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भोपाल में15 नवंबर को बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाया जा रहा है. इसका हिस्सा बनने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी भी पहुंचेंगे. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) में आगामी 15 नवंबर को बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाया जा रहा है. इसमें पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) शिरकत करेंगे. फिलहाल पीएम का कार्यक्रम लगभग तय हो गया है. इसके अनुसार वे करीब 3 घंटे भोपाल में रहेंगे. वहीं, अमर शहीद बिरसा मुंडा के जन्म जंयती पर जंबूरी मैदान में आयोजित इस जनजातीय महासम्मेलन आयोजन में प्रदेश भर के लगभग 2 लाख आदिवासियों को लाने की तैयारी है. इस दौरान पीएम मोदी वर्ल्ड क्लास हबीबगंज रेलवे स्टेशन का लोकार्पण कर देश को समर्पित करेंगे. दरअसल, सूत्रों के मुताबिक ये जनजातीय गौरव दिवस का कार्यक्रम भोपाल के जंबूरी मैदान में होगा. इसमें सोशल डिस्टेंसिंग के साथ करीब 2 लाख आदिवासियों के बैठने का इंतजाम किया जा रहा है. पीएम मोदी इसमें दोपहर 12 से 2 बजे तक कार्यक्रम में रहेंगे. यहां सेल्फ समूह के उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी. वहीं, पीएम के आगमन से पहले गायक कैलाश खेर व चेन्नई पारंपरिक मांदल पर शिवमणि की प्रस्तुति भी होगी. मोदी यहां से दोपहर 2 बजे हबीबगंज स्टेशन रवाना हो जाएंगे. सोलर ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहन देने के लिए राज्य सरकार ऊर्जा साक्षरता मिशन प्रारंभ करने जा रही है. इसका शुभारंभ पीएम मोदी करेंगे. बता दें कि पीएम मोदी राज्य स्किल सेल मिशन का पायलेट कार्यक्रम का शुभारंभ भी करेंगे. इस दौरान पहले मरीजों का ब्लड सैंपल लिया जाएगा. वहीं, स्किल सेल एक जेनेटिक बीमारी है. सामान्य रूप में हमारे शरीर में लाल रक्त कण प्लेट की तरह चपटे और गोल होते हैं. यह रक्त वाहिकाओं में आसानी से आवाजाही कर पाते हैं, लेकिन यदि जीन असामान्य हैं तो इसके कारण लाल रक्त कण प्लेट की तरह गोल न होकर अर्धचंद्राकार रूप में दिखाई देते हैं. इसके कारण से यह रक्त वाहिकाओं में ठीक तरह से आवागमन नहीं कर पाते हैं, जिससे शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने लगती है. इसके कारण मरीज को एनीमिया की समस्या होती है. ऐसे में आदिवासियों में यह रोग तेजी से पनप रहा है. गौरतलब है कि सीएम शिवराज सिंह चौहान कार्यक्रम के दौरान सामुदायिक वनों के प्रबंधन के अधिकार ग्राम सभाओं को सौंपे जाने की घोषणा करेंगे. इसके साथ ही अनुसुचित जनजाति साहूकार एक्ट को लागू किया जाएगा। इसके अलावा मुख्यमंत्री आदिवासियों से जुड़ी कोई बड़ी योजना का ऐलान भी कर सकते हैं. सूत्रों के मुताबिक इस कार्यक्रम के आयोजन में आदिवासियों की गौंड, भील, कोल व सहरिया को अधिक संख्या में बुलाने का फैसला लिया गया है. ऐसे में आयोजन की प्रारंभिक तैयारी के मुताबिक आदिवासियों को 14 नवंबर को विदिशा, राससेन, सांची व सीहोर में ठहराया जाएगा. इन्हें 15 नंवबर को कार्यक्रम स्थल पर लाया जाएगा.
भोपाल मेंपंद्रह नवंबर को बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाया जा रहा है. इसका हिस्सा बनने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी भी पहुंचेंगे. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आगामी पंद्रह नवंबर को बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाया जा रहा है. इसमें पीएम नरेंद्र मोदी शिरकत करेंगे. फिलहाल पीएम का कार्यक्रम लगभग तय हो गया है. इसके अनुसार वे करीब तीन घंटाटे भोपाल में रहेंगे. वहीं, अमर शहीद बिरसा मुंडा के जन्म जंयती पर जंबूरी मैदान में आयोजित इस जनजातीय महासम्मेलन आयोजन में प्रदेश भर के लगभग दो लाख आदिवासियों को लाने की तैयारी है. इस दौरान पीएम मोदी वर्ल्ड क्लास हबीबगंज रेलवे स्टेशन का लोकार्पण कर देश को समर्पित करेंगे. दरअसल, सूत्रों के मुताबिक ये जनजातीय गौरव दिवस का कार्यक्रम भोपाल के जंबूरी मैदान में होगा. इसमें सोशल डिस्टेंसिंग के साथ करीब दो लाख आदिवासियों के बैठने का इंतजाम किया जा रहा है. पीएम मोदी इसमें दोपहर बारह से दो बजे तक कार्यक्रम में रहेंगे. यहां सेल्फ समूह के उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी. वहीं, पीएम के आगमन से पहले गायक कैलाश खेर व चेन्नई पारंपरिक मांदल पर शिवमणि की प्रस्तुति भी होगी. मोदी यहां से दोपहर दो बजे हबीबगंज स्टेशन रवाना हो जाएंगे. सोलर ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहन देने के लिए राज्य सरकार ऊर्जा साक्षरता मिशन प्रारंभ करने जा रही है. इसका शुभारंभ पीएम मोदी करेंगे. बता दें कि पीएम मोदी राज्य स्किल सेल मिशन का पायलेट कार्यक्रम का शुभारंभ भी करेंगे. इस दौरान पहले मरीजों का ब्लड सैंपल लिया जाएगा. वहीं, स्किल सेल एक जेनेटिक बीमारी है. सामान्य रूप में हमारे शरीर में लाल रक्त कण प्लेट की तरह चपटे और गोल होते हैं. यह रक्त वाहिकाओं में आसानी से आवाजाही कर पाते हैं, लेकिन यदि जीन असामान्य हैं तो इसके कारण लाल रक्त कण प्लेट की तरह गोल न होकर अर्धचंद्राकार रूप में दिखाई देते हैं. इसके कारण से यह रक्त वाहिकाओं में ठीक तरह से आवागमन नहीं कर पाते हैं, जिससे शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने लगती है. इसके कारण मरीज को एनीमिया की समस्या होती है. ऐसे में आदिवासियों में यह रोग तेजी से पनप रहा है. गौरतलब है कि सीएम शिवराज सिंह चौहान कार्यक्रम के दौरान सामुदायिक वनों के प्रबंधन के अधिकार ग्राम सभाओं को सौंपे जाने की घोषणा करेंगे. इसके साथ ही अनुसुचित जनजाति साहूकार एक्ट को लागू किया जाएगा। इसके अलावा मुख्यमंत्री आदिवासियों से जुड़ी कोई बड़ी योजना का ऐलान भी कर सकते हैं. सूत्रों के मुताबिक इस कार्यक्रम के आयोजन में आदिवासियों की गौंड, भील, कोल व सहरिया को अधिक संख्या में बुलाने का फैसला लिया गया है. ऐसे में आयोजन की प्रारंभिक तैयारी के मुताबिक आदिवासियों को चौदह नवंबर को विदिशा, राससेन, सांची व सीहोर में ठहराया जाएगा. इन्हें पंद्रह नंवबर को कार्यक्रम स्थल पर लाया जाएगा.
उत्तर कोरिया ने कोरियाई प्रायद्वीप के पूर्वी एवं पश्चिमी तटों के पास 10 से अधिक मिसाइल दागी हैं. दक्षिण कोरिया की सेना ने बोला कि विभिन्न प्रकार की मिसाइल कोरियाई प्रायद्वीप के पूर्वी एवं पश्चिमी तटों की ओर दागी गईं, लेकिन उसने इनके बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी. इससे पहले दक्षिण कोरिया की सेना ने बोला कि उसने प्रायद्वीप के पूर्वी तट के पास दागी गईं कम दूरी की तीन उत्तर कोरियाई बैलिस्टिक मिसाइल का पता लगाया है. एक मिसाइल प्रतिद्वंद्वियों की समुद्री सीमा के पास गिरी, जिसके कारण दक्षिण कोरिया ने अपने एक द्वीप पर हवाई हमले की चेतावनी जारी की. इन हमलों से पहले उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया के साथ संयुक्त सेना अभ्यासों का विस्तार करने को लेकर अमेरिका की आलोचना की थी. उत्तर कोरिया दावा करता है कि ये संभावित आक्रमण का युद्धाभ्यास है तथा उसने मंगलवार को इसके उत्तर में "अधिक प्रभावशाली उपायों" की चेतावनी दी थी. मंत्रालय का यह बयान ऐसे समय में आया, जब अमेरिका तथा दक्षिण कोरिया ने 200 से अधिक युद्धक विमानों के साथ हवाई अभ्यास किया. इनमें एफ-35 लड़ाकू विमान भी शामिल रहे. दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ ने एक बयान में बोला कि उत्तर कोरिया ने बुधवार सुबह वोनसान के पूर्वी तटीय क्षेत्र से मिसाइल दागीं. ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ ने बोला कि एक मिसाइल कोरिया प्रायद्वीप की पूर्वी समुद्री सीमा से 26 किलोमीटर (16 मील) दक्षिण में और दक्षिण कोरिया के उलेउंग द्वीप से 167 किलोमीटर (104 मील) पश्चिमोत्तर में अंतर्राष्ट्रीय जलक्षेत्र में गिरी. दक्षिण कोरिया ने बताय कि उसने उलेउंग द्वीप पर हवाई हमले का अलर्ट जारी किया है. उत्तर कोरिया ने इस वर्ष अपने हथियारों का प्रदर्शन तेज कर दिया है. अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने इस वर्ष बड़े पैमाने पर सेना अभ्यास फिर से प्रारम्भ किए. उन्होंने प्योंगयांग के साथ कूटनीतिक वार्ता के प्रयासों और महामारी के कारण पिछले कुछ सालों में अभ्यास नहीं किए थे. उत्तर कोरिया ने बोला था कि उसकी प्रक्षेपण गतिविधियां संयुक्त सेना अभ्यासों के बीच एक चेतावनी के तौर पर हैं. उसने एक बयान में बोला था, "अगर अमेरिका गंभीर सेना उकसावों को जारी रखता है तो उत्तर कोरिया इसके उत्तर में अधिक ताकतवर तरीका करेगा.
उत्तर कोरिया ने कोरियाई प्रायद्वीप के पूर्वी एवं पश्चिमी तटों के पास दस से अधिक मिसाइल दागी हैं. दक्षिण कोरिया की सेना ने बोला कि विभिन्न प्रकार की मिसाइल कोरियाई प्रायद्वीप के पूर्वी एवं पश्चिमी तटों की ओर दागी गईं, लेकिन उसने इनके बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी. इससे पहले दक्षिण कोरिया की सेना ने बोला कि उसने प्रायद्वीप के पूर्वी तट के पास दागी गईं कम दूरी की तीन उत्तर कोरियाई बैलिस्टिक मिसाइल का पता लगाया है. एक मिसाइल प्रतिद्वंद्वियों की समुद्री सीमा के पास गिरी, जिसके कारण दक्षिण कोरिया ने अपने एक द्वीप पर हवाई हमले की चेतावनी जारी की. इन हमलों से पहले उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया के साथ संयुक्त सेना अभ्यासों का विस्तार करने को लेकर अमेरिका की आलोचना की थी. उत्तर कोरिया दावा करता है कि ये संभावित आक्रमण का युद्धाभ्यास है तथा उसने मंगलवार को इसके उत्तर में "अधिक प्रभावशाली उपायों" की चेतावनी दी थी. मंत्रालय का यह बयान ऐसे समय में आया, जब अमेरिका तथा दक्षिण कोरिया ने दो सौ से अधिक युद्धक विमानों के साथ हवाई अभ्यास किया. इनमें एफ-पैंतीस लड़ाकू विमान भी शामिल रहे. दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ ने एक बयान में बोला कि उत्तर कोरिया ने बुधवार सुबह वोनसान के पूर्वी तटीय क्षेत्र से मिसाइल दागीं. ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ ने बोला कि एक मिसाइल कोरिया प्रायद्वीप की पूर्वी समुद्री सीमा से छब्बीस किलोग्राममीटर दक्षिण में और दक्षिण कोरिया के उलेउंग द्वीप से एक सौ सरसठ किलोग्राममीटर पश्चिमोत्तर में अंतर्राष्ट्रीय जलक्षेत्र में गिरी. दक्षिण कोरिया ने बताय कि उसने उलेउंग द्वीप पर हवाई हमले का अलर्ट जारी किया है. उत्तर कोरिया ने इस वर्ष अपने हथियारों का प्रदर्शन तेज कर दिया है. अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने इस वर्ष बड़े पैमाने पर सेना अभ्यास फिर से प्रारम्भ किए. उन्होंने प्योंगयांग के साथ कूटनीतिक वार्ता के प्रयासों और महामारी के कारण पिछले कुछ सालों में अभ्यास नहीं किए थे. उत्तर कोरिया ने बोला था कि उसकी प्रक्षेपण गतिविधियां संयुक्त सेना अभ्यासों के बीच एक चेतावनी के तौर पर हैं. उसने एक बयान में बोला था, "अगर अमेरिका गंभीर सेना उकसावों को जारी रखता है तो उत्तर कोरिया इसके उत्तर में अधिक ताकतवर तरीका करेगा.
शोहरत का दूसरा नाम बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख खान को कहें तो ज्यादा नहीं होगा। इस एक्टर ने फिल्मी दुनिया में कामयाबी की ऐसी कहानी लिख दी है जिसे पार कर पाना हर एक के बस की बात नहीं है। आज ये एक्टर अपना 52वां बर्थडे सेलिब्रेट कर रहा है। तो चलिए हम आपको किंग खान के फिल्मी सफर के दस ऐसे लुक दिखाते हैं जिसने शाहरुख को बॉलीवुड का बेताज बादशाह बना दिया। शाहरुख ने 1992 में पहली फिल्म 'दीवाना' से इंट्री की थी। इस फिल्म ने शाहरुख को रातोंरात स्टार बना दिया। वहीं अगर लुक की बात करें तो शाहरुख का सड़क पर बाइक पर सवार गाने वाले रफ एंड टफ लुक ने लोगों के दिलों में खास जगह बना दीं। अब जरा फिल्म 'बाजीगर' में किंग खान के लुक पर गौर फरमाइए। इस फिल्म में शाहरुख ने अपना पहला निगेटिव किरदार निभाया था जिसे लोगों ने बेहद पसंद किया। वहीं इस फिल्म में 'किताबें बहुत सी पढ़ीं होंगी' फिल्म में चश्मा लगाकर शिल्पा के साथ रोमांस करते हुए स्टाइल लोगों को काफी पसंद आया था। 'प्यार दोस्ती है'. . शाहरुख खान की फिल्म 'कुछ कुछ होता है' फिल्म का ये डायलॉग लोगों की जुबान पर ऐसा चढ़ा की फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर जमकर कमाई की। इस फिल्म में शाहरुख के इस सतरंगी शर्ट वाले लुक को भी लोगों ने खूब पसंद किया। समय के साथ शाहरुख के लुक में लगातार बदलाव आता गया। करण जौहर की 'कभी खुशी कभी गम' फिल्म में किंग खान ने अपने ड्रेसिंग सेन्स में हाईनेक का ज्यादा इस्तेमाल किया जिससे लोग काफी अट्रैक्ट हुए।
शोहरत का दूसरा नाम बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख खान को कहें तो ज्यादा नहीं होगा। इस एक्टर ने फिल्मी दुनिया में कामयाबी की ऐसी कहानी लिख दी है जिसे पार कर पाना हर एक के बस की बात नहीं है। आज ये एक्टर अपना बावनवां बर्थडे सेलिब्रेट कर रहा है। तो चलिए हम आपको किंग खान के फिल्मी सफर के दस ऐसे लुक दिखाते हैं जिसने शाहरुख को बॉलीवुड का बेताज बादशाह बना दिया। शाहरुख ने एक हज़ार नौ सौ बानवे में पहली फिल्म 'दीवाना' से इंट्री की थी। इस फिल्म ने शाहरुख को रातोंरात स्टार बना दिया। वहीं अगर लुक की बात करें तो शाहरुख का सड़क पर बाइक पर सवार गाने वाले रफ एंड टफ लुक ने लोगों के दिलों में खास जगह बना दीं। अब जरा फिल्म 'बाजीगर' में किंग खान के लुक पर गौर फरमाइए। इस फिल्म में शाहरुख ने अपना पहला निगेटिव किरदार निभाया था जिसे लोगों ने बेहद पसंद किया। वहीं इस फिल्म में 'किताबें बहुत सी पढ़ीं होंगी' फिल्म में चश्मा लगाकर शिल्पा के साथ रोमांस करते हुए स्टाइल लोगों को काफी पसंद आया था। 'प्यार दोस्ती है'. . शाहरुख खान की फिल्म 'कुछ कुछ होता है' फिल्म का ये डायलॉग लोगों की जुबान पर ऐसा चढ़ा की फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर जमकर कमाई की। इस फिल्म में शाहरुख के इस सतरंगी शर्ट वाले लुक को भी लोगों ने खूब पसंद किया। समय के साथ शाहरुख के लुक में लगातार बदलाव आता गया। करण जौहर की 'कभी खुशी कभी गम' फिल्म में किंग खान ने अपने ड्रेसिंग सेन्स में हाईनेक का ज्यादा इस्तेमाल किया जिससे लोग काफी अट्रैक्ट हुए।
उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) एक सैन्य गठबंधन है। जिसकी स्थापना साल 1949 में की गई थी। पिछले साल स्वीडन और फ़िनलैंड ने रूस-यूक्रेन के बढ़ते युद्ध को देखते हुए संयुक्त रूप से नाटो की सदस्यता हासिल करने के लिए संयुक्त रूप से आवेदन किया था। जिसमें से फ़िनलैंड को कुछ महीनों पहले नाटो की सदस्यता हासिल हो गई है। लेकिन स्वीडन के लिए तुर्की अभी भी बाधक बन रहा था। तुर्की के राष्ट्रपति की स्वीडन से नाराजगी का कारण कुर्द समुदाय के लोग हैं। दरअसल तुर्की और मेसोपोटामिया के मैदानी इलाकों, उत्तर-पूर्वी सीरिया, उत्तरी इराक, उत्तर-पश्चिमी ईरान और दक्षिण-पश्चिमी आर्मेनिया के पहाड़ी क्षेत्रों में कई वर्षों से एक जातीय समूह रहता आ रहा है। जिसे 'कुर्द' नाम से जाना जाता है। कुर्द समुदाय तुर्की से अपने अलग देश कुर्दिस्तान बनाने की मांग करते हैं। कुर्दों की यह मांग कई बार तुर्की में हिंसा का कारण बन चुका है। इसी के परिणामस्वरूप वर्ष 1978 में कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (पीकेके) का जन्म हुआ। बाद में इस पार्टी ने सशस्त्र संघर्ष शुरू कर दिया। तुर्की इसे आतंकी गुट बताता है और संगठन पर देश में प्रतिबंध लगाया हुआ है। तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन का कहना है कि पीकेके में शामिल तुर्की के करीब डेढ़ सौ लोग स्वीडन में रह रहे हैं। इसलिए वह स्वीडन पर आरोप लगता है की इस देश ने अपने देशों को आतंकवादी का घोसला बना दिया है और उन्हें अपने यहाँ शरण दे रखी है। तुर्की ने इन दोनों देशों के सामने शर्त राखी थी कि वे अपने देश से इन आतंकियों को निका ल दें , लेकिन इसके बाद भी ये देश आतंक का अड्डा बने हुए हैं। जिस कारण नाराज तुर्की ने विरोध जाहिर करता है । उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) उत्तरी अमेरिका और यूरोपीय देशों का एक अंतरराष्ट्रीय सैन्य संगठन है। यह राजनीतिक और सैन्य साधनों के माध्यम से अपने सदस्य देशों को स्वतंत्रता और सुरक्षा की गारंटी प्रदान करता है। इसके तहत कहा गया है कि यदि कोई बाहरी देश इसके सदस्य देशों पर हमला करता है तो फिर सभी सदस्य देश मिलकर उसकी रक्षा करेंगे। इस संगठन का गठन वर्ष 1949 में द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद हुआ था। दूसरे विश्वयुद्ध के बाद इसकी स्थापना सोवियत संघ के बढ़ते दायरे को समिति करने के उद्देश्य से की गई थी। नाटो की स्थापना अमेरिका, ब्रिटेन, बेल्जियम, कनाडा, डेनमार्क, फ्रांस, आइसलैंड, इटली, लक्जमबर्ग, नीदरलैंड, नॉर्वे और पुर्तगाल ने मिलकर की थी । जिसके बाद अब तक इसमें कई अन्य देशों ने भी सदस्यता हासिल कर ली है। वर्तमान में नाटो के 31 सदस्य देश हैं अगर स्वीडन इसमें शामिल होता है तो यह नाटो का 32वा सदस्य देश बनेगा।
उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन एक सैन्य गठबंधन है। जिसकी स्थापना साल एक हज़ार नौ सौ उनचास में की गई थी। पिछले साल स्वीडन और फ़िनलैंड ने रूस-यूक्रेन के बढ़ते युद्ध को देखते हुए संयुक्त रूप से नाटो की सदस्यता हासिल करने के लिए संयुक्त रूप से आवेदन किया था। जिसमें से फ़िनलैंड को कुछ महीनों पहले नाटो की सदस्यता हासिल हो गई है। लेकिन स्वीडन के लिए तुर्की अभी भी बाधक बन रहा था। तुर्की के राष्ट्रपति की स्वीडन से नाराजगी का कारण कुर्द समुदाय के लोग हैं। दरअसल तुर्की और मेसोपोटामिया के मैदानी इलाकों, उत्तर-पूर्वी सीरिया, उत्तरी इराक, उत्तर-पश्चिमी ईरान और दक्षिण-पश्चिमी आर्मेनिया के पहाड़ी क्षेत्रों में कई वर्षों से एक जातीय समूह रहता आ रहा है। जिसे 'कुर्द' नाम से जाना जाता है। कुर्द समुदाय तुर्की से अपने अलग देश कुर्दिस्तान बनाने की मांग करते हैं। कुर्दों की यह मांग कई बार तुर्की में हिंसा का कारण बन चुका है। इसी के परिणामस्वरूप वर्ष एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर में कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी का जन्म हुआ। बाद में इस पार्टी ने सशस्त्र संघर्ष शुरू कर दिया। तुर्की इसे आतंकी गुट बताता है और संगठन पर देश में प्रतिबंध लगाया हुआ है। तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन का कहना है कि पीकेके में शामिल तुर्की के करीब डेढ़ सौ लोग स्वीडन में रह रहे हैं। इसलिए वह स्वीडन पर आरोप लगता है की इस देश ने अपने देशों को आतंकवादी का घोसला बना दिया है और उन्हें अपने यहाँ शरण दे रखी है। तुर्की ने इन दोनों देशों के सामने शर्त राखी थी कि वे अपने देश से इन आतंकियों को निका ल दें , लेकिन इसके बाद भी ये देश आतंक का अड्डा बने हुए हैं। जिस कारण नाराज तुर्की ने विरोध जाहिर करता है । उत्तर अटलांटिक संधि संगठन उत्तरी अमेरिका और यूरोपीय देशों का एक अंतरराष्ट्रीय सैन्य संगठन है। यह राजनीतिक और सैन्य साधनों के माध्यम से अपने सदस्य देशों को स्वतंत्रता और सुरक्षा की गारंटी प्रदान करता है। इसके तहत कहा गया है कि यदि कोई बाहरी देश इसके सदस्य देशों पर हमला करता है तो फिर सभी सदस्य देश मिलकर उसकी रक्षा करेंगे। इस संगठन का गठन वर्ष एक हज़ार नौ सौ उनचास में द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद हुआ था। दूसरे विश्वयुद्ध के बाद इसकी स्थापना सोवियत संघ के बढ़ते दायरे को समिति करने के उद्देश्य से की गई थी। नाटो की स्थापना अमेरिका, ब्रिटेन, बेल्जियम, कनाडा, डेनमार्क, फ्रांस, आइसलैंड, इटली, लक्जमबर्ग, नीदरलैंड, नॉर्वे और पुर्तगाल ने मिलकर की थी । जिसके बाद अब तक इसमें कई अन्य देशों ने भी सदस्यता हासिल कर ली है। वर्तमान में नाटो के इकतीस सदस्य देश हैं अगर स्वीडन इसमें शामिल होता है तो यह नाटो का बत्तीसवा सदस्य देश बनेगा।
नई दिल्लीः मोटापा लोगों के लिए एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है. इसी बीच मोटापे से जुड़ी एक नई रिपोर्ट ने सभी को हैरान कर दिया है। एक चौंकाने वाली रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले 12 वर्षों में दुनिया की आधी से अधिक आबादी अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त होगी। वर्ल्ड ओबेसिटी एटलस 2023 की रिपोर्ट में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है कि 2035 तक 1. 5 अरब वयस्क और करीब 40 करोड़ बच्चे मोटे हो सकते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले वर्षों में बचपन में मोटापे की दर में नाटकीय रूप से वृद्धि होगी, युवा पुरुषों में दोगुनी होकर 208 मिलियन और युवा महिलाओं में 125 प्रतिशत से 175 मिलियन हो जाएगी। वर्ल्ड ओबेसिटी फेडरेशन के अध्यक्ष लुइस बाउर ने कहा, "दुनिया भर की सरकारों और नीति निर्माताओं को युवा पीढ़ी के लिए स्वास्थ्य, सामाजिक और आर्थिक लागत से बचने के लिए हर संभव प्रयास करने की जरूरत है। " 'इसका मतलब है सिस्टम और मोटापे के मूल कारणों पर तत्काल ध्यान देना और सक्रिय रूप से युवा लोगों को समाधान के रूप में शामिल करना। अगर हम अभी एक साथ काम करते हैं, तो यह भविष्य में मदद करेगा। " रिपोर्ट की ट्रेंड लाइन बताती है कि वैश्विक मोटापे के स्वास्थ्य और आर्थिक परिणाम संभावित रूप से बहुत अधिक हैं। एटलस भविष्यवाणी करता है कि इन बढ़ती दरों का इलाज करने और रोकने में विफल रहने का आर्थिक प्रभाव 2030 तक 4. 32 ट्रिलियन डॉलर तक बढ़ सकता है। अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन के जर्नल में प्रकाशित एक नए अध्ययन में पाया गया कि 2009 से 2020 तक 20-44 आयु वर्ग के युवा वयस्कों में मोटापा और मधुमेह दोनों में वृद्धि हुई है। इन युवा वयस्कों में मोटापे की दर 2009 में 32 प्रतिशत से बढ़कर 2020 में लगभग 41 प्रतिशत हो गई, जबकि इसी समय सीमा में मधुमेह की दर 3 प्रतिशत से बढ़कर 4 प्रतिशत हो गई। अधिक वजन और मोटापे की दर में सबसे महत्वपूर्ण वृद्धि निम्न और निम्न-मध्यम-आय वाले देशों में देखी जा सकती है। कहा जाता है कि अतिरिक्त रोकथाम और उपचार के प्रयासों को समायोजित करने के लिए उनकी स्वास्थ्य प्रणाली कम से कम तैयार है।
नई दिल्लीः मोटापा लोगों के लिए एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है. इसी बीच मोटापे से जुड़ी एक नई रिपोर्ट ने सभी को हैरान कर दिया है। एक चौंकाने वाली रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले बारह वर्षों में दुनिया की आधी से अधिक आबादी अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त होगी। वर्ल्ड ओबेसिटी एटलस दो हज़ार तेईस की रिपोर्ट में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है कि दो हज़ार पैंतीस तक एक. पाँच अरब वयस्क और करीब चालीस करोड़ बच्चे मोटे हो सकते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले वर्षों में बचपन में मोटापे की दर में नाटकीय रूप से वृद्धि होगी, युवा पुरुषों में दोगुनी होकर दो सौ आठ मिलियन और युवा महिलाओं में एक सौ पच्चीस प्रतिशत से एक सौ पचहत्तर मिलियन हो जाएगी। वर्ल्ड ओबेसिटी फेडरेशन के अध्यक्ष लुइस बाउर ने कहा, "दुनिया भर की सरकारों और नीति निर्माताओं को युवा पीढ़ी के लिए स्वास्थ्य, सामाजिक और आर्थिक लागत से बचने के लिए हर संभव प्रयास करने की जरूरत है। " 'इसका मतलब है सिस्टम और मोटापे के मूल कारणों पर तत्काल ध्यान देना और सक्रिय रूप से युवा लोगों को समाधान के रूप में शामिल करना। अगर हम अभी एक साथ काम करते हैं, तो यह भविष्य में मदद करेगा। " रिपोर्ट की ट्रेंड लाइन बताती है कि वैश्विक मोटापे के स्वास्थ्य और आर्थिक परिणाम संभावित रूप से बहुत अधिक हैं। एटलस भविष्यवाणी करता है कि इन बढ़ती दरों का इलाज करने और रोकने में विफल रहने का आर्थिक प्रभाव दो हज़ार तीस तक चार. बत्तीस ट्रिलियन डॉलर तक बढ़ सकता है। अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन के जर्नल में प्रकाशित एक नए अध्ययन में पाया गया कि दो हज़ार नौ से दो हज़ार बीस तक बीस-चौंतालीस आयु वर्ग के युवा वयस्कों में मोटापा और मधुमेह दोनों में वृद्धि हुई है। इन युवा वयस्कों में मोटापे की दर दो हज़ार नौ में बत्तीस प्रतिशत से बढ़कर दो हज़ार बीस में लगभग इकतालीस प्रतिशत हो गई, जबकि इसी समय सीमा में मधुमेह की दर तीन प्रतिशत से बढ़कर चार प्रतिशत हो गई। अधिक वजन और मोटापे की दर में सबसे महत्वपूर्ण वृद्धि निम्न और निम्न-मध्यम-आय वाले देशों में देखी जा सकती है। कहा जाता है कि अतिरिक्त रोकथाम और उपचार के प्रयासों को समायोजित करने के लिए उनकी स्वास्थ्य प्रणाली कम से कम तैयार है।
तुम्हारे उद्योग से, यह सब होता तो तुम दोषी थी । तुम तो नारी- कुल की शोभा और पातिव्रत की मूर्ति हो । रक्षोराज रावण से कौन स्त्री अपना सतीत्व बचा सकी है ? जिस-जिस पर उसने दृष्टि डाली - किसीने वैभव के लोभ और किसीने प्राणो के भय से अपना आत्म-समर्पण किया । तुम्ही हो, मैथिली, कि तुमने उसकी ओर आँख उठाकर देखा तक नही, इस स्वर्गतुल्य वैभव और इस कुन्दन से अपने शरीर को तुच्छ समझा, वह भी उस समय, वैदेही, जब रघुनाथजी के लका मे आ सकने की कोई सम्भावना न थी, इस दुख-समुद्र का कोई पार दृष्टिगोचर न होता था । सीता -- कोई नारी कैसे इस प्रकार आत्म-समर्पण कर सकती है, यह मेरी तो समझ में ही नही आता, सरमा । मुझे तो अपने पर उल्टा इस बात का आश्चर्य हो रहा है कि बिना आर्यपुत्र के अबतक मै प्राण कैसे रख सकी । कदाचित् उन्हीका स्मरण मुझे जीवित रखे हुए है, वे विस्मृत हो जावे तो कदाचित् यह शरीर क्षणमात्र भी नहीं रह सकता । सरमा -- किस किस नारी के प्राण इस प्रकार केवल पति - दर्शन की अभिलाषा पर अवलम्बित रहते है ! सीता -- न जाने कैसे आरम्भ से ही मुझे यह आशा रही कि आर्यपुत्र मुझे मिलेगे । निराशा का कुहरा बार-बार हृदय पर छा जाता है, पर यह आशारूपी सूर्य इतना प्रखर है कि उस कुहरे को बहुत देर नहीं ठहरने देता । आर्यपुत्र, आर्यपुत्र का क्या-क्या वृत्त कहूँ, सरमा ? वह रूप, वह हृदय, वे चरित्र । आह । मिथिलापुरी की पुष्पवाटिका मे सर्व प्रथम उनके दर्शन हुए थे, फिर धनुषयज्ञ के समय धनुषभग के अवसर पर; इसके पश्चात विवाह मे और परशुराम के पराभव के समय और फिर तो गत ग्यारह मास के पूर्व नित्य ही । उष काल से शयन- पर्यन्त उनकी कैसी दिनचर्या है आठो पहर और चौसठो घडी कैसे भाव उनके हृदय मे उठते है । न उन्हे
तुम्हारे उद्योग से, यह सब होता तो तुम दोषी थी । तुम तो नारी- कुल की शोभा और पातिव्रत की मूर्ति हो । रक्षोराज रावण से कौन स्त्री अपना सतीत्व बचा सकी है ? जिस-जिस पर उसने दृष्टि डाली - किसीने वैभव के लोभ और किसीने प्राणो के भय से अपना आत्म-समर्पण किया । तुम्ही हो, मैथिली, कि तुमने उसकी ओर आँख उठाकर देखा तक नही, इस स्वर्गतुल्य वैभव और इस कुन्दन से अपने शरीर को तुच्छ समझा, वह भी उस समय, वैदेही, जब रघुनाथजी के लका मे आ सकने की कोई सम्भावना न थी, इस दुख-समुद्र का कोई पार दृष्टिगोचर न होता था । सीता -- कोई नारी कैसे इस प्रकार आत्म-समर्पण कर सकती है, यह मेरी तो समझ में ही नही आता, सरमा । मुझे तो अपने पर उल्टा इस बात का आश्चर्य हो रहा है कि बिना आर्यपुत्र के अबतक मै प्राण कैसे रख सकी । कदाचित् उन्हीका स्मरण मुझे जीवित रखे हुए है, वे विस्मृत हो जावे तो कदाचित् यह शरीर क्षणमात्र भी नहीं रह सकता । सरमा -- किस किस नारी के प्राण इस प्रकार केवल पति - दर्शन की अभिलाषा पर अवलम्बित रहते है ! सीता -- न जाने कैसे आरम्भ से ही मुझे यह आशा रही कि आर्यपुत्र मुझे मिलेगे । निराशा का कुहरा बार-बार हृदय पर छा जाता है, पर यह आशारूपी सूर्य इतना प्रखर है कि उस कुहरे को बहुत देर नहीं ठहरने देता । आर्यपुत्र, आर्यपुत्र का क्या-क्या वृत्त कहूँ, सरमा ? वह रूप, वह हृदय, वे चरित्र । आह । मिथिलापुरी की पुष्पवाटिका मे सर्व प्रथम उनके दर्शन हुए थे, फिर धनुषयज्ञ के समय धनुषभग के अवसर पर; इसके पश्चात विवाह मे और परशुराम के पराभव के समय और फिर तो गत ग्यारह मास के पूर्व नित्य ही । उष काल से शयन- पर्यन्त उनकी कैसी दिनचर्या है आठो पहर और चौसठो घडी कैसे भाव उनके हृदय मे उठते है । न उन्हे
लेडी डॉक्टर का चक्कर वक्कर तो नहीं ?" बात खत्म करते करते फिर एक बार नरेन ने कहकहों से समान गुंजा दिया। मैंने कहा, "नरेन ! मैंने आज तक अपने अनुभवों से सत्य को ग्रहण करना सीखा है } आंखें बन्द करके किसी दूसरे के अनुभूत सत्य को अपना कह कर घोड़े फिरना न मुझसे हुआ है और न हो सकेगा । बुद्ध या गांधी ने, मार्क्स या लेनिन ने कोई बात कही है अतः उसके सत्य का विकास रुक गया, यह मैंने कभी नहीं माना । मुझे जब, जहां से, जैसी भी स्थिति में सत्य मिला है मैंने उसे झुठलाया नहीं, ग्रहण कर लिया है। अपने देश में एक हुए हैं ऋषि दयानन्द, शायद तुम उनका नाम ग्राज पहली बार सुन रहे होगे। वे महर्षि एक बहुत पते की बात कह गये हैं कि व्यक्ति को सत्य को ग्रहण करने और असत्य को त्यागने के लिये सर्वदा समुद्यत रहना चाहिए । सयासत और गुटबन्दी के लिहाज़ से देखा जाए तो बात बहुत घटिया थी क्योंकि इसे ग्रहण करने से गुटबन्दियों की बुनियाद कमज़ोर होने लगती है, लेकिन मुझक्ल के अन्धे को यह बात जंच गई और मैं मैंने उसे छोर से बांध लिया। मुझे चाहे तुम राइट रिवीज़निस्ट कह लो, 1 चाहे सर्वोदय वालों का अनुयायी समझ लो लेकिन उससे कोई विशेष अन्तर नहीं पड़ेगा, क्योंकि मैं जानता हूं कि मैं जो कुछ हूं वही रहूंगा ।। किसी के कुछ कहने से, मुझे समझने में ग़लती लग सकती है, मेरे होने में ग़लती नहीं लग सकती । नोक झोंक, ताने उलाहनों से से सहम कर दिल की बात पर पर्दा डालने के मेरे दिन निकल गए, अब तो तलवार की नोक सीने पर कोई रख दे तब भी दिल की बात ही मुंह से निकलती है। जैसा समझता हूं, वही कहने में किसी को कुछ मिले या न मिले, मेरा श्रात्मसन्तोष नष्ट नहीं होता। कभी सोच सोच कर डरा करता था कि लोग मुझे क्या समझेंगे, व यही चिन्ता होती है कि पहले अपने ग्राप के सामने तो सच्चा हो लूं । मेरे लिए न तुम्हारे.
लेडी डॉक्टर का चक्कर वक्कर तो नहीं ?" बात खत्म करते करते फिर एक बार नरेन ने कहकहों से समान गुंजा दिया। मैंने कहा, "नरेन ! मैंने आज तक अपने अनुभवों से सत्य को ग्रहण करना सीखा है } आंखें बन्द करके किसी दूसरे के अनुभूत सत्य को अपना कह कर घोड़े फिरना न मुझसे हुआ है और न हो सकेगा । बुद्ध या गांधी ने, मार्क्स या लेनिन ने कोई बात कही है अतः उसके सत्य का विकास रुक गया, यह मैंने कभी नहीं माना । मुझे जब, जहां से, जैसी भी स्थिति में सत्य मिला है मैंने उसे झुठलाया नहीं, ग्रहण कर लिया है। अपने देश में एक हुए हैं ऋषि दयानन्द, शायद तुम उनका नाम ग्राज पहली बार सुन रहे होगे। वे महर्षि एक बहुत पते की बात कह गये हैं कि व्यक्ति को सत्य को ग्रहण करने और असत्य को त्यागने के लिये सर्वदा समुद्यत रहना चाहिए । सयासत और गुटबन्दी के लिहाज़ से देखा जाए तो बात बहुत घटिया थी क्योंकि इसे ग्रहण करने से गुटबन्दियों की बुनियाद कमज़ोर होने लगती है, लेकिन मुझक्ल के अन्धे को यह बात जंच गई और मैं मैंने उसे छोर से बांध लिया। मुझे चाहे तुम राइट रिवीज़निस्ट कह लो, एक चाहे सर्वोदय वालों का अनुयायी समझ लो लेकिन उससे कोई विशेष अन्तर नहीं पड़ेगा, क्योंकि मैं जानता हूं कि मैं जो कुछ हूं वही रहूंगा ।। किसी के कुछ कहने से, मुझे समझने में ग़लती लग सकती है, मेरे होने में ग़लती नहीं लग सकती । नोक झोंक, ताने उलाहनों से से सहम कर दिल की बात पर पर्दा डालने के मेरे दिन निकल गए, अब तो तलवार की नोक सीने पर कोई रख दे तब भी दिल की बात ही मुंह से निकलती है। जैसा समझता हूं, वही कहने में किसी को कुछ मिले या न मिले, मेरा श्रात्मसन्तोष नष्ट नहीं होता। कभी सोच सोच कर डरा करता था कि लोग मुझे क्या समझेंगे, व यही चिन्ता होती है कि पहले अपने ग्राप के सामने तो सच्चा हो लूं । मेरे लिए न तुम्हारे.
जोहानसबर्ग- भारतीय बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा बेशक फॉर्म में नहीं चल रहे हैं लेकिन उन्हें भरोसा है कि इस बार भारत के पास दक्षिण अफ़्रीका में टेस्ट सीरीज़ जीतने का सुनहरा मौक़ा है। इसके लिए उन्हें अपने तेज़ गेंदबाज़ों से सबसे ज़्यादा उम्मीदें हैं। वह मानते हैं कि भारतीय तेज़ गेंदबाज़ प्रत्येक टेस्ट में 20 विकेट लेने के क़ाबिल हैं। अपने चौथे दक्षिण अफ्रीका दौरे पर पहुंचे पुजारा ने कहा, "दोनों ही टीमों के बीच जो बड़ा अंतर है, वे हमारे तेज़ गेंदबाज़ ही हैं। चोट की वजह से रोहित शर्मा टेस्ट सीरीज़ से बाहर हैं, लिहाज़ा उनकी जगह केएल राहुल के कंधों पर उप-कप्तानी की ज़िम्मेदारी होगी। रोहित को इससे पहले अजिंक्या रहाणे की जगह भारतीय टेस्ट टीम का उप-कप्तान बनाया गया था। इस समय रोहित बेंगलुरु स्थित राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (एनसीए) में चोट से उबर रहे हैं। पुजारा ने इसके अलावा कहा कि भारत के लिए एक अच्छी बात यह है कि ज़्यादातर खिलाड़ियों ने हाल ही में लाल गेंद से क्रिकेट खेली है, जो भारत के पक्ष में जा सकती है। नवंबर-दिसंबर में भारत ने न्यूज़ीलैंड की दो टेस्ट मैचों की सीरीज़ के लिए मेज़बानी की थी, जबकि हनुमा विहारी और बैक-अप ओपनर प्रियांक पांचाल भारत ए की ओर से दक्षिण अफ़्रीका दौरे पर प्रथम श्रेणी मैच खेल रहे थे। दूसरी तरफ़ मेज़बान दक्षिण अफ़्रीका ने आख़िरी बार जून में टेस्ट मैच खेला था। दक्षिण अफ़्रीका और भारत के बीच होने वाली ये सीरीज़ बायो-बबल के अंदर खेली जाएगी, हालांकि क्रिकेट साउथ अफ़्रीका (सीएसए) ने प्रोटोकॉल में कुछ ढील देने का फ़ैसला किया था, लेकिन साउथ अफ़्रीका में इस समय कोविड का नया वैरिएंट सक्रिय है जिस वजह से सीरीज़ को बायो-बबल में कराए जाने का निर्णय लिया गया है। पुजारा ने बायो-बबल को लेकर कहा कि ये टीम के लिए अच्छा भी है, "कभी-कभी बायो-बबल आपके लिए बेहतर भी होता है क्योंकि इसकी वजह से खिलाड़ी एक दूसरे के साथ ज़्यादा समय व्यतीत करते हैं, और एक ही साथ कमरे में रहते हैं, साथ ही खाना भी खाते हैं, इसलिए मुझे लगता है कि कभी-कभी ये आपके लिए फ़ायदेमंद भी होता है। भारत का दक्षिण अफ़्रीका में यह आठंवा टेस्ट दौरा होगा, जिसकी शुरुआत बॉक्सिंग डे टेस्ट यानि 26 दिसंबर से सेंचुरियन में होगी।
जोहानसबर्ग- भारतीय बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा बेशक फॉर्म में नहीं चल रहे हैं लेकिन उन्हें भरोसा है कि इस बार भारत के पास दक्षिण अफ़्रीका में टेस्ट सीरीज़ जीतने का सुनहरा मौक़ा है। इसके लिए उन्हें अपने तेज़ गेंदबाज़ों से सबसे ज़्यादा उम्मीदें हैं। वह मानते हैं कि भारतीय तेज़ गेंदबाज़ प्रत्येक टेस्ट में बीस विकेट लेने के क़ाबिल हैं। अपने चौथे दक्षिण अफ्रीका दौरे पर पहुंचे पुजारा ने कहा, "दोनों ही टीमों के बीच जो बड़ा अंतर है, वे हमारे तेज़ गेंदबाज़ ही हैं। चोट की वजह से रोहित शर्मा टेस्ट सीरीज़ से बाहर हैं, लिहाज़ा उनकी जगह केएल राहुल के कंधों पर उप-कप्तानी की ज़िम्मेदारी होगी। रोहित को इससे पहले अजिंक्या रहाणे की जगह भारतीय टेस्ट टीम का उप-कप्तान बनाया गया था। इस समय रोहित बेंगलुरु स्थित राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी में चोट से उबर रहे हैं। पुजारा ने इसके अलावा कहा कि भारत के लिए एक अच्छी बात यह है कि ज़्यादातर खिलाड़ियों ने हाल ही में लाल गेंद से क्रिकेट खेली है, जो भारत के पक्ष में जा सकती है। नवंबर-दिसंबर में भारत ने न्यूज़ीलैंड की दो टेस्ट मैचों की सीरीज़ के लिए मेज़बानी की थी, जबकि हनुमा विहारी और बैक-अप ओपनर प्रियांक पांचाल भारत ए की ओर से दक्षिण अफ़्रीका दौरे पर प्रथम श्रेणी मैच खेल रहे थे। दूसरी तरफ़ मेज़बान दक्षिण अफ़्रीका ने आख़िरी बार जून में टेस्ट मैच खेला था। दक्षिण अफ़्रीका और भारत के बीच होने वाली ये सीरीज़ बायो-बबल के अंदर खेली जाएगी, हालांकि क्रिकेट साउथ अफ़्रीका ने प्रोटोकॉल में कुछ ढील देने का फ़ैसला किया था, लेकिन साउथ अफ़्रीका में इस समय कोविड का नया वैरिएंट सक्रिय है जिस वजह से सीरीज़ को बायो-बबल में कराए जाने का निर्णय लिया गया है। पुजारा ने बायो-बबल को लेकर कहा कि ये टीम के लिए अच्छा भी है, "कभी-कभी बायो-बबल आपके लिए बेहतर भी होता है क्योंकि इसकी वजह से खिलाड़ी एक दूसरे के साथ ज़्यादा समय व्यतीत करते हैं, और एक ही साथ कमरे में रहते हैं, साथ ही खाना भी खाते हैं, इसलिए मुझे लगता है कि कभी-कभी ये आपके लिए फ़ायदेमंद भी होता है। भारत का दक्षिण अफ़्रीका में यह आठंवा टेस्ट दौरा होगा, जिसकी शुरुआत बॉक्सिंग डे टेस्ट यानि छब्बीस दिसंबर से सेंचुरियन में होगी।
बिहार में सोमवार की सुबह अलग-अलग सड़क हादसे में 5 लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन व्यक्ति की हालत गंभीर बनी हुई है। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, राज्य के औरंगाबाद में एक ट्रक और कार की टक्कर में 5 लोगों की मौत हो गई। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
बिहार में सोमवार की सुबह अलग-अलग सड़क हादसे में पाँच लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन व्यक्ति की हालत गंभीर बनी हुई है। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, राज्य के औरंगाबाद में एक ट्रक और कार की टक्कर में पाँच लोगों की मौत हो गई। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
हस्तेड़ा क्षेत्र में दिनों दिन खेतों में सिंचाई के लिए लगे फव्वारा सेट के नोजल चोरी की घटनाएं कम होने का नाम ही नहीं ले रही है। पुलिस भी अब तो चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने में नाकामयाब दिखाई दे रही है। ग्राम बागा का बास व चेता का बास में बुधवार रात को चोर 4 किसानों के खेतों में लगे 42 पीतल के नोजल चोरी कर ले गए। पीड़ित किसान बाबूलाल शर्मा, भंवरलाल शर्मा, महिपाल , गोपाल ने बताया कि रात को खेत में नोजल लगे हुए थे। सुबह उठकर देखा तो नोजल गायब मिले। चोरों 42 नोजल चुरा कर ले गए। चोरी की घटना की सूचना मिलने पर आसपास की ढाणियों के किसान एकत्रित हो गए और अपने अपने खेतों में जाकर नोजल को संभाला। इसके बाद में पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलने पर पुलिस ने घटनास्थल का मौका मुआयना किया और चोरों को शीघ्र पकड़ने का आश्वासन दिया। किसानों ने क्षेत्र में पुलिस गश्त बढ़ाने की मांग की है। ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में पुलिस के सुस्त रवैए से चोरों के हौसले बुलंद है। इसलिए शीघ्र ही नोजल चोरों को पकड़कर कार्रवाई करने की मांग की है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
हस्तेड़ा क्षेत्र में दिनों दिन खेतों में सिंचाई के लिए लगे फव्वारा सेट के नोजल चोरी की घटनाएं कम होने का नाम ही नहीं ले रही है। पुलिस भी अब तो चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने में नाकामयाब दिखाई दे रही है। ग्राम बागा का बास व चेता का बास में बुधवार रात को चोर चार किसानों के खेतों में लगे बयालीस पीतल के नोजल चोरी कर ले गए। पीड़ित किसान बाबूलाल शर्मा, भंवरलाल शर्मा, महिपाल , गोपाल ने बताया कि रात को खेत में नोजल लगे हुए थे। सुबह उठकर देखा तो नोजल गायब मिले। चोरों बयालीस नोजल चुरा कर ले गए। चोरी की घटना की सूचना मिलने पर आसपास की ढाणियों के किसान एकत्रित हो गए और अपने अपने खेतों में जाकर नोजल को संभाला। इसके बाद में पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलने पर पुलिस ने घटनास्थल का मौका मुआयना किया और चोरों को शीघ्र पकड़ने का आश्वासन दिया। किसानों ने क्षेत्र में पुलिस गश्त बढ़ाने की मांग की है। ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में पुलिस के सुस्त रवैए से चोरों के हौसले बुलंद है। इसलिए शीघ्र ही नोजल चोरों को पकड़कर कार्रवाई करने की मांग की है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
मध्य प्रदेश की भोपाल लोकसभा सीट पर चुनाव में वोट की खातिर मंदिर-मंदिर मस्जिद-मस्जिद जा रहे दिग्विजय सिंह को सवर्णों की बेरुखी भी झेलनी पड़ रही है. दरअसल, रविवार को राजधानी भोपाल के दशहरा मैदान में सवर्ण समाज के कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने पूजा अर्चना की और पुजारियों का आशीर्वाद लिया लेकिन आयोजन के दौरान मैदान में लगी ज्यादातर कुर्सियां खाली रहीं. माना जा रहा है कि सवर्ण समाज मध्य प्रदेश सरकार की ओर से सवर्णों को दस फीसदी आरक्षण लागू न किए जाने के फैसले से नाराज हैं. यही वजह है कि दिग्विजय सिंह को इसकी बेरुखी झेलनी पड़ी. वहीं डैमेज कंट्रोल के लिए कार्यक्रम में मौजूद जनसंपर्क मंत्री पी सी शर्मा ये तक भी भूल गए कि मध्य प्रदेश में गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण दिया गया है या नहीं. बता दें कि भोपाल सीट से कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह पूरे चुनावी मोड में आ गए हैं. वहीं बीजेपी ने अभी अपने प्रत्याशी का ऐलान नहीं किया है. बीजेपी और कांग्रेस दोनों की तरफ से बयानों का दौर जारी है. शनिवार को जहां मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि उम्मीदवार के लिए बीजेपी को विज्ञापन निकालना चाहिए तो वहीं शिवराज सिंह चौहान ने पलटवार करते हुए कहा कि लिखकर रख लो, 23 तारीख को भोपाल से बीजेपी ही जीतेगी. .
मध्य प्रदेश की भोपाल लोकसभा सीट पर चुनाव में वोट की खातिर मंदिर-मंदिर मस्जिद-मस्जिद जा रहे दिग्विजय सिंह को सवर्णों की बेरुखी भी झेलनी पड़ रही है. दरअसल, रविवार को राजधानी भोपाल के दशहरा मैदान में सवर्ण समाज के कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने पूजा अर्चना की और पुजारियों का आशीर्वाद लिया लेकिन आयोजन के दौरान मैदान में लगी ज्यादातर कुर्सियां खाली रहीं. माना जा रहा है कि सवर्ण समाज मध्य प्रदेश सरकार की ओर से सवर्णों को दस फीसदी आरक्षण लागू न किए जाने के फैसले से नाराज हैं. यही वजह है कि दिग्विजय सिंह को इसकी बेरुखी झेलनी पड़ी. वहीं डैमेज कंट्रोल के लिए कार्यक्रम में मौजूद जनसंपर्क मंत्री पी सी शर्मा ये तक भी भूल गए कि मध्य प्रदेश में गरीब सवर्णों को दस फीसदी आरक्षण दिया गया है या नहीं. बता दें कि भोपाल सीट से कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह पूरे चुनावी मोड में आ गए हैं. वहीं बीजेपी ने अभी अपने प्रत्याशी का ऐलान नहीं किया है. बीजेपी और कांग्रेस दोनों की तरफ से बयानों का दौर जारी है. शनिवार को जहां मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि उम्मीदवार के लिए बीजेपी को विज्ञापन निकालना चाहिए तो वहीं शिवराज सिंह चौहान ने पलटवार करते हुए कहा कि लिखकर रख लो, तेईस तारीख को भोपाल से बीजेपी ही जीतेगी. .
बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए छतरपुर जिला अस्पताल में क्रिटिकल केयर यूनिट का निर्माण कराया जाएगा। 26 करोड़ की लागत से बनने वाले इस यूनिट से उन मरीजों को अत्यधिक लाभ होगा जो या तो गंभीर हैं अथवा असाध्य रोगों से पीड़ित हैं। उनको यहां अलग से उपचार की सुविधा मिल सकेगी। प्रदेश सरकार द्वारा इस यूनिट के निर्माण के लिए स्वीकृति प्रदान करने के साथ ही राशि भी जारी कर दी है। क्रिटिकल केयर यूनिट निर्माण के लिए जल्द ही एजेंसी और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा मौका मुआयना किया जाएगा। सिविल सर्जन डाॅ. जीएल अहिरवार की मानें तो जिस तरह यहां ट्रामा सेंटर खोला गया है उसी तरह क्रिटिकल केयर यूनिट का भी निर्माण किया जाएगा। यूनिट का निर्माण परिसर में किस स्थान पर होगा यह जल्द ही तय कर लिया जाएगा। इसके बाद विभाग के इंजीनियर इसकी ड्राइंग तैयार करेंगे। जिसके बाद टेंडर की प्रक्रिया होने के बाद निर्माण कार्य प्रारंभ हो जाएगा। छतरपुर जिला अस्पताल परिसर में क्रिटिकल केयर यूनिट का निर्माण किया जाएगा। यह यूनिट 100 बिस्तरों वाला होगा। इसमें गंभीर और असाध्य रोगों के मरीजों को भर्ती कर अलग से उपचार सुविधा मुहैया कराई जाएगी। यहां पैरामेडिकल स्टाफ के साथ ही आक्सीजन की सप्लाई से लेकर वेंटीलेटर सहित विभिन्न प्रकार के उपकरण मौजूद रहेंगे। इस यूनिट के लिए चिकित्सकों की भर्ती अलग से शासन स्तर पर की जाएगी। बताया गया है कि इस यूनिट में एक से दो डाॅक्टर इमरजेंसी ड्यूटी पर हर समय मौजूद रहेंगे। जिला अस्पताल परिसर में क्रिटिकल केयर यूनिट निर्माण के लिए कम से कम 15 हजार वर्गफीट जमीन का होना आवश्यक है। मप्र बिल्डिंग डेवलपमेंट कार्पोरेशन के ईई अच्छेलाल अहिरवार के मुताबिक कम से कम 15 हजार वर्गफीट जमीन उपलब्ध होती है तो दो मंजिला भवन का निर्माण किया जाएगा। यदि 25 हजार वर्गफीट जमीन उपलब्ध होगी तो एक मंजिला भवन का निर्माण होगा। जिला अस्पताल के सिविल सर्जन के मुताबिक अस्पताल में गंभीर और क्रिटिकल मरीजों को इलाज देने के लिए वर्तमान में पर्याप्त सुविधाएं व चिकित्सक उपलब्ध नहीं है। ऐसे में इनको झांसी, ग्वालियर या सागर रेफर किया जाता है। इस यूनिट के बन जाने से मरीजों को स्थानीय स्तर पर बेहतर इलाज मिलने लगेगा।
बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए छतरपुर जिला अस्पताल में क्रिटिकल केयर यूनिट का निर्माण कराया जाएगा। छब्बीस करोड़ की लागत से बनने वाले इस यूनिट से उन मरीजों को अत्यधिक लाभ होगा जो या तो गंभीर हैं अथवा असाध्य रोगों से पीड़ित हैं। उनको यहां अलग से उपचार की सुविधा मिल सकेगी। प्रदेश सरकार द्वारा इस यूनिट के निर्माण के लिए स्वीकृति प्रदान करने के साथ ही राशि भी जारी कर दी है। क्रिटिकल केयर यूनिट निर्माण के लिए जल्द ही एजेंसी और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा मौका मुआयना किया जाएगा। सिविल सर्जन डाॅ. जीएल अहिरवार की मानें तो जिस तरह यहां ट्रामा सेंटर खोला गया है उसी तरह क्रिटिकल केयर यूनिट का भी निर्माण किया जाएगा। यूनिट का निर्माण परिसर में किस स्थान पर होगा यह जल्द ही तय कर लिया जाएगा। इसके बाद विभाग के इंजीनियर इसकी ड्राइंग तैयार करेंगे। जिसके बाद टेंडर की प्रक्रिया होने के बाद निर्माण कार्य प्रारंभ हो जाएगा। छतरपुर जिला अस्पताल परिसर में क्रिटिकल केयर यूनिट का निर्माण किया जाएगा। यह यूनिट एक सौ बिस्तरों वाला होगा। इसमें गंभीर और असाध्य रोगों के मरीजों को भर्ती कर अलग से उपचार सुविधा मुहैया कराई जाएगी। यहां पैरामेडिकल स्टाफ के साथ ही आक्सीजन की सप्लाई से लेकर वेंटीलेटर सहित विभिन्न प्रकार के उपकरण मौजूद रहेंगे। इस यूनिट के लिए चिकित्सकों की भर्ती अलग से शासन स्तर पर की जाएगी। बताया गया है कि इस यूनिट में एक से दो डाॅक्टर इमरजेंसी ड्यूटी पर हर समय मौजूद रहेंगे। जिला अस्पताल परिसर में क्रिटिकल केयर यूनिट निर्माण के लिए कम से कम पंद्रह हजार वर्गफीट जमीन का होना आवश्यक है। मप्र बिल्डिंग डेवलपमेंट कार्पोरेशन के ईई अच्छेलाल अहिरवार के मुताबिक कम से कम पंद्रह हजार वर्गफीट जमीन उपलब्ध होती है तो दो मंजिला भवन का निर्माण किया जाएगा। यदि पच्चीस हजार वर्गफीट जमीन उपलब्ध होगी तो एक मंजिला भवन का निर्माण होगा। जिला अस्पताल के सिविल सर्जन के मुताबिक अस्पताल में गंभीर और क्रिटिकल मरीजों को इलाज देने के लिए वर्तमान में पर्याप्त सुविधाएं व चिकित्सक उपलब्ध नहीं है। ऐसे में इनको झांसी, ग्वालियर या सागर रेफर किया जाता है। इस यूनिट के बन जाने से मरीजों को स्थानीय स्तर पर बेहतर इलाज मिलने लगेगा।
जब महारानी एलिजाबेथ पैगंबर मोहम्मद की वंशज हो सकती हैं तो कोई और क्यों नहीं ? कोलकाता का मौलवी खुद का पैगंबर मोहम्मद का वंशज बता रहा है, तो यह बात हमें बेवकूफी भरी लग रही है. लेकिन उन शोध को क्यों कहेंगे जो साबित किए बैठे हैं कि ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ भी पैंगबर की वंशज हैं. 'मेरा पैगंबर मोहम्मद से सीधा नाता है. मैं उनका 35वां वंशज हूं. . . ' ये है कथित इमाम का बयान. ये वही इमाम है जिसने सोनू निगम के खिलाफ 10 लाख का फतवा जारी किया था और सोनू ने इनके ही कारण अपना सिर मुंडवा लिया. इमाम (कथित इमाम) सैयद शा अतिफ अली अल कादरी ना तो इमाम हैं ना मौलाना हैं. उनके पास कोई भी धार्मिक अधिकार नहीं है. कादरी का मुस्लिम समुदाय का कोई ऐसा चर्चित चेहरा नहीं है कि उनकी बात को माना जाए, लेकिन HT को दिए अपने इंटरव्यू में कादरी ने पैगंबर के वंशज होने का दावा किया है. इतना ही नहीं उनके विजिटिंग कार्ड में भी यही लिखा हुआ है. इसी इंसान ने दावा किया है कि वो पैगंबर का 35वां वंशज हैअब इसे सुनकर आपको झटका लगा होगा और हो सकता है कि आप मन में इतना सोच रहे हों कि आखिर कितना फेंकता है ये इंसान. शायद स्वामी ओम जैसी छवि मन में बना ली हो आपने. खैर, कादरी की बात में कितना सच है ये तो बिलकुल नहीं पता और मुस्लिम समुदाय के लोगों को कादरी का ये बयान कैसा लगा होगा ये तो पता नहीं, लेकिन ऐसा पहली बार नहीं है जब कोई किसी ईष्ट का वंशज होने का दावा कर रहा है. ये सुनकर शायद आप चौंक जाएं, लेकिन इंटरनेट के मुताबिक ऐसा सच है. क्वीन एलिजाबेथ 2 पैगंबर मोहम्मद की वंशज हैं! एक Quora थ्रेड के मुताबिक ब्रिटेन की महारानी वाकई पैगंबर की 43वीं वंशज हैं. (अब ज़ैदा का नाम कुछ जगहों पर इसाबेला भी कहा गया है. यहीं से पैगंबर के वंशज के इसाई होने की बात कही गई है) यहां से ब्रिटिश रॉयल परिवार शुरू हो गया : और जॉर्ज I के बेटे जॉर्ज II दोनों ही ब्रिटेन के राजा थे. . . . और फिर अब जॉर्ज VI की बेटी एलिज़ाबेथ II ब्रिटेन की रानी हैं. इस पूरी हिस्ट्री को देखें तो यकीन हो जाएगा कि ब्रिटेन की रानी पैगंबर मोहम्मद की वंशज हैं. अब ये जानकारी इंटरनेट पर बहुत सारी जगह मौजूद है. हाल ही में एक और खबर आई है जिसमें वैज्ञानिकों और बाइबल स्कॉलरों की एक टीम जीसस के डीएनए को ट्रैक करने की कोशिश कर रही है. ऐसा वो श्राउड ऑफ ट्यूरियन (जिस कपड़े में जीसस को मृत्यू के बाद लपेटा गया था) और जीसस के कजिन जॉन की हड्डियों के सैंपल की मदद से किया जा रहा है. टीम का मानना है कि DNA सैंपल उन्हें 'भगवान के बेटे' तक पहुंचा सकता है. जीसस के वंशज के बारे में बताती किताब 'ड विंची कोड' को भी लोग इसी से जोड़कर देखते हैं. जीसस के डीएनए का पता लगा लिया गया हैतो क्या भगवान की संतान हो सकती है? फिर तो ऐसा भी हो सकता है कि भगवान राम के वंशज भी मौजूद हों ! जो लोग क्वीन एलिज़ाबेथ को पैगंबर की वंशज मानते हैं, उन्हें तो फिर इस बात पर भी यकीन हो जाएगा कि कलकत्ता के कादरी पैगंबर के 35वें वंशज हैं. गाहे-बगाहे ऐसे किसी ना किसी किस्से के बारे में पता चल ही जाता है जिसमें लोग ये दावा करते हैं कि वो किसी इष्ट के खानदान से ताल्लुक रखते हैं. इन बातों में कितना सच है इसके बारे में तो नहीं बताया जा सकता, लेकिन हां ये सुनने में दिलचस्प जरूर लगता है. देशभक्ति का पाठ सिर्फ मदरसों में ही क्यों ?
जब महारानी एलिजाबेथ पैगंबर मोहम्मद की वंशज हो सकती हैं तो कोई और क्यों नहीं ? कोलकाता का मौलवी खुद का पैगंबर मोहम्मद का वंशज बता रहा है, तो यह बात हमें बेवकूफी भरी लग रही है. लेकिन उन शोध को क्यों कहेंगे जो साबित किए बैठे हैं कि ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ भी पैंगबर की वंशज हैं. 'मेरा पैगंबर मोहम्मद से सीधा नाता है. मैं उनका पैंतीसवां वंशज हूं. . . ' ये है कथित इमाम का बयान. ये वही इमाम है जिसने सोनू निगम के खिलाफ दस लाख का फतवा जारी किया था और सोनू ने इनके ही कारण अपना सिर मुंडवा लिया. इमाम सैयद शा अतिफ अली अल कादरी ना तो इमाम हैं ना मौलाना हैं. उनके पास कोई भी धार्मिक अधिकार नहीं है. कादरी का मुस्लिम समुदाय का कोई ऐसा चर्चित चेहरा नहीं है कि उनकी बात को माना जाए, लेकिन HT को दिए अपने इंटरव्यू में कादरी ने पैगंबर के वंशज होने का दावा किया है. इतना ही नहीं उनके विजिटिंग कार्ड में भी यही लिखा हुआ है. इसी इंसान ने दावा किया है कि वो पैगंबर का पैंतीसवां वंशज हैअब इसे सुनकर आपको झटका लगा होगा और हो सकता है कि आप मन में इतना सोच रहे हों कि आखिर कितना फेंकता है ये इंसान. शायद स्वामी ओम जैसी छवि मन में बना ली हो आपने. खैर, कादरी की बात में कितना सच है ये तो बिलकुल नहीं पता और मुस्लिम समुदाय के लोगों को कादरी का ये बयान कैसा लगा होगा ये तो पता नहीं, लेकिन ऐसा पहली बार नहीं है जब कोई किसी ईष्ट का वंशज होने का दावा कर रहा है. ये सुनकर शायद आप चौंक जाएं, लेकिन इंटरनेट के मुताबिक ऐसा सच है. क्वीन एलिजाबेथ दो पैगंबर मोहम्मद की वंशज हैं! एक Quora थ्रेड के मुताबिक ब्रिटेन की महारानी वाकई पैगंबर की तैंतालीसवीं वंशज हैं. यहां से ब्रिटिश रॉयल परिवार शुरू हो गया : और जॉर्ज I के बेटे जॉर्ज II दोनों ही ब्रिटेन के राजा थे. . . . और फिर अब जॉर्ज VI की बेटी एलिज़ाबेथ II ब्रिटेन की रानी हैं. इस पूरी हिस्ट्री को देखें तो यकीन हो जाएगा कि ब्रिटेन की रानी पैगंबर मोहम्मद की वंशज हैं. अब ये जानकारी इंटरनेट पर बहुत सारी जगह मौजूद है. हाल ही में एक और खबर आई है जिसमें वैज्ञानिकों और बाइबल स्कॉलरों की एक टीम जीसस के डीएनए को ट्रैक करने की कोशिश कर रही है. ऐसा वो श्राउड ऑफ ट्यूरियन और जीसस के कजिन जॉन की हड्डियों के सैंपल की मदद से किया जा रहा है. टीम का मानना है कि DNA सैंपल उन्हें 'भगवान के बेटे' तक पहुंचा सकता है. जीसस के वंशज के बारे में बताती किताब 'ड विंची कोड' को भी लोग इसी से जोड़कर देखते हैं. जीसस के डीएनए का पता लगा लिया गया हैतो क्या भगवान की संतान हो सकती है? फिर तो ऐसा भी हो सकता है कि भगवान राम के वंशज भी मौजूद हों ! जो लोग क्वीन एलिज़ाबेथ को पैगंबर की वंशज मानते हैं, उन्हें तो फिर इस बात पर भी यकीन हो जाएगा कि कलकत्ता के कादरी पैगंबर के पैंतीसवें वंशज हैं. गाहे-बगाहे ऐसे किसी ना किसी किस्से के बारे में पता चल ही जाता है जिसमें लोग ये दावा करते हैं कि वो किसी इष्ट के खानदान से ताल्लुक रखते हैं. इन बातों में कितना सच है इसके बारे में तो नहीं बताया जा सकता, लेकिन हां ये सुनने में दिलचस्प जरूर लगता है. देशभक्ति का पाठ सिर्फ मदरसों में ही क्यों ?
कांवड़ यात्रा के दौरान हरिद्वार में एक बेटा अपने माता-पिता को कंधे पर उठाकर यात्रा कर रहा है. बेटे का कहना है कि उसने अपने माता-पिता की आंखों पर पट्टी बांधी हैं, ऐसा उसने इसलिए किया है ताकि वो उसकी कठिनाई देखकर परेशान न हों. आज के समय में जहां बच्चे अपने माता-पिता के साथ रहना पसंद नहीं करते, उन्हे बोझ समझकर वृद्धा आश्रमों में छोड़ आते हैं. वहीं एक ऐसा भी बेटा है जो अपने माता-पिता को कंधे पर उठाकर कावड़ यात्रा (Kanwar Yatra 2022) कर रहा है. गाजियाबाद के रहने वाले विकास गहलोत को कलयुग का श्रवण कुमार कहा जा रहा है. विकास श्रवण कुमार बनकर अपने माता-पिता को कंधे पर उठाकर हरिद्वार (Haridwar) से गाजियाबाद अपने घर जा रहे हैं. रास्ते में जो कोई उन्हे देख रहा है वो हैरान हो गया है. विकास का अपने माता-पिता से प्यार इसी बात से साबित हो रहा है कि उसने अपने माता-पिता की आंखों पर पट्टी बांधी हुई है, ताकि उसके पेरेंट्स बेटे के कंधों का दर्द का अहसास उसके चेहरे पर न देख सकें. उत्तराखंडः कांवड़ यात्रा के दौरान हरिद्वार में एक बेटा अपने माता-पिता को कंधे पर उठाकर यात्रा कर रहा है। उमस भरी इस गर्मी में तपती सड़क पर विकास अपने माता-पिता को लेकर हरिद्वार से सैकड़ों किलोमीटर का पैदल सफर तय कर गाजियाबाद अपने घर जाएगा. रास्ते में जिस किसी ने विकास को देखा वो हैरान रह गया. विकास गहलोत का कहना है कि उनके माता-पिता ने कांवड़ यात्रा की इच्छा जताई थी, लेकिन उसके माता-पिता की उम्र इतनी नहीं है कि वो पैदल चलकर यात्रा कर सके. इसलिए उसने मन बनाकर दृढ़ निश्चय कर इस तरह से माता पिता को यात्रा करवाने का फैसला किया. विकास गहलोत और उसके माता पिता ने हरिद्वार पहुंचकर गंगा स्नान किया और उसके बाद कांवड़ जल लेकर पालकी में माता-पिता को बैठाकर वो गाजियाबाद के लिए चल पड़ा. लोहे की मजबूत चादर की बनी पालकी में एक तरफ मां तो दूसरी तरफ पिता बैठे हैं. पिता के पास 20 लीटर गंगाजल का कैन भी है. श्रवण कुमार बनकर विकास माता-पिता को पैदल ही गाजियाबाद अपने गंतव्य तक लेकर जा रहे हैं. बीच बीच में पालकी को सहारा देने के लिए उसके साथ अन्य दो साथी भी चल रहे हैं.
कांवड़ यात्रा के दौरान हरिद्वार में एक बेटा अपने माता-पिता को कंधे पर उठाकर यात्रा कर रहा है. बेटे का कहना है कि उसने अपने माता-पिता की आंखों पर पट्टी बांधी हैं, ऐसा उसने इसलिए किया है ताकि वो उसकी कठिनाई देखकर परेशान न हों. आज के समय में जहां बच्चे अपने माता-पिता के साथ रहना पसंद नहीं करते, उन्हे बोझ समझकर वृद्धा आश्रमों में छोड़ आते हैं. वहीं एक ऐसा भी बेटा है जो अपने माता-पिता को कंधे पर उठाकर कावड़ यात्रा कर रहा है. गाजियाबाद के रहने वाले विकास गहलोत को कलयुग का श्रवण कुमार कहा जा रहा है. विकास श्रवण कुमार बनकर अपने माता-पिता को कंधे पर उठाकर हरिद्वार से गाजियाबाद अपने घर जा रहे हैं. रास्ते में जो कोई उन्हे देख रहा है वो हैरान हो गया है. विकास का अपने माता-पिता से प्यार इसी बात से साबित हो रहा है कि उसने अपने माता-पिता की आंखों पर पट्टी बांधी हुई है, ताकि उसके पेरेंट्स बेटे के कंधों का दर्द का अहसास उसके चेहरे पर न देख सकें. उत्तराखंडः कांवड़ यात्रा के दौरान हरिद्वार में एक बेटा अपने माता-पिता को कंधे पर उठाकर यात्रा कर रहा है। उमस भरी इस गर्मी में तपती सड़क पर विकास अपने माता-पिता को लेकर हरिद्वार से सैकड़ों किलोमीटर का पैदल सफर तय कर गाजियाबाद अपने घर जाएगा. रास्ते में जिस किसी ने विकास को देखा वो हैरान रह गया. विकास गहलोत का कहना है कि उनके माता-पिता ने कांवड़ यात्रा की इच्छा जताई थी, लेकिन उसके माता-पिता की उम्र इतनी नहीं है कि वो पैदल चलकर यात्रा कर सके. इसलिए उसने मन बनाकर दृढ़ निश्चय कर इस तरह से माता पिता को यात्रा करवाने का फैसला किया. विकास गहलोत और उसके माता पिता ने हरिद्वार पहुंचकर गंगा स्नान किया और उसके बाद कांवड़ जल लेकर पालकी में माता-पिता को बैठाकर वो गाजियाबाद के लिए चल पड़ा. लोहे की मजबूत चादर की बनी पालकी में एक तरफ मां तो दूसरी तरफ पिता बैठे हैं. पिता के पास बीस लीटरटर गंगाजल का कैन भी है. श्रवण कुमार बनकर विकास माता-पिता को पैदल ही गाजियाबाद अपने गंतव्य तक लेकर जा रहे हैं. बीच बीच में पालकी को सहारा देने के लिए उसके साथ अन्य दो साथी भी चल रहे हैं.
के एक संगठन क्या है व्यापार प्रबंधन? इस कुल आदेश कंपनी, गतिविधियों का क्रम है, साथ ही सीमाओं के भीतर जो गतिविधियों बाहर किया जाना चाहिए निर्दिष्ट करने के लिए है। उद्यम के सामाजिक-आर्थिक वातावरण - प्रबंधन का एक उद्देश्य है। यह कर्मचारियों के भी शामिल है, श्रम की वस्तुओं, वित्त, सूचना संसाधन। उद्यम के प्रबंधन को व्यवस्थित करने के कार्यों के एक नंबर प्रदर्शन करने के लिए आवश्यक हैः - निर्धारित लक्ष्यों को; - लोगों का एक समुदाय बनाने के लिए; - एक संगठनात्मक संरचना के रूप में; - आवश्यक शर्तों पैदा करते हैं। मुख्य विशेषताएं इस प्रकार है कि संगठन के उद्यम प्रबंधन में निहित हैं पर विचार करेंः - उद्यम लक्ष्यों को प्राप्त करने; - कंपनी लागत में कमी; - श्रम, जिसके तहत कर्मचारियों को अधिक गुणात्मक अपने कर्तव्यों को पूरा कर रहे हैं के विभाजन। श्रम विभाजन के इन प्रकार, दोनों क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर आवंटित करें। पहले मामले में, कंपनी के एक इकाई विशेष कार्य के एक नंबर पर काम की स्थापना की। जब खड़ी जुदाई नियंत्रण स्तरों बनते हैं। उनमें से प्रत्येक के नेताओं, समस्या को हाइलाइट करना चाहिए तरीके और समाधान, जिम्मेदार व्यक्तियों की नियुक्ति कार्य को पूरा करने के लिए समय लेने के लिए लगता है। प्रबंधन के निम्न स्तरों कार्यों का स्पष्ट अलगाव आवंटित करने के लिएः 1. कम या तकनीकी। यह प्रबंधकों जो काम लक्ष्यों (उत्पादन, लाभ, आदि) के कार्यान्वयन पर विशिष्ट प्रश्न है, साथ ही कलाकारों के साथ सीधे फैसला भी शामिल है। 2. मध्यम, या प्रबंधन के स्तर। यह प्रबंधकों है कि कई को नियंत्रित शामिल संरचनात्मक डिवीजनों उद्यम की है, साथ ही विशिष्ट परियोजनाओं और कार्यक्रमों, सेवा और सहायता उद्योगों के नेताओं। 3. उच्चतर या संस्थागत स्तर पर नियंत्रण। उद्यम के इस प्रशासन जो उद्यम भर में सबसे महत्वपूर्ण सामरिक उद्देश्यों के निर्णय में लगी हुई है (विकास, एक वस्तु बाजार, वित्तीय प्रबंधन, आदि की पसंद)। प्रबंधन ए थॉम्पसन और ए स्ट्रीकलैंड के क्षेत्र में विशेषज्ञों निम्नलिखित विकसित प्रबंधन के सिद्धांत संगठनों। उनके दृष्टिकोण के अनुसार, वहाँ रणनीतिक प्रबंधन स्तर हैंः 1. कॉर्पोरेट रणनीति। यह कंपनी की आम लक्ष्यों और उसके अंतरिक्ष के सभी से संबंधित है। प्रबंधन के इस तरह के स्तर को सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी, औद्योगिक, आर्थिक समस्याओं की गोद लेने के रूप में सेवा करते हैं। Oobychno निदेशक मंडल का फैसला किया। यह उच्च संरचना के नियंत्रण भी शामिल है। 2. व्यापार नीति। एक प्रतिस्पर्धी बाजार अलग व्यवसाय में सफलता हासिल करने के लिए कम है। इस स्तर पर, निम्न कार्यः बाहरी परिवर्तन, रणनीति के बुनियादी संरचनात्मक इकाइयों के व्यवहार की परिभाषा के लिए प्रतिस्पर्धा, प्रतिक्रिया को मजबूत बनाने। के रूप में यह सीईओ, विभागों के प्रमुखों हो सकता है निर्णय लेने की इस स्तर पर शरीर, निदेशक मंडल है। 3. कार्यात्मक रणनीति। यह कंपनी की प्रत्येक दिशा में लक्ष्य को प्राप्त करने गतिविधियों का क्रम बना लेता है। संगठन में प्रबंधन के इन स्तरों विश्लेषण, क्षेत्र में प्रबंधकों, साथ ही कार्यों द्वारा किए गए विभाग के लक्ष्यों और चयनित रणनीति का समर्थन प्राप्त करने के लिए प्रस्तावों के संश्लेषण की समीक्षा प्रदान करते हैं। इन स्तरों मध्य प्रबंधक हैं। निर्णय विभागों के प्रमुखों द्वारा लिया जाता है। 4. परिचालन रणनीति। यह उद्यम के व्यक्तिगत संरचनात्मक इकाइयों, प्रबंधन स्तर, क्षेत्र में नेताओं सहित के लिए विशिष्ट रणनीति में शामिल है। कि इस विशेष इकाई के लिए विशिष्ट हैं प्रश्नों को हल करें। निर्णय विभागों, कार्यात्मक सेवाओं के सिर से बनते हैं।
के एक संगठन क्या है व्यापार प्रबंधन? इस कुल आदेश कंपनी, गतिविधियों का क्रम है, साथ ही सीमाओं के भीतर जो गतिविधियों बाहर किया जाना चाहिए निर्दिष्ट करने के लिए है। उद्यम के सामाजिक-आर्थिक वातावरण - प्रबंधन का एक उद्देश्य है। यह कर्मचारियों के भी शामिल है, श्रम की वस्तुओं, वित्त, सूचना संसाधन। उद्यम के प्रबंधन को व्यवस्थित करने के कार्यों के एक नंबर प्रदर्शन करने के लिए आवश्यक हैः - निर्धारित लक्ष्यों को; - लोगों का एक समुदाय बनाने के लिए; - एक संगठनात्मक संरचना के रूप में; - आवश्यक शर्तों पैदा करते हैं। मुख्य विशेषताएं इस प्रकार है कि संगठन के उद्यम प्रबंधन में निहित हैं पर विचार करेंः - उद्यम लक्ष्यों को प्राप्त करने; - कंपनी लागत में कमी; - श्रम, जिसके तहत कर्मचारियों को अधिक गुणात्मक अपने कर्तव्यों को पूरा कर रहे हैं के विभाजन। श्रम विभाजन के इन प्रकार, दोनों क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर आवंटित करें। पहले मामले में, कंपनी के एक इकाई विशेष कार्य के एक नंबर पर काम की स्थापना की। जब खड़ी जुदाई नियंत्रण स्तरों बनते हैं। उनमें से प्रत्येक के नेताओं, समस्या को हाइलाइट करना चाहिए तरीके और समाधान, जिम्मेदार व्यक्तियों की नियुक्ति कार्य को पूरा करने के लिए समय लेने के लिए लगता है। प्रबंधन के निम्न स्तरों कार्यों का स्पष्ट अलगाव आवंटित करने के लिएः एक. कम या तकनीकी। यह प्रबंधकों जो काम लक्ष्यों के कार्यान्वयन पर विशिष्ट प्रश्न है, साथ ही कलाकारों के साथ सीधे फैसला भी शामिल है। दो. मध्यम, या प्रबंधन के स्तर। यह प्रबंधकों है कि कई को नियंत्रित शामिल संरचनात्मक डिवीजनों उद्यम की है, साथ ही विशिष्ट परियोजनाओं और कार्यक्रमों, सेवा और सहायता उद्योगों के नेताओं। तीन. उच्चतर या संस्थागत स्तर पर नियंत्रण। उद्यम के इस प्रशासन जो उद्यम भर में सबसे महत्वपूर्ण सामरिक उद्देश्यों के निर्णय में लगी हुई है । प्रबंधन ए थॉम्पसन और ए स्ट्रीकलैंड के क्षेत्र में विशेषज्ञों निम्नलिखित विकसित प्रबंधन के सिद्धांत संगठनों। उनके दृष्टिकोण के अनुसार, वहाँ रणनीतिक प्रबंधन स्तर हैंः एक. कॉर्पोरेट रणनीति। यह कंपनी की आम लक्ष्यों और उसके अंतरिक्ष के सभी से संबंधित है। प्रबंधन के इस तरह के स्तर को सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी, औद्योगिक, आर्थिक समस्याओं की गोद लेने के रूप में सेवा करते हैं। Oobychno निदेशक मंडल का फैसला किया। यह उच्च संरचना के नियंत्रण भी शामिल है। दो. व्यापार नीति। एक प्रतिस्पर्धी बाजार अलग व्यवसाय में सफलता हासिल करने के लिए कम है। इस स्तर पर, निम्न कार्यः बाहरी परिवर्तन, रणनीति के बुनियादी संरचनात्मक इकाइयों के व्यवहार की परिभाषा के लिए प्रतिस्पर्धा, प्रतिक्रिया को मजबूत बनाने। के रूप में यह सीईओ, विभागों के प्रमुखों हो सकता है निर्णय लेने की इस स्तर पर शरीर, निदेशक मंडल है। तीन. कार्यात्मक रणनीति। यह कंपनी की प्रत्येक दिशा में लक्ष्य को प्राप्त करने गतिविधियों का क्रम बना लेता है। संगठन में प्रबंधन के इन स्तरों विश्लेषण, क्षेत्र में प्रबंधकों, साथ ही कार्यों द्वारा किए गए विभाग के लक्ष्यों और चयनित रणनीति का समर्थन प्राप्त करने के लिए प्रस्तावों के संश्लेषण की समीक्षा प्रदान करते हैं। इन स्तरों मध्य प्रबंधक हैं। निर्णय विभागों के प्रमुखों द्वारा लिया जाता है। चार. परिचालन रणनीति। यह उद्यम के व्यक्तिगत संरचनात्मक इकाइयों, प्रबंधन स्तर, क्षेत्र में नेताओं सहित के लिए विशिष्ट रणनीति में शामिल है। कि इस विशेष इकाई के लिए विशिष्ट हैं प्रश्नों को हल करें। निर्णय विभागों, कार्यात्मक सेवाओं के सिर से बनते हैं।
बिलासपुर। देश की सबसे तेज ट्रेन वंदेभारत एक्सप्रेस मवेशी से टकराकर क्षतिग्रस्त हो गई है। यह घटना सोमवार को नागपुर से बिलासपुर जाते समय मूड़ीपार-परमालकसा स्टेशन के बीच हुई। इस हादसे में वंदे भारत के इंजन के सामने का हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है। बता दें कि बिलासपुर से नागपुर के मध्य वंदे भारत एक्सप्रेस का उद्घाटन नागपुर में 11 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। यह ट्रेन बिलासपुर से नागपुर के मध्य 130 की स्पीड में दौड़ाई जा रही है। नागपुर-बिलासपुर वंदे भारत एक्सप्रेस में पिछले दिनों पत्थरबाजी भी हुई थी। इससे वंदे भारत एक्सप्रेस के ई-1 कोच सीट 1-2 के पास लगे विंडो का शीशा टूट गया था। वहीं सोमवार को मवेशी से टकराने के बाद वंदे भारत के इंजन के सामने का हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है।
बिलासपुर। देश की सबसे तेज ट्रेन वंदेभारत एक्सप्रेस मवेशी से टकराकर क्षतिग्रस्त हो गई है। यह घटना सोमवार को नागपुर से बिलासपुर जाते समय मूड़ीपार-परमालकसा स्टेशन के बीच हुई। इस हादसे में वंदे भारत के इंजन के सामने का हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है। बता दें कि बिलासपुर से नागपुर के मध्य वंदे भारत एक्सप्रेस का उद्घाटन नागपुर में ग्यारह दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। यह ट्रेन बिलासपुर से नागपुर के मध्य एक सौ तीस की स्पीड में दौड़ाई जा रही है। नागपुर-बिलासपुर वंदे भारत एक्सप्रेस में पिछले दिनों पत्थरबाजी भी हुई थी। इससे वंदे भारत एक्सप्रेस के ई-एक कोच सीट एक-दो के पास लगे विंडो का शीशा टूट गया था। वहीं सोमवार को मवेशी से टकराने के बाद वंदे भारत के इंजन के सामने का हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि कोरोना काल से पहले ही दिल्ली सरकार ने राजधानी के वकीलों को मेडिकल इंश्योरेंस की सुविधा प्रदान कर दी थी। इसका बड़ा लाभ वकील समुदाय के लोगों ने उठाया और अब तक 1220 अधिवक्ताओं को इस योजना के अंतर्गत मदद दी जा चुकी है। इस पर 7. 25 करोड़ jgपये का खर्च हुआ है। हालांकि, सरकार ने स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए कुल 12. 25 करोड़ रुपये जारी किए थे। उन्होंने कहा है कि दिल्ली सरकार इस तरह की कल्याणकारी योजनाओं को लागू करती रहेगी। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि कोरोना काल से पहले ही दिल्ली सरकार ने राजधानी के वकीलों को मेडिकल इंश्योरेंस की सुविधा प्रदान कर दी थी। इसका बड़ा लाभ वकील समुदाय के लोगों ने उठाया और अब तक एक हज़ार दो सौ बीस अधिवक्ताओं को इस योजना के अंतर्गत मदद दी जा चुकी है। इस पर सात. पच्चीस करोड़ jgपये का खर्च हुआ है। हालांकि, सरकार ने स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए कुल बारह. पच्चीस करोड़ रुपये जारी किए थे। उन्होंने कहा है कि दिल्ली सरकार इस तरह की कल्याणकारी योजनाओं को लागू करती रहेगी। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
अब्बू कोचवान बड़ा छैल छबीला था। उस का ताँगा घोड़ा भी शहर में नंबर वन था। कभी मामूली सवारी नहीं बिठाता था। उस के लगे बंधे गाहक थे जिन से उस को रोज़ाना दस पंद्रह रुपय वसूल हो जाते थे जो अब्बू के लिए काफ़ी थे। दूसरे कोचवानों की तरह नशा पानी की उसे आदत नहीं थी। लेकिन साफ़ सुथरे कपड़े पहनने और हर वक़्त बांका बने रहने का उसे बेहद शौक़ था। अब्बू लोगों की निगाहों से ये बातें सुनता तो उस की गर्दन में एक बड़ा बांका ख़म पैदा हो जाता और उस के घोड़े की चाल और ज़्यादा पुर-कशिश हो जाती। अब्बू के हाथों ने घोड़े की बागें कुछ इस अंदाज़ से पकड़ी होती थीं जैसे उन को उसे पकड़ने की ज़रूरत नहीं। ऐसा लगता था कि घोड़ा इशारों के बग़ैर चला जा रहा है। उस को अपने मालिक के हुक्म की ज़रूरत नहीं। बाअज़ वक़्त तो ऐसा महसूस होता कि अब्बू और उस का घोड़ा चुनी दोनों एक हैं, बल्कि सारा टांगा एक हस्ती है और वो हस्ती अब्बू के सिवा और कौन हो सकती थी। अब्बू के होंटों पर जो हल्की हल्की मोंछों की छाओं में रहते थे ख़ुद एतिमाद सी मुस्कुराहट नाचती रहती थी। उस को देख कर कई कोचवान जल भुन जाते थे। अब्बू की देखा देखी चंद कोचवानों ने इधर उधर से क़र्ज़ लेकर तांगे बनवाए। उन को पीतल के साज़ ओ सामान से सजाया मगर फिर भी अब्बू की सी शान पैदा ना होसकी। उन को वो गाहक नसीब ना हो सके जो अब्बू के और उस के टांगे घोड़े के शैदा थे। एक दिन दोपहर को अब्बू दरख़्त की छाओं में टांगे पर बैठा ऊँघ रहा था कि एक आवाज़ उस के कानों में भन भनाई। अब्बू ने आँखें खोल कर देखा। एक औरत टांगे के बिंब के पास खड़ी थी। अब्बू ने उसे बमुश्किल एक नज़र देखा मगर उस की तीखी जवानी एक दम उस के दिल में खब गई। वो औरत नहीं जवान लड़की थी। सोला सतरह बरस की। दुबली पतली लेकिन मज़बूत। रंग साँवला मगर चमकीला। कानों में चांदी की छोटी छोटी बालियां। सीधी मांग स्तवां नाक। उस की फुनंग पर एक छोटा सा चमकीला तिल.............. लंबा करता और नीला लाचा। सर पर चदरिया। हाय हाय, तू तो........ लड़की कुछ और कहते कहते रुक गई। लड़की ने सर पर पल्लू ठीक किया। उस की आँखें साफ़ बता रही थीं कि वो अब्बू का मतलब समझ चुकी है। उस के चेहरे से इस बात का भी पता चलता था कि उस ने अब्बू की बात का बुरा नहीं माना। लेकिन वो इस कश्मकश में थी कि दोनों का टेशन एक हो या ना हो। अब्बू बांका सजीला तो है लेकिन क्या वफ़ादार भी है। क्या वो अपना टेशन छोड़ दे। जहां उस की गाड़ी पता नहीं कब की जा चुकी थी। लड़की ने सिर्फ़ इतना कहा। "छोड़ भी दे" लेकिन वो फ़ौरन ही अब्बू के बाज़ूओं में थी। इस के बाद उस ने मुज़ाहिमत न की। उस का दिल अलबत्ता ज़ोर ज़ोर से फड़फड़ा रहा था जैसे ख़ुद को छुड़ा कर उड़ जाना चाहता है। दूसरे रोज़ अब्बू और उस लड़की का निकाह होगया। वो ज़िला गुजरात की मोचन थी नाम उस का इनायत यानी नीयती था। अपने रिश्तेदारों के साथ आई थी। वो स्टेशन पर उस का इंतिज़ार कर रहे थे कि अब्बू और उस की मुडभेड़ होगई जो फ़ौरन ही मुहब्बत की सारी मंज़िलें तै करगई। दोनों बहुत ख़ुश थे। अब्बू ने टांगा घोड़ा बेच कर तो नीयती के लिए सोने के कड़े नहीं बनवाए थे लेकिन अपने जमा किए पैसों से उस को सोने की बालियां ख़रीद दी थीं। कई रेशमी कपड़े भी बनवा दिए थे। नीयती के माँ बाप ने बहुत ज़ोर लगाया मगर वो उन के साथ न गई। थक हार कर उन्हों ने उस को अपने हाल पर छोड़ दिया। नीयती अकेली रहने लगी। देना उसे शाम को पाँच रुपय दे जाता था जो उस के ख़र्च के लिए काफ़ी थे। इस के इलावा मुक़द्दमे के दौरान में रोज़ाना पाँच रुपय के हिसाब से जो कुछ जमा हुआ था वो भी उस के पास था। बड़ी लेत-ओ-लाल के बाद बिल-आख़िर देने ने बादल-ए-नाख़्वास्ता टांगा घोड़ा नीयती की तहवील में दे दिया। उस ने माझे के सपुर्द कर दिया जो अब्बू का दोस्त था। उस ने भी कुछ दिनों के बाद शादी की दरख़ास्त की। नीयती ने इनकार किया तो उस की आँखें बदल गईं। हमदर्दी वग़ैरा सब हवा होगई। नीयती ने उस से टांगा घोड़ा वापिस लिया और एक अनजाने कोचवान के हवाले कर दिया। उस ने तो हद ही करदी। एक शाम पैसे देने आया तो शराब में धुत था। डेयुढ़ी में क़दम रखते ही नीयती पर हाथ डालने की कोशिश की। नीयती ने उस को ख़ूब सुनाईं। और काम से हटा दिया। आठ दस रोज़ टांगा घोड़ा बेकार तवीले में पड़ा रहा। घास दाने का ख़र्च अलाहिदा। तवीले का किराया अलेहिदा। नीयती अजीब उलझन में गिरफ़्तार थी। कोई शादी की दरख़ास्त करता था, कोई उस की इस्मत पर हाथ डालने की कोशिश करता था। कोई पैसे मार लेता था। बाहर निकलती तो लोग बुरी निगाहों से घूरते थे। एक रात उस का हमसाया दीवार फांद के आगया और दराज़ दस्ती करने लगा। नीयती सोच सोच कर पागल होगई कि क्या करे। नीयती ने कुछ दिन सोच बिचार किया। आख़िर में फ़ैसला कर लिया कि वो टांगा ख़ुद चलाएगी। उस को ख़ुद पर पूरा एतिमाद था, चुनांचे अल्लाह का नाम ले कर वह तवेले पहुंच गई...... टांगा जोतने लगी तो सारे कोचवान हक्का बका रह गए। बाअज़ मज़ाक़ समझ कर ख़ूब हंसे। जो बुज़ुर्ग थे उन्हों ने नीयती को समझाया कि "देखो ऐसा न करो। ये मुनासिब नहीं" मगर नीयती न मानी। टांगा ठीक ठाक किया। पीतल का साज़ ओ सामान अच्छी तरह चमकाया। घोड़े को ख़ूब प्यार किया और अब्बू से दिल ही दिल में प्यार की बातें करती तवेले से बाहर निकल गई। कोचवान हैरतज़दा थे, क्योंकि नीयती के हाथ रवां थे जैसे वो टांगा चलाने के फ़न पर हावी है। शहर में एक तहलका बरपा होगया कि एक ख़ूबसूरत औरत टांगा चला रही है। हर जगह इसी बात का चर्चा था। लोग सुनते थे तो उस वक़्त का इतंज़ार करते थे जब वो उन की सड़क पर से गुज़रेगा। शुरू शुरू में तो मर्द सवारियां झिजकती थीं मगर ये झिजक थोड़ी देर में दूर होगई और ख़ूब आमदन होने लगी। एक मिनट के लिए भी नीयती का टांगा बेकार न रहता था। इधर सवार उत्तरी उधर बैठी। आपस में कभी कभी सवारीयों की लड़ाई भी हो जाती थी। इस बात पर नीयती को पहले किस ने बुलाया था। जब काम ज़्यादा होगया तो नीयती ने टांगा जोतने के औक़ात मुक़र्रर करदिए सुब्ह सात बजे से बारह बजे, दोपहर दो से छः बजे तक............. ये सिलसिला बड़ा आरामदेह साबित हुआ। चुनी भी ख़ुश था मगर नीयती महसूस कररही थी कि अक्सर लोग सिर्फ़ उस की क़ुरबत हासिल करने के लिए उस के टांगे में बैठते। बे-मतलब बे-मक़्सद उसे इधर उधर फ़िराते थे। आपस में गंदे गंदे मज़ाक़ भी करते थे। सिर्फ़ उस को सुनाने के लिए बातें करते थे। उस को ऐसा लगा था कि वो तो ख़ुद को नहीं बेचती। लेकिन लोग चुपके चुपके उसे ख़रीद रहे हैं। इस के इलावा उस को इस बात का भी एहसास था कि शहर के सारे कोचवान उस को बुरा समझते हैं। इन तमाम एहसासात के बावजूद मुज़्तरिब नहीं थी। अपनी ख़ुद एतिमादी के बाइस वो पुर-सुकून थी।
अब्बू कोचवान बड़ा छैल छबीला था। उस का ताँगा घोड़ा भी शहर में नंबर वन था। कभी मामूली सवारी नहीं बिठाता था। उस के लगे बंधे गाहक थे जिन से उस को रोज़ाना दस पंद्रह रुपय वसूल हो जाते थे जो अब्बू के लिए काफ़ी थे। दूसरे कोचवानों की तरह नशा पानी की उसे आदत नहीं थी। लेकिन साफ़ सुथरे कपड़े पहनने और हर वक़्त बांका बने रहने का उसे बेहद शौक़ था। अब्बू लोगों की निगाहों से ये बातें सुनता तो उस की गर्दन में एक बड़ा बांका ख़म पैदा हो जाता और उस के घोड़े की चाल और ज़्यादा पुर-कशिश हो जाती। अब्बू के हाथों ने घोड़े की बागें कुछ इस अंदाज़ से पकड़ी होती थीं जैसे उन को उसे पकड़ने की ज़रूरत नहीं। ऐसा लगता था कि घोड़ा इशारों के बग़ैर चला जा रहा है। उस को अपने मालिक के हुक्म की ज़रूरत नहीं। बाअज़ वक़्त तो ऐसा महसूस होता कि अब्बू और उस का घोड़ा चुनी दोनों एक हैं, बल्कि सारा टांगा एक हस्ती है और वो हस्ती अब्बू के सिवा और कौन हो सकती थी। अब्बू के होंटों पर जो हल्की हल्की मोंछों की छाओं में रहते थे ख़ुद एतिमाद सी मुस्कुराहट नाचती रहती थी। उस को देख कर कई कोचवान जल भुन जाते थे। अब्बू की देखा देखी चंद कोचवानों ने इधर उधर से क़र्ज़ लेकर तांगे बनवाए। उन को पीतल के साज़ ओ सामान से सजाया मगर फिर भी अब्बू की सी शान पैदा ना होसकी। उन को वो गाहक नसीब ना हो सके जो अब्बू के और उस के टांगे घोड़े के शैदा थे। एक दिन दोपहर को अब्बू दरख़्त की छाओं में टांगे पर बैठा ऊँघ रहा था कि एक आवाज़ उस के कानों में भन भनाई। अब्बू ने आँखें खोल कर देखा। एक औरत टांगे के बिंब के पास खड़ी थी। अब्बू ने उसे बमुश्किल एक नज़र देखा मगर उस की तीखी जवानी एक दम उस के दिल में खब गई। वो औरत नहीं जवान लड़की थी। सोला सतरह बरस की। दुबली पतली लेकिन मज़बूत। रंग साँवला मगर चमकीला। कानों में चांदी की छोटी छोटी बालियां। सीधी मांग स्तवां नाक। उस की फुनंग पर एक छोटा सा चमकीला तिल.............. लंबा करता और नीला लाचा। सर पर चदरिया। हाय हाय, तू तो........ लड़की कुछ और कहते कहते रुक गई। लड़की ने सर पर पल्लू ठीक किया। उस की आँखें साफ़ बता रही थीं कि वो अब्बू का मतलब समझ चुकी है। उस के चेहरे से इस बात का भी पता चलता था कि उस ने अब्बू की बात का बुरा नहीं माना। लेकिन वो इस कश्मकश में थी कि दोनों का टेशन एक हो या ना हो। अब्बू बांका सजीला तो है लेकिन क्या वफ़ादार भी है। क्या वो अपना टेशन छोड़ दे। जहां उस की गाड़ी पता नहीं कब की जा चुकी थी। लड़की ने सिर्फ़ इतना कहा। "छोड़ भी दे" लेकिन वो फ़ौरन ही अब्बू के बाज़ूओं में थी। इस के बाद उस ने मुज़ाहिमत न की। उस का दिल अलबत्ता ज़ोर ज़ोर से फड़फड़ा रहा था जैसे ख़ुद को छुड़ा कर उड़ जाना चाहता है। दूसरे रोज़ अब्बू और उस लड़की का निकाह होगया। वो ज़िला गुजरात की मोचन थी नाम उस का इनायत यानी नीयती था। अपने रिश्तेदारों के साथ आई थी। वो स्टेशन पर उस का इंतिज़ार कर रहे थे कि अब्बू और उस की मुडभेड़ होगई जो फ़ौरन ही मुहब्बत की सारी मंज़िलें तै करगई। दोनों बहुत ख़ुश थे। अब्बू ने टांगा घोड़ा बेच कर तो नीयती के लिए सोने के कड़े नहीं बनवाए थे लेकिन अपने जमा किए पैसों से उस को सोने की बालियां ख़रीद दी थीं। कई रेशमी कपड़े भी बनवा दिए थे। नीयती के माँ बाप ने बहुत ज़ोर लगाया मगर वो उन के साथ न गई। थक हार कर उन्हों ने उस को अपने हाल पर छोड़ दिया। नीयती अकेली रहने लगी। देना उसे शाम को पाँच रुपय दे जाता था जो उस के ख़र्च के लिए काफ़ी थे। इस के इलावा मुक़द्दमे के दौरान में रोज़ाना पाँच रुपय के हिसाब से जो कुछ जमा हुआ था वो भी उस के पास था। बड़ी लेत-ओ-लाल के बाद बिल-आख़िर देने ने बादल-ए-नाख़्वास्ता टांगा घोड़ा नीयती की तहवील में दे दिया। उस ने माझे के सपुर्द कर दिया जो अब्बू का दोस्त था। उस ने भी कुछ दिनों के बाद शादी की दरख़ास्त की। नीयती ने इनकार किया तो उस की आँखें बदल गईं। हमदर्दी वग़ैरा सब हवा होगई। नीयती ने उस से टांगा घोड़ा वापिस लिया और एक अनजाने कोचवान के हवाले कर दिया। उस ने तो हद ही करदी। एक शाम पैसे देने आया तो शराब में धुत था। डेयुढ़ी में क़दम रखते ही नीयती पर हाथ डालने की कोशिश की। नीयती ने उस को ख़ूब सुनाईं। और काम से हटा दिया। आठ दस रोज़ टांगा घोड़ा बेकार तवीले में पड़ा रहा। घास दाने का ख़र्च अलाहिदा। तवीले का किराया अलेहिदा। नीयती अजीब उलझन में गिरफ़्तार थी। कोई शादी की दरख़ास्त करता था, कोई उस की इस्मत पर हाथ डालने की कोशिश करता था। कोई पैसे मार लेता था। बाहर निकलती तो लोग बुरी निगाहों से घूरते थे। एक रात उस का हमसाया दीवार फांद के आगया और दराज़ दस्ती करने लगा। नीयती सोच सोच कर पागल होगई कि क्या करे। नीयती ने कुछ दिन सोच बिचार किया। आख़िर में फ़ैसला कर लिया कि वो टांगा ख़ुद चलाएगी। उस को ख़ुद पर पूरा एतिमाद था, चुनांचे अल्लाह का नाम ले कर वह तवेले पहुंच गई...... टांगा जोतने लगी तो सारे कोचवान हक्का बका रह गए। बाअज़ मज़ाक़ समझ कर ख़ूब हंसे। जो बुज़ुर्ग थे उन्हों ने नीयती को समझाया कि "देखो ऐसा न करो। ये मुनासिब नहीं" मगर नीयती न मानी। टांगा ठीक ठाक किया। पीतल का साज़ ओ सामान अच्छी तरह चमकाया। घोड़े को ख़ूब प्यार किया और अब्बू से दिल ही दिल में प्यार की बातें करती तवेले से बाहर निकल गई। कोचवान हैरतज़दा थे, क्योंकि नीयती के हाथ रवां थे जैसे वो टांगा चलाने के फ़न पर हावी है। शहर में एक तहलका बरपा होगया कि एक ख़ूबसूरत औरत टांगा चला रही है। हर जगह इसी बात का चर्चा था। लोग सुनते थे तो उस वक़्त का इतंज़ार करते थे जब वो उन की सड़क पर से गुज़रेगा। शुरू शुरू में तो मर्द सवारियां झिजकती थीं मगर ये झिजक थोड़ी देर में दूर होगई और ख़ूब आमदन होने लगी। एक मिनट के लिए भी नीयती का टांगा बेकार न रहता था। इधर सवार उत्तरी उधर बैठी। आपस में कभी कभी सवारीयों की लड़ाई भी हो जाती थी। इस बात पर नीयती को पहले किस ने बुलाया था। जब काम ज़्यादा होगया तो नीयती ने टांगा जोतने के औक़ात मुक़र्रर करदिए सुब्ह सात बजे से बारह बजे, दोपहर दो से छः बजे तक............. ये सिलसिला बड़ा आरामदेह साबित हुआ। चुनी भी ख़ुश था मगर नीयती महसूस कररही थी कि अक्सर लोग सिर्फ़ उस की क़ुरबत हासिल करने के लिए उस के टांगे में बैठते। बे-मतलब बे-मक़्सद उसे इधर उधर फ़िराते थे। आपस में गंदे गंदे मज़ाक़ भी करते थे। सिर्फ़ उस को सुनाने के लिए बातें करते थे। उस को ऐसा लगा था कि वो तो ख़ुद को नहीं बेचती। लेकिन लोग चुपके चुपके उसे ख़रीद रहे हैं। इस के इलावा उस को इस बात का भी एहसास था कि शहर के सारे कोचवान उस को बुरा समझते हैं। इन तमाम एहसासात के बावजूद मुज़्तरिब नहीं थी। अपनी ख़ुद एतिमादी के बाइस वो पुर-सुकून थी।
इंडिया के सबसे बड़े ओटीटी प्लेटफॉर्म ज़ी5 ने मनोज बाजपेयी अभिनीत अपनी अगली डायरेक्ट-टू-डिजिटल ओरिजनल मूवी 'बंदा' का एलान कर दिया गया है। सच्ची घटनाओं से प्रेरित 'बंदा', विनोद भानुशाली के भानुशाली स्टूडियोज लिमिटेड, ज़ी स्टूडियोज और सुपर्ण एस वर्मा द्वारा समर्थित एक पावर-पैक कोर्टरूम ड्रामा मूवी है, जो अपूर्व सिंह कार्की द्वारा निर्देशित और दीपक किंगरानी द्वारा लिखित है। 'बंदा' डायरेक्ट-टू-डिजिटल रिलीज़ होने वाली है। 'साइलेंस. . . कैन यू हियर इट' की सफलता के उपरांत यह पद्म श्री और राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्तकर्ता, मनोज बाजपेयी का ZEE5 के साथ तीसरा OTT ओरिजनल सहयोग है। 'बंदा' में, वह एक प्रसिद्ध वकील का रोल प्ले करने में लगे हुए है, जो सच्चाई और न्याय के लिए सभी बाधाओं के विरुद्ध अकेले ही लड़ता है। बिना पैसे दिए प्रियंका चोपड़ा को मिला ब्लू टिक! जानिए क्या बोली एक्ट्रेस?
इंडिया के सबसे बड़े ओटीटी प्लेटफॉर्म ज़ीपाँच ने मनोज बाजपेयी अभिनीत अपनी अगली डायरेक्ट-टू-डिजिटल ओरिजनल मूवी 'बंदा' का एलान कर दिया गया है। सच्ची घटनाओं से प्रेरित 'बंदा', विनोद भानुशाली के भानुशाली स्टूडियोज लिमिटेड, ज़ी स्टूडियोज और सुपर्ण एस वर्मा द्वारा समर्थित एक पावर-पैक कोर्टरूम ड्रामा मूवी है, जो अपूर्व सिंह कार्की द्वारा निर्देशित और दीपक किंगरानी द्वारा लिखित है। 'बंदा' डायरेक्ट-टू-डिजिटल रिलीज़ होने वाली है। 'साइलेंस. . . कैन यू हियर इट' की सफलता के उपरांत यह पद्म श्री और राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्तकर्ता, मनोज बाजपेयी का ZEEपाँच के साथ तीसरा OTT ओरिजनल सहयोग है। 'बंदा' में, वह एक प्रसिद्ध वकील का रोल प्ले करने में लगे हुए है, जो सच्चाई और न्याय के लिए सभी बाधाओं के विरुद्ध अकेले ही लड़ता है। बिना पैसे दिए प्रियंका चोपड़ा को मिला ब्लू टिक! जानिए क्या बोली एक्ट्रेस?
अभिनेत्री अंकिता लोखंडे काफी समय बाद चर्चा में आई हैं और वो इसलिए कि शादी के बाद उनके किसी नए प्रोजेक्ट का भी ऐलान नहीं हुआ। कंगना रनौत की फिल्म 'मणिकर्णिका' से अंकिता ने बॉलीवुड में अपनी शुरुआत की थी। लगा था कि इसके बाद उनके लिए बॉलीवुड में दरवाजे खुल जाएंगे, लेकिन इसके उलट उनके पास काम की मारा मारी हो गई। हाल ही में अंकिता ने खुद यह खुलासा किया। उन्होंने क्या कुछ कहा, आइए जानते हैं। अंकिता ने बॉलीवुड बबल को दिए एक इंटरव्यू में कहा, "मणिकर्णिका से मैंने बॉलीवुड में कदम रखा, लेकिन इसके बाद मुझे किसी फिल्म का प्रस्ताव नहीं मिला। मैं जानती हूं कि मेरा कोई गॉडफादर भी नहीं है, जो मुझे फिल्म दिला सके। " उन्होंने कहा, "बस इसी वजह से मेरे करियर की गाड़ी एक ही जगह पर अटकी हुई है। मैं जानती हूं कि मैं प्रतिभाशाली थी, लेकिन मना करने के लिए आपके पास कुछ चीजें आनी भी तो चाहिए। " अंकिता ने आगे कहा, "जैसा कि लोग कहते हैं कि उन्हें अच्छे प्रस्ताव नहीं मिल रहे हैं, लेकिन अपने मामले में तो मैं ऐसा भी नहीं कह सकती, क्योंकि मेरे पास कभी उतने प्रस्ताव आए ही नहीं। ठुकराना तो दूर की बात है। " उन्होंने कहा, "दूसरी बात मैं उन लोगों में से नहीं हूं, जो काम के लिए किसी की चापलूसी करूं या किसी के सामने गिड़गिड़ाऊं। मैं किसी के पास जाकर काम नहीं मांग सकती। " अंकिता ने इससे पहले एक इंटरव्यू में कहा था, "फिल्म नहीं मिल रही है, तो कोई बात नहीं। मेरे पास जब बहुत पैसे होंगे, तब खुद अपने लिए फिल्म बना लूंगी। मैं खुद अपने लिए कर सकती हूं। " उन्होंने कहा, "अगर मैं हुनरमंद हूं, तब चाहे टीवी हो, फिल्म में हो या कोई भी माध्यम हो, वो हुनर निखरकर आता ही आता है। आखिर में दर्शकों का प्यार ही चाहिए ना। वो तो किसी भी तरीके से मिल सकता है। " वीर सावरकर की बायोपिक 'स्वतंत्रवीर सावरकर' में अंकिता अपनी मौजूदगी दर्ज कराएंगी। रणदीप हुड्डा इसमें सावरकर के किरदार में हैं और वो ही इस फिल्म का निर्देशन भी कर रहे हैं। अंकिता ने इस पर अपनी उत्सुकता जाहिर कर कहा, "मुझे चुनौतीपूर्ण किरदार निभाना अच्छा लगता है। ऐसे किरदार, जो न सिर्फ कहानी को आगे बढ़ाएं, बल्कि दर्शकों पर अपनी छाप भी छोड़ सकें। 'स्वतंत्रवीर सावरकर' ऐसी ही एक प्रेरक कहानी है, जिसे बताना जरूरी है। " अंकिता धारावाहिक 'पवित्र रिश्ता' से घर-घर में मशहूर हुई थीं। 2019 में उन्हें फिल्म 'मणिकर्णिका' में झलकारी बाई की भूमिका में देखा गया था, लेकिन उनके इस किरदार ने इतना ध्यान नहीं खींचा। 2021 में अंकिता ने अपने बॉयफ्रेंड विक्की जैन से शादी रचाई थी।
अभिनेत्री अंकिता लोखंडे काफी समय बाद चर्चा में आई हैं और वो इसलिए कि शादी के बाद उनके किसी नए प्रोजेक्ट का भी ऐलान नहीं हुआ। कंगना रनौत की फिल्म 'मणिकर्णिका' से अंकिता ने बॉलीवुड में अपनी शुरुआत की थी। लगा था कि इसके बाद उनके लिए बॉलीवुड में दरवाजे खुल जाएंगे, लेकिन इसके उलट उनके पास काम की मारा मारी हो गई। हाल ही में अंकिता ने खुद यह खुलासा किया। उन्होंने क्या कुछ कहा, आइए जानते हैं। अंकिता ने बॉलीवुड बबल को दिए एक इंटरव्यू में कहा, "मणिकर्णिका से मैंने बॉलीवुड में कदम रखा, लेकिन इसके बाद मुझे किसी फिल्म का प्रस्ताव नहीं मिला। मैं जानती हूं कि मेरा कोई गॉडफादर भी नहीं है, जो मुझे फिल्म दिला सके। " उन्होंने कहा, "बस इसी वजह से मेरे करियर की गाड़ी एक ही जगह पर अटकी हुई है। मैं जानती हूं कि मैं प्रतिभाशाली थी, लेकिन मना करने के लिए आपके पास कुछ चीजें आनी भी तो चाहिए। " अंकिता ने आगे कहा, "जैसा कि लोग कहते हैं कि उन्हें अच्छे प्रस्ताव नहीं मिल रहे हैं, लेकिन अपने मामले में तो मैं ऐसा भी नहीं कह सकती, क्योंकि मेरे पास कभी उतने प्रस्ताव आए ही नहीं। ठुकराना तो दूर की बात है। " उन्होंने कहा, "दूसरी बात मैं उन लोगों में से नहीं हूं, जो काम के लिए किसी की चापलूसी करूं या किसी के सामने गिड़गिड़ाऊं। मैं किसी के पास जाकर काम नहीं मांग सकती। " अंकिता ने इससे पहले एक इंटरव्यू में कहा था, "फिल्म नहीं मिल रही है, तो कोई बात नहीं। मेरे पास जब बहुत पैसे होंगे, तब खुद अपने लिए फिल्म बना लूंगी। मैं खुद अपने लिए कर सकती हूं। " उन्होंने कहा, "अगर मैं हुनरमंद हूं, तब चाहे टीवी हो, फिल्म में हो या कोई भी माध्यम हो, वो हुनर निखरकर आता ही आता है। आखिर में दर्शकों का प्यार ही चाहिए ना। वो तो किसी भी तरीके से मिल सकता है। " वीर सावरकर की बायोपिक 'स्वतंत्रवीर सावरकर' में अंकिता अपनी मौजूदगी दर्ज कराएंगी। रणदीप हुड्डा इसमें सावरकर के किरदार में हैं और वो ही इस फिल्म का निर्देशन भी कर रहे हैं। अंकिता ने इस पर अपनी उत्सुकता जाहिर कर कहा, "मुझे चुनौतीपूर्ण किरदार निभाना अच्छा लगता है। ऐसे किरदार, जो न सिर्फ कहानी को आगे बढ़ाएं, बल्कि दर्शकों पर अपनी छाप भी छोड़ सकें। 'स्वतंत्रवीर सावरकर' ऐसी ही एक प्रेरक कहानी है, जिसे बताना जरूरी है। " अंकिता धारावाहिक 'पवित्र रिश्ता' से घर-घर में मशहूर हुई थीं। दो हज़ार उन्नीस में उन्हें फिल्म 'मणिकर्णिका' में झलकारी बाई की भूमिका में देखा गया था, लेकिन उनके इस किरदार ने इतना ध्यान नहीं खींचा। दो हज़ार इक्कीस में अंकिता ने अपने बॉयफ्रेंड विक्की जैन से शादी रचाई थी।
देह व्यापार करने से मना करने पर पति ने अपनी पत्नी को पहले जमकर पीटा फिर तीन तलाक़ देकर घर से निकाल दिया. पीड़िता ने जब मामले की शिकायत पुलिस से की तो देवर ने भाभी को फोन करके हलाला का दबाव बनाने लगा. वहीं पीड़िता ने अपने देवर के कॉल की रिकॉर्ड करके ऑडियो पुलिस को सौंप दी है. मामला उत्तर प्रदेश के बरेली का है. मिली जानकारी के मुताबिक, पीड़िता का नाम फरजाना है, वो मुंबई की रहने वाली है. उसका चार साल पहले 30 जनवरी 2014 को निकाह बरेली के शहर कोतवाली इलाके के आजमनगर के आरिफ कुरैशी से हुआ था. शादी के एक महीने बाद ही फरजाना को दहेज़ के लिए प्रताड़ित किया जाने लगा. फरजाना का आरोप है कि उसका पति बाइक की डिमांड कर रहा था. पति कहता था कि पहले बाइक लाओ उसके बाद काम पर जाऊंगा. 13 नवंबर को उसके पति ने उसके साथ पहले मारपीट की और फिर उसे तीन बार तालक बोलकर तीन साल की मासूम बेटी के साथ घर से निकाल दिया. फरजाना का कहना है जब उसने पुलिस में मामले की शिकायत की तो उसके देवर ने उसे फोन किया और हलाला करने का दबाव बनाया. देवर की ऑडियो फोन में रिकॉर्ड हो गई है, जो फरजाना ने पुलिस को सौंप दी है. वहीं इस मामले में फरज़ाना की तहरीर पर एसपी सिटी अभिनंदन सिंह ने एफआईआर के आदेश दे दिया है. एसपी सिटी के आदेश पर शहर कोतवाली में एफआईआर दर्ज कर ली गई है. एसपी सिटी का कहना है कि मामले की जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी. गौरतलब है कि तीन तलाक पर देश का सर्वोच्च न्यायालय पहले ही प्रतिबंध लगा चुका है. तीन तलाक पर केंद्र की मोदी सरकार अध्यादेश भी लेकर आई है, जिसमें ट्रिपल तलाक़ देने पर सजा का प्रावधान है. बावजूद इसके तीन तलाक़ के मामले थम नहीं रहे हैं. (रिपोर्ट- हरीश शर्मा) .
देह व्यापार करने से मना करने पर पति ने अपनी पत्नी को पहले जमकर पीटा फिर तीन तलाक़ देकर घर से निकाल दिया. पीड़िता ने जब मामले की शिकायत पुलिस से की तो देवर ने भाभी को फोन करके हलाला का दबाव बनाने लगा. वहीं पीड़िता ने अपने देवर के कॉल की रिकॉर्ड करके ऑडियो पुलिस को सौंप दी है. मामला उत्तर प्रदेश के बरेली का है. मिली जानकारी के मुताबिक, पीड़िता का नाम फरजाना है, वो मुंबई की रहने वाली है. उसका चार साल पहले तीस जनवरी दो हज़ार चौदह को निकाह बरेली के शहर कोतवाली इलाके के आजमनगर के आरिफ कुरैशी से हुआ था. शादी के एक महीने बाद ही फरजाना को दहेज़ के लिए प्रताड़ित किया जाने लगा. फरजाना का आरोप है कि उसका पति बाइक की डिमांड कर रहा था. पति कहता था कि पहले बाइक लाओ उसके बाद काम पर जाऊंगा. तेरह नवंबर को उसके पति ने उसके साथ पहले मारपीट की और फिर उसे तीन बार तालक बोलकर तीन साल की मासूम बेटी के साथ घर से निकाल दिया. फरजाना का कहना है जब उसने पुलिस में मामले की शिकायत की तो उसके देवर ने उसे फोन किया और हलाला करने का दबाव बनाया. देवर की ऑडियो फोन में रिकॉर्ड हो गई है, जो फरजाना ने पुलिस को सौंप दी है. वहीं इस मामले में फरज़ाना की तहरीर पर एसपी सिटी अभिनंदन सिंह ने एफआईआर के आदेश दे दिया है. एसपी सिटी के आदेश पर शहर कोतवाली में एफआईआर दर्ज कर ली गई है. एसपी सिटी का कहना है कि मामले की जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी. गौरतलब है कि तीन तलाक पर देश का सर्वोच्च न्यायालय पहले ही प्रतिबंध लगा चुका है. तीन तलाक पर केंद्र की मोदी सरकार अध्यादेश भी लेकर आई है, जिसमें ट्रिपल तलाक़ देने पर सजा का प्रावधान है. बावजूद इसके तीन तलाक़ के मामले थम नहीं रहे हैं. .
लखनऊः प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री श्री ए0के0 शर्मा ने कहा कि प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को सुधारने के लिए ऊर्जा विभाग के सभी विद्युत अभियन्ता लगातार प्राथमिकता के आधार पर कार्य करें, सामने जो भी कमियां दिखे उसे तत्काल प्रभाव से ठीक करने की कोशिश करें। उपभोक्ताओं की परियाद को भी गम्भीरता से लेते हुए तत्काल इसके समाधान के प्रयास किये जाने चाहिए। विद्युत दुर्घटनाओं को भी होने से रोकने के लिए प्रोएक्टिव होकर कार्य करना होगा। बेहतर विद्युत व्यवस्था एवं 24X7 आपूर्ति से ही हम प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनाने में आगे बढ़ सकेंगे और 24 घंटे निर्वाध विद्युत आपूर्ति भी प्रदेश को मिल सकेगी। ऊर्जा मंत्री श्री ए0के0 शर्मा आज रविन्द्रालय, चारबाग में आयोजित राज विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन के 75वां महाधिवेशन के हीरक जयंती समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि विद्युत अभियन्ता यह सुनिश्चित करें कि जितनी भी बिजली उपभोक्ताओं को दें, उतने की राजस्व वसूली भी करें। प्रदेश में हो रही बिजली चोरी को पूरे प्रयासों के साथ हरहाल में रोकना होगा। तभी हम लाइन लॉस के साथ राजस्व घाटे में कमी ला सकेंगे। उन्होंने नेवर पेड और नान मीटर उपभोक्ताओं को शीघ्र ही सिस्टम से समाप्त करने को कहा तथा जीर्णशीर्ण लटकते एवं झूलते तारों, बिजली पोल, ट्रांसफार्मर को बदलना होगा तथा इसकी भी निरन्तर निगरानी करनी होगी कि विद्युत दुर्घटनाओं से कोई भी जन, धन एवं पशु हानि न होने पाये। ए0के0 शर्मा ने कहा कि इस वर्ष 26 हजार मेगावाट से ज्यादा के विद्युत मांग को अभियन्ताओं के सहयोग से पूरा किया गया। व्यापक विद्युतीकरण की प्रक्रिया के कारण प्रदेश की विद्युत मांग बढ़ी है, जिसे पूरा किया जा रहा है। उन्होंने बिलों में गड़बड़ी को रोकने के लिए स्वयं उपभोक्ताओं द्वारा मीटर की फोटो खींचकर बिल जमा करने की प्रक्रिया को व्यापक बनाने की भी बात कही। उन्होंने विद्युत कनेक्शन के लिए झटपट पोर्टल को और व्यवहारिक बनाने के लिए कहा। ऊर्जा मंत्री ने सभी विद्युत अभियन्ताओं को विद्युत व्यवस्था को सुधारने के लिए लगातार उनके द्वारा किये जा रहे कार्यों की प्रशंसा की और कहा कि इस वर्कशाप में प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को सुधारने पर चर्चा होगी और इसकी चिंता भी सभी करेंगे और सभी अभियन्ता यह संकल्प लेकर जायेंगे कि किसी भी विद्युत कर्मी की मौत विद्युत करंट से न हो, इस कार्य में संवाद को बढ़ाये और किसी भी प्रकार की इसमें लापरवाही न होने पाये। उन्होंने विद्युत अभियन्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका की प्रशंसा की और इस क्षेत्र में अर्जित ज्ञान को आधुनिक तकनीकी के साथ देश एवं प्रदेश के विकास तथा लोगों की भलाई के लिए प्रयोग करने को कहा। उन्होंने कहा कि काविड काल में जब पूरा देश बंद था तब भी हमारे विद्युत अभियन्ता पूरी लगन एवं मेहनत के साथ विद्युत आपूर्ति चालू रखें, जिसके लिए बहुत ही बधाई के पात्र हैं। श्री ए0के0 शर्मा ने कहा कि संगठन द्वारा सौपें गये मांग पत्र एवं सुझाव पत्र पर भी विचार किया जायेगा। संगठन के पदाधिकारियों ने कार्यक्रम में ऊर्जा मंत्री एवं ऊर्जा राज्यमंत्री जी का जोरदार स्वागत किया और उन्हें भगवान राम दरबार का प्रतीक चिन्ह भी भेंट किया। कार्यक्रम में ऊर्जा राज्यमंत्री डा0 सोमेन्द्र तोमर, संगठन के केन्द्रीय अध्यक्ष इंजी0 जी0वी0 पटेल, केन्द्रीय महासचिव इंजी0 श्री जय प्रकाश के साथ संगठन के सभी पदाधिकारी एवं प्रदेश भर से आये संगठन से जुड़े हजारों की संख्या जूनि0 इजी0 मौजूद थे।
लखनऊः प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री श्री एशून्यकेशून्य शर्मा ने कहा कि प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को सुधारने के लिए ऊर्जा विभाग के सभी विद्युत अभियन्ता लगातार प्राथमिकता के आधार पर कार्य करें, सामने जो भी कमियां दिखे उसे तत्काल प्रभाव से ठीक करने की कोशिश करें। उपभोक्ताओं की परियाद को भी गम्भीरता से लेते हुए तत्काल इसके समाधान के प्रयास किये जाने चाहिए। विद्युत दुर्घटनाओं को भी होने से रोकने के लिए प्रोएक्टिव होकर कार्य करना होगा। बेहतर विद्युत व्यवस्था एवं चौबीसXसात आपूर्ति से ही हम प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनाने में आगे बढ़ सकेंगे और चौबीस घंटाटे निर्वाध विद्युत आपूर्ति भी प्रदेश को मिल सकेगी। ऊर्जा मंत्री श्री एशून्यकेशून्य शर्मा आज रविन्द्रालय, चारबाग में आयोजित राज विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन के पचहत्तरवां महाधिवेशन के हीरक जयंती समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि विद्युत अभियन्ता यह सुनिश्चित करें कि जितनी भी बिजली उपभोक्ताओं को दें, उतने की राजस्व वसूली भी करें। प्रदेश में हो रही बिजली चोरी को पूरे प्रयासों के साथ हरहाल में रोकना होगा। तभी हम लाइन लॉस के साथ राजस्व घाटे में कमी ला सकेंगे। उन्होंने नेवर पेड और नान मीटर उपभोक्ताओं को शीघ्र ही सिस्टम से समाप्त करने को कहा तथा जीर्णशीर्ण लटकते एवं झूलते तारों, बिजली पोल, ट्रांसफार्मर को बदलना होगा तथा इसकी भी निरन्तर निगरानी करनी होगी कि विद्युत दुर्घटनाओं से कोई भी जन, धन एवं पशु हानि न होने पाये। एशून्यकेशून्य शर्मा ने कहा कि इस वर्ष छब्बीस हजार मेगावाट से ज्यादा के विद्युत मांग को अभियन्ताओं के सहयोग से पूरा किया गया। व्यापक विद्युतीकरण की प्रक्रिया के कारण प्रदेश की विद्युत मांग बढ़ी है, जिसे पूरा किया जा रहा है। उन्होंने बिलों में गड़बड़ी को रोकने के लिए स्वयं उपभोक्ताओं द्वारा मीटर की फोटो खींचकर बिल जमा करने की प्रक्रिया को व्यापक बनाने की भी बात कही। उन्होंने विद्युत कनेक्शन के लिए झटपट पोर्टल को और व्यवहारिक बनाने के लिए कहा। ऊर्जा मंत्री ने सभी विद्युत अभियन्ताओं को विद्युत व्यवस्था को सुधारने के लिए लगातार उनके द्वारा किये जा रहे कार्यों की प्रशंसा की और कहा कि इस वर्कशाप में प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को सुधारने पर चर्चा होगी और इसकी चिंता भी सभी करेंगे और सभी अभियन्ता यह संकल्प लेकर जायेंगे कि किसी भी विद्युत कर्मी की मौत विद्युत करंट से न हो, इस कार्य में संवाद को बढ़ाये और किसी भी प्रकार की इसमें लापरवाही न होने पाये। उन्होंने विद्युत अभियन्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका की प्रशंसा की और इस क्षेत्र में अर्जित ज्ञान को आधुनिक तकनीकी के साथ देश एवं प्रदेश के विकास तथा लोगों की भलाई के लिए प्रयोग करने को कहा। उन्होंने कहा कि काविड काल में जब पूरा देश बंद था तब भी हमारे विद्युत अभियन्ता पूरी लगन एवं मेहनत के साथ विद्युत आपूर्ति चालू रखें, जिसके लिए बहुत ही बधाई के पात्र हैं। श्री एशून्यकेशून्य शर्मा ने कहा कि संगठन द्वारा सौपें गये मांग पत्र एवं सुझाव पत्र पर भी विचार किया जायेगा। संगठन के पदाधिकारियों ने कार्यक्रम में ऊर्जा मंत्री एवं ऊर्जा राज्यमंत्री जी का जोरदार स्वागत किया और उन्हें भगवान राम दरबार का प्रतीक चिन्ह भी भेंट किया। कार्यक्रम में ऊर्जा राज्यमंत्री डाशून्य सोमेन्द्र तोमर, संगठन के केन्द्रीय अध्यक्ष इंजीशून्य जीशून्यवीशून्य पटेल, केन्द्रीय महासचिव इंजीशून्य श्री जय प्रकाश के साथ संगठन के सभी पदाधिकारी एवं प्रदेश भर से आये संगठन से जुड़े हजारों की संख्या जूनिशून्य इजीशून्य मौजूद थे।
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने शुक्रवार को बियर की बिक्री और आपूर्ति में गुटबंदी करने के लिए यूनाइटेड ब्रुअरीज, काल्र्सबर्ग इंडिया, ऑल इंडिया ब्रुअर्स एसोसिएशन (एआईबीए) और अन्य 11 कंपनियों पर 873 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। व्यापक जांच के आदेश दिए जाने के करीब चार बाद जारी किए गए इस 231 पृष्ठ के आदेश में सीसीआई ने कंपनियों, संगठन और लोगों को भविष्य में प्रतिस्पर्धा-विरोधी प्रणालियों से बचने का भी निर्देश दिया है। इस संबंध में निर्णायक आदेश यूनाइटेड बु्रअरीज लिमिटेड (यूबीएल), सैबिमलर इंडिया (अब नाम बदलकर एन्हेयूजर बु्रश इनबेव इंडिया लिमिटेड हो गया है), और काल्र्सबर्ग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (सीआईपीएल) - के खिलाफ जारी किया गया है। नियामक ने एबी इनबेव पर कोई जुर्माना नहीं लगाया है, जबकि कई अन्य पर कम जुर्माना लगाया गया है। एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि इन कंपनियों और अन्य को भारत के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बियर की बिक्री एवं आपूर्ति में गुटबंदी करने का आरोपी पाया गया है। इसमें एआईबीए के प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किए जाने का भी आरोप है। एआईबीए पर इस तरह की गुटबंदी को आसान बनाने में सक्रिय तौर पर शामिल होने का आरोप लगाया गया था और सीसीआई ने इसे प्रतिस्पर्धी कानून का उल्लंघन भी माना है। यूबीएल और काल्र्सबर्ग इंडिया पर जुर्माना करीब 752 करोड़ रुपये और 121 करोड़ रुपये है। नियामक द्वारा एआईबीए पर भी 6. 25 लाख रुपये से ज्यादा का जुर्माना लगाया गया है। विज्ञप्ति में कहा गया है, 'सीसीआई ने यूबीएल और सीआईपीएल को करीब 750 करोड़ रुपये और 120 करोड़ रुपये का जुर्माना चुकाने का निर्देश दिया है। ' व्यावसायिक गुटबंदी की अवधि 2009 से कम से कम 10 अक्टूबर, 2018 तक मानी गई थी और सीआईपीएल 2012 से इसमें शामिल हुई और एआईबीए ने 2013 से ऐसी गुटबंदी को आसान बनाने के लिए प्लेटफॉर्म के तौर पर कार्य किया। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि 10 अक्टूबर, 2018 को महानिदेशक (डीजी) ने बियर कंपनियों के परिसरों में तलाशी अभियान चलाया था। तलाशी और छापेमारी के दौरान डीजी द्वारा जुटाए गए इन कंपनियों के बीच नियमित बातचीत के प्रमाण के आधार पर सीसीआई ने यह निष्कर्ष निकाला कि ये तीनों कंपनियां कीमत को लेकर तालमेल और गुटबंदी बनाने में जुटी हुई थीं, जो प्रतिस्पर्धा नियमों का उल्लंघन है। विभिन्न क्षेत्रों की अनुचित व्यावसायिक कार्य प्रणालियों पर नजर रखने वाले सीसीआई ने अक्टूबर 2017 में अपनी जांच इकाई डीजी के जरिये इस संबंध में व्यापक जांच का आदेश दिया था। क्राउन बियर्स इंडिया और सैबमिलर इंडिया द्वारा जुलाई 2017 में यूबीएल, काल्र्सबर्ग इंडिया और एआईबीए के खिलाफ प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा 46 के तहत आवेदन दर्ज कराए जाने के बाद नियामक द्वारा इस मामले को संज्ञान में लिया गया था। धारा 46 कम जुर्माना प्रावधानों से संबंधित है। कंपनियों को आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और पुडुचेरी में कीमत गुटबंदी करने का आरोपी पाया गया था। Apple जल्द Samsung को पछाड़ बन जाएगी भारत की सबसे बड़ी स्मार्टफोन निर्यातक ! डिज्नी का कारोबार खरीदने में प्राइवेट इक्विटी कंपनियों की रुचि!
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने शुक्रवार को बियर की बिक्री और आपूर्ति में गुटबंदी करने के लिए यूनाइटेड ब्रुअरीज, काल्र्सबर्ग इंडिया, ऑल इंडिया ब्रुअर्स एसोसिएशन और अन्य ग्यारह कंपनियों पर आठ सौ तिहत्तर करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। व्यापक जांच के आदेश दिए जाने के करीब चार बाद जारी किए गए इस दो सौ इकतीस पृष्ठ के आदेश में सीसीआई ने कंपनियों, संगठन और लोगों को भविष्य में प्रतिस्पर्धा-विरोधी प्रणालियों से बचने का भी निर्देश दिया है। इस संबंध में निर्णायक आदेश यूनाइटेड बु्रअरीज लिमिटेड , सैबिमलर इंडिया , और काल्र्सबर्ग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड - के खिलाफ जारी किया गया है। नियामक ने एबी इनबेव पर कोई जुर्माना नहीं लगाया है, जबकि कई अन्य पर कम जुर्माना लगाया गया है। एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि इन कंपनियों और अन्य को भारत के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बियर की बिक्री एवं आपूर्ति में गुटबंदी करने का आरोपी पाया गया है। इसमें एआईबीए के प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किए जाने का भी आरोप है। एआईबीए पर इस तरह की गुटबंदी को आसान बनाने में सक्रिय तौर पर शामिल होने का आरोप लगाया गया था और सीसीआई ने इसे प्रतिस्पर्धी कानून का उल्लंघन भी माना है। यूबीएल और काल्र्सबर्ग इंडिया पर जुर्माना करीब सात सौ बावन करोड़ रुपये और एक सौ इक्कीस करोड़ रुपये है। नियामक द्वारा एआईबीए पर भी छः. पच्चीस लाख रुपये से ज्यादा का जुर्माना लगाया गया है। विज्ञप्ति में कहा गया है, 'सीसीआई ने यूबीएल और सीआईपीएल को करीब सात सौ पचास करोड़ रुपये और एक सौ बीस करोड़ रुपये का जुर्माना चुकाने का निर्देश दिया है। ' व्यावसायिक गुटबंदी की अवधि दो हज़ार नौ से कम से कम दस अक्टूबर, दो हज़ार अट्ठारह तक मानी गई थी और सीआईपीएल दो हज़ार बारह से इसमें शामिल हुई और एआईबीए ने दो हज़ार तेरह से ऐसी गुटबंदी को आसान बनाने के लिए प्लेटफॉर्म के तौर पर कार्य किया। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि दस अक्टूबर, दो हज़ार अट्ठारह को महानिदेशक ने बियर कंपनियों के परिसरों में तलाशी अभियान चलाया था। तलाशी और छापेमारी के दौरान डीजी द्वारा जुटाए गए इन कंपनियों के बीच नियमित बातचीत के प्रमाण के आधार पर सीसीआई ने यह निष्कर्ष निकाला कि ये तीनों कंपनियां कीमत को लेकर तालमेल और गुटबंदी बनाने में जुटी हुई थीं, जो प्रतिस्पर्धा नियमों का उल्लंघन है। विभिन्न क्षेत्रों की अनुचित व्यावसायिक कार्य प्रणालियों पर नजर रखने वाले सीसीआई ने अक्टूबर दो हज़ार सत्रह में अपनी जांच इकाई डीजी के जरिये इस संबंध में व्यापक जांच का आदेश दिया था। क्राउन बियर्स इंडिया और सैबमिलर इंडिया द्वारा जुलाई दो हज़ार सत्रह में यूबीएल, काल्र्सबर्ग इंडिया और एआईबीए के खिलाफ प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा छियालीस के तहत आवेदन दर्ज कराए जाने के बाद नियामक द्वारा इस मामले को संज्ञान में लिया गया था। धारा छियालीस कम जुर्माना प्रावधानों से संबंधित है। कंपनियों को आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और पुडुचेरी में कीमत गुटबंदी करने का आरोपी पाया गया था। Apple जल्द Samsung को पछाड़ बन जाएगी भारत की सबसे बड़ी स्मार्टफोन निर्यातक ! डिज्नी का कारोबार खरीदने में प्राइवेट इक्विटी कंपनियों की रुचि!
भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी (Mohammed Shami) एक बार फिर अपनी पत्नी हसीन जहां के चलते विवाद के घेरे में आ गए हैं। शमी की पत्नी ने उनके और उनके परिवार के ऊपर मार पिटाई से लेकर रेप तक के संगीन आरोप लगाए हैं। अब एक और विवादित बयान के साथ हसीन जहां ने सुर्खियों में अपनी जगह बना ली है। इस बार उन्होंने खिलाड़ी को अपनी बेटी के प्रति खराब व्यवहार करने का आरोप लगाया है। मोहम्मद शमी (Mohammed Shami) की पत्नी पेशे से अभिनेत्री है, मौजूदा समय में वे अपनी बांग्ला भाषा की फिल्म के प्रमोशन के सिलसिले में मीडिया से मुखातिब हो रहीं है। इसी दौरान उन्होंने पत्रकारों के सवाल का जवाब देते हुए अपनी निजी जिंदगी का किस्सा साझा किया है। जिसमें वे अपने पति मोहम्मद शमी का अपनी बेटी के प्रति दुर्व्यवहार करने का आरोप लगा रही है। हसीन जहां (Hasin Jahan) ने कहा कि गेंदबाज अपनी बेटी से मिलने की रुचि नहीं रखते हैं और एक दफा बच्ची के बर्थ-डे पर उन्होंने एक सस्ती ड्रेस गिफ्ट में भेजी। उन्होंने कहा, मैंने शमी अहमद से बहुत बात करने की कोशिश की, अब बेबो तो बड़ी हो रही है, स्कूल जा रही है, डांस क्लास जाती है, स्विमिंग करने जाती है। काफी सारी एक्टिविटी में वह शामिल रहती है। हर जगह वह देखती है कि सबके पिता उसके साथ होते हैं। इतने साल हो गए शमी ने बेटी को अब तक कोई गिफ्ट भी नहीं भेजा। मैंने उसे कहा डैडी को मैसेज करो और बोलो जन्मदिन का गिफ्ट भेजेंगे। तो आप यकीन नहीं करेंगे, जो फुटपाथ में जो बिकते हैं कपड़े, शायद 50 -60 रुपये या 100 रुपये में बिकते होंगे। मोहम्मद शमी (Mohammed Shami) और हसीन जहां का विवाद किसी से छुपा नहीं है, लेकिन अगर आप इससे वाकिफ नहीं है तो आपको बता दें कि साल 2018 में हसीन जहां ने भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी पर मारपीट, रेप, घरेलू हिंसा और हत्या की कोशिश का आरोप लगाया था। शमी के खिलाफ आईपीसी की धारा 498 ए (दहेज उत्पीड़न) और धारा 354 (यौन उत्पीड़न) के तहत मामला दर्ज करवाया गया था, जबकि उनके भाई हासिद अहमद पर धारा 354 के तहत रेप का केस दर्ज करवाया था। साल 2014 में 6 जून को मोहम्मद शमी (Mohammed Shami) और हसीन जहां की शादी हुई थी। हालांकि शमी के घरवाले इस शादी के खिलाफ थे। लेकिन शमी ने अपने घरवालों के खिलाफ जाकर हसीन जहां से शादी की थी। मौजूदा समय में मोहम्मद शमी और हसीन जहां बिना तलाक किए एक-दूसरे से अलग रह रहे हैं। शमी और जहां की एक बेटी भी है, जिसका जन्म 17 जुलाई 2015 को हुआ था।
भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी एक बार फिर अपनी पत्नी हसीन जहां के चलते विवाद के घेरे में आ गए हैं। शमी की पत्नी ने उनके और उनके परिवार के ऊपर मार पिटाई से लेकर रेप तक के संगीन आरोप लगाए हैं। अब एक और विवादित बयान के साथ हसीन जहां ने सुर्खियों में अपनी जगह बना ली है। इस बार उन्होंने खिलाड़ी को अपनी बेटी के प्रति खराब व्यवहार करने का आरोप लगाया है। मोहम्मद शमी की पत्नी पेशे से अभिनेत्री है, मौजूदा समय में वे अपनी बांग्ला भाषा की फिल्म के प्रमोशन के सिलसिले में मीडिया से मुखातिब हो रहीं है। इसी दौरान उन्होंने पत्रकारों के सवाल का जवाब देते हुए अपनी निजी जिंदगी का किस्सा साझा किया है। जिसमें वे अपने पति मोहम्मद शमी का अपनी बेटी के प्रति दुर्व्यवहार करने का आरोप लगा रही है। हसीन जहां ने कहा कि गेंदबाज अपनी बेटी से मिलने की रुचि नहीं रखते हैं और एक दफा बच्ची के बर्थ-डे पर उन्होंने एक सस्ती ड्रेस गिफ्ट में भेजी। उन्होंने कहा, मैंने शमी अहमद से बहुत बात करने की कोशिश की, अब बेबो तो बड़ी हो रही है, स्कूल जा रही है, डांस क्लास जाती है, स्विमिंग करने जाती है। काफी सारी एक्टिविटी में वह शामिल रहती है। हर जगह वह देखती है कि सबके पिता उसके साथ होते हैं। इतने साल हो गए शमी ने बेटी को अब तक कोई गिफ्ट भी नहीं भेजा। मैंने उसे कहा डैडी को मैसेज करो और बोलो जन्मदिन का गिफ्ट भेजेंगे। तो आप यकीन नहीं करेंगे, जो फुटपाथ में जो बिकते हैं कपड़े, शायद पचास -साठ रुपयापये या एक सौ रुपयापये में बिकते होंगे। मोहम्मद शमी और हसीन जहां का विवाद किसी से छुपा नहीं है, लेकिन अगर आप इससे वाकिफ नहीं है तो आपको बता दें कि साल दो हज़ार अट्ठारह में हसीन जहां ने भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी पर मारपीट, रेप, घरेलू हिंसा और हत्या की कोशिश का आरोप लगाया था। शमी के खिलाफ आईपीसी की धारा चार सौ अट्ठानवे ए और धारा तीन सौ चौवन के तहत मामला दर्ज करवाया गया था, जबकि उनके भाई हासिद अहमद पर धारा तीन सौ चौवन के तहत रेप का केस दर्ज करवाया था। साल दो हज़ार चौदह में छः जून को मोहम्मद शमी और हसीन जहां की शादी हुई थी। हालांकि शमी के घरवाले इस शादी के खिलाफ थे। लेकिन शमी ने अपने घरवालों के खिलाफ जाकर हसीन जहां से शादी की थी। मौजूदा समय में मोहम्मद शमी और हसीन जहां बिना तलाक किए एक-दूसरे से अलग रह रहे हैं। शमी और जहां की एक बेटी भी है, जिसका जन्म सत्रह जुलाई दो हज़ार पंद्रह को हुआ था।
जब कोई वैश्विक संकट खड़ा होता है तो लोगों का ध्यान मुख्यधारा में विवेचित विषय पर ही होता है। जबकि हो सकता है कि उसके अन्य परिणाम भी बेहद घातक साबित हो रहे हैं। कोरोना महामारी के संदर्भ में देखें तो कई वैश्विक अध्ययनों में पाया गया है कि इसका बच्चों की मानसिक स्थिति पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। अमेरिका के मिनेसोटा विश्वविद्यालय में स्वास्थ्य नीति के शोधकर्ता एजरा गोल बरसटीन का मानना है कि इसका बच्चों पर दोहरा प्रभाव पड़ रहा है। बीमारी का भय तो है ही, लॉकडाउन के कारण उनका स्कूल जाना बंद है। वे अपने दोस्तों से नहीं मिल पाते। बाल मनोवैज्ञानिक मेरी एलवोर्ड का कहना है कि खासतौर पर उन बच्चों पर चिंता का बोझ बढ़ गया है जो पहले ही निराशाजनक स्थितियों का सामना कर रहे हैं। बच्चे कहते हैं कि मुझे अपने साथ माता-पिता की भी चिंता है। अगर हम बीमार पड़ गए तो क्या होगा? बच्चों के सामने जिस तरह की चीजें लगातार चल रही हैं, उसमें उनके भीतर कोरोना संक्रमण को लेकर ऐसे विचार आना स्वाभाविक है। लेकिन हम सबको, खासकर बच्चों के माता-पिता और अभिभावकों को बच्चों के दिल-दिमाग से कोरोना के भय को निकालना होगा। बच्चो को टीवी में भय पैदा करने वाले या तनाव देने वाले समाचारों से दूर रखना चाहिए। उनके सामने कभी डरावनी या बीमारी या महामारी से भरी खौफनाक तस्वीर या नकारात्मकता से भरा वातावरण निर्मित नहीं करना चाहिए। बाल जिज्ञासा में कई प्रश्न चलते रहते हैं, जिनका जवाब देना माता-पिता के लिए कभी-कभी मुश्किल हो जाता है। बच्चों को जितना भी खुशनुमा, ज्ञानवर्धक ओर प्रोत्साहन भरा माहौल दे सकते हैं, देना चाहिए। इसमें कोई दो मत नहीं कि बच्चों की मानसिकता परिवार में मौत और आर्थिक स्थिति से बुरी तरह प्रभावित होती हैं। यह दोहरा बोझ, यानी बीमारी का भय और माता-पिता की स्थिति उन्हें अवसाद और चिंता का शिकार बना देती है। इसलिए हमें अपने उत्तरदायित्वों का सकारात्मक रूप से निर्वहन करके बच्चों का आत्मविश्वास मजबूत बनाने और उनके मन से भय पूरी तरह से निकालने की कोशिश लगातार करनी चाहिए। ऐसे माहौल में बच्चों को निर्भीक बनाना बेहद जरूरी है। प्रसिद्ध कहावत है कि आवश्यकता ही आविष्कार की जननी होती है और परिवर्तन ही संसार का नियम है। पूरे चौंतीस साल बाद एक बड़ा बदलाव देखने में आया। शिक्षा नीति में परिवर्तन तो हुए ही, साथ में मानव संसाधन मंत्रालय का भी नवीन नामकरण कर शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया। जरूरत और मांग के अनुसार सरकार ने बदलाव कर एक नया मार्ग और बेहतर भविष्य बनाने की कोशिश की है। उच्च शिक्षा में शोध के लिए जाने वाले विद्यार्थी भी कम समय में ही पीएचडी कर सकेंगे। वहीं इंटरमीडिएट में हर विषय को समान माना गया है। वाणिज्य, विज्ञान, कला, वोकेशनल या नॉन वोकेशनल, सभी को सामान्य दर्जा दिया गया है। विद्यार्थी अपनी पसंद के अनुसार कोई भी विषय चुन सकते हैं। हालांकि दिक्कत की बात यह है कि सरकार ने नई शिक्षा नीति तो ला दी, लेकिन रोजगार के लिए कुछ नहीं किया। आज वे बच्चे बेहद नाखुश हैं, जिन्होंने अपनी शिक्षा तो पूरी कर ली, लेकिन अभी भी बेरोजगार हैं। रोजगार के मोर्चे पर स्थिति पूरी तरह दयनीय हो चुकी है।
जब कोई वैश्विक संकट खड़ा होता है तो लोगों का ध्यान मुख्यधारा में विवेचित विषय पर ही होता है। जबकि हो सकता है कि उसके अन्य परिणाम भी बेहद घातक साबित हो रहे हैं। कोरोना महामारी के संदर्भ में देखें तो कई वैश्विक अध्ययनों में पाया गया है कि इसका बच्चों की मानसिक स्थिति पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। अमेरिका के मिनेसोटा विश्वविद्यालय में स्वास्थ्य नीति के शोधकर्ता एजरा गोल बरसटीन का मानना है कि इसका बच्चों पर दोहरा प्रभाव पड़ रहा है। बीमारी का भय तो है ही, लॉकडाउन के कारण उनका स्कूल जाना बंद है। वे अपने दोस्तों से नहीं मिल पाते। बाल मनोवैज्ञानिक मेरी एलवोर्ड का कहना है कि खासतौर पर उन बच्चों पर चिंता का बोझ बढ़ गया है जो पहले ही निराशाजनक स्थितियों का सामना कर रहे हैं। बच्चे कहते हैं कि मुझे अपने साथ माता-पिता की भी चिंता है। अगर हम बीमार पड़ गए तो क्या होगा? बच्चों के सामने जिस तरह की चीजें लगातार चल रही हैं, उसमें उनके भीतर कोरोना संक्रमण को लेकर ऐसे विचार आना स्वाभाविक है। लेकिन हम सबको, खासकर बच्चों के माता-पिता और अभिभावकों को बच्चों के दिल-दिमाग से कोरोना के भय को निकालना होगा। बच्चो को टीवी में भय पैदा करने वाले या तनाव देने वाले समाचारों से दूर रखना चाहिए। उनके सामने कभी डरावनी या बीमारी या महामारी से भरी खौफनाक तस्वीर या नकारात्मकता से भरा वातावरण निर्मित नहीं करना चाहिए। बाल जिज्ञासा में कई प्रश्न चलते रहते हैं, जिनका जवाब देना माता-पिता के लिए कभी-कभी मुश्किल हो जाता है। बच्चों को जितना भी खुशनुमा, ज्ञानवर्धक ओर प्रोत्साहन भरा माहौल दे सकते हैं, देना चाहिए। इसमें कोई दो मत नहीं कि बच्चों की मानसिकता परिवार में मौत और आर्थिक स्थिति से बुरी तरह प्रभावित होती हैं। यह दोहरा बोझ, यानी बीमारी का भय और माता-पिता की स्थिति उन्हें अवसाद और चिंता का शिकार बना देती है। इसलिए हमें अपने उत्तरदायित्वों का सकारात्मक रूप से निर्वहन करके बच्चों का आत्मविश्वास मजबूत बनाने और उनके मन से भय पूरी तरह से निकालने की कोशिश लगातार करनी चाहिए। ऐसे माहौल में बच्चों को निर्भीक बनाना बेहद जरूरी है। प्रसिद्ध कहावत है कि आवश्यकता ही आविष्कार की जननी होती है और परिवर्तन ही संसार का नियम है। पूरे चौंतीस साल बाद एक बड़ा बदलाव देखने में आया। शिक्षा नीति में परिवर्तन तो हुए ही, साथ में मानव संसाधन मंत्रालय का भी नवीन नामकरण कर शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया। जरूरत और मांग के अनुसार सरकार ने बदलाव कर एक नया मार्ग और बेहतर भविष्य बनाने की कोशिश की है। उच्च शिक्षा में शोध के लिए जाने वाले विद्यार्थी भी कम समय में ही पीएचडी कर सकेंगे। वहीं इंटरमीडिएट में हर विषय को समान माना गया है। वाणिज्य, विज्ञान, कला, वोकेशनल या नॉन वोकेशनल, सभी को सामान्य दर्जा दिया गया है। विद्यार्थी अपनी पसंद के अनुसार कोई भी विषय चुन सकते हैं। हालांकि दिक्कत की बात यह है कि सरकार ने नई शिक्षा नीति तो ला दी, लेकिन रोजगार के लिए कुछ नहीं किया। आज वे बच्चे बेहद नाखुश हैं, जिन्होंने अपनी शिक्षा तो पूरी कर ली, लेकिन अभी भी बेरोजगार हैं। रोजगार के मोर्चे पर स्थिति पूरी तरह दयनीय हो चुकी है।
इन तेरह संस्थाओं के अतिरिक्त भावनगर में एक केन्द्रीय लवण शोध केन्द्र खुल रहा है, जिसके डायरेक्टर डा० माता प्रसाद होंगे। कौंसिल ने लखनऊ में सिकन्दरा उद्यान को अपने कब्ज़े में ले लिया है, और यह प्रस्ताव है कि अध्यापक के० एन० कौल के सचालकत्व मे इसे एक राष्ट्रीय उद्भिद वैज्ञानिक उद्यान के रूप में विकसित किया जाये । पचवर्षीय योजना में एक यांत्रिक इजीनियरिग प्रयोगशाला स्थापित किये जाने की व्यवस्था है । यहा यह बता दिया जाये कि राष्ट्रीय प्रयोगशालाओ का उद्देश्य किसी भी प्रकार देश की अन्य शोध संस्थाओं के कार्य को दबाना या उन मे रोडे अटकाना नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय प्रयोगशालाओ को बनाने में सरकार का यह उद्देश्य रहा है कि वे उन सस्थाओ के सहायक के रूप में काम करे । यह बड़ी खुशी की बात है कि हमारे देश मे ऊपर गिनाई हुई राष्ट्रीय प्रयोगशालाओ के अतिरिक्त कुछ और महत्वपूर्ण शोध संस्थाए है । यह शोध संस्थाए भौतिक विज्ञान और प्रौद्योगिक विज्ञानो से सम्बन्ध रखती है । ये सस्थाए विशुद्ध शोध तक ही अपने कार्यक्षेत्र को सीमित रखती है और सरकार से स्वतंत्र रूप से कार्य करती है I. -- प्राचीन उद्भिद विद्या सम्बन्धी वीरवल साहनी सस्था, 53 युनिवर्सिटी रोड लखनऊ । 2 - - बोस शोध संस्था, 93 अपर सरकुलर रोड, कलकत्ता । 3. - - इंडियन एसोसियेशन फार दी कल्टीवेशन आफ माइम, बौ बाजार स्ट्रीट, 4 - - इंडियन इंस्टीच्यूट आफ साइस, बगलौर । 5. -- इंडियन एकेडमी आफ माइस (रमन इस्टीच्यूट) की प्रयोगशालाए मल्लेअरम बगलोर । 6 टाटा इस्टीच्यूट आफ फंडामेंटल रिसर्च, बम्बई । पहले ही बताया गया है कि कौमिल आफ साइटिफिक एण्ड इडस्ट्रियल रिसर्च एक बहुत बड़ा काम कर रही है । इसका एक मुख्य काम यह भी है कि औद्योगिक शोध संस्थाओं के निर्माण में सहायता दे। यह खुशी की बात है कि अहमदाबाद कपडा मिल उद्योग बम्बई की असली तथा नकली रेशम की मिले, कलकत्ते की जूट मिळे तथा दिल्ली स्थित औद्योवि सम्बन्धी श्रीराम इस्टीट्यूट उल्लिखित प्रकार की सस्थाए है। इन संस्थाओं को सरकार कुछ सहायता देती है, पर जिस उद्योग से संस्था का प्रत्यक्ष सम्बन्ध है, वही इसका अधिकाश खर्च उठाता ह । कौसिल इस प्रकार की शोध संस्थाओं को स्वीकृति देती है । सहायता प्राप्त शोध विश्वविद्यालयो तथा दूसरी शोध संस्थाओं में जो मौलिक तथा व्यावहारिक शोध कार्य चालू है, उन्हे प्रोत्साहन देने के लिये कौसिल धन की सहायता देती है । कौसिल की देखरेख में चालू तथा जल्दी ही चालू होने वाली शोध योजनाओं की संख्या 117 है । ये शोध योजनायें या तो वैज्ञानिक संस्थाओं के जरिये चालू हो रही है या विश्वविद्यालयों के जरिये । 1952-53 में बोर्ड आफ साइंटिफिक एण्ड इंडस्ट्रियल रिसर्च के महत्वपूर्ण कार्य हमारा देश एक महादेश है इसलिये इसमें आश्चर्य नहीं कि यहा पर 30 विभिन्न सम्वत्सर पद्धति एक साथ चालू है । यदि उनमे से प्रत्येक पद्धति का इतिहास देखा जाये, तो ज्ञात होगा कि भूतकाल की किसी न किसी राजनीतिक तथा सास्कृतिक घटना या परम्परा के कारण वह चालू हुई है तथा जारी रही। कहना न होगा कि निजी तौर पर कोई कुछ भी मान सरकार अपने सारे कामो के लिये केवल एक सम्वत्सर पद्धति को ही स्वीकार कर सकती थी । इस काम के लिये भारत सरकार ने सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक डा० मेघनाद साहा के सचालकत्व मे सम्वत्सर सुधार समिति नाम से एक संस्था स्थापित की । यह संस्था भी कौसिल आफ साइटिफिक एण्ड इंडस्ट्रियल रिसर्च की देखरेख में काम कर रही है। अभी इस समिति का कार्य चालू है, पर ज्ञात हुआ है कि वैज्ञानिक आधार पर एक अखिल भारतीय राष्ट्रीय सौर सम्वत्सर पद्धति तैयार करने की योजना है । यह न समझा जाये कि चाद्र सम्वत्सर पद्धतिया इससे समाप्त हो जायेगी, धार्मिक कार्यो के लिये कई क्षेत्रों में चाद्र वर्ष का होना जरूरी है । पर यह आशा की जाती है कि चांद्र सम्वत्सर पद्धतियो को सौर पद्धति से निकट कर दिया जायेगा। प्राचीन काल में हमारी गणनाओ मे उज्जैन को विशेष महत्व प्राप्त था, तद्नुसार यह तय हुआ है कि उज्जैन जिस अक्षाश पर स्थित है, यानी ग्रीनविच 8 5°ये पूर्व में किसी स्थान पर एक केन्द्रीय स्थान चुना जाये जहा से भारत की सारी गणना की जाये । यो तो हमारे यहा कई वेधशालाये है, पर आधुनिक सूक्ष्म यत्रों से समन्वित एक केन्द्रीय वेधशाला की जरूरत थी । इसी बात को देखते हुए इस समिति ने इसकी भी सिफारिश की है। इस बीच में और भी जो काम हुआ है, उसका व्यौरा यो है कि आगामी 5 साल के लिये एक प्रयोगात्मक चाद्र-मौर सम्वत्सर पद्धति कायम की जाये । श्री जं० आर० डी० टाटा के सभापतित्व में एक गैस टरबाउन और जैट प्रौपल्शन इजन कमेटी भी कायम हुई है। इस कमेटी का काम यह होगा कि वह गैस टरबाइन और जैट प्रौपल्शन इजनो के सम्बन्ध में शोध करे और भारत मे उनका निर्माण करे । रेडियो शोध कार्य हमारे देश में अब रेडियो को कितना महत्व प्राप्त हुआ है यह सभी को मालूम है, तद्नुसार एक रेडियो शोध समिति कायम की गई है जो रेडियो के वल्बो, रेडियो तरगो के वितरण तथा ध्रुवीकरण और लघु तरगों के अन्तर्निधान के सम्बन्ध में शोध करेगी। इसके अलावा यह समिति वातावरण तथा आय नोस्फीयर के सम्बन्ध में खोज कर रही है । अपने शोध के परिणामो को यह समिति बुलेटिनो के रूप में प्रकाशित करती है। दुनिया के और हिस्मो मे इस सम्बन्ध में जो शोध कार्य हो रहे है उनके परिणाम भी बुलेटिनो में प्रकाशित होते है। इन बुलेटिनो के पारस्परिक विनिमय से दोनो पक्षो को लाभ होता है । फर्मासी में उत्पन्न द्रव्य तथा दवाएं पहले ही लखनऊ के ड्रग रिसर्च इस्टीच्यूट का उल्लेख किया जा चुका है। इस संस्था की ओर से जम्मू और काश्मीर मे जड़ी बूटियो के शोध के सम्बन्ध में एक दीर्घकालीन कार्यक्रम चालू है। इसके साथ ही देश में जिन विभिन्न जडी बूटियों का इस्तेमाल होता है, उन पर भी शोध किये जा रहे है, जिससे मालूम हो सके कि कहा तक लोगों का विश्वास सही है। दूसरे देशो की जड़ी बूटिया यहा आ कर किस हद तक उत्पन्न हो सकती है या नहीं, इस सम्बन्ध मे भी खोज की जा रही है । गुलाब के पौधों पर खोज गुलाब की कदर सारी दुनिया में है इसलिये इसमें आश्चर्य नही कि विशेष रूप से गुलाब के पौधो पर खोज की गई । भूमि और जलवायु के साथ गुलाब की खेती का क्या सम्बन्ध है, गुलाब की कौन सी किस्मे खेती के लिये सब से उपयोगी है तथा विभिन्न गुलाब मे से कौन से गुलाब तथा उन की उपजो में अधिक सुगन्ध होती है उन पर शोध कार्य किया जा चुका है और परिणाम जल्दी ही प्रकाशित होगा । देखते देखते प्लास्टिक का धन्धा कितना महत्वपूर्ण होता जा रहा है, यह सभी को मालूम है । इसलिये यह उचित ही है कि प्लास्टिक रिसर्च कमेटी की देखरेख मे शोधयोग्य समस्याओं की सूची तैयार हो चुकी है और वह जल्दी ही प्रकाशित होगी । आंकड़ेगत गुण नियंत्रण का प्रशिक्षण और शोध कौसिल आफ साइटिफिक एण्ड इडस्ट्रियल रिसर्च की ओर से बम्बई के इडियन स्टैटि स्टिकल इस्टीच्यूट से आकडेगत गुण नियंत्रण के सम्बन्ध में प्रशिक्षण देने की एक योजना को वित्तीय सहायता दी जा रही है। इस सम्बन्ध मे सयुक्त राष्ट्र संघ के भारत में मौजूद विशेषज्ञो से सलाह ली गई । 1952 के अक्तूबर मे आकडेगत गुण नियंत्रण समिति की सभा में विशेषज्ञ समिति के द्वारा प्रस्तुत प्रशिक्षण कार्यक्रम पर विचार किया गया। इसके बाद अध्यापक महलानविस ने एक उन्नततर शिक्षण तथा शोध सम्बन्धी कार्यक्रम दिया जिस पर विचार हो रहा है । भारतीय चट्टानों का वय-निर्णय भूगर्भ विज्ञान में चट्टानो का वय-निर्णय एक प्रमुख विषय है । इस सम्बन्ध मे भूगर्भ वैज्ञानिक समय प्रमापन समिति कार्य कर रही है । इस कार्य के लिये भौतिक, रासायनिक तथा प्राचीन उद्भिद विज्ञान सम्बन्धी कार्यक्रम काम में लाया जा रहा है । आध्र विश्वविद्यालय मे समुद्र परिमापन शोध के सम्बन्ध में भी एक नया तरीका काम में लाया जा रहा है । यह कार्य अमेरिका के अध्यापक ई० एस० ला फौन्ड की देखरेख मे चल रहा है, जो समुद्र परिमापन सम्बन्धी स्क्रिप्स संस्था के सदस्य है । अभी परिमापन का काम बहुत प्रारम्भिक अवस्था मे है, फिर भी भारत के पूर्वी तट के सरसरी परिमापन से समुद्रगर्भ की गहराई, भूगर्भवैज्ञानिक विशेषताओ, चट्टानों की तेजोद्गर अन्तर्गत वस्तु तथा समुद्र के गर्भ के प्राणियो और उद्भिदो के सम्बन्ध में बहुत उपयोगी सूचनाये प्राप्त हुई है । कहना न होगा कि यह काम अभी उस हद तक नहीं हुआ है जितना कि होना चाहिये । आशा की जाती है कि जल्दी ही इस कार्य का विस्तार होगा । भारत के वैज्ञानिक कार्यकर्ताओं के लिये एक अभाव यह भी रहा कि उन्हें आवश्यकतानुसार दुष्प्राप्य रासायनिक पदार्थ प्राप्त नहीं होते थे । इसलिये पूना की राष्ट्रीय रासायनि प्रयोगशाला इस सम्बन्ध में कार्य कर रही है, और यह आशा की जा रही है कि उनके द्वारा बनाई हुई योजना के अनुसार कुछ दुष्प्राप्य रासायनिक पदार्थ शोध कार्य करने वालों को उचित मूल्य पर प्राप्त होगे । भौतिक विज्ञान पर शोध दिल्ली की राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला मे आर० एफ० अम्मीटरस शोध योजना के फलस्वरूप तैयार हुए और उनके डिजाइन बने । ये परीक्षण मे सन्तोषजनक पाये गये । अब नागरिक उड्डयन तथा प्रतिरक्षा सेवाओ मे उनका परीक्षण हो रहा है । विज्ञान मंदिर विज्ञान को गाव वालो तक ले जाना एक महान् उद्देश्य है। तदनुसार दिल्ली राज्य के गाव मे एक विज्ञान मन्दिर की स्थापना की गई है । इस मन्दिर का उद्देश्य गाव वालो को खेती तथा स्वास्थ्य के सम्बन्ध मे उठने वाली दैनिक समस्याओ पर सलाह देना है । विज्ञान मन्दिर नई समस्याओ पर भी विचार करेगा । इसमे भुमि और जल का विश्लेषण किया जायेगा और बीमारियों के सम्बन्ध मे भी अध्ययन होगे । इस मन्दिर से गाव वालो मे वैज्ञानिक ज्ञान का प्रचार किया जायेगा और आसान साहित्य का वितरण होगा । केवल सलाह देने से ही काम नहीं चल सकता, इसलिये पौधो की बीमारियों को दूर करने के लिये आवश्यक चीजे भी मन्दिर में मिल सकेगी । दिल्ली का यह प्रयोग सफल रहा तो भारत भर में विज्ञान मन्दिर खोले जायेगे । इंजीनियरिंग शोध 1950 में इजीनियरिंग सम्बन्धी शोध कार्य को आगे बढ़ाने के लिये बोर्ड आफ इजीनिर्यारंग रिसर्च की स्थापना हुई । इसकी सहायक समितियों के रूप में 5 विशेषज्ञ समितिया काम करती है, जैसे ( I ) असैनिक इजीनियरिंग समिति, ( 2 ) यत्रसम्बन्धी इजीनियरिग समिति, (3) विजली और रेडियो इंजीनियरिंग समिति, (4) हाइड्रोलिक समिति और (5) वायुयान विज्ञान सम्बन्धी इजीनियरिंग समिति । इस बोर्ड के सामने विशेषरूप से दो कार्य है, एक तो देश में इजीनियरिग शोध से प्राप्त सुविधाओ का परिमापन तथा दूसरे उन समस्याओ का पता लगाना जो अभी तक हल नहीं की जा सकी । कौसिल जो काम कर रही है, उसके सम्बन्ध में लोगो को जानकारी देने के लिये कई पत्र - पत्रिकाये निकलती रहती है । अंग्रेजी मे 'जरनल आफ साइंटिफिक एण्ड इंडस्ट्रियल रिसर्च' और हिन्दी में विज्ञान प्रगति मासिक साहित्य के रूप में प्रकाशित हुई है । इनका उद्देश्य जनता में विज्ञान का प्रचार करना है। इसके अलावा विभिन्न राष्ट्रीय प्रयोगशालाये अपनी बुलेटिन प्रकाशित करती है । भारत मे कौन कौन से कच्चे माल प्राप्त है उस के सम्बन्ध मे II जिल्दो मे एक ग्रन्थ प्रका शित हो रहा है, जिन में से चार जिल्दे प्रकाशित हो चुकी है। समय-समय पर और भी छोटी मोटी पुस्तिकाये तथा परिमापन रिपोर्ट प्रकाशित हुई है। इस संस्था की ओर से जो सबसे ( 1 ) वनस्पति की बनावट तथा ताजी रचनाये प्रकाशित हुई है पौष्टिक मूल्य पर शोध, ( 2 ) उनके नाम इस प्रकार है भारतीय फर्मासी ग्रन्थ । या के विभिन्न द्रव्यों के परिमापन के साथ साथ कौसिल यहा की वैज्ञानिक तथा प्रौद्योगिक जनशक्ति के सम्बन्ध में भी एक विस्तृत पूजी तैयार कर रही है । इस पुस्तक के लिखे जाने के समय तक 40,000 से ऊपर वैज्ञानिक तथा औद्योगिक विशेषज्ञों के सम्बन्ध में सूचना एकत्र की जा चुकी है । वैज्ञानिक सम्पर्क भारत में विज्ञान की उन्नति के लिये इतना ही यथेष्ट नही है कि भारत के वैज्ञानिक परस्पर विचार विनिमय ही करते रहे, बल्कि इस के साथ यह भी जरूरी है कि हमारे वैज्ञानिको का सम्पर्क संसार के अन्य वैज्ञानिको के साथ बना रहे । इसी उद्देश्य से केन्द्रीय सरकार की ओर से एक वैज्ञानिक कर्मचारी इंग्लैंड में नियुक्त है, जो कामनवैल्थ के देशों के अन्दर वैज्ञानिको के आने जाने में सहायता देता है । ससार के वैज्ञानिक निरन्तर जो नये आविष्कार कर रहे है, यह कर्मचारी सरकार को उन से परिचित कराता रहता है, और साथ ही भारतीय छात्रों के लिये विदेशो में विज्ञान की शिक्षा का प्रबन्ध करता रहता है । राष्ट्रीय शोध विकास कारपोरेशन हमारी राष्ट्रीय प्रयोगशाला मे निरन्तर नई-नई प्रक्रियाये तथा पद्धतियो का आविष्कार होता है । यदि केवल इन बातो को विज्ञान की पुस्तको तक ही सीमित रखा जाये, तो कोई विशेष लाभ नहीं है । निजी व्यापारियों से यह आशा नही की जा सकती कि वे उन आविष्कारो को फौरन ही काम में लायेगे, तथा उस के लिये आवश्यक विपत्ति उठायेगे। इस खतरे से बचने के लिये भारत सरकार ने राष्ट्रीय शोध विकास कारपोरेशन नाम से एक संस्था की स्थापना की है । यह संस्था आविष्कृत तरीकों का प्रयोग कर नये यत्रो तथा आविष्कारों का परीक्षण करेगी । जब परीक्षण मे आविष्कार खरे उतर जायेगे, तब तो निजी व्यापारी स्वय ही उस ओर बढेगे । आणविक शक्ति आयोग सारे संसार मे आणविक शक्ति के सम्बन्ध मे जो क्रियाशीलता चालू थी, उसे देखते हुए भारत सरकार इस ओर से उदासीन नहीं रह सकती थी । इसलिये 1948 के आणविक शक्ति ऐक्ट के अनुसार अगस्त 1948 मे आणविक शक्ति आयोग की स्थापना की गई। इस आयोग का काम यह है कि आणविक शक्ति के विकास और उपयोग सम्बन्धी सारे विषयो पर काम करे । आणविक शक्ति शोध बोर्ड तथा कास्मिक रश्मि समिति आयोग के काम में हाथ बटाती है । हमारे यहा गणित, रसायनशास्त्र, भौतिक विज्ञान पर अध्ययन का मान दण्ड उतना ऊचा नही था जितना कि उच्च वैज्ञानिक अध्ययन के लिये आवश्यक है । इस उद्देश्य से आयोग ने देश की कई शिक्षा संस्थाओं को काफी अनुदान दिया है । आयोग ने शोध सम्बन्धी जो कार्यक्रम बनाया है, उसके अनुसार विश्वविद्यालय, टाटा इस्टीट्यूट तथा दूसरी संस्थाओं में शोध कार्य हो रहा है । कास्मिक रश्मि सम्बन्धी शोध करने के लिये आयोग की ओर से कलकत्ता के इस्टीट्यूट आफ न्यूक्लेयर फिजिक्स तथा बोस रिसर्च इस्टीट्यूट को तथा अहमदाबाद की फिजिकल रिसर्च लैबोरेटरी को सहायता दी जाती है। इस मद में प्रतिवर्ष कई लाख रुपये खर्च होते है । आयोग ने तिरुवाकुर-कोचीन के अल्वाए नामक स्थान में भारतीय लि० स्थापित की है। इस कारखाने पर भारत सरकार और की सम्मिलित मिल्कियत है । 1952 के अप्रैल में यह कारखाना दुष्प्राप्य मिट्टिया तिरुवाकुर कोचीन स्थापित हुआ था, और इस में मोनाजाइट का प्रोसेसिंग होता है । इसी कारखाने में बहुत लाभ हो रहा है, और साथ ही भारत को युद्धोपयोगी माल भी मिल रहा है। अब तक इस कारखाने मे यूरेनियम और थोरेनियम निकालने का कोई उपाय नही था, और इस के लिये वही एक दूसरा कारखाना खुल रहा है । इस कारखाने मे जो दुष्प्राप्य मिट्टियो वाला नमक प्राप्त होता है, उसमें से कुछ गैस मैन्टल धन्धे में लगा दिया जायेगा और बाकी भविष्य के लिये रख दिया जायेगा । न्यूक्लेयर शोध भारत में अभी कई मामलो मे जैसे न्यूक्लेयर शोध मे तो अभी हाल ही मे शुरुआत हुई है । इस सम्बन्ध मे 1945 में स्थापित टाटा इस्टीट्यूट अग्रगामी रहा है । यह संस्था वित्तीय सहायता के लिये भारत सरकार पर निर्भर करती है और शोध करने के अतिरिक्त छात्रो को प्रशिक्षण भी देती है । 1950 में कलकत्ता मे मदाम जोलियो कूरी ने इस्टीट्यूट आफ न्युक्लेयर फिजिक्स की स्थापना की ।
इन तेरह संस्थाओं के अतिरिक्त भावनगर में एक केन्द्रीय लवण शोध केन्द्र खुल रहा है, जिसके डायरेक्टर डाशून्य माता प्रसाद होंगे। कौंसिल ने लखनऊ में सिकन्दरा उद्यान को अपने कब्ज़े में ले लिया है, और यह प्रस्ताव है कि अध्यापक केशून्य एनशून्य कौल के सचालकत्व मे इसे एक राष्ट्रीय उद्भिद वैज्ञानिक उद्यान के रूप में विकसित किया जाये । पचवर्षीय योजना में एक यांत्रिक इजीनियरिग प्रयोगशाला स्थापित किये जाने की व्यवस्था है । यहा यह बता दिया जाये कि राष्ट्रीय प्रयोगशालाओ का उद्देश्य किसी भी प्रकार देश की अन्य शोध संस्थाओं के कार्य को दबाना या उन मे रोडे अटकाना नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय प्रयोगशालाओ को बनाने में सरकार का यह उद्देश्य रहा है कि वे उन सस्थाओ के सहायक के रूप में काम करे । यह बड़ी खुशी की बात है कि हमारे देश मे ऊपर गिनाई हुई राष्ट्रीय प्रयोगशालाओ के अतिरिक्त कुछ और महत्वपूर्ण शोध संस्थाए है । यह शोध संस्थाए भौतिक विज्ञान और प्रौद्योगिक विज्ञानो से सम्बन्ध रखती है । ये सस्थाए विशुद्ध शोध तक ही अपने कार्यक्षेत्र को सीमित रखती है और सरकार से स्वतंत्र रूप से कार्य करती है I. -- प्राचीन उद्भिद विद्या सम्बन्धी वीरवल साहनी सस्था, तिरेपन युनिवर्सिटी रोड लखनऊ । दो - - बोस शोध संस्था, तिरानवे अपर सरकुलर रोड, कलकत्ता । तीन. - - इंडियन एसोसियेशन फार दी कल्टीवेशन आफ माइम, बौ बाजार स्ट्रीट, चार - - इंडियन इंस्टीच्यूट आफ साइस, बगलौर । पाँच. -- इंडियन एकेडमी आफ माइस की प्रयोगशालाए मल्लेअरम बगलोर । छः टाटा इस्टीच्यूट आफ फंडामेंटल रिसर्च, बम्बई । पहले ही बताया गया है कि कौमिल आफ साइटिफिक एण्ड इडस्ट्रियल रिसर्च एक बहुत बड़ा काम कर रही है । इसका एक मुख्य काम यह भी है कि औद्योगिक शोध संस्थाओं के निर्माण में सहायता दे। यह खुशी की बात है कि अहमदाबाद कपडा मिल उद्योग बम्बई की असली तथा नकली रेशम की मिले, कलकत्ते की जूट मिळे तथा दिल्ली स्थित औद्योवि सम्बन्धी श्रीराम इस्टीट्यूट उल्लिखित प्रकार की सस्थाए है। इन संस्थाओं को सरकार कुछ सहायता देती है, पर जिस उद्योग से संस्था का प्रत्यक्ष सम्बन्ध है, वही इसका अधिकाश खर्च उठाता ह । कौसिल इस प्रकार की शोध संस्थाओं को स्वीकृति देती है । सहायता प्राप्त शोध विश्वविद्यालयो तथा दूसरी शोध संस्थाओं में जो मौलिक तथा व्यावहारिक शोध कार्य चालू है, उन्हे प्रोत्साहन देने के लिये कौसिल धन की सहायता देती है । कौसिल की देखरेख में चालू तथा जल्दी ही चालू होने वाली शोध योजनाओं की संख्या एक सौ सत्रह है । ये शोध योजनायें या तो वैज्ञानिक संस्थाओं के जरिये चालू हो रही है या विश्वविद्यालयों के जरिये । एक हज़ार नौ सौ बावन-तिरेपन में बोर्ड आफ साइंटिफिक एण्ड इंडस्ट्रियल रिसर्च के महत्वपूर्ण कार्य हमारा देश एक महादेश है इसलिये इसमें आश्चर्य नहीं कि यहा पर तीस विभिन्न सम्वत्सर पद्धति एक साथ चालू है । यदि उनमे से प्रत्येक पद्धति का इतिहास देखा जाये, तो ज्ञात होगा कि भूतकाल की किसी न किसी राजनीतिक तथा सास्कृतिक घटना या परम्परा के कारण वह चालू हुई है तथा जारी रही। कहना न होगा कि निजी तौर पर कोई कुछ भी मान सरकार अपने सारे कामो के लिये केवल एक सम्वत्सर पद्धति को ही स्वीकार कर सकती थी । इस काम के लिये भारत सरकार ने सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक डाशून्य मेघनाद साहा के सचालकत्व मे सम्वत्सर सुधार समिति नाम से एक संस्था स्थापित की । यह संस्था भी कौसिल आफ साइटिफिक एण्ड इंडस्ट्रियल रिसर्च की देखरेख में काम कर रही है। अभी इस समिति का कार्य चालू है, पर ज्ञात हुआ है कि वैज्ञानिक आधार पर एक अखिल भारतीय राष्ट्रीय सौर सम्वत्सर पद्धति तैयार करने की योजना है । यह न समझा जाये कि चाद्र सम्वत्सर पद्धतिया इससे समाप्त हो जायेगी, धार्मिक कार्यो के लिये कई क्षेत्रों में चाद्र वर्ष का होना जरूरी है । पर यह आशा की जाती है कि चांद्र सम्वत्सर पद्धतियो को सौर पद्धति से निकट कर दिया जायेगा। प्राचीन काल में हमारी गणनाओ मे उज्जैन को विशेष महत्व प्राप्त था, तद्नुसार यह तय हुआ है कि उज्जैन जिस अक्षाश पर स्थित है, यानी ग्रीनविच आठ पाँच°ये पूर्व में किसी स्थान पर एक केन्द्रीय स्थान चुना जाये जहा से भारत की सारी गणना की जाये । यो तो हमारे यहा कई वेधशालाये है, पर आधुनिक सूक्ष्म यत्रों से समन्वित एक केन्द्रीय वेधशाला की जरूरत थी । इसी बात को देखते हुए इस समिति ने इसकी भी सिफारिश की है। इस बीच में और भी जो काम हुआ है, उसका व्यौरा यो है कि आगामी पाँच साल के लिये एक प्रयोगात्मक चाद्र-मौर सम्वत्सर पद्धति कायम की जाये । श्री जंशून्य आरशून्य डीशून्य टाटा के सभापतित्व में एक गैस टरबाउन और जैट प्रौपल्शन इजन कमेटी भी कायम हुई है। इस कमेटी का काम यह होगा कि वह गैस टरबाइन और जैट प्रौपल्शन इजनो के सम्बन्ध में शोध करे और भारत मे उनका निर्माण करे । रेडियो शोध कार्य हमारे देश में अब रेडियो को कितना महत्व प्राप्त हुआ है यह सभी को मालूम है, तद्नुसार एक रेडियो शोध समिति कायम की गई है जो रेडियो के वल्बो, रेडियो तरगो के वितरण तथा ध्रुवीकरण और लघु तरगों के अन्तर्निधान के सम्बन्ध में शोध करेगी। इसके अलावा यह समिति वातावरण तथा आय नोस्फीयर के सम्बन्ध में खोज कर रही है । अपने शोध के परिणामो को यह समिति बुलेटिनो के रूप में प्रकाशित करती है। दुनिया के और हिस्मो मे इस सम्बन्ध में जो शोध कार्य हो रहे है उनके परिणाम भी बुलेटिनो में प्रकाशित होते है। इन बुलेटिनो के पारस्परिक विनिमय से दोनो पक्षो को लाभ होता है । फर्मासी में उत्पन्न द्रव्य तथा दवाएं पहले ही लखनऊ के ड्रग रिसर्च इस्टीच्यूट का उल्लेख किया जा चुका है। इस संस्था की ओर से जम्मू और काश्मीर मे जड़ी बूटियो के शोध के सम्बन्ध में एक दीर्घकालीन कार्यक्रम चालू है। इसके साथ ही देश में जिन विभिन्न जडी बूटियों का इस्तेमाल होता है, उन पर भी शोध किये जा रहे है, जिससे मालूम हो सके कि कहा तक लोगों का विश्वास सही है। दूसरे देशो की जड़ी बूटिया यहा आ कर किस हद तक उत्पन्न हो सकती है या नहीं, इस सम्बन्ध मे भी खोज की जा रही है । गुलाब के पौधों पर खोज गुलाब की कदर सारी दुनिया में है इसलिये इसमें आश्चर्य नही कि विशेष रूप से गुलाब के पौधो पर खोज की गई । भूमि और जलवायु के साथ गुलाब की खेती का क्या सम्बन्ध है, गुलाब की कौन सी किस्मे खेती के लिये सब से उपयोगी है तथा विभिन्न गुलाब मे से कौन से गुलाब तथा उन की उपजो में अधिक सुगन्ध होती है उन पर शोध कार्य किया जा चुका है और परिणाम जल्दी ही प्रकाशित होगा । देखते देखते प्लास्टिक का धन्धा कितना महत्वपूर्ण होता जा रहा है, यह सभी को मालूम है । इसलिये यह उचित ही है कि प्लास्टिक रिसर्च कमेटी की देखरेख मे शोधयोग्य समस्याओं की सूची तैयार हो चुकी है और वह जल्दी ही प्रकाशित होगी । आंकड़ेगत गुण नियंत्रण का प्रशिक्षण और शोध कौसिल आफ साइटिफिक एण्ड इडस्ट्रियल रिसर्च की ओर से बम्बई के इडियन स्टैटि स्टिकल इस्टीच्यूट से आकडेगत गुण नियंत्रण के सम्बन्ध में प्रशिक्षण देने की एक योजना को वित्तीय सहायता दी जा रही है। इस सम्बन्ध मे सयुक्त राष्ट्र संघ के भारत में मौजूद विशेषज्ञो से सलाह ली गई । एक हज़ार नौ सौ बावन के अक्तूबर मे आकडेगत गुण नियंत्रण समिति की सभा में विशेषज्ञ समिति के द्वारा प्रस्तुत प्रशिक्षण कार्यक्रम पर विचार किया गया। इसके बाद अध्यापक महलानविस ने एक उन्नततर शिक्षण तथा शोध सम्बन्धी कार्यक्रम दिया जिस पर विचार हो रहा है । भारतीय चट्टानों का वय-निर्णय भूगर्भ विज्ञान में चट्टानो का वय-निर्णय एक प्रमुख विषय है । इस सम्बन्ध मे भूगर्भ वैज्ञानिक समय प्रमापन समिति कार्य कर रही है । इस कार्य के लिये भौतिक, रासायनिक तथा प्राचीन उद्भिद विज्ञान सम्बन्धी कार्यक्रम काम में लाया जा रहा है । आध्र विश्वविद्यालय मे समुद्र परिमापन शोध के सम्बन्ध में भी एक नया तरीका काम में लाया जा रहा है । यह कार्य अमेरिका के अध्यापक ईशून्य एसशून्य ला फौन्ड की देखरेख मे चल रहा है, जो समुद्र परिमापन सम्बन्धी स्क्रिप्स संस्था के सदस्य है । अभी परिमापन का काम बहुत प्रारम्भिक अवस्था मे है, फिर भी भारत के पूर्वी तट के सरसरी परिमापन से समुद्रगर्भ की गहराई, भूगर्भवैज्ञानिक विशेषताओ, चट्टानों की तेजोद्गर अन्तर्गत वस्तु तथा समुद्र के गर्भ के प्राणियो और उद्भिदो के सम्बन्ध में बहुत उपयोगी सूचनाये प्राप्त हुई है । कहना न होगा कि यह काम अभी उस हद तक नहीं हुआ है जितना कि होना चाहिये । आशा की जाती है कि जल्दी ही इस कार्य का विस्तार होगा । भारत के वैज्ञानिक कार्यकर्ताओं के लिये एक अभाव यह भी रहा कि उन्हें आवश्यकतानुसार दुष्प्राप्य रासायनिक पदार्थ प्राप्त नहीं होते थे । इसलिये पूना की राष्ट्रीय रासायनि प्रयोगशाला इस सम्बन्ध में कार्य कर रही है, और यह आशा की जा रही है कि उनके द्वारा बनाई हुई योजना के अनुसार कुछ दुष्प्राप्य रासायनिक पदार्थ शोध कार्य करने वालों को उचित मूल्य पर प्राप्त होगे । भौतिक विज्ञान पर शोध दिल्ली की राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला मे आरशून्य एफशून्य अम्मीटरस शोध योजना के फलस्वरूप तैयार हुए और उनके डिजाइन बने । ये परीक्षण मे सन्तोषजनक पाये गये । अब नागरिक उड्डयन तथा प्रतिरक्षा सेवाओ मे उनका परीक्षण हो रहा है । विज्ञान मंदिर विज्ञान को गाव वालो तक ले जाना एक महान् उद्देश्य है। तदनुसार दिल्ली राज्य के गाव मे एक विज्ञान मन्दिर की स्थापना की गई है । इस मन्दिर का उद्देश्य गाव वालो को खेती तथा स्वास्थ्य के सम्बन्ध मे उठने वाली दैनिक समस्याओ पर सलाह देना है । विज्ञान मन्दिर नई समस्याओ पर भी विचार करेगा । इसमे भुमि और जल का विश्लेषण किया जायेगा और बीमारियों के सम्बन्ध मे भी अध्ययन होगे । इस मन्दिर से गाव वालो मे वैज्ञानिक ज्ञान का प्रचार किया जायेगा और आसान साहित्य का वितरण होगा । केवल सलाह देने से ही काम नहीं चल सकता, इसलिये पौधो की बीमारियों को दूर करने के लिये आवश्यक चीजे भी मन्दिर में मिल सकेगी । दिल्ली का यह प्रयोग सफल रहा तो भारत भर में विज्ञान मन्दिर खोले जायेगे । इंजीनियरिंग शोध एक हज़ार नौ सौ पचास में इजीनियरिंग सम्बन्धी शोध कार्य को आगे बढ़ाने के लिये बोर्ड आफ इजीनिर्यारंग रिसर्च की स्थापना हुई । इसकी सहायक समितियों के रूप में पाँच विशेषज्ञ समितिया काम करती है, जैसे असैनिक इजीनियरिंग समिति, यत्रसम्बन्धी इजीनियरिग समिति, विजली और रेडियो इंजीनियरिंग समिति, हाइड्रोलिक समिति और वायुयान विज्ञान सम्बन्धी इजीनियरिंग समिति । इस बोर्ड के सामने विशेषरूप से दो कार्य है, एक तो देश में इजीनियरिग शोध से प्राप्त सुविधाओ का परिमापन तथा दूसरे उन समस्याओ का पता लगाना जो अभी तक हल नहीं की जा सकी । कौसिल जो काम कर रही है, उसके सम्बन्ध में लोगो को जानकारी देने के लिये कई पत्र - पत्रिकाये निकलती रहती है । अंग्रेजी मे 'जरनल आफ साइंटिफिक एण्ड इंडस्ट्रियल रिसर्च' और हिन्दी में विज्ञान प्रगति मासिक साहित्य के रूप में प्रकाशित हुई है । इनका उद्देश्य जनता में विज्ञान का प्रचार करना है। इसके अलावा विभिन्न राष्ट्रीय प्रयोगशालाये अपनी बुलेटिन प्रकाशित करती है । भारत मे कौन कौन से कच्चे माल प्राप्त है उस के सम्बन्ध मे II जिल्दो मे एक ग्रन्थ प्रका शित हो रहा है, जिन में से चार जिल्दे प्रकाशित हो चुकी है। समय-समय पर और भी छोटी मोटी पुस्तिकाये तथा परिमापन रिपोर्ट प्रकाशित हुई है। इस संस्था की ओर से जो सबसे वनस्पति की बनावट तथा ताजी रचनाये प्रकाशित हुई है पौष्टिक मूल्य पर शोध, उनके नाम इस प्रकार है भारतीय फर्मासी ग्रन्थ । या के विभिन्न द्रव्यों के परिमापन के साथ साथ कौसिल यहा की वैज्ञानिक तथा प्रौद्योगिक जनशक्ति के सम्बन्ध में भी एक विस्तृत पूजी तैयार कर रही है । इस पुस्तक के लिखे जाने के समय तक चालीस,शून्य से ऊपर वैज्ञानिक तथा औद्योगिक विशेषज्ञों के सम्बन्ध में सूचना एकत्र की जा चुकी है । वैज्ञानिक सम्पर्क भारत में विज्ञान की उन्नति के लिये इतना ही यथेष्ट नही है कि भारत के वैज्ञानिक परस्पर विचार विनिमय ही करते रहे, बल्कि इस के साथ यह भी जरूरी है कि हमारे वैज्ञानिको का सम्पर्क संसार के अन्य वैज्ञानिको के साथ बना रहे । इसी उद्देश्य से केन्द्रीय सरकार की ओर से एक वैज्ञानिक कर्मचारी इंग्लैंड में नियुक्त है, जो कामनवैल्थ के देशों के अन्दर वैज्ञानिको के आने जाने में सहायता देता है । ससार के वैज्ञानिक निरन्तर जो नये आविष्कार कर रहे है, यह कर्मचारी सरकार को उन से परिचित कराता रहता है, और साथ ही भारतीय छात्रों के लिये विदेशो में विज्ञान की शिक्षा का प्रबन्ध करता रहता है । राष्ट्रीय शोध विकास कारपोरेशन हमारी राष्ट्रीय प्रयोगशाला मे निरन्तर नई-नई प्रक्रियाये तथा पद्धतियो का आविष्कार होता है । यदि केवल इन बातो को विज्ञान की पुस्तको तक ही सीमित रखा जाये, तो कोई विशेष लाभ नहीं है । निजी व्यापारियों से यह आशा नही की जा सकती कि वे उन आविष्कारो को फौरन ही काम में लायेगे, तथा उस के लिये आवश्यक विपत्ति उठायेगे। इस खतरे से बचने के लिये भारत सरकार ने राष्ट्रीय शोध विकास कारपोरेशन नाम से एक संस्था की स्थापना की है । यह संस्था आविष्कृत तरीकों का प्रयोग कर नये यत्रो तथा आविष्कारों का परीक्षण करेगी । जब परीक्षण मे आविष्कार खरे उतर जायेगे, तब तो निजी व्यापारी स्वय ही उस ओर बढेगे । आणविक शक्ति आयोग सारे संसार मे आणविक शक्ति के सम्बन्ध मे जो क्रियाशीलता चालू थी, उसे देखते हुए भारत सरकार इस ओर से उदासीन नहीं रह सकती थी । इसलिये एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस के आणविक शक्ति ऐक्ट के अनुसार अगस्त एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस मे आणविक शक्ति आयोग की स्थापना की गई। इस आयोग का काम यह है कि आणविक शक्ति के विकास और उपयोग सम्बन्धी सारे विषयो पर काम करे । आणविक शक्ति शोध बोर्ड तथा कास्मिक रश्मि समिति आयोग के काम में हाथ बटाती है । हमारे यहा गणित, रसायनशास्त्र, भौतिक विज्ञान पर अध्ययन का मान दण्ड उतना ऊचा नही था जितना कि उच्च वैज्ञानिक अध्ययन के लिये आवश्यक है । इस उद्देश्य से आयोग ने देश की कई शिक्षा संस्थाओं को काफी अनुदान दिया है । आयोग ने शोध सम्बन्धी जो कार्यक्रम बनाया है, उसके अनुसार विश्वविद्यालय, टाटा इस्टीट्यूट तथा दूसरी संस्थाओं में शोध कार्य हो रहा है । कास्मिक रश्मि सम्बन्धी शोध करने के लिये आयोग की ओर से कलकत्ता के इस्टीट्यूट आफ न्यूक्लेयर फिजिक्स तथा बोस रिसर्च इस्टीट्यूट को तथा अहमदाबाद की फिजिकल रिसर्च लैबोरेटरी को सहायता दी जाती है। इस मद में प्रतिवर्ष कई लाख रुपये खर्च होते है । आयोग ने तिरुवाकुर-कोचीन के अल्वाए नामक स्थान में भारतीय लिशून्य स्थापित की है। इस कारखाने पर भारत सरकार और की सम्मिलित मिल्कियत है । एक हज़ार नौ सौ बावन के अप्रैल में यह कारखाना दुष्प्राप्य मिट्टिया तिरुवाकुर कोचीन स्थापित हुआ था, और इस में मोनाजाइट का प्रोसेसिंग होता है । इसी कारखाने में बहुत लाभ हो रहा है, और साथ ही भारत को युद्धोपयोगी माल भी मिल रहा है। अब तक इस कारखाने मे यूरेनियम और थोरेनियम निकालने का कोई उपाय नही था, और इस के लिये वही एक दूसरा कारखाना खुल रहा है । इस कारखाने मे जो दुष्प्राप्य मिट्टियो वाला नमक प्राप्त होता है, उसमें से कुछ गैस मैन्टल धन्धे में लगा दिया जायेगा और बाकी भविष्य के लिये रख दिया जायेगा । न्यूक्लेयर शोध भारत में अभी कई मामलो मे जैसे न्यूक्लेयर शोध मे तो अभी हाल ही मे शुरुआत हुई है । इस सम्बन्ध मे एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस में स्थापित टाटा इस्टीट्यूट अग्रगामी रहा है । यह संस्था वित्तीय सहायता के लिये भारत सरकार पर निर्भर करती है और शोध करने के अतिरिक्त छात्रो को प्रशिक्षण भी देती है । एक हज़ार नौ सौ पचास में कलकत्ता मे मदाम जोलियो कूरी ने इस्टीट्यूट आफ न्युक्लेयर फिजिक्स की स्थापना की ।
बैंक कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। देश के लाखों बैंक कर्मचारियों को दिवाली से पहले बड़ी सौगात मिली है। बैंक कर्मचारियों के वेतन में 15 फीसद का इजाफा होगा। बैंक कर्मचारियों को वेतन वृद्धि का लाभ नवंबर से ही मिलना शुरू हो जाएगा। अर्थात बैंक कर्मचारियों को नवंबर महीने का वेतन इजाफे के साथ प्राप्त होगा। भारतीय बैंक संघ ने बताया कि कर्मचारी यूनियनों और अधिकारी संघों के साथ 11वीं द्विपक्षीय वेतन वृद्धि वार्ता सहमति से सम्पन्न हो गई है। आईबीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुनील मेहता ने कहा, 'भारतीय बैंक संघ (कर्मचारी) यूनियनों और (अधिकारी) संघों के साथ 11वीं द्विपक्षीय वेतनवृद्धि वार्ता सहमति के साथ सम्पन्न होने घोषणा करता है। यह एक नवंबर 2017 से प्रभावी माना गया है। समझौते में वेतन में 15 फीसद के इजाफे का प्रावधान है। ' यह समझौता सरकारी क्षेत्र के बैंकों, कुछ पुरानी पीढ़ी के निजी बैंकों और कुछ विदेशी बैंकों पर लागू होगा। पांच कर्मचारी संगठनों व बैंक अधिकारियों के चार संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाले यूएफबीयू (UFBU) और आइबीए ने तीन वर्षों की बातचीत के बाद इस साल 22 जुलाई को सालाना 15 फीसद वेतन वृद्धि का समझौता किया था। लगभग 37 सरकारी, निजी और अंतरराष्ट्रीय बैंकों ने कर्मचारियों के वेतन में इजाफे पर बातचीत के लिए आइबीए को अधिकृत किया था। वेतन में इस बढ़ोत्तरी से बैंकों पर सालाना 7,898 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा।
बैंक कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। देश के लाखों बैंक कर्मचारियों को दिवाली से पहले बड़ी सौगात मिली है। बैंक कर्मचारियों के वेतन में पंद्रह फीसद का इजाफा होगा। बैंक कर्मचारियों को वेतन वृद्धि का लाभ नवंबर से ही मिलना शुरू हो जाएगा। अर्थात बैंक कर्मचारियों को नवंबर महीने का वेतन इजाफे के साथ प्राप्त होगा। भारतीय बैंक संघ ने बताया कि कर्मचारी यूनियनों और अधिकारी संघों के साथ ग्यारहवीं द्विपक्षीय वेतन वृद्धि वार्ता सहमति से सम्पन्न हो गई है। आईबीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुनील मेहता ने कहा, 'भारतीय बैंक संघ यूनियनों और संघों के साथ ग्यारहवीं द्विपक्षीय वेतनवृद्धि वार्ता सहमति के साथ सम्पन्न होने घोषणा करता है। यह एक नवंबर दो हज़ार सत्रह से प्रभावी माना गया है। समझौते में वेतन में पंद्रह फीसद के इजाफे का प्रावधान है। ' यह समझौता सरकारी क्षेत्र के बैंकों, कुछ पुरानी पीढ़ी के निजी बैंकों और कुछ विदेशी बैंकों पर लागू होगा। पांच कर्मचारी संगठनों व बैंक अधिकारियों के चार संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाले यूएफबीयू और आइबीए ने तीन वर्षों की बातचीत के बाद इस साल बाईस जुलाई को सालाना पंद्रह फीसद वेतन वृद्धि का समझौता किया था। लगभग सैंतीस सरकारी, निजी और अंतरराष्ट्रीय बैंकों ने कर्मचारियों के वेतन में इजाफे पर बातचीत के लिए आइबीए को अधिकृत किया था। वेतन में इस बढ़ोत्तरी से बैंकों पर सालाना सात,आठ सौ अट्ठानवे करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा।
>DEHRADUN: उत्तराखंड के जंगलों में आग से लगभग साढे़ तीन हजार हेक्टेयर से अधिक के जंगल को नुकसान पहुंचा है। इस आग की चपेट में वन क्षेत्र का बड़ा हिस्सा आया है, जिससे जानवरों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। वन विभाग ने आग में झुलसे जानवरों के लिए आपरेशन रेस्क्यू चलाया है। इसके तहत जंगल में घायल या झुलसे जानवरों की तलाश की जाएगी और उनका इलाज कराया जाएगा। पिछले दो दिन में उत्तराखंड के काफी हिस्से में बारिश हो चुकी है। ऐसे में आग पर काफी हद तक काबू हो चुका है। वहीं एनडीआरएफ, वन विभाग, पुलिस सहित हजारों कर्मचारी आग बुझाने में लगे हैं। जिन क्षेत्रों में आग बुझा दी गई है, वहीं पर वन विभाग अपना आपरेशन शुरू करने जा रहा है। जंगल में आग इस कदर लगी थी कि उस क्षेत्र में वन विभाग कोई आपरेशन नहीं चला पाया। सभी का ध्यान केवल आग बुझाने पर लगा था। ऐसे में दूसरी ओर इस आग में वन्य जीवों, पक्षियों को भारी नुकसान होने की आशंका जताई गई तो वन विभाग ने आपरेशन रेस्क्यू चलाने का निर्णय लिया। शु़क्रवार को राजा जी पार्क और कार्बेट पार्क के कई हिस्सों में यह आपरेशन चलाया गया। जंगलों में घायल और झुलसे जानवरों की तलाश की गई। आग से प्रभावित वन क्षेत्रों में रेस्क्यू अभियान चलवाया जा रहा है। कार्बेट और राजा जी पार्क में शुरुआत कर दी गई है। दूसरी जगहों पर भी अभियान चलेगा। इसका उद्देश्य घायल हुए वन्य जीवों को इलाज देना है।
>DEHRADUN: उत्तराखंड के जंगलों में आग से लगभग साढे़ तीन हजार हेक्टेयर से अधिक के जंगल को नुकसान पहुंचा है। इस आग की चपेट में वन क्षेत्र का बड़ा हिस्सा आया है, जिससे जानवरों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। वन विभाग ने आग में झुलसे जानवरों के लिए आपरेशन रेस्क्यू चलाया है। इसके तहत जंगल में घायल या झुलसे जानवरों की तलाश की जाएगी और उनका इलाज कराया जाएगा। पिछले दो दिन में उत्तराखंड के काफी हिस्से में बारिश हो चुकी है। ऐसे में आग पर काफी हद तक काबू हो चुका है। वहीं एनडीआरएफ, वन विभाग, पुलिस सहित हजारों कर्मचारी आग बुझाने में लगे हैं। जिन क्षेत्रों में आग बुझा दी गई है, वहीं पर वन विभाग अपना आपरेशन शुरू करने जा रहा है। जंगल में आग इस कदर लगी थी कि उस क्षेत्र में वन विभाग कोई आपरेशन नहीं चला पाया। सभी का ध्यान केवल आग बुझाने पर लगा था। ऐसे में दूसरी ओर इस आग में वन्य जीवों, पक्षियों को भारी नुकसान होने की आशंका जताई गई तो वन विभाग ने आपरेशन रेस्क्यू चलाने का निर्णय लिया। शु़क्रवार को राजा जी पार्क और कार्बेट पार्क के कई हिस्सों में यह आपरेशन चलाया गया। जंगलों में घायल और झुलसे जानवरों की तलाश की गई। आग से प्रभावित वन क्षेत्रों में रेस्क्यू अभियान चलवाया जा रहा है। कार्बेट और राजा जी पार्क में शुरुआत कर दी गई है। दूसरी जगहों पर भी अभियान चलेगा। इसका उद्देश्य घायल हुए वन्य जीवों को इलाज देना है।
भोजपुर जिले के आयर थाना क्षेत्र के लालगंज गांव में ईंट का दीवार गिरने से एक किशोरी की मौत हो गई। इलाज के लिए जगदीशपुर रेफरल अस्पताल ले जाने के दौरान उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। घटना को लेकर लोगों के बीच काफी देर तक अफरा-तफरी का आलम रहा। जानकारी के अनुसार मृत किशोरी आयर थाना क्षेत्र के लालगंज गांव निवासी अजय गिरी के 11 वर्षीय पुत्र चांदनी कुमारी है। वह पांचवी कक्षा में पढ़ती थी। इधर, मृतक किशोरी चांदनी कुमारी के परिजन ने बताया कि वह शुक्रवार की अपने घर से कुछ दूरी पर स्थित गौशाला गई थी। जब देर शाम वह जब गौशाला से वापस घर आ रही थी। तभी घर के समीप ही एक पुराना ईंट का दीवार अचानक भरभरा कर उस पर गिर पड़ा। जिससे वह गंभीर रुप से घायल हो गई। जिसके बाद परिजन उसे इलाज के लिए जगदीशपुर रेफरल अस्पताल ले जा रहे थे। तभी उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। बावजूद इसके परिजनों से जगदीशपुर रेफरल अस्पताल ले गए। जहां चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया। जिसके पश्चात परिजनों ने इसकी सूचना स्थानीय थाना को दी। सूचना मिलते ही स्थानीय थाना मौके पर पहुंच शव को अपने कब्जे में लेकर उसका पोस्टमार्टम आरा सदर अस्पताल में करवाया। मृत किशोरी अपने तीन भाई व तीन बहन में सबसे छोटी थी। घटना के बाद किशोरी के घर में कोहराम मच गया है। घटी इस घटना के बाद मृत किशोरी की मां दया देवी एवं परिवार के सभी सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल था। This website follows the DNPA Code of Ethics.
भोजपुर जिले के आयर थाना क्षेत्र के लालगंज गांव में ईंट का दीवार गिरने से एक किशोरी की मौत हो गई। इलाज के लिए जगदीशपुर रेफरल अस्पताल ले जाने के दौरान उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। घटना को लेकर लोगों के बीच काफी देर तक अफरा-तफरी का आलम रहा। जानकारी के अनुसार मृत किशोरी आयर थाना क्षेत्र के लालगंज गांव निवासी अजय गिरी के ग्यारह वर्षीय पुत्र चांदनी कुमारी है। वह पांचवी कक्षा में पढ़ती थी। इधर, मृतक किशोरी चांदनी कुमारी के परिजन ने बताया कि वह शुक्रवार की अपने घर से कुछ दूरी पर स्थित गौशाला गई थी। जब देर शाम वह जब गौशाला से वापस घर आ रही थी। तभी घर के समीप ही एक पुराना ईंट का दीवार अचानक भरभरा कर उस पर गिर पड़ा। जिससे वह गंभीर रुप से घायल हो गई। जिसके बाद परिजन उसे इलाज के लिए जगदीशपुर रेफरल अस्पताल ले जा रहे थे। तभी उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। बावजूद इसके परिजनों से जगदीशपुर रेफरल अस्पताल ले गए। जहां चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया। जिसके पश्चात परिजनों ने इसकी सूचना स्थानीय थाना को दी। सूचना मिलते ही स्थानीय थाना मौके पर पहुंच शव को अपने कब्जे में लेकर उसका पोस्टमार्टम आरा सदर अस्पताल में करवाया। मृत किशोरी अपने तीन भाई व तीन बहन में सबसे छोटी थी। घटना के बाद किशोरी के घर में कोहराम मच गया है। घटी इस घटना के बाद मृत किशोरी की मां दया देवी एवं परिवार के सभी सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल था। This website follows the DNPA Code of Ethics.
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
Tenolol 100 Tablet डॉक्टर के लिखे गए पर्चे पर मिलने वाली दवा है। यह दवाई टैबलेट में मिलती है। यह दवाई खासतौर से एनजाइना, हाई बीपी के उपचार के लिए इस्तेमाल की जाती है। इस दवाई Tenolol 100 Tablet को अन्य दिक्कतों में भी काम लिया जा सकता है, जिनके बारे में नीचे बताया गया है। Tenolol 100 Tablet को कितनी मात्रा में लेना है, यह पूर्ण रूप से रोगी के वजन, लिंग, आयु और पिछले चिकित्सकीय इतिहास पर निर्भर करता है। इसकी सही मात्रा इस पर भी निर्भर करती है, कि मरीज की मुख्य समस्या क्या है और उसे किस तरीके से दवा दी जा रही है। नीचे दिए गए खुराक के खंड में इस बारे में पूरी जानकारी के साथ बताया गया है। Tenolol 100 Tablet के साथ आमतौर पर कुछ साइड इफेक्ट देखे जाते हैं, जैसे धुंधली दृष्टि, ठंडे हाथ। इन दुष्परिणामों के अलावा Tenolol 100 Tablet के कुछ अन्य दुष्प्रभाव भी हैं, जिनके बारे में आगे बताया गया है। Tenolol 100 Tablet के दुष्प्रभाव जल्दी ही खत्म हो जाते हैं और इलाज के बाद जारी नहीं रहते। अपने डॉक्टर से संपर्क करें अगर ये साइड इफेक्ट और ज्यादा बदतर हो जाते हैं या फिर लंबे समय तक रहते हैं। इसके अलावा Tenolol 100 Tablet का प्रभाव प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए गंभीर है और जो महिलाएं बच्चों को दूध पिलाती हैं, उन पर इसका प्रभाव गंभीर है। आगे Tenolol 100 Tablet से जुड़ी चेतावनियों के सेक्शन में बताया गया है कि Tenolol 100 Tablet का लिवर, हार्ट, किडनी पर क्या असर होता है। यदि किसी व्यक्ति को शुगर, लो बीपी, दमा जैसी कोई समस्या है, तो उसे Tenolol 100 Tablet दवा नहीं लेनी चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। आगे ऐसी अन्य समस्याएं भी बताई गई हैं जिनमें Tenolol 100 Tablet लेने से आपको दुष्प्रभाव अनुभव हो सकते हैं। साथ ही, Tenolol 100 Tablet को कुछ दवाओं के साथ लेने से गंभीर साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। ऐसी दवाओं की पूरी सूची आगे इस लेख में दी गयी है। ऊपर दी गई सावधानियों के अलावा ये जानना भी आवश्यक है कि गाडी चलाते समय Tenolol 100 Tablet लेना असुरक्षित है और इसकी लत नहीं लग सकती है। यह अधिकतर मामलों में दी जाने वाली Tenolol 100 Tablet की खुराक है। कृपया याद रखें कि हर रोगी और उनका मामला अलग हो सकता है। इसलिए रोग, दवाई देने के तरीके, रोगी की आयु, रोगी का चिकित्सा इतिहास और अन्य कारकों के आधार पर Tenolol 100 Tablet की खुराक अलग हो सकती है। क्या Tenolol 100 Tablet का उपयोग गर्भवती महिला के लिए ठीक है? गर्भवती स्त्रियों पर Tenolol के कई खतरनाक दुष्प्रभाव होते हैं, इसलिए इसको बिना किसी डॉक्टरी सलाह के न लें। क्या Tenolol 100 Tablet का उपयोग स्तनपान करने वाली महिलाओं के लिए ठीक है? स्तनपान कराने वाली जो महिलाएं Tenolol का सेवन करती हैं, उनको डॉक्टर से पूछने के बाद ही इसको खाना चाहिए, नहीं तो इसके कई घातक परिणाम भी हो सकते हैं। Tenolol 100 Tablet का प्रभाव गुर्दे पर क्या होता है? Tenolol का हानिकारक प्रभाव बहुत कम है, इसलिए इसे बिना डॉक्टर की सलाह के भी ले सकते हैं। Tenolol 100 Tablet का जिगर (लिवर) पर क्या असर होता है? लीवर पर Tenolol का प्रभाव कैसा होगा, इस विषय पर चिकित्सा जगत में रिसर्च नहीं की गई है। अतः इसके प्रभाव के बारे मे कुछ भी कहना मुश्किल होगा। क्या ह्रदय पर Tenolol 100 Tablet का प्रभाव पड़ता है? दिल पर Tenolol के हानिकारक प्रभाव काफी कम देखे गए हैं। क्या Tenolol 100 Tablet आदत या लत बन सकती है? नहीं, लेकिन फिर भी आप Tenolol 100 Tablet को लेने से पहले डॉक्टर से जरूर पूछें। क्या Tenolol 100 Tablet को लेते समय गाड़ी चलाना या कैसी भी बड़ी मशीन संचालित करना सुरक्षित है? नहीं, आप ऐसा कोई भी काम न करें, जिसमें दिमाग के सक्रिय होने की आवश्यकता होती हो। Tenolol 100 Tablet लेने के बाद किसी मशीन पर काम करने या वाहन चलाने से आपको दूरी बनानी होगी। क्या Tenolol 100 Tablet को लेना सुरखित है? हां, डॉक्टर के कहने पर आप Tenolol 100 Tablet को खा सकते हैं। क्या मनोवैज्ञानिक विकार या मानसिक समस्याओं के इलाज में Tenolol 100 Tablet इस्तेमाल की जा सकती है? मस्तिष्क विकारों में Tenolol 100 Tablet काम नहीं कर पाती है। क्या Tenolol 100 Tablet को कुछ खाद्य पदार्थों के साथ लेने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है? कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे होते हैं जिनको Tenolol 100 Tablet के साथ सेवन करने से दवा का असर करने की अवधि में बढ़ोतरी हो जाती है। जब Tenolol 100 Tablet ले रहे हों, तब शराब पीने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्या? शराब दवा के असर को कम करती है और Tenolol 100 Tablet के साथ यह कई तरह के विपरीत प्रभाव भी दिखाती है। इसलिए डॉक्टर के निर्देशों पर ही इसका सेवन करें। US Food and Drug Administration (FDA) [Internet]. Maryland. USA; Package leaflet information for the user; Tenormin® (atenolol)
Tenolol एक सौ Tablet डॉक्टर के लिखे गए पर्चे पर मिलने वाली दवा है। यह दवाई टैबलेट में मिलती है। यह दवाई खासतौर से एनजाइना, हाई बीपी के उपचार के लिए इस्तेमाल की जाती है। इस दवाई Tenolol एक सौ Tablet को अन्य दिक्कतों में भी काम लिया जा सकता है, जिनके बारे में नीचे बताया गया है। Tenolol एक सौ Tablet को कितनी मात्रा में लेना है, यह पूर्ण रूप से रोगी के वजन, लिंग, आयु और पिछले चिकित्सकीय इतिहास पर निर्भर करता है। इसकी सही मात्रा इस पर भी निर्भर करती है, कि मरीज की मुख्य समस्या क्या है और उसे किस तरीके से दवा दी जा रही है। नीचे दिए गए खुराक के खंड में इस बारे में पूरी जानकारी के साथ बताया गया है। Tenolol एक सौ Tablet के साथ आमतौर पर कुछ साइड इफेक्ट देखे जाते हैं, जैसे धुंधली दृष्टि, ठंडे हाथ। इन दुष्परिणामों के अलावा Tenolol एक सौ Tablet के कुछ अन्य दुष्प्रभाव भी हैं, जिनके बारे में आगे बताया गया है। Tenolol एक सौ Tablet के दुष्प्रभाव जल्दी ही खत्म हो जाते हैं और इलाज के बाद जारी नहीं रहते। अपने डॉक्टर से संपर्क करें अगर ये साइड इफेक्ट और ज्यादा बदतर हो जाते हैं या फिर लंबे समय तक रहते हैं। इसके अलावा Tenolol एक सौ Tablet का प्रभाव प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए गंभीर है और जो महिलाएं बच्चों को दूध पिलाती हैं, उन पर इसका प्रभाव गंभीर है। आगे Tenolol एक सौ Tablet से जुड़ी चेतावनियों के सेक्शन में बताया गया है कि Tenolol एक सौ Tablet का लिवर, हार्ट, किडनी पर क्या असर होता है। यदि किसी व्यक्ति को शुगर, लो बीपी, दमा जैसी कोई समस्या है, तो उसे Tenolol एक सौ Tablet दवा नहीं लेनी चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। आगे ऐसी अन्य समस्याएं भी बताई गई हैं जिनमें Tenolol एक सौ Tablet लेने से आपको दुष्प्रभाव अनुभव हो सकते हैं। साथ ही, Tenolol एक सौ Tablet को कुछ दवाओं के साथ लेने से गंभीर साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। ऐसी दवाओं की पूरी सूची आगे इस लेख में दी गयी है। ऊपर दी गई सावधानियों के अलावा ये जानना भी आवश्यक है कि गाडी चलाते समय Tenolol एक सौ Tablet लेना असुरक्षित है और इसकी लत नहीं लग सकती है। यह अधिकतर मामलों में दी जाने वाली Tenolol एक सौ Tablet की खुराक है। कृपया याद रखें कि हर रोगी और उनका मामला अलग हो सकता है। इसलिए रोग, दवाई देने के तरीके, रोगी की आयु, रोगी का चिकित्सा इतिहास और अन्य कारकों के आधार पर Tenolol एक सौ Tablet की खुराक अलग हो सकती है। क्या Tenolol एक सौ Tablet का उपयोग गर्भवती महिला के लिए ठीक है? गर्भवती स्त्रियों पर Tenolol के कई खतरनाक दुष्प्रभाव होते हैं, इसलिए इसको बिना किसी डॉक्टरी सलाह के न लें। क्या Tenolol एक सौ Tablet का उपयोग स्तनपान करने वाली महिलाओं के लिए ठीक है? स्तनपान कराने वाली जो महिलाएं Tenolol का सेवन करती हैं, उनको डॉक्टर से पूछने के बाद ही इसको खाना चाहिए, नहीं तो इसके कई घातक परिणाम भी हो सकते हैं। Tenolol एक सौ Tablet का प्रभाव गुर्दे पर क्या होता है? Tenolol का हानिकारक प्रभाव बहुत कम है, इसलिए इसे बिना डॉक्टर की सलाह के भी ले सकते हैं। Tenolol एक सौ Tablet का जिगर पर क्या असर होता है? लीवर पर Tenolol का प्रभाव कैसा होगा, इस विषय पर चिकित्सा जगत में रिसर्च नहीं की गई है। अतः इसके प्रभाव के बारे मे कुछ भी कहना मुश्किल होगा। क्या ह्रदय पर Tenolol एक सौ Tablet का प्रभाव पड़ता है? दिल पर Tenolol के हानिकारक प्रभाव काफी कम देखे गए हैं। क्या Tenolol एक सौ Tablet आदत या लत बन सकती है? नहीं, लेकिन फिर भी आप Tenolol एक सौ Tablet को लेने से पहले डॉक्टर से जरूर पूछें। क्या Tenolol एक सौ Tablet को लेते समय गाड़ी चलाना या कैसी भी बड़ी मशीन संचालित करना सुरक्षित है? नहीं, आप ऐसा कोई भी काम न करें, जिसमें दिमाग के सक्रिय होने की आवश्यकता होती हो। Tenolol एक सौ Tablet लेने के बाद किसी मशीन पर काम करने या वाहन चलाने से आपको दूरी बनानी होगी। क्या Tenolol एक सौ Tablet को लेना सुरखित है? हां, डॉक्टर के कहने पर आप Tenolol एक सौ Tablet को खा सकते हैं। क्या मनोवैज्ञानिक विकार या मानसिक समस्याओं के इलाज में Tenolol एक सौ Tablet इस्तेमाल की जा सकती है? मस्तिष्क विकारों में Tenolol एक सौ Tablet काम नहीं कर पाती है। क्या Tenolol एक सौ Tablet को कुछ खाद्य पदार्थों के साथ लेने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है? कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे होते हैं जिनको Tenolol एक सौ Tablet के साथ सेवन करने से दवा का असर करने की अवधि में बढ़ोतरी हो जाती है। जब Tenolol एक सौ Tablet ले रहे हों, तब शराब पीने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्या? शराब दवा के असर को कम करती है और Tenolol एक सौ Tablet के साथ यह कई तरह के विपरीत प्रभाव भी दिखाती है। इसलिए डॉक्टर के निर्देशों पर ही इसका सेवन करें। US Food and Drug Administration [Internet]. Maryland. USA; Package leaflet information for the user; Tenormin®
भोपाल। छतरपुर के थाना भगवा क्षेत्र अन्तर्गत दबंगो द्वारा की गई दलित परिवार के स्व. रखुआ अहिरवार की हत्या की घटना को मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष एवं कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के चैयरमेन सुरेन्द्र चौधरी ने गम्भीरता से लेते हुये घटना की जाँच हेतु मध्य प्रदेश कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग की ओर से तीन सदस्सीय जाँच कमेटी गठित की है। गठित जाँच कमेटी में मनोज त्रिवेदी अध्यक्ष जिला कांग्रेस कमेटी छतरपुर, पंकज अहिरवार प्रदेश उपाध्यक्ष मध्य प्रदेश कांग्रेस अजा. विभाग, देवीदीन (कल्लन ) अहिवार कार्यकरी अध्यक्ष कांग्रेस अजा. विभाग बड़ा मलहरा को जाँच कमेटी में शामिल किया जाकर एक सप्ताह में सम्पूर्ण घटनाक्रम की जाँच रिपोर्ट प्रदेश कार्यालय को भेजने के निर्देश जारी किए गये है। एक दिन पहले छतरपुर के भगवा थाना क्षेत्र में जमीनी विवाद के चलते रात करीब 10. 30 बजे गाँव के कुछ दबंगों ने ग्राम पठिया निवासी रखुआ अहिरवार की लाठी डंडों से पीट-पीटकर हत्या कर दी थीृ। मृतक के पुत्र ने दंबगों को भाजपा का संरक्षण होना बताया था।
भोपाल। छतरपुर के थाना भगवा क्षेत्र अन्तर्गत दबंगो द्वारा की गई दलित परिवार के स्व. रखुआ अहिरवार की हत्या की घटना को मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष एवं कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के चैयरमेन सुरेन्द्र चौधरी ने गम्भीरता से लेते हुये घटना की जाँच हेतु मध्य प्रदेश कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग की ओर से तीन सदस्सीय जाँच कमेटी गठित की है। गठित जाँच कमेटी में मनोज त्रिवेदी अध्यक्ष जिला कांग्रेस कमेटी छतरपुर, पंकज अहिरवार प्रदेश उपाध्यक्ष मध्य प्रदेश कांग्रेस अजा. विभाग, देवीदीन अहिवार कार्यकरी अध्यक्ष कांग्रेस अजा. विभाग बड़ा मलहरा को जाँच कमेटी में शामिल किया जाकर एक सप्ताह में सम्पूर्ण घटनाक्रम की जाँच रिपोर्ट प्रदेश कार्यालय को भेजने के निर्देश जारी किए गये है। एक दिन पहले छतरपुर के भगवा थाना क्षेत्र में जमीनी विवाद के चलते रात करीब दस. तीस बजे गाँव के कुछ दबंगों ने ग्राम पठिया निवासी रखुआ अहिरवार की लाठी डंडों से पीट-पीटकर हत्या कर दी थीृ। मृतक के पुत्र ने दंबगों को भाजपा का संरक्षण होना बताया था।
संगड़ाह - विकास खंड संगड़ाह की 41 में से तीन दर्जन के करीब पंचायतों द्वारा बाहरी राज्यों से महंगे दामों पर खरीदी गई सोलर स्ट्रीट लाइट में से 80 फ़ीसदी के करीब खराब हो चुकी है। वर्ष 2016 व 2017 में अकेले संगड़ाह पंचायत ने 7 लाख 92 हजार की लागत से चंडीगढ़ की एक निजी कंपनी से 38 लाइट सोलर लाइट खरीदी थी, हालांकि बाद में करीब दो लाख 40 हजार की लागत से दर्जन भर अन्य लाइट हिम ऊर्जा से भी खरीदी गई। संगड़ाह के अलावा उपमंडल की देवना, पालर, शिवपुर, लुधियाना, रेडली, माइना व भाटगढ़ आदि पंचायतों में भी बाहरी राज्यों से खरीदी गई स्ट्रीट लाइट में से 80 फीसदी से ज़्यादा खराब हो चुकी है। कुछ पंचायतों से शिकायतें आने के बाद नवंबर 2018 में हालांकि संबंधित विभाग द्वारा हिम ऊर्जा से उक्त मामले की जांच भी की गईए मगर न तो लाइटें ठीक हुई और न ही अब तक अनियमितताओं के आरोपियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई हुई है। विभाग अथवा सरकार की एनओसी के बिना चंडीगढ़ अथवा बाहरी राज्य से खरीदी गई इन लाइट्स की मरम्मत नहीं होने से अंधेरे में रह रहे क्षेत्र के ग्रामीणों में पंचायतों तथा प्रशासन के प्रति नाराजगी है। बुधवार को लुधियाना पंचायत में 90 फीसदी सोलर लाइट खराब होने तथा इनकी मरम्मत न किए जाने की शिकायत एक स्थानीय युवक द्वारा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर पर दर्ज करवाई जा चुकी है। संबधित पंचायतों के सचिव लायक़ रामए चंपा देवी, पूर्ण चंद, दीप राम व लेख राज आदि ने कहा कि कंपनी के कर्मचारी बार-बार कहने के बावजूद लाइट ठीक करने नहीं पहुंचे तथा कुछ स्थानों पर वारंटी पीरियड भी खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा किए 14वां वित्त आयोग अथवा किसी अन्य हैड से अतिरिक्त बजट की व्यवस्था कर इनकी मरम्मत करवाई जा सकती है। सौर ऊर्जा के परियोजना अधिकारी सिरमौर ओम प्रकाश ने कहा किए संगड़ाह ब्लॉक की अधिकतर पंचायतों द्वारा हिम ऊर्जा की बजाय बाहरी राज्यों की कंपनियों से लाइट खरीदी गई है। उन्होंने कहा कि हालांकि प्रदेश सरकार द्वारा सोलर लाइट को लेकर हिम ऊर्जा से एग्रीमेंट किया गया है, मगर अधिकतर पंचायतों द्वारा बिना एनओसी के बाहरी राज्यों से सोलर लाइट खरीदने को प्राथमिकता दी गई।
संगड़ाह - विकास खंड संगड़ाह की इकतालीस में से तीन दर्जन के करीब पंचायतों द्वारा बाहरी राज्यों से महंगे दामों पर खरीदी गई सोलर स्ट्रीट लाइट में से अस्सी फ़ीसदी के करीब खराब हो चुकी है। वर्ष दो हज़ार सोलह व दो हज़ार सत्रह में अकेले संगड़ाह पंचायत ने सात लाख बानवे हजार की लागत से चंडीगढ़ की एक निजी कंपनी से अड़तीस लाइट सोलर लाइट खरीदी थी, हालांकि बाद में करीब दो लाख चालीस हजार की लागत से दर्जन भर अन्य लाइट हिम ऊर्जा से भी खरीदी गई। संगड़ाह के अलावा उपमंडल की देवना, पालर, शिवपुर, लुधियाना, रेडली, माइना व भाटगढ़ आदि पंचायतों में भी बाहरी राज्यों से खरीदी गई स्ट्रीट लाइट में से अस्सी फीसदी से ज़्यादा खराब हो चुकी है। कुछ पंचायतों से शिकायतें आने के बाद नवंबर दो हज़ार अट्ठारह में हालांकि संबंधित विभाग द्वारा हिम ऊर्जा से उक्त मामले की जांच भी की गईए मगर न तो लाइटें ठीक हुई और न ही अब तक अनियमितताओं के आरोपियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई हुई है। विभाग अथवा सरकार की एनओसी के बिना चंडीगढ़ अथवा बाहरी राज्य से खरीदी गई इन लाइट्स की मरम्मत नहीं होने से अंधेरे में रह रहे क्षेत्र के ग्रामीणों में पंचायतों तथा प्रशासन के प्रति नाराजगी है। बुधवार को लुधियाना पंचायत में नब्बे फीसदी सोलर लाइट खराब होने तथा इनकी मरम्मत न किए जाने की शिकायत एक स्थानीय युवक द्वारा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर पर दर्ज करवाई जा चुकी है। संबधित पंचायतों के सचिव लायक़ रामए चंपा देवी, पूर्ण चंद, दीप राम व लेख राज आदि ने कहा कि कंपनी के कर्मचारी बार-बार कहने के बावजूद लाइट ठीक करने नहीं पहुंचे तथा कुछ स्थानों पर वारंटी पीरियड भी खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा किए चौदहवां वित्त आयोग अथवा किसी अन्य हैड से अतिरिक्त बजट की व्यवस्था कर इनकी मरम्मत करवाई जा सकती है। सौर ऊर्जा के परियोजना अधिकारी सिरमौर ओम प्रकाश ने कहा किए संगड़ाह ब्लॉक की अधिकतर पंचायतों द्वारा हिम ऊर्जा की बजाय बाहरी राज्यों की कंपनियों से लाइट खरीदी गई है। उन्होंने कहा कि हालांकि प्रदेश सरकार द्वारा सोलर लाइट को लेकर हिम ऊर्जा से एग्रीमेंट किया गया है, मगर अधिकतर पंचायतों द्वारा बिना एनओसी के बाहरी राज्यों से सोलर लाइट खरीदने को प्राथमिकता दी गई।
PM Kisan: पीएम किसान सम्मान निधि के लाभार्थियों को 13वीं किस्त होली से पहले आने की पूरी उम्मीद है। दिसंबर-मार्च की 2000 रुपये की किस्त के आने का टाइम वैसे तो 1 दिसंबर से 31 मार्च के बीच है। PM Kisan Updates: पीएम किसान सम्मान निधि के लाभार्थियों को 13वीं किस्त होली (Holi) से पहले आने की पूरी उम्मीद है। इस बार होली 8 मार्च को पड़ रही है और उम्मीद है कि पीएम किसान की 13वीं किस्त 11 करोड़ से अधिक किसानों के खातों में पहुंच जाए। बता दें दिसंबर-मार्च की 2000 रुपये की किस्त के आने का टाइम 1 दिसंबर से 31 मार्च के बीच है। पीएम किसान योजना में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए मोदी सरकार ने कई कड़े कदम उठाए हैं। इसकी वजह से विलंब हो रहा है। इनमें ई-केवाईसी का अनिवार्य करना, आधार लिंकिंग, जमीन के कागजात की सिडिंग, डोर टू डोर वेरीफिकेश आदि हैं। अब पीएम किसान पोर्टल या कृषि विभाग से रजिस्टर्ड किसानों के पास ई-केवाइसी कराने के लिए लगातार मैसेज भेजा जा रहा है, ताकि कोई पात्र किसानी 13वीं या दिसंबर-मार्च की किस्त से वंचित न होने पाए। इसके अलावा फर्जी लाभार्थियों को पहचानने के लिए पीएफएमएस यूआईडीएआई , आईटी और एनपीसीआई जैसी सस्थाएं कड़ी निगरानी कर रही हैं। लाभार्थी का जमीन के रिकॉर्ड का आधार से मिलान किया जा रहा है। डेटा को UIDAI सर्वर पर भेजकर की पहचान की जा रही है। लाभार्थी के बैंक खाते का ऑथंटिकेशन, किसान का डेटा और बैंक खाता का मिलान किया जा रहा है। बैंक एकाउंट प्रमाणित होने के बाद NPCI से आधार लिंक्ड भुगतान किया जा रहा है। स्टेटस चेक करने के लिए इन स्टेप्स को फॉलो करें. . - पहले पीएम किसान (PM Kisan) की आधिकारिक वेबसाइट https://pmkisan. gov. in/ पर जाएं। - यहां 'Beneficiary Status' के ऑप्शन पर क्लिक करें। यहां नया पेज खुल जाएगा। - नए पेज पर आधार नंबर, बैंक खाता संख्या में से किसी एक विकल्प को चुनिए। इन 2 नंबरों के जरिए आप चेक कर सकते हैं कि आपके अकाउंट में पैसे आए या नहीं। - आपने जिस विकल्प का चुनाव किया है, उसका नंबर भरिए। इसके बाद 'Get Data' पर क्लिक करें। - यहां क्लिक करने के बाद आपको सभी ट्रांजेक्शन की जानकारी मिल जाएगी। यानी कौनसी किस्त कब आपके खाते में आई और किस बैंक अकाउंट में क्रेडिट हुई। - संवैधानिक पद पर काम कर रहे या कर चुके पूर्व या मौजूदा मंत्री, सांसद, विधायक, मेयर, पंचायत प्रमुख। - सभी अवकाश प्राप्त पेंशनभोगी, जिनकी मासिक पेंशन 10 हजार रुपए या इससे अधिक है।
PM Kisan: पीएम किसान सम्मान निधि के लाभार्थियों को तेरहवीं किस्त होली से पहले आने की पूरी उम्मीद है। दिसंबर-मार्च की दो हज़ार रुपयापये की किस्त के आने का टाइम वैसे तो एक दिसंबर से इकतीस मार्च के बीच है। PM Kisan Updates: पीएम किसान सम्मान निधि के लाभार्थियों को तेरहवीं किस्त होली से पहले आने की पूरी उम्मीद है। इस बार होली आठ मार्च को पड़ रही है और उम्मीद है कि पीएम किसान की तेरहवीं किस्त ग्यारह करोड़ से अधिक किसानों के खातों में पहुंच जाए। बता दें दिसंबर-मार्च की दो हज़ार रुपयापये की किस्त के आने का टाइम एक दिसंबर से इकतीस मार्च के बीच है। पीएम किसान योजना में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए मोदी सरकार ने कई कड़े कदम उठाए हैं। इसकी वजह से विलंब हो रहा है। इनमें ई-केवाईसी का अनिवार्य करना, आधार लिंकिंग, जमीन के कागजात की सिडिंग, डोर टू डोर वेरीफिकेश आदि हैं। अब पीएम किसान पोर्टल या कृषि विभाग से रजिस्टर्ड किसानों के पास ई-केवाइसी कराने के लिए लगातार मैसेज भेजा जा रहा है, ताकि कोई पात्र किसानी तेरहवीं या दिसंबर-मार्च की किस्त से वंचित न होने पाए। इसके अलावा फर्जी लाभार्थियों को पहचानने के लिए पीएफएमएस यूआईडीएआई , आईटी और एनपीसीआई जैसी सस्थाएं कड़ी निगरानी कर रही हैं। लाभार्थी का जमीन के रिकॉर्ड का आधार से मिलान किया जा रहा है। डेटा को UIDAI सर्वर पर भेजकर की पहचान की जा रही है। लाभार्थी के बैंक खाते का ऑथंटिकेशन, किसान का डेटा और बैंक खाता का मिलान किया जा रहा है। बैंक एकाउंट प्रमाणित होने के बाद NPCI से आधार लिंक्ड भुगतान किया जा रहा है। स्टेटस चेक करने के लिए इन स्टेप्स को फॉलो करें. . - पहले पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट https://pmkisan. gov. in/ पर जाएं। - यहां 'Beneficiary Status' के ऑप्शन पर क्लिक करें। यहां नया पेज खुल जाएगा। - नए पेज पर आधार नंबर, बैंक खाता संख्या में से किसी एक विकल्प को चुनिए। इन दो नंबरों के जरिए आप चेक कर सकते हैं कि आपके अकाउंट में पैसे आए या नहीं। - आपने जिस विकल्प का चुनाव किया है, उसका नंबर भरिए। इसके बाद 'Get Data' पर क्लिक करें। - यहां क्लिक करने के बाद आपको सभी ट्रांजेक्शन की जानकारी मिल जाएगी। यानी कौनसी किस्त कब आपके खाते में आई और किस बैंक अकाउंट में क्रेडिट हुई। - संवैधानिक पद पर काम कर रहे या कर चुके पूर्व या मौजूदा मंत्री, सांसद, विधायक, मेयर, पंचायत प्रमुख। - सभी अवकाश प्राप्त पेंशनभोगी, जिनकी मासिक पेंशन दस हजार रुपए या इससे अधिक है।
Meerut : गंगानगर थानाक्षेत्र के एफ ब्लॉक में एक हृदयविदारक घटना ने पूरे परिवार को शोकाकुल कर दिया। बाथरूम में नहाने गया उनका लाडला मृत पाया गया। बाथरूम में गैस का गीजर लगा हुआ था। बताया जा रहा है कि गैस रिसाव की वजह से उसका दम घुट गया और उसकी मौके पर ही मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद मानो परिवार पर कहर टूट पड़ा। सभी दहाड़े मारकर रोने लगे। शोर सुनकर पड़ोसी भी पहुंच गए। हर कोई सकते में था अचानक इस तरह से हादसा कैसे हो गया। गंगानगर के एफ ब्लॉक में प्रेम कुमार अपनी पत्नी सुशीला और बच्चों के साथ रहते हैं। उनकी बेटी की शादी हो चुकी थी। घर में बेटे रवि और नवीन थे। 22 वर्षीय रवि सबसे बड़ा बेटा था और ट्रांसलेम एकेडमी में बीफार्मा थर्ड ईयर का स्टूडेंट था। बताया जा रहा है कि सुबह करीब 12:30 बजे वह बाथरूम में नहाने घुसा। लेकिन बाहर नहीं निकला। करीब आधे घंटे बाद जब बाथरूम में पानी गिराने की आवाज नहीं आई तो परिवार वालों ने आवाज लगाई। लेकिन रवि ने अंदर से आवाज नहीं दी। इसके बाद तो परिवार सहम गया। वे दरवाजा पीटने लगे, तब भी रवि ने कोई आवाज नहीं दी। बाथरूम के बाहर परिजनों का रोना-धोना शुरू हो गया। शोर सुनकर पड़ोसी भी आ गए। बाथरूम का दरवाजा खोला तो रवि अंदर मृत पड़ा था। रवि को मृत देखकर मां तो बेसुध होकर गिर पड़ी। पड़ोसियों की मदद से रवि को प्राइवेट हॉस्पिटल ले जाया गया लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद तो पूरे परिवार में शोक की लहर फैल गई। पड़ोसी भी सकते में आ गए। अचानक इस तरह के हादसा होने की किसी को आशंका नहीं थी। पड़ोसी परिजनों को चुप करा रहे थे लेकिन कोई भी अपने आप में नहीं था। रवि को जब बाथरूम से बाहर निकाला गया तो गैस की तेज बदबू आ रही थी। बाथरूम में सिलेंडर वाला गीजर लगा हुआ है। बताया जा रहा है कि गैस रिसाव की वजह से रवि का दम घुटने से मौत हो गई। गंगानगर थाना के इंस्पेक्टर राजेश भारती ने बताया कि घटना को लेकर कोई भी कंप्लेन नहीं आई है। मृतक का पोस्टमार्टम भी नहीं कराया गया।
Meerut : गंगानगर थानाक्षेत्र के एफ ब्लॉक में एक हृदयविदारक घटना ने पूरे परिवार को शोकाकुल कर दिया। बाथरूम में नहाने गया उनका लाडला मृत पाया गया। बाथरूम में गैस का गीजर लगा हुआ था। बताया जा रहा है कि गैस रिसाव की वजह से उसका दम घुट गया और उसकी मौके पर ही मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद मानो परिवार पर कहर टूट पड़ा। सभी दहाड़े मारकर रोने लगे। शोर सुनकर पड़ोसी भी पहुंच गए। हर कोई सकते में था अचानक इस तरह से हादसा कैसे हो गया। गंगानगर के एफ ब्लॉक में प्रेम कुमार अपनी पत्नी सुशीला और बच्चों के साथ रहते हैं। उनकी बेटी की शादी हो चुकी थी। घर में बेटे रवि और नवीन थे। बाईस वर्षीय रवि सबसे बड़ा बेटा था और ट्रांसलेम एकेडमी में बीफार्मा थर्ड ईयर का स्टूडेंट था। बताया जा रहा है कि सुबह करीब बारह:तीस बजे वह बाथरूम में नहाने घुसा। लेकिन बाहर नहीं निकला। करीब आधे घंटे बाद जब बाथरूम में पानी गिराने की आवाज नहीं आई तो परिवार वालों ने आवाज लगाई। लेकिन रवि ने अंदर से आवाज नहीं दी। इसके बाद तो परिवार सहम गया। वे दरवाजा पीटने लगे, तब भी रवि ने कोई आवाज नहीं दी। बाथरूम के बाहर परिजनों का रोना-धोना शुरू हो गया। शोर सुनकर पड़ोसी भी आ गए। बाथरूम का दरवाजा खोला तो रवि अंदर मृत पड़ा था। रवि को मृत देखकर मां तो बेसुध होकर गिर पड़ी। पड़ोसियों की मदद से रवि को प्राइवेट हॉस्पिटल ले जाया गया लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद तो पूरे परिवार में शोक की लहर फैल गई। पड़ोसी भी सकते में आ गए। अचानक इस तरह के हादसा होने की किसी को आशंका नहीं थी। पड़ोसी परिजनों को चुप करा रहे थे लेकिन कोई भी अपने आप में नहीं था। रवि को जब बाथरूम से बाहर निकाला गया तो गैस की तेज बदबू आ रही थी। बाथरूम में सिलेंडर वाला गीजर लगा हुआ है। बताया जा रहा है कि गैस रिसाव की वजह से रवि का दम घुटने से मौत हो गई। गंगानगर थाना के इंस्पेक्टर राजेश भारती ने बताया कि घटना को लेकर कोई भी कंप्लेन नहीं आई है। मृतक का पोस्टमार्टम भी नहीं कराया गया।
महाभारत सीरियल देखने के बाद गोल्डन बाबा को सोने पहनने का शौक लग गया. उन्होंने इसके बाद 4 सोने की चेन बनवाई जो लगभग ढाई सौ ग्राम की हैं. सभी जानते हैं कोरोना से अगर बचना है तो दो गज की दूरी का पालन और मास्क लगाकर ही रखना होगा. क्योंकि मास्क ही वो शस्त्र है जो इस महामारी से बचाने में आपकी मदद कर सकता है. अब चूंकि मास्क आज के समय में एक जरूरत बन गया है तो ऐसे में मार्किट में हर तरह के मास्क उपलब्ध हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोने के मास्क के बारे में सुना है. उत्तर प्रदेश के कानपुर में गोल्डन बाबा के नाम से मशहूर मनोज सेंगर जिन्हें 'मनोजानंद महाराज' के नाम से भी जाना जाता है, उन्होंने सोने का मास्क बनवाया है. इस मास्क की कीमत लगभग 5 लाख रुपए बताई जा रही है. मनोजानंद महाराज उर्फ गोल्डन बाबा के मुताबिक, मास्क के अंदर एक सैनिटाइजर की लेयर है जो 36 महीने तक काम करेगी. उन्होंने अपने मास्क को 'शिव शरण मास्क' का नाम दिया है. मनोज को सोना पहनने का बहुत शौक है. वो चार सोने की चेन पहनते हैं जिनका वजन एक साथ लगभग 250 ग्राम है. उनके पास एक शंख, मछली और भगवान हनुमान का लॉकेट है. सभी सोने से बने हैं. इसके अलावा उनके पास एक जोड़ी गोल्डन इयररिंग्स, रिवॉल्वर के लिए एक गोल्डन कवर और तीन गोल्ड बेल्ट हैं. मनोज ने कहा कि इतना सोना पहने के चलते उन्हें बहुत बार धमकियां भी मिल चुकी हैं. जिसको देखते हुए मनोज ने अपनी सुरक्षा के लिए दो गार्ड रखे हुए हैं.
महाभारत सीरियल देखने के बाद गोल्डन बाबा को सोने पहनने का शौक लग गया. उन्होंने इसके बाद चार सोने की चेन बनवाई जो लगभग ढाई सौ ग्राम की हैं. सभी जानते हैं कोरोना से अगर बचना है तो दो गज की दूरी का पालन और मास्क लगाकर ही रखना होगा. क्योंकि मास्क ही वो शस्त्र है जो इस महामारी से बचाने में आपकी मदद कर सकता है. अब चूंकि मास्क आज के समय में एक जरूरत बन गया है तो ऐसे में मार्किट में हर तरह के मास्क उपलब्ध हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोने के मास्क के बारे में सुना है. उत्तर प्रदेश के कानपुर में गोल्डन बाबा के नाम से मशहूर मनोज सेंगर जिन्हें 'मनोजानंद महाराज' के नाम से भी जाना जाता है, उन्होंने सोने का मास्क बनवाया है. इस मास्क की कीमत लगभग पाँच लाख रुपए बताई जा रही है. मनोजानंद महाराज उर्फ गोल्डन बाबा के मुताबिक, मास्क के अंदर एक सैनिटाइजर की लेयर है जो छत्तीस महीने तक काम करेगी. उन्होंने अपने मास्क को 'शिव शरण मास्क' का नाम दिया है. मनोज को सोना पहनने का बहुत शौक है. वो चार सोने की चेन पहनते हैं जिनका वजन एक साथ लगभग दो सौ पचास ग्राम है. उनके पास एक शंख, मछली और भगवान हनुमान का लॉकेट है. सभी सोने से बने हैं. इसके अलावा उनके पास एक जोड़ी गोल्डन इयररिंग्स, रिवॉल्वर के लिए एक गोल्डन कवर और तीन गोल्ड बेल्ट हैं. मनोज ने कहा कि इतना सोना पहने के चलते उन्हें बहुत बार धमकियां भी मिल चुकी हैं. जिसको देखते हुए मनोज ने अपनी सुरक्षा के लिए दो गार्ड रखे हुए हैं.
गर्मी के इस मौसम में बुधवार देर शाम आए जबर्दस्त आंधी-तूफान ने कई राज्यों में कहर बरपाया है. जिसके कारण कई राज्य बड़ी बुरी तरह से प्रभावित हुए है. इस अचानक आए तूफान और भवंडर ने राजस्थान के अलवर, भरतपुर और धौलपुर जिलों में अपना सही कहर दिखाया है. इसमें 100 से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर है और तक़रीबन 27 लोगों की मौत बताई गई है. वही उत्तर प्रदेश में इस आंधी तूफान के शिकार से दस लोगों की मौत हुई. जानकारी के अनुसार, बेमौसम बारिश और आंधी-तूफान से कई राज्य में हालात काफी ख़राब है. राजस्थान शहर के अलवर जिले में बिजली गायब है. पश्चिमी बंगाल, आन्ध्र प्रदेश, पंजाब, हरियाण, और हिमाचल प्रदेश में इस बारिश और तूफान से जनजीवन काफी बुरी तरह से प्रभावित हुआ है. संभल में भी एक व्यक्ति की मौत की खबर है। वहीं आगरा जिले में चार लोगों की मौत हुई है. इस कहर से हर राज्यों में कई लोगों की जाने गई है फिलहाल सभी राज्यों के प्रशासन राहत और बचाव कार्य में लगे हुए है. राजधानी दिल्ली के लोग जो मई की गर्मी से जूझ रहे है इस बुधवार की बदली फिजा ने उनको अच्छी खासी राहत दी. हालांकि पहले तूफान से काफी परेशानी हुए पर बाद में मौसम काफी सुहावना हो गया था. परंतु इस भरी आंधी ने दिल्ली की रफ्तार थाम दी. सड़कों पर चल रहे ट्रैफिक को इससे काफी परेशानी हुई लोगों को घंटों भर ट्रैफिक जाम में रुकना पड़ा. इस खराब मौसम का असर हवाई सेवा पर भी पड़ा. तेज हवा और बारिश की वजह से आइजीआइ एयरपोर्ट आ रही कई उड़ानों को आसपास के एयरपोर्ट के लिए डायवर्ट कर दिया गया. उत्तराखंड, नैनीताल, अल्मोड़ा, देहरादून और हरिद्वार समेत कई हिस्सों में भरी बारिश हुई जिससे वातावरण में ठंडक भी महसूस की गई है. कहा यह भी गया है की बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री व यमनोत्री में बारिश होने से श्रद्धालुओं को ठंड का काफी सामना करना पड़ रहा है. जिसके के कारण यात्रा को बाधित किया गया है. कल दिन से यह बिजली नही है और हाईवे पर पेड़ गिरे है. जिससे रास्ते बंद हो गए है. जगह जगह पर लैंडस्लाइड की भी खबर बताई गई है.
गर्मी के इस मौसम में बुधवार देर शाम आए जबर्दस्त आंधी-तूफान ने कई राज्यों में कहर बरपाया है. जिसके कारण कई राज्य बड़ी बुरी तरह से प्रभावित हुए है. इस अचानक आए तूफान और भवंडर ने राजस्थान के अलवर, भरतपुर और धौलपुर जिलों में अपना सही कहर दिखाया है. इसमें एक सौ से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर है और तक़रीबन सत्ताईस लोगों की मौत बताई गई है. वही उत्तर प्रदेश में इस आंधी तूफान के शिकार से दस लोगों की मौत हुई. जानकारी के अनुसार, बेमौसम बारिश और आंधी-तूफान से कई राज्य में हालात काफी ख़राब है. राजस्थान शहर के अलवर जिले में बिजली गायब है. पश्चिमी बंगाल, आन्ध्र प्रदेश, पंजाब, हरियाण, और हिमाचल प्रदेश में इस बारिश और तूफान से जनजीवन काफी बुरी तरह से प्रभावित हुआ है. संभल में भी एक व्यक्ति की मौत की खबर है। वहीं आगरा जिले में चार लोगों की मौत हुई है. इस कहर से हर राज्यों में कई लोगों की जाने गई है फिलहाल सभी राज्यों के प्रशासन राहत और बचाव कार्य में लगे हुए है. राजधानी दिल्ली के लोग जो मई की गर्मी से जूझ रहे है इस बुधवार की बदली फिजा ने उनको अच्छी खासी राहत दी. हालांकि पहले तूफान से काफी परेशानी हुए पर बाद में मौसम काफी सुहावना हो गया था. परंतु इस भरी आंधी ने दिल्ली की रफ्तार थाम दी. सड़कों पर चल रहे ट्रैफिक को इससे काफी परेशानी हुई लोगों को घंटों भर ट्रैफिक जाम में रुकना पड़ा. इस खराब मौसम का असर हवाई सेवा पर भी पड़ा. तेज हवा और बारिश की वजह से आइजीआइ एयरपोर्ट आ रही कई उड़ानों को आसपास के एयरपोर्ट के लिए डायवर्ट कर दिया गया. उत्तराखंड, नैनीताल, अल्मोड़ा, देहरादून और हरिद्वार समेत कई हिस्सों में भरी बारिश हुई जिससे वातावरण में ठंडक भी महसूस की गई है. कहा यह भी गया है की बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री व यमनोत्री में बारिश होने से श्रद्धालुओं को ठंड का काफी सामना करना पड़ रहा है. जिसके के कारण यात्रा को बाधित किया गया है. कल दिन से यह बिजली नही है और हाईवे पर पेड़ गिरे है. जिससे रास्ते बंद हो गए है. जगह जगह पर लैंडस्लाइड की भी खबर बताई गई है.
चीन के वुहान में एक रात में बुखार से 700 से ज्यादा बच्चे बीमार. (twitter. com/Reuters) वुहान. चीन में जीरो कोविड पॉलिसी के कठेर नियमों में ढील दिए जाने के बाद कोरोना के मामले बहुत तेजी से बढ़े हैं. वुहान शहर में बुखार से सैकड़ों बच्चों के बीमार होने की खबर आ रही है. बताया गया है कि केवल 13 दिसंबर की आधी रात में बुखार से पीड़ित 700 से अधिक बच्चे डॉक्टरों को दिखाने के लिए कतार में खड़े थे. इसके कारण अस्पतालों में लंबी लाइनें लग रहीं हैं. जबकि बच्चों का इलाज करने के लिए बहुत कम डॉक्टर अस्पताल में मौजूद हैं. खबरों में कहा गया है कि वुहान के फीवर क्लिनिक्स में लंबी-लंबी लाइनें लग रही हैं. डॉक्टरों के घर पर इलाज से ठीक होने के लिए कहने के बावजूद कोविड-19 के रोगी क्लिनिकों में आ रहे हैं. कोविड पॉजिटिव पाए जा रहे लोग अभी भी कोरोनावायरस से काफी डरे हुए हैं. इलाज के लिए स्थानीय अस्पताल जाना टेस्ट के बाद उनका अगला कदम हो रहा है. भले ही उनके लक्षण हल्के ही क्यों न हों. जबकि चीन का सरकारी मीडिया कोविड-19 के बारे में जानकारी प्रकाशित करने और घर पर ठीक होने के तरीकों को प्रकाशित करने के लिए लगातार दिन-रात काम में जुटा हुआ है. वुहान शहर में फीवर क्लीनिकों के सामने लंबी लाइनें चीनी सोशल मीडिया पर टॉप ट्रेंडिंग बन गई हैं. डॉक्टरों के कमरों से लेकर पार्किंग तक लोगों की कतारें लग रही हैं. इस हालात को देखते हुए चीन के कुछ विश्वविद्यालयों ने कहा है कि वे जनवरी में नववर्ष की छुट्टियों के दौरान कोविड-19 का प्रकोप और बढ़ने की आशंका को देखते हुए छात्रों को घर से पढ़ाई करते हुए सेमेस्टर पूरा करने की अनुमति देंगे. अभी यह साफ नहीं है कि कितने स्कूल-कॉलेज ऐसा करेंगे. बहरहाल शंघाई और आसपास के शहरों में विश्वविद्यालयों ने कहा कि छात्रों को या तो जल्दी घर लौटने या परिसर में रहने और हर 48 घंटे पर जांच कराने का विकल्प दिया जाएगा. (एजेंसी इनपुटः एपी) .
चीन के वुहान में एक रात में बुखार से सात सौ से ज्यादा बच्चे बीमार. वुहान. चीन में जीरो कोविड पॉलिसी के कठेर नियमों में ढील दिए जाने के बाद कोरोना के मामले बहुत तेजी से बढ़े हैं. वुहान शहर में बुखार से सैकड़ों बच्चों के बीमार होने की खबर आ रही है. बताया गया है कि केवल तेरह दिसंबर की आधी रात में बुखार से पीड़ित सात सौ से अधिक बच्चे डॉक्टरों को दिखाने के लिए कतार में खड़े थे. इसके कारण अस्पतालों में लंबी लाइनें लग रहीं हैं. जबकि बच्चों का इलाज करने के लिए बहुत कम डॉक्टर अस्पताल में मौजूद हैं. खबरों में कहा गया है कि वुहान के फीवर क्लिनिक्स में लंबी-लंबी लाइनें लग रही हैं. डॉक्टरों के घर पर इलाज से ठीक होने के लिए कहने के बावजूद कोविड-उन्नीस के रोगी क्लिनिकों में आ रहे हैं. कोविड पॉजिटिव पाए जा रहे लोग अभी भी कोरोनावायरस से काफी डरे हुए हैं. इलाज के लिए स्थानीय अस्पताल जाना टेस्ट के बाद उनका अगला कदम हो रहा है. भले ही उनके लक्षण हल्के ही क्यों न हों. जबकि चीन का सरकारी मीडिया कोविड-उन्नीस के बारे में जानकारी प्रकाशित करने और घर पर ठीक होने के तरीकों को प्रकाशित करने के लिए लगातार दिन-रात काम में जुटा हुआ है. वुहान शहर में फीवर क्लीनिकों के सामने लंबी लाइनें चीनी सोशल मीडिया पर टॉप ट्रेंडिंग बन गई हैं. डॉक्टरों के कमरों से लेकर पार्किंग तक लोगों की कतारें लग रही हैं. इस हालात को देखते हुए चीन के कुछ विश्वविद्यालयों ने कहा है कि वे जनवरी में नववर्ष की छुट्टियों के दौरान कोविड-उन्नीस का प्रकोप और बढ़ने की आशंका को देखते हुए छात्रों को घर से पढ़ाई करते हुए सेमेस्टर पूरा करने की अनुमति देंगे. अभी यह साफ नहीं है कि कितने स्कूल-कॉलेज ऐसा करेंगे. बहरहाल शंघाई और आसपास के शहरों में विश्वविद्यालयों ने कहा कि छात्रों को या तो जल्दी घर लौटने या परिसर में रहने और हर अड़तालीस घंटाटे पर जांच कराने का विकल्प दिया जाएगा. .
डायबिटीज जटिल बीमारी है, लेकिन ब्लड शुगर लेवल की हेल्दी रेंज बनाए रखने से जोखिम को काफी कम किया जा सकता है. ब्लड शुगर लेवल को मैनेज करने में डाइट, एक्सरसाइज, पानी , नींद , टेंशन के लेवल और ओवरऑल लाइफस्टाइल बहुत जरूरी है. जब आप ब्लड शुगर को मैनेज करने की बात करते हैं, तो इसमें कार्बोहाइड्रेट को पूरी तरह से बाहर करने की सिफारिश नहीं की जाती है. बल्कि हम ऐसे आहार की ओर रुख कर सकते हैं ,जो कॉम्पलेक्स कार्ब्स का सही अनुपात हमारे शरीर को देता हो. अपनी डायबिटिक डाइट में कॉम्पलेक्स कार्ब्स को कैसे शामिल करें? - रिफाइंड गेहूं के आटे की रोटियों को मल्टीग्रेन या ओट्स रोटियों से बदलें. - सफेद चावल को ब्राउन राइस से बदलें. - जब भी संभव हो, आप ब्राउन राइस को दलिया या कीनुआ (quinoa) से भी बदल सकते हैं. - सलाद में उबले हुए बीन्स, स्प्राउट्स, उबली हुई दालें, मेवे या मिले-जुले बीज डालें. - चॉकलेट, कुकीज, बेकरी उत्पादों से बचें, बिना मीठा 'मुखवास' ले सकते हैं. - फ्रेंच फ्राइज़ और पैकेज्ड स्नैक्स से बचें-घर में बने खाकरा और वेजिटेबल एयर-फ्राइड क्रिस्प्स ट्राई करें. डायबिटीज वाले लोगों के लिए, डेली मेनू में कॉम्पलेक्स कार्बोहाइड्रेट के प्रमुख अनुपात के साथ कम कार्बोहाइड्रेट वाली डाइट को फोलो करना ब्लड शुगर लेवल में जरूरी बैलेंस लाया जा सकता है.
डायबिटीज जटिल बीमारी है, लेकिन ब्लड शुगर लेवल की हेल्दी रेंज बनाए रखने से जोखिम को काफी कम किया जा सकता है. ब्लड शुगर लेवल को मैनेज करने में डाइट, एक्सरसाइज, पानी , नींद , टेंशन के लेवल और ओवरऑल लाइफस्टाइल बहुत जरूरी है. जब आप ब्लड शुगर को मैनेज करने की बात करते हैं, तो इसमें कार्बोहाइड्रेट को पूरी तरह से बाहर करने की सिफारिश नहीं की जाती है. बल्कि हम ऐसे आहार की ओर रुख कर सकते हैं ,जो कॉम्पलेक्स कार्ब्स का सही अनुपात हमारे शरीर को देता हो. अपनी डायबिटिक डाइट में कॉम्पलेक्स कार्ब्स को कैसे शामिल करें? - रिफाइंड गेहूं के आटे की रोटियों को मल्टीग्रेन या ओट्स रोटियों से बदलें. - सफेद चावल को ब्राउन राइस से बदलें. - जब भी संभव हो, आप ब्राउन राइस को दलिया या कीनुआ से भी बदल सकते हैं. - सलाद में उबले हुए बीन्स, स्प्राउट्स, उबली हुई दालें, मेवे या मिले-जुले बीज डालें. - चॉकलेट, कुकीज, बेकरी उत्पादों से बचें, बिना मीठा 'मुखवास' ले सकते हैं. - फ्रेंच फ्राइज़ और पैकेज्ड स्नैक्स से बचें-घर में बने खाकरा और वेजिटेबल एयर-फ्राइड क्रिस्प्स ट्राई करें. डायबिटीज वाले लोगों के लिए, डेली मेनू में कॉम्पलेक्स कार्बोहाइड्रेट के प्रमुख अनुपात के साथ कम कार्बोहाइड्रेट वाली डाइट को फोलो करना ब्लड शुगर लेवल में जरूरी बैलेंस लाया जा सकता है.
सिवनी, नईदुनिया प्रतिनिधि। पेंच नेशनल पार्क के बफर जोन के तेलिया क्षेत्र में सैलानियों को ब्लैक लेपर्ड (बघीरा) के दीदार हुए। करीब 4 घंटे तक काला तेंदुआ एक पेड़ में बैठकर अठखेलियां करता नजर आया। इस रोमांचक पल को सैलानियों ने अपने कैमरे में कैद किया। 32 वाहनों में गए सैलानियों ने देखा बघीरा : जानकारी के मुताबिक रविवार को दोपहर की शिफ्ट में 32 वाहनों में सैलानी बफर जोन के आकर्षक नजारे व वन्य प्राणियों के दीदार करने गए थे। यह सभी सैलानी उस समय रोमांच से भर गए जब उन्हें ब्लैक लेपर्ड के दीदार हुए। पेंच के बफर जोन के तेलिया क्षेत्र में ब्लैक लेपर्ड सैलानियों को एक पेड़ में बैठा नजर आया। इसकी जानकारी लगते हैं सभी पर्यटक तेलिया क्षेत्र में पहुंच गए। सभी ने ब्लैक लेपर्ड के दीदार किए। सैलानियों को पोज देता रहा लेपर्ड : फैमिली के साथ रविवार को बफर जोन में सफारी करने पहुंचे पेंच पार्क के नेचरालिस्ट ओमवीर चौधरी ने बताया कि ब्लैक लेपर्ड को देखकर सैलानियों ने उसकी अठखेलियों को कैमरे में कैद किया। इस दौरान ब्लैक लेपर्ड सैलानियों को कई पोज देते नजर आया। सैलानियों ने ब्लैक लेपर्ड की सभी हरकतों का लुत्फ उठाया। चार घंटे से ज्यादा समय तक ब्लैक लेपर्ड पेड़ पर बैठा रहा। निडर है ब्लेक लेपर्ड : आमतौर पर लेपर्ड शर्मीले स्वभाव का होता है। वाहनों व लोगों को देखकर वह तुरंत भाग जाता है, लेकिन पेंच पार्क के कोर व बफर जोन में देखे जाने वाला यह ब्लैक लेपर्ड निडर है। करीब डेढ़ साल का ब्लैक लेपर्ड अब अपनी मां से अलग हो गया है और खुद ही शिकार करने लगा है। यह ब्लैक लेपर्ड वाहनों व सैलानियों को देखकर भागने की बजाए बैठा रहता है। कुछ ऐसा ही रविवार को हुआ। इनके भी हो रहे दीदार : जिले के पेंच टाइगर रिजर्व के बफर रेंज में पर्यटकों को जंगल सफारी के दौरान चीतल, सांभर, बायसन जैसे वन्य प्राणियों के साथ-साथ टाइगर के भी दीदार समय-समय पर हो रहे हैं। वन्य प्राणियों के अधिक संख्या में दिखाई देने के कारण बफर जोन में पर्यटकों की आवाजाही लगातार बढ़ी है। बफर जोन में नाइट सफारी प्रारंभ करने के प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन अब तक इस दिशा में कुछ नहीं हो पाया है।
सिवनी, नईदुनिया प्रतिनिधि। पेंच नेशनल पार्क के बफर जोन के तेलिया क्षेत्र में सैलानियों को ब्लैक लेपर्ड के दीदार हुए। करीब चार घंटाटे तक काला तेंदुआ एक पेड़ में बैठकर अठखेलियां करता नजर आया। इस रोमांचक पल को सैलानियों ने अपने कैमरे में कैद किया। बत्तीस वाहनों में गए सैलानियों ने देखा बघीरा : जानकारी के मुताबिक रविवार को दोपहर की शिफ्ट में बत्तीस वाहनों में सैलानी बफर जोन के आकर्षक नजारे व वन्य प्राणियों के दीदार करने गए थे। यह सभी सैलानी उस समय रोमांच से भर गए जब उन्हें ब्लैक लेपर्ड के दीदार हुए। पेंच के बफर जोन के तेलिया क्षेत्र में ब्लैक लेपर्ड सैलानियों को एक पेड़ में बैठा नजर आया। इसकी जानकारी लगते हैं सभी पर्यटक तेलिया क्षेत्र में पहुंच गए। सभी ने ब्लैक लेपर्ड के दीदार किए। सैलानियों को पोज देता रहा लेपर्ड : फैमिली के साथ रविवार को बफर जोन में सफारी करने पहुंचे पेंच पार्क के नेचरालिस्ट ओमवीर चौधरी ने बताया कि ब्लैक लेपर्ड को देखकर सैलानियों ने उसकी अठखेलियों को कैमरे में कैद किया। इस दौरान ब्लैक लेपर्ड सैलानियों को कई पोज देते नजर आया। सैलानियों ने ब्लैक लेपर्ड की सभी हरकतों का लुत्फ उठाया। चार घंटे से ज्यादा समय तक ब्लैक लेपर्ड पेड़ पर बैठा रहा। निडर है ब्लेक लेपर्ड : आमतौर पर लेपर्ड शर्मीले स्वभाव का होता है। वाहनों व लोगों को देखकर वह तुरंत भाग जाता है, लेकिन पेंच पार्क के कोर व बफर जोन में देखे जाने वाला यह ब्लैक लेपर्ड निडर है। करीब डेढ़ साल का ब्लैक लेपर्ड अब अपनी मां से अलग हो गया है और खुद ही शिकार करने लगा है। यह ब्लैक लेपर्ड वाहनों व सैलानियों को देखकर भागने की बजाए बैठा रहता है। कुछ ऐसा ही रविवार को हुआ। इनके भी हो रहे दीदार : जिले के पेंच टाइगर रिजर्व के बफर रेंज में पर्यटकों को जंगल सफारी के दौरान चीतल, सांभर, बायसन जैसे वन्य प्राणियों के साथ-साथ टाइगर के भी दीदार समय-समय पर हो रहे हैं। वन्य प्राणियों के अधिक संख्या में दिखाई देने के कारण बफर जोन में पर्यटकों की आवाजाही लगातार बढ़ी है। बफर जोन में नाइट सफारी प्रारंभ करने के प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन अब तक इस दिशा में कुछ नहीं हो पाया है।
Delhi से बड़ी खबर है. 18 जुलाई को NDA की घटक दलों की बैठक बुलाई गई है. इस बैठक में NDA ने छोटे-छोटे दलों को भी न्योता दी है. Delhi के अशोक होटल में ये बैठक बुलाई गई है. चुनाव की तैयारियों को लेकर ये बैठक बुलाई गई है. Seema Bhabhi कह कर जिसका Sachin Meena के मोहल्ले वालों ने किया था Welcom, अब क्यों मुंह मोड़ रहे ? Breaking News: ATS को Seema Haider के पास से मिली ऐसी चीज़ें जिसे जानकर उड़ जाएंगे आपके होश?
Delhi से बड़ी खबर है. अट्ठारह जुलाई को NDA की घटक दलों की बैठक बुलाई गई है. इस बैठक में NDA ने छोटे-छोटे दलों को भी न्योता दी है. Delhi के अशोक होटल में ये बैठक बुलाई गई है. चुनाव की तैयारियों को लेकर ये बैठक बुलाई गई है. Seema Bhabhi कह कर जिसका Sachin Meena के मोहल्ले वालों ने किया था Welcom, अब क्यों मुंह मोड़ रहे ? Breaking News: ATS को Seema Haider के पास से मिली ऐसी चीज़ें जिसे जानकर उड़ जाएंगे आपके होश?
अतः भरत द्वारा मान्य मूल चार रसों की भांति करुण भी एक स्वतन्त्र र के कप में स्वीकार किया जा कता है । यह संदैव किसी रस के या पारस्परिक सम्बन्ध से ही नहीं उत्पन्न होता है, अपितु स्वतन्त्र रूप में भी इसी बहा रहती है। उदाहरण के लिए वीकिका यह पप द्रष्टव्य हैमा निषाद प्रतिष्ठा काममोहितम् ।। की मृत्यु देकर महर्षि वाल्मीकि का हृदय करुणाभूत हो गया। परिणामस्वरूप उनके मुख से सहला बहेलिये के लिए अभिशाप निकल पहा । कुछ दिनों का मत है कि यहां पर अभिशाप का कारण वाल्मीकि का रहा होगा और स्खलिए करुण की उत्पति उन्होंने रोड से मान लिया है; किन्तु वाल्मीकि जैसे महणि के हृदय में को की पेक्षा करुणा की अनुभूति अधिक स्वाभाविक है; क्योंकि एक तो वाल्मीकि जैसे महकेका होना ही अस्वामाविक है और दूसरे, ब्रोध के कारण शाप देना उनके लिए और भी अस्वाभाविक प्रतीत होता है । अतएव यहाँ पर करुण रस की उत्पत्ति स्वतन्त्र रूप से मानना समाचीन प्रतीत होता है । करुण शब्द की व्युत्पति - Scho má करुण शब्द की व्युत्पति के सम्बन्ध में शारदातनय का कथन द्रष्टव्य है। उनके अनुसार, काय है - अलेश । बम बुद्धि कलश को करु अभिप्राय सहन नहीं कर पाती है, तब उसे करुणाकरुणा की प्रतीति में करुण रस होता है। अन्य लोगों में रहने वाले क्लेश के कारण Ame din resp
अतः भरत द्वारा मान्य मूल चार रसों की भांति करुण भी एक स्वतन्त्र र के कप में स्वीकार किया जा कता है । यह संदैव किसी रस के या पारस्परिक सम्बन्ध से ही नहीं उत्पन्न होता है, अपितु स्वतन्त्र रूप में भी इसी बहा रहती है। उदाहरण के लिए वीकिका यह पप द्रष्टव्य हैमा निषाद प्रतिष्ठा काममोहितम् ।। की मृत्यु देकर महर्षि वाल्मीकि का हृदय करुणाभूत हो गया। परिणामस्वरूप उनके मुख से सहला बहेलिये के लिए अभिशाप निकल पहा । कुछ दिनों का मत है कि यहां पर अभिशाप का कारण वाल्मीकि का रहा होगा और स्खलिए करुण की उत्पति उन्होंने रोड से मान लिया है; किन्तु वाल्मीकि जैसे महणि के हृदय में को की पेक्षा करुणा की अनुभूति अधिक स्वाभाविक है; क्योंकि एक तो वाल्मीकि जैसे महकेका होना ही अस्वामाविक है और दूसरे, ब्रोध के कारण शाप देना उनके लिए और भी अस्वाभाविक प्रतीत होता है । अतएव यहाँ पर करुण रस की उत्पत्ति स्वतन्त्र रूप से मानना समाचीन प्रतीत होता है । करुण शब्द की व्युत्पति - Scho má करुण शब्द की व्युत्पति के सम्बन्ध में शारदातनय का कथन द्रष्टव्य है। उनके अनुसार, काय है - अलेश । बम बुद्धि कलश को करु अभिप्राय सहन नहीं कर पाती है, तब उसे करुणाकरुणा की प्रतीति में करुण रस होता है। अन्य लोगों में रहने वाले क्लेश के कारण Ame din resp
विश्वास न्यूज की पड़ताल में यूपी के सीएम योगी के वायरल वीडियो को लेकर किया जा रहा दावा गलत साबित हुआ। सीएम योगी आदित्यनाथ ने महात्मा गांधी की मूर्ति पर फूल चढ़ाने के बाद हाथ जोड़कर नमन किया था। वायरल वीडियो महात्मा गांधी की पुण्यतिथि 30 जनवरी 2022 का है। वायरल वीडियो दूसरे एंगल से लिया गया है। नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि गांधी जयंती के मौके पर सीएम योगी आदित्यनाथ महात्मा गांधी को बेमन से श्रद्धांजलि देते हुए बिना प्रणाम किए ही चले गए। विश्वास न्यूज की पड़ताल में वायरल दावा गलत साबित हुआ। वायरल वीडियो महात्मा गांधी की पुण्यतिथि 30 जनवरी 2022 का है। सीएम योगी ने महात्मा गांधी की मूर्ति पर फूल चढ़ाने के बाद हाथ जोड़कर नमन किया था। वायरल वीडियो दूसरे एंगल से लिया गया है, जिसे भ्रामक दावे के साथ शेयर किया जा रहा है। क्या है वायरल पोस्ट में ? वायरल पोस्ट के क्लेम को यहां ज्यों का त्यों ही लिखा गया है। इसे सच मानकर दूसरे यूजर्स भी वायरल कर रहे हैं। पोस्ट का आर्काइव वर्जन यहां देखें। वायरल वीडियो की सच्चाई जानने के लिए हमने गूगल पर कीवर्ड्स से सर्च करना शुरू किया। इस दौरान हमें यह वीडियो एएनआई के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया मिला। वीडियो को 30 जनवरी 2022 को शेयर किया गया था। दी गई जानकारी के मुताबिक, वीडियो गांधी की पुण्यतिथि का है। वीडियो में देखा जा सकता है कि जैसे ही सीएम योगी मूर्ति के सामने प्रणाम करते हैं, कैमरे का एंगल बदल जाता है। कैमरा मूर्ति पर चला जाता है। पड़ताल को आगे बढ़ाते हुए हमने गूगल पर कई अन्य कीवर्ड्स से सर्च करना शुरू किया। इस दौरान हमें दावे से जुड़ी एक रिपोर्ट जी न्यूज की वेबसाइट पर 30 जनवरी 2022 को प्रकाशित मिली। रिपोर्ट में कार्यक्रम की कई सारी तस्वीरें मौजूद हैं। इन तस्वीरों में साफ तौर पर सीएम योगी को महात्मा गांधी की मूर्ति के सामने हाथ जोड़कर प्रणाम करते हुए देखा जा सकता है। कई अन्य न्यूज वेबसाइट ने भी इस खबर को प्रकाशित किया था। जांच के दौरान हमें कई वेरिफाइड ट्विटर हैंडल पर भी इस कार्यक्रम की तस्वीर मिली। अधिक जानकारी के लिए हमने दैनिक जागरण उत्तर प्रदेश के डिजिटल इंचार्ज धर्मेंद्र कुमार पांडेय से संपर्क किया। उन्होंने हमें बताया कि वायरल दावा गलत है। यह वीडियो गांधी जयंती का नहीं, बल्कि पुण्यतिथि के कार्यक्रम का है। सीएम योगी ने महात्मा गांधी का अपमान नहीं किया था। उन्होंने सारी रीति-रिवाज से महात्मा गांधी को पूरा सम्मान दिया था। उन्होंने मूर्ति के सामने हाथ जोड़े थे। विश्वास न्यूज ने जांच के आखिरी चरण में उस प्रोफाइल की पृष्ठभूमि की जांच की, जिसने वायरल पोस्ट को साझा किया था। हमने पाया कि यूजर अगस्त 2022 से ट्विटर पर सक्रिय है। जेपीपी के अकाउंट को 205 फॉलो करते हैं। निष्कर्षः विश्वास न्यूज की पड़ताल में यूपी के सीएम योगी के वायरल वीडियो को लेकर किया जा रहा दावा गलत साबित हुआ। सीएम योगी आदित्यनाथ ने महात्मा गांधी की मूर्ति पर फूल चढ़ाने के बाद हाथ जोड़कर नमन किया था। वायरल वीडियो महात्मा गांधी की पुण्यतिथि 30 जनवरी 2022 का है। वायरल वीडियो दूसरे एंगल से लिया गया है। - Claim Review : गांधी जयंती के मौके पर सीएम योगी आदित्यनाथ महात्मा गांधी को बेमन से श्रद्धांजलि देते हुए बिना प्रणाम किए ही चले गए। कॉरपोरेट और राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर सत्ता को हमेशा आइना दिखाने वाली फैक्ट चेक जर्नलिज्म सिर्फ और सिर्फ आपके सहयोग से संभव है। इस मुहिम में हमें आपके साथ और सहयोगी की जरूरत है। फर्जी और गुमराह करने वाली खबर के खिलाफ जारी इस लड़ाई में हमारी मदद करें और कृपया हमें आर्थिक सहयोग दें।
विश्वास न्यूज की पड़ताल में यूपी के सीएम योगी के वायरल वीडियो को लेकर किया जा रहा दावा गलत साबित हुआ। सीएम योगी आदित्यनाथ ने महात्मा गांधी की मूर्ति पर फूल चढ़ाने के बाद हाथ जोड़कर नमन किया था। वायरल वीडियो महात्मा गांधी की पुण्यतिथि तीस जनवरी दो हज़ार बाईस का है। वायरल वीडियो दूसरे एंगल से लिया गया है। नई दिल्ली । सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि गांधी जयंती के मौके पर सीएम योगी आदित्यनाथ महात्मा गांधी को बेमन से श्रद्धांजलि देते हुए बिना प्रणाम किए ही चले गए। विश्वास न्यूज की पड़ताल में वायरल दावा गलत साबित हुआ। वायरल वीडियो महात्मा गांधी की पुण्यतिथि तीस जनवरी दो हज़ार बाईस का है। सीएम योगी ने महात्मा गांधी की मूर्ति पर फूल चढ़ाने के बाद हाथ जोड़कर नमन किया था। वायरल वीडियो दूसरे एंगल से लिया गया है, जिसे भ्रामक दावे के साथ शेयर किया जा रहा है। क्या है वायरल पोस्ट में ? वायरल पोस्ट के क्लेम को यहां ज्यों का त्यों ही लिखा गया है। इसे सच मानकर दूसरे यूजर्स भी वायरल कर रहे हैं। पोस्ट का आर्काइव वर्जन यहां देखें। वायरल वीडियो की सच्चाई जानने के लिए हमने गूगल पर कीवर्ड्स से सर्च करना शुरू किया। इस दौरान हमें यह वीडियो एएनआई के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया मिला। वीडियो को तीस जनवरी दो हज़ार बाईस को शेयर किया गया था। दी गई जानकारी के मुताबिक, वीडियो गांधी की पुण्यतिथि का है। वीडियो में देखा जा सकता है कि जैसे ही सीएम योगी मूर्ति के सामने प्रणाम करते हैं, कैमरे का एंगल बदल जाता है। कैमरा मूर्ति पर चला जाता है। पड़ताल को आगे बढ़ाते हुए हमने गूगल पर कई अन्य कीवर्ड्स से सर्च करना शुरू किया। इस दौरान हमें दावे से जुड़ी एक रिपोर्ट जी न्यूज की वेबसाइट पर तीस जनवरी दो हज़ार बाईस को प्रकाशित मिली। रिपोर्ट में कार्यक्रम की कई सारी तस्वीरें मौजूद हैं। इन तस्वीरों में साफ तौर पर सीएम योगी को महात्मा गांधी की मूर्ति के सामने हाथ जोड़कर प्रणाम करते हुए देखा जा सकता है। कई अन्य न्यूज वेबसाइट ने भी इस खबर को प्रकाशित किया था। जांच के दौरान हमें कई वेरिफाइड ट्विटर हैंडल पर भी इस कार्यक्रम की तस्वीर मिली। अधिक जानकारी के लिए हमने दैनिक जागरण उत्तर प्रदेश के डिजिटल इंचार्ज धर्मेंद्र कुमार पांडेय से संपर्क किया। उन्होंने हमें बताया कि वायरल दावा गलत है। यह वीडियो गांधी जयंती का नहीं, बल्कि पुण्यतिथि के कार्यक्रम का है। सीएम योगी ने महात्मा गांधी का अपमान नहीं किया था। उन्होंने सारी रीति-रिवाज से महात्मा गांधी को पूरा सम्मान दिया था। उन्होंने मूर्ति के सामने हाथ जोड़े थे। विश्वास न्यूज ने जांच के आखिरी चरण में उस प्रोफाइल की पृष्ठभूमि की जांच की, जिसने वायरल पोस्ट को साझा किया था। हमने पाया कि यूजर अगस्त दो हज़ार बाईस से ट्विटर पर सक्रिय है। जेपीपी के अकाउंट को दो सौ पाँच फॉलो करते हैं। निष्कर्षः विश्वास न्यूज की पड़ताल में यूपी के सीएम योगी के वायरल वीडियो को लेकर किया जा रहा दावा गलत साबित हुआ। सीएम योगी आदित्यनाथ ने महात्मा गांधी की मूर्ति पर फूल चढ़ाने के बाद हाथ जोड़कर नमन किया था। वायरल वीडियो महात्मा गांधी की पुण्यतिथि तीस जनवरी दो हज़ार बाईस का है। वायरल वीडियो दूसरे एंगल से लिया गया है। - Claim Review : गांधी जयंती के मौके पर सीएम योगी आदित्यनाथ महात्मा गांधी को बेमन से श्रद्धांजलि देते हुए बिना प्रणाम किए ही चले गए। कॉरपोरेट और राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर सत्ता को हमेशा आइना दिखाने वाली फैक्ट चेक जर्नलिज्म सिर्फ और सिर्फ आपके सहयोग से संभव है। इस मुहिम में हमें आपके साथ और सहयोगी की जरूरत है। फर्जी और गुमराह करने वाली खबर के खिलाफ जारी इस लड़ाई में हमारी मदद करें और कृपया हमें आर्थिक सहयोग दें।
>BAREILLY: यूपी में चल रहे विधानसभा चुनाव का असर इस बार बोर्ड एग्जाम में शामिल होने वाले स्टूडेंट्स पर पड़ता दिखाई रहा है। चुनाव के दौरान टीचर्स की ड्यूटी के चलते स्टूडेंट्स का कोर्स पूरा नहीं हो सका है। ऐसे में स्टूडेंट्स के सामने बड़ी चुनौती है कि वह एग्जाम में अच्छे मार्क्स कैसे लाएं। इस नाते स्टूडेंट्स अब अधूरे कोर्स के सहारे भविष्य संवारने की जंग लड़ रहे हैं। चुनाव आयोग के विधानसभा चुनाव की घोषणा करते ही सरकारी मशीनरी हरकत में आ गई थी। जिला प्रशासन निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से मतदान कराने के लिए सभी विभाग के कर्मचारियों के अलावा तमाम शिक्षकों की ड्यूटी भी लगाई गई थी। चुनाव के लिए पहले उन्हें ट्रेनिंग दी गई। इसके बाद टीचर्स ने मतदान कराया। इन सब के बीच टीचर्स ने क्लास अटेंड नहीं की। इसके चलते इस बार बोर्ड एग्जाम में शामिल होने वाले हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के हजारों स्टूडेंट्स का का 75 प्रतिशत ही कोर्स पूरा हो सका। ऐसे में स्टूडेंट्स को एग्जाम में परेशानी होना लाजिमी है। हालांकि बहुत से स्टूडेंट्स सेल्फ स्टडी में लगे हैं, लेकिन सवाल यह है कि चुनाव के चलते स्टूडेंट्स के मार्क्स कम आए तो इसका जवाबदेह कौन है? हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के एग्जाम इस वर्ष 16 मार्च से स्टार्ट होंगे। जो 21 अप्रैल तक चलेंगे। हाईस्कूल के एग्जाम 15 और इंटरमीडिएट के एग्जाम 25 वर्किंग डे में खत्म होंगे। डीआईओएस मुन्ने अली ने बताया इस वर्ष 97,803 स्टूडेंट्स यूपी बोर्ड के एग्जाम देंगे। एग्जाम के लिए 133 सेंटर्स बनाए गए हैं। टीचर्स के चुनावी ड्यूटी में बिजी होने कारण वे कोर्स पूरा कराने ध्यान केन्द्रित नहीं कर पाए। वहीं, स्टूडेंट्स का कोर्स पूरा नहीं हो पाना चिंता का विषय है। रोजाना कॉलेज गए। सभी टीचर्स की क्लासेज भी अटेंड कीं। लेकिन, चुनाव ने शिक्षा को बेपटरी कर दिया। अब समझ में नहीं आ रहा है अधूरे कोर्स के सहारे कैसे एग्जाम दें। एग्जाम में अच्छे मार्क्स लाने का दबाव है। जबकि, कॉलेज में 75 फीसदी ही कोर्स पढ़ाया गया है। चुनाव के चलते टीचर्स क्लास में आए नहीं है। जिसकी वजह से तैयारी बेहतर नहीं हो सकी है। जो कोर्स रह गया है, उसे पढ़ने के लिए भाई-बहनों और पेरेंट्स की मदद ले रहे हैं। ताकि बचा हुआ कोर्स कंप्लीट कर सकूं और एग्जाम में अच्छे से सवालों का जवाब देने में दिक्कत न हो। चुनावी ड्यूटी के चलते टीचर्स कोर्स पूरा नहीं करा पाए। अब अधूरे कोर्स के भरोसे कॅरियर की जंग लड़ेंगे। स्कूल ने एक्स्ट्रा क्लासेज भी नहीं चलवाई। जिससे कोर्स पूरा हो जाता।
>BAREILLY: यूपी में चल रहे विधानसभा चुनाव का असर इस बार बोर्ड एग्जाम में शामिल होने वाले स्टूडेंट्स पर पड़ता दिखाई रहा है। चुनाव के दौरान टीचर्स की ड्यूटी के चलते स्टूडेंट्स का कोर्स पूरा नहीं हो सका है। ऐसे में स्टूडेंट्स के सामने बड़ी चुनौती है कि वह एग्जाम में अच्छे मार्क्स कैसे लाएं। इस नाते स्टूडेंट्स अब अधूरे कोर्स के सहारे भविष्य संवारने की जंग लड़ रहे हैं। चुनाव आयोग के विधानसभा चुनाव की घोषणा करते ही सरकारी मशीनरी हरकत में आ गई थी। जिला प्रशासन निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से मतदान कराने के लिए सभी विभाग के कर्मचारियों के अलावा तमाम शिक्षकों की ड्यूटी भी लगाई गई थी। चुनाव के लिए पहले उन्हें ट्रेनिंग दी गई। इसके बाद टीचर्स ने मतदान कराया। इन सब के बीच टीचर्स ने क्लास अटेंड नहीं की। इसके चलते इस बार बोर्ड एग्जाम में शामिल होने वाले हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के हजारों स्टूडेंट्स का का पचहत्तर प्रतिशत ही कोर्स पूरा हो सका। ऐसे में स्टूडेंट्स को एग्जाम में परेशानी होना लाजिमी है। हालांकि बहुत से स्टूडेंट्स सेल्फ स्टडी में लगे हैं, लेकिन सवाल यह है कि चुनाव के चलते स्टूडेंट्स के मार्क्स कम आए तो इसका जवाबदेह कौन है? हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के एग्जाम इस वर्ष सोलह मार्च से स्टार्ट होंगे। जो इक्कीस अप्रैल तक चलेंगे। हाईस्कूल के एग्जाम पंद्रह और इंटरमीडिएट के एग्जाम पच्चीस वर्किंग डे में खत्म होंगे। डीआईओएस मुन्ने अली ने बताया इस वर्ष सत्तानवे,आठ सौ तीन स्टूडेंट्स यूपी बोर्ड के एग्जाम देंगे। एग्जाम के लिए एक सौ तैंतीस सेंटर्स बनाए गए हैं। टीचर्स के चुनावी ड्यूटी में बिजी होने कारण वे कोर्स पूरा कराने ध्यान केन्द्रित नहीं कर पाए। वहीं, स्टूडेंट्स का कोर्स पूरा नहीं हो पाना चिंता का विषय है। रोजाना कॉलेज गए। सभी टीचर्स की क्लासेज भी अटेंड कीं। लेकिन, चुनाव ने शिक्षा को बेपटरी कर दिया। अब समझ में नहीं आ रहा है अधूरे कोर्स के सहारे कैसे एग्जाम दें। एग्जाम में अच्छे मार्क्स लाने का दबाव है। जबकि, कॉलेज में पचहत्तर फीसदी ही कोर्स पढ़ाया गया है। चुनाव के चलते टीचर्स क्लास में आए नहीं है। जिसकी वजह से तैयारी बेहतर नहीं हो सकी है। जो कोर्स रह गया है, उसे पढ़ने के लिए भाई-बहनों और पेरेंट्स की मदद ले रहे हैं। ताकि बचा हुआ कोर्स कंप्लीट कर सकूं और एग्जाम में अच्छे से सवालों का जवाब देने में दिक्कत न हो। चुनावी ड्यूटी के चलते टीचर्स कोर्स पूरा नहीं करा पाए। अब अधूरे कोर्स के भरोसे कॅरियर की जंग लड़ेंगे। स्कूल ने एक्स्ट्रा क्लासेज भी नहीं चलवाई। जिससे कोर्स पूरा हो जाता।
Upcoming Car in April 2023 मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि Fronx को अब तक 15 हजार से अधिक बुकिंग मिल चुकी हैं। लोगों में Maruti की इस नई एसयूवी को लेकर काफी क्रेज देखने को मिल रहा है। (जागरण फोटो) नई दिल्ली, ऑटो डेस्क। अगर आप इस महीने नई कार खरीदने का प्लान बना रहे हैं तो थोड़ा इंतजार कर लें। क्योंकि इस महीने कई धाकड़ एसयूवी, ईवी और लग्जरी कार लॉन्च होने के लिए तैयार है। जिसमें एमजी की फिफायती ईवी, टोयोटा की इनोवा डीजल और मारुति की कॉम्पैक्ट एसयूवी फ्रोंक्स शामिल है। इसके अलावा, लग्जरी कार भी इस महीने लॉन्च हो सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी Maruti Suzuki Fronx को इस माह के मध्य तक लॉन्च कर सकती है। मारुती ने इसकी बुकिंग लेना पहले से ही शुरु कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि Fronx को अब तक 15 हजार से अधिक बुकिंग मिल चुकी हैं। लोगों में Maruti की इस नई एसयूवी को लेकर काफी क्रेज देखने को मिल रहा है। टोयोटा ने साल की शुरुआत में Toyota Innova diesel कार की बुकिंग शुरू कर की है। कंपनी इस कार को कुल चार वेरिएंट्स- जी, जीएक्स, वीएक्स और जेडएक्स और पांच कलर शेड्स- व्हाइट पर्ल क्रिस्टल शाइन, सुपर व्हाइट, सिल्वर, एटिट्यूड ब्लैक और अवंत-गार्डे ब्रॉन्ज में उपलब्ध कराएगी। एमजी की सबसे छोटी और सबसे सस्ती इलेक्ट्रिक कार इस महीने लॉन्च हो सकती है। यह हैचबैक कार दिखने में ऑल्टो और टाटा नैनो से भी छोटी है। एमजी मोटर इंडिया ने कुछ समय पहले इसके आधिकारिक छवियों के माध्यम से 2-डोर इलेक्ट्रिक वाहन का खुलासा किया है। Lamborghini Urus S को इंडियन मार्केट में 13 अप्रैल को लॉन्च किया जाएगा, कंपनी ने इससे पहले Lamborghini Urus Performante को लॉन्च किया था, बेहतरीन परफॉर्मेंस के लिए जानी जाती है। फॉर्मुला 1 से इंस्पायर्ड मर्सिडीज की इस कार को इस महीने लॉन्च किया जा सकता है। कंपनी का दावा है कि ये गाड़ी अपने एमजी मॉडस में सबसे पावरफुल कारों में से एक होगी।
Upcoming Car in April दो हज़ार तेईस मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि Fronx को अब तक पंद्रह हजार से अधिक बुकिंग मिल चुकी हैं। लोगों में Maruti की इस नई एसयूवी को लेकर काफी क्रेज देखने को मिल रहा है। नई दिल्ली, ऑटो डेस्क। अगर आप इस महीने नई कार खरीदने का प्लान बना रहे हैं तो थोड़ा इंतजार कर लें। क्योंकि इस महीने कई धाकड़ एसयूवी, ईवी और लग्जरी कार लॉन्च होने के लिए तैयार है। जिसमें एमजी की फिफायती ईवी, टोयोटा की इनोवा डीजल और मारुति की कॉम्पैक्ट एसयूवी फ्रोंक्स शामिल है। इसके अलावा, लग्जरी कार भी इस महीने लॉन्च हो सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी Maruti Suzuki Fronx को इस माह के मध्य तक लॉन्च कर सकती है। मारुती ने इसकी बुकिंग लेना पहले से ही शुरु कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि Fronx को अब तक पंद्रह हजार से अधिक बुकिंग मिल चुकी हैं। लोगों में Maruti की इस नई एसयूवी को लेकर काफी क्रेज देखने को मिल रहा है। टोयोटा ने साल की शुरुआत में Toyota Innova diesel कार की बुकिंग शुरू कर की है। कंपनी इस कार को कुल चार वेरिएंट्स- जी, जीएक्स, वीएक्स और जेडएक्स और पांच कलर शेड्स- व्हाइट पर्ल क्रिस्टल शाइन, सुपर व्हाइट, सिल्वर, एटिट्यूड ब्लैक और अवंत-गार्डे ब्रॉन्ज में उपलब्ध कराएगी। एमजी की सबसे छोटी और सबसे सस्ती इलेक्ट्रिक कार इस महीने लॉन्च हो सकती है। यह हैचबैक कार दिखने में ऑल्टो और टाटा नैनो से भी छोटी है। एमजी मोटर इंडिया ने कुछ समय पहले इसके आधिकारिक छवियों के माध्यम से दो-डोर इलेक्ट्रिक वाहन का खुलासा किया है। Lamborghini Urus S को इंडियन मार्केट में तेरह अप्रैल को लॉन्च किया जाएगा, कंपनी ने इससे पहले Lamborghini Urus Performante को लॉन्च किया था, बेहतरीन परफॉर्मेंस के लिए जानी जाती है। फॉर्मुला एक से इंस्पायर्ड मर्सिडीज की इस कार को इस महीने लॉन्च किया जा सकता है। कंपनी का दावा है कि ये गाड़ी अपने एमजी मॉडस में सबसे पावरफुल कारों में से एक होगी।
ऑस्ट्रेलियाई पुरुष क्रिकेट टीम भारत के खिलाफ आगामी टी 20 सीरीज में विशेष रूप से डिजाइन की गई इन्डिजनस (मूल निवासी या आदिवासी) शर्ट पहनने के लिए तैयार है, जिसका उद्देश्य खेल में ऑस्ट्रेलियाई मूल लोगों की भूमिका को पहचानना और उन्हें प्रोत्साहित करना है। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने बुधवार को डिजाइन का अनावरण किया। इस शर्ट को ASICS और दो मूल निवासी महिलाओं आंटी फियोना क्लार्क और कर्टनी हेगन के सहयोग से तैयार किया गया है। cricket. co. au ने बताया, "क्लार्क स्वर्गीय क्रिकेटर 'मॉस्किटो' कूजेंस (ग्रॉन्ग्रॉन्ग के नाम से जाना जाता है) की प्रत्यक्ष वंशज है। वह उन आदिवासी खिलाड़ियों में से एक जिन्होंने 1868 में ऑस्ट्रेलिया की पहली टीम के के रूप में इंग्लैंड का दौरा किया था। " ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज मिचेल स्टार्क नई शर्ट को लेकर काफी उत्साहित हैं। स्टार्क ने कहा, ". . . यह वास्तव में रोमांचक है कि हमारी टीम को पहली स्वदेशी जर्सी पहनने का मौका मिल रहा है। " भारत का ऑस्ट्रेलिया दौरा सिडनी में 27 नवंबर से तीन वनडे मैचों की सीरीज के साथ शुरू होगा। इसके बाद दोनों टीमों के बीच तीन T20I और चार टेस्ट मैचों की सीरीज खेली जाएगी।
ऑस्ट्रेलियाई पुरुष क्रिकेट टीम भारत के खिलाफ आगामी टी बीस सीरीज में विशेष रूप से डिजाइन की गई इन्डिजनस शर्ट पहनने के लिए तैयार है, जिसका उद्देश्य खेल में ऑस्ट्रेलियाई मूल लोगों की भूमिका को पहचानना और उन्हें प्रोत्साहित करना है। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने बुधवार को डिजाइन का अनावरण किया। इस शर्ट को ASICS और दो मूल निवासी महिलाओं आंटी फियोना क्लार्क और कर्टनी हेगन के सहयोग से तैयार किया गया है। cricket. co. au ने बताया, "क्लार्क स्वर्गीय क्रिकेटर 'मॉस्किटो' कूजेंस की प्रत्यक्ष वंशज है। वह उन आदिवासी खिलाड़ियों में से एक जिन्होंने एक हज़ार आठ सौ अड़सठ में ऑस्ट्रेलिया की पहली टीम के के रूप में इंग्लैंड का दौरा किया था। " ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज मिचेल स्टार्क नई शर्ट को लेकर काफी उत्साहित हैं। स्टार्क ने कहा, ". . . यह वास्तव में रोमांचक है कि हमारी टीम को पहली स्वदेशी जर्सी पहनने का मौका मिल रहा है। " भारत का ऑस्ट्रेलिया दौरा सिडनी में सत्ताईस नवंबर से तीन वनडे मैचों की सीरीज के साथ शुरू होगा। इसके बाद दोनों टीमों के बीच तीन TबीसI और चार टेस्ट मैचों की सीरीज खेली जाएगी।
Corona in Agra: विदेशी पर्यटक की आरटीसी पीआर रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई है। पर्यटक अब गायब है। एलआईयू समेत सुरक्षा एजेंसियां पर्यटक की तलाश में जुटी हुई हैं। Corona in Agra: उत्तर प्रदेश के आगरा में ताजमहल घूमने आए विदेशी पर्यटक की आरटीसी पीआर रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई है। पर्यटक अब गायब है। एलआईयू समेत सुरक्षा एजेंसियां पर्यटक की तलाश में जुटी हुई हैं। पर्यटक कहां गायब हुआ है। इस बात से जिले में हड़कंप मचा हुआ है। पर्यटक का फोन भी स्विच ऑफ जा रहा है। पर्यटक ने ताजमहल पर अर्जेंटीना का पता लिखवाया है। अभी माना जा रहा है कि पर्यटक ने पते के बारे में गलत जानकारी दी है। फोन पर हुई बात में मुख्य चिकित्सा अधिकारी आगरा ने बताया कि पर्यटक 26 तारीख को ताजमहल देखने आया था। ताजमहल पर पर्यटक का आईसीटीआर टेस्ट किया गया था। नाम पता भी दर्ज किया गया था। आज पर्यटक की रिपोर्ट कोविड पॉजिटिव आई है। रिपोर्ट सामने आने के बाद अधिकारियों को पर्यटक के बारे में जानकारी नहीं मिल पा रही है। एल आई यू और संबंधित विभाग पर्यटक की तलाश में जुटी हुए है। विदेशी पर्यटक में कोरोना संस्करण की पुष्टि होने के बाद हालात गंभीर बन गए हैं।
Corona in Agra: विदेशी पर्यटक की आरटीसी पीआर रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई है। पर्यटक अब गायब है। एलआईयू समेत सुरक्षा एजेंसियां पर्यटक की तलाश में जुटी हुई हैं। Corona in Agra: उत्तर प्रदेश के आगरा में ताजमहल घूमने आए विदेशी पर्यटक की आरटीसी पीआर रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई है। पर्यटक अब गायब है। एलआईयू समेत सुरक्षा एजेंसियां पर्यटक की तलाश में जुटी हुई हैं। पर्यटक कहां गायब हुआ है। इस बात से जिले में हड़कंप मचा हुआ है। पर्यटक का फोन भी स्विच ऑफ जा रहा है। पर्यटक ने ताजमहल पर अर्जेंटीना का पता लिखवाया है। अभी माना जा रहा है कि पर्यटक ने पते के बारे में गलत जानकारी दी है। फोन पर हुई बात में मुख्य चिकित्सा अधिकारी आगरा ने बताया कि पर्यटक छब्बीस तारीख को ताजमहल देखने आया था। ताजमहल पर पर्यटक का आईसीटीआर टेस्ट किया गया था। नाम पता भी दर्ज किया गया था। आज पर्यटक की रिपोर्ट कोविड पॉजिटिव आई है। रिपोर्ट सामने आने के बाद अधिकारियों को पर्यटक के बारे में जानकारी नहीं मिल पा रही है। एल आई यू और संबंधित विभाग पर्यटक की तलाश में जुटी हुए है। विदेशी पर्यटक में कोरोना संस्करण की पुष्टि होने के बाद हालात गंभीर बन गए हैं।
4. चैक का रेखांकन कौन कर सकता है ? को रद्द किस प्रकार किया जा सकता है ? दोहरे विशेषांकन को समझाइये । निम्नलिखित प्रकार के रेखाकन के प्रभावों की व्याख्या कीजिए-( अ ) सामान्य रेखांकन (ब) विशेष रेखांकन (स) रेखान के साथ "केवल (लखनऊ, बी. कॉम. 1976 ) निम्नलिखित की व्याख्या कोजिए-(i) एक रेति चैक पर यह शब्द "चैवल प्रदाता का साता" लिखे है । इन शब्दों से किस बैंक पर प्रभाव पड़ेगा - वसूली करने वाले पर या मदायगी करनेवाले पर ? (दिल्ली, बी कॉम. 1971) ( 11 ) प्रपरत्राम्य रेखांकन (Not Negotiable Cressing ) (दिल्ली, बी. कॉम. 1972) एक चैक के खi को वैधानिक स्थिति स्पष्ट कीजिये जबकि यह ( अ ) सामान्य रेखांकित हो, (ब) "स्टेट बैंक ग्रॉफ इण्डिया" शब्दो के साथ रेखांकित हो तथा (स) "अपराम्य" (Not Negotiable) शब्द लिखकर रेखाकित हो ।
चार. चैक का रेखांकन कौन कर सकता है ? को रद्द किस प्रकार किया जा सकता है ? दोहरे विशेषांकन को समझाइये । निम्नलिखित प्रकार के रेखाकन के प्रभावों की व्याख्या कीजिए- सामान्य रेखांकन विशेष रेखांकन रेखान के साथ "केवल निम्नलिखित की व्याख्या कोजिए- एक रेति चैक पर यह शब्द "चैवल प्रदाता का साता" लिखे है । इन शब्दों से किस बैंक पर प्रभाव पड़ेगा - वसूली करने वाले पर या मदायगी करनेवाले पर ? प्रपरत्राम्य रेखांकन एक चैक के खi को वैधानिक स्थिति स्पष्ट कीजिये जबकि यह सामान्य रेखांकित हो, "स्टेट बैंक ग्रॉफ इण्डिया" शब्दो के साथ रेखांकित हो तथा "अपराम्य" शब्द लिखकर रेखाकित हो ।
रामकृष्ण । २३ से अधिक प्रभावशाली होने से कभी नहीं रोक सकते । और इसमें कोई न्यायरहित बात भी नहीं है। यह मानवात्मा की एक अतुलनीय व अपरिहार्य सृष्टि है। यह मानवात्मा की शरद् का एक सुन्दरतम फल है। प्रकृति के एक ही नियम के अनुसार एक ही वृक्ष में जीवन व किम्बदन्ती का जन्म हुआ है। एक ही जीवित देह की दृष्टि, निःश्वास और शैन्य व सजलता से दोनों की उत्पत्ति हुई है। मै योरोप के सन्मुख एक नवीन रामकृष्ण नामी शरद् ऋतु की आत्मा के एक नवीन सन्देश, भारत के एक महासंगीत, को ला रहा हूँ । यह दिखाया जा सकता है, ( और मैं इसे दिखाना भूलूंगा भी नही ) कि हमारी प्राचीन संगीत प्रतिभाओं के जन्म के समान, यह महासंगीत भी अतीत से संगृहीत अनेक प्रकार के विभिन्न स्वरों के समावेश से ही बनी है। इस सृष्टि के पीछे बहुत से मनुष्यो का अक्लान्त श्रम विद्यमान है। किन्तु यह सब होने पर भी जो सार्वभौम व्यक्तित्व विभिन्न स्वरों के साजबाज को अपने में संगृहीत करके, उन्हें एक राजसिक स्वरसंगति का रूप देता है, उसका ही नाम इस सब सृष्टि कि जिन सब व्यक्तियों की भारतवासी देवता समझ कर पूजा करते हैं, उन सबके ऐतिहासिक अस्तित्व के बारे में वे एक प्रकार से उदासीन रहते हैं - उनके लिये अंशतः यह एक सर्वथा गौण वस्तु है। जहाँ तक वे आध्यात्मिक रूप से सत्य हैं, वहाँ तक उनकी वाह्य वास्तविकता कोई महत्व नहीं रखती। सर्वश्रेष्ठ विश्वासी रामकृष्ण ने कहा हैं, "जो अपने अन्दर ऐसे विचारों को कल्पना कर सकते हैं, वे अपने आपको उन्हीं विचारों में परिणत भी कर सकते हैं।" और विवेकानन्द जो कि कृष्ण तथा ईसा के बाह्य अस्तित्व में सन्देह करते थे (ईसा की अपेक्षा भी कृष्ण के वैहिक अस्तित्व में अधिक संशयालु थे ) उन्होंने इस प्रकार कहा है-- "परन्तु आज कृष्ण सब अवतारों में पूर्णतम अवतार हैं।" और वह उसकी पूजा करते थे। (भगिनी निवेदिता के 'स्वामी विवेकानन्द के साथ परिभ्रमणसम्बन्धी नोट्स में देखिये) । सच्चे धर्मप्राण व्यक्ति जिस प्रकार अवतार की वास्तविकता में भगवान् को प्रत्यक्ष करते हैं, ठीक उसी प्रकार विचारशील व्यक्तियों के अन्दर भी जीवित भगवान् को प्रत्यक्ष देखते हैं। श्रेष्ठ विश्वासियों की दृष्टि में यह दोनों चीजें ही समान रूप से वास्तविक हैं। कारण, उनके निकट जो भी वास्तव है, वही भगवान् है । इसके अतिरिक्त वे यह भी निर्णय नहीं कर पाते, कि इन दोनों चीजों में किसका महत्व अधिक है--जिसे एक जाति ने जन्म दिया है, वह अधिक महत्वपूर्ण है अथवा जिसे एक युग ने जन्म दिया है, वह अधिक महत्व रखता है ?
रामकृष्ण । तेईस से अधिक प्रभावशाली होने से कभी नहीं रोक सकते । और इसमें कोई न्यायरहित बात भी नहीं है। यह मानवात्मा की एक अतुलनीय व अपरिहार्य सृष्टि है। यह मानवात्मा की शरद् का एक सुन्दरतम फल है। प्रकृति के एक ही नियम के अनुसार एक ही वृक्ष में जीवन व किम्बदन्ती का जन्म हुआ है। एक ही जीवित देह की दृष्टि, निःश्वास और शैन्य व सजलता से दोनों की उत्पत्ति हुई है। मै योरोप के सन्मुख एक नवीन रामकृष्ण नामी शरद् ऋतु की आत्मा के एक नवीन सन्देश, भारत के एक महासंगीत, को ला रहा हूँ । यह दिखाया जा सकता है, कि हमारी प्राचीन संगीत प्रतिभाओं के जन्म के समान, यह महासंगीत भी अतीत से संगृहीत अनेक प्रकार के विभिन्न स्वरों के समावेश से ही बनी है। इस सृष्टि के पीछे बहुत से मनुष्यो का अक्लान्त श्रम विद्यमान है। किन्तु यह सब होने पर भी जो सार्वभौम व्यक्तित्व विभिन्न स्वरों के साजबाज को अपने में संगृहीत करके, उन्हें एक राजसिक स्वरसंगति का रूप देता है, उसका ही नाम इस सब सृष्टि कि जिन सब व्यक्तियों की भारतवासी देवता समझ कर पूजा करते हैं, उन सबके ऐतिहासिक अस्तित्व के बारे में वे एक प्रकार से उदासीन रहते हैं - उनके लिये अंशतः यह एक सर्वथा गौण वस्तु है। जहाँ तक वे आध्यात्मिक रूप से सत्य हैं, वहाँ तक उनकी वाह्य वास्तविकता कोई महत्व नहीं रखती। सर्वश्रेष्ठ विश्वासी रामकृष्ण ने कहा हैं, "जो अपने अन्दर ऐसे विचारों को कल्पना कर सकते हैं, वे अपने आपको उन्हीं विचारों में परिणत भी कर सकते हैं।" और विवेकानन्द जो कि कृष्ण तथा ईसा के बाह्य अस्तित्व में सन्देह करते थे उन्होंने इस प्रकार कहा है-- "परन्तु आज कृष्ण सब अवतारों में पूर्णतम अवतार हैं।" और वह उसकी पूजा करते थे। । सच्चे धर्मप्राण व्यक्ति जिस प्रकार अवतार की वास्तविकता में भगवान् को प्रत्यक्ष करते हैं, ठीक उसी प्रकार विचारशील व्यक्तियों के अन्दर भी जीवित भगवान् को प्रत्यक्ष देखते हैं। श्रेष्ठ विश्वासियों की दृष्टि में यह दोनों चीजें ही समान रूप से वास्तविक हैं। कारण, उनके निकट जो भी वास्तव है, वही भगवान् है । इसके अतिरिक्त वे यह भी निर्णय नहीं कर पाते, कि इन दोनों चीजों में किसका महत्व अधिक है--जिसे एक जाति ने जन्म दिया है, वह अधिक महत्वपूर्ण है अथवा जिसे एक युग ने जन्म दिया है, वह अधिक महत्व रखता है ?
धनु राशिः आज आप खुद को गर्व से भरा महसूस करेंगे। संतान पक्ष से कोई बड़ी खुशी मिलने वाली है। घर में लोग बधाई देने आ सकते हैं। आपके ऑफिस से रिलेटिड काम आज समय से पूरे हो जायेंगे, जिससे आपको खुशी मिलेगी। आज जीवनसाथी के साथ घूमने जा सकते हैं, रिश्तों में प्यार बढ़ेगा। आज मन्दिर में गुड़ का दान करें, आपकी खुशी दुगनी हो जायेगी। मकर राशिः आज आपको कार्यक्षेत्र में सफलता पाने के लिये मेहनत करनी होंगी। आपकी कोशिशें सफल भी हो सकती हैं। इस राशि के इंजीनियर्स को आज जॉब के अच्छे ऑफर मिल सकते हैं। आपकी तरक्की में आ रही बाधा दूर होती नजर आ रही है। आज धन लाभ के भी योग बन रहे हैं। सेहत फिट रखने के लिये आज के दिन फ्रूट सैलेड खाएं। श्री गणेश को एक हल्दी की गांठ चढ़ाएं, सफलता मिलेगी।
धनु राशिः आज आप खुद को गर्व से भरा महसूस करेंगे। संतान पक्ष से कोई बड़ी खुशी मिलने वाली है। घर में लोग बधाई देने आ सकते हैं। आपके ऑफिस से रिलेटिड काम आज समय से पूरे हो जायेंगे, जिससे आपको खुशी मिलेगी। आज जीवनसाथी के साथ घूमने जा सकते हैं, रिश्तों में प्यार बढ़ेगा। आज मन्दिर में गुड़ का दान करें, आपकी खुशी दुगनी हो जायेगी। मकर राशिः आज आपको कार्यक्षेत्र में सफलता पाने के लिये मेहनत करनी होंगी। आपकी कोशिशें सफल भी हो सकती हैं। इस राशि के इंजीनियर्स को आज जॉब के अच्छे ऑफर मिल सकते हैं। आपकी तरक्की में आ रही बाधा दूर होती नजर आ रही है। आज धन लाभ के भी योग बन रहे हैं। सेहत फिट रखने के लिये आज के दिन फ्रूट सैलेड खाएं। श्री गणेश को एक हल्दी की गांठ चढ़ाएं, सफलता मिलेगी।
RANCHI (14 Dec): लालपुर सब्जी मार्केट के दुकानदारों को अब डिस्टिलरी पुल के बगल में ही बसाया जाएगा। इसके लिए पुल की पूरब दिशा में खाली पड़ी रांची नगर निगम की जमीन में मिट्टी भरने का काम भी शुरू कर दिया गया है। जहां पर 400 दुकानें लग जाएंगी। गुरुवार को मेयर आशा लकड़ा, डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय और नगर आयुक्त डॉ शांतनु कुमार अग्रहरि ने टीम के साथ मार्केट वाली नई जगह का इंस्पेक्शन भी किया। साथ ही इस जगह को जल्द से जल्द भरकर समतल करने का निर्देश दिया गया। तीन दिनों में इस मार्केट को तैयार कर वहां पर दुकान लगाने का काम भी शुरू कर ि1दया जाएगा। मार्केट में गार्डवाल भी बनाई जाएगी, ताकि नाले की ओर से किसी को परेशानी न हो। इसके साथ ही किसी भी तरह के हादसे से भी बच सकेंगे। इसके अलावा मार्केट में रांची नगर निगम स्ट्रीट लाइट की भी व्यवस्था करेगा, ताकि दुकानदारों के साथ ही कस्टमर्स को भी दिक्कत न हो। साथ ही मार्केट में अलग-अलग डस्टबीन भी लगाए जाएंगे। इसमें वेज और नॉन वेज बेचने वाले अलग-अलग कचरा डालेंगे। इससे निगम को भी कचरा उठाने में परेशानी नहीं होगी। गुरुवार को जब लैंड फीलिंग का काम शुरू हुआ तो कुछ दुकानदार व आसपास रहने वाले लोग भी निगम के अधिकारियों से मिलने पहुंचे। जहां लोगों ने कहा कि इस जगह को भरकर मार्केट बना दिया जाएगा, तो वे लोग कहां जाएंगे। कई लोगों ने यह भी कहा कि उनके घरों में शौचालय नहीं है तो उसी जगह पर शौच के लिए जाते हैं। इस पर निगम के एक अधिकारी ने कहा कि उनका घर तो है ही। पास में ही माड्यूलर टॉयलेट भी बना दिया जाएगा। इससे उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। वे भी अपनी दुकान उस जगह पर लगा सकेंगे।
RANCHI : लालपुर सब्जी मार्केट के दुकानदारों को अब डिस्टिलरी पुल के बगल में ही बसाया जाएगा। इसके लिए पुल की पूरब दिशा में खाली पड़ी रांची नगर निगम की जमीन में मिट्टी भरने का काम भी शुरू कर दिया गया है। जहां पर चार सौ दुकानें लग जाएंगी। गुरुवार को मेयर आशा लकड़ा, डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय और नगर आयुक्त डॉ शांतनु कुमार अग्रहरि ने टीम के साथ मार्केट वाली नई जगह का इंस्पेक्शन भी किया। साथ ही इस जगह को जल्द से जल्द भरकर समतल करने का निर्देश दिया गया। तीन दिनों में इस मार्केट को तैयार कर वहां पर दुकान लगाने का काम भी शुरू कर िएकदया जाएगा। मार्केट में गार्डवाल भी बनाई जाएगी, ताकि नाले की ओर से किसी को परेशानी न हो। इसके साथ ही किसी भी तरह के हादसे से भी बच सकेंगे। इसके अलावा मार्केट में रांची नगर निगम स्ट्रीट लाइट की भी व्यवस्था करेगा, ताकि दुकानदारों के साथ ही कस्टमर्स को भी दिक्कत न हो। साथ ही मार्केट में अलग-अलग डस्टबीन भी लगाए जाएंगे। इसमें वेज और नॉन वेज बेचने वाले अलग-अलग कचरा डालेंगे। इससे निगम को भी कचरा उठाने में परेशानी नहीं होगी। गुरुवार को जब लैंड फीलिंग का काम शुरू हुआ तो कुछ दुकानदार व आसपास रहने वाले लोग भी निगम के अधिकारियों से मिलने पहुंचे। जहां लोगों ने कहा कि इस जगह को भरकर मार्केट बना दिया जाएगा, तो वे लोग कहां जाएंगे। कई लोगों ने यह भी कहा कि उनके घरों में शौचालय नहीं है तो उसी जगह पर शौच के लिए जाते हैं। इस पर निगम के एक अधिकारी ने कहा कि उनका घर तो है ही। पास में ही माड्यूलर टॉयलेट भी बना दिया जाएगा। इससे उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। वे भी अपनी दुकान उस जगह पर लगा सकेंगे।
केन्द्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम और सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने महात्मा गांधी की 150वीं जयंती की पूर्व संध्या पर आज नई दिल्ली में केवीआईसी के नए उत्पादों को लॉन्च करने के साथ-साथ एक विशेष बिक्री अभियान भी शुरू किया। उन्होंने बांस से बनी 700 एमएल और 900 एमएल की क्षमता वाली बोतल को लॉन्च किया। यह बोतल त्रिपुरा स्थित एक संगठन द्वारा बनाई गई है। इसे प्लास्टिक की बोतलों का सटीक प्रतिस्थापन या विकल्प माना जा रहा है क्योंकि यह प्राकृतिक, किफायती, आकर्षक और सर्वाधिक पर्यावरण अनुकूल है। उन्होंने लाडली द्वारा तैयार किफायती सैनिटरी नैपकिन के साथ-साथ एक नए साबुन और कच्ची घानी सरसों तेल को भी लॉन्च किया। महात्मा गांधी की 150वीं जयंती की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपिता को स्मरण करते हुए श्री गडकरी ने कहा कि खादी और ग्रामोद्योग गांधीजी के हृदय के बहुत करीब थे। उन्होंने कहा कि गांधीवादी अर्थशास्त्र में अधिकतम लोगों की भागीदारी के साथ अधिकतम उत्पादन पर जोर दिया जाता है और भारत सरकार उनके सपनों को साकार करने के लिए पूरी तन्मयता के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा कि 400 रेलवे स्टेशनों पर कुल्हड़ में चाय सुलभ कराना और चमड़ा कारीगरों को टूल किट का वितरण इसी दिशा में अहम कदम हैं। श्री गडकरी ने खादी उत्पादों के आधुनिकीकरण की आवश्यकता पर भी बल दिया, ताकि उन्हें युवाओं के लिए और ज्यादा आकर्षक बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि मंत्रालय और केवीआईसी इस संबंध में प्रख्यात डिजाइनरों के साथ सहयोग कर रहे हैं। श्री गडकरी ने कहा कि मौजूदा समय में 200 एमएसएमई कंपनियां नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) में सूचीबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि केवीआईसी को भी एनएसई में कुछ उद्यमियों को सूचीबद्ध कराने के प्रयास करने चाहिए जिससे कर्ज का प्रवाह आसान हो जाएगा। श्री गडकरी ने पर्यावरण अनुकूल, किफायती और स्वास्थ्य तथा पर्यावरण के लिए बेहतर माने जाने वाले नए उत्पादों को विकसित करने में केवीआईसी द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस वर्ष खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) 13 अक्टूबर, 2018 को एक ही दिन में 1.25 करोड़ रुपये की बिक्री करने के स्वयं के रिकॉर्ड को तोड़ देगा। केवीआईसी के अध्यक्ष श्री विनय सक्सेना ने कहा कि केवीआईसी ग्रामोद्योगों के पुनरुत्थान में जुटा हुआ है। आज लॉन्च किए गए कच्ची घानी सरसों तेल की आपूर्ति प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) से जुड़ी एक यूनिट कर रही है, जिसे हाल ही में जयपुर के निकट स्थापित किया गया है। किफायती सैनिटरी नैपकिन भी एक पीएमईजीपी यूनिट में तैयार किए जा रहे हैं जो चंडीगढ़ में अवस्थित है। उन्होंने बताया कि केवीआईसी का वार्षिक कारोबार लगभग 3,000 करोड़ रुपये है और इसे आने वाले वर्षों में बढ़ाकर 5,000 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मनाने के मद्देनजर केवीआईसी पहली बार गांधी टोपी एवं गांधी धोती पर 40 प्रतिशत डिस्काउंट या छूट दे रही है। इसी तरह सभी ग्रामोद्योग उत्पादों पर 20 प्रतिशत छूट दी जाएगी जो 2 अक्टूबर से प्रभावी होगी और यह 40 दिनों के लिए मान्य होगी।
केन्द्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम और सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने महात्मा गांधी की एक सौ पचासवीं जयंती की पूर्व संध्या पर आज नई दिल्ली में केवीआईसी के नए उत्पादों को लॉन्च करने के साथ-साथ एक विशेष बिक्री अभियान भी शुरू किया। उन्होंने बांस से बनी सात सौ एमएल और नौ सौ एमएल की क्षमता वाली बोतल को लॉन्च किया। यह बोतल त्रिपुरा स्थित एक संगठन द्वारा बनाई गई है। इसे प्लास्टिक की बोतलों का सटीक प्रतिस्थापन या विकल्प माना जा रहा है क्योंकि यह प्राकृतिक, किफायती, आकर्षक और सर्वाधिक पर्यावरण अनुकूल है। उन्होंने लाडली द्वारा तैयार किफायती सैनिटरी नैपकिन के साथ-साथ एक नए साबुन और कच्ची घानी सरसों तेल को भी लॉन्च किया। महात्मा गांधी की एक सौ पचासवीं जयंती की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपिता को स्मरण करते हुए श्री गडकरी ने कहा कि खादी और ग्रामोद्योग गांधीजी के हृदय के बहुत करीब थे। उन्होंने कहा कि गांधीवादी अर्थशास्त्र में अधिकतम लोगों की भागीदारी के साथ अधिकतम उत्पादन पर जोर दिया जाता है और भारत सरकार उनके सपनों को साकार करने के लिए पूरी तन्मयता के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा कि चार सौ रेलवे स्टेशनों पर कुल्हड़ में चाय सुलभ कराना और चमड़ा कारीगरों को टूल किट का वितरण इसी दिशा में अहम कदम हैं। श्री गडकरी ने खादी उत्पादों के आधुनिकीकरण की आवश्यकता पर भी बल दिया, ताकि उन्हें युवाओं के लिए और ज्यादा आकर्षक बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि मंत्रालय और केवीआईसी इस संबंध में प्रख्यात डिजाइनरों के साथ सहयोग कर रहे हैं। श्री गडकरी ने कहा कि मौजूदा समय में दो सौ एमएसएमई कंपनियां नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि केवीआईसी को भी एनएसई में कुछ उद्यमियों को सूचीबद्ध कराने के प्रयास करने चाहिए जिससे कर्ज का प्रवाह आसान हो जाएगा। श्री गडकरी ने पर्यावरण अनुकूल, किफायती और स्वास्थ्य तथा पर्यावरण के लिए बेहतर माने जाने वाले नए उत्पादों को विकसित करने में केवीआईसी द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस वर्ष खादी और ग्रामोद्योग आयोग तेरह अक्टूबर, दो हज़ार अट्ठारह को एक ही दिन में एक.पच्चीस करोड़ रुपये की बिक्री करने के स्वयं के रिकॉर्ड को तोड़ देगा। केवीआईसी के अध्यक्ष श्री विनय सक्सेना ने कहा कि केवीआईसी ग्रामोद्योगों के पुनरुत्थान में जुटा हुआ है। आज लॉन्च किए गए कच्ची घानी सरसों तेल की आपूर्ति प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम से जुड़ी एक यूनिट कर रही है, जिसे हाल ही में जयपुर के निकट स्थापित किया गया है। किफायती सैनिटरी नैपकिन भी एक पीएमईजीपी यूनिट में तैयार किए जा रहे हैं जो चंडीगढ़ में अवस्थित है। उन्होंने बताया कि केवीआईसी का वार्षिक कारोबार लगभग तीन,शून्य करोड़ रुपये है और इसे आने वाले वर्षों में बढ़ाकर पाँच,शून्य करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। महात्मा गांधी की एक सौ पचासवीं जयंती मनाने के मद्देनजर केवीआईसी पहली बार गांधी टोपी एवं गांधी धोती पर चालीस प्रतिशत डिस्काउंट या छूट दे रही है। इसी तरह सभी ग्रामोद्योग उत्पादों पर बीस प्रतिशत छूट दी जाएगी जो दो अक्टूबर से प्रभावी होगी और यह चालीस दिनों के लिए मान्य होगी।
जल्दी XX सदी में, रूसी साम्राज्य में बड़े पैमाने पर किसान विद्रोह देश में कृषि समस्या के समाधान की तलाश के लिए अधिकारियों को मजबूर कर दिया। निष्पक्ष संभव कृषि सुधार के दो तरीके थे। पहला तरीका उतरा सम्पदा के संरक्षण और किसान समुदाय के विनाश के लिए नेतृत्व किया। दूसरा रास्ता उतरा सम्पदा को रद्द करने और भूमि के राष्ट्रीयकरण का नेतृत्व किया। भूमि सुधार के कार्यान्वयन के दौरान और की अवधारणा पैदा हुई "कटौती। " सदी की शुरुआत में इस भाषण में पहले से दुर्लभ शब्द है, लेकिन, अपने मूल्य सभी खेतों साम्राज्य के लिए जाना जाता है। यूनाइटेड कुलीनों के सभी रूसी कांग्रेस भूमि सुधार के पहले जिस तरह के कार्यान्वयन के लिए प्रोत्साहन दिया। खाते में जीवन के पुराने किसान जिस तरह से व्यक्ति की मृत्यु की अनिवार्यता लेते हुए सरकार किसान आवंटन भूमि के पूर्ण विनाश पर फैसला किया, बड़े जमींदारों की भूमि अक्षुण्ण बनी रही। सुधारों प्रधानमंत्री P स्टोलिपिन के नेतृत्व में किया जाता है, और जल्द ही के नाम की सुनवाई पर दिखाई दिया "Stolypin के सुधारों। " नवंबर 3, 1905 जिसके अनुसार शाही घोषणा पत्र को प्रस्तुत किया गया था, मोचन भुगतान रद्द कर दिया जाता है और आवंटन पूरी तरह किसान के स्वामित्व में हो गया। इसलिए संभवतः जमीन में कटौती की बनाने के लिए किया गया था। यह शब्द 1906 के शुरुआत में प्रकट होता है और सफलतापूर्वक जब तक इस्तेमाल किया गया है 1917 की क्रांति साल। "काटना", "कट" इस अवधारणा से ली गई है - तो खेतों के बीच देश के राष्ट्रीय पर्यावरण प्रभाग में कहा जाता है। शब्द "कट" किसान के निजी इस्तेमाल में चुने गए समुदाय कार्यकाल का एक अलग हिस्से को दर्शाता है। साथ में सांप्रदायिक भूमि के विभाजन के साथ, यह रूसी साम्राज्य के सीमान्त भूमि पर गरीब किसान खेतों को बेदखल करने का निर्णय लिया गया। क्योंकि tsars के तहत किसानों पूर्ण अधिकार और स्वतंत्रता, आंदोलन की स्वतंत्रता के इस वर्ग के प्रतिनिधि के समेकन का सवाल था। मार्च 10, 1906 मंत्रिपरिषद की स्थिति निवास के चुनाव, आंदोलन की स्वतंत्रता, पासपोर्ट "प्रतिबंधक नियम" और अन्य वर्गों के साथ अपने नागरिक अधिकारों में किसानों के समकारी के रद्द होने के किसानों स्वतंत्रता दे दी। इस प्रकार, किसान समुदाय छोड़ सकता और निजी स्वामित्व में भूमि प्राप्त करने के लिए - कटौती। यह उन क्षेत्रों में जहाँ भी संभव बनाया है उपजाऊ मिट्टी तो तय है और साम्राज्य के बाहरी इलाके में पुनर्वास के मुद्दे - पर्याप्त नहीं था। अलग-अलग जमीन के स्वामित्व के साथ कई घरों में खेत का गठन किया। एक नियम के रूप में, इस तरह एक छोटी सी बस्ती के नव कब्जा कर लिया क्षेत्रों में पैदा हुई Tsarist रूस, जहां सांप्रदायिक भूमि कार्यकाल का प्रचलन नहीं है या व्यापक वितरण प्राप्त नहीं किया। फार्म और चोकर Stolypin के सुधार है, जो प्रशिया मॉडल पर छोटे खेतों में किसानों के पुनर्गठन करने के उद्देश्य से किया गया था की एक प्रतिष्ठित प्रतीक है। Stolypin सुधारों के सफल समापन अक्टूबर क्रांति को रोका। उसके आगमन के बाद से, कई शब्दों के अपने अर्थ खो दिया है, जिनमें शामिल हैं "कटौती। " इस अवधारणा को भूमि पर डिक्री के प्रकाशन के बाद इसके महत्व खो दिया है, छठी द्वारा हस्ताक्षर किए लेनिन।
जल्दी XX सदी में, रूसी साम्राज्य में बड़े पैमाने पर किसान विद्रोह देश में कृषि समस्या के समाधान की तलाश के लिए अधिकारियों को मजबूर कर दिया। निष्पक्ष संभव कृषि सुधार के दो तरीके थे। पहला तरीका उतरा सम्पदा के संरक्षण और किसान समुदाय के विनाश के लिए नेतृत्व किया। दूसरा रास्ता उतरा सम्पदा को रद्द करने और भूमि के राष्ट्रीयकरण का नेतृत्व किया। भूमि सुधार के कार्यान्वयन के दौरान और की अवधारणा पैदा हुई "कटौती। " सदी की शुरुआत में इस भाषण में पहले से दुर्लभ शब्द है, लेकिन, अपने मूल्य सभी खेतों साम्राज्य के लिए जाना जाता है। यूनाइटेड कुलीनों के सभी रूसी कांग्रेस भूमि सुधार के पहले जिस तरह के कार्यान्वयन के लिए प्रोत्साहन दिया। खाते में जीवन के पुराने किसान जिस तरह से व्यक्ति की मृत्यु की अनिवार्यता लेते हुए सरकार किसान आवंटन भूमि के पूर्ण विनाश पर फैसला किया, बड़े जमींदारों की भूमि अक्षुण्ण बनी रही। सुधारों प्रधानमंत्री P स्टोलिपिन के नेतृत्व में किया जाता है, और जल्द ही के नाम की सुनवाई पर दिखाई दिया "Stolypin के सुधारों। " नवंबर तीन, एक हज़ार नौ सौ पाँच जिसके अनुसार शाही घोषणा पत्र को प्रस्तुत किया गया था, मोचन भुगतान रद्द कर दिया जाता है और आवंटन पूरी तरह किसान के स्वामित्व में हो गया। इसलिए संभवतः जमीन में कटौती की बनाने के लिए किया गया था। यह शब्द एक हज़ार नौ सौ छः के शुरुआत में प्रकट होता है और सफलतापूर्वक जब तक इस्तेमाल किया गया है एक हज़ार नौ सौ सत्रह की क्रांति साल। "काटना", "कट" इस अवधारणा से ली गई है - तो खेतों के बीच देश के राष्ट्रीय पर्यावरण प्रभाग में कहा जाता है। शब्द "कट" किसान के निजी इस्तेमाल में चुने गए समुदाय कार्यकाल का एक अलग हिस्से को दर्शाता है। साथ में सांप्रदायिक भूमि के विभाजन के साथ, यह रूसी साम्राज्य के सीमान्त भूमि पर गरीब किसान खेतों को बेदखल करने का निर्णय लिया गया। क्योंकि tsars के तहत किसानों पूर्ण अधिकार और स्वतंत्रता, आंदोलन की स्वतंत्रता के इस वर्ग के प्रतिनिधि के समेकन का सवाल था। मार्च दस, एक हज़ार नौ सौ छः मंत्रिपरिषद की स्थिति निवास के चुनाव, आंदोलन की स्वतंत्रता, पासपोर्ट "प्रतिबंधक नियम" और अन्य वर्गों के साथ अपने नागरिक अधिकारों में किसानों के समकारी के रद्द होने के किसानों स्वतंत्रता दे दी। इस प्रकार, किसान समुदाय छोड़ सकता और निजी स्वामित्व में भूमि प्राप्त करने के लिए - कटौती। यह उन क्षेत्रों में जहाँ भी संभव बनाया है उपजाऊ मिट्टी तो तय है और साम्राज्य के बाहरी इलाके में पुनर्वास के मुद्दे - पर्याप्त नहीं था। अलग-अलग जमीन के स्वामित्व के साथ कई घरों में खेत का गठन किया। एक नियम के रूप में, इस तरह एक छोटी सी बस्ती के नव कब्जा कर लिया क्षेत्रों में पैदा हुई Tsarist रूस, जहां सांप्रदायिक भूमि कार्यकाल का प्रचलन नहीं है या व्यापक वितरण प्राप्त नहीं किया। फार्म और चोकर Stolypin के सुधार है, जो प्रशिया मॉडल पर छोटे खेतों में किसानों के पुनर्गठन करने के उद्देश्य से किया गया था की एक प्रतिष्ठित प्रतीक है। Stolypin सुधारों के सफल समापन अक्टूबर क्रांति को रोका। उसके आगमन के बाद से, कई शब्दों के अपने अर्थ खो दिया है, जिनमें शामिल हैं "कटौती। " इस अवधारणा को भूमि पर डिक्री के प्रकाशन के बाद इसके महत्व खो दिया है, छठी द्वारा हस्ताक्षर किए लेनिन।
आधुनिक क्या होना चाहिए इलेक्ट्रिक स्टोव? ग्लास चीनी मिट्टी की चीज़ें - एक सामग्री है कि इक्कीसवीं सदी का विकास है। उन्होंने कहा कि खाना पकाने के लिए उपकरणों के निर्माण में आवेदन पाता है फायदे का एक बहुत है। इस सामग्री की मुख्य विशेषता एक उच्च तापीय चालकता है। यह यह बहुत आसान है, एक पारंपरिक ओवन, खाना पकाने की प्रक्रिया में तापमान नियंत्रण की तुलना में आसान बनाता है। इस बोर्ड और उसकी सुरक्षा अलग करती है। डिवाइस के शीर्ष चिकनी कांच के बने, नवीनतम तकनीकों पर उत्पादन किया जाता है। इस मामले में, सामग्री के भौतिक गुणों बस अद्वितीय हैं। वह जल्दी से तपता है और बहुत किफायती ठंडा करता है। इसके अलावा, प्लेटें जहां कांच मिट्टी के पात्र प्रयोग किया जाता है में, वहाँ हीटिंग क्षेत्र की एक सीमा होती है। वहाँ भी क्षेत्र के क्षेत्र को बदलने की संभावना है। ग्लास मिट्टी के पात्र अभ्रक के आधार है, जिस पर एक सर्पिल रखी है पर स्थित है लचीला हीटिंग तत्व। टोंड सतह पूरी तरह से यह शामिल किया गया। कांच पर जोनों हीटिंग निशान है। वे हॉब्स कहा जाता है। ग्लास सिरेमिक सामग्री उच्च तापीय रोधन गुण है। इस संबंध में यह पूरी तरह से गर्मी ऊपर की ओर हीटर से आ रही गुजरता है। एक ही समय में सतह के बाकी व्यावहारिक रूप से गर्म नहीं है। इस प्रकार, गर्म थाली की सतह पर यह केवल बर्नर क्षेत्र है। शेष अंतरिक्ष - ठंड। ग्लास सिरेमिक प्लेट विभिन्न मॉडलों के बने होते हैं। उनमें से कुछ दो सर्किट खाना पकाने क्षेत्र है, जो आप हीटिंग क्षेत्र बदलने की अनुमति प्रदान की जाती हैं। इस समारोह में खाना पकाने के बर्तन और विभिन्न आकारों की पैन में उपयोग के लिए अनुमति देता है। वहाँ एक बहुआयामी बिजली है कुकर। गिलास मिट्टी के पात्र उस पर अंडाकार पदनाम हीटिंग क्षेत्र होते हैं। यह समान रूप से मछली खाना पकाने, आदि के लिए utyatnitsu में रखा उत्पादों, पैन गर्मी होगा इस तरह के बर्नर स्विच किया जा सकता है एक अतिरिक्त खंड के साथ परिपत्र हो जाता है। रसोई घर में विश्वसनीय और अपरिहार्य सहायक एक छोटा सा डेस्कटॉप इलेक्ट्रिक स्टोव है। गिलास मिट्टी के पात्र है, जो इसकी सतह से ही बना है पूरी तरह से किसी भी इंटीरियर में फिट। इस तरह प्लेटें माली के लिए अच्छे हैं। वे जो आराम करने के लिए चाहते लोगों के लिए सुविधाजनक हैं "बर्बर। " ग्लास चीनी मिट्टी की चीज़ें एक बहुत ही आकर्षक उपस्थिति है कि रसोई सुविधाओं के डिजाइन पर जोर देती है है। यह की देखभाल के लिए आसान है। कोटिंग विशेष डिटर्जेंट और स्पंज के साथ साफ किया जाता है। इस प्लेट का एक महत्वपूर्ण लाभ निर्मित खंड प्रदर्शन, अवशिष्ट गर्मी का प्रमाण भी दे रहा है। इस डिवाइस को खाना पकाने के क्षेत्र का निर्धारण करेगा ठंडा नहीं हुआ है। यह उन्हें एक गर्म राज्य में बनाए रखने के लिए भोजन दिया जा सकता है। यह हमेशा आरामदायक और व्यावहारिक इस लेख इलेक्ट्रिक स्टोव में शामिल नहीं है। Vitroceramic ग्राहकों की प्रतिक्रिया हॉब के किनारों के साथ कम झालर की वजह से नकारात्मक है। कभी-कभी यह तथ्य यह है कि पॉट सूप से "बचने" मंजिल पर है की ओर जाता है। इस तरह के तरल पदार्थ गर्म क्षेत्र पड़ोसी बर्नर में प्रवेश, प्लेट की सतह के खुर के लिए नेतृत्व कर सकते हैं। गिलास चीनी मिट्टी प्लेटें और बर्तन का उपयोग करके सख्त आवश्यकताओं प्रस्तुत कर रहे हैं। बर्तन के नीचे पूरी तरह से चिकनी और भी होना चाहिए। एक महत्वपूर्ण कारक कीमत है। यह गिलास चीनी मिट्टी की थाली में है परंपरागत प्रकार के उपकरणों की तुलना में काफी अधिक है।
आधुनिक क्या होना चाहिए इलेक्ट्रिक स्टोव? ग्लास चीनी मिट्टी की चीज़ें - एक सामग्री है कि इक्कीसवीं सदी का विकास है। उन्होंने कहा कि खाना पकाने के लिए उपकरणों के निर्माण में आवेदन पाता है फायदे का एक बहुत है। इस सामग्री की मुख्य विशेषता एक उच्च तापीय चालकता है। यह यह बहुत आसान है, एक पारंपरिक ओवन, खाना पकाने की प्रक्रिया में तापमान नियंत्रण की तुलना में आसान बनाता है। इस बोर्ड और उसकी सुरक्षा अलग करती है। डिवाइस के शीर्ष चिकनी कांच के बने, नवीनतम तकनीकों पर उत्पादन किया जाता है। इस मामले में, सामग्री के भौतिक गुणों बस अद्वितीय हैं। वह जल्दी से तपता है और बहुत किफायती ठंडा करता है। इसके अलावा, प्लेटें जहां कांच मिट्टी के पात्र प्रयोग किया जाता है में, वहाँ हीटिंग क्षेत्र की एक सीमा होती है। वहाँ भी क्षेत्र के क्षेत्र को बदलने की संभावना है। ग्लास मिट्टी के पात्र अभ्रक के आधार है, जिस पर एक सर्पिल रखी है पर स्थित है लचीला हीटिंग तत्व। टोंड सतह पूरी तरह से यह शामिल किया गया। कांच पर जोनों हीटिंग निशान है। वे हॉब्स कहा जाता है। ग्लास सिरेमिक सामग्री उच्च तापीय रोधन गुण है। इस संबंध में यह पूरी तरह से गर्मी ऊपर की ओर हीटर से आ रही गुजरता है। एक ही समय में सतह के बाकी व्यावहारिक रूप से गर्म नहीं है। इस प्रकार, गर्म थाली की सतह पर यह केवल बर्नर क्षेत्र है। शेष अंतरिक्ष - ठंड। ग्लास सिरेमिक प्लेट विभिन्न मॉडलों के बने होते हैं। उनमें से कुछ दो सर्किट खाना पकाने क्षेत्र है, जो आप हीटिंग क्षेत्र बदलने की अनुमति प्रदान की जाती हैं। इस समारोह में खाना पकाने के बर्तन और विभिन्न आकारों की पैन में उपयोग के लिए अनुमति देता है। वहाँ एक बहुआयामी बिजली है कुकर। गिलास मिट्टी के पात्र उस पर अंडाकार पदनाम हीटिंग क्षेत्र होते हैं। यह समान रूप से मछली खाना पकाने, आदि के लिए utyatnitsu में रखा उत्पादों, पैन गर्मी होगा इस तरह के बर्नर स्विच किया जा सकता है एक अतिरिक्त खंड के साथ परिपत्र हो जाता है। रसोई घर में विश्वसनीय और अपरिहार्य सहायक एक छोटा सा डेस्कटॉप इलेक्ट्रिक स्टोव है। गिलास मिट्टी के पात्र है, जो इसकी सतह से ही बना है पूरी तरह से किसी भी इंटीरियर में फिट। इस तरह प्लेटें माली के लिए अच्छे हैं। वे जो आराम करने के लिए चाहते लोगों के लिए सुविधाजनक हैं "बर्बर। " ग्लास चीनी मिट्टी की चीज़ें एक बहुत ही आकर्षक उपस्थिति है कि रसोई सुविधाओं के डिजाइन पर जोर देती है है। यह की देखभाल के लिए आसान है। कोटिंग विशेष डिटर्जेंट और स्पंज के साथ साफ किया जाता है। इस प्लेट का एक महत्वपूर्ण लाभ निर्मित खंड प्रदर्शन, अवशिष्ट गर्मी का प्रमाण भी दे रहा है। इस डिवाइस को खाना पकाने के क्षेत्र का निर्धारण करेगा ठंडा नहीं हुआ है। यह उन्हें एक गर्म राज्य में बनाए रखने के लिए भोजन दिया जा सकता है। यह हमेशा आरामदायक और व्यावहारिक इस लेख इलेक्ट्रिक स्टोव में शामिल नहीं है। Vitroceramic ग्राहकों की प्रतिक्रिया हॉब के किनारों के साथ कम झालर की वजह से नकारात्मक है। कभी-कभी यह तथ्य यह है कि पॉट सूप से "बचने" मंजिल पर है की ओर जाता है। इस तरह के तरल पदार्थ गर्म क्षेत्र पड़ोसी बर्नर में प्रवेश, प्लेट की सतह के खुर के लिए नेतृत्व कर सकते हैं। गिलास चीनी मिट्टी प्लेटें और बर्तन का उपयोग करके सख्त आवश्यकताओं प्रस्तुत कर रहे हैं। बर्तन के नीचे पूरी तरह से चिकनी और भी होना चाहिए। एक महत्वपूर्ण कारक कीमत है। यह गिलास चीनी मिट्टी की थाली में है परंपरागत प्रकार के उपकरणों की तुलना में काफी अधिक है।
MP Board Exam Paper Leak Case Update: मध्य प्रदेश में हुए पेपर लीक मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है. राजगढ़ जिले के पिपल्याकुल्मी परीक्षा केंद्र के 3 शिक्षकों पर FIR दर्ज की गई है. वही भोपाल क्राइम ब्रांच ने टीलीग्राम पर निगरानी बढ़ा दी है. MP Board 2023 Paper Leak Case update: माध्यमिक परीक्षा मंडल मध्य प्रदेश यानी माशिमं (MPBSE) के पेपर लीक मामले में लगातार कार्रवाई हो रही है. रविवार को इसी केस में राजगढ़ में बड़ा एक्शन हुआ है. वहीं भोपाल क्राइम ब्रांच ने टीलीग्राम पर निगरानी बढ़ा दी है. इससे पहले भोपाल और इंदौर में FIR दर्ज कराई गई थी. जिसके बाद 4 सेंटरों के 9 लोगों को सस्पेंड के साथ ही 21 लोगों को गिरफ्तार किया गया था. बता दें स्कूल शिक्षा मंत्री ने भी पेपर लीक की बात स्वीकार की है. टेलीग्राम पर बोर्ड पेपर लीक करने के नाम पर ठगी करने वाला गिरोह सक्रिय अभी भी सक्रिय हैं. इस कारण क्राइम ब्रांच ने टेलीग्राम पर निगरानी बढ़ा दी है. फर्जी पेपर लीक करने वालों की गिरफ्तारी के लिए क्राइम ब्रांच की टीम प्रदेश के कई जिलों में दबिश दे रही है. आरोपियों पर शिकंजा कसने के लिए भोपाल क्राइम ब्रांच ने दो टीमों रवाना किया है. फिलहाल टेलीग्राम पर एमपी बोर्ड पेपर लीक नाम से कई ग्रुप चल रहे हैं. ग्रुप्स पर माध्यमिक शिक्षा मंडल का लोगो का उपयोग किया जा रहा है. इन ग्रुपों में पेपर उपलब्ध कराने का हवाला देकर छात्रों से हजारों रुपये वसूले जा रहे हैं. हालांकि, कई ग्रुप क्राइम ब्रांच की सख्ती के बाद प्राइवेट हो गए हैं. पेपर लीक होने के बाद दोबारा परीक्षा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हुआ था. इसे लेकर स्कूल शिक्षा मंत्री ने मीडिया से बात करते हुए बड़ी बात कही है. उन्होंने कहा कि परीक्षण कर रहे हैं, पर अभी ऐसी स्थिति नहीं है. क्योंकि परीक्षा कक्ष में बच्चों के बैठने के बाद प्रश्न पत्र बाहर आया है. फिर भी प्रश्न पत्र निरस्त करेंगे तो उन बच्चों के साथ अन्याय होगा, जो पढ़कर आए और अच्छा प्रश्न पत्र हल किया. राजगढ़ जिले के पिपल्याकुल्मी परीक्षा केंद्र की केंद्र अध्यक्ष रेखा बैरागी, सहायक केंद्र अध्यक्ष रामसागर शर्मा और स्थानिय सहायक केंद्र अध्यक्ष धनराज पाटीदार के खिलाफ FIR दर्ज की गई है. इन शिक्षकों द्वारा 12 कक्षा का जीव विज्ञान का पेपर टेलीग्राम पर वायरल किया गया था. माध्यमिक शिक्षा मंडल के आयुक्त नोटिस के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने माचलपुर थाने में मामला दर्ज कराया. बता दें मामले की गंभीरता को देखते हुए माध्यमिक शिक्षा मंडल (MPBSE) ने 6 सदस्यीय कमेटी बनाई है. जो पेपर लीक केस की जांच कर रही है. बोर्ड उसी के आधार पर कार्रवाई और आगे की प्लानिंग करेगा. हालांकि, सबसे पहले बोर्ड की ओर से संबंधित टेलीग्राम चैनल (Telegram Channel) के खिलाफ FIR भी दर्ज कराई जा चुकी है.
MP Board Exam Paper Leak Case Update: मध्य प्रदेश में हुए पेपर लीक मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है. राजगढ़ जिले के पिपल्याकुल्मी परीक्षा केंद्र के तीन शिक्षकों पर FIR दर्ज की गई है. वही भोपाल क्राइम ब्रांच ने टीलीग्राम पर निगरानी बढ़ा दी है. MP Board दो हज़ार तेईस Paper Leak Case update: माध्यमिक परीक्षा मंडल मध्य प्रदेश यानी माशिमं के पेपर लीक मामले में लगातार कार्रवाई हो रही है. रविवार को इसी केस में राजगढ़ में बड़ा एक्शन हुआ है. वहीं भोपाल क्राइम ब्रांच ने टीलीग्राम पर निगरानी बढ़ा दी है. इससे पहले भोपाल और इंदौर में FIR दर्ज कराई गई थी. जिसके बाद चार सेंटरों के नौ लोगों को सस्पेंड के साथ ही इक्कीस लोगों को गिरफ्तार किया गया था. बता दें स्कूल शिक्षा मंत्री ने भी पेपर लीक की बात स्वीकार की है. टेलीग्राम पर बोर्ड पेपर लीक करने के नाम पर ठगी करने वाला गिरोह सक्रिय अभी भी सक्रिय हैं. इस कारण क्राइम ब्रांच ने टेलीग्राम पर निगरानी बढ़ा दी है. फर्जी पेपर लीक करने वालों की गिरफ्तारी के लिए क्राइम ब्रांच की टीम प्रदेश के कई जिलों में दबिश दे रही है. आरोपियों पर शिकंजा कसने के लिए भोपाल क्राइम ब्रांच ने दो टीमों रवाना किया है. फिलहाल टेलीग्राम पर एमपी बोर्ड पेपर लीक नाम से कई ग्रुप चल रहे हैं. ग्रुप्स पर माध्यमिक शिक्षा मंडल का लोगो का उपयोग किया जा रहा है. इन ग्रुपों में पेपर उपलब्ध कराने का हवाला देकर छात्रों से हजारों रुपये वसूले जा रहे हैं. हालांकि, कई ग्रुप क्राइम ब्रांच की सख्ती के बाद प्राइवेट हो गए हैं. पेपर लीक होने के बाद दोबारा परीक्षा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हुआ था. इसे लेकर स्कूल शिक्षा मंत्री ने मीडिया से बात करते हुए बड़ी बात कही है. उन्होंने कहा कि परीक्षण कर रहे हैं, पर अभी ऐसी स्थिति नहीं है. क्योंकि परीक्षा कक्ष में बच्चों के बैठने के बाद प्रश्न पत्र बाहर आया है. फिर भी प्रश्न पत्र निरस्त करेंगे तो उन बच्चों के साथ अन्याय होगा, जो पढ़कर आए और अच्छा प्रश्न पत्र हल किया. राजगढ़ जिले के पिपल्याकुल्मी परीक्षा केंद्र की केंद्र अध्यक्ष रेखा बैरागी, सहायक केंद्र अध्यक्ष रामसागर शर्मा और स्थानिय सहायक केंद्र अध्यक्ष धनराज पाटीदार के खिलाफ FIR दर्ज की गई है. इन शिक्षकों द्वारा बारह कक्षा का जीव विज्ञान का पेपर टेलीग्राम पर वायरल किया गया था. माध्यमिक शिक्षा मंडल के आयुक्त नोटिस के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने माचलपुर थाने में मामला दर्ज कराया. बता दें मामले की गंभीरता को देखते हुए माध्यमिक शिक्षा मंडल ने छः सदस्यीय कमेटी बनाई है. जो पेपर लीक केस की जांच कर रही है. बोर्ड उसी के आधार पर कार्रवाई और आगे की प्लानिंग करेगा. हालांकि, सबसे पहले बोर्ड की ओर से संबंधित टेलीग्राम चैनल के खिलाफ FIR भी दर्ज कराई जा चुकी है.
राष्ट्रीय महिला आयोग के स्थापना दिवस पर बुधवार को नई दिल्ली में कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। रायपुर। राष्ट्रीय महिला आयोग के स्थापना दिवस पर बुधवार को नई दिल्ली में कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ सहित 15 राज्यों से महिला आयोग के अध्यक्ष पहुंचे थे। अध्यक्षों की इसी सूची में छत्तीसगढ़ को प्रथम पंक्ति में रखा गया था। इस कार्यक्रम में शामिल हुईं छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डा. किरणमयी नायक ने बताया कि प्रदेश में महिलाओं को मिल रही त्वरित न्याय और कानूनी जागरूकता के लिए चलाये जा रहे मुख्यमंत्री महतारी न्याय रथ के कारण यह गौरवशाली सौभाग्य प्राप्त हुआ है। डा. किरणमयी नायक ने बताया कि समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि एक सवाल उठता है कि केवल महिलाओं के लिए अलग आयोग बनाने की जरूरत क्यों पड़ी। इसका उत्तर है हम देख रहे हैं कि हमारी बहन-बेटियां अंतरिक्ष में उड़ रही हैं, सशस्त्र बलों में नेतृत्व दे रही हैं, वहीं दूसरी ओर वे घरेलू हिंसा का शिकार हो रही हैं और कार्यस्थल पर भेदभाव और उत्पीड़न का सामना कर रही हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय महिला आयोग का मिशन महिलाओं के खिलाफ भेदभाव और अत्याचार से उत्पन्न होने वाली विशिष्ट समस्याओं का समाधान करना और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए प्रयास करना है। उन्होंने कहा कि देश की आधी आबादी के लिए अलग आयोग बनाने की जरूरत बताती है कि महिलाओं को अभी तक उनका उचित सम्मान और अधिकार नहीं मिल पाया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाओं की स्थिति में सुधार करके ही देश समग्र प्रगति करने में सक्षम होगा। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी से राष्ट्रीय महिला यात्रा आयोग की पुस्तक 'सशक्त नारी, सशक्त भारत' की पहली प्रति प्राप्त की।
राष्ट्रीय महिला आयोग के स्थापना दिवस पर बुधवार को नई दिल्ली में कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। रायपुर। राष्ट्रीय महिला आयोग के स्थापना दिवस पर बुधवार को नई दिल्ली में कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ सहित पंद्रह राज्यों से महिला आयोग के अध्यक्ष पहुंचे थे। अध्यक्षों की इसी सूची में छत्तीसगढ़ को प्रथम पंक्ति में रखा गया था। इस कार्यक्रम में शामिल हुईं छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डा. किरणमयी नायक ने बताया कि प्रदेश में महिलाओं को मिल रही त्वरित न्याय और कानूनी जागरूकता के लिए चलाये जा रहे मुख्यमंत्री महतारी न्याय रथ के कारण यह गौरवशाली सौभाग्य प्राप्त हुआ है। डा. किरणमयी नायक ने बताया कि समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि एक सवाल उठता है कि केवल महिलाओं के लिए अलग आयोग बनाने की जरूरत क्यों पड़ी। इसका उत्तर है हम देख रहे हैं कि हमारी बहन-बेटियां अंतरिक्ष में उड़ रही हैं, सशस्त्र बलों में नेतृत्व दे रही हैं, वहीं दूसरी ओर वे घरेलू हिंसा का शिकार हो रही हैं और कार्यस्थल पर भेदभाव और उत्पीड़न का सामना कर रही हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय महिला आयोग का मिशन महिलाओं के खिलाफ भेदभाव और अत्याचार से उत्पन्न होने वाली विशिष्ट समस्याओं का समाधान करना और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए प्रयास करना है। उन्होंने कहा कि देश की आधी आबादी के लिए अलग आयोग बनाने की जरूरत बताती है कि महिलाओं को अभी तक उनका उचित सम्मान और अधिकार नहीं मिल पाया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाओं की स्थिति में सुधार करके ही देश समग्र प्रगति करने में सक्षम होगा। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी से राष्ट्रीय महिला यात्रा आयोग की पुस्तक 'सशक्त नारी, सशक्त भारत' की पहली प्रति प्राप्त की।
भारत के जाने-माने दिग्गज निवेशक राकेश झुनझुनवाला के पास 30 जून तक कंपनी में 1. 6% हिस्सेदारी, या 7,245,605 शेयर थे. Fuel Demand: मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने बुधवार को कहा कि सरकारी ऑइल कंपनियां IOC, BPCL और HPCL की इनकम अगले 12-18 महीनों में बढ़ेगी. चांदी का वायदा भाव गुरुवार दोपहर 0. 43 फीसद या 270 रुपये की गिरावट के साथ 62,501 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड करता दिखाई दिया. Sapphire Foods IPO: देवयानी इंटरनेशनल के बाद एक और KFC, PIZZA HUT ऑपरेटर ने आईपीओ (IPO) के लिए सेबी के पास पेपर जमा किए हैं. NLC India Recruitment News: उम्मीदवार को संबंधित विषय में मान्यता प्राप्त बोर्ड से ITI/ BCom/ BBA/ BCA/ BSc पास होना चाहिए. Tejas Express: त्योहारों पर आईआरसीटीसी यात्रियों का सफर यादगार बनाने के लिए गिफ्ट भी देता है. ऐसा देश की किसी और ट्रेन में नहीं होता है. शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स के शेयरों में सबसे अधिक तेजी पावरग्रिड, टेक महिंद्रा, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज-ऑटो और एचसीएल टेक में देखने को मिली. Devyani International 1838 करोड़ रुपये के इस आईपीओ के तहत जुटाई गई पूंजी का उपयोग कर्ज चुकाने जैसे कार्यों में करेगी. योनो और योना लाइट ऐप पर सिम बाइंडिंग का सिस्टम केवल उन्हीं मोबाइल पर काम करेगा जिनका सिम कार्ड बैंक में वेरिफाई होगा. महामारी के प्रकोप के कारण एयरलाइंस को इस वित्त वर्ष में लगभग 21,000 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा होने की आशंका है.
भारत के जाने-माने दिग्गज निवेशक राकेश झुनझुनवाला के पास तीस जून तक कंपनी में एक. छः% हिस्सेदारी, या सात,दो सौ पैंतालीस,छः सौ पाँच शेयर थे. Fuel Demand: मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने बुधवार को कहा कि सरकारी ऑइल कंपनियां IOC, BPCL और HPCL की इनकम अगले बारह-अट्ठारह महीनों में बढ़ेगी. चांदी का वायदा भाव गुरुवार दोपहर शून्य. तैंतालीस फीसद या दो सौ सत्तर रुपयापये की गिरावट के साथ बासठ,पाँच सौ एक रुपयापये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड करता दिखाई दिया. Sapphire Foods IPO: देवयानी इंटरनेशनल के बाद एक और KFC, PIZZA HUT ऑपरेटर ने आईपीओ के लिए सेबी के पास पेपर जमा किए हैं. NLC India Recruitment News: उम्मीदवार को संबंधित विषय में मान्यता प्राप्त बोर्ड से ITI/ BCom/ BBA/ BCA/ BSc पास होना चाहिए. Tejas Express: त्योहारों पर आईआरसीटीसी यात्रियों का सफर यादगार बनाने के लिए गिफ्ट भी देता है. ऐसा देश की किसी और ट्रेन में नहीं होता है. शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स के शेयरों में सबसे अधिक तेजी पावरग्रिड, टेक महिंद्रा, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज-ऑटो और एचसीएल टेक में देखने को मिली. Devyani International एक हज़ार आठ सौ अड़तीस करोड़ रुपये के इस आईपीओ के तहत जुटाई गई पूंजी का उपयोग कर्ज चुकाने जैसे कार्यों में करेगी. योनो और योना लाइट ऐप पर सिम बाइंडिंग का सिस्टम केवल उन्हीं मोबाइल पर काम करेगा जिनका सिम कार्ड बैंक में वेरिफाई होगा. महामारी के प्रकोप के कारण एयरलाइंस को इस वित्त वर्ष में लगभग इक्कीस,शून्य करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा होने की आशंका है.
Mahashivratri 2023: इस साल महा शिवरात्रि 18 फरवरी 2023 है. शिव भक्तों के लिए ये सबसे खास दिन है. इस दिन शिव भक्त मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं. महा शिवरात्रि हिंदू संस्कृति में सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है और इसे महान भगवान शिव और उनकी पत्नी देवी पार्वती के सम्मान में मनाया जाता है. महा शिवरात्रि को उनके विवाह की रात के रूप में मनाया जाता है. वृष राशि - वृष राशि वाले जातकों को प्रमोशन के साथ आय में भी वृद्धि की उम्मीद है. भूमि, भवन या वाहन खरीदने के लिए भी इस महाशिवरात्रि पर शुभ मुहूर्त बन रहा है. मिथुन राशि- मिथुन राशि वाले लोगों के संपूर्ण स्वास्थ्य में सुधार देखने को मिलेगा. कार्यस्थल पर उपलब्धि के साथ जिम्मेदारी भी मिल सकती है. घर-परिवार में न केवल सुख-समृद्धि बढ़ेगी बल्कि धन की आमद भी बढ़ सकती है. धनु राशि- धनु राशि के लोगों को भगवान शिव की कृपा से मनोकामनाएं पूरी होती हुई नजर आएंगी. काम की तारीफ होगी और कार्यक्षेत्र में तरक्की करने का मौका मिलेगा. तुला राशि- तुला राशि वालों को महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होगी. व्यवसाय में लाभ मिलने की उम्मीद है, धन की आवक बढ़ेगी और समग्र स्वास्थ्य में भी सुधार होगा. कुंभ राशि- कुंभ राशि वालों के लिए महा शिवरात्रि शुभ रहने वाला है. शनि देव कुंभ राशि में विराजमान रहेंगे. शनि देव को भगवान शिव का परम शिष्य माना जाता है. कार्यक्षेत्र में नए अवसर मिलेंगे. धन लाभ और मोटा मुनाफा होने की भी संभावना है.
Mahashivratri दो हज़ार तेईस: इस साल महा शिवरात्रि अट्ठारह फरवरी दो हज़ार तेईस है. शिव भक्तों के लिए ये सबसे खास दिन है. इस दिन शिव भक्त मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं. महा शिवरात्रि हिंदू संस्कृति में सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है और इसे महान भगवान शिव और उनकी पत्नी देवी पार्वती के सम्मान में मनाया जाता है. महा शिवरात्रि को उनके विवाह की रात के रूप में मनाया जाता है. वृष राशि - वृष राशि वाले जातकों को प्रमोशन के साथ आय में भी वृद्धि की उम्मीद है. भूमि, भवन या वाहन खरीदने के लिए भी इस महाशिवरात्रि पर शुभ मुहूर्त बन रहा है. मिथुन राशि- मिथुन राशि वाले लोगों के संपूर्ण स्वास्थ्य में सुधार देखने को मिलेगा. कार्यस्थल पर उपलब्धि के साथ जिम्मेदारी भी मिल सकती है. घर-परिवार में न केवल सुख-समृद्धि बढ़ेगी बल्कि धन की आमद भी बढ़ सकती है. धनु राशि- धनु राशि के लोगों को भगवान शिव की कृपा से मनोकामनाएं पूरी होती हुई नजर आएंगी. काम की तारीफ होगी और कार्यक्षेत्र में तरक्की करने का मौका मिलेगा. तुला राशि- तुला राशि वालों को महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होगी. व्यवसाय में लाभ मिलने की उम्मीद है, धन की आवक बढ़ेगी और समग्र स्वास्थ्य में भी सुधार होगा. कुंभ राशि- कुंभ राशि वालों के लिए महा शिवरात्रि शुभ रहने वाला है. शनि देव कुंभ राशि में विराजमान रहेंगे. शनि देव को भगवान शिव का परम शिष्य माना जाता है. कार्यक्षेत्र में नए अवसर मिलेंगे. धन लाभ और मोटा मुनाफा होने की भी संभावना है.
स्टारप्लस के शो 'फालतू' की कहानी हमेशा अपनी प्रेरणादायक और आकर्षक कहानी के लिए चर्चा में रही है जो अनचाही बालिकाओं के संबंध में एक बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दे को उजागर करती है। अपनी रिलीज के बाद से ही इस शो को हर तरफ से शानदार प्रतिक्रिया मिल रही है और इसने टॉप टीआरपी बटोरी है। 'फालतू' की कहानी ने दर्शकों के दिलों में गहरी जगह बना ली है जहां वे 'फालतू' की मासूमियत को पसंद कर रहे हैं और कई तरह से उससे जुड़ रहे हैं। हाल ही इस पर शो की लीड निहारिका चौकसी ने अपनी निजी जिंदगी से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा शेयर किया है। निहारिका चौकसी ने कहा, फालतू जैसा ही अनुभव मुझे तब हुआ जब मैंने अपने माता-पिता से कहा कि मैं एक्टिंग लाइन में अपना करियर बनाना चाहती हूं। वे सपोर्टिव थे लेकिन मेरे रिश्तेदार नहीं थे। वे ऐसे थे जैसे लड़कियों को इस फील्ड में काम नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा, यह स्पष्ट रूप से इस बारे में उनके ज्ञान की कमी को दर्शाता है और वे कितने भेदभावपूर्ण हैं। वे इस तरह से प्रतिक्रिया नहीं करते अगर मेरा भाई ऐसा करना चाहता था, इसलिए जैसा कि हम देख सकते हैं कि हम सभी अपने डेली लाइफ में इस तरह के भेदभाव का सामना करते हैं और हमें पता भी नहीं चलता। इस तरह के मुद्दों को सामने लाने में सबसे आगे होने के नाते, स्टार प्लस का नया शो फालतू एक प्रेरणादायक कहानी होने का वादा करता है, जो एक लड़की की ताकत के बारे में समाज के लिए एक बहुत ही मजबूत संदेश पेश करता है। दर्शकों को इस शो की कहानी बेहद पसंद आ रही है। जहां यह शो टॉप ट्रेंडिंग में से एक है, वहीं दर्शक हमेशा यह जानने के लिए उत्सुक रहते हैं कि आगे के एपिसोड में शो क्या नया मोड़ लेने जा रहा है।
स्टारप्लस के शो 'फालतू' की कहानी हमेशा अपनी प्रेरणादायक और आकर्षक कहानी के लिए चर्चा में रही है जो अनचाही बालिकाओं के संबंध में एक बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दे को उजागर करती है। अपनी रिलीज के बाद से ही इस शो को हर तरफ से शानदार प्रतिक्रिया मिल रही है और इसने टॉप टीआरपी बटोरी है। 'फालतू' की कहानी ने दर्शकों के दिलों में गहरी जगह बना ली है जहां वे 'फालतू' की मासूमियत को पसंद कर रहे हैं और कई तरह से उससे जुड़ रहे हैं। हाल ही इस पर शो की लीड निहारिका चौकसी ने अपनी निजी जिंदगी से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा शेयर किया है। निहारिका चौकसी ने कहा, फालतू जैसा ही अनुभव मुझे तब हुआ जब मैंने अपने माता-पिता से कहा कि मैं एक्टिंग लाइन में अपना करियर बनाना चाहती हूं। वे सपोर्टिव थे लेकिन मेरे रिश्तेदार नहीं थे। वे ऐसे थे जैसे लड़कियों को इस फील्ड में काम नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा, यह स्पष्ट रूप से इस बारे में उनके ज्ञान की कमी को दर्शाता है और वे कितने भेदभावपूर्ण हैं। वे इस तरह से प्रतिक्रिया नहीं करते अगर मेरा भाई ऐसा करना चाहता था, इसलिए जैसा कि हम देख सकते हैं कि हम सभी अपने डेली लाइफ में इस तरह के भेदभाव का सामना करते हैं और हमें पता भी नहीं चलता। इस तरह के मुद्दों को सामने लाने में सबसे आगे होने के नाते, स्टार प्लस का नया शो फालतू एक प्रेरणादायक कहानी होने का वादा करता है, जो एक लड़की की ताकत के बारे में समाज के लिए एक बहुत ही मजबूत संदेश पेश करता है। दर्शकों को इस शो की कहानी बेहद पसंद आ रही है। जहां यह शो टॉप ट्रेंडिंग में से एक है, वहीं दर्शक हमेशा यह जानने के लिए उत्सुक रहते हैं कि आगे के एपिसोड में शो क्या नया मोड़ लेने जा रहा है।
"'हरीश रावत फिर मुख्यमंत्री बने तो कैबिनेट मंत्री होंगे फुरकान...? न वोटरों के दिल में बनाया घर, न कार्यकर्ताओं को संतुष्ट कर सके मुनीष. . घड़ियाली आँसू बहाकर नहीं मिलेंगे मत, जनता विकास कार्यों में रखती है विश्वासः स्वामी यतीश्वरानंद. . जनहित में किए गए कार्यो को लेकर राठौर ने मांगे वोट. . आप प्रत्याशी संजय सैनी ने चुनाव प्रचार में झोंकी ताकत. . "रावण ने किया भूरा प्रधान के लिए रोड-शो, प्रत्याशी के लिए मांगे वोट. . भाजपा सरकार में स्वास्थ्य, शिक्षा व सुरक्षा सबसे अव्वलः आदेश चौहान. . शिवराज चौहान का वीडियो वायरल, बोले उत्तराखंड में गई बीजेपी. . व्यापारियों ने पोस्टर लगाकर पूछे सवाल, जब दुकानों पर जेसीबी गरजी तब कहां थे विधायक जी. .
"'हरीश रावत फिर मुख्यमंत्री बने तो कैबिनेट मंत्री होंगे फुरकान...? न वोटरों के दिल में बनाया घर, न कार्यकर्ताओं को संतुष्ट कर सके मुनीष. . घड़ियाली आँसू बहाकर नहीं मिलेंगे मत, जनता विकास कार्यों में रखती है विश्वासः स्वामी यतीश्वरानंद. . जनहित में किए गए कार्यो को लेकर राठौर ने मांगे वोट. . आप प्रत्याशी संजय सैनी ने चुनाव प्रचार में झोंकी ताकत. . "रावण ने किया भूरा प्रधान के लिए रोड-शो, प्रत्याशी के लिए मांगे वोट. . भाजपा सरकार में स्वास्थ्य, शिक्षा व सुरक्षा सबसे अव्वलः आदेश चौहान. . शिवराज चौहान का वीडियो वायरल, बोले उत्तराखंड में गई बीजेपी. . व्यापारियों ने पोस्टर लगाकर पूछे सवाल, जब दुकानों पर जेसीबी गरजी तब कहां थे विधायक जी. .
थे, अतः अब उनमें इतना साहस, उत्साह एवं बल न था कि वे कुछ उठ सकते । जनता तो प्रथम ही से राजनैतिक क्षेत्र से बहुत कुछ दूर रहती थी, वह इस क्षेत्र में कुछ भी कार्य न कर सकती थी, अब तो उसका साहस एवं उत्साह, जो कुछ भी रहा सहा शेष था, और भी जाता रहा, क्योंकि वह दासता एवं परतन्त्रता की बेड़ियों से पूर्णतया जड़ीकृत हो गई, और यह देखकर कि उसके वीर राजपूत रण में काम आ गये और केवल पराजय के ही और कुछ भी सफलता न प्राप्त हुई, वह सर्वथा हताश हो गई थी । सौभाग्य - समय को परिवर्तित तथा विधि-विधान में रूपान्तरित देखते हुये उसकी चित्तवृत्ति (मनोवृत्ति) भी परिवर्तित हो चली। दुखी हृदय होकर उसे अब ईश्वरोपासना, भक्ति-भाव एवं ईश्वरानुराग की ही बातें अच्छी लगने लगीं। दुखी श्रात्मा को ईश्वर का ही एक सहारा स्वभावतः ही हुआ करता है। बस ईश्वर के गुणस्तवन से चित्त को सान्त्वना, धैर्य, एवं शान्ति देना ही उसका अभीष्ट कार्य हो चला, कवियों के भी हृदय अब मलीन एवं हतोत्साह हो गये, न तो उनकी नसों में वह वीरता का रक्त ही रह गया और न उनके मानलों में वीर रस की वे तरल तरंगें ही रह गई, जो चन्द्र के समय में रहती थीं। अतः वे लोग भी ईश्वरप्रेम एवं भक्ति-भाव को ओर प्रोन्मुख हो चले, और ईश्वर-स्तवन सम्बन्धी काव्य से अपना एवं अपनी दुखी जनता का मनोरंजन करने लगे। धार्मिक सिद्धान्तों को रक्षा के लिये उन्हें अपने काव्य के ही द्वारा पूर्ण प्रयत्न करना पड़ा, क्योंकि अब विरुद्ध धर्मानुयायी मुसलमानों का यहाँ आधिपत्य जम गया था और इसी से उनके साथ हिन्दू जनता (हिन्दू जाति) का सम्पर्क सम्बन्ध (विचारविनिमय, आचार- परिवर्तन आदि) प्रतिदिन बढ़ रहा था। साथ ही धर्माचरण एवं प्रभुगुण-गानादि से ईश्वर को प्रसन्न करना भी उन्हें अभीष्ट था, जिससे उन्हें पुनः स्वातंत्र्य-सुख आदि की प्राप्ति हो और उनके कष्टों का निवारण हो सके, भक्ति-भाव से प्रसन्न होकर भगवान उन्हें अपनाकर उनके दुखों को दूर करें। ज्ञान-योग के द्वारा ईश्वरीय आनन्द का प्राप्त करना तो सुख-साभ्य एवं व्यापक रूप से सुलभ न था क्योंकि वह बड़ी ही कठिन समस्या थी, इसी से प्रेम एवं भक्ति के ही द्वारा (जो प्रायः सुलभ, व्यापक या सर्वसाधारण तथा सरल साध्य सी है) ईश्वरीयआनन्द के प्राप्त करने का प्रयत्न किया जाने लगा। इस समय मुसलमान सम्राटों की कुटिल नीति के कारण अन्य प्रकार से इष्ट-साधन न हो सकता था। दीन दास केवल ईश्वर ही को पुकार सकता है और उसी से अपनी मुक्ति के लिये प्रार्थना कर सकता है। इन्हीं सब कारणों से जनता की मनोवृत्ति एवं रुचि परिवर्तित होकर धार्मिक भक्ति-भावों की ओर लग गई और देश में धार्मिक विचार तथा ईश्वरानुराग की धारा चारों ओर द्रुति गति से प्रवाहित हो चली । देश के राजपूतों में अब ऐसे वीरों के न होने से जो वास्तव में प्रशंसा पात्र हों, कवियों को भी अब बीर-काव्य की ओर से उन्मुख होकर वैमुखी वृत्ति लेनी पड़ी, और जनता की चित्तवृत्ति तथा समय के परिवर्तन से उत्पन्न होने वाले प्रभावों से प्रभावित होकर अपनी काव्य-धारा को धर्म की ओर झुकाना पड़ा । दूसरा कारण इस प्रकार के परिवर्तन का यह भी था कि कवि लोग अपने वीर राजाओं का यशोगान मुसलमानों के शासन में रह कर स्वतंत्रता के साथ मुक्तकंठ से कदापि न कर सकते थे, यदि कहीं कभी कोई प्रशंसनीय राजपूत राजा को पाकर वे वीर-काव्य के करने का अवसर भी पाते थे। हाँ राज
थे, अतः अब उनमें इतना साहस, उत्साह एवं बल न था कि वे कुछ उठ सकते । जनता तो प्रथम ही से राजनैतिक क्षेत्र से बहुत कुछ दूर रहती थी, वह इस क्षेत्र में कुछ भी कार्य न कर सकती थी, अब तो उसका साहस एवं उत्साह, जो कुछ भी रहा सहा शेष था, और भी जाता रहा, क्योंकि वह दासता एवं परतन्त्रता की बेड़ियों से पूर्णतया जड़ीकृत हो गई, और यह देखकर कि उसके वीर राजपूत रण में काम आ गये और केवल पराजय के ही और कुछ भी सफलता न प्राप्त हुई, वह सर्वथा हताश हो गई थी । सौभाग्य - समय को परिवर्तित तथा विधि-विधान में रूपान्तरित देखते हुये उसकी चित्तवृत्ति भी परिवर्तित हो चली। दुखी हृदय होकर उसे अब ईश्वरोपासना, भक्ति-भाव एवं ईश्वरानुराग की ही बातें अच्छी लगने लगीं। दुखी श्रात्मा को ईश्वर का ही एक सहारा स्वभावतः ही हुआ करता है। बस ईश्वर के गुणस्तवन से चित्त को सान्त्वना, धैर्य, एवं शान्ति देना ही उसका अभीष्ट कार्य हो चला, कवियों के भी हृदय अब मलीन एवं हतोत्साह हो गये, न तो उनकी नसों में वह वीरता का रक्त ही रह गया और न उनके मानलों में वीर रस की वे तरल तरंगें ही रह गई, जो चन्द्र के समय में रहती थीं। अतः वे लोग भी ईश्वरप्रेम एवं भक्ति-भाव को ओर प्रोन्मुख हो चले, और ईश्वर-स्तवन सम्बन्धी काव्य से अपना एवं अपनी दुखी जनता का मनोरंजन करने लगे। धार्मिक सिद्धान्तों को रक्षा के लिये उन्हें अपने काव्य के ही द्वारा पूर्ण प्रयत्न करना पड़ा, क्योंकि अब विरुद्ध धर्मानुयायी मुसलमानों का यहाँ आधिपत्य जम गया था और इसी से उनके साथ हिन्दू जनता का सम्पर्क सम्बन्ध प्रतिदिन बढ़ रहा था। साथ ही धर्माचरण एवं प्रभुगुण-गानादि से ईश्वर को प्रसन्न करना भी उन्हें अभीष्ट था, जिससे उन्हें पुनः स्वातंत्र्य-सुख आदि की प्राप्ति हो और उनके कष्टों का निवारण हो सके, भक्ति-भाव से प्रसन्न होकर भगवान उन्हें अपनाकर उनके दुखों को दूर करें। ज्ञान-योग के द्वारा ईश्वरीय आनन्द का प्राप्त करना तो सुख-साभ्य एवं व्यापक रूप से सुलभ न था क्योंकि वह बड़ी ही कठिन समस्या थी, इसी से प्रेम एवं भक्ति के ही द्वारा ईश्वरीयआनन्द के प्राप्त करने का प्रयत्न किया जाने लगा। इस समय मुसलमान सम्राटों की कुटिल नीति के कारण अन्य प्रकार से इष्ट-साधन न हो सकता था। दीन दास केवल ईश्वर ही को पुकार सकता है और उसी से अपनी मुक्ति के लिये प्रार्थना कर सकता है। इन्हीं सब कारणों से जनता की मनोवृत्ति एवं रुचि परिवर्तित होकर धार्मिक भक्ति-भावों की ओर लग गई और देश में धार्मिक विचार तथा ईश्वरानुराग की धारा चारों ओर द्रुति गति से प्रवाहित हो चली । देश के राजपूतों में अब ऐसे वीरों के न होने से जो वास्तव में प्रशंसा पात्र हों, कवियों को भी अब बीर-काव्य की ओर से उन्मुख होकर वैमुखी वृत्ति लेनी पड़ी, और जनता की चित्तवृत्ति तथा समय के परिवर्तन से उत्पन्न होने वाले प्रभावों से प्रभावित होकर अपनी काव्य-धारा को धर्म की ओर झुकाना पड़ा । दूसरा कारण इस प्रकार के परिवर्तन का यह भी था कि कवि लोग अपने वीर राजाओं का यशोगान मुसलमानों के शासन में रह कर स्वतंत्रता के साथ मुक्तकंठ से कदापि न कर सकते थे, यदि कहीं कभी कोई प्रशंसनीय राजपूत राजा को पाकर वे वीर-काव्य के करने का अवसर भी पाते थे। हाँ राज
Cat bigger than Dog: दुनिया में वन्य जीव प्रेमियों को बीच एक बिल्ली इन दिनों चर्चा का विषय बन गई है। इसे देख कर अक्सर कुत्ते तो क्या इंसान भी धोखा खा जाते हैं। ये कैट देखने में कुत्ते जैसी ही लगती है। इसका वजन बिल्ली के औसत वजन से दोगुना है। 'मर्फी द मेन कून' नाम की एक ऐसी ही बिल्ली है। जो एक मीटर से अधिक लंबे है। इसका वजन एक बिल्ली के औसत वजन से दोगुना है। उसकी लंबाई देख लोगों को अक्सर भ्रम हो जाता है। उसे एक पालतू कुत्ता समझ लिया जाता है। 'मर्फी द मेन कून'की लंबाई अभी भी बढ़ रही है। ऐसे में कैट के मालिकों को आशंका कि ये एक सामान्य कुत्ते से भी बड़ी दिखेगी। मर्फी को भख भी बहुत अधिक भूख लगती है। उसे खिलाने में काफी खर्च करना पड़ता है। एक महीने में सिर्फ सूखा भोजन खिलाने में 60 पाउंड यानी करीब 4900 रुपए खर्च हो जाते हैं। बिल्ली पालने वाली लेडी सारीटा को ये अंदाजा भी नहीं था की मर्फी इतनी बड़ी हो जाएगी। पिछले साल जब नवंबर में देखा था तो वो एक सामान्य कुत्ते जितना बड़ी थी। सरीटा ने कहा कि मर्फी ने पिछले साल क्रिसमस के मौके पर जमकर उत्पात मचाया। कई केबल्स और लाइट्स के उपकरणों को नुकसान पहुंचा दिया था। जिसे ठीक करने में करीब 25000 रुपए (£300) खर्च हो गए। उसकी हरकतों के डर से इस साल क्रिसमस की सजावट भी नहीं हो पाई। मर्फी को देखकर कुत्ते भी डर जाते हैं। जबकि बिल्लियां उसके साथ खेलती हैं। बिल्ली की मालिक सरीटा कहती हैं कि वो उसका विशेष ध्यान रखती हैं। इसकी लंबाई अभी और अधिक बढ़ेगी। दुनिया में अब तक सबसे बड़ी बिल्ली अमेरिका की स्टीवी है। जिसकी लंबाई 121 सेमी से अधिक है।
Cat bigger than Dog: दुनिया में वन्य जीव प्रेमियों को बीच एक बिल्ली इन दिनों चर्चा का विषय बन गई है। इसे देख कर अक्सर कुत्ते तो क्या इंसान भी धोखा खा जाते हैं। ये कैट देखने में कुत्ते जैसी ही लगती है। इसका वजन बिल्ली के औसत वजन से दोगुना है। 'मर्फी द मेन कून' नाम की एक ऐसी ही बिल्ली है। जो एक मीटर से अधिक लंबे है। इसका वजन एक बिल्ली के औसत वजन से दोगुना है। उसकी लंबाई देख लोगों को अक्सर भ्रम हो जाता है। उसे एक पालतू कुत्ता समझ लिया जाता है। 'मर्फी द मेन कून'की लंबाई अभी भी बढ़ रही है। ऐसे में कैट के मालिकों को आशंका कि ये एक सामान्य कुत्ते से भी बड़ी दिखेगी। मर्फी को भख भी बहुत अधिक भूख लगती है। उसे खिलाने में काफी खर्च करना पड़ता है। एक महीने में सिर्फ सूखा भोजन खिलाने में साठ पाउंड यानी करीब चार हज़ार नौ सौ रुपयापए खर्च हो जाते हैं। बिल्ली पालने वाली लेडी सारीटा को ये अंदाजा भी नहीं था की मर्फी इतनी बड़ी हो जाएगी। पिछले साल जब नवंबर में देखा था तो वो एक सामान्य कुत्ते जितना बड़ी थी। सरीटा ने कहा कि मर्फी ने पिछले साल क्रिसमस के मौके पर जमकर उत्पात मचाया। कई केबल्स और लाइट्स के उपकरणों को नुकसान पहुंचा दिया था। जिसे ठीक करने में करीब पच्चीस हज़ार रुपयापए खर्च हो गए। उसकी हरकतों के डर से इस साल क्रिसमस की सजावट भी नहीं हो पाई। मर्फी को देखकर कुत्ते भी डर जाते हैं। जबकि बिल्लियां उसके साथ खेलती हैं। बिल्ली की मालिक सरीटा कहती हैं कि वो उसका विशेष ध्यान रखती हैं। इसकी लंबाई अभी और अधिक बढ़ेगी। दुनिया में अब तक सबसे बड़ी बिल्ली अमेरिका की स्टीवी है। जिसकी लंबाई एक सौ इक्कीस सेमी से अधिक है।
पलामूः उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी शशि रंजन ने समाहरणालय स्थित अपने कार्यालय में जनता दरबार का आयोजन किया. इसमें जिले के विभिन्न स्थानों से पहुंचे ग्रामीणों ने अपनी-अपनी समस्याओं को उपायुक्त के समक्ष रखा. इससे पूर्व कोरोना महामारी को देखते हुए सभी फरियादियों के हाथों को सैनिटाइज किया गया. उपायुक्त ने कई मामलों का ऑन स्पॉट निपटारा किया. अन्य मामलों को संबंधित विभाग को भेजते हुए तत्काल निष्पादन का निर्देश दिया. जनता दरबार में पहुंचे प्रेमजीत कुमार सिंह ने उपायुक्त को बताया कि उनके पिता स्वर्गीय विरोधी सिंह जो पांकी के प्रखंड कार्यालय में पंचायत सचिव के पद पर तैनात थे, उनको ए.सी.बी पलामू द्वारा 15.7.2020 को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था. तत्पश्चात उपायुक्त द्वारा निलंबित कर दिया गया था. कोरोना काल में वे 45 दिन पैरोल पर जेल से बाहर आये थे. इसी दरमियान 19 अगस्त को उनका स्वर्गवास हो गया. अतः प्रेमजीत कुमार सिंह ने उपायुक्त से स्वर्गीय विरोधी सिंह को निलंबन मुक्त कर उनके आश्रितों को पवना भुगतान करने तथा अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने हेतु अनुरोध किया. इसी तरह हुसैनाबाद से आयी ग्राम सेविका उमा देवी ने स्थानांतरण संबंधित आवेदन दिया. पिपराटांड़ से आए आलम मियां ने वृद्धा पेंशन नहीं मिलने को लेकर शिकायत किया. चैनपुर के हरिनामाड़ से आये माला चौधरी ने उपायुक्त को बताया कि 29.1.2019 को उनका कच्चा खपड़ा का मकान आग लगने के कारण पूर्ण रूप से जल गया था. कई बार अंचलाधिकारी को आवेदन देने के बावजूद अब तक किसी प्रकार की सहायता नहीं प्रदान की गयी है. उन्होंने उपायुक्त से आवश्यक कार्रवाई कर राशि भुगतान कराने हेतु अनुरोध किया. चैनपुर से आए आशीष कुमार तिवारी ने ऑनलाइन रजिस्टर 2 में सुधार करने को लेकर आवेदन दिया. पिपरा के बभंडी से आये कामेश्वर मेहता ने उपायुक्त को बताया कि वो एक बेरोजगार युवक है. अपनी बेरोजगारी दूर करने के उद्देश्य से उन्होंने एक पुराना टेंपो खरीदा था, जिसका नाम ट्रांसफर कराने को लेकर जिला परिवहन कार्यालय में लॉकडाउन के पूर्व ही आवेदन दिया गया था. उन्होंने उपायुक्त को बताया कि कार्ड निर्गत होने के बावजूद अब तक उनको कार्ड नहीं मिला है. यह सुन उपायुक्त ने संबंधित पदाधिकारी को तत्काल निष्पादन करने का निर्देश दिया. उपायुक्त का निर्देश मिलते ही जिला परिवहन कार्यालय के आशुतोष पांडेय ने सक्रियता दिखाते हुए रजिस्ट्रेशन कार्ड जारी करने हेतु सारी औपचारिकता पूर्ण किया, जिसके बाद आवेदनकर्ता को उपायुक्त द्वारा कार्ड सौंप दिया गया.
पलामूः उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी शशि रंजन ने समाहरणालय स्थित अपने कार्यालय में जनता दरबार का आयोजन किया. इसमें जिले के विभिन्न स्थानों से पहुंचे ग्रामीणों ने अपनी-अपनी समस्याओं को उपायुक्त के समक्ष रखा. इससे पूर्व कोरोना महामारी को देखते हुए सभी फरियादियों के हाथों को सैनिटाइज किया गया. उपायुक्त ने कई मामलों का ऑन स्पॉट निपटारा किया. अन्य मामलों को संबंधित विभाग को भेजते हुए तत्काल निष्पादन का निर्देश दिया. जनता दरबार में पहुंचे प्रेमजीत कुमार सिंह ने उपायुक्त को बताया कि उनके पिता स्वर्गीय विरोधी सिंह जो पांकी के प्रखंड कार्यालय में पंचायत सचिव के पद पर तैनात थे, उनको ए.सी.बी पलामू द्वारा पंद्रह.सात.दो हज़ार बीस को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था. तत्पश्चात उपायुक्त द्वारा निलंबित कर दिया गया था. कोरोना काल में वे पैंतालीस दिन पैरोल पर जेल से बाहर आये थे. इसी दरमियान उन्नीस अगस्त को उनका स्वर्गवास हो गया. अतः प्रेमजीत कुमार सिंह ने उपायुक्त से स्वर्गीय विरोधी सिंह को निलंबन मुक्त कर उनके आश्रितों को पवना भुगतान करने तथा अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने हेतु अनुरोध किया. इसी तरह हुसैनाबाद से आयी ग्राम सेविका उमा देवी ने स्थानांतरण संबंधित आवेदन दिया. पिपराटांड़ से आए आलम मियां ने वृद्धा पेंशन नहीं मिलने को लेकर शिकायत किया. चैनपुर के हरिनामाड़ से आये माला चौधरी ने उपायुक्त को बताया कि उनतीस.एक.दो हज़ार उन्नीस को उनका कच्चा खपड़ा का मकान आग लगने के कारण पूर्ण रूप से जल गया था. कई बार अंचलाधिकारी को आवेदन देने के बावजूद अब तक किसी प्रकार की सहायता नहीं प्रदान की गयी है. उन्होंने उपायुक्त से आवश्यक कार्रवाई कर राशि भुगतान कराने हेतु अनुरोध किया. चैनपुर से आए आशीष कुमार तिवारी ने ऑनलाइन रजिस्टर दो में सुधार करने को लेकर आवेदन दिया. पिपरा के बभंडी से आये कामेश्वर मेहता ने उपायुक्त को बताया कि वो एक बेरोजगार युवक है. अपनी बेरोजगारी दूर करने के उद्देश्य से उन्होंने एक पुराना टेंपो खरीदा था, जिसका नाम ट्रांसफर कराने को लेकर जिला परिवहन कार्यालय में लॉकडाउन के पूर्व ही आवेदन दिया गया था. उन्होंने उपायुक्त को बताया कि कार्ड निर्गत होने के बावजूद अब तक उनको कार्ड नहीं मिला है. यह सुन उपायुक्त ने संबंधित पदाधिकारी को तत्काल निष्पादन करने का निर्देश दिया. उपायुक्त का निर्देश मिलते ही जिला परिवहन कार्यालय के आशुतोष पांडेय ने सक्रियता दिखाते हुए रजिस्ट्रेशन कार्ड जारी करने हेतु सारी औपचारिकता पूर्ण किया, जिसके बाद आवेदनकर्ता को उपायुक्त द्वारा कार्ड सौंप दिया गया.
आईपीएल में, तो एंकरिंग करते हुए आप सभी ने संजना गणेशन को कई बार देखा होगा. साथ ही आपने विश्व कप 2019 में भी संजना की एंकरिंग देखी होगी, लेकिन शायद आपकों ये बात पता नहीं होगी कि वह प्रो बैडमिंटन को भी होस्ट कर चुकी है. वह क्रिकेट के साथ-साथ बैडमिंटन को भी काफी पसंद करती है और इसे करीब से फॉलो करती है. प्रो बैडमिंटन लीग में उनकी एंकरिंग को काफी पसंद किया गया था, जिसके बाद उन्हें स्टार स्पोर्ट्स ने आईपीएल में भी एंकरिंग करने का मौका दिया.
आईपीएल में, तो एंकरिंग करते हुए आप सभी ने संजना गणेशन को कई बार देखा होगा. साथ ही आपने विश्व कप दो हज़ार उन्नीस में भी संजना की एंकरिंग देखी होगी, लेकिन शायद आपकों ये बात पता नहीं होगी कि वह प्रो बैडमिंटन को भी होस्ट कर चुकी है. वह क्रिकेट के साथ-साथ बैडमिंटन को भी काफी पसंद करती है और इसे करीब से फॉलो करती है. प्रो बैडमिंटन लीग में उनकी एंकरिंग को काफी पसंद किया गया था, जिसके बाद उन्हें स्टार स्पोर्ट्स ने आईपीएल में भी एंकरिंग करने का मौका दिया.
शिवपुरी- वनों के विस्तार के लिए अब वन विभाग शिवपुरी को बारिश के मौसम के बाद सुध आई है। जहां शहर के झंासी रोड के समीप रेंज ऑफिस के पास सरेआम रोड किनारे तार फेंसिंग कर वृक्षारोपण के नाम पर अतिक्रमण करते हुए दुर्घटनाओं को आमंत्रण देने जैसा कार्य किया है। इस तार फेंसिंग से कई लोगों को परेशानी का सामना भी करना पड़ रहा है। नागरिकों की शिकायत है कि सड़क से महज 15 फिट के दूरी से ही वन विभाग ने तार फेसिंग शुरू कर दी जबकि इस स्थान से लोग पैदल निकलते है तो फिर कैसे यह वृक्षारोपण सही माना जाएगा। इस तार फेंसिंग के कारण अब दुर्घटनाऐं घटने का अंदेशा हर समय बना हुआ है। यहां बता दें कि वन विभाग शिवपुरी द्वारा वृक्षारोपण के नाम पर झांसी रोड स्थित रेंज ऑफिस के ठीक बाहर विभाग की बाउण्ड्रीबाल से सटाकर पीडब्ल्यूडी विभाग की सड़क से महज 10 फिट की दूरी पर से ही वृक्षारोपण किया जाना शुरू कर दिया है। चूंकि यह जमीन पीडब्ल्यूडी विभाग की है और वन विभाग ने इस भूमि को भी अपने कब्जे में लेकर वृक्षारोपण के नाम पर अतिक्रमण कर लिया। दूसरी ओर यहां से निकलने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। चूंकि इस रोड से प्रतिदिन आवागमन अधिक होता है इसलिए रोड से दूर अगर वृक्षारोपण किया जाए तो दुर्घटनाओं से तो बचाव होगा ही साथ ही साथ हरियाली भी आ सकेगी। बताया गया है कि रेंज ऑफिस और पीडब्लयूडी रोड के बीच की कुल दूरी 52 फिट है लेकिन यहां वन विभाग ने 10 फिट रोड छोड़कर वृक्षारोपण के लिए तार फेंसिंग शुरू करवा दी। स्कूली बच्चों और आमजनों के लिए निकलने वाले इस मार्ग का उपयोग सर्वाधिक हर वर्ग करता है और चार पहिया वाहनों का भी यहां से निकलना होता है। इसलिए आमजनों की समस्या को ध्यान में रखते हुए वन विभाग को रोड से कुछ दूरी छोड़कर ही वृक्षारोपण किया जाए तो अधिक लाभकारी रहेगा अन्यथा किसी भी दुर्घटना से इंकार नहीं किया जा सकता। यूं तो वन विभाग हमेशा से बारिश के मौसम में ही वृक्षरोपण कार्यक्रम आयोजित करता है लेकिन इन दिनों झांसी रोड पर रेंज कार्यालय के सामने होने वाला वृक्षारोपण कई सवालों को जन्म देता है। जहां बारिश के बाद सरेआम रोड किनोर और पीडब्लयूडी विभाग पर किए जाने वाले इस अतिक्रमण के लिए जिम्मेदार कौन है? वन विभाग के अधिकारी इसे वृक्षरोपण का नाम दे रहे है जबकि हकीकत में देखा जाए तो यह अतिक्रमण करने की सोची समझी रणनीति है जिसके तहत विभाग के आलाधिकारियों के आदेश पर इस कृत्य को अंजाम दिया जा रहा है। रोड पर होने वाली तार फेंसिंग किसी भी समय दुर्घटना का कारण बन सकती है इस ओर शायद अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। वैसे भी नियमों को दरकिनार कर यह तार फेसिंग की गई है। आपने जो जानकारी दी है उसकी मुझे जानकारी तो नहीं है लेकिन मैं इस मामले को दिखवा लूंगा चॅंूकि अभी डीएफओ बाहर है जैसे ही आते है उन्हें इस मामले की जानकारी देकर उचित कार्यवाही की जाएगी। रोड से 52 फिट स्थान छोड़कर वृक्षारोपण करना चाहिए यदि ऐसा नहीं हुआ तो मैं मामले को दिखवाता हॅूं और इस बात से वन विभाग को भी अवगत कराऐंगे।
शिवपुरी- वनों के विस्तार के लिए अब वन विभाग शिवपुरी को बारिश के मौसम के बाद सुध आई है। जहां शहर के झंासी रोड के समीप रेंज ऑफिस के पास सरेआम रोड किनारे तार फेंसिंग कर वृक्षारोपण के नाम पर अतिक्रमण करते हुए दुर्घटनाओं को आमंत्रण देने जैसा कार्य किया है। इस तार फेंसिंग से कई लोगों को परेशानी का सामना भी करना पड़ रहा है। नागरिकों की शिकायत है कि सड़क से महज पंद्रह फिट के दूरी से ही वन विभाग ने तार फेसिंग शुरू कर दी जबकि इस स्थान से लोग पैदल निकलते है तो फिर कैसे यह वृक्षारोपण सही माना जाएगा। इस तार फेंसिंग के कारण अब दुर्घटनाऐं घटने का अंदेशा हर समय बना हुआ है। यहां बता दें कि वन विभाग शिवपुरी द्वारा वृक्षारोपण के नाम पर झांसी रोड स्थित रेंज ऑफिस के ठीक बाहर विभाग की बाउण्ड्रीबाल से सटाकर पीडब्ल्यूडी विभाग की सड़क से महज दस फिट की दूरी पर से ही वृक्षारोपण किया जाना शुरू कर दिया है। चूंकि यह जमीन पीडब्ल्यूडी विभाग की है और वन विभाग ने इस भूमि को भी अपने कब्जे में लेकर वृक्षारोपण के नाम पर अतिक्रमण कर लिया। दूसरी ओर यहां से निकलने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। चूंकि इस रोड से प्रतिदिन आवागमन अधिक होता है इसलिए रोड से दूर अगर वृक्षारोपण किया जाए तो दुर्घटनाओं से तो बचाव होगा ही साथ ही साथ हरियाली भी आ सकेगी। बताया गया है कि रेंज ऑफिस और पीडब्लयूडी रोड के बीच की कुल दूरी बावन फिट है लेकिन यहां वन विभाग ने दस फिट रोड छोड़कर वृक्षारोपण के लिए तार फेंसिंग शुरू करवा दी। स्कूली बच्चों और आमजनों के लिए निकलने वाले इस मार्ग का उपयोग सर्वाधिक हर वर्ग करता है और चार पहिया वाहनों का भी यहां से निकलना होता है। इसलिए आमजनों की समस्या को ध्यान में रखते हुए वन विभाग को रोड से कुछ दूरी छोड़कर ही वृक्षारोपण किया जाए तो अधिक लाभकारी रहेगा अन्यथा किसी भी दुर्घटना से इंकार नहीं किया जा सकता। यूं तो वन विभाग हमेशा से बारिश के मौसम में ही वृक्षरोपण कार्यक्रम आयोजित करता है लेकिन इन दिनों झांसी रोड पर रेंज कार्यालय के सामने होने वाला वृक्षारोपण कई सवालों को जन्म देता है। जहां बारिश के बाद सरेआम रोड किनोर और पीडब्लयूडी विभाग पर किए जाने वाले इस अतिक्रमण के लिए जिम्मेदार कौन है? वन विभाग के अधिकारी इसे वृक्षरोपण का नाम दे रहे है जबकि हकीकत में देखा जाए तो यह अतिक्रमण करने की सोची समझी रणनीति है जिसके तहत विभाग के आलाधिकारियों के आदेश पर इस कृत्य को अंजाम दिया जा रहा है। रोड पर होने वाली तार फेंसिंग किसी भी समय दुर्घटना का कारण बन सकती है इस ओर शायद अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। वैसे भी नियमों को दरकिनार कर यह तार फेसिंग की गई है। आपने जो जानकारी दी है उसकी मुझे जानकारी तो नहीं है लेकिन मैं इस मामले को दिखवा लूंगा चॅंूकि अभी डीएफओ बाहर है जैसे ही आते है उन्हें इस मामले की जानकारी देकर उचित कार्यवाही की जाएगी। रोड से बावन फिट स्थान छोड़कर वृक्षारोपण करना चाहिए यदि ऐसा नहीं हुआ तो मैं मामले को दिखवाता हॅूं और इस बात से वन विभाग को भी अवगत कराऐंगे।
सोमवार को लंबे समय के बाद बिहार के सीएम नीताीश कुमार ने जनता दरबार का आयोजन किया. जनता दरबार में पहली बार तेजस्वी यादव भी मौजूद रहे. बिहार में महागठबंधन सरकार बनने के बाद नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव के बीच शानदार समन्वय दिख रहा है. सोमवार को नीतीश कुमार ने जनता दरबार का आयोजन किया. नई सरकार बनने के बाद यह पहला जनता दरबार था. सोमवार को जनता दरबार में पहली बार बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव भी मौजूद रहे. सीएम नीतीश कुमार बड़े भाई लालू प्रसाद के बेटे को राजकाज सिखा रहे हैं. इससे पहले जब नीतीश कुमार ने 2015 में महागठबंधन की सरकार बनाई थी तब मुख्यमंत्री का जनता दरबार कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया था. सोमवार को आयोजित जनता दरबार में गृह, राजस्व एवं भूमि सुधार, मद्य निषेध उत्पाद एवं निबंधन विभाग और निगरानी से संबंधित शिकायतों पर सुनवाई हुई. जनता दरबार में कटिहार से पहुंचे एक फरियादी ने कहा कि हुजूर जमीन के मुआवजा को लेकर सीओ पचास लाख रुपए की मांग कर रहा है. सीओ कहता है जब तक पैसा नहीं दोगे भुगतान नहीं होगा. वह खुद पूर्व डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद का आदमी बताता है और धमकाता है. इसके बाद नीतीश कुमार ने संबंधित अधिकरी को मामले को देखने के लिए कहा. जनता दरबार में आए फरियादियों की सबसे ज्यादा शिकायत सीओ के खिलाफ था. एक फरियादी ने मुख्यमंत्री ने कहा कि जमाबंदी में सीओ घालमेल कर रहे हैं. तो वहीं दूसरे फरियादी ने सीएम को बताया कि जमीन का कागद देने लिए कर्मी पचास हजार रू मांग रहा है. इसके बाद सीएम नीतीश कुमार ने विभाग के अपर मुख्य सचिव को फोन कहा कि इससे पचास हजार रू मांगे जा रहे हैं इसको देखिए. तो वहीं जनता दरबार में पहुंची एक महिला फरियादी ने सीएम से रोते हुए गुहार लगाई. महिला ने बताया- डेढ़ साल पहले बेटी का फोटो वायरल कर दिया गया था. तब उसके गांव के ही एर लड़के ने पूरे परिवार को बदनाम कर दिया. इसके बाद किसी तरह बेटी की शादी कहीं तय की. लेकिन अब वह धमकी दे रहा है अगर उसकी शादी कराई तो जान से मार डालेंगे. ये सुनते ही नीतीश कुमार ने तुरंत डीजीपी को फ़ोन लगाया इस मामले में कार्रवाई करने के निर्देश दिए.
सोमवार को लंबे समय के बाद बिहार के सीएम नीताीश कुमार ने जनता दरबार का आयोजन किया. जनता दरबार में पहली बार तेजस्वी यादव भी मौजूद रहे. बिहार में महागठबंधन सरकार बनने के बाद नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव के बीच शानदार समन्वय दिख रहा है. सोमवार को नीतीश कुमार ने जनता दरबार का आयोजन किया. नई सरकार बनने के बाद यह पहला जनता दरबार था. सोमवार को जनता दरबार में पहली बार बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव भी मौजूद रहे. सीएम नीतीश कुमार बड़े भाई लालू प्रसाद के बेटे को राजकाज सिखा रहे हैं. इससे पहले जब नीतीश कुमार ने दो हज़ार पंद्रह में महागठबंधन की सरकार बनाई थी तब मुख्यमंत्री का जनता दरबार कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया था. सोमवार को आयोजित जनता दरबार में गृह, राजस्व एवं भूमि सुधार, मद्य निषेध उत्पाद एवं निबंधन विभाग और निगरानी से संबंधित शिकायतों पर सुनवाई हुई. जनता दरबार में कटिहार से पहुंचे एक फरियादी ने कहा कि हुजूर जमीन के मुआवजा को लेकर सीओ पचास लाख रुपए की मांग कर रहा है. सीओ कहता है जब तक पैसा नहीं दोगे भुगतान नहीं होगा. वह खुद पूर्व डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद का आदमी बताता है और धमकाता है. इसके बाद नीतीश कुमार ने संबंधित अधिकरी को मामले को देखने के लिए कहा. जनता दरबार में आए फरियादियों की सबसे ज्यादा शिकायत सीओ के खिलाफ था. एक फरियादी ने मुख्यमंत्री ने कहा कि जमाबंदी में सीओ घालमेल कर रहे हैं. तो वहीं दूसरे फरियादी ने सीएम को बताया कि जमीन का कागद देने लिए कर्मी पचास हजार रू मांग रहा है. इसके बाद सीएम नीतीश कुमार ने विभाग के अपर मुख्य सचिव को फोन कहा कि इससे पचास हजार रू मांगे जा रहे हैं इसको देखिए. तो वहीं जनता दरबार में पहुंची एक महिला फरियादी ने सीएम से रोते हुए गुहार लगाई. महिला ने बताया- डेढ़ साल पहले बेटी का फोटो वायरल कर दिया गया था. तब उसके गांव के ही एर लड़के ने पूरे परिवार को बदनाम कर दिया. इसके बाद किसी तरह बेटी की शादी कहीं तय की. लेकिन अब वह धमकी दे रहा है अगर उसकी शादी कराई तो जान से मार डालेंगे. ये सुनते ही नीतीश कुमार ने तुरंत डीजीपी को फ़ोन लगाया इस मामले में कार्रवाई करने के निर्देश दिए.
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य की सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत बी. पी. एल श्रेणी के सभी राशनकार्ड धारियों को जून माह में प्रति कार्ड एक किलोग्राम निःशुल्क अरहर दाल देने निर्देश दिए हैं । मुख्यमंत्री के निर्देश पर खाद्य विभाग द्वारा शासकीय उचित मूल्य की दुकानों में जून माह में वितरण के लिए अरहर दाल का आबंटन जारी किया गया है । बीपीएल श्रेणी के जो राशनकार्डधारी जून माह में अरहर दाल नहीं ले पाएं हैं, वे अपनी शासकीय उचित मूल्य की दुकानों से जून माह का निःशुल्क अरहर दाल जुलाई माह में ले सकते हैं । राज्य शासन द्वारा कोरोना वायरस संक्रमण के कारण उत्पन्न विषम परिस्थितियों में लोगों को राहत प्रदान करने के लिए जून माह में अवितरित अरहर दाल का वितरण पात्र राशनकार्डधारियों को जुलाई माह में करने के निर्देश राज्य के सभी कलेक्टरों को दिए गए हैं । खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा आज मंत्रालय महानदी भवन से राज्य के सभी कलेक्टरों को पत्र भेजकर जून माह में अवितरित अरहर दाल का वितरण जुलाई माह कराने कहा गया है ।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य की सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत बी. पी. एल श्रेणी के सभी राशनकार्ड धारियों को जून माह में प्रति कार्ड एक किलोग्राम निःशुल्क अरहर दाल देने निर्देश दिए हैं । मुख्यमंत्री के निर्देश पर खाद्य विभाग द्वारा शासकीय उचित मूल्य की दुकानों में जून माह में वितरण के लिए अरहर दाल का आबंटन जारी किया गया है । बीपीएल श्रेणी के जो राशनकार्डधारी जून माह में अरहर दाल नहीं ले पाएं हैं, वे अपनी शासकीय उचित मूल्य की दुकानों से जून माह का निःशुल्क अरहर दाल जुलाई माह में ले सकते हैं । राज्य शासन द्वारा कोरोना वायरस संक्रमण के कारण उत्पन्न विषम परिस्थितियों में लोगों को राहत प्रदान करने के लिए जून माह में अवितरित अरहर दाल का वितरण पात्र राशनकार्डधारियों को जुलाई माह में करने के निर्देश राज्य के सभी कलेक्टरों को दिए गए हैं । खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा आज मंत्रालय महानदी भवन से राज्य के सभी कलेक्टरों को पत्र भेजकर जून माह में अवितरित अरहर दाल का वितरण जुलाई माह कराने कहा गया है ।
कारों, मोटरसाइकिलों, बिजली टिलर और अन्य उपकरण आंतरिक दहन इंजन के साथ से कई नौसिखिया मालिकों इग्निशन प्रणाली के साथ समस्याओं हो सकता है। के कैसे ठीक कारों, मोटरसाइकिलों और अन्य उपकरणों पर प्रज्वलन समायोजित करने के लिए पर नजर डालते हैं। इस प्रणाली के बिना, किसी भी इंजन का काम बस असंभव है। यह एक निश्चित समय पर दहन कक्ष में ईंधन मिश्रण igniting के लिए जिम्मेदार है। वहाँ ऐसी प्रणालियों के कई प्रकार हैं। पहले - एक संपर्क है, जिसमें दालों संपर्क अंतराल में उत्पन्न कर रहे हैं। इसके अलावा संपर्क प्रणाली अलग करते हैं। इधर, दालों इलेक्ट्रॉनिक स्विच के माध्यम से उत्पन्न कर रहे हैं। फिर भी यह एक पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक एक माइक्रोप्रोसेसर द्वारा नियंत्रित प्रणाली आवंटित करने के लिए संभव है। इस संपर्क प्रणाली "यूराल" पर खड़ा है। कैसे प्रज्वलन मोटरसाइकिल "यूराल" समायोजित करने के लिए, आप नीचे दिए पा सकते हैं। दो स्ट्रोक मशीनों, अक्सर टिलर, मोपेड और स्कूटर पर पाया जा सकता है, एक डिवाइस एक चिंगारी चुंबक बनाने के लिए इस्तेमाल के रूप में लिए। यह EMF के सिद्धांत काम करते हैं। स्थायी चुंबक का तार में घूमती है, और इसलिए गति उत्पन्न। सिस्टम में से किसी में कई बुनियादी तत्वों में शामिल हैं। इस प्रकार, बिजली की आपूर्ति के रूप में बैटरी प्रयोग किया जाता है, और इंजन चल रहा है, अल्टरनेटर है। स्विच है एक यांत्रिक ताला। वह अक्सर कई कार्य करता है। ऊर्जा भंडारण या तो एक तार या एक संधारित्र ड्राइव है। मोमबत्तियाँ भी प्रणाली में इस्तेमाल किया जाता है। वे एक दूसरे से एक छोटी सी दूरी पर दो इलेक्ट्रोड की है। मोमबत्ती एक विसंवाहक चीनी मिट्टी के बरतन से बना है, जो धागे पर लगाया है। मध्य भाग - कंडक्टर इलेक्ट्रोड, और एक धागा दूसरा इलेक्ट्रोड के रूप में प्रयोग किया जाता है। कैसे प्रज्वलन समायोजित करने के लिए? यह आसान है। इस उपकरण आप चिंगारी संपर्क करने के लिए पर्याप्त रूप से उच्च वोल्टेज चिंगारी अनुमति देता है। मोटर वाहन सिस्टम के लिए वोल्टेज आदेश चिंगारी उत्पन्न करता है, संपर्क मोमबत्ती का तार से जुड़ा है में से 30 000 वी हो सकता है। यह उसके लिए धन्यवाद एक बनाने के लिए है उच्च वोल्टेज। सिग्नल संपर्कों की एक विशेष समूह द्वारा तार को खिलाया जाता है। जब भी संपर्क नहीं है खोला का उपयोग कर एक विशेष तंत्र, एक चिंगारी है का गठन किया। प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए मोटर, यह उस समय एक चिंगारी पूरी तरह अनुरूप स्थिति है आवश्यक है पिस्टन दहन कक्षों में। , टाइमर हेलिकॉप्टर को घूर्णी ऊर्जा संचारण - इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए, एक अच्छी तरह से डिजाइन तंत्र का उपयोग करें। एक ऐसी प्रणाली का नुकसान में गठन और चिंगारी की गुणवत्ता पर पृथक उच्च यांत्रिक पहनने प्रभाव है। यह बहुत आंतरिक दहन इंजन की गुणवत्ता को प्रभावित करता है और कोई विन्यास की आवश्यकता है। इसलिए, यह जानना चाहते हैं कि इग्निशन समायोजित करने के लिए महत्वपूर्ण है। के इस समूह कार बिजली के उपकरणों tramblera के आधार पर नहीं है। एक चिंगारी यहाँ के गठन में मुख्य उपकरण ट्रांजिस्टर पर एक स्विच है, साथ ही एक सेंसर माना जाता है। इस प्रणाली में, वहाँ स्पार्क्स की गुणवत्ता और संपर्क समूहों की सतह खुरदरापन के बीच कोई संबंध नहीं है - यह एक गारंटी नहीं है कि चिंगारी विभिन्न कारकों की परवाह किए बिना बहुत ही उच्च गुणवत्ता है, है। में इस प्रकार की प्रणाली लागू होता है वितरक जिम्मेदार के लिए आपूर्ति आवश्यक वर्तमान को स्पार्क प्लग में पल। यहाँ मिश्रण किसी भी यांत्रिक उपकरणों और किसी भी भागों चलती के बिना प्रज्वलित किया जाता है। विशेष सेंसरों और नियंत्रण इकाइयों के माध्यम से चिंगारी वास्तव में वांछित पल में निर्मित है। इस उपकरण में काफी बेहतर बनाता है आंतरिक दहन इंजन के समारोह अपनी शक्ति बढ़ जाती है, ईंधन की खपत कम है। इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक इग्निशन बहुत विश्वसनीय है और कम या कोई समायोजन की आवश्यकता है। इससे पहले कि हम आपको बताएँगे कि इग्निशन समायोजित करने के लिए, तुम क्या कारखाने की स्थापना की हानि खड़ी कर रहा है पता लगाना चाहिए। अक्सर इस बात के लिए दोषी कार, मोटरसाइकिल, या अन्य वाहनों के बहुत ड्राइवर है। मोटर चालकों विभिन्न कारणों के लिए टाइमर या वितरक पर कब्जा कर सकते हैं। उसकी सेवा, मरम्मत और उसके सही जगह पर वितरक के अन्य नोड्स की वापसी के बाद इंजन और अधिक प्रभावी ढंग से काम नहीं कर सकते। कभी-कभी वह भी शुरू नहीं करता है। क्यों इतने? लेबल, जो कारखाने में स्थापित किए गए थे के सभी मामले। नौसिखिए चालकों शायद ही कभी टैग मैच महत्व के बारे में सोचते हैं। यह सबसे महत्वपूर्ण मापदंडों में से एक है। यह पूरी प्रणाली के सही संचालन निर्धारित करता है। इस बार के दौरान जो चिंगारी से एक ईंधन मिश्रण ignites है। टॉर्क डिग्री में टीडीसी के लिए पिस्टन के आगे नाड़ी के समय में क्रैंकशाफ्ट की स्थिति के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। करने के लिए मिश्रण को प्रभावी ढंग से जला दिया जाता है, यह एक निश्चित समय की आवश्यकता है। जिस गति से लौ से प्रसारित, करने के लिए 20 मी / से बराबर। इग्निशन शीर्ष मृत केंद्र में हो जाएगा, तो ईंधन तो आंशिक रूप से रिलीज पर विस्तार स्ट्रोक में जला दिया और है। नतीजतन, पिस्टन होगा एक पर्याप्त स्तर पर नहीं पर दबाव। तब के विस्तार गैसों और दहन के दबाव टीडीसी में हो जाएगा - यह सही इस पल का चयन करने के लिए आवश्यक है। कैसे WHA के लिए प्रज्वलन समायोजित करने के लिए? काम करने के लिए कुछ उपकरणों की जरूरत है। यही कारण है कि कुंजी 13, एक वाल्टमीटर, और मोमबत्तियों के लिए एक महत्वपूर्ण है। प्रदर्शनी इग्निशन बिंदु पहले या चौथे सिलेंडर होना चाहिए। पहला अवतार पर विचार करें। अधिकांश मॉडलों में VAZ समय ढक्कन पर समय के निशान द्वारा नियंत्रित है। लंबे, मध्यम और लघु - आप तीन लेबल देखते हैं देख सकते हैं। इस प्रकार, कम से कम निशान - कोण 10 डिग्री है। मध्यम - 5 डिग्री, और लंबाई 0 डिग्री से मेल खाती है। टीडीसी चरखी रिम पर दर्शाया गया है। लेबल क्षेत्र में चरखी का केंद्र एक विशेष भीड़ है। पहला कदम पहले सिलेंडर पर प्लग खोलना है। उसके बाद, उद्घाटन एक रबर डाट के साथ बंद होना चाहिए। इसके अलावा, जब एक विशेष कुंजी आवश्यक है क्रैंकशाफ्ट क्रैंक करने के लिए जब तक पहले सिलेंडर कम्प्रेशन स्ट्रोक में नहीं जाते हैं। यह समझने में आसान है - पिस्टन ऊपर ले जाने के लिए शुरू होता है। आप इसे ट्यूब पर देख सकते हैं - यह धीरे धीरे निचोड़। जब तक चरखी पर लेबल पूरी तरह से समय मामले कवर पर अंकन के साथ मेल नहीं किया गया शाफ्ट घुमाएँ। 95 ऑक्टेन के लिए पेट्रोल औसत निशान से संपर्क करेगा। अब कुंडी रिलीज और कवर tramblera को हटा दें। ताकि बाहरी संपर्क ढक्कन tramblera पर पहले सिलेंडर की दिशा में क्रैंक एक बार जब आप क्रैंकशाफ्ट स्क्रॉल किया है, रोटर इस तंत्र चालू करना होगा। संरेखण के निशान के बाद वितरक को देखो और कुंडी के माध्यम से एक रेखा खींच - सही काल्पनिक रेखा इंजन की धुरी के समानांतर है। अपनी लाइन समानांतर नहीं है, तो आप के लिए कैसे प्रज्वलन को समायोजित करने के बारे में अधिक जानकारी। ट्विस्ट अखरोट कि वाल्व सुरक्षित करता है और यह ऊपर की ओर जाते हैं। रोटर घुमाएँ और मोटर को अपनी धुरी समानांतर निर्धारित किया है। टाइमर सेट, अखरोट कस, लेकिन बहुत ज्यादा नहीं। तो फिर तुम स्थापना बात करने के लिए आगे बढ़ सकते हैं। भूमि पर - यह एक पूर्व तैयार कुंडल, दूसरे को समाप्त करने के एक छोर पर जुड़ा हुआ बल्ब की आवश्यकता है। प्रज्वलन को शामिल करें और धीरे-धीरे टाइमर घड़ी की बारी। दीपक बुझ जाता है, तो, सब ठीक है। दीपक शुरू में प्रकाश नहीं करता है, तो सभी यह सही डालता है। अब वाल्व वामावर्त बदल जाते हैं। जब दीपक जलाया जाता है, रोटर ताला और अखरोट कस। अब आप इंजन और tramblera कवर को दबा सकते हैं - वापस जगह में। कैसे एक स्ट्रोब प्रकाश का उपयोग कर इग्निशन समय समायोजित करने के लिए? इस विधि का उपयोग करने के लिए, ऑपरेटिंग तापमान पर इंजन को गर्म। तब पर बोर्ड नेटवर्क साधन को stroboscope कनेक्ट। सेंसर डिवाइस 1 सिलेंडर के एक उच्च वोल्टेज केबल पर डाल दिया। इसके बाद, अखरोट तोड़ने वाला ढीला वैक्यूम पढ़नेवाला से नली को हटा दें और इसे रोकने के। स्ट्रोब से प्रकाश क्रैंकशाफ्ट चरखी पर भेजें। अब, इंजन शुरू और यह निष्क्रिय गति से चल रहा हैं। वितरक आवास घुमाएँ, आवास तब स्थिति ताला ताकि एक चरखी पर लेबल कवर पर एक समय के निशान के साथ मेल खाता है। तो अखरोट कस। और अगर इलेक्ट्रॉनिक इग्निशन? सबसे आधुनिक कारों, मोटरसाइकिलों और बिजली टिलर निर्माताओं पर इलेक्ट्रॉनिक इग्निशन स्थापित करें। चलो कैसे इलेक्ट्रॉनिक इग्निशन समायोजित करने के लिए देखते हैं। पहला कदम हमेशा जमा है, जो चिंगारी पर जमा जांच होनी चाहिए। इसके अलावा संपर्क होने की जाँच करें। अगर उनमें से कुछ झुलसे, तो वे बदला जाना चाहिए। ठीक समायोजन स्ट्रोब की जरूरत बनाने के लिए। यदि ऐसा नहीं है, तो विधि उपयुक्त चिंगारी है। तो पेशेवर सेटिंग बाहर ले जाने के। ऑपरेटिंग तापमान पर गर्म मोटर की जरूरत को समायोजित करने के लिए। समाप्ति tramblera जरूरत नहीं है, यह केवल थोड़ा कमजोर कर सकते हैं। वितरक और पहले सिलेंडर में पिस्टन से केंद्रीय तार ऊपरी मृत बिंदु पर सेट है निकालें। अब इग्निशन पर स्विच। अपने हाथ में एक ही समय में स्पूल से एक तार होना चाहिए। दाहिने हाथ वाल्व दक्षिणावर्त समायोजित करें, और धातु की सतह से ऊपर broneprovod पकड़ो। अब स्पार्क्स जब तक विपरीत दिशा में बारी बारी से। अब आप गैर-संपर्क इग्निशन सेट करने के लिए कैसे पता है कि। वाल्व कस - और यह किया है। आधुनिक मॉडल के चलने के पीछे ट्रैक्टर निर्माताओं स्थापित संपर्क इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों। वे चक्का, तार, उच्च वोल्टेज केबल और मोमबत्ती में एक चुंबकीय कोर से मिलकर बनता है। सभी सेटिंग को कारखाने में सेट और अक्सर समायोजन की आवश्यकता नहीं है कर रहे हैं। कैसे इलेक्ट्रॉनिक इग्निशन साथ टिलर्स पर प्रज्वलन समायोजित करने के लिए? कार प्रणालियों के साथ तुलना करके। यह भी तार और चुंबक तत्व के बीच मंजूरी समायोजित करने के लिए संभव है। इस अंतर को दो शिकंजा के माध्यम और एक पूर्वाग्रह का तार से समायोज्य है। आधुनिक मोटर ब्लॉक में अंतर को और अधिक से अधिक 0. 8 मिमी नहीं होना चाहिए। कृषि मशीनरी समायोजन के कुछ मॉडलों पर आम तौर पर प्रदान नहीं की है। उदाहरण के लिए, इस तरह के डीएम निर्माता के रूप में इंजन में समायोजित करने के लिए कुछ करने की संभावना नहीं दी है। लेकिन आधुनिक तकनीक इस तरह के एक अवसर प्रदान करता है। कुंडल और चुंबक के बीच की खाई में परिवर्तन करके - टिलर के लिए प्रज्वलन समायोजित करने के लिए। सबसे पहले, टीडीसी के लिए पहला सिलेंडर स्थापित करें। इस निशान में मदद करेगा। इस मामले में, आप भी स्पर्श मोमबत्ती और रोटर समायोजित कर सकते हैं। तब इसकी लगाने ढीला के बाद इकाई इलेक्ट्रॉनिक्स बारी वामावर्त। अब चाहे एक ही लेबल की जाँच करें। दीपक की मदद से यकीन है कि वोल्टेज न हो। इकाई को ऊपर ले जाएं जब तक सूचक नहीं रह गया है प्रकाशित किया जाता है। यहां "यूराल" करने के लिए प्रज्वलन समायोजित करने के लिए है। समझते हैं कि सब कुछ सही ढंग से किया जाता है, प्रकाश में मदद मिलेगी। जब क्रैंकशाफ्ट मोड़ यह फ्लैश करना चाहिए।
कारों, मोटरसाइकिलों, बिजली टिलर और अन्य उपकरण आंतरिक दहन इंजन के साथ से कई नौसिखिया मालिकों इग्निशन प्रणाली के साथ समस्याओं हो सकता है। के कैसे ठीक कारों, मोटरसाइकिलों और अन्य उपकरणों पर प्रज्वलन समायोजित करने के लिए पर नजर डालते हैं। इस प्रणाली के बिना, किसी भी इंजन का काम बस असंभव है। यह एक निश्चित समय पर दहन कक्ष में ईंधन मिश्रण igniting के लिए जिम्मेदार है। वहाँ ऐसी प्रणालियों के कई प्रकार हैं। पहले - एक संपर्क है, जिसमें दालों संपर्क अंतराल में उत्पन्न कर रहे हैं। इसके अलावा संपर्क प्रणाली अलग करते हैं। इधर, दालों इलेक्ट्रॉनिक स्विच के माध्यम से उत्पन्न कर रहे हैं। फिर भी यह एक पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक एक माइक्रोप्रोसेसर द्वारा नियंत्रित प्रणाली आवंटित करने के लिए संभव है। इस संपर्क प्रणाली "यूराल" पर खड़ा है। कैसे प्रज्वलन मोटरसाइकिल "यूराल" समायोजित करने के लिए, आप नीचे दिए पा सकते हैं। दो स्ट्रोक मशीनों, अक्सर टिलर, मोपेड और स्कूटर पर पाया जा सकता है, एक डिवाइस एक चिंगारी चुंबक बनाने के लिए इस्तेमाल के रूप में लिए। यह EMF के सिद्धांत काम करते हैं। स्थायी चुंबक का तार में घूमती है, और इसलिए गति उत्पन्न। सिस्टम में से किसी में कई बुनियादी तत्वों में शामिल हैं। इस प्रकार, बिजली की आपूर्ति के रूप में बैटरी प्रयोग किया जाता है, और इंजन चल रहा है, अल्टरनेटर है। स्विच है एक यांत्रिक ताला। वह अक्सर कई कार्य करता है। ऊर्जा भंडारण या तो एक तार या एक संधारित्र ड्राइव है। मोमबत्तियाँ भी प्रणाली में इस्तेमाल किया जाता है। वे एक दूसरे से एक छोटी सी दूरी पर दो इलेक्ट्रोड की है। मोमबत्ती एक विसंवाहक चीनी मिट्टी के बरतन से बना है, जो धागे पर लगाया है। मध्य भाग - कंडक्टर इलेक्ट्रोड, और एक धागा दूसरा इलेक्ट्रोड के रूप में प्रयोग किया जाता है। कैसे प्रज्वलन समायोजित करने के लिए? यह आसान है। इस उपकरण आप चिंगारी संपर्क करने के लिए पर्याप्त रूप से उच्च वोल्टेज चिंगारी अनुमति देता है। मोटर वाहन सिस्टम के लिए वोल्टेज आदेश चिंगारी उत्पन्न करता है, संपर्क मोमबत्ती का तार से जुड़ा है में से तीस शून्य वी हो सकता है। यह उसके लिए धन्यवाद एक बनाने के लिए है उच्च वोल्टेज। सिग्नल संपर्कों की एक विशेष समूह द्वारा तार को खिलाया जाता है। जब भी संपर्क नहीं है खोला का उपयोग कर एक विशेष तंत्र, एक चिंगारी है का गठन किया। प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए मोटर, यह उस समय एक चिंगारी पूरी तरह अनुरूप स्थिति है आवश्यक है पिस्टन दहन कक्षों में। , टाइमर हेलिकॉप्टर को घूर्णी ऊर्जा संचारण - इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए, एक अच्छी तरह से डिजाइन तंत्र का उपयोग करें। एक ऐसी प्रणाली का नुकसान में गठन और चिंगारी की गुणवत्ता पर पृथक उच्च यांत्रिक पहनने प्रभाव है। यह बहुत आंतरिक दहन इंजन की गुणवत्ता को प्रभावित करता है और कोई विन्यास की आवश्यकता है। इसलिए, यह जानना चाहते हैं कि इग्निशन समायोजित करने के लिए महत्वपूर्ण है। के इस समूह कार बिजली के उपकरणों tramblera के आधार पर नहीं है। एक चिंगारी यहाँ के गठन में मुख्य उपकरण ट्रांजिस्टर पर एक स्विच है, साथ ही एक सेंसर माना जाता है। इस प्रणाली में, वहाँ स्पार्क्स की गुणवत्ता और संपर्क समूहों की सतह खुरदरापन के बीच कोई संबंध नहीं है - यह एक गारंटी नहीं है कि चिंगारी विभिन्न कारकों की परवाह किए बिना बहुत ही उच्च गुणवत्ता है, है। में इस प्रकार की प्रणाली लागू होता है वितरक जिम्मेदार के लिए आपूर्ति आवश्यक वर्तमान को स्पार्क प्लग में पल। यहाँ मिश्रण किसी भी यांत्रिक उपकरणों और किसी भी भागों चलती के बिना प्रज्वलित किया जाता है। विशेष सेंसरों और नियंत्रण इकाइयों के माध्यम से चिंगारी वास्तव में वांछित पल में निर्मित है। इस उपकरण में काफी बेहतर बनाता है आंतरिक दहन इंजन के समारोह अपनी शक्ति बढ़ जाती है, ईंधन की खपत कम है। इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक इग्निशन बहुत विश्वसनीय है और कम या कोई समायोजन की आवश्यकता है। इससे पहले कि हम आपको बताएँगे कि इग्निशन समायोजित करने के लिए, तुम क्या कारखाने की स्थापना की हानि खड़ी कर रहा है पता लगाना चाहिए। अक्सर इस बात के लिए दोषी कार, मोटरसाइकिल, या अन्य वाहनों के बहुत ड्राइवर है। मोटर चालकों विभिन्न कारणों के लिए टाइमर या वितरक पर कब्जा कर सकते हैं। उसकी सेवा, मरम्मत और उसके सही जगह पर वितरक के अन्य नोड्स की वापसी के बाद इंजन और अधिक प्रभावी ढंग से काम नहीं कर सकते। कभी-कभी वह भी शुरू नहीं करता है। क्यों इतने? लेबल, जो कारखाने में स्थापित किए गए थे के सभी मामले। नौसिखिए चालकों शायद ही कभी टैग मैच महत्व के बारे में सोचते हैं। यह सबसे महत्वपूर्ण मापदंडों में से एक है। यह पूरी प्रणाली के सही संचालन निर्धारित करता है। इस बार के दौरान जो चिंगारी से एक ईंधन मिश्रण ignites है। टॉर्क डिग्री में टीडीसी के लिए पिस्टन के आगे नाड़ी के समय में क्रैंकशाफ्ट की स्थिति के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। करने के लिए मिश्रण को प्रभावी ढंग से जला दिया जाता है, यह एक निश्चित समय की आवश्यकता है। जिस गति से लौ से प्रसारित, करने के लिए बीस मी / से बराबर। इग्निशन शीर्ष मृत केंद्र में हो जाएगा, तो ईंधन तो आंशिक रूप से रिलीज पर विस्तार स्ट्रोक में जला दिया और है। नतीजतन, पिस्टन होगा एक पर्याप्त स्तर पर नहीं पर दबाव। तब के विस्तार गैसों और दहन के दबाव टीडीसी में हो जाएगा - यह सही इस पल का चयन करने के लिए आवश्यक है। कैसे WHA के लिए प्रज्वलन समायोजित करने के लिए? काम करने के लिए कुछ उपकरणों की जरूरत है। यही कारण है कि कुंजी तेरह, एक वाल्टमीटर, और मोमबत्तियों के लिए एक महत्वपूर्ण है। प्रदर्शनी इग्निशन बिंदु पहले या चौथे सिलेंडर होना चाहिए। पहला अवतार पर विचार करें। अधिकांश मॉडलों में VAZ समय ढक्कन पर समय के निशान द्वारा नियंत्रित है। लंबे, मध्यम और लघु - आप तीन लेबल देखते हैं देख सकते हैं। इस प्रकार, कम से कम निशान - कोण दस डिग्री है। मध्यम - पाँच डिग्री, और लंबाई शून्य डिग्री से मेल खाती है। टीडीसी चरखी रिम पर दर्शाया गया है। लेबल क्षेत्र में चरखी का केंद्र एक विशेष भीड़ है। पहला कदम पहले सिलेंडर पर प्लग खोलना है। उसके बाद, उद्घाटन एक रबर डाट के साथ बंद होना चाहिए। इसके अलावा, जब एक विशेष कुंजी आवश्यक है क्रैंकशाफ्ट क्रैंक करने के लिए जब तक पहले सिलेंडर कम्प्रेशन स्ट्रोक में नहीं जाते हैं। यह समझने में आसान है - पिस्टन ऊपर ले जाने के लिए शुरू होता है। आप इसे ट्यूब पर देख सकते हैं - यह धीरे धीरे निचोड़। जब तक चरखी पर लेबल पूरी तरह से समय मामले कवर पर अंकन के साथ मेल नहीं किया गया शाफ्ट घुमाएँ। पचानवे ऑक्टेन के लिए पेट्रोल औसत निशान से संपर्क करेगा। अब कुंडी रिलीज और कवर tramblera को हटा दें। ताकि बाहरी संपर्क ढक्कन tramblera पर पहले सिलेंडर की दिशा में क्रैंक एक बार जब आप क्रैंकशाफ्ट स्क्रॉल किया है, रोटर इस तंत्र चालू करना होगा। संरेखण के निशान के बाद वितरक को देखो और कुंडी के माध्यम से एक रेखा खींच - सही काल्पनिक रेखा इंजन की धुरी के समानांतर है। अपनी लाइन समानांतर नहीं है, तो आप के लिए कैसे प्रज्वलन को समायोजित करने के बारे में अधिक जानकारी। ट्विस्ट अखरोट कि वाल्व सुरक्षित करता है और यह ऊपर की ओर जाते हैं। रोटर घुमाएँ और मोटर को अपनी धुरी समानांतर निर्धारित किया है। टाइमर सेट, अखरोट कस, लेकिन बहुत ज्यादा नहीं। तो फिर तुम स्थापना बात करने के लिए आगे बढ़ सकते हैं। भूमि पर - यह एक पूर्व तैयार कुंडल, दूसरे को समाप्त करने के एक छोर पर जुड़ा हुआ बल्ब की आवश्यकता है। प्रज्वलन को शामिल करें और धीरे-धीरे टाइमर घड़ी की बारी। दीपक बुझ जाता है, तो, सब ठीक है। दीपक शुरू में प्रकाश नहीं करता है, तो सभी यह सही डालता है। अब वाल्व वामावर्त बदल जाते हैं। जब दीपक जलाया जाता है, रोटर ताला और अखरोट कस। अब आप इंजन और tramblera कवर को दबा सकते हैं - वापस जगह में। कैसे एक स्ट्रोब प्रकाश का उपयोग कर इग्निशन समय समायोजित करने के लिए? इस विधि का उपयोग करने के लिए, ऑपरेटिंग तापमान पर इंजन को गर्म। तब पर बोर्ड नेटवर्क साधन को stroboscope कनेक्ट। सेंसर डिवाइस एक सिलेंडर के एक उच्च वोल्टेज केबल पर डाल दिया। इसके बाद, अखरोट तोड़ने वाला ढीला वैक्यूम पढ़नेवाला से नली को हटा दें और इसे रोकने के। स्ट्रोब से प्रकाश क्रैंकशाफ्ट चरखी पर भेजें। अब, इंजन शुरू और यह निष्क्रिय गति से चल रहा हैं। वितरक आवास घुमाएँ, आवास तब स्थिति ताला ताकि एक चरखी पर लेबल कवर पर एक समय के निशान के साथ मेल खाता है। तो अखरोट कस। और अगर इलेक्ट्रॉनिक इग्निशन? सबसे आधुनिक कारों, मोटरसाइकिलों और बिजली टिलर निर्माताओं पर इलेक्ट्रॉनिक इग्निशन स्थापित करें। चलो कैसे इलेक्ट्रॉनिक इग्निशन समायोजित करने के लिए देखते हैं। पहला कदम हमेशा जमा है, जो चिंगारी पर जमा जांच होनी चाहिए। इसके अलावा संपर्क होने की जाँच करें। अगर उनमें से कुछ झुलसे, तो वे बदला जाना चाहिए। ठीक समायोजन स्ट्रोब की जरूरत बनाने के लिए। यदि ऐसा नहीं है, तो विधि उपयुक्त चिंगारी है। तो पेशेवर सेटिंग बाहर ले जाने के। ऑपरेटिंग तापमान पर गर्म मोटर की जरूरत को समायोजित करने के लिए। समाप्ति tramblera जरूरत नहीं है, यह केवल थोड़ा कमजोर कर सकते हैं। वितरक और पहले सिलेंडर में पिस्टन से केंद्रीय तार ऊपरी मृत बिंदु पर सेट है निकालें। अब इग्निशन पर स्विच। अपने हाथ में एक ही समय में स्पूल से एक तार होना चाहिए। दाहिने हाथ वाल्व दक्षिणावर्त समायोजित करें, और धातु की सतह से ऊपर broneprovod पकड़ो। अब स्पार्क्स जब तक विपरीत दिशा में बारी बारी से। अब आप गैर-संपर्क इग्निशन सेट करने के लिए कैसे पता है कि। वाल्व कस - और यह किया है। आधुनिक मॉडल के चलने के पीछे ट्रैक्टर निर्माताओं स्थापित संपर्क इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों। वे चक्का, तार, उच्च वोल्टेज केबल और मोमबत्ती में एक चुंबकीय कोर से मिलकर बनता है। सभी सेटिंग को कारखाने में सेट और अक्सर समायोजन की आवश्यकता नहीं है कर रहे हैं। कैसे इलेक्ट्रॉनिक इग्निशन साथ टिलर्स पर प्रज्वलन समायोजित करने के लिए? कार प्रणालियों के साथ तुलना करके। यह भी तार और चुंबक तत्व के बीच मंजूरी समायोजित करने के लिए संभव है। इस अंतर को दो शिकंजा के माध्यम और एक पूर्वाग्रह का तार से समायोज्य है। आधुनिक मोटर ब्लॉक में अंतर को और अधिक से अधिक शून्य. आठ मिमी नहीं होना चाहिए। कृषि मशीनरी समायोजन के कुछ मॉडलों पर आम तौर पर प्रदान नहीं की है। उदाहरण के लिए, इस तरह के डीएम निर्माता के रूप में इंजन में समायोजित करने के लिए कुछ करने की संभावना नहीं दी है। लेकिन आधुनिक तकनीक इस तरह के एक अवसर प्रदान करता है। कुंडल और चुंबक के बीच की खाई में परिवर्तन करके - टिलर के लिए प्रज्वलन समायोजित करने के लिए। सबसे पहले, टीडीसी के लिए पहला सिलेंडर स्थापित करें। इस निशान में मदद करेगा। इस मामले में, आप भी स्पर्श मोमबत्ती और रोटर समायोजित कर सकते हैं। तब इसकी लगाने ढीला के बाद इकाई इलेक्ट्रॉनिक्स बारी वामावर्त। अब चाहे एक ही लेबल की जाँच करें। दीपक की मदद से यकीन है कि वोल्टेज न हो। इकाई को ऊपर ले जाएं जब तक सूचक नहीं रह गया है प्रकाशित किया जाता है। यहां "यूराल" करने के लिए प्रज्वलन समायोजित करने के लिए है। समझते हैं कि सब कुछ सही ढंग से किया जाता है, प्रकाश में मदद मिलेगी। जब क्रैंकशाफ्ट मोड़ यह फ्लैश करना चाहिए।
"Lyubimov" एक ट्रेडमार्क है जो पैदा करता हैचॉकलेट उत्पाद फॉर्म में सुखद, नाज़ुक, अविस्मरणीय स्वाद हैं, ज्यादातर, विभिन्न पूरक के साथ सुंदर दिल। पैकेजिंग के सुरुचिपूर्ण डिजाइन के लिए धन्यवाद, वे एक प्रेजेंटेशन या उपहार के रूप में पूरी तरह फिट हो सकते हैं। एक मध्यम, सस्ती कीमतें आपके बजट की स्थिति को प्रभावित नहीं करतीं। आम तौर पर, यदि आप किसी प्रियजन को खुश करना चाहते हैं, तो सेवा के लिए एक साथी को धन्यवाद - कैंडी "Lyubimov" खरीदें - यह निस्संदेह सही विकल्प है। "Ljubimov" - मिठाई, जिसका निर्माता एलएलसी रेनफोर्ड है (विभिन्न प्रकार के उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों के लिए जाना जाता है)। कंपनी "रैंडफोर्ड" एक बड़ी हैवाणिज्यिक और औद्योगिक समूह। इसकी मुख्य दिशा - औद्योगिक सामान, और अधिक विशेष रूप से, यह तकनीक हैः घरेलू रसोई और टीवी। इसलिए, कंपनी का उत्पादन होता हैः माइक्रोवेव ओवन, रेफ्रीजरेटर, वॉटर हीटर, इलेक्ट्रिक और गैस, और संयुक्त प्लेट्स और कुछ अन्य सामान भी। यूक्रेन और दुनिया में "रेनफोर्ड" के भंडार-गोदामों का एक बड़ा नेटवर्क विकसित किया गया है। रेनफोर्ड उत्पादों की खाद्य रेखा का प्रतिनिधित्व "Lyubimov" और "Shchodnya" ब्रांडों द्वारा किया जाता है, जो उपभोक्ता बाजार की उनकी गुणवत्ता से प्रसन्न हैं। "शोकोड्न्या" डेयरी और किण्वित दूध उत्पादों की एक श्रृंखला है। "Lyubimov" ब्रांड की मिठाई के लिए, इसके बारे में विवरण इस आलेख में कहा गया है। रेनफोर्ड के खाद्य उद्योग में पेय पदार्थ भी शामिल हैंः कराट मादक पेय पदार्थ और गैर मादक पेय - बॉन बोइसन, नॉस्टल्गी, आरसी-कोला। वे यूक्रेनी बाजार में अच्छी तरह से जाना जाता है। व्यापार चिह्न "Lyubimov" रेनफोर्ड कंपनी के चॉकलेट उत्पादों का खाद्य उद्योग है। वे अपनी उच्च गुणवत्ता और व्यापक पसंद के लिए जाने जाते हैं। यह और मिश्रित, और पक्षी के दूध, और विभिन्न प्राकृतिक फलों के टुकड़े, स्वादिष्ट चॉकलेट की एक मोटी परत के साथ कवर किया। सर्वोत्तम पारंपरिक fillers के साथमिठाई "Assorti" में चार प्रकार और उत्पादों के विभिन्न रूपों, विदेशी भरने के साथ चॉकलेट फज है, जैसे तिरामिसू, praline और truffle। मिठाई "लुबिमोव" अपनी सीमा में शामिल हैकई प्रकार के चॉकलेट बार। चॉकलेट प्रेमियों के लिए, व्यक्तिगत स्वाद के लिए एक विकल्प हैः काला, दूध, सफेद, और दूध और सफेद का संयोजन भी। इन सभी प्रजातियों को उप-प्रजातियों में विभाजित किया जा सकता हैः सामान्य चॉकलेट, छिद्रपूर्ण "मिलेनियम", पूरे या कटा हुआ पागल, नट और किशमिश के साथ। दूध और काले चॉकलेट से इस ब्रांड के स्वादिष्ट सलाखों का एक बड़ा चयन भी है। वे कई प्रकार के भरने के साथ उत्पादित होते हैंः प्रैलीन, अखरोट प्रीलिन, बादाम, तिरामिसू, ट्रफल। उत्पाद पैकेजिंग का मतलब बहुत है। उसका आकर्षण विज्ञापन के स्तर पर काम करता है। आखिरकार, जब कोई उत्पाद चुनते हैं, कपड़े पर एक बैठक के बारे में एक नीति कहती है। और यह सच है, अगर निर्माता अपने उत्पाद की उपस्थिति पर परिश्रमपूर्वक काम कर रहा है, तो कोई आत्मविश्वास से यह मान सकता है कि वह अपनी सामग्री की गुणवत्ता के साथ अथक रूप से काम करता है। तो वयस्क सोच सकते हैं। और बच्चों की सुंदर रैपर कितनी ईमानदारी से आकर्षक है! बक्से में कैंडी "Lyubimov" का उत्पादन होता है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि बक्से हमेशा पारंपरिक आकार नहीं होते हैं। अक्सर इस ब्रांड की मिठाई के पैकेजिंग को इसके परिष्करण और विशेष आकर्षण से अलग किया जाता है। और यहां तक कि, यह सबसे आम पैकेजिंग प्रतीत होता हैडिजाइनर कुछ "उत्साह" लाने के लिए अथक रूप से काम करते हैं। अक्सर, विचार की एक बड़ी उड़ान के लिए, वे पुरस्कार के साथ ऑनलाइन प्रतियोगिताओं के रूप में सक्रिय इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के पैकेजिंग के लिए एक ड्राइंग के निर्माण में जुड़ते हैं। सबसे रचनात्मक डिजाइन कार्यों को उनके रचनाकारों के लिए एक सभ्य इनाम के बाद पैकेज के विकास में लिया जाता है। "Lyubimov" मिठाई बनाने के लिए "भीड़ में" खड़े हो जाओबहुत से मजबूत प्रतियोगियों, और अपने उत्पाद "चेहरे" को दिखाएं, माल की उपस्थिति अविश्वसनीय रूप से प्रस्तुत करने योग्य होनी चाहिए, खरीदार के लिए पहली बार पहली बार "प्यार में पड़ना" आवश्यक है। इस ब्रांड के कई प्रकार के पैकेज बनाए गएसिर्फ बच्चों के लिए। कारों के साथ एक हंसमुख मिकी माउस के साथ परी राजकुमारी, परी, elves के साथ। बच्चों की खुशी - कोई सीमा नहीं है! इस तरह की मिठाई "क्रिसमस के पेड़ के नीचे, अपने जन्मदिन पर या सिर्फ बच्चे के आनंद और अच्छे मूड के लिए उपहारों के लिए सबसे उपयुक्त है। बच्चों के लिए खुशी - माता-पिता को खुशी! "Lyubimov" ब्रांड खुशी देना पसंद करता है। कैंडी "लुबिमोव", जिसकी कीमत काफी किफायती है,विशेष रूप से उत्पाद के सभी फायदों पर विचार करते हुए, कृपया इसकी विविधता। और सबसे आम चॉकलेट को भी काफी सस्ती कहा जा सकता है। और यह अक्सर खरीदार के लिए एक महत्वपूर्ण जानकारी भी है। तो, यूक्रेनी बाजार में बक्से में कैंडी लगभग 23-28 UAH की कीमत पर लिया जा सकता है। 100 ग्राम के लिए इस मामले में, चॉकलेट का एक बार 85 ग्राम वजन - 16.5 UAH से। प्रत्येक। और जब सभी लाभ तुरंत एकत्र किए जाते हैंः उपस्थिति, गुणवत्ता, स्वाद की भव्यता और एक किफायती मूल्य - यह जीतने पर "जीत!" जीतने वाली जीत है। प्रचुरता के बीच आज अनुमान लगाना मुश्किल है"स्वादिष्ट", जो अलग-अलग जीवन स्थितियों में खरीदना बेहतर है। लेकिन इस निर्माता की चॉकलेट श्रृंखला भी इसके वर्गीकरण में नामुमकिन है, कोई भी हमेशा किसी भी जीवन की घटनाओं के लिए आवश्यक विकल्प ढूंढ सकता है। सामान्य रूप से, सभी परिस्थितियों में, यह मत भूलना कि "लुबिमोव" की मिठाई हैं। चिंता न करें, वे हमेशा आपके लिए उपयोगी होंगे। किसी व्यक्ति के दिल में गर्मी और ध्यान देना चाहते हैं, दिल की कैंडी सबसे अधिक है! वे शब्दों के बिना भी आपकी भावनाओं को व्यक्त करने में आपकी सहायता करेंगे। यात्रा के लिए जाओ और सीमित धन की वजह से,तय नहीं कर सकता कि आपके साथ क्या लाया जाए? "बर्ड मिल्क" लें। ये मिठाई 1 9 60 के दशक के सर्वोत्तम व्यंजनों के अनुसार बनाई गई हैं। स्वादिष्ट स्वादिष्ट, एक प्रस्तुत करने योग्य और सुंदर पैकेज में, वे निश्चित रूप से मालिकों को खुश करेंगे और पूरी तरह से चाय या कॉफी के लिए उपयुक्त होंगे। इसके अलावा, इसे अधिक पैसे की आवश्यकता नहीं है। अपनी प्रेमिका को खुश करना चाहते हैं? चॉकलेट में फल खरीदें। यह उत्तम स्वाद निश्चित रूप से उसकी आत्माओं को उठाएगा। अगर आप किसी मित्र के साथ इलाज करना चाहते हैं, तो आप सभी को चॉकलेट बार खरीद सकते हैं। वे बहुत स्वादिष्ट हैं। बच्चे संतुष्ट होंगे। कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए एक अच्छा उपस्थिति की आवश्यकता हैसेवा के लिए, लेकिन पता नहीं कि किस स्वाद नेविगेट करना है? मिश्रित के साथ "टोकरी" ले लो - आप हार नहीं पाएंगे। किसी भी स्वाद के लिए चॉकलेट में चार प्रकार के क्लासिक भरने। और प्रत्येक कैंडी के आकार की सुंदरता और विविधता किसी भी, यहां तक कि बहुत प्यारी, आंखों को खुश करेगी। यदि आप खुद को एक मधुर दांत हैं, और वास्तव में चाहते हैंअपने आप को स्वादिष्ट लगाना, "लुबिमोव" से चॉकलेट खरीदें। आश्वस्त रहें, इस बार आप न केवल मीठे से परिपूर्ण हो पाएंगे, बल्कि स्वाद की गुणवत्ता के साथ खुद को खुश कर पाएंगे।
"Lyubimov" एक ट्रेडमार्क है जो पैदा करता हैचॉकलेट उत्पाद फॉर्म में सुखद, नाज़ुक, अविस्मरणीय स्वाद हैं, ज्यादातर, विभिन्न पूरक के साथ सुंदर दिल। पैकेजिंग के सुरुचिपूर्ण डिजाइन के लिए धन्यवाद, वे एक प्रेजेंटेशन या उपहार के रूप में पूरी तरह फिट हो सकते हैं। एक मध्यम, सस्ती कीमतें आपके बजट की स्थिति को प्रभावित नहीं करतीं। आम तौर पर, यदि आप किसी प्रियजन को खुश करना चाहते हैं, तो सेवा के लिए एक साथी को धन्यवाद - कैंडी "Lyubimov" खरीदें - यह निस्संदेह सही विकल्प है। "Ljubimov" - मिठाई, जिसका निर्माता एलएलसी रेनफोर्ड है । कंपनी "रैंडफोर्ड" एक बड़ी हैवाणिज्यिक और औद्योगिक समूह। इसकी मुख्य दिशा - औद्योगिक सामान, और अधिक विशेष रूप से, यह तकनीक हैः घरेलू रसोई और टीवी। इसलिए, कंपनी का उत्पादन होता हैः माइक्रोवेव ओवन, रेफ्रीजरेटर, वॉटर हीटर, इलेक्ट्रिक और गैस, और संयुक्त प्लेट्स और कुछ अन्य सामान भी। यूक्रेन और दुनिया में "रेनफोर्ड" के भंडार-गोदामों का एक बड़ा नेटवर्क विकसित किया गया है। रेनफोर्ड उत्पादों की खाद्य रेखा का प्रतिनिधित्व "Lyubimov" और "Shchodnya" ब्रांडों द्वारा किया जाता है, जो उपभोक्ता बाजार की उनकी गुणवत्ता से प्रसन्न हैं। "शोकोड्न्या" डेयरी और किण्वित दूध उत्पादों की एक श्रृंखला है। "Lyubimov" ब्रांड की मिठाई के लिए, इसके बारे में विवरण इस आलेख में कहा गया है। रेनफोर्ड के खाद्य उद्योग में पेय पदार्थ भी शामिल हैंः कराट मादक पेय पदार्थ और गैर मादक पेय - बॉन बोइसन, नॉस्टल्गी, आरसी-कोला। वे यूक्रेनी बाजार में अच्छी तरह से जाना जाता है। व्यापार चिह्न "Lyubimov" रेनफोर्ड कंपनी के चॉकलेट उत्पादों का खाद्य उद्योग है। वे अपनी उच्च गुणवत्ता और व्यापक पसंद के लिए जाने जाते हैं। यह और मिश्रित, और पक्षी के दूध, और विभिन्न प्राकृतिक फलों के टुकड़े, स्वादिष्ट चॉकलेट की एक मोटी परत के साथ कवर किया। सर्वोत्तम पारंपरिक fillers के साथमिठाई "Assorti" में चार प्रकार और उत्पादों के विभिन्न रूपों, विदेशी भरने के साथ चॉकलेट फज है, जैसे तिरामिसू, praline और truffle। मिठाई "लुबिमोव" अपनी सीमा में शामिल हैकई प्रकार के चॉकलेट बार। चॉकलेट प्रेमियों के लिए, व्यक्तिगत स्वाद के लिए एक विकल्प हैः काला, दूध, सफेद, और दूध और सफेद का संयोजन भी। इन सभी प्रजातियों को उप-प्रजातियों में विभाजित किया जा सकता हैः सामान्य चॉकलेट, छिद्रपूर्ण "मिलेनियम", पूरे या कटा हुआ पागल, नट और किशमिश के साथ। दूध और काले चॉकलेट से इस ब्रांड के स्वादिष्ट सलाखों का एक बड़ा चयन भी है। वे कई प्रकार के भरने के साथ उत्पादित होते हैंः प्रैलीन, अखरोट प्रीलिन, बादाम, तिरामिसू, ट्रफल। उत्पाद पैकेजिंग का मतलब बहुत है। उसका आकर्षण विज्ञापन के स्तर पर काम करता है। आखिरकार, जब कोई उत्पाद चुनते हैं, कपड़े पर एक बैठक के बारे में एक नीति कहती है। और यह सच है, अगर निर्माता अपने उत्पाद की उपस्थिति पर परिश्रमपूर्वक काम कर रहा है, तो कोई आत्मविश्वास से यह मान सकता है कि वह अपनी सामग्री की गुणवत्ता के साथ अथक रूप से काम करता है। तो वयस्क सोच सकते हैं। और बच्चों की सुंदर रैपर कितनी ईमानदारी से आकर्षक है! बक्से में कैंडी "Lyubimov" का उत्पादन होता है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि बक्से हमेशा पारंपरिक आकार नहीं होते हैं। अक्सर इस ब्रांड की मिठाई के पैकेजिंग को इसके परिष्करण और विशेष आकर्षण से अलग किया जाता है। और यहां तक कि, यह सबसे आम पैकेजिंग प्रतीत होता हैडिजाइनर कुछ "उत्साह" लाने के लिए अथक रूप से काम करते हैं। अक्सर, विचार की एक बड़ी उड़ान के लिए, वे पुरस्कार के साथ ऑनलाइन प्रतियोगिताओं के रूप में सक्रिय इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के पैकेजिंग के लिए एक ड्राइंग के निर्माण में जुड़ते हैं। सबसे रचनात्मक डिजाइन कार्यों को उनके रचनाकारों के लिए एक सभ्य इनाम के बाद पैकेज के विकास में लिया जाता है। "Lyubimov" मिठाई बनाने के लिए "भीड़ में" खड़े हो जाओबहुत से मजबूत प्रतियोगियों, और अपने उत्पाद "चेहरे" को दिखाएं, माल की उपस्थिति अविश्वसनीय रूप से प्रस्तुत करने योग्य होनी चाहिए, खरीदार के लिए पहली बार पहली बार "प्यार में पड़ना" आवश्यक है। इस ब्रांड के कई प्रकार के पैकेज बनाए गएसिर्फ बच्चों के लिए। कारों के साथ एक हंसमुख मिकी माउस के साथ परी राजकुमारी, परी, elves के साथ। बच्चों की खुशी - कोई सीमा नहीं है! इस तरह की मिठाई "क्रिसमस के पेड़ के नीचे, अपने जन्मदिन पर या सिर्फ बच्चे के आनंद और अच्छे मूड के लिए उपहारों के लिए सबसे उपयुक्त है। बच्चों के लिए खुशी - माता-पिता को खुशी! "Lyubimov" ब्रांड खुशी देना पसंद करता है। कैंडी "लुबिमोव", जिसकी कीमत काफी किफायती है,विशेष रूप से उत्पाद के सभी फायदों पर विचार करते हुए, कृपया इसकी विविधता। और सबसे आम चॉकलेट को भी काफी सस्ती कहा जा सकता है। और यह अक्सर खरीदार के लिए एक महत्वपूर्ण जानकारी भी है। तो, यूक्रेनी बाजार में बक्से में कैंडी लगभग तेईस-अट्ठाईस UAH की कीमत पर लिया जा सकता है। एक सौ ग्राम के लिए इस मामले में, चॉकलेट का एक बार पचासी ग्राम वजन - सोलह.पाँच UAH से। प्रत्येक। और जब सभी लाभ तुरंत एकत्र किए जाते हैंः उपस्थिति, गुणवत्ता, स्वाद की भव्यता और एक किफायती मूल्य - यह जीतने पर "जीत!" जीतने वाली जीत है। प्रचुरता के बीच आज अनुमान लगाना मुश्किल है"स्वादिष्ट", जो अलग-अलग जीवन स्थितियों में खरीदना बेहतर है। लेकिन इस निर्माता की चॉकलेट श्रृंखला भी इसके वर्गीकरण में नामुमकिन है, कोई भी हमेशा किसी भी जीवन की घटनाओं के लिए आवश्यक विकल्प ढूंढ सकता है। सामान्य रूप से, सभी परिस्थितियों में, यह मत भूलना कि "लुबिमोव" की मिठाई हैं। चिंता न करें, वे हमेशा आपके लिए उपयोगी होंगे। किसी व्यक्ति के दिल में गर्मी और ध्यान देना चाहते हैं, दिल की कैंडी सबसे अधिक है! वे शब्दों के बिना भी आपकी भावनाओं को व्यक्त करने में आपकी सहायता करेंगे। यात्रा के लिए जाओ और सीमित धन की वजह से,तय नहीं कर सकता कि आपके साथ क्या लाया जाए? "बर्ड मिल्क" लें। ये मिठाई एक नौ साठ के दशक के सर्वोत्तम व्यंजनों के अनुसार बनाई गई हैं। स्वादिष्ट स्वादिष्ट, एक प्रस्तुत करने योग्य और सुंदर पैकेज में, वे निश्चित रूप से मालिकों को खुश करेंगे और पूरी तरह से चाय या कॉफी के लिए उपयुक्त होंगे। इसके अलावा, इसे अधिक पैसे की आवश्यकता नहीं है। अपनी प्रेमिका को खुश करना चाहते हैं? चॉकलेट में फल खरीदें। यह उत्तम स्वाद निश्चित रूप से उसकी आत्माओं को उठाएगा। अगर आप किसी मित्र के साथ इलाज करना चाहते हैं, तो आप सभी को चॉकलेट बार खरीद सकते हैं। वे बहुत स्वादिष्ट हैं। बच्चे संतुष्ट होंगे। कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए एक अच्छा उपस्थिति की आवश्यकता हैसेवा के लिए, लेकिन पता नहीं कि किस स्वाद नेविगेट करना है? मिश्रित के साथ "टोकरी" ले लो - आप हार नहीं पाएंगे। किसी भी स्वाद के लिए चॉकलेट में चार प्रकार के क्लासिक भरने। और प्रत्येक कैंडी के आकार की सुंदरता और विविधता किसी भी, यहां तक कि बहुत प्यारी, आंखों को खुश करेगी। यदि आप खुद को एक मधुर दांत हैं, और वास्तव में चाहते हैंअपने आप को स्वादिष्ट लगाना, "लुबिमोव" से चॉकलेट खरीदें। आश्वस्त रहें, इस बार आप न केवल मीठे से परिपूर्ण हो पाएंगे, बल्कि स्वाद की गुणवत्ता के साथ खुद को खुश कर पाएंगे।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
Kidnapping Case In Jaipur: राजधानी जयपुर में रुपयों के लेनदेन को लेकर एक बिजनेसमैन का किडनैप कर लिया गया। किडनैपर्स ने फोन कर बेटे को पैसे नहीं देने पर पिता को जान से मारने की धमकी दी। जयपुर की तूंगा थाना पुलिस ने महज चार घंटे में दौसा से दोनों किडनैपर्स को गिरफ्तार कर लिया। जिनके चंगुल से किडनैप किए बिजनेसमैन को सुरक्षित बचा लिया गया। फिलहाल पकड़े गए आरोपियों से पुलिस पूछताछ कर रही है। मिली जानकारी के अनुसार डीसीपी (ईस्ट) प्रहलाद कृष्णियां ने बताया है कि अपहरण के मामले में आरोपी विनोद कुमार मीना (42) पुत्र प्यारे लाल मीना और नरेश योगी (27) पुत्र हरि सिंह योगी निवासी मानपुर दौसा को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपियों के चुंगल से किडनैप बिजनेसमैन गंगाराम (46) निवासी पचवारा दौसा हाल तूंगा को सुरक्षित मुक्त करवा लिया गया है। पुलिस ने पीड़ित की बोलेरो गाड़ी भी बदमाशों के कब्जे से बरामद कर ली है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक बिजनेसमैन गंगाराम के बेटे विक्रम मीना ने तूंगा थाने में शिकायत दी। उसके पिता सुबह करीब सात बजे बोलेरो गाड़ी लेकर गए थे। जाते समय उन्होंने बताया था कि किसी व्यक्ति के रुपयों का हिसाब करने दस लाख रुपए लेकर हाथीपुरा जा रहे हैं। थोड़ी ही देर बाद पिता को फोन करने पर फोन रिसीव नहीं किया। कुछ समय बाद विनोद मीना ने खुद के मोबाइल से उसे फोन किया। कहा- तेरे पिता की जान बचानी है तो तुम्हारी गाड़ी पर जो ड्राइवर काम करते हैं, उनको लेकर यहां आ जाओ। पिता के साथ किसी तरह की अनहोनी की आंशका के चलते बेटे ने थाने में शिकायत दर्ज कराई। जानकारी के लिए बता दें कि थानाधिकारी तूंगा रमेश मीना के नेतृत्व में टीम ने तुरंत कार्रवाई की। मोबाइल लोकेशन को ट्रैक करके पुलिस टीम दौसा जा पहुंची। विनोद मीना के अड्डे पर दबिश दी। जहां बिजनेसमैन गंगाराम के मिलने पर उसे छुड़ाया गया। पुलिस ने अपहरण करने वाले आरोपी विनोद कुमार मीना और नरेश योगी को गिरफ्तार किया। पुलिस ने मौके पर मिली पीड़ित बिजनेसमैन की बोलेरो को भी जब्त किया है। पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि गंगाराम की गाड़ियां चलती हैं, इसी में रुपयों को लेकर विवाद हुआ था।
Kidnapping Case In Jaipur: राजधानी जयपुर में रुपयों के लेनदेन को लेकर एक बिजनेसमैन का किडनैप कर लिया गया। किडनैपर्स ने फोन कर बेटे को पैसे नहीं देने पर पिता को जान से मारने की धमकी दी। जयपुर की तूंगा थाना पुलिस ने महज चार घंटे में दौसा से दोनों किडनैपर्स को गिरफ्तार कर लिया। जिनके चंगुल से किडनैप किए बिजनेसमैन को सुरक्षित बचा लिया गया। फिलहाल पकड़े गए आरोपियों से पुलिस पूछताछ कर रही है। मिली जानकारी के अनुसार डीसीपी प्रहलाद कृष्णियां ने बताया है कि अपहरण के मामले में आरोपी विनोद कुमार मीना पुत्र प्यारे लाल मीना और नरेश योगी पुत्र हरि सिंह योगी निवासी मानपुर दौसा को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपियों के चुंगल से किडनैप बिजनेसमैन गंगाराम निवासी पचवारा दौसा हाल तूंगा को सुरक्षित मुक्त करवा लिया गया है। पुलिस ने पीड़ित की बोलेरो गाड़ी भी बदमाशों के कब्जे से बरामद कर ली है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक बिजनेसमैन गंगाराम के बेटे विक्रम मीना ने तूंगा थाने में शिकायत दी। उसके पिता सुबह करीब सात बजे बोलेरो गाड़ी लेकर गए थे। जाते समय उन्होंने बताया था कि किसी व्यक्ति के रुपयों का हिसाब करने दस लाख रुपए लेकर हाथीपुरा जा रहे हैं। थोड़ी ही देर बाद पिता को फोन करने पर फोन रिसीव नहीं किया। कुछ समय बाद विनोद मीना ने खुद के मोबाइल से उसे फोन किया। कहा- तेरे पिता की जान बचानी है तो तुम्हारी गाड़ी पर जो ड्राइवर काम करते हैं, उनको लेकर यहां आ जाओ। पिता के साथ किसी तरह की अनहोनी की आंशका के चलते बेटे ने थाने में शिकायत दर्ज कराई। जानकारी के लिए बता दें कि थानाधिकारी तूंगा रमेश मीना के नेतृत्व में टीम ने तुरंत कार्रवाई की। मोबाइल लोकेशन को ट्रैक करके पुलिस टीम दौसा जा पहुंची। विनोद मीना के अड्डे पर दबिश दी। जहां बिजनेसमैन गंगाराम के मिलने पर उसे छुड़ाया गया। पुलिस ने अपहरण करने वाले आरोपी विनोद कुमार मीना और नरेश योगी को गिरफ्तार किया। पुलिस ने मौके पर मिली पीड़ित बिजनेसमैन की बोलेरो को भी जब्त किया है। पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि गंगाराम की गाड़ियां चलती हैं, इसी में रुपयों को लेकर विवाद हुआ था।
- 4 hrs ago ये क्या, 3. 3 लाख की ओवरसाइज़्ड हुडी पहनकर मलाइका अरोड़ा ने दिखाया अपना जलवा, फैंस की बोलती हुई बंद! Don't Miss! MC Stan- बजरंग दल ने कर दी एमसी स्टैन की पिटाई? इस शहर में नहीं होने दिया लाइव शो! सलमान खान का विवादित शो बिग बॉस 16 का विनर बनने के बाद रैपर एमसी स्टैन खबरों का हिस्सा हैँ। स्टैन को लेकर आए दिन किसी ना किसी तरह की खबरें सामने आती रहती हैं और इस वक्त कुछ ऐसा हुआ है कि शायद ये उनके फैंस को बिल्कुल पसंद नहीं आने वाला है। बता दें कि एमसी स्टैन का विरोध हो रहा है और ऐसा करने वाला कोई और नहीं बल्कि बजरंग दल है। अक्सर देखा जाता है कि ये दल किसी ना किसी मामले को लेकर खबरों का हिस्सा रहता है। आरोपों की मानें तो इंदौर में स्टैन का लाइव कॉन्सर्ट होना था जो कि रद्द कर दिया गया है, आरोप है कि बजरंग दल ने रैपर की पिटाई की और धमकी भी दी है। ये पूरा मामाल? एमसी स्टैन जिनकी फैन फॉलोविंग इस वक्त काफी शानदार है और वो कई जगहों पर अपने लाइव शो कर रहे हैँ। इस बीच उनका एक शो 17 मार्च को इंदौर में भी होना था। इस दौरान बजरंग ने इस शो का विरोध किया और उनका कहना है कि, एमसी स्टैन जिस तरह के शब्दों का प्रयोग महिलाओं के लिए करता है और गाली गलौज करता है, दल इसके खिलाफ है। इसके अलावा उनका आरोप था कि आज की युवा जनरेशन को बर्बाद कर रहा है। हालांकि एमसी स्टैन की पिटाई को लेकर किसी तरह की आधिकारिक जानकारी नहीं सामने आई है। फैंस इंतजार कर रहे हैं कि वो खुद सामने आकर अपनी बात रखें। एमसी स्टैन अपने बाकी शोज को लेकर बिजी हैं। बॉलीवुड पर राज करती थी ये हसीना, बहन ने भी एक्टिंग में बनाया करियर, इमरान हाशमी से है खास कनेक्शन, पहचाना?
- चार hrs ago ये क्या, तीन. तीन लाख की ओवरसाइज़्ड हुडी पहनकर मलाइका अरोड़ा ने दिखाया अपना जलवा, फैंस की बोलती हुई बंद! Don't Miss! MC Stan- बजरंग दल ने कर दी एमसी स्टैन की पिटाई? इस शहर में नहीं होने दिया लाइव शो! सलमान खान का विवादित शो बिग बॉस सोलह का विनर बनने के बाद रैपर एमसी स्टैन खबरों का हिस्सा हैँ। स्टैन को लेकर आए दिन किसी ना किसी तरह की खबरें सामने आती रहती हैं और इस वक्त कुछ ऐसा हुआ है कि शायद ये उनके फैंस को बिल्कुल पसंद नहीं आने वाला है। बता दें कि एमसी स्टैन का विरोध हो रहा है और ऐसा करने वाला कोई और नहीं बल्कि बजरंग दल है। अक्सर देखा जाता है कि ये दल किसी ना किसी मामले को लेकर खबरों का हिस्सा रहता है। आरोपों की मानें तो इंदौर में स्टैन का लाइव कॉन्सर्ट होना था जो कि रद्द कर दिया गया है, आरोप है कि बजरंग दल ने रैपर की पिटाई की और धमकी भी दी है। ये पूरा मामाल? एमसी स्टैन जिनकी फैन फॉलोविंग इस वक्त काफी शानदार है और वो कई जगहों पर अपने लाइव शो कर रहे हैँ। इस बीच उनका एक शो सत्रह मार्च को इंदौर में भी होना था। इस दौरान बजरंग ने इस शो का विरोध किया और उनका कहना है कि, एमसी स्टैन जिस तरह के शब्दों का प्रयोग महिलाओं के लिए करता है और गाली गलौज करता है, दल इसके खिलाफ है। इसके अलावा उनका आरोप था कि आज की युवा जनरेशन को बर्बाद कर रहा है। हालांकि एमसी स्टैन की पिटाई को लेकर किसी तरह की आधिकारिक जानकारी नहीं सामने आई है। फैंस इंतजार कर रहे हैं कि वो खुद सामने आकर अपनी बात रखें। एमसी स्टैन अपने बाकी शोज को लेकर बिजी हैं। बॉलीवुड पर राज करती थी ये हसीना, बहन ने भी एक्टिंग में बनाया करियर, इमरान हाशमी से है खास कनेक्शन, पहचाना?
वाशिंगटनः कोरोना वायरस आखिर कहां से आया? इसका जन्म कहां हुआ, यह मुद्दा एक बार चर्चा में है और अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने जांच एजेंसियों से कहा है कि वे 90 दिन में जांच कर इसका पता लगाएं और उनको रिपोर्ट दें। अमेरिका कोरोना वायरस के उत्पत्ति की जांच में जुटा है। इस बीच, कोरोना वायरस को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है। एक खुफिया रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि चीन के एक बड़े अधिकारी ने वुहान लैब से जुड़ी खुफिया जानकारी अमेरिका को दी थी। खुफिया रिपोर्ट में कहा गया है कि चीनी उप-राज्य सुरक्षा मंत्री डोंग जिंगवेई कथित तौर पर अमेरिका चले गए और अमेरिका को वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी से जुड़ी खुफिया जानकारी उसे दी। वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी कोरोना की उत्पत्ति की जांच का केंद्रबिंदु है। कई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कोरोना वायरस चीन की वुहान लैब से ही लीक हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, चीनी भाषा के कम्युनिस्ट विरोधी मीडिया और ट्विटर हैंडल उन अफवाहों से भरे हुए हैं कि डोंग अपनी बेटी, डोंग यांग के साथ फरवरी के मध्य में हांगकांग के रास्ते अमेरिका भाग गए। स्पाईटॉक सबस्टैक प्लेटफॉर्म पर अमेरिकी खुफिया, रक्षा और विदेश नीति को कवर करने वाला एक न्यूजलेटर है। डोंग ने कथित तौर पर वाशिंगटन को वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के बारे में जानकारी दी, जिसने कोरोना वायरस की उत्पत्ति के संबंध में अमेरिकी के रुख में आक्रामक बदलाव लाया। अगर अफवाहें सच होती हैं, तो यह पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के इतिहास में सबसे ऊंचे स्तर पर खुफिया तंत्र का फेल्योर होगा। डोंग चीन के राज्य सुरक्षा मंत्रालय (एमएसएस) में लंबे समय से अधिकारी हैं या थे। जिन्हें चीन में गुओनबु के नाम से भी जाना जाता है।
वाशिंगटनः कोरोना वायरस आखिर कहां से आया? इसका जन्म कहां हुआ, यह मुद्दा एक बार चर्चा में है और अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने जांच एजेंसियों से कहा है कि वे नब्बे दिन में जांच कर इसका पता लगाएं और उनको रिपोर्ट दें। अमेरिका कोरोना वायरस के उत्पत्ति की जांच में जुटा है। इस बीच, कोरोना वायरस को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है। एक खुफिया रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि चीन के एक बड़े अधिकारी ने वुहान लैब से जुड़ी खुफिया जानकारी अमेरिका को दी थी। खुफिया रिपोर्ट में कहा गया है कि चीनी उप-राज्य सुरक्षा मंत्री डोंग जिंगवेई कथित तौर पर अमेरिका चले गए और अमेरिका को वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी से जुड़ी खुफिया जानकारी उसे दी। वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी कोरोना की उत्पत्ति की जांच का केंद्रबिंदु है। कई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कोरोना वायरस चीन की वुहान लैब से ही लीक हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, चीनी भाषा के कम्युनिस्ट विरोधी मीडिया और ट्विटर हैंडल उन अफवाहों से भरे हुए हैं कि डोंग अपनी बेटी, डोंग यांग के साथ फरवरी के मध्य में हांगकांग के रास्ते अमेरिका भाग गए। स्पाईटॉक सबस्टैक प्लेटफॉर्म पर अमेरिकी खुफिया, रक्षा और विदेश नीति को कवर करने वाला एक न्यूजलेटर है। डोंग ने कथित तौर पर वाशिंगटन को वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के बारे में जानकारी दी, जिसने कोरोना वायरस की उत्पत्ति के संबंध में अमेरिकी के रुख में आक्रामक बदलाव लाया। अगर अफवाहें सच होती हैं, तो यह पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के इतिहास में सबसे ऊंचे स्तर पर खुफिया तंत्र का फेल्योर होगा। डोंग चीन के राज्य सुरक्षा मंत्रालय में लंबे समय से अधिकारी हैं या थे। जिन्हें चीन में गुओनबु के नाम से भी जाना जाता है।
लखनऊः राजधानी के सीएमएस स्कूलों पर पाकिस्तान के पेशावर में आर्मी स्कूल की तरह के आतंकी हमले की आशंका है। खुफिया विभाग से मिले सूचना के बाद लखनऊ में अलर्ट घोषित कर दिया गया है। क्या है मामला ? -यूपी पुलिस को खुुफिया विभाग से राजधानी के CMS स्कूलों पर किसी बड़े आतंकी हमले होने की इनपुट मिली थी। -बांग्लादेश का आतंकी संगठन जमात-उल-मुजाहिद्दीन के आतंकी हमले की साजिश रच रहे हैं। -इनपुट मिलने के बाद आईजी जोन ने सभी स्कूलों की सुरक्षा बढ़ाने ने निर्देश दिए हैं।
लखनऊः राजधानी के सीएमएस स्कूलों पर पाकिस्तान के पेशावर में आर्मी स्कूल की तरह के आतंकी हमले की आशंका है। खुफिया विभाग से मिले सूचना के बाद लखनऊ में अलर्ट घोषित कर दिया गया है। क्या है मामला ? -यूपी पुलिस को खुुफिया विभाग से राजधानी के CMS स्कूलों पर किसी बड़े आतंकी हमले होने की इनपुट मिली थी। -बांग्लादेश का आतंकी संगठन जमात-उल-मुजाहिद्दीन के आतंकी हमले की साजिश रच रहे हैं। -इनपुट मिलने के बाद आईजी जोन ने सभी स्कूलों की सुरक्षा बढ़ाने ने निर्देश दिए हैं।
एमपी के अशोकनगर में नाबालिग स्कूली छात्र की हैरतअंगेज अपराध कहानी सामने आई है। छात्र अपने क्लास में पढ़ने वाली लड़कियों से पहले दोस्ती करता था और फिर उनकी अश्लील तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट कर पैसे वसूलता था। वह अपने क्लास टीचर को भी शिकार बना चुका था। अपने महंगे शौक पूरे करने के लिए वह इन अपराधों को अंजाम देता था। मामला पुलिस में पहुंचने के बाद पोल खुलने के डर से उसने सुसाइड करने की कोशिश की।
एमपी के अशोकनगर में नाबालिग स्कूली छात्र की हैरतअंगेज अपराध कहानी सामने आई है। छात्र अपने क्लास में पढ़ने वाली लड़कियों से पहले दोस्ती करता था और फिर उनकी अश्लील तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट कर पैसे वसूलता था। वह अपने क्लास टीचर को भी शिकार बना चुका था। अपने महंगे शौक पूरे करने के लिए वह इन अपराधों को अंजाम देता था। मामला पुलिस में पहुंचने के बाद पोल खुलने के डर से उसने सुसाइड करने की कोशिश की।
मध्य प्रदेश के खंडवा में रविवार को एक मुस्लिम के घर जबरन हनुमान मूर्ति स्थापित कर वहां पूजा की, जिसके बाद सांप्रदायिक तनाव फैल गया है। दोनों पक्ष के लोग आमने-सामने हो गए। इस बीच, पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर हिंसा को बढ़ने पर रोक लगा दी। पुलिस ने लोगों को तितर-बितर करने की कोशिश की, तो मौके पर मौजूद दोनों पक्ष के लोगों ने पथराव शुरू कर दिया। पथराव की शिकार पुलिस भी हो गई। पथराव में एक मुख्य पुलिस अधीक्षक और एसएचओ सहित कम से कम चार पुलिसकर्मियों के घायल होने की सूचना है। आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना रविवार को भोपाल से करीब 360 किलोमीटर दूर खंडवा में मुंशी चौक इलाके के पास स्थित एक आवासीय कॉलोनी में हुई थी। पुलिस ने सोमवार को कहा कि स्थिति नियंत्रण में है। हालांकि, इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था और आसपास के इलाकों में धारा 144 लागू कर दी गई थी। पुलिस ने सोमवार को कहा कि घटना के पांच कथित अपराधियों को अब तक हिरासत में लिया गया है और अन्य की पहचान की जा रही है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने सोमवार को बताया, "रविवार रात करीब 8:30 बजे लोगों के एक ग्रुप ने घर में घुसकर हनुमान की मूर्ति स्थापित की और मंत्रोच्चारण किया। इसके कारण दोनों समुदायों के लोग घर के बाहर जमा हो गए। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर पथराव किया। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और भीड़ को तितर-बितर किया। " पुलिस के मुताबिक, जिस घर में घटना हुई, वह गणेश जाधव का था, जिसे हाल ही में एक मुस्लिम शेख असगर को बेचा गया था। उत्तेजित लोगों ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पहुंची पुलिस पर भी हमला किया, जिससे उन्हें भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा।
मध्य प्रदेश के खंडवा में रविवार को एक मुस्लिम के घर जबरन हनुमान मूर्ति स्थापित कर वहां पूजा की, जिसके बाद सांप्रदायिक तनाव फैल गया है। दोनों पक्ष के लोग आमने-सामने हो गए। इस बीच, पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर हिंसा को बढ़ने पर रोक लगा दी। पुलिस ने लोगों को तितर-बितर करने की कोशिश की, तो मौके पर मौजूद दोनों पक्ष के लोगों ने पथराव शुरू कर दिया। पथराव की शिकार पुलिस भी हो गई। पथराव में एक मुख्य पुलिस अधीक्षक और एसएचओ सहित कम से कम चार पुलिसकर्मियों के घायल होने की सूचना है। आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना रविवार को भोपाल से करीब तीन सौ साठ किलोग्राममीटर दूर खंडवा में मुंशी चौक इलाके के पास स्थित एक आवासीय कॉलोनी में हुई थी। पुलिस ने सोमवार को कहा कि स्थिति नियंत्रण में है। हालांकि, इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था और आसपास के इलाकों में धारा एक सौ चौंतालीस लागू कर दी गई थी। पुलिस ने सोमवार को कहा कि घटना के पांच कथित अपराधियों को अब तक हिरासत में लिया गया है और अन्य की पहचान की जा रही है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने सोमवार को बताया, "रविवार रात करीब आठ:तीस बजे लोगों के एक ग्रुप ने घर में घुसकर हनुमान की मूर्ति स्थापित की और मंत्रोच्चारण किया। इसके कारण दोनों समुदायों के लोग घर के बाहर जमा हो गए। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर पथराव किया। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और भीड़ को तितर-बितर किया। " पुलिस के मुताबिक, जिस घर में घटना हुई, वह गणेश जाधव का था, जिसे हाल ही में एक मुस्लिम शेख असगर को बेचा गया था। उत्तेजित लोगों ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पहुंची पुलिस पर भी हमला किया, जिससे उन्हें भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा।
का प्रतिपादित करते है। यदि वे भक्ति के सामाजिक महत्त्व को इसके उक-हितकारिणी शक्ति को स्वीकार करते है, यदि वे कलाओं में साधन-सम्पन्नता की अपेक्षा उनसे पड़ने वाले मनोहारी प्रभाव का अधिक मूल्य है, यदि वे पक्के राग गाने वालों के स्वर संधान को आठ अंगुल मुँह फैलाना या स्वरग्राम की लम्बी-चौड़ी कवायद कहते है, यदि वे सच्चा विद्वान् उसे ही समझते है जो ज्ञान का भण्डारी भी हो और उपयोगकर्ता भी हो; यदि वे नीतिवादी है और काव्य में व्यावहारिक उपयोगिता का अनुसंधान करते है; यदि वे सदाचारी एवं लोकोपकारी के प्रति नतमस्तक होना परम कर्तव्य मानते है तो केवल इसीलिए कि वे लोकवादी है, लोक-संग्रह की भावना से ओत-प्रोत है । उनकी सामाजिकता उनके सारे कृतित्व पर सघनता से प्रतिच्छायित । उनके व्यक्तित्व का समाहार इसी लोकवाद मे किया जा सकता है । लोक मगल भावना ने उनके व्यक्तित्व को चार चाँद लगा दिये है । वह हमारे लिए अनुकरणीय एवं उपादेय बन गया है । प्रकृति प्रेम - शुक्लजी के व्यक्तित्व की समीक्षा करते हुए यदि उनके प्रकृति प्रेम की चर्चा न की जाए तो यह समीक्षा अधूरी कहलाएगी । लोकसंग्रह की भावना के समान उनके प्रकृति प्रेम ने भी उन्हे अत्यन्त गहराई के साथ प्रभावित किया है । शुक्लजी के जीवन से प्रकृति का बड़ा घनिष्ठ सम्बन्ध रहा है । वे प्रकृति के अन्य प्रेमी थे । वाल्यकाल से ही उनका यह प्रकृति प्रेम उत्कट रूप में प्रकट होने लगा था । वनस्पतियों में विहार करना, कलकल-निनाद करती जलधारा का चिरकाल तक अवलोकन करना, लताविटपों के शाखा पल्लवों की हरीतिमा से उल्लसित होना, सघन द्रुमों की शीतल छाया में निरन्तर विश्राम करना, पर्वतों की चोटियो पर विहार करना उनके वाल्यकाल के जीवन का प्रमुख प्रग था। यह प्रकृति प्रेम आजीवन उनमे स्थिरता से विद्यमान रहा । बड़ी आयु मे भी वे यथावसर वन - 1 विहार का आनन्द उठाने में प्रवृत्त होते रहे । उनका यह प्रकृति प्रेम उनके लेखों में भी यथास्थान उभरता परिलक्षित होता है । 'लोभ और प्रीति' शीर्षक लेख में सच्चे देश-प्रेम की व्याख्या के प्रसंग में उनकी ये पक्तियाँ उनके हृदय मे बीज रूप से विद्यमान प्रकृति प्रेम को ही झलकाती है । वे कहते है - "वाहर निकलो तो आँखे खोलकर देखो कि खेत कैसे लहलहा रहे है, नाले झाड़ियों के बीच से कैसे बह रहे है, टेसू के फूलो से वनस्थली कैली लाल हो रही है, चौपायों के झुण्ड चरते है, चरवाहे तान लडा रहे है, प्रमराइयों के बीच मे गाँव झाँक रहे है ।" एक-एक शब्द से प्रकृति प्रेम की मधुर धारा प्रवाहित हो रही है। प्रकृति के प्रत्येक पदार्थ के प्रति उनके हृदय मे आकर्षण है । वे प्रकृति के मधुर, कोमल तथा सुरूप पदार्थों मे ही आकृष्ट नही होते अपितु उनके लिए भीषण, कठोर तथा कुरूप प्राकृतिक दृश्य भी विमोहक बन जाते थे । वे उन लोगों मे से नहीं थे जिन्हें प्रकृति के सामान्य पदार्थो मे तल्लीन होने में असभ्यता की गधी है । उक्त लेख मे ही वे अपने एक लखनवी मित्र की चर्चा करके ऐसे लोगों के प्रति अरुचि प्रदर्शित कर देते है । वे लिखते है - "मैं अपने एक लखनवी दोस्त के साथ साँची का स्तूप देखने गया । यह स्तूप एक बहुत सुन्दर एक छोटी-सी पहाड़ी के ऊपर है। नीचे एक छोटा-सा जंगल है, जिसमें महुए के पेड़ भी बहुत से है । वसन्त का समय था । महुए चारों ओर टपक रहे थे। मेरे मुँह से निकला - "महुआ की कैसी मीठी महक ग्रा रही है ।" इस पर लखनवी महाराय ने मुझे रोक कर कहा, "यहाँ महुए सहुए का नाम न लीजिए लोग देहाती समझेंगे । मै चुप हो गया, समझ गया कि महुए का नाम जानने से बाबूपन मे वडा भारी बट्टा लगता है ।" यह स्पष्ट है कि शुक्लजी प्रकृति के पदार्थों के प्रति अपनी रुचि प्रकट करने मे सकोच नहीं करते थे । काव्य सिद्धान्तो के विवेचन मे भी उनका यह प्रकृति प्रेम छिपा नही रह सका है । उन्हें इस बात का खेद है कि हिन्दी की कविताओं में प्राकृतिक दृश्यो का वह सूक्ष्म वर्णन नही मिलता, जो सस्कृत की प्राचीन कविता में पाया जाता है । वे काव्य मे प्रकृति का आलम्बन रूप मे वर्णन देखना चाहते है । प्रकृति के नाना रूपों को वे रसात्मक-बोध के के योग्य समझते हैं। उनकी धारणा के अनुसार अनेक प्रकार के प्राकृतिक
का प्रतिपादित करते है। यदि वे भक्ति के सामाजिक महत्त्व को इसके उक-हितकारिणी शक्ति को स्वीकार करते है, यदि वे कलाओं में साधन-सम्पन्नता की अपेक्षा उनसे पड़ने वाले मनोहारी प्रभाव का अधिक मूल्य है, यदि वे पक्के राग गाने वालों के स्वर संधान को आठ अंगुल मुँह फैलाना या स्वरग्राम की लम्बी-चौड़ी कवायद कहते है, यदि वे सच्चा विद्वान् उसे ही समझते है जो ज्ञान का भण्डारी भी हो और उपयोगकर्ता भी हो; यदि वे नीतिवादी है और काव्य में व्यावहारिक उपयोगिता का अनुसंधान करते है; यदि वे सदाचारी एवं लोकोपकारी के प्रति नतमस्तक होना परम कर्तव्य मानते है तो केवल इसीलिए कि वे लोकवादी है, लोक-संग्रह की भावना से ओत-प्रोत है । उनकी सामाजिकता उनके सारे कृतित्व पर सघनता से प्रतिच्छायित । उनके व्यक्तित्व का समाहार इसी लोकवाद मे किया जा सकता है । लोक मगल भावना ने उनके व्यक्तित्व को चार चाँद लगा दिये है । वह हमारे लिए अनुकरणीय एवं उपादेय बन गया है । प्रकृति प्रेम - शुक्लजी के व्यक्तित्व की समीक्षा करते हुए यदि उनके प्रकृति प्रेम की चर्चा न की जाए तो यह समीक्षा अधूरी कहलाएगी । लोकसंग्रह की भावना के समान उनके प्रकृति प्रेम ने भी उन्हे अत्यन्त गहराई के साथ प्रभावित किया है । शुक्लजी के जीवन से प्रकृति का बड़ा घनिष्ठ सम्बन्ध रहा है । वे प्रकृति के अन्य प्रेमी थे । वाल्यकाल से ही उनका यह प्रकृति प्रेम उत्कट रूप में प्रकट होने लगा था । वनस्पतियों में विहार करना, कलकल-निनाद करती जलधारा का चिरकाल तक अवलोकन करना, लताविटपों के शाखा पल्लवों की हरीतिमा से उल्लसित होना, सघन द्रुमों की शीतल छाया में निरन्तर विश्राम करना, पर्वतों की चोटियो पर विहार करना उनके वाल्यकाल के जीवन का प्रमुख प्रग था। यह प्रकृति प्रेम आजीवन उनमे स्थिरता से विद्यमान रहा । बड़ी आयु मे भी वे यथावसर वन - एक विहार का आनन्द उठाने में प्रवृत्त होते रहे । उनका यह प्रकृति प्रेम उनके लेखों में भी यथास्थान उभरता परिलक्षित होता है । 'लोभ और प्रीति' शीर्षक लेख में सच्चे देश-प्रेम की व्याख्या के प्रसंग में उनकी ये पक्तियाँ उनके हृदय मे बीज रूप से विद्यमान प्रकृति प्रेम को ही झलकाती है । वे कहते है - "वाहर निकलो तो आँखे खोलकर देखो कि खेत कैसे लहलहा रहे है, नाले झाड़ियों के बीच से कैसे बह रहे है, टेसू के फूलो से वनस्थली कैली लाल हो रही है, चौपायों के झुण्ड चरते है, चरवाहे तान लडा रहे है, प्रमराइयों के बीच मे गाँव झाँक रहे है ।" एक-एक शब्द से प्रकृति प्रेम की मधुर धारा प्रवाहित हो रही है। प्रकृति के प्रत्येक पदार्थ के प्रति उनके हृदय मे आकर्षण है । वे प्रकृति के मधुर, कोमल तथा सुरूप पदार्थों मे ही आकृष्ट नही होते अपितु उनके लिए भीषण, कठोर तथा कुरूप प्राकृतिक दृश्य भी विमोहक बन जाते थे । वे उन लोगों मे से नहीं थे जिन्हें प्रकृति के सामान्य पदार्थो मे तल्लीन होने में असभ्यता की गधी है । उक्त लेख मे ही वे अपने एक लखनवी मित्र की चर्चा करके ऐसे लोगों के प्रति अरुचि प्रदर्शित कर देते है । वे लिखते है - "मैं अपने एक लखनवी दोस्त के साथ साँची का स्तूप देखने गया । यह स्तूप एक बहुत सुन्दर एक छोटी-सी पहाड़ी के ऊपर है। नीचे एक छोटा-सा जंगल है, जिसमें महुए के पेड़ भी बहुत से है । वसन्त का समय था । महुए चारों ओर टपक रहे थे। मेरे मुँह से निकला - "महुआ की कैसी मीठी महक ग्रा रही है ।" इस पर लखनवी महाराय ने मुझे रोक कर कहा, "यहाँ महुए सहुए का नाम न लीजिए लोग देहाती समझेंगे । मै चुप हो गया, समझ गया कि महुए का नाम जानने से बाबूपन मे वडा भारी बट्टा लगता है ।" यह स्पष्ट है कि शुक्लजी प्रकृति के पदार्थों के प्रति अपनी रुचि प्रकट करने मे सकोच नहीं करते थे । काव्य सिद्धान्तो के विवेचन मे भी उनका यह प्रकृति प्रेम छिपा नही रह सका है । उन्हें इस बात का खेद है कि हिन्दी की कविताओं में प्राकृतिक दृश्यो का वह सूक्ष्म वर्णन नही मिलता, जो सस्कृत की प्राचीन कविता में पाया जाता है । वे काव्य मे प्रकृति का आलम्बन रूप मे वर्णन देखना चाहते है । प्रकृति के नाना रूपों को वे रसात्मक-बोध के के योग्य समझते हैं। उनकी धारणा के अनुसार अनेक प्रकार के प्राकृतिक
नयी दिल्ली, 19 जून शनिवार को पीटीआई-भाषा की विभिन्न फाइलों से जारी कोरोना वायरस से संबंधित मुख्य समाचार इस प्रकार हैंः नयी दिल्ली, देश में एक दिन में कोविड-19 के 60,753 नए मामले आने के बाद संक्रमण के कुल मामलों की संख्या बढ़कर 2,98,23,546 हो गयी है, जबकि उपचाराधीन मरीजों की संख्या 7,60,019 हो गयी है जो 74 दिनों में सबसे कम है। नयी दिल्ली, केंद्र सरकार ने शनिवार को राज्यों से अपील की है कि वह कोविड-19 महामारी से बचाव के लिए लॉकडाउन खोलते समय कोविड अनुकूल व्यवहार, जांच-निगरानी-इलाज, टीकाकरण जैसी 'अति महत्वपूर्ण' पांच रणनीतियां अपनाए। संयुक्त राष्ट्र, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) एस्ट्राजेनेका, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) और भारत सरकार के साथ काम करने की "तत्काल" कोशिश कर रहा है ताकि उन देशों को कोविड-19 टीकों की खेप पहुंचाना फिर से शुरू किया जा सके, जो आपूर्ति बाधित होने के कारण अपने देशवासियों को टीकों की दूसरी खुराक नहीं लगा पाए। संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। न्यूयॉर्क, न्यूयॉर्क सिटी के स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार शहर में कोविड-19 जांच में छह प्रतिशत से अधिक मामलों में संक्रमण के 'डेल्टा' स्वरूप की पुष्टि हुई है। नयी दिल्ली, केंद्र सरकार ने शनिवार को बताया कि 'कोविड सीवियरिटी स्कोर' नामक एक सॉफ्टवेयर बनाया गया है जो ऐसे मरीजों की पहले से पहचान कर सकता है जिन्हें वेंटिलेटर या आपातकालीन सेवा और आईसीयू की जरूरत पड़ सकती है। वॉशिंगटन, अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने घोषणा की कि देश में उनके कार्यभार संभालने के बाद से 150 दिन में कोरोना वायरस रोधी टीकों की 30 करोड़ खुराक लगाई गईं। साओ पाउलो, ब्राजील के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि कोपा अमेरिका फुटबॉल से जुड़े कोरोना संक्रमण के मामले बढकर 82 हो गए हैं जबकि कुल 6926 टेस्ट कराये गए । कोलंबो, श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने कोरोना वायरस संक्रमण से हुई मौत संबंधी गलत आंकड़ा पेश किए जाने के कारण 14 जून को देश में प्रतिबंधों में ढील नहीं दे पाने पर नाराजगी जताई, जिसके बाद देश के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी का स्थानांतरण कर दिया गया। पुडुचेरी, केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी में शनिवार सुबह 10 बजे तक पिछले 24 घंटों के दौरान कोविड-19 के 295 नए मामले आए, जिससे क्षेत्र में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 1. 14 लाख हो गयी है। वहीं, संक्रमण से छह और लोगों के दम तोड़ने से मृतक संख्या 1720 हो गयी है। ईटानगर, अरुणाचल प्रदेश में 209 लोगों में कोरोना वायरस संक्रमण की पुष्टि होने से संक्रमितों की संख्या बढ़कर 32,692 हो गयी है। एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी ने शनिवार को इस बारे में बताया। ठाणे, महाराष्ट्र के ठाणे में कोरोना वायरस संक्रमण के 417 नए मामले सामने आने के बाद जिले में संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर 5,27,400 हो गई। एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी। लेह, लद्दाख में कोविड-19 के 26 नए मामले आने से संक्रमितों की संख्या बढ़कर 19,730 हो गयी है जबकि 75 और मरीजों के स्वस्थ होने से उपचाराधीन मामलों की संख्या 433 हो गयी है। अधिकारियों ने शनिवार को इसकी जानकारी दी । पोर्ट ब्लेयर, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में कोविड-19 के 28 नए मामले आने से संक्रमण के कुल मामलों की संख्या 7,363 पर पहुंच गयी है। एक अधिकारी ने इसकी जानकारी दी। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
नयी दिल्ली, उन्नीस जून शनिवार को पीटीआई-भाषा की विभिन्न फाइलों से जारी कोरोना वायरस से संबंधित मुख्य समाचार इस प्रकार हैंः नयी दिल्ली, देश में एक दिन में कोविड-उन्नीस के साठ,सात सौ तिरेपन नए मामले आने के बाद संक्रमण के कुल मामलों की संख्या बढ़कर दो,अट्ठानवे,तेईस,पाँच सौ छियालीस हो गयी है, जबकि उपचाराधीन मरीजों की संख्या सात,साठ,उन्नीस हो गयी है जो चौहत्तर दिनों में सबसे कम है। नयी दिल्ली, केंद्र सरकार ने शनिवार को राज्यों से अपील की है कि वह कोविड-उन्नीस महामारी से बचाव के लिए लॉकडाउन खोलते समय कोविड अनुकूल व्यवहार, जांच-निगरानी-इलाज, टीकाकरण जैसी 'अति महत्वपूर्ण' पांच रणनीतियां अपनाए। संयुक्त राष्ट्र, विश्व स्वास्थ्य संगठन एस्ट्राजेनेका, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और भारत सरकार के साथ काम करने की "तत्काल" कोशिश कर रहा है ताकि उन देशों को कोविड-उन्नीस टीकों की खेप पहुंचाना फिर से शुरू किया जा सके, जो आपूर्ति बाधित होने के कारण अपने देशवासियों को टीकों की दूसरी खुराक नहीं लगा पाए। संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। न्यूयॉर्क, न्यूयॉर्क सिटी के स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार शहर में कोविड-उन्नीस जांच में छह प्रतिशत से अधिक मामलों में संक्रमण के 'डेल्टा' स्वरूप की पुष्टि हुई है। नयी दिल्ली, केंद्र सरकार ने शनिवार को बताया कि 'कोविड सीवियरिटी स्कोर' नामक एक सॉफ्टवेयर बनाया गया है जो ऐसे मरीजों की पहले से पहचान कर सकता है जिन्हें वेंटिलेटर या आपातकालीन सेवा और आईसीयू की जरूरत पड़ सकती है। वॉशिंगटन, अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने घोषणा की कि देश में उनके कार्यभार संभालने के बाद से एक सौ पचास दिन में कोरोना वायरस रोधी टीकों की तीस करोड़ खुराक लगाई गईं। साओ पाउलो, ब्राजील के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि कोपा अमेरिका फुटबॉल से जुड़े कोरोना संक्रमण के मामले बढकर बयासी हो गए हैं जबकि कुल छः हज़ार नौ सौ छब्बीस टेस्ट कराये गए । कोलंबो, श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने कोरोना वायरस संक्रमण से हुई मौत संबंधी गलत आंकड़ा पेश किए जाने के कारण चौदह जून को देश में प्रतिबंधों में ढील नहीं दे पाने पर नाराजगी जताई, जिसके बाद देश के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी का स्थानांतरण कर दिया गया। पुडुचेरी, केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी में शनिवार सुबह दस बजे तक पिछले चौबीस घंटाटों के दौरान कोविड-उन्नीस के दो सौ पचानवे नए मामले आए, जिससे क्षेत्र में संक्रमितों की संख्या बढ़कर एक. चौदह लाख हो गयी है। वहीं, संक्रमण से छह और लोगों के दम तोड़ने से मृतक संख्या एक हज़ार सात सौ बीस हो गयी है। ईटानगर, अरुणाचल प्रदेश में दो सौ नौ लोगों में कोरोना वायरस संक्रमण की पुष्टि होने से संक्रमितों की संख्या बढ़कर बत्तीस,छः सौ बानवे हो गयी है। एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी ने शनिवार को इस बारे में बताया। ठाणे, महाराष्ट्र के ठाणे में कोरोना वायरस संक्रमण के चार सौ सत्रह नए मामले सामने आने के बाद जिले में संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर पाँच,सत्ताईस,चार सौ हो गई। एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी। लेह, लद्दाख में कोविड-उन्नीस के छब्बीस नए मामले आने से संक्रमितों की संख्या बढ़कर उन्नीस,सात सौ तीस हो गयी है जबकि पचहत्तर और मरीजों के स्वस्थ होने से उपचाराधीन मामलों की संख्या चार सौ तैंतीस हो गयी है। अधिकारियों ने शनिवार को इसकी जानकारी दी । पोर्ट ब्लेयर, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में कोविड-उन्नीस के अट्ठाईस नए मामले आने से संक्रमण के कुल मामलों की संख्या सात,तीन सौ तिरेसठ पर पहुंच गयी है। एक अधिकारी ने इसकी जानकारी दी। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
गया। बिहार चुनाव में शनिवार को शिवहर में जनता दल राष्ट्रवादी के उम्मीदवार नारायण सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इसी तरह गया में भी टिकारी विधानसभा से पप्पू यादव की जन अधिकार पार्टी के प्रत्याशी अजय यादव पर जानलेवा हमला किया गया। हालांकि इस हमले में वह बाल-बाल बच गए। अजय यादव पर चुनाव प्रचार के दौरान फायरिंग की गई। घटना में प्रत्याशी बाल-बाल बचे। घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने घटनास्थल से चार खोखे भी बरामद किए हैं। उल्लेखनीय है कि बिहार में शिवहर जिले के शिवहर विधानसभा क्षेत्र से जनता दल राष्ट्रवादी के प्रत्याशी श्रीनारायण सिंह को शनिवार शाम चुनाव प्रचार के दौरान अपराधियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। सिंह जिले में पुरनहिया थाना क्षेत्र के हाथसर गांव में चुनाव प्रचार करने गए थे। इसी दौरान दो बाइक सवार चार अपराधी ने उन पर गोली चला दी। इस हमले में जनता दल राष्ट्रवादी के प्रत्याशी सिंह को दो गोली लगी और वे गंभीर रूप से घायल हो गए।
गया। बिहार चुनाव में शनिवार को शिवहर में जनता दल राष्ट्रवादी के उम्मीदवार नारायण सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इसी तरह गया में भी टिकारी विधानसभा से पप्पू यादव की जन अधिकार पार्टी के प्रत्याशी अजय यादव पर जानलेवा हमला किया गया। हालांकि इस हमले में वह बाल-बाल बच गए। अजय यादव पर चुनाव प्रचार के दौरान फायरिंग की गई। घटना में प्रत्याशी बाल-बाल बचे। घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने घटनास्थल से चार खोखे भी बरामद किए हैं। उल्लेखनीय है कि बिहार में शिवहर जिले के शिवहर विधानसभा क्षेत्र से जनता दल राष्ट्रवादी के प्रत्याशी श्रीनारायण सिंह को शनिवार शाम चुनाव प्रचार के दौरान अपराधियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। सिंह जिले में पुरनहिया थाना क्षेत्र के हाथसर गांव में चुनाव प्रचार करने गए थे। इसी दौरान दो बाइक सवार चार अपराधी ने उन पर गोली चला दी। इस हमले में जनता दल राष्ट्रवादी के प्रत्याशी सिंह को दो गोली लगी और वे गंभीर रूप से घायल हो गए।
जम्मू कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा समाप्त होने के साथ ही पाकिस्तान तिलमिला गया है और सख्त प्रतिक्रियां दे रहा है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार ने भारतीय फिल्मों की सीडी जी बिक्री पर रोक लगा दी है और अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद शुक्रवार को टेलीविजन चैनलों पर भारत निर्मित उत्पादों के विज्ञापनों पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। पाकिस्तान के डॉन मीडिया से बातचीत के दौरान फिरदौस आशिक एवान ने कहा कि आंतरिक मंत्रालय ने इस्लामाबाद में कुछ दुकानों पर छापेमारी भी की और भारतीय फिल्मों की सीडी को जब्त कर लिया था। इस बीच, पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेगुलेटरी अथॉरिटी ने टेलीविजन और रेडियो नेटवर्क पर भारत के उत्पादों के विज्ञापनों पर रोक लगा दी है। बुधवार को पेमरा ने अपने ट्वीटर एकाउंट पर एक पोस्ट साझा किया था इस खत में याद बताया कि उनकी सरकार ने अक्टूबर 2018 में शीर्ष अदालत के निर्देश पर भारतीय चैनलो और सामग्री को प्रसारित करने की अनुमति को वापस ले लिया था। जम्मू कश्मीर से धारा 370 के हटते ही दोनो मुल्कों के बीच तनाव काफी हद तक बढ़ गया था और पाकिस्तान ने भारत के साथ सभी राजनयिक सम्बंधो को खत्म करने की चेतावनी दी थी। भारत के जम्मू कश्मीर से 370 आर्टिकल को हटाने के बाद भारत सरकार के फैसले से बौखलाए पाकिस्तान ने अपने यहां भारतीय फिल्मों व ड्रामों के पाक में प्रदर्शन पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही द्विपक्षीय कारोबार पर भी बैन लगा दिया है। पाकिस्तान ने समझौता एक्सप्रेस के आवागमन को भी रोकने का फैसला किया है।
जम्मू कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा समाप्त होने के साथ ही पाकिस्तान तिलमिला गया है और सख्त प्रतिक्रियां दे रहा है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार ने भारतीय फिल्मों की सीडी जी बिक्री पर रोक लगा दी है और अनुच्छेद तीन सौ सत्तर को हटाए जाने के बाद शुक्रवार को टेलीविजन चैनलों पर भारत निर्मित उत्पादों के विज्ञापनों पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। पाकिस्तान के डॉन मीडिया से बातचीत के दौरान फिरदौस आशिक एवान ने कहा कि आंतरिक मंत्रालय ने इस्लामाबाद में कुछ दुकानों पर छापेमारी भी की और भारतीय फिल्मों की सीडी को जब्त कर लिया था। इस बीच, पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेगुलेटरी अथॉरिटी ने टेलीविजन और रेडियो नेटवर्क पर भारत के उत्पादों के विज्ञापनों पर रोक लगा दी है। बुधवार को पेमरा ने अपने ट्वीटर एकाउंट पर एक पोस्ट साझा किया था इस खत में याद बताया कि उनकी सरकार ने अक्टूबर दो हज़ार अट्ठारह में शीर्ष अदालत के निर्देश पर भारतीय चैनलो और सामग्री को प्रसारित करने की अनुमति को वापस ले लिया था। जम्मू कश्मीर से धारा तीन सौ सत्तर के हटते ही दोनो मुल्कों के बीच तनाव काफी हद तक बढ़ गया था और पाकिस्तान ने भारत के साथ सभी राजनयिक सम्बंधो को खत्म करने की चेतावनी दी थी। भारत के जम्मू कश्मीर से तीन सौ सत्तर आर्टिकल को हटाने के बाद भारत सरकार के फैसले से बौखलाए पाकिस्तान ने अपने यहां भारतीय फिल्मों व ड्रामों के पाक में प्रदर्शन पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही द्विपक्षीय कारोबार पर भी बैन लगा दिया है। पाकिस्तान ने समझौता एक्सप्रेस के आवागमन को भी रोकने का फैसला किया है।
छोटी उंगली बुध ग्रह की मानी जाती है। यह उंगली अगर अनामिका उंगली के नाखून वाले ऊपरी पोर तक पहुंचे तो व्यक्ति अपनी बुद्धि से जीवन में काफी तरक्की करता है। यदि हाथ की सबसे छोटी उंगली सामान्य लंबाई से बहुत छोटी है तो ऐसा व्यक्ति हर काम में जल्दबाजी करने वाला होता है। जिस कारण ऐसे लोगों को थोड़ा नासमझ समझा जाता है। तो वहीं जिन लोगों की यह उंगली आगे से नुकीली होती है वह बुद्धिमान किस्म के होते हैं। दिमाग इनका काफी तेज होता है। यदि छोटी उंगली रिंग फिंगर के बराबर हो तो व्यक्ति वैज्ञानिक या फिर बड़ा कारोबारी बन सकता है। अगर हाथ की छोटी उंगली काफी छोटी है तो व्यक्ति धन का लालची हो सकता है। ऐसे लोग धन कमाने के लिए गलत राह भी अपना सकते हैं। यदि छोटी उंगली सामान्य से अधिक लंबी है तो व्यक्ति चालाक हो सकता है। ऐसे लोग चतुराई से अपने हर काम में सफलता हासिल कर लेते हैं। जिन लोगों की ये उंगली सामान्य लंबाई वाली होती है वे लोग घर परिवार में उचित मान-सम्मान पाते हैं। अपनी योग्यता के बल पर कार्यों में सफलता हासिल कर लेते हैं। यदि छोटी उंगली का अंतिम भाग चौकोर दिखाई देता है तो व्यक्ति काफी दूरदर्शी होता है। वहीं छोटी उंगली के टेढ़ी होने पर जीवन में आप कई बार अयोग्य साबित हो सकते हैं। यदि छोटी उंगली अनामिका उंगली की तरफ झुकी हुई है तो ऐसा व्यक्ति अच्छा व्यापारी होता है। जिन लोगों की छोटी उंगली अनामिका उंगली से दूर होती है, वे लोग अपने कार्यों को आजादी के साथ करना पसंद करते हैं।
छोटी उंगली बुध ग्रह की मानी जाती है। यह उंगली अगर अनामिका उंगली के नाखून वाले ऊपरी पोर तक पहुंचे तो व्यक्ति अपनी बुद्धि से जीवन में काफी तरक्की करता है। यदि हाथ की सबसे छोटी उंगली सामान्य लंबाई से बहुत छोटी है तो ऐसा व्यक्ति हर काम में जल्दबाजी करने वाला होता है। जिस कारण ऐसे लोगों को थोड़ा नासमझ समझा जाता है। तो वहीं जिन लोगों की यह उंगली आगे से नुकीली होती है वह बुद्धिमान किस्म के होते हैं। दिमाग इनका काफी तेज होता है। यदि छोटी उंगली रिंग फिंगर के बराबर हो तो व्यक्ति वैज्ञानिक या फिर बड़ा कारोबारी बन सकता है। अगर हाथ की छोटी उंगली काफी छोटी है तो व्यक्ति धन का लालची हो सकता है। ऐसे लोग धन कमाने के लिए गलत राह भी अपना सकते हैं। यदि छोटी उंगली सामान्य से अधिक लंबी है तो व्यक्ति चालाक हो सकता है। ऐसे लोग चतुराई से अपने हर काम में सफलता हासिल कर लेते हैं। जिन लोगों की ये उंगली सामान्य लंबाई वाली होती है वे लोग घर परिवार में उचित मान-सम्मान पाते हैं। अपनी योग्यता के बल पर कार्यों में सफलता हासिल कर लेते हैं। यदि छोटी उंगली का अंतिम भाग चौकोर दिखाई देता है तो व्यक्ति काफी दूरदर्शी होता है। वहीं छोटी उंगली के टेढ़ी होने पर जीवन में आप कई बार अयोग्य साबित हो सकते हैं। यदि छोटी उंगली अनामिका उंगली की तरफ झुकी हुई है तो ऐसा व्यक्ति अच्छा व्यापारी होता है। जिन लोगों की छोटी उंगली अनामिका उंगली से दूर होती है, वे लोग अपने कार्यों को आजादी के साथ करना पसंद करते हैं।
अनन्या पांडे के एयरपोर्ट वाले वीडियो को एक इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया गया है, जो सोशल मीडिया पर छाया हुआ है। अनन्या हाल ही में मालदीव से वकेशन एन्जॉय करने के बाद मुंबई लौटी हैं। एयरपोर्ट पर अनन्या का कातिलाना लुक देखने लायक था। सोशल मीडिया यूजर्स को उनका स्पॉर्टी लुक काफी ज्यादा पसंद आ रहा है और वह उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे हैं। पर्सनल लाइफ की बात करें तो ऐसी चर्चा है कि वह फिल्म 'खाली पीली' के को- ऐक्टर ईशान खट्टर को डेट कर रही हैं। दोनों नए साल पर मालदीव में छुट्टियां मनाने गए हुए थे। तब अनन्या और ईशान की मालदीव की तस्वीरों ने खूब सुर्खियां भी बटोरी थीं। वर्कफ्रंट की बात करें तो अनन्या पांडे जल्द ही शकुन बत्रा की एक फिल्म में नजर आएंगी, जोकि एक लव स्टोरी होगी। इसके अलावा वह 'लिगर' में विजय देवरकोंडा के साथ टॉलीवुड में भी डेब्यू करने जा रही हैं। यह फिल्म पुरी जगन्नाथ के निर्देशन में बनने जा रही है। फिल्म में राम्या कृष्णा, रोनित रॉय, मारखंड देशपांडे भी अहम भूमिका में नजर आएंगे।
अनन्या पांडे के एयरपोर्ट वाले वीडियो को एक इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया गया है, जो सोशल मीडिया पर छाया हुआ है। अनन्या हाल ही में मालदीव से वकेशन एन्जॉय करने के बाद मुंबई लौटी हैं। एयरपोर्ट पर अनन्या का कातिलाना लुक देखने लायक था। सोशल मीडिया यूजर्स को उनका स्पॉर्टी लुक काफी ज्यादा पसंद आ रहा है और वह उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे हैं। पर्सनल लाइफ की बात करें तो ऐसी चर्चा है कि वह फिल्म 'खाली पीली' के को- ऐक्टर ईशान खट्टर को डेट कर रही हैं। दोनों नए साल पर मालदीव में छुट्टियां मनाने गए हुए थे। तब अनन्या और ईशान की मालदीव की तस्वीरों ने खूब सुर्खियां भी बटोरी थीं। वर्कफ्रंट की बात करें तो अनन्या पांडे जल्द ही शकुन बत्रा की एक फिल्म में नजर आएंगी, जोकि एक लव स्टोरी होगी। इसके अलावा वह 'लिगर' में विजय देवरकोंडा के साथ टॉलीवुड में भी डेब्यू करने जा रही हैं। यह फिल्म पुरी जगन्नाथ के निर्देशन में बनने जा रही है। फिल्म में राम्या कृष्णा, रोनित रॉय, मारखंड देशपांडे भी अहम भूमिका में नजर आएंगे।
7th Pay Commission: हाल ही में केंद्र सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी की थी. उसके बाद कई राज्य सरकारों ने सरकारी कर्मचारियों को तोहफा देते हुए महंगाई भत्ता (DA) में इजाफा का फैसला किया है. अब तमिलनाडु की एमके स्टालिन (MK Stalin) सरकार ने बुधवार को बड़ी घोषणा की है. तमिलनाडु सरकार ने राज्य सरकार के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते को 4 फीसदी बढ़ाकर 38 फीसदी से 42 फीसदी कर दिया है. महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी का ये फैसला 1 अप्रैल, 2023 से लागू माना जाएगा. एक आधिकारिक बयान में बुधवार को कहा गया है कि इस कदम से राजकोष पर सालाना 2,366. 82 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा. सरकार के इस फैसले से 16 लाख सरकारी कर्मचारियों, शिक्षकों, पेंशनभोगियों और परिवार पेंशन पाने वाले को लाभ होगा. ये भी पढ़ें- मायानगरी को मिलेगी चौथी वंदे भारत, मुंबई से गोवा के बीच जल्द भरेगी रफ्तार, जानिए कब से शुरू होगा परिचालन? बयान में कहा गया है कि डीए को 38 फीसदी से बढ़ाकर 42 फीसदी कर दिया गया है. बयान में कहा गया है कि आगे भी जब केंद्र सरकार ऐसा कदम उठाएगी तो राज्य सरकार भी उसके अनुरूप डीए में बढ़ोतरी करेगी. ये भी पढ़ें- चलाएं मास्टर स्ट्रॉक! हर बार मिलेगी ट्रेन में कन्फर्म टिकट, किसी से नहीं करनी होगी बैठाने की रिक्वेस्ट, जानें कैसे? बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार (24 मार्च) को हुई कैबिनेट की बैठक में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनधारकों के महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी का फैसला लिया गया था. महंगाई भत्ते को 38 फीसदी से बढ़ाकर 42 फीसदी कर दिया गया है. महंगाई भत्ते में ये बढ़ोतरी जनवरी 2023 से लागू होगी. .
सातth Pay Commission: हाल ही में केंद्र सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी की थी. उसके बाद कई राज्य सरकारों ने सरकारी कर्मचारियों को तोहफा देते हुए महंगाई भत्ता में इजाफा का फैसला किया है. अब तमिलनाडु की एमके स्टालिन सरकार ने बुधवार को बड़ी घोषणा की है. तमिलनाडु सरकार ने राज्य सरकार के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते को चार फीसदी बढ़ाकर अड़तीस फीसदी से बयालीस फीसदी कर दिया है. महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी का ये फैसला एक अप्रैल, दो हज़ार तेईस से लागू माना जाएगा. एक आधिकारिक बयान में बुधवार को कहा गया है कि इस कदम से राजकोष पर सालाना दो,तीन सौ छयासठ. बयासी करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा. सरकार के इस फैसले से सोलह लाख सरकारी कर्मचारियों, शिक्षकों, पेंशनभोगियों और परिवार पेंशन पाने वाले को लाभ होगा. ये भी पढ़ें- मायानगरी को मिलेगी चौथी वंदे भारत, मुंबई से गोवा के बीच जल्द भरेगी रफ्तार, जानिए कब से शुरू होगा परिचालन? बयान में कहा गया है कि डीए को अड़तीस फीसदी से बढ़ाकर बयालीस फीसदी कर दिया गया है. बयान में कहा गया है कि आगे भी जब केंद्र सरकार ऐसा कदम उठाएगी तो राज्य सरकार भी उसके अनुरूप डीए में बढ़ोतरी करेगी. ये भी पढ़ें- चलाएं मास्टर स्ट्रॉक! हर बार मिलेगी ट्रेन में कन्फर्म टिकट, किसी से नहीं करनी होगी बैठाने की रिक्वेस्ट, जानें कैसे? बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट की बैठक में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनधारकों के महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी का फैसला लिया गया था. महंगाई भत्ते को अड़तीस फीसदी से बढ़ाकर बयालीस फीसदी कर दिया गया है. महंगाई भत्ते में ये बढ़ोतरी जनवरी दो हज़ार तेईस से लागू होगी. .
ज्योतिष शास्त्र में नवग्रह बताए गए हैं। इन नव ग्रहों में से राहु और केतु को छोड़कर अन्य सभी ग्रहों को किसी न किसी राशि का स्वामित्व प्राप्त है। ये ग्रह एक राशि से दूसरी राशि में भ्रमण करते हैं। इनकी बदलती हुई स्थिति मनुष्य के जीवन पर प्रभाव डालती है। इस समय देव गुरु बृहस्पति मकर राशि में भ्रमण कर रहे हैं। 6 अप्रैल को रात्रि 12 बजकर 25 मिनट गुरु कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे। गुरु के कुंभ में प्रवेश करने से वायु तत्व की मिथुन तुला और कुंभ को राहत मिलेगी। गुरु का कुंभ में प्रवेश इन तीनों राशियों के लिए बेहद ही सकारात्मक परिणाम लेकर आएगा। इन राशि के जातकों के व्यापार संबंधी महत्वपूर्ण मामलों में गति आएगी। इसके साथ ही गुरु के शुभ फल के कारण मांगलिक कार्यों विवाह आदि में आने वाली बाधाएं भी दूर होंगी। जानते हैं तीनों राशियों में किस राशि पर कैसा रहेगा गुरु का प्रभाव। गुरु मिथुन राशि के भाग्य स्थान में भ्रमण करेंगे। इससे इस राशि के जातकों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से राहत मिलेगी। इनका प्रभाव बढ़ेगा। धार्मिक यात्रा पर जाने के योग बनेंगे। धर्म आस्था और पुण्य कर्म करने के अवसर प्राप्त होंगे। इसके साथ ही किसी सकारात्मक लंबी यात्रा का योग भी बन सकता है। तुला राशि से गुरु पांचवें स्थान पर भ्रमण करेंगे। इस राशि के जातकों की सेहत अच्छी होगी यदि स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हैं तो वे भी दूर होंगी। गुरु का भ्रमण मिथुन राशि के विद्यार्थियों के लिए बहुत अच्छा रहेगा। पठन पाठन में रुचि बढ़ेगी और परीक्षा प्रतियोगिता में भी प्रदर्शन अच्छा रहेगा। कुंभ राशि में गुरु स्वयं विराजमान होंगे। इससे इस राशि के जातक अपनी जिम्मेदारियों के प्रति गंभीर होंगे। इनका भाग्य प्रबल होगा। जिससे इनके रुके हुए कार्य भी पूरे होने लगेंगे। इस राशि के विद्यार्थियों का परीक्षा में प्रदर्शन अच्छा रहेगा।
ज्योतिष शास्त्र में नवग्रह बताए गए हैं। इन नव ग्रहों में से राहु और केतु को छोड़कर अन्य सभी ग्रहों को किसी न किसी राशि का स्वामित्व प्राप्त है। ये ग्रह एक राशि से दूसरी राशि में भ्रमण करते हैं। इनकी बदलती हुई स्थिति मनुष्य के जीवन पर प्रभाव डालती है। इस समय देव गुरु बृहस्पति मकर राशि में भ्रमण कर रहे हैं। छः अप्रैल को रात्रि बारह बजकर पच्चीस मिनट गुरु कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे। गुरु के कुंभ में प्रवेश करने से वायु तत्व की मिथुन तुला और कुंभ को राहत मिलेगी। गुरु का कुंभ में प्रवेश इन तीनों राशियों के लिए बेहद ही सकारात्मक परिणाम लेकर आएगा। इन राशि के जातकों के व्यापार संबंधी महत्वपूर्ण मामलों में गति आएगी। इसके साथ ही गुरु के शुभ फल के कारण मांगलिक कार्यों विवाह आदि में आने वाली बाधाएं भी दूर होंगी। जानते हैं तीनों राशियों में किस राशि पर कैसा रहेगा गुरु का प्रभाव। गुरु मिथुन राशि के भाग्य स्थान में भ्रमण करेंगे। इससे इस राशि के जातकों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से राहत मिलेगी। इनका प्रभाव बढ़ेगा। धार्मिक यात्रा पर जाने के योग बनेंगे। धर्म आस्था और पुण्य कर्म करने के अवसर प्राप्त होंगे। इसके साथ ही किसी सकारात्मक लंबी यात्रा का योग भी बन सकता है। तुला राशि से गुरु पांचवें स्थान पर भ्रमण करेंगे। इस राशि के जातकों की सेहत अच्छी होगी यदि स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हैं तो वे भी दूर होंगी। गुरु का भ्रमण मिथुन राशि के विद्यार्थियों के लिए बहुत अच्छा रहेगा। पठन पाठन में रुचि बढ़ेगी और परीक्षा प्रतियोगिता में भी प्रदर्शन अच्छा रहेगा। कुंभ राशि में गुरु स्वयं विराजमान होंगे। इससे इस राशि के जातक अपनी जिम्मेदारियों के प्रति गंभीर होंगे। इनका भाग्य प्रबल होगा। जिससे इनके रुके हुए कार्य भी पूरे होने लगेंगे। इस राशि के विद्यार्थियों का परीक्षा में प्रदर्शन अच्छा रहेगा।
मुंबईः इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के 13वें संस्करण का आयोजन यूएई में आयोजित होगा और मध्य सितंबर से शुरुआती नवंबर तक ये टूर्नामेंट खेला जाएगा। टी20 विश्व कप स्थगित होने के बाद भारत में कोरोना महामारी के संक्रमण को देखते हुए बीसीसीआई ने आईपीएल क यूएई में कराने की तैयारी की है और सरकार ने भी उनको मंजूरी दे दी है। हालांकि बॉम्बे उच्च न्यायालय में एक याचिका डाली गई है जिसमें इसका आयोजन यूएई की जगह भारत में ही कराने का आदेश देने की गुजारिश की गई है। बॉम्बे उच्च न्यायालय में एक अधिवक्ता ने भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) से आईपीएल 2020 का आयोजन यूएई की जगह भारत में करने के लिए निर्देश देने की याचिका दायर की है। पुणे के अधिवक्ता अभिषेक लागू द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि अगर आईपीएल भारत के बाहर आयोजित होता है तो इससे देश को भारी आर्थिक और राजस्व नुकसान होगा। लागू ने खुद को क्रिकेट प्रशंसक बताते हुए याचिका में कहा कि आईपीएल बीसीसीआई की आय का मुख्य स्रोत है। इस साल आईपीएल मार्च में शुरू होना था लेकिन कोविड-19 महामारी के प्रकोप के कारण इसे स्थगित कर दिए गया था। बीसीसीआई ने दो अगस्त को टूर्नामेंट का आयोजन 19 सितंबर से 10 नवंबर तक यूएई में करने की घोषणा की थी। टीमों व खिलाड़ियों के लिए SOP जारी कर दी गई हैं और सभी को इसका पालन करना होगा ताकि संक्रमण से बचते हुए टूर्नामेंट का आयोजन कराया जा सके।
मुंबईः इंडियन प्रीमियर लीग के तेरहवें संस्करण का आयोजन यूएई में आयोजित होगा और मध्य सितंबर से शुरुआती नवंबर तक ये टूर्नामेंट खेला जाएगा। टीबीस विश्व कप स्थगित होने के बाद भारत में कोरोना महामारी के संक्रमण को देखते हुए बीसीसीआई ने आईपीएल क यूएई में कराने की तैयारी की है और सरकार ने भी उनको मंजूरी दे दी है। हालांकि बॉम्बे उच्च न्यायालय में एक याचिका डाली गई है जिसमें इसका आयोजन यूएई की जगह भारत में ही कराने का आदेश देने की गुजारिश की गई है। बॉम्बे उच्च न्यायालय में एक अधिवक्ता ने भारतीय क्रिकेट बोर्ड से आईपीएल दो हज़ार बीस का आयोजन यूएई की जगह भारत में करने के लिए निर्देश देने की याचिका दायर की है। पुणे के अधिवक्ता अभिषेक लागू द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि अगर आईपीएल भारत के बाहर आयोजित होता है तो इससे देश को भारी आर्थिक और राजस्व नुकसान होगा। लागू ने खुद को क्रिकेट प्रशंसक बताते हुए याचिका में कहा कि आईपीएल बीसीसीआई की आय का मुख्य स्रोत है। इस साल आईपीएल मार्च में शुरू होना था लेकिन कोविड-उन्नीस महामारी के प्रकोप के कारण इसे स्थगित कर दिए गया था। बीसीसीआई ने दो अगस्त को टूर्नामेंट का आयोजन उन्नीस सितंबर से दस नवंबर तक यूएई में करने की घोषणा की थी। टीमों व खिलाड़ियों के लिए SOP जारी कर दी गई हैं और सभी को इसका पालन करना होगा ताकि संक्रमण से बचते हुए टूर्नामेंट का आयोजन कराया जा सके।
न्यूयार्क, अमेरिका. शनिवार को 26 हज़ार लोग अमेरिका के राष्ट्रपति पद के दावेदारी के चुनाव डेमोक्रेट प्राइमरी में बर्नी सैंडर्स को सुनने जुटे. ये किसी डेमोक्रेटिक उम्मीदवार की 2020 के चुनाव के लिए सबसे बड़ी रैली है. हार्ट अटैक के बाद बर्नी की ये पहली रैली थी. रैली में फायरब्रांड डेमोक्रेटिक कांग्रेस की सदस्य अलेक्ज़ेंड्रिया ओकासिओ कार्टेज ने भी राष्ट्रपति पद के लिए बर्नी सैंडर्स का समर्थन किया. रैली में उन्होंने कहा कि वे बर्नी को टायो बर्नी कहेंगी. टायो स्पेशिश शब्द है जिसका मतलब अंकल होता है. कार्टेज खुद को सोशलिस्ट डेमोक्रिटिक कहती हैं. तीस साल की कार्टेज हाऊस की प्रतिनिधि बनने वाले सबसे कम उम्र की सदस्य हैं. जबकि सैंडर्स 1991 से कांग्रेस के सदस्य हैं. ओकासिओ कार्टेन ने कहा कि बर्नी के रुप में इस युग में हमारे पास सबसे अच्छा राष्ट्रपति का उम्मीदवार है. उन्होंने बर्नी के द्वारा पूरी ज़िंदगी में किए गए कार्यों के लिए धन्यवाद अदा किया. डेमोक्रेटिक प्रायमरी में कुल 19 उम्मीदवार राष्ट्रपति पद की दौड़ में हैं. जिनमें से 12 ने मंगलवार को नेशनल डिबेट में हिस्सा लिया. सैंडर्स को पोल में इस रेस में जो बिडेन और एलिज़ाबेथ वारेन के बाद तीसरे नंबर पर बताया जा रहा है. जबकि क्राउड फंडिग और भीड़ जुटाने में बर्नी बाकी सभी से काफी आगे हैं. पोल में एलिज़ाबेथ के साथ संघर्ष कर रहे बर्नी इस कैंपेन के ज़रिए अपनी दावेदारी के आगे पहुंचने की उम्मीद कर रहे हैं. उन्हें यूनिवर्सल हेल्थकेयर स्कीम से भी फायदा मिलने की उम्मीद है. सैंडर्स 78 साल के हैं. उन्हें कार्पोरेट से राजनीतिक चंदे के सबसे बड़े विरोधी के रुप में जाना जाता है.
न्यूयार्क, अमेरिका. शनिवार को छब्बीस हज़ार लोग अमेरिका के राष्ट्रपति पद के दावेदारी के चुनाव डेमोक्रेट प्राइमरी में बर्नी सैंडर्स को सुनने जुटे. ये किसी डेमोक्रेटिक उम्मीदवार की दो हज़ार बीस के चुनाव के लिए सबसे बड़ी रैली है. हार्ट अटैक के बाद बर्नी की ये पहली रैली थी. रैली में फायरब्रांड डेमोक्रेटिक कांग्रेस की सदस्य अलेक्ज़ेंड्रिया ओकासिओ कार्टेज ने भी राष्ट्रपति पद के लिए बर्नी सैंडर्स का समर्थन किया. रैली में उन्होंने कहा कि वे बर्नी को टायो बर्नी कहेंगी. टायो स्पेशिश शब्द है जिसका मतलब अंकल होता है. कार्टेज खुद को सोशलिस्ट डेमोक्रिटिक कहती हैं. तीस साल की कार्टेज हाऊस की प्रतिनिधि बनने वाले सबसे कम उम्र की सदस्य हैं. जबकि सैंडर्स एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे से कांग्रेस के सदस्य हैं. ओकासिओ कार्टेन ने कहा कि बर्नी के रुप में इस युग में हमारे पास सबसे अच्छा राष्ट्रपति का उम्मीदवार है. उन्होंने बर्नी के द्वारा पूरी ज़िंदगी में किए गए कार्यों के लिए धन्यवाद अदा किया. डेमोक्रेटिक प्रायमरी में कुल उन्नीस उम्मीदवार राष्ट्रपति पद की दौड़ में हैं. जिनमें से बारह ने मंगलवार को नेशनल डिबेट में हिस्सा लिया. सैंडर्स को पोल में इस रेस में जो बिडेन और एलिज़ाबेथ वारेन के बाद तीसरे नंबर पर बताया जा रहा है. जबकि क्राउड फंडिग और भीड़ जुटाने में बर्नी बाकी सभी से काफी आगे हैं. पोल में एलिज़ाबेथ के साथ संघर्ष कर रहे बर्नी इस कैंपेन के ज़रिए अपनी दावेदारी के आगे पहुंचने की उम्मीद कर रहे हैं. उन्हें यूनिवर्सल हेल्थकेयर स्कीम से भी फायदा मिलने की उम्मीद है. सैंडर्स अठहत्तर साल के हैं. उन्हें कार्पोरेट से राजनीतिक चंदे के सबसे बड़े विरोधी के रुप में जाना जाता है.
लॉफबोरो, छह मार्च (द कन्वर्सेशन) यूक्रेन में रूस की सैन्य कार्रवाई के खिलाफ प्रतिरोध तेज रहा है। यूक्रेन ही नहीं, दुनिया के अन्य देशों में भी हजारों लोग रूसी आक्रामता के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। यूक्रेन में 18 से 60 साल के पुरुषों को जबरन लामबंद किया जा रहा है। सैकड़ों गैर-यूक्रेनी स्वयंसेवकों से लैस एक 'अंतरराष्ट्रीय सेना' बनाई जा रही है। सैन्य साजो-सामान खरीदने में यूक्रेन की मदद करने के लिए दुनियाभर के लोग पैसे दान कर रहे हैं। पश्चिमी देश हथियार भेज रहे हैं। लेकिन क्या अहिंसक प्रतिरोध एक प्रभावी या बेहतर विकल्प हो सकता है? शांति और अहिंसा के पैरोकारों को अक्सर भोला, खतरनाक या देशद्रोही कायर बताकर, उनका मजाक उड़ाया जाता है। अकादमिक हलकों में भी शांतिवाद को बदनाम या खारिज किया जाता है। बावजूद इसके, शांतिवाद की एक लंबी परंपरा रही है और इसके पैरोकारों में लियो टॉल्स्टॉय के रूप में एक प्रसिद्ध रूसी भी शामिल है। चूंकि, उन्होंने 1880-1910 के आसपास हुई सभी हिंसक घटनाओं की कड़ी निंदा की, लिहाजा इस बात के प्रबल सबूत हैं कि अहिंसक प्रतिरोध हिंसक प्रतिरोध से अधिक प्रभावी है, यहां तक कि तानाशाही के खिलाफ भी। अहिंसक प्रतिरोध से लंबी अवधि में मानवाधिकारों के लिहाज से अधिक सम्मानजनक परिणाम भी सामने आते हैं। इस संबंध में और शोध किए जाने की जरूरत है, लेकिन हम यह जानते हैं कि अहिंसा नैतिकता का बड़े पैमाने पर रणनीतिक उपयोग करती है। जैसा कि टॉल्स्टॉय ने माना है कि इसका मतलब यह नहीं है कि हिंसा नहीं होगी, लेकिन अहिंसक प्रदर्शनकारियों के हिंसा भड़काने के बजाय उसका शिकार होने का खतरा ज्यादा रहता है। महात्मा गांधी के अनुयायी भी इसी सिद्धांत पर अमल करते थे। वे जानते थे कि अहिंसक प्रदर्शनकारियों का हिंसक दमन दुनिया का ध्यान खींचेगा। यह एक शक्तिशाली रणनीति है और साथ ही साथ खतरनाक भी, क्योंकि इसमें दुश्मन के हथियारों का सामना करने का जोखिम ज्यादा होता है और यह शायद काम भी न करे, लेकिन इससे नैतिक संतुलन और यहां तक कि शक्ति संतुलन को बदलने में मदद मिल सकती है। अहिंसक प्रतिरोध विरोधियों को इंसानों के रूप में देखता है और उन्हें तथा उनके समर्थकों को यह सोचने पर मजबूर कर सकता है कि वे क्या कर रहे हैं और उनकी निष्ठा किसके साथ है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि हिंसा हमेशा काम करती है या नहीं। हम अक्सर मानते हैं कि यह कारगर है, लेकिन किसी भी कदम का प्रभाव विरोधी की प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है, जो इसे या तो सह लेता है या फिर विरोध जताता है। इस बीच हिंसा का ध्रुवीकरण हो जाता है। यह प्रतिबद्धताओं को और मजबूत बनाता है। यही नहीं, हिंसा लोगों की जान लेती है, उनके परिजनों, दोस्तों, रिश्तेदारों को दुख देती है, जो जवाब में बदला लेने की कोशिश कर सकते हैं। यूक्रेन में जारी रूस की सैन्य कार्रवाई के मामले में कई लोग तर्क देंगे कि हिंसक प्रतिरोध 'सिर्फ युद्ध के सिद्धांत' के कड़े मानदंडों को पूरा करता है। यह साम्राज्यवादी आक्रमण के खिलाफ जंग है, जो आंशिक रूप से मानसिक उन्माद, भू-राजनीतिक नुकसान और 1990 के दशक की क्रूर पूंजीवादी 'शॉक थेरेपी' के प्रतिशोध से प्रेरित है। यूक्रेनी नागरिकों ने वलोदिमीर जेलेंस्की को अपना राष्ट्रपति चुना। वे यूरोपीय संघ और पश्चिम के साथ घनिष्ठ संबंधों के पक्षधर हैं। नाटो के विस्तार से रूस को खतरा महसूस हो सकता है, लेकिन जो देश इसमें शामिल हुए, उन्होंने ऐसा इसलिए किया, क्योंकि वे रूस से चिंतित थे। यह आक्रमण उनकी चिंता की पुष्टि करता है। ऐसे में लड़ाई का आह्वान समझ में आता है। लेकिन अहिंसक प्रतिरोध के तरीके और भी हैं। कुछ यूक्रेनी नागरिकों ने रूसी टैंकों का रास्ता बाधित किया है। उन्होंने सैनिकों का सामना अपशब्दों, मंत्रोच्चारण और नारेबाजी से किया है। यूक्रेनी सड़क कंपनी ने हमलावर सैनिकों को भ्रमित करने के लिए लोगों को सड़क पर लगे संकेतक हटाने के लिए प्रोत्साहित किया है।
लॉफबोरो, छह मार्च यूक्रेन में रूस की सैन्य कार्रवाई के खिलाफ प्रतिरोध तेज रहा है। यूक्रेन ही नहीं, दुनिया के अन्य देशों में भी हजारों लोग रूसी आक्रामता के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। यूक्रेन में अट्ठारह से साठ साल के पुरुषों को जबरन लामबंद किया जा रहा है। सैकड़ों गैर-यूक्रेनी स्वयंसेवकों से लैस एक 'अंतरराष्ट्रीय सेना' बनाई जा रही है। सैन्य साजो-सामान खरीदने में यूक्रेन की मदद करने के लिए दुनियाभर के लोग पैसे दान कर रहे हैं। पश्चिमी देश हथियार भेज रहे हैं। लेकिन क्या अहिंसक प्रतिरोध एक प्रभावी या बेहतर विकल्प हो सकता है? शांति और अहिंसा के पैरोकारों को अक्सर भोला, खतरनाक या देशद्रोही कायर बताकर, उनका मजाक उड़ाया जाता है। अकादमिक हलकों में भी शांतिवाद को बदनाम या खारिज किया जाता है। बावजूद इसके, शांतिवाद की एक लंबी परंपरा रही है और इसके पैरोकारों में लियो टॉल्स्टॉय के रूप में एक प्रसिद्ध रूसी भी शामिल है। चूंकि, उन्होंने एक हज़ार आठ सौ अस्सी-एक हज़ार नौ सौ दस के आसपास हुई सभी हिंसक घटनाओं की कड़ी निंदा की, लिहाजा इस बात के प्रबल सबूत हैं कि अहिंसक प्रतिरोध हिंसक प्रतिरोध से अधिक प्रभावी है, यहां तक कि तानाशाही के खिलाफ भी। अहिंसक प्रतिरोध से लंबी अवधि में मानवाधिकारों के लिहाज से अधिक सम्मानजनक परिणाम भी सामने आते हैं। इस संबंध में और शोध किए जाने की जरूरत है, लेकिन हम यह जानते हैं कि अहिंसा नैतिकता का बड़े पैमाने पर रणनीतिक उपयोग करती है। जैसा कि टॉल्स्टॉय ने माना है कि इसका मतलब यह नहीं है कि हिंसा नहीं होगी, लेकिन अहिंसक प्रदर्शनकारियों के हिंसा भड़काने के बजाय उसका शिकार होने का खतरा ज्यादा रहता है। महात्मा गांधी के अनुयायी भी इसी सिद्धांत पर अमल करते थे। वे जानते थे कि अहिंसक प्रदर्शनकारियों का हिंसक दमन दुनिया का ध्यान खींचेगा। यह एक शक्तिशाली रणनीति है और साथ ही साथ खतरनाक भी, क्योंकि इसमें दुश्मन के हथियारों का सामना करने का जोखिम ज्यादा होता है और यह शायद काम भी न करे, लेकिन इससे नैतिक संतुलन और यहां तक कि शक्ति संतुलन को बदलने में मदद मिल सकती है। अहिंसक प्रतिरोध विरोधियों को इंसानों के रूप में देखता है और उन्हें तथा उनके समर्थकों को यह सोचने पर मजबूर कर सकता है कि वे क्या कर रहे हैं और उनकी निष्ठा किसके साथ है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि हिंसा हमेशा काम करती है या नहीं। हम अक्सर मानते हैं कि यह कारगर है, लेकिन किसी भी कदम का प्रभाव विरोधी की प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है, जो इसे या तो सह लेता है या फिर विरोध जताता है। इस बीच हिंसा का ध्रुवीकरण हो जाता है। यह प्रतिबद्धताओं को और मजबूत बनाता है। यही नहीं, हिंसा लोगों की जान लेती है, उनके परिजनों, दोस्तों, रिश्तेदारों को दुख देती है, जो जवाब में बदला लेने की कोशिश कर सकते हैं। यूक्रेन में जारी रूस की सैन्य कार्रवाई के मामले में कई लोग तर्क देंगे कि हिंसक प्रतिरोध 'सिर्फ युद्ध के सिद्धांत' के कड़े मानदंडों को पूरा करता है। यह साम्राज्यवादी आक्रमण के खिलाफ जंग है, जो आंशिक रूप से मानसिक उन्माद, भू-राजनीतिक नुकसान और एक हज़ार नौ सौ नब्बे के दशक की क्रूर पूंजीवादी 'शॉक थेरेपी' के प्रतिशोध से प्रेरित है। यूक्रेनी नागरिकों ने वलोदिमीर जेलेंस्की को अपना राष्ट्रपति चुना। वे यूरोपीय संघ और पश्चिम के साथ घनिष्ठ संबंधों के पक्षधर हैं। नाटो के विस्तार से रूस को खतरा महसूस हो सकता है, लेकिन जो देश इसमें शामिल हुए, उन्होंने ऐसा इसलिए किया, क्योंकि वे रूस से चिंतित थे। यह आक्रमण उनकी चिंता की पुष्टि करता है। ऐसे में लड़ाई का आह्वान समझ में आता है। लेकिन अहिंसक प्रतिरोध के तरीके और भी हैं। कुछ यूक्रेनी नागरिकों ने रूसी टैंकों का रास्ता बाधित किया है। उन्होंने सैनिकों का सामना अपशब्दों, मंत्रोच्चारण और नारेबाजी से किया है। यूक्रेनी सड़क कंपनी ने हमलावर सैनिकों को भ्रमित करने के लिए लोगों को सड़क पर लगे संकेतक हटाने के लिए प्रोत्साहित किया है।
मेष राशि के जातको का मन अशान्त रहेगा. पारिवारिक समस्याएं परेशान कर सकती हैं. रहन-सहन अव्यवस्थित हो सकता है. शैक्षिक कार्यों के सुखद परिणाम मिलेंगे. मन अशान्त रहेगा. कारोबार में विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है. भाई-बहनों का सहयोग मिलेगा. वृष राशि के जातक आत्मविश्वास से भरपूर रहेंगे. किसी मित्र का आगमन हो सकता है. रहन-सहन अव्यवस्थित रहेगा. धर्मकर्म में व्यस्तता हो सकती है. क्षणे रुष्टा-क्षणे तुष्टा के भाव रहेंगे. कार्यक्षेत्र की स्थिति में सुधार होगा. किसी मित्र के सहयोग से नौकरी के अवसर मिल सकते हैं. मिथुन राशि के जातक आत्मसंयत रहें. धैर्यशीलता बनाये रखने के प्रयास करें. जीवनसाथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखें. किसी मित्र के सहयोग से आय के साधन बन सकते हैं. वाणी में कठोरता का प्रभाव हो सकता है. बातचीत में सन्तुलित रहें. मानसिक कठिनाइयां परेशान करेंगी. खर्च अधिक रहेंगे. कर्क राशि के जातको मन में उतार-चढ़ाव रहेंगे. परिवार का साथ मिलेगा. माता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें. कारोबार में कठिनाई आ सकती है. वस्त्रों के प्रति रुझान बढ़ेगा. कुछ पुराने मित्रों से पुनःसम्पर्क बन सकते हैं. सुस्वाद खान-पान में रुचि रहेगी. सिंह राशि के जातक किसी पुराने मित्र से भेंट हो सकती है. भवन सुख में वृद्धि होगी. माता-पिता का सानिध्य एवं सहयोग मिलेगा. स्वास्थ्य का ध्यान रखें. आत्मविश्वास में कमी रहेगी. अनियोजित खर्चों में वृद्धि होगी. संचित धन में कमी आयेगी. जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा. कन्या राशि के जातक आत्मविश्वास से लवरेज रहेंगे. नौकरी में कार्यक्षेत्र में परिवर्तन की सम्भावना बन रही है. परिश्रम अधिक रहेगा. क्षणे रुष्टा-क्षणे तुष्टा के भाव रहेंगे. किसी पुराने मित्र का आगमन हो सकता है. मीठे खानपान के प्रति रुझान रहेगा. तुला राशि के जातको क्रोध के अतिरेक से बचें. घर-परिवार में धार्मिक कार्य हो सकते हैं. परिश्रम अधिक रहेगा. पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें. आत्मविश्वास में वृद्धि होगी, परन्तु शोध की अधिकता भी रहेगी. पिता को स्वास्थ्य विकार हो सकते हैं. वृश्चिक राशि के जातक मानसिक शान्ति रहेगी. वस्त्रों आदि के प्रति रुझान हो सकता है. नौकरी में कार्यक्षेत्र का विस्तार हो सकता है. सेहत का ध्यान रखें. माता से धन प्राप्ति के योग बन रहे हैं. संचित धन में वृद्धि होगी. धैर्यशीलता में कमी रहेगी. परिवार का सहयोग मिलेगा. धनु राशि के जातको अपनी भावनाओं को वश में रखें. क्रोध एवं आवेश के अतिरेक से बचें. वाहन के रखरखाव पर खर्च बढ़ सकते हैं. नौकरी में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है. घर-परिवार में मांगलिक कार्य होंगे. भवन के रखरखाव पर खर्च बढ़ेंगे. मकर राशि के जातको मन प्रसन्न रहेगा. शैक्षिक एवं शोधादि कार्यों में सफलता मिलेगी. परिवार में मान-सम्मान की प्राप्ति होगी. जीवनसाथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखें. मन में निराशा एवं असन्तोष के भाव रहेंगे. माता-पिता का सानिध्य मिल सकता है. भवन सुख में वृद्धि हो सकती है. कुंभ राशि के जातक मन परेशान हो सकता है. स्वास्थ्य का ध्यान रखें. नौकरी में अफसरों का सहयोग मिलेगा. वाहन सुख में वृद्धि हो सकती है. शैक्षिक कार्यों में सफलता मिलेगी. मित्रों के साथ यात्रा का कार्यक्रम बन सकता है. वाहन के रख-रखाव पर खर्च बढ़ेंगे. मीन राशि के जातक आत्मविश्वास में कमी रहेगी. धार्मिक संगीत में रुचि हो सकती है. किसी मित्र के सहयोग से नौकरी के अवसर मिल सकते हैं क्षणे रुष्टा-क्षणे तुष्टा के भाव रहेंगे. बातचीत में संयत रहें. अनियोजित खर्च बढ़ेंगें. रहन-सहन कष्टमय रहेगा.
मेष राशि के जातको का मन अशान्त रहेगा. पारिवारिक समस्याएं परेशान कर सकती हैं. रहन-सहन अव्यवस्थित हो सकता है. शैक्षिक कार्यों के सुखद परिणाम मिलेंगे. मन अशान्त रहेगा. कारोबार में विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है. भाई-बहनों का सहयोग मिलेगा. वृष राशि के जातक आत्मविश्वास से भरपूर रहेंगे. किसी मित्र का आगमन हो सकता है. रहन-सहन अव्यवस्थित रहेगा. धर्मकर्म में व्यस्तता हो सकती है. क्षणे रुष्टा-क्षणे तुष्टा के भाव रहेंगे. कार्यक्षेत्र की स्थिति में सुधार होगा. किसी मित्र के सहयोग से नौकरी के अवसर मिल सकते हैं. मिथुन राशि के जातक आत्मसंयत रहें. धैर्यशीलता बनाये रखने के प्रयास करें. जीवनसाथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखें. किसी मित्र के सहयोग से आय के साधन बन सकते हैं. वाणी में कठोरता का प्रभाव हो सकता है. बातचीत में सन्तुलित रहें. मानसिक कठिनाइयां परेशान करेंगी. खर्च अधिक रहेंगे. कर्क राशि के जातको मन में उतार-चढ़ाव रहेंगे. परिवार का साथ मिलेगा. माता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें. कारोबार में कठिनाई आ सकती है. वस्त्रों के प्रति रुझान बढ़ेगा. कुछ पुराने मित्रों से पुनःसम्पर्क बन सकते हैं. सुस्वाद खान-पान में रुचि रहेगी. सिंह राशि के जातक किसी पुराने मित्र से भेंट हो सकती है. भवन सुख में वृद्धि होगी. माता-पिता का सानिध्य एवं सहयोग मिलेगा. स्वास्थ्य का ध्यान रखें. आत्मविश्वास में कमी रहेगी. अनियोजित खर्चों में वृद्धि होगी. संचित धन में कमी आयेगी. जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा. कन्या राशि के जातक आत्मविश्वास से लवरेज रहेंगे. नौकरी में कार्यक्षेत्र में परिवर्तन की सम्भावना बन रही है. परिश्रम अधिक रहेगा. क्षणे रुष्टा-क्षणे तुष्टा के भाव रहेंगे. किसी पुराने मित्र का आगमन हो सकता है. मीठे खानपान के प्रति रुझान रहेगा. तुला राशि के जातको क्रोध के अतिरेक से बचें. घर-परिवार में धार्मिक कार्य हो सकते हैं. परिश्रम अधिक रहेगा. पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें. आत्मविश्वास में वृद्धि होगी, परन्तु शोध की अधिकता भी रहेगी. पिता को स्वास्थ्य विकार हो सकते हैं. वृश्चिक राशि के जातक मानसिक शान्ति रहेगी. वस्त्रों आदि के प्रति रुझान हो सकता है. नौकरी में कार्यक्षेत्र का विस्तार हो सकता है. सेहत का ध्यान रखें. माता से धन प्राप्ति के योग बन रहे हैं. संचित धन में वृद्धि होगी. धैर्यशीलता में कमी रहेगी. परिवार का सहयोग मिलेगा. धनु राशि के जातको अपनी भावनाओं को वश में रखें. क्रोध एवं आवेश के अतिरेक से बचें. वाहन के रखरखाव पर खर्च बढ़ सकते हैं. नौकरी में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है. घर-परिवार में मांगलिक कार्य होंगे. भवन के रखरखाव पर खर्च बढ़ेंगे. मकर राशि के जातको मन प्रसन्न रहेगा. शैक्षिक एवं शोधादि कार्यों में सफलता मिलेगी. परिवार में मान-सम्मान की प्राप्ति होगी. जीवनसाथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखें. मन में निराशा एवं असन्तोष के भाव रहेंगे. माता-पिता का सानिध्य मिल सकता है. भवन सुख में वृद्धि हो सकती है. कुंभ राशि के जातक मन परेशान हो सकता है. स्वास्थ्य का ध्यान रखें. नौकरी में अफसरों का सहयोग मिलेगा. वाहन सुख में वृद्धि हो सकती है. शैक्षिक कार्यों में सफलता मिलेगी. मित्रों के साथ यात्रा का कार्यक्रम बन सकता है. वाहन के रख-रखाव पर खर्च बढ़ेंगे. मीन राशि के जातक आत्मविश्वास में कमी रहेगी. धार्मिक संगीत में रुचि हो सकती है. किसी मित्र के सहयोग से नौकरी के अवसर मिल सकते हैं क्षणे रुष्टा-क्षणे तुष्टा के भाव रहेंगे. बातचीत में संयत रहें. अनियोजित खर्च बढ़ेंगें. रहन-सहन कष्टमय रहेगा.
नई दिल्ली। शेयर बाजार में दोपहर के कारोबार में शानदार रिकवरी की मदद से प्रमुख इंडेक्स आज लगातार तीसरे दिन बढ़त के साथ बंद हुए हैं। बुधवार के कारोबार में सेंसेक्स 355 अंक की बढ़त के साथ 40116 पर और निफ्टी 95 अंक की बढ़त के साथ 11908 के स्तर पर बंद हुआ है। आज के कारोबार में फार्मा सेक्टर में सबसे ज्यादा बढ़त देखने को मिली है। फिलहाल बाजार की नजर अमेरिका के चुनावों पर लगी हुई है। निवेशकों के लिए सबसे अहम ये है कि नतीजे जल्द से जल्द साफ हों क्योंकि नतीजों में देरी का मतलब है कि राहत पैकेज में और देरी होना। फिलहाल संकेत हैं कि जीत हार का फैसला जल्द सामने आ सकता है इससे निवेशकों की बीच सेंटीमेंट्स बेहतर हो रहे हैं। इसके साथ बाजार में बढ़त की एक और वजह रिलायंस इंडस्ट्रीज सहित दिग्गज शेयरों में आई खरीदारी रही है। आज के कारोबार में रिलायंस इंडस्ट्रीज में 3. 46 फीसदी की बढ़त दर्ज हुई है। मार्केट कैप के हिसाब से देश की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर का प्रमुख इंडेक्स के प्रदर्शन पर सबसे ज्यादा असर होता है। इसके साथ ही इंफोसिस 3 फीसदी, टीसीएस 0. 78 फीसदी एचडीएफसी बैंक 0. 75 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ है। आज के कारोबार में सबसे ज्यादा बढ़त फार्मा सेक्टर में देखने को मिली है, इंडेक्स 2. 18 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ है। वहीं आईटी सेक्टर में 1. 78 फीसदी की बढ़त दर्ज हुई है। ऑटो सेक्टर इंडेक्स 0. 67 फीसदी और बैंकिंग सेक्टर इंडेक्स 0. 35 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ है। दूसरी तरफ मेटल सेक्टर में 0. 31 फीसदी और फाइनेंशियल सर्विस सेक्टर में 0. 08 फीसदी की गिरावट रही है। निफ्टी में शामिल 33 स्टॉक बढ़त के साथ बंद हुए हैं। सबसे ज्यादा 4. 89 फीसदी की बढ़त इंडसइंड बैंक में दर्ज हुई है। वहीं यूपीएल 3. 9 फीसदी की गिरावट के साथ सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाला शेयर रहा।
नई दिल्ली। शेयर बाजार में दोपहर के कारोबार में शानदार रिकवरी की मदद से प्रमुख इंडेक्स आज लगातार तीसरे दिन बढ़त के साथ बंद हुए हैं। बुधवार के कारोबार में सेंसेक्स तीन सौ पचपन अंक की बढ़त के साथ चालीस हज़ार एक सौ सोलह पर और निफ्टी पचानवे अंक की बढ़त के साथ ग्यारह हज़ार नौ सौ आठ के स्तर पर बंद हुआ है। आज के कारोबार में फार्मा सेक्टर में सबसे ज्यादा बढ़त देखने को मिली है। फिलहाल बाजार की नजर अमेरिका के चुनावों पर लगी हुई है। निवेशकों के लिए सबसे अहम ये है कि नतीजे जल्द से जल्द साफ हों क्योंकि नतीजों में देरी का मतलब है कि राहत पैकेज में और देरी होना। फिलहाल संकेत हैं कि जीत हार का फैसला जल्द सामने आ सकता है इससे निवेशकों की बीच सेंटीमेंट्स बेहतर हो रहे हैं। इसके साथ बाजार में बढ़त की एक और वजह रिलायंस इंडस्ट्रीज सहित दिग्गज शेयरों में आई खरीदारी रही है। आज के कारोबार में रिलायंस इंडस्ट्रीज में तीन. छियालीस फीसदी की बढ़त दर्ज हुई है। मार्केट कैप के हिसाब से देश की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर का प्रमुख इंडेक्स के प्रदर्शन पर सबसे ज्यादा असर होता है। इसके साथ ही इंफोसिस तीन फीसदी, टीसीएस शून्य. अठहत्तर फीसदी एचडीएफसी बैंक शून्य. पचहत्तर फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ है। आज के कारोबार में सबसे ज्यादा बढ़त फार्मा सेक्टर में देखने को मिली है, इंडेक्स दो. अट्ठारह फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ है। वहीं आईटी सेक्टर में एक. अठहत्तर फीसदी की बढ़त दर्ज हुई है। ऑटो सेक्टर इंडेक्स शून्य. सरसठ फीसदी और बैंकिंग सेक्टर इंडेक्स शून्य. पैंतीस फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ है। दूसरी तरफ मेटल सेक्टर में शून्य. इकतीस फीसदी और फाइनेंशियल सर्विस सेक्टर में शून्य. आठ फीसदी की गिरावट रही है। निफ्टी में शामिल तैंतीस स्टॉक बढ़त के साथ बंद हुए हैं। सबसे ज्यादा चार. नवासी फीसदी की बढ़त इंडसइंड बैंक में दर्ज हुई है। वहीं यूपीएल तीन. नौ फीसदी की गिरावट के साथ सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाला शेयर रहा।
Bihar: बिहार के छपरा में RJD नेता और पूर्व युवा प्रदेश उपाध्यक्ष Sunil Rai का सुबह 4 बजे अपहरण हो गया। बिहार के छपरा से RJD नेता के अपहरण की खबर सामने आ रही है। यहां RJD नेता और पूर्व युवा प्रदेश उपाध्यक्ष Sunil Rai का आज मंगलवार सुबह 4 बजे अपहरण हो गया। जानकारी के अनुसार, स्कॉर्पियो में सवार नकाबपोश हथियारबंद आरोपियों ने Kidnapping की वारदात को अंजाम दिया है। RJD नेता सुनील राय का साढ़ा स्थित उनके आवास से अपराधियों ने उनका अपहरण किया है। सुनील कुमार राय पहले आरजेडी से बगावत कर निर्दलीय चुनाव भी लड़ चुके हैं। अपहरण की घटना सीसीटीवी में कैद हो गई है। जानकारी के अनुसार, ये वारदात मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बाजार समिति के पास हुई है। आज सुबह 4 बजे करीब सफेद स्कॉर्पियो में अज्ञात बदमाशों ने राजद नेता सुनील राय का अपहरण कर लिया। बदमाशों ने सुनील राय के ऑफिस के पास से उनका अपहरण किया है। इस वारदात की जानकारी जैसे ही लोगों के पास तक पहुंची तो आसपास में हड़कंप मच गया। इस घटना की जानकारी पाते ही मौके पर स्थानीय पुलिस पहुंच गई। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। RJD नेता सुनील राय के पिता रामविलास ने इस मामले की जानकारी देते हुए बताया कि आज सुबह किसी ने उनके बेटे को फोन करके घर से बाहर बुलाया। उन्होंने बताया सुनील घर के पास में ही स्थित अपने कार्यालय के पास पहुंचे ही थे कि उसी समय सफेद स्कॉर्पियो से आए बदमाशों ने उन्हें जबरन खींचकर अपनी अंदर बैठा लिया और फिर फरार हो गए। उन्होंने कहा कि जिन्होंने फोन किया था वह सुनील के जानने वाले थे, तभी वह उन लोगों से मिलने घर से बाहर आया था। इसके साथ ही सुनील राय के पिता ने किसी भी तरह के पुराने विवाद की घटना से इनकार भी कर दिया है। वहीं, इस अपहरण की वारदात उनके कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। पुलिस ने भी इस मामले में मुकदमा दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। पुलिस सीसीटीवी में कैद आरोपियों की पहचान करने की कोशिश कर रही है।
Bihar: बिहार के छपरा में RJD नेता और पूर्व युवा प्रदेश उपाध्यक्ष Sunil Rai का सुबह चार बजे अपहरण हो गया। बिहार के छपरा से RJD नेता के अपहरण की खबर सामने आ रही है। यहां RJD नेता और पूर्व युवा प्रदेश उपाध्यक्ष Sunil Rai का आज मंगलवार सुबह चार बजे अपहरण हो गया। जानकारी के अनुसार, स्कॉर्पियो में सवार नकाबपोश हथियारबंद आरोपियों ने Kidnapping की वारदात को अंजाम दिया है। RJD नेता सुनील राय का साढ़ा स्थित उनके आवास से अपराधियों ने उनका अपहरण किया है। सुनील कुमार राय पहले आरजेडी से बगावत कर निर्दलीय चुनाव भी लड़ चुके हैं। अपहरण की घटना सीसीटीवी में कैद हो गई है। जानकारी के अनुसार, ये वारदात मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बाजार समिति के पास हुई है। आज सुबह चार बजे करीब सफेद स्कॉर्पियो में अज्ञात बदमाशों ने राजद नेता सुनील राय का अपहरण कर लिया। बदमाशों ने सुनील राय के ऑफिस के पास से उनका अपहरण किया है। इस वारदात की जानकारी जैसे ही लोगों के पास तक पहुंची तो आसपास में हड़कंप मच गया। इस घटना की जानकारी पाते ही मौके पर स्थानीय पुलिस पहुंच गई। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। RJD नेता सुनील राय के पिता रामविलास ने इस मामले की जानकारी देते हुए बताया कि आज सुबह किसी ने उनके बेटे को फोन करके घर से बाहर बुलाया। उन्होंने बताया सुनील घर के पास में ही स्थित अपने कार्यालय के पास पहुंचे ही थे कि उसी समय सफेद स्कॉर्पियो से आए बदमाशों ने उन्हें जबरन खींचकर अपनी अंदर बैठा लिया और फिर फरार हो गए। उन्होंने कहा कि जिन्होंने फोन किया था वह सुनील के जानने वाले थे, तभी वह उन लोगों से मिलने घर से बाहर आया था। इसके साथ ही सुनील राय के पिता ने किसी भी तरह के पुराने विवाद की घटना से इनकार भी कर दिया है। वहीं, इस अपहरण की वारदात उनके कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। पुलिस ने भी इस मामले में मुकदमा दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। पुलिस सीसीटीवी में कैद आरोपियों की पहचान करने की कोशिश कर रही है।
चित्र लेना था । इंग्लैंड के 'लन्दन टाइम्ज' और अमरीकी 'लाइफ' व 'टाइम' पत्रिकाओं ने प्रत्येक चित्र के लिए २००० पौंड •तक मूल्य दिया । सिनेमा निर्माताओं ने भी चित्र खरीदे । इस वायुयान ने एवरेस्ट पर दो बार उड़ान की। पहली बार शनिवारं, छः जून, सन् १९५३ को प्रातःकाल बिहार के हवाई अड्डे से उड़कर उत्तर की ओर बढ़ा । एक घंटे तक उड़ने के पश्चात - यह विमान दक्षिण दिशा से हिमालय की ओर बढ़ा । " विमान कैमरामैन अपना अनुभव बताते हुए लिखते हैं "मैदानी इलाका पीछे छूट गया और नीचे पहाड़ियां दिखाई देने लगीं। बीस मिनट तक हम सर्वोच्च शिखर की खोज में उस हिमाच्छादित पर्वतीय क्षेत्र पर मंडराने लगे । उड़ते-उड़ते हम समुद्रतल से ३२००० फुट से भी ऊपर जा पहुँचे अर्थात् एवरेस्ट शिखर से भी तीन हजार फुट ऊपर । इतनी ऊँचाई से नेपाली सीमा पर उड़ते हुए हमने एवरेस्ट को देखा और उसकी ओर बढ़ने लगे। बादलों का नाम-निशान न था और स्वच्छ आकाश में मीलों तक बर्फीली चोटियां दिखाई दे रही थीं। उन्हीं में सबसे ऊँची और हिममुकुटों से सजी एवरेस्ट की चोटी चांदी के चमकीले पहाड़ की तरह उभरी हुई दिखाई दे रही थी । उड़ने के लगभग ६० मिनट बाद हमारा विमान एवरेस्ट के समीप पहुँच गया। मौसम बहुत अच्छा था और १०० मील दूर की वस्तु भी स्पष्ट दिखाई दे रही थी। बादल एवरेस्ट शिखर से बहुत नीचे थे और
चित्र लेना था । इंग्लैंड के 'लन्दन टाइम्ज' और अमरीकी 'लाइफ' व 'टाइम' पत्रिकाओं ने प्रत्येक चित्र के लिए दो हज़ार पौंड •तक मूल्य दिया । सिनेमा निर्माताओं ने भी चित्र खरीदे । इस वायुयान ने एवरेस्ट पर दो बार उड़ान की। पहली बार शनिवारं, छः जून, सन् एक हज़ार नौ सौ तिरेपन को प्रातःकाल बिहार के हवाई अड्डे से उड़कर उत्तर की ओर बढ़ा । एक घंटे तक उड़ने के पश्चात - यह विमान दक्षिण दिशा से हिमालय की ओर बढ़ा । " विमान कैमरामैन अपना अनुभव बताते हुए लिखते हैं "मैदानी इलाका पीछे छूट गया और नीचे पहाड़ियां दिखाई देने लगीं। बीस मिनट तक हम सर्वोच्च शिखर की खोज में उस हिमाच्छादित पर्वतीय क्षेत्र पर मंडराने लगे । उड़ते-उड़ते हम समुद्रतल से बत्तीस हज़ार फुट से भी ऊपर जा पहुँचे अर्थात् एवरेस्ट शिखर से भी तीन हजार फुट ऊपर । इतनी ऊँचाई से नेपाली सीमा पर उड़ते हुए हमने एवरेस्ट को देखा और उसकी ओर बढ़ने लगे। बादलों का नाम-निशान न था और स्वच्छ आकाश में मीलों तक बर्फीली चोटियां दिखाई दे रही थीं। उन्हीं में सबसे ऊँची और हिममुकुटों से सजी एवरेस्ट की चोटी चांदी के चमकीले पहाड़ की तरह उभरी हुई दिखाई दे रही थी । उड़ने के लगभग साठ मिनट बाद हमारा विमान एवरेस्ट के समीप पहुँच गया। मौसम बहुत अच्छा था और एक सौ मील दूर की वस्तु भी स्पष्ट दिखाई दे रही थी। बादल एवरेस्ट शिखर से बहुत नीचे थे और
मां के शब्द में जबरदस्त शक्ति होती है, और यह कारण नहीं है कि सबसे भयानक माता-पिता का अभिशाप है, और शक्तिशाली आशीर्वाद है। बहुत से बेटे के लिए प्रार्थना कर सकती है जो अपने बच्चे को बुरे फैसलों और बीमारियों से बचाने में मदद करती है, और वह उसे सही रास्ते पर भी निर्देशित करती है। पादरी लोग आश्वस्त करते हैं कि सबसे शक्तिशाली माता की प्रार्थनाएं हैं , क्योंकि उनमें एक वास्तविक चमत्कार बनाने में सक्षम असीमित और अनावश्यक प्रेम होता है। प्रार्थना ग्रंथों की एक बड़ी संख्या है जो विभिन्न परिस्थितियों में मदद करती है। अपने बेटे के लिए मां की एक मजबूत प्रार्थना को कई नियमों के अनुसार उच्चारण किया जाना चाहिएः - मुख्य प्रार्थना बच्चे की आत्मा के बारे में होनी चाहिए, ताकि वह जीवन में सही सड़क चुन सके और पूर्णता के लिए प्रयास करे। शुद्ध हृदय से ईमानदार अपील ब्रह्मांड की सुरक्षात्मक शक्तियों को सक्रिय करती है, जो बच्चे के चारों ओर एक अदृश्य ढाल बनाती है, और वह उसे विभिन्न नकारात्मक से बचाएगा। विचारों और ईमानदारी की इस शुद्धता के लिए बहुत महत्व है। - माता-पिता की प्रार्थना को तैयार किए गए पाठ द्वारा दर्शाया जा सकता है, लेकिन आप अपने स्वयं के शब्दों में उच्च शक्तियों का उल्लेख कर सकते हैं। - बेटे के लिए प्रार्थना शांत वातावरण में उच्चारण की जानी चाहिए, ताकि कुछ भी परेशान न हो। इसके दौरान विचार शुद्ध और विनम्र होना चाहिए। - दिल से प्रार्थना पाठ सीखना बेहतर होता है, लेकिन आप इसे कागज की चादर से पढ़ सकते हैं, लेकिन फिर इसे बिना किसी हिचकिचाहट के उच्चारण किया जाना चाहिए, शब्दों को न बदलें और शब्दों को न बदलें। - आप मंदिर और घर दोनों में प्रार्थनाएं पढ़ सकते हैं, मुख्य बात यह है कि आपकी आंखों के सामने एक आइकन होना चाहिए। आपको तब तक प्रार्थना करने की ज़रूरत है जब तक दिल शांत न हो और स्थिति में सुधार न हो। - सहायता प्राप्त करने की मुख्य स्थिति भगवान और संतों की शक्ति में एक अविश्वसनीय विश्वास है। एक समय जब बच्चा बीमार होता है, माता-पिता को उनकी जगह नहीं मिलती है, क्योंकि इस समय एकमात्र चीज वे कर सकते हैं, आवश्यक देखभाल प्रदान करने के अलावा, नियमित प्रार्थना होती है। पैंटेलिमॉन हेलर से मदद लेना सबसे अच्छा है, जिन्होंने अपने जीवनकाल के दौरान सभी ज़रूरतमंद लोगों को ठीक किया। संतों की शक्ति को देखते हुए बड़ी संख्या में विश्वासियों की संख्या है। - बेटे के स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना संत की छवि से पहले उच्चारण की जानी चाहिए, जिसे रोगी के बिस्तर के पास रखा जाना चाहिए। - आप पवित्र पानी के लिए पाठ पढ़ सकते हैं और इसे बच्चे को दे सकते हैं या इसे बच्चे के साथ छिड़क सकते हैं। कई माता-पिता, जब वे सीखते हैं कि उनका बच्चा ड्रग्स का उपयोग कर रहा है, तो नहीं पता कि क्या करना है और छोड़ देना है। यह एक गलत निर्णय है, क्योंकि केवल करीबी लोग आश्रित को धार्मिक मार्ग पर लौटने में मदद कर सकते हैं। दैनिक प्रार्थना, ताकि पुत्र नशीली दवाओं का उपयोग न करे, आपको अपने जीवन के बारे में सोचने में मदद करता है, विश्वास खोने में मदद नहीं करता है और निर्भरता से निपटने के लिए ताकत पाता है। बच्चे को यह दिखाने के लिए महत्वपूर्ण है कि वह इस स्थिति में अकेला नहीं है और अपने परिवार पर भरोसा कर सकता है। आइकन "अविश्वसनीय चालीस" भगवान की मां की सबसे प्रसिद्ध छवियों में से एक है। इससे पहले कि लोग खुद से छुटकारा पाने के लिए प्रार्थना करें या दूसरों को अल्कोहल निर्भरता से निपटने में मदद करें। बेटे की शराबीपन से प्रार्थना "अविश्वसनीय कप" न केवल दुष्ट बीमारी से निपटने में मदद करती है, बल्कि आध्यात्मिक दुनिया को भी धार्मिक मार्ग पर निर्देशित करती है। इसका उपयोग न केवल उस परिस्थिति में किया जा सकता है जहां कोई व्यक्ति किसी समस्या को पहचानता है, लेकिन अगर वह मानता है कि सब कुछ सामान्य है और वह अल्कोहल पर निर्भर नहीं है। प्रार्थना है कि बेटा शराब नहीं पीता है हर दिन उपचार के लिए उच्चारण किया जाना चाहिए। पारंपरिक रूप से, विवाह से पहले, माता-पिता अपना आशीर्वाद देते हैं। इस अनुष्ठान के दौरान पुत्र के लिए आइकन "उद्धारकर्ता सर्वशक्तिमान" का उपयोग करें। यह ध्यान देने योग्य है कि नवविवाहितों को इस छवि को पहले अपने घर में पेश करना चाहिए। माता-पिता अपने शब्दों में अलग-अलग शब्दों को बोल सकते हैं, लेकिन अक्सर उनके बेटे के लिए एक मजबूत प्रार्थना का उपयोग किया जाता है। इसकी शक्ति का उद्देश्य विवाह को मजबूत करना और खुशी का सौदा करना है। बच्चे का आशीर्वाद भगवान भगवान के सामने मध्यस्थता प्राप्त करने में मदद करता है। छात्रों के लिए, चाहे किसी स्कूल या संस्थान में, परीक्षण ज्ञान की अवधि तनाव और भावनाओं के साथ होती है। अक्सर, मजबूत तनाव के कारण भी सामग्री अच्छी तरह से सीखा है, आप सब कुछ भूल सकते हैं। परीक्षा में बेटे के लिए मां की प्रार्थना अनुभवों का सामना करने और शुभकामनाओं को आकर्षित करने में मदद करती है। प्रस्तुत पाठ परीक्षाओं की पूर्व संध्या पर और उस समय के दौरान जब बच्चा शैक्षिक संस्थान में होगा। आप एक नए रूमाल पर तीन बार प्रार्थना पढ़ सकते हैं और बच्चे को एक ताकतवर के रूप में दे सकते हैं। विभिन्न भयानक सेना कहानियां मां को सेवा में अपने बेटों के बारे में चिंता करती हैं। बच्चे को संभावित समस्याओं से बचाने और अपनी सेना के जीवन को कम करने के लिए, कोई मदद के लिए उच्च शक्तियों में बदल सकता है। सेना में सेवा करने वाले बेटे के लिए प्रार्थना घर पर उच्चारण की जा सकती है, लेकिन ऐसी सिफारिशों का पालन करना बेहतर हैः - सबसे पहले, मंदिर की यात्रा करें, जहां आप अपने स्वास्थ्य और बेटे के लिए एक नोट जमा करते हैं। उसके बाद, यीशु मसीह की छवि, निकोलस पाइनर और मॉस्को के Matrona की छवि से पहले एक मोमबत्ती डालें। इसके दौरान उत्सुकता से बपतिस्मा लेना आवश्यक है। - घर जाकर, घर प्रार्थना के लिए तीन मोमबत्तियां खरीदें। कमरे में रहें और उन्हें पहले वर्णित तीन छवियों के सामने प्रकाश दें। - हम कई बार "हमारे पिता" और भजन 9 0 कहते हैं। उसके बाद, अपने आप को पार करें और अपने स्वस्थ और खुश बेटे की कल्पना करें। - बेटे के लिए ये प्रार्थनाएं एक के बाद कई बार पढ़ी जानी चाहिए। रूपांतरण के अंत में, क्रॉस का संकेत बनाएं और आपकी मदद के लिए भगवान का धन्यवाद करें। मोमबत्तियाँ मोमबत्ती, और अगली प्रार्थना के दौरान उनका उपयोग करें। प्राचीन काल से, मां, अपने बच्चों को सड़क पर भेजकर, उनके लिए ताबीज बनाते थे और नियमित रूप से अपने कल्याण के लिए प्रार्थना करते थे। ईमानदार उपचार बच्चे को विभिन्न समस्याओं और खतरों से बचाने में मदद करता है, और वे सभी मामलों के त्वरित समाधान और सफल वापसी घर में भी योगदान देते हैं। बेटे के कल्याण के लिए प्रार्थना सुबह में कम से कम एक बार घोषित की जानी चाहिए, लेकिन अगर वांछित है, तो आप इसे किसी अन्य समय दोहरा सकते हैं। माता-पिता अपने बच्चों की सभी असफलताओं का अनुभव करते हैं, उन्हें समर्थन और सहायता प्रदान करने के सभी तरीकों की तलाश करते हैं। अपने बेटे के लिए मां की रूढ़िवादी प्रार्थना उन स्थितियों के लिए उपयुक्त है जहां उन्हें अच्छी नौकरी नहीं मिल रही है। प्रस्तुत पाठ परिस्थितियों के सफल संयोग में योगदान देगा और अच्छी किस्मत को आकर्षित करने में मदद करेगा, जो सफलता की संभावनाओं को काफी बढ़ाता है। यह महत्वपूर्ण है कि वह व्यक्ति खुद को एक प्रस्ताव प्राप्त करने की प्रतीक्षा करने के बजाय सक्रिय रूप से काम की खोज में लगेगा, और फिर उच्च सेना निश्चित रूप से लक्ष्य की उपलब्धि में योगदान देगी। "पैसे और जेल से त्याग नहीं" की एक अभिव्यक्ति है और जब आप अच्छे लोग बार के पीछे थे तो आप बड़ी संख्या में उदाहरण पा सकते हैं। ऐसी परिस्थितियों में अपने बेटे की मदद करने के लिए, मां सेंट निकोलस से सहायता ले सकती हैं, जो ईमानदार अनुरोधों का उत्तर देते हैं। बेटे को मनाने के लिए प्रार्थना का उपयोग किया जा सकता है यदि वह दोषी है और उसे सजा मिलती है, और एक निर्दोष व्यक्ति को कैद किया गया है तो निर्णय और उचित न्याय की समीक्षा करने के लिए। अपने बेटे के बारे में निकोलस वंडरवर्कर के लिए प्रार्थना 40 दिनों के लिए दोहराई जानी चाहिए।
मां के शब्द में जबरदस्त शक्ति होती है, और यह कारण नहीं है कि सबसे भयानक माता-पिता का अभिशाप है, और शक्तिशाली आशीर्वाद है। बहुत से बेटे के लिए प्रार्थना कर सकती है जो अपने बच्चे को बुरे फैसलों और बीमारियों से बचाने में मदद करती है, और वह उसे सही रास्ते पर भी निर्देशित करती है। पादरी लोग आश्वस्त करते हैं कि सबसे शक्तिशाली माता की प्रार्थनाएं हैं , क्योंकि उनमें एक वास्तविक चमत्कार बनाने में सक्षम असीमित और अनावश्यक प्रेम होता है। प्रार्थना ग्रंथों की एक बड़ी संख्या है जो विभिन्न परिस्थितियों में मदद करती है। अपने बेटे के लिए मां की एक मजबूत प्रार्थना को कई नियमों के अनुसार उच्चारण किया जाना चाहिएः - मुख्य प्रार्थना बच्चे की आत्मा के बारे में होनी चाहिए, ताकि वह जीवन में सही सड़क चुन सके और पूर्णता के लिए प्रयास करे। शुद्ध हृदय से ईमानदार अपील ब्रह्मांड की सुरक्षात्मक शक्तियों को सक्रिय करती है, जो बच्चे के चारों ओर एक अदृश्य ढाल बनाती है, और वह उसे विभिन्न नकारात्मक से बचाएगा। विचारों और ईमानदारी की इस शुद्धता के लिए बहुत महत्व है। - माता-पिता की प्रार्थना को तैयार किए गए पाठ द्वारा दर्शाया जा सकता है, लेकिन आप अपने स्वयं के शब्दों में उच्च शक्तियों का उल्लेख कर सकते हैं। - बेटे के लिए प्रार्थना शांत वातावरण में उच्चारण की जानी चाहिए, ताकि कुछ भी परेशान न हो। इसके दौरान विचार शुद्ध और विनम्र होना चाहिए। - दिल से प्रार्थना पाठ सीखना बेहतर होता है, लेकिन आप इसे कागज की चादर से पढ़ सकते हैं, लेकिन फिर इसे बिना किसी हिचकिचाहट के उच्चारण किया जाना चाहिए, शब्दों को न बदलें और शब्दों को न बदलें। - आप मंदिर और घर दोनों में प्रार्थनाएं पढ़ सकते हैं, मुख्य बात यह है कि आपकी आंखों के सामने एक आइकन होना चाहिए। आपको तब तक प्रार्थना करने की ज़रूरत है जब तक दिल शांत न हो और स्थिति में सुधार न हो। - सहायता प्राप्त करने की मुख्य स्थिति भगवान और संतों की शक्ति में एक अविश्वसनीय विश्वास है। एक समय जब बच्चा बीमार होता है, माता-पिता को उनकी जगह नहीं मिलती है, क्योंकि इस समय एकमात्र चीज वे कर सकते हैं, आवश्यक देखभाल प्रदान करने के अलावा, नियमित प्रार्थना होती है। पैंटेलिमॉन हेलर से मदद लेना सबसे अच्छा है, जिन्होंने अपने जीवनकाल के दौरान सभी ज़रूरतमंद लोगों को ठीक किया। संतों की शक्ति को देखते हुए बड़ी संख्या में विश्वासियों की संख्या है। - बेटे के स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना संत की छवि से पहले उच्चारण की जानी चाहिए, जिसे रोगी के बिस्तर के पास रखा जाना चाहिए। - आप पवित्र पानी के लिए पाठ पढ़ सकते हैं और इसे बच्चे को दे सकते हैं या इसे बच्चे के साथ छिड़क सकते हैं। कई माता-पिता, जब वे सीखते हैं कि उनका बच्चा ड्रग्स का उपयोग कर रहा है, तो नहीं पता कि क्या करना है और छोड़ देना है। यह एक गलत निर्णय है, क्योंकि केवल करीबी लोग आश्रित को धार्मिक मार्ग पर लौटने में मदद कर सकते हैं। दैनिक प्रार्थना, ताकि पुत्र नशीली दवाओं का उपयोग न करे, आपको अपने जीवन के बारे में सोचने में मदद करता है, विश्वास खोने में मदद नहीं करता है और निर्भरता से निपटने के लिए ताकत पाता है। बच्चे को यह दिखाने के लिए महत्वपूर्ण है कि वह इस स्थिति में अकेला नहीं है और अपने परिवार पर भरोसा कर सकता है। आइकन "अविश्वसनीय चालीस" भगवान की मां की सबसे प्रसिद्ध छवियों में से एक है। इससे पहले कि लोग खुद से छुटकारा पाने के लिए प्रार्थना करें या दूसरों को अल्कोहल निर्भरता से निपटने में मदद करें। बेटे की शराबीपन से प्रार्थना "अविश्वसनीय कप" न केवल दुष्ट बीमारी से निपटने में मदद करती है, बल्कि आध्यात्मिक दुनिया को भी धार्मिक मार्ग पर निर्देशित करती है। इसका उपयोग न केवल उस परिस्थिति में किया जा सकता है जहां कोई व्यक्ति किसी समस्या को पहचानता है, लेकिन अगर वह मानता है कि सब कुछ सामान्य है और वह अल्कोहल पर निर्भर नहीं है। प्रार्थना है कि बेटा शराब नहीं पीता है हर दिन उपचार के लिए उच्चारण किया जाना चाहिए। पारंपरिक रूप से, विवाह से पहले, माता-पिता अपना आशीर्वाद देते हैं। इस अनुष्ठान के दौरान पुत्र के लिए आइकन "उद्धारकर्ता सर्वशक्तिमान" का उपयोग करें। यह ध्यान देने योग्य है कि नवविवाहितों को इस छवि को पहले अपने घर में पेश करना चाहिए। माता-पिता अपने शब्दों में अलग-अलग शब्दों को बोल सकते हैं, लेकिन अक्सर उनके बेटे के लिए एक मजबूत प्रार्थना का उपयोग किया जाता है। इसकी शक्ति का उद्देश्य विवाह को मजबूत करना और खुशी का सौदा करना है। बच्चे का आशीर्वाद भगवान भगवान के सामने मध्यस्थता प्राप्त करने में मदद करता है। छात्रों के लिए, चाहे किसी स्कूल या संस्थान में, परीक्षण ज्ञान की अवधि तनाव और भावनाओं के साथ होती है। अक्सर, मजबूत तनाव के कारण भी सामग्री अच्छी तरह से सीखा है, आप सब कुछ भूल सकते हैं। परीक्षा में बेटे के लिए मां की प्रार्थना अनुभवों का सामना करने और शुभकामनाओं को आकर्षित करने में मदद करती है। प्रस्तुत पाठ परीक्षाओं की पूर्व संध्या पर और उस समय के दौरान जब बच्चा शैक्षिक संस्थान में होगा। आप एक नए रूमाल पर तीन बार प्रार्थना पढ़ सकते हैं और बच्चे को एक ताकतवर के रूप में दे सकते हैं। विभिन्न भयानक सेना कहानियां मां को सेवा में अपने बेटों के बारे में चिंता करती हैं। बच्चे को संभावित समस्याओं से बचाने और अपनी सेना के जीवन को कम करने के लिए, कोई मदद के लिए उच्च शक्तियों में बदल सकता है। सेना में सेवा करने वाले बेटे के लिए प्रार्थना घर पर उच्चारण की जा सकती है, लेकिन ऐसी सिफारिशों का पालन करना बेहतर हैः - सबसे पहले, मंदिर की यात्रा करें, जहां आप अपने स्वास्थ्य और बेटे के लिए एक नोट जमा करते हैं। उसके बाद, यीशु मसीह की छवि, निकोलस पाइनर और मॉस्को के Matrona की छवि से पहले एक मोमबत्ती डालें। इसके दौरान उत्सुकता से बपतिस्मा लेना आवश्यक है। - घर जाकर, घर प्रार्थना के लिए तीन मोमबत्तियां खरीदें। कमरे में रहें और उन्हें पहले वर्णित तीन छवियों के सामने प्रकाश दें। - हम कई बार "हमारे पिता" और भजन नौ शून्य कहते हैं। उसके बाद, अपने आप को पार करें और अपने स्वस्थ और खुश बेटे की कल्पना करें। - बेटे के लिए ये प्रार्थनाएं एक के बाद कई बार पढ़ी जानी चाहिए। रूपांतरण के अंत में, क्रॉस का संकेत बनाएं और आपकी मदद के लिए भगवान का धन्यवाद करें। मोमबत्तियाँ मोमबत्ती, और अगली प्रार्थना के दौरान उनका उपयोग करें। प्राचीन काल से, मां, अपने बच्चों को सड़क पर भेजकर, उनके लिए ताबीज बनाते थे और नियमित रूप से अपने कल्याण के लिए प्रार्थना करते थे। ईमानदार उपचार बच्चे को विभिन्न समस्याओं और खतरों से बचाने में मदद करता है, और वे सभी मामलों के त्वरित समाधान और सफल वापसी घर में भी योगदान देते हैं। बेटे के कल्याण के लिए प्रार्थना सुबह में कम से कम एक बार घोषित की जानी चाहिए, लेकिन अगर वांछित है, तो आप इसे किसी अन्य समय दोहरा सकते हैं। माता-पिता अपने बच्चों की सभी असफलताओं का अनुभव करते हैं, उन्हें समर्थन और सहायता प्रदान करने के सभी तरीकों की तलाश करते हैं। अपने बेटे के लिए मां की रूढ़िवादी प्रार्थना उन स्थितियों के लिए उपयुक्त है जहां उन्हें अच्छी नौकरी नहीं मिल रही है। प्रस्तुत पाठ परिस्थितियों के सफल संयोग में योगदान देगा और अच्छी किस्मत को आकर्षित करने में मदद करेगा, जो सफलता की संभावनाओं को काफी बढ़ाता है। यह महत्वपूर्ण है कि वह व्यक्ति खुद को एक प्रस्ताव प्राप्त करने की प्रतीक्षा करने के बजाय सक्रिय रूप से काम की खोज में लगेगा, और फिर उच्च सेना निश्चित रूप से लक्ष्य की उपलब्धि में योगदान देगी। "पैसे और जेल से त्याग नहीं" की एक अभिव्यक्ति है और जब आप अच्छे लोग बार के पीछे थे तो आप बड़ी संख्या में उदाहरण पा सकते हैं। ऐसी परिस्थितियों में अपने बेटे की मदद करने के लिए, मां सेंट निकोलस से सहायता ले सकती हैं, जो ईमानदार अनुरोधों का उत्तर देते हैं। बेटे को मनाने के लिए प्रार्थना का उपयोग किया जा सकता है यदि वह दोषी है और उसे सजा मिलती है, और एक निर्दोष व्यक्ति को कैद किया गया है तो निर्णय और उचित न्याय की समीक्षा करने के लिए। अपने बेटे के बारे में निकोलस वंडरवर्कर के लिए प्रार्थना चालीस दिनों के लिए दोहराई जानी चाहिए।
नई दिल्ली : राजधानी दिल्ली में हथियारों की खेप ले जा रहे तस्करो को ग्रेटर नोएडा एसटीएफ ने गिरफ्तार किया है. बीती रात तीन तस्कर कार में हथियार रखकर नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस वे से दिल्ली जा रहे थे. इस बीच उन्हें एसटीएफ ने दबोच लिया. एसटीएफ ने तस्करो के पास से 18 हथियार बरामद किये है. एसटीएफ के एसपी अजय सहदेव ने जानकारी देते हुए बताया की मथुरा के मांट थाना क्षेत्र के गांव जहांगीरपुर निवासी जगदीश, नौझील का शफीक और अलीगढ़ टप्पल का रहने वाला तनवीर शनिवार की रात कार अपनी कार से दिल्ली जा रहे थे. गणतंत्र दिवस को देखते हुए एसटीएफ हाई अलर्ट पर है. नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस वे पर ओमेक्स मॉल के समीप कार को रोका गया. जब कार को चेक किया गया थो मालूम पड़ा की कार के अंदर 18 पिस्टल रखी हुई है जिन्हे जब्द कर लिया गया. पूछताछ करने पर पता लगा कि ये लोग हथियारों की खेप लेकर जा रहे थे. एसपी एसटीएफ ने बताया कि इन लोगों के ठिकानों पर छापामारी की जा रही है. जिन लोगों को ये सप्लाई करते हैं, उनका पता लगाया जा रहा है. जल्द ही इस मामले में और भी लोगो का खुलासा होगा और कार्यवाही की जाएगी.
नई दिल्ली : राजधानी दिल्ली में हथियारों की खेप ले जा रहे तस्करो को ग्रेटर नोएडा एसटीएफ ने गिरफ्तार किया है. बीती रात तीन तस्कर कार में हथियार रखकर नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस वे से दिल्ली जा रहे थे. इस बीच उन्हें एसटीएफ ने दबोच लिया. एसटीएफ ने तस्करो के पास से अट्ठारह हथियार बरामद किये है. एसटीएफ के एसपी अजय सहदेव ने जानकारी देते हुए बताया की मथुरा के मांट थाना क्षेत्र के गांव जहांगीरपुर निवासी जगदीश, नौझील का शफीक और अलीगढ़ टप्पल का रहने वाला तनवीर शनिवार की रात कार अपनी कार से दिल्ली जा रहे थे. गणतंत्र दिवस को देखते हुए एसटीएफ हाई अलर्ट पर है. नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस वे पर ओमेक्स मॉल के समीप कार को रोका गया. जब कार को चेक किया गया थो मालूम पड़ा की कार के अंदर अट्ठारह पिस्टल रखी हुई है जिन्हे जब्द कर लिया गया. पूछताछ करने पर पता लगा कि ये लोग हथियारों की खेप लेकर जा रहे थे. एसपी एसटीएफ ने बताया कि इन लोगों के ठिकानों पर छापामारी की जा रही है. जिन लोगों को ये सप्लाई करते हैं, उनका पता लगाया जा रहा है. जल्द ही इस मामले में और भी लोगो का खुलासा होगा और कार्यवाही की जाएगी.
३- 'साधु के सिवा दूसरों को अन्नादि देने से तीर्थंकर पुण्य प्रकृति से भिन्न पुण्य प्रकृति का वध होता है इस प्रतिपादन की अयोति ( दो० २-३ ) : 'अन्न पुण्य आदि के साथ विशेषात्मक अथवा व्यास्यात्मक शब्द नहीं है। प्रा इनका अर्थ दो प्रकार से किया जा सकता है १ --पच महाव्रतवारी मुनि को, जो योग्य पात्र है, प्रामुक एवणीय आहार आदि का देना अन्न पुण्य श्रादि हैं । २ ~ पायापात्र के भेदातिरिक्त चाहे जो भी हो उमे मचित प्रति अन्न आदिका देना श्रन्न पुण्य श्रादि हैं। स्वामीजी कहते हैं- "अन्न पुण्य आदि की पहली व्याख्या ही ठीक है। क्योकि दिया दान से ही पुण्य हो सकता है सावद्यदान मे नहीति-नित्त देवारा दान है वह पुण्य का हेतु नहीं।" उदाहरणम्वरूप स्वामीजी कहते हैं- "जा हे ए विन्दु मे श्रमस्य अपुकायिक जीव हैं । उसमे नम्पति जीवो की नियमा है। मानवाि भी सचित्त हैं । जो इन सजीव चीजो का दान करता है उसके पुण्य का वर रंगे हागा मुनि ऐसी प्रामुक वस्तुओं को लेने ही नहीं । वे प्रागुरु श्रचित्त वस्तुएँ लो है। ज वस्तुमो को पात्र ही ले सकते हैं । अपात्र दान सावय है ।" स्वामीजी कहते हैं कि जोमावद्य दान में पुण्यवतनाते हैं वे ज्ञान-नशुम्रो गा स्वामीजी के समय में कई जैन-माथु ऐसी प्रपणा करते रहे कि पारी गाए को माहार ग्रादि देने मे तीर्थंकर पुण्य प्रकृति का वय होता है और गायु के लिए गा षो देने से श्रय पुण्य प्रकृति का बर होता है ऐसा थाना में दिया है।
तीन- 'साधु के सिवा दूसरों को अन्नादि देने से तीर्थंकर पुण्य प्रकृति से भिन्न पुण्य प्रकृति का वध होता है इस प्रतिपादन की अयोति : 'अन्न पुण्य आदि के साथ विशेषात्मक अथवा व्यास्यात्मक शब्द नहीं है। प्रा इनका अर्थ दो प्रकार से किया जा सकता है एक --पच महाव्रतवारी मुनि को, जो योग्य पात्र है, प्रामुक एवणीय आहार आदि का देना अन्न पुण्य श्रादि हैं । दो ~ पायापात्र के भेदातिरिक्त चाहे जो भी हो उमे मचित प्रति अन्न आदिका देना श्रन्न पुण्य श्रादि हैं। स्वामीजी कहते हैं- "अन्न पुण्य आदि की पहली व्याख्या ही ठीक है। क्योकि दिया दान से ही पुण्य हो सकता है सावद्यदान मे नहीति-नित्त देवारा दान है वह पुण्य का हेतु नहीं।" उदाहरणम्वरूप स्वामीजी कहते हैं- "जा हे ए विन्दु मे श्रमस्य अपुकायिक जीव हैं । उसमे नम्पति जीवो की नियमा है। मानवाि भी सचित्त हैं । जो इन सजीव चीजो का दान करता है उसके पुण्य का वर रंगे हागा मुनि ऐसी प्रामुक वस्तुओं को लेने ही नहीं । वे प्रागुरु श्रचित्त वस्तुएँ लो है। ज वस्तुमो को पात्र ही ले सकते हैं । अपात्र दान सावय है ।" स्वामीजी कहते हैं कि जोमावद्य दान में पुण्यवतनाते हैं वे ज्ञान-नशुम्रो गा स्वामीजी के समय में कई जैन-माथु ऐसी प्रपणा करते रहे कि पारी गाए को माहार ग्रादि देने मे तीर्थंकर पुण्य प्रकृति का वय होता है और गायु के लिए गा षो देने से श्रय पुण्य प्रकृति का बर होता है ऐसा थाना में दिया है।
Dulha Dulhan: दूल्हे और बारातियो के सामने मंडप में दुल्हन और उसके प्रेमी ने कर डाला कांड! फटाफट जानिए आगे क्या हुआ? UP News: कभी-कभी ऐसे कांड हो जाते हैं जिनके विषय में कोई सपने में भी नही सोचे रहता। हाल के दिनों में उत्तर प्रदेश में ऐसा ही कांड हो गया। जिसमें बारातियों के सामने लड़की पक्ष के लोगों को काफी शर्मिंदगी झेलनी पडी। मां-बाप आपने बेटा तथा बेटी का पालपोष कर बड़ा करते हैं। उन्हे शिक्षित करने उच्च शिक्षा दिलाते हैं। लेकिन कई बार न बच्चों की नासमझी की वजह से काफी शर्मिदगी झेलनी पडती है। ऐसा ही एक वाकया यूपी में घटित हुआ। जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले के चरवा थाना क्षेत्र के गांव में बहुत बड़ा कांड हो गया। बताया जाता है कि 6 फरवरी की रात गांव में एक बारात आई। रात 11 बजे द्वार पूजा के बाद दूल्हा और दुलहन जयमाला कार्यक्रम के लिए स्टेज पर पहुचे। वहां इस भीड में दुलहन ने वरमाला दूल्हे के गले में डालने के बजाय अपने प्रेमी के गले में डाल दी। इसके बाद तो बवाल मचना तय था। घराती और बराती आपस में भिड़ गये। किसी तरह समझाइस के बाद मामला शांत हुआ। लेकिन इसके बाद दुल्हन ने प्रेमी के साथ मिलकर और बड़ा कांड कर दिया। बताया जाता है कि लोगों की समझाइस के बाद मामला सांत हुआ। विवाह कार्यक्रम के बाद दुलहन बिदा होकर अपने ससुराल आ गई। कहते हैं तब तक सब ठीक था। लेकिन रात के समय दुल्हन ने मौका लगाकर अपने प्रेमी के साथ भाग निकली। जैसे ही इस बात की जानकारी दूल्हे के घरवालों को हुई फिर मामला गर्मा गया। दहेज के सामान के साथ दूल्हा तथा उसके परिजन थाने पहुंच गये। वहां सूचना दी गई साथ में लडकी के परिवार वालों को भी बुलाया गया। इस पूरे घटना क्रम के बाद लड़की पक्ष के लोग काफी शर्मिदा हैं।
Dulha Dulhan: दूल्हे और बारातियो के सामने मंडप में दुल्हन और उसके प्रेमी ने कर डाला कांड! फटाफट जानिए आगे क्या हुआ? UP News: कभी-कभी ऐसे कांड हो जाते हैं जिनके विषय में कोई सपने में भी नही सोचे रहता। हाल के दिनों में उत्तर प्रदेश में ऐसा ही कांड हो गया। जिसमें बारातियों के सामने लड़की पक्ष के लोगों को काफी शर्मिंदगी झेलनी पडी। मां-बाप आपने बेटा तथा बेटी का पालपोष कर बड़ा करते हैं। उन्हे शिक्षित करने उच्च शिक्षा दिलाते हैं। लेकिन कई बार न बच्चों की नासमझी की वजह से काफी शर्मिदगी झेलनी पडती है। ऐसा ही एक वाकया यूपी में घटित हुआ। जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले के चरवा थाना क्षेत्र के गांव में बहुत बड़ा कांड हो गया। बताया जाता है कि छः फरवरी की रात गांव में एक बारात आई। रात ग्यारह बजे द्वार पूजा के बाद दूल्हा और दुलहन जयमाला कार्यक्रम के लिए स्टेज पर पहुचे। वहां इस भीड में दुलहन ने वरमाला दूल्हे के गले में डालने के बजाय अपने प्रेमी के गले में डाल दी। इसके बाद तो बवाल मचना तय था। घराती और बराती आपस में भिड़ गये। किसी तरह समझाइस के बाद मामला शांत हुआ। लेकिन इसके बाद दुल्हन ने प्रेमी के साथ मिलकर और बड़ा कांड कर दिया। बताया जाता है कि लोगों की समझाइस के बाद मामला सांत हुआ। विवाह कार्यक्रम के बाद दुलहन बिदा होकर अपने ससुराल आ गई। कहते हैं तब तक सब ठीक था। लेकिन रात के समय दुल्हन ने मौका लगाकर अपने प्रेमी के साथ भाग निकली। जैसे ही इस बात की जानकारी दूल्हे के घरवालों को हुई फिर मामला गर्मा गया। दहेज के सामान के साथ दूल्हा तथा उसके परिजन थाने पहुंच गये। वहां सूचना दी गई साथ में लडकी के परिवार वालों को भी बुलाया गया। इस पूरे घटना क्रम के बाद लड़की पक्ष के लोग काफी शर्मिदा हैं।
मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के साथ रावलपिंडी में मंच साझा करने पर भारत के कड़े विरोध के बाद फिलस्तीन ने अपने राजदूत वलीद अबु अली को इस्लामाबाद से वापस बुलाए जाने का फैसला निश्चित रूप से न सिर्फ भारतीय कूटनीति की सफलता बल्कि पाकिस्तान की आतंकवाद समर्थक कूटनीति को झटका भी है। पाकिस्तान आर्मी और सरकार जमात-उद-दावा के सरगना को संयुक्त राष्ट्र द्वारा आतंकी घोषित किए जाने के बाद भी संरक्षण एवं राजनीतिक व्यक्ति बताकर उसका बचाव करते रहते हैं। असल में हाफिज के साथ राजदूत वलीद की फोटो आने के बाद शुक्रवार को ही भारत ने कूटनीतिक सक्रियता दिखाई और सबसे पहले भारत में फिलस्तीन के राजदूत अदनान अबु अल हाइजा को विदेश मंत्रालय में बुलाकर आर्थिक मामलों के सचिव विजय गोखले ने सख्त एतराज जताया। साथ ही रामल्ला में फिलस्तीनी विदेशमंत्री के साथ भारतीय प्रतिनिधि ने नाराजगी जाहिर की। यही नहीं विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर भारत की गंभीरता का स्पष्ट संदेश दिया। बयान में कहा गया कि भारत ने फिलस्तीन को दो टूक शब्दों में बता दिया है कि आतंकी के साथ राजदूत का मंच साझा करना हमें किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं है। भारतीय विदेश मंत्रालय के एतराज के बाद ही फिलस्तीन ने अपने राजदूत के खिलाफ उचित कार्रवाई का भरोसा दिला दिया था। आखिरकार हाफिज के साथ मंच साझा करने के 24 घंटे के अंदर ही फिलस्तीन ने अपना राजदूत हटाने का फैसला कर लिया। मजे की बात तो यह है कि हाल ही में इजरायल और अमेरिका के साथ अपने मधुर संबंधों के बावजूद भारत ने संयुक्त राष्ट्र में यरूशलम के मुद्दे पर फिलस्तीन के पक्ष में वोट दिया था भारत सरकार की आलोचना करते हुए कुछ जानकारों ने कहा था कि भारत ने गलत किया है। भारत ने यह वोटिंग तब की थी जब इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू जनवरी में ही भारत यात्रा पर आने वाले हैं। बहरहाल फिलस्तीन भारत को नाराज करके संबंधों में खटास नहीं आने देना चाहता था किन्तु सवाल यह है कि यदि राजदूत वलीद अबु अली जैसे लोग पाकिस्तान के आतंकियों के साथ मधुर संबंध रखने में दिलचस्पी रखते हैं तो इससे कहीं न कहीं फिलस्तीन के लोगों में भारत और पाकिस्तान तथा पाक आतंकियों के प्रति नजरिये में आए बदलाव का साफ संकेत दिख रहा है। असल में फिलस्तीन में कुछ लोगों को लगता है कि भारत का झुकाव अमेरिका-इजरायल के प्रति आजकल जितना है उतना कभी नहीं रहा है। यह धारणा फिलस्तीन के कुछ लोगों में यदि बनी है तो सही भी है किन्तु भारत के जितने अच्छे रिश्ते इन दिनों अरब देशों से बने हैं उतने अच्छे इससे पहले कभी नहीं थे। प्रधानमंत्री मोदी ने अरब मुल्कों से संबंध इस हद तक मजबूत कर लिए हैं कि पाकिस्तान हैरान है कि अरब देशों में भारत के प्रति जबरदस्त झुकाव आ गया है और पाकिस्तान के प्रति अनादर जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। लेकिन भारत ने फिलस्तीन के प्रति अपनी नीति में कोई बदलाव भी नहीं किया है। यदि प्रधानमंत्री मोदी ने इजरायल की यात्रा की तो वह कुछ दिनों बाद ही फिलस्तीन भी जाने वाले हैं। लेकिन अपने राष्ट्रीय हितों के प्रति सजग भारत इजरायल से सहयोग सिर्फ इसलिए हासिल करने का अवसर नहीं गंवा सकता कि उसके संबंध फिलस्तीन और अरब मुल्कों से अच्छे नहीं हैं। भारत का इजरायल के प्रति अपने संबंधों सुरक्षा, कृषि एवं व्यापारिक सहयोग की संभावनाओं को तलाशने में इजरायल और फिलस्तीन के कटु संबंधों से कुछ भी लेनादेना नहीं है क्योंकि भारत दोनों देशों के बीच संबंधों को सुधारने की सद्भावना रखता है। इसलिए उसके लिए दोनों ही देशों की शांति एवं समृद्धि आवश्यक है। भारत इन्हीं संभावनाओं के साथ फिलस्तीन और अरब मुल्कों के रिश्ते भी देखता है। भारत यदि अपने हितों की संभावनाओं को तलाशने के लिए इजरायल के साथ संबंधों की ऊंचाइयों को बढ़ाता है तो इसमें फिलस्तीन या अरब मुल्कों को तिलमिलाने की जरूरत नहीं है। दुनिया का कोई देश किसी एक देश या एक गुट के खूंटे में बंधा नहीं रह सकता क्योंकि राष्ट्रीय हितों के लिए हर देश अपने अनुसार अपनी विदेश नीति का निर्धारण करता है। लब्बोलुआब यह है कि फिलस्तीन द्वारा पाकिस्तान से अपने राजदूत को वापस बुलाया जाना भारतीय कूटनीति की बड़ी जीत है।
मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के साथ रावलपिंडी में मंच साझा करने पर भारत के कड़े विरोध के बाद फिलस्तीन ने अपने राजदूत वलीद अबु अली को इस्लामाबाद से वापस बुलाए जाने का फैसला निश्चित रूप से न सिर्फ भारतीय कूटनीति की सफलता बल्कि पाकिस्तान की आतंकवाद समर्थक कूटनीति को झटका भी है। पाकिस्तान आर्मी और सरकार जमात-उद-दावा के सरगना को संयुक्त राष्ट्र द्वारा आतंकी घोषित किए जाने के बाद भी संरक्षण एवं राजनीतिक व्यक्ति बताकर उसका बचाव करते रहते हैं। असल में हाफिज के साथ राजदूत वलीद की फोटो आने के बाद शुक्रवार को ही भारत ने कूटनीतिक सक्रियता दिखाई और सबसे पहले भारत में फिलस्तीन के राजदूत अदनान अबु अल हाइजा को विदेश मंत्रालय में बुलाकर आर्थिक मामलों के सचिव विजय गोखले ने सख्त एतराज जताया। साथ ही रामल्ला में फिलस्तीनी विदेशमंत्री के साथ भारतीय प्रतिनिधि ने नाराजगी जाहिर की। यही नहीं विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर भारत की गंभीरता का स्पष्ट संदेश दिया। बयान में कहा गया कि भारत ने फिलस्तीन को दो टूक शब्दों में बता दिया है कि आतंकी के साथ राजदूत का मंच साझा करना हमें किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं है। भारतीय विदेश मंत्रालय के एतराज के बाद ही फिलस्तीन ने अपने राजदूत के खिलाफ उचित कार्रवाई का भरोसा दिला दिया था। आखिरकार हाफिज के साथ मंच साझा करने के चौबीस घंटाटे के अंदर ही फिलस्तीन ने अपना राजदूत हटाने का फैसला कर लिया। मजे की बात तो यह है कि हाल ही में इजरायल और अमेरिका के साथ अपने मधुर संबंधों के बावजूद भारत ने संयुक्त राष्ट्र में यरूशलम के मुद्दे पर फिलस्तीन के पक्ष में वोट दिया था भारत सरकार की आलोचना करते हुए कुछ जानकारों ने कहा था कि भारत ने गलत किया है। भारत ने यह वोटिंग तब की थी जब इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू जनवरी में ही भारत यात्रा पर आने वाले हैं। बहरहाल फिलस्तीन भारत को नाराज करके संबंधों में खटास नहीं आने देना चाहता था किन्तु सवाल यह है कि यदि राजदूत वलीद अबु अली जैसे लोग पाकिस्तान के आतंकियों के साथ मधुर संबंध रखने में दिलचस्पी रखते हैं तो इससे कहीं न कहीं फिलस्तीन के लोगों में भारत और पाकिस्तान तथा पाक आतंकियों के प्रति नजरिये में आए बदलाव का साफ संकेत दिख रहा है। असल में फिलस्तीन में कुछ लोगों को लगता है कि भारत का झुकाव अमेरिका-इजरायल के प्रति आजकल जितना है उतना कभी नहीं रहा है। यह धारणा फिलस्तीन के कुछ लोगों में यदि बनी है तो सही भी है किन्तु भारत के जितने अच्छे रिश्ते इन दिनों अरब देशों से बने हैं उतने अच्छे इससे पहले कभी नहीं थे। प्रधानमंत्री मोदी ने अरब मुल्कों से संबंध इस हद तक मजबूत कर लिए हैं कि पाकिस्तान हैरान है कि अरब देशों में भारत के प्रति जबरदस्त झुकाव आ गया है और पाकिस्तान के प्रति अनादर जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। लेकिन भारत ने फिलस्तीन के प्रति अपनी नीति में कोई बदलाव भी नहीं किया है। यदि प्रधानमंत्री मोदी ने इजरायल की यात्रा की तो वह कुछ दिनों बाद ही फिलस्तीन भी जाने वाले हैं। लेकिन अपने राष्ट्रीय हितों के प्रति सजग भारत इजरायल से सहयोग सिर्फ इसलिए हासिल करने का अवसर नहीं गंवा सकता कि उसके संबंध फिलस्तीन और अरब मुल्कों से अच्छे नहीं हैं। भारत का इजरायल के प्रति अपने संबंधों सुरक्षा, कृषि एवं व्यापारिक सहयोग की संभावनाओं को तलाशने में इजरायल और फिलस्तीन के कटु संबंधों से कुछ भी लेनादेना नहीं है क्योंकि भारत दोनों देशों के बीच संबंधों को सुधारने की सद्भावना रखता है। इसलिए उसके लिए दोनों ही देशों की शांति एवं समृद्धि आवश्यक है। भारत इन्हीं संभावनाओं के साथ फिलस्तीन और अरब मुल्कों के रिश्ते भी देखता है। भारत यदि अपने हितों की संभावनाओं को तलाशने के लिए इजरायल के साथ संबंधों की ऊंचाइयों को बढ़ाता है तो इसमें फिलस्तीन या अरब मुल्कों को तिलमिलाने की जरूरत नहीं है। दुनिया का कोई देश किसी एक देश या एक गुट के खूंटे में बंधा नहीं रह सकता क्योंकि राष्ट्रीय हितों के लिए हर देश अपने अनुसार अपनी विदेश नीति का निर्धारण करता है। लब्बोलुआब यह है कि फिलस्तीन द्वारा पाकिस्तान से अपने राजदूत को वापस बुलाया जाना भारतीय कूटनीति की बड़ी जीत है।
प्रति दिन कोविड-19 केसों में गिरावट के बीच, योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने मंगलवार को नए दिशानिर्देश जारी किए, जिसमें खुले स्थानों पर शादी समारोह और अन्य कार्यक्रमों की इजाजत दी गई। सरकार के आदेश के मुताबिक, शादियों में अधिकतम लोगों की अनुमति क्षेत्र पर निर्भर करेगी। मेहमानों को सुरक्षा COVID प्रोटोकॉल का पालन करना होगा जिसमें मास्क और सैनिटाइज़र पहनना शामिल है। राज्य में प्रशासन के अधिकारियों को संबोधित एक पत्र में, सरकार ने कहा कि COVID प्रोटोकॉल का पालन किया जाना चाहिए और प्रवेश द्वार पर COVID हेल्प डेस्क की स्थापना अनिवार्य है। इससे पहले प्रदेश में COVID-19 नियंत्रण क्षेत्रों के बाहर एक स्थान पर शादियों और अन्य कार्यों में एक समय में 100 से अधिक व्यक्तियों को अनुमति नहीं दी गई थी। 19 सितंबर को जारी आदेश में कहा गया था कि बंद और खुले स्थानों में, COVID-19 प्रोटोकॉल का पालन करते हुए अधिकतम 100 लोगों को एक स्थान पर इकट्ठा होने की अनुमति दी गई है। इससे पहले, 19 जून के सरकारी आदेश के मुताबिक, अधिकतम 50 लोगों को खुले और बंद स्थानों पर इकट्ठा होने की अनुमति थी। इस बीच, 14 ताजा कोरोना केसों के साथ, उत्तर प्रदेश में कुल मामले शनिवार को बढ़कर 17,09,761 हो गए, जबकि राज्य में वायरस से संबंधित कोई ताजा मौत नहीं हुई। मरने वालों की कुल संख्या 22,890 रही। सरकार ने एक बयान में कहा कि 14 ताजा मामलों में से महाराजगंज और गौतम बौद्ध नगर से तीन-तीन, झांसी और प्रयागराज से दो-दो मामले सामने आए हैं।
प्रति दिन कोविड-उन्नीस केसों में गिरावट के बीच, योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने मंगलवार को नए दिशानिर्देश जारी किए, जिसमें खुले स्थानों पर शादी समारोह और अन्य कार्यक्रमों की इजाजत दी गई। सरकार के आदेश के मुताबिक, शादियों में अधिकतम लोगों की अनुमति क्षेत्र पर निर्भर करेगी। मेहमानों को सुरक्षा COVID प्रोटोकॉल का पालन करना होगा जिसमें मास्क और सैनिटाइज़र पहनना शामिल है। राज्य में प्रशासन के अधिकारियों को संबोधित एक पत्र में, सरकार ने कहा कि COVID प्रोटोकॉल का पालन किया जाना चाहिए और प्रवेश द्वार पर COVID हेल्प डेस्क की स्थापना अनिवार्य है। इससे पहले प्रदेश में COVID-उन्नीस नियंत्रण क्षेत्रों के बाहर एक स्थान पर शादियों और अन्य कार्यों में एक समय में एक सौ से अधिक व्यक्तियों को अनुमति नहीं दी गई थी। उन्नीस सितंबर को जारी आदेश में कहा गया था कि बंद और खुले स्थानों में, COVID-उन्नीस प्रोटोकॉल का पालन करते हुए अधिकतम एक सौ लोगों को एक स्थान पर इकट्ठा होने की अनुमति दी गई है। इससे पहले, उन्नीस जून के सरकारी आदेश के मुताबिक, अधिकतम पचास लोगों को खुले और बंद स्थानों पर इकट्ठा होने की अनुमति थी। इस बीच, चौदह ताजा कोरोना केसों के साथ, उत्तर प्रदेश में कुल मामले शनिवार को बढ़कर सत्रह,नौ,सात सौ इकसठ हो गए, जबकि राज्य में वायरस से संबंधित कोई ताजा मौत नहीं हुई। मरने वालों की कुल संख्या बाईस,आठ सौ नब्बे रही। सरकार ने एक बयान में कहा कि चौदह ताजा मामलों में से महाराजगंज और गौतम बौद्ध नगर से तीन-तीन, झांसी और प्रयागराज से दो-दो मामले सामने आए हैं।
मध्य प्रदेश से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। मामला आदेगांव थाना अंतर्गत कोंडरा गांव का है। जहां मंगलवार को संदिग्ध अवस्था में दो बहनों का शव कुएं से बरामद हुए हैं। इस मामले की जांच पुलिस कर रही है। जानकारी के अनुसार दोनों लड़की सोमवार को अपने खेत के काम करने के नाम से घर से निकली थीं। देर शाम तक जब वे अपने घर नहीं लौटी तो परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की। मंगलवार को दोनों बहनों के गांव के खेत में एक कुएं में देखे गए, जिसकी सूचना आंदेगाव पुलिस थाने में दी गई, मामले को गंभीरता से लेते हुए थाना प्रभारी ईश्वरी पटले पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और शवों को बाहर निकलवाकर पंचनामा की कार्रवाई और पोस्टमार्टम उपरांत परिजनों को सौंप दिया गया। आदेगांव थाना प्रभारी ने बताया कि थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले कोंडरा गांव में खेत के कुएं में दो युवतियों के शव मिले हैं, दोनों सगी बहने हैं। परिजनो ने हत्या की आशंका जताते हुए 2 युवकों का नाम भी अपनी शिकायत में दर्ज कराया है। पुलिस ने मर्ग कायम कर विवेचना में ले लिया है।
मध्य प्रदेश से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। मामला आदेगांव थाना अंतर्गत कोंडरा गांव का है। जहां मंगलवार को संदिग्ध अवस्था में दो बहनों का शव कुएं से बरामद हुए हैं। इस मामले की जांच पुलिस कर रही है। जानकारी के अनुसार दोनों लड़की सोमवार को अपने खेत के काम करने के नाम से घर से निकली थीं। देर शाम तक जब वे अपने घर नहीं लौटी तो परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की। मंगलवार को दोनों बहनों के गांव के खेत में एक कुएं में देखे गए, जिसकी सूचना आंदेगाव पुलिस थाने में दी गई, मामले को गंभीरता से लेते हुए थाना प्रभारी ईश्वरी पटले पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और शवों को बाहर निकलवाकर पंचनामा की कार्रवाई और पोस्टमार्टम उपरांत परिजनों को सौंप दिया गया। आदेगांव थाना प्रभारी ने बताया कि थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले कोंडरा गांव में खेत के कुएं में दो युवतियों के शव मिले हैं, दोनों सगी बहने हैं। परिजनो ने हत्या की आशंका जताते हुए दो युवकों का नाम भी अपनी शिकायत में दर्ज कराया है। पुलिस ने मर्ग कायम कर विवेचना में ले लिया है।
उच्चतम न्यायालय अब इस बात की जांच-पड़ताल करने जा रहा है कि 1975 में इंदिरा गांधी सरकार की लगाई हुई इमरजेंसी को क्या 'पूरी तरह असंवैधानिक' घोषित किया जा सकता है। एक 94 साल की महिला की याचिका पर कोर्ट ने केंद्र से 14 दिसंबर को जवाब मांगा है। सुनवाई की अनुमति देकर उच्चतम न्यायालय ने पंडोरा बॉक्स खोल दिया है। महिला की ओर से तर्क दिया गया है कि ताकत के गलत इस्तेमाल को ठीक किया जाना चाहिए और कई सालों बाद युद्ध अपराधों की सुनवाई होती है। हालांकि इमरजेंसी तत्कालीन संविधिक प्रावधानों के अनुरूप थी, वर्ना जनता पार्टी सरकार को 1978 में संविधान संशोधन नहीं करना पड़ता। हो सकता है कि अभी उन तमाम मामलों की फिर से सुनवाई उच्चतम न्यायालय न करे, जिनसे मोदी सरकार की किरकिरी होती हो, पर कौन जाने भविष्य में ऐसी सरकार हो जिसे मोदी सरकार के कार्यकाल से शिकायत हो तो राफेल, राम मंदिर, कोरोना के दोषी, संपत्तियां बेचने, नोटबंदी और जीएसटी घोटाले, गुजरात दंगे, जज लोया की संदिग्ध मौत, गुजरात के फ़र्ज़ी मुठभेड़, कांग्रेस नेता एहसान जाफरी की दंगाइयों द्वारा जला कर हत्या, हरेन पंड्या हत्याकांड, अडानी-अंबानी के लिए देश के आर्थिक हितों से समझौता जैसी कारगुजारियों की नए सिरे से सुनवाई हो सकती है। उच्चतम न्यायालय ने 45 साल बाद इमरजेंसी की सुनवाई करने की स्वीकारोक्ति देकर न्यायिक नजीर बना दी है। पीठ ने कहा कि वो देखेगी कि क्या इमरजेंसी लगाए जाने के 45 सालों बाद इसकी वैधता की जांच करना 'संभव या वांछित' है। उच्चतम न्यायालय में याचिका 94 साल की वीना सरीन ने दायर की है। वीना चाहती हैं कि कोर्ट इमरजेंसी को असंवैधानिक घोषित करे। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी में उन्हें और उनके पति को देश छोड़ने के लिए मजबूर किया गया था और उनकी संपत्तियां छीन ली गईं थीं और मेरे पति इस दबाव की वजह से चल बसे थे। महिला ने बताया कि 1975 में उनका दिल्ली में अच्छा गोल्ड आर्ट्स बिजनेस था और बिना किसी वजह के जेल में डाल दिए जाने के डर से उन्हें देश छोड़ कर जाना पड़ा था। वीना सरीन ने याचिका में इस असंवैधानिक कृत्य में सक्रिय भूमिका निभाने वालों से 25 करोड़ रुपये का मुआवजा दिलाने का भी अनुरोध किया है। पीठ पहले इस याचिका को मंजूर करने में झिझक रही थी। पीठ ने कहा कि हमें मुश्किल हो रही है। इमरजेंसी ऐसी घटना है जो नहीं होनी चाहिए थी। याचिकाकर्ता के वकील हरीश साल्वे से जस्टिस कौल ने कहा कि कोई घटना 45 साल पहले इतिहास में हुई है, लेकिन अब इस विवाद में जाना? इस याचिका को मंजूर करने में हमें मुश्किल हो रही है। हम इन विवादों को देखते नहीं रह सकते हैं, लोग जा चुके हैं। हरीश साल्वे ने कहा कि ताकत के गलत इस्तेमाल को ठीक किया जाना चाहिए और कई सालों बाद युद्ध अपराधों की सुनवाई होती है। साल्वे ने कहा कि एक लोकतंत्र के अधिकारों का 19 महीनों तक हनन हुआ था। ये हमारे संविधान पर सबसे बड़ा हमला था। ये राजनीतिक बहस नहीं है और इसे उच्चतम न्यायालय को तय करना चाहिए। साल्वे ने कहा कि याचिकाकर्ता राजनीतिक शख्सियत नहीं हैं, वो इमरजेंसी से प्रभावित हैं और कोर्ट को इमरजेंसी को अवैध करार देना चाहिए। पीठ ने कहा कि वह इस पहलू पर भी विचार करेगा कि क्या 45 साल बाद आपात काल लागू करने की वैधता का परीक्षण व्यावहारिक है। इस याचिका को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र को नोटिस जारी किया है। बता दें कि आपातकाल को 45 साल बीत चुके हैं। देश में 25 जून, 1975 की आधी रात को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल की घोषणा कर दी थी। यह आपातकाल 1977 में खत्म हुआ था। इंदिरा गांधी ने संविधान के अनुच्छेद 352 में 'आंतरिक अशांति' के प्रावधान के आधार पर राष्ट्रीय आपात की उद्घोषणा की थी। आपातकाल में हुए संशोधनों में सबसे पहला था, भारतीय संविधान का 38वां संशोधन। 22 जुलाई 1975 को पास हुए इस संशोधन के द्वारा न्यायपालिका से आपातकाल की न्यायिक समीक्षा करने का अधिकार छीन लिया गया। इसके लगभग दो महीने बाद ही संविधान का 39वां संशोधन लाया गया। यह संविधान संशोधन इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री पद को बनाए रखने के लिए किया गया था। इलाहाबाद उच्च न्यायालय इंदिरा गांधी का चुनाव रद्द कर चुका था, लेकिन इस संशोधन ने न्यायपालिका से प्रधानमंत्री पद पर नियुक्त व्यक्ति के चुनाव की जांच करने का अधिकार ही छीन लिया। इस संशोधन के अनुसार प्रधानमंत्री के चुनाव की जांच सिर्फ संसद द्वारा गठित की गई समिति ही कर सकती थी। आपातकाल को समय की जरूरत बताते हुए इंदिरा गांधी ने उस दौर में लगातार कई संविधान संशोधन किए। 40वें और 41वें संशोधन के जरिए संविधान के कई प्रावधानों को बदलने के बाद 42वां संशोधन पास किया गया। (क) संविधान की प्रस्तावना में 'समाजवादी' 'धर्मनिरपेक्ष' एवं 'एकता और अखंडता' आदि शब्द जोड़े गए। (ख) सभी नीति-निर्देशक सिद्धांतों को मूल अधिकारों पर सर्वोच्चता सुनिश्चित की गई। (ग) इसके अंतर्गत संविधान में दस मौलिक कर्तव्यों को अनुच्छेद 51(क), (भाग-iv क) के अंतर्गत जोड़ा गया। (घ) इसके द्वारा संविधान को न्यायिक परीक्षण से मुख्यत किया गया। (ङ) सभी विधानसभाओं एवं लोकसभा की सीटों की संख्या को इस शताब्दी के अंत तक के लिए स्थिर कर दिया गया। (च) लोकसभा एवं विधानसभाओं की अवधि को पांच से छह वर्ष कर दिया गया। (छ) इसके द्वारा यह निर्धारित किया गया कि किसी केंद्रीय कानून की वैधता पर सर्वोच्च न्यायालय एवं राज्य के कानून की वैधता का उच्च न्यायालय परीक्षण करेगा। साथ ही, यह भी निर्धारित किया गया कि किसी संवैधानिक वैधता के प्रश्न पर पांच से अधिक न्यायधीशों की बेंच द्वारा तिहाई बहुमत से निर्णय दिया जाना चाहिए और योदि न्यायाधीशों की संख्या पांच तक हो तो निर्णय सर्वसम्मति से होना चाहिए। (ज) इसके द्वारा वन संपदा, शिक्षा, जनसंख्या- नियंत्रण आदि विषयों को राज्य सूचि से समवर्ती सूची के अंतर्गत कर दिया गया। (झ) इसके अंतर्गत निर्धारित किया गया कि राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद एवं उसके प्रमुख प्रधानमंत्री की सलाह के अनुसार कार्य करेगा। (ट) इसने संसद को राष्ट्र विरोधी गतिविधियों से निपटने के लिए कानून बनाने के अधिकार दिए एवं सर्वोच्चता स्थापित की। इसके बाद जब केंद्र में मोरारजी देसाई के नेतृत्व में जनता पार्टी की सरकार आई तो उसने 44वां संशोधन (1978) संसद से पारित कराया। इसके अंतर्गत राष्ट्रीय आपात स्थिति लागू करने के लिए आंतरिक अशांति के स्थान पर सैन्य विद्रोह का आधार रखा गया एवं आपात स्थिति संबंधी अन्य प्रावधानों में परिवर्तन लाया गया, जिससे उनका दुरुपयोग न हो। इसके द्वारा संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकारों के भाग से हटा कर विधेयक (क़ानूनी) अधिकारों की श्रेणी में रख दिया गया। लोकसभा तथा राज्य विधानसभाओं की अवधि 6 वर्ष से घटाकर पुनः 5 वर्ष कर दी गई। उच्चतम न्यायालय को राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति के निर्वाचन संबंधी विवाद को हल करने की अधिकारिता प्रदान की गई। क- अनुच्छेद 352 में राष्ट्रीय आपात की उद्घोषणा का आधार 'आंतरिक अशांति' के स्थान पर 'सशस्त्र विद्रोह' को रखा गया। अतः अब राष्ट्रपति आपात की उद्घोषणा 'आंतरिक अशांति' के आधार पर की जाती है। ख- यह भी उपबंधित किया गया कि राष्ट्रपति राष्ट्रीय आपात की उद्घोषणा तभी करेगा, जब उसे मंत्रिमंडल द्वारा इसकी लिखित सूचना दी जाए। ग- संपत्ति के मूलाधिकार को समाप्त करके इसे अनुच्छेद 300क, के तहत विविध अधिकार का दर्जा प्रदान किया गया। इसके लिए अनुच्छेद 31 तथा अनुच्छेद 19 को निरस्त किया गया। घ- अनुच्छेद 74 में पुनः संशोधन कर राष्ट्रपति को यह अधिकार दिया गया कि वह मंत्रिमंडल की सलाह, को एक बार पुनर्विचार के लिए वापस भेज सकता है, किन्तु पुनः दी गई सलाह को मानने के लिए बाध्य होगा। ङ- लोकसभा तथा राज्य विधानसभाओं की अवधि पुनः 5 वर्ष कर दी गई। च- उच्चतम न्यायालय को राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति के निर्वाचन संबंधी विवाद को हल करने की अधिकारित पुनः प्रदान कर दी गई। न्यायपालिका को दोबारा मजबूत करने और 42वें संशोधन के दोषों को दूर करने के साथ ही 44वें संशोधन ने संविधान को पहले से भी ज्यादा मजबूत करने का काम भी किया है। इस संशोधन ने संविधान में कई ऐसे बदलाव किए, जिससे 1975 के आपातकाल जैसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो। इस संशोधन ने मौलिक अधिकारों को भी मजबूती दी। जनता पार्टी भले ही अपने इस कार्यकाल के बाद पूरी तरह बिखर गई हो, लेकिन उसने निश्चित ही भारतीय संविधान को बिखरने से बचाया था। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार और कानूनी मामलों के जानकार हैं। वह इलाहाबाद में रहते हैं।)
उच्चतम न्यायालय अब इस बात की जांच-पड़ताल करने जा रहा है कि एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर में इंदिरा गांधी सरकार की लगाई हुई इमरजेंसी को क्या 'पूरी तरह असंवैधानिक' घोषित किया जा सकता है। एक चौरानवे साल की महिला की याचिका पर कोर्ट ने केंद्र से चौदह दिसंबर को जवाब मांगा है। सुनवाई की अनुमति देकर उच्चतम न्यायालय ने पंडोरा बॉक्स खोल दिया है। महिला की ओर से तर्क दिया गया है कि ताकत के गलत इस्तेमाल को ठीक किया जाना चाहिए और कई सालों बाद युद्ध अपराधों की सुनवाई होती है। हालांकि इमरजेंसी तत्कालीन संविधिक प्रावधानों के अनुरूप थी, वर्ना जनता पार्टी सरकार को एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर में संविधान संशोधन नहीं करना पड़ता। हो सकता है कि अभी उन तमाम मामलों की फिर से सुनवाई उच्चतम न्यायालय न करे, जिनसे मोदी सरकार की किरकिरी होती हो, पर कौन जाने भविष्य में ऐसी सरकार हो जिसे मोदी सरकार के कार्यकाल से शिकायत हो तो राफेल, राम मंदिर, कोरोना के दोषी, संपत्तियां बेचने, नोटबंदी और जीएसटी घोटाले, गुजरात दंगे, जज लोया की संदिग्ध मौत, गुजरात के फ़र्ज़ी मुठभेड़, कांग्रेस नेता एहसान जाफरी की दंगाइयों द्वारा जला कर हत्या, हरेन पंड्या हत्याकांड, अडानी-अंबानी के लिए देश के आर्थिक हितों से समझौता जैसी कारगुजारियों की नए सिरे से सुनवाई हो सकती है। उच्चतम न्यायालय ने पैंतालीस साल बाद इमरजेंसी की सुनवाई करने की स्वीकारोक्ति देकर न्यायिक नजीर बना दी है। पीठ ने कहा कि वो देखेगी कि क्या इमरजेंसी लगाए जाने के पैंतालीस सालों बाद इसकी वैधता की जांच करना 'संभव या वांछित' है। उच्चतम न्यायालय में याचिका चौरानवे साल की वीना सरीन ने दायर की है। वीना चाहती हैं कि कोर्ट इमरजेंसी को असंवैधानिक घोषित करे। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी में उन्हें और उनके पति को देश छोड़ने के लिए मजबूर किया गया था और उनकी संपत्तियां छीन ली गईं थीं और मेरे पति इस दबाव की वजह से चल बसे थे। महिला ने बताया कि एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर में उनका दिल्ली में अच्छा गोल्ड आर्ट्स बिजनेस था और बिना किसी वजह के जेल में डाल दिए जाने के डर से उन्हें देश छोड़ कर जाना पड़ा था। वीना सरीन ने याचिका में इस असंवैधानिक कृत्य में सक्रिय भूमिका निभाने वालों से पच्चीस करोड़ रुपये का मुआवजा दिलाने का भी अनुरोध किया है। पीठ पहले इस याचिका को मंजूर करने में झिझक रही थी। पीठ ने कहा कि हमें मुश्किल हो रही है। इमरजेंसी ऐसी घटना है जो नहीं होनी चाहिए थी। याचिकाकर्ता के वकील हरीश साल्वे से जस्टिस कौल ने कहा कि कोई घटना पैंतालीस साल पहले इतिहास में हुई है, लेकिन अब इस विवाद में जाना? इस याचिका को मंजूर करने में हमें मुश्किल हो रही है। हम इन विवादों को देखते नहीं रह सकते हैं, लोग जा चुके हैं। हरीश साल्वे ने कहा कि ताकत के गलत इस्तेमाल को ठीक किया जाना चाहिए और कई सालों बाद युद्ध अपराधों की सुनवाई होती है। साल्वे ने कहा कि एक लोकतंत्र के अधिकारों का उन्नीस महीनों तक हनन हुआ था। ये हमारे संविधान पर सबसे बड़ा हमला था। ये राजनीतिक बहस नहीं है और इसे उच्चतम न्यायालय को तय करना चाहिए। साल्वे ने कहा कि याचिकाकर्ता राजनीतिक शख्सियत नहीं हैं, वो इमरजेंसी से प्रभावित हैं और कोर्ट को इमरजेंसी को अवैध करार देना चाहिए। पीठ ने कहा कि वह इस पहलू पर भी विचार करेगा कि क्या पैंतालीस साल बाद आपात काल लागू करने की वैधता का परीक्षण व्यावहारिक है। इस याचिका को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र को नोटिस जारी किया है। बता दें कि आपातकाल को पैंतालीस साल बीत चुके हैं। देश में पच्चीस जून, एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर की आधी रात को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल की घोषणा कर दी थी। यह आपातकाल एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर में खत्म हुआ था। इंदिरा गांधी ने संविधान के अनुच्छेद तीन सौ बावन में 'आंतरिक अशांति' के प्रावधान के आधार पर राष्ट्रीय आपात की उद्घोषणा की थी। आपातकाल में हुए संशोधनों में सबसे पहला था, भारतीय संविधान का अड़तीसवां संशोधन। बाईस जुलाई एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर को पास हुए इस संशोधन के द्वारा न्यायपालिका से आपातकाल की न्यायिक समीक्षा करने का अधिकार छीन लिया गया। इसके लगभग दो महीने बाद ही संविधान का उनतालीसवां संशोधन लाया गया। यह संविधान संशोधन इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री पद को बनाए रखने के लिए किया गया था। इलाहाबाद उच्च न्यायालय इंदिरा गांधी का चुनाव रद्द कर चुका था, लेकिन इस संशोधन ने न्यायपालिका से प्रधानमंत्री पद पर नियुक्त व्यक्ति के चुनाव की जांच करने का अधिकार ही छीन लिया। इस संशोधन के अनुसार प्रधानमंत्री के चुनाव की जांच सिर्फ संसद द्वारा गठित की गई समिति ही कर सकती थी। आपातकाल को समय की जरूरत बताते हुए इंदिरा गांधी ने उस दौर में लगातार कई संविधान संशोधन किए। चालीसवें और इकतालीसवें संशोधन के जरिए संविधान के कई प्रावधानों को बदलने के बाद बयालीसवां संशोधन पास किया गया। संविधान की प्रस्तावना में 'समाजवादी' 'धर्मनिरपेक्ष' एवं 'एकता और अखंडता' आदि शब्द जोड़े गए। सभी नीति-निर्देशक सिद्धांतों को मूल अधिकारों पर सर्वोच्चता सुनिश्चित की गई। इसके अंतर्गत संविधान में दस मौलिक कर्तव्यों को अनुच्छेद इक्यावन, के अंतर्गत जोड़ा गया। इसके द्वारा संविधान को न्यायिक परीक्षण से मुख्यत किया गया। सभी विधानसभाओं एवं लोकसभा की सीटों की संख्या को इस शताब्दी के अंत तक के लिए स्थिर कर दिया गया। लोकसभा एवं विधानसभाओं की अवधि को पांच से छह वर्ष कर दिया गया। इसके द्वारा यह निर्धारित किया गया कि किसी केंद्रीय कानून की वैधता पर सर्वोच्च न्यायालय एवं राज्य के कानून की वैधता का उच्च न्यायालय परीक्षण करेगा। साथ ही, यह भी निर्धारित किया गया कि किसी संवैधानिक वैधता के प्रश्न पर पांच से अधिक न्यायधीशों की बेंच द्वारा तिहाई बहुमत से निर्णय दिया जाना चाहिए और योदि न्यायाधीशों की संख्या पांच तक हो तो निर्णय सर्वसम्मति से होना चाहिए। इसके द्वारा वन संपदा, शिक्षा, जनसंख्या- नियंत्रण आदि विषयों को राज्य सूचि से समवर्ती सूची के अंतर्गत कर दिया गया। इसके अंतर्गत निर्धारित किया गया कि राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद एवं उसके प्रमुख प्रधानमंत्री की सलाह के अनुसार कार्य करेगा। इसने संसद को राष्ट्र विरोधी गतिविधियों से निपटने के लिए कानून बनाने के अधिकार दिए एवं सर्वोच्चता स्थापित की। इसके बाद जब केंद्र में मोरारजी देसाई के नेतृत्व में जनता पार्टी की सरकार आई तो उसने चौंतालीसवां संशोधन संसद से पारित कराया। इसके अंतर्गत राष्ट्रीय आपात स्थिति लागू करने के लिए आंतरिक अशांति के स्थान पर सैन्य विद्रोह का आधार रखा गया एवं आपात स्थिति संबंधी अन्य प्रावधानों में परिवर्तन लाया गया, जिससे उनका दुरुपयोग न हो। इसके द्वारा संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकारों के भाग से हटा कर विधेयक अधिकारों की श्रेणी में रख दिया गया। लोकसभा तथा राज्य विधानसभाओं की अवधि छः वर्ष से घटाकर पुनः पाँच वर्ष कर दी गई। उच्चतम न्यायालय को राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति के निर्वाचन संबंधी विवाद को हल करने की अधिकारिता प्रदान की गई। क- अनुच्छेद तीन सौ बावन में राष्ट्रीय आपात की उद्घोषणा का आधार 'आंतरिक अशांति' के स्थान पर 'सशस्त्र विद्रोह' को रखा गया। अतः अब राष्ट्रपति आपात की उद्घोषणा 'आंतरिक अशांति' के आधार पर की जाती है। ख- यह भी उपबंधित किया गया कि राष्ट्रपति राष्ट्रीय आपात की उद्घोषणा तभी करेगा, जब उसे मंत्रिमंडल द्वारा इसकी लिखित सूचना दी जाए। ग- संपत्ति के मूलाधिकार को समाप्त करके इसे अनुच्छेद तीन सौक, के तहत विविध अधिकार का दर्जा प्रदान किया गया। इसके लिए अनुच्छेद इकतीस तथा अनुच्छेद उन्नीस को निरस्त किया गया। घ- अनुच्छेद चौहत्तर में पुनः संशोधन कर राष्ट्रपति को यह अधिकार दिया गया कि वह मंत्रिमंडल की सलाह, को एक बार पुनर्विचार के लिए वापस भेज सकता है, किन्तु पुनः दी गई सलाह को मानने के लिए बाध्य होगा। ङ- लोकसभा तथा राज्य विधानसभाओं की अवधि पुनः पाँच वर्ष कर दी गई। च- उच्चतम न्यायालय को राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति के निर्वाचन संबंधी विवाद को हल करने की अधिकारित पुनः प्रदान कर दी गई। न्यायपालिका को दोबारा मजबूत करने और बयालीसवें संशोधन के दोषों को दूर करने के साथ ही चौंतालीसवें संशोधन ने संविधान को पहले से भी ज्यादा मजबूत करने का काम भी किया है। इस संशोधन ने संविधान में कई ऐसे बदलाव किए, जिससे एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर के आपातकाल जैसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो। इस संशोधन ने मौलिक अधिकारों को भी मजबूती दी। जनता पार्टी भले ही अपने इस कार्यकाल के बाद पूरी तरह बिखर गई हो, लेकिन उसने निश्चित ही भारतीय संविधान को बिखरने से बचाया था।
सन्देह - रहित कर दिया। वे सो गये इधर माइकेल नामधारी फोलेनकोने लियो आदि कैदियोको जेलसे बाहर किया। खुद भी निकल भागा । नदीमें नाव पहलेसे लगी थी। वे सबके सब उस पर सवार होकर चल दिये और एक सप्ताह तक चलते ही रहे । पुलिस उनकी टोह न पा सकी । उक्त घटनाके दो वर्ष बाद तक लियो प्रचार कार्यमें लगा रहा, पर अन्तमें अधिक दिनों तक पुलिसकी तीक्ष्ण आँखों से बचा रहना असम्भव जानकर और यह सोचकर कि अबकी बार पकड़े जानेपर वह जरूर ही शुशेलवर्गके किलेमें ठूसा जायगा, उसने रूस से भाग निकलना ही श्रेयस्कर समझा और सन् १८८० के प्रारम्भ में रूससे निकल भागा । रूससे बिदा होकर ड्यस्क प्रायः चार सालतक स्विट्जरलैण्ड और जर्मनीमें निवास करता रहा और कई विपयोंके अध्ययनमें लगा रहा। अन्तमें १८८३ ई० में उसने और कई रूसी साम्यवादियों के साथ मिल कर जो स्विट्जरलैंडमें शरण ले रहे थे, "मजदूरोंके उद्धारार्थ समिति की नींव डाल, जिसका उद्देश्य रूस में कार्ल मार्क्सके विचारों का प्रचार करना था। इसी उद्देश्य पूर्तिके लिये उन लोगो ने स्विट्जरलैंड में एक प्रेस भी खोल डाला और १८८४ के मार्च महीने मे ड्य एक इस सम्बन्धकी कुछ पुस्तिकाएँ वगैरह साथ लेकर फीबर्गके लिये रवाना हुआ। वहाँसे उसका अभिप्राय उन कागज-पत्रोंको एक ऐसे स्थानपर भेजना था, जो रूसकी सरहद के समीप हो और जहांसे वे गुम रूपसे रूसको भेजे 'एक चतुर क्रांतिकारी ] जा सके। उन दिनों समाज प्रजातन्त्रवादियों (Social - Democrats ) पर जर्मनीमें भी कड़ी निगाह रखी जाती थी और उनका मुखपत्र Der Sozial Demokrat ( दर सोशल डेमोक्रेट ) जर्मनीमे न छपकर स्विटजरलण्डमें छपता था और चहाँसे गुप्त रूपसे जर्मनीको भेजा जाता था । फीवर्गके जिस होटलमें ड्यू स्क जाकर ठहरा, उसके मालिक को जर्मन सरकारकी ओरसे सख्त हिदायत थी कि वह स्विटजूर-लेण्डसे आने वाले यात्रियों पर कड़ी निगाह रखें और जिसके सम्बन्ध में जरा भी सन्देह हो कि वह जब्त पत्र-पत्रिकाएं अथवा पुस्तकोंको भेजना चाहता है, उसके आने की सूचना तत्काल पुलिस को दे दे । ड्यू स्कके पास भी एक बड़ा-सा बक्स था, जो पुस्तकों और पर्चों से भरा था । होटलके मालिकने सरकारी आज्ञानुसार उसके आनेकी खबर पुलिसको दे दी और पुलिसने आकर बिना किसी वारण्टके उसकी तलाशी ली। दुर्भाग्यवश उसके बक्ससे और चीजोंके साथ-साथ 'Sosial-Demokrat' अखबार की, जो जब्त था, कुछ कापिया निकल आई । वह फौरन गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिसके द्वारा नाम-धाम पूछे जाने पर उसने अपने को बुलिगिन नामक मास्कोका एक छात्र बतलाया, पर तहकीकात करने पर मालूम हुआ कि मास्को में बुलिंगिन नामकी कोई छात्र नहीं है। रूसकी पुलिस चौकन्नी हो गयी और अन्त में उसे यह पता चल गया कि यह बुलगिन नामधारी व्यक्ति दूसरा कोई नहीं, ड्यूस्क ही है । फिर क्या था ? रूसी सरकारने जर्मन सरकारसे
सन्देह - रहित कर दिया। वे सो गये इधर माइकेल नामधारी फोलेनकोने लियो आदि कैदियोको जेलसे बाहर किया। खुद भी निकल भागा । नदीमें नाव पहलेसे लगी थी। वे सबके सब उस पर सवार होकर चल दिये और एक सप्ताह तक चलते ही रहे । पुलिस उनकी टोह न पा सकी । उक्त घटनाके दो वर्ष बाद तक लियो प्रचार कार्यमें लगा रहा, पर अन्तमें अधिक दिनों तक पुलिसकी तीक्ष्ण आँखों से बचा रहना असम्भव जानकर और यह सोचकर कि अबकी बार पकड़े जानेपर वह जरूर ही शुशेलवर्गके किलेमें ठूसा जायगा, उसने रूस से भाग निकलना ही श्रेयस्कर समझा और सन् एक हज़ार आठ सौ अस्सी के प्रारम्भ में रूससे निकल भागा । रूससे बिदा होकर ड्यस्क प्रायः चार सालतक स्विट्जरलैण्ड और जर्मनीमें निवास करता रहा और कई विपयोंके अध्ययनमें लगा रहा। अन्तमें एक हज़ार आठ सौ तिरासी ईशून्य में उसने और कई रूसी साम्यवादियों के साथ मिल कर जो स्विट्जरलैंडमें शरण ले रहे थे, "मजदूरोंके उद्धारार्थ समिति की नींव डाल, जिसका उद्देश्य रूस में कार्ल मार्क्सके विचारों का प्रचार करना था। इसी उद्देश्य पूर्तिके लिये उन लोगो ने स्विट्जरलैंड में एक प्रेस भी खोल डाला और एक हज़ार आठ सौ चौरासी के मार्च महीने मे ड्य एक इस सम्बन्धकी कुछ पुस्तिकाएँ वगैरह साथ लेकर फीबर्गके लिये रवाना हुआ। वहाँसे उसका अभिप्राय उन कागज-पत्रोंको एक ऐसे स्थानपर भेजना था, जो रूसकी सरहद के समीप हो और जहांसे वे गुम रूपसे रूसको भेजे 'एक चतुर क्रांतिकारी ] जा सके। उन दिनों समाज प्रजातन्त्रवादियों पर जर्मनीमें भी कड़ी निगाह रखी जाती थी और उनका मुखपत्र Der Sozial Demokrat जर्मनीमे न छपकर स्विटजरलण्डमें छपता था और चहाँसे गुप्त रूपसे जर्मनीको भेजा जाता था । फीवर्गके जिस होटलमें ड्यू स्क जाकर ठहरा, उसके मालिक को जर्मन सरकारकी ओरसे सख्त हिदायत थी कि वह स्विटजूर-लेण्डसे आने वाले यात्रियों पर कड़ी निगाह रखें और जिसके सम्बन्ध में जरा भी सन्देह हो कि वह जब्त पत्र-पत्रिकाएं अथवा पुस्तकोंको भेजना चाहता है, उसके आने की सूचना तत्काल पुलिस को दे दे । ड्यू स्कके पास भी एक बड़ा-सा बक्स था, जो पुस्तकों और पर्चों से भरा था । होटलके मालिकने सरकारी आज्ञानुसार उसके आनेकी खबर पुलिसको दे दी और पुलिसने आकर बिना किसी वारण्टके उसकी तलाशी ली। दुर्भाग्यवश उसके बक्ससे और चीजोंके साथ-साथ 'Sosial-Demokrat' अखबार की, जो जब्त था, कुछ कापिया निकल आई । वह फौरन गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिसके द्वारा नाम-धाम पूछे जाने पर उसने अपने को बुलिगिन नामक मास्कोका एक छात्र बतलाया, पर तहकीकात करने पर मालूम हुआ कि मास्को में बुलिंगिन नामकी कोई छात्र नहीं है। रूसकी पुलिस चौकन्नी हो गयी और अन्त में उसे यह पता चल गया कि यह बुलगिन नामधारी व्यक्ति दूसरा कोई नहीं, ड्यूस्क ही है । फिर क्या था ? रूसी सरकारने जर्मन सरकारसे