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Sleeping
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| "title": "प्रकृति का गीत", | |
| "author": "रामधारी सिंह 'दिनकर'", | |
| "text": "प्रकृति का गीत अनोखा है, बहती है धूप-छाँव में रोशनी। नदी की धारा सुगंधित हो, उठती है मिट्टी की खुशबू। पेड़-पौधे हरियाली से भरे, पक्षियों की मधुर बोल है। यही है प्रकृति का आह्वान, जीवन का संगीत खोल है।", | |
| "genre": "poem" | |
| } |