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बैटरी एलिमिनेटर एक एलेक्ट्रानिक युक्ति है जो प्राय छोटे एलेक्ट्रानिक उपकरणों के लिये डीी पैदा <ref>करत</ref>ा हैऔ र इसकी सहायता से बैटरी के बिना भीउ स उपकरण को चलाया जा सकता है।। इसीलिय े इसा नाम बैटरी एलिमिनेटर पड़ा।। यह प्राय आम घरों में उ पलब्ध एस ी वोल्<ref>ट</ref>ेज से चलता है और <ref>अलगअलग</ref> उपकरणों क आवश्यक... | बैटरी एलिमिनेटर एक एलेक्ट्रानिक युक्ति है जो प्राय छोटे एलेक्ट्रानिक उपकरणों के लिये डीसी पैदा करता है और इसकी सहायता से बैटरी के बिना भी उस उपकरण को चलाया जा सकता है। इसीलिये इसका नाम बैटरी एलिमिनेटर पड़ा। यह प्राय आम घरों में उपलब्ध एसी वोल्टेज से चलता है और अलगअलग उपकरणों की आवश्यकता के अनुसार अलगअलग वोल्टेज एवं धार... |
कारब उत्तर प्रदेश मुरा ज़िले और महावन तहस ील का एक गांव है। गावं का पनि कोड २८१२०४ है।। क ारब में एसवीएस एजुकेशनल ग्रुप है जिसके द्वरा अ ंतराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा ्रान की जा रही है कारब अने क प्रतिभाओं क ी खान है,, जिसमें राजनीत ेस लकेर आईआईटी एवं GATE की परीक्षा ओं तक कार ब काव र्चस्व रहा है ारब की रामलीला विश ्वस्तर... | कारब उत्तर प्रदेश मथुरा ज़िले और महावन तहसील का एक गांव है। गांव का पिन कोड २८१२०४ है। कारब में एसवीएस एजुकेशनल ग्रुप है जिसके द्वारा अंतराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा प्रदान की जा रही है कारब अनेक प्रतिभाओं की खान है, जिसमें राजनीत से लेकर आईआईटी एवं GATE की परीक्षाओं तक कारब का वर्चस्व रहा है कारब की रामलीला विश्वस्तरीय प्... |
राष््टरकुल से निलंबन किसी राष्ट्रकुल के सदस्य ेश को दी जाने वाल ीसबसे गं<ref>भ</ref>ीर सा है।। राष्ट्रकुल के नियमों का उल्लंघन करने पर किस सदसय को निष्कासन की व्यवस्था के आभा व मे राष्ट्रमडंल मंत्रिस्तरयी का<ref>र</ref>्य समूह सदसय् को निलंिबत करता हैं।। वर्ष1995 में इस निती की स्थापना के बा द <ref>स</ref>े चार देशों क... | राष्ट्रकुल से निलंबन किसी राष्ट्रकुल के सदस्य देश को दी जाने वाली सबसे गंभीर सजा है। राष्ट्रकुल के नियमों का उल्लंघन करने पर किसी सदस्य को निष्कासन की व्यवस्था के आभाव मे राष्ट्रमंडल मंत्रिस्तरीय कार्य समूह सदस्य को निलंबित करता हैं। वर्ष1995 में इस निती की स्थापना के बाद से चार देशों के पास राष्ट्रमंडल से निलंबित किया... |
के पास राष्ट्रमंडल से <ref>न</ref>िलंबित कि<ref>य</ref>ा जा चुका है फ़िजी, नाईजीरिया, पाकिसतान और जिम्<ref>ब</ref>ाब्वे। पाकिस्तान के एक दो बार निलंबि<ref>त</ref> किया <ref>गय</ref>ा है, नाइजीरिया एक बार <ref>न</ref>िलंबि तगया है,, फ़ि<ref>ज</ref> कोस ्थायी रू पसे िष्<ref>क</ref>ासित कर दिया गया <ref>ह</ref>ैं।। जमि्बब... | जिम्बाब्वे। पाकिस्तान के एक दो बार निलंबित किया गया है, नाइजीरिया एक बार निलंबित गया है, फ़िजी को स्थायी रूप से निष्कासित कर दिया गया हैं। जिम्बाब्वे ने अपनी सदस्यता ८ दिसम्बर २००३ में वापस ले ली। वर्त्तमान रूप में राष्ट्रमंडल में ५४ देश शामिल हैं, जो धरती के सभी महाद्वीपों पर फैले हुए हैं। इन सदस्य देशों में 24 अरब लो... |
<ref>क</ref>ासित कर दिया गया <ref>ह</ref>ैं।। जमि्बबा्वे ने अपनी सदस्यता ८ िसम्बर २००३ में वाप सले ली।। वर्त्तमान रूप में राष्ट्रमंडल में ५४ दे शामिल हैं,, जो धरती के सभी महाद्वीपों पर <ref>फ</ref>ैले हुए हैं। इन सदस्य देशों <ref>म</ref>ें 24 अरब लोगों की संयुक्त आबाद है, यानि दुनया की आबादी का लगभग एक तिहाई हिस्सा। इस... | ों की संयुक्त आबादी है, यानि दुनिया की आबादी का लगभग एक तिहाई हिस्सा। इसमें से १२६ अरब भारत में रहते हैं तथा २२ करोड़ पाकिस्तान में रहते हैं, क्रमशः ९४ आबादी एशिया और अफ्रीका में फैली हुई है। भारत और पाकिस्तान के बाद, जनसंख्या के हिसाब से अगले सबसे बड़े राष्ट्रमंडल देश नाइजीरिया, बांग्लादेश और यूनाइटेड किंगडम हैं। तुवा... |
का लगभग एक तिहाई हिस्सा। इसमेंस े १२६ <ref>अरब</ref> भारत में रहते हैं ताथ २२ करोड़ पाकिस्तानम ें रहते हैं,, क्रमशः ९४ आबादी एशिया और अफ्रीका में फैली हुई है। भारत और पा<ref>क</ref>िस्तान के बाद, जनसंख्या के हिसाब से अगले सबेस बड़े ष्ट्<ref>रम</ref>ंडल देश नाइजीरिया,, ब ांग्लादेश और यूनाइटेड कंिगम हैं।। तुवालु सबसे छोट... | ुवालु सबसे छोटा सदस्य है, जिसमें लगभग १० हज़ार लोग हैं। राष्ट्रमंडल देशों का भूक्षेत्र लगभग है, यानी कुल वैश्विक भूक्षेत्र का लगभग २१। इस लिहाज़ से तीन सबसे बड़े राष्ट्रमंडल देश कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और भारत हैं। सदस्यता के मानदंड राष्ट्रमंडल देशों की सदस्यता के लिए मानदंड समय के साथ, विभिन्न दस्तावेजों की एक श्रृंखला से ... |
देश और यूनाइटेड कंिगम हैं।। तुवालु सबसे छोटा दस्य है,, <ref>ज</ref>िसें लगगभ १ हज़ार लोग हैं।। रष्ट्रमंडल देशों क ाभूक्षेत्र लगभग है,, यानी ुल वैश्विक भूक्षेत्र का गभग २१। इस लिाज़ से तीन स बसे बड़े <ref>र</ref>ाष्ट्<ref>रम</ref>ंडल दशे कनडाा,, ऑस्ट्रेलिया और भा<ref>रत</ref> ैं। सदस्यता के मानदंड राष्ट्रमंडल देशों की स... | । वेस्टमिंस्टर की संविधि, 1931 ने यह निर्धारित किया कि सदस्यता के लिए ब्रिटिश डोमिनियन होना आवश्यकता है। 1949 के लंदन घोषणा ने इस आवश्यकता को समाप्त कर दिया, जिस कारण गणतंत्रीय और स्वदेशी राजशाही भी राशर्तकुल में शामिल हो सकते थे, इस शर्त पर कि वे ब्रिटिश संप्रभु को राष्ट्रमंडल के प्रमुख के रूप में मान्यता दें। 1960 के... |
ref> ैं। सदस्यता के मानदंड राष्ट्रमंडल देशों की सदस्यता के लिए मानदंड समय के सा,, विभिन्न दस्तावेजों की <ref>एक</ref> श्रृंखला से विकसित हुआ है।। वेस्टमिंस्टर की संविधि,, 1931 ने यह िर्धारत किया कि सदस्यता के लिए ब्रिटिश डोमिनिन होना आवश्यकता है। 1499 के लंदन घोषणा ने इस आवश्यकता को समाप्त कर <ref>द</ref>िया, जिस कारण ... | लहर के मद्देनजर, इन आवश्यकताओं को संवैधानिक सिद्धांतों को राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक सिद्धांतों द्वारा संवर्धित किया जाने लगा। पहला 1961 में घोषित किया गया जब यह निर्णय लिया गया था कि नस्लीय समानता के लिए सम्मान सदस्यता की आवश्यकता होगी, इस कारण दक्षिण अफ्रीका के पुन आवेदन को वापस लेने के लिए अग्रणी होगा । 1971 के सिं... |
जिस कारण गणतंत्रीय और स्वदेशी राजशाही भ ी राशर्तकुल में शामिल हो सकेत थे, इस शर्त पर कि वे ब्रिटिश सपं्रभु को राष्ट्रमंडल के ्परमुख के रूप में <ref>म</ref>ान्<ref>यत</ref>ा दें।। 1960 के दशक में विउपनिवेशीकरण की लहर के मद्देनजर,, इन आवश्यकतां को संवैधानक सिद्धांतों को राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक सिद्धांतों द्वारा सवरं्... | के 14 बिंदुओं ने सभी सदस्यों को विश्व शांति, स्वतंत्रता, मानवाधिकार, समानता और मुक्त व्यापार के सिद्धांतों के लिए समर्पित किया गया। 1991 में, हरारे घोषणापत्र जारी किया गया था, नेताओं को डीकोलाइज़ेशन के समापन, शीत युद्ध के अंत और दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के अंत के लिए सिंगापुर के सिद्धांतों को लागू करने के लिए समर्पित ... |
सवरं्धित क िया <ref>ज</ref>ाने लगा। पहला 1961 में घोषित किया गया जब य ह निर्णय लिया गया था कि नस्लीय मसानता के लिए स म्मान सदस्यता की आवश्यकता होगी, इस कारण दक्िण अफ्रीका के <ref>प</ref>ुनआ वेदन को वापसल ने के लिए अग्णीर होगा । 1971 <ref>क</ref>े सिंगा<ref>प</ref>ुर घोषणा के 14 बिंदुओं ने सभी सदस्योंक ो विश्व शांति, स्... | नियम के अलावा, पूर्व नियमों को एक दस्तावेज़ में समेकित किया गया था। ये आवश्यकताएं हैं कि सदस्यों को हरारे के सिद्धांतों को स्वीकार करना चाहिए और उनका पालन करना चाहिए, पूरी तरह से संप्रभु राज्य होने चाहिए, राष्ट्रमंडल प्रमुखों के राष्ट्रमंडल प्रमुख के रूप में मान्यता प्राप्त करें, राष्ट्रमंडल संचार के साधनों के रूप में ... |
व्याकरण सुधारें: व्यक्तिगत सत्यगा्रह ०३ सितम्ब रसन् १९३९ को भारत के तत्काीलन वायसराय लार्ड लिनलिथगो ने यह घोषणा की कि भारत भी द्वितीय विश्व युद्ध ेमं सम्मिलित ैह। इस घोषा से पूर्व उसने किसी भी राजनैतिक दल से परामर्श नीहं किया।। सइसे कागरेस असंतुष्ट् होगई।। महात्मा गाँधी ने ब्रिटिश सरकार की युद्धनीति का विरोध करने के िल... | व्यक्तिगत सत्याग्रह ०३ सितम्बर सन् १९३९ को भारत के तत्कालीन वायसराय लार्ड लिनलिथगो ने यह घोषणा की कि भारत भी द्वितीय विश्व युद्ध में सम्मिलित है। इस घोषणा से पूर्व उसने किसी भी राजनैतिक दल से परामर्श नहीं किया। इससे कांग्रेस असंतुष्ट् हो गई। महात्मा गाँधी ने ब्रिटिश सरकार की युद्धनीति का विरोध करने के लिए सन् १९४० में ... |
करने के िलए सन् १९४० में अहिंसात्मक व्यक्िगत सत्याग्रह आरम्भ कया।। गांधी जी के प्रस्ताव पर 17 अक्टूबर 1940 में पनवार शआ्रम से प्रतीकात्मक विरोधस्वरूप व्यक्िगत सत्यग्रह प्रारं भक िया। इस सत्याग्रह में महात्मा गाँधी के द्वारा चुना हआ सत्याग्रही पूर्व निर्धारित स्थान पर भाषण देकर गिरफ्तारी देता था।। भाषण सेपूर्व सत्याग्रह... | आरम्भ किया। गांधी जी के प्रस्ताव पर 17 अक्टूबर 1940 में पवनार आश्रम से प्रतीकात्मक विरोधस्वरूप व्यक्तिगत सत्याग्रह प्रारंभ किया। इस सत्याग्रह में महात्मा गाँधी के द्वारा चुना हुआ सत्याग्रही पूर्व निर्धारित स्थान पर भाषण देकर गिरफ्तारी देता था। भाषण से पूर्व सत्याग्रही अपने सत्याग्रह की सूचना जिला मजिस्ट्रेट को भी देता ... |
साफ करिए: महावीर चक्र,,भारत का युद्ध के समय वीरता का पदक है।। यह सम्मान सैनिकों और असैिकों को असाधारण वीरता याप ्रकट शूरता या बलिदान के लिए दिया जाता है।। यह मरणोपरान्त भी दिया जा सकता है।। वरीयता क्रम में यह रमवी र चक्र के बाद आता है। बनावट पकद गलाकार और निर्धारित मानक की चाँदी से निर्मित होता है एवं इसे अग्रभाग पर पा... | महावीर चक्र,भारत का युद्ध के समय वीरता का पदक है। यह सम्मान सैनिकों और असैनिकों को असाधारण वीरता या प्रकट शूरता या बलिदान के लिए दिया जाता है। यह मरणोपरान्त भी दिया जा सकता है। वरीयता क्रम में यह परमवीर चक्र के बाद आता है। बनावट पदक गोलाकार और निर्धारित मानक की चाँदी से निर्मित होता है एवं इसके अग्रभाग पर पांच कोनों वा... |
है एवं इसे अग्रभाग पर पांच कोनं वाला उभरा हुआ तारा उकेरा गया है जिसके कोने गोलाकार किनारों को छूते हैं।। इस पदक का व्यास 138 इंच का ैह इसके केंद्र भाग में राज्य का प्तीक अपने ध्येय के ाथ उकेरा गया है ो की उभरा हुआ है। तारा पॉिलश किया हुआ है और क ेन्द्र भाग स्वर् ण रंजित है। इसके पीछे के भाग पर हिन्दी और अंग्रेजी शब्दों... | कोनों वाला उभरा हुआ तारा उकेरा गया है जिसके कोने गोलाकार किनारों को छूते हैं। इस पदक का व्यास 138 इंच का है इसके केंद्र भाग में राज्य का प्रतीक अपने ध्येय के साथ उकेरा गया है जो की उभरा हुआ है। तारा पॉलिश किया हुआ है और केन्द्र भाग स्वर्ण रंजित है। इसके पीछे के भाग पर हिन्दी और अंग्रेजी शब्दों के बीच में दो कमल के फूलो... |
हिन्दी और अंग्रेजी शब्दों के बीच मे ंदो कमल के फलूों के साथ हिन्दी और अं्रेजी दोनों मं महवाीर चक्र उकेरा गया है ।। फीता इसके साथ संलग्न फीता आधा सफेद रंग र आधा नारंगी रंग का है। बार चक्र प्राप्तकर्ता के द्वार ा पुनः ऐसी ही बहादरुी का कारय होता है जो उसे चक्र प्राप्त करने हेतु पात्र बनाता है तोआगे ऐसा बहादुरी क ाकार्य ब... | के साथ हिन्दी और अंग्रेजी दोनों में महावीर चक्र उकेरा गया है । फीता इसके साथ संलग्न फीता आधा सफेद रंग और आधा नारंगी रंग का है। बार चक्र प्राप्तकर्ता के द्वारा पुनः ऐसी ही बहादुरी का कार्य होता है जो उसे चक्र प्राप्त करने हेतु पात्र बनाता है तो आगे ऐसा बहादुरी का कार्य बार द्वारा उस फीता पट्टी में जोड़े जाने के लिए रिका... |
व्याकरण सुधारें: क्या भूलूं क्या याद करूँ हरिवंश राय बच्चन की बहुप्रशंसित आत्मकथा थत ा हिन्दी साहितय् की एक कालजयी कृति है। यह चार खण्डों में हैः क्या भूलूँ क्या यादक रूँ, नीड़ का निर्माण फिर, बसेरे से दूर और दशद्ार से सोपान तक।। इसके लिए ब्चचनजी को भारतीय साहितय के सर्वोच्च पुरस्कार सरस्वती सम्मानसे सम्मानित भी किया ज... | क्या भूलूं क्या याद करूँ हरिवंश राय बच्चन की बहुप्रशंसित आत्मकथा तथा हिन्दी साहित्य की एक कालजयी कृति है। यह चार खण्डों में हैः क्या भूलूँ क्या याद करूँ, नीड़ का निर्माण फिर, बसेरे से दूर और दशद्वार से सोपान तक। इसके लिए बच्चनजी को भारतीय साहित्य के सर्वोच्च पुरस्कार सरस्वती सम्मान से सम्मानित भी किया जा चुका है। हिन्द... |
किया जा चुका है। हिन्दी प्रकाशनों में इस आत्मकथा क ा अत्यंत ऊंा स्थान है। डॉ॰ धर्मवीर भारती ने इसे हिन्दी के हज़ार वर्षों के इतिहास में ऐसी पहली घटना बताया जब अनपे बारे ें सब कुछ इतनी बेबाकी, साहस और सद्भावना से कह दिया है । डॉ॰ हजारीप्रसाद द्विवदी के अनुसार इसमें केवल बच्चन जी का परिवार और उना व्यक्तित्व ही नहींउभरा ह... | अत्यंत ऊंचा स्थान है। डॉ॰ धर्मवीर भारती ने इसे हिन्दी के हज़ार वर्षों के इतिहास में ऐसी पहली घटना बताया जब अपने बारे में सब कुछ इतनी बेबाकी, साहस और सद्भावना से कह दिया है। डॉ॰ हजारीप्रसाद द्विवेदी के अनुसार इसमें केवल बच्चन जी का परिवार और उनका व्यक्तित्व ही नहीं उभरा है, बल्कि उनके साथ समूचा काल और क्षेत्र भी अधिक गह... |
बल्कि उनके साथ समूचा काल और क्षेत्र भी अधिक हरे रंगों में उभरा है। डॉ॰ शिवमंगल सिंह सुमन की राय में ऐसी अभव्यक्तियाँ नई पीढ़ी के लिए पाठेय बन सकेंगी,, इसी में उनकी सार्थकता भी है।। क्या भूलूँ,, क्या याद करूँ मैं अगणित उन्मादों के क्षण हैं,, अगणित अवसादों के क्षण हैं,, रजनी की सूनी घडि़यं को किनकिन स ेआबाद करूँ मैं क्या... | में उभरा है। डॉ॰ शिवमंगल सिंह सुमन की राय में ऐसी अभिव्यक्तियाँ नई पीढ़ी के लिए पाठेय बन सकेंगी, इसी में उनकी सार्थकता भी है। क्या भूलूँ, क्या याद करूँ मैं अगणित उन्मादों के क्षण हैं, अगणित अवसादों के क्षण हैं, रजनी की सूनी घड़ियों को किनकिन से आबाद करूँ मैं क्या भूलूँ, क्या याद करूँ मैं याद सुखों की आँसू लाती, दुख की,... |
ॉडक्टर येदुगुड़ी सं दिंती राशजेखर रेड्डी व ाईएसआर नाम से लोकप्रिय, वर्ष 2004 से 2 009 कत आन्ध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री थे।। वे भारतीय रा ष् ट्रीय कांग्रेस पार्टी के सदस्थे।। राजनीतिक करियर वे कड ़प्ा से नौंवंी, दसवीं,, ग्यारवीं और बारहवीं लोकभा के लिए चार ाबर लोकसभ सदस्य चुने गए। पुलिवेंुदला से पा ंच बार विधानसभा सदस ्य... | डॉक्टर येदुगुड़ी संदिंती राजशेखर रेड्डी वाईएसआर नाम से लोकप्रिय, वर्ष 2004 से 2009 तक आन्ध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के सदस्थे। राजनीतिक करियर वे कड़प्पा से नौंवीं, दसवीं, ग्यारवीं और बारहवीं लोकसभा के लिए चार बार लोकसभा सदस्य चुने गए। पुलिवेंदुला से पांच बार विधानसभा सदस्य चुने गए... |
सदस ्य चुने गए। 2003 में उन्होंने पूरेआ न्ध्र प् रदेश में प दात्रा की 2004 मेंउ न्हीं के नेतृत्व में कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव जीत ानधिन 2 सितंबर 2 009 को उन्हें ले ज ा रहा हेीलकॉप्टर नल्लामला के जंल में खो गया।। 3 सितंबर की सुबह करनूल से 40 नॉट िकल म ील क ी दूरी पर रूद्रको ंडा की पहाड़ी पर उनका क्षतविक्षत शव मिला उनक... | रे आन्ध्र प्रदेश में पदयात्रा की 2004 में उन्हीं के नेतृत्व में कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव जीता निधन 2 सितंबर 2009 को उन्हें ले जा रहा हेलीकॉप्टर नल्लामला के जंगल में खो गया। 3 सितंबर की सुबह करनूल से 40 नॉटिकल मील की दूरी पर रूद्रकोंडा की पहाड़ी पर उनका क्षतविक्षत शव मिला उनके साथ हेलीकॉप्टर से जा रहे चार अन्य लोगों क... |
ावा भूकंप २००९ २ सितंबर २००९ को इंडोनेशिया के जाा द्वीप में स्थानीय समय १४५५ क ो आया भूकंप है।। इसकी तीव्रता ७३ मा<ref>प</ref> गई और इसमे ४२ लोगो के मरे जाे क ी खबर हं।। भूंकप का केंद्र जावा <ref>क</ref>े <ref>दक</ref>्षिणी तट पर तासि<ref>कमलय</ref> <ref>शहर</ref> क े पास था।। यह जकार्ता से दो सौ किलोमीटर दूर है।। क्षत... | जावा भूकंप २००९ २ सितंबर २००९ को इंडोनेशिया के जावा द्वीप में स्थानीय समय १४५५ को आया भूकंप है। इसकी तीव्रता ७३ मापी गई और इसमे ४२ लोगो के मारे जाने की खबर हैं। भूंकप का केंद्र जावा के दक्षिणी तट पर तासिकमलय शहर के पास था। यह जकार्ता से दो सौ किलोमीटर दूर है। क्षति इसका केंद्र सतह से 63 किलोमीटर नीचे स्थित था। भूकंप के... |
शहर</ref> क े पास था।। यह जकार्ता से दो सौ किलोमीटर दूर है।। क्षति इसका केंद्र सतह से 63 किलोमीटर नीचे स्थित था। भू<ref>क</ref>ंप के केंदर पश्चिमी जा<ref>व</ref>ा मे लगभग 13 स घरों को नुकसान पहुंचा है तथा हजारों लोगों को अपने घरों को छोड़कर पायन करना पड़ा है।। <ref>एक</ref> <ref>आध</ref>िकारिक बयान के अनुसार भूकंप से 7... | मीटर नीचे स्थित था। भूकंप के केंद्र पश्चिमी जावा में लगभग 13 सौ घरों को नुकसान पहुंचा है तथा हजारों लोगों को अपने घरों को छोड़कर पलायन करना पड़ा है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार भूकंप से 700 घर पूरी तरह ढह गए हैं तथा 600 घरों को सामान्य नुकसान पहुंचा है। बाद के झटके 49 तीव्रता वाला २ सितंबर २००९ को स्थानीय समय १६२८ को। |
साफ करिए: नीड़ का निरमाण फ िर ह रिव श रा य बच्चन की एक प्रसिद्ध कृति है।ये पद्यख ंड श्री हरिंश राय बच्चन के सतरंगिन ी नामक काव ्य से है यह उनकी आत्मकथा का दूसर ा भाग है, जिसक ा प्रकानश 1970 में हुआ।। डॉ॰ हरिवंश राय बच्च को इसके लिए प्रथम सरस्वत ी सम्मान दिया गया था।। मधुशाला,, एका ंत संगीत,, आकुल अंतर,, निश ा निमंत्रण,... | नीड़ का निर्माण फिर हरिवंश राय बच्चन की एक प्रसिद्ध कृति है।ये पद्यखंड श्री हरिवंश राय बच्चन के सतरंगिनी नामक काव्य से है यह उनकी आत्मकथा का दूसरा भाग है, जिसका प्रकाशन 1970 में हुआ। डॉ॰ हरिवंश राय बच्चन को इसके लिए प्रथम सरस्वती सम्मान दिया गया था। मधुशाला, एकांत संगीत, आकुल अंतर, निशा निमंत्रण, सतरंगिनी इत्यादि इनकी ... |
व्याकरण सुधारें: लेखनी, क़लम या पेन व वतु है जिेस काग़ज़ पर सय्ाही द्वारा लिखा जाता है।। क़लम से <ref>बह</ref>ुत से अन्य चीजों पर ीभ लिखा जाता है।। प्राचीन कालस े लेकर जतक अनेक प्रकार की लेनियाँ प्रयोग की जातीं ैं जै<ref>स</ref>े नरकट क ी <ref>क</ref>़लम, पंख <ref>स</ref>े बनी क़लम,, फ़ाउंटेन पने, बॉलपॉइंट पेन आदि।। कल... | लेखनी, क़लम या पेन वह वस्तु है जिससे काग़ज़ पर स्याही द्वारा लिखा जाता है। क़लम से बहुत से अन्य चीजों पर भी लिखा जाता है। प्राचीन काल से लेकर आजतक अनेक प्रकार की लेखनियाँ प्रयोग की जातीं हैं जैसे नरकट की क़लम, पंख से बनी क़लम, फ़ाउंटेन पेन, बॉलपॉइंट पेन आदि। क़लम की इतिहास आज हमको प्राचीन समय का इतिहास चित्रों के माध्य... |
नी क़लम,, फ़ाउंटेन पने, बॉलपॉइंट पेन आदि।। कल़म की इतिहास आज हमको प्राचीन समय का इतिहास चित्रों <ref>क</ref>े ाम्धय म से पता चलता है ।। पहले क़लम कान िर्माण इराक के लोगों ने किया था । इराक से ही क़लम से लिखने की शुरुआ हुई थी ।। उसके बाद मिस् र के लोगों ने रीड ़कलम का निर्माण कया था ।। कई वर्षों तक रीड क़लम से <ref>लखन<... | य का इतिहास चित्रों के माध्यम से पता चलता है । पहले क़लम का निर्माण इराक के लोगों ने किया था । इराक से ही क़लम से लिखने की शुरुआत हुई थी । उसके बाद मिस्र के लोगों ने रीड क़लम का निर्माण किया था । कोई वर्षों तक रीड क़लम से लिखने का काम जाता रहा था । इसके बाद मिस्र के ही लोगों ने फाउंटेन क़लम का निर्माण किया और सभी फाउंट... |
कलम का निर्माण कया था ।। कई वर्षों तक रीड क़लम से <ref>लखन</ref>े का काम जाता रा था । इसके बाद मिस्र के ही लोगों ने <ref>फ</ref>ाउंटेन क ़लम का निर्<ref>म</ref>ाण कि<ref>य</ref>ा और सभी फाउंटेन पेन से लिखने लगे थे ।।भा<ref>रत</ref> म े ं कलम की शुरुआत ५,,००० वर्ष पहले हुई थी ।। १३०० ईसीव ूपर्व रोमन ने एक धातु का <ref>क... | क़लम का निर्माण किया और सभी फाउंटेन पेन से लिखने लगे थे । भारत में कलम की शुरुआत ५,००० वर्ष पहले हुई थी । १३०० ईसवी पूर्व रोमन ने एक धातु का क़लम बनाया था । प्राचीन समय में हड्डियों के माध्यम से भी लिखने का काम किया जाता था । समय बीतने अनुसार नएनए लिखन के खोजे गए थे और नए नए क़लम का आविष्कार हुआ था । अंग्रेजों का विरोध... |
नेपाल के दक्िणी भाग के मैदानी क्षेत्र का मधेश प्रदेश में निवास करने वाले नेपाली लोगोंको मधेशी कहतेह ैं। इस क्षत्र को तराई भी कहते हैं और तराई में वास करने वाले इन नेपाल लोगों को तराईबासी भी कहते हैं।। मधेश शब्द मध्यदेश का अपभर्ंश है। मैथिली,, थारु,, अवधी, उर्दु रऔ भोजपुरी भाषा बोले वले लोग जो बिहार और उत्तर प्रदे के लो... | नेपाल के दक्षिणी भाग के मैदानी क्षेत्र का मधेश प्रदेश में निवास करने वाले नेपाली लोगोंको मधेशी कहते हैं। इस क्षेत्र को तराई भी कहते हैं और तराई में वास करने वाले इन नेपाली लोगों को तराईबासी भी कहते हैं। मधेश शब्द मध्यदेश का अपभ्रंश है। मैथिली, थारु, अवधी, उर्दु और भोजपुरी भाषा बोलने वाले लोग जो बिहार और उत्तर प्रदेश के... |
साफ करिए: सग भारतीय उपमहाद्वीप से एक शाकाहारी पकवा नहै,, जिसे रोटी, नान या चावल के साथ खाया जाता है।। इसे अनेक हरी ब्ज़ियों से बनाया जाता है। । ओड़िशा में,, इेस पखाल े साथ ाखया जाात है।। परी के जगन्नाथ मंदिर में,, ासग जगन्नाथ क ो महाप्रसाद के रूप में प्रस्तावित ियक जाता है। उत्तर भारत में, सरसों का साग ख्यात है,, िसे म... | साग भारतीय उपमहाद्वीप से एक शाकाहारी पकवान है, जिसे रोटी, नान या चावल के साथ खाया जाता है। इसे अनेक हरी सब्ज़ियों से बनाया जाता है। ओड़िशा में, इसे पखाल के साथ खाया जाता है। पुरी के जगन्नाथ मंदिर में, साग जगन्नाथ को महाप्रसाद के रूप में प्रस्तावित किया जाता है। उत्तर भारत में, सरसों का साग ख्यात है, जिसे मक्की की रोटी ... |
साफ करिए: ब्राह्मी परिवार उन लिपियों का परिवार हैं िनकी पूर्वज ब ्राह्मी लिपि है।। इनक ा प्रयोग दक्षिण एशिया,, द्षिणपूर ्व शएिया में होता है, तथा मध्य व पूर्व एशिया के क ुछ भागों में भी होता है। स परिवार क ी किसी लेखन ्रणाली को ब्राहम्ीआधारित लपिि या भारतीय लपिि कहा जा सकता ह ै।। इन लिपियों का प्रोग कई भाषा परिवारों मे... | ब्राह्मी परिवार उन लिपियों का परिवार हैं जिनकी पूर्वज ब्राह्मी लिपि है। इनका प्रयोग दक्षिण एशिया, दक्षिणपूर्व एशिया में होता है, तथा मध्य व पूर्व एशिया के कुछ भागों में भी होता है। इस परिवार की किसी लेखन प्रणाली को ब्राह्मीआधारित लिपि या भारतीय लिपि कहा जा सकता है। इन लिपियों का प्रयोग कई भाषा परिवारों में होता था, उदा... |
ई भाषा परिवारों में होता था, उदाहरणा्थ भा र ोपीय, चीनीतिब्बती,, मंगोलियाई,, द्रवि डीय,, ऑस्ट्रोएियाई, ऑस्ट्रोनेशिया ई,, ताई और सम् भव तः कोरियाई में।। इनका प्भराव आधुनिक जापानी भाषा में प्रयुक्त अक्षर क्रमांकन पर भी दिखत ा है।। तइिास ब्राह्म ीआ धारित लिपियाँ ब्राह्मी लिपि स े उपजी हैं। ईसा पूर्व तीस री सदी में अशोक के ... | लियाई, द्रविडीय, ऑस्ट्रोएशियाई, ऑस्ट्रोनेशियाई, ताई और सम्भवतः कोरियाई में। इनका प्रभाव आधुनिक जापानी भाषा में प्रयुक्त अक्षर क्रमांकन पर भी दिखता है। इतिहास ब्राह्मीआधारित लिपियाँ ब्राह्मी लिपि से उपजी हैं। ईसा पूर्व तीसरी सदी में अशोक के राज्यकाल में ब्राह्मी का प्रयोग का साक्ष्य मिलता है, उन्होंने इस लिपि का इस्तेमा... |
े उपजी हैं। ईसा पूर्व तीस री सदी में अशोक के राज्यकालम ें ब्राह्मी का प्रयोग का साक्ष्य मि लता है,, उन्होंने इस लिपि क ा इस्तेमाल साम्राज्यीय शिलालेख ो ं के लिए किया था।। लेकिन इसे अलावा,,हाल ही में, श्री लंा में अनुराधापुर में सा पूर्व छठ सदी के समय के मिट्टी के बर्तनों पर सिंहल ब्राह्म ी में लिखे कुछ भंजित शिलालेख मि... | म्राज्यीय शिलालेखों के लिए किया था। लेकिन इसके अलावा, हाल ही में, श्री लंका में अनुराधापुर में ईसा पूर्व छठी सदी के समय के मिट्टी के बर्तनों पर सिंहल ब्राह्मी में लिखे कुछ भंजित शिलालेख मिले हैं। ईसा पूर्व चौथी या पाँचवी सदी के तमिल ब्राह्मी के नमूने भी भट्टिप्रोलु व अन्यत्र मिले हैं। गुप्त वंश के समय उत्तरी ब्राह्मी स... |
लेख मिले हैं।। ईसा पूर् ौचथी या पाँचवी सदी के तमिल ब्राह्मी क नमूने भी भट्टिप्रोलु व अन् यत्र मिले हैं।। गुप्त वंश के समय उत्त री ब्राह्मी से गुप्त लिपि आई औ म ध्यकल मे ं कई लखावटों की ज ननी बनी,, नमें सिद्धम,, शारद ा और न ागरी प्रमुख हैं।। सिद्ध म लिपि ब ौद्ध धर्म ेक िलए क ाफ़ी महत्वपूर्ण ीथ क्योंक ि कई सूत्र इसी मेंल... | लिपि आई और मध्यकाल में कई लिखावटों की जननी बनी, इनमें सिद्धम, शारदा और नागरी प्रमुख हैं। सिद्धम लिपि बौद्ध धर्म के लिए काफ़ी महत्वपूर्ण थी क्योंकि कई सूत्र इसी में लिखे गए थे और आज भी जापान में सिद्धम सुलेख की कला कायम है। दक्षिणी ब्राह्मी से ग्रन्थ लिपि व अन्य लिपियों की उपज हुई और फिर इनसे दक्षिणपूर्व एशिया की कई लिप... |
ाफ़ी महत्वपूर्ण ीथ क्योंक ि कई सूत्र इसी मेंल िखे एग थे और आज भी जा पान मे सिद्धम सुलेख की कला कायम है।। दक्षिणी ब्राह्म ी से ग्रन् लिपि व अन ्य लिपियों की उपज हुई और फिर इनसे दक्षिणपूर ्व एशिया की कई लिपियाँ ब नी ।। तीसरी सदी म ें भट ्टिप्रलोु बौद् धधर्म का एक बड़ ा केन्द्र थ,ा, यहीं से बौद्ध धर्म पूर्वी एशिया में फैल... | बनीं। तीसरी सदी में भट्टिप्रोलु बौद्ध धर्म का एक बड़ा केन्द्र था, यहीं से बौद्ध धर्म पूर्वी एशिया में फैला। आधुनिक तेलुगु लिपि भट्टिप्रोलु लिपि या कन्नडतेलुगु लिपि से ही जनित है, इसे प्राचीन कन्नड़ लिपि भी कहते हैं क्योंकि कन्नड़ से इसकी समानता काफ़ी है। प्रारंभ में कुछ छोटे परिवर्तन हुए, उससे जो लिपि बनी उसे अब तमिल ब... |
हीं से बौद्ध धर्म पूर्वी एशिया में फैला।। आधु निक तेलुगु लिपि भट्टिप्रोलु लिप या कन्नडतेलुग ु लिपि से ही जन ित है,, इसे ्रपा चीन क न्नड़ लि पि भी कहते हं क्योंकि क न्ड ़ से इसकी समानता ाफ़ी है। प्रारभ में कुछ छोटे परिवर्त हुए,, उससे जो लिपि ब नी उसे अब तम िल ब्राह्मी कहते हैं,, इसमें कुछ अ्य भारतीय लिपियों ीक तुलना म े... | से अब तमिल ब्राह्मी कहते हैं, इसमें कुछ अन्य भारतीय लिपियों की तुलना में कहीं कम अक्षर हैं क्योंकि इसमें अलग से महाप्राण या सघोष व्यंजन नहीं हैं। बाद में ग्रन्थ के प्रभाव से वेट्टुळुतु का प्रादुर्भाव हुआ जो कि आधुनिक मलयालम लिपि जैसी दिखती है। 11वीं और 20वीं सदी में और भी बदलाव हुए ताकि छपाई और टंकण के लिए सुविधा हो और... |
में कुछ अ्य भारतीय लिपियों ीक तुलना म ें कहीं कम अ क्षर है ं क्योंकि इसें अलग से महाप्राण या सष व्यं न न हीं हैं।। ब ाद में ग ्रन्थ के ्रभाव से वेट्टुळुतु ाक प्रादुरभ्वा हुआ जो कि आधुनिक मयालम लिपि जैसी दिखती ैह।। 1 1वीं और 20वीं सदी में औ भी बदलाव हुए ताकि छपाई और टंकण के लिए सुविधा हो औ र इस प्रकार समकालीन लिपि सामने... | सुविधा हो और इस प्रकार समकालीन लिपि सामने आई। गेरी लेडयार्ड ने परिकल्पना की है कि हांगुल लिपि, जो कोरियाई लिखने के काम आती है, वास्तव में मंगोल फग्स्पा लिपि से उपजी है, जो कि तिब्बती के माध्यम से ब्राह्मी परिवार से उत्पन्न हुई थी। विशेषताएँ कुछ विशेषताएँ, जो अधिकांश लिपियों में नहीं बल्कि सभी लिपियों में मौजूद हैं तुलन... |
लिए सुविधा हो औ र इस प्रकार समकालीन लिपि सामने आई। गेर ी ल डेयार्ड ने परिकल्पना की है कि हांगुल लिप, जो कोरियाई लिख नेक े ाम ती ैह,, वास्तव मे ं मगोल फग्स्ाप लिपि से पजी है,, जो कि तिब् बती के माध्यम से ब्राह्मी परिवार से उत्न्न हुई थी।। विश ेषताएँ कुछ विशेषताएँ,, जो अधिकां लिपि यों में नीहं बल्कि सभ ी लिपियों में मौजू... | कई प्रमुख भारतीय लिपियों की तुलना के लिए तालिकाएँ दी गईं हैं। स्वर एकल स्वर हर स्तंभ में बाएँ तरफ प्रदर्शित हैं और उस लिपि के क व्यंजन में मात्रा के तौर पर दाईं तरफ हैं। ब्राह्मी आधारित लिपियों की सूची ब्राह्मी से उपजी लिपियाँ। ऐतिहासिक सबसे पुराने ज्ञात लेखों के अवेशेष तीसरी सदी ईसा पूर्व के हैं, इस समय तक ब्राह्मी लि... |
हं बल्कि सभ ी लिपियों में मौजू द ह ैं तुलना न ीचे कई प्रमुख भारतीय लिपियों की तुलना के लिए तालिकाएँ दी गईं हैं।। स्वर एकल स्र हर स्तंभ में बाएँ तरफ प ्रदर्शित हैं औ र उस ल पि के क व्यंजन में मातर्ा के तौर पर दाईं त रफ हैं।। ब्र ाह्मी आधारति लिपियों की सू ची ब्राह्मी स उपजी लिपियाँ।। तऐिहास िक सबसे पुराने ज्ञात लेखों क ... | के कई क्षेत्रीय संस्करण बन ही चुके थे। ब्राह्मी लिपि की बनावट पाँचवी सदी ईसवीं के बाद से और अधिक विविध होती गई और मध्य युग में इसने लगातार कई नई लिपियों को जन्म दिया। प्राचीनकाल का मुख्य विभाजन था उत्तरी व दक्षिणी ब्राह्मी के बीच का। उत्तरी समूह में गुप्त लिपि का प्रभाव काफ़ी था और दक्षिणी समूह में हिंदू धर्म के फैलाव ... |
धान को उबा लकर तथा कुछकुछ नम अवस्था <ref>म</ref>ंे ही किसी ची से पीटक या दबाकर चिवड ़ा बन ाा जाता है। चिवड़ ा <ref>क</ref>ो कुछ अन्य चीजों के साथ मिलकार नमकीन पोहा बनाया जाता है।। चिवड़ा को उत्तर प्दरेश,, बिहार आदि ेमं दही के <ref>स</ref>ाथ ख ाया ाता है।। बिहार <ref>म</ref>ें चिव़ा को चुडा े नाम से बोला जाात है | धान को उबालकर तथा कुछकुछ नम अवस्था में ही किसी चीज से पीटकर या दबाकर चिवड़ा बनाया जाता है। चिवड़ा को कुछ अन्य चीजों के साथ मिलाकर नमकीन पोहा बनाया जाता है। चिवड़ा को उत्तर प्रदेश, बिहार आदि में दही के साथ खाया जाता है। बिहार में चिवड़ा को चुडा के नाम से बोला जाता है |
साफ करिए: राजभाषा िवभाग,, गृह मंत्रालय भ ार त सरकार ने सीडैक पुणे क तकनीकी सहयोग से ईमहाशब्दको श का निर्माण किया है।। इस योजना के अंतर्गत शुरुआती दौर में प्राशसनिक शब्द संग्रह को देवन ागरी यून किोड में प्रस्तुत किया गा है। इसमें आप अँग्रेजी का हिं दी पर्याय त थ ा हिंदी शब्दों का वा क्य में अतिरि क्त प ्रयोग ेख सकते हैं... | राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, भारत सरकार ने सीडैक पुणे के तकनीकी सहयोग से ईमहाशब्दकोश का निर्माण किया है। इस योजना के अंतर्गत शुरुआती दौर में प्रशासनिक शब्द संग्रह को देवनागरी यूनिकोड में प्रस्तुत किया गया है। इसमें आप अँग्रेजी का हिंदी पर्याय तथा हिंदी शब्दों का वाक्य में अतिरिक्त प्रयोग देख सकते हैं। इसकी विशेषता यह भ... |
व िशेषता यह भी है कि आप हिंदी श ्दों का उच्चारण भी सुन सकते ह ैं। यह एक बहुउपयोग शब् दकोश है। इसमें आप अन्य श ब्द जोड़ सकते हैं।। इसे अधिक उन्नत करने में आपका सहयोग अपे कष्ित है। इस ईमहा शब्दकोश की मुख्य विशेषताएँ दे वनागर ी लििप के लिए यूनीकोड फॉन्ट,, खो जे गये शब्द का उच्चा रण, स्पष ट लेआउट जी यू आई प्रयोग में आसान, ... | सकते हैं। यह एक बहुउपयोगी शब्दकोश है। इसमें आप अन्य शब्द जोड़ सकते हैं। इसे अधिक उन्नत करने में आपका सहयोग अपेक्षित है। इस ईमहाशब्दकोश की मुख्य विशेषताएँ देवनागरी लिपि के लिए यूनीकोड फॉन्ट, खोजे गये शब्द का उच्चारण, स्पष्ट लेआउट जी यू आई प्रयोग में आसान, तीन अक्षरों पर शब्द सूची, पूर्ण शब्द खोज, द्विआयामी खोज, शब्दों क... |
ट जी यू आई प्रयोग में आसान, तीन अक्षरों पर श ब्द सूची, पूर्ण श ब्द खोज,, द्विआयामी खोज,, शब्दों की सूची में े खोजने की सुवि धा,, स ही मौखिक उच्चारण रऔ संबंधित जानकारी,, अर्थ एवं स ंबंधत ाजनकारी, बश्द ्परदबंध का प्रयोग,,शब्द प्रदबधं का सचित्र चित्रणह ै।। श्रीमती पीवी वल्सला जी कुट्टी, संयुक्त सचिव,, भारत सरकार,, राजाषा ... | ची में से खोजने की सुविधा, सही मौखिक उच्चारण और संबंधित जानकारी, अर्थ एवं संबंधित जानकारी, शब्द प्रदबंध का प्रयोग, शब्द प्रदबंध का सचित्र चित्रण है। श्रीमती पीवी वल्सला जी कुट्टी, संयुक्त सचिव, भारत सरकार, राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय के अनुसार काफी समय से केन्द्र सरकार के कर्मचारियों के कार्य में हिंदी प्रयोग को बढ़ावा... |
, संयुक्त सचिव,, भारत सरकार,, राजाषा वि भाग,, गृह ंत् रालय के अनुसार का फ ी समय से ेकन्द्र सरकार के कर्मचा रियों क े कार्य म ें हिंदी प्रयोग को बढ़ ाव ा देने ह ेतु प्रयसा किए गए हैं।। अनुभव बताा है कि केनदर सरकार के कार्यालयों औ र ंसगठनों में बड़ी संख्या में कर्मचारी अपने क्रियाकलापों ें हिंदी का अधिका धिक प्र योग करने... | कि केन्द्र सरकार के कार्यालयों और संगठनों में बड़ी संख्या में कर्मचारी अपने क्रियाकलापों में हिंदी का अधिकाधिक प्रयोग करने के इच्छुक हैं परंतु पर्याप्त तकनीकी सुविधाओं के अभाव में हिंदी भाषा का प्रयोग प्रभावशाली ढंग से नहीं कर पाते हैं। सरकार द्वारा हिंदी में सहजता से कार्य करने के लिए प्रभावी साधनों को मुहैया कराने पर... |
ने के इच्छुक हैं परंतु पर्याप्त तकनीक ी सुविधाओं के अाव में हिंदी भाष ा क प्रयग प ्रभा वशाली ढंग से नहीं कर पाते हैं । सरकरा दव्ारा हिंदी में हसतज से कार्य करने ेक लि ए प्रभावी सा धनों को मु हयैा क र ान े पर विचार किया गया है । हि ंदी के प्रगामी प्रयोग को ब ढ़ावा देने हेतु इलैक्ट्ॉनिक मीडिा के माध्यम से आधुनिक तकनीक के... | तु इलैक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से आधुनिक तकनीक के समावेश के विचार ने उन लोगों की समस्या के समाधान के रूप में जन्म लिया जो हिंदी में कार्य करने के इच्छुक हैं परंतु पर्याप्त सुविधा के अभाव में ऐसा करने से झिझक रहे हैं। सरकारी कार्यालयों में सरल व प्रभावी तरीके से हिंदी में कार्य करने के लिए उपयुक्त सॉफ्टवेयरों के विकास... |
धुनिक तकनीक के समावेश के विचार न े नउ लोगों क ी समस्या के समाधान के रूप में जन्म िलया जो हिंदी मे ंकार्य करने क े इच्छुक हैं परंतु पर्याप्तस ुविधा के अभाव में ऐस करने से िझक रहे हैं। सरकारी कार ्यालयों में सरल व प्रभाव तीके से हिंदी म ें कार्य करने के ल िएउपयुक्त सॉफ् टवेयरों के िवकसा ेह तु राजभ ाषा विभाग ने सूचना एवं ... | ालय की कंप्यूटिंग कंपनी, नामत, सीडैक, पुणे के साथ एक समझौता किया है। पिछले कुछ वर्षों में विकसित सॉफ्टवेयरों में हिंदी भाषा का स्वयं शिक्षण, मंत्रा शृंखला द्वारा चुने गए कार्यक्षेत्रों में अंग्रेजी से हिंदी तुरंत अनुवाद, हिंदी डिक्टेशन के लिए श्रुतलेखन सॉफ्टवेयर, अंग्रेजी स्पीच की पहचान कर उसे हिंदी में अनुवाद के लिए व... |
षा विभाग ने सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंतरालय की कंप्यूटिं कंपनी,, नामत,, सीडैक, पुणे के साथ एक समझौता किया है।। पिछले कुछ वर्षों में विकसित सॉफ्टवेयरों में हिंदी भाषा का स्वयं शिक्ष ण,, मंत्रा शृंखला द्ारा चुने गए कार्यक्षेत्रो में अंग्रेजी से हिंदी तुरंत अ नुवाद,, हिंीद डिक्टेशन े लि ए श्रु तलेखन सॉफ्टव ेयर,, अ ंग्ेरजी ... | सॉफ्टवेयर शामिल है। सॉफ्टवेयरों के विकास की इस शृंखला में नवीनतम विकास राजभाषा विभाग द्वारा सीडैक के माध्यम से ईमहाशब्दकोश का विकास है, जो कि एक द्विभाषीद्विआयामी उच्चारण शब्दकोश है। प्रौद्योगिकी को हिंदी के प्रयोग से जोड़कर राजभाषा के प्रयोग को बढ़ाने के इरादे से हिंदी प्रेमियों के लिए ईमहाशब्दकोश को प्रस्तुत करना मेर... |
ेयर,, अ ंग्ेरजी स ्पीच की पहचान कर उसे हिंदी म ं अनुवाद के लिए वाचांतर सॉफ्टेयर शाम िल है। सफ्टवेयरों के विकास की इस शृंखला में नवीनतम विकास रजभ ाषा विभ ग द्वारा सीड ै क के माधयम से ईमहाशब्दकोश क ा विकास है,, जो कि क द्विभाषीद्वियामी उच्चारण शब्दकोश है। प्र ौद्योगिकीको हिंदी के प्रयोग से जोड़कर राभाषा के प्रयोग को बढ़ा... | और गर्व की बात है। ईमहाशब्दकोश के वर्तमान शुरूआती संस्करण में प्रशासनिक कार्यक्षेत्र में प्रयुक्त होने वाले शब्दों को शामिल किया गया है। मुझे विश्वास है कि ईमहाशब्दकोश प्रयोगकर्ताओं में बहुत लोकप्रिय होगा क्योंकि यह केन्द्र सरकार के कार्यालयों में हिंदी में सामान्य कार्य करने में आने वाली अनेक बाधाओं को दूर करने में सह... |
के प्रयोग से जोड़कर राभाषा के प्रयोग को बढ़ाने के रदाे स े हिंदी प्रेमियों के लिए ईहाश्दकोश को पर स्ततु करना मेर लिए हर्ष और गर्व की बात ैह। ईहाशब्द ोकश क े वर ्तमान शु ू आती संस्क रण में प्रशास निक ार्यक्षेत्र म ें प्रय ुक्तह ोने वाले शब्दों को शामिल किय ागय ा है। मु झे विश्वास है कि ईमहाशब्दकोश प्रयोगकर्ता ओं में बह ... | में एक शब्दकोश ही नहीं वरन् इससे आगे अपनी पहुंच को ले जाते हुए यह शुद्ध उच्चारण, विशेष प्रयोगकर्ताओं के लिए विशिष्ट अर्थ देना, शब्दों और मुहावरों को प्रयोग करने का विवरण आदि सुविधाओं को देने में सहायक है। यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि यह शब्दकोश मुहावरों को प्रयोग करने में आने वाली दिक्कतों को दूर करने तथा उनको ठीक से... |
महाशब्दकोश प्रयोगकर्ता ओं में बह ुत लोकप्रिय होगा क्यंकि यह केन्द्र रसकार के कारय्ालयों में हिदी में सामान्य कार्य करन में आने वाली अनेक बाधाओ ं को दर करन में सहायक हो गा।। वास्तव ेमं यह के वल सीमित अर्थों में क शब्दकोश ही नहीं वरन् इससे आगे अ पनी पह ंच को े जाते हुए यह शुद्ध उ च ्चराण,, विशेष प्रयो गकर्ताओं क े लिए वि... | प्रयोगकर्ता के लिए लाभकारी होगा। ईमहाशब्दकोश उनके लिए बहुत उपयोगी होगा जो वास्तव में हिंदी में काम करना चाहते हैं। सीडैक, पुणे के सहयोग से राजभाषा विभाग द्वारा विकसित कराए गए सॉफ्टवेयरों में यह एक उल्लेखनीय उत्पाद होगा। ईमहाशब्दकोश की सूची में आगे सुधार के लिए यह आवश्यक होगा कि अधिक से अधिक लोग इसका प्रयोग करके अपना अम... |
व्याकरण सुधारें: पीठा भारतीय पउमहाद्वीप के पूर्वी क्षेत्रों स चाव ल केक क ा एक प्रका रहै, जिस में बांग्लादेश है औभरार मतें आम तौर पर ओडिशा,, असम,, पश्चिम बंगाल,, झारखंड,, बिहार और पूर्वोत तर क्षेत्र के पूर्वी राज्य भी शामिल है। ।पीठा आम तौर प चावल के आटे से बने होते हैं,, हा लांकि गेूं के आटे से भी पीठे बनाये जाते है।।... | पीठा भारतीय उपमहाद्वीप के पूर्वी क्षेत्रों से चावल केक का एक प्रकार है, जिसमें बांग्लादेश है औरभारत में आम तौर पर ओडिशा, असम, पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार और पूर्वोत्तर क्षेत्र के पूर्वी राज्य भी शामिल है। पीठा आम तौर पर चावल के आटे से बने होते हैं, हालांकि गेहूं के आटे से भी पीठे बनाये जाते है। पीठा मूल रूप से भारत के ... |
बनाये जाते है।। पीठा मूल रूप से भा त के बिहा र और झ राखंड राज् का ए बोहोत ही प्रसिद्ध व्यंजन है,,इसेचावल के आटे से नाया जाता है,य े मीठा ओर नमक ी न दोनो ं तरह से बनाय ा जाता है,ीठे में इसकेअंदर तिल और गुड़ का म िश्रण भर जाता है,,ओ र खोय ा,पोस् ता, नारियल आदि का प्रय ो ग मा पीठा बनाने के लिए किया ज ाता है,,व ही नमीकन पी... | ंड राज्य का एक बोहोत ही प्रसिद्ध व्यंजन है,इसे चावल के आटे से बनाया जाता है,ये मीठा ओर नमकीन दोनों तरह से बनाया जाता है,मीठे में इसके अंदर तिल और गुड़ का मिश्रण भर जाता है,ओर खोया,पोस्ता, नारियल आदि का प्रयोग मीठा पीठा बनाने के लिए किया जाता है,वही नमकीन पीठ बनाने के लिए चने की दाल,उरद की दाल,आलू आदि का भरावन तैयार किय... |
साफ करिए: फ़ालूदा भारत ीय उपमहाद्वीप में एक ठ ंडी मिठईा के रूप में बहुत लो कप्रिय है।। पर ंपरागत रूप से यह गुलाब सिर प,, सेवई, मीठी तुसली के बीज और दूध के साथ जेली के टकुड़ों को मिलाकर बनाया जाता है, जो अ ्सर आइसक्रीम के एक स्कूप के साथ सबसे ऊपर रहता ह।। फ़ालूदा की तउ्पत्ित ापरस में ह ुई थी औ यह भार तीय उपमहाद्वीप में ... | फ़ालूदा भारतीय उपमहाद्वीप में एक ठंडी मिठाई के रूप में बहुत लोकप्रिय है। परंपरागत रूप से यह गुलाब सिरप, सेवई, मीठी तुलसी के बीज और दूध के साथ जेली के टुकड़ों को मिलाकर बनाया जाता है, जो अक्सर आइसक्रीम के एक स्कूप के साथ सबसे ऊपर रहता है। फ़ालूदा की उत्पत्ति पारस में हुई थी और यह भारतीय उपमहाद्वीप में लोकप्रिय है। वहीं ... |
व्याकरण सुधारें: हैमलेट शेकसपियर का एक दुखांत नाटक है I इस नाटक का पूरा नम डेनमार्क के राजकुमार हैमलेट की त्ारसदी है I सर्वप्रथम इसका अ भिनय सन् 1603 ई मे हुआ था ।। सर्वप्रथम इसका प्रकाशन लगभग सन् 1604 ई के आसपास हुआ था। कथानक क्लॉडियस अपने बड़े भाई और डेनमार्क के राजा हैमलेट की हत्या करता है।। उके इस षडयंत्र में मृत र... | हैमलेट शेक्सपियर का एक दुखांत नाटक है I इस नाटक का पूरा नाम डेनमार्क के राजकुमार हैमलेट की त्रासदी है I सर्वप्रथम इसका अभिनय सन् १६०३ ई में हुआ था । सर्वप्रथम इसका प्रकाशन लगभग सन् १६०४ ई के आसपास हुआ था। कथानक क्लॉडियस अपने बड़े भाई और डेनमार्क के राजा हैमलेट की हत्या करता है। उसके इस षडयंत्र में मृत राजा की पत्नी गरट... |
डयंत्र में मृत राजा की पत्नी गटर्रूड भी उसका साथ देती हैI वो ोदनों ये अफवाह फैला देते हैं कि राजा हैमलेट की मौत सांप के काटने से हु ई है I राजा क ी मृत्यु के कुछ दिन बाद ह ी गरटर्ूड क्लॉडियस से शादी कर लेती है।। इस प्रकार अब क्लॉडियस डेनमार्क का नया राजा बन जाता है I राजकुमार हैमट,, जो कि राजा हैमलेट का ुपत्र है, वह इस... | राजा की पत्नी गरट्रूड भी उसका साथ देती हैI वो दोनों ये अफवाह फैला देते हैं कि राजा हैमलेट की मौत सांप के काटने से हुई है I राजा की मृत्यु के कुछ दिन बाद ही गरट्रूड क्लॉडियस से शादी कर लेती है। इस प्रकार अब क्लॉडियस डेनमार्क का नया राजा बन जाता है I राजकुमार हैमलेट, जो कि राजा हैमलेट का पुत्र है, वह इस कहानी का नायक है ... |
मलेट का ुपत्र है, वह इस कहानी का नायक है Iजब राजा की मृत्यु होी है तब वह में पढने के लिए गया ुआ था और पिता ीक अकस्ामत मृत्यु की खबर सुनकर डेनमार्क वापिस लौटता है I स्वाभविक रूप से उसे अपनी माँ की इतनी जल्दी दूसरी शादी से बहुत हैरानी होती है I क रात उसे पअने पिता का भूत दिखाई देता है जो उसे उसके चाचा और उसी ाम के डयंत्र... | का नायक है I जब राजा की मृत्यु होती है तब वह में पढने के लिए गया हुआ था और पिता की अकस्मात मृत्यु की खबर सुनकर डेनमार्क वापिस लौटता है I स्वाभविक रूप से उसे अपनी माँ की इतनी जल्दी दूसरी शादी से बहुत हैरानी होती है I एक रात उसे अपने पिता का भूत दिखाई देता है जो उसे उसके चाचा और उसकी माँ के षडयंत्र से अवगत करवाता है और उ... |
से उसके चाचा और उसी ाम के डयंत्र े अवगत करवाता है और सउे अपने चचा क्लॉडियस से बदला लेने लिए प्रेरित करता है I वह प्रेत उ स से वचन लेता है कि वह अपी मँ को कोई नुक्सान न पहुचाये I राज कमुार हैमलेट अपन बदले की भावनाए छुपा कर अजीब सा व्यवहार रकन लगता है I जिससे लोगंो के मन में यह ाधरण होती है कि वह लार्ड चेंबरलेन पोलोनियस ... | डयंत्र से अवगत करवाता है और उसे अपने चाचा क्लॉडियस से बदला लेने लिए प्रेरित करता है I वह प्रेत उस से वचन लेता है कि वह अपनी माँ को कोई नुक्सान न पहुचाये I राज कुमार हैमलेट अपनी बदले की भावनाए छुपा कर अजीब सा व्यवहार करने लगता है I जिससे लोगों के मन में यह धारण होती है कि वह लार्ड चेंबरलेन पोलोनियस की पुत्री ओफीलिया के ... |
है कि वह लार्ड चेंबरलेन पोलोनियस की पुत्री ओफीलिय ा के प्रेम में पाग हलो गया है। वह ओफीलिया से पय्ार करता है लेकिन उसका अजीब व्वहार ओीफलिा को भी परेशानी में डाल देता है I हैमलेट के पागलपन और अपने पिता की मौत के सदमे ेक कारण ओफीलिया पागल हो जाती है और उसकी मृत्यु हो जाती है I लेयरटीज पोलोनियस का पुत्र और ओफीलिया का भाई ... | ओफीलिया के प्रेम में पागल हो गया है। वह ओफीलिया से प्यार करता है लेकिन उसका अजीब व्यवहार ओफीलिया को भी परेशानी में डाल देता है I हैमलेट के पागलपन और अपने पिता की मौत के सदमे के कारण ओफीलिया पागल हो जाती है और उसकी मृत्यु हो जाती है I लेयरटीज पोलोनियस का पुत्र और ओफीलिया का भाई है I क्लॉडियस उसे ये विश्वास दिला देता है ... |
और ओफीलिया का भाई है I क्लॉडियसउ से ये विश्वास दला देता ह कि उन दोों की मौत का कारण हैमलेट ह ी है I लेटरीज हैमलेट कोद ्ंवद युद्ध के लिए चुनौती देता है।। लेयरटीज को क्लडयिस का समर्थन प्रा्त पहै।। क्लाडियस लयरटीज को विष स े बुीझ हुई तलवार देता है तािक हैमलेट को मारना आसान ह ो ज ाये I क्लाडियस ेय भी इंतजाम करता है कि यदि ... | दोनों की मौत का कारण हैमलेट ही है I लेयरटीज हैमलेट को द्वंद युद्ध के लिए चुनौती देता है। लेयरटीज को क्लाडियस का समर्थन प्राप्त है। क्लाडियस लेयरटीज को विष से बुझी हुई तलवार देता है ताकि हैमलेट को मारना आसान हो जाये I क्लाडियस ये भी इंतजाम करता है कि यदि हैमलेट लेयरटीज को मार देता है तो वह उसकी जीत की ख़ुशी में विष मिला... |
ाडियस ेय भी इंतजाम करता है कि यदि हैमलेट लेयटीज को र देत है तो वह उसी जीत ीक ख़ुशी में विष िमला हुआ मदिर का प्यलाा उसे दे देगाI हैमलेट और लेयरटीज ोनों घायल हो जाते हैं औरनउकी तलवारें भी आप समें बदल जाती हैं I लेयरटीज पहले मर जता है और मरने स पहले हैलमेट से माफ़ी मांगा ै और गरटरूड भी अनजाने में विषमिली ह ु ईमदिरा पीकर म... | ख़ुशी में विष मिला हुआ मदिरा का प्याला उसे दे देगा I हैमलेट और लेयरटीज दोनों घायल हो जाते हैं और उनकी तलवारें भी आपस में बदल जाती हैं I लेयरटीज पहले मर जाता है और मरने से पहले हैमलेट से माफ़ी मांगता है और गरट्रूड भी अनजाने में विष मिली हुई मदिरा पीकर मर जाती है। हैमलेट क्लाडियस को मार देता है और मरने से पहले अपने ख़ास ... |
साफ करिए: ठेकुआ या खमौनी,, खबौी,, या ठोकनी भारतीय उपमहाद्ीप में बनने वाील एक सूखी मिठाई है।। बिार,, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल े तराई क्षेत्र में ह बुत लोकप्रिय है।। छठ पूजा में ठेकुआ को प्रसाद के रूप में बनाया जाता है।। इन स्थानों में सदियों से से एक मीठे कपवान के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। ठेकुआ बना... | ठेकुआ या खमौनी, खबौनी, या ठोकनी भारतीय उपमहाद्वीप में बनने वाली एक सूखी मिठाई है। बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्र में यह बहुत लोकप्रिय है। छठ पूजा में ठेकुआ को प्रसाद के रूप में बनाया जाता है। इन स्थानों में सदियों से इसे एक मीठे पकवान के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। ठेकुआ बनाने के लिए... |
लिए मुख्य रूप ेस गेहूं े आटे,, चीनी य ागुड़ और घी का प्रयोग किया जाता है।। स्वाद और सुगन्ध क ो बढ़ाने के लिए इलायची और नारियलक े बुरादे का उपयोग भी किया जाता है।। आटे को ीचनी और अन्य अवयवों के साथ गूंधा जाता ह और हल्की आँच पर घी या तेल में लालभूरा होने तक तला जाता है।। गर्म होने पर यह नरम ोहता है लेिकन ठंडा होन े ेक बा... | गेहूं के आटे, चीनी या गुड़ और घी का प्रयोग किया जाता है। स्वाद और सुगन्ध को बढ़ाने के लिए इलायची और नारियल के बुरादे का उपयोग भी किया जाता है। आटे को चीनी और अन्य अवयवों के साथ गूंधा जाता है और हल्की आँच पर घी या तेल में लालभूरा होने तक तला जाता है। गर्म होने पर यह नरम होता है लेकिन ठंडा होने के बाद खस्ता हो जाता है। इ... |
साफ करिए: मध्य प्रदे ाक मुख्यमंत्री म ध्य भातर के राज्य मध्य प्रदेश का प्रमुख होता है।। म्य प्रदेश के मुख्यमंत्रियों की सूची य हाँ दी गई है।। स ूची निम्नलिखित वय्क्ति भारत के मध्य प्दरेश रा्जय के मुख्यमंत्री रहे चुके हैं मधयप्रदेश म े सबसे मक और अधिक समय तक रहने वले मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश के पहले मुख्यमंत्र पण्डित रविश... | मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री मध्य भारत के राज्य मध्य प्रदेश का प्रमुख होता है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्रियों की सूची यहाँ दी गई है। सूची निम्नलिखित व्यक्ति भारत के मध्य प्रदेश राज्य के मुख्यमंत्री रहे चुके हैं मध्यप्रदेश मे सबसे कम और अधिक समय तक रहने वाले मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश के पहले मुख्यमंत्री पण्डित रविशंकर शुक्ल ज... |
सम्बंधित थे। मध्पय्रदेश म सबसे कम स मय अधवि तक मुख्यमंत्री का कार्यभार सम्भालने वाले मुख्मंत्री श्ीर नरेश चन्द्रज ी ह,,ै ये कुल 12 दिन त मध्यप्रदेश के मुख्मयंत्री रहे है। ये वर्तमान छत्तीसगढ के पुसौर विधासभा सीट से चुन कर आये थे।। सइके अलवा भाजपा के वर्तमान उपाध्यक्ष और वर्तमान मु्खयमंत्री श्री शिराजिंह चौाहन नें मध्यप... | भार सम्भालने वाले मुख्यमंत्री श्री नरेश चन्द्र जी है, ये कुल 12 दिन तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे है। ये वर्तमान छत्तीसगढ के पुसौर विधानसभा सीट से चुन कर आये थे। इसके अलावा भाजपा के वर्तमान उपाध्यक्ष और वर्तमान मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान नें मध्यप्रदेश मे सबसे लम्बे समय तक मुख्यमंत्री का कार्यभार संभाला है, ... |
व्याकरण सुधारें: लिट्टी एक भारतीय व्यंजन <ref>ह</ref>ै जो मु<ref>ख</ref>्यतः बिार और पू्वी उत्तर परदेश में लोकप्<ref>र</ref>िय है। ारजस्थान के बाटी से मि<ref>लत</ref>ाजुलताय ह व्यंजन आटे की लोई को सत्तू से भकरर बनाया जा<ref>त</ref>ा है।। इसे देसी घी में ुबाकर आलूबैंगन के <ref>च</ref>ोखे के साथ खाने की परंपरा है, जिसे ल... | लिट्टी एक भारतीय व्यंजन है जो मुख्यतः बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में लोकप्रिय है। राजस्थान के बाटी से मिलताजुलता यह व्यंजन आटे की लोई को सत्तू से भरकर बनाया जाता है। इसे देसी घी में डुबाकर आलूबैंगन के चोखे के साथ खाने की परंपरा है, जिसे लिट्टीचोखा कहते हैं। लिट्टी चोखा एक प्रकार का व्यंजन है जो से लिट्टी तथा चोखे दो ... |
के साथ खाने की परंपरा है, जिसे लिट्टीचोखा कहते हैं।। लिट्टी चोखा एक पर्कार का ्यंजन है जो से लिटटी तथा चोखे दो अलग व्यंजनों के <ref>स</ref>ाथसाथ खाने को कहते हैं। यह बिहार रऔ उत्तर प्रदे<ref>श</ref> राज्य के विशेष व्यंजनो में स े एक ह। यह व्यंजन लोग किस ी भी समय खाना पसंद करते हैं और दूर के सफर के लिये भी लेकर जाना पसं... | ने को कहते हैं। यह बिहार और उत्तर प्रदेश राज्य के विशेष व्यंजनो में से एक है। यह व्यंजन लोग किसी भी समय खाना पसंद करते हैं और दूर के सफर के लिये भी लेकर जाना पसंद करते हैं।,यह व्यंजन यंहा के लोगो के बीच मौर्य काल से ही प्रसिद्ध है। लिट्टी बनाने के लिए आवश्यक सामग्री गेहूं का आटा, अजवायन, नमक, सत्तू, लाल मिर्च पाउडर, लह... |
साफ करिए: िढाकुर गआरा प्रखंड, आगरा, उत्तर प्देश स्थित एक गाँव है।। इस गाँव का प्राीन नाम मीर आकु था । बादशाह अकबर के ज़माने में यहॉं हा<ref>थ</ref>ी ठहरते थे इस <ref>ल</ref>िये ाघस की मंडी लगी थी।यहाँ घ का दरोग़ा भी रहता थ फासी मे मीर ा अर्थ हेता है दरोग़ा और आकुर कहते हैं घास को। इसी लिये ाँव का नाम मीर आकुर पड़ा जो क... | मिढाकुर आगरा प्रखंड, आगरा, उत्तर प्रदेश स्थित एक गाँव है। इस गाँव का प्राचीन नाम मीर आकुर था । बादशाह अकबर के ज़माने में यहॉं हाथी ठहरते थे इस लिये घास की मंडी लगती थी।यहाँ घास का दरोग़ा भी रहता था फ़ारसी में मीर का अर्थ हेता है दरोग़ा और आकुर कहते हैं घास को। इसी लिये गाँव का नाम मीर आकुर पड़ा जो कालांतर में मिराकुर फ... |
स को। इसी लिये ाँव का नाम मीर आकुर पड़ा जो कालांतर में मिराकु रफिर मिढाकुर हो गया ।गाँव मे ं हाथियों के ठहरने कास्थान अाज <ref>भ</ref>ी अहाथे के नाम से जाना जाता है।। यहाँ अकबर की बनवाइ हुई शाही मस्जिद मौू है। कृष्ण जी का अति प्राचीन मंदिर गाँव के गौरव को और भी ़ढाता है।। शिक्षा के क्षेत्र में भी यह गॉवं अगर्ण रहाह ै।।... | में मिराकुर फिर मिढाकुर हो गया ।गाँव में हाथियों के ठहरने का स्थान अाज भी अहाथे के नाम से जाना जाता है। यहाँ अकबर की बनवाइ हुई शाही मस्जिद मौजूद है। कृष्ण जी का अति प्राचीन मंदिर गाँव के गौरव को और भी बढ़ाता है। शिक्षा के क्षेत्र में भी यह गॉंव अग्रणी रहा है।कहते हैं कि यहॉं रहकर गणेश शंकर बिध्यार्थी जी ने भी शिक्षा ग्... |
THE SONA CORPUS — Noisy-to-Clean Hindi–English Parallel Dataset
A clean, bilingual dataset card you can read at a glance and use immediately.
- Curated by: Aditya (AADIMIND)
- Languages: Hindi, English
- Total examples: 581312 (INPUT: 256 TOKEN• TARGET: 256 TOKEN)
- Tasks: Text cleaning, GEC, OCR post-processing, Seq2Seq fine-tuning
- License: MIT
- Source: Hindi Wikipedia (HiWiki) processed into noisy–clean pairs
- Repo: https://huggingface.co/datasets/AADIMIND/sona-corpus
Overview
THE SONA CORPUS is a parallel dataset of noisy inputs and their cleaned/corrected targets in Hindi and English. It’s built for models that transform imperfect text (typos, OCR errors, informal writing) into clean, standardized text.
- Input: Noisy text (with errors)
- Target: Corrected / clean text
- Great for: Seq2Seq training, GEC, OCR post-processing, text normalization
Dataset Structure
Columns:
- input_text: string (noisy text)
- target_text: string (clean/corrected text)
SIZE OF DATA:
TRAIN LINES OF DATASET: 581312
INPUT: 256 TOKEN
TARGET: 256 TOKEN
Data Sources and Creation
- Source data: Hindi Wikipedia dump (HiWiki)
- Processing:
- Extracted sentences from HiWiki
- Added artificial noise and OCR-like errors
- Aligned with manually cleaned target text
- Annotations: Expert-generated (Aditya); manual cleaning + selective automated scripts
Intended Uses
- Direct:
- Train encoder–decoder (Seq2Seq) models for Hindi text correction
- Benchmark for noisy-to-clean conversion
- OCR post-processing and spell correction
- Out-of-scope:
- Conversational chatbot training
- Sensitive/private data processing
Limitations and Notes
- Domain: Primarily Wikipedia-style text; limited colloquial/code-mixed coverage
- Generalization: May require adaptation for social-media style, heavy code-mixing, or domain-specific jargon
- License note: If source content includes Wikipedia text (CC BY-SA), ensure compliance with attribution and share-alike requirements when redistributing derivatives
How to Use
from datasets import load_dataset
dataset = load_dataset("AADIMIND/sona-corpus")
# 95% train और 5% validation split
dataset = dataset["train"].train_test_split(test_size=0.05)
train_data = dataset["train"]
val_data = dataset["test"]
print(train_data[0])
print(val_data[0])
Model training tip:
- For encoder–decoder models (e.g., T5, mT5), concatenate language/task prompts if helpful (e.g., "gec:
- Evaluate with normalization-aware metrics (e.g., chrF, token-level accuracy, or edit distance).
Citation
BibTeX:
@misc{aadimind-sona-corpus-2025,
title={THE SONA CORPUS: Noisy-to-Clean Hindi-English Text Dataset},
author={Aditya},
year={2025},
howpublished={\url{https://huggingface.co/datasets/AADIMIND/sona-corpus}}
}
APA: Aditya. (2025). THE SONA CORPUS: Noisy-to-Clean Hindi-English Text Dataset. Hugging Face. https://huggingface.co/datasets/AADIMIND/sona-corpus
Maintainer
- Aditya (AADIMIND)
- Contact: https://huggingface.co/AADIMIND
- EMAIL : AK332575@GMAIL.COM
- INSTAGRAM : @thinker.aditya
THE SONA CORPUS — डेटासेट कार्ड (हिंदी)
- क्यूरेटर: आदित्य (AADIMIND)
- भाषाएँ: हिंदी, अंग्रेज़ी
- कुल उदाहरण: 38,497 (ट्रेन: 36,572 • वैलिडेशन: 1,925)
- कार्य: टेक्स्ट क्लीनिंग, GEC, OCR पोस्ट-प्रोसेसिंग, Seq2Seq फाइन-ट्यूनिंग
- लाइसेंस: MIT
- स्रोत: हिंदी विकिपीडिया (HiWiki) से प्रोसेस्ड नॉइज़ी–क्लीन पेयर्स
- रिपो: https://huggingface.co/datasets/AADIMIND/sona-corpus
परिचय
THE SONA CORPUS में नॉइज़ी इनपुट और उनके साफ/सही (करेक्टेड) टारगेट पेयर्स हैं। इसका उद्देश्य ऐसे मॉडल ट्रेन करना है जो गलत/अधूरा टेक्स्ट (टाइपो, OCR त्रुटियाँ, अनौपचारिक लेखन) को मानकीकृत, साफ टेक्स्ट में बदल सकें।
- इनपुट: नॉइज़ी टेक्स्ट (त्रुटियों सहित)
- टारगेट: साफ/सही किया हुआ टेक्स्ट
- उपयोग: Seq2Seq प्रशिक्षण, GEC, OCR पोस्ट-प्रोसेसिंग, टेक्स्ट नॉर्मलाइज़ेशन
डेटासेट संरचना
कॉलम:
- input_text: string (नॉइज़ी टेक्स्ट)
- target_text: string (क्लीन/करेक्टेड टेक्स्ट)
स्प्लिट्स:
- ट्रेन: 36,572
- वैलिडेशन: 1,925
- कुल: 38,497
स्रोत और निर्माण
- स्रोत डेटा: हिंदी विकिपीडिया (HiWiki)
- प्रोसेस:
- HiWiki से वाक्य निकाले गए
- कृत्रिम नॉइज़ व OCR-जैसी त्रुटियाँ जोड़ी गईं
- मैन्युअल रूप से साफ/करेक्टेड टारगेट के साथ एलाइन किया गया
- एनोटेशन: विशेषज्ञ (आदित्य) द्वारा—मैन्युअल क्लीनिंग + चयनित ऑटो स्क्रिप्ट्स
उपयोग
- सीधे उपयोग:
- हिंदी टेक्स्ट करेक्शन के लिए एन्कोडर–डिकोडर (Seq2Seq) मॉडल ट्रेनिंग
- नॉइज़ी-टू-क्लीन कन्वर्ज़न के लिए बेंचमार्क
- OCR पोस्ट-प्रोसेसिंग और स्पेल करेक्शन
- अनुपयुक्त:
- बातचीत-आधारित चैटबॉट ट्रेनिंग
- संवेदनशील/निजी डेटा प्रोसेसिंग
सीमाएँ और नोट्स
- डोमेन: मुख्यतः विकिपीडिया-शैली; बोलचाल/कोड-मिक्स्ड कंटेंट का सीमित प्रतिनिधित्व
- सामान्यीकरण: सोशल मीडिया-स्टाइल, भारी कोड-मिक्सिंग या विशिष्ट डोमेन जार्गन के लिए अतिरिक्त अनुकूलन अपेक्षित
- लाइसेंस नोट: यदि स्रोत में विकिपीडिया टेक्स्ट (CC BY-SA) शामिल है/से व्युत्पन्न है, तो पुनर्वितरण में एट्रिब्यूशन और शेयर-अलाइक शर्तों का पालन सुनिश्चित करें
उपयोग कैसे करें
from datasets import load_dataset
dataset = load_dataset("AADIMIND/sona-corpus")
# 95% train और 5% validation split
dataset = dataset["train"].train_test_split(test_size=0.05)
train_data = dataset["train"]
val_data = dataset["test"]
print(train_data[0])
print(val_data[0])
ट्रेनिंग सुझाव:
- T5/mT5 जैसे मॉडलों के लिए टास्क/भाषा प्रॉम्प्ट जोड़ना लाभकारी हो सकता है (जैसे, "gec:
- मूल्यांकन में chrF, टोकन-स्तरीय एक्यूरेसी या एडिट-डिस्टेंस जैसे मेट्रिक उपयोगी हैं।
उद्धरण
BibTeX:
@misc{aadimind-sona-corpus-2025,
title={THE SONA CORPUS: Noisy-to-Clean Hindi-English Text Dataset},
author={Aditya},
year={2025},
howpublished={\url{https://huggingface.co/datasets/AADIMIND/sona-corpus}}
}
APA: आदित्य. (2025). THE SONA CORPUS: Noisy-to-Clean Hindi-English Text Dataset. Hugging Face. https://huggingface.co/datasets/AADIMIND/sona-corpus
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