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थायस ने स्वाधीन, लेकिन निर्धन और मूर्तिपूजक मातापिता के घर जन्म लिया था। जब वह बहुत छोटीसी लड़की थी तो उसका बाप एक सराय का भटियारा था। उस सराय में परायः मल्लाह बहुत आते थे। बाल्यकाल की अशृंखल, किन्तु सजीव स्मृतियां उसके मन में अब भी संचित थीं। उसे अपने बाप की याद आती थी जो पैर पर पैर रखे अंगीठी के सामने बैठा रहता था। ल...
ं में ईसाई बिशपों और वरतधारिणी कुमारियों को कोड़े मारे गये हैं, सूली दी गयी हैं और जंगल के जानवरों के समान डाल दिया गया है। इस दारुण विपत्ति के समय जब ऐसा निश्चय हो रहा था कि ईसाइयों का नाम निशान भी न रहेगा; एन्थोनी ने अपने एकान्तवास से निकलकर मानो मुरझाये हुए धान में पानी डाल दिया। एन्थोनी मिस्त्रनिवासी ईसाइयों का नेत...
लगाये हुए चला। थायस कुछ डरी, किन्तु उत्सुक भी थी। उसने सिर चोगे से बाहर निकाल लिया और अपने दोनों हाथ अहमद की मर्दन में डाल दिये। अहमद उसे लिये वेग से दौड़ा चला जाता था। वह एक तंग अंधेरी गली से होकर गुजरा; तब यहूदियों के मुहल्ले को पार किया, फिर एक कबिरस्तान के गिर्द में घूमते हुए एक खुले मैदान में पहुंचा जहां, ईसाई, धम...
लगे थे। धर्मनिष्ठ अहमद इन सभाओं में सम्मिलित होने से कभी न चूकता। उसका धमोर्त्साह दिनोंदिन ब़ने लगा। कभीकभी वह बाजार में ईसाइयों को जमा करके उन्हें आने वाले सुखों की शुभ सूचना देता। उसकी सूरत देखते ही शहर के भिखारी, मजदूर, गुलाम, जिनका कोई आश्रय न था, जो रातों में सड़क पर सोते थे, एकत्र हो जाते और वह उनसे कहता-'गुलामों...
े शहर के बाहर चली गयी। बुयि का नाम मीरा था। उसके पास कई लड़केलड़कियों की एक मंडली थी। उन्हें उसने नाचना, गाना, नकलें करना सिखाया था। इस मंडली को लेकर वह नगरनगर घूमती थी, और अमीरों के जलसों में उनका नाचगाना कराके अच्छा पुरस्कार लिया करती थी। उसकी चतुर आंखों ने देख लिया कि यह कोई साधारण लड़की नहीं है। उसका उठान कहे देता ...
बुल के फूल बटोरने चले जाते। उनकी थाली एक थी। प्याला एक था, मेज एक थी। लोलस उसके मुंह के अंगूर निकालकर अपने मुंह में खा जाता। तब मीरा लोलस के पास आकर रोनेपीटने लगी कि मेरी थायस को छोड़ दो। वह मेरी बेटी है, मेरी आंखों की पुतली ! मैंने इसी उदर से उसे निकाल, इस गोद में उसका लालनपालन किया और अब तू उसे मेरी गोद से छीन लेना च...
रेमियों और विलासियों के मारे उसे सांस न मिलती, पर वह किसी को मुंह न लगाती। दूसरा, लोलस उसे जब न मिला तो उसने उसकी चिन्ता ही छोड़ दी। उस स्वर्गसुख की अब उसे आशा न थी। उसके अन्य परेमियों में तत्त्वज्ञानी निसियास भी था जो विरक्त होने का दावा करने पर भी उसके परेम का इच्छुक था। वह धनवान था पर अन्य धनपतियों की भांति अभिमानी ...
्मित और चिन्तित होकर एक पादरी से पूछा-'पूज्य पिता, यह कैसा समारोह है ?' पादरी ने उत्तर दिया-'क्या तुम्हें नहीं मालूम कि हम आज सन्त थियोडोर की जयन्ती मना रहे हैं ? उनका जीवन पवित्र था। उन्होंने अपने को धर्म की बलिवेदी पर च़ा दिया, और इसीलिए हम श्वेत वस्त्र पहनकर उनकी समाधि पर लाल गुलाब के फूल च़ाने आये हैं।' यह सुनते ही...
, विद्वानों और तत्त्वज्ञानियों को उसकी गति, अगंविन्यास और उस पराकृतिक माधुर्य की झलक नजर आती थी जो समस्त संसार में व्यापक है और उनके विचार में ऐसी अर्पूव शोभा स्वयं एक पवित्र वस्तु थी। दीन, दरिद्र, मूर्ख लोग उसे एक स्वगीर्य पदार्थ समझते थे। कोई किसी रूप में उसकी उपासना करता था, कोई किसी रूप में। कोई उसे भोग्य समझता था,...
ी। उसके अभद्र और उद्दण्ड वेश ने उसे विस्मित कर दिया। उसे अब तक जितने मनुष्य मिले थे, यह उन सबों से निराला था। उसके मन में ऐसे अद्भुत पराणी के जीवनवृत्तान्त जानने की परबल उत्कंठा हुई। उसने उसका मजाक उड़ाते हुए कहा-'महाशय, आप परेमपरदर्शन में बड़े कुशल मालूम होते हैं। होशियार रहियेगा कि मेरी चितबनें आपके हृदय के पार न हो ...
को परेरित करेगा जो तुम्हें मोम की भांति पिघला दें कि मेरी उंगलियां तुम्हें अपनी इच्छा के अनुसार रूप दे सकें ? ओ नारीरत्न ! यह कौनसी शक्ति है जो तुम्हें मेरे हाथों में सौंप देगी कि मेरे अन्तःकरण में निहित सद्परेरणा तुम्हारा पुनसरंस्कार करके तुम्हें ऐसा नया और परिष्कृत सौन्दर्य परदान करे कि तुम आनन्द से विह्वल हो पुकार उ...
पत्थर तथा नमक की मूर्ति बन जाऊं। मुझे भयभीत न कीजिए। मेरे तो पहले ही से पराण सूखे हुए हैं। मुझे मौत का मुंह न दिखाइए, मुझे मौत से बहुत डर लगता है।' पापनाशी ने उसे उठने का इशारा किया और बोला-'बच्चा, डर मत। तेरे परति अपमान या घृणा का शब्द भी मेरे मुंह से न निकलेगा। मैं उस महान पुरुष की ओर से आया हूं, जो पापियों को गले ल...
। मैं उस महान पुरुष की ओर से आया हूं, जो पापियों को गले लगाता था, वेश्याओं के घर भोजन करता था, हत्यारों से परेम करता था, पतितों को सान्त्वना देता था। मैं स्वयं पापमुक्त नहीं हूं कि दूसरों पर पत्थर फेंकूं। मैंने कितनी ही बार उस विभूति का दुरुपयोग किया है जो ईश्वर ने मुझे परदान की है। क्रोध ने मुझे यहां आने पर उत्साहित न...
मुंह से आपही-आप निकल पड़ेगा-यही मेरा आराध्य देव है। तूने अभी उसकी आलौकिक शक्ति देखी ! अगर उसने मेरी आंखों के सामने अपने दयालु हाथ न फैला दिये होते तो अब तक मैं तेरे साथ पापाचरण कर चुका होता; क्योंकि स्वतः मैं अत्यन्त दुर्बल और पापी हूं। लेकिन उसने हम दोनों की रक्षा की। वह जितना ही शक्तिशाली है उतना ही दयालु है और उसका ...
यह अपने काम में बड़े परवीण और कुशल हैं। मैं उन्हें यथेष्ट पुरस्कार देती हूं। वह जो सोने की अंगूठियां पहने हैं और जिनके मोती केसे दांत चमक रहे हैं, उसे मैंने परधानमन्त्री की पत्नी से लिया है।' पापनाशी की पहले तो यह इच्छा हुई कि थायस को इस भोज में सम्मिलित होने से यथाशक्ति रोके। पर पुनः विचार किया तो विदित हुआ कि यह उताव...
गिरीश लाहौर का रहनेवाला है, विद्यार्थी है, युवा है और युवकों की साधारण भावुकता से भी सम्पन्न है। और इन सबके अतिरिक्त वह धनिक नहीं है। तो भी ऐसा है कि उसे कभी पहाड़ जाने के लिए खीस के बहाने घर से रुपये मँगा कर जोड़ने नहीं पड़ते, बिना बहाने ही मिल जाते हैं। हाँ, तो गिरीश ने निश्चय किया है कि उसमें साहित्यिक प्रतिभा है और...
कि इस प्रकार अपने विभिन्न तात्कालिक धन्धों में निरत और व्यस्त जान पड़नेवाले इन व्यक्तियों की वास्तविक दृष्टि, वास्तविक प्रतीक्षा, किसी और ही ओर लगी हुई है। इन लोगों के सामान्य शारीरिक उद्योग से कुचले हुए शरीरों के भीतर छिपी हुई है भूखे भेड़िये की-सी प्रमादपूर्ण और अन्वेषण तत्परता, जो लारियों के आते ही फूट पड़ेगी। इससे...
सेठ साहब की ओर ही। जब उसकी बात सुनकर उस पहाड़ी ने प्रश्न-भरी दृष्टि से मोटर-कम्पनी के दफ़्तर के भीतर देखा, तब उसने हाथ उठाकर सेठ साहब की ओर इशारा किया। वह स्त्री घबराकर घूम गयी और उस पहाड़ी के साथ, जिससे उसने कुछ कहा था, जल्दी से भीड़ में से निकलकर अदृश्य हो गयी। गिरीश की स्मृति में उसका तो कुछ रहा नहीं, रहा केवल उसकी ...
िश्वास, इतनी श्रद्धा टपकती है। गिरीश फिर एक बार उस अंश को पढ़ने लगा - "आपने पूछा है, मेरे जीवन में क्यों यह परिवर्तन आ गया है, क्यों मैं ऐसी अशान्त-सी रहती हूँ? आप पूछते हैं; पर मैं आपको न लिखूँगी, तो किसको लिखूँगी? यहाँ के लोगों को जिन्हें इतना भी पता नहीं कि शान्ति क्या होती है? "मैं तो पूरा लिख भी नहीं सकती, थोड़ा-स...
-एक दिखावटी दिलेरी से। किन्तु आज शायद पहाड़ियों ने निश्चय किया था कि अपने जीवन की समस्त पहेलियाँ एक साथ उसके आगे बिखरा देंगे; उसे ललकारेंगे कि वह उन्हें सुलझा सकता हो तो सुलझाये। वह अभी इसी समस्या पर विचार कर रहा था कि उसने फिर सेठ साहब का स्वर सुना, अब की बार अपने बहुत निकट और धीमा, मानो कुछ गुपचुप बात कहने का यत्न कर...
विशृँखलता की ओर, जो उदारता की आड़ में फैल रही है। उसने अपनी ग़लती जानी कि जिस विषय की वह आलोचना कर रहा है उसका उद्भव उन भावनाओं से नहीं हुआ था, जो वह उन्हें दे रहा है, बल्कि केवल रुपये के लालच के लिए यानी रुपये के लिए इन पहाड़ियों का आचार और चरित्र बिकाऊ है। पर यह धोखा है! ऐसे तर्क से केवल पतन ही पतन हो सकता है। उन्नत...
तिमत्ता को छोड़कर लौट जाता है अपने घिरे हुए, बँधे हुए, कलुषित, मारक, चूहेदान जैसे संसार में, तब वे उसे वापस भी नहीं बुलाते। वे उसी भव्य, विराट्, उपेक्षा-पूर्ण कठोर मुस्कराहट से निश्चल आकाश की ओर देखा करते हैं।
नीति के उपदेश यही सिखाते हैं कि त्रिवर्ग की उन्नति करनी चाहिए, जिससे मोक्ष की प्राति सुकर हो जाय । त्रिवर्ग से तात्पर्य धर्म, अर्थ और काम तीनों से है। प्राचीन समय में भारत की सम्पत्ति सभी देशों के लिए स्पृहणीय थी । काम, अर्थात् व्यवहार तो भारत से ही और देशों ने सीखा है। सुखोपभोग की सामग्री भारत में कितनी विपुल थी, इसका...
है, इसका ज्ञान भारतीय संस्कृति में मुख्य माना गया था । यन्त्रों को जन्म देनेवाली कल्पना शक्ति के उद्भावक मन, बुद्धि और सब-के-सव चैतन्यप्रद आत्मा का विचार आध्यात्मिकवाद है । भारतीय संस्कृति के नेता यही कहते हैं कि जो अपने-आपका परिष्कार वा सुधार न कर सका, वह अन्य वस्तुओं का निर्माता होने पर महत्त्वशाली नहीं कहा जा सकता।...
हमें भी मोक्ष को ही यह संस्कृति परम पुरुषार्थ कहती है। वह मोक्ष क्या है ? आत्मा को स्वतंत्र बना देना ही मोक्ष है । कर्त्तव्य का आचरण करते-करते मन, बुद्धि और शरीर पवित्र हो जाते हैं। इस प्रकार के पवित्र मन और बुद्धि में आत्मा की स्वतंत्र सत्ता प्रतीत होने लगती है। वह आत्मा हमें कहीं बाहर से लेने नहीं जाना पड़ेगा, वह तो ...
ौन सा कर्म नियत है - इसका उत्तर तो वर्ण-व्यवस्था ही दे सकती है। उसमें ही भिन्न-भिन्न वर्णों के अपने-अपने कर्म नियत हैं, उनका अनुष्ठान विना फल की इच्छा के ही करते रहना चाहिए । यदि विना वर्ण व्यवस्था माने भी कर्त्तव्य-निष्ठा का कोई यह समाधान करे कि जगत् के लाभदायक कर्म फल की इच्छा विना ही करते रहना चाहिए अथवा आत्मा की आज...
ान में बैठती है। इसीलिए, प्रकृति ने शिर को सव अवयवों में ऊँचा स्थान दिया है । शिर सब अवयवों से सदा ऊँचा ही रहना चाहता है। यदि आप सब अंगों को एक सीध में लिटाना चाहें, तब भी एक तकिया लगाकर शिर को कुछ ऊँचा कर ही देना पड़ेगा । नहीं तो शरीर को चैन ही नहीं मिलेगा । यह ज्ञान शक्ति की ही महिमा है। इसी प्रकार प्रपंच में भी ज्ञा...
हैं और वहीं से विभक्त होकर सच अंगों का पोषण करते हैं । यहाँ तक कि मस्तक में वा पैर में भी पीड़ा हो, तो औषधि उदर में ही डाली जाती है। वही से वह शिर आदि में पहुँचकर पीड़ा शान्त करती है। चौथे भाग पाद में सेवा-शक्ति है । यह उक्त तीनों अंगों को अपने-अपने कार्य में सहायता देता है। देखने की इच्छा आँख को होती है। उसी को उत्तम ...
यह नहीं है कि ख्वाब सिर्फ निद्रावस्था में ही दिखाई देते हों, अपितु जाग्रतावस्था में भी उतनी ही सरलता से ख्वाब देखे जा सकते हैं । फर्क सिर्फ इतना होता है कि जाग्रतावस्था में हम अपनी इच्छानुसार ख्वाब देख सकते हैं जबकि निद्रावस्था में देखे जाने वाले ख्वाबों पर हमारा या हमारे मन का कोई नियंत्रण नहीं होता है । अंगूठी - विवा...
लाभ हो । अच्छे कार्य करके नामवर हो जाए । हर प्रकार का सुख मिले । कमंद देखना - बड़ा काम पड़े किन्तु सहयोगी मिले । सफलता और ऊँचा स्थान प्राप्त होगा । किसी प्रकार का सुख मिले । शुभ समाचार आए । कमल देखना - साधुसन्तों से ज्ञान की प्राप्ति हो । विद्या धन मिले । उत्तीर्ण हो, पत्नी सुन्दर मिले । प्रेमिका सुन्दर और बुद्धिमान मि...
ेखना - पत्नी वफादार और सुशील मिले । कोई बुरा करने की भूल हो जाय जिसके परिणामस्वरूप लज्जित होना पड़े । चक्की देखना - जनता में सम्मान पाए, लोगों को अच्छी सलाह दे, यात्रा सामने आए, सकुशल वापसी हो । चींटियां देखना - वह घर उजड़ जाए । रहने वाले कम हो जायें, दुःख हो संकट आए । जाम देखना - हर काम में सफलता होगी, बुद्धि बढ़ेगी औ...
नेता या बड़े अधिकारी से दोस्ती का लाभ हो । धन बहुत हाथ आए, जिस व्यापार में हाथ लगाए घाटा न हो तो इरादा करे पूरा हो जाए, खुशी का समाचार मिले डूबता देखे तो हानि हो तैरना देखे तो सफलता पाए । दौलत देखना - पत्नी गर्भवती हो, किसी स्त्री से लाभ हो, सन्तान की प्राप्ति हो, व्यापार में लाभ हो, खुशी ही खुशी है । दलदल देखना - परेश...
े पश्चात् । भिखारी देखना - कोई अच्छा कार्य करे, राहत होगी । भैंस देखना - धन भोजन की प्राप्ति । मिठाई खाना - सुख पाए, दोस्ती बढ़े, प्रेम और स्नेह पाए, प्रेमिका से मिलन हो पत्नी मन पसन्द पाए, बिगड़े काम बन जायेंगे । मछली देखना - एक या दो देखे तो सुन्दर हसीना से विवाह हो, बड़ी हो तो खूब धन पाए और छोटी हो तो गरीबी और तंगी ...
सूर्य देखना - तेज बढ़े, ख्याति और धन की समृद्धि बढ़े, यशस्वी पुत्र प्राप्त हो । पत्नी का सुख मिले । सुलगती हुई आग देखना - दुःख बीमारी, दुश्मन से चिन्ता, शोक समाचार मिले । स्त्री की छाती से दूध टपकना - काम सुख मिले, पुत्र का जन्म हो, ससुराल से माल मिले । सीपी देखना - पानी में देखें तो हानि रेत पर पाये तो लाभ होगा । स्या...
मियाँ शहसवार का दिल दुनिया से तो गिर गया था, मगर जोगिन की उठती जवानी देख कर धुन समाई कि इसको निकाह में लावें। उधर जोगिन ने ठान ली थी कि उम्र भर शादी न करूँगी। जिसके लिए जोगिन हुई, उसी की मुहब्बत का दम भरूँगी। एक दिन शहसवार ने जो सुना कि सिपहआरा कोठे पर से कूद पड़ी, तो दिल बेअख्तियार हो गया। चल खड़े हुए कि देखें, माजरा ...
चा के पास जा कर बोली - बेगम साहब ने मुझे आपके पास भेजा है और कहा है कि रुपए की जरूरत हो तो हम हाजिर हैं। जितने रुपए कहिए, भेज दें। आजाद अपनी फौज के साथ एक मैदान में पड़े हुए थे कि एक सवार ने फौज में आ कर कहा - अभी बिगुल दो। दुश्मन सिर पर आ पहुँचा। बिगुल की आवाज सुनते ही अफसर, प्यादे, सवार सब चौंक ...Read Moreसवार ऐंठते...
हवा उसको ऐसी पसंद आई कि कई दिन तक उसी पड़ाव पर शिकार खेलती रही। एक ...Read Moreमिस-कलरिसा ने सुबह को देखा कि उसके खेमे के सामने एक दूसरा बहुत बड़ा खेमा खड़ा हुआ है। हैरत हुई कि या खुदा, यह किसका सामान है। आधी रात तक सन्नाटा था, एकाएक खेमे कहाँ से आ गए! एक औरत को भेजा कि जा कर पता लगाए कि ये कौन लोग है। वह औरत जो खेमे म...
रतों ने रहना शुरू किया है। एक का नाम फिरोजा है, दूसरी का फारखुंदा। इस गाँव में कोई डेढ़ हजार घर आबाद होंगे, मगर उन सब में दो ठाकुरों ...Read Moreमकान आलीशान थे। फिरोजा का मकान छोटा था, मगर बहुत खुशनुमा। वह जवान औरत थी, कपड़ेलत्ते भी साफ-सुथरे पहनती थी, लेकिन उसकी बातचीत से उदासी पाई जाती थी। फरखुंदा इतनी हसीन तो न थी, ...
री हैं। जानी बेगम ने पूछा - असगर मियाँ कौन हैं? कोई देहाती भाई हैं? इस पर हशमत बहू ने कहा, बहन वह कोई हों। अब तो हमारे मेहमान हैं। फीरीजा बेगम बोलीं - हाँ-हाँ तमीज से बात करो, मगर वह जो आई है, उनको नाम क्या है? महरी ने आहिस्ता से कहा - फैजन। इस पर दो-तीन बेगमों ने एक दूसरे की तरफ देखा। आजाद पोलेंड की शाहजादी से रुखसत ह...
आजाद पाशा को इस्कंदरिया में कई दिन रहना पड़ा। हैजे की वजह से जहाजों का आना-जाना बंद था। एक दिन उन्होंने खोजी से कहा - भाई, अब तो यहाँ से रिहाई पाना मुश्किल है। खोजी - खुदा का शुक्र करो ...Read Moreबचके चले आए, इतनी जल्दी क्या है? आजाद - मगर यार, तुमने वहाँ नाम न किया, अफसोस की बात है। खोजी - क्या खूब, हमने नाम नहीं किय...
तीनों पात्रों के सिवा हमारे विचार में तो और कोई ऐसा पात्र नहीं है जिसके विषय में कुछ कहना बाकी रह गया हो। अच्छा सुनिए। मियाँ खोजी मरते दम तक आजाद के वफादार दोस्त बने रहे। अफीम की डिबिया और करौली की धुन ने कभी उनका साथ न छोड़ा। मिस मीडा औ मिस क्लारिसा ने उर्दू और हिंदी पढ़ी और दोनो थियासोफिस्ट हो गईं।
जान-पहचान और संपर्क की घनिष्ठता बढ़ने पर यार-दोस्तों की मंडली जुड़ती गयी । विद्यालय की सीमा छोड़ने पर खत्ता-दड़ी, धुन्ना, अंटा, और लट्टू खेलने की ऐसी बान पड़ी कि दूसरी कोई भी बात अच्छी नही लगती थी । खाना खाते समय मन खत्ता-दड़ी के साथ गुड़कने लग जाता ; पढ़ते समय धुन्ना के डण्डों में सराबोर हो जाता । धुन्ने की जीत में को...
र के ही आनदीलालजी थे. विद्यार्थियों को दुख पहुंचाने में उनका कोई जवाब नही था । कान उमेठ कर मुझे बुरी तरह पीटा - लातों में, घूसों से और ठोलों से । पसली में किसी एक घूस की असह्य चोट से मै मूच्छित हो गया। विद्या मीखने के निमित्त मार जरूरी होते हुए भी मुझे वैसी बेजा मार का सपने में भी अनुमान नहीं था । होश आते ही गुस्सा तो ...
रही थी ! थकावट मिटाने के बहाने वह तेजी से सांस खींच रही थी । दौड़ते-दौड़ते आखिर बेदम होकर हांफना पड़े तो इस में आश्चर्य की क्या बात ? सूरज से भी काफी देर बाद - घड़ी-डेढ़-घड़ी के उपरांत मेरी आंख खुली । अपरिचित स्टेशन । अजनबी मानुस । अजाना हाट-बाजार। अजानी राह । अजाने घर । अजाने गाछ-बिरछ । अजाने कुत्ते और अजाने ही कौए ।...
ी आबादी फैल गयी है । जानवरों की उपमा देने पर मनुष्य बुरा मानेगे या जानवर ? तुम्हे क्या लगता है ? तुम्हारा प्रत्युत्तर बांचने से मुझे काफी राहत मिलेगी । हमेशा की तरह देरी से जवाब न देकर, जरा जल्दी देना । आज की बात अलहदा है । उस दिन की बात अलहदा थी । इसी एक नाम से कक्षा में हाजरी देता था और आज भी उसी नाम से मेरी पहचान है...
दिन-ब-दिन परिचय का दायरा बढ़ने लगा । किसी दूसरे माध्यम से पार नहीं पड़ी तो कुबद और कुलंगों की ओर मेरा मन स्वतः ही खिंचने लगा । और कुछ ही दिनों में हिन्दी व संस्कृत की अपेक्षा बदमाशी के सीगे में मेरा नाम भीतर ही भीतर चमकने लगा । कभी-कभार हेड माट सा'ब यों ही अपनी रौ मे प्रार्थना के बाद पूछ बैठते कि स्कूल में सबसे ज्यादा...
थपायी और शाबाशी दी। आज तुम्हें यह पत्र लिखते समय, वाकई ऐसा महसूस हो रहा है इरपिंदर कि हेड मा 'ट सा'ब का वह अदृष्ट हाथ अभी-अभी मेरी पीठ थपथपा रहा है और वे अदृष्ट अधखुले होंठ मुझे बार-बार शाबाशी दे रहे हैं । देवी ठेठ सीढ़ियों तक नीचे हमें छोड़ने आयी । ऐसा महसूस हुआ कि मैं नीचे उतरने की बजाय ऊपर-ही- ऊपर चढ़ रहा हूं। उस के...
त सरे आम उजागर नहीं करते तो आज मुझे लिखते समय दो बार सोचना पडता । किन्तु उस खांटी बन्दे ने बाप होकर जब बेटी के बुरे भले की रंचमात्र भी चिन्ता न करके निर्भय - निशंक सबके सामने सत्य पर पर्दा नही डाला तो आज किसे, कैसी जोखिम है ? जोखिम तो उस दिन थी । पर सत्य की टेक रखने वाले जवामर्द बिरले ही जन्म लेते है । सुना है कि धरती ...
नहीं भरा । हेड मा ट सा'ब ने अत्यधिक खुशी में छक कर मुझे शाबाशी दी। देवी के आनंद का भी वारापार नहीं था । उस रात दमकते सितारों के बीच उसका मन भी दमका होगा, जरूर दमका होगा। मुझे स्वयं भी कुछ देर के लिए यह भ्रम हुआ कि इस अथाह यश-कीत्ति का दावेदार मैं ही हूं । पर उस रात के सघन अधियारे मे मेरी आंखों के सामने यह स्पष्ट हो गय...
पत्थर तैरते थे । शहर का चुनिंदा स्कूल था । वैसे ही नामजद गुरु और वैसे ही कुशल विद्यार्थी ! कुए के मेंढ़क ने जैसे विशाल सरोवर मे छलांग मारी हो । कई दिन तक तो घबराया-घबराया-सा रहा । मानो अपने ठिकाने पर स्वयं खो गया हूं । किसी तरह का कोई संपट ही नहीं जुड़ पाया । जगल की नीलगाय बस्ती मे आने पर जिस तरह होश भूल जाती है, ठीक म...
तुम में से प्रत्येक व्यक्ति को नए सिरे से जाँच करनी चाहिए कि अपने पूरे जीवन में तुमने परमेश्वर पर किस तरह से विश्वास किया है, ताकि तुम यह देख सको कि परमेश्वर का अनुसरण करने की प्रक्रिया में तुम परमेश्वर को वास्तव में समझ, बूझ और जान पाए हो या नहीं, तुम वास्तव में जानते हो या नहीं कि विभिन्न प्रकार के मनुष्यों के प्रति ...
नहीं चल रहा है, परमेश्वर पर उसका विश्वास किसी वास्तविक तत्त्व से रहित है, उसका परमेश्वर का ज्ञान भी निश्चित ही शून्य है, और कहने की आवश्यकता नहीं कि परमेश्वर के प्रति श्रद्धा क्या होती है, इसका उसे बिलकुल भी पता नहीं है। परमेश्वर का स्वरूप और अस्तित्व, परमेश्वर का सार, परमेश्वर का स्वभाव - यह सब मानवजाति को उसके वचनों...
अंधविश्वासों और रोमानी रंगों से युक्त भक्ति के पारंपरिक रूपों की बुनियाद पर ही अटका हुआ है। मनुष्य के परमेश्वर संबंधी ज्ञान के प्रस्थान-बिंदु पर ही रुके होने का अर्थ व्यावहारिक रूप से उसका न होना है। मनुष्य द्वारा परमेश्वर की स्थिति और पहचान की पुष्टि के अलावा परमेश्वर पर मनुष्य का विश्वास अभी भी अस्पष्ट अनिश्चतता की ...
बहुधा परमेश्वर के वचनों में "परमेश्वर" की अगुआई प्राप्त करते हुए, वे उसकी गंभीर परवाह और उदार मंतव्य समझते प्रतीत होते हैं और साथ ही लगता है कि उन्होंने मनुष्य के लिए परमेश्वर के उद्धार और उसके प्रबंधन को भी जान लिया है, उसके सार को भी जान लिया है और उसके धार्मिक स्वभाव को भी समझ लिया है। इस नींव के आधार पर, वे परमेश्व...
लेना-देना नहीं है। कहने का तात्पर्य यह है कि ऐसा व्यक्ति परमेश्वर के वचनों के सतही अर्थ पर चाहे कितनी भी मेहनत से कार्य करे, वह सब व्यर्थ है : क्योंकि वह मात्र शब्दों का अनुसरण करता है, इसलिए उसे अनिवार्य रूप से मात्र शब्द ही प्राप्त होंगे। परमेश्वर द्वारा बोले गए वचन दिखने में भले ही सीधे-सादे या गहन हों, लेकिन वे सभी...
्चा समर्पण और प्रतिदान नहीं होगा; परमेश्वर के सच्चे ज्ञान के बिना मनुष्य में सच्ची आराधना और समर्पण नहीं होगा, मात्र अंधी मूर्तिपूजा और अंधविश्वास होगा; परमेश्वर के सच्चे ज्ञान के बिना मनुष्य परमेश्वर के तरीके के अनुसार कार्य नहीं कर पाएगा, या परमेश्वर का भय नहीं मानेगा, या बुराई का त्याग नहीं कर पाएगा। इसके विपरीत, मन...
प्रतिदान करना और उसके प्रभुत्व के प्रति समर्पित होना चाहते हो। तुम अब उसके द्वारा मार्गदर्शन किए जाने, पोषण दिए जाने, निगरानी किए जाने, उसके द्वारा देखभाल किए जाने से इंकार नहीं करते और न ही उसकी आज्ञा और आदेश का पालन करने से इंकार करते हो। तुम सिर्फ़ उसका अनुसरण करना चाहते हो, उसके साथ उसके आस-पास रहना चाहते हो, उसे अ...
कृपा करें और पूरी तरह अश्रद्धालु हो जाएं। डरें मत। भय भी न खाएं। तर्क ही करना है, तो पूरा कर लें। कुतर्क की सीमा का भी कुछ संकोच न करें। पूरी तरह उतर जाएं अपनी अश्रद्धा में। वह पूरी तरह उतर जाना ही आपको नरक में ले जाएगा। और नरक में जाए बिना नरक से कोई छुटकारा नहीं है। और दूसरों की बातें मत सुनें। क्योंकि अधकचरी दूसरों ...
ै! लेकिन तुम्हारी आस्तिकता तक झूठी है। और जिसकी आस्तिकता तक झूठी है, वह कैसे परमात्मा तक पहुंच सकता है! धार्मिकता भी झूठी है, ऊपर-ऊपर है। जरा - सा खोदो, तो हर आदमी के भीतर नास्तिक मिल जाता है। बस, ऊपर से एक पर्त है आस्तिकता की, स्किन डीप। चमड़ी जरा - सी खरोंच दो, नास्तिक बाहर आ जाता है। और वह जो भीतर है, वही असली है। व...
ि अश्रद्धा करके हम अपनी शक्ति नष्ट करें ? वह जो अश्रद्धा कर रहा है, वह असल में श्रद्धा की तलाश में है। वह चाहता है कि हो। लेकिन उसे मालूम नहीं पड़ता कि है। इसलिए इनकार करता है। और इनकार करता है, तो पीड़ा अनुभव करता है। इनकार पूरा होने दें। यह धार तलवार की गहरे उतर जाए और हृदय को काट डाले पूरा। आप प्रार्थना के रास्ते पर...
है। इस नाच के पीछे कुछ अलौकिक खड़ा है। वह अलौकिक की श्रद्धा न हो, तो नाच तो आप भी सकते हैं, लेकिन आपकी आत्मा में आनंद पैदा नहीं होगा। नाच बाहर - बाहर रह जाएगा। आप भीतर खाली के खाली, रिक्त, उदास, वैसे के वैसे रह जाएंगे। मीरा की श्रद्धा ही केंद्र है। आप संदेह के केंद्र पर नाच सकते हैं, लेकिन मीरा के सुख की अनुभूति आपको ...
देह ही आपको समर्पण तक ले आया। इससे उलटा कभी भी नहीं हुआ है। सभी संदेह करने वाले, सम्यक संदेह करने वाले, राइट डाउट करने वाले लोग समर्पण पर पहुंच गए हैं। अश्रद्धा ही श्रद्धा का द्वार बन जाती है। मगर पूरी अश्रद्धा । अनास्था ईमानदार, प्रामाणिक अनास्था आस्था की जननी है। थोपें मत। ऊपर - ऊपर से थोपें मत। ऊपर की चिंता मत करें।...
लने नहीं आएगा। लेकिन आप तृप्त हो नहीं सकते। यह कठिनाई ईश्वर की नहीं है। यह आदमी के आदमी के होने के ढंग की कठिनाई है। आदमी इस ढंग का है कि बिना ईश्वर के तृप्त नहीं हो सकता। और इसलिए जब हम आदमी से ईश्वर छीन लेते हैं, तो वह न मालूम किस-किस तरह के ईश्वर गढ़ लेता है। रूस में एक बड़ा प्रयोग हुआ कि कम्युनिस्टों ने ईश्वर छीन ल...
क बच्चे की आंखों में झांकें; और एक काई जमे हुए पत्थर को देखें; और सागर के किनारे की रेत को, और सागर की लहरों को - तो फिर हर जगह उसका प्रमाण है। फिर वही वही है । एक दफा खयाल में आ जाए कि वह है, तो फिर सब जगह उसका प्रमाण है। और जब तक उसका खयाल न आए, तब तक उसका कोई प्रमाण नहीं है।
"हुजूर, माई-बाप, मुझ पर कैसी विपदा आ पड़ी है। कल रात जवान लड़के को पाखाना हुआ। मैं गरीब भीख माँग कर खाने वाला आदमी। डॉक्टर का खर्चा कहाँ से लाता? सोच रहा था, सुबह होते ही सरकारी अस्पताल ले जाऊँगा। डॉक्टर बाबू के पाँव पडूँगा। क्या कहूँ हुजूर, भगवान बड़ा ही निष्ठुर है। मुझसे मेरा कालिया छीन लिया। सुबह होते-होते बेटे की न...
हुए हैं स्लोगन - "प्रधानमंत्री लौट जाओ"। खूब सारी जीपें इधर से उधर भाग रही हैं। कहीं शासक दल के झंडें दिख रहे हैं। कहीं-कहीं पर विरोधी दल के झंडें। कहीं अधिकारीगण व्यग्र होकर भाग रहे हैं। चारों तरफ माइक बज रहे हैं। चारों तरफ प्रचार-पत्र नजर आ रहे हैं। "बंधुगण! बंधुगण! प्रधानमंत्री की सभा को सफल बनाइए। प्रधानमंत्री को क...
से गाँव में? इतनी सुबह -सुबह किसान अपना हल लेकर खेत की तरफ जा रहा है। कोई आदमी अपने दोस्तों के साथ हँसते-हँसते तालाब की तरफ जा रहा है। एक ओह, इतनी सुंदर राजकन्या! इतनी सुंदर कन्या होती भी है क्या? अगर थोड़ी सी भी धूप लग गई तो सारा सौन्दर्य दुःख और कष्ट में पिघल जाएगा। आहा, यह सुंदर कन्या ऐसे ही हमेशा हँसती रहे। घोड़ा स...
ों में घोड़ा अचानक चौंककर खड़ा हो गया। कुछ लोग सामने में घोड़े पर भागते हुए इधर आ रहे थे। राजकुमार की पोशाक धारण किया हुआ दस-बारह साल का लड़का अचानक चौंक पड़ा। कौन हैं वे लोग? क्या दस्युगण? या शत्रु राज्य की सेना? कमर में कसी हुई तलवार को अपनी मुट्ठी से जोर से पकड़ लिया। "महाराज, महाराज! हमारी मदद कीजिए, महाराज।" आगंतु...
ताहत नहीं होते। सरकार यह बात पहले से जानती थी कि उड़िसा के इन इलाकों में तेज आँधी-तूफान आ सकते हैं, तब बचाव के उपायों की व्यवस्ता क्यों नहीं की गई?" "कोई भी प्राकृतिक आपदा कितनी भी भयंकर हो, गाँव के सारे लोगों को उनकी जमीन-जायदाद छोड़कर हटाना क्या इतना सहज है? धन दौलत, जमीन-जायदाद तथा उनसे जुड़ी हुई उनकीस्मृतियाँ,उनके ...
वाले कर्मचारीगण उसकी अवहेलना करते हैं। ऊपर के अधिकारी उसको उचित सम्मान नहीं देते हैं क्योंकि वह एक प्रमोटेड आई.ए.एस ऑफिसर है। ऐसी ही कुछ हीन-भावना हमेशा उसके मस्तिष्क में छाई रहती है। तभी एस.पी. ने आकर कुछ कागज उसके सामने रख दिए। "इन सब कागजों पर हस्ताक्षर कर दीजिए। आवश्यकता पड़ने पर काम आएँगे।" "ये सब क्या कागज हैं? आ...
री की उन तमतमाई आँखों का वह र्इंट का जवाब पत्थर से देगा। प्रधानंत्री को बी यह बात समझ में आ जाएगी कि मंगलू स्वाँई कितना ताकतवर है। उसके जैसी एक मिल जाए तो जीवन में उसके कोई चाह बाकी नहीं रहेगी. उसने राजकुमारी को हथेली से पकड़ लिया। उसकी मुलायम-मुलायम हथेलियों से उसका सारा शरीर सिहर उठा। कितनी सुंदर अनुभूति थी वह! राजकु...
टे।" बूढ़ा ड़र रहा है। इतनी भयंकर भीड़। इतनी भयंकर भीड़ का बूढ़े ने कभी सामना नहीं किया था. जहाँ पकड़े गए, वहाँ मारे गए। यहां से निकलते ही, थोडा-बहुत नाश्ता कर लेने के बाद खिसकना पड़ेगा। बूढ़े ने मन ही मन सोच लिया है, यहाँ से खिसकते ही कटक जाना उचित रहेगा। खाना-पीना भी कटक में ही खाया जाएगा। उसके बाद जितना जल्दी हो सके...
ें नहीं खोल पा रहा था। तभी किसी ने उसके पेट पर लाठी से वार कर दिया। उसने अपनी आत्मरक्षा के लिए ज्यों ही हाथ ऊपर किया, वैसे ही लाठी का दूसरा वार हुआ। उस वार से उसके हाथ की हड्डी टूट गई। टूटी हुई डाल की तरह उसका हाथ झूलने लगा। सारे शरीर में दर्द के मारे वह कराहने लगा। राजकुमारी कहने लगी, "राक्षस आने का वक्त हो गया है। रा...
े में रिपोर्ट देते समय यह फोटो नहीं भी चलेगा तो कोई बात नहीं, मगर आँधी-तूफान, अकाल आदि किसी भी परिस्थिति में यह फोटो काम आ जाएगा। अंतिम बचे हुए एक फ्लैश बल्ब की सहायता से पुण्यश्लोक ने इस दृश्य को अपने कैमरे में अंकित कर लिया और खुश होने लगा। पुण्यश्लोक द्वारा लिए गए फोटो का दृश्य इस प्रकार था। शिरीष पेड़ के सहारे बैठक...
एक बार देवलोक की परम सुंदरी अप्सरा उर्वशी अपनी सखियों के साथ कुबेर के भवन से लौट रही थी। मार्ग में केशी दैत्य ने उन्हें देख लिया और तब उसे उसकी सखी चित्रलेखा सहित वह बीच रास्ते से ही पकड़ कर ले गया। यह देखकर दूसरी अप्सराएँ सहायता के लिए पुकारने लगीं, "आर्यों! जो कोई भी देवताओं का मित्र हो और आकाश में आ-जा सके, वह आकर ह...
अच्छे नहीं लगते थे। इसलिए उन्होंने विदूषक से कहा, "कोई ऐसा उपाय सोचो कि मेरे मन की साध पूरी हो सके।" विदूषक ऐसा उपाय सोचने का नाटक कर ही रहा था कि अच्छे शकुन होने लगे और चित्रलेखा के साथ उर्वशी ने वहाँ प्रवेश किया। उन्होंने माया के वस्त्र ओढ़ रखे थे, इसलिए उन्हें कोई देख नहीं सकता था, वे सबको देख सकती थीं। जब प्रमद वन ...
ी नहीं मानीं तो वह भी क्रुद्ध हो उठे। देवसभा में भरत मुनि ने लक्ष्मी-स्वयंवर नाम का जो नाटक खेला था, उसके गीत स्वयं सरस्वती देवी ने बनाये थे। उसमें रसों का परिपाक इतना सुंदर हुआ था कि देखते समय पूरी-की-पूरी सभा मगन हो उठती थी। लेकिन उस नाटक में उर्वशी ने बोलने में एक बड़ी भूल कर दी। जिस समय वारुणी बनी हुई मेनका ने, लक्...
द महाराज पुरुरवा ने राजकाज मंत्रियों को सौंप दिया और स्वयं गंधमादन पर्वत पर चले गए। उर्वशी साथ ही थी। वहाँ वे बहुत दिन तक आनंद मनाते रहे। एक दिन उर्वशी मंदाकिनी के तट पर बालू के पहाड़ बना-बनाकर खेल रही थी कि अचानक उसने देखा- महाराज एक विद्याधर की परम सुंदर बेटी की ओर एकटक देख रहे हैं। बस वह इसी बात पर रूठ गई और रूठी भी...
सुनी करके दूसरी ओर मुँह फेर लिया।ठीक ही है, जब खोटे दिन आते हैं तो सभी दुरदुराने लगते हैं। लेकिन तभी उन्होंने लाल अशोक के पेड़ को देखा। उससे भी वही प्रश्न किया और जब वह हवा से हिलने लगा तो समझे कि वह मना कर रहा है - उसने उर्वशी को नहीं देखा। इसी प्रकार पागलों की तरह प्रलाप करते हुए जब वह यहाँ से मुड़े तो उन्हें एक पत्थ...
गा कि उसे कसकर छाती से लगा ले। पर ऊपर से वह शांत ही बने रहे। उन्होंने तापसी को प्रणाम किया आशीर्वाद देकर तापसी ने कुमार से कहा, "बेटा, अपने पिताजी को प्रणाम करो।" कुमार ने ऐसा ही किया। महाराज ने उसे गदगद होकर आशीर्वाद दिया और तब तापसी बोली, "महाराज! जब यह पुत्र पैदा हुआ तभी कुछ सोचकर उर्वशी इसे मेरे पास छोड़ आई थी। क्ष...
एक मंजिल ही नहीं ए मेरे दिल, जिंदगी और भी है। अब तक तुमने जो जाना है, वह कुछ भी नहीं अक्षय विवेक ! अभी असली तो जानने कोशेष है। अब तक तुमने जो जीआ है वह कुछ भी नहीं, अक्षय विवेक ! असली जीने को तो अभी शेष है। " है कोई लेवनहारा" -- उसी के लिए पुकार उठाई जा रही है। और तुम्हारे हृदय तक पुकार पहुंची। अब साहस करो। अब हिम्मत ज...
ल को चांद-तारों के सामने फैला देना। कहने की बात नहीं। प्रार्थना एक भाव - दशा है, वक्तव्य नहीं। कोई हरे कृष्ण, हरे राम, ऐसा कहने से कोई प्रार्थना नहीं होती। कि "अल्ला-ईश्वर तेरे नाम, सबको सनमति दे भगवान," ऐसा कहने से प्रार्थना नहीं होती! प्रार्थना मौन निवेदन है। प्रार्थनाझुकने की कला है। जहां झुक जाओ घुटने टेक कर पृथ्वी...
पहचानना और उसके पीछे चले चलना । वह कच्चा सा धागा तुम्हें परमात्मा तक पहुंचा देगा; या उस कच्चे धागे में बंधा हुआ परमात्मा तुम तक आ जाएगा। कुछ भी हो, बूंद सागर में गिरे कि सागर बूंद में गिरे, बात एक ही है। छठवां प्रवचन विद्रोह के पंख पहला प्रश्नः ओशो! किसी अन्य आश्रम से--जैसे युग निर्माण योजना, मथुरा; रामकृष्ण आश्रम आदि-...
है। और कृष्ण के वचनों में कुछ है जो जीसस के वचनों में नहीं है। कृष्ण के वचनों में एक अपूर्व सुसंस्कृत अभिव्यक्ति है। जीसस के वचनों में एक ग्राम्य सौम्यता है, सरलता है, सीधापन है, सादगी है। बुद्ध के वचनों में कुछ है--सम्राट के बेटे के वचन हैं - बहुत परिष्कृत हैं। कबीर के वचनों में भी कुछ है -- माटी की सुगंध है। होंगे ब...
के भीतर शरण मिलती हो तो उससे तो बेहतर हाथी के पैर कि नीचे दब कर मर जाना है। तुमने घंटाकरण की कहानी तो सुनी है न, जो अपने कानों में घंटे बांधे रखता था! ये तुम्हारे आस्तिक बस घंटाकरण हैं। वह कानों में घंटे बांधे रखता था, क्यों? ताकि उसके कान में उसके इष्ट देवता के अतिरिक्त और कोई नाम सुनाई न पड़े। अगर उसके इष्ट देवता राम...
के। जरूरी नहीं है कि तुम्हें नहीं मिला, इसका यह अर्थ है कि वहां नहीं है। तुमसे तालमेल न बैठा हो, तुम्हारे व्यक्तित्व के अनुकूल न पड़ा हो। रामकृष्ण सभी के अनुकूल नहीं पड़ सकते, नहीं तो वैविध्य मिट जाए। किसी को कुरान ही जमती है और कुरान के वचन ही किसी के प्राणों में पड़े हुए जन्मों-जन्मों के बीजों को अंकुरित करते हैं। और...
ात्मा अभी भी चुक नहीं गया है, अभी बहुत महावीर होंगे और बहुत बुद्ध होंगे और बहुत मोहम्मद होंगे और बहुत जीसस होंगे। और परमात्मा तब भी चुकेगा नहीं। नये-नये वाद्य जुड़ते जाएंगे, संगीत और सघन होता जाएगा, संगीत और गहन होता जाएगा। कृपण न बनो, कंजूस न बनो । हृदय को खोलो इस विराट आकाश के प्रति। पूरे परमात्मा को ही अंगीकार करो, ...
हो कि चरखे का गीत गाए जाते हो! इस सदी के पूरे होते-होते तुम्हें पता चलेगा कि गांधीवाद के नाम पर तुमने जो मूढ़ता की है, इससे बड़ी और कोई मूढ़ता नहीं हो सकती थी। गांधी को भविष्य का कोई बोध नहीं था। गांधी मरे - मराए अतीत के प्रशंसक थे। वे रेलगाड़ी के खिलाफ थे, टेलीफोन के खिलाफ थे, पोस्ट आफिस के खिलाफ थे, दवाइयों के खिलाफ...
कि अगर हम अपने द्वार खोल दें तो यह देश समृद्ध हो सकता है। लेकिन हम पिटी-पिटाई बातें दोहराए चले जाते हैं। हमारे अर्थशास्त्री कौन हैं? चौधरी चरणसिंह जैसे लोग हमारे अर्थशास्त्री हैं। जिनको अर्थशास्त्र का अ ब स भी नहीं आता। अनर्थशास्त्र का आता होगा, अर्थशास्त्र का बिल्कुल नहीं आता। वे अभी तक गांवों का गुणगान किए जा रहे हैं...
ली आदमी जो बैठता, आलसी होता, उसकी निंदा करनी होती थी। नये भविष्य में जब यंत्र सारा उद्योग हाथ में ले लेंगे तो हमें कहना पड़ेगाः खाली बैठो, खाली बैठना भगवान का मंदिर है। मैं उसी खाली बैठने की कला को सिखा रहा हूं, ध्यान कह रहा हूं उसको। तो ध्यान अनिवार्य होगा। कला के नये-नये आयाम हमें खोल देने चाहिए, जो सिर्फ राजाओं-महार...
ान के खतरों से बच सके और विज्ञान का सदुपयोग कर ले। जरूरी नहीं है कि विज्ञान जंगलों को काटे । हमने गलती से काट डाले हैं। विज्ञान ने अब इस तरह की सुविधा जुटा दी है कि अगर हम चाहें तो समुद्र में बस्तियां बस सकती हैं, जंगल काटने की जरूरत नहीं है। समुद्र में बस्तियां तैराई जा सकती हैं। जमीन पैदावार के काम में लाई जा सकती है...
ैंः किसको बनाया आज, आज किसको फांसा, आज कौन लुटा? जो नहीं देता, भिखमंगा जानता हैः होशियार आदमी है। भिखमंगे के मन में सम्मान उसका है जो नहीं देता उसको, क्योंकि वह देखता है कि मेरी बातों में नहीं आता। लेकिन भिखमंगे तुम्हारे पुराने संस्कारों को जगा लेते हैं। तुम अगर भूखे हो तो मंदिर में जाकर भी मांगोगे क्या? रोटी, रोजी, कप...
ठीक दाएँ जहाँ 'लर्न इंगलिश विद दीपिशखा क्लासेज' का बोर्ड था और बाएँ 'तीन महीने में वजन घटाएँ' का ऐलान करती होर्डिंग, उसने अपने संस्थान का बोर्ड लगवाया था और यह उसे खासा उत्साहित करता था 'रिलेशनशिप' बढ़ते-बढ़ते दोनों बोर्डों को निगल चुका था। उसकी वर्कशॉप में ज्यादातर युवा होते या अभी-अभी युवावस्था का पड़ाव पार किए प्रौढ...
लिखवाना। वह किसी ऐसे इनसान की तलाश करे जो उसकी तरह की महिलाओं को पसंद करता हो और अगर प्रेम का रिश्ता निभाने में कोई दिक्कत आती है तब वह उसे निस्संकोच संपर्क करे। वह कुछ प्रकाशन संस्थानों से बात करे और उन्हें इस बात पर राजी करे कि वह उसका शोधग्रंथ छाप दें। उसकी दोनों प्रेमिकाओं ने उससे बहुत टूट कर ठीक उसी तरह उससे प्रे...
से पहले इतना पी ले कि मरते वक्त दर्द का एहसास न हो। मरना मुश्किल काम है, यह पहला पैग जज्ब होते ही उसे समझ में आ गया था। उसने ढेर सारी सिगरेटें पीं और उनका धुआँ बाहर नहीं निकाला। उसने अँधेरे से खूब बातें कीं और उसे बताया कि वह हमेशा से उससे प्रेम करता है। अँधेरे ने उससे कहा कि वह खूब पीए और उसकी बाँहों में खुद को ढीला छ...
हँसते रहते थे। आवश्यकता है एक ऐसे इनसान की जिसकी जिंदगी में हवा से ज्यादा प्रेम हो। जो मानता हो कि प्रेम से पेट भी भर सकता है। एक ऐसी महिला को अपने लिए प्रेमी की जरूरत है जिसके अंदर ढेर सारा प्रेम भरा हुआ है। तलाश है एक ऐसे इनसान की जो इतना प्रेम सँभाल सके...। जो पिछले एक वर्ष में कभी किसी चिड़िया की मौत पर रोया हो, क...
उसकी साँसों में शामिल हो रही है। 'हाँ-हाँ क्यों नहीं आइए।' एएम अपने बिस्तर पर लैपटॉप पर कुछ कर रही थी। वह सीधी होकर बैठ गई। 'क्या कर रही थी?' उसने एक तरफ बैठते हुए पूछा। उसने लैपटॉप सुप्रीमो की तरफ मोड़ दिया। सुप्रीमो ने कुछ देर तक स्क्रीन पर निगाहें जमाए रखीं। उसके चेहरे के भाव बदलने लगे। 'क्या तुम्हारा कोई ब... ब......
ुम्हें मुकुट पहनाएगा उसी तरह सूली पर भी चढ़ाएगा। जिस तरह वह तुम्हारे विकास के लिए है, उसकी तरह तुम्हारी काट-छाँट के लिए भी। अनाज की बालियों की तरह वह तुम्हें अपने अंदर भर लेता है। तुम्हें नंगा करने के लिए कूटता है। तुम्हारी भूसी दूर के लिए तुम्हें फटकता है। तुम्हें पीसकर श्वेत बनाता है। तुम्हें नरम बनाने तक गूँथता है। ...
र लेता हूँ। वह बहुत कमजोर हो गई है। ऐसी बीमारी उसे वाकई है, मुझे अब भी विश्वास नहीं होता। उसकी दवाइयाँ उसके साथ हँसी खेल कर रही हैं। मगर अब भी वह हर दूसरे रविवार को विज्ञापन जरूर निकलवाती है। मैं बहुत मना करता हूँ कि अब उसे साक्षात्कार लेने नहीं बैठना चाहिए लेकिन वह नहीं मानती और दो दिन खूब हँसती है और दो दिन खूब रोती ...
आवाज में पूछा। 'नहीं नहीं वो सारा आपका था।' उसने मुस्कराती आवाज में कहा। वह चुप हो गया। इसके बाद के संवाद बोलने में उसे नशे में भी शर्म आई। उसने मन में कहा 'उसमें से एकाध दोगी?' और पलटकर जाने लगा। 'आप और लेंगे?' एएम ने पलँग से उतरते हुए पूछा। वह चुपचाप उसकी ओर देखने लगा और उसकी आँखों से आँसू बहने लगे जो धीरे-धीरे अतिक...