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weeping, sighing,indifference,dicouragement",glani - guilty,sanka - doubt (apprehension),asuya/irsya - jealousy (envy),mada - madness (intoxication),srama - fatigue,"alasya/alasata - laziness,sitting idle (unwililng to work)","dainya - meekness (depression),(despair)",cinta - contemplation (anxiety/reflection),"moha - bewilderment,[a feeling of being perplexed and confused] (distraction)",smrti - rememberance (recollection),"dhriti - forbearance,indifference abstenance (equanimity)",vrida - shame,capalya/capalatha/capala - impudence [rude behavior that does not show respect for others] (unsteadiness),"harsa - jubiliation,enjoyment (joy)",avega - intense emotion (agitation/flurry),"jadya/jadatha - invalidity,looking with steadfast gaze,unable to think properly",garva - pride,"visada - moroseness, sad [quality of being unhappy, annoyed, and unwilling to speak or smile]",autsukya - eagerness (impatience/longing),nidra - sleep (drowsiness),apasmara - forgetfulness (epilepsy/dementedness),supti/supta - deep sleep (dreaming),prabodha/vibodha - awakening,amarsa - impatience of opposition,avahittha - concealment (hiding of true feelings),"augrya/ugrata - violence,battle (cruelity/sterness)","mati - attention,instructing pupils (resolve)",vyadhi - disease (sickness),unmada - craziness (insanity/madness),mriti/marana - death,"trasa - shock,fear (fright/alarm)",vitarka - argument (doubt),utsuka - restless/anxious,tarka -deliberation [long and careful consideration or discussion],rati - romantic,lajja - shy,marsa - patience,tyaga - sacrifice,vimochana - releif,utsaha - hyped/enthused,"shraddhaadaya - confidence,trust",krodha - anger,"karuna - pity,kind","veera - royality,valour,greatness","shanta - serene,peaceful,pleasant",vismaya - exaggeration/wonder/surprise/pride/doubt,bhakti - devotion,no emotion
वागर्थाविवसंपृक्तौवागर्थप्रतिपत्तये।जगतःपितरौवन्देपार्वतीपरमेश्वरौ,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0
क्वसूर्यप्रभवोवंशःक्वचाल्पविषयामतिः।तितीर्षुर्दुस्तरंमोहादुडुपेनास्मिसागरम्,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
मन्दःकवियशःप्रार्थीगमिष्याम्यपहास्यताम्।प्रांशुलभ्येफलेलोभादुद्बाहुरिववामनः,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
अथवाकृतवाग्द्वारेवंशेऽस्मिन्पूर्वसूरिभिः।मणौवज्रसमुत्कीर्णेसूत्रस्येवास्तिमेगतिः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
सोऽहमाजन्मशुद्धानामाफलोदयकर्मणाम्।आसमुद्रक्षितीशानामानाकरथवर्त्मनाम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
यथाविधिहुताग्नीनांयथाकामार्चितार्थिनाम्।यथापराथदण्डानांयथाकालप्रबोधिनाम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0
त्यागायसंभृतार्थानांसत्यायमितभाषिणाम्।यशसेविजिगीषूणांप्रजायैगृहमेधिनाम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
शैशवेऽभ्यस्तविद्यानांयौवनेविषयैषिणाम्।वार्धकेमुनिवृत्तीनांयोगेनान्तेतनुत्यजाम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
रघूणामन्वयंवक्ष्येतनुवाग्विभवोऽपिसन्।तद्गुणैःकर्णमागत्यचापलायप्रचोदितः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0
तंसन्तःश्रोतुमर्हन्तिसदसद्व्यक्तिहेतवः। हेम्नःसंलक्ष्यतेह्यग्नौविशुद्धिःश्यामिकाऽपिवा,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
वैवस्वतोमनुर्नाममाननीयोमनीषिणाम्।आसीन्महीक्षितामाद्यःप्रणवश्छन्दसामिव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
तदन्वयेशुद्धिमतिप्रसूतःशुद्धिमत्तरः।दिलीपइतिराजेन्दुरिन्दुःक्षीरनिधाविव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
व्यूढोरस्कोवृषस्कन्धःशालप्रांशुर्महाभुजः।आत्मकर्मक्षमंदेहंक्षात्रोधर्मइवाश्रितः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
सर्वातिरिक्तसारेणसर्वतेजोभिभाविना।स्थितःसर्वोन्नतेनोर्वीक्रान्त्वामेरुरिवात्मना,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
आकारसदृशप्रज्ञःप्रज्ञयासदृशागमः।आगमैःसदृशारम्भआरम्भसदृशोदयः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
भीमकान्तैर्नृपगुणैःसबभूवोपजीविनाम्।अधृष्यश्चाभिगम्यश्चयादोरत्नैरिवार्णवः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
रेखामात्रमपिक्षुण्णादामनोर्वर्त्मनःपरम्।नव्यतीयुःप्रजास्तस्यनियन्तुर्नेमिवृत्तयः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
प्रजानामेवभूत्यर्थंसताभ्योबलिमग्रहीत्।सहस्रगुणमुत्स्रष्टुमादत्तेहिरसंरविः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
सेनापरिच्छदस्तस्यद्वयमेवार्थसाधनम्।शास्त्रेष्वकुण्ठिताबुद्धिर्मौर्वीधनुषिचातता,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
तस्यसंवृतमन्त्रस्यगूढाकारेङ्गितस्यच।फलानुमेयाःप्रारम्भाःसंस्काराःप्राक्तनाइव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
जुगोपात्मानमत्रस्तःभेजेधर्ममनातुरः।अगृध्नुराददेसोऽर्थमसक्तःसुखमन्वभूत्,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
ज्ञानेमौनंक्षमाशक्तौत्यागेश्लाघाविपर्ययः।गुणागुणानुबन्धित्वात्तस्यसप्रसवाइव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
अनाकृष्टस्यविषयैर्विद्यानाम्प्रारदृश्वनः।तस्यधर्मरतेरासीद्वृद्धत्वंजरसाविना,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
प्रजानांविनयाधानाद्रक्षणाद्भरणादपि।सपितापितरस्तासांकेवलंजन्महेतवः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
स्थित्यैदण्डयतोदण्ड्यान्परिणेतुःप्रसूतये।अप्यर्थकामौतस्यास्तांधर्मएवमनीषिणः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
दुदोहगांसयज्ञायसस्यायमघवादिवम्।सम्पद्विनियमेनोभौदधतुर्भुवनद्वयम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
नकिलानुनयुस्तस्यराजानोरक्षितुर्यशः।व्यावृत्तायत्परस्वेभ्यःश्रुतौतस्करतास्थिता,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
द्वेष्योऽपिसम्मतःशिष्टस्तस्यार्तस्ययथौषधम्।त्याज्योदुष्टःप्रियोऽप्यासीदङ्गुलीवोरगक्षता,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
तंवेधाविदधेनूनंमहाभूतसमाधिना।तथाहिसर्वेतस्यासन्परार्थैकफलागुणाः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
सवेलावप्रवलयांपरिखीकृतसागराम्।अनन्यशासनामुर्वींशशासैकपुरीमिव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
तस्यदाक्षिण्यरूढेननाम्नामगधवंशजा।पत्नीसुदक्षिणेत्यासीदध्वरस्येवदक्षिणा,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
कलत्रवन्तमात्मानमवरोधेमहत्यपि।तयामेनेमनस्विन्यालक्ष्म्याचवसुधाधिपः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तस्यामात्मानुरूपायामात्मजन्मसमुत्सुकः।विलम्बितफलैःकालंसनिनायमनोरथैः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
सन्तानार्थायविधयेस्वभुजादवतारिता।तेनधूर्जगतोगुर्वीसचिवेषुनिचिक्षिपे,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
अथाभ्यर्चविधातारंप्रयतौपुत्रकामया।तौदम्पतीवसिष्ठस्यगुरोर्जग्मतुराश्रमम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0
स्निग्धगम्भीरनिर्घोषमेकंस्यन्दनमाश्रितौ।प्रावृषेण्यंपयोवाहंविद्युदैरारताविव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
माभूदाश्रमपीडेतिपरिमेयपुरस्सरौ।अनुभावविशेषात्तुसेनापरिवृताविव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
सेव्यमानौसुखस्पर्शैःशालनिर्यासगन्धिभिः।पुष्परेणूत्किरैर्वातैराधूतवनराजिभिः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0
मनोभिरामाःशृण्वन्तौरथनेमिस्वनोन्मुखैः।षड्जसंवादिनीःकेकाद्विधाभिन्नाःशिखण्डिभिः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0
परस्पराक्षिसादृश्यमदूरोज्झितवर्त्मसु।मृगद्वन्द्वेषुपश्यन्तौस्यन्दनाबद्धदृष्टिषु,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
श्रेणीबन्धाद्वितन्वद्भिरस्तम्भांतोरणस्रजम्।सारसैःकलनिर्ह्रादैःक्वचिदुन्नमिताननौ,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
पवनस्यानुकूलत्वात्प्रार्थनासिद्धिशंसिनः।रजोभिस्तुरगोत्कीर्णैरस्पृष्टालकवेष्टनौ,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
सरसीष्वरविन्दानांवीचिविक्षोभशीतलम्।आमोदमुपजिघ्रन्तौस्वनिःश्वासानुकारिणम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
ग्रामेष्वात्मविसृष्टेषुयूपचिह्नेषुयज्वनाम्।अमोघाःप्रतिगृह्णन्तावर्घ्यानुपदमाशिषः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
हैयङ्गवीनमादायघोषवृद्धानुपस्थितान्।नामधेयानिपृच्छन्तौवन्यानांमार्गशाखिनाम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
काप्यभिख्यातयोरासीद्व्रजतोःशुद्धवेषयोः।हिमनिर्मुक्तयोर्योगेचित्राचन्द्रमसोरिव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0
तत्तद्भूमिपतिःपत्न्यैदर्शयन्प्रियदर्शनः।अपिलङ्घितमध्वानंबुबुधेनबुधोपमः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
सदुष्प्रापयशाःप्रापदाश्रमंश्रान्तवाहनः।सायंसंयमिनस्तस्यमहर्षेर्महिषीसखः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
वनान्तरादुपावृत्तैःसमित्कुशफलाहरैः।पूर्यमाणमदृश्याग्निप्रत्युद्यात्यैस्तपस्विभिः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
आकीर्णमृषिपत्नीनामुटजद्वाररोधिभिः।अपत्यैरिवनीवारभागधेयोचितैर्मृगैः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
सेकान्तेमुनिकन्याभिस्तत्क्षणोज्झितवृक्षकम्।विश्वासायविहङ्गानामालवालाम्बुपायिनम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
आतपात्ययसंक्षिप्तनीवारासुनिषादिभिः।मृगैर्वर्तितरोमन्थमुटजाङ्गनभूमिषु,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0
अभ्युत्थिताग्निपिशुनैरतिथीनाश्रमोन्मुखान्।पुनानंपवनोद्धूतैर्धूमैराहुतिगन्धिभिः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1
अथयन्तारमादिश्यधुर्यान्विश्रामयेतिसः।तामवारोहयत्पत्नींरथादवततारच,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
तस्मैसभ्याःसभार्यायगोप्त्रेगुप्ततमेन्द्रियाः।अर्हणामर्हतेचक्रुर्मुनयोनयचक्षुषे,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
विधेःसायन्तनस्यान्तेसददर्शतपोनिधिम्।अन्वासितमरुन्धत्यास्वाहयेवहविर्भुजम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
तयोर्जगृहतुःपादान्राजाराज्ञीचमागधी।तौगुरुर्गुरुपत्नीचप्रीत्याप्रतिननन्दतुः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0
तमातिथ्यक्रियाशान्तरथक्षोभपरिश्रमम्।पप्रच्छकुशलंराज्येराज्याश्रममुनिंमुनिः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
अथाथर्वनिधेस्तस्यविजितारिपुरःपुरः।अर्थ्यामर्थपतिर्वाचमाददेवदतांवरः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
उपपन्नंननुशिवंसप्तस्वङ्गेषुयस्यमे।दैवीनांमानुषीणांचप्रतिकर्तात्वमापदाम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0
तवमन्त्रकृतोमन्त्रैर्दूरात्प्रशमितारिभिः।प्रत्यादिश्यन्तइवमेदृष्टलक्ष्यभिदःशराः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,1,0
हविरावर्जितंहोतस्त्वयाविधिवदग्निषु।वृष्टिर्भवतिसस्यानामवग्रहविशोषिणाम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,1,0
पुरुषायुष्यजीविन्योनिरातङ्कानिरीतयः।यन्मदीयाःप्रजास्तस्यहेतुस्त्वद्ब्रह्मवर्चसम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,1,0
त्वयैवंचिन्त्यमानस्यगुरुणाब्रह्मयोनिना।सानुबन्धाःकथंनस्युःसंपदोमेनिरापदः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,1,0
किन्तुवध्वांतवैतस्यामदृष्टसदृशप्रजम्।नमामवतिसद्वीपारत्नसूरपिमेदिनी,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
नूनंमत्तःपरंवंश्याःपिण्डविच्छेददर्शिनः।नप्रकामभुजःश्राद्धेस्वधासंग्रहतत्पराः,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
मत्परंदुर्लभंमत्वानूनमावर्जितंमया।पयःपूर्वैःस्वनिःश्वासैःकवोष्णमुपभुज्यते,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
सोऽहमिज्याविशुद्धात्माप्रजालोपनिमीलितः।प्रकाशश्चाप्रकाशश्चलोकालोकइवाचलः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
लोकान्तरसुखंपुण्यंतपोदानसमुद्भवम्।संततिःशुद्धवंश्याहिपरत्रेहचशर्मणे,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तयाहीनंविधातर्मांकथंपश्यन्नदूयसे।सिक्तंस्वयमिवस्नेहाद्वन्ध्यमाश्रमवृक्षकम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
असह्यपीडंभगवनृणमन्त्यमवेहिमे।अरुन्तुदमिवालानमनिर्वाणस्यदन्तिनः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तस्मान्मुच्येयथातातसंविधातुंतथार्हसि।इक्ष्वाकूणांदुरापेऽर्थेत्वदधीनाहिसिद्धयः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0
इतिविज्ञापितोराज्ञाध्यानस्तिमितलोचनः।क्षणमात्रमृषिस्तस्थौसुप्तमीनइवह्रदः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0
सोऽपश्यत्प्रणिधानेनसन्ततेःस्तम्भकारणम्।भावितात्माभुवोभर्तुरथैनंप्रत्यबोधयत्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
पुराशक्रमुपस्थायतवोर्वींप्रतियास्यतः।आसीत्कल्पतरुच्छायामाश्रितासुरभिःपथि,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
धर्मलोपभयाद्राज्ञीमृतुस्नातामनुस्मरन्।प्रदक्षिणक्रियार्हायांतस्यांत्वंसाधुनाचरः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
अवजानासिमांयस्मादतस्तेनाभविष्यति।मत्प्रसूतिमनाराध्यप्रजेतित्वांशशापसा,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0
सशापोनत्वयाराजन्नचसारथिनाश्रुतः।नदत्याकाशगङ्गायाःस्रोतस्युद्दमदिग्गजे,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
ईप्सितंतदवज्ञानाद्विद्धिसार्गलमात्मनः।प्रतिबध्नातिहिश्रेयःपूज्यपूजाव्यतिक्रमः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
हविषेदीर्घसत्रस्यसाचेदानींप्रचेतसः।भुजङ्गपिहितद्वारंपातालमधितिष्ठति,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
सुतांतदीयांसुरभेःकृत्वाप्रतिनिधिंशुचिः।आराधयसपत्नीकःप्रीताकामदुघाहिसा,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
इतिवादिनएवास्यहोतुराहुतिसाधनम्।अनिन्द्यानंदिनीनामधेनुराववृतेवनात्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
ललाटोदयमाभुग्नंपल्लवस्निग्धपाटला।बिभ्रतीश्वेतरोमाङ्कंसन्ध्येवशशिनंनवम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
भुवंकोष्णेनकुण्डोध्नीमेध्येनावभृथादपि।प्रस्रवेणाभिवर्षन्तीवत्सालोकप्रवर्तिना,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
रजःकणैःखुरोद्धूतैःस्पृशद्भिर्गात्रमन्तिकात्।तीर्थाभिषेकजांशुद्धिमादधानामहीक्षितः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
तांपुण्यदर्शनांदृष्ट्वानिमित्तज्ञस्तपोनिधिः।याज्यमाशंसितावन्ध्यप्रार्थनंपुनरब्रवीत्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
अदूरवर्तिनींसिद्धिंराजन्विगणयात्मनः।उपस्थितेयंकल्याणीनाम्निकीर्तितएवयत्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
वन्यवृत्तिरिमांशश्वदात्मानुगमनेनगाम्।विद्यामभ्यसनेनेवप्रसादयितुमर्हसि,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
प्रस्थितायांप्रतिष्ठेथाःस्थितायांस्थितिमाचरेः।निषिण्णायांनिषीदास्यांपीताम्भसिपिबेरपः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
वधूर्भक्तिमतीचैनामर्चितामातपोवनात्।प्रयताप्रातरन्वेतुसायंप्रत्युद्व्रजेदपि,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
इत्याप्रसादादस्यास्त्वंपरिचर्यापरोभव।अविघ्नमस्तुतेस्थेयाःपितेवधुरिपुत्रिणाम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तथेतिप्रतिजग्राहप्रीतिमान्सपरिग्रहः।आदेशंदेशकालज्ञःशिष्यःशासितुरानतः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
अथप्रदोषेदोषज्ञःसंवेशायविशांपतिम्।सूनुःसूनृतवाक्स्रष्टुर्विससर्जोर्जितश्रियम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
सत्यामपितपःसिद्धौनियमापेक्षयामुनिः।कल्पवित्कल्पयामासवन्यामेवास्यसंविधाम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
निर्दिष्टांकुलपतिनासपर्णशालामध्यास्यप्रयतपरिग्रहद्वितीयः।तच्छिष्याध्यननिवेदितावसानांसंविष्टःकुशशयनेनिशांनिनाय,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
अथप्रजानामधिपःप्रभातेजायाप्रतिग्राहितगन्धमाल्याम्।वनायपीतप्रतिबद्धवत्सांयशोधनोधेनुमृषेर्मुमोच,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
तस्याःखुरन्यासपवित्रपांसुमपांसुलानांधुरिकीर्तनीया।मार्गंमनुष्येश्वरधर्मपत्नीश्रुतेरिवार्थंस्मृतिरन्वगच्छत्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0
निवर्त्यराजादयितांदयालुस्तांसौरभेयींसुरभिर्यशोभिः।पयोधरीभूतचतुःसमुद्रांजुगोपगोरूपधरामिवोर्वीम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,1,0
व्रतायतेनानुचरेणधेनोर्न्यषेधिशेषोऽप्यनुयायिवर्गः।नचान्यतस्तस्यशरीररक्षास्ववीर्यगुप्ताहिमनोःप्रसूतिः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0
आस्वादवद्भिःकवलैस्तृणानांकन्डूयनैर्दंशनिवारणैःश्च।अव्याहतैःस्वैरगतैश्चतस्याःसम्राट्समाराधनतत्परोऽभूत्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0
स्थितःस्थितामुच्चलितःप्रयातांनिषेदुषीमासनबन्धधीरः।जलाभिलाषीजलमाददानांछायेवतांभूपतिरन्वगच्छत्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0
सन्यस्तचिह्नामपिराजलक्ष्मींतेजोविशेषानुमितांदधान।आसीदनाविष्कृतदानराजिरन्तर्मदावस्थइवद्विपेन्द्रः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
लताप्रतानोद्ग्रथितैःसकेशैरधिज्यधन्वाविचचारदावम्।रक्षापदेशान्मुनिहोमधेनोर्वन्यान्विनेष्यन्निवदुष्टसत्त्वान्,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
विसृष्टपार्श्वानुचरस्यतस्यपार्श्वद्रुमाःपाशभृतासमस्य।उदीरयामासुरिवोन्मदानामालोकशब्दंवयसांविरावैः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,1,0,1,0,0
मरुत्प्रयुक्ताश्चमरुत्सखाभंतमर्च्यमारादभिवर्तमानम्।अवाकिरन्बाललताःप्रसूनैराचारलाजैरिवपौरकन्याः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
धनुर्भृतोऽप्यस्यदयार्द्रभावमाख्यातमन्तःकरणैर्विशङ्कैः।विलोकयन्त्योवपुरापुरक्ष्णांप्रकामविस्तारफलंहरिण्यः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0
सकीचकैर्मारुतपूर्णरन्ध्रैःकूजद्भिरापादितवंशकृत्यम्।शुश्रावकुञ्जेषुयशःस्वमुच्चैरुद्गीयमानंवनदेवताभिः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
पृक्तस्तुषारैर्गिरिनिर्झराणमनोकहाकम्पितपुष्पगन्धी।तमातपक्लान्तमनातपत्रमाचारपूतंपवनोनिषेवे,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
शशामवृष्ट्यापिविनादवाग्निरासीद्विशेषाफलपुष्पवृद्धिः।ऊनंनसत्त्वेष्वधिकोबबाधेतस्मिन्वनंगोप्तरिगाहमाने,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,1,0,0
संचारपूतानिदिगन्तराणिकृत्वादिनान्तेनिलयायगन्तुम्।प्रचक्रमेपल्लवरागताम्राप्रभापतंगस्यमुनेश्चधेनुः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
तांदेवतापित्रतिथिक्रियार्थामन्वग्ययौमध्यमलोकपालः।बभौचसातेनसतांमतेनश्रद्धेवसाक्षाद्विधिनोपपन्ना,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,1,0
सवल्वलोत्तीर्णवराहयूथान्यावासवृक्षोन्मुखबर्हिणानि।ययौमृगाध्यासितशाद्वलानिश्यामायमानानिवनानिपश्यन्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0
आपीनभारोद्वहनप्रयत्नाद्गृष्टिर्गुरुत्वाद्वपुषोनरेन्द्रः।उभावलंचक्रतुरञ्चिताभ्यांतपोवनावृत्तिपथंगताभ्याम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0
वसिष्ठधेनोरनुयायिनंतमावर्तमानंवनितावनान्तात्।पपौनिमेषालसपक्ष्मपङ्क्तिरुपोषिताभ्यामिवलोचनाभ्याम्,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
पुरस्कृतावर्त्मनिपार्थिवेनप्रत्युद्गतापार्थिवधर्मपत्न्या।तदन्तरेसाविरराजधेनुर्दिनक्षपामध्यगतेवसन्ध्या,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
प्रदक्षिणीकृत्यपयस्विनींतांसुदक्षिणासाक्षतपात्रहस्ता।प्रणम्यचानर्चविशालमस्याःशृङ्गान्तरंद्वारमिवार्थसिद्धेः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0
वत्सोत्सुकापिस्तिमितासपर्यांप्रत्यग्रहीत्सेतिननदुतुस्तौ।भक्त्योपपन्नेषुहितद्विधानानांप्रसादचिह्नानिपुरःफलानि,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0
गुरोःसदारस्यनिपीड्यपादौसमाप्यसांध्यंचविधिंदिलीपः।दोहावसानेपुनरेवदोग्ध्रींभेजेभुजोच्छिन्नरिपुर्निषण्णाम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0
तामन्तिकन्यस्तबलिप्रदीपामन्वास्यगोप्तागृहिणीसहायः।क्रमेणसुप्तामनुसंविवेशसुप्तोत्थितांप्रातरनूदतिष्ठत्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0
इत्थंव्रतंधारयतःप्रजार्थंसमंमहिष्यामहनीयकीर्तेः।सप्तव्यतीयुस्त्रिगुणानितस्यदिनानिदीनोद्धरणोचितस्य,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,1,0,0,0,1,0
अन्येद्युरात्मानुचरस्यभावंजिज्ञासमानामुनिहोमधेनुः।गङ्गाप्रपातान्तविरूढशष्पंगौरीगुरोर्गह्वरमाविवेश,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
सादुष्प्रधर्षामनसापिहिंस्रैरित्यद्रिशोभाप्रहितेक्षणेन।अलक्षिताभ्युत्पतनोनृपेणप्रसह्यसिंहःकिलतांचकर्ष,1,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तदीयमाक्रन्दितमार्तसाधोर्गुहानिबद्धप्रतिशब्ददीर्घम्।रश्मिष्विवादायनगेन्द्रसक्तांनिवर्तयामासनृपस्यदृष्टिम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
सपाटलायांगवितस्थिवांसंधनुर्धरःकेसरिणंददर्श।अधित्यकायामिवधातुमय्यांलोध्रद्रुमंसानुमतःप्रफुल्लम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
ततोमृगेन्द्रस्यमृगेन्द्रगामीवधायवध्यस्यशरंशरण्यः।जाताभिषङ्गोनृपतिर्निषङ्गादुद्धर्तुमैच्छत्प्रसभोद्धृतारिः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,1,1,0,0,0,0
वामेतरस्तस्यकरःप्रहर्तुर्नखप्रभाभूषितकङ्कपत्रे।सक्ताङ्गुलिःसायकपुङ्खएवचित्रार्पितारम्भइवावतस्थे,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
बाहुप्रतिष्टम्भविवृद्धमन्युरभ्यर्णमागस्कृतमस्पृशद्भिः।राजास्वतेजोभिरदह्यतान्तर्भोगीवमन्त्रौषधिरुद्धवीर्यः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0
तमार्यगृह्यंनिगृहीतधेनुर्मनुष्यवाचामनुवंशकेतुम्।विस्माययन्विस्मितमात्मवृत्तौसिंहोरुसत्त्वंनिजगादसिंहः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
अलंमहीपालतवश्रमेणप्रयुक्तमप्यस्त्रमितोवृथास्यात्।सपादपोन्मूलनशक्तिरंहःशिलोच्चयेमूर्च्छतिमारुतस्य,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
कैलासगौरंवृषमारुरक्षोःपादार्पणानुग्रहपूतपृष्ठम्।अवेहिमांकिंकरमष्टमूर्तेःकुम्भोदरंनामनिकुम्भमित्रम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
अमुंपुरःपश्यसिदेवदारुंपुत्रीकृतोऽसौवृषभध्वजेन।योहेमकुम्भस्तननिःसृतानांस्कन्दस्यमातुःपयसांरसज्ञः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
कण्डूयमानेनकटंकदाचिद्वन्यद्विपेनोन्मथितात्वगस्य।अथैनमद्रेस्तनयाशुशोचसेनान्यमालीढमिवासुरास्त्रैः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
तदाप्रभृत्येववनद्विपानांत्रासार्थमस्मिन्नहमद्रिकुक्षौ।व्यापरितःशूलभृताविधायसिंहत्वमङ्कागतसत्त्ववृत्ति,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
तस्यालमेषाक्षुधितस्यतृप्त्यैप्रदिष्टकालापरमेश्वरेण।उपस्थिताशोणितपारणामेसुरद्विषश्चान्द्रमसीसुधेव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0
सत्वंनिवर्तस्वविहायलज्जांगुरोर्भवान्दर्शितशिष्यभक्तिः।शस्त्रेणरक्ष्यंयदशक्यरक्षंनतद्यशःशस्त्रभृतांक्षिणोति,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
इतिप्रगल्भंपुरुषाधिराजोमृगाधिराजस्यवचोनिशम्य।प्रत्याहतास्त्रोगिरिशप्रभावादात्मन्यवज्ञांशिथिलीचकार,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
प्रत्यब्रवीच्चैनमिषुप्रयोगेतत्पूर्वभङ्गेवितथप्रयत्नः।जडीकृतस्त्र्यम्बकवीक्षणेनवज्रंमुमुक्षन्निववज्रपाणिः,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
संरुद्धचेष्टस्यमृगेद्रकामंहास्यंवचस्तद्यदहंविवक्षुः।अन्तर्गतंप्राणभृतांहिवेदसर्वंभवान्भावमतोऽभिधास्ये,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
मान्यःसमेस्थावरजंगमानांसर्गस्थितिप्रत्यवहारहेतुः।गुरोरपीदंधनमाहितग्नेर्नश्यत्पुरस्तादनुपेक्षणीयम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0
सत्वंमदीयेनशरीरवृत्तिंदेहेननिर्वर्तयितुंप्रसीद।दिनावसानोत्सुकबालवत्साविसृज्यतांधेनुरियंमहर्षेः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0
अथान्धकारंगिरिगह्वराणांदंष्ट्रामयूखैःशकलानिकुर्वन्।भूयःसभूतेश्वरपार्श्ववर्तीकिंचिद्विहस्यार्थपतिंबभाषे,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
एकातपत्रंजगतःप्रभुत्वंनवंवयःकान्तमिदंवपुश्च।अल्पस्यहेतोर्बहुहातुमिच्छन्विचारमूढःप्रतिभासिमेत्वम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
भूतानुकम्पातवचेदियंगौरेकाभवेत्स्वस्तिमतीत्वदन्ते।जीवन्पुनःशश्वदुपप्लवेभ्यःप्रजाःप्रजानाथपितेवपासि,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,1,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0
अथैकधेनोरपराधचण्डाद्गुरोःकृशानुप्रतिमाद्बिभेषि।शक्योऽस्यमन्युर्भवताविनेतुंगाःकोटिशःस्पर्शयताघटोध्नीः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0
तद्रक्षकल्याणपरम्पराणांभोक्तारमूर्जस्वलमात्मदेहम्।महीतलस्पर्शनमात्रभिन्नमृद्धंहिराज्यंपदमैन्द्रमाहुः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
एतावदुक्त्वाविरतेमृगेन्द्रेप्रतिस्वनेनास्यगुहागतेन।शिलोच्चयोऽपिक्षितिपालमुच्चैःप्रीत्यातमेवार्थमभाषतेव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
निशम्यदेवानुचरस्यवाचंमनुष्यदेवःपुनरप्युवाच।धेन्वातदध्यासितकातराक्ष्यानिरीक्ष्यमाणःसुतरांदयालुः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,1,0,0,0,0
क्षतात्किलत्रायतइत्युदग्रःक्षत्रस्यशब्दोभुवनेषुरूढः।राज्येनकिंतद्विपरीतवृत्तेःप्राणैरुपक्रोशमलीमसैर्वा,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
कथंनुशक्योऽनुनयोमहर्षेर्विश्राणनाच्चान्यपयस्विनाम्।इमामनूनांसुरभेरवेहिरुद्रौजसातुप्रहृतंत्वयास्याम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0
सेयंस्वदेहार्पणनिष्क्रयेणन्याय्यामयामोचयितुंभवत्तः।नपारणास्याद्विहतातवैवंभवेदलुप्तश्चमुनेःक्रियार्थः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
भवानपीदंपरवानवैतिमहान्हियत्नस्तवदेवदारौ।स्थातुंनियोक्तुर्नहिशक्यमग्रेविनाश्यरक्ष्यंस्वयमक्षतेन,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
किमप्यहिंस्यस्तवचेन्मतोऽहंयशःशरीरेभवमेदयालुः।एकान्तविध्वंसिषुमद्विधानंपिण्डेष्वनास्थाखलुभौतिकेषु,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
संबन्धमाभाषणपूर्वमाहुर्वृत्तःसनौसंगतयोर्वनान्ते।तद्भूतनाथानुगनार्हसित्वंसंबन्धिनोमेप्रणयंविहन्तुम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तथेतिगामुक्तवतेदिलीपःसद्यःप्रतिष्टम्भविमुक्तबाहुः।सन्न्यस्तशस्त्रोहरयेस्वदेहमुपानयत्पिण्डमिवामिषस्य,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
तस्मिन्क्षणेपालयितुःप्रजानामुत्पश्यतःसिंहनिपातमुग्रम्।अवाङ्मुखस्योपरिपुष्पवृष्टिःपपातविद्याधरहस्तमुक्ता,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
उत्तिष्ठवत्सेत्यमृतायमानंवचोनिशम्योत्थितमुत्थितःसन्।ददर्शराजाजननीमिवस्वांगामग्रतःप्रस्रविणींनसिंहम्,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
तंविस्मितंधेनुरुवाचसाधोमायांमयोद्भाव्यपरीक्षितोऽसि।ऋषिप्रभावान्मयिनान्तकोऽपिप्रभुःप्रहर्तुंकिमुतान्यहिंस्राः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
भक्त्यागुरौमय्यनुकम्पयाचप्रीतास्मितेपुत्रवरंवृणीष्व।नकेवलानांपयसांप्रसूतिमवेहिमांकामदुघांप्रसन्नाम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
ततःसमानीयसमानितार्थीहस्तौस्वहस्तार्जितवीरशब्दः।वंशस्यकर्तारमनन्तकीर्तिंसुदक्षिणायांतनयंययाचे,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
संतानकामायतथेतिकामंराज्ञेप्रतिश्रुत्यपयस्विनीसा।दुग्ध्वापयःपत्रपुटेमदीयंपुत्रोपभुङ्क्ष्वेतितमदिदेश,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
वत्सस्यहोमार्थविधेश्चशेषंगुरोरनुज्ञामधिगम्यमातः।ऊधस्यमिच्छामितवोपभोक्तुंषष्ठांशमुर्व्याइवरक्षितायाः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
इत्थंक्षितीशेनवसिष्ठधेनुर्विज्ञापिताप्रीततराबभूव।तदन्विताहैमवताच्चकुक्षेःप्रत्याययावाश्रममश्रमेण,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
तस्याःप्रसन्नेन्दुमुखप्रसादंगुरुर्नृपाणांगुरवेनिवेद्य।प्रहर्षचिह्नानुमितंप्रियायैशशंसवाचापुनरुक्तमेव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
सनन्दिनीस्तन्यमनिन्दितात्मासद्वत्सलोवत्सहुतावशेषम्।पपौवसिष्ठेनकृताभ्यनुज्ञःशुभ्रंयशोमूर्तमिवातितृष्णः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
प्रातर्यथोक्तव्रतपारणान्तेप्रास्थानिकंस्वस्त्ययनंप्रयुज्य।तौदंपतीस्वांप्रतिराजधानींप्रस्थापयामासवशीवसिष्ठः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
प्रदक्षिणीकृत्यहुतंहुताशमनन्तरंभर्तुररुन्धतींच।धेनुंसवत्सांचनृपःप्रतस्थेसन्मङ्गलोदग्रतरप्रभावः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0
श्रोत्राभिरामध्वनिनारथेनसधर्मपत्नीसहितःसहिष्णुः।ययावनुद्घातसुखेनमार्गंस्वेनेवपूर्णेनमनोरथेन,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तमाहितौत्सुक्यमदर्शनेनप्रजाःप्रजार्थव्रतकर्शिताङ्गम्।नेत्रैःपपुस्तृप्तिमनाप्नुवद्भिर्नवोदयंनाथमिवौषधीनाम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
पुरंदरश्रीःपुरमुत्पताकंप्रविश्यपौरैरभिनन्द्यमानः।भुजेभुजंगेन्द्रसमानसारेभूयःसभूमेर्धुरमाससञ्ज,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
अथनयनसमुत्थंज्योतिरत्रेरिवद्यौःसुरसरिदिवतेजोवह्निनिष्ठ्यूतमैशम्।नरपतिकुलभूत्यैगर्भमाधत्तराज्ञीगुरुभिरभिनिविष्टंलोकपालानुभावैः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
अथेप्सितंभर्तुरुपस्थितोदयंसखीजनोद्वीक्षणकौमुदीमुखम्|निदानमिक्ष्वाकुकुलस्यसंततेःसुदक्षिणादौहृदलक्षणंदधौ,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
शरीरसादादसमग्रभूषणामुखेनसालक्ष्यतलोध्रपाण्डुना|तनुप्रकाशेनविचेयतारकाप्रभातकल्पाशशिनेवशर्वरी,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तदाननंमृत्सुरभिक्षितीश्वरोरहस्युपाघ्रायनतृप्तिमाययौ|करीवसिक्तंपृषतैःपयोमुचांशुचिव्यपायेवनराजिपल्वलम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
दिवंमरुत्वानिवभोक्ष्यतेभुवंदिगन्तविश्रान्तरथोहितत्सुतः|अतोऽभिलाषेप्रथमंतथाविधेमनोबबन्धान्यरसान्विलङ्घ्यसा,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
नमेह्रियाशंसतिकिंचिदीप्सितंस्पृहावतीवस्तुषुकेषुमागधी|इतिस्मपृच्छत्यनुवेलमादृतःप्रियासखीरुत्तरकोसलेश्वरः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
उपेत्यसादोहददुःखशीलतांयदेववव्रेतदपश्यदाहृतम्|नहीष्टमस्यत्रिदिवेऽपिभूपतेरभूदनासाद्यमधिज्यधन्वनः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
क्रमेणनिस्तीर्यचदोहदव्यथांप्रचीयमानावयवारराजसा|पुराणपत्रापगमादनन्तरंलतेवसंनद्धमनोज्ञपल्लवा,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
दिनेषुगच्छत्सुनितान्तपीवरंतदीयमांनीलमुखंस्तनद्वयम्।तिरंश्रकारभ्रमरोभिलीनयोःसुजातयोःपङ्कजकोशयोःश्रियम्ट||,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
निधानगर्भामिवसागराम्बरांशमीमिवाभ्यन्तरलीनपावकाम्|नदीमिवान्तःसलिलांसरस्वतींनृपःससत्त्वांमहिषीममन्यत,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
प्रियानुरागस्यमनःसमुन्नतेर्भुजार्जितानांचदिगन्तसंपदाम्|यथाक्रमंपुंसवनादिकाःक्रियाधृतेश्चधीरःसदृशीर्व्यधत्तसः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
सुरेन्द्रमात्राश्रितगर्भगौरवात्प्रयत्नमुक्तासनयागृहागतः|तयोपचाराञ्जलिखिन्नहस्तयाननन्दपारिप्लवनेत्रयानृपः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
कुमारभृत्याकुशलैरनुष्ठितेभिषग्भिराप्तैरथगर्भभर्मणि|पतिःप्रतीतःप्रसवोन्मुखींप्रियांददर्शकालेदिवमभ्रितामिव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
ग्रहैस्ततःपञ्चभिरुच्चसंस्थितैरसूर्यगैःसूचितभाग्यसंपदम्|असूतपुत्रंसमयेशचीसमात्रिसाधनाशक्तिरिवार्थमक्षयम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
दिशःप्रसेदुर्मरुतोववुःसुखाःप्रदक्षिणार्चिर्हविरग्निराददे|बभूवसर्वंशुभशंसितत्क्षणंभवोहिलोकाभ्युदयायतादृशाम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
अरिष्टशय्यांपरितोविसारिणासुजन्मनस्तस्यनिजेनतेजसा|निशीथदीपाःसहसाहतत्विषोबभूवुरालेख्यसमर्पिताइव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0
जनायशुद्धान्तचरायशंसतेकुमारजन्मामृतसंमिताक्षरम्|आदेयमासीत्त्रयमेवभूपतेःशशिप्रभंछत्रमुभेचचामरे,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
निवातपद्मस्तिमितेनचक्षुषानृपस्यकान्तंपिबतःसुताननम्|महोदधेःपूरइवेन्दुदर्शनाद्गुरुःप्रहर्षःप्रबभूवनात्मनि,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
सजातकर्मण्यखिलेतपस्विनातपोवनादेत्यपुरोधसाकृते|दिलीपसूनुर्मणिराकरोद्भवःप्रयुक्तसंस्कारइवाधिकंबभौ,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
सुखश्रवामङ्गलतूर्यनिस्वनाःप्रमोदनृत्यैःसहवारयोषिताम्।नकेवलंसद्मनिमागधीपतेःपथिव्यजृम्भन्तदिवौकसामपि,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
नसंयतस्तस्यबभूवरक्षितुर्विसर्जयेद्यंसुतजन्महर्षितः|ऋणाभिधानात्स्वयमेवकेवलंतदापितॄणांमुमुचेसबन्धनात्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
श्रुतस्ययायादयमन्तमर्भकःतथापरेषांयुधिचेतिपार्थिवः|अवेक्ष्यधातोर्गमनार्थमर्थविच्चकारनाम्नारघुमात्मसम्भवम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
पितुःप्रयत्नात्ससमग्रसंपदःशुभैःशरीरावयवैर्दिनेदिने|पुपोषवृद्धिंहरिदश्वदीधितेरनुप्रवेशादिवबालचन्द्रमाः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
उमावृषाङ्कौशरजन्मनायथायथाजयन्तेनशचीपुरन्दरौ|तथानृपःसाचसुतेनमागधीननन्दतुस्तत्सदृशेनतत्समौ,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
रथाङ्कनाम्नोरिवभावबन्धनंबभूवयत्प्रेमपरस्पराश्रयम्|विभक्तमप्येकसुतेनतत्तयोःपरस्परस्योपरिपर्यचीयत,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
उवाचधात्र्याप्रथमोदितंवचोययौतदीयामवलम्ब्यचाङ्गुलिम्|अभूच्चनम्रःप्रणिपातशिक्षयापितुर्मुदंतेनततानसोऽर्भकः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तमङ्कमारोप्यशरीरयोगजैःसुखैर्निषिञ्चन्तमिवामृतंत्वचि|उपान्तसंमीलितलोचनोनृपश्चिरात्सुतस्पर्शरसज्ञतांययौ,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
अमंस्तचानेनपरार्ध्यजन्मनास्थितेरभेत्तास्थितिमन्तमन्वयम्|स्वमूर्तिभेदेनगुणाग्र्यवर्तिनापतिःप्रजानामिवसर्गमात्मनः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
सवृत्तचूलश्चलकाकपक्षकैरमात्यपुत्रैःसवयोभिरन्वितः|लिपेर्यथावद्ग्रहणेनवाङ्मयंनदीमुखेनेवसमुद्रमाविशत्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
अथोपनीतंविधिवद्विपश्चितोविनिन्युरेनंगुरवोगुरुप्रियम्|अवन्ध्ययत्नाश्चबभूवुरत्रतेक्रियाहिवस्तूपहिताप्रसीदति,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
धियःसमग्रैःसगुणैरुदारधीःक्रमाच्चतस्रश्चतुरर्णवोपमाः|ततारविद्याःपवनातिपातिभिर्दिशोहरिद्भिर्हरितामिवेश्वरः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
त्वचंचमेध्यांपरिधायरौरवीमशिक्षतास्त्रंपितुरेवमन्त्रवत्|नकेवलंतद्गुरुरेकपार्थिवःक्षितावभूदेकधनुर्धरोऽपिसः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
महोक्षतांवत्सतरःस्पृशन्निवद्विपेन्द्रभावंकलभःश्रयन्निव|रघुःक्रमाद्यौवनभिन्नशैशवःपुपोषगाम्भीर्यमनोहरंवपुः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
अथास्यगोदानविधेरनन्तरंविवाहदीक्षांनिरवर्तयद्गुरुः|नरेन्द्रकन्यास्तमवाप्यसत्पतिंतमोनुदंदक्षसुताइवाबभुः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
युवायुगव्यायतबाहुरंसलःकवाटवक्षाःपरिणद्धकंधरः|वपुःप्रकर्षादजयद्गुरुंरघुस्तथापिनीचैर्विनयाददृश्यत,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
ततःप्रजानांचिरमात्मनाधृतांनितान्तगुर्वींलघयिष्यताधुरम्|निसर्गसंस्कारविनीतइत्यसौनृपेणचक्रेयुवराजशब्दभाक्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
नरेन्द्रमूलायतनादनन्तरंतदास्पदंश्रीर्युवराजसंज्ञितम्|अगच्छदंशेनगुणाभिलाषिणीनवावतारंकमलादिवोत्पलम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
विभावसुःसारथिनेववायुनाघनव्यपायेनगभस्थिमानिव|बभूवतेनातितरांसुदुःसहःकटप्रभेदेनकरीवपार्थिवः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
नियुज्यतंहोमतुरंगरक्षणेधनुर्धरंराजसुतैरनुद्रुतम्|अपूर्णमेकेनशतक्रतूपमःशतंक्रतूनामपविघ्नमापसः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
ततःपरंतेनमखाययज्वनातुरंगमुत्सृष्टमनर्गलंपुनः|धनुर्भृतामग्रतएवरक्षिणांजहारशक्रःकिलगूढविग्रहः,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
विषादलुप्तप्रतिपत्तिविस्मितंकुमारसैन्यंसपदिस्थितंचतत्|वसिष्ठधेनुश्चयदृच्छयागताश्रुतप्रभावाददृशेऽथनन्दिनी,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तदङ्गनिष्यन्दनजलेनलोचनेप्रमृज्यपुण्येनपुरस्कृतःसताम्|अतीन्द्रियेष्वप्युपपन्नदर्शनोबभूवभावेषुदिलीपनन्दनः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
सपूर्वतःपर्वतपक्षशातनंददर्शदेवंनरदेवसंभवः|पुनःपुनःसूतनिषिद्धचापलंहरन्तमश्वंरथरश्मिसंयुतम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
शतैस्तमक्ष्णामनिमेषवृत्तिभिर्हरिंविदित्वाहरिभिश्चवाजिभिः|अवोचदेनंगगनस्पृशारघुःस्वरेणधीरेणनिवर्तयन्निव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
मखांशभाजांप्रथमोमनीषिभिस्त्वमेवदेवेन्द्रसदानिगद्यसे|अजस्रदीक्षाप्रयतस्यमद्गुरोःक्रियाविघातायकथंप्रवर्तसे,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
त्रिलोकनाथेनसदामखद्विषस्त्वयानियम्याननुदिव्यचक्षुषा|सचेत्स्वयंकर्मसुधर्मचारिणांत्वमन्तरायोभवसिच्युतोविधिः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तदङ्गमग्र्यम्मघवन्महाक्रतोरमुंतुरंगंप्रतिमोक्तुमर्हसि|पथःश्रुतेर्दर्शयितारईश्वरामलीमसामददतेनपद्धतिम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
इतिप्रगल्भंरघुणासमीरितंवचोनिशम्याधिपतिर्दिवौकसाम्|निवर्तयामासरथंसविस्मयःप्रचक्रमेचप्रतिवक्तुमुत्तरम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
यदात्थराजन्यकुमारतत्तथायशस्तुरक्ष्यंपरतोयशोधनैः|जगत्प्रकाशंतदशेषमिज्ययाभवद्गुरुर्लङ्घयितुंममोद्यतः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
हरिर्यथैकःपुरुषोत्तमःस्मृतोमहेश्वरस्त्र्यम्बकएवनापरः|तथाविदुर्मांमुनयःशतक्रतुंद्वितीयगामीनहिशब्दएषनः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
अतोऽयमश्वःकपिलानुकारिणापितुस्त्वदीयस्यमयापहारितः|अलंप्रयत्नेनतवात्रमानिधाःपदंपदव्यांसगरस्यसंततेः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
ततःप्रहास्यापभयःपुरन्दरंपुनर्बभाषेतुरगस्यरक्षिता|गृहाणशस्त्रंयदिसर्गएषतेनखल्वनिर्जित्यरघुंकृतीभवान्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
सएवमुक्त्वामघवन्तमुन्मुखःकरिष्यमाणःसशरंशरासनम्|अतिष्ठदालीढविशेषशोभिनावपुःप्रकर्षेणविडम्बितेश्वरः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
रघोरवष्टम्भमयेनपत्रिणाहृदिक्षतोगोत्रभिदप्यमर्षणः|नवाम्बुदानीकमुहूर्तलाञ्छनेधनुष्यमोघंसमधत्तसायकम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
दिलीपसूनोःसबृहद्भुजान्तरंप्रविश्यभीमासुरशोणितोचितः|पपावनास्वादितपूर्वमाशुगःकुतूहलेनेवमनुष्यशोणितम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
हरेःकुमारोऽपिकुमारविक्रमःसुरद्विपास्फालनकर्कशाङ्गुलौ|भुजेशचीपत्रविशेषकाङ्कितेस्वनामचिह्नंनिचखानसायकम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0
जहारचान्येनमयूरपत्रिणाशरेणशक्रस्यमहाशनिध्वजम्|चुकोपतस्मैसभृशंसुरश्रियःप्रसह्यकेशव्यपरोपणादिव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तयोरुपान्तस्थितसिद्धसैनिकंगरुत्मदाशीविषभीमदर्शनैः|बभूवयुद्धंतुमुलंजयैषिणोरधोमुखैरूर्ध्वमुखैश्चपत्रिभिः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
अतिप्रबन्धप्रहितास्त्रवृष्टिभिस्तमाश्रयंदुष्प्रसहस्यतेजसः|शशाकनिर्वापयितुंनवासवःस्वतश्च्युतंवह्निमिवाद्भिरम्बुदः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0
ततःप्रकोष्ठेहरिचन्दनाङ्कितेप्रमथ्यमानार्णवधीरनादिनीम्|रघुःशशाङ्कार्धमुखेनपत्रिणाशरासनज्यामलुनाद्बिडौजसः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
सचापमुत्सृज्यविवृद्धमत्सरःप्रणाशनायप्रबलस्यविद्विषः|महीध्रपक्षव्यपरोपणोचितंस्फुरत्प्रभामण्डलमस्त्रमाददे,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
रघुर्भृशंवक्षसितेनताडितःपपातभूमौसहसैनिकाश्रुभिः|निमेषमात्रादवधूयचव्यथांसहोत्थितःसैनिकहर्षनिस्वनैः,1,0,1,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,1,1,0,0,0,1,1,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0
तथापिशस्त्रव्यवहारनिष्ठुरेविपक्षभावेचिरमस्यतस्थुषः|तुतोषवीर्यातिशयेनवृत्रहापदंहिसर्वत्रगुणैर्निधीयते,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
असङ्गमद्रिष्वपिसारवत्तयानमेत्वदन्येनविसोढमायुधम्|अवेहिमांप्रीतमृतेतुरङ्गमात्किमिच्छसीतिस्फुटमाहवासवः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
ततोनिषङ्गादसमग्रमुधृतंसुवर्णपुङ्खद्युतिरञ्जिताङ्गुलिम्|नरेन्द्रसूनुःप्रतिसंहरन्निषुंप्रियंवदःप्रत्यवदत्सुरेश्वरम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
अमोच्यमश्वंयदिमन्यसेप्रभोततःसमाप्तेविधिनैवकर्मणि|अजस्रदीक्षाप्रयतःसमद्गुरुःक्रतोरशेषेणफलेनयुज्यताम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
यथासवृत्तान्तमिमंसदोगतस्त्रिलोचनैकांशतयादुरासदः|तवैवसंदेशहराद्विशांपतिःशृणोतिलोकेशतथाविधीयताम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तथेतिकामंप्रतिशुश्रुवान्रघोर्यथागतंमातलिसारथिर्ययौ|नृपस्यनातिप्रमनाःसदोगृहंसुदक्षिणासूनुरपिन्यवर्तत,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तमभ्यनन्दत्प्रथमंप्रबोधितःप्रजेश्वरःशासनहारिणाहरेः|परामृशन्हर्षजडेनपाणिनातदीयमङ्गंकुलिशव्रणाङ्कितम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
इतिक्षितीशोनवतिंनवाधिकांमहाक्रतूनांमहनीयशासनः|समारुरुक्षुर्दिवमायुषःक्षयेततानसोपानपरम्परामिव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
अथसविषयव्यावृत्तात्मायथाविधिसूनवेनृपतिककुदंदत्त्वायूनेसितातपवारणम्|मुनिवनतरुच्छायांदेव्यातयासहशिश्रियेगलितवयसामिक्ष्वाकूणामिदंहिकुलव्रतम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
इतिकालिदासकृतरघुवंशमहाकाव्येतृतीयःसर्गः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
सराज्यंगुरुणादत्तंप्रतिपद्याधिकंबभौ|दिनान्तेनिहितंतेजःसवित्रेवहुताशनः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
दिलीपानन्तरंराज्येतंनिशम्यप्रतिष्ठितम्|पूर्वंप्रधूमितोराज्ञांहृदयेऽग्निरिवोत्थितः,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
पुरुहूतध्वजस्येवतस्योन्नयनपङ्क्तयः|नवाभ्युत्थानदर्शिन्योननन्दुःसप्रजाःप्रजाः|,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
सममेवसमाक्रान्तंद्वयंद्विरदगामिना|तेनसिंहासनंपित्र्यमखिलंचारिमण्डलम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
छायामण्डललक्ष्येणतमदृश्याकिलस्वयम्|पद्मापद्मातपत्रेणभेजेसाम्राज्यदीक्षितम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
परिकल्पितसांनिध्याकालेकालेचबन्दिषु|स्तुत्यंस्तुतिभिरर्थ्याभिरुपतस्थेसरस्वती,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
मनुप्रभुतिर्मान्यैर्भुक्तायद्यपिराजभिः|तथाप्यनन्यपूर्वेवतस्मिन्नासीद्वसुंधरा,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
सहिसर्वस्यलोकस्ययुक्तदण्डतयामनः|आददेनातिशीतोष्णोनभस्वानिवदक्षिणः,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
मन्दोत्कण्ठाःकृतास्तेनगुणाधिकतयागुरौ|फलेनसहकारस्यपुष्पोद्गमइवप्रजाः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
नयविद्भिर्नवेराज्ञिसदसच्चोपदर्शितम्|पूर्वएवाभवत्पक्षस्तस्मिन्नाभवदुत्तरः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
पञ्चानामपिभूतानामुत्कर्षंपुपुषुर्गुणाः|नवेतस्मिन्महीपालेसर्वंनवमिवाभवत्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
यथाप्रह्लादनाच्चन्द्रःप्रतापात्तपनोयथा|तथैवसोऽभूदन्वर्थोराजाप्रकृतिरञ्जनात्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
कामंकर्णान्तविश्रान्तेविशालेतस्यलोचने|चक्षुष्मत्तातुशास्त्रेणसूक्ष्मकार्यार्थदर्शिना,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
लब्धप्रशमनस्वस्थमथैनंसमुपस्थिता|पार्थिवश्रीर्द्वितीयेवशरत्पङ्कजलक्षणा,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
निर्वृष्टलघुभिर्मेघैर्मुक्तवर्त्मासुदुःसहः|प्रतापस्तस्यभानोश्चयुगपद्व्यानशेदिशः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
वार्षिकंसंजहारेन्द्रोधनुर्जैत्रंरघुर्ददौ|प्रजार्थसाधनेतौहिपर्यायोद्यतकार्मुकौ,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
पुण्डरीकातपत्रस्तंविकसत्काशचामरः|ऋतुर्विडम्बयामासनपुनःप्रापतच्छ्रियम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
प्रसादसुमुखेतस्मिंश्चन्द्रेचविशदप्रभे|तदाचक्षुष्मतांप्रीतिरासीत्समरसाद्वयोः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
हंसश्रेणीषुतारासुकुमुद्वत्सुचवारिषु|विभूतयस्तदीयानांपर्यस्तायशसामिव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
इक्षुच्छायनिषादिन्यस्तस्यगोप्तुर्गुणोदयम्|आकुमारकथोद्धातंशालिगोप्योजगुर्यशः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
प्रससादोदयादम्भःकुम्भयोनेर्महौजसः|रघोरभिभवाशङ्किचुक्षुमेद्विषतांमनः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
मदोदग्राःककुद्मन्तःसरितांकूलमुद्रुजाः|लीलाखेलमनुप्रापुर्महोक्षास्तस्यविक्रमम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
प्रसवैःसप्तपर्णानांमदगन्धिभिराहताः|असूययेवतन्नागाःसप्तधैवप्रसुस्रुवुः,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
सरितःकुर्वतीगाधाःपथश्चाश्यानकर्दमान्|यात्रायैचोदयामासतंशक्तेःप्रथमंशरत्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
तस्मैसम्यग्घुतोवह्निर्वाजिनीराजनाविधौ|प्रदक्षिणार्चिर्व्याजेनहस्तेनेवजयंददौ,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
सगुप्तमूलप्रत्यन्तःशुद्धपार्ष्णिरयान्वितः|षड्विधंबलमादायप्रतस्थेदिग्जिगीषया,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
अवाकिरन्वयोवृद्धास्तंलाजैःपौरयोषितः|पृषतैर्मन्दरोद्भूतैःक्षीरोर्मयइवाच्युतम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
सययौप्रथमंप्राचींतुल्यःप्राचीनबर्हिषा|अहिताननिलोद्धूतैस्तर्जयन्निवकेतुभिः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
रजोभिःस्यन्दनोद्धूतैर्गजैश्चघनसंनिभैः|भुवस्तलमिवव्योमकुर्वन्व्योमेवभूतलम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
प्रतापोऽग्रेततःशब्दःपरागस्तदनन्तरम्|ययौपश्चाद्रथादीतिचतुःस्कन्धेवसाचमूः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
मरुपृष्ठान्युदम्भांसिनाव्याःसुप्रतरानदीः|विपिनानिप्रकाशानिशक्तिमत्त्वाच्चकारसः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
ससेनांमहतींकर्षन्पूर्वसागरगामिनीम्|बभौहरजटाभ्रष्टांगङ्गामिवभगीरथः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
त्याजितैःफलमुत्खातैर्भग्नैश्चबहुधानृपैः|तस्यासीदुल्बणोमार्गःपादपैरिवदन्तिनः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
पौरस्त्यानेवमाक्रामंस्तांस्ताञ्जनपदाञ्जयी|प्रापतालीवनश्याममुपकण्ठंमहोदधेः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
अनम्राणांसमुद्धर्तुस्तस्मात्सिन्धुरयादिव|आत्मासंरक्षितःसुह्मैर्वृत्तिमाश्रित्यवैतसीम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
वङ्गानुत्खायतरसानेतानौसाधनोद्यतान्|निचखानजयस्तम्भान्गङ्गास्रोतोन्तरेषुसः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0
आपादपद्मप्रणताःकलमाइवतेरघुम्|फलैःसंवर्धयामासुरुत्खातप्रतिरोपिताः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
सतीर्त्वाकपिशांसैन्यैर्बद्धद्विरदसेतुभिः|उत्कलादर्शितपथःकलिङ्गाभिमुखोययौ,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
सप्रतापंमहेन्द्रस्यमूर्ध्नितीक्ष्णंन्यवेशयत्|अङ्कुशंद्विरदस्येवयन्तागम्भीरवेदिनः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
प्रतिजग्राहकालिङ्गस्तमस्त्रैर्गजसाधनः|पक्षच्छेदोद्यतंशक्रंशिलावर्षीवपर्वतः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
द्विषांविषह्यकाकुत्स्थस्तत्रनाराचदुर्दिनम्|सन्मङ्गलस्नातइवप्रतिपेदेजयश्रियम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
ताम्बुलीनांदलैस्तत्ररचितापानभूमयः|नारिकेलासवंयोधाःशात्रवंचपपुर्यशः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
गृहीतप्रतिमुक्तस्यसधर्मविजयीनृपः|श्रियंमहेन्द्रनाथस्यजहारनतुमेदिनीम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
ततोवेलातटेनैवफलवत्पूगमालिना|अगस्त्याचरितामाशामनाशास्यजयोययौ,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
ससैन्यपरिभोगेणगजदानसुगन्धिना|कावेरींसरितांपत्युःशङ्कनीयामिवाकरोत्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
बलैरध्युषितास्तस्यविजिगीषोर्गतध्वनः|मारीचोद्भ्रान्तहारीतामलयाद्रेरुपत्यकाः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
ससञ्जुरश्वक्षुण्णानमेलानामुत्पतिष्णवः|तुल्यगन्धिषुमत्तेभकटेषुफलरेणवः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
भोगिवेष्टनमार्गेषुचन्दनानांसमर्पितम्|नास्रसत्करिणांग्रैवंत्रिपदीच्छेदिनामपि,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
दिशिमन्दायतेतेजोदक्षिणस्यांरवेरपि|तस्यामेवरघोःपाण्ड्याःप्रतापंनविषेहिरे,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
ताम्रपर्णीसमेतस्यमुक्तासारंमहादधेः|तेनिपत्यददुस्तस्मैयशःस्वमिवसंचितम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,1,0,0,0
सनिर्विश्ययथाकामंतटेष्वालीनचन्दनौ|स्तनाविवदिशस्तस्याःशैलौमलयदर्दुरौ,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
असह्यविक्रमःसह्यंदूरान्मुक्तमुदन्वता|नितम्बमिवमेदिन्याःस्रस्तांशुकमलङ्घयत्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
तस्यानीकैर्विसर्पद्भिरपरान्तजयोद्यतैः|रामास्त्रोत्सारितोऽप्यासीत्सह्यलग्नइवार्णवः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
भयोत्सृष्टविभूषाणांतेनकेरलयोषिताम्|अलकेषुचमूरेणुश्चूर्णप्रतिनिधीकृतः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
मुरलामारुतोद्धूतमगमत्कैतकंरजः|तद्योधवारबाणानामयत्नपटवासताम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
अभ्यभूयतवाहानांचरतांगात्रशिञ्जितैः|वर्मभिःपवनोद्धूतराजतालीवनध्वनिः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
खर्जूरीस्कन्धनद्धानांमदोद्गारसुगन्धिषु|कटेषुकरिणांपेतुःपुंनागेभ्यःशिलीमुखाः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
अवकाशंकिलोदन्वान्रामायाभ्यर्थितोददौ|अपरान्तमहीपालव्याजेनरघवेकरम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
मत्तेभरदनोत्कीर्णव्यक्तविक्रमलक्षणम्|त्रिकूटमेवतत्रोच्चैर्जयस्तम्भंचकारसः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
पारसीकांस्ततोजेतुंप्रतस्थेस्थलवर्त्मना|इन्द्रियाख्यानिवरिपूंस्तत्त्वज्ञानेनसंयमी,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
यवनीमुखपद्मानांसेहेमधुमदंनसः|बालातपमिवाब्जानामकालजलदोदयः,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
सङ्ग्रामस्तुमुलस्तस्यपाश्चात्यैरश्वसाधनैः|शार्ङ्गकूजितविज्ञेयप्रतियोधेरजस्यभूत्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
भल्लापवर्जितैस्तेषांशिरोभिःश्मश्रुलैर्महीम्|तस्तारसरघाव्याप्तैःसक्षौद्रपटलैरिव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
अपनीतशिरस्त्राणाःशेषास्तंशरणंययुः|प्रणिपातप्रतीकारःसंरम्भोहिमहात्मनाम्,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
विनयन्तेस्मतद्योधामधुभिर्विजयश्रमम्|आस्तीर्णाजिनरत्नासुद्राक्षावलयभूमिषु,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
ततःप्रतस्थेकौबेरींभास्वानिवरघुर्दिशम्|शरैरुस्रैरिवोदीच्यानुद्धरिष्यन्रसानिव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0
विनीताध्वश्रमास्तस्यसिन्धुतीरविचेष्टनैः|दुधुवुर्वाजिनःस्कन्धाम्ल्लग्नकुङ्कुमकेसरान्,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0
तत्रहूणावरोधानांभर्तृषुव्यक्तविक्रमम्|कपोलपाटलादेशिबभूवरघुचेष्टितम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
काम्बोजाःसमरेसोढुंतस्यवीर्यमनीश्वराः|गजालानपरिक्लिष्टैरक्षोटैःसार्धमानताः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तेषांसदश्वभूयिष्ठास्तुङ्गाद्रविणराशयः|उपदाविविशुःशश्वन्नोत्सेकाःकोसलेश्वरम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
ततोगौरीगुरुंशैलमारुरोहाश्वसाधनः|वर्धयन्निवतत्कूटानुद्धूतैर्धातुरेणुभिः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0
शशंसतुल्यसत्त्वानांसैन्यघोषेऽप्यसंभ्रमम्|गुहाशयानांसिंहानांपरिवृत्यावलोकितम्,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
भूर्जेषुमर्मरीभूताःकीचकध्वनिहेतवः|गङ्गाशीकरिणोमार्गेमरुतस्तंसिषेविरे,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
विशश्रमुर्नमेरूणांछायास्वध्यास्यसैनिकाः|दृषदोवासितोत्सङ्गानिषण्णमृगनाभिभिः,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
सरलासक्तमातङ्गग्रैवेयस्फुरितत्विषः|आसन्नोषधयोनेतुर्नक्तमस्नेहदीपिकाः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
तस्योत्सृष्टनिवासेषुकण्ठरज्जुक्षतत्वचः|गजवर्ष्मकिरातेभ्यःशशंसुर्देवदारवः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
तत्रजन्यंरघोर्घोरंपर्वतीयैर्गणैरभूत्|नाराचक्षेपणीयाश्मनिष्पेषोत्पतितानलम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
शरैरुत्सवसंकेतान्सकृत्वाविरतोत्सवान्|जयोदाहरणंबाह्वोर्गापयामासकिंनरान्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
परस्परेणविज्ञातस्तेषूपायनपाणिषु|राज्ञाहिमवतःसारोराज्ञःसारोहिमाद्रिणा,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
तत्राक्षोभ्यंयशोराशिंनिवेश्यावरुरोहसः|पौलस्त्यतुलितस्याद्रेरादधानइवह्रियम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
चकम्पेतीर्णलौहित्येतस्मिन्प्राग्ज्योतिषेश्वरः|तद्गजालानतांप्राप्तैःसहकालागुरुद्रुमैः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
नप्रसेहेसरुद्धार्कमधारावर्षदुर्दिनम्|रथवर्त्मरजोऽप्यस्यकुतएवपताकिनीम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
तमीशःकामरूपाणामत्याखण्डलविक्रमम्|भेजेभिन्नकटैर्नागैरन्यानुपरुरोधयैः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
कामरूपेश्वरस्तस्यहेमपीठाधिदेवताम्|रत्नपुष्पोपहारेणछायमानर्चपादयोः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
इतिजित्वादिशोजिष्णुर्न्यवर्ततरथोद्धतम्|रजोविश्रामयन्राज्ञांछत्रशून्येषुमौलिषु,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
सविश्वजितमाजह्रेयज्ञंसर्वस्वदक्षिणम्|आदानंहिविसर्गायसतांवारिमुचामिव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
सत्रान्तेसचिवसखःपुरस्क्रियाभिर्गुर्वीभिःशमितपराजयव्यलीकान्|काकुत्स्थश्चिरविरहोत्सुकावरोधान्राजन्यान्स्वपुरनिवृत्तयेऽनुमेने,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तेरेखाकुलिशातपत्रचिह्नंसम्राजश्चरणयुगंप्रसादलभ्यम्|प्रस्थानप्रणतिभिरङ्गुलीषुचक्रुर्मौलिस्रक्च्युतमकरन्दरेणुगौरम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
इतिकालिदासकृतरघुवंशमहाकाव्येचतुर्थःसर्गः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
तमध्वरेविश्वजितिक्षितीशंनिःशेषविश्राणितकोशजातम्|उत्पातविद्योगुरुदक्षिणार्थीकौत्सःप्रपेदेवरतन्तुशिष्यः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
समृण्मयेवीतहिरण्मयत्वात्पात्रेनिधायार्घ्यमनर्घशीलः|श्रुतप्रकाशंयशसाप्रकाशःप्रत्युज्जगामातिथिमातिथेयः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,1,0,0,0,0
तमर्चयित्वाविधिवद्विधिज्ञस्तपोधनंमानधनाग्रयायी|विशांपतिर्विष्टरभाजमारात्कृताञ्जलिःकृत्यविदित्युवाच,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
अप्यग्रणीर्मन्त्रकृतामृषीणांकुशाग्रबुद्धेकुशलीगुरुस्ते|यतस्त्वयाज्ञानमशेषमाप्तंलोकेनचैतन्यमिवोष्णरश्मेः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
कायेनवाचामनसाशश्वद्यत्संभृतंवासवधैर्यलोपि|आपाद्यतेनव्ययमन्तरायैःकच्चिन्महर्षेस्त्रिविधंतपस्तत्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,1,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,0,0,0
आधारबन्धप्रमुखैःप्रयत्नैःसंवर्धितानांसुतनिर्विशेषम्|कच्चिन्नवाय्वादिरुपप्लवोवःश्रमच्छिदामाश्रमपादपानाम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,1,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,0,0,0
क्रियानिमित्तेश्वपिवत्सलत्वादभग्नकामामुनिभिःकुशेषु|तदङ्कशय्याच्युतनाभिनालाकच्चिन्मृगीणामनघाप्रसूतिः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,1,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,1,0,0
निर्वत्यतेयैर्नियमाभिषेकोयेभ्योनिवापाञ्जलयःपितॄणाम्|तान्युञ्छषष्ठाङ्कितसैकतानिशिवानिवस्तीर्थजलानिकच्चित्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,1,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0
नीवारपाकादिकडंगरीयैरामृश्यतेजानपदैर्नकच्चित्|कालोपपन्नातिथिकल्प्यभागंवन्यंशरीरस्थितिसाधनंवः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,1,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0
अपिप्रसन्नेनमहर्षिणात्वंसम्यग्विनीयानुमतोगृहाय|कालोह्ययंसंक्रमितुंद्वितीयंसर्वोपकारक्षममाश्रमंते,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0
तवार्हतोनाभिगमेनतृप्तंमनोनियोगक्रिययोत्सुकंमे|अप्याज्ञयाशासितुरात्मनावाप्राप्तोऽसिसंभावयितुंवनान्माम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
इत्यर्घ्यपात्रानुमितव्ययस्यरघोरुदारामपिगांनिशम्य|स्वार्थोपपत्तिंप्रतिदुर्बलाशस्तमित्यवोचद्वरतन्तुशिष्यः,0,0,1,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
सर्वत्रनोवार्तमवेहिराजन्नाथेकुतस्त्वय्यशुभंप्रजानाम्|सूर्येतपत्यावरणायदृष्टेःकल्पेतलोकस्यकथंतमिस्रा,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
भक्तिःप्रतीक्ष्येषुकुलोचितातेपूर्वान्महाभागतयातिशेषे|व्यतीतकालस्त्वहमभ्युपेतस्त्वामर्थिभावादितिमेविषादः,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
शरीरमात्रेणनरेन्द्रतिष्ठन्नाभासितीर्थप्रतिपादितर्द्धिः|आरण्यकोपात्तफलप्रसूतिःस्तम्बेननीवारइवावशिष्टः,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
स्थानेभवानेकनराधिपःसन्नकिंचनत्वंमखजंव्यनक्ति|पर्यायपीतस्यसुरैर्हिमांशोःकलाक्षयःश्लाघ्यतरोहिवृद्धेः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
तदन्यतस्तावदनन्यकार्योगुर्वर्थमाहर्तुमहंयतिष्ये|स्वस्त्यस्तुतेनिर्गलिताम्बुगर्भंशरद्घनंनार्दतिचातकोऽपि,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
एतावदुक्त्वाप्रतियातुकामंशिष्यंमहर्षेर्नृपतिर्निषिध्य|किंवस्तुविद्वन्गुरवेप्रदेयंत्वयाकियद्वेतितमन्वयुङ्क्त,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
ततोयथावद्विहिताध्वरायतस्मैस्मयावेशविवर्जिताय|वर्णाश्रमाणांगुरवेसवर्णीविचक्षणःप्रस्तुतमाचचक्षे,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
समाप्तविद्येनमयामहर्षिर्विज्ञापितोऽभूद्गुरुदक्षिणायै|समेचिरायास्खलितोपचारांतांभक्तिमेवागणयत्पुरस्तात्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
निर्बन्धसंजातरुषार्थकार्श्यमचिन्तयित्वागुरुणाहमुक्तः|वित्तस्यविद्यापरिसंख्ययामेकोटीश्चतस्रोदशचाहरेति,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0
सोऽहंसपर्याविधिभाजनेनमत्वाभवन्तंप्रभुशब्दशेषम्|अभ्युत्सहेसंप्रतिनोपरोद्धुमल्पेतरत्वाच्छ्रुतनिष्क्रयस्य,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0
इत्थंद्विजेनद्विजराजकान्तिरावेदितोवेदविदांवरेण|एनोनिवृत्तेन्द्रियवृत्तिरेनंजगादभूयोजगदेकनाथः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
गुर्वर्थमर्थीश्रुतपारदृश्वारघोःसकाशादनवाप्यकामम्|गतोवदान्यान्तरमित्ययंमेमाभूत्परीवादनवावतारः,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
सत्वंप्रशस्तेमहितेमदीयेवसंश्चतुर्थोऽग्निरिवाग्निगारे|द्वित्राण्यहान्यर्हसिसोढुमर्हन्यावद्यतेसाधयितुंत्वदर्थम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
तथेतितस्यावितथंप्रतीतःप्रत्यग्रहीत्संगरमग्रजन्मा|गामात्तसारांरघुरप्यवेक्ष्यनिष्क्रष्टुमर्थंचकमेकुबेरात्,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
वसिष्ठमन्त्रोक्षणजात्प्रभावादुदन्वदाकाशमहीधरेषु|मरुत्सखस्येवबलाहकस्यगतिर्विजघ्नेनहितद्रथस्य,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
अथाधिशिश्येप्रयतःप्रदोषेरथंरघुःकल्पितशस्त्रगर्भम्|सामन्तसंभावनयैवधीरःकैलासनाथंतरसाजिगीषुः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
प्रातःप्रयाणाभिमुखायतस्मैसविस्मयाःकोषगृहेनियुक्ताः|हिरण्मयींकोषगृहस्यमध्येवृष्टिंशशंसुःपतितांनभस्तः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
सभूपतिर्भासुरहेमराशिंलब्धंकुबेरादभियास्यमानात्|दिदेशकौत्सायसमस्तमेवपादंसुमेरोरिववज्रभिन्नम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
जनस्यसाकेतनिवासिनस्तौद्वावप्यभूतानभिनन्द्यसत्त्वौ|गुरुप्रदेयाधिकनिःस्पृहोऽर्थीनृपोऽर्थिकामादधिकप्रदश्च,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
अथोष्ट्रवामीशतवाहितार्थंप्रजेश्वरंप्रीतमनामहर्षिः|स्पृशन्करेणानतपूर्वकायंसंप्रस्थितोवाचमुवाचकौत्सः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0
किमत्रचित्रंयदिकामसूर्भूर्वृत्तेस्थितस्याधिपतेःप्रजानाम्|अचिन्तनीयस्तुतवप्रभावोमनीषितंद्यौरपियेनदुग्धा,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
आशास्यमन्यत्पुनरुक्तभूतंश्रेयांसिसर्वाण्यधिजग्मुषस्ते|पुत्रंलभस्वात्मगुणानुरूपंभवन्तमीड्यंभवतःपितेव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
इत्थंप्रयुज्याशिषमग्रजन्माराज्ञेप्रतीयायगुरोःसकाशम्|राजापिलेभेसुतमाशुतस्मादालोकमर्कादिवजीवलोकः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
ब्राह्मेमुहूर्तेकिलतस्यदेवीकुमारकल्पंसुषुवेकुमारम्|अतःपिताब्रह्मणएवनाम्नातमात्मजन्मानमजंचकार,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
रूपंतदोजस्वितदेववीर्यंतदेवनैसर्गिकमुन्नतत्वम्|नकारणात्स्वाद्बिभिदेकुमारःप्रवर्तितोदीपइवप्रदीपात्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
उत्पातविद्यंविधिवद्गुरुभ्यस्तंयौवनोद्भेदविशेषकान्तम्|श्रीःसाभिलाषापिगुरोरनुज्ञांधीरेवकन्यापितुराचकाङ्क्ष,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
अथेश्वरेणक्रथकैशिकानांस्वयंवरार्थंस्वसुरिन्दुमत्याः|आप्तःकुमारानयनोत्सुकेनभोजेनदूतोरघवेविसृष्टः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
तम्श्लाघ्यसंबन्धमसौविचिन्त्यदारक्रियायोग्यदशश्चपुत्रम्|प्रस्थापयामासससैन्यमेनमृद्धांविदर्भाधिपराजधानीम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
तस्योपकार्यारचितोपचारावन्येतराजानपदोपदाभिः|मार्गेनिवासामनुजेन्द्रसूनोर्बभूवुरुद्यानविहारकल्पाः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
सनर्मदारोधसिसीकरार्द्रैर्मरुद्भिरानर्तितनक्तमाले|निवेशयामासविलङ्घिताध्वाक्लान्तंरजोधूसरकेतुसैन्यम्,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0
अथोपरिष्टाद्भ्रमरैर्भ्रमद्भिःप्राक्सूचितान्तःसलिलप्रवेशः|निर्धौतदानामलगण्डभित्तिर्वन्यःसरित्तोगजउन्ममज्ज,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
निःशेषविक्षालितधातुनापिवप्रक्रियामृक्षवतस्तटेषु|नीलोर्ध्वरेखाशबलेनशंसन्दन्तद्वयेनाश्मविकुण्ठितेन,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
संहारविक्षेपलघुक्रियेणहस्तेनतीराभिमुखःसशब्दम्|बभौसभिन्दन्बृहतस्तरंगान्वार्यर्गलाभङ्गइवप्रवृत्तः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
शैलोपमःशैवलमञ्जरीणांजालानिकर्षन्नुरसासपश्चात्|पूर्वंतदुत्पीडितवारिराशिःसरित्प्रवाहस्तटमुत्ससर्प,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
तस्यैकनागस्यकपोलभित्त्योर्जलावगाहक्षणमेकशान्ता।वन्येतरानेकपदर्शनेनपुनर्दिदीपेमददुर्दिनश्रीः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
सप्तच्छदक्षीरकटुप्रवाहमसह्यमाघ्रायमदंतदीयम्।विलङ्घिताधोरणतीव्रयत्नाःसेनागजेन्द्राविमुखाबभूवुः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
सच्छिन्नबन्धद्रुतयुग्यशून्यंभग्नक्षपर्यस्तरथंक्षणेन|रामापरित्राणविहस्तयोधंसेननिवेशंतुमुलंचकार,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तमापतन्तंनृपतेरवध्योवन्यःकरीतिश्रुतवान्कुमारः|निर्वर्तयिष्यन्विशिखेनकुम्भेजघाननात्यायतकृष्टशार्ङ्गः,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
सविद्धमात्रःकिलनागरूपमुत्सृज्यतद्विस्मितसैन्यदृष्टः|स्फुरत्प्रभामण्डलमध्यवर्तिकान्तंवपुर्व्योमचरःप्रपेदे,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
अथप्रभावोपनतैःकुमारंकल्पद्रुमोत्थैरवकीर्यपुष्पैः|उवाचवाग्मीदशनप्रभाभिःसंवर्धितोरःस्थलतारहारः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
मतङ्गशापादवलेपमूलादवाप्तवानस्मिमतङ्गजत्वम्|अवेहिगन्धर्वपतेस्तनूजंप्रियंवदंमांप्रियदर्शनस्य,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
सचानुनीतःप्रणतेनपश्चान्मयामहर्षिर्मृदुतामगच्छत्|उष्णत्वमग्न्यातपसंप्रयोगाच्छैत्यंहियत्साप्रकृतिर्जलस्य,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
इक्ष्वाकुवंशप्रभवोयदातेभेत्स्यत्यजःकुम्भमयोमुखेन|संयोक्ष्यसेस्वेनवपुर्महिम्नातदेत्यवोचत्सतपोनिधिर्माम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0
संमोचितःसत्त्ववतात्वयाहंशापाच्चिरप्रार्थितदर्शनेन|प्रतिप्रियंचेद्भवतोनकुर्यांवृथाहिमेस्यात्स्वपदोपलब्धिः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
संमोहनंनामसखेममास्त्रंप्रयोगसंहारविभक्तमन्त्रम्|गान्धर्वमादत्स्वयतःप्रयोक्तुर्नचारिहिंसाविजयश्चहस्ते,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
अलंह्रियामांप्रतियन्मुहूर्तंदयापरोऽभूःप्रहरन्नपित्वम्|तस्मादुपच्छन्दयतिप्रयोज्यंमयित्वयानप्रतिषेधरौक्ष्यम्,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तथेत्युपस्पृश्यपयःपवित्रंसोमोद्भवायाःसरितोनृसोमः|उदङ्मुखःसोऽस्त्रविदस्त्रमन्त्रंजग्राहतस्मान्निगृहीतशापात्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
एवंतयोरध्वनिदैवयोगादासेदुषोःसख्यमचिन्त्यहेतु|एकोययौचैत्ररथप्रदेशान्सौराज्यरम्यानपरोविदर्भान्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
तंतस्थिवांसंनगरोपकण्ठेतदागमारूढगुरुप्रहर्षः|प्रत्युज्जगामक्रथकैशिकेन्द्रश्चन्द्रंप्रवृद्धोर्मिरिवोर्मिमाली,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
प्रवेश्यचैनंपुनरग्रयायीनीचैस्तथोपाचरदर्पितश्रीः|मेनेयथातत्रजनःसमेतोवैदर्भमागन्तुमजंगृहेशम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
तस्याधिकारपुरुषैःप्रणतैःप्रदिष्टांप्राग्द्वारवेदिविनिवेशितपूर्णकुम्भाम्|रम्यांरघुप्रतिनिधिःसनवोपकार्यांबाल्यात्परामिवदशांमदनोऽध्युवास,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
तत्रस्वयंवरसमाहृतराजलोकंकन्याललामकमनीयमजस्यलिप्सोः|भावावबोधकलुषादयितेवरात्रौनिद्राचिरेणनयनाभिमुखीबभूव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तंकर्णभूषणनिपीडितपीवरांसंशय्योत्तरच्छदविमर्दकृशाङ्गरागम्|सूतात्मजाःसवयसःप्रथितप्रबोधंप्राबोधयन्नुषसिवाग्भिरुदारवाचः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
रात्रिर्गतामतिमतांवरमुञ्चशय्यांधात्राद्विधैवननुधूर्जगतोविभक्ता|तामेकतस्तवबिभर्तिगुरुर्विनिद्रस्तस्याभवानपरधुर्यपदावलम्बी,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
निद्रावशेनभवताप्यनवेक्षमाणापर्युत्सुकत्वमबलानिशिखण्डितेव|लक्ष्मीर्विनोदयतियेनदिगन्तलम्बीसोऽपित्वदाननरुचिंविजहातिचन्द्रः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
तद्वल्गुनायुगपदुन्मिषितेनतावत्सद्यःपरस्परतुलामधिरोहतांद्वे|प्रस्पन्दमानपरुषेतरतारमन्तश्चक्षुस्तवप्रचलितभ्रमरंचपद्मम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
वृन्ताच्छ्लथंहरतिपुष्पमनोकहानांसंसृज्यतेसरसिजैररुणांशुभिन्नैः|स्वाभाविकंपरगुणेनविभातवायुःसौरभ्यमीप्सुरिवतेमुखमारुतस्य,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
ताम्रोदरेषुपतितंतरुपल्लवेषुनिर्धौतहारगुलिकाविशदंहिमाम्भःआभातिलब्धपरभागतयाधरोष्ठेलीलास्मितंसदशनार्चिरिवत्वदीयम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
यावत्प्रतापनिधिराक्रमतेनभानुरह्नायतावदरुणेनतमोनिरस्तम्|आयोधनाग्रसरतांत्वयिवीरयातेकिंवारिपूंस्तवगुरुःस्वयमुच्छिनत्ति,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
शय्यांजहत्युभयपक्षविनीतनिद्राःस्तम्बेरमामुखरशृङ्खलकर्षिणस्ते|येषांविभातितरुणारुणरागयोगाद्भिन्नाद्रिगैरिकतटाइवदन्तकोशाः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
दीर्घेष्वमीनियमिताःपटमण्डपेषुनिद्रांविहायवनजाक्षवनायुदेश्याः|वक्त्रोष्मणामलिनयन्तिपुरोगतानिलेह्यानिसैन्धवशिलाशकलानिवाहाः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
भवतिविरलभक्तिर्म्लानपुष्पोपहारःस्वकिरणपरिवेषोद्भेदशून्याःप्रदीपाः|अयमपिचगिरंनस्त्वत्प्रबोधप्रयुक्तामनुवदतिशुकस्तेमञ्जुवाक्पञ्जरस्थः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
इतिविरचितवाग्भिर्बन्दिपुत्रैःकुमारःसपदिविगतनिद्रस्तल्पमुज्झांचकार|मदपटुनिनदद्भिर्बोधितोराजहंसैःसुरगजइवगाङ्गंसैकतंसुप्रतीकः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
अथविधिमवसाय्यशास्त्रदृष्टंदिवसमुखोचितमञ्चिताक्षिपक्ष्मा|कुशलविरचितानुकूलवेशःक्षितिपसमाजमगात्स्वयंवरस्थम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
इतिकालिदासकृतरघुवंशमहाकाव्येपंचमःसर्गः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
सतत्रमञ्चेषुमनोज्ञवेषान्सिंहासनस्थानुपचारवत्सु|वैमानिकानाम्मरुतामपश्यदाकृष्टलीलान्नरलोकपालान्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
रतेर्गृहीतानुनयेनकामम्प्रत्यर्पितस्वाङ्गमिवेश्वरेण|काकुत्स्थमालोकयताम्नृपाणाम्मनोबभूवेन्दुमतीनिराशम्,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
वैदर्भनिर्दिष्टमसौकुमारःकॢप्तेनसोपानपथेनमञ्चम्|शिलाविभङ्गैर्मृगराजशावस्तुङ्गम्नगोत्सङ्गमिवारुरोह,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
परार्ध्यवर्णास्तरणोपपन्नमासेदिवान्रत्नवदासनम्सः|भूयिष्ठमासीदुपमेयकान्तिर्मयूरपृष्ठाश्रयिणागुहेन,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
तासुश्रियाराजपरंपरासुप्रभाविशेषोदयदुर्निरीक्ष्यः|सहस्रधात्माव्यरुचद्विभक्तःपयोमुचाम्पङ्क्तिषुविद्युतेव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
तेषाम्महार्हासनसंस्थितानामुदारनेपथ्यभृताम्समध्ये|रराजधाम्नारघुसूनुरेवकल्पद्रुमाणामिवपारिजातः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
नेत्रव्रजाःपौरजनस्यतस्मिन्विहायसर्वान्नृपतीन्निपेतुः|मदोत्कटेरेचितपुष्पवृक्षागन्धद्विपेवन्यइवद्विरेफाः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
अथस्तुतेबन्दिभिरन्वयज्ञैःसोमार्कवंश्येनरदेवलोके|संचारितेचागुरुसारयोनौधूपेसमुत्सर्पतिवैजयन्तीः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
पुरोपकण्टोपवनाश्रयाणाम्कलापिनामुद्धतनृत्तहेतौ|प्रध्मातशङ्खेपरितोदिगन्तांस्तूर्यस्वनेमूर्च्छतिमङ्गलार्थे,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
मनुष्यवाह्यम्चतुरन्तयानमध्यास्यकन्यापरिवारशोभि|विवेशमञ्चान्तरराजमार्गम्पतिंवराकॢप्तविवाहवेषा,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
तस्मिन्विधानातिशयेविधातुःकन्यामयेनेत्रशतैकलक्ष्ये|निपेतुरन्तःकरणैर्नरेन्द्रादेहैःस्थिताःकेवलमासनेषु,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
ताम्प्रत्यभिव्यक्तमनोरथानांमहीपतीनाम्प्रणयाग्रदूत्यः|प्रवालशोभाइवपादपानांशृङ्गारचेष्टाविविधाबभूवुः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
कश्चित्कराभ्यामुपगूढनालमालोलपत्राभिहतद्विरेफम्|रजोभिरन्तःपरिवेषबन्धिलीलारविन्दम्भ्रमयांचकार,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
विस्रस्तमंसादपरोविलासीरत्नानुविद्धाङ्गदकोटिलग्नम्|प्रालम्बमुत्कृष्ययथावकाशम्निनायसाचीकृतचारुवक्त्रः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
आकुञ्चिताग्राङ्गुलिनाततोऽन्यःकिञ्चित्समावर्जितनेत्रशोभः|तिर्यग्विसंसर्पिनखप्रभेणपादेनहैमम्विलिलेखपीठम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
निवेश्यवामम्भुजमासनार्धेतत्संनिवेशात्अधिकोन्नतांसः|कश्चिद्विवृत्तत्रिकभिन्नहारःसुहृत्समाभाषणतत्परोऽभूत्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
विलासिनीविभ्रमदन्तपत्रमपाण्डुरम्केतकबर्हमन्यः|प्रियानितम्बोचितसंनिवेशैर्विपाटयामासयुवानखाग्रैः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
कुशेशयाताम्रतलेनकश्चित्करेणरेखाध्वजलाञ्छनेन|रत्नाङ्गुलीयप्रभयानुविद्धानुदीरयामाससलीलमक्षान्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
कश्चिद्यथाभागमवस्थितेऽपिस्वसंनिवेशाद्व्यतिलङ्घिनीव|वज्रांशुगर्भाङ्गुलिरन्ध्रमेकम्व्यापारयामासकरम्किरीटे,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
ततोनृपाणाम्श्रुतवृत्तवंशापुंवत्प्रगल्भाप्रतिहाररक्षी|प्राक्संनिकर्षम्मगधेश्वरस्यनीत्वाकुमारीमवदत्सुनन्दा,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
असौशरण्यःशरणोन्मुखानामगाधसत्त्वोमगधप्रतिष्ठः|राजाप्रजारञ्जनलब्धवर्णःपरंतपोनामयथार्थनामा,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
कामम्नृपाःसन्तुसहस्रशोऽन्येराजन्वतीमाहुरनेनभूमिम्|नक्षत्रताराग्रहसंकुलापिज्योतिष्मतीचन्द्रमसैवरात्रिः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
क्रियाप्रबन्धादयमध्वराणामजस्रमाहूतसहस्रनेत्रः|शच्याश्चिरम्पाण्डुकपोललम्बान्मन्दारशून्यानलकांश्चकार,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
अनेनचेदिच्छसिगृह्यमाणम्पाणिम्वरेण्येनकुरुप्रवेशे|प्रासादवातायनसंस्थितानाम्नेत्रोत्सवम्पुष्पपुराङ्गनानाम्,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
एवम्तयोक्तेतमवेक्ष्यकिंचिद्विस्रंसिदूर्वाङ्कमधूकमाला|ऋजुप्रणामक्रिययैवतन्वीप्रत्यादिदेशैनमभाषमाणा,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
ताम्सैववेत्रग्रहणेनियुक्ताराजान्तरम्राजसुताम्निनाय|समीरणोत्थेवतरंगरेखापद्मान्तरम्मानसराजहंसीम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
जगादचैनामयमङ्गनाथःसुराङ्गनाप्रार्थितयौवनश्रीः|विनीतनागःकिलसूत्रकारैरैन्द्रम्पदम्भूमिगतोऽपिभुङ्क्ते,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
अनेनपर्यासयताश्रुबिन्दून्मुक्ताफलस्थूलतमान्स्तनेषु|प्रत्यर्पिताःशत्रुविलासिनीनामुन्मुच्यसूत्रेणविनैवहाराः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
निसर्गभिन्नास्पदमेकसंस्थमस्मिन्द्वयम्श्रीश्चसरस्वतीच|कान्त्यागिरासूनृतयाचयोग्यात्वमेवकल्याणितयोस्तृतीया,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
अथाङ्गराजदवतार्यचक्षुर्याहीतिजन्यामवदत्कुमारी|नासौनकाम्योनचवेदसम्यग्द्रष्टुम्नसाभिन्नरुचिर्हिलोकः,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
ततःपरम्दुःप्रसहम्द्विषद्भिर्नृपम्नियुक्ताप्रतिहारभूमौ|निदर्शयामासविशेषदृश्यमिन्दुम्नवोत्थानमिवेन्दुमत्यै,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
अवन्तिनाथोऽयमुग्रबाहुर्विशालवक्षास्तनुवृत्तमध्यः|आरोप्यचक्रभ्रममुष्णतेजास्त्वष्ट्रेवयत्नोल्लिखितोविभाति,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
अस्यप्रयाणेषुसमग्रशक्तेरग्रेसरैर्वाजिभिरुत्थितानि|कुर्वन्तिसामन्तशिखामणीनाम्प्रभाप्ररोहास्तमयम्रजांसि,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
असौमहाकालनिकेतनस्यवसन्नदूरेकिलचन्द्रमौलेः|तमिस्रपक्षेऽपिसहप्रियाभिर्ज्योत्स्नावतोनिर्विशतिप्रदोषान्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
अनेनयूनासहपार्थिवेनरम्भोरुकच्चिन्मनसोरुचिस्ते|सिप्रातरंगानिलकम्पितासुविहर्तुमुद्यानपरंपरासु,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तस्मिन्नभिद्योतितबन्धुपद्मेप्रतापसंशोषितशत्रुपङ्के|बबन्धसानोत्तमसौकुमार्याकुमुद्वतीभानुमतीवभावम्,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
तामग्रतस्तामरसान्तराभामनूपराजस्यगुणैरनूनाम्|विधायसृष्टिम्ललिताम्विधातुर्जगादभूयःसुदतीम्सुनन्दा,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
सङ्ग्रामनिर्विष्टसहस्रबाहुरष्टादशद्वीपनिखातयूपः|अनन्यसाधारणराजशब्दोबभूवयोगीकिलकार्तवीर्यः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
अकार्यचिन्तासमकालमेवप्रादुर्भवंश्चापधरःपुरस्तात्|अन्तःशरीरेष्वपियःप्रजानाम्प्रत्यादिदेशाविनयम्विनेता,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
ज्याबन्धनिष्पन्दभुजेनयस्यविनिःश्वसद्वक्त्रपरंपरेण|कारागृहेनिर्जितवासवेनलङ्केश्वरेणोषितमाप्रसादात्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
तस्यान्वयेभूपतिरेषजातःप्रतीपइत्यागमवृद्धसेवी|येनःश्रियःसंश्रयदोषरूढम्स्वभावलोलेत्ययशम्प्रमृष्टम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
आयोधनेकृष्णगतिम्सहायमवाप्ययःक्षत्रियकालरात्रिम्|धाराम्शिताम्रामपरश्वधस्यसंभावयत्युत्पलपत्रसाराम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
अस्याङ्कलक्ष्मीर्भवदीर्घबाहोर्माहिष्मतीवप्रनितम्बकाञ्चीम्|प्रासादजालैर्जलवेणिरम्याम्रेवाम्यदिप्रेक्षितुमस्तिकामः,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तस्याःप्रकामम्प्रियदर्शनोऽपिनसक्षितीशोरुचयेबभूव|शरत्प्रमृष्टाम्बुधरोपरोधःशशीवपर्याप्तकलोनलिन्याः,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
साशूरसेनाधिपतिम्सुषेणमुद्दिश्यलोकान्तरगीतकीर्तिम्|आचारशुद्धोभयवंशदीपम्शुद्धान्तरक्ष्याजगदेकुमारी,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0
नीपान्वयःपार्थिवएषयज्वागुणैर्यमाश्रित्यपरस्परेण|सिद्धाश्रमम्शान्तमिवेत्यसत्त्वैर्नैसर्गिकोऽप्युत्ससृजेविरोधः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,1,0,0,0
यस्यात्मगेहेनयनाभिरामाकान्तिर्हिमांशोरिवसंनिविष्टा|हर्म्याग्रसंरूढतृणाङ्कुरेषुतेजोऽविषह्यम्रिपुमन्दिरेषु,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,1,0,0,0
यस्यावरोधस्तनचन्दनानाम्प्रक्षालनाद्वारिविहारकाले|कलिन्दकन्यामथुराम्गतापिगङ्गोर्मिसंसक्तजलेवभाति,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
त्रस्तेनतार्क्ष्यात्किलकालियेनमणिम्विसृष्टम्यमुनौकसायः|वक्षःस्थलव्यापिरुचम्दधानःसकौस्तुभम्ह्रेपयतीवकृष्णम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
संभाव्यभर्तारममुम्युवानम्मृदुप्रवालोत्तरपुष्पशय्ये|वृन्दावनेचैत्ररथादनूनेनिर्विश्यताम्सुन्दरियौवनश्रीः,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
अध्यास्यचाम्भःपृषतोक्षितानिशैलेयगन्धीनिशिलातलानि|कलापिनाम्प्रावृषिपश्यनृत्यम्कान्तासुगोवर्धनकन्दरासु,0,0,1,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
नृपम्तमावर्तमनोज्ञनाभिःसाव्यत्यगादन्यवधूर्भवित्री|महीधरम्मार्गवशादुपेतम्स्रोतोवहासागरगामिनीव,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
अथाङ्गदालिष्टभुजम्भुजिष्याहेमाङ्गदम्नामकलिङ्गनाथम्|आसेदुषीम्सादितशत्रुपक्षम्बालामबालेन्दुमुखीम्बभाषे,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
असौमहेन्द्रादिसमानसारःपतिर्महेन्द्रस्यमहोदधेश्च|यस्यक्षरत्सैन्यगजच्छलेनयात्रासुयातीवपुरोमहेन्द्रः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
ज्याघातरेखेसुभुजोभुजाभ्याम्बिभर्तियश्चापभृताम्पुरोगः|रिपुश्रियाम्साञ्जनबाष्पसेकेबन्दीकृतानामिवपद्धतीद्वे,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
यमात्मनःसद्मनिसंनिकृष्टोमन्द्रध्वनित्याजितयामतूर्यः|प्रासादवातायनदृश्यवीचिःप्रबोधयत्यर्णवएवसुप्तम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
अनेनसार्धम्विहराम्बुराशेस्तीरेषुतालीवनमर्मरेषु|द्वीपान्तरानीतलवङ्गपुष्पैरपाकृतस्वेदलवामरुद्भिः,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
प्रलोभिताप्याकृतिलोभनीयाविदर्भराजावरजातयैवम्|तस्मादपावर्ततदूरकृष्टानीत्येवलक्ष्मीःप्रतिकूलदैवात्,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
अथोरगाख्यस्यपुरस्यनाथम्दौवारिकीदेवसरूपमेत्य|इतश्चकोराक्षिविलोकयेतिपूर्वानुशिष्टाम्निजगादभोज्याम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
पाण्ड्योऽयमंसार्पितलम्बहारःकॢप्ताङ्गरागोहरिचन्दनेन|आभातिबालातपरक्तसानुःसनिर्झरोद्गारइवाद्रिराजः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
विन्ध्यस्यसंस्तम्भयितामहाद्रेर्निःशेषपीतोज्झितसिन्धुराजः|प्रीत्याश्वमेधावभृथार्द्रमूर्तेःसौस्नातिकोयस्यभवत्यगस्त्यः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0
अस्त्रम्हरादाप्तवतादुरापम्येनेन्द्रलोकावजयायदृप्तः|पुराजनस्थानविमर्दशङ्कीसंधायलङ्काधिपतिःप्रतस्थे,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
अनेनपाणौविधिवद्गृहीतेमहाकुलीनेनमहीवगुर्वी|रत्नानुविद्धार्णवमेखलायादिशःसपत्नीभवदक्षिणस्याः,0,0,1,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
ताम्बूलवल्लीपरिणद्धपूगास्वेलालतालिङ्गितचन्दनासु|तमालपत्रास्तरणासुरन्तुम्प्रसीदशश्वन्मलयस्थलीषु,0,0,1,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
इन्दीवरश्यामतनुर्नृपोऽसौत्वम्रोचनागौरशरीरयष्टिः|अन्योन्यशोभापरिवृद्धयेवाम्योगस्तडित्तोयदयोरिवास्तु,0,0,1,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
स्वसुर्विदर्भाधिपतेस्तदीयोलेभेऽन्तरम्चेतसिनोपदेशः|दिवाकरादर्शनबद्धकोशेनक्षत्रनाथांशुरिवारविन्दे,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
संचारिणीदीपशिखेवरात्रौयम्यम्व्यतीयायपतिंवरासा|नरेन्द्रमार्गाट्टइवप्रपेदेविवर्णभावम्ससभूमिपालः,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तस्याम्रघोःसूनुरुपस्थितायाम्वृणीतमाम्नेतिसमाकुलोऽभूत्|वामेतरःसंशयमस्यबाहुःकेयूरबन्धोच्छ्वसितैर्नुनोद,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तम्प्राप्यसर्वावयवानवद्यम्व्यावर्ततान्योपगमात्कुमारी|नहिप्रफुल्लम्सहकारमेत्यवृक्षान्तरम्काङ्क्षतिषट्पदाली,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तस्मिन्समावेशितचित्तवृत्तिमिन्दुप्रभामिन्दुमतीमवेक्ष्य|प्रचक्रमेवक्तुमनुक्रमज्ञासविस्तरम्वाक्यमिदम्सुनन्दा,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
इक्ष्वाकुवंश्यःककुदम्नृपाणाम्ककुत्स्थइत्याहितलक्षणोऽभूत्|काकुत्स्थशब्दम्यतउन्नतेच्छाःश्लाघ्यम्दधत्युत्तरकोसलेन्द्राः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
महेन्द्रमास्थायमहोक्षरूपम्यःसंयतिप्राप्तपिनाकिलीलः|चकारबाणैरसुराङ्गनानाम्गण्डस्थलीःप्रोषितपत्रलेखाः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
ऐरावतस्फालनविश्लथम्यःसंघट्टयन्नङ्गदमङ्गदेन|उपेयुषःस्वामपिमूर्तिमग्र्यामर्धासनम्गोत्रभिदोऽधितष्ठौ,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
जातःकुलेतस्यकिलोरुकीर्तिःकुलप्रदीपोनृपतिर्दिलीपः|अतिष्ठदेकोनशतक्रतुत्वेशक्राभ्यसूयाविनिवृत्तयेयः,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
यस्मिन्महीम्शासतिवाणिनीनाम्निद्राम्विहारार्धपथेगतानाम्|वातोऽपिनास्रंसयदंशुकानिकोलम्बयेदाहरणायहस्तम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
पुत्रोरघुस्तस्यपदम्प्रशास्तिमहाक्रतोर्विश्वजितःप्रयोक्ता|चतुर्दिगावर्जितसंभृताम्योमृत्पात्रशेषामकरोद्विभूतिम्,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
आरूढमद्रीनुदधीन्वितीर्णम्भुजंगमानाम्वसतिम्प्रविष्टम्|ऊर्ध्वम्गतम्यस्यनचानुबन्धियशःपरिच्छेत्तुमियत्तयालम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
असौकुमारस्तमजोऽनुजातस्त्रिविष्टपस्येवपतिम्जयन्तः|गुर्वीम्धुरम्योजगतस्यपित्राधुर्येणदम्यःसदृशम्बिभर्ति,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
कुलेनकान्त्यावयसानवेनगुणैश्चतैस्तैर्विनयप्रधानैः|त्वमात्मनस्तुल्यममुम्वृणीष्वरत्नम्समागच्छतुकाञ्चनेन,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
ततःसुनन्दावचनावसानेलज्जाम्तनूकृत्यनरेन्द्रकन्या|दृष्ट्याप्रसादामलयाकुमारम्प्रत्यग्रहीत्संवरणस्रजेव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
सायूनितस्मिन्नभिलाषबन्धम्शशाकशालीनतयानवक्तुम्|रोमाञ्चलक्ष्येणसगात्रयष्टिम्भित्त्वानिराक्रामदरालकेश्याः,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तथागतायाम्परिहासपूर्वम्सख्याम्सखीवेत्रभृदाबभाषे|आर्येव्रजामोऽन्यतइत्यथैनाम्वधूरसूयाकुटिलम्ददर्श,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
साचूर्णगौरम्रघुनन्दनस्यधात्रीकराभ्याम्करभोपमोरूः|आसञ्जयामासयथाप्रदेशम्कण्ठेगुणम्मूर्तमिवानुरागम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तयास्रजामङ्गलपुष्पमय्याविशालवक्षःस्थललम्बयासः|अमंस्तकण्ठार्पितबाहुपाशाम्विदर्भराजावरजाम्वरेण्यः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
शशिनमुपगतेयम्कौमुदीमेघमुक्तंजलनिधिमनुरूपम्जह्नुकन्यावतीर्णा|इतिसमगुणयोगप्रीतयस्तत्रपौराःश्रवणकटुनृपाणामेकवाक्यम्विवव्रुः,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0
प्रमुदितवरपक्षमेकतस्तत्क्षितिपतिमण्डलमन्यतोवितानम्|उषसिसरइवप्रफुल्लपद्मम्कुमुदवनप्रतिपन्ननिद्रमासीत्,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
इतिकालिदासकृतरघुवंशमहाकाव्येषष्ठःसर्गः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
अथोपयन्त्रासदृशेणयुक्ताम्स्कन्देनसाक्षादिवदेवसेनाम्।स्वसारमादायविदर्भनाथःपुरप्रवेशाभिमुखोबभूव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
सेनानिवेशान्पृथिवीक्षितोऽपिजग्मुर्विभातग्रहमन्दभासः।भोज्याम्प्रतिव्यर्थमनोरथत्वाद्रूपेषुवेशेषुचसाभ्यसूया,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
सांनिध्ययोगात्किलतत्रशच्याःस्वयंवरक्षोभकृतामभावः।काकुत्स्थमुद्दिश्यसमत्सरोऽपिशशामतेनक्षितिपाललोकः,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तावत्प्रकीर्णाभिनवोपचारमिन्द्रायुधद्योतिततोरणाङ्कम्।वरःसवध्वासहराजमार्गम्प्रापध्वजच्छायनिवारितोष्णम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
ततस्तदालोकनतत्पराणाम्सौधेषुचामीकरजालवत्सुबभूवुरित्थम्पुरसुन्दरीणाम्त्यक्तान्यकार्याणिविचेष्टितानि,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
आलोकमार्गम्सहसाव्रजन्त्याकयाचिदुद्वेष्टनवान्तमाल्यः।बद्धुम्नसंभावितएवतावत्करेणरुद्धोऽपिचकेशपाशः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0
प्रसाधिकालम्बितमग्रपादमाक्षिप्यकाचिद्द्रवरागमेव।उत्सृष्टलीलागतिरागवाक्षादलक्तकाङ्काम्पदवीम्ततान,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0
विलोचनम्दक्षिणमञ्जनेनसंभाव्यतद्वञ्चितवामनेत्रा।तथैववातायनसंनिकर्षम्ययौशलाकामपरावहन्ती,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0
जालान्तरप्रेषितदृष्टिरन्याप्रस्थानभिन्नाम्नबबन्धनीवीम्।नाभिप्रविष्टाभरणप्रभेनहस्तेनतस्थाववलम्ब्यवासः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0
अर्धाञ्चितासत्वरमुत्थितायाःपदेपदेदुर्निमितेगलन्ती।कस्याश्चिदासीद्रशनातदानीमङ्गुष्ठमूलार्पितसूत्रशेषा,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0
तासाम्मुखैरासवगन्धगर्भैर्व्याप्तान्तराःसान्द्रकुतूहलानाम्।विलोलनेत्रभ्रमरैर्गवाक्षाःसहस्रपत्राभरणाइवासन्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0
ताराघवम्दृष्टिभिरापिबन्त्योनार्योनजग्मुर्विषयान्तराणि।तथाहिशेषेन्द्रियवृत्तिरासाम्सर्वात्मनाचक्षुरिवप्रविष्टा,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,1,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0
स्थानेवृताभूपतिभिःपरोक्षैःस्वयंवरम्साधुममंस्तभोज्या।पद्मेवनारायणमन्यथासौलभेतकान्तम्कथमात्मतुल्यम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
परस्परेणस्पृहणीयशोभम्नचेदिदम्द्वन्द्वमयोजयिष्यत्।अस्मिन्द्वयेरूपविधानयत्नःपत्युःप्रजानाम्वितथोऽभविष्यत्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
रतिस्मरौनूनमिमावभूताम्राज्ञाम्सहस्रेषुतथाहिबाला।गतेयमात्मप्रतिरूपमेवमनोहिजन्मान्तरसंगतिज्ञम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
इत्युद्गताःपौरवधूमुखेभ्यःशृण्वन्कथाःश्रोत्रसुखाःकुमारः।उद्भासितम्मङ्गलसंविधाभिःसंबन्धिनःसद्मसमाससाद,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
ततोऽवतीर्याशुकरेणुकायाःसकामरूपेश्वरदत्तहस्तः।वैदर्भनिर्दिष्टमथोविवेशनारीमनांसीवचतुष्कमन्तः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
महार्हसिंहासनसंस्थितोऽसौसरत्नमर्घ्यम्मधुपर्कमिश्रम्।भोजोपनीतम्चदुकूलयुग्मम्जग्राहसार्धम्वनिताकटाक्षैः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
दुकूलवासाःसवधूसमीपम्निन्येविनीतैरवरोधरक्षैः।वेलासकाशम्स्फुटफेनराजिर्नवैरुदन्वानिवचन्द्रपादैः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
तत्रार्चितोभोजपतेःपुरोधाहुत्वाग्निमाज्यादिभिरग्निकल्पः।तमेवचाधायविवाहसाक्ष्येवधूवरौसंगमयांचकार,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
हस्तेनहस्तम्परिगृह्यवध्वाःसराजसूनुःसुतराम्चकासे।अनन्तराशोकलताप्रवालम्प्राप्येवचूतःप्रतिपल्लवेन,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
आसीद्वरःकण्टकितप्रकोष्ठःस्विन्नाङ्गुलिःसंववृतेकुमारी।तस्मिन्द्वयेतत्क्षणमात्मवृत्तिःसमम्विभक्तेवमनोभवेन,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तयोरपाङ्गप्रतिसारितानिक्रियासमापत्तिनिवर्तितानि।ह्रीयन्त्रणामानशिरेमनोज्ञामन्योन्यलोलानिविलोचनानि,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
प्रदक्षिणप्रक्रमणात्कृशानोरुदर्चिषस्तन्मिथुनम्चकाशे।मेरोरुपान्तेष्विववर्तमानमन्योन्यसंसक्तमहस्त्रियामम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
नितम्बगुर्वीगुरुणाप्रयुक्तावधूर्विधातृप्रतिमेनतेन।चकारसामत्तचकोरनेत्रालज्जावतीलाजविसर्गमग्नौ,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
हविःशमीपल्लवलाजगन्धीपुण्यःकृशानोरुदियायधूमः।कपोलसंसर्पिशिखःसतस्यामुहूर्तकर्णोत्पलताम्प्रपेदे,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
तदञ्जनक्लेदसमाकुलाक्षम्प्रम्लानबीजाङ्कुरकर्णपूरम्।वधूमुखम्पाटलगन्धलेखमाचारधूमग्रहणाद्बभूव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
तौस्नातकैर्बन्धुमताचराज्ञापुरंध्रिभिश्चक्रमशःप्रयुक्तम्।कन्याकुमारौकनकासनस्थावार्द्राक्षतारोपणमन्वभूताम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
इतिस्वसुर्भोजकुलप्रदीपःसंपाद्यपाणिग्रहणम्सराजा।महीपतीनाम्पृथगर्हणार्थम्समादिदेशाधिकृतानधिश्रीः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
लिङ्गैर्मुदःसंवृतविक्रियास्तेह्रदाःप्रसन्नाइवगूढनक्राः।वैदर्भमामन्त्र्यययुस्तदीयाम्प्रत्यर्प्यपूजामुपदाछलेन,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
सराजलोकःकृतपूर्वसंविदारम्भसिद्धौसमयोपलभ्यम्।आदास्यमानःप्रमदामिषम्तदावृत्यपन्थानमजस्यतस्थौ,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
भर्तापितावत्क्रथकैशिकानामनुष्ठितानन्तरजाविवाहः।सत्त्वानुरूपाहरणीकृतश्रीःप्रास्थापयद्राघवमन्वगाच्च,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तिस्रस्त्रिलोकप्रथितेनसार्धमजेनमार्गेवसतीरुषित्वा।तस्मादपावर्ततकुण्डिनेशःपर्वात्ययेसोमइवोष्णरश्मेः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
प्रमन्यवःप्रागपिकोसलेन्द्रेप्रत्येकमात्तस्वतयाबभ्रुवुः।अतोनृपाश्रक्षमिरेसमेताःस्त्रीरत्नलाभंनतदात्मजस्य,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तमुद्वहन्तम्पथिभोजकन्याम्रुरोधराजन्यगणसदृप्तः।बलिप्रदिष्टाम्श्रियमाददानम्त्रैविक्रमम्पादमिवेन्द्रशत्रुः,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तस्याःसरक्षार्थमनल्पयोधमादिश्यपित्र्यम्सचिवम्कुमारः।प्रत्यग्रहीत्पार्थिववाहिनीम्ताम्भागीरथीम्शोणइवोत्तरङ्गः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
पत्तिःपदातिम्रथिनम्रथेशस्तुरंगसादीतुरगाधिरूढम्।यन्तागजस्याभ्यपतद्गजस्थम्तुल्यप्रतिद्वन्द्विबभूवयुद्धम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
नदत्सुतूर्येष्वविभाव्यवाचोनोदीरयन्तिस्मकुलोपदेशान्।बाणाक्षरैरेवपरस्परस्यनामोर्जितम्चापभृतःशशंसुः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
उत्थापितःसंयतिरेणुरश्वैःसान्द्रीकृतःस्यन्दनवंशचक्रैः।विस्तारितःकुञ्जरकर्णतालैर्नेत्रक्रमेणोपरुरोधसूर्यम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
मत्स्यध्वजावायुवशाद्विदीर्णैर्मुखैःप्रवृद्धध्वजिनीरजांसि।बभुःपिबन्तःपरमार्थमत्स्याःपर्याविलानीवनवोदकानि,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
रथोरथाङ्गध्वनिनाविजज्ञेविलोलघण्टाक्वणितेननागः।स्वभर्तुनामग्रहणाद्बभूवसान्द्रेरजस्यात्मपरावबोधः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
आवृण्वतोलोचनमार्गमाजौरजोन्धकारस्यविजृम्भितस्य।शस्त्रक्षताश्वद्वीपवीरजन्माबालारुणोऽभूद्रुधिरप्रवाहः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
सच्छिन्नमूलःक्षतजेनरेणुस्तस्योपरिष्टात्पवनापधूतः।अङ्गारशेषस्यहुताशनस्यपूर्वोत्थितोधूमइवाबभासे,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
प्रहारमूर्च्छापगमेरथस्थायन्तॄनुपालभ्यनिवर्तिताश्वान्।यैःसादितालक्षितपूर्वकेतूंस्तानेवसामर्षतयानिजघ्नुः,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0
अप्यर्धमार्गेपरबाणलूनाधनुर्भृताम्हस्तवताम्पृषत्काः।संप्रापुरेवात्मजवानुवृत्त्यापूर्वार्धभागैःफलिभिःशरव्यम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
आधोरणानाम्गजसंनिपातेशिरांसिचक्रैर्निशितैःक्षुराग्रैः।हतान्यपिश्येननखाग्रकोटिव्यासक्तकेशानिचिरेणपेतुः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
पूर्वम्प्रहर्तानजघानभूयःप्रतिप्रहाराक्षममश्वसादी।तुरंगमस्कन्धनिषण्णदेहम्प्रत्याश्वसन्तम्रिपुमाचकाङ्क्ष,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तनुत्यजाम्वर्मभृताम्विकोशैबृहत्सुदन्तेष्वसिभिःपतद्भिः।उद्यन्तमग्निम्शमयांबभूवुर्गजाविविग्नाःकरशीकरेण,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
शिलीमुखोत्कृत्तशिरःफलाढ्याच्युतैःशिरस्त्रैश्चषकोत्तरेव।रणक्षितिःशोणितमद्यकुल्यारराजमृत्योरिवपानभूमिः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
उपान्तयोर्निष्कुषितम्विहंगैराक्षिप्यतेभ्यःपिशितप्रियापि।केयूरकोटिक्षततालुदेशाशिवाभुजच्छेदमपाचकार,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
कश्चिद्विषत्खड्गहृतोत्तमाङ्गःसद्योविमानप्रभुतामुपेत्य।वामाङ्गसंसक्तसुराङ्गनःस्वम्नृत्यत्कबन्धम्समरेददर्श,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
अन्योन्यसूतोन्मथनादभूताम्तावेवसूतौरथिनौचकौचित्।व्यश्वौगदाव्यायतसंप्रहारौभग्नायुधौबाहुविमर्दनिष्ठौ,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0
परस्परेणक्षतयोःप्रहर्त्रोरुत्क्रान्तवाय्वोःसमकालमेव।अमर्त्यभावेऽपिकयोश्चिदासीदेकाप्सरःप्रार्थितयोर्विवादः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
व्यूहावुभौतावितरेतरस्माद्भङ्गम्जयम्चापतुरव्यवस्थम्।पश्चात्पुरोमारुतयोःप्रवृद्धौपर्यायवृत्येवमहार्णवोर्मी,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
परेणभग्नेऽपिबलेमहौजाययावजःप्रत्यरिसैन्यमेव।धूमोनिवर्त्येतसमीरणेनयतस्तुकक्षस्ततएववह्निः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
रथीनिषङ्गीकवचीधनुष्मान्दृप्तःसराजन्यकमेकवीरः।निवारयामासमहावराहःकल्पक्षयोद्वृत्तमिवार्णवाम्भः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
सदक्षिणम्तूणमुखेनवामम्व्यापारयन्हस्तमलक्ष्यताजौ।आकर्णकृष्टासकृदस्ययोद्धुर्मौर्वीवबाणान्सुषुवेरिपुघ्नान्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
सरोषदष्टाधिकलोहितोष्ठैर्व्यक्तोर्ध्वरेखाभृकुटीर्वहद्भिः।तस्तारगाम्भल्लनिकृत्तकण्ठैर्हूंकारगर्भैर्द्विषताम्शिरोभिः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
सर्वैर्बलाङ्गैर्द्विरदप्रधानैःसर्वायुधैःकङ्कटभेदिभिश्च।सर्वप्रयत्नेनचभूमिपालास्तस्मिन्प्रजह्रुर्युधिसर्वएव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
सोऽस्त्रव्रजैश्छन्नरथःपरेषाम्ध्वजाग्रमात्रेणबभूवलक्ष्यः।नीहारमग्नोदिनपूर्वभागःकिंचित्प्रकाशेनविवस्वतेव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
प्रियंवदात्प्राप्तमसौकुमारःप्रायुङ्क्तराजस्वधिराजसूनुः।गान्धर्वमस्त्रम्कुसुमास्त्रकान्तःप्रस्वापनम्स्वप्ननिवृत्तलौल्यः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
ततोधनुष्कर्षणमूढहस्तमेकांसपर्यस्तशिरस्त्रजालम्।तस्थौध्वजस्तम्भनिषण्णदेहम्निद्राविधेयम्नरदेवसैन्यम्,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
ततःप्रियोपात्तरसेऽधरोष्ठेनिवेश्यदध्मौजलजम्कुमारः।तेनस्वहस्तार्जितमेकवीरःपिबन्यशोमूर्तमिवाबभासे,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,1,0,0,0,1,0,0,0,0
शङ्खस्वनाभिज्ञतयानिवृत्तास्तम्सन्नशत्रुम्ददृशुःस्वयोधाः।निमीलितानामिवपङ्कजानाम्मध्येस्फुरन्तंप्रतिमाशशाङ्कम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
सशोणितैस्तेनशिलीमुखाग्रैर्निक्षेपिताःकेतुषुपार्थिवानाम्।यशोहृतम्संप्रतिराघवेणनजीवितम्वःकृपयेतिवर्णाः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
सचापकोटीनिहितैकबाहुःशिरस्त्रनिष्कर्षणभिन्नमौलिः।ललाटबद्धश्रमवारिबिन्दुर्भीताम्प्रियामेत्यवचोबभाषे,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
इतःपरानर्भकहार्यशस्त्रान्वैदर्भिपश्यानुमतामयासि।एवंविधेनाहवचेष्टितेनत्वम्प्रार्थ्यसेहस्तगताममैभिः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तस्याःप्रतिद्वन्द्विभवाद्विषादात्सद्योविमुक्तम्मुखमाबभासे।निःश्वासबाष्पापगमात्प्रपन्नःप्रसादमात्मीयमिवात्मदर्शः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
हृष्टापिसाह्रीविजितानसाक्षाद्वाग्भिःसखीनाम्प्रियमभ्यनन्दत्।स्थलीनवाम्भःपृषताभिवृष्टामयूरकेकाभिरिवाभ्रवृन्दम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
इतिशिरसिसवामम्पादमाधायराज्ञामुदवहदनवद्याम्तामवद्यादपेतः।रथतुरगरजोभिस्तस्यरूक्षालकाग्रासमरविजयलक्ष्मीःसैवमूर्ताबभूव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
प्रथमपरिगतार्थस्तम्रघुःसंनिवृत्तंविजयिनमभिनन्द्यश्लाघ्यजायासमेतम्।तदुपहितकुटुम्बःशान्तिमार्गोत्सुकोऽभून्नहिसतिकुलधुर्येसूर्यवंश्यागृहाय,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
इतिमहाकविकालिदासकृतरघुवंशमहाकाव्येसप्तमःसर्गः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
अथतस्यविवाहकौतुकम्ललितम्बिभ्रतएवपार्थिवः|वसुधामपिहस्तगामिनीमकरोदिन्दुमतीमिवापराम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
दुरितैरपिकर्तुमात्मसात्प्रयतन्तेनृपसूनवोहियत्|तदुपस्थितमग्रहीदजःपितुराज्ञेतिनभोगतृष्णया,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
अनुभूयवसिष्ठसंभृतैःसलिलैस्तेनसहाभिषेचनम्|विशदोच्छ्वसितेनमेदिनी कथयामासकृतार्थतामिव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
सबभूवदुरासदःपरैर्गुरुणाऽथर्वविदाकृतक्रियः|पवनाग्निसमागमोह्ययम्सहितम्ब्रह्मयदस्त्रतेजसा,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
रघुमेवनिवृत्तयौवनम्तममन्यन्तनवेश्वरम्प्रजाः|सहितस्यनकेवलाम्श्रियम्प्रतिपेदेसकलान्गुणानपि,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
अधिकम्शुशुभेशुभंयुनाद्वितयेनद्वयमेवसंगतम्|पदमृद्धमजेनपैतृकम्विनयेनास्यनवम्चयौवनम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
सदयम्बुभुजेमहाभुजःसहसोद्वेगमियम्व्रजेदिति|अचिरोपनताम्समेदिनीम्नवपाणिग्रहणाम्वधूमिव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
अहमेवमतोमहीपतेरितिसर्वःप्रकृतिष्वचिन्तयत्|उदधेरिवनिम्नगाशतेष्वभवन्नास्यविमाननाक्वचित्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
नखरोनचभूयसामृदुःपवमानःपृथिवीरुहानिव|सपुरस्कृतमध्यमक्रमोनमयामासनृपाननुद्धरन्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
अथवीक्ष्यरघुःप्रतिष्ठितम्प्रकृतिष्वात्मजमात्मवत्तया|विषयेषुविनाशधर्मसुत्रिदिवस्थेष्वपिनिःस्पृहोऽभवत्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
गुणवत्सुतरोपितश्रियःपरिणामेहिदिलीपवंशजाः|पदवीम्तरुवल्कवाससाम्प्रयताःसंयमिनाम्प्रपेदिरे,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
तमरण्यसमाश्रयोन्मुखम्शिरसावेष्टनशोभिनासुतः|पितरम्प्रणिपत्यपादयोरपरित्यागमयाचतात्मनः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
रघुरश्रुमुखस्यतस्यतत्कृतवानीप्सितमात्मजप्रियः|नतुसर्पइवत्वचम्पुनःप्रतिपेदेव्यपवर्जिताम्श्रियम्,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
सकिलाश्रममन्त्यमाश्रितोनिवसन्नावसथेपुराद्बहिः|समुपास्यतपुत्रभोग्ययास्नुषयेवाविकृतेन्द्रियःश्रिया,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
प्रशमस्थितपूर्वपार्थिवम्कुलमभ्यद्यतनूतनेश्वरम्|नभसानिभृतेन्दुनातुलामुदितार्केणसमारुरोहतत्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
यतिपार्थिवलिङ्गधारिणौददृशातेरघुराघवौजनैः|अपवर्गमहोदयार्थयोर्भुवमंशाविवधर्मयोर्गतौ,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
अजिताधिगमायमन्त्रिभिर्युयुजेनीतिविशारदैरजः|अनुपायिपदोपप्राप्तयेरघुराप्तैःसमियाययोगिभिः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
नृपतिःप्रकृतीरवेक्षितुम्व्यवहारासनमाददेयुवा|परिचेतुमुपांशुधारणाम्कुशपूतम्प्रवयास्तुविष्टरम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
अनयत्प्रभुशक्तिसंपदावशमेकोनृपतीननन्तरान्|अपरःप्रणिधानयोग्ययामरुतःपञ्चशरीरगोचरान्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
अकरोदचिरेश्वरःक्षितौद्विषदारम्भफलानिभस्मसात्|इतरोदहनेस्वकर्मणाम्ववृतेज्ञानमयेनवह्निना,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
पणबन्धमुखान्गुणानजःषडुपायुङ्क्तसमीक्ष्यतत्फलम्|रघुरप्यजयत्गुणत्रयम्प्रकृतिस्थम्समलोष्टकाञ्चनः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
ननवःप्रभुराफलोदयात्स्थिरकर्माविररामकर्मणः|नचयोगविधेर्नवेतरःस्थिरधीरापरमात्मदर्शनात्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
इतिशत्रुषुचेन्द्रियेषुचप्रतिषिद्धप्रसरेषुजाग्रतौ|प्रसितावुदयापवर्गयोरुभयीम्सिद्धिमुभाववापतुः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
अथकाश्चिदजव्यपेक्षयागमयित्वासमदर्शनःसमाः|तमसःपरमापदव्ययम्पुरुषम्योगसमाधिनारघुः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0
श्रुतदेहविसर्जनःपितुश्चिरमश्रूणिविमुच्यराघवः|विदधेविधिमस्यनैष्ठिकम्यतिभिःसार्धमनग्निरग्निचित्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
अकरोत्सतदौर्ध्वदैहिकम्पितृभक्त्यापितृकार्यकल्पवित्|नहितेनपथातनुत्यजस्तनयावर्जितपिण्डकाङ्क्षिणः,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
सपरार्ध्यगतेरशोच्यताम्पितुरुद्दिश्यसदर्थवेदिभिः|शमिताधिरधिज्यकार्मुकःकृतवानप्रतिशासनम्जगत्,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
क्षितिरिन्दुमतीचभामिनीपतिमासाद्यतमग्र्यपौरुषम्|प्रथमाबहुरत्नसूरभूदपरावीरमजीजनत्सुतम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
दशरश्मिशतोपमद्युतिम्यशसादिक्षुदशस्वपिश्रुतम्|दशपूर्वरथम्यमाख्ययादशकण्ठारिगुरुम्विदुर्बुधाः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
ऋषिदेवगणस्वधाभुजाम्श्रुतयागप्रसवैःसपार्थिवः|अनृणत्वमुपेयिवान्बभौपरिधेर्मुक्तइवोष्णदीधितिः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
बलमार्तभयोपशान्तयेविदुषाम्सत्कृतयेबहुश्रुतम्|वसुतस्यविभोर्नकेवलम्गुणवत्तापिपरप्रयोजना,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
सकदाचिदवेक्षितप्रजःसहदेव्याविजहारसुप्रजाः|नगरोपवनेशचीसखोमरुताम्पालयितेवनन्दने,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
अथरोधसिदक्षिणोदधेःश्रितगोकर्णनिकेतमीश्वरम्|उपवीणयितुम्ययौरवेरुदयावृत्तिपथेननारदः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
कुसुमैर्ग्रथितामपार्थिवैःस्रजमातोद्यशिरोनिवेशिताम्|अहरत्किलतस्यवेगवानधिवासस्पृहयेवमारुतः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
भ्रमरैःकुसुमानुसारिभिःपरिकीर्णापरिवादिनीमुनेः|ददृशेपवनापलेपजम्सृजतीबाष्पमिवाञ्जनाविलम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
अभिभूयविभूतिमार्तवीम्मधुगन्धातिशयेनवीरुधाम्|नृपतेरमरस्रगापसादयितोरुस्तनकोटिसुस्थितीम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
क्षणमात्रसखीम्सुजातयोःस्तनयोस्तामवलोक्यविह्वला|निमिमीलनरोत्तमप्रियाहृतचन्द्रातमसेवकौमुदी,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
वपुषाकरणोज्झितेनसानिपतन्तीपतिमप्यपातयत्|ननुतैलनिषेकबिन्दुनासहदीपार्चिरुपैतिमेदिनीम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
उभयोरपिपार्श्ववर्तिनाम्तुमुलेनार्तरवेणवेजिताः|विहगाःकमलाकरालयाःसमदुःखाइवतत्रचुक्रुशुः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
नृपतेर्व्यजनादिभिस्तमोनुनुदेसातुतथैवसंस्थिता|प्रतिकारविधानमायुषःसतिशेषेहिफलायकल्पते,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
प्रतियोजयितव्यवल्लकीसमवस्थामथसत्त्वविप्लवात्|सनिनायनितान्तवत्सलःपरिगृह्योचितमङ्कमङ्गनाम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
पतिरङ्कनिषण्णयातयाकरणापायविभिन्नवर्णया|समलक्ष्यतबिभ्रदाविलाम्मृगलेखामुषसीवचन्द्रमाः,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
विललापसबाष्पगद्गदम्सहजामप्यपहायधीरताम्|अभितप्तमयोऽपिमार्दवम्भजतेकैवकथाशरीरिषु,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
कुसुमान्यपिगात्रसंगमात्प्रभवन्त्यायुरपोहितुम्यदि|नभविष्यतिहन्तसाधनम्किमिवान्यत्प्रहरिष्यतोविधेः,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
अथवामृदुवस्तुहिंसितुम्मृदुनैवारभतेप्रजान्तकः|हिमसेकविपत्तिरत्रमेनलिनीपूर्वनिदर्शनम्मता,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
स्रगियम्यदिजीवितापहाहृदयेकिम्निहितानहन्तिमाम्|विषमप्यमृतम्क्वचिद्भवेदमृतम्वाविषमीश्वरेच्छया,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
अथवाममभाग्यविप्लवादशनिःकल्पितएववेधसा|यदनेनतरुर्नपातितःक्षपितातद्विटपाश्रितालता,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
कृतवत्यसिनावधीरणामपराद्धेऽपियदाचिरम्मयि|कथमेकपदेनिरागसम्जनमाभाष्यमिमम्नमन्यसे,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
ध्रुवमस्मिशठःशुचिस्मितेविदितःकैतववत्सलस्तव|परलोकमसंनिवृत्तयेयदनापृच्छ्यगतासिमामितः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
दयिताम्यदितावदन्वगाद्विनिवृत्तम्किमिदम्तयाविना|सहताम्हतजीवितम्ममप्रबलामात्मकृतेनवेदनाम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
सुरतश्रमसंभृतोमुखेध्रियतेस्वेदलवोद्गमोऽपिते|अथचास्तमितात्वमात्मनाधिगिमाम्देहभृतामसारताम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
मनसापिनविप्रियम्मयाकृतपूर्वम्तवकिम्जहासिमाम्|ननुशब्दपतिःक्षितेरहम्त्वयिमेभावनिबन्धनारतिः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
कुसुमोत्खचितान्वलीभृतश्चलयन्भृङ्गरुचस्तवालकान्|करभोरुकरोतिमारुतस्त्वदुपावर्तनशङ्किमेमनः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तदपोहितुमर्हसिप्रियेप्रतिबोधेनविषादमाशुमे|ज्वलितेनगुहागतम्तमस्तुहिनाद्रेरिवनक्तमोषधिः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
इदमुच्छ्वसितालकम्मुखम्तव विश्रान्तकथम्दुनोतिमाम्|निशिसुप्तमिवैकपङ्कजम्विरताभ्यन्तरषट्पदस्वनम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
शशिनम्पुनरेतिशर्वरीदयिताद्वन्द्वचरम्पतत्रिणम्|इतितौविरहान्तरक्षमौकथमत्यन्तगतानमाम्दहेः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
नवपल्लवसंस्तरेऽपितेमृदुदूयेतयदङ्गमर्पितम्|तदिदम्विषहिष्यतेकथम्वदवामोरुचिताधिरोहणम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
इयमप्रतिबोधशायिनीम्रशनात्वाम्प्रथमारहःसखी|गतिविभ्रमसादनीरवानशुचानानुमृतेवलक्ष्यते,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
कलमन्यभृतासुभासितम्कलहंसीषुमदालसम्गतम्|पृषतीषुविलोलमीक्षितम्पवनाधूतलतासुविभ्रमाः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
त्रिदिवोत्सुकयाप्यवेक्ष्यमाम्निहिताःसत्यममीगुणास्त्वया|विरहेतवमेगुरुव्यथम्हृदयम्नत्ववलम्बितुम्क्षमाः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
मिथुनम्परिकल्पितम्त्वयासहकारःफलिनीचनन्विमौ|अविधायविवाहसत्क्रियामनयोर्गम्यतइत्यसांप्रतम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
कुसुमम्कृतदोहदस्त्वयायदशोकोऽयमुदीरयिष्यति|अलकाभरणम्कथम्नुतत्तवनेष्यामिनिवापमाल्यताम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
स्मरतेवसशब्दनूपुरम्चरणानुग्रहमन्यदुर्लभम्|अमुनाकुसुमाश्रुवर्षिणात्वमशोकेनसुगात्रिशोच्यसे,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
तवनिःश्वसितानुकारिभिर्बकुलैरर्धचिताम्समम्मया|असमाप्यविलासमेखलाम्किमिदम्किन्नरकण्ठिसुप्यते,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
समदुःखसुखःसखीजनःप्रतिपच्चन्द्रनिभोऽयमात्मजः|अहमेकरसस्तथापितेव्यवसायःप्रतिपत्तिनिष्ठुरः,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
धृतिरस्तमितारतिश्च्युताविरतम्गेयमृतुर्निरुत्सवः|गतमाभरणप्रयोजनम्परिशून्यम्शयनीयमद्यमे,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
गृहिणीसचिवःसखीमिथःप्रियशिष्याललितेकलाविधौ|करुणाविमुखेनमृत्युनाहरतात्वाम्वदकिम्नमेहृतम्,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
मदिराक्षिमदाननार्पितम्मधुपीत्वारसवत्कथम्नुमे|अनुपास्यसिबाष्पदूषितम्परलोकोपनतम्जलाञ्जलिम्,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
विभवेऽपिसतित्वयाविनासुखमेतावदजस्यगण्यताम्|अहृतस्यविलोभनान्तरैर्ममसर्वेविषयास्त्वदाश्रयाः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
विलपन्नितिकोसलाधिपःकरुणार्थग्रथितम्प्रियाम्प्रति|अकरोत्पृथिवीरुहानपिस्रुतशाखारसबाष्पदूषितान्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
अथतस्यकथंचिदङ्कतःस्वजनस्तामपनीयसुन्दरीम्|विससर्जतदन्त्यमण्डनामनलायागुरुचन्दनैधसे,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
प्रमदामनुसंस्थितःशुचानृपतिःसन्नपिवाच्यदर्शनात्|नचकारशरीरमग्निसात्सहदेव्यानतुजीविताशया,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
अथतेनदशाहतःपरेगुणशेषामपदिश्यभामिनीम्|विदुषाविधयोमहर्द्धयःपुरएवोपवनेसमापिताः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
सविवेशपुरीम्तयाविनाक्षणदापायशशाङ्कदर्शनः|परिवाहमिवावलोकयन्स्वशुचःपौरवधूमुखाश्रुषु,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
अथतम्सवनायदीक्षितःप्रणिधानाद्गुरुराश्रमस्थितः|अभिषङ्गजडम्विजज्ञिवानितिशिष्येणकिलान्वबोधयत्,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0
असमाप्तविधिर्यतोमुनिस्तवविद्वानपितापकारणम्|नभवन्तमुपस्थितःस्वयम्प्रकृतौस्थापयितुम्पथश्च्युतम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
मयितस्यसुवृत्तवर्ततेलघुसंदेशपदासरस्वती|श्रुणुविश्रुतसत्त्वसारताम्हृदिचैनामपधातुमर्हसि,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
पुरुषस्यपदेष्वजन्मनःसमतीतम्चभवच्चभाविच|सहिनिष्प्रतिघेनचक्षुषात्रितयम्ज्ञानमयेनपश्यति,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
चरतःकिलदुश्चरम्तपस्तृणबिन्दोःपरिशङ्कितःपुरा|प्रजिघायसमाधिभेदिनीम्हरिरस्मैहरिणीम्सुराङ्गनाम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
सतपःप्रतिबन्धमन्युनाप्रमुखाविष्कृतचारुविभ्रमम्|अशपद्भवमानुषीतिताम्शमवेलाप्रलयोर्मिणाभुवि,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0
भगवन्परवानयम्जनःप्रतिकूलाचरितम्क्षमस्वमे|इतिचोपनताम्क्षितिस्पृशम्कृतवानासुरपुष्पदर्शनात्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0
क्रथकैशिकवंशसंभवातवभूत्वामहिषीचिरायसा|उपलब्धवतीदिवश्च्युतम्विवशाशापनिवृत्तिकारणम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
तदलम्तदपायचिन्तयाविपदुत्पत्तिमतामुपस्थिता|वसुधेयमवेक्ष्यताम्त्वयावसुमत्याहिनृपाःकलत्रिणः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
उदयेमदवाच्यमुज्झताश्रुतमाविष्कृतमात्मवत्त्वया|मनसस्तदुपस्थितेज्वरेपुनरक्लीबतयाप्रकाश्यताम्,1,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
रुदताकुतएवसापुनर्भवतानानुमृतापिलभ्यते|परलोकजुषाम्स्वकर्मभिर्गतयोभिन्नपथाहिदेहिनाम्,1,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
अपशोकमनाःकुटुम्बिनीमनुगृह्णीष्वनिवापदत्तिभिः|स्वजनाश्रुकिलातिसंततम्दहतिप्रेतमितिप्रचक्षते,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
मरणम्प्रकृतिःशरीरिणाम्विकृतिर्जीवितमुच्यतेबुधैः|क्षणमप्यवतिष्ठतेश्वसन्यदिजन्तुर्ननुलाभवानसौ,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
अवगच्छतिमूढचेतनःप्रियनाशम्हृदिशल्यमर्पितम्|स्थिरधीस्तुतदेवमन्यतेकुशलद्वारतयासमुद्धृतम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
स्वशरीरशरीरिणावपिश्रुतसंयोगविपर्ययौयदा|विरहःकिमिवानुतापयेद्वदबाह्यैर्विषयैर्विपश्चितम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
नपृथग्जनवच्छुचोवशम्वशिनामुत्तमगन्तुमर्हसि|द्रुमसानुमताम्किमन्तरम्यदिवायौद्वितयेऽपितेचलाः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
सतथेतिविनेतुरुदारमतेःप्रतिगॄह्यवचोविससर्जमुनिम्|तदलब्धपदम्हृदिशोकघनेप्रतियातमिवान्तिकमस्यगुरोः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तेनाष्टौपरिगमिताःसमाःकथंचिद्बालत्वादवितथसूनृतेनसूनोः|सादृश्यप्रतिकृतिदर्शनैःप्रियायाःस्वप्नेषुक्षणिकसमागमोत्सवैश्च,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तस्यप्रसह्यहृदयम्किलशोकशङ्कुःप्लक्षप्ररोहइवसौधतलम्बिभेद|प्राणान्तहेतुमपितम्भिषजामसाध्यंलाभम्प्रियानुगमनेत्वरयासमेने,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
सम्यग्विनीतमथवर्महरम्कुमारमादिश्यरक्षणविधौविधिवत्प्रजानाम्|रोगोपसृष्टतनुदुर्वसतिम्मुमुक्षुःप्रायोपवेशनमतिर्नृपतिर्बभूव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तीर्थेतोयव्यतिकरभवेजह्नुकन्यासरय्वोर्देहत्यागादमरगणनालेख्यमासाद्यसद्यः|पूर्वाकाराधिकतररुचासंगतःकान्तयासौलीलागारेष्वरमतपुनर्नन्दनाभ्यन्तरेषु,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
इतिकालिदासकृतरघुवंशमहाकाव्येअष्टमःसर्गः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
पितुरनन्तरमुत्तरकोसलान्समधिगम्यसमाधिजितेन्द्रियः।दशरथःप्रशशासमहारथोयमवतामवताम्चधुरिस्थितः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
अधिगतम्विधिवद्यदपालयत्प्रकृतिमण्डलमात्मकुलोचितम्।अभवदस्यततोगुणवत्तरम्सनगरम्नगरन्ध्रकरौजसः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0
उभयमेववदन्तिमनीषिणःसमयवर्षितयाकृतकर्मणाम्।बलनिषुदनमर्थपतिम्चतम्श्रमनुदम्मनुदण्डधरान्वयम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
जनपदेनगदःपदमादधावभिभवःकुतएवसपत्नजः।क्षितिरभुत्फलवत्यजनन्दनेशमरतेऽमरतेजसिपार्थिवे,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
दशदिगन्तजितारघुणायथाश्रियमपुष्यदजेनततःपरम्।तमधिगम्यतथैवपुनर्बभौननमहीनमहीनपराक्रमम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
समतयावसुवृष्टिविसर्जनैनियमनादसताम्चनराधिपः।अनुययौयमपुण्यजनेश्वरौसवरुणावरुणाग्रसरम्रुचा,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
नमृगयाभिरतिर्नदुरोदरम्नचशशिप्रतिमाभरणम्मधु।तमुदयायनवानवयौवनाप्रियतमायतमानमपाहरत्,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
नकृपणाप्रभवत्यपिवासवेनवितथापरिहासकथास्वपि।नचसपत्नजनेष्वपितेनवागपरुषापरुषाक्षरमीरिता,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
उदयमस्तमयम्चरघूद्वहादुभयमानशिरेवसुधाधिपाः।सहिनिदेशमलङ्घयतामभुत्सुहृदयोहृदयःप्रतिगर्जताम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
अजयदेकरथेनसमेदिनीमुदधिनेमिमधिज्यशरासनः।जयमघोषयदस्यतुकेवलम्गजवतीजवतीव्रहयाचमुः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
अवनिमेकरथेनवरुथिनाजितवतःकिलतस्यधनुर्भृतः।विजयदुन्दुभिताम्ययुरर्णवाघनरवानरवाहनसम्पदः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
शमितपक्षबलःशतकोटिनाशिखरिणाम्कुलिशेनपुरम्दरः।सशरवृष्टिमुचाधनुषाद्विषाम्स्वनवतानवतामरसाननः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
चरणयोर्नखरागसमृद्धिभिर्मुकुटरत्नमरीचिभिरस्पृशन्।नृपतयःशतशोमरुतोयथाशतमखम्तमखण्डितपौरुषम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
निववृतेसमहार्णवरोधसःसचिवकारितबालसुताञ्जलीन्।समनुकम्प्यसपत्नपरिग्रहाननलकानलकानवमाम्पुरीम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
उपगतोऽपिचमण्डलनाभितामनुदितान्यसितातपवारणः।श्रियमवेक्ष्यसरन्ध्रचलामभुदनलसोऽनलसोमसमद्युतिः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
तमपहायककुत्स्थकुलोद्भवम्पुरुषमात्मभवम्चपतिव्रता।नृपतिमन्यमसेवतदेवतासकमलाकमलाघवमर्थिषु,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
तमलभन्तपतिम्पतिदेवताःशिखरिणामिवसागरमापगाः।मगधकोसलकेकयशासिनाम्दुहितरोऽहितरोपितमार्गणम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
प्रियतमाभिरसौतिसृभिर्बभौतिसृभिरेवभुवम्सहशक्तिभिः।उपगतोविनिनीषुरिवप्रजाहरिहयोऽरिहयोगविचक्षणः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
सकिलसम्युगमुर्ध्निसहायताम्मघवतःप्रतिपद्यमहारथः।स्वभुजवीर्यमगापयदुच्छ्रितम्सुरवधुरवधुतभयाःशरैः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
क्रतुषुतेनविसर्जितमौलिनाभुजसमाहृतदिग्वसुनाकृताः।कनकयुपसमुच्छ्रयशोभिनोवितमसातमसासरयुतटाः,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0
अजिनदण्डभृतम्कुशमेखलाम्यतगिरम्मृगशृङ्गपरिग्रहाम्।अधिवसम्स्तनुमध्वरदीक्षितामसमभासमभासयदीश्वरः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
अवभृथप्रयतोनियतेन्द्रियःसुरसमाजसमाक्रमणोचितः।नमयतिस्मसकेवलमुन्नतम्वनमुचेनमुचेररयेशिरः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0
असकृदेकरथेनतरस्विनाहरिहयाग्रसरेणधनुर्भृता।दिनकराभिमुखारणरेणवोरुरुधिरेरुधिरेणसुरद्विषाम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
अथसमाववृतेकुसुमैर्नवैस्तमिवसेवितुमेकनराधिपम्।यमकुबेरजलेश्वरवज्रिणाम्समधुरम्मधुरञ्चितविक्रमम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
जिगमिषुर्धनदाध्युषिताम्दिशम्रथयुजापरिवर्तितवाहनः।दिनमुखानिरविर्हिमनिग्रहैर्विमलयन्मलयम्नगमत्यजत्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
कुसुमजन्मततोनवपल्लवास्तदनुषट्पदकोकिलकुजितम्।इतियथाक्रममाविरभुन्मधुर्द्रुमवतीमवतीर्यवनस्थलीम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
नयगुणोपचितामिवभुपतेःसदुपकारफलाम्श्रियमर्थिनः।अभिययुःसरसोमधुसम्भृताम्कमलिनीमलिनीरपतत्रिणः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0
कुसुममेवनकेवलमार्तवम्नवमशोकतरोःस्मरदीपनम्।किसलयप्रसवोऽपिविलासिनाम्मदयितादयिताश्रवणार्पितः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0
विरचितामधुनोपवनश्रियामभिनवाइवपत्रविशेषकाः।मधुलिहाम्मधुदानविशारदाःकुरबकारवकारणताम्ययुः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0
सुवदनावदनासवसम्भृतस्तदनुवादिगुणःकुसुमोद्गमः।मधुकरैरकरोन्मधुलोलुपैर्वकुलमाकुलमायतपङ्क्तिभिः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0
उपहितम्शिशिरापगमश्रियामुकुलजालमशोभतकिम्शुके।प्रणयिनीवनखक्षतमण्डनम्प्रमदयामदयापितलज्जया,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
व्रणगुरुप्रमदाधरदुःसहम्जघननिर्विषयीकृतमेखलम्।नखलुतावदशेषमपोहितुम्रविरलम्विरलम्कृतवान्हिमम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
अभिनयान्परिचेतुमिवोद्यतामलयमारुतकम्पितपल्लवा।अमदयत्सहकारलतामनःसकलिकाकलिकामजितामपि,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
प्रथममन्यभृताभिरुदीरिताःप्रविरलाइवमुग्धवधूकथाः।सुरभिगन्धिषुशुश्रुविरेगिरःकुसुमितासुमितावनराजिषु,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
श्रुतिसुखभ्रमरस्वनगीतयःकुसुमकोमलदन्तरुचोबभुः।उपवनान्तलताःपवनाहतैःकिसलयैःसलयैरिवपाणिभिः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0
ललितविभ्रमबन्धविचेक्षणम्सुरभिगन्धपराजितकेसरम्।पतिषुनिर्विविशुर्मधुमङ्गनाःस्मरसखम्रसखण्डनवर्जितम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
शुशुभिरेस्मितचारुतराननाःस्त्रियइवश्लथशिञ्जितमेखलाः।विकचतामरसागृहदीर्घिकामदकलोदकलोलविहम्गमाः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
उपययौतनुताम्मधुखण्डिताहिमकरोदयपाण्डुमुखच्छविः।सदृशमिष्टसमागमनिर्वृतिम्वनितयानितयारजनीवधुः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
अपतुषारतयाविशदप्रभैःसुरतसङ्गपरिश्रमनोदिभिः।कुसुमचापमतेजयदम्शुभिर्हिमकरोमकरोर्जितकेतनम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
हुतहुताशनदीप्तिवनश्रियःप्रतिनिधिःकनकाभरणस्ययत्।युवतयःकुसुमंदधुराहितम्तदलकेदलकेसरपेशलम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
अलिभिरञ्जनबिन्दुमनोहरैःकुसुमपङ्क्तिनिपातिभिरङ्कितः।नखलुशोभयतिस्मवनस्थलीम्नतिलकस्तिलकःप्रमदामिव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
अमदयन्मधुगन्धसनाथयाकिसलयाधरसम्गतयामनः।कुसुमसम्भृतयानवमल्लिकास्मितरुचातरुचारुविलासिनी,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
अरुणरागनिषेधिभिरम्शुकैःश्रवणलब्धपदैश्चयवाङ्कुरैः।परभृताविरुतैश्चविलासिनःस्मरबलैरबलैकरसाःकृताः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
उपचितावयवाशुचिभिःकणैरलिकदम्बकयोगमुपेयुषी।सदृशकान्तिरक्ष्यतमञ्जरीतिलकजालकजालकमौक्तिकैः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
ध्वजपटम्मदनस्यधनुर्भृतश्छविकरम्मुखचुर्णमृतुश्रियः।कुसुमकेसररेणुमलिव्रजाःसपवनोपवनोत्थितमन्वयुः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0
अनुभवन्नवदोलमृतुत्सवम्पटुरपिप्रियकण्ठजिघृक्षया।अनयदासनरज्जुपरिग्रहेभुजलताम्जलतामबलाजनः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
त्यजतमानमलम्बतविग्रहैर्नपुनरेतिगतम्चतुरम्वयः।परभृताभिरितीवनिवेदितेस्मरमतेरमतेस्मवधुजनः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
अथयथासुखमार्तवमुत्सवम्समनुभुयविलासवतीसखः।नरपतिश्चकमेमृगयारतिम्समधुमन्मधुमन्मथसम्निभः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
परिचयम्चललक्ष्यनिपातनेभयरुचोश्चतदिङ्गितबोधनम्।श्रमजयात्प्रगुणाम्चकरोत्यसौतनुमतोऽनुमतःसचिवैर्ययौ,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
मृगवनोपगमक्षमवेषभृद्विपुलकण्ठनिषक्तशरासनः।गगनमश्वखुरोद्धतरेणुभिर्नृसवितासवितानमिवाकरोत्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
ग्रथितमौलिरसौवनमालयातरुपलाशसवर्णतनुच्छदः।तुरगवल्गनचञ्चलकुण्डलोविरुरुचेरुरुचेष्टितभुमिषु,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
तनुलताविनिवेशितविग्रहाभ्रमरसम्क्रमितेक्षणवृत्तयः।ददृशुरध्वनितम्वनदेवताःसुनयनम्नयनन्दितकोसलम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
श्वगणिवागुरिकैःप्रथमास्थितम्व्यपगतानलदस्युविवेशसः।स्थिरतुरम्गमभुमिनिपानवन्मृगवयोगवयोपचितम्वनम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
अथनभस्यइवत्रिदशायुधम्कनकपिङ्गतडिद्गुणसम्युतम्।धनुरधिज्यमनाधिरुपाददेनरवरोरवरोषितकेसरी,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
तस्यस्तनप्रणयिभिर्मुहुरेणशाबैर्व्याहन्यमानहरिणीगमनम्पुरस्तात्।आविर्बभुवकुशगर्भमुखम्मृगाणाम्युथम्तदग्रसरगर्वितकृष्णसारम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
तत्प्रार्थितम्जवनवाजिगतेनराज्ञातुणीमुखोद्धृतशरेणविशीर्णपङ्क्ति।श्यामीचकारवनमाकुलदृष्टिपातैर्वातेरितोत्पलदलप्रकरैरिवार्द्रैः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
लक्ष्यीकृतस्यहरिणस्यहरिप्रभावःप्रेक्ष्यस्थिताम्सहचरीम्व्यवधायदेहम्।आकर्णकृष्टमपिकामितयासधन्वीबाणम्कृपामृदुमनाःप्रतिसम्जहार,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तस्यापरेष्वपिमृगेषुशरान्मुमुक्षोःकर्णान्तमेत्यबिभिदेनिबिडोऽपिमुष्टिः।त्रासातिमात्रचटुलैःस्मरतःसुनेत्रैःप्रौढप्रियानयनविभ्रमचेष्टितानि,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
उत्तस्थुषःसपदिपल्वलपङ्कमध्यान्मुस्ताप्ररोहकवलावयवानुकीर्णम्।जग्राहसद्रुतवराहकुलस्यमार्गम्सुव्यक्तमार्द्रपदपङ्क्तिभिरायताभिः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तम्वाहनादवनतोत्तरकायमीषद्विध्यन्तमुद्धृतसटाःप्रतिहन्तुमीषुः।नात्मानमस्यविविदुःसहसावराहावृक्षेषुविद्धमिषुभिर्जघनाश्रयेषु,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
तेनाभिघातरभसस्यविकृष्यपत्रीवन्यस्यनेत्रविवरेमहिषस्यमुक्तः।निर्भिद्यविग्रहमशोणितलिप्तपुङ्खस्तम्पातयाम्प्रथममासपपातपश्चात्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
प्रायोविषाणपरिमोक्षलघूत्तमाङ्गान्खड्गाम्श्चकारनृपतिर्निशितैःक्षुरप्रैः।शृङ्गम्सदृप्तविनयाधिकृतःपरेषामत्युच्छ्रितम्नममृषेनतुदीर्घमायुः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
व्याघ्रानभीरभिमुखोत्पतितान्गुहाभ्यःफुल्लासनाग्रविटपानिववायुरुग्णान्।शिक्षाविशेषलघुहस्ततयानिमेषात्तुणीचकारशरपुरितवक्त्ररन्ध्रान्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
निर्घातोग्रैःकुञ्जलीनाञ्जिघाम्सुर्ज्यानिर्घोषैःक्षोभयामाससिम्हान्।नुनम्तेषामभ्यसुयापरोऽभुद्वीर्योदग्रेराजशब्दोमृगेषु,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तान्हत्वागजकुलबद्धतीव्रवैरान्काकुत्स्थःकुटिलनखाग्रलग्नमुक्तान्।आत्मानम्रणकृतकर्मणाम्गजानामानृण्यम्गतमिवमार्गणैरमम्स्त,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
चमरान्परितःप्रवर्तिताश्वःक्वचिदाकर्णविकृष्टभल्लवर्षी।नृपतीनिवतान्वियोज्यसद्यःसितबालव्यजनैर्जगामशान्तिम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
अपितुरगसमीपादुत्पतन्तम्मयुरम्नसरुचिरकलापम्बाणलक्ष्यीचकार।सपदिगतमनस्कश्चित्रमाल्यानुकीर्णेरतिविगलितबन्धेकेशपाशेप्रियायाः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तस्यकर्कशविहारसम्भवम्स्वेदमाननविलग्नजालकम्।आचचामसतुषारशीकरोभिन्नपल्लवपुटोवनानिलः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
इतिविस्मृतान्यकरणीयमात्मनःसचिवावलम्बितधुरम्धराधिपम्।परिवृद्धरागमनुबन्धसेवयामृगयाजहारचतुरेवकामिनी,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
सललितकुसुमप्रवालशय्याम्ज्वलितमहौषधिदीपिकासनाथाम्।नरपतिरतिवाहयाम्बभुवक्वचिदसमेतपरिच्छदस्त्रियामाम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
उषसिसगजयुथकर्णतालैःपटुपटहध्वनिभिर्विनीतनिद्रः।अरमतमधुराणितत्रशृण्वन्विहगविकुजितवन्दिमङ्गलानि,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0
अथजातुरुरोर्गृहीतवर्त्माविपिनेपार्श्वचरैरलक्ष्यमाणः।श्रमफेनमुचातपस्विगाढाम्तमसाम्प्रापनदीम्तुरम्गमेण,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
कुम्भपुरणभवःपटुरुच्चैरुच्चचारनिनदोऽम्भसितस्याः।तत्रसद्विरदबृम्हितशङ्कीशब्दपातिनमिषुम्विससर्ज,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
नृपतेःप्रतिषिद्धमेवतत्कृतवान्पङ्क्तिरथोविलङ्घ्ययत्।अपथेपदमर्पयन्तिहिश्रुतवन्तोऽपिरजोनिमीलिताः,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
हातातेतिक्रन्दितमाकर्ण्यविषण्णस्तस्यान्विष्यन्वेतसगुढम्प्रभवम्सः।शल्यप्रोतम्प्रेक्ष्यसकुम्भम्मुनिपुत्रम्तापादन्तःशल्यइवासीत्क्षितिपोऽपि,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तेनावतीर्यतुरगात्प्रथितान्वयेनपृष्टान्वयःसजलकुम्भनिषण्णदेहः।तस्मैद्विजेतरतपस्विसुतम्स्खलद्भिरात्मानमक्षरपदैःकथयाम्बभुव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तच्चोदितःसतमनुद्धृतशल्यमेवपित्रोःसकाशमवसन्नदृशोर्निनाय।ताभ्याम्तथागतमुपेत्यतमेकपुत्रमज्ञ्यानतःस्वचरितम्नृपतिःशशम्स,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तौदम्पतीबहुविलप्यशिशोःप्रहर्त्राशल्यम्निखातमुदहारयतामुरस्तः।सोऽभूत्परासुरथभुमिपतिम्शशापहस्तार्पितैर्नयनवारिभिरेववृद्धः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0
दिष्टान्तमाप्स्यतिभवानपिपुत्रशोकादन्त्येवयस्यहमिवेतितमुक्तवन्तम्।आक्रान्तपुर्वमिवमुक्तविषम्भुजम्गम्प्रोवाचकोसलपतिःप्रथमापराद्धः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0
शापोऽप्यदृष्टतनयाननपद्मशोभेसानुग्रहोभगवतामयिपातितोऽयम्।कृष्याम्दहन्नपिखलुक्षितिमिन्धनेद्धोबीजप्ररोहजननीम्ज्वलनःकरोति,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
इत्थम्गतेगतघृणःकिमयम्विधत्ताम्वध्यस्तवेत्यभिहितोवसुधाधिपेन।एधान्हुताशनवतःसमुनिर्ययाचेपुत्रम्परासुमनुगन्तुमनाःसदारः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
प्राप्तानुगःसपदिशासनमस्यराजासम्पाद्यपातकविलुप्तधृतिर्निवृत्तः।अन्तर्निविष्टपदमात्मविनाशहेतुम्शापम्दधज्ज्वलनमौर्वमिवाम्बुराशिः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
इतिकालिदासकृतरघुवम्शमहाकाव्येनवमःसर्गः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
पृथिवीम्शासतस्तस्यपाकशासनतेजसः।किन्चिदूनमनूनर्द्धेःशरदामयुतम्ययौ,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
नचोपलेभेपूर्वेषामृणनिर्मोक्षसाधनम्।सुताभिधानम्सज्योतिःसद्यःशोकतमोपहम्,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
अतिष्ठत्प्रत्ययापेक्षसम्ततिःसचिरम्नृपः।प्राङ्मन्थादनभिव्यक्तरत्नोत्पत्तिरिवार्णवः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
ऋष्यशृङ्गादयस्तस्यसन्तःसन्तानकाङ्क्षिणः।आरेभिरेजितात्मानःपुत्रीयामिष्टिमृत्विजः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
तस्मिन्नवसरेदेवाःपौलस्त्योपप्लुताहरिम्।अभिजग्मुर्निदाघार्ताश्छायावृक्षमिवाध्वगाः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तेचप्रापुरुदन्वन्तम्बुबुधेचादिपूरुषः।अव्याक्षेपोभविष्यन्त्याःकार्यसिद्धेर्हिलक्षणम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
भोगिभोगासनासीनम्ददृशुस्तम्दिवौकसः।तत्फणामण्डलोदर्चिर्मणिद्योतितविग्रहम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
श्रियःपद्मनिषण्णायाःक्षौमान्तरितमेखले।अङ्केनिक्षिप्तचरणमास्तीर्णकरपल्लवे,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
प्रबुद्धपुण्डरीकाक्षम्बालातपनिभाम्शुकम्।दिवसम्शारदमिवप्रारम्भसुखदर्शनम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0
प्रभानुलिप्तश्रीवत्सम्लक्ष्मीविभ्रमदर्पणम्।कौस्तुभाख्यमपाम्सारम्बिभ्राणम्बृहतोरसा,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
बहुभिर्विटपाकारैर्दिव्याभरणभूषितैः।आविर्भूतमपाम्मध्येपारिजातमिवापरम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
दैत्यस्त्रीगण्डलेखानाम्मदरागविलोपिभिः।हेतिभिश्चेतनावद्भिरुदीरितजयस्वनम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
मुक्तशेषविरोधेनकुलिशव्रणलक्ष्मणा।उपस्थितम्प्राञ्जलिनाविनीतेनगरुत्मता,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
योगनिद्रान्तविशदैःपावनैरवलोकनैः।भृग्वादीननुगृह्णन्तम्सौखशायनिकानृषीन्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
प्रणिपत्यसुरास्तस्मैशमयित्रेसुरद्विषाम्।अथैनम्तुष्टुवुःस्तुत्यमवाङ्मनसगोचरम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0
नमोविश्वसृजेपूर्वम्विश्वम्तदनुबिभ्रते।अथविश्वस्यसम्हर्त्रेतुभ्यम्त्रेधास्थितात्मने,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0
रसान्तराण्येकरसम्यथादिव्यम्पयोऽश्नुते।देशेदेशेगुणेष्वेवमवस्थास्त्वमविक्रियः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0
अमेयोमितलोकस्त्वमनर्थीप्रार्थनावहः।अजितोजिष्णुरत्यन्तमव्यक्तोव्यक्तकारणम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0
हृदयस्थमनासन्नमकामम्त्वाम्तपस्विनम्।दयालुमनघस्पृष्टम्पुराणमजरम्विदुः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0
सर्वज्ञस्त्वमविज्ञातःसर्वयोनिस्त्वमात्मभूः।सर्वप्रभुरनीशस्त्वमेकस्त्वम्सर्वरूपभाक्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0
सप्तसामोपगीतम्त्वाम्सप्तार्णवजलेशयम्।सप्तार्चिमुखमाचख्युःसप्तलोकैकसम्श्रयम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0
चतुर्वर्गफलम्ज्ञानम्कालावस्थाश्चतुर्युगाः।चतुर्वर्णमयोलोकस्त्वत्तःसर्वम्चतुर्मुखात्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0
अभ्यासनिगृहीतेनमनसाहृदयाश्रयम्।ज्योतिर्मयम्विचिन्वन्तियोगिनस्त्वाम्विमुक्तये,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0
अजस्यगृह्णतोजन्मनिरीहस्यहतद्विषः।स्वपतोजागरूकस्ययाथार्थ्यम्वेदकस्तव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0
शब्दादीन्विषयान्भोक्तुम्चरितुम्दुश्चरम्तपः।पर्याप्तोऽसिप्रजाःपातुमौदासीन्येनवर्तितुम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0
बहुधाप्यागमैर्भिन्नाःपन्थानःसिद्धिहेतवः।त्वय्येवनिपतन्त्योघाजाह्नवीयाइवार्णवे,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0
त्वय्यावेशितचित्तानाम्त्वत्समर्पितकर्मणाम्।गतिस्त्वम्वीतरागाणामभूयःसम्निवृत्तये,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0
प्रत्यक्षोऽप्यपरिच्छेद्योमह्यादिर्महिमातव।आप्तवागनुमानाभ्याम्साध्यम्त्वाम्प्रतिकाकथा,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0
केवलम्स्मरणेनैवपुनासिपुरुषम्यतः।अनेनवृत्तयःशेषानिवेदितफलास्त्वयि,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0
उदधेरिवरत्नानितेजाम्सीवविवस्वतः।स्तुतिभ्योव्यतिरिच्यन्तेदूराणिचरितानिते,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0
अनवाप्तमवाप्तव्यम्नतेकिञ्चनविद्यते।लोकानुग्रहएवैकोहेतुस्तेजन्मकर्मणोः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0
महिमानम्यदुत्कीर्त्यतवसम्ह्रियतेवचः।श्रमेणतदशक्त्यावानगुणानामियत्तया,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0
इतिप्रसादयामासुस्तेसुरास्तमधोक्षजम्।भूतार्थव्याहृतिःसाहिनस्तुतिःपरमेष्ठिनः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0
तस्मैकुशलसम्प्रश्नव्यञ्जितप्रीतयेसुराः।भयमप्रलयोद्वेलादाचख्युर्नैरृतोदधेः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
अथवेलासमासन्नशैलरन्ध्रानुवादिना।स्वरेणोवाचभगवान्परिभूतार्णवध्वनिः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
पुराणस्यकवेस्तस्यवर्णस्थानसमीरिता।बभूवकृतसम्स्काराचरितार्थैवभारती,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
बभौसदशनज्योत्स्नासाविभोर्वदनोद्गता।निर्यातशेषाचरणाद्गङ्गेवोर्ध्वप्रवर्तिनी,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
जानेवोरक्षसाक्रान्तावनुभावपराक्रमौ।अङ्गिनाम्तमसेवोभौगुणौप्रथममध्यमौ,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
विदितम्तप्यमानम्चतेनमेभुवनत्रयम्।अकामोपनतेनेवसाधोर्हृदयमेनसा,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
कार्येषुचैककार्यत्वादभ्यर्थ्योऽस्मिनवज्रिणा।स्वयमेवहिवातोऽग्नेःसारथ्यम्प्रतिपद्यते,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
स्वासिधारापरिहृतःकामम्चक्रस्यतेनमे।स्थापितोदशमोमूर्धालभ्याम्शइवरक्षसा,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
स्रष्टुर्वरातिसर्गात्तुमयातस्यदुरात्मनः।अत्यारूढम्रिपोःसोढम्चन्दनेनेवभोगिनः,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
धातारम्तपसाप्रीतम्ययाचेसहिराक्षसः।दैवात्सर्गादवध्यत्वम्मर्त्येष्वास्थापराङ्मुखः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
सोऽहम्दाशरथिर्भूत्वारणभूमेर्बलिक्षमम्।करिष्यामिशरैस्तीक्ष्णैस्तच्छिरःकमलोच्चयम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0
अचिराद्यज्वभिर्भागम्कल्पितम्विधिवत्पुनः।मायाविभिरनालीढमादास्यध्वेनिशाचरैः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0
वैमानिकाःपुण्यकृतस्त्यजन्तुमरुताम्पथि।पुष्पकालोकसम्क्षोभम्मेघावरणतत्पराः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0
मोक्ष्यध्वेस्वर्गबन्दीनाम्वेणीबन्धनदूषितान्।शापयन्त्रितपौलस्त्यबलात्कारकचग्रहैः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0
रावणावग्रहक्लान्तमितिवागमृतेनसः।अभिवृष्यमरुत्सस्यम्कृष्णमेघस्तिरोदधे,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
पुरहूतप्रभृतयःसुरकार्योद्यतम्सुराः।अम्शैरनुययुर्विष्णुम्पुष्पैर्वायुमिवद्रुमाः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,1,0,0
अथतस्यविशाम्पत्युरन्तेकामस्यकर्मणः।पुरुषःप्रबभूवाग्नेर्विस्मयेनसहर्त्विजाम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
हेमपात्रगतम्दोर्भ्यामादधानःपयश्चरुम्।अनुप्रवेशादाद्यस्यपुम्सस्तेनापिदुर्वहम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
प्राजापत्योपनीतम्तदन्नम्प्रत्यग्रहीन्नृपः।वृषेवपयसाम्सारमाविष्कृतमुदन्वता,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
अनेनकथिताराज्ञोगुणास्तस्यान्यदुर्लभाः।प्रसूतिम्चकमेतस्मिम्स्त्रैलोक्यप्रभवोऽपियत्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
सतेजोवैष्णवम्पत्न्योर्विभेजेचरुसम्ज्ञितम्।द्यावापृथिव्योःप्रत्यग्रमहर्पतिरिवातपम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
अर्चितातस्यकौसल्याप्रियाकेकयवम्शजा।अतःसम्भाविताम्ताभ्याम्सुमित्रामैच्छदीश्वरः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
तेबहुज्ञस्यचित्तज्ञेपत्नौपत्युर्महीक्षितः।चरोरर्धार्धभागाभ्याम्तामयोजयतामुभे,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
साहिप्रणयवत्यासीत्सपत्न्योरुभयोरपि।भ्रमरीवारणस्येवमदनिस्यन्दरेखयोः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
ताभिर्गर्भःप्रजाभूत्यैदध्रेदेवाम्शसम्भवः।सौरीभिरिवनाडीभिरमृताख्याभिरम्मयः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
सममापन्नसत्त्वास्तारेजुरापाण्डुरत्विषः।अन्तर्गतफलारम्भाःसस्यानामिवसम्पदः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
गुप्तम्ददृशुरात्मानम्सर्वाःस्वप्नेषुवामनैः।जलजासिकदाशार्ङ्गचक्रलाञ्छितमूर्तिभिः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0
हेमपक्षप्रभाजालम्गगनेचवितन्वता।उह्यन्तेस्मसुपर्णेनवेगाकृष्टपयोमुचा,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0
बिभ्रत्याकौस्तुभन्यासम्स्तनान्तरविलम्बितम्।पर्युपास्यन्तलक्ष्म्याचपद्मव्यजनहस्तया,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0
कृताभिषेकैर्दिव्यायाम्त्रिस्रोतसिचसप्तभिः।ब्रह्मर्षिभिःपरम्ब्रह्मगृणद्भिरुपतस्थिरे,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0
ताभ्यस्तथाविधान्स्वप्नाञ्छ्रुत्वाप्रीतोहिपार्थिवः।मेनेपरार्ध्यमात्मानम्गुरुत्वेनजगद्गुरोः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0
विभक्तआत्माविभुस्तासामेकःकुक्षिष्वनेकधा।उवासप्रतिमाचन्द्रःप्रसन्नानामपामिव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
अथाग्र्यमहिषीराज्ञःप्रसूतिसमयेसती।पुत्रम्तमोऽपहम्लेभेनक्तम्ज्योतिरिवौषधिः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
रामइत्यभिरामेणवपुषातस्यचोदितः।नामधेयम्गुरुश्चक्रेजगत्प्रथममङ्गलम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
रघुवम्शप्रदीपेनतेनाप्रतिमतेजसा।रक्षागृहगतादीपाःप्रत्यादिष्टाइवाभवन्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
शय्यागतेनरामेणमाताशातोदरीबभौ।सैकताम्भोजबलिनाजाह्नवीवशरत्कृशा,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
कैकेय्यास्तनयोजज्ञेभरतोनामशीलवान्।जनयित्रीमलम्चक्रेयःप्रश्रयइवश्रियम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
सुतौलक्ष्मणशत्रुघ्नौसुमित्रासुषुवेयमौ।सम्यगाराधिताविद्याप्रबोधविनयाविव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
निर्दोषमभवत्सर्वमाविष्कृतगुणम्जगत्।अन्वगादिवहिस्वर्गोगाम्गतम्पुरुषोत्तमम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
तस्योदयेचतुर्मूर्तेःपौलस्त्यचकितेश्वराः।विरजस्कैर्नभस्वद्भिर्दिशउच्छ्वसिताइव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0
कृशानुरपधूमत्वात्प्रसन्नत्वात्प्रभाकरः।रक्षोविप्रकृतावास्तामपविद्धशुचाविव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0
दशाननकिरीटेभ्यस्तत्क्षणम्राक्षसश्रियः।मणिव्याजेनपर्यस्ताःपृथिव्यामश्रुबिन्दवः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
पुत्रजन्मप्रवेश्यानाम्तूर्याणाम्तस्यपुत्रिणः।आरम्भम्प्रथमम्चक्रुर्देवदुन्दुभयोदिवि,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
सन्तानकमयीवृष्टिर्भवनेचास्यपेतुषी।सन्मङ्गलोपचाराणाम्सैवादिरचनाऽभवत्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
कुमाराःकृतसम्स्कारास्तेधात्रीस्तन्यपायिनः।आनन्देनाग्रजेनेवसमम्ववृधिरेपितुः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
स्वाभाविकम्विनीतत्वम्तेषाम्विनयकर्मणा।मुमूर्च्छसहजम्तेजोहविषेवहविर्भुजाम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
परस्परविरुद्धास्तेतद्रगोरनघम्कुलम्।अलमुद्योतयामासुर्देवारण्यमिवर्तवः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
समानेऽपिचसौभ्रात्रेयथेभौरामलक्ष्मणौ।तथाभरतशत्रुघ्नौप्रीत्याद्वन्द्वम्बभूवतुः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0
तेषाम्द्वयोर्द्वयोरैक्यम्बिभिदेनकदाचन।यथावायुर्विभावस्वोर्यथाचन्द्रसमुद्रयोः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0
तेप्रजानाम्प्रजानाथास्तेजसाप्रश्रयेणच।मनोजह्रुर्निदाघान्तेश्यामाभ्रादिवसाइव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
सचतुर्धाबभौव्यस्तःप्रसवःपृथिवीपतेः।धर्मार्थकाममोक्षाणामवतारइवाङ्गवान्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
गुणैराराधयामासुस्तेगुरुम्गुरुवत्सलाः।तमेवचतुरन्तेशम्रत्नैरिवमहार्णवाः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
सुरगजइवदन्तैर्भग्नदैत्यासिधारैर्नयइवपणबन्धव्यक्तयोगैरुपायैः।हरिरिवयुगदीर्घैर्दोर्भिरम्शैस्तदीयैःपतिरवनिपतीनाम्तैश्चकाशेचतुर्भिः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
इतिकालिदासकृतरघुवम्शमहाकाव्येदशमःसर्गः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
कौशिकेनसकिलक्षितीश्वरोराममध्वरविघातशान्तये।काकपक्षधरमेत्ययाचितःmतेजसाम्हिनवयःसमीक्ष्यते,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
कृच्छ्रलब्धमपिलब्धवर्णभाक्तम्दिदेशमुनयेसलक्ष्मणम्।अप्यसुप्रणयिनाम्रघोःकुलेनव्यहन्यतकदाचिदर्थिता,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
यावदादिशतिपार्थिवस्तयोःनिर्गमायपुरमार्गसंस्क्रियाम्।तावदाशुविदधेमरुत्सखैःसासपुष्पजलवर्षिभिर्घनैः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
तौनिदेशकरणोद्यतौपितुःधन्विनौचरणयोर्निपेततुः।भूपतेरपितयोःप्रवत्स्यतोःनम्रयोरुपरिबाष्पबिन्दवः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तौपितुर्नयनजेनवारिणाकिंचिदुक्षितशिखण्डकावुभौ।धन्विनौतमृषिमन्वगच्छताम्पौरदृष्टिकृतमार्गतोरणौ,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
लक्ष्मणानुचरमेवराघवम्नेतुमैच्छदृषिरित्यसौनृपः।आशिषम्प्रयुयुजेनवाहिनीम्साहिरक्षणविधौतयोःक्षमा,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
मातृवर्गचरणस्पृशौमुनेःतौप्रपद्यपदवीम्महौजसः।रेजतुर्गतिवशात्प्रवर्तिनौभास्करस्यमधुमाधवाविव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
वीचिलोलभुजयोस्तयोर्गतम्शैशवाच्चपलमप्यशोभत।तोयदागमेइवोद्ध्यभिद्ययोःनामधेयसदृशम्विचेष्टितम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
तौबलातिबलयोःप्रभावतोविद्ययोःपथिमुनिप्रदिष्टयोः।मम्लतुर्नमणिकुट्टिमोचितौमातृपार्श्वपरिवर्तिनाविव,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
पूर्ववृत्तकथितैःपुराविदःसानुजःपितृसखस्यराघवः।उह्यमानइववाहनोचितःपादचारमपिनव्यभावयत्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
तौसरांसिरसवद्भिरम्बुभिःकूजितैःश्रुतिसुखैःपतत्रिणः।वायवःसुरभिपुष्परेणुभिःछाययाचजलदाःसिषेविरे,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
नाम्भसाम्कमलशोभिनाम्तथाशाखिनाम्चनपरिश्रमच्छिदाम्।दर्शनेनलघुनायथातयोःप्रीतिमापुरुभयोस्तपस्विनः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
स्थाणुदग्धवपुषस्तपोवनम्प्राप्यदाशरथिरात्तकार्मुकः।विग्रहेणमदनस्यचारुणासोऽभवत्प्रतिनिधिर्नकर्मणा,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
तौसुकेतुसुतयाखिलीकृतेकौशिकाद्विदितशापयापथि।निन्यतुःस्थलनिवेशिताटनीलीलयैवधनुषीअधिज्यताम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
ज्यानिनादमथगृह्णतीतयोःप्रादुरासबहुलक्षपाछविः।ताडकाचलकपालकुण्डलाकालिकेवनिबिडाबलाकिनी,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तीव्रवेगधुतमार्गवृक्षयाप्रेतचीवरवसास्वनोग्रया।अभ्यभाविभरताग्रजस्तयावात्ययेवपितृकाननोत्थया,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
उद्यतैकभुजयष्टिमायतीम्श्रोणिलम्बिपुरुषान्त्रमेखलाम्।ताम्विलोक्यवनितावधेघृणाम्पत्रिणासहमुमोचराघवः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
यच्चकारविवरम्शिलाघनेताडकोरसिसरामसायकः।अप्रविष्टविषयस्यरक्षसाम्द्वारतामगमदन्तकस्यतत्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
बाणभिन्नहृदयानिपेतुषीसास्वकाननभुवम्नकेवलाम्।विष्टपत्रयपराजयस्थिराम्रावणश्रियमपिव्यकम्पयत्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
राममन्मथशरेणताडितादुःसहेनहृदयेनिशाचरी।गन्धवद्रुधिरचन्दनोक्षिताजीवितेशवसतिम्जगामसा,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
नैरृतघ्नमथमन्त्रवन्मुनेःप्रापदस्त्रमवदानतोषितात्।ज्योतिरिन्धननिपातिभास्करात्सूर्यकान्तइवताडकान्तकः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
वामनाश्रमपदम्ततःपरम्पावनम्श्रुतमृषेरुपेयिवान्।उन्मनाःप्रथमजन्मचेष्टितान्यस्मरन्नपिबभूवराघवः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
आससादमुनिरात्मनस्ततःशिष्यवर्गपरिकल्पितार्हणम्।बद्धपल्लवपुटाञ्जलिद्रुमम्दर्शनोन्मुखमृगम्तपोवनम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
तत्रदीक्षितमृषिम्ररक्षतुःविघ्नतोदशरथात्मजौशरैः।लोकमन्धतमसात्क्रमोदितौरश्मिभिःशशिदिवाकराविव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
वीक्ष्यवेदिमथरक्तबिन्दुभिःबन्धुजीवपृथुभिःप्रदूषिताम्।संभ्रमोऽभवदपोढकर्मणाम्ऋत्विजाम्च्युतविकङ्कतस्रुचाम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
उन्मुखःसपदिलक्षमणाग्रजोबाणमाश्रयमुखात्समुद्धरन्।रक्षसाम्बलमपश्यदम्बरेगृध्रपक्षपवनेरितध्वजम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तत्रयावधिपतीमखद्विषाम्तौशरव्यमकरोत्सनेतरान्।किम्महोरगविसर्पिविक्रमोराजिलेषुगरुडःप्रवर्तते,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
सोऽस्त्रमुग्रजवमस्त्रकोविदःसंदधेधनुषिवायुदैवतम्।तेनशैलगुरुमप्यपातयत्पाण्डुपत्रमिवताडकासुतम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
यःसुबाहुरितिराक्षसोऽपरःतत्रतत्रविससर्पमायया।तम्क्षुरप्रशकलीकृतम्कृतीपत्रिणाम्व्यभजदाश्रमाद्बहिः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
इत्यपास्तमखविघ्नयोस्तयोःसांयुगीनमभिनन्द्यविक्रमम्।ऋत्विजःकुलपतेर्यथाक्रमम्वाग्यतस्यनिरवर्तयन्क्रियाः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,1,0,0,0
तौप्रणामचलकाकपक्षकौभ्रातराववभृथाप्लुतोमुनिः।आशिषामनुपदंसमस्पृशत्दर्भपाटलतलेनपाणिना,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तम्न्यमन्त्रयतसंभृतक्रतुःमैथिलःसमिथिलाम्व्रजन्वशी।राघवावपिनिनायबिभ्रतौतद्धनुःश्रवणजम्कुतूहलम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तैःशिवेषुवसतिर्गताध्वभिःसायमाश्रमतनुष्वगृह्यत।येषुदीर्घतपसःपरिग्रहोवासवक्षणकलत्रताम्ययौ,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0
प्रत्यपद्यतचिराययत्पुनश्चारुगौतमवधूःशिलामयी।स्वम्वपुःसकिलकिल्बिषच्छिदाम्रामपादरजसामनुग्रहः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
राघवान्वितमुपस्थितम्मुनिम्तम्निशम्यजनकोजनेश्वरः।अर्थकामसहितम्सपर्ययादेहबद्धमिवधर्ममभ्यगात्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तौविदेहनगरीनिवासिनाम्गाम्गताविवदिवःपुनर्वसू।मन्यतेस्मपिबताम्विलोचनैःपक्ष्मपातमपिवञ्चनाम्मनः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
यूपवत्यवसितेक्रियाविधौकालवित्कुशिकवंशवर्धनः।राममिष्वसनदर्शनोत्सुकम्मैथिलायकथयांबभूवसः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0
तस्यवीक्ष्यललितम्वपुःशिशोःपार्थिवःप्रथितवंशजन्मनः।स्वम्विचिन्त्यचधनुर्दुरानमम्पीडितोदुहितृशुल्कसंस्थया,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
अब्रवीच्चभगवन्मतङ्गजैर्यद्बृहद्भिरपिकर्मदुष्करम्।तत्रनाहमनुमन्तुमुत्सहेमोघवृत्तिकलभस्यचेष्टितम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
ह्रेपिताहिबहवोनरेश्वरास्तेनतातधनुषाधनुर्भृतः।ज्यानिघातकठिनत्वचोभुजान्स्वान्विधूयधिगितिप्रतस्थिरे,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
प्रत्युवाचतमृषिर्निशम्यताम्सारतोऽयमथवागिराकृतम्।चापएवभवतोभविष्यतिव्यक्तशक्तिरशनिर्गिराविव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0
एवमाप्तवचनात्सपौरुषम्काकपक्षकधरेऽपिराघवे।श्रद्दधेत्रिदशगोपमात्रकेदाहशक्तिमिवकृष्णवर्त्मनि,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0
व्यादिदेशगणशोऽथपार्श्वगान्कार्मुकाभिहरणायमैथिलः।तैजसस्यधनुषःप्रवृत्तयेतोयदानिवसहस्रलोचनः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
तत्प्रसुप्तभुजगेन्द्रभीषणम्वीक्ष्यदाशरथिराददेधनुः।विद्रुतक्रतुमृगानुसारिणम्येनबाणमसृजत्वृषध्वजः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
आततज्यमकरोत्ससंसदाविस्मयस्तिमितनेत्रमीक्षितः।शैलसारमपिनातियत्नतःपुष्पचापमिवपेशलम्स्मरः,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
भज्यमानमतिमात्रकर्षणात्तेनवज्रपरुषस्वनम्धनुः।भार्गवायदृढमन्यवेपुनःक्षत्रमुद्यतमिवन्यवेदयत्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
दृष्टसारमथरुद्रकार्मुकेवीर्यशुल्कमभिनन्द्यमैथिलः।राघवायतनयामयोनिजाम्रूपिणीम्श्रियमिवन्यवेदयत्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
मैथिलःसपदिसत्यसंगरोराघवायतनयामयोनिजाम्।संनिधौद्युतिमतस्तपोनिधेरग्निसाक्षिकइवातिसृष्टवान्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
प्राहिणोच्चमहितम्महाद्युतिःकोसलाधिपतयेपुरोधसम्।भृत्यभाविदुहितुःपरिग्रहात्दिश्यताम्कुलमिदम्निमेरिति,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
अन्वियेषसदृशीम्सचस्नुषाम्प्रापचैनमनुकूलवाग्द्विजः।सद्यएवसुकृताम्हिपच्यतेकल्पवृक्षफलधर्मिकाङ्क्षितम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
तस्यकल्पितपुरस्क्रियाविधेःशुश्रुवान्वचनमग्रजन्मनः।उच्चचालबलभित्सखोवशीसैन्यरेणुमुषितार्कदीधितिः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
आससादमिथिलाम्सवेष्टयन्पीडितोपवनपादपाम्बलैः।प्रीतिरोधमसहिष्टसापुरीस्त्रीवकान्तपरिभोगमायतम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तौसमेत्यसमयेस्थितावुभौभूपतीवरुणवासवोपमौ।कन्यकातनयकौतुकक्रियाम्स्वप्रभावसदृशीम्वितेनतुः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
पार्थिवीमुदवहद्रघूद्वहोलक्ष्मणस्तदनुजामथोर्मिलाम्।यौतयोरवरजौवरौजसौतौकुशध्वजसुतेसुमध्यमे,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तेचतुर्थसहितास्त्रयोबभुःसूनवोनववधूपरिग्रहाः।सामदानविधिभेदनिग्रहाःसिद्धिमन्तइवतस्यभूपतेः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
तानराधिपसुतानृपात्मजैःतेचताभिरगमन्कृतार्थताम्।सोऽभवद्वरवधूसमागमःप्रत्ययप्रकृतियोगसंनिभः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0
एवमात्तरतिरात्मसंभवांतान्निवेश्यचतुरोऽपितत्रसः।अध्वसुत्रिषुविसृष्टमैथिलःस्वाम्पुरीम्दशरथोन्यवर्तत,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
तस्यजातुमरुतःप्रतीपगावर्त्मसुध्वजतरुप्रमाथिनः।चिक्लिशुर्भृशतयावरूथिनीम्उत्तटाइवनदीरयाःस्थलीम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
लक्ष्यतेस्मतदनन्तरम्रविःबद्धभीमपरिवेषमण्डलः।वैनतेयशमितस्यभोगिनोभोगवेष्टितइवच्युतोमणिः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
श्येनपक्षपरिधूसरालकाःसांध्यमेघरुधिरार्द्रवाससः।अङ्गनाइवरजस्वलादिशोनोबभूवुरवलोकनक्षमाः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
भास्करश्चदिशमध्युवासयाम्ताम्श्रिताःप्रतिभयम्ववासिरे।क्षत्रशोणितपितृक्रियोचितम्चोदयन्त्यइवभार्गवम्शिवाः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
तत्प्रतीपपवनादिवैकृतम्प्रेक्ष्यशान्तिमधिकृत्यकृत्यविद्।अन्वयुङ्क्तगुरुमीश्वरःक्षितेःस्वन्तमित्यलघयत्सतद्व्यथाम्,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तेजसःसपदिराशिरुत्थितःप्रादुरासकिलवाहिनीमुखे।यःप्रमृज्यनयनानिसैनिकैःलक्षणीयपुरुषाकृतिश्चिरात्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
पित्र्यमंशमुपवीतलक्षणम्मातृकम्चधनुरूर्जितम्दधत्।यःससोमइवघर्मदीधितिःसद्विजिह्वइवचन्दनद्रुमः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
येनरोषपरुषात्मनःपितुःशासनेस्थितिभिदोऽपितस्थुषा।वेपमानजननीशिरश्छिदाप्रागजीयतघृणाततोमही,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
अक्षबीजवलयेननिर्बभौदक्षिणश्रवणसंस्थितेनयः।क्षत्रियान्तकरणैकविंशतेःव्याजपूर्वगणनामिवोद्वहन्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तम्पितुर्वधभवेनमन्युनाराजवंशनिधनायदीक्षितम्।बालसूनुरवलोक्यभार्गवम्स्वाम्दशाम्चविषसादपार्थिवः,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
नामरामइतितुल्यमात्मजेवर्तमानमहितेचदारुणे।हृद्यमस्यभयदायिचाभवद्रत्नजातमिवहारसर्पयोः,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
अर्घ्यमर्घ्यमितिवादिनम्नृपम्सोऽनवेक्ष्यभरताग्रजोयतः।क्षत्रकोपदहनार्चिषम्ततःसंदधेदृशमुदग्रतारकाम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तेनकार्मुकनिषक्तमुष्टिनाराघवोविगतभीःपुरोगतः।अङ्गुलीविवरचारिणम्शरम्कुर्वतानिजगदेयुयुत्सुना,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
क्षत्रजातमपकारवैरिमेतन्निहत्यबहुशःशमम्गतः।सुप्तसर्पइवदण्डघट्टनात्रोषितोऽस्मितवविक्रमश्रवात्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
मैथिलस्यधनुरन्यपार्थिवैःत्वम्किलानमितपूर्वमक्षणोः।तन्निशम्यभवतासमर्थयेवीर्यशृङ्गमिवभग्नमात्मनः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
अन्यदाजगतिरामइत्ययम्शब्दउच्चरितएवमामगात्।व्रीडमावहतिमेससंप्रतिव्यस्तवृत्तिरुदयोन्मुखेत्वयि,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
बिभ्रतोऽस्त्रमचलेऽप्यकुण्ठितम्द्वौरुपूमममतौसमागसौ।धेनुवत्सहरणाच्चहैहयस्त्वम्चकीर्तिमपहर्तुमुद्यतः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
क्षत्रियान्तकरणोऽपिविक्रमःतेनमामवतिनाजितेत्वयि।पावकस्यमहिमासगण्यतेकक्षवज्जलतिसागरेऽपियः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
विद्धिचात्तबलमोजसाहरेःऐश्वरम्धनुरभाजियत्त्वया।खातमूलमनिलोनदीरयैःपातयत्यपिमृदुस्तटद्रुमम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तन्मदीयमिदमायुधम्ज्ययासंगमय्यसशरम्विकृष्यताम्।तिष्ठतुप्रधनमेवमप्यहम्तुल्यबाहुतरसाजितस्त्वया,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
कातरोऽसियदिवोद्गतार्चिषातर्जितःपरशुधारयामम।ज्यानिघातकठिनाङ्गुलिर्वृथाबध्यतामभययाचनाञ्जलिः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
एवमुक्तवतिभीमदर्शनेभार्गवेस्मितविकम्पिताधरः।तद्धनुर्ग्रहणमेवराघवःप्रत्यपद्यतसमर्थमुत्तरम्,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
पूर्वजन्मधनुषासमागतःसोऽतिमात्रलघुदर्शनोऽभवत्।केवलोऽपिसुभगोनवाम्बुदःकिम्पुनस्त्रिदशचापलाञ्छितः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
तेनभूमिनिहितैककोटितत्कार्मुकम्चबलिनाधिरोपितम्।निष्प्रभश्चरिपुरासभूभृताम्धूमशेषइवधूमकेतनः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तावुभावपिपरस्परस्थितौवर्धमानपरिहीनतेजसौ।पश्यतिस्मजनतादिनात्ययेपार्वणौशशिदिवाकराविव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
तम्कृपामृदुरवेक्ष्यभार्गवम्राघवःस्खलितवीर्यमात्मनि।स्वम्चसंहितममोघमाशुगम्व्याजहारहरसूनुसंनिभः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0
नप्रहर्तुमलमस्मिनिर्दयम्विप्रइत्यभिभत्यपित्वयि।शंसकिम्गतिमनेनपत्रिणाहन्मिलोकमुततेमखार्जितम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0
प्रत्युवाचतमृषिर्नतत्त्वतःत्वाम्नवेद्मिपुरुषम्पुरातनम्।गाम्गतस्यतवधामवैष्णवम्कोपितोह्यसिमयादिदृक्षुणा,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0
भस्मसात्कृतवतःपितृद्विषःपात्रसाच्चवसुधाम्ससागराम्।आहितोजयविपर्ययोऽपिमेश्लाघ्यएवपरमेष्ठिनात्वया,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तत्गतिम्मतिमताम्वरेप्सिताम्पुण्यतीर्थगमनायरक्षमे।पीडयिष्यतिनमाम्खिलीकृतास्वर्गपद्धतिःअभोघलोलुपम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0
प्रत्यपद्यततथेतिराघवःप्राङ्मुखश्चविससर्जसायकम्।भार्गवस्यसुकृतोऽपिसोऽभवत्स्वर्गमार्गपरिघोदुरत्ययः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
राघवोऽपिचरणौतपोनिधेःक्षम्यतामितिवदन्समस्पृशत्।निर्जितेषुतरसातरस्विनाम्शत्रुषुप्रणतिरेवकीर्तये,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
राजसत्वमवधूयमातृकम्पित्र्यमस्मिगमितःशमम्यदा।नन्वनिन्दितफलोममत्वयानिग्रहोऽप्ययमनुगृहीकृतः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
साधयाम्यहमविघ्नमस्तुतेदेवकार्यमुपपादयिष्यतः।ऊचिवानितिवचःसलक्ष्मणम्लक्ष्मणाग्रजमृषितिरोदधे,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0
तस्मिन्गतेविजयिनम्परिरभ्यरामम्स्नेहादमन्यतपितापुनरेवजातम्।तस्याभवत्क्षणशुचःपरितोषलाभःकक्षाग्निलङ्घिततरोरिववृष्टिपातः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
अथपथिगमयित्वाकॢप्तरम्योपकार्येकतिचिदवनिपालःशर्वरीःशर्वकल्पः।पुरमविशदयोध्याम्मैथिलीदर्शनीनाम्कुवलयितगवाक्षाम्लोचनैरङ्गनानाम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
इतिकालिदासकृतरघुवंशमहाकाव्येएकादशःसर्गः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
निर्विष्टविषयस्नेहःसदशान्तमुपेयिवान्।आसीदासन्ननिर्वाणःप्रदीपार्चिरिवोषसि,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तम्कर्णमूलमागत्यरामेश्रीर्न्यस्यतामिति।कैकेयीशङ्कयेवाहपलितच्छद्मनाजरा,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
सापौरान्पौरकान्तस्यरामस्याभ्युदयश्रुतिः।प्रत्येकम्ह्रादयांचक्रेकुल्येवोद्यानपादपान्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तस्याभिषेकसंभारम्कल्पितम्क्रूरनिश्चया।दूषयामासकैकेयीशोकोष्णैःपार्थिवाश्रुभिः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
साकिलाश्वासिताचण्डीभर्त्रातत्संश्रुतौवरौ।उद्ववामेन्द्रसिक्ताभूर्बिलमग्नाविवोरगौ,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तयोश्चतुर्दशैकेनरामम्प्राव्राजयत्समाः।द्वितीयेनसुतस्यैच्छद्वैधव्यैकफलाम्श्रियम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
पित्रादत्तम्रुदन्रामःप्राङ्महीम्प्रत्यपद्यत।पश्चाद्वनायगच्छेतितदाज्ञाम्मुदितोऽग्रहीत्,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
दधतोमङ्गलक्षौमेवसानस्यचवल्कले।ददृशुर्विस्मितास्तस्यमुखरागम्समम्जनाः,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
ससीतालक्ष्मणसखःसत्याद्गुरुमलोपयन्।विवेशदण्डकारण्यम्प्रत्येकम्चसताम्मनः,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
राजापितद्वियोगार्तःस्मृत्वाशापम्स्वकर्मजम्।शरीरत्यागमात्रेणशुद्धिलाभमन्यत,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
विप्रोषितकुमारम्तद्राज्यमस्तमितेश्वरम्।रन्ध्रान्वेषणदक्षाणाम्द्विषामामिषतताम्ययौ,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
अथानाथाःप्रकृतयोमातृबन्धुनिवासिनम्।मौलैरानाययामासुर्भरतम्स्तम्भिताश्रुभिः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
श्रुत्वातथाविधम्मृत्युम्कैकेयीतनयःपितुः।मातुर्नकेवलम्स्वस्याःश्रियोऽप्यासीत्पराङ्मुखः,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0
ससैन्यश्चान्वगाद्रामम्दर्शितानाश्रमालयैः।तस्यपश्यन्ससौमित्रेरुदश्रुर्वसतिद्रुमान्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
चित्रकूटवनस्थम्चकथितस्वर्गतिर्गुरोः।लक्ष्म्यानिमन्त्रयांचक्रेतमनुच्छिष्टसंपदा,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
सहिप्रथमजेतस्मिन्नकृतश्रीपरिग्रहे।परिवेत्तारमात्मानम्मेनेस्वीकरणाद्भुवः,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तमशक्यमपाक्रष्टुम्निदेशात्स्वर्गिणःपितुः।ययाचेपादुकेपश्चात्कर्तुम्राज्याधिदेवते,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
सविसृष्टस्तथेत्युक्त्वाभ्रात्रानैवाविशत्पुरीम्।नन्दिग्रामगतस्तस्यराज्यम्न्यासमिवाभुनक्,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
दृढभक्तिरितिज्येष्ठेराज्यतृष्णापराङ्मुखः।मातुःपापस्यभरतःप्रायश्चित्तमिवाकरोत्,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
रामोऽपिसहवैदेह्यावनेवन्येनवर्तयन्।चचारसानुजःशान्तोवृद्धेक्ष्वाकुव्रतम्युवा,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
प्रभावस्तम्भितच्छायमाश्रितःसवनस्पतिम्।कदाचिदङ्केसीतायाःशिश्येकिंचिदिवश्रमात्,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
ऐन्द्रिःकिलनखैस्तस्याविददारस्तनौद्विजः।प्रियोपभोगचिह्नेषुपौरोभाग्यमिवाचरन्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तस्मिन्नस्थदिषीकास्त्रम्रामोरामावबोधितः।आत्मानम्मुमुचेतस्मादेकनेत्रव्ययेनसः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0
रामस्त्वासन्नदेशत्वाद्भरतागमनम्पुनः।आशङ्क्योत्सुकसारङ्गाम्चित्रकूटस्थलीम्जहौ,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
प्रययावातिथेयेषुवसन्नृषिकुलेषुसः।दक्षिणाम्दिशमृक्षेषुवार्षिकेष्विवभास्करः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
बभौतमनुगच्छन्तीविदेहाधिपतेःसुता।प्रतिषिद्धापिकैकेय्यालक्ष्मीरिवगुणोन्मुखी,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
अनसूयातिसृष्टेनपुण्यगन्धेनकाननम्।साचकाराङ्गरागेणपुष्पोच्चलितषट्पदम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
संध्याभ्रकपिशस्तस्यविराधोनामराक्षसः।अतिष्ठन्मार्गमावृत्यरामस्येन्दोरिवग्रहः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
सजहारतयोर्मध्येमैथिलीम्लोकशोषणः।नभोनभस्ययोर्वृष्टिमवग्रहइवान्तरे,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तम्विनिष्पिष्यकाकुत्स्थौपुरादूषयतिस्थलीम्।गन्धेनाशुचिनाचेतिवसुधायाम्निचख्नतुः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
पञ्चवट्याम्ततोरामःशासनात्कुम्भजन्मनः।अनपोढस्थितिस्तस्थौविन्ध्याद्रिःप्रकृताविव,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
रावणावरजातत्रराघवम्मदनातुरा।अभिपेदेनिदाघार्ताव्यालीवमलयद्रुमम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
सासीतासंनिधावेवतम्वव्रेकथितान्वया।अत्यारूढोहिनारीणामकालज्ञोमनोभवः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
कलत्रवानहम्बालेकनीयांसम्भजस्वमे।इतिरामोवृषस्यन्तीम्वृषस्कन्धःशशासताम्,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
ज्येष्ठाभिगमनात्पूर्वम्तेनाप्यनभिनन्दिताम्।साऽभूद्रामाश्रयाभूयोनदीवोभयकूलभाक्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
संरम्भम्मैथिलीहासःक्षणसौम्याम्निनायताम्।निवातस्तिमिताम्वेलाम्चन्द्रोदयइवोदधेः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0
फलमस्योपहासस्यसद्यःप्राप्स्यसिपश्यमाम्।मृग्याःपरिभवोव्याघ्र्यामित्यवेहित्वयाकृतम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0
इत्युक्त्वामैथिलीम्भर्तुरङ्केनिविशतीम्भयात्।रूपम्शूर्पणखानाम्नःसदृशम्प्रत्यपद्यत,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
लक्ष्मणःप्रथमम्श्रुत्वाकोकिलामञ्जुवादिनीम्।शिवाघोरस्वनाम्पश्चाद्बुबुधेविकृतेतिताम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
पर्णशालामथक्षिप्रम्विकृष्टासिःप्रविश्यसः।वैरूप्यपौनरुक्त्येनभीषणाम्तामयोजयत्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0
सावक्रनखधारिण्यावेणुकर्कशपर्वया।अङ्कुशाकारयाङ्गुल्यातावतर्जयदम्बरे,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0
प्राप्यचाशुजनस्थानम्खरादिभ्यस्तथाविधम्।रामोपक्रममाचख्यौरक्षःपरिभवम्नवम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
मुखावयवलूनाम्ताम्नैरृतायत्पुरोदधुः।रामाभियायिनाम्तेषाम्तदेवाभूदमङ्गलम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
उदायुधानात्पततस्तान्दृप्तान्प्रेक्ष्यराघवः।निदधेविजयाशंसाम्चापेसीताम्चलक्ष्मणे,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
एकोदाशरथिःकामम्यातुधानाःसहस्रशः।तेतुयावन्तएवाजौतावांश्चददृशेसतैः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
असज्जनेनकाकुत्स्थःप्रयुक्तमथदूषणम्।नचक्षमेशुभाचारःसदूषणमिवात्मनः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तम्शरैःप्रतिजग्राहखरत्रिशिरसौचसः।क्रमशस्तेपुनस्तस्यचापात्सममिवोद्ययुः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
तैस्त्रयाणाम्शितैर्बाणैर्यथापूर्वविशुद्धिभिः।आयुर्देहातिगैःपीतम्रुधिरम्तुपतत्रिभिः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तस्मिन्रामशरोत्कृत्तेबलेमहतिरक्षसाम्।उत्थितम्ददृशेऽन्न्यच्चकबन्धेभ्योनकिंचन,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
साबाणवर्षिणम्रामम्योधयित्वासुरद्विषाम्।अप्रबोधायसुष्वापगृध्रच्छायेवरूथिनी,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
राघवास्त्रविदीर्णानाम्रावणम्प्रतिरक्षसाम्।तेषाम्शूर्पणखैवैकादुष्प्रवृत्तिहराऽभवत्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
निग्रहात्स्वसुराप्तानाम्वधाच्चधनदानुजः।रामेणनिहितम्मेनेपदम्दशसुमूर्धसु,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
रक्षसामृगरूपेणवञ्चयित्वासराघवौ।जहारसीताम्पक्षीन्द्रप्रयासक्षणविघ्नितः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तौसीतावेषिणौगृध्रम्लूनपक्षमपश्यताम्।प्राणैर्दशरथप्रीतेरनृणम्कण्ठवर्तिभिः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
सरावणहृताम्ताभ्याम्वचसाचष्टमैथिलीम्।आत्मनःसुमहत्कर्मव्रणैरावेद्यसंस्थितः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तयोस्तस्मिन्नवीभूतपितृव्यापतिशोकयोः।पितरीवाग्निसंस्कारात्पराववृतिरेक्रियाः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
वधनिर्धूतशापस्यकबन्धस्योपदेशतः।मुमूर्च्छसख्यम्रामस्यसमानव्यसनेहरौ,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
सहत्वावालिनम्वीरस्तत्पदेचिरकाङ्क्षिते।धातोःस्थानइवादेशम्सुग्रीवम्संन्यवेशयत्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
इतस्ततश्चवैदेहीमन्वेष्टुम्भर्तृचोदिताः।कपयश्चेरुरार्तस्यरामस्येवमनोरथाः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
प्रवृत्तावुपलब्धायाम्तस्याःसंपातिदर्शनात्।मारुतिःसागरम्तीर्णःसंसारमिवनिर्ममः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
दृष्टाविचिन्वतातेनलङ्कायाम्राक्षसीवृता।जानकीविषवल्लीभिःपरितेवमहौषधिः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तस्यैभर्तुरभिज्ञ्यानमङ्गुलीयम्ददौकपिः।प्रत्युद्गतमिवानुष्णैस्तदानन्दाश्रुबिन्दुभिः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
निर्वाप्यप्रियसंदेशैःसीतामक्षवधोद्धतः।सददाहपुरीम्लङ्काम्क्षणसोढारिनिग्रहः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
प्रत्यभिज्ञानरत्नम्चरामायादर्शयत्कृती।हृदयम्स्वयमायातम्वैदेह्याइवमूर्तिमत्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
सप्रापहृदयन्यस्तमणिस्पर्शनिमीलितः।अपयोधरसंसर्गाम्प्रियालिङ्गननिर्वृतिम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
श्रुत्वारामःप्रियोदन्तम्मेनेतत्सङ्गमोत्सुकः।महार्णवपरिक्षेपम्लङ्कायाःपरिखालघुम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
सप्रतस्थेऽरिनाशायहरिसैन्यैरनुद्रुतः।नकेवलम्भुवःपृष्ठेव्योम्निसंबाधवर्तिभिः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
निविष्टमुदधेःकूलेतम्प्रपादबिभीषणः।स्नेहाद्राक्षसलक्ष्म्येवबुद्धिमाविश्यचोदितः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
तस्मैनिशाचरैश्वर्यम्प्रतिशुश्रावराघवः।कालेखलुसमालब्धाःफलम्बध्नन्तिनीतयः,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
ससेतुम्बन्धयामासप्लवगैर्लवणाम्भसि।रसातलादिवोन्मग्नम्शेषम्स्वप्नायशार्ङ्गिणः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
तेनोत्तीर्यपथालङ्काम्रोधयामासपिङ्गलैः।द्वितीयम्हेमप्राकारम्कुर्वद्भिरिववानरैः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
रणःप्रववृतेतत्रभीमःप्लवगरक्षसाम्।दिग्विजृम्भितकाकुत्स्थपौलस्त्यजयघोषणः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
पादपाविद्धपरिघःशिलानिष्पिष्टमुद्गरः।अतिशस्त्रनखन्यासःशैलरुग्णमतंगजः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
अथरामशिरश्छेददर्शनोद्भ्रान्तचेतनाम्।सीताम्मायेतिशंसन्तीत्रिजटासमजीवयत्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
कामम्जीवतिमेनाथइतिसाविजहौशुचम्।प्राङ्मत्वासत्यमस्यान्तम्जीवितास्मीतिलज्जिता,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
गरुडापातविश्लिष्टमेघनादास्त्रबन्धनः।दाशरथ्योःक्षणक्लेशःस्वप्नवृत्तइवाभवत्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
ततोबिभेदपौलस्त्यःशक्त्यावक्षसिलक्ष्मणम्।रामस्त्वनाहतोऽप्यासीद्विदीर्णहॄदयःशुचा,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
समारुतिसमानीतमहौषधिहतव्यथः।लङ्कास्त्रीणाम्पुनश्चक्रेविलापाचार्यकम्शरैः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
सनादम्मेघनादस्यधनुश्चेन्द्रायुधप्रभम्।मेघस्येवशरत्कालोनकिञ्चित्पर्यशेषयत्,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
कुम्भकर्णःकपीन्द्रेणतुल्यावस्थःस्वसुःकृतः।रुरोधरामम्शृङ्गीवटङ्कच्छिन्नमनःशिलः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
अकालेबोधितोभ्राताप्रियस्वप्नोवृथाभवान्।रामेषुभिरितीवासौदीर्घनिद्राम्प्रवेशितः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
इतराण्यपिरक्षांसिपेतुर्वानरकोटिषु।रजांसिसमरोत्थानितच्छोणितनदीष्विव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
निर्ययावथपौलस्त्यःपुनर्युद्धायमन्दिरात्।अरावणमरामम्वाजगदद्येतिनिश्चितः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0
रामम्पदातिमालोक्यलङ्केशम्चवरूथिनम्।हरियुग्यम्रथम्तस्मैप्रजिघायपुरंदरः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
तमाधूतध्वजपटम्व्योमगङ्गोर्मिवायुभिः।देवसूतभुजालम्बीजैत्रमध्यास्तराघवः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0
मातलिस्तस्यमाहेन्द्रमामुमोचतनुच्छदम्।यत्रोत्पलदलक्लैब्यमस्त्राण्यापुःसुरद्विषाम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
अन्योन्यदर्शनप्राप्तविक्रमावसरम्चिरात्।रामरावणयोर्युद्धम्चरितार्थमिवाभवत्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
भुजमूर्धोरुबाहुल्यादेकोऽपिधनदानुजः।ददृशेह्ययथापूर्वोमातृवंशइवस्थितः,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
जेतारम्लोकपालानाम्स्वमुखैरर्चितेश्वरम्।रामस्तुलितकैलासमारातिम्बह्वमन्यत,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
तस्यस्फुरतिपौलस्त्यःसीतासंगमशंसिनि।निचखानाधिकक्रोधःशरम्सव्येतरेभुजे,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
रावणस्यापिरामास्तोभित्त्वाहृदयमाशुगः।विवेशभुवमाख्यातुमुरगेभ्यइवप्रियम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
वचसैवतयोर्वाक्यमस्त्रमस्त्रेणनिघ्नतोः।अन्योन्यजयसंरम्भोववृधेवादिनोरिव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
विक्रमव्यतिहारेणसामान्याऽभूद्द्वयोरपि।जयश्रीरन्तरावेदिर्मत्तवारणयोरिव,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
कृतप्रतिकृतप्रीतैस्तयोर्मुक्ताम्सुरासुरैः।परस्परशरव्राताःपुष्पवृष्टिम्नसेहिरे,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
अयःशङ्कुचिताम्रक्षःशतघ्नीमथशत्रवे।हृताम्वैवस्वतस्येवकूटशाल्मलिमक्षिपत्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
राघवोरथमप्राप्ताम्तामाशाम्चसुरद्विषाम्।अर्धचन्द्रमुखैर्बाणैश्चिच्छेदकदलीसुखम्,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
अमोघम्संदधेचास्मैधनुष्येकधनुर्धरः।ब्राह्ममस्त्रम्प्रियाशोकशल्यनिष्कर्षणौषधम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
तद्व्योम्निशतधाभिन्नम्ददृशेदीप्तिमन्मुखम्।वपुर्महोरगस्येवकरालफलमण्डलम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
तेनमन्त्रप्रयुक्तेननिमेषार्धादपातयत्।सरावणशिरःपङ्क्तिमज्ञातव्रणवेदनाम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
बालार्कप्रतिमेवाप्सुवीचिभिन्नापतिष्यतः।रराजरक्षःकायस्यकण्ठच्छेदपरम्परा,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0
मरुताम्पश्यताम्तस्यशिरांसिपतितान्यपि।मनोनातिविशस्वासपुनःसंधानशङ्किनाम्,0,0,0,0,0,0,1,1,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
अथमदगुरुपक्षैलोकपालद्विपानामनुगतमलिवृन्दैर्गण्डभित्तीर्विहाय।उपनतमणिबन्धेमूर्ध्निपौलस्त्यशत्रोःसुरभिसुरविमुक्तम्पुष्पवर्षम्पपात,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
यन्ताहरेःसपदिसंहृतकार्मुकज्यमापृच्छ्यराघवमनुष्ठितदेवकार्यम्।नामाङ्करावणशराङ्कितकेतुयष्टिमूर्ध्वम्रथम्हरिसहस्रयुजम्निनाय,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0
रघुपतिरपिजातवेदोविशुद्धाम्प्रगृह्यप्रियाम्प्रियसुहृदिबिभीषणेसंगमय्यश्रियम्वैरिणः।रविसुतसहितेनतेनानुयातःससौमित्रिणाभुजविजितविमानरत्नाधिरूढःप्रतस्थेपुरीम्,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1,0,0,0,0
इतिकालिदासकृतरघुवंशमहाकाव्येद्वादशःसर्गः,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,0,1
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