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केन्द्रीय जहाजरानी, सड़क परिवहन और राजमार्ग तथा जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री श्री नितिन गडकरी कल मुम्बई बंदरगाह पर वाटरफ्रंट विकास के तहत दो तैरते रेस्त्रां का उद्घाटन करेंगे। श्री गडकरी मुम्बई बंदरगाह ट्रस्ट के नए पूर्वी वाटरफ्रंट पर भूमि पूजन समारोह में भाग लेंगे। श्री गडकरी उद्यम संसाधन नियोजन (ईआरपी) के विकास के साथ ही एक्सेस कंट्रोल एंड आरएफआईडी प्रणाली की भी शुरूआत करेंगे। श्री गडकरी मुम्बई-ऐलिफेंटा रोप-वे और बंदरगाह पर एक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के लिए निविदा आमंत्रण की भी शुरूआत करेंगे।मुम्बई बंदरगाह पर बनने वाले तैरते रेस्त्रां की 475 लोगों की क्षमता है। तीन तैरते रेस्तरां के लिए लाइसेंस प्रदान किया गया है। इनमें से दो गेटवे ऑफ इंडिया के पास और एक गिरगांव चौपाटी के पास बनेगा। ये रेस्त्रां पारिवारिक कार्यक्रमों, कॉरपोरेट या विशेष आयोजनों, सार्वजनिक बैठकों इत्यादि के लिए उपलब्ध होंगे। सुरक्षा की दृष्टि से इनका पंजीकरण महाराष्ट्र मैरिटाईम बोर्ड (एमएमबी) के साथ किया गया है। समुद्र के हिसाब से इनके टिकने के लिए जरूरी साधनों, जीवन रक्षक यंत्रों और अग्निशमन उपकरणों का भी परीक्षण कर लिया गया है। इन रेस्त्रां में 500 जीवन रक्षक जैकेट और रबर की 24 छोटी नौकाएं उपलब्ध रहेंगी। इनमें 2 वीएचएफ, 1 रडार, ईको-साउंडर, जीपीएस और जहाजों के आवागमन पर नजर रखने के लिए एआईएस लगे होंगे।सभी जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ मुम्बई-ऐलिफेंटा रोपवे समुद्र पर बनी दुनिया की सबसे अधिक लगभग 8 किलोमीटर लम्बी होगी। इसका निर्माण समुद्र तल से 50 से लेकर 125 मीटर की ऊंचाई तक होगा, जिसके एक छोर से दूसरे छोर पर जाने में 16 मिनट का समय लगेगा। रोपवे पर 800 करोड़ रुपये की लागत आएगी। मुम्बई बंदरगाह पर 600 बिस्तर वाला एक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का भी निर्माण होगा, जिसमें 75000 बंदरगाहकर्मियों और उनके आश्रितों का ईलाज होगा। इस परियोजना पर 693 करोड़ रुपये की लागत आएगी। ****आर.के.मीणा/अर्चना/एके/डीके-11259
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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी सोमवार, 12 नवम्बर, 2018 को वाराणसी में गंगा नदी पर नवनिर्मित बहुआयामी टर्मिनल राष्ट्र को समर्पित करेंगे। यह गंगा नदी पर बनाये जा रहे तीन बहुआयामी टर्मिनलों और दो इंटरमॉडल टर्मिनलों में से एक है। इन बहुआयामी टर्मिनलों का निर्माण जलमार्ग विकास परियोजना के तहत कराया जा रहा है, जिसका उद्देश्य 1500 से 2000 टन तक भारी जहाजों को वाराणसी से हल्दिया तक चलाने के लिए गंगा नदी का विस्तार करना है। इसका उद्देश्य अंतर्देशीय जलमार्ग को सस्ता, पर्यावरण के अनुकूल परिवहन बनाना और विशेष रूप से कार्गो जहाजों के आवागमन को बढ़ावा देना है। यह परियोजना भारतीय अंतर्देशीय जल मार्ग प्राधिकरण के अधीन चल रही है। जल मार्ग विकास परियोजना (जेएमवीपी) को राष्ट्रीय जल मार्ग-1 के हल्दिया-वाराणसी मार्ग के खंड पर विश्व बैंक की तकनीकी और वित्तीय सहायता से चलाया जा रहा है, जिसकी अनुमानित लागत 5369.18 करोड़ रुपये है। इसमें भारत सरकार और विश्व बैंक की साझेदारी 50-50 प्रतिशत होगी। इस परियोजना में तीन बहुआयामी टर्मिनल (वाराणसी, साहिबगंज और हल्दिया), दो इंटरमॉडल टर्मिनल, पांच रोल ऑन-रोल ऑफ (रो-रो) टर्मिनल, फरक्का में नई नेवीगेशन लॉक, एकीकृत जहाज मरम्मत एवं रखरखाव सुविधा, डीजीपीएस, नदी सूचना प्रणाली (आरआईएस), नदी प्रशिक्षण एवं नदी संरक्षण कार्य शामिल हैं। आर.के.मीणा/अर्चना/एके/जीआरएस-11123
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विश्व बैंक रिपोर्ट 2019 के अनुसार ‘कारोबार में सुगमता’ सूचकांक में 23 पायदानों की ऊंची छलांग लगाकर भारत वर्ष 2017-18 के 100वें पायदान से ऊपर चढ़कर वर्ष 2018-19 में 77वें पायदान पर पहुंच गया है। इससे संकेत मिलता है कि भारत वैश्विक मानकों को अपनाने की दिशा में निरंतर तेज गति से बढ़ रहा है। इस लम्बी छलांग में जिस एक महत्वपूर्ण पैमाने ने उल्लेखनीय योगदान दिया है, वह ‘सीमा पार व्यापार’ है। इस मोर्चे पर भारत की रैंकिंग पिछले वर्ष की 146वीं से काफी सुधर कर इस वर्ष 80वीं हो गई है। शिपिंग मंत्रालय ‘सीमा पार व्यापार’ पैमाने पर सुधार के लिए निरंतर पहल करता रहा है। उल्लेखनीय है कि मात्रा की दृष्टि से भारत के निर्यात-आयात व्यापार के 92 प्रतिशत का संचालन बंदरगाहों पर ही होता है। रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख किया गया है कि भारत द्वारा सुधार एजेंडे को निरंतर आगे बढ़ाने से ही यह संभव हो पाया है, जिसकी बदौलत भारतीय अर्थव्यवस्था इस क्षेत्र में शीर्ष रैंकिंग वाली अर्थव्यवस्था बन गई है। बंदरगाह से जुड़े बुनियादी ढांचे के उन्नयन, प्रक्रियाओं में सुधार और दस्तावेज प्रस्तुति के डिजिटलीकरण से बंदरगाहों पर निर्यात/आयात कारगो के संचालन में लगने वाला समय काफी घट गया है, जिसने ‘सीमा पार व्यापार’ पैमाने में सुधार करने के साथ-साथ विश्व बैंक रिपोर्ट में भारत की रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। विश्व बैंक ने इस वर्ष के दौरान अपनी रैंकिंग में सर्वाधिक सुधार करने वाले देशों में भारत को भी शुमार किया है। रिपोर्ट के अनुसार, बंदरगाह क्षेत्र के लिए प्रासंगिक माने जाने वाले सीमा अनुपालन पैमाने के तहत निर्यात लागत 382.4 डॉलर से घटकर 251.6 डॉलर के स्तर पर आ गई है। इसी तरह आयात लागत भी 543.2 डॉलर से घटकर 331 डॉलर रह गई है। केन्द्रीय शिपिंग, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग और जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री श्री नितिन गडकरी ने कहा, ‘प्रमुख बंदरगाहों पर निर्यात-आयात कारगो के संचालन में बेहतरी लाने हेतु किए गए अथक प्रयासों से भारत में कारोबार करने में और ज्यादा सुगमता या आसानी संभव हो पाई है। इससे आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी और युवाओं के लिए बड़ी संख्या में रोजगार अवसर सृजित होंगे।’ सरकार ने समय एवं लागत की दृष्टि से ���ारत के एक्जिम लॉजिस्टिक्स को और ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए अनेक कदम उठाए हैं। भारत के प्रमुख बंदरगाहों के प्रदर्शन को उनके अंतर्राष्ट्रीय समकक्षों के अनुरूप करने के लिए कई अध्ययन कराए गए हैं और इनकी क्षमता एवं उत्पादकता को वैश्विक मानकों के अनुरूप करने के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं। विशेषकर 114 चिन्हित पहल की गई हैं। श्री गडकरी ने कहा, ‘बंदरगाह से जुड़ी बुनियादी ढांचागत सुविधाओं के विकास एवं क्षमता बढ़ाने, अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी बेहतर करने और एक्जिम को बढ़ावा देने के लिए मल्टी- मोडल केन्द्रों (हब) के विकास पर फोकस किया गया है। सागरमाला के तहत सरकार की बंदरगाह आधारित विकास पहल और 1.45 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक के निवेश वाली 266 बंदरगाह आधुनिकीकरण परियोजनाओं को अगले 10 वर्षों के दौरान कार्यान्वयन के लिए चिन्हित किया गया है।’ 13710 करोड़ रुपये की लागत वाली 80 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि 2.39 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजनाएं फिलहाल कार्यान्वित की जा रही हैं। श्री गडकरी ने कहा, ‘अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी बढ़ाने के उद्देश्य से सागरमाला के तहत 250907 करोड़ रुपये की लागत वाली 211 सड़क-रेल परियोजनाओं को चिन्हित किया गया है। 3989 करोड़ रुपये के निवेश वाले 15 मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक पार्कों से इस कार्यक्रम के तहत माल ढुलाई की क्षमता बेहतर होगी।’ पिछले चार वर्षों के दौरान प्रमुख बंदरगाहों पर औसत विकास दर पांच प्रतिशत से अधिक रहने के मद्देनजर शिपिंग मंत्रालय ने नीति एवं प्रक्रिया में बदलावों के साथ-साथ यंत्रीकरण के जरिए भी इनकी परिचालन क्षमता बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसके परिणामस्वरूप दक्षता से जुड़े महत्वपूर्ण पैमानों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। जहाजों पर माल लादने एवं उतारने की प्रक्रिया (टर्नअराउंड) में लगने वाला औसत समय 82 घंटों से कम होकर वर्ष 2017-18 में 64 घंटे रह गया है। प्रति जहाज बर्थ दिन औसत उत्पादन वर्ष 2016-17 के 14583 टन से बढ़कर वर्ष 2017-18 में 14912 टन हो गया है। इसी तरह प्रमुख बंदरगाहों पर यातायात वर्ष 2016-17 के 6483.98 लाख टन से बढ़कर वर्ष 2017-18 में 6794.7 लाख टन के स्तर पर पहुंच गया है। परम्परागत गतिविधियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हस्तांतरित करने, कारगो संचालन के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करने और प्रक्रियाओं के सरलीकरण स�� कारोबार को नई गति मिली है और इसके साथ ही कारोबार करने में सुगमता या आसानी सुनिश्चित हुई है। इस दिशा में निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं : सुरक्षा बढ़ाने और बंदरगाह के द्वार पर यातायात की निर्बाध आवाजाही से जुड़ी बाधाओं को दूर करने के लिए 11 प्रमुख बंदरगाहों पर रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआईडी) प्रणाली लगाई गई है। आरएफआईडी प्रणाली स्वत: ही ट्रकों और ड्राइवरों की पहचान कर लेती है तथा इसके तहत मानवीय चेकिंग के लिए बंदरगाह के द्वार पर उन्हें रुकने की जरूरत नहीं पड़ती है।प्रमुख बंदरगाहों पर एक्जिम कंटेनरों की आवाजाही पर करीबी नजर रखने के लिए डीएमआईसीडीसी की लॉजिस्टिक्स डेटाबैंक प्रणाली (एलडीबी) लगाई गई है। इससे माल भेजने वालों एवं माल प्राप्त करने वाले दोनों को ही पोर्टल से कंटेनरों की आवाजाही पर नजर रखने में मदद मिलती है। सीधी बंदरगाह डिलीवरी (डीपीडी) और सीधा बंदरगाह प्रवेश (डीपीई) की भी सुविधाएं स्थापित की गई हैं, जिससे कारखानों/बंदरगाहों से कंटेनरों की सीधी आवाजाही सुनिश्चित हो गई है और इसके लिए किसी मध्यवर्ती व्यक्ति या निकाय द्वारा संचालन करने की जरूरत नहीं पड़ती है। इससे लागत एवं समय की बचत होती है। आयात कंटेनरों की सीधी बंदरगाह डिलीवरी नवम्बर 2016 के 3 प्रतिशत से बढ़कर जुलाई, 2018 में 40.62 प्रतिशत के उच्च स्तर पर पहुंच गई। इससे डीपीडी आयातक लाभान्वित होते हैं, क्योंकि लागत में 15000 रुपये तक की बचत होती है और डिलीवरी समय औसतन पांच दिनों का होता है। निर्यात कंटेनरों के सीधे बंदरगाह प्रवेश का प्रतिशत अप्रैल, 2017 के 60 प्रतिशत से बढ़कर जुलाई, 2018 में 82.66 प्रतिशत हो गया। ड्राइव-थ्रू कंटेनर स्कैनरों को लगाने से प्रमुख बंदरगाहों पर समय बचेगा। कागजी कार्यवाही कम हो गई है और इसकी जगह प्रमुख बंदरगाहों पर ई-डिलीवरी ऑर्डर, ई-इनवॉयस और ई-पेमेंट जारी करने की व्यवस्था की गई है। विभिन्न प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण से प्रोसेसिंग में लगने वाला समय काफी घट गया है। केन्द्रीकृत वेब आधारित बंदरगाह समुदाय प्रणाली (पीसीएस) का उन्नयन किया गया है, जिसका उद्देश्य इंटरनेट आधारित इंटरफेस के जरिए इसके समस्त हितधारकों को केन्द्रीय डेटाबेस तक पहुंच सुलभ कराने के साथ-साथ वैश्विक दृश्यता या अवलोकन प्रदान करना भी है। ***आर.के.मीणा/अर्चना/आर���रएस/वाईबी-11039
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सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठान राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त विकास निगम (एनबीसीएफडीसी) ने आज नई दिल्ली में दिल्ली और एनसीआर के स्लम क्षेत्रों के बच्चों के लिए प्रश्नोत्तरी और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया। इसका उद्देश्य बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाना और उन्हें स्वस्थ व्यवहार के लिए प्रेरित करना था। महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मनाने के सिलसिले में आयोजित यह कार्यक्रम बाल उमंग दृश्य संस्था, राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय और महावीर इंटरेनेशनल के सहयोग से आयोजित किया गया। चित्रकला प्रतियोगिता और प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम के विजेताओं को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय में अपर सचिव उपमा श्रीवास्तव ने पुरस्कार और प्रमाण पत्र प्रदान किए। इस अवसर पर मंत्रालय में संयुक्त सचिव वी.एल. मीणा और संयुक्त सचिव एवं वित्तीय सलाहकार सुश्री टी.सी.ए कल्याणी भी उपस्थित थीं। इस कार्यक्रम का मुख्य संदेश उपेक्षित बच्चों को आगे लाना और उनकी आकांक्षाएं पूरी करने में सहायता प्रदान करना था। इसके जरिए उपेक्षित बच्चों की शिक्षा मनोरंजन स्वास्थ्य सांस्कृतिक-आर्थिक और सामाजिक जरूरतों पर ध्यान केन्द्रित करने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम में स्वास्थ्य जांचचित्रकला प्रतियोगिता और प्रश्नोत्तरी का आयोजन भी शामिल था। इस अवसर पर आयोजित गतिविधियों में उपेक्षित बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन स्वच्छता के बारे में चित्रकला प्रतियोगिताबेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओं और बाल विवाह विषय पर नुक्कड़ नाटकमहात्मा गांधी के जीवन और कार्यों के बारे में प्रश्नोत्तरी तथा नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच और दंत जांच शिविर का आयोजन शामिल था। इस अवसर पर प्रत्येक प्रतिभागी को उपहार पुरस्कार और गर्म कपड़े प्रदान किए गए। कई स्वयंसेवी संगठनों ने भी इस आयोजन में सहयोग किया। आर.के.मीणा/अर्चना/आरएसबी/वाईबी-11441
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केन्द्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री श्री थावरचंद गहलोत की उपस्थिति में आज नई दिल्ली में दिव्यांग युवाओं के लिए वैश्विक आईटी प्रतिस्पर्धा 2018 का समापन हुआ। 9-11 नवंबर, 2018 तक इस तीन दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्ल्यूडी) ने रिहैबिलिटेशन इंटरनेशनल (आरआई), कोरिया और उनके सहयोगी एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स के सहयोग से किया है। श्री थावरचंद गहलोत और कोरिया, भारत और ईएससीएपी के अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने पुरस्कार प्रदान किए। कार्यक्रम का समापन करते हुए श्री थावरचंद गहलोत ने कार्यक्रम के सफल समापन के बारे में गहरा संतोष व्यक्त किया और भागीदार देशों का आह्वान करते हुए कहा कि दिव्यांग युवाओं का आईटी कौशल बढ़ाने के सभी उपाय किए जाएं। इससे वे अन्य लोगों की तुलना में एकसमान आत्म-सम्मान के साथ स्वावलंबी जीवन जी सकेंगे।आरआई, कोरिया के अध्यक्ष ने इस कार्यक्रम की सफल मेज़बानी के लिए भारत सरकार को धन्यवाद दिया। इस वर्ष 18 देशों - भारत, इंडोनेशिया, चीन, वियतनाम, मलेशिया, थाईलैंड, श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल, मंगोलिया, कंबोडिया, लाओस, फिलीपींस, कोरिया, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ब्रिटेन और संयुक्त अरब अमीरात से आए 96 दिव्यांग युवाओं (दृष्टि बाधित, श्रवण बाधित, लोकोमोटर, अक्षमता और बौद्धिक अक्षमता/अवरूद्ध शारीरिक विकास) ने “दिव्यांग युवाओं के लिए वैश्विक आईटी प्रतिस्पर्धा 2018” में भाग लिया। ई-टूल और ई-लाइफ मैपिंग पर आधारित व्यक्तिगत स्पर्धा 9 नवंबर, 2018 को आयोजित की गई थी और सामूहिक प्रतिस्पर्धा कार्यक्रम 10 नवंबर, 2018 को पूरा हो गया था। साथ ही, दिव्यांगजनों का सशक्तिकरण बढ़ाने के लिए आईसीटी के इस्तेमाल के बारे में विभिन्न भागीदार देशों द्वारा अपनाए जा रहे श्रेष्ठ क्रियाकलापों को दर्शाने के लिए आईटी फोरम नामक एक अन्य कार्यक्रम में आईटी चुनौती प्रतिस्पर्धा आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में श्रेष्ठ स्वयंसेवी पुरस्कारों सहित विभिन्न श्रेणियों में 55 पुरस्कार प्रदान किए गए। प्रत्येक श्रेणी यानी दृष्टि, श्रवण, शारीरिक एवं विकास/बौद्धिक अक्षमता में व्यक्तिगत और सामूहिक कार्यक्रमों में “सर्वश्रेष्ठ, विशिष्ट और उत्तम” नामक तीन पुरस्कार प्रदान किए गए।थाइलैंड ने सर्वाधिक 6 पुरस्कार जीते, उसके बाद 5 पुरस्कारों के साथ फिलीपिंस को स्थान मिला। भारत ने सुपर चैलेंजर पुरस्कारों सहित 3 पुरस्कार जीते। भारत से श्री मनजोत सिंह ने दृष्टि अक्षमता श्रेणी के तहत ई-टूल चैलेंज और ई-लाइफ चैलेंज में दो पुरस्कार जीते। साथ ही, भारत के श्री सौरव कुमार सिन्हा ने सुपर चैलेंजर पुरस्कार जीता। इंडोनेशिया की सुश्री फैयजा पुत्री और अदिला ने ‘ग्लोबल आईटी लीडर पुरस्कार’ जीते।दिव्यांग युवाओं के लिए वैश्विक आईसीटी चैलेंज के आयोजन का मुख्य उद्धेश्य आईटी की मदद से दिव्यागों का कौशल विकास करना है ताकि वह अपनी कमियों पर विजय पा सकें और इस तरह एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बसने वाले सभी दिव्यांग जन समाज में अपनी सहभागिता बढ़ाने और अपना जीवन स्तर सुधारने में कामयाब हो सकें। यह एक ऐसी क्षमता निर्माण परियोजना है, जो दिव्यांग युवाओं को आईसीटी और संबंधित क्रियाकलापों तक उनकी पहुंच कायम कराते हुए एक बेहतर भविष्य के लिए उनकी सीमाओं और चुनौतियों पर विजय प्राप्त करने में उनकी मदद करती है। इसके साथ ही विकलांगताओं से संबंधित भागीदार देशों के बीच अंतर्राष्ट्रीय सहयोग तथा आदान-प्रदान बढ़ाने के लिए आईसीटी एजेंडा निर्धारित करते समय जानकारी और सामाजिक भागीदारी से लैस करने में मदद मिलेगी। भारत की ओर से इस प्रतिस्पर्धा के लिए 12 दिव्यांग युवाओं को नामित किया गया था। इनका चयन मंत्रालय द्वारा जून 2018 में कुरुक्षेत्र में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के जरिए किया गया था। भारत इस तरह की वैश्विक प्रतियोगिता में 2013 से ही हिस्सा ले रहा है और तब से यह पुरस्कार जीतता रहा है। इस प्रतियोगिता का आयोजन पिछले साल वियतनाम में हुआ था। ***आर.के.मीणा/अर्चना/एसकेएस/एमएस-11149
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आज नई दिल्ली में 18 देशों - भारत, इंडोनेशिया, चीन, वियतनाम, मलेशिया, थाईलैंड, श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल, मंगोलिया, कंबोडिया, लाओस, फिलीपींस, कोरिया, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ब्रिटेन और संयुक्त अरब अमीरात से आए लगभग 100 दिव्यांग युवा (दृष्टि बाधित, श्रवण बाधित, लोकोमोटर, अक्षमता और बौद्धिक अक्षमता/अवरूद्ध शारीरिक विकास) “दिव्यांग युवाओं के लिए वैश्विक आईटी प्रतिस्पर्धा 2018” में भाग ले रहे हैं। केन्द्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री श्री कृष्ण पाल गुर्जर ने इस तीन दिवसीय कार्यक्रम का कल उद्घाटन किया था। 9 नवंबर से 11 नवंबर, 2018 तक चलने वाले इस कार्यक्रम का आयोजन सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्ल्यूडी) ने रिहैबिलिटेशन इंटरनेशनल (आरआई), कोरिया और उनके सहयोगी एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स के सहयोग से किया है। 11 नवंबर, 2018 को पुरस्कार समारोह आयोजित किया जाएगा।ई-टूल और ई-लाइफ मैपिंग पर आधारित व्यक्तिगत स्पर्धा कल 9 नवंबर, 2018 को आयोजित की गई थी और सामूहिक प्रतिस्पर्धा कार्यक्रम आज पूरा हो गया। साथ ही, दिव्यांगजनों का सशक्तिकरण बढ़ाने के लिए आईसीटी के इस्तेमाल के बारे में विभिन्न भागीदार देशों द्वारा अपनाए जा रहे श्रेष्ठ क्रियाकलापों को दर्शाने के लिए आईटी फोरम नामक एक अन्य कार्यक्रम में आईटी चुनौती प्रतिस्पर्धा आयोजित की गई। विभिन्न देशों से आए भागीदार दिव्यांग युवाओं और अन्य प्रतिनिधियों के सम्मान में आज भारत सरकार की ओर से एक सांस्कृतिक संध्या कार्यक्रम आयोजित किया गया था। उसके बाद एक शानदार रात्रिभोज आयोजित किया गया।दिव्यांग युवाओं के लिए वैश्विक आईसीटी चैलेंज के आयोजन का मुख्य उद्धेश्य आईटी की मदद से दिव्यागों का कौशल विकास करना है ताकि वह अपनी कमियों पर विजय पा सकें और इस तरह एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बसने वाले सभी दिव्यांग जन समाज में अपनी सहभागिता बढ़ाने और अपना जीवन स्तर सुधारने में कामयाब हो सकें। यह एक ऐसी क्षमता निर्माण परियोजना है, जो दिव्यांग युवाओं को आईसीटी और संबंधित क्रियाकलापों तक उनकी पहुंच कायम कराते हुए एक बेहतर भविष्य के लिए उनकी सीमाओं और चुनौतियों पर विजय प्राप्त करने में उनकी मदद करती है। इसके साथ ही विकलांगताओं से संबंधित भागीदार देशों के बीच अंतर्र��ष्ट्रीय सहयोग तथा आदान-प्रदान बढ़ाने के लिए आईसीटी एजेंडा निर्धारित करते समय जानकारी और सामाजिक भागीदारी से लैस करने में मदद मिलेगी। भारत की ओर से इस प्रतिस्पर्धा के लिए 12 दिव्यांग युवाओं को नामित किया गया था। इनका चयन मंत्रालय द्वारा जून 2018 में कुरुक्षेत्र में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के जरिए किया गया था। भारत इस तरह की वैश्विक प्रतियोगिता में 2013 से ही हिस्सा ले रहा है और तब से यह पुरस्कार जीतता रहा है। इस प्रतियोगिता का आयोजन पिछले साल वियतनाम में हुआ था। ***आर.के.मीणा/अर्चना/एसकेएस/एमएस-11150
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केन्द्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा नयी दिल्ली में आयोजित दिव्यांग वैश्विक सूचना प्रैाद्योगिकी स्पर्धा में 18 देशों के बौद्धिक अक्षमता, अवरुद्ध शारीरिक विकास तथा लोकोमोटर अक्षमता वाले करीब 100 दिव्यांग युवा हिस्सा ले रहे हैं । ये प्रतिभागी भारत,इंडोनेशिया,मलेशिया,चीन,वियतनाम,थाईलैंड,श्रीलंका,बांग्लादेश,नेपाल,मंगोलिया,कंबोडिया,लाओस,फिलीपींस,कोरिया,कजाकिस्तान,किर्गिस्तान,संयुक्त अरब अमीरात और ब्रिटेन से आए हैं। इस तीन दिवसीय प्रतिस्पर्धा के आयोजन का उद्घाटन कल सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री श्री कृष्ण पाल गुर्जर ने किया था। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांग जन सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्ल्यूडी) तथा रिहेबिलिटेशन इंटरनेशनल कोरिया और उसके सहयोगी साझेदार एलजी इलेक्ट्रानिक्स की ओर से 9 नवंबर से 11 नवंबर तक नयी दिल्ली में आयोजित किया गया है। विजेताओं को 11 नवंबर को पुरस्कार दिए जाएंगे। .इस प्रतिस्पर्धा के आयोजन का मुख्य उद्धेश्य आईटी की मदद से दिव्यागों का कौशल विकास करना है ताकि वह अपनी कमियों पर विजय पा सकें और इस तरह एशिया प्रशांत क्षेत्र में बसने वाले सभी दिव्यांग जन समाज में अपनी सहभागिता बढ़ाने और अपना जीवन स्तर सुधारने में कामयाब हो सकें।भारत की ओर से इस प्रतिस्पर्धा के लिए 12 दिव्यांग युवाओं को नामित किया गया है। इनका चयन मंत्रालय द्वारा जून 2018 में कुरुक्षेत्र में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के जरिए किया गया था। भारत इस तरह की वैश्विक प्रतियोगिता में 2013 से ही हिस्सा ले रहा है। इस प्रतियोगिता का आयोजन पिछले साल वियतनाम में हुआ था। यह प्रतियोगिता चार विषयों पर आधारित होती है जिसमें ई-टूल (एमएस – एक्सेल, एमएस – वर्ड आदि का अनुप्रयोग) व्यक्तिगत स्पर्धा ई-लाइफ मानचित्र प्रतिस्पर्धा (विशेष परिस्थिति में प्रतिक्रिया देने की क्षमता,व्यक्तिगत ई-क्रियेटिव प्रतिस्पर्धा (एनीमेशन कहानी या गेम के निर्माण की क्षमता) सामूहिक स्पर्धा(प्रत्येक देश के लिए अलग अलग) ई-कंटेट (वीडियो बनाने की क्षमता सामूहिक स्पर्धा (प्रत्येक देश के लिए अलग-अलग) शामिल होती है। ***आर.के.मीणा/अर्चना/एमएस-11143
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केन्द्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री श्री कृष्ण पाल गुर्जर ने आज यहां दिव्यांग युवाओं के लिए वैश्विक आईटी प्रतिस्पर्धा 2018 का उद्घाटन किया। 9-11 नवंबर, 2018 तक चलने वाले इस तीन दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्ल्यूडी) ने रिहैबिलिटेशन इंटरनेशनल (आरआई), कोरिया और उनके सहयोगी एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स के सहयोग से किया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य दिव्यांग युवाओं में आईटी कौशल का विकास करना तथा दिव्यांगजनों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए सूचना और कम्प्यूटर प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। पुरस्कार समारोह का आयोजन 11 नवंबर, 2018 को किया जाएगा। इस अवसर पर डीईपीडब्ल्यूडी की सचिव श्रीमती शकुंतला डी. गेमलिन, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स, इंडिया के एमडी श्री किम की वान और यूएनईएससीएपी (दक्षिण एशिया) के प्रमुख श्री नागेश कुमार तथा अन्य गणमान्य उपस्थित थे।दिव्यांग युवाओं के लिए वैश्विक आईटी प्रतिस्पर्धा एक क्षमता निर्माण परियोजना है, जो दिव्यांगजनों को आईसीटी की सहायता से उनकी कमियों पर विजय पाने में मदद करता है। यह डिजिटल अंतर को समाप्त करेगा और समाज में दिव्यांगजनों की सहभागिता को बढ़ाएगा। दृष्टि दिव्यांगता, श्रवण दिव्यांगता, लोको मोटर दिव्यांगता और विकास संबंधी विकार (बौद्धिक अक्षमता/एमआर) वाले 100 से अधिक युवा इस कार्यक्रम में भाग लेंगे। 18 देशों - इंडोनेशिया, चीन, वियतनाम, मलेशिया, थाईलैंड, श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल, मंगोलिया, कम्बोडिया, लाओस, फिलीपींस, कोरिया, कज़ाखस्तान, किर्गिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात, भारत और ब्रिटेन के युवा इस कार्यक्रम में भाग लेंगे। भारत ने 12 दिव्यांग युवाओं को इस प्रतिस्पर्धा में भाग लेने के लिए नामित किया है। इन युवाओं का चयन राष्ट्रीय आईटी प्रतिस्पर्धा के आधार पर किया गया है, जिसे राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कुरूक्षेत्र ने संचालित किया था। भारत 2013 से इस प्रतिस्पर्धा में भाग ले रहा है और पुरस्कार जीतता रहा है। पिछले वर्ष यह कार्यक्रम वियतनाम में आयोजित हुआ था।यह प्रतिस्पर्धा दिव्यांग युवाओं में आईटी कौशल बढ़ाने पर आधारित है। अन्य युवाओं के समान सूचना और संचार सेवाओं तक पहुंच को बेहतर बनाने के लिए दिव्यांग युवाओं में आईटी कौशल होना आवश्यक है। प्रतिस्पर्धा में चार प्रतियोगिताएं होगी। ई-टूल प्रतियोगिता एमएस-ऑफिस के अनुप्रयोग कौशल के मूल्यांकन पर आधारित है। ई-लाईफ मैप प्रतियोगिता ऑनलाईन सूचना ढूंढने के कौशल से संबंधित है।अपने उद्घाटन संबोधन में श्री कृष्ण पाल गुर्जर ने दिव्यांग युवाओं के आईसीटी तक पहुंच को बेहतर बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। ताकि वे अन्य युवाओं के समान ही समाज की गतिविधियों में भाग ले सके। उन्होंने कहा कि सभी हितधारकों को दिव्यांग युवाओं में आईटी कौशल को बेहतर बनाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण और समावेश के लिए भारत पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आईटी प्रौद्योगिकी के उपयोग से उनके जीवन को बेहतर बनाने के लिए सभी कदम उठाए जा रहे है।श्री शकुंतला डी. गेमलिन ने अपने संबोधन में कहा कि संचार और सूचना प्रौद्योगिकी दिव्यांगजनों तक सूचना प्रौद्योगिकी के लाभ को पहुंचाने का प्राथमिक माध्यम है। आज हमारे पास सैकड़ों अनुप्रयोग और सॉफ्टवेयर है जिनका उपयोग दिव्यांगजनों के जीवन कौशल को बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है। इसकी सहायता से वे सम्मान का जीवन जी सकते है। आईसीटी के उपयोग से डिजिटल अंतर में कमी आएगी और दिव्यांगजनों के सामाजिक समावेश का विस्तार होगा। इसके लिए वैश्विक सूचना नेटवर्क बनाया जाना चाहिए। सॉफ्टवेयर विका के क्षेत्र में भारत पूरी दुनिया में अग्रणी देश रहा है। दिव्यांगजनों को सशक्त बनाने के लिए आईसीटी के अनुप्रयोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। हम इस दिशा में अथक प्रयास कर रहे है।उन्होंने कहा कि प्रत्येक वर्ष वैश्विक आईटी प्रतिस्पर्धा के आयोजन से दिव्यांग युवाओं में आईसीटी के उपयोग बढ़ावा मिला है। डीईपीडब्ल्यूडी प्रत्येक वर्ष जीआईसीटी के सहयोग से राष्ट्रीय आईटी प्रतियोगिता का आयोजन कर रहा है।इस अवसर पर एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया के प्रबंध निदेशक श्री किम की वान ने कहा, ‘दिव्यांग युवाओं के लिए वैश्विक आईटी प्रतिस्पर्धा के इस वर्ष भारत में आयोजन से हम बहुत प्रसन्न है। प्रत्येक वर्ष युवा छात्र इस प्रतिस्पर्धा में भाग लेते है, यह उत्साहवर्धक है। इस वर्ष भी इस आयोजन से दिव्यांग युवाओं में मूल्यों का विकास होगा और इससे उन्हें भविष्य का नेतृत्व प्रदान करने में सहायता मिलेगी।’***आर.के.मीणा/अर्चना/जेके/डीके-11131
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केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्ल्यूडी) 9 - 11 नवम्बर, 2018 तक दिव्यांग युवाओं के लिए वैश्विक आईटी प्रतिस्पर्धा आयोजित करेगा। इस वर्ष भारत, कोरिया सरकार और रिहैबिलिटेशन इंटरनेशनल (आरआई) के सहयोग से इस कार्यक्रम की मेजबानी कर रहा है। दिव्यांगता के लिए वैश्विक आईटी प्रतिस्पर्धा एक क्षमता निर्माण परियोजना है, जो दिव्यांगजनों को आईसीटी की सहायता से उनकी कमियों पर विजय पाने में मदद करता है। यह डिजिटल अंतर को समाप्त करेगा और समाज में दिव्यांगजनों की सहभागिता को बढ़ाएगा। यह परियोजना दिव्यांगजनों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (धारा 21) के दिशा-निर्देशों को लागू करने से संबंधित है। धारा 21 सूचना तक पहुंच से संबंधित है। केंद्रीय सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री श्री थावर चंद गहलोत 9 नवम्बर, 2018 को इस कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे और 11 नवम्बर, 2018 को विजेताओं को पुरस्कार वितरित करेंगे। कार्यक्रम में सरकार के उच्च अधिकारियों के भाग लेने से दिव्यांगजनों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रदर्शन होगा। यह प्रतिस्पर्धा निम्न विषयों पर आयोजित की जाएगी-ई-टूल (एमएस - एक्सेल, एमएस – वर्ड आदि का अनुप्रयोग) व्यक्तिगत स्पर्धाई-लाइफ मानचित्र प्रतिस्पर्धा (विशेष परिस्थिति में प्रतिक्रिया देने की क्षमता) व्यक्तिगत स्पर्धाई-क्रियेटिव (एनीमेशन कहानी या गेम के निर्माण की क्षमता) सामूहिक स्पर्धा (प्रत्येक देश के लिए अलग-अलग)ई-कंटेट (वीडियो बनाने की क्षमता) सामूहिक स्पर्धा (प्रत्येक देश के लिए अलग-अलग)13 – 21 वर्ष आयु वर्ग में दृष्टि दिव्यांगता, श्रवण दिव्यांगता, लोको मोटर दिव्यांगता और विकास संबंधी विकार (बौद्धिक अक्षमता/ एमआर) वाले 100 से अधिक युवा इस कार्यक्रम में भाग लेंगे। 18 देशों - इंडोनेशिया, चीन, वियतनाम, मलेशिया, थाईलैंड, श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल, मंगोलिया, कंबोडिया, लाओस, फिलीपींस, कोरिया, कज़ाखस्तान, किर्गिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात, भारत और ब्रिटेन के युवा इस कार्यक्रम में भाग लेंगे। तीन टीमों के कुल 12 प्रतिभागी भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इन युवाओं का चयन राष्ट्रीय आईटी प्रतिस्पर्धा के आधार पर किया गया है, जिसे राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कुरूक्षेत्र ने संचालित किया था। पू���ी दुनिया में दिव्यांगजनों की कुल आबादी एक अरब है। यह दुनिया की कुल आबादी का 15 प्रतिशत है। इस आबादी का बड़ा हिस्सा विकासशील देशों में रहता है जहां आईसीटी की पहुंच निम्न है। सूचना अंतर के कारण दिव्यांगजन समाज से अलग-थलग पड़ जाते हैं। इन्हें गरीबी में जीवन जीना पड़ता है। वैश्विक आईटी प्रतिस्पर्धा की शुरूआत दिव्यांग युवाओं में सूचना प्रौद्योगिकी के कौशल को बढ़ाने के उद्देश्य से की गई थी। कार्यक्रम की शुरुआत 1992 में कोरिया में हुई थी। 2011 के बाद यह वैश्विक आयोजन हो गया है। रिहैबिलिटेशन इंटरनेशनल (आरआई) इस कार्यक्रम का प्रमुख आयोजक है। कोरिया के इस संगठन का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रमुख व्यक्ति हैं : -डॉ. इन क्यू किम, रिहैबिलिटेशन इंटरनेशनल (आरआई) कोरिया के अध्यक्षडॉ. जून ओह, क्यूंग ही विश्वविद्यालय में प्रोफेसरश्री यांगी चोई, सियोल नेशनल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर श्री बोंग-किल शिन, भारत में कोरिया गणराज्य के राजदूत श्री ह्यून-डॉन बाए, राष्ट्रीय आईटी उद्योग संवर्धन एजेंसी, कोरिया के आईसीटी विकास विभाग में सलाहकारश्री जांग-वू क्वोन, जीआईटीसी की तकनीकी समिति के प्रमुख श्री नागेश कुमार, यूएनईएससीएपी, सामाजिक विकास विभाग के निदेशक ***आर.के.मीणा/अर्चना/जेके/सीएस-11111
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सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) ने चालू वित्त वर्ष यानी 2018-19 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितम्बर) के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के अनुमान स्थिर मूल्यों (2011-12) और वर्तमान मूल्यों दोनों पर ही जारी कर दिए हैं। इन अनुमानों से जुड़ी मुख्य बातों का उल्लेख नीचे किया गया है:आर्थिक गतिविधि की दृष्टि से जीवीए के अनुमानस्थिर (2011-12) मूल्यों पर अनुमानवर्ष 2018-19 की दूसरी तिमाही में स्थिर (2011-12) मूल्यों पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के बढ़कर 33.98 लाख करोड़ रुपये हो जाने का अनुमान लगाया गया है, जबकि वर्ष 2017-18 की दूसरी तिमाही में यह 31.72 लाख करोड़ रुपये आंका गया था। यह स्थिर मूल्यों पर जीडीपी में 7.1 प्रतिशत की वृद्धि दर को दर्शाता है। वर्ष 2018-19 की दूसरी तिमाही में बुनियादी स्थिर मूल्यों (2011-12) पर तिमाही जीवीए (सकल मूल्य वर्द्धित) के बढ़कर 31.40 लाख करोड़ रुपये हो जाने का अनुमान लगाया गया है, जो वर्ष 2017-18 की दूसरी तिमाही में 29.38 लाख करोड़ रुपये था। यह 6.9 प्रतिशत की वृद्धि दर को दर्शाता है।जिन क्षेत्रों ने वर्ष 2018-19 की दूसरी तिमाही में 7.0 फीसदी से ज्यादा की वृद्धि दर दर्ज की है उनमें ‘विनिर्माण’, ‘विद्युत, गैस, जलापूर्ति एवं अन्य उपयोगी सेवाएं’, ‘निर्माण’ एवं ‘लोक प्रशासन, रक्षा एवं अन्य सेवाएं’ शामिल हैं। ‘कृषि, वानिकी एवं मत्स्य पालन’, ‘खनन एवं उत्खनन’, ‘व्यापार, होटल, परिवहन, संचार एवं प्रसारण से जुड़ी सेवाओं’ और ‘वित्तीय,अचल संपत्ति एवं प्रोफेशनल सेवाओं’ की वृद्धि दर क्रमश: 3.8, (-) 2.4, 6.8 और 6.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है।दूसरी तिमाही के अनुमान कृषि, सहयोग एवं किसान कल्याण विभाग से प्राप्त वर्ष 2018-19 के खरीफ सीजन के दौरान हुए कृषि उत्पादन, बीएसई/एनएसई में सूचीबद्ध कंपनियों के संक्षिप्त वित्तीय परिणामों, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी), महालेखा नियंत्रक (सीजीए) द्वारा लेखा-जोखा रखे जाने वाले केन्द्र सरकार के व्यय के मासिक खातों के साथ-साथ जुलाई-सितम्बर 2018-19 के लिए भारत के महालेखा परीक्षक (सीएजी) द्वारा लेखा-जोखा रखे जाने वाले राज्य सरकारों के व्यय के मासिक खातों पर आधारित हैं। ‘कृषि, वानिकी एवं मत्स्य पालन’वर्ष 2018-19 की दूसरी तिमाही में बुनियादी मूल्यों पर ‘कृषि, वानिकी एवं मत्स्य पालन’ सेक्ट��� की तिमाही जीवीए वृद्धि दर 3.8 प्रतिशत रही, जबकि वर्ष 2017-18 की दूसरी तिमाही में यह वृद्धि दर 2.6 प्रतिशत थी। कृषि सहयोग एवं किसान कल्याण एवं विभाग से प्राप्त सूचनाओं के अनुसार कृषि वर्ष 2018-19 के खरीफ सीजन के दौरान खाद्यान्न उत्पादन में 0.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि वर्ष 2017-18 की समान अवधि में यह दर 1.7 प्रतिशत आंकी गई थी।खनन एवं उत्खनन वर्ष 2018-19 की दूसरी तिमाही में बुनियादी मूल्यों पर ‘खनन एवं उत्खनन’ सेक्टर की तिमाही जीवीए वृद्धि दर 2.4 प्रतिशत घट गई, जबकि वर्ष 2017-18 की दूसरी तिमाही में यह वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत दर्ज की गई थी। खनन क्षेत्र के महत्वपूर्ण संकेतकों यथा कोयला, कच्चा तेल एवं प्राकृतिक गैस के उत्पादन और आईआईपी से जुड़े खनन की वृद्धि दर वर्ष 2018-19 की दूसरी तिमाही में क्रमश: 6.2, (-) 4.4, (-) 2.0 तथा 1.0 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि वर्ष 2017-18 की दूसरी तिमाही में ये दरें क्रमश: 8.5, (-) 0.7, 4.7 तथा 7.1 प्रतिशत आंकी गई थीं।विनिर्माणवर्ष 2018-19 की दूसरी तिमाही में बुनियादी मूल्यों पर ‘विनिर्माण’ सेक्टर की तिमाही जीवीए वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत आंकी गई, जबकि वर्ष 2017-18 की दूसरी तिमाही में यह वृद्धि दर 7.1 प्रतिशत थी। आईआईपी से जुड़े विनिर्माण ने वित्त वर्ष 2018-19 की दूसरी तिमाही में 5.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जबकि वित्त वर्ष 2017-18 की दूसरी तिमाही में यह दर 2.5 प्रतिशत आंकी गई थी। वर्तमान मूल्यों पर अनुमानसकल घरेलू उत्पादवर्ष 2018-19 की दूसरी तिमाही में वर्तमान मूल्यों पर जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) के बढ़कर 45.54 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच जाने का अनुमान है, जो वर्ष 2017-18 की दूसरी तिमाही में 40.68 लाख करोड़ रुपये आंकी गई थी। यह 12.0 फीसदी की वृद्धि दर दर्शाती है। वर्ष 2018-19 की दूसरी तिमाही में बुनियादी वर्तमान मूल्यों पर जीवीए के बढ़कर 41.46 लाख करोड़ रुपये हो जाने का अनुमान लगाया गया है, जो वर्ष 2017-18 की दूसरी तिमाही में 37.03 लाख करोड़ रुपये था। यह 12.0 प्रतिशत की वृद्धि दर को दर्शाता है। विभिन्न क्षेत्रों (सेक्टर) में वृद्धि दरें इस तरह रहीं : ‘कृषि, वानिकी एवं मत्स्य पालन’(2.8 प्रतिशत), ‘खनन एवं उत्खनन’(20.7 प्रतिशत), विनिर्माण (12.2 प्रतिशत), ‘विद्युत,गैस, जलापूर्ति एवं अन्य उपयोगी सेवाएं’ (16.3 प्रतिशत), ‘निर्माण’ (13.2 प्रतिशत),‘व्यापार, होटल, परिवहन एवं संचार’ (12.3 प्रतिशत), ‘वित्तीय, अचल संपत्ति एवं प्रोफेशनल सेवाओं’ (12.5 प्रतिशत) और ‘लोक प्रशासन, रक्षा एवं अन्य सेवाएं’ (16.1 प्रतिशत)।अपस्फीतिकारक (डिफ्लैटर) के रूप में उपयोग किए गए मूल्य सूचकांक वित्त वर्ष 2018-19 की दूसरी तिमाही के दौरान विभिन्न समूहों जैसे कि खनिज, विनिर्मित उत्पादों, बिजली और सभी जिसों से संबंधित थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) ने वित्त वर्ष 2017-18 की दूसरी तिमाही की तुलना में क्रमश: 8.2, 4.4, 6.4 तथा 5.0 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। वित्त वर्ष 2018-19 की दूसरी तिमाही के दौरान उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) में 3.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि वित्त वर्ष 2017-18 की दूसरी तिमाही के दौरान इसमें 3.0 प्रतिशत की वृद्धि आंकी गई थी। जीडीपी पर व्यय के अनुमानजीडीपी पर व्यय के घटकों यथा उपभोग व्यय और पूंजी निर्माण का आकलन आम तौर पर बाजार मूल्यों पर किया जाता है। निजी अंतिम उपभोग व्यय वित्त वर्ष 2018-19 की दूसरी तिमाही में वर्तमान मूल्यों पर निजी अंतिम उपभोग व्यय 26.31 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया है, जबकि वित्त वर्ष 2017-18 की दूसरी तिमाही में यह 23.58 लाख करोड़ रुपये आंका गया था। वित्त वर्ष 2018-19 की दूसरी तिमाही में स्थिर (2011-12) मूल्यों पर निजी अंतिम उपभोग व्यय 18.52 लाख करोड़ रुपये आंका गया है, जबकि वित्त वर्ष 2017-18 की दूसरी तिमाही में यह आंकड़ा 17.30 लाख करोड़ रुपये रहा था। सरकारी अंतिम उपभोग व्ययवित्त वर्ष 2018-19 की दूसरी तिमाही में वर्तमान मूल्यों पर सरकारी अंतिम उपभोग व्यय 5.99 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया है, जबकि वित्त वर्ष 2017-18 की दूसरी तिमाही में यह आंकड़ा 5.10 लाख करोड़ रुपये रहा था। वित्त वर्ष 2018-19 की दूसरी तिमाही में स्थिर (2011-12) मूल्यों पर सरकारी अंतिम उपभोग व्यय 4.22 लाख करोड़ रुपये आंका गया है, जबकि वित्त वर्ष 2017-18 की दूसरी तिमाही में यह आंकड़ा 3.74 लाख करोड़ रुपये रहा था। सकल स्थायी (फिक्स्ड) पूंजी निर्माणवित्त वर्ष 2018-19 की दूसरी तिमाही में वर्तमान मूल्यों पर सकल स्थायी (फिक्स्ड) पूंजी निर्माण 13.28 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया है, जबकि वित्त वर्ष 2017-18 की दूसरी तिमाही में यह 11.37 लाख करोड़ रुपये आंका गया था। वित्त वर्ष 2018-19 की दूसरी तिमाही में स्थिर (2011-12) मूल्यों पर सकल स्थायी (फिक्स्ड) पूंजी निर्माण 10.99 लाख करोड़ रुपये रहा है, जबकि वित्त वर्ष 2017-18 की दूसरी तिमाही में यह आंकड़ा 9.77 लाख करोड़ रुपये था। वर��ष 2018-19 की दूसरी तिमाही में जीवीए और व्यय से जुड़ी विस्तृत जानकारी पाने के लिए अंग्रेजी का अनुलग्नक यहां क्लिक करें***आर.के.मीणा/अर्चना/आरआरएस/वीके-11512
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सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) ने आज अक्टूबर, 2018 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) की दरों के आंकड़े जारी किए। अक्टूबर 2018 माह के लिए ग्रामीण, शहरी और संयुक्त उपभोक्ता आंकड़े जारी किये गये हैं। इन आंकड़ों के अनुसार महंगाई की दरों में पिछले वर्ष अक्टूबर और इस वर्ष सितम्बर माह की तुलना में कमी दर्ज हुई है। इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सीपीआई आधारित महंगाई दर 2.82 फीसदी (अनंतिम) रही, जो अक्टूबर, 2017 में 3.36 फीसदी थी। इसी तरह शहरी क्षेत्रों के लिए सीपीआई आधारित महंगाई दर अक्टूबर, 2018 में 3.97 फीसदी (अनंतिम) आंकी गई, जो अक्टूबर, 2017 में 3.81 फीसदी थी। ये दरें सितम्बर, 2018 में क्रमशः 3.27 और 4.31 फीसदी (अंतिम) थीं।केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने आज अक्टूबर, 2018 के लिए उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (सीएफपीआई) पर आधारित महंगाई दर के आंकड़े भी जारी किए। इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सीएफपीआई आधारित महंगाई दर (-) 0.57 फीसदी (अनंतिम) रही, जो अक्टूबर, 2017 में 1.75 फीसदी थी। इसी तरह शहरी क्षेत्रों के लिए सीएफपीआई आधारित महंगाई दर अक्टूबर, 2018 में (-) 1.15 फीसदी (अनंतिम) आंकी गई, जो अक्टूबर, 2017 में 2.13 फीसदी थी। ये दरें सितम्बर, 2018 में क्रमशः 0.87 और (-) 0.22 फीसदी (अंतिम) थीं।अगर शहरी एवं ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों पर समग्र रूप से गौर करें तो उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित महंगाई दर अक्टूबर, 2018 में 3.31 फीसदी (अनंतिम) आंकी गई है, जो अक्टूबर, 2017 में 3.36 फीसदी (अंतिम) थी। वहीं, सीपीआई पर आधारित महंगाई दर सितम्बर, 2018 में 3.70 फीसदी (अंतिम) थी। इसी तरह यदि शहरी एवं ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों पर समग्र रूप से गौर करें तो उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (सीएफपीआई) पर आधारित महंगाई दर अक्टूबर, 2018 में (-) 0.86 फीसदी (अनंतिम) रही है, जो अक्टूबर, 2017 में 1.90 फीसदी (अंतिम) थी। वहीं, सीएफपीआई पर आधारित महंगाई दर सितम्बर, 2018 में 0.51 फीसदी (अंतिम) थी।सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) ने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के लिए आधार वर्ष को 2010=100 से संशोधित करके 2012=100 कर दिया है।सूचकांक में हुए मासिक बदलाव के साथ-साथ अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांकों और महंगाई दर से जुड़ी विस्तृत जानकारी प्राप्त कर��े के लिए अंग्रेजी का अनुलग्नक यहां क्लिक करें ****आर.के.मीणा/अर्चना/आरएसबी/एसएस-11164
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सितंबर, 2018 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) 128.6 अंक रहा, जो सितंबर, 2017 के मुकाबले 4.5 फीसदी ज्यादा है। इसका मतलब यही है कि सितंबर, 2018 में औद्योगिक विकास दर 4.5 फीसदी रही। उधर, अप्रैल-सितंबर, 2018 में औद्योगिक विकास दर पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में 5.1 फीसदी आंकी गई है।सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा सितंबर, 2018 के लिए जारी किये गये औद्योगिक उत्पादन सूचकांक के त्वरित आकलन (आधार वर्ष 2011-12=100) से उपर्युक्त जानकारी मिली है। 14 स्रोत एजेंसियों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर आईआईपी का आकलन किया जाता है। औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआईपीपी), केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और उर्वरक विभाग भी इन एजेंसियों में शामिल हैं।सितंबर, 2018 में खनन, विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) एवं बिजली क्षेत्रों की उत्पादन वृद्धि दर सितंबर, 2017 के मुकाबले क्रमश: 0.2 फीसदी, 4.6 फीसदी तथा 8.2 फीसदी रही। उधर, अप्रैल-सितंबर 2018 में इन तीनों क्षेत्रों यानी सेक्टरों की उत्पादन वृद्धि दर पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में क्रमश: 3.3, 5.3 तथा 6.2 फीसदी आंकी गई है।उद्योगों की दृष्टि से विनिर्माण क्षेत्र के 23 उद्योग समूहों (दो अंकों वाली एनआईसी-2018 के अनुसार) में से 17 समूहों ने सितंबर, 2017 की तुलना में सितंबर, 2018 के दौरान धनात्मक वृद्धि दर दर्ज की है। इस दौरान ‘फर्नीचर के विनिर्माण’ ने 32.8 प्रतिशत की सर्वाधिक धनात्मक वृद्धि दर दर्ज की है। इसके बाद ‘पहनने योग्य परिधान’ का नम्बर आता है जिसने 20.9 प्रतिशत की धनात्मक वृद्धि दर दर्ज की है। फर्नीचर को छोड़कर लकड़ी और कॉर्क की लकड़ी एवं उत्पादों के निर्माण की वृद्धि दर 20.6 प्रतिशत आंकी गई है। वहीं, दूसरी ओर 'रिकॉर्डेड मीडिया की प्रिंटिंग एवं रिप्रोडक्शन’ ने (-) 12.9 प्रतिशत की सर्वाधिक ऋणात्मक वृद्धि दर दर्ज की है। इसके बाद ‘अन्य विनिर्माण’ और ‘तम्बाकू उत्पादों के विनिर्माण’ नामक उद्योग समूहों का नम्बर आता है जिन्होंने क्रमश: (-) 10.7 और (-) 7.3 प्रतिशत की ऋणात्मक वृद्धि दर दर्ज की है।उपयोग आधारित वर्गीकरण के अनुसार सितंबर, 2018 में प्राथमिक वस्तुओं (प्राइमरी गुड्स), पूंजीगत सामान, मध्यवर्ती वस्तुओं एवं बुनियादी ढांचागत/निर्माण वस्तुओं की उत्पादन वृद्धि दर सितंबर 2017 की तुलना में क्रमश: 2.6 फीसदी, 5.8 फीसदी, 1.4 फीसदी और 9.5 फीसदी रही। जहां तक टिकाऊ उपभोक्ता सामान का सवाल है, इनकी उत्पादन वृद्धि दर सितंबर, 2018 में 5.2 फीसदी रही है। वहीं, दूसरी ओर गैर-टिकाऊ उपभोक्ता सामान की उत्पादन वृद्धि दर सितंबर, 2018 में 6.1 फीसदी रही।इस प्रेस विज्ञप्ति से जुड़ी सूचना मंत्रालय की वेबसाइट http://www.mospi.nic.in पर भी उपलब्ध है।विवरण I: औद्योगिक उत्पादन सूचकांक- क्षेत्रवार(आधार वर्ष : 2011-12=100)माहखननविनिर्माणविद्युतसामान्य(14.372472)(77.63321)(7.994318)(100)2017-182018-192017-182018-192017-182018-192017-182018-19अप्रैल98.8102.6117.3123.1150.6153.7117.3122.6मई101.7107.6125.6130.1158.1164.7124.8129.6जून98.5104.9120.3128.6147.4159.9119.3127.7जुलाई92.495.5119.3127.6151.9162.1118.0125.7अगस्त92.692.1124.1130.4155.4167.2122.1127.8सितंबर*94.494.6125.6131.4150.5162.9123.1128.6अक्टूबर100.8123.7149.8122.5नवंबर107.7127.7140.1125.8दिसंबर115.5132.0143.9130.6जनवरी114.7133.8149.5132.3फरवरी110.1129.7136.1127.4मार्च131.6140.2156.7140.3औसतन अप्रैल-सितंबर96.499.6122.0128.5152.3161.8120.8127.0पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में वृद्धि दर सितंबर*7.60.23.84.63.48.24.14.5अप्रैल-सितंबर3.93.32.05.35.76.22.65.1* सितंबर 2018 से जुड़े सूचकांक त्वरित अनुमान हैंनोट : जून, 2018 और अगस्त, 2018 से जुड़े सूचकांकों में अद्यतन उत्पादन आंकड़े शामिल हैं औद्योगिक उत्पादन सूचकांक से जुड़ी विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए अंग्रेजी का अनुलग्नक यहां क्लिक करें ***आर.के.मीणा/अर्चना/आरआरएस/एसकेपी-11165
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इस्पात मंत्री चौधरी बिरेंद्र सिंह ने आज दुर्गापुर में मिश्र धातु इस्पात संयंत्र (एएसपी) का दौरा किया। एएसपी के प्रदर्शन की समीक्षा के बाद मंत्री ने कहा कि एएसपी अब परिचालन और वित्तीय दोनों मोर्चे पर बेहतर प्रदर्शन दर्ज कर रहा है। चौधरी बिरेंद्र सिंह ने यह भी कहा कि यह संयंत्र अगले वर्ष से शुद्ध लाभ अर्जित करने के लिए तैयार है।एएसपी का उत्पाद पोर्टफोलियो काफी विविधतापूर्ण है उसमें इस्पात संयंत्रों के अलावा रक्षा, रेलवे, वाहन, बिजली संयंत्र, भारी इंजीनियरिंग एवं विनिर्माण उद्योग जैसे रणनीतिक क्षेत्रों के 400 से अधिक महत्वपूर्ण उत्पाद शामिल हैं। मिश्र धातु एवं विशेष इस्पात के उत्पादन में भारत की आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए एएसपी की स्थापना 1965 में हिंदुस्तान स्टील लिमिटेड (अब सेल) के तहत की गई थी।इस्पात मंत्री ने दुर्गापुर इस्पात संयंत्र (डीएसपी) का भी दौरा किया। उन्होंने कहा कि 2030-31 तक 300 एमटी इस्पात बनाने की राष्ट्रीय इस्पात नीति के अनुरूप डीएसपी की विकास योजना तैयार की गई है और सेल की योजना उत्पादन को 50 टन तक बढ़ाने की है। उन्होंने कहा कि सेल को कहीं अधिक लाभप्रद होना चाहिए और उसे बाजार में अपनी अग्रणी की स्थिति को बनाए रखना चाहिए। संयंत्र के मुद्दों के अलावा चौधरी बिरेंदर सिंह ने टाउनशिप में विकास और डीएसपी मुख्य अस्पताल में बेहतर चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करने की आवश्यकता के बारे में भी बात की।दुर्गापुर इस्पात संयंत्र की स्थापना पचास के दशक में 1 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) कच्चे स्टील की प्रारंभिक उत्पादन क्षमता के साथ की गई थी। नब्बे के दशक में आखिरी आधुनिकीकरण के दौरान उसकी उत्पादन क्षमता को 1.8 एमटीपीए तक बढ़ाया गया था। डीएसपी फिलहाल अपनी आधुनिकीकरण एवं विस्तार योजना (चरण -1) को लागू कर रहा है। इसका उद्देश्य मूल्यवर्द्धित रोल्ड उत्पाद तैयार करना है। पहला चरण पूरा होने के बाद डीएसपी की क्षमता हॉट मेटल में बढ़कर 2.40 एमटीपीए, कच्चे इस्पात में 2.20 एमटीपीए और बिक्री योग्य इस्पात में 2.12 एमटीपीए हो जाएगी।इस्पात मंत्री चौधरी बिरेंदर सिंह ने कल सालेम इस्पात संयंत्र का दौरा किया और उसके प्रदर्शन की समीक्षा की। उन्होंने इस संयंत्र को लाभप्रद बनाने के तरीकों और साधनों पर अधिकारियों के साथ चर्चा की क्योंकि पिछले 10 वर्षों से इस संयंत्र को सालाना करीब 200 करोड़ रूपये का नुकसान हो रहा है। हालांकि इस साल घाटे में कमी आई है और उसमें 20% से अधिक की कमी आ सकती है।तमिलनाडु के सालेम और पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में तीन इस्पात संयंत्रों के मंत्री के दौरे के दौरान सेल के चेयरमैन और संयुक्त सचिव, इस्पात उनके साथ थे।आर.के.मीणा/एएम/एस-11562
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पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार की स्वदेश दर्शन योजना के तहत दो प्रमुख परियोजनाओं का आज अरूणाचल प्रदेश के तवांग में पीटीएसओ झील में उद्घाटन किया गया। ये परियोजनाएं हैः- पूर्वोत्तर सर्किटों का विकास- भालुकपोंग-बोमडिला- तवांग परियोजना और नफरा- सेप्पा- पप्पू, पासा, पक्के घाटियां - सांगडुपाटा- न्यू सगाली- ज़ीरो-योम्चा परियोजनाएं"।इन परियोजनाओं का केंद्रीय पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री के.जे. अल्फॉन्स, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री, श्री पेमा खांडू और अरुणाचल प्रदेश के पर्यटन मंत्री, श्री जकर जैमलिन ने संयुक्त रूप से उद्घाटन किया। इस अवसर पर अन्य महत्वपूर्ण गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।इस अवसर पर श्री के.जे. अल्फॉन्स ने कहा कि मंत्रालय के प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं और इस क्षेत्र में विदेशी पर्यटन आगमन में पिछले कुछ वर्षों के दौरान बढ़ोतरी का रुख दिखाई दिया है। वर्ष 2017 के दौरान जहां 1.45 लाख पर्यटक आए थे 2017 के दौरान 1.6 लाख विदेशी पर्यटक इस क्षेत्र में आए। इस प्रकार 2016 के मुकाबले 16.7 प्रतिशत बढ़ोतरी दर्ज हुई। 2017 में 95.47 लाख घरेलू पर्यटक इस क्षेत्र में आए जबकि 2016 में 77.71 लाख पर्यटक यहां आए थे। इस प्रकार 2016 की तुलना में 22.8 प्रतिशत बढ़ोतरी दर्ज हुई। पर्यटकों की बढ़ती हुई तादाद ने इस क्षेत्र के स्थानीय लोगों के लिए बेहतर रोजगार के अवसर जुटाए हैं।भालुकपोंग-बोमडिला के विकास की 49.77 करोड़ रुपये लागत वाली इस परियोजना को पर्यटन मंत्रालय ने मार्च 2015 में मंजूरी दी थी। इस परियोजना के तहत मंत्रालय ने जांग, सोरंग मठ, लंपो, ज़ीमिथांग, बुमला पास, ग्रिट्संग टीएसओ झील, पीटीएसओ झील, थिंगबू और ग्रेन्खा हॉट स्प्रिंग और सेला झील में आवास, कैफेटेरिया, मार्गस्थ सुविधाएं अंतिम छोर तक जुड़ाव, पाथवे, शौचालय, बहुउद्देशीय हाल जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं।नाफरा- सेपा-पप्पू, पासा, पक्के घाटियां- संगदूपोटा- न्यू सगाली- ज़ीरो-योम्चा की विकास परियोजना को दिसंबर 2015 में पर्यटन मंत्रालय द्वारा मंजूरी दी गई थी। इस परियोजना की लागत 97.14 करोड़ रुपये थी।पूर्वोत्तर क्षेत्र में पर्यटन का विकास केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय का एक प्रमुख केंद्र बिंदु है। मंत्रालय ने इस क्षेत्र में घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन के विकास के लिए अनेक पहल की हैं। मंत्रालय ने इस क्षेत्र में अपनी प्रमुख योजनाओं स्वदेश दर्शन और प्रसाद के तहत पर्यटन बुनियादी ढांचे को बहुत महत्व दिया है। मंत्रालय ने पर्यटन के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए अपनी स्वदेश दर्शन और प्रसाद योजनाओं के तहत सभी पूर्वोत्तर क्षेत्र के राज्यों को शामिल करके 1349.04 करोड़ रुपये की 16 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। मंत्रालय इस क्षेत्र में पर्यटन के विकास के लिए अन्य केंद्रीय मंत्रालयों जैसे संस्कृति, पूर्वोत्तर विकास, सड़क परिवहन और राजमार्ग तथा नागर विमानन के साथ मिलकर सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। स्वदेश दर्शन पर्यटन मंत्रालय की एक प्रमुख योजना है जिसका उद्देश्य एक योजनाबद्ध और प्राथमिकता वाले तरीके से देश में स्वदेश दर्शन योजना के तहत विषयगत सर्किट का विकास करना है। यह योजना 2014 -15 में शुरू की गई थी और आज तक मंत्रालय ने 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 5873.99 करोड़ रुपये की लागत वाली 53 परियोजनाओं को मंजूरी दी हैं। इन परियोजनाओं में से 30 परियोजनाओं/प्रमुख घटकों के इस वर्ष पूरा होने की उम्मीद है। पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास के लिए केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय इस क्षेत्र की विविधता, पर्यटन उत्पादों और इस क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति का उल्लेख करते हुए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में विशेष प्रचार करता है। पर्यटन मंत्रालय ने पूर्वेत्तर क्षेत्र में पर्यटन और आतिथ्य सत्कार में कुशल कामगारों के सृजन के लिए होटल प्रबंधन और खाद्य शिल्प संस्थान भी स्थापित किए हैं।***आर.के.मीणा/अर्चना/आईपीएस/सीएल-11233
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अंडमान और निकोबार द्वीपों में संरक्षित जनजातियों द्वारा एक अमेरिकी नागरिक के मारे जाने के मुद्दे पर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की 108वीं बैठक में चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता आयोग के अध्यक्ष डॉ. नंद कुमार साई ने की। आयोग ने घटना पर गृह मंत्रालय और अंडमान एवं निकोबार प्रशासन द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट की समीक्षा की। बैठक में जनजातीय कार्य मंत्रालय के अपर सचिव ने आयोग को अंडमान एंव निकोबार द्वीपों में 30 द्वीपों के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र परमिट में रियायत देने के विषय पर मंत्रालय के निर्णय की पृष्ठभूमि से अवगत कराया। उन्होंने यह भी बताया कि अंडमान एंव निकोबार द्वीपों के उप राज्यपाल ने अंडमान एंव निकोबार प्रशासन के सचिव (जनजातीय कल्याण) की अध्यक्षता में एक 5 सदस्यीय समिति का गठन किया है, जो निम्नलिखित बिन्दुओं पर गौर करेगी-उत्तर सेंटीनल द्वीप में विदेशी नागरिकों को जाने से रोकने के संबंध में संस्थागत प्रणाली की समीक्षा, और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उपायों को सुझाना।समिति 30 दिनों के अंदर अपनी रिपोर्ट सौंप देगी। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि इस दुर्भाग्यशाली घटना के बाद उत्तर सेंटीनल द्वीप में सेंटीनल जनजातीयों के लिए खतरा बहुत बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि शव बरामद करने के लिए अगर कोई भी सख्त कदम उठाया गया, तो द्वीप की शांति पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने बताया कि आयोग भारत के संविधान के अनुच्छेद 338ए (5ए) के तहत मामले की जांच और निगरानी करने के लिए 4 से 6 दिसंबर, 2018 को अंडमान एवं निकोबार द्वीपों का दौरा करेगा। उन्होंने कहा कि ‘उत्तर सेंटीनल द्वीप की अनुल्लंघनीयता’ कायम रखने के लिए सरकार को सभी आवश्यक कदम उठाने चाहिए। ***आर.के.मीणा/एएम/एकेपी/सीएस-11466
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29 नवंबर, 2018 को समाप्त सप्ताह के दौरान देश के 91 प्रमुख जलाशयों में 98.353 बीसीएम (अरब घन मीटर) जल संग्रह हुआ। यह इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 61 प्रतिशत है। 22 नवंबर, 2018 को समाप्त सप्ताह में जल संग्रह 63 प्रतिशत के स्तर पर था। 29 नवंबर, 2018 को समाप्त सप्ताह में यह संग्रहण पिछले वर्ष की इसी अवधि के कुल संग्रहण का 99 प्रतिशत तथा पिछले दस वर्षों के औसत जल संग्रहण का 95 प्रतिशत है।इन 91 जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता 161.993 बीसीएम है, जो समग्र रूप से देश की अनुमानित कुल जल संग्रहण क्षमता 257.812 बीसीएम का लगभग 63 प्रतिशत है। इन 91 जलाशयों में से 37 जलाशय ऐसे हैं जो 60 मेगावाट से अधिक की स्थापित क्षमता के साथ पनबिजली लाभ देते हैं।क्षेत्रवार संग्रहण स्थिति : -उत्तरी क्षेत्रउत्तरी क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश, पंजाब तथा राजस्थान आते हैं। इस क्षेत्र में 18.01 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले छह जलाशय हैं, जो केन्द्रीय जल आयोग (सीडब्यूसी) की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 14.36 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 80 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 66 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 68 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी बेहतर है।पूर्वी क्षेत्रपूर्वी क्षेत्र में झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल एवं त्रिपुरा आते हैं। इस क्षेत्र में 18.83 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 15 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 12.62 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 67 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 76 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 70 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण कम है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कम है।पश्चिमी क्षेत्रपश्चिमी क्षेत्र में गुजरात तथा महाराष्ट्र आते हैं। इस क्षेत्र में 31.26 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 27 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 14.72 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 47 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 64 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 61 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण कम है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कम है।मध्य क्षेत्रमध्य क्षेत्र में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ आते हैं। इस क्षेत्र में 42.30 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 12 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 28.79 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 68 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 57 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 64 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी बेहतर है।दक्षिणी क्षेत्रदक्षिणी क्षेत्र में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना एपी एवं टीजी (दोनों राज्यों में दो संयुक्त परियोजनाएं), कर्नाटक, केरल एवं तमिलनाडु आते हैं। इस क्षेत्र में 51.59 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 31 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 27.87 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 54 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 56 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 61 प्रतिशत था। इस तरह चालू वर्ष में संग्रहण पिछले वर्ष की इसी अवधि में हुए संग्रहण से कम है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कम है।पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल संग्रहण बेहतर है उनमें हिमाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु शामिल हैं। पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल संग्रहण कम है उनमें झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगा���, त्रिपुरा, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, एपी एवं टीजी (दोनों राज्यों में दो संयुक्त परियोजनाएं), आंध्र प्रदेश और तेलंगाना शामिल हैं।****आर.के.मीणा/अर्चना/एसकेएस/डीके-11499
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राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) की कार्यकारी समिति ने 1573.28 करोड़ रुपये की दस परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। केन्द्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण, सड़क परिवहन और राजमार्ग तथा नौवहन मंत्री श्री नितिन गडकरी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में कल हुई एक बैठक में, यह फैसला किया गया है कि आगरा में यमुना में प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए एक विस्तृत समाधान ढूंढने की आवश्यकता है। ओऔरएम व्यय सहित 857.26 करोड़ रुपये के कुल खर्च के साथ 15 वर्ष की अवधि में आगरा सीवरेज योजना (रोकना और पंथातरण कार्यों) की पुनर्सुधार/नवीनीकरण परियोजना की कल्पना की गई।परियोजना के प्रमुख घटकों में 61 नालों की निकासी, 166 एमएलडी की कुल क्षमता वाले 3 सीवरेज शोधन संयंत्र (एसटीपी), 9.38 एमएलडी के 10 विकेन्द्रीकृत एसटीपी का निर्माण और 2 वर्तमान एसटीपी का आधुनिकीकरण, रोकने के कार्य में सुधार, एसटीपी का उन्नयन (क्लोरीन डालने के लिए) और 15 वर्ष के लिए संचालन और रख-रखाव शामिल हैं। उम्मीद है कि इन परियोजनाओं से आगरा शहर से यमुना नदी में होने वाले प्रदूषण के स्तर को कम किया जा सकेगा, ताजमहल को बचाने में मदद मिलेगी और नदी के जल की गुणवत्ता और क्षेत्र के कुल सौंदर्य में सुधार होगा।कार्यकारी समिति ने 73.73 करोड़ रुपये की लागत से रोकना और पंथातरण कार्यों (आईऔरडी) तथा कासगंज में सीवेज शोधन संयंत्र को भी मंजूरी दे दी। इस परियोजना में 2 आईऔरडी ढांचों, 2.8 किलोमीटर की लम्बाई तक नेटवर्क बिछाने और 15 एमएलडी क्षमता की एसटीपी का निर्माण शामिल हैं। परियोजना की लागत में 15 वर्ष के लिए ओऔरएम शामिल है। इस समय कासगंज में सीवरेज की कोई व्यवस्था नहीं है, बेकार पानी खुले नालों में चला जाता है जो अंत में काली नदी में गिरकर नदी में प्रदूषण फैलाता है। इस परियोजना के अंतर्गत काली नदी में गिरने वाले सभी नालों की निकासी की व्यवस्था की जाएगी और बेकार पानी को पम्पपिंग/गुरुत्वाकर्षण प्रवाह के जरिए शोधन के लिए प्रस्तावित एसटीपी में डाल दिया जाएगा।कार्यकारी समिति ने उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में कुल 64.76 करोड़ रुपये और 15 वर्ष के लिए ओऔरएम व्यय वाली परियोजना को भी मंजूरी दी। इसमें 7 एमएलडी के नए एसटीपी का निर्माण, वर्तमान 5 एमएलडी डब्ल्यूएसपी का उन्नयन करके 10 एमएलडी करना है। सुल्तानप��र गोमती नदी के किनारे बसा हुआ है और शहर का कचरा 6 नालों के जरिए निकलता है। ये नाले गोमती नदी में गिरते हैं जिसके परिणामस्वरूप नदी में प्रदूषण होता है। अतः यह आवश्यक है कि नालों को रोका जाए/उनका रास्ता बदला जाए, सीवेज/कीचड़ का शोधन हो और गोमती नदी में स्वीकार्य स्तर तक धार छोड़ी जाए। समिति ने बिहार में छपरा, फतूहा, बख्तियारपुर और खगड़िया में 328.52 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की मंजूरी दी। फतूहा में 35.49 करोड़ रुपये, बख्तियारपुर में 35.88 करोड़ रुपये और खगड़िया में 21 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इससे गंगा नदी में प्रदूषण को कम किया जा सकेगा। खगड़िया में यह परिकल्पना की गई है कि एसटीपी से शोधित जल का इस्तेमाल शहर में एक जलाशय विकसित करने के लिए किया जाएगा।वर्द्धमान नगर निगम के अंतर्गत पम्पपिंग स्टेशन और एसटीपी सहित पश्चिम बंगाल में 234.31 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दे दी गई है। वर्द्धमान जिला गंगा नदीं के किनारे स्थित नहीं है फिर भी इस शहर का अशोधित खराब पानी बांका नदी के रास्ते गंगा नदी में प्रदूषण फैलाने में योगदान देता है। शहर में कोई केन्द्रीय सीवरेज प्रणाली नहीं है और उसे वर्तमान में स्वच्छता संबंधी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।हिमाचल प्रदेश के पोंटा शहर के मंडल-और के लिए 11.57 करोड़ रुपये की सीवरेज योजना को मंजूरी दी गई। पोंटा शहर यमुना नदी के तट पर स्थित है। यह नदी हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड राज्यों के बीच सीमा है। पोंटा साहिब शहर 11 वार्डों में विभाजित है। इस योजना की तीन मंडलों में परिकल्पना की गई है।****आर.के.मीणा/अर्चना/केपी/डीके – 11331
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राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) ने कल नई दिल्ली में विश्व जीआईएस दिवस 2018 के अवसर पर भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से नमामि गंगे कार्यक्रम के जी-शासन के बारे में एक विचार-विमर्श सत्र का आयोजन किया। इस सत्र का उद्देश्य नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत चलाई जा रही विभिन्न गतिविधियों की निगरानी और प्रबंधन के लिए भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी के उपयोग और अनुप्रयोग पर जानकारी साझा करना और गंगा बेसिन के संदर्भ में इस प्रौद्योगिकी के वर्तमान उपयोग के बारे में जानकारी देना था। इस विचार-विमर्श सत्र में चर्चा के लिए निर्णय-निर्माता, टेक्टोक्रेट और कार्यान्वयन एजेंसियां एक मंच पर आए।इस अवसर जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय के सचिव श्री यूपी सिंह ने कहा कि जल क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौती विश्वसनीय डाटा की कमी है। भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी नदी की सफाई और संरक्षण कार्यक्रमों के बारे में बेहतर निगरानी योजना और फीड बैक के लिए नदी बेसिन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध करा सकती है। भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) प्रौद्योगिकी का नदी बेसिन प्रबंधन में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। नमामि गंगे कार्यक्रम के अनुसंधान और साक्ष्य आधारित निर्णय लेने के कार्य को उच्च प्राथमिकता दी गई है। इसमें भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी सहित नई प्रौद्योगिकी के उपयोग को विशेष स्थान दिया गया है। एनएमसीजी पहले ही भूस्थानिक प्रौद्योगिकी पर आधारित अनेक अनुसंधान परियोजनाएं चला रहा है।एनएमसीजी के महानिदेशक श्री राजीव रंजन मिश्रा ने कहा कि जीआईएस प्रौद्योगिकी के उपयोग से गंगा नदी बेसिन के बारे में हमारी जमीनी स्तर की समझ में सुधार आया है और हम साक्ष्य आधारित नीतियों को शामिल करने और परियोजनाओं का विकास करने में समर्थ हुए हैं। इनसे स्थिति में काफी बदलाव आ रहा है। अपनी असीम क्षमता के कारण गंगा नदी में प्रदूषण को प्रभावी रूप से रोकने के उद्देश्य को प्राप्त करने में जीआईएस मैपिंग एनएमसीजी में महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। एनएमसीजी ने जून, 2015 में भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी के उपयोग के बारे में नेशनल रिमोट सेन्सिंग सेंटर (एनआरएससी) के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इन्होंने भुवन गंगा जियो-पोर्टल और भुवन गंगा मोबाइल एप विकसित किया है।इस अवसर पर नेशनल रिमोट सेन्सिंग सेंटर (एनआरएससी) के निदेशक श्री शांतनु चौधरी ने कहा कि भुवन गंगा मोबाइल एप गंगा नदी के जल प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों के बारे में जानकारी इकठ्ठा करने और उसकी रिपोर्ट देने के लिए उपयोगकर्ता-सहायक एप है। इस एप को भुवन गंगा वेब पोर्टल के साथ-साथ गुगल प्ले स्टोर से भी डाउनलोड किया जा सकता है। भारत के सर्वेक्षक महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कुमार वीएसएम ने बताय कि कैमरा लगे ड्रोन और वाहनों में कुम्भ मेला क्षेत्र के समग्र नयनाभिराम दृश्यों के फोटो खींचे हैं। जिससे गंगा नदी में गिरने वाले प्रदूषित नालों की पहचान करने में मदद मिली है। उन्होंने नागरिकों की सहायता से प्रदूषण की स्थिति सुधारने के लिए सहयोग मोबाइल एप का भी जिक्र किया। एनएमसीजी ने डिजीटल एलिवेशन मॉडल तैयार करके उच्च रिज्योलूशन में गंगा बेसिन की मैपिंग के लिए भौगोलिक सूचना प्रणाली प्रौद्योगिकी का प्रयोग करके गंगा संरक्षण के कार्यों में मदद के लिए सर्वे ऑफ इंडिया के साथ सहयोग किया है। आईआईटी कानपुर कोरोना अभिलेखीय इमेजनरी का उपयोग करके अतीत की गंगा के पुनर्गठन की एक परियोजना पर कार्य कर रहा है। सर्वे ऑफ इंडिया गंगा नदी की मुख्य धारा के साथ-साथ एक कोरिडोर के लिए एयर बोर्न प्लेटफॉर्म पर उचित सेंसरों का उपयोग करके डिजीटल एलिवेशन मॉडल/डिजीटल टेरेन मॉडल तैयार करने की एक अन्य परियोजना पर भी कार्य कर रहा है। ***आर.के.मीणा/अर्चना/आईपीएस/सीएल-11227
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08 नवंबर, 2018 को समाप्त सप्ताह के दौरान देश के 91 प्रमुख जलाशयों में 107.883 बीसीएम (अरब घन मीटर) जल संग्रह हुआ। यह इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 67 प्रतिशत है। 01 नवंबर, 2018 को समाप्त सप्ताह में जल संग्रह समान स्तर पर था। 08 नवंबर, 2018 को समाप्त सप्ताह में यह संग्रहण पिछले वर्ष की इसी अवधि के कुल संग्रहण का 102 प्रतिशत तथा पिछले दस वर्षों के औसत जल संग्रहण का 98 प्रतिशत है।इन 91 जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता 161.993 बीसीएम है, जो समग्र रूप से देश की अनुमानित कुल जल संग्रहण क्षमता 257.812 बीसीएम का लगभग 63 प्रतिशत है। इन 91 जलाशयों में से 37 जलाशय ऐसे हैं जो 60 मेगावाट से अधिक की स्थापित क्षमता के साथ पनबिजली लाभ देते हैं।क्षेत्रवार संग्रहण स्थिति : -उत्तरी क्षेत्रउत्तरी क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश, पंजाब तथा राजस्थान आते हैं। इस क्षेत्र में 18.01 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले छह जलाशय हैं, जो केन्द्रीय जल आयोग (सीडब्यूसी) की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 15.35 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 85 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 71 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 74 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी बेहतर है।पूर्वी क्षेत्रपूर्वी क्षेत्र में झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल एवं त्रिपुरा आते हैं। इस क्षेत्र में 18.83 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 15 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 13.22 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 70 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 79 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 74 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण कम है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कम है।पश्चिमी क्षेत्रपश्चिमी क्षेत्र में गुजरात तथा महाराष्ट्र आते हैं। इस क्षेत्र में 31.26 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 27 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी क�� निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 16.52 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 53 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 69 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 66 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण कम है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कम है।मध्य क्षेत्रमध्य क्षेत्र में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ आते हैं। इस क्षेत्र में 42.30 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 12 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 31.47 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 74 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 57 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 68 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी बेहतर है।दक्षिणी क्षेत्रदक्षिणी क्षेत्र में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना एपी एवं टीजी (दोनों राज्यों में दो संयुक्त परियोजनाएं), कर्नाटक, केरल एवं तमिलनाडु आते हैं। इस क्षेत्र में 51.59 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 31 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 31.33 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 61 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 64 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 65 प्रतिशत था। इस तरह चालू वर्ष में संग्रहण पिछले वर्ष की इसी अवधि में हुए संग्रहण से कम है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कम है।पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल संग्रहण बेहतर है उनमें हिमाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु शामिल हैं। पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल संग्रहण कम है उनमें झारखंड, ओडिशा पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, गुजरात और महाराष्ट्र, एपी एवं टीजी (दोनों राज्यों में दो संयुक्त परियोजनाएं), आंध्र प्रदेश और तेलंगाना शामिल हैं। ***आर.के.मीणा/अर्चना/जेके/डीके-11130
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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 12 नवम्बर, 2018 को वाराणसी में 425.41 करोड़ रुपये की तीन सीवेज इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं राष्ट्र को समर्पित करेंगे और एक अन्य परियोजना की आधारशिला भी रखेंगे। राष्ट्र को समर्पित की जाने वाली योजनाओं में पहली योजना दीनापुर में 140 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) है जिस पर 235.53 करोड़ रुपये की लागत आई है। इस परियोजना में 10 साल तक का संचालन और रखरखाव समझौता शामिल है। दूसरी परियोजना में चौकाघाट (140 एमएलडी), फुलवरिया (7.6 एमएलडी) और सरइया (3.7 एमएलडी) तीन सीवेज पम्पिंग स्टेशन शामिल हैं। इन पर 34.01 करोड़ रुपये की लागत आई है। तीसरी परियोजना में 155.87 करोड़ रुपये की लागत से वरूणा से अस्सी तक 28 किलोमीटर लंबे ट्रंक सीवर और इन्टरसेप्टर सीवर बने हैं। प्रधानमंत्री रामनगर के लिए 72.91 करोड़ रुपये की लागत वाली सीवरेज प्रबंधन योजना की आधारशिला भी रखेंगे। इन परियोजनाओं के शुरू होने पर वाराणसी की सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता मौजूदा 102 एमएलडी से बढ़कर 242 एमएलडी हो जाएगी। इन परियोजनाओं से गंगा में छोड़े जाने से पहले 140 एमएलडी सीवेज का ट्रीटमेंट होगा, जिससे गंगा नदी में प्रदूषण घटाने में मदद मिलेगी। इन परियोजनाओं के अलावा गोइथा में 120 एमएलडी और रमना में 50 एमएलडी एसटीपी की दो अन्य परियोजनाओं से वाराणसी की ट्रीटमेंट क्षमता 412 एमएलडी तक बढ़ जाएगी, जो वर्ष 2035 तक की सीवेज ट्रीटमेंट जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त होगा। आर.के.मीणा/अर्चना/एके/जीआरएस-11124
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उत्तर प्रदेश में जमीनी स्तर पर नमामि गंगे से जुड़ी परियोजनाओं का काम गति पकड़ रहा है। प्रदेश में नमामि गंगे के तहत 6960.22 करोड़ की लागत से कुल 32 स्वीकृत परियोजनाओं में से 08 परियोजनाएँ पूरी हो चुकी हैं, 15 निर्माणाधीन हैं और 9 टेण्डर की प्रक्रिया में हैं। इलाहाबाद के फुलवारिया, सलोरी और नैनी में सीवरेज शोधन संयंत्र (एसटीपी) और लगभग 161 कि.मी. सीवर लाइन बिछाने का कार्य पूर्ण हो चुका है। इन सभी संयंत्रों से 119 एम.एल.डी. मल जल का शोधन किया जा सकेगा। इसी प्रकार कन्नौज में 62.5 कि.मी. लम्बी सीवर लाइन बिछाई जा चुकी है और नरौरा, बुलंदशहर में 4 एम.एल.डी. क्षमता की एस.टी.पी. और 21.03 कि.मी. लम्बी सीवर लाइन तैयार है। गढ़मुक्तेश्वर (हापुड़) में 9 एमएलडी की क्षमता वाले एसटीपी का और 69 कि.मी. लम्बी सीवर लाइनों का निर्माण कराया गया है। इन सभी पूर्ण परियोजनाओं की संयुक्त क्षमता 133 एमएलडी मल-जल शोधन करने की है। भारत वर्ष के कुल भू-भाग का 26 प्रतिशत हिस्सा गंगा बेसिन में हैं और देश की लगभग 43 प्रतिशत जनसंख्या गंगा नदी पर निर्भर है। देश का 57 प्रतिशत कृषि भू-भाग सिंचाई के लिए गंगा व उसकी सहायक नदियों पर निर्भर है। गंगा नदी की कुल लंबाई 2,525 किमी है और यह पांच राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से होकर बहती है। वैसे गंगा बेसिन में कुल 11 राज्य है। देश के जल संसाधनों में से 28 प्रतिशत गंगा नदी से ही प्राप्त होता है।गंगा नदी के आम जनजीवन में व्यापक महत्व को देखते हुए, केन्द्र सरकार ने जुलाई 2014 में पहली बार गंगा पुनरूद्धार के लिए एक अलग मंत्रालय की स्थापना की और मई, 2015 में 20,000 करोड़ के बजट के आबंटन से गंगा की निर्मलता और अविरलता को बहाल करने के उद्देश्य से नमामि गंगे कार्यक्रम की शुरुआत की । नमामि गंगे के तहत, अब तक सीवेज अवसंरचना ,औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण, नदी तट, घाट और मुक्तिधामों के विकास हेतु 22,273 करोड़ रुपये की लागत से कुल 230 परियोजनाएं स्वीकृति की जा चुकी है जिनमें तेजी से कार्य हो रहा है। 44 स्थानों पर जल की गुणवत्ता की नियमित जांच हेतु मानिटरिंग स्टेशन बनाए गए हैं। नमामि गंगे शत-प्रतिशत केंद्रीय वित्तपोषित योजना है और पूरे पांच वर्ष के लिए एकमुश्त बजट का आबंटन कर दिया गया है। इसके अंतर्गत सभी शहरों में चलने वाली परियोजनाओं की एमएलडी क्षमता इस प्रकार रखी ��ई है कि यह 2035 तक अनुमानित सीवेज के शोधन के लिए पर्याप्त होगी। कई सीवरेज परियोजनाओं में हाईब्रिड एन्यूटी आधारित पीपीपी मॉडल का उपयोग किया जा रहा है जिसमें 15 वर्ष तक के लिए एस.टी.पी. का संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी निजी कंपनी ऑपरेटरों की ही होगी।इस मिशन के द्वारा, गंगा नदी में प्रदूषणकारी औद्योगिक इकाइयों और शहरों से निकलने वाले लाखों लीटर मल-जल, सैंकड़ो नालों का गंदा पानी तथा राम गंगा,काली जैसी सहायक नदियों के द्वारा मिलने वाले मल-जल के शोधन का महत्वपूर्ण कार्य होना है।उत्तर प्रदेश की निर्माणाधीन 15 परियोजनाओं में कानपुर शहर के सीसामऊ नाला में इंटरसेप्शन व डायवर्जन (आई एण्ड डी) का कार्य तेजी से चल रहा है। इसके पूरा होने पर इस नाला के द्वारा गंगा में मिलने वाले मल-जल को एसटीपी के जरिए शोधित किया जा सकेगा। कानपुर व विठूर में भी एसटीपी व सीवर लाइन का कार्य प्रगति पर है। वाराणसी के दीनापुर में एसटीपी का कार्य चल रहा है जिससे 140 एमएलडी क्षमता का मल जल शोधित होगा और 28 कि.मी. लम्बी सीवर लाइन भी बिछाई जा रही है। 13 जून, 2018 को दिल्ली में एनएमसीजी, यू.पी. जल निगम और त्रिवेणी इंजीनियरिंग और इण्डस्ट्रीज के बीच एक एमझौता हुआ था जिसके जरिए मथुरा के लिए एक समेकित मल जल योजना 437.95 करोड़ की लागत से प्रस्तावित की गई थी। मथुरा के सारे वर्तमान और भविष्य में बनने वाले एसटीपी, सीवर लाइन, सीवर पम्प आदि की देखभाल एक ही कम्पनी करेगी। यह योजना ‘वन सिटी वन ऑपरेटर’ और हाइब्रिड एन्यूटी मोड के तहत लागू की जाएगी। उसी दिन मथुरा में इंडियन ऑयल कार्पोरेशन लि. और नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के बीच एक समझौता हुआ था जिसके जिरए मथुरा मल-जल संयंत्र से निकलने वाले शोधित जल को मथुरा रिफाइनरी प्रयोग करेगी। यह कार्य जल्दी ही शुरू हो जाएगा। इसी प्रकार मथुरा, उन्नाव, फर्रुखाबाद और बुलंदशहर में भी एसटीपी, आई एंड डी और सीवर लाइन के कार्य प्रगति पर हैं। इन सभी योजनाओं के पूर्ण होने पर 1370 कि.मी.लम्बी सीवर लाइन बिछेगी और 534 एमएलडी क्षमता का मल जल शोधन हो सकेगा। इलाहाबाद (फाफामऊ व झूंसी), मिर्जापुर, गाजीपुर, अयोध्या, मुरादाबाद, वृंदावन और चुनार में भी एसटीपी, सीवर लाइन व आई एंड डी के विभिन्न कार्यों के लिए निविदा प्रक्रिया चल रही है।घाटों और मुक्तिधामों का निर्माणउत्तर प्रदेश के कानपु��, कन्नौज, बिठूर, इलाहाबाद, वाराणसी आदि अनेक शहरों में 87 घाटों और शवदाह हेतु 25 मुक्तिधामों का निर्माण कार्य 398 करोड़ के लागत से कराया जा रहा है। इनमें से 25 घाटों का कार्य पूरा हो चुका है। कानपुर, इलाहाबाद और वाराणसी में ट्रैशस्किमर्स चलाए जा रहे हैं जिससे नदी की सतह से कूड़ा-कचरा निकाला जाता है। वाराणसी के 84 घाटों की सफाई का जिम्मा आईएल एंड एफएस एनवायरमेंटल इंफ्रास्ट्रक्चर एंड सर्विस लि. को 5 करोड़ प्रतिवर्ष की लागत से तीन वर्षों के लिए दिया गया है। इसी प्रकार बिठूर, कानपुर, इलाहाबाद और मथुरा-वृंदावन में 94 घाटों की अगले तीन वर्षों के लिए सफाई के लिए 12.97 करोड़ रुपए स्वीकृत किया गए हैं।प्रदूषणकारी औद्योगिक इकाइयों पर कार्रवाईगंगा तट पर कुल 961 औद्योगिक इकाइयां ऐसी थीं जो गंगा नदी को काफी प्रदूषित कर रही थीं। तकनीकी संस्थाओं के सहयोग से एक अभियान चलाकर उनका निरीक्षण किया गया। अभियान के फलस्वरूप 211 इकाइयां स्वत: बंद हो गईं, 54 उद्योगों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और 3 इकाइयों को बंद करने के नोटिस दिए गए हैं। टैनरी उद्योगों द्वारा होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए जाजमऊ (कानपुर) में 554 करोड़ की लागत से सीईटीपी अनुमोदित किया गया है। चीनी उद्योगों में प्रति टन पीसे हुए गन्ने पर अपशिष्ट सृजन 400 लीटर से कम करके 200 लीटर किया गया है। इसी प्रकार पेपर और पल्प तथा टेक्सटाइल इंण्डस्ट्री में भी प्रदूषण कम करने की कोशिश हो रही है। जल संसाधन मंत्रालय द्वारा की गई एक नई पहल एक शहर एक प्रचालक (वन सिटी वन आपरेटर) के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में मथुरा, फर्रुखाबाद एवं कानपुर में कार्य आबंटित किया जा चुका है। इलाहाबाद, गाजीपुर और मिर्जापुर में निविदाएं प्राप्त हो चुकी हैं। ‘वन सिटी वन आपरेटर’ के द्वारा एक शहर की समस्त योजनाओं को (एसटीपी हो, सीवर नेटवर्क हो आदि) एक ही कम्पनी द्वारा संचालित किया जाता है जिससे कार्य के संचालन में सुविधा हो। **** नीता/सुधीर/इरशाद
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01 नवम्बर, 2018 को समाप्त सप्ताह के दौरान देश के 91 प्रमुख जलाशयों में 109.247 बीसीएम (अरब घन मीटर) जल संग्रह हुआ। यह इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 67 प्रतिशत है। 25 अक्टूबर, 2018 को समाप्त सप्ताह में जल संग्रह 70 प्रतिशत के स्तर पर था। 01 नवम्बर, 2018 को समाप्त सप्ताह में यह संग्रहण पिछले वर्ष की इसी अवधि के कुल संग्रहण का 99 प्रतिशत तथा पिछले दस वर्षों के औसत जल संग्रहण का 97 प्रतिशत है।इन 91 जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता 161.993 बीसीएम है, जो समग्र रूप से देश की अनुमानित कुल जल संग्रहण क्षमता 257.812 बीसीएम का लगभग 63 प्रतिशत है। इन 91 जलाशयों में से 37 जलाशय ऐसे हैं जो 60 मेगावाट से अधिक की स्थापित क्षमता के साथ पनबिजली लाभ देते हैं।क्षेत्रवार संग्रहण स्थिति : -उत्तरी क्षेत्रउत्तरी क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश, पंजाब तथा राजस्थान राज्य आते हैं। इस क्षेत्र में 18.01 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले छह जलाशय हैं, जो केन्द्रीय जल आयोग (सीडब्यूसी) की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 15.67 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 87 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 74 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 76 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी बेहतर है।पूर्वी क्षेत्रपूर्वी क्षेत्र में झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल एवं त्रिपुरा राज्य आते हैं। इस क्षेत्र में 18.83 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 15 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 13.50 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 72 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 79 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 75 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण कम है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कम है।पश्चिमी क्षेत्रपश्चिमी क्षेत्र में गुजरात तथा महाराष्ट्र राज्य आते हैं। इस क्षेत्र में 31.26 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वा���े 27 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 16.65 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 53 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 71 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 66 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण कम है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कम है।मध्य क्षेत्रमध्य क्षेत्र में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ राज्य आते हैं। इस क्षेत्र में 42.30 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 12 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 30.92 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 73 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 62 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 71 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी बेहतर है।दक्षिणी क्षेत्रदक्षिणी क्षेत्र में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना एपी एवं टीजी (दोनों राज्यों में दो संयुक्त परियोजनाएं), कर्नाटक, केरल एवं तमिलनाडु राज्य आते हैं। इस क्षेत्र में 51.59 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 31 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 32.50 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 63 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 66 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 66 प्रतिशत था। इस तरह चालू वर्ष में संग्रहण पिछले वर्ष की इसी अवधि में हुए संग्रहण से कम है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कम है।पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल संग्रहण बेहतर है उनमें हिमाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु राज्य शामिल हैं। पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल संग्रहण बराबर है उनमें ओडिशा शामिल है। वहीं, पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल संग्रहण कम है उनमें झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, गुजरात, महाराष्ट्र, एपी एवं टीजी (दोनों राज्यों में दो संयुक्त परियोजनाएं), आंध्र प्रदेश और तेलंगाना शामिल हैं।***आर.के.मीणा/अर्चना/आईपीएस/डीए –11034
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केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित 10 दिवसीय ‘’ वूमेन ऑफ इंडिया ऑर्गेनिक फेस्टिवल 2018’’ का पांचवा संस्करण 4 नवंबर, 2018 (रविवार) की रात्रि में समाप्त हुआ। इसे जनपथ स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में आयोजित किया गया था। इन 10 दिनों में पूरे देश से आई महिला किसानों और उद्यमियों ने विभिन्न किस्मों के जैविक उत्पादों का प्रदर्शन किया। इसमें खाद्य पदार्थ से लेकर वस्त्र, स्वास्थ्य व सौन्दर्य प्रसाधन शामिल आदि थे। 26 राज्यों से आए महिला किसानों एवं उद्यमियों ने इस वर्ष 2.75 करोड़ रूपये की रिकॉर्ड बिक्री की। पिछले वर्ष यह फेस्टिवल दिल्ली हाट, आईएनए, नई दिल्ली में आयोजित किया गया था जहां उत्पादों की बिक्री 1.84 करोड़ रूपये की रही थी। रिकॉर्ड 12 लाख लोग इस प्रदर्शनी को देखने आए। इस आयोजन की सफलता ने मजूली, कांगड़ा, लेह, पलक्कड़, चिकमंगलूर, यवतमाल, दीमापुर, अलमोड़ा आदि जगहों से आए महिला किसानों को उत्साहित किया है। कार्यक्रम के दौरान महिला किसानों व उद्यमियों को यात्रा करने तथा दिल्ली में ठहरने की नि:शुल्क व्यवस्था की गई थी। इस वर्ष वेजन फूड का स्टॉल लगाया गया था जिसे आगंतुकों ने बहुत पसंद किया। वूमेन ऑफ इंडिया ऑर्गेनिक फेस्टिवल 2018 का उदघाटन 26 अक्टूबर, 2018 को केंद्रीय महिला व बाल विकास मंत्री श्रीमती मेनका संजय गांधी द्वारा किया गया था। मुंबई की महिला उद्यमी सुश्री अनामिका ने बांस के टूथब्रश और स्टील के स्ट्रा का प्रदर्शन किया था। उन्होंने कहा कि लोगों की प्रतिक्रियाएं उत्साहवर्धक है। पंजाब की महिला किसान सुश्री सरबजीत कौर ने कहा कि वे पहली बार यहां आई हैं और विभिन्न किस्मों के जैविक अनाजों के प्रति लोगों के रूझान को देखकर प्रसन्न है। उन्होंने ऐसा अवसर प्रदान करने के लिए महिला व बाल विकास मंत्रालय को धन्यवाद दिया। तमिलनाडु से आई सुश्री अपर्णा के स्टॉल में चावल की 30 से ज्यादा किस्में थी जिसे तमिलनाडु, केरल, मणिपुर, ओडिशा, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल राज्यों से संग्रह किया गया था। मणिपुर के चखाओ पोईरीटन तथा पश्चिम बंगाल के गोविंद भोग चावल को लोगों ने बहुत पसंद किया। वूमेन ऑफ इंडिया ऑर्गेनिक फेस्टिवल 2018 के प्रतिनिधियों को महिला ई-हाट में पंजीकरण का अवसर दिया गया है। इस पोर्टल का निर्मा��� महिला व बाल विकास मंत्रालय ने किया है। यह पोर्टल, फेस्टिवल, 2018 के बाद भी महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण में सहायता प्रदान करेगा। www.wcd.nic.in; https://twitter.com/MinistryWCD; https://www.facebook.com/Women-of-India-Festival-2017-Organic-Products-170237486643358/ महिला ई-हाट का लिंक :- http://mahilaehaat-rmk.gov.in/en/ *** आर.के.मीणा/अर्चना/जेके/एसके-11097
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सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) ने आज वित्त वर्ष 2018-19 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितम्बर) के लिए जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) अनुमान जारी किए। सीएसओ के अनुसार जुलाई-सितम्बर, 2018 में स्थिर मूल्यों पर जीडीपी वृद्धि दर 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। यह अनुमान पिछले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में दर्ज की गई 6.3 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि दर की तुलना में काफी अधिक है। इससे भारत में आर्थिक विकास के मोर्चे पर निरंतर तेज वृद्धि होने के संकेत मिलते हैं। सीएसओ के अनुमानों में यह बताया गया है कि वित्त वर्ष 2018-19 की दूसरी तिमाही में स्थिर मूल्यों पर जीडीपी 33.98 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है जो वित्त वर्ष 2017-18 और वित्त वर्ष 2016-17 की समान अवधि में दर्ज की गई 31.72 लाख करोड़ रुपये और 29.79 लाख करोड़ रुपये की जीडीपी की तुलना में काफी अधिक है। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के अध्यक्ष डॉ. बिबेक देबरॉय ने जीडीपी वृद्धि दर के नवीनतम अनुमान का स्वागत करते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितताओं के बावजूद घरेलू परिवेश में स्थिरता या स्थायित्व बनाए रखने के सफल सरकारी नीतिगत प्रयासों से ही यह संभव हो पाया है। उन्होंने कहा कि भारत में कारोबार एवं निवेश करने में आसानी सुनिश्चित करने के साथ-साथ विकास को और ज्यादा न्यायसंगत एवं समावेशी बनाने के लिए सरकार द्वारा अनगिनत नई पहल करने से ही हाल के महीनों में भारत के आर्थिक हालात को बेहतर करने में काफी मदद मिली है। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के मोर्चे पर तनाव रहने और कच्चे तेल के मूल्यों में तेज उतार-चढ़ाव होने के बावजूद भारत के मजबूत बुनियादी आर्थिक तत्वों की बदौलत वैश्विक स्तर पर आर्थिक विकास की गति बढ़ाने में भारत निरंतर मददगार साबित हो रहा है। विनिर्माण के साथ-साथ निर्माण जैसे अनेक सेक्टरों में भी वृद्धि दर उल्लेखनीय रहने से यह पता चलता है कि विकास का दायरा अब भी अत्यंत व्यापक है। विकास के आंकड़े अत्यंत उत्साहवर्धक रहना और अंतिम छोर तक बिजली की कनेक्टिविटी एवं सभी के लिए आवास जैसे कार्यक्रमों के जरिए आर्थिक दृष्टि से कमजोर लोगों का निरंतर सशक्तिकरण किया जाना आने वाली तिमाहियों में भारत की आर्थिक संभावनाओं की दृष���टि से सकारात्मक संकेत हैं। ***आर.के.मीणा/अर्चना/आरआरएस/वीके-11517
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राष्ट्रपति ने श्री अरविन्द सक्सेना को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) का चेयरमैन नियुक्त किया है। चेयरमैन के रूप में श्री अरविन्द सक्सेना की सेवा अवधि उनके पदभार ग्रहण करने के दिन से प्रारंभ होगी। उनकी सेवा अवधि 07 अगस्त 2020 को समाप्त होगी जब उनकी आयु 65 वर्ष हो जाएगी या यदि कोई अन्य आदेश जारी होता है तो ऐसी स्थिति में जो पहले होगा उसे मान्य समझा जाएगा। श्री अरविन्द सक्सेना ने यूपीएससी के सदस्य के रूप में 08 मईको पदभार ग्रहण किया था और वे 20 जून, 2018 से यूपीएससी के चेयरमैन के कार्यों का निर्वहन कर रहे हैं। यूपीएससी में सदस्य का पदभार ग्रहण करने से पूर्व श्री सक्सेना एविएशन रिसर्च सेन्टर (एआरसी) के निदेशक के रूप में कार्य कर रहे थे। श्री सक्सेना ने दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। उन्होंने आईआईटी, नई दिल्ली से सिस्टम मैनेजमेंट में एम.टेक की डिग्री हासिल की। वे 1978 में सिविल सेवा के लिए चयनित हुये और भारतीय डाक सेवा में पदभार ग्रहण किया। श्री सक्सेना ने 1988 में कैबिनेट सचिवालय में योगदान दिया। श्री सक्सेना ने विभिन्न देशों तथा जम्मू और कश्मीर, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में अपनी सेवाएं दी हैं। श्री अरविन्द सक्सेना को मेरिटोरियस सर्विसेज (2005) और डिस्टिंगविस्ट सर्विसेज (2012) पुरस्कारों से सम्मानित किया गया हैं। उन्होंने देश और विदेश में विस्तृत यात्राएं की हैं। आर.के.मीणा/अर्चना/जेके/जीआरएस-11472
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संघ लोक सेवा आयोग द्वारा जून तथा जुलाई, 2018 में आयोजित भारतीय आर्थिक सेवा/भारतीय सांख्यिकी सेवा परीक्षा, 2018 के लिखित भाग और तत्पश्चात् नवंबर, 2018 में व्यक्तित्व परीक्षण हेतु लिए गए साक्षात्कार के परिणाम के आधार पर निम्नलिखित सूचियां, योग्यताक्रम में, उन उम्मीदवारों की हैं, जिनकी अनुशंसा भारतीय आर्थिक सेवा तथा भारतीय सांख्यिकी सेवा में पदों पर नियुक्ति के लिए की गई है। भारतीय आर्थिक सेवा/भारतीय सांख्यिकी सेवा में नियुक्ति हेतु अनुशंसित उम्मीदवारों की संख्या निम्नानुसार है: सेवा सामान्यअ.पि.व.अ.जा.अ.ज.जा.योगभारतीय आर्थिक सेवा 06(01 शा.वि.-3 सहित) 05 0201 14(01 शा.वि.-3 सहित)भारतीय सांख्यिकी सेवा 1711 03 01 32 नियुक्तियां अनिवार्य रूप से मौजूदा नियमों और उपलब्ध रिक्तियों की संख्या के अनुसार की जाएंगी। सरकार द्वारा भरे जाने वाले पदों के प्रयोजनार्थ सूचित रिक्तियों की संख्या निम्नानुसार है:- सेवा सामान्यअ.पि.व.अ.जा.अ.ज.जा.योगभारतीय आर्थिक सेवा 06 05020114(01 शा.वि.-3 सहित) भारतीय सांख्यिकी सेवा 22 07 0301 33 (01 शा.वि.-3 सहित) निम्नलिखित अनुक्रमांक वालेअनुशंसित उम्मीदवारों की उम्मीदवारी अनंतिम है: भारतीय आर्थिक सेवा (कुल 01)0800814 भारतीय सांख्यिकी सेवा (कुल 05)05000280801308 0800124 08015630801415 जिन उम्मीदवारों का परिणाम अनंतिम रखा गया है उन्हें नियुक्ति प्रस्ताव तब तक जारी नहीं किया जाएगा जब तक कि आयोग ऐसे उम्मीदवारों से मंगाए गए मूल दस्तावेजों की जांच नहीं कर लेता और इन उम्मीदवारों की अनंतिम स्थिति को स्पष्ट नहीं कर देता। ऐेसे उम्मीदवारों की अनंतिम स्थिति अंतिम परिणाम की घोषणा की तारीख से केवल तीन माह की अवधि [अर्थात् 28/02/2019 तक] के लिए मान्य होगी। ऐसे अनंतिम उम्मीदवार अपने मूल दस्तावेज आयोग में जमा करेंगे। यदि कोई उम्मीदवार आयोग द्वारा अपेक्षित दस्तोवज निर्धारित अवधि में जमा करने में विफल रहता है, तो उसकी उम्मीदवारी रद्द कर दी जाएगी और इस संबंध में आगे किसी पत्र आदि पर विचार नहीं किया जाएगा। संघ लोक सेवा आयोग के परिसर में परीक्षा भवन के निकट ‘सुविधा काउन्टर’ स्थित है। उम्मीदवार अपनी परीक्षा/भर्ती से संबंधित किसी प्रकार की जानकारी/स्पष्टीकरण व्यक्तिगत रूप से अथवा टेलीफोन नं. 011-23385271 तथा 23381125 पर प्रात: 10.00 बजे से सायं 5.00 बजे के बीच किसी भी कार्यदिवस में प्राप्त कर सकते हैं। परीक्षा परिणाम, संघ लोक सेवा आयोग की वेबसाइट अर्थात पर भी उपलब्ध होगा। उम्मीदवारों के अंक, परिणाम के प्रकाशन की तारीख से पन्द्रह दिनों के भीतर वेबसाइट पर उपलब्ध करा दिए जाएंगे। आईईएस की पूरी सूची के लिए यहां क्लिक करें: आईएसएस की पूरी सूची के लिए यहां क्लिक करें: आर.के.मीणा/अर्चना/जेके/एसकेपी-114
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संघ लोकसेवा आायोग द्वारा जुलाई ,2018 में आयोजित इंजीनियरिंग सेवा की लिखित परीक्षा तथा सितंबर-अक्टूबर में व्यक्तित्व परीक्षण हेतु आयोजित साक्षात्कार के परिणाम के आधार पर संबधित मंत्रालयों/विभागों/सेवाओं/पदों पर नियुक्ति के लिए योग्यताक्रम में अनुशंसित किए गए उम्मीदवारों की सूची निम्नानुसार है: विभिन्न विषयों के अंतर्गत नियुक्ति के लिए अनुशंसित उम्मीदवारों की संख्या निम्नानुसार है:विषयनियुक्ति हेतु अनुशंसित उम्मीदवारों की संख्या कुलसामान्य अन्य पिछड़ा वर्गअनुसूचित जाति अनुसूचित जनजातिसीविल इंजीनियरी161(05 पीएच-1 और 01 पीएच-3 उम्मीदवारों सहित)83492207मेकेनिकल इंजीनियरी136( 04 पीएचए-1और 01पीचए-3 उम्मीदवारों सहित )98211304इेलेक्ट्रिकल इंजीनियरी 108(02PH-1और शून्य पीचए-3 उम्मीदसवारों सहित)61261308इेलेक्ट्रानिक्स और दूरसंचार इंजीनियरी & 106( 05 पीचए -1 और शून्यपीएच-3 उम्मीदवारों सहित)58261309कुल511(16पीएच-1और 02पीएच‑3 उम्मीदवारों सहित)3001226128मौजूदा नियमों और रिक्तियों की संख्या के अनुसार ही नियुक्तियां की जाएंगी। विभिन्न सेवाओं/पदों में उम्मीदवारों का आबंटन उनके द्वारा प्राप्त रैंक और दिए गए विकल्पों के अनुसार किया जाएगा। समूह क/ख सेवाओं/पदों के लिए सरकार द्वारा रिपोर्ट की गई रिक्तियां,जो भरी जानी है कि संख्या निम्नानुसार है: विषय रिक्तियांकुलसामान्य अन्य पिछड़ा वर्गअनुसूचित जाति अनुसचित जनजातिसविल इंजीनियरी187 {शा.वि. उम्मीदवारों के लिए आरक्षित 06 रिक्तियों सहित (05 पीएच-1 और 01 पीएच-3)}109492207मेकेनिकल इंजीनियरी155 {शा.वि. उम्मीदवारों के लिए आरिक्षत 05 रिक्तियों सहित (04 पीएच-1 और 01 पीएच-3)}117211304इेलक्ट्रिकल इंजीनियरी122 {शा.वि. उम्मीदवारों के लिए आरिक्षत 04 रिक्तियों सहित(02पीएच-1 और 02 पीएच-3)}75261308इलेक्ट्रानिक्स और दूरसंचार इंजीनियरी119 {शा.वि. उम्मीदवारों के लिए आरक्षित 05 रिक्तियों सहित (05 पीएच और शून्य पीएच-3) }71261309कुल 583 {पीएच उम्मीदवारों के लिए आरिक्षत 20 रिक्तियों सहित(16पीएच-1 और 04 पीएच-3)} including 20 vacancies reserved for PH candidates (16 PH-1 & 04 PH-3)}37212261285.1 निम्नलिखित अनुक्रमांक वाले 50 अनुशंसित उम्मीदवारों की उम्मीदवारी अनंतिम है: सीविल इंजीनियरी कुल (11Nos.)08019820805360080911808105390811536081209608171211004515100714911029751103912मेकेनिकल इंजीनियरी कुल (21 Nos.)010357404102060410477081852608193830819904082398908276800828093082887808319870832854083466508364360837987101119410129721013417101395911082601505061इलेक्ट्रिकल इंजीनियरी कुल (09 Nos.)051552208401280841141084164108420480842564084572308486501113643इलेक्ट्रानिक्स और दूरसंचार इंजीनियरी कुल (09 Nos.)0309941031228706116380850463085617708597141027862103343910350825.2 उन उम्मीदवारों की नियुक्ति के प्रस्ताव को जिनके परिणाम को अनंतिम माना गया है तब तक जारी नहीं किया जाएगा जबतक आयोग ऐसे उम्मीदवारों से प्राप्त मूल दस्तावेजों का सत्यापान नहीं कर लेता और उनकी उम्मीदवारी को अनंतिम स्थिति से मुक्त नहीं कर देता है। इन उम्मीदवारों की अनंतिम स्थिति इनके परिणाम घोषति होने की तारीख से तीन महिने की अवधि 11/02/2019 तक वैध रहेगी । ऐसे उम्मीदवार अपने मूल दस्तावेज केवल आयोग के समक्ष पेश करेंगे। यदि किसी कारणवश उम्मीदवार निर्धारित अवधि के भीतर ऐसा करने से असफल रहा तो उसकी उम्मीदवारी निरस्त कर दी जाएगी और इस बारे में आगे किसी तरह का कोई पत्राचार नहीं किया जाएग। इंजीनियरिंग सेवा परीक्षा नियमावली 2018 के नियम 13 (चार) और (पांच) के अनुसार आयोग द्वारा प्रत्येक विषय के उम्मीदवारों की समेकित आरक्षित सूची निम्नानुसार तैयार की जाती है: विषयरिजर्व सूची में रखे गए उम्मीदवारों की संख्यासामान्यओबीसीएससीएसटीकुलसीविल इंजीनियरी2623--0352मेकेनिकल इंजीनियरी1919----38इलेक्ट्रिकल इंजीनियरी1212----24इलेक्ट्रानिक्स और दूरसंचार इंजीनियरी131201--26कुल70660103140संघ लोकसेवा आयोग के परिसर में परीक्षा हॉल के पास एक सुविधा काउंटर है। उम्मीदवार इस काउंटर से परीक्षा/भर्ती संबधित कोई भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। काउंटर सुबह दस बजे से लेकर शाम पांच बजे तक सभी कार्यदिवस खुला रहता है।कांउटर का फोन नंबर 011-23385271 तथा 011-23381125 है। परीक्षा परिणाम आयोग की वेबस साइटwww.upsc.gov.in.पर उपब्ध है। सफल उम्मीदवारों के नाम की सूची के लिए यहां क्लिक करें। ***आर.के.मीणा/अर्चना/एमएस-11142
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राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद म्यांमार की अपनी राजकीय यात्रा के दूसरे दिन आज दोपहर (12 दिसम्बर, 2018) यांगून पहुंचे। यहां उन्होंने म्यांमार में भारत के राजदूत श्री विक्रम मिस्री द्वारा आयोजित स्वागत समारोह को सम्बोधित किया। इस समारोह में ज्यादातर भारतवंशी और भारतीय विशेषज्ञ उपस्थित थे। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने अपने सम्बोधन में कहा कि भारत की ‘’एक्ट ईस्ट’’ और ‘’सबसे पहले पड़ोसी’’ जैसी नीतियों में करीबी पड़ोसी देशों को प्राथमिकता दी गई है और दोनों ही नीतियों के लिए म्यामां फोकस राष्ट्र है। इन नीतियों ने प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं वाले विश्व में सामंजस्य बैठाने में भारत की मदद की है तथा उसके पड़ोसी देशों को वृद्धि और विकास के लिए साझेदारियां करने में भी समर्थ बनाया है। इनकी बदौलत अवसरों का विस्तार व्यापार और निवेश से बढ़कर ऊर्जा और बिजली के ग्रिड, संचार और परिवहन तथा जनता के आपसी संपर्क तक किया गया है। राष्ट्रपति ने कहा कि विकास से संबंधित सहयोग विदेशों के साथ विशेषकर पड़ोसी देशों के साथ भारत के संबंधों का महत्वपूर्ण घटक बन चुका है। भारत बुनियादी ढांचे के निर्माण, क्षमता के सृजन तथा संस्थाओं की स्थापना में अपनी विशेषज्ञता साझा कर सकता है। राष्ट्रपति ने कहा कि इसके पीछे यह विश्वास है कि शांतिपूर्ण, खुशहाल और स्थिर पड़ोसी देशों हर किसी के हित में हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी परियोजनाओं का कार्यान्वयन करते समय भारत का दृष्टिकोण उसके साझेदारों की प्राथमिकताओं के अनुरूप रहता है। राष्ट्रपति ने कहा कि ये अवधारणाएं परियोजना के जिम्मेदारी से विकास का अनिवार्य मानक हैं और उन्हें खुशी है कि भारत-म्यामां द्विपक्षीय सहयोग इन्हीं अवधारणाओं के अनुरूप है। राष्ट्रपति ने कहा कि लोकतांत्रिक देश और सभ्यतागत मित्र होने के नाते भारत, म्यामां के समक्ष आ रही चुनौतियों से पूरी तरह अवगत है। उन्होंने कहा कि पिछले 70 वर्षों से भारत ने शासन की ऐसी प्रणालियां और संरचनाएं स्थापित की हैं, जिन्होंने विविधता को राष्ट्रीय प्रगति का वाहक बनने में समर्थ बनाया है। अच्छा पड़ोसी होने के नाते भारत, म्यामां को राष्ट्रीय सुलह, पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास से जुड़े मसलों को हल करने के लिए हर संभव सहायता देने को तत्पर है। इससे पहले राष्ट्रपति ने या���गून में शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने श्रद्धेय श्वेदागॉन पगोड़ा का भी दौरा किया। उसके बाद उन्होंने यांगून में रहने वाले आजाद हिंद फौज के नौ सैनिकों से भी मुलाकात कर उनका अभिनंदन किया। उन सैनिकों में से सबसे बुजुर्ग श्री के.ए. पेरूमल की आयु लगभग 90 वर्ष है।इससे पहले, राष्ट्रपति म्यामां की राजधानी नेपीडॉ से आज सुबह यांगून पहुंचे। राष्ट्रपति ने वहां येजिन कृषि विश्वविद्यालय स्थित उन्नत कृषि अनुसंधान और शिक्षा केन्द्र (एसीएआरई) का दौरा किया। वहां उन्होंने म्यामां के किसानों की सहायता के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा विदेश मंत्रालय के सहयोग से चलाई जा रही भारतीय प्रौद्योगिकीय परियोजनाओं का उद्घाटन किया और उनकी समीक्षा की। राष्ट्रपति ने किसानों को तकनीकी सहायता प्रदान करने वाले मोबाइल ऐप का औपचारिक उद्घाटन किया, साथ ही साथ रासायनिक विश्लेषण पर आधारित मृदा स्वास्थ्य कार्डों का भी वितरण किया। म्यामां में मृदा स्वास्थ्य कार्ड इस्तेमाल किए जाने का यह पहला अवसर है।इसके बाद राष्ट्रपति ने राइस बायो-पार्क का भी दौरा किया। वहां विदेश मंत्रालय द्वारा वित्त पोषित एम.एस. स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन की ओर से धान से संबंधित परियोजना चलाई जा रही है। अपनी राजकीय यात्रा के अंतिम दिन कल (13 दिसंबर, 2018) राष्ट्रपति यांगून में 5वें इंटरप्राइज इंडिया एक्जीबिशन का उद्घाटन करेंगे। वह शहर के ऐतिहासिक काली मंदिर भी जाएंगे। राष्ट्रपति इसके अलावा स्वाधीनता के प्रथम संग्राम की विशिष्ट हस्ती और अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर के मकबरे पर भी जाएंगे। ****आर.के.मीणा/अर्चना/आरके/एमएस-11716
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राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोंविद ने आज (10 दिसंबर, 2018) उत्तर प्रदेश में गोरखपुर के महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के स्थापना समारोह को संबोधित किया।राष्ट्रपति ने इस अवसर पर कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में ज्ञान और जागरुकता के प्रचार-प्रसार में गोरखनाथ पीठ ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। परिषद ने युवाओं में संस्कृति का सम्मान करने और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना तथा सामाजिक कार्यों के लिए तत्परता का भाव विकसित कर उनके चरित्र निर्माण में मदद की है। राष्ट्रपति के भाषण के मूलपाठ के लिए यहां क्लिक करें- ***आर.के.मीणा/अर्चना/मधुलिका/सीएस-11666
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उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू ने दवा उद्योग का आह्वान करते हुए कहा कि वे भारत को जेनरिक दवाओं का एक अंतर्राष्ट्रीय केन्द्र बनाने की दिशा में कार्य करें।उपराष्ट्रपति ने आज नोएडा में 70वें भारतीय फॉर्मास्युटिकल कांग्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि भारत विश्वभर में जेनरिक दवाओं का सबसे बड़ा उत्पादक बन गया है। वैश्विक निर्यातों में भारत की जेनरिक दवाओं की 20 प्रतिशत हिस्सेदारी है। भारतीय दवा उद्योग गुणवत्ता और कीमत के मामले में बेहतर है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि जेनरिक दवाओं के मामले में वैश्विक तौर पर अग्रणी होने के साथ-साथ भारत को भारतीय चिकित्सा प्रणाली को भी बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने युवा अनुसंधानकर्ताओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे भारतीय चिकित्सा प्रणाली के मानकीकरण की दिशा में कार्य करें और वैश्विक तौर पर स्थापित प्रयौगिक तौर-तरीके का इस्तेमाल करते हुए इन पारम्परिक चिकित्सा प्रणालियों को गुणात्मकता, वैधता और प्रभावोत्पादकता स्थापित करें।उपराष्ट्रपति ने दवा कम्पनियों का आह्वान करते हुए कहा कि वे कॉरपोरेट-सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) से जुड़े नियमों से आगे जाकर लोगों की जान बचाएं और उन लोगों को अन्य अनिवार्य दवाएं उपलब्ध कराएं, जो उन्हें खरीद नहीं सकते। उन्होंने कहा कि भारत जैसे एक देश के लिए सस्ती दरों पर स्वास्थ्य सुविधाएं और दवाएं उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारत विकासशील देशों में सस्ती दरों पर जीवन रक्षक दवाएं उपलब्ध करा रहा है। इससे पहले, श्री नायडू ने सभी प्रमुख फॉर्मास्युटिकल कम्पनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों से बातचीत की। इस सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर देशभर से आए 5000 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के उत्पाद और मद्य निषेध मंत्री श्री जय प्रताप सिंह और दवा उद्योग के अन्य अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। ***आर.के.मीणा/एएम/एसकेएस/डीके -11836
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केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल में सीधे नियुक्त अधिकारियों 50वें बैच के दीक्षांत समारोह के अवसर पर प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करते हुए भारत के उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु ने कहा कि - “आज कल के सुरक्षा माहौल में, सुरक्षा बलों को आधुनिक तकनीक का ज्ञान होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों को आधुनिक तकनीक पर आधारित निगरानी, सुरक्षा उपकरण और शस्त्र उपलब्ध कराये जाने चाहिए तथा उसके लिए सतत प्रशिक्षण होना चाहिए।” सुरक्षा बलों के आधुनिकीकरण पर बल देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि “सरकार ने केन्द्रीय बलों के आधुनिकीकरण के लिए आबंटन बढ़ाया है। आप इस आबंटन का कारगर उपयोग करें और अपने अधिकारियों जवानों को नयी तकनीक उपलब्ध करायें उसमें प्रशिक्षित करें।” प्रशिक्षु अधिकारियों को 1971 के भारत-पाक युद्ध का स्मरण कराते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि “देश के इतिहास में 16 दिसंबर एक महत्वपूर्ण तिथि है। आज ही के दिन 1971 में पाकिस्तानी सेनाओं ने भारतीय सेना की वीरता के समक्ष आत्मसमर्पण किया था। आज आप भी राष्ट्र निष्ठा और कर्तव्यनिष्ठा की उसी गौरवशाली परंपरा में सम्मिलित हो रहे हैं।” देश की आंतरिक सुरक्षा में सीआरपीएफ की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि “देश की आंतरिक सुरक्षा को बनाए रखने में सीआरपीएफ का योगदान सर्वविदित है। वे सीआरपीएफ के सुरक्षा कर्मी ही थे जिन्होंने आतंकवादियों को मार कर संसद भवन और सांसदों की रक्षा की।” उपराष्ट्रपति ने कहा कि स्वतंत्रता के पश्चात् देश के एकीकरण से लेकर उत्तर पूर्व के अलगाववाद और पंजाब के उग्रवाद को समाप्त करने में सीआरपीएफ ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सीआरपीएफ ने जम्मू कश्मीर में आतंकवाद तथा नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्रों में कानून व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने में तथा आम नागरिकों और युवाओं के साथ शांति और सौहार्द स्थापित करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है।हाल के वर्षों में सीआरपीएफ से अधिकारियों तथा सुरक्षा कर्मियों द्वारा स्वत: सेवा निवृत्ति या त्यागपत्र पर चिंता व्यक्त करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि “बल के शीर्षस्थ नेतृत्व को इस विषय पर गंभीर चिंतन करना चाहिए। मैं आशा करूंगा कि सरकार बल में पदोन्नति के अवसर बढ़ाने पर विचार करेगी और रिक��त स्थानों को शीघ्र भरने का प्रयास करेगी।”दुर्गम स्थानों पर तैनात सुरक्षाबलों की स्थिति सुधारने की आवश्यकता पर बल देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि “मैं यह भी अपेक्षा करूंगा कि सरकार और बल का शीर्ष नेतृत्व दुरूह, दुर्गम स्थानों पर तैनात हमारे सुरक्षा कर्मियों के लिए सुविधाओं में सतत सुधार करे। आवश्यक हो तो इसके लिए डीआरडीओ जैसे रक्षा शोध संस्थानों से सहायता लें। बल का नेतृत्व, हमारे सुरक्षा कर्मियों के परिजनों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सुविधाओं के लिए विशेष प्रयास करे।”उपराष्ट्रपति ने सीआरपीएफ में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की प्रशंसा करते हुए दीक्षांत परेड में भाग लेने वाली 4 महिला अधिकारियों को विशेष बधाई दी।उपराष्ट्रपति के भाषण का पाठ निम्नलिखित है:“सर्वप्रथम, 50वें बैच के सीधे नियुक्त अधिकारियों को उनकी उत्कृष्ट वेशभूषा और चुस्त परेड के लिए मैं बधाई देता हूं। मैं आपकी इस दीक्षांत परेड पर आपके भावी कैरियर के लिए अपनी हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित करता हूं। मैं प्रशिक्षु अधिकारियों के उपस्थित अभिभावकों को भी अपनी शुभकामनाएं देता हूं। आपके सुसंस्कार और राष्ट्र सेवा और कर्तव्यनिष्ठा की सीआरपीएफ की शपथ, इन नवयुवकों को भावी जीवन में भी मार्गदर्शन करेंगी।2. मित्रों, देश के इतिहास में 16 दिसंबर एक महत्वपूर्ण तिथि है। आज ही के दिन 1971 में पाकिस्तानी सेनाओं ने भारतीय सेना की वीरता के समक्ष आत्मसमर्पण किया था। आज आप भी राष्ट्र निष्ठा और कर्तव्यनिष्ठा की उसी गौरवशाली परंपरा में सम्मिलित हो रहे हैं।50 सप्ताह के कठिन प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद आपने यह गौरवशाली क्षण अर्जित किया है। स्वयं को मातृभूमि की सेवा और देश एवं जनता की सुरक्षा का व्रत लिया है। आज आपने देश के प्रति निष्ठा, समर्पण, प्रतिबद्धता और बलिदान की नयी यात्रा प्रारंभ की है। केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल के आदर्श वाक्य “सेवा और निष्ठा” न सिर्फ आपकी पवित्र वर्दी पर अंकित होगा बल्कि आपकी अंत:चेतना पर भी अंकित रहेगा।सीआरपीएफ अपनी प्रकार का दुनिया का सबसे बड़ा सशस्त्र पुलिस बल है जिसने राष्ट्र की एकता और अखंडता को सुरक्षित रखने में मुख्य भूमिका अदा की है। इस बल का एक गौरवशाली अतीत, सराहनीय वर्तमान और आशा और सेवा से भरा भविष्य है। आपके बल का इतिहास बहादुरी की ��संख्य गाथाओं से समृद्ध है। आपको स्वयं को इस महान विरासत का उत्तराधिकारी सिद्ध करना है।देश की आंतरिक सुरक्षा को बनाए रखने में सीआरपीएफ का योगदान सर्वविदित है। विगत 13 दिसंबर को हमने 2001 में संसद परिसर पर हुए हमले में सीआरपीएफ के सुरक्षाकर्मियों की वीरता को प्रणाम किया। वे सीआरपीएफ के सुरक्षा कर्मी ही थे जिन्होंने आतंकवादियों को मार कर संसद भवन और सांसदों की रक्षा की।स्वतंत्रता के पश्चात् देश के एकीकरण से लेकर उत्तर पूर्व के अलगाववाद और पंजाब के उग्रवाद को समाप्त करने में सीआरपीएफ ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सीआरपीएफ ने जम्मू कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ़ कानून व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने तथा जम्मू कश्मीर में आम नागरिकों और युवाओं के साथ शांति और सौहार्द स्थापित करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है।देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए नक्सलवाद एक गंभीर समस्या है। नक्सल समस्या से निपटने के लिए इस बल का बड़ा भाग नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात है। राज्य सरकारों की मदद से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अभियान चला रहा है। मुझे ज्ञात हुआ है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं को बल में अवसर दिये जा रहे हैं। इससे नक्सल विरोधी अभियान में स्थानीय समुदाय और युवाओं का सहयोग मिल सकेगा। साथ ही इन इलाकों में तीव्र विकास सुनिश्चित हो सकेगा।देश की आंतरिक सुरक्षा के साथ साथ सीआरपीएफ ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त राष्ट्र शांति सेना के तौर पर कोसोवो और लाइबेरिया में शांति स्थापना में अपना योगदान दिया है।इस बल का एक सराहनीय मानवीय चेहरा है। मुझे नागरिकों की सहायता के लिए आपके सिविक एक्शन प्रोग्राम के विषय में ज्ञात हुआ है। नागरिकों के बीच पुलिस बल के कार्यों की स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए यह एक उत्तम प्रोग्राम है। राष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में सीआरपीएफ को जहां भी तैनात किया गया है, इसने सामान्य जनमानस का भरोसा और विश्वास जीता है।10. मित्रों, भविष्य में भी आपको दुरूह परिस्थितियों और दुर्गम स्थानों पर कार्य करना पड़ सकता है। एक नायक के रूप में आपको हर स्थिति में दी गई जिम्मेदारियों को निभाना होगा। कुशल संचालन हेतु अपनी पेशेवर क्षमता को बढ़ाना होगा। अपना और अपने साथियों का मनोबल बढ़ाना होगा। आपको अधीनस्थ सहयोगियों की समस्याओं को सुनना और सुलझाना होगा। याद रखें कि आपके साथी जवान आपका अनुसरण करेंगे। आपका प्रशिक्षण आपको भावी चुनौतियों का सफलतापूर्वक समाधान करने में सहायक होगा।11. हाल के वर्षों में साइबर टेक्नोलॉजी ने देश और क्षेत्र की सीमाओं को तोड़ा है। लेकिन साइबर टेक्नोलॉजी ने संगठित अपराध को नये आयाम भी दिये हैं। देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए नई चुनौतियां खड़ी हुई हैं। आंतरिक नक्सलवाद और सीमापार आतंकी गिरोहों के बीच गहरे संबंध हैं। हवाला आदि माध्यमों से इन गुटों को धन उपलब्ध कराया जाता रहा है। ये गिरोह आर्थिक अपराधों में भी लिप्त पाये गये हैं।12. कहा गया है “नास्ति विद्या समं चक्षु:, नास्ति सत्य समं तप:’’ - ज्ञान से बड़ी कोई दृष्टि नहीं है और सत्य से बड़ा कोई तप नहीं। अत: जरूरी है कि आप तकनीक की नई चुनौतियों को अवसर में बदलने की क्षमता विकसित करें। मुझे आशा है कि इन नयी चुनौतियों के विरूद्ध आपको प्रशिक्षित किया जायेगा। आज कल के सुरक्षा माहौल में, सुरक्षा बलों को आधुनिक तकनीक का ज्ञान होना अत्यंत आवश्यक है। सुरक्षा बलों को आधुनिक तकनीक पर आधारित निगरानी, सुरक्षा उपकरण और शस्त्र उपलब्ध कराये जाने चाहिए तथा उसके लिए सतत प्रशिक्षण होना चाहिए।13. गृह मंत्रालय की संसदीय समिति के अध्यक्ष के रूप में मुझे केन्द्रीय बलों और उनसे जुड़े मुद्दों का नजदीक से अध्ययन करने का अवसर मिला। राष्ट्रीय सुरक्षा में आपका योगदान महत्वपूर्ण है। मुझे ज्ञात हुआ है कि सरकार ने केन्द्रीय बलों के आधुनिकीकरण के लिए आबंटन बढ़ाया है। आप इस आबंटन का कारगर उपयोग करें और अपने अधिकारियों जवानों को नयी तकनीक उपलब्ध करायें उसमें प्रशिक्षित करें। मुझे यह भी ज्ञात हुआ है कि हाल के वर्षों में सीआरपीएफ से कई अधिकारियों तथा सुरक्षा कर्मियों ने स्वत: सेवा निवृत्ति ली है या त्यागपत्र दिया है। ये चिंता का विषय है। बल के शीर्षस्थ नेतृत्व को इस विषय पर गंभीर चिंतन करना चाहिए। मैं आशा करूंगा कि सरकार बल में पदोन्नति के अवसर बढ़ाने पर विचार करेगी और रिक्त स्थानों को शीघ्र भरने का प्रयास करेगी। मैं यह भी अपेक्षा करूंगा कि सरकार और बल का शीर्ष नेतृत्व दुरूह, दुर्गम स्थानों पर तैनात हमारे सुरक्षा कर्मियों के लिए सुविधाओं में सतत सुधार करे। आवश्यक हो तो इसके लिए डीआरडीओ जैसे रक���षा शोध संस्थानों से सहायता लें। बल का नेतृत्व, हमारे सुरक्षा कर्मियों के परिजनों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सुविधाओं के लिए विशेष प्रयास करे।14. मुझे यह जानकार खुशी हो रही है कि सीआरपीएफ महिलाओं और Gender Equality को बढ़ाने में अग्रणी रही है। वर्तमान में केरिपुबल में 05 महिला बटालियन हैं। “रैपिड एक्शन फोर्स’’ में भी महिला दस्ते की महत्वपूर्ण भूमिका है। हर्ष का विषय है कि सीआरपीएफ ने संयुक्त राष्ट्र शांति सेना के तौर पर लाइबेरिया में महिला इकाई को तैनात किया था। आंतरिक सुरक्षा के क्षेत्र में नारी-शक्ति को शामिल करना राष्ट्रीय आवश्यकता है। इस बैच की 04 महिला अधिकारियों को, जो आज दीक्षांत परेड में शामिल हैं, बधाई की पात्र हैं।15. अंत में मैं, एक बार पुन: एक सधी हुई परेड और उच्च अनुशासन में बंधे इस शानदार प्रदर्शन के लिए प्रशिक्षु अधिकारियों की सराहना करता हूं। मैं इस गौरवशाली बल में आपके उज्जवल भविष्य और अच्छे स्वास्थ्य की भी शुभकामनाएं देता हूं। मैं सभी अभिभावकों और परिवारजनों को भी बधाई देता हूं।16. मैं, इस अवसर पर सीआरपीएफ की युवा पीढ़ी व भावी नायकों को तैयार करने में सीआरपीएफ अकादमी की सराहना करता हूं और सीआरपीएफ को अपनी शुभकामनाएं भी प्रेषित करता हूं।जय हिंद।”***AKT/BK/MS
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उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू ने सशस्त्र सेना झंडा दिवस के मौके पर सैन्य बलों को राष्ट्र की सुरक्षा में उनकी बहादुरी और चौकसी के लिए बधाई दी है। उपराष्ट्रपति इस मौके पर श्री पुदी हरिप्रसाद के नेतृत्व में उनसे मिलने आये सैन्य कर्मियों के साथ बातचीत कर रहे थे। झंडा दिवस के मौके पर उपराष्ट्रपति ने सीमा की सुरक्षा में लगे बहादुर जवानों को सलाम किया। इस मौके पर कर्नल आर.एस. देसवाल, कैप्टन (आईएन) संजय सहरावत, सूबेदार मेजर (एच/कैप्टन) बी.जी. राव और अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे। ***आर.के.मीणा/अर्चना/एके/एम-11654
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उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू ने कहा है कि युवा डॉक्टरों को नैतिकता कायम रखने की बात दिमाग में रखनी चाहिए और प्रत्येक मरीज का करूणा और सहानुभूति से इलाज करना चाहिए, चाहे उसकी वित्तीय पृष्ठभूमि कुछ भी हो। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के 46वें वार्षिक दीक्षांत समारोह को आज नई दिल्ली में संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि एम्स जैसा संस्थान राष्ट्र का गौरव है और मरीजों की देखरेख, अध्ययन और अनुसंधान में उसने उत्कृष्टता हासिल की है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा में प्रतिमान सम्बन्धी बदलाव आया है। यह वयस्क शिक्षा के सिद्धांतों का इस्तेमाल करते हुए कक्षा में लघु समूह शिक्षा पर आधारित उपदेशपूर्ण अध्यापन से स्वनिर्देशित शिक्षा में बदल चुकी है। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि प्रशिक्षुओं को लाइसेंस मिलने से पहले उनके पास आवश्यक कौशल हो, ज्ञान बांटने के जरिए अध्ययन का परम्परागत तरीका प्रतिस्पर्धा आधारित शिक्षा में बदल चुका है। श्री नायडू ने कहा कि नवीनतम प्रगति के साथ चिकित्सा शिक्षा के पाठ्यक्रम में निरंतर सुधार की आवश्यकता है। मुझे यकीन है कि एम्स में विकसित पाठ्यक्रम को एम्स जैसे अन्य संस्थानों और अन्य चिकित्स कॉलेजों द्वारा अपनाया जाएगा। बहु-विषयक टीमों को समय की जरूरत बताते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि एम्स के विभिन्न विभागों के साथ अनुसंधान गठबंधन कायम करके, देश में उत्कृष्टता और अनुसंधानकर्ताओं के अन्य केन्द्रों तक पहुंचने को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमें गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं तैयार करनी चाहिए, जिन तक सबकी पहुंच हो और वह सस्ती हों। उन्होंने कहा कि शहर और गांव के बीच स्पष्ट विभाजन है। उन्होंने पीडब्ल्यूसी की एक रिपोर्ट का जिक्र किया, जिसमें कहा गया है, ‘भारत में प्रति एक हजार की आबादी पर केवल 1.1 बिस्तर है, जबकि दुनिया का औसत 2.7 है। भारत की 70 प्रतिशत स्वास्थ्य सेवाएं शीर्ष के 20 शहरों में हैं।’ उपराष्ट्रपति ने कहा कि आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में शहर और गांव के इस बीच विभाजन को खत्म किया जाना चाहिए। श्री नायडू ने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में हमारे सामने बेतुकी स्थ��ति है। एक तरफ भारत मेडिकल टूरिज्म में तेजी से आगे बढ़ रहा है, लोग अन्य देशों से लीवर ट्रांसप्लांट से लेकर घुटने बदलने तक के इलाज के लिए हमारे देश में आ रहे हैं। लेकिन दूसरी तरफ वही इलाज अनेक भारतीयों की पहुंच से बाहर है। हमें सभी भारतीयों के लिए सस्ता इलाज सुनिश्चित कर इस बेतुकी स्थिति से बाहर आना होगा। उन्होंने कहा कि इस दिशा में खासतौर से मेक इन इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण कदम देश में आधुनिक औजारों और उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा देना होगा। इस तरह के कदम से न केवल कीमती विदेशी मुद्रा की बचत होगी, बल्कि औजारों की कीमतों में भी गिरावट आएगी। उपराष्ट्रपति ने कहा कि केवल डॉक्टर ही बीमार व्यक्ति को हीलिंग टच दे सकते हैं और वही जीवन और मृत्यु के बीच अंतर कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि केवल आप ही लोगों के जीवन के वर्ष बढ़ा सकते हैं। लोग अभिनेताओं के प्रशंसक होते हैं, लेकिन डॉक्टरों को पूजते हैं। डॉक्टरों को हमेशा अपने पेशे को एक मिशन के रूप में लेना चाहिए। श्री नायडू ने एम्स को उत्कृष्ट संस्थान बनाने के लिए उसके निदेशक, विभाग के सदस्यों और अन्य कर्मचारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा, ‘मुझे उम्मीद है हमारा भारत आयुष्मान बनेगा और प्रत्येक नागरिक को अधिक प्रतिक्रियाशील, सस्ती, नैतिक दृष्टि से मजबूत और गुणात्मक स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी, जो दुनिया में सर्वश्रेष्ठ होंगी।’ उपराष्ट्रपति ने इस अवसर पर डॉ. ए.के. सराया, डॉ. समीरा नंदी, डॉ. कमल बख्शी और डॉ. गोमती गोपीनाथ (अनुपस्थिति में) को लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार प्रदान किए। उन्होंने सर्वोच्च योग्यता हासिल करने वाले 31 चिकित्सा छात्रों को स्वर्ण पदक और प्रमाण पत्र भी प्रदान किए। इस अवसर पर केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री तथा एम्स के अध्यक्ष श्री जे.पी. नड्डा, एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया और अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे। ****आर.के.मीणा/अर्चना/केपी/वाईबी-
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मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार।साल 2018 ख़त्म होने वाला है। हम 2019 में प्रवेश करने वाले हैं। स्वाभाविक रूप से ऐसे समय,बीते वर्ष की बातें चर्चा में होती हैं, तो आने वाले वर्ष के संकल्प की भी चर्चा सुनाई देती है। चाहे व्यक्ति का जीवन हो, समाज का जीवन हो, राष्ट्र का जीवन हो – हर किसी को पीछे मुड़कर के देखना भी होता है और आगे की तरफ जितना दूर तक देख सकें,देखने की कोशिश भी करनी होती है और तभी अनुभवों का लाभ भी मिलता है और नया करने का आत्मविश्वास भी पैदा होता है। हम ऐसा क्या करें जिससे अपने स्वयं के जीवन में बदलाव ला सकें और साथ-ही-साथ देश एवं समाज को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दे सकें।आप सबको 2019 की ढ़ेर सारी शुभकामनाएं।आप सभी ने सोचा होगा कि 2018 को कैसे याद रखा जाए। 2018 को भारत एक देश के रूप में, अपनी एक सौ तीस करोड़ की जनता के सामर्थ्य के रूप में, कैसे याद रखेगा - यह याद करना भी महत्वपूर्ण है। हम सब को गौरव से भर देने वाला है।2018 में, विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना ‘आयुष्मान भारत’ की शुरुआत हुई। देश के हर गाँव तक बिजली पहुँच गई। विश्व की गणमान्य संस्थाओं ने माना है कि भारत रिकॉर्ड गति के साथ, देश को ग़रीबी से मुक्ति दिला रहा है।देशवासियों के अडिग संकल्प से स्वच्छता कवरेज बढ़कर के95% को पार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।आजादी के बादलाल-किले से पहली बार, आज़ाद हिन्द सरकार की 75वीं वर्षगाँठ पर तिरंगा फहराया गया। देश को एकता के सूत्र में पिरोने वाले, सरदार वल्लभभाई पटेल के सम्मान में विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमा ‘Statue of Unity’ देश को मिली। दुनिया में देश का नाम ऊँचा हुआ।देश को संयुक्त राष्ट्र का सर्वोच्च पर्यावरण पुरस्कार ‘Champions of the Earth’awards से सम्मानित किया गया।सौर ऊर्जा और climate change मेंभारत के प्रयासों को विश्व में स्थान मिला। भारत में, अन्तर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन की पहली महासभा ‘International Solar Alliance’ का आयोजन हुआ। हमारे सामूहिक प्रयासों का ही नतीजा है कि हमारे देश की ease of doing business rankingमें अभूतपूर्व सुधार हुआ है।देश के self defence को नई मजबूती मिली है। इसी वर्ष हमारे देश ने सफलतापूर्वक Nuclear Triad को पूरा किया है,यानीअब हम जल, थल और नभ-तीनों में परमाणुशक्ति संपन्न हो गए हैं।देश की बेटियों ने नाविका सागर परिक्रमा के माध्यम से पूरे विश्व का भ्रमण कर देश को गर्व से भर दिया है।वाराणसी में भारत के पहले जलमार्ग की शुरुआत हुई। इससे waterways के क्षेत्र में नयी क्रांति का सूत्रपात हुआ है। देश के सबसे लम्बे रेल-रोड पुल बोगीबील ब्रिज का लोकार्पण किया गया। सिक्किम के पहले और देश के 100वें एयरपोर्ट – पाक्योंग की शुरुआत हुई।Under-19 क्रिकेट विश्व कप और Blind क्रिकेट विश्व कप में भारत ने जीत दर्ज करायी। इस बार, एशियन गेम्स में भारत ने बड़ी संख्या में मेडल जीते।Para Asian Games में भी भारत ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया है। वैसे, यदि मैं हर भारतीय के पुरुषार्थ की हमारे सामूहिक प्रयासों की बाते करता रहूँ, तो हमारा ‘मन की बात’ इतनी देर चलेगा कि शायद 2019 ही आ जायेगा। यह सब 130 करोड़ देशवासियों के अथक प्रयासों से संभव हो सका है।मुझे उम्मीद है कि 2019 में भी भारत की उन्नति और प्रगति की यह यात्रा यूं ही जारी रहेगी और हमारा देश और मजबूती के साथ नयी ऊंचाइयों को छुयेगा।मेरे प्यारे देशवासियो, इस दिसम्बर में हमने कुछ असाधारण देशवासियों को खो दिया। 19 दिसम्बर को चेन्नई के डॉक्टर जयाचंद्रन का निधन हो गया।डॉक्टर जयाचंद्रन को प्यार से लोग ‘मक्कल मारुथुवर’कहते थे क्योंकि वे जनता के दिल में बसे थे। डॉक्टर जयाचंद्रन ग़रीबों को सस्ते-से-सस्ता इलाज उपलब्ध कराने के लिए जाने जाते थे।लोग बताते हैं कि वे मरीजों के इलाज के लिए हमेशा ही तत्पर रहते थे। अपने पास इलाज के लिए आने वाले बुजुर्ग मरीजों कोवोआने-जाने का किराया तक दे देते थे।मैंने thebetterindia.com websiteमें समाज को प्रेरणा देने वाले उनके अनेक ऐसे कार्यों के बारे में पढ़ा है।इसी तरह, 25 दिसम्बर को कर्नाटक की सुलागिट्टी नरसम्मा के निधन की जानकारी मिली। सुलागिट्टी नरसम्मा गर्भवती माताओं-बहनों को प्रसव में मदद करने वाली सहायिका थीं। उन्होंने कर्नाटक में, विशेषकर वहाँ के दुर्गम इलाकों में हजारों माताओं-बहनों को अपनी सेवायें दीं। इस साल की शुरुआत में उन्हें ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया गया था। डॉ. जयाचंद्रन और सुलागिट्टी नरसम्मा जैसे कई प्रेरक व्यक्तित्व हैं,जिन्होंने समाज में सब की भलाई के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। जब हम health care की बातें कर रहे हैं, तो मैं यहाँ उत्तर प्रदेश के बिजनौर में डॉक्टरों के सामाजिक प्रयासों के बारे में भी चर्चा करना चाहूँगा। पिछले दिनों हमारी पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं ने मुझे बताया कि शहर के कुछ युवा डॉक्टर कैंप लगाकर ग़रीबों का फ्री उपचार करतेहैं। यहाँ के Heart Lungs Critical Centre की ओर से हर महीने ऐसे मेडिकल कैंप लगाये जाते हैं जहाँ कई तरह की बीमारियों की मुफ्त जाँच और इलाज की व्यवस्था होती है। आज, हर महीने सैकड़ों ग़रीब मरीज़ इस कैंप से लाभान्वित हो रहे हैं। निस्वार्थ भाव से सेवा में जुटे इन doctors मित्रों का उत्साह सचमुच तारीफ़ के काबिल है। आज मैं यह बात बहुत ही गर्व के साथ बता रहा हूँ कि सामूहिक प्रयासों के चलते ही ‘स्वच्छ भारत मिशन’ एक सफल अभियान बन गया है। मुझे कुछ लोगों ने बताया कि कुछ दिनों पहले मध्यप्रदेश के जबलपुर में एक साथ तीन लाख से ज्यादा लोग सफाई अभियान में जुटे। स्वच्छता के इस महायज्ञ में नगर निगम, स्वयं सेवी संगठन, स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थी, जबलपुर की जनता-जनार्दन, सभी लोगों ने बढ़-चढ़ करके भाग लिया।मैंने अभी thebetterindia.com का उल्लेख किया था। जहाँ मुझे डॉ. जयाचंद्रन के बारे में पढ़ने को मिला और जब मौका मिलता है तो मैं जरुर thebetterindia.comwebsite पर जाकर के ऐसी प्रेरित चीजों को जानने का प्रयास करता रहता हूँ। मुझे ख़ुशी है कि आजकल ऐसी कई website हैंजो ऐसे विलक्षण लोगों के जीवन से प्रेरणा देने वाली कई कहानियों से हमें परिचित करा रही है। जैसे thepositiveindia.com समाज में positivity फ़ैलाने और समाज को ज्यादा संवेदनशील बनाने का काम कर रही है। इसी तरह yourstory.com उस पर young innovators और उद्यमियों की सफलता की कहानी को बखूबी बताया जाता है।इसी तरह samskritabharati.in के माध्यम से आप घर बैठे सरल तरीके से संस्कृत भाषा सीख सकते हैं। क्या हम एक काम कर सकते हैं - ऐसी website के बारे में आपस में share करें।Positivity को मिलकर viral करें। मुझे विश्वास है कि इसमें अधिक-से-अधिक लोग समाज में परिवर्तन लाने वाले हमारे नायकों के बारे में जान पाएँगे।Negativity फैलाना काफी आसान होता है, लेकिन, हमारे समाज में, हमारे आस-पास बहुत कुछ अच्छे काम हो रहे हैं और ये सब 130 करोड़ भारतवासियों के सामूहिक प्रयासों से हो रहा है।हर समाज में खेल-कूद का अपना महत्व होता है। जब खेल खेले जाते हैं तो देखने वालों का मन भी ऊर्जा से भर जाता है। खिलाड़ियों को नाम, पहचान, सम्मान बहुत सी चीज़ें हम अनुभव करते हैं। लेकिन, कभी-कभी इसके पीछे की बहुत-सी बातें ऐसी होती हैं जो खेल-विश्व से भी बहुत बढ़ करके होती है, बहुत बड़ी होती है। मैं कश्मीर की एक बेटी हनाया निसार के बारे में बताना चाहता हूँ जिसने कोरिया में karate championship में gold medal जीता है। हनाया 12 साल की है और कश्मीर के अनंतनाग में रहती है। हनाया ने मेहनत और लगन से karate का अभ्यास किया, उसकी बारीकियों को जाना और स्वयं को साबित करके दिखाया। मैं सभी देशवासियों की ओर से उसके उज्जवल भविष्य की कामना करता हूँ। हनाया को ढ़ेर सारी शुभकामनाएँ और आशीर्वाद। वैसे ही 16 साल की एक बेटी रजनी के बारे में media में बहुत चर्चा हुई है। आपने भी जरुर पढ़ा होगा। रजनी ने junior महिला मुक्केबाजी championship मेंगोल्ड मेडल जीता है। जैसे ही रजनी ने पदक जीता वह तुरंत पास के एक दूध के stall पर गई और एक गिलास दूध पिया।इसके बाद, रजनी ने अपने पदक को एक कपड़े में लपेटा और बैग में रख लिया। अब आप सोच रहे होंगे कि रजनी ने एक गिलास दूध क्यों पिया? उसने ऐसा अपने पिता जसमेर सिंह जी के सम्मान में किया, जो पानीपत के एक stall पर लस्सी बेचते हैं। रजनी ने बताया कि उनके पिता ने उसे यहाँ तक पहुँचाने में बहुत त्याग किया है, बहुत कष्ट झेले हैं। जसमेर सिंह हर सुबह रजनी और उनके भाई-बहनों के उठने से पहले ही काम पर चले जाते थे। रजनी ने जब अपने पिता से Boxing सीखने की इच्छा जताई तो पिता ने उसमें सभी संभव साधन जुटा कर उसका हौसला बढ़ाया। रजनी को मुक्केबाजी का अभ्यास पुराने gloves के साथ शुरू करना पड़ा क्योंकि उन दिनों उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। इतनी सारी बाधाओं के बाद भी रजनी ने हिम्मत नहीं हारी और मुक्केबाजी सीखती रही। उसने सर्बियामें भी एक पदक जीता है। मैं रजनी को शुभकामनाएँ और आशीर्वाद देता हूँ और रजनी का साथ देने और उसका उत्साह बढ़ाने के लिए उसकेमाता-पिता जसमेर सिंह जी और उषारानी जी को भी बधाई देता हूँ। इसी महीने पुणे की एक 20 साल की बेटी वेदांगी कुलकर्णी साइकल से दुनिया का चक्कर लगाने वाली सबसे तेज एशियाई बन गयी हैं। वह 159 दिनों तक रोजाना लगभग 300 किलोमीटर साइकल चलाती थी। आप कल्पना कर सकते हैं - प्रतिदिन 300 किलोमीटर cycling ! साईकिल चलाने के प्रति उनका जुनून वाकई सराहनीय है। क्या इस तरह की achievements, ऐसी सिद्धि के बारे में सुनकर हमें inspiration नहीं मिलती। ख़ासकर के मेरे युवा मित्रों, जब ऐसी घटनाएँ सुनते हैं तब हम भी कठिनाइयों के बीच कुछ कर गुजरने की प्रेरणा पाते हैं। अगर संकल्प में सामर्थ्य है, हौसले बुलंद हैं तो रुकावटें खुद ही रुक जाती हैं। कठिनाइयाँ कभी रुकावट नही बन सकती हैं। अनेकऐसे उदाहरण जब सुनते हैं तो हमें भी अपने जीवन में प्रतिपल एक नयी प्रेरणा मिलती है। मेरे प्यार��� देशवासियों, जनवरी में उमंग और उत्साह से भरे कई सारे त्योहार आने वाले हैं - जैसे लोहड़ी, पोंगल, मकर संक्रान्ति, उत्तरायण, माघ बिहू, माघी; इन पर्व त्योहारों के अवसर पर पूरे भारत में कहीं पारंपरिक नृत्यों का रंग दिखेगा, तो कहीं फसल तैयार होने की खुशियों में लोहड़ी जलाई जाएगी, कहीं पर आसमान में रंग-बिरंगी पतंगे उड़ती हुई दिखेंगी, तो कहीं मेले की छठा बिखरेगी, तो कहीं खेलों में होड़ लगेगी, तो कहीं एक-दूसरे को तिल गुड़ खिलाया जायेगा। लोग एक-दूसरे को कहेंगे –“तिल गुड घ्या –आणि गोड़ -गोड़ बोला।” इन सभी त्योहारों के नाम भले ही अलग-अलग हैं लेकिन सब को मनाने की भावना एक है। ये उत्सव कहीं-न-कहीं फसल और खेती-बाड़ी से जुड़े हुए हैं, किसान से जुड़े हुए हैं, गाँव से जुड़े हुए हैं, खेत खलिहान से जुड़े हुए हैं। इसी दौरान सूर्य उत्तरायण होकर मकर राशि में प्रवेश करता है। इसी के बाद से दिन धीरे-धीरे बड़े होने लगते हैं और सर्दियों की फसलों की कटाई भी शुरू हो जाती है। हमारे अन्नदाता किसान भाई-बहनों को भी खूब-खूब शुभकामनाएं।‘विविधता में एकता’ –‘एक भारतश्रेष्ठ भारत’ की भावना की महक हमारे त्योहार अपने में समेटे हुए हैं। हम देख सकते हैं हमारे पर्व, त्योहार प्रकृति से कितनी निकटता से जुड़े हुए हैं। भारतीय संस्कृति में समाज और प्रकृति को अलग-अलग नहीं माना जाता। यहाँ व्यक्ति और समष्टि एक ही है।प्रकृति के साथ हमारे निकट संबंध का एक अच्छा उदाहरण है - त्योहारों पर आधारित कैलेंडर।इसमें वर्ष भर के पर्व, त्योहारों के साथ ही ग्रह नक्षत्रों का लेखा-जोखा भी होता है। इस पारंपरिक कैलेंडरसे पता चलता है कि प्राकृतिक और खगोलीय घटनाओं के साथ हमारा संबंध कितना पुराना है। चन्द्रमा और सूर्य की गति पर आधारित, चन्द्र और सूर्य कैलेंडरके अनुसार पर्व और त्योहारों की तिथि निर्धारित होती है। ये इस पर निर्भर करता है कि कौन किस कैलेंडरको मानता है। कई क्षेत्रों में ग्रह नक्षत्रों की स्थिति के अनुसार भी पर्व, त्योहार मनाये जाते हैं। गुड़ी पड़वा, चेटीचंड, उगादि ये सब जहाँ चन्द्र कैलेंडरके अनुसार मनाये जाते हैं, वहीँ तमिल पुथांडु, विषु, वैशाख, बैसाखी, पोइला बैसाख, बिहु - ये सभी पर्व सूर्य कैलेंडरके आधार पर मनाये जाते हैं। हमारे कई त्योहारों में नदियों और पानी को बचाने का भाव विशिष्ट रूप से समाहित है। छठ पर्व - नदियों, तालाबो��� में सूर्य की उपासना से जुड़ा हुआ है। मकर संक्रान्ति पर भी लाखों-करोड़ों लोग पवित्र नदियों में डुबकी लगाते हैं। हमारे पर्व, त्योहार हमें सामाजिक मूल्यों की शिक्षा भी देते हैं। एक ओर जहाँ इनका पौराणिक महत्व है, वहीं हर त्योहार जीवन के पाठ -एक दूसरे के साथ भाईचारे से रहने की प्रेरणा बड़ी सहजता से सिखा जाते हैं। मैं आप सभी को 2019 की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ देता हूँ और आने वाले त्योहारों का आप भरपूर आनन्द उठाएँ इसकी कामना करता हूँ। इन उत्सवों पर ली गई photos को सबके साथ share करें ताकि भारत की विविधता और भारतीय संस्कृति की सुन्दरता को हर कोई देख सके।मेरे प्यारे देशवासियो, हमारी संस्कृति में ऐसी चीज़ों की भरमार है, जिनपर हम गर्व कर सकते हैं और पूरी दुनिया को अभिमान के साथ दिखा सकते हैं - और उनमें एक है कुंभ मेला। आपने कुंभ के बारे में बहुत कुछ सुना होगा। फ़िल्मों में भी उसकी भव्यता और विशालता के बारे में काफी कुछ देखा होगा और ये सच भी है। कुंभ का स्वरूप विराट होता है - जितना दिव्य उतना ही भव्य। देश और दुनिया भर के लोग आते हैं और कुंभ से जुड़ जाते हैं। कुंभ मेले में आस्था और श्रद्धा का जन-सागर उमड़ता है। एक साथ एक जगह पर देश-विदेश के लाखों करोड़ों लोग जुड़ते हैं। कुंभ की परम्परा हमारी महान सांस्कृतिक विरासत से पुष्पित और पल्लवित हुई है। इस बार 15 जनवरी से प्रयागराज में आयोजित होने जा रहा विश्व प्रसिद्ध कुंभ मेला जिसकी शायद आप सब भी बहुत ही उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रहे होंगे। कुंभ मेले के लिए अभी से संत-महात्माओं के पहुँचने का सिलसिला प्रारंभ भी हो चुका है। इसके वैश्विक महत्व का अंदाज़ा इसी से लग जाता है कि पिछले वर्ष UNESCO ने कुंभ मेले को Intangible Cultural Heritage of Humanity की सूची में चिन्हित किया है। कुछ दिन पहले कई देशों के राजदूत ने कुंभ की तैयारियों को देखा। वहाँ पर एक साथ कई देशों के राष्ट्रध्वज फहराए गए। प्रयागराज में आयोजित हो रहे इस कुंभ के मेले में 150 से भी अधिकदेशों के लोगों के आने की संभावना है। कुंभ की दिव्यता से भारत की भव्यता पूरी दुनिया में अपना रंग बिखेरेगी। कुंभ मेला self discoveryका भी एक बड़ा माध्यम है, जहाँ आने वाले हर व्यक्ति को अलग-अलग अनुभूति होती है।सांसारिक चीज़ों को आध्यात्मिक नज़रिए से देखते-समझते हैं। खासकर युवाओं के लिए यह एक बहुत बड़ा learning experience हो सकता है। मैं स्वयं कुछ दिन पहले प्रयागर���ज गया था। मैंने देखा कि कुंभ की तैयारी ज़ोर-शोर से चल रही है। प्रयागराज के लोग भी कुंभ को लेकर काफी उत्साही हैं। वहाँ मैंने Integrated Command & Control Centre का लोकार्पण किया। श्रद्धालुओं को इससे काफी सहायता मिलेगी। इस बार कुंभ में स्वच्छता पर भी काफी बल दिया जा रहा है। आयोजन में श्रद्धा के साथ-साथ सफाई भी रहेगी तो दूर-दूर तक इसका अच्छा संदेश पहुंचेगा। इस बार हर श्रद्धालु संगम में पवित्र स्नान के बाद अक्षयवट के पुण्य दर्शन भी कर सकेगा। लोगों की आस्था का प्रतीक यह अक्षयवट सैंकड़ों वर्षों से किले में बंद था, जिससे श्रद्धालु चाहकर भी इसके दर्शन नहीं कर पाते थे। अब अक्षयवट का द्वार सबके लिए खोल दिया गया है। मेरा आप सब से आग्रह है कि जब आप कुंभ जाएं तो कुंभ के अलग-अलग पहलू और तस्वीरें social media पर अवश्य share करें ताकि अधिक-से-अधिक लोगों को कुंभ में जाने की प्रेरणा मिले।अध्यात्मका ये कुंभ भारतीय दर्शन का महाकुंभ बने।आस्था का ये कुंभ राष्ट्रीयता का भी महाकुंभ बने।राष्ट्रीय एकता का भी महाकुंभ बने।श्रद्धालुओं का ये कुंभ वैश्विक टूरिस्टों का भी महाकुंभ बने।कलात्मकता का ये कुंभ, सृजन शक्तियों का भी महाकुंभ बने।मेरे प्यारे देशवासियो, 26 जनवरी के गणतंत्र दिवस समारोह को लेकर हम देशवासियों के मन में बहुत ही उत्सुकता रहती है। उस दिन हम अपनी उस महान विभूतियों को याद करते हैं, जिन्होंने हमें हमारा संविधान दिया।इस वर्ष हम पूज्य बापू का 150वाँ जयन्ती वर्ष मना रहे हैं। हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति श्री सिरिल रामाफोसा, इस साल गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि के रूप में भारत पधार रहे हैं। पूज्य बापू और दक्षिण अफ्रीका का एक अटूट सम्बन्ध रहा है।यह दक्षिण अफ्रीका ही था, जहाँ से मोहन,‘महात्मा’बन गए। दक्षिण अफ्रीका में ही महात्मा गांधी ने अपना पहला सत्याग्रह आरम्भ किया था और रंग-भेद के विरोध में डटकर खड़े हुए थे। उन्होंने फीनिक्स और टॉलस्टॉय फार्म्स की भी स्थापना की थी, जहाँ से पूरे विश्व में शान्ति और न्याय के लिए गूँज उठी थी। 2018 - नेल्सन मंडेला के जन्म शताब्दी वर्ष के रूप में भी मनाया जा रहा है। वे ‘मड़ीबा’ के नाम से भी जाने जाते हैं। हम सब जानते हैं कि नेल्सन मंडेला पूरे विश्व में नस्लभेद के खिलाफ संघर्ष की एक मिसाल थे और मंडेला के प्रेरणास्रोत कौन थे? उन्हें इतने वर्ष ���ेल में काटने की सहनशक्ति और प्रेरणा पूज्य बापू से ही तो मिली थी। मंडेला ने बापू के लिए कहा था – “महात्मा हमारे इतिहास के अभिन्न अंग है क्योंकि यहीं पर उन्होंने सत्य के साथ अपना पहला प्रयोग किया था; यहीं पर उन्होंने न्याय के प्रति अपनी दृढ़ता का विलक्षण प्रदर्शन किया था; यहीं पर उन्होंने अपने सत्याग्रह का दर्शन और संघर्ष के तरीके विकसित किये।” वे बापू को रोल मॉडल मानते थे। बापू और मंडेला दोनों, पूरे विश्व के लिए ना केवल प्रेरणा के स्रोत हैं, बल्कि उनके आदर्श हमें प्रेम और करुणा से भरे हुए समाज के निर्माण के लिए भी सदैव प्रोत्साहित करते हैं।मेरे प्यारे देशवासियो, कुछ दिन पहले गुजरात के नर्बदा के तट पर केवड़िया मेंDGP conferenceहुई, जहाँ पर दुनिया की सबसे ऊँची प्रतिमा‘Statue of Unity’ है, वहाँ देश के शीर्ष पुलिसकर्मियों के साथ सार्थक चर्चा हुई। देश और देशवासियों की सुरक्षा को और मजबूती देने के लिए किस तरह के कदम उठाये जाएँ, इस पर विस्तार से बात हुई।उसी दौरान मैंने राष्ट्रीय एकता के लिए ‘सरदार पटेल पुरस्कार’ शुरू करने की भी घोषणा की। यह पुरस्कार उनको दिया जाएगा, जिन्होंने किसी भी रूप में राष्ट्रीय एकता के लिए अपना योगदान दिया हो। सरदार पटेल ने अपना पूरा जीवन देश की एकता के लिए समर्पित कर दिया।वे हमेशा भारत की अखंडता कोअक्षुण्ण रखने में जुटे रहे। सरदार साहब मानते थे कि भारत की ताकत यहाँ की विविधता में ही निहित है। सरदार पटेल जी की उस भावना का सम्मान करते हुए एकता के इस पुरस्कार के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।मेरे प्यारे देशवासियो, 13 जनवरी गुरु गोबिंद सिंह जी की जयन्ती का पावन पर्व है। गुरुगोबिंद सिंह जी का जन्म पटना में हुआ। जीवन के अधिकांश समय तक उनकी कर्मभूमि उत्तर भारत रही और महाराष्ट्र के नांदेड़ में उन्होंने अपने प्राण त्यागे। जन्मभूमि पटना में, कर्मभूमि उत्तर भारत में और जीवन का अंतिम क्षण नांदेड़ में। एक तरह से कहा जाए तो पूरे भारतवर्ष को उनका आशीर्वाद प्राप्त हुआ। उनके जीवन-काल को देखें तो उसमें पूरे भारत की झलक मिलती है। अपने पिता श्री गुरु तेगबहादुर जी के शहीद होने के बाद गुरुगोबिंद सिंह जी ने 9 साल की अल्पायु में ही गुरु का पद प्राप्त किया। गुरु गोबिन्द सिंह जी को न्याय की लड़ाई लड़ने का साहस सिख गुरुओं से विरासत में मिला। वे शांत और सर�� व्यक्तित्व के धनी थे, लेकिन जब-जब,ग़रीबों और कमजोरों की आवाज़ को दबाने का प्रयास किया गया, उनके साथ अन्याय किया गया, तब-तब गुरु गोबिन्द सिंह जी ने गरीबों और कमजोरों के लिए अपनी आवाज़ दृढ़ता के साथ बुलंद की और इसलिए कहते हैं –“सवा लाख से एक लड़ाऊँ, चिड़ियों सों मैं बाज तुड़ाऊँ, तबे गोबिंदसिंह नाम कहाऊँ।वे कहा करते थे कि कमज़ोर तबकों से लड़कर ताकत का प्रदर्शन नहीं किया जा सकता। श्री गोबिन्द सिंह मानते थे कि सबसे बड़ी सेवा है मानवीय दुखों को दूर करना। वे वीरता, शौर्य, त्याग धर्मपरायणता से भरे हुए दिव्य पुरुष थे, जिनको शस्त्र और शास्त्र दोनों का ही अलौकिक ज्ञान था। वे एक तीरंदाज तो थे ही, इसके साथ-साथ गुरूमुखी, ब्रजभाषा, संस्कृत, फारसी, हिन्दी और उर्दू सहित कई भाषाओं के भी ज्ञाता थे। मैं एक बार फिर से श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी को नमन करता हूँ।मेरे प्यारे देशवासियों, देश में कई ऐसे अच्छे प्रकरण होते रहते हैं, जिनकी व्यापक चर्चा नहीं हो पाती, ऐसा ही एक अनूठा प्रयासF.S.S.A.I यानी Food Safety and Standard Authority of India द्वारा हो रहा है। महात्मा गांधी के 150वें जयन्ती वर्ष के उपलक्ष्य में देशभर में कई कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। इसी कड़ी में F.S.S.A.I., Safe और Healthy Diet Habits खाने की अच्छी आदतों को बढ़ावा देने में जुटा है। “Eat Right India” अभियान के अन्दर देश भर में स्वस्थ भारत यात्राएं निकाली जा रही हैं। ये अभियान 27 जनवरी तक चलेगा।कभी-कभी सरकारी संगठनों का परिचय एक regulator की तरह होता है लेकिन यह सराहनीय है कि F.S.S.A.I इससे आगे बढ़कर जन-जागृति और लोकशिक्षा का काम कर रहा है। जब भारत स्वच्छ होगा, स्वस्थ होगा, तभी भारत समृद्ध भी होगा। अच्छे स्वास्थ्य के लिए सबसे आवश्यक है पौष्टिक भोजन। इस सन्दर्भ में, इस पहल के लिए F.S.S.A.I का हार्दिक अभिनन्दन करता हूँ। मेरा आप सबसे आग्रह है, आइये इस पहल से जुडें। आप भी इसमें हिस्सा लें और खासकर मैं आग्रह करूंगा कि बच्चों को जरूर ये चीज़ें दिखाएँ। खाने के महत्व की शिक्षा बचपन से ही आवश्यक होती है।मेरे प्यारे देशवाशियों, 2018 का ये अंतिम कार्यक्रम है, 2019 में हम फिर से मिलेंगे, फिर से मन की बातें करेंगे। व्यक्ति का जीवन हो, राष्ट्र का जीवन हो, समाज का जीवन हो, प्रेरणा, प्रगति का आधार होती है। आइये, नयी प्रेरणा, नयी उमंग, नया संकल्प, नयीसिद्धि, नयी ऊँचाई - आगे चलें, बढ़ते चलें, खुद भी बदलें, देश को भी बदलें। बहुत-बहुत धन्यवा��।*****AKT/SH/VK
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यहां उपस्थित सभी सज्जनों और देवियो।पूर्वांचल के महान शिल्पकार भाई लोगन को प्रणाम हो। देश दुनिया में अपने हाथ के हुनर का डंका बजाने वाले भी बंधु-भगिनी के बार-बार अभिनंदन।पुरातन काल से काशी नगरी दुनिया के बाजार में स्थापित रहल हो। रेशम की साड़ी हो या हाथ का खिलौना, मेरी काशी सबसे आगे।जब पचौरी जी बोल रहे थे तो वो कह रहे थे कि प्रधानमंत्री जी हमारे अतिथि के रूप में आए। जी नहीं, मैं अतिथि नहीं रहा। आपने मुझे इतना प्यार दिया है, मुझे अपना बना लिया है। मुझे बताया गया है कि सिल्क, फेबरिक, सूत, कपड़े और कालीन से जुड़े 11 जिलों के उद्यमी यहां आए हैं। और थोड़ी देर पहले यहां लगे stalls में मैं गया था, वहां एक से एक बेहतरीन प्रोडक्ट्सरखे गए हैं। यहां कुछ लोगों को लोन की सहायता भी मिल रही है और कुछ हस्तशिल्प बहन-भाइयों को tool kit भी दी गई हैं। आप सभी को भी बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं देता हूं।साथियो, थोड़ी देर पहले यहां वाराणसी और देश से जुड़े सैंकड़ों करोड़ के प्रोजेक्ट्स का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया गया है। इसमें वाराणसी के infrastructure से जुड़े projects तो हैं ही, साथ में टेलीकॉम विभाग के देशभर के पेंशन धारक भाई-बहनों को सुविधा देने वाली योजना भी शामिल है। इन सभी परियोजनाओं के लिए मैं वाराणसी सहित सभी लाभार्थियों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं।भाइयो-बहनों, आज यहां जितनी भी योजनाओं या परियोजनाओं का लोकर्पण या शिलान्यास किया गया है, उन सभी के मूल में एक बात प्रमुख है, और वो बात है- जीवन आसान हो, व्यापार-कारोबार आसान हो, ease of livingऔर ease of doing business, यानी जीवन भी सरल हो, सुगम हो और व्यापार-कारोबार करना भी आसान हो। इन दोनों का आपस में जितना संबंध है, उतना ही विकास के इन तमाम प्रोजेक्ट्स का आपस में संबंध है। सज्य सरकार मेक इन इंडिया के अभियान को मजबूती देने के लिए प्रतिबद्ध है।यूपी सरकार का One District, One Productये प्रयोगMake in India का ही एक प्रकार से मजबूत विस्तार है। ये योजना यूपी को दुनिया के औद्योगिक मानचित्र पर स्थापित करने में सक्षम है। इसके लिए मैं योगीजी और उनकी पूरी टीम को बहुत-बहुत बधाई देता हूं। यूपी तो छोटे और लघु उद्योगों का हब है। कृषि के बाद सबसे अधिक रोजगार MSME sector देता है। यहां MSME sector परम्परा का हिस्सा है।मुरादाबाद की पीतल कला हो, भदोई की कालीन, बनारस का रेशम उत्पाद, यहां की साड़���, आगरा का पेठा, मेरठ का खेल का सामान, लखनऊ की चिकनकारी, गोरखपुर के टेराकोटा काल, प्रतापगढ़ का आंवला, श्रावस्ती की थारू कला; हर जिले में कुछ न कुछ अलग है, विशेष है, अनूठा है; जिसने यहां लोगों को रोजगार से जोड़ा है। ये कला को विस्तार देने के लिए एक जनपद-एक उत्पाद योजना लाभकारी सिद्ध होने वाली है।साथियो, वाराणसी समेत ये पूरा पूर्वांचल तो हस्तशिल्प का हब है। कलाकारी चाहे कपड़े और कालीन में हो या फिर मिट्टी या धातु के बर्तन में; यहां के कण-कण में कला बसी हुई है। वाराणसी के आसपास के क्षेत्रों से जुड़े 10 उत्पादों को तो जीआई टैग यानी geographical indication का प्रमाण भी मिल चुका है।यहां करीब 60 हजार हथकरघे हैं, करीब 70 हजार पावरलूम हैं, करीब डेढ़ लाख बुनकर इस कला को समृद्ध कर रहे हैं।One District, One Product कार्यक्रम के माध्यम से सरकार इस कला को एक लाभकारी व्यवसाय में बदलने में जुटी है।उद्यमियों को, हस्तशिल्पियों को, कलाकारों को फंड की कमी न हो, उनको अच्छी मशीनें, अच्छे औजार मिलें, उनकी सही ट्रेनिंग हो, उनके प्रोडक्ट की सही मार्केटिंग हो सके, सही दाम मिल सकें; इसके लिए ये योजना चलाई जा रही है।ये कला, ये परम्परा बनी रहे- इसके लिए केन्द्र और राज्य सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। मैं खुद भी देश के ऐसे 100 जिलों की monitoring regular base पर कर रहा हूं जहां लघु उद्योग, MSME हमारी परम्परा का हिस्सा हैं।भाइयो और बहनों, जैसा कि बताया गया है कि इससम्मेलन के दौरान करीब दो हजार करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया जाना है। अब दो हजार करोड़ रुपया कारोबारियों के हाथ में आना है, ये अपने-आप में आर्थिक विकास को कितनी गति देता है।यहां तमाम उद्यमियों के अलावा बैंकों के भी सभी महानुभाव मौजूद हैं। सब कुछ मौके पर ही निपटाया जा रहा है। मुझे खुशी है कि जिस लक्ष्य को लेकर इस दीनदयाल हस्तकला संकुल का निर्माण किया गया था, वो सपना आज हमारी आंखों के सामने पूरा होता नजर आ रहा है।आप सभी के लिए ये व्यापार, कारोबार और संवाद का माध्यम बने, यही इसके पीछे की सोच थी।साथियो, एक जनपद-एक उत्पाद योजना का मकसद उत्पादन से लेकर बिक्री तक का समपूर्ण समाधान देना है। मैं आपको यहां बनारस के बुनकरों और शिल्पकारों का ही उदाहरण दूंगा।सरकार द्वारा उन्हें आसान शर्तों पर बैंकों से ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है, कच्चे माल के लिए सहायता दी जा रही है। ���हचान- इस पहचान नाम से जो पहचान पत्र बुनकरों को दिया गया है, उससे बिचौलियों को हटाने में बहुत मदद मिली है। क्यों बिचौलियों वाली बात पसंद नहीं आई? तकलीफ होती होगी ना? लेकिन तकलीफ झेल करके भी देश को बिचौलियों से बचाना है।इसके अलावा यहां बनारस में ही 9 common facility centre-common service centreबनाए गए हैं। इन सेंटरों के माध्यम से मार्केटिंग के लिए बुनकरों को सहायता दी जा रही है। इसके अलावा भदोई, मिर्जापुर, मेघा कारपेट कलस्टर में भी बनुकरों को आधुनिक loom दिए गए हैं।बुनकरों के साथ-साथ मिट्टी के काम से जुड़े शिल्पकारों को भी आधुनिक ‘चाक’ दिए हैं, नई मशीनें उपलब्ध कराई जा रही हैं। अभी मुझे हमारा एक शिल्पकार बता रहा था- आधुनिक चाक एक छोटे से टेबल पर लेकर बैठा था, बर्तन बना रहा था।उसने कहा मुझे मुद्रा योजना से 10 लाख रुपया मिल गया। पहले धीरे-धीरे कारोबार बंद हो रहा था, अब बहुत बड़ी मात्रा में परिवार फिर से इस कारोबार में आने लगे हैं। देखिए कैसे बदलाव आता है। और मैं उसके चेहरे पर चमक देख रहा था। उसको लग रहा था मेरी जिंदगी बदल गई। और जब उसके चेहरे की चमक देता हूं, तो मेरा चेहरा भी चमकता है। इन सारे प्रयासों के बीच आज जिस जगह ये कार्यक्रम हो रहा है, उस बहुमूल्य उपहार की सार्थकता तो हम सब लगातार देख रहे हैं।साथियो, सामान्य से सामान्य परिवार के युवाओं को रोजगार से जोड़ने के इस कार्य को हम निरंतर विस्तार दे रहे हैं। थोड़ी देर पहले कुछ ऐसे लाभार्थियों को भी यहां सहायता दी गई है, जो एलपीजी गैस के transportation से जुड़ना चाहते हैं। सरकार ट्रक खरीदने में ऐसे उद्यमियों की मदद कर रही है और तेल कम्पनियां इनकी सेवाएं ले रही हैं।भाइयो और बहनों, सामान्य मानवी का जीवन जब सरल और सुगम होता है तो व्यापार और कारोबार करना अपने-आप में आसान हो जाता है। जब infrastructure अच्छा हो और सरकारी प्रक्रियाएं व्यक्ति को उलझाने वाली न हों, तब जीवन भी आसान होता है और कारोबार भी। इसी संकल्प को लेकर बीते चार वर्षों से हम काम कर रहे हैं।मैं मनोज सिन्हा जी और उनके विभाग को बधाई देता हूं। उन्होंने टेलीकॉम विभाग में सरकारी प्रक्रियाओं से जुड़ी एक बड़ी अड़चन को भी आज दूर किया है।जीवनभर देश को सेवा देने के बाद पेंशनभागियों को जो दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे, जो मुश्किलें आती थीं, उस प्रक्रिया को आसान करने का प्रयास किया गया ह��।‘SAMPANN’ सम्पन्न यानी system for authority and management of pension योजना आज लॉन्च हुई है।साथियो, अब पेंशन की स्वीकृति से लेकर निपटारे तक का काम खुद विभाग ही करेगा। इससे सरकार को हर साल करोड़ों रुपये की बचत तो होगी ही, पेंशन धारकों को बहुत बड़ी सुविधा होगी। इससे करीब 11 हजार करोड़ रुपये की पेंशन का समय पर भुगतान संभव हो पाएगा। पेंशन धारक अपनी पेंशन स्टेट्स को घर बैठे- बैठे अपने मोबाइल फोन से track कर पाएगा। पहले अलग-अलग एजेंसियों के जुड़े होने की वजह से जो परेशानियां सामने आती थीं, वो बहुत मात्रा में कम हो जाएंगी। अगर कोई शिकायत आती है तो उसको हल करने में कम समय लगेगा। इससे देश भर में पोस्टल विभाग के लाखों पूर्व कर्मचारियों को लाभ होने वाला है।वैसे वाराणसी और पूर्वांचल वालों के लिए तो ये डबल बधाई है क्योंकि control communication account यानी CCA का sub-office वाराणसी में अब खोला जा चुका है। अब आपको पेंशन से जुड़े दस्तावेज जमा करने और दूसरी शिकायतों का निवारण करने के लिए बार-बार लखनऊ जाने की जरूरत नहीं है।साथियो, पेंशनधारकों के लिए जो टेलीकॉमविभागकी ये योजना आज लॉन्च हुई है, ये सरकार की citizen centric approach, minimum government-maximum governance का एक मूलभूत हिस्सा है। यानी सरकार की प्रकियाएं कैसे सरल हों, सामान्य मानवी की पहुंच में हों; सरकार लगातार उस प्रयास को आगे बढ़ा रही है।डिजीटल इंडिया के माध्यम से देश के जन-जन के जीवन को आसान बनाने की कोशिश का ये हिस्सा है। आज जन्म प्रमाणपत्र से लेकर जीवन प्रमाणपत्र तक, सरकार की सैंकड़ों सेवाओं का बड़ी तेज गति से विस्तार हो रहा है।EPF- उसके ऑनलाइन या ट्रांसफर या निकासी की सुविधा तो पहले ही दी जा चुकी है।अब पेंशन जैसी व्यवस्थाओं को भी आसान किया जा रहा है।घर पर जाकर ही दिव्यांगों, वृद्धजनों को डिजीटल जीवन प्रमाणपत्र जारी करने का काम आज चल रहा है। जीवन प्रमाणपत्र योजना से करीब ढाई करोड़ पेंशनभोगियों को लाभ मिल चुका है।भाइयो और बहनों, सरकार India post payment bank के जरिए गांव-गांव, घर-घर तक बैंकिंग सेवा पहुंचाने में जुटी है। डाकिया ही आपके घर पर बैंक से जुड़ा लेनदेन करेगा। इस व्यवस्था की तरफ सरकार ने कई कदम उठाए हैं और काम आगे बढ़ रहा है।अभी तक देशभर में करीब 25 हजार पोस्ट ऑफिस ये सुविधा शुरू कर चुके हैं। बाकियों में भी बहुत ही जल्द बैंकिंग सेवा शुरू हो जाएगी।साथियो, बैंकिंग से लेकर जमीन से जुड़ी जानकारी से लेकर अपनी फसल, अपना उत्पाद ऑनलाइन बेचने तक की अनेक सुविधाएं आज ऑनलाइन हैं। देशभर में फैले तीन लाख से अधिक कॉमन सर्विस सेंटर के नेटवर्क से गांव में भी ये सुविधाएं पहुंच रही हैं। इस नेटवर्क को बीते साढ़े चार वर्षों में तैयार किया गया है।आपने भी अखबारों में पढ़ा होगा कि बीते दो-ढाई वर्षों के दौरान ही भारत में इंटरनेट कनेक्शन में 65 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है और देश में 50 करोड़ से अधिक इंटरनेट कनेक्शन आज काम कर रहे हैं। शहरों में तो ये बढ़ोत्तरी हुई ही है, गांवों में भी तेजी से इंटरनेट का दायरा बढ़ा है। देश की लगभग सवा लाख पंचायतें ब्रॉडबैंड से जुड़ चुकी हैं। जिसमें से सबसे अधिक करीब 29 हजार उत्तर प्रदेश में पहुंच चुकी हैं, 29 हजार गांवों में।आने वाले समय में जब देश के कोने-कोने तक तेज इंटरनेट पहुंच जाएगा, तब डिजीटल इंडिया New India को नई शक्ति, नई पहचान देगा।साथियो, डिजीटल इंडिया अभियान से देश के आम नागरिकों की सुविधा तो बढ़ ही रही है, साथ ही ये भ्रष्टाचार को कम करने और सरकारी लेनदेन में पारदर्शिता का साधन भी बन रहा है। पहले सरकारी विभागों की खरीदारी को लेकर किस प्रकार शक और शिकायतें सामने आती थीं? अब केन्द्र सरकार ने अपने विभागों के लिए खरीदारी की एक नई पारदर्शी व्यवस्था बनाई है। केन्द्र सरकार ने Government E-market place यानी जैम GEM नाम से पोर्टल बनाया है और मैं आप सबसे चाहूंगा कि आप उसका भरपूर फायदा उठाइए। उत्तर प्रदेश के छोटे-छोटे कारोबारी भी इसका भरपूर फायदा उठा सकते हैं।इसके माध्यम से देश का कोई भी छोटे से छोटा कारोबारी अपना प्रोडक्ट केन्द्र सरकार को, राज्य सरकारों को सीधे बेच सकता है। इसका बड़ा लाभ सामान्य से सामान्य गृहणियों से लेकर हमारे MSME से जुड़े उद्यमियों को हुआ है।साथियो, छोटे, लघु, मझले उद्योग यानी MSME के लिए तो ये बेहतरीन प्लेटफॉर्म सिद्ध हो रहा है। हाल में ही MSME सेक्टर के लिए जो 12 दिवाली गिफ्ट का ऐलान किया गया था, उसमें GEM का एक बड़ा रोल है। बड़ी कम्पनियों के पास छोटे उद्यमियों का पैसा न फंसे, कैश फ्लो न टूटे, इसके लिए केन्द्र सरकार की सभी कम्पनियों को GEM से जुड़ना अनिवार्य किया गया है।इतना ही नहीं, डिजिटल सेवाओं की शक्ति के माध्यम से ही MSME को ऋण लेने में असुविधा न हो, इसके लिए ऑनलाइन लोन स्वीकृत किए जा रहे हैं। और आपको खुशी होगी, आप में से बहुत लोगों ने इसका फायदा लिया होगा। सिर्फ 59 मिनट में, उनसठ मिनट में एक करोड़ रुपये तक के लोन ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से स्वीकृति देने का काम चल रहा है, सफलतापूर्वक चल रहा है। वरना एक करोड़ का लोन लेना हो तो पता नहीं कितने जूते घिस जाते होंगे। आज fifty nine minute में ये काम हो रहा है।साथियो, देश में MSME को सशक्त करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। सरकार का प्रयास है जितने भी MSMEs हैं, जीएसटी से जुड़े रहे हैं, उनको बैंकों से लोन लेने के लिए बहुत मशक्कत न करनी पड़े, वो ऑनलाइन इसको देख करके काम आगे बढ़ सकता है। सिर्फ जीएसटी और अपने रिटर्न के दस्तावेजों के माध्यम से या ऑनलाइन रिकॉर्ड देखने के बाद बैंक खुद ही ऋण के लिए संपर्क करें।ये तमाम प्रयास देश में ease of doing business सुनिश्चित कर रहे हैं, जिससे व्यापार और कारोबार में आसानी हो रही है, युवाओं को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं।साथियो, काशी और पूर्वांचल सहित सम्पूर्ण पूर्वी भारत में आधुनिक सुविधाएं और उद्योगों के लिए बेहतर माहौल बनाने का काम व्यापक स्तर पर चल रहा है। प्रधानमंत्री ऊर्जा गंगा योजना के तहत गैस पाइप लाइन बिछाई जा रही है। इससे घरों की रसोई से लेकर खाद कारखानों तक के लिए गैस मिलनी शुरू हो चुकी है। वाराणसी में भी इस सस्ती रसोई गैस की योजना से हजारों घर जुड़ भी चुके हैं। उत्तर प्रदेश हो, बिहार हो, झारखंड हो, ओडिशा हो, पश्चिम बंगाल हो, जगदीशपुर से हल्दिया तक करीब 13 हजार करोड़ रुपये की लागत से पाइप लाइन बिछाई जा रही है। इसका पहला चरण तो बहुत ही जल्द पूरा होने वाला है।महिलाओं को साफ और सस्ती गैस मिलेगी। सीएनजी से गाड़ियां चलेंगी तो प्रदूषण कम होगा और युवा साथियों को उद्योगों के विस्तार से रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।साथियो, यहां आने से पहले मैं International rice research institute campus में भी गया था। ये सेंटर विज्ञान और तकनीक से खेती को लाभकारी बनाने की हमारी नीति का ही परिणाम है। यहां भारत के लिए धान से जुड़ी उत्तम किस्मों, बीजों और दूसरी तकनीकों पर शोध तो होगा ही, एशिया और दुनिया के दूसरे देशों के लिए भी यहां समाधान तैयार होंगे।साथियो, काशी में परिवर्तन अब दिखने लगा है। दिव्य काशी का स्वरूप अब और भव्य होता जा रहा है। आज भी बनारस के विकास से जुड़ी अनेक परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया गया है। इनमें से अधिकतर प��रोजेक्ट रास्तों को चौड़ा करने से जुड़े हैं और यहां के ऐतिहासिक आस्था से जुड़े महत्वपूर्ण स्थानों के सौंदर्यीकरण से भी जुड़े हैं।ये सारे कार्य काशी की सुन्दरता को और निखारने वाले हैं। काशीवासियों के, काशी आने-जाने वालों के जीवन को आसान करने वाले हैं।कई ऐसे कार्यों को भी किया जा रहा है, जिन पर स्वतंत्रता से पहले थोड़ा-बहुत काम हुआ था।भाइयो और बहनों, सरकार का प्रयास है कि काशी की आत्मा से छेड़छाड़़ किए बिना हमारा ये चिर-पुरातन शहर नई काया के साथ दुनिया के सामने आए।बाबा विश्वनाथ की असीम कृपा हम सभी पर रही है। हमारा ये कर्तव्य है कि जो काम माता अहिल्याबाई होलकर ने करीब दो सौ वर्ष पूर्व किया था, उसको आज आगे बढ़ाने का हमें सौभाग्य मिला है। अनेक दशकों की उदासीनता के बाद बनारस के घाटों, यहां के मंदिरों के संरक्षण और सौंदर्यीकरण के कार्यों का आप जिस तरह समर्थन कर रहे हैं, उसके लिए मैं आपका, काशीवासियों का हृदयपूर्वक आभार व्यक्त करता हूं।यहां का सांसद होने के नाते मैं काशीवासियों के इस समर्थन से कृतज्ञ हूं। बाबा के चिर पुरातन स्थान की दिव्यता को भव्यता से जोड़ना भी हमारा दायित्व है ताकि देश और दुनिया से आने वाला हर भक्त बिना किसी दिक्कत के अपने बाबा विश्वनाथ के दरबार में मत्था टेक सके।ऐसी अनेक सुविधाओं का निर्माण हम सभी काशीवासी मिल करके कर रहे हैं और इस काम को हमें तेज गति से आगे बढ़ाना है।साथियो, इसी तरह मां गंगा की पवित्रता और अविरलता के प्रति भी हमारी प्रतिबद्धता है। मुझे खुशी है कि हमारे प्रयासों के परिणाम भी धीरे-धीरे दिखने लगे हैं। आप सभी ने मीडिया में आई उन रिपोर्टों को देखा होगा कि कैसे मछलियां, मगरमच्छ समेत अनेक जीव-जंतु जीवनदायिनी मां गंगा में फिर से लौटने लगे हैं। हाल में देश के अनेक वैज्ञानिकों की टीम ने गंगा जल के परीक्षण के बाद एक रिपोर्ट भी दी है। इस रिपोर्ट के मुताबिक मां गंगा में प्रदूषण के स्तर में कमी आई है। नमामि गंगे का अभियान जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे निर्मल और अविरल गंगा का लक्ष्य नजदीक दिख रहा है। ये सब आप सभी काशीवासियों, गंगा के किनारे बसे हर व्यक्ति की इच्छाशक्ति और सहयोग से संभव हो पा रहा है।साथियो, जब पूरी पारदर्शिता के साथ, प्रमाणिकता के साथ, जनभागीदारी से सरकार काम करती है तब सार्���क परिणाम अवश्य मिलते हैं। वरना, आप तो साक्षी रहे हैं कि कभी गंगा एक्शन प्लान से लेकर गंगा बेसिन अथॉरिटी तक की न जाने कैसी-कैसी योजनाएं बनाई गई। मां गंगा के नाम पर हजारों करोड़ रुपये बहा दिए गए।मां गंगा की निर्मलता के लिए धन की शक्ति ही काफी नहीं है, साफ नीयत भी चाहिए। नीयत साफ है तो गंगा भी साफ होना तय है।हम पूरी ईमानदारी के साथ, साफ नीयत के साथ गंगाजी को स्वच्छ करने के अभियान में जुटे हुए हैं।काशी के भाइयो और बहनों, प्रवासी भारतीय दिवस के लिए अब दो-तीन हफ्ते ही बचे हैं। मैं खुद दुनियाभर के प्रवासी भारतीयों को काशी आने का न्यौता दे चुका हूं। आपकी तरफ से मैं ही बताता रहता हूं। आने वाले दिनों में हमें दुनिया के सामने पुरातन काशी का आधुनिक स्वरूप, दुनिया की आंखों में प्रभावित करने वाला दृश्य खड़ा करना हम काशीवासियों की जिम्मेदारी है। काशी उनको प्रभावित भी करे, काशी उनको प्रेरित भी करे; ये ऐसा अवसर काशी को जाने नहीं देना चाहिए।हम निश्चित रूप से एक भव्य और सफल आयोजन करेंगे और मुझे एक सांसद के रूप में, आपके प्रतिनिधि के रूप में विश्वभर से आए हुए मेहमानों को पलक-पांवड़े बिछा करके ऐसा स्वागत-सम्मान करना है, ऐसा गौरव करना है कि फिर एक बार दुनिया में काशी का डंका बजने लग जाए।अंत में फिर से आप सभी शिल्पकार साथियों को, सभी लाभार्थियों को मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूं। अब दो दिन के बाद 2018 की विदाई हो जाएगी, 2019 दरवाजे पर दस्तक दे रहा है। मैं आप सबको नए साल की भी शुभकामनाएं देता हूं। काशी और यूपी के सभी स्वजनों को मेरी तरफ से मंगल-कामनाएं। बाबा विश्वनाथ के आशीर्वाद से हम सभी देश के नव-निर्माण के लिए, अपनी काशी के नव-निर्माण के लिए, अपने उत्तर प्रदेश के नव-निर्माण के लिए दिन-रात एक करते रहें, अपने परिश्रम में कहीं कोई कमी न आने दें, इसी कामना के साथ मैं अपनी बात को समाप्त करता हूं।आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद।हर-हर महादेव।धन्यवाद जी।***अतुल तिवारी/शाहबाज हसीबी/निर्मल शर्मा
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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 29-30 दिसंबर को अंडबार और निकोबार द्वीपसमूह की यात्रा करेंगे। प्रधानमंत्री 29 दिसंबर की शाम पोर्ट ब्लेयर पहुंचेंगे। प्रधानमंत्री 30 दिसंबर को अंडमार निकोबार में सुनामी स्मारक जाएंगे। प्रधानमंत्री वहां पुष्पांजलि अर्पित करेंगे और वाल ऑफ लॉस्ट सोल्स पर कैंडिल जलाएंगे। प्रधानमंत्री एरोंग में आईटीआई का उद्घाटन करेंगे और अनेक आधारभूत परियोनजाओं की आधारशिला रखेंगे। प्रधानमंत्री सार्वजनिक सभा को संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री बाद में पोर्ट ब्लेयर में शहीद कॉलम पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। श्री मोदी शहर के सेल्लुयर जेल को देखने जाएंगे। प्रधानमंत्री पोर्ट ब्लेयर के साउथ पॉइंट पर हाई मास्ट ध्वज फहराएंगे। प्रधानमंत्री पोर्ट ब्लेयर के मरीना पार्क में नेताजी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। प्रधानमंत्री नेताजी स्टेडियम में स्मृति डाक टिकट, सिक्का और नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा भारत की धरती पर तिरंगा फहराने की 75वीं वर्षगांठ पर फर्स्ट डे कवर जारी करेंगे। प्रधानमंत्री अंडमान निकोबार द्वीपसमूह के लिए नवाचार तथा स्टार्टअप नीति जारी करेंगे। श्री मोदी 7 मेगावाट के सौर विद्युत संयंत्र तथा सौर ग्राम का उद्घाटन करेंगे। प्रधानमंत्री अनेक विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे। प्रधानमंत्री उपस्थि समूह को संबोधित करेंगे। ***आर.के.मीणा/एएमएजी/डीए-11928
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भारत और भूटान के सहयोग के लंबे इतिहास में hydro projects में सहयोग एक अहम हिस्सा रहा है। आज हमने इस महत्वपूर्ण sector में सभी संबंधित projects में अपने सहयोग की समीक्षा की। यह प्रसन्नता का विषय है कि मान्ग-देछू project पर काम शीघ्र ही पूरा होने वाला है। इस project के tariff पर भी सहमति हो गई है। अन्य projects पर भी कार्य संतोषजनक प्रगति कर रहा है। और हम दोनों सभी projects को और अधिक गति देना चाहते हैं। हमारे सहयोग में एक नया आयाम अंतरिक्ष विज्ञान का है। मुझे प्रसन्नता है कि South Asian Satellite से लाभ उठाने के लिए ISRO द्वारा भूटान में बनाया जा रहा Ground-Station भी शीघ्र तैयार होने वाला है। इस project के पूरा होने से भूटान के दूर-दराज के क्षेत्रों में भी मौसम की जानकारी, tele-medicine और disaster relief जैसे कार्यों में मदद मिलेगी।Friends,
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आपने अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए भारत को चुना। और, चार वर्ष पहले, प्रधानमंत्री के रूप में मेरी पहली विदेश यात्रा भूटान की थी। एक दूसरे के साथ सहयोग मजबूत करने के लिए, विकास की राह पर क़दम से क़दम मिला कर आगे बढ़ने के लिए, हमारी साझा प्रतिबद्धता का यह प्रतीक है। मुझे विश्वास है कि आपकी यह भारत यात्रा हमारे संबंधों को एक नई गति देने में सफ़ल होगी। इन्हीं शब्दों के साथ मैं एक बार फ़िर भारत में आपका और आपके delegation का हार्दिक स्वागत करता हूँ।धन्यवाद।ताशी देलेग!*****एकेटी/एसएच/एसबीपी
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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने हिमाचल प्रदेश सरकार के एक वर्ष पूरे होने के अवसर पर आज धर्मशाला में जन आभार रैली को संबोधित किया। इससे पहले उन्होंने सरकारी योजनाओं पर आयोजित एक प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों से बातचीत भी की।प्रधानमंत्री ने विशाल जन समुदाय को संबोधित करते हुए आध्यात्मिकता और वीरता की भूमि के रूप में हिमाचल प्रदेश की प्रशंसा की। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी के राज्य के साथ विशेष संबंध का स्मरण किया। प्रधानमंत्री ने अपनी योजनाओँ के माध्यम से सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों तक पहुंचने के लिए राज्य सरकार की सराहना की। प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अगली पीढ़ी को ध्यान में रखते हुए अवसंरचना निर्माण पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में राजमार्ग, रेल, ऊर्जा, सौर ऊर्जा और पेट्रोलियम क्षेत्र की विभिन्न परियोजनाएं निर्माण की प्रक्रिया में हैं।प्रधानमंत्री ने राज्य की पर्यटन क्षमता के संबंध में विस्तार से चर्चा की। इस संदर्भ में उन्होंने भारत में विदेशी पर्यटकों की संख्या में वृद्धि का उल्लेख किया। देश में विदेशी पर्यटकों की संख्या 2013 में 70 लाख थी जो 2017 में एक करोड़ हो गई है। इसी प्रकार 2013 में अनुशंसित होटलों की संख्या लगभग 1200 थी जो बढ़कर 1,800 हो गई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 40 सालों से हमारे पूर्व सैनिक वन रैंक वन पेंशन चाहते थे। उन्होंने कहा कि जब उनकी सरकार बनी तो सभी मामलों और आवश्यक संसाधनों पर विचार किया गया। इसके पश्चात हमारे पूर्व सैन्यकर्मियों का कल्याण सुनिश्चित करने के लिए ओआरओपी को लागू किया गया। प्रधानमंत्री ने स्वच्छता के प्रति प्रतिबद्धता के लिए हिमाचल प्रदेश के लोगों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि लोगों ने स्वच्छता को संस्कार (संस्कृति) के रूप में स्वीकार कर लिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे पर्यटन क्षेत्र को भी लाभ मिलेगा। प्रधानमंत्री ने केन्द्र सरकार द्वारा भ्रष्टाचार को समाप्त करने के तरीकों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के जरिए भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई गई है और इससे लगभग 90 हजार करोड़ रुपये की बचत हुई है। ***आर.के.मीणा/एएम/जेके/डीए -11918
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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने क्रिसमस के अवसर पर देशवासियों को बधाइयां दी हैं। अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने कहासभी लोगों के लिए क्रिसमस की शुभकामनाएं हैं। इस अवसर पर हम जीसस क्राइस्ट के पवित्र उपदेशों को याद करने के साथ ही एक करूणामय और समतामूलक समाज के निर्माण की दिशा में उनके प्रयासों का भी स्मरण करें।***आर.के.मीणा/एएम/एसकेएस/वाईबी -11895
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यहां पधारे भाई-बहनों और युवा मित्रों।ओडि़शा के विकास के लिए समर्पित भाव से काम करने का हमारा संकल्प आज एक और अहम पढ़ाव पर पहुंचा है। थोड़ी देर पहले 14 हजार करोड़ रुपये से अधिक के अनेक प्रोजेक्ट्स काशिलान्यास और लोकार्पण किया गया है। इन योजनाओं में उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य, गैस, रोडऔर सांस्कृतिक महत्व की तमाम परियोजनाएं है। यह सारे प्रोजेक्ट्स ओडि़शा के विकास यहां के जन-जन के जीवन को आसान और सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले हैं। विकास के इन सभी प्रोजेक्ट्स के लिए आप सभी को ओडि़शा के प्रत्येक व्यक्ति को बहुत-बहुत बधाई देता हूं।साथियों, देश के इतिहास में यह पहली बार हैजब किसी केंद्र सरकार द्वारा ओडि़शा समेत पूरे पूर्वी भारत के विकास पर इतना ध्यान दिया जा रहा है। देश के संतुलित विकास को प्राथमिकता देते हुए बीते चार वर्षों से निरंतर यहां infrastructureसे जुड़े,जरूरी सुविधाओं से जुड़ेअनेक प्रोजेक्ट्स का विस्तार हुआ है। केंद्र सरकार पूर्वी भारत को पूर्वी एशिया और दक्षिण एशिया के गेटवे के तौर पर विकसित करने की तरफ आगे बढ़ रही है। सबका साथ, सबका विकास के मंत्र पर चलते हुए ओडि़शा के जन-जन, ओडि़शा के कौने-कौने का विकास यहसंकल्प ले करके केंद्र सरकार आगे बढ़ रही है।साथियों, आज आईआईटी भुवनेश्वर को ओडि़शाकीप्रतिभावों के लिए, युवाओं के लिए समर्पित करने का मुझे सौभाग्य मिला है। इसके निर्माण में 1260 करोड़ रुपये खर्च किए गएहै। यह भव्य कैंपस आने वाले समय में ओडि़शा के नौजवानों के सपनों को.. इन सपनों का सेंटर तो बनेगा ही। यहां के युवाओं के लिए रोजगार का नया माध्यम भी सिद्ध होगा। आईआईटी के इस कैंपस में ओडि़शा के स्थानीय उद्योगों यहां के जंगलों में मौजूद संपदा से जुड़ी रिसर्च होगी। यहां के आदिवासी बहन-भाईयों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए नई तकनीक पर शोध होगा। यह संस्थान देश और दुनिया के लिए उच्च स्तर के इंजीनियर और उद्यमी तो पैदा करेगा ही ओडि़शा को भी high-tech औद्योगिक विकास के रास्ते पर आगे ले जाने में अहम भूमिका निभाएगा। इसके अलावा आने वाले दिनों में बरहामपुर में करीब 1600 करोड़ रुपये की लागत से Indian Institute of Science Education & Research इसका भी काम शुरू होने वाला है।साथियों! शिक्षा, विज्ञान और टेक्नोलॉजी से जुड़े ऐसे अनेक संस्थान बीते साढ़े चार वर्षों में केंद्र सरकार ने देशभर में स्वीकृत किए हैं। यह सरकार के उस विजन को ही आगे बढ़ाता है। जिसके तहत New India नया भारत उसको दुनिया के लिए आधुनिक टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप का hub बनाने का प्रयास किया जा रहा है। मुझे उम्मीद है कि ओडि़शा के यह नये संस्थान knowledge और innovation की ओडि़शा की अपनी पुरातन पहचान को और मजबूत करेंगे। साथियों, शिक्षा के साथ-साथ जनता के स्वास्थ्य पर भी केंद्र सरकार पूरी गंभीरता से ध्यान दे रही है। इसी भावना के साथ खोरदा भुवनेश्वर में बने ईएसआईसी अस्पताल में हुए विस्तारीकरण का काम भी पूरा किया जा चुका है।आज आधुनिक सुविधाओं से युक्त इस अस्पताल को भी जनता के लिए समर्पित किया गया है, जो पुराना अस्पताल था उसकी क्षमता अब दोगुनी हो गई है। अब यह सौ बेड का बड़ा अस्पताल हो गया है। केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि दूर-दराज के गांवों में जंगलों में रहने वाले मेरे आदिवासी परिवारों को इलाज के लिए भटकना न पड़े। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए आयुष्मान भारत योजना के तहत Health and wellness Centre बनाने का काम तेज गति से चल रहा है। ओडि़शो में भी लगभग साढ़े ग्यारह सौ Health and wellness Centre स्वीकृत किए गए हैं। आने वाले एक दो वर्षों में जब यह तमाम सेंटर बनकर तैयार हो जाएंगे तो ओडि़शा और देश में स्वास्थ्य सुविधाओं में क्रांतिकारी परिवर्तन आएगा।साथियों, ओडि़शा में स्वास्थ्य सुविधाओं बढ़ाने के साथ ही सड़क संपर्क connectivity को मजबूत करने का काम भी केंद्र सरकार द्वारा तेजी से किया जा रहा है। राज्य के तमाम दुर्गम क्षेत्रों को सड़कों से जोड़ने के लिए योजनाओं को गति दी जा रही है। गांवों और शहरों में सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है। ओडि़शा में नेशनल हाईवे की लंबाई 10 हजार किलोमीटर तक करने की तरफ केंद्र सरकार तेजी से आगे बढ़ रही है। इसी लक्ष्य के तहत आज सड़कों, हाईवे से जुड़े चार प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया गया है। चांदीखोले-भद्रक सेक्शन और टांगी-पोईटोला सेक्शन की six laning हो, कटक-आंगुल सेक्शन का चौड़ीकरण होया फिर खांडागिरि फ्लाईओवर का निर्माण,करीब साढ़े चार हजार करोड़ रुपये के यह तमाम प्रोजेक्ट ओडि़शा के विकास में अहम भूमिका निभाने वाले हैं। इन सुविधा से लोगों का आना-जाना आसान होगा।व्यापार-कारोबार करना भी आसान होगा।साथियों, ओडि़शा के infrastructure में जैसे-जैसे विस्तार हो रहा है वैसे-वैसे यहां उद्योगधंधों के लिए भी नये रास्ते, नये अवसर खुल रहे हैं। विशेषतौर तेल और गैस के क्षेत्र में ओडि़शा का भविष्य बड़ा उज्जवल है। पारादीप हैदराबाद पाइपलाइन ओडि़शा को नई पहचान देने वाली है। यहां के युवाओं के लिए रोजगार के नये अनेक अवसर पैदा करने वाली है। करीब 1200 किलोमीटर की यह पाइपलाइन ओडि़शा के साथ-साथ आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के पेट्रोलियम पदार्थों की जरूरत को भी पूरा करेगी। पारादीप रिफाइंडरी से निकला पेट्रोल, डीजल, केरोसीन और हवाई जहाज का ईंधन अनेक शहरों और गांवों की जरूरत को पूरा करेगा। करीब चार हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाला इस प्रोजेक्ट के तहत बहरामपुर, विशाखापट्टनम, राजमुंद्री और विजयवाड़ा में delivery cum pumping station बनने इस पाइप लाइन के बन जाने के बाद ओडि़शा एक प्रकार से पूर्वी भारत का पेट्रोलियम hub बनने जा रहा है।साथियों, देश के गरीब से गरीब परिवार तक साफ-सुथरा धुआँ मुक्त ईंधन देने के लिए सरकार पूरी तरह से समर्पित है। देश के हर घर तक एलपीजी सेलेंडर पहुंचाने में तो हम सफलता के बहुत करीब ही हैं। अब पाइप से रसौई गैस देने का भी एक व्यापक अभियान सरकार ने आरंभ किया है। विशेषतौर पर पूर्वी भारत को पाइप से गैस पहुंचाने की दिशा में प्रधानमंत्री ऊर्जा गंगा योजना तेज गति से चल रही है। यूपी से लेकर ओडि़शा तक पीएनजी की लाइन बिछाने के लिए हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसी के तहत आज जगदीशपुर, हलदिया, बोकारो, धामरा पाइप लाइन प्रोजेक्ट के बोकारो-आंगुल सेक्शन का शिलान्यास आज किया गया है। करीब साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह प्रोजेक्ट जब पूरा हो जाएगा तो इससे ओडि़शा के पांच जिलों के साथ-साथ झारखंड के छह जिले भी पाइप वाली गैस से जुड़ जाएंगे।साथियों, साधनों, संसाधनों का विकास तब तक अपूर्ण है, जब तक सांस्कृतिक विकास का आयाम उससे नहीं जुड़ता देश के पहले स्वातंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाने वाली पायकाक्रांति के 200 वर्ष पूरे होने पर एक विशेष डाक टिकट और सिक्का भी आज जारी किया गया है। इसके अतिरिक्त पायका क्रांति के नायक बक्शी जगबंधु के नाम से उत्कल युनिवर्सिटी में एक चेयरभी सरकार ने शुरू की है। यह चेयर पायका और आदिवासी आंदोलन समेत तमाम राष्ट्रवादी आंदोलन की रिसर्च से जुड़े विषयों पर रि��र्च का सेंटर तो होगी ही। साथ में यह ओडि़शा के आदिवासी समाज में आए सामाजिक और आर्थिक बदलावों को समझने की दिशा में भी अहम भूमिका निभाएगी।साथियों, पायका के नायकों को सम्मान देने के साथ-साथ ओडि़शा की समृद्ध अध्यात्मिक विरासत को दुनिया के सामने लाने का ध्यान भी दिया जा रहा है। कटक जिले के ललितगिरी में archeology museum का उद्घाटन भी आज करने का मुझे अवसर मिला है। इसमें बौद्ध काल के आरंभिक समय से जुड़े अहम अवशेष रखे गए हैं। यह museum दुनियाभर के बौद्ध मत से जुड़े लोगों,research scholar को तो आकर्षित करेगा ही, दूसरे लोगों के लिए भी टूरिस्टों के लिए भी यह आकर्षण का केंद्र होगा। ओडि़शा की tourism industry से इसको और शक्ति मिलने वाली है। जिससे यहां के नौजवानों के लिए रोजगार के नये अवसर पैदा होंगे।साथियों, केंद्र सरकार ओडि़शा के सम्पूर्ण विकास के लिए समर्पित है। ओडि़शा के infrastructure से लेकर जन-जन के विकास के लिए तमाम कदम उठाए जा रहे हैं। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि यह काम निरंतर जारी रहेगा। ओडि़शा New India के विकास का एक महत्वपूर्ण engine बनें। इसके लिए हम सभी को साथ मिलकर आगे बढ़ना है, आगे बढ़ेंगे, मिलकर प्रयास करे। इसी कामना के साथ एक बार फिर इन तमाम विकास परियोजनाओं के लिए ओडि़शा के जन-जन को हृदय पूर्वक बधाई देता हूं। और जय जगन्नाथ का स्मरण करते हुएआप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद।***अतुल कुमार तिवारी/शाहबाज़ हसीबी/सतीश शर्मा/ तारा-11893
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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कैप्टन जय नारायण प्रसाद निषाद के निधन पर शोक व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘मैं कैप्टन जय नारायण प्रसाद निषाद जी के निधन से मर्माहत हूं। उन्होंने बड़ी लगन से राष्ट्र की सेवा की। बिहार की प्रगति के लिए कैप्टन निषाद द्वारा किए गए प्रयास अत्यंत उल्लेखनीय रहे हैं। गरीबों के सशक्तिकरण के लिए कैप्टन निषाद द्वारा किए गए उल्लेखनीय कार्यों को सदैव याद किया जाएगा। उनके परिवार और समर्थकों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं।’ ***आर.के.मीणा/अर्चना/आरआरएस/एसकेपी-11877
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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कल केवडिया में डीजीपीआईजीपी सम्मेलन में राष्ट्रीय अखण्डता के लिए वार्षिक सरदार पटेल पुरस्कार की घोषणा की। यह पुरस्कार राष्ट्रीय एकीकरण को और बढ़ाने की दिशा में असाधारण प्रयासों के लिए दिया जाएगा।प्रधानमंत्री ने कहासरदार पटेल ने भारत को एकजुट करने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। राष्ट्रीय अखण्डता के लिए सरदार पटेल पुरस्कार उनके लिए एक उचित श्रद्धांजलि होगी और यह अधिक से अधिक लोगों को भारत की एकता और राष्ट्रीय अखण्डता को बढ़ाने की दिशा में काम करने के लिए प्रेरित करेगा। आर.के.मीणा/अर्चना/एसकेजे/एनके-11866
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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इंडोनेशिया में ज्वालामुखी आने के बाद त्सुनामी के कारण लोगों की मौत पर शोक व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा, ‘इंडोनेशिया में ज्वालामुखी आने के बाद त्सुनामी के कारण लोगों की मौत और तबाही से दु:खी हूं। शोकसंतप्त परिवारों के लिए मेरी संवेदनाएं हैं और घायल लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। भारत राहत कार्य में अपने इस पड़ोसी और मित्र की सहायता के लिए तैयार है।’ ***आर.के.मीणा/एएम/एसकेएस/एसएस -11870
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यहां पधारे भाइयो और बहनों, महाराष्ट्र का आज ये मेरा चौथा कार्यक्रम है। इससे पहले मैं ठाणे में था। वहां भी हजारों-करोड़ के विकास कार्यों का शिलान्यास और लोकार्पण किया गया है।इसमें गरीबों के घर के प्रोजेक्ट्स भी थे और मेट्रो के विस्तार से जुड़े प्रोजेक्ट भी थे।थोड़ी देर पहले यहां 8 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत से बन रही पुणे मेट्रो लाइन के तीसरे phase का अभी मुझे शिलान्यास करने का अवसर मिला है। हिंजवड़ी से शिवाजी नगर को जोड़ने वाले इस मेट्रो प्रोजेक्ट से देश के सबसे व्यस्त आईटी सेंटर में से एक, इस क्षेत्र को बड़ी सुविधा मिलने वाली है।महाराष्ट्र और देश के कोने-कोने से यहां काम करने पहुंचे IT Professionalsको, यहां के स्थानीय लोगों काजीवन इससे सुगम होने वाला है।साथियो, दो साल पहले मुझे पुणे मेट्रो प्रोजेक्ट का शुभारंभ करने का सौभाग्य मिला था। मुझे बहुत खुशी है कि जिन दो Corridors पर काम शुरू किया गया, वहां तेज गति से काम चल रहा है। मुझे उम्मीद है कि अगले साल के अंत तक पुणे में 12 किलोमीटर के route पर मेट्रो दौड़ने लगेगी।अब शिवाजी नगर से तीसरे phase का भी आज शुभारंभ हो गया है। ऐसे में जब ये phase पूरा होगा, तो लोगों को पुणे और पिंपरी चिंदवाड़ के चार अलग-अलग कोने से हिंजवड़ी आईटी पार्क पहुंचने में बहुत सहूलियत हो जाएगी।यहां उपस्थित IT सेक्टर से जुड़े Professionalsको मैं इसकी विशेष बधाई देता हूं। आज यहां पर जिन भी प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू हुआ है, ये केंद्र और महाराष्ट्र की सरकार के उस व्यापक विजन का हिस्सा है, जिसके केंद्र में Infrastructure है, बुनियादी सुविधाएं हैं।आप बीते चार-साढ़े चार वर्षों से निरंतर देख रहे हैं कि कैसे Infrastructure पर सरकार का फोकस है।देश भर में connectivity, यानी highway, railway, airway, waterway और I-way को विस्तार-रफ्तार देने का काम तेज गति से चल रहा है।साथियो, कारगिल से ले करके कन्याकुमारी तक, कच्छ से लेकर कामरूप तक, आप यात्रा करेंगे तो पता चलेगा कि किस गति से और कितने बडे स्तर पर काम चल रहा है।ये सब अगर हो पा रहा है तो इसके पीछे सरकार की प्रतिबद्धता है ही, स्थानीय लोगों, किसानों, कामगारों, प्रोफेशलन की इच्छा-आकांक्षा और सहयोग भी है।विकास के हाईवे से आज कोई भी अछूता रहना नहीं चाहता। आर्थिक और सामाजिक रूप से भले कोई कितना भी समर्थ और असमर्थ हो, लेकिन सिर्फ आवागमन में ही वो अपना समय व्यर्थ नहीं करना चाहता। वो नहीं चाहता कि connectivity के अभाव में उसकी फसलें, उपज, उसका दूध-दही, उसका उत्पाद बरबाद हो जाए। वो चाहता है कि स्कूल आने-जाने में उसके बच्चों का कम से कम समय लगे, ताकि वो पढ़ाई और खेलकूद को ज्यादा समय दे पाएं। वो घंटों ट्रैफिक जाम में फंसकर आठ-नौ घंटे के ऑफिस टाइम को 12-13 घंटे नहीं होने देना चाहता। वो अपने परिवार के साथ समय बिताना चाहता है। अपने समय का सही उपयोग करना चाहता है। यही कारण है कि आज गांव से लेकर शहरों तक, next generation infrastructure और transport sector केintegration पर ध्यान दिया जा रहा है।साथियो, इसी सोच के साथ केन्द्र सरकार यहां देवेन्द्र फडणवीस जी की सरकार के साथ मिलकर महाराष्ट्र के पुणे के infrastructure को मजबूत करने में जुटी है।हिंजवडी-शिवाजीनगरमेट्रो लाइन तो एक और मायने में भी खास है। सरकार ने देश में मेट्रो के विकास के लिए पहली बार जो मेट्रो पॉलिसी बनाई है, उसके तहत बनने वाला ये प्रोजेक्ट पहला प्रोजेक्ट है। ये प्रोजेक्ट PPPयानी public private partnership में बनाया जा रहा है।एक साल पहले जो नई मेट्रो रेल पॉलिसी सरकार ने बनाई है, ये देश में मेट्रो के विस्तार के प्रति हमारे संकल्प को दिखाती है। इसी policy के आने के बाद मेट्रो के निर्माण में तेजी आ रही है, क्योंकि नियम-कायदे स्पष्ट हुए हैं।शहरों में transport sector की अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल के तौर-तरीके तय किए गए हैं। ये मेट्रो रेल पॉलिसी reform oriented बनाई गई है। ये सुनिश्चित किया जा रहा है कि सिर्फ मेट्रो ट्रेन के साथ-साथ मेट्रो स्टेशन तक फीडर बसों, नए walk-ways, नए path-ways को भी साथ ही साथ विकसित किया जाए।अब मेट्रो में Unified Urban Transport Authority के जरिए single command system के तहत काम हो रहा है। इससे लोगों की असली जरूरत तो पता लग ही रही है, परेशानियों को भी कम किया जा रहा है।भाइयो और बहनों, मेट्रो आज देश के शहरों की life-line बनती जा रही है। बीते चार वर्षों में सरकार ने देश के दर्जन भर शहरों तक इसको विस्तार दिया है, और आने वाले समय में अनेक और शहर इससे जुड़ने वाले हैं।पिछले चार साल में 300 किलोमीटर की नई लाइनों को कमीशन कर दिया है और 200 किलोमीटर के नए प्रस्ताव को भी पास किया गया है। इसी का परिणाम है कि इस समय देश में 500 किलोमीटर से ज्यादा की मेट्रो लाइन चल रही है और करीब 650 किलोमीटर से ज्यादा की लाइनें पूरी होने को हैं।महाराष्ट्र में भी केन्द्र और राज्य सरकार मिलकर 200 किलोमीटर से अधिक की मेट्रो लाइनों का निर्माण कर रही हैं।भाइयो और बहनों, आज देश में मेट्रो का जो भी विस्तार हो रहा है, उसको सही मायने में गति अटलजी की सरकार ने दी थी। शहर और गांव में infrastructure पर अटलजी ने जो बल दिया, उसको 10 वर्ष बाद हमारी सरकार ने स्पीड भी दी और स्केल भी बढ़ाई।मुझे कहते हुए जरा भी संकोच नहीं है कि अगर अटलजी की सरकार को थोड़ा समय और मिलता तो शायद आज मुम्बई और इसके आसपास के इलाकों को, महाराष्ट्र के अनेक शहरों को मेट्रो से जोड़ा जा चुका होता।दिल्ली में अटलजी की सरकार के दौरान मेट्रो पर काम शुरू हुआ था। आज करीब-करीब पूरी दिल्ली मेट्रो से जुड़ चुकी है।साथियो, पहले जो सरकार रही, उसकी प्राथमिकता में transport और infrastructure उतना नहीं रहा, जितना होना चाहिए था।साथियो, उनको- उनकी सोच मुबारक, हमारी सोच है देश का कोना-कोना, कण-कण जुड़े, देश का संतुलित विकास हो। हम एक भारत-श्रेष्ठ भारत बनाने के लिए इस मिशन पर निकले हुए लोग हैं।हां, इतना मैं जरूर याद दिला दूं कि 2004 से- 2004 का कालखंड और 2018 में, एक पीढ़ी का अंतर आ गया है, सोच का अंतर आ गया है, आकांक्षाओं का अंतर आ गया है।भाइयो और बहनों, केंद्र सरकार की प्राथमिकता ease of living और ease of doing business सुनिश्चित करने में है। यही कारण है कि देशभर में करीब hundred smart city विकसित की जा रही हैं।पुणे समेत महाराष्ट्र में भी 8 शहरों को स्मार्ट बनाया जा रहा है। देशभर में इस मिशन के तहत 5 हजार से ज्यादा परियोजनाओं का चयन किया गया है।इन प्रोजेक्ट्स पर आने वाले दिनों में दो लाख करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए जाएंगे। 10 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं और 53 हजार करोड़ रुपये के 1700 प्रोजेक्ट को तेजी से पूरा किया जा रहा है।साथियो, पुणे समेत महाराष्ट्र के 8 शहरों में smart city mission के तहत करीब डेढ़ हजार करोड़ रुपये के काम पूरे हो चुके हैं जबकि साढ़े तीन हजार करोड़ के काम तेजी से पूरे कएि जा रहे हैं।पुणे का integrated command and control system शुरू हो चुका है। यहीं से अब पूरे शहर की व्यवस्थाओं की निगरानी का काम किया जा रहा है।इतना ही नहीं Amrut mission के तहत महाराष्ट्र के 41 से अधिक शहरों में भी काम तेजी से चल रहा है। सड़क, बिजली, पानी, सीवेज; ऐसी प्राथमिक सुविधा से जुड़े करीब 6 हजार करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स जल्द पूरे होने की स्थिति में हैं।इसके साथ-साथ शहरों को ��ोशन करने के लिए, उनकी सुंदरता को बढ़ाने के लिए, कम बिजली से अधिक रोशनी के लिए LED Street Lights लगाई जा रही हैं।महाराष्ट्र में करीब एक लाख ऐसी Street Lights अलग-अलग शहरों में लगाई जा चुकी हैं। इससे सैंकड़ों करोड़ रुपये की बिजली की बचत हो रही है।साथियो, सामान्य जन को बचत हो; इसके साथ-साथ उसकी सरकारी सेवाओं तक आसानी से पहुंच हो, इसके लिए डिजिटल इंडिया अभियान व्यापक स्वरूप ले चुका है।आज जन्म प्रणामपत्र से लेकर जीवन प्रणामपत्र तक, ऐसी सैंकड़ों सुविधाएं online हैं।बिजली, पानी के बिल से लेकर अस्पतालों में appointment, बैंकों का लेन-देन, पेंशन, provident fund, admission, reservation, करीब-करीब हर सुविधा को online किया गया है। ताकि कतारें न लगें और corruptionकी गुंजाइश कम हो।अब Digi-Locker में आपके सब सर्टिफिकेट्स सुरक्षित रह सकते हैं। करीब डेढ़ करोड़ खाते देशभर में खुल चुके हैं।इतना ही नहीं, अब Driving License समेत तमाम दूसरे दस्तावेज को साथ रखने की भी जरूरत नहीं रहेगी। मोबाइल फोन पर उसकी Soft copy या फिर Digi-Locker के जरिए ही काम चल जाएगा।भाइयो और बहनों, सरकार का प्रयास है कि हमारे professionals, उनकी दिनचर्या हमारे उद्योगों और देश की नई जरूरत के हिसाब से नियम-कानून बनाएं और बदले जाएं। नियम सरल भी हों और सुगमता और पारदर्शिता भी सुनिश्चित करें।डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया ने सरकार के इन प्रयासों को गति दी है। आज अगर सामान्य से सामान्य व्यक्ति तक तकनीक पहुंच पा रही है तो सस्ता मोबाइल फोन, सस्ता और तेज इंटरनेट डेटा बड़ी भूमिका निभा रहा है।मोबाइल फोन इसलिए सस्ते हुए, क्योंकि अब भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन बनाने वाला देश बन गया है। करीब सवा सौ मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स देश भर में चल रही हैं। जबकि चार वर्ष पहले सिर्फ-सिर्फ दो ही ऐसी फैक्टरियां थीं। साढ़े चार से पांच लाख युवा इन फैक्टरियों में काम कर रहे हैं। अभी इसमें और विस्तार होने वाला है। मोबाइल समेत पूरे electronics manufacturing का एक बड़ा हब भारत बन रहा है।साथियो, हार्डवेयर के साथ-साथ सस्ते और तेज डेटा को गांव-गांव, गली-गली तक पहुंचाने का काम चल रहा है। देशभर की करीब सवा लाख ग्राम पंचायतों तकoptical fibre networkपहुंचाया जा चुका है।तीन लाख से अधिक common service centreगांवों में काम कर रहे हैं। इनमें काम कर रहे करीब दस लाख युवा, गांवों को ऑनलाइन सुविधा दे रहे हैं।डेढ़ लाख से अधिक पोस्�� ऑफिस अब ऑनलाइन बैंकिंग के माध्यम तो बन ही रहे हैं, होम डिलीवरी सर्विस के भी सेंटर बनने जा रहे हैं।देश के करीब 700 रेलवे स्टेशनों पर मुफ्त वाई-फाई की सुविधा दी जा रही है।साथियो, 2014 से पहले देश में जहांdigital लेनदेनहोता था, वो अब 6 गुना से ज्यादा बढ़ चुका है। देश में अब तक 50 करोड़ से ज्यादा रुपे, डेविट कार्ड वितरित किए जा चुके हैं। सिर्फ बीते 2 वर्षों के दौरान ही यूपीआई, भीम और दूसरे डिजिटल प्लेटफार्म्स के माध्यम से लेनदेन में लाखों गुना बढ़ोत्तरी हुई है।भाइयो और बहनों, पुणे- एजुकेशन, आईटी, इंजीनियरिंग और बिजनेस का भी सेंटर है। ये knowledge का सेंटर है, तकनीक का सेंटर है। यही न्यू इंडियाकी पहचान होने वाली है।चौथी औद्योगिक क्रांति के लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर हमारे पास तैयार है और यहां मौजूद हजारों युवा साथियों की तरह, एक से एक innovative minds की फौज भी हमारे पास तैयार है।Startup India और Atal innovation mission के माध्यम से भारत भविष्यकी तकनीक का एक बड़ा सेंटर बनता जा रहा है। र्स्टाटअप के मामले में भारत दुनिया का दूसरा बड़ा eco system बन चुका है। देश के करीब 500 जिलों में 14 हजार से अधिक Startups को Startup India अभियान के तहत recognize किया जा चुका है।हमारे देश में आइडियाज की कमी कभी नहीं रही। कमी थी इनको दिशा देने की, हाथ पकड़कर आगे बढ़ाने की, hand holding की। अब सरकार आइडिया को इंडस्ट्री बनाने की दिशा में काम कर रही है।कम उम्र में ही technology के लिए temperament विकसित किया जा रहा है। स्कूलों में Atal tinkering labखोली जा रही है तो starts ups के लिए Atal incubationcentreदेशभर में खोले जा रहे हैं।न्यू इंडिया के नए सेंटर्स में देश का भविष्य तैयार होगा। दुनिया का सबसे बड़ा talent pool तैयार होगा। नए भारत के निर्माण में आप सभी का, पुणे का, महाराष्ट्र का अहम् रोल रहने वाला है।इसी विश्वास के साथ एक बार फिर आप सभी को मेट्रो लाइन का काम शुरू होने पर बहुत-बहुत बधाई देता हूं, बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। और इतनी बड़ी संख्या में आप आशीर्वाद देने के लिए आए, इसके लिए मैं हृदयपूर्वक आपका आभार व्यक्त करता हूं।बहुत-बहुत धन्यवाद।*****अतुल तिवारी/कंचन पतियाल/निर्मल शर्मा
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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज महाराष्ट्र यात्रा के दौरान आवास एवं शहरी परिवहन से जुड़ी कई अहम परियोजनाओं का शिलान्यास किया। महाराष्ट्र के कल्याण में एक जनसभा में प्रधानमंत्री ने दो महत्वपूर्ण मेट्रो कोरिडोर ठाणे-भिवंडी-कल्याण और दहिसार-मीरा-भयंदर मेट्रो की आधारशिला रखी। दोनों कोरिडोरों के बन जाने पर क्षेत्र के लोगों की सार्वजनिक परिवहन की सुविधा बढ़ जाएगी। प्रधानमंत्री ने कल्याण में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ईडब्ल्यूएस और एलआईजी आवास योजना के तहत 90,000 घरों को लांच किया। इस परियोजना पर कुल 33,000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।कल्याण में प्रधानमंत्री ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए बताया कि केन्द्र सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर और सार्वजनिक परिवहन विकास को गति प्रदान की है। उन्होंने 2022 तक केन्द्र सरकार की ‘सबके लिए आवास’ योजना पर जोर दिया। पुणे में प्रधानमंत्री ने पुणे मेट्रो फेज-3 की आधारशिला रखी। पुणे में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार कनेक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा जोर दे रही है। उन्होंने कहा कि उत्कृष्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और परिवहन क्षेत्र की मजबूती पर जोर दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने बताया कि स्टार्टअप इंडिया और अटल नवोन्मेष मिशन के जरिए भारत प्रौद्योगिकी के केन्द्र के रूप में उभर रहा है। ***आर.के.मीणा/एएम/एके/वीके-11802
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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 18 दिसंबर, 2018 को महाराष्ट्र की यात्रा पर जाएंगे। प्रधानमंत्री मुंबई में रिपब्लिक टेलीविजन द्वारा आयोजित रिपब्लिक सम्मेलन को संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री राजभवन में आयोजित एक समारोह में टाइमलेस लक्ष्मण शीर्षक वालीएक पुस्तक का विमोचन करेंगे। यह पुस्तक प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट आर.के. लक्ष्मण पर आधारित है। प्रधानमंत्री की राज्य की यात्रा के दौरान आवास और शहरी परिवहन से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाओं का शुभारंभ किया जाएगा। कल्याण में एक सार्वजनिक सभा में प्रधानमंत्री दो महत्वपूर्ण मेट्रो गलियारों की आधारशिला रखेंगे। इनमें ठाणे-भिवंडी-कल्याण मेट्रो और दहिसार-मीरा-भयंडर मेट्रो शामिल है। इन दो गलियारों के पूरा हो जाने पर क्षेत्र में सार्वजनिक परिवहन अधिक सुविधाजनक हो जाएगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) और कम आय वर्ग वाले (एलआईजी) लोगों के लिए आवास योजना के अंतर्गत 90,000 इकाईयां प्रारंभ करेंगे। श्री नरेन्द्र मोदी वहां एकत्र समूह को भी संबोधित करेंगे।प्रधानमंत्री इसके बाद पुणे जाएंगे। वह पुणे मेट्रो के तीसरे चरण की आधारशिला रखेंगे और एक जनसभा को संबोधित करेंगे। आर.के.मीणा/अर्चना/केपी/एमएस–114
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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 16 दिसम्बर 2018 को उत्तर प्रदेश का दौरा करेंगे।प्रधानमंत्री रायबरेली में मॉडर्न कोच फैक्ट्री का निरीक्षण करेंगे। एक सार्वजनिक बैठक के दौरान वह इस फैक्ट्री के 900वें कोच तथा एक हमसफर रेक को झंडी दिखाएंगे। वह विभिन्न विकास परियोजनाओं को देश के नाम समर्पित करेंगे, उद्घाटन करेंगे या शिलान्यास करेंगे। प्रधानमंत्री जनसमूह को भी संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री इसके बाद प्रयागराज के लिए रवाना होंगे। वह कुंभ मेला के लिए एक अत्याधुनिक कमान एवं नियंत्रण केंद्र का उद्घाटन करेंगे। वह गंगा पूजन करेंगे तथा स्वच्छ कुंभ प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगे। श्री नरेंद्र मोदी प्रयागराज में ‘अक्षयवत’ का दौरा भी करेंगे। प्रधानमंत्री इसके बाद अंडावा के लिए रवाना होंगे, जहां वह विभिन्न विकास परियोजनाओं को देश के नाम समर्पित करेंगे, उद्घाटन करेंगे या शिलान्यास करेंगे। प्रधानमंत्री जनसमूह को भी संबोधित करेंगे।प्रधानमंत्री इसके बाद प्रयागराज के बामरोली हवाई अड्डा पहुंचेंगे। दिल्ली लौटने से पूर्व वह हवाई अड्डे के नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन करेंगे। ***आर.के.मीणा/अर्चना/एसकेजे/एसएस-11758
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मंचासीन विशिष्टगण, भारत और विदेश से आए प्रतिनिधिगण,देवियो और सज्जनो,नमस्तेपार्टनर फोरम, 2018 में दुनियाभर से आए सभी प्रतिनिधियों का हार्दिक स्वागत है। केवल सहभागिता से हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं। नागरिकों के बीच में सहभागिता, समुदायों के बीच सहभागिता, देशों के बीच सहभागिता। सतत विकास एजेंडा इसकी झांकी है। देश एकल प्रयासों से आगे बढ़ चुके हैं। वे सभी समुदायों को शक्ति सम्पन्न बनाने, स्वास्थ्य और शिक्षा में सुधार करने, निर्धनता समाप्त करने, आर्थिक विकास में तेजी लाने और अंत में किसी को भी पीछे न रहने देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मां के स्वास्थ्य से बच्चों का स्वास्थ्य तय होता है और बच्चों के स्वास्थ्य से आने वाले कल का स्वास्थ्य तय होता है। हम यहां स्वास्थ्य में सुधार करने तथा माताओं और बच्चों के आरोग्य में विकास करने के उपायों पर चर्चा करने के लिए जमा हुए हैं। हमारी चर्चा के नतीजों से हमारे आने वाले कल पर गहरा प्रभाव पड़ेगा।पार्टनर फोरम का विजन भारत के ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ संबंधी प्राचीन विचार से मेल खाता है। यह मेरी सरकार के दर्शन ‘सबका साथ, सबका विकास’ के भी अनुरूप है, जिसका अर्थ समावेशी विकास के लिए सामूहिक प्रयास और सहभागिता है। मातृत्व, नवजात और बाल विकास के लिए सहभागिता एक अनोखा और प्रभावशाली मंच है। हम केवल बेहतर स्वास्थ्य की बात नहीं करते। हम तेज विकास के लिए भी बात करते हैं। जहां पूरी दुनिया तेज विकास के नए-नए तरीके तलाश रही है, वहीं इस काम को करने का सबसे बढ़िया तरीका महिलाओं के लिए अच्छा स्वास्थ्य सुनिश्चित करना है। इस दिशा में पिछले चंद वर्षों के दौरान हमने बहुत प्रगति की है। इसके बावजूद अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। बड़े बजट से बेहतर नतीजों तक और मानसिकता में बदलाव से सघन निगरानी तक, बहुत कुछ किया जाना है।भारत की दास्तान उम्मीदों वाली है। उम्मीद है कि अड़चनें दूर होंगी। उम्मीद है कि व्यवहारों में बदलाव लाया जा सकेगा। उम्मीद है कि तेज प्रगति प्राप्त की जा सकती है। जब सहस्राब्दी विकास लक्ष्यों पर सहमति बनी थी, उस समय भारत में महिलाओं और बच्चों की मृत्यु दर दुनिया में सबसे अधिक थी। सतत गति और पिछले कुछ वर्षों के दौरान मृत्यु दर में तेजी से आने वाली कमी के बल पर भारत मातृत्व और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए एसडीज�� लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में चल पड़ा था। यह 2030 की स्वीकृत तिथि से बहुत आगे है। भारत उन पहले देशों में शामिल है, जो किशोरावस्था पर विशेष ध्यान देने की बात करते हैं तथा किशोरों के लिए सघन स्वास्थ्य संवर्धन और रोकथाम कार्यक्रम लागू करते हैं। हमारे प्रयासों से यह सुनिश्चित हो सका कि 2015 में अपनाए जाने वाली महिलाओं, बच्चों और किशोरों के स्वास्थ्य संबंधी वैश्विक रणनीति में उन्हें उनकी पहचान मिल सके। मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि इस मंच के आयोजन के दौरान लातीनी अमेरिका, कैरिबियाई क्षेत्र और भारत वैश्विक रणनीति को अपनाने के संबंध में अपनी पेशकश कर रहे हैं। मैं आशा करता हूं कि इन संयोजनों से समान रणनीतियां विकसित करने के लिए अन्य देशों और क्षेत्रों को प्रेरणा मिलेगी। मित्रो,हमारे धार्मिक ग्रंथ कहते हैं ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः’, अर्थात ‘जहां नारी का आदर होता है, वहीं देवताओं का वास होता है।’ मेरा दृढ़ विश्वास है कि एक राष्ट्र तभी समृद्ध होता है, जब वहां के लोग विशेषकर महिलाएं और बच्चे शिक्षित हों तथा वे स्वतंत्र, शक्ति सम्पन्न और स्वस्थ्य जीवन जीने में सक्षम हों। मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई कि भारत के टीकाकरण कार्यक्रम को इस फोरम में भारत की सफलता के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है। यह विषय मेरे दिल के बहुत करीब है। इन्द्रधनुष मिशन के तहत पिछले तीन वर्षों के दौरान हम 32.8 मिलियन बच्चों और 8.4 मिलियन गर्भवती महिलाओं तक पहुंचे हैं। हमने सर्वव्यापी टीकाकरण के तहत टीकों की संख्या 7 से बढ़ाकर 12 की हैं। हमारे टीकों के दायरे में निमोनिया और डायरिया जैसे प्राणघातक रोग भी शामिल हैं। मित्रो,जब 2014 में मेरी सरकार ने कार्यभार संभाला था, उस समय हर वर्ष प्रसव के दौरान 44,000 से अधिक माताओं को हम खो देते थे। हमने गर्भ के दौरान माताओं को हर संभव सुविधा प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान की शुरूआत की थी। हमने अपने डॉक्टरों से आग्रह किया था कि वे इस अभियान के लिए प्रतिमाह एक दिन सेवा देने का संकल्प करें। इस अभियान के तहत 16 मिलियन प्रसव-पूर्व जांच की गईं। देश में 25 मिलियन नवजात शिशु हैं। हमारे यहां नवजात शिशुओं की देखभाल की शानदार प्रणाली मौजूद है, जो 794 उत्कृष्ट विशेष नवजात शिशु सुविधा इकाइयों के जरिये 10 लाख से अधिक नवजात ��िशुओं की देखभाल करती है। यह हमारी एक सफल प्रणाली है। हमारी इस पहल से 4 वर्ष पहले की तुलना में प्रतिदिन 5 वर्ष से कम आयु वाले 840 अतिरिक्त बच्चों के जीवन की रक्षा होती है। बच्चों के पोषाहार की समस्या का समाधान पोषण अभियान के माध्यम से किया जा रहा है। इसमें विभिन्न योजनाएं शामिल हैं जो भारत को कुपोषणमुक्त बनाने के समान लक्ष्य की दिशा में काम कर रही है। बच्चों की जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए हम राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम लागू कर रहे हैं। पिछले चार वर्षों में इससे 800 मिलियन बच्चों की स्वास्थ्य जांच हुई है और 20 मिलियन बच्चे ईलाज के लिए निःशुल्क रेफर किए गए हैं। चिकित्सा पर परिवारों द्वारा जेब से अधिक खर्च किए जाने की चिंता हमेशा हमें सताती रही। इसलिए हमने आयुष्मान भारत योजना लांच की। आयुष्मान भारत की दोतरफा रणनीति है। पहली, इसमें समुदाय के निकट व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा का प्रावधान है जिसमें स्वस्थ्य जीवनशैली तथा स्वास्थ्य और वेलनेस सेंटरों के माध्यम से योग शामिल हैं। स्वास्थ्य और आरोग्य के लिए ‘फिट इंडिया’ तथा ‘इट राईट’ आंदोलन भी हमारी रणनीति के महत्वपूर्ण अंग हैं। इससे समुदाय को उच्च तनावग्रस्तता, मधुमेह तथा स्तन, गर्भाशय तथा मुंह के कैंसर सहित सामान्य बीमारियों की निःशुल्क जांच और चिकित्सा में मदद मिलेगी। मरीज अपने घर के नजदीक निःशुल्क दवाएं तथा नैदानिक समर्थन प्राप्त कर सकेंगे। हमारी योजना 2022 तक ऐसे 150 हजार स्वास्थ्य और आरोग्य केन्द्र प्रारंभ करने की है।आयुष्मान भारत योजना का दूसरा घटक प्रधानमंत्री जन-आरोग्य योजना है। इसके अंतर्गत प्रति वर्ष प्रति परिवार पांच लाख रुपये का नकद रहित स्वास्थ्य बीमा देने का प्रावधान है। इसके अंतर्गत सर्वाधिक गरीब और कमजोर तबके के 500 मिलियन नागरिकों को कवर किया जाएगा। यह संख्या कनाडा, मेक्सिको और अमेरिका की कुल आबादी के लगभग बराबर है। हमने इस योजना के प्रारंभ होने के दस सप्ताह के अंदर निःशुल्क चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए 700 करोड़ रुपये पांच लाख परिवारों को दिए हैं।आज वैश्विक सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज दिवस है। इस अवसर पर मैं फिर कहता हूं कि हम सभी के लिए व्यापक स्वास्थ्य कवरेज प्रदान करने की दिशा में संकल्पबद्ध हैं। हमारे पास एक मिलियन पंजीकृत सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता या आ���ाकर्मी तथा 2.32 लाख आंगनवाड़ी नर्स हैं जो अग्रिम पंक्ति की महिला स्वास्थ्यकर्मियों का बल है। यह हमारे कार्यक्रम की शक्ति है।भारत एक विशाल देश है। कुछ राज्यों और जिलों ने विकसित देशों के समकक्ष कार्य प्रदर्शन किया है। अन्य को अभी कार्य करना है। मैंने अपने अधिकारियों को 117 ‘आकांक्षी जिलों’ की पहचान करने का निर्देश दिया है। ऐसे प्रत्येक जिले को एक टीम उपलब्ध कराई गई है जो शिक्षा, जल तथा स्वच्छता, ग्रामीण विकास के क्षेत्र में स्वास्थ्य और पोषाहार को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए काम करेंगे।हम अन्य विभागों के माध्यम से महिला केन्द्रित योजनाओं पर काम कर रहे हैं। 2015 तक भारत की आधी से अधिक महिलाओँ के पास रसोई के लिए स्वच्छ ईंधन नहीं था। हमने उज्जवला योजना के माध्यम से इसमें परिवर्तन किया। उज्जवला योजना ने 58 मिलियन महिलाओँ को स्वच्छ रसोई के विकल्प उपलब्ध कराए।हम युद्धस्तर पर स्वच्छ भारत मिशन चला रहे है ताकि भारत 2019 तक खुले में शौच से मुक्त हो जाए। पिछले चार वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता कवरेज 39 प्रतिशत से बढ़कर 95 प्रतिशत हो गया है। हम सभी यह कहावत जानते हैं कि अगर आप एक पुरुष को शिक्षित करते हैं तो एक व्यक्ति को शिक्षित करते हैं लेकिन यदि आप एक महिला को शिक्षित करते हैं तो आप पूरे परिवार को शिक्षित बनाते हैं। इसे हमने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम के रूप में अपनाया है। इस कार्यक्रम का फोकस लड़की पर तथा उसे सबसे अच्छा जीवन और शिक्षा प्रदान करने पर है। इसके अतिरिक्त हमने लड़कियों के लिए जमा बचत योजना- ‘सुकन्या समृद्धि योजना’- प्रारंभ की है। इस योजना के अंतर्गत 12.6 मिलियन खाते खोले गए हैं और यह योजना लड़की का भविष्य सुनिश्चित करने में हमारी मदद कर रही है। हमने प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना भी प्रारंभ की है। इस योजना से 50 लाख गर्भवती महिलाओं तथा स्तनपान कराने वाली माताओं को लाभ होगा। यह योजना वेतन नुकसान, बच्चे को जन्म देने से पहले और बाद में बेहतर पोषाहार और पर्याप्त आराम के लिए उनके खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से राशि देने में सक्षम है। हमने मातृत्व अवकाश को पहले के 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह कर दिया है। हम 2025 तक सकल घरेलू उत्पाद का 2.5 प्रतिशत स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ाने के लिए संकल्पबद्ध हैं। यह 100 बिलियन अमेरीकी डॉलर से अधिक ���ै। इसका अर्थ यह होगा कि केवल आठ वर्षों में वर्तमान हिस्से से 345 प्रतिशत की वास्तविक वृद्धि होगी। हम लोगों की बेहतरी के लिए काम करते रहेंगे। प्रत्येक नीति, कार्यक्रम और पहल के केन्द्र में महिलाओं, बच्चों और युवाओं को रखेंगे। मैं सफलता प्राप्ति के लिए बहु-हितधारकों की साझेदारी की आवश्यकता पर बल देना चाहूंगा। हमें मालूम है कि कारगर स्वास्थ्य देखभाल विशेषकर महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए मिश्रित कार्रवाई सबसे उत्तम कदम है। मित्रों,मैं समझता हूं कि अगले दो दिनों में यह फोरम पूरी दुनिया की 12 सफल कहानियों पर चर्चा करेगा। वास्तव में यह विभिन्न देशों के बीच संवाद का अवसर है, यह साझा करने का अवसर है कि हम एक-दूसरे से सीख सकते हैं। भारत कौशल और प्रशिक्षण कार्यक्रमों, रियायती औषाधियों के प्रावधान तथा टीकाकरण, ज्ञान हस्तांतरण और आदान-प्रदान कार्यक्रमों के माध्यम से सहयोगी देशों को उनके विकास लक्ष्यों को हासिल करने में समर्थन देने के लिए तैयार है।मैं मंत्रिस्तरीय सम्मेलन के परिणामों को सुनना चाहूंगा। यह फोरम एक जीवंत मंच के रूप में हमें ‘सरवाइव- थ्राइव- ट्रासफॉर्म’ के प्रति दृढ़ता प्रदान करेगा।हमारे कार्यक्रम तय हैं और हम सर्वाधिक समर्पण के साथ सभी के लिए स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए काम करते रहेंगे। भारत सभी सहयोगियों के साथ हमेशा साथ खड़ा रहेगा।यहां मैं आप सभी से आग्रह करता हूं कि इसे सही भाव से अपनाएं ताकि हम सम्पूर्ण मानवता को अपना समर्थन देने में समर्थ हो सकें।आईए, हम सब एक साथ मिलकर इस नेक कार्य के लिए अपना संकल्प व्यक्त करें।धन्यवाद। ***आर.के.मीणा/अर्चना/एकेपी/एजी/डीके/सीएस-11700
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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने तटीय नियमन जोन (सीआरजेड) अधिसूचना, 2018 को मंजूरी दे दी है जिसकी पिछली समीक्षा वर्ष 2011 में की गई थी और फिर उसी वर्ष इसे जारी भी किया गया था। समय-समय पर इसके कुछ अनुच्छेदों में संशोधन भी किए जाते रहे हैं। सीआरजेड अधिसूचना, 2011 के प्रावधानों, विशेषकर समुद्री एवं तटीय पारिस्थितिकी के प्रबंधन एवं संरक्षण, तटीय क्षेत्रों के विकास, पारिस्थितिकी पर्यटन, तटीय समुदायों की आजीविका से जुड़े विकल्प एवं सतत विकास इत्यादि से संबंधित प्रावधानों की व्यापक समीक्षा के लिए विभिन्न तटीय राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ-साथ अन्य हितधारकों की ओर से भी पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को प्राप्त हुए अनेक ज्ञापनों को ध्यान में रखते हुए ही यह कदम उठाया गया है। लाभ : प्रस्तावित सीआरजेड अधिसूचना, 2018 से तटीय क्षेत्रों में गतिविधियां काफी बढ़ जाएंगी जिसके परिणामस्वरूप आर्थिक विकास की रफ्तार भी तेज हो जाएगी। इसके साथ ही तटीय क्षेत्रों के संरक्षण संबंधी सिद्धांतों को भी ध्यान में रखा जाएगा। इससे न केवल बड़ी संख्या में रोजगारों का सृजन होगा, बल्कि बेहतर जीवन के साथ-साथ भारत की अर्थव्यवस्था में मूल्यवर्धन भी सुनिश्चित होगा। नई अधिसूचना से तटीय क्षेत्रों की अतिसंवेदनशीलता में कमी आने के साथ-साथ उनका जीर्णोद्धार भी होने की आशा है। प्रमुख विशेषताएं :सीआरजेड क्षेत्रों में वर्तमान मानकों के अनुसार एफएसआई की अनुमति : सीआरजेड अधिसूचना, 2011 के अनुसार सीआरजेड-II (शहरी) क्षेत्रों के लिए फ्लोर स्पेस इंडेक्स (एफएसआई) अथवा फर्श क्षेत्र अनुपात (एफएआर) को वर्ष 1991 के विकास नियंत्रण नियमन (डीसीआर) के स्तरों के अनुसार यथावत रखा गया था। सीआरजेड अधिसूचना, 2018 में इन स्तरों को यथावत न रखने और निर्माण परियोजनाओं के लिए उस एफएसआई को तय करने की अनुमति देने का निर्णय लिया गया जो नई अधिसूचना की तिथि पर मान्य या प्रचलित होगी। इससे उभरती जरूरतों को पूरा करने के लिए इन क्षेत्रों का पुनर्विकास संभव हो पाएगा। घनी आबादी वाले क्षेत्रों को विकास के लिए ज्यादा अवसर प्रदान किए जाएंगे : सीआरजेड-III (ग्रामीण) क्षेत्रों के लिए अब दो अलग-अलग श्रेणियां निर्दिष्ट की गई हैं जिनका उल्लेख नीचे किया गया है :(ए) सीआरजेड-III ए – ये वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार प्रति वर्ग किलोमीटर 2161 के जनसंख्या घनत्व के साथ घनी आबादी वाले ग्रामीण क्षेत्र हैं। इस तरह के क्षेत्रों में उच्च ज्वार रेखा (एचटीएल) से 50 मीटर का ‘एनडीजेड (कोई विकास जोन नहीं)’ होगा, जबकि सीआरजेड अधिसूचना, 2011 में एचटीएल से 200 मीटर का ‘एनडीजेड’ इसके लिए निर्दिष्ट किया गया था, क्योंकि इस तरह के क्षेत्रों में शहरी क्षेत्रों की ही भांति समान विशेषताएं हैं। (बी) सीआरजेड-III बी – वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार प्रति वर्ग किलोमीटर 2161 से कम के जनसंख्या घनत्व वाले ग्रामीण क्षेत्र। इस तरह के क्षेत्रों में भविष्य में भी एचटीएल से 200 मीटर का ‘एनडीजेड’ होगा। (iii) बुनियादी सुविधाओं के लिए पर्यटन से जुड़े बुनियादी ढांचे को बढ़ावा दिया जाएगा : समुद्री तटों (सी-बीच) पर अब पर्यटन से जुड़ी अस्थायी सुविधाओं जैसे कि कुटीर या छोटे कमरों, शौचालय ब्लॉकों, कपड़ा बदलने के कमरों (चेंज रूम) के साथ-साथ पेयजल सुविधाओं इत्यादि की भी अनुमति दी गई है। अधिसूचना के अनुसार, पर्यटन से जुड़ी इस तरह की अस्थायी सुविधाओं की अनुमति अब सीआरजेड-III क्षेत्रों के ‘एनडीजेड (कोई विकास जोन नहीं)’ में भी दी गई है। हालांकि, इस तरह की सुविधाओं की स्थापना के लिए एचटीएल से 10 मीटर की न्यूनतम दूरी को बरकरार रखना होगा। सीआरजेड मंजूरी की प्रक्रिया सुव्यवस्थित की गई: सीआरजेड मंजूरियों से जुड़ी प्रक्रिया को सरल कर दिया गया है। केवल सीआरजेड-I (पारिस्थितिकी दृष्टि से संवेदनशील माने जाने वाले क्षेत्र) एवं सीआरजेड- IV (निम्न ज्वार रेखा और समुद्र की ओर 12 समुद्री मील के बीच अवस्थित क्षेत्र) में अवस्थित इस तरह की परियोजनाओं/गतिविधियों के लिए सीआरजेड मंजूरी पाने हेतु पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से संपर्क करना होगा। सीआरजेड-II और सीआरजेड-III के संबंध में मंजूरी का अधिकार आवश्यक मार्गदर्शन के साथ राज्य स्तर पर दिया गया है। सभी द्वीपों के लिए 20 मीटर का ‘एनडीजेड (कोई विकास जोन नहीं)’ निर्दिष्ट किया गया है: मुख्य भूमि तट के निकट स्थित द्वीपों और मुख्य भूमि पर अवस्थित सभी ‘बैकवाटर द्वीपों’ के लिए 20 मीटर का ‘एनडीजेड (कोई विकास जोन नहीं)’ निर्दिष्ट किया गया है। उपलब्ध स्थल के सीमित रहने के साथ-साथ इस तरह के क्षेत्रों की विशिष्ट भौगोलिक ��्थिति को ध्यान में रखकर ही इस आशय का निर्णय लिया गया है। इस तरह के क्षेत्रों के मामले में एकरूपता लाने के लिए भी यह निर्णय लिया गया है। पारिस्थितिकी दृष्टि से संवेदनशील माने जाने वाले सभी क्ष्ोत्रों को विशेष अहमियत दी गई है: सीआरजेड अधिसूचना के एक हिस्से के रूप में उनके संरक्षण एवं प्रबंधन योजनाओं से संबंधित विशिष्ट दिशा-निर्देश तैयार किए गए हैं। प्रदूषण में कमी करने पर विशेष रूप से फोकस किया गया है: तटीय क्षेत्रों में प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए सीआरजेड-1बी क्षेत्र में शोधन संबंधी सुविधाओं को स्वीकार्य गतिविधियां माना गया है। हालांकि, इस संबंध में कुछ आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाओं को ध्यान में रखना होगा। रक्षा एवं रणनीतिक परियोजनाओं को आवश्यक छूट दी गई है। पृष्ठभूमि : तटीय क्षेत्रों के संरक्षण एवं सुरक्षा के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने वर्ष 1991 में तटीय नियमन जोन अधिसूचना जारी की थी, जिसे वर्ष 2011 में संशोधित किया गया था। इस संबंध में समय-समय पर प्राप्त ज्ञापनों को ध्यान में रखते हुए अधिसूचना को संशोधित किया गया था। समुद्री एवं तटीय पारिस्थितिकी के प्रबंधन एवं संरक्षण, तटीय क्षेत्रों के विकास, पारिस्थितिकी पर्यटन, तटीय समुदायों की आजीविका से जुड़े विकल्प एवं सतत विकास इत्यादि से संबंधित प्रावधानों की व्यापक समीक्षा के लिए विभिन्न तटीय राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ-साथ अन्य हितधारकों की ओर से भी प्राप्त अनेक ज्ञापनों के आधार पर इस अधिसूचना में व्यापक संशोधन करने की जरूरत महसूस की गई। इसे ध्यान में रखते हुए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने डॉ. शैलेश नायक (पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में सचिव) की अध्यक्षता में जून 2014 में एक समिति गठित की थी जिसे सीआरजेड अधिसूचना, 2011 में उपयुक्त बदलावों की सिफारिश करने के लिए तटीय राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों और अन्य हितधारकों की चिंताओं के साथ-साथ विभिन्न मुद्दों पर भी गौर करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।शैलेश नायक समिति ने राज्य सरकारों एवं अन्य हितधारकों के साथ व्यापक सलाह-मशविरा करने के बाद वर्ष 2015 में अपनी सिफारिशें पेश कर दी थीं। तटीय राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों के सांसदो�� के साथ-साथ भारत सरकार के संबंधित मंत्रालयों के साथ भी सलाह-मशविरा करके इन सिफारिशों पर फिर से गौर किया गया। इसके बाद अप्रैल, 2018 में एक मसौदा अधिसूचना जारी कर आम जनता से उनके सुझाव आमंत्रित किए गए थे। सरकार को बड़ी संख्या में सुझाव और टिप्पणियां प्राप्त हुईं। तटीय क्षेत्रों के सतत विकास की समग्र अनिवार्यता और तटीय परिवेश के संरक्षण की आवश्यकता के आधार पर सरकार ने तटीय नियमन जोन अधिसूचना 2018 को मंजूरी दी है, जिसके तटीय समुदायों की आकांक्षाएं पूरी करने और समाज के गरीब एवं कमजोर तबकों का कल्याण सुनिश्चित करने में काफी मददगार साबित होने की आशा है। सीआरजेड अधिसूचना में किए गए बदलावों से किफायती आवास के लिए अतिरिक्त अवसर सृजित होने में भी मदद मिलेगी। इससे न केवल आवास क्षेत्र, बल्कि आश्रय की तलाश कर रहे लोग भी लाभान्वित होंगे। यह अधिसूचना कुछ विशेष तरह से तैयार की गई है। इससे संबंधित जरूरतों में कुछ इस तरह से समुचित संतुलन स्थापित होता है जिससे दोनों की ही पूर्ति हो जाती है। पर्यटन को भी आजीविका और रोजगारों के सबसे बड़े सृजकों में शुमार किया जाता है। नई अधिसूचना अधिक गतिविधियों, अधिक बुनियादी ढांचागत सुविधाओं और अधिक अवसरों की दृष्टि से पर्यटन को बढ़ावा देगी और इसके साथ ही यह पर्यटन के विभिन्न पहलुओं में रोजगार अवसर सृजित करने में निश्चित तौर पर काफी मददगार साबित होगी। इससे उन लोगों का उत्साह भी काफी बढ़ जाएगा, जो अथाह समुद्र का अवलोकन करने और उसके सौंदर्य का आनंद उठाने के इच्छुक हैं। ***अतुल कुमार तिवारी/आर.के.मीणा/अर्चना/आरआरएस/एनआर/वाईबी-
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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज भारतीय चिकित्सा प्रणालियों के लिए राष्ट्रीय आयोग (एनसीआईएम) विधेयक, 2018 के मसौदे को मंजूरी दी जिसका उद्देश्य मौजूदा नियामक भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद (सीसीआईएम) के स्थान पर एक नया निकाय गठित करना है, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। प्रमुख विशेषताएं :विधेयक के मसौदे में चार स्वायत्त बोर्डों के साथ एक राष्ट्रीय आयोग के गठन का प्रावधान किया गया है। इसके तहत आयुर्वेद से जुड़ी समग्र शिक्षा के संचालन की जिम्मेदारी आयुर्वेद बोर्ड और यूनानी, सिद्ध एवं सोवा रिग्पा से जुड़ी समग्र शिक्षा के संचालन की जिम्मेदारी यूनानी, सिद्ध एवं सोवा रिग्पा बोर्ड के पास होगी। इसके अलावा दो सामान्य या आम बोर्डों में आकलन एवं रेटिंग बोर्ड और आचार नीति एवं भारतीय चिकित्सा प्रणालियों के चिकित्सकों का पंजीकरण बोर्ड शामिल हैं। आकलन एवं रेटिंग बोर्ड भारतीय चिकित्सा प्रणालियों के शैक्षणिक संस्थानों का आकलन करने के साथ-साथ उन्हें मंजूरी देगा। भारतीय चिकित्सा प्रणालियों के चिकित्सकों का पंजीकरण बोर्ड भारतीय राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के अधीन प्रैक्टिस से जुड़े आचार नीति मुद्दों के साथ-साथ राष्ट्रीय रजिस्टर के रख-रखाव की जिम्मेदारी संभालेगा। विधेयक के मसौदे में सामान्य प्रवेश परीक्षा और एक ‘एक्जिट एक्जाम’ का प्रस्ताव भी किया गया है जिसमें सभी स्नातकों को पास करना होगा, तभी उन्हें प्रैक्टिस करने का लाइसेंस मिलेगा। इसके अलावा विधेयक में शिक्षक अर्हता परीक्षा आयोजित करने का भी प्रस्ताव किया गया है, ताकि नियुक्ति एवं पदोन्नति से पहले शिक्षकों के ज्ञान के स्तर (स्टैंडर्ड) का आकलन किया जा सके। विधेयक के मसौदे का उद्देश्य एलोपैथी चिकित्सा प्रणाली के लिए प्रस्तावित राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की तर्ज पर भारतीय चिकित्सा क्षेत्र की चिकित्सा शिक्षा में व्यापक सुधार लाना है। प्रस्तावित नियामक ढांचे या व्यवस्था से पारदर्शिता के साथ-साथ आम जनता के हितों के संरक्षण के लिए जवाबदेही सुनिश्चित होगी। एनसीआईएम देश के सभी हिस्सों में किफायती स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को बढ़ावा देगा। ***अतुल कुमार तिवारी/आर.के.मीणा/अर्चना/आरआरएस/��नआर-
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