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भारत-उत्तर कोरिया संबंध हे दोन आशियाई देश भारत आणि उत्तर कोरियामधील द्विपक्षीय संबंध आहेत. दोन्ही देशांमध्ये व्यापार आणि राजनैतिक संबंध वाढत आहेत. प्याँगयांगमध्ये भारताचा दूतावास आहे आणि उत्तर कोरियाचा दूतावास नवी दिल्लीत आहे.
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भारत हा उत्तर कोरियाचा सर्वात मोठा व्यापारी भागीदार आणि प्रमुख अन्न सहाय्य पुरवठादार होता.[१] २०१३ मध्ये उत्तर कोरियाला भारताची निर्यात एकूण US$६० दशलक्षपेक्षा जास्त होती.[२] तथापि, भारताने संयुक्त राष्ट्रांच्या सुरक्षा परिषदेच्या आर्थिक निर्बंधांची अंमलबजावणी केली आहे आणि एप्रिल २०१७ मध्ये उत्तर कोरियाबरोबरचा बहुतांश व्यापार बंद केला आहे [३]
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भारत हा उत्तर कोरियाच्या अण्वस्त्र प्रसाराच्या टीकाकार आहे आणि त्याने अण्वस्त्रीकरण आणि निःशस्त्रीकरणावरही चिंता व्यक्त केली आहे. भारताने उत्तर कोरियाच्या अणुचाचण्यांचा वारंवार निषेध केला आहे आणि त्याचा आण्विक कार्यक्रम प्रादेशिक सुरक्षेसाठी धोका असल्याचे मानले आहे.[४][५] पण दुसरीकडे, भारताने कोविड-१९ साथीच्या आजारादरम्यान उत्तर कोरियाला $१ दशलक्ष वैद्यकीय मदत दिली आहे.
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उत्तर कोरिया आणि दक्षिण कोरिया यांच्यातील कोणत्याही शांततापूर्ण कराराचे जोरदार समर्थन केले जाईल, असे भारताने म्हटले आहे. भारताने स्पष्ट केले आहे की तो कोरियाच्या एकीकरणाचा समर्थक आहे.[६] २०१४ च्या बीबीसी वर्ल्ड सर्व्हिस पोलनुसार, २३% भारतीय उत्तर कोरियाच्या जागतिक प्रभावाकडे सकारात्मकतेने पाहतात, तर २७% लोक नकारात्मक मत व्यक्त करतात.[७]
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१३ व्या शतकातील समगुक युसा या इतिहासानुसार, प्राचीन कोरियन राणी हीओ ह्वांग-ओके "आयुता" नावाच्या राज्यातून आली होती. विविध सिद्धांत भारतातील अयुताला अयोध्या किंवा कन्याकुमारी म्हणून ओळखतात.[८] २००१ मध्ये, दक्षिण कोरियाच्या शिष्टमंडळाने अयोध्येत राणीच्या स्मारकाचे उद्घाटन केले.[९]
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१९२९ मध्ये रवींद्रनाथ टागोरांची "लॅम्प ऑफ द इस्ट" ही कविता कोरियाच्या गौरवशाली भूतकाळाबद्दल आणि उज्ज्वल भविष्याबद्दल बोलते. ही कविता आजही लोकप्रिय आहे.[१]
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दोन्ही देशांचे राजधानीत दूतावास आहे. १० डिसेंबर १९७३ रोजी प्याँगयांगमध्ये भारतीय दूतावासाची स्थापना करण्यात आली. दोन्ही राज्ये अलिप्ततावादी चळवळीचे सदस्य आहेत, जे अनेक आंतरराष्ट्रीय मुद्द्यांवर एक समान दृष्टिकोन अधोरेखित करतात.[१०][११]
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पाकिस्तान-उत्तर कोरिया संबंधांमुळे; विशेषतः पाकिस्तानच्या आण्विक क्षेपणास्त्र कार्यक्रमासाठी केलेल्या मदतीमुळे; भारत-उत्तर कोरिया संबंधांबवर परिणाम झाला आहे. १९९९ मध्ये, भारताने कांडला किनाऱ्यावर उत्तर कोरियाचे एक जहाज जप्त केले ज्यामध्ये क्षेपणास्त्र घटक आणि ब्लूप्रिंट्स आढळून आले. दक्षिण कोरियाशी भारताचे संबंध आर्थिक आणि तांत्रिकदृष्ट्या खूप मोठे आहेत आणि दक्षिण कोरियातील गुंतवणूक आणि तंत्रज्ञानासाठी भारताच्या उत्सुकतेचा उत्तरेसोबतच्या संबंधांवर विपरीत परिणाम झाला आहे.[१२][१३]
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ओटारा जिल्हा ( ब्रम्ही : ဥတ္တရခရိုင်, शब्दशः "उत्तर जिल्हा") हा म्यानमारमधील नायपिडॉ केंद्रशासित प्रदेशाचा जिल्हा आहे. [१] [२]
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उत्तर जेओला (कोरियन: 전라북도; संक्षिप्त नाव: जेओलाबुक) हा दक्षिण कोरिया देशामधील एक प्रांत आहे. हा प्रांत दक्षिण कोरियाच्या पश्चिम भागात पिवळ्या समुद्राच्या किनाऱ्यावर वसला आहे.
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उत्तर ही चार प्रमुख दिशांपैकी एक आहे. ही दिशा दक्षिणेच्या विरुद्ध आणि पूर्व पश्चिमेला लंबरूप असते. ध्रुव तारा उत्तर दिशेला दिसतो.
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वायव्य मुंबई' हा महाराष्ट्रातील ४८ लोकसभा संसद मतदारसंघांपैकी एक आहे. ह्या मतदारसंघामध्ये मुंबईमधील ६ विधानसभा मतदारसंघ समाविष्ट केले गेले आहेत.
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*= उप मतदान
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ईशान्य मुंबई हा महाराष्ट्रातील ४८ लोकसभा संसद मतदारसंघांपैकी एक आहे. ह्या मतदारसंघामध्ये मुंबईमधील ६ विधानसभा मतदारसंघ समाविष्ट केले गेले आहेत.
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[१]
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उत्तर प्रदेश विधान परिषद हे भारतातील उत्तर प्रदेश या राज्याच्या द्विसदनीय विधिमंडळाचे वरचे सभागृह आहे. उत्तर प्रदेश हे भारतातील सहा राज्यांपैकी एक आहे, जिथे राज्य विधानमंडळ द्विसदनीय आहे. ह्या पद्धतीत दोन सभागृहे आहेत: विधानसभा आणि विधान परिषद. उत्तर प्रदेश विधान परिषद मध्ये १०० सदस्य आहे.
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योगी आदित्यनाथ
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भाजप
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योगी आदित्यनाथ
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भाजप
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२०२२ उत्तर प्रदेश विधानसभा निवडणूक भारताच्या उत्तर प्रदेश राज्यामध्ये १० फेब्रुवारी ते ७ मार्च दरम्यान ७ फेऱ्यांमध्ये घेतली गेली. ह्या निवडणुकीत उत्तर प्रदेश विधानसभेच्या सर्व ४०३ जागांसाठी आमदार निवडले गेले. १० मार्च २०२२ रोजी मतगणना करण्यात आली. विद्यमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ह्यांच्या नेतृत्वाखाली भारतीय जनता पार्टीने २७४ जागांवर विजय मिळवून सलग दुसऱ्यांदा स्पष्ट बहुमत मिळवले व उत्तर प्रदेशामधील सत्ता राखली.
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भारत निवडणूक आयोगाने ८ जानेवारी २०२० रोजी निवडणुकीचे वेळापत्रक जाहीर केले होते.[१]
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मतदान टक्केवारी (%)
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मतदान टक्केवारी (%)
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निवडणुकीचा निकाल १० मार्च २०२२ला निकाल घोषित करण्यात आला.[१७]
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येमेनचे जनतेचे प्रजासत्ताकीय गणराज्य ', प्रजासत्ताकीय येमेन, येमेन(एडन) हे एक समाजवादी राष्ट्र होते. सध्याचा यमन पुर्वी दोन विभागात विभागलेला होता. त्यातील उत्तर येमेन हा एक भाग होता. २२ मे १९९० रोजी हा देश उत्तर येमेन बरोबर एकत्र झाला.
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गुणक: 27°14′26″N 94°6′20″E / 27.24056°N 94.10556°E / 27.24056; 94.10556
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उत्तर लखीमपूर (आसामी: উত্তৰ লখিমপুৰ) हे भारत देशाच्या आसाम राज्यातील लखीमपूर जिल्ह्याचे मुख्यालय आहे. उत्तर लखीमपूर शहर आसामच्या उत्तर भागात गुवाहाटीच्या ३९४ किमी ईशान्येस वसले आहे. २०११ साली उत्तर लखीमपूरची लोकसंख्या ५९ हजार होती.
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लिलाबारी विमानतळ येथून ७ किमी अंतरावर स्थित आहे. उत्तर लखीमपूरला अरुणाचल प्रदेशचे प्रवेशद्वार मानले जाते.
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उत्तर सुमात्रा (बहासा इंडोनेशिया: Sumatera Utara) हा इंडोनेशिया देशाचा एक प्रांत आहे. हा प्रांत सुमात्रा बेटाच्या उत्तर भागात वसला आहे. आकाराने श्रीलंका देशापेक्षा किंचित मोठ्या असलेल्या उत्तर सुमात्रा प्रांताची लोकसंख्या सुमारे १.३० कोटी इतकी आहे.
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उत्तर सोलापूर हा भारताच्या महाराष्ट्र राज्यातील सोलापूर जिल्ह्यात तालुका आहे.एकूण ११ तालुके आहेत त्यापैकी उत्तर सोलापूर तालुका हा सर्वात लहान तालुका आहे.
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उत्तररामचरित्र हे भवभूतीनी लिहिलेले नाटक असून, त्यात सात अंक आहेत. त्यात रामराज्याभिषेक ते सीतात्याग पर्यंत रामायणाची कथा आहे. यात कवीकल्पनेला बराच वाव दिला गेला आहे.
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अंथीपाडा हे भारताच्या महाराष्ट्र राज्यातील नंदुरबार जिल्ह्यातील नवापूर तालुक्यातील एक गाव आहे.
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येथील हवामान सामान्यतः गरम आणि कोरडे आहे. येथे उन्हाळा, पावसाळा,आणि हिवाळा असे तीन वेगवेगळे ऋतू आहेत. उन्हाळा मार्चपासून चालू होऊन जूनमध्यापर्यंत असतो.उन्हाळा गरम आणि कोरडा असतो.मे महिन्यात तापमान फार असते.तापमान ४३ अंश सेल्सियसपर्यंत जाते.जूनच्या मध्यास किंवा अखेरीस पावसाळा सुरू होतो.पावसाळी हंगामात हवामान सामान्यतः आर्द्र आणि गरम असते.वार्षिक पर्जन्यमान ७६० मि.मी.पर्यंत असते.हिवाळी मोसम नोव्हेंबरपासून साधारण फेब्रुवारीपर्यंत असतो.हिवाळा सौम्य थंड आणि कोरडा असतो.
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जिवंत स्थितीत जीव आणि त्यांच्या शरीराचे भाग सभोवतालच्या परिस्थितीत होणाऱ्या बदलांना अनुसरून प्रतिक्रिया व्यक्त करतात. परिस्थितीतील बदल उद्दीपकाचे कार्य करतात आणि त्यांना अनुसरून जीव योग्य ती अनुक्रिया व्यक्त करतात. परिस्थितीतील भौतिक किंवा रासायनिक फेरबदलांना अनुसरून आंतरिक बदलांच्या योगाने त्यांना उत्तर देण्याचे जीवांच्या अंगी जे सामर्थ्य असते, त्याला उत्तेजनक्षमता म्हणतात. सजीवांची जी काही मुख्य लक्षणे आहेत त्यांपैकी उत्तेजनक्षमता हे एक आहे. उद्दीपन बाह्य अथवा आंतरिक असते. उष्णता, प्रकाश, आर्द्रता, दाब किंवा स्पर्श ही बाह्य उद्दीपनाची काही उदाहरणे होत. आंतरिक उद्दीपन प्राण्याच्या शरीरातच उत्पन्न होणारे असते. या गुणधर्मापासूनच प्राण्यांची काही विस्मयजनक विशेष लक्षणे उत्पन्न झाली आहेत. विविध प्रकारच्या बाह्य उद्दीपनांना प्राणी वेळोवेळी ज्या प्रतिक्रिया व्यक्त करतात, त्या सगळ्यांना मिळून प्राण्यांचे वर्तन म्हणतात. अर्थात कोणत्याही प्राण्याचे वर्तन उत्तेजनक्षमतेमुळेच शक्य होते. उत्तेजनामुळे (उद्दीपन-उत्तर प्रतिक्रिया) सबंध प्राणी कोणते तरी कार्य करतो अथवा त्याच्या शरीराचा एखादा भाग कार्यान्वित होतो. उदा., प्राण्याचे धावणे, त्याच्या एखाद्या स्नायूचे संकुचन होणे, एखाद्या ग्रंथीपासून स्राव होणे इ. प्रतिक्रियेच्या व्याप्तीचे प्रमाण उद्दीपनाच्या कमी अधिक तीव्रतेवर सामान्यतः अवलंबून नसते वस्तुतः उद्दीपनाच्या वेगवेगळ्या तीव्रतेला प्राण्यांकडून अगदी भिन्न प्रकारची उत्तरे मिळतात. सामान्यतः परिस्थितीच्या बदलाला प्राणी जी प्रतिक्रिया व्यक्त करतो ती कोणत्या ना कोणत्या प्रकारे प्राण्याला उपयुक्त अशीच असते, अथवा थोडे वेगळ्या प्रकाराने सांगावयाचे तर असे म्हणता येईल की, ती अनुकूली असते. गती किंवा संचलन जरी सामान्यतः उद्दीपनामुळे घडून येत असले, तरी गती किंवा गतीचा अभाव जिवंतपणाचे गमक होऊ शकत नाही. कारण वारा, लाटा, मोटारगाडी इ. निर्जीव पदार्थांना गती असते, तर शीतसुप्तीत (हिवाळ्यात अंशतः किंवा पूर्णपणे निष्क्रिय अवस्थेत) असणारे प्राणी व बिया गतिहीन असतात.
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सर्व जीवद्रव्य थोडेफार उत्तेजनक्षम उत्तेजनक्षम असते, परंतु प्राणि-जीवनाची एकेक पायरी चढून आपण जसजसे वर जाऊ लागतो तसतसे सामान्य संवेद���क्षमतेच्या भरीला, गुंतागुंतीची रचना असणाऱ्या प्राण्यांच्या शरीरातील काही कोशिकांचे (पेशींचे) केवळ या कार्याकरिताच विशिष्टीकरण होऊन त्यांची तंत्रिका तंत्रे (मज्जा संस्था) तयार होतात. विलगित (अलग असलेल्या) तंत्रिका-कोशिका अथवा त्यांचे समूह यांच्यापासून तो उच्च पृष्ठवंशी (पाठीचा कणा असलेले) प्राणी अथवा मनुष्य यांत आढळणाऱ्या अत्यंत गुंतागुंतीच्या रचनांपर्यंत सर्वांचा या तंत्रांत समावेश होतो. पण हे लक्षात ठेवायला पाहिजे की, उच्च कोटीतील प्राण्यांच्या तंत्रिका तंत्रीय सक्रियता (हालचाली) जीवद्रव्याच्या अशाच सक्रियतांसारख्या पण शीघ्र गतीने होणाऱ्या आणि तीव्र प्रतिक्रिया असतात.
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अंदबोरी हे भारतातील महाराष्ट्र राज्यातील यवतमाळ जिल्ह्यातील कळंब तालुक्यातील एक गाव आहे.
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येथील हवामान उष्ण व कोरडे असून उन्हाळ्यात अतिउष्ण तर हिवाळ्यात अतिथंड असते.पावसाळ्यात मध्यम प्रमाणात पाऊस पडतो.
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उत्पादन अभियांत्रिकी ही शाखा उत्पादन तंत्रज्ञान, अभियांत्रिकी विज्ञान व व्यवस्थापन विज्ञान या तिहींचे मिश्रण आहे. उत्पादन अभियंत्याला अभियांत्रिकी पद्धतींचे सर्वकष ज्ञान असते तसेच उत्पादनासंबंधी आव्हानेदेखील त्याला योग्य रितीने अवगत असतात. त्याचे ध्येय हे उत्पादन प्रणालीला त्रासदायक न ठरता, योग्य न्यायाने व तारतम्य वापरून व आर्थिकदृष्ट्या परवडेल अश्या तऱ्हेने उत्पादन करणे असे असते.
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अणुविघटन होतांना होणाऱ्या उत्सर्जनाला किरणोत्सर्ग असे म्हणतात. किरणोत्सर्ग ज्ञानेंद्रियांच्या पलीकडे असल्याने तो आपल्याला जाणवत नाही.
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किरणोत्सर्ग आपल्या सभोवताली नेहमीच होत असतो. सुर्यप्रकाश, मायक्रोव्हेव ओव्हन, मोबाईल हवेतून, खाद्यपदार्थातून तर आसमंतातल्या टेकडय़ा, कातळ अगदी मातीतूनही किरणोत्सर्ग होत असतो. वैद्यकीय चाचण्या व उपचार पद्धतीत नियंत्रीत/सामान्य किरणोत्सर्गाचा वापर होतो.
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कोबाल्ट, युरेनियम, युरेनिअम २३५, थोरिअम, प्लुटोनिअम इ. घटकांपासून किरणोत्सर्जन घडते.
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अणुभट्टी मध्ये न्युट्रॉनचे उत्सर्जन नियंत्रित करण्याचे काम फसले की उष्णतेचे नियंत्रण बंद होते. अणुभट्टीच्या आतील उष्णतामान एवढे वाढते, की आण्विक इंधन वितळू लागते. अनियंत्रित अशा उष्णतेचे हे प्रमाण १००० फॅरनहाईट पेक्षाही अधिक होत जाते. त्यातून अनियंत्रित असा किरणोत्सर्ग होऊ लागतो.
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किरणोत्सर्गाचे प्रमाण "मिलिरेम' पद्धतीने मोजले जाते सरासरी वार्षिक ६२० मिलिरेम एवढ्या प्रमाणातील किरणोत्सर्ग मनुष्यप्राणी सहन करू शकतो. चेर्नोबिल येथे २६ एप्रिल इ.स. १९८६ रोजी दुर्घटना घडली तेव्हा तेथे हे प्रमाण ८० हजार ते १६ लाख मिलिरेम इतके होते. पावणेचार लाख ते पाच लाख मिलिरेम इतका किरणोत्सर्ग तीन महिन्यांत प्राणघातक ठरतो. चेर्नोबिल भोवतीचा ३० किलोमीटरचा परिसर आजही निर्मनुष्य अवस्थेत ठेवण्यात आलेला आहे.
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मोठ्या प्रमाणातील किरणोत्सर्गामुळे कर्करोग ( कॅन्सर ), जन्मजात विकलांगता (पुनरुत्पादक पेशींवर परिणाम होऊन), नपुंसकता, बालवयात वृद्धत्व, किडनीचे विकार आणि इतर अनेक विकार होतात.
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भारतीय नौदल ही एक कमान आहे. मुख्यालय पोर्ट ब्लेर भारत येथे आहे.
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११° ४०′ ४८″ N, ९२° ४३′ १२″ E
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अंदमान आणि निकोबार द्वीपसमूह किंवा अंदमान आणि निकोबार बेटे हा ५७१ बेटे समाविष्ट असलेला एक भारतीय केंद्रशासित प्रदेश आहे. भारताच्या आग्नेयेस ही बेटे समाविष्ट आहेत. अंदमान बेटावरील पोर्ट ब्लेअर शहर हे अंदमान आणि निकोबार बेटांची राजधानी आहे. निकोबारी व बंगाली येथील प्रमुख भाषा आहेत. अंदमान आणि निकोबार बेटांचे क्षेत्रफळ ८,२४९ चौ.किमी असून लोकसंख्या ३,७९,९४४ एवढी आहे. येथील साक्षरता ८६.२७ टक्के आहे. तांदूळ, चिकू व अननस ही येथील प्रमुख पिके आहेत. तसेच येथे दगडी कोळसा, तांबे व गंधक ही खनिजे देखील मोठ्या प्रमाणात आढळतात. निकोबार बेटावरील इंदिरा पॉइंट हे भारताच्या सरहद्दीचे शेवटचे टोक आहे.
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‘अंदमान’ हे नाव रामायणातील ‘हनुमान’ या नावावरून पडल्याचे सांगितले जाते. (हनुमान – हन्दुमान – अन्दुमान -अंदमान).[ संदर्भ हवा ] दुसऱ्या मतानुसार,
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अंदमान हे नाव तेथील ग्रेट अंदमानी या तेथील मूलनिवासी जमाती जमातीवरून पडलेले आहे.
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‘निकोबार’चे मूळ तमिळ नाव नक्कवरम (अर्थ- नग्न लोकांचा प्रदेश) असे आहे. राजेंद्र चोल (इ.स. १०१४ ते इ.स. १०४२) हा तमिळनाडूच्या प्रसिद्ध चोल राजघराण्यातील एक पराक्रमी राजा होऊन गेला. त्याने अंदमान-निकोबार द्वीपसमूहाचा ताबा घेऊन, सुमात्रा (इंडोनेशिया)च्या श्रीविजय साम्राज्याविरुद्ध लढण्यासाठी तिथे आपला कायमस्वरूपी आरमारी तळ स्थापन केला. त्या बेटांना त्या काळी तिनमत्तिवू असे संबोधले जाई. चोल राजवंशाच्या आमदानीत निकोबार बेटांचे नाव नक्कवरम असल्याचे तंजावरच्या इ.स. १०५० च्या शिलालेखांवरूनही स्पष्ट होते. इसवी सनाच्या बाराव्या-तेराव्या शतकातील प्रसिद्ध जगप्रवासी मार्को पोलो यानेही आपल्या प्रवास वर्णनांत या बेटांचा उल्लेख ‘नेकुवेरन’ (Necuveran) असा केलेला आढळतो.
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अंदमान-निकोबारची हवा दमट असल्याने एकेकाळी रोगट होती. त्यामुळे जन्मठेप झालेल्या कैद्याला जेव्हा अंदमानला पाठवण्यात येई तेव्हा त्याला काळ्या पाण्याची शिक्षा झाली असे म्हणत. सावरकरांनी त्यांच्या 'कमला' काव्याची निर्मिती या ठिकाणच्या सेल्युलर जेलमध्ये केली. कोणतेही लेखन साहित्य नसताना ही निर्मिती केली गेली होती.
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अंदमान-निकोबारमध्ये एकूण ३ जिल्हे आहेत.
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१) उत्तर आणि मध्य अंदमान
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२) दक्षिण अंदमान
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३) निकोबार
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या समूहात असलेल्या रोझ बेटाला नेताजी सुभाषचंद्र बोस द्वीप हे नवीन नाव दिले आहे. तसेच नील बेटाचे 'शहीद द्वीप', तर 'हॅवलॉक' बेटाचे 'स्वराज द्वीप' अशी बदलेली नावे आहेत.[१][२]
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पाच वेळा अंदमानचे अभ्यास दौरे, त्यांत अनेक बेटांवर प्रत्यक्ष जाऊन केलेले अवलोकन, व्यक्तिगत मुलाखती, संदर्भग्रंथांचा आधार, सेल्युलर जेलचे ‘दप्तर’, अन्य प्रकाशित माहिती अशा शक्य तेवढ्या उपलब्ध साधनांचा वापर करून संशोधकाची चिकाटी व इतिहासाचे भान जपत, वयाच्या ८२व्या वर्षी आडेलकरांनी ‘क्रांतितीर्थ’ हे पुस्तक लिहिले आहे.
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कृषी
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अंदमान-निकोबारमधील एकूण ४८,६७५ हेक्टर (१२०,२८० एकर) जमीन कृषी हेतूसाठी वापरली जाते. अन्नपदार्थ, अंदमान ग्रुप बेटांमध्ये मुख्यत्वे घेतले जाते, तर नारळ आणि अंडकोट हे निकोबार ग्रुप बेटांची रोख पिके आहेत. रब्बी हंगामात डाळी, तेलबिया आणि भाजीपाला इत्यादी उत्पादन घेतले जाते. शेतकऱ्यांच्या मालकीच्या डोंगराळ प्रदेशात आंबा, सांता (Kinnow?), संत्री, केळी, पपया, अननस आणि रूट पीक यांसारख्या विविध प्रकारच्या फळांचे पीक घेतले जाते. मटि(??), लवंग, जायफळ आणि दालचिनी यांसारख्या मसाल्यांची पिके एक मल्टि-स्तरीय पीक पद्धती अनुसरून उगवली जातात. या बेटांवर रबर, लाल तेल, हस्तरेखा(??), नॉन आणि काजू मर्यादित प्रमाणात होतात.
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उद्योग
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अंदमान-निकोबारमध्ये १,३७४ नोंदणीकृत लघु-स्तरीय, गावे आणि हस्तकला एकके आहेत. यांशिवाय शेल (??) आणि लाकूड हस्तकला हीही एकके आहेत. मध्यम आकाराची चार औद्योगिक एकके देखील आहेत. एसएसआय युनिट्स पॉलिथीन पिशव्या, पीव्हीसी कंड्यूट पाईप्स आणि फिटिंग्ज, पेंट्स व वार्निश, फायबर ग्लास आणि मिनी आट(??) मिल्स, सॉफ्ट ड्रिंक आणि पेये इत्यादींच्या निर्मितीमध्ये गुंतलेली आहेत. लहान आकाराची हस्तकला एकके शिंपले, बेकरी उत्पादनांमध्ये गुंतलेले आहेत. तांदूळ गिरण्या चालवणे, फर्निचर बनविणे हेही उद्योग अंदमान-निकोबारमध्ये चालतात..
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अंदमान आणि निकोबार बेटे इन्टिग्रेटेड डेव्हलपमेंट कॉर्पोरेशन हे पर्यटन, मत्स्यव्यवसाय, उद्योग आणि औद्योगिक वित्तपुरवठा या क्षेत्रांत विस्तारले आहेत. ते अलायन्स एर / जेट एरवेजसाठी अधिकृत एजंट म्हणून काम करतात. बहुतेक स्वच्छ आणि व्हर्जिन समुद्रकिनारे असल्याने ही बेटे एक पर्यटन स्थळ बनली आहेत.[३]
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पर्यटन
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मुख्य लेख : अंडमान आणि निकोबार बेटांमधील पर्यटन
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अंदमान आणि निकोब���र बेटे ही परदेशी समुद्रकिनाऱ्यांप्रमाणे जागतिक प्रवाशांच्या भेटीची बेटे, तसेच समान नामांकित, स्नॉर्केलिंग आणि समुद्र-चालनासारख्या साहसी खेळांच्या अद्भुत संधींसह प्रमुख पर्यटन केंद्रे म्हणून विकसित होत आहेत. एनआयटीआय (नॅशनल इंस्टिट्यूट ऑफ ट्रान्सफॉर्मिंग इंडिया)च्या अंतर्गत वेगवेगळ्या बेटांचा विकास करण्याची योजना चालू आहे. अव्हिस आयलॅंड, स्मिथ आयलॅंड आणि लाँग आयलंडमध्ये शासनाच्या सहभागाने लक्झरी रिसॉर्ट्स नियोजित आहेत.[४]
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पोर्ट ब्लेअरमध्ये, मुख्य ठिकाणे म्हणजे सेल्युलर जेल, महात्मा गांधी मरीन नॅशनल पार्क, अंदमान वॉटर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, चथम सॉ मिल, मिनी झू, कॉर्बिन्स कॉव्ह, चिडिया टापू, वंदूर बीच, फॉरेस्ट म्युझियम, ॲँथ्रोपॉलॉजिकल म्युझियम, फिशरीज म्युझियम, नवल संग्रहालय (सामुद्रिका), रॉस बेट आणि उत्तर बे बेट. पूर्वी भेट देता येत असलेले वायपर बेट आता प्रशासनाने बंद ठेवले आहे. रावळगर बीचसाठी नील आयलॅंड, स्कुबा डायविंग / स्नॉर्केलिंग / समुद्रचालनासाठी, सिंक बेट, सॅडल पीक, माउंट हॅरिएट, माड ज्वालामुखी व हॅवेलॉक बेट आहे. उत्तर अंदमान येथे असलेल्या दिगलीपूर हेदेखील २०१८पासून लोकप्रिय आहे आणि बरेच पर्यटक उत्तर अंदमान येथे देखील येऊ लागले आहेत. दक्षिणी गट (निकोबार बेटे) बहुतेक पर्यटकांना उपलब्ध नसतात.
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ऊर्जा निर्मिती
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जपानच्या साहाय्याने, दक्षिणी अंदमान द्वीपसमूहात आता १५-मेगावॅट डिझेल पॉवर प्लांट असेल. चीनहून होणाऱ्या तेल पुरवठ्यासाठी एक रणनीतिकदृष्ट्या महत्त्वपूर्ण चोक पॉईंट असेल. जलसंध्यां(??)जवळील नागरी पायाभूत सुविधा मजबूत करण्यासाठी ही इंडो-जपानी रणनीति असल्याचे मानले जाते.[५][६]
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उदयगिरीचा किल्ला भारताच्या तमिळनाडू राज्यातील कन्याकुमारी जिल्ह्यात असलेला एक किल्ला आहे. उदयगिरी लेणी येथून जवळ आहेत.
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हा लेख त्रिपुरा राज्यातील उदयपुर शहराविषयी आहे. राजस्थानमधील उदयपुर शहराविषयीचा लेख येथे आहे.
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उदयपुर भारताच्या त्रिपुरा राज्यातील एक शहर आहे.
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हे शहर दक्षिण त्रिपुरा जिल्ह्याचे प्रशासकीय केंद्र आहे.
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उदयसिंग राजपूत मराठी राजकारणी आहेत. हे कन्नड मतदारसंघातून शिवसेनेकडून महाराष्ट्राच्या चौदाव्या विधानसभेवर निवडून गेले.
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उदित नारायण झा (जन्म : बायसी गोठ, सुपौल जिल्हा, बिहार, १ डिसेंबर १९५५) :[१][२]- ) हे हिंदी चित्रपटसृष्टीतील नेपाळी पार्श्वगायक आहे. हे हिंदी चित्रपटसृष्टीतील अतिशय प्रसिद्ध व्यक्तींपैकी एक असून त्यांनी अनेक हिंदी चित्रपटांतील गाण्यांना आपला आवाज दिला आहे. विशेषतः शाहरूख खानचे गाणे उदित नारायणच गायचे.
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उदेळी हे भारतातील महाराष्ट्र राज्यातील दक्षिण कोकणातील सिंधुदुर्ग जिल्ह्यातील सावंतवाडी तालुक्यातील एक गाव आहे.
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पावसाळ्यात येथे भरपूर प्रमाणात पाऊस पडतो आणि हवामान समशीतोष्ण राहते. हिवाळ्यात येथील हवामान थंड असते व अनेकदा सकाळी धुके पडते. उन्हाळ्यात हवामान उष्ण असते. पावसाळ्यात येथे भातशेती केली जाते.
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१.https://villageinfo.in/
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२.https://www.census2011.co.in/
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३.http://tourism.gov.in/
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४.https://www.incredibleindia.org/
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५.https://www.india.gov.in/topics/travel-tourism
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६.https://www.mapsofindia.com/
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उद्धव किशनराव भयवाळ (जन्म : बदनापूर-जालना जिल्हा, १८ जून १९५०) हे एक मराठी साहित्यिक आहेत.
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मूळ गावातून १९६६ साली एस.एस.सी झाल्यावर उद्धव भयवाळ जालन्याला आले. तेथे ते जे.ई.एस. कॉलेजमधून फिजिक्स विषय घेऊन बी.एस्सी. झाले. त्यानंतर त्यांनी १९७३-२००६ या काळात स्टेट बँक ऑफ हैद्राबादमध्ये विविध पदांवर काम केले. तेथून २००६ साली स्वेच्छानिवृत्ती घेतल्यावर ते लेखनाकडे वळले.
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११° ४०′ ४८″ N, ९२° ४३′ १२″ E
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अंदमान आणि निकोबार द्वीपसमूह किंवा अंदमान आणि निकोबार बेटे हा ५७१ बेटे समाविष्ट असलेला एक भारतीय केंद्रशासित प्रदेश आहे. भारताच्या आग्नेयेस ही बेटे समाविष्ट आहेत. अंदमान बेटावरील पोर्ट ब्लेअर शहर हे अंदमान आणि निकोबार बेटांची राजधानी आहे. निकोबारी व बंगाली येथील प्रमुख भाषा आहेत. अंदमान आणि निकोबार बेटांचे क्षेत्रफळ ८,२४९ चौ.किमी असून लोकसंख्या ३,७९,९४४ एवढी आहे. येथील साक्षरता ८६.२७ टक्के आहे. तांदूळ, चिकू व अननस ही येथील प्रमुख पिके आहेत. तसेच येथे दगडी कोळसा, तांबे व गंधक ही खनिजे देखील मोठ्या प्रमाणात आढळतात. निकोबार बेटावरील इंदिरा पॉइंट हे भारताच्या सरहद्दीचे शेवटचे टोक आहे.
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‘अंदमान’ हे नाव रामायणातील ‘हनुमान’ या नावावरून पडल्याचे सांगितले जाते. (हनुमान – हन्दुमान – अन्दुमान -अंदमान).[ संदर्भ हवा ] दुसऱ्या मतानुसार,
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अंदमान हे नाव तेथील ग्रेट अंदमानी या तेथील मूलनिवासी जमाती जमातीवरून पडलेले आहे.
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‘निकोबार’चे मूळ तमिळ नाव नक्कवरम (अर्थ- नग्न लोकांचा प्रदेश) असे आहे. राजेंद्र चोल (इ.स. १०१४ ते इ.स. १०४२) हा तमिळनाडूच्या प्रसिद्ध चोल राजघराण्यातील एक पराक्रमी राजा होऊन गेला. त्याने अंदमान-निकोबार द्वीपसमूहाचा ताबा घेऊन, सुमात्रा (इंडोनेशिया)च्या श्रीविजय साम्राज्याविरुद्ध लढण्यासाठी तिथे आपला कायमस्वरूपी आरमारी तळ स्थापन केला. त्या बेटांना त्या काळी तिनमत्तिवू असे संबोधले जाई. चोल राजवंशाच्या आमदानीत निकोबार बेटांचे नाव नक्कवरम असल्याचे तंजावरच्या इ.स. १०५० च्या शिलालेखांवरूनही स्पष्ट होते. इसवी सनाच्या बाराव्या-तेराव्या शतकातील प्रसिद्ध जगप्रवासी मार्को पोलो यानेही आपल्या प्रवास वर्णनांत या बेटांचा उल्लेख ‘नेकुवेरन’ (Necuveran) असा केलेला आढळतो.
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अंदमान-निकोबारची हवा दमट असल्याने एकेकाळी रोगट होती. त्यामुळे जन्मठेप झालेल्या कैद्याला जेव्हा अंदमानला पाठवण्यात येई तेव्हा त्याला काळ्या पाण्याची शिक्षा झाली असे म्हणत. सावरकरांनी त्यांच्या 'कमला' काव्याची निर्मिती या ठिकाणच्या सेल्युलर जेलमध्ये केली. कोणतेही लेखन साहित्य नसताना ही निर्मिती केली गेली होती.
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अंदमान-निकोबारमध्ये एकूण ३ जिल्हे आहेत.
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१) उत्तर आणि मध्य अंदमान
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२) दक्षिण अंदमान
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३) निकोबार
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या समूहात असलेल्या रोझ बेटाला नेताजी सुभाषचंद्र बोस द्वीप हे नवीन नाव दिले आहे. तसेच नील बेटाचे 'शहीद द्वीप', तर 'हॅवलॉक' बेटाचे 'स्वराज द्वीप' अशी बदलेली नावे आहेत.[१][२]
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पाच वेळा अंदमानचे अभ्यास दौरे, त्यांत अनेक बेटांवर प्रत्यक्ष जाऊन केलेले अवलोकन, व्यक्तिगत मुलाखती, संदर्भग्रंथांचा आधार, सेल्युलर जेलचे ‘दप्तर’, अन्य प्रकाशित माहिती अशा शक्य तेवढ्या उपलब्ध साधनांचा वापर करून संशोधकाची चिकाटी व इतिहासाचे भान जपत, वयाच्या ८२व्या वर्षी आडेलकरांनी ‘क्रांतितीर्थ’ हे पुस्तक लिहिले आहे.
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कृषी
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अंदमान-निकोबारमधील एकूण ४८,६७५ हेक्टर (१२०,२८० एकर) जमीन कृषी हेतूसाठी वापरली जाते. अन्नपदार्थ, अंदमान ग्रुप बेटांमध्ये मुख्यत्वे घेतले जाते, तर नारळ आणि अंडकोट हे निकोबार ग्रुप बेटांची रोख पिके आहेत. रब्बी हंगामात डाळी, तेलबिया आणि भाजीपाला इत्यादी उत्पादन घेतले जाते. शेतकऱ्यांच्या मालकीच्या डोंगराळ प्रदेशात आंबा, सांता (Kinnow?), संत्री, केळी, पपया, अननस आणि रूट पीक यांसारख्या विविध प्रकारच्या फळांचे पीक घेतले जाते. मटि(??), लवंग, जायफळ आणि दालचिनी यांसारख्या मसाल्यांची पिके एक मल्टि-स्तरीय पीक पद्धती अनुसरून उगवली जातात. या बेटांवर रबर, लाल तेल, हस्तरेखा(??), नॉन आणि काजू मर्यादित प्रमाणात होतात.
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उद्योग
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अंदमान-निकोबारमध्ये १,३७४ नोंदणीकृत लघु-स्तरीय, गावे आणि हस्तकला एकके आहेत. यांशिवाय शेल (??) आणि लाकूड हस्तकला हीही एकके आहेत. मध्यम आकाराची चार औद्योगिक एकके देखील आहेत. एसएसआय युनिट्स पॉलिथीन पिशव्या, पीव्हीसी कंड्यूट पाईप्स आणि फिटिंग्ज, पेंट्स व वार्निश, फायबर ग्लास आणि मिनी आट(??) मिल्स, सॉफ्ट ड्रिंक आणि पेये इत्यादींच्या निर्मितीमध्ये गुंतलेली आहेत. लहान आकाराची हस्तकला एकके शिंपले, बेकरी उत्पादनांमध्ये गुंतलेले आहेत. तांदूळ गिरण्या चालवणे, फर्निचर बनविणे हेही उद्योग अंदमान-निकोबारमध्ये चालतात..
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अंदमान आणि निकोबार बेटे इन्टिग्रेटेड डेव्हलपमेंट कॉर्पोरेशन हे पर्यटन, मत्स्यव्यवसाय, उद्योग आणि औद्योगिक वित्तपुरवठा या क्षेत्रांत विस्तारले आहेत. ते अलायन्स एर / जेट एरवेजसाठी अधिकृत एजंट म्हणून काम करतात. बहुतेक स्वच्छ आणि व्हर्जिन समुद्रकिनारे असल्याने ही बेटे एक पर्यटन स्थळ बनली आहेत.[३]
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पर्यटन
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मुख्य लेख : अंडमान आणि निकोबार बेटांमधील पर्यटन
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अंदमान आणि निकोब���र बेटे ही परदेशी समुद्रकिनाऱ्यांप्रमाणे जागतिक प्रवाशांच्या भेटीची बेटे, तसेच समान नामांकित, स्नॉर्केलिंग आणि समुद्र-चालनासारख्या साहसी खेळांच्या अद्भुत संधींसह प्रमुख पर्यटन केंद्रे म्हणून विकसित होत आहेत. एनआयटीआय (नॅशनल इंस्टिट्यूट ऑफ ट्रान्सफॉर्मिंग इंडिया)च्या अंतर्गत वेगवेगळ्या बेटांचा विकास करण्याची योजना चालू आहे. अव्हिस आयलॅंड, स्मिथ आयलॅंड आणि लाँग आयलंडमध्ये शासनाच्या सहभागाने लक्झरी रिसॉर्ट्स नियोजित आहेत.[४]
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पोर्ट ब्लेअरमध्ये, मुख्य ठिकाणे म्हणजे सेल्युलर जेल, महात्मा गांधी मरीन नॅशनल पार्क, अंदमान वॉटर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, चथम सॉ मिल, मिनी झू, कॉर्बिन्स कॉव्ह, चिडिया टापू, वंदूर बीच, फॉरेस्ट म्युझियम, ॲँथ्रोपॉलॉजिकल म्युझियम, फिशरीज म्युझियम, नवल संग्रहालय (सामुद्रिका), रॉस बेट आणि उत्तर बे बेट. पूर्वी भेट देता येत असलेले वायपर बेट आता प्रशासनाने बंद ठेवले आहे. रावळगर बीचसाठी नील आयलॅंड, स्कुबा डायविंग / स्नॉर्केलिंग / समुद्रचालनासाठी, सिंक बेट, सॅडल पीक, माउंट हॅरिएट, माड ज्वालामुखी व हॅवेलॉक बेट आहे. उत्तर अंदमान येथे असलेल्या दिगलीपूर हेदेखील २०१८पासून लोकप्रिय आहे आणि बरेच पर्यटक उत्तर अंदमान येथे देखील येऊ लागले आहेत. दक्षिणी गट (निकोबार बेटे) बहुतेक पर्यटकांना उपलब्ध नसतात.
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जपानच्या साहाय्याने, दक्षिणी अंदमान द्वीपसमूहात आता १५-मेगावॅट डिझेल पॉवर प्लांट असेल. चीनहून होणाऱ्या तेल पुरवठ्यासाठी एक रणनीतिकदृष्ट्या महत्त्वपूर्ण चोक पॉईंट असेल. जलसंध्यां(??)जवळील नागरी पायाभूत सुविधा मजबूत करण्यासाठी ही इंडो-जपानी रणनीति असल्याचे मानले जाते.[५][६]
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महाराष्ट्र शासनाने उद्योग दिन हा १० मार्च रोजी लक्ष्मणराव काशिनाथ किर्लोस्कर यांच्या स्मृतीप्रित्यर्थ घोषित केला आहे. महाराष्ट्र राज्यात हा दिवस साजरा केला जातो.
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उद्योग विभाग मंत्रालय हे महाराष्ट्र शासनचेमहाराष्ट्रातील उद्योगांना चालना देण्यासाठी मंत्रालय जबाबदार आहे.उदय सामंत हे सध्याचे उद्योगमंत्री आहेत.
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मंत्रालयाचे नेतृत्व कॅबिनेट स्तरावरील मंत्री करतात. उदय सामंत हे सध्या उद्योग विभाग कॅबिनेट मंत्री आहेत.[१][२]
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उद्योग विभाग मंत्रालय हे महाराष्ट्र शासनचेमहाराष्ट्रातील उद्योगांना चालना देण्यासाठी मंत्रालय जबाबदार आहे.उदय सामंत हे सध्याचे उद्योगमंत्री आहेत.
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मंत्रालयाचे नेतृत्व कॅबिनेट स्तरावरील मंत्री करतात. उदय सामंत हे सध्या उद्योग विभाग कॅबिनेट मंत्री आहेत.[१][२]
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उधना हे भारतीय रेल्वेच्या दिल्ली–मुंबई रेल्वेमार्गावरील एक प्रमुख रेल्वे स्थानक आहे. हे स्थानक दक्षिण गुजरातमधील उधनाशहराला मुंबई, वडोदरा आणि भारतातील इतर भागांशी रेल्वेमार्गाद्वारे जोडते. येथून जळगावला जाणारा रेल्वेमार्ग आहे.
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सगळ्या पॅसेंजर, मेमू आणि निवडक एक्सप्रेस गाड्या येथे थांबतात. येथून ३ गाड्या सुरू होतात व संपतात.[१][२][३]
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उधलोड हे भारताच्या महाराष्ट्र राज्यातील नंदुरबार जिल्ह्यातील शहादा तालुक्यातील एक गाव आहे.
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येथील हवामान सामान्यतः गरम आणि कोरडे आहे. येथे उन्हाळा, पावसाळा,आणि हिवाळा असे तीन वेगवेगळे ऋतू आहेत. उन्हाळा मार्चपासून चालू होऊन जूनमध्यापर्यंत असतो.उन्हाळा गरम आणि कोरडा असतो.मे महिन्यात तापमान फार असते.तापमान ४१ अंश सेल्सियसपर्यंत जाते.जूनच्या मध्यास किंवा अखेरीस पावसाळा सुरू होतो.पावसाळी हंगामात हवामान सामान्यतः आर्द्र आणि गरम असते.वार्षिक पर्जन्यमान ७८० मि.मी.पर्यंत असते.हिवाळी मोसम नोव्हेंबरपासून साधारण फेब्रुवारीपर्यंत असतो.हिवाळा सौम्य थंड आणि कोरडा असतो.
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भारताच्या महाराष्ट्र राज्याच्या नांदेड जिल्ह्याच्या किनवट तालुक्यातील एक स्थळ. येथे गरम पाण्याचे झरे आहेत.
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{{ (लेखक-अरुण लक्ष्मीनारायण धकाते, धामणगाव रेल्वे 9405524184) माहूर -किनवट रोड वर माहूर शहरापासून 25 किमी अंतरावर सारखनी पासून पूर्वेकडे 15 किमी अंतरावर निसर्ग रम्य वातावरणात किनवट तालुक्यात वसलेले उनकेश्वर हे ठिकाण आहे. रामायण अध्याय 13 मध्ये या ठिकाणाचे वर्णन आलेले आहे. आख्यायिकेनुसार प्रभू रामचंद्र 14वर्षे वनवास भोगताना सीता व लक्ष्मणासह या ठिकाणी काही काळ व्यतीत केल्याचे वर्णन आहे. या ठिकाणी भरभंग ऋषींनी तपश्चर्या केल्याचे वर्णन आढळून येते. उनकेश्वर येथे प्राचीन शिवलिंग आहे.येथील महादेवाचे पिंड 'उपलिंग' म्हणून ओळखले जाते. ज्यांना 12 ज्योतिर्लिंगाचे दर्शन करणे शक्य नाही, त्यांनी या उपलिंगाचे दर्शन केल्यास 12 ज्योतिर्लिंगाचे दर्शन केल्यासारखे आहे, अशी आख्यायिका आहे.
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उनकेश्वर येथे नैसर्गिक गरम पाण्याचे झरे आहेत. या पाण्यात सल्फर अंशतः (गंधक )हे मूलद्रव्य (अधातू)आढळतो. या पाण्यात औषधी तत्वे आढळून येतात. या पाण्यात अंघोळ केल्यामुळे त्वचेसंबंधित रोगांचे निर्मूलन होतात, अशी मान्यता आहे. यामुळे अनेक लोक येथे अंघोळ करण्यासाठी येतात.
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उनकेश्वर येथील परिसरात उपयोगी वनौषधी सापडतात. या वनौषधी पासून पांढरा कोड, सोरॅसिस, मधुमेह इत्यादी रोंगांवर औषध तयार केली जातात.
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उनकेश्वर येथे श्री संस्थान, उनकेश्वर ही सेवाभावी संस्था विनामूल्य लोकसेवा करित आहे. श्री संस्थान मार्फत मोफत अन्नदान केले जाते. यासोबत ही संस्था कुष्ठरोगीसाठी सेवा देते. श्री संस्थांनतर्फे निराधार वृद्धांना आश्रय दिला जातो. या संस्थेतर्फे वृद्धाश्रम व कुष्ठरोग सेवाश्रम सेवा ही अनमोल समाजसेवा ठरते. शासनाकडून कोणतेही अनुदान न घेता ही संस्था भेट देणाऱ्या भाविकांसाठी मोफत अन्नछत्र, रुग्णवाहिनी सेवा व निवास सेवा पुरविते. या संस्थानातर्फे वनौषधी पासून तयार केलेले विविध रोगांवरील औषधी माफक दरात विक्री केली जातात. (संकलन -अरुण लक्ष्मीनारायण धकाते धामणगाव रेल्वे 9405524184) }}
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उन्नाव हा उत्तर प्रदेश राज्यातील लोकसभा मतदारसंघ आहे
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उन्हेरे हे रायगड जिल्ह्यातल्या, सुधागड तालुक्यातील एक गाव आहे. येथे गरम पाण्याची कुंडे आहेत.
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उन्हाळा हा भारतातील तीन मुख्य ऋतूंपैकी एक आहे. उन्हाळ्यात हवामान उष्ण आणि कोरडे असते. उन्हाळ्यात शाळा आणि विद्यापीठांना सुट्टी असते.
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भारतात उन्हाळा फेब्रुवारी ते मे पर्यंत असतो. उन्हाळ्याच्या सुरुवातीला वसंत ऋतूमध्ये झाडांना पालवी फुटताना दिसते. महाराष्ट्रात उन्हाळ्याच्या सुरुवातीला होळी आणि रंगपंचमी हे सण साजरे केले जातात, याच वेळी कलिंगड, फणस, इत्यादी फळे पिकलेली दिसतात. उन्हाळ्याच्या शेवटी मोठ्या प्रमाणात आंबा पिकलेला दिसतो. याच काळात वळिवाचा वादळी पाऊस पडतो. उन्हाळ्यात सर्व शाळांना सुट्टी असते .
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सूर्याची किरणे पृथ्वीवर लंबरूप पडतात.त्यामुळे तापमानात वाढ होते. महाराष्ट्र राज्यातील विदर्भात तर उन्हाचा कहरच असतो. उन्हामुळे पारा ४७० सेल्सियस इतका वा त्याच्या थोडा मागेपुढे (४६.७ किंवा ४७.६) राहू शकतो.[ संदर्भ हवा ]जमीन प्रचंड तापते. दिवसभर गरम वारे वाहतात. रात्रीही बराच वेळ गरम झळा वाहत राहतात.भारताच्या इतरही राज्यांत साधारणतः हीच परिस्थिती असते. राजस्थानमध्ये ४९० इतके तापमानही राहते.[ संदर्भ हवा ]
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लोकसंख्यावाढ, त्यामुळे होणारी उपलब्ध पाण्याची विभागणी, प्रचंड प्रमाणात वृक्षतोड, पर्यायी झाडे न लावणे, सिमेंटची बांधकामे, जमिनीवर झालेल्या रस्ते, पदपथ आदी बांधकामांमुळे जमिनीवर पडणारे पावसाचे पाणी जमिनीत न मुरणे, पाण्याचा भूगर्भातून प्रचंड उपसा, औद्योगिकीकरण, इत्यादी कारणे आहेत.[ संदर्भ हवा ]
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सन २०१६ च्या उन्हाळ्यात कोल्हापूर जिल्ह्यातील उंचगाव परिसरातील नारळीची झाडे मारू लागली,तर काही मरणांत स्थितीत आहेत.आत्ताच पडलेल्या पावसाने थोडा झाडांना दिलासा दिला आहे.सोलापूर जिल्ह्यात मोठ्या प्रमाणात उन्हाळा असतो.
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आकाशातल्या मानवनिर्मित उपग्रहापासून थेट घरावरच्या आकाशीपर्यंत बिनतारी दुव्याने चालवली जाणारी दूरचित्रवाणी सेवा उपग्रह थेट प्रसारण अर्थात (डायरेक्ट ब्रॉडकास्ट सॅटेलाईट - डीबीएस) या नावाने ओळखली जाते. पूर्वी याच सेवेला डायरेक्ट टू होम (डीटीएच) या नावानेही ओळखले जात असे.
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महाराष्ट्र राज्य नागरी सेवेतील उपजिल्हाधिकारी हे राजपत्रित दर्जाचे वर्ग (१) म्हणजे गट "अ" मधील सर्वोच्च पद आहे. उपजिल्हाधिकारी हे जिल्हाधिकारी. (भा.प्र.से) यांना जिल्ह्यातील , प्रशासकीय यंत्रणा सांभाळण्यासाठी कार्य करतात.
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उपजिल्हाधिकारी यांची निवड महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग.(MPSC) या संविधानिक आयोगामार्फत करण्यात येते.
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उपजिल्हाधिकारी यांची नेमणूक महाराष्ट्र शासन करते.
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मुंज/उपनयन हा हिंदू धर्मातील सोळा संस्कारापैकी तेरावा संस्कार आहे.[१] हा कुमाराचा एक प्रमुख संस्कार आहे. परंपरेनुसार, हा संस्कार ब्राह्मण, क्षत्रिय व वैश्य या तीन वर्णांतील पुरुषांसाठीच सांगितला आहे. याला मौंजीबंधन व व्रतबंध अशीही नावे आहेत.
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उपनयनाची संस्कृतमध्ये व्याख्या अशी-
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अर्थ: ज्या गृह्यसूत्रोक्त कर्माने बाळाला वेदाध्ययनासाठी गुरूजवळ नेले जाते त्याला "उपनयन" असे म्हणतात.[२]
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या संस्कारानंतर संस्कारित व्यक्ती आपल्या पालकांपासून दूर होऊन स्वतःच्या शिक्षणावर लक्ष केंद्रित करते. या संस्कारात यज्ञोपवीत (जानवे) धारण करणे हा मुख्य विधी असतो.[३] लहानग्या बटुला लंगोट नेसवून इंद्रियनिग्रह समजावणारा हा महत्त्वाचा संस्कार आहे.
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काही वर्षांपर्यंत फक्त ब्राह्मण, क्षत्रिय व काही अंशी वैश्य वर्णांतील पुरुषांना हा संस्कार करवून घेण्याचा अधिकार असे. नवीन मतप्रणालीनुसार, विशेषतः नागरी महाराष्ट्रात, हे बंधन शिथिल होत गेले.
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गायत्रीमंत्राचा उपदेश, 'देवसवितरेष ते ब्रह्मचारी' आणि मंगलाष्टकानंतर बटूचे आचार्य जे मुखनिरीक्षण करतो, यापैकी प्रत्येकाला उपनयन समजणारे तीन पक्ष होतात. वेदाध्ययनाला सुरुवात या दृष्टीने गायत्रीमंत्राच्या उपदेशाला अनन्यसाधारण महत्त्व देण्यात येते. आपल्या हिंदू धर्माचा, या विश्वाचा मूळ जो प्रजापति त्याला बटु(कुमर) अर्पण करणे हा ऐतिहासिक व अत्यंत महत्त्वाचा भाग आहे. म्हणून त्याचे सोळा संस्कारात परंपरा या दृष्टीने विशेष महत्त्व आहे. यज्ञोपवीत जानवे वगैरे प्रजापतीचे रूप घेण्याची साधने आहेत. उपनयन म्हणजे आपला मूळ जो प्रजापति, आत्म्याने त्याच्या जवळ जाणे, त्याची वस्त्रे, त्याची विद्या आपण मिळविण्याचा प्रयत्न करणे, केवळ या प्रमाणावरून पाहता ज्यांना वेदाधिकार पाहिजे असेल त्यांनी हा संस्कार करावयाचा आणि वैदिक व्हावयाचे असा मूळ उद्देश उपनयन संस्कारात दिसतो. सर्व सोळा संस्कारात उपनयनसंस्कार सर्वात श्रेष्ठ होय. हा संस्कार केल्याने बटूला वेदाध्ययनाचा अधिकार प्राप्त होतो. तसेच त्याला वैदिक धर्मात सांगितलेली कर्मे करण्याचाही अधिकार प्राप्त होतो.[४]
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शास्त्रतः हा संस्कार त्रैवर्णिकांना करण्याचा अधिकार आहे. परंतु सध्या हा संस्कार विशेषतः ब्राह्मणात, फार थोड्या क्षत्रियात आणि वैश्यात करण्या�� येतो. याला दुसरा जन्म मानण्याची चाल आहे.म्हणूनच मुंज झालेल्या व्यक्तीला 'द्विज'म्हणतात. पहिला जन्म आई-बापांपासून आणि दुसरा जन्म गायत्री मंत्रापासून आणि आचार्य यांच्यामुळे प्राप्त होतो, असे या संस्काराचे महत्त्व वेदांत वर्णिलेले आहे.
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उपनयन म्हणजे गुरूंच्या जवळ जाणे. गुरूच्या जवळ राहून , ब्रह्मचारी म्हणून चांगल्या प्रकारे ,एकाग्रचित्ताने अभ्यास करण्यासाठी काही नियम पाळणे आवश्यक असते. त्या नियमांनी व व्रतांनी स्वतःला बांधून घेणे म्हणजेच व्रतबंध. ही व्रते नियमाने पाळण्यासाठी निश्चयशक्तीची जोडही त्याला द्यावी लागते. सारांश, ब्रह्मचारी म्हणून स्वतःच्या शरीराला , मनाला आणि बुद्धीला जाणीवपूर्वक वळण लावावे लागते. ज्याप्रमाणे कंदिलाच्या बाहेरची काच जर खराब असेल तर दिव्याच्या वातीचे तेज बाहेर नीट पडत नाही ; त्यासाठी कंदिलाची काच स्वच्छ असावी लागते त्याप्रमाणे योगाची जी आठ अंगे आहेत त्यांचे अनुष्ठान केल्याने चित्तातील अशुद्धीचा क्षय होत जातो आणि ज्ञानशक्ती प्रदीप्त होते आणि प्रज्ञेचा विकास होतो. १ भारतीय संस्कृतीत प्रत्येक आश्रमानुसार ब्रह्मचर्याचे स्वरूप वेगवेगळे सांगितले आहे. पण प्रत्येक टप्प्यावर ब्रह्मचर्याचा अभ्यास करीत असताना आपली संयमशक्ती वाढविण्याकडे विशेष लक्ष द्यावे लागते. यासाठीही योगाभ्यासाचा उपयोग होऊ शकतो.[५]
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धार्मिक विद्यांचे अध्ययन या अर्थी ब्रह्मचर्य या शब्दाचा प्रयोग केला जातो.
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प्रत्येक वर्णाच्या लोकांना उपनयनाचा काल वेगळा सांगितला आहे. आठ, अकरा व बारा अशा क्रमाने ब्राह्मण, क्षत्रिय व वैश्य यांना काल सांगितला आहे. अनुक्रमे सोळा, बावीस व चोवीस वयाच्या पुढे तरी उपनयन न करता राहणे उपयोगी नाही. (आश्व. १-१९).तरी प्रगत महाराष्ट्रात हा विधी ब्राह्मणांत वयाच्या आठव्या वर्षी, क्षत्रियांत सोळाव्या वर्षापर्यंत, तर वैश्यांमध्ये बाराव्या वर्षी करण्याचे संकेत आहेत.
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घाणा भरणे हा एक धार्मिक विधीपेक्षाही महत्त्वाचा विधी होऊन बसला आहे. वास्तविक घाणा भरणे म्हणजे सर्व कार्याची तयारी झाल्यामुळे उखळ, मुसळ वगैरे व्यवस्थित बांधून बाजूस ठेवणे. परंतु त्याला आता एका रूढीचे महत्त्व आले आहे. पूर्वी दारापुढे मांडव घालून कार्य होत असे पण आता मंगल कार्यालयात कार्य होत असल्याने मंडपप्रतिष्ठा हीसुद्धा अशीच रूढी झाली आहे. मांडव न घालता मंडपाच्या वेगवेगळ्या भागावर स्थापन करावयाच्या देवता सुपात मांडून ठेवावयाच्या ही गोष्ट केवळ प्रतिकात्मक होऊन बसते. तसेच पूर्वांगात आणि उत्तरांगात अनेक अनावश्यक विधी शिरले आहेत. ते काढून टाकून विधीचे स्वरूप मुख्य भागावर आणून बसविणे हे आपले कर्तव्य आहे.
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उपनयन करण्यास मुख्य अधिकारी वडील होय. त्यानंतर आजोबा , भाऊ, जातीचा कोणी तरी हे होत. ज्याची मुंज करावयाची त्याच्यापेक्षा तो वयाने मोठा असावा म्हणजे झाले.
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मोबाइल ॲंप हे एक सॉफ्टवेर आहे की जे स्मार्ट फोन आणि टॅब्लेट संगणकावर योग्य त्या आकाराची जुळवणी करून उपयोग करता येतों. अनेक नमुन्यातील तयार करून विक्री केलेले ॲंप म्हणजेच वेब ब्राऊजर, इमेल क्लाईंट, कॅलेंडर, मापपिंग कार्यक्रम. खरेदलेले संगीत, इतर माध्यमे, आणि कितीतरी ॲंप मुळातः संग्रह करून वापरता येतात. मोबाइल किंवा इतरात साठविलेले ॲंप खूप झाले तर ते त्यातून रद्द करण्याचीही अतिशय साधी सरळं व्यवस्था त्यात आहे.
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काही ॲंप मोबाइल उपकरणात बसविलेले नसतात ते ॲंप ॲंपगॅलरीत उपलब्ध असतात. ही सुविधा सन २००८ मध्ये चालू झाली ती म्हणजे ॲपल ॲंप संग्रहालय, गूगल प्ले, विंडोज फोन स्टोर, आणि ब्लॅक बेरी ॲंप वर्ल्ड. काही ॲंप मोफत मिळतात पण बाकी खरेदीच करावे लागतात. सामान्यतः ते मोबाइल उपकरणात इच्छित ठिकाणी डाउनलोड करावे लागतात, पण काही वेळा लॅपटॉपवर आणि मेजवरील संगणकात ते डाउनलोड झालेले असतात. ॲंपचे किमतीचा विचार केला तर २०-३०% किंमत वितरकाकडे राहते आणि बाकी ॲंपचे उत्पादकाकडे जाते.[१] त्यामुळे त्याची किंमत मोबाइल विक्रेत्यावर अवलंबून राहते.
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ॲंप हा ॲप्लिकेशन सॉफ्टवेरचा सॉर्ट फॉर्म आहे. हा शब्द अतिशय प्रसिद्द आहे. सन २०१० मध्ये अमेरिकन डियलेक्ट सोसायटीने वर्ड ऑफ द इयर असे शब्दाचे वर्णन करून त्यांनी त्यांचे यादीत नोंद केली.[२] तंत्रज्ञान स्तंभ लेखक डेविड पोगुए हे त्यांचे लिखाणात म्हणाले की या नवीन स्मार्ट फोनचे आधुनिक काळातील स्पर्धात्मक स्थितीत वेगळेपण राहावे म्हणून याचे निकनेम ॲंप फोन असावे.
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मोबाइल फोन मधून साधारणपने ईमेल, कॅलेंडर, संपर्क, स्टॉक मार्केट, हवामान अंदाज, याची माहिती मिळते. तरीसुद्दा इतर विभागात म्हणजेच टेबलावर संगणकावरील कामकाज करणाऱ्या वर्गात सॉफ्टवेरची फार मोठी मागणी येऊन विकासात्मक बाबीत फार मोठी क्रांती झाली. ॲंपच्या संशोधक आव्हानांच्या भडक्यामुळे ब्लॉग,मासिके,आणि ऑनलाइन समर्पित ॲंप संशोधित सेवाना उधाण आलेले आहे. सन २०१४ मध्ये सरकारने मेडिकल क्षेत्रात नियमनतेसाठी ॲंपचा वापर करण्याचे धोरण आत्मसात करण्याचा प्रयत्न केला.[३] काही कंपनी ॲंपचा वापर व्यावसायिक समाधान मिळविण्यासाठी पोहचवितात.
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सर्व मोबाइल फोन वापर करणाऱ्यामध्ये मोबाइल ॲंपची प्रचिती, प्रशिद्दी, वाढलेली आहे. याचे उदाहरण म्हणजे मे २०१२ मध्ये या संबंधाने एक गणना केली त्यात तेव्हा लक्षात आले की मोबाइल धारक त्यांचे मोबाईलवर ॲंपचा वापर वेब ब्रौस ४९.८% तर ॲंप वापर ५१.१% करत आहेत.[४]
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ॲंपचा विकास मोबाइल उपकरणाच्या गरजेपोटी फार महत्त्वाचा आहे. मोबाइलचे दिसणे, जलदगती, गरजेची हवी ती माहिती या बाबींचा ॲंप विकास करते आहे. मोबाइल उपकरन बाटरीवर चालते त्यामुळे ते वैयक्तिक संगणकापेक्षा कमी शक्तिमान आहे. शिवाय त्यात स्थळं शोध,चीत्रीकरण करणारा कॅमेरा, संगीत, बातम्या, देश विदेशातील चालू घडामोडी अशा विविध बांबी अंतर्भूत आहेत. याच्या विकासाच्या बांबींचा विचार करताना विकासकाने त्याचे स्क्रीन सजावट, आकार, हार्डवेयर तपशील आणि त्याच्या बाह्य आकाराचा विचार करणे आवश्यक आहे कारण मोबाइल व्यवसाव्यात खूप मोठी स्पर्धा आहे आणि क्षणो क्षणी याच्या सॉफ्टवेर मध्ये या स्पर्धत बदल घडतायेत.
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ॲंपची अन्द्रोइड हे गूगल प्ले आणि आयओएस हे ॲंप स्टोर साठी दोन तुल्यबळ संग्राहालये आहेत.
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हे आंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन सॉफ्टवेर संग्रहालय अन्द्रोइड मोबाइल उपकरणासाठी गूगल यांनी विकशीत केले.[५] याचे उद्घाटन ऑक्टोबर २००८ मध्ये झाले. जुलै २०१३ मध्ये गूगल प्ले संग्रहालयातील असणाऱ्या ५० मिल्लीयन ॲंप मधील उपलब्ध एक मिललियन ॲंप पैकी सरस असे कित्येक ॲंप डाउन लोड केले.
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स्टातीसताचे अनुमानानुसार १.४ मिल्लीयन पेक्षाही जास्तं ॲंप फेब्रुवारी २०१५ मध्ये ॲंप कडे संग्रहीत होते.
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आयओएस ॲपलचे ॲंप संग्रहालय हे ॲंपचे प्रथम ॲंप वितरण सेवा केंद्र न्हवते, पण जुलै २००८ मध्ये मोबाइलची रोमहर्षक उत्क्रांती झाली होती. आणि जानेवारी २०११ मध्ये १० बिल्लियन ॲंप डाउन लोड झाले असा अहवाल सादर झाला.[६] सन १९९३ मध्ये नेक्स्ट वर्ल्ड एक्सपो मध्ये जेससे टायलर यांनी स्टीव जॉब्स यांना मुळचे ॲंप संग्रहाचे प्रात्यक्षिक दाखविले होते.[७]
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६ जून २०११ रोजी आयओएस वापर करनाऱ्या २०० मिल्लियन ग्राहकासाठी ४२५००० ॲंप्स डाउन लोड केले. सन २०१२ मध्ये ॲपलचे सीईओ टिम कूक यांनी जगातील मोबाइल विकासकांच्या सभेत माहिती दिली की ॲंपचे संग्रहालयात ६५०००० ॲंप्स डाउन लोड करण्यास उपलब्ध आहेत, आणि आजपर्यंत ३० बिल्लियन अप्प् डाउन लोड झालेले आहेत.[८]
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अमेझोन ॲंप संग्रहालय,
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ब्लॅक बेरी
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ओवी (नोकीया)
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विंडोज संग्रहालय
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समसंग ॲंप्स
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इलेक्त्रोंनिक ॲंप व्रापर,
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एफ ड्रोइड आणि कित्येक ॲं���ची संग्रहालये आहेत.
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मोबाइल ॲप्लिकेशन मॅनेजमेंट (MAM) ही सॉफ्टवेर आणि त्याची व त्यासंबंधाचे होणारे सर्व दुष्परिणाम, धोके , नियोजन, कंट्रोल आणि विकशीत बांबी तसेच व्यावसायिक म्हणजेच ॲंपची सेवा असणारे मोबाईलची व्यवस्थापन यंत्रणा यांची जबाबदारी स्वीकारते. कामकाजातील डावपेच म्हणजे सुरक्षततेसाठी "ब्रिंग यूवर ओन डिवाइस" (BYOD) आणि ॲंप सेवा प्राप्त करा.
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७ फेब्रुवारी, इ.स. २०११
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दुवा: Cricinfo (इंग्लिश मजकूर)
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उपुल थरंगा (२ फरवरी, इ.स. १९८५:श्रीलंका) हा श्रीलंकाचा क्रिकेट खेळाडू आहे।
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धार्मिक कारणांसाठी उपवास करणे ही भारतीयांची श्रद्धा आहे, प्रथा आहे. महाराष्ट्रात आषाढी आणि कार्तिकी एकादशी, चतुर्थी, महाशिवरात्र यासारख्या निमित्ताने त्या दिवशी उपवास करतात. कित्येकजण आराध्य देवतेनुसार आठवडयातून एकदा सोमवार, गुरुवार किंवा शनिवार या दिवशी असे उपवास करीत असतात. उपवासाच्या दिवशी काही खास पदार्थ खाण्याची परवानगी असते. रोजच्या जेवणातल्या पदार्थांपेक्षा वेगळया वस्तूंपासून बनविलेले पदार्थ उपवासाच्या दिवशी आवडीने खाल्ले जातात.
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बुद्धांनी शिकवले की उपोसथ दिवस म्हणजे “अशुद्ध मनाची शुद्धता” करण्याचा दिवस होय,उपोसथ किंवा उपोस्थ या शब्दाचा अर्थ उप+स्था म्हणजे एकत्र बसने होय, भिक्षुसंघाची एकसंधपणा टिकवून राहण्यासाठी उपोसथ विधी खूप महत्त्वाचा मानला गेला.उपोसथ विधी बुद्ध काळापासून अस्तित्वात (६०० ई.पू.) आहे आणि बौद्ध देशांमध्ये उपोसथ विधी श्रद्धापूर्वक पाळला जातो.
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अमावस्या आणि पौर्णिमेच्या दिवशी भिक्खू पटिमोक्खा (आचारसंहितेचे नियम) यांचे पाक्षिक कबुलीजबाब आणि पाठ होते. या दिवशी बौद्ध उपासक आणि भन्ते धम्म अध्ययन आणि ध्यानाची त्रीव्रता आणखीन वाढवतात. बुद्धाच्या काळी अमावस्या आणि पौर्णिमेच्या दिवशी भिक्खू पटिमोक्खा (आचारसंहितेचे नियम) यांचे पाक्षिक कबुलीजबाब आणि पाठ होत असत.विनयासंबधी जर आचारात काही दोष आला असेल तर उपोसथ दिनी भन्ते सर्वा समोर कबुलीजबाब देत असत व संघ नियमानुसार त्यांना पुढील कारवाईस समोर जावे लागत. हा विधी खूप पवित्र मानला जाई आजही त्याचे पालन केले जाते.
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धम्माप्रती वचनबद्ध उपासक गृहस्थ अष्टांगिक मार्गाचे पालन करतात धम्मा आचरणात उत्साह जागृत होण्याकरिता समाधी मार्गाचे ध्यानाचे अवलंबन करतात.जेव्हा शक्य असेल तेव्हा उपासक या दिवसाचा उपयोग स्थानिक विहारात जाण्याची संधी म्हणून करतात. या दिनी संघाला विशेष दान अर्पण केले जाते, धम्म प्रवचन ऐकले जाते आणि रात्री उशिरापर्यंत धम्म बांधवा सोबत ध्यान धारणा केली जाते. जे उपासक विहारात जाऊ शकत नाहीत अश्याना ही उपोसथ दिन संधी देतो कि आपली ध्यान करण्याचे प्रयन्त वाढवावे कारण या पवित्र दिनी जगातील हजारो उपासक ध्यान धारणेचा अभ्यासात वुद्धी होण्याच्या दिशेने पाऊल टाकतात.
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वर्षावास म्हणजे पावसाळ्यातील तीन महिने अर्थात आश्विन पौर्णिमेपर्यंत निमंत्रित बुद्ध विहारात व्यतीत करणे. या काळात भिक्खू विनयात कमीपणा आला असेल त्यांनी ज्येष्ठ भिक्खुंद्वारा पूर्तता करणे, ध्यान - साधना करणे, बौद्ध उपासक / उपासिकांना धम्म शिकविणे, उपासकांकडून अष्ट पुरस्कारांचे धम्मदान स्वीकारणे व उर्वरीत नऊ महिने धम्म - प्रचार - प्रसाराला घालविणे हे भिक्खुंचे कार्य असते.
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तथागतांनी बुद्धत्व प्राप्तीनंतर पंचवर्गीय संन्याशांना आपला अष्टांगिक मार्ग, प्रतीत्य समुत्पाद, चार आर्यसत्य हे समजावून दिल्यानंतर त��यांना ते कळले. इसिपतन वन (आधुनिक सारनाथ), वाराणसी येथे अनुत्तर असे पहिले धम्मचक्र प्रवर्तन केले. आश्विन पौर्णिमेला एकसष्ठ अर्हत भिक्षुंच्या समवेत धम्मचक्राची घोषणा केली. चारही दिशांना जाऊन माझ्या बहुजन हिताय - बहुजन सुखाय धम्मची अशी सिंहगर्जना केली. जेव्हापासून तथागतांनी आषाढी पौर्णिमेला भिक्षु समवेत प्रथम वर्षावास इसिपतन मध्ये केला, तेव्हापासून भिक्खू वर्षावास प्रारंभ करतात.
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वर्षावास
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भगवान बुद्धाच्या काळात बुद्धांनी सर्व भिक्षूंना धम्माचा प्रसार करण्याचे आदेश दिले आणि सर्व बौद्ध भिख्खू या कामात गुंतले होते, परंतु असे केल्याने त्यांना बऱ्याच संकटांना आणि विशेषतः पावसाळ्यात नद्यांमध्ये अनेक संकटांना सामोरे जावे लागे. पुरामुळे बौद्ध भिक्खू वाहून जात आणि त्यांच्या चालण्याने शेतातील पिकांचे नुकसान होत त्यांनी हे तथागतांना सांगितले,बुद्धांनी आदेश दिला की आषाढ पौर्णिमेपासून ते अश्विनी पौर्णिमेपर्यंत सर्व भिक्षूंनी एकाच ठिकाणी रहावे, भिक्षासाठी गावात जाऊ नये. ऐकाच ठिकाणी राहून धम्मचा पठण अध्ययन करावे जर गरज पडली तर भिक्षू आपल्या गुरूंकडून जास्तीत जास्त एका आठवड्याचा वेळ घेऊन विहारातून बाहेर जाऊ शकतात, भगवान बुद्ध काळापासून वर्षावास अस्तित्वात आहे. भगवान बुद्धांनी पहिला वर्षावास इ.स.पू. ५२७ मध्ये सारनाथच्या इसिपटन मध्ये केला आणि त्यानंतर ४५ वर्षावास त्यांनी श्रावस्ती, जेतावन, वैशाली, राजगृह इत्यादी ठिकाणी केले. अश्या प्राचीन गुरू शिष्य परंपरेचे पालन आजही भारतात आणि बौद्धराष्ट्र थायलंड, म्यानमार, श्रीलंका कंबोडिया आणि बांगलादेश पालन करतात.
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व वर्षभर केलेल्या चुकांची क्षमा मागितली जाते
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पर्युषण सणाच्या वेळी सर्व भाविक धार्मिक ग्रंथांचे पठण करतात. आणि त्याशी संबंधित प्रवचने ऐकतात. अनेक भाविक उत्सवाच्या वेळी उपवास करतात. या सणात दान करणे हा सर्वांत श्रेष्ठ पुण्य मानला जातो. पर्युषण उत्सवात रथयात्रा किंवा मिरवणूक काढली जाते. अनेक ठिकाणी सामुदायिक मेजवानी आयोजित केल्या जातात.
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| 10 |
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कठोर उपवास करण्यात घालवतात
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जनगणना स्थल निर्देशांक ५३८८७९ असलेले उबदली हे गाव, गडचिरोली या जिल्ह्यातील ५०३.७ हेक्टर क्षेत्राचे गाव असून २०११ च्या जनगणनेनुसार [१] ह्या गावात ३९ कुटुंबे आहेत व एकूण लोकसंख्या १५४ आहे.ह्याच्या सर्वात जवळचे शहर गडचिरोली हे ७० किलोमीटर अंतरावर आहे.
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+
गावात असणाऱ्या सुविधा - प्राथमिक शाळा-१. स्थानिक नसलेल्या सुविधांची अंतरे -
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५ किमीपेक्षा कमी अंतरावर : पूर्व-प्राथमिक शाळा जयसिंगटोला येथे आहे. ५ ते १० किमी अंतरावर : कनिष्ठ माध्यमिक शाळा देवसरा येथे आहे. माध्यमिक शाळा मालेवाडा येथे आहे. उच्च माध्यमिक शाळा मालेवाडा येथे आहे. १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर : पदवी महाविद्यालय गडचिरोली येथे आहे. अभियांत्रिकी महाविद्यालय गडचिरोली येथे आहे. वैद्यकीय महाविद्यालय गडचिरोली येथे आहे. मॅनिजमेन्ट इन्स्टिट्युट गडचिरोली येथे आहे. पॉलिटेक्निक गडचिरोली येथे आहे. व्यावसायिक प्रशिक्षण शाळा गडचिरोली येथे आहे. अनौपचारिक प्रशिक्षण केन्द्र गडचिरोली येथे आहे. अपंगांसाठी खास शाळा गडचिरोली येथे आहे.
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असलेल्या सुविधा- काही नाही
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नसलेल्या सुविधा -
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कम्युनिटी हेल्थ सेंटर, प्राथमिक आरोग्य केन्द्र, प्राथमिक आरोग्य उपकेन्द्र, प्रसूति व शिशुसंगोपन केन्द्र, क्षयरोग रुग्णालय, अॅलोपॅथिक रुग्णालय, अन्य उपचार पद्धतीचे रुग्णालय, दवाखाने, गुरांचे दवाखाने, फिरते दवाखाने, कुटुंब कल्याण केन्द्र,
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+
असलेल्या सुविधा- काही नाही
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नसलेल्या सुविधा -
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+
बाह्य रोगी विभाग, बाह्य व भरती असलेले रोगी विभाग, धर्मादाय बिगर-सरकारी रुग्णालय, एमबीबीएस पदवीधर डॉक्टर, इतर पदवीधर डॉक्टर, पदवी नसलेले डॉक्टर, पारंपरिक वैद्य व वैदू, औषधाची दुकाने, इतर बिगरसरकारी वैद्यकीय सुविधा,
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| 10 |
+
असलेल्या सुविधा-
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| 11 |
+
झाकण नसलेल्या विहिरीच्या पाण्याचा पुरवठा, हँड पंपच्या पाण्याचा पुरवठा,
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| 12 |
+
नसलेल्या सुविधा -
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शुद्ध केलेल्या पाण्याचा नळातून पुरवठा, शुद्ध न केलेल्या पाण्याचा नळातून पुरवठा, झाकलेल्या विहिरीच्या पाण्याचा पुरवठा, बारमाही सुरू असलेल्या हँड पंपच्या पाण्याचा पुरवठा, बोअर वेलच्या पाण्याचा पुरवठा, बारमाही सुरू असलेल्या बोअरवेल पाण्याचा पुरवठा, झऱ्यांच्या पाण्याचा पुरवठा, नदी /कालवे यातील पाण्याचा पुरवठा, तलाव / तळी यातील पाण्याचा पुरवठा, इतर पाण्याचा पुरवठा,
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| 14 |
+
असलेल्या सुविधा-
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| 15 |
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सांडपाणी शुद्धीकरणाच्या सयंत्रात सोडले जाते.
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नसलेल्या सुविधा -
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उघडी गटारे, न्हाणीघरासह सार्वजनिक स्वच्छता गृह, न्हाणीघर नसलेले सार्वजनिक स्वच्छता गृह, ग्रामीण सॅनिटरी हार्डवेरचे दुकान, सामूहिक बायोगॅस किंवा कचऱ्याच्या उत्पादक पुनर्वापराची व्यवस्था,
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| 18 |
+
गावात असणाऱ्या सुविधा -
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| 19 |
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बारमाही रस्ते, स्थानिक नसलेल्या सुविधांची अंतरे -
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पोस्ट ऑफिस, - ५ किमीपेक्षा कमी अंतरावर. उपपोस्ट ऑफिस, - ५ किमीपेक्षा कमी अंतरावर. मोबाइल फोन सुविधा, - ५ किमीपेक्षा कमी अंतरावर. इंटरनेट कॅफे / सर्व्हिस सेंटर, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. खाजगी कूरियर, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. सार्वजनिक बस सेवा, - ५ किमीपेक्षा कमी अंतरावर. खाजगी बस सेवा, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. रेल्वे स्थानक, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. ऑटो व टमटम, - ५ किमीपेक्षा कमी अंतरावर. टॅक्सी, - ५ किमीपेक्षा कमी अंतरावर. ट्रॅक्टर - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. सायकल रिक्षा (पायचाकी), - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. बैल व इतर जनावरांनी ओढलेल्या गाड्या, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. राष्ट्रीय महामार्गाला जोडलेले रस्ते, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. राज्य महामार्गाला जोडलेले रस्ते, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. जिल्ह्यातील मुख्य रस्त्याला जोडलेले रस्ते, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. जिल्ह्यातील दुय्यम रस्त्याना जोडलेले रस्ते, - ५ ते १० किमी अंतरावर. डांबरी रस्ते, - ५ किमीपेक्षा कमी अंतरावर. कच्चे रस्ते, - ५ किमीपेक्षा कमी अंतरावर. पाण्यासाठी नाल्या असणारे डांबरी रस्ते, - ५ किमीपेक्षा कमी अंतरावर. तळटीप- शिरगिणतीत असलेल्या पुढील सुविधांच्या उपलब्धततेची माहिती नाही - सायकल रिक्षा (यांत्रिक), समुद्र व नदीवरील बोट वाहतूक, बोट वाहतुकीयोग्य जलमार्ग,
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| 21 |
+
गावात असणाऱ्या सुविधा -
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| 22 |
+
स्थानिक नसलेल्या सुविधांची अंतरे -
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| 23 |
+
ए टी एम, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. व्यापारी बँका, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. सहकारी बँका, - ५ ते १० किमी अंतरावर. शेतकी कर्ज संस्था, - ५ ते १० किमी अंतरावर. स्वसहाय्य गट (SHG), - ५ किमीपेक्षा कमी अंतरावर. रेशनचे दुकान, - ५ किमीपेक्षा कमी अंतरावर. मंडया / कायम बाजार, - ५ ते १० किमी अंतरावर. आठवड्याचा बाजार, - ५ ते १० किमी अंतरावर.
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| 24 |
+
गावात असणाऱ्या सुविधा -
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| 25 |
+
इतर पौष्टिक आहार केन्द्र,
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| 26 |
+
स्थानिक नसलेल्या सुविधांची अंतरे -
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| 27 |
+
शिशुविकास पौष्टिक आहार केन्द्र (ICDS), - ५ किमीपेक्षा कमी अंतरावर. अंगणवाडी पौष्टिक आहार केन्द्र, - ५ किमीपेक्षा कमी अंतरावर. अंगणवाडी पौष्टिक आहार केन्द्र, - ५ किमीपेक्षा कमी अंतरावर. आशा, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. समुदाय भवन (दूरचित्रवाणी सह अथवा विरहित), - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. क्रीडांगण, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. खेळ / करमणूक क्लब, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. सिनेमा/ व्हिडियो थियेटर, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. सार्वजनिक ग्रंथालय, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. सार्वजनिक वाचनालय, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. वृत्तपत्र पुरवठा, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. विधानसभा मतदान केन्द्र, - ५ ते १० किमी अंतरावर. जन्म व मृत्यु नोंदणी केन्द्र, - ५ किमीपेक्षा कमी अंतरावर.
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| 28 |
+
घरगुती वापरासाठी वीजपुरवठा - आहे.
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| 29 |
+
शेतीसाठी वीजपुरवठा - नाही.
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+
व्यापारी वापरासाठी वीजपुरवठा - नाही.
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| 31 |
+
सर्व प्रकारच्या वापरासाठी वीजपुरवठा - नाही.
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उभाडे हे भारताच्या महाराष्ट्र राज्यातील नाशिक जिल्ह्यातील इगतपुरी तालुक्यातील एक गाव आहे.
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येथे मार्चच्या मध्यापासून जूनच्या पूर्वार्धापर्यंत उन्हाळा असतो. उन्हाळ्यात हवामान सामान्यतः उष्ण असून तापमान ३७ ते ३९ सेल्सियसपर्यंत असते.जून महिन्याच्या मध्यापासून पावसास सुरुवात होऊन ऑक्टोबरच्या मध्यापर्यंत पावसाळा असतो. सर्वसाधारण नोव्हेंबर ते फेब्रुवारी या काळात थंडी असते.वार्षिक सर्वसाधारण हवामान उष्ण व विषम असते.वार्षिक पर्जन्यमान २०५० मि.मी.पर्यंत असते.
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उभादगड हे भारताच्या महाराष्ट्र राज्यातील नंदुरबार जिल्ह्यातील शहादा तालुक्यातील एक गाव आहे.
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| 2 |
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येथील हवामान सामान्यतः गरम आणि कोरडे आहे. येथे उन्हाळा, पावसाळा,आणि हिवाळा असे तीन वेगवेगळे ऋतू आहेत. उन्हाळा मार्चपासून चालू होऊन जूनमध्यापर्यंत असतो.उन्हाळा गरम आणि कोरडा असतो.मे महिन्यात तापमान फार असते.तापमान ४१ अंश सेल्सियसपर्यंत जाते.जूनच्या मध्यास किंवा अखेरीस पावसाळा सुरू होतो.पावसाळी हंगामात हवामान सामान्यतः आर्द्र आणि गरम असते.वार्षिक पर्जन्यमान ७८० मि.मी.पर्यंत असते.हिवाळी मोसम नोव्हेंबरपासून साधारण फेब्रुवारीपर्यंत असतो.हिवाळा सौम्य थंड आणि कोरडा असतो.
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अंधा कानून हा १९८३ साली प्रदर्शित झालेला एक हिंदी चित्रपट आहे. ह्या चित्रपटामध्ये रजनीकांत व हेमा मालिनी ह्यांच्या प्रमुख भूमिका आहेत.
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| 3 |
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चित्रपटाचे कथानक बदल्याच्या भावनेभोवती फिरतो.रजनीकांत त्याच्या पालकांच्या हत्यारांच्या सुडाचा बदला घेत असतांच, त्याची बहीण हेमा मालिनी,पोलिस अधिकारी त्याला पकडण्यात गुंतलेली असते.
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+
उमरगा हे भारताच्या महाराष्ट्र राज्यातील उस्मानाबाद जिल्ह्यातील तुळजापूर तालुक्यातील एक गाव आहे.
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| 2 |
+
येथील वातावरण साधारणपणे उष्ण व कोरडे असते. पावसाळा जून महिन्याच्या मध्यापासून सुरू होऊन सप्टेंबरच्या शेवटी संपतो.ऑक्टोबर ते नोव्हेंबर मध्यापर्यंत दमट वातावरण असते. नोव्हेंबर मध्य ते जानेवारी हिवाळा असतो. फेब्रुवारी ते मार्च वातावरण कोरडे असते. एप्रिल ते जून उन्हाळा असतो.सरासरी वार्षिक पर्जन्यमान ६२० मिलीमीटर असते.
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अंधा कानून हा १९८३ साली प्रदर्शित झालेला एक हिंदी चित्रपट आहे. ह्या चित्रपटामध्ये रजनीकांत व हेमा मालिनी ह्यांच्या प्रमुख भूमिका आहेत.
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| 3 |
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चित्रपटाचे कथानक बदल्याच्या भावनेभोवती फिरतो.रजनीकांत त्याच्या पालकांच्या हत्यारांच्या सुडाचा बदला घेत असतांच, त्याची बहीण हेमा मालिनी,पोलिस अधिकारी त्याला पकडण्यात गुंतलेली असते.
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