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# सूचनाको हक सम्बन्धी ऐन, २०६४
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| 2 |
+
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+
## प्रमाणीकरण र प्रकाशन मिति
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| 4 |
+
२०६४।४।४
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| 5 |
+
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| 6 |
+
## संशोधन गर्ने ऐन
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| 7 |
+
(१) केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७२
|
| 8 |
+
२०७२।११।१३
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| 9 |
+
(२) नेपालको संविधान अनुकूल बनाउन केही नेपाल ऐनलाई संशोधन गर्ने ऐन, २०७४
|
| 10 |
+
२०७४।११।१९
|
| 11 |
+
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| 12 |
+
व्यवस्थापिका-संसदले बनाएको २०६४ सालको ऐन न. ४
|
| 13 |
+
सूचनाको हक सम्बन्धमा व्यवस्था गर्न बनेको ऐन
|
| 14 |
+
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| 15 |
+
**प्रस्तावना:**
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| 16 |
+
राज्यका काम कारबाही लोकतान्त्रिक पद्धति अनुरुप खुला र पारदर्शी बनाई नागरिकप्रति जबाफदेही र जिम्मेबार बनाउन, सार्वजनिक निकायमा रहेको सार्वजनिक महत्वको सूचनामा आम नागरिकको पहुँचलाई सरल र सहज बनाउन, राज्य र नागरिकको हितमा प्रतिकूल असर पर्ने सम्बेदनशील सूचनाको संरक्षण गर्न र नागरिकको सुसुचित हुने हकलाई संरक्षण र प्रचलन गराउने सम्बन्धमा कानूनी व्यवस्था गर्न बाञ्छुनीय भएकोले, व्यवस्थापिका-संसदले यो ऐन बनाएको छु।
|
| 17 |
+
|
| 18 |
+
---
|
| 19 |
+
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| 20 |
+
### परिच्छेद-१
|
| 21 |
+
**प्रारम्भिक**
|
| 22 |
+
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| 23 |
+
**१. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भ:**
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| 24 |
+
(१) यस ऐनको नाम "सूचनाको हक सम्बन्धी ऐन, २०६४" रहेको छ।
|
| 25 |
+
(२) यो ऐन प्रमाणीकरण भएको मितिबाट तीसौं दिनमा प्रारम्भ हुनेछ।
|
| 26 |
+
|
| 27 |
+
**२. परिभाषा:**
|
| 28 |
+
विषय बा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
|
| 29 |
+
(क) "सार्वजनिक निकाय" भन्नाले देहाय बमोजिमका निकाय बा संस्था सम्झनु पर्छ:
|
| 30 |
+
(१) संविधान अन्तर्गतका निकाय,
|
| 31 |
+
(२) ऐनद्वारा स्थापित निकाय,
|
| 32 |
+
(३) नेपाल सरकारद्वारा गठित निकाय,
|
| 33 |
+
(३क) प्रदेश सरकारका कार्यालय बा प्रदेश सरकारद्वारा गठित निकाय,
|
| 34 |
+
(३ख) स्थानीय तह बा त्यसका कार्यालयहरु,
|
| 35 |
+
(४) कानूनद्वारा स्थापित सार्वजनिक सेवाप्रदायक सङ्गठित संस्था बा प्रतिष्ठान,
|
| 36 |
+
(५) प्रचलित कानून बमोजिम दर्ता भएका राजनैतिक दल तथा सङ्गठन,
|
| 37 |
+
(६) नेपाल सरकारको पूर्ण बा आंशिक स्वामित्व बा नियन्त्रणमा रहेको बा अनुदानमा सञ्चालित बा नेपाल सरकारको अनुदान प्राप्त सङ्गठित संस्था,
|
| 38 |
+
(७) नेपाल सरकार बा कानूनद्वारा स्थापित निकायले कुनै सम्झौता गरी गठन गरेको सङ्गठित संस्था,
|
| 39 |
+
(द) प्रत्यक्ष बा अप्रत्यक्ष रुपमा नेपाल सरकार बा विदेशी राष्ट्र बा अन्तरराष्ट्रिय संघ/संस्थाबाट रकम प्राप्त गरेर सञ्चालन भएका गैरसरकारी संघ/संस्थाहरु,
|
| 40 |
+
(९दक) प्रदेश सरकारको पूर्ण बा आंशिक स्वामित्व बा नियन्त्रणमा रहेको बा अनुदानमा सञ्चालित बा प्रदेश सरकारको अनुदान प्राप्त संगठित संस्था,
|
| 41 |
+
(९दख) प्रदेश सरकार बा कानूनद्वारा स्थापित ��िकायले कुनै सम्झौता गरी गठन गरेको संगठित संस्था,
|
| 42 |
+
(९दग) प्रत्यक्ष बा अप्रत्यक्ष रुपमा प्रदेश सरकारबाट रकम प्राप्त गरेर सञ्चालन भएका गैरसरकारी संघर संस्थाहरु,
|
| 43 |
+
(९) नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी सार्वजनिक निकाय भनी तोकेका अन्य निकाय बा संस्था।
|
| 44 |
+
|
| 45 |
+
(ख) "सूचना" भन्नाले सार्वजनिक निकायबाट सम्पादन हुने बा भएको सार्वजनिक महत्वको काम, तत्सम्बन्धी कारबाही बा निर्णयसँग सम्बन्धित कुनै लिखत, सामग्री बा जानकारी सम्झनु पर्छ।
|
| 46 |
+
(ग) "सार्वजनिक महत्व" भन्नाले सार्वजनिक सरोकारको बिषय सम्झनु पर्छ।
|
| 47 |
+
(घ) "लिखत" भन्नाले लिपिबद्ध भएको जुनसुकै किसिमको लिखत सम्झनु पर्छ र सो शब्दले कुनै यन्त्रको माध्यमबाट सङ्लन बा अद्यावधिक गरिएको बा मुद्रित बा पुनः प्रस्तुत गर्न सकिने श्रव्य-दृश्य सामग्री समेतलाई जनाउँछ।
|
| 48 |
+
(ङ) "सूचनाको हक" भन्नाले सार्वजनिक निकायमा रहेको सार्वजनिक महत्वको सूचना माग्ने र पाउने अधिकार सम्झनु पर्छ र सो शब्दले सार्वजनिक निकायमा रहेको कुनै लिखत, सामग्री बा सो निकायको काम कारबाहीको अध्ययन बा अवलोकन गर्ने, त्यस्तो लिखतको प्रमाणित प्रतिलिपि प्राप्त गर्ने, सार्वजनिक महत्वको निर्माण कार्य भैरहेको स्थलको भ्रमण र अवलोकन गर्ने, कुनै सामग्रीको प्रमाणित नमूना लिने बा कुनै पनि किसिमको यन्त्रमा राखिएको सूचना त्यस्तो यन्त्र मार्फत प्राप्त गर्ने अधिकार समेतलाई जनाउँछ।
|
| 49 |
+
(च) "सूचना अधिकारी" भन्नाले दफा ६ बमोजिम तोकिएको व्यक्ति सम्झनु पर्छ।
|
| 50 |
+
(छ) "प्रमुख" भन्नाले सार्वजनिक निकायको प्रमुख सम्झनु पर्छ।
|
| 51 |
+
(ज) "आयोग" भन्नाले दफा ११ बमोजिमको राष्ट्रिय सूचना आयोग सम्झनु पर्छ।
|
| 52 |
+
(झ) "प्रमुख सूचना आयुक्त" भन्नाले दफा ११ बमोजिम नियुक्त व्यक्ति सम्झनु पर्छ।
|
| 53 |
+
(ज) "सूचना आयुक्त" भन्नाले दफा ११ बमोजिम नियुक्त व्यक्ति सम्झनु पर्छ।
|
| 54 |
+
(ट) "तोकिएको" बा "तोकिए बमोजिम" भन्नाले यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा तोकिएको बा तोकिए बमोजिम सम्झनु पर्छ।
|
| 55 |
+
|
| 56 |
+
---
|
| 57 |
+
|
| 58 |
+
### परिच्छेद—२
|
| 59 |
+
**सूचनाको हक र सूचना प्रवाह सम्बन्धी व्यवस्था**
|
| 60 |
+
|
| 61 |
+
**३. सूचनाको हक हुने:**
|
| 62 |
+
(१) प्रत्येक नेपाली नागरिकलाई यस ऐनको अधीनमा रही सूचनाको हक हुनेछ।
|
| 63 |
+
(२) प्रत्येक नेपाली नागरिकलाई सार्वजनिक निकायमा रहेको सूचनामा पहुँच हुनेछ।
|
| 64 |
+
(३) उपदफा (१) र (२) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि सार्वजनिक निकायमा रहेको देहायको बिषय सम्बन्ध��� सूचना प्रवाह गरिने छैन:
|
| 65 |
+
(क) नेपालको सार्वभौमसत्ता, अखण्डता, राष्ट्रिय सुरक्षा, सार्वजनिक शान्ति सुव्यवस्था बा अन्तर्राष्ट्रिय सम्बन्धमा गम्भीर खलल पार्ने,
|
| 66 |
+
(ख) अपराधको अनुसन्धान, तहकिकात तथा अभियोजनमा प्रत्यक्ष असर पार्ने,
|
| 67 |
+
(ग) आर्थिक, व्यापारिक तथा मौद्रिक हित बा बौद्धिक सम्पत्तिको संरक्षण बा बैद्विङ् बा व्यापारिक गोपनीयतामा गम्भीर आघात पार्ने,
|
| 68 |
+
(घ) बिभिन्न जातजाति बा सम्प्रदायबीचको सुसम्बन्धमा प्रत्यक्ष रुपमा खलल पार्ने,
|
| 69 |
+
(ङ) व्यक्तिगत गोपनीयता र व्यक्तिको जीउ, ज्यान, सम्पत्ति, स्वास्थ्य, बा सुरक्षामा खतरा पुएयाउने।
|
| 70 |
+
तर त्यसरी सूचना प्रवाह नगर्नु पर्ने उचित र पर्याप्त कारण भएकोमा बाहेक त्यस्तो सूचना प्रवाह गर्ने दायित्वबाट सार्वजनिक निकाय पन्छिन पाउने छैन।
|
| 71 |
+
(४) सार्वजनिक निकायको अभिलेखमा यस ऐन बमोजिम प्रवाह गर्न मिल्ने र नमिल्ने सूचना भए सूचना अधिकारीले प्रवाह गर्न मिल्ने सूचना छुट्याएर निवेदकलाई उपलब्ध गराउनु पर्नेछ।
|
| 72 |
+
|
| 73 |
+
**४. सार्वजनिक निकायको दायित्व:**
|
| 74 |
+
(१) प्रत्येक सार्वजनिक निकायले नागरिकको सूचनाको हकको सम्मान र संरक्षण गर्नु गराउनु पर्नेछ।
|
| 75 |
+
(२) उपदफा (१) को प्रयोजनको लागि देहायका काम गर्नु सार्वजनिक निकायको दायित्व हुनेछ:
|
| 76 |
+
(क) सूचना बर्गीकरण र अद्यावधिक गरी समय समयमा सार्वजनिक, प्रकाशन तथा प्रसारण गर्ने गराउने,
|
| 77 |
+
(ख) सूचनामा नागरिकको पहुँच सरल र सहज बनाउने,
|
| 78 |
+
(ग) आफ्नो काम कारबाही खुला र पारदर्शी रुपमा गर्ने,
|
| 79 |
+
(घ) आफ्ना कर्मचारीको लागि उपयुक्त तालीम र प्रशिक्षणको व्यवस्था गर्ने।
|
| 80 |
+
(३) सार्वजनिक निकायले उपदफा (२) को खण्ड (क) बमोजिम सूचना सार्वजनिक, प्रकाशन वा प्रसारण गर्दा विभिन्न राष्ट्रिय भाषा तथा आमसञ्चारका माध्यमबाट गर्न सक्नेछ।
|
| 81 |
+
|
| 82 |
+
**५. सूचनाको अद्यावधिक र प्रकाशन:**
|
| 83 |
+
(१) सार्वजनिक निकायले आफ्नो निकायसँग सम्बन्धित सूचना अद्यावधिक गरी राख्नु पर्नेछ।
|
| 84 |
+
(२) सार्वजनिक निकायले सम्भव भएसम्म यो ऐन लागू हुनुभन्दा कम्तीमा बीस वर्ष अघिसम्मका आफ्नो निकायसँग सम्बन्धित सूचना उपदफा (१) बमोजिम अद्यावधिक गर्नु गराउनु पर्नेछ।
|
| 85 |
+
(३) सार्वजनिक निकायले सो निकायसँग सम्बन्धित देहायका सूचना सूचीकृत गरी प्रकाशन गर्नु पर्नेछ:
|
| 86 |
+
(क) निकायको स्वरुप र प्रकृति,
|
| 87 |
+
(ख) निकायको काम, कर्तव्य र अधिकार,
|
| 88 |
+
(ग) निकायमा रहने कर्मचारी संख्या र कार्य विवरण,
|
| 89 |
+
(घ) निकायबाट ��्रदान गरिने सेवा,
|
| 90 |
+
(ङ) सेवा प्रदान गर्ने निकायको शाखा र जिम्मेबार अधिकारी,
|
| 91 |
+
(च) सेवा प्राप्त गर्न लाग्ने दस्तुर र अवधि,
|
| 92 |
+
(छ) निर्णय गर्ने प्रक्रिया र अधिकारी,
|
| 93 |
+
(ज) निर्णय उपर उजुरी सुन्ने अधिकारी,
|
| 94 |
+
(झ) सम्पादन गरेको कामको विवरण,
|
| 95 |
+
(ज) सूचना अधिकारी र प्रमुखको नाम र पद,
|
| 96 |
+
(ट) ऐन, नियम, विनियम वा निर्देशिकाको सूची,
|
| 97 |
+
(ट) आम्दानी, खर्च तथा आर्थिक कारोबार सम्बन्धी अद्यावधिक विवरण,
|
| 98 |
+
(ड) तोकिए बमोजिमका अन्य विवरण।
|
| 99 |
+
(४) सार्वजनिक निकायले उपदफा (३) बमोजिमको सूचना यो ऐन प्रारम्भ भएको मितिले तीन महिनाभित्र र त्यसपछि प्रत्येक तीन महिनामा अद्यावधिक गरी प्रकाशन गर्नु पर्नेछ।
|
| 100 |
+
|
| 101 |
+
**६. सूचना अधिकारीको व्यवस्था:**
|
| 102 |
+
(१) सार्वजनिक निकायले आफ्नो कार्यालयमा रहेको सूचना प्रवाह गर्ने प्रयोजनको लागि सूचना अधिकारीको व्यवस्था गर्नेछ।
|
| 103 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम सूचना प्रवाह गर्ने प्रयोजनको लागि प्रमुखले आफ्नो कार्यालयमा रहेको सूचना नियमित रुपमा सूचना अधिकारीलाई उपलब्ध गराउनु पर्नेछ।
|
| 104 |
+
(३) सार्वजनिक निकायले सूचना प्रवाह गर्ने प्रयोजनको निम्ति आवश्यकतानुसार सूचना शाखाको व्यवस्था गर्न सक्नेछ।
|
| 105 |
+
|
| 106 |
+
**७. सूचना प्राप्त गर्ने कार्यबिधि:**
|
| 107 |
+
(१) यस ऐन बमोजिम कुनै सूचना प्राप्त गर्न चाहने नेपाली नागरिकले त्यस्तो सूचना प्राप्त गर्नु पर्ने कारण खुलाई सम्बन्धित सूचना अधिकारी समक्ष निवेदन दिनु पर्नेछ।
|
| 108 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम निवेदन प्राप्त भएमा सूचना अधिकारीले तत्काल उपलब्ध गराउन सकिने प्रकृतिको सूचना भए तत्काल र तत्काल उपलब्ध गराउन नसकिने प्रकृतिको सूचना भए निवेदन प्राप्त भएको मितिले पन्ध्र दिनभित्र निवेदकलाई सूचना उपलब्ध गराउनु पर्नेछ।
|
| 109 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम तत्काल सूचना उपलब्ध गराउन नसकिने भएमा सूचना अधिकारीले सोको कारण सहितको जानकारी तुरुन्त निवेदकलाई गराउनु पर्नेछ।
|
| 110 |
+
(४) उपदफा (३) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि सूचना अधिकारीले कुनै व्यक्तिको जीउ-ज्यानको सुरक्षासँग सम्बन्धित सूचना माग गरेको रहेछ भने त्यस्तो सूचना माग गरेको चौबीस घण्टाभित्र निवेदकलाई उपलब्ध गराउनु पर्नेछ।
|
| 111 |
+
(५) सूचना अधिकारीले निवेदकद्वारा माग भएको सूचना सम्भव भएसम्म माग भएको स्वरुपमा नै उपलब्ध गराउनु पर्नेछ।
|
| 112 |
+
(६) उपदफा (५) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि निवेदकले माग गरेको स्वरुपमा सूचना उपलब्ध गराउँदा सूचनाको स्रोत ब��ग्रने, भत्कने वा नष्ट हुने सम्भावना भएमा सूचना अधिकारीले सोको कारण खोली उपयुक्त स्वरुपमा निवेदकलाई सूचना उपलब्ध गराउन सक्नेछ।
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| 113 |
+
(७) कुनै व्यक्तिले उपदफा (१) बमोजिम कुनै लिखत, सामग्री वा काम कारबाहीको अध्ययन वा अवलोकन गर्नको लागि निवेदन दिएको भए सूचना अधिकारीले निवेदकलाई त्यस्तो लिखत, सामग्री वा काम कारबाहीको अध्ययन वा अवलोकनको निमित्त मनासिब समय उपलब्ध गराउनेछ।
|
| 114 |
+
(८) उपदफा (१) बमोजिम प्राप्त भएको निबेदन जाँचबुझ गर्दा निबेदकले माग गरेको सूचना आफ्नो निकायसँग सम्बन्धित नदेखिएमा सूचना अधिकारीले सो कुराको जानकारी तुरुन्त निबेदकलाई दिनु पर्नेछ।
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| 115 |
+
|
| 116 |
+
**८. सूचना बापत लाग्ने दस्तुर:**
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| 117 |
+
(१) दफा ७ बमोजिम सूचना माग गर्दा निबेदकले तोकिए बमोजिमको दस्तुर सम्बन्धित निकायमा बुझाउनु पर्नेछ।
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| 118 |
+
तर कुनै सूचनाको सन्दर्भमा प्रचलित कानूनमा छुट्टै दस्तुरको व्यवस्था रहेकोमा सोही बमोजिम हुनेछ।
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| 119 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम दस्तुर तोक्दा सूचना उपलब्ध गराउँदा लाग्ने वास्तविक लागतको आधारमा तोकिनेछ।
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| 120 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम तोकिएको दस्तुर लागतभन्दा बढी भएको लागेमा सम्बन्धित व्यत्किले आयोग समक्ष उजूरी दिन सक्नेछ।
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| 121 |
+
(४) उपदफा (३) बमोजिम परेको उजुरी जाँचबुझ गर्दा उपदफा (२) बिपरीत दस्तुर तोकेको देखिएमा आयोगले त्यस्तो दस्तुर पुनरावलोकन गर्न आदेश दिन सक्नेछ।
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| 122 |
+
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| 123 |
+
**९. उजूरी दिन सक्ने:**
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| 124 |
+
(१) सूचना अधिकारीले सूचना उपलब्ध नगराएमा, सूचना दिन अस्वीकार गरेमा, आंशिक रुपमा सूचना उपलब्ध गराएमा बा गलत सूचना दिएमा बा सरोकारबाला होइन भनी सूचना नदिएमा सम्बन्धित व्यत्किले त्यसरी सूचना नपाएको बा आंशिक रुपमा सूचना पाएको मितिले सात दिनभित्र प्रमुख समक्ष उजूरी दिन सक्नेछ।
|
| 125 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम प्राप्त उजूरी जाँचबुझ गर्दा सूचना नदिएको बा आंशिक रुपमा सूचना दिएको बा गलत सूचना दिएको देखिएमा प्रमुखले निबेदकद्वारा माग भए बमोजिमको सूचना उपलब्ध गराउन सूचना अधिकारीलाई आदेश दिनेछ र त्यसरी आदेश भएमा सूचना अधिकारीले सम्बन्धित निबेदकलाई सूचना उपलब्ध गराउनु पर्नेछ।
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| 126 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम जाँचबुझ गर्दा सूचना अधिकारीले जानी जानी बा बद्नीयतपूर्वक सूचना नदिएको, सूचना दिन अस्वीकार गरेको बा आंशिक रुपमा सूचना दिएको बा गलत सूचना दिएको देखिएमा प्रमुखले त्यस्तो सूचना अधिकारीलाई प्रचलित कानून बमोजिम विभागीय कारब���ही गर्न सक्नेछ।
|
| 127 |
+
(४) उपदफा (२) बमोजिम जाँचबुझ गर्दा सूचना दिन नमिल्ने देखिएमा प्रमुखले सोही व्यहोराको निर्णय गरी सोको कारण सहितको जानकारी निबेदकलाई दिनु पर्नेछ।
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| 128 |
+
|
| 129 |
+
**१०. पुनरावेदन दिन सक्ने:**
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| 130 |
+
(१) दफा ९ को उपदफा (४) बमोजिम प्रमुखले गरेको निर्णयउपर चित्त नवुङने व्यत्तिले त्यस्तो निर्णयको जानकारी पाएको मितिले पैतीस दिनभित्र आयोग समक्ष पुनरावेदन दिन सक्नेछ।
|
| 131 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम प्राप्त भएको पुनरावेदनको कारबाही र किनारा गर्दा आयोगले सम्बन्धित प्रमुख बा सूचना अधिकारीलाई आफू समक्ष उपस्थित गराई बयान गराउन, कुनै लिखत पेश गर्न लगाउन, सो सम्बन्धमा साक्षी प्रमाण बुझ्न बा सार्वजनिक निकायबाट कुनै लिखतको नक्कल माग गर्न सक्नेछ।
|
| 132 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम पुनरावेदनको कारबाही र किनारा गर्दा आयोगले देहाय बमोजिम गर्न सक्नेछ:
|
| 133 |
+
(क) पुनरावेदनको व्यहोरा मनासिब देखिएमा समयाबधि तोकी पुनरावेदकलाई बिना शुल्क सूचना उपलव्ध गराउनु भनी सम्बन्धित प्रमुखको नाममा आदेश गर्न,
|
| 134 |
+
(ख) पुनरावेदन निरर्थक देखिएमा पुनरावेदन खारेज गर्न।
|
| 135 |
+
(४) आयोगले पुनरावेदन परेको साठी दिनभित्र सो पुनरावेदनको सम्बन्धमा आवश्यक कारबाही गरी अन्तिम निर्णय गर्नु पर्नेछ।
|
| 136 |
+
(५) आयोगले यस दफा बमोजिम पुनरावेदनको कारबाही गर्दा अपनाउनु पर्ने अन्य कार्यबिधि तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 137 |
+
|
| 138 |
+
---
|
| 139 |
+
|
| 140 |
+
### परिच्छेद-३
|
| 141 |
+
**आयोग सम्बन्धी व्यवस्था**
|
| 142 |
+
|
| 143 |
+
**११. आयोग सम्बन्धी व्यवस्था:**
|
| 144 |
+
(१) सूचनाको हकको संरक्षण, सम्बर्ढन र प्रचलन गर्ने कामका लागि एक स्वतन्त्र राष्ट्रिय सूचना आयोग रहनेछ।
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| 145 |
+
(२) आयोगमा प्रमुख सूचना आयुक्त र अन्य दुईजना सूचना आयुक्तहरू रहनेछन्।
|
| 146 |
+
(३) प्रमुख सूचना आयुक्त र सूचना आयुक्तको पदमा नियुक्तिको लागि सिफारिस गर्न देहाय बमोजिमको एक समिति रहनेछ:
|
| 147 |
+
(क) प्रधानमन्त्री - अध्यक्ष
|
| 148 |
+
(ख) सञ्चार तथा सूचना प्रविधि मन्त्री बा राज्यमन्त्री - सदस्य
|
| 149 |
+
(ग) सभापति, नेपाल पत्रकार महासंघ - सदस्य
|
| 150 |
+
(४) उपदफा (३) बमोजिमको समितिको सिफारिसमा नेपाल सरकारले प्रमुख सूचना आयुक्त र सूचना आयुक्तको नियुक्त गर्नेछ त्यसरी नियुक्ति गर्दा कम्तीमा एकजना महिला समावेश हुने गरी नियुक्त गर्नु पर्नेछ।
|
| 151 |
+
(५) उपदफा (३) बमोजिमको समितिले प्रमुख सूचना आयुक्त र सूचना आयुक्तको पदमा नियुक्तिको लागि सिफारिस गर्दा सम्भव भएसम्म समावेशी सिद्धान्तको अनुसरण गर्नेछ।
|
| 152 |
+
(६) उपदफा (३) ब��ोजिम नियुक्तिको सिफारिस गर्दा अपनाउने कार्यविधि सिफारिस समिति आफैले निर्धारण गरे बमोजिम हुनेछ।
|
| 153 |
+
|
| 154 |
+
**१२. योग्यता:**
|
| 155 |
+
प्रमुख सूचना आयुक्त र सूचना आयुक्तको पदमा नियुक्ति हुन देहाय बमोजिमको योग्यता पुगेको हुनु पर्नेछ:
|
| 156 |
+
(क) नेपाली नागरिक,
|
| 157 |
+
(ख) मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयबाट कम्तीमा स्नातकोपाधि हासिल गरेको, र
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| 158 |
+
(ग) आमसञ्चार, कानून न्याय, सार्वजनिक प्रशासन, सूचना प्रविधि बा व्यवस्थापनको क्षेत्रमा कम्तीमा पन्ध्र वर्षको अनुभव हासिल गरेको।
|
| 159 |
+
|
| 160 |
+
**१३. अयोग्यता:**
|
| 161 |
+
देहायको व्यक्ति प्रमुख सूचना आयुक्त र सूचना आयुक्तको पदमा नियुक्त हुन अयोग्य हुनेछ:
|
| 162 |
+
(क) दफा १२ बमोजिमको योग्यता नभएको,
|
| 163 |
+
(ख) नैतिक पतन देखिने फौजदारी कसूरमा अदालतबाट दोपी ठहरी सजाय पाएको,
|
| 164 |
+
(ग) सरकारी बा सार्वजनिक संस्थाको बहालबाला कर्मचारी,
|
| 165 |
+
(घ) कुनै राजनैतिक पदमा बहाल रहेको, र
|
| 166 |
+
(ङ) प्रचलित कानून बमोजिम नियुक्तिको लागि अयोग्य भएको।
|
| 167 |
+
|
| 168 |
+
**१४. पदावधि:**
|
| 169 |
+
(१) प्रमुख सूचना आयुक्त र सूचना आयुक्तको पदावधि पाँच बर्षको हुनेछ र निज सो पदमा पुनः नियुक्त हुन सक्ने छैन।
|
| 170 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि सो उपदफामा लेखिएको पदावधिको अधीनमा रही सूचना आयुक्त प्रमुख सूचना आयुक्तको पदमा नियुक्त हुन सक्नेछ।
|
| 171 |
+
(३) आयोगको प्रमुख सूचना आयुक्त र सूचना आयुक्तहरूको पदावधि समाप्त हुनुभन्दा एक महिना अगाडि नै दफा ११ को उपदफा (३) बमोजिमको सिफारिस समितिले नयाँ नियुक्तिको लागि सिफारिस गर्नु पर्नेछ।
|
| 172 |
+
|
| 173 |
+
**१५. पद रिक्त हुने:**
|
| 174 |
+
देहायका अवस्थामा प्रमुख सूचना आयुक्त र सूचना आयुक्तको पद रिक्त भएको मानिनेछ:
|
| 175 |
+
(क) निजको मृत्यु भएमा,
|
| 176 |
+
(ख) निजको उमेर पैंसट्टी वर्ष पूरा भएमा,
|
| 177 |
+
(ग) निजले प्रधानमन्त्री समक्ष राजीनामा दिएमा,
|
| 178 |
+
(घ) निजको पदावधि पूरा भएमा,
|
| 179 |
+
(ङ) निज नैतिक पतन देखिने फौजदारी कसूरमा अदालतबाट दोषी ठहरिएमा, बा
|
| 180 |
+
(च) निजलाई दफा १६ बमोजिम आफ्नो पदबाट हटाएमा।
|
| 181 |
+
|
| 182 |
+
**१६. पदबाट हटाउन सक्ने:**
|
| 183 |
+
व्यवस्थापिका-संसदको सूचना तथा सञ्चारसँग सम्बन्धित समितिको सम्पूर्ण सदस्य संख्याको कम्तीमा दुई तिहाई सदस्य उपस्थित भई बसेको बैटकको दुई तिहाई बहुमतबाट कार्यक्षमताको अभाव बा खराब आचरण भएको बा ईमान्दारीपूर्वक आफ्नो पदीय कर्तव्यको पालना नगरेको आधारमा पदमा रहिरहनु उपयुक्त छैन भनी निर्णय भएको प्रस्ताव व्यवस्थापिका-संसदको बैटकबाट पारित भएमा त्यस्तो प्रमु�� सूचना आयुक्त बा सूचना आयुक्त पदबाट हट्नेछ।
|
| 184 |
+
तर त्यस्तो आरोप लागेको प्रमुख सूचना आयुक्त बा सूचना आयुक्तलाई आफ्नो सफाई पेश गर्न मनासिब माफिकको मौकाबाट बञ्चित गरिने छैन।
|
| 185 |
+
|
| 186 |
+
**१७. सेबा शर्त सम्बन्धी व्यवस्था:**
|
| 187 |
+
प्रमुख सूचना आयुक्त र सूचना आयुक्तको पारिश्रमिक, सेबा शर्त र सुविधा सम्बन्धी व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 188 |
+
|
| 189 |
+
**१८. शपथ:**
|
| 190 |
+
आफ्नो कार्यभार समाल्नु अघि प्रमुख सूचना आयुक्तले प्रधानमन्त्री र सूचना आयुक्तले प्रमुख सूचना आयुक्त समक्ष अनुसूची बमोजिमको ढाँचामा शपथ ग्रहण गर्नु पर्नेछ।
|
| 191 |
+
|
| 192 |
+
**१९. आयोगको काम, कर्तव्य र अधिकार:**
|
| 193 |
+
यस ऐनमा अन्यत्र उल्लेखित काम, कर्तव्य र अधिकारको अतिरिक्त आयोगको काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछ:
|
| 194 |
+
(क) सार्वजनिक निकायमा रहेको सार्वजनिक महत्वको सूचना सम्बन्धी अभिलेख, लिखत तथा अन्य सामग्रीको अध्ययन तथा अवलोकन गर्ने,
|
| 195 |
+
(ख) त्यस्तो निकायमा रहेको अभिलेख, लिखत बा अन्य सामग्री सम्बन्धी सूचना सूचीकृत गरी मिलाई राख्न आदेश दिने,
|
| 196 |
+
(ग) नागरिकको जानकारीको लागि सूचना सार्वजनिक गर्न सम्बन्धित सार्वजनिक निकायलाई आदेश दिने,
|
| 197 |
+
(घ) समय किटान गरी निवेदकले माग गरेको सूचना दिन सम्बन्धित सार्वजनिक निकायलाई आदेश दिने,
|
| 198 |
+
(ङ) यस ऐन बमोजिमको दायित्व पालना गर्न गसउन सम्बन्धित पक्षलाई आदेश दिने,
|
| 199 |
+
(च) नेपाल सरकार तथा सूचना तथा सञ्चारसँग सम्बन्धित विभिन्न निकायहरुलाई सूचनाको हकको संरक्षण र सम्बर्पनका लागि आवश्यक सुझाव दिने बा सिफारिस गर्ने,
|
| 200 |
+
(छ) सूचनाको हकको संरक्षण, सम्बर्पन र प्रचलन गर्नको लागि आवश्यक पर्ने अन्य उपयुक्त आदेश दिने।
|
| 201 |
+
|
| 202 |
+
**२०. अधिकार प्रत्यायोजन:**
|
| 203 |
+
आयोगले आफ्नो दफा ९ बमोजिम पुनरावेदनको कारबाही र किनारा गर्ने अधिकार बाहेकका अन्य काम, कर्तव्य र अधिकारमध्ये कुनै काम, कर्तव्य र अधिकार प्रमुख सूचना आयुक्त, सूचना आयुक्त बा कुनै निकाय बा अधिकारीलाई तोकिएको शर्तको अधीनमा रही प्रयोग तथा पालना गर्न पाउने गरी प्रत्यायोजन गर्न सक्नेछ।
|
| 204 |
+
|
| 205 |
+
**२१. आयोगको कार्यालय:**
|
| 206 |
+
आयोगको केन्द्रीय कार्यालय काठमाडौं उपत्यकामा रहनेछ र आयोगले आवश्यकता अनुसार नेपालका विभिन्न स्थानमा आफ्नो कार्यालय खोल्न सक्नेछ।
|
| 207 |
+
|
| 208 |
+
**२२. आयोगको कर्मचारी:**
|
| 209 |
+
(१) आयोगमा आवश्यक संख्यामा कर्मचारीहरु रहनेछन्।
|
| 210 |
+
(२) आयोगलाई आवश्यक पर्ने कर्मचारी नेपाल सरकारले व्यवस्था गर्नेछ।
|
| 211 |
+
|
| 212 |
+
**२३. ���योगको खर्च:**
|
| 213 |
+
(१) आयोगको लागि आवश्यक खर्चको व्यवस्था नेपाल सरकारले गर्नेछ।
|
| 214 |
+
(२) आयोगले आफूलाई आवश्यक पर्ने बित्तीय श्रोत नेपाल सरकारको पूर्वस्वीकृति लिएर अन्य क्षेत्रबाट पनि प्राप्त गर्न सक्नेछ।
|
| 215 |
+
|
| 216 |
+
**२४. आयोगलाई सहयोग गर्नु पर्ने:**
|
| 217 |
+
सार्वजनिक निकायले आयोगको काम कारबाहीमा सहयोग गर्नु पर्नेछ।
|
| 218 |
+
|
| 219 |
+
**२५. बार्षिक प्रतिवेदन:**
|
| 220 |
+
(१) आयोगले प्रत्येक बर्ष आफूले गरेका काम कारवाहीको बार्षिक प्रतिवेदन प्रधानमन्त्री मार्फत व्यवस्थापिका-संसदमा प्रस्तुत गर्नु पर्नेछ।
|
| 221 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको प्रतिवेदन आयोगले सर्वसाधारणको जानकारीको लागि सार्वजनिक रुपमा प्रकाशन गर्नेछ।
|
| 222 |
+
|
| 223 |
+
**२६. नेपाल सरकारसँग सम्पर्क:**
|
| 224 |
+
आयोगले नेपाल सरकारसँग सम्पर्क राख्दा सञ्चार तथा सूचना प्रबिधि मन्त्रालय मार्फत राख्नु पर्नेछ।
|
| 225 |
+
|
| 226 |
+
---
|
| 227 |
+
|
| 228 |
+
### परिच्छेद-४
|
| 229 |
+
**सूचनाको संरक्षण सम्बन्धी व्यवस्था**
|
| 230 |
+
|
| 231 |
+
**२७. सूचनाको बर्गीकरण सम्बन्धी व्यवस्था:**
|
| 232 |
+
(१) सार्वजनिक निकायमा रहेका दफा ३ को उपदफा (३) सँग सम्बन्धित सूचनाको संरक्षण गर्नका लागि नीतिगत रुपमा सूचनाको बर्गीकरण गर्न देहाय बमोजिमको एक समिति रहनेछ:
|
| 233 |
+
(क) नेपाल सरकारको मुख्य सचिव
|
| 234 |
+
(ख) सम्बन्धित मन्त्रालयका सचिव
|
| 235 |
+
(ग) कार्यालय प्रमुख बा अध्यक्षले तोकेको सम्बन्धित बिषयको विशेषज्ञ
|
| 236 |
+
(२) उपदफा (१) अन्तर्गतको समितिले सूचनाको बर्गीकरण गर्ने प्रयोजनको लागि दफा ३ को उपदफा (३) सँग सम्बन्धित सूचना कति बर्षसम्म गोप्य राख्नु पर्ने हो सोको अबधि र संरक्षण गर्ने तरिका समेतका बारेमा निश्चित मापदण्ड निर्धारण गरी सोको जानकारी आयोगलाई दिनु पर्नेछ।
|
| 237 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम समितिले गरेको बर्गीकरणमा चित्त नबुढने व्यत्तिले त्यस्तो सूचना सार्वजनिक हुनु पर्ने भनी आयोगमा पुनरावलोकनको लागि निवेदन दिन सक्नेछ।
|
| 238 |
+
(४) उपदफा (३) बमोजिम परेको निवेदनउपर आयोगले पुनरावलोकन गर्दा सो सूचना गोप्य राख्नु पर्ने नदेखिएमा सार्वजनिक गर्न आदेश दिनेछ।
|
| 239 |
+
(५) उपदफा (२) बमोजिम बर्गीकरण गरिएको सूचना त्यस्तो सूचनाको प्रकृति अनुसार बढीमा तीस बर्षको अबधि सम्म गोप्य राख्न सकिनेछ।
|
| 240 |
+
(६) उपदफा (५) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भएतापनि त्यसरी गोप्य राख्नु पर्ने सूचना गोप्य राखिराख्नु पर्ने वा नपर्ने सम्बन्धमा समितिले प्रत्येक दश बर्षमा पुनरावलोकन गर्नेछ।
|
| 241 |
+
(७) उपदफा (६) बमोजिम पुनरावलोकन गर्दा त्यस्तो सूचना थप अबधि सम्भको लागि गोप्य राखिराख्नु पर्ने भएमा त्यसरी गोप्य रहनु पर्ने अबधि खुलाई सो अबधि सम्म गोप्य राख्ने गरी र गोप्य राख्नु नपर्ने भएमा गोप्य राख्नु नपर्ने गरी बर्गीकरण गर्न सक्नेछ।
|
| 242 |
+
|
| 243 |
+
**२८. सूचनाको संरक्षण:**
|
| 244 |
+
(१) सार्वजनिक निकायले आफू समक्ष रहेका व्यक्तिगत प्रकृतिका सूचनाहरु अनधिकृत प्रकाशन र प्रसारण नहुने गरी संरक्षण गरिराख्नु पर्नेछ।
|
| 245 |
+
(२) सार्वजनिक निकायमा रहेका व्यक्तिगत सूचनाहरु देहायको अवस्थामा बाहेक सम्बन्धित व्यक्तिको लिखित सहमति बिना प्रयोग गर्न हुँदैन:
|
| 246 |
+
(क) कुनै व्यक्तिको जीवन वा सर्वसाधारणको स्वास्थ्य वा सुरक्षामा रहेको गम्भिर खतराको निवारण गर्ने सम्बन्धमा,
|
| 247 |
+
(ख) प्रचलित कानून बमोजिम प्रकट गर्नु पर्ने विषय भएमा,
|
| 248 |
+
(ग) भ्रष्टाचार नियन्त्रण गर्ने सम्बन्धमा।
|
| 249 |
+
|
| 250 |
+
**२९. सूचनादाताको संरक्षण:**
|
| 251 |
+
(१) सार्वजनिक निकायमा भएको वा भैरहेको वा हुनसक्ने भ्रष्टाचार, अनियमितता र प्रचलित कानून बमोजिम अपराध मानिने कुनै कार्यको सूचना दिनु सम्बन्धित सार्वजनिक निकायका कर्मचारीको दायित्व हुनेछ।
|
| 252 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम सूचना दिने सूचनादाताको पहिचान गोप्य राख्नु सूचना प्राप्तकर्ताको कर्तव्य हुनेछ।
|
| 253 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम सूचना दिएको कारणले त्यस्तो सूचनादातालाई पदबाट मुक्त गर्न वा कुनै किसिमको कानूनी दायित्व बहन गराउने गरी सजाय गरिने वा हानि नोक्सानी पुर्याउन पाईने छैन।
|
| 254 |
+
(४) उपदफा (३) विपरीत हुने गरी सूचनादातालाई सजाय गरेमा वा हानि नोक्सानी पुर्याएमा सूचनादाताले सो निर्णय बदर गराउन क्षतिपूर्तिको माग सहितको उजूरी आयोगमा गर्न सक्नेछ।
|
| 255 |
+
(५) आयोगले उपदफा (४) बमोजिम परेको उजूरीमा जाँचबुझ गर्दा सूचनादातालाई पदमुक्त गरेको भए त्यस्तो निर्णय बदर गर्न र सूचनादातालाई कुनै नोक्सानी पुगेको रहेछ भने क्षतिपूर्ति भराउन समेत आदेश दिनसक्नेछ।
|
| 256 |
+
|
| 257 |
+
**३०. व्यक्तिगत सूचना उपलब्ध गराउने:**
|
| 258 |
+
(१) कुनै व्यक्तिले सार्वजनिक निकायमा बहाल रहँदा सार्वजनिक पदसँग सम्बन्धित विषयको सूचना माग गरेमा त्यस्तो निकायले माग भए बमोजिम सम्बन्धित व्यक्तिलाई सूचना उपलब्ध गराउनु पर्नेछ।
|
| 259 |
+
(२) कुनै सरोकारबाला व्यक्तिले सार्वजनिक निकायमा रहेका आफूसँग सम्बन्धित विषयको सूचना माग गरेमा निजलाई सो सूचना उपलब्ध गराउनु पर्नेछ।
|
| 260 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम सूचना माग गर्ने र प्राप्त गर्ने कार्यबिधि दफा ७ मा उल्लेख भए बमोजिम हुनेछ।
|
| 261 |
+
(४) उपदफा (१) बमोजिम सूचना लिँदा दफा ६ बमोजिमको दस्तुर लाग्नेछ।
|
| 262 |
+
|
| 263 |
+
**३१. सूचनाको दुरुपयोग गर्न नहुने:**
|
| 264 |
+
(१) कुनै पनि व्यक्तिले सार्वजनिक निकायबाट प्राप्त गरेको सूचना जुन प्रयोजनको लागि प्राप्त गरेको हो सोही प्रयोजनको लागि प्रयोग नगरी दुरुपयोग गर्न हुँदैन।
|
| 265 |
+
(२) उपदफा (१) बिपरीत कुनै व्यक्तिले सूचनाको दुरुपयोग गरेमा सम्बन्धित सार्वजनिक निकायले सो सम्बन्धमा आयोग समक्ष उजूरी गर्न सक्नेछ।
|
| 266 |
+
|
| 267 |
+
---
|
| 268 |
+
|
| 269 |
+
### परिच्छेद-५
|
| 270 |
+
**सजाय तथा क्षतिपूर्ति सम्बन्धी व्यवस्था**
|
| 271 |
+
|
| 272 |
+
**३२. सजाय:**
|
| 273 |
+
(१) सार्वजनिक निकायको प्रमुख बा सूचना अधिकारीले मनासिब कारण बिना सूचना नदिएको बा दिन इन्कार गरेको, आंशिक रुपमा बा गलत सूचना दिएको बा सूचना नष्ट गरेको देखिएमा आयोगले त्यस्तो प्रमुख बा सूचना अधिकारीलाई एक हजारदेखि पच्चीस हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना गरी त्यस्तो प्रमुख बा सूचना अधिकारी बिभागीय कारबाही हुने पढमा रहेको भए निजलाई बिभागीय सजायको लागि सम्बन्धित निकायमा लेखी पठाउन सक्नेछ।
|
| 274 |
+
(२) सार्वजनिक निकायको प्रमुख बा सूचना अधिकारीले समयमा दिनु पर्ने सूचना बिना कारण समयमा उपलब्ध नगराई ढिलाई गरेमा जति दिन ढिलाई गरेको हो प्रति दिन दुई सय रुपैयाको दरले निजलाई जरिबाना हुनेछ।
|
| 275 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम आयोगबाट बिभागीय कारबाहीको लागि लेखी आएमा सार्वजनिक निकायले तीन महिनाभित्र त्यस्तो प्रमुख बा सूचना अधिकारीलाई बिभागीय कारबाही गरी सोको जानकारी आयोगलाई दिनु पर्नेछ।
|
| 276 |
+
(४) कुनै व्यक्तिले सार्वजनिक निकायबाट प्राप्त गरेको सूचना जुन प्रयोजनको निमित्त प्राप्त गरेको हो सोही प्रयोजनको लागि प्रयोग नगरी दुरुपयोग गरेको देखिएमा आयोगले सूचनाको दुरुपयोगको गम्भीरता हेरी त्यस्तो व्यक्तिलाई पाँच हजार देखि पच्चीस हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना गर्न सक्नेछ।
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| 277 |
+
(५) आयोगले यस ऐन बमोजिम गरेको निर्णय बा दिएको आदेश पालना नगर्ने व्यक्तिलाई आयोगले दश हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना गर्न सक्नेछ।
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+
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**३३. क्षतिपूर्ति:**
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(१) सार्वजनिक निकायको प्रमुख बा सूचना अधिकारीले यस ऐन बमोजिम सूचना नदिएको, दिन इन्कार गरेको, आंशिक रुपमा बा गलत सूचना दिएको बा सूचना नष्ट गरेको कारणले कुनै व्यक्तिलाई हानि नोक्सानी पर्न गएमा त्यस्तो व्यक्तिले सूचना नपाएको, आंशिक रुपमा बा गलत सूचना पाएको बा सूचना नष्ट गरेको मितिले तीन महिनाभि��्र आयोग समक्ष क्षतिपूर्तिको लागि निबेदन दिन सक्नेछ।
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+
(२) उपदफा (१) बमोजिम प्राप्त निबेदन जाँचबुझ गर्दा मनासिब देखिएमा आयोगले निबेदकलाई पर्न गएको वास्तविक हानि नोक्सानीलाई विचार गरी मनासिब माफिकको क्षतिपूर्ति सम्बन्धित निकायबाट भराई दिन सक्नेछ।
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**३४. पुनराबेदन:**
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दफा ३२ बमोजिम आयोगले गरेको निर्णयउपर चित्त नबुझ्ने व्यक्तिले त्यस्तो निर्णयको जानकारी पाएको मितिले पेंतीस दिनभित्र उच्च अदालतमा पुनराबेदन गर्न सक्नेछ।
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### परिच्छेद-६
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**विविध**
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**३५. सूचना सच्चाउन सकिने:**
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(१) सार्वजनिक निकायमा रहेको कुनै बिषयको सूचना गलत छ भन्ने कुरा कुनै व्यक्तिलाई लागेमा त्यस्तो व्यक्तिले सो सूचना सच्चाउनको लागि आवश्यक प्रमाण सहित सम्बन्धित प्रमुख समक्ष निबेदन दिन सक्नेछ।
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(२) उपदफा (१) बमोजिम निबेदन प्राप्त भएमा प्रमुखले सो सम्बन्धमा आवश्यक जाँचबुझ गर्नेछ र त्यसरी जाँचबुझ गर्दा आफ्नो निकायमा रहेको सूचना गलत भएको देखिएमा निबेदन परेको सात दिनभित्र त्यस्तो सूचना सच्चाई सोको जानकारी निबेदकलाई दिनु पर्नेछ।
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**३६. असल नियतले गरेको कामको बचाउ:**
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यस ऐनमा अन्यत्र जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि प्रमुख बा सूचना अधिकारीले सूचना प्रवाह गर्ने सम्बन्धमा असल नियतले गरेको काम कारबाहीको सम्बन्धमा निजउपर कुनै प्रकारको मुद्दा चलाइने र निजलाई कुनै सजाय गरिने छैन।
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**३७. यसै ऐन बमोजिम हुने:**
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यस ऐनमा लेखिए जति कुरामा यसै ऐन बमोजिम र अन्यमा प्रचलित कानून बमोजिम हुनेछ।
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**३८. नियम बनाउने अधिकार:**
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यस ऐनको उद्देश्य कार्यान्वयन गर्न नेपाल सरकारले आयोगसँग परामर्श गरी आवश्यक नियम बनाउन सक्नेछ।
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+
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+
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| 306 |
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### अनुसूची
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**(दफा १६ सँग सम्बन्धित)**
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| 308 |
+
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| 309 |
+
**शपथ**
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| 310 |
+
म ... ... ... ... ... ... ... ... ... मुलुक र जनताप्रति पूर्ण बफादार रही सत्य निष्ठापूर्वक प्रतिज्ञा गर्छु/ईश्वरको नाममा शपथ लिन्छु कि नेपालको राजकीय सत्ता र सार्वभौमसत्ता नेपाली जनतामा मात्र निहित रहनु पर्ने भनी जनताद्वारा जनआन्दोलन मार्फत अभिव्यक्त भावनालाई उच्च सम्मान गर्दै मुलुकको संविधान र कानूनप्रति निष्ठावान रही आफूले ग्रहण गरेको प्रमुख सूचना आयुक्त/सूचना आयुक्त पदको जिम्मेवारी र कर्तव्य कसैको डर, मोलाहिजा, पक्षपात, द्वेष वा लोभमा नपरी नागरिकको सुसूचित हुने हकको सम्मान गर्दै सूचनाको हक सम्बन्धी कानूनको प्रभावकारी प्रचलन र कार्यान्वयन गर्न क्रियाशील रहनेछु।
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+
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+
मिति:-
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| 313 |
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हस्ताक्षर
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section_10_pdf_3.txt
ADDED
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@@ -0,0 +1,313 @@
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# विज्ञापन (नियमन गर्ने) ऐन, २०७६
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+
**प्रमाणीकरण मिति**
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+
२०७६।०७।०६
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+
**संशोधन गर्ने ऐन**
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| 6 |
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केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०६२
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| 7 |
+
२०६२।०४।१४
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**संवत् २०७६ सालको ऐन नं. १४**
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+
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+
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| 11 |
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+
## विज्ञापन नियमन गर्ने सम्बन्धमा व्यवस्था गर्न बनेको ऐन
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| 13 |
+
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+
**प्रस्तावनाः**
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| 15 |
+
वस्तु वा सेबाको बजार प्रवर्द्धन वा बिक्री, वितरण गर्न वा त्यस्तो वस्तु वा सेबाको प्रचार प्रसारको लागि गरिने विज्ञापन तथा तत्सम्बन्धी व्यवसायलाई नियमन गर्ने सम्बन्धमा कानूनी व्यवस्था गर्न बाञ्छुनीय भएकोले, सङ्घीय संसदले यो ऐन बनाएको छ।
|
| 16 |
+
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| 17 |
+
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| 18 |
+
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| 19 |
+
## परिच्छेद-१
|
| 20 |
+
**प्रारम्भिक**
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| 21 |
+
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| 22 |
+
१. **संक्षिप्त नाम र प्रारम्भः**
|
| 23 |
+
(१) यस ऐनको नाम "विज्ञापन (नियमन गर्ने) ऐन, २०७६" रहेको छ।
|
| 24 |
+
(२) यो ऐन तुरून्त प्रारम्भ हुनेछ।
|
| 25 |
+
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| 26 |
+
२. **परिभाषाः**
|
| 27 |
+
विषय वा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
|
| 28 |
+
(क) "अध्यक्ष" भन्नाले बोर्डको अध्यक्ष सम्झनु पर्छ।
|
| 29 |
+
(ख) "तोकिएको" वा "तोकिए बमोजिम" भन्नाले यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा तोकिएको वा तोकिए बमोजिम सम्झनु पर्छ।
|
| 30 |
+
(ग) "बोर्ड" भन्नाले दफा १४ बमोजिमको विज्ञापन बोर्ड सम्झनु पर्छ।
|
| 31 |
+
(घ) "मन्त्रालय" भन्नाले नेपाल सरकारको सञ्चार तथा सूचना प्रविधि मन्त्रालय सम्झनु पर्छ।
|
| 32 |
+
(ङ) "विज्ञापन" भन्नाले कुनै वस्तु, सेवा, कार्यक्रम वा अवसरको बारेमा छापा, विद्युतीय माध्यम, अनलाइन, सामाजिक सञ्जाल, होर्डिङ बोर्ड, बेलुन वा कुनै संरचना लगायतका माध्यमबाट सार्वजनिक रुपमा प्रचार प्रसार गरिएको वा प्रचार प्रसार गर्ने उद्देश्यले तयार गरिएको शब्द, वाक्य, चित्र, तस्बिर, सङ्गेत, पोष्टर, पर्चा, प्रकाश, चिन्ह, संरचना वा जुनसुकै किसिमको श्रव्य, दृश्य वा श्रव्यदृश्य सम्झनु पर्छ।
|
| 33 |
+
(च) "सदस्य" भन्नाले बोर्डको सदस्य सम्झनु पर्छ र सो शब्दले बोर्डको अध्यक्षलाई समेत जनाउँछ।
|
| 34 |
+
(छ) "होर्डिङ बोर्ड" भन्नाले विज्ञापन प्रदर्शनको लागि राखिएको वा राखिने साधन सम्झनु पर्छ र सो शब्दले डिजिटल डिस्प्ले, चलदृश्य बोर्ड, एलसीडी बोर्ड, लिड बोर्ड, रोलर बोर्ड, ग्लो बोर्ड, नियोन साइन, प्रोजेक्टर, स्टल डिस्प्ले वा यस्तै अन्य प्रविधि वा प्रकारका बाह्य विज्ञापनको साधनलाई समेत जनाउँछ।
|
| 35 |
+
(ज) "विज्ञापन दाता" भन्नाले आफ्नो पक्षबाट विज्ञापन प्रकाशन, प्रसारण गर्न वा विज्ञापन राख्न लगाउने वा विज्ञापन गर्ने व्यक्ति वा संस्था सम्झनु पर्छ।
|
| 36 |
+
(झ) "विज्ञापन एजेन्सी" भन्नाले विज्ञापन सम्बन्ध�� सामग्री उत्पादन, वितरण वा विज्ञापन सम्बन्धी व्यवसाय गर्ने गरी प्रचलित कानून बमोजिम स्थापना भएका फर्म, संस्था वा कम्पनी सम्झनु पर्छ।
|
| 37 |
+
|
| 38 |
+
---
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| 39 |
+
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| 40 |
+
## परिच्छेद-२
|
| 41 |
+
**विज्ञापन सम्बन्धी व्यवस्था**
|
| 42 |
+
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| 43 |
+
३. **विज्ञापन गर्न सकिनेः**
|
| 44 |
+
कसैले आफूले बिक्री वितरण गर्ने वस्तु वा सेबाको गुण वा विशेषता समेत उल्लेख गरी त्यस्ता वस्तु वा सेबाको प्रवर्द्धन गर्न वा उपभोक्ता समक्ष वस्तु वा सेबाको छनोटको जानकारी पुन्याउन वा आफूले आयोजना गरेको कुनै कार्यक्रम वा अवसरको बारेमा जानकारी दिन वा सार्वजनिक हितको लागि कुनै विषयमा जानकारी गराउन यस ऐन तथा प्रचलित कानूनको अधीनमा रही विज्ञापन गर्न वा गराउन सक्नेछ।
|
| 45 |
+
|
| 46 |
+
४. **होर्डिङ बोर्डबाट विज्ञापन गर्न अनुमतिपत्र लिनु पर्नेः**
|
| 47 |
+
(१) सार्वजनिक स्थलबाट देखिने गरी होर्डिङ बोर्ड राख्न र त्यसमा विज्ञापन गर्न चाहने व्यक्तिले सम्बन्धित स्थानीय तहबाट अनुमतिपत्र लिनु पर्नेछ।
|
| 48 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि आफ्नो पेशा वा व्यवसाय गर्ने घर वा कार्यालयको परिसरभित्र सार्वजनिक सडक वा जग्गामा बाधा नपर्ने वा सर्वसाधारणको सुरक्षामा असर नपर्ने गरी आफ्नो पेशा वा व्यवसायका सम्बन्धमा यस ऐनको प्रतिकूल नहुने गरी तोकिएको आकारमा नबढ्ने गरी होर्डिङ बोर्ड राखी विज्ञापन गर्न बाधा पर्ने छैन।
|
| 49 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम होर्डिङ बोर्डबाट विज्ञापन गर्न चाहने व्यक्तिले अनुमतिपत्रको लागि सम्बन्धित स्थानीय तहको कार्यालयमा निबेदन दिनु पर्नेछ।
|
| 50 |
+
(४) उपदफा (३) बमोजिम प्राप्त निबेदन उपर आवश्यक जाँचबुझ गरी स्थानीय तहको कार्यालयले यस ऐन तथा प्रचलित कानून बमोजिम होर्डिङ बोर्डबाट विज्ञापन गर्ने अनुमतिपत्र दिन मनासिब देखेमा अनुमतिपत्र दिनेछ। त्यसरी अनुमतिपत्र प्राप्त व्यक्तिले अनुमतिपत्रमा उल्लिखित अवधि समाप्त भएपछि त्यस्तो होर्डिङ बोर्ड हटाउनु पर्नेछ।
|
| 51 |
+
(५) उपदफा (४) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि देहायको अवस्थामा होर्डिङ बोर्डबाट त्यस्तो विज्ञापन गर्न अनुमतिपत्र दिन सकिने छैनः-
|
| 52 |
+
(क) यस ऐन वा प्रचलित कानून प्रतिकूल हुने विज्ञापन भएमा,
|
| 53 |
+
(ख) सर्वसाधारणलाई आबतजाबत गर्न बाधा वा असुविधा हुने भएमा,
|
| 54 |
+
(ग) शहर वा स्थानको प्राकृतिक सौन्दर्यमा प्रतिकूल असर पर्ने भएमा,
|
| 55 |
+
(घ) धार्मिक, सांस्कृतिक, पुरातात्विक, ऐतिहासिक स्थल वा विश्वसम्पदा सूचीमा सूचिकृत स्थानहरुको मौलिक संस्कृति तथा प्राकृतिक सौन्दर्यमा प्रतिकूल असर पर्ने भएमा,
|
| 56 |
+
(ङ) सडक पेटी तथा सार्वजनिक स्थानमा प्रतिकूल असर पर्ने भएमा,
|
| 57 |
+
(च) बिधुत, टेलिफोन लगायतका खम्बामा त्यस्तो बोर्ड राख्ने विषयमा,
|
| 58 |
+
(छ) सबारी आवागमनमा असर पर्ने भएमा,
|
| 59 |
+
(ज) कुनै घरको झ्याल, ढोका छेकी त्यस्तो घरमा हावा र घाम आउन बाधा पुग्ने भएमा,
|
| 60 |
+
(झ) स्थानीय कानूनमा तोकिएको अन्य व्यवस्थाको प्रतिकूल हुने गरी।
|
| 61 |
+
(६) होर्डिङ बोर्ड राख्ने अनुमतिपत्रको लागि दिने निवेदन, निवेदन साथ संलग्न गर्नु पर्ने विवरण तथा कागजात, दस्तुर तथा त्यस्तो अनुमतिपत्रको अवधि तथा तत्सम्बन्धी अन्य व्यवस्था स्थानीय तहको कानून बमोजिम हुनेछ।
|
| 62 |
+
|
| 63 |
+
५. **विज्ञापन गर्न नहुनेः**
|
| 64 |
+
(१) प्रचलित कानूनमा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि देहायका विषयमा विज्ञापन गर्न पाइने छैनः-
|
| 65 |
+
(क) प्रचलित नेपाल कानूनले उत्पादन, बिक्री, वितरण, उपयोग वा प्रयोग गर्न निषेध गरेका कुनै बस्तु, पदार्थ वा सेबाको उत्पादन, बिक्री, वितरण, उपयोग वा प्रयोग गर्न प्रोत्साहन गर्ने विषयमा,
|
| 66 |
+
(ख) जुबा खेल्न खेलाउन वा प्रचलित कानून बमोजिम अनुमति नलिएको चिह्ना किन्न किनाउन प्रोत्साहन गर्ने विषयमा,
|
| 67 |
+
(ग) प्रचलित कानून बमोजिम अश्लिल मानिने विषय वा तत्सम्बन्धी अन्य विषय, वस्तु वा सेबाको उपयोग वा प्रयोग गर्न वा प्रवर्द्धन गर्न प्रोत्साहन गर्ने विषयमा,
|
| 68 |
+
(घ) हतियार वा विष्फोटक पदार्थ वा नेपालको सुरक्षा, शान्ति र व्यवस्थामा खतरा उत्पन्न गर्न सक्ने अन्य यस्तै वस्तु वा पदार्थको उत्पादन, बिक्री, वितरण, उपयोग वा प्रयोग गर्न प्रोत्साहन गर्ने विषयमा,
|
| 69 |
+
(ङ) चिकित्सकको सिफारिसमा मात्र बिक्री गरिने औषधिहरुको विषयमा,
|
| 70 |
+
(च) नेपालमा बिक्री, वितरण वा प्रयोगको लागि प्रचलित कानून बमोजिम अनुमति लिनु पर्नेमा त्यस्तो अनुमति प्राप्त भइनसकेको बस्तु वा सेबाको विषयमा,
|
| 71 |
+
(छ) प्रचलित कानूनले विज्ञापन गर्न निषेध गरेका विषयमा,
|
| 72 |
+
(ज) विद्यालय तथा विश्वविद्यालयको पाठ्यपुस्तकमा,
|
| 73 |
+
तर शैक्षिक जानकारी दिने विषय उल्लेख गर्न बाधा पर्ने छैन।
|
| 74 |
+
(झ) अन्धविश्वासलाई प्रोत्साहन हुने विषयमा।
|
| 75 |
+
(२) प्रचलित कानूनमा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि देहाय बमोजिम हुने गरी विज्ञापन गर्न पाइने छैनः-
|
| 76 |
+
(क) नेपालको सार्वभौमसत्ता, भौगोलिक अखण्डता, राष्ट्रियता, स्वाधीनता वा सड्खीय इकाइबीचको सुसम्बन्ध, सार्वजनिक शान्ति, सुव���यवस्था वा अन्तर्राष्ट्रिय सम्बन्धमा खलल पुन्याउने गरी,
|
| 77 |
+
(ख) राज्यद्रोह, अदालतको अवहेलना वा अपराध गर्न दुरुत्साहन गर्ने गरी,
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| 78 |
+
(ग) नेपालको राष्ट्रिय झण्डा, राष्ट्रिय गान, नेपालको निशान छाप वा त्यसको कुनै वा सबै भाग वा राष्ट्रिय विभूतिको प्रयोग गरी वा त्यसको अवमूल्यन हुने गरी,
|
| 79 |
+
(घ) गाली बेइज्जती हुने गरी,
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| 80 |
+
(ड) सार्वजनिक शिष्टाचार वा नैतिकताको प्रतिकूल हुने गरी,
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| 81 |
+
(च) श्रमप्रति अवहेलना गर्ने, लैशिक बिभेद एवं जातीय छुबाछूतलाई दुरुत्साहन गर्ने गरी,
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| 82 |
+
(छ) धर्म, वर्ण, लिङ्ग, जात, जाति वा समुदायबीचको सुसम्बन्धमा खलल पार्ने वा आर्थिक अवस्था, भाषा, क्षेत्र, बैचारिक आस्था वा अपाइता लगायतका कुनै पनि आधारमा बिभेद हुने गरी,
|
| 83 |
+
(ज) ट्रेडमार्क, पेटेण्ट, डिजाइन लगायतका औद्योगिक सम्पत्तिको हकबालाको अनुमति वा स्वीकृति बिना प्रयोग गरी,
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| 84 |
+
(झ) स्वदेशी वा अन्य कुनै उत्पादनलाई हतोत्साहित र निरुत्साहित गर्ने गरी,
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| 85 |
+
(अ) भ्रम वा अफबाह फैलाउने, उत्तेजना फैलाउने वा अन्य यस्तै अमर्यादित व्यवहार गर्ने गरी,
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| 86 |
+
(ट) स्वच्छ् प्रतिस्पर्धामा प्रतिकूल असर पार्ने गरी,
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| 87 |
+
(ठ) अरूको उत्पादन वस्तु वा सेबासँग तुलना गरी त्यस्तो उत्पादन वस्तु वा सेबालाई कमसल वा नराम्रो देखाउने गरी,
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| 88 |
+
(ड) कानून बमोजिम गोप्य रहेका विषयमा जानकारी गराउने गरी, र
|
| 89 |
+
(ढ) प्रचिलत कानून प्रतिकूल हुने गरी।
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| 90 |
+
(३) कसैले पनि निर्बाचनको स्वच्छतामा प्रतिकूल असर पार्ने गरी वा निर्बाचनमा अबरोध गर्ने गरी विज्ञापन गर्न गराउन पाइने छैन।
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| 91 |
+
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| 92 |
+
६. **विज्ञापनरहित र प्रसारण गर्नु पर्नेः**
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| 93 |
+
(१) नेपालमा प्रसारण हुने विदेशी टेलिभिजन च्यानलहरुले विज्ञापनरहित (क्लिन फिड) प्रसारण गर्नु पर्नेछ।
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| 94 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि ऐन प्रारम्भ हुँदाको बखतमा विदेशी च्यानलसँग डाउनलिङ्ग गरी प्रसारण गर्न सम्झौता गरिसकेका संस्थाहरुले यस ऐन प्रारम्भ भएको एक बर्षभित्र विज्ञापनरहित (क्लिन फिड) प्रसारण गर्नु पर्नेछ।
|
| 95 |
+
(३) विदेशी विज्ञापनलाई नेपालका सञ्चार माध्यमले प्रसारण गर्दा डबिड् गरी प्रसारण गर्न पाइने छैन।
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| 96 |
+
(४) विज्ञापनरहित प्रसारण सम्बन्धी अन्य व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 97 |
+
|
| 98 |
+
७. **विज्ञापन गर्न निषेधित क्षेत्र घोषणा गर्न सक्नेः**
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| 99 |
+
(१) स्थानीय तहले बोर्डले निर्धारण गरेको मापदण्डको आधारमा कुनै धार्मिक, सांस्कृतिक वा पुरातात्त्विक स्थल, शैक्षिक वा स्वास्थ्य संस्था वा त्यस्तो स्थल वा संस्थाबाट निश्चित दुरीभित्र सबै प्रकार वा विषयका वा कुनै खास प्रकार वा विषयमा विज्ञापन गर्न नपाउने गरी विज्ञापन निषेधित क्षेत्र घोषणा गर्न सक्नेछ। त्यसरी निषेधित क्षेत्र घोषणा गरेको सूचना सार्वजनिक रुपमा प्रकाशन गर्नु पर्नेछ।
|
| 100 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको निषेधित क्षेत्रमा त्यसरी निषेध गरिएको प्रकार वा विषयका विज्ञापन गर्न पाइने छैन।
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| 101 |
+
|
| 102 |
+
८. **खास समय निर्धारण गर्न सक्नेः**
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| 103 |
+
(१) बोर्डले सार्वजनिक रुपमा सूचना प्रकाशन गरी रेडियो, टेलिभिजन वा अनलाइन वा यस्तै बिघुतीय सञ्चार माध्यमबाट प्रसारण वा प्रकाशन हुने कुनै खास विषयका विज्ञापनको लागि त्यस्तो विज्ञापन प्रसारण गर्ने वा प्रकाशन गर्ने समयावधि निर्धारण गर्न सक्नेछ।
|
| 104 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम निर्धारण गरिएको समयावधि बाहेकको अन्य समयमा त्यस्ता विषयको विज्ञापन प्रसारण वा प्रकाशन गर्न पाइने छैन।
|
| 105 |
+
|
| 106 |
+
९. **विज्ञापनमा विज्ञापनकर्ताको नाम, ठेगाना तथा चेतावनीमूलक सन्देश उल्लेख गर्नु पर्नेः**
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| 107 |
+
(१) विज्ञापनमा जसको तर्फबाट विज्ञापन गरिने हो त्यस्तो व्यक्तिको नाम, ठेगाना स्पष्ट रुपले उल्लेख हुनु पर्नेछ।
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| 108 |
+
(२) विज्ञापन गरिएको वस्तु वा सेबाको प्रयोग गर्दा हुन सक्ने असर वा अबलम्बन गर्नु पर्ने सचेतनाको विषयमा विज्ञापनमा उपयुक्त तवरले चेतावनीमूलक सन्देश समेत उल्लेख गर्नु पर्नेछ।
|
| 109 |
+
|
| 110 |
+
१०. **मन्जुरी नलिई इमेल वा एस एम एस बाट विज्ञापन गर्न नहुनेः**
|
| 111 |
+
(१) सम्बन्धित व्यक्तिको मन्जुरी बिना कसैको इमेल वा मोबाइलमा इमेल वा एस.एम.एस.बाट विज्ञापनमूलक सन्देश वा इमेल पठाउन पाइने छैन।
|
| 112 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि नेपाल सरकार, प्रदेश सरकार वा स्थानीय तहले सार्वजनिक हितको लागि जानकारीमूलक सूचना प्रवाह गर्न वा विपद्को अवस्थामा पूर्वसूचना वा जानकारी पठाउन सम्बन्धित व्यक्तिको मन्जुरी नभए पनि बाधा पर्ने छैन।
|
| 113 |
+
|
| 114 |
+
११. **प्रचलित कानूनले निर्धारण गरेको प्रक्रिया र मापदण्ड पालना गर्नु पर्नेः**
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| 115 |
+
प्रचलित कानूनले कुनै खास प्रकारको वस्तु वा सेबाको विज्ञापनको लागि कुनै खास प्रक्रिया, शर्त वा मापदण्ड पालना गर्नु पर्ने गरी निर्धारण गरेकोमा यस ऐनमा लेखिएको विषयको अतिरिक्त त्यस्तो कानूनले निर्धारण गरेको प्रक्रिया, शर्त वा मापदण्ड समेत पालना गर्नु पर्नेछ।
|
| 116 |
+
|
| 117 |
+
१२. **आधिकारिक रुपमा जानकार�� नभई विज्ञापन गर्न नहुनेः**
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| 118 |
+
(१) विज्ञापन प्रकाशन वा प्रसारण गर्ने बिघुतीय, अनलाइन, छापा वा सञ्चारका माध्यमले वा सामाजिक सञ्जालको माध्यमबाट विज्ञापन गर्ने व्यक्ति वा संस्थाले विज्ञापनकर्ताको नाम, टेगाना आधिकारिकताको बारेमा जानकारी नभई विज्ञापन गर्न गराउन हुँदैन।
|
| 119 |
+
(२) कुनै विज्ञापनको विषयमा बिबाद उत्पन्न भई त्यस्तो विज्ञापनकर्ताको नाम, टेगाना पत्ता लाग्न नसकेको अवस्थामा त्यस्तो विज्ञापन प्रकाशन गर्ने संस्था वा व्यक्ति नै जिम्मेबार हुनेछ।
|
| 120 |
+
|
| 121 |
+
१३. **निःशुल्क वा सहुलियत दरमा विज्ञापन गर्नु पर्नेः**
|
| 122 |
+
मन्त्रालय, प्रदेश सरकार वा स्थानीय तहबाट बिपद्को समयमा सर्वसाधारणको हित वा जानकारीको लागि प्रवाह गरिने सूचना वा विज्ञापन सञ्चार माध्यमले निःशुल्क वा सहुलियत दरमा प्रकाशन वा प्रसारण गर्नु पर्नेछ।
|
| 123 |
+
|
| 124 |
+
---
|
| 125 |
+
|
| 126 |
+
## परिच्छेद-३
|
| 127 |
+
**विज्ञापन बोर्ड सम्बन्धी व्यवस्था**
|
| 128 |
+
|
| 129 |
+
१४. **विज्ञापन बोर्डको गठनः**
|
| 130 |
+
(१) विज्ञापनको नियमन सम्बन्धी काम गर्नको लागि देहाय बमोजिमको एक विज्ञापन बोर्डको गठन हुनेछः-
|
| 131 |
+
(क) नेपाल सरकारले नियुक्त गरेको व्यक्ति - अध्यक्ष
|
| 132 |
+
(ख) सहसचिब, गृह मन्त्रालय - सदस्य
|
| 133 |
+
(ग) सहसचिब, उद्योग, बाणिज्य तथा आपूर्ति मन्त्रालय - सदस्य
|
| 134 |
+
(घ) सहसचिब, सञ्चार तथा सूचना प्रविधि मन्त्रालय - सदस्य
|
| 135 |
+
(ङ) विज्ञापनदाता, विज्ञापन एजेन्सी वा विज्ञापन प्रसारण/वितरण गर्ने संघ संस्थाहरुमध्येबाट मन्त्रालयले मनोनयन गरेको संस्थाको प्रतिनिधि दुईजना - सदस्य
|
| 136 |
+
(च) उपभोक्ता हक, हितको क्षेत्रमा वा आमसञ्चारको क्षेत्रमा कम्तीमा दश बर्ष अनुभवप्राप्त व्यक्तिहरुमध्येबाट मन्त्रालयले मनोनयन गरेका कम्तीमा एकजना महिला सहित तीनजना - सदस्य
|
| 137 |
+
(२) बोर्डको बरिष्ठ कर्मचारीमध्येबाट बोर्डले तोकेको कर्मचारीले बोर्डको सचिव भई काम गर्नेछ।
|
| 138 |
+
(३) उपदफा (१) को खण्ड (च) बमोजिमका सदस्यहरुको मनोनयन गर्दा समावेशी सिद्धान्तको आधारमा गर्नु पर्नेछ।
|
| 139 |
+
(४) अध्यक्षको पदमा नियुक्तिका लागि नेपाल सरकार समक्ष सिफारिस गर्न मन्त्रालयका सचिवको संयोजकत्वमा मन्त्रालयले नियुक्त गरेको सम्बन्धित विषयको एकजना विज्ञ सदस्य र मन्त्रालयको सहसचिव सदस्य-सचिव रहेको एक सिफारिस समिति रहनेछ। सो समितिले दफा १७ बमोजिमको योग्यता पुगेका व्यक्तिहरुमध्येबाट तोकिए बमोजिम खुला प्रतिस्पर्धाबाट उपयुक्त व्यक्ति छुनेाट गरी नियुक्तिको लागि नेपाल सरकार समक्ष सिफारिस गर्नेछ।
|
| 140 |
+
(५) उपदफा (१) को खण्ड (ङ) र (च) बमोजिमका सदस्यको पदावधि चार बर्षको हुनेछ।
|
| 141 |
+
(६) उपदफा (५) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि कुनै सदस्यको काम सन्तोषजनक नदेखिएमा वा बोर्डको हित विपरित हुने कुनै काम गरेमा वा खराब आचरण भएमा वा कार्यसम्पादन नगरी निष्क्रिय भएमा पदावधि पूरा नहुँदै मन्त्रालयले त्यसको कारण खुलाई निजलाई पदमुक्त गर्न सक्नेछ।
|
| 142 |
+
(७) उपदफा (६) बमोजिम कुनै सदस्यलाई पद मुक्त गर्नु अघि निजलाई सफाई पेश गर्ने मनासिब माफिकको मौका दिनु पर्नेछ।
|
| 143 |
+
|
| 144 |
+
१५. **बोर्डको काम, कर्तव्य र अधिकारः**
|
| 145 |
+
यस ऐनमा अन्यत्र उल्लिखित काम, कर्तव्य र अधिकारको अतिरिक्त बोर्डको काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछः-
|
| 146 |
+
(क) विज्ञापन सम्बन्धमा राष्ट्रिय नीति तय गरी मन्त्रालयमा सिफारिस गर्ने,
|
| 147 |
+
(ख) सञ्चार माध्यमबाट प्रसारण गरिने विज्ञापनको सामग्री परीक्षण गर्न तोकिएको आधारमा मापदण्ड तयार गर्ने,
|
| 148 |
+
(ग) विज्ञापन उत्पादन, प्रसारण र वितरण सम्बन्धी आचार संहिता बनाउने,
|
| 149 |
+
(घ) मुलुकको आवश्यकता अनुसार राष्ट्रिय हित, सार्वजनिक हित सम्बन्धी विज्ञापन निर्माण गरी प्रकाशन तथा प्रसारण गर्न प्रोत्साहन गर्ने,
|
| 150 |
+
(ङ) नभए वा नगरेको कुराको भ्रम फैलाउने, उत्तेजना फैलाउने, अमर्यादित, भेदभावजन्य वा यस ऐन विपरीत विज्ञापन गरिए वा नगरिएको अनुगमन गर्ने वा गराउने,
|
| 151 |
+
(च) विदेशी च्यानलहरूबाट विज्ञापनरहित प्रसारण भए वा नभएको अनुगमन गरी कारबाही गर्ने,
|
| 152 |
+
(छ) नेपाल सरकार, विज्ञापन एजेन्सी, विज्ञापनदाता, सञ्चारमाध्यम तथा सरकारी निकायबीच समन्वय गर्ने,
|
| 153 |
+
(ज) विज्ञापन व्यवसाय र व्यवसायीको योग्यता र क्षमता विकास गर्नका लागि आवश्यक कार्यक्रम सञ्चालन गर्न मन्त्रालयमा सिफारिस गर्ने,
|
| 154 |
+
(झ) उपभोक्ता सजगता सम्बन्धी कार्यक्रम सञ्चालन गर्ने, गराउने,
|
| 155 |
+
(ज) विज्ञापनको क्षेत्रमा उत्कृष्ट कार्य गर्नेलाई पुरस्कृत गर्ने,
|
| 156 |
+
(ट) विज्ञापन उत्पादक, निर्माता, वितरक वा प्रसारकलाई आवश्यक निर्देशन दिने,
|
| 157 |
+
(ट) सञ्चार माध्यमहरुलाई नेपाल सरकारबाट उपलव्ध गराइने सार्वजनिक हित सम्बन्धी सबै विज्ञापन तोकिएको आधारमा बोर्ड मार्फत समानुपातिक रुपमा वितरण गर्ने,
|
| 158 |
+
(ड) तोकिए बमोजिमका अन्य कार्य गर्ने।
|
| 159 |
+
|
| 160 |
+
१६. **बोर्डको बैठक र निर्णयः**
|
| 161 |
+
(१) बोर्डको बैठक अध्यक्षले तोकेको मिति, समय र स्थानमा बस्नेछ।
|
| 162 |
+
(२) बोर्डको बैठकको अध्यक्���ता अध्यक्षले गर्नेछ।
|
| 163 |
+
(३) बोर्डको कूल सदस्य संख्याको पचास प्रतिशतभन्दा बढी सदस्यहरु उपस्थित भएमा बोर्डको बैठकको लागि गणपूरक सङ्ख्या पुगेको मानिनेछ।
|
| 164 |
+
(४) बोर्डको बैठकमा बहुमतको राय मान्य हुनेछ र मत बराबर भएमा अध्यक्षले निर्णायक मत दिनेछ।
|
| 165 |
+
(५) बैठकको निर्णय अध्यक्ष र सचिबले प्रमाणित गरी राख्नु पर्नेछ।
|
| 166 |
+
(६) बोर्डले आवश्यक देखेमा सम्बन्धित विषयका विज्ञलाई बोर्डको बैठकमा आमन्त्रण गर्न सक्नेछ।
|
| 167 |
+
(७) बोर्डको बैठक सम्बन्धी अन्य कार्यविधि बोर्ड आफैले निर्धारण गरे बमोजिम हुनेछ।
|
| 168 |
+
|
| 169 |
+
१७. **अध्यक्षको योग्यताः**
|
| 170 |
+
देहायको व्यक्ति अध्यक्षको पदमा नियुक्त हुन योग्य मानिनेछः-
|
| 171 |
+
(क) नेपाली नागरिक,
|
| 172 |
+
(ख) आमसञ्चार, कानून, विज्ञापन वा व्यवस्थापन विषयमा मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालयबाट कम्तीमा स्नातक उपाधि हासिल गरेको र सो क्षेत्रमा कम्तीमा दश बर्षको अनुभव प्राप्त गरेको,
|
| 173 |
+
(ग) पैंतीस वर्ष उमेर पूरा भएको,
|
| 174 |
+
(घ) कुनै विदेशी राष्ट्रको स्थायी आवासीय अनुमतिपत्र नलिएको,
|
| 175 |
+
(ड) कुनै कानूनले अयोग्य नभएको।
|
| 176 |
+
|
| 177 |
+
१८. **अध्यक्षको पारिश्रमिक, सेवाको शर्त तथा काम, कर्तव्य र अधिकारः**
|
| 178 |
+
(१) अध्यक्ष बोर्डको कार्यकारी प्रमुख हुनेछ।
|
| 179 |
+
(२) अध्यक्षको पदाबधि चार बर्षको हुनेछ।
|
| 180 |
+
(३) उपदफा (२) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि निजको काम सन्तोषजनक नदेखिएमा वा बोर्डको हित बिपरीत हुने कुनै काम गरेमा वा खराब आचरण भएमा वा कार्यसम्पादन नगरी निष्क्रिय भएमा पदाबधि पूरा नहुँदै नेपाल सरकारले कारण खुलाई जुनसुकै बखत पदमुक्त गर्न सक्नेछ।
|
| 181 |
+
(४) उपदफा (३) बमोजिम अध्यक्षलाई पदमुक्त गर्नुअघि सफाई पेश गर्ने मनासिब माफिकको मौका दिनु पर्नेछ।
|
| 182 |
+
(५) अध्यक्षको पारिश्रमिक तथा अन्य सुबिधा नेपाल सरकारले तोके बमोजिम हुनेछ।
|
| 183 |
+
(६) यस ऐनमा अन्यत्र लेखिएको काम, कर्तव्य र अधिकारका अतिरिक्त अध्यक्षको काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछः-
|
| 184 |
+
(क) बोर्डको दैनिक प्रशासनिक कार्य गर्ने,
|
| 185 |
+
(ख) बोर्डको बैठकको कार्यसूची तयार गर्ने,
|
| 186 |
+
(ग) बोर्डको बैठकको निर्णयहरू कार्यान्वयन गर्ने, गराउने,
|
| 187 |
+
(घ) बोर्डको नीति कार्यक्रमहरूको मस्यौदा तयार गर्ने,
|
| 188 |
+
(ङ) बोर्डको बजेट खर्च गर्ने, खर्चको लेखा राख्ने र लेखापरीक्षण गराउने,
|
| 189 |
+
(च) बोर्डको कर्मचारी प्रशासनको कार्य गर्ने,
|
| 190 |
+
(छ) बोर्डको बार्षिक बजेट तथा कार्यक्रम पेश गर्ने,
|
| 191 |
+
(ज) बोर्डले अधिकार प्रत्यायोजन गरेका अन्��� कार्य गर्ने।
|
| 192 |
+
|
| 193 |
+
१९. **अध्यक्षको पद रिक्त हुने अवस्थाः**
|
| 194 |
+
देहायको अवस्थामा अध्यक्षको पद रिक्त हुनेछ :-
|
| 195 |
+
(क) निजको पदाबधि समाप्त भएमा,
|
| 196 |
+
(ख) निजको उमेर पैंसट्टी बर्ष पूरा भएमा,
|
| 197 |
+
(ग) निजले नैतिक पतन देखिने फौजदारी कसूरमा अदालतबाट सजाय पाएमा,
|
| 198 |
+
(घ) निजले राजीनामा दिएमा,
|
| 199 |
+
(ङ) निजको मृत्यु भएमा,
|
| 200 |
+
(च) नेपाल सरकारले दफा १८ को उपदफा (३) बमोजिम पदमुक्त गरेमा।
|
| 201 |
+
|
| 202 |
+
२०. **बोर्डको कार्यालय र कर्मचारीः**
|
| 203 |
+
(१) बोर्डको कार्यालय काठमाडौं उपत्यकामा रहनेछ।
|
| 204 |
+
(२) बोर्डको कार्यालयको लागि आवश्यक पर्ने कर्मचारी मन्त्रालयले उपलब्ध गराउनेछ। मन्त्रालयले कर्मचारी उपलब्ध गराउन नसकेको अवस्थामा बोर्डले तोकिए बमोजिम सेवा करारमा कर्मचारी राख्न सक्नेछ।
|
| 205 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम करारमा राखिने कर्मचारीको पारिश्रमिक तथा सेवाका शर्तहरु तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 206 |
+
|
| 207 |
+
---
|
| 208 |
+
|
| 209 |
+
## परिच्छेद-४
|
| 210 |
+
**बोर्डको कोष तथा लेखापरीक्षण**
|
| 211 |
+
|
| 212 |
+
२१. **बोर्डको कोषः**
|
| 213 |
+
(१) बोर्डको एउटा छुट्टै कोष रहनेछ।
|
| 214 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको कोषमा देहायका रकमहरू रहनेछन्:-
|
| 215 |
+
(क) नेपाल सरकारबाट प्राप्त रकम,
|
| 216 |
+
(ख) बोर्ड मार्फत् विज्ञापन वितरण गर्न नेपाल सरकारले छुट्याएको कुल बजेटको तीन प्रतिशत रकम,
|
| 217 |
+
तर विज्ञापन वितरणमा खर्च हुन नसकेको रकमबाट त्यस्तो रकम कट्ठा गर्न पाइने छैन।
|
| 218 |
+
(३) बोर्डको कोषको रकम कुनै बाणिज्य बैङ्कमा खाता खोली जम्मा गरिनेछ।
|
| 219 |
+
(४) बोर्डको सबै खर्चहरू उपदफा (१) बमोजिमको कोषबाट ब्यहोरिनेछ।
|
| 220 |
+
(५) नेपाल सरकार वा सरकारी निकायबाट कोषमा विज्ञापनको लागि प्राप्त रकममध्ये विज्ञापनको लागि खर्च भई प्रत्येक आर्थिक बर्षको अन्त्यमा कोषमा बचत भएको रकम नेपाल सरकारले प्रचलित कानून बमोजिम खर्च गर्न सक्नेछ।
|
| 221 |
+
(६) बोर्डको कोष र खाताको सञ्चालन तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 222 |
+
|
| 223 |
+
२२. **कोषको लेखापरीक्षणः**
|
| 224 |
+
(१) बोर्डको आय-ब्ययको लेखा नेपाल सरकारले अपनाएको लेखा प्रणाली बमोजिम राख्नु पर्नेछ।
|
| 225 |
+
(२) बोर्डको लेखाको लेखापरीक्षण महालेखापरीक्षकबाट हुनेछ।
|
| 226 |
+
|
| 227 |
+
---
|
| 228 |
+
|
| 229 |
+
## परिच्छेद-५
|
| 230 |
+
**प्रदेश तथा स्थानीय तहका सञ्चार माध्यमबाट हुने विज्ञापनको नियमन**
|
| 231 |
+
|
| 232 |
+
२३. **प्रदेशस्तरका सञ्चार माध्यमबाट गरिने विज्ञापनको अनुगमन तथा नियमनः**
|
| 233 |
+
(१) प्रचलित कानून बमोजिम प्रदेश सरकारबाट अनुमति प्राप्त गरी सञ्चालन भएका छापा वा बिघुतीय सञ्चार माध्यमबाट हुने वा भएका विज्ञापनमा यस ऐन तथा प्रचलित कानून बमोजिमको मापदण्ड पूरा गरे न���रेको विषयको अनुगमन तथा नियमनको काम प्रदेश कानून बमोजिम सूचना तथा सञ्चार सम्बन्धी विषय हेर्ने मन्त्रालयले गर्नेछ।
|
| 234 |
+
(२) उपदफा (१) को प्रयोजनको लागि सम्बन्धित प्रदेशमा सूचना तथा सञ्चार सम्बन्धी विषय हेर्ने मन्त्रालयको सचिबको अध्यक्षतामा एक अनुगमन तथा नियमन समिति रहनेछ। अनुगमन तथा नियमन समितिमा अध्यक्षको अतिरिक्त समावेशी सिद्धान्तको आधारमा प्रदेश सरकारले प्रदेश राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी तोके बमोजिमका बढीमा छजना सदस्य रहने छन्।
|
| 235 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिमको समितिले अनुगमन गर्दा कसैले विज्ञापन गर्दा यो ऐन वा यस ऐन बमोजिम बनेको नियम वा मापदण्ड पालना गरेको नपाइएमा कारण उल्लेख गरी त्यस्तो विज्ञापन संशोधन गर्न, बन्द गर्न वा हटाउन आदेश दिनेछ। त्यसरी दिएको आदेशको पालना गर्नु सम्बन्धित पक्षको कर्तव्य हुनेछ।
|
| 236 |
+
(४) उपदफा (३) बमोजिमको आदेशको पालना नगर्ने वा यो ऐन वा यस ऐन बमोजिम बनेको नियम वा मापदण्ड पालना नगरी विज्ञापन गर्ने व्यक्तिलाई उपदफा (२) बमोजिमको समितिले बढीमा एक लाख रुपैयाँसम्म जरिबाना गर्न सक्नेछ। अनुगमनको क्रममा कसैले विज्ञापन गर्दा यो ऐन बमोजिम कसूर हुने काम गरेको पाइएमा त्यस्तो व्यक्तिलाई यस ऐन बमोजिम कारबाही गर्न सम्बन्धित निकायमा लेखी पठाउनेछ।
|
| 237 |
+
(५) उपदफा (२) बमोजिमको समितिको अन्य काम, कर्तव्य र अधिकार यो ऐन तथा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियमावलीको प्रतिकूल नहुने गरी सम्बन्धित प्रदेश सरकारले निर्धारण गरे बमोजिम हुनेछ।
|
| 238 |
+
|
| 239 |
+
२४. **स्थानीय स्तरका सञ्चार माध्यमबाट गरिने विज्ञापन तथा होर्डिङ बोर्डको अनुगमन तथा नियमनः**
|
| 240 |
+
(१) होर्डिङ बोर्ड वा प्रचलित कानून बमोजिम स्थानीय तहबाट अनुमति प्राप्त गरी स्थानीय स्तरमा सञ्चालन भएका छापा वा बिघुतीय सञ्चार माध्यमबाट हुने वा भएका विज्ञापनमा यस ऐन तथा प्रचलित कानून बमोजिमको मापदण्ड पूरा गरे नगरेको विषयको अनुगमन तथा नियमनको काम सम्बन्धित स्थानीय तहले गर्नेछ।
|
| 241 |
+
(२) उपदफा (१) को प्रयोजनको लागि स्थानीय तहले आवश्यक कानूनी व्यवस्था मिलाउनेछ।
|
| 242 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम अनुगमन गर्दा कसैले विज्ञापन गर्दा यो ऐन वा यस ऐन बमोजिम बनेको नियम वा मापदण्ड पालना गरेको नपाइएमा वा अनधिकृत रुपमा होर्डिङ बोर्ड राखेको पाइएमा कारण उल्लेख गरी त्यस्तो विज्ञापन संशोधन गर्न, बन्द गर्न वा हटाउन आदेश दिनेछ। त्यसरी दिएको आदेशक��� पालना गर्नु सम्बन्धित पक्षको कर्तव्य हुनेछ।
|
| 243 |
+
(४) उपदफा (१) बमोजिम अनुगमन गर्दा यो ऐन वा यस ऐन बमोजिम बनेको नियम वा मापदण्ड पालना नगरी विज्ञापन गर्ने व्यक्ति वा अनधिकृत रुपमा होर्डिङ बोर्ड राख्ने वा त्यसमा विज्ञापन गर्ने व्यक्तिलाई स्थानीय तहको न्यायिक समितिको आदेशले एक लाख रुपैयाँसम्म जरिबाना गर्न सक्नेछ। अनुगमनको क्रममा कसैले विज्ञापन गर्दा यो ऐन बमोजिम कसूर हुने काम गरेको पाइएमा त्यस्तो व्यक्तिलाई यस ऐन बमोजिम कारबाही गर्न सम्बन्धित निकायमा लेखी पठाउनेछ।
|
| 244 |
+
(५) स्थानीय स्तरका सञ्चार माध्यमबाट गरिने विज्ञापन तथा होर्डिङ बोर्डको अनुगमन तथा नियमन सम्बन्धी अन्य व्यवस्था यो ऐन तथा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियमावलीको प्रतिकूल नहुने गरी सम्बन्धित स्थानीय तहले निर्धारण गरे बमोजिम हुनेछ।
|
| 245 |
+
|
| 246 |
+
---
|
| 247 |
+
|
| 248 |
+
## परिच्छेद-६
|
| 249 |
+
**कसूर र सजाय**
|
| 250 |
+
|
| 251 |
+
२५. **कसूर र सजायः**
|
| 252 |
+
(१) कसैले यस ऐनको दफा ४ को उपदफा (१), दफा ५, ६, ७, ९, १०, ११ वा १२ विपरीत विज्ञापन गरेमा यस ऐन बमोजिम कसूर गरेको मानिनेछ।
|
| 253 |
+
(२) कसैले दफा ४ को उपदफा (१) वा (२) प्रतिकूल हुने गरी गरेको कसूरमा त्यस्तो कसूर गर्ने गराउनेलाई सो कसूर गरे बापत प्रचलित कानूनले कुनै सजाय हुने रहेछ भने सोही बमोजिम सजाय गर्नु पर्नेछ र सो नभएमा एक बर्षसम्म कैद र दश हजार रुपैयाँसम्म जरिवाना गर्नु पर्नेछ।
|
| 254 |
+
(३) कसैले देहायको कसूर गरेमा देहाय बमोजिम सजाय हुनेछः-
|
| 255 |
+
(क) दफा ४ को उपदफा (१) बमोजिमको कसूर गर्ने गराउने व्यक्तिलाई एक लाख रुपैयाँसम्म जरिवाना,
|
| 256 |
+
(ख) दफा ६ बमोजिमको कसूर गर्ने गराउने व्यक्तिलाई पाँच लाख रुपैयाँसम्म जरिवाना।
|
| 257 |
+
(ग) ऐनको दफा ७, ९, १०, ११ वा १२ बमोजिमको कसूर गर्ने गराउने व्यक्तिलाई एक लाख रुपैयाँसम्म जरिवाना।
|
| 258 |
+
(४) आमसञ्चारको माध्यमबाट यस ऐन विपरीत कुनै विज्ञापन प्रकाशन, प्रसारण वा सम्प्रेषण भएकोमा त्यस्तो सञ्चार माध्यमको सम्पादन सम्बन्धी कार्यभार सम्हाल्ने सम्पादकलाई सोही कारणले मात्र यस ऐन बमोजिम सजाय गरिने छैन।
|
| 259 |
+
तर त्यस्तो सम्पादक नै आमसञ्चार माध्यमको सञ्चालक भएकोमा यस दफा बमोजिम सजाय गर्न बाधा पर्ने छैन।
|
| 260 |
+
|
| 261 |
+
---
|
| 262 |
+
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| 263 |
+
## परिच्छेद-७
|
| 264 |
+
**विविध**
|
| 265 |
+
|
| 266 |
+
२६. **सूचीकृत हुनुपर्नेः**
|
| 267 |
+
(१) विज्ञापन कारोबार गर्ने सञ्चार माध्यम तथा विज्ञापन एजेन्सी तोकिए बमोजिमको विवरण दाखिला गरी बोर्डमा सूचीकृत हुनु पर्नेछ।
|
| 268 |
+
(२) यो दफा प्रारम्भ हुँदाका बखत कायम रहेका विज्���ापन कारोबार गर्ने सञ्चार माध्यम यो दफा प्रारम्भ भएको मितिले एक बर्षभित्र उपदफा (१) बमोजिम सूचीकृत हुनु पर्नेछ।
|
| 269 |
+
(३) सूचीकृत सञ्चार माध्यम तथा एजेन्सीको बर्गीकरण तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 270 |
+
|
| 271 |
+
२७. **उजुरी गर्न सक्नेः**
|
| 272 |
+
(१) यो ऐन वा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियमावली वा मापदण्ड बिपरीत कसैले विज्ञापन गरेको पाइएमा त्यसको जानकारी जुनसुकै व्यक्तिले बोर्ड वा दफा २३ को उपदफा (२) बमोजिमको समिति वा स्थानीय तहमा दिन सक्नेछ।
|
| 273 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम प्राप्त जानकारीको आधारमा बोर्ड, समिति वा स्थानीय तहलाई आफै कारबाही गर्ने अधिकार भएकोमा आफैले र आफ्नो अधिकार क्षेत्र नभएकोमा अधिकार भएको बोर्ड, समिति वा स्थानीय तहमा कारबाहीको लागि पठाउनु पर्नेछ।
|
| 274 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम प्राप्त उजुरी उपर भएको कारबाहीको जानकारी उजुरीकर्ताले नाम ठेगाना उल्लेख गरी उजुरी दिएको भएमा सम्बन्धित बोर्ड, समिति वा स्थानीय तहले त्यस्तो उजुरीकर्तालाई दिनु पर्नेछ।
|
| 275 |
+
|
| 276 |
+
२८. **मुद्दा हेर्ने अधिकारीः**
|
| 277 |
+
(१) दफा २५ को उपदफा (२) बमोजिम प्रचलित कानून अन्तर्गत सजाय हुने मुद्दा त्यस्तो कानूनले तोकेको अदालतबाट सुरु कारबाही, सुनुबाइ र किनारा हुनेछ र त्यस्तो कानून बमोजिम सजायको व्यवस्था नभएको कारण यस ऐन बमोजिम मुद्दा चलाउनु पर्ने भएमा त्यस्तो कसूर सम्बन्धी मुद्दाको सुरु कारबाही, सुनुबाइ र किनारा गर्ने अधिकार सम्बन्धित जिल्ला अदालतलाई हुनेछ।
|
| 278 |
+
(२) दफा २५ को उपदफा (३) को खण्ड (क) अन्तर्गत सजाय हुने कसूर सम्बन्धी मुद्वाको सुरु कारबाही, सुनुबाइ र किनारा गर्ने अधिकार सम्बन्धित स्थानीय तहको न्यायिक समितिलाई हुनेछ।
|
| 279 |
+
(३) दफा २५ को उपदफा (३) को खण्ड (ख) र (ग) अन्तर्गत सजाय हुने कसूर सम्बन्धी मुद्वाको सुरु कारबाही, सुनुबाइ र किनारा गर्ने अधिकार बोर्डलाई हुनेछ।
|
| 280 |
+
|
| 281 |
+
२९. **प्रचलित कानून बमोजिम मुद्दा चलाइनेः**
|
| 282 |
+
(१) दफा २५ को उपदफा (२) अन्तर्गत सजाय हुने मुद्वाको सम्बन्धमा प्रचलित कानून बमोजिम कसूर हुने भई त्यस्तो कसूरमा प्रचलित कानूनमा कुनै खास पक्षले मुद्दा चलाउने गरी व्यवस्था भएकोमा सोही बमोजिम नै मुद्दा चलाइनेछ।
|
| 283 |
+
(२) दफा २५ को उपदफा (२) अन्तर्गतको मुद्दामा प्रचलित कानून बमोजिम मुद्दा नचल्ने अवस्था भई यस ऐन बमोजिम मुद्दा चलाउनु पर्दा त्यस्तो मुद्दामा नेपाल सरकार बादी भई चलाइनेछ। सो मुद्दा मुलुकी फौजदारी कार्यविधि संहिता, २०७४ ��ो अनुसूची-१ मा समावेश भएको मानिनेछ।
|
| 284 |
+
|
| 285 |
+
३०. **क्षतिपूर्ति सम्बन्धी व्यवस्थाः**
|
| 286 |
+
(१) कसैले यो ऐन वा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बिपरीत विज्ञापन गरेबाट कसैलाई कुनै किसिमको क्षति भएमा वा कुनै गम्भीर असर परेमा वा सर्जक वा स्रष्टाको अनुमति वा स्वीकृति नलिई निजको सिर्जनालाई विज्ञापनमा प्रयोग गरेको पाइएमा त्यसबाट मर्का पर्ने पक्षले क्षतिपूर्तिको लागि बोर्ड समक्ष निवेदन दिन सक्नेछ।
|
| 287 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम निवेदन पर्न आएमा बोर्डले सो निवेदन उपर जाँचबुझ गर्दा क्षति पुगेको देखिएमा त्यस्तो निवेदकलाई विज्ञापनकर्ताबाट मनासिब माफिकको क्षतिपूर्ति भराई दिनु पर्नेछ।
|
| 288 |
+
|
| 289 |
+
३१. **पुनरावेदनः**
|
| 290 |
+
यस ऐन बमोजिमको मुद्दामा निर्णयको जानकारी पाएको मितिले पैतीस दिनभित्र देहाय बमोजिमका अदालतमा पुनरावेदन लाग्नेछ:-
|
| 291 |
+
(क) जिल्ला अदालतले सुरु कारबाही र किनारा गरेको निर्णय उपर सम्बन्धित उच्च अदालतमा,
|
| 292 |
+
(ख) बोर्डले गरेको निर्णय उपर जिल्ला अदालतमा,
|
| 293 |
+
(ग) अनुगमन तथा नियमन समिति तथा स्थानीय तहले गरेको निर्णय उपर सम्बन्धित जिल्ला अदालतमा।
|
| 294 |
+
|
| 295 |
+
३२. **बोर्ड मार्फत विज्ञापन गर्नु पर्नेः**
|
| 296 |
+
(१) नेपाल सरकार वा नेपाल सरकार अन्तर्गतका निकायले लोक कल्याणकारी वा अन्य विज्ञापन वा सूचना प्रकाशन तथा प्रसारण गर्दा बोर्ड मार्फत गर्नु पर्नेछ र त्यस्तो विज्ञापन बापतको रकम बोर्ड मार्फत खर्च गर्नु पर्नेछ।
|
| 297 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि नेपाल सरकार वा नेपाल सरकार अन्तर्गतका निकायहरुले कुनै विज्ञापन वा सूचना तत्काल प्रकाशन गर्नु पर्ने अवस्था भएमा विज्ञापन वा सूचनाको एक प्रति बोर्डलाई उपलब्ध गराई सो बापतको रकम बोर्ड मार्फत् भुक्तानी गर्ने गरी कुनै पनि माध्यमबाट विज्ञापन वा सूचना प्रकाशन गर्न बाधा पर्ने छैन।
|
| 298 |
+
|
| 299 |
+
३३. **उपसमिति वा कार्यदल गठन गर्न सक्नेः**
|
| 300 |
+
(१) बोर्डले आफ्नो कार्यमा सहयोग पुन्याउन आवश्यकता अनुसार उपसमिति वा कार्यदल गठन गर्न सक्नेछ।
|
| 301 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको उपसमिति वा कार्यदलको काम, कर्तव्य, अधिकार र कार्याबधि त्यस्तो उपसमिति वा कार्यदल गठन गर्दाका बखत बोर्डले तोके बमोजिम हुनेछ।
|
| 302 |
+
|
| 303 |
+
३४. **अधिकार प्रत्यायोजनः**
|
| 304 |
+
बोर्डले आफूलाई प्राप्त अधिकारमध्ये आवश्यकता अनुसार केही अधिकार बोर्डको अध्यक्ष वा सदस्य वा बोर्डको कुनै कर्मचारी, दफा २३ को उपदफा (२) बमोजिमको अनुगमन तथा नियमन समिति ���ा दफा ३३ बमोजिमको उपसमिति वा कार्यदल वा नेपाल सरकारको कुनै निकायलाई प्रत्यायोजन गर्न सक्नेछ।
|
| 305 |
+
|
| 306 |
+
३५. **निर्देशन दिन सक्नेः**
|
| 307 |
+
मन्त्रालयले विज्ञापनलाई व्यवस्थित वा नियमन गर्ने सम्बन्धमा बोर्डलाई आवश्यक निर्देशन दिन सक्नेछ, र त्यस्तो निर्देशनको पालना गर्नु बोर्डको कर्तव्य हुनेछ।
|
| 308 |
+
|
| 309 |
+
३६. **नियम बनाउने अधिकारः**
|
| 310 |
+
यस ऐनको उद्देश्य प्राप्त गर्नका लागि नेपाल सरकारले आवश्यक नियमहरु बनाउन सक्नेछ।
|
| 311 |
+
|
| 312 |
+
३७. **मापदण्ड निर्धारण गर्न सक्नेः**
|
| 313 |
+
यस ऐनको कार्यान्वयनको लागि यो ऐन तथा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियमावलीको अधीनमा रही बोर्डले आवश्यक मापदण्ड निर्धारण गर्न सक्नेछ। त्यस्तो मापदण्ड लागू गर्नुभन्दा अघि बोर्डले उपयुक्त माध्यमबाट सार्वजनिक गर्नु पर्नेछ।
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|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
**राष्ट्रिय प्रकृति संरक्षण कोष ऐन, २०३९**
|
| 2 |
+
|
| 3 |
+
**लालमोहर र प्रकाशन मिति**
|
| 4 |
+
२०३९। ७। ३
|
| 5 |
+
|
| 6 |
+
**संशोधन गर्ने ऐन**
|
| 7 |
+
१. न्याय प्रशासन ऐन, २०४६
|
| 8 |
+
२०४६।२।१६
|
| 9 |
+
प्रमाणिकरण र प्रकाशन मिति
|
| 10 |
+
|
| 11 |
+
२. केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६३
|
| 12 |
+
२०६३। ६।२६
|
| 13 |
+
|
| 14 |
+
३. गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६६
|
| 15 |
+
२०६६।१०। ७
|
| 16 |
+
|
| 17 |
+
४. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७२
|
| 18 |
+
२०७२।११।१३
|
| 19 |
+
|
| 20 |
+
५. नेपालको संविधान अनुकूल बनाउन केही नेपाल ऐनलाई संशोधन गर्ने ऐन, २०७४
|
| 21 |
+
२०७४।११।१९
|
| 22 |
+
|
| 23 |
+
२०३९, सालको ऐन नं. १२
|
| 24 |
+
|
| 25 |
+
---
|
| 26 |
+
|
| 27 |
+
**राष्ट्रिय प्रकृति संरक्षण कोषको व्यवस्था गर्न बनेको ऐन**
|
| 28 |
+
|
| 29 |
+
**प्रस्तावना:**
|
| 30 |
+
प्रकृति तथा प्राकृतिक सम्पदाको संरक्षण र व्यवस्थापन गर्नको लागि राष्ट्रिय प्रकृति संरक्षण कोष स्थापना गर्न बाञ्छुनीय भएकोले,
|
| 31 |
+
श्री ४ महाराजाधिराज वीरन्द्र वीर विक्रम शाहदेवबाट राष्ट्रिय पद्यायतको सल्लाह र सम्भतिले यो ऐन बनाइबक्सेको छ।
|
| 32 |
+
|
| 33 |
+
**१. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भ:**
|
| 34 |
+
(१) यस ऐनको नाम "राष्ट्रिय प्रकृति संरक्षण कोष ऐन, २०३९" रहेको छ।
|
| 35 |
+
(२) यो ऐन तुरुन्त प्रारम्भ हुनेछ।
|
| 36 |
+
|
| 37 |
+
**२. परिभाषा:**
|
| 38 |
+
बिषय वा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
|
| 39 |
+
(क) "कोष" भन्नाले दफा ३ बमोजिम स्थापना भएको राष्ट्रिय प्रकृति संरक्षण कोष सम्झनु पर्छ।
|
| 40 |
+
(ख) "समिति" भन्नाले दफा ४ बमोजिम गठन भएको सवालक समिति सम्झनु पर्छ।
|
| 41 |
+
(ग) "अध्यक्ष" भन्नाले कोषको अध्यक्ष सम्झनु पर्छ।
|
| 42 |
+
(घ) "सदस्य र सदस्य-सचिव" भन्नाले कोषको सदस्य सम्झनु पर्छ।
|
| 43 |
+
(ङ) "तोकिएको" बा "तोकिए बमोजिम" भन्नाले यस ऐन अन्तर्गत बनेको विनियममा तोकिएको बा तोकिए बमोजिम सम्झनु पर्छ।
|
| 44 |
+
|
| 45 |
+
**३. कोषको स्थापना:**
|
| 46 |
+
(१) राष्ट्रिय प्रकृति संरक्षण कोष नामको एक कोष स्थापना हुनेछ।
|
| 47 |
+
(२) कोष अविछिन्न उत्तराधिकारबाला एक स्वशासित र संगठित संस्था हुनेछ।
|
| 48 |
+
(३) कोषको सबै काम कारबाहीको निमित्त आफ्नो एउटा छुट्टै छाप हुनेछ।
|
| 49 |
+
(४) कोषले व्यक्ति सरह चल अचल सम्पत्ति प्राप्त गर्न उपभोग गर्न बेचबिखन गर्न बा अन्य किसिमले बन्दोबस्त गर्न सक्नेछ।
|
| 50 |
+
(५) कोषले व्यक्ति सरह नालिस उजुर गर्न र कोष उपर पनि सोही नामबाट नालिस उजूर लाग्न सक्नेछ।
|
| 51 |
+
|
| 52 |
+
**४. संरक्षक:**
|
| 53 |
+
प्रधानमन्त्री कोषको संरक्षक हुनेछ।
|
| 54 |
+
|
| 55 |
+
**५. सज्ञानक समितिको गठन:**
|
| 56 |
+
कोषको सम्पूर्ण काम कारबाईको सज्ञानन तथा रेखदेख गर्न देहाय बमोजिमको सज्ञानक समिति गठन हुनेछ:
|
| 57 |
+
(क) संरक्षकबाट मनोनीत व्यक्ति एकजना — अध्यक्ष
|
| 58 |
+
(ख) अध्यक्षबाट मनोनित नेपाल सरकारको सचिवहरु मध्येबाट तीनजना — सदस्य
|
| 59 |
+
(ग) अध्यक्षबाट मनोनीत नेपाल सरकारको विभाग बा सरकारी बा गैरसरकारी संस्थाका प्रतिनिधिहरुमध्येबाट तीनजना — सदस्य
|
| 60 |
+
(घ) अध्यक्षबाट मनोनीत अन्तर्राष्ट्रिय संस्थाकाप्रतिनिधि बा अन्तर्राष्ट्रिय ख्याति प्राप्त व्यक्तिहरुमध्येबाट चारजना — सदस्य
|
| 61 |
+
(ङ) अध्यक्षबाट मनोनीत कोषको लागि उपयुक्त टानेका व्यक्तिहरु तीनजना — सदस्य
|
| 62 |
+
(छ) अध्यक्षबाट मनोनीत व्यक्ति एकजना — सदस्य-सचिव
|
| 63 |
+
|
| 64 |
+
**६. पदावधि:**
|
| 65 |
+
(१) अध्यक्ष तथा सदस्यहरुको पदावधि पाँच बर्षको हुनेछ।
|
| 66 |
+
(२) अध्यक्ष तथा सदस्यको पदावधि समाप्त भएपछि निजहरु दफा ४ बमोजिम पुनः मनोनीत हुन सक्नेछन्।
|
| 67 |
+
(३) पदावधि समाप्त नहुँदै अध्यक्ष बा सदस्यको पद रिक्त हुन आएमा बाँकी पदावधिका लागि दफा ४ बमोजिम अध्यक्ष बा सदस्य मनोनित हुनेछ।
|
| 68 |
+
(४) अध्यक्ष बा सदस्यले राजीनामा गरेमा निजहरु आफ्नो पदबाट मुक्त भएको मानिनेछ।
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| 69 |
+
(५) आफ्नो कर्तव्य सुचारु रुपले पालन नगर्ने सदस्यलाई अध्यक्षबाट जुनसुकै बखतमा हटाउन सक्नेछ।
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| 70 |
+
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| 71 |
+
**७. पारिश्रमिक:**
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| 72 |
+
समितिका अध्यक्ष, सदस्य बा अन्य पदाधिकारीले पाउने पारिश्रमिक भत्ता तथा अन्य सुविधाहरु तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 73 |
+
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| 74 |
+
**८. समितिको बैठक:**
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| 75 |
+
(१) अध्यक्षको निर्देशनमा सदस्य-सचिबले मिति, स्थान र समय तोकी बैठक बोलाउनेछ। बैठकको अध्यक्षता अध्यक्षबाट हुनेछ र अध्यक्षको अनुपस्थितिमा सदस्यहरुले आफूमध्येवाट छानेको कुनै सदस्यले अध्यक्षता गर्नेछ।
|
| 76 |
+
(२) बैठक बस्ने सूचना बैठक बस्नु भन्दा साधारणतया एक महिना अगावै दिनु पर्नेछ।
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| 77 |
+
(३) ६ जना सदस्यहरु उपस्थित भएमा समितिको बैठकको लागि गणपूरक सङ्ब्या पुगेको मानिनेछ।
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| 78 |
+
(४) बैठकमा बहुमतको राय मान्य हुनेछ र मत बराबर भएमा बैठकको अध्यक्षता गर्ने व्यक्तिले निर्णयात्मक मत दिनेछ।
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| 79 |
+
(५) साधारणतया समितिको बैठक बर्षको एक पटक बस्नेछ।
|
| 80 |
+
(६) बैठकको निर्णय सदस्य-सचिबद्वारा प्रमाणित गरिने छ।
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| 81 |
+
(७) यस दफामा लेखिएदेखि बाहेक बैठकमा अपनाईने अन्य कार्यबिधि समितिले आफै व्यवस्थित गर्न सक्नेछ।
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| 82 |
+
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| 83 |
+
**९. कोषको काम र कर्तव्य:**
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| 84 |
+
कोषको काम र कर्तव्य देहाय बमोजिम हुनेछ:
|
| 85 |
+
(क) बन्यजन्तु तथा अन्य प्राकृतिक सम्पदाको संरक्षण, संबद्ध्रन र व्यवस्थापन गर्ने,
|
| 86 |
+
(ख) राष्ट्रिय निकुञ्ज तथा आरक्षहरुको विकासको निमित्त आवश्यक व्यवस्था गर्ने,
|
| 87 |
+
(ग) बन्यजन्तु तथा अन्य प्राक���तिक सम्पदाको वैज्ञानिक अध्ययन तथा अनुसन्धान गर्ने।
|
| 88 |
+
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| 89 |
+
**१०. कोषको अधिकार:**
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| 90 |
+
कोषको अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछ:
|
| 91 |
+
(क) राष्ट्रिय बा अन्तर्राष्ट्रिय संघ, संस्था तथा अन्य क्षेत्रबाट नगदी, जिन्सी बा अन्य किसिमको सहायता प्राप्त गर्ने।
|
| 92 |
+
(ख) बन्यजन्तु तथा अन्य प्राकृतिक सम्पदासंग सम्बन्धित विदेशी संस्था र अन्तर्राष्ट्रिय संघ संस्थासंग सम्पर्क राखे।
|
| 93 |
+
(ग) विदेशी संस्था बा अन्तर्राष्ट्रिय संघ संस्था मार्फत चन्दा सङ्कलन गर्ने गराउने।
|
| 94 |
+
(घ) कोषको हितको लागि अन्य आवश्यक काम गर्ने।
|
| 95 |
+
|
| 96 |
+
**११. उपसमिति गठन गर्न सक्ने:**
|
| 97 |
+
(१) कोषले आफ्नो काम कारबाहीको निमित्त आवश्यकता अनुसार उपसमिति गठन गर्न सक्नेछ।
|
| 98 |
+
(२) उपसमितिको काम, कर्तव्य र अधिकार तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 99 |
+
|
| 100 |
+
**१२. कोष:**
|
| 101 |
+
(१) कोषमा देहायका रकमहरु रहनेछन्:
|
| 102 |
+
(क) नेपाल सरकारले प्रदान गरेको रकम,
|
| 103 |
+
(ख) राष्ट्रिय बा अन्तरराष्ट्रिय संघ संस्थाबाट प्राप्त रकम,
|
| 104 |
+
(ग) अन्य श्रोतबाट प्राप्त रकम।
|
| 105 |
+
(२) कोषको सबै रकम नेपाल राष्ट्र बैङ् बा अन्य कुनै बैङ्मा कोषको नाउँमा जम्मा गरिनेछ।
|
| 106 |
+
(३) जिन्सी आम्दानी खर्चको हिसाब छुट्टै राखिनेछ।
|
| 107 |
+
(४) कोषको तर्फबाट गर्नु पर्ने सबै खर्च कोषबाट व्यहोरिनेछ।
|
| 108 |
+
(५) कोषको खाता सज्ञान तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 109 |
+
|
| 110 |
+
**१३. लेखा र लेखापरीक्षण:**
|
| 111 |
+
(१) कोषको आय—व्ययको लेखा तोकिए बमोजिम राखिनेछ।
|
| 112 |
+
(२) कोषको लेखापरीक्षण महालेखापरीक्षकको बिभागबाट हुनेछ।
|
| 113 |
+
(३) नेपाल सरकारले चाहेमा कोषको हिसाब किताब सम्बन्धी कागजात र अरु नगदी जिन्सी समेत जुनसुकै बखत जाँच्न सक्नेछ।
|
| 114 |
+
|
| 115 |
+
**१४. मुद्दा हेर्ने अधिकारी:**
|
| 116 |
+
कोष बादी बा प्रतिबादी भएको कुनै मुद्दा बा यो ऐन अन्तर्गतको कुनै मुद्दाको शुरु कारबाई र किनारा गर्ने अधिकार उच्च अदालतलाई हुनेछ।
|
| 117 |
+
|
| 118 |
+
**१५. अधिकार प्रत्यायोजन:**
|
| 119 |
+
समितिले आफ्नो केही अधिकार अध्यक्ष, सदस्य, उपसमिति बा कोषको कुनै पदाधिकारीलाई प्रत्यायोजन गर्न सक्नेछ।
|
| 120 |
+
|
| 121 |
+
**१६. नियम बनाउने अधिकार:**
|
| 122 |
+
यो ऐनको उद्देश्य कार्यान्वयन गर्न समितिको परामर्श लिई नेपाल सरकारले आवश्यक नियमहरु बनाउन सक्नेछ।
|
| 123 |
+
|
| 124 |
+
**१७. विनियम बनाउने अधिकार:**
|
| 125 |
+
यो ऐन र यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम विपरीत नहुने गरी कोषले आवश्यक विनियमहरु बनाउन सक्नेछ र त्यस्तो विनियम नेपाल सरकारबाट स्वीकृत भएपछि लागू हुनेछ।
|
| 126 |
+
|
| 127 |
+
**१८. नेपाल सरकारसंग सम्पर्क:**
|
| 128 |
+
कोषले नेपाल सरकारसंग सम्पर्क राख्दा बन तथा बाताबरण मन्त्रालय राष्ट्रिय निकुञ्ज तथा बन्यजन्तु संरक्षण विभाग मार्फत राखेछ।
|
| 129 |
+
|
| 130 |
+
---
|
| 131 |
+
|
| 132 |
+
**द्वष्टव्य:**
|
| 133 |
+
केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६३ द्वारा रूपान्तर गरिएका शब्दहरू:
|
| 134 |
+
(क) "श्री ४ को सरकार" को सट्टा "नेपाल सरकार"
|
| 135 |
+
(ख) "श्री ४ महेन्द्र प्रकृति संरक्षण कोष" को सट्टा "राष्ट्रिय प्रकृति संरक्षण कोष"
|
section_15_pdf_22.txt
ADDED
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@@ -0,0 +1,260 @@
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| 1 |
+
**बी.पी.कोईराला स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान ऐन, २०४९**
|
| 2 |
+
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| 3 |
+
**लालमोहर र प्रकाशन मिति**
|
| 4 |
+
२०४९। १०। ५
|
| 5 |
+
|
| 6 |
+
**संशोधन गर्ने ऐन**
|
| 7 |
+
१. बी.पी. कोईराला स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान (पहिलो संशोधन) ऐन, २०४५
|
| 8 |
+
२. आयकर ऐन, २०४६
|
| 9 |
+
|
| 10 |
+
२०४५। ७। ११
|
| 11 |
+
२०५६। १२। १९
|
| 12 |
+
|
| 13 |
+
**प्रमाणीकरण र प्रकाशन मिति**
|
| 14 |
+
३. गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानुन संशोधन गर्ने ऐन, २०६६*
|
| 15 |
+
४. नेपालको संविधान अनुकूल बनाउन केही नेपाल ऐनलाई संशोधन गर्ने ऐन, २०७५
|
| 16 |
+
५. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०६२
|
| 17 |
+
|
| 18 |
+
२०६६। १०। ७
|
| 19 |
+
२०७५। ११। १९
|
| 20 |
+
२०६२। ०४। १४
|
| 21 |
+
|
| 22 |
+
२०४९ सालको ऐन नं. ४६
|
| 23 |
+
$x$
|
| 24 |
+
बी.पी. कोईराला स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठानको व्यवस्था गर्न बनेको ऐन
|
| 25 |
+
|
| 26 |
+
**प्रस्तावनाः**
|
| 27 |
+
जननेता स्वर्गीय विश्वेश्वर प्रसाद कोईरालाको चीर पुण्यस्मृतिका लागि एवं नेपाललाई स्वास्थ्य क्षेत्रमा क्रमशः आत्मनिर्भर बनाउँदै लैजान, सर्वसाधारण जनतालाई स्तरीय स्वास्थ्य सेवा प्रदान गर्न, स्वास्थ्य सम्बन्धी उच्चस्तरीय अध्ययन र अनुसन्धानको प्रवर्धन गर्न आवश्यक जनशक्ति तयार गर्न राष्ट्रिय महत्वको बी.पी. कोईराला स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान स्थापना र सञ्चालन गर्नको लागि कानुनी व्यवस्था गर्न बाञ्छुनीय भएकोले,
|
| 28 |
+
|
| 29 |
+
थी ५ महाराजाधिराज वीरेन्द्र वीर विक्रम शाहदेवको शासनकालको एक्काईसौं बर्षमा संसदले यो ऐन बनाएकोछ।
|
| 30 |
+
- यो ऐन संवत् २०६५ साल जेठ १५ गतेदेखि लागू भएको।
|
| 31 |
+
$x$ गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन. २०६६ द्वारा झिकिएको।
|
| 32 |
+
|
| 33 |
+
---
|
| 34 |
+
|
| 35 |
+
### **परिच्छेद-१**
|
| 36 |
+
**प्रारम्भिक**
|
| 37 |
+
|
| 38 |
+
**१. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भः**
|
| 39 |
+
(१) यस ऐनको नाम "बी.पी. कोईराला स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान ऐन, २०४९," रहेकोछ।
|
| 40 |
+
(२) यो ऐन तुरुन्त प्रारम्भ हुनेछ।
|
| 41 |
+
|
| 42 |
+
**२. परिभाषाः**
|
| 43 |
+
विषय बा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
|
| 44 |
+
(क) "प्रतिष्ठान" भन्नाले दफा ३ बमोजिम स्थापना भएको बी.पी. कोइराला स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान सम्झनु पर्छ।
|
| 45 |
+
(ख) "परिषद्" भन्नाले दफा ७ बमोजिम गठित सञ्चालक परिषद् (गभर्निङ्ग काउन्सिल) सम्झनु पर्छ।
|
| 46 |
+
(ख१) "कुलपति" भन्नाले दफा ११ बमोजिमको कुलपति सम्झनु पर्छ।
|
| 47 |
+
(ख२) "सहकुलपति" भन्नाले दफा ११क. बमोजिमको सहकुलपति सम्झनु पर्छ।
|
| 48 |
+
(ग) "उपकुलपति" भन्नाले दफा ११ख. बमोजिम नियुक्त उपकुलपति सम्झनु पर्छ।
|
| 49 |
+
(ग१) "शिक्षाध्यक्ष, रजिष्ट्रार र अस्पताल निर्देशक" भन्नाले दफा ११ग. बमोजिम नियुक्त शिक्षाध्यक्ष, रजिष्ट्���ार र अस्पताल निर्देशक सम्झनु पर्छ।
|
| 50 |
+
(घ) "तोकिएको" बा "तोकिए बमोजिम" भन्नाले यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा तोकिएको बा तोकिएबमोजिम सम्झनु पर्छ।
|
| 51 |
+
|
| 52 |
+
---
|
| 53 |
+
|
| 54 |
+
### **परिच्छेद-२**
|
| 55 |
+
**बी.पी.कोईराला स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठानको स्थापना, उद्देश्य तथा काम, कर्तव्य र अधिकार**
|
| 56 |
+
|
| 57 |
+
**३. बी.पी.कोईराला स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठानको स्थापनाः**
|
| 58 |
+
(१) नेपाललाई स्वास्थ्य क्षेत्रमा कमशः आत्मनिर्भर बनाउँदै लैजान, सर्वसाधारण जनतालाई स्तरीय स्वास्थ्य सेवा प्रदान गर्न, स्वास्थ्य सम्बन्धी उच्चस्तरीय अध्ययन र अनुसन्धानको प्रवर्धन गर्न आवश्यक जनशक्ति तयार गर्न बी.पी. कोईराला स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान स्थापना गरिएकोछ, जसलाई अंग्रेजी भाषामा "बी.पी. कोईराला इन्स्टिच्यूट अफ हेल्थ साइन्सेस" भनिनेछ।
|
| 59 |
+
(२) प्रतिष्ठानको कार्यालय सुनसरी जिल्लाको धरानमा रहनेछ।
|
| 60 |
+
|
| 61 |
+
**४. प्रतिष्ठान स्वशासित संस्था हुनेः**
|
| 62 |
+
(१) प्रतिष्ठान अबिच्छिन्न उत्तराधिकारबाला एक स्वशासित संस्था हुनेछ।
|
| 63 |
+
(२) प्रतिष्ठानको सबै काम कारबाहीको लागि एउटा छुट्टै छाप हुनेछ।
|
| 64 |
+
(३) प्रतिष्ठानले व्यक्ति सरह चल अचल सम्पत्ति प्राप्त गर्न, उपभोग गर्न, बेचबिखन गर्न बा अन्य किसिमले व्यवस्था गर्न सक्नेछ।
|
| 65 |
+
(४) प्रतिष्ठानले व्यक्ति सरह आफ्नो नामबाट नालिस उजुर गर्न र प्रतिष्ठान उपर पनि सोही नामबाट नालिस उजुर लाग्न सक्नेछ।
|
| 66 |
+
|
| 67 |
+
**५. प्रतिष्ठानको उद्देश्यः**
|
| 68 |
+
प्रतिष्ठानको उद्देश्य देहाय बमोजिम हुनेछः-
|
| 69 |
+
(क) देशलाई स्वास्थ्य क्षेत्रमा आत्मनिर्भर बनाउँदै लगी स्तरीय स्वास्थ्य सेवाको विकासका लागि आवश्यक दक्ष जनशक्ति तयार गर्न तोकिए बमोजिमको योग्यता प्राप्त व्यक्तिहरूलाई चिकित्सा, नर्सिङ्ग तथा स्वास्थ्य क्षेत्रका अन्य विषयहरूमा प्रमाणपत्र, स्नातक, स्नातकोत्तर तथा विद्याबारिधि तहको शिक्षा प्रदान गर्ने।
|
| 70 |
+
(ख) स्तरीय स्वास्थ्य सेवा प्रदान गर्ने, स्वास्थ्य सम्बन्धी विभिन्न तालिम प्रदान गर्ने र अन्य स्वास्थ्य संस्थाहरूलाई परामर्श दिने र लिने।
|
| 71 |
+
(ग) स्वास्थ्यको क्षेत्रमा आवश्यक अनुसन्धान गर्ने।
|
| 72 |
+
(घ) संक्रामक र टुपिकल रोगहरूको अनुसन्धान र उपचारको व्यवस्था गरी यी विषयहरूमा राष्ट्रियस्तरको एउटा उत्कृष्ट केन्द्र स्थापना गर्ने।
|
| 73 |
+
(ङ) स्वास्थ्य क्षेत्रमा मानवीय स्रोतको विकास तथा स्वास्थ्य विज्ञानका शिक्षकहरूको तालिमका लागि रा���्ट्रिय स्रोत केन्द्रहरूमध्ये एकको रूपमा काम गर्ने।
|
| 74 |
+
|
| 75 |
+
**६. प्रतिष्ठानको काम, कर्तव्य र अधिकारः**
|
| 76 |
+
प्रतिष्ठानको काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछः-
|
| 77 |
+
(क) स्वास्थ्य क्षेत्रको विभिन्न विषयहरूमा अध्ययन, अध्यापन, अनुसन्धान कार्य सञ्चालन र प्रबर्धन गर्ने।
|
| 78 |
+
(ख) प्रतिष्ठानद्वारा सञ्चालित कार्यको स्तर अभिबृद्धि गर्न स्वदेशी वा विदेशी विश्वविद्यालय, अस्पताल वा शैक्षिक संस्थाहरूसँग समन्वय कायम गर्ने।
|
| 79 |
+
(ग) स्वास्थ्य सम्बन्धी स्वदेशी तथा विदेशी विश्वविद्यालय तथा प्रतिष्ठान र राष्ट्रिय तथा अन्तर्राष्ट्रिय संघ संस्थासित सम्बन्ध स्थापना, विस्तार र सुदृढ गरी पारस्परिक सहयोग आदान प्रदान गर्ने।
|
| 80 |
+
(घ) स्वास्थ्य क्षेत्रमा योग्य जनशक्ति तयार गर्नको लागि स्वास्थ्य सम्बन्धी शिक्षण प्रशिक्षण तथा अनुसन्धानको व्यवस्था गर्ने।
|
| 81 |
+
(ङ) प्रतिष्ठानको उद्देश्य पूरा गर्नको लागि स्वास्थ्य सम्बन्धी विषयहरूमा गोष्ठी, सम्मेलन आदि आयोजना गर्ने, गराउने तथा स्वास्थ्य सम्बन्धी विभिन्न प्रकाशन गर्ने, गराउने।
|
| 82 |
+
(च) प्रतिष्ठानको सञ्चालन तथा यसको उद्देश्य अनुरूप स्वास्थ्य सम्बन्धी कार्यको लागि स्वदेशी तथा विदेशी व्यक्ति र राष्ट्रिय तथा अन्तर्राष्ट्रिय निकायबाट बित्तिय, प्राविधिक तथा अन्य सहयोग प्राप्त गरी परिचालन गर्ने।
|
| 83 |
+
(छ) स्वास्थ्य सेवाको उपयोगिता र उपादेयता बारे जनमानसमा जागरुकता अभिबृद्धि गर्ने, गराउने।
|
| 84 |
+
(ज) स्वास्थ्य सम्बन्धी नीति एवं स्वास्थ्य क्षेत्रको विकासमा नेपाल सरकारको परामर्शदाताहरू मध्ये एकको रूपमा कार्य गर्ने।
|
| 85 |
+
(झ) स्वास्थ्य सेवामा संलग्न निकायलाई बित्तिय तथा प्राविधिक सहयोग प्रदान गर्ने।
|
| 86 |
+
(ज) प्रतिष्ठानले दिने शिक्षा र तालिमको व्यवस्था गर्ने, परीक्षा लिने, स्नातक, स्नातकोत्तर र विद्याबारिधि तथा अन्य प्रमाणपत्र र उपाधि प्रदान गर्ने।
|
| 87 |
+
(ट) छात्रवृत्ति, पदक र पुरस्कारहरू प्रदान गर्ने।
|
| 88 |
+
(ट) प्रमाणपत्र, स्नातक, स्नातकोत्तर र विद्याबारिधि तहको शिक्षा प्रदान गर्ने कार्यक्रमको लागि पाठ्यक्रम र पाठ्यपुस्तक तयार गर्ने।
|
| 89 |
+
(ड) स्वास्थ्य सेवामा सूचना प्रवाह र अनुसन्धान प्रवर्धनका लागि तोकिएका जिल्लाहरूमा नमूना सूचना एवं अनुसन्धान क्षेत्रको विकास गर्ने।
|
| 90 |
+
(द) प्रतिष्ठानमा कार्यरत पदाधिकारी शिक्षक एवं कर्मचारीहरूको सेवा, शर्त र सुविधा स��्बन्धमा आवश्यक व्यवस्था गर्ने।
|
| 91 |
+
(ण) प्रतिष्ठानको बिभिन्न पदमा तोकिए बमोजिम नियुक्ति गर्ने।
|
| 92 |
+
(त) शैक्षिक र अन्य सेवा शुल्कहरू तोक्ने र प्राप्त गर्ने।
|
| 93 |
+
(थ) प्रतिष्ठानको सम्पत्तिको सुरक्षणमा ऋण लिने।
|
| 94 |
+
(द) प्रतिष्ठानको सम्पत्तिको लगानी गर्ने।
|
| 95 |
+
(ध) प्रतिष्ठानको अक्षयकोष खडा गरी तोकिए बमोजिम सञ्चालन गर्ने।
|
| 96 |
+
(न) प्रतिष्ठानको उद्देश्य पूर्ति गर्न अन्य आवश्यक कामहरू गर्ने, गराउने।
|
| 97 |
+
|
| 98 |
+
---
|
| 99 |
+
|
| 100 |
+
### **परिच्छेद-३**
|
| 101 |
+
**सञ्चालक परिषद् र कार्यकारिणी समितिको गठन तथा काम, कर्तव्य र अधिकार**
|
| 102 |
+
|
| 103 |
+
**७. सञ्चालक परिषद्को गठनः**
|
| 104 |
+
(१) प्रतिष्ठानको तर्फबाट गर्नु पर्ने कार्यहरू गर्न देहाय बमोजिमका सदस्यहरू भएको सञ्चालक परिषद् गठन हुन्छ-
|
| 105 |
+
(क) सहकुलपति
|
| 106 |
+
(ख) ...
|
| 107 |
+
(ग) ...
|
| 108 |
+
(घ) सदस्य, राष्ट्रिय योजना आयोग (स्वास्थ्य क्षेत्र हने) - सदस्य
|
| 109 |
+
(ड) प्रतिष्ठानको भूतपूर्व उपकुलपतिहरू मध्येबाट नेपाल सरकारले मनोनित गरेको एकजना - सदस्य
|
| 110 |
+
(च) विश्वविद्यालयका उपकुलपतिहरू मध्येबाट कार्यकारिणी समितिको सिफारिसमा नेपाल सरकारले मनोनित गरेका बढीमा दुईजना - सदस्य
|
| 111 |
+
(छ) उपकुलपति, नेपाल विज्ञान तथा प्रविधि प्रज्ञा प्रतिष्ठान
|
| 112 |
+
सचिब, स्वास्थ्य तथा जनसंख्या मन्त्रालय
|
| 113 |
+
|
| 114 |
+
(झ) सचिव, शिक्षा, विज्ञान तथा प्रविधि मन्त्रालय - सदस्य
|
| 115 |
+
(ज) सचिव, अर्थ मन्त्रालय - सदस्य
|
| 116 |
+
(ट) डीन, चिकित्सा शास्त्र अध्ययन संस्थान (त्रिभुवन विश्वविद्यालय) - सदस्य
|
| 117 |
+
(ट) अध्यक्ष, नेपाल स्वास्थ्य अनुसन्धान परिषद् - सदस्य
|
| 118 |
+
(ड) अध्यक्ष, नेपाल मेडिकल काउन्सिल - सदस्य
|
| 119 |
+
(ढ) स्वास्थ्य वैज्ञानिकहरूमध्येबाट कार्यकारिणी समितिको सिफारिसमा नेपाल सरकारले मनोनित गरेका दुईजना - सदस्य
|
| 120 |
+
(ण) प्रमुख, धरान नगरपालिका - सदस्य
|
| 121 |
+
(त) शिक्षाध्यक्ष - सदस्य
|
| 122 |
+
(थ) रजिष्ट्रार - सदस्य
|
| 123 |
+
(द) अस्पताल निर्देशक - सदस्य
|
| 124 |
+
(ध) प्रतिष्ठानका शिक्षकहरूमध्येबाट उपकुलपतिको सिफारिसमा सहकुलपतिले मनोनित गरेका दुईजना - सदस्य
|
| 125 |
+
(न) प्रतिष्ठित विद्वान, समाजसेवी, उद्योगपति तथा व्यापारी मध्येबाट कार्यकारिणी समितिको सिफारिसमा सहकुलपतिले मनोनित गरेका बढीमा दुईजना - सदस्य
|
| 126 |
+
(प) उपकुलपति - सदस्य-सचिव
|
| 127 |
+
|
| 128 |
+
(१क) उपदफा (१) को खण्ड (प) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि उपकुलपतिलाई कारबाही गर्नु पर्ने विषयमा छलफल गर्न बस्ने परिषद्को बैठकमा सोही उपदफाको खण्ड (थ) बमोजिमको सदस्यले तथा उपकुलपति र रजिष्ट्रारलाई एकै पटक कारबाही गर्नु पर्न�� विषयमा छलफल गर्न बस्ने परिषद्को बैठकमा सोही उपदफाको खण्ड (ज) बमोजिमको सदस्यले सदस्य-सचिवको रूपमा काम गर्नेछु।
|
| 129 |
+
|
| 130 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमका सदस्यहरू मध्ये पदेन सदस्यहरू बाहेक मनोनित सदस्यहरूको पदाबधि चार बर्षको हुनेछ।
|
| 131 |
+
|
| 132 |
+
**८. परिषद्को बैठक र निर्णय:**
|
| 133 |
+
(१) परिषद्को बैठक कम्तिमा बर्षको दुई पटक बस्नेछ।
|
| 134 |
+
(२) परिषद्को बैठकको अध्यक्षता परिषद्को अध्यक्षले गर्नेछ र निजको अनुपस्थितिमा बैठकमा उपस्थित सदस्यहरूले आफू मध्येबाट छानेको सदस्यले बैठकको अध्यक्षता गर्नेछ।
|
| 135 |
+
(३) परिषद्को कूल सदस्य संख्याको पचास प्रतिशत सदस्यहरू उपस्थित भएमा बैठकको लागि गणपूरक संख्या पुगेको मानिनेछ।
|
| 136 |
+
(४) बहुमतको निर्णय बैठकको निर्णय हुनेछ। बैठकमा बहुमत कायम हुन नसकेमा अध्यक्षले निर्णायक मत दिन सक्नेछ।
|
| 137 |
+
(५) बैठकको निर्णय परिषद्को सदस्य-सचिबबाट प्रमाणित गरिनेछ।
|
| 138 |
+
(६) बैठकको अन्य कार्यबिधि परिषद् आफैले निर्धारण गरे बमोजिम हुनेछ।
|
| 139 |
+
|
| 140 |
+
**९. परिषद्को काम, कर्तव्य र अधिकार:**
|
| 141 |
+
(१) यस ऐनमा अन्यत्र लेखिएको कामको अतिरिक्त परिषद्को काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछ:-
|
| 142 |
+
(क) प्रतिष्ठानबाट सञ्चालन गरिने प्रशिक्षण तथा अनुसन्धान कार्यक्रम सम्बन्धी नीति निर्धारण गर्ने।
|
| 143 |
+
(ख) प्रतिष्ठानको नियम बनाउने।
|
| 144 |
+
(ग) प्रतिष्ठानको योजना तथा कार्यक्रमहरू स्वीकृत गर्ने।
|
| 145 |
+
(घ) प्रतिष्ठानको बार्षिक तथा कार्यक्रमको प्रगति सम्बन्धी समीक्षा एवं मूल्यांकन गर्ने र बार्षिक बजेट स्वीकृत गर्ने।
|
| 146 |
+
(ङ) तोकिए बमोजिमका अन्य कामहरू गर्ने।
|
| 147 |
+
(२) परिषद्ले यस ऐन बमोजिम आफूले गर्नु पर्ने कुनै काम गर्नको लागि आवश्यकता अनुसार समिति र उपसमिति गठन गर्न सक्नेछ।
|
| 148 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम गठित समितिको काम, कर्तव्य र अधिकार तथा कार्यबिधि परिषद्ले तोके बमोजिम हुनेछ।
|
| 149 |
+
|
| 150 |
+
**१०. कार्यकारिणी समितिको गठन तथा काम, कर्तव्य र अधिकार:**
|
| 151 |
+
(१) प्रतिष्ठानको कार्यकारिणी निकायको रूपमा काम गर्न देहाय बमोजिमका सदस्यहरू रहेको कार्यकारिणी समिति रहनेछ:-
|
| 152 |
+
(क) उपकुलपति - अध्यक्ष
|
| 153 |
+
(ख) शिक्षाध्यक्ष - सदस्य
|
| 154 |
+
(ग) प्रतिनिधि, स्वास्थ्य तथा जनसंख्या मन्त्रालय - सदस्य
|
| 155 |
+
(घ) अस्पताल निर्देशक - सदस्य
|
| 156 |
+
(ङ) प्रतिष्ठानका विभागीय प्रमुखहरू मध्येबाट उपकुलपतिको सिफारिसमा सहकुलपतिले मनोनित गरेका दुईजना - सदस्य
|
| 157 |
+
(च) रजिष्ट्रार - सदस्य-सचिब
|
| 158 |
+
|
| 159 |
+
(२) उपदफा (१) को खण्ड (ड) बमोजिमका सदस्यहरूको पदा��धि दुई बर्षको हुनेछ।
|
| 160 |
+
(३) कार्यकारिणी समितिको अन्य काम, कर्तव्य र अधिकार तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 161 |
+
|
| 162 |
+
---
|
| 163 |
+
|
| 164 |
+
### **परिच्छेद-४**
|
| 165 |
+
**प्रतिष्ठानका पदाधिकारी, शिक्षक तथा कर्मचारीको सेवा, शर्त सम्बन्धी व्यवस्था**
|
| 166 |
+
|
| 167 |
+
**११. कुलपतिः**
|
| 168 |
+
(१) प्रधानमन्त्री प्रतिष्ठानको कुलपति हुनेछ।
|
| 169 |
+
(२) प्रतिष्ठानको दीक्षान्त समारोहमा कुलपतिले अध्यक्षको आसन ग्रहण गर्नेछ।
|
| 170 |
+
|
| 171 |
+
**११क. सहकुलपतिः**
|
| 172 |
+
स्वास्थ्य मन्त्री बा राज्यमन्त्री प्रतिष्ठानको सहकुलपति हुनेछ।
|
| 173 |
+
|
| 174 |
+
**११ख. उपकुलपतिको नियुक्तिः**
|
| 175 |
+
(१) प्रतिष्ठानको उपकुलपति पदमा नियुक्तिको लागि सिफारिस पेश गर्न कुलपतिबाट सहकुलपतिको अध्यक्षतामा अन्य दुईजना सदस्यहरू रहेको एक समिति गठन हुनेछ र सो समितिको सिफारिसमा कुलपतिबाट उपकुलपतिको नियुक्ति हुनेछ।
|
| 176 |
+
(२) उपकुलपति प्रतिष्ठानको पूरा समय काम गर्ने कार्यकारी प्रमुख हुनेछ।
|
| 177 |
+
(३) उपकुलपतिको पदाबधि पाँच बर्षको हुनेछ र निजको पदाबधि पुनः थप हुन सक्नेछ।
|
| 178 |
+
(४) उपकुलपतिको काम, कर्तव्य र अधिकार तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 179 |
+
(५) उपकुलपतिको पारिश्रमिक, सेवाको शर्त तथा सुविधा सम्बन्धी अन्य व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 180 |
+
|
| 181 |
+
**११ग. शिक्षाध्यक्ष, रजिष्ट्रार र अस्पताल निर्देशकको नियुक्ति:**
|
| 182 |
+
(१) उपकुलपतिको सिफारिसमा सहकुलपतिले प्रतिष्ठानको शिक्षाध्यक्ष, रजिष्ट्रार र अस्पताल निर्देशकको नियुक्ति गर्नेछ।
|
| 183 |
+
(२) शिक्षाध्यक्ष, रजिष्ट्रार र अस्पताल निर्देशकको पदाबधि पाँच बर्षको हुनेछ।
|
| 184 |
+
(३) शिक्षाध्यक्ष, रजिष्ट्रार र अस्पताल निर्देशकको काम, कर्तव्य र अधिकार तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 185 |
+
(४) शिक्षाध्यक्ष, रजिष्ट्रार र अस्पताल निर्देशकको पारिश्रमिक, सेवाको शर्त तथा सुविधा सम्बन्धी अन्य व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 186 |
+
|
| 187 |
+
**११घ. पदबाट हटाउन सकिने:**
|
| 188 |
+
(१) प्रतिष्ठानको उपकुलपति, शिक्षाध्यक्ष, रजिष्ट्रार र अस्पताल निर्देशकले आफ्नो पद अनुसारको दायित्व पूरा गरेको छैन भनी परिषद्का तत्काल कायम रहेका एक चौथाई सदस्यहरूले कुलपति समक्ष लिखित निवेदन दिएमा कुलपतिले सहकुलपतिको अध्यक्षतमा परिषद्का दुईजना सदस्यहरू समेत रहेको एक छानबिन समिति गठन गर्नेछ।
|
| 189 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम गठित छानबिन समितिले सो सम्बन्धमा आवश्यक छानबिन गरी आफ्नो प्रतिबेदन परिषद् समक्ष पेश गर्नेछ।
|
| 190 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम पेश भएको प्रतिवेदनमा उपकुलपति, शिक्षाध्यक्ष, रजिष्ट्रार बा अस्पताल निर्देशकले आफ्नो पद अनुसारको दायित्व पूरा गरेको छैन भनी उल्लेख गरेको भए सो सम्बन्धमा परिषद्मा छलफल हुँदा निजले पद अनुसारको दायित्व पूरा नगरेकोले पदबाट हटाउने भनी परिषद्को सम्पूर्ण सदस्य संख्याको बहुमतबाट पारित प्रस्ताव कुलपति समक्ष पेश भएपछि कुलपतिले निजलाई पदबाट हटाउनेछ।
|
| 191 |
+
(४) उपदफा (१) बमोजिम गठित छानबिन समितिले उपदफा (२) बमोजिम छानबिन गर्दा निजलाई आफ्नो सफाइ पेश गर्ने मनासिब माफिकको मौका दिनु पर्नेछ।
|
| 192 |
+
|
| 193 |
+
**१२. प्रतिष्ठानको शिक्षक तथा कर्मचारीहरूको नियुक्ति, सेवाको शर्त तथा पारिश्रमिक सम्बन्धी व्यवस्था:**
|
| 194 |
+
(१) प्रतिष्ठानका शिक्षक तथा कर्मचारीहरूको नियुक्ति, सेवाको शर्त तथा पारिश्रमिक सम्बन्धी व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 195 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम नियुक्त भएका सबै शिक्षक तथा कर्मचारीहरू नन्प्राक्टिसिङ् हुनेछन्।
|
| 196 |
+
|
| 197 |
+
**स्पष्टीकरण:**
|
| 198 |
+
यस उपदफाको प्रयोजनको लागि "नन्प्राक्टिसिङ्" भन्नाले प्रतिष्ठानको पदीय काम बाहेक पारिश्रमिक लिई बा नलिई अन्यत्र कुनै चिकित्सा (मेडिकल प्राक्टिस), अध्यापन (प्राइभेट ट्यूशन) लगायतका अन्य कुनै प्रकारको निर्जी व्यवसाय गर्न नपाइने सम्झनु पर्छ।
|
| 199 |
+
|
| 200 |
+
---
|
| 201 |
+
|
| 202 |
+
### **परिच्छेद-५**
|
| 203 |
+
**प्रतिष्ठानको कोष, लेखा तथा लेखापरीक्षण**
|
| 204 |
+
|
| 205 |
+
**१४. प्रतिष्ठानको कोष:**
|
| 206 |
+
(१) प्रतिष्ठानको एक छुई कोष हुनेछ।
|
| 207 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको कोषमा देहायका रकमहरू रहनेछन्:-
|
| 208 |
+
(क) नेपाल सरकारबाट प्राप्त रकम,
|
| 209 |
+
(ख) कुनै व्यक्ति, संस्था बा सरकारबाट प्राप्त ऋण, चन्दा, सहायता, अनुदान बा दान दातव्यको रकम,
|
| 210 |
+
(ग) शैक्षिक शुल्क तथा सेवा शुल्कबाट प्राप्त रकम,
|
| 211 |
+
(घ) अन्य कुनै स्रोतबाट प्राप्त रकम।
|
| 212 |
+
(३) विदेशी व्यक्ति, संस्था, सरकार बा अन्तर्राष्ट्रिय संस्थाबाट प्रतिष्ठानले रकम प्राप्त गदा नेपाल सरकारको स्वीकृति लिनु पर्नेछ।
|
| 213 |
+
(४) प्रतिष्ठानको कोषको रकम कुनै बैकमा खाता खोली जम्मा गरिनेछ।
|
| 214 |
+
(५) प्रतिष्ठानको सबै खर्चहरू उपदफा (२) बमोजिमको कोषबाट व्यहोरिनेछ।
|
| 215 |
+
(६) प्रतिष्ठानको कोष र खाताको सञ्चालन तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 216 |
+
|
| 217 |
+
**१५. लेखा र लेखापरीक्षण:**
|
| 218 |
+
(१) प्रतिष्ठानको आय-व्ययको लेखा तोकिए बमोजिम राख्नु पर्नेछ।
|
| 219 |
+
(२) प्रतिष्ठानको लेखापरीक्षण महालेखा परीक्षकको विभागबाट बा सो विभागबाट नियुक्त लेखा परीक्षकबाट हुनेछ।
|
| 220 |
+
|
| 221 |
+
---
|
| 222 |
+
|
| 223 |
+
### **परिच्छेद-६**
|
| 224 |
+
**विविध**
|
| 225 |
+
|
| 226 |
+
**१६. प्रतिष्ठानबाट प्रदान गरिने प्रमाणपत्रहरू:**
|
| 227 |
+
प्रचलित कान���नमा जुनसुकै कुरा लेखिएको भएता पनि प्रतिष्ठानले यस ऐन अन्तर्गत स्वास्थ्य सम्बन्धी स्नातक, स्नातकोत्तर, विद्याबारिधि तथा अन्य प्रमाणपत्र र उपाधि प्रदान गर्न सक्नेछ।
|
| 228 |
+
|
| 229 |
+
**१७. प्रतिष्ठानबाट प्रदान गरिने प्रमाणपत्रहरूको मान्यताः**
|
| 230 |
+
यस ऐन बमोजिम प्रतिष्ठानबाट प्रदान गरिने स्वास्थ्य सम्बन्धी स्नातक, स्नातकोत्तर, विद्याबारिधि तथा अन्य प्रमाणपत्र र उपाधिको मान्यता नेपाल मेडिकल काउन्सिल ऐन, २०२० बमोजिम हुनेछ।
|
| 231 |
+
|
| 232 |
+
**१८. बार्षिक प्रतिवेदन:**
|
| 233 |
+
प्रतिष्ठानको बार्षिक प्रतिवेदन उपकुलपतिले बार्षिक बर्ष समाप्त भएको तीन महिनाभित्र परिषद् समक्ष पेश गर्नेछ।
|
| 234 |
+
|
| 235 |
+
**१९. अधिकार प्रत्यायोजन:**
|
| 236 |
+
प्रतिष्ठानले यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बमोजिम आफूलाई प्राप्त अधिकारहरू मध्ये केही अधिकार परिषद्को कुनै सदस्यलाई प्रत्यायोजन गर्न सक्नेछ।
|
| 237 |
+
|
| 238 |
+
**२०. नेपाल सरकारको राष्ट्रिय स्वास्थ्य र शिक्षा नीति अनुरूप कार्य गर्नेः**
|
| 239 |
+
नेपाल सरकारको राष्ट्रिय स्वास्थ्य र शिक्षा नीति अनुरूप कार्य सञ्चालन गर्नु प्रतिष्ठानको कर्तव्य हुनेछ।
|
| 240 |
+
|
| 241 |
+
**२०क. नेपाल सरकारले आवश्यक निर्देशन दिन सक्नेः**
|
| 242 |
+
नेपाल सरकारले प्रतिष्ठानलाई आवश्यक निर्देशन दिन सक्नेछ।
|
| 243 |
+
|
| 244 |
+
**२१. प्रतिष्ठानलाई छुट र सुविधाः**
|
| 245 |
+
प्रतिष्ठानलाई देहाय बमोजिमका कुराहरूमा भन्सार, बिक्री कर जस्ता कर लाग्ने छैनन्।
|
| 246 |
+
(क) प्रतिष्ठानको निर्माण तथा सञ्चालनको लागि विदेशबाट झिकाइने निर्माण सामग्री तथा मेशिनरी औजारहरूमा।
|
| 247 |
+
(ख) प्रतिष्ठानले प्रदान गर्ने छात्रवृत्ति, विद्धतवृत्ति र पुरस्कारहरूमा।
|
| 248 |
+
(ग) प्रतिष्ठानले प्राप्त गरेको दान, दातव्य, अनुदान तथा अन्य आयस्रोत र प्रतिष्ठानको सम्पत्तिमा।
|
| 249 |
+
(घ) रजिष्टेशन गर्नु पर्ने जुनसुकै लिखतको रजिष्ट्रेशनमा।
|
| 250 |
+
|
| 251 |
+
**२२. सम्पर्क मन्त्रालय:**
|
| 252 |
+
प्रतिष्ठानले नेपाल सरकारसँग सम्पर्क राख्दा नेपाल सरकार, स्वास्थ्य तथा जनसंख्या मन्त्रालय मार्फत राख्नु पर्नेछ।
|
| 253 |
+
|
| 254 |
+
**२३. नियम बनाउने अधिकार:**
|
| 255 |
+
यो ऐनको उद्देश्य कार्यान्वयन गर्न परिषद्ले आवश्यक नियम बनाउन सक्नेछ।
|
| 256 |
+
|
| 257 |
+
---
|
| 258 |
+
**द्रष्टव्य:**
|
| 259 |
+
केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६३ द्वारा रूपान्तर भएका शब्दहरू:-
|
| 260 |
+
"श्री ४ को सरकार" को सट्टा "नेपाल सरकार"।
|
section_15_pdf_23.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,308 @@
|
|
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| 1 |
+
# औषधि ऐन, २०३४
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| 2 |
+
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| 3 |
+
**लालमोहर र प्रकाशन मिति**
|
| 4 |
+
२०३४। ७। ६
|
| 5 |
+
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| 6 |
+
## संशोधन गर्ने ऐन
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| 7 |
+
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| 8 |
+
१. औषधि (पहिलो संशोधन) ऐन, २०४४
|
| 9 |
+
२०४४। ७। १०
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| 10 |
+
२०४७। ६। १४
|
| 11 |
+
प्रमाणीकरण र प्रकाशन मिति
|
| 12 |
+
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| 13 |
+
३. गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानुन संशोधन गर्ने ऐन, २०६६
|
| 14 |
+
२०६६। १०। ७
|
| 15 |
+
|
| 16 |
+
४. केही नेपाल कानूनलाई संशोधन, एकीकरण, समायोजन र खारेज गर्ने ऐन, २०७४
|
| 17 |
+
२०७४। ६। ३०
|
| 18 |
+
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| 19 |
+
५. नेपालको संविधान अनुकूल बनाउन केही नेपाल ऐनलाई संशोधन गर्ने ऐन, २०७४
|
| 20 |
+
२०७४। ११। १९
|
| 21 |
+
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| 22 |
+
६. औषधि (तेस्रो संशोधन) ऐन, २०७९
|
| 23 |
+
२०७९। ०३। ३१
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| 24 |
+
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| 25 |
+
७. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०६२
|
| 26 |
+
२०६२। ०४। १४
|
| 27 |
+
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| 28 |
+
---
|
| 29 |
+
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| 30 |
+
## २०३४ सालको ऐन नं. २१
|
| 31 |
+
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| 32 |
+
### औषधिका सम्बन्धमा व्यवस्था गर्न बनेको ऐन
|
| 33 |
+
|
| 34 |
+
**प्रस्तावना:**
|
| 35 |
+
औषधि वा औषधिका साधक पदार्थहरूको अनुचित प्रयोग वा दुरूपयोग हुन नदिन त्यसको उपयोगिता एवम् प्रयोग सम्बन्धी झूठा वा भ्रमात्मक प्रचार हुन नदिन र जनसुरक्षित, असरयुक्त तथा गुणयुक्त नहुने औषधि उत्पादन, बिक्री-वितरण, निकासी पैठारी, सञ्चय र सेवनको नियन्त्रण गर्न बाज्छुनीय भएकोले,
|
| 36 |
+
|
| 37 |
+
श्री ४ महाराजाधिराज वीरेन्द्र वीर विक्रम शाहदेवबाट राष्ट्रिय पञ्चायतको सल्लाह र सम्भतिले यो ऐन बनाइवक्सेकोछ।
|
| 38 |
+
|
| 39 |
+
---
|
| 40 |
+
|
| 41 |
+
### परिच्छेद-१
|
| 42 |
+
**प्रारम्भिक**
|
| 43 |
+
|
| 44 |
+
१. **संक्षिप्त नाम, विस्तार र प्रारम्भ:**
|
| 45 |
+
(१) यस ऐनको नाम "औषधि ऐन, २०३४" रहेको छ।
|
| 46 |
+
(२) यो ऐनको विस्तार नेपाल भर हुनेछ।
|
| 47 |
+
(३) यस ऐनको दफा (१) तुरुन्त प्रारम्भ हुनेछ र अरू दफा समय समयमा नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशित गरी तोकेको क्षेत्रमा तोकेको मितिदेखि प्रारम्भ हुनेछ।
|
| 48 |
+
|
| 49 |
+
२. **परिभाषा:**
|
| 50 |
+
विषय बा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
|
| 51 |
+
(क) "औषधि" भन्नाले मानिस, पशु बा पक्षीलाई हुने रोगको निदान गर्न, उपचार गर्न बा रोकथाम गर्न, रोग निको पार्न बा साम्य गर्न बा मानिस, पशु बा पक्षीलाई रोग ल्याउने कीराको नाश गर्न मानिस, पशु बा पक्षीको शारीरिक बनावट बा प्रकियालाई असर पार्न प्रयोग गरिने पदार्थ बा त्यस्तो पदार्थमा लगाउने साधक पदार्थ समेतलाई सम्झनु पर्छ।
|
| 52 |
+
|
| 53 |
+
(ख) "उत्पादन" भन्नाले औषधि बनाउने, तयार गर्ने, प्रशोधन गर्ने, परिणत गर्ने, प्याकिङ्ग गर्ने, पुनः प्याकिङ्ग गर्ने बा लेबुल लगाउने प्रक्रिया बा सो सम्बन्धमा अपनाइने सम्पूर्ण बा कुनै प्रक्रिया सम्झनु पर्छ।
|
| 54 |
+
|
| 55 |
+
(ग) "डिस्पेन्सिङ्" भन्नाले ठीक तरहले लेबुल लगाइएको सुहाउँदो भाँडामा राखी मिश्रण गरी रोगीको सेवनको लागि औ��धि दिने कामलाई सम्झनु पर्छ।
|
| 56 |
+
|
| 57 |
+
(घ) "लेबुल" भन्नाले औषधि रहेको भाँडोमा लेखिएको सोही औषधिको नाम र तत्सम्बन्धी वर्णन सम्झनु पर्छ।
|
| 58 |
+
|
| 59 |
+
(ङ) "चिकित्सक" भन्नाले नेपाल मेडिकल काउन्सिल ऐन, २०२० बमोजिम दर्ता भएको चिकित्सक सम्झनु पर्छ।
|
| 60 |
+
|
| 61 |
+
(च) "सेवन" भन्नाले रोगीको तत्कालिक शारीरिक र मानसिक अवस्थामा सुधार ल्याउने मनसायले चिकित्सकले बा चिकित्सकबाट अधिकृत गरिएको व्यत्तिले रोगीलाई औषधि खुबाउने बा प्रयोग गर्ने बा त्यस्तो चिकित्सकले लेखिदिएको प्रेसकिप्सन अनुसार रोगी आफैले त्यस्तो औषधि खाने बा प्रयोग गर्ने कार्य सम्झनु पर्छ।
|
| 62 |
+
|
| 63 |
+
(छ) "बिभाग" भन्नाले दफा ४ बमोजिम गठित औषधि व्यवस्था बिभाग सम्झनु पर्छ।
|
| 64 |
+
|
| 65 |
+
(ज) "व्यवस्थापक" भन्नाले बिभागको प्रमुख सम्झनु पर्छ।
|
| 66 |
+
|
| 67 |
+
(झ) "निरीक्षक" भन्नाले परिच्छेद-६ को प्रयोजनको लागि विभाग 'वा प्रदेश सरकारले खटाइएको व्यक्ति सम्झनु पर्छ।
|
| 68 |
+
|
| 69 |
+
(ज) "तोकिएको" बा "तोकिएबमोजिम" भन्नाले यस ऐन अन्तर्गत बनेका नियममा तोकिएको बा तोकिएबमोजिम सम्झनु पर्छ।
|
| 70 |
+
|
| 71 |
+
---
|
| 72 |
+
|
| 73 |
+
### परिच्छेद-२
|
| 74 |
+
**औषधि परामर्श परिषद् र औषधि सल्लाहकार समिति**
|
| 75 |
+
|
| 76 |
+
३. **औषधि परामर्श परिषद्:**
|
| 77 |
+
(१) नेपाल सरकारलाई औषधि सम्बन्धी सैद्धान्तिक तथा प्रशासनिक विषयमा परामर्श दिन तोकिएबमोजिम औषधि परामर्श परिषद् गठन हुनेछ।
|
| 78 |
+
(२) औषधि परामर्श परिषद्को काम, कर्तव्य र अधिकार तोकिएबमोजिम हुनेछ।
|
| 79 |
+
|
| 80 |
+
४. **औषधि सल्लाहकार समिति:**
|
| 81 |
+
(१) औषधिको अनुसन्धान, विकास र नियन्त्रण सम्बन्धी प्राविधिक कुरामा विभागलाई परामर्श दिन तोकिएबमोजिम औषधि सल्लाहकार समिति गठन हुनेछ।
|
| 82 |
+
(२) औषधि सल्लाहकार समितिको काम, कर्तव्य र अधिकार तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 83 |
+
|
| 84 |
+
---
|
| 85 |
+
|
| 86 |
+
### परिच्छेद-३
|
| 87 |
+
**औषधिको अनुसन्धान र नियन्त्रण**
|
| 88 |
+
|
| 89 |
+
५. **औषधि व्यवस्था विभाग:**
|
| 90 |
+
(१) यस ऐनको उद्देश्य कार्यान्वयन गर्नको लागि नेपाल सरकारले औषधि व्यवस्था विभागको स्थापना गर्नेछ।
|
| 91 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम स्थापना भएको विभागले यो ऐन र यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बमोजिम औषधि नियन्त्रण सम्बन्धी सबै काम कारबाही गर्नेछ।
|
| 92 |
+
|
| 93 |
+
६. **नेपाल औषधि अनुसन्धानशाला र अन्य अनुसन्धानशाला:**
|
| 94 |
+
(१) नेपाल सरकारले स्थापना गरेको "नेपाल औषधि अनुसन्धानशाला" औषधिको बैज्ञानिक अनुसन्धान, परीक्षण र विश्लेषण गर्ने नेपाल सरकारको प्रमुख अंग हुनेछ।
|
| 95 |
+
(१क) उपदफा (१) बमोजिम स्थापना गरिएको "नेपाल औषधि अनुसन्धानशालाले औषधिको बैज्ञानिक अनुसन्धान, परी���्षण र विश्लेषण गर्दा अपनाउने कार्यविधि तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 96 |
+
(२) कुनै औषधिको बैज्ञानिक अनुसन्धान र विकास गर्न कुनै स्वेदशी बा विदेशी व्यक्ति बा संस्थाले नेपाल सरकारको स्वीकृति लिई अन्य अनुसन्धानशाला बा प्रयोगशाला स्थापना गर्न सक्नेछ।
|
| 97 |
+
|
| 98 |
+
---
|
| 99 |
+
|
| 100 |
+
### परिच्छेद-४
|
| 101 |
+
**औषधिको उत्पादन बिक्री-वितरण तथा निकासी पैठारी**
|
| 102 |
+
|
| 103 |
+
७. **औषधिको उद्योग स्थापना गर्न सिफारिसपत्र लिनु पर्ने:**
|
| 104 |
+
कुनै व्यक्तिले औषधिको उत्पादन गर्नको लागि उद्योग स्थापना गर्न प्रचलित कानुनबमोजिम नेपाल सरकारको स्वीकृति लिनुभन्दा अघि तोकिएबमोजिम विभागबाट सिफारिसपत्र लिनु पर्नेछ।
|
| 105 |
+
|
| 106 |
+
८. **उत्पादन अनुज्ञापत्र लिनु पर्ने:**
|
| 107 |
+
(१) दफा ७ बमोजिम विभागको सिफारिस लिई औषधि उद्योगको स्थापना गरिसकेपछि औषधि उत्पादन गर्नुभन्दा अघि औषधि उत्पादन गर्ने व्यक्तिले तोकिएको दस्तुर तिरी तोकिए बमोजिम विभागबाट उत्पादन अनुज्ञापत्र (प्रोडक्ट लाइसेन्स) लिनु पर्नेछ।
|
| 108 |
+
(२) यो ऐन प्रारम्भ हुनुभन्दा अगावै स्थापना भइसकेका औषधि उद्योगले पनि तोकिएको दस्तुर तिरी उपदफा (१) बमोजिम उत्पादन अनुज्ञापत्र लिनु पर्नेछ।
|
| 109 |
+
|
| 110 |
+
९. **औषधि दर्ता गर्नु पर्ने:**
|
| 111 |
+
(१) कुनै उद्योगले उत्पादन गरेको प्रत्येक औषधि बिकी वितरण गर्नु अघि त्यस्तो औषधि उत्पादन गर्ने उद्योगले तोकिएको दस्तुर तिरी तोकिए बमोजिम विभागमा दर्ता गराई औषधि दर्ता प्रमाणपत्र लिनु पर्नेछ।
|
| 112 |
+
(२) औषधि पैटारी गर्न चाहने व्यक्तिले आफूले पैटारी गर्न चाहेको अनुज्ञापत्र प्राप्त कम्पनीको प्रत्येक औषधि पैटारी गर्नुभन्दा अघि तोकिएको दस्तुर तिरी तोकिएबमोजिम विभागमा दर्ता गराई दर्ता प्रमाणपत्र लिनु पर्नेछ।
|
| 113 |
+
|
| 114 |
+
१०. **औषधिको निकासी पैटारी गर्न सिफारिसपत्र लिनु पर्ने:**
|
| 115 |
+
औषधिको निकासी पैटारी गर्न चाहने व्यक्तिले प्रचलित कानून बमोजिम निकासी पैटारीको अनुजापत्र लिनु भन्दा अघि तोकिएको दस्तुर तिरी तोकिए बमोजिम विभागबाट सिफारिसपत्र लिनु पर्नेछ।
|
| 116 |
+
|
| 117 |
+
१०क. **औषधि बा खोपको आपत्कालीन प्रयोग:**
|
| 118 |
+
(१) यस ऐन बा प्रचलित कानूनमा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि महामारीको रूपमा फैलिएको सङ्कामक रोगको रोकथाम, नियन्त्रण बा निर्मूल गर्न विश्व स्वास्थ्य सङ्गठनमा सूचीकृत भएका बा सम्बन्धित मुलुकको औषधि नियामक निकायले दर्ता गरेका बा त्यस्ता नियामक निकायले आपत्कालीन प्रयोगको अनुमति प्रदान गरेका औषधि बा खो���लाई नेपालमा आपत्कालीन प्रयोगको लागि औषधि सल्लाहकार समितिको सिफारिसमा विभागले दर्ता गर्नेछ।
|
| 119 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम दर्ता भएको औषधि बा खोपको पैटारीको लागि प्रचलित कानून बमोजिम अनुजापत्र दिन यस ऐन बमोजिम विभागले सिफारिसपत्र दिनेछ।
|
| 120 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम सिफारिसपत्र दिंदा विभागले पैटारी गर्ने परिमाण तोक्न बा त्यस्तो औषधि बा खोपको प्रयोग, बिक्री बा बितरण सम्बन्धमा आवश्यक शर्त तोक्न सक्नेछ।
|
| 121 |
+
(४) यस दफा बमोजिम पैटारी गरिएको बा प्रयोग, बिक्री बा बितरणमा रहेको औषधि बा खोपको प्रभावका कारण प्रयोगमा रोक लगाउन आवश्यक देखिएमा बा उपदफा (१) बमोजिम सूचीकृत गर्ने, दर्ता गर्ने बा त्यस्तो औषधि बा खोपको प्रयोग बा अनुमति प्रदान गर्ने निकायले रोक लगाएमा विभागले त्यस्तो औषधि बा खोपको दर्ता खारेज गर्न सक्नेछ।
|
| 122 |
+
|
| 123 |
+
११. **औषधिको बिक्री-वितरण गर्न नाम दर्ता गर्नु पर्ने:**
|
| 124 |
+
औषधिको बिक्री-वितरण गर्ने व्यक्तिले आफनो नाम र पसल बा फर्म विभागमा तोकिएबमोजिम दर्ता गराई तोकिएको दस्तुर तिरी प्रमाणपत्र लिनु पर्नेछ।
|
| 125 |
+
|
| 126 |
+
११क. **दर्ता भएको औषधि मात्र बिकी वितरण गर्नु पर्ने:**
|
| 127 |
+
दफा १० बमोजिम प्रमाणपत्र लिएको व्यक्तिले दफा ९क बमोजिम दर्ता भएको औषधि मात्र बिकी वितरण गर्नु पर्नेछ।
|
| 128 |
+
|
| 129 |
+
१२. **उत्पादन अनुज्ञापत्र, सिफारिसपत्र र प्रमाणपत्रको अवधि र नवीकरण:**
|
| 130 |
+
(१) उत्पादन अनुज्ञापत्र, सिफारिसपत्र र प्रमाणपत्र जारी भएको मितिले देहायको अवधिसम्म मान्य हुनेछ:
|
| 131 |
+
(क) दफा ८ बमोजिमको उत्पादन अनुज्ञापत्र पाँच वर्ष,
|
| 132 |
+
(ख) दफा ९क. बमोजिमको प्रमाणपत्र तीन वर्ष,
|
| 133 |
+
(ग) दफा ९, बमोजिमको सिफारिसपत्र तीन वर्ष, र
|
| 134 |
+
(घ) दफा १० बमोजिमको प्रमाणपत्र तीन वर्ष।
|
| 135 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको अवधि समाप्त हुनुभन्दा अगावै सम्बन्धित व्यक्तिले तोकिएको दस्तुर तिरी प्रत्येक उत्पादन अनुज्ञापत्र, सिफारिसपत्र र प्रमाणपत्र नवीकरण गर्नको लागि विभागमा निवेदन दिनु पर्नेछ।
|
| 136 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम निवेदन दिन नसक्ने व्यक्तिले सोको कारण खुलाई उपदफा (१) बमोजिमको अवधि समाप्त भएको मितिले तीस दिनभित्र दोब्बर दस्तुर सहित प्रत्येक उत्पादन अनुज्ञापत्र, सिफारिसपत्र र प्रमाणपत्र नवीकरणको लागि विभागमा निवेदन दिन सक्नेछ।
|
| 137 |
+
(४) उपदफा (२) बा (३) बमोजिम परेको निवेदनको सम्बन्धमा आवश्यक जाँचबुझ गरी विभागले उत्पादन अनुज्ञापत्र, सिफारिसपत्र र प्रमाणपत्र अर्को अव��िको लागि नवीकरण गरिदिन सक्नेछ।
|
| 138 |
+
(५) यस दफा बमोजिम नवीकरण नगराएको उत्पादन अनुज्ञापत्र, सिफारिसपत्र बा प्रमाणपत्र स्वतः रद् हुनेछ। त्यसरी रद् भएको जानकारी विभागले सम्बन्धित व्यक्तिलाई दिनु पर्नेछ।
|
| 139 |
+
(६) यस दफामा अन्यत्र जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि यो दफा प्रारम्भ हुनुअधि कायम रहने अवधि समाप्त भएका उत्पादन अनुज्ञापत्र, सिफारिसपत्र र प्रमाणपत्र नवीकरणको लागि त्यस्तो अवधि समाप्त भएको तीन महिनाभित्र नवीकरण गराउन आएमा पच्चीस प्रतिशत थप दस्तुर लिई यस दफा बमोजिम नवीकरण गर्न बाधा परेको मानिने छैन।
|
| 140 |
+
|
| 141 |
+
---
|
| 142 |
+
|
| 143 |
+
### परिच्छेद-५
|
| 144 |
+
**औषधिको स्तर**
|
| 145 |
+
|
| 146 |
+
१३. **औषधि जनसुरक्षित, असरयुक्त र गुणयुक्त हुनु पर्ने:**
|
| 147 |
+
प्रत्येक औषधि तोकिएको स्तर कायम रहने गरी जनसुरक्षित, असरयुक्त र गुणयुक्त हुनु पर्नेछ।
|
| 148 |
+
|
| 149 |
+
१४. **तोकिएको स्तर नभएको औषधिको उत्पादन, बिकी-वितरण, निकासी-पैठारी सञ्चय, बा सेवन गर्न मनाही:**
|
| 150 |
+
जनसुरक्षित, असरयुक्त र गुणयुक्त नभएको औषधिको उत्पादन, बिकी वितरण, निकासी-पैठारी, सञ्चय गर्न गराउन बा सेवन गराउन हुँदैन।
|
| 151 |
+
|
| 152 |
+
१५. **जनसुरक्षित, असरयुक्त र गुणयुक्त नभएको औषधि फिर्ता गराउने:**
|
| 153 |
+
(१) बिकी-वितरणको लागि बजारमा आइसकेको औषधि दफा १३ बमोजिम जनसुरक्षित, असरयुक्त र गुणयुक्त नभएमा उत्पादन गर्ने व्यक्ति बा निजको प्रतिनिधिले त्यस्तो औषधि बिकी-वितरण गर्ने व्यक्तिबाट फिर्ता लिनु पर्नेछ।
|
| 154 |
+
(२) जनसुरक्षित, असरयुक्त बा गुणयुक्त नभएको औषधि बिकी-वितरणको लागि बजारमा आएको कुरा व्यवस्थापकलाई कुनै तबरबाट जानकारी हुन आएमा निजले त्यस्तो औषधि बिकी-वितरण गर्ने व्यक्तिबाट उत्पादन गर्ने व्यक्तिलाई फिर्ता गराउन सक्नेछ।
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| 155 |
+
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| 156 |
+
१६. **क्षतिपूर्ति दिनु पर्ने:**
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| 157 |
+
जनसुरक्षित, असरयुक्त र गुणयुक्त नहुने गरी उत्पादन गरिएको औषधिबाट कुनै व्यक्तिको मृत्यु भएमा बा स्वास्थ्यलाई हानी हुन गएमा औषधिको उत्पादन गर्ने व्यक्ति जबाफदेही हुनेछ र त्यस्तो मृत्यु भए बापत मर्नेको हकदारलाई र हानी हुन गए बापत सो व्यक्तिलाई तोकिएबमोजिम क्षतिपूर्ति उत्पादन गर्ने व्यक्तिले दिनु पर्नेछ।
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| 158 |
+
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| 159 |
+
१७. **प्रत्याभूतिको लिखत विभागमा पेश गर्नु पर्ने:**
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| 160 |
+
दफा ९क. बमोजिम दर्ता भएको औषधि जनसुरक्षित, असरयुक्त र गुणयुक्त छ भनी त्यस्तो औषधि उत्पादन गर्ने व्यक्तिले प्रत्याभूति गरी लेखिदिएको लिखतको प्रमाणित प्रतिलिपि औषधि उत्पादन गर्ने ���्यक्ति स्वयंले बा निजको अधिकृत प्रतिनिधिले बा निकासीकर्ता बा पैठारीकर्ताले विभागमा पेश गर्नु पर्नेछ।
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| 161 |
+
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| 162 |
+
१८. **औषधिलाई समूहमा विभाजन गर्न सकिने:**
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| 163 |
+
(१) औषधिलाई तोकिए बमोजिम समूह बा उपसमूहमा विभाजन गर्न सकिनेछ।
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| 164 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम समूह विभाजन गर्दा चिकित्सकको प्रेसक्रिप्सन बिना बिक्री-वितरण गर्न नहुने भनी समूहकृत गरिएको औषधि चिकित्सकको प्रेसक्रिप्सन बिना कसैले बिक्री-वितरण गर्न हुँदैन। त्यस्तो औषधि चिकित्सकको प्रेसक्रिप्सन बमोजिम बिक्री-वितरण गर्दा फर्मासिष्ट वा फार्मेसी सहायक वा व्यवसायी आफैले बिक्री-वितरण गर्नु पर्नेछ र फर्मासिष्ट वा फार्मेसी सहायक वा व्यवसायी बाहेक अरूले त्यस्तो औषधि बिक्री-वितरण गर्दा फर्मासिष्ट वा फार्मेसी सहायक वा व्यवसायीको उपस्थिति अनिवार्य हुनेछ।
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| 165 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम समूह विभाजन गर्दा फर्मासिष्ट वा फार्मेसी सहायक वा व्यवसायीले वा निजमध्ये कुनैको उपस्थितिमा मात्र बिक्री-वितरण गर्नु पर्ने गरी समूहीकृत गरिएको औषधि निजले वा निजको उपस्थितिमा मात्र बिक्री वितरण गर्न सकिनेछ।
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| 166 |
+
(४) उपदफा (२) र (३) बमोजिम समूहीकृत गरिएको औषधि बाहेक अन्य औषधि अनुभवका आधारमा मनासिव मात्रामा कुनै पनि विक्रताले बिक्री गर्न सक्नेछ।
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| 167 |
+
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| 168 |
+
**स्पष्टीकरण:**
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| 169 |
+
"फर्मासिष्ट" भन्नाले फार्मेसीमा स्नातक वा फर्मास्यूटिक्समा स्नातकोपाधि प्राप्त गरेको वा औषधि सम्बन्धी अनुभव प्राप्त गरेको भई औषधि सल्लाहकार समितिबाट मान्यता प्राप्त व्यक्ति, "फार्मेसी सहायक" भन्नाले फार्मेसिमा प्रमाणपत्र तह वा सरह उत्तीर्ण गरेको व्यक्ति र "व्यवसायी" भन्नाले औषधि सल्लाहकार समितिबाट तोकेबमोजिमको योग्यता प्राप्त गरेको भई सोही समितिबाट मान्यता प्राप्त व्यक्ति सम्झनु पर्छ।
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| 170 |
+
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| 171 |
+
१९. **औषधिको अनुचित प्रयोग वा दुरूपयोग गर्न नहुने:**
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| 172 |
+
(१) कुनै व्यक्तिले औषधिको अनुचित प्रयोग वा दुरूपयोग गर्न हुँदैन।
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| 173 |
+
(२) दफा १८ को उपदफा (२) र (३) को विपरीत कुनै औषधिको बिक्री-वितरण गरे गराएमा सो औषधिको अनुचित प्रयोग वा दुरूपयोग भएको मानिनेछ।
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| 174 |
+
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| 175 |
+
२०. **औषधिको झूठा वा भ्रमात्मक प्रचार गर्न नहुने:**
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| 176 |
+
(१) कुनै व्यक्तिले औषधिको प्रयोग उपयोगिता वा प्रभावकारिता सम्बन्धमा झूठा वा भ्रमात्मक प्रचार वा विज्ञापन गर्न हुँदैन।
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| 177 |
+
(२) कुनै औषधिको प्रचार वा विज्ञापन गर्न चाहने व्यक्तिले त्यसको लागि तोकिए��ो दस्तुर तिरी तोकिएबमोजिम विभागवाट अनुमतिपत्र लिनु पर्नेछ।
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| 178 |
+
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| 179 |
+
---
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| 180 |
+
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| 181 |
+
### परिच्छेद-६
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| 182 |
+
**जाँचबुझ र निरीक्षण**
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| 183 |
+
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| 184 |
+
२१. **निरीक्षकले जाँचबुझ र निरीक्षण गर्न सक्ने:**
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| 185 |
+
(१) निरीक्षकले कुनै औषधिको उत्पादन, सञ्चय, बिक्री-वितरण वा परिवहन गर्ने काम भैरहेको कुनै ठाउँमा निरीक्षण जाँचबुझ र खानतलासी गर्न सक्नेछ।
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| 186 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम निरीक्षण जाँचबुझ वा खानतलासी गर्दा कुनै औषधि जनसुरक्षित, असरयुक्त, वा गुणयुक्त नभएको भन्ने शङा लागेमा वा यो ऐन वा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बर्खिलाप कुनै काम कारबाही भैरहेको छ भन्ने विश्वास हुने मनासिब कारण भएमा निरीक्षकले आफूले फेला पारेको औषधि सिलबन्दी गरी सो औषधिको धनीलाई जिम्मा लगाई त्यसको भरपाई निज धनीवाट लिई त्यस्तो औषधि रोक्का राखी त्यस्तो काम कारबाही तुरुन्त रोक्न आदेश दिन सक्नेछ।
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| 187 |
+
(३) निरीक्षकले यस दफाबमोजिम आफूले निरीक्षण, जाँचबुझ वा खानतलासी गरेकोमा वा औषधि रोक्का राखेकोमा वा औषधिको नमूना जाँच्न पठाएकोमा सो सम्बन्धी प्रतिवेदन तीन दिनभित्र व्यवस्थापक समक्ष पेश गर्नेछ।
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| 188 |
+
(४) उपदफा (२) बमोजिम रोक्का भएको औषधि जनसुरक्षित, असरयुक्त वा गुणयुक्त नभएको हो भन्ने अनुसन्धानशाला, प्रयोगशाला, अस्पताल, औषधालय वा क्लिनिकको विश्लेषण वा परीक्षणवाट ठहरिएमा व्यवस्थापकको आदेशले त्यस्तो औषधि जफत वा नष्ट गर्न सकिनेछ र त्यसरी आदेश दिंदा यस ऐन बमोजिम दिइएको सिफारिसपत्र, उत्पादन अनुज्ञापत्र, प्रमाणपत्र वा अनुमतिपत्र समेत रद्द गर्ने गरी आदेश दिन सक्नेछ।
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| 189 |
+
|
| 190 |
+
(४क) उपदफा (४) बमोजिम विश्लेषण बा परीक्षण गर्दा कुनै औषधि जनसुरक्षित, असरयुक्त र गुणयुक्त भएको पाइए तापनि त्यस्तो औषधि उत्पादन, बिक्री वितरण, सञ्चय, परिवहन बा निकासी पैठारी गर्ने व्यक्तिले यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियमको बर्खिलाप हुने कुनै कारबाही गरेको ठहरिएमा व्यवस्थापकले त्यस्तो औषधि जफत गरी औषधि उत्पादन, बिक्री वितरण, सञ्चय, परिवहन बा निकासी पैठारीमा नियन्त्रण गर्न बा त्यस्तो व्यक्तिको अनुज्ञापत्र बा प्रमाणपत्र बा सिफारिसपत्र छ महिनासम्मको लागि निलम्बन गर्न सक्नेछ।
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| 191 |
+
(५) उपदफा (४) बमोजिम औषधि नष्ट गर्दा लाग्ने खर्च उत्पादन गर्ने व्यक्तिले व्यहोर्नु पर्नेछ। बिकी गर्ने व्यक्तिबाट लिई रोक्का राखिएको औषधि नष्ट गर्नु पर्ने भएमा त्यस्तो औषधिको लिएको मोल समेत उत्पादन गर्ने व्यक्तिबाट बिकी गर्ने व्यक्तिलाई भराइनेछ।
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| 192 |
+
(६) यस दफा बमोजिमको जाँचबुझ र निरीक्षणको कार्यमा सहयोग गर्न विभागले आवश्यकता अनुसार सम्बन्धित विषयको कुनै विशेषज्ञलाई खटाउन सक्नेछ।
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| 193 |
+
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| 194 |
+
२१क. **प्रदेश सरकारबाट खटिएको निरीक्षकले जाँचबुझ र निरीक्षण गर्न सक्ने:**
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| 195 |
+
(१) प्रदेश सरकारबाट खटिएको निरीक्षकले कुनै औषधिको उत्पादन, गुणस्तर, सञ्चय, बिकी वितरण बा परिवहन भईरहेको कुनै टाउँको जाँचबुझ, निरीक्षण र खानतलासी गर्न सक्नेछ।
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| 196 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम खटिने निरीक्षकले निरीक्षण गर्दा औषधि जनसुरक्षित, असरयुक्त र गुणयुक्त नभएको बा यस ऐन बिपरीत बिकी वितरण गरेको पाईएमा व्यवस्थापक समक्ष प्रतिबेदन दिनु पर्नेछ।
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| 197 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम प्रतिबेदन प्राप्त भएपछि यस ऐन बमोजिम कसै उपर मुद्दा चलाउनु पर्ने अवस्था भएमा व्यवस्थापकले मुद्दा तहकिकात गर्ने अधिकारी समक्ष लेखी पटाउनु पर्नेछ।
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| 198 |
+
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| 199 |
+
२२. **व्यवस्थापकको आदेश उपर उजूर गर्न सक्ने:**
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| 200 |
+
(१) दफा २० को उपदफा (४) र (४क) बमोजिम उत्पादन अनुज्ञापत्र, प्रमाणपत्र वा सिफारिशपत्र, रद् वा निलम्बन गर्न व्यवस्थापकले दिएको आदेश उपर चित्त नबुझ्ने व्यक्तिले त्यस्तो आदेशको सूचना पाएको मितिले पैतीस दिनभित्र स्वास्थ्य मन्त्रालयको सचिव समक्ष उजूर गर्न सक्नेछ।
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| 201 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम परेको उजूरीको निर्णय तीन महिनाभित्र गरिसक्नु पर्नेछ।
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| 202 |
+
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| 203 |
+
२३. **निरीक्षण वा जाँचबुझ गर्दा अपनाउने कार्यविधि:**
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| 204 |
+
यो ऐनबमोजिम निरीक्षण जाँचबुझ र खानतलासी गर्दा तोकिए बमोजिमको तरिका र कार्यविधि अपनाउनु पर्नेछ।
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| 205 |
+
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| 206 |
+
२४. **निरीक्षक र विश्लेषकको लागि योग्यता:**
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| 207 |
+
(१) निरीक्षकको लागि देहायको योग्यता हुनु पर्नेछ:
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| 208 |
+
(क) फार्मेसीमा स्नातक, वा
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| 209 |
+
(ख) फार्मेसीमा प्रमाणपत्र तह वा सो सरह उत्तीर्ण भै फार्मेसी सम्बन्धी काममा कम्तीमा पाँच वर्षको अनुभव भएको।
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| 210 |
+
(२) विश्लेषकको लागि देहायको योग्यता हुनुपर्नेछ:
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| 211 |
+
(क) फार्मेसीमा स्नातक, वा
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| 212 |
+
(क १) रसायनशास्त्रमा स्नातकोत्तर, वा
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| 213 |
+
(ख) रसायन शास्त्रमा स्नातक भै औषधि विश्लेषण कार्यमा कम्तीमा तीन वर्षको अनुभव भएको।
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| 214 |
+
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| 215 |
+
२५. **औषधिको नमूना जाँच्न पटाउने:**
|
| 216 |
+
निरीक्षण वा जाँचबुझको सिलसिलामा रोक्का राखिएको वा कब्जा गरिएको औषधिको नमूना निरीक्षकले परीक्षण वा विश्लेषण गर्नको लागि अनुसन्धानशाला, प्रयोगशाला, अस्पताल, औषधालय वा क्लिनिकमा तोकिएबमोजिम पटाउनु पर्नेछ �� विश्लेषकले पनि आवश्यक परीक्षण वा विश्लेषण गरी त्यसको प्रतिवेदन तोकिएबमोजिम व्यवस्थापककहाँ पटाउनु पर्नेछ।
|
| 217 |
+
|
| 218 |
+
---
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| 219 |
+
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| 220 |
+
### परिच्छेद-७
|
| 221 |
+
**विविध**
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| 222 |
+
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| 223 |
+
२६. **नेपाल सरकारले औषधिको उत्पादन, बिक्री वितरण, सञ्चय, परिवहन, निकासी, पैटारी वा सेवन गर्न मनाही गर्न सक्नेः**
|
| 224 |
+
कुनै औषधिको उत्पादन, बिक्री वितरण, सञ्चय, परिवहन, निकासी, पैटारी वा सेवन गर्नको लागि मनाही गर्नु पर्ने देखिएमा नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी त्यस्तो औषधिको उत्पादन, बिक्री वितरण, सञ्चय, परिवहन, निकासी, पैटारी वा सेवन गर्नको लागि मनाही गर्न आदेश दिन सक्नेछ।
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| 225 |
+
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| 226 |
+
२७. **औषधिको मूल्य निर्धारण गर्न सक्ने:**
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| 227 |
+
विभागले आवश्यक देखेमा नेपाल सरकारको स्वीकृति लिई कुनै औषधिको मूल्य निर्धारण गर्न सक्नेछ। यसरी विभागले कुनै औषधिको मूल्य निर्धारण गरेको रहेछ भन्ने त्यसको सूचना नेपाल राजपत्रमा प्रकाशन गर्नु पर्नेछ।
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| 228 |
+
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| 229 |
+
२८. **प्रेसक्रिप्सन दिने सम्बन्धी व्यवस्था:**
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| 230 |
+
तोकिएको चिकित्सक, एकीकृत चिकित्सक वा स्वास्थ्यकर्मीले दफा १८ बमोजिम समूहीकृत गरिएका औषधिको प्रेशक्रिप्शन दिने सम्बन्धी व्यवस्था तोकिएबमोजिम हुनेछ।
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| 231 |
+
|
| 232 |
+
२९. **आवश्यक जनशक्ति र साधन नजुटाई औषधिको उत्पादन, बिक्री-वितरण, डिस्पेन्सिङ् वा सञ्चय गर्न नहुने:**
|
| 233 |
+
कुनै औषधिको उत्पादन, बिक्री-वितरण, डिस्पेन्सिङ्, सञ्चय वा निकासीपैटारी गर्नको लागि त्यस्तो कामसित सम्बन्धित तोकिए बमोजिमको जनशक्ति तथा अन्य आवश्यक साधन पर्याप्त मात्रामा नजुटाई त्यस्तो औषधिको उत्पादन, बिक्री-वितरण, डिस्पेन्सिङ्ग, सञ्चय बा निकासी पैटारी गर्न हुँदैन।
|
| 234 |
+
|
| 235 |
+
३०. **औषधिमा मिसावट र मिसावट भएको औषधि बिकी गर्न नहुने:**
|
| 236 |
+
(१) औषधिको प्रभाव शुन्य हुने, घटी हुने बा बदलिने बा हानिकारक हुने गरी कसैले कुनै औषधिमा मिसावट गर्न बा त्यस्तो मिसावट भएको हो भन्ने जानी जानी त्यस्तो औषधि बिकी गर्न बा बिकीको लागि राख्न बा उपचारको निमित्त कसैलाई दिन हुँदैन।
|
| 237 |
+
(२) कसैले कुनै अरू थोकलाई औषधि भनि बिकी गर्न हुँदैन।
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| 238 |
+
|
| 239 |
+
३१. **म्याद नाघेको औषधि बिकी-वितरण गर्न नहुने:**
|
| 240 |
+
म्याद नाघेको औषधि कसैले बिक्रीवितरण गर्न हुँदैन।
|
| 241 |
+
|
| 242 |
+
३२. **क्लिनिकल ट्रायल गर्न अनुमतिपत्र लिनु पर्नेः**
|
| 243 |
+
(१) कसैले कुनै नयाँ औषधि बा खोपको क्लिनिकल ट्रायल गर्न चाहेमा सो कामको लागि विभागवाट तोकिए बमोजिम अनुमतिपत्र लिनु पर्नेछ।
|
| 244 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि कुनै विदेशी मुलुकको सरकार बा सम्बन्धित नियामक निकायको अनुमति बमोजिम क्लिनिकल ट्रायलमा रहेको खोप विकास गर्ने संस्था बा कम्पनीले त्यस्तो खोपको नेपालमा क्लिनिकल ट्रायल गर्न चाहेमा नेपाल सरकारले सोको लागि अनुमति दिन सक्नेछ।
|
| 245 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम अनुमति दिने तथा क्लिनिकल ट्रायल गर्ने सम्बन्धी अन्य प्रक्रिया नेपाल सरकारले निर्धारण गरे बमोजिम हुनेछ।
|
| 246 |
+
|
| 247 |
+
३३. **औषधि उत्पादन गर्दा औषधिको प्रणाली र अन्य कुरा खुलाउनु पर्नेः**
|
| 248 |
+
(१) औषधिको उत्पादन गर्दा त्यस्तो औषधि एतोप्याथिक, आयुर्वेदिक, होमियोप्याथिक र यूनानी प्रणालीमध्ये कुन प्रणालीको औषधि हो सो खुलाई लेबुलमा उल्लेख गर्नु पर्नेछ।
|
| 249 |
+
(२) औषधि उत्पादन गर्दा त्यसको सेबनबाट हुन सक्ने सम्भावित प्रतिकूल असरको सम्बन्धमा तोकिएबमोजिम उल्लेख गर्नु पर्नेछ।
|
| 250 |
+
|
| 251 |
+
३४. **लागू र विषालु औषधिहरु सुरक्षित राख्नु पर्ने:**
|
| 252 |
+
(१) तोकिएको लागू तथा विषालु औषधिमा स्पष्ट लेबुल लगाई तोकिए बमोजिम सुरक्षित राख्नु पर्नेछ।
|
| 253 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमका लागू तथा विषालु औषधि बिकी वितरण गर्ने व्यक्तिले आफूले बिकी-वितरण गरेको लागू र विषालु औषधिको अभिलेख तोकिएको ढाँचामा राख्नु पर्नेछ र चिकित्सकबाट लेखिदिएको त्यस्तो लागू र विषालु औषधि सम्बन्धी प्रेसकिप्सन त्यस्तो अभिलेखसाथ संलग्न गरी राख्नु पर्नेछ।
|
| 254 |
+
|
| 255 |
+
---
|
| 256 |
+
|
| 257 |
+
### परिच्छेद-८
|
| 258 |
+
**दण्ड सजाय**
|
| 259 |
+
|
| 260 |
+
३५. **दण्ड सजाय:**
|
| 261 |
+
(१) यस ऐनको परिच्छेद-४ को बर्खिलाप बा दफा २४ बमोजिमको आदेशको बर्खिलाप काम कारबाही गर्ने व्यक्तिलाई तीन बर्षसम्म कैद बा पच्चीस हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना बा दुबै सजाय हुनेछ।
|
| 262 |
+
(२) दफा १६ को विपरीत हुने गरी औषधिको अनुचित प्रयोग बा दुरुपयोग गरेमा बा दफा ३० विपरीत कसैले औषधिमा मिसाबट गरेमा बा मिसाबट भएको औषधि बिकी गरेमा बा कुनै अरु थोकलाई औषधि भनी बिकी गरेमा बा दफा ३१ विपरीत म्याद नाघेको औषधि बिकी वितरण गरेमा बा दफा ३४ विपरीत हुने गरी कुनै काम कारबाही गरेमा निजलाई देहाय बमोजिम सजाय हुनेछ:
|
| 263 |
+
(क) त्यस्तो औषधि सेबन गरेको कारणले ज्यान मरिसकेकोमा कसूरको मात्रा अनुसार जन्मकैदसम्म,
|
| 264 |
+
(ख) त्यस्तो औषधि सेबन गरेको कारणले ज्यान मर्न सक्ने गरी खतरा पुगेको बा पुग्ने सम्भावना भएकोमा ज्यान मार्ने उद्योग गरे सरह,
|
| 265 |
+
(ग) त्यस्तो औषधि सेबन गरेको कारणले शरीरको कुनै अङ्गभङ्ग हुने बा सोको ���क्ति क्षीण बा हरण हुन सक्ने भएमा दश बर्षसम्म कैद र एक लाख रुपैयाँसम्म जरिबाना,
|
| 266 |
+
(घ) खण्ड (क), (ख) बा (ग) बाहेकको अन्य अवस्थामा पाँच बर्षसम्म कैद र पचास हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना।
|
| 267 |
+
(३) उपदफा (१) र (२) मा लेखिएदेखि बाहेक यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेका नियम बर्खिलाप कुनै काम कारबाही गर्ने व्यक्तिलाई एक बर्षसम्म कैद बा पाँच हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना बा दुबै सजाय हुनेछ।
|
| 268 |
+
(४) कसैले यस ऐन बमोजिमको कसूर गरेको कारणबाट कसैको ज्यान मरेमा बा अङ्गभङ्ग भएमा बा अन्य हानि, नोक्सानी बा क्षति पुगेकोमा कसूरदारबाट सम्बन्धित पीडितलाई र निजको मृत्यु भएकोमा निजको हकबालालाई मनासिब क्षतिपूर्ति भराई दिनु पर्नेछ।
|
| 269 |
+
|
| 270 |
+
३६. **जरिबानाको उपल्लो हद र जरिबाना बापतको कैद:**
|
| 271 |
+
(१) दफा ३५ को उपदफा (२) बमोजिम जरिबाना गर्ने प्रयोजनको लागि त्यसरी जरिबाना गर्दा बिगो बमोजिम बा एक लाख रुपैयाँसम्म जुन बढी हुन्छ, सो हदसम्म जरिबाना हुनेछ। तर कसूरदारको बा कसूर गरेको अवस्थासँग नसुहाउने गरी अत्याधिक जरिबाना तोक्न हुँदैन।
|
| 272 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम जरिबानाको सजाय तोक्दा जरिबाना नतिरेमा सो नतिरे बापत कति समयको लागि कैद हुने हो भन्ने कुरा पनि मुद्दा हेर्ने अधिकारीले आफ्नो निर्णयमा तोक्नु पर्छ।
|
| 273 |
+
(३) जुन कसूर गरे बापत जरिबानाको सजाय भएको छ, सो कसूरमा कैदको सजाय समेत हुने रहेछ भने उपदफा (२) अन्तर्गत जरिबाना नतिरे बापत पाँच बर्षभन्दा बढी अवधिका लागि कैद तोक्नु हुँदैन। जन्मकैद गरिएकोमा जरिबाना बापत थप कैद गरिने छैन।
|
| 274 |
+
|
| 275 |
+
---
|
| 276 |
+
|
| 277 |
+
### परिच्छेद-९
|
| 278 |
+
**अन्य व्यवस्था**
|
| 279 |
+
|
| 280 |
+
३७. **औषधिको पेटेण्ट दर्ता गर्ने अधिकार:**
|
| 281 |
+
औषधिको पेटेण्ट दर्ता गर्ने सम्बन्धी अधिकार प्रचलित कानूनबमोजिम हुनेछ।
|
| 282 |
+
|
| 283 |
+
३८. **अधिकार प्रत्यायोजन:**
|
| 284 |
+
यस ऐनबमोजिम व्यवस्थापकलाई प्राप्त अधिकारमध्ये सबै बा कुनै अधिकार नेपाल सरकारले कुनै अधिकारीलाई प्रत्यायोजन गर्न सक्नेछ।
|
| 285 |
+
|
| 286 |
+
३९. **सरकारबादी हुने:**
|
| 287 |
+
यो ऐन अन्तर्गतको मुद्दा नेपाल सरकारबादी हुनेछ।
|
| 288 |
+
|
| 289 |
+
४०. **मुद्दाको तहकिकात र दायरी:**
|
| 290 |
+
(१) यस ऐन बमोजिम सजाय हुने कसूर सम्बन्धी मुद्दाको तहकिकात विभागले खटाएको निरीक्षकले गर्नेछ र त्यस्तो तहकिकातको काम पूरा भएपछि मुद्दा हेर्ने अधिकारी समक्ष मुद्दा दायर गर्नेछ।
|
| 291 |
+
(१क) उपदफा (१) बमोजिम मुद्दाको तहकिकात गर्दा कसूरमा संलग्न व्यक्तिलाई गिरफ्तार गर्ने, कसूरसँग सम्बन्धित जुनसुकै स्थान���ो खानतलासी लिने, कसूरसँग सम्बन्धित कागजात बा अन्य माल बस्तु आफनो जिम्मामा लिने तथा सर्जमिन मुचुल्का तयार गर्ने अधिकार निरीक्षकलाई हुनेछ।
|
| 292 |
+
(१ख) उपदफा (१) र (१क) बमोजिम तहकिकात गर्दा निरीक्षकले अभियुक्तलाई बयान गराई मनासिब आधार भएमा तारखमा राख्न, धर्रोट बा जमानत लिई छाड्न बा मुद्दा हेर्ने अधिकारीको पूर्व स्वीकृति लिई बढीमा पच्चीस दिनसम्म थुनामा राख्न सक्नेछ।
|
| 293 |
+
(१ग) उपदफा (१क) र (१ख) बमोजिमको कुनै काम कारबाही गर्दा निरीक्षकले आवश्यकता अनुसार प्रहरी कर्मचारीको सहयोग माग गर्न सक्नेछ। त्यस्तो सहयोग माग भएमा प्रहरी कर्मचारीले आवश्यक सहयोग पु¥याउनु पर्नेछ।
|
| 294 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम मुद्दा तहकिकात र दायर गर्दा निरीक्षकले सरकारी बकीलको राय लिन सक्नेछ। मुद्दा दायर भई सकेपछि मुद्दाको बहस पैरबी र पुनराबेदन सरकारी बकीलबाट हुनेछ।
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| 295 |
+
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+
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| 297 |
+
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### परिच्छेद-१०
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| 299 |
+
**नियम बनाउने अधिकार**
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| 300 |
+
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| 301 |
+
४१. **नियम बनाउने अधिकार:**
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| 302 |
+
यस ऐनको उद्देश्य कार्यान्वित गर्नको लागि नेपाल सरकारले नियम बनाउने सक्नेछ।
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| 303 |
+
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+
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**इष्टव्य:**
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| 307 |
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केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६३ द्वारा रूपान्तर भएका शब्दहरू:
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| 308 |
+
"श्री ४ को सरकार" को सट्टा "नेपाल सरकार"।
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section_16_pdf_10.txt
ADDED
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@@ -0,0 +1,149 @@
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| 1 |
+
# घरेलु हिंसा (कसूर र सजाय) ऐन, २०६६
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| 2 |
+
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| 3 |
+
## प्रमाणीकरण र प्रकाशन मिति
|
| 4 |
+
२०६६।०१।१४
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| 5 |
+
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| 6 |
+
## संशोधन गर्ने ऐन
|
| 7 |
+
१. लैहिक समानता कायम गर्न तथा लैहिक हिंसा अन्त्य गर्न केही नेपाल ऐनलाई संशोधन गर्ने ऐन, २०७२
|
| 8 |
+
२०७२।०६।१४
|
| 9 |
+
२. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७२
|
| 10 |
+
२०७२।११।१३
|
| 11 |
+
३. नेपालको संविधान अनुकूल बनाउन केही नेपाल ऐनलाई संशोधन गर्ने ऐन, २०७४
|
| 12 |
+
२०७४।११।१९
|
| 13 |
+
४. मुलुकी संहिता सम्बन्धी केही नेपाल ऐनलाई संशोधन गर्ने ऐन, २०७४
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| 14 |
+
२०७६।०१।०२
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| 15 |
+
४. सुशासन प्रबर्धन तथा सार्वजनिक सेवा प्रबाह सम्बन्धी केही नेपाल ऐनलाई संशोधन गर्ने ऐन, २०६१
|
| 16 |
+
२०६१।१२।१६
|
| 17 |
+
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| 18 |
+
संबत् २०६६ सालको ऐन नं. १
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| 19 |
+
घरेलु हिंसा नियन्त्रण गर्ने सम्बन्धमा व्यवस्था गर्न बनेको ऐन
|
| 20 |
+
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| 21 |
+
प्रस्तावना: प्रत्येक व्यक्तिको सुरक्षित र सम्मानजनक तवरले बाँच्न पाउने अधिकारको सम्मान गर्दै घर परिवारभित्र वा घर परिवारसँग गाँसिएर हुने हिंसाजन्य कार्यलाई दण्डनीय बनाई त्यस्तो कार्य नियन्त्रण गर्न तथा घरेलु हिंसावाट पीडित व्यक्तिलाई संरक्षण गरी न्याय प्रदान गर्ने सम्बन्धमा कानूनी व्यवस्था गर्न बाञ्छुनीय भएकोले,
|
| 22 |
+
|
| 23 |
+
नेपालको अन्तरिम संविधान, २०६३ को धारा ६३ को उपधारा (१) बमोजिम संविधान सभाले यो ऐन बनाएको छ।
|
| 24 |
+
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| 25 |
+
१. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भ:
|
| 26 |
+
(१) यस ऐनको नाम "घरेलु हिंसा (कसूर र सजाय) ऐन, २०६६" रहेको छ।
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| 27 |
+
(२) यो ऐन तुरुन्त प्रारम्भ हुनेछ।
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| 28 |
+
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| 29 |
+
२. परिभाषा:
|
| 30 |
+
विषय वा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
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| 31 |
+
(क) "घरेलु हिंसा" भन्नाले कुनै व्यत्कृिले घरेलु सम्बन्ध भएको अर्को कुनै व्यत्किलाई दिएको शारीरिक, मानसिक, यौनजन्य बा आर्थिक यातना सम्झनु पर्छ।
|
| 32 |
+
(ख) "घरेलु सम्बन्ध" भन्नाले बंशज, बिबाह बा धर्मपुत्र बा धर्मपुत्री भएको बा संयुक्त परिवारको सदस्य, आश्रित बा कामदारको रुपमा एकै परिवारमा बसेका व्यत्किहरुका बीचमा भएको सम्बन्ध सम्झनु पर्छ र सो शब्दले सँगै बसेका जोडी बा अंश लिई बा नलिई भिन्न बसेका पति बा पत्नीको सम्बन्ध समेतलाई जनाउँछ।
|
| 33 |
+
(ग) "शारीरिक यातना" भन्नाले कुटपिट गर्ने, गैर कानूनी थुनामा राख्ने, शारीरिक चोट पुन्याउने, त्तेजाब बाहेक अन्य रासायनिक पदार्थ छुर्किइ बा सो पदार्थले पोली, डामी, दली, घसी जीउमा पीडा गराउने बा अनुहार बा शरीरको कुनै अंग कुरुप पारिदिने बा यस्तै अन्य कुनै काम गर्ने बा गराउने कार्य सम्झनु पर्छ।
|
| 34 |
+
(घ) "मानसिक यातना" भन्नाले शारीरि�� यातनाको डर धाक देखाउने बा धम्की दिने, त्रासपूर्ण व्यवहार गर्ने, गालीगलोज गर्ने, झूझ बात लगाउने, घरबाट निकाला गर्ने, बैचारिक, धार्मिक, साँस्कृतिक, प्रथा, परम्पराका आधारमा भेदभाव गर्ने, रुप, रंग, शारीरिक बनावट तथा कुनै रोग लागेको आधारमा अपमानित गर्ने, मानसिक सन्तुलन गुमाउने, आत्महत्या गर्न दुरुत्साहन दिने बा आत्महत्या गर्ने परिस्थिति खडा गर्ने हदसम्मको कार्य सम्झनु पर्छ र सो शब्दले मानसिक बा भावनात्मक चोट पुग्न सक्ने अन्य कुनै काम समेतलाई जनाउँछ।
|
| 35 |
+
(ङ) "यौनजन्य यातना" भन्नाले यौनजन्य प्रकृतिको दुर्व्यबहार, अपमान, हतोत्साह बा आत्मसम्मानमा चोट पु¥याउने बा सुरक्षित यौन स्वास्थ्यमा आघात पुग्ने कुनै पनि कार्य सम्झनु पर्छ।
|
| 36 |
+
(च) "आर्थिक यातना" भन्नाले सगोल बा निजी सम्पत्तिको प्रयोग गर्न बा रोजगारी बा आर्थिक स्रोत र साधनको पहुँच बा प्रयोगमा बञ्चित गर्ने कार्न्य सम्झनु पर्छ र सो शब्दले महिलाको हकमा दाइजो माग गर्ने, दाइजो ल्याउन दबाब दिने बा दाइजो नल्याएको कारणबाट गरिने घुणा, हेला बा तिरस्कार समेतलाई जनाउँछ।
|
| 37 |
+
(छ) "पीडित" भन्नाले पीडकसँग घरेलु सम्बन्ध भै निजद्वारा गरिएको घरेलु हिसाबाट पीडित भनी दाबी गर्ने व्यक्ति सम्झनु पर्छ।
|
| 38 |
+
(ज) "पीडक" भन्नाले पीडितसँग घरेलु सम्बन्ध भै निजविरुद्ध घरेलु हिसा गरेको भनी पीडितले दाबी गरेको व्यक्ति सम्झनु पर्छ र सो शब्दले घरेलु हिसा गर्ने कार्यमा संलग्न रहेको अन्य व्यक्ति बा मतियारलाई समेत जनाउँछ।
|
| 39 |
+
(झ) "प्रहरी कार्यालय" भन्नाले पीडित बसोबास गरेको, पीडक रहेको बा घटनास्थलको नजिकको प्रहरी कार्यालय सम्झनु पर्छ र सो शब्दले जिल्ला प्रहरी कार्यालय अन्तर्गतको बालबालिका बा महिला सेल बा प्रहरी चौकी बा उपचौकी समेतलाई जनाउँछ।
|
| 40 |
+
(अ) "स्थानीय तह" भन्नाले पीडित बसोबास गरेको बा पीडक रहेको बा घटना भएको "गाउँपालिका बा नगरपालिका सम्झनु पर्छ र सो शब्दले नगरपालिकाको बडा समिति समेतलाई जनाउँछ।
|
| 41 |
+
(ट) "अदालत" भन्नाले नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी तोकेको अदालत सम्झनु पर्छ।
|
| 42 |
+
(ट9) "उजूरी" भन्नाले दफा ४ बा ४ बमोजिम दिइने उजुरी सम्झनु पर्छ र सो शब्दले दफा ४क. बमोजिम दिइने जाहेरी दरखास्त समेतलाई जनाउँछ।
|
| 43 |
+
(ट) "तोकिएको" बा "तोकिए बमोजिम" भन्नाले यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा तोकिएको बा तोकिए बमोजिम सम्झनु पर्छ।
|
| 44 |
+
|
| 45 |
+
३. घरेलु हिंस�� गर्न गराउन नहुने:
|
| 46 |
+
(१) कसैले पनि घरेलु हिंसा गर्न गराउन बा सो कुराको उद्योग गर्न बा घरेलु हिंसाको निमित्त कसैलाई दुरुत्साहन गर्न हुँदैन।
|
| 47 |
+
(२) कसैले उपदफा (१) बिपरीतको कार्य गरेमा यस ऐन अन्तर्गतको कसूर गरेको मानिनेछ।
|
| 48 |
+
|
| 49 |
+
४. उजुरी गर्ने:
|
| 50 |
+
(१) घरेलु हिंसा भएको, भैरहेको बा हुन लागेको थाहा पाउने जुनसुकै व्यत्किले सो सम्बन्धी बिबरण खुलाई प्रहरी कार्यालय बा राष्ट्रिय महिला आयोग बा "स्थानीय तह समक्ष लिखित बा मौखिक उजुरी दिन सक्नेछ।
|
| 51 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको उजुरी लिखित रुपमा प्राप्त भएकोमा तुरुन्त र मौखिक रुपमा प्राप्त भएकोमा सो सम्बन्धी आवश्यक बिबरण लेखी लेखाई उजुरीकर्ताको सहीछाप गराई दर्ता गर्नु पर्नेछ।
|
| 52 |
+
(३) राष्ट्रिय महिला आयोगमा दर्ता भएको उजुरीको सम्बन्धमा राष्ट्रिय महिला आयोग सम्बन्धी प्रचलित कानून बमोजिम आवश्यक कारबाही हुनेछ।
|
| 53 |
+
(४) प्रहरी कार्यालयमा उजुरी दर्ता भएकोमा प्रहरी कार्यालयले बाटोको म्याद बाहेक चौबीस घण्टाभित्र पीडकलाई झिकाई र अटेर गरे पक्राउ गरी तुरुन्त बयान गराउनु पर्नेछ।
|
| 54 |
+
(४) "स्थानीय तहमा उजुरी दर्ता भएकोमा बाटोको म्याद बाहेक चौबीस घण्टाभित्र पीडकलाई झिकाई तथा अटेर गरेमा प्रहरीको सहयोग लिई पक्राउ गरी तुरुन्त बयान गराउनु पर्नेछ।
|
| 55 |
+
(६) घरेलु हिंसाको कारण पीडितलाई कुनै शारीरिक चोटपटक बा मानसिक यातना पुगेको देखिएमा तत्काल उपचारका लागि नजिकको अस्पताल बा स्वास्थ्य केन्द्रमा पटाई निजको उपचार र घा जाँच गराउनु पर्नेछ। स्थानीय निकायले गराएको घा जाँच प्रतिबेदनको एक प्रति प्रहरी कार्यालयमा पटाउनु पर्नेछ।
|
| 56 |
+
(७) उजुरीको प्रारम्भिक रुपमा छानबिन गर्दा पीडित र निजसँग आबित व्यक्तिलाई सुरक्षा प्रदान गर्न आवश्यक देखिएमा प्रहरी कार्यालयको सहयोग लिई तत्काल सुरक्षाको व्यवस्था मिलाउनु पर्नेछ।
|
| 57 |
+
(द) उपदफा (४) बा (४) बमोजिमको बयान समेतबाट घरेलु हिंसा भएको देखिएमा र पीडितले चाहेमा प्रहरी कार्यालय र "स्थानीय तहले उजुरी परेको मितिले तीस दिनभित्र दुवै पक्षबीच मेलमिलाप गराइदिनु पर्नेछ।
|
| 58 |
+
(९) उपदफा (द) बमोजिम मेलमिलाप गराउँदा आवश्यकता अनुसार उपलब्ध भएसम्म मनोचिकित्सक, समाजशास्त्री, समाजसेबी, पीडितले पत्याएको परिवारको सदस्य र अन्य साक्षी समेतको सहयोग लिन सकिनेछ। यसरी मेलमिलाप गराउँदा पीडितलाई पर्न सक्ने मनोबैज्ञानिक तथा सामाजिक प्रभा��� र गोपनीयताको अधिकार समेतलाई ध्यानमा राख्नु पर्नेछ।
|
| 59 |
+
(१०) प्रहरी कार्यालय बा "स्थानीय तहले उजुरीको कारबाही र किनारा गर्दा पीडकलाई तारेखमा राखी गर्नु पर्नेछ।
|
| 60 |
+
(११) उपदफा (४) बा (४) बमोजिम झिकाउँदा पीडक उपस्थित नभएमा बा उपस्थित गराउन नसकिएमा बा पक्षहरुबीच मेलमिलाप हुन नसकेमा प्रहरी कार्यालय बा "स्थानीय तहले उजुरीकर्ताको सहमति भएमा उपदफा (६) बमोजिमको म्याद समाघ्त भएको मितिले पन्ध्र दिनभित्र सोही व्यहोरा उल्लेख गरी उजुरी र सोसँग सम्बन्धित मिसिल कागज र प्रमाण अदालत समक्ष पटाइदिनु पर्नेछ।
|
| 61 |
+
(१२) उपदफा (४) र (७) बमोजिम सहयोग उपलब्ध गराउनु प्रहरी कार्यालयको कर्तव्य हुनेछ।
|
| 62 |
+
|
| 63 |
+
४. अदालतले कारबाही गर्ने:
|
| 64 |
+
(१) दफा ४ को उपदफा (११) बमोजिम उजुरी प्राप्त भएमा अदालतले सोही उजुरीको आधारमा यस ऐन बमोजिम कारबाही र किनारा गर्नु पर्नेछ।
|
| 65 |
+
(२) दफा ४ मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि पीडितले चाहेमा सोझै अदालतमा उजुरी दिन सक्नेछ।
|
| 66 |
+
|
| 67 |
+
४क. जाहेरी दिन सक्ने:
|
| 68 |
+
(१) दफा ४ र ४ मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि अङ्ग भङ्ग गरेको बा तजाव बाहेक अन्य रासायनिक पदार्थ छर्किढ बा सो पदार्थले पोली, डामी, दली, घसी जीउमा पीडा गराउने बा अनुहार बा शरीरको कुनै अंग कुरुप पारिदिने गरी भएको शारीरिक यातना बा यौनजन्य यातना सम्बन्धी घरेलु हिंसाको कसूर भएको, भइरहेको बा हुन लागेको थाहा पाउने जुनसुकै व्यक्तिले प्रचलित कानून बमोजिम नजिकको प्रहरी कार्यालयमा जाहेरी दरखास्त दिन सक्नेछ।
|
| 69 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम जाहेरी दरखास्त परेकोमा प्रहरी कार्यालयले अनुसन्धान तहकिकात गर्ने र मुद्दा दायर गर्ने सम्बन्धी व्यवस्था प्रचलित कानून बमोजिम हुनेछ।
|
| 70 |
+
|
| 71 |
+
६. अन्तरिम संरक्षणात्मक आदेश जारी गर्न सक्नेः
|
| 72 |
+
(१) उजुरीको प्रारम्भिक छानबिनबाट पीडितलाई तत्काल संरक्षण दिन आवश्यक देखिएमा अदालतले उजुरीको अन्तिम निर्णय नभएसम्मको लागि पीडकका नाममा देहाय बमोजिम गर्न आदेश दिन सक्नेछ:
|
| 73 |
+
(क) पीडितलाई निज बसी आएको घरमा बसोबास गर्न दिन, खान लाउन दिन, कुटपिट नगर्न तथा शिष्ट र सभ्य व्यवहार गर्न,
|
| 74 |
+
(ख) पीडितलाई शारीरिक बा मानसिक चोट पुगेको भएमा उचित उपचार गराउन बा उपचारका लागि उपयुक्त रकम दिन,
|
| 75 |
+
(ग) पीडक र पीडितलाई एकै टाउँमा बसोबास गर्न उपयुक्त हुने नदेखिएमा पीडकलाई अलग बस्ने व्यवस्था गर्न तथा त्यसरी अलग बस्दा पीडितको भरण पोषणको लागि आवश्यक ��्यवस्था गर्न,
|
| 76 |
+
(घ) गाली बेइज्जती गर्ने, धम्की दिने बा असभ्य व्यवहार गर्ने काम नगर्न बा नगराउन,
|
| 77 |
+
(ड) पीडित छुट्टै बसेको टाउँमा बा बाटोघाटोमा बा कार्यालयमा गई बा कुनै किसिमको सञ्चार माध्यमद्वारा बा अन्य कुनै प्रकारले दुःख दिने बा सताउने कार्य नगर्न,
|
| 78 |
+
(च) पीडितको हित र सुरक्षाको निमित्त अन्य आवश्यक र उपयुक्त कुरा गर्न गराउन।
|
| 79 |
+
(२) उजुरीको प्रारम्भिक छानबिनबाट पीडितको अतिरिक्त निजका नाबालक सन्तान बा निजसँग आखित कुनै व्यक्तिलाई उपदफा (१) बमोजिमको कुनै संरक्षण दिन आवश्यक देखिएमा अदालतले सो उपदफा बमोजिमको कुनै आदेश दिन सक्नेछ।
|
| 80 |
+
|
| 81 |
+
६क. कानून व्यवसायी राख्न सक्ने:
|
| 82 |
+
यस ऐन अन्तर्गतको कसूर सम्बन्धी मुदाको कारबाहीको सिलसिलामा पीडितले चाहेमा अन्य कानून व्यवसायी राख्न सक्नेछ।
|
| 83 |
+
|
| 84 |
+
७. बन्द इजलासमा सुनुवाइ गर्ने:
|
| 85 |
+
(१) पीडितले अनुरोध गरेमा यस ऐन अन्तर्गतको उजुरी सम्बन्धी कारबाही र सुनुवाइ अदालतले बन्द इजलासमा गर्नु पर्नेछ।
|
| 86 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको बन्द इजलासमा कारबाही र सुनुवाइ हुँदा मुदाका पक्ष, बिपक्ष, निजहरुका कानून व्यवसायी र अदालतले अनुमति दिएका व्यक्ति मात्र त्यस्तो इजलासमा प्रवेश गर्न सक्नेछन्।
|
| 87 |
+
|
| 88 |
+
८. संक्षिप्त कार्यबिधि अपनाउनु पर्ने:
|
| 89 |
+
यस ऐन बमोजिमको मुदाको कारबाही र किनारा गर्दा संक्षिप्त कार्यबिधि ऐन, २०२६ बमोजिमको कार्यबिधि अपनाउनु पर्नेछ।
|
| 90 |
+
|
| 91 |
+
१९. उपचारको रकम पीडकले व्यहोर्ने:
|
| 92 |
+
(१) घरेलु हिंसाबाट पीडित व्यक्तिलाई दफा ४ को उपदफा (६) बमोजिम तत्काल उपचार गराउँदा लागेको खर्च पीडकले व्यहोर्नु पर्नेछ र कुनै कारणले पीडकले त्यस्तो खर्च तत्काल उपलब्ध गराउन नसक्ने भएमा सम्बन्धित स्थानीय तहले तत्काल त्यस्तो खर्च उपलब्ध गराई त्यस्तो रकम पीडकबाट असूल गर्न बा गराउनु पर्नेछ।
|
| 93 |
+
(२) घरेलु हिंसाबाट पीडित व्यक्ति मानसिक बा शारीरिक रुपमा अशक्त भएको कारणले अस्पतालमा उपचार उराउनु परेमा उपचार गराउँदा लागेको सम्पूर्ण खर्च पीडकले व्यहोर्नु पर्नेछ।
|
| 94 |
+
(३) उपदफा (२) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि कुनै कारणले पीडकले त्यस्तो खर्च तत्काल उपलब्ध गराउन नसक्ने भएमा अदालतले सम्बन्धित स्थानीय तह बा दफा ११ बमोजिमको सेवा केन्द्रबाट पीडितले त्यस्तो उपचार रकम पाउने गरी आदेश गर्न सक्नेछ र त्यसरी उपलब्ध गराइएको रकम पीडकबाट सरकारी बाँकी सरह असुल गर्नु बा गराउनु पर्नेछ।
|
| 95 |
+
|
| 96 |
+
१��. क्षतिपूर्ति दिलाइदिनेः
|
| 97 |
+
पीडित व्यक्तिलाई घरेलु हिंसाको प्रकृति, मात्रा, पीडितलाई पुगेको पीडा र पीडक तथा पीडितको आर्थिक तथा सामाजिक हैसियत समेतलाई विचार गरी अदालतले पीडकबाट मनासिब माफिकको क्षतिपूर्ति भराइदिन सक्नेछ।
|
| 98 |
+
|
| 99 |
+
११. सेवा केन्द्र:
|
| 100 |
+
(१) पीडितलाई तत्काल सुरक्षा प्रदान गर्न तथा उपचारको कममा अलग्गै बस्ने व्यवस्थाको लागि नेपाल सरकारले आवश्यकता अनुसार सेवा केन्द्रको स्थापना गर्न सक्नेछ।
|
| 101 |
+
(१क) नेपाल सरकारसँग समन्वय गरी प्रदेश सरकार तथा स्थानीय तहले आवश्यकता अनुसार सेवा केन्द्रको स्थापना गर्न सक्नेछन्।
|
| 102 |
+
(१ख) नेपाल सरकारले स्थापना गरेका सेवा केन्द्रलाई प्रदेश सरकार बा स्थानीय तहले सञ्चालन गर्न चाहेमा नेपाल सरकारले त्यस्ता सेवा केन्द्र प्रदेश सरकार बा स्थानीय तहले सञ्चालन गर्ने गरी हस्तान्तरण गर्न सक्नेछ।
|
| 103 |
+
(२) कुनै संस्थाले तोकिए बमोजिम स्वीकृति लिई उपदफा (१) को उद्देश्यको लागि सेवा केन्द्र स्थापना र सञ्चालन गर्न सक्नेछ।
|
| 104 |
+
(२क) उपदफा (१क) र (१ख) बमोजिम प्रदेश सरकार बा स्थानीय तहले स्थापना र सञ्चालन गरेको सेवा केन्द्रको अनुगमन सम्बन्धित प्रदेश सरकार बा स्थानीय तहले गर्नेछ।
|
| 105 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम सञ्चालन भएको केन्द्रलाई दफा १२ बमोजिमको कोषबाट आर्थिक तथा अन्य सहयोग प्रदान गर्न सकिनेछ।
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| 106 |
+
(४) सेवा केन्द्रले आवश्यकता अनुसार पीडितलाई कानूनी सहायता, मनोबिमर्श सेवा, मनोवैज्ञानिक सेवा र आर्थिक सहायता उपलब्ध गराउन सक्नेछ।
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| 107 |
+
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+
१२. सेवा कोष:
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| 109 |
+
(१) दफा ११ को उपदफा (१) बमोजिम स्थापना भएका सेवा केन्द्र सञ्चालन गर्नको लागि नेपाल सरकारले एक सेवा कोष स्थापना गर्नेछ।
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| 110 |
+
(१)क) दफा ११ को उपदफा (१क) र (१ख) बमोजिम स्थापना तथा हस्तान्तरण भएका सेवा केन्द्रको व्यवस्थापन तथा सञ्चालन गर्न चाहने प्रदेश सरकारले आफ्नो श्रोतबाट व्यवस्था गर्ने गरी प्रदेश कानून बमोजिम र स्थानीय तहले आफ्नो श्रोतबाट व्यवस्था गर्ने गरी स्थानीय कानून बमोजिम सेवा कोष स्थापना गर्न सक्नेछ।
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| 111 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको कोषमा देहाय बमोजिमका रकम रहनेछन्ः
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+
(क) नेपाल सरकारबाट प्राप्त रकम,
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| 113 |
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(ख) कुनै स्वदेशी बा विदेशी संघ, संस्था बा व्यक्तिबाट प्राप्त रकम,
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| 114 |
+
(ग) अन्य श्रोतबाट प्राप्त रकम।
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| 115 |
+
(३) सेवा कोषको व्यवस्थापन र सञ्चालन तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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१९क. संरक्षण अधिकृत:
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स्थानीय तहले घरेलु हिंसा नियन्त्रण गर्न तथा घरेलु हिंसाबाट पीडित व्यक्तिलाई संरक्षण गर्ने काम समेतका लागि एकजना संरक्षण अधिकृत तोक्न सक्नेछ।
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+
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+
१९ख. नि:शुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध गराउने:
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| 121 |
+
नेपाल सरकारले घरेलु हिंसाबाट पीडित व्यक्तिलाई निजको अनुरोधमा जिल्ला कानूनी सहायता समिति मार्फत नि:शुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध गराउनेछ।
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+
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१९२ग. नेपाल सरकार बादी हुने:
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+
दफा ४क. मा उल्लिखित मुद्दा नेपाल सरकार बादी भई चल्नेछ र त्यस्तो मुद्दा "मुलुकी फौजदारी कार्यबिधि संहिता, २०७४ को अनुसूची-१ मा समावेश भएको मानिनेछ।
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| 125 |
+
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| 126 |
+
१३. सजाय:
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(१) कसैले अङ्गभङ्ग गरी बा तेजाव बाहेक अन्य रासायनिक पदार्थ छुर्किढ बा सो पदार्थले पोली, डामी, दली, घसी जीउमा पीडा गराई बा अनुहार बा शरीरको कुनै अङ्ग कुरुप पारिदिने गरी शारीरिक यातना बा यौनजन्य यातना सम्बन्धी घरेलु हिंसाको कसूर गरेमा त्यस्तो व्यक्तिलाई प्रचलित कानून बमोजिम सजाय हुनेछ।
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| 128 |
+
(१)क) कसैले उपदफा (१) मा लेखिए देखि बाहेकको अन्य घरेलु हिंसा गरेमा त्यस्तो व्यक्तिलाई तीन हजार रुपैयाँदेखि पच्चीस हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना बा छ महिनासम्म कैद बा दुवै सजाय हुनेछ।
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| 129 |
+
(२) घरेलु हिंसाको उद्योग बा दुरुत्साहन गर्ने बा मतियार हुनेलाई मुख्य कसूरदारलाई हुने सजायको आधा सजाय हुनेछ।
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| 130 |
+
(३) घरेलु हिंसाको कसूरमा सजाय पाइसकेको व्यक्तिले पुनः सोही कसूर गरेमा पटकैपिच्छे दोब्बर सजाय हुनेछ।
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| 131 |
+
(४) सार्वजनिक जबाफदेहीको पदमा बहाल रहेको कुनै व्यक्तिले आफ्नो पत्नी, ज्येष्ठ नागरिक, अपाइता भएका व्यक्ति, नाबालक बा गर्भवती महिला बिरुद्ध यस ऐन बमोजिमको कसूर गरेमा निजलाई थप दश प्रतिशत सजाय हुनेछ।
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| 132 |
+
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| 133 |
+
(४) कसैले दफा ६ बमोजिम अदालतबाट दिएको आदेश पालन नगरेमा त्यस्तो व्यक्तिलाई दुई हजार रुपैयाँदेखि पन्थ्र हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना बा चार महिनासम्म कैद बा दुबै सजाय हुनेछ।
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| 134 |
+
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| 135 |
+
१४. हदम्याद:
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| 136 |
+
यस ऐन बमोजिमको कसूरमा भए गरेको मितिले नब्बे दिनभित्र उजुरी दिनु पर्नेछ।
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| 137 |
+
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| 138 |
+
१४. प्रचलित कानून बमोजिम मुद्दा चलाउन बाधा नपर्ने:
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| 139 |
+
यस ऐन बमोजिम कसूर मानिने कुनै काम कारबाहीमा अन्य प्रचलित कानून बमोजिम पनि सजाय हुने रहेछ भने त्यस्तो कानून बमोजिम मुद्दा चलाउन तथा कारबाही गर्न यस ऐनले कुनै बाधा पन्याएको मानिने छैन।
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| 140 |
+
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| 141 |
+
१६. प्रचलित कानून बमोजिम हुने:
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| 142 |
+
यस ऐनमा लेखिएको कुरामा यसै ऐन बमोजिम र अरुमा प्रचलित कानून बमोजिम हुनेछ।
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| 143 |
+
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| 144 |
+
१७. नियम बनाउने अधिकार:
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| 145 |
+
यस ऐनको उद्देश्य कार्यान्वयन गर्न नेपाल सरकारले आबश्यक नियमहरु बनाउन सक्नेछ।
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| 146 |
+
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| 147 |
+
द्वष्टव्य:
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| 148 |
+
केही नेपाल कानूनलाई संशोधन, एकीकरण, समायोजन र खारेज गर्ने ऐन, २०७४ द्वारा रुपान्तर भएका शब्दहरु:
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| 149 |
+
"सरकारी मुद्दा सम्बन्धी ऐन, २०४९," को सट्टा "मुलुकी फौजदारी कार्यबिधि (संहिता) ऐन, २०७४"।
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section_16_pdf_11.txt
ADDED
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@@ -0,0 +1,346 @@
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| 1 |
+
# प्रतिलिपि अधिकार ऐन, २०४९
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| 2 |
+
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| 3 |
+
## लालमोहर र प्रकाशन मिति
|
| 4 |
+
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| 5 |
+
२०४९।४।३०
|
| 6 |
+
|
| 7 |
+
## संशोधन गर्ने ऐन
|
| 8 |
+
|
| 9 |
+
## प्रमाणीकरण र प्रकाशन मिति
|
| 10 |
+
|
| 11 |
+
1. निकासी पैठारी तथा बौद्धिक सम्पत्ति सम्बन्धी केही नेपाल ऐन संशेधन गर्ने ऐन, २०६३
|
| 12 |
+
२०६३। ६। ६
|
| 13 |
+
2. गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६६
|
| 14 |
+
२०६६। १०। ७
|
| 15 |
+
3. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७२
|
| 16 |
+
२०७२। ११। १३
|
| 17 |
+
4. नेपालको संविधान अनुकूल बनाउन केही नेपाल ऐनलाई संशोधन गर्ने ऐन, २०७४
|
| 18 |
+
२०७४। ११। १९
|
| 19 |
+
4. मुलुकी संहिता सम्बन्धी केही नेपाल ऐनलाई संशोधन गर्ने ऐन, २०७६
|
| 20 |
+
२०७६। १। २
|
| 21 |
+
२०४९ सालको ऐन नं. ६
|
| 22 |
+
|
| 23 |
+
## प्रतिलिपि अधिकार सम्बन्धी व्यवस्था गर्न बनेको ऐन
|
| 24 |
+
|
| 25 |
+
प्रस्तावनाः प्रतिलिपि अधिकार सम्बन्धी कानूनी व्यवस्थालाई समयानुकूल बनाउन बाञ्छुनीय भएकोले,
|
| 26 |
+
|
| 27 |
+
यो ऐन संबत् २०६३ साल असोज ४ गतेदेखि लागू भएको।
|
| 28 |
+
यो ऐन संबत् २०६४ साल जेट १४ गतेदेखि लागू भएको।
|
| 29 |
+
गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६६ द्वारा झिकिएको।
|
| 30 |
+
|
| 31 |
+
श्री ४ महाराजाधिराज ज्ञानेन्द्र वीर विक्रम शाहदेवको शासनकालको पहिलो वर्षमा संसदले यो ऐन बनाएको छ।
|
| 32 |
+
|
| 33 |
+
---
|
| 34 |
+
|
| 35 |
+
# परिच्छेद-१
|
| 36 |
+
|
| 37 |
+
## प्रारम्भिक
|
| 38 |
+
|
| 39 |
+
१. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भः
|
| 40 |
+
(१) यस ऐनको नाम "प्रतिलिपि अधिकार ऐन, २०४९," रहेको छु।
|
| 41 |
+
(२) यो ऐन तुरुन्त प्रारम्भ हुनेछ।
|
| 42 |
+
|
| 43 |
+
२. परिभाषाः
|
| 44 |
+
बिषय बा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
|
| 45 |
+
(क) "रचना" भन्नाले साहित्य, कला, ज्ञान-विज्ञान र अन्य क्षेत्रमा मौलिक एवं बौद्धिक रुपले प्रस्तुत गरिएका रचना सम्झनु पर्छ र सो शब्दले देहायका रचना समेतलाई जनाउछ:-
|
| 46 |
+
(१) किताब, पर्चा, लेख, शोधपत्र,
|
| 47 |
+
(२) नाटक, नाट्य-संगीत, मुक चित्र र यस्तै किसिमले मञ्चनका लागि तयार गरिएका रचना,
|
| 48 |
+
(३) शब्द सहित बा शब्द रहित सांगीतिक रचना,
|
| 49 |
+
(४) श्रव्य दृश्य रचना,
|
| 50 |
+
(५) आर्किटेक्चरल डिजाइन,
|
| 51 |
+
(६) चित्रकला, पेन्टिङ्ग, मूर्तिकला, काष्ठकला, लिथोग्राफी र आर्किटेक्चर सम्बन्धी अन्य रचना,
|
| 52 |
+
(७) फोटोजन्य रचना,
|
| 53 |
+
(८) प्रयोगात्मक कला सम्बन्धी रचना,
|
| 54 |
+
(९) उद्धरण, मानचित्र, योजना, भूगोल सम्बन्धी त्रि-आयामिक रचना, टोपोग्राफी र वैज्ञानिक लेख रचना,
|
| 55 |
+
(१०) कम्प्युटर प्रोग्राम।
|
| 56 |
+
|
| 57 |
+
(ख) "रचयिता" भन्नाले खण्ड (क) मा उल्लिखित रचना तयार गर्ने व्यक्ति सम्झनु पर्छ।
|
| 58 |
+
(ग) "श्रव्यदृश्य रचना" भन्नाले ध्वनि सहित बा ध्वनि रहित रुपमा पर्दामा अवलोकन गर्न सकिने चलचित्रमय रचना सम्झनु पर्छ।
|
| 59 |
+
(घ) "���ोटोजन्य रचना" भन्नाले कुनै पनि बस्तुको धरातलमा चित्राकृति आउने गरी बा त्यस्तो धरातलबाट चित्राकृति पैदा गर्न सकिने गरी रासायनिक, बिघुतीय बा अन्य कुनै प्रबिधिको सहायताबाट त्यस्तो धरातलमा प्रकाश बा अन्य बिकिरणको अड्न गरी तयार गरिएको रचना सम्झनु पर्छ।
|
| 60 |
+
|
| 61 |
+
(ङ) "ध्वनि अङ्गन" भन्नाले ध्वनि र आकृतिको एकैसाथ अङ्गन गर्ने कार्य बाहेकको श्रवण गर्नको लागि जुनसुकै तरिकाबाट जुनसुकै माधयममा अङ्गन गरिएको कुनै पनि प्रस्तुतिको ध्वनिअङ्गन गर्ने कार्य सम्झनु पर्छ।
|
| 62 |
+
(च) "प्रस्तुति" भन्नाले,
|
| 63 |
+
(१) श्रव्य दृश्य रचना बाहेक अरु प्रकारको रचनाको हकमा प्रत्यक्ष रुपमा बा अन्य कुनै उपकरण बा प्रक्रियाबाट बाचन, बादन, नृत्य, अभिनय बा अन्य प्रकारले प्रस्तुत गर्ने कार्य,
|
| 64 |
+
(२) श्रव्य दृश्य रचनाको हकमा त्यस्तो रचनामा समायोजित दृश्यलाई सिलसिलाबद्ध रुपमा देखाउँदै त्यसमा समायोजित ध्वनि समेत सुनाउने कार्य,
|
| 65 |
+
(३) ध्वनि अड्नको हकमा परिवार बा छरछिमेक, साथीभाई, इष्टमिबको भन्दा बाहिर रहेर बा त्यस्ता व्यत्किको उपस्थिति भए पनि सार्वजनिक रुपमा सुन्न सकिने गरी प्रस्तुत गर्ने कार्य सम्झनु पर्छ।
|
| 66 |
+
|
| 67 |
+
(छ) "आर्थिक अधिकार" भन्नाले प्रतिलिपि अधिकार धनीलाई दफा ७ बमोजिम प्राप्त अधिकार सम्झनु पर्छ।
|
| 68 |
+
(ज) "प्रतिलिपि अधिकार धनी" भन्नाले कुनै रचनाको रचयितामा आर्थिक अधिकार निहित रहेको भए त्यस्तो रचयिता, रचयिता बाहेक अन्य कुनै व्यत्कि बा संस्थामा मूल रुपमा आर्थिक अधिकार निहित रहेको भए त्यस्तो व्यत्कि बा संस्था र आर्थिक अधिकारको स्वामित्व कुनै व्यत्कि बा संस्थालाई हस्तान्तरण गरिएको भए त्यस्तो व्यत्कि बा संस्था सम्झनु पर्छ।
|
| 69 |
+
(झ) "प्रसारण" भन्नाले सार्वजनिक जानकारीको लागि रचनाको प्रदर्शन बा सञ्चार बा तारबिहिन उपकरण बा भू-उपग्रहको माध्यमद्वारा गरिने श्रव्य बा श्रव्यदृश्य रचनाको प्रसारण सम्झनु पर्छ।
|
| 70 |
+
(ज) "सार्वजनिक सञ्चार" भन्नाले कुनै कार्यकमको प्रस्तुती, ध्वनि अड्न तथा प्रसारणको ध्वनि बा दृश्य बा दुवै प्रसारण स्थलको नजिक बा टाढा जहाँ रहेर पनि सुन्न बा अबलोकन गर्न सकिने गरी तारयुक्त बा तारबिहिन उपकरणबाट प्रसारण गरिने कार्य सम्झनु पर्छ।
|
| 71 |
+
(ट) "नैतिक अधिकार" भन्नाले रचयिता बा निजको हकबाला बा निजबाट अधिकार प्राप्त व्यत्किलाई दफा द बमोजिम प्राप्त हुने अधिकार सम्झनु पर्छ।
|
| 72 |
+
(ट) "प्रस्तोता" भन���नाले अभिनय, गायन, संगीत र नाचको माध्यमद्वारा साहित्यिक बा कलात्मक कार्य बा लोककला अभिव्यक्तिलाई जनसमक्ष प्रस्तुत गर्ने अभिनयकर्ता, गायक, संगीतकार, नर्तक र अन्य व्यत्कि सम्झनु पर्छ।
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| 73 |
+
(ड) "प्रकाशन" भन्नाले,
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| 74 |
+
(१) नाटक, चलचित्र बा अन्य कुनै किसिमले अभिनित रचनाको हकमा सो रचनाको अनुवाद बा रुपान्तर गरी बा नगरी सार्वजनिक रुपमा प्रदर्शन गरेको, बिक्री गरेको बा बहालमा दिएको, र
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| 75 |
+
(२) अन्य कुनै रचनाको हकमा सो रचनाको अनुवाद बा रुपान्तर गरी बा नगरी सो रचना सार्वजनिक रुपमा बिक्री बितरण बा उपयोगमा ल्याइएको बा बिक्री बितरण बा उपयोग हुने गरी निकालिएको रचना सम्झनु पर्छ र सो शब्दले अभिनयद्वारा प्रदर्शन हुन सक्ने रचनाको हकमा सो रचनाको रुपान्तर बा अनुवाद गरी बा नगरी सार्वजनिक रुपमा प्रदर्शन गरिएको कुरा समेतलाई जनाउँछ।
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| 76 |
+
(ढ) "रजिष्ट्रार" भन्नाले दफा ३० को उपदफा (१) बमोजिम तोकिएको व्यक्ति सम्झनु पर्छ।
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| 77 |
+
(ण) "रोयल्टी संकलन संस्था" भन्नाले दफा ३९ अनुसार गठित संस्था सम्झनु पर्छ।
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| 78 |
+
(त) "तोकिएको" बा "तोकिए बमोजिम" भन्नाले यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा तोकिएको बा तोकिए बमोजिम सम्झनु पर्छ।
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| 79 |
+
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| 80 |
+
---
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| 81 |
+
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| 82 |
+
# परिच्छेद-२
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| 83 |
+
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| 84 |
+
## प्रतिलिपि अधिकारको संरक्षण र प्राप्ति
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| 85 |
+
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| 86 |
+
३. प्रतिलिपि अधिकारको संरक्षण:
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| 87 |
+
(१) कुनै पनि रचनालाई प्रतिलिपि अधिकारको संरक्षण प्राप्त हुनेछ।
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| 88 |
+
(२) प्रस्तुतिकरण, सङ्लन बा अभिव्यक्तिको दृष्टिकोणबाट मौलिक रुपमा प्रस्तुत भएका अनुवाद, संयोजन, क्रमबद्ध संयोजन, रचना बा कृतिहरुको संग्रह, यन्त्रको सहायताले बा यन्त्रको सहायता बेगर पढ्न सकिने गरी सङ्लन गरिएको तथ्याङ् बा तथ्याङ्को आधार, लौकिक अभिव्यक्ति बिधा अन्तर्गतका उखान, लोककथा, लोकगीत बा अन्य कुनै लोक अभिव्यक्तिमा आधारित व्युत्पन्न रचनालाई मूल रचनाको प्रतिलिपि अधिकारमा प्रतिकूल असर नपुय्याउने किसिमले मौलिक रचना सरह नै प्रतिलिपि अधिकारको संरक्षण प्राप्त हुनेछ।
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| 89 |
+
|
| 90 |
+
४. प्रतिलिपि अधिकारको संरक्षण प्राप्त नहुने:
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| 91 |
+
दफा ३ मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि कुनै विचार, धर्म, समाचार, संचालन बिधि, अवधारणा, सिद्धान्त, अदालतको फैसला, प्रशासनिक निर्णय, लोकगीत, लोककथा, उखान र सामान्य तथ्याइ जस्ता कुराहरुलाई व्यक्त बा बर्णन बा व्याख्या गरिए बा कुनै रचनामा समावेश गरिएको भए तापनि यस ऐन बमोजिमको संरक्षण प्राप्त हुने छैन।
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| 92 |
+
|
| 93 |
+
५. दर्ता अनिबार्य ��हुने:
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| 94 |
+
(१) यस ऐन बमोजिमको अधिकार प्राप्त गर्न कुनै पनि रचना, ध्वनिअड्न, प्रस्तुति बा प्रसारण दर्ता गराउन अनिबार्य हुने छैन।
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| 95 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि कुनै रचना, ध्वनिअड्न, प्रस्तुति बा प्रसारण स्वेच्छाले दर्ता गराउन चाहेमा रजिष्ट्रार समक्ष निवेदन दिई दर्ता गराउन सकिनेछ र दर्ता सम्बन्धी कार्यबिधि तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 96 |
+
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| 97 |
+
६. रचनाको आर्थिक अधिकारको धनी:
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| 98 |
+
(१) रचनाको आर्थिक अधिकारको पहिलो धनी रचयिता हुनेछ।
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| 99 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि देहायको अवस्थामा रचनाको आर्थिक अधिकार देहायको व्यक्ति बा संस्थालाई हुनेछः
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| 100 |
+
(क) संयुक्त रचनाका हकमा सह-रचयिता,
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| 101 |
+
(ख) कुनै व्यक्ति बा संस्थाको सक्रियता बा निर्देशनमा संयुक्त रचना तयार गरिएको भए जसको सक्रियता बा निर्देशनमा त्यस्तो रचना तयार भएको हो सो तयार गराउने व्यक्ति बा संस्था,
|
| 102 |
+
(ग) कसैले पारिश्रमिक दिई कुनै रचना तयार गर्न लगाएको भए त्यस्तो पारिश्रमिक दिने व्यक्ति बा संस्था,
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| 103 |
+
(घ) बेनामी रचनाको हकमा सो रचनाको रचयिता यो हो भन्ने प्रमाणित नहुन्जेल सो रचनाको प्रकाशक,
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| 104 |
+
(ङ) करारमा अन्यथा उल्लेख गरिएकोमा बाहेक श्रव्य दृश्य रचनाको हकमा त्यस्तो रचनाको उत्पादक,
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| 105 |
+
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| 106 |
+
७. आर्थिक अधिकार:
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| 107 |
+
परिच्छेद-४ को अधीनमा रही रचनाको सम्बन्धमा देहाय बमोजिमको कार्य गर्न पाउने अधिकार रचयिता बा प्रतिलिपि अधिकारको धनीलाई मात्र हुनेछः
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| 108 |
+
(क) रचनाको पुनरुत्पादन गर्ने,
|
| 109 |
+
(ख) रचनाको अनुबाद गर्ने,
|
| 110 |
+
(ग) रचनाको परिमार्जन बा संशोधन गर्ने,
|
| 111 |
+
(घ) संयोजन लगायत रचनाको अन्य रुपान्तरण गर्ने,
|
| 112 |
+
(ङ) रचनाको मूल र प्रतिलिपि सर्वसाधारणको लागि बिक्री वितरण बा बहालमा दिने,
|
| 113 |
+
(च) श्रव्य दृश्य रचना, ध्वनि अङ्गन समाविष्ट रचना, कम्प्युटर कार्यकम, तथ्याङ्मा आधारित बा ग्राफ स्वरुपमा रहेको साङ्गीतिक रचनाको आफूलाई प्राप्त अधिकार हस्तान्तरण गर्ने बा बहालमा दिने,
|
| 114 |
+
(छ) रचनाको प्रतिलिपि आयात गर्ने,
|
| 115 |
+
(ज) मूल रचना बा सो रचनाको प्रतिलिपिको सार्वजनिक प्रदर्शन गर्ने,
|
| 116 |
+
(झ) रचनाको प्रस्तुति गर्ने,
|
| 117 |
+
(ज) रचनाको प्रसारण गर्ने,
|
| 118 |
+
(ट) रचनाको सार्वजनिक सञ्चार गर्ने।
|
| 119 |
+
|
| 120 |
+
८. नैतिक अधिकार:
|
| 121 |
+
(१) कुनै रचनामा रचयिताको आर्थिक अधिकार निहित रहे बा नरहेको जेसुकै भए तापनि त्यस्तो रचयितालाई देहाय बमोजिमको नैतिक अधिकार प्राप्त हुनेछ:-
|
| 122 |
+
(क) आफ्नो रचनाका प्रतिहरूमा बा आफ्नो रचना सार्वजनिक रुपमा प्रयोग गरिएमा त्यस्तो रचनामा आफ्नो नाम उल्लेख गर्न लगाउने,
|
| 123 |
+
(ख) आफ्नो रचनामा वास्तविक नाम उल्लेख नगरी छद्म नाम उल्लेख गरिएको भएमा त्यस्तो रचनाको सार्वजनिक रुपमा प्रयोग गर्दा त्यस्तो छद्म नाम उल्लेख गर्न लगाउने,
|
| 124 |
+
(ग) आफ्नो रचनालाई बङ्ग्याई बा विकृत रुपमा प्रस्तुत गरी निजले आर्जन गरेको सम्मान बा ख्यातिलाई गिराउने जस्ता कार्य रोक्ने,
|
| 125 |
+
(घ) आफ्नो रचनामा आवश्यक संशोधन बा परिमार्जन गर्ने।
|
| 126 |
+
(२) उपदफा (१) मा उल्लिखित अधिकार रचयिताको जीवनभर हस्तान्तरण हुने छैन।
|
| 127 |
+
|
| 128 |
+
९. प्रस्तोताको अधिकार:
|
| 129 |
+
(१) प्रस्तोतालाई देहाय बमोजिमको कार्य गर्न पाउने अधिकार हुनेछ:-
|
| 130 |
+
(क) आफ्नो प्रस्तुतिलाई प्रसारण बा सञ्चार गरी जन समक्ष पुए्याउने,
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| 131 |
+
(ख) आफ्नो प्रस्तुतिलाई प्रस्तुत गर्ने तोरतरिका बा माध्यमको निर्धारण गर्ने र पुनरुत्पादन गर्ने,
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| 132 |
+
(ग) आफ्नो प्रस्तुतिको प्रस्तुतीकरण बा त्यसको प्रतिलिपिहरु बिकी बा हस्तान्तरण गरी बा स्वामित्व परिवर्तन गरी पहिलो पटक जन समक्ष पुए्याउने,
|
| 133 |
+
(घ) आफ्नो प्रस्तुतिको प्रतिलिपि भाडामा दिने,
|
| 134 |
+
(ङ) निर्धारित तोरतरिका बा माध्यमद्वारा उत्पादित प्रस्तुतिलाई तारयुक्त बा तार बिहिन उपकरण मार्फत सर्वसाधारण समक्ष सर्वसुलभ हुने गरी पुए्याउने,
|
| 135 |
+
(च) आफ्नो प्रस्तुतिलाई परिमार्जन बा संशोधन गर्ने।
|
| 136 |
+
(२) प्रस्तोताले एक पटक आफ्नो प्रस्तुतिलाई श्रव्यदृश्य माध्यममा समावेश गर्न स्वीकृति दिइसकेपछि निजले त्यसमा पुनः उपदफा (१) मा उल्लिखित अधिकार प्रयोग गर्न पाउने छैन।
|
| 137 |
+
(३) उपदफा (२) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि प्रस्तोतालाई प्रत्यक्ष श्रव्य प्रस्तुति एवं ध्वनिअइनमा समायोजित प्रस्तुतिको प्रस्तोताको रुपमा आफ्नो पहिचान कायम गराउने र सोको दावी गर्न सक्ने अधिकार तथा आफ्नो प्रतिष्ठा बा ख्यातिको प्रतिकूल हुने गरी कसैले आफ्नो प्रस्तुतिलाई तोडमोड गरेको बा खण्डित गरेको बा अन्य प्रकारले अर्थान्तर हुने गरी विरुप गरेकोमा त्यस्तो कार्यलाई रोक्ने अधिकार हुनेछ।
|
| 138 |
+
(४) यस दफामा लेखिएको कुनै कुराले आफ्नो प्रस्तुतिबाट बढी लाभान्वित हुने बा बढी सुविधा प्राप्त गर्ने खालका शर्त राखी सम्झौता गर्ने बा त्यसमा सहमत हुने प्रस्तोताको अधिकारमा कुनै असर पारेको मानिने छैन।
|
| 139 |
+
(५) यस दफा बमोजिम प्रस्तोतालाई प्राप्त अधिकार ध्वनि उपकरणमा समायोजन भएको बर्षबाट पचास बर्षसम्म र त्यसरी समायोजन नगरेको भए त्यस्तो प्रस्तुति भएको बर्षबाट पचास बर्षसम्म कायम रहनेछ।
|
| 140 |
+
|
| 141 |
+
१०. ध्वनि अड्न उत्पादकको अधिकार:
|
| 142 |
+
(१) ध्वनि अड्न उत्पादकलाई देहाय बमोजिमको अधिकार हुनेछ:-
|
| 143 |
+
(क) कुनै पनि तरिका बा स्वरुपमा ध्वनि अड्नको प्रत्यक्ष बा अप्रत्यक्ष रुपले पुनरुत्पादन गर्ने,
|
| 144 |
+
(ख) ध्वनि अड्नको प्रतिलिपि आयात गर्ने,
|
| 145 |
+
(ग) ध्वनि अड्नको मूल प्रति बा प्रतिलिपिको बिक्री बा स्वामित्व हस्तान्तरणका अन्य तरिकाबाट त्यस्ता ध्वनि अड्न सर्वसुलभ गराउने,
|
| 146 |
+
(घ) सार्वजनिक रुपमा ध्वनि अड्नलाई भाडामा बा सापटीमा दिने,
|
| 147 |
+
(ङ) तारयुक्त बा तारबिहिन उपकरणबाट ध्वनि अड्नलाई एउटै खास टाउँबाट बा आफूले चाहेको टाउँबाट बा जनसाधारणद्वारा श्रवण गर्न सक्ने बनाउने।
|
| 148 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको अधिकार त्यस्तो ध्वनिअड्न प्रकाशन भएको बर्षबाट पचास बर्षसम्म कायम रहनेछ।
|
| 149 |
+
|
| 150 |
+
११. ध्वनि अड्नको प्रयोग बापत मनासिब माफिकको पारिश्रमिक पाउने:
|
| 151 |
+
(१) व्यापारिक प्रयोजनको लागि प्रकाशन भएको कुनै ध्वनिअड्न बा त्यस्तो ध्वनिअड्नको पुनरुत्पादित प्रतिलिपिलाई प्रसारण बा अन्य सञ्चारको लागि सोझै प्रयोग गरी सार्वजनिक रुपमा जनसमक्ष प्रस्तुत गरिएको भए सो बापत मनासिब माफिकको पारिश्रमिकको रकम उत्पादकले प्रयोगकर्ताबाट भुक्तानी पाउनेछ।
|
| 152 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको पारिश्रमिक प्राप्त गर्ने सम्बन्धमा प्रस्तोता र उत्पादक बीच सम्झौता भएकोमा सोही बमोजिम र सम्झौता नभएको अबस्थामा उत्पादकले प्राप्त गरेको आधा रकम प्रस्तोताले पाउनेछ।
|
| 153 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम मनासिब माफिकको पारिश्रमिक रकम पाउने अधिकार त्यस्तो ध्वनिअड्न प्रकाशन भएको बा ध्वनिअड्न समायोजन भएको बर्षबाट पचास बर्षसम्म कायम रहनेछ।
|
| 154 |
+
|
| 155 |
+
१२. प्रसारण संस्थाको अधिकार:
|
| 156 |
+
(१) प्रसारण संस्थालाई देहायका कार्य गर्न पाउने अधिकार हुनेछ:-
|
| 157 |
+
(क) आफूले प्रसारण गरेको बिषयलाई पुनःप्रसारण गर्ने,
|
| 158 |
+
(ख) आफ्नो प्रसारणलाई सर्वसाधारण समक्ष सर्वसुलभ हुने गरी सञ्चार गर्ने,
|
| 159 |
+
(ग) आफ्नो प्रसारणको समायोजन गर्ने,
|
| 160 |
+
(घ) आफ्नो प्रसारणको समायोजनको पुनरुत्पादन गर्ने।
|
| 161 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको अधिकार त्यस्तो प्रसारण शुरु भएको बर्षबाट पचास बर्षसम्म कायम रहनेछ।
|
| 162 |
+
|
| 163 |
+
१३. रचना, प्रस्तोता, ध्वनि उत्पादक बा प्रसारण संस्थाको संरक्षण:
|
| 164 |
+
(१) देहायका रचयिताको रचनालाई यस ऐन बमोजिमको संरक्षण प्राप्त हुनेछ:-
|
| 165 |
+
(क) नेपाल राज्य बा विश्व व्यापार सङ्गठनको सदस्य मुलुकमा बसोबास गर्ने रचयिताबाट रचित नेपाल राज्य बा सोही मुलुकमा प्रकाशन भएको रचना,
|
| 166 |
+
(ख) नेपाल राज्य बा विश्व व्यापार सङ्गठनको सदस्य मुलुकमा बसोबार गर्ने उत्पादकबाट उत्पादित श्रव्य-दृश्य रचना,
|
| 167 |
+
(ग) नेपाल राज्य बा विश्व व्यापार सङ्गठनको सदस्य मुलुकभित्र गरिएको भवनको आर्किटेक्चरल डिजायन बा भवन बा अन्य कुनै संरचनामा प्रयोग गरिएको अन्य कुनै प्रकारको कलात्मक रचना,
|
| 168 |
+
(घ) नेपाल राज्य बा विश्व व्यापार सङ्गठनको सदस्य मुलुक बाहेक अन्य मुलुकमा बसोबास भएको रचयिताबाट नेपाल राज्यमा प्रकाशित रचना बा त्यस्तो मुलुकको उत्पादकबाट नेपाल राज्यमा उत्पादित श्रव्य दृष्य रचना।
|
| 169 |
+
(२) देहायका प्रस्तोतालाई यस ऐन बमोजिमको प्रस्तोता सम्बन्धी अधिकार प्राप्त हुनेछ:-
|
| 170 |
+
(क) नेपाल राज्य बा विश्व व्यापारा सङ्गठनको सदस्य मुलुकको प्रस्तोता,
|
| 171 |
+
(ख) नेपाल राज्य बा विश्व व्यापार सङ्गठनको सदस्य मुलुकमा प्रस्तुत गरिएको कुनै प्रस्तुति बा यस ऐन बमोजिम संरक्षण प्राप्त ध्वनि अड्नमा प्रयुक्त भएको प्रस्तुति बा ध्वनि अड्नमा समाबिष्ट नगरेको भए पनि प्रसारणमा समाबिष्ट प्रस्तुतिको प्रस्तोता।
|
| 172 |
+
(३) देहायका ध्वनि अड्न उत्पादकलाई यस ऐन बमोजिमको ध्वनि अड्नको उत्पादक सम्बन्धी अधिकार प्राप्त हुनेछ:-
|
| 173 |
+
(क) नेपाल राज्य बा विश्व व्यापार सङ्गठनको सदस्य मुलुकका व्यक्तिबाट उत्पादित ध्वनि अड्न,
|
| 174 |
+
(ख) नेपाल राज्य बा विश्व व्यापार सङ्गठनको सदस्य मुलुकमा प्रकाशन भएको ध्वनि अड्न,
|
| 175 |
+
(४) देहायका प्रसारण संस्थालाई यस ऐन बमोजिमको प्रसारण संस्था सम्बन्धी अधिकार प्राप्त हुनेछ:-
|
| 176 |
+
(क) नेपाल राज्य बा विश्व व्यापारा सङ्गठनको सदस्य मुलुकमा कार्यालय रहेको प्रसारण संस्थाबाट प्रसारित प्रसारण,
|
| 177 |
+
(ख) नेपाल राज्य बा विश्व व्यापार सङ्गठनको सदस्य मुलुकमा अबस्थित प्रसारण केन्द्रबाट प्रसारित प्रसारण।
|
| 178 |
+
|
| 179 |
+
---
|
| 180 |
+
|
| 181 |
+
# परिच्छेद-३
|
| 182 |
+
|
| 183 |
+
## प्रतिलिपि अधिकार संरक्षणको अबधि
|
| 184 |
+
|
| 185 |
+
१४. प्रतिलिपि अधिकार संरक्षणको अबधिः
|
| 186 |
+
(१) यस ऐन बमोजिम रचयितालाई प्राप्त आर्थिक र नैतिक अधिकार रचयिताको जीवनभर र निजको मृत्यु भएकोमा मृत्यु भएको बर्पबाट पचास बर्पसम्म संरक्षित हुनेछ।
|
| 187 |
+
(२) संयुक्त रुपमा तयार गरिएको रचनाको आर्थिक र नैतिक अधिकारको हकमा रचयिताहरुमध्ये सबैभन्दा पछि मृत्यु हुने रचयिताको मृत्यु भएको बर्पबाट पच��स बर्पसम्म संरक्षित हुनेछ।
|
| 188 |
+
(३) दफा ६ को उपदफा (२) को खण्ड (ख) र (ग) बमोजिम तयार गरिएको रचनाको आर्थिक र नैतिक अधिकार त्यस्तो रचना प्रथम पटक प्रकाशन भएको बा प्रथम पटक जनसाधारण समक्ष ल्याइएको मिति मध्ये जुन पहिले आउँछ सो मितिबाट पचास बर्पसम्म संरक्षित हुनेछ।
|
| 189 |
+
(४) बेनामी बा छद्म नामबाट प्रकाशित रचनाको आर्थिक तथा नैतिक अधिकार त्यस्तो रचना प्रथम पटक प्रकाशन भएको बा जनसाधारण समक्ष ल्याइएको मिति मध्ये जुन पहिले आउँछ सो मितिबाट पचास बर्पसम्म संरक्षित हुनेछ।
|
| 190 |
+
|
| 191 |
+
१५. रचयिताको मृत्युपछि प्रकाशित रचनाको संरक्षण अबधिः
|
| 192 |
+
दफा १४ मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि कुनै रचनाको रचयिता एउटै भए निजको र दुई बा दुई भन्दा बढी रचयिता भए ती मध्ये कुनै एकको मृत्यु भएपछि प्रकाशित रचनाको हकमा सो रचना प्रकाशन भएको बर्षबाट पचास बर्षसम्म संरक्षित हुनेछ।
|
| 193 |
+
|
| 194 |
+
---
|
| 195 |
+
|
| 196 |
+
# परिच्छेद-४
|
| 197 |
+
|
| 198 |
+
## अनुमति बिना प्रतिलिपि अधिकार प्राप्त सामग्री प्रयोग गर्न पाइने अवस्था
|
| 199 |
+
|
| 200 |
+
१६. व्यक्तिगत प्रयोजनको लागि पुनरुत्पादन गर्न पाइने:
|
| 201 |
+
(१) दफा ७ को खण्ड (क) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि व्यक्तिगत प्रयोजनको लागि कुनै पनि प्रकाशित रचनाको केही भाग पुनरुत्पादन गर्न रचयिता बा प्रतिलिपि अधिकार धनीको अनुमति आबश्यक पर्ने छैन।
|
| 202 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि भवनको रुपमा तयार गरिएको आर्किटेक्चरल डिजाइन र अन्य निर्माण सम्बन्धी डिजाइनको पुनरुत्पादन बा कुनै पुस्तकको टूलो हिस्साको पुनरुत्पादन बा सांगीतिक रचनालाई नोटेशनको रुपमा पुनरुत्पादन बा डाटाबेसको सम्पूर्ण बा उल्लेखनीय हिस्सा डिजिटल ट्रान्समिसनको प्रक्रियाद्वारा पुनरुत्पादन गर्दा रचयिता बा प्रतिलिपि अधिकार धनीको आर्थिक अधिकारमा प्रतिकूल असर पर्ने गरी पुनरुत्पादन गर्न पाइने छैन।
|
| 203 |
+
|
| 204 |
+
१७. उद्धरण गर्न पाइने:
|
| 205 |
+
दफा ७ को खण्ड (क) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि प्रकाशित रचनाको केही अंश सत्कार्यको लागि रचयिता बा प्रतिलिपि अधिकार धनीको आर्थिक अधिकारमा प्रतिकूल असर नपर्ने गरी निजको अनुमति बिना नै उद्धरण गर्न पाइने छ। त्यसरी उद्धरण गर्दा सोको स्रोत र त्यस्तो रचनाका रचयिताको नाम उल्लेख भए सो समेत उल्लेख गर्नु पर्नेछु।
|
| 206 |
+
|
| 207 |
+
१८. पठनपाठनको लागि पुनरुत्पादन गर्न पाइने:
|
| 208 |
+
(१) दफा ७ को खण्ड (क) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि रचयिता बा प्रतिलिपि अधिका��� धनीको अनुमति बिना पठनपाठनको लागि रचयिता बा प्रतिलिपि अधिकार धनीको आर्थिक अधिकारमा प्रतिकूल असर नपुयाउने गरी देहायको कार्य गर्न पाइनेछ:-
|
| 209 |
+
(क) उद्धरण, लेखन बा श्रव्य दृश्यको सहायताद्वारा कुनै प्रकाशित रचनाको छोटो भाग पुनरुत्पादन गर्न,
|
| 210 |
+
(ख) कक्षामा प्रस्तुत हुने शैक्षिक क्रियाकलापको प्रयोजनको लागि रचनाको केही अंश पुनरुत्पादन, प्रसारण र प्रदर्शन गर्न।
|
| 211 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम पुनरुत्पादन गरिएको सबै प्रतिहरुमा स्रोत र रचयिताको नाम उल्लेख गर्नु पर्नेछु।
|
| 212 |
+
|
| 213 |
+
१९. पुस्तकालय तथा अभिलेखालयले पुनरुत्पादन गर्न पाइने:
|
| 214 |
+
दफा ७ को खण्ड (क) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि प्रत्यक्ष बा अप्रत्यक्ष रुपले आर्थिक लाभ नलिई शोध बा अध्ययन गर्ने व्यत्किको अनुरोधमा आफूसँग रहेका रचना उपलब्ध गराउने सार्वजनिक पुस्तकालय बा अभिलेखालयले आफूसँग रहेका कुनै पनि रचना हराए बा नष्ट भए बा पुरानो भएमा बा त्यस्तो रचना प्राप्त गर्न नसकिने भएमा त्यस्तो रचनाको रचयिता बा प्रतिलिपि अधिकार धनीको अनुमति बिना त्यस्तो रचनाको एकप्रति पुनरुत्पादन गर्न पाइनेछ।
|
| 215 |
+
|
| 216 |
+
२०. सर्वसाधारणलाई जानकारी गराउने उद्देश्यले पुनरुत्पादन, प्रसारण र अन्य किसिमको सञ्चार गर्न पाइने:
|
| 217 |
+
(१) दफा ७ को खण्ड (क), (झ) र (ज) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि रचयिता बा प्रतिलिपि अधिकार धनीको अनुमति बिना कुनै रचनाको स्रोत र रचयिताको नाम उल्लेख गरी देहायका काम गर्न पाइनेछ:-
|
| 218 |
+
(क) कुनै समाचारपत्र बा पत्रपत्रिकामा छापिएको लेख, राजनैतिक बा धार्मिक शीर्षकको लेख बा यस्तै प्रकृतिको प्रसारणलाई कुनै समाचार पत्र बा पत्रपत्रिकामा छाप्न बा सर्वसाधारणलाई प्रसारण गर्न बा अन्य किसिमको प्रसारण गर्न,
|
| 219 |
+
(ख) कुनै ताजा घटनाका सम्बन्धमा सर्वसाधारणलाई जानकारी गराउने उद्देश्यले पुनरुत्पादन गर्न, प्रसारण बा अन्य किसिमको सञ्चार गर्न बा कुनै घटनालाई पुष्टि गर्न,
|
| 220 |
+
(ग) ताजा सूचना प्रबाह गर्ने उद्देश्यले सर्वसाधारण समक्ष प्रस्तुत गरिएका बा अदालती कारबाहीका सम्बन्धमा गरिएको बहस कुनै समाचारपत्र बा नियमित रुपमा प्रकाशत हुने पत्रिकाको केही अंश पुनरुत्पादन गर्न, प्रसारण गर्न बा अन्य सार्वजनिक सञ्चार गर्न।
|
| 221 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि रचयिताले नै पुनरुत्पादन, प्रसारण र अन्य किसिमको सञ्चार गर्न नपाइने भनी उल्लेख गरेको रह���छ भने त्यस्तो अबस्थामा पुनरुत्पादन, प्रसारण र अन्य किसिमको सञ्चार गर्न पाइनेछैन।
|
| 222 |
+
|
| 223 |
+
२१. कम्प्युटर प्रोग्रामको पुनरुत्पादन गर्न पाइने:
|
| 224 |
+
दफा ७ को खण्ड (क) र (ग) मा जुनसुकै लेखिएको भए तापनि जुन उद्देश्यका लागि कम्प्युटर प्रोग्राम प्राप्त गरिएको हो सो उद्देश्य प्राप्त गर्न नसकेको अबस्थामा बा अभिलेख राख्ने उद्देश्यले बा वैध रुपले प्राप्त गरिएको कम्प्युटर प्रोग्राम हराए बा नष्ट भए बा प्रयोग गर्न नसकिने भएमा रचयिता बा प्रतिलिपि अधिकार धनीको अनुमति बिना नै एक प्रति कम्प्युटर प्रोग्राम पुनरुत्पादन गर्न पाइनेछ।
|
| 225 |
+
|
| 226 |
+
२२. व्यक्तिगत प्रयोजनको लागि पैठारी गर्न पाइने:
|
| 227 |
+
दफा ७ को खण्ड (छ) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि रचयिता बा प्रतिलिपि अधिकार धनीको इजाजत बिना व्यक्तिगत प्रयोजनको लागि कुनै रचनाको एकप्रति पैठारी गर्न पाइनेछ।
|
| 228 |
+
|
| 229 |
+
२३. सार्वजनिक प्रदर्शन गर्न पाउने:
|
| 230 |
+
दफा ७ को खण्ड (ज) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि कुनै व्यत्किले कुनै रचना बा रचनाको प्रतिलिपिको सार्वजनिक प्रदर्शन गर्न चाहेमा रचयिता बा प्रतिलिपि अधिकार धनीको अनुमति बिना त्यस्तो रचना बा रचनाको प्रतिलिपिको सार्वजनिक प्रदर्शन गर्न पाउनेछ।
|
| 231 |
+
तर त्यस्तो प्रदर्शन चलचित्र, स्लाइड, टेलिभिजन बा पर्दा बा अन्य किसिमको यन्त्रको सहायता बिना नै गरिएको हुनु पर्नेछ।
|
| 232 |
+
|
| 233 |
+
---
|
| 234 |
+
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| 235 |
+
# परिच्छेद-५
|
| 236 |
+
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| 237 |
+
## प्रतिलिपि अधिकारको हस्तान्तरण
|
| 238 |
+
|
| 239 |
+
२४. प्रतिलिपि अधिकारको हस्तान्तरण:
|
| 240 |
+
(१) प्रतिलिपि अधिकार धनीले आफूलाई प्राप्त आर्थिक अधिकारमध्ये सबै बा केही अधिकार लिखित रुपमा सम्झौता गरी अरुलाई हस्तान्तरण गर्न बा कुनै शर्त तोकी बा नतोकी प्रयोग गर्न अनुमति दिन सक्नेछ।
|
| 241 |
+
(२) नैतिक अधिकार प्राप्त व्यक्तिले आफ्नो मृत्युपछ्छ लागू हुने गरी निजलाई प्राप्त नैतिक अधिकारको संरक्षणको लागि रचनामा आफ्नो नाम नहटाउने शर्त सहित लिखित रुपमा सम्झौता गरी कसैलाई हस्तान्तरण गर्न सक्नेछ।
|
| 242 |
+
(३) यस दफा बमोजिम प्रतिलिपि अधिकार धनीबाट अधिकार हस्तान्तरण गरी लिने व्यक्तिले त्यसरी हस्तान्तरण गरी लिएको अधिकार बाहेक अन्य कुनै काम कारबाही गर्न पाउने छैन।
|
| 243 |
+
|
| 244 |
+
---
|
| 245 |
+
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| 246 |
+
# परिच्छेद-६
|
| 247 |
+
|
| 248 |
+
## संरक्षित अधिकारको उल्लङ्घन र दण्ड सजाय
|
| 249 |
+
|
| 250 |
+
२५. संरक्षित अधिकारको उल्लङ्घन भएको मानिने:
|
| 251 |
+
(१) कसैले देहाय बमोजिमको कार्य गरेमा यस ऐन बमोजिम संरक्षित अधिकार उल्लङ्घन गरेको मानिन���छ:-
|
| 252 |
+
(क) रचयिता बा प्रतिलिपि अधिकार धनीको अनुमति प्राप्त नगरी बा अनुमति प्राप्त गरेको भए तापनि सम्झौता बा अनुमतिपत्रमा उल्लेख भएको शर्तको उल्लङ्घन गरी आर्थिक लाभ उठाई बा नउठाई व्यापारिक बा अन्य कुनै उद्देश्यले आफ्नो हक नपुग्ने रचना बा ध्वनिअद्दनको प्रतिलिपिहरु उत्पादन गरी बिक्री वितरण बा सार्वजनिक सञ्चार गरेमा बा भाडामा दिएमा,
|
| 253 |
+
(ख) अर्काको रचनाले आर्जित गरेको प्रतिष्ठाको फाइदा उठाउने नियतले त्यस्तो रचनाको अनुकरण गरी बिज्ञापन बा प्रचार प्रसार गरेमा,
|
| 254 |
+
(ग) अर्काको रचनाको स्वरुप बा भाषाको माध्यम परिबर्तन गरी आर्थिक लाभ उठाउने उद्देश्यले अर्के विषय बा प्रकृतिको रचना निर्माण गरेमा,
|
| 255 |
+
(घ) बिज्ञापन बा अन्य कुनै माध्यमबाट दर्शक बा श्रोता बा पाठकलाई अर्के रचना हो भन्ने भान पार्ने नियतले प्रत्यक्ष बा अप्रत्यक्ष रुपले कुनै कुरा निर्माण बा तयार गरी फाइदा उठाउने प्रयत्न गरेमा।
|
| 256 |
+
(ङ) अनधिकृत पुनरुत्पादन गर्न हतोत्साहित गर्न गरिएको व्यवस्थालाई असफल गराउने ध्येय राखी तयार गरिएको उपकरण बा माध्यमको आयात, उत्पादन बा भाडामा दिने कार्य गरेमा,
|
| 257 |
+
(च) सांकेतिक भाषामा गोप्य रुपमा (इन्क्रिप्ट गरी) प्रसारण गरिएको कार्यकमलाई अनधिकृत रुपमा हेर्न मद्दत गर्ने उपकरण बिक्री गर्ने उद्देश्यले उत्पादन बा आयात गर्ने कार्य गरेमा,
|
| 258 |
+
(छ) खण्ड (ङ) र (च) मा उल्लेख भए बाहेक प्रतिलिपि अधिकार उल्लङ्घन गर्ने उद्देश्यले मात्र तयार गरिएको यान्विक उपकरण आयात, बिक्री, बितरण तथा प्रयोग गरेमा।
|
| 259 |
+
(२) कसैले उपदफा (१) उल्लङ्घन गरी कुनै रचना बा ध्वनिअड्न प्रकाशन गरेको कुरा थाहा पाउँदा पाउँदै बा बिश्वास गर्ने पर्याम कारण हुँदा हुँदै त्यसरी प्रकाशन गरिएका रचनाका प्रतिहरु एवं ध्वनिअड्नका प्रतिहरु बिक्री वितरण गर्न बा बहालमा दिनु हुँदैन।
|
| 260 |
+
|
| 261 |
+
२६. अनधिकार प्रतिलिपिहरुको पैठारीमा प्रतिबन्ध:
|
| 262 |
+
नेपाल भित्र तयार गरिएको भए अनधिकार प्रकाशन ठहरिने कुनै रचना बा ध्वनि अड्नको प्रतिलिपिहरु विदेशमा तयार गरी बा अन्य कुनै तरिकाले प्राप्त गरी व्यपारिक प्रयोजनको लागि नेपाल भित्र पैठारी गर्न हुँदैन।
|
| 263 |
+
|
| 264 |
+
२७. संरक्षित अधिकारको उल्लङ्घन गरेमा दण्ड सजाय:
|
| 265 |
+
(१) कसैले दफा २४ उल्लङ्घन गरेमा त्यस्तो उल्लङ्घन गर्ने व्यत्तिलाई कसूरको मात्रा अनुसार दश हजार रुपैयाँदेखि एक लाख रुपैयाँसम्म जरिबाना बा छ महिनासम��म कैद बा दुवै सजाय हुनेछ र दोस्रो पटक देखि पटकै पिच्छे बीस हजार रुपैयाँदेखि दुई लाख रुपैयाँसम्म जरिबाना बा एक बर्षसम्म कैद बा दुवै सजाय हुनेछ। त्यसरी प्रकाशन बा पुनरुत्पादन गरेको बा बितरण गरेको बा पुनरुत्पादन गर्न प्रयोग गरिएका सामग्रीहरु जफत हुनेछ।
|
| 266 |
+
(२) संरक्षित अधिकारको उल्लङ्घन गर्ने व्यत्तिबाट प्रतिलिपि अधिकार प्राप्त व्यत्तिलाई परेको नोक्सानीको क्षतिपूर्ति समेत भराई दिनु पर्नेछ।
|
| 267 |
+
|
| 268 |
+
२८. अनाधिकार प्रतिलिपि पैठारी गरेमा सजाय:
|
| 269 |
+
कसैले दफा २६ उल्लङ्र्धन गरी कुनै रचनाको अनाधिकार प्रतिलिपिहरु पैठारी गरेमा त्यस्तो प्रतिलिपिहरु जफत गरी निजलाई कसूरको मात्रा अनुसार दश हजार रुपैयाँदेखि एकलाख रुपैयाँसम्म जरिबाना हुनेछ र प्रतिलिपि अधिकार प्राप्त व्यक्तिलाई त्यस्तो पैठारीबाट भएको नोक्सानीको क्षतिपूर्ति समेत सो पैठारी गर्ने व्यक्तिबाट भराई दिनु पर्नेछ।
|
| 270 |
+
|
| 271 |
+
२९. अन्य सजाय:
|
| 272 |
+
कसैले यो ऐन र यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा लेखिएका अन्य कुनै कुरा उल्लङ्घन गरेमा कसूरको मात्रा अनुसार पौंचहजार रुपैयाँदेखि पचासहजार रुपैयाँसम्म जरिबाना हुनेछ।
|
| 273 |
+
|
| 274 |
+
---
|
| 275 |
+
|
| 276 |
+
# परिच्छेद-७
|
| 277 |
+
|
| 278 |
+
## विविध
|
| 279 |
+
|
| 280 |
+
३०. रजिष्ट्रार तथा निजको काम, कर्तव्य र अधिकार:
|
| 281 |
+
(१) यस ऐन बमोजिम रजिष्ट्रारको काम गर्न नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सुचना प्रकाशन गरी कम्तीमा राजपत्राङ्गित द्वितीय श्रेणीको अधिकृतलाई रजिष्ट्राको काम गर्ने गरी तोक्नेछ।
|
| 282 |
+
(२) यस ऐनमा अन्यत्र लेखिएदेखि बाहेक रजिष्ट्रारको काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछ:-
|
| 283 |
+
(क) रोयल्टी सङ्लन संस्थाको रेखदेख र नियन्त्रण गर्ने,
|
| 284 |
+
(ख) रोयल्टी सङ्लन संस्थाले निर्धारण गरेको रोयल्टीमा कुनै पक्षको चित्त नबुझेमा तोकिए बमोजिम उजुरी सुन्ने,
|
| 285 |
+
(ग) यस ऐनको उद्देश्य पूर्तिको लागि तोकिए बमोजिमका अन्य कार्य गर्ने बा गराउने।
|
| 286 |
+
|
| 287 |
+
३१. रजिष्टूरको आदेश र निर्णय उपर पुनरावेदन:
|
| 288 |
+
रजिष्ट्रारले दिएको कुनै आदेश बा निर्णय उपर चित्त नबुढने पक्षले पैतीस दिनभित्र रजिष्ट्रारको कार्यालय रहेको क्षेत्रको जिल्ला अदालत समक्ष पुनरावेदन दिन सक्नेछ।
|
| 289 |
+
|
| 290 |
+
३२. रचना, ध्वनि अड्नका प्रतिहरु बा अन्य सामग्री कब्जा गर्न सक्ने:
|
| 291 |
+
(१) कसैले दफा २४ बिपरीत कुनै रचना बा ध्वनिअड्नको प्रकाशन बा पुनरुत्पादन गरेको बा गर्न लागेको शङा लागेमा यस ऐन बमोजिम कसूर तहकिकात गर्ने प्रहरी कर्मचारी सम��्ष उजुरी दिएमा सो प्रहरी कर्मचारीले त्यस्तो रचना बा ध्वनिअड्नको प्रतिहरु बिकी वितरण हुन नदिनको लागि आवश्यक व्यवस्था गर्नेछ र आवश्यक भएमा त्यस्तो रचना बा ध्वनिअड्नको प्रतिहरु प्रचलित कानून बमोजिम खानतलासी गरी कब्जामा लिन सक्नेछ।
|
| 292 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम खानतलासी गरी कब्जामा लिंदा त्यस्तो रचना बा ध्वनि अड्नका प्रतिहरु प्रकाशन बा पुनरुत्पादन गर्न प्रयोग गरिएको मेशिन लगायतका सामग्रीहरु समेत कब्जामा लिन सकिनेछ।
|
| 293 |
+
|
| 294 |
+
३३. रचना, ध्वनिअड्नका प्रतिहरु बा अन्य सामग्री नष्ट गर्नुपर्ने:
|
| 295 |
+
दफा ३२ बमोजिम कब्जा गरिएका रचना र ध्वनिअड्नका प्रतिहरु अदालतबाट मुद्दा किनारा हुँदा जफत हुने टहरिएमा जिल्ला प्रशासन कार्यालय र स्थानीय तहका प्रतिनिधिको रोहबरमा मुचुल्का गरी नष्ट गर्नुपर्नेछ।
|
| 296 |
+
|
| 297 |
+
३४. अनधिकार प्रतिलिपिको पैठारी रोक्ने सम्बन्धी भन्सार अधिकृतको अधिकार:
|
| 298 |
+
(१) दफा २६ उल्लङ्र्धन गरी कसैले नेपाल भित्र अनधिकार प्रतिलिपिको सामग्री पैठारी गर्न लागेको छ भन्ने शङा लागेमा त्यस्तो सामग्रीको पैठारीमा रोक लगाउन प्रमाण सहित भन्सार अधिकृत समक्ष निवेदन दिन सक्नेछ।
|
| 299 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम निवेदन प्राप्त भएमा भन्सार अधिकृतले आवश्यक जाँचबुझ गर्दा निवेदकको माग मनासिब देखिन आएमा निजले पैठारी हुन लागेको सामग्रीलाई एक पटकमा दश कार्यदिन गरी बढीमा बीस कार्यदिनसम्म रोक लगाउन सक्नेछ।
|
| 300 |
+
(३) उपदफा (१) र (२) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भएतापनि भन्सार अधिकृतले नेपाल भित्र अनधिकार प्रतिलिपिको सामग्री पैठारी गर्न लागेको थाहा पाएमा बा शङा लागेमा त्यस्तो सामग्रीलाई एक पटकमा दश कार्यदिन गरी बढीमा बीस कार्यदिनसम्म रोक लगाउन सक्नेछ।
|
| 301 |
+
(४) अनधिकार प्रतिलिपिको पैठारी रोक्ने सम्बन्धी अन्य कार्यबिधि तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 302 |
+
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| 303 |
+
३५. मुद्दाको कारबाही र किनाराः
|
| 304 |
+
(१) यस ऐन अन्तर्गत सजाय हुने मुद्दाको कारबाही र किनारा गर्ने अधिकार सम्बन्धित जिल्ला अदालतलाई हुनेछ।
|
| 305 |
+
(२) यस ऐन अन्तर्गतको मुद्दाको कारबाही र किनारा गर्दा संक्षिम कार्यबिधि ऐन, २०२६ बमोजिमको कार्यबिधि अपनाइनेछ।
|
| 306 |
+
|
| 307 |
+
३६. रोक्का गर्न आदेश दिन सक्नेः
|
| 308 |
+
यस ऐन बमोजिम उजुरीको कारबाही र किनारा गर्ने सिलसिलामा सम्बन्धित पक्षको निवेदन माग बमोजिम जिल्ला अदालतले यस ऐन बिपरीतको कुनै काम कारबाही तत्काल रोक्न मनासिब ठहन्याएमा सम्बन्धित व्यक्���ि बा निकायलाई त्यस्तो काम कारबाही रोक्का गर्न आदेश दिन सक्नेछ।
|
| 309 |
+
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| 310 |
+
३७. नेपाल सरकार बादी हुने:
|
| 311 |
+
(१) दफा २७ र २६ अन्तर्गत सजाय हुने मुद्दा नेपाल सरकार बादी हुनेछ र सो मुलुकी फोजदारी कार्यबिधि संहिता, २०७४ को अनुसूची -१ मा परेको मानिनेछ।
|
| 312 |
+
(२) यस ऐन अन्तर्गतको मुद्दाको अनुसन्धान र तहकिकात कम्तीमा प्रहरी निरीक्षकले गर्नेछ।
|
| 313 |
+
|
| 314 |
+
३८. हदम्याद:
|
| 315 |
+
यस ऐन अन्तर्गतको कुनै अधिकार उल्लङ्घन भएकोमा सो भएको थाहा पाएको मितिले तीन महिनाभित्र उजुरी दिनु पर्नेछ।
|
| 316 |
+
|
| 317 |
+
३९. रोयल्टी सङ्लन संस्था सम्बन्धी व्यवस्था:
|
| 318 |
+
(१) प्रतिलिपि अधिकार सम्बन्धी रचनाको रोयल्टी निर्धारण गर्ने, सङ्लन गर्ने, सङ्लित रोयल्टी बितरण गर्ने प्रयोजनको लागि सामान्यतया एउटा बिधामा एउटा रोयल्टी सङ्लन संस्था तोकिए बमोजिम गठन गरिनेछ।
|
| 319 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम गठन गरिएको रोयल्टी संङ्लन संस्थालाई रजिष्ट्रार समक्ष तोकिए बमोजिम दर्ता गराउनु पर्नेछ।
|
| 320 |
+
(३) रोयल्टी संकलन संस्था अविच्छिन्न उत्तराधिकारबाला स्वशासित र संगठित संस्था हुनेछ।
|
| 321 |
+
(४) रोयल्टी संकलन संस्थाको सबै काम कारबाहीको निमित्त आफ्नो छुट्टै छाप हुनेछ।
|
| 322 |
+
(५) रोयल्टी संकलन संस्थाले व्यक्ति सरह चल, अचल सम्पत्ति प्राप्त गर्न, उपभोग गर्न, बेचबिखन गर्न बा अन्य किसिमले व्यवस्था गर्न र व्यक्ति सरह नालिस उजूर गर्न एबं सोही नामबाट नालिस उजूर लारन सक्नेछ।
|
| 323 |
+
(६) नेपाल सरकारले रोयल्टी संकलन संस्थाले पालन गर्नुपर्ने शर्त तोक्न सक्नेछ र त्यस्तो शर्तको पालना गर्नु रोयल्टी संकलन संस्थाको कर्तव्य हुनेछ।
|
| 324 |
+
|
| 325 |
+
४०. नेपाल सरकार र प्रदेश सरकारको प्रतिलिपि अधिकार:
|
| 326 |
+
(१) नेपाल सरकारद्वारा तयार गरिएको रचनाको प्रतिलिपि अधिकार नेपाल सरकार र प्रदेश सरकारद्वारा तयार गरिएको रचनाको प्रतिलिपि अधिकार प्रदेश सरकारलाई हुनेछ।
|
| 327 |
+
(२) नेपाल सरकार बा प्रदेश सरकारले उपदफा (१) बमोजिम प्राप्त अधिकार कुनै व्यक्ति बा संस्थालाई बहालमा दिन बा बिक्री गर्न बा अन्य कुनै प्रकारले प्रयोग गर्न अनुमति दिन सक्नेछ।
|
| 328 |
+
|
| 329 |
+
४१. बर्षको गणना:
|
| 330 |
+
यस ऐन बमोजिम बर्ष गणना गर्दा रचना प्रकाशन बा सार्वजनिक सञ्चार भएको बा ध्वनिअङ्गन उत्पादन भएको बर्षको अन्त्यबाट शुरु हुने बिक्रम सम्वत् बमोजिमको नयाँ बर्षबाट गणना गरिनेछ।
|
| 331 |
+
|
| 332 |
+
४२. नियम बनाउने अधिकार:
|
| 333 |
+
यस ऐनको उद्देश्य कार्यान्वयन गर्न नेपाल सरकारले आवश्यक नियमहरु बनाउन सक्नेछ।
|
| 334 |
+
|
| 335 |
+
४३. खारेजी र बचाउ:
|
| 336 |
+
(१) प्रतिलिपि अधिकार ऐन, २०२२ खारेज गरिएको छ।
|
| 337 |
+
(२) यो ऐन प्रारम्भ हुनु पूर्व सार्वजनिक रूपमा प्रकाशन भएका रचनाको बांकी रहेको प्रतिलिपि अधिकारको संरक्षण अवधि यस ऐन बमोजिम संरक्षण भएको मानिनेछ।
|
| 338 |
+
(३) प्रतिलिपि अधिकार ऐन, २०२२ बमोजिम भए गरेका काम कारबाहीहरू यसै ऐन बमोजिम भए गरेको मानिने छन्।
|
| 339 |
+
|
| 340 |
+
---
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| 341 |
+
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| 342 |
+
**द्वष्टव्य:**
|
| 343 |
+
(१) केही नेपाल कानुन संशोधन गर्ने ऐन, २०६३ द्वारा रुपान्तर भएका शब्दहरु:-
|
| 344 |
+
"थी ४ सरकार" को सझ "नेपाल सरकार"।
|
| 345 |
+
(२) केही नेपाल कानूनलाई संशोधन, एकीकरण, समायोजन र खारेज गर्ने ऐन, २०७४ द्वारा रुपान्तर भएका शब्दहरु:-
|
| 346 |
+
"सरकारी मुद्दा सम्बन्धी ऐन, २०४९" को सझ "मुलुकी फौजदारी कार्यबिधि (संहिता) ऐन, २०७४"।
|
section_16_pdf_15.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,237 @@
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# अभिलेख संरक्षण ऐन, २०४६
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लालमोहर र प्रकाशन मिति
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२०४६। ७। ११
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संशोधन गर्ने ऐन
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प्रमाणीकरण र प्रकाशन मिति
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१. गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६६$\cdot$
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२०६६। १०। ७
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२. केही नेपाल कानून संशोधन तथा खारेज गर्ने ऐन, २०७२
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२०७२। ०६। १४
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३. नेपालको संविधान अनुकूल बनाउन केही नेपाल ऐनलाई संशोधन गर्ने ऐन, २०७४
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२०७४। ११। १९
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४. अभिलेख संरक्षण (पहिलो संशोधन) ऐन, २०६१
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२०६१। ०४। १४
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२०४६ सालको ऐन नं. १७
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".......................
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अभिलेख संरक्षण सम्बन्धी व्यवस्था गर्न बनेको ऐन
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प्रस्तावना: राष्ट्रिय दृष्टिकोणले महत्वपूर्ण कागजातलाई अभिलेखको रूपमा व्यवस्थित एवं सुरक्षित तरिकाले राख्ने सम्बन्धमा कानूनी व्यवस्था गर्न बाञ्छुनीय भएकोले,
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+
श्री ४ महाराजाधिराज बीरेन्द्र बीर विक्रम शाहदेवबाट राष्ट्रिय पञ्चायतको सल्लाह र सम्भतिले यो ऐन बनाइबक्सेको छ ।
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## १. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भ:
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१.१ यस ऐनको नाम "अभिलेख संरक्षण ऐन, २०४६" रहेको छ ।
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- यो ऐन संबत् २०६४ साल जेठ १४ गतेदेखि लागू भएको ।
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- गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६६ द्वारा झिकिएको ।
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+
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+
१.२ यो ऐन तुरून्त प्रारम्भ हुनेछ ।
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# २. परिभाषा:
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२.१ विषय बा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,-
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+
२.१.१ 'कागजात' भन्नाले देहायका कुराहरू समेत सम्झनुपर्छ:-
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| 36 |
+
०२.१.१.१ हस्तलिखित ग्रन्थ, किताब, प्रतिवेदन, आर्थिक विवरण, संविधान, ऐन, नियम, निर्देशिका, कार्यविधि, परिपत्र, टिप्पणी, सूचना, सन्धि, सम्झौता, पत्र-पत्रिका, चिट्टीपत्र, लिखत, चित्र, तस्बिर, नक्सा, योजना, चार्ट, फाइल, मिसिल, रजिष्टर, लालमोहर, स्याहामोहर, वंशावली, सनद, सबाल, रुक्का, एकछापे, दुईछापे, इस्तिहार, राजीनामापत्र, निर्णय पुस्तिका, भूमि सम्बन्धी तमसुक, भर्पाई, रसिद लगायत यस्तै प्रकारका कागजात बा कुनै प्रकाशन।
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| 37 |
+
२.१.१.२ फिल्म, माइक्रो फिल्म, टेप (ध्वनि रेकर्डर), चलचित्र, कम्प्युटर डिस्क बा कम्प्युटर क्यासेट लगायत डिजिटल बा विद्युतीय रेकर्डका मूलप्रति बा प्रतिलिपि ।
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| 38 |
+
२.१.१.३ ताडपत्र, भोजपत्र, स्वर्णपत्र, रजतपत्र, ताम्रपत्र, शिलापत्र, काष्ठपत्र, इष्टिकापत्र बा तिनका प्रतिलिपि बा तस्बिर।
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| 39 |
+
२.१.१.४ ०प्रकाशनको प्रथम दिवसीय टाँचा लागेको हुलाक टिकट तथा मनीअर्डर फर्म, हवाई पत्र र पोष्ट कार्डको नयाँ प्रकाशन ।
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| 40 |
+
२.१.१.५ कुनै अभिलेख बा चित्र अङ्गित मुण्मय, छालाको गाता, हस्तिहाड, मुद्रा, तक्मा, पदक, मेडल, टुफि र सिलछाप।
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+
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+
२.१.२ "अभिलेख" भन्नाले राष्ट्रिय अभिलेखालयमा अभिलेखको रूपमा सुरक्षित रूपमा राखिएका कागजात र खण्ड ४.१.१ बमोजिम दर्ता भएका कागजात सम्झनु पर्छ।
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| 43 |
+
२.१.३ "राष्ट्रिय अभिलेखालय" भन्नाले दफा ३ बमोजिम स्थापना भएको राष्ट्रिय अभिलेखालय सम्झनुपर्छ ।
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| 44 |
+
२.१.४ "कार्यालय" भन्नाले देहायका निकाय बा कार्यालय सम्झनु पर्छः-
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+
२.१.४.१ सङ्घीय संसद, नेपाल सरकारका मन्त्रालय, अदालत, संबैधानिक निकाय, आयोग, सचिवालय, विभाग बा सो अन्तर्गतका अन्य जुनसुकै सरकारी निकाय बा कार्यालय,
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| 46 |
+
२.१.४.२ नेपाल सरकारको पूर्ण बा आंशिक स्वामित्व बा नियन्त्रणमा रहेको संस्थान, कम्पनी, बेड़ बा समिति बा प्रचलित कानून बमोजिम स्थापित बा नेपाल सरकारद्वारा गठित आयोग, संस्थान, प्राधिकरण, निगम, प्रतिष्ठान, बोर्ड, केन्द्र, परिषद्, पुस्तकालय र यस्तै प्रकृतिका अन्य सङ्गठित संस्था,
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| 47 |
+
२.१.४.३ प्रदेश सभा, प्रदेश सरकार र सो अन्तर्गतका कार्यालय,
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| 48 |
+
२.१.४.४ स्थानीय तह र सो अन्तर्गतका कार्यालय,
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| 49 |
+
२.१.४.४ बिध्रविद्यालय, महाविद्यालय, अनुसन्धान केन्द्र र यस्तै प्रकृतिका अन्य प्राज्ञिक बा शैक्षिक संस्था,
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| 50 |
+
२.१.४.६ नेपाल सरकारबाट जारी आदेश बमोजिम स्थापना भएका निकाय बा कार्यालय, बा
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| 51 |
+
२.१.४.७ नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी तोकेका अन्य निकाय बा कार्यालय।
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| 52 |
+
२.१.४ "समिति" भन्नाले दफा ४ बमोजिम गठन गरिएको सल्लाहकार समिति सम्झनु पर्छ ।
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+
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+
२.१.६ "तोकिएको बा तोकिएबमोजिम" भन्नाले यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा तोकिएको बा तोकिएबमोजिम सम्झनुपर्छ ।
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| 55 |
+
"२.१.७ "मन्त्रालय" भन्नाले नेपाल सरकार, संस्कृति, पर्यटन तथा नागरिक उड्डयन मन्त्रालय सम्झनु पर्छ।
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+
"२.१.६ "राष्ट्रिय महत्त्वका कागजात" भन्नाले अनुसूचीमा उल्लेख भएका कागजात सम्झनु पर्छ र सो शब्दले नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी तोकिदिएको कागजात समेतलाई जनाउँछ।
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| 57 |
+
"२.१.९ "संरक्षण" भन्नाले अभिलेखको मौलिक स्वरूप, गुण र मात्रामा फरक नपर्ने गरी उचित बाताबरणमा राख्ने, किटाणुरहित बनाउने, मर्मत गर्ने, सफा राख्ने समेतको प्रबन्ध गरी परम्परागत तथा आधुनिक प्रबिधिबाट सुरक्षित र व्यवस्थित राख्ने कार्य सम्झनु पर्छ।
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| 58 |
+
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+
# ३. राष्ट्रिय अभिलेखालयको स्थापना:
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| 60 |
+
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+
३.१ अभिलेखहरू व्यवस्थित र सुरक्षित तरिकाले राख्नको लागि एक र��ष्ट्रिय अभिलेखालय रहनेछ ।
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+
३.२ यो ऐन प्रारम्भ हुनुभन्दा अघि स्थापना भएको राष्ट्रिय अभिलेखालय यस ऐन बमोजिम स्थापना भएको मानिनेछ ।
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| 63 |
+
"३.३ राष्ट्रिय अभिलेखालयको प्रमुखको रूपमा काम गर्न एकजना महानिर्देशक रहनेछ।
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| 64 |
+
"३.४ उपदफा ३.३ बमोजिमको महानिर्देशक शिक्षा सेवा, पुरातत्त्व समूहको राजपत्राहित प्रथम श्रेणी (प्राबिधिक) को हुनेछ।
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| 65 |
+
"३.४ महानिर्देशकको काम, कर्तव्य र अधिकार तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 66 |
+
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+
# ४. सल्लाहकार समितिको गठन:
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+
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+
४.१ अभिलेख व्यवस्थित र सुरक्षित तरिकाले संरक्षण गर्नका लागि राष्ट्रिय अभिलेखालयलाई आवश्यक सुझाव दिन देहाय बमोजिमको एक सल्लाहकार समिति रहनेछ:-
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| 70 |
+
(क) सचिव, मन्त्रालय - अध्यक्ष
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| 71 |
+
(ख) सहसचिव, प्रधानमन्त्री तथा मन्त्रिपरिषद्को कार्यालय
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| 72 |
+
(ग) सहसचिव, अर्थ मन्त्रालय
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| 73 |
+
(घ) सहसचिव, परराष्ट्र मन्त्रालय
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| 74 |
+
(ङ) सहसचिव, कानून, न्याय तथा सेसदीय मामिला मन्त्रालय
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| 75 |
+
(च) सहसचिव, भूमि व्यवस्था, सहकारी तथा गरिवी निवारण मन्त्रालय
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| 76 |
+
(छ) सहसचिव, मन्त्रालय
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| 77 |
+
(ज) सहसचिव, शिक्षा, विज्ञान तथा प्रविधि मन्त्रालय
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| 78 |
+
(झ) प्रमुख, नेपाल राष्ट्रिय पुस्तकालय
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| 79 |
+
(ज) सम्बन्धित विषयका विशेषज्ञहरूमध्येवाट नेपाल सरकारले मनोनयन गरेको कम्तीमा दुईजना महिला सहित चारजना
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| 80 |
+
(ट) महानिर्देशक, राष्ट्रिय अभिलेखालय - सदस्य-सचिव
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| 81 |
+
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| 82 |
+
४.२ उपदफा ४.१ को खण्ड (ज) बमोजिम सदस्य मनोनयन गर्दा समावेशी सिद्धान्तका आधारमा गर्नु पर्नेछ।
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| 83 |
+
४.३ उपदफा ४.१ को खण्ड (ज) बमोजिमका सदस्यको पदावधि चार वर्षको हुनेछ।
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| 84 |
+
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| 85 |
+
४.४ उपदफा ४.३ मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि उपदफा ४.१ को खण्ड (ज) बमोजिमको सदस्यको काम सन्तोषजनक नभएमा मन्त्रालयले जुनसुकै बखत हटाउन सक्नेछ।
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| 86 |
+
तर यसरी हटाउनु अघि निजलाई सफाइ पेस गर्ने मनासिब मौका दिनु पर्नेछ।
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| 87 |
+
४.४ उपदफा ४.१ बमोजिमको समितिको बैठकमा आवश्यकता अनुसार अभिलेख संरक्षण सम्बन्धी बिज्ञलाई समेत आमन्क्रण गर्न सकिनेछ।
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| 88 |
+
४.६ समितिको काम, कर्तव्य र अधिकार तथा बैठक सम्बन्धी व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 89 |
+
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| 90 |
+
# ५. राष्ट्रिय अभिलेखालयको काम, कर्तव्य र अधिकार:
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| 91 |
+
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| 92 |
+
५.१ राष्ट्रिय अभिलेखालयको काम, कर्तव्य र अधिकार देहायबमोजिम हुनेछ :-
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| 93 |
+
५.१.१ दफा ६ र ७ बमोजिम प्राप्त भएका कागजात दर्ता गर्ने,
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| 94 |
+
५.१.२ अभिलेखहरू व्यवस्थित एवं सुरक्षित तरिकाले राख्ने,
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| 95 |
+
५.१.३ अभिलेखहरू तोकिएबमोजिम बर्गीकरण गरी सो को सूचि तयार गर्ने,
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| 96 |
+
५.१.४ आवश्यकतानुसा�� अभिलेख छपाउने बा प्रतिलिपि निकाल्ने,
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| 97 |
+
५.१.४ कुनै व्यक्तिलाई अभिलेख हेर्न बा सार्न दिने बा प्रतिलिपि दिने सम्बन्धमा आवश्यक व्यवस्था गर्ने,
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| 98 |
+
५.१.६ सुरक्षित तरिकाले कागजात राख्ने सम्बन्धमा कार्यालयलाई आवश्यक परामर्श दिने,
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| 99 |
+
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| 100 |
+
"५.१.६क. राष्ट्रिय महत्त्वका अभिलेखको सर्वेक्षण, खोज, सङ्गलन, संरक्षण र संवर्द्धन गर्ने,
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| 101 |
+
"५.१.६ख. ऐतिहासिक तथा राष्ट्रिय महत्त्वका कागजात उपहार, खरिद, लिज बा अन्य माध्यमबाट सङ्गलन बा प्राप्त गर्ने,
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| 102 |
+
"५.१.६ग. कार्यालयमा रहेका कागजातको संरक्षण तथा व्यवस्थापन सम्बन्धी कार्यको सुपरिवेक्षण गर्ने,
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| 103 |
+
"५.१.६घ. कार्यालय, प्रदेश बा स्थानीय तहले राख्ने अभिलेख तथा कागजातको संरक्षण तथा व्यवस्थापन सम्बन्धमा सहयोग गर्ने तथा परामर्श दिने,
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| 104 |
+
"५.१.६ङ. अभिलेखको माईक्रोफिल्म बनाउने र डिजिटाइज्ड गर्ने,
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| 105 |
+
"५.१.६च. बिपदबाट हानि नोक्सानी हुन नसक्ने गरी अभिलेखको संरक्षण गर्ने,
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| 106 |
+
"५.१.६छ. अभिलेख प्रकाशन गर्न कसैले माग गरेमा सर्त तोकी स्वीकृति दिने,
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| 107 |
+
"५.१.६ज. अभिलेख सङ्गलन तथा संरक्षण गर्ने सम्बन्धमा जनचेतना अभिबुद्धि गराउने,
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| 108 |
+
"५.१.६झ. प्रत्येक बर्ष अभिलेख व्यवस्थापनको बार्षिक प्रतिवेदन मन्त्रालय समक्ष पेस गर्ने,
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| 109 |
+
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| 110 |
+
५.१.७ राष्ट्रिय अभिलेखालयको अन्य काम, कर्तव्य र अधिकार तोकिएबमोजिम हुनेछ ।
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| 111 |
+
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| 112 |
+
# ६. कार्यालयले राष्ट्रिय अभिलेखालयमा कागजात पठाउने सम्बन्धमा:
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| 113 |
+
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| 114 |
+
६.१ कार्यालयले देहायका कागजात सुरक्षित रूपमा संरक्षण गरी राख्नको लागि राष्ट्रिय अभिलेखालयमा पठाउनु पर्नेछ:-
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| 115 |
+
६.१.१ पच्चीस बर्ष बा सो भन्दा पुराना ञ्उपखण्ड २.१.१.१ र २.१.१.२ मा उल्लिखित राष्ट्रिय महत्त्वका कागजात,
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| 116 |
+
६.१.१क. नेपाल पक्ष भएको कार्यालयसँग सम्बन्धित सन्धि, सम्झौताको प्रमाणित प्रति,
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| 117 |
+
६.१.२ ताडपत्र, भोजपत्र, स्वर्णपत्र, रजतपत्र, ताम्रपत्र, शिलापत्र, काष्ठपत्र, इष्टिकापत्र बा तिनका प्रतिलिपि बा तस्बिर,
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| 118 |
+
६.१.३ प्रत्येक प्रकाशनको प्रथम दिवसीय टाँचा लागेको हुलाक टिकट तथा मनीअर्डर फर्म, हवाई पत्र र पोष्ट कार्डको नयाँ प्रकाशन ।
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| 119 |
+
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| 120 |
+
६.२ कार्यालयले राष्ट्रिय दृष्टिकोणबाट अभिलेखको रूपमा संरक्षण गरिनु पर्ने ठानेमा देहायका कागजात अबधि तोकी बा नतोकी सुरक्षित रूपमा संरक्षण गरी राख्नको लागि राष्ट्रिय अभिलेखालयमा पठाउनु पर्नेछ :-
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| 121 |
+
६.२.१ प्रतिवेदन, आर्थिक विवरण, सन्धि सम्झौता बा कुनै प्रकाशन,
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| 122 |
+
६.२.२ हस्तलिख���त ग्रन्थ, किताब, पत्र-पत्रिका, चिट्टीपत्र, लिखत चित्र बा तस्वीर,
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| 123 |
+
६.२.३ नक्सा, योजना, चार्ट, फाइल, मिसिल बा रजिष्टर, फिल्म,
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| 124 |
+
६.२.४ फिल्म, माइक्रो फिल्म, टेप (ध्वनि रेकर्डर, चलचित्र बा कम्प्युटर डिस्क बा कम्प्युटर क्यासेट लगायत डिजिटल बा बिघुतीय रेकर्डका मूलप्रति बा प्रतिलिपि,
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| 125 |
+
६.२.४ खण्ड ६.२.१, ६.२.२, ६.२.३ बा ६.२.४ मा उल्लेख भए बाहेकका अन्य कागजात ।
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| 126 |
+
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| 127 |
+
६.३ कार्यालयले सरकारी कागजात धुल्याउने सम्बन्धी प्रचलित कानून बमोजिम सरकारी कागज धुल्याउँदा तोकिएबमोजिमका कागजात राष्ट्रिय अभिलेखालयमा पटाउनु पर्नेछ् ।
|
| 128 |
+
६.३क. कार्यालयले प्रचलित कानून बमोजिम धुल्याएका कागजातको सूची सहितको पज्जिका अभिलेखको लागि राष्ट्रिय अभिलेखालयमा पटाउनु पर्नेछ।
|
| 129 |
+
६.४ कार्यालयले राष्ट्रिय अभिलेखालयमा कागजात पटाउँदा सो को वर्गीकरण अनुसारको सूची समेत पटाउनु पर्नेछ ।
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| 130 |
+
६.४ कार्यालयले उपदफा ६.१ बा ६.२ बमोजिमका कागजात राष्ट्रिय अभिलेखालयमा पटाउँदा कुनै खास अबधिसम्म त्यस्ता कागजात तोकिएको व्यक्ति बाहेक अरु कसैलाई हेर्न, सार्न बा त्यसको प्रतिलिपि दिन नहुने भएमा सो कुरा र त्यस्तो अबधि समेत उल्लेख गरी राष्ट्रिय अभिलेखालयमा राख्न पटाउनु पर्नेछ ।
|
| 131 |
+
६.६ उपदफा ६.१ बमोजिम कार्यालयले राष्ट्रिय अभिलेखालयमा पटाएका कागजात सो कार्यालयले फिर्ता लिन सक्ने छैन ।
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| 132 |
+
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| 133 |
+
तर उपदफा ६.२ बमोजिम राष्ट्रिय अभिलेखालयमा पटाएका कागजात मध्ये अबधि तोकी पटाएका कागजात त्यस्तो अबधि समाप्त भएपछि सम्बन्धित कार्यालयले चाहेमा तोकिएबमोजिम फिर्ता लिन सक्नेछ ।
|
| 134 |
+
६.७ उपदफा ६.१ बमोजिम राष्ट्रिय अभिलेखालयमा पटाइएका कागजात जुन कार्यालयले पटाएको हो सोही कार्यालयलाई आवश्यक पर्न गएमा त्यस्तो कागजात पुनः राष्ट्रिय अभिलेखालयमा फिर्ता गर्ने गरी तोकिएको अबधिसम्मको लागि राष्ट्रिय अभिलेखालयले सम्बन्धित कार्यालयलाई तोकिएबमोजिम उपलब्ध गराउन सक्नेछ ।
|
| 135 |
+
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| 136 |
+
**६क. प्रदेश सरकार तथा स्थानीय तहले कागजात पटाउनु पर्नेः प्रदेश सरकार तथा स्थानीय तहले राष्ट्रिय महत्त्वका कागजातको एक प्रति संरक्षणको लागि राष्ट्रिय अभिलेखालयमा पटाउनु पर्नेछ।
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| 137 |
+
**६ख. अभिलेख संरक्षण सम्पर्क व्यक्ति तोक्नु पर्नेः
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| 138 |
+
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| 139 |
+
६ख.१ कार्यालयले कागजात संरक्षण तथा व्यवस्थापनको लागि एकजना कर्मचारीलाई अभिलेख संरक्षण सम्पर्क व्यक्तिको रूपमा तोक्नु पर्नेछ।
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| 140 |
+
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| 141 |
+
���ख.२ उपदफा ६ख.१ बमोजिमको सम्पर्क व्यक्तिले कागजातको संरक्षण तथा व्यवस्थापन गर्ने सम्बन्धी अन्य व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 142 |
+
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| 143 |
+
# ७. राष्ट्रिय अभिलेखालयमा कागजात पटाउन सकिनेः
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| 144 |
+
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| 145 |
+
७.१ कुनै व्यवक्ति, समुदाय वा संघ, संस्थाले आफूसँग रहेको ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक, आर्थिक वा अन्य दृष्टिकोणले राष्ट्रिय महत्वको कुनै कागजात राष्ट्रिय सम्पत्तिको रूपमा सुरक्षित तरिकाले संरक्षण गर्नको लागि राष्ट्रिय अभिलेखालयमा पटाउन सक्नेछ ।
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| 146 |
+
७.२ उपदफा ७.१ बमोजिम राष्ट्रिय अभिलेखालयमा पटाएका कागजात त्यस्तो कागजात पटाउने व्यवक्ति, समुदाय वा संघ, संस्थाले राष्ट्रिय अभिलेखालयबाट फिर्ता लिन पाउने छैन ।
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| 147 |
+
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| 148 |
+
**७क. नेपाल सरकारले खरिद वा स्वीकार गर्न सक्नेः
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| 149 |
+
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| 150 |
+
७क.१ कुनै व्यक्ति वा संस्थाले आफूले सङ्लन गरेको ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, धार्मिक तथा राष्ट्रिय महत्त्वका अभिलेखहरू मूल्य लिई वा नलिई नेपाल सरकारलाई हस्तान्तरण गर्न चाहेमा नेपाल सरकारले त्यस्ता अभिलेख स्वीकार गर्न सक्नेछ।
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| 151 |
+
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+
७क.२ नेपालसँग सम्बन्धित कुनै ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, धार्मिक महत्त्वका अभिलेखहरू कुनै राष्ट्रिय बा अन्तर्राष्ट्रिय संस्था बा स्वदेशी बा विदेशी व्यक्तिसँग रहेकोमा त्यस्ता संस्था बा व्यक्तिले नेपाललाई दिन बा बिकी गर्न चाहेमा राष्ट्रिय अभिलेखालयको सिफारिसमा नेपाल सरकारले त्यस्ता महत्त्वपूर्ण अभिलेखहरू लिन बा खरिद गर्न सक्नेछ।
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| 153 |
+
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| 154 |
+
७क.३ यस ऐनमा अन्यत्र जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि निजी सङलनमा रहेका राष्ट्रिय महत्त्वका कागजातमा कसैले हानि, नोक्सानी पन्याउने भएमा नेपाल सरकारले त्यस्तो कागजात जफत गरी राष्ट्रिय अभिलेखालयमा पठाउन सक्नेछ।
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| 155 |
+
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+
# ८. कागजात व्यवस्थित तथा सुरक्षित तरिकाले राख्नु पर्नेः
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+
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८.१ कार्यालयले आफ्नो कार्यालयमा भएका कागजात व्यवस्थित तरिकाले सुरक्षित रूपमा राख्नु पर्नेछ ।
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८.२ उपदफा ८.१ बमोजिम कागजात व्यवस्थित तरिकाले सुरक्षित रूपमा राख्ने सम्बन्धमा सम्बन्धित कार्यालयले राष्ट्रिय अभिलेखालयसँग आवश्यक परामर्श लिन सक्नेछ ।
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+
८.३ राष्ट्रिय अभिलेखालयले कार्यालयहरूको अभिलेख व्यवस्थापनको सम्बन्धमा अनुगमन तथा निरीक्षण गर्न सक्नेछ।
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| 161 |
+
८.४ उपदफा ८.३ बमोजिम अनुगमन तथा निरीक्षण गर्दा अभिलेखको व्यवस्थापन उचित तरिकाले गरेको नपाइएमा राष्ट्रिय अभिलेखालयले संरक्षण र व्यवस्थापनका लागि आवश्यक निर्देशन दिन सक्नेछ। त्यस्तो निर्देशनको पालना गर्नु सम्बन्धित कार्यालयको कर्तव्य हुनेछ।
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| 162 |
+
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| 163 |
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# ९. निषेधित अभिलेख:
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९.१ देहायका अभिलेखहरू निषेधित अभिलेख मानिनेछन्:-
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९.१.१ सम्बन्धित कार्यालयले अबधि तोकी बा नतोकी तोकिएको व्यक्ति बाहेक अरूले हेर्न, सार्न बा सो को प्रतिलिपि लिन नहुने गरी सुरक्षित तरिकाले राख्नको लागि राष्ट्रिय अभिलेखालयमा पठाउने कागजात,
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| 168 |
+
९.१.२ राष्ट्रिय अभिलेखालयले अबधि तोकी बा नतोकी तोकिएको व्यक्ति बाहेक अरुले हेर्न, सार्न बा सो को प्रतिलिपि दिन नहुने गरी राष्ट्रिय दृष्टिकोणले निषेधित भनी तोकिएको अभिलेखहरू ।
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# १०. अभिलेख हेर्न बा सो को प्रतिलिपि दिन सकिने:
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१०.१ कसैले निषेधित अभिलेख बाहेक अन्य अभिलेख हेर्न चाहेमा राष्ट्रिय अभिलेखालयले तोकिएबमोजिम त्यस्तो अभिलेख हेर्न सक्नेछ ।
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१०.२ कसैले निषेधित अभिलेख बाहेक अन्य अभिलेख सार्न बा सो को प्रतिलिपि लिन चाहेमा राष्ट्रिय अभिलेखालयले तोकिएबमोजिम दस्तूर लिई तोकिएबमोजिम त्यस्तो अभिलेख सार्न बा सो को प्रतिलिपि दिन सक्नेछ ।
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१०.३ उपदफा १०.२ मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि तोकिएको अबस्थामा त्यस्तो अभिलेख बिना दस्तूर सार्न बा सो को प्रतिलिपि दिन सकिनेछ ।
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# ११. अभिलेखामा केरमेट बा थपघट गर्न नहुने:
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११.१ अभिलेखहरू सुरक्षित राख्नु पर्ने दायित्व भएका राष्ट्रिय अभिलेखालयका कर्मचारीले त्यस्ता अभिलेखहरूमा केरमेट गर्न, थपघट गर्न बा उक्त अभिलेख च्यात्न बा कुनै किसिमले नष्ट गर्न हुँदैन ।
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| 181 |
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११.२ अभिलेख हेर्ने, सार्ने बा प्रतिलिपि लिने व्यक्ति बा अन्य कसैले त्यस्तो अभिलेखमा केरमेट गर्न, थपघट गर्न बा उक्त अभिलेख च्यात्न बा कुनै किसिमले नष्ट गर्न हुँदैन ।
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१११क. प्रदेश र स्थानीय तहले अभिलेखको संरक्षण तथा व्यवस्थापन गर्न सक्ने: (१) प्रदेश र स्थानीय तहले आफ्ना अभिलेखहरुको संरक्षण तथा व्यवस्थापन सम्बन्धमा आवश्यक व्यवस्था गर्ने छन् ।
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+
(२) उपदफा (१) बमोजिम अभिलेखहरुको संरक्षण तथा व्यवस्थापन सम्बन्धी व्यवस्था सम्बन्धित प्रदेश र स्थानीय तहको कानूनमा व्यवस्था भए बमोजिम हुनेछ ।
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११ख. स्वीकृति लिनु पर्ने:
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११ख.१ कसैले पनि राष्ट्रिय महत्त्वका कागजात नेपाल बाहिर लैजान पाउने छैन।
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११ख.२ उपदफा ११ख.१ मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि कुनै विश��ष कारणले राष्ट्रिय महत्त्वका कागजातको सकल प्रति केही समयको लागि नेपाल बाहिर लैजानु परेमा सोको कारण खुलाई मन्त्रालयको सिफारिसमा नेपाल सरकार, मन्त्रिपरिषद्वाट स्वीकृति लिनु पर्नेछ।
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| 191 |
+
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११ख.३ उपदफा ११ख.२ बमोजिम राष्ट्रिय महत्त्वका कागजात नेपाल बाहिर लैजाने सम्बन्धी अन्य व्यवस्था नेपाल सरकार, मन्त्रिपरिषद्वाट स्वीकृत भए बमोजिम हुनेछ।
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+
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११ख.४ कसैले यस ऐन बमोजिमको राष्ट्रिय महत्त्वका कागजातको प्रतिलिपि लिन चाहेमा राष्ट्रिय अभिलेखालयले दिन सक्नेछ र त्यस्तो कागजातको प्रतिलिपि दिएको जानकारी मन्त्रालयलाई दिनु पर्नेछ।
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# १२. दण्ड सजाय:
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१२.१ अभिलेख सुरक्षित राख्नु पर्ने दायित्व भएका राष्ट्रिय अभिलेखालयका कर्मचारीले दफा ९, बमोजिमको निषेधित अभिलेख तोकिएको व्यक्ति बाहेक अरुलाई हेर्न, सार्न बा सो को प्रतिलिपि दिएमा त्यस्तो कर्मचारीलाई ऽपचास हजार रुपैयाँसम्म जरीबाना बा तीन बर्षसम्म कैद बा दुबै सजाय हुनेछ ।
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| 199 |
+
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| 200 |
+
१२.२ अभिलेख सुरक्षित राख्नु पर्ने दायित्व भएका राष्ट्रिय अभिलेखालयका कर्मचारीले उपदफा ११.१ को उल्लङ्घन गरी अभिलेखमा केरमेट बा थपघट गरेमा, च्यातेमा बा नष्ट गरेमा त्यस्तो कर्मचारीलाई ऽपचास हजार रुपैयाँसम्म जरीबाना बा दुई बर्षसम्म कैद बा दुबै सजाय हुनेछ ।
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| 201 |
+
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| 202 |
+
१२.३ अभिलेख सुरक्षित राख्नु पर्ने दायित्व भएका राष्ट्रिय अभिलेखालयका कर्मचारी बाहेक अरु कसैले उपदफा ११.२ को उल्लङ्घन गरी अभिलेखमा केरमेट बा थपघट गरेमा, च्यातेमा बा नष्ट गरेमा निजलाई ऽतीस हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना बा तीन बर्षसम्म कैद बा दुबै सजाय हुनेछ ।
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| 203 |
+
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+
१२.४ उपदफा १२.१, १२.२ र १२.३ मा लेखिएदेखि बाहेक यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बिपरीत हुने गरी कसैले कुनै काम गरेमा निजलाई ऽपचास हजार रुपैयाँसम्म जरीबाना हुनेछ ।
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| 205 |
+
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+
१३. अन्य प्रचलित कानून बमोजिम कारबाही हुन सक्ने: कसैले यस ऐन अन्तर्गत कसूर टहरिने काम गरेकोमा त्यस्तो काम अन्य प्रचलित कानून बमोजिम पनि कसूर टहरिने रहेछ भने त्यस्तो कसूरको सम्बन्धमा निजलाई अन्य प्रचलित कानून बमोजिम कारबाही गर्न यस ऐनमा लेखिएको कुनै कुराले बाधा पुन्याएको मानिने छैन ।
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| 207 |
+
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+
१४. सरकार बादी हुने: यो ऐन अन्तर्गतको मुद्दा नेपाल सरकार बादी हुनेछ ।
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| 209 |
+
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+
१४. नियम बनाउने अधिकार: यस ऐनको उद्देश्य कार्यान्वयन गर्न नेपाल सरकारले आवश्यक नियमहरू बनाउन स���्नेछ ।
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| 211 |
+
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+
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+
# अनुसूची (दफा २ को उपदफा २.९ को खण्ड २.९.६ सँग सम्बन्धित) राष्ट्रिय महत्त्वका कागजात
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| 215 |
+
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+
- १. लालमोहर लागेको कागजात,
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| 217 |
+
- २. तत्काल कायम रहेको राष्ट्रप्रमुखको हैसियतमा काम गर्ने पदाधिकारीबाट हस्ताक्षर भएको कागजात,
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| 218 |
+
- ३. नेपालको राजनीतिक परिवर्तन सम्बन्धी भए, गरेका निर्णय, सम्झौता आदिका सक्कल प्रति,
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| 219 |
+
- ४. नेपालको संविधान र संविधान निर्माण सम्बन्धी दस्ताबेजका सक्कल प्रति,
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| 220 |
+
- ५. सङ्घीय संसदले पारित गरी प्रमाणीकरण भएका विधेयकका सक्कल प्रति,
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| 221 |
+
- ६. नेपाल सरकार, मन्त्रिपरिषद्को निर्णयको मूल प्रति,
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| 222 |
+
- ७. विदेशी राष्ट्र, अन्तर्राष्ट्रिय संघ, संस्था वा अन्य विदेशी संघ, संस्थासँग भएको सन्धि, सम्झौता र तत्सम्बन्धी लेखापढी भएका महत्त्वपूर्ण कागजात,
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| 223 |
+
- ८. नेपालको समय-समयको नक्सा,
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+
- ९. देशको सिमाना सम्बन्धी लेखापढी भएका कागजात,
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| 225 |
+
- १०. नेपाल र विदेशी राष्ट्रका प्रतिनिधिहरूको संयुक्त विज्ञिास,
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| 226 |
+
- ११. सम्बन्धित मन्त्रालयमा रहने मन्त्रिपरिषद्को निर्णयको मूल प्रति,
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| 227 |
+
- १२. देशको शान्ति-सुरक्षा सम्बन्धी महत्त्वपूर्ण कागजात,
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| 228 |
+
- १३. अमुद्रित ऐन, सवाल, सनद, खड्गनिसाना,
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| 229 |
+
- १४. चल वा अचल सम्पत्तिका हकदैया दर्शाउने कागजात,
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| 230 |
+
- १५. संघीय संसदका सदस्यको वैयक्तिक विवरण,
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| 231 |
+
- १६. नापी नक्साको कागजात,
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| 232 |
+
- १७. कर्मचारीको सिटरोल,
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| 233 |
+
- १८. नेपाल सरकार बादी वा प्रतिबादी भएको वा नेपाल सरकारलाई सरोकार भएको मुद्दामा अधिकारप्राप्त अड्डा वा अदालतबाट भएको अन्तिम फैसला वा आदेश,
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| 234 |
+
- १९. नागरिकता र नागरिकहरूको मुद्दा सम्बन्धी विषयमा विदेशी राष्ट्रसँग भएको लेखापढीका कागजात,
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| 235 |
+
- २०. विभिन्न आयोगका प्रतिवेदन,
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| 236 |
+
- २१. देशको ऐतिहासिक, सामाजिक, धार्मिक र सांस्कृतिक महत्त्वका हस्तलिखित ग्रन्थ तथा अभिलेख, बा
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| 237 |
+
- २२. कार्यालय प्रमुखले उचित सम्झेका अन्य कागजात।
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section_16_pdf_4.txt
ADDED
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@@ -0,0 +1,230 @@
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| 1 |
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**मानव बेचबिखन तथा ओसारपसार (नियन्त्रण) ऐन, २०६४**
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| 2 |
+
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| 3 |
+
---
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| 4 |
+
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| 5 |
+
### प्रमाणीकरण र प्रकाशन मिति
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| 6 |
+
२०६४।०४।१
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| 7 |
+
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| 8 |
+
---
|
| 9 |
+
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| 10 |
+
### संशोधन गर्ने ऐन
|
| 11 |
+
1. लैहिक समानता कायम गर्न तथा लैहिक हिसा अन्त्य गर्न केही नेपाल ऐनलाई संशोधन गर्ने ऐन, २०७२
|
| 12 |
+
२०७२।०६।१४
|
| 13 |
+
2. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७२
|
| 14 |
+
२०७२।११।१३
|
| 15 |
+
3. केही नेपाल कानूनलाई संशोधन, एकीकरण, समायोजन र खारेज गर्ने ऐन, २०७४
|
| 16 |
+
२०७४।०६।३०
|
| 17 |
+
4. नेपालको संविधान अनुकूल बनाउन केही नेपाल ऐनलाई संशोधन गर्ने ऐन, २०७४
|
| 18 |
+
२०७४।११।१९
|
| 19 |
+
5. मुलुकी संहिता सम्बन्धी केही नेपाल ऐनलाई संशोधन गर्ने ऐन, २०७४
|
| 20 |
+
२०७६।०१।०२
|
| 21 |
+
6. सम्पत्ति शुद्धीकरण (मनी लाउण्डरिङ्ग) निवारण तथा व्यावसायिक बातावरण प्रवर्द्धन सम्बन्धी केही ऐनलाई संशोधन गर्ने ऐन, २०६०
|
| 22 |
+
२०६०।१२।३०
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| 23 |
+
|
| 24 |
+
---
|
| 25 |
+
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| 26 |
+
### प्रस्तावना
|
| 27 |
+
व्यवस्थापिका-संसदले बनाएको २०६४ सालको ऐन न. ४
|
| 28 |
+
मानव बेचबिखन तथा ओसारपसार नियन्त्रण गर्ने सम्बन्धमा व्यवस्था गर्न बनेको ऐन
|
| 29 |
+
प्रस्तावना: मानव बेचबिखन तथा ओसारपसार गर्ने कार्यलाई नियन्त्रण गर्न र त्यस्तो कार्यबाट पीडित व्यक्तिको संरक्षण तथा पुनर्स्थापना गर्ने सम्बन्धमा कानूनी व्यवस्था गर्न बाज्छुनीय भएकोले, व्यवस्थापिका-संसदले यो ऐन बनाएको छ।
|
| 30 |
+
|
| 31 |
+
---
|
| 32 |
+
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| 33 |
+
### परिच्छेद-१: प्रारम्भिक
|
| 34 |
+
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| 35 |
+
**१. संक्षिप्त नाम, विस्तार र प्रारम्भः**
|
| 36 |
+
(१) यस ऐनको नाम "मानव बेचविखन तथा ओसारपसार (नियन्त्रण) ऐन, २०६४" रहेको छ।
|
| 37 |
+
(२) यो ऐन तुरुन्त प्रारम्भ हुनेछ।
|
| 38 |
+
(३) यो ऐन नेपालभर लागु हुनेछ र नेपालवाहिर बसी नेपाली नागरिक विरुद्ध यस ऐन बमोजिमको कसूर गर्ने जुनसुकै व्यक्तिको हकमा समेत लागू हुनेछ।
|
| 39 |
+
|
| 40 |
+
**२. परिभाषाः**
|
| 41 |
+
बिषय वा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
|
| 42 |
+
(क) "कसूर" भन्नाले दफा ३ बमोजिमको कार्य सम्झनु पर्छ।
|
| 43 |
+
(ख) "केन्द्र" भन्नाले दफा १३ बमोजिम स्थापित पुनर्स्थापना केन्द्र सम्झनु पर्दछ।
|
| 44 |
+
(ग) "पीडित" भन्नाले बेचिएको, ओसारपसार गरिएको वा बेश्यावृत्तिमा लगाइएकोे व्यक्ति सम्झनु पर्छ।
|
| 45 |
+
(घ) "बालबालिका" भन्नाले अटार वर्ष उमेर पूरा नभएको व्यक्ति सम्झनु पर्छ।
|
| 46 |
+
(ङ) "शोषण" भन्नाले दास तुल्याउने, बाँधा बनाउने कार्य सम्झनु पर्छ र सो शब्दले प्रचलित कानून बमोजिम बाहेक मानिसको अङ्ग झिक्ने कार्य समेतलाई जनाउँछ।
|
| 47 |
+
(च) "तोकिएको" वा "तोकिए बमोजिम" भन्नाले यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा तोकिएको वा तोकिए बमोजिम सम्झनु पर्छ।
|
| 48 |
+
|
| 49 |
+
---
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| 50 |
+
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| 51 |
+
### परिच्छेद-२: कसूर र अनुसन���धान सम्बन्धी व्यवस्था
|
| 52 |
+
|
| 53 |
+
**३. मानव बेचविखन र ओसारपसार गर्न नहुने:**
|
| 54 |
+
(१) कसैले पनि मानव बेचविखन र ओसारपसार गर्नु गराउनु हुँदैन।
|
| 55 |
+
(२) कसैले उपदफा (१) बमोजिमको कार्य गरेमा यस ऐन बमोजिमको कसूर गरेको मानिनेछ।
|
| 56 |
+
|
| 57 |
+
**४. मानव बेचविखन र ओसारपसार गरेको मानिने:**
|
| 58 |
+
(१) कसैले देहायको कुनै कार्य गरेमा मानव बेचविखन गरेको मानिनेछ:-
|
| 59 |
+
(क) कुनै पनि उद्देश्यले मानिस बेच्ने बा किन्ने,
|
| 60 |
+
(ख) कुनै प्रकारको फाइदा लिई बा नलिई बेश्यावृत्तिमा लगाउने,
|
| 61 |
+
(ग) प्रचलित कानून बमोजिम बाहेक मानिसको अङ्ग झिक्ने,
|
| 62 |
+
(घ) बेश्यागमन गर्ने।
|
| 63 |
+
(२) कसैले देहायको कुनै कार्य गरेमा मानव ओसारपसार गरेको मानिनेछ:-
|
| 64 |
+
(क) किन्ने बा बेच्ने उद्देश्यले मानिसलाई विदेशमा लैजाने,
|
| 65 |
+
(ख) बेश्यावृत्तिमा लगाउने बा शोषण गर्ने उद्देश्यले कुनै प्रकारले ललाई फकाई, प्रलोभनमा पारी, झुक्याई, जालसाज गरी, प्रपज मिलाई, जबर्जस्ती गरी, करकापमा पारी, अपहरण गरी, शरीर बन्धक राखी, नाजुक स्थितिको फाइदा लिई, बेहोस पारी, पद बा शक्तिको दुरुपयोग गरी, अभिभावक बा संरक्षकलाई प्रलोभनमा पारी, डर, त्रास, धाक, धम्की दिई बा करकापमा पारी कसैलाई बसिरहेको घर, स्थान बा व्यक्तिबाट छुटाई लग्ने बा आफूसँग राखे बा आफ्नो नियन्त्रणमा लिने बा कुनै स्थानमा राख्ने बा नेपालभित्रको एक टाउँबाट अर्को टाउँमा बा विदेशमा लैजाने बा अरु कसैलाई दिने।
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| 66 |
+
(ग) प्रत्यक्ष बा अप्रत्यक्ष रूपमा कुनै गैरकानूनी लाभ बा अन्य फाइदा लिने उद्देश्यले बदनियतपूर्वक कुनै नेपाली नागरिक, विदेशी बा आप्रवासी व्यक्तिलाई नकली बा झुट्टा कागजात बनाई बा झुक्याई विदेश लैजाने बा त्यस्तो व्यक्तिको आफ्नो मुलुक बा निज रहको स्थान बाहेक अन्य मुलुकमा गैरकानूनी रूपमा प्रवेश गराउने मानव तस्करी सम्बन्धी कार्य गरे बा गराएमा।
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| 67 |
+
(घ) किन्ने बा बेच्ने उद्देश्यले कसैलाई नेपालको मार्ग प्रयोग गरी अर्को मुलुकमा पटाउने बा कुनै मुलुकमा पटाउने उद्देश्यको लागि नेपाल ल्याउने।
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| 68 |
+
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| 69 |
+
**५. उजुर गर्ने:**
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| 70 |
+
(१) दफा ३ बमोजिमको कसूर गरेको, गरिरहेको बा गर्न लागेको थाहा पाउने जुनसुकै व्यक्तिले नजिकको प्रहरी कार्यालयमा उजुर गर्न सक्नेछ।
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| 71 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम उजुर गर्ने व्यक्तिले आफ्नो नाम गोप्य राखिदिन लिखित अनुरोध गरेमा उजुर दर्ता गर्ने प्रहरी कार्यालयले निजको नाम गोप्य राख्नु पर्नेछ।
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| 72 |
+
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| 73 |
+
**६. बयान प्रमाणित गराउने:**
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| 74 |
+
(१) दफा ४ बमोजिमको उजुर पीडित आफैले दिएमा प्रहरी कार्यालयले निजको तत्काल बयान गराई त्यस्तो बयान प्रमाणित गराउनको लागि निजलाई तुरुन्त नजिकको जिल्ला अदालतमा उपस्थित गराउनु पर्नेछ।
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| 75 |
+
(२) प्रहरी कार्यालयले उपदफा (१) बमोजिम बयान प्रमाणित गराउन ल्याएमा प्रचलित कानूनमा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि र सो बयानसँग सम्बन्धित कसूरको मुद्दा सो जिल्ला अदालतको क्षेत्राधिकारभित्र नपर्ने भए पनि त्यस्तो जिल्ला अदालतको न्यायाधीशले त्यस्तो बयान निजलाई पढी बाँची सुनाई निजले भने बमोजिम लेखिएको भए सोही ब्यहोरा र भने बमोजिम नभएमा के कति फरक छ सो ब्यहोरा उल्लेख गरी प्रमाणित गरिदिनु पर्नेछ।
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| 76 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम बयान प्रमाणित गरिएकोमा त्यस्तो पीडित मुद्दाको कारबाहीको सिलसिलामा अदालतमा उपस्थित नभए पनि त्यसरी प्रमाणित गरिएको बयान अदालतले प्रमाणमा लिन सक्नेछ।
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| 77 |
+
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| 78 |
+
**७. पकाउ गर्न बा खानतलासी लिन सकिने:**
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| 79 |
+
(१) यस ऐन अन्तर्गत कसूर मानिने कुनै कार्य कुनै घर, जग्गा, स्थान बा सबारी साधनमा भएको बा भइरहेको बा हुन लागेको जानकारी पाई तुरुन्त कारबाही नगरेमा कसूरदार भाग्ने उम्कने बा त्यस्तो कसूरसँग सम्बन्धित कुनै प्रमाण लोप बा नष्ट हुने सम्भावना देखिएमा प्रचलित कानूनमा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि कम्तीमा प्रहरी सहायक निरीक्षक स्तरको प्रहरी कर्मचारीले पर्चा खडा गरी जुनसुकै बखत देहायको कार्य गर्न सक्नेछ:-
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| 80 |
+
(क) त्यस्तो घर, जग्गा, स्थान बा सबारी साधनमा प्रवेश गर्न, खानतलासी लिन बा आफ्नो कब्जामा राख्न,
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| 81 |
+
(ख) त्यस्तो कार्य गर्न लाग्दा कसैले बाधा विरोध गरेमा आवश्यकता अनुसार झ्याल, ढोका खोली बा फोरी आवश्यक कारबाही गर्न,
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| 82 |
+
(ग) त्यस्तो कार्य गर्ने ब्यक्तिलाई बिना पकाउ पूर्जी गिरफ्तार गर्न बा निजको खानतलासी लिन,
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| 83 |
+
(घ) त्यस्तो घर, जग्गा, स्थान बा सबारी साधनमा भेटिएका सबै दसी, प्रमाण बरामद गर्न बा कब्जामा लिन।
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| 84 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको कार्य गर्दा त्यस्तो प्रहरी कर्मचारीले सम्भव भएसम्म "स्थानीय तहका प्रतिनिधि समेत र सम्भव नभए त्यस समयमा उपस्थित ब्यक्तिहरुको रोहबरमा गर्नु पर्नेछ र सोको मुचुल्का तयार गरी सोको प्रतिलिपि सम्बन्धित घर, जग्गा बा सबारी साधन धनीलाई दिनु पर्नेछ।
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| 85 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम कुनै व्यक्तिलाई पक्राउ पूर्जी बिना पक्राउ गरिएकोमा पक्राउ परेको व्यक्ति सहित त्यस्तो पक्राउको स्वीकृतिको लागि मुद्दा हेर्ने अधिकारी समक्ष पेश गर्नु पर्नेछ।
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| 86 |
+
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| 87 |
+
**८. अभियुक्तलाई धुनामा राखी कारबाही गर्नु पर्ने:**
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| 88 |
+
प्रचलित कानूनमा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि दफा ४ को उपदफा (१) को खण्ड (घ) को कसूरमा बाहेक यस ऐन अन्तर्गत अन्य कसूर सम्बन्धि मुद्दामा कारबाही गर्दा तत्काल प्राप्त प्रमाणबाट अभियुक्तले कसूर गरेको हो भन्ने विश्वास गर्ने मनासिब आधार भएमा अदालतले अभियुक्तलाई धुनामा राखी कारबाही गर्नु पर्नेछ।
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| 89 |
+
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| 90 |
+
**९. प्रमाणको भार:**
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| 91 |
+
प्रचलित कानूनमा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि कुनै व्यक्तिलाई यस ऐन अन्तर्गतको कसूर गरेको अभियोग लागेकोमा सो कसूर आफूले गरेको छैन भन्ने कुराको प्रमाण निजले नै पुन्याउनु पर्नेछ।
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| 92 |
+
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| 93 |
+
**१०. कानून व्यवसायी राख्न सक्ने:**
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| 94 |
+
यस ऐन अन्तर्गतको कसूर सम्बन्धी मुद्दाको कारबाहीको सिलसिलामा पीडितले चाहेमा अन्य कानून व्यवसायी राख्न सक्नेछ।
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| 95 |
+
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| 96 |
+
**११. दोभाषे, सांकेतिक भाषा बिज्ञ बा अनुबादक राख्न सक्ने:**
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| 97 |
+
यस ऐन अन्तर्गतको कसूर सम्बन्धी मुदाको काम कारबाहीमा प्रयोग हुने भाषा पीडितले नबुझ्ने भएमा सम्बन्धित अडा अदालतको अनुमति लिई निजले दोभाषे, सांकेतिक भाषा बिज्ञ बा अनुबादक राख्न सक्नेछ।
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| 98 |
+
त्यसरी दोभाषे, सांकेतिक भाषा बिज्ञ बा अनुबादक राख्दा लागेको रकम मध्ये तोकिए बमोजिमको रकम सम्बन्धित व्यक्तिको अनुरोधमा नेपाल सरकारले व्यहोर्नेछ।
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| 99 |
+
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| 100 |
+
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| 101 |
+
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| 102 |
+
### परिच्छेद-३: उद्धार, पुनर्स्थापना तथा पुनर्मिलन सम्बन्धी व्यवस्था
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| 103 |
+
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| 104 |
+
**१२. उद्धार सम्बन्धी कार्य:**
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| 105 |
+
कुनै नेपाली नागरिक विदेशमा बेचिएको रहेछ भने निजको उद्धार गर्ने व्यवस्था नेपाल सरकारले गर्नेछ।
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| 106 |
+
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| 107 |
+
**१२क. पारस्परिक कानूनी सहायता आदन प्रदान गर्न आवश्यक व्यवस्था गर्न सक्ने:**
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| 108 |
+
दफा १२ बमोजिम उद्धार गर्दा बा विदेशी मुलुकमा रहेको यस ऐन अन्तर्गत सजाय हुने कसूर सम्बन्धी मुदाको न्यायिक कारबाहीमा नेपाल सरकारले प्रचलित कानून बमोजिम पारस्परिक कानूनी सहायता प्राप्त गर्नको लागि आवश्यक व्यवस्था गर्न सक्नेछ।
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| 109 |
+
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| 110 |
+
**१३. पुनस्थापना केन्द्र:**
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| 111 |
+
(१) पीडितलाई शारीरिक बा मानसिक उपचार गराउन, सामाजिक रुपमा पुनर्स्थापना गर्न र पारिबारिक पुनर्मिलन गराउनको लागि नेपाल सरकारले आवश्यकता अनुसार पुनर्स्थापना केन्द्र स्थापना गर्नेछ।
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| 112 |
+
(१क) नेपाल सरकारसँग समन्वय गरी प्रदेश सरकार तथा स्थानीय तहले आवश्यकता अनुसार पुनर्स्थापना केन्द्र स���थापना गर्न सक्नेछ।
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| 113 |
+
(१ख) नेपाल सरकारले स्थापना गरेका पुनर्स्थापना केन्द्रलाई प्रदेश सरकार बा स्थानीय तहले सञ्चालन गर्न चाहेमा नेपाल सरकारले त्यस्ता केन्द्र प्रदेश सरकार बा स्थानीय तहले सञ्चालन गर्ने गरी हस्तान्तरण गर्न सक्नेछ।
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| 114 |
+
(२) कुनै संस्थाले तोकिए बमोजिम स्वीकृति लिई उपदफा (१) को उद्देश्यको लागि पुनर्स्थापना केन्द्र स्थापना र सञ्चालन गर्न सक्नेछ र नेपाल सरकारले त्यस्तो संस्था तथा संस्थाद्वारा स्थापित पुनर्स्थापना केन्द्रको नियमित र प्रभावकारी अनुगमन गर्नेछ।
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| 115 |
+
(२क) उपदफा (१क) र (१ख) बमोजिम प्रदेश सरकार बा स्थानीय तहले स्थापना र सञ्चालन गरेको केन्द्रको अनुगमन सम्बन्धित प्रदेश सरकार बा स्थानीय तहले गर्नेछ।
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| 116 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम सञ्चालन भएको केन्द्रलाई नेपाल सरकारले तोकिदिए बमोजिम आर्थिक तथा अन्य सहयोग प्रदान गर्न सक्नेछ।
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| 117 |
+
(४) केन्द्रमा रहेको व्यक्तिलाई सामाजिक रुपमा पुनर्स्थापना र पारिबारिक पुनर्मिलन गराउने व्यवस्था केन्द्रले गर्नेछ।
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| 118 |
+
(५) केन्द्रले पीडितलाई आवश्यकता अनुसार औषधि उपचार र परामर्श सेवा तथा सुबिधाको व्यवस्था गर्नु पर्नेछ।
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| 119 |
+
(६) केन्द्रमा रहेका पीडितलाई निजको इच्छा विपरीत कसैले कुनै काममा लगाउन हुँदैन।
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| 120 |
+
(७) केन्द्रको व्यवस्थापन, सञ्चालन मापदण्ड, अनुगमन, पीडितको लागि सीपमूलक तालिम तथा रोजगारी, पुनर्स्थापना, पारिबारिक पुनर्मिलन सम्बन्धी व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 121 |
+
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| 122 |
+
**१४. पुनर्स्थापना कोष:**
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| 123 |
+
(१) दफा १३ को उपदफा (१) बमोजिम स्थापना भएका पुनर्स्थापना केन्द्र सञ्चालन गर्न गराउनको लागि नेपाल सरकारले एक पुनर्स्थापना कोष स्थापना गर्नेछ।
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| 124 |
+
(१क) दफा १३ को उपदफा (१क) र (१ख) बमोजिम स्थापना तथा हस्तान्तरण भएका पुनर्स्थापना केन्द्रको व्यवस्थापन तथा सञ्चालन गर्न चाहने प्रदेश सरकारले आफ्नो श्रोतबाट व्यवस्था गर्ने गरी प्रदेश कानून बमोजिम र स्थानीय तहले आफ्नो श्रोतबाट व्यवस्था गर्ने गरी स्थानीय कानून बमोजिम पुनर्स्थापना कोष स्थापना गर्न सक्नेछन्।
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| 125 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको कोषमा देहाय बमोजिमका रकम रहनेछन्:-
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| 126 |
+
(क) नेपाल सरकारबाट प्राप्त रकम,
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| 127 |
+
(ख) कुनै स्वदेशी बा विदेशी संघ, संस्था बा व्यक्तिबाट प्राप्त रकम,
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| 128 |
+
(ग) दफा १४ बमोजिम भएको जरिबाना बापत प्राप्त हुने रकमको आधा रकम।
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| 129 |
+
(३) पुनर्स्थापन कोषको व्यवस्थापन र सञ्चालन तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 130 |
+
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| 131 |
+
---
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| 132 |
+
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| 133 |
+
### परिच्छेद-४: दण्ड सजाय तथा क्षतिपूर्ति सम्बन्धी व्यवस्था
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| 134 |
+
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| 135 |
+
**१५. दण्ड सजाय:**
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| 136 |
+
(१) दफा ३ बमोजिमको कसूर गर्ने व्यक्तिलाई देहाय बमोजिम सजाय हुनेछ:-
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| 137 |
+
(क) मानिस किन्ने बा बेच्नेलाई बीस बर्ष कैद र दुई लाख रुपैयाँ जरिबाना,
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| 138 |
+
(ख) कुनै प्रकारको फाइदा लिई बा नलिई बेश्यावृत्तिमा लगाउनेलाई कसूरको मात्रा अनुसार दश बर्षदेखि पन्थ्र वर्षसम्म कैद र पचास हजार रुपैयाँदेखि एक लाख रुपैयाँसम्म जरिबाना,
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| 139 |
+
(ग) प्रचलित कानून बमोजिम बाहेक मानिसको कुनै अङ्ग झिक्नेलाई दश बर्ष कैद र दुई लाख रुपैयाँदेखि पाँच लाख रुपैयाँसम्म जरिबाना,
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| 140 |
+
(घ) बेश्यागमन गर्नेलाई एक महिनादेखि तीन महिनासम्म कैद र दुई हजार रुपैयाँदेखि पाँच हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना।
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| 141 |
+
(ड) किन्न, बेच्न बा बेश्यावृत्तिमा लगाउने उद्देश्यले मानिसलाई,
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| 142 |
+
(१) विदेश लैजानेलाई दश बर्षदेखि पन्थ्र बर्षसम्म कैद र पचास हजार रुपैयाँदेखि एक लाख रुपैयाँसम्म जरिबाना र बालबालिका लगेको भए पन्थ्र बर्षदेखि बीस बर्षसम्म कैद र एक लाख रुपैयाँदेखि दुईलाख रुपैयाँसम्म जरिबाना,
|
| 143 |
+
(२) नेपालभित्रको एक टाउँबाट अर्को टाउँमा लैजानेलाई दश बर्ष कैद र पचास हजार रुपैयाँदेखि एक लाख रुपैयाँसम्म जरिबाना र बालबालिका लगेको भए दश बर्षदेखि बाह्र बर्षसम्म कैद र एक लाख रुपैयाँ जरिबाना।
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| 144 |
+
(च) शोषण गर्ने उद्देश्यले दफा ४ को उपदफा (२) को खण्ड (ख) बमोजिम नेपालभित्रको एक टाउँबाट अर्को टाउँमा लैजानेलाई एक बर्षदेखि दुई बर्षसम्म कैद र विदेश लगेको भए दुई बर्षदेखि पाँच बर्षसम्म कैद,
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| 145 |
+
(छ) खण्ड (ङ) र (च) मा लेखिएदेखि बाहेक दफा ४ को उपदफा (२) को खण्ड (ख) बा खण्ड (ग) बमोजिमको कसूर गर्नेलाई सात बर्षदेखि दश बर्षसम्म कैद,
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| 146 |
+
(ज) मानव बेचबिखन बा ओसारपसारको कसूर गर्न दुरुत्साहन, षडघन्त्र बा उद्योग गर्नेलाई बा सो कसूरको मतियारलाई सो कसूर गर्दा हुने सजायको आधा सजाय।
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| 147 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि देहायका कुराका हकमा देहाय बमोजिम हुनेछ:-
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| 148 |
+
(क) किन्ने बा बेच्ने व्यक्ति र कुनै प्रकारको फाइदा लिई बा नलिई बेश्यावृत्तिमा लगाउने व्यक्ति एउटै भएमा निजलाई किने बा बेचे बापत र कुनै प्रकारको फाइदा लिई बा नलिई बेश्यावृत्तिमा लगाए बापत छुट्टाछुट्टै सजाय,
|
| 149 |
+
(ख) किन्ने बा बेच्ने बा कुनै प्रकारको फाइदा लिई बा नलिई बेश्यावृत्तिमा लगाउने र दफा ४ को उपदफा (२) को खण्ड (ख) बमोजिमको कसूर गर्ने व्यक्ति एउटै भएमा निजलाई किने बा बेचे बापत र त्यस्तो कसूर गरे बापत छुट्टाछुट्टै सजाय,
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| 150 |
+
(ग) खण्ड (ख) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि दफा ४ को उपदफा (२) को खण्ड (ख) बमोजिम छुटाइ लैजाने र किन्ने, बेच्ने बा कुनै प्रकारको फाइदा लिई बा नलिई बेश्यावृत्तिमा लगाउने उद्देश्यले विदेश बा नेपालभित्रको एक टाउँबाट अर्को टाउँमा लैजाने व्यत्कि एउटै भएमा त्यसरी छुटाइ लगेको र विदेश बा नेपालभित्रको एक टाउँबाट अर्को टाउँमा लगे बापत छुट्टाछुट्टै सजाय।
|
| 151 |
+
(३) दफा ३ बमोजिमको कसूर कुनै सार्वजनिक पद धारण गरेको व्यत्किले गरेको भएमा निजलाई सो कसूर गरे बापत हुने सजायको अतिरिक्त सो सजायको पच्चीस प्रतिशत थप सजाय हुनेछ।
|
| 152 |
+
(४) कसैले दफा ३ बमोजिमको कसूर आफ्नो संरक्षणमा बा अभिभाबकत्वमा रहेको बा प्रचलित कानून बमोजिम हाड्नाता करणीको कसूरमा सजाय हुने व्यत्किका सम्बन्धमा गरेको रहेछ भने निजलाई यस ऐनमा लेखिएको सजायको अतिरिक्त सो सजायको दश प्रतिशत थप सजाय हुनेछ।
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| 153 |
+
(५) कसैले दफा ३ बमोजिमको कसूर पुनः गरेमा प्रत्येक पटक कसूर गरे बापत सो कसूर गरेमा हुने सजायको एक चौथाई थप सजाय हुनेछ।
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| 154 |
+
(६) दफा ४ बमोजिम उजुर गर्ने व्यत्तिले आपूmले एकपटक दिएको बयान बिपरीत हुने गरी मुद्दाको पुर्पक्षको सिलसिलामा कुनै बयान दिएमा, पहिले आफूले दिएको बयान बा सूचनाका आधारमा कसैका विरुद्ध कारबाही चलिसकेपछि सो सम्बन्धी तथ्य ढटिमा, नियतबस बयान परिवर्तन गरेमा, अदालतले बोलाएको समयमा उपस्थित नभएमा बा अदालतलाई सहयोग नगरेमा निजलाई तीन महिनादेखि एक बर्षसम्म कैद हुनेछ।
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| 155 |
+
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| 156 |
+
**१६. सजाय नहुने:**
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| 157 |
+
आफूलाई किन्न, बेच्न बा बेश्यावृत्तिमा लगाउन लागेको बा लगेको बा किनेको बा बेचेको बा बेश्यावृत्तिमा लगाएको थाहा पाई बा बिखास गर्नु पर्ने मनासिब आधार भई निजले कुनै टाउँबाट उम्कन, भाग्न मद्दत खोज्दा कसैले बाधा बिरोध गरेमा, रोकेमा, पकेमा, जोर जुलुम गरेमा, ज्यान लिन लागेमा बा जबरजस्ती करणी गर्न खोजेकोमा बल प्रयोग गरेरे त्यस्तो बाधा, बिरोध बा जोर जुलुमबाट बा पक्राउबाट माग्न, उम्कन, ज्याउन जोगाउन बा आफूलाई जबरजस्ती करणीबाट बचाउन नसक्ने कुरामा बिश्वस्त भई निजले कुनै कार्य गर्दा त्यस्तो बाधा विरोध गर्ने, पकने बा जोरजुलुम गर्ने, ज्यान लिन खोज्ने बा जबरजस्ती करणी गर्न खोज्ने व्यत्तिको ज्यान गएमा बा निजलाई कुनै प्रकारको चोट���टक लाग्न गएमा प्रचलित कानूनमा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि त्यस्तो व्यत्तिलाई कुनै प्रकारको सजाय हुने छैन।
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| 158 |
+
|
| 159 |
+
**१७. क्षतिपूर्तिः**
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| 160 |
+
(१) अदालतले कसूरदारलाई भएको जरिबानाको पचास प्रतिशत बराबरको रकममा नघट्ने गरी निजबाट पीडितलाई मनासिब माफिकको क्षतिपूर्ति भराइदिनु पर्नेछ।
|
| 161 |
+
(१क) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि कसूरदारको न्यून आर्थिक हैसियत भएको बा अन्य कुनै कारणले कसूरदारबाट पीडितले क्षतिपूर्ति पाउन नसक्ने अबस्था देखिएमा प्रचलित कानून बमोजिम स्थापित पीडित राहत कोषबाट पीडितलाई मनासिब क्षतिपूर्ति भराई दिने आदेश गर्न सक्नेछ।
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| 162 |
+
(२) उपदफा (१) बा (१क) बमोजिमको क्षतिपूर्तिको रकम लिन नपाउँदै पीडितको मृत्यु भएमा त्यस्तो रकम तोकिए बमोजिम निजको नाबालक छोराछोरीलाई र त्यस्ता छोराछोरी नभए निजमा आबित बाबुआमालाई दिइनेछ।
|
| 163 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम क्षतिपूर्तिको रकम पाउने पीडितको नाबालक छोराछोरी र आबित बाबुआमा नभएमा त्यस्तो रकम दफा १४ बमोजिमको पुनस्र्थापन कोषमा जम्मा गर्नु पर्नेछ।
|
| 164 |
+
|
| 165 |
+
---
|
| 166 |
+
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| 167 |
+
### परिच्छेद-५: विविध
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| 168 |
+
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| 169 |
+
**१८. सम्पत्ति जफत हुने:**
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| 170 |
+
(१) कसैले यस ऐन अन्तर्गतको कसूरबाट कुनै चल-अचल सम्पत्ति प्राप्त गरेको रहेछ भने त्यस्तो सबै सम्पत्ति जफत हुनेछ।
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| 171 |
+
(२) कसैले यस ऐन अन्तर्गतको कसूर मानिने कार्य गर्न बा गराउनको लागि आफ्नो घर, जग्गा बा सबारी साधन जानी-जानी प्रयोग गरेको बा प्रयोग गर्न दिएको प्रमाणित भएमा त्यस्तो घर, जग्गा बा सबारी साधन जफत हुनेछ।
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| 172 |
+
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| 173 |
+
**१९. पुरस्कार:**
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| 174 |
+
(१) यस ऐन अन्तर्गत कसूर मानिने कुनै कार्य गरेको बा गर्न लागेको छ भन्ने कुराको सूचना कसैले दिएको आधारमा कसैलाई उद्धार गरिएमा बा त्यस्तो कार्यमा संलग्न व्यक्ति पक्राउ परेमा त्यस्तो सूचना दिने व्यक्तिलाई दफा १४ बमोजिम भएको जरिबानाको दश प्रतिशत बराबरको रकम पुरस्कार स्वरुप दफा १४ बमोजिमको पुनस्थापन कोषबाट प्रदान गरिनेछ।
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| 175 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम सूचना दिने व्यक्ति एक जनाभन्दा बढी भएमा निजहरुलाई त्यस्तो रकम दामासाहीको दरले दिइनेछ।
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| 176 |
+
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| 177 |
+
**२०. सुराकीको बिबरण गोप्य राख्नु पर्ने:**
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| 178 |
+
दफा १९ को उपदफा (१) बमोजिम सूचना दिने सुराकीको नाम,टेगाना र निजबाट प्राप्त सुचनाको बिबरण गोप्य राख्नु पर्नेछ।
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| 179 |
+
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| 180 |
+
**२१. सजायको माग दाबीमा छुट:**
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| 181 |
+
(१) यस ऐन बमोजिमको कसूर गरेको भनी अभियोग लागेको कुनै अभियुक्तले आफूले गरेको कसूर स्वीकार ग���ी सो कसूरका सम्बन्धमा प्रमाण जुटाउन, अन्य अभियुक्त बा त्यसको गिरोह बा मतियारलाई पक्राउ गर्न प्रहरी, सरकारी बकिल बा अदालतलाई सघाउ पुए्याएको र निजले पहिलो पटक कसूर गरेको रहेछ भने त्यस्तो कसूरमा अदालतले सजाय तोक्दा निजलाई हुने सजायको बढीमा पच्चीस प्रतिशतसम्म सजाय छुट दिन सक्नेछ।
|
| 182 |
+
तर, निजले गरेको सहयोग अन्य सबुद प्रमाणबाट प्रमाणित नभएमा बा निजले प्रहरी बा सरकारी बकिललाई गरेको सहयोग प्रतिकूल हुने गरी अदालत समक्ष बयान दिएमा यस ऐन बा प्रचलित कानूनमा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि निज उपर पुनः मुद्दा दायर गर्न सकिनेछ।
|
| 183 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि देहायका अबस्थामा यस दफा बमोजिम सजायको माग दावीमा छुट दिन सकिने छैन:-
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| 184 |
+
(क) मुख्य अभियुक्तलाई सजायको माग दावी छुट दिन,
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| 185 |
+
(ख) बालबालिका बेचबिखन बा ओसारपसार गरेकोमा,
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| 186 |
+
(ग) एकपटक सजाय छुटको सुविधा पाइसकेको।
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| 187 |
+
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| 188 |
+
**२२. दावी गर्न सक्ने:**
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| 189 |
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यस ऐन बमोजिमको कसूरमा अदालतमा मुद्दा दर्ता गर्दाका बखत सम्बन्धित सरकारी बकिलले अभियुक्तले नैतिक पतन देखिने फौजदारी कसूर गरेको हो भनी दावी लिन सक्नेछ।
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| 190 |
+
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+
**२३. समिति गठन गर्न सक्ने:**
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(१) यस ऐन बमोजिमको कसूर नियन्त्रण गर्ने तथा पीडितलाई पुर्नस्थापना गर्ने सम्बन्धी कार्यमा सरकारी निकाय तथा गैरसरकारी संस्थाबीच समन्वय समेत गर्नका लागि तोकिए बमोजिम नेपाल सरकारले एक राष्ट्रिय समिति र आवश्यकता अनुसार जिल्ला समिति गठन गर्न सक्नेछ।
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| 193 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको समितिको काम, कर्तव्य र अधिकार तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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**२४. बाधा विरोध गर्नेलाई सजाय हुने:**
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| 196 |
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कसैले यस ऐन अन्तर्गतको कसूरको अनुसन्धान तथा तहकिकात सम्बन्धी काम कारबाहीमा बाधा विरोध गरेमा निजलाई दश हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना हुनेछ।
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| 197 |
+
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+
**२५. प्रचार प्रसार गर्न नहुने:**
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(१) कसैले पनि पीडितको स्वीकृति नलिई निजको वास्तविक नाम, तस्वीर बा निजको चरित्रमा प्रतिकूल हुने कुनै बिबरण पत्रपत्रिकामा छाप्न बा अन्य सजार माध्यमबाट प्रचार प्रसार गर्न हुँदैन।
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| 200 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम नाम, तस्वीर, बिबरण छाप्ने बा प्रचार प्रसार गर्ने व्यक्तिलाई दश हजार रुपैयाँदेखि पच्चीस हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना हुनेछ।
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| 201 |
+
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| 202 |
+
**२६. सुरक्षाको व्यवस्थाः**
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| 203 |
+
दफा ४ बमोजिम उजुर गर्ने व्यत्तिले आफूले प्रहरीमा उजुर गरेको कारण बा अड्रा अदालतमा बयान बा साक्षीको रुपमा गरेको बकपत्र बा महिला मानब अधिकारको रक्षाको लागि खटिएका अधिकारकर्मीले पीडितलाई कुनै सहयोग उपलब्ध गराएको आधारमा कुनै प्रतिशोधात्मक कारबाहीमा पर्न सक्ने मनासिब कारण देखाई सुरक्षाको लागि नजिकको प्रहरी कार्यालयमा अनुरोध गरेमा त्यस्तो प्रहरी कार्यालयले निजलाई देहाय बमोजिमको कुनै बा सबै व्यवस्था गरिदिनु पर्नेछ:-
|
| 204 |
+
(क) मुद्दाको कारबाहीको सिलसिलामा अड्रा अदालत आउँदा-जाँदा सुरक्षा दिने,
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| 205 |
+
(ख) निश्चित अबधिसम्म प्रहरी सुरक्षामा राख्ने बा राख्न लगाउने,
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| 206 |
+
(ग) केन्द्रमा राख्ने।
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| 207 |
+
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| 208 |
+
**२६क. साक्षीलाई दैनिक तथा भ्रमण भत्ता दिनु पर्नेः**
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| 209 |
+
(१) यस ऐन अन्तर्गतको मुद्दामा नेपाल सरकारका तर्फबाट अदालतमा उपस्थित भएका साक्षीलाई राजपत्र अनंकित प्रथम श्रेणीका सरकारी कर्मचारीले प्रचलित कानून बमोजिम पाए सरहको दैनिक तथा भ्रमण भत्ता सम्बन्धित सरकारी बकील कार्यालयले उपलब्ध गराउनु पर्नेछ।
|
| 210 |
+
(२) कुनै सरकारी कर्मचारी साक्षी बा विशेषज्ञको हैसियतले उपदफा (१) अन्तर्गतको मुद्दामा अदालतमा उपस्थित भएमा निजलाई प्रचलित कानून बमोजिम निजले पाउने दैनिक तथा भ्रमण भत्ता निज बहाल रहेको कार्यालयले उपलब्ध गराउनु पर्नेछ।
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| 211 |
+
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| 212 |
+
**२७. बन्द इजलासमा कारबाही हुने:**
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| 213 |
+
(१) यस ऐन अन्तर्गतको कसूर सम्बन्धी मुद्दाको कारबाही तथा सुनुबाइ बन्द इजलासमा गरिनेछ।
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| 214 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको बन्द इजलासमा कारबाही तथा सुनुबाइ हुँदा मुद्दाका पक्ष, बिपक्ष, निजहरुका कानून व्यवसायी र अदालतले अनुमति दिएका व्यत्तिमात्र त्यस्तो इजलासमा प्रवेश गर्न सक्नेछन्।
|
| 215 |
+
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| 216 |
+
**२८. सरकार बादी हुने:**
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| 217 |
+
यस ऐन अन्तर्गतको मुद्दा सरकारबादी हुनेछ र सो मुद्दा "मुलुकी फौजदारी कार्यबिधि संहिता, २०७४ को अनुसूची -९ मा समाबेश भएको मानिनेछ।
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| 218 |
+
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| 219 |
+
**२९. नियम बनाउने अधिकार:**
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| 220 |
+
यो ऐनको उद्देश्य कार्यान्वयन गर्न नेपाल सरकारले आवश्यक नियमहरु बनाउन सक्नेछ।
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| 221 |
+
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| 222 |
+
**३०. खारेजी र बचाउ:**
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| 223 |
+
(१) जीउ मास्ने बेच्ने कार्य (नियन्त्रण) ऐन, २०४३ खारेज गरिएको छ।
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| 224 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको ऐन अन्तर्गत भए गरेका काम कारबाहीहरु यसै ऐन बमोजिम भए गरेका मानिनेछन्।
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| 225 |
+
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| 226 |
+
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| 227 |
+
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| 228 |
+
**द्रष्टव्य:**
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| 229 |
+
केही नेपाल कानूनलाई संशोधन, एकीकरण, समायोजन र खारेज गर्ने ऐन, २०७४ द्वारा रुपान्तर भई मुलुकी संहिता सम्बन्धी केही नेपाल ऐनलाई संशोधन गर्ने ऐन, २०७४ द्वारा संशोधित।
|
| 230 |
+
"सरकारी मुद्दा सम्बन्धी ऐन, २०४९," को सट्टा "मुलुकी फौ��दारी कार्यबिधि (संहिता) ऐन, २०७४"।
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| 1 |
+
**महाभियोग (कार्यबिधि नियमित गर्ने) ऐन, २०४९**
|
| 2 |
+
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| 3 |
+
**लालमोहर र प्रकाशन मिति**
|
| 4 |
+
२०४९।०६।१०
|
| 5 |
+
|
| 6 |
+
---
|
| 7 |
+
|
| 8 |
+
### संशोधन गर्ने ऐन
|
| 9 |
+
|
| 10 |
+
### प्रमाणीकरण र प्रकाशन मिति
|
| 11 |
+
|
| 12 |
+
१. *गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानुन संशोधन गर्ने ऐन, २०६६*
|
| 13 |
+
२०६६।१०।०७
|
| 14 |
+
२. *केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७२*
|
| 15 |
+
२०७२।११।१३
|
| 16 |
+
|
| 17 |
+
२०४९ सालको ऐन नं. ११
|
| 18 |
+
|
| 19 |
+
**महाभियोगको कार्यबिधि नियमित गर्ने सम्बन्धमा व्यवस्था गर्न बनेको ऐन**
|
| 20 |
+
|
| 21 |
+
**प्रस्तावना:**
|
| 22 |
+
*नेपालको संविधान अनुसार संबैधानिक निकायमा बहाल रहेका पदाधिकारी उपर महाभियोग सम्बन्धी कारबाही चलाउन सकिने व्यवस्था रहेको र त्यस्तो कारबाहीको कार्यबिधि नियमित गर्ने सम्बन्धमा कानुनी व्यवस्था गर्न बाञ्छुनीय भएकोले।*
|
| 23 |
+
|
| 24 |
+
श्री ४ महाराजाधिराज ज्ञानेन्द्र बीर विक्रम शाहदेवको शासनकालको पहिलो वर्षमा संसदले यो ऐन बनाएको छ ।
|
| 25 |
+
|
| 26 |
+
---
|
| 27 |
+
|
| 28 |
+
**१. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भ:**
|
| 29 |
+
(१) यस ऐनको नाम "महाभियोग (कार्यबिधि नियमित गर्ने) ऐन, २०४९" रहेको छ।
|
| 30 |
+
(२) यो ऐन तुरुन्त प्रारम्भ हुनेछ।
|
| 31 |
+
|
| 32 |
+
* यो ऐन संबत् २०६४ साल जेठ १४ गतेदेखि लागू भएको।
|
| 33 |
+
* गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६६ द्वारा झिकिएको।
|
| 34 |
+
+ केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७२ द्वारा संशोधित।
|
| 35 |
+
|
| 36 |
+
---
|
| 37 |
+
|
| 38 |
+
**२. परिभाषा:**
|
| 39 |
+
विषय बा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
|
| 40 |
+
(क) "संबैधानिक पदाधिकारी" भन्नाले नेपालको संविधानको धारा २६४ बमोजिम संबैधानिक परिषद्को सिफारिसमा नियुक्त भएको प्रधान न्यायाधीश, संबैधानिक निकायको प्रमुख बा पदाधिकारी सम्झनु पर्छ र सो शब्दले सर्वोच्च अदालतको न्यायाधिश र नेपालको संविधानको धारा १४३ को उपधारा (१) को खण्ड (घ) र (ङ) बमोजिमका न्याय परिषद्का सदस्य समेतलाई जनाउँछ।
|
| 41 |
+
(ख) "कार्यक्षमताको अभाब" भन्नाले संबैधानिक पदाधिकारीको शारीरिक बा मानसिक क्षमताको अभाबमा निजले आफ्नो पदीय कर्तव्य पालना गर्न नसक्ने अवस्था सम्झनु पर्छ।
|
| 42 |
+
(ग) "खराब आचरण" भन्नाले संबैधानिक पदाधिकारीमा आफनो पद अनुरूप हुनु पर्ने आचरण नभएको अवस्था सम्झनु पर्छ र सो शब्दले प्रचलित कानुन बमोजिम भ्रष्टाचार मानिने काम समेतलाई जनाउँछ।
|
| 43 |
+
(घ) "इमान्दारीपूर्वक पदीय कर्तव्य पालना नगरेको" भन्नाले संबैधानिक पदाधिकारीले प्रचलित कानुन बमोजिम असल नियतले आफनो जिम्मेबारी पालन नगरेको बा गर्न नखोजेको अवस्था सम्झनु पर्छ।
|
| 44 |
+
(ङ) "जाँचबुझ समिति" भन्नाले दफा ४ को उपदफा (१) बमोजिम गठन हुने जाँचबुझ समिति सम्झनु पर्छ।
|
| 45 |
+
|
| 46 |
+
* केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७२ द्वारा संशोधित।
|
| 47 |
+
|
| 48 |
+
---
|
| 49 |
+
|
| 50 |
+
**३. महाभियोगको प्रस्ताव पेश गर्न सक्ने:**
|
| 51 |
+
(१) देहायका अवस्थामा *व्यवस्थापिका-संसदका कम्तीमा पच्चीस प्रतिशत सदस्यहरूले कुनै पनि संबैधानिक पदाधिकारीलाई पदबाट मुक्त गर्न निज उपर महाभियोगको प्रस्ताव पेश गर्न सक्नेछन्:
|
| 52 |
+
(क) संबैधानिक पदाधिकारीको कार्यक्षमताको अभाव भएमा,
|
| 53 |
+
(ख) संबैधानिक पदाधिकारीको खराब आचरण भएमा, बा
|
| 54 |
+
(ग) संबैधानिक पदाधिकारीले आफ्नो पदीय कर्तव्य ईमान्दारीपूर्वक पालना नगरेमा।
|
| 55 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम प्रस्ताव पेश गर्न चाहने सदस्यहरूले त्यस्तो प्रस्ताव पेश गर्नु परेको कारण र आधार खुलाई सो प्रस्ताव सहितको सूचना *व्यवस्थापिका-संसदको महासचिव मार्फत *व्यवस्थापिका-संसदको सभामुखलाई दिनु पर्नेछ।
|
| 56 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम प्रस्ताव साथ सम्भव भएसम्म सो कुरालाई पुष्टि गर्ने प्रमाण समेत पेश गर्नु पर्नेछ।
|
| 57 |
+
(४) उपदफा (२) बमोजिमको प्रस्ताव प्राप्त भएपछि सभामुखले सो प्रस्ताव *व्यवस्थापिका-संसदको बैठकमा पेश गर्ने र छलफल गर्ने दिन तथा समय तोकी सोको सूचना *व्यवस्थापिका-संसदको सदस्यलाई दिनु पर्नेछ।
|
| 58 |
+
|
| 59 |
+
* गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानुन संशोधन गर्ने ऐन, २०६६ द्वारा संशोधित।
|
| 60 |
+
|
| 61 |
+
---
|
| 62 |
+
|
| 63 |
+
**४. जाँचबुझ समिति गठन गर्ने:**
|
| 64 |
+
(१) दफा ३ को उपदफा (२) बमोजिम प्राप्त प्रस्तावमा उल्लेख गरिएका कारण र आधार जाँचबुझ गर्नको लागि *व्यवस्थापिका-संसदले यथासम्भव एकभन्दा बढी राजनैतिक दलको प्रतिनिधित्व रहने गरी सो सभाका आवश्यक संख्याका सदस्य र एकजना कानुनविद् रहेको बढीमा एघारजनासम्मको जाँचबुझ समिति गठन गर्नेछ।
|
| 65 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम गठन हुने समितिमा रहने कानुनविद् सदस्यको योग्यता सर्वोच्च अदालतको न्यायाधीश भइसकेको बा हुन योग्यता पुगेको व्यक्ति सरह हुनेछ।
|
| 66 |
+
(३) कानुनविद् सदस्यले आफनो पद बहाल गर्नु अघि सभामुख समक्ष शपथ लिनु पर्नेछ।
|
| 67 |
+
(४) जाँचबुझ समितिमा रहने *व्यवस्थापिका-संसदका सदस्यहरूमध्ये *व्यवस्थापिका-संसदले तोकेको सदस्य जाँचबुझ समितिको अध्यक्ष हुनेछ।
|
| 68 |
+
(५) जाँचबुझ समितिले सम्भव भएसम्म एकमत हुने गरी निर्णय गर्नु पर्नेछ र एकमत हुन नसकेमा बहुमतको निर्णय जाँचबुझ समितिको निर्णय मानिनेछ।
|
| 69 |
+
|
| 70 |
+
* गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानुन संशोधन गर्ने ऐन, २०६६ द्वारा संशोधित��
|
| 71 |
+
|
| 72 |
+
---
|
| 73 |
+
|
| 74 |
+
**५. जाँचबुझ समितिको कार्यालय र कर्मचारी:**
|
| 75 |
+
(१) जाँचबुझ समितिको कार्यालय सभामुखले तोकेको ठाउँमा रहनेछ।
|
| 76 |
+
(२) जाँचबुझ समितिको कामको लागि आवश्यक पर्ने कर्मचारी *व्यवस्थापिका-संसद सचिबालयले उपलब्ध गराउनेछ।
|
| 77 |
+
(३) उपदफा (२) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि जाँचबुझ समितिले अनुरोध गरेमा नेपाल सरकार बा नेपाल सरकारको स्वामित्वमा रहेको संस्थाको कुनै कर्मचारीलाई नेपाल सरकारले जाँचबुझ समितिको कामको लागि उपलब्ध गराउनेछ।
|
| 78 |
+
|
| 79 |
+
---
|
| 80 |
+
|
| 81 |
+
**६. जाँचबुझ समितिको कार्यावधि:**
|
| 82 |
+
जाँचबुझ समितिको कार्यावधि तीन महिनाको हुनेछ। तर मनासिब कारण परेमा सभामुखले बढीमा तीस दिनको म्याद थप्न सक्नेछ।
|
| 83 |
+
|
| 84 |
+
---
|
| 85 |
+
|
| 86 |
+
**७. जाँचबुझ समितिको अधिकार:**
|
| 87 |
+
(१) दफा ३ को उपदफा (२) बमोजिम पेश गरिएको प्रस्तावमा उल्लिखित कारण र आधारका सम्बन्धमा छानबिन तथा जाँचबुझ गर्ने सिलसिलामा जाँचबुझ समितिलाई देहायका अधिकार हुनेछ:
|
| 88 |
+
(क) आरोप लागेको संबैधानिक पदाधिकारी बा अन्य कुनै व्यत्किलाई जाँचबुझ समिति समक्ष उपस्थित हुन म्याद, सूचना बा आवश्यकता अनुसार बन्द सवाल जारी गर्ने,
|
| 89 |
+
(ख) कुनै व्यत्कि, निकाय बा अधिकारीसँग रहेको कुनै कागजात बा प्रमाण निश्चित समयभित्र जाँचबुझ समिति समक्ष पेश गर्न लगाउने,
|
| 90 |
+
(ग) आरोप लागेको संबैधानिक पदाधिकारीको बयान लिने,
|
| 91 |
+
(घ) सम्बद्ध तथ्यको बारेमा जानकारी भएको कुनै व्यत्कि, विशेषज्ञ, साक्षी बा अन्य व्यत्किलाई जाँचबुझ समिति समक्ष उपस्थित गराई सोधपुछ गर्ने बा निजको बकपत्र गराउने,
|
| 92 |
+
(ङ) जाँचबुझसँग सम्बन्धित अन्य आवश्यक कारबाही गर्ने गराउने।
|
| 93 |
+
(२) संबैधानिक पदाधिकारीले भ्रष्टाचार गरेको आरोपमा महाभियोग सम्बन्धी प्रस्ताव पेश भई जाँचबुझ समितिको गठन भएको भए सो समितिले भ्रष्टाचार सम्बन्धी मुद्दामा प्रचलित कानुन बमोजिम अनुसन्धान अधिकृतले प्रयोग गर्न सक्ने अधिकार समेत प्रयोग गर्न सक्नेछ।
|
| 94 |
+
(३) यस दफा बमोजिम हुने जाँचबुझको कारबाही सामान्यतया गोप्य रहने छ र जाँचबुझको कारबाहीमा आरोपित संबैधानिक पदाधिकारी, निजले कानुन व्यवसायी मुकरर गरेको भए त्यस्तो कानुन व्यवसायी, आरोप जाँचबुझको सम्बन्धमा जाँचबुझ समितिले आवश्यक ठहव्याएको व्यक्ति, विशेषज्ञ तथा जाँचबुझ समितिको काममा खटिएका कर्मचारी बाहेक अरु कसैलाई सो कारबाहीमा उपस्थित बा सहभागी गराईने छैन।
|
| 95 |
+
(४) यस दफा बमोजिम जारी गरिएको म्याद, सूचना बा बन्द सबालको अबहेलना गर्ने, दिएको आदेश बमोजिम कागजात बा प्रमाण पेश नगर्ने बा जाँचबुझ समितिको अन्य कुनै आदेश उल्लंघन गर्ने बा जाँचबुझ समितिको काम कारबाहीमा बाधा विरोध गर्ने व्यक्तिलाई जाँचबुझ समितिले दश हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना गर्न सक्नेछ। तर त्यस्तो कागजात बा प्रमाण पेश गर्न नसकेको मनासिब कारण खुलाई निबेदन दिएमा र सोको कारण उपयुक्त देखिएमा जाँचबुझ समितिले निजलाई हुने जरिबाना पूरे बा आंशिक रूपमा छुट गर्न सक्नेछ।
|
| 96 |
+
|
| 97 |
+
---
|
| 98 |
+
|
| 99 |
+
**८. जाँचबुझ सम्बन्धी कार्यबिधि:**
|
| 100 |
+
(१) संबैधानिक पदाधिकारीलाई जुन कारणको आधारमा पदमुक्त गर्न निज उपर महाभियोगको प्रस्ताव पेश गरिएको हो जाँचबुझ समितिले सोही कारण र आधार खुलाई आरोपपत्र तयार गरी आरोपित संबैधानिक पदाधिकारीलाई आफनो स्पष्टीकरण सहितको सफाई पेश गर्ने मनासिब म्याद दिई निजलाई आरोपपत्र दिनु पर्नेछ।
|
| 101 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको आरोपपत्रमा अन्य कुराका अतिरिक्त देहायका कुराहरू स्पष्ट रूपमा उल्लेख हुनु पर्नेछ:
|
| 102 |
+
(क) कुन आरोपमा निजलाई पद्मुक्त गर्न महाभियोगको प्रस्ताव पेश गरिएको हो सोको संक्षिप्त बिबरण,
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| 103 |
+
(ख) कुन आरोप कुन कुन कुरामा आधारित छ र सोको उपलब्ध भएसम्मको प्रमाण,
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| 104 |
+
(ग) एकैपटक एकभन्दा बढी आरोप लगाई महाभियोग सम्बन्धी प्रस्ताव पेश गरिएको भए प्रत्येक आरोपका सम्बन्धमा खण्ड (क) र (ख) मा लेखिएका बिबरण र प्रमाण,
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| 105 |
+
(घ) अन्य आवश्यक कुराहरू।
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| 106 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम म्यादभित्र संबैधानिक पदाधिकारीले स्पष्टीकरण पेश नगरेमा बा पेश गरेको स्पष्टीकरण जाँचबुझ समितिलाई मनासिब नलागेमा जाँचबुझ समितिले सोही बमोजिम मूल्यांकन गरी महाभियोगको प्रस्ताव उपयुक्त भए बा नभएको निर्णय गर्नेछ।
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| 107 |
+
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| 108 |
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**९. चिकित्सकको बोर्ड गठन गर्न सक्ने:**
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(१) कार्यक्षमताको अभाबको आरोपमा संबैधानिक पदाधिकारी उपर जाँचबुझ गर्दा निजबाट माग गरिएको स्पष्टीकरणमा सम्बन्धित संबैधानिक पदाधिकारीले सो आरोप इन्कार गरेमा जाँचबुझ समितिले सभामुखसँग परामर्श गरी निजको शारीरिक बा मानसिक अवस्थाको परीक्षण गर्नको लागि सम्बन्धित बिषयको विशेषज्ञ रहेको तीन सदस्यीय चिकित्सकको बोर्ड (मेडिकल बोर्ड) गटन गर्न सक्नेछ।
|
| 112 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको बोर्डले सम्बन्धित संबैधानिक पदाधिकारीको शारीरिक बा मानसिक अवस्थाको परीक्षण गरी निजको शारीरिक बा मानसिक अवस्थाको कारण र आधार सहितको प्रतिवेदन जाँचबुझ समितिले तोकेको म्यादभित्र सो समिति समक्ष पेश गर्नेछ।
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| 113 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिमको बोर्ड समक्ष आफ्नो शारीरिक बा मानसिक अवस्थाको परीक्षण गराउन सम्बन्धित संबैधानिक पदाधिकारीले इन्कार गरेमा बा त्यस्तो बोर्डले परीक्षणको लागि तोकेको म्यादभित्र मनासिब कारण बिना निज अनुपस्थित भएमा सो बोर्डले सोही कुराको प्रतिवेदन जाँचबुझ समिति समक्ष दिनु पर्नेछ।
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| 114 |
+
(४) उपदफा (३) बमोजिमको प्रतिवेदन प्राप्त भएपछि शारीरिक बा मानसिक अवस्थाको परीक्षण गराउन इन्कार गर्ने संबैधानिक पदाधिकारीमा अन्यथा प्रमाणित भएकोमा बाहेक शारीरिक बा मानसिक अवस्थाको कारणले कार्य क्षमताको अभाव रहेको अनुमान गरिनेछ र जाँचबुझ समितिले आफनो प्रतिवेदनमा सो कुरालाई आधार लिनेछ।
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| 115 |
+
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| 116 |
+
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| 117 |
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+
**१०. भ्रष्टाचार भएको आरोपको सम्बन्धमा जाँचबुझ सम्बन्धी विशेष व्यवस्था:**
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| 119 |
+
(१) यस ऐनमा अन्यत्र जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि कुनै संबैधानिक पदाधिकारी उपर भ्रष्टाचारको आरोपमा जाँचबुझ गर्न दफा ४ बमोजिम समिति गठन भएकोमा त्यस्तो आरोपको छानबिन तथा अनुसन्धान जाँचबुझ समिति आफैले गर्न बा त्यस्तो छानबिन तथा अनुसन्धान गर्न जाँचबुझ समितिले कुनै उपयुक्त व्यक्ति बा निकायको सहयोग लिन सक्नेछ। त्यस्तो सहयोग दिनु सम्बन्धित व्यक्ति बा निकायको कर्तव्य हुनेछ।
|
| 120 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको व्यक्ति बा निकायले भ्रष्टाचार सम्बन्धी प्रचलित कानुन बमोजिम छानबिन तथा अनुसन्धान गरी जाँचबुझ समिति समक्ष आफनो राय टहर सहितको प्रतिवेदन पेश गर्नु पर्नेछ।
|
| 121 |
+
(३) जाँचबुझ समितिले उपदफा (२) बमोजिम पेश भएको प्रतिवेदन समेतलाई आधार लिई आफनो निर्णय गर्नेछ।
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| 122 |
+
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| 123 |
+
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+
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| 125 |
+
**११. प्रतिवेदन दिनु पर्ने:**
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| 126 |
+
(१) जाँचबुझ समितिले दफा १० को उपदफा (३) बमोजिम टहर गरिसकेपछि सो कुराको प्रतिवेदन सभामुख समक्ष पेश गर्नु पर्नेछ।
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| 127 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम पेश भएको प्रतिवेदनमा अन्य कुराको अतिरिक्त देहायका कुराहरू हुनु पर्नेछ:
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| 128 |
+
(क) जाँचबुझको संक्षिप्त बिबरण,
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| 129 |
+
(ख) जाँचबुझ गर्दा जाँचबुझ समितिले टहर गरेको बा निष्कर्ष निकालेको बिषय,
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| 130 |
+
(ग) खण्ड (ख) बमोजिम टहर गर्न बा निष्कर्ष निकाल्न लिइएका आधार तथा प्रमाणहरू,
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| 131 |
+
(घ) कुनै विशेषज्ञ बा अधिकारीले सो सम्बन्धमा कुनै राय दिएको भए सो सम्बन्धी बिबरण,
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| 132 |
+
(ङ) भ्रष्टाचारजन्य खराब आचरणको सम्बन्धमा जाँचबुझ गरिएको भए दफा १० को उपदफा (२) बमोजिम प्राप्त प्रतिवेद���को विवरण,
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| 133 |
+
(च) आरोप ठहर गर्न बा नगर्न लिद्दएका अन्य आवश्यक कुराहरू।
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| 134 |
+
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| 135 |
+
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| 136 |
+
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+
**१२. प्रस्ताव उपर विचार गर्नु पर्ने:**
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| 138 |
+
(१) जाँचबुझ समितिले दफा ११ बमोजिम पेश भएको प्रतिवेदन सभामुखले *व्यवस्थापिका-संसदमा पेश गर्नेछ।
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| 139 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम पेश भएको प्रतिवेदन दफा ३ को उपदफा (२) बमोजिम पेश भएको प्रस्तावको अभिन्न अङ्ग हुनेछ।
|
| 140 |
+
(३) *व्यवस्थापिका-संसदबाट दफा ३ को उपदफा (२) बमोजिमको प्रस्ताव स्वीकृत भएमा आरोपित संबैधानिक पदाधिकारी उपर महाभियोगको प्रस्ताव पारित भएको मानिनेछ।
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| 141 |
+
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| 142 |
+
* गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानुन संशोधन गर्ने ऐन, २०६६ द्वारा संशोधित।
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+
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+
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**१३. पदमुक्त भएको मानिने:**
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+
दफा १२ को उपदफा (३) बमोजिम व्यवस्थापिका-संसदबाट आरोपित संबैधानिक पदाधिकारी उपर महाभियोगको प्रस्ताव पारित भएपछि त्यस्तो पदाधिकारी पदबाट स्वतः मुक्त भएको मानिनेछ।
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+
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**१४. मुद्दा दायर गर्नु पर्ने:**
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+
(१) कुनै संबैधानिक पदाधिकारी भ्रष्टाचारको अभियोगमा यस ऐन बमोजिम पदमुक्त भएमा निज उपर प्रचलित कानुन बमोजिम भ्रष्टाचारको मुद्दा दायर गर्नु पर्नेछ।
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| 153 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम दायर भएको मुद्दामा जाँचबुझ समितिले पेश गरेको प्रतिबेदनलाई प्रमाणको रूपमा लिइनेछ।
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| 154 |
+
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**द्रष्टव्य:**
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(१) केही नेपाल कानुन संशोधन गर्ने ऐन, २०६३ बमोजिम रूपान्तर भएका शब्दहरू:
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| 159 |
+
"श्री ४ को सरकार" भन्ने शब्दको सट्टा "नेपाल सरकार"
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| 160 |
+
(२) व्यवस्थापिका-संसद हाल संघीय संसद कायम भएको।
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section_1_pdf_3.txt
ADDED
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@@ -0,0 +1,107 @@
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# संबैधानिक परिषद् (काम, कर्तव्य, अधिकार र कार्यविधि) सम्बन्धी ऐन, २०६६
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| 2 |
+
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| 3 |
+
## प्रमाणीकरण र प्रकाशित मिति
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| 4 |
+
२०६६।९।२२
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| 5 |
+
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| 6 |
+
## संशोधन गर्ने ऐन
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| 7 |
+
१. संबैधानिक परिषद् (काम, कर्तव्य, अधिकार र कार्यविधि) सम्बन्धी ऐन, २०६६ को साबिकको व्यवस्था जगाउने ऐन, २०७० २०७०।१२।१२
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| 8 |
+
२. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७२ २०७२।११।१३
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| 9 |
+
३. केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७४ २०७४।११।१९
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| 10 |
+
४. केही अध्यादेश खारेज गरी नेपाल ऐनको साबिकको व्यवस्था जगाउन बनेको अध्यादेशलाई प्रतिस्थापन गर्ने ऐन, २०७७ २०७७।३।१४
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| 11 |
+
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| 12 |
+
संबत् २०६६ सालको ऐन नं. ६
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| 13 |
+
संबैधानिक परिषद्को काम, कर्तव्य, अधिकार र कार्यविधि सम्बन्धमा व्यवस्था गर्न बनेको ऐन
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| 14 |
+
प्रस्तावना : संबैधानिक निकायका पदाधिकारीको नियुक्ति सम्बन्धी कार्यविधि तथा संबैधानिक परिषद्को काम, कर्तव्य, अधिकार र कार्यविधि सम्बन्धमा कानूनी व्यवस्था गर्न बाञ्छुनीय भएकोले,
|
| 15 |
+
नेपालको अन्तरिम संविधान, २०६३ को धारा ६३ को उपधारा (१) बमोजिम संविधान सभाले यो ऐन बनाएको छ ।
|
| 16 |
+
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| 17 |
+
### १. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भ :
|
| 18 |
+
(१) यस ऐनको नाम "संबैधानिक परिषद् (काम, कर्तव्य, अधिकार र कार्यविधि) सम्बन्धी ऐन, २०६६" रहेको छ ।
|
| 19 |
+
(२) यो ऐन तुरुन्त प्रारम्भ हुनेछ ।
|
| 20 |
+
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| 21 |
+
### २. परिभाषा :
|
| 22 |
+
बिषय बा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
|
| 23 |
+
(क) "अध्यक्ष" भन्नाले परिषद्को अध्यक्ष सम्झनु पर्छ ।
|
| 24 |
+
(ख) "पदाधिकारी" भन्नाले परिषद्को सिफारिसमा नियुक्त हुने देहायका पदाधिकारी सम्झनु पर्छ :-
|
| 25 |
+
(१) सर्वोच्च अदालतका प्रधान न्यायाधीश,
|
| 26 |
+
(२) अद्व्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोगका प्रमुख आयुक्त तथा आयुक्तहरु,
|
| 27 |
+
(३) महालेखा परीक्षक,
|
| 28 |
+
(४) लोक सेबा आयोगका अध्यक्ष तथा सदस्यहरु,
|
| 29 |
+
(४) निर्बाचन आयोगका प्रमुख निर्बाचन आयुक्त तथा निर्बाचन आयुक्तहरु,
|
| 30 |
+
(६) राष्ट्रिय मानव अधिकार आयोगका अध्यक्ष तथा सदस्यहरु,
|
| 31 |
+
(७) राष्ट्रिय प्राकृतिक श्रोत तथा बित्त आयोगका अध्यक्ष तथा सदस्यहरु,
|
| 32 |
+
(८) राष्ट्रिय महिला आयोगका अध्यक्ष तथा सदस्यहरु,
|
| 33 |
+
(९) राष्ट्रिय दलित आयोगका अध्यक्ष तथा सदस्यहरु,
|
| 34 |
+
(१०) राष्ट्रिय समावेशी आयोगका अध्यक्ष तथा सदस्यहरु,
|
| 35 |
+
(११) आदिवासी जनजाति आयोगका अध्यक्ष तथा सदस्यहरु,
|
| 36 |
+
(१२) मधेशी आयोगका अध्यक्ष तथा सदस्यहरु,
|
| 37 |
+
(१३) थारु आयोगका अध्यक्ष तथा सदस्यहरु,
|
| 38 |
+
(१४) मुस्लिम आयोगका अध्यक्ष तथा सदस्यहरु ।
|
| 39 |
+
|
| 40 |
+
(ग) "परिषद्" भन्नाले संविधानको धारा २६४ बमोजिम गठन भएको संबैधानिक परिषद् सम्झनु पर्छ ।
|
| 41 |
+
(घ) "संबिधान" भन्नाले नेपालको संविधान सम्झनु पर्छ ।
|
| 42 |
+
(ङ) "सचिब" भन्नाले परिषद्को सचिब सम्झनु पर्छ ।
|
| 43 |
+
(च) "सचिबालय" भन्नाले दफा ५ बमोजिमको परिषद्को सचिबालय सम्झनु पर्छ ।
|
| 44 |
+
(छ) "सदस्य" भन्नाले परिषद्को सदस्य सम्झनु पर्छ ।
|
| 45 |
+
|
| 46 |
+
### ३. परिषद्को काम, कर्तव्य र अधिकार :
|
| 47 |
+
संबिधानमा उल्लिखित काम, कर्तव्य र अधिकारका अतिरिक्त परिषद्को अन्य काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछ :-
|
| 48 |
+
(क) पदाधिकारीको नियुक्तिको लागि संविधानको धारा २९२ को उपधारा (१) को प्रयोजनको लागि संसदीय सुनुवाइको लागि सिफारिस गर्ने,
|
| 49 |
+
(ख) खण्ड (क) बमोजिम सिफारिस गरिएका व्यक्तिहरुमध्ये संघीय-संसद सचिबालयबाट नियुक्ति गर्न बाधा नपर्ने गरी लेखी आएको व्यक्तिलाई नियुक्तिको लागि राष्ट्रपति समक्ष सिफारिस गर्ने,
|
| 50 |
+
(ग) खण्ड (क) बमोजिम सिफारिसको लागि योग्यता पुगेका व्यक्तिहरुको अभिलेख तयार गर्ने,
|
| 51 |
+
(घ) पदाधिकारीको नियुक्ति, पदावधि, पद रिक्तता, पुनर्नियुक्ति लगायतका विषयको अभिलेख अद्यावधिक गरी राख्ने ।
|
| 52 |
+
|
| 53 |
+
### ४. अभिलेख तयार गर्नु पर्ने :
|
| 54 |
+
(१) सचिबालयले संबैधानिक निकायका पदाधिकारीहरुको पदमा संविधान बमोजिम नियुक्त हुन योग्यता पुगेका व्यक्तिहरुको छुट्टाछुट्टै अभिलेख तयार गरी राख्नु पर्नेछ ।
|
| 55 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम तयार गरिएको अभिलेख गोप्य हुनेछ र सचिवको जिम्मामा रहनेछ ।
|
| 56 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिमको अभिलेख सचिवले परिषद्को स्वीकृतिविना कसैलाई दिन वा सार्वजनिक गर्न हुँदैन ।
|
| 57 |
+
(४) यस दफामा अन्यत्र जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि सो अभिलेखमा नाम समावेश नभएको कारणले मात्र संविधान तथा कानून बमोजिम योग्यता पुगेको कुनै व्यक्तिलाई पदाधिकारीको पदमा सिफारिस गर्न बाधा पर्ने छैन ।
|
| 58 |
+
|
| 59 |
+
### ५. नियुक्तिको लागि सिफारिस गर्दा अपनाउनु पर्ने कार्यविधि :
|
| 60 |
+
(१) परिषद्ले कुनै व्यक्तिलाई संबैधानिक निकायको कुनै पदाधिकारीको पदमा नियुक्तिको लागि सिफारिस गर्दा त्यस्तो पदमा नियुक्त हुन संविधान तथा प्रचलित कानूनमा उल्लेख भएको योग्यता तथा उपयुक्तताको कारण र आधार समेत स्पष्ट रूपमा उल्लेख गर्नु पर्नेछ ।
|
| 61 |
+
(२) परिषद्ले उपदफा (१) बमोजिम कुनै व्यक्तिलाई नियुक्तिको लागि सिफारिस गर्दा निजको सामाजिक प्रतिष्ठा, उच्च नैतिक चरित्र, इमान्दारिता, निजप्रतिको जनभावना तथा निजले पहिले गरेको सेवा र पेशागत अनुभव समेतलाई विचार गर्नु प��्नेछ ।
|
| 62 |
+
|
| 63 |
+
### ६. परिषद्को बैठक सम्बन्धी कार्यविधि :
|
| 64 |
+
(१) परिषद्को बैठक आवश्यकता अनुसार अध्यक्षले तोकेको मिति, समय र स्थानमा बस्नेछ ।
|
| 65 |
+
(२) अध्यक्षको निर्देशानुसार सचिवले परिषद्को बैठक बस्ने मिति, समय र स्थान तथा छलफलको विषय सूची सहितको सूचना बैठक बस्नुभन्दा कम्तीमा अट्चालीस घण्टा अगावै सदस्यहरुलाई पठाउनु पर्नेछ ।
|
| 66 |
+
(३) अध्यक्ष र कम्तीमा चारजना अन्य सदस्यहरू उपस्थित भएमा परिषद्को बैठकको लागि गणपूरक सङ्ख्या पुगेको मानिनेछ ।
|
| 67 |
+
(४) परिषद्को बैठकको अध्यक्षता अध्यक्षले गर्नेछ ।
|
| 68 |
+
(५) बैठकमा पेश भएको प्रत्येक विषयको निर्णय सर्वसम्मतिको आधारमा हुनेछ ।
|
| 69 |
+
(६) उपदफा (५) बमोजिम सर्वसम्मति कायम हुन नसकेमा सो विषयमा निर्णय हुन सक्ने छैन ।
|
| 70 |
+
(७) उपदफा (६) बमोजिम निर्णय हुन नसकेको विषयमा निर्णय गर्न अध्यक्षले पुनः अर्को बैठक बोलाउन लगाउनेछ र त्यस्तो बैठकको सहमतिले सो विषयमा निर्णय गरिनेछ । तर त्यस्तो बैठकमा पनि सहमतिबाट निर्णय हुन नसकेमा परिषद्का सम्पूर्ण सदस्यको बहुमतबाट निर्णय गरिनेछ ।
|
| 71 |
+
(८) परिषद्ले गरेको निर्णयको अभिलेख सचिबले तयार गरी अध्यक्ष तथा सदस्यहरूको हस्ताक्षर गराई राख्नेछ ।
|
| 72 |
+
(९) परिषद्को बैठक सम्बन्धी अन्य कार्यविधि आवश्यकता अनुसार परिषद् आफैले निर्धारण गर्नेछ ।
|
| 73 |
+
|
| 74 |
+
### ७. संसदीय सुनुवाइका लागि लेखी पठाउनु पर्ने :
|
| 75 |
+
(१) परिषद्ले कुनै पदाधिकारीको नियुक्तिको लागि सिफारिस गरेमा सचिवले संसदीय सुनुवाइको लागि त्यस्तो सिफारिस संघीय-संसद सचिबालयमा लेखी पठाउनु पर्नेछ ।
|
| 76 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम लेखी पठाएकोमा संघीय-संसद सचिबालयबाट नियुक्ति गर्न बाधा नपर्ने गरी लेखी आएको व्यक्तिलाई परिषद्को निर्णय बमोजिम सचिवले नियुक्तिको लागि राष्ट्रपति समक्ष पेश गर्न राष्ट्रपतिको कार्यालयमा लेखी पठाउनु पर्नेछ ।
|
| 77 |
+
|
| 78 |
+
### ८. परिषद्को सचिबालय :
|
| 79 |
+
परिषद्को सचिबालयको काम प्रधानमन्त्री तथा मन्त्रिपरिषद्को कार्यालयले गर्नेछ ।
|
| 80 |
+
|
| 81 |
+
### ९. पदाधिकारी पदमा नरहेको जानकारी दिनु पर्ने :
|
| 82 |
+
(१) कुनै संबैधानिक निकायको कुनै पदाधिकारी कुनै तरिकाले आफ्नो पदमा नरहेमा निज सो पदमा नरहेको मितिले सात दिनभित्र सम्बन्धित संबैधानिक निकायले सो व्यहोरा सचिबालयमा लेखी पठाउनु पर्नेछ र सोको जानकारी सम्बन्धित मन्त्रालयलाई समेत दिनु पर्नेछ ।
|
| 83 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको जानकारी सचिबालयमा प्राप्त भएपछि सचिवले सो स���्बन्धमा यथाशीघ्र अध्यक्षलाई अवगत गराउनु पर्नेछ ।
|
| 84 |
+
|
| 85 |
+
### १०. सचिवको काम, कर्तव्य र अधिकार :
|
| 86 |
+
(१) यस ऐनमा अन्यत्र उल्लिखित काम, कर्तव्य र अधिकारको अतिरिक्त सचिवको अन्य काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछ :-
|
| 87 |
+
(क) अध्यक्षको निर्देशन अनुसार परिषद्को बैठक बोलाउने,
|
| 88 |
+
(ख) परिषद्ले गरेका निर्णयहरू कार्यान्वयन गर्ने वा गराउने,
|
| 89 |
+
(ग) सचिबालयमा राखिने अभिलेखलाई अद्यावधिक गराई व्यवस्थित र सुरक्षित रूपमा राख्ने व्यवस्था मिलाउने,
|
| 90 |
+
(घ) सचिबालयले गर्नु पर्ने काम कारवाहीको अनुगमन, नियन्त्रण, सुपरिवेक्षण र समन्वय गर्ने तथा सचिबालयका कर्मचारीको कार्यविभाजन गरी काममा लगाउने,
|
| 91 |
+
(ङ) परिषद्मा रहेका अभिलेख प्रमाणित गर्ने,
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| 92 |
+
(च) नेपाल सरकारका विभिन्न निकायका साथै आवश्यकता अनुसार अन्य निकायसँग सम्पर्क र समन्वय गर्ने ।
|
| 93 |
+
(२) उपदफा (१) मा लेखिएदेखि बाहेक सचिवको अन्य काम कर्तव्य र अधिकार परिषद्ले तोके बमोजिम हुनेछ ।
|
| 94 |
+
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| 95 |
+
### ११. सचिबालयको लागि बजेट र कर्मचारीको व्यवस्था :
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| 96 |
+
(१) सचिबालयको लागि आवश्यक बजेट अर्थ मन्त्रालयले प्रधानमन्त्री तथा मन्त्रिपरिषद्को कार्यालयको नाममा निकाशा दिनेछ ।
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| 97 |
+
(२) सचिबालयको लागि आवश्यक कर्मचारीको व्यवस्था प्रधानमन्त्री तथा मन्त्रिपरिषद्को कार्यालयबाट हुनेछ ।
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| 98 |
+
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| 99 |
+
### १२. नेपाल सरकारसँगको सम्पर्क :
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| 100 |
+
परिषद्ले नेपाल सरकारसँग सम्पर्क राख्न पर्दा प्रधानमन्त्री तथा मन्त्रिपरिषद्को कार्यालय मार्फत राख्नु पर्नेछ ।
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| 101 |
+
|
| 102 |
+
### १३. नियम बनाउने अधिकार :
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| 103 |
+
यस ऐनको उद्देश्य कार्यान्वयन गर्न परिषद्ले आवश्यक नियम बनाउन सक्नेछ ।
|
| 104 |
+
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| 105 |
+
### १४. खारेजी :
|
| 106 |
+
(१) संबैधानिक अङ्ग पदाधिकारीको नियुक्ति सम्बन्धी कार्यविधि तथा संबैधानिक परिषद्को काम, कर्तव्य, अधिकार तथा कार्यविधि सम्बन्धी नियमावली, २०६४ खारेज गरिएको छ ।
|
| 107 |
+
(२) संबैधानिक अङ्ग पदाधिकारीको नियुक्ति सम्बन्धी कार्यविधि तथा संबैधानिक परिषद्को काम, कर्तव्य, अधिकार तथा कार्यविधि सम्बन्धी नियमावली, २०६४ बमोजिम भए गरेको काम कारवाही यसै ऐन बमोजिम भए गरेको मानिनेछ ।
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| 1 |
+
**यातना सम्बन्धी क्षतिपूर्ति ऐन, २०४३**
|
| 2 |
+
|
| 3 |
+
**संशोधन गर्ने ऐन**
|
| 4 |
+
राणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६६
|
| 5 |
+
२०६६। १०। ७
|
| 6 |
+
२०४३ सालको ऐन नं. १४
|
| 7 |
+
|
| 8 |
+
---
|
| 9 |
+
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| 10 |
+
**प्रस्तावना:**
|
| 11 |
+
अनुसन्धान, तहकिकात वा पुर्पक्षको सिलसिलामा वा अरु कुनै किसिमले धुनामा रहेको व्यक्तिलाई शारीरिक वा मानसिक यातना दिए वा निर्मम, अमानवीय वा अपमानजनक व्यवहार गरे बापत क्षतिपूर्ति दिने सम्बन्धमा व्यवस्था गर्न बाऽधुनीय भएकोले,
|
| 12 |
+
श्री ४ महाराजाधिराज वीरेन्द्र वीर विक्रम शाहदेवको शासनकालको पच्चीसौं वर्षमा संसदले यो ऐन बनाएको छ।
|
| 13 |
+
|
| 14 |
+
---
|
| 15 |
+
|
| 16 |
+
**१. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भ:**
|
| 17 |
+
(१) यस ऐनको नाम "यातना सम्बन्धी क्षतिपूर्ति ऐन, २०४३" रहेको छ।
|
| 18 |
+
(२) यो ऐन तुरुन्त प्रारम्भ हुनेछ।
|
| 19 |
+
|
| 20 |
+
---
|
| 21 |
+
|
| 22 |
+
**२. परिभाषा:**
|
| 23 |
+
विषय वा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
|
| 24 |
+
(क) "यातना" भन्नाले अनुसन्धान, तहकिकात वा पुर्पक्षको सिलसिलामा वा अरु कुनै किसिमले धुनामा रहेको व्यक्तिलाई दिएको शारीरिक वा मानसिक यातना सम्झनु पर्छ र सो शब्दले निजसँग गरिएको निर्मम, अमानवीय वा अपमानजनक व्यवहारलाई समेत जनाउँछ।
|
| 25 |
+
(ख) "पीडित व्यक्ति" भन्नाले यातना पाउने व्यक्ति सम्झनु पर्छ।
|
| 26 |
+
|
| 27 |
+
---
|
| 28 |
+
|
| 29 |
+
**३. यातना दिन नहुने:**
|
| 30 |
+
(१) अनुसन्धान, तहकिकात वा पुर्पक्षको सिलसिलामा वा अरु कुनै किसिमले धुनामा रहेको कुनै पनि व्यक्तिलाई यातना दिनु हुँदैन।
|
| 31 |
+
**स्पष्टीकरण:** यस उपदफाको प्रयोजनको लागि "धुनामा रहेको" भन्ने शब्दले प्रचलित कानून बमोजिम हिरासतमा रहेको अवस्थालाई समेत जनाउँछ।
|
| 32 |
+
(२) कुनै पनि व्यक्तिलाई धुनामा राख्दा र छोड्दा सम्भव भएसम्म सरकारी सेवामा रहेका चिकित्सक र चिकित्सक उपलब्ध हुन नसकेको अवस्थामा सम्बन्धित अधिकारी आफैले निजको शारीरिक स्थितिको जाँच गरी गराई सोको अभिलेख खडा गरी राख्नु पर्नेछ।
|
| 33 |
+
**स्पष्टीकरण:** यस उपदफाको प्रयोजनको लागि "चिकित्सक" भन्नाले सरकारी सेवामा रहेको डाक्टर, कबिराज, हेल्थ असिष्टेण्ट, अ.हे.ब. बा बैद्य समेतलाई सम्झनुपर्छ।
|
| 34 |
+
(३) उपदफा (२) मा उल्लेखित शारीरिक वा मानसिक स्थितिको जाँच सम्बन्धी प्रतिबेदनको एक प्रति सम्बन्धित जिल्ला अदालतमा पटाउनु पर्नेछ।
|
| 35 |
+
|
| 36 |
+
---
|
| 37 |
+
|
| 38 |
+
**४. क्षतिपूर्ति दिइने:**
|
| 39 |
+
नेपाल सरकारको कुनै कर्मचारीले कुनै व्यक्तिलाई यातना दिएको टहरेमा पीडित व्यक्तिलाई यस ऐन बमोजिको क्षतिपूर्ति दिइनेछ।
|
| 40 |
+
|
| 41 |
+
---
|
| 42 |
+
|
| 43 |
+
**५. उजूरी दिन सक्ने:**
|
| 44 |
+
(१) पीडित व्यक्त��ले आफूलाई यातना दिएको मितिले वा थुनाबाट मुक्त भएको मितिले ३४ दिनभित्र क्षतिपूर्तिको माग दाबी गरी आफू थुनामा रहेको जिल्लाको जिल्ला अदालतमा उजूरी दिन सक्नेछ।
|
| 45 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि पीडित व्यक्तिको मृत्यु भएको अवस्थामा वा अन्य कुनै कारणबाट पीडित व्यक्ति आफैले उजुरी दिन नसक्ने अवस्था भएमा त्यसको कारण खोली निजको परिवारको उमेर पुगेको कुनै व्यक्ति वा निजको कानून व्यवसायीले उपदफा (१) बमोजिम उजुरी दिन सक्नेछ।
|
| 46 |
+
(३) थुनामा रहेको व्यक्तिलाई यातना दिएको छ भन्ने लागेमा निजको परिवारको उमेर पुगेको कुनै व्यक्ति वा निजको कानून व्यवसायीले सम्बन्धित जिल्ला अदालतमा निबेदन दिन सक्नेछ। यस्तो निबेदन परेकोमा अदालतले तीन दिनभित्र थुनमा रहेको व्यक्तिको शारीरिक वा मानसिक जाँच गराउन आदेश दिन सक्नेछ। यसरी जाँच गर्दा उपचार गर्नु पर्ने भएमा नेपाल सरकारको तर्फबाट उपचार गराइनेछ।
|
| 47 |
+
(४) उपदफा (१) वा (२) बमोजिम दिइने उजुरीमा यथासम्भव देहायका कुराहरु समेत खुलाउनु पर्नेछ:-
|
| 48 |
+
(क) थुनामा परेको कारण र थुनामा बिताएको अवधि।
|
| 49 |
+
(ख) थुनामा रहँदा दिइएको यातनाको विवरण।
|
| 50 |
+
(ग) यातना दिएको कारणबाट पुग्न गएको क्षतिको विवरण।
|
| 51 |
+
(घ) दाबी गरेको क्षतिपूर्तिको रकम।
|
| 52 |
+
(ङ) दाबी प्रमाणित गर्न सहायक हुने अरु कुनै ब्यहोरा।
|
| 53 |
+
|
| 54 |
+
---
|
| 55 |
+
|
| 56 |
+
**६. उजुरीमा कारबाही र क्षतिपूर्ति:**
|
| 57 |
+
(१) दफा ५ बमोजिम परेको उजुरीको सम्बन्धमा जिल्ला अदालतले संक्षिप्त कार्यविधि ऐन, २०२६ बमोजिमको कार्यविधि अपनाई कारबाही गर्ने छ र त्यस्तो उजुरीको ब्यहोरा ठीक टहरेमा पीडित व्यक्तिलाई नेपाल सरकारबाट एकलाख रुपैयाँसम्म क्षतिपूर्ति भराई दिने निर्णय गर्न सक्नेछ।
|
| 58 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम कारबाही गर्दा बदनियत चिताई उजुरी दिएको टहरिएमा जिल्ला अदालतले त्यस्तो उजुरी दिने व्यक्तिलाई पाँच हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना गर्न सक्नेछ।
|
| 59 |
+
|
| 60 |
+
---
|
| 61 |
+
|
| 62 |
+
**९. यातना दिने कार्यमा संलग्न व्यक्ति उपर कारबाही:**
|
| 63 |
+
यस ऐन बमोजिम यातना दिएको टहरिएमा जिल्ला अदालतले त्यस्तो यातना दिने सरकारी कर्मचारीलाई प्रचलित कानून बमोजिम विभागीय कारबाही गर्न सम्बन्धित निकायलाई आदेश दिनेछ।
|
| 64 |
+
|
| 65 |
+
---
|
| 66 |
+
|
| 67 |
+
**५. क्षतिपूर्तिको रकम निर्धारण:**
|
| 68 |
+
दफा ६ को उपदफा (१) को प्रयोजनको निमित्त क्षतिपूर्तिको रकम निर्धारण गर्दा देहायका कुराहरूलाई ध्यानमा राखी निर्धारण गर्नु पर्नेछ:-
|
| 69 |
+
(क) पीडित व्��क्तिलाई पर्न गएको शारीरिक वा मानसिक कष्ट वा पीडा र त्यसको गम्भीरता।
|
| 70 |
+
(ख) शारीरिक वा मानसिक क्षतिको कारण पीडित व्यक्तिको आय आर्जन गर्ने क्षमतामा हुन गएको नोक्सानी।
|
| 71 |
+
(ग) उपचार हुन नसक्ने किसिमको शारीरिक वा मानसिक क्षति पुगेकोमा पीडित व्यक्तिको उमेर र निजको पारिवारिक दायित्व।
|
| 72 |
+
(घ) उपचार हुन सक्ने किसिमको क्षति भएकोमा उपचार गराउन लागने अनुमानित खर्च।
|
| 73 |
+
(ङ) यातनाको कारणबाट पीडित व्यक्तिको मृत्यु भएकोमा निजको आम्दानीमा आर्थिक निजको परिवारका सदस्यहरुको संख्या र तिनीहरुको जीविकोपार्जनको निमित्त आवश्यक पर्ने न्यूनतम खर्च।
|
| 74 |
+
(च) पीडित व्यक्तिले दाबी गरेका कुराहरु मध्ये उचित र उपयुक्त देखिएका कुराहरु।
|
| 75 |
+
|
| 76 |
+
---
|
| 77 |
+
|
| 78 |
+
**९. निर्णयको कार्यान्वयन:**
|
| 79 |
+
(१) पीडित व्यक्तिलाई क्षतिपूर्ति दिने सम्बन्धमा अन्तिम निर्णय भएपछि त्यस्तो निर्णयको सूचना पाएको मितिले एक वर्षभित्र पीडित व्यक्ति वा निजको मृत्यु भएकोमा निजको नजिकको हकबालाले क्षतिपूर्तिको रकम पाउन पीडित व्यक्ति थुनामा रहेको जिल्लाको प्रमुख जिल्ला अधिकारी समक्ष क्षतिपूर्ति दिने सम्बन्धमा जिल्ला अदालतबाट भएको निर्णयको प्रतिलिपि सहित निबेदन दिनु पर्नेछ।
|
| 80 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको निबेदन प्राप्त भएको मितिले पैंतीस दिनभित्र प्रमुख जिल्ला अधिकारीले निबेदकलाई क्षतिपूर्तिको रकम दिनु पर्नेछ।
|
| 81 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिमको म्यादभित्र निबेदन नदिएमा क्षतिपूर्तिको रकम पाउने छैन।
|
| 82 |
+
|
| 83 |
+
---
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| 84 |
+
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| 85 |
+
**१०. सरकारी बकिलबाट प्रतिरक्षा हुन सक्ने:**
|
| 86 |
+
दफा ४ बमोजिम परेको उजुरीको सम्बन्धमा सम्बन्धित कार्यालय प्रमुखले अनुरोध गरेमा सरकारी बकिलले त्यस्तो कर्मचारीको तर्फबाट अदालतमा उपस्थित भई प्रतिरक्षा गरिदिनेछ।
|
| 87 |
+
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| 88 |
+
---
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| 89 |
+
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| 90 |
+
**११. यातना दिएको नमानिने:**
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| 91 |
+
यस ऐनमा अन्यत्र जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि प्रचलित कानून बमोजिम थुनामा रहेको कारणबाट स्वाभावतः हुने कष्टलाई यस ऐनको प्रयोजनको निमित्त यातना दिएको मानिने छैन।
|
| 92 |
+
|
| 93 |
+
---
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| 94 |
+
|
| 95 |
+
**१२. प्रचलित कानून बमोजिम कारबाही चलाउन बाधा नपर्ने:**
|
| 96 |
+
यातना दिए बापत यस ऐनबमोजिम क्षतिपूर्तिको लागि कारबाही चलेको वा क्षतिपूर्ति प्राप्त गरेको कारणले मात्र प्रचलित कानून बमोजिम अपराध टहरिने विषयमा छुट्टै कारबाही चलाउन बाधा पुगेको मानिने छैन।
|
| 97 |
+
|
| 98 |
+
---
|
| 99 |
+
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| 100 |
+
**१३. नियम बनाउन सक्ने:**
|
| 101 |
+
यस ऐनको उद्देश्य कार्यान्वयन गर्नको लागि नेपाल सरकारले ���वश्यक नियमहरु बनाउन सक्नेछ।
|
| 102 |
+
|
| 103 |
+
---
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| 104 |
+
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| 105 |
+
**दृष्टव्य:**
|
| 106 |
+
केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६३ द्वारा रूपान्तर भएका शब्दहरू:-
|
| 107 |
+
"श्री ४ को सरकार" को सट्टा "नेपाल सरकार"।
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# वित्तीय मध्यस्थताको काम गर्ने संस्था सम्बन्धी ऐन, २०४४
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| 3 |
+
## लालमोहर र प्रकाशन मिति
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| 4 |
+
२०४४।१२।१७
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| 5 |
+
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| 6 |
+
### संशोधन गर्ने ऐन
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| 7 |
+
१. वित्तीय मध्यस्थताको काम गर्ने संस्था सम्बन्धी (पहिलो संशोधन) ऐन, २०४६
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| 8 |
+
२०४९।४।२२
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| 9 |
+
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| 10 |
+
२. गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानुन संशोधन गर्ने ऐन, २०६६
|
| 11 |
+
२०६६।१०।७
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| 12 |
+
|
| 13 |
+
३. नेपालको संविधान अनुकूल बनाउन केही नेपाल ऐनलाई संशोधन गर्ने ऐन, २०७४
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| 14 |
+
२०७४।११।१९
|
| 15 |
+
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| 16 |
+
२०४४ सालको ऐन नं. २९
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| 17 |
+
|
| 18 |
+
---
|
| 19 |
+
|
| 20 |
+
## वित्तीय मध्यस्थताको काम गर्ने संस्थाको सम्बन्धमा व्यवस्था गर्न बनेको ऐन
|
| 21 |
+
|
| 22 |
+
### प्रस्तावना
|
| 23 |
+
देशका विभिन्न क्षेत्रमा बसोबास गर्ने न्यून आय भएका व्यक्तिहरूलाई लघुव्यवसायमा सहभागी बनाई तिनीहरूको आर्थिक स्थितिमा सुधार गर्नको निमित्त संस्थागत रूपमा लघुबचत सङ्कलन गर्न तथा लघुकर्जा उपलब्ध गराउन वित्तीय मध्यस्थताको काम गर्ने संस्थाहरूको सम्बन्धमा व्यवस्था गर्न बाञ्छुनीय भएकोले,
|
| 24 |
+
|
| 25 |
+
- यो ऐन संवत् २०६४ साल जेठ १४ गतेदेखि लागू भएको।
|
| 26 |
+
- गणतन्त्र सुदृढीकरण तथा केही नेपाल कानून संशोधन गर्ने ऐन, २०६६ द्वारा झिकिएको।
|
| 27 |
+
- पहिलो संशोधनद्वारा संशोधित।
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| 28 |
+
|
| 29 |
+
श्री ४ महाराजाधिराज बीरेन्द्र बीर बिक्रम शाहदेवको शासनकालको सत्ताइसौं वर्षमा संसदले यो ऐन बनाएको छ।
|
| 30 |
+
|
| 31 |
+
---
|
| 32 |
+
|
| 33 |
+
## परिच्छेद - १
|
| 34 |
+
### प्रारम्भिक
|
| 35 |
+
|
| 36 |
+
**१. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भः**
|
| 37 |
+
(१) यस ऐनको नाम "वित्तीय मध्यस्थताको काम गर्ने संस्था सम्बन्धी ऐन, २०४४" रहेको छ।
|
| 38 |
+
(२) यो ऐन नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी तोकिदिएको मितिदेखि प्रारम्भ हुनेछ।
|
| 39 |
+
|
| 40 |
+
**२. परिभाषाः**
|
| 41 |
+
विषय बा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
|
| 42 |
+
(क) "वित्तीय मध्यस्थता" भन्नाले यस ऐन बमोजिम लघुवचत सङ्गलन गर्ने तथा लघुकर्जा उपलब्ध गराउने काम सम्झनुपर्छ।
|
| 43 |
+
(ख) "संस्था" भन्नाले संस्था दर्ता ऐन, २०३४ अन्तर्गत दर्ता भई यस ऐन बमोजिम वित्तीय मध्यस्थताको काम गर्ने अनुमतिपत्र प्राप्त संस्था सम्झनुपर्छ।
|
| 44 |
+
(ग) "अनुमतिपत्र" भन्नाले दफा ४ बमोजिम वित्तीय मध्यस्थताको काम गर्न दिइएको अनुमतिपत्र सम्झनुपर्छ।
|
| 45 |
+
(घ) "बैङ्क" भन्नाले नेपाल राष्ट्र बैङ्क ऐन, २०४६ अन्तर्गत स्थापना भएको नेपाल राष्ट्र बैङ्क सम्झनुपर्छ।
|
| 46 |
+
(ङ) "लघुव्यवसाय" भन्नाले दशजना भन्दा कम व्यक्ति काममा संलग्न भई सञ्चालन हुने आयमूलक व्यवसाय सम्झनुपर्छ।
|
| 47 |
+
(च) "न्यून आय भएको व्यक्ति" भन्नाले बैङ्कले समय समयमा तोकेकोभन्दा कम आय भएको व्यक्ति सम्झनुपर्छ।
|
| 48 |
+
(छ) "समूह" भन्नाले तोकिएबमोजिमको प्रक्रिया पूरा गरी गठन गरिएको न्यून आय भएका व्यक्तिहरूको समूह सम्झनुपर्छ।
|
| 49 |
+
(ज) "सामूहिक जमानी" भन्नाले समूहको कुनै सदस्यले लिएको लघुकर्जाको भुक्तानी निजले नगरेमा त्यस्तो समूहको अन्य सदस्यहरूले सामूहिक रूपमा तिर्न मजुर गरी संस्थालाई लेखिदिएको जमानीको लिखत सम्झनुपर्छ।
|
| 50 |
+
(ज१) "लघुबचत" भन्नाले संस्थाको सदस्य रहेका न्यून आय भएको व्यक्ति बा व्यक्तिहरूको समूहबाट बैङ्कले समय समयमा तोकिदिए बमोजिम संस्थाले सङ्लन गर्ने बचत रकम सम्झनुपर्छ।
|
| 51 |
+
(झ) "लघुकर्जा" भन्नाले लघुव्यवसाय सञ्चालन गर्ने बैङ्कले समय समयमा तोकिदिए बमोजिमका सीमासम्म संस्थाले प्रदान गर्ने कर्जा सम्झनुपर्छ।
|
| 52 |
+
(ट) "ऋणी" भन्नाले संस्थासँग लघुकर्जा लिने समूह बा समूहको कुनै सदस्य सम्झनुपर्छ।
|
| 53 |
+
(ठ) "सुरक्षण" भन्नाले लघुकर्जा लिँदा प्रचलित कानून बमोजिम धितो, बन्धक बा अरू कुनै किसिमले लिखत गरिदिएको चल अचल सम्पत्ति सम्झनुपर्छ।
|
| 54 |
+
(ड) "कर्मचारी" भन्नाले संस्थामा पारिश्रमिक लिई बा नलिई काम गर्न संस्थाद्वारा नियुक्त व्यक्ति सम्झनुपर्छ र सो शब्दले संस्थाको पदाधिकारी समेतलाई जनाउनेछ।
|
| 55 |
+
(ढ) "तोकिएको" बा "तोकिए बमोजिम" भन्नाले यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बा विनियममा तोकिएको बा तोकिएबमोजिम सम्झनुपर्छ।
|
| 56 |
+
|
| 57 |
+
---
|
| 58 |
+
|
| 59 |
+
## परिच्छेद - २
|
| 60 |
+
### अनुमतिपत्र सम्बन्धी व्यवस्था
|
| 61 |
+
|
| 62 |
+
**३. अनुमतिपत्र नलिई वित्तीय मध्यस्थताको काम गर्न नहुने:**
|
| 63 |
+
यो ऐन प्रारम्भ भएपछि कसैले पनि अनुमतिपत्र नलिई यस ऐन बमोजिम वित्तीय मध्यस्थताको काम गर्न गराउन हुँदैन।
|
| 64 |
+
|
| 65 |
+
**४. अनुमतिपत्रका लागि निवेदन दिनुपर्नेः**
|
| 66 |
+
वित्तीय मध्यस्थताको काम गर्ने उद्देश्य राखी संस्था दर्ता ऐन, २०३४ अन्तर्गत दर्ता भएको संस्थाले यस ऐन बमोजिम वित्तीय मध्यस्थताको काम गर्न चाहेमा देहायको बिबरणहरू खुलाई तोकिएको ढाँचामा बैङ्क समक्ष निवेदन दिनुपर्नेछः
|
| 67 |
+
(क) संस्था दर्ता प्रमाणपत्र तथा संस्थाको विधान,
|
| 68 |
+
(ख) संस्थाका पदाधिकारीहरूको नाम, ठेगाना र पेशा,
|
| 69 |
+
(ग) संस्थाको कूल सदस्य सङ्ख्या,
|
| 70 |
+
(घ) संस्थाको चल अचल सम्पत्ति,
|
| 71 |
+
(ङ) संस्थाले वित्तीय मध्यस्थताको काम गर्न चाहेको भौगोलिक क्षेत्र,
|
| 72 |
+
(च) तोकिएबमोजिमका अन्य कुराहरू।
|
| 73 |
+
|
| 74 |
+
**५. अनुमतिपत्र दिनुपर्नेः**
|
| 75 |
+
(१) दफा ४ बमोजिम निवेदन पर्न आएमा बैङ्कले सो निवेदन उपर आवश्यक जाँचबुझ गर्नेछ र त्यसरी जाँचबुझ गर्दा थप जानकारी बा बिबरण लिन आवश्यक देखेमा त्यस्तो निवेदन दिने संस्थासँग थप जानकारी बा बिबरण माग गर्न सक्नेछ।
|
| 76 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम जाँचबुझ गर्दा बैङ्कले अनुमतिपत्र दिन उपयुक्त देखेमा तोकिएको दस्तुर लिई निवेदकलाई वित्तीय मध्यस्थताको काम गर्न तोकिएको ढाँचामा अनुमतिपत्र दिनुपर्नेछ।
|
| 77 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम अनुमतिपत्र दिंदा बा अस्वीकृत भएको जानकारी दिंदा निवेदन प्राप्त भएको मितिले बा उपदफा (१) बमोजिम थप जानकारी बा बिबरण माग गरिएकोमा त्यस्तो जानकारी बा बिबरण प्राप्त भएको मितिले चबढीमा पचहत्तर दिनभित्र दिनुपर्नेछ।
|
| 78 |
+
|
| 79 |
+
**६. शर्तहरू तोक्न सक्नेः**
|
| 80 |
+
(१) बैङ्कले दफा ४ बमोजिम अनुमतिपत्र प्रदान गर्दा वित्तीय मध्यस्थताको काम गर्दा संस्थाले पालना गर्नुपर्ने शर्तहरू तोक्न सक्नेछ।
|
| 81 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम तोकिएका शर्तहरू पालन गर्नु संस्थाको कर्तव्य हुनेछ।
|
| 82 |
+
|
| 83 |
+
**७. नवीकरण गर्नुपर्नेः**
|
| 84 |
+
(१) संस्थाले प्रत्येक दुई बर्षमा तोकिए बमोजिम बैङ्कबाट अनुमतिपत्र नवीकरण गराउनु पर्नेछ।
|
| 85 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको म्यादभित्र अनुमतिपत्र नवीकरण नगरेमा त्यस्तो अनुमतिपत्र स्वतः रद्द हुनेछ।
|
| 86 |
+
(३) अनुमतिपत्र नवीकरण सम्बन्धी अन्य व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 87 |
+
|
| 88 |
+
---
|
| 89 |
+
|
| 90 |
+
## परिच्छेद - ३
|
| 91 |
+
### संस्थाको काम, कर्तव्य र अधिकार
|
| 92 |
+
|
| 93 |
+
**८. संस्थाको काम, कर्तव्य र अधिकार:**
|
| 94 |
+
यस ऐनमा अन्यत्र लेखिएको काम, कर्तव्य र अधिकारको अतिरिक्त संस्थाका काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछः
|
| 95 |
+
(क) न्यून आय भएको व्यक्तिहरूलाई समूह गठन गर्न प्रोत्साहन गर्ने,
|
| 96 |
+
(क१) समूह बा समूह सदस्यबाट लघुबचत सङ्गलन गर्ने,
|
| 97 |
+
(ख) समूह बा समूहको सदस्यलाई लघुव्यवसाय सञ्चालन गर्न कुनै चलअचल सम्पत्ति सुरक्षण बा जमानत लिई बा नलिई लघुकर्जा दिने,
|
| 98 |
+
(ग) नेपाल सरकार बा बैङ्क बा स्वदेशी बा विदेशी संघ, संस्था आदिबाट ऋण बा अनुदान प्राप्त गर्ने र त्यस्तो ऋण बा अनुदान लघुकर्जा बितरणमा बा सो कार्यलाई प्रभावकारी बनाउने काममा प्रयोग गर्ने,
|
| 99 |
+
(घ) लघुकर्जा उपलब्ध गराउनु अघि जुन कार्यको लागि कर्जा माग भएको हो सो सम्बन्धी कार्यको मूल्यांकन गर्ने र त्यस्तो कार्यको सम्भाव्यता छ छैन पहिचान गर्ने,
|
| 100 |
+
(ङ) न्यून आय भएको व्यक्तिको आर्थिक स्थितिमा सुधार हुने खालका लघुव्यवसाय बारे प्रचारप्रसार गर्ने,
|
| 101 |
+
(च) लघुव्यवसायको सम्बन्धमा गोष्टी सञ्चालन गर्ने, प���ियोजना तर्जुमा गर्न प्रशिक्षण दिने, सहयोग गर्ने, प्राविधिक ज्ञान दिलाउने र आवश्यकता अनुसार प्राविधिक सहयोग जुटाउने,
|
| 102 |
+
(छ) लघुवचत तथा लघुकर्जा परिचालन सम्बन्धमा समूहलाई आवश्यक सेवा प्रदान गर्ने,
|
| 103 |
+
(ज) लघुकर्जा समयमा नै असुलउपर गर्नेतर्फ आवश्यक कारबाही गर्ने,
|
| 104 |
+
(झ) लघुकर्जाका उचित प्रयोग भए नभएको सम्बन्धमा समय समयमा जाँचबुझ गर्न र जाँचबुझ गर्दा उचित प्रयोग भएको नदेखिएमा आवश्यक निर्देशन दिने बा आवश्यक कारबाही गर्ने,
|
| 105 |
+
(ज) लघुवचत सङ्लन तथा लघुकर्जा वितरण सम्बन्धमा तोकिएबमोजिमको अन्य काम गर्ने,
|
| 106 |
+
(ट) बाणिज्य बैङ्क तथा वित्तीय संस्थाको एजेन्ट भई काम गर्ने।
|
| 107 |
+
|
| 108 |
+
**९. विवरण, तथ्याङ्क वा कागजात माग गर्न सक्नेः**
|
| 109 |
+
बैङ्कले संस्थासँग लघुवचत तथा लघुकर्जा सम्बन्धी कुनै विवरण, तथ्याङ्क वा कागजात माग गर्न सक्नेछ र त्यसरी माग गरिएको विवरण, तथ्याङ्क वा कागजात पेश गर्न सम्बन्धित संस्थाको कर्तव्य हुनेछ।
|
| 110 |
+
|
| 111 |
+
**१०. सम्झौता गर्नुपर्नेः**
|
| 112 |
+
(१) संस्थाले लघुकर्जा दिँदा सो कर्जाको सुरक्षण तथा उचित प्रयोगको लागि आवश्यकता अनुसार शर्तहरू राखी ऋणीसँग लिखित रूपमा सम्झौता गर्नुपर्नेछ।
|
| 113 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम सम्झौता गर्दा संस्थाले जतिसुकै अवधिको भाखा राख्न, संस्थाले तोकेको शर्त भङ्ग गरेमा ऋणीले लिएको साँवा व्याज फिर्ता बुझाउन लगाउन वा ऋणीले लिखत गरी दिएको सुरक्षण वा सामूहिक जमानीबाट असुलउपर गर्न सक्ने गरी शर्त तोक्न सक्नेछ।
|
| 114 |
+
|
| 115 |
+
**११. शर्त उल्लंघन गरेमा संस्थाको अधिकार:**
|
| 116 |
+
(१) कुनै ऋणीले संस्थासँग गरेको सम्झौता वा शर्त पालन नगरेमा वा लिखतको भाखाभित्र संस्थाको लघुकर्जा चुक्ता नगरेमा वा संस्थाले जाँचबुझ गर्दा लघुकर्जा लिएको रकम दुरूपयोग गरेको वा हिनामिना गरेको देखिएमा प्रचलित कानूनमा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि ऋणीले संस्थालाई लेखिदिएको वा संस्थामा राखेको सुरक्षणलाई प्रचलित कानून बमोजिम लिलाम बिक्री गरी साँवा व्याज असुलउपर गर्न सक्नेछ।
|
| 117 |
+
(२) ऋणीले संस्थामा राखेको सुरक्षण कुनै किसिमले अन्य व्यक्तिलाई हक छाडी दिएमा वा कुनै कारणबाट संस्थामा राखेको सुरक्षणको मूल्य घट्न गएमा प्रचलित कानूनमा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि संस्थाले तोकिदिएको म्यादभित्र ऋणीबाट सो बापत कर्जा खाम्ने गरी थप सुरक्षण राख्न लगाउन सक्नेछ। संस्थाले तोकेको म्यादभित्र ऋणीले त्यस्तो सुरक्षण राख्न नसकेमा संस्थाले आफ्नो सौंबा ब्याज सुरक्षण राखेको सम्पत्तिबाट लिलाम बिक्री गरी असुलउपर गर्न सक्नेछ।
|
| 118 |
+
(३) उपदफा (१) बा (२) बमोजिम संस्थाले लिलाम बिक्री गरी असुलउपर गर्दा त्यस्तो सुरक्षणबाट संस्थाको सौंबा ब्याजको पूरा रकम असुलउपर हुन नसकेमा समूहको कुनै सदस्यले व्यक्तिगत लघुकर्जा लिएकोमा सो सदस्यको र सामूहिक रूपमा लघुकर्जा लिएकोमा त्यस्तो समूहको सदस्यको अरू जायजेथाबाट संस्थाले लिलाम बिक्री गरी असुलउपर गर्न सक्नेछ।
|
| 119 |
+
(४) यस दफा बमोजिम लिलाम बिक्री गरी असुलउपर गरी आएको रकममध्ये सम्पत्ति लिलाम बिक्री गर्दा भएको खर्चको रकम र संस्थाको सौंबा ब्याजको रकम कट्टा गरी बाँकी रहन आएको रकम सम्बन्धित व्यक्तिलाई फिर्ता दिनुपर्नेछ।
|
| 120 |
+
(५) यस दफा बमोजिम संस्थाले लिलाम बिक्री गर्दा कसैले नसकारेमा तोकिए बमोजिम संस्थाले सो सम्पत्ति आफूले सकार गर्न सक्नेछ।
|
| 121 |
+
|
| 122 |
+
**१२. रजिष्ट्रेशन बा दाखिल खारेज गरिदिनुपर्नेः**
|
| 123 |
+
(१) सुरक्षणमा रहेको सम्पत्ति दफा ११ बमोजिम लिलाम बिक्री गर्दा कसैले लिलाम सकारेमा त्यस्तो व्यक्तिको नाममा र कसैले पनि लिलाम सकार नगरी संस्थाले सकार गरेकोमा संस्थाको नाममा सो जायजेथा प्रचलित कानून बमोजिम रजिष्ट्रेशन बा दाखिल खारेज गरिदिनको लागि संस्थाले सम्बन्धित मालपोत कार्यालयमा लेखी पटाउनेछ।
|
| 124 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम संस्थाबाट लेखी आएमा सम्बन्धित मालपोत कार्यालयले रजिष्ट्रेशन बा दाखिल खारेज गरी दिनुपर्नेछ।
|
| 125 |
+
|
| 126 |
+
---
|
| 127 |
+
|
| 128 |
+
## परिच्छेद - ४
|
| 129 |
+
### बैङ्कको काम, कर्तव्य र अधिकार
|
| 130 |
+
|
| 131 |
+
**१७. निरीक्षण बा जाँचबुझ गर्ने गराउन सक्नेः**
|
| 132 |
+
(१) बैङ्कले संस्थाको कार्यालय बा काम कारबाहीको सम्बन्धमा आवश्यकता अनुसार निरीक्षण बा जाँचबुझ गर्न गराउन सक्नेछ।
|
| 133 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम निरीक्षण बा जाँचबुझको सिलसिलामा सो निरीक्षण बा जाँचबुझ गर्ने व्यक्तिले मागेको कागजात बा विवरणहरू उपलब्ध गराउन सम्बन्धित संस्था तथा कर्मचारीको कर्तव्य हुनेछ।
|
| 134 |
+
(३) निरीक्षण बा जाँचबुझ सम्बन्धी अन्य व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 135 |
+
|
| 136 |
+
**१८. निर्देशन दिन सक्नेः**
|
| 137 |
+
(१) दफा १७ बमोजिम निरीक्षण बा जाँचबुझको सिलसिलामा संस्थाले देहायको कुनै काम कारबाही गरेको देखिएमा बैङ्कले निश्चित समय तोकी सो संस्थाले गर्ने कुनै काम कारबाहीको सम्बन्धमा सुधार गर्न बा कुनै खास व्यवस्था गर्न निर्देशन दिन सक्नेछः
|
| 138 |
+
(क) यस ऐन बमोजिम गर्नुपर्ने काम कारबाही नगरेको,
|
| 139 |
+
(ख) बचतकर्ता तथा ऋणीलाई प्रतिकूल हुने कुनै काम कारबाही गरेको,
|
| 140 |
+
(ग) आफ्नो बहीखाता, हरहिसाब बा कागजातहरू उचित ढङ्गले नराखेको पाइएको,
|
| 141 |
+
(घ) बैङ्कले तोकेको शर्तहरू तथा दिएको निर्देशनहरू पालन नगरेको,
|
| 142 |
+
(ङ) संस्थाको रकम हिनामिना गरेको बा प्राप्त रकम यस ऐनको उद्देश्य विपरीतको काममा लगाएको,
|
| 143 |
+
(च) यस ऐन बमोजिम मागिएको बिबरण, तथ्याङ्क बा कागजात उपलब्ध नगराएको।
|
| 144 |
+
(२) बैङ्कले यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बमोजिम संस्थाले गर्नुपर्ने कुराहरूको सम्बन्धमा संस्थालाई समय समयमा निर्देशन दिन सक्नेछ र त्यस्तो निर्देशनको पालना गर्नु सम्बन्धित संस्थाको कर्तव्य हुनेछ।
|
| 145 |
+
|
| 146 |
+
**१९. अनुमतिपत्र खारेज गर्न सक्नेः**
|
| 147 |
+
(१) कुनै संस्थाले दफा १८ बमोजिम दिएको निर्देशनको उल्लंघन गरेमा बैङ्कले सुधारको लागि सचेत गराउन बा सो संस्थाको कुनै कार्यमा बन्देज लगाउन सक्नेछ। यस्तो निर्देशनको तीन पटक उल्लङ्घन गरेमा बा देहायको कुनै काम कारबाही गरेमा बैङ्कले त्यस्तो संस्थाको अनुमतिपत्र निलम्बन बा खारेज गर्न सक्नेछः
|
| 148 |
+
(क) वित्तीय मध्यस्थताको काम गर्न छाडेमा,
|
| 149 |
+
(ख) संस्थाको रकम हिनामिना गरेमा बा जुन उद्देश्यको लागि रकम प्राप्त गरेको हो सो काममा नलगाएमा,
|
| 150 |
+
(ग) बैङ्कले समय तोकी कुन काम कारबाहीको सम्बन्धमा सुधार गर्न बा कुनै खास व्यवस्था गर्न निर्देशन दिएकोमा सो अनुरूप काम नगरेमा,
|
| 151 |
+
(घ) संस्था दर्ता ऐन, २०३४ र यस ऐनका दफा ७ बमोजिम नवीकरण नगराएमा।
|
| 152 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम अनुमतिपत्र खारेज गर्ने आदेश दिनु अघि बैङ्कले आवश्यक देखेमा सो सम्बन्धमा आवश्यक जाँचबुझ बा छानबीन गराउन सक्नेछ।
|
| 153 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम अनुमतिपत्र खारेज गर्नु अघि बैङ्कले सम्बन्धित संस्थालाई स्पष्टीकरण पेश गर्ने मौका दिनेछ।
|
| 154 |
+
|
| 155 |
+
**२०. वित्तीय मध्यस्थताको काम गर्नमा रोक लगाउन सक्नेः**
|
| 156 |
+
कुनै संस्थाले दफा १८ बमोजिमको कुनै काम कारबाही गरेको कारणबाट सो संस्थालाई यथाबत् रूपमा वित्तीय मध्यस्थताको काम गर्न दिइरहनु उचित नदेखिएमा बैङ्कले त्यस्तो संस्थालाई आवश्यक सुधार गर्न मौका दिई निश्चित अवधिको लागि वित्तीय मध्यस्थताको काम गर्नबाट रोक लगाउन सक्नेछ।
|
| 157 |
+
|
| 158 |
+
**२१. वित्तीय मध्यस्थताको कामबाट फुर्सद लिनदिनेः**
|
| 159 |
+
कुनै संस्थाले वित्तीय मध्यस्थताको काम गर्नबाट फुर्सद पाउँ भनी बैङ्क समक्ष निवेदन दिएमा त्यस्तो संस्थाले तिर्नुपर्ने सम्पूर्ण दायित्व चुक्ता गरेको देखिएमा बैङ्कले त्यस्तो संस्थालाई वित्तीय मध्यस्थताको काम गर्नबाट फुर्सद दिन सक्नेछ।
|
| 160 |
+
तर त्यस्तो संस्थाले सम्पूर्ण दायित्व चुक्ता गर्न नसकेको अवस्थामा बैङ्कले त्यस्तो संस्थालाई वित्तीय मध्यस्थता सम्बन्धी काम गर्नबाट रोक लगाई संस्था दर्ता ऐन, २०३४ बमोजिम सो संस्थाको जायजेथाबाट दायित्व भुक्तानी गर्नको लागि नेपाल सरकार समक्ष लेखी पटाउनु पर्नेछ।
|
| 161 |
+
|
| 162 |
+
**२१क. पदाधिकारीको घरघरानाबाट असुलउपर गरिनेः**
|
| 163 |
+
संस्थाको कुनै पदाधिकारीले व्यक्तिगत स्वार्थ बा यस ऐनको उद्देश्य विपरीत बदनियतपूर्ण तरिकाले वित्तीय मध्यस्थताको काम कारबाही गरे गराएमा बा संस्थाको रकम हिनामिना गरेमा बैङ्कले त्यस्ता पदाधिकारीको घरघराना बा उसको नाम र स्वामित्वमा नेपालमा रहेको चल अचल सम्पत्तिबाट त्यस्तो हिनामिना भएको रकम असुलउपर गर्ने गराउनेछ।
|
| 164 |
+
|
| 165 |
+
---
|
| 166 |
+
|
| 167 |
+
## परिच्छेद - ५
|
| 168 |
+
### संस्थाको कोष, लेखा र लेखापरीक्षण
|
| 169 |
+
|
| 170 |
+
**२४. संस्थाको कोष:**
|
| 171 |
+
(१) संस्थाको एउटा छुट्टै कोष हुनेछ र सो कोषमा देहायको रकमहरू रहनेछन्ः
|
| 172 |
+
(क) नेपाल सरकार, प्रदेश सरकार बा बैङ्क बा स्वदेशी बा विदेशी संघ, संस्था आदिबाट अनुदान बा ऋण स्वरूप प्राप्त रकम,
|
| 173 |
+
(क१) लघुवचत सङ्लन गरी प्राप्त गरेको रकम,
|
| 174 |
+
(क२) बाणिज्य बैङ्क बा वित्तीय संस्थाबाट प्राप्त गरेको रकम।
|
| 175 |
+
(ख) संस्थाको सदस्यहरूबाट प्राप्त शुल्कमध्ये तोकिए बमोजिमको रकम,
|
| 176 |
+
(ग) संस्थाले प्रदान गरेको सेवा बापत प्राप्त सेवा शुल्कको रकम,
|
| 177 |
+
(घ) लघुकर्जाबाट प्राप्त ब्याज, शुल्क आदि रकम,
|
| 178 |
+
(ङ) अन्य श्रोतबाट प्राप्त रकम।
|
| 179 |
+
(२) संस्थाको नामबाट गरिने सबै खर्चहरू उपदफा (१) बमोजिमको कोषबाट व्यहोरिनेछ।
|
| 180 |
+
(३) लघुवचतबाट सङ्लन भएको तथा लघुकर्जाको लागि प्राप्त रकम अन्य प्रयोजनको लागि खर्च गर्न पाइने छैन।
|
| 181 |
+
(४) कोषको रकम कुनै बाणिज्य बैङ्क बा वित्तीय संस्थामा खाता खोली जम्मा गरिनेछ र त्यस्तो खाताको सञ्चालन तोकिएबमोजिम हुनेछ।
|
| 182 |
+
(५) संस्थाले तत्काल लघुकर्जा प्रवाह गर्न सक्ने स्थिति नभएको खण्डमा बैङ्कको स्वीकृति लिई बढीमा छ महिनासम्मको लागि आवधिक निक्षेपमा लगानी गर्न सक्नेछ।
|
| 183 |
+
|
| 184 |
+
**२५. जोखिम व्यहोर्ने कोष:**
|
| 185 |
+
(१) संस्थाले लघुकर्जा प्रवाह गर्दा हुने सम्भावित हानी नोक्सानी व्यहोर्ने प्रयोजनको लागि दफा २४ मा उल्लिखित कोषको अतिरिक्त जोखिम व्यहोर्ने एउटा छुट्टै कोष ���डा गर्नेछ र सो कोषमा प्रत्येक आर्थिक बर्षको अन्तिम दिनसम्म लगानीमा रहिरहेका बाँकी कूल कर्जा रकमको तोकिएबमोजिम हुने रकम जम्मा गर्नुपर्नेछ।
|
| 186 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम कोषमा जम्मा भएको रकम संस्थाले नेपाल सरकार बा बैङ्कको धितोपत्रमा बा बाणिज्य बैङ्क बा वित्तीय संस्थाको आवधिक निक्षेपमा लगानी गर्न सक्नेछ।
|
| 187 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम कोषमा जम्मा भएको रकम लघुकर्जा मिनाहा गर्ने कार्यको लागि मात्र प्रयोग गर्नुपर्नेछ। त्यसरी लघुकर्जा मिनाहा गर्नु परेमा संस्थाले बैङ्कको स्वीकृति लिनुपर्नेछ।
|
| 188 |
+
|
| 189 |
+
**२६. संस्थाको हिसाब र लेखापरीक्षण:**
|
| 190 |
+
(१) संस्थाले वित्तीय मध्यस्थता सम्बन्धी कामको हिसाब छुट्टै राख्नु पर्नेछ र प्रत्येक आर्थिक बर्षको बासलात तयार गरी सो आर्थिक बर्ष समाप्त भएको छ महिनाभित्र संस्थाको साधारण सभाले नियुक्त गरेको कुनै मान्यता प्राप्त लेखापरीक्षकद्वारा लेखापरीक्षण गराउनु पर्नेछ।
|
| 191 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम लेखापरीक्षक नियुक्त गर्दा एउटै व्यक्ति बा फर्मलाई लगातार तीन पटकभन्दा बढी नियुक्त गर्नु हुँदैन।
|
| 192 |
+
(३) लेखापरीक्षकको पारिश्रमिक संस्थाको साधारण सभाले तोकिदिएबमोजिम हुनेछ।
|
| 193 |
+
(४) बैङ्कले चाहेमा संस्थाको हिसाब किताब जुनसुकै बखत जाँच्न बा जचाउन सक्नेछ।
|
| 194 |
+
|
| 195 |
+
---
|
| 196 |
+
|
| 197 |
+
## परिच्छेद - ६
|
| 198 |
+
### सजाय
|
| 199 |
+
|
| 200 |
+
**२७. सजाय:**
|
| 201 |
+
(१) कसैले यस ऐन बमोजिम अनुमतिपत्र नलिई वित्तीय मध्यस्थताको काम गरेमा त्यस्तो व्यक्तिलाई बीस हजार रूपैयाँसम्म जरिबाना बा छ महिनासम्म कैद बा दुबै सजाय हुनेछ। कुनै संस्थाले त्यस्तो काम गरेको भए त्यस्तो संस्थाको काम काज गर्ने पदाधिकारीलाई सो सजाय हुनेछ।
|
| 202 |
+
(२) कुनै संस्थाले यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बा बैङ्कले दिएको आदेश बा निर्देशनको पालना नगरेमा बा यस ऐन बमोजिम मागिएको कुनै बिबरण बा कागजात नदिएमा बा पेश नगरेमा बा जानाजान झुटो सूचना दिएमा सो कामबाट कुनै हानि नोक्सानी भएको रहेछ भने सम्बन्धित कर्मचारीबाट बिगो असुलउपर गरी निजलाई दश हजार रूपैयाँसम्म जरिबाना बा छ महिनासम्म कैद बा दुबै सजाय हुनेछ।
|
| 203 |
+
(३) संस्थाको कुनै कर्मचारीले संस्थाको नगद बा जिन्सी मासेमा बा निजी काममा प्रयोग गरेमा त्यस्तो कर्मचारीबाट बिगो असुलउपर गरी निजलाई पाँच बर्षसम्म कैद बा बिगो बमोजिम जरिबाना बा दुबै सजाय हुनेछ।
|
| 204 |
+
(४) संस्थाको कुनै कर्मचारीले ऋणीलाई टगन बा गैर कानूनी किसिमबाट मर��का पार्ने बा दुःख दिने काम गरेमा निजलाई बैङ्क बा सम्बन्धित पक्षले प्रचलित कानून बमोजिम कारबाही चलाउन सक्नेछ।
|
| 205 |
+
|
| 206 |
+
**२८. प्रचलित कानून बमोजिम कारबाही गर्न सकिनेः**
|
| 207 |
+
कुनै संस्थाले प्रचलित कानून बमोजिम सजाय हुने कुनै काम गरेमा त्यस्तो संस्थालाई सो बमोजिम कारबाही गर्न यस ऐनले बाधा पुर्याएको मानिने छैन।
|
| 208 |
+
|
| 209 |
+
---
|
| 210 |
+
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| 211 |
+
## परिच्छेद - ७
|
| 212 |
+
### विविध
|
| 213 |
+
|
| 214 |
+
**२९. रजिष्ट्रेशन दस्तुर बा आय टिकट नलाग्नेः**
|
| 215 |
+
संस्थाले ऋणीबाट सुरक्षण बापत लिएको सम्पत्ति संस्थाको नाममा पारित गराई लिँदा बा संस्थाले कुनै अचल सम्पत्ति खरिद बिक्री गर्दा त्यस्तो कारोबारमा रजिष्ट्रेशन दस्तुर बा आय टिकट लाग्ने छैन।
|
| 216 |
+
|
| 217 |
+
**३०. आयकर छुट:**
|
| 218 |
+
नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी संस्थाले आर्जन गरेको आयमा पूर्ण बा आंशिक रूपमा आयकर नलाग्ने गरी छुट दिन सक्नेछ।
|
| 219 |
+
|
| 220 |
+
**३१. बार्षिक प्रतिवेदन पेश गर्नुपर्नेः**
|
| 221 |
+
संस्थाले प्रत्येक आर्थिक बर्ष समाप्त भएको तीन महिनाभित्र आफ्नो नाफा नोक्सानको बिबरण सहित वित्तीय मध्यस्थता सम्बन्धमा आफूले गरेको काम कारबाहीको प्रारम्भिक बार्षिक प्रतिवेदन बैङ्क समक्ष पेश गर्नुपर्नेछ।
|
| 222 |
+
|
| 223 |
+
**३२. बैङ्कसँग परामर्श गर्नुपर्नेः**
|
| 224 |
+
संस्था दर्ता ऐन, २०३४ बमोजिम संस्थालाई खारेज गर्नु अघि बैङ्कसँग परामर्श गर्नुपर्नेछ।
|
| 225 |
+
|
| 226 |
+
**३३क. गाभ्न बा गाभिन सक्नेः**
|
| 227 |
+
(१) संस्था दर्ता ऐन, २०३४ मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि यस ऐन बमोजिम वित्तीय मध्यस्थताको काम गरिरहेको संस्थाको साधारण सभामा उपस्थित सदस्य सङ्ख्याको दुई तिहाई सदस्यहरूले अर्को संस्था आफूमा गाभ्न बा आफ्नो संस्था अरूमा गाभिने प्रस्तावमा समर्थन गरेमा सो प्रस्ताव साधारण सभाबाट पारित भएको मानिनेछ।
|
| 228 |
+
तर यस ऐन बमोजिम वित्तीय मध्यस्थताको काम नगरेको संस्थासँग गाभ्ने बा गाभिने गरी प्रस्ताव पारित गर्न पाइने छैन।
|
| 229 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम पारित भएको प्रस्ताव गाभिने संस्था दर्ता गर्ने कार्यालय र बैङ्कमा पेश गरी सो कार्यालय र बैङ्कबाट छुट्टाछुट्टै स्वीकृति प्राप्त भएपछि त्यस्तो संस्थाको कानूनी अस्तित्व स्वतः समाप्त भएको मानिनेछ।
|
| 230 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम गाभिने संस्थाको सम्पत्ति गाभ्ने संस्थामा सर्नेछ र सो संस्थाको सम्पूर्ण दायित्व गाभ्ने संस्थाले व्यहोर्नु पर्नेछ।
|
| 231 |
+
|
| 232 |
+
**३४. असल नियतले गरेको कामको बचाऊ:**
|
| 233 |
+
यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियमको अधीनमा रही असल नियतले गरेको कुनै काम कारबाहीको सम्बन्धमा संस्थाको सदस्य बा कर्मचारीहरू व्यक्तिगत बा सामूहिक रूपमा जबाफदेही हुने छैनन्।
|
| 234 |
+
|
| 235 |
+
**३५. प्रचलित कानून बमोजिम हुने:**
|
| 236 |
+
प्रचलित कानूनमा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा लेखिएकोमा सोही बमोजिम र अरूमा प्रचलित कानून बमोजिम हुनेछ।
|
| 237 |
+
|
| 238 |
+
**३६. नियम बनाउने अधिकार:**
|
| 239 |
+
यस ऐनको उद्देश्य कार्यान्वयन गर्न बैङ्कले आवश्यक नियम बनाउन सक्नेछ र त्यस्तो नियम नेपाल सरकारबाट स्वीकृत भएपछि लागू हुनेछ।
|
| 240 |
+
|
| 241 |
+
**३७. विनियम बनाउन सक्नेः**
|
| 242 |
+
संस्थाले आफ्नो कार्य सञ्चालनको लागि यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियमको अधीनमा रही आवश्यकता अनुसार विनियम बनाउन सक्नेछ र त्यस्तो विनियम बैङ्कबाट स्वीकृत भएपछि लागू हुनेछ।
|
| 243 |
+
|
| 244 |
+
---
|
| 245 |
+
|
| 246 |
+
### दृष्टव्य:
|
| 247 |
+
१. वित्तीय मध्यस्थताको काम गर्ने संस्था सम्बन्धी पहिलो संशोधन ऐन, २०४६ द्वारा रूपान्तर गरिएका शब्दहरू:
|
| 248 |
+
"आय तथा रोजगार मूलक व्यवसाय" को सट्टा "लघु व्यवसाय"।
|
| 249 |
+
|
| 250 |
+
२. केही नेपाल कानुन संशोधन गर्ने ऐन, २०६३ द्वारा रूपान्तर गरिएका शब्द:
|
| 251 |
+
"श्री ४ को सरकार" को सट्टा "नेपाल सरकार"।
|
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| 1 |
+
# निवृत्तभरण कोष ऐन, २०७४
|
| 2 |
+
|
| 3 |
+
**प्रमाणीकरण मिति**
|
| 4 |
+
२०७४।१२।०४
|
| 5 |
+
सुशासन प्रबर्धन तथा सार्वजनिक सेवा प्रवाह सम्बन्धी केही नेपाल ऐनलाई संशोधन गर्ने ऐन, २०६१
|
| 6 |
+
|
| 7 |
+
२०६१।१२।१६
|
| 8 |
+
संबत् २०७४ सालको ऐन नं. ३०
|
| 9 |
+
|
| 10 |
+
## निवृत्तभरण कोष सम्बन्धमा व्यवस्था गर्न बनेको ऐन
|
| 11 |
+
|
| 12 |
+
**प्रस्तावना:**
|
| 13 |
+
सरकारी कर्मचारीको लागि योगदानमूलक निवृत्तभरण प्रणाली लागू गर्न तथा प्रचलित कानून बमोजिम सरकारी कोषबाट निवृत्तभरण पाउने गरी नियुक्त भएका कर्मचारीले अबकाश पछि पाउने निवृत्तभरण वा उपदान रकमलाई व्यवस्थित गर्ने सम्बन्धमा निवृत्तभरण कोषको स्थापना तथा सञ्चालन गर्न बाञ्छुनीय भएकोले,
|
| 14 |
+
संघीय संसद्ले यो ऐन बनाएको छ।
|
| 15 |
+
|
| 16 |
+
---
|
| 17 |
+
|
| 18 |
+
### परिच्छेद-१
|
| 19 |
+
**प्रारम्भिक**
|
| 20 |
+
|
| 21 |
+
**१. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भ:**
|
| 22 |
+
(१) यस ऐनको नाम "निवृत्तभरण कोष ऐन, २०७४" रहेको छ।
|
| 23 |
+
(२) यो ऐन तुरुन्त प्रारम्भ हुनेछ।
|
| 24 |
+
|
| 25 |
+
**२. परिभाषा:**
|
| 26 |
+
विषय वा प्रसहले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
|
| 27 |
+
(क) "अध्यक्ष" भन्नाले समितिको अध्यक्ष सम्झनु पर्छ।
|
| 28 |
+
(ख) "अबकाश" भन्नाले कर्मचारीको सेबाका शर्त सम्बन्धी कानून बमोजिम उमेर वा सेवा अबधिको कारण हुने अबकाश सम्झनु पर्छ र सो शब्दले जुनसुकै कारणले सेवा निवृत्त भएको अवस्थालाई समेत जनाउँछ।
|
| 29 |
+
(ग) "कर्मचारी" भन्नाले दफा ९ बमोजिम योगदानमूलक निवृत्तभरण प्रणालीमा आबद्ध हुने सरकारी कर्मचारी सम्झनु पर्छ।
|
| 30 |
+
(घ) "कार्यालय" भन्नाले योगदानमूलक निवृत्तभरण प्रणालीमा आबद्ध हुने कर्मचारी कार्यरत रहेको सरकारी सेबासँग सम्बन्धित कार्यालय सम्झनु पर्छ।
|
| 31 |
+
(ङ) "कोष" भन्नाले दफा ३ बमोजिम स्थापना भएको निवृत्तभरण कोष सम्झनु पर्छ।
|
| 32 |
+
(च) "तोकिएको" बा "तोकिए बमोजिम" भन्नाले यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा तोकिएको बा तोकिए बमोजिम सम्झनु पर्छ।
|
| 33 |
+
(छ) "मन्त्रालय" भन्नाले नेपाल सरकारको अर्थ मन्त्रालय सम्झनु पर्छ।
|
| 34 |
+
(ज) "योगदानमूलक निवृत्तभरण प्रणाली" भन्नाले कर्मचारीको मासिक तलबबाट रकम कट्टा गरी कोषमा जम्मा गर्ने तथा सो कोषमा नेपाल सरकारका तर्फबाट थप गरिने रकम र अबकाश हुँदा सोही कोषबाट निवृत्तभरण बा रकम प्रदान गर्ने प्रणाली सम्झनु पर्छ।
|
| 35 |
+
(झ) "व्यक्तिगत खाता" भन्नाले दफा ११ बमोजिम कर्मचारीको नाममा रहेको व्यक्तिगत निवृत्तभरण खाता सम्झनु पर्छ।
|
| 36 |
+
(ट) "सदस्य" भन्नाले समितिको सदस्य सम्झनु पर्छ र सो शब्दले अध्यक्ष तथा सदस्य-सचिबलाई समेत जनाउँछ।
|
| 37 |
+
(ठ) "समिति" भन्नाले दफा ६ ब���ोजिमको कोषको सञ्चालक समिति सम्झनु पर्छ।
|
| 38 |
+
(ड) "सेबा" भन्नाले यस ऐन बमोजिम योगदानमूलक निवृत्तभरण प्रणालीमा समावेश भएका कर्मचारीको सेबा शर्त सम्बन्धी प्रचलित कानून बमोजिमको सेबा सम्झनु पर्छ।
|
| 39 |
+
|
| 40 |
+
---
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| 41 |
+
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| 42 |
+
### परिच्छेद-२
|
| 43 |
+
**कोषको स्थापना**
|
| 44 |
+
|
| 45 |
+
**३. कोषको स्थापनाः**
|
| 46 |
+
(१) कर्मचारीलाई निवृत्तभरण लगायतको रकम उपलब्ध गराउने प्रयोजनको लागि निवृत्तभरण कोष नामको एक कोषको स्थापना गरिनेछ।
|
| 47 |
+
(२) कोषको केन्द्रीय कार्यालय काठमाडौं उपत्यकामा रहनेछ र कोषले आवश्यकता अनुसार प्रदेश स्तरीय कार्यालय बा शाखा कार्यालय खोल्न तथा कुनै टाउँमा कोषको कामको लागि प्रतिनिधि नियुक्त गर्न सक्नेछ।
|
| 48 |
+
|
| 49 |
+
**४. कोष स्वशासित र सङटित संस्था हुने:**
|
| 50 |
+
(१) कोष अविच्छिन्न उत्तराधिकारबाला एक स्वशासित र सङटित संस्था हुनेछ।
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| 51 |
+
(२) कोषको काम कारबाहीको निमित्त आफ्नो एउटा छुट्टै छाप हुनेछ।
|
| 52 |
+
(३) कोषले यस ऐनको अधीनमा रही चल अचल सम्पत्ति प्राप्त गर्न, उपभोग गर्न, सज्रय गर्न, बेच बिखन गर्न र त्यस्तै अन्य किसिमले व्यवस्था गर्न सक्नेछ।
|
| 53 |
+
(४) कोषले आफ्नो नामबाट नालिस उजूर गर्न र कोष उपर पनि सोही नामबाट नालिस उजूर लाग्न सक्नेछ।
|
| 54 |
+
|
| 55 |
+
**५. कोषमा रहने रकम:**
|
| 56 |
+
(१) कोषमा देहाय बमोजिमको रकम रहनेछः-
|
| 57 |
+
(क) कर्मचारीको मासिक तलबबाट दफा १० बमोजिम कट्टा गरिएको रकम,
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| 58 |
+
(ख) यो ऐन प्रारम्भ हुनुअघि दफा १६ बमोजिमको सेबामा निवृत्तभरण पाउने गरी नियुक्त भएका कर्मचारी तथा सामुदायिक बिघालयका शिक्षकलाई निवृत्तभरण तथा उपदान उपलब्ध गराउने प्रयोजनको लागि नेपाल सरकारले बार्षिक रुपमा उपलब्ध गराएको रकम,
|
| 59 |
+
(ग) कोषको रकम लगानीबाट प्राप्त ब्याज, लाभांश तथा मुनाफा समेतको रकम,
|
| 60 |
+
(घ) योगदानमूलक निवृत्तभरण प्रणाली सञ्चालनको लागि कोषलाई प्राप्त अन्य रकम,
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| 61 |
+
(ङ) नेपाल सरकारले प्रयोजन तोकी उपलब्ध गराएको रकम।
|
| 62 |
+
(२) कर्मचारीलाई निवृत्तभरण लगायतको रकम उपलब्ध गराउने कार्यलाई सहज तथा दिगो बनाउन नेपाल सरकारले समय समयमा कोषमा थप रकम उपलब्ध गराउनेछ।
|
| 63 |
+
(३) उपदफा (१) बा (२) बमोजिम कोषलाई प्राप्त भएको रकम समितिले तोकेको नेपाल राष्ट्र बैङ्बाट इजाजत प्राप्त "क" बर्गको बाणिज्य बैङ्कमा खाता खोली जम्मा गरिनेछ।
|
| 64 |
+
|
| 65 |
+
---
|
| 66 |
+
|
| 67 |
+
### परिच्छेद-३
|
| 68 |
+
**सञ्चालक समिति सम्बन्धी व्यवस्था**
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| 69 |
+
|
| 70 |
+
**६. सञ्चालक समितिको गठन:**
|
| 71 |
+
(१) कोषको तर्फबाट गर्नुपर्ने सम्पूर्ण कामका लागि एक कोष सञ्चालक समिति रहनेछ।
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| 72 |
+
(२) समितिको गठन देहाय ब��ोजिम हुनेछः-
|
| 73 |
+
(क) नेपाल सरकारले तोकेको बिशिष्ट श्रेणीको अधिकृत - अध्यक्ष
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| 74 |
+
(ख) सहसचिव, मन्त्रालय - सदस्य
|
| 75 |
+
(ग) सहसचिव, कानून, न्याय तथा संसदीय मामिला मन्त्रालय - सदस्य
|
| 76 |
+
(घ) सहसचिव, कर्मचारी प्रशासन सम्बन्धी विषय हेर्ने नेपाल सरकारको मन्त्रालय - सदस्य
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| 77 |
+
(ङ) कार्यकारी निर्देशक - सदस्य-सचिव
|
| 78 |
+
|
| 79 |
+
**७. समितिको बैठक र निर्णय:**
|
| 80 |
+
(१) समितिको बैठक कम्तीमा दुई महिनामा एकपटक अध्यक्षले तोकेको मिति, समय र स्थानमा बस्नेछ।
|
| 81 |
+
(२) समितिको सदस्य-सचिबले बैठकमा छलफल हुने बिषय सहितको सूची बैठक बस्नुभन्दा कम्तीमा चौबीस घण्टा अगाडि सबै सदस्यलाई उपलब्ध गराउनु पर्नेछ।
|
| 82 |
+
(३) अध्यक्ष सहित तीनजना सदस्य उपस्थित भएमा समितिको बैठकको लागि गणपूरक सङ्ख्या पुगेको मानिनेछ।
|
| 83 |
+
(४) समितिको बैठकको अध्यक्षता अध्यक्षले गर्नेछ र निजको अनुपस्थितिमा उपस्थित सदस्यहरुमध्येबाट तोकेको सदस्यले बैठकको अध्यक्षता गर्नेछ।
|
| 84 |
+
(५) समितिको बैठकमा उपस्थित सदस्यको बहुमतको राय मान्य हुनेछ र मत बराबर भएमा अध्यक्षले निर्णायक मत दिनेछ।
|
| 85 |
+
(६) समितिको निर्णय सदस्य-सचिबले प्रमाणित गर्नेछ।
|
| 86 |
+
(७) समितिले बैठकमा कुनै बिज बा नेपाल सरकारको कुनै पदाधिकारीलाई आमन्त्रण गर्न सक्नेछ।
|
| 87 |
+
(८) समितिको बैठक सम्बन्धी अन्य व्यवस्था समिति आफैले निर्धारण गरे बमोजिम हुनेछ।
|
| 88 |
+
(९) अध्यक्ष तथा सदस्यले समितिको बैठकमा भाग लिए बापत तोकिए बमोजिमको बैठक भत्ता पाउने छन्।
|
| 89 |
+
|
| 90 |
+
**८. समितिको काम, कर्तव्य र अधिकार:**
|
| 91 |
+
यस ऐनमा अन्यत्र उल्लिखित काम, कर्तव्य र अधिकारको अतिरिक्त समितिको अन्य काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछः-
|
| 92 |
+
(क) योगदानमूलक निवृत्तभरण प्रणालीलाई भरपर्दो र प्रभावकारी बनाउन आवश्यक नीति तर्जुमा गरी नेपाल सरकार समक्ष पेश गर्ने,
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| 93 |
+
(ख) कोषको बार्षिक कार्यक्रम तथा योजना स्वीकृत गर्ने,
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| 94 |
+
(ग) कोषको पूँजी व्यवस्थापन र लगानीका आधार (नर्मस) तथा मापदण्ड निर्धारण गर्ने,
|
| 95 |
+
(घ) कोषलाई दिगो, भरपर्दो र व्यवस्थित बनाउन आवश्यक कार्य गर्ने,
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| 96 |
+
(ङ) यस ऐन बमोजिम निवृत्तभरण बा उपदान उपलब्ध गराउनु पर्ने कर्मचारीलाई सरल ढङले रकम पाउने व्यवस्था गर्ने,
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| 97 |
+
(च) मितव्ययी र व्यवस्थित रुपमा कोषको सञ्चालन गर्ने,
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| 98 |
+
(छ) सरकारी कर्मचारी बाहेकका कर्मचारीलाई योगदानमूलक निवृत्तभरण प्रणालीमा आवद्ध गर्ने सम्बन्धमा आवश्यक अध्ययन तथा अनुसन्धान गर्ने, गराउने,
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| 99 |
+
(ज) तोकिए बमोजिमका अन्य कार्यहरु गर्ने।
|
| 100 |
+
|
| 101 |
+
---
|
| 102 |
+
|
| 103 |
+
### परिच्छेद-४
|
| 104 |
+
**योगदानमूलक निवृत्तभरण प्रणाली सम्बन्धी व्यवस्था**
|
| 105 |
+
|
| 106 |
+
**९. योगदानमूलक निवृत्तभरण प्रणालीमा समावेश गरिने:**
|
| 107 |
+
यो ऐन प्रारम्भ भएपछि देहायका सरकारी सेबामा स्थायी रुपमा नियुक्त हुने कर्मचारीलाई दफा १० बमोजिम कोषमा योगदान गर्ने गरी योगदानमूलक निवृत्तभरण प्रणालीमा समावेश गरिनेछः-
|
| 108 |
+
(क) निजामती सेबा,
|
| 109 |
+
स्पष्टीकरण: यस खण्ड तथा दफा १६ को उपदफा (१) को खण्ड (क) को प्रयोजनका लागि "निजामती सेबा" भन्नाले नेपाल स्वास्थ्य सेबा तथा व्यवस्थापिका-संसद सेबा समेत सम्झनु पर्छ।
|
| 110 |
+
(क१) शिक्षक सेबा,
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| 111 |
+
स्पष्टीकरण: यस खण्ड बमोजिमको व्यवस्था संबत् २०६२ साल बैशाख १ गतेदेखि प्रारम्भ हुनेछ।
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| 112 |
+
(ख) नेपाली सैनिक सेवा, नेपाल प्रहरी सेवा, सशस्त्र प्रहरी बल, नेपालको सेवा र नेपाल विशेष सेवा।
|
| 113 |
+
|
| 114 |
+
**१०. निवृत्तभरण कोषमा कर्मचारीको योगदान:**
|
| 115 |
+
(१) कार्यालयले कर्मचारीको मासिक तलबबाट छ प्रतिशतले हुन आउने रकम कट्टा गरी सोमा नेपाल सरकारको तर्फबाट शतप्रतिशत रकम थप गरी कोषमा जम्मा गर्नु पर्नेछ।
|
| 116 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि कुनै कर्मचारी बेतलबि बा असाधारण विदामा रहेको बा निलम्बन भएकोमा त्यस्तो विदामा रहेको बा निलम्बन भएको अबधिभर कोषमा रकम जम्मा गरिने छैन।
|
| 117 |
+
तर त्यस्तो कर्मचारीलाई लगाइएको अभियोग प्रमाणित नभई निलम्बन फुकुवा भएमा कार्यालयले निजले पाउने तलब बापतको रकमबाट कट्टा गरी निलम्बनमा रहेको अबधिको उपदफा (१) बमोजिमको एकमुष्ट रकम कोषमा जम्मा गर्नु पर्नेछ।
|
| 118 |
+
(३) कोषले यस दफा बमोजिम कार्यालयबाट प्राप्त भएको रकम तोकिएको अबधिभित्र कर्मचारीको व्यक्तिगत खातामा नियमित रुपले जम्मा गर्नु पर्नेछ।
|
| 119 |
+
|
| 120 |
+
**११. कर्मचारीको व्यक्तिगत निवृत्तभरण खाता:**
|
| 121 |
+
(१) प्रत्येक कर्मचारीको लागि कोषमा छुट्टै व्यक्तिगत निवृत्तभरण खाता रहनेछ।
|
| 122 |
+
(२) कोषले दफा ९ बमोजिमको सेबामा कार्यरत कर्मचारीको मासिक तलबबाट कट्टा भई प्राप्त भएको रकम, नेपाल सरकारबाट थप भएको रकम, सो को ब्याज र कोषले आर्जन गरेको मुनाफाको तोकिए बमोजिमको रकम कर्मचारीको व्यक्तिगत खातामा जम्मा गर्नु पर्नेछ।
|
| 123 |
+
(३) कोषले प्रत्येक आर्थिक बर्ष समाप्त भएको तीन महिनाभित्र कर्मचारीको व्यक्तिगत खातामा जम्मा भएको रकम, सोको ब्याज तथा मुनाफा समेत जोडी त्यसको बिबरण अग्राबधिक गर्नु पर्नेछ।
|
| 124 |
+
(४) कर्मचारीको व्यक्तिगत खाता��ा जम्मा भएको रकमको बिबरण सरल र सहज किसिमले हेर्न बा त्यस्तो बिबरणको प्रति चाहेको बखत सम्बन्धित कर्मचारीले प्राप्त गर्न सक्ने गरी कोषले आवश्यक ब्यबस्था मिलाउनु पर्नेछ।
|
| 125 |
+
|
| 126 |
+
**१२. निवृत्तभरण पाउने:**
|
| 127 |
+
(१) बीस बर्ष बा सोभन्दा बढी सेवा अबधि पूरा गरी सेबाबाट अलग भएका कर्मचारीले कोषबाट मासिक रुपमा देहाय बमोजिमको हिसाबले आजीवन निवृत्तभरण पाउनेछः-
|
| 128 |
+
जम्मा सेवा बर्ष x आखिरी तलबको रकम
|
| 129 |
+
(२) नेपाल सरकारले कोषबाट निवृत्तभरण पाउने कर्मचारीको निवृत्तभरण रकममा प्रत्येक तीन बर्ष पुगेपछिको अर्को महिनादेखि खाइपाई आएको निवृत्तभरण रकमको १० प्रतिशतले हुन आउने रकम थप गरी भुक्तानी गर्नेछ।
|
| 130 |
+
|
| 131 |
+
**१३. पारिबारिक निवृत्तभरण दिइने:**
|
| 132 |
+
(१) बीस बर्ष सेवा अबधि पूरा गरेको कुनै कर्मचारीको दफा १२ बमोजिम निवृत्तभरण लिनु अगाबै बा निवृत्तभरण लिएपछि मृत्यु भएमा निजको सगोलको पति बा पत्नीलाई कर्मचारीले पाउने निवृत्तभरण रकमको पचास प्रतिशत रकम पारिबारिक निवृत्तभरणको रुपमा दिइनेछ।
|
| 133 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि मृत्यु भएको कर्मचारीको सगोलको पति बा पत्नी नभएमा, पारिबारिक निवृत्तभरण लिन थालेपछि त्यस्तो पति बा पत्नीको मृत्यु भएमा बा त्यस्तो पति बा पत्नीले अर्को बिबाह गरेमा मृत्यु भएको कर्मचारीको नाबालिग सन्तान अठार बर्ष उमेर नपुगेसम्म त्यस्तो पारिबारिक निवृत्तभरण पाउनेछ।
|
| 134 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम कुनै कर्मचारीको एकभन्दा बढी नाबालिग सन्तानले पारिबारिक निवृत्तभरण पाउने अबस्थामा त्यस्तो निवृत्तभरण दामासाहीले उपलब्ध गराइनेछ।
|
| 135 |
+
|
| 136 |
+
**१४. सेबाबाट अलग भएमा रकम पाउने:**
|
| 137 |
+
(१) कुनै कर्मचारी बीस बर्ष सेवा अबधि पूरा नहुँदै जुनसुकै कारणवश सेबामा नरहेमा निजको व्यक्तिगत खातामा जम्मा भएको रकम, ब्याज र मुनाफा समेत निजले एकमुष्ट रुपमा पाउनेछ।
|
| 138 |
+
(२) कुनै कर्मचारीको बीस बर्ष सेवा अबधि पूरा नहुँदै मृत्यु भएमा निजको व्यक्तिगत खातामा जम्मा भएको रकम, सोको ब्याज तथा मुनाफा समेत निजले इच्छाएको ब्यक्तिले एकमुष्ट रुपमा पाउनेछ।
|
| 139 |
+
(३) उपदफा (२) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि मृत्यु भएको कर्मचारीले कसैलाई नइच्छाएको बा इच्छाएको ब्यक्तिको समेत मृत्यु भईसकेको अबस्थामा त्यस्तो कर्मचारीलाई हेरचाह गरेको निजको हकबाला बा त्यस्तो हकबाला पनि नभए प्रचलित कानून बमोजिमको हकबालाले त्यस्तो रकम पाउ���ेछ।
|
| 140 |
+
(४) कर्मचारीले कोषबाट रकम फिर्ता पाउने सम्बन्धी अन्य ब्यबस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 141 |
+
|
| 142 |
+
**१५. तलबबाट कट्टी भएको रकम र सोको ब्याज मात्र पाउने:**
|
| 143 |
+
यस ऐनमा अन्यत्र जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि कुनै कर्मचारी भविष्यमा सरकारी सेबाको निमित्त अयोग्य टहरिने गरी सेबाबाट बर्खास्त भएमा निजको मासिक तलबबाट कट्टी भएको रकम र त्यस्तो रकमबाट प्राप्त गरेको ब्याज मात्र निजले फिर्ता पाउनेछ।
|
| 144 |
+
|
| 145 |
+
---
|
| 146 |
+
|
| 147 |
+
### परिच्छेद-५
|
| 148 |
+
**कोष मार्फत निवृत्तभरण बा उपदान प्रदान गर्ने सम्बन्धी ब्यबस्था**
|
| 149 |
+
|
| 150 |
+
**१६. कोष मार्फत निवृत्तभरण बा उपदान भुक्तानी गरिने:**
|
| 151 |
+
(१) यो ऐन प्रारम्भ हुनु अघि सरकारी कोषबाट निवृत्तभरण पाउने गरी देहायका सेबामा स्थायी नियुक्ति भएका कर्मचारी तथा सामुदायिक बिघालयका शिक्षकलाई उपलब्ध गराउनु पर्ने निवृत्तभरण बा उपदान तथा यो ऐन प्रारम्भ हुँदाका बखत सरकारी कोषबाट निवृत्तभरण पाइरहेका त्यस्तो कर्मचारी बा सामुदायिक बिघालयका शिक्षकलाई उपलब्ध गराउनु पर्ने निवृत्तभरण बापतको रकम कोष मार्फत भुक्तानी गरिनेछ-
|
| 152 |
+
(क) निजामती सेबा,
|
| 153 |
+
(ख) नेपाली सैनिक सेबा, नेपाल प्रहरी सेबा, सशस्त्र प्रहरी बल, नेपालको सेबा र नेपाल विशेष सेबा,
|
| 154 |
+
(ग) नेपाल शिक्षक सेबा।
|
| 155 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम निवृत्तभरण बा उपदान भुक्तानी गर्ने प्रयोजनको लागि आवश्यक पर्ने रकम प्रत्येक बर्ष नेपाल सरकारले कोषलाई उपलब्ध गराउनेछ।
|
| 156 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम प्राप्त भएको रकम कोषले अलग्गै खातामा राखी ब्यबस्थापन गर्नु पर्नेछ।
|
| 157 |
+
|
| 158 |
+
**१७. संस्था मार्फत भुक्तानी गरिने:**
|
| 159 |
+
कोषले यस ऐन बमोजिम प्रदान गरिने निवृत्तभरण लगायतको रकम तोकिए बमोजिमको संस्थासँग सम्झौता गरी सो संस्थामार्फत सम्बन्धित ब्यक्तिलाई भुक्तानी गर्ने ब्यबस्था मिलाउनेछ।
|
| 160 |
+
|
| 161 |
+
---
|
| 162 |
+
|
| 163 |
+
### परिच्छेद-६
|
| 164 |
+
**कोषको रकम लगानी सम्बन्धी ब्यबस्था**
|
| 165 |
+
|
| 166 |
+
**१८. कोषमा रहेको रकम लगानी गर्न सक्ने:**
|
| 167 |
+
(१) कोषले मौज्दात रहेको रकम देहाय बमोजिम लगानी गर्न सक्नेछः-
|
| 168 |
+
(क) नेपाल सरकारले जारी गरेको ऋणपत्रमा,
|
| 169 |
+
(ख) बाणिज्य बैङ्कको नगद प्रमाणपत्र मुद्दति निक्षेपमा,
|
| 170 |
+
(ग) उपयुक्त बैङ् जमानत लिई कोषले उपयुक्त टहराएको वित्तीय संस्थाको नगद प्रमाणपत्र मुद्दति डिपोजिटमा,
|
| 171 |
+
(घ) नेपाल सरकारको जमानतमा कोषले तोकेको शर्तमा कुनै उद्योग बा सङ्गठित संस्थालाई ऋणमा,
|
| 172 |
+
(ङ) बैङ् र वित्तीय संस्थाको अधिकतम पच्चिस प्रतिशत सम्भको शेयरमा लगानी,
|
| 173 |
+
(च) कुनै बैङ् बा वित्तीय संस्थासँग मिली सह-वित्तीयकरणको आधारमा धितो विभाजन (पारिपासु) गर्ने गरी आपसमा भएको सम्झौता अनुसार संयुक्त कर्जामा,
|
| 174 |
+
(छ) अधिकतम पच्चिस प्रतिशतमा नबढ्ने गरी कुनै कम्पनी बा सङ्गठित संस्थाले जारी गरेको डिबेन्चरमा,
|
| 175 |
+
(ज) कोष आफैले बा अरू संस्थासँग मिली कर्मचारी आवास परियोजना सञ्चालन गर्ने, जग्गा खरिद गरी भवन निर्माण गर्ने र भवन बहालमा दिने जस्ता कार्यमा,
|
| 176 |
+
(झ) कोषले उपयुक्त टहराएको क्षेत्रमा नेपाल सरकारको स्वीकृति प्राप्त गरी पर्याप्त धितो बा जमानी लिई लगानीमा,
|
| 177 |
+
(ट) मन्त्रालयको स्वीकृति लिई उत्पादनमुलक क्षेत्रका उद्योगमा,
|
| 178 |
+
(ठ) नेपाल सरकारको परियोजनामा,
|
| 179 |
+
(ड) कोषको पूँजी पर्याप्तताका आधारमा नेपाल राष्ट्र बैकको स्वीकृति लिई अन्तर्राष्ट्रिय बण्ड बा विदेशी मुद्रामा,
|
| 180 |
+
(ढ) नेपाल सरकारले बिक्री गर्ने ट्रेजरी बिलमा,
|
| 181 |
+
(ण) यस ऐन अन्तर्गत कोषले गर्नु पर्ने अन्य आवश्यक काममा।
|
| 182 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि कोषले कम्तीमा तीन बर्षलाई निवृत्तभरण प्रदान गर्न पुग्ने रकम कोषमा मौज्दात रहने गरी लगानी योजना बनाउनु पर्नेछ।
|
| 183 |
+
(३) उपदफा (१) मा उल्लिखित कार्यको लागि कोष आफैले बा तोकिएको आधारमा नेपाल सरकारले तोकेको अन्य संस्थासँगको संयुक्त लगानीमा सहायक कम्पनी बा संस्था स्थापना गर्न सक्नेछ।
|
| 184 |
+
(४) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि दफा ४ को उपदफा (१) को खण्ड (ख) बमोजिमको रकम लगानी गर्नुअघि कोषले नेपाल सरकारको पूर्व स्वीकृति लिनु पर्नेछ।
|
| 185 |
+
|
| 186 |
+
**१९. कोषको सुरक्षाः**
|
| 187 |
+
(१) प्रचलित कानूनमा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि देहायका कुराहरुको सम्बन्धमा देहाय बमोजिम हुनेछः-
|
| 188 |
+
(क) कोषमा कर्मचारीको व्यक्तिगत खातामा जम्मा रहेको रकममा कर्मचारीका अंशियारहरु कसैको अंश बापत हक नलाग्ने,
|
| 189 |
+
(ख) अदालतको फैसला बा अन्य कुनै आधारमा कोषबाट कर्मचारीले पाउने रकममा साहुको दाबी नलाग्ने,
|
| 190 |
+
(ग) प्रचलित कानून अन्तर्गत सर्वस्व जायजात हुने बा रकम असूल गर्नुपर्ने अवस्थामा कोषबाट कर्मचारीले पाउने रकम कट्टा गर्न नपाइने,
|
| 191 |
+
(घ) सरकारी रकम-कलम बाँकी लिनुपर्नेमा कोषबाट कर्मचारीले पाउने रकम कट्टा गर्न नपाइने,
|
| 192 |
+
(ड) कोषमा रहेको कर्मचारीको व्यक्तिगत खातामा रहेको बा कोषको मुनाफा बापत कर्मचारीले प्राप्त गरेको रकममा आयकर नलाग्ने,
|
| 193 |
+
(च) कुनै कम्पनीमा कोषको रकम लगानी भएको बा कोषबाट ऋण लिएकोमा सो कम्पनी बिघटन भै त्यसको जायजेथा बितरण हुँदा कोषको लगानी, त्यस बापतको लाभांश र ऋणको असूल उपर हुन बाँकी रकम बापत त्यस्तो कम्पनीको जायजेथा उपर कोषको सबैभन्दा पहिलो हक रहने,
|
| 194 |
+
(छ) कुनै व्यक्तिबाट कोषले कुनै रकम लिन बाँकी भएकोमा त्यस्तो व्यक्तिको जायजेथा साहुहरुको दामासाहीमा परेमा निजको जायजेथा उपर कोषको लिनुपर्ने रकम बापत सबैभन्दा पहिलो हक रहने,
|
| 195 |
+
(ज) कोषले कुनै सइटित संस्थासँग धितो लिएको जायजेथाबाट सम्पूर्ण रकम असूल हुन नसकेमा प्रचलित कानून बमोजिम त्यस्तो सइटित संस्थाको अन्य सम्पत्तिबाट बाँकी रकम असूल उपर गर्न सक्ने,
|
| 196 |
+
(झ) कुनै व्यत्किले आफूले गरी दिएको लिखत अनुसार कोषलाई बुझाउनु पर्ने सापटी, पेश्की, ऋण बा ब्याजको रकम समयमा नबुझाएमा सो समय नाघेको पैतीस दिनपछि त्यस्तो व्यत्किले कोषलाई धितो बा भोगबन्धकी लेखिदिएको बा जमानीले जेथा जमानीमा लेखिदिएको घर, जग्गा बा अन्य कुनै पनि सम्पत्ति कोषले लिलाम बिकी गरी त्यस्तो रकम असूल उपर गर्न सक्ने र यसरी लिलाम बिकी हुँदा कसैले नसकारेमा कोषले त्यस्तो सम्पत्ति सकार गर्न सक्ने,
|
| 197 |
+
(ट) कोषले लिखत गराई कुनै सम्पत्ति धितो लिएको लिखतमा उल्लेख भएको शर्त बमोजिमको म्यादभित्र धितो कब्जा गर्न बा कर्जा असूल गर्न कारबाही प्रारम्भ नगरेको कारणले मात्र धितो माथिको कोषको अधिकार समाप्त नहुने,
|
| 198 |
+
(ठ) कोषले कुनै व्यत्किलाई अचल सम्पत्तिको धितोमा ऋण बा सापटी दिँदा पाँच बर्षभन्दा बढीको भाखा राख्न सक्ने।
|
| 199 |
+
(२) उपदफा (१) को खण्ड (झ) बमोजिम कोषले सकार गरेको सम्पत्ति नामसारी दाखिल खारेजको लागि कोषले मालपोत कार्यालय बा सम्बन्धित कार्यालयमा लेखी पठाउनेछ र यसरी लेखी आएकोमा त्यस्तो कार्यालयले आफ्नो कार्यालयमा रहेको स्रेस्तामा तदनुसार नामसारी, दाखिल, खारेज गरी दिनु पर्नेछ।
|
| 200 |
+
(३) कोषमा एउटा प्रयोजनको लागि प्राप्त भएको रकम अर्को प्रयोजनको लागि खर्च गर्न पाइने छैन।
|
| 201 |
+
|
| 202 |
+
**२०. कोषलाई दस्तुर नलाग्ने:**
|
| 203 |
+
कोषले ऋण लगानी गरेको सइटित संस्थाबाट लिखत गराई धितो लिँदा बा धितो लिएको सम्पत्ति कोषको नाममा पारित गराउँदा बा कोषले कुनै अचल सम्पत्ति खरीद बिकी गर्दा त्यस्तो कारोबारमा कोषलाई कुनै आय टिकट बा रजिष्टेशन दस्तुर लाग्ने छैन।
|
| 204 |
+
|
| 205 |
+
---
|
| 206 |
+
|
| 207 |
+
### परिच्छेद-७
|
| 208 |
+
**कार्यकारी निर्देशक र कर्मचारी सम्बन्धी व्यवस्था**
|
| 209 |
+
|
| 210 |
+
**२१. कार्यकारी निर्देशक:**
|
| 211 |
+
(१) कोषको प्रशासकीय प्रमुखको रुपमा काम गर्न एकजना कार्यकारी निर्देशक रहनेछ।
|
| 212 |
+
(२) नेपाल सरकारले कार्यकारी निर्देशकको नियुक्तिको लागि सिफारिस गर्न सम्बन्धित बिषयका बिजहरु समेत रहेको तीन सदस्यीय सिफारिस समिति गठन गर्नेछ।
|
| 213 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिमको समितिले मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थाबाट व्यवस्थापन, अर्थशास्त्र, बाणिज्य बा कानूनमा कम्तीमा स्नातकोत्तर उपाधि हासिल गरी उद्योग, बाणिज्य, व्यापार, सार्वजनिक प्रशासन, राजस्व प्रशासन, व्यवस्थापन बा कानूनको क्षेत्रमा कम्तीमा बाह्र बर्षको अनुभव प्राप्त व्यक्तिहरु मध्यबाट खुला प्रतिस्पर्धाको आधारमा छनौट गरी कार्यकारी निर्देशकको पदमा नियुक्त गर्न तीनजना व्यक्तिको नाम नेपाल सरकार समक्ष सिफारिस गर्नेछ।
|
| 214 |
+
(४) उपदफा (३) बमोजिम सिफारिस भएको व्यक्तिहरु मध्येबाट नेपाल सरकारले उपयुक्त व्यक्तिलाई कार्यकारी निर्देशक पदमा नियुक्ति गर्नेछ।
|
| 215 |
+
(५) कार्यकारी निर्देशकको पदावधि चार बर्षको हुनेछ र निजको काम सन्तोषजनक देखिएमा निजलाई पुनः अर्को एक पटकको लागि कार्यकारी निर्देशकको पदमा नियुक्ति गर्न सकिनेछ।
|
| 216 |
+
(६) उपदफा (५) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि कार्यकारी निर्देशकले आफ्नो पदीय जिम्मेबारी पूरा नगरेको बा कोषको हित बिपरीत कुनै काम कारबाही गरेको देखिएमा नेपाल सरकारले समितिको सिफारिसमा निजलाई जुनसुकै बखत कार्यकारी निर्देशकको पदबाट हटाउन सक्नेछ।
|
| 217 |
+
तर त्यसरी पदबाट हटाउनु अघि निजलाई आफ्नो सफाई पेश गर्ने मनासिब मौका दिनु पर्नेछ।
|
| 218 |
+
(७) कार्यकारी निर्देशकको पारिश्रमिक, सुबिधा तथा सेबाका अन्य शर्त तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 219 |
+
(८) यस दफामा अन्यत्र जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि कार्यकारी निर्देशकको नियुक्ति नभएको बा कार्यकारी निर्देशक निलम्बनमा परेको अबस्थामा मन्त्रालयले निजामती सेबाको राजपत्राहित प्रथम श्रेणीको कुनै अधिकृतलाई कार्यकारी निर्देशकको रुपमा कामकाज गर्ने गरी तोक्न सक्नेछ।
|
| 220 |
+
|
| 221 |
+
**२२. कार्यकारी निर्देशकको काम, कर्तव्य र अधिकार:**
|
| 222 |
+
कार्यकारी निर्देशकको काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछः-
|
| 223 |
+
(क) कोषको नीति तथा बार्षिक कार्यक्रम तयार गरी समिति समक्ष पेश गर्ने,
|
| 224 |
+
(ख) कोषमा जम्मा भएको रकमको सुरक्षित लगानीका क्षेत्रहरु पहिचान गरी समिति समक्ष सिफारिस गर्ने,
|
| 225 |
+
(ग) कोषको सम्पत्ति तथा जायजेथाको संरक्षण र व्यवस्थापन गर्ने,
|
| 226 |
+
(घ) समितिमा छलफल हुने प्रस्ताव तयार गर्ने,
|
| 227 |
+
(ङ) कोषको स्वीकृत बार्षिक कार्यक्रम कार्यान्वयन गर्ने, गराउने,
|
| 228 |
+
(च) कोषको काम कारबाहीको निरीक्षण तथा अनुगमन गरी समिति समक्ष प्रतिवेदन पेश गर्ने,
|
| 229 |
+
(छ) समितिबाट भएको निर्णय तथा निर्देशन कार्यान्वयन गर्ने, गराउने,
|
| 230 |
+
(ज) कोषको प्रशासकीय प्रमुखको रुपमा दैनिक प्रशासन सञ्चालन गर्ने,
|
| 231 |
+
(झ) समितिबाट निर्देशित तथा प्रत्यायोजित अन्य काम गर्ने, गराउने।
|
| 232 |
+
|
| 233 |
+
**२३. कर्मचारी तथा विज्ञ सम्बन्धी व्यवस्थाः**
|
| 234 |
+
(१) कोषमा आवश्यक सङ्ख्यामा कर्मचारीहरु रहनेछन्।
|
| 235 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमका कर्मचारीको नियुक्ति, पारिश्रमिक, सुविधा तथा सेबाका शर्तहरु तोकिए बमोजिम हुनेछन्।
|
| 236 |
+
(३) कोषका कर्मचारी नियुक्त नभएसम्मको लागि आवश्यक पर्ने कर्मचारी नेपाल सरकारले उपलब्ध गराउनेछ।
|
| 237 |
+
(४) उपदफा (३) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि नेपाल सरकारले आवश्यक सङ्ख्यामा कर्मचारी उपलब्ध गराउन नसकेमा कोषमा कर्मचारी नियुक्त नभएसम्मको लागि कोषले करारमा कर्मचारी नियुक्त गर्न सक्नेछ।
|
| 238 |
+
(५) कोषले आवश्यकता अनुसार कुनै विज्ञको सेबा लिन सक्नेछ। त्यस्तो विज्ञलाई दिइने सेबा सुविधा प्रचलित कानूनको अधीनमा रही कोषले निर्धारण गरे बमोजिम हुनेछ।
|
| 239 |
+
|
| 240 |
+
---
|
| 241 |
+
|
| 242 |
+
### परिच्छेद-८
|
| 243 |
+
**विविध**
|
| 244 |
+
|
| 245 |
+
**२४. कोष सञ्चालनको लागि निकाय तोक्न सक्ने:**
|
| 246 |
+
यस ऐन बमोजिम कोषको गठन नभएसम्म नेपाल सरकारले राजपत्रमा सूचना प्रकाशित गरी कुनै निकायलाई कोष सञ्चालन सम्बन्धी कार्य गर्ने गरी तोक्न सक्नेछ।
|
| 247 |
+
|
| 248 |
+
**२५. छुट्टछुट्टै अभिलेख राख्नु पर्ने:**
|
| 249 |
+
कोषले प्रचलित कानून बमोजिम निवृत्तभरण पाउने कर्मचारी तथा शिक्षक र यस ऐन बमोजिम योगदानमा आधारित निवृत्तभरण प्रणाली बमोजिम निवृत्तभरण पाउने कर्मचारीको लागि प्राप्त रकम, सो रकमको लगानी तथा हिसाब किताबको अभिलेख छुट्टछुट्टै रुपमा राख्नु पर्नेछ।
|
| 250 |
+
|
| 251 |
+
**२६. परिचयपत्र उपलब्ध गराउने:**
|
| 252 |
+
(१) कोषले प्रत्येक कर्मचारीलाई कोषको परिचयपत्र उपलब्ध गराउनेछ।
|
| 253 |
+
(२) कर्मचारीले उपदफा (१) बमोजिमको परिचयपत्र लिनको लागि कोषले निर्धारण गरेका प्रक्रिया अबलम्बन गर्नुपर्नेछ।
|
| 254 |
+
|
| 255 |
+
**२७. निर्देशन दिन सक्ने:**
|
| 256 |
+
(१) नेपाल सरकारले योगदानमूलक निवृत्तभरण प्रणालीको सञ्चालन सम्बन्धमा कोषलाई आवश्यक निर्देशन दिन सक्नेछ।
|
| 257 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम नेपाल सरकारबाट प्राप्त निर्देशनको पालना गर्नु कोषको कर्तव्य हुनेछ।
|
| 258 |
+
|
| 259 |
+
**२८. निरीक्षण तथा सुपरिवेक्षण गर्न सक्ने:**
|
| 260 |
+
मन्त्रालयले कोषको निरीक्षण तथा सुपरीवेक्षण गर्न सक्नेछ।
|
| 261 |
+
|
| 262 |
+
**२९. लेखा तथा लेखापरीक्षण:**
|
| 263 |
+
(१) कोषको लेखा नेपाल सरकारले अबलम्बन गरेको लेखा प्रणाली बमोजिम तोकिए बमोजिमको ढाँचामा राखिनेछ।
|
| 264 |
+
(२) कोषको लेखापरीक्षण महालेखा परीक्षकबाट हुनेछ।
|
| 265 |
+
(३) कोषले बार्षिक रुपमा लेखापरीक्षण प्रतिवेदन तयार गरी सार्वजनिक गर्नु पर्नेछ।
|
| 266 |
+
|
| 267 |
+
**३०. प्रतिवेदन पेश गर्नुपर्ने:**
|
| 268 |
+
(१) कोषले बर्ष भरिमा आफूले गरेको कामको बार्षिक प्रतिवेदन तयार गरी कात्तिक मसान्तभित्र मन्त्रालयमा पेश गर्नुपर्नेछ।
|
| 269 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम तयार गरिएको प्रतिवेदन कोषले सार्वजनिक गर्नुपर्नेछ।
|
| 270 |
+
|
| 271 |
+
**३१. अधिकार प्रत्यायोजन:**
|
| 272 |
+
समितिले यो ऐन र यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बमोजिम आफूलाई प्राप्त अधिकारमध्ये आवश्यकता अनुसार केही अधिकार समितिको अध्यक्ष, सदस्य, कार्यकारी निर्देशक बा कोषको कुनै अधिकृत कर्मचारीलाई प्रत्यायोजन गर्न सक्नेछ।
|
| 273 |
+
|
| 274 |
+
**३२. नेपाल सरकारसँग सम्पर्क:**
|
| 275 |
+
कोषले नेपाल सरकारसँग सम्पर्क राख्दा मन्त्रालय मार्फत राख्नु पर्नेछ।
|
| 276 |
+
|
| 277 |
+
**३३. उपदान तथा निवृत्तभरण नपाउने:**
|
| 278 |
+
(१) शिक्षक तथा कर्मचारीको सेबाका शर्त सम्बन्धी प्रचलित कानूनमा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि यो ऐन प्रारम्भ भए पछि नेपाल सरकार, प्रदेश सरकार र स्थानीय तह तथा नेपाल सरकारको स्वामित्व बा नियन्त्रणमा रहेको बा नेपाल सरकारबाट नियमित रुपमा अनुदान पाउने संस्थाले नेपाल सरकारको दायित्व पर्ने गरी उपदान र निवृत्तभरण पाउने गरी कुनै कर्मचारी, शिक्षक तथा पदाधिकारी नियुक्ति गर्न पाउने छैन।
|
| 279 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमका कर्मचारी, शिक्षक तथा पदाधिकारीको हकमा कानून बनाई योगदानमूलक निवृत्तभरण प्रणाली लागू गर्न सकिनेछ।
|
| 280 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम कानून बनाउँदा यस ऐन बमोजिम कोष मार्फत योगदानमूलक निवृत्तभरण प्रणाली लागू हुने गरी व्यवस्था गर्न सकिनेछ।
|
| 281 |
+
|
| 282 |
+
**३४. नियम बनाउन सक्ने:**
|
| 283 |
+
यो ऐन कार्यान्वयनको लागि नेपाल सरकारले आवश्यक नियम बनाउन सक्नेछ।
|
| 284 |
+
|
| 285 |
+
**३५. विनियम बनाउन सक्नेः**
|
| 286 |
+
(१) यो ऐन र यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियमको अधीनमा रही समितिले आवश्यक विनियम बनाउन सक्नेछ।
|
| 287 |
+
(२) उपदफा (१) को सर्वसामान्यतामा कुनै प्रतिकूल असर नपर्ने गरी समितिले देहायका बिषयमा विनियम बनाउन सक्नेछः-
|
| 288 |
+
(क) कोषमा कार्यरत कर्मचारीको सेबा शर्त पारिश्रम���क तथा सुबिधा,
|
| 289 |
+
(ख) योगदानमूलक निवृत्तभरण प्रणाली सञ्चालन सम्बन्धमा आवश्यक देखिएका अन्य बिषय।
|
| 290 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिमको विनियम मन्त्रालयबाट स्वीकृत भएको मितिबाट लागू हुनेछ।
|
| 291 |
+
|
| 292 |
+
**३६. निर्देशिका बनाई लागू गर्नेः**
|
| 293 |
+
समितिले यो ऐन र यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बा विनियमावलीको अधीनमा रही कोषको दैनिक कार्य सञ्चालन सम्बन्धमा आवश्यक निर्देशिका बनाई लागू गर्न सक्नेछ।
|
| 294 |
+
|
| 295 |
+
**३७. संशोधन:**
|
| 296 |
+
देहायका ऐनहरुमा देहाय बमोजिम संशोधन गरिएको छः-
|
| 297 |
+
(१) निजामती सेबा ऐन, २०४९ को दफा ३९ख. को सट्टा देहायको दफा ३९ख. राखिएको छः-
|
| 298 |
+
"३९ख. योगदानमूलक निवृत्तभरण कोष सम्बन्धी विशेष व्यवस्थाः (१) यो ऐन प्रारम्भ भएपछि निजामती सेबामा नियुक्त हुने कर्मचारीको हकमा योगदानमूलक निवृत्तभरण प्रणाली सम्बन्धी प्रचलित कानून बमोजिमको व्यवस्था लागू हुनेछ।
|
| 299 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम योगदानमूलक निवृत्तभरण प्रणाली लागू हुने निजामती कर्मचारीको हकमा दफा ३४, ३६, ३७, ३७क., ३६, ३९, ३९क. र ३९ग.को व्यवस्था लागू हुने छैन।"
|
| 300 |
+
(२) नेपाल स्वास्थ्य सेबा ऐन, २०४३ को दफा ४० पछि देहायको दफा ४०क. थपिएको छः-
|
| 301 |
+
"४०क. योगदानमूलक निवृत्तभरण कोष सम्बन्धी विशेष व्यवस्थाः (१) यो ऐन प्रारम्भ भएपछि स्वास्थ्य सेबामा नियुक्त हुने कर्मचारीको हकमा योगदानमूलक निवृत्तभरण प्रणाली सम्बन्धी प्रचलित कानून बमोजिमको व्यवस्था लागू हुनेछ।
|
| 302 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम योगदानमूलक निवृत्तभरण प्रणाली लागू हुने कर्मचारीको हकमा दफा ४६, ४७, ४६, ४९ र ४० को व्यवस्था लागू हुने छैन।"
|
| 303 |
+
(३) व्यवस्थापिका-संसद सचिवालय सम्बन्धी ऐन, २०६४ को दफा ४२ को सट्टा देहायको दफा ४२ राखिएको छः-
|
| 304 |
+
"४२. योगदानमूलक निवृत्तभरण कोष सम्बन्धी विशेष व्यवस्थाः (१) यो ऐन प्रारम्भ भएपछि नियुक्त हुने कर्मचारीको हकमा योगदानमूलक निवृत्तभरण प्रणाली सम्बन्धी प्रचलित कानून बमोजिमको व्यवस्था लागू हुनेछ।
|
| 305 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम योगदानमूलक निवृत्तभरण प्रणाली लागू हुने कर्मचारीको हकमा दफा ४२, ४९, ४०, ४१, ४३, ४४ २ ४४ को व्यवस्था लागू हुने छैन।"
|
section_7_pdf_6.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,418 @@
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# भुक्तानी तथा फर्स्योट ऐन, २०७४
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**प्रमाणीकरण र प्रकाशन मिति**
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| 4 |
+
२०७४।१२।०४
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| 5 |
+
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## सम्बत् २०७४ सालको ऐन नं. ३१
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| 7 |
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| 8 |
+
**प्रस्तावना:**
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| 9 |
+
मुलुकको समग्र भुक्तानी, समाशोधन तथा फर्स्योट प्रणालीको विकास, विस्तार, प्रबर्धन, निगरानी तथा नियमन गर्ने सम्बन्धमा आवश्यक ब्यबस्था गर्न बाज्छुनीय भएकोले, संघीय संसदले यो ऐन बनाएको छ।
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| 10 |
+
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| 11 |
+
---
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| 12 |
+
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| 13 |
+
## परिच्छेद-१
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| 14 |
+
### प्रारम्भिक
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| 15 |
+
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| 16 |
+
**१. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भः**
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| 17 |
+
(१) यस ऐनको नाम "भुक्तानी तथा फर्स्योट ऐन, २०७४" रहेको छ।
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| 18 |
+
(२) यो ऐन तुरुन्त प्रारम्भ हुनेछ।
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| 19 |
+
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| 20 |
+
**२. परिभाषाः**
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| 21 |
+
बिषय बा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
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| 22 |
+
(क) "अनुमतिपत्र" भन्नाले भुक्तानी प्रणाली सञ्चालन गर्न बा भुक्तानी सेवा प्रदान गर्न दफा ९. बमोजिम प्रदान गरिएको अनुमतिपत्र सम्झनु पर्छ।
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| 23 |
+
(ख) "आरटिजिएस (रियल टाइम ग्रस सेटलमेन्ट सिस्टम)" भन्नाले स्वचालित बिघुतीय प्रणालीको माध्यमबाट वास्तविक समयमा बैङ्गले तोके बमोजिमको टूलो मूल्यको भुक्तानी र अति जरुरी भुक्तानी सम्बन्धी प्रत्येक कारोबारको अलग अलग हिसाब मिलान गर्ने गरी सम्बन्धित पक्षको बैङ खातामा रकम जम्मा बा खर्च गरी हिसाब मिलान गरिने प्रणाली सम्झनु पर्छ।
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| 24 |
+
(ग) "तोकिएको" बा "तोकिए बमोजिम" भन्नाले यस ऐन अन्तर्गत बनेका बिनियम बा जारी भएका निर्देशनमा तोकिएको बा तोकिए बमोजिम सम्झनु पर्छ।
|
| 25 |
+
(घ) "फर्स्योट" भन्नाले भुक्तानी उपकरण जारी गर्ने र स्वीकार गर्ने पक्षहरुको दावी बा दायित्व रकम प्रचलित व्यवस्था बा प्रणाली बमोजिम हिसाब मिलान बा फरफारख गर्ने कार्य बा प्रक्रिया सम्झनु पर्छ।
|
| 26 |
+
(ङ) "टूलो मूल्य" भन्नाले बैङले समय समयमा टूलो मूल्य (हाइभ्यालु) भनी निर्धारण गरेको सीमा बा सोभन्दा बढी रकम सम्झनु पर्छ।
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| 27 |
+
(च) "बैङ" भन्नाले नेपाल राष्ट्र बैङ ऐन, २०४६ बमोजिम स्थापना भएको नेपाल राष्ट्र बैङ सम्झनु पर्छ।
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| 28 |
+
(छ) "बैङ तथा बित्तीय संस्था" भन्नाले बैङ तथा बित्तीय संस्था सम्बन्धी ऐन, २०७३ बमोजिम स्थापना भएका बैङ तथा बित्तीय संस्था सम्झनु पर्छ।
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| 29 |
+
(ज) "बोर्ड" भन्नाले दफा ३ बमोजिम गठन भएको राष्ट्रिय भुक्तानी बोर्ड सम्झनु पर्छ।
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| 30 |
+
(झ) "भुक्तानी उपकरण" भन्नाले दफा ३१ बमोजिमका भुक्तानी उपकरण सम्झनु पर्छ।
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| 31 |
+
(ञ) "भुक्तानी प्रणाली" भन्नाले कुनै भुक्तानी उपकरणको माध्यमबाट सेबाग्राही, संस्था बा बैङ बीच हुने जुनसुकै प्रकारको भुक्तानी दावी बा दायित्वको भुक्तानी, ���माशोधन बा फर्स्योट गरिने प्रणाली सम्झनु पर्छ।
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| 32 |
+
(ट) "भुक्तानी प्रणाली सञ्चालक" भन्नाले भुक्तानी सम्बन्धी कार्यको सञ्चालन, व्यवस्थापन र समाशोधनको कार्य गर्ने संस्था सम्झनु पर्छ र सो शब्दले समाशोधन गृह, बिघुतीय कार्ड बा अन्य बिघुतीय (अनलाइन) भुक्तानी सञ्चालन गर्ने संस्थालाई समेत जनाउँछ।
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| 33 |
+
(ठ) "भुक्तानी सेबा प्रदायक" भन्नाले सेबाग्राहीलाई भुक्तानी सम्बन्धी सेबा दिने संस्था सम्झनु पर्छ र सो शब्दले संस्था र सेबाग्राही बीचमा वस्तु, सेबा, सम्पत्ति बा अन्य दायित्व बापतको रकम भुक्तानी गर्ने, स्वदेश तथा बिदेशमा रकम स्थानान्तरण (ट्रान्सफर) गर्ने बा बिघुतीय माध्यमबाट भुक्तानी कारोबार सञ्चालन गर्ने संस्थालाई समेत जनाउँछ।
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| 34 |
+
(ड) "संस्था" भन्नाले दफा ६ को उपदफा (१) बमोजिम कम्पनीको रूपमा स्थापना भई दफा ९, बमोजिम अनुमतिपत्र प्राप्त संस्था सम्झनु पर्छ र सो शब्दले बैङ् तथा वित्तीय संस्थालाई समेत जनाउँछ।
|
| 35 |
+
(ढ) "सञ्चार सेवा प्रदायक" भन्नाले टेलीफोन, मोबाइल तथा इन्टरनेट सेवा जस्ता बिघुतीय सूचना तथा सञ्चार सेवा प्रदान गर्ने प्रचलित कानून बमोजिम स्थापना भएको कम्पनी सम्झनु पर्छ।
|
| 36 |
+
(ण) "सेटलमेण्ट बैङ्" भन्नाले भुक्तानीसँग सम्बन्धित वित्तीय कारोबारको समाशोधन, फर्स्योट र दायित्व भुक्तानी गर्ने प्रयोजनको लागि संस्थाले दफा १२ बमोजिम सम्झौता गरेको बैङ् सम्झनु पर्छ।
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| 37 |
+
|
| 38 |
+
---
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| 39 |
+
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| 40 |
+
## परिच्छेद-२
|
| 41 |
+
### राष्ट्रिय भुक्तानी बोर्ड
|
| 42 |
+
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| 43 |
+
**३. राष्ट्रिय भुक्तानी बोर्डको गठनः**
|
| 44 |
+
(१) देहायका अध्यक्ष र सदस्य रहेको एक राष्ट्रिय भुक्तानी बोर्डको गठन गरिएको छः-
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| 45 |
+
(क) बैङ्को गभर्नर - अध्यक्ष
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| 46 |
+
(ख) अर्थ मन्त्रालयको सचिव - सदस्य
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| 47 |
+
(ग) नेपाल सरकारबाट मनोनीत तोकिएको योग्यता पुगेको एकजना विज्ञ - सदस्य
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| 48 |
+
(घ) महालेखा नियन्त्रक - सदस्य
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| 49 |
+
(ङ) बैङ्को सम्बन्धित क्षेत्र हेर्ने डेपुटी गभर्नर - सदस्य
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| 50 |
+
(च) नेपाल दूरसञ्चार प्राधिकरणको अध्यक्ष - सदस्य
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| 51 |
+
(छ) बैङ्को भुक्तानी प्रणाली बिभागको कार्यकारी निर्देशक - सदस्य-सचिव
|
| 52 |
+
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| 53 |
+
(२) उपदफा (१) को खण्ड (ग) बमोजिमको सदस्यको पदाबधि दुई बर्षको हुनेछ।
|
| 54 |
+
(३) उपदफा (२) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि उपदफा (१) को खण्ड (ग) बमोजिम मनोनीत सदस्यले आफ्नो पद अनुसारको काम नगरेमा नेपाल सरकारले निजलाई जुनसुकै बखत हटाउन सक्नेछ। तर त्यसरी हटाउनु अघि निजलाई सफाई पेश गर्ने मनासिब मौका दिनुपर्नेछ।
|
| 55 |
+
(४) बोर्डको बैठक आवश्यकता अनुसार अध्यक्षले तोकेको मिति, समय र स्थानमा बस्नेछ।
|
| 56 |
+
(५) बोर्डको बैठक बस्नुभन्दा कम्तीमा चौबीस घण्टा अघि बैठकमा छलफल हुने बिषय सदस्य-सचिबले सबै सदस्यलाई उपलब्ध गराउनु पर्नेछ।
|
| 57 |
+
(६) कम्तीमा एकाउन्न प्रतिशत सदस्य उपस्थित भएमा बोर्डको बैठकको लागि गणपूरक सङ्ख्या पुगेको मानिनेछ।
|
| 58 |
+
(७) बैठकको अध्यक्षता अध्यक्षले गर्नेछ र अध्यक्षको अनुपस्थितिमा अर्थ मन्त्रालयको सचिबले बैठकको अध्यक्षता गर्नेछ।
|
| 59 |
+
(८) बैठकमा बहुमतको निर्णय मान्य हुनेछ र मत बराबर भएमा बैठकमा अध्यक्षता गर्ने व्यक्तिले निर्णायक मत दिनेछ।
|
| 60 |
+
(९) बोर्डले आवश्यक टानेमा भुक्तानी, समाशोधन बा फस्यौंट सम्बन्धी बिज बा अन्य पदाधिकारीलाई बोर्डको बैठकमा आमन्त्रण गर्न सक्नेछ।
|
| 61 |
+
(१०) बैठकको निर्णय छुट्टै पुस्तिकामा अभिलेख गरिनेछ र त्यस्तो पुस्तिकामा बैठकको अध्यक्षता गर्ने व्यक्ति र उपस्थित सम्पूर्ण सदस्यले दस्तखत गर्नु पर्नेछ।
|
| 62 |
+
(११) बोर्डको निर्णय बोर्डको सदस्य-सचिबले प्रमाणित गरी राख्नु पर्नेछ।
|
| 63 |
+
(१२) बोर्डको सचिबालय बैङ्गले तोकेको बैङ्कको बिभागमा रहनेछ।
|
| 64 |
+
(१३) बोर्डको बैठक सम्बन्धी अन्य कार्यबिधि बोर्ड आफैले निर्धारण गरे बमोजिम हुनेछ।
|
| 65 |
+
|
| 66 |
+
**४. बोर्डको काम, कर्तव्य र अधिकार:**
|
| 67 |
+
बोर्डको काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछ:-
|
| 68 |
+
(क) भुक्तानी प्रणालीलाई सुरक्षित, व्यवस्थित तथा सक्षम बनाई बित्तीय स्थायित्व कायम गर्ने, जोखिम न्यूनीकरण गर्ने, भुक्तानी प्रणालीको बिश्वसनीयता अभिबुद्धि गर्ने तथा भुक्तानी प्रणालीलाई आधुनिकीकरण गर्ने सम्बन्धमा नीतिगत व्यवस्था गर्ने,
|
| 69 |
+
(ख) भुक्तानी प्रणालीसँग सम्बन्धित कम्पनीहरू बीच समन्वय गर्ने, गराउने,
|
| 70 |
+
(ग) भुक्तानी प्रणाली सम्बन्धमा भए गरेका काम कारबाहीको नियमित अनुगमन, नियमन तथा निगरानी (ओभरसाइट) गर्ने, गराउने,
|
| 71 |
+
(घ) भुक्तानी प्रणालीसँग सम्बन्धित काम कारबाहीलाई सुरक्षित र व्यवस्थित गर्ने सम्बन्धमा कम्पनी र सञ्चार सेवा प्रदायकलाई समय समयमा आवश्यक निर्देशन दिने,
|
| 72 |
+
(ङ) यस ऐन विपरीत कार्य गर्ने संस्थालाई आवश्यक कारबाही गर्ने वा त्यस्तो कारबाहीको लागि सम्बन्धित निकायमा लेखी पटाउन बेडको सम्बन्धित विभागलाई निर्देशन दिने,
|
| 73 |
+
(च) भुक्तानी प्रणाली सुरक्षित एवं व्यवस्थित रूपमा सञ्चालन भए नभएको सम्बन्धमा अनुगमन, नियमन तथा निगरानी गर्न आवश्यकता अनुसार बिभिन्न प्राविधिक समिति तथा उपसमिति गठन गर्ने।
|
| 74 |
+
|
| 75 |
+
---
|
| 76 |
+
|
| 77 |
+
## परिच्छेद-३
|
| 78 |
+
### अनुमतिपत्र
|
| 79 |
+
|
| 80 |
+
**५. अनुमतिपत्र नलिई सेवा सञ्चालन गर्न नहुने:**
|
| 81 |
+
कसैले पनि बैङ्गबाट अनुमतिपत्र नलिई यस ऐन बमोजिम भुक्तानी प्रणाली सञ्चालन गर्न बा भुक्तानी सेवा प्रदायकको रूपमा काम गर्न बा त्यस्तो सेवा सञ्चालन गर्न हुँदैन।
|
| 82 |
+
|
| 83 |
+
**६. कम्पनी स्थापना गर्नु पर्नेः**
|
| 84 |
+
(१) यस ऐन बमोजिम भुक्तानी प्रणाली सञ्चालक बा भुक्तानी सेवा प्रदायकको रूपमा काम गर्न चाहने व्यक्तिले प्रचलित कानून बमोजिम कम्पनी स्थापना गर्नु पर्नेछ।
|
| 85 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि बैङ् तथा वित्तीय संस्थाले उपदफा (१) को प्रयोजनको लागि पुनः कम्पनी स्थापना गर्नु पर्ने छैन।
|
| 86 |
+
(३) यस दफामा अन्यत्र जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि बैङ् तथा वित्तीय संस्था र भुक्तानी सेवा प्रदायक संस्थाले यस ऐन बमोजिम भुक्तानी सेवा प्रदायकको रूपमा काम गर्नको लागि अर्को कुनै कम्पनी स्थापना गर्न बा अन्य कम्पनीसँग सम्झौता गरी त्यस्तो सेवा दिन बा त्यस्तो कार्यको लागि एजेण्ट नियुक्त गर्न सक्नेछ।
|
| 87 |
+
|
| 88 |
+
**९. आशयपत्र लिनु पर्नेः**
|
| 89 |
+
(१) भुक्तानी प्रणाली सञ्चालक बा भुक्तानी सेवा प्रदायकको रूपमा काम गर्न चाहने व्यक्तिले दफा ६ बमोजिम कम्पनी स्थापना गर्नु अघि देहायको कागजात र तोकिए बमोजिमको दस्तुर सहित आशयपत्रको लागि बैङ् समक्ष निवेदन दिनु पर्नेछ:-
|
| 90 |
+
(क) प्रस्तावित कम्पनीको प्रबन्धपत्र र नियमाबली,
|
| 91 |
+
(ख) व्यावसायिक तथा प्राविधिक सम्भाव्यता अध्ययन प्रतिवेदन,
|
| 92 |
+
(ग) तोकिएको ढाँचामा संस्थापकको व्यक्तिगत विवरण,
|
| 93 |
+
(घ) संस्थापकको नागरिकताको प्रमाणपत्रको प्रतिलिपि,
|
| 94 |
+
(ङ) संस्थापकको लगानीको स्रोत खुलेको विवरण,
|
| 95 |
+
(च) चालु आर्थिक बर्षभन्दा अघिल्लो आर्थिक बर्षको कर चुक्ता गरेको प्रमाण बा सो प्रयोजनको सम्बन्धित आन्तरिक राजश्र कार्यालयमा आय विवरण पेश गरेको निस्सा,
|
| 96 |
+
(छ) कम्पनीको तर्फबाट संस्थापक बाहेकका अन्य व्यक्तिले निवेदन दिएमा अस्तियारी पत्र,
|
| 97 |
+
(ज) कालोसूची बा द्रिफल्टरमा नपरेको,
|
| 98 |
+
(झ) बैङले तोकिदिएका अन्य कागजात।
|
| 99 |
+
|
| 100 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि यो ऐन प्रारम्भ हुनुअघि भुक्तानी तथा फस्र्योट सम्बन्धी कारोबार गर्न बैङ्बाट अनुमति प्राप्त संस्थाले यस दफा बमोजिम आशयपत्र लिएको मानिनेछ। तर त्यस्तो संस्थाले कुनै नयाँ भुक्तानी उपकरण सञ्चालनमा ���्याउन चाहेमा त्यस्तो उपकरणको लागि बैङ्कको स्वीकृति लिनु पर्नेछ।
|
| 101 |
+
|
| 102 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम प्राप्त निवेदन जाँचबुझ गर्दा बैङले आशयपत्र दिन उपयुक्त देखेमा निवेदन प्राप्त भएको नब्बे दिनभित्र निवेदकलाई तोकिए बमोजिमको ढाँचामा आशयपत्र दिनु पर्नेछ।
|
| 103 |
+
|
| 104 |
+
(४) उपदफा (३) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि बैङले देहायको कुनै अबस्थामा निवेदकलाई आशयपत्र दिन इन्कार गर्न सक्नेछ:-
|
| 105 |
+
(क) उपदफा (१) बमोजिम पेश गर्नु पर्ने सम्पूर्ण बिबरण कागजात पेश नगरेमा,
|
| 106 |
+
(ख) मुलुकको अर्थतन्त्रको अबस्था, आकार र बजार प्रतिस्पर्धा जस्ता बित्तीय तथा प्राविधिक बा दफा १४ को उपदफा (२) मा उल्लिखित आधारबाट थप संस्थाको स्थापना गर्न उपयुक्त नदेखिएमा।
|
| 107 |
+
|
| 108 |
+
(६) उपदफा (४) बमोजिम आशयपत्र दिन इन्कार गरेमा बैङले सोको कारण सहितको लिखित जानकारी निवेदकलाई दिनु पर्नेछ।
|
| 109 |
+
|
| 110 |
+
(७) उपदफा (३) बमोजिम आशयपत्र प्राप्त व्यक्तिले बैङले तोकेको अबधिभित्र दफा ६ बमोजिम कम्पनी स्थापना गर्नु पर्नेछ।
|
| 111 |
+
(८) उपदफा (७) बमोजिमको अबधिभित्र कम्पनी स्थापना हुन नसकेमा त्यस्तो आशयपत्र स्वतः रद् हुनेछ।
|
| 112 |
+
|
| 113 |
+
**८. निवेदन दिनु पर्नेः**
|
| 114 |
+
(१) दफा ७ बमोजिम कम्पनीको रुपमा दर्ता भएको संस्थाले आशयपत्र प्राप्त गरेको छ महिनाभित्र भुक्तानी प्रणाली सञ्चालन गर्ने बा भुक्तानी सेवा प्रदान गर्ने अनुमतिपत्रको लागि देहायको बिबरण कागजात सहित बैइ समक्ष निवेदन दिनु पर्नेछ:-
|
| 115 |
+
(क) प्रस्तावित कम्पनीको प्रबन्धपत्र र नियमावली,
|
| 116 |
+
(ख) भुक्तानी प्रणाली सञ्चालन बा भुक्तानी सेवा प्रदान गर्न आवश्यक पर्ने सेवा, सुविधा भएको कार्यालय भवनको बिबरण र भवन भाडामा लिएको भए भवन बहाल सम्बन्धी सम्झौताको प्रतिलिपि,
|
| 117 |
+
(ग) संस्थाको संस्थापकले लिन कबूल गरेको शेयरको रकम चुक्ता गरेको प्रमाणित हुने कागजात,
|
| 118 |
+
(घ) कारोबार गर्ने मुख्य स्थान र शाखा कार्यालयको स्थान यकिन भएकोमा सोको टेमाना,
|
| 119 |
+
(ङ) सञ्चालन गरिने कारोबारको प्रकृति तथा संस्थाको व्याबसायिक योजना,
|
| 120 |
+
(च) संस्थाको सञ्चालक तथा पदाधिकारीको नामाबली र त्यस्ता व्यक्ति यस ऐन बमोजिम सञ्चालक तथा पदाधिकारी हुन योग्य रहेको घोषणापत्र,
|
| 121 |
+
(छ) सम्भावित जोखिम व्यवस्थापनको लागि आन्तरिक नियन्त्रण प्रणाली कायम गर्न कम्पनीले व्यक्त गरेको प्रतिबद्धतापत्र,
|
| 122 |
+
(ज) बैङ्गले तोकिदिएको अन्य कागजात।
|
| 123 |
+
|
| 124 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको अबधिभित्र अनुमतिपत्रको लागि निबेदन ��दिने संस्थाको आशयपत्र उपर कुनै कारबाही गरिने छैन।
|
| 125 |
+
|
| 126 |
+
**९. अनुमतिपत्र दिनु पर्ने:**
|
| 127 |
+
(१) दफा ८ बमोजिम निबेदन प्राप्त भएको तीस दिनभित्र बैङ्गले निबेदक संस्थाको भौतिक तथा प्राविधिक पूर्वाधारको सम्बन्धमा स्थलगत निरीक्षण एवं जाँचबुझ गर्नु पर्नेछ।
|
| 128 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम निरीक्षण एवं जाँचबुझ गर्दा निबेदकलाई अनुमतिपत्र दिन उपयुक्त देखिएमा बैङ्गले निबेदन प्राप्त भएको मितिले साठी दिनभित्र तोकिए बमोजिमको रकम धरौटी लिई निबेदकलाई भुक्तानी प्रणाली सञ्चालक बा भुक्तानी सेवा प्रदायकको रूपमा काम गर्न अनुमतिपत्र दिनु पर्नेछ।
|
| 129 |
+
|
| 130 |
+
**१०. शर्त तोक्न सक्ने:**
|
| 131 |
+
(१) बैङ्गले दफा ९ बमोजिम जारी गरेको अनुमतिपत्रमा संस्थाले पालना गर्नु पर्ने आवश्यक शर्तहरू तोक्न सक्नेछ।
|
| 132 |
+
(२) उपदफा (१) का अतिरिक्त बैङ्गले समय समयमा निर्देशन जारी गरी अन्य थप शर्तहरू तोक्न, कायम रहेका शर्तहरू हटाउन बा शर्तमा हेरफेर गर्न सक्नेछ।
|
| 133 |
+
(३) उपदफा (१) र (२) बमोजिम तोकिएका शर्तहरूको पालना गर्नु सम्बन्धित संस्थाको कर्तव्य हुनेछ।
|
| 134 |
+
|
| 135 |
+
**११. अनुमतिपत्र दिन इन्कार गर्न सक्ने:**
|
| 136 |
+
(१) यस ऐनमा अन्यत्र जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि बैइले देहायको अवस्थामा निवेदकलाई भुक्तानी प्रणाली सञ्चालक बा भुक्तानी सेवा प्रदायकको रूपमा काम गर्न अनुमतिपत्र दिन इन्कार गर्न सक्नेछ:-
|
| 137 |
+
(क) संस्थाको भौतिक तथा प्राविधिक पूर्वाधार अपर्याप्त देखिएमा,
|
| 138 |
+
(ख) दफा ८ को उपदफा (१) मा उल्लेख भए बमोजिमका सम्पूर्ण बिबरण कागजात पेश नगरेमा,
|
| 139 |
+
(ग) बैइले तोकेको अबधिभित्र अनुमतिपत्र बापतको धरौटी रकम बैइमा नबुझाएमा।
|
| 140 |
+
|
| 141 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम अनुमति दिन इन्कार गरेमा बैइले सोको कारण सहितको लिखित जानकारी निवेदकलाई दिनु पर्नेछ।
|
| 142 |
+
(३) यस दफा बमोजिम अनुमतिपत्र प्रदान गर्न इन्कार गरिएको कारणबाट निवेदकलाई कुनै हानि नोक्सानी हुन गएमा त्यस्तो हानि नोक्सानी उपर बैइले कुनै दायित्व व्यहोर्ने छैन।
|
| 143 |
+
|
| 144 |
+
**१२. सम्झौता गर्नु पर्ने:**
|
| 145 |
+
(१) संस्थाले आफ्नो सेवा सञ्चालन गर्नु अघि यस ऐन बमोजिम बित्तीय कारोबारको समाशोधन, फस्योट, हिसाब मिलान बा दायित्व भुक्तानी गर्ने प्रयोजनको लागि कुनै सेटलमेण्ट बैइसँग तोकिए बमोजिम सम्झौता गर्नु पर्नेछ।
|
| 146 |
+
(२) संस्थाले उपदफा (१) बमोजिम सम्झौता गरेको सेटलमेण्ट बैइमा यस ऐन बमोजिम गरिने भुक्तानी तथा फस्यौट कारोबारको लागि छुट्टै खाता खोल्नु पर्नेछ।
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| 147 |
+
|
| 148 |
+
**१३. अनुमतिपत्रको अबधि र नबीकरण:**
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| 149 |
+
(१) यस ऐन बमोजिम नबीकरण गरेकोमा बाहेक दफा ९ बमोजिम प्रदान गरिएको अनुमतिपत्रको अबधि पाँच बर्षको हुनेछ।
|
| 150 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम अनुमतिपत्रको अबधि समाप्त हुनुभन्दा नब्बे दिन अगावै सम्बन्धित संस्थाले तोकिए बमोजिमको दस्तुर सहित नबीकरणको लागि बैइसमक्ष निवेदन दिनु पर्नेछ।
|
| 151 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम निवेदन प्राप्त भएपछि बैइले त्यस्तो संस्थाको स्थलगत निरीक्षण समेत गरी जाँचबुझ गर्दा अनुमतिपत्र नबीकरण गर्न उपयुक्त देखेमा निवेदन प्राप्त भएको मितिले साठी दिनभित्र अनुमतिपत्र नबीकरण गरिदिनु पर्नेछ।
|
| 152 |
+
(४) उपदफा (३) बमोजिमको स्थलगत निरीक्षण तथा जाँचबुझबाट अनुमतिपत्र नवीकरण गर्न उपयुक्त नदेखिएमा सात दिनभित्र सोको लिखित जानकारी निवेदकलाई दिनु पर्नेछ।
|
| 153 |
+
(५) उपदफा (२) बमोजिम तोकिएको अबधिभित्र कुनै कारणले अनुमतिपत्र नवीकरणको लागि निवेदन दिन नसकिएमा अनुमतिपत्रको म्याद समाप्त भएको नब्बे दिनसम्म यस ऐन बमोजिम लाग्ने नवीकरण दस्तुरको दोब्बर दस्तुर तिरी अनुमतिपत्र नवीकरण गराउन सकिनेछ।
|
| 154 |
+
(६) उपदफा (५) बमोजिम तोकिएको अबधिभित्र नवीकरणको लागि निवेदन नदिने संस्थाको अनुमतिपत्र त्यस्तो अनुमतिपत्रको अबधि समाप्त भएपछि स्वतः रद्द हुनेछ।
|
| 155 |
+
(७) अनुमतिपत्र नवीकरण सम्बन्धी अन्य व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 156 |
+
|
| 157 |
+
**१४. भुक्तानी उपकरण थप गर्न बा खारेज गर्न निवेदन दिनु पर्नेः**
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| 158 |
+
(१) संस्थाले यस ऐन बमोजिम प्राप्त गरेको अनुमतिपत्रमा उल्लेख नभएको कुनै भुक्तानी उपकरण थप गर्न बा कायम रहेको कुनै भुक्तानी उपकरण खारेज गर्न चाहेमा बैइ समक्ष तोकिए बमोजिम निवेदन दिनु पर्नेछ।
|
| 159 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम प्राप्त निवेदन देहायको आधारमा जाँचबुझ गर्दा कुनै भुक्तानी उपकरण थप गर्न बा कायम रहेको भुक्तानी उपकरण खारेज गर्न उपयुक्त देखिएमा बैइले त्यस्तो भुक्तानी उपकरण थप गर्न बा खारेज गर्न सम्बन्धित संस्थालाई अनुमति दिन सक्नेछ:-
|
| 160 |
+
(क) राष्ट्रिय अर्थतन्त्रको अवस्था,
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| 161 |
+
(ख) भुक्तानी सेबाको प्रभावकारिता, पारदर्शिता र बिश्वसनीयता,
|
| 162 |
+
(ग) भुक्तानी सम्बन्धी कारोबारको गोपनीयता,
|
| 163 |
+
(घ) भुक्तानी सम्बन्धी उपकरणमा अन्तरनिहित जोखिम,
|
| 164 |
+
(ङ) छिटो, छरितो र सुलभ सेबाको प्रत्याभूति,
|
| 165 |
+
(च) तरलता व्यवस्थापन,
|
| 166 |
+
(छ) अन्तर्राष्ट्रिय प्रचलन तथा असल अभ्यास,
|
| 167 |
+
(ज) ग्राहकको हित संरक्षण,
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| 168 |
+
(झ) समग्र जोखिम व्यवस्थापन बिधि, र
|
| 169 |
+
(ञ) बैइले उपयुक्त देखेका अन्य बिषयहरु।
|
| 170 |
+
|
| 171 |
+
**१५. संस्थाको विवरण प्रकाशन गर्नु पर्ने:**
|
| 172 |
+
बैइले यस ऐन बमोजिम अनुमतिपत्र प्राप्त संस्थाको विवरण तोकिए बमोजिम अद्यावधिक गरी आफ्नो बेवसाइट मार्फत नियमित रूपमा प्रकाशन गर्नु पर्नेछ।
|
| 173 |
+
|
| 174 |
+
**१६. चुक्ता पूँजी:**
|
| 175 |
+
संस्थाको चुक्ता पूँजी बैइले समय समयमा निर्धारण गरे बमोजिम हुनेछ।
|
| 176 |
+
|
| 177 |
+
---
|
| 178 |
+
|
| 179 |
+
## परिच्छेद-४
|
| 180 |
+
### संस्थाको सञ्चालक समिति
|
| 181 |
+
|
| 182 |
+
**१७. सञ्चालक समितिको गठन:**
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| 183 |
+
(१) प्रत्येक संस्थामा कम्तीमा तीनजना सञ्चालकहरु रहेको एक सञ्चालक समिति रहनेछ।
|
| 184 |
+
(२) संस्थाको सञ्चालकको नियुक्ति प्रचलित कानूनको अधीनमा रही संस्थाको साधारण सभाले गर्नेछ।
|
| 185 |
+
(३) सञ्चालकहरुले आफूमध्ये बहुमतबाट छानेको कुनै एकजना व्यक्ति सञ्चालक समितिको अध्यक्ष हुनेछ।
|
| 186 |
+
(४) बैइ तथा बितीय संस्था बाहेकका संस्थाको सञ्चालकको पदमा नियुक्ति हुने व्यक्तिको योग्यता तथा सञ्चालक समिति सम्बन्धी अन्य व्यवस्था यस ऐन अन्तर्गत बनेको विनियममा उल्लेख भए बमोजिम हुनेछ।
|
| 187 |
+
|
| 188 |
+
**१८. सञ्चालक समितिको काम, कर्तव्य र अधिकार:**
|
| 189 |
+
(१) संस्थाको साधारण सभाबाट हुने काम बाहेक बैइबाट भुक्तानी, समाशोधन तथा फस्यौंटको सम्बन्धमा यस ऐन, प्रचलित कानून, प्रबन्धपत्र र नियमावलीको अधीनमा रही संस्थाले गर्नु पर्ने सम्पूर्ण काम, कर्तव्य र अधिकार सञ्चालक समितिमा निहित रहनेछ।
|
| 190 |
+
(२) संस्थाको समग्र जोखिम व्यवस्थापन गरी सेबाग्राहीको हितमा संस्थाको सञ्चालन गर्नु र संस्थागत सुशासन कायम गर्नु सम्बन्धित संस्थाको सञ्चालक समितिको कर्तव्य हुनेछ।
|
| 191 |
+
(३) सञ्चालक समितिको अन्य काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछ:-
|
| 192 |
+
(क) संस्थाले गर्नु पर्ने काम सुव्यबस्थित रुपले सञ्चालन गर्न यस ऐन, प्रचलित कानून तथा बैङ्कको निर्देशनको अधीनमा रही आवश्यक विनियम, निर्देशिका र कार्यबिधि बनाई लागू गर्ने,
|
| 193 |
+
(ख) संस्थाको संगटनात्मक संरचना स्वीकृत गर्ने,
|
| 194 |
+
(ग) भुक्तानी प्रणाली सञ्चालन बा भुक्तानी सेवा प्रदान गर्दा जोखिम बा जोखिमजन्य परिस्थिति उत्पन्न हुन नदिन आन्तरिक नियन्त्रण प्रणाली एवं जोखिम व्यवस्थापनका मापदण्ड तयार गरी लागू गर्ने,
|
| 195 |
+
(घ) संस्थाले गर्नु पर्ने सम्पूर्ण काम कारबाहीको नियमित अनुगमन गरी व्यवस्थित तबरबाट संस्था सञ्चालन गर्ने, गराउने,
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| 196 |
+
(ङ) बार्षिक प्रतिबेदन सहितको लेखापरीक्षण प्रतिबेदन तयार गर्न लगाई संस्थाको बार��षिक साधारण सभामा पेश गर्ने,
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| 197 |
+
(च) बैङ्कले समय समयमा तोके बमोजिमका अन्य कार्यहरु गर्ने।
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| 198 |
+
(४) संस्थाको सञ्चालकको हैसियतले काम गर्ने सञ्चालक आफ्नो अधिकारक्षेत्र नाघी गरेको कुनै पनि काम कारबाही प्रति व्यक्तिगत रुपमा उत्तरदायी हुनेछ।
|
| 199 |
+
(५) सञ्चालक समितिको अन्य काम, कर्तव्य र अधिकार तथा बैठक सम्बन्धी कार्यबिधि तथा अन्य व्यवस्था संस्थाको प्रबन्धपत्र तथा नियमाबलीमा उल्लेख भए बमोजिम हुनेछ।
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| 200 |
+
|
| 201 |
+
**१९. कार्यकारी प्रमुखको नियुक्ति र सेबाका शर्त:**
|
| 202 |
+
(१) सञ्चालक समितिले यो ऐन, संस्थाको प्रबन्धपत्र र नियमाबलीको अधीनमा रही संस्थामा एक कार्यकारी प्रमुखको नियुक्ति गर्नु पर्नेछ।
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| 203 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको कार्यकारी प्रमुखको शैक्षिक योग्यता र अनुभव यस ऐन अन्तर्गत बनेको विनियममा तोकिए बमोजिम हुनेछ।
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| 204 |
+
(३) सञ्चालक समितिले उपदफा (२) बमोजिम योग्यता पुगेको व्यक्तिलाई संस्थाको कार्यकारी प्रमुखमा नियुक्त गरी सात दिनभित्र सोको जानकारी बैइलाई दिनु पर्नेछ।
|
| 205 |
+
(४) कार्यकारी प्रमुखको पदाबधि सामान्यतयाः चार बर्षको हुनेछ र निज पुनः नियुक्त हुन सक्नेछ।
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| 206 |
+
(५) कार्यकारी प्रमुखको पारिश्रमिक, सेबाका शर्त तथा अन्य सुविधा कम्पनीको सञ्चालक समितिले निर्धारण गरे बमोजिम हुनेछ।
|
| 207 |
+
(६) कार्यकारी प्रमुखको पारिश्रमिक, सेबाका शर्त तथा अन्य सुविधाको निर्धारण निजलाई नियुक्त गर्दाका बखत गर्नु पर्नेछ।
|
| 208 |
+
(७) यस दफामा अन्यत्र जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि बैइ तथा बित्तीय संस्थाको कार्यकारी प्रमुख सम्बन्धी व्यवस्था सो सम्बन्धी प्रचलित कानून बमोजिम हुनेछ।
|
| 209 |
+
|
| 210 |
+
**२०. कार्यकारी प्रमुखको काम, कर्तव्य र अधिकार:**
|
| 211 |
+
कार्यकारी प्रमुखको काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछ:-
|
| 212 |
+
(क) साधारणसभा बा सञ्चालक समितिको निर्णय कार्यान्वयन गर्ने, गराउने,
|
| 213 |
+
(ख) प्रबन्धपत्र र नियमाबलीको अधीनमा रही सञ्चालक समितिबाट प्राप्त अधिकारको प्रयोग गरी संस्थाको प्रशासकीय प्रमुखको रूपमा काम गर्ने,
|
| 214 |
+
(ग) भुक्तानी प्रणाली सञ्चालन बा भुक्तानी सेवा प्रदान सम्बन्धी काम कारबाहीको रेखदेख तथा नियन्त्रण गर्ने,
|
| 215 |
+
(घ) संस्थाको बार्षिक बजेट र कार्ययोजना तयार गरी स्वीकृतिको लागि सञ्चालक समिति समक्ष पेश गर्ने,
|
| 216 |
+
(ङ) कर्मचारी विनियमाबलीको अधीनमा रही संस्थालाई आवश्यक पर्ने जनशक्ति व्यवस्थापन गर्ने,
|
| 217 |
+
(च) बैइको निर्देशन अनुरुप संस्था सञ्चालन ���र्ने तथा प्रभावकारी आन्तरिक नियन्त्रण एवं जोखिम व्यवस्थापन गर्ने,
|
| 218 |
+
(छ) सेबाग्राही, शेयरधनी तथा संस्थाको उच्चतम हित हुने गरी संस्था सञ्चालन गर्ने,
|
| 219 |
+
(ज) बैइद्वारा जारी गरिएका विनियम, निर्देशन तथा आदेशको अधीनमा रही भुक्तानी तथा फर्स्योट सम्बन्धी काम छिटो, छरितो, सुरक्षित र ब्यबस्थित रुपले सम्पादन गर्ने।
|
| 220 |
+
|
| 221 |
+
---
|
| 222 |
+
|
| 223 |
+
## परिच्छेद-५
|
| 224 |
+
### संस्थाको दायित्व
|
| 225 |
+
|
| 226 |
+
**२१. संस्था आबद्ध हुनु पर्ने:**
|
| 227 |
+
प्रत्येक संस्था र त्यस्तो संस्थाले जारी गरेको भुक्तानी उपकरण बैइले निर्धारण गरेको प्रक्रिया बमोजिम राष्ट्रिय भुक्तानी (वित्तीय) स्त्रीच र भुक्तानीद्वार (पेमेन्ट गेट बे) मा आबद्ध हुनु पर्नेछ।
|
| 228 |
+
|
| 229 |
+
**२२. सेवा सञ्चालन गर्नु पर्ने:**
|
| 230 |
+
(१) संस्थाले यस ऐन, यस ऐन अन्तर्गत बनेको विनियम, बैइले जारी गरेको निर्देशन तथा अनुमतिपत्रमा तोकिएका शर्त तथा अन्य प्रचलित कानूनले तोकेको मापदण्ड बमोजिम भुक्तानी प्रणाली सञ्चालन बा भुक्तानी सेवा प्रदान गर्नु पर्नेछ।
|
| 231 |
+
(२) संस्थाले बैइले स्वीकृत गरेको बा जारी गरेको भुक्तानी, समाशोधन, फर्स्योट र हिसाब मिलान प्रक्रिया सम्बन्धी कार्यविधिको पूर्ण पालना गर्नु पर्नेछ।
|
| 232 |
+
(३) संस्थाले अनुमतिपत्रमा तोकिएको अबधिभित्र अनुमतिपत्रमा उल्लेख भए बमोजिम भुक्तानी प्रणाली सञ्चालक बा भुक्तानी सेवा प्रदायक सम्बन्धी काम शुरु गर्नु पर्नेछ।
|
| 233 |
+
(४) उपदफा (३) बमोजिमको अबधिभित्र काम शुरु नगर्ने संस्थाको अनुमतिपत्र बैइले तोकिए बमोजिम खारेज गर्न सक्नेछ।
|
| 234 |
+
|
| 235 |
+
**२३. अभिलेख सुरक्षित राख्नु पर्ने:**
|
| 236 |
+
(१) संस्थाले भुक्तानी प्रणाली सञ्चालन बा भुक्तानी सेवा प्रदान गर्दा अपनाउनु पर्ने सुरक्षा नीति, ढाँचा र सोको लागि अबलम्बन गरिएका उपाय बा संयन्त्रको नियमित अनुगमन बा परीक्षण गरी भुक्तानी तथा फर्स्योटको बिबरण र सो सम्बन्धी सूचना तथा अभिलेख सुरक्षित राख्नु पर्नेछ।
|
| 237 |
+
(२) संस्थाले भुक्तानी प्रणालीको सुरक्षा, गोपनीयता र बिश्वसनीयताको लागि आधिकारिक बा प्रमाणित कम्प्युटर संयन्त्र (सर्टिफाइड सफ्टवेयर र हार्ड बेयर) र सुरक्षित तथ्याइ प्रणाली (सेक्युड्ड डेटाबेस, डेटा ब्याकअप, डेटा सेन्टर) को अतिरिक्त र संभावित क्षतिको न्यूनीकरण गर्न क्षति पुनःस्थापन प्रणाली (डिजास्टर रिकभरी सिस्टम) को व्यवस्था गर्नु पर्नेछ।
|
| 238 |
+
(३) संस्थाले सेबाग्राहीको नाम, ठेगाना, खाता नम्बर, कारोबार मिति, कारोबारक��� रकम, रकम स्थानान्तरण (ट्रान्सफर) को किसिम, सेबाग्राहीले रकम स्थानान्तरण (ट्रान्सफर) गरेको खाता र रकमको विवरण, भुक्तानी बा रकम स्थानान्तरण (ट्रान्सफर) गर्न सेबाग्राहीले दिएको आदेश, मौज्दात विवरण र तोकिए बमोजिमका अन्य विवरण तथा अभिलेख बैङ्गले तोकेको अबधिसम्म सुरक्षित राख्नु पर्नेछ।
|
| 239 |
+
|
| 240 |
+
**२४. तरलता मौज्दात राख्नु पर्ने:**
|
| 241 |
+
(१) संस्थाले भुक्तानी सेबा प्रदान गर्दा कारोबारको प्रकृति, कारोबारको परिमाण, कारोबारमा निहित जोखिम समेतका आधारमा संस्थाले बहन गर्नु पर्ने दायित्वलाई खाम्ने गरी बैङ्गले समय समयमा तोके बमोजिमको मात्रामा नघट्ने गरी सेटलमेण्ट बैङ्गमा पर्याप्त तरलता मौज्दात राख्नु पर्नेछ।
|
| 242 |
+
(२) कम्पनीले कुनै कारणले ग्राहकको कारोबारको दायित्व भुक्तानी गर्न नसकेको अबस्थामा सोको फर्स्योट गर्ने दायित्व सेटलमेण्ट बैङ्कको हुनेछ।
|
| 243 |
+
|
| 244 |
+
**२५. लेखा तथा लेखापरीक्षण:**
|
| 245 |
+
(१) संस्थाले आफ्नो हिसाब किताब, बहीखाता, स्रेस्ता र लेखाको अभिलेख प्रचलित लेखामान बा लेखाका सर्वमान्य सिद्धान्त अनुरुप कारोबारको यथार्थ स्थिति स्पष्ट रुपमा प्रतिबिम्बित हुने गरी दुरुस्त राख्नु पर्नेछ।
|
| 246 |
+
(२) संस्थाले प्रत्येक आर्थिक बर्ष समाप्त भएको चार महिनाभित्र अनिबार्य रुपमा आफ्नो बित्तीय र समग्र भुक्तानी प्रणालीको लेखापरीक्षण गराउनु पर्नेछ।
|
| 247 |
+
(३) संस्थाले आफ्नो बार्षिक बित्तीय विवरण सार्वजनिक गर्नुअघि तोकिए बमोजिम बैङ्कको स्वीकृति लिनु पर्नेछ।
|
| 248 |
+
(४) संस्थाको लेखा तथा लेखापरीक्षण सम्बन्धी अन्य व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 249 |
+
|
| 250 |
+
**२६. जानकारी गराउनु पर्ने:**
|
| 251 |
+
(१) संस्थाले आफूले प्रदान गर्ने सेबा, सेबा प्रयोग गरे बापत लाग्ने शुल्क, सेबाग्राहीले पालना गर्नु पर्ने शर्तहरु र कारोबार सञ्चालन प्रक्रिया बारेमा सेबाग्राहीलाई नियमित रूपमा जानकारी गराउनु पर्नेछ।
|
| 252 |
+
(२) संस्थाले सेबाग्राहीले मागेका बखत निजसँग सम्बन्धित कारोबारको विवरण लिखित रूपमा बा बिघुतीय माध्यमबाट उपलब्ध गराउनु पर्नेछ।
|
| 253 |
+
(३) संस्थाले बिघुतीय माध्यमबाट कारोबार गर्ने क्रममा कुनै बुटि भएमा सोको जानकारी तत्काल सम्बन्धित सेबाग्राहीलाई दिनु पर्नेछ।
|
| 254 |
+
|
| 255 |
+
**२७. विवरण पेश गर्नुपर्ने:**
|
| 256 |
+
संस्थाले बैङले तोकेको अबधिभित्र देहाय बमोजिमका विवरण कागजात बिघुतीय माध्यमद्वारा बैङ समक्ष पेश गर्नु पर्नेछ:-
|
| 257 |
+
(क) सञ्चालनमा रहेका खाता संख्या तथा विवरण,
|
| 258 |
+
(ख) कारोबार रकम,
|
| 259 |
+
(ग) संस्थाको बैङ माज्दात,
|
| 260 |
+
(घ) जालसाजी (फ्रड) तथा बिबाद सम्बन्धी घटनाहरुको विवरण,
|
| 261 |
+
(ङ) बिबादको अबस्था र समाधानको विवरण,
|
| 262 |
+
(च) प्राप्त गुनासो तथा सुझावहरु,
|
| 263 |
+
(छ) सेवा अवरुद्ध बा सुरक्षासँग सम्बन्धित घटनाहरु,
|
| 264 |
+
(ज) बैइले तोकेका अन्य विवरण।
|
| 265 |
+
|
| 266 |
+
**२८. विवरण गोप्य राख्नु पर्ने:**
|
| 267 |
+
(१) बैइले यस ऐन बमोजिम संस्थाको अनुगमन, नियमन तथा निगरानी गर्ने सिलसिलामा कुनै संस्थाबाट प्राप्त जानकारी, तथ्याङ, विवरण, सूचना तथा अभिलेख प्रचलित कानूनको अधीनमा रही गोप्य राख्नु पर्नेछ।
|
| 268 |
+
(२) संस्थाले संस्था र सेबाग्राही बीचको सम्बन्ध, संस्थाको हिसाब किताब, बहीखाता, स्रेस्ता र लेखाको विवरण सम्बन्धित व्यक्ति बाहेक अन्य कसैलाई उपलब्ध गराउनु हुँदैन।
|
| 269 |
+
(३) उपदफा (२) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि देहायको अबस्थामा कुनै जानकारी, तथ्याङ, विवरण, सूचना तथा अभिलेख उपलब्ध गराएमा गोपनीयता भङ्ग गरेको मानिने छैन:-
|
| 270 |
+
(क) संस्थाको निगरानीको सिलसिलामा बैइलाई उपलब्ध गराएमा,
|
| 271 |
+
(ख) मुद्दा बा कानूनी कारबाहीको सिलसिलामा अदालतलाई उपलब्ध गराएमा,
|
| 272 |
+
(ग) कानून बमोजिम अधिकार प्राप्त अनुसन्धान, तहकिकात, जाँचबुझ बा अभियोजन गर्ने अधिकारीलाई तहकिकात, जाँचबुझ बा अभियोजनको सिलसिलामा उपलब्ध गराएमा,
|
| 273 |
+
(घ) लेखापरीक्षणको सिलसिलामा सम्बन्धित लेखापरीक्षकलाई उपलब्ध गराएमा।
|
| 274 |
+
|
| 275 |
+
**२९. प्रतिबेदन गर्नुपर्ने:**
|
| 276 |
+
प्रत्येक संस्थाले सम्पत्ति शुद्धीकरण सम्बन्धी प्रचलित कानूनी व्यवस्था र सो सम्बन्धमा बैङ् बा सम्बन्धित निकायले जारी गरेको निर्देशन बमोजिम आफ्नो कारोबारको अभिलेख राखी समयमै सोको प्रतिबेदन सम्बन्धित निकायमा गर्नुपर्नेछ।
|
| 277 |
+
|
| 278 |
+
**३०. उपभोक्ताको हित संरक्षण हुने गरी सेबा सञ्चालन गर्नु पर्ने:**
|
| 279 |
+
कम्पनीले भुक्तानी प्रणाली बा भुक्तानी सेबा प्रदायकको कारोबारको सञ्चालन गर्दा उपभोक्ताको हित संरक्षण एबं भुक्तानीको सुरक्षा हुने व्यवस्था गरी बिश्वसनीय र गुणस्तरीय सेबा सञ्चालन गर्नुपर्नेछ।
|
| 280 |
+
|
| 281 |
+
---
|
| 282 |
+
|
| 283 |
+
## परिच्छेद-६
|
| 284 |
+
### भुक्तानी उपकरण तथा फर्स्योट
|
| 285 |
+
|
| 286 |
+
**३१. भुक्तानीका उपकरण:**
|
| 287 |
+
(१) भुक्तानी प्रणालीमा देहाय बमोजिमका भुक्तानीका उपकरणको प्रयोग हुनेछ:-
|
| 288 |
+
(क) नगद,
|
| 289 |
+
(ख) चेक,
|
| 290 |
+
(ग) बिधुतीय बैंकिङ् (इ-बैंकिङ्),
|
| 291 |
+
(घ) भुक्तानी कार्ड,
|
| 292 |
+
(ङ) स्वीफ्टको माध्यमबाट हुने भुक्तानी,
|
| 293 |
+
(च) अन्तर बैङ् भुक्तानी,
|
| 294 |
+
(छ) इ-मनी (बालेट),
|
| 295 |
+
(ज) मोबाइल बैंकिङ्ग,
|
| 296 |
+
(झ) तोकिए बमोजिमका अन्य भुक्तानी उपकरण।
|
| 297 |
+
(२) भुक्तानी उपकरण सम्बन्धी अन्य व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 298 |
+
|
| 299 |
+
**३२. कारोबारको फर्स्योट:**
|
| 300 |
+
(१) बैङ्ग बा संस्थाले प्रत्येक भुक्तानी आदेश बा प्रत्येक भुक्तानी कारोबारको फर्स्योट गर्दा त्यस्तो आदेश बा कारोबार बास्तविक समय (रियल टाइम) मा छुट्टछुट्टै तरिकाले फर्स्योट गर्नुपर्नेछ।
|
| 301 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि बैङ् बा संस्थाले कारोबारको फर्स्योट गर्दा निश्चित समयको अन्तरालभित्र प्राप्त भुक्तानी आदेश बा भुक्तानी कारोबारलाई भुक्तानीसँग सम्बन्धित खाता डेबिट बा क्रेडिट नेटिङ्को आधारमा एकमुष्ठ रूपमा अन्तराल हिसाब गरी कारोबारको फर्स्योट गर्न सक्नेछ।
|
| 302 |
+
|
| 303 |
+
**स्पष्टीकरण:**
|
| 304 |
+
यस उपदफाको प्रयोजनको लागि "नेटिङ्" भन्नाले बैङले तोकेको प्रक्रिया बमोजिम निश्चित अबधिमा भुक्तानी तथा फर्स्योट कार्यमा संलग्न कम्पनीहरु बीच भएको कारोबारको बैङ् मार्फत खुद हिसाब मिलान गर्ने प्रणाली सम्झनु पर्छ।
|
| 305 |
+
|
| 306 |
+
(३) नगद, ट्रान्सफर र स्वीपट कारोबारको फर्स्योट उपदफा (१) बमोजिम र बिघुतीय चेक राफसाफ (क्लियरिङ) मार्फत हुने दैनिक कारोबारको फर्स्योट उपदफा (२) बमोजिम गर्नुपर्नेछ।
|
| 307 |
+
(४) आरटिजिएस बमोजिम हुने टूलो मूल्य भुक्तानी कारोबारको फर्स्योट उपदफा (१) बमोजिम हुनेछ।
|
| 308 |
+
(५) बिघुतीय चेक राफसाफ (क्लियरिङ) गर्दा समाशोधन गृह (क्लियरिङ हाउस) मार्फत हुने कारोबार बैङ्ले तोकेबमोजिम कुल फर्स्योट बा खुद फर्स्योट बिधि मार्फत गर्नुपर्नेछ।
|
| 309 |
+
|
| 310 |
+
**स्पष्टीकरण:**
|
| 311 |
+
यस उपदफाको प्रयोजनको लागि "कुल फर्स्योट" भन्नाले सेबाग्राहीको आदेश बमोजिम छुट्टछुट्टै तरिकाले गरिने कारोबारको फर्स्योट र "खुद फर्स्योट" भन्नाले निश्चित समय अन्तरालमा बा बैङ्ले निर्धारण गरे बमोजिम कारोबारको एकमुष्ठ फर्स्योट सम्झनु पर्छ।
|
| 312 |
+
|
| 313 |
+
(६) धितोपत्र तथा ऋणपत्रको निष्कासन, ब्याज गणना, लाभांश भुक्तानी, साबौं तथा व्याज भुक्तानी, स्वामित्व हस्तान्तरण तथा खरिद बिकी सम्बन्धी कारोबारको फर्स्योट धितोपत्र तथा ऋणपत्र सम्बन्धी प्रचलित कानून बमोजिम हुनेछ।
|
| 314 |
+
|
| 315 |
+
**३३. अन्तिम फर्स्योट:**
|
| 316 |
+
(१) संस्थाले बैइले समय समयमा दिएको निर्देशन अनुसार बैइ मार्फत कारोबारको अन्तिम फर्स्योट जोखिम कम हुने गरी छिटो, छरितो र प्रभावकारी रुपमा हुने व्यवस्था मिलाउनु पर्नेछ।
|
| 317 |
+
(२) संस्थाले कारोबारको कुनै पनि ब��ला अन्तिम फर्स्योट हुन सक्ने गरी पर्याप्त तरलता, धितो सुरक्षण र जोखिम व्यवस्थापन गर्नुपर्नेछ।
|
| 318 |
+
(३) बैइको खातामा कुल बा खुद कारोबार जुनसुकै रुपमा भए तापनि वास्तविक रकम हस्तान्तरण भएपछि मात्र कारोबारको अन्तिम फर्स्योट हुन्छ।
|
| 319 |
+
(४) कारोबारको अन्तिम फर्स्योट भइसकेपछि कुनै पनि भुक्तानी फिर्ता गर्न बा पुनः भुक्तानी गर्न पाइने छैन। तर कुनै कारणवश हिसाब फरक पर्न गएमा प्रमाणको आधारमा हिसाब मिलान गर्न बाधा पुगेको मानिने छैन।
|
| 320 |
+
(५) संस्थाले बैइले निर्धारण गरे बमोजिम कुनै रकम, तरल सम्पत्ति बा उपकरण सुरक्षण बापत धितो राख्न सक्नेछ।
|
| 321 |
+
(६) उपदफा (५) बमोजिम सुरक्षण बापत राखिएको धितो संस्थाले व्यहोर्नु पर्ने भुक्तानी सम्बन्धी अन्य दायित्व निर्बाहका लागि समेत प्रयोग गर्न सकिनेछ।
|
| 322 |
+
(७) संस्थाले भुक्तानीको अन्तिम हिसाब मिलान गर्दा बैइ मौज्दात बा उपदफा (५) बमोजिम राखिएको धितो बा सुरक्षणले नखामेको अवस्थामा कुनै विशेष समय तोकिएको रहेछ भने सोही समयभित्र र समय तोकिएको रहेनछ भने सोही दिन (इन्ट्राडे) हिसाब मिलान हुने गरी बैइले संस्थालाई ऋण उपलब्ध गराउन सक्नेछ।
|
| 323 |
+
|
| 324 |
+
**३४. आरटिजिएस प्रणालीबाट फर्स्योट गर्नु पर्ने:**
|
| 325 |
+
(१) यस ऐनमा अन्यत्र जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि बैइले तोकिदिए बमोजिम टूलो मूल्य र अति जरुरी भुक्तानी (हाइभ्यालु एण्ड क्रिटिकल पेमेन्ट) तथा कारोबारको फर्स्योट आरटिजिएस कुल बा खुद प्रणाली बमोजिम गर्नुपर्नेछ।
|
| 326 |
+
(२) आरटिजिएस प्रणालीको सञ्चालन कार्यबिधि, सदस्यता, कारोबारको सीमा, सेवा शुल्क, तरलताको व्यवस्था, जोखिम व्यवस्था, कारोबार समय, फर्स्योट विधि लगायतका व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 327 |
+
|
| 328 |
+
---
|
| 329 |
+
|
| 330 |
+
## परिच्छेद-७
|
| 331 |
+
### कारबाही, कसूर तथा दण्ड सजाय
|
| 332 |
+
|
| 333 |
+
**३५. कारबाही गर्न सक्ने:**
|
| 334 |
+
(१) यो ऐन, यस ऐन अन्तर्गत बनेको विनियम बा बैङले जारी गरेको निर्देशन बा आदेशको उल्लङ्गन गर्ने संस्थालाई उल्लङ्गनको प्रकृति र गम्भीरता हेरी बैइले देहाय बमोजिमको कुनै एक बा एकभन्दा बढी कारबाही गर्न सक्नेछ:-
|
| 335 |
+
(क) सचेत गराउने बा नसिहत दिने,
|
| 336 |
+
(ख) सुधारात्मक कदम चाल्नको लागि कवुलियत गराउने,
|
| 337 |
+
(ग) कारोबारमा सीमा तोक्ने,
|
| 338 |
+
(घ) संस्थाको सञ्चालक समितिलाई निलम्बन गर्ने,
|
| 339 |
+
(ङ) भुक्तानी उपकरणको सञ्चालनमा आंशिक बा पूर्ण प्रतिबन्ध लगाउने,
|
| 340 |
+
(च) अनुमतिपत्र खारेज गर्ने।
|
| 341 |
+
|
| 342 |
+
(२) यो ऐन, यस ऐन अन्तर्गत बनेको विनियम बा बैङले जारी गरेको निर्देशन बा आदेशबमोजिम बैइले माग गरेका बिबरण कागजात उपलब्ध नगराउने संस्थाको सञ्चालक बा कर्मचारीलाई बैइले देहाय बमोजिम कुनै एक बा एकभन्दा बढी कारबाही गर्न सक्नेछ:-
|
| 343 |
+
(क) सचेत गराउने बा नसिहत दिने,
|
| 344 |
+
(ख) निलम्बनमा राख्न बा तलबभत्ता लगायत सम्पूर्ण सुबिधाहरु रोक्का राख्न सम्बन्धित संस्थाको सञ्चालक समितिलाई आदेश दिने,
|
| 345 |
+
(ग) सञ्चालकको हकमा पदबाट हटाउने र कर्मचारीको हकमा संस्थाको कर्मचारी सेवा शर्त सम्बन्धी विनियमाबलीमा जुनसुकै व्यवस्था भए तापनि निजलाई सेबाबाट अबकाश दिन सम्बन्धित संस्थाको सञ्चालक समितिलाई आदेश दिने,
|
| 346 |
+
(घ) हिनामिना गरिएको रकम सम्बन्धित कसूरदारबाट असूल उपर गर्ने, गराउने।
|
| 347 |
+
|
| 348 |
+
(३) बैङ्कले उपदफा (१) बा (२) बमोजिम कुनै संस्था बा सोको पदाधिकारी बा कर्मचारीलाई कारबाहीको प्रस्ताव गर्नुअघि सफाई पेश गर्ने मनासिब मौका दिनुपर्नेछ।
|
| 349 |
+
|
| 350 |
+
**३६. कसूर गरेको मानिनेः**
|
| 351 |
+
कसैले देहायको कुनै कार्य गरेमा यस ऐन बमोजिम कसूर गरेको मानिनेछ:-
|
| 352 |
+
(क) दफा ५ बिपरीत अनुमतिपत्र नलिई भुक्तानी प्रणाली सञ्चालक बा भुक्तानी सेवा प्रदायकको रुपमा कार्य गरे, गराएमा,
|
| 353 |
+
(ख) दफा ६ को उपदफा (१) बमोजिम अनुमतिपत्र प्राप्त गर्न पेश गरेको निवेदनसाथ बा यस ऐन बमोजिम बैङ् समक्ष पेश गर्नु पर्ने कागजात, जानकारी, बिबरण बा तथ्याइमा गलत बा झूठा व्यहोरा उल्लेख गरेमा,
|
| 354 |
+
(ग) दफा १४ बमोजिम बैङ्कको अनुमति नलिई भुक्तानीका उपकरण थप गरी बा खारेज गरी सेवा सञ्चालन गरेमा बा भुक्तानी प्रणालीमा कुनै परिवर्तन गरेमा,
|
| 355 |
+
(घ) दफा २८ बमोजिम गोपनीयता कायम नगरेमा,
|
| 356 |
+
(ङ) संस्थाको सम्पत्ति हानि नोक्सानी गरेमा,
|
| 357 |
+
(च) बैङ्बाट गरिने निरीक्षण, अनुगमन बा निगरानी कार्यमा बाधा बिरोध गरेमा,
|
| 358 |
+
(छ) बैङ्कले दिएको निर्देशन पालना नगरेमा बा अनुमतिपत्रमा तोकिदिएका शर्त उल्लङ्गन गरेमा,
|
| 359 |
+
(ज) यस ऐन अर्न्तगत बनेको बिनियम, बैङ्कले जारी गरेको निर्देशन बा आदेश बिपरीत अन्य कुनै कार्य गरेमा।
|
| 360 |
+
|
| 361 |
+
**३७. दण्ड सजाय:**
|
| 362 |
+
(१) देहायका कसूर गर्ने व्यक्तिलाई देहाय बमोजिमको सजाय हुनेछ:-
|
| 363 |
+
(क) दफा ३६ को खण्ड (क) र (ख) को कसूर गरेमा पौब बर्पदेखि दश बर्पसम्म कैद बा एक करोड रूपैयौंसम्म जरीबाना बा दुबै सजाय,
|
| 364 |
+
(ख) दफा ३६ को खण्ड (ग), (घ) र (ङ) बमोजिमको कसूर गरेमा दुई बर्षसम्म कैद बा दश लाख रुपैयाँसम्म जरिवाना बा दुबै सजाय।
|
| 365 |
+
(२) कसैले दफा ३६ को खण्ड (च), (छ) र (ज) बमोजिमको कसूर गरेमा कसूरको प्रकृति र गम्भीरता हेरी बैइले कसूरदारलाई एक लाख रुपैयाँदेखि पाँच लाख रुपैयाँसम्म जरिवाना गर्न सक्नेछ।
|
| 366 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम सजाय हुने कसूरमा बिगो कायम भएमा त्यस्तो बिगो प्रचलित कानून बमोजिम सम्बन्धित कसूरदारबाट असुल उपर गरिनेछ।
|
| 367 |
+
(४) दफा ३६ बमोजिमको कसूरको उद्योग गर्ने बा त्यस्तो कसूरमा मतियार भई कार्य गर्ने व्यक्तिलाई मुख्य कसूरदारलाई हुने सजायको आधा सजाय हुनेछ।
|
| 368 |
+
(५) कसैले उपदफा (२) बमोजिम बैइले तोकेका जरिवाना तीस दिनभित्र बैइमा दाखिला नगरेमा निजको नाममा जुनसुकै बैइ तथा बित्तीय संस्थामा रहेको निक्षेपबाट त्यस्तो रकम कट्टा गरी बा निजको नाममा रहेको अचल सम्पत्ति रोक्का गरी बिगो रकम असूल गर्ने व्यवस्था मिलाउन बैइले सम्बन्धित निकायमा लेखी पटाउन सक्नेछ।
|
| 369 |
+
|
| 370 |
+
**३८. नेपाल सरकार बादी हुने:**
|
| 371 |
+
दफा ३६ को खण्ड (क), (ख), (ग), (घ) र (ङ) मा उल्लिखित कसूर सम्बन्धी मुट्ठामा नेपाल सरकार बादी हुनेछ।
|
| 372 |
+
|
| 373 |
+
**३९. पुनराबेदन लाग्ने:**
|
| 374 |
+
दफा ३७ को उपदफा (२) बमोजिम बैइले गरेको सजाय उपर चित्त नबुझने पक्षले सजायको आदेश पाएको मितिले पैतिस दिनभित्र सम्बन्धित उच्च अदालतमा पुनराबेदन गर्न सक्नेछ।
|
| 375 |
+
|
| 376 |
+
**४०. कारबाहीको लागि लेखी पटाउने:**
|
| 377 |
+
(१) दफा ३६ बमोजिमको कसूर गरेको जानकारी कुनै माध्यमबाट बैइलाई प्राप्त भएमा बैइले त्यस्तो कसूर उपर छानबिन गर्नको लागि सम्बन्धित अधिकारी समक्ष लेखी पटाउनु पर्नेछ।
|
| 378 |
+
(२) बैइले कुनै संस्था बा पदाधिकारीले दफा ३७ मा उल्लेख भएको बाहेक प्रचलित कानून बमोजिम सजाय हुन सक्ने कुनै कसूर गरेको जानकारी पाएमा सो सम्बन्धमा आवश्यक कारबाहीको लागि सम्बन्धित निकायमा लेखी पटाउन सक्नेछ।
|
| 379 |
+
|
| 380 |
+
**४१. प्रचलित कानून बमोजिम सजाय हुन सक्ने:**
|
| 381 |
+
यस ऐन बमोजिम सजाय हुने कुनै कसूरमा अन्य प्रचलित कानून बमोजिम पनि सजाय हुने रहेछ भने त्यस्तो कानून बमोजिम सजाय गर्न यस ऐनको कुनै कुराले बाधा पुगेको मानिने छैन।
|
| 382 |
+
|
| 383 |
+
---
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| 384 |
+
|
| 385 |
+
## परिच्छेद-८
|
| 386 |
+
### विविध
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| 387 |
+
|
| 388 |
+
**४२. अनुगमन, निगरानी तथा निरीक्षण:**
|
| 389 |
+
(१) बैइले यो ऐन, यस ऐन अन्तर्गत बनेको विनियम, प्रचलित कानून एवं स्थापित अभ्यासको आधारमा नियमित रूपमा संस्थाको अनुगमन तथा निरीक्षण गर्न सक्नेछ।
|
| 390 |
+
(२) बैइले सेबाग्राहीको हितलाई ध्यानमा राखी प्रचलित कानूनको अधीनमा रही संस्थाको कारोबार र भुक्तानीका उपकरणको नियमित निगरानी गर्नेछ।
|
| 391 |
+
(३) प्रचलित कानूनमा अन्यथा व्यवस्था भएकोमा बाहेक संस्थाको अनुगमन, निरीक्षण तथा निगरानी सम्बन्धी अन्य व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 392 |
+
|
| 393 |
+
**४३. विवादको समाधान:**
|
| 394 |
+
(१) यस ऐन बमोजिम संस्थाबाट सम्पादन हुने कुनै कामको सम्बन्धमा संस्था र सेबाग्राही बीचमा कुनै विवाद उत्पन्न भएमा त्यस्तो विवाद उत्पन्न भएको सात दिनभित्र सम्बन्धित संस्थाले आपसी सहमतिबाट समाधान गर्नु पर्नेछ।
|
| 395 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको अबधिभित्र विवाद समाधान हुन नसकेमा सो व्यहोरा खुलाई पन्ध्र दिनभित्र कुनै विवादको कुनै पक्षले बैइको भुक्तानी प्रणाली विभागमा विवाद समाधानको लागि निवेदन दिन सक्नेछ।
|
| 396 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम निवेदन पर्न आएमा बैइले विवादका पक्षलाई झिकाई सुनुवाईको मौका दिई मेलमिलापको प्रक्रिया बा अन्य प्रचलित कानून बमोजिम विवाद समाधानका उपायहरु अबलम्बन गरी विवादको समाधान गरिदिनु पर्नेछ।
|
| 397 |
+
(४) उपदफा (३) बमोजिम बैइले गरेको निर्णय अन्तिम हुनेछ।
|
| 398 |
+
|
| 399 |
+
**४४. विवाद समाधान समिति:**
|
| 400 |
+
(१) यस ऐन बमोजिम सम्पादन हुने कुनै कामको सम्बन्धमा संस्थाहरू बीच कुनै विवाद उत्पन्न भएमा त्यस्तो विवाद समाधान गर्न देहाय बमोजिमको एक बिबाद समाधान समिति रहनेछ:-
|
| 401 |
+
(क) सहसचिव, अर्थ मन्त्रालय - अध्यक्ष
|
| 402 |
+
(ख) सहसचिव, महालेखा नियन्त्रकको कार्यालय - सदस्य
|
| 403 |
+
(ग) बैङ्कको भुक्तानी प्रणाली विभागको कार्यकारी निर्देशक - सदस्य
|
| 404 |
+
(२) यस ऐन बमोजिम हुने कारोबारको सम्बन्धमा संस्थाहरूबीच कुनै बिबाद उत्पन्न भएमा कुनै पक्षले उपदफा (१) बमोजिमको समिति समक्ष बिबाद समाधानको लागि निवेदन दिन सक्नेछ।
|
| 405 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम कुनै पक्षको निवेदन परेमा बिबाद समाधान समितिले पन्ध्र दिनभित्र सम्बन्धित अर्को पक्षलाई झिकाई सुनुवाईको मौका दिई बिबादको समाधान गर्नु पर्नेछ।
|
| 406 |
+
(४) उपदफा (३) बमोजिम बिबाद समाधान समितिले गरेको निर्णय अन्तिम हुनेछ।
|
| 407 |
+
(५) बिबाद समाधान सम्बन्धी अन्य प्रक्रिया तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 408 |
+
|
| 409 |
+
**४५. निर्देशन दिन सक्ने:**
|
| 410 |
+
(१) यो ऐनको कार्यान्वयनको लागि बैङ्कले सम्बन्धित संस्थालाई समय समयमा आवश्यक निर्देशन दिन सक्नेछ।
|
| 411 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम बैङ्कले दिएको निर्देशन पालना गर्नु सम्बन्धित सबै संस्थाको कर्तव्य हुन्छ।
|
| 412 |
+
|
| 413 |
+
**४६. विनियम बनाउने अधिकार:**
|
| 414 |
+
यो ऐन कार्यान्वयन गर्न बैङ्कले आवश्यक विनियम बनाउन सक्नेछ।
|
| 415 |
+
|
| 416 |
+
**४७. खारेजी र बचाउ:**
|
| 417 |
+
(१) नेपाल राष्ट्र बैङ्ग ऐन, २०४६ को दफा १०३ खारेज गरिएको छ।
|
| 418 |
+
(२) उपदफा (१) बमोज��म भए गरेका काम कारबाही यसै ऐन बमोजिम भए गरेको मानिनेछ।
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section_8_pdf_10.txt
ADDED
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@@ -0,0 +1,397 @@
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| 1 |
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**वस्तुको प्रत्यक्ष बिक्री (व्यवस्थापन तथा नियमन गर्ने) ऐन, २०७४**
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| 2 |
+
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| 3 |
+
**प्रमाणीकरण तथा प्रकाशित मिति**
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| 4 |
+
२०७४। ७। १
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| 5 |
+
संबत् २०७४ सालको ऐन नं. ४३
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| 6 |
+
वस्तुको प्रत्यक्ष बिक्री सम्बन्धमा व्यवस्थापन तथा नियमन गर्न बनेको ऐन
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| 7 |
+
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| 8 |
+
**प्रस्तावनाः**
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| 9 |
+
वस्तुको प्रत्यक्ष बिक्री बा बितरण सम्बन्धी व्यवसायलाई नियमन गरी भरपर्दो, पारदर्शी एवं प्रतिस्पर्धात्मक बनाई सर्वसाधारण उपभोक्ताको हक हित संरक्षण गर्ने सम्बन्धमा आवश्यक व्यवस्था गर्न बाञ्छुनीय भएकोले, नेपालको संविधानको धारा २९६ को उपधारा (१) बमोजिमको व्यवस्थापिका-संसदले यो ऐन बनाएको छ ।
|
| 10 |
+
|
| 11 |
+
---
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| 12 |
+
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| 13 |
+
### **परिच्छेद-१**
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| 14 |
+
### **प्रारम्भिक**
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| 15 |
+
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| 16 |
+
**१. संक्षिप्त नाम र प्रारम्भः**
|
| 17 |
+
(१) यस ऐनको नाम "वस्तुको प्रत्यक्ष बिक्री (व्यवस्थापन तथा नियमन गर्ने) ऐन, २०७४" रहेको छ ।
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| 18 |
+
(२) यो ऐन व्यवस्थापिका-संसदबाट स्वीकृत भएको ९१ औं दिनदेखि लागू हुनेछ ।
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| 19 |
+
|
| 20 |
+
**२. परिभाषाः**
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| 21 |
+
बिषय बा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
|
| 22 |
+
(क) "अनुगमन समिति" भन्नाले दफा ३० बमोजिमको अनुगमन समिति सम्झनु पर्छ ।
|
| 23 |
+
(ख) "इजाजतपत्र" भन्नाले दफा ४ बमोजिम प्रदान गरिएको इजाजतपत्र सम्झनु पर्छ ।
|
| 24 |
+
(ग) "इजाजतपत्रबाला" भन्नाले दफा ४ बमोजिम इजाजतपत्र प्राप्त कम्पनी सम्झनु पर्छ ।
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| 25 |
+
(घ) "कम्पनी" भन्नाले प्रचलित कानून बमोजिम संस्थापना भएको कम्पनी सम्झनु पर्छ र सो शब्दले त्यस्तो कम्पनीको संस्थापक तथा सञ्चालक समेतलाई जनाउँछ ।
|
| 26 |
+
(ङ) "निर्देशक समिति" भन्नाले दफा २७ बमोजिमको निर्देशक समिति सम्झनु पर्छ ।
|
| 27 |
+
(च) "तोकिएको बा तोकिए बमोजिम" भन्नाले यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा तोकिएको बा तोकिए बमोजिम सम्झनु पर्छ ।
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| 28 |
+
(छ) "निरीक्षण अधिकृत" भन्नाले दफा २१ बमोजिम तोकिएको निरीक्षण अधिकृत सम्झनु पर्छ ।
|
| 29 |
+
(ज) "बैइ ग्यारेण्टी" भन्नाले विभागले माग गर्ना साथ बैइले नगद भुक्तानी गर्नु पर्ने गरी विभागले तोकेको बैइबाट जारी भएको बैइ ग्यारेण्टी सम्झनु पर्छ ।
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| 30 |
+
(झ) "मन्त्रालय" भन्नाले बाणिज्य मन्त्रालय सम्झनु पर्छ ।
|
| 31 |
+
(ट) "बस्तुको प्रत्यक्ष विक्रता बा बितरक" भन्नाले वस्तुको प्रत्यक्ष बिकी सम्बन्धी बजारीकरण बा बजार प्रबर्धन गर्नको लागि इजाजतपत्रबालाले सम्झौता गरी नियुक्त गरेको कम्तीमा अटार बर्ष उमेर पूरा भएको व्यक्ति बा प्रतिनिधि सम्झनु पर्छ ।
|
| 32 |
+
(ठ) "बस्तुको प्रत्यक्ष बिकी बा बितरण" भन्नाले इजाजतपत्रबालाले कुनै उत्पादक कम्पनी बा बि���रक कम्पनीबाट उपलब्ध बस्तु प्रत्यक्ष रुपमा उपभोक्तालाई बिकी बा बितरण गर्ने कार्यलाई सम्झनु पर्छ ।
|
| 33 |
+
(ड) "विभाग" भन्नाले बाणिज्य विभाग सम्झनु पर्छ ।
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| 34 |
+
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| 35 |
+
---
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| 36 |
+
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| 37 |
+
### **परिच्छेद-२**
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| 38 |
+
### **इजाजतपत्र सम्बन्धी व्यवस्था**
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| 39 |
+
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| 40 |
+
**३. इजाजतपत्र प्राम्र नगरी वस्तुको प्रत्यक्ष बिक्री बा वितरण सम्बन्धी कार्य गर्न नहुने:**
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| 41 |
+
यस ऐन बमोजिम इजाजतपत्र प्राम्र नगरी कसैले पनि तोकिएका वस्तुको प्रत्यक्ष बिक्री बा वितरण सम्बन्धी कार्य गर्न बा गराउन हुँदैन ।
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| 42 |
+
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| 43 |
+
**४. इजाजतपत्र प्राम्र गर्न निवेदन दिनु पर्ने:**
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| 44 |
+
(१) वस्तुको प्रत्यक्ष बिक्री बा वितरण सम्बन्धी व्यवसाय सञ्चालन गर्न चाहने कम्पनीले इजाजतपत्र प्राम्र गर्नका लागि देहाय बमोजिमको कागजात बा विवरण खुलाई तोकिएको ढाँचामा विभागमा निवेदन दिनु पर्नेछ:-
|
| 45 |
+
(क) कम्पनीको नाम,
|
| 46 |
+
(ख) कम्पनी दर्ताको प्रमाणपत्र, प्रबन्धपत्र र नियमावलीको प्रमाणित प्रतिलिपि,
|
| 47 |
+
(ग) प्रचलित कानून बमोजिम मूल्य अभिबुद्धि करदर्ता प्रमाणपत्रको प्रतिलिपि,
|
| 48 |
+
(घ) वस्तुका प्रत्यक्ष बिक्री सम्बन्धी विस्तृत कार्य योजना, लाभांश, कमिशन बाँडफाँट योजना,
|
| 49 |
+
(ङ) तोकिए बमोजिमका अन्य विवरण ।
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| 50 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम इजाजतपत्र माग गर्ने कम्पनीको चुक्ता पूँजी कम्तीमा एक करोड रुपैयाँ हुनु पर्नेछ् ।
|
| 51 |
+
|
| 52 |
+
**५. इजाजतपत्र प्रदान गर्न सक्ने:**
|
| 53 |
+
(१) विभागले दफा ४ बमोजिम प्राम्र निवेदनसाथ संलग्न कागजात तथा विवरणको अध्ययन गर्दा त्यस्तो कम्पनीलाई वस्तुको प्रत्यक्ष बिक्री बा वितरण सम्बन्धी व्यवसाय सञ्चालन गर्न इजाजतपत्र प्रदान गर्न उपयुक्त देखिएमा निवेदन प्राम्र भएको मितिले नब्बे दिनभित्र तोकिए बमोजिमको इजाजतपत्र दस्तुर र चुक्ता पूँजीको कम्तीमा पचास प्रतिशत नगद धरौटी बा सो बराबरको बैङ्ग ग्यारेण्टी लिई तोकिए बमोजिमको ढाँचामा इजाजतपत्र प्रदान गर्न सक्नेछ ।
|
| 54 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम निवेदनसाथ संलग्न कागजात तथा विवरण अध्ययन गर्दा निवेदकसँग थप कागजात बा विवरण माग गर्नुपनें बा पेश भएको कागजात बा विवरणका सम्बन्धमा थप स्पष्ट गर्नुपनें देखिएमा विभागले त्यस्तो कागजात बा विवरण माग गर्न बा पेश भएको कागजात बा विवरणका सम्बन्धमा थप स्पष्ट गर्नको लागि अवधि तोकी आदेश दिन सक्नेछ ।
|
| 55 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम आदेश भएमा सम्बन्धित निवेदकले त्यस्तो आदेश बमोजिम तोकिएको अवधिभित्र विभागमा आवश्यक कागजात बा विवरण पेश गर्न ��ा पेश भएको कागजात बा विवरणमा थप स्पष्ट गर्नु पर्नेछ ।
|
| 56 |
+
(४) उपदफा (१) बमोजिम इजाजतपत्र प्रदान गर्दा विभागले यो ऐन तथा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा उल्लिखित शर्तका अतिरिक्त अन्य आवश्यक शर्त तोक्न सक्नेछ ।
|
| 57 |
+
|
| 58 |
+
**६. इजाजतपत्र प्रदान नगरिनेः**
|
| 59 |
+
(१) दफा ४ बमोजिम प्राप्त निवेदनसाथ संलग्न कागजात तथा विवरण अध्ययन गर्दा इजाजतपत्र प्रदान गर्नु पर्ने मनासिब आधार र कारण नदेखेमा त्यस्तो निवेदकलाई इजाजतपत्र प्रदान गरिने छैन । विभागले त्यसरी इजाजतपत्र प्रदान नगर्नुको आधार र कारण सहितको लिखित जानकारी तीस दिनभित्र निवेदकलाई दिनु पर्नेछ ।
|
| 60 |
+
(२) उपदफ़ा (१) बमोजिम विभागले गरेको निर्णयमा चित्त नबुझ्ने निवेदकले त्यस्तो निर्णयको जानकारी पाएको मितिले एकाईस दिनभित्र मन्त्रालयमा पुनरावेदन गर्न सक्नेछ ।
|
| 61 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम पुनरावेदन पर्न आएमा पुनरावेदन परेको पैतीस दिनभित्र मन्त्रालयले निर्णय गर्नु पर्नेछ । मन्त्रालयले गरेको निर्णय अन्तिम हुनेछ ।
|
| 62 |
+
|
| 63 |
+
**७. चुक्ता पूँजी बुद्धि गर्न बा धरौटी थप गर्न आदेश दिन सक्नेः**
|
| 64 |
+
(१) दफा ४ र ४ मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि इजाजतपत्रवालाको चुक्ता पूँजी र इजाजतपत्र प्राप्त गर्दाको बखत राखेको धरौटी इजाजतपत्रवालाको कारोबारमा भएको बुद्धिको अनुपातमा कमी देखिन आएमा विभागले आवश्यकता अनुसार त्यस्तो चुक्ता पूँजीमा बुद्धि गर्न बा थप धरौटी दाखिला गर्न इजाजतपत्रवालालाई आदेश दिन सक्नेछ ।
|
| 65 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम आदेश भएमा सम्बन्धित इजाजतपत्रवालाले विभागले दिएको आदेश बमोजिम तोकिएको समय सीमाभित्र कम्पनीको चुक्ता पूँजीमा बृद्धि गर्न बा थप धरौटी दाखिला गर्नु पर्नेछ ।
|
| 66 |
+
|
| 67 |
+
**८. इजाजतपत्रको अबधि र नवीकरण सम्बन्धी व्यवस्थाः**
|
| 68 |
+
(१) यस ऐन बमोजिम प्रदान गरिएको इजाजतपत्र दुई बर्षसम्म बहाल रहनेछ ।
|
| 69 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम इजाजतपत्रको अबधि समाघ हुनुभन्दा साठी दिन अगावै इजाजतपत्रवालाले इजाजतपत्र नवीकरणका लागि तोकिए बमोजिमको दस्तुर सहित तोकिए बमोजिमको ढाँचामा विभागमा निवेदन दिनु पर्नेछ ।
|
| 70 |
+
(३) उपदफा (२) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि इजाजतपत्रको अबधि समाघ हुनुभन्दा कम्तीमा पन्ध्र दिन अगावै इजाजतपत्र नवीकरणका लागि लाग्ने दस्तुरको दोब्बर दस्तुर सहित तोकिए बमोजिमको ढाँचामा विभागमा निवेदन दिन सकिनेछ ।
|
| 71 |
+
(४) उपदफा (२) बा (३) बमोजिम नवीकरणका लागि निवेदन प्राघ भएमा विभागले निवेदन प्राघ भएको मितिले पन्ध्र दिनभित्र दुई बर्षका लागि इजाजतपत्र नवीकरण गरी त्यसको जानकारी इजाजतपत्रवालालाई दिनु पर्नेछ ।
|
| 72 |
+
(५) यस दफा बमोजिम इजाजतपत्र नवीकरण नभई अबधि समाघ भएमा त्यस्तो इजाजतपत्र स्वतः रद्द हुनेछ ।
|
| 73 |
+
|
| 74 |
+
**९. इजाजतपत्र रद् गर्न सक्नेः**
|
| 75 |
+
(१) विभागले देहायको कुनै अवस्थामा यस ऐन बमोजिम प्रदान गरिएको इजाजतपत्र रद् गर्न सक्नेछ:-
|
| 76 |
+
(क) झूझ कागजात बा विवरण पेश गरी इजाजतपत्र प्राम्र गरेको देखिएमा,
|
| 77 |
+
(ख) दफा ७ बमोजिम विभागले दिएको आदेश बमोजिम तोकिएको अबधिभित्र चुक्ता पूँजी बृद्धि नगरेमा बा थप धरौटी दाखिला नगरेमा,
|
| 78 |
+
(ग) दफा ११ विपरीत हुने गरी व्यवसाय सञ्चालन गरेमा,
|
| 79 |
+
(घ) दफा १४ बमोजिम सम्झौता नगरी व्यवसाय सञ्चालन गरेमा,
|
| 80 |
+
(ङ) दफा २३ बमोजिम उपभोक्तालाई दिनु पर्ने क्षतिपूर्ति तोकिएको अबधिभित्र नदिएमा,
|
| 81 |
+
(च) दफा २४ बमोजिम तिर्नु पर्ने जरिबाना तीन महिनाभित्र नतिरेमा,
|
| 82 |
+
(छ) दुई बर्षको अबधिभित्र तेस्रो पटक दफा २४ बमोजिम जरिबाना हुने कार्य गरेमा,
|
| 83 |
+
(ज) यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बिपरीत अन्य कुनै कार्य गरेमा ।
|
| 84 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम इजाजतपत्र रद् गर्नु अघि विभागले सम्बन्धित इजाजतपत्रवालालाई आफ्नो सफाइ पेश गर्ने मनासिब मौका दिनु पर्नेछ् ।
|
| 85 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम इजाजतपत्र रद् गर्ने विभागको निर्णय उपर चित्त नबुझ्ने पक्षले त्यस्तो इजाजतपत्र रद् गर्ने निर्णयको जानकारी पाएको मितिले पैतीस दिनभित्र सम्बन्धित उच्च अदालतमा पुनरावेदन दिन सक्नेछ् ।
|
| 86 |
+
|
| 87 |
+
**१०. स्वामित्व बा दायित्व हस्तान्तरण बा परिवर्तन सम्बन्धी व्यवस्थाः**
|
| 88 |
+
(१) इजाजतपत्रवालाले आफ्नो कम्पनीको स्वामित्व बा दायित्व हस्तान्तरण गर्न बा परिवर्तन गर्न चाहेमा त्यसको स्पष्ट आधार र कारण खुलाई स्वीकृतिका लागि विभागमा निवेदन दिनु पर्नेछ् ।
|
| 89 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम प्राप्त निवेदनको व्यहोरा मनासिब देखिएमा विभागले त्यस्तो कम्पनीको स्वामित्व बा दायित्व हस्तान्तरण गर्न बा परिवर्तन गर्न स्वीकृति दिन सक्नेछ् ।
|
| 90 |
+
|
| 91 |
+
**११. पिरामिडमा आधारित व्यवसाय गर्न नहुने:**
|
| 92 |
+
यस ऐनमा अन्यत्र जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि कसैले पनि पिरामिड्मा आधारित व्यवसाय सञ्चालन गर्न हुँदैन ।
|
| 93 |
+
|
| 94 |
+
**स्पष्टीकरण:**
|
| 95 |
+
यस दफाको प्रयोजनको लागि "पिरामिडमा आधारित व्यवसाय" भन्नाले देहायको कुनै कार्यसँग सम्बन्धित व्यवसाय सम्झनु पर्छः
|
| 96 |
+
(क) बस्तु खरिद गर्नु पूर्व अनिबार्य रुपमा कुनै किसिमको सदस्यता लिनु पर्ने अबस्था भएको सञ्जालयुक्त कार्य,
|
| 97 |
+
(ख) एक बस्तु खरिद गर्दा अन्य बस्तु समेत एकमुष्ट प्याकेजमा खरिद गर्नु पर्ने सञ्जालयुक्त कार्य,
|
| 98 |
+
(ग) बस्तु खरिद गर्ने व्यत्किले आफू मातहत अर्को प्रत्यक्ष बिकेता बा बितरक बनाउन नसकेको अबस्थामा आफूले भुक्तानी गरेको रकम बा लाभ बराबरको बस्तु प्राप्त गर्न नसक्ने स्थितिको सञ्जालयुक्त कार्य,
|
| 99 |
+
(घ) बस्तुको कारोबार नगरी केबल प्रत्यक्ष बिकेता बा बितरक बनाई शुल्क मात्र लिने गरी गरिने सञ्जालयुक्त कार्य,
|
| 100 |
+
(ङ) कम्पनीले बस्तु बिक्री गर्ने प्रयोजनको लागि व्यावसायिक दृष्टिले अनुचित र असम्भब देखिने आकर्षक उपहार दिई बा कमिशनको प्रलोभन देखाई सदस्य बनाउने बा महङ्गो बस्तु खरिद गर्न लगाउने सञ्जालयुक्त कार्य,
|
| 101 |
+
(च) बस्तुको खुद्रा बिक्रीलाई निरुत्साहित गर्ने व्यापारिक कार्ययोजना भएको सञ्जालयुक्त कार्य, बा
|
| 102 |
+
(छ) कुनै बस्तुलाई अप्रत्याशित लाभ हुने बा चिकित्सा विज्ञानबाट निको नहुने भनी प्रमाणित भएको रोग निको हुने अलौकिक बस्तु हो भनी बिधासमा पारी बिक्री बा बितरण गर्ने सञ्जालयुक्त कार्य ।
|
| 103 |
+
|
| 104 |
+
---
|
| 105 |
+
|
| 106 |
+
### **परिच्छेद-३**
|
| 107 |
+
### **इजाजतपत्रवालाले पालन गर्नु पर्ने शर्त सम्बन्धी व्यवस्था**
|
| 108 |
+
|
| 109 |
+
**१२. इजाजतपत्रवालाले शर्त पालना गर्नु पर्नेः**
|
| 110 |
+
यो ऐन, यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम तथा इजाजतपत्रमा लेखिएका शर्तका अतिरिक्त इजाजतपत्रवालाले देहाय बमोजिमका शर्त पालना गर्नु पर्नेछ:
|
| 111 |
+
(क) बस्तुको प्रत्यक्ष बिक्री बा बितरण सम्बन्धी कार्य गर्दा असीमित दायित्व सृजना गर्ने खालको प्याकेज बनाई बस्तुको बिक्री गर्न नहुने,
|
| 112 |
+
(ख) निश्चित परिमाणको वस्तु खरिद गर्नु पर्ने र त्यस्तो वस्तु खरिद नगरे इजाजतपत्रवालाको व्यावसायिक योजना अनुसार बोनस बा कमिशन प्राम्र नगर्ने खालको बन्धनकारी व्यवस्था राख्न नहुने,
|
| 113 |
+
(ग) उपभोक्तालाई आफ्नो इच्छा अनुसारको छुट्टछुट्टै सामान खरिद गर्न दिनु पर्ने,
|
| 114 |
+
(घ) इजाजतपत्रवालाले वस्तुको कारोबार नगरी केबल प्रत्यक्ष बिकेता बा बितरक मात्र बनाउने कार्य गर्न नहुने,
|
| 115 |
+
(ङ) उपभोक्ताको स्वास्थ्यमा प्रतिकूल असर पर्ने किसिमका उपभोग्य वस्तुको उत्पादन, प्रचार प्रसार बा बिकी वितरण गर्न नहुने,
|
| 116 |
+
(च) तोकिए बमोजिमका अन्य शर्त ।
|
| 117 |
+
|
| 118 |
+
**१३. भौतिक पूर्वाधार सम्बन्धी व्यवस्थाः**
|
| 119 |
+
(१) कुनै वस्तुको प्रत्यक्ष बिकी बा वितरण सम्बन्धी व्यवसाय सञ्चालन गर्न छुट्टै भौतिक पूर्वाधारको आवश्यकता पर्ने रहेछ भने इजाजतपत्रवालाले त्यस्तो भौतिक पूर्वाधारको व्यवस्था गरेर मात्र व्यवसाय सञ्चालन गर्नु पर्नेछ ।
|
| 120 |
+
(२) भौतिक पूर्वाधार सम्बन्धी अन्य व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ ।
|
| 121 |
+
|
| 122 |
+
**१४. सम्झौता गर्नु पर्नेः**
|
| 123 |
+
(१) इजाजतपत्रवालाले प्रत्यक्ष बिकेता बा वितरकलाई वस्तुको प्रत्यक्ष बिक्री बा बितरण सम्बन्धी कारोबार गर्न लगाउनु पूर्व निजसँग तत्सम्बन्धी सम्झौता गर्नु पर्नेछ ।
|
| 124 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम सम्झौता गर्दा प्रत्यक्ष बिकेता बा वितरकले वस्तु बिकी वितरण गरे बा गराए बापत इजाजतपत्रवालाबाट पाउने सेवा, सुविधा, कमिशन बा बोनसको सम्बन्धमा स्पष्ट रूपमा खुलाउनु पर्नेछ ।
|
| 125 |
+
|
| 126 |
+
**१५. कमिशन बा बोनस सम्बन्धी विवरण पेश गर्नुपर्नेः**
|
| 127 |
+
(१) इजाजतपत्रवालाले वस्तुको प्रत्यक्ष बिकी बा बितरण गरे बापत प्रत्यक्ष बिकेता बा वितरकले प्राम्र गर्ने सेवा, सुविधा, कमिशन बा बोनस सम्बन्धी व्यवस्था निर्धारण गरी त्यस्तो व्यवस्था लागू गर्नु पूर्व त्यसको विवरण विभागमा पेश गर्नु पर्नेछ ।
|
| 128 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम पेश भएको विवरणमा आवश्यकता अनुसार परिमार्जन गर्न विभागले निर्देशन दिन सक्नेछ र इजाजतपत्रवालाले विभागले दिएको निर्देशनको पालना गर्नु पर्नेछ ।
|
| 129 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम निर्धारित विवरणमा कुनै हेरफेर गरेमा त्यसरी हेरफेर गरेको तीस दिनभित्र त्यस्तो विवरण विभागमा पेश गर्नु पर्नेछ ।
|
| 130 |
+
|
| 131 |
+
**१६. स्वदेशी वस्तु बिक्री बा वितरण गर्नु पर्ने:**
|
| 132 |
+
(१) इजाजतपत्रवालाले वस्तुको प्रत्यक्ष बिक्री बा वितरण गर्दा कम्तीमा पचास प्रतिशत स्वदेशी वस्तुको बिक्री बा वितरण गर्नु पर्नेछ । तर नेपालमा उत्पादन नहुने वस्तुको हकमा यो व्यवस्था लागू हुने छैन ।
|
| 133 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम बिक्री बा वितरण गरेको विवरण आर्थिक बर्ष समाम्र भएको साठी दिनभित्र विभागमा पेश गर्नु पर्नेछ ।
|
| 134 |
+
|
| 135 |
+
**१७. खरिद गरेको वस्तु फिर्ता गर्न सक्ने:**
|
| 136 |
+
(१) प्रत्यक्ष विक्रता बा वितरकबाट खरिद गरेको वस्तुको मूल्य, गुणस्तर परिमाण बा उपयोगितामा चित्त नबुझेमा उपभोक्ताले त्यस्तो वस्तु खरिद गरेको मितिले तीस दिनभित्र सम्बन्धित प्रत्यक्ष विक्रता बा वितरकलाई फिर्ता गर्न सक्नेछ ।
|
| 137 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम उपभोक्ताले खरिद गरेको वस्तु फिर्ता गरेमा इजाजतपत्रवाला तथा वस्तुको प्रत्यक्ष ���िक्रता बा वितरकले वस्तु बिक्री बा वितरण गर्दाका बखत लिई सकेको सेवा शुल्क र कानून बमोजिम लाग्ने कर कट्टी गरी बाँकी रकम फिर्ता गर्नु पर्नेछ ।
|
| 138 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम कर कट्टी गरेको रकम सम्बन्धित कर कार्यालयमा दाखिला गर्नु पर्नेछ ।
|
| 139 |
+
|
| 140 |
+
**१८. बीमा गराउनु पर्ने:**
|
| 141 |
+
इजाजपत्रवालाले वस्तुको प्रत्यक्ष बिक्री बा वितरण सम्बन्धी व्यवसायको प्रचलित कानून बमोजिम बीमा गराउनु पर्नेछ ।
|
| 142 |
+
|
| 143 |
+
---
|
| 144 |
+
|
| 145 |
+
### **परिच्छेद-४**
|
| 146 |
+
### **विभागको काम, कर्तव्य र अधिकार**
|
| 147 |
+
|
| 148 |
+
**१९. विभागको काम, कर्तव्य र अधिकार:**
|
| 149 |
+
यस ऐनमा अन्यत्र लेखिएको काम, कर्तव्य र अधिकारको अतिरिक्त विभागको अन्य काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछः-
|
| 150 |
+
(क) यो ऐन तथा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियमको अधीनमा रही वस्तुको प्रत्यक्ष बिक्री बा वितरण सम्बन्धी व्यवसाय सञ्चालन गर्ने इजाजतपत्र प्रदान गर्ने,
|
| 151 |
+
(ख) इजाजतपत्रबालाको अनुगमन तथा निरीक्षण गर्ने,
|
| 152 |
+
(ग) वस्तुको प्रत्यक्ष बिक्री बा वितरण सम्बन्धमा उपभोक्ताको गुनासो सुन्ने र सम्बोधन गर्ने,
|
| 153 |
+
(घ) अनुचित व्यावसायिक क्रियाकलाप गर्ने इजाजतपत्रबालालाई कारबाही गर्ने,
|
| 154 |
+
(ङ) वस्तुको प्रत्यक्ष बिक्री बा वितरण सम्बन्धी व्यवसायको सम्बन्धमा सर्वसाधारणलाई विभिन्न माध्यमद्वारा जानकारी गराउने,
|
| 155 |
+
(च) तोकिए बमोजिमका अन्य कार्य गर्ने ।
|
| 156 |
+
|
| 157 |
+
**२०. निरीक्षण बा जाँचबुझ गराउनु पर्ने:**
|
| 158 |
+
(१) विभागले इजाजतपत्रबाला तथा वस्तुको प्रत्यक्ष विक्रता बा वितरकको कारोबारको नियमित रूपमा निरीक्षण बा जाँचबुझ गराउनु पर्नेछ ।
|
| 159 |
+
(२) कुनै इजाजतपत्रबाला तथा वस्तुको प्रत्यक्ष विक्रता बा वितरकले उपभोक्तालाई हानि, नोक्सानी हुने बा उपभोक्ताको हक हितमा प्रतिकूल असर पर्ने गरी कुनै अनुचित व्यापारिक क्रियाकलाप गरी एकाधिकार कायम गर्ने, उपभोग्य वस्तुको मूल्य बा आपूर्ति व्यवस्थालाई प्रभावित पार्ने बा गुणस्तरहीन उपभोग्य वस्तुको उत्पादन बा बिक्री वितरण गरेको कारणबाट आफूलाई कुनै हानि, नोक्सानी भएको बा कुनै क्षति पुगेको भनी तोकिएको ढाँचामा विभागमा उजुरी दिएमा बा यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम विपरीत काम कारबाही भइरहेको बा हुन सक्ने मनासिब कारण भएमा विभागले जुनसुकै बखत निरीक्षण बा जाँचबुझ गर्न बा गराउन सक्नेछ ।
|
| 160 |
+
|
| 161 |
+
**२१. निरीक्षण अधिकृत तोक्न सक्ने:**
|
| 162 |
+
(१) दफा २० को प्रयोजनको लागि नेपाल सरकारले कुनै राजपत्राहित कर्मचारीलाई निरीक���षण अधिकृतको रूपमा काम गर्न तोक्न सक्नेछ ।
|
| 163 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम निरीक्षण अधिकृत तोक्दा निजको कार्यक्षेत्र समेत तोक्नु पर्नेछ ।
|
| 164 |
+
|
| 165 |
+
**२२. निरीक्षण अधिकृतको काम, कर्तव्य र अधिकार:**
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| 166 |
+
(१) यस ऐनमा अन्यत्र लेखिएको काम, कर्तव्य र अधिकारको अतिरिक्त निरीक्षण अधिकृतको अन्य काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछ—
|
| 167 |
+
(क) इजाजतपत्रबाला तथा बस्तुको प्रत्यक्ष बिकेता बा बितरकले असुरक्षित, हानिकारक बा गुणस्तरहीन बस्तुको उत्पादन बा बिक्री बितरण गरिरहेको बा यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बिपरीत कुनै काम कारबाही भइरहेको बा हुनसक्ने मनासिब कारण भएमा त्यस्तो काम कारबाहीको सम्बन्धमा आवश्यक निरीक्षण बा जाँचबुझ गर्ने,
|
| 168 |
+
(ख) खण्ड (क) बमोजिम निरीक्षण बा जाँचबुझ गर्दा कुनै हानिकारक बा गुणस्तरहीन बस्तुको उत्पादन बा बिक्री बितरण भइरहेको बा यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बिपरीत कुनै काम कारबाही भइरहेको पाएमा बा त्यस्तो काम कारबाही हुन सक्ने मनासिब आधार र कारण भएमा त्यस्तो बस्तु भण्डारण गरिएको स्थानमा खानतलासी गर्ने र त्यस्तो वस्तुको नमूना सङ्लन गर्ने,
|
| 169 |
+
(ग) खण्ड (क) बमोजिम निरीक्षण बा जाँचबुझ गर्दा बा खण्ड (ख) बमोजिम खानतलासी गर्दा कुनै हानिकारक बा गुणस्तरहीन वस्तुको उत्पादन बा बिकी वितरण भइरहेको बा यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम विपरीत काम कारबाही भइरहेको देखिएमा तोकिएको अबधिको लागि त्यस्तो उपभोग्य वस्तुको उत्पादन बा बिकी वितरण गर्न रोक लगाउने,
|
| 170 |
+
(घ) खण्ड (क), (ख) र (ग) बमोजिम गरेको काम कारबाही सम्बन्धी प्रतिबेदन सात दिनभित्र विभागमा पेश गर्ने ।
|
| 171 |
+
(२) यस दफा बमोजिम निरीक्षण, जाँचबुझ बा खानतलासी गर्दाका बखत निरीक्षण अधिकृतले माग गरे बमोजिमको विवरण बा अभिलेख उपलब्ध गराउनु इजाजतपत्रबाला तथा प्रत्यक्ष विक्रता बा वितरकको कर्तव्य हुनेछ ।
|
| 172 |
+
|
| 173 |
+
**२३. क्षतिपूर्ति भराई दिन सक्ने:**
|
| 174 |
+
(१) दफा २० बमोजिम गरेको निरीक्षण बा जाँचबुझबाट कुनै उपभोक्तालाई हानि, नोक्सानी भएको बा क्षति पुगेको देखिएमा विभागले त्यस्तो उपभोक्तालाई मनासिब रकम क्षतिपूर्ति भराइदिन सम्बन्धित इजाजतपत्रबाला, वस्तुको प्रत्यक्ष विक्रता बा वितरकलाई आदेश दिन सक्नेछ ।
|
| 175 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम आदेश प्राप्त भएमा इजाजतपत्रबाला, वस्तुको प्रत्यक्ष विक्रता बा वितरकले त्यस्तो आदेश बमोजिमको रकम आदेश प्राप्त भएको ��न्थ्र दिनभित्र सम्बन्धित उपभोक्तालाई प्रदान गरी त्यसको जानकारी विभागलाई दिनु पर्नेछ ।
|
| 176 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिमको अबधिभित्र क्षतिपूर्तिको रकम उपलब्ध नगराएमा विभागले त्यस्तो इजाजतपत्रबालाले राखेको धर्रोटीबाट पीडित उपभोक्तालाई क्षतिपूर्तिको रकम प्रदान गर्नेछ ।
|
| 177 |
+
|
| 178 |
+
**२४. जरिबाना गर्न सक्नेः**
|
| 179 |
+
(१) दफा १० बमोजिम स्वीकृति नलिई कम्पनीको स्वामित्व बा दायित्व हस्तान्तरण बा परिवर्तन गर्ने इजाजतपत्रवालालाई विभागले पचास हजार रुपैयाँदेखि एक लाख रुपैयाँसम्म जरिबाना गर्न सक्नेछ ।
|
| 180 |
+
(२) दफा १२ बमोजिमको शर्त पालना नगर्ने इजाजतपत्रवालालाई विभागले एक लाख रुपैयाँसम्म जरिबाना गर्न सक्नेछ ।
|
| 181 |
+
(३) यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बिपरीत कुनै कार्य गर्ने बा विभागले दिएको आदेश बा निर्देशनको पालना नगर्ने इजाजतपत्रबाला तथा वस्तुको प्रत्यक्ष विक्रेता बा बितरकलाई विभागले पाँच लाख रुपैयाँसम्म जरिबाना गर्न सक्नेछ ।
|
| 182 |
+
(४) कुनै इजाजतपत्रवालाले मनासिब माफिकको कारण बाहेक दफा ४४ बमोजिम तोकिएको अबधिभित्र पेश गर्नु पर्ने प्रतिवेदन पेश नगरेमा बा दफा ४९ बमोजिम दिनु पर्ने जानकारी नदिएमा त्यस्तो इजाजतपत्रवालालाई विभागले प्रतिदिन एकसय रुपैयाँका दरले बढीमा दश हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना गर्न सक्नेछ ।
|
| 183 |
+
(५) दफा ३१ को खण्ड (ख) र (ग) बमोजिम दिएको निर्देशन बा आदेश पालना नगरेमा त्यस्तो इजाजतपत्रवाला तथा वस्तुको प्रत्यक्ष विक्रेता बा बितरकलाई अनुगमन समितिले एक लाख रुपैयाँसम्म जरिबाना गर्न सक्नेछ ।
|
| 184 |
+
(६) वस्तुको प्रत्यक्ष बिक्री बा बितरण गर्ने स्थानमा निरीक्षण गर्दा वस्तुको मूल्य, गुणस्तर र परिमाणमा हेरफेर गरेको बा मूल्यसूची नराखेको पाएमा त्यस्तो इजाजतपत्रवाला, वस्तुको प्रत्यक्ष विक्रेता बा बितरकलाई निरीक्षण अधिकृतले अवस्था हेरी पाँच हजार रुपैयाँदेखि पन्ध्र हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना गर्न सक्नेछ । त्यस्तो कार्य पुनः दोहोय्याएमा पटकैपिच्छे दोब्बर जरिबाना गर्न सक्नेछ ।
|
| 185 |
+
|
| 186 |
+
**२५. निलम्बन गर्न सक्नेः**
|
| 187 |
+
(१) दफा २० बमोजिम निरीक्षण बा जाँचबुझ गर्दा कुनै इजाजतपत्रवाला तथा वस्तुको प्रत्यक्ष विक्रेता बा बितरकले यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियमको गम्भीर उल्लङ्गन गरेको बा उपभोक्ताको हक हितमा गम्भीर असर पुग्ने कार्य गरेको भनी निरीक्षण अधिकृतले कानूनी कारबाहीका लागि विभागमा सिफारिस गरेमा विभागले त्यस्तो इजाजतपत्रवालाको इजाजतपत्र तोकिएको अबधिसम्मको लागि निलम्बन गर्न सक्नेछ ।
|
| 188 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि दफा ३९, बमोजिम मुद्दा दायर भएमा त्यस्तो इजाजतपत्रवालाको इजाजतपत्र स्वतः निलम्बन हुनेछ ।
|
| 189 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम इजाजतपत्र निलम्बन गरिएको जानकारी इजाजतपत्रवालालाई दिनु पर्नेछ ।
|
| 190 |
+
(४) उपदफा (१) बा (२) बमोजिम इजाजतपत्रनिलम्बन भएको अबधिभर त्यस्तो इजाजतपत्रवालाले यस ऐन बमोजिम वस्तुको प्रत्यक्ष बिक्री बा वितरण सम्बन्धी कार्य गर्न पाउने छैन ।
|
| 191 |
+
|
| 192 |
+
**२६. पुनरावेदन दिन सक्ने:**
|
| 193 |
+
(१) विभागबाट दफा २३ बमोजिम क्षतिपूर्ति भराइदिने गरी भएको आदेश, दफा २४ को उपदफा (१), (२), (३) र (४) बमोजिम भएको जरिबाना बा दफा २४ को उपदफा (१) बमोजिम गरेको निलम्बन उपर चित्त नबुझ्ने पक्षले त्यस्तो निर्णयको जानकारी पाएको पैतीस दिनभित्र सम्बन्धित उच्च अदालतमा पुनरावेदन दिन सक्नेछ ।
|
| 194 |
+
(२) दफा २४ को उपदफा (४) र (६) बमोजिम गरेको जरिबाना उपर चित्त नबुझ्ने पक्षले त्यस्तो निर्णयको जानकारी पाएको मितिले पैतीस दिनभित्र सम्बन्धित जिल्ला अदालतमा पुनरावेदन दिन सक्नेछ ।
|
| 195 |
+
|
| 196 |
+
---
|
| 197 |
+
|
| 198 |
+
### **परिच्छेद—४**
|
| 199 |
+
### **समिति सम्बन्धी व्यवस्था**
|
| 200 |
+
|
| 201 |
+
**२७. निर्देशक समितिको गठन:**
|
| 202 |
+
(१) वस्तुको प्रत्यक्ष बिक्री बा वितरण सम्बन्धी व्यवसायलाई सुरक्षित, व्यवस्थित एवं मर्यादित बनाई उपभोक्ताको हक हितको संरक्षण सम्बन्धी आवश्यक काम गर्न केन्द्रीयस्तरमा एक निर्देशक समिति रहनेछ ।
|
| 203 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको निर्देशक समितिमा देहायका सदस्य रहने छुन्:-
|
| 204 |
+
(क) सचिव, मन्त्रालय -अध्यक्ष
|
| 205 |
+
(ख) सहसचिव, अर्थ मन्त्रालय -सदस्य
|
| 206 |
+
(ग) सहसचिव, गृह मन्त्रालय -सदस्य
|
| 207 |
+
(घ) सहसचिव, उद्योग मन्त्रालय -सदस्य
|
| 208 |
+
(ङ) प्रमुख, कम्पनी रजिष्ट्रारको कार्यालय -सदस्य
|
| 209 |
+
(च) प्रतिनिधि,उपभोक्ता हक हितसँग सम्बन्धित प्रतिनिधिमूलक संस्थाको तर्फबाट मन्त्रालयबाट मनोनीत एकजना -सदस्य
|
| 210 |
+
(छ) प्रतिनिधि,बस्तुको प्रत्यक्ष बिकी बा बितरणसँग सम्बद्ध प्रतिनिधिमूलक संस्थाको तर्फबाट मन्त्रालयबाट मनोनीत एक जना -सदस्य
|
| 211 |
+
(ज) प्रतिनिधि, बस्तुको प्रत्यक्ष बिकी बा बितरणसँग सम्बन्धी अनुभव भएका बिज्रमध्ये मन्त्रालयबाट मनोनित एकजना -सदस्य
|
| 212 |
+
(झ) महानिर्देशक, विभाग -सदस्य सचिव
|
| 213 |
+
(३) उपदफा (२) को खण्ड (च), (छ) र (ज) बमोजिम मनोनीत सदस्यको पदावधि दुई बर्षको हुनेछ र निजहरू पुन: मनो���ीत हुन सक्ने छन् ।
|
| 214 |
+
(४) उपदफा (३) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि मनोनीत सदस्यले आफ्नो पद अनुसारको काम नगरेमा मन्त्रालयले निजलाई जुनसुकै बखत हटाउन सक्नेछ । तर त्यसरी हटाउनु अघि निजलाई आफ्नो सफाइ पेश गर्ने मनासिब मौका दिनु पर्नेछ ।
|
| 215 |
+
(५) निर्देशक समितिको सदस्यको पद कुनै कारणबाट रिक्त हुन आएमा जुन तरिकाले त्यस्तो पदमा मनोनयन भएको हो सोही तरिकाबाट रिक्त पदको पूर्ति गरिनेछ ।
|
| 216 |
+
(६) निर्देशक समितिको सचिवालयको काम विभागले गर्नेछ् ।
|
| 217 |
+
|
| 218 |
+
**२८. निर्देशक समितिको काम, कर्तव्य र अधिकार:**
|
| 219 |
+
(१) निर्देशक समितिको काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछ:-
|
| 220 |
+
(क) बस्तुको प्रत्यक्ष बिक्री बा बितरण सम्बन्धी व्यवसायलाई सरल र सहज रूपमा सञ्चालन गराउन त्यसको आर्थिक तथा प्राविधिक पक्षको अध्ययन अनुसन्धान गराउने,
|
| 221 |
+
(ख) बस्तुको प्रत्यक्ष बिक्री बा बितरण सम्बन्धी कानून कार्यान्वयनको अवस्था हेरी त्यस्तो कानूनमा समायानुकुल परिमार्जनको लागि आवश्यक अध्ययन अनुसन्धान कार्य गर्न बिभागलाई निर्देशन दिने,
|
| 222 |
+
(ग) बस्तुको प्रत्यक्ष बिक्री बा बितरणलाई सुरक्षित, व्यवस्थित र मर्यादित बनाई उपभोक्ताको हकहितको संरक्षण गर्ने सम्बन्धमा अबलम्बन गर्नु पर्ने अल्पकालीन र दीर्घकालीन नीति तर्जुमा गरी नेपाल सरकार समक्ष पेश गर्ने,
|
| 223 |
+
(घ) बस्तुको प्रत्यक्ष बिक्री बा बितरण सम्बन्धी अनुचित व्यावसायिक क्रियाकलाप रोक्ने सम्बन्धमा आवश्यक उपाय अबलम्बन गर्न बिभागलाई निर्देशन दिने,
|
| 224 |
+
(ङ) अनुगमन समितिले गर्ने काम कारबाहीमा समन्वय एबम् सुपरिबेक्षण गरी आवश्यकता अनुसार निर्देशन दिने,
|
| 225 |
+
(च) तोकिए बमोजिमका अन्य कार्य गर्ने ।
|
| 226 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको कुनै कार्य सम्पादन गर्न निर्देशक समितिले आवश्यकता अनुसार उपसमिति गटन गर्न सक्नेछ ।
|
| 227 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम गटन गरिने उपसमितिको काम, कर्तव्य र अधिकार निर्देशक समितिले तोके बमोजिम हुनेछ ।
|
| 228 |
+
|
| 229 |
+
**२९. निर्देशक समितिको बैटक र निर्णय:**
|
| 230 |
+
(१) निर्देशक समितिको बैटक आवश्यकता अनुसार बस्नेछ ।
|
| 231 |
+
(२) निर्देशक समितिको बैटक अध्यक्षले तोकेको मिति, समय र स्थानमा बस्नेछ ।
|
| 232 |
+
(३) निर्देशक समितिको कुल सदस्य सङ्ख्याको पचास प्रतिशतभन्दा बढी सदस्य उपस्थित भएमा निर्देशक समितिको बैठकको लागि गणपूरक सङ्ख्या पुगेको मानिनेछ ।
|
| 233 |
+
(४) निर्देशक समितिको बैठकमा बहुमतको राय मान्य हुनेछ र मत बराबर भएमा बैठकमा अध्यक्षता गर्ने व्यत्किले निर्णायक मत दिनेछ ।
|
| 234 |
+
(५) अध्यक्षले बस्तुको प्रत्यक्ष बिक्री बा बितरणसँग सम्बन्धित कुनै बिज्ञलाई निर्देशक समितिको बैठकमा आमन्त्रण गर्न सक्नेछ ।
|
| 235 |
+
(६) निर्देशक समितिको निर्णय समितिको सदस्य-सचिब्रले प्रमाणित गरी राख्नेछ ।
|
| 236 |
+
(७) निर्देशक समितिको बैठक सम्बन्धी अन्य कार्यबिधि समिति आफैले निर्धारण गरे बमोजिम हुनेछ ।
|
| 237 |
+
(८) निर्देशक समितिको अध्यक्ष तथा सदस्यले समितिको बैठकमा भाग लिए बापत तोके बमोजिमको बैठक भत्ता पाउने छन् ।
|
| 238 |
+
|
| 239 |
+
**३०. अनुगमन समितिः**
|
| 240 |
+
(१) बस्तुको प्रत्यक्ष बिक्री बा बितरण सम्बन्धी व्यवसायको अनुगमन गर्न जिल्लास्तरमा एक अनुगमन समिति रहनेछ ।
|
| 241 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको अनुगमन समितिमा देहाय बमोजिमका सदस्य रहने छन्:-
|
| 242 |
+
(क) प्रमुख जिल्ला अधिकारी बा सहायक प्रमुख जिल्ला अधिकारी -अध्यक्ष
|
| 243 |
+
(ख) प्रतिनिधि, जिल्ला समन्वय समिति -सदस्य
|
| 244 |
+
(ग) प्रतिनिधि, सम्बन्धित जिल्ला स्थित उद्योग बाणिज्य संघ -सदस्य
|
| 245 |
+
(घ) प्रतिनिधि, उपभोक्ता हक हितसँग सम्बन्धित प्रतिनिधिमूलक संस्थाको तर्फबाट अध्यक्षबाट मनोनीत एक जना -सदस्य
|
| 246 |
+
(ङ) बाणिज्य कार्यालय (बाणिज्य कार्यालय नभएको टाँउमा जिल्लास्थित घरेलु तथा साना उद्योग कार्यालय बा घरेलु तथा साना उद्योग विकास समिति) को प्रमुख -सदस्य सचिव
|
| 247 |
+
(३) उपदफा (२) को खण्ड (घ) बमोजिम मनोनीत सदस्यको पदावधि दुई बर्षको हुनेछ र निजहरु पुनः मनोनीत हुन सक्नेछन् ।
|
| 248 |
+
(४) उपदफा (३) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि मनोनीत सदस्यले आफ्नो पद अनुसारको काम नगरेमा अध्यक्षले निजलाई जुनसुकै बखत हटाउन सक्नेछ । तर त्यसरी हटाउनु अघि निजलाई आफ्नो सफाइ पेश गर्ने मनासिब मौका दिनु पर्नेछ ।
|
| 249 |
+
(५) अनुगमन समितिको सदस्यको पद कुनै कारणबाट रिक्त हुन आएमा जुन तरिकाले त्यस्तो पदमा मनोनयन भएको हो सोही तरिकाबाट रिक्त पद पूर्ति गरिनेछ् ।
|
| 250 |
+
|
| 251 |
+
**३१. अनुगमन समितिको काम, कर्तव्य र अधिकार:**
|
| 252 |
+
(१) यस ऐनमा अन्यत्र लेखिएको काम, कर्तव्य र अधिकारको अतिरिक्त अनुगमन समितिको अन्य काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछ:-
|
| 253 |
+
(क) आफ्नो जिल्लाभित्र इजाजतपत्रबाला तथा बस्तुको प्रत्यक्ष बिकेता बा बितरकको बस्तुको प्रत्यक्ष बिक्री बा बितरण सम्बन्धी व्यवसायको अनुगमन गर्ने,
|
| 254 |
+
(ख) इजाजतपत्रबाला तथा बस्तुको प्रत्यक्ष बिकेता बा बितरकले यस ऐनमा उल्लिखित कुनै शर्तको पालना नगरेको बा यो ऐन ब��� यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बिपरीत कार्य गरेको पाइएमा त्यस्तो इजाजतपत्रबाला तथा प्रत्यक्ष बिकेता बा बितरकलाई आवश्यक निर्देशन दिने,
|
| 255 |
+
(ग) इजाजतपत्रबाला तथा बस्तुको प्रत्यक्ष बिकेता बा बितरकले यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम विपरीत कुनै काम गरेको पाइएमा तत्काल त्यस्तो बस्तुको प्रत्यक्ष बिक्री बा बितरण सम्बन्धी सम्पूर्ण कारोबार रोका राख्न आदेश दिने,
|
| 256 |
+
(घ) इजाजतपत्रबाला तथा बस्तुको प्रत्यक्ष बिकेता बा बितरकले प्रचलित अन्य कानून विपरीत काम कारबाही गरेको पाइएमा त्यस्तो इजाजतपत्रबाला तथा बस्तुको प्रत्यक्ष बिकेता बा बितरकलाई प्रचलित कानून बमोजिम कारबाही गर्न बा यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम विपरीत कुनै काम गरेको कारणबाट कुनै उपभोक्तालाई हानि नोक्सानी पुग्न गएको देखिएमा त्यस्तो हानि, नोक्सानीको क्षतिपूर्ति सम्बन्धित इजाजतपत्रबाला तथा बस्तुको प्रत्यक्ष बिकेता बा बितरकबाट भराई दिन विभागमा लेखी पटाउने,
|
| 257 |
+
(ङ) निर्देशक समितिले दिएको निर्देशन कार्यान्वयन गर्ने ।
|
| 258 |
+
|
| 259 |
+
**३२. अनुगमन समितिको बैठक र निर्णय:**
|
| 260 |
+
(१) अनुगमन समितिको बैठक आवश्यकता अनुसार बस्नेछ् ।
|
| 261 |
+
(२) अनुगमन समितिको बैठक अध्यक्षले तोकेको मिति, समय र स्थानमा बस्नेछ् ।
|
| 262 |
+
(३) अनुगमन समितिको कुल सदस्य सङ्ख्याको पचास प्रतिशतभन्दा बढी सदस्य उपस्थित भएमा अनुगमन समितिको बैठकको लागि गणपूरक सङ्ख्या पुगेको मानिनेछ् ।
|
| 263 |
+
(४) अनुगमन समितिको बैठकमा बहुमतको राय मान्य हुनेछ र मत बराबर भएमा बैठकमा अध्यक्षता गर्ने व्यक्तिले निर्णायक मत दिनेछ् ।
|
| 264 |
+
(५) अध्यक्षले वस्तुको प्रत्यक्ष बिक्री बा बितरणसँग सम्बन्धित कुनै बिज्ञलाई अनुगमन समितिको बैटकमा आमन्त्रण गर्न सक्नेछ ।
|
| 265 |
+
(६) अनुगमन समितिको निर्णय समितिको सदस्य-सचिबले प्रमाणित गरी राख्नेछ ।
|
| 266 |
+
(७) अनुगमन समितिको बैटक सम्बन्धी अन्य कार्यबिधि समिति आफैले निर्धारण गरे बमोजिम हुनेछ ।
|
| 267 |
+
(८) अनुगमन समितिको अध्यक्ष तथा सदस्यले समितिको बैटकमा भाग लिए बापत तोके बमोजिमको बैटक भत्ता पाउने छन् ।
|
| 268 |
+
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| 269 |
+
---
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| 270 |
+
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| 271 |
+
### **परिच्छेद-६**
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| 272 |
+
### **अभिमुखीकरण तालीम तथा सचेतना सम्बन्धी व्यवस्था**
|
| 273 |
+
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| 274 |
+
**३४. अभिमुखीकरण तालीम दिनु पर्ने:**
|
| 275 |
+
(१) इजाजतपत्रबालाले वस्तुको प्रत्यक्ष बिक्री बा बितरणसँग सम्बन्धित विषयमा जानकारी दिन वस्तुको प्रत्यक्ष बिक्रता बा बितरकलाई आवश्यकता अनुसार अभिमुखीकरण तालीम दिनु पर्नेछ ।
|
| 276 |
+
(२) अभिमुखीकरण तालीम सम्बन्धी अन्य व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ ।
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| 277 |
+
|
| 278 |
+
**३५. सचेतना कार्यकम सञ्चालन गर्ने:**
|
| 279 |
+
(१) इजाजतपत्रबालाले उपभोक्ताको चेतनाको स्तर र वस्तुको प्रत्यक्ष बिक्री बा बितरणको अबस्था समेतलाई दृष्टिगत गरी आवश्यकता अनुसार उपभोक्ता सचेतना सम्बन्धी कार्यक्रम सञ्चालन गर्नु पर्नेछ ।
|
| 280 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको कार्यकम सञ्चालन गर्दा स्थानीय सज्रार माघ्यमलाई प्राथमिकता दिनु पर्नेछ ।
|
| 281 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम सचेतना कार्यक्रम सञ्चालन सम्बन्धी अन्य व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ ।
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| 282 |
+
|
| 283 |
+
---
|
| 284 |
+
|
| 285 |
+
### **परिच्छेद—७**
|
| 286 |
+
### **कसूर र दण्ड सजाय सम्बन्धी व्यवस्था**
|
| 287 |
+
|
| 288 |
+
**३६. कसूर मानिनेः**
|
| 289 |
+
कसैले देहायको कुनै कार्य गरे बा गराएमा यस ऐन बमोजिम कसूर गरेको मानिनेछ:-
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| 290 |
+
(क) दफा ३ बिपरीत वस्तुको प्रत्यक्ष बिक्री बा बितरण सम्बन्धी कार्य गरे गराएमा,
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| 291 |
+
(ख) दफा ११ को बिपरीत हुने गरी व्यवसाय सञ्चालन गरे गराएमा,
|
| 292 |
+
(ग) दफा १४ बमोजिम सम्झौता नगरी वस्तुको प्रत्यक्ष बिक्रता बा बितरक नियुक्त गरी वस्तुको प्रत्यक्ष बिक्री बा बितरण सम्बन्धी काममा लगाएमा,
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| 293 |
+
(घ) दफा २४ बमोजिम निलम्बन भएकोमा निलम्बन भएको अबधिमा वस्तुको प्रत्यक्ष बिक्री बा बितरण गरेमा,
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| 294 |
+
(ङ) यस ऐन बमोजिम निरीक्षण, जाँचबुझ बा अनुसन्धान तहकिकात गर्ने कार्यमा बाधा बिरोध गरेमा ।
|
| 295 |
+
|
| 296 |
+
**३७. सजाय:**
|
| 297 |
+
(१) देहायको कसूर गर्ने बा गराउने व्यक्तिलाई कसूरको मात्रा हेरी देहाय बमोजिम सजाय हुनेछ:-
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| 298 |
+
(क) दफा ३६ को खण्ड (क) बा (घ) बमोजिमको कसूर गर्ने व्यक्तिलाई बिगो खुलेको भएको भए बिगो बमोजिमको जरिबाना र बिगो नखुलेकोमा एक लाख रुपैयाँदेखि पाँच लाख रुपैयाँसम्म जरिबाना बा छ महिनादेखि एक बर्षसम्म कैद बा दुवै सजाय,
|
| 299 |
+
(ख) दफा ३६ को खण्ड (ख) बमोजिमको कसूर गर्ने व्यक्तिलाई बिगो खुलेको भए बिगो बमोजिमको जरिबाना र बिगो नखुलेकोमा पाँच लाख रुपैयाँदेखि दश लाख रुपैयाँसम्म जरिबाना बा तीन बर्पदेखि पाँच बर्पसम्म कैद बा दुबै सजाय.
|
| 300 |
+
(ग) दफा ३६ को खण्ड (ग) बमोजिमको कसूर गर्ने व्यक्तिलाई बिगो खुलेको भए बिगो बमोजिम जरिबाना र बिगो नखुलेकोमा एक लाख रुपैयाँसम्म जरिबाना बा तीन बर्पसम्म कैद बा दुबै सजाय.
|
| 301 |
+
(घ) दफा ३६ को खण्ड (ङ) बमोजिमको कसूर गर्ने व्यक्तिलाई पचास हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना बा तीन महिनासम्म कैद बा दुबै सजाय ।
|
| 302 |
+
(२) यस ऐन बमोजिम इजाजतपत्रबाला कुनै कम्पनीले दफा ३६ बमोजिमको कसूर गरेमा त्यस्तो कसूर गर्ने कम्पनीको संस्थापक, सञ्चालक बा सम्बन्धित पदाधिकारीलाई यस दफा बमोजिमको सजाय हुनेछ।
|
| 303 |
+
(३) दफा ३६ बमोजिमको कसूरमा मतियार हुने बा त्यस्तो कसूर गर्न दुरुत्साहन गर्ने इजाजतपत्रबाला बा व्यक्तिलाई त्यस्तो कसूर गरे बापत हुने सजायको आधा सजाय हुनेछ ।
|
| 304 |
+
|
| 305 |
+
---
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| 306 |
+
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| 307 |
+
### **परिच्छेद-८**
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| 308 |
+
### **मुद्दाको अनुसन्धान र दायरी सम्बन्धी व्यवस्था**
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| 309 |
+
|
| 310 |
+
**३८. उजुरी दिन सक्ने:**
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| 311 |
+
(१) दफा ३६ बमोजिम कसूर मानिने कुनै कार्य भएको, भइरहेको बा हुन लागेको थाहा पाएमा जोसुकैले पनि नब्बे दिनभित्र निरीक्षण अधिकृतसमक्ष बा नजिकको प्रहरी कार्यालयमा उजुरी दिन सक्नेछ ।
|
| 312 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम प्रहरी कार्यालयमा पर्न आएमा उजुरी प्रहरी कार्यालयले यथाशीघ्र निरीक्षण अधिकृतसमक्ष पटाई त्यसको जानकारी सम्बन्धित उजुरीकर्तालाई दिनु पर्नेछ ।
|
| 313 |
+
(३) उपदफा (१) बा (२) बमोजिम प्राप्त हुन आएको उजुरी उपर निरीक्षण अधिकृतले तोकिए बमोजिम अनुसन्धान कार्य शुरु गर्नु पर्नेछ ।
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| 314 |
+
|
| 315 |
+
**३९. मुद्दाको अनुसन्धान र दायरी:**
|
| 316 |
+
(१) यस ऐन बमोजिम सजाय हुने कसूर सम्बन्धी मुद्दाको अनुसन्धान निरीक्षण अधिकृतले गर्नेछ । मुद्दाको अनुसन्धानको सिलसिलामा निरीक्षण अधिकृतले सम्बन्धित जिल्ला प्रहरी कार्यालयबाट आबश्यक सहयोग लिन सक्नेछ ।
|
| 317 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम अनुसन्धान सम्पन्न भएको मितिले पैतीस दिनभित्र सम्बन्धित जिल्ला अदालतमा मुद्दा दायर गर्नु पर्नेछ ।
|
| 318 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम निरीक्षण अधिकृतले मुद्दा दायर गर्दा सरकारी बकिलको राय लिनु पर्नेछ ।
|
| 319 |
+
(४) यस ऐन बमोजिम निरीक्षण अधिकृतले दायर गरेको मुद्दाको प्रतिरक्षा सरकारी बकिलबाट हुनेछ ।
|
| 320 |
+
|
| 321 |
+
**४०. नेपाल सरकार बादी हुने:**
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| 322 |
+
दफा ३६ बमोजिमको कसूरसँग सम्बन्धित मुद्दा नेपाल सरकार बादी भई दायर हुनेछ ।
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| 323 |
+
|
| 324 |
+
**४१. संक्षिप्त कार्यबिधि अपनाउनु पर्ने:**
|
| 325 |
+
यस ऐन अन्तर्गत दायर भएको मुद्दाको कारबाही र किनारा गर्दा संक्षिप्त कार्यबिधि ऐन २०२६ बमोजिमको कार्यबिधि अपनाउनु पर्नेछ ।
|
| 326 |
+
|
| 327 |
+
**४२. प्रचलित कानून बमोजिम मुद्दा चलाउन बाधा नपर्ने:**
|
| 328 |
+
यस ऐन बमोजिम कसूर टहरिने काम कारबाही अन्य प्रचलित कानून अन्तर्गत पनि कसूर टहरिने रहेछ भने उक्त प्रचलित कानून बमोजिम मुद्दा चलाउन यस ऐनले बाधा पुए्याएको मानिने छैन ।
|
| 329 |
+
|
| 330 |
+
---
|
| 331 |
+
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| 332 |
+
### **परिच्छेद—९**
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| 333 |
+
### **विविध**
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| 334 |
+
|
| 335 |
+
**४३. इजाजतपत्रवालाको वर्गीकरण:**
|
| 336 |
+
बिभागले बस्तुको प्रत्यक्ष बिक्री बा बितरण स��्बन्धी कार्य गर्ने इजाजतपत्रवालाको तोकिए बमोजिम बर्गीकरण गर्न सक्नेछ ।
|
| 337 |
+
|
| 338 |
+
**४४. सामाजिक सुरक्षा सम्बन्धी व्यवस्थाः**
|
| 339 |
+
इजाजतपत्रवालाले वस्तुको प्रत्यक्ष बिक्री बा वितरण सम्बन्धी व्यवसाय गर्नु पूर्व तोकिए बमोजिमको सामाजिक सुरक्षा सम्बन्धी मापदण्ड पूरा गर्नु पर्नेछ ।
|
| 340 |
+
|
| 341 |
+
**४५. अभिलेख र प्रतिवेदन सम्बन्धी व्यवस्थाः**
|
| 342 |
+
(१) इजाजतपत्रवालाले वस्तुको प्रत्यक्ष बिक्री बा बितरण सम्बन्धी कारोबार तथा वस्तुको प्रत्यक्ष विक्रेता बा वितरक लगायतको विवरणको अभिलेख तोकिए बमोजिमको ढाँचामा राख्नु पर्नेछ । त्यस्तो अभिलेख निरीक्षण अधिकृत बा विभागले जुनसुकै बखत निरीक्षण गर्ने झिकाउन बा जाँच्न सक्नेछ ।
|
| 343 |
+
(२) इजाजतपत्रवालाले प्रत्येक तीन महिनामा आफ्नो कारोबारको विवरण सहितको प्रतिवेदन तोकिएको ढाँचामा विभागमा पेश गर्नु पर्नेछ ।
|
| 344 |
+
(३) इजाजतपत्रवालाले प्रत्येक आर्थिक वर्ष समाप्त भएको तीन महिनाभित्र बार्षिक प्रतिवेदन तयार गरी विभागमा पेश गर्नु पर्नेछ ।
|
| 345 |
+
(४) यस दफा बमोजिम अभिलेख राख्ने र प्रतिवेदन सम्बन्धी गर्ने अन्य व्यवस्था तोकिए बमोजिम हुनेछ ।
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| 346 |
+
|
| 347 |
+
**४६. विवरण दर्ता गर्नु पर्नेः**
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| 348 |
+
विभागले यस ऐन बमोजिम इजाजतपत्रवालाबाट समयसमयमा प्राप्त विवरण अद्वाबधिक गरी तोकिए बमोजिमको ढाँचामा दर्ता गरी अभिलेख राख्नु पर्नेछ ।
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| 349 |
+
|
| 350 |
+
**४७. विवरण परिवर्तन गर्न सक्नेः**
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| 351 |
+
(१) कसैले इजाजतपत्रमा उल्लिखित कुनै सामान्य विवरण परिवर्तन गर्न चाहेमा तोकिए बमोजिमको दस्तुर सहित तोकिए बमोजिमको ढाँचामा विभागमा निवेदन दिनु पर्नेछ ।
|
| 352 |
+
स्पष्टीकरण: यस दफाको प्रयोजनको लागि "सामान्य विवरण" भन्नाले कम्पनी बा सञ्चालकको नाम, टेगाना, सम्पर्क नम्बर जस्ता कुरालाई जनाउँछ ।
|
| 353 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम विवरण परिवर्तन सम्बन्धमा दिएको निवेदनको व्यहोरा मनासिब देखिएमा विभागले निवेदन बमोजिमको विवरण परिवर्तन गर्न सक्नेछ ।
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| 354 |
+
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| 355 |
+
**४८. विवरण सार्वजनिक गर्नुपर्ने:**
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| 356 |
+
(१) विभागले समयसमयमा इजाजतपत्रवालाको नाम, टेगाना, टेलिफोन नम्बर, वस्तुको प्रत्यक्ष विक्रेता बा वितरक नियुक्ति गरेको बा शाखा खोलेको भए त्यसको विवरण र इजाजतपत्रको अबधि समेतको विवरण अद्यावधिक गरी कम्तीमा राष्ट्रियस्तरको दैनिक पत्रिका बा आफ्नो बेवसाइटमार्फत सार्वजनिक गर्नु पर्नेछ ।
|
| 357 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम विवरण सार्वजनिक गर्दा कुनै इजाजतपत्रवाला उपर यस ऐन ��मोजिमको कसूरमा अनुसन्धान बा कारबाही भइरहेको बा कुनै इजाजतपत्रवालाको इजाजतपत्र रद्द गरिएको भए त्यस्तो व्यहोरा समेत उल्लेख गर्नु पर्नेछ ।
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| 358 |
+
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| 359 |
+
**४९. व्यवसाय बन्द गरेमा जानकारी दिनु पर्ने:**
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| 360 |
+
इजाजतपत्रवालाले आफ्नो व्यवसाय बन्द गरेमा व्यवसाय बन्द गरेको पैतीस दिनभित्र विभागलाई जानकारी दिनु पर्नेछ ।
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| 361 |
+
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| 362 |
+
**५०. पुनः इजाजतपत्र जारी नगरिने:**
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| 363 |
+
यस ऐनमा अन्यत्र जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि कुनै इजाजतपत्रवालाको इजाजतपत्र रद्द भएमा पुनः सोही कम्पनी बा सोही सञ्चालकको नाममा इजाजतपत्र जारी गरिने छैन ।
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| 364 |
+
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| 365 |
+
**५१. इजाजतपत्रको प्रतिलिपि दिन सक्ने:**
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| 366 |
+
इजाजतपत्र हराएमा, कुनै दैवी प्रकोप परी नासिएमा, पुरानो भई च्यातिएमा बा नवीकरण गर्ने टाउँ समाम्र भएको कारण देखाई कुनै इजाजतपत्रवालाले प्रतिलिपि माग गरेमा विभागले तोकिए बमोजिमको दस्तुर लिई त्यस्तो इजाजतपत्रको प्रतिलिपि दिन सक्नेछ ।
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| 367 |
+
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| 368 |
+
**५२. धरौटी फिर्ता बा बैड ग्यारेण्टी फुकुबा:**
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| 369 |
+
(१) यस ऐन बमोजिम कुनै इजाजतपत्रवालाको इजाजतपत्र रद्द भएमा बा त्यस्तो कम्पनीले इजाजतपत्र बमोजिमको व्यवसाय नगर्ने भएमा त्यस्तो इजाजतपत्रवालाले इजाजतपत्र लिँदा राखेको धरौटी रकम फिर्ता बा बैड ग्यारेण्टी फुकुबा गरिदिन विभागमा निवेदन दिन सक्नेछ ।
|
| 370 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम निबेदन दिंदा इजाजतपत्रबालाले नेपाल सरकार बा अरु कसैलाई कुनै रकम तिर्न बुझाउन बाँकी रहे नरहेको व्यहोरा समेत खुलाउनु पर्नेछ ।
|
| 371 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिम प्राप्त निबेदनको व्यहोरा मनासिब देखिएमा बिभागले त्यस्तो धरौटी रकम फिर्ता बा बैङ्ग ग्यारेण्टी फुकुबा गर्न सक्नेछ ।
|
| 372 |
+
(४) उपदफा (३) बमोजिम धरौटी बा बैङ्ग ग्यारेण्टी फुकुबा गर्नु अघि बिभागले त्यस्तो इजाजतपत्रबाला बा वस्तुको प्रत्यक्ष बिक्रता बा बितरकबाट कसैले कुनै रकम लिन बाँकी भए सबुद प्रमाण सहित दाबी गर्न आउनु भनी तीस दिनको म्याद दिई राष्ट्रियस्तरको दैनिक पत्रिकामा सूचना प्रकाशन गर्नु पर्नेछ ।
|
| 373 |
+
(५) उपदफा (४) बमोजिम प्रकाशित सूचनामा तोकिएको म्यादभित्र कसैको दाबी परी त्यस्तो दाबी उपर जाँचबुझ गर्दा व्यहोरा मनासिब देखिएमा बा इजाजतपत्रबालाले वस्तुको प्रत्यक्ष बिक्री बा बितरणको लागि कसैबाट कुनै रकम लिएको तर वस्तु उपलब्ध नगराएको व्यहोरा प्रमाणित भएमा बिभागले त्यस्तो रकम सम्बन्धित व्यत्किलाई पन्ध्र दिनभित्र फिर्ता गर्न ���म्बन्धित इजाजतपत्रवालालाई आदेश दिनेछ ।
|
| 374 |
+
(६) उपदफा (५) बमोजिम बिभागले दिएको आदेश अनुसार इजाजतपत्रवालाले सम्बन्धित व्यत्किलाई फिर्ता गर्नु पर्ने रकम फिर्ता नगरेमा त्यस्तो रकम बिभागले इजाजतपत्रबालाले राखेको धरौटी बा बैङ्ग ग्यारेण्टीको रकमबाट कट्टा गरी सम्बन्धित व्यत्किलाई भराई दिनु पर्नेछ ।
|
| 375 |
+
(७) उपदफा (४) बमोजिम प्रकाशित सूचनाको म्यादभित्र कसैको दाबी नपरेमा दाबी परी उपदफा (५) बमोजिम त्यस्तो रकम इजाजतपत्रबालाले फिर्ता गरेको प्रमाण प्राप्त भएमा बा उपदफा (६) बमोजिम सम्बन्धित व्यत्किलाई भराई दिएपछि बिभागले बाँकी रहेको धरौटी रकम फिर्ता बा बैङ्ग ग्यारेण्टी फुकुबा गरी दिनु पर्नेछ ।
|
| 376 |
+
(८) उपदफा (६) बमोजिम धरौटी बा बैङ्ग ग्यारेण्टीबाट रकम फिर्ता दिन नपुग भएमा त्यस्तो नपुग भए जति रकम इजाजतपत्रबालाको सञ्चालकबाट प्रचलित कानून बमोजिम भराई दिन सम्बन्धित निकायमा लेखी पटाउनु पर्नेछ ।
|
| 377 |
+
(९) उपदफा (४) बमोजिम सूचना प्रकाशन गर्दा लाग्न गएको खर्च सम्बन्धित इजाजतपत्रबालाको बैङ्ग ग्यारेण्टीको रकमबाट कट्टा गर्नु पर्नेछ ।
|
| 378 |
+
|
| 379 |
+
**५३. निर्देशन दिन सक्ने:**
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| 380 |
+
(१) विभागले समय समयमा इजाजतपत्रवालालाई बस्तुको प्रत्यक्ष बिक्री बा बितरण सम्बन्धी कारोबारको सम्बन्धमा आवश्यक निर्देशन दिन सक्नेछ ।
|
| 381 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम विभागले दिएको निर्देशन पालना गर्नु सम्बन्धित सबै इजाजतपत्रवालाको कर्तव्य हुनेछ ।
|
| 382 |
+
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| 383 |
+
**५४. प्रतिवेदन पेश गर्नु पर्ने:**
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| 384 |
+
विभागले यस ऐन बमोजिम आफूले गरेको काम कारबाहीको चौमासिक प्रतिवेदन मन्त्रालयमा पेश गर्नु पर्नेछ ।
|
| 385 |
+
|
| 386 |
+
**५५. कालो सूचीमा राख्न सक्ने:**
|
| 387 |
+
यस ऐन बमोजिम इजाजतपत्र लिनको लागि कुनै कम्पनीले पेश गरेको कागजात बा बिबरण झुट्टा टहरिएमा विभागले त्यस्तो कम्पनीलाई तोकिए बमोजिम कालो सूचीमा राख्न र आवश्यक कारबाहीको लागि सम्बन्धित निकायमा लेखी पठाउन सक्नेछ ।
|
| 388 |
+
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| 389 |
+
**५६. अधिकार प्रत्यायोजन:**
|
| 390 |
+
मन्त्रालय बा विभागले यस ऐन बमोजिम आफूलाई प्राप्त भएको अधिकारमध्ये आवश्यकता अनुसार केही अधिकार नेपाल सरकारको कुनै अधिकृतस्तरको कर्मचारीलाई प्रत्यायोजन गर्न सक्नेछ ।
|
| 391 |
+
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| 392 |
+
**५७. नियम बनाउने अधिकार:**
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| 393 |
+
यस ऐनको कार्यान्वयन गर्न नेपाल सरकारले आवश्यक नियमहरु बनाउन सक्नेछ ।
|
| 394 |
+
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| 395 |
+
**५८. निर्देशिका बनाई लागू गर्ने:**
|
| 396 |
+
(१) विभागले यो ऐन तथा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियमको अधीनमा रही बस्तुको प्��त्यक्ष बिक्री बा बितरण सम्बन्धमा आवश्यक निर्देशिका बनाई लागू गर्न सक्नेछ ।
|
| 397 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको निर्देशिका मन्त्रालयबाट स्वीकृत भएपछि लागू हुनेछ ।
|
section_8_pdf_11.txt
ADDED
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@@ -0,0 +1,317 @@
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+
# प्रतिस्पर्धा प्रवर्द्धन तथा बजार संरक्षण ऐन, २०६३
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| 2 |
+
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| 3 |
+
**प्रमाणीकरण र प्रकाशन मिति**
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| 4 |
+
२०६३।०९।३०
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| 5 |
+
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| 6 |
+
**संशोधन गर्ने ऐन**
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| 7 |
+
- केही नेपाल ऐनलाई संशोधन गर्ने ऐन, २०६४ (२०६४।०४।०९)
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| 8 |
+
- केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०६२ (२०६२।०४।१४)
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| 9 |
+
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| 10 |
+
२०६३ सालको ऐन न. ३४
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| 11 |
+
**प्रतिस्पर्धा प्रवर्द्धन तथा बजार संरक्षणका सम्बन्धमा व्यवस्था गर्न बनेको ऐन**
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| 12 |
+
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| 13 |
+
**प्रस्तावना:**
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| 14 |
+
वस्तु बा सेबाको उत्पादन बा बितरण गर्ने व्यक्ति बा प्रतिष्ठानबीच स्वच्छ प्रतिस्पर्धा कायम गरी राष्ट्रिय अर्थतन्त्रलाई अझ बढी खुला, उदार बजारमुखी तथा प्रतिस्पर्धी बनाउन, स्वच्छ प्रतिस्पर्धाको माध्यमबाट उत्पादक बा बितरकको व्यावसायिक क्षमता विकास गरी राष्ट्रिय उत्पादकत्व बृद्धि गर्न, बजारलाई अबाज्छित रुपमा हस्तक्षेप हुनबाट संरक्षण प्रदान गर्न, एकाधिकार तथा नियन्त्रित व्यापारिक अभ्यासलाई नियन्त्रण गरी उत्पादित वस्तु तथा सेबाको गुणस्तर अभिबृद्धि गराई प्रतिस्पर्धी मूल्यमा उपभोक्ता समक्ष पु¥याउने काममा प्रोत्साहन गर्न तथा व्यापारिक अभ्यासमा हुन सक्ने सम्भावित अस्वच्छ प्रतिस्पर्धालाई निवारण गरी सर्वसाधारणको आर्थिक हित तथा सदाचार कायम गर्न कानूनी व्यवस्था गर्न बाज्छुनीय भएकोले,
|
| 15 |
+
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| 16 |
+
प्रतिनिधिसभाको घोषणा, २०६३ जारी भएको पहिलो बर्षमा प्रतिनिधिसभाले यो ऐन बनाएको छ।
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| 17 |
+
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| 18 |
+
---
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| 19 |
+
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| 20 |
+
## परिच्छेद-१
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| 21 |
+
**प्रारम्भिक**
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| 22 |
+
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| 23 |
+
**१. संक्षिप्त नाम, विस्तार र प्रारम्भः**
|
| 24 |
+
(१) यस ऐनको नाम "प्रतिस्पर्धा प्रवर्द्धन तथा बजार संरक्षण ऐन, २०६३" रहेको छ।
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| 25 |
+
(२) यो ऐन नेपाल राज्यभर लागू हुनेछ र कसैले नेपाल बाहिर बसी यस ऐन बिपरीतका कार्य गरेमा निजको हकमा समेत यो ऐन लागू हुनेछ।
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| 26 |
+
(३) यो ऐन तुरुन्त प्रारम्भ हुनेछ।
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| 27 |
+
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| 28 |
+
**२. परिभाषाः**
|
| 29 |
+
बिषय बा प्रसङ्गले अर्को अर्थ नलागेमा यस ऐनमा,
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| 30 |
+
- (क) "अध्यक्ष" भन्नाले बोर्डको अध्यक्ष सम्झनु पर्छ।
|
| 31 |
+
- (ख) "प्रतिष्ठान" भन्नाले वस्तु बा सेबा उत्पादन बा बितरण गर्ने कुनै फर्म, कम्पनी बा सङ्गठित संस्था सम्झनु पर्छ र सो शब्दले त्यस्तो फर्म, कम्पनी बा संस्थाको प्रत्यक्ष बा अप्रत्यक्ष नियन्त्रणमा रहेका सहायक बा सोसँग आबद्ध फर्म, कम्पनी बा संस्था समेतलाई जनाउँछ।
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| 32 |
+
- (ग) "बोर्ड" भन्नाले दफा १२ बमोजिमको प्रतिस्पर्धा प्रबद्धन तथा बजार संरक्षण बोर्ड सम्झनु पर्छ।
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| 33 |
+
- (घ) "बोलपत्र" भन्नाले कुनै संस्था बा निकायले कुनै बस्तु खरिद गर्दा, निर्माण कार्य गर्दा बा सोको मर्मत गर्दा बा कुनै सेबा लिँदा त्यस्तो संस्था बा निकायको सूचना अनुसार कुनै व्यक्ति बा प्रतिष्ठानले सो संस्था बा निकायले तोकेको ढाँचामा खामबन्दी गरी लाहाझाप लगाई पेश गरेको प्रस्ताव सम्झनु पर्छ र सो शब्दले प्रति एकाइ मूल्य सहितको बिबरण र सो सम्बन्धी कागजात बा दर रेट सहितको दरभाउपत्र समेतलाई जनाउँछ।
|
| 34 |
+
- (ङ) "बिज्ञापन" भन्नाले कुनै बस्तु बा सेबाको बजार प्रबद्धन बा प्रचार प्रसारको लागि सार्वजनिक रुपमा गराइएको जानकारी सम्झनु पर्छ।
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| 35 |
+
- (च) "सदस्य" भन्नाले बोर्डको सदस्य सम्झनु पर्छ र सो शब्दले बोर्डको अध्यक्ष तथा सदस्य-सचिव समेतलाई जनाउँछ।
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| 36 |
+
- (छ) "सम्झौता" भन्नाले दुई बा दुईभन्दा बढी व्यक्ति बा प्रतिष्ठानबीच कुनै काम गर्न बा नगर्न लिखित बा मौखिक रुपमा बा आचरणबाट गरेको प्रचलित कानून बमोजिम कार्यान्वयन गर्न सकिने बा नसकिने करार, सम्झौता, बन्दोबस्त बा समझदारी सम्झनु पर्छ र सो शब्दले त्यस्ता व्यक्ति बा प्रतिष्ठानबीच भएको निर्णय बा सिफारिस समेतलाई जनाउँछ।
|
| 37 |
+
- (ज) "अदालत" भन्नाले नेपाल सरकारले सबीच्च अदालतको परामर्श लिई नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी तोकिदिएको अदालतको बाणिज्य इजलास सम्झनु पर्छ।
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| 38 |
+
- (झ) "बजार संरक्षण अधिकृत" भन्नाले दफा २२ बमोजिमको बजार संरक्षण अधिकृत सम्झनु पर्छ।
|
| 39 |
+
- (ज) "बिकी मूल्य" भन्नाले कुनै बस्तु बा सेबाको उत्पादन बा बितरण गरे बापत प्राप्त हुने मूल्य, कुनै प्रकारको भाडा, बीमा, शुल्क, ब्याजदर, बिनिमय दर, प्रिमियम बा यस्तै अन्य कुनै प्रकारको रकम सम्झनु पर्छ।
|
| 40 |
+
- (ट) "तोकिएको" बा "तोकिए बमोजिम" भन्नाले यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियममा तोकिएको बा तोकिए बमोजिम सम्झनु पर्छ।
|
| 41 |
+
|
| 42 |
+
---
|
| 43 |
+
|
| 44 |
+
## परिच्छेद-२
|
| 45 |
+
**स्वच्छ प्रतिस्पर्धा विरुद्धका काम कारबाहीहरु**
|
| 46 |
+
|
| 47 |
+
**३. प्रतिस्पर्धा विरुद्धको सम्झौता गर्न नहुने:**
|
| 48 |
+
(१) कुनै बस्तु बा सेबा उत्पादन बा बितरण गर्ने कुनै व्यक्ति बा प्रतिष्ठानले प्रतिस्पर्धा सीमित बा नियन्त्रण गर्ने उद्देश्यले त्यस्तै किसिमको बस्तु बा सेबा उत्पादन गर्ने अन्य कुनै व्यक्ति बा प्रतिष्ठानसँग एक्लै बा सामूहिक रुपमा देहायको कुनै सम्झौता गर्न बा गराउन हुँदैनः-
|
| 49 |
+
(क) कुनै बस्तु बा सेबाको प्रत्यक्ष बा परोक्ष रुपमा खरिद बा बिकी मूल्य निर्धारण गर्ने बा त्यस्तो बस्तु बा सेबाको खरिद बिकीका शर्तहरु तोक्ने,
|
| 50 |
+
(ख) कुनै बस्तु बा सेबाको उत्पादन बा बितरण बजार सीमित बा नियन्त्रण गर्ने बा सोको प्राविधिक बिकास बा उन्नतिका लागि गरिने लगानी सीमित बा नियन्त्रण गर्ने,
|
| 51 |
+
(ग) कुनै बस्तु बा सेबाको उत्पादन बा बितरणको थोक परिमाण सीमित बा नियन्त्रण गर्ने बा त्यस्तो बस्तुको खुद्रा उपभोग्य परिमाण बा त्यसको गुणस्तर घटाउने,
|
| 52 |
+
(घ) कुनै खास टाउँमा त्यस्तो बस्तु बा सेबाको बिकी बितरण नगर्ने बा कुनै खास टाउँमा मात्र बिकी बितरण गर्ने बा गराउने,
|
| 53 |
+
(ङ) कुनै निश्चित व्यक्ति बा प्रतिष्ठानले उत्पादन बा बितरण गरेको बस्तु बा सेबाको मात्र बजार प्रवर्द्धन गर्ने गरी त्यस्तै किसिमका बस्तु बा सेबा उत्पादन बा बितरण गर्ने अन्य कुनै व्यक्ति बा प्रतिष्ठानको बस्तु बा सेबा खरिद बिकी बा बितरण नगर्ने बा त्यस्ता बस्तु बा सेबाको बजारमा प्रवेश हुन नदिने,
|
| 54 |
+
(च) कुनै बस्तु बा सेबा उत्पादन बा बितरण गर्ने व्यक्ति बा प्रतिष्ठानबीच आपसमा बजार बिभाजन गर्ने,
|
| 55 |
+
(छ) कुनै वस्तु बा सेबा पालैपालोसँग उत्पादन बा बितरण गर्ने बा त्यस्तो वस्तु बा सेबाको कोटा निर्धारण गरी उत्पादन बा बितरण गर्ने,
|
| 56 |
+
(ज) मनासिब कारण बिना कुनै वस्तु बा सेबाको मूल्य फरक फरक तोकी खरिद, बिक्री बा बितरण गर्ने बा खरिद, बिक्री बा बितरणका फरक फरक शर्त तोक्ने,
|
| 57 |
+
(झ) सार्वजनिक रुपमा आहान गरिएको बोलपत्र बा दरभाउपत्र उपर आपसी सहमतिबाट बोलपत्र बा दरभाउपत्र दाखिला गर्ने बा समान अङ बा अन्य बिबरण उल्लेख गरी दाखिला गर्ने,
|
| 58 |
+
(ज) कुनै पनि वस्तु बा सेबाको ढुबानी बा बितरणमा चक प्रणाली (सिण्डिकेट) लागू गर्ने,
|
| 59 |
+
(ट) तोकिए बमोजिमका अन्य काम गर्ने बा गराउने।
|
| 60 |
+
|
| 61 |
+
(२) उपदफा (१) को सर्वमान्यतामा प्रतिकूल हुने गरी कुनै वस्तुको उत्पादन बा बितरण गर्ने बा कुनै सेबा उत्पादन, बितरण बा सञ्चालन गर्ने कुनै दुई बा दुईभन्दा बढी व्यक्ति बा प्रतिष्ठानले कुनै संस्थासँग मिली बा अन्य कुनै उपाय अपनाई निजहरुले वस्तु बा सेबा उत्पादन, बितरण बा सञ्चालन गरेको इलाकामा अर्को व्यक्ति बा प्रतिष्ठानले त्यस्तो वस्तु बा सेबा उत्पादन, बितरण बा सञ्चालन गर्न नपाउने बा त्यस्तो वस्तु बा सेबा उत्पादन, बितरण बा सञ्चालन गर्न त्यस्तो व्यक्ति बा संस्थासँग सम्बद्ध हुनु पर्ने बा त्यस्तो उपायमा संलग्न हुनु पर्ने बा त्यस्तो सम्झौता बा उपायद्वारा तोकिएको कुनै शर्त पालना गर्नु पर्ने गरी कुनै किसिमको सम्झौता गर्न सकिने ��ैन।
|
| 62 |
+
|
| 63 |
+
(३) उपदफा (२) को प्रतिकूल हुने गरी भएको सम्झौता स्वतःबदर हुनेछ।
|
| 64 |
+
|
| 65 |
+
**४. प्रभुत्वशाली हैसियतको दुरुपयोग गर्न नहुने:**
|
| 66 |
+
(१) प्रभुत्वशाली हैसियत भएको कुनै प्रतिष्ठानले आफूले बा आफ्ना सम्बद्ध निकाय मार्फत कुनै वस्तु बा सेबाको उत्पादन बा बितरण गर्दा प्रतिस्पर्धा नियन्त्रण गर्ने उद्देश्यले त्यस्तो हैसियतको दुरुपयोग गर्न गराउन हुँदैन।
|
| 67 |
+
|
| 68 |
+
**स्पष्टीकरण:**
|
| 69 |
+
यस दफाको प्रयोजनको लागि "प्रभुत्वशाली हैसियत" भन्नाले कुनै बस्तु बा सेवा उत्पादन बा वितरण गर्ने कुनै व्यक्ति बा प्रतिष्ठानले एक्लै बा समान प्रकृतिका बस्तु बा सेवा उत्पादन बा वितरण गर्ने अन्य प्रतिष्ठानसँग आपसमा मिली त्यस्ता बस्तु बा सेबाको नेपाल राज्यभित्र बार्षिक उत्पादन बा वितरणको कम्तीमा चालीस प्रतिशत बा सोभन्दा बढी हिस्सा ओगटेको हैसियत बा त्यस्तो प्रतिष्ठानले एक्लै बा समान प्रकृतिका बस्तु बा सेवा उत्पादन बा वितरण गर्ने अन्य व्यक्ति बा प्रतिष्ठानसँग मिली सम्बद्ध बजार प्रभाव पार्न सक्ने बा आफ्ना निर्णय एकपक्षीय रुपमा कार्यान्वयन गर्न सक्ने हैसियत सम्झनु पर्छ।
|
| 70 |
+
|
| 71 |
+
(२) उपदफा (१) को सर्वमान्यतामा प्रतिकूल हुने गरी प्रभुत्वशाली हैसियत भएको कुनै प्रतिष्ठानले नेपाल राज्यभर बा नेपाल राज्यको कुनै इलाकामा देहायको कुनै काम गरेमा प्रभुत्वशाली हैसियतको दुरुपयोग गरेको मानिनेछ:-
|
| 72 |
+
(क) समान प्रकृतिको बस्तु बा सेबाको उत्पादन बा वितरण गर्ने अन्य व्यक्ति बा प्रतिष्ठानले उत्पादन बा पैटारी गरेको कुनै बस्तु बा सेबालाई आफ्नो बस्तु बा सेबाको बजार प्रवेशमा रोक बा बन्देज लगाउने,
|
| 73 |
+
(ख) मनासिब कारण विना बजारमा आपूर्ति कम हुन सक्ने गरी कुनै बस्तु बा सेबाको उत्पादन बा वितरण सीमित बा नियन्त्रण गर्ने बा त्यस्तो बस्तु बा सेबाको उत्पादन बा वितरण सम्बन्धी प्रविधिको विकासको लागि गरिने लगानीमा सीमित गर्ने बा रोक लगाउने,
|
| 74 |
+
(ग) समान भौगोलिक क्षेत्रको बजारमा मनासिब कारण विना कुनै बस्तु बा सेबाको खरिद बा बिकी मूल्य फरक कायम गर्ने बा त्यस्ता बस्तु बा सेबाको खरिद बा बिकीका थप शर्त तोक्ने,
|
| 75 |
+
(घ) आफूले उत्पादन बा वितरण गरेको बस्तु बा सेबाको प्रत्यक्ष बा परोक्ष रुपमा बजारमा प्रतिस्पर्धा हुन नसक्ने गरी मूल्य तोक्ने, तर नेपाल सरकार बा प्रचलित कानून बमोजिम अधिकार प्राम्र अधिकारीबाट पूर्व स्वीकृति लिई सम्बन्धित ���्रतिष्ठानले त्यस्तो बस्तु बा सेबाको मूल्य निर्धारण गर्न बा त्यस्तो कुनै बस्तु बा सेबाको मूल्यमा हेरफेर गर्न यस खण्डमा लेखिएको कुनै कुराले प्रतिकूल असर पारेको मानिने छैन।
|
| 76 |
+
(ङ) मनासिब कारण बिना उपभोक्तालाई प्रतिकूल असर पर्ने गरी आफूले उत्पादन बा बितरण गरेको बस्तु बा सेबाको परिमाण कटौती गर्ने बा त्यस्ता बस्तु बा सेबाको गुणस्तर घटाउने,
|
| 77 |
+
(च) कुनै बस्तु बा सेबा उत्पादन बा बितरण गर्दा त्यस्तो बस्तु बा सेबासँग असम्बन्धित बा अनावश्यक शर्त तोक्ने।
|
| 78 |
+
|
| 79 |
+
(३) उपदफा (२) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि देहायको कुनै काम गर्दा सो उपदफा बमोजिमको काम हुन गएको प्रमाणित भएमा प्रभुत्वशाली हैसियतको दुरुपयोग गरेको मानिने छैन:-
|
| 80 |
+
(क) प्रभुत्वशाली हैसियत भएको कुनै व्यक्ति बा प्रतिष्ठानले उत्पादन बा बितरण गर्दै आएको बस्तु बा सेबाको गुणस्तर बृद्धि गर्न बा सोको प्राविधिकस्तर सुधार गर्नका लागि कुनै काम कारबाही गरेकोमा र त्यस्तो काम कारबाहीबाट प्राप्त हुने प्रतिफल त्यस्तो बस्तु बा सेबाको उपभोग गर्ने उपभोक्ताको हितमा हुने भएमा,
|
| 81 |
+
(ख) प्रचलित कानून बमोजिम कुनै व्यक्तिलाई प्राप्त भएको कुनै किसिमको बौद्धिक सम्पत्तिको संरक्षण बा प्रचलनका लागि त्यस्तो कार्य गरेकोमा।
|
| 82 |
+
|
| 83 |
+
(४) यस दफाको प्रयोजनको लागि बोर्डले बिभिन्न बस्तु बा सेबा उत्पादन बा बितरण गर्ने प्रभुत्वशाली हैसियत भएका प्रतिष्ठानको सूची तयार गरी समय समयमा सार्वजनिक रुपमा प्रकाशन गर्नु पर्नेछ।
|
| 84 |
+
|
| 85 |
+
(५) उपदफा (४) बमोजिमको सूचीमा हेरफेर नभएसम्म त्यस्ता प्रतिष्ठानको प्रभुत्वशाली हैसियत कायम रहेको मानिनेछ।
|
| 86 |
+
|
| 87 |
+
**५. प्रतिस्पर्धालाई नियन्त्रण गर्ने उद्देश्यले प्रतिष्ठान गाभिन बा मिल्न नहुने:**
|
| 88 |
+
कुनै बस्तु बा सेबा उत्पादन बा बितरण गर्ने प्रतिष्ठानले एकाधिकार कायम गर्ने बा बजारमा नियन्त्रित व्यापारिक अभ्यास कायम गर्ने उद्देश्यले समान प्रकृतिको बस्तु बा सेबा उत्पादन बा बितरण गर्ने अन्य प्रतिष्ठानसँग गाभिन, आपसमा मिल्न एक्लै बा आफ्नो सहायक प्रतिष्ठानसँग मिली त्यस्तो प्रतिष्ठानको पचास प्रतिशत बा सोभन्दा बढी शेयर खरिद गर्न बा त्यस्तो प्रतिष्ठानको व्यवसाय कब्जा गरी ग्रहण (टेक ओभर) गर्न सक्ने छैन।
|
| 89 |
+
|
| 90 |
+
**स्पष्टीकरण:**
|
| 91 |
+
यस दफाको प्रयोजनको लागि कुनै एकै प्रकृतिको बस्तु बा सेबा उत्पादन बा बितरण गर्ने व्यत्कि बा प्र��िष्ठान एक आपसमा गाभिदा, मिल्दा, शेयर खरिद गर्दा बा टेक ओभर गर्दा त्यस्ता बस्तु बा सेबा नेपाल राज्यभित्र हुने कुल उत्पादन बा बितरण मध्ये चालीस प्रतिशतभन्दा बढी उत्पादन बा बितरण हुने भएमा प्रतिस्पर्धा नियन्त्रण गर्ने उद्देश्यले प्रतिष्ठान गाभिएको, मिलेको बा टेकओभर गरेको मानिनेछ।
|
| 92 |
+
|
| 93 |
+
**६. बोलपत्रमा अनियमितता गर्न नहुने:**
|
| 94 |
+
(१) कुनै निकायले सार्वजनिक रुपमा आह्वान गरेको बोलपत्रमा त्यस्तो बोलपत्र पेश गर्ने बोलपत्रदाताले देहायको काम गरी बोलपत्रमा अनियमितता गर्न गराउन हुँदैन:-
|
| 95 |
+
(क) कुनै बोलपत्रदाताको बोलपत्र दाखिला नगर्न बा एउटा मात्र बोलपत्रदाताले बोलपत्र दाखिला गर्न बा प्रत्यक्ष बा परोक्ष रुपमा सबै बोलपत्रदाताले एकै किसिमको मूल्य बा अन्य बिबरण उल्लेख गरी बोलपत्र दाखिला गर्ने गरी सम्झौता गरेर,
|
| 96 |
+
(ख) बोलपत्रदाताहरुबीच बोलपत्र दाखिला गर्नु अघि बोलपत्रमा खुलाउनु पर्ने सूचना बा अन्य कुराहरु एक अर्कालाई जानकारी गराएर,
|
| 97 |
+
(ग) कुनै एक बोलपत्रदाताको बोलपत्र स्वीकार हुन सक्ने गरी आपसमा सम्झौता गरी बोलपत्र दाखिला गरेर।
|
| 98 |
+
|
| 99 |
+
(२) यस दफामा अन्यत्र जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि कुनै प्रतिष्ठान बा त्यस्ता प्रतिष्ठानको सहायक प्रतिष्ठानबीच बोलपत्र सम्बन्धी एक आपसमा सूचना आदान प्रदान गर्दा उपदफा (१) बमोजिमको अनियमितता भएको मानिने छैन।
|
| 100 |
+
|
| 101 |
+
**७. एकलौटी कारोबार गर्न नहुने:**
|
| 102 |
+
(१) कुनै बस्तु बा सेबा उत्पादन बा बितरण गर्ने व्यत्कि बा प्रतिष्ठानले त्यस्तो बस्तु बा सेबाको उत्पादन बा बितरण एकलौटी कारोबार (एक्सक्लुसिभ डिलिङ्ग) गर्न गराउन हुँदैन।
|
| 103 |
+
|
| 104 |
+
**स्पष्टीकरण:**
|
| 105 |
+
यस दफाको प्रयोजनको लागि कुनै प्रतिष्ठानले देहायको कुनै शर्त राखी कुनै बस्तु बा सेबाको उत्पादन बा बितरण गरेमा एकलौटी कारोबार गरेको मानिनेछ:-
|
| 106 |
+
(क) कुनै व्यत्कि बा प्रतिष्ठानले उत्पादन बा बितरण गरेको बस्तु बा सेबा बाहेक अन्य व्यत्कि बा प्रतिष्ठानले उत्पादन बा बितरण गरेको त्यस्तै प्रकृतिको वस्तु बा सेबा खरिद नगर्ने बा त्यस्तो व्यक्ति बा प्रतिष्ठानसँग तत्सम्बन्धी कुनै कारोबार नगर्ने,
|
| 107 |
+
(ख) खण्ड (क) बमोजिमको शर्त पालना गरी बस्तु बा सेबाको खरिद बिकी बा कारोबार गरेमा बढी सहुलियतपूर्ण शर्तमा बस्तु बा सेबा आपूर्ति गर्ने।
|
| 108 |
+
|
| 109 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि कुनै प्रतिष्ठानले आफ्नो मुख्य बा सहायक प��रतिष्ठानबाट मात्र कुनै बस्तु बा सेबा प्राप्त गर्ने बा आफ्नो अधिकृत विक्रता बा एजेन्सी मार्फत आफ्नो बस्तु बा सेबा बितरण गर्ने व्यवस्था भएकोमा एकलौटी कारोबार गरेको मानिने छैन।
|
| 110 |
+
|
| 111 |
+
**८. बजार सीमित गर्न नहुने:**
|
| 112 |
+
कुनै बस्तु बा सेबा उत्पादन बा बितरण गर्ने व्यक्ति बा प्रतिष्ठानले त्यस्तो बस्तु बा सेबाको उत्पादन बा बितरणको बजार सीमित (मार्केट रेस्ट्रिक्शन) गर्ने गरी कुनै कारोबार गर्न गराउन हुँदैन।
|
| 113 |
+
|
| 114 |
+
**स्पष्टीकरण:**
|
| 115 |
+
कुनै बस्तु बा सेबा उत्पादन बा बितरण गर्ने व्यक्ति बा प्रतिष्ठानले तोकेको कुनै निश्चित बजारमा मात्र त्यस्तो बस्तु बा सेबा उत्पादन बा बितरण गर्ने बा त्यस्तो व्यक्ति बा प्रतिष्ठानले तोकेको निश्चित बजारमा बाहेक अन्य कुनै स्थानमा त्यस्तो बस्तु बा सेबा बितरण गरेमा सो बापत क्षतिपूर्ति शोधभर्ना माग गर्ने शर्त राखी कुनै विक्रता, डिलर, व्यापारी बा प्रतिष्ठानलाई त्यस्तो बस्तु बा सेबा उपलब्ध गराएमा बजार सीमित गरेको मानिनेछ।
|
| 116 |
+
|
| 117 |
+
**९. बन्धनयुक्त बिकी गर्न नहुने:**
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| 118 |
+
कुनै बस्तु बा सेबा बिकी गर्ने व्यक्ति बा प्रतिष्ठानले बन्धनयुक्त बिकी (टाइड सेलिङ) को कारोबार गर्न हुँदैन।
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| 119 |
+
|
| 120 |
+
**स्पष्टीकरण:**
|
| 121 |
+
यस दफाको प्रयोजनको लागि कुनै व्यक्ति बा प्रतिष्ठानले देहायको कुनै शर्त राखी कुनै बस्तु बा सेबाको बिकी बितरण गरेकोमा बन्धनयुक्त बिकीको कारोबार गरेको मानिनेछ:-
|
| 122 |
+
(क) कुनै बस्तु बा सेबा खरिद गर्दा त्यस्तो व्यक्ति बा प्रतिष्ठान बा त्यस्तो प्रतिष्ठानले तोकेको अन्य व्यक्ति बा प्रतिष्ठानबाट उत्पादन बा बितरण गरेको अर्को कुनै बस्तु बा सेबा समेत खरिद गर्नु पर्ने,
|
| 123 |
+
(ख) खण्ड (क) बमोजिम खरिद गरेको बस्तु बा सेबामा त्यस्तो बस्तु बा सेबा उत्पादन बा बितरण गर्ने बा निजले तोकेको व्यक्ति बा प्रतिष्ठान बाहेक अन्य व्यक्ति बा प्रतिष्ठानले उत्पादन बा बितरण गरेको बस्तु बा सेबा राखी प्रयोग गर्न बा बिकी बितरण गर्न नहुने,
|
| 124 |
+
(ग) खण्ड (क) वा (ख) बमोजिमको शर्त पालना गरी कुनै वस्तु वा सेबाको प्रयोग वा बिक्री बितरण गरेमा बढी सहुलियतपूर्ण शर्तमा त्यस्तो वस्तु वा सेवा वितरण गर्ने।
|
| 125 |
+
|
| 126 |
+
**१०. भ्रमपूर्ण विज्ञापन गर्न नहुने:**
|
| 127 |
+
कुनै वस्तु वा सेवा उत्पादन वा वितरण गर्ने व्यक्ति वा प्रतिष्ठानले प्रतिस्पर्धालाई नियन्त्रण वा सीमित गर्ने उद्देश्यले भ्रमपूर्ण विज्ञापन गर्न गराउन हुँदैन।
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| 128 |
+
|
| 129 |
+
**स्पष्टी��रण:**
|
| 130 |
+
यस दफाको प्रयोजनको लागि कुनै व्यक्ति वा प्रतिष्ठानले देहायको कुनै काम गरेमा भ्रमपूर्ण विज्ञापन गरेको मानिनेछ:-
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| 131 |
+
(क) वस्तु वा सेबाको वास्तविक गुण, परिमाण वा मूल्यभन्दा फरक हुने गरी भ्रमपूर्ण वा झूझ विवरण दिई विज्ञापन गरेमा,
|
| 132 |
+
(ख) वस्तु वा सेबाको वरिण्टी, फाइदा, गुण वा आयु सम्बन्धी झूझ वा भ्रमपूर्ण विज्ञापन गरी बजार प्रवर्द्धन गरेमा,
|
| 133 |
+
(ग) कुनै व्यक्ति वा प्रतिष्ठानले उत्पादन वा वितरण गरेको वस्तु वा सेबाको बजारलाई प्रतिकूल हुने वा त्यस्तो वस्तु वा सेबाका विरुद्ध झूझ वा भ्रमपूर्ण विज्ञापन गरेमा,
|
| 134 |
+
(घ) विज्ञापनमा उल्लेख गरिएको मूल्यभन्दा बढी हुने गरी वस्तु वा सेबाको बिक्री वितरण गरेमा।
|
| 135 |
+
|
| 136 |
+
**११. यो ऐन लागू नहुने:**
|
| 137 |
+
यस परिच्छेदमा अन्यत्र जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि दफा १० को व्यवस्था बाहेक देहायका व्यापारिक वा व्यावसायिक क्रियाकलापहरुमा यो ऐन लागू हुने छैन:-
|
| 138 |
+
(क) औद्योगिक व्यवसाय ऐन, २०७६ बमोजिमका लघु तथा घरेलु उद्योग सम्बन्धी व्यवसाय,
|
| 139 |
+
(ख) तोकिए बमोजिमका साना किसानबाट उत्पादित कृषि उत्पादन तथा कृषिजन्य सहकारी व्यवसाय,
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| 140 |
+
(ग) "कच्चा पदार्थको खरिद कार्य,
|
| 141 |
+
(घ) निर्यात व्यवसाय,
|
| 142 |
+
(ङ) सामूहिक सौदाबाजीको श्रमिक अधिकारको लागि गरिने कार्य,
|
| 143 |
+
(च) अनुसन्धान तथा विकास सम्बन्धी कार्य,
|
| 144 |
+
(छ) व्यवस्थापन सम्बन्धी सहकार्य,
|
| 145 |
+
(ज) व्यापारिक क्षमता अभिबुद्धिको लागि गरिने सङ्गठनात्मक र प्रकियागत सुधारका लागि गरिने सहकार्य।
|
| 146 |
+
|
| 147 |
+
---
|
| 148 |
+
|
| 149 |
+
## परिच्छेद-३
|
| 150 |
+
**बोर्डको गठन तथा काम, कर्तव्य र अधिकार**
|
| 151 |
+
|
| 152 |
+
**१२. बोर्डको गठन:**
|
| 153 |
+
(१) बजार संरक्षण गरी बजारमा स्वच्छ्र प्रतिस्पर्धा अभिबुद्धि गर्न प्रतिस्पर्धा प्रबर्द्धन तथा बजार संरक्षण बोर्डको गठन गरिएको छ।
|
| 154 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको बोर्डमा देहायका सदस्यहरु रहने छुन्:-
|
| 155 |
+
(क) सचिव, उद्योग, वाणिज्य तथा आपूर्ति मन्त्रालय - अध्यक्ष
|
| 156 |
+
(ख) प्रतिनिधि, कानून, न्याय तथा संसदीय व्यवस्था मन्त्रालय - सदस्य
|
| 157 |
+
(ग) प्रतिनिधि, अर्थ मन्त्रालय - सदस्य
|
| 158 |
+
(घ) प्रतिनिधि, उद्योग, वाणिज्य तथा आपूर्ति मन्त्रालय - सदस्य
|
| 159 |
+
(ङ) उद्योग तथा वाणिज्य सम्बन्धी संघ संस्थामा कार्यरत व्यक्तिहरुमध्येबाट नेपाल सरकारले मनोनीत गरेको दुईजना - सदस्य
|
| 160 |
+
(च) उपभोक्ता हकहितसँग सम्बन्धित संघ संस्थामा कार्यरत व्यक्तिहरुमध्येबाट कम्तीमा एकजना महिला रहने गरी नेपाल सरकारले मनोनीत गरेको चारजना - सदस्य
|
| 161 |
+
(छ) महानिर्देशक, वाणिज्य विभाग - सदस्य-सचिव
|
| 162 |
+
|
| 163 |
+
(३) उपदफा (२) बमोजिम मनोनीत सदस्यहरुको पदावधि दुई बर्षको हुनेछ।
|
| 164 |
+
(४) उपदफा (३) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि कुनै मनोनीत सदस्यको काम सन्तोषजनक नदेखिएमा नेपाल सरकारले त्यसको कारण खुलाई निजलाई जुनसुकै बखत बोर्डको सदस्यबाट हटाउन सक्नेछ।
|
| 165 |
+
|
| 166 |
+
**१३. बोर्डको बैठक र निर्णय:**
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| 167 |
+
(१) बोर्डको बैठक आवश्यकता अनुसार बस्नेछ।
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| 168 |
+
(२) बोर्डको बैठक अध्यक्षले तोकेको मिति, समय र स्थानमा बस्नेछ।
|
| 169 |
+
(३) बोर्डको कुल सदस्य सङ्ख्याको पचास प्रतिशतभन्दा बढी सदस्यहरु उपस्थित भएमा बोर्डको बैटकको लागि गणपूरक सङ्ख्या पुगेको मानिनेछ।
|
| 170 |
+
(४) बोर्डको बैटकको अध्यक्षता अध्यक्षले गर्नेछ र निजको अनुपस्थितिमा उपस्थित सदस्यहरुले आफूहरु मध्येबाट छानेको सदस्यले बैटकको अध्यक्षता गर्नेछ।
|
| 171 |
+
(५) बोर्डको बैटकमा बहुमतको राय मान्य हुनेछ र मत बराबर भएमा बैटकको अध्यक्षता गर्ने व्यत्तिले निर्णायक मत दिनेछ।
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| 172 |
+
(६) बोर्डको निर्णय बोर्डको सदस्य-सचिबले प्रमाणित गर्नेछ।
|
| 173 |
+
(७) बोर्डले आवश्यक देखेमा सम्बन्धित बिषयका बिज्ञलाई बोर्डको बैटकमा पर्यवेक्षकको रुपमा भाग लिन आमन्क्षण गर्न सक्नेछ।
|
| 174 |
+
(८) बोर्डको बैटक सम्बन्धी अन्य कार्यबिधि बोर्ड आफैले निर्धारण गरे बमोजिम हुनेछ।
|
| 175 |
+
|
| 176 |
+
**१४. बोर्डको काम, कर्तव्य र अधिकार:**
|
| 177 |
+
यस ऐनमा अन्यब लेखिएका काम, कर्तव्य र अधिकारको अतिरिक्त बोर्डको काम, कर्तव्य र अधिकार देहाय बमोजिम हुनेछ:-
|
| 178 |
+
(क) स्वच्छ प्रतिस्पर्धा कायम गर्ने सम्बन्धमा अबलम्बन गर्नु पर्ने नीति तर्जुमा गरी नेपाल सरकार समक्ष पेश गर्ने,
|
| 179 |
+
(ख) प्रतिस्पर्धा सम्बन्धी कानूनको पुनराबलोकन गर्नु पर्ने देखिएमा सोको पुनराबलोकन गरी आवश्यक सुधारको लागि नेपाल सरकारलाई सुझाब दिने,
|
| 180 |
+
(ग) स्वच्छ प्रतिस्पर्धाबाट अर्थतन्त्रमा पर्ने सकारात्मक प्रभाव र स्वच्छ प्रतिस्पर्धा बिपरीतका कृयाकलापबाट पर्ने नकारात्मक असरका सम्बन्धमा जनचेतना जगाउने,
|
| 181 |
+
(घ) मुलुकको आर्थिक अबस्था, व्यापारिक स्थिति, बजारमा स्वच्छ प्रतिस्पर्धा तथा उपभोक्ता हित अभिबुद्धिका लागि गर्नु पर्ने कामका सम्बन्धमा नेपाल सरकारलाई आवश्यक सुझाब दिने,
|
| 182 |
+
(ङ) बजारमा स्वच्छ प्रतिस्पर्धा अभिबुद्धिका लागि देखिएका समस्याको पहिचान गर्ने तथा त्यस्ता समस्या समाधान गर्न सम्बन्धित निकायलाई सुझाब दिने,
|
| 183 |
+
(च) बजारमा स्वच्छ प्रतिस्पर्धा प्रबद्���नका लागि निजी क्षेत्रसँग सहकार्य गर्ने,
|
| 184 |
+
(छ) बजारमा स्वच्छ प्रतिस्पर्धालाई प्रबर्द्धन गर्ने सम्बन्धमा आवश्यक अध्ययन तथा अनुसन्धान गर्ने, गराउने,
|
| 185 |
+
(ज) स्वच्छ प्रतिस्पर्धा प्रबर्द्धन गर्ने सम्बन्धमा कार्ययोजना बनाई लागू गराउने,
|
| 186 |
+
(झ) स्वच्छ प्रतिस्पर्धा विपरीतका काम कारबाही कसैबाट भए नभएको सम्बन्धमा निरीक्षण, अनुगमन तथा जाँचबुझ गर्ने, गराउने,
|
| 187 |
+
(ज) खण्ड (झ) बमोजिम निरीक्षण, अनुगमन तथा जाँचबुझ गर्दा गराउँदा कसैबाट स्वच्छ प्रतिस्पर्धा विपरीतका कुनै काम कारबाही हुन लागेको देखिएमा त्यस्तो काम तुरुन्त रोक्न लगाउने,
|
| 188 |
+
(ट) आफूले गर्नु पर्ने कामका सम्बन्धमा आवश्यकतानुसार समिति गठन गर्ने,
|
| 189 |
+
(ठ) स्वच्छ प्रतिस्पर्धा कायम गर्ने सम्बन्धमा आवश्यक अन्य काम गर्ने, गराउने।
|
| 190 |
+
|
| 191 |
+
**१५. बैठक भत्ताः**
|
| 192 |
+
बोर्डको बैठकमा भाग लिए बापत अध्यक्ष तथा सदस्यले तोकिए बमोजिम बैठक भत्ता पाउने छन्।
|
| 193 |
+
|
| 194 |
+
**१६. बोर्डको सचिबालय:**
|
| 195 |
+
बाणिज्य विभागले बोर्डको सचिबालयको रुपमा काम गर्नेछ।
|
| 196 |
+
|
| 197 |
+
---
|
| 198 |
+
|
| 199 |
+
## परिच्छेद-४
|
| 200 |
+
**कसूर तथा सजाय सम्बन्धी व्यवस्था**
|
| 201 |
+
|
| 202 |
+
**१७. स्वच्छ प्रतिस्पर्धा विपरीतको कसूर गरेको मानिनेः**
|
| 203 |
+
कुनै व्यक्ति बा प्रतिष्ठानले परिच्छेद-२ विपरीतको कुनै काम कारबाही गरे गराएमा निजले स्वच्छ प्रतिस्पर्धा विपरीतको कसूर गरे गराएको मानिनेछ।
|
| 204 |
+
|
| 205 |
+
**१८. सजाय:**
|
| 206 |
+
(१) देहायको काम कारबाही गर्ने गराउने व्यक्ति बा प्रतिष्ठानलाई कसूरको मात्रा अनुसार देहाय बमोजिमको सजाय हुनेछ:-
|
| 207 |
+
(क) दफा ३, ४ बा ५ विपरीत काम कारबाही गरे गराएमा त्यस्तो काम कारबाही बदर गरी त्यस्तो काम कारबाही गर्ने गराउने व्यक्ति बा प्रतिष्ठानलाई पाँच लाख रुपैयाँसम्म जरिबाना,
|
| 208 |
+
(ख) दफा ६ को उपदफा (१) विपरीत काम कारबाही गरे गराएमा त्यस्तो काम कारबाही बदर गरी त्यस्तो काम कारबाही गर्ने गराउने व्यक्ति बा प्रतिष्ठानलाई तीन लाख रुपैयाँसम्म जरिबाना,
|
| 209 |
+
(ग) दफा ७ बिपरीत काम कारबाही गरे गराएमा त्यस्तो काम कारबाही गर्ने गराउने व्यक्ति बा प्रतिष्ठानलाई एक लाख रुपैयाँसम्म जरिबाना,
|
| 210 |
+
(घ) दफा ८ बिपरीत काम कारबाही गरे गराएमा त्यस्तो काम कारबाही गर्ने गराउने व्यक्ति बा प्रतिष्ठानलाई पचास हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना,
|
| 211 |
+
(ङ) दफा ९ बा १० बिपरीत काम कारबाही गरे गराएमा त्यस्तो काम कारबाही गर्ने गराउने व्यक्ति बा प्रतिष्ठानलाई पच्चीस हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना,
|
| 212 |
+
(च) खण्ड (क), (ख), (ग), (घ) र (ङ) मा लेखिएदेखि बाहेक यो ऐन बा यस ऐन अन्तर्गत बनेको नियम बिपरीत काम कारबाही गर्ने गराउने व्यक्ति बा प्रतिष्ठानलाई दश हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना।
|
| 213 |
+
|
| 214 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिमको सजाय पाएको व्यक्ति बा प्रतिष्ठानले यस ऐन अन्तर्गतको कुनै कसूर पुनः गरेमा त्यस्तो व्यक्ति बा प्रतिष्ठानलाई सो उपदफा बमोजिम हुने जरिबानाको दोब्बर जरिबाना हुनेछ।
|
| 215 |
+
|
| 216 |
+
(३) उपदफा (१) बमोजिमको काम कारबाही कुनै सम्झौता अनुसार भए गरेको रहेछ भने त्यस्तो सम्झौता समेत बदर हुनेछ।
|
| 217 |
+
|
| 218 |
+
(४) कसैले कुनै व्यक्ति बा प्रतिष्ठानलाई हानि नोक्सानी पुन्याउने बा दुःख दिने नियतले झुहा उजुर दिएको ठहरेमा निजलाई दश हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना हुनेछ।
|
| 219 |
+
|
| 220 |
+
**१९. बाधा विरोध गर्नेलाई सजाय:**
|
| 221 |
+
यस ऐन अन्तर्गतको कसूरमा अनुसन्धान तथा तहकिकात सम्बन्धी काम कारबाहीमा कसैले बाधा विरोध गरेमा निजलाई बजार संरक्षण अधिकृतको प्रतिबेदनको आधारमा अदालतले पच्चीस हजार रुपैयाँसम्म जरिबाना गर्न सक्नेछ।
|
| 222 |
+
|
| 223 |
+
**२०. मुख्य भई काम गर्नेले कसूर गरेको मानिनेः**
|
| 224 |
+
कुनै फर्म, कम्पनी बा सङ्गठित संस्थाले यस ऐन बमोजिम कसूर मानिने कुनै काम गरेमा फर्मको हकमा त्यस्तो काम गर्दाका बखत कायम रहेका फर्मका हिस्सेदार र कम्पनी बा सङ्गठित संस्थाको हकमा त्यस्तो कम्पनी बा संस्थाको मुख्य भई काम गर्ने व्यक्तिले त्यस्तो कसूर गरेको मानिनेछ।
|
| 225 |
+
|
| 226 |
+
**स्पष्टीकरण:**
|
| 227 |
+
यस दफाको प्रयोजनको लागि "मुख्य भई काम गर्ने व्यक्ति" भन्नाले कम्पनी बा सङ्गटित संस्थाको अध्यक्ष, सञ्चालक समितिका सदस्य, महाप्रबन्धक, प्रबन्ध निर्देशक बा सोही हैसियतमा काम गर्ने व्यक्ति सम्झनु पर्छ।
|
| 228 |
+
|
| 229 |
+
**२१. सजायमा छुट:**
|
| 230 |
+
(१) कुनै कसूरको अनुसन्धान तथा तहकिकात गर्दा सो कसूरसँग सम्बन्धित कुनै व्यक्ति बा प्रतिष्ठानले देहाय बमोजिम सहयोग गरेमा बजार संरक्षण अधिकृतले मुद्दा दायर गर्दा त्यस्तो व्यक्ति बा प्रतिष्ठानलाई दफा १८ बमोजिम हुने सजाय पूरे बा आंशिक रुपमा छुट दिने गरी अदालत समक्ष माग गर्न सक्नेछ:-
|
| 231 |
+
(क) अनुसन्धान तथा तहकिकात प्रारम्भ हुनु अघि नै त्यस्तो कसूरको बारेमा जानकारी बा सूचना दिएमा,
|
| 232 |
+
(ख) अनुसन्धान तथा तहकिकातको सिलसिलामा जाँचबुझ गर्ने अधिकारीले पत्ता लगाउन नसकेको महत्वपूर्ण प्रमाण बा जानकारी उपलब्ध गराएमा,
|
| 233 |
+
(ग) अनुसन्धान तथा तहकिकातको काम कारबाहीमा अन्य कुनै विशेष सहयोग पुए्याएमा।
|
| 234 |
+
|
| 235 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम बजार संरक्षण अधिकृतले माग गरेको सजाय छुटको व्यहोरा मनासिब देखिएमा अदालतले कसूर गर्ने व्यक्ति बा प्रतिष्ठानलाई यस ऐन बमोजिम हुन सक्ने सजाय आंशिक बा पूर्ण रुपले छुट गर्न सक्नेछ।
|
| 236 |
+
|
| 237 |
+
(३) उपदफा (२) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि कसूरमा संलग्न व्यक्ति बा प्रतिष्ठानले दफा २९, बमोजिम क्षतिपूर्ति दिनु पर्ने दायित्वबाट छुट पाउन सक्ने छैन।
|
| 238 |
+
|
| 239 |
+
---
|
| 240 |
+
|
| 241 |
+
## परिच्छेद-५
|
| 242 |
+
**मुद्दाको तहकिकात र दायरी सम्बन्धी व्यवस्था**
|
| 243 |
+
|
| 244 |
+
**२२. बजार संरक्षण अधिकृत तोक्ने:**
|
| 245 |
+
(१) यस ऐन बमोजिम सजाय हुने कसूर सम्बन्धी मुद्दाको अनुसन्धान तथा तहकिकात गरी अदालत समक्ष मुद्दा दायर गर्ने काम समेतको लागि नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी नेपाल राज्यको आवश्यक जिल्लामा कुनै अधिकृत कर्मचारीलाई बजार संरक्षण अधिकृतको रुपमा तोक्नेछ।
|
| 246 |
+
(२) बजार संरक्षण अधिकृतको योग्यता तथा अन्य काम, कर्तव्य र अधिकार तोकिए बमोजिम हुनेछन्।
|
| 247 |
+
|
| 248 |
+
**२३. उजुरी दिन सक्ने:**
|
| 249 |
+
(१) कुनै व्यक्ति बा प्रतिष्ठानले यस ऐन बिपरीत कुनै काम कारबाही गरेमा सो कुराको जानकारी पाउने जुनसुकै व्यत्किले आफूसँग भएको जानकारी बा सबूत प्रमाण सहित तोकिए बमोजिम बोर्ड बा बजार संरक्षण अधिकृत समक्ष उजुरी दिन सक्नेछ।
|
| 250 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम उजुरी दिने व्यत्किले आफ्नो नाम गोप्य राख्न चाहेमा त्यस्तो व्यत्किको नाम गोप्य राखिनेछ।
|
| 251 |
+
|
| 252 |
+
**२४. मुद्दाको तहकिकात र दायरी:**
|
| 253 |
+
(१) यस ऐन बमोजिम सजाय हुने कुनै कसूर भए गरेको सम्बन्धमा दफा २३ बमोजिम उजुरी प्राम्र भएमा बा सो बिषयमा अन्य कुनै माध्यमबाट आफूलाई जानकारी हुन आएमा बजार संरक्षण अधिकृतले सो मुदाको अनुसन्धान तथा तहकिकात गर्नेछ।
|
| 254 |
+
(२) उपदफा (१) मा जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि यस ऐन बमोजिम सजाय हुने कुनै कसूर भए गरेको सम्बन्धमा दफा २३ बमोजिम बोर्डमा उजुरी परेकोमा बोर्डले त्यस्तो उजुरी आवश्यक कारबाहीको लागि कुनै बजार संरक्षण अधिकृत समक्ष पटाउन बा त्यस्तो उजुरी उपर उपसमिति गठन गरी आफैले अनुसन्धान तथा तहकिकात गराउन सक्नेछ।
|
| 255 |
+
(३) दफा २३ बमोजिम उजुरी दिने व्यत्किले कसूरको अनुसन्धान तथा तहकिकातको सिलसिलामा थप प्रमाण बा जानकारी दिएमा अनुसन्धान तथा तहकिकात गर्ने अधिकारीले त्यस्तो प्रमाण बा जानकारीलाई समेत बिचार गरी अनुसन्धान तथा तहकिकात गर्नु पर्नेछ।
|
| 256 |
+
(४) उपदफा (२) बमोजिम उपसमितिबाट कुनै मुद्दाको अनुसन्धान तथा तहकिकात भएकोमा त्यस्तो मुद्दाको अनुसन्धान तथा तहकिकातको काम समाम्र भएपछि अदालतमा मुद्दा दायर गर्न बोर्डले कुनै बजार संरक्षण अधिकृतलाई आदेश दिनेछ।
|
| 257 |
+
(५) उपदफा (१) बमोजिम मुद्दाको अनुसन्धान तथा तहकिकातको काम समाम्र भएको बा उपदफा (४) बमोजिम बोर्डबाट मुद्दा दायर गर्न आदेश पाएको मितिले पैंतीस दिनभित्र बजार संरक्षण अधिकृतले अदालत समक्ष मुद्दा दायर गर्नु पर्नेछ।
|
| 258 |
+
(६) उपदफा (४) बमोजिम मुद्दा दायर गर्दा बजार संरक्षण अधिकृतले सरकारी बकीलको राय लिनु पर्नेछ।
|
| 259 |
+
(७) उपदफा (४) बमोजिम अदालत समक्ष दायर भएको मुद्वाको बहस पैरवी तथा प्रतिरक्षा सरकारी बकीलबाट हुनेछ।
|
| 260 |
+
|
| 261 |
+
**२५. निरीक्षण, जाँचबुझ बा खानतलासी गर्न सक्ने:**
|
| 262 |
+
(१) कसैले यो ऐन बा यस अन्तर्गत बनेको नियम बिपरीत कुनै काम कारबाही गरिरहेको छ भन्ने बिश्वास हुने मनासिब कारण भएमा बा सो सम्बन्धमा दफा २३ बमोजिम उजुरी प्राप्त भएमा बजार संरक्षण अधिकृत बा बोर्डद्वारा गठित उपसमितिले सम्बन्धित टाउँको निरीक्षण, जाँचबुझ बा खानतलासी गर्न सक्नेछ।
|
| 263 |
+
(२) उपदफा (१) बमोजिम निरीक्षण, जाँचबुझ बा खानतलासी गर्दा अपनाउनु पर्ने कार्यबिधि तोकिए बमोजिम हुनेछ।
|
| 264 |
+
|
| 265 |
+
**२६. नेपाल सरकार बादी हुने:**
|
| 266 |
+
यस ऐन अन्तर्गत कसूर हुने मुद्दा नेपाल सरकार बादी हुनेछ।
|
| 267 |
+
|
| 268 |
+
**२७. विशेषज्ञको सहयोग लिन सक्ने:**
|
| 269 |
+
कुनै कसूरको प्रकृति र गाम्भीर्यताको कारण सो कसूरको अनुसन्धान तथा तहकिकातमा सम्बन्धित बिषयको विशेषज्ञको सहयोग आवश्यक भएमा बा तहकिकात गर्ने उपसमिति बा बजार संरक्षण अधिकृतले सम्बन्धित विशेषज्ञको सेवा लिन सक्नेछ।
|
| 270 |
+
|
| 271 |
+
**२८. मुद्दाको कारबाही र किनाराः**
|
| 272 |
+
(१) यस ऐन अन्तर्गतको मुद्दाको कारबाही र किनारा गर्ने अधिकार अदालतलाई हुनेछ।
|
| 273 |
+
(२) अदालतले यस ऐन अन्तर्गत दायर भएको मुद्वाको कारबाही र किनारा गर्दा संक्षिप्त कार्यबिधि ऐन, २०२६ बमोजिमको कार्यबिधि अपनाउनु पर्नेछ।
|
| 274 |
+
|
| 275 |
+
---
|
| 276 |
+
|
| 277 |
+
## परिच्छेद-६
|
| 278 |
+
**बिबिध**
|
| 279 |
+
|
| 280 |
+
**२९. क्षतिपूर्तिः**
|
| 281 |
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(१) कुनै व्यक्ति बा प्रतिष्टानले यस ऐन अन्तर्गतको कुनै कसूर गरेको कारणबाट कसैलाई कुनै प्रकारको हानि नोक्सानी हुन गएमा त्यस्तो हानि नोक्सानीको क्षतिपूर्ति भराई पाउन अदालत समक्ष निवेदन दिन सक्नेछ।
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(२) उपदफा (१) बमोजिम परेको निवेदन उपर कारबाही हुँदा क्षतिपूर्ति भराउनु पर्ने देखिएमा अदालतले हानि नोक्सानीको यकिन गरी त्यसरी हान�� नोक्सानी पुए्याउने व्यक्ति बा प्रतिष्ठानबाट निवेदकलाई क्षतिपूर्ति भराई दिनु पर्नेछ।
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**३०. नेपाल सरकारको विशेष अधिकार:**
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यस ऐनमा अन्यत्र जुनसुकै कुरा लेखिएको भए तापनि नेपाल राज्यभर बा नेपाल राज्यको कुनै खास क्षेत्रमा कुनै बस्तु बा सेबाको उत्पादन बा बितरणमा सङट उत्पन्न भएमा बा हुन सक्ने देखिएमा बा कुनै बस्तु बा सेबाको आपूर्ति तथा बितरणको अबस्थालाई विचार गरी नेपाल सरकारले नेपाल राजपत्रमा सूचना प्रकाशन गरी सोही सूचनामा तोकिएको अबधि र क्षेत्रमा परिच्छेद-२ मा लेखिएको कुनै कुरा लागू नहुने गरी आवश्यक आदेश जारी गर्न सक्नेछ।
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**३१. काम कारबाही रोक्न आदेश दिन सक्नेः**
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कसैले यस ऐन बिपरीत गर्न लागेको कुनै काम कारबाही तत्काल नरोकिएमा बजारमा कुनै बस्तु बा सेबाको आपूर्ति बा बितरणमा तत्काल गम्भीर प्रतिकूल अबस्था सूजना हुन सक्छ भन्ने कुरा बजार संरक्षण अधिकृत बा बोर्डबाट अदालतलाई जानकारी हुन आएमा र सो कुरामा अदालत बिश्वस्त भएमा अदालतले सो काम कारबाही तत्काल रोक्न आदेश दिन सक्नेछ।
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**३२. बौद्धिक सम्पत्तिको दुरुपयोग रोक्ने व्यवस्था गर्न सक्नेः**
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कुनै बौद्धिक सम्पत्तिको धनीले आफ्नो बौद्धिक सम्पत्तिको दुरुपयोग गरी स्वच्छ प्रतिस्पर्धामा बाधा पुर्याएमा बा उपभोक्ताको हक हित बिपरीत काम गरेमा नेपाल सरकारले सो सम्बन्धमा आवश्यक व्यवस्था गर्न सक्नेछ।
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**३३. प्रचलित कानून बमोजिम मुद्दा चलाउन बाधा नपर्नेः**
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यस ऐन बमोजिम कसूर टहरिने कुनै काम कारबाही अन्य प्रचलित कानून बमोजिम पनि कसूर टहरिने रहेछ भने सो कानून बमोजिम मुद्दा चलाउन यस ऐनको कुनै कुराले बाधा पुए्याएको मानिने छैन।
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**३४. पुरस्कार दिन सक्नेः**
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कसैले यस ऐन बिपरीत कुनै कसूर गरेको बा गर्न लागेको भन्ने सम्बन्धमा बोर्ड बा बजार संरक्षण अधिकृतलाई दिएको सूचना अदालतबाट मुद्दाको अन्तिम किनारा हुँदा सत्य ठहरिएमा त्यस्तो सूचनादातालाई बोर्डले उचित पुरस्कार दिन सक्नेछ।
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**३५. सहयोग गर्नु पर्नेः**
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यस ऐन अन्तर्गतको कसूरको सम्बन्धमा अनुसन्धान तथा तहकिकात गर्दा बोर्ड, बोर्डद्वारा गठित उपसमिति बा बजार संरक्षण अधिकृतलाई आवश्यक सहयोग पुए्याउनु सम्बन्धित सबैको कर्तव्य हुनेछ।
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**३६. सूचनाको गोप्यताः**
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यस ऐन बमोजिम निरीक्षण, अनुगमन, अनुसन्धान बा तहकिकात गर्दा बोर्ड बा बजार संरक्षण अधिकृतले आफ���लाई प्राप्त हुन आएको व्यापारिक कारोबार तथा सूचना गोप्य राख्नु पर्नेछ।
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**३७. अधिकार प्रत्यायोजन:**
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बोर्डले आफूलाई प्राप्त अधिकार मध्ये आवश्यकतानुसार केही अधिकार बोर्डको अध्यक्ष, सदस्य, सदस्य-सचिब, यस ऐन बमोजिम गठित समिति बा नेपाल सरकारको कुनै अधिकृत कर्मचारीलाई प्रत्यायोजन गर्न सक्नेछ।
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**३८. बार्षिक प्रतिबेदन:**
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(१) बोर्डले आफ्नो काम कारबाहीको बार्षिक प्रतिबेदन प्रत्येक आर्थिक बर्ष समाप्त भएको मितिले साठी दिनभित्र नेपाल सरकार समक्ष पेश गर्नु पर्नेछ।
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(२) उपदफा (१) बमोजिम पेश भएको बार्षिक प्रतिबेदन नेपाल सरकारले सार्वजनिक गर्न सक्नेछ।
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**३९. नियम बनाउने अधिकार:**
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यस ऐनको उद्देश्य कार्यान्वयन गर्न नेपाल सरकारले आवश्यक नियम बनाउन सक्नेछ।
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**दूष्टव्य:**
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केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने ऐन, २०७२ द्वारा रुपान्तर भएका शब्दहरुः-
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"कानून न्याय तथा संसदीय व्यवस्था मन्त्रालय" को सझ "कानून, न्याय तथा संसदीय मामिता मन्त्रालय"।
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