diff --git "a/Data/Gita_Word_Meanings_Hindi.csv" "b/Data/Gita_Word_Meanings_Hindi.csv" new file mode 100644--- /dev/null +++ "b/Data/Gita_Word_Meanings_Hindi.csv" @@ -0,0 +1,10850 @@ +Chapter,Shloka,Sanskrit Word,Hindi Meaning +1,1,धृतराष्ट्रः उवाच,धृतराष्ट्र ने कहा +1,1,धर्म,क्षेत्र धर्मभूमिः कुरू +1,1,युयुत्सवः,युद्ध करने को इच्छुक +1,1,मामकाः,मेरे पुत्रों +1,1,पाण्डवाः,पाण्डु के पुत्रों ने +1,1,च,तथा +1,1,एव,निश्चय ही +1,1,किम्,क्या +1,1,अकुर्वत,उन्होंने किया +1,1,संजय,हे संजय। +1,2,संजय उवाच,संजय ने कहा +1,2,दृष्टा,देखकर +1,2,तु,किन्तु +1,2,पाण्डव,अनीकम् +1,2,व्यूढं,व्यूह रचना में खड़े होना +1,2,दुर्योधनः,राजा दुर्योधन +1,2,तदा,तब +1,2,आचार्यम्,"गुरु, उपसंगम्य" +1,2,राजा,राजा +1,2,वचनम्,शब्द +1,2,अब्रवीत्,कहा। +1,3,पश्य,देखना +1,3,एताम्,इसः पाण्डु +1,3,आचार्य,आदरणीय आचार्य महतीम +1,3,चमूम्,सेना को +1,3,व्यूढां,सुव्यस्थित व्यूह रचना +1,3,द्वपद,पुत्रेण द्रुपद पुत्र द्वारा +1,3,तव,तुम्हारे +1,3,शिष्येण,शिष्य द्वारा +1,3,धी,मता +1,4,अत्र,यहाँ +1,4,शूराः,शक्तिशाली योद्धा +1,4,महा,इषु +1,4,भीम,अर्जुन +1,4,युधि,युद्धकला के पराक्रमी योद्धा +1,4,युयुधान:,युयुधान +1,4,विराट:,विराटः च +1,4,द्रुपदः,द्रुपद +1,4,च,भी +1,4,महारथ:,"महान योद्धा, जो अकेले दस हजार साधारण सैनिकों का सामना करने की सामर्थ्य रखता हो" +1,4,धृष्टकेतुः,धृष्टकेतु +1,4,चेकितानः,चेकितान +1,4,काशिराज:,काशिराज +1,4,च,और +1,4,वीर्यवान्,महानयोद्धा +1,4,पुरुजित्,पुरुजित् कुन्तिभोज +1,4,च,तथा +1,4,शैब्य:,शैव्य +1,4,च,और +1,4,नरपुङ्गवः,उत्तम पुरूष +1,4,युधामन्युः,युधामन्यु +1,4,च,और +1,4,विक्रान्त:,निडर +1,4,उत्तमौजा:,उत्तमौजा +1,4,च,और +1,4,वीर्यवान्,महाशक्तिशाली +1,4,सौभद्र,सुभद्रा का पुत्र +1,4,द्रौपदेया:,द्रोपदी के पुत्र +1,4,च,और +1,4,सर्वे,सभी +1,4,एक्,निश्चय ही +1,4,महारथाः,"महारथी, जो युद्ध में अकेले ही दस हजार साधारण योद्धाओं का सामना कर सके।" +1,5,अत्र,यहाँ +1,5,शूराः,शक्तिशाली योद्धा +1,5,महा,इषु +1,5,भीम,अर्जुन +1,5,युधि,युद्धकला के पराक्रमी योद्धा +1,5,युयुधान:,युयुधान +1,5,विराट:,विराटः च +1,5,द्रुपदः,द्रुपद +1,5,च,भी +1,5,महारथ:,"महान योद्धा, जो अकेले दस हजार साधारण सैनिकों का सामना करने की सामर्थ्य रखता हो" +1,5,धृष्टकेतुः,धृष्टकेतु +1,5,चेकितानः,चेकितान +1,5,काशिराज:,काशिराज +1,5,च,और +1,5,वीर्यवान्,महानयोद्धा +1,5,पुरुजित्,पुरुजित् कुन्तिभोज +1,5,च,तथा +1,5,शैब्य:,शैव्य +1,5,च,और +1,5,नरपुङ्गवः,उत्तम पुरूष +1,5,युधामन्युः,युधामन्यु +1,5,च,और +1,5,विक्रान्त:,निडर +1,5,उत्तमौजा:,उत्तमौजा +1,5,च,और +1,5,वीर्यवान्,महाशक्तिशाली +1,5,सौभद्र,सुभद्रा का पुत्र +1,5,द्रौपदेया:,द्रोप���ी के पुत्र +1,5,च,और +1,5,सर्वे,सभी +1,5,एक्,निश्चय ही +1,5,महारथाः,"महारथी, जो युद्ध में अकेले ही दस हजार साधारण योद्धाओं का सामना कर सके।" +1,6,अत्र,यहाँ +1,6,शूराः,शक्तिशाली योद्धा +1,6,महा,इषु +1,6,भीम,अर्जुन +1,6,युधि,युद्धकला के पराक्रमी योद्धा +1,6,युयुधान:,युयुधान +1,6,विराट:,विराटः च +1,6,द्रुपदः,द्रुपद +1,6,च,भी +1,6,महारथ:,"महान योद्धा, जो अकेले दस हजार साधारण सैनिकों का सामना करने की सामर्थ्य रखता हो" +1,6,धृष्टकेतुः,धृष्टकेतु +1,6,चेकितानः,चेकितान +1,6,काशिराज:,काशिराज +1,6,च,और +1,6,वीर्यवान्,महानयोद्धा +1,6,पुरुजित्,पुरुजित् कुन्तिभोज +1,6,च,तथा +1,6,शैब्य:,शैव्य +1,6,च,और +1,6,नरपुङ्गवः,उत्तम पुरूष +1,6,युधामन्युः,युधामन्यु +1,6,च,और +1,6,विक्रान्त:,निडर +1,6,उत्तमौजा:,उत्तमौजा +1,6,च,और +1,6,वीर्यवान्,महाशक्तिशाली +1,6,सौभद्र,सुभद्रा का पुत्र +1,6,द्रौपदेया:,द्रोपदी के पुत्र +1,6,च,और +1,6,सर्वे,सभी +1,6,एक्,निश्चय ही +1,6,महारथाः,"महारथी, जो युद्ध में अकेले ही दस हजार साधारण योद्धाओं का सामना कर सके।" +1,7,अस्माकम्,हमारे +1,7,तु,परन्तु +1,7,विशिष्टा,विशेष रूप से +1,7,ये,जो +1,7,तान्,उनको +1,7,"निबोध जानकारी देना, द्विज",उत्तम +1,7,सैन्यस्थ,सेना के +1,7,संज्ञा,अर्थम् +1,7,तान्,उन्हें +1,7,ब्रवीमि,वर्णन कर रहा हूँ +1,7,ते,आपको। +1,8,भवान्,आप: भीष्मः +1,8,कर्ण:,कर्णः च और +1,8,कपः,कृपाचार्य च +1,8,समितिन्जयः,युद्ध में सदा विजयी +1,8,"अश्वत्थामा अश्वत्थामा, विकर्ण:",विकर्ण +1,8,च,और +1,8,सौमदत्ति:,सोमदत्त का पुत्र भूरिश्रवा +1,8,तथा,और +1,8,एक,समान रूप से +1,8,च,भी।। +1,9,अन्ये,अन्य सब +1,9,च,भी +1,9,बहवः,अनेक +1,9,शूराः,महायोद्धा +1,9,मत्,अर्थे मेरे लिए +1,9,त्यक्त,जीविता: +1,9,नाना,शस्त्र +1,9,सर्वे,सभी +1,9,युद्ध विशारदा:,युद्ध कौशल में निपुण।। +1,10,अपर्याप्तम्,असीमित +1,10,तत्,वह +1,10,अस्माकम्,हमारी +1,10,बलम्,शक्ति +1,10,भीष्म,भीष्म पितामह के नेतृत्व में अभिरक्षितम् +1,10,पर्याप्तम्,सीमित +1,10,तु,"लेकिन, इदम्" +1,10,एतेषाम्,उनकी +1,10,बलम्,शक्ति +1,10,भीम,भीम की देख रेख में +1,10,अभिरक्षितम्,पूर्णतया सुरक्षित। +1,11,अयनेषु,निश्चित स्थान पर +1,11,च,भी +1,11,सर्वेषु,सर्वत्र +1,11,यथा,भागम् +1,11,अवस्थिता:,स्थित +1,11,भीष्मम्,भीष्म पितामह की +1,11,एव,निश्चय ही +1,11,अभिरक्षन्तु,सुरक्षा करना +1,11,भवन्त:,आप +1,11,सर्वे,सव के सव +1,11,एव हि,जब भी। +1,12,तस्य,उसका +1,12,सन्जनयन्,हेतु +1,12,हर्षम्,हर्षः कुरू +1,12,पितामहः,पितामह (दादा) सिंह +1,12,विनद्य,गर्जना +1,12,उच्चैः,उ��्च स्वर से +1,12,शङ्ख,शंख +1,12,दध्मौ,बजाया +1,12,प्रताप,वान् +1,13,ततः,तत्पश्चात +1,13,शङ्खा:,"शंख, च" +1,13,भेर्य:,नगाड़े च +1,13,पणव,आनक +1,13,गोमुखाः,तुरही +1,13,सहसा,अचानक +1,13,एव,वास्तव में +1,13,अभ्यहन्यन्त,एक साथ बजाये गये +1,13,सः,वह +1,13,शब्दः,स्वर +1,13,तुमुल:,कोलाहलपूर्ण +1,13,अभवत्,हो गया था। +1,14,ततः,तत्पश्चात +1,14,श्वेत,श्वेत +1,14,हयैः,अश्व से +1,14,युक्ते,युक्त +1,14,महति,भव्य +1,14,स्यन्दने,रथ में +1,14,स्थितौ,आसीन +1,14,माधव:,कृष्ण +1,14,पाण्डवः,"पाण्डु पुत्र, अर्जुन ने" +1,14,च,और +1,14,एव,निश्चय ही +1,14,दिव्यौ,दिव्य +1,14,शङ्खौ,शंख +1,14,प्रदध्मतुः,बजाये। +1,15,पाञ्चजन्यं,पाञ्चजन्य नामक शंख +1,15,ऋषीकेश:,"श्रीकृष्ण, जो मन और इन्द्रियों के स्वामी हैं" +1,15,देवदत्तम,देवदत्त नामक शंख +1,15,धनम्,जयः +1,15,दध्मौ,बजाया +1,15,महा,शङ्ख +1,15,भीम,कर्मा +1,15,वृक,उदरः +1,16,अनन्त,विजयम् +1,16,राजा,राजा +1,16,कुन्ति,पुत्रः +1,16,युधिष्ठिरः,युधिष्ठिर +1,16,नकुलः,नकुलः सहदेवः +1,16,च,तथा +1,16,सुघोष,मणिपुष्पकौ +1,16,काश्य:,काशी (वाराणसी) के राजा ने +1,16,च,और +1,16,परम,ईषु +1,16,शिखण्डी,शिखण्डी ने +1,16,च,भी +1,16,महा,रथ: +1,16,धृष्टद्युम्नो:,धृष्टद्युम्न ने +1,16,विराट:,विराट +1,16,च,और +1,16,सात्यकिः,सात्यकि +1,16,च,तथा +1,16,अपराजित:,अजेय +1,16,द्रुपदः,"द्रुपद, द्रौपदेया:" +1,16,च,भी +1,16,सर्वश:,सभी +1,16,पृथिवी,पते हे पृथ्वी का राजा +1,16,सौभद्रः,"सुभद्रा के पुत्र, अभिमन्यु ने" +1,16,च,भी +1,16,महा,बाहुः +1,16,शड्.खान्,शंख +1,16,दध्मुः,बजाए +1,16,पृथक,पृथक +1,17,अनन्त,विजयम् +1,17,राजा,राजा +1,17,कुन्ति,पुत्रः +1,17,युधिष्ठिरः,युधिष्ठिर +1,17,नकुलः,नकुलः सहदेवः +1,17,च,तथा +1,17,सुघोष,मणिपुष्पकौ +1,17,काश्य:,काशी (वाराणसी) के राजा ने +1,17,च,और +1,17,परम,ईषु +1,17,शिखण्डी,शिखण्डी ने +1,17,च,भी +1,17,महा,रथ: +1,17,धृष्टद्युम्नो:,धृष्टद्युम्न ने +1,17,विराट:,विराट +1,17,च,और +1,17,सात्यकिः,सात्यकि +1,17,च,तथा +1,17,अपराजित:,अजेय +1,17,द्रुपदः,"द्रुपद, द्रौपदेया:" +1,17,च,भी +1,17,सर्वश:,सभी +1,17,पृथिवी,पते हे पृथ्वी का राजा +1,17,सौभद्रः,"सुभद्रा के पुत्र, अभिमन्यु ने" +1,17,च,भी +1,17,महा,बाहुः +1,17,शड्.खान्,शंख +1,17,दध्मुः,बजाए +1,17,पृथक,पृथक +1,18,अनन्त,विजयम् +1,18,राजा,राजा +1,18,कुन्ति,पुत्रः +1,18,युधिष्ठिरः,युधिष्ठिर +1,18,नकुलः,नकुलः सहदेवः +1,18,च,तथा +1,18,सुघोष,मणिपुष्पकौ +1,18,काश्य:,काशी (वाराणसी) के राजा ने +1,18,च,और +1,18,परम,ईषु +1,18,शिखण्डी,शिखण्डी ने +1,18,च,भी +1,18,महा,रथ: +1,18,धृष्टद्युम्नो:,धृष्टद्युम्न ने +1,18,विराट:,विराट +1,18,च,और +1,18,सात्यकिः,सात्यकि +1,18,च,तथा +1,18,अपराजित:,अजेय +1,18,द्रुपदः,"द्रुपद, द्रौपदेया:" +1,18,च,भी +1,18,सर्वश:,सभी +1,18,पृथिवी,पते हे पृथ्वी का राजा +1,18,सौभद्रः,"सुभद्रा के पुत्र, अभिमन्यु ने" +1,18,च,भी +1,18,महा,बाहुः +1,18,शड्.खान्,शंख +1,18,दध्मुः,बजाए +1,18,पृथक,पृथक +1,19,सः,उस +1,19,घोषः,शब्द ध्वनि +1,19,धार्तराष्ट्राणाम्,धृतराष्ट्र के पुत्रों के +1,19,हृदयानि,हृदयों को +1,19,व्यदारयत्,विदीर्ण कर दिया +1,19,नभ:,आकाश +1,19,च,भी +1,19,पृथिवीम्,पृथ्वी को +1,19,च,भी +1,19,एव,निश्चय ही +1,19,तुमुल:,कोलाहलपूर्ण ध्वनि +1,19,व्यनुनादयन्,गर्जना करना। +1,20,अथ,तत्पश्चात +1,20,व्यवस्थितान्,सुव्यवस्थित +1,20,दृष्टा,देखकर +1,20,धार्तराष्ट्रान्,धृतराष्ट्र के पुत्रों को +1,20,कपिधवजः,वानर चित्र अंकित +1,20,प्रवृत्ते,उद्यत +1,20,शस्त्र,सम्पाते +1,20,धनुः,ध नुष +1,20,उद्यम्य,"ग्रहण करके, पाण्डवः" +1,20,हृषीकेशम्,भगवान् कृष्ण से +1,20,तदा,उस समय +1,20,वाक्यम्,वचन +1,20,इदम्,ये +1,20,आह,कहे +1,20,मही,पते +1,21,अर्जुनः उवाच,अर्जुन ने कहा +1,21,सेनयोः,सेनाएं +1,21,उभयोः,दोनों +1,21,मध्ये,बीच +1,21,रथम्,रथ +1,21,स्थापय,खड़ा करें +1,21,मे,मेरे +1,21,अच्युत,"अमोधा, श्रीकृष्ण" +1,21,यावत्,जब तक +1,21,एतान्,इन सब +1,21,निरीक्षे,देखना +1,21,अहम्,मैं +1,21,योद्ध,कामान् +1,21,अवस्थितान्,व्यूह रचना में एकत्र +1,21,के:,किन +1,21,मया,मुझे सह +1,21,योद्धव्यम्,युद्ध करना +1,21,अस्मिन्,"इसमें, रण" +1,22,अर्जुनः उवाच,अर्जुन ने कहा +1,22,सेनयोः,सेनाएं +1,22,उभयोः,दोनों +1,22,मध्ये,बीच +1,22,रथम्,रथ +1,22,स्थापय,खड़ा करें +1,22,मे,मेरे +1,22,अच्युत,"अमोधा, श्रीकृष्ण" +1,22,यावत्,जब तक +1,22,एतान्,इन सब +1,22,निरीक्षे,देखना +1,22,अहम्,मैं +1,22,योद्ध,कामान् +1,22,अवस्थितान्,व्यूह रचना में एकत्र +1,22,के:,किन +1,22,मया,मुझे सह +1,22,योद्धव्यम्,युद्ध करना +1,22,अस्मिन्,"इसमें, रण" +1,23,योत्स्यमानान्,युद्ध करने के लिए आए योद्धाओं को +1,23,अवेक्षे,अहम् +1,23,ये,जो +1,23,एते,वे +1,23,अत्र,यहाँ +1,23,समागता:,एकत्र +1,23,धार्तराष्ट्रस्य,धृतराष्ट्र के पुत्र +1,23,दुर्बुद्धेः,हीन मानसिकता वाले +1,23,युद्धे,युद्ध में +1,23,प्रिय,चिकीर्षवः +1,24,संजयः उवाच,संजय ने कहा +1,24,एवम्,इस प्रकार +1,24,उक्त:,व्यक्त किए गये +1,24,हृषीकेशः,"इन्द्रियों के स्वामी, श्रीकृष्ण ने" +1,24,गुडाकेशेन,"निद्रा को वश में करने वाला, अर्जुन" +1,24,भारत,भरत वंशी +1,24,सेनयोः,सेनाओं के +1,24,उभयोः,दोनों +1,24,मध्ये,मध्य में +1,24,स्थापयित्वा,स्थित करना +1,24,रथ,उत्तमम् भव्य रथ को। +1,25,भीष्म,भीष्म पितामह +1,25,द्रोण,द्रोणाच��र्य प्रमुखतः +1,25,सर्वेषाम्,सब +1,25,च,और +1,25,मही,क्षिताम् +1,25,उवाच,कहा +1,25,पार्थ,"पृथा पुत्र, अर्जुनः पश्य देखो" +1,25,एतान्,इन सबों को +1,25,समवेतान्,एकत्रित +1,25,कुरून्,कुरु वंशियों को +1,25,इति,इस प्रकार। +1,26,तत्र,वहाँ +1,26,अपश्यत्,देखा +1,26,स्थितान्,खड़े पार्थः +1,26,पितॄन्,पिता +1,26,अथ,तत्पश्चात +1,26,पितामहान,पितामहों को +1,26,आचार्यान्,शिक्षकों को +1,26,मातुलान्,मामाओं को +1,26,भ्रातृन्,भाइयों को +1,26,पुत्रान्,पुत्रों को +1,26,सखीन्,मित्रों को +1,26,तथा,और +1,26,श्वशुरान्,श्वसुरों को +1,26,सुहृदः,शुभचिन्तकों को +1,26,च,भी +1,26,एव,निश्चय ही +1,26,सेनयोः,सेना के +1,26,उभयोः,दोनो पक्षों की सेनाएं +1,26,अपि:,भी। +1,27,तान्,उन्हीं +1,27,समीक्ष्य,देखकर +1,27,सः,वे +1,27,कौन्तेयः,"कुन्तीपुत्र, अर्जुनः सर्वान्" +1,27,बंधु,बान्धव +1,27,अवस्थितान्,उपस्थित +1,27,कृपया,करुणा से +1,27,परया,अत्यधिक +1,27,आविष्ट:,अभिभूत +1,27,विषीदन्,गहन शोक प्रकट करता हुआ +1,27,इदम्,इस प्रकार +1,27,अब्रवीत्,बोला। +1,28,अर्जुन:,उवाच +1,28,दृष्ट्वा,देख कर +1,28,इमम्,इन सबको +1,28,स्वजनम्,वंशजों को +1,28,कृष्ण,कृष्ण +1,28,युयुत्सुम,युद्ध लड़ने की इच्छा रखने वाले +1,28,समुपस्थितम्,उपस्थित +1,28,सीदन्ति,काँप रहे हैं +1,28,मम,मेरे +1,28,गात्रणि,होंठ +1,28,मुखम्,मुँह +1,28,च,भी +1,28,परिशुष्यति,सूख रहा है। +1,29,वेपथुः,कम्पन +1,29,च,भी +1,29,शरीरे,शरीर में +1,29,मे,मेरे +1,29,रोम,हर्षः +1,29,च,भी +1,29,जायते,उत्पन्न हो रहा है +1,29,गाण्डीवम्,अर्जुन का धनुष +1,29,स्रंसते,सरक रहा है +1,29,हस्तात्,हाथ से +1,29,त्वक्,त्वचा +1,29,च,भी +1,29,एव,वास्तव में +1,29,परिदह्यते,सब ओर जल रही है। न +1,29,च,भी +1,29,शक्नोमि,समर्थ हूँ +1,29,अवस्थातुम्,स्थिर खड़े होने में +1,29,भ्रमतीव,झूलता हुआ +1,29,च,और +1,29,मे,मेरा +1,29,मनः,मन +1,29,निमित्तानि,अशुभ लक्षण +1,29,च,भी +1,29,पश्यामि,देखता हूँ +1,29,विपरीतानि,दुर्भाग्य +1,29,केशव,"हे केशी असुर को मारने वाले, श्रीकृष्ण" +1,29,न,न तो +1,29,च,भी +1,29,श्रेयः,कल्याण +1,29,अनुपश्यामि,पहले से देख रहा हूँ +1,29,हत्वा,वध करना +1,29,स्वजनम्,सगे संबंधी को +1,29,आहवे,यद्ध में। +1,30,वेपथुः,कम्पन +1,30,च,भी +1,30,शरीरे,शरीर में +1,30,मे,मेरे +1,30,रोम,हर्षः +1,30,च,भी +1,30,जायते,उत्पन्न हो रहा है +1,30,गाण्डीवम्,अर्जुन का धनुष +1,30,स्रंसते,सरक रहा है +1,30,हस्तात्,हाथ से +1,30,त्वक्,त्वचा +1,30,च,भी +1,30,एव,वास्तव में +1,30,परिदह्यते,सब ओर जल रही है। न +1,30,च,भी +1,30,शक्नोमि,समर्थ हूँ +1,30,अवस्थातुम्,स्थिर खड़े होने में +1,30,भ्रमतीव,झूलता हुआ +1,30,च,औ�� +1,30,मे,मेरा +1,30,मनः,मन +1,30,निमित्तानि,अशुभ लक्षण +1,30,च,भी +1,30,पश्यामि,देखता हूँ +1,30,विपरीतानि,दुर्भाग्य +1,30,केशव,"हे केशी असुर को मारने वाले, श्रीकृष्ण" +1,30,न,न तो +1,30,च,भी +1,30,श्रेयः,कल्याण +1,30,अनुपश्यामि,पहले से देख रहा हूँ +1,30,हत्वा,वध करना +1,30,स्वजनम्,सगे संबंधी को +1,30,आहवे,यद्ध में। +1,31,वेपथुः,कम्पन +1,31,च,भी +1,31,शरीरे,शरीर में +1,31,मे,मेरे +1,31,रोम,हर्षः +1,31,च,भी +1,31,जायते,उत्पन्न हो रहा है +1,31,गाण्डीवम्,अर्जुन का धनुष +1,31,स्रंसते,सरक रहा है +1,31,हस्तात्,हाथ से +1,31,त्वक्,त्वचा +1,31,च,भी +1,31,एव,वास्तव में +1,31,परिदह्यते,सब ओर जल रही है। न +1,31,च,भी +1,31,शक्नोमि,समर्थ हूँ +1,31,अवस्थातुम्,स्थिर खड़े होने में +1,31,भ्रमतीव,झूलता हुआ +1,31,च,और +1,31,मे,मेरा +1,31,मनः,मन +1,31,निमित्तानि,अशुभ लक्षण +1,31,च,भी +1,31,पश्यामि,देखता हूँ +1,31,विपरीतानि,दुर्भाग्य +1,31,केशव,"हे केशी असुर को मारने वाले, श्रीकृष्ण" +1,31,न,न तो +1,31,च,भी +1,31,श्रेयः,कल्याण +1,31,अनुपश्यामि,पहले से देख रहा हूँ +1,31,हत्वा,वध करना +1,31,स्वजनम्,सगे संबंधी को +1,31,आहवे,यद्ध में। +1,32,न,न तो +1,32,काक्ष्ये,इच्छा करता हूँ +1,32,विजयं,विजय +1,32,कृष्ण,कृष्ण +1,32,न,न ही +1,32,च,उसी प्रकार से +1,32,राज्यम,राज्य +1,32,सुखानि,सुख +1,32,च,भी +1,32,किम्,क्या +1,32,राज्येन,राज्य द्वारा +1,32,गोविन्द,"श्रीकृष्ण, जो इन्द्रियों को सुख प्रदान करते हैं और जो गायों से प्रेम करते हैं" +1,32,भोगैः,सुख +1,32,जीवितेन,जीवन +1,32,वा,अथवा +1,32,येषाम्,जिनके +1,32,अर्थ,लिए +1,32,काडक्षितम्,इच्छित है +1,32,न:,हमारे द्वारा +1,32,राज्यम्,राज्य +1,32,भोगा:,सुख +1,32,,सुख +1,32,च,भी +1,32,ते,वे +1,32,इमे,ये +1,32,अवस्थिता:,स्थित +1,32,युद्धे,युद्धभूमि में +1,32,प्राणान्,जीवन को +1,32,त्यक्त्वा,त्याग कर +1,32,धनानि,धन +1,32,च,भी +1,33,न,न तो +1,33,काक्ष्ये,इच्छा करता हूँ +1,33,विजयं,विजय +1,33,कृष्ण,कृष्ण +1,33,न,न ही +1,33,च,उसी प्रकार से +1,33,राज्यम,राज्य +1,33,सुखानि,सुख +1,33,च,भी +1,33,किम्,क्या +1,33,राज्येन,राज्य द्वारा +1,33,गोविन्द,"श्रीकृष्ण, जो इन्द्रियों को सुख प्रदान करते हैं और जो गायों से प्रेम करते हैं" +1,33,भोगैः,सुख +1,33,जीवितेन,जीवन +1,33,वा,अथवा +1,33,येषाम्,जिनके +1,33,अर्थ,लिए +1,33,काडक्षितम्,इच्छित है +1,33,न:,हमारे द्वारा +1,33,राज्यम्,राज्य +1,33,भोगा:,सुख +1,33,,सुख +1,33,च,भी +1,33,ते,वे +1,33,इमे,ये +1,33,अवस्थिता:,स्थित +1,33,युद्धे,युद्धभूमि में +1,33,प्राणान्,जीवन को +1,33,त्यक्त्वा,त्याग कर +1,33,धनानि,धन +1,33,च,भी +1,34,आचार्याः,शिक्षक +1,34,पितरः,पितृगणः पुत्रा +1,34,तथा,उसी प्रकार +1,34,एव,वास्तव में +1,34,च,भी +1,34,पितामहाः,पितामह +1,34,मातुला:,मामा +1,34,श्वशुरा:,श्वसुर +1,34,पौत्रा:,पौत्र +1,34,श्याला:,साले +1,34,सम्बन्धिनः,वंशजी +1,34,तथा,उसी प्रकार से तथा +1,34,एतान्,ये सब +1,34,न,नहीं +1,34,हन्तुम्,वध करना +1,34,इच्छामि,मैं चाहता हूँ +1,34,घ्रतः,वध करने पर +1,34,अपि,भी +1,34,मधुसूदन," मधु नामक असुर का वध करने वाले, श्रीकृष्ण" +1,34,अपि,तो भी +1,34,त्रै,लोक्य +1,34,हेतो:,के लिए +1,34,किम नु,क्या कहा जाए +1,34,मही,कृते +1,35,आचार्याः,शिक्षक +1,35,पितरः,पितृगणः पुत्रा +1,35,तथा,उसी प्रकार +1,35,एव,वास्तव में +1,35,च,भी +1,35,पितामहाः,पितामह +1,35,मातुला:,मामा +1,35,श्वशुरा:,श्वसुर +1,35,पौत्रा:,पौत्र +1,35,श्याला:,साले +1,35,सम्बन्धिनः,वंशजी +1,35,तथा,उसी प्रकार से तथा +1,35,एतान्,ये सब +1,35,न,नहीं +1,35,हन्तुम्,वध करना +1,35,इच्छामि,मैं चाहता हूँ +1,35,घ्रतः,वध करने पर +1,35,अपि,भी +1,35,मधुसूदन," मधु नामक असुर का वध करने वाले, श्रीकृष्ण" +1,35,अपि,तो भी +1,35,त्रै,लोक्य +1,35,हेतो:,के लिए +1,35,किम नु,क्या कहा जाए +1,35,मही,कृते +1,36,निहत्य,मारकर +1,36,धार्तराष्ट्रान्,धृतराष्ट्र के पुत्रों को +1,36,नः,हमारी +1,36,का,क्या +1,36,प्रीतिः,सुख +1,36,स्यात्,होगी +1,36,"जनार्दन हे जीवों के पालक, श्रीकृष्ण। पापम्",पाप +1,36,एव,निश्चय ही +1,36,आश्रयेत्,लगेगा +1,36,अस्मान्,हमें +1,36,हत्वा,मारकर +1,36,एतान्,इन सबको +1,36,आततायिन:,आततायियों को +1,36,तस्मात्,अतः +1,36,न,कभी नहीं +1,36,अर्हाः,योग्य +1,36,वयम्,हम +1,36,हन्तुम्,मारने के लिए +1,36,धृतराष्ट्रान्,धृतराष्ट्र के पुत्रों को +1,36,स्व,बान्धवान् मित्रों सहित +1,36,सव,जनम् +1,36,हि,निश्चय ही +1,36,कथम्,कैसे +1,36,हत्वा,मारकर +1,36,सुखिनः,सुखी +1,36,स्याम,हम होंगे +1,36,माधाव,"योगमाया के स्वामी, श्रीकृष्ण।" +1,37,निहत्य,मारकर +1,37,धार्तराष्ट्रान्,धृतराष्ट्र के पुत्रों को +1,37,नः,हमारी +1,37,का,क्या +1,37,प्रीतिः,सुख +1,37,स्यात्,होगी +1,37,"जनार्दन हे जीवों के पालक, श्रीकृष्ण। पापम्",पाप +1,37,एव,निश्चय ही +1,37,आश्रयेत्,लगेगा +1,37,अस्मान्,हमें +1,37,हत्वा,मारकर +1,37,एतान्,इन सबको +1,37,आततायिन:,आततायियों को +1,37,तस्मात्,अतः +1,37,न,कभी नहीं +1,37,अर्हाः,योग्य +1,37,वयम्,हम +1,37,हन्तुम्,मारने के लिए +1,37,धृतराष्ट्रान्,धृतराष्ट्र के पुत्रों को +1,37,स्व,बान्धवान् मित्रों सहित +1,37,सव,जनम् +1,37,हि,निश्चय ही +1,37,कथम्,कैसे +1,37,हत्वा,मारकर +1,37,सुखिनः,सुखी +1,37,स्याम,हम होंगे +1,37,माधाव,"योगमाया के स्वामी, श्रीकृष्ण।" +1,38,यदि,अपि यद्यपि +1,38,एते,ये +1,38,न,नहीं +1,38,पश्यन्ति,देखते हैं +1,38,लोभ,लालच +1,38,उपहत,अभिभूत +1,38,चेतसः,विचार वाले +1,38,कुल,क्षय कृतम् +1,38,दोषम्,दोष को मित्र +1,38,च,भी +1,38,पातकम्,पाप +1,38,कथम्,क्यों +1,38,न,नहीं +1,38,ज्ञेयम्,जानना चाहिए। अस्माभिः +1,38,पापात्,पापों से +1,38,अस्मात्,इन +1,38,निवर्तितुम्,दूर रहना +1,38,कुल,क्षय +1,38,कृतम्,हो जाने पर +1,38,दोषम्,अपराध +1,38,प्रपश्यदिभः,जो देख सकता है +1,38,जनार्दन,"सभी जीवों के पालक, श्रीकृष्ण!" +1,39,यदि,अपि यद्यपि +1,39,एते,ये +1,39,न,नहीं +1,39,पश्यन्ति,देखते हैं +1,39,लोभ,लालच +1,39,उपहत,अभिभूत +1,39,चेतसः,विचार वाले +1,39,कुल,क्षय कृतम् +1,39,दोषम्,दोष को मित्र +1,39,च,भी +1,39,पातकम्,पाप +1,39,कथम्,क्यों +1,39,न,नहीं +1,39,ज्ञेयम्,जानना चाहिए। अस्माभिः +1,39,पापात्,पापों से +1,39,अस्मात्,इन +1,39,निवर्तितुम्,दूर रहना +1,39,कुल,क्षय +1,39,कृतम्,हो जाने पर +1,39,दोषम्,अपराध +1,39,प्रपश्यदिभः,जो देख सकता है +1,39,जनार्दन,"सभी जीवों के पालक, श्रीकृष्ण!" +1,40,कुल,क्षये +1,40,प्रणश्यन्ति,विनष्ट हो जाती हैं +1,40,कुल,धर्माः +1,40,सनातनाः,शाश्वत +1,40,धर्मे,नष्टे +1,40,कुलम्,परिवार को +1,40,कृत्स्नम्,सम्पूर्ण +1,40,अधर्म:,अधर्म +1,40,अभिभवति,अभिभूत +1,40,उत,वास्तव में। +1,41,अधर्म,अधर्म +1,41,अभिभवात्,प्रबलता होने से +1,41,कृष्ण,श्रीकृष्ण +1,41,प्रदुष्यन्ति,अपवित्र हो जाती हैं +1,41,परिवार,कुल +1,41,स्त्रिय,परिवार की स्त्रियां +1,41,स्त्रीषू,स्त्रीत्व +1,41,दुष्टासु,अपवित्र होने से वार्ष्णेय +1,41,जायते,उत्पन्न होती है +1,41,वर्ण,सङ्कर अवांछित सन्तान। +1,42,सड्करः,अवांछित बच्चे +1,42,नरकाय,नारकीय +1,42,एव,निश्चय ही +1,42,कुल,धयानानं +1,42,च,भी +1,42,पतन्ति,गिर जाते हैं +1,42,पतिर:,पितृगण +1,42,हि,निश्चय ही +1,42,एषाम्,उनके +1,42,लुप्त,समाप्त +1,42,पिण्ड,उदक +1,43,दोषैः,दुष्कर्मों से +1,43,एतैः,इन सब +1,43,कुलघ्रनाम्,अपने परिवार को नष्ट करने वालों का +1,43,वर्ण,सङ्कर अवांछित संतानों के कारकैः +1,43,उत्साद्यन्ते,नष्ट हो जाते हैं +1,43,जाति,धर्माः +1,43,कुल,धर्माः +1,43,च,भी +1,43,शाश्वता:,सनातन। +1,44,उत्सन्न,विनष्ट +1,44,कुल,धर्माणाम् +1,44,मनुष्याणाम्,ऐसे मनुष्यों का +1,44,जनाद्रन,"सभी जीवों के पालक, श्रीकृष्ण" +1,44,नरके,नरक में +1,44,अनियतम्,अनिश्चितकाल +1,44,वासः,निवास +1,44,भवति,होता है +1,44,इति,इस प्रकार +1,44,अनुशुश्रुम,विद्वानों से मैंने सुना है। +1,45,अहो,ओह +1,45,बत,कितना +1,45,महत्,महान +1,45,पापम्,पाप कर्म +1,45,कर्तुम्,करने के लिए +1,45,व्यवसिता,निश्चय किया है +1,45,वयम्,हमने +1,45,यत्,क्योंकि +1,45,राज्य,सुख +1,45,हन्तुम्,मारने के लिए +1,45,स्वजनम्,अपने सम्बन्धियों को +1,45,उद्यता:,तत्पर। यदि +1,45,माम्,मुझको +1,45,अप्रतीकारम्,प्रतिरोध न करने पर +1,45,अशस्त्रम्,बिना शास्त्र के +1,45,शस्त्र,पाणयः +1,45,धार्तराष्ट्राः,धृतराष्ट्र के पुत्र +1,45,रणे,युद्धभूमि में +1,45,हन्यु:,मार देते है +1,45,तत्,वह +1,45,मे,मेरे लिए +1,45,क्षेम,तरम् श्रेयस्कर +1,45,भवेत्,होगा। +1,46,अहो,ओह +1,46,बत,कितना +1,46,महत्,महान +1,46,पापम्,पाप कर्म +1,46,कर्तुम्,करने के लिए +1,46,व्यवसिता,निश्चय किया है +1,46,वयम्,हमने +1,46,यत्,क्योंकि +1,46,राज्य,सुख +1,46,हन्तुम्,मारने के लिए +1,46,स्वजनम्,अपने सम्बन्धियों को +1,46,उद्यता:,तत्पर। यदि +1,46,माम्,मुझको +1,46,अप्रतीकारम्,प्रतिरोध न करने पर +1,46,अशस्त्रम्,बिना शास्त्र के +1,46,शस्त्र,पाणयः +1,46,धार्तराष्ट्राः,धृतराष्ट्र के पुत्र +1,46,रणे,युद्धभूमि में +1,46,हन्यु:,मार देते है +1,46,तत्,वह +1,46,मे,मेरे लिए +1,46,क्षेम,तरम् श्रेयस्कर +1,46,भवेत्,होगा। +1,47,संजयः उवाच,संजय ने कहा +1,47,एवम्,उक्त्वा +1,47,अर्जुन:,अर्जुन +1,47,संङ्ख,ये युद्धभूमि में +1,47,रथ,उपस्थे रथ पर +1,47,उपाविशत्,बैठ गया +1,47,विसृज्य,एक ओर रखकर +1,47,स,शरम् +1,47,चापम्,धनुष +1,47,शोक,दुख से +1,47,संविग्र,व्यथित +1,47,मानसः,मन। +2,1,संजयः,उवाच +2,1,,संजय ने कहा +2,1,तम्,"उसे, अर्जुन को" +2,1,कृपया,करुणा के साथ +2,1,आविष्टम,अभिभूत +2,1,अश्रु,पूर्ण +2,1,आकुल,निराश +2,1,ईक्षणम्,नेत्र +2,1,विषीदन्तम्,शोकाकुल +2,1,इदम्,ये +2,1,वाक्यम्,शब्द +2,1,उवाच,कहा +2,2,श्रीभगवान्,उवाच +2,2,कुत:,कहाँ से +2,2,त्वा,तुमको +2,2,कश्मलम्,"मोह, अज्ञान" +2,2,इदम्,यह +2,2,विषमे,इस संकटकाल में +2,2,समुपस्थितम्,उत्पन्न हुआ +2,2,अनार्य,अशिष्ट जन +2,2,जुष्टम्,सद् +2,2,अस्वय॑म्,उच्च लोकों की ओर न ले जाने वाला +2,2,अकीर्तिकरम्,अपयश का कारण +2,2,अर्जुन,अर्जुन। +2,3,क्लैब्यम्,नपुंसकता +2,3,मा,स्म +2,3,गमः,प्राप्त हो +2,3,पार्थ,"पृथापुत्र,अर्जुन" +2,3,न,कभी नहीं +2,3,एतत्,यह +2,3,त्वयि,तुमको +2,3,उपपद्यते,उपयुक्त +2,3,क्षुद्रम्,दया +2,3,हृदय,हृदय की +2,3,दौर्बल्यम्,दुर्बलता +2,3,त्यक्त्वा,त्याग कर +2,3,उत्तिष्ठ,खड़ा हो +2,3,परम्,तप +2,4,अर्जुन उवाच,अर्जुन ने कहा +2,4,कथम्,कैसे +2,4,भीष्मम्,भीष्म को +2,4,अहम्,मे +2,4,संख्ये,युद्ध मे +2,4,द्रोणम्,द्रोणाचार्य को +2,4,च,और +2,4,मधुसूदन,"मधु राक्षस के दमनकर्ता, श्रीकृष्ण" +2,4,इषुभिः,वाणों से +2,4,प्रतियोत्स्यामि,प्रहार करूँगा +2,4,पूजा,अहौ +2,4,अरि,सूदन +2,5,गुरून्,शिक्षक +2,5,अहत्वा,न मारना +2,5,हि,निःस���देह +2,5,महा,अनुभावान् +2,5,श्रेयः,उत्तम +2,5,भोक्तुम्,जीवन का सुख भोगना +2,5,भैक्ष्यम्,भीख माँगकर +2,5,अपि,भी +2,5,इह,इस जीवन में +2,5,लोके,इस संसार में +2,5,हत्वा,वध कर +2,5,अर्थ,लाभ +2,5,कामान्,इच्छा से +2,5,तु,लेकिन +2,5,गुरून्,आदरणीय वयोवृद्ध +2,5,इह,इस संसार में +2,5,एव,निश्चय ही +2,5,भुञ्जीय,भोगना +2,5,भोगान्,सुख +2,5,रूधिर,रक्त से +2,5,प्रदिग्धान्,रंजित। +2,6,न,नहीं +2,6,च,और +2,6,एतत्,यह +2,6,विद्यः,हम जानते हैं +2,6,कतरत्,जो +2,6,न:,हमारे लिए +2,6,गरीयः,श्रेयस्कर +2,6,यत्वा,क्या +2,6,जयेम,वे विजयी हो +2,6,यदि,यदि +2,6,वा,या +2,6,न:,हमें +2,6,जयेयुः,विजयी हो +2,6,यान्,जिनको +2,6,एव,निश्चय ही +2,6,हत्वा,मारने के बाद +2,6,न,कभी नहीं +2,6,जिजीविषामः,हम जीवित रहना चाहेंगे +2,6,ते,वे सब +2,6,अवस्थिताः,खड़े हैं +2,6,प्रमुखे,हमारे सामने +2,6,धार्तराष्ट्राः,धृतराष्ट्र के पुत्र। +2,7,कार्पण्य,दोष +2,7,उपहत,ग्रस्त +2,7,स्वभावः,"प्रकृति, पृच्छामि में पूछ रहा हूँ" +2,7,त्वाम्,तुमसे +2,7,धर्म,कर्त्तव्य +2,7,सम्मूढ,व्याकुल +2,7,चेताः,हृदय में +2,7,यत्,जो +2,7,श्रेयः,श्रेष्ठ +2,7,स्यात्,हो +2,7,निश्चितम्,निश्चयपूर्वक +2,7,ब्रूहि,कहो +2,7,तत्,वह +2,7,मे,मुझको +2,7,शिष्यः,शिष्य +2,7,ते,तुम्हारा +2,7,अहम्,मैं +2,7,शाधि,कृपया उपदेश दीजिये +2,7,माम्,मुझको +2,7,त्वाम्,तुम्हारा +2,7,प्रपन्नम्,शरणागत। +2,8,न,नहीं +2,8,हि,निश्चय ही +2,8,प्रपश्यामि,मैं देखता हूँ +2,8,मम,मेरा +2,8,अपनुद्यात्,दूर कर सके +2,8,यत्,जो +2,8,शोकम्,शोक +2,8,उच्छोषणम्,सुखाने वाला +2,8,इन्द्रियाणाम्,इन्द्रियों को +2,8,अवाप्य,प्राप्त करके +2,8,भूमौ,पृथ्वी पर +2,8,असपत्नम्,शत्रुविहीन +2,8,ऋद्धम्,समृद्ध +2,8,राज्यम्,राज्य +2,8,सुराणाम्,स्वर्ग के देवताओं जैसा +2,8,अपि,चाहे +2,8,च,भी +2,8,आधिपत्यम्,प्रभुत्व। +2,9,सञ्जयः उवाच,संजय ने कहा +2,9,एवम्,इस प्रकार +2,9,उक्त्वा,कहकर +2,9,हृषीकेशम्,"कृष्ण से, जो मन और इन्द्रियों के स्वामी हैं" +2,9,गुडाकेश:,"निद्रा को वश में करने वाला, अर्जुन" +2,9,परन्तपः,"शत्रुओं का दमन करने वाला, अर्जुन" +2,9,न योस्ये,मैं नहीं लडूंगा +2,9,इति,इस प्रकार +2,9,गोविन्दम्,"इन्द्रियों को सुख देने वाले, कृष्ण" +2,9,उक्तवा,कहकर +2,9,तृष्णीम्,चुप +2,9,बभूव,हो गया +2,9,ह,वह हो गया +2,10,तम्,उससे +2,10,उवाच,कहा +2,10,हृषीकेश:,"मन और इन्द्रियों के स्वामी, श्रीकृष्ण ने" +2,10,प्रहसन,हँसते हुए +2,10,इव,मानो +2,10,भारत,भरतवंशी धृतराष्ट्र +2,10,सेनयोः,सेनाओं के +2,10,उभयो:,दोनों की +2,10,मध्ये,बीच में +2,10,विषीदन्तम्,शोकमग्न +2,10,इदम्,यह +2,10,वचः,शब्द। +2,11,श्रीभगवान् उवाच,परमप्रभु ने कहा +2,11,अशोच्यान्,जो शोक के पात्र नहीं हैं +2,11,अन्वशोच:,शोक करते हो +2,11,त्वम्,तुम +2,11,प्रज्ञावादान्,बुद्धिमता के वचन +2,11,च,भी +2,11,भाष से,कहते हो +2,11,गता असून,मरे हुए +2,11,अगता असून,जीवित +2,11,च,भी +2,11,न,कभी नहीं +2,11,अनुशोचन्ति,शोक करते हैं +2,11,पण्डिताः,बुद्धिमान लोग। +2,12,न,नहीं +2,12,तु,लेकिन +2,12,एव,निश्चय ही +2,12,अहम्,मे +2,12,जातु,किसी समय में +2,12,न,नहीं +2,12,आसम्,था +2,12,न,नहीं +2,12,त्वम्,तुम +2,12,न,नहीं +2,12,इमे,ये सब +2,12,जन,अधिपा: +2,12,न,कभी नहीं +2,12,च,भी +2,12,एव,वास्तव में +2,12,न,नहीं +2,12,भविष्यामः,रहेंगे +2,12,सर्वे वयम्,हम सब +2,12,अतः,इसके +2,12,परम्,आगे। +2,13,देहिनः,देहधारी की +2,13,अस्मिन्,इसमें +2,13,यथा,जैसे +2,13,देहै,शरीर में +2,13,कौमारम्,बाल्यावस्था +2,13,यौवनम्,यौवन +2,13,जरा,वृद्धावस्था +2,13,तथा,समान रूप से +2,13,देह,अन्तर +2,13,प्राप्तिः,प्राप्त होती है +2,13,धीर:,बुद्धिमान व्यक्ति +2,13,तत्र,इस संबंध मे +2,13,न,मुह्यति +2,14,मात्रा,स्पर्श: +2,14,तु,वास्तव में +2,14,कौन्तेय,"कुन्तीपुत्र, अर्जुन" +2,14,शीत,जाड़ा +2,14,उष्ण,ग्रीष्म +2,14,सुख,"सुख, दुःख" +2,14,दाः,देने वाले +2,14,आगम,आना +2,14,अपायिनः,जाना +2,14,अनित्या:,क्षणिक +2,14,तान्,उनको +2,14,तितिक्षस्व,सहन करना +2,14,भारत,हे भरतवंशी। +2,15,यम्,जिस +2,15,हि,निश्चित रूप से +2,15,न,कभी नहीं +2,15,व्यथयन्ति,दुखी नहीं होते +2,15,एते,ये सब +2,15,पुरुषम्,मनुष्य को +2,15,पुरुष,ऋषभ +2,15,सम,अपरिवर्तनीय +2,15,दुःख,दुख में +2,15,सुखम्,तथा सुख में +2,15,धीरम्,धीर पुरुष +2,15,सः,वह पुरुष +2,15,अमृतत्वाय,मुक्ति के लिए +2,15,कल्पते,पात्र हे +2,16,न,नहीं +2,16,असतः,अस्थायी का +2,16,विद्यते,वहां है +2,16,भावः,सत्ता है +2,16,न,कभी नहीं +2,16,अभावः,अन्त +2,16,विद्यते,वहाँ है +2,16,सतः,शाश्वत का +2,16,अभयोः,दोनों का +2,16,अपि,भी +2,16,दृष्ट:,देखा गया +2,16,अन्तः,निष्कर्ष +2,16,तु,निस्सन्देह +2,16,अनयोः,इनका +2,16,तत्त्व,सत्य के +2,16,दर्शिभिः,तत्त्वदर्शियों द्वारा। +2,17,अविनाशि,अनश्वर +2,17,तु,वास्तव में +2,17,तत्,उसे +2,17,विद्धि,जानो +2,17,येन,किसके द्वारा +2,17,सर्वम्,सम्पूर्ण +2,17,इदम्,यह +2,17,ततम्,व्याप्त +2,17,विनाशम्,नाश +2,17,अव्ययस्य,अविनाशी का +2,17,अस्य,इसके द्वारा +2,17,न कश्चित्,कोई नहीं +2,17,कर्तुम्,का कारण +2,17,अर्हति,समर्थ है। +2,18,अन्तवन्त,नष्ट होने वाला +2,18,इमे,ये +2,18,देहाः,भौतिक शरीर +2,18,नित्यस्य,शाश्वत +2,18,उक्ताः,कहा गया है +2,18,शरीरिणः,देहधारी आत्मा का +2,18,अनाशिन:,अविनाशी +2,18,अप्रमेयस्य,अपरिमेय अर्थात ��िसे मापा जा सका +2,18,तस्मात्,इसलिए +2,18,युध्यस्व,युद्ध करो +2,18,भारत,भरतवंशी अर्जुन। +2,19,यः,वह जो +2,19,एनम्,इसे +2,19,वेत्ति,जानता है +2,19,हन्तारम्,मारने वाला +2,19,यः,जो +2,19,च,और +2,19,एनम्,इसे +2,19,मन्यते,सोचता है +2,19,हतम्,मरा हुआ +2,19,उभौ,दोनों +2,19,तौ,वे +2,19,न,न तो +2,19,विजानीतः,जानते हैं +2,19,न,न ही +2,19,अयम्,यह +2,19,हन्ति,मारता है +2,19,न,नहीं +2,19,हन्यते,मारा जाता है। +2,20,न,जायते जन्म नहीं लेता +2,20,म्रियते,मरता है +2,20,वा,या +2,20,कदाचित्,किसी काल में भी +2,20,न,कभी नहीं +2,20,अयम्,यह +2,20,भूत्वा,होकर +2,20,भविता,होना +2,20,वा,अथवा +2,20,न,कहीं +2,20,भूयः,आगे होने वाला +2,20,अजः,अजन्मा +2,20,नित्यः,सनातन +2,20,शाश्वतः,स्थायी +2,20,अयम्,यह +2,20,पुराणः,सबसे प्राचीन +2,20,न,नहीं +2,20,हन्यते,अविनाशी +2,20,हन्यमाने,नष्ट होना +2,20,शरीरे,शरीर में। +2,21,वेद,जानता है +2,21,अवनाशिनम्,अविनाशी को +2,21,नित्यम्,शाश्वत +2,21,यः,वह जो +2,21,एनम्,इस +2,21,अजम्,अजन्मा +2,21,अव्यम्,अपरिवर्तनीय +2,21,कथम्,कैसे +2,21,सः,वह +2,21,पुरुषः,पुरुषः पार्थ +2,21,कम्,किसको +2,21,घातयति,मारने का कारण +2,21,हन्ति,मारता है +2,21,कम्,किसको। +2,22,वासांसि,वस्त्र +2,22,जीर्णानि,फटे पुराने +2,22,यथा,जिस प्रकार +2,22,विहाय,त्याग कर +2,22,नवानि,नये +2,22,गृहणति,धारण करता है +2,22,नरः,मनुष्य +2,22,तथा,उसी प्रकार +2,22,शरीराणि,शरीर को +2,22,विहाय,त्याग कर +2,22,जीर्णानि,व्यर्थ +2,22,अन्यानि,भिन्न +2,22,संयाति,प्रवेश करता है +2,22,नवानि,नये +2,22,देही,देहधारी आत्मा। +2,23,न,नहीं +2,23,एनम्,इस आत्मा को +2,23,छिन्दन्ति,टुकड़े +2,23,शस्त्राणि,शस्त्र द्वारा +2,23,न,नहीं +2,23,एनम्,इस आत्मा को +2,23,दहति,जला सकता है +2,23,पावक:,अग्नि +2,23,न,कभी नहीं +2,23,च,और +2,23,एनम्,इस आत्मा को +2,23,क्लेदयन्ति,भिगोया जा सकता है +2,23,आपः,जल +2,23,न,कभी नहीं +2,23,शोषयति,सुखाया जा सकता है +2,23,मारूतः,वायु। +2,24,अच्छेद्यः,खण्डित न होने वाला +2,24,अयम्,यह आत्मा +2,24,अदाह्यः,भिगोया न जा सकने वाला +2,24,अयम्,यह आत्मा +2,24,अक्लेद्यः,गीला नहीं किया जा सकता +2,24,अशोष्यः,सुखाया न जा सकने वाला +2,24,एव,वास्तव में +2,24,च,तथा +2,24,नित्यः,सनातन +2,24,सर्वगतः,सर्वव्यापी +2,24,स्थाणुः,अपरिवर्तनीय +2,24,अचलः,जड़ +2,24,अयम्,यह आत्मा +2,24,सनातनः,सदा नित्य। +2,25,अव्यक्त:,अप्रकट +2,25,अयम्,यह आत्मा +2,25,अचिन्त्यः,अकल्पनीयः अयम् +2,25,अविकार्य:,अपरिवर्तित +2,25,अयम्,यह आत्मा +2,25,उच्यते,कहलाता है +2,25,तस्मात्,इसलिए +2,25,एवम्,इस प्रकार +2,25,विदित्वा,जानकर +2,25,एनम्,इस आत्मा में +2,25,न,नहीं +2,25,अनुशोचितुम्,शोक ��रना +2,25,अर्हसि,उचित। +2,26,अथ,"यदि, फिर भी" +2,26,च,और +2,26,एनम्,आत्मा +2,26,नित्य,जातम् +2,26,नित्यम्,सदैव +2,26,वा,अथवा +2,26,मन्यसे,तुम ऐसा सोचते हो +2,26,मृतम,निर्जीव +2,26,तथा अपि,फिर भी +2,26,त्वम्,तुम +2,26,महाबाहो,बलिष्ठ भुजाओं वाला +2,26,न,नहीं +2,26,एवम्,इस प्रकार +2,26,शोचितुम्,शोक अर्हसि उचित। +2,27,जातस्य,वह जो जन्म लेता है +2,27,हि,के लिए +2,27,ध्रुवः,निश्चय ही +2,27,मृत्युः,मृत्युः ध्रुवम् निश्चित है +2,27,जन्म,जन्म +2,27,मृतस्य,मृत प्राणी का +2,27,च,भी +2,27,तस्मात्,इसलिए +2,27,अपरिहार्य,अर्थे +2,27,न,नहीं +2,27,त्वम्,तुम +2,27,शोचितुम्,शोक करना +2,27,अर्हसि,उचित। +2,28,अव्यक्त,आदीनि +2,28,भूतानि,सभी जीव +2,28,व्यक्त,प्रकट +2,28,मध्यानि,मध्य में +2,28,भारत,"भरतवंशी, अर्जुन" +2,28,अव्यक्त,अप्रकट +2,28,निधानानि,मृत्यु होने पर +2,28,एव,वास्तव में +2,28,तत्र,अतः +2,28,का,क्या +2,28,परिदेवना,शोक। +2,29,आश्चर्यवत्,आश्चर्य के रूप में +2,29,पश्यति,देखता है +2,29,कश्चित्,कोई +2,29,एनम्,इस आत्मा को +2,29,आश्चर्यवत्,आश्चर्य के समान +2,29,वदति,कहता है +2,29,तथा,जिस प्रकार +2,29,एव,वास्तव में +2,29,च,भी +2,29,अन्यः,दूसरा +2,29,आश्चर्यवत्,आश्चर्यः च +2,29,एनम्,इस आत्मा को +2,29,अन्यः,दूसरा +2,29,शृणोति,सुनता है +2,29,श्रृत्वा,सुनकर +2,29,अपि,भी +2,29,एनम्,इस आत्मा को +2,29,वेद,जानता है +2,29,न,कभी नहीं +2,29,च,तथा +2,29,एव,नि:संदेह +2,29,कश्चित्,कुछ। +2,30,देही,शरीर में निवास करने वाली जीवात्मा +2,30,नित्यम्,सदैव +2,30,अवध्यः,अविनाशी +2,30,अयम्,यह आत्मा +2,30,देहै,शरीर में +2,30,सर्वस्य,प्रत्येक +2,30,भारत,"भरतवंशी, अर्जुन" +2,30,तस्मात्,इसलिए +2,30,सर्वाणि,समस्त +2,30,भूतानि,जीवित प्राणी +2,30,न,नहीं +2,30,त्वम्,तुम +2,30,शोचितुम्,शोक करना +2,30,अर्हसि,चाहिए। +2,31,स्व,धर्मम् +2,31,अपि,भी +2,31,च,और +2,31,अवेक्ष्य,विचार कर +2,31,न,नहीं +2,31,विकम्पितुम्,त्यागना +2,31,अर्हसि,चाहिए +2,31,धात्,धर्म के लिए +2,31,हि,वास्तव में युद्धात् +2,31,श्रेयः,श्रेष्ठ +2,31,अन्यत्,अन्य +2,31,क्षत्रियस्य,क्षत्रिय का +2,31,न,नहीं +2,31,विद्यते,है। +2,32,यदृच्छया,बिना इच्छा के +2,32,च,भी +2,32,उपपन्नम्,प्राप्त होना +2,32,स्वर्ग,स्वर्गलोक का +2,32,द्वारम्,द्वार +2,32,अपावृतम्,खुल जाता है +2,32,सुखिनः,सुखी +2,32,क्षत्रियाः,योद्धा +2,32,पार्थ,"पृथापुत्र, अर्जुन" +2,32,लभन्ते,प्राप्त करते हैं +2,32,युद्धम्,युद्ध को +2,32,ईदृशम्,इस प्रकार। +2,33,अथ,चेत् यदि फिर भी +2,33,त्वम्,तुम +2,33,इमम्,इस +2,33,धर्म्यम्,संग्रामम् +2,33,न,नहीं +2,33,करिष्यसि,करोगे +2,33,ततः,तब +2,33,स्व,धर्मम् वेदों के अन��सार मनुष्य के निर्धारित कर्त्तव्य +2,33,कीर्तिम्,प्रतिष्ठा +2,33,च,भी +2,33,हित्वा,खोकर +2,33,पापम्,पाप +2,33,अवाप्स्यसि,प्राप्त करोगे। +2,34,अकीर्तिम्,अपयश +2,34,च,और +2,34,अपि,भी +2,34,भूतानि,लोगः कथयिष्यन्ति +2,34,ते,तुम्हारे +2,34,अव्ययाम्,सदा के लिए +2,34,सम्भावितस्य,सम्मानित व्यक्ति के लिए +2,34,च,भी +2,34,अकीर्तिः,अपमान +2,34,मरणात्,मृत्यु की तुलना में +2,34,अतिरिच्यते,से बढ़कर होता है। +2,35,भयात्,भय के कारण +2,35,रणात्,युद्धभूमि से +2,35,उपरतम्,भाग जाना +2,35,मस्यन्ते,सोचेंगे +2,35,त्वाम्,तुमको महारथा +2,35,येषाम,जिनकी +2,35,च,और +2,35,बहुमतः,अति सम्मानित +2,35,भूत्वा,हो कर +2,35,यास्यसि,तुम गवा दोगे +2,35,लाघवम्,तुच्छ श्रेणी के। +2,36,अवाच्य,वादान +2,36,बहून् कईः वदिष्यन्ति,कहेंगे +2,36,तब,तुम्हारे +2,36,अहिताः,शत्रु +2,36,निन्दन्तः,निन्दा +2,36,तब,तुम्हारी +2,36,सामर्थ्यम्,शक्ति को +2,36,ततः,उसकी अपेक्षा +2,36,दुःख,तरम् +2,36,नु,निसन्देह +2,36,किम्,क्या +2,37,हत:,मारे जाना +2,37,वा,या तो +2,37,प्राप्स्यसि,प्राप्त करोगे +2,37,स्वर्गम्,स्वर्गलोक को +2,37,जित्वा,विजयी होकर +2,37,वा,अथवा +2,37,भोक्ष्यसे,तुम भोगोगे +2,37,महीम्,पृथ्वी लोक का सुख +2,37,तस्मात्,इसलिए +2,37,उत्तिष्ठ,उठो +2,37,कौन्तेय,"कुन्तीपुत्र, अर्जुन" +2,37,युद्धाय,युद्ध के लिए +2,37,कृत,निश्चय +2,38,सुख,"सुख, दुःखे" +2,38,समेकृत्वा,समभाव से +2,38,लाभ,अलाभौ लाभ तथा हानि +2,38,जय,अजयौ +2,38,युद्धाय,युद्ध के लिए +2,38,युज्यस्व,तैयार हो जाओ +2,38,न,कभी नहीं +2,38,एवम्,इस प्रकार +2,38,पापम्,पाप +2,38,अवाप्स्यसि,अर्जित करेंगे। +2,39,एषा,अबतक +2,39,ते तुम्हारे लिए: अभिहिता,वर्णन कियाः सांख्ये +2,39,तु,वास्तव में +2,39,इमाम्,इसे +2,39,शृणु,सुनो +2,39,बुद्धया,बुद्धि से +2,39,युक्तः,"एकीकृत, यया जिससे" +2,39,पार्थ,"पृथापुत्र,अर्जुन" +2,39,कर्म,बन्धाम् +2,39,प्रहास्यसि,तुम मुक्त हो जाओगे। +2,40,न,नहीं +2,40,इह,इस मे +2,40,अभिक्रम,प्रयत्न +2,40,नाश:,हानि +2,40,अस्ति,है +2,40,प्रत्यवायः,प्रतिकूल परिणाम +2,40,न,कभी नहीं +2,40,विद्यते,है +2,40,सु,अल्पम् +2,40,अपि,यद्यपि +2,40,अस्य,इसका +2,40,धर्मस्य,व्यवसाय +2,40,त्रयते,रक्षा करता है +2,40,महतः,महान +2,40,भयात्,भय से। +2,41,व्यवसाय,आत्मिका +2,41,बुद्धि:,बुद्धि +2,41,एका,एकमात्र +2,41,इह,इस मार्ग पर +2,41,कुरु,नन्दन +2,41,बहु,शाखा: +2,41,हि,निश्चय ही +2,41,अनन्ताः,असीमित +2,41,च,भी +2,41,बुद्धयः,वुद्धि +2,41,अव्यवसायिनाम्,संकल्प रहित। +2,42,याम् इमाम् ये सब पुष्पिताम्,बनावटी +2,42,वाचम्,शब्द +2,42,प्रवदन्ति,कहते हैं +2,42,अविपश्च���त:,अल्पज्ञान वाले मनुष्य +2,42,वेदवादरताः,वेदों के अलंकारिक शब्दों में आसक्ति रखने वाले +2,42,पार्थ,"पृथा का पुत्र, अर्जुन" +2,42,न,अन्यत् +2,42,अस्ति,है +2,42,इति,इस प्रकार +2,42,वादिनः,अनुशंसा करना +2,42,काम,आत्मानः +2,42,स्वर्गपरा:,स्वर्गलोक की प्राप्ति का लक्ष्य रखने वाले +2,42,जन्म,कर्म +2,42,प्रदाम,प्रदान करने वाला +2,42,क्रियाविशेष,आडम्बरपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान करना +2,42,बहुलाम्,विभिन्न +2,42,भोग,इन्द्रिय तृप्ति +2,42,ऐश्वर्य,वैभव +2,42,गतिम्,उन्नति +2,42,प्रति,की ओर। +2,43,याम् इमाम् ये सब पुष्पिताम्,बनावटी +2,43,वाचम्,शब्द +2,43,प्रवदन्ति,कहते हैं +2,43,अविपश्चित:,अल्पज्ञान वाले मनुष्य +2,43,वेदवादरताः,वेदों के अलंकारिक शब्दों में आसक्ति रखने वाले +2,43,पार्थ,"पृथा का पुत्र, अर्जुन" +2,43,न,अन्यत् +2,43,अस्ति,है +2,43,इति,इस प्रकार +2,43,वादिनः,अनुशंसा करना +2,43,काम,आत्मानः +2,43,स्वर्गपरा:,स्वर्गलोक की प्राप्ति का लक्ष्य रखने वाले +2,43,जन्म,कर्म +2,43,प्रदाम,प्रदान करने वाला +2,43,क्रियाविशेष,आडम्बरपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान करना +2,43,बहुलाम्,विभिन्न +2,43,भोग,इन्द्रिय तृप्ति +2,43,ऐश्वर्य,वैभव +2,43,गतिम्,उन्नति +2,43,प्रति,की ओर। +2,44,भोग,तृप्ति +2,44,ऐश्वर्य,विलासता +2,44,प्रसक्तानाम्,द्योर आसक्त पुरुष +2,44,तया,ऐसे पदार्थों से +2,44,अपहृत,चेतसाम् +2,44,व्यवसाय,आत्मिका: +2,44,बुद्धि,बुद्धि +2,44,समाधौ,पूरा करना +2,44,न,नहीं +2,44,विधीयते,घटित होती है। +2,45,त्रै,गुण्य +2,45,विषयाः,विषयों में +2,45,वेदाः,वैदिक ग्रंथ +2,45,निस्त्रैगुण्यः,"गुणतीत, प्रकृति के तीनों गुणों से परे" +2,45,भव,होना +2,45,अर्जुन,अर्जुन +2,45,निर्द्वन्द्वः,द्वैतभाव से मुक्त +2,45,नित्य,सत्त्व +2,45,निर्योग,क्षेमः +2,45,आत्मवान्,आत्मलीन। +2,46,यावान्,जितना भी +2,46,अर्थः,प्रयोजन +2,46,उदपाने,जलकूप में +2,46,सर्वतः,सभी प्रकार से +2,46,सम्प्लुत,उदके +2,46,तावान्,उसी तरह +2,46,सर्वेषु,समस्त +2,46,वेदेषु,वेदों में +2,46,ब्राह्मणस्य,परम सत्य को जानने वाला +2,46,विजानतः,पूर्ण ज्ञानी।। +2,47,कर्मणि,निर्धारित कर्मः एव केवल +2,47,अधिकारः,अधिकार +2,47,ते,तुम्हारा +2,47,मा,नहीं +2,47,फलेषु,कर्मफल मे +2,47,कदाचन,किसी भी समय +2,47,मा,कभी नहीं +2,47,कर्म,फल +2,47,हेतुः,कारण +2,47,भू:,होना +2,47,मा,नहीं +2,47,ते,तुम्हारी +2,47,सङ्गः,आसक्ति +2,47,अस्तु,हो +2,47,अकर्मणि,अकर्मा रहने में। +2,48,योगस्थः,योग में स्थिर होकर +2,48,कुरु,करो +2,48,कर्मणि,कर्त्तव्यः सङ्गम् +2,48,त्यक्त्वा,त्याग कर +2,48,धनञ्जय,अर्जुन +2,48,सिद्धि,असिद्धयोः +2,48,समः,समभाव +2,48,भूत्वा,होकर +2,48,समत्वम्,समभाव +2,48,योग,योग +2,48,उच्यते,कहा जाता है। +2,49,दूरेण,दूर से त्यागना +2,49,हि,निश्चय ही +2,49,अवरम्,निष्कृष्ट +2,49,कर्म,कामनायुक्त कर्म +2,49,बुद्धि योगात्,दिव्य ज्ञान में स्थित बुद्धि के साथ +2,49,धनञ्जय,अर्जुन +2,49,बुद्धौ,दिव्य ज्ञान और अंतर्दृष्टि +2,49,शरणम्,शरण ग्रहण करना +2,49,अन्विच्छ,शरण ग्रहण करो +2,49,कृपणा:,कंजूस +2,49,फल,हैतवः +2,50,बुद्धि,युक्त: +2,50,जहाति,मुक्त हो सकता है +2,50,इह,इस जीवन मे +2,50,उभे,दोनों +2,50,सुकृत,दुष्कृते +2,50,तस्मात्,इसलिए +2,50,योगाय,योग के लिए +2,50,युज्यस्व,प्रयास करना +2,50,योगः,योगः कर्मसु +2,51,कर्मजम्,सकाम कर्मों से उत्पन्न +2,51,बुद्धि,युक्ताः +2,51,हि,निश्चय ही +2,51,फलम्,फल +2,51,त्यक्त्वा,त्याग कर +2,51,मनीषिणः,बड़े +2,51,पदं,अवस्था पर +2,51,गच्छन्ति,पहुँचते हैं +2,51,अनामयम्,कष्ट रहित। +2,52,यदा,जब +2,52,ते,तुम्हारा +2,52,मोह,मोह +2,52,कलिलम्,दलदल +2,52,बुद्धिः,बुद्धि +2,52,व्यतितरिष्यति,पार करना +2,52,तदा,तब +2,52,गन्तासि,तुम प्राप्त करोगे +2,52,निर्वेदम्,उदासीनता +2,52,श्रोतव्यस्य,सुनने योग्य +2,52,श्रुतस्य,सुने हुए को +2,52,च,और। +2,53,श्रुतिविप्रतिपन्ना,वेदों के साकाम कर्मकाण्डों के खडों की ओर आकर्षित न होना +2,53,ते,तुम्हारा +2,53,यदा,जब +2,53,स्थास्यति,स्थिर हो जाएगा +2,53,निश्चला,अस्थिर +2,53,समाधौ,दिव्य चेतना +2,53,अचला,स्थिर +2,53,बुद्धिः,बुद्धि +2,53,तदा,तब +2,53,योगम्,योग +2,53,अवाप्स्यसि,तुम प्राप्त करोगे। +2,54,अर्जुन उवाच,अर्जुन ने कहा +2,54,स्थित,प्रज्ञस्य +2,54,का,क्या +2,54,भाषा,बोलना +2,54,समाधिस्थस्य,दिव्य चेतना में स्थित मनुष्य का +2,54,केशव,"केशी राक्षस का दमन करने वाले, श्रीकृष्ण" +2,54,स्थितधी:,प्रबुद्ध व्यक्ति +2,54,किम्,क्या +2,54,प्रभाषेत,बोलता है +2,54,किम्,कैसे +2,54,आसीत,बैठता है +2,54,व्रजेत,चलता है +2,54,किम्,कैसे। +2,55,श्रीभगवान्,उवाच +2,55,प्रजहाति,परित्याग करता है +2,55,यदा,जब +2,55,कामान्,स्वार्थयुक्त +2,55,सर्वान्,सभी +2,55,पार्थ,"पृथापुत्र, अर्जुन" +2,55,मनः,गतान् +2,55,आत्मनि,आत्मा की +2,55,एव,केवल +2,55,आत्मना,शुद्ध मन से +2,55,तुष्टः,"सन्तुष्ट, स्थितप्रज्ञः" +2,55,तदा,"उस समय, तब" +2,55,उच्यत,कहा जाता है। +2,56,दुःखेषु,दुखों में +2,56,अनुद्वि,ग्रमना: +2,56,सुखेषु,सुख में +2,56,विगत,स्पृहः +2,56,वीत,मुक्त +2,56,राग,आसक्ति +2,56,भय,भय +2,56,क्रोधः,क्रोध से +2,56,स्थित,धी: +2,56,मुनि:,मुनि +2,56,उच्यते,कहलाता है। +2,57,यः,जो +2,57,सर्वत्र,सभी जगह +2,57,अनभिस्नेहः,अनासक्त +2,57,तत्,उस +2,57,प्राप्य,प्राप्त करके +2,57,शुभ,अच्छा +2,57,अशुभम्,बुरा +2,57,न,न तो +2,57,अभिनन्दति,हर्षित होता है +2,57,न,न ही +2,57,द्वेष्टि,द्वेष करता है +2,57,तस्य,उसका +2,57,प्रज्ञा,"ज्ञान, प्रतिष्ठिता" +2,58,यदा,जब +2,58,संहरते,संकुचित कर लेता है +2,58,च,भी +2,58,अयम्,यह +2,58,कर्म:,कछुआ +2,58,अड्गानि,अंग +2,58,इव,वैसे ही +2,58,सर्वशः,पूरी तरह +2,58,इन्द्रियाणि,इन्द्रियाँ इन्द्रिय +2,58,तस्य,उसकी +2,58,प्रज्ञा,दिव्य चेतना +2,58,प्रतिष्ठिता,स्थित। +2,59,विषयाः,इन्द्रिय विषय +2,59,विनिवर्तन्ते,रोकना +2,59,निराहारस्य,स्वयं को दूर रखने का अभ्यास +2,59,देहिनः,देहधारी जीव के लिए +2,59,रस,वर्जम +2,59,रस:,भोग विलास +2,59,अपि,यद्यपि +2,59,अस्य,उसका +2,59,परम,सर्वोत्तम +2,59,दृष्टा,अनुभव होने पर +2,59,निवर्तते,वह समाप्त हो जाता है। +2,60,यततः,आत्म नियंत्रण का अभ्यास करते हुए +2,60,हि,के लिए +2,60,अपि,तथपि +2,60,कौन्तेय,"कुन्तीपुत्र, अर्जुन पुरुषस्य" +2,60,विपश्चितः,विवेक से युक्त +2,60,इन्द्रियाणि,"इन्द्रियाँ, प्रमाथीन" +2,60,हरन्ति,वश मे करना +2,60,प्रसभम्,बलपूर्वक +2,60,मनः,मन। +2,61,तानि,उन्हें +2,61,सर्वाणि,समस्त +2,61,संयम्य,वश में करना +2,61,युक्तः,एक हो जाना +2,61,आसीत,स्थित होना चाहिए +2,61,मत्,परः +2,61,वशे,वश में +2,61,हि,निश्चय ही +2,61,यस्य,जिसकी +2,61,इन्द्रियाणि,इन्द्रियाँ +2,61,तस्य,उनकी +2,61,प्रज्ञा,पूर्ण ज्ञान प्रतिष्ठिता +2,62,ध्यायत:,चिन्तन करते हुए +2,62,विषयान्,इन्द्रिय विषय +2,62,पुंस:,मनुष्य की +2,62,सङ्गः,आसक्ति +2,62,तेषु,उनके (इन्द्रिय विषय) +2,62,उपजायते,उत्पन्न होना +2,62,सङ्गात्,आसक्ति से +2,62,सञ्जायते विकसित होती है। कामः,इच्छा +2,62,कामात्,कामना से +2,62,क्रोध:,क्रोध +2,62,अभिजायते,उत्पन्न होता है। +2,63,क्रोधात्,क्रोध से +2,63,भवति,होना +2,63,सम्मोहः,निर्णय लेने की क्षमता क्षीण होना +2,63,सम्मोहात्,निर्णय लेने की क्षमता क्षीण हो जाना +2,63,स्मृति,स्मरणशक्ति +2,63,विभ्रमः,भ्रमित +2,63,स्मृतिभ्रंशात्,स्मृति का भ्रम होने से +2,63,बुद्धिनाश:,बुद्धि का विनाश +2,63,बुद्धिनाशात्,बुद्धि के विनाश से प्रणश्यति +2,64,राग,अनुरागद्वेष +2,64,वियुक्तेः,मुक्त +2,64,तु,लेकिन +2,64,विषयान्,इन्द्रिय विषयों को +2,64,इन्द्रियैः,इन्द्रियों द्वारा +2,64,चरन्,भोग करते हुए +2,64,आत्मवश्यैः,मन को अपने वश में करने वाला +2,64,विधेय,आत्मा +2,64,प्रसादम्,भगवतकृपा को +2,64,अधिगच्छति,प्राप्त करता है। +2,65,प्रसादे,भगवान की दिव्य कृपा द्वारा +2,65,सर्व,सभी +2,65,दुःखनाम्,दुखों का +2,65,��ानि:,"क्षय, अस्य" +2,65,उपजायते,होता है। प्रसन्न +2,65,हि,वास्तव में आशु +2,65,बुद्धि,बुद्धि +2,65,परि,अवतिष्ठते +2,66,न,नहीं +2,66,अस्ति,है +2,66,बुद्धिः,बुद्धि +2,66,अयुक्तस्य,भगवान में स्थित न होना +2,66,न,नहीं +2,66,च,और +2,66,अयुक्तस्य,भगवान में स्थित न रहने वाले +2,66,भावना,चिन्तन +2,66,न,नहीं +2,66,च,और +2,66,अभावयतः,जो स्थिर नहीं है उसके +2,66,शान्तिः,शान्ति +2,66,अशान्तस्य,अशान्त +2,66,कृतः,कहाँ है +2,66,सुखम्,सुख। +2,67,इन्द्रियाणाम् इन्द्रियों के हि,वास्तव में +2,67,चरताम्,चिन्तन करते हुए +2,67,यत्,जिसके +2,67,मन:,मन +2,67,अनुविधीयते,निरन्तर रत रहता है। तत् +2,67,अस्य,इसकी +2,67,हरति,वश मे करना +2,67,प्रज्ञाम्,बुद्धि के +2,67,वायुः,वायु +2,67,नावम्,नाव को +2,67,इव,जैसे +2,67,अम्भसि,जल पर। +2,68,तस्मात्,इसलिए +2,68,यस्य,जिसकी +2,68,महाबाहो,महाबलशाली +2,68,निगृहीतानि,विरक्त +2,68,सर्वशः,सब प्रकार से +2,68,इन्द्रियाणि,इन्द्रियाँ इन्द्रिय +2,68,तस्य,उस व्यक्ति की +2,68,प्रज्ञा,दिव्य ज्ञान +2,68,प्रतिष्ठिता,स्थिर रहना। +2,69,या,जिसे +2,69,निशा,रात्रि +2,69,सर्व,सब +2,69,भूतानाम्,सभी जीवः तस्याम् +2,69,जागर्ति,जागता रहता है +2,69,संयमी,आत्मसंयमी +2,69,यस्याम्,जिसमें +2,69,जाग्रति,जागते हैं +2,69,भूतानि,सभी जीव +2,69,सा,वह +2,69,निशा,रात्रि +2,69,पश्यतः,देखना +2,69,मुनेः,मुनि। +2,70,आपूर्यमाणम्,सभी ओर से जलमग्न +2,70,अचल,प्रतिष्ठम् +2,70,समुद्रम्,समुद्र में +2,70,आपः,जलः प्रविशन्ति +2,70,यद्वत्,जिस प्रकार +2,70,तद्वत्,उसी प्रकार +2,70,काम,कामनाएँ यम् +2,70,प्रविशन्ति,प्रवेश करती हैं +2,70,सर्वे,सभी +2,70,सः,वह व्यक्ति +2,70,शन्तिम्,शान्ति +2,70,आप्नोति,प्राप्त करता है +2,70,न,नहीं +2,70,कामकामी,कामनाओं को तुष्ट करने वाला। +2,71,विहाय,त्याग कर +2,71,कामान्,भौतिक इच्छाएँ +2,71,यः,जो +2,71,सर्वान्,समस्त +2,71,पुमान्,पुरुष +2,71,चरति,रहता है +2,71,निःस्पृहः,कामना रहित +2,71,निर्ममाः,स्वामित्व की भावना से रहित +2,71,निरहंकारः,अहंकार रहित +2,71,सः,वह +2,71,शान्तिम्,पूर्ण शान्ति को +2,71,अधिगच्छति,प्राप्त करता है। +2,72,एषा,ऐसे +2,72,ब्राह्मी,स्थितिः +2,72,न,कभी नहीं +2,72,एनाम्,इसको +2,72,प्राप्य,प्राप्त करके +2,72,विमुह्यति,मोहित होता है +2,72,स्थित्वा,स्थित होकर +2,72,अस्याम्,इसमें +2,72,अन्तकाले,मृत्यु के समय +2,72,अपि,भी +2,72,ब्रह्म,निवाणम् +2,72,ऋच्छति,प्राप्त करता है। +3,1,अर्जुनः उवाच,अर्जुन ने कहा +3,1,ज्यायसी,श्रेष्ठ +3,1,चेत्,यदि +3,1,कर्मण,कर्मफल से +3,1,ते,आप द्वारा +3,1,मता,मानना +3,1,बुद्धि,बुद्धि +3,1,जनार्दन,"जीवों का पालन करने वाले, श्रीकृष्ण" +3,1,तत्,तब +3,1,किम,क्यों +3,1,कर्मणि,कर्मः घोर +3,1,मम्,मुझे +3,1,नियोजयसि,लगाते हो +3,1,केशव,"केशी नामक राक्षस का वध करने वाले, श्रीकृष्ण। व्यामिश्रेण" +3,1,इव,मानो +3,1,वाक्येन,वचनों से +3,1,बुद्धिम्,बुद्धि +3,1,मोहयसि,मैं मोहित हो रहा हूँ +3,1,इव,मानो +3,1,मे,मेरी +3,1,तत्,उस +3,1,एकम्,एकमात्र +3,1,वद,अवगत कराए +3,1,निश्चित्य,निश्चित रूप से +3,1,येन,जिससे +3,1,श्रेयः,"अति श्रेष्ठ, अहम्" +3,1,आप्नुयाम्,प्राप्त कर सकू। +3,2,अर्जुनः उवाच,अर्जुन ने कहा +3,2,ज्यायसी,श्रेष्ठ +3,2,चेत्,यदि +3,2,कर्मण,कर्मफल से +3,2,ते,आप द्वारा +3,2,मता,मानना +3,2,बुद्धि,बुद्धि +3,2,जनार्दन,"जीवों का पालन करने वाले, श्रीकृष्ण" +3,2,तत्,तब +3,2,किम,क्यों +3,2,कर्मणि,कर्मः घोर +3,2,मम्,मुझे +3,2,नियोजयसि,लगाते हो +3,2,केशव,"केशी नामक राक्षस का वध करने वाले, श्रीकृष्ण। व्यामिश्रेण" +3,2,इव,मानो +3,2,वाक्येन,वचनों से +3,2,बुद्धिम्,बुद्धि +3,2,मोहयसि,मैं मोहित हो रहा हूँ +3,2,इव,मानो +3,2,मे,मेरी +3,2,तत्,उस +3,2,एकम्,एकमात्र +3,2,वद,अवगत कराए +3,2,निश्चित्य,निश्चित रूप से +3,2,येन,जिससे +3,2,श्रेयः,"अति श्रेष्ठ, अहम्" +3,2,आप्नुयाम्,प्राप्त कर सकू। +3,3,श्रीभगवान् उवाच,परम कृपालु भगवान ने कहा +3,3,लोके,संसार में +3,3,अस्मिन्,इस +3,3,द्वि,विधा +3,3,निष्ठा,श्रद्धा +3,3,पुरा,पहले +3,3,प्रोक्ता,वर्णित +3,3,मया,"मेरे द्वारा, श्रीकृष्ण" +3,3,अनघ,निष्पाप +3,3,ज्ञानयोगेन,ज्ञानयोग के मार्ग द्वारा +3,3,सांख्यानाम्,वे जो चिन्तन में रुचि रखते हैं +3,3,कर्मयोगेन,कर्म योग के द्वारा +3,3,योगिनाम्,योगियों का। +3,4,न,नहीं +3,4,कर्मणाम्,कर्मों के +3,4,अनारम्भात्,विमुख रहकर +3,4,नैष्कर्म्यम्,कर्म +3,4,पुरुषः,मनुष्य +3,4,अष्नुते,प्राप्त करता है +3,4,न,नहीं +3,4,च,और +3,4,संन्यसनात्,त्याग से +3,4,एव,केवल +3,4,सिद्धिम्,सफलता +3,4,समधि,गच्छति +3,5,न,नहीं +3,5,हि,निश्चय ही +3,5,कश्चित्,कोई +3,5,क्षणम्,क्षण के लिए +3,5,अपि,भी +3,5,जातु,सदैव +3,5,तिष्ठति,रह सकता है +3,5,अकर्म,कृत बिना कर्म +3,5,कार्यते,कर्म करने के लिए +3,5,हि,निश्चय ही +3,5,अवशः,बाध्य होकर +3,5,कर्म,कर्म +3,5,सर्वः,समस्त +3,5,प्रकृति,जैः +3,5,गुणैः,गुणों के द्वारा। +3,6,कर्म,इन्द्रियाणि कर्मेन्द्रियों के घटक +3,6,संयम्य,नियंत्रित करके +3,6,यः,जो +3,6,आस्ते,रहता है +3,6,मनसा,मन में +3,6,स्मरन्,चिन्तन +3,6,इन्द्रिय,अर्थात +3,6,विमूढ,आत्मा +3,6,मिथ्या,आचार: +3,6,सः,वे +3,6,उच्यते,कहलाते हैं। +3,7,यः,जो +3,7,तु,लेकिन +3,7,इन्द्रिया���ि,इन्द्रियाँ +3,7,मनसा,मन से +3,7,नियम्य,नियत्रित करना +3,7,आरम्भते,प्रारम्भ करता है +3,7,अर्जुन,अर्जुन +3,7,कर्म,इन्द्रियैः +3,7,कर्म,कर्मयोग +3,7,असक्तः,आसक्ति रहित +3,7,सः,विशिष्यते +3,8,नियतम्,निर्धारित +3,8,कुरु,निष्पादन +3,8,कर्म,वैदिक कर्तव्यः त्वम् +3,8,कर्म,कर्म करना +3,8,ज्यायः,श्रेष्ठ +3,8,हि,निश्चय ही +3,8,अकर्मणः,निष्क्रिय रहने की अपेक्षा +3,8,शरीर,शरीर का +3,8,यात्रा,"पालन पोषण, अपि" +3,8,च,भी +3,8,ते,तुम्हारा +3,8,प्रसिद्धयेत्,संभव न होना +3,8,अकर्मण:,निष्क्रिय। +3,9,यज्ञ,अर्थात +3,9,कर्मणः,कर्म की अपेक्षा +3,9,अन्यत्र,अन्यथा +3,9,लोक:,भौतिक संसार +3,9,अयम्,यह +3,9,कर्मबन्धनः,किसी के कर्मों के बन्धन +3,9,तत्,वह +3,9,अर्थम्,के लिए +3,9,कर्म,कर्म +3,9,कौन्तेय,"कुन्तिपुत्र, अर्जुन" +3,9,मुक्तसङ्गगः,आसक्ति रहित +3,9,समाचर,ध्यान से कार्य करना। +3,10,सह,के साथ +3,10,यज्ञाः,यज्ञों +3,10,प्रजाः,मानव जाति +3,10,सृष्ट्वा,सृजन करना +3,10,पुरा,आरम्भ में +3,10,उवाच,कहा +3,10,प्रजापतिः,ब्रह्मा +3,10,अनेन,इससे +3,10,प्रसविष्यध्वम्,अधिक समृद्ध होना +3,10,एषः,इन +3,10,वः,तुम्हारा +3,10,अस्तु,होगा +3,10,इष्ट,काम +3,11,देवान्,स्वर्ग के देवताओं को +3,11,भावयता,प्रसन्न होंगे +3,11,अनेन,इन यज्ञों से +3,11,ते,वे +3,11,देवाः,स्वर्ग के देवता +3,11,भावयन्तु,प्रसन्न होंगे +3,11,वः,तुमको +3,11,परस्परम,एक दूसरे को +3,11,भावयन्तः,एक दूसरे को प्रसन्न करते हुए +3,11,श्रेयः,समृद्ध +3,11,परम,सर्वोच्च +3,11,अवाप्स्यथ,प्राप्त करोगे। +3,12,इष्टान्,वांछित +3,12,भोगान्,जीवन की आवश्यकताएँ +3,12,हि,निश्चय ही +3,12,व:,तुम्हें +3,12,देवा:,स्वर्ग के देवता +3,12,दास्यन्ते,प्रदान करेंगे +3,12,यज्ञभाविता:,यज्ञ कर्म से प्रसन्न होकर +3,12,तैः,उनके द्वारा +3,12,दत्तान्,प्रदान की गई वस्तुएँ +3,12,अप्रदाय,अर्पित किए बिना +3,12,एभ्यः,इन्हें +3,12,यः,जो +3,12,भुङ्क्ते,सेवन करता है +3,12,स्तेनः,चोर +3,12,एव,निश्चय ही +3,12,सः,वे। +3,13,यज्ञशिष्ट,यज्ञ में अर्पित भोजन के अवशेष +3,13,अशिनः,सेवन करने वाले +3,13,सन्तः,संत लोग +3,13,मुच्यन्ते,मुक्ति पाते हैं +3,13,सर्व,सभी प्रकार के +3,13,किल्बिशैः,पापों से +3,13,भुञ्जते,भोगते हैं +3,13,ते,वे +3,13,तु,लेकिन +3,13,अघम्,घोर पाप +3,13,पापा:,पापीजन +3,13,ये,जो +3,13,पचन्ति,भोजन बनाते हैं +3,13,आत्मकारणात्,अपने सुख के लिए। +3,14,अन्नात्,अन्न पदार्थ +3,14,भवन्ति,निर्भर होता है +3,14,भूतानि,जीवों को पर्जन्यात् +3,14,अन्न खाद्यान्न सम्भवः,उत्पादन +3,14,यज्ञात्,यज्ञ सम्पन्न करने से +3,14,भवति,सम��भव होती है। पर्जन्य: +3,14,यज्ञः,यज्ञ का सम्पन्न होना +3,14,कर्म,निश्चित कर्त्तव्य से +3,14,समुद्भवः,उत्पन्न होता है। +3,15,कर्म,कर्त्तव्यः ब्रह्म +3,15,उद्भवम्,प्रकट +3,15,विद्धि,तुम्हें जानना चाहिए +3,15,ब्रह्म,वेद +3,15,अक्षर,अविनाशी परब्रह्म से +3,15,समुद्भवम्,साक्षात प्रकट हुआ +3,15,तस्मात्,अतः +3,15,सर्व,गतम् सर्वव्यापी +3,15,ब्रह्म,भगवान +3,15,नित्यम्,शाश्वत +3,15,यज्ञ,यज्ञ में प्रतिष्ठितम् +3,16,एवम्,इस प्रकार +3,16,प्रवर्तितम्,कार्यशील होना +3,16,चक्रम,चक्र +3,16,न,नहीं +3,16,अनुवर्तयति,पालन करना +3,16,इह,इस जीवन में +3,16,यः,जो +3,16,अघ,आयुः +3,16,इन्द्रिय,आरामः +3,16,मोघम्,व्यर्थः पार्थ +3,16,जीवति,जीवित रहता है। +3,17,यः,जो +3,17,तु,लेकिन +3,17,आत्म,रतिः +3,17,एव,निश्चय ही +3,17,स्यात्,रहता है +3,17,आत्म,तृप्तः +3,17,च,तथा +3,17,मानव:,मनुष्य +3,17,आत्मनि,अपनी आत्मा में +3,17,एव,निश्चय ही +3,17,च,और +3,17,सन्तुष्ट:,सन्तुष्ट +3,17,तस्य,उसका +3,17,कार्यम्,कर्त्तव्य +3,17,न,नहीं +3,17,विद्यते,रहता। +3,18,न,कभी नहीं +3,18,एव,वास्तव में +3,18,तस्य,उसका +3,18,कृतेन,कर्त्तव्य का पालन +3,18,अर्थ:,प्राप्त करना +3,18,न,न तो +3,18,अकृतेन,कर्त्तव्य का पालन न करने से +3,18,इह,यहाँ +3,18,कश्चन,जो कुछ भी +3,18,न,कभी नहीं +3,18,च,तथा +3,18,अस्य,उसका +3,18,सर्वभूतेषु,सभी जीवों में +3,18,कश्चित्,कोई +3,18,अर्थ,आवश्यकता +3,18,व्यपाश्रयः,निर्भर होना। +3,19,तस्मात्,अतः +3,19,असक्तः,आसक्ति रहित +3,19,सततम्,निरन्तर +3,19,कार्यम्,कर्त्तव्यं +3,19,कर्म,कार्य +3,19,समाचर,निष्पादन करना +3,19,असक्तो:,आसक्तिरहित +3,19,हि,निश्चय ही +3,19,आचरन्,निष्पादन करते हुए +3,19,कर्म,कार्य +3,19,परम,सर्वोच्च भगवान +3,19,आप्नोति,प्राप्त करता है +3,19,पुरुषः,"पुरुष, मनुष्य।" +3,20,कर्मणा,निर्धारित कर्त्तव्यों का पालन करना +3,20,एव,केवल +3,20,हि,निश्चय ही +3,20,संसिद्धिम्,पूर्णता +3,20,आस्थिताः,प्राप्त करना +3,20,जनक,आदयः +3,20,लोक,संङ्ग्रहम् सामान्य लोगों के कल्याण के लिए +3,20,एव अपि,केवल +3,20,सम्पश्यत्,विचार करते हुए +3,20,कर्तुम्,निष्पादन करना +3,20,अर्हसि,तुम्हें चाहिए। यत् +3,20,आचरित,करता है +3,20,श्रेष्ठ:,उत्तम +3,20,तत्,वही +3,20,तत्,केवल वही +3,20,एव,निश्चय ही +3,20,इतरः,सामान्य +3,20,जनः,व्यक्ति +3,20,सः,वह +3,20,यत्,जो कुछ +3,20,प्रमाणम्,आदर्श +3,20,कुरुते,करता है +3,20,लोकः,संसार +3,20,तत्,उसके +3,20,अनुवर्तते,अनुसरण करता है। +3,21,कर्मणा,निर्धारित कर्त्तव्यों का पालन करना +3,21,एव,केवल +3,21,हि,निश्चय ही +3,21,संसिद्धिम्,पूर्णता +3,21,आस्थिताः,प्राप्�� करना +3,21,जनक,आदयः +3,21,लोक,संङ्ग्रहम् सामान्य लोगों के कल्याण के लिए +3,21,एव अपि,केवल +3,21,सम्पश्यत्,विचार करते हुए +3,21,कर्तुम्,निष्पादन करना +3,21,अर्हसि,तुम्हें चाहिए। यत् +3,21,आचरित,करता है +3,21,श्रेष्ठ:,उत्तम +3,21,तत्,वही +3,21,तत्,केवल वही +3,21,एव,निश्चय ही +3,21,इतरः,सामान्य +3,21,जनः,व्यक्ति +3,21,सः,वह +3,21,यत्,जो कुछ +3,21,प्रमाणम्,आदर्श +3,21,कुरुते,करता है +3,21,लोकः,संसार +3,21,तत्,उसके +3,21,अनुवर्तते,अनुसरण करता है। +3,22,न,नहीं +3,22,मे,मुझे पार्थ +3,22,अस्ति,है +3,22,कर्तव्यम्,निर्धारित कर्त्तव्य +3,22,त्रिषु,तीनों में +3,22,लोकेषु,लोकों में +3,22,किञ्चन,कोई +3,22,न,कुछ नहीं +3,22,अनवाप्तम्,अप्राप्त +3,22,अवाप्तव्यम्,प्राप्त करने के लिए +3,22,वर्त,संलग्न रहते हैं +3,22,एव,निश्चय ही +3,22,च,भी +3,22,कर्मणि,नियत कर्त्तव्य। +3,23,यदि,यदि +3,23,हि,निश्चय ही +3,23,अहम्,मैं +3,23,न,नहीं +3,23,वर्तेयम्,इस प्रकार संलग्न रहता हूँ +3,23,जातु,सदैव +3,23,कर्मणि,नियत कर्मों के निष्पादन में +3,23,अतन्द्रितः,सावधानी से +3,23,मम,मेरा +3,23,वर्त्म,मार्ग का +3,23,अनुवर्तन्ते,अनुसरण करेंगे +3,23,मनुष्या:,सभी मनुष्य +3,23,पार्थ,"पृथापुत्र, अर्जुन" +3,23,सर्वश:,सभी प्रकार से। +3,24,उत्सीदेयुः,नष्ट हो जाएंगें +3,24,इमे,ये सब +3,24,लोका:,लोक +3,24,न,नहीं +3,24,कुर्याम्,मैं करूँगा +3,24,कर्म,नियत कर्त्तव्यः चेत् यदि +3,24,अहम्,मैं +3,24,संकरस्य,असभ्य जन समुदाय +3,24,च,तथा +3,24,कर्ता,उत्तरदायी +3,24,स्याम्,होऊँगा +3,24,उपहन्याम्,विनाश करने वाला +3,24,इमाः,इन सब +3,24,प्रजाः,मानव जाति का। +3,25,सक्ताः,आसक्त +3,25,कर्मणि,नियत कर्तव्य +3,25,अविद्वांसः,अज्ञानी +3,25,यथा,जिस प्रकार से +3,25,कुर्वन्ति,करते है +3,25,भारत,"भरतवंशी, अर्जुन कुर्यात्" +3,25,तथा,उसी प्रकार से +3,25,असक्तः,अनासक्त +3,25,चिकीर्षुः,इच्छुक +3,25,लोकसंग्रहम्,लोक कल्याण के लिए। +3,26,न,नहीं +3,26,बुद्धिभेदम्,बुद्धि में मतभेद +3,26,जनयेत्,उत्पन्न होना चाहिए +3,26,अज्ञानाम्,अज्ञानियों का +3,26,कर्म,संङ्गिनाम् +3,26,जोषयेत्,प्रेरित करना चाहिए +3,26,सर्व,सारे +3,26,कर्माणि,कर्म +3,26,विद्वान्,ज्ञानवान व्यक्ति +3,26,युक्तः,"प्रबुद्ध, समाचरन्" +3,27,प्रकृतेः,प्राकृत शक्ति का +3,27,क्रियमाणानि,क्रियान्वित करना +3,27,गुणैः,तीन गुणों द्वारा +3,27,कर्माणि,कर्म +3,27,सर्वशः,सभी प्रकार के +3,27,अहङ्कार,विमूढ +3,27,कर्ता,करने वाला +3,27,अहम्,मैं +3,27,इति,इस प्रकार +3,27,मन्यते,सोचता है। +3,28,तत्ववित्,सत्य को जानने वाला +3,28,तु,लेकिन +3,28,महाबाहो,विशाल भुजाओं वाला +3,28,गुण,कर्म +3,28,विभागयोः,भेद +3,28,गुणा:,मन और इन्द्रियों आदि के रूप में प्रकृति के तीन गुण +3,28,गुणेषु,इन्द्रिय विषयों के बोध के रूप में प्रकृति के गुण +3,28,वर्तन्ते,लगे रहते हैं +3,28,इति,इस प्रकार +3,28,मत्वा,जानकर +3,28,न,कभी नहीं +3,28,सज्जते,आसक्त होते हैं। +3,29,प्रकृतेः,भौतिक शक्ति +3,29,गुण,प्रकृति के गुण +3,29,सम्मूढाः,भ्रमित +3,29,सज्जन्ते,आसक्त हो जाते हैं +3,29,गुण,कर्मसु +3,29,तान्,उन +3,29,अकृत्स्नविद्:,"अज्ञानी पुरुष, मन्दान्" +3,29,कृत्स्न,वित् +3,29,न,नहीं +3,29,विचालयेत्,विचलित करना चाहिए। +3,30,मयि,मुझमें +3,30,सर्वाणि,सब प्रकार के कर्माणि +3,30,सन्यस्य,पूर्ण त्याग करके +3,30,अध्यात्मचेतसा,भगवान में स्थित होने की भावना +3,30,निराशी:,"कर्म फल की लालसा से रहित, निर्ममः" +3,30,युध्यस्व,लड़ो +3,30,विगत,ज्वरः +3,31,ये,जो +3,31,मे,मेरे +3,31,मतम्,उपदेशों को +3,31,इदम्,इन +3,31,नित्यम्,निरन्तर +3,31,अनुतिष्ठन्ति,अनुपालन करना +3,31,मानवाः,मुनष्यों को श्रद्धावन्तः +3,31,अनसूयन्तः,दोष दृष्टि से मुक्त होकर +3,31,मुच्यन्ते,मुक्त हो जाते हैं +3,31,ते,वे +3,31,अपि,भी +3,31,कर्मभिः,कर्म के बन्धनों से। +3,32,ये,जो +3,32,तु,लेकिन +3,32,एतत्,इस +3,32,अभ्यसूयन्तः,दोषारोपण +3,32,न,नहीं +3,32,अनुतिष्ठन्ति,अनुसरण करते हैं +3,32,मे,मेरा +3,32,मतम्,उपदेश +3,32,सर्वज्ञान,सभी प्रकार का ज्ञान +3,32,विमूढान्,भ्रमित +3,32,तान्,उन्हें +3,32,विद्धि,जानो +3,32,नष्टान्,नाश होता है +3,32,अचेतसः,विवेकहीन। +3,33,सदृशम्,तदानुसार +3,33,चेष्टते,कर्म करता है +3,33,स्वस्याः,अपने +3,33,प्रकृतेः,प्रकृति के गुणों का +3,33,ज्ञानवान्,बुद्धिमान +3,33,अपि,यद्यपि +3,33,प्रकृतिम्,प्रकृति को +3,33,यान्ति,पालन करते हैं +3,33,भूतानि,सभी जीव +3,33,निग्रहः,दमन +3,33,किम्,क्या +3,33,करिष्यति,करेगा। +3,34,इन्द्रियस्य,इन्द्रिय का +3,34,इन्द्रियस्य,अर्थ इन्द्रियों के विषयों में +3,34,राग,आसक्ति +3,34,द्वेषौ,विमुखता +3,34,व्यस्थितौ,स्थित +3,34,तयोः,उनके +3,34,न,कभी नहीं +3,34,वशम्,नियंत्रित करना +3,34,आगच्छेत्,आना चाहिए +3,34,तौ,उन्हें +3,34,हि,निश्चय ही +3,34,अस्य,उसके लिए +3,34,परिपन्थिनौ,शत्रु। +3,35,श्रेयान्,अति श्रेष्ठ स्वधर्म: +3,35,विगुणः,दोषयुक्त +3,35,पर,धर्मात् +3,35,स्व,अनुण्ठितात् +3,35,स्वधर्मे,अपने निश्चित कर्त्तव्यों से +3,35,निधनम्,मृत्युः श्रेयः +3,35,परधर्म:,अन्यों के लिए नियत कर्त्तव्य +3,35,भयआवहः,भयावह। +3,36,अर्जुनः उवाच,अर्जुन ने कहा +3,36,अथ,तव +3,36,केन,किस के द्वारा +3,36,प्रयुक्तः,प्रेर���त +3,36,अयम्,कोई +3,36,पापम्,पाप +3,36,चरति,करता है। पुरुषः +3,36,अनिच्छन्,बिना इच्छा के +3,36,अपि यद्यपि वार्ष्णेय,"वृष्णि वंश से संबंध रखने वाले, श्रीकृष्ण" +3,36,बलात्,बलपूर्वक +3,36,इव,मानो +3,36,नियोजितः,संलग्न होना। +3,37,श्री,भगवान् उवाच +3,37,कामः,काम +3,37,एषः,यह +3,37,क्रोधः,क्रोध +3,37,एषः,यह +3,37,रजो,गुण +3,37,समुद्भवः,उत्पन्न +3,37,महा,अशनः +3,37,महापाप्मा,महान पापी +3,37,विद्धि,समझो +3,37,एनम्,इसे +3,37,इह,भौतिक संसार में +3,37,वैरिणम्,सर्वभक्षी शत्रु। +3,38,धूमेन,धुंए से +3,38,आवियते,आच्छादित हो जाती है +3,38,वहिन:,अग्नि +3,38,यथा,जिस प्रकार +3,38,आदर्श:,दर्पण +3,38,मलेन,धूल से +3,38,च,भी +3,38,यथा,जिस प्रकार +3,38,उल्न,गर्भाशय द्वारा +3,38,आवृतः,ढका रहता है। गर्भ: +3,38,तेन,काम से +3,38,इदम्,यह +3,38,आवृतम्,आवरण है। +3,39,आवृतम्,आच्छादित होना +3,39,ज्ञानम्,ज्ञान +3,39,एतेन,इससे +3,39,ज्ञानिन,ज्ञानी पुरुष +3,39,नित्यवैरिणा,कट्टर शत्रु द्वारा +3,39,कामरूपेण,कामना के रूप में +3,39,कौन्तेय,"कुन्तीपुत्र, अर्जुन" +3,39,दुष्पूरेण,तुष्ट न होने वाली +3,39,अनलेन,अग्नि के समान +3,39,च,भी। +3,40,इन्द्रियाणि,इन्द्रियाँ +3,40,मन:,"मन, बुद्धिः" +3,40,अधिष्ठानम्,निवासस्थान +3,40,उच्यते,कहा जाता है +3,40,एतैः,इनके द्वारा +3,40,विमोहयति,मोहित करती है +3,40,एषः,यह काम +3,40,ज्ञानम्,ज्ञान को +3,40,आवृत्य,ढक कर +3,40,देहिनम्,देहधारी को। +3,41,तस्मात्,इसलिए +3,41,त्वम्,तुम +3,41,इन्द्रियाणि,इन्द्रियों को +3,41,आदौ,प्रारम्भ से +3,41,नियम्य,नियंत्रित करके +3,41,भरत,ऋषभ +3,41,पाप्मानम्,पाप +3,41,प्रजहि,वश में करो +3,41,हि,निश्चय ही +3,41,एनम्,इस +3,41,ज्ञान,ज्ञान +3,41,विज्ञान,वास्तविक बोध +3,41,नाशनम्,विनाशक। +3,42,इन्द्रियाणि,इन्द्रियाँ +3,42,पराणि,बलवान +3,42,आहु:,कहा जाता है +3,42,इन्द्रियेभ्यः,इन्द्रियों से श्रेष्ठ +3,42,मनः,मन +3,42,मनस:,मन की अपेक्षा +3,42,तु,लेकिन +3,42,परा,श्रेष्ठ +3,42,बुद्धिः,बुद्धि +3,42,यः,जो +3,42,बुद्धेः,बुद्धि की अपेक्षा +3,42,परत:,अधिक श्रेष्ठ +3,42,तु,किन्तुः सः +3,43,एवम्,इस प्रकार से +3,43,बुद्धेः,बुद्धि से +3,43,परम,श्रेष्ठ +3,43,बुद्ध्वा,जानकर +3,43,संस्तभ्य,वश में करके +3,43,आत्मानम्,"निम्न आत्मा (इन्द्रिय, मन और बुद्धि)" +3,43,आत्मना,बुद्धि द्वारा +3,43,जहि,वध करना +3,43,शत्रुम्,शत्रु का +3,43,महाबाहो,महाबलशाली +3,43,कामरूपम्,कामना रूपी +3,43,दुरासदम्,दुर्जेय। +4,1,श्रीभगवान् उवाच,परम भगवान श्रीकृष्ण ने कहा +4,1,इमम्,इस +4,1,विवस्वते,सूर्यदेव को +4,1,योगम्,योग शास्त्र में प्रोक्तवान् +4,1,अह��्,मैंने +4,1,अव्ययम्,शाश्वत +4,1,विवस्वान्,सूर्यदेव का नाम: मनवे +4,1,प्राह,दिया +4,1,मनुः,मनु +4,1,इक्ष्वाक,सूर्यवंश के प्रथम राजा इक्ष्वाकु +4,1,अब्रवीत्,उपदेश दिया। +4,2,एवम्,इस प्रकार +4,2,परम्परा,सतत परम्परागत +4,2,प्राप्तम्,प्राप्त +4,2,इमम,इस विज्ञान को +4,2,राज,ऋषयः +4,2,विदुः,जाना +4,2,सः,वह +4,2,कालेन,अनंत युगों के साथ +4,2,इह,इस संसार में +4,2,महता,महान +4,2,योग:,योग शास्त्र +4,2,नष्ट:,विलुप्त होना +4,2,परन्तप,"शत्रुओं का दमनकर्ता, अर्जुन।" +4,3,स:,वही +4,3,एव,निःसंदेह +4,3,अयम्,यह +4,3,मया,मेरे द्वारा +4,3,ते,तुम्हारे +4,3,अद्य,आज +4,3,योग:,योग शास्त्रः प्रोक्तः +4,3,पुरातन:,आदिकालीन +4,3,भक्तः,भक्त +4,3,असि,हो +4,3,मे,मेरे +4,3,सखा,मित्र +4,3,च,भी +4,3,इति,इसलिए +4,3,रहस्यम्,रहस्य +4,3,हि,नि:संदेह +4,3,एतत्,यह +4,3,उत्तमम्,उत्तम +4,4,अर्जुन उवाच,अर्जुन ने कहा +4,4,अपरम्,बाद में +4,4,भवतः,आपका +4,4,जन्म,जन्म +4,4,परम्,पहले +4,4,जन्म,जन्म +4,4,विवस्वतः,सूर्यदेव का +4,4,कथम्,कैसे +4,4,एतत्,यह +4,4,विजानीयाम्,मैं मानू +4,4,त्वम्,तुमने +4,4,आदौ,प्रारम्भ में +4,4,प्रोक्तवान्,उपदेश दिया +4,4,इति,इस प्रकार। +4,5,श्री,भगवान् उवाच +4,5,बहूनि,अनेक +4,5,मे,मेरे +4,5,व्यतीतानि,व्यतीत हो चुके +4,5,जन्मानि,जन्म +4,5,तव,तुम्हारे +4,5,च,और +4,5,अर्जुन,अर्जुन +4,5,तानि,उन +4,5,अहम्,मैं जानता हूँ +4,5,सर्वाणि,सभी जन्मों को +4,5,न,नहीं +4,5,त्वम्,तुम +4,5,वेत्थ,जानते हो +4,5,परन्तप,"शत्रुओं का दमन करने वाला, अर्जुन।" +4,6,अजः,अजन्मा +4,6,अपि,तथापिः सन् +4,6,अव्यय,आत्मा +4,6,भूतानाम्,सभी जीवों का +4,6,ईश्वरः,भगवान +4,6,अपि,यद्यपि +4,6,सन्,होने पर +4,6,प्रकृतिम्,दिव्य प्रकृति +4,6,स्वाम्,अपने +4,6,अधिष्ठाय,स्थित +4,6,सम्भवामि,मैं अवतार लेता हूँ +4,6,आत्म,मायया +4,7,यदा,यदा +4,7,हि,निश्चय ही +4,7,धर्मस्य,धर्म की +4,7,ग्लानिः,पतन +4,7,भवति,होती है +4,7,भारत,"भरतवंशी, अर्जुन" +4,7,अभ्युत्थानम्,वृद्धि +4,7,अधर्मस्य,अधर्म की +4,7,तदा,उस समय +4,7,आत्मानम्,स्वयं को +4,7,सृजामि,अवतार लेकर प्रकट होता हूँ +4,7,अहम्,मैं। +4,8,परित्रणाय,रक्षा के लिए +4,8,साधूनाम्,भक्तों का +4,8,विनाशाय,संहार के लिए +4,8,च,और +4,8,दुष्कृताम्,दुष्टों के +4,8,धर्म,शाश्वत धर्म +4,8,संस्थापन,अर्थाय +4,8,सम्भवामि,प्रकट होता हूँ +4,8,युगे,युग +4,8,युगे,प्रत्येक युग में। +4,9,जन्म,जन्म +4,9,कर्म,कर्म +4,9,च,और +4,9,मे,मेरे +4,9,दिव्यम्,दिव्य +4,9,एवम्,इस प्रकार +4,9,यः,जो कोई +4,9,वेत्ति,जानता है +4,9,तत्त्वतः,वास्तव में +4,9,त्यक्त्वा,त्याग कर +4,9,देहम्,शरी��� में +4,9,पुनः,फिर +4,9,जन्म,जन्म +4,9,न,कभी नहीं +4,9,जन्त,जन्म +4,9,एति,प्राप्त करता है। माम् +4,9,एति,प्राप्त करता है +4,9,सः,वह +4,9,अर्जुन,अर्जुन। +4,10,वीत,से मुक्त +4,10,राग,आसक्ति +4,10,भय,भय +4,10,क्रोधा:,क्रोध +4,10,मत्,मया +4,10,माम्,मुझमें +4,10,उपाश्रिताः,पूर्णतया आश्रित +4,10,बहवः,अनेक +4,10,ज्ञान,ज्ञान +4,10,तपसा,ज्ञान में तपकर +4,10,पूताः,शुद्ध होना +4,10,मत्,भवम् मेरा दिव्य प्रेम +4,10,आगताः,प्राप्त करता है। +4,11,ये,जो +4,11,यथा,जैसे भी +4,11,माम्,मेरी +4,11,प्रपद्यन्ते,शरण ग्रहण करते हैं +4,11,तान्,उनको +4,11,तथा,उसी प्रकार +4,11,एव,निश्चय ही +4,11,भजामि,फल प्रदान करता हूँ +4,11,अहम्,मैं +4,11,मम,मेरे +4,11,वर्त्म,मार्ग का +4,11,अनुवर्तन्ते,अनुसरण करते हैं +4,11,मनुष्याः,मनुष्य +4,11,पार्थ,"पृथापुत्र, अर्जुन" +4,11,सर्वशः,सभी प्रकार से। +4,12,काड्.क्षन्तः,इच्छा करते हुए +4,12,कर्मणाम्,भौतिक कर्म +4,12,सिद्धिम्,सफलता +4,12,जयन्ते,पूजा +4,12,इह,इस संसार में +4,12,देवताः,स्वर्ग के देवता +4,12,क्षिप्रम्,शीघ्र ही +4,12,हि,निश्चय ही +4,12,मानुषे,मानव समाज में +4,12,लोके,इस संसार में +4,12,सिद्धिः,सफलता +4,12,भवति,प्राप्त होती है +4,12,कर्मजा,भौतिक कर्मों से। +4,13,चातुःवर्ण्यम्,वर्ण के अनुसार चार वर्ग +4,13,मया,मेरे द्वारा +4,13,सृष्टम्,उत्पन्न हुए +4,13,गुण,गुण +4,13,कर्म,कर्म +4,13,विभागशः,विभाजन के अनुसार +4,13,तस्य,उसका +4,13,कर्तारम्,सृष्टा +4,13,अपि,यद्यपि +4,13,माम्,मुझको +4,13,विद्धि,जानो +4,13,अकर्तारम्,अकर्ता +4,13,अव्ययम्,अपरिवर्तनीय। +4,14,न,कभी नहीं +4,14,माम्,मुझको +4,14,कर्माणि,कर्म +4,14,लिम्पन्ति,दूषित करते हैं +4,14,न,नहीं +4,14,मे,मेरी +4,14,कर्मफले,कर्म +4,14,स्पृहा,इच्छा +4,14,इति,इस प्रकार +4,14,माम्,मुझको +4,14,यः,जो +4,14,अभिजानाति,जानता है +4,14,कर्मभिः,कर्म का फल +4,14,न,कभी नहीं +4,14,सः,वह +4,14,बध्यते,बँध जाता है। +4,15,एवम्,इस प्रकार +4,15,ज्ञात्वा,जानकर +4,15,कृतम्,सम्पादन करना +4,15,कर्म,कर्म +4,15,पूर्वेः,प्राचीन काल का +4,15,अपि,वास्तव में +4,15,मुमक्षुभिः,मोक्ष का इच्छुक +4,15,कुरु,करना चाहिए +4,15,कर्म,कर्त्तव्य +4,15,एव,निश्चय ही +4,15,तस्मात्,अतः +4,15,त्वम्,तुम +4,15,पूर्वेः,प्राचीनकाल की मुक्त आत्माओं का +4,15,पूर्वतरम्,प्राचीन काल में +4,15,कृतम्,सम्पन्न किए। +4,16,किम्,क्या है +4,16,कर्म,कर्म किम् +4,16,अकर्म,"अकर्म, इति इस प्रकार" +4,16,कवयः,विद्धान अपि +4,16,अत्र,इसमें +4,16,मोहिताः,विचलित हो जाते हैं +4,16,तत्,वह +4,16,ते,तुमको +4,16,कर्म,कर्म +4,16,प्रवक्ष्यामि,प्रकट करुंगा +4,16,यत्,जिसे +4,16,ज्ञात्वा,जानकर +4,16,मोक्ष्यसे,तुम्हें मुक्ति प्राप्त होगी +4,16,अशुभात्,अशुभ से। +4,17,कर्मणः,अनुशंसित कर्म +4,17,हि,निश्चय ही +4,17,अपि,भी +4,17,बोद्धव्यम्,जानना चाहिए +4,17,च,भी +4,17,विकर्मणः,वर्जित कर्म का +4,17,अकर्मणः,अकर्म +4,17,च,भी +4,17,बोद्धव्यम्,जानना चाहिए +4,17,गहना,गहन कठिन +4,17,कर्मणः,कर्म की +4,17,गतिः,सत्य मार्ग। +4,18,कर्मणि,कर्म +4,18,अकर्म,निष्क्रिय होना +4,18,यः,जो +4,18,पश्येत्,देखता है +4,18,अकर्मणि,अकर्म में +4,18,च,और +4,18,कर्म,कर्म +4,18,यः,जो +4,18,सः,वे +4,18,बुद्धिमान्,बुद्धिमान् है +4,18,मनुष्येषु,मनुष्यों में +4,18,सः,वे +4,18,युक्त:,योगी +4,18,कृत्स्न,कर्म +4,19,यस्य,जिसके +4,19,सर्वे,प्रत्येक +4,19,समारम्भाः,"प्रयास, काम" +4,19,संकल्प,दृढनिश्चयः वर्जिताः +4,19,ज्ञान,दिव्य ज्ञान की +4,19,अग्रि,अग्नि में +4,19,दग्धः,भस्म हुए +4,19,कर्माणम्,कर्म +4,19,तम्,उसके +4,19,आहुः,कहते हैं +4,19,पण्डितम्,ज्ञानी +4,19,बुधा,बुद्धिमान। +4,20,त्यक्त्वा,त्याग कर +4,20,कर्मफल,आसड्.गम् +4,20,नित्य,सदा +4,20,तृप्तः,संतुष्ट +4,20,निराश्रयः,किसी पर निर्भर न होना +4,20,कर्मणि,कर्म में +4,20,अभिप्रवृत्तः,संलग्न रहकर +4,20,अपि,वास्तव में +4,20,न,नहीं +4,20,एव,निश्चय ही +4,20,किञ्चित्,कुछ +4,20,करोति,करता है +4,20,स:,वह मनुष्य। +4,21,निराशी:,"फल की कामना से रहित, यत" +4,21,चित,आत्मा +4,21,त्यक्त,त्याग कर +4,21,सर्व,सबको +4,21,परिग्रहः,स्वामित्व का भाव +4,21,शारीरम्,देह +4,21,केवलम्,केवल +4,21,कर्म,कर्म +4,21,कुर्वन्,संपादित करना +4,21,न,कभी नहीं +4,21,आप्नोति,प्राप्त करता है +4,21,किल्बिषम्,पाप। +4,22,यदृच्छा,स्वयं के प्रयासों से प्राप्तः +4,22,लाभ,लाभ +4,22,सन्तुष्ट:,सन्तोष +4,22,द्वन्द्व,द्वन्द्व से +4,22,अतीत:,परे +4,22,विमत्सरः,ईर्ष्यारहित +4,22,समः,समभाव +4,22,सिद्धौ,सफलता में +4,22,असिद्धौ,असफलता में +4,22,च,भी +4,22,कृत्वा,करके +4,22,अपि,यद्यपि +4,22,न,कभी नहीं +4,22,निबध्यते,बंधता है। +4,23,गत,सङ्गस्य +4,23,मुक्तस्य,मुक्ति +4,23,ज्ञान,अवस्थित +4,23,चेतसः,जिसकी बुद्धि यज्ञाय +4,23,आचरतः,करते हुए +4,23,कर्म,कर्म +4,23,समग्रम् सम्पूर्णः प्रविलीयते,मुक्त हो जाता है। +4,24,ब्रहम्,ब्रह्म +4,24,अर्पणम्,यज्ञ में आहुति डालना +4,24,ब्रहम्,ब्रह्म +4,24,हविः,आहुती +4,24,ब्रह्म,ब्रह्म +4,24,अग्नौ,यज्ञ रूपी अग्नि में +4,24,ब्रह्मणा,उस व्यक्ति द्वारा +4,24,हुतम्,अर्पित +4,24,ब्रह्म,ब्रह्म +4,24,एव,निश्चय ही +4,24,तेन,उसके द्वारा +4,24,गन्तव्यम्,प्राप्त करने योग्य +4,24,ब्रह्म,ब्रह्म +4,24,कर्म,अर्पण +4,24,समाधिना,भगवद् चेतना में पूर्ण रूप से तल्लीन। +4,25,देवम्,स्वर्ग के देवता +4,25,एव,वास्तव में +4,25,अपरे,अन्य +4,25,यज्ञम्,यज्ञ +4,25,योगिनः,अध्यात्मिक साधक +4,25,पर्युपासते,पूजा करते हैं +4,25,ब्रह्म,परमसत्य +4,25,अग्नौ,अग्नि में +4,25,अपरे,अन्य +4,25,यज्ञम्,यज्ञ को +4,25,यज्ञेन,यज्ञ से +4,25,एव,वास्तव में +4,25,उपजुह्वति,अर्पित करते हैं। +4,26,श्रोत्र,आदीनि +4,26,इन्द्रियाणि,इन्द्रियाँ +4,26,अन्ये,अन्य +4,26,संयम,नियंत्रण रखना +4,26,अग्निषु,यज्ञ की अग्नि में +4,26,जुह्वति,अर्पित करना +4,26,शब्द,आदीन् +4,26,विषयान्,इन्द्रिय तृप्ति के विषय +4,26,अन्ये,दूसरे +4,26,इन्द्रिय,इन्द्रियों की +4,26,अग्निषु,अग्नि में +4,26,जुह्वति,अर्पित करते हैं। +4,27,सर्वाणि,समस्त +4,27,इन्द्रिय,इन्द्रियों के कर्माणि +4,27,अपरे,अन्य +4,27,आत्म,संयम +4,27,जुह्वति,अर्पित करते हैं +4,27,ज्ञान,दीपिते +4,28,द्रव्ययज्ञाः,यज्ञ में के किसी द्वारा अपनी सम्पत्ति अर्पित करना +4,28,तपः,यज्ञाः +4,28,योगयज्ञः,अष्टांग योग का यज्ञ के रूप में अभ्यास +4,28,तथा,इस प्रकार +4,28,अपरे,अन्य +4,28,स्वाध्याय,वैदिक शास्त्रों के अध्ययन द्वारा ज्ञान पोषित करना +4,28,ज्ञान,यज्ञाः +4,28,च,भी +4,28,यतयः,ये सन्यासी +4,28,संशित,व्रत: +4,29,अपाने,भीतरी श्वास +4,29,जुह्वति,अर्पित करते हैं। प्राणम् बाहरी श्वासः प्राणे +4,29,अपानम्,भीतरी श्वास +4,29,तथा,भी +4,29,अपरे,दूसरे +4,29,प्राण,बाहर जाने वाली श्वास को +4,29,अपान,अंदर आने वाली श्वास में +4,29,गती,गति +4,29,रुवा,रोककर +4,29,प्राण,आयाम +4,29,परायणा:,पूर्णतया समर्पित +4,29,अपरे,अन्य +4,29,नियत,नियंत्रित +4,29,आहारा:,खाकर +4,29,प्राणान्,प्राण वायु को +4,29,प्राणेषु,जीवन शक्ति +4,29,जुह्वति,अर्पित करते हैं +4,29,सर्वे,सभी +4,29,अपि,भी +4,29,एते,ये +4,29,यज्ञ,विदः +4,29,यज्ञ,क्षपित +4,29,कल्मषाः,अशुद्धता +4,30,अपाने,भीतरी श्वास +4,30,जुह्वति,अर्पित करते हैं। प्राणम् बाहरी श्वासः प्राणे +4,30,अपानम्,भीतरी श्वास +4,30,तथा,भी +4,30,अपरे,दूसरे +4,30,प्राण,बाहर जाने वाली श्वास को +4,30,अपान,अंदर आने वाली श्वास में +4,30,गती,गति +4,30,रुवा,रोककर +4,30,प्राण,आयाम +4,30,परायणा:,पूर्णतया समर्पित +4,30,अपरे,अन्य +4,30,नियत,नियंत्रित +4,30,आहारा:,खाकर +4,30,प्राणान्,प्राण वायु को +4,30,प्राणेषु,जीवन शक्ति +4,30,जुह्वति,अर्पित करते हैं +4,30,सर्वे,सभी +4,30,अपि,भी +4,30,एते,ये +4,30,यज्ञ,विदः +4,30,यज्ञ,क्षपित +4,30,कल्मषाः,अशुद्धता +4,31,यज्ञशिष्टा अमृत भुजो,वे यज्ञों के अवशेषों के अमृत का पान करते हैं +4,31,यान्ति,जाते हैं +4,31,ब्रह्म,"प��म, सत्य" +4,31,सनातन,शाश्वत +4,31,न,कभी +4,31,अयम्,यह +4,31,लोकः,ग्रह +4,31,अस्ति,है +4,31,अयज्ञस्य,यज्ञ न करने वाला +4,31,कुतः,कहाँ +4,31,अन्यः,अन्य लोकों में +4,31,कुरु,सत् +4,32,एवम्,इस प्रकार +4,32,बहु,विधा: +4,32,यज्ञाः,यज्ञ +4,32,वितताः,वर्णितं +4,32,ब्रह्मणाः,वेदों के +4,32,मुखे,मुख में +4,32,कर्म,जान् +4,32,विद्धि,जानो +4,32,तान्,उन्हें +4,32,सर्वान्,सबको +4,32,एवम्,इस प्रकार से +4,32,ज्ञात्वा,जानकर +4,32,विमोक्ष्यसे,तुम मुक्त हो जाओगे। +4,33,श्रेयान्,श्रेष्ठ +4,33,द्रव्य,मयात् +4,33,यज्ञात्,यज्ञ की अपेक्षा +4,33,ज्ञानयज्ञः,ज्ञान युक्त होकर यज्ञ सम्पन्न करना +4,33,परन्तप,"शत्रुओं का दमन कर्ता, अर्जुन" +4,33,सर्वम्,सभी +4,33,कर्म,कर्म +4,33,अखिलम्,सभी +4,33,पार्थ,"पृथापुत्र, अर्जुन" +4,33,ज्ञाने,ज्ञान में +4,33,परिसमाप्यते,समाप्त होते हैं। +4,34,तत्,सत्य +4,34,विद्धि,जानने का प्रयास करना +4,34,प्रणिपातेन,आध्यात्मिक गुरु के पास जाकर के +4,34,परिप्रश्नेन,विनम्रता से जिज्ञासा प्रकट करना +4,34,सेवया,सेवा के द्वारा +4,34,उपदेक्ष्यन्ति,प्रदान करेंगे +4,34,ते,तुमको +4,34,ज्ञानम्,दिव्य ज्ञान +4,34,ज्ञानिन,ज्ञानी महात्मा +4,34,तत्त्वदर्शिनः,सत्य को अनुभव करने वाला। +4,35,यत्,जिसे +4,35,ज्ञात्वा,जानकर +4,35,न,कभी +4,35,पुनः,फिर +4,35,मोहम्,मोह को +4,35,एवम्,इस प्रकार +4,35,यास्यसि,तुम प्राप्त करोगे +4,35,पाण्डव,"पाण्डव पुत्र, अर्जुन" +4,35,येन,जिसके द्वारा +4,35,भूतानि,जीवों को +4,35,अशेषेण,समस्त +4,35,द्रक्ष्यसि,तुम देखोगे +4,35,आत्मनि,"मुझ परमात्मा, श्रीकृष्ण में" +4,35,अथो,यह कहा गया है +4,35,मयि,मुझमें। +4,36,अपि,भी +4,36,चेत्,यदि +4,36,असि,तुम हो +4,36,पापेभ्यः,पापी +4,36,सर्वेभ्यः,समस्त +4,36,पाप,कृत +4,36,सर्वम्,ऐसे समस्त कर्म +4,36,ज्ञान,प्लवेन दिव्यज्ञान की नौका द्वारा +4,36,एव,निश्चय ही +4,36,वृजिनम्,पाप के समुद्र से +4,36,सन्तरिष्यसि,तुम पार कर जाओगे। +4,37,यथा,जिस प्रकार से +4,37,एधासि,ईंधन को +4,37,समिः,जलती हुई +4,37,अग्नि:,अग्नि +4,37,भस्मसात्,राख +4,37,कुरुते,कर देती है +4,37,अर्जुन,अर्जुन +4,37,ज्ञान,अग्निः +4,37,सर्वकर्माणि,भौतिक कर्मों के समस्त फल को +4,37,भस्मसात्,भस्म +4,37,कुरुते,करती है +4,37,तथा,उसी प्रकार से। +4,38,न,नहीं +4,38,हि,निश्चय ही +4,38,ज्ञानेन,दिव्य ज्ञान के साथ +4,38,सदृशम्,समान +4,38,पवित्रम्,शुद्ध +4,38,इह,इस संसार में +4,38,विद्यते,विद्यमान है +4,38,तत्,उस +4,38,स्वयम्,अपने आप +4,38,योग,योग के अभ्यास में +4,38,संसिद्धः,जो पूर्णता प्राप्त कर लेता है +4,38,कालेन,यथासमय +4,38,आत्मनि,अपन�� अन्तर में +4,38,विन्दति,पाता है। +4,39,श्रद्धावान्,श्रद्धायुक्त व्यक्ति +4,39,लभते,प्राप्त करता है +4,39,ज्ञानम्,दिव्य ज्ञान +4,39,तत्,परः +4,39,संयत,नियंत्रित +4,39,इन्द्रियः,इन्द्रियाँ +4,39,ज्ञानम्,दिव्य ज्ञान +4,39,लब्धवा,प्राप्त करके +4,39,पराम्,दिव्य +4,39,शान्तिम्,शान्ति +4,39,अचिरेण,अविलम्ब +4,39,अधिगच्छति,प्राप्त करता है। +4,40,अज्ञः,"अज्ञानी," +4,40,च,और +4,40,अश्रद्दधानः,श्रद्धा विहीन +4,40,च,और +4,40,संशय,शंकाग्रस्त +4,40,आत्मा,व्यक्ति +4,40,विनश्यति,पतन हो जाता है +4,40,न,न +4,40,अयम्,इस +4,40,लोकः,संसार में +4,40,अस्ति,है +4,40,न,न तो +4,40,परः,अगले जन्म में +4,40,न,नहीं +4,40,सुखम्,सुख +4,40,संशय,आत्मन संशयग्रस्त आत्मा। +4,41,योगसंन्यस्त,कर्माणम +4,41,ज्ञान,ज्ञान से +4,41,सञिछन्न,दूर कर देते हैं +4,41,संशयम्,सन्देह को +4,41,आत्मवन्तम्,आत्मज्ञान में स्थित होकर +4,41,न,कभी नहीं +4,41,कर्माणि,कर्म +4,41,निबध्नन्ति,बाँधते हैं +4,41,धनन्जय," धन और वैभव का स्वामी, अर्जुन।" +4,42,तस्मात्,इसलिए +4,42,अज्ञान,सम्भूतम् +4,42,ज्ञान,ज्ञान +4,42,असिना,खड्ग से +4,42,आत्मनः,स्व के छित्त्वा +4,42,एनम्,इस +4,42,संशयम्,संदेह को +4,42,योगम्,कर्म योग में +4,42,अतिष्ठ,शरण लो +4,42,उत्तिष्ठ,उठो +4,42,भारत,"भरतवंशी, अर्जुन।" +5,1,अर्जुन,उवाच +5,1,संन्यासम्,वैराग्य +5,1,कर्मणाम्,कर्मों का +5,1,कृष्ण,श्रीकृष्णः पुनः +5,1,योगम्,कर्मयोग +5,1,च,भी +5,1,शंससि,प्रशंसा करते हो +5,1,यत्,जो +5,1,श्रेयः,अधिक लाभदायक +5,1,एतयो:,इन दोनों में से +5,1,एकम्,एक +5,1,तत्,वह +5,1,मे,मेरे लिए +5,1,ब्रूहि,कृपया बताएँ +5,1,सुनिश्चितम्,निश्चित रूप से +5,2,श्री,भगवान् उवाच +5,2,संन्यासः,कर्म का त्यागः कर्मयोगः +5,2,च,और +5,2,निःश्रेयस,करौ +5,2,उभौ,दोनों +5,2,तयोः,दोनों में से +5,2,तु,लेकिन +5,2,कर्म,संन्यासात् +5,2,विशिष्यते,श्रेष्ठ +5,3,ज्ञेयः,मानना चाहिएः सः +5,3,नित्य,सदैव +5,3,संन्यासी,वैराग्य का अभ्यास करने वाला +5,3,यः,जो +5,3,न,कभी नहीं +5,3,द्वेष्टि,घृणा करता है +5,3,न,न तो +5,3,काङ्क्षति,कामना करता है +5,3,निर्द्वन्द्वः,सभी द्वंदों से मुक्त +5,3,हि,निश्चय ही +5,3,महाबाहो,बलिष्ठ भुजाओं वाला अर्जुन +5,3,सुखम्,सरलता से +5,3,बन्धात्,बन्धन से +5,3,प्रमुच्यते,मुक्त होना। +5,4,सांख्य,कर्म का त्याग +5,4,योगौ,कर्मयोगः पृथक् +5,4,बाला:,अल्पज्ञ +5,4,प्रवदन्ति,कहते हैं +5,4,न,कभी नहीं +5,4,पण्डिताः,विद्वान् +5,4,एकम्,एक +5,4,अपि,भी +5,4,आस्थित:,स्थित होना +5,4,सम्यक्,पूर्णतया +5,4,उभयोः,दोनों का +5,4,विन्दते,प्राप्त करना है +5,4,फलम्,परिणाम। +5,5,यत,क्या +5,5,साङ्ख्यैः,कर्म संन्यास के अभ्यास द्वारा प्राप्यते +5,5,तत्,वह +5,5,योगैः,भक्ति युक्त कर्म द्वारा +5,5,अपि,भी +5,5,गम्यते,प्राप्त करता है +5,5,एकम्,एक +5,5,सांख्यम्,कर्म का त्यागः च +5,5,योगम्,कर्मयोगः च +5,5,यः,जो +5,5,पश्यति,देखता है +5,5,स:,वह +5,5,पश्चति,वास्तव में देखता है। +5,6,संन्यासः,वैराग्य +5,6,तु,लेकिन +5,6,महाबाहो,"बलिष्ठ भुजाओं वाला, अर्जुन" +5,6,दुःखम्,दुख +5,6,आप्तुम्,प्राप्त करता है +5,6,अयोगतः,कर्म रहित +5,6,योग,युक्त: +5,6,मुनिः,साधुः ब्रह्म +5,6,न चिरेण,शीघ्र ही +5,6,अधिगच्छति,पा लेता है। +5,7,योग,युक्त: +5,7,विशुद्ध,आत्मा: +5,7,विजित,आत्मा +5,7,जितेन्द्रियः,इन्द्रियों को वश में करने वाला +5,7,सर्व,भूत +5,7,न,कभी नहीं +5,7,लिप्यते,बंधता। +5,8,न,नहीं +5,8,एव,निश्चय ही +5,8,किंचित्,कुछ भी +5,8,करोमि,मैं करता हूँ +5,8,इति,इस प्रकार +5,8,युक्तः,कर्मयोग में दृढ़ता से स्थित +5,8,मन्येत,सोचता है +5,8,तत्त्ववित्,सत्य को जानने वाला +5,8,पश्यन्,देखते हुए +5,8,शृण्वन्,सुनते हुए +5,8,स्पृशन्,स्पर्श करते हुए +5,8,जिघ्रन्,सूंघते हुए +5,8,अश्नन्,खाते हुए +5,8,गच्छन्,जाते हुए +5,8,स्वपन्,सोते हुए +5,8,श्वसन्,साँस लेते हुए +5,8,प्रलपन्,बात करते हुए +5,8,विसृजन्,त्यागते हुए +5,8,गृह्णन्,स्वीकार करते हुए +5,8,उन्मिषन्,आंखें खोलते हुए +5,8,निमिषन्,आंखें बन्द करते हुए +5,8,अपि,तो भी +5,8,इन्द्रियाणि,इन्द्रियों कोः इन्द्रिय +5,8,वर्तन्ते,क्रियाशील +5,8,इति,इस प्रकार +5,8,धारयन्,विचार करते हुए। +5,9,न,नहीं +5,9,एव,निश्चय ही +5,9,किंचित्,कुछ भी +5,9,करोमि,मैं करता हूँ +5,9,इति,इस प्रकार +5,9,युक्तः,कर्मयोग में दृढ़ता से स्थित +5,9,मन्येत,सोचता है +5,9,तत्त्ववित्,सत्य को जानने वाला +5,9,पश्यन्,देखते हुए +5,9,शृण्वन्,सुनते हुए +5,9,स्पृशन्,स्पर्श करते हुए +5,9,जिघ्रन्,सूंघते हुए +5,9,अश्नन्,खाते हुए +5,9,गच्छन्,जाते हुए +5,9,स्वपन्,सोते हुए +5,9,श्वसन्,साँस लेते हुए +5,9,प्रलपन्,बात करते हुए +5,9,विसृजन्,त्यागते हुए +5,9,गृह्णन्,स्वीकार करते हुए +5,9,उन्मिषन्,आंखें खोलते हुए +5,9,निमिषन्,आंखें बन्द करते हुए +5,9,अपि,तो भी +5,9,इन्द्रियाणि,इन्द्रियों कोः इन्द्रिय +5,9,वर्तन्ते,क्रियाशील +5,9,इति,इस प्रकार +5,9,धारयन्,विचार करते हुए। +5,10,ब्रह्मण,भगवान् को +5,10,आधाय,समर्पित +5,10,कर्माणि,समस्त कार्यों को +5,10,सङ्गगम्,आसक्ति +5,10,त्यक्त्वा,त्यागकर +5,10,करोति,करना यः +5,10,लिप्यते,प्रभावित होता है +5,10,न,कभी नहीं +5,10,स:,वह +5,10,पापेन,पाप से +5,10,पद्म,पत्रम् +5,10,इव,के समान +5,10,अम्भसा,जल द्वारा। +5,11,कायेन,शरीर के साथ +5,11,मनसा,मन से +5,11,बुद्धया,बुद्धि से +5,11,केवलैः,केवल +5,11,इन्द्रियैः,इन्द्रियों से +5,11,अपि,भी +5,11,योगिनः,योगी +5,11,कर्म,कर्म +5,11,कुर्वन्ति,करते हैं +5,11,सङ्गम्,आसक्ति +5,11,त्यक्त्वा,त्याग कर +5,11,आत्म,आत्मा की +5,11,शुद्धये,"शुद्धि के लिए। योगीजन आसक्ति को त्याग कर अपने शरीर, इन्द्रिय, मन और बुद्धि द्वारा केवल अपने शुद्धिकरण के उद्देश्य से कर्म करते हैं।" +5,12,युक्तः,अपनी चेतना को भगवान में एकीकृत करने वाला +5,12,कर्म,फलम् +5,12,त्यक्त्वा,त्यागकर +5,12,शान्तिम्,पूर्ण शान्ति +5,12,आप्नोति,प्राप्त करता है +5,12,नैष्ठिकीम्,अनंत काल तक +5,12,अयुक्तः,वह जिसकी चेतना भगवान में एकीकृत न हो +5,12,कामकारेण,कामनाओं से प्रेरित होकर +5,12,फले,परिणाम में +5,12,सक्तः,आसक्त +5,12,निबध्यते,बंधता है। +5,13,सर्व,समस्त +5,13,कर्माणि,कर्म +5,13,मनसा,मन से +5,13,संन्यस्य,त्यागकर +5,13,आस्ते,रहता है +5,13,सुखम्,सुखी +5,13,वशी,आत्म +5,13,नव,द्वारे +5,13,पुरे,नगर में +5,13,देही,देहधारी जीव +5,13,न,नहीं +5,13,एव,निश्चय ही +5,13,कुर्वन,कुछ भी करना +5,13,न,नहीं +5,13,कारयन्,कारण मानना। +5,14,न,नहीं +5,14,कर्तृव्यम्,कर्त्तापन का बोध +5,14,न,न तो +5,14,कर्माणि,कर्मों के +5,14,लोकस्य,लोगों के +5,14,सृजति उत्पन्न करता है। प्रभुः,भगवान +5,14,न,न तो +5,14,कर्म,फल +5,14,संयोगम्,सम्बन्ध +5,14,स्वभावः,जीव की प्रकृति +5,14,तु,लेकिन +5,14,प्रवर्तते,कार्य करते हैं। +5,15,न,कभी नहीं +5,15,आदत्ते,स्वीकार करना +5,15,कस्यचित्,किसी का +5,15,पापम्,पाप +5,15,न,न तो +5,15,च,और +5,15,एव,निश्चय ही +5,15,सु,कृतम् +5,15,विभुः,सर्वव्यापी भगवान +5,15,अज्ञानेन,अज्ञान से +5,15,आवृतम्,आच्छादित +5,15,ज्ञानम्,ज्ञान +5,15,तेन,उससे +5,15,मुह्यन्ति,मोह ग्रस्त होते हैं +5,15,जन्तवः,जीवगण। +5,16,ज्ञानेन,दिव्य ज्ञान द्वारा +5,16,तु,लेकिन +5,16,तत्,वह +5,16,अज्ञानम्,अज्ञानता +5,16,येषाम्,जिनका +5,16,नाशितम्,नष्ट हो जाती है +5,16,आत्मनः,आत्मा का +5,16,तेषाम्,उनके +5,16,आदित्यवत्,सूर्य के समान +5,16,ज्ञानम्,ज्ञान +5,16,प्रकाशयति,प्रकाशित करता है +5,16,तत्,उस +5,16,परम्,परम तत्त्व। +5,17,तत्,बुद्धयः +5,17,तत्,आत्मानः +5,17,तत्,निष्ठाः +5,17,तत्,परायणाः +5,17,गच्छन्ति,जाते हैं +5,17,अपुन:,आवृत्तिम् +5,17,ज्ञान,ज्ञान द्वारा निर्धूत निवारण होना +5,17,कल्मषाः,पाप। +5,18,विद्या,दिव्य ज्ञान +5,18,विनय,विनम्रता से +5,18,सम्पन्ने,से युक्त +5,18,ब्राह्मणे,ब्राह्मण +5,18,गवि,गाय में +5,18,हस्तिनि,हाथ�� में +5,18,शुनि,कुत्ते में +5,18,च,तथा +5,18,एव,निश्चय ही +5,18,श्वपाके,"कुत्ते का मांस भक्षण करने वाले, चाण्डाल में" +5,18,च,और +5,18,पण्डिताः,विद्ववान +5,18,समदर्शिनः,समदृष्टि। +5,19,इहैव,इस जीवन में +5,19,तै:,उनके द्वारा +5,19,र्जितः,विजयी +5,19,सर्गः,सृष्टि +5,19,येषाम्,जिनका +5,19,साम्ये,समता में +5,19,स्थितम्,स्थित +5,19,मन:,मन +5,19,निर्दोषम,दोषरहित +5,19,हि,निश्चय ही +5,19,समम्,समान +5,19,ब्रह्म,भगवान +5,19,तस्मात्,इसलिए +5,19,ब्रह्मणि,परम सत्य में +5,19,ते,वे +5,19,स्थिताः,स्थित हैं। +5,20,न,कभी नहीं +5,20,प्रहृष्येत्,हर्षित होना +5,20,प्रियम्,परम सुखदः प्राप्य प्राप्त करना +5,20,न,नहीं +5,20,उद्विजेत्,विचलित होना +5,20,प्राप्य,प्राप्त करके +5,20,च,भी +5,20,अप्रियम्,दुखद +5,20,स्थिरबुद्धिः,"दृढ़ बुद्धि, असम्मूढः" +5,20,ब्रह्म,वित् +5,20,ब्रह्मणि,भगवान में +5,20,स्थित:,स्थित। +5,21,बाह्य,स्पर्शेषु +5,21,असक्त,आत्मा +5,21,विन्दति,पाना +5,21,आत्मनि,आत्मा में +5,21,यत्,जो +5,21,सुखम्,आनन्द +5,21,सः,वह व्यक्ति +5,21,ब्रह्म,योग +5,21,सुखम्,आनन्द +5,21,अक्षयम्,असीम +5,21,अश्नुते,अनुभव करता +5,22,ये,जो +5,22,हि,वास्तव में +5,22,संस्पर्शजा:,इन्द्रियों के विषयों के स्पर्श से उत्पन्न +5,22,भोगा:,सुख भोग +5,22,दुःख,दुख +5,22,योनयः,"का स्रोत, एव" +5,22,ते,वे +5,22,आदि,अन्तवन्तः +5,22,कौन्तेय,"कुन्तीपुत्र, अर्जुन" +5,22,न,कभी नहीं +5,22,तेषु,उनमें +5,22,रमते,आनन्द लेता है +5,22,बुधः,बुद्धिमान्। +5,23,शक्नोति,समर्थ है +5,23,इह,एव +5,23,यः,जो +5,23,सोढुम्,सहन करना +5,23,प्राक्,पहले +5,23,शरीर,शरीर +5,23,विमोक्षणात्,त्याग करना +5,23,काम,इच्छा +5,23,क्रोध,क्रोध से +5,23,उद्भवम्,उत्पन्न वेगम् +5,23,सः,वह +5,23,युक्तः,योगी +5,23,सः,वही व्यक्ति +5,23,सुखी,सुखी +5,23,नरः,व्यक्ति। +5,24,यः,जो +5,24,अन्त:,सुखः +5,24,अन्त:,आरामः +5,24,तथा,उसी प्रकार से +5,24,अन्तः,ज्योतिः +5,24,यः,जो +5,24,स:,वह +5,24,योगी,योगी +5,24,ब्रह्म,निर्वाणं +5,24,ब्रह्म,भूतः +5,24,अधिगच्छति,प्राप्त करना। +5,25,लभन्ते,प्राप्त करना +5,25,ब्रह्मनिर्वाणम्,भौतिक जीवन से मुक्ति +5,25,ऋषयः,पवित्र मनुष्य +5,25,क्षीण,कल्मषा: +5,25,छिन्न,संहार +5,25,द्वैधाः,संदेह से +5,25,यत,आत्मानः +5,25,सर्वभूत,समस्त जीवों के +5,25,हिते,कल्याण के कार्य +5,25,रताः,आनन्दित होना। +5,26,काम,इच्छाएँ +5,26,क्रोध,क्रोध +5,26,वियुक्तानाम्,वे जो मुक्त हैं +5,26,यतीनाम्,संत महापुरुष +5,26,यत,चेतसाम् +5,26,अभितः,सभी ओर से +5,26,ब्रह्म,आध्यात्मिक +5,26,निर्वाणम्,भौतिक जीवन से मुक्ति +5,26,वर्तते,होती है। विदित +5,27,स्पर्शान,इन्द्रि�� विषयों से सम्पर्क +5,27,कृत्वा,करना +5,27,बहिः,बाहरी +5,27,बाह्यान्,बाहरी विषय +5,27,चक्षुः,आंखें +5,27,च,और +5,27,एव,निश्चय ही +5,27,अन्तरे,मध्य में +5,27,भ्रवोः,आंखों की भौहों के +5,27,प्राण,अपानो +5,27,समौ,समान +5,27,कृत्वा,करना +5,27,नास,अभ्यन्तर +5,27,चारिणौ,गतिशील +5,27,यत,संयमित +5,27,इन्द्रिय,इन्द्रियाँ +5,27,मन:,मन +5,27,बुद्धिः,बुद्धि +5,27,मुनिः,योगी +5,27,मोक्ष,मुक्ति +5,27,परायणः,समर्पित +5,27,विगत,मुक्त +5,27,इच्छा,कामनाएँ +5,27,भय,डर +5,27,क्रोधः,क्रोध +5,27,यः,जो +5,27,सदा,सदैव +5,27,मुक्तः,मुक्ति +5,27,एव,निश्चय ही +5,27,सः,वह व्यक्ति। +5,28,स्पर्शान,इन्द्रिय विषयों से सम्पर्क +5,28,कृत्वा,करना +5,28,बहिः,बाहरी +5,28,बाह्यान्,बाहरी विषय +5,28,चक्षुः,आंखें +5,28,च,और +5,28,एव,निश्चय ही +5,28,अन्तरे,मध्य में +5,28,भ्रवोः,आंखों की भौहों के +5,28,प्राण,अपानो +5,28,समौ,समान +5,28,कृत्वा,करना +5,28,नास,अभ्यन्तर +5,28,चारिणौ,गतिशील +5,28,यत,संयमित +5,28,इन्द्रिय,इन्द्रियाँ +5,28,मन:,मन +5,28,बुद्धिः,बुद्धि +5,28,मुनिः,योगी +5,28,मोक्ष,मुक्ति +5,28,परायणः,समर्पित +5,28,विगत,मुक्त +5,28,इच्छा,कामनाएँ +5,28,भय,डर +5,28,क्रोधः,क्रोध +5,28,यः,जो +5,28,सदा,सदैव +5,28,मुक्तः,मुक्ति +5,28,एव,निश्चय ही +5,28,सः,वह व्यक्ति। +5,29,भोक्तारम्,भोक्ता +5,29,यज्ञ,यज्ञ +5,29,तपसाम्,तपस्या +5,29,सर्वलोक,सभी लोक +5,29,महाईश्वरम्,परम् प्रभुः सुहृदम् +5,29,सर्व,सबका +5,29,भूतानाम्,जीव +5,29,ज्ञात्वा,जानकर +5,29,माम्,"मुझे, श्रीकृष्ण" +5,29,शान्तिम्,शान्ति +5,29,ऋच्छति,प्राप्त करता। +6,1,श्रीभगवानुवाच,परम् भगवान ने कहा +6,1,अनाश्रितः,आश्रय न लेकर +6,1,कर्मफलं,कर्म +6,1,कार्यम्,कर्त्तव्य +6,1,कर्म,कार्यः करोति +6,1,यः,वह जो +6,1,सः,वह व्यक्ति +6,1,संन्यासी,संसार से वैराग्य लेने वाला +6,1,च,और +6,1,योगी,योगी +6,1,च,और +6,1,न,नहीं +6,1,निः,रहित +6,1,अग्नि:,आग +6,1,न,नहीं +6,1,च,भी +6,1,अक्रियः,निष्क्रिय।। +6,2,यम्,जिसे +6,2,संन्यासम्,वैराग्य +6,2,इति,इस प्रकार +6,2,प्राहुः,वे कहते हैं +6,2,योगम्,योग +6,2,तम्,उसे +6,2,विद्धि,जानो +6,2,पाण्डव,"पाण्डुपुत्र, अर्जुन" +6,2,न,कभी नहीं +6,2,हि,निश्चय ही +6,2,असंन्यस्त,त्याग किए बिना +6,2,सङ्कल्पः,इच्छा +6,2,योगी,योगी +6,2,भवति,होता है +6,2,कश्चन,कोई +6,3,आरूरूक्षो:,नवप्रशिक्षुः मुने: +6,3,योगम्,योगः कर्म बिना आसक्ति के कार्य करना +6,3,कारणम्,कारण +6,3,उच्यते,कहा जाता है +6,3,योगारूढस्य,योग में सिद्धि प्राप्त +6,3,तस्य,उसका +6,3,एव,निश्चय ही +6,3,शमः,ध्यान +6,3,कारणम्,कारण +6,3,उच्यते,कहा जाता है। +6,4,यदा,जब +6,4,हि,निश्चय ही +6,4,��,नहीं +6,4,इन्द्रिय,अर्थेषु इन्द्रिय विषयों के लिए +6,4,न,कभी नहीं +6,4,कर्मसु,कर्म करना +6,4,अनुषज्जते,आसक्ति होना +6,4,सर्व,सङ्कल्प +6,4,संन्यासी,वैरागी +6,4,योग,आरूढ: +6,4,तदा,उस समय +6,4,उच्यते,कहा जाता है। +6,5,उद्धरेत्,उत्थान +6,5,आत्मना,मन द्वारा +6,5,आत्मानम्,जीव +6,5,न,नहीं +6,5,आत्मानम्,जीव +6,5,अवसादयेत्,पतन होना +6,5,आत्मा,मन +6,5,एव,निश्चय ही +6,5,हि,वास्तव में +6,5,आत्मनः,जीव का +6,5,बन्धुः,मित्र +6,5,आत्मा,मन +6,5,एव,निश्चय ही +6,5,रिपुः,शत्रु +6,5,आत्मनः,जीव का। +6,6,बन्धुः,मित्र +6,6,आत्मा,मन +6,6,आत्मनः,उस व्यक्ति के लिए +6,6,तस्य,उसका +6,6,येन,जिसने +6,6,आत्मा,मन +6,6,एव,निश्चय ही +6,6,आत्मना,जीवात्मा के लिए +6,6,जित:,विजेता +6,6,अनात्मनः,जो मन को वश नहीं कर सका +6,6,तु,लेकिन +6,6,शत्रुत्वे,शत्रुता का +6,6,वर्तेत,बना रहता है +6,6,आत्मा,मन +6,6,एव,जैसे +6,6,शत्रु,वत् +6,7,जित,आत्मन: +6,7,परम,आत्मा +6,7,समाहितः,दृढ़ संकल्प से +6,7,शीत,सर्दी +6,7,उष्ण,गर्मी में +6,7,सुख,"सुख, दुःखेषु और दुख में" +6,7,तथा,भी +6,7,मान,सम्मान +6,7,अपमानयोः,और अपमान। +6,8,ज्ञान,ज्ञान +6,8,विज्ञान,आंतरिक ज्ञान +6,8,तृप्त,आत्मा पूर्णतया संतुष्ट मनुष्य +6,8,कूट,स्थ: +6,8,विजित,इन्द्रियः +6,8,युक्तः,भगवान से निरन्तर साक्षात्कार करने वाला +6,8,इति,इस प्रकार +6,8,उच्यते,कहा जाता है +6,8,योगी,योगी +6,8,सम,समदर्शी +6,8,लोष्ट्र,कंकड़ +6,8,अश्म,पत्थर +6,8,काञ्चनः,स्वर्ण +6,9,सु,हत् +6,9,मित्र,मित्र +6,9,अरि,शत्रु +6,9,उदासीन,तटस्थ व्यक्ति +6,9,मध्य,स्थ +6,9,"द्वेष्य ईर्ष्यालु, बन्धुषु",संबंधियों +6,9,साधुषु,पुण्य आत्माएँ +6,9,अपि,उसी प्रकार से +6,9,च,तथा +6,9,पापेषु,पापियों के +6,9,सम,बुद्धिः +6,9,विशिष्यते,श्रेष्ठ हैं +6,10,योगी,योगी +6,10,युञ्जीत,साधना में लीन रहना +6,10,सततम्,निरन्तर +6,10,आत्मानम्,स्वयं +6,10,रहसि,एकान्त वास में +6,10,स्थित,रहकर +6,10,एकाकी,अकेला +6,10,यत,चित्त +6,10,निराशी:,कामना रहित +6,10,अपरिग्रहः,सुखों का संग्रह करने की भावना से रहित। +6,11,शुचौ,स्वच्छ +6,11,देशे,स्थान +6,11,प्रतिष्ठाप्य,स्थापित करके +6,11,स्थिरम्,स्थिर +6,11,आसनम्,आसन +6,11,आत्मनः,जीव का +6,11,न,नहीं +6,11,अति,अधिक +6,11,उच्छ्रितम्,ऊँचा +6,11,न,न +6,11,अति,अधिक +6,11,नीचम्,निम्न +6,11,चैल,वस्त्र +6,11,अजिन,मृगछाला +6,11,कुश,घास +6,11,उत्तरम्,मृगछला से ढक कर +6,12,तत्रै,वहाँ +6,12,एकाग्रम्,एक बिन्दु पर केन्द्रित +6,12,मनः,मन +6,12,कृत्वा,करके +6,12,यतचित्ते,मन पर नियंत्रण +6,12,इन्द्रिय,इन्द्रियाँ +6,12,क्रियः,गतिविधि +6,12,उपविश्या,स्थिर होकर ��ैठना +6,12,आसने,आसन पर +6,12,युञ्जयात्,योगम् +6,12,आत्म,विशुद्धये +6,12,काय,शरीर +6,12,शिरः,सिर +6,12,ग्रीवम्,गर्दन +6,12,धारयन्,रखते हुए +6,12,अचलम्,स्थिर +6,12,स्थिरः,शान्त +6,12,सम्प्रेक्ष्य,दृष्टि रखकर +6,12,नासिका,अग्रम +6,12,स्वम्,अपनी +6,12,दिशः,दिशाएँ +6,12,च,भी +6,12,अनवलोकयन्,न देखते हुए +6,13,तत्रै,वहाँ +6,13,एकाग्रम्,एक बिन्दु पर केन्द्रित +6,13,मनः,मन +6,13,कृत्वा,करके +6,13,यतचित्ते,मन पर नियंत्रण +6,13,इन्द्रिय,इन्द्रियाँ +6,13,क्रियः,गतिविधि +6,13,उपविश्या,स्थिर होकर बैठना +6,13,आसने,आसन पर +6,13,युञ्जयात्,योगम् +6,13,आत्म,विशुद्धये +6,13,काय,शरीर +6,13,शिरः,सिर +6,13,ग्रीवम्,गर्दन +6,13,धारयन्,रखते हुए +6,13,अचलम्,स्थिर +6,13,स्थिरः,शान्त +6,13,सम्प्रेक्ष्य,दृष्टि रखकर +6,13,नासिका,अग्रम +6,13,स्वम्,अपनी +6,13,दिशः,दिशाएँ +6,13,च,भी +6,13,अनवलोकयन्,न देखते हुए +6,14,प्रशान्त,शान्त +6,14,आत्मा,मन +6,14,विगत,भी: +6,14,ब्रह्मचारि,व्रते +6,14,स्थित:,स्थित +6,14,मन:,मन को +6,14,संयम्य,नियंत्रित करना +6,14,मत्,चित्तः +6,14,युक्तः,तल्लीन +6,14,आसीत,बैठना +6,14,मत्,परः +6,15,युज्जन्,मन को भगवान में तल्लीन करना +6,15,एवम्,इस प्रकार से +6,15,सदा,निरन्तर +6,15,आत्मानम्,मन +6,15,योगी,योगी +6,15,नियत,मानसः +6,15,शान्तिम्,शान्ति +6,15,निर्वाण,भौतिक बन्धनों से मुक्ति +6,15,परमाम्,परमानंद +6,15,मत्,संस्थाम् +6,15,अधिगच्छति,प्राप्त करना। +6,16,न,कभी नहीं +6,16,अति,अधिक +6,16,अश्नतः,खाने वाले का +6,16,तु,लेकिन +6,16,योग:,योग +6,16,अस्ति,है +6,16,न,न तो +6,16,च,भी +6,16,एकान्तम्,नितान्त +6,16,अनश्नतः,भोजन न करने वाले का +6,16,न,न तो +6,16,च,भी +6,16,अति,अत्यधिक +6,16,स्वप्न,शीलस्य +6,16,जागृतः,जो पर्याप्त नींद नहीं लेता +6,16,न,नहीं +6,16,एव,ही +6,16,च,और +6,16,अर्जुन,अर्जुन। +6,17,युक्त,सामान्य +6,17,आहार,भोजन ग्रहण करना +6,17,विहारस्य,मनोरंजन +6,17,युक्त,चेष्टस्य +6,17,युक्त,संयमित +6,17,स्वप्न,अवबोधस्य +6,17,योगः,योगः भवति +6,17,दु:ख,हा +6,18,यदा,जब +6,18,विनियतम्,पूर्ण नियंत्रित +6,18,चित्तम्,मन +6,18,आत्मनि,आत्मा का +6,18,एव,निश्चय ही +6,18,अवतिष्ठते,स्थित होना +6,18,निस्पृह,लालसा रहित +6,18,सर्व,सभी प्रकार से +6,18,कामेभ्यः,इन्द्रिय तृप्ति की लालसा +6,18,तृप्तिः,योग में पूर्णतया स्थित +6,18,इति,इस प्रकार से +6,18,उच्यते,कहा जाता है +6,18,तदा,उस समय। +6,19,यथा,जैसे +6,19,दीपः,दीपक +6,19,निवात,स्थ: +6,19,न,नहीं +6,19,इङ्गते,हिलना डुलना +6,19,सा,यह +6,19,उपमा,तुलना +6,19,स्मृता,मानी जाती है +6,19,योगिनः,योगी की +6,19,यत,चित्तस्य +6,19,युञ्जतः,दृढ़ अनुपालन +6,19,योगम्,ध्यान में +6,19,आत्मन:,परम भगवान में। +6,20,यत्र,जैसे +6,20,उपरमते,आंतरिक सुख की अनुभूति +6,20,चित्तम्,मन +6,20,निरूद्धम्,हटाना +6,20,योग,सेवया योग के अभ्यास द्वारा +6,20,यत्र,जब +6,20,च,भी +6,20,एव,निश्चय ही +6,20,आत्मना,शुद्ध मन के साथ +6,20,आत्मानम्,आत्मा +6,20,आत्मनि,अपने में +6,20,तुष्यति,संतुष्ट हो जाना +6,21,सुखम्,सुख +6,21,आत्यन्तिकम्,असीम +6,21,यत्,जो +6,21,तत्,वह +6,21,बुद्धि,बुद्धि द्वारा +6,21,ग्राह्मम्,ग्रहण करना +6,21,अतीन्द्रियम्,इन्द्रियातीत +6,21,वेत्ति,जानता है +6,21,यत्र,जिसमें +6,21,न,कभी नहीं +6,21,च,और +6,21,एव,निश्चय ही +6,21,अयम्,वह +6,21,स्थितः,स्थित +6,21,चलति,विपथ न होना +6,21,तत्त्वतः,परम सत्य से +6,22,यम्,जिसे +6,22,लब्ध्वा,प्राप्त कर +6,22,च,और +6,22,अपरम्,अन्य कोई +6,22,लाभम्,लाभ +6,22,मन्यते,मानता है +6,22,न,कभी नहीं +6,22,अधिकम्,अधिक +6,22,ततः,उससे +6,22,यस्मिन्,जिसमें +6,22,स्थित:,स्थित होकर +6,22,न,कभी नहीं +6,22,दुःखेन,दुखों से +6,22,गुरूणा,बड़ी +6,22,अपि,से +6,22,विचाल्यते,विचलित होना +6,23,तम्,उसको +6,23,विद्यात्,तुम जानो +6,23,दु:ख,संयोग +6,23,योग,संज्ञितम् +6,23,निश्चयेन,दृढ़तापूर्वक +6,23,योक्तव्यो,अभ्यास करना चाहिए +6,23,योग,योग +6,23,अनिर्विण्णचेतसा,अविचलित मन के साथ। +6,24,संकल्प,दृढ़ संकल्पः प्रभवान् +6,24,कामान्,कामना +6,24,त्यक्त्वा,त्यागकर +6,24,सर्वान्,समस्त +6,24,अशेषत:,पूर्णतया +6,24,मनसा,मन से +6,24,एव,निश्चय ही +6,24,इन्द्रिय,ग्रामम् +6,24,विनियम्य,रोक कर +6,24,समन्ततः,सभी ओर से। शनै: +6,24,उपरमेत्,शान्ति प्राप्त करना +6,24,बुद्धया,बुद्धि से +6,24,धृति,गृहीतया ग्रंथों के अनुसार दृढ़ संकल्प से प्राप्त करना +6,24,आत्म,संस्थम् +6,24,मन:,मन +6,24,कृत्वा,करके +6,24,न,नहीं +6,24,किञ्चित्,अन्य कुछ +6,24,अपि,भी +6,24,चिन्तयेत्,सोचना चाहिए। +6,25,संकल्प,दृढ़ संकल्पः प्रभवान् +6,25,कामान्,कामना +6,25,त्यक्त्वा,त्यागकर +6,25,सर्वान्,समस्त +6,25,अशेषत:,पूर्णतया +6,25,मनसा,मन से +6,25,एव,निश्चय ही +6,25,इन्द्रिय,ग्रामम् +6,25,विनियम्य,रोक कर +6,25,समन्ततः,सभी ओर से। शनै: +6,25,उपरमेत्,शान्ति प्राप्त करना +6,25,बुद्धया,बुद्धि से +6,25,धृति,गृहीतया ग्रंथों के अनुसार दृढ़ संकल्प से प्राप्त करना +6,25,आत्म,संस्थम् +6,25,मन:,मन +6,25,कृत्वा,करके +6,25,न,नहीं +6,25,किञ्चित्,अन्य कुछ +6,25,अपि,भी +6,25,चिन्तयेत्,सोचना चाहिए। +6,26,यतः,यत: +6,26,निश्चरति,भटकने लगे +6,26,मन:,मन +6,26,चञ्चलम्,बेचैन +6,26,अस्थिरम्,अस्थिर +6,26,ततः,तत: +6,26,नियम्य,हटाकर +6,26,एतत्,इस +6,26,आत्मनि,भगवान पर +6,26,एव,निश्चय ही +6,26,वशम्,नियंत्रण +6,26,नयेत्,ले आए। +6,27,प्रशान्त,शान्तिप्रियः मनसम् +6,27,हि,निश्चय ही +6,27,एनम्,यह +6,27,योगिनम्,योगी +6,27,सुखम्,उत्तमम् +6,27,उपैति,प्राप्त करता है +6,27,शान्त,रजसम् +6,27,ब्रह्म,भूतम् +6,27,अकल्मषम्,पाप रहित। +6,28,युञ्जन्,स्वयं को भगवान में एकीकृत करना +6,28,एवम्,इस प्रकार +6,28,सदा,सदैव +6,28,आत्मानम्,आत्मा +6,28,योगी,योगी +6,28,विगत,मुक्त रहना +6,28,कल्मषः,पाप से +6,28,सुखेन,सहजता से +6,28,ब्रह्म,संस्पर्शम् निरन्तर ब्रह्म के सम्पर्क में रहकर +6,28,अत्यन्तम्,परम +6,28,सुखम्,आनन्द +6,28,अश्नुते,प्राप्त करना। +6,29,सर्व,भूत +6,29,आत्मानम्,परमात्मा +6,29,सर्व,सभी +6,29,भूतानि,जीवों को +6,29,च,भी +6,29,आत्मनि,भगवान में +6,29,ईक्षते,देखता है +6,29,योग,युक्त +6,29,सर्वत्र,सभी जगह +6,29,सम,दर्शनः +6,30,यः,जो +6,30,माम्,मुझे +6,30,पश्यति,देखता है +6,30,सर्वत्र,सभी जगह +6,30,सर्वम्,प्रत्येक पदार्थ में +6,30,च,और +6,30,मयि,मुझमें +6,30,पश्यति,देखता है +6,30,तस्य,उसके लिए +6,30,अहम्,मैं +6,30,न,नहीं +6,30,प्रणश्यामि,अप्रकट होता हूँ +6,30,सः,वह +6,30,च,और +6,30,मे,मेरे लिए +6,30,न,नहीं +6,30,प्रणश्यति,अदृश्य होता है। +6,31,सर्व,भूत +6,31,यः,जो +6,31,माम्,मुझको +6,31,भजति,आराधना करता है +6,31,एकत्वम्,एकीकृत +6,31,अस्थितः,विकसित +6,31,सर्वथा,सभी प्रकार से +6,31,वर्तमान:,करता हुआ +6,31,अपि,भी +6,31,सः,सह +6,31,योगी,योगी +6,31,मयि,मुझमें +6,31,वर्तते,निवास करता है। +6,32,आत्म,औपम्येन +6,32,सर्वत्र,सभी जगह +6,32,समम्,समान रूप से +6,32,पश्यति,देखता है +6,32,यः,जो +6,32,अर्जुन,अर्जुनः सुखम् +6,32,वा,अथवा +6,32,यदि,यदि +6,32,वा,अथवा +6,32,दुःखम्,दुख +6,32,सः,ऐसा +6,32,योगी,योगी +6,32,परमः,परम सिद्ध +6,32,मत:,माना जाता है। +6,33,अर्जुन उवाच,अर्जुन ने कहा +6,33,य:,जिस +6,33,अयम्,यह +6,33,योग:,योग की पद्धति +6,33,त्वया तुम्हारे द्वारा: प्रोक्तः,वर्णित +6,33,साम्येन,समानता से +6,33,मधुसूदन,"श्रीकृष्ण, मधु नाम के असुर का संहार करने वाले" +6,33,एतस्य,इसकी +6,33,अहम्,मैं +6,33,न,नहीं +6,33,पश्यामि,देखता हूँ +6,33,चञ्चलत्वात्,बेचैन होने के कारण +6,33,स्थितिम्,स्थिति को +6,33,स्थिराम्,स्थिर। +6,34,चञ्चलम्,बैचेन +6,34,हि,निश्चय ही +6,34,मनः,मन +6,34,कृष्ण,श्रीकृष्ण प्रमाथि +6,34,बल,वत् +6,34,दृढम्,हठीला +6,34,तस्य,उसका +6,34,अहम्,मैं +6,34,निग्रहम्,नियंत्रण में करना +6,34,मन्ये,विचार करना +6,34,वायोः,वायु की +6,34,इव,समान +6,34,सु,दुष्करम् +6,35,श्रीभगवान् उवाच,भगवान ने कहा +6,35,असंशयम्,निस्सन्देह +6,35,महाबाहो,"बलिष्ठ भुजाओं वाला, अर्जुन" +6,35,मनः,मन को +6,35,दुर्निग्रहम्,वश में करना कठिन है +6,35,च��म्,बेचैन +6,35,अभ्यासेन,अभ्यास द्वारा +6,35,तु,लेकिन +6,35,कौन्तेय,"कुन्तीपुत्र, अर्जुन" +6,35,वैराग्येण,वैराग्य द्वारा +6,35,च,और +6,35,गृह्यते,नियंत्रण में लाया जा सकता है। +6,36,असंयत,आत्मना +6,36,योग:,योग +6,36,दुष्प्रापः,प्राप्त करना कठिन +6,36,इति,इस प्रकार +6,36,मे,मेरा +6,36,मति:,मत +6,36,वश्य,आत्मना +6,36,तु,लेकिन +6,36,यतता,प्रयत्न करने वाला +6,36,शक्यः,संभव +6,36,अवाप्तुम्,प्राप्त करना +6,36,उपायतः,उपयुक्त साधनों द्वारा। +6,37,अर्जुनः उवाच,अर्जुन ने कहा +6,37,अयतिः,आलस्य +6,37,श्रद्धया,श्रद्धा के साथ +6,37,उपेतः,सम्पन्न +6,37,योगात्,योग से +6,37,चलित,मानस: +6,37,अप्राप्य,प्राप्त करने में असफल +6,37,योग,संसिद्धिम् योग में परम सिद्धि +6,37,काम्,किस +6,37,गतिम्,लक्ष्य +6,37,कृष्ण,श्रीकृष्ण +6,37,गच्छति,प्राप्त करता है। +6,38,कच्चित्,क्या +6,38,न,नहीं +6,38,उभय,दोनों +6,38,विभ्रष्ट:,पथ भ्रष्ट +6,38,छिन्न,टूटना +6,38,अभ्रम्,बादल +6,38,इव,सदृश +6,38,नश्यति,नष्ट होना +6,38,अप्रतिष्ठ:,बिना किसी सहायता के +6,38,महा,बाहो +6,38,विमूढ़ः,मोहित +6,38,ब्रह्मणः,भगवद्प्राप्ति +6,38,पथि,मार्ग पर चलने वाला। +6,39,एतत्,यह +6,39,मे,मेरा +6,39,संशयम्,सन्देह +6,39,कृष्ण,कृष्ण +6,39,छेत्तुम्,निवारण करना +6,39,अर्हसि,तुम कर सकते हो +6,39,अशेषतः,पूर्णतया +6,39,त्वत्,आपकी अपेक्षा +6,39,अन्यः,दूसरा +6,39,संशयस्य,सन्देह का +6,39,अस्य,इस +6,39,छेत्ता,निवारण करने वाला +6,39,न,नहीं +6,39,हि,निश्चय ही +6,39,उपपद्यते,समर्थ होना।। +6,40,श्रीभगवानुवाच,भगवान् ने कहा +6,40,पार्थ,"पृथापुत्र, अर्जुन" +6,40,न,एव +6,40,इह,इस संसार में +6,40,न,कभी नहीं +6,40,अमुत्र,परलोक में +6,40,विनाश:,नाश +6,40,तस्य,उसका +6,40,विद्यते,होता है +6,40,न,कभी नहीं +6,40,हि,निश्चय ही +6,40,कल्याण,कृत् +6,40,कश्चित्,कोई भी +6,40,दुर्गतिम्,पतन को +6,40,तात,मेरे प्रिय मित्र +6,40,गच्छति,जाता है। +6,41,प्राप्य,प्राप्त करके +6,41,पुण्य,कृताम् +6,41,उषित्वा,निवास के पश्चात +6,41,शाश्वती:,अनेक +6,41,समा:,वर्ष +6,41,शुचीनाम्,पुण्य आत्माओं के +6,41,श्री,मताम् +6,41,गेहे,घर में +6,41,योग,भ्रष्ट: +6,41,अभिजायते,जन्म लेता है +6,41,अथवा,या +6,41,योगिनाम्,दिव्य ज्ञान से सम्पन्न +6,41,एव,निश्चय ही +6,41,कुले,परिवार में +6,41,भवति,जन्म लेता है।धी +6,41,एतत्,यह +6,41,हि,निश्चय ही +6,41,दुर्लभ,तरम् +6,41,जन्म,जन्म +6,41,यत्,जो +6,41,ईदृशम्,इस प्रकार का। +6,42,प्राप्य,प्राप्त करके +6,42,पुण्य,कृताम् +6,42,उषित्वा,निवास के पश्चात +6,42,शाश्वती:,अनेक +6,42,समा:,वर्ष +6,42,शुचीनाम्,पुण्य आत्माओं के +6,42,श्री,मताम् +6,42,ग��हे,घर में +6,42,योग,भ्रष्ट: +6,42,अभिजायते,जन्म लेता है +6,42,अथवा,या +6,42,योगिनाम्,दिव्य ज्ञान से सम्पन्न +6,42,एव,निश्चय ही +6,42,कुले,परिवार में +6,42,भवति,जन्म लेता है।धी +6,42,एतत्,यह +6,42,हि,निश्चय ही +6,42,दुर्लभ,तरम् +6,42,जन्म,जन्म +6,42,यत्,जो +6,42,ईदृशम्,इस प्रकार का। +6,43,तत्र,वहाँ +6,43,तम्,उस +6,43,बुद्धि,संयोगम् +6,43,लभते,प्राप्त होता है +6,43,पौर्व,देहिकम् +6,43,यतते,प्रयास करता है +6,43,च,भी +6,43,ततः,तत्पश्चात +6,43,भूयः,पुनः +6,43,संसिद्धौ,सिद्धि के लिए +6,43,कुरुनन्दन,"कुरुपुत्र, अर्जुन।" +6,44,पूर्व,पिछला +6,44,अभ्यासेन,अभ्यास से +6,44,तेन,उसके द्वारा +6,44,एव,निश्चय ही +6,44,हियते,आकर्षित होता है +6,44,हि,निश्चय ही +6,44,अवश:,असहाय +6,44,अपि,यद्यपि +6,44,स:,वह व्यक्ति +6,44,जिज्ञासुः,उत्सुक +6,44,अपि,भी +6,44,योगस्य,योग के संबंध में +6,44,शब्द,ब्रह्म +6,44,अतिवर्तते,ऊपर उठ जाते हैं। +6,45,प्रयत्नात्,कठिन प्रयास के साथ +6,45,यतमानः,प्रयत्न करते हुए +6,45,तु,और +6,45,योगी,ऐसा योगी +6,45,संशुद्ध,शुद्ध होकर +6,45,किल्बिष:,सांसारिक कामना से +6,45,अनेक,अनेकानेक +6,45,जन्म,जन्मों के बाद +6,45,संसिद्धः,पूर्ण सिद्धि प्राप्त कर +6,45,ततः,तब +6,45,याति,प्राप्त करता है +6,45,पराम्,सर्वोच्च +6,45,गतिम्,लक्ष्य। +6,46,तपस्विभ्यः,तपस्वियों की अपेक्षा +6,46,अधिक:,श्रेष्ठ +6,46,योगी,योगी +6,46,ज्ञानिभ्यः,ज्ञानियों से +6,46,अपि,भी +6,46,मत:,माना जाता है +6,46,अधिक,श्रेष्ठ +6,46,कर्मिभ्यः,कर्मकाण्डों से श्रेष्ठ +6,46,च,भी +6,46,अधिक:,"श्रेष्ठ, योगी" +6,46,तस्मात्,अतः +6,46,योगी,योगी +6,46,भव,हो जाना +6,46,अर्जुन,अर्जुन। +6,47,योगिनाम्,सभी योगियों में से +6,47,अपि,फिर भी +6,47,सर्वेषाम्,समस्त प्रकार के +6,47,मत्,गतेन +6,47,अन्त:,आंतरिक +6,47,आत्मना,मन के साथ +6,47,श्रद्धावान्,पूर्ण विश्वास के साथ +6,47,भजतेभक्ति,में लीन +6,47,य:,जो +6,47,माम्,मेरे प्रति +6,47,स:,वह +6,47,मे,मेरे द्वारा +6,47,युक्त,तमः +6,47,मतः,माना जाता है। +7,1,श्रीभगवान,उवाच +7,1,मयि,मुझमें +7,1,आसक्त,मना: +7,1,पार्थ,"पृथापुत्र, अर्जुन" +7,1,योगम्,भक्ति योगः युञ्जन् +7,1,आश्रयः,मेरे प्रति समर्पित +7,1,असंशयम्,सन्देह से मुक्त +7,1,समग्रम्,पूर्णतया +7,1,माम्,मुझे +7,1,यथा,कैसे +7,1,ज्ञास्यसि,तुम जान सकते हो +7,1,तत्,वह +7,1,श्रृणु,सुनो। +7,2,ज्ञानम्,ज्ञान +7,2,ते,तुमसे +7,2,अहम्,मैं +7,2,स,सहित +7,2,विज्ञानम्,विवेक +7,2,इदम्,यह +7,2,वक्ष्यामि,प्रकट करना +7,2,अशेषत:,पूर्णरूप से +7,2,यत्,जिसे +7,2,ज्ञात्वा,जानकर +7,2,न,नहीं +7,2,इह,इस संसार में +7,2,भूयः,आगे +7,2,अन्यत्,अन्य कुछ +7,2,ज्ञातव्यम्,जानने योग्य +7,2,अवशिष्यते,शेष रहता है। +7,3,मनुष्याणाम्,मनुष्यों में +7,3,सहस्त्रेषु,कई हजारों में से +7,3,कश्चित्,कोई एक +7,3,यतति,प्रयत्न करता है +7,3,सिद्धये,पूर्णता के लिए +7,3,यतताम्,प्रयास करने वाला +7,3,अपि,निस्सन्देह +7,3,सिद्धानाम्,वह जिसने सिद्धि प्राप्त कर ली हो +7,3,कश्चित्,कोई एक +7,3,माम्,मुझको +7,3,वेत्ति,जानता है +7,3,तत्त्वतः,वास्तव +7,4,भूमिः,पृथ्वी +7,4,आप:,जल +7,4,अनल:,अग्नि +7,4,वायु:,वायुः खम् +7,4,मन:,मन +7,4,बुद्धिः,बुद्धि +7,4,एव,निश्चय ही +7,4,च,और +7,4,अहंकारः,अहम् +7,4,इति,इस प्रकार +7,4,इयम्,ये सब +7,4,मे,मेरी +7,4,भिन्ना,पृथक् +7,4,प्रकृतिः,भौतिक शक्तियाँ +7,4,अष्टधा,आठ प्रकार की। +7,5,अपरा,"निकृष्ट, इयम्" +7,5,इत:,इसके अतिरिक्त +7,5,तु,लेकिन +7,5,अन्याम्,अन्य +7,5,प्रकृतिम्,प्राकृत शक्ति +7,5,विद्धि,जानना +7,5,मे,मेरी +7,5,परम,उत्कृष्ट +7,5,जीव,भूताम् +7,5,महा,बाहो +7,5,यथा,जिसके द्वारा +7,5,इदम्,यह +7,5,धार्यते,आधार पर +7,5,जगत्,भौतिक संसार। +7,6,एतत्,योनीनि +7,6,भूतानि,सभी जीव +7,6,सर्वाणि,सभी +7,6,इति,वह +7,6,उपधारय,जानो +7,6,अहम्,मैं +7,6,कृत्स्नस्य,सम्पूर्ण +7,6,जगतः,सृष्टि +7,6,प्रभवः,स्रोत +7,6,प्रलयः,संहार +7,6,तथा,और। +7,7,मत्तः,मुझसे +7,7,पर,तरम् +7,7,न,नहीं +7,7,अन्यत्,किञ्चित् +7,7,अस्ति,है +7,7,ध नञ्जय,"धन और वैभव का स्वामी, अर्जुन," +7,7,मयि,मुझमें +7,7,सर्वम्,सब कुछ +7,7,इदम्,जो हम देखते हैं +7,7,प्रोतम्,गुंथा हुआ +7,7,सूत्रे,धागे में +7,7,मणि,गणा: +7,7,इव,समान। +7,8,रसः,स्वाद +7,8,अहम्,मैं +7,8,अप्सु,जल में +7,8,कौन्तेय,"कुन्तीपुत्र, अर्जुन" +7,8,प्रभा,प्रकाश +7,8,अस्मि,हूँ +7,8,शशि,सूर्ययो: +7,8,प्रणवः,पवित्र मंत्र ओम +7,8,सर्व,सारे +7,8,वेदेषु,वेद +7,8,शब्दः,ध्वनि +7,8,खे,व्योम में +7,8,पौरूषम्,सामर्थ्य +7,8,नृषु,मनुष्यों में। +7,9,पुण्यः,"पवित्र, गन्धः" +7,9,पृथिव्याम्,पृथ्वी में +7,9,च,और +7,9,तेज:,प्रकाश +7,9,च,भी +7,9,अस्मि,मैं हूँ +7,9,विभावसौ,अग्नि में +7,9,जीवनम्,जीवन शक्ति +7,9,सर्व,समस्त +7,9,भूतेषु,जीव +7,9,तपः,तपस्या +7,9,च,भी +7,9,अस्मि,हूँ +7,9,तपस्विषु,तपस्वियों में। +7,10,बीजम्,बीज +7,10,माम,मुझको +7,10,सर्व,भूतानाम् +7,10,विद्धि,जानना +7,10,पार्थ,"पृथापुत्र, अर्जुनः सनातनम्" +7,10,बुद्धिः,बुद्धि +7,10,बुद्धि,मताम् +7,10,अस्मि,हूँ +7,10,तेजः,तेज +7,10,तेजस्विनाम्,तेजस्वियों का +7,10,अहम्,मैं। +7,11,बलम्,शक्ति +7,11,बल,वताम् +7,11,च,तथा +7,11,अहम्,मैं हूँ +7,11,काम,कामना +7,11,राग,आसक्ति +7,11,विवर्जितम्,रहित +7,11,धर्म,अविरुद्धः +7,11,भूतेषु,सभी जीवों में +7,11,कामः,कामुक गतिविधियाँ +7,11,अस्मि,मैं हूँ +7,11,भरत,ऋषभ +7,12,ये,जो भी +7,12,च,तथा +7,12,एव,निश्चय ही +7,12,सात्त्विका:,"सत्वगुण, अच्छाई का गुण" +7,12,भावाः,भौतिक अस्तित्त्व की अवस्था +7,12,राजसा:,"रजो गुण, आसक्ति का गुणः तामसा:" +7,12,च,भी +7,12,ये,जो +7,12,मत्तः,मुझसे +7,12,एव,निश्चय ही +7,12,इति,इस प्रकार +7,12,तान्,उनको +7,12,विद्धि,जानो +7,12,न,नहीं +7,12,तु,लेकिन +7,12,अहम्,मैं +7,12,तेषु,उनमें +7,12,ते,वे +7,12,मयि,मुझमें। +7,13,त्रिभिः,तीन +7,13,गुण,मयैः +7,13,भावैः,अवस्था द्वारा +7,13,एभिः,ये सब +7,13,सर्वम्,सम्पूर्ण +7,13,इदम्,यह +7,13,जगत्,ब्रह्माण्ड +7,13,मोहितम्,मोहित होना +7,13,न,नहीं +7,13,अभिजानाति,नहीं जानना +7,13,माम्,मुझको +7,13,एभ्यः,इनसे +7,13,परम्,सर्वोच्च +7,13,अव्ययम्,अविनाशी।। +7,14,दैवी,दिव्य +7,14,हि,वास्तव में +7,14,एषा,यह +7,14,गुण,मयी +7,14,मम,मेरी +7,14,माया,भगवान की एक शक्ति जो उन जीवात्माओं से भगवान के वास्तविक दिव्य स्वरूप को आच्छादित रखती है जिन्होंने अभी तक भगवद्प्राप्ति की ओर अग्रसर होने की सामर्थ्य प्राप्त नहीं की है +7,14,दुरत्यया,पार कर पाना कठिन +7,14,माम्,मुझे +7,14,एव,निश्चय ही +7,14,ये,जो +7,14,प्रपद्यन्ते,शरणागत होना +7,14,मायाम्,एताम् +7,14,तरन्ति,पार कर जाते हैं +7,14,ते,वे। +7,15,न,नहीं +7,15,माम्,मेरी +7,15,दुष्कृतिन:,बुरा करने वाले +7,15,मूढाः,अज्ञानी +7,15,प्रपद्यन्ते,शरण ग्रहण करते हैं +7,15,नर,अधमाः +7,15,मायया,भगवान की प्राकृत शक्ति द्वारा +7,15,अपहृत,ज्ञानाः +7,15,आसुरम्,आसुरी +7,15,भावम्,प्रकृति वाले +7,15,आश्रिताः,शरणागति। +7,16,चतुः विधाः,चार प्रकार के +7,16,भजन्ते,सेवा करते हैं +7,16,माम्,मेरी +7,16,जनाः,व्यक्ति +7,16,सुकृतिनः,वे जो पुण्यात्मा हैं +7,16,अर्जुन,अर्जुन +7,16,आर्त:,पीड़ित +7,16,जिज्ञासुः,ज्ञान अर्जन करने के अभिलाषी +7,16,अर्थ,अर्थी +7,16,ज्ञानी,वे जो ज्ञान में स्थित रहते हैं +7,16,च,भी +7,16,भरत,ऋषभ +7,17,तेषाम्,उनमें से +7,17,ज्ञानी,वे जो ज्ञान में स्थित रहते हैं +7,17,नित्य,युक्त: +7,17,एक,अनन्य +7,17,भक्ति:,भक्ति में +7,17,विशिष्यते,श्रेष्ठ है +7,17,प्रियः,अति प्रिय +7,17,हि,निश्चय ही +7,17,ज्ञानिनः,ज्ञानवान +7,17,अत्यर्थम्,अत्यधिक +7,17,अहम्,मैं हूँ +7,17,सः,वह +7,17,च,भी +7,17,मम,मेरा +7,17,प्रियः,प्रिय। +7,18,उदारा:,महान +7,18,सर्वे,सभी +7,18,एव,वास्तव में +7,18,एते,ये +7,18,ज्ञानी,वे जो ज्ञान में स्थित रहते हैं +7,18,तु,लेकिनः आत्मा +7,18,मे,मेरे +7,18,मतम्,विचार +7,18,आस्थित:,स्थित +7,18,सः,वह +7,18,हि,निश्चय ही +7,18,युक्त,आत्मा भगवान में एकीकृत +7,18,माम्,मुझे एव +7,18,अनुत्तमाम्,सर्वोच्च गतिम् +7,19,बहूनाम्,अनेक +7,19,जन्मनाम्,जन्म +7,19,अन्ते,बाद में +7,19,ज्ञान,वान् +7,19,माम्,मुझको +7,19,प्रपद्यते,शरणागति +7,19,वासुदेवः,"वासुदेव के पुत्र, श्रीकृष्ण" +7,19,सर्वम्,सब कुछ +7,19,इति,इस प्रकार +7,19,सः,ऐसा +7,19,महा,आत्मा +7,19,सु,दुर्लभः +7,20,कामैः,भौतिक कामनाओं द्वारा +7,20,तैः,तैः +7,20,हृत,ज्ञाना: +7,20,प्रपद्यन्ते,शरण लेते हैं +7,20,अन्य,अन्य +7,20,देवताः,स्वर्ग के देवताओं की +7,20,तम्,तम् +7,20,नियमम्,नियम एवं विनियम +7,20,आस्थाय,पालन करना +7,20,प्रकृत्या,स्वभाव से +7,20,नियता:,नियंत्रित +7,20,स्वया,अपने आप। +7,21,यः,यः +7,21,याम्,याम् +7,21,तनुम्,के रूप में +7,21,भक्तः,भक्त +7,21,श्रद्धया,श्रद्धा के साथ +7,21,अर्चितुम्,पूजा करना +7,21,इच्छति,इच्छा +7,21,तस्य,तस्य +7,21,अचलाम्,स्थिर +7,21,श्रद्धाम्,श्रद्धा +7,21,ताम्,उस +7,21,एव,निश्चय ही +7,21,विदधामि,प्रदान करना +7,21,अहम्,मैं। +7,22,स:,वह +7,22,तया,उसके साथ +7,22,श्रद्धया,विश्वास से +7,22,युक्त:,सम्पन्न +7,22,तस्य,उसकी +7,22,आराधनम्,पूजा +7,22,ईहते,तल्लीन होने का प्रयास करना +7,22,लभते,प्राप्त करना +7,22,च,तथा +7,22,ततः,उससे +7,22,कामान्,कामनाओं को +7,22,मया,मेरे द्वारा +7,22,एव,केवल +7,22,विहितान्,स्वीकृत +7,22,हि,निश्चय ही +7,22,तान्,उन। +7,23,अन्त,वत् +7,23,तु,लेकिन +7,23,फलम्,फल +7,23,तेषाम्,उनके द्वारा +7,23,तत्,वह +7,23,भवति,होता है +7,23,अल्पमेधसाम्,अल्पज्ञों का +7,23,देवान्,स्वर्ग के देवता +7,23,देव,यज्ञः +7,23,यान्ति,जाते हैं +7,23,मत्,मेरे +7,23,भक्ताः,भक्त जन +7,23,यान्ति,जाते हैं +7,23,माम्,मेरे +7,23,अपि,भी। +7,24,अव्यक्तम्,निराकारव्यक्तिम् साकार स्वरूप +7,24,आपन्नम्,प्राप्त हुआ +7,24,मन्यन्ते,सोचना +7,24,माम्,मुझको +7,24,अबुद्धयः,अल्पज्ञानी +7,24,परम्,सर्वोच्च +7,24,भावम्,प्रकृति +7,24,अजानन्तः,बिना समझे मम +7,24,अव्ययम्,अविनाशी +7,24,अनुत्तमम्,सर्वोत्तम। +7,25,ना न तो अहम्,मैं +7,25,प्रकाश:,प्रकट +7,25,सर्वस्य,सब के लिये +7,25,योग,माया भगवान की परम अंतरंग शक्ति +7,25,समावृतः,आच्छादित +7,25,मूढः,"मोहित, मूर्ख" +7,25,अयम्,इन +7,25,न,नहीं +7,25,अभिजानाति,जानना +7,25,लोकः,लोग +7,25,माम्,मुझको +7,25,अजम्,अजन्मा को +7,25,अव्ययम्,अविनाशी। +7,26,वेद,जानना +7,26,अहम्,मैं +7,26,समतीतानि,भूतकाल को +7,26,वर्तमानानि,वर्तमान को +7,26,च,तथा +7,26,अर्जुन,अर्जुन +7,26,भविष्याणि,भविष्य को +7,26,च,भी +7,26,भूतानि,सभी जीवों को +7,26,माम्,मुझको +7,26,तु,लेकिन +7,26,वेद,जानना +7,26,न,नहीं +7,26,कश्चन,कोई हे +7,27,इच्छा,इच्छा +7,27,द्वेष,घृणा +7,27,समुत्थेन,उत्पन्न होने से +7,27,द्वन्द्व,द्वन��द्व से +7,27,मोहेन,मोह से +7,27,भारत,"भरतवंशी, अर्जुन" +7,27,सर्व,सभी +7,27,भूतानि,जीव +7,27,सम्मोहम्,मोह से +7,27,सर्गे,जन्म लेकर +7,27,यान्ति,जाते हैं +7,27,परन्तप,"अर्जुन, शत्रुओं का विजेता।" +7,28,येषाम्,जिसका +7,28,तु,लेकिन +7,28,अन्त,गतम् +7,28,जनानाम्,जीवो का +7,28,पुण्य,पवित्र +7,28,कर्मणाम्,गतिविधियाँ +7,28,ते,वे +7,28,द्वन्द्व,द्विविधताएँ +7,28,मोह,मोह +7,28,निर्मुक्ताः,से मुक्त +7,28,भजन्ते,आराधना करना +7,28,माम्,मुझको +7,28,दृढ,व्रताः +7,29,जरा,वृद्धावस्था +7,29,मरण,और मृत्यु से +7,29,मोक्षाय,मुक्ति के लिए +7,29,माम्,"मुझको, मेरे" +7,29,आश्रित्य,शरणागति में +7,29,यतन्ति,प्रयत्न करते हैं +7,29,ये,जो +7,29,ते,ऐसे व्यक्ति +7,29,ब्रह्म,ब्रह्म +7,29,तत्,उस +7,29,विदु,जान जाते हैं +7,29,कृत्स्नम्,सब कुछ +7,29,अध्यात्मम्,जीवात्मा +7,29,कर्म,कर्म +7,29,च,भी +7,29,अखिलम्,सम्पूर्ण +7,30,स,अधिभूत +7,30,अधिदैवम्,समस्त देवताओं को नियन्त्रित करने वाले सिद्धान्त +7,30,माम्,मुझको +7,30,स,अधियज्ञम् समस्त यज्ञों को सम्पन्न करने वाले सिद्धान्त का नियामक भगवान +7,30,च,और +7,30,ये,जो +7,30,विदुः,जानते हैं। प्रयाण +7,30,काले,समय में +7,30,अपि,भी +7,30,च,तथा +7,30,माम्,मुझको +7,30,ते,वे +7,30,विदुः,जानना +7,30,युक्त,चेतसः +8,1,अर्जुनः उवाच,अर्जुन ने कहा +8,1,किम्,क्या +8,1,तत्,वह +8,1,ब्रह्म,ब्रह्म +8,1,किम्,क्या +8,1,अध्यात्मम्,जीवात्मा +8,1,किम्,क्या +8,1,कर्म,कर्म के नियम +8,1,पुरूष,उत्तम +8,1,अधिभूतम्,भौतिक अभिव्यक्तियाँ +8,1,च,और +8,1,किम्,क्याः प्रोक्तम् +8,1,अधिदैवम्,स्वर्ग के देवता +8,1,किम्,क्या +8,1,उच्यते,कहलाता है। अधियज्ञः +8,1,कथम्,किस प्रकार से +8,1,क:,कौन +8,1,अत्र,यहाँ +8,1,देहे,शरीर में +8,1,अस्मिन्,इस +8,1,मधुसूदन,"मधु नाम के असुर का दमन करने वाले, श्रीकृष्णः प्रयाण" +8,1,च,तथा +8,1,कथम्,कैसे +8,1,ज्ञेयः,जानना +8,1,असि,सकनाः +8,1,आत्मभिः,दृढ़ मन वालो द्वारा। +8,2,अर्जुनः उवाच,अर्जुन ने कहा +8,2,किम्,क्या +8,2,तत्,वह +8,2,ब्रह्म,ब्रह्म +8,2,किम्,क्या +8,2,अध्यात्मम्,जीवात्मा +8,2,किम्,क्या +8,2,कर्म,कर्म के नियम +8,2,पुरूष,उत्तम +8,2,अधिभूतम्,भौतिक अभिव्यक्तियाँ +8,2,च,और +8,2,किम्,क्याः प्रोक्तम् +8,2,अधिदैवम्,स्वर्ग के देवता +8,2,किम्,क्या +8,2,उच्यते,कहलाता है। अधियज्ञः +8,2,कथम्,किस प्रकार से +8,2,क:,कौन +8,2,अत्र,यहाँ +8,2,देहे,शरीर में +8,2,अस्मिन्,इस +8,2,मधुसूदन,"मधु नाम के असुर का दमन करने वाले, श्रीकृष्णः प्रयाण" +8,2,च,तथा +8,2,कथम्,कैसे +8,2,ज्ञेयः,जानना +8,2,असि,सकनाः +8,2,आत्मभिः,दृढ़ मन वालो द्वारा। +8,3,श्रीभगवान् उवाच,आनन्दमयी भगवान ने कहा +8,3,अक्षरम्,अविनाशी +8,3,ब्रह्म,ब्रह्म परमम् +8,3,स्वभाव,प्रकृति +8,3,अध्यात्मम्,अपनी आत्मा +8,3,उच्यते,कहलाता है +8,3,भूत,भाव +8,3,कर्म,सकाम कर्म +8,3,सञ्जितः,कहलाता है। +8,4,अधिभूतम्,भौतिक अभिव्यक्ति में नित्य परिवर्तन +8,4,क्षर:,नाशवान +8,4,भावः,प्रकृति +8,4,पुरुषः,भौतिक सृष्टि में व्याप्त भगवान का ब्रह्माण्डीय स्वरूप +8,4,च,तथा +8,4,अधिदैवतम्,स्वर्ग के देवता +8,4,अधियज्ञः,सभी यज्ञों के स्वामी +8,4,अहम्,मैं (कृष्ण) +8,4,एव,निश्चय ही +8,4,अत्र,इस +8,4,देहे,शरीर में +8,4,देह,भृताम् +8,4,वर,श्रेष्ठ। +8,5,अन्त,काले +8,5,च,और +8,5,माम्,मुझे +8,5,एवं,केवल +8,5,स्मरन्,स्मरण करते हुए +8,5,मुक्त्वा,त्यागना +8,5,कलेवरम्,शरीर को +8,5,यः,जो +8,5,प्रयाति,जाता है। सः +8,5,मत्,भावम् +8,5,याति,प्राप्ति करता है +8,5,न,नहीं +8,5,अस्ति,है +8,5,अत्र,यहाँ +8,5,संशयः,सन्देह। +8,6,यम्,यम् +8,6,वा,या +8,6,अपि,किसी भी +8,6,स्मरन्,स्मरण कर +8,6,भावम्,स्मरण +8,6,त्यजति,त्याग करना अन्ते +8,6,कलेवरम्,शरीर को +8,6,तम्,तम् +8,6,एव,निश्चय ही +8,6,एति,प्राप्त करता है +8,6,कौन्तेय,"कुन्तीपुत्र, अर्जुन," +8,6,सदा,सदैव +8,6,तत्,उस +8,6,भाव,भावितः +8,7,तस्मात्,इसलिए +8,7,सर्वेषु,सब में +8,7,कालेषु,कालों में +8,7,माम्,मुझको +8,7,अनुस्मर,स्मरण करना +8,7,युध्य,युद्ध करना +8,7,च,भी +8,7,मयि,मुझमें +8,7,अर्पित,समर्पित +8,7,मनः,"मन, बुद्धि:" +8,7,माम्,मुझको +8,7,एव,निश्चय ही +8,7,एष्यसि,प्राप्त करोगे +8,7,असंशयः,सन्देह रहित। +8,8,अभ्यास,योग +8,8,युक्तेन,निरन्तर स्मरण में लीन रहना +8,8,चेतसा,मन द्वारा +8,8,न,अन्य +8,8,परमम,परम +8,8,पुरुषम्,पुरुषोत्तम भगवान +8,8,दिव्यम्,दिव्य +8,8,याति,प्राप्त करता है +8,8,पार्थ,"पृथापुत्र, अर्जुन" +8,8,अनुचिन्तयन्,निरन्तर स्मरण करना। +8,9,कविम्,"कवि, सर्वज्ञः पुराणम्" +8,9,अणो:,अणु से +8,9,अणीयांसम्,लघुतर +8,9,अनुस्मरेत्,सदैव सोचता है +8,9,यः,जो +8,9,सर्वस्य,सब कुछ +8,9,धातारम्,पालक +8,9,अचिन्त्य,अकल्पनीयः रूपम् +8,9,आदित्य,वर्णम् +8,9,तमसः,अज्ञानता का अंधकार +8,9,परस्तात्,परे। प्रयाण +8,9,मनसा,मन +8,9,अचलेन,दृढ़ः भक्त्या श्रद्धा भक्ति से स्मरण +8,9,युक्तः,एकीकृत कर +8,9,योग,बलेन +8,9,च,भी +8,9,एव,निश्चय ही +8,9,भ्रुवोः,दोनों भौहों के +8,9,मध्ये,मध्य में प्राणम् +8,9,आवेश्य,स्थित करना +8,9,सम्यक्,पूर्णतया +8,9,स:,वह +8,9,तम्,उसका +8,9,परम्,पुरुषोत्तम भगवान +8,9,उपैति,प्राप्त करता है। दिव्यम् +8,10,कविम्,"कवि, सर्वज्ञः पुराणम्" +8,10,अणो:,अणु से +8,10,अणीया���सम्,लघुतर +8,10,अनुस्मरेत्,सदैव सोचता है +8,10,यः,जो +8,10,सर्वस्य,सब कुछ +8,10,धातारम्,पालक +8,10,अचिन्त्य,अकल्पनीयः रूपम् +8,10,आदित्य,वर्णम् +8,10,तमसः,अज्ञानता का अंधकार +8,10,परस्तात्,परे। प्रयाण +8,10,मनसा,मन +8,10,अचलेन,दृढ़ः भक्त्या श्रद्धा भक्ति से स्मरण +8,10,युक्तः,एकीकृत कर +8,10,योग,बलेन +8,10,च,भी +8,10,एव,निश्चय ही +8,10,भ्रुवोः,दोनों भौहों के +8,10,मध्ये,मध्य में प्राणम् +8,10,आवेश्य,स्थित करना +8,10,सम्यक्,पूर्णतया +8,10,स:,वह +8,10,तम्,उसका +8,10,परम्,पुरुषोत्तम भगवान +8,10,उपैति,प्राप्त करता है। दिव्यम् +8,11,यत्,जिस +8,11,अक्षरम्,अविनाशी +8,11,वेद,विदः +8,11,वदन्ति,वर्णन करते हैं +8,11,वशन्ति,प्रवेश करना +8,11,यत्,जिसमें +8,11,यतयः,बड़े +8,11,वीत,रागाः +8,11,यत्,जो +8,11,इच्छन्तः,इच्छा करने वाले +8,11,ब्रह्मचर्यम्,ब्रह्मचर्य का +8,11,चरन्ति,अभ्यास करना +8,11,तत्,उस +8,11,ते,तुमको +8,11,पदं,लक्ष्य +8,11,सङ्ग्रहेण,संक्षेप में +8,11,प्रवक्ष्ये,मैं बतलाऊँगा। +8,12,सर्व,द्वाराणि +8,12,संयम्य,नियंत्रित करके +8,12,मन:,मनः हृदि हृदय में +8,12,निरूध्य,अवरोध +8,12,च,भी +8,12,मूर्ध्नि,सिर पर +8,12,आधाय,स्थिर करना +8,12,आत्मन:,अपने प्राणम् +8,12,आस्थितः,स्थित +8,12,योग,धारणाम् योग में एकाग्रता। +8,13,ॐ,निराकार भगवान के स्वरूप का प्रतिनिधित्व करने वाला मंत्र +8,13,इति,इस प्रकार +8,13,एक,अक्षरम् +8,13,ब्रह्म,परम सत्य +8,13,व्याहरन्,उच्चारण करना +8,13,माम्,मुझको +8,13,अनुस्मरन्,स्मरण करते हुए +8,13,यः,जो +8,13,प्रयाति,प्रस्थान करना +8,13,त्यजन्,छोड़ते हुए +8,13,देहम्,इस शरीर को +8,13,सः,वह +8,13,याति प्राप्त करता है। परमाम्,परम +8,13,गतिम्,लक्ष्य। +8,14,अनन्य,चेताः +8,14,सततम्,सदैव +8,14,यः,जो +8,14,माम्,मुझमें +8,14,स्मरति,स्मरण +8,14,नित्यश:,नियमित रूप से +8,14,तस्य,उसका +8,14,अहम्,मैं हूँ +8,14,सु,लभः +8,14,पार्थ,पृथापुत्र +8,14,नित्य,निरन्तर +8,14,युक्तस्य,तल्लीन +8,14,योगिनः,योगी। +8,15,माम्,मुझे उपेत्य +8,15,पुनः,फिर +8,15,जन्म,जन्म +8,15,दुःख,आलयम् +8,15,आशाश्वतम्,अस्थायी +8,15,न,कभी नहीं +8,15,आप्नुवन्ति,प्राप्त करते हैं +8,15,महा,आत्मानः +8,15,संसिद्धिम्,पूर्णता को +8,15,परमाम्,परम +8,15,गताः,प्राप्त हुए। +8,16,आ,ब्रह्म +8,16,लोकाः,सारे लोक +8,16,पुनः,फिर +8,16,आवर्तिनः,पुर्नजन्म लेने वाले +8,16,अर्जुन,अर्जुन +8,16,माम्,मुझको +8,16,उपेत्य,पाकर +8,16,तु,लेकिन +8,16,कौन्तेय,कुन्तीपुत्र अर्जुनः पुनः जन्म +8,16,न,कभी नहीं +8,16,विद्यते,होता है। +8,17,सहस्त्र,एक हजार +8,17,युग,युग +8,17,पर्यन्तम्,तक +8,17,अहः,एक दिन +8,17,यत्,जो +8,17,ब्रह्मण,ब्रह्मा का +8,17,विदु:,जानना +8,17,रात्रिम्,रात्रि +8,17,युग,युग +8,17,सहस्न्नान्ताम्,एक हजार युग समाप्त होने पर +8,17,ते,वे +8,17,अहः,रात्र +8,17,जना:,लोग। +8,18,अव्यक्तात,अव्यक्त अवस्था से +8,18,व्यक्तयः,व्यक्तावस्थाः सर्वाः +8,18,अहः,आगमे ब्रह्मा के दिन का शुभारम्भ +8,18,रात्रि,आगमे रात्रि होने पर +8,18,प्रलीयन्ते,लीन हो जाते हैं +8,18,तत्र,उसमें +8,18,एव,निश्चय ही +8,18,अव्यक्त,अप्रकट +8,18,अव्यक्त,संज्ञके +8,19,भूत,ग्रामः +8,19,सः,ये +8,19,एव,निश्चय ही +8,19,अयम्,यह +8,19,भूत्वा,बारम्बार जन्म लेना +8,19,प्रलीयते,विलीन हो जाता है +8,19,रात्रि,आगमे +8,19,अवशः,असहाय +8,19,पार्थ,"पृथापुत्र, अर्जुनः प्रभवति" +8,19,अहः,दिन +8,19,आगमे,दिन के आरम्भ में। +8,20,पर:,परे +8,20,तस्मात्,उसकी अपेक्षा +8,20,तु,लेकिन +8,20,भावा:,सृष्टि +8,20,अन्य:,दूसरी +8,20,अव्यक्त:,अव्यक्त +8,20,अव्यक्तात्,अव्यक्त की +8,20,सनातनः,शाश्वत +8,20,य,जो +8,20,सः,वह जो +8,20,सर्वेषु,समस्त +8,20,भूतेषु,जीवों में +8,20,नश्यत्सु,नष्ट होने पर +8,20,न,कभी नहीं +8,20,विनश्यति,विनष्ट होती है। +8,21,अव्यक्त:,अप्रकट +8,21,अक्षर:,अविनाशी +8,21,इति,इस प्रकार +8,21,उक्त:,कहा गया +8,21,तम्,उसको +8,21,आहुः,कहा जाता है +8,21,परमाम्,सर्वोच्च +8,21,गतिम्,गन्तव्य +8,21,यम्,जिसको +8,21,प्राप्य,प्राप्त करके +8,21,न,कभी +8,21,निवर्तन्ते,वापस आते है +8,21,तत्,वह +8,21,धाम,लोक +8,21,परमम्,सर्वोच्च +8,21,मम,मेरा। +8,22,पुरूषः,परम भगवान +8,22,सः,वह +8,22,परः,"महान, पार्थ" +8,22,भक्त्या,भक्ति द्वारा +8,22,लभ्यः,प्राप्त किया जा सकता है +8,22,तु,वास्तव में +8,22,अनन्यया,बिना किसी अन्य के +8,22,यस्य,जिसके +8,22,अन्तः,स्थानि +8,22,भूतानि,सभी जीव +8,22,येन,जिनके द्वारा +8,22,सर्वम्,समस्त +8,22,इदम्,जो कुछ हम देख सकते हैं +8,22,ततम्,व्याप्त है। +8,23,यत्र,जहाँ +8,23,काले,समय +8,23,तु,निश्चित रूप से +8,23,अनावृत्तिम्,लौटकर न आना +8,23,आवृत्तिम्,लौटना +8,23,च,भी +8,23,एव,निश्चय ही +8,23,योगिनः,योगी +8,23,प्रयाता:,देह त्यागने वाले +8,23,यान्ति,प्राप्त करते हैं +8,23,तम्,उस +8,23,कालम्,काल को +8,23,यक्ष्यामि,वर्णन करूँगा +8,23,भरत,ऋषभ +8,23,ज्योति:,प्रकाश +8,23,अहः,दिन +8,23,शुक्ल:,शुक्लपक्ष +8,23,षट्,मासाः +8,23,उत्तर,अयणम् +8,23,तत्र,वहाँ +8,23,प्रयाता:,देह त्यागने वाले +8,23,गच्छन्ति,जाते हैं +8,23,ब्रह्म,विदः +8,23,जनाः,लोग। धूम: +8,23,रात्रि:,रात +8,23,तथा,और +8,23,कृष्ण:,चन्द्रमा का कृष्णपक्ष +8,23,षट्,मासा: +8,23,दक्षिण,अयणम् +8,23,तत्र,वहाँ +8,23,चान्द्र,मसम् चन्द्रमा संबंधी +8,23,ज्योतिः,प्रकाश +8,23,योगी,योगी +8,23,प्��ाप्य,प्राप्त करके +8,23,निवर्तते वापस आता है। शुक्ल,प्रकाश +8,23,कृष्णे,अंधकार +8,23,गती,मार्ग +8,23,हि,निश्चय ही +8,23,एते,ये दोनों +8,23,जगतः,भौतिक जगत् का +8,23,शाश्वते,नित्य +8,23,मते,मत से +8,23,एकया,एक के द्वारा +8,23,याति,जाता है +8,23,अनावृत्तिम्,न लौटने के लिए +8,23,अन्यथा,अन्य के द्वारा +8,23,आवर्तते,लौटकर आ जाता है +8,23,पुनः,फिर से। +8,24,यत्र,जहाँ +8,24,काले,समय +8,24,तु,निश्चित रूप से +8,24,अनावृत्तिम्,लौटकर न आना +8,24,आवृत्तिम्,लौटना +8,24,च,भी +8,24,एव,निश्चय ही +8,24,योगिनः,योगी +8,24,प्रयाता:,देह त्यागने वाले +8,24,यान्ति,प्राप्त करते हैं +8,24,तम्,उस +8,24,कालम्,काल को +8,24,यक्ष्यामि,वर्णन करूँगा +8,24,भरत,ऋषभ +8,24,ज्योति:,प्रकाश +8,24,अहः,दिन +8,24,शुक्ल:,शुक्लपक्ष +8,24,षट्,मासाः +8,24,उत्तर,अयणम् +8,24,तत्र,वहाँ +8,24,प्रयाता:,देह त्यागने वाले +8,24,गच्छन्ति,जाते हैं +8,24,ब्रह्म,विदः +8,24,जनाः,लोग। धूम: +8,24,रात्रि:,रात +8,24,तथा,और +8,24,कृष्ण:,चन्द्रमा का कृष्णपक्ष +8,24,षट्,मासा: +8,24,दक्षिण,अयणम् +8,24,तत्र,वहाँ +8,24,चान्द्र,मसम् चन्द्रमा संबंधी +8,24,ज्योतिः,प्रकाश +8,24,योगी,योगी +8,24,प्राप्य,प्राप्त करके +8,24,निवर्तते वापस आता है। शुक्ल,प्रकाश +8,24,कृष्णे,अंधकार +8,24,गती,मार्ग +8,24,हि,निश्चय ही +8,24,एते,ये दोनों +8,24,जगतः,भौतिक जगत् का +8,24,शाश्वते,नित्य +8,24,मते,मत से +8,24,एकया,एक के द्वारा +8,24,याति,जाता है +8,24,अनावृत्तिम्,न लौटने के लिए +8,24,अन्यथा,अन्य के द्वारा +8,24,आवर्तते,लौटकर आ जाता है +8,24,पुनः,फिर से। +8,25,यत्र,जहाँ +8,25,काले,समय +8,25,तु,निश्चित रूप से +8,25,अनावृत्तिम्,लौटकर न आना +8,25,आवृत्तिम्,लौटना +8,25,च,भी +8,25,एव,निश्चय ही +8,25,योगिनः,योगी +8,25,प्रयाता:,देह त्यागने वाले +8,25,यान्ति,प्राप्त करते हैं +8,25,तम्,उस +8,25,कालम्,काल को +8,25,यक्ष्यामि,वर्णन करूँगा +8,25,भरत,ऋषभ +8,25,ज्योति:,प्रकाश +8,25,अहः,दिन +8,25,शुक्ल:,शुक्लपक्ष +8,25,षट्,मासाः +8,25,उत्तर,अयणम् +8,25,तत्र,वहाँ +8,25,प्रयाता:,देह त्यागने वाले +8,25,गच्छन्ति,जाते हैं +8,25,ब्रह्म,विदः +8,25,जनाः,लोग। धूम: +8,25,रात्रि:,रात +8,25,तथा,और +8,25,कृष्ण:,चन्द्रमा का कृष्णपक्ष +8,25,षट्,मासा: +8,25,दक्षिण,अयणम् +8,25,तत्र,वहाँ +8,25,चान्द्र,मसम् चन्द्रमा संबंधी +8,25,ज्योतिः,प्रकाश +8,25,योगी,योगी +8,25,प्राप्य,प्राप्त करके +8,25,निवर्तते वापस आता है। शुक्ल,प्रकाश +8,25,कृष्णे,अंधकार +8,25,गती,मार्ग +8,25,हि,निश्चय ही +8,25,एते,ये दोनों +8,25,जगतः,भौतिक जगत् का +8,25,शाश्वते,नित्य +8,25,मते,मत से +8,25,एकया,एक के द्वारा +8,25,याति,ज���ता है +8,25,अनावृत्तिम्,न लौटने के लिए +8,25,अन्यथा,अन्य के द्वारा +8,25,आवर्तते,लौटकर आ जाता है +8,25,पुनः,फिर से। +8,26,यत्र,जहाँ +8,26,काले,समय +8,26,तु,निश्चित रूप से +8,26,अनावृत्तिम्,लौटकर न आना +8,26,आवृत्तिम्,लौटना +8,26,च,भी +8,26,एव,निश्चय ही +8,26,योगिनः,योगी +8,26,प्रयाता:,देह त्यागने वाले +8,26,यान्ति,प्राप्त करते हैं +8,26,तम्,उस +8,26,कालम्,काल को +8,26,यक्ष्यामि,वर्णन करूँगा +8,26,भरत,ऋषभ +8,26,ज्योति:,प्रकाश +8,26,अहः,दिन +8,26,शुक्ल:,शुक्लपक्ष +8,26,षट्,मासाः +8,26,उत्तर,अयणम् +8,26,तत्र,वहाँ +8,26,प्रयाता:,देह त्यागने वाले +8,26,गच्छन्ति,जाते हैं +8,26,ब्रह्म,विदः +8,26,जनाः,लोग। धूम: +8,26,रात्रि:,रात +8,26,तथा,और +8,26,कृष्ण:,चन्द्रमा का कृष्णपक्ष +8,26,षट्,मासा: +8,26,दक्षिण,अयणम् +8,26,तत्र,वहाँ +8,26,चान्द्र,मसम् चन्द्रमा संबंधी +8,26,ज्योतिः,प्रकाश +8,26,योगी,योगी +8,26,प्राप्य,प्राप्त करके +8,26,निवर्तते वापस आता है। शुक्ल,प्रकाश +8,26,कृष्णे,अंधकार +8,26,गती,मार्ग +8,26,हि,निश्चय ही +8,26,एते,ये दोनों +8,26,जगतः,भौतिक जगत् का +8,26,शाश्वते,नित्य +8,26,मते,मत से +8,26,एकया,एक के द्वारा +8,26,याति,जाता है +8,26,अनावृत्तिम्,न लौटने के लिए +8,26,अन्यथा,अन्य के द्वारा +8,26,आवर्तते,लौटकर आ जाता है +8,26,पुनः,फिर से। +8,27,न,कभी नहीं +8,27,एते,इन दोनों +8,27,सृती,मार्गः पार्थ +8,27,जानन्,जानते हुए भी +8,27,योगी,योगी +8,27,मुह्यति,मोहग्रस्त +8,27,कश्चन,कोई +8,27,तस्मात्,अतः +8,27,सर्वेषु,कालेषु +8,27,योग,युक्तः योग में स्थित +8,27,भव,होना +8,27,अर्जुन,हे अर्जुन। +8,28,वेदेष,वेदो के अध्ययन में +8,28,यज्ञेषु,यज्ञ का अनुष्ठान करने में +8,28,तपःसु,तपस्याएँ करने में +8,28,च,भी +8,28,एव,निश्चय ही +8,28,दानेषु,दान देने में +8,28,यत्,जो +8,28,पुण्य,सफलम् +8,28,प्रदिष्टम्,प्राप्त करना +8,28,अत्येति,पार कर जाता है +8,28,तत्,सर्वम् +8,28,इदम्,यह +8,28,विदित्वा,जानकर +8,28,योगी,योगी +8,28,परम,परम +8,28,स्थानम्,धाम को +8,28,उपैति,प्राप्त करता है +8,28,च,भी +8,28,आद्यम्,"सनातन, आदि।" +9,1,श्रीभगवान्,उवाच +9,1,इदम्,इस +9,1,तु,लेकिन +9,1,ते,तुमको +9,1,गुह्य,तमम् अत्यन्त गूढ़ प्रवक्ष्यामि मैं प्रदान करूँगा अनसूयवे +9,1,ज्ञानम्,ज्ञान +9,1,विज्ञान,अनुभूत ज्ञान +9,1,सहितम्,सहित +9,1,यत्,जिसे +9,1,ज्ञात्वा,जानकर +9,1,मोक्ष्यसे,मुक्त हो सकोगे +9,1,अशुभात्,भौतिक संसार के कष्ट। +9,2,राज,विद्या +9,2,राज,गुह्यम् +9,2,पवित्रम्,शुद्ध +9,2,इदम्,यह +9,2,उत्तमम्,सर्वोच्च +9,2,प्रत्यक्ष,प्रत्यक्ष +9,2,अवगमम्,प्रत्यक्ष समझा जाने वाला +9,2,धर्म्यम्,धर्म युक्त +9,2,सु,सुखम् अत्यन्त सरल +9,2,कर्तुम्,अभ्यास करने में +9,2,अव्ययम्,अविनाशी। +9,3,अश्रद्दधानाः,श्रद्धाविहीन लोग +9,3,पुरुषा:,व्यक्ति +9,3,धर्मस्य,धर्म के प्रति +9,3,अस्य,इस +9,3,परन्तप,"शत्रु विजेता, अर्जुन" +9,3,अप्राप्य,बिना प्राप्त किये +9,3,माम्,मुझको +9,3,निवर्तन्ते,लौटते हैं +9,3,मृत्युः,मृत्युः संसार +9,3,वर्त्मनि,मार्ग में। +9,4,मया,मेरे द्वारा +9,4,ततम्,व्याप्त है +9,4,इदम्,यह +9,4,सर्वम्,समस्त +9,4,जगत्,ब्रह्माण्डीय अभिव्यक्तियाँ +9,4,अव्यक्त,मूर्तिना +9,4,मत्,स्थानि +9,4,सर्व,भूतानि +9,4,न,नहीं +9,4,च,भी +9,4,अहम्,मैं +9,4,तेषु,उनमें +9,4,अवस्थितः,निवास। +9,5,न,कभी नहीं +9,5,च,और +9,5,मत्,स्थानि +9,5,भूतानि,सभी जीव +9,5,पश्य,देखो +9,5,मे,मेरा +9,5,योगम् ऐश्वरम्,दिव्य शक्ति +9,5,भूत,भृत् +9,5,न,नहीं +9,5,च,भी +9,5,भूतस्थ:,में रहते हैं +9,5,मम,मेरा +9,5,आत्मा,स्वयं +9,5,भूत,भावन +9,6,यथा,जैसे +9,6,आकाश,स्थितः +9,6,नित्यम्,सदैव +9,6,वायुः,हवा +9,6,सर्वत्र,ग: +9,6,महान,शक्तिशाली +9,6,तथा,उसी प्रकार +9,6,सर्वाणि,भूतानि सारे प्राणी +9,6,मत्स्थानि,मुझमें स्थित +9,6,इति,इस प्रकार +9,6,उपधारय,जानो। +9,7,यान्ति,विलीन होना +9,7,मामिकाम्,मेरी +9,7,कल्प,क्षये +9,7,पुनः,फिर से +9,7,तानि,उनमें +9,7,कल्प,आदो +9,7,विसृजामि,व्यक्त करता हूँ +9,7,अहम्,मैं। प्रकृतिम् +9,7,स्वाम्,मेरी निजी +9,7,अवष्टभ्य,प्रवेश करके +9,7,विसृजामि,उत्पन्न करता हूँ +9,7,पुनः,पुन: +9,7,भूत,ग्रमम् +9,7,इमम्,इन +9,7,कृत्स्नम्,सबकोः +9,7,अवशम्,नियंत्रण से परे +9,7,प्रकृतेः,प्रकृति के +9,7,वशात्,बल में। +9,8,यान्ति,विलीन होना +9,8,मामिकाम्,मेरी +9,8,कल्प,क्षये +9,8,पुनः,फिर से +9,8,तानि,उनमें +9,8,कल्प,आदो +9,8,विसृजामि,व्यक्त करता हूँ +9,8,अहम्,मैं। प्रकृतिम् +9,8,स्वाम्,मेरी निजी +9,8,अवष्टभ्य,प्रवेश करके +9,8,विसृजामि,उत्पन्न करता हूँ +9,8,पुनः,पुन: +9,8,भूत,ग्रमम् +9,8,इमम्,इन +9,8,कृत्स्नम्,सबकोः +9,8,अवशम्,नियंत्रण से परे +9,8,प्रकृतेः,प्रकृति के +9,8,वशात्,बल में। +9,9,न,कोई नहीं +9,9,च,भी +9,9,माम्,मुझमो +9,9,तानि,वे +9,9,कर्माणि,कर्म +9,9,निबधनन्ति,बाँधते हैं +9,9,धनञ्जय,"धन और वैभव का स्वामी, अर्जुन" +9,9,उदासीन,वत् +9,9,आसीनम्,स्थित हुआ +9,9,असक्तम्,आसक्ति रहित +9,9,तेषु,उन +9,9,कर्मसु,कर्मो में। +9,10,मया,मेरे द्वारा +9,10,अध्यक्षेण,अध्यक्ष होने के कारण +9,10,प्रकृति:,प्राकृत शक्ति +9,10,सूयते,प्रकट होती है +9,10,स,दोनों +9,10,चर,अचरम् +9,10,हेतुना,कारण +9,10,अनेन,इस +9,10,कौन्तेय,"कुन्तीपुत्र, अर्जुन" +9,10,जगत्,भौतिक जगत +9,10,विपरिवर्तते,परिवर्तनशील। +9,11,अवजानन्ति,उपेक्षा करते हैं +9,11,माम्,मुझको +9,11,मूढाः,अल्प ज्ञानी +9,11,मानुषीम्,मनुष्य रूप में +9,11,तनुम्,शरीर +9,11,आश्रितम्,मानते हुए +9,11,परम्,दिव्य +9,11,भावम्,व्यक्तित्व को +9,11,अजानन्तः,न जानते हुए +9,11,मम,मेरा +9,11,भूत,प्रत्येक जीव का +9,11,महा,ईश्वरम् +9,12,मोघ,आशा: +9,12,मोघ,कर्माण: +9,12,मोघ,ज्ञानाः +9,12,विचेतसः,मोहग्रस्त +9,12,राक्षसीम्,आसुरी +9,12,आसुरीम्,नास्तिक +9,12,च,तथा +9,12,निश्चय,ही +9,12,प्रकृतिम्,प्राकृत शक्ति को +9,12,मोहिनीम्,मोहने वाली +9,12,श्रिताः,शरण ग्रहण करना। +9,13,महा,आत्मनः +9,13,माम्,मुझको +9,13,पार्थ,"पृथापुत्र, अर्जुन" +9,13,दैवीम्,प्रकृतिम् +9,13,आश्रिताः,शरणग्रहण करना +9,13,भजन्ति,भक्ति में लीन +9,13,अनन्य,मनसः +9,13,ज्ञात्वा,जानकर +9,13,भूत,समस्त सृष्टि +9,13,आदिम्,उदगम +9,13,अव्ययम्,अविनाशी। +9,14,सततम्,सदैव +9,14,कीर्तयन्तः,दिव्य महिमा का गान +9,14,माम्,मेरी +9,14,यतन्तः,प्रयास करते हुए +9,14,च,भी +9,14,दृढ,व्रताः +9,14,नमस्यन्तः,नतमस्तक होकर +9,14,च,तथा +9,14,माम्,मुझको +9,14,भक्त्या,भक्ति में +9,14,नित्य,युक्ताः +9,14,उपासते,पूजा करते हैं। +9,15,ज्ञान,यज्ञेन +9,15,च,और +9,15,अपि,भी +9,15,अन्ये,अन्य लोग +9,15,यजन्तः,यज्ञ करते हुए +9,15,माम्,मुझको +9,15,उपासते,पूजते हैं +9,15,एकत्वेन,एकान्त भाव से +9,15,पृथक्त्वेन,अलग से +9,15,बहुधा,अनेक प्रकार से +9,15,विश्वतः,मुखम् ब्रह्माण्डीय रूप में। +9,16,अहम्,मैं +9,16,क्रतुः,वैदिक कर्मकाण्ड +9,16,अहम्,मैं +9,16,यज्ञः,समस्त यज्ञ +9,16,स्वधा,तर्पण +9,16,अहम्,मैं +9,16,औषधाम्,जड़ी +9,16,मन्त्र,वैदिक मंत्र +9,16,अहम्,मैं +9,16,एव,निश्चय ही +9,16,आश्यम्,घी +9,16,अहम्,मैं +9,16,पिता,पिता +9,16,अहम्,मैं +9,16,अस्य,इसका +9,16,जगतः,ब्रह्माण्ड +9,16,माता,माता +9,16,धाता,रक्षक +9,16,पितामहः,दादा +9,16,वेद्यम्,ज्ञान का लक्ष्य +9,16,पवित्रम्,शुद्ध करने वाला +9,16,ओङ्कारः,पवित्र मंत्र ओम +9,16,ऋक्,ऋग्वेदा +9,16,साम,सामवेदा +9,16,यजुः,यजुर्वेदा +9,16,एव,निश्चय ही +9,16,च,तथा। +9,17,अहम्,मैं +9,17,क्रतुः,वैदिक कर्मकाण्ड +9,17,अहम्,मैं +9,17,यज्ञः,समस्त यज्ञ +9,17,स्वधा,तर्पण +9,17,अहम्,मैं +9,17,औषधाम्,जड़ी +9,17,मन्त्र,वैदिक मंत्र +9,17,अहम्,मैं +9,17,एव,निश्चय ही +9,17,आश्यम्,घी +9,17,अहम्,मैं +9,17,पिता,पिता +9,17,अहम्,मैं +9,17,अस्य,इसका +9,17,जगतः,ब्रह्माण्ड +9,17,माता,माता +9,17,धाता,रक्षक +9,17,पितामहः,दादा +9,17,वेद्यम्,ज्ञान का लक्ष्य +9,17,पवित्रम्,शुद्ध करने वाला +9,17,ओङ्कारः,पवित्र मंत्र ओम +9,17,ऋक्,ऋग्वेदा +9,17,साम,सामवेदा +9,17,यजुः,यजुर्वेदा +9,17,एव,निश्चय ही +9,17,च,तथा। +9,18,गति:,परम लक्ष्य +9,18,भर्ता,पालक +9,18,प्रभुः,स्वामी +9,18,साक्षी,गवाह +9,18,निवासः,धाम +9,18,शरणम्,शरण +9,18,सुहृत्,परम मित्र +9,18,प्रभवः,मूल +9,18,प्रलयः,संहार +9,18,स्थानम्,भण्डारग्रह +9,18,निधानम्,"आश्रय, स्थल" +9,18,बीजम्,"बीज, कारण कारण" +9,18,अव्ययम्,अविनाशी। +9,19,तपामि,गर्मी पहुँचाता हूँ +9,19,अहम्,मैं +9,19,अहम्,मैं +9,19,वर्षम्,वर्षा +9,19,निगृह्णामि,रोकना +9,19,उत्सृजामि,लाता हूँ +9,19,च,और +9,19,अमृतम्,अमरत्व +9,19,च,और +9,19,एव,निश्चय ही +9,19,मृत्युः,मृत्यु +9,19,च,और +9,19,सत्,शाश्वत आत्मा +9,19,असत्,अस्थायी पदार्थ +9,19,च,तथा +9,19,अहम्,मैं +9,19,अर्जुन,अर्जुन। +9,20,त्रै,विद्या: +9,20,माम्,मुझको +9,20,सोम,पा: +9,20,पूत,पवित्र +9,20,पापा:,पापों का +9,20,यज्ञैः,यज्ञों द्वारा +9,20,इष्ट्वा,आराधना करके +9,20,स्व:,गतिम् +9,20,प्रार्थयन्ते,प्रार्थना करते हैं +9,20,ते,वे +9,20,पुण्यम्,पवित्र +9,20,सुर,इन्द्र +9,20,लोकम्,लोक को +9,20,अश्नन्ति,भोग करते हैं +9,20,दिव्यान्,दैवी +9,20,दिवि,स्वर्ग में +9,20,देव,भोगान् +9,21,ते,वे +9,21,तम्,उसको +9,21,भुक्त्वा,भोग करके +9,21,स्वर्ग,लोकम् स्वर्ग +9,21,विशालम्,गहन +9,21,क्षीणे,समाप्त हो जाने पर +9,21,पुण्ये,पुण्य और पाप कर्म +9,21,मर्त्य,लोकम् +9,21,विशन्ति,लौट आते हैं +9,21,एवम्,इस प्रकार +9,21,त्रयी,धर्म +9,21,अनुप्रपन्नाः,पालन करना +9,21,गत,आगतम् +9,21,काम,कामाः +9,21,लभन्ते,प्राप्त करते हैं। +9,22,अनन्या:,सदैव +9,22,चिन्तयन्तः,सोचते हुए +9,22,माम्,मुझको +9,22,ये,जो +9,22,जनाः,व्यक्ति +9,22,पर्युपासते,पूजा करते हैं +9,22,तेषाम्,उनके +9,22,नित्य,सदा +9,22,अभियुक्तानाम्,सदैव भक्ति में तल्लीन मनुष्यों की +9,22,योग,आध्यात्मिक सम्पत्ति की आपूर्ति +9,22,क्षेम्,आध्यात्मिक संपदा की सुरक्षा +9,22,वहामि,वहन करता हूँ +9,22,अहम्,मैं। +9,23,ये,जो +9,23,अपि,यद्यपि +9,23,अन्य,दूसरे +9,23,देवता,देवताओं के +9,23,भक्ताः,भक्त +9,23,यजन्ते,पूजते हैं +9,23,श्रद्धया अन्विताः,श्रद्धा युक्त +9,23,ते,वे +9,23,अपि,भी +9,23,माम्,मुझको +9,23,एव,केवल +9,23,कौन्तेय,"कुन्तीपुत्र, अर्जुन" +9,23,यजन्ति,पूजा करते हैं +9,23,अविधि,पूर्वकम् त्रुटिपूर्ण ढंग से। +9,24,अहम्,मैं +9,24,हि,वास्तव में +9,24,सर्व,सब का +9,24,यज्ञानाम्,यज्ञ +9,24,भोक्ता,भोग करने वाला +9,24,च,और +9,24,प्रभुः,भगवान +9,24,एव,भी +9,24,च,तथा +9,24,न,नहीं +9,24,तु,लेकिन +9,24,माम्,मुझको +9,24,अभिजानन्ति,अनुभव करना +9,24,तत्त्वेन,दिव्य प्रकृति +9,24,अतः,इसलिए +9,24,च्यवन्ति,पुनर्जन्म लेना (संसार में भटकना) +9,25,यान्ति,जाते हैं +9,25,द���व,व्रताः +9,25,देवान्,देवताओं के बीच +9,25,पितृन्,पित्तरों के बीच +9,25,यान्ति,जाते हैं +9,25,पितृ,व्रता: +9,25,भूतानि,भूत +9,25,यान्ति,जाते हैं +9,25,भूत,इज्या: +9,25,यान्ति,जाते हैं +9,25,मत्,मेरे +9,25,याजिनः,भक्तगण +9,25,अपि,लेकिन +9,25,माम्,मेरे पास। +9,26,पत्रम्,पत्ता +9,26,पुष्पम्,पुष्प +9,26,फलम्,फल +9,26,तोयम्,जल +9,26,यः,जो कोई +9,26,मे,मुझको +9,26,भक्त्या,श्रद्धापूर्वक +9,26,प्रयच्छति,अर्पित करता है +9,26,तत्,वह +9,26,अहम्,मैं +9,26,भक्ति,उपन्नतम् +9,26,अश्नामि स्वीकार करता हूँ। प्रयत,आत्मन: +9,27,यत्,जो कुछ +9,27,करोषि,करते हो +9,27,यत्,जो भी +9,27,अश्नासि,खाते हो +9,27,यत्,जो कुछ +9,27,जुहोषि,यज्ञ में अर्पित करना +9,27,ददासि,उपहार स्वरूप प्रदान करना +9,27,यत्,जो +9,27,यत्,जो भी +9,27,तपस्यसि,तप करते हो +9,27,कौन्तेय,"कुन्तीपुत्र, अर्जुन" +9,27,तत्,वह सब +9,27,कुरूष्व,करो +9,27,मत्,मुझको +9,27,अप्रणम्,अर्पण के रूप में। +9,28,शुभ,अशुभ +9,28,एवम्,इस प्रकार +9,28,मोक्ष्यसे,तुम मुक्त हो जाओगे +9,28,कर्म,कर्म +9,28,बन्धनैः,बन्धन से +9,28,संन्यास,योग +9,28,युक्त,आत्मा +9,28,विमुक्तः,मुक्त होना +9,28,माम्,मुझे उपैष्यसि +9,29,समः,समभाव से व्यवस्थित करना +9,29,अहम्,मैं +9,29,सर्व,भूतेषु +9,29,न,कोई नहीं +9,29,मे,मुझको +9,29,द्वेष्यः,द्वेष +9,29,अस्ति,हे +9,29,न,न तो +9,29,प्रियः,प्रिय +9,29,ये,जो +9,29,भजन्ति,प्रेमामयी भक्ति +9,29,तु,लेकिन +9,29,माम्,मुझको +9,29,भक्त्या,भक्ति से +9,29,मयि,मुझमें +9,29,ते,ऐसा व्यक्ति +9,29,तेषु,उनमें +9,29,च,भी +9,29,अपि,निश्चय ही +9,29,अहम्,मैं। +9,30,अपि,भी +9,30,चेत्,यदि +9,30,सु,दुराचारः +9,30,भजते,सेवा करना माम् +9,30,अनन्य,भाक् +9,30,साधु:,साधु पुरुष +9,30,एव,निश्चय ही +9,30,स:,वह +9,30,मन्तव्यः,संकल्पः सम्यक् +9,30,व्यवसित,संकल्प युक्त +9,30,हि,निश्चय ही +9,30,सः,वह। +9,31,क्षिप्रम्,शीघ्रः भवति +9,31,धर्म,आत्मा +9,31,शश्वत्,शान्तिम् +9,31,निगच्छति,प्राप्त करना +9,31,कौन्तेय,"कुन्तीपुत्र, अर्जुन प्रतिजानीहि" +9,31,न,कभी नहीं +9,31,मे,मेरा +9,31,भक्त:,भक्त +9,31,प्रणश्यति,विनाश। +9,32,माम्,मेरी +9,32,हि,निःसंदेह +9,32,पार्थ,"पृथापुत्र, अर्जुनः व्यपाश्रित्य" +9,32,ये,जो +9,32,अपि,भी +9,32,स्युः,हों +9,32,पाप,योनयः +9,32,वैश्या:,व्यावसायिक लोग +9,32,तथा,भी +9,32,शूद्राः,शारीरिक श्रम करने वाले +9,32,ते,अपि +9,32,यान्ति,जाते हैं +9,32,परम्,परम +9,32,गतिम्,गंतव्य। +9,33,किम्,"क्या, कितनाः पुनः" +9,33,ब्राह्यणाः,ज्ञानी +9,33,पुण्या:,धर्मात्मा +9,33,भक्ताः,भक्तगण +9,33,राजऋषयः,राजर्षि +9,33,तथा,भी +9,33,अनित्यम्,अस्थायी +9,33,असुखम्,दुखमय +9,33,लोकम्,सं���ार को +9,33,इमम्,इस +9,33,प्राप्य,प्राप्त करके +9,33,भजस्व,अनन्य भक्ति में लीन +9,33,माम्,मेरी। +9,34,मत्,मना: +9,34,भव,होओ +9,34,मत्,मेरा +9,34,भक्त:,भक्त +9,34,मत्,मेरा +9,34,याजी,उपासक +9,34,माम्,मुझको +9,34,नमस्कुरू,नमस्कार करो +9,34,माम्,मुझको +9,34,एव,निःसंदेह +9,34,एष्यासि,पाओगे +9,34,युक्त्वा,तल्लीन होकर +9,34,एवम्,इस प्रकार +9,34,आत्मानम्,आत्मा को +9,34,मत्,परायणः +10,1,श्रीभगवान् उवाच,आनन्दमयी भगवान् ने कहा +10,1,भूयः,पुनः एव +10,1,महा,बाहो +10,1,शृणु,सुनो +10,1,मे,मेरा +10,1,परमम्,दिव्य +10,1,वचः,उपदेश +10,1,यत्,जो +10,1,ते,तुमको +10,1,अहम्,मैं +10,1,प्रीयमाणाय,प्रिय विश्वस्थ मित्र +10,1,वक्ष्यामि,कहता हूँ +10,1,हित,काम्यया तुम्हारे कल्याण के लिए। +10,2,न,कभी नहीं +10,2,मे,मेरे +10,2,विदुः,जानना +10,2,सुर,गणाः +10,2,न,कभी नहीं +10,2,महा,ऋषयः +10,2,अहम्,मैं +10,2,आदि:,मूल स्रोत +10,2,हि,नि:संदेह +10,2,देवानाम्,स्वर्ग के देवताओं का +10,2,महा,ऋषीणाम् +10,2,च,भी +10,2,सर्वशः,सभी प्रकार से। +10,3,यः,जो +10,3,माम्,मुझे +10,3,अजम्,अजन्मा +10,3,अनादिम्,जिसका कोई आदि न हो +10,3,च,भी +10,3,वेत्ति,जानता है +10,3,लोक,ब्रह्माण्ड +10,3,महा,ईश्वरम् +10,3,असम्मूढः,मोहरहित +10,3,सः,वह +10,3,मत्र्येषु,मनुष्यों में +10,3,सर्व,पापैः +10,3,प्रमुच्यते,मुक्त हो जाता है। +10,4,बुद्धिः,बुद्धि +10,4,ज्ञानम्,ज्ञान +10,4,असम्मोहः,विचारों की स्पष्टता +10,4,क्षमा क्षमाः सत्यम्,सत्यता +10,4,दमः,इन्द्रियों पर संयम +10,4,शमः,मन का निग्रह +10,4,सुखम्,आनन्द +10,4,दु:खम्,दुख +10,4,भवः,जन्म +10,4,अभावः,मृत्यु +10,4,भयम्,भय +10,4,च,और +10,4,अभयम्,निर्भीकता +10,4,एव,भी +10,4,च,और +10,4,अहिंसा,अहिंसा +10,4,समता,समभाव +10,4,तुष्टि:,सन्तोष +10,4,तपः,तपस्या +10,4,दानम्,दान +10,4,यश:,कीर्ति +10,4,अयश:,अपकीर्ति +10,4,भवन्ति,होना +10,4,भावाः,गुण +10,4,भूतानाम्,जीवों की +10,4,मत्तः,मुझसे +10,4,एव,निश्चय ही +10,4,पृथक्,विधा: +10,5,बुद्धिः,बुद्धि +10,5,ज्ञानम्,ज्ञान +10,5,असम्मोहः,विचारों की स्पष्टता +10,5,क्षमा क्षमाः सत्यम्,सत्यता +10,5,दमः,इन्द्रियों पर संयम +10,5,शमः,मन का निग्रह +10,5,सुखम्,आनन्द +10,5,दु:खम्,दुख +10,5,भवः,जन्म +10,5,अभावः,मृत्यु +10,5,भयम्,भय +10,5,च,और +10,5,अभयम्,निर्भीकता +10,5,एव,भी +10,5,च,और +10,5,अहिंसा,अहिंसा +10,5,समता,समभाव +10,5,तुष्टि:,सन्तोष +10,5,तपः,तपस्या +10,5,दानम्,दान +10,5,यश:,कीर्ति +10,5,अयश:,अपकीर्ति +10,5,भवन्ति,होना +10,5,भावाः,गुण +10,5,भूतानाम्,जीवों की +10,5,मत्तः,मुझसे +10,5,एव,निश्चय ही +10,5,पृथक्,विधा: +10,6,महा,ऋषयः +10,6,पूर्वे,पहले +10,6,चत्वारः,चार +10,6,मनवः,मनुः तथा +10,6,मत्,भावाः +10,6,मानसाः,मन से +10,6,जाता:,उत्पन्न +10,6,येषाम्,जिनकी +10,6,लोके,संसार में +10,6,इमा:,ये सब +10,6,प्रजाः,लोग। +10,7,एताम्,इन +10,7,विभूतिम्,वैभवों +10,7,योगम्,दिव्य शक्ति +10,7,च,भी +10,7,मम,मेरा +10,7,यः,जो कोई +10,7,वेत्ति,जानता है +10,7,तत्त्वतः,वास्तव में +10,7,सः,वे +10,7,अविकम्पेन,निश्चित रूप से +10,7,योगेन,भक्ति से +10,7,युज्यते,एक हो जाता है +10,7,न,कभी नहीं +10,7,अत्र,यहाँ +10,7,संशयः,शंका। +10,8,अहम्,मैं +10,8,सर्वस्य,सभी का +10,8,प्रभवः,उत्पत्ति का कारण +10,8,मत्तः,मुझसे +10,8,सर्वम्,सब कुछ +10,8,प्रवर्तते,उत्पन्न होती हैं +10,8,इति,इस प्रकार +10,8,मत्वा,जानकर +10,8,भजन्ते,भक्ति करते हैं +10,8,माम्,मेरी +10,8,बुधाः,बुद्धिमान +10,8,भाव,समन्विताः +10,9,मत्,चित्ता: +10,9,मत्,गत +10,9,बोधयन्तः,भगवान के दिव्य ज्ञान से प्रकाशित +10,9,परस्परम्,एक दूसरे से +10,9,कथयन्तः,वार्तालाप करते हुए +10,9,च,और +10,9,माम्,मेरे विषय में +10,9,नित्यम्,सदैव +10,9,तुष्यन्ति,संतुष्ट होते हैं +10,9,च,और +10,9,रमन्ति,आनन्द भोगते हैं +10,9,च,भी। +10,10,तेषाम्,उनको +10,10,सतत,युक्तानाम् +10,10,भजताम्,भक्ति करने वालों को +10,10,प्रीति,पूर्वकम् +10,10,ददामि,मैं देता हूँ +10,10,बुद्धि,योगम् +10,10,तम्,वह +10,10,येन,जिससे +10,10,माम्,मुझको +10,10,उपयान्ति,प्राप्त होते हैं +10,10,ते,वे। +10,11,तेषाम्,उनके लिए +10,11,एव,केवल +10,11,अनुकम्पा,अर्थम् विशेष कृपा करने के लिए +10,11,अहम्,मैं +10,11,अज्ञान,जम् +10,11,तमः,अंधकार +10,11,नाशयामि,दूर करता हूँ +10,11,आत्म,भाव +10,11,स्थ:,निवास +10,11,ज्ञान,ज्ञान के +10,11,दीपेन,दीपक द्वारा +10,11,भास्वता,प्रकाशित। +10,12,अर्जुनःउवाच,अर्जुन ने कहा +10,12,परम्,परम +10,12,ब्रह्म,सत्य +10,12,परम्,परम +10,12,धाम,लोक +10,12,पवित्रम्,शुद्ध +10,12,परमम्,सर्वोच्च +10,12,भवान्,आप +10,12,पुरुषम्,पुरुष +10,12,शाश्वतम्,सनातन +10,12,दिव्यम्,दिव्य +10,12,आदि,देवम् +10,12,अजम्,अजन्मा +10,12,विभुम्,सर्वोच्च +10,12,आहुः,कहते हैं +10,12,त्वाम्,आपको +10,12,ऋषयः,ऋषिगण +10,12,सर्वे,सभी +10,12,देव,ऋषिः +10,12,नारदः,नारद +10,12,तथा,और +10,12,असितः,असित +10,12,देवलः,देवल +10,12,व्यासः,व्यास +10,12,स्वयम्,स्वयं +10,12,च,और +10,12,एव,निश्चय ही +10,12,ब्रवीषि,आप बता रहे हैं +10,12,मे,मुझको। +10,13,अर्जुनःउवाच,अर्जुन ने कहा +10,13,परम्,परम +10,13,ब्रह्म,सत्य +10,13,परम्,परम +10,13,धाम,लोक +10,13,पवित्रम्,शुद्ध +10,13,परमम्,सर्वोच्च +10,13,भवान्,आप +10,13,पुरुषम्,पुरुष +10,13,शाश्वतम्,सनातन +10,13,दिव्यम्,दिव्य +10,13,आदि,देवम् +10,13,अजम्,अजन्मा +10,13,विभुम्,सर्वोच्च +10,13,आहुः,कहते हैं +10,13,त्वाम्,आपको +10,13,ऋषयः,ऋषिगण +10,13,सर्वे,सभी +10,13,देव,ऋषिः +10,13,नारदः,नारद +10,13,तथा,और +10,13,असितः,असित +10,13,देवलः,देवल +10,13,व्यासः,व्यास +10,13,स्वयम्,स्वयं +10,13,च,और +10,13,एव,निश्चय ही +10,13,ब्रवीषि,आप बता रहे हैं +10,13,मे,मुझको। +10,14,सर्वम्,सब कुछ +10,14,एतत्,इस +10,14,ऋतम्,सत्य +10,14,मन्ये,मैं स्वीकार करता हूँ +10,14,यत्,जिसका +10,14,माम्,मुझे वदसि +10,14,केशव,"केशी नामक असुर का दमन करने वाले, श्रीकृष्ण" +10,14,न,कभी नहीं +10,14,हि,निश्चय ही +10,14,ते,आपके +10,14,भगवन्,परम भगवान +10,14,व्यक्तिम्,व्यक्तित्व +10,14,विदुः,जान सकते हैं +10,14,देवाः,देवतागण +10,14,न,न तो +10,14,दानवाः,असुर। +10,15,स्वयम्,स्वयं +10,15,एव,वास्तव में +10,15,आत्मना,अपने आप +10,15,आत्मानम्,अपने को +10,15,वेत्थ,जानते हो +10,15,त्वम्,आप +10,15,पुरूष,उत्तम +10,15,भूत,भावन +10,15,भूत,ईश +10,15,देव,देव +10,15,जगत्,पते +10,16,वक्तुम्,वर्णन करना +10,16,अर्हसि,कृपा करे +10,16,अशेषेण,पूर्णरूप से +10,16,दिव्याः,अलौकिक +10,16,हि,वास्तव में +10,16,आत्म,तुम्हारा अपना +10,16,विभूतयः,ऐश्वर्य +10,16,याभि:,जिनके द्वारा +10,16,विभूतिभिः,ऐश्वर्य से +10,16,लोकान्,समस्त लोकों को +10,16,इमान्,इन +10,16,त्वम्,आप +10,16,व्याप्य,व्याप्त होकर +10,16,तिष्ठसि स्थित हैं। कथम्,कैसे +10,16,विद्याम् अहम्,मैं जान सकूँ +10,16,योगिन्,योगमाया के स्वामी +10,16,त्वाम्,आपको +10,16,सदा,सदैव +10,16,परिचिन्तयन,चिन्तन करना +10,16,केषु,किस +10,16,च,भी +10,16,भावेषु,रूपों मे +10,16,चिन्त्य:असि,आपका चिन्तन कर +10,16,भगवन्,परम सत्ता +10,16,मया,मेरे द्वारा। +10,17,वक्तुम्,वर्णन करना +10,17,अर्हसि,कृपा करे +10,17,अशेषेण,पूर्णरूप से +10,17,दिव्याः,अलौकिक +10,17,हि,वास्तव में +10,17,आत्म,तुम्हारा अपना +10,17,विभूतयः,ऐश्वर्य +10,17,याभि:,जिनके द्वारा +10,17,विभूतिभिः,ऐश्वर्य से +10,17,लोकान्,समस्त लोकों को +10,17,इमान्,इन +10,17,त्वम्,आप +10,17,व्याप्य,व्याप्त होकर +10,17,तिष्ठसि स्थित हैं। कथम्,कैसे +10,17,विद्याम् अहम्,मैं जान सकूँ +10,17,योगिन्,योगमाया के स्वामी +10,17,त्वाम्,आपको +10,17,सदा,सदैव +10,17,परिचिन्तयन,चिन्तन करना +10,17,केषु,किस +10,17,च,भी +10,17,भावेषु,रूपों मे +10,17,चिन्त्य:असि,आपका चिन्तन कर +10,17,भगवन्,परम सत्ता +10,17,मया,मेरे द्वारा। +10,18,विस्तरेण,विस्तार से +10,18,आत्मन:,अपनी +10,18,योगम्,दिव्य महिमा +10,18,विभूतिम्,ऐश्वर्य +10,18,च,भी +10,18,जनार्दन,"जीवों के पालन कर्ता, श्रीकृष्ण" +10,18,भूयः,पुनः +10,18,कथय,वर्णन करें +10,18,तृप्तिः,संतोष +10,18,हि,क्योंकि +10,18,श्रृण्वतः,सुनते हुए +10,18,न अस्ति,नहीं है +10,18,मे,मेरी +10,18,अमृतम्,अमृत। +10,19,श्रीभगवान् उवाच,आनन्दमयी भगवान ने कहा +10,19,ह���्त,हाँ +10,19,ते,तुमसे +10,19,कथयिष्यामि,मैं वर्णन करूँगा +10,19,दिव्याः,दिव्य +10,19,हि,निश्चय ही +10,19,आत्म,विभूतयः +10,19,कुरुश्रेष्ठ,कुरुश्रेष्ठ +10,19,न,नहीं +10,19,अनतः,सीमा +10,19,विस्तरस्य,अनंत महिमा +10,19,मे,मेरी। +10,20,अहम्,मैं +10,20,आत्मा,आत्मा +10,20,गुडाकेश,"निद्रा को वश में करने वाला, अर्जुन, सर्व" +10,20,आशय,स्थित: +10,20,अहम्,मैं +10,20,आदि:,आदि च +10,20,च,भी +10,20,भूतानाम्,समस्त जीवों का +10,20,अन्तः,अंत +10,20,एव,निश्चय ही +10,20,च,भी। +10,21,आदित्यानाम्,आदिति के बारह पुत्रों में +10,21,अहम्,मैं हूँ +10,21,विष्णु:,भगवान विष्णु +10,21,ज्योतिषाम्,समस्त प्रकाशित होने वाले पदार्थों में +10,21,रविः,सूर्य +10,21,अंशुमान्,किरणों वाला +10,21,मरीचिः,"मरीचि, मरूताम्" +10,21,अस्मि,हूँ +10,21,नक्षत्राणाम्,तारों में +10,21,अहम्,मैं हूँ +10,21,शशि,चन्द्रमा। +10,22,वेदानाम्,वेदों में +10,22,साम,वेदः +10,22,अस्मि,हूँ +10,22,देवानाम्,देवताओं में +10,22,अस्मि,हूँ +10,22,वासवः,स्वर्ग के देवताओं का राजा इन्द्र +10,22,इन्द्रियाणाम्,इन्द्रियों में +10,22,मनः,मन +10,22,च,और +10,22,अस्मि,हूँ +10,22,भूतानाम्,जीवों में +10,22,अस्मि,हूँ +10,22,चेतना,जीवन दायिनी शक्ति। +10,23,रुद्राणाम्,समस्त रुद्रों में +10,23,शडकरः,शिव भगवान +10,23,च,और +10,23,अस्मि,हूँ +10,23,वित्त,ईश: +10,23,यक्ष,रक्षसाम् +10,23,वसूनाम्,वसुओं में +10,23,पावकः,अग्नि +10,23,च,भी +10,23,अस्मि,हूँ +10,23,मेरू:,मेरू पर्वत +10,23,शिखरिणाम्,पर्वतों में +10,23,अहम्,मैं हूँ। +10,24,पुरोधासाम्,समस्त पुरोहितों में +10,24,च,भी +10,24,मुख्यम्,प्रमुख +10,24,माम्,मुझको +10,24,विद्धि,जानो +10,24,पार्थ,पृथापुत्र अर्जुन +10,24,बृहस्पतिम्,बृहस्पति +10,24,सेनानीनाम्,समस्त सेनानायकों में से +10,24,अहम्,मैं हूँ +10,24,स्कन्दः,कार्तिकेय +10,24,सरसाम्,समस्त जलाशयों मे +10,24,अस्मि,मैं हूँ +10,24,सागरः,समुद्र। +10,25,महा,ऋषीणाम् +10,25,भृगुः,भृगुः अहम् +10,25,गिराम्,वाणी में +10,25,अस्मि,हूँ +10,25,एकम् अक्षरम्,ओम +10,25,यज्ञानाम्,यज्ञों में +10,25,जप,यज्ञः +10,25,अस्मिमैं,हूँ +10,25,स्थावराणाम्,जड़ पदार्थों में +10,25,हिमालयः,हिमालय पर्वत।। +10,26,अश्वत्थः,बरगद का वृक्ष +10,26,सर्व,वृक्षाणाम् सारे वृक्षों में +10,26,देव,ऋषीणाम् समस्त स्वर्ग के देवर्षियों में +10,26,च,तथा +10,26,नारदः,नारद +10,26,गन्धर्वाणाम्,गन्धर्वलोक के वासियों में +10,26,चित्ररथ:,चित्ररथ +10,26,सिद्धानाम्,सिद्धि प्राप्त संतों में +10,26,कपिल:मुनि:,कपिल मुनि। +10,27,उच्चैःश्रवसम्,श्रवा नाम का अश्वः अश्वानाम् अश्वों में +10,27,विद्धि,जानो +10,27,माम्,म���झे +10,27,अमृत,उद्धवम् समुद्र मन्थन से उत्पन्न अमृत +10,27,ऐरावतम्,ऐरावत +10,27,गज,इन्द्राणाम् +10,27,नराणाम्,मनुष्यों में +10,27,च,तथा +10,27,नर,अधिपम् +10,28,आयुधानाम्,शास्त्रों में +10,28,अहम्,मैं हूँ +10,28,वज्रम्,वज्रः धेनूनाम् +10,28,अस्मि,हूँ +10,28,काम,धुक् +10,28,प्रजनः,"सन्तान, उत्पत्ति का कारण" +10,28,च,तथा +10,28,अस्मि,हूँ +10,28,कन्दर्पः,कामदेव +10,28,सर्पाणाम्,सर्पो में +10,28,अस्मि,हूँ +10,28,वासुकि:,वासुकि। +10,29,अनन्तः,अनन्त +10,29,च,भी +10,29,अस्मि,हूँ +10,29,नागानाम्,फणों वाले सर्पो में +10,29,वरुण:,जलचरों के देवता +10,29,यादसाम्,समस्त जलचरों में +10,29,अहम्,मैं हूँ +10,29,पितृणाम्,पितरों में +10,29,अर्यमा,अर्यमा +10,29,च,भी +10,29,अस्मि,हूँ +10,29,यमः,मृत्यु का देवता +10,29,संयमताम्,समस्त नियमों के नियंताओं में और +10,29,अहम्,मैं हूँ। +10,30,प्रहलादः,प्रह्लाद +10,30,च,भी +10,30,अस्मि,हूँ +10,30,दैत्यानाम्,असुरों में +10,30,काल:,काल +10,30,कलयताम्,दमनकर्ताओं में काल +10,30,अहम्,मैं हूँ +10,30,मृगाणाम्,पशुओं में +10,30,च,तथा +10,30,मृग,इन्द्रः +10,30,अहम्,मैं हूँ +10,30,वैनतेयः,गरुड़ +10,30,च,भी +10,30,पक्षिणाम्,पक्षियों में। +10,31,पवन:,वायुः पवताम् +10,31,अस्मि,हूँ +10,31,रामः,श्रीराम +10,31,शस्त्र,भृताम् +10,31,अहम्,मैं +10,31,झषाणाम्,मछलियों में +10,31,मकर:,मगर +10,31,च,भी अस्मि +10,31,स्रोतसाम्,बहती नदियों में +10,31,अस्मि,हूँ +10,31,जाह्नवी,गंगा नदी।/p> +10,32,सर्गाणाम्,सम्पूर्ण सृष्टियों का +10,32,आदिः,प्रारम्भ +10,32,अन्तः,अन्त +10,32,च,तथा +10,32,मध्यम्,मध्यः च +10,32,एव,निसंदेह +10,32,अहम्,मैं हूँ +10,32,अर्जुन,अर्जुन +10,32,अध्यात्म,विद्या +10,32,विद्यानाम्,विद्याओं में +10,32,वादः,"तार्किक, निष्कर्षः प्रवदताम्" +10,32,अहम्,मैं हूँ। +10,33,अक्षराणाम्,सभी अक्षरों में +10,33,अ,कारः +10,33,अस्मि,हूँ +10,33,द्वन्द्वः,द्वन्द्व समास +10,33,सामासिकस्य,सामासिक शब्दों में +10,33,च,तथा +10,33,अहम्,मैं हूँ +10,33,एव,केवल ही +10,33,अक्षयः,अनन्त +10,33,काल,समय +10,33,धाता,सृष्टाओं में +10,33,अहम्,मैं +10,33,विश्वतः,मुखः +10,34,मृत्युः,मृत्यु +10,34,सर्व,हर: +10,34,च,भी +10,34,अहम्,मैं हूँ +10,34,उद्धवः,मूल +10,34,च,भी +10,34,भविष्यताम्,भावी अस्तित्वों में +10,34,कीर्तिः,यश +10,34,श्री:,समृद्वि या सुन्दरता +10,34,वाक्,वाणी +10,34,च,और +10,34,नारीणाम्,स्त्रियों जैसे गुण +10,34,स्मृतिः,"स्मृति, स्मरणशक्ति" +10,34,मेधा,बुद्धि +10,34,धृतिः,साहस +10,34,क्षमा,क्षमा। +10,35,बृहत्,साम +10,35,तथा,भी +10,35,साम्नाम्,सामवेद के स्रोत में +10,35,गायत्रीगायत्री,मंत्र +10,35,छन्दसाम्,समस्त छन्दों में +10,35,अहम्,मैं हूँ +10,35,मासानाम्,बारह महीनों में +10,35,मार्ग,शीर्ष: +10,35,अहम्,मैं +10,35,ऋतूनाम्,सभी ऋतुओं में +10,35,कुसुम,आकर: +10,36,द्यूतम्,जुआ +10,36,छलयताम्,छलियों में +10,36,अस्मि,हूँ +10,36,तेजः,दीप्ति +10,36,तेजस्विनाम्,तेजस्वियों में +10,36,अहम्,मैं हूँ +10,36,जयः,विजय +10,36,अस्मि,हूँ +10,36,व्यवसाय:,दृढ़ संकल्प +10,36,अस्मि,हूँ +10,36,सत्त्वम्,सात्विक भाव +10,36,वताम्,गुणियों में +10,36,अहम्,मैं हूँ। +10,37,वृष्णीनाम्,वृष्णि वंशियों में +10,37,वासुदेवः,"वासुदेव के पुत्र, श्रीकृष्ण" +10,37,अस्मि,हूँ +10,37,पाण्डवानाम्,पाण्डवों में +10,37,धनंजयः,"धन और वैभव का स्वामी, अर्जुन" +10,37,मुनीनाम्,मुनियों में +10,37,अपि,भी +10,37,अहम्,मैं हूँ +10,37,व्यासः,वेदव्यास +10,37,कवीनाम्,महान विचारकों में +10,37,उशना,शुक्राचार्यः कविः +10,38,दण्ड:,दण्ड +10,38,दमयताम्,अराजकता को रोकने वाले साधनों के बीच +10,38,अस्मि,हूँ +10,38,नीतिः,सदाचार +10,38,अस्मि,हूँ +10,38,जिगीषताम्,विजय की इच्छा रखने वालों में +10,38,मौनम्,मौन +10,38,च,और +10,38,एव,भी +10,38,अस्मि,हूँ +10,38,गुह्यानाम्,रहस्यों में ज्ञानम् +10,38,ज्ञान,वताम् +10,38,अहम्,मैं हूँ। +10,39,यत्,जो +10,39,च,और +10,39,अपि,भी +10,39,सर्व,भूतानाम् +10,39,बीजम्,जनक बीज +10,39,तत्,वह +10,39,अहम्,मैं हूँ +10,39,अर्जुन,अर्जुन +10,39,न,नहीं +10,39,तत्,वह +10,39,अस्ति,है +10,39,विना,रहित +10,39,यत्,जो +10,39,स्यात्,हो +10,39,मया,मुझसे +10,39,भूतम्,जीव +10,39,चर,अचरम् +10,40,न,न तो +10,40,अन्तः,अन्त +10,40,अस्ति,है +10,40,मम,मेरी +10,40,दिव्यानाम्,दिव्य +10,40,विभूतीनाम,अभिव्यक्तियाँ परन्तप +10,40,एषः,यह सब +10,40,तु,लेकिन +10,40,उद्देशतः,केवल एक भागः प्रोक्तः +10,40,विभूते:,वैभवों का +10,40,विस्तरः,विशद वर्णन +10,40,मया,मेरे द्वारा। +10,41,यत्,यत् +10,41,विभूति,शक्ति +10,41,मत्,युक्त +10,41,सत्त्वम्,अस्तित्व +10,41,श्री,मत् +10,41,ऊर्जितम्,यशस्वी +10,41,एव,भी +10,41,वा,अथवा +10,41,तत्,तत् +10,41,एव,निःसंदेह +10,41,अवगच्छ,जानो +10,41,त्वम्,तुम +10,41,मम,मेरे +10,41,तेजो,अंश +10,42,अथवा,या +10,42,बहुना,विस्तृत +10,42,एतेन,इसके द्वारा +10,42,किम्,क्या +10,42,ज्ञातेन,तब +10,42,अर्जुन,अर्जुन +10,42,विष्टभ्य,व्याप्त होना और रक्षा करना +10,42,अहम्,मैं +10,42,इदम्,इस +10,42,कृत्स्नम्,सम्पूर्ण +10,42,एक,एक +10,42,अंशेन,अंश +10,42,स्थित:,स्थित हूँ +10,42,जगत्,सृष्टि में। +11,1,अर्जुनः उवाच,अर्जुन ने कहा +11,1,मत्,अनुग्रहाय +11,1,परमम्,परम +11,1,गुह्यम्,गोपनीय +11,1,अध्यात्म,संज्ञितम् +11,1,यत्,जो +11,1,त्वया,आपके द्वारा +11,1,उक्तम्,कहे गये +11,1,वचः,शब्द +11,1,तेन,उससे +11,1,मोहः,मोह +11,1,अयम्,यह +11,1,विगतः,दूर होना +11,1,मम,मेरा। +11,2,भव,उत्पत्ति +11,2,अप्ययौ,संहार +11,2,हि,वास्तव में +11,2,भूतानाम्,समस्त प्राणियों का +11,2,श्रुतौ,सुना गया है +11,2,विस्तरशः,विस्तारपूर्वक +11,2,मया,मेरे द्वारा +11,2,त्वत्त:,आपसे +11,2,कमल,पत्र +11,2,माहात्म्यम्,महिमा +11,2,अपि,भी +11,2,च,तथा +11,2,अव्ययम्,अविनाशी । +11,3,एवम्,इस प्रकार +11,3,एतत्,यह +11,3,यथा,जिस प्रकार +11,3,आत्थ,कहा गया है। त्वम् +11,3,आत्मानम्,स्वयं को +11,3,परम,ईश्वर +11,3,इच्छामि,इच्छा करता हूँ +11,3,ते,आपका +11,3,रुपम्,रूप +11,3,ऐश्वरम्,वैभव +11,3,पुरुष,उत्तम हे पुरुषोत्तम । +11,4,मन्यसे,तुम सोचते हो +11,4,यदि,अगर +11,4,तत्,वह +11,4,शक्यम्,संभव +11,4,मया,मेरे द्वारा +11,4,द्रष्टुम्,देखने के लिए +11,4,इति,इस प्रकार +11,4,प्रभो,परम स्वामी +11,4,योग,ईश्वर +11,4,ततः,तब +11,4,मे,मुझे +11,4,त्वम्,आप +11,4,दर्शय,दिखाये +11,4,आत्मानम्,अपने स्वरूप को +11,4,अव्ययम्,अविनाशी। +11,5,श्रीभगवान् उवाच,परम् प्रभु ने कहा +11,5,पश्य,देखो +11,5,मे,मेरा +11,5,पार्थ,"पृथापुत्र, अर्जुन रुपाणि" +11,5,शतश:,सैकड़ों +11,5,अथ,भी +11,5,सहस्त्रश:,हजारों +11,5,नाना,विधानि विविध रूप वाले +11,5,दिव्यानि,दिव्य +11,5,नाना,विभिन्न प्रकार के +11,5,वर्ण,रंग +11,5,आकृतीनि,आकार +11,5,च,भी। +11,6,पश्य,देखो +11,6,आदित्यान्,अदिति के बारह पुत्रों को +11,6,बसून्,आठ वसुओं को +11,6,रुद्रान्,रुद्र के ग्यारह रूपों को +11,6,अश्विनौ,दो अश्विनी कुमारों को +11,6,मरुतः,उन्चास मरुतों को +11,6,तथा,भी +11,6,बहूनि,अनेक +11,6,अदृष्ट,न देखे हुए +11,6,पूर्वाणि,पहले +11,6,पश्य,देखो +11,6,आश्चर्याणि,आश्चर्यों को +11,6,भारत,भरतवंशियों में श्रेष्ठ अर्थात अर्जुन +11,7,इह,यहाँ +11,7,एक,स्थम् +11,7,जगत्,ब्रह्माण्ड +11,7,कृत्स्नम्,समस्त +11,7,पश्य,देखो +11,7,अद्य,अब +11,7,स,सहित +11,7,चर,चलने वाले +11,7,अचरम्,जड +11,7,मम,मेरे +11,7,देहे,एक शरीर में +11,7,गुडाकेश,"निद्रा पर विजय पाने वाला, अर्जुन" +11,7,यत्,जो +11,7,च,भी +11,7,अन्यत्,"अन्य, और" +11,7,द्रष्टुम्,देखना +11,7,इच्छसि,तुम चाहते हो। +11,8,न,कभी नहीं +11,8,तु,लेकिन +11,8,माम्,मुझको +11,8,शक्यसे,तुम समर्थ हो सकते हो +11,8,द्रष्टुम्,देखने में +11,8,अनेन,इन +11,8,एव,भी +11,8,स्व,चक्षुषा +11,8,दिव्यम्,दिव्य +11,8,ददामि,देता हूँ +11,8,ते,तुमको +11,8,चक्षुः,आँखें +11,8,पश्य,देखो +11,8,मे,मेरी +11,8,योगम्,ऐश्वरम् अद्भुत आश्चर्य। +11,9,संजय उवाच,संजय ने कहा +11,9,एवम्,इस प्रकार से +11,9,उक्त्वा,कहकर +11,9,ततः,तत्पश्चात +11,9,राजन्,राजा +11,9,महा,योग +11,9,हरिः,श्रीकृष्ण +11,9,दर्शयाम्,आस +11,9,पार्थाय,अर्जुन को +11,9,परमम्,दिव्य +11,9,रुपम्,ऐश्वरम् +11,10,��नेक,असंख्य +11,10,वक्त्र,मुख +11,10,नयनम्,नेत्र +11,10,अनेक,अनेक +11,10,अद्भुत,विचित्र +11,10,दर्शनम्,देखना +11,10,अनेक,कई +11,10,दिव्य,अलौकिक +11,10,आभरणम्,आभूषण +11,10,दिव्य,दैवीय +11,10,अनेक,कई +11,10,उद्यत,उठाये हुए +11,10,आयुधम्,शस्त्र +11,10,दिव्य,दिव्य +11,10,माल्य,मालाएँ +11,10,अम्बर,वस्त्र +11,10,धरम्,धारण करना +11,10,दिव्य,दिव्य +11,10,गन्ध,सुगन्धियाँ +11,10,अनुलेपनम्,लगी थीं +11,10,सर्व,समस्त +11,10,आश्चर्यमयम्,अद्भुत +11,10,देवम्,भगवान +11,10,अनंतम्,असीम +11,10,विश्वतः,सभी ओर +11,10,मुखम्,मुख। +11,11,अनेक,असंख्य +11,11,वक्त्र,मुख +11,11,नयनम्,नेत्र +11,11,अनेक,अनेक +11,11,अद्भुत,विचित्र +11,11,दर्शनम्,देखना +11,11,अनेक,कई +11,11,दिव्य,अलौकिक +11,11,आभरणम्,आभूषण +11,11,दिव्य,दैवीय +11,11,अनेक,कई +11,11,उद्यत,उठाये हुए +11,11,आयुधम्,शस्त्र +11,11,दिव्य,दिव्य +11,11,माल्य,मालाएँ +11,11,अम्बर,वस्त्र +11,11,धरम्,धारण करना +11,11,दिव्य,दिव्य +11,11,गन्ध,सुगन्धियाँ +11,11,अनुलेपनम्,लगी थीं +11,11,सर्व,समस्त +11,11,आश्चर्यमयम्,अद्भुत +11,11,देवम्,भगवान +11,11,अनंतम्,असीम +11,11,विश्वतः,सभी ओर +11,11,मुखम्,मुख। +11,12,दिवि,आकाश में +11,12,सूर्य,सूर्य +11,12,सहस्त्रस्य,हजारों +11,12,भवेत्,थे +11,12,युगपत्,एक साथ +11,12,उत्थिता,उदय +11,12,यदि,यदि +11,12,भाः,प्रकाश +11,12,सदृशी,के तुल्य +11,12,सा,वह +11,12,स्यात्,हो +11,12,भासः,तेज +11,12,तस्य,उनका +11,12,महात्म्नः,परम पुरुष का। +11,13,तत्र,वहाँ +11,13,एक,स्थम +11,13,जगत्,ब्रह्माण्ड +11,13,कृत्स्नम्,समस्त +11,13,प्रविभक्तम्,विभाजित +11,13,अनेकधा,अनेक +11,13,अपश्यत्,देखा +11,13,देव,देवस्य +11,13,पाण्डवः,अर्जुन +11,13,तदा,तव। +11,14,ततः,तबसः +11,14,विस्मय,आविष्टः +11,14,हृष्ट,रोमा रोंगटे खड़े होना +11,14,धनंजयः,अर्जुनः प्रणम्य +11,14,सिरसा,सिर के बल +11,14,देवम्,भगवान को +11,14,कृत,अंजलि: +11,14,अभाषत,कहने लगा। +11,15,अर्जुनः,उवाच +11,15,पश्यामि,मैं देखता हूँ +11,15,देवान्,सभी देवताओं को +11,15,तव,आपके +11,15,देव,भगवान +11,15,देहे,शरीर में +11,15,सर्वान्,समस्त +11,15,तथा,भी +11,15,भूत,जीव +11,15,विशेष,सड्घान् +11,15,ब्रह्माणम्,ब्रह्मा को +11,15,ईशम्,शिव को +11,15,कमल,आसन +11,15,ऋषीन्,ऋषियों को +11,15,च,भी +11,15,सर्वान्,समस्त +11,15,उरगान्,सर्पो को +11,15,च,भी +11,15,दिव्यान्,दिव्य। +11,16,अनेक,अनंत +11,16,बाहु,भुजाएँ +11,16,उदर,पेट +11,16,वक्त्र,मुख +11,16,नेत्रम्,आँखें +11,16,पश्यामि,मैं देखता हूँ +11,16,त्वाम्,तुम्हें +11,16,सर्वतः,चारों ओर +11,16,अनंत,रुपम् +11,16,न अन्तम्,अन्तहीन +11,16,न,नहीं +11,16,मध्यम्,मध्य रहित +11,16,न पुनः,न फिर +11,16,तव,आपका +11,16,आदिम्,आरम्भ +11,16,पश्यामि,देखता हूँ +11,16,विश्व,ईश्व��� +11,16,विश्वरूप,ब्रह्माण्डिय रूप में । +11,17,किरीटिनम्,मुकुट से सुसज्जित +11,17,गदिनम्,गदा के साथ +11,17,चक्रिणम्,चक्र सहित +11,17,च,तथा +11,17,तेल: राशिम्,दीप्तिमान लोक +11,17,सर्वतः,सभी ओर +11,17,दीप्ति,मन्तम् +11,17,पश्यामि,देखता हूँ +11,17,त्वाम्,आपको +11,17,दुर्निरीक्ष्यम्,देखने में कठिन +11,17,समन्तात्,चारों ओर +11,17,दीप्त,अनल +11,17,अर्क,सूर्य के समान +11,17,द्युतिम्,धूप +11,17,अप्रमेयम्,असंख्य। +11,18,त्वम्,आप +11,18,अक्षरम्,अविनाशी +11,18,परमम्,परम +11,18,वेदितव्यम्,जानने योग्य +11,18,त्वम्,आप +11,18,अस्य,इस +11,18,विश्वस्य,सृष्टि के +11,18,परम्,परम +11,18,निधानम्,आधार +11,18,त्वम्,आप +11,18,अव्ययः,अविनाशी +11,18,शाश्वत,धर्म +11,18,सनातनः,नित्य +11,18,त्वम्,आप +11,18,पुरुषः,"दिव्य पुरुष, मतः मे" +11,19,अनादि,मध्य +11,19,अनन्त,"असीमित, मध्य और अंत रहित" +11,19,वीर्यम्,शक्ति +11,19,अनंत,असीमित +11,19,बाहुम्,भुजाएँ +11,19,शशि,चन्द्रमा +11,19,सूर्य,सूर्य +11,19,नेत्रम्,आँखें +11,19,पश्यामि,देखता हूँ +11,19,त्वामम्,आपको +11,19,दीप्त,प्रज्ज्वलित +11,19,हुताश,वक्त्रम् +11,19,स्व,तेजसा +11,19,विश्वम्,ब्रह्माण्ड को +11,19,इदम्,इस +11,19,तपन्तम्,जलते हुए। +11,20,द्यौ,आ +11,20,इदम्,इस +11,20,अन्तरम्,मध्य में +11,20,हि,वास्तव में +11,20,व्याप्तम्,व्याप्त +11,20,त्वया,आपके द्वारा +11,20,एकेन,अकेला +11,20,दिश:,दिशाएँच +11,20,सर्वाः,सभी +11,20,दृष्टा,देखकर +11,20,अद्भुतम्,अद्भुत +11,20,रुपम्,रूप को +11,20,उग्रम्,भयानक +11,20,तव,आपके +11,20,इदम्,इस +11,20,लोक,लोक +11,20,त्रयम्,तीन +11,20,प्रव्यथितम्,कम्पन्न +11,20,महा,आत्मन् +11,21,अमी,ये सब +11,21,हि,वास्तव में +11,21,त्वाम्,आपको +11,21,सुर,सडा: +11,21,विशन्ति,प्रवेश कर रहे हैं +11,21,केचित्,कुछ +11,21,भीताः,भयवश +11,21,प्राञ्जलयः,हाथ जोड़े +11,21,गृणनित,प्रशंसा कर रहे हैं +11,21,स्वस्ति,पवित्र हो +11,21,इति,इस प्रकार +11,21,उक्त्वा,कहकर +11,21,महा,ऋषि +11,21,सिद्ध,सड्घा: +11,21,स्तुवन्ति,स्तुति कर रहे हैं +11,21,त्वाम्,आपकी +11,21,स्तुतिभिः,प्रार्थनाओं के साथ +11,21,पुष्पकलाभिः,स्रोतों से। +11,22,रुद्र,शिव का रूप +11,22,आदित्याः,आदित्यगण के पुत्रों +11,22,वसवः,समस्त वसुः ये +11,22,च,तथा +11,22,साध्या:,साध्य +11,22,विश्वे,विश्वदेव +11,22,अश्विनौ,अश्विनीकुमार +11,22,मरुतः,मरुतः च +11,22,उष्म,पा: +11,22,च,तथा +11,22,गन्धर्व,गन्धर्वः यक्ष +11,22,असुर,असुर +11,22,सिद्ध,सिद्धों को +11,22,सड्घा:,समूह +11,22,वीक्षन्ते,देख रहे हैं +11,22,त्वाम्,आपको +11,22,विस्मिता:,आश्चर्यचकित होकर +11,22,च,भी +11,22,एव,वास्तव में +11,22,सर्वे,सब। +11,23,रुपम्,रूप +11,23,महत्,विराट +11,23,ते,आपका +11,23,बहु,अनेक +11,23,वक्त्र,मुख +11,23,नेत्रम्,आँखें +11,23,महाबाहो,"बलिष्ठ भुजाओं वाला, अर्जुन" +11,23,बहु,अनेक +11,23,बाहु,भुजाएँ +11,23,ऊरु,जाँघे +11,23,पादम्,पाँव +11,23,बहुउदरम्,अनेक पेट +11,23,बहु,दंष्ट्रा +11,23,करालम्,भयानक +11,23,दृष्टवा,देखकर +11,23,लोकाः,सारे लोक +11,23,प्रव्यथिताः,भय से त्रस्त +11,23,तथा,उसी प्रकार +11,23,अहम्,मैं। +11,24,नभः,स्पृशम् +11,24,दीप्तम्,प्रकाशित +11,24,अनेक,कई +11,24,वर्णम्,रंग +11,24,व्यात्त,खुले हुए +11,24,अननम्,मुख +11,24,दीप्त,प्रदीप्त +11,24,विशाल,बड़े +11,24,नेत्रम्,आँखें +11,24,दृष्टवा,देखकर +11,24,हि,निश्चय ही +11,24,त्वाम्,आपको +11,24,प्रव्यथित:,अन्तः +11,24,धृतिम्,दृढ़ता से +11,24,न,नहीं +11,24,विन्दामि,पाता हूँ +11,24,शमम्,मानसिक शान्ति को +11,24,च,भी +11,24,विष्णो,भगवान विष्णु। +11,25,दंष्ट्रा,दाँत +11,25,करालानि,भयंकर +11,25,च,भी +11,25,ते,आपके +11,25,मुखानि,मुखों को +11,25,दृष्ट्रा,देखकर +11,25,एव,इस प्रकार +11,25,काल,अनल +11,25,सन्नि,भानि +11,25,दिश:,दिशाएँ +11,25,न,नहीं +11,25,जाने,जानता हूँ +11,25,न,नहीं +11,25,लभे,प्राप्त की +11,25,च,तथा +11,25,शर्म,शांति +11,25,प्रसीद,करुणा +11,25,देव,ईश +11,25,जगत्,निवास +11,26,अमी,ये +11,26,च,भी +11,26,त्वाम्,आपको +11,26,धृतराष्ट्रस्य,धृतराष्ट्र के पुत्राः +11,26,सर्वे,सभी +11,26,सह,सहित +11,26,एव,निश्चय ही +11,26,अवनि,पाल +11,26,सड्.घैः,समूह +11,26,भीष्मः,भीष्म पितामह +11,26,द्रोणः,द्रोणाचार्य +11,26,सूत,पुत्रः +11,26,तथा,भी +11,26,असौ,यह +11,26,सह,साथ +11,26,अस्मदीयैः,हमारी ओर के +11,26,अपि,भी +11,26,योधा,मुख्यैः +11,26,वक्त्रणि,मुखों में +11,26,ते,आपके +11,26,त्वरमाणाः,तीव्रता से +11,26,विशन्ति,प्रवेश कर रहे हैं +11,26,दंष्ट्रा,दाँत +11,26,करालानि,विकराल +11,26,भयानकानि,भयानक +11,26,केचित्,उनमें से कुछ +11,26,विलग्नाः,लगे रहकर +11,26,दशन,अन्तरेषु +11,26,सन्दृश्यन्ते,दिख रहे हैं +11,26,चूर्णित:,पीसते हुए +11,26,उत्तम,अडगैः +11,27,अमी,ये +11,27,च,भी +11,27,त्वाम्,आपको +11,27,धृतराष्ट्रस्य,धृतराष्ट्र के पुत्राः +11,27,सर्वे,सभी +11,27,सह,सहित +11,27,एव,निश्चय ही +11,27,अवनि,पाल +11,27,सड्.घैः,समूह +11,27,भीष्मः,भीष्म पितामह +11,27,द्रोणः,द्रोणाचार्य +11,27,सूत,पुत्रः +11,27,तथा,भी +11,27,असौ,यह +11,27,सह,साथ +11,27,अस्मदीयैः,हमारी ओर के +11,27,अपि,भी +11,27,योधा,मुख्यैः +11,27,वक्त्रणि,मुखों में +11,27,ते,आपके +11,27,त्वरमाणाः,तीव्रता से +11,27,विशन्ति,प्रवेश कर रहे हैं +11,27,दंष्ट्रा,दाँत +11,27,करालानि,विकराल +11,27,भयानकानि,भयानक +11,27,केचित्,उनमें से कुछ +11,27,विलग्नाः,लगे रहकर +11,27,दशन,अन्तरेषु +11,27,सन्दृश्यन्ते,दिख रहे हैं +11,27,चूर्णित:,पीसते हुए +11,27,उत्तम,अडगैः +11,28,यथा,जैसे +11,28,नदीनाम्,नदियों +11,28,बहवः,अनेक +11,28,अम्बु,वेगा: +11,28,समुद्रम्,समुद्र +11,28,एव,निश्चय ही +11,28,अभिमुखा:,की ओर +11,28,द्रवन्ति,तीव्रता से निकलती हैं +11,28,तथा,उसी प्रकार से +11,28,तव,आपके +11,28,अमी,ये +11,28,नर,लोक +11,28,विशनित,प्रवेश कर रहे हैं +11,28,वक्त्रणि,मुखों में +11,28,अभिविज्वलन्ति,जल रहे हैं। यथा +11,28,ज्वलनम्,अग्नि में +11,28,पतड्गा:,पतंगें +11,28,विशन्ति,प्रवेश करते हैं +11,28,नाशाय,विनाश के लिए +11,28,वेगा:,तीव्र वेग से +11,28,तथाएव,उसी प्रकार से +11,28,नाशाय,विनाश के लिए +11,28,विशन्ति,प्रवेश कर रहे हैं +11,28,लोका:,ये लोग +11,28,तव,आपके +11,28,अपि,भी +11,28,वक्त्रणि,मुखों में +11,28,समृद्ध,वेगा: +11,29,यथा,जैसे +11,29,नदीनाम्,नदियों +11,29,बहवः,अनेक +11,29,अम्बु,वेगा: +11,29,समुद्रम्,समुद्र +11,29,एव,निश्चय ही +11,29,अभिमुखा:,की ओर +11,29,द्रवन्ति,तीव्रता से निकलती हैं +11,29,तथा,उसी प्रकार से +11,29,तव,आपके +11,29,अमी,ये +11,29,नर,लोक +11,29,विशनित,प्रवेश कर रहे हैं +11,29,वक्त्रणि,मुखों में +11,29,अभिविज्वलन्ति,जल रहे हैं। यथा +11,29,ज्वलनम्,अग्नि में +11,29,पतड्गा:,पतंगें +11,29,विशन्ति,प्रवेश करते हैं +11,29,नाशाय,विनाश के लिए +11,29,वेगा:,तीव्र वेग से +11,29,तथाएव,उसी प्रकार से +11,29,नाशाय,विनाश के लिए +11,29,विशन्ति,प्रवेश कर रहे हैं +11,29,लोका:,ये लोग +11,29,तव,आपके +11,29,अपि,भी +11,29,वक्त्रणि,मुखों में +11,29,समृद्ध,वेगा: +11,30,लेलिह्यसे,तुम चाट रहे हो +11,30,ग्रसमानः,निगलते हुए +11,30,समन्तात्,सभी दिशाओं से +11,30,लोकान्,लोकों को +11,30,समग्रान्,सभी +11,30,वदनैः,मुखों से +11,30,ज्वलद्भिः,जलते हुए से +11,30,तेजोभि,तेज द्वारा +11,30,आपूर्य,परिपूर्ण करके +11,30,जगत्,ब्रह्माण्ड को +11,30,समग्रम्,सबको +11,30,भासः,किरणें +11,30,लब,आपकी +11,30,उग्राः,भयंकर +11,30,प्रतपन्ति,झुलसा रही हैं +11,30,विष्णो,विष्णु भगवान्। +11,31,आख्याहि,बताना +11,31,मे,मुझे कः +11,31,भवान्,आप +11,31,उग्र,रूपः +11,31,नम:अस्तु,नमस्कार करता हूँ +11,31,ते,आपको +11,31,देव,वर +11,31,प्रसीद,करुणा करो +11,31,विज्ञातुम्,जानने के लिए +11,31,इच्छामि,इच्छुक हूँ +11,31,भवन्तम्,आपको +11,31,आद्यम्,आदि +11,31,न,नहीं +11,31,हि,क्योंकि +11,31,प्रजानामि,जानता हूँ +11,31,तव,आपका +11,31,प्रवृत्तिम्,प्रकृति और प्रयोजन। +11,32,श्रीभगवान्,उवाच +11,32,काल:,काल +11,32,अस्मि,मैं हूँ +11,32,लोक,क्षय +11,32,प्रवद्धोः,शक्तिमान काल +11,32,लोकान्,समस्त लोकों का +11,32,समाहर्तुम्,संहार करने वाला +11,32,इह,इस संसार में +11,32,प्रवृत्तः,लगा हुआ +11,32,ते,बिना +11,32,अपि,भी +11,32,त्वाम्,आपको +11,32,न,कभी नहीं +11,32,भविष्यन्ति,मारे जाना +11,32,सर्वे,सभी +11,32,ये,जो +11,32,अवस्थिताः,व्यूह रचना में खड़े +11,32,प्रति,अनीकेषु +11,32,योधाः,सैनिक। +11,33,तस्मात्,अतएव +11,33,त्वम्,तुम +11,33,उत्तिष्ठ,उठो +11,33,यशः,लभस्व +11,33,जित्वा,विजयी होकर +11,33,शत्रून्,शत्रुओं को +11,33,भुड़क्ष्व,भोग करो +11,33,राज्यम्,राज्य का +11,33,समृद्ध,धन +11,33,एव,निश्चय ही +11,33,एते,ये सब +11,33,निहता:,मारे गये +11,33,पूर्वम्,एव +11,33,निमित्त,मात्रम् +11,33,भव,बनो +11,33,सव्य,साचिन् +11,34,द्रोणम्,च +11,34,भीष्मम्,"भीष्म, च" +11,34,जयद्रथम्,जयद्रथ +11,34,च,और +11,34,कर्णम्,कर्ण तथा +11,34,अन्यान्,अन्य +11,34,अपि,भी +11,34,योधा,वीरान् +11,34,मया,मेरे द्वारा +11,34,हतान्,पहले ही मारे गये +11,34,त्वम्,तुम +11,34,जहि,मारो +11,34,मा,मत +11,34,व्यथिष्ठाः,विक्षुब्ध होओ +11,34,युधयस्व,लड़ो +11,34,जेता असि,तुम विजय पाओगे +11,34,रणे,युद्ध में +11,34,सपत्नान्,शत्रुओं पर। +11,35,संजयः उवाच,संजय ने कहा +11,35,एतत्,इस प्रकार +11,35,श्रुत्वा,सुनकर +11,35,वचनम्,वाणी +11,35,केशवस्य,श्रीकृष्ण की +11,35,कृत,अंजलि: +11,35,वेपमान:,काँपते हुए +11,35,किरीटी,अर्जुन ने +11,35,नमस्कृत्वा,नमस्कार करके +11,35,भूयः,फिर +11,35,एव,भी +11,35,आह,बोला +11,35,कृष्णम्,कृष्ण से +11,35,स,गद्गदम् +11,35,भीतभीत:,भयातुर होकर +11,35,प्रणम्य,झुक कर।। +11,36,अर्जुन उवाच,अर्जुन ने कहा +11,36,स्थाने,यह एकदम ठीक है +11,36,हृषीक,ईश +11,36,तव,आपके +11,36,प्रकीर्त्या,यश +11,36,जगत्,सारा संसार +11,36,प्रहृष्यति,हर्षित होना +11,36,अनुरश्यते,आकृष्ट होना +11,36,च,तथा +11,36,रक्षांसि,असुरगण +11,36,भीतानि,भयातुर +11,36,दिश:,समस्त दिशाओं में +11,36,द्रवन्ति,भागना +11,36,सर्वे,सभी +11,36,नमस्यन्ति,नमस्कार करते हैं +11,36,च,भी +11,36,सिद्ध,सड्घा: +11,37,कस्मात्,क्यों +11,37,च,और +11,37,ते,आपको +11,37,न,नमेरन् +11,37,गरीयसे,जो श्रेष्ठ हैं +11,37,ब्रह्मणः,ब्रह्मा की अपेक्षाः अपि यद्यपि +11,37,आदि,कर्त्रे +11,37,अनंत,असीम +11,37,देव,ईश +11,37,जगत्,निवास +11,37,त्वम्,आप हैं +11,37,अक्षर्,अविनाशी +11,37,सत्,असत् +11,37,तत्,वहाँ +11,37,परम्,परे +11,37,यत,जो ना करे। +11,38,त्वम्,आप +11,38,आदि,देवः +11,38,अस्य,इस +11,38,विश्वस्य,ब्रह्माण्ड का +11,38,परम्,दिव्य +11,38,निधानम्,आश्रय स्थल +11,38,वेत्ता,जानने वाला +11,38,असि,हो +11,38,वेद्यम्,जानने योग्य +11,38,च,तथा +11,38,परम,सर्वोच्च +11,38,च,और +11,38,धाम,"वास, आश्रय" +11,38,त्वया,आपके द्वारा +11,38,ततम्,व्याप्त +11,38,विश्वम्,विश्व +11,38,अनंत,रुप +11,39,वायुः,वायुदेव +11,39,यमः,मृत्यु का देवता +11,39,अग्नि:,अग्नि +11,39,वरुणः,जल +11,39,शश,अड्क: +11,39,प्रजापतिः,ब्रह्मा +11,39,त्वम्,आप +11,39,प्र,पिताम��ः +11,39,च,तथा +11,39,नमः,मेरा नमस्कार +11,39,नमः,पुनः नमस्कार +11,39,ते,आपको +11,39,अस्तु,हो +11,39,सहस्र,कृत्वः +11,39,पुनःच,और फिर +11,39,भूयः,फिर +11,39,अपि,भी +11,39,नमः,नमस्कार +11,39,नमःते,आपको मेरा नमस्कार है। +11,40,नमः,नमस्कार +11,40,पुरस्तात्,सामने से +11,40,अथ,भी +11,40,पृष्ठतः,पीछे से +11,40,ते,आपको +11,40,नम:अस्तु,मैं नमस्कार करता हूँ +11,40,ते,आपको +11,40,सर्वतः,सभी दिशाओं से +11,40,एव,वास्तव में +11,40,सर्व,सब +11,40,अनंत,वीर्य +11,40,अमित,विक्रमः +11,40,त्वम्,आप +11,40,सर्वम्,सब कुछ +11,40,समाप्नोषि,व्याप्त रहना +11,40,ततः,अतएव +11,40,असि,हो +11,40,सर्वः,सब कुछ। +11,41,सखा,मित्र +11,41,इति,इस प्रकार +11,41,मत्वा,सोचकर +11,41,प्रसभम्,हठपूर्वक +11,41,यत्,जो भी +11,41,उक्तम्,कहा गया +11,41,हे कृष्ण,कृष्ण +11,41,हे यादव,"हे यादव, श्रीकृष्ण जिनका जन्म यदु वंश में हुआ" +11,41,हे सखा,हे मित्र +11,41,इति,इस प्रकार +11,41,अजानता,अज्ञानता से +11,41,महिमानम्,शक्तिशाली +11,41,तब,आपकी +11,41,इदम्,यह +11,41,मयां,मेरे द्वारा +11,41,प्रमादात्,असावधानी से +11,41,प्रणयेन,प्रेमवश +11,41,वापि,या तो +11,41,यत्,जो +11,41,च,भी +11,41,अवहास,अर्थम् +11,41,असत्,कृतः +11,41,असि,हो +11,41,विहार,विश्राम करते +11,41,शय्या,लेटे रहने पर +11,41,आसन,बैठे रहने पर +11,41,भोजनेषु,या भोजन करते समयः एकः +11,41,अथवा,या +11,41,अपि,भी +11,41,अच्युत,"अच्युत, श्रीकृष्ण" +11,41,तत्,समक्षम् +11,41,तत्,उन सभी +11,41,क्षामये,क्षमा की याचना करता हूँ +11,41,त्वाम्,आपसे +11,41,अहम्,मैं +11,41,अप्रमेयम्,अचिन्तय। +11,42,सखा,मित्र +11,42,इति,इस प्रकार +11,42,मत्वा,सोचकर +11,42,प्रसभम्,हठपूर्वक +11,42,यत्,जो भी +11,42,उक्तम्,कहा गया +11,42,हे कृष्ण,कृष्ण +11,42,हे यादव,"हे यादव, श्रीकृष्ण जिनका जन्म यदु वंश में हुआ" +11,42,हे सखा,हे मित्र +11,42,इति,इस प्रकार +11,42,अजानता,अज्ञानता से +11,42,महिमानम्,शक्तिशाली +11,42,तब,आपकी +11,42,इदम्,यह +11,42,मयां,मेरे द्वारा +11,42,प्रमादात्,असावधानी से +11,42,प्रणयेन,प्रेमवश +11,42,वापि,या तो +11,42,यत्,जो +11,42,च,भी +11,42,अवहास,अर्थम् +11,42,असत्,कृतः +11,42,असि,हो +11,42,विहार,विश्राम करते +11,42,शय्या,लेटे रहने पर +11,42,आसन,बैठे रहने पर +11,42,भोजनेषु,या भोजन करते समयः एकः +11,42,अथवा,या +11,42,अपि,भी +11,42,अच्युत,"अच्युत, श्रीकृष्ण" +11,42,तत्,समक्षम् +11,42,तत्,उन सभी +11,42,क्षामये,क्षमा की याचना करता हूँ +11,42,त्वाम्,आपसे +11,42,अहम्,मैं +11,42,अप्रमेयम्,अचिन्तय। +11,43,पिता,पिता +11,43,असि,आप हैं +11,43,लोकस्य,पूर्ण ब्रह्माण्ड +11,43,चर,सचल +11,43,अचरस्य,अचल +11,43,त्वम्आप,हैं +11,43,अस्य,इसके +11,43,पूज्य:,पूज्यनीय +11,43,च,भी +11,43,गुरु:,आध्यात��मिक गुरु +11,43,गरीयान्,"यशस्वी, महिमामय" +11,43,न,कभी नहीं +11,43,त्वत्,समः +11,43,अस्ति,है +11,43,अभ्यधिक:,बढ़ कर +11,43,कुत:,किस तरह सम्भव है +11,43,अन्य:,दूसरा +11,43,लोक,त्रये तीनों लोकों में +11,43,अपि,भी +11,43,अप्रतिम,प्रभाव +11,44,तस्मात् इसलिएः प्रणम्य,नतमस्तक होकर प्रणाम करना +11,44,प्राणिधाय,साष्टांग प्रणाम करके +11,44,कायम्,शरीर को प्रसादये +11,44,त्वाम्,आपसे +11,44,अहम्,मैं +11,44,ईशम्,परमेश्वर +11,44,ईड्यम्,पूजनीय +11,44,पिता,पिता +11,44,पुत्रस्य,पुत्र का +11,44,इव,जैसे +11,44,सख्युः,मित्र के साथ +11,44,प्रियः,प्रेमी +11,44,प्रियायाः,प्रिया का +11,44,अर्हसि,आपको चाहिए +11,44,देव,मेरे प्रभु +11,44,सोढुम्,क्षमा करना। +11,45,अदृष्ट,पूर्वम् +11,45,हृर्षितः,अति प्रसन्न +11,45,अस्मि,मैं अति प्रसन्न हूँ +11,45,दृष्टा,देखकर +11,45,भयेन,भय से +11,45,च,भी +11,45,प्रव्यथितम्,कम्पन +11,45,मन:,मन +11,45,मे,मेरा +11,45,तत्,वह +11,45,एव,निश्चय ही +11,45,मे,मुझको +11,45,दर्शय,दिखलाइये +11,45,देव,परम प्रभु +11,45,रुपम्,रूप +11,45,प्रसीद,कृपया करुणा करके +11,45,देव,देवेश +11,45,जगत्,निवास हे ब्रह्माण्ड के आश्रय। +11,46,किरीटिनम्,मुकुट धारण करना +11,46,गदिनम्,गदाधारी +11,46,चक्रहस्तम्,हाथ में चक्रधारण किए हुए +11,46,इच्छामि,इच्छुक हूँ +11,46,त्वाम्,आपको +11,46,द्रष्टुम्,देखना +11,46,अहम्,मैं +11,46,तथा एवं,उसी प्रकार से +11,46,तेन,एव +11,46,रुपेण,रूप में +11,46,चतुः जेन,चतुर्भुजाधारी +11,46,सहस्र,बाहो +11,46,भव,हो जाइये +11,46,विश्वमूर्ते,विश्वरूप। +11,47,श्रीभगवान्,उवाच +11,47,मया,मेरे द्वारा +11,47,प्रसकेन,प्रसन्न होकर +11,47,तव,तुम्हारे साथ +11,47,अर्जुन,अर्जुन +11,47,इदम्,इस +11,47,रुपम्,रूप को +11,47,परम्,दिव्य +11,47,दर्शितम्,दिखाया गया +11,47,आत्म,योगात् +11,47,तेज:मयम्,तेज से पूर्ण +11,47,विश्वम्,समस्त ब्रह्माण्ड को +11,47,अनंतम्,असीम +11,47,आद्यम्,आदिः यत् +11,47,मे,मेरा +11,47,त्वत्,अन्येन तुम्हारे अलावा अन्य किसी द्वारा +11,47,न,दृष्टपूर्वम् +11,48,न,नहीं +11,48,वेद,यज्ञ +11,48,अध्ययनैः,वेदों के अध्ययन से +11,48,न,नहीं +11,48,दानैः,दान के द्वारा +11,48,न,कभी नहीं +11,48,च,भी +11,48,क्रियाभिः,कर्मकाण्डों से +11,48,न,कभी नहीं +11,48,तपोभिः,तपस्या द्वारा +11,48,उग्रैः,कठोर +11,48,एवम्,रूप: +11,48,शक्यः,समर्थ +11,48,अहम्,मैं +11,48,नृ,लोके +11,48,द्रष्टुम्,देखे जाने में +11,48,त्वत्,तुम्हारे अलावा +11,48,अन्येन,अन्य के द्वारा +11,48,कुरु,प्रवीर +11,49,मा,ते +11,49,न,होवो +11,49,व्यथा,भयभीत +11,49,मा,न हो +11,49,च,और +11,49,विमूढ,भावः +11,49,दृष्टा,देखकर +11,49,रुपम्,रूप को +11,49,घोरम्,भयानक +11,49,ईदृक्,इस प्रका�� का +11,49,मम,मेरे +11,49,इदम्,इस +11,49,व्यपेत,भी: +11,49,प्रीत,मनाः +11,49,पुनः,फिर +11,49,त्वम्,तुम +11,49,तत्,उस +11,49,एव,इस प्रकार +11,49,मे,मेरे +11,49,रूपम्,रूप को +11,49,इदम्,इस +11,49,प्रपश्य,देखो। +11,50,सन्जय उवाच,संजय ने कहा +11,50,इति,इस प्रकार +11,50,अर्जुनम्,अर्जुन को +11,50,वासुदेवः,"वासुदेव पुत्र, श्रीकृष्ण ने" +11,50,तथा,उस प्रकार से +11,50,उक्त्वा,कहकर +11,50,स्वकम्,अपना साकार रूप +11,50,रूपम्,रूप को +11,50,दर्शयाम्,आस +11,50,भूयः,फिर +11,50,आश्वासयाम्,आस +11,50,च,भी +11,50,भीतम्,भयभीत +11,50,एनम्,उसको +11,50,भूत्वा,होकर +11,50,पुनः,फिर +11,50,सौम्य वपुः,सुन्दर रूप +11,50,महा,आत्मा +11,51,अर्जुनःउवाच,अर्जुन ने कहा +11,51,दृष्टा,देखकर +11,51,इदम्,इस +11,51,मानुषम्,मानव +11,51,रूपम्,रूप को +11,51,तव,आपके +11,51,सौम्यम्,अत्यन्त सुंदर +11,51,जनार्दन,"लोगों का पालन करने वाला, कृष्ण" +11,51,इदानीम्,अब +11,51,अस्मि,हूँ +11,51,संवृत्त:,स्थिर +11,51,सचेता:,अपनी चेतना में +11,51,प्रकृतिम्,अपनी समान्य अवस्था में +11,51,गतः,आ जाना +11,52,श्रीभगवान् उवाच,परम् प्रभु ने कहा +11,52,सु,दुर्दर्शम् +11,52,इदम्,इस +11,52,रुपम्,रूप को +11,52,दृष्टवान् असि,जो तुमने देखा +11,52,यत्,जो +11,52,मम,मेरे +11,52,देवा:,स्वर्ग के देवता +11,52,अपि,भी +11,52,अस्य,इस +11,52,रुपस्य,रूप का +11,52,नित्यम्,शाश्वत +11,52,दर्शन,काड्.क्षिणः +11,52,न,कभी नहीं +11,52,अहम्,मैं +11,52,वेदैः,वेदाध्ययन से +11,52,न,कभी नहीं +11,52,तपसा,कठिन तपस्या द्वारा +11,52,न,कभी नहीं +11,52,दानेन,दान से +11,52,न,कभी नहीं +11,52,च,भी +11,52,इज्यया,पूजा से +11,52,शक्यः,यह सम्भव है +11,52,एवम्,विधः +11,52,द्रष्टुम्,देख पाना +11,52,दृष्टवान्,देख रहे +11,52,असि,तुम हो +11,52,माम्,मुझको +11,52,यथा,जिस प्रकार। +11,53,श्रीभगवान् उवाच,परम् प्रभु ने कहा +11,53,सु,दुर्दर्शम् +11,53,इदम्,इस +11,53,रुपम्,रूप को +11,53,दृष्टवान् असि,जो तुमने देखा +11,53,यत्,जो +11,53,मम,मेरे +11,53,देवा:,स्वर्ग के देवता +11,53,अपि,भी +11,53,अस्य,इस +11,53,रुपस्य,रूप का +11,53,नित्यम्,शाश्वत +11,53,दर्शन,काड्.क्षिणः +11,53,न,कभी नहीं +11,53,अहम्,मैं +11,53,वेदैः,वेदाध्ययन से +11,53,न,कभी नहीं +11,53,तपसा,कठिन तपस्या द्वारा +11,53,न,कभी नहीं +11,53,दानेन,दान से +11,53,न,कभी नहीं +11,53,च,भी +11,53,इज्यया,पूजा से +11,53,शक्यः,यह सम्भव है +11,53,एवम्,विधः +11,53,द्रष्टुम्,देख पाना +11,53,दृष्टवान्,देख रहे +11,53,असि,तुम हो +11,53,माम्,मुझको +11,53,यथा,जिस प्रकार। +11,54,भक्त्या,भक्ति से +11,54,तु,अकेले +11,54,अनन्यया,अनन्य भक्ति +11,54,शक्यः,सम्भव +11,54,अहम्,मैं +11,54,एवम्,विध: +11,54,अर्जुन,हे अर्जुन +11,54,ज्ञातुम,जानना +11,54,द्रष्टुम्,देखन�� +11,54,च,तथा +11,54,तत्त्वेन वास्तव में प्रवेष्टुम्,मुझमें एकीकृत होने से +11,54,च,भी +11,54,परन्तप,"शत्रुहंता,अर्जुन।" +11,55,मत्,कर्म +11,55,मत्,परमः +11,55,मत्,भक्त: +11,55,सङ्गवर्जितः,आसक्ति रहित +11,55,निरः,शत्रुतारहित +11,55,सर्व,भूतेषु +11,55,यः,जो +11,55,सः,वह +11,55,माम्,मुझको +11,55,एति,प्राप्त करता है +11,55,पाण्डव,"पाण्डु पुत्र, अर्जुन।" +12,1,अर्जुनः उवाच,अर्जुन ने कहा +12,1,एवम्,इस प्रकार +12,1,सतत,निरंतर +12,1,युक्ताः,समर्पित +12,1,ये,जो +12,1,भक्ताः,भक्तजन +12,1,त्वाम्,आपको +12,1,पर्युपासते,आराधना करते हैं +12,1,ये,जो +12,1,च,भी +12,1,अपि,पुनः +12,1,अक्षरम्,अविनाशी +12,1,अव्यक्तम्,अप्रकट को +12,1,तेषाम्,उनमें से +12,1,के,कौन +12,1,योगवित्,तमा: +12,2,श्री,भगवान् उवाच +12,2,मयि,मुझमें +12,2,आवेश्य,स्थिर करके +12,2,मन:,मन को +12,2,ये,जो +12,2,माम्,मुझमें +12,2,नित्य,युक्ताः +12,2,उपासते,उपासना करते हैं +12,2,श्रद्धया,श्रद्धापूर्वक +12,2,परया,उत्तम +12,2,उपेता:,युक्त होकर +12,2,ते,वे +12,2,मे,मेरे द्वारा +12,2,युक्त,तमा: +12,2,मता:,मैं मानता हूँ। +12,3,ये,जो +12,3,तु,लेकिन +12,3,अक्षरम्,अविनाशी +12,3,अनिर्देश्यम्,अनिचित +12,3,अव्यक्तम्,अप्रकट +12,3,पर्युपासते,आराधना करना +12,3,सर्वत्र,गम् +12,3,अचिन्त्यम्,अकल्पनीय +12,3,च,और +12,3,कूट,स्थम् +12,3,अचलम्,अचल +12,3,ध्रुवम्,शाश्वत +12,3,सकियम्य,वश में करके +12,3,इन्द्रियग्रामम्,समस्त इन्द्रियों को +12,3,सर्वत्र,सभी स्थानों में +12,3,सम,बुद्धयः +12,3,ते,वे +12,3,प्राप्नुवन्ति,प्राप्त करते हैं +12,3,माम्,मुझको +12,3,एव,निश्चय ही +12,3,सर्व,भूत +12,3,रताः,तल्लीन। +12,4,ये,जो +12,4,तु,लेकिन +12,4,अक्षरम्,अविनाशी +12,4,अनिर्देश्यम्,अनिचित +12,4,अव्यक्तम्,अप्रकट +12,4,पर्युपासते,आराधना करना +12,4,सर्वत्र,गम् +12,4,अचिन्त्यम्,अकल्पनीय +12,4,च,और +12,4,कूट,स्थम् +12,4,अचलम्,अचल +12,4,ध्रुवम्,शाश्वत +12,4,सकियम्य,वश में करके +12,4,इन्द्रियग्रामम्,समस्त इन्द्रियों को +12,4,सर्वत्र,सभी स्थानों में +12,4,सम,बुद्धयः +12,4,ते,वे +12,4,प्राप्नुवन्ति,प्राप्त करते हैं +12,4,माम्,मुझको +12,4,एव,निश्चय ही +12,4,सर्व,भूत +12,4,रताः,तल्लीन। +12,5,क्लेशः,कष्ट +12,5,अधिकतरः,भरा होना +12,5,तेषाम्,उन +12,5,अव्यक्त,अव्यक्त के प्रति +12,5,आसक्त,अनुरक्त +12,5,चेतसाम्,मन वालों का +12,5,अव्यक्ता,अव्यक्त की ओर +12,5,हि,वास्तव में +12,5,गतिः,प्रगति +12,5,दुःखम्,दुख के साथ +12,5,देह,वद्धिः +12,5,अवाप्यते,प्राप्त किया जाता है। +12,6,ये,जो +12,6,तु,लेकिन +12,6,सर्वाणि,समस्त +12,6,कर्माणि,कर्म +12,6,मयि,मुझे सन्नयस्य +12,6,मत्,पराः +12,6,अनंयेन,अ��न्य +12,6,एव,निश्चय ही +12,6,योगेन,भक्ति युक्त होकर +12,6,माम्,मुझको +12,6,ध्यायन्तः,ध्यान करते हुए +12,6,उपासते,उपासना करते हुए +12,6,तेषाम्,उनका +12,6,अहम्,मैं +12,6,समुद्धर्ता,उद्धारक +12,6,मृत्यु,मृत्यु के +12,6,संसार,संसार रूपी +12,6,सागरत्,जन्म और मृत्यु के सागर से +12,6,भवामि,होता हूँ +12,6,न,नहीं +12,6,चिरात्,दीर्घ काल +12,6,पार्थ,"पृथा पुत्र, अर्जुन" +12,6,मयि,मुझ पर +12,6,आवेशित,चेतसाम् +12,7,ये,जो +12,7,तु,लेकिन +12,7,सर्वाणि,समस्त +12,7,कर्माणि,कर्म +12,7,मयि,मुझे सन्नयस्य +12,7,मत्,पराः +12,7,अनंयेन,अनन्य +12,7,एव,निश्चय ही +12,7,योगेन,भक्ति युक्त होकर +12,7,माम्,मुझको +12,7,ध्यायन्तः,ध्यान करते हुए +12,7,उपासते,उपासना करते हुए +12,7,तेषाम्,उनका +12,7,अहम्,मैं +12,7,समुद्धर्ता,उद्धारक +12,7,मृत्यु,मृत्यु के +12,7,संसार,संसार रूपी +12,7,सागरत्,जन्म और मृत्यु के सागर से +12,7,भवामि,होता हूँ +12,7,न,नहीं +12,7,चिरात्,दीर्घ काल +12,7,पार्थ,"पृथा पुत्र, अर्जुन" +12,7,मयि,मुझ पर +12,7,आवेशित,चेतसाम् +12,8,मयि,मुझमें +12,8,एव,अकेले ही +12,8,मन:,मन को +12,8,आधत्स्व,स्थिर +12,8,मयि,मुझमें +12,8,बुद्धिम्,बुद्धि +12,8,निवेशय,समर्पित करो +12,8,निवसिष्यसि,तुम सदैव निवास करोगे +12,8,मयि,मुझमें +12,8,एव,अकेले ही +12,8,अतःऊर्ध्वम्,तत्पश्चात +12,8,न,कभी नहीं +12,8,संशयः,सन्देह। +12,9,अथ,"यदि," +12,9,चित्तम्,मन +12,9,समाधातुम्,स्थिर करना +12,9,न,नहीं +12,9,शक्नोषि,तुम समर्थ नहीं हो +12,9,मयि,मुझ पर +12,9,स्थिरम्,स्थिर भाव से +12,9,अभ्यास,योगेन +12,9,ततः,तब +12,9,माम्,मेरा +12,9,इच्छ,इच्छा +12,9,आप्तुम्,प्राप्त करने की +12,9,धनम्,जय +12,10,अभ्यासे,अभ्यास में +12,10,अपि,यदि +12,10,असमर्थ:,असमर्थ +12,10,असि,हो +12,10,मत्,कर्म परम +12,10,भव,बनो +12,10,मत्,अर्थम् मेरे लिए +12,10,अपि,भी +12,10,कर्माणि,कर्म +12,10,कुर्वन्,करते हुए +12,10,सिद्धिम्,पूर्णता को +12,10,अवाप्स्यसि,तुम प्राप्त करोगे। +12,11,अथ,यदि +12,11,एतत्,यह +12,11,अपि,भी +12,11,अशक्त:,असमर्थ +12,11,असि,तुम हो +12,11,कर्तुम्,कार्य करना +12,11,मत्,मेरे प्रति +12,11,योगम्,मेरे प्रति समर्पण +12,11,आश्रित:,निर्भर +12,11,सर्व,कर्म +12,11,फल,त्यागम् +12,11,ततः,तब +12,11,कुरु,करो +12,11,यत,आत्मवान् +12,12,श्रेयः,उत्तम +12,12,हि,निश्चय ही +12,12,ज्ञानम्,ज्ञान +12,12,अभ्यासात्,शारीरिक अभ्यास से +12,12,ज्ञानात्,ज्ञान से +12,12,ध्वानम्,ध्यान +12,12,विशिष्यते,श्रेष्ठ समझा जाता है +12,12,ध्यानात्,ध्यान से +12,12,कर्म,फल +12,12,त्यागात्,त्याग से +12,12,शान्तिः,शान्ति +12,12,अनंतरम्,शीध्र। +12,13,अद्वेष्टा द्वेष रहितः सर्व,भूतानाम +12,13,च,भी +12,13,निर्मम,स���वामित्व की आसक्ति से रहित +12,13,निरहंकारः,अहंकार रहित +12,13,सम,समभाव +12,13,दुःख,दुख +12,13,सुखः,सुख +12,13,क्षमी,क्षमावान +12,13,सन्तुष्टः,तुष्ट +12,13,सततम्,निरंतर +12,13,योगी,भक्ति में एकीकृत +12,13,यत,आत्मा आत्मसंयमी +12,13,दृढ,निश्चयः +12,13,मयि,मुझमें +12,13,अर्पित,समर्पित +12,13,मन:,मन को +12,13,बुद्धिः,तथा बुद्धि को +12,13,यः,जो +12,13,मत्,भक्त: +12,13,स:,वह +12,13,मे,मेरा +12,13,प्रियः,अतिप्रिय। +12,14,अद्वेष्टा द्वेष रहितः सर्व,भूतानाम +12,14,च,भी +12,14,निर्मम,स्वामित्व की आसक्ति से रहित +12,14,निरहंकारः,अहंकार रहित +12,14,सम,समभाव +12,14,दुःख,दुख +12,14,सुखः,सुख +12,14,क्षमी,क्षमावान +12,14,सन्तुष्टः,तुष्ट +12,14,सततम्,निरंतर +12,14,योगी,भक्ति में एकीकृत +12,14,यत,आत्मा आत्मसंयमी +12,14,दृढ,निश्चयः +12,14,मयि,मुझमें +12,14,अर्पित,समर्पित +12,14,मन:,मन को +12,14,बुद्धिः,तथा बुद्धि को +12,14,यः,जो +12,14,मत्,भक्त: +12,14,स:,वह +12,14,मे,मेरा +12,14,प्रियः,अतिप्रिय। +12,15,यस्मात्,जिसके द्वारा +12,15,न,कभी नहीं +12,15,उद्विजते,उत्तेजित +12,15,लोकः,लोग +12,15,लोकात्,लोगों से +12,15,न,कभी नहीं +12,15,उद्विजते,विक्षुब्ध होना +12,15,च,भी +12,15,यः,जो +12,15,हर्ष,प्रसन्न +12,15,अमर्ष,अप्रसन्नता +12,15,भय,भय +12,15,उद्वेगैः,चिन्ता से +12,15,मुक्त:,मुक्त +12,15,यः,जो +12,15,सः,वह +12,15,च,और +12,15,मे,मेरा +12,15,प्रियः,प्रिय। +12,16,अनपेक्ष:,सासांरिक प्रलोभनों से उदासीन +12,16,शुचि:,शुद्ध +12,16,दक्षः,कुशल +12,16,उदासीन:,चिन्ता रहित +12,16,गत,व्यथ: +12,16,सर्व,आरम्भ +12,16,परित्यागी,त्याग करने वाला +12,16,यः,जो +12,16,मत्,भक्त: +12,16,सः,वह +12,16,मे,मेरा +12,16,प्रियः,अति प्रिय। +12,17,यः,जो +12,17,न,न तो +12,17,हृष्यति,प्रसन्न होता है +12,17,न,नहीं +12,17,द्वेष्टि,निराश होता है +12,17,न,कभी न हीं +12,17,शोचति,शोक करता है +12,17,न,न तो +12,17,काड क्षति,सुख की लालसा करता है +12,17,शुभ,अशुभ परित्यागी +12,17,भक्ति से परिपूर्ण,मान् +12,17,यः,जो +12,17,स:,वह है +12,17,मे,मेरा +12,17,प्रियः,प्रिय। +12,18,समः,समान +12,18,शत्रे,शत्र में +12,18,च,और +12,18,मित्रे,मित्र में +12,18,च,भी +12,18,तथा,उसी प्रकार +12,18,मान,अपमानयो +12,18,मान,अपमान में +12,18,शीत,उष्ण +12,18,सुख,सुख में +12,18,दुःखेषु,दुख में +12,18,समः,समभाव +12,18,सडग,विवर्जितः +12,18,तुल्य,जैसा +12,18,निन्दा,स्तुतिः +12,18,मौनी,मौन +12,18,सन्तुष्ट:,तृप्त +12,18,येन केनचित्,किसी प्रकार से +12,18,अनिकेतः,घर गृहस्थी के प्रति ममतारहित +12,18,स्थिरः,दृढ़ः मतिः +12,18,भक्तिमान्,भक्ति में लीन +12,18,मे,मेरा +12,18,प्रियः,प्रिय +12,18,नरः,मनुष्य। +12,19,समः,समान +12,19,शत्रे,शत्र में +12,19,च,और +12,19,मित्रे,मित्र में +12,19,च,भी +12,19,तथा,उसी प्रकार +12,19,मान,अपमानयो +12,19,मान,अपमान में +12,19,शीत,उष्ण +12,19,सुख,सुख में +12,19,दुःखेषु,दुख में +12,19,समः,समभाव +12,19,सडग,विवर्जितः +12,19,तुल्य,जैसा +12,19,निन्दा,स्तुतिः +12,19,मौनी,मौन +12,19,सन्तुष्ट:,तृप्त +12,19,येन केनचित्,किसी प्रकार से +12,19,अनिकेतः,घर गृहस्थी के प्रति ममतारहित +12,19,स्थिरः,दृढ़ः मतिः +12,19,भक्तिमान्,भक्ति में लीन +12,19,मे,मेरा +12,19,प्रियः,प्रिय +12,19,नरः,मनुष्य। +12,20,ये,जो +12,20,तु,लेकिन +12,20,धर्म,बुद्धि रूपी +12,20,अमृतम्,अमृता +12,20,इदम्,इस +12,20,यथा,जिस प्रकार से +12,20,उक्तम्,कहा गया +12,20,पर्युपासते,अनन्य भक्ति +12,20,श्रद्धाना:,श्रद्धा के साथ +12,20,मत्,परमा: +12,20,भक्ताः,भक्तजन +12,20,ते,वे +12,20,अतीव,अत्यधिक +12,20,मे,मेरे +12,20,प्रिया:,प्रिय।। +13,1,श्रीभगवान्,उवाच +13,1,इदम्,यह +13,1,शरीरम्,शरीर +13,1,कौन्तेय,"कुन्तीपुत्र, अर्जुन क्षेत्रम्" +13,1,इति,इस प्रकार +13,1,अभिधीयते,कहा जाता है +13,1,एतत्,यह +13,1,यः,जो +13,1,वेत्ति,जानता है +13,1,तम्,वह मनुष्यः प्राहुः +13,1,क्षेत्र,ज्ञः +13,1,इति,इस प्रकार +13,1,तत्,विदः +13,2,क्षेत्र,ज्ञम् +13,2,च,भी +13,2,अपि,निश्चय ही +13,2,माम्,मुझको +13,2,विद्धि,जानो +13,2,सर्व,समस्त +13,2,क्षेत्रेषु,शरीर के कर्मों का क्षेत्र +13,2,भारत,भरतवंशी +13,2,क्षेत्र,कर्मक्षेत्र +13,2,क्षेत्र,ज्ञयो: +13,2,ज्ञानम्,जानना +13,2,यत्,जो +13,2,तत्,वह +13,2,ज्ञानम्,ज्ञान +13,2,मतम्,मत +13,2,मम,मेरा। +13,3,तत्,वह +13,3,क्षेत्रम्,कर्मक्षेत्र +13,3,यत्,क्या +13,3,च,भी +13,3,यादृक्,उसकी प्रकृति +13,3,च,भी +13,3,यत्,विकारि +13,3,च,भी +13,3,यत्,जोः सः +13,3,च,भी +13,3,यः,जो +13,3,यत्,प्रभाव: +13,3,च,भी +13,3,तत्,उस +13,3,समासेन,संक्षेप में +13,3,मे,मुझसे +13,3,शृणु,सुनो। +13,4,ऋषिभिः,महान ऋषियों द्वारा +13,4,बहुधा,अनेक प्रकार से +13,4,गीतम्,वर्णित +13,4,छन्दोभिः,वैदिक मन्त्रो में +13,4,विविधो:,विविध प्रकार के +13,4,पृथक्,अलग +13,4,ब्रह्म,सूत्र +13,4,पदैः,स्त्रोतों द्वारा +13,4,च,भी +13,4,एव,विशेष रूप से +13,4,हेतु,मद्भिः +13,4,विनिश्चितैः,निर्णयात्मक साक्ष्यों। +13,5,महा,भूतानि +13,5,अहडकार:,अभिमान +13,5,बुद्धिः,बुद्धि +13,5,अव्यक्तम्,अप्रकट मौलिक पदार्थ +13,5,एव,वास्तव में +13,5,च,भी +13,5,इन्द्रियाणि,इन्द्रियाँ +13,5,दश,एकम् +13,5,च,भी +13,5,पञ्च,पाँच +13,5,च,भी +13,5,इन्द्रिय,गो +13,6,इच्छा,कामना +13,6,द्वेषः,घृणा +13,6,सुखम्,"सुख, दुःखम्" +13,6,सडघातः,सकल +13,6,चेतना,शरीर में चेतना +13,6,धृतिः,इच्छा शक्ति +13,6,एतत्,सब +13,6,क्षेत्रम्,कर्मों का क्षेत्र +13,6,समासेन,सम्मिलित करना +13,6,स,विकारम् विकारों सहित +13,6,उदात्रतम्,कहा गया। +13,7,अमानित्वम्,विनम्रता +13,7,अदम्भित्वम्,आडम्बर से मुक्ति +13,7,अहिंसा,अहिंसा +13,7,क्षान्ति:,क्षमाशील +13,7,आर्जवम्,सरलता +13,7,आचार्य,उपासनम् +13,7,शौचम्,मन और शरीर की पवित्रता +13,7,स्थैर्यम्,दृढ़ता +13,7,आत्म,विनिग्रहः +13,7,इन्द्रियम,अर्थेषु +13,7,वैराग्यम्,विरक्ति +13,7,अनहंकार:,अभिमान से रहित +13,7,एव,निश्चय ही +13,7,च,भी +13,7,जन्म,जन्म +13,7,मृत्यु,मृत्युःजरा +13,7,व्याधि,रोग +13,7,दुःख,दुख का +13,7,दोष,बुराई +13,7,अनुदर्शनम्,बोध +13,7,असक्ति,आसक्ति +13,7,अनभिष्वङ्गः,लालसा रहित +13,7,पुत्र,पुत्र +13,7,दार,स्त्री +13,7,गृह,आदिषु +13,7,नित्यम्,निरंतर +13,7,च,भी +13,7,सम,चित्तवम् +13,7,इष्ट,इच्छित +13,7,अनिष्ट,अवांछित +13,7,उपपत्तिषु,प्राप्त करके +13,7,मयि,मुझ में +13,7,च,भी +13,7,अनन्य,योगेन +13,7,भक्ति:,भक्ति +13,7,अव्यभिचारिणी,निरंतर +13,7,विविक्त,एकान्त +13,7,देश,स्थानों की +13,7,सेवित्वम्,इच्छा करते हुए +13,7,अरति:,विरक्त भाव से +13,7,जन,संसदि +13,7,अध्यात्म,आत्मा सम्बन्धी +13,7,ज्ञान,ज्ञान +13,7,नित्यत्वम्,निरंतर +13,7,तत्त्वज्ञानं,आध्यात्मिक सिद्वान्तों का ज्ञान +13,7,अर्थ,हेतु +13,7,दर्शनम्,दर्शनशास्त्र +13,7,एतत्,यह सारा +13,7,ज्ञानम्,ज्ञान +13,7,इति,इस प्रकार +13,7,प्रोक्तम्,घोषित +13,7,अज्ञानम्,अज्ञान +13,7,यत्,जो +13,7,अत:,इससे +13,7,अन्यथा,विपरीत। +13,8,अमानित्वम्,विनम्रता +13,8,अदम्भित्वम्,आडम्बर से मुक्ति +13,8,अहिंसा,अहिंसा +13,8,क्षान्ति:,क्षमाशील +13,8,आर्जवम्,सरलता +13,8,आचार्य,उपासनम् +13,8,शौचम्,मन और शरीर की पवित्रता +13,8,स्थैर्यम्,दृढ़ता +13,8,आत्म,विनिग्रहः +13,8,इन्द्रियम,अर्थेषु +13,8,वैराग्यम्,विरक्ति +13,8,अनहंकार:,अभिमान से रहित +13,8,एव,निश्चय ही +13,8,च,भी +13,8,जन्म,जन्म +13,8,मृत्यु,मृत्युःजरा +13,8,व्याधि,रोग +13,8,दुःख,दुख का +13,8,दोष,बुराई +13,8,अनुदर्शनम्,बोध +13,8,असक्ति,आसक्ति +13,8,अनभिष्वङ्गः,लालसा रहित +13,8,पुत्र,पुत्र +13,8,दार,स्त्री +13,8,गृह,आदिषु +13,8,नित्यम्,निरंतर +13,8,च,भी +13,8,सम,चित्तवम् +13,8,इष्ट,इच्छित +13,8,अनिष्ट,अवांछित +13,8,उपपत्तिषु,प्राप्त करके +13,8,मयि,मुझ में +13,8,च,भी +13,8,अनन्य,योगेन +13,8,भक्ति:,भक्ति +13,8,अव्यभिचारिणी,निरंतर +13,8,विविक्त,एकान्त +13,8,देश,स्थानों की +13,8,सेवित्वम्,इच्छा करते हुए +13,8,अरति:,विरक्त भाव से +13,8,जन,संसदि +13,8,अध्यात्म,आत्मा सम्बन्धी +13,8,ज्ञान,ज्ञान +13,8,नित्यत्वम्,निरंतर +13,8,तत्त्वज्ञानं,आध्यात्मिक सिद्वान्तों का ज्ञान +13,8,अर्थ,हेतु +13,8,दर्शनम्,दर्शनशास्त्र +13,8,एतत्,यह सारा +13,8,ज्ञानम्,ज्ञान +13,8,इति,इस प्रकार +13,8,प्रोक्तम्,घोषित +13,8,अज्ञानम्,अज्ञान +13,8,यत्,जो +13,8,अत:,इससे +13,8,अन्यथा,विपरीत। +13,9,अमानित्वम्,विनम्रता +13,9,अदम्भित्वम्,आडम्बर से मुक्ति +13,9,अहिंसा,अहिंसा +13,9,क्षान्ति:,क्षमाशील +13,9,आर्जवम्,सरलता +13,9,आचार्य,उपासनम् +13,9,शौचम्,मन और शरीर की पवित्रता +13,9,स्थैर्यम्,दृढ़ता +13,9,आत्म,विनिग्रहः +13,9,इन्द्रियम,अर्थेषु +13,9,वैराग्यम्,विरक्ति +13,9,अनहंकार:,अभिमान से रहित +13,9,एव,निश्चय ही +13,9,च,भी +13,9,जन्म,जन्म +13,9,मृत्यु,मृत्युःजरा +13,9,व्याधि,रोग +13,9,दुःख,दुख का +13,9,दोष,बुराई +13,9,अनुदर्शनम्,बोध +13,9,असक्ति,आसक्ति +13,9,अनभिष्वङ्गः,लालसा रहित +13,9,पुत्र,पुत्र +13,9,दार,स्त्री +13,9,गृह,आदिषु +13,9,नित्यम्,निरंतर +13,9,च,भी +13,9,सम,चित्तवम् +13,9,इष्ट,इच्छित +13,9,अनिष्ट,अवांछित +13,9,उपपत्तिषु,प्राप्त करके +13,9,मयि,मुझ में +13,9,च,भी +13,9,अनन्य,योगेन +13,9,भक्ति:,भक्ति +13,9,अव्यभिचारिणी,निरंतर +13,9,विविक्त,एकान्त +13,9,देश,स्थानों की +13,9,सेवित्वम्,इच्छा करते हुए +13,9,अरति:,विरक्त भाव से +13,9,जन,संसदि +13,9,अध्यात्म,आत्मा सम्बन्धी +13,9,ज्ञान,ज्ञान +13,9,नित्यत्वम्,निरंतर +13,9,तत्त्वज्ञानं,आध्यात्मिक सिद्वान्तों का ज्ञान +13,9,अर्थ,हेतु +13,9,दर्शनम्,दर्शनशास्त्र +13,9,एतत्,यह सारा +13,9,ज्ञानम्,ज्ञान +13,9,इति,इस प्रकार +13,9,प्रोक्तम्,घोषित +13,9,अज्ञानम्,अज्ञान +13,9,यत्,जो +13,9,अत:,इससे +13,9,अन्यथा,विपरीत। +13,10,अमानित्वम्,विनम्रता +13,10,अदम्भित्वम्,आडम्बर से मुक्ति +13,10,अहिंसा,अहिंसा +13,10,क्षान्ति:,क्षमाशील +13,10,आर्जवम्,सरलता +13,10,आचार्य,उपासनम् +13,10,शौचम्,मन और शरीर की पवित्रता +13,10,स्थैर्यम्,दृढ़ता +13,10,आत्म,विनिग्रहः +13,10,इन्द्रियम,अर्थेषु +13,10,वैराग्यम्,विरक्ति +13,10,अनहंकार:,अभिमान से रहित +13,10,एव,निश्चय ही +13,10,च,भी +13,10,जन्म,जन्म +13,10,मृत्यु,मृत्युःजरा +13,10,व्याधि,रोग +13,10,दुःख,दुख का +13,10,दोष,बुराई +13,10,अनुदर्शनम्,बोध +13,10,असक्ति,आसक्ति +13,10,अनभिष्वङ्गः,लालसा रहित +13,10,पुत्र,पुत्र +13,10,दार,स्त्री +13,10,गृह,आदिषु +13,10,नित्यम्,निरंतर +13,10,च,भी +13,10,सम,चित्तवम् +13,10,इष्ट,इच्छित +13,10,अनिष्ट,अवांछित +13,10,उपपत्तिषु,प्राप्त करके +13,10,मयि,मुझ में +13,10,च,भी +13,10,अनन्य,योगेन +13,10,भक्ति:,भक्ति +13,10,अव्यभिचारिणी,निरंतर +13,10,विविक्त,एकान्त +13,10,देश,स्थानों की +13,10,सेवित्वम्,इच्छा करते हुए +13,10,अरति:,विरक्त भाव से +13,10,जन,संसदि +13,10,अध्यात्म,आत्मा सम्बन्धी +13,10,ज्ञान,ज्ञान +13,10,नित्यत्वम्,नि���ंतर +13,10,तत्त्वज्ञानं,आध्यात्मिक सिद्वान्तों का ज्ञान +13,10,अर्थ,हेतु +13,10,दर्शनम्,दर्शनशास्त्र +13,10,एतत्,यह सारा +13,10,ज्ञानम्,ज्ञान +13,10,इति,इस प्रकार +13,10,प्रोक्तम्,घोषित +13,10,अज्ञानम्,अज्ञान +13,10,यत्,जो +13,10,अत:,इससे +13,10,अन्यथा,विपरीत। +13,11,अमानित्वम्,विनम्रता +13,11,अदम्भित्वम्,आडम्बर से मुक्ति +13,11,अहिंसा,अहिंसा +13,11,क्षान्ति:,क्षमाशील +13,11,आर्जवम्,सरलता +13,11,आचार्य,उपासनम् +13,11,शौचम्,मन और शरीर की पवित्रता +13,11,स्थैर्यम्,दृढ़ता +13,11,आत्म,विनिग्रहः +13,11,इन्द्रियम,अर्थेषु +13,11,वैराग्यम्,विरक्ति +13,11,अनहंकार:,अभिमान से रहित +13,11,एव,निश्चय ही +13,11,च,भी +13,11,जन्म,जन्म +13,11,मृत्यु,मृत्युःजरा +13,11,व्याधि,रोग +13,11,दुःख,दुख का +13,11,दोष,बुराई +13,11,अनुदर्शनम्,बोध +13,11,असक्ति,आसक्ति +13,11,अनभिष्वङ्गः,लालसा रहित +13,11,पुत्र,पुत्र +13,11,दार,स्त्री +13,11,गृह,आदिषु +13,11,नित्यम्,निरंतर +13,11,च,भी +13,11,सम,चित्तवम् +13,11,इष्ट,इच्छित +13,11,अनिष्ट,अवांछित +13,11,उपपत्तिषु,प्राप्त करके +13,11,मयि,मुझ में +13,11,च,भी +13,11,अनन्य,योगेन +13,11,भक्ति:,भक्ति +13,11,अव्यभिचारिणी,निरंतर +13,11,विविक्त,एकान्त +13,11,देश,स्थानों की +13,11,सेवित्वम्,इच्छा करते हुए +13,11,अरति:,विरक्त भाव से +13,11,जन,संसदि +13,11,अध्यात्म,आत्मा सम्बन्धी +13,11,ज्ञान,ज्ञान +13,11,नित्यत्वम्,निरंतर +13,11,तत्त्वज्ञानं,आध्यात्मिक सिद्वान्तों का ज्ञान +13,11,अर्थ,हेतु +13,11,दर्शनम्,दर्शनशास्त्र +13,11,एतत्,यह सारा +13,11,ज्ञानम्,ज्ञान +13,11,इति,इस प्रकार +13,11,प्रोक्तम्,घोषित +13,11,अज्ञानम्,अज्ञान +13,11,यत्,जो +13,11,अत:,इससे +13,11,अन्यथा,विपरीत। +13,12,ज्ञेयम्,जानने योग्य +13,12,यत्,जो +13,12,तत्,वह +13,12,प्रवक्ष्यामि,अब मैं प्रकट करूंगा +13,12,यत्,जिसे +13,12,ज्ञात्वा,जानकर +13,12,अमृतम्,अमरत्व को +13,12,अश्नुते,प्राप्त होता है +13,12,अनादि,आदि रहित +13,12,मत्,परम् +13,12,ब्रह्म,ब्रह्म +13,12,न,न तो +13,12,सत्,अस्तित्व +13,12,तत्,वह +13,12,न,न तो +13,12,असत्,"अस्तित्व होता है, प्रभाव" +13,12,उच्यते,कहा जाता है। +13,13,सर्वतः,सर्वत्र +13,13,पाणि,हाथ +13,13,पादम्,पैर +13,13,तत्,वह +13,13,सर्वतः,सर्वत्र +13,13,अक्षि,आँखें +13,13,शिरः,सिर +13,13,मुखम्,मुँह +13,13,सर्वतः,सर्वत्र +13,13,श्रुति,मत् +13,13,लोके,संसार में +13,13,सर्वम्,हर वस्तु +13,13,आवृत्य,व्याप्त +13,13,तिष्ठति,अवस्थित है। +13,14,सर्व,सभी +13,14,इन्द्रिय,इन्द्रियों +13,14,गुण,इन्द्रिय विषय का +13,14,आभासम्,गोचर +13,14,सर्व,सभी +13,14,इन्द्रिय,इन्द्रियों से +13,14,विवर्जितम्,रहित +13,14,असक्तम्,अनासक्त +13,14,सर्वभृत्,सबके पालनहार +13,14,च,भी +13,14,एव,वास्तव में +13,14,निर्गुणम्,प्राकृत शक्ति के तीनों गुणों से परे +13,14,गुण,भोक्तृ +13,14,च,यद्दपि। +13,15,बहिः,बाहर +13,15,अनतः,भीतरः च और +13,15,भूतानाम्,सभी जीवों का +13,15,अचरम्,जड़ा चरम् +13,15,एव,भी +13,15,च,और +13,15,सूक्ष्मत्वात्,सूक्ष्म होने के कारण +13,15,तत्,वह +13,15,अविज्ञेयम्,अज्ञेय +13,15,दूर,स्थम् +13,15,च,भी +13,15,अन्तिके,अति समीप +13,15,च,तथा +13,15,तत्,वह। +13,16,अविभक्तम्,अविभाजित +13,16,च,यद्यपि +13,16,भूतेषु,सभी जीवों में विभक्तम् +13,16,इव,प्रत्यक्ष रूप से +13,16,च,फिर +13,16,स्थितम्,स्थित +13,16,भूत,भर्तृ +13,16,च,भी +13,16,तत्,वह +13,16,ज्ञेयम्,जानने योग्य +13,16,ग्रसिष्णु,"संहारक, प्रभविष्णु" +13,16,च,और। +13,17,ज्योतिषाम्,सभी प्रकाशित वस्तुओं में +13,17,अपि,भी +13,17,तत्,वह +13,17,ज्योतिः,प्रकाश का स्रोत +13,17,तमस:,अन्धकार +13,17,परम्,परे +13,17,उच्यते,कहलाता है +13,17,ज्ञानम्,ज्ञान +13,17,ज्ञेयम्,ज्ञान का विषय +13,17,ज्ञान,गम्यम् +13,17,हृदि,हृदय में +13,17,सर्वस्य,सब +13,17,विष्ठितम्,निवास। +13,18,इति,इस प्रकार +13,18,क्षेत्रम्,क्षेत्र की प्रकृति +13,18,तथा,और +13,18,ज्ञानम्,ज्ञान का अर्थ +13,18,ज्ञेयम्,ज्ञान का विषय +13,18,च,और +13,18,उक्तम्,प्रकट करना +13,18,समासतः,संक्षेप में +13,18,मत्,भक्त: +13,18,एतत्,यह सब +13,18,विज्ञाय,जान कर +13,18,मत्,भावाय +13,18,उपपद्यते,प्राप्त करता है। +13,19,प्रकृतिम्,प्राकृत शक्ति +13,19,पुरुषम्,जीवात्मा को +13,19,च,भी +13,19,एव,वास्तव में +13,19,विद्धि,जानो +13,19,अनादी,आदिरहित +13,19,उभौ,दोनों +13,19,अपि,भी +13,19,विकारान्,विकारों को +13,19,च,भी +13,19,गुणान्,प्रकृति के तीन गुण +13,19,च,भी +13,19,एव,निश्चय ही +13,19,विद्धि,जानो +13,19,प्रकृति,भौतिक प्रकृति से +13,19,सम्भवान्,उत्पक। +13,20,कार्य,परिणाम +13,20,कारण,कारण +13,20,कर्तृत्वे,सृष्टि के विषय में +13,20,हेतुः,माध्यम +13,20,प्रकृतिः,भौतिक शक्ति +13,20,उच्यते,कही जाती है। पुरूष: +13,20,सुख,दुखानाम् +13,20,भोक्तृत्वे,अनुभूति +13,20,हेतुः,उत्तरदायी +13,20,उच्यते,कहा जाता है। +13,21,पुरुषः,जीवात्मा +13,21,प्रकृतिस्थ:,भौतिक शक्ति में स्थित होकर +13,21,हि,निश्चय ही +13,21,भुक्ते,भोग की इच्छा +13,21,प्रकृति,जान् +13,21,गुणान्,प्रकृति के तीन गुणों को +13,21,कारणम्,कारण +13,21,गुण,सडगः +13,21,अस्य,जीव की +13,21,सत्,असत् +13,21,योनि,उत्तम और अधम योनियों में +13,21,जन्मसु,जन्म लेना। +13,22,उपद्रष्टा,साक्षी +13,22,अनुमन्ता,अनुमति देने वाला +13,22,च,भी +13,22,भर्ता,निर्वाहक +13,22,भोक्ता,परम भोक्ता +13,22,महा,ईश्वर: +13,22,परम्,आत्म +13,22,इति,भी +13,22,च,तथा +13,22,अपि,��िस्सन्देह +13,22,उक्तः,कहा गया है +13,22,देहे,शरीर में +13,22,अस्मिन्,इस +13,22,पुरुषःपर,परम प्रभु। +13,23,यः,जो +13,23,एवम्,इस प्रकार +13,23,वेत्ति,जानना है +13,23,पुरुषम्,जीव +13,23,प्रकृतिम्,भौतिक शक्ति +13,23,च,तथा +13,23,गुणैः,प्रकृति के तीनों गुणों के सह +13,23,सर्वथा,सभी प्रकार +13,23,वर्तमान:,स्थित होकर +13,23,अपि,यद्यपि +13,23,न,कभी नहीं +13,23,स:,वह +13,23,भूयः,फिर से +13,23,अभिजायते,जन्म लेता है। +13,24,ध्यानेन,ध्यान के द्वारा +13,24,आत्मनि,अपने भीतर +13,24,पश्यन्ति,देखते हैं +13,24,केचित्,कुछ लोग +13,24,आत्मानम्,परमात्मा को +13,24,आत्मना,मन से +13,24,अन्ये,अन्य लोग +13,24,साङ्ख्येन,ज्ञान के पोषण द्वारा +13,24,योगेन,योग पद्धति द्वारा +13,24,कर्म,योगेन +13,24,च,भी +13,24,अपरे,अन्य। +13,25,अन्ये,अन्य +13,25,तु,लेकिन +13,25,एवम्,इस प्रकार +13,25,अजानन्तः,आध्यात्मिक ज्ञान से अनभिज्ञ +13,25,श्रुत्वा,सुनकर +13,25,अन्येभ्यः,अन्यों से +13,25,उपासते,अराधना करना प्रारम्भ कर देते हैं +13,25,ते,वे +13,25,अपि,भी +13,25,च,तथा +13,25,अतितरन्ति,पार कर जाते हैं +13,25,एव,निश्चय ही +13,25,मृत्युम्,मृत्युः श्रुतिपरायणाः +13,26,यावत्,जो भी +13,26,सञ्जायते,प्रकट होता है +13,26,किञ्चित्,कुछ भी +13,26,सत्त्वम्,अस्तित्त्व +13,26,स्थावर,अचर +13,26,जङ्गमम्,चर +13,26,क्षेत्र,कर्मक्षेत्र +13,26,क्षेत्र,ज्ञ तथा शरीर को जानने वाले का +13,26,संयोगत्,संयोग से +13,26,तत्,तुम +13,26,विद्धि,जानो +13,26,भरत,ऋषभ +13,27,समम्,समभाव से +13,27,सर्वेषु,सब में +13,27,भूतेषु,जीवों में +13,27,तिष्ठन्तम्,निवास करते हुए +13,27,परम,ईश्वरम् +13,27,विनश्यत्सु,नाशवानों में अविनश्यन्तम् +13,27,यः,जो +13,27,पश्यति,देखता है +13,27,सः,वही +13,27,पश्यति,अनुभव करते हैं। +13,28,समम्,समान रूप से +13,28,पश्यन्,देखते हुए +13,28,हि,निश्चय ही +13,28,सर्वत्र,सभी स्थानों में +13,28,समवस्थितम्,एक समान रूप से स्थित +13,28,ईश्वरम्,परमात्मा के रूप में भगवान +13,28,न,नहीं +13,28,हिनस्ति,निम्नीकृत +13,28,आत्मना,मन से +13,28,आत्मानम्,आत्मा को +13,28,ततः,तब +13,28,याति,पहुँचता है +13,28,पराम्,दिव्य +13,28,गतिम्,गन्तव्य को। +13,29,प्रकृत्या,प्राकृतिक शक्ति द्वारा +13,29,एव,वास्तव में +13,29,च,भी +13,29,कर्माणि,कर्म +13,29,क्रियमाणानि,निष्पादित किये गये +13,29,सर्वशः,सभी प्रकार से +13,29,यः,जो +13,29,पश्यति,देखता है +13,29,तथा,भी +13,29,आत्मानम्,देहधारी आत्मा को +13,29,अकर्तारम्,अकर्ताः सः +13,29,पश्यति,देखता है। +13,30,यदा,जब +13,30,भूत,जीव +13,30,पृथक्,भावम् विभिन्न जीवन रूप +13,30,एक,स्थम् +13,30,अनुपश्यति,देखता है +13,30,तत:,तत्पश्चात +13,30,एव,वास्तव में +13,30,च,और +13,30,विस्तारम्,जन्म से +13,30,ब्रह्म,ब्रह्म +13,30,सम्पद्यते,वे प्राप्त करते हैं +13,30,तदा,उस समय। +13,31,अनादित्वात्,आदि रहित +13,31,निर्गुणत्वात्,प्रकृति के गुणों से रहित +13,31,परम,सर्वोच्च +13,31,आत्मा,आत्मा +13,31,अयम्,यह +13,31,अव्ययः,अविनाशी +13,31,शरीर,स्थ: +13,31,अपि,यद्यपि +13,31,कौन्तेय,"कुन्तीपुत्र, अर्जुन" +13,31,न करोति,कुछ नहीं करता +13,31,न लिप्यते,न ही दूषित होता है। +13,32,यथा,जैसे +13,32,सर्व,गतम् +13,32,सौक्ष्म्यात्,सूक्ष्म होने के कारण +13,32,आकाशम्,अंतरिक्ष +13,32,न,नहीं +13,32,उपलिप्यते,दूषित होता है +13,32,सर्वत्र,सभी स्थानों पर +13,32,अवस्थितः,स्थित +13,32,देहे,शरीर में +13,32,तथा,उसी प्रकार +13,32,आत्म,आत्माव +13,32,न,कभी नहीं +13,32,उपलिप्यते,दूषित होता है। +13,33,यथा,जैसे +13,33,प्रकाशयति,आलोकित करता है +13,33,एकः,एक +13,33,कृत्स्नम्,समस्त +13,33,लोकम्,ब्रह्माण्ड प्रणालियाँ +13,33,इमम्,इस +13,33,रविः,सूर्य क्षेत्रम् +13,33,क्षेत्री,आत्मा +13,33,तथा,उसी तरह +13,33,कृत्स्नम्,समस्त +13,33,प्रकाशयति,आलोकित करता है +13,33,भारत,"भरतपुत्र, अर्जुन।" +13,34,क्षेत्र,शरीर +13,34,क्षेत्र,ज्ञयोः +13,34,एवम्,इस प्रकार +13,34,अन्तरम्,अन्तर को +13,34,ज्ञानचक्षुषा,ज्ञान की दृष्टि से +13,34,भूत,जीवित प्राणी +13,34,प्रकृति,प्राकृतिक शक्ति +13,34,मोक्षम्,"मोक्ष को, प्राकृत शक्ति से मुक्ति" +13,34,च,और +13,34,ये,जो +13,34,विदुः,जानते हैं +13,34,यान्ति,प्राप्त होते हैं +13,34,ते,वे +13,34,परम,परम लक्ष्य। +14,1,श्री,भगवान् उवाच +14,1,परम्,सर्वोच्च +14,1,भूयः,पुन: प्रवक्ष्यामि +14,1,ज्ञानानाम्,समस्त ज्ञान की +14,1,ज्ञानम्,उत्तमम् +14,1,यत्,जिसे +14,1,ज्ञात्वा,जानकर +14,1,मुनयः,संत +14,1,सर्वे,समस्त +14,1,परम्,सर्वोच्च +14,1,सिद्धिम्,पूर्णता +14,1,इत:,इस संसार से +14,1,गताः,प्राप्त की। +14,2,इदम्,इस +14,2,ज्ञानम्,ज्ञान को +14,2,उपाश्रित्य,आश्रय पाकर +14,2,मम,मेरा +14,2,साधर्म्यम्,समान प्रकृति को +14,2,आगताः,प्राप्त करके +14,2,सर्गे,सृष्टि के समय +14,2,अपि,भी +14,2,न,कभी नहीं +14,2,उपजायन्ते,जन्म लेते हैं +14,2,प्रलये,प्रलय के समय +14,2,न,तो +14,2,व्यथन्ति,कष्ट अनुभव नहीं करते +14,2,च,भी। +14,3,मम,मेरा +14,3,योनि:,गर्भ +14,3,महत्,ब्रह्म +14,3,तस्मिन्,उसमें +14,3,गर्भम्,गर्भ +14,3,दधामि,उत्पक करता हूँ +14,3,अहम्,मैं +14,3,सम्भवः,जन्म +14,3,सर्व,भूतानाम् +14,3,ततः,तत्पश्चात +14,3,भवति,होना भारत +14,3,योनिषु,समस्त योनियों में +14,3,कौन्तेय,"कुन्तीपुत्र, अर्जुन" +14,3,मूर्तयः,रूप +14,3,सम्भवन्ति,प्रकट होते हैं +14,3,याः,जो +14,3,तासाम्,उन सबों का +14,3,ब्रह्म,महत् +14,3,योनिः,जन्म +14,3,अहम्,मैं +14,3,बीजप्रदः,बीजप्रदाता +14,3,पिता,पिता। +14,4,मम,मेरा +14,4,योनि:,गर्भ +14,4,महत्,ब्रह्म +14,4,तस्मिन्,उसमें +14,4,गर्भम्,गर्भ +14,4,दधामि,उत्पक करता हूँ +14,4,अहम्,मैं +14,4,सम्भवः,जन्म +14,4,सर्व,भूतानाम् +14,4,ततः,तत्पश्चात +14,4,भवति,होना भारत +14,4,योनिषु,समस्त योनियों में +14,4,कौन्तेय,"कुन्तीपुत्र, अर्जुन" +14,4,मूर्तयः,रूप +14,4,सम्भवन्ति,प्रकट होते हैं +14,4,याः,जो +14,4,तासाम्,उन सबों का +14,4,ब्रह्म,महत् +14,4,योनिः,जन्म +14,4,अहम्,मैं +14,4,बीजप्रदः,बीजप्रदाता +14,4,पिता,पिता। +14,5,सत्त्वम्,"अच्छाई का गुण, सत्वगुण" +14,5,रजः,"आसक्ति का गुण, रजोगुण" +14,5,तमः,"अज्ञानता का गुण, तमोगुण" +14,5,इति,इस प्रकार +14,5,गुणा:,गुण +14,5,प्रकृति,भौतिक शक्ति +14,5,सम्भवाः,उत्पन्न +14,5,निबध नन्ति,बाँधते हैं +14,5,महा,बाहो +14,5,देहे,इस शरीर में +14,5,देहिनम्,जीव को +14,5,अव्ययम्,अविनाशी। +14,6,तत्र,इनके मध्य +14,6,सत्त्वम्,अच्छाई का गुण +14,6,निर्मलत्वात्,शुद्ध होना +14,6,प्रकाशकम्,प्रकाशित करना +14,6,अनामयम्,स्वास्थ्य और पूर्ण रूप से हष्ट +14,6,सुख,सुख की +14,6,सङ्गन,आसक्ति +14,6,बध्नाति,बाँधता है +14,6,ज्ञान,ज्ञान +14,6,सङ्गन,आसक्ति से +14,6,च,भी +14,6,अनघ,"पापरहित, अर्जुन।" +14,7,रजो,"रजोगुण, आसक्ति का गुण" +14,7,राग,आत्मकम् +14,7,विद्धि,जानो +14,7,तृष्णा,इच्छा +14,7,सड्.ग,संगति से +14,7,समुद्भवम्,उत्पन्नतत् +14,7,निबन्धनाति,बाँधता है +14,7,कौन्तेय,"कुन्तीपुत्र, अर्जुन" +14,7,कर्मसङ्गेन,सकाम कर्म की आसक्ति से +14,7,देहिनम्,देहधारी आत्मा को ।। +14,8,तमः,तमोगुण +14,8,तु,लेकिन +14,8,अज्ञान,जम् +14,8,विद्धि,जानो +14,8,मोहनम्,मोह +14,8,सर्वदेहिनाम्,सभी जीवों में प्रमाद असावधानी +14,8,आलस्य,आलस्य +14,8,निद्राभिः,नींद +14,8,तत्,वह +14,8,निबध्नाति,बाँधता है +14,8,भारत,"भरतपुत्र, अर्जुन।" +14,9,सत्त्वम्,सत्वगुण +14,9,सुखे,सुख में +14,9,सबजयति,बाँधता है +14,9,रजः,रजोगुण +14,9,कर्माणि,कर्म के प्रति +14,9,भारत,"भरतपुत्र, अर्जुन" +14,9,ज्ञानम्,ज्ञान को +14,9,आवृत्य,ढकना +14,9,तु,लेकिन +14,9,तम:,अज्ञानता का गुण +14,9,प्रमादे,मोह +14,9,सञ्जयति,बाँधता है +14,9,उत,वास्तव में। +14,10,रजः,रजोगुण +14,10,तमः,अज्ञानता का गुण +14,10,च,भी +14,10,अभिभूय,पार करके +14,10,सत्त्वम्,सत्वगुणः भवतिबनता है +14,10,भारत,"भरतपुत्र, अर्जुन" +14,10,रजः,आसक्ति का गुण +14,10,सत्त्वम्,सत्वगुण +14,10,तमः,तमोगुण +14,10,च,भी +14,10,एव,उसी प्रकार से +14,10,तमः,तमोगुण +14,10,सत्त्वम्,सत्वगुण को +14,10,रजः,रजोगुण +14,10,तथा,इस प्रकार +14,11,सर्व,सभी मे��� +14,11,द्वारेषु,द्वारो द्वारा +14,11,देह,शरीर अस्मिन् +14,11,प्रकाश:,प्रकाश +14,11,उपजायते,प्रकट होता है +14,11,ज्ञानम्,ज्ञान +14,11,यदा,जब +14,11,तदा,उस सम +14,11,विद्यात्,जानो +14,11,विदृद्धम्,प्रधानता +14,11,सत्त्वम्,सत्वगुणः इति इस प्रकार से +14,11,उत,निश्चित रूप से +14,11,लोभ:,लोभ +14,11,प्रवृत्तिः,गतिविधि +14,11,आरम्भः,परिश्रम +14,11,कर्मणाम्,साकाम कर्म +14,11,अशम:,बैचेनः स्पृहा +14,11,राजसि,रजोगुण में +14,11,एतानि,ये सब +14,11,जायन्ते,विकसित +14,11,विवृद्धे,जब प्रधानता होती है +14,11,भरत,ऋशभ +14,11,अप्रकाश:,अँधेरा +14,11,अप्रवृत्तिः,जड़ताएँ +14,11,च,तथा +14,11,प्रमादः,असावधानी +14,11,मोह:,मोह +14,11,एव,निस्संदेह +14,11,च,भी +14,11,तमसि,तमोगुण का +14,11,एतानि,ये +14,11,जायन्ते,प्रकट होते हैं +14,11,विवृद्ध,प्रधानता होने पर +14,11,कुरूनन्दन,"कुरूपुत्र, अर्जुन।" +14,12,सर्व,सभी में +14,12,द्वारेषु,द्वारो द्वारा +14,12,देह,शरीर अस्मिन् +14,12,प्रकाश:,प्रकाश +14,12,उपजायते,प्रकट होता है +14,12,ज्ञानम्,ज्ञान +14,12,यदा,जब +14,12,तदा,उस सम +14,12,विद्यात्,जानो +14,12,विदृद्धम्,प्रधानता +14,12,सत्त्वम्,सत्वगुणः इति इस प्रकार से +14,12,उत,निश्चित रूप से +14,12,लोभ:,लोभ +14,12,प्रवृत्तिः,गतिविधि +14,12,आरम्भः,परिश्रम +14,12,कर्मणाम्,साकाम कर्म +14,12,अशम:,बैचेनः स्पृहा +14,12,राजसि,रजोगुण में +14,12,एतानि,ये सब +14,12,जायन्ते,विकसित +14,12,विवृद्धे,जब प्रधानता होती है +14,12,भरत,ऋशभ +14,12,अप्रकाश:,अँधेरा +14,12,अप्रवृत्तिः,जड़ताएँ +14,12,च,तथा +14,12,प्रमादः,असावधानी +14,12,मोह:,मोह +14,12,एव,निस्संदेह +14,12,च,भी +14,12,तमसि,तमोगुण का +14,12,एतानि,ये +14,12,जायन्ते,प्रकट होते हैं +14,12,विवृद्ध,प्रधानता होने पर +14,12,कुरूनन्दन,"कुरूपुत्र, अर्जुन।" +14,13,सर्व,सभी में +14,13,द्वारेषु,द्वारो द्वारा +14,13,देह,शरीर अस्मिन् +14,13,प्रकाश:,प्रकाश +14,13,उपजायते,प्रकट होता है +14,13,ज्ञानम्,ज्ञान +14,13,यदा,जब +14,13,तदा,उस सम +14,13,विद्यात्,जानो +14,13,विदृद्धम्,प्रधानता +14,13,सत्त्वम्,सत्वगुणः इति इस प्रकार से +14,13,उत,निश्चित रूप से +14,13,लोभ:,लोभ +14,13,प्रवृत्तिः,गतिविधि +14,13,आरम्भः,परिश्रम +14,13,कर्मणाम्,साकाम कर्म +14,13,अशम:,बैचेनः स्पृहा +14,13,राजसि,रजोगुण में +14,13,एतानि,ये सब +14,13,जायन्ते,विकसित +14,13,विवृद्धे,जब प्रधानता होती है +14,13,भरत,ऋशभ +14,13,अप्रकाश:,अँधेरा +14,13,अप्रवृत्तिः,जड़ताएँ +14,13,च,तथा +14,13,प्रमादः,असावधानी +14,13,मोह:,मोह +14,13,एव,निस्संदेह +14,13,च,भी +14,13,तमसि,तमोगुण का +14,13,एतानि,ये +14,13,जायन्ते,प्रकट होते हैं +14,13,विवृद्ध,प्रधानता होने पर +14,13,कुरूनन्दन,"कुरूपुत्र, अर्जुन।" +14,14,यदा,जब +14,14,सत्त्वे,सत्वगुण में प्रवृद्ध +14,14,तु,लेकिन +14,14,प्रलयम्,"मृत्यु, यति" +14,14,तदा,उस समय +14,14,उत्तम,विदाम् +14,14,अमलान्,शुद्ध प्रतिपद्यते +14,14,रजसि,रजोगुण में +14,14,प्रलयम्,मृत्यु को +14,14,गत्वा,प्राप्त करके +14,14,कर्म,सड्.िगषु +14,14,जायते,जन्म लेता है तथा उसी प्रकार +14,14,प्रलीन:,मरकर +14,14,तमसि,तमोगुण में +14,14,मूढ,योनिषु +14,14,जायते,जन्म लेता है +14,15,यदा,जब +14,15,सत्त्वे,सत्वगुण में प्रवृद्ध +14,15,तु,लेकिन +14,15,प्रलयम्,"मृत्यु, यति" +14,15,तदा,उस समय +14,15,उत्तम,विदाम् +14,15,अमलान्,शुद्ध प्रतिपद्यते +14,15,रजसि,रजोगुण में +14,15,प्रलयम्,मृत्यु को +14,15,गत्वा,प्राप्त करके +14,15,कर्म,सड्.िगषु +14,15,जायते,जन्म लेता है तथा उसी प्रकार +14,15,प्रलीन:,मरकर +14,15,तमसि,तमोगुण में +14,15,मूढ,योनिषु +14,15,जायते,जन्म लेता है +14,16,कर्मण:,कर्म का +14,16,सु,कृतस्य +14,16,आहुः,कहा गया है +14,16,सात्त्विकम्,सत्वगुण +14,16,निर्मलम्,विशुद्ध +14,16,फलम्,फल +14,16,रजसः,रजोगुण का +14,16,तु,लेकिन +14,16,फलम्,परिणाम +14,16,दुःखम्,दुख +14,16,अज्ञानम्,अज्ञानता +14,16,तमसः,तमोगुण का +14,16,फलम्,फल +14,17,सत्त्वात्,सत्वगुणी +14,17,सञ्जायते,उत्पन्न होता है +14,17,ज्ञानम्,ज्ञान +14,17,रजसः,रजोगुण से +14,17,लोभः,लालच +14,17,एव,निश्चय ही +14,17,च,और प्रमाद असावधानी +14,17,मोहौ,तथा मोह +14,17,तमसः,तमोगुण से +14,17,भवतः,होता है +14,17,अज्ञानम्,अज्ञान +14,17,एव,नि +14,17,संदेह च,और। +14,18,ऊर्ध्वम्,ऊपर की ओर +14,18,गच्छन्ति,जाते हैं +14,18,सत्त्व,स्था: +14,18,मध्ये,मध्य में +14,18,तिष्ठन्ति,निवास करते हैं +14,18,राजसाः,रजोगुणी +14,18,जघन्य,घृणित +14,18,गुण,गुण +14,18,वृत्ति,स्था: +14,18,अधः,निम्न +14,18,गच्छन्ति,जाते हैं +14,18,तामसाः,तमोगुणी। +14,19,न,नहीं +14,19,अन्यम्,अन्य +14,19,गुणेभ्यः,गुणों के कर्तारम् +14,19,यदा,जब +14,19,द्रष्टा,देखने वाला +14,19,अनुपश्यति,ठीक से देखता है +14,19,गुणेभ्यः,प्रकृति के गुणों से +14,19,च,तथा +14,19,परम्,दिव्य +14,19,वेत्ति,जानता है +14,19,मत्,भावम् मेरी दिव्य प्रकृति को +14,19,सः,वह +14,19,अधिगच्छति,प्राप्त करता है। +14,20,गुणान्,प्रकृति के तीन गुण +14,20,एतान्,इन +14,20,अतीत्य,गुणातीत होना +14,20,त्रीन्,तीन +14,20,देही,देहधारी +14,20,देह,शरीर +14,20,समुद्धवान्,से उत्पन्न +14,20,जन्म,जन्म +14,20,मृत्यु,मृत्युः जरा +14,20,दुःखैः,दुखों से +14,20,विमुक्तः,से मुक्त +14,20,अमृतम्,दुराचार +14,20,अश्नुते,प्राप्त है। +14,21,अर्जुन उवाच,अर्जुन ने कहा +14,21,कै:,किन +14,21,लिडगै,लक्षणों से +14,21,त्रीन्,तीनों +14,21,गुणान्,प्रक���ति के तीन गुणों को +14,21,एतान्,ये +14,21,अतीत:,गुणातीत +14,21,भवति,है +14,21,प्रभो,परम प्रभुः किम् +14,21,आचार:,आचरण +14,21,कथम्,कैसे +14,21,च,भी +14,21,एतान्,ये +14,21,त्रीन्,तीनों +14,21,गुणान्,गुणों को +14,21,अतिवर्तते,पार करना। +14,22,श्रीभगवान् उवाच,परम प्रभु ने कहा +14,22,प्रकाशम्,प्रकाश +14,22,च,तथाप्रवृत्तिम् +14,22,च,तथा +14,22,मोहम्,मोह +14,22,एव,भी +14,22,च,और +14,22,पाण्डव,"पाण्डुपुत्र, अर्जुनः न" +14,22,सम्प्रवृत्तानि,जब प्रकट होते हैं +14,22,न,निवृत्तानि +14,22,काड क्षति,आकांक्षा करना +14,22,उदासीनवत्,तटस्थ +14,22,आसीनः,स्थित +14,22,गुणैः,प्राकृत शक्ति के गुणों द्वारा +14,22,य:,जो +14,22,न,कभी नहीं +14,22,विचाल्यते,विक्षुब्ध होना +14,22,गुणा:,प्राकृतिक गुण +14,22,वर्तन्ते,कर्म करना +14,22,इति,एवम् +14,22,यः,जो +14,22,अवतिष्ठति,आत्म स्थित है +14,22,न,कभी नहीं +14,22,इङ्गते,विचलित +14,23,श्रीभगवान् उवाच,परम प्रभु ने कहा +14,23,प्रकाशम्,प्रकाश +14,23,च,तथाप्रवृत्तिम् +14,23,च,तथा +14,23,मोहम्,मोह +14,23,एव,भी +14,23,च,और +14,23,पाण्डव,"पाण्डुपुत्र, अर्जुनः न" +14,23,सम्प्रवृत्तानि,जब प्रकट होते हैं +14,23,न,निवृत्तानि +14,23,काड क्षति,आकांक्षा करना +14,23,उदासीनवत्,तटस्थ +14,23,आसीनः,स्थित +14,23,गुणैः,प्राकृत शक्ति के गुणों द्वारा +14,23,य:,जो +14,23,न,कभी नहीं +14,23,विचाल्यते,विक्षुब्ध होना +14,23,गुणा:,प्राकृतिक गुण +14,23,वर्तन्ते,कर्म करना +14,23,इति,एवम् +14,23,यः,जो +14,23,अवतिष्ठति,आत्म स्थित है +14,23,न,कभी नहीं +14,23,इङ्गते,विचलित +14,24,सम,समान +14,24,दुःख,दुख +14,24,सुखः,तथा सुख में +14,24,स्व,स्थ: +14,24,सम,एक समान +14,24,लोष्ट,मिट्टी +14,24,अश्म,पत्थर +14,24,काञ्चनः,सोना +14,24,तुल्य,समान +14,24,प्रिय,सुखद +14,24,अप्रियः,दुखद +14,24,धीरः,दृढ़तुल्य +14,24,निन्दा,बुराई +14,24,आत्म,संस्तुतिः +14,24,मान,सम्मान +14,24,अपमानयो:,तथा अपमान में +14,24,तुल्य:,समान +14,24,मित्र,मित्र +14,24,अरि,शत्रु +14,24,पक्षयोः,पक्षों को +14,24,सर्व,सबों का +14,24,आरम्भ,परिश्रम +14,24,परित्यागी,त्याग करने वाला +14,24,गुण,अतीत +14,24,सः,वह +14,24,उच्यते,कहा जाता है । +14,25,सम,समान +14,25,दुःख,दुख +14,25,सुखः,तथा सुख में +14,25,स्व,स्थ: +14,25,सम,एक समान +14,25,लोष्ट,मिट्टी +14,25,अश्म,पत्थर +14,25,काञ्चनः,सोना +14,25,तुल्य,समान +14,25,प्रिय,सुखद +14,25,अप्रियः,दुखद +14,25,धीरः,दृढ़तुल्य +14,25,निन्दा,बुराई +14,25,आत्म,संस्तुतिः +14,25,मान,सम्मान +14,25,अपमानयो:,तथा अपमान में +14,25,तुल्य:,समान +14,25,मित्र,मित्र +14,25,अरि,शत्रु +14,25,पक्षयोः,पक्षों को +14,25,सर्व,सबों का +14,25,आरम्भ,परिश्रम +14,25,परित्यागी,त्याग करने वाला +14,25,गुण,अ���ीत +14,25,सः,वह +14,25,उच्यते,कहा जाता है । +14,26,माम्,मेरी +14,26,च,भी +14,26,यः,जो +14,26,अव्यभिचारेण,विशुद्ध विकारों के +14,26,भक्ति,भक्ति योग से +14,26,सेवते,सेवा करता है +14,26,स:,वह +14,26,गुणान्,प्रकृति के गुणों को +14,26,समतीत्य,पार कर +14,26,एतान्,इन सब +14,26,ब्रह्म,भूयाय +14,26,कल्पते,हो जाता है। +14,27,ब्रह्मणः,निराकर ब्रह्म का +14,27,हि,केवल +14,27,प्रतिष्ठा,आधार +14,27,अहम्,मैं हूँ +14,27,अमृतस्य,अमरता का +14,27,अव्ययस्य,अविनाशी का +14,27,च,भी +14,27,शाश्वतस्य,शाश्वत का +14,27,च,तथा +14,27,धर्मस्य,परम धर्म +14,27,सुखस्य,सुख का +14,27,ऐकान्तिकस्य,"चरम, असीम" +14,27,च,भी। +15,1,श्रीभगवान् उवाच,परम पुरुषोत्तम भगवान ने कहा +15,1,ऊधर्व,मूलम् +15,1,अधः,नीचे की ओर +15,1,शाखम्,"शाखाएँ, अश्वत्थम्" +15,1,प्राहु:,कहा गया है +15,1,अव्ययम्,शाश्वत +15,1,छन्दांसि वैदिक मंत्रः यस्य,जिसके +15,1,पर्णानि,पत्ते +15,1,यः,जो कोई +15,1,तम्,उसको +15,1,वेद,जानता है +15,1,सः,वह +15,1,वेद,वित् +15,2,अध:,नीचे की ओर +15,2,च,और +15,2,ऊर्ध्वम्,ऊपर की ओर +15,2,प्रसृताः,प्रसारित +15,2,तस्य,उसकी +15,2,शाखाः,शाखाएँ +15,2,गुण,प्राकृतिक गुणों द्वारा +15,2,प्रवद्धाः,पोषित +15,2,विषय,इन्द्रिय विषय +15,2,प्रवाला:,कोंपलें +15,2,अध:,नीचे की ओर +15,2,च,तथा +15,2,मूलानि,जड़ें +15,2,अनुसन्ततानि,बंधन +15,2,कर्म,कर्म +15,2,अनुबन्धीनि,बांधना +15,2,मनुष्य,लोके +15,3,न,नहीं +15,3,रूपम्,रूप +15,3,अस्य,इसकी +15,3,इह,इस संसार में +15,3,तथा,जैसे की +15,3,उपलभ्यते,बोध किया जा सकता है +15,3,न,कभी नहीं +15,3,अन्तः,अन्त +15,3,न,कभी नहीं +15,3,च,भी +15,3,आदिः,प्रारम्भ +15,3,न,कभी नहीं +15,3,च,भी +15,3,सम्प्रतिष्ठा,आधार +15,3,अश्वत्थम्,पवित्र बरगद वृक्ष का +15,3,एनम्,इस +15,3,सु,विरूढ मूलम् +15,3,असडग,शस्त्रेण विरक्ति के शस्त्र से +15,3,दृढेन,दृढ +15,3,छित्वा,काट देना चाहिए +15,3,ततः,तब +15,3,तत्,उस +15,3,परिमार्गितव्यम्,खोजना चाहिए +15,3,यस्मिन्,जहाँ +15,3,गताः,जाकर +15,3,न,कभी नहीं +15,3,निवर्तन्ति,वापस आते हैं +15,3,भूयः,पुनः +15,3,तम्,उसको +15,3,एव,निश्चय ही +15,3,च,भी +15,3,आद्यम्,मूल +15,3,पुरुषम्,परम प्रभुः प्रपद्ये +15,3,यतः,जिससे +15,3,प्रवृत्तिः,गतिविधि +15,3,प्रसृता,प्रवाह +15,3,पुराणी,अनादिकाल। +15,4,न,नहीं +15,4,रूपम्,रूप +15,4,अस्य,इसकी +15,4,इह,इस संसार में +15,4,तथा,जैसे की +15,4,उपलभ्यते,बोध किया जा सकता है +15,4,न,कभी नहीं +15,4,अन्तः,अन्त +15,4,न,कभी नहीं +15,4,च,भी +15,4,आदिः,प्रारम्भ +15,4,न,कभी नहीं +15,4,च,भी +15,4,सम्प्रतिष्ठा,आधार +15,4,अश्वत्थम्,पवित्र बरगद वृक्ष का +15,4,एनम्,इस +15,4,सु,विरूढ मूलम् +15,4,असडग,शस्त्रेण विरक्ति क�� शस्त्र से +15,4,दृढेन,दृढ +15,4,छित्वा,काट देना चाहिए +15,4,ततः,तब +15,4,तत्,उस +15,4,परिमार्गितव्यम्,खोजना चाहिए +15,4,यस्मिन्,जहाँ +15,4,गताः,जाकर +15,4,न,कभी नहीं +15,4,निवर्तन्ति,वापस आते हैं +15,4,भूयः,पुनः +15,4,तम्,उसको +15,4,एव,निश्चय ही +15,4,च,भी +15,4,आद्यम्,मूल +15,4,पुरुषम्,परम प्रभुः प्रपद्ये +15,4,यतः,जिससे +15,4,प्रवृत्तिः,गतिविधि +15,4,प्रसृता,प्रवाह +15,4,पुराणी,अनादिकाल। +15,5,निः,से मुक्त +15,5,मान,अभिमान +15,5,मोहा:,मोह +15,5,जित,वश में करना +15,5,सडग,आसक्ति +15,5,दोषा:,बुराइयाँ अध्यात्म +15,5,विनिवृत्त,से मुक्त +15,5,कामा:,विषय भोगों की लालसा +15,5,द्वन्द्वैः,द्वैत से +15,5,विमुक्ताः,मुक्त +15,5,सुख,दुःख +15,5,संज्ञैः,जाने जाते हैं +15,5,गच्छन्ति,प्राप्त करते हैं +15,5,अमूढाः,मोहरहित +15,5,पदम्,लोक +15,5,अव्ययम्,अविनाशी +15,5,तत्,उस। +15,6,न,नहीं +15,6,तत्,वह +15,6,भासयते,आलोकित करता है +15,6,सूर्यः,सूर्य न +15,6,शशाङ्कः,चन्द्रमा +15,6,न,न तो +15,6,पावकः,अग्नि +15,6,यत्,जहाँ +15,6,गत्वा,जाकर न +15,6,निवर्तन्ते,वापस आते हैं +15,6,तत्,धाम +15,6,परमम्,परम +15,6,मम,मेरा । +15,7,मम,मेरा +15,7,एव,केवल +15,7,अंश:,अणु अंश +15,7,जीव,लोके +15,7,जीवभूतः,सन्निहित आत्मा +15,7,सनातनः,नित्य +15,7,मनः,मन +15,7,षष्ठानि,छह +15,7,इन्द्रियाणि,इन्द्रियों सहित +15,7,प्रकृति,भौतिक प्रकृति के बंधन में +15,7,स्थानि,स्थित +15,7,कर्षति,संघर्ष। +15,8,शरीरम्,शरीर +15,8,यत्,जैसे +15,8,अवाप्नोति,प्राप्त करता है +15,8,यत्,जैसे +15,8,च,और +15,8,अपि,भी +15,8,उत्क्रामति,छोड़ता है +15,8,ईश्वरः,भौतिक शरीर का स्वामी +15,8,गृहीत्वा,ग्रहण करके +15,8,एतानि,इन्हें +15,8,संयाति,चला जाता है +15,8,वायुः,वायुः गन्धान् +15,8,इव,सदृश +15,8,आशयात्,धारण करना। +15,9,श्रोत्रम्,कान +15,9,चक्षुः,आँखें +15,9,स्पर्शनम्,"त्वचा इन्द्रिय, च" +15,9,रसनम्,"जीभ, घ्राणम्" +15,9,एव,भी +15,9,च,तथा +15,9,अधिष्ठाय,स्थित होकर +15,9,मन:,मन +15,9,च,भी +15,9,अयम्,यह +15,9,विषयान्,इन्द्रिय विषय +15,9,उपसेवते,भोग करता है। +15,10,उत्क्रामन्तम्,प्रस्थान करते हुए +15,10,स्थितम्,शरीर में रहते हुए +15,10,वा,अपि +15,10,भुजजानम्,भोग करते हुए +15,10,वा,अथवा +15,10,गुण,अन्वितम् +15,10,विमूढाः,अज्ञानी +15,10,न,कभी नहीं +15,10,अनुपश्यन्ति,जान सकते हैं +15,10,पश्यन्ति,देख सकते हैं +15,10,ज्ञान,चक्षुषः +15,11,यतन्तः,प्रयासरत करता +15,11,योगिन:,योगी +15,11,च,भी +15,11,एनम्,इसे +15,11,पश्यनित,देखता है +15,11,आत्मनि,शरीर में +15,11,अवस्थितम्,प्रतिष्ठित +15,11,यतन्तः,प्रयत्न करते हुए +15,11,अपि,यद्यपि +15,11,अकृत,आत्मानः +15,11,न,नहीं +15,11,एनम्,इसे +15,11,पश्यन्ति,देखते हैं +15,11,अचेतसः,अनभिज्ञ रहते हैं। +15,12,यत्,जो +15,12,आदित्य,गतम् +15,12,तेजः,दीप्ति +15,12,जगत्,ब्रह्मांड +15,12,भासयते,आलोकित होता है +15,12,अखिलम्,सम्पूर्ण +15,12,यत्,जो +15,12,चन्द्रमसि,चन्द्रमा में +15,12,यत्,जो +15,12,च,भी +15,12,अग्नौ,अग्नि में +15,12,तत्,वह +15,12,तेजः,तेज +15,12,विद्धि,जानो +15,12,मामकम्,मुझसे।। +15,13,गाम्,पृथ्वीलोक में +15,13,आविश्य,व्याप्त +15,13,च,भी +15,13,भूतानि,जीवों के +15,13,धारयामि,धारणा करता हूँ +15,13,अहम्,मैं +15,13,ओजसा,शक्ति +15,13,पुष्णामि,पोषण करता +15,13,च,तथा +15,13,औषधीः,पेड़ पौधों को +15,13,सर्वोः,समस्त +15,13,सोमः,चन्द्रमा +15,13,भूत्वा,बनकर +15,13,रस,आत्मकः +15,14,अहम्,मैं +15,14,वैश्वानरः,पाचक +15,14,भूत्वा,बन कर +15,14,प्राणिनाम्,सभी जीवों के +15,14,देहम्,शरीर +15,14,अश्रित:,स्थित +15,14,प्राण,अपान +15,14,समायुक्तः,संतुलित होना +15,14,पचामि,पचाता हूँ +15,14,अन्नम्,अन्न को +15,14,चतुःविधम्,चार प्रकार के। +15,15,सर्वस्य,सभी प्रणियों के +15,15,च,और +15,15,अहम्,मैं +15,15,हृदि,हृदय में +15,15,सन्निविष्ट:,स्थित +15,15,मत्तः,मुझसे +15,15,स्मृति:,स्मरणशक्ति +15,15,ज्ञानम्,ज्ञान +15,15,अपोहनम्,विस्मृति +15,15,च,और +15,15,सर्वेः,समस्त +15,15,अहम्,मैं हूँ +15,15,एव,निश्चय ही +15,15,वेद्यः,"वेदों द्वारा जानने योग्य, ज्ञेय" +15,15,वेदान्त,कृत +15,15,वेदवित्,वेदों का अर्थ जानने वाले +15,15,एव,निश्चय ही +15,15,च,और +15,15,अहम्,मैं। +15,16,द्वौ,दो +15,16,इमौ,ये +15,16,पुरुषौ,जीव +15,16,लोके,सृष्टि में +15,16,क्षर:,नश्वर +15,16,च,और +15,16,अक्षर:,अविनाशी +15,16,एव,वास्तव में +15,16,च,तथा +15,16,क्षरः,नश्वर +15,16,सर्वाणि,सभी +15,16,भूतानि,जीवों को +15,16,कूट,स्थ: +15,16,अक्षर:,अविनाशी +15,16,उच्यते,कहा जाता है। +15,17,उत्तमः,परम +15,17,पुरुषः,दिव्य व्यक्तित्व +15,17,तु,लेकिन +15,17,अन्यः,अतिरिक्त +15,17,परम,आत्मा +15,17,इति,इस प्रकार +15,17,उदाहृतः,कहा जाता है +15,17,यः,जो +15,17,लोक,त्रयम् +15,17,आविश्य,प्रवेश करके +15,17,बिभिर्ति,पालन करना +15,17,अव्ययः,अविनाशी +15,17,ईश्वरः,नियन्ता। +15,18,यस्मात्,क्योंकि +15,18,क्षरम्,नश्वर +15,18,अतीत:,परे +15,18,अहम्,मैं हूँ +15,18,अक्षरात्,अक्षर से भी +15,18,अपि,भी +15,18,च,तथा +15,18,उत्तमः,परे +15,18,अत:,अतएव +15,18,अस्मि,मैं हूँ +15,18,लोके,संसार में +15,18,वेदे,वैदिक ग्रंथों में +15,18,च,तथा +15,18,प्रथितः,विख्यात +15,18,पुरुष,उत्तमः पुरुषोत्तम के रूप में। +15,19,यः,जो +15,19,माम्,मुझको +15,19,एवम्,इस प्रकार +15,19,असम्मूढः,संदेह रहित +15,19,जानाति,जानता है +15,19,पुरुष,उत्तमम् +15,19,सर्व,वित् +15,19,भजति,भक्ति में तल्लीन +15,19,माम्,मुझको +15,19,सर्व,भावेन सर���वस्व रूप से +15,19,भारत,"भरतपुत्र, अर्जुन।" +15,20,इति,इन +15,20,गुह्य,तमम् +15,20,शास्त्रम्,वैदिक शास्त्र +15,20,इदम्,यह +15,20,उक्तम्,प्रकट किया गया +15,20,मया,मेरे द्वारा +15,20,अनघ,"पापरहित, अर्जुन" +15,20,एतत्,यह +15,20,बुद्ध्वा,समझ कर +15,20,बुद्धिमान्,प्रबुद्ध +15,20,स्यात्,हो जाता है +15,20,कृत,कृत्यः +15,20,च,तथा +15,20,भारत,"भरतपुत्र, अर्जुन।" +16,1,श्रीभगवानुवाच,पुरुषोत्तम भगवान् ने कहा +16,1,अभयम्,निडर +16,1,सत्त्व,संशुद्धिः +16,1,योग,अध्यात्मिक +16,1,व्यवस्थिति:,दृढ़ता +16,1,दानम्,दान +16,1,दमः,इन्द्रियों पर नियंत्रण +16,1,च,और +16,1,यज्ञः,यज्ञ का अनुष्ठान +16,1,च,और +16,1,स्वाध्यायः,धार्मिक ग्रन्थों का अध्ययन +16,1,तपः,तपस्या +16,1,आर्जवम्,स्पष्टवादिता +16,1,अहिंसा,अहिंसा +16,1,सत्यम्,सत्यता +16,1,अक्रोधः,क्रोध से मुक्ति +16,1,त्यागः,त्याग +16,1,शन्तिः,शान्तिप्रियता +16,1,अपैशुनम्,दोषारोपण से दूर +16,1,दया,करुणा +16,1,भूतेषु,सभी जीवों के प्रति +16,1,अलोलुप्त्वम्,लोभ से मुक्ति +16,1,मार्दवम्,भद्रता +16,1,ह्री:,लज्जा +16,1,अचापलम्,अस्थिरहीनता +16,1,तेजः,शक्ति +16,1,क्षमा क्षमाः धृतिः,धैर्य +16,1,शौचम्,पवित्रता +16,1,अद्रोहः,दूसरों के प्रति ईर्ष्याभाव से मुक्ति +16,1,न,नहीं +16,1,अतिमानिता,प्रतिष्ठा की इच्छा से मुक्त +16,1,भवन्ति,हैं +16,1,सम्पदम्,गुण +16,1,दैवीम्,दिव्य स्वभाव +16,1,अभिजातस्य,से संपर्क +16,1,भारत,हे भरतपुत्र। +16,2,श्रीभगवानुवाच,पुरुषोत्तम भगवान् ने कहा +16,2,अभयम्,निडर +16,2,सत्त्व,संशुद्धिः +16,2,योग,अध्यात्मिक +16,2,व्यवस्थिति:,दृढ़ता +16,2,दानम्,दान +16,2,दमः,इन्द्रियों पर नियंत्रण +16,2,च,और +16,2,यज्ञः,यज्ञ का अनुष्ठान +16,2,च,और +16,2,स्वाध्यायः,धार्मिक ग्रन्थों का अध्ययन +16,2,तपः,तपस्या +16,2,आर्जवम्,स्पष्टवादिता +16,2,अहिंसा,अहिंसा +16,2,सत्यम्,सत्यता +16,2,अक्रोधः,क्रोध से मुक्ति +16,2,त्यागः,त्याग +16,2,शन्तिः,शान्तिप्रियता +16,2,अपैशुनम्,दोषारोपण से दूर +16,2,दया,करुणा +16,2,भूतेषु,सभी जीवों के प्रति +16,2,अलोलुप्त्वम्,लोभ से मुक्ति +16,2,मार्दवम्,भद्रता +16,2,ह्री:,लज्जा +16,2,अचापलम्,अस्थिरहीनता +16,2,तेजः,शक्ति +16,2,क्षमा क्षमाः धृतिः,धैर्य +16,2,शौचम्,पवित्रता +16,2,अद्रोहः,दूसरों के प्रति ईर्ष्याभाव से मुक्ति +16,2,न,नहीं +16,2,अतिमानिता,प्रतिष्ठा की इच्छा से मुक्त +16,2,भवन्ति,हैं +16,2,सम्पदम्,गुण +16,2,दैवीम्,दिव्य स्वभाव +16,2,अभिजातस्य,से संपर्क +16,2,भारत,हे भरतपुत्र। +16,3,श्रीभगवानुवाच,पुरुषोत्तम भगवान् ने कहा +16,3,अभयम्,निडर +16,3,सत्त्व,संशुद्धिः +16,3,योग,अध्यात्मिक +16,3,व्यवस्थिति:,दृढ़ता +16,3,दानम्,दान +16,3,दमः,इन्द्रियों पर नियंत्रण +16,3,च,और +16,3,यज्ञः,यज्ञ का अनुष्ठान +16,3,च,और +16,3,स्वाध्यायः,धार्मिक ग्रन्थों का अध्ययन +16,3,तपः,तपस्या +16,3,आर्जवम्,स्पष्टवादिता +16,3,अहिंसा,अहिंसा +16,3,सत्यम्,सत्यता +16,3,अक्रोधः,क्रोध से मुक्ति +16,3,त्यागः,त्याग +16,3,शन्तिः,शान्तिप्रियता +16,3,अपैशुनम्,दोषारोपण से दूर +16,3,दया,करुणा +16,3,भूतेषु,सभी जीवों के प्रति +16,3,अलोलुप्त्वम्,लोभ से मुक्ति +16,3,मार्दवम्,भद्रता +16,3,ह्री:,लज्जा +16,3,अचापलम्,अस्थिरहीनता +16,3,तेजः,शक्ति +16,3,क्षमा क्षमाः धृतिः,धैर्य +16,3,शौचम्,पवित्रता +16,3,अद्रोहः,दूसरों के प्रति ईर्ष्याभाव से मुक्ति +16,3,न,नहीं +16,3,अतिमानिता,प्रतिष्ठा की इच्छा से मुक्त +16,3,भवन्ति,हैं +16,3,सम्पदम्,गुण +16,3,दैवीम्,दिव्य स्वभाव +16,3,अभिजातस्य,से संपर्क +16,3,भारत,हे भरतपुत्र। +16,4,दम्भ:,पाखंड +16,4,दर्पः,दम्भ +16,4,अभिमान:,गर्व +16,4,च,और +16,4,क्रोध:,क्रोध +16,4,पारुष्यम्,कठोर +16,4,एव,निश्चय ही +16,4,च,और +16,4,अज्ञानम्,अज्ञानता +16,4,च,और +16,4,अभिजातस्य,से सम्पन्न +16,4,पार्थ,पृथापुत्र अर्थात अर्जुन +16,4,सम्पदम्,गुण +16,4,आसुरीम्,आसुरी।। +16,5,दैवी,दिव्य +16,5,सम्पत्,गुण +16,5,विमोक्षाय,मुक्ति की ओर +16,5,निबन्धाय,बन्धन +16,5,आसुरी,आसुरी गुण +16,5,मता,माने जाते हैं +16,5,मा,नहीं +16,5,शुचः,शोक +16,5,सम्पदम्,गुणों +16,5,दैवीम्,दैवीय +16,5,अभिजात:,जन्मे +16,5,असि,तुम हो +16,5,पाण्डव,"पाण्डुपुत्र, अर्जुन।" +16,6,द्वौ,दो +16,6,भूत,सर्गों +16,6,लोके,संसार में +16,6,अस्मिन्,इस +16,6,दैवः,दिव्य +16,6,आसुरः,आसुरी +16,6,एव,निश्चय ही +16,6,च,और +16,6,दैव:,दिव्य +16,6,विस्तरश:,विस्तृत रूप से +16,6,प्रोक्त:,कहा गया +16,6,आसुरम् आसुरी लोगः पार्थ,"पृथापुत्र, अर्जुन" +16,6,मे,मुझसे +16,6,शृणु,सुनो। +16,7,प्रवृत्तिम्,उचित कर्म +16,7,च,और +16,7,निवृत्तिम्,अनुचित कर्म करना +16,7,च,और +16,7,जना:,लोग +16,7,न,नहीं +16,7,विदुः,समझते हैं +16,7,आसुराः,आसुरी गुण से युक्त +16,7,न,न हीं +16,7,शौचम्,पवित्रता +16,7,न,न तो +16,7,अपि,भी +16,7,च,और +16,7,आचारः,आचरण +16,7,न,न ही +16,7,सत्यम्,सत्यता +16,7,तेषु,उनमें +16,7,विद्यते,होता है। +16,8,असत्यम्,परम सत्य के बिना +16,8,अप्रतिष्ठम्,बिना आधार के +16,8,ते,वे +16,8,जगत्,संसार +16,8,आहुः,कहते हैं +16,8,अनीश्वरम्,भगवान के बिना +16,8,अपरस्पर,अकारण +16,8,सम्भूतम्,सृजित +16,8,किम्,क्या +16,8,अन्यत्,दूसरे +16,8,काम,हैतुकम् +16,9,एताम्,ऐसे +16,9,दृष्टिम्,विचार +16,9,अवष्टभ्य,देखते हैं +16,9,नष्ट,दि��ाहीन होकर +16,9,आत्मानः,जीवात्माएँ आप +16,9,अल्प,बुद्धयः +16,9,प्रभवन्ति,जन्मते हैं +16,9,उग्र,निर्दयी +16,9,कर्माणः,कर्म +16,9,क्षयाय,विनाशकारी +16,9,जगतः,संसार का +16,9,अहिताः,शत्रु। +16,10,कामम्,काम +16,10,आश्रित्य,प्रश्रय लेकर +16,10,दुष्पूरम्,अतृप्ति +16,10,दम्भ,अहंकार +16,10,मान,अन्विता: +16,10,मोहात्,मोह +16,10,गृहीत्वा,आकर्षित होकर +16,10,असत्,अस्थायी +16,10,ग्रहान्,वस्तुओं को प्रवर्तन्ते +16,10,अशुचि,व्रताः +16,11,चन्ताम्,चिन्ताएँ +16,11,अपरिमेयाम्,अंतहीन +16,11,च,और +16,11,प्रलय,अन्ताम् मृत्यु काल तक +16,11,उपाश्रिताः,शरण लेना +16,11,काम,उपभोग +16,11,परमाः,जीवन का लक्ष्य +16,11,एतावत्,फिर भी +16,11,इति,इस प्रकार +16,11,निश्चिताः,पूर्ण आश्वासन के साथ +16,12,आशा,पाश +16,12,शतैः,सैकड़ों द्वारा +16,12,बद्धाः,बँधे हुए +16,12,काम,वासना +16,12,क्रोध,क्रोधः परायणाः +16,12,ईहन्ते,प्रयास करते हैं +16,12,काम,वासना +16,12,भोग,इन्द्रिय +16,12,अर्थम्,के लिए +16,12,अन्यायेन,अवैध रूप से +16,12,अर्थ,धन +16,12,सञ्चयान्,संचय करना। +16,13,इदम्,यह +16,13,अद्य,आज +16,13,मया,मेरे द्वारा +16,13,लब्धाम्,प्राप्त +16,13,इमम्,इसे +16,13,प्राप्स्ये,मैं प्राप्त करूँगा +16,13,मनः,रथम् इच्छित +16,13,इदम्,यह +16,13,अस्ति,है +16,13,इदम्,यह +16,13,अपि,भी +16,13,मे,मेरा +16,13,भविष्यति,भविष्य में +16,13,पुनः,फिर +16,13,धनम्,धन +16,13,असौ,वह +16,13,मया,मेरे द्वारा +16,13,हतः,मारा गया +16,13,शत्रुः,शत्रु +16,13,हनिष्ये,मैं मारूगाँ +16,13,च,और +16,13,अपरान्,अन्यों को +16,13,अपि,भी +16,13,ईश्वरः,भगवान +16,13,अहम्,मैं हूँ +16,13,अहम्,मैं हूँ +16,13,भोगी,भोक्ता +16,13,सिद्धः,सिद्ध +16,13,अहम्,मैं +16,13,बलवान्,शक्तिशाली +16,13,सुखी,प्रसन्न +16,13,आढ्यः,धनी +16,13,अभिजन,वान् कुलीन संबंधियों के साथ +16,13,अस्मि,मैं +16,13,कः,कौन +16,13,अन्यः,दूसरा +16,13,अस्ति,है +16,13,सदृशः,समान +16,13,मया,मेरे द्वारा +16,13,यक्ष्ये,मैं यज्ञ करूँगा +16,13,दास्यामि,मैं दान दूंगा +16,13,मोदिष्ये,मैं आनंद मनाऊँगा +16,13,इति,इस प्रकार +16,13,अज्ञान,आनतावश +16,13,विमोहिताः,मोहग्रस्त। +16,14,इदम्,यह +16,14,अद्य,आज +16,14,मया,मेरे द्वारा +16,14,लब्धाम्,प्राप्त +16,14,इमम्,इसे +16,14,प्राप्स्ये,मैं प्राप्त करूँगा +16,14,मनः,रथम् इच्छित +16,14,इदम्,यह +16,14,अस्ति,है +16,14,इदम्,यह +16,14,अपि,भी +16,14,मे,मेरा +16,14,भविष्यति,भविष्य में +16,14,पुनः,फिर +16,14,धनम्,धन +16,14,असौ,वह +16,14,मया,मेरे द्वारा +16,14,हतः,मारा गया +16,14,शत्रुः,शत्रु +16,14,हनिष्ये,मैं मारूगाँ +16,14,च,और +16,14,अपरान्,अन्यों को +16,14,अपि,भी +16,14,ईश्वरः,भगवान +16,14,अहम्,मैं हूँ +16,14,अहम्,मैं हूँ +16,14,भोगी,भोक��ता +16,14,सिद्धः,सिद्ध +16,14,अहम्,मैं +16,14,बलवान्,शक्तिशाली +16,14,सुखी,प्रसन्न +16,14,आढ्यः,धनी +16,14,अभिजन,वान् कुलीन संबंधियों के साथ +16,14,अस्मि,मैं +16,14,कः,कौन +16,14,अन्यः,दूसरा +16,14,अस्ति,है +16,14,सदृशः,समान +16,14,मया,मेरे द्वारा +16,14,यक्ष्ये,मैं यज्ञ करूँगा +16,14,दास्यामि,मैं दान दूंगा +16,14,मोदिष्ये,मैं आनंद मनाऊँगा +16,14,इति,इस प्रकार +16,14,अज्ञान,आनतावश +16,14,विमोहिताः,मोहग्रस्त। +16,15,इदम्,यह +16,15,अद्य,आज +16,15,मया,मेरे द्वारा +16,15,लब्धाम्,प्राप्त +16,15,इमम्,इसे +16,15,प्राप्स्ये,मैं प्राप्त करूँगा +16,15,मनः,रथम् इच्छित +16,15,इदम्,यह +16,15,अस्ति,है +16,15,इदम्,यह +16,15,अपि,भी +16,15,मे,मेरा +16,15,भविष्यति,भविष्य में +16,15,पुनः,फिर +16,15,धनम्,धन +16,15,असौ,वह +16,15,मया,मेरे द्वारा +16,15,हतः,मारा गया +16,15,शत्रुः,शत्रु +16,15,हनिष्ये,मैं मारूगाँ +16,15,च,और +16,15,अपरान्,अन्यों को +16,15,अपि,भी +16,15,ईश्वरः,भगवान +16,15,अहम्,मैं हूँ +16,15,अहम्,मैं हूँ +16,15,भोगी,भोक्ता +16,15,सिद्धः,सिद्ध +16,15,अहम्,मैं +16,15,बलवान्,शक्तिशाली +16,15,सुखी,प्रसन्न +16,15,आढ्यः,धनी +16,15,अभिजन,वान् कुलीन संबंधियों के साथ +16,15,अस्मि,मैं +16,15,कः,कौन +16,15,अन्यः,दूसरा +16,15,अस्ति,है +16,15,सदृशः,समान +16,15,मया,मेरे द्वारा +16,15,यक्ष्ये,मैं यज्ञ करूँगा +16,15,दास्यामि,मैं दान दूंगा +16,15,मोदिष्ये,मैं आनंद मनाऊँगा +16,15,इति,इस प्रकार +16,15,अज्ञान,आनतावश +16,15,विमोहिताः,मोहग्रस्त। +16,16,अनेक,कई +16,16,चित्त,कल्पनाएँ +16,16,विभ्रान्ताः,भ्रमित +16,16,मोह,मोह में +16,16,जाल,जाल +16,16,समावृताः,आच्छादित +16,16,प्रसक्ताः,आसक्त +16,16,काम,भोगेषु इन्द्रिय सुखों की तृप्तिः पतन्ति +16,16,नरके,नरक में +16,16,अशुचौ,अंधा नर्क +16,17,आत्म,सम्भाविताः आत्म +16,17,स्तब्धाः,हठी +16,17,धन,संपत्ति +16,17,मान,गर्वः मद +16,17,अन्विताः,पूर्ण +16,17,यजन्ते,यज्ञ करते हैं +16,17,नाम,नाम मात्र के लिए +16,17,यज्ञैः,यज्ञों द्वारा +16,17,ते,वे +16,17,दम्भेन,आडंबरपूर्ण +16,17,अविधि,पूर्वकम् +16,18,अहडकारम्,अभिमान +16,18,बलम्,शक्ति +16,18,दर्पम्,घमंड +16,18,काम,कामना +16,18,क्रोधम्,क्रोध +16,18,च,और +16,18,संश्रिताः,परायण +16,18,माम्,मुझे +16,18,आत्म,पर +16,18,अभ्यसूयकाः,दूसरो की निंदा करने वाले। +16,19,तान्,इन +16,19,अहम्,मैं +16,19,द्विषत:,विद्वेष +16,19,क्रूरान्,निर्दयी +16,19,संसारेषु,भौतिक संसार में +16,19,नराधामान्,नीच और दुष्ट प्राणी +16,19,क्षिपामि,डालता हूँ +16,19,अशस्त्रम्,बार +16,19,अशुभान्,अपवित्र +16,19,आसुरीषु,आसुरी +16,19,एव,वास्तव में +16,19,योनिषु,गर्भ में +16,19,आसुरीम्,आसुरी +16,19,योनिम्,गर्भ ��ें +16,19,आपन्ना:,प्राप्त हुए +16,19,मूढाः,मूर्ख +16,19,जनमनि जनमनि,जन्म +16,19,माम्,मुझको +16,19,अप्राप्य,पाने में असफल +16,19,एव,भी +16,19,कौन्तेय,"कुन्तीपुत्र, अर्जुन" +16,19,ततः,तत्पश्चात +16,19,यान्ति,जाते हैं +16,19,अधमाम्,निन्दित +16,19,गतिम्,गंतव्य को। +16,20,तान्,इन +16,20,अहम्,मैं +16,20,द्विषत:,विद्वेष +16,20,क्रूरान्,निर्दयी +16,20,संसारेषु,भौतिक संसार में +16,20,नराधामान्,नीच और दुष्ट प्राणी +16,20,क्षिपामि,डालता हूँ +16,20,अशस्त्रम्,बार +16,20,अशुभान्,अपवित्र +16,20,आसुरीषु,आसुरी +16,20,एव,वास्तव में +16,20,योनिषु,गर्भ में +16,20,आसुरीम्,आसुरी +16,20,योनिम्,गर्भ में +16,20,आपन्ना:,प्राप्त हुए +16,20,मूढाः,मूर्ख +16,20,जनमनि जनमनि,जन्म +16,20,माम्,मुझको +16,20,अप्राप्य,पाने में असफल +16,20,एव,भी +16,20,कौन्तेय,"कुन्तीपुत्र, अर्जुन" +16,20,ततः,तत्पश्चात +16,20,यान्ति,जाते हैं +16,20,अधमाम्,निन्दित +16,20,गतिम्,गंतव्य को। +16,21,त्रिविधाम्,तीन प्रकार का +16,21,नरकस्य,नरक में +16,21,इदम्,यह +16,21,द्वारम्,द्वार +16,21,नाशनम्,विनाश +16,21,आत्मन:,आत्मा का +16,21,कामः,"काम, क्रोध:" +16,21,तथा,और +16,21,लोभ:,लोभ +16,21,तस्मात्,इसलिए +16,21,एतत्,उन +16,21,त्रयम्,तीनों को +16,21,त्यजेत्,त्याग देना चाहिए। +16,22,एतैः,इन +16,22,विमुक्तः,मुक्त होकर +16,22,कौन्तेय,कुन्तीपुत्र अर्जुन +16,22,तमः,द्वारैः +16,22,त्रिभिः,तीन +16,22,नरः,व्यक्ति +16,22,आचरति,प्रयास करता है +16,22,आत्मन:,आत्मा +16,22,श्रेयः,कल्याण +16,22,ततः,तत्पश्चात +16,22,यति,प्राप्त करता है +16,22,पराम्,सर्वोच्च +16,22,गतिम्,लक्ष्य। +16,23,यः,जो +16,23,शास्त्र,विधिम् +16,23,उत्सृज्य,त्याग कर +16,23,वर्तते,करते हैं +16,23,कामकारतः,इच्छा के आवेग से प्रेरित होकर +16,23,न,न तो +16,23,सः,वे +16,23,सिद्धिम्,पूर्णतः को +16,23,अवाप्नोति,प्राप्त करते हैं +16,23,न,कभी नहीं +16,23,सुखम्,सुख +16,23,न,कभी नहीं +16,23,पराम्,सर्वोच्च +16,23,गतिम्,लक्ष्य। +16,24,तस्मात्,इसलिए +16,24,शास्त्रम्,धार्मिक ग्रंथ +16,24,प्रमाणम्,प्राधिकारी +16,24,ते,तुम्हारा +16,24,कार्य,कर्त्तव्य +16,24,अकार्य,निषिद्ध कर्म +16,24,व्यवस्थितौ,निश्चित करने में +16,24,ज्ञात्वा,जानकर +16,24,शास्त्र,धार्मिक ग्रंथ +16,24,विधान,विधि +16,24,उक्तम्,जैसा कहा गया +16,24,कर्म,कर्म +16,24,कर्तुम्,संपन्न करना +16,24,इह,इस संसार में +16,24,अर्हसि,तुम्हें चाहिए। +17,1,अर्जुन उवाच,अर्जुन ने कहा +17,1,ये,जो +17,1,शास्त्र,विधिम् शास्त्रों के विधि निषेध +17,1,उत्सज्य,उपेक्षाः यजन्ते +17,1,श्रद्धया,अन्विता +17,1,तेषाम्,उनकी +17,1,निष्ठा,श्रद्धा +17,1,तु,वास्तव में +17,1,का,कौन सी +17,1,कृष्ण,कृष्ण +17,1,सत्त्वम्,सत्व गुण +17,1,आहो,अथवा अन्य +17,1,रजः,रजोगुण +17,1,तमः,तमोगुण। +17,2,श्री भगवान् उवाच,भगवान ने कहा +17,2,त्रि,विद्या +17,2,भवति,होना +17,2,श्रद्धा,विश्वास +17,2,देहिनाम्,देहधारियों की +17,2,सा,किसमें +17,2,स्व,भाव +17,2,सात्त्विकी,सत्वगुण +17,2,राजसी,रजोगुण +17,2,च,भी +17,2,एव,निश्चय ही +17,2,तामसी,तमोगुण +17,2,च,तथा +17,2,इति,इस प्रकार +17,2,ताम्,उसको +17,2,शृणु,सुनो। +17,3,सत्त्व,अनुरूपा +17,3,सर्वस्य,सब +17,3,श्रद्धा,"विश्वास, निष्ठा" +17,3,भवति,हो जाती है +17,3,भारत,"भरतपुत्र, अर्जुन" +17,3,श्रद्धामयः,श्रद्धा से युक्त +17,3,अवम्,यह +17,3,पुरुष:,मनुष्य +17,3,यः,जो +17,3,यत्,श्रद्धा +17,3,स,उनकी +17,3,एव,निश्चय ही +17,3,सः,वे। +17,4,यजन्ते,पूजा करते हैं +17,4,सात्त्विका,सत्वगुण से युक्त लोग +17,4,देवान्,स्वर्ग के देवता +17,4,यक्ष,देवताओं के समकक्ष धन और शक्ति से सम्पन्न +17,4,रक्षांसि,शक्तिशाली असुरगण +17,4,राजसाः,रजोगुण में स्थित लोग +17,4,प्रेतान्,भूत +17,4,च,तथा +17,4,अन्ये,अन्य +17,4,यजन्ते,पूजते हैं +17,4,तामसा:,अज्ञानता के गुण में स्थित +17,4,जना:,लोग। +17,5,अ,शास्त्र +17,5,घोरम्,कठोर +17,5,तप्यन्ते,तप करते हैं +17,5,ये,जो लोग +17,5,तपः,तपस्याः जनाः +17,5,दम्भ,घमण्ड +17,5,आहङ्कार,अहंकार युक्त +17,5,संयुक्ताः,से सम्पन्न +17,5,काम,कामना +17,5,राग,आसक्ति +17,5,बल,शक्ति +17,5,अन्विता,प्रेरित होते हैं +17,5,कर्षयन्त:,कष्ट देना +17,5,शरीर,स्थम् शरीर के भीतर +17,5,भूत,ग्रामम् +17,5,अचेतसः,अचेतन +17,5,माम्,मुझे विद्धि +17,5,आसुर,निश्चयान् +17,6,अ,शास्त्र +17,6,घोरम्,कठोर +17,6,तप्यन्ते,तप करते हैं +17,6,ये,जो लोग +17,6,तपः,तपस्याः जनाः +17,6,दम्भ,घमण्ड +17,6,आहङ्कार,अहंकार युक्त +17,6,संयुक्ताः,से सम्पन्न +17,6,काम,कामना +17,6,राग,आसक्ति +17,6,बल,शक्ति +17,6,अन्विता,प्रेरित होते हैं +17,6,कर्षयन्त:,कष्ट देना +17,6,शरीर,स्थम् शरीर के भीतर +17,6,भूत,ग्रामम् +17,6,अचेतसः,अचेतन +17,6,माम्,मुझे विद्धि +17,6,आसुर,निश्चयान् +17,7,आहारः,भोजन +17,7,तु,वास्तव में +17,7,अपि,भी +17,7,सर्वस्य,सबका +17,7,त्रि,विधा +17,7,भवति,होना +17,7,प्रियः,प्यारा +17,7,यज्ञः,यज्ञ +17,7,तपः,तपस्या +17,7,तथा,और +17,7,दानम्,दान +17,7,तेषाम्,उनका +17,7,भेदम्,अंतर +17,7,इमम्,इसे +17,7,शृणु,सुनो। +17,8,आयु,सत्त्वः +17,8,बल,शक्ति +17,8,आरोग्य,स्वास्थ्य +17,8,सुख,सुख +17,8,प्रीति,संतोष +17,8,विवर्धनाः,वृद्धि +17,8,रस्याः,रस से युक्त +17,8,स्निग्धाः,सरस +17,8,स्थिरा:,पौष्टिक +17,8,हृद्याः,हृदय को अच्छे लगने वाले आहारा: +17,8,सात्त्विक,प्रिया सत्वगुणी को प्रिय लगने वाले। +17,9,कटु,कड़वे +17,9,अम्ल,खट्ट +17,9,लवण,नमकीन +17,9,अति,उष्ण +17,9,तीक्ष्ण,चटपटे +17,9,रूक्ष,शुष्क +17,9,विदाहीनः,दाहकारक +17,9,आहाराः,भोजन +17,9,राजसस्य,रजोगुणी व्यक्ति के +17,9,इष्टाः,"प्रिय, दुःखः" +17,9,शोक,दुख +17,9,आमय,रोग +17,9,प्रदाः,उत्पन्न करना। +17,10,यात,यामम् बासी भोजन +17,10,गत,रसम् +17,10,पूति,दुर्गन्धयुक्त +17,10,पर्युषितम्,प्रदूषित +17,10,च,भी +17,10,यत्,जो +17,10,उच्छिष्टम्,जूठा भोजन +17,10,भोजन,आहार +17,10,अपि,भी +17,10,च,और +17,10,अमेध्यम्,अशुद्ध +17,10,भोजनम,भोजन +17,10,तामस,तमोगुणी व्यक्ति को +17,10,प्रियम्,प्रिय। +17,11,अफल,आकाक्षिभिः +17,11,यज्ञः,यज्ञ +17,11,विधि,दिष्टः +17,11,यः,जो +17,11,इज्यते,सम्पन्न करना +17,11,यष्टव्यम,एव +17,11,मनः,मन में +17,11,समाधाय,दृढ़ निश्चय करके +17,11,सः,वह +17,11,सात्त्विकः,सत्वगुण। +17,12,अभिसन्धाय,प्रेरित होकर +17,12,तु,लेकिन +17,12,फलम्,फल +17,12,दम्भ,घमंड +17,12,अर्थम्,के लिए +17,12,अपि,भी +17,12,च,और +17,12,एव,वास्तव में +17,12,यत्,जो +17,12,इज्यते,किया जाता है +17,12,भरत,श्रेष्ठ +17,12,तम्,उस +17,12,यज्ञम्,यज्ञ को +17,12,विधि,जानो +17,12,राजसम्,रजोगुण। +17,13,विधि,हीनम् +17,13,असृष्ट,अत्रम् +17,13,मन्त्र,हीनम् +17,13,अदक्षिणम्,पुरोहितों को दक्षिणा दिये बिना +17,13,श्रद्धा,श्रद्धा +17,13,विरहितम्,बिना +17,13,यज्ञम्,यज्ञ +17,13,तामसम्,तमोगुणः परचिक्षते +17,14,देव,परम प्रभु +17,14,द्विज,ब्राह्मण +17,14,गुरु,आध्यात्मिक आचार्यः प्राज्ञ +17,14,पूजनम्,पूजा +17,14,शौचम्,पवित्रता +17,14,आर्जवम्,पवित्रता +17,14,ब्रह्मचर्यम्,"ब्रह्मचर्य, अहिंसा" +17,14,च,भी +17,14,शरीरम्,देह संबंधी +17,14,तपः,तपस्या +17,14,उच्यते,कहा जाता है। +17,15,अनुद्वेग,करम् +17,15,वाक्यम्,शब्द +17,15,सत्यम्,सत्य +17,15,प्रिय,हितम् +17,15,च,भी +17,15,यत्,जो +17,15,स्वाध्याय,अभ्यसनम् +17,15,च,एव +17,15,वाक्,मयम् +17,15,तपः,तपस्या +17,15,उच्यते,कहा जाता है। +17,16,मनः,प्रसादः +17,16,सौम्यन्तम्,विनम्रता +17,16,मौनम्,मौन धारण करना +17,16,आत्म,विनिग्रह +17,16,भाव,संशुद्धिः +17,16,इति,इस प्रकार +17,16,एतत्,ये +17,16,तपः,तपस्या +17,16,मानसम्,मन की +17,16,उच्यते,इस प्रकार से घोषित किया गया है। +17,17,श्रद्धया,श्रद्धा के साथ +17,17,परया,परे +17,17,तप्तम्,सम्पन्न किए हुए +17,17,तपः,तप +17,17,तत्,वह +17,17,त्रि,विधाम् +17,17,नरैः,मनुष्यों द्वारा +17,17,अफल,काक्षिभिः +17,17,युक्तै:,दृढ़ निश्चय +17,17,सात्त्विकम्,सत्वगुण में +17,17,परिचक्षते,निर्दिष्ट करना। +17,18,सत्,कार +17,18,मान,सम्मान +17,18,पूजा,पूजा +17,18,अर्थम्,के लिए +17,18,तपः,तपस्या +17,18,दम्भेन,डींग मारना +17,18,च,भी +17,18,एव,वास्तव में +17,18,यत्,जो +17,18,क्��ियते,सम्पन्न करना +17,18,तत्,वह +17,18,इस,इस संसार में +17,18,प्रोक्तं,कहा जाता है। राजसम् +17,18,चलम्,अस्थिर +17,18,अध्रुवम्,अस्थायी। +17,19,मूढ,भ्रमित विचारों वाले +17,19,ग्रहेण,प्रयत्न के साथ +17,19,आत्मनः,अपने ही +17,19,यत्,जो +17,19,पीडया,यातना +17,19,क्रियते,सम्पन्न किया जाता है +17,19,तपः,तपस्या +17,19,परस्य,अन्यों को +17,19,उत्सादन,अर्थम् +17,19,वा,अथवा +17,19,तत्,वह +17,19,तामसम्,तमोगुण +17,19,उदाहतम्,कही जाती है। +17,20,दातव्यम्,दान देने योग्यः इति इस प्रकार +17,20,यत्,जो +17,20,दानम्,दान +17,20,दीयते,दिया जाता है +17,20,अनुपकारिणे,बिना प्रतिफल की इच्छा से दान करने वाला +17,20,देशे,उचित स्थान में +17,20,काले,उचित समय में +17,20,च,भी +17,20,पात्रे,पात्र व्यक्ति को +17,20,च,तथा +17,20,तत्,वह +17,20,दानम्,दान +17,20,सात्त्विकम्,सत्वगुण +17,20,स्मृतम्,माना जाता है। +17,21,यत्,जो +17,21,तु,परंतुः प्रति +17,21,फलम्,फल +17,21,उद्देश्य,प्रयोजन +17,21,वा,या +17,21,पुनः,फिर +17,21,दीयते,दिया जाता है +17,21,च,भी +17,21,परिक्लिष्टम्,अनिच्छापूर्वक +17,21,तत्,उस +17,21,दानम्,दान +17,21,राजसम्,रजोगुणी +17,21,स्मृतम्,कहा जाता है। +17,22,अदेश,अपवित्र स्थान +17,22,काले,अनुचित समय में +17,22,यत्,जो +17,22,दानम्,दान +17,22,अपात्रेभ्यः,कुपात्र व्यक्तियों को +17,22,च,भी +17,22,दीयते,दिया जाता है +17,22,असत्,कृतम् +17,22,अवज्ञातम्,अवमानना करके +17,22,तत्,वह +17,22,तामसम्,तामसिक प्रकृति का +17,22,उदाहतम्,कहा जाता है। +17,23,ॐ,तत् +17,23,इति,इस प्रकार +17,23,निर्देशः,प्रतिकात्मक अभिव्यक्तियाँ +17,23,ब्राह्मणः,ब्रह्म का +17,23,त्रि,विध +17,23,स्मृतः,माना जाता है +17,23,ब्राह्मणा:,ब्राह्मण लोग +17,23,तेन,उससे +17,23,वेदा:,धार्मिक ग्रंथ +17,23,च,भी +17,23,यज्ञाः,यज्ञ +17,23,विहिता:,प्रयुक्त +17,23,पुरा,आदिकाल में। +17,24,तस्मात् इसलिए: ॐ,"ओम, पवित्र अक्षर" +17,24,इति,इस प्रकार +17,24,उदाहत्य,उच्चारण करके +17,24,यज्ञ,यज्ञ +17,24,दान,दान +17,24,तपः,तथा तप की +17,24,क्रिया:,क्रियाएँ सम्पन्न करना +17,24,प्रवर्तन्ते,प्रारम्भ हैं +17,24,विधान,उक्ता +17,24,सत्ततम्,सदैव +17,24,ब्रह्म,विदिनाम् +17,25,तत्,पवित्र अक्षर तत्इति +17,25,अनभिसन्धाय,बिना इच्छा के फलम् फल +17,25,यज्ञ,यज्ञ तपः +17,25,क्रियाः,क्रियाएँ +17,25,दान,दान की +17,25,च,भी +17,25,विविधाः,विभिन्न +17,25,क्रियन्ते,की जाती हैं +17,25,मोक्ष,काक्षिभिः +17,26,सत्,भावे +17,26,साधु,भावे +17,26,च,भी +17,26,सत्,सत् शब्द +17,26,इति,इस प्रकार +17,26,एतत्,इस +17,26,प्रयुज्यते,प्रयुक्त किया जाता है +17,26,प्रशस्ते,पवित्रः कर्मणि +17,26,तथा,भी +17,26,सत्,शब्द +17,26,सत्:,पार्थ +17,26,युज्यते,प्रयोग किया जाता है +17,26,यज्ञे,यज्ञ में +17,26,तपसि,तपस्या में +17,26,दाने,दान में +17,26,च,भी +17,26,स्थिति:,दृढ़ता से प्रतिस्थापित +17,26,सत्,पवित्र अक्षर सत +17,26,इति,इस प्रकार +17,26,च,तथा +17,26,उच्यते,उच्चारण किया जाता है +17,26,कर्म,कार्य +17,26,एव,वास्तव में +17,26,तत्,अर्थीयम् +17,26,सत्,पवित्र अक्षर सत्यः इति इस प्रकार +17,26,एव,वास्तव में +17,26,अभिधीयते,नाम दिया गया है। +17,27,सत्,भावे +17,27,साधु,भावे +17,27,च,भी +17,27,सत्,सत् शब्द +17,27,इति,इस प्रकार +17,27,एतत्,इस +17,27,प्रयुज्यते,प्रयुक्त किया जाता है +17,27,प्रशस्ते,पवित्रः कर्मणि +17,27,तथा,भी +17,27,सत्,शब्द +17,27,सत्:,पार्थ +17,27,युज्यते,प्रयोग किया जाता है +17,27,यज्ञे,यज्ञ में +17,27,तपसि,तपस्या में +17,27,दाने,दान में +17,27,च,भी +17,27,स्थिति:,दृढ़ता से प्रतिस्थापित +17,27,सत्,पवित्र अक्षर सत +17,27,इति,इस प्रकार +17,27,च,तथा +17,27,उच्यते,उच्चारण किया जाता है +17,27,कर्म,कार्य +17,27,एव,वास्तव में +17,27,तत्,अर्थीयम् +17,27,सत्,पवित्र अक्षर सत्यः इति इस प्रकार +17,27,एव,वास्तव में +17,27,अभिधीयते,नाम दिया गया है। +17,28,अश्रद्धया,श्रद्धाविहीन +17,28,हुतम्,यज्ञ +17,28,दत्तम,दान +17,28,तपः,कठोर तपस्या +17,28,तप्तम्,सम्पर्क करना +17,28,कृतम्,किया गया +17,28,च,भी +17,28,यत्,जो +17,28,असत्,नश्वर +17,28,इति,इस प्रकार +17,28,उच्यते,कहा जाता है +17,28,पार्थ,"हे पृथापुत्र, अर्जुन" +17,28,न,कभी नहीं +17,28,च,भी +17,28,तत्,वह +17,28,प्रेत्य,परलोक में +17,28,न उ,न तो +17,28,इह,इस संसार में। +18,1,अर्जुनः उवाच,अर्जुन ने कहा +18,1,संन्यासस्य,कर्मों का त्याग +18,1,महाबाहो,बलिष्ट +18,1,तत्त्वम्,सत्य को +18,1,इच्छामि,चाहता हूँ +18,1,वेदितुम,जानना +18,1,त्यागस्य,कर्मफल के भोग की इच्छा का त्याग +18,1,च,भी +18,1,हृषीकेश,"इन्द्रियों के स्वामी, श्रीकृष्ण" +18,1,पृथक्,भिन्न रूप से +18,1,केशि,निषूदन +18,2,श्री भगवान् उवाच,परम भगवान ने कहा +18,2,काम्यानाम्,कामना युक्त +18,2,कर्मणाम्,कर्मो का +18,2,न्यासम्,त्याग करना +18,2,संन्यासम्,संन्यासः कवयः +18,2,विदुः,जानना +18,2,सर्व,सब +18,2,कर्म,कर्म +18,2,फल,कर्मों के फल +18,2,त्यागम् कर्मों फलों के भोग की इच्छा का त्यागः प्राहुः,कहते हैं +18,2,त्यागम्,कर्म फलों के भोग की इच्छा का त्याग +18,2,विचक्षणा:,बुद्धिमान। +18,3,त्यागम्,त्याग देना चाहिए +18,3,दोष,वत् +18,3,इति,इस प्रकार +18,3,एके,कुछ +18,3,कर्म,कर्म +18,3,प्राहुः,कहते हैं +18,3,मनीषिणः,महान विद्वान +18,3,यज्ञ,यज्ञ +18,3,दान,दान +18,3,तपः,तप +18,3,कर्म,कर्म +18,3,न,कभी नहीं +18,3,त्याज्यम्,त्यागना चाहिए +18,3,इति,इस प���रकार +18,3,च,और +18,3,अपरे,अन्य।। +18,4,निश्चयम् निष्कर्षःशृणु,सुनो +18,4,मे,मेरे +18,4,तत्र,वहाँ +18,4,त्यागे,कर्मफलों के भोग की इच्छा का त्याग +18,4,भरत,सत् +18,4,त्यागः,कर्मफलों के भोग की इच्छा का त्याग +18,4,हि,वास्तव में +18,4,पुरुष,व्याघ्र +18,4,त्रि,विधा: +18,4,सम्प्रकीर्तितः,घोषित किया जाता है। +18,5,यज्ञ,"यज्ञ, दान" +18,5,तपः,तपः कर्म +18,5,न,कभी नहीं +18,5,त्याज्यम्,त्यागने चाहिए। कार्यम् +18,5,तत्,उसे +18,5,यज्ञः,यज्ञ +18,5,दानम्,दान +18,5,तपः,तप +18,5,च,और +18,5,एव,वास्तव में +18,5,पावनानि,शुद्ध करने वाले +18,5,मनीषिणाम्,ज्ञानियों के लिए भी। +18,6,एतानि,ये सब +18,6,अपि,निश्चय ही +18,6,तु,लेकिन +18,6,कर्माणि,कार्य +18,6,सड.गम्,आसक्ति को +18,6,त्यक्त्वा,त्यागकर +18,6,फलानि,फलों को +18,6,च,भी +18,6,कर्तव्यानि,कर्त्तव्य समझ कर करने चाहिए +18,6,इति,इस प्रकार +18,6,मे,मेरा +18,6,पार्थ,हे पृथापुत्र अर्जुन +18,6,निश्चितम,निश्चित +18,6,मतम्,मत +18,6,उत्तमम्,श्रेष्ठ। +18,7,नियतस्य,नियत कार्य +18,7,तु,लेकिन +18,7,संन्यासः,संन्यास +18,7,कर्मणः,कर्मो का +18,7,न,कभी नहीं +18,7,उपपद्यते,उचित +18,7,मोहात्,मोहवश +18,7,तस्य,उसका +18,7,परित्यागः,त्याग देना +18,7,तामसः,तमोगुणी +18,7,परिकीर्तितः,घोषित किया जाता है। +18,8,दुःखम्,कष्टदायक +18,8,इति,इस प्रकार +18,8,एव,निश्चय ही +18,8,यत्,जो +18,8,कर्म,कार्य +18,8,काय,शरीर के लिए +18,8,कलेश,कष्टपूर्ण +18,8,भयात्,भय से +18,8,त्यजेत्,त्याग देता है। सः +18,8,कृत्वा,करके +18,8,राजसम्,रजोगुण में +18,8,त्यागम्,त्याग +18,8,न,कभी नहीं +18,8,एव,निश्चय ही +18,8,त्याग,त्यागः फलम् +18,8,लभेत्,प्राप्त करता है। +18,9,कार्यम्,कर्त्तव्य के रूप में +18,9,इति,इस प्रकार +18,9,एव,निःसन्देह +18,9,यत्,जो कर्म +18,9,नियतम्,निर्दिष्ट +18,9,क्रियते,किया जाता है +18,9,अर्जुन,हे अर्जुन +18,9,सडकम्,आसक्ति +18,9,त्यक्त्वा,त्याग कर +18,9,फलम्,फल +18,9,च,भी +18,9,एव,निश्चय ही +18,9,सः,वह +18,9,त्यागः,त्याग +18,9,सात्त्विकः,सत्वगुणी +18,9,मतः,मेरे मत से। +18,10,न,नहीं +18,10,द्वेष्टि,घृणा करता है। अकुशलम् +18,10,कर्म,कर्म +18,10,कुशले,प्रिय +18,10,न,न तो +18,10,अनुषज्जते,आसक्त होता है +18,10,त्यागी,त्यागी +18,10,सत्त्व,सत्वगुण में +18,10,समाविष्ट:,लीन +18,10,मेध वी,बुद्धिमान छिन्न +18,11,न,नहीं +18,11,हि,वास्तव में ही +18,11,देह,भृता +18,11,शक्यम्,सम्भव है +18,11,त्यक्तुम्,त्यागना +18,11,कर्माणि,कर्म +18,11,अशेषतः,पूर्णतया +18,11,यः,जो +18,11,तु,लेकिन +18,11,कर्म,फल +18,11,त्यागी,कर्मफलों को भोगने की इच्छा का त्याग करने वाला +18,11,सः,वे +18,11,त्यागी,कर्म फलो का भोग��े की इच्छा का त्याग करने वाला +18,11,इति,इस प्रकार +18,11,अभिधीयते,कहलाता है। +18,12,अनिष्टम्,दुखद +18,12,इष्टम्,सुखद +18,12,मिश्रम्,मिश्रित +18,12,च,और +18,12,त्रि,विधम् तीन प्रकार के +18,12,कर्मणः,फलम् कर्मों के फल +18,12,भवति,होता है +18,12,अत्यागिनाम्,वे जो निजी पारितोषिक में आसक्त रहते हैं +18,12,प्रेत्य,मृत्यु के पश्चात +18,12,न,नहीं +18,12,तु,लेकिन +18,12,संन्यासिनाम्,कर्मों का त्याग करने वालों के लिए +18,12,क्वचित्,किसी समय। +18,13,पञच,पाँच +18,13,एतानि,ये +18,13,महा,बाहो +18,13,कारणानि,कारण +18,13,निबोध,सुनो +18,13,मे,मुझसे +18,13,साङ्ख्ये,"सांख्य दर्शन के, कृत" +18,13,प्रोक्तानि,व्याख्या करना +18,13,सिद्धये,उपलब्धियों के लिए +18,13,सर्व,समस्त +18,13,कर्मणाम्,कर्मो का। +18,14,अधिष्ठानम्,शरीर +18,14,तथा,भी +18,14,कर्ता,करने वाला (जीवात्मा) +18,14,करणम्,इन्द्रियाँ +18,14,च,और +18,14,पृथक्,विधाम् +18,14,च,और +18,14,पृथक,अलग +18,14,चेष्टा:,प्रयास +18,14,दैवम्,भगवान का विधान +18,14,च,एव +18,14,पञचमम्,पाँचवा। +18,15,शरीर,शरीर वाक् +18,15,मनोभिः,मन से +18,15,यत्,जो +18,15,कर्म,कर्म +18,15,प्रारभते,संपन्न करता है +18,15,नरः,व्यक्ति +18,15,न्याय्य्,"उचित, वा" +18,15,विपरीतम्,अनुचित +18,15,वा,अथवा +18,15,पञ्च,पाँच +18,15,एते,ये सब +18,15,तस्य,उसके +18,15,हेतवः,कारण। तत्र +18,15,सति,होकर +18,15,कर्तारम्,कर्ता +18,15,आत्मानम्,स्वयं का +18,15,केवलम्,केवल +18,15,तु,लेकिन +18,15,यः,जो +18,15,पश्यति,देखता है +18,15,अकृत,बुद्धित्वात् +18,15,न,कभी नहीं +18,15,सः,वह +18,15,पश्यति,देखता है +18,15,दुर्मतिः,मूर्ख। +18,16,शरीर,शरीर वाक् +18,16,मनोभिः,मन से +18,16,यत्,जो +18,16,कर्म,कर्म +18,16,प्रारभते,संपन्न करता है +18,16,नरः,व्यक्ति +18,16,न्याय्य्,"उचित, वा" +18,16,विपरीतम्,अनुचित +18,16,वा,अथवा +18,16,पञ्च,पाँच +18,16,एते,ये सब +18,16,तस्य,उसके +18,16,हेतवः,कारण। तत्र +18,16,सति,होकर +18,16,कर्तारम्,कर्ता +18,16,आत्मानम्,स्वयं का +18,16,केवलम्,केवल +18,16,तु,लेकिन +18,16,यः,जो +18,16,पश्यति,देखता है +18,16,अकृत,बुद्धित्वात् +18,16,न,कभी नहीं +18,16,सः,वह +18,16,पश्यति,देखता है +18,16,दुर्मतिः,मूर्ख। +18,17,यस्य,जिसके +18,17,न,नहीं +18,17,अहडकृतः,कर्तापन के अहंकार से मुक्त +18,17,भावः,प्रकृति +18,17,बुद्धिः,बुद्धि +18,17,यस्य,जिसकी +18,17,न,लिप्यते +18,17,हत्वा,मारकर +18,17,अपि,भी +18,17,सः,वे +18,17,इमान्,इस +18,17,लोकान्,जीवों को +18,17,न,कभी नहीं +18,17,हन्ति,मारता है +18,17,न,कभी नहीं +18,17,निबध्यते,बंधन में पड़ता है। +18,18,ज्ञानम्,ज्ञान +18,18,ज्ञेयम्,ज्ञान का विषयः परिज्ञाता +18,18,त्रि,विधा +18,18,कर्म,चोदना +18,18,करणम्,कर्म के उपादान +18,18,कर्म,कर्म +18,18,कर्ता,कर्ता इति +18,18,त्रि,विधाः +18,18,सड्.ग्रहः,संग्रह। +18,19,ज्ञानम्,ज्ञान +18,19,कर्म,कर्म +18,19,च,और +18,19,कर्ता,कर्ता +18,19,च,भी +18,19,त्रिधा,तीन प्रकार का +18,19,एव,निश्चय ही +18,19,गुण,भेदतः +18,19,प्रोच्यते,कहे जाते हैं +18,19,गुण,"सड्. ख्याने सांख्य दर्शन, जो प्रकृति के गुणों का वर्णन करता हैं" +18,19,यथा,वत् +18,19,शृणु,सुनो +18,19,तानि,उन सबों को +18,19,अपि,भी। +18,20,सर्व,भूतेषु +18,20,येन,जिससे +18,20,एकम्,एक +18,20,भावम्,प्रकृति +18,20,अव्ययम्,अविनाशी +18,20,ईक्षते,कोई देखता है +18,20,अविभक्तम्,अविभाजित +18,20,विभक्तेषु,विभिन्न प्रकार से विभक्त +18,20,तत्,उस +18,20,ज्ञानम्,ज्ञान को +18,20,विद्धि,जानों +18,20,सात्त्विकम्,सत्वगुण। +18,21,पृथक्त्वेन,असंबद्ध +18,21,तु,लेकिन +18,21,यत्,जो +18,21,ज्ञानम्,ज्ञान +18,21,नाना,भावान् +18,21,पृथक्,विधान +18,21,वेत्ति,जानता है +18,21,सर्वेषु,समस्त +18,21,भूतेषु,जीवों में +18,21,तत्,उस +18,21,ज्ञानम्,ज्ञान को +18,21,विद्धि,जानो +18,21,राजसम्,राजसी। +18,22,यत्,जो +18,22,तु,लेकिन +18,22,कृत्स्नवत्,जैसे कि वह पूर्ण सम्मिलित हो +18,22,एकस्मिन्,एक +18,22,कार्ये,कार्य +18,22,सक्तम्,तल्लीन +18,22,अहैतुकम्,अकारण +18,22,अतत्त्व,अर्थ +18,22,अल्पम्,अणु अंश +18,22,च,और +18,22,तत्,वह +18,22,तामसम्,तमोगुणी +18,22,उदाहृतम्,कहा जाता है। +18,23,नियतम्,शास्त्रों के अनुमोदन के अनुसार +18,23,सड्ग,रहितम् +18,23,अराग,द्वतः +18,23,कृतम्,किया गया +18,23,अफल,प्रेप्सुना +18,23,कर्म,कर्म +18,23,यत्,जो +18,23,तत्,वह +18,23,सात्त्विकम्,सत्वगुण +18,23,उच्चये,कहा जाता है। +18,24,यत्,जो +18,24,तु,लेकिन +18,24,काम,ईप्सुना +18,24,कर्म,कर्म +18,24,स,अहङ्कारेण +18,24,वा,अथवा +18,24,पुनः,फिर +18,24,क्रियते,किया जाता है +18,24,बहुल,आयासम् +18,24,तत्,वह +18,24,राजसम्,राजसिक प्रकृति +18,24,उदाहृतम्,कहा जाता +18,25,अनुबन्धाम्,फलस्वरूप +18,25,क्षयम्,क्षति +18,25,हिंसाम्,कष्ट +18,25,अनपेक्ष्य,उपेक्षा करना +18,25,च,और +18,25,पौरुषम्,मनुष्य का सामर्थ्य +18,25,मोहात्,मोह से +18,25,आरभ्यते,प्रारम्भ होता है +18,25,कर्म,कर्म +18,25,यत्,जो +18,25,तत्,वह +18,25,तामसम्,तमोगुण +18,25,उच्यते,कहा जाता है। +18,26,मुक्त,सङ्ग: +18,26,अनहम्,वादी +18,26,धृति,दृढ़ +18,26,उत्साह,उत्साह सहित +18,26,समन्वितः,सम्पन्न +18,26,सिद्धि,असिद्धयोः +18,26,निर्विकारः,अप्रभावित +18,26,कर्ता,कर्ता +18,26,सात्त्विकः,सत्वगुणी +18,26,उच्यते,कहा जाता है। +18,27,रागी अत्यधिक लालायितः कर्म,फल +18,27,हिंसा,आत्मक:हिंसक प्रवृत्ति +18,27,अशुचिः,अपवित्र +18,27,हर्ष,शोक +18,27,कर्ता,ऐसा कर्ता +18,27,राजसः,रजोगुणी +18,27,परिकीर्तितः,घोषित ���िया जाता है। +18,28,अयुक्तः,अनुशासनहीन +18,28,प्राकृतः,अशिष्ट +18,28,स्तब्धाः,हठी +18,28,शठः,धूर्त +18,28,नैष्कृतिक:,कुटिल या नीच +18,28,अलसः,आलसी +18,28,विषादी,अप्रसन्न और निराश +18,28,दीर्घ,सूत्री +18,28,च,और +18,28,कर्ता,कर्ता +18,28,तामसः,तमोगुण +18,28,उच्यते,कहलाता है। +18,29,बुद्धेः,बुद्धि का +18,29,भेदम्,अन्तर +18,29,धृतेः,दृढ़ संकल्प +18,29,च,और +18,29,एव,निश्चय ही +18,29,गुणत:,गुणों के द्वारा +18,29,त्रि,विधाम् +18,29,शृणु,सुनो +18,29,प्रोच्यमानम्,वर्णन +18,29,अशेषेण,विस्तार से +18,29,पृथक्त्वेन,भिन्न प्रकार से +18,29,धनबजय,"धन और वैभव का स्वामी, अर्जुन।" +18,30,प्रवृत्तिम्,गतिविधियाँ +18,30,च,और +18,30,निवृत्तिम्,कर्म से वैराग्य +18,30,च,और +18,30,कार्य,उचित कार्य: अकार्य +18,30,भय,भय +18,30,अभये,भय रहित +18,30,बन्धम्,बंधन क्या है +18,30,मोक्षम्,मोक्ष क्या है +18,30,च,और +18,30,या,जो +18,30,वेत्ति,जानता है +18,30,बुद्धिः,बुद्धि +18,30,सा,वह +18,30,पार्थ,"पृथापुत्र, अर्जुन" +18,30,सात्त्विकी,सत्वगुणी। +18,31,यया,जिसके द्वारा +18,31,धर्मम्,धर्म को +18,31,अधर्मम्,अधर्म को +18,31,च,और +18,31,कार्यम्,उचित आचरण +18,31,च,और +18,31,अकार्यम्,अनुचित आचरण +18,31,एव,निश्चय ही +18,31,च,और +18,31,अयथा,वत् +18,31,प्रजानाति,भेद करना +18,31,बुद्धिः,बुद्धि +18,31,सा,वह +18,31,पार्थ,"पृथा पुत्र, अर्जुन" +18,31,राजसी,रजोगुण। +18,32,अधर्मम्,अधर्म +18,32,धर्मम्,धर्म +18,32,इति,इस प्रकार +18,32,या,जो +18,32,मन्यते,कल्पना करते हैं +18,32,तमसा,अंधकार से +18,32,आवृता,आच्छादित +18,32,सर्व,अर्थान् +18,32,विपरीतान्,विपरीत दिशा में +18,32,च,और +18,32,बुद्धिः,बुद्धि +18,32,सा,वह +18,32,पार्थ,"पृथापुत्र, अर्जुन" +18,32,तामसी,तमोगुण। +18,33,धृत्या,संकल्प द्वारा +18,33,यया,जिससे +18,33,धरयते,धारण करता है +18,33,मन:,मन का +18,33,प्राण,जीवन शक्ति +18,33,इन्द्रिय,इन्द्रियों के क्रिया: +18,33,योगेन,योगाभ्यास द्वारा +18,33,अव्यभिचारिण्या,दृढ़ संकल्प के साथ +18,33,धृतिः,दृढ़ निश्चय +18,33,सा,वह +18,33,पार्थ,"पृथापुत्र, अर्जुन" +18,33,सात्त्विकी,सत्वगुणी। +18,34,यया,जिसके द्वारा +18,34,तु,लेकिन +18,34,धर्म,काम +18,34,धृत्या,दृढ़ इच्छा द्वारा +18,34,धारयते,धारण करता है +18,34,अर्जुन,अर्जुनः प्रसङ्गन +18,34,फल,आकाङ्क्षी +18,34,धृतिः,दृढ़ संकल्प +18,34,सा,वह +18,34,पार्थ,"पृथापुत्र, अर्जुन" +18,34,राजसी,रजोगुण। +18,35,यया,जिससे +18,35,स्वप्नं,स्वप्नम् +18,35,भयम्,भय +18,35,शोकम्,शोक +18,35,विषादम्,दुख +18,35,मदम्,मोह +18,35,एव,वास्तव में +18,35,च,और +18,35,न,कभी नहीं +18,35,विमुञ्चति,त्यागती है +18,35,दुर्मेधा,दुर्बुद्धि +18,35,बृति:,संकल्प +18,35,सा,वह +18,35,���ार्थ,"पृथापुत्र, अर्जुन" +18,35,तामसी,तमोगुणी। +18,36,सुखम्,सुख +18,36,तु,लेकिन +18,36,इदानीम्,अब +18,36,त्रि,विधम् तीन प्रकार का +18,36,शृणु,सुनो +18,36,मे,मुझसे +18,36,भरत,ऋषभ +18,36,रमते,भोगता है +18,36,यत्र,जहाँ +18,36,दुःख,अन्तम् +18,36,च,और +18,36,निगच्छति,पहुंचता है। +18,37,यत्,जो +18,37,तत्,वह +18,37,अग्रे,आरम्भ में +18,37,विषम्,इव +18,37,परिणामे,अन्त में +18,37,अमृत,उपमम् +18,37,तत्,वह +18,37,सुखम्,सुख +18,37,सात्त्विकम्,सत्वगुणी +18,37,प्रोक्तम्,कहा जाता है +18,37,आत्म,बुद्धि +18,37,प्रसाद,जम् +18,38,विषय,इन्द्रिय विषयों के साथ +18,38,इन्द्रिय,इन्द्रियों के +18,38,संयोगत्,संपर्क से +18,38,यत्,जो +18,38,तत्,वह +18,38,अग्रे,प्रारम्भ में +18,38,अमृत,उपमम् +18,38,परिणामे,अन्त में +18,38,विषम्,इव +18,38,तत्,वह +18,38,सुखम्,सुख +18,38,राजसम्,राजसी +18,38,स्मृतम्,माना जाता है। +18,39,यत्,जो +18,39,अग्रे,प्रारम्भ में +18,39,च,और +18,39,अनुबन्धे,अंत में +18,39,च,और +18,39,सुखम्,सुख +18,39,मोहनम्,मोह +18,39,आत्मन:,अपना +18,39,निद्रा,नींद +18,39,आलस्य,आलस्य +18,39,प्रमाद,मोह से +18,39,उत्थम्,उत्पन्न +18,39,तत्,वह +18,39,तामसम्,तामसी +18,39,उदाहृतम्,कहलाता है। +18,40,न,नहीं +18,40,तत्,वह +18,40,अस्थि,है +18,40,पृथ्वीव्याम्,पृथ्वी पर +18,40,वा,या +18,40,दिवि,स्वर्ग के उच्च लोक +18,40,देवेषु,स्वर्ग के देवताओं में +18,40,वा,याः पुनः +18,40,सत्वम,अस्तित्त्व +18,40,प्रकृति,जे +18,40,मुक्तम,मुक्त होना +18,40,यत्,जो +18,40,एभि,इनके प्रभाव से +18,40,स्यात,है +18,40,त्रिभिः,तीन +18,40,गुणैः,प्रकृति के गुण। +18,41,ब्राह्मण,पुरोहित वर्गः क्षत्रिय युद्ध और शासन करने वाला वर्ग: विशाम व्यापार और कषि करने वाला वर्ग +18,41,शूद्राणाम्,श्रमिक वर्ग +18,41,च,और +18,41,परन्तप,"शत्रुओं का विजेता, अर्जुन" +18,41,कर्माणि,कर्त्तव्य +18,41,प्रविभक्तानि,विभाजित +18,41,स्वभाव,प्रभवैः +18,42,शमः,शान्ति +18,42,दमः,संयम +18,42,तपः,तपस्या +18,42,शौचम्,पवित्रता +18,42,क्षान्तिः,धैर्य +18,42,आर्जवम्,सत्यनिष्ठा +18,42,एव,निश्चय ही +18,42,च,और +18,42,ज्ञानम्,"ज्ञान, विज्ञानम्" +18,42,अस्तिक्यम्,परलोक में विश्वास +18,42,ब्रह्म,"ब्राह्मण, पुरोहित वर्ग" +18,42,कर्म,कार्य +18,42,स्वभावजम्,स्वाभाविक गुणों से उत्पन्न। +18,43,शौयम्,शौर्य +18,43,तेजः,शक्ति +18,43,धृतिः,धैर्य +18,43,दाक्ष्यम्,युद्धे +18,43,च,और +18,43,अपि,भी +18,43,अपलायनम्,विमुख न होना +18,43,दानम्,उदार हृदय +18,43,ईश्वर,नेतृत्व +18,43,भावः,गुणः च +18,43,क्षात्रम्,योद्धा और शासक वर्ग +18,43,कर्म,कार्य +18,43,स्वभाव,जम् +18,44,कृषि,खेती +18,44,गो,रक्ष्य +18,44,वाणिज्यम्,व्यापार +18,44,वैश्य,व्यापारी और ���ृषक वर्ग +18,44,कर्म,कार्य +18,44,स्वभाव,जम् +18,44,परिचर्या,श्रम द्वारा +18,44,आत्मकम्,स्वाभाविक +18,44,कर्म,कर्त्तव्य +18,44,शूद्रस्य,कर्मचारी वर्ग +18,44,अपि,भी +18,44,स्वभाव,जम् +18,45,स्वे,स्वे +18,45,कर्मणि,कर्म में +18,45,अभिरत:,पूरा करना +18,45,संसिद्धिम्,पूर्णता को +18,45,लभते,प्राप्त करना +18,45,नरः,मनुष्य +18,45,स्व,कर्म +18,45,निरतः,संलग्न +18,45,सिद्धिम्,पूर्णता को +18,45,यथा,जैसे +18,45,विन्दति,प्राप्त करता है +18,45,तत्,वह +18,45,शृणु,सुनो। +18,46,यतः,जिससे +18,46,प्रवृत्तिः,अस्तित्त्व में आना +18,46,भूतानाम्,सभी जीवित प्राणी +18,46,येन,जिसके द्वारा +18,46,सर्वम्,सब +18,46,इदम्,यह +18,46,ततम्,व्याप्त +18,46,स्व,कर्मणा किसी की स्वाभाविक वृत्तियाँ +18,46,तम्,उसको +18,46,अभ्यर्च्य,पूजा करके +18,46,सिद्धिम्,सिद्धि को +18,46,विन्दति,प्राप्त करता है +18,46,मानवः,मनुष्य। +18,47,श्रेयान्,श्रेष्ठ +18,47,स्व,धर्मः +18,47,विगुणः,त्रुटिपूर्ण ढंग से सम्पन्न करना +18,47,परधार्मात्,दूसरों की अपेक्षा +18,47,सु,अनुष्ठितात् +18,47,स्वभाव,नियतम् +18,47,कर्म,कर्म कुर्वन् +18,47,न,कभी नहीं +18,47,आप्नोति,प्राप्त करता है +18,47,किल्बिषम्,पाप को। +18,48,सहजम्,किसी की प्रकृति से उत्पन्न +18,48,कर्म,कर्त्तव्य +18,48,कौन्तेय,"कुन्तीपुत्र, अर्जुन" +18,48,स,दोषम् दोषयुक्त +18,48,अपि,यद्यपि +18,48,न,त्यजेत् +18,48,सर्व,आरम्भाः +18,48,हि,वास्तव में +18,48,दोषेण,बुराई के साथ +18,48,धूमेन,धुएँ से +18,48,अग्निः,अग्नि +18,48,इव,सदृश +18,48,आवृताः,आच्छादित। +18,49,असक्त,बुद्धिः +18,49,सर्वत्र,सभी स्थानों पर +18,49,जित,आत्मा +18,49,विगत,स्पृहः +18,49,नैष्कर्म्य,सद्धिम् अकर्मण्यता की स्थिति +18,49,परमाम्,सर्वोच्च +18,49,संन्यासेन,वैराग्य के अभ्यास द्वारा +18,49,अधिगच्छति,प्राप्त करता है। +18,50,सिद्धिम् पूर्णता को प्राप्तः,प्राप्त करना +18,50,यथा,कैसे +18,50,ब्रह्म,ब्रह्म +18,50,तथा,भी +18,50,आप्नोति,प्राप्त करता है +18,50,निबोध,सुनो +18,50,मे,मुझसे +18,50,समासेन,संक्षेप में +18,50,एव,वास्तव में +18,50,कौन्तेय,"कुन्तीपुत्र, अर्जुन" +18,50,निष्ठा,दृढ़ता से स्थित +18,50,ज्ञानस्य,ज्ञान की +18,50,या,जो +18,50,परा,दिव्य। +18,51,बुद्धया,बुद्धि +18,51,विशुद्धया,शुद्ध +18,51,युक्तः,युक्त होना +18,51,धृत्या,दृढ़ संकल्प के साथ +18,51,आत्मानम्,बुद्धि को +18,51,नियम्य,रोकना +18,51,च,और +18,51,शब्द,आदीन् +18,51,त्यक्त्वा,त्यागकर +18,51,राग,द्वेषौ +18,51,व्युदस्य,एक ओर रख कर +18,51,च,और +18,51,विविक्त,सेवी +18,51,लघु,आशी +18,51,यत,नियंत्रण करके +18,51,वाक्,वाणी +18,51,काय,शरीर +18,51,मानसः,मन +18,51,ध्यान,योग +18,51,नित्यम्,सदैव +18,51,वैराग्यम्,उदासीनता +18,51,समुपाश्रितः,शरण लेकर +18,51,अहड्.कारम्,अहंकार +18,51,बलम्,अहिंसा +18,51,दर्पम्,घमंड को +18,51,कामम्,इच्छा +18,51,क्रोधम्,क्रोध +18,51,परिग्रहम्,स्वार्थ मुक्त +18,51,विमुच्य,मुक्त होकर +18,51,निर्ममः,स्वामित्व की भावना से रहित +18,51,शान्तः,शान्तिप्रियब्रह्म +18,51,कल्पते,योग्य हो जाता है। +18,52,बुद्धया,बुद्धि +18,52,विशुद्धया,शुद्ध +18,52,युक्तः,युक्त होना +18,52,धृत्या,दृढ़ संकल्प के साथ +18,52,आत्मानम्,बुद्धि को +18,52,नियम्य,रोकना +18,52,च,और +18,52,शब्द,आदीन् +18,52,त्यक्त्वा,त्यागकर +18,52,राग,द्वेषौ +18,52,व्युदस्य,एक ओर रख कर +18,52,च,और +18,52,विविक्त,सेवी +18,52,लघु,आशी +18,52,यत,नियंत्रण करके +18,52,वाक्,वाणी +18,52,काय,शरीर +18,52,मानसः,मन +18,52,ध्यान,योग +18,52,नित्यम्,सदैव +18,52,वैराग्यम्,उदासीनता +18,52,समुपाश्रितः,शरण लेकर +18,52,अहड्.कारम्,अहंकार +18,52,बलम्,अहिंसा +18,52,दर्पम्,घमंड को +18,52,कामम्,इच्छा +18,52,क्रोधम्,क्रोध +18,52,परिग्रहम्,स्वार्थ मुक्त +18,52,विमुच्य,मुक्त होकर +18,52,निर्ममः,स्वामित्व की भावना से रहित +18,52,शान्तः,शान्तिप्रियब्रह्म +18,52,कल्पते,योग्य हो जाता है। +18,53,बुद्धया,बुद्धि +18,53,विशुद्धया,शुद्ध +18,53,युक्तः,युक्त होना +18,53,धृत्या,दृढ़ संकल्प के साथ +18,53,आत्मानम्,बुद्धि को +18,53,नियम्य,रोकना +18,53,च,और +18,53,शब्द,आदीन् +18,53,त्यक्त्वा,त्यागकर +18,53,राग,द्वेषौ +18,53,व्युदस्य,एक ओर रख कर +18,53,च,और +18,53,विविक्त,सेवी +18,53,लघु,आशी +18,53,यत,नियंत्रण करके +18,53,वाक्,वाणी +18,53,काय,शरीर +18,53,मानसः,मन +18,53,ध्यान,योग +18,53,नित्यम्,सदैव +18,53,वैराग्यम्,उदासीनता +18,53,समुपाश्रितः,शरण लेकर +18,53,अहड्.कारम्,अहंकार +18,53,बलम्,अहिंसा +18,53,दर्पम्,घमंड को +18,53,कामम्,इच्छा +18,53,क्रोधम्,क्रोध +18,53,परिग्रहम्,स्वार्थ मुक्त +18,53,विमुच्य,मुक्त होकर +18,53,निर्ममः,स्वामित्व की भावना से रहित +18,53,शान्तः,शान्तिप्रियब्रह्म +18,53,कल्पते,योग्य हो जाता है। +18,54,ब्रह्म,भूतः ब्रह्म में स्थित प्रसन्न +18,54,न,न तो +18,54,शोचति,शोक करना +18,54,न,न ही +18,54,काङ्क्षति,कामना करता है +18,54,समः,समभाव से +18,54,सर्वेषु,सब के प्रति +18,54,भूतेषु,जीवों पर +18,54,मत्,भक्तिम् +18,54,लभते,प्राप्त करता है +18,54,पराम्,परम। +18,55,भक्त्या,प्रेममयी भक्ति +18,55,माम्,मुझे अभिजानाति +18,55,यावान्,जितना +18,55,यः,च +18,55,तत्त्वतः,सत्य के रूप में +18,55,ततः,तत्पश्चात +18,55,माम्,मुझे +18,55,तत्त्वतः,सत्य के रूप में +18,55,ज्ञात्वा,जानकर +18,55,विशते,प्रवेश करता है +18,55,तत्,अनन्तर���् तत्पश्चात। +18,56,सर्व,सब +18,56,कर्माणि,कर्म +18,56,अपि,यद्यपि +18,56,सदा,सदैव +18,56,कुर्वाणः,निष्पादित करते हुए +18,56,मत्,व्यपाश्रयः +18,56,मत्,प्रसादात् +18,56,अवाप्नोति,प्राप्त करता है +18,56,शाश्वतम्,नित्य +18,56,पदम्,धाम +18,56,अव्ययम्,अविनाशी। +18,57,चेतसा,चेतना द्वारा +18,57,सर्व,कर्माणि समस्त कर्म +18,57,मयि,मुझको +18,57,संन्यस्य,सम्पर्ण +18,57,मत्,परः +18,57,बुद्धि,योगम् बुद्धि को भगवान में एकीकृत करते हुए +18,57,उपाश्रित्य,शरण लेकर +18,57,मत्,चित् +18,57,सततम्,सदैव +18,57,भव,होना। +18,58,मत्,चित्त: +18,58,सर्व,सब +18,58,दुर्गाणि,बाधाओं को +18,58,मत्,प्रसादात् +18,58,तरिष्यसि,तुम पार कर सकोगे +18,58,अथ,लेकिन +18,58,चेत्,यदि +18,58,त्वम्,तुम +18,58,अहङ्कारात्,अभिमान के कारण +18,58,न,श्रोष्यसि +18,58,विनश्यसि,तुम्हारा विनाश हो जाएगा। +18,59,यत्,यदि +18,59,अहङ्कारम्,अहंकार से प्रेरित +18,59,आश्रित्य,शरण लेकर +18,59,न,योत्स्ये +18,59,इति,इस प्रकार +18,59,मन्यसे,तुम सोचते हो +18,59,मिथ्याएष,यह सब झूठ है +18,59,व्यवसायः,दृढ़ संकल्प +18,59,ते,तुम्हारा +18,59,प्रकृतिः,भौतिक प्रकृति +18,59,त्वाम्,तुमको +18,59,नियोक्ष्यति,विवश करेगी। +18,60,स्वभाव,जेन अपने प्राकृतिक गुण से उत्पन्न +18,60,कौन्तेय,"कुन्तीपुत्र,अर्जुन" +18,60,निबद्धः,बद्ध +18,60,स्वेनअपनी,प्रवृत्ति द्वारा +18,60,कर्मणा,कर्मों द्वारा +18,60,कर्तुम्,करने के लिए +18,60,न,नहीं +18,60,इच्छसि,इच्छा करते हो +18,60,यत्,जिसे +18,60,मोहात्,मोह के कारण +18,60,करिष्यसि,तुम करोगे +18,60,अवश:,असहाय होकर +18,60,अपि,भी +18,60,तत्,वह। +18,61,ईश्वर:,परमेश्वर +18,61,सर्व,भूतानाम् +18,61,हृत्,देशे +18,61,अर्जुन,अर्जुन +18,61,तिष्ठति,वास करता है +18,61,भ्रामयन्,भटकने का कारण +18,61,सर्व,भूतानि +18,61,यन्त्र,आरूढानि +18,62,तम्,उस पर +18,62,एव,केवल +18,62,शरणम् गच्छ,शरण ग्रहण करो +18,62,सर्व,भावेन विशाल हृदय से +18,62,भारत,"भरतपुत्र, अर्जुन" +18,62,तत्,प्रसादात् +18,62,पराम्,परम +18,62,शान्तिम्,शान्ति +18,62,स्थानम्,धाम को प्राप्सयसि +18,62,शाश्वतम्,नित्य। +18,63,इति,इस प्रकार +18,63,ते,तुमको +18,63,ज्ञानम्,ज्ञान +18,63,आख्यातम्,समझाना +18,63,गुह्यात्,गूढ़ से अधिक +18,63,गुह्य,तरम् +18,63,मया,मेरे द्वारा +18,63,विमृश्य,विचार करके +18,63,एतत्,इस +18,63,अशेषेण,पूर्णतया +18,63,यथा,जैसी +18,63,इच्छसि,इच्छा हो +18,63,तथा,वैसा ही +18,63,कुरु,करो। +18,64,सर्व,गुह्य +18,64,भूयः,पुनः शृणु +18,64,मे,मुझसे +18,64,परमम्,परम +18,64,वचः,आदेश +18,64,इष्ट:असि,अतिशय प्रिय हो +18,64,मे,मुझे दृढम् +18,64,ततः,क्योंकि +18,64,वक्ष्यामि,कह रहा हूँ +18,64,ते,तुम्हारे +18,64,हितम्,लाभ के लिए +18,65,मत्,मनाः +18,65,भव,होओ +18,65,मत्,भक्त: +18,65,मत्,याजी +18,65,माम्,मुझे नमस्कुरू +18,65,माम्,मेरे पास +18,65,एव,निश्चित रूप से +18,65,एष्यसि,आओगे +18,65,सत्यम्,वास्तव में +18,65,ते,तुमसे +18,65,प्रतिजाने,वचन देता हूँ +18,65,प्रिय:,प्रिय +18,65,असि,हो +18,65,मे,मुझको। +18,66,सर्व,धर्मान् सभी प्रकार के धर्मः परित्यज्य +18,66,माम्,मेरी +18,66,एकम्,केवल +18,66,शरणम्,शरण में +18,66,व्रज,जाओ +18,66,अहम्,मैं +18,66,त्वाम्,मुमको +18,66,सर्व,समस्त +18,66,पापेभ्यः,पापों से +18,66,मोक्षयिष्यामि,मुक्त करूँगा +18,66,मा,मत +18,66,शुचः,डरो मत। +18,67,इदम्,यह +18,67,ते,तुम्हारे द्वारा +18,67,न,कभी नहीं +18,67,अतपस्काय,वे जो संयमी नहीं है +18,67,न,कभी नहीं +18,67,अभक्ताय,वे जो भक्त नहीं हैं +18,67,कदाचन,किसी समय +18,67,न,कभी नहीं +18,67,च,भी +18,67,अशुश्रूषवे,वे जो आध्यात्मिक विषयों को सुनने के विरुद्ध हैं +18,67,वाच्यम्,कहने के लिए +18,67,न,कभी नहीं +18,67,च,भी +18,67,माम्,मेरे प्रति +18,67,यः,जो +18,67,अभ्यसूयति,द्वेष करता है। +18,68,यः,जो +18,68,इदम्,इस +18,68,परमम्,अत्यन्त +18,68,गुह्यम्,गूढ़ ज्ञान को +18,68,मत्,भक्तेषु मेरे भक्तों में +18,68,अभिधास्यति,सिखाता है +18,68,भक्तिम्,प्रेम भक्ति का महान कार्य +18,68,मयि,मेरी +18,68,परम्,अलौकिक +18,68,कृत्वा,करके +18,68,माम्,मुझको +18,68,एव,निश्चय ही +18,68,एष्यति,प्राप्त होता है +18,68,असंशयः,नि:संदेह। +18,69,न,कभी नहीं +18,69,च,और +18,69,तस्मात्,उनकी उपेक्षा +18,69,मनुष्येषु,मनुष्यों में +18,69,कश्चित्,कोई +18,69,मे,मुझको +18,69,प्रिय,कृत् +18,69,भविता,होगा +18,69,न,न तो +18,69,च,तथा +18,69,मे,मुझे +18,69,तस्मात्,उनकी अपेक्षा +18,69,अन्यः,दूसरा +18,69,प्रिय,तरः +18,69,भुवि,इस पृथ्वी पर। +18,70,अध्येष्यते,अध्ययन +18,70,च,और +18,70,यः,जो +18,70,इमं,इस +18,70,धर्म्यम्,पवित्र +18,70,संवादम्,संवाद +18,70,आवयोः,हमारे +18,70,ज्ञान,ज्ञान +18,70,यज्ञेन,ज्ञान का समर्पण +18,70,तेन,उसके द्वारा +18,70,अहम्,मैं +18,70,इष्ट:,पूजा +18,70,स्याम्,होऊँगा +18,70,इति,इस प्रकार +18,70,मे,मेरा +18,70,मतिः,मत। +18,71,श्रद्धा,वान् +18,71,अनसूयः,द्वेषरहित +18,71,च,तथा +18,71,शृणुयात्,सुनता है +18,71,अपि,निश्चय ही +18,71,यः,जो +18,71,नरः,वह मनुष्यः सः +18,71,अपि,भी +18,71,मुक्तः,मुक्त होकर +18,71,शुभान्,पवित्र +18,71,लोकान्,लोकों को प्राप्नुयात् +18,71,पुण्य,कर्मणाम् +18,72,कच्चित्,क्या +18,72,एतत्,यह +18,72,श्रुतम्,सुना गया +18,72,पार्थ,"पृथापुत्र, अर्जुन" +18,72,त्वया,तुम्हारे द्वारा +18,72,एक,अग्रेण चेतसा +18,72,कच्चित्,क्या +18,72,अज्ञान,अज्ञान का +18,72,सम्मोहः,मोह +18,72,प्रणष्ट:,नष्ट हो गया +18,72,ते,तुम्हारा +18,72,���नत्रय,"धन और वैभव का स्वामी, अर्जुन।" +18,73,अर्जुन उवाच,अर्जुन ने कहा +18,73,नष्ट:,दूर हुआ +18,73,मोह:,मोह +18,73,स्मृति:,स्मरण शक्ति +18,73,लब्धा,पुनः प्राप्त हुई +18,73,त्वत्,प्रसादात् +18,73,मया,मेरे द्वारा +18,73,अच्युत,"अच्युत, श्रीकृष्ण" +18,73,स्थितः,स्थित +18,73,अस्मि,हूँ +18,73,गत,सन्देहः +18,73,करिष्ये,मैं करूँगा +18,73,वचनम्,आदेश को +18,73,तव,आपके। +18,74,सञ्जयःउवाच,संजय ने कहा +18,74,इति,इस प्रकार +18,74,अहम्,मैं +18,74,वासुदेवस्य,श्रीकृष्ण का +18,74,पार्थस्य,तथा अर्जुन का +18,74,च,और +18,74,महा,आत्म्न: +18,74,संवादम्,वार्तालाप +18,74,इमम्,यह +18,74,अश्रौषम्,सुना है +18,74,अद्भुतम्,अद्भुत +18,74,रोम,हर्षणम् +18,75,व्यास,प्रसादात् +18,75,श्रुतवान्,सुना है +18,75,एतत्,इस +18,75,गुह्य,गोपनीय ज्ञान +18,75,अहम्,मैंने +18,75,परम्,परमः योगम् योग +18,75,योग,ईश्वरात् +18,75,कृष्णात्,कृष्ण से +18,75,साक्षात्,साक्षात +18,75,कथ्यतः,कहते हुए +18,75,स्वयम्,स्वयं। +18,76,राजन्,राजा +18,76,संस्मृत्य,बार +18,76,संवादम्,संवाद को +18,76,इमम्,इस +18,76,अद्भुतम्,चौंका देने वाले केशव +18,76,पुण्यम्,पवित्र +18,76,हृष्यामि,हर्षित होता हूँ +18,76,च,और +18,76,मुहुः,मुहुः +18,77,तत्,उस +18,77,च,भी +18,77,संस्मृत्य,संस्मृत्य +18,77,रूपम्,विराट रूप को +18,77,अति,अत्यधिक +18,77,अद्भुतम्,आश्चर्यजनक +18,77,हरे:,भगवान् श्रीकृष्ण के +18,77,विस्मय:,आश्चर्य +18,77,मे,मेरा +18,77,महान,महान +18,77,राजन्,राजा +18,77,हृष्यामि,मैं हर्ष से रोमांचित हो रहा हूँ +18,77,च,और +18,77,पुनः,पुनः +18,78,यत्र,जहाँ +18,78,योग,ईश्वर: +18,78,यत्र,जहाँ +18,78,पार्थः,"पृथापुत्र, अर्जुन" +18,78,धनु:,धरः +18,78,तत्र,वहाँ +18,78,श्री:,ऐश्वर्य +18,78,विजयः,विजय +18,78,भूति:,समृद्धि +18,78,ध्रुवा,अनन्त +18,78,नीतिः,नीति +18,78,मतिः,मम \ No newline at end of file