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तेझू हे भारताच्या अरुणाचल प्रदेश राज्यातील एक शहर आहे. हे शहर लोहित जिल्ह्याचे प्रशासकीय केंद्र आहे. या शहरात एक विमानतळ आहे.
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| 2 |
+
तेझू येथे वर्षात सरासरी ३,०६३ मिमी (३ मीटर) इतका पाउस होतो.
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| 1 |
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तेझू विमानतळ(आहसंवि: TEI, आप्रविको: VETJ) हा भारताच्या अरुणाचल प्रदेश राज्यातील तेझू शहरातला विमानतळ आहे.
|
| 2 |
+
सध्या येथे कोणतीही विमानसेवा उपलब्ध नाही.
|
| 3 |
+
|
| 4 |
+
|
| 5 |
+
आग्रा •
|
| 6 |
+
अराक्कोणम •
|
| 7 |
+
अंबाला •
|
| 8 |
+
बागडोगरा •
|
| 9 |
+
भूज रुद्रमाता •
|
| 10 |
+
कार निकोबार •
|
| 11 |
+
चबुआ •
|
| 12 |
+
छत्तीसगढ •
|
| 13 |
+
दिमापूर •
|
| 14 |
+
दुंडिगुल •
|
| 15 |
+
गुवाहाटी •
|
| 16 |
+
हलवारा •
|
| 17 |
+
कानपूर •
|
| 18 |
+
लोहगांव •
|
| 19 |
+
कुंभिरग्राम •
|
| 20 |
+
पालम •
|
| 21 |
+
सफदरजंग •
|
| 22 |
+
तंजावर •
|
| 23 |
+
येलहंका
|
| 24 |
+
|
| 25 |
+
|
| 26 |
+
बेगमपेट (हैदराबाद) • एचएएल बंगळूर (एचएएल/हिंदुस्थान)
|
| 27 |
+
|
| 28 |
+
|
| 29 |
+
जोगबनी विमानतळ •
|
| 30 |
+
मुझफ्फरपूर विमानतळ •
|
| 31 |
+
पाटना: लोकनायक जयप्रकाश विमानतळ •
|
| 32 |
+
पूर्णिया विमानतळ •
|
| 33 |
+
रक्सौल विमानतळ
|
| 34 |
+
|
| 35 |
+
|
| 36 |
+
बिलासपूर विमानतळ •
|
| 37 |
+
जगदलपूर विमानतळ •
|
| 38 |
+
Raipur: विमानतळ
|
| 39 |
+
|
| 40 |
+
|
| 41 |
+
चकुलिया विमानतळ •
|
| 42 |
+
जमशेदपूर: सोनारी विमानतळ •
|
| 43 |
+
|
| 44 |
+
|
| 45 |
+
बारवानी विमानतळ •
|
| 46 |
+
भोपाळ: राजा भोज विमानतळ •
|
| 47 |
+
ग्वाल्हेर विमानतळ •
|
| 48 |
+
इंदूर: देवी अहिल्याबाई होळकर विमानतळ •
|
| 49 |
+
जबलपूर विमानतळ •
|
| 50 |
+
खजुराहो विमानतळ •
|
| 51 |
+
ललितपूर विमानतळ •
|
| 52 |
+
पन्ना विमानतळ •
|
| 53 |
+
सतना विमानतळ
|
| 54 |
+
|
| 55 |
+
|
| 56 |
+
भुवनेश्वर: बिजु पटनायक विमानतळ •
|
| 57 |
+
हिराकुद विमानतळ •
|
| 58 |
+
झरसुगुडा विमानतळ •
|
| 59 |
+
रूरकेला विमानतळ
|
| 60 |
+
|
| 61 |
+
|
| 62 |
+
आग्रा: खेरीया विमानतळ •
|
| 63 |
+
अलाहाबाद: बमरौली विमानतळ •
|
| 64 |
+
गोरखपूर विमानतळ •
|
| 65 |
+
झांसी विमानतळ •
|
| 66 |
+
कानपूर: चकेरी विमानतळ •
|
| 67 |
+
ललितपूर विमानतळ
|
| 68 |
+
|
| 69 |
+
|
| 70 |
+
अलाँग विमानतळ •
|
| 71 |
+
दापोरिजो विमानतळ •
|
| 72 |
+
पासीघाट विमानतळ •
|
| 73 |
+
तेझू विमानतळ •
|
| 74 |
+
झिरो विमानतळ
|
| 75 |
+
|
| 76 |
+
|
| 77 |
+
दिब्रुगढ: मोहनबारी विमानतळ •
|
| 78 |
+
जोरहाट: रौरिया विमानतळ •
|
| 79 |
+
उत्तर लखिमपूर: लिलाबारी विमानतळ •
|
| 80 |
+
सिलचर: कुंभीरग्राम विमानतळ •
|
| 81 |
+
तेझपूर: सलोनीबारी विमानतळ
|
| 82 |
+
|
| 83 |
+
|
| 84 |
+
इंफाल: तुलिहाल विमानतळ
|
| 85 |
+
|
| 86 |
+
|
| 87 |
+
रुपसी विमानतळ •
|
| 88 |
+
शेला विमानतळ •
|
| 89 |
+
शिलाँग: उमरोई विमानतळ
|
| 90 |
+
|
| 91 |
+
|
| 92 |
+
ऐझ्वाल: लेंगपुई विमानतळ
|
| 93 |
+
|
| 94 |
+
|
| 95 |
+
दिमापूर विमानतळ
|
| 96 |
+
|
| 97 |
+
|
| 98 |
+
पाकयाँग विमानतळ
|
| 99 |
+
|
| 100 |
+
|
| 101 |
+
अगरतला: सिंगरभिल विमानतळ •
|
| 102 |
+
कैलाशहर विमानतळ •
|
| 103 |
+
कमलपूर विमानतळ •
|
| 104 |
+
खोवै विमानतळ
|
| 105 |
+
|
| 106 |
+
|
| 107 |
+
बालुरघाट विमानतळ •
|
| 108 |
+
बेहाला विमानतळ •
|
| 109 |
+
कूच बिहार विमानतळ •
|
| 110 |
+
इंग्लिश बझार: मालदा विमानतळ
|
| 111 |
+
|
| 112 |
+
|
| 113 |
+
चंदिगढ विमानतळ
|
| 114 |
+
|
| 115 |
+
|
| 116 |
+
धरमशाला: गग्गल विमानतळ •
|
| 117 |
+
कुलू: भुंतार विमानतळ •
|
| 118 |
+
शिमला विमानतळ
|
| 119 |
+
|
| 120 |
+
|
| 121 |
+
जम्मू: सतवारी विमानतळ •
|
| 122 |
+
कारगिल विमानतळ •
|
| 123 |
+
लेह: कुशोक बकुला रिम्पोचे विमानतळ
|
| 124 |
+
|
| 125 |
+
|
| 126 |
+
लुधियाना: साहनेवाल विमानतळ •
|
| 127 |
+
पठाणकोट विमानतळ
|
| 128 |
+
|
| 129 |
+
|
| 130 |
+
अजमेर विमानतळ •
|
| 131 |
+
बिकानेर: नाल विमानतळ •
|
| 132 |
+
जेसलमेर विमानतळ •
|
| 133 |
+
जोधपूर विमानतळ •
|
| 134 |
+
कोटा विमानतळ •
|
| 135 |
+
उदयपूर: महाराणा प्रता��� विमानतळ (दबोक)
|
| 136 |
+
|
| 137 |
+
|
| 138 |
+
देहराडून: जॉली ग्रँट विमानतळ •
|
| 139 |
+
पंतनगर विमानतळ
|
| 140 |
+
|
| 141 |
+
|
| 142 |
+
पोर्ट ब्लेर: वीर सावरकर विमानतळ
|
| 143 |
+
|
| 144 |
+
|
| 145 |
+
कडप्पा विमानतळ •
|
| 146 |
+
दोनाकोंडा विमानतळ •
|
| 147 |
+
काकिनाडा विमानतळ •
|
| 148 |
+
नादिरगुल विमानतळ •
|
| 149 |
+
पुट्टपार्थी: श्री सत्य साई विमानतळ •
|
| 150 |
+
राजमुंद्री विमानतळ •
|
| 151 |
+
तिरुपती विमानतळ •
|
| 152 |
+
विजयवाडा विमानतळ •
|
| 153 |
+
विशाखापट्टणम विमानतळ •
|
| 154 |
+
वारंगळ विमानतळ
|
| 155 |
+
|
| 156 |
+
|
| 157 |
+
बेळगाव: सांबरे विमानतळ •
|
| 158 |
+
बेळ्ळारी विमानतळ •
|
| 159 |
+
विजापूर विमानतळ •
|
| 160 |
+
हंपी विमानतळ •
|
| 161 |
+
हस्सन विमानतळ •
|
| 162 |
+
हुबळी विमानतळ •
|
| 163 |
+
मैसुर: मंडकळ्ळी विमानतळ •
|
| 164 |
+
विद्यानगर विमानतळ
|
| 165 |
+
|
| 166 |
+
|
| 167 |
+
अगत्ती विमानतळ
|
| 168 |
+
|
| 169 |
+
|
| 170 |
+
पाँडिचेरी विमानतळ
|
| 171 |
+
|
| 172 |
+
|
| 173 |
+
मदुरै विमानतळ •
|
| 174 |
+
सेलम विमानतळ •
|
| 175 |
+
तुतिकोरिन विमानतळ •
|
| 176 |
+
वेल्लोर विमानतळ
|
| 177 |
+
|
| 178 |
+
|
| 179 |
+
दमण विमानतळ •
|
| 180 |
+
दीव विमानतळ
|
| 181 |
+
|
| 182 |
+
|
| 183 |
+
भावनगर विमानतळ •
|
| 184 |
+
भूज: रुद्र माता विमानतळ •
|
| 185 |
+
जामनगर: गोवर्धनपूर विमानतळ •
|
| 186 |
+
कंडला विमानतळ •
|
| 187 |
+
केशोद विमानतळ •
|
| 188 |
+
पालनपूर विमानतळ •
|
| 189 |
+
पोरबंदर विमानतळ •
|
| 190 |
+
राजकोट विमानतळ •
|
| 191 |
+
सुरत विमानतळ •
|
| 192 |
+
उत्तरलाई विमानतळ •
|
| 193 |
+
वडोदरा: हरणी विमानतळ
|
| 194 |
+
|
| 195 |
+
|
| 196 |
+
अकोला विमानतळ •
|
| 197 |
+
औरंगाबाद: चिकलठाणा विमानतळ •
|
| 198 |
+
हडपसर विमानतळ •
|
| 199 |
+
कोल्हापूर विमानतळ •
|
| 200 |
+
लातूर विमानतळ •
|
| 201 |
+
मुंबई: जुहू विमानतळ •
|
| 202 |
+
नांदेड विमानतळ •
|
| 203 |
+
नाशिक: गांधीनगर विमानतळ •
|
| 204 |
+
रत्नागिरी विमानतळ •
|
| 205 |
+
शिर्डी विमानतळ •
|
| 206 |
+
सोलापूर विमानतळ
|
dataset/scraper_4/batch_6/wiki_s4_10036.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,2 @@
|
|
|
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|
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तेनाली रामकृष्ण (जन्म गारलापती रामकृष्ण ; ते तेनाली रामलिंग, आणि तेनाली रामा म्हणूनही ओळखले जात; 22 सप्टेंबर 1480-5 ऑगस्ट 1528) ( तेलुगू: తెనాలి రామకృష్ణుడు ) हे भारतीय कवी, विद्वान, विचारवंत आणि विजयनगरचे महाराज राजा कृष्णदेवराय यांच्या दरबारातील विशेष सल्लागार होते, ज्यांनी 1509 ते 1529 CE या काळात राज्य केले. [१] ते तेनाली गावचे रहिवासी होते आणि त्यांनी तेलुगूमध्ये कविता लिहिल्या. त्याच्या बुद्धीवर लक्ष केंद्रित करणाऱ्या लोककथांसाठी ते सामान्यतः ओळखले जात. [२] महाराज कृष्णदेवराय यांच्या दरबारातील अष्टदिग्जांपैकी एक (आठ 'जागतिक-शासक'), आठवे कवी होते.
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रामा लहान असतानाच त्याचे वडील वारले.[ स्पष्टीकरण आवश्यक ] रामाला आलेल्या नैराश्यावर मात करण्यासाठी, त्यांची आई लक्षम्मा त्यांना विजयनगरला घेऊन गेली जिथे ते महाराज कृष्णदेवराय यांचे सल्लागार आणि त्यांच्या दरबारातील आठवे विद्वान बनले. ते तेलुगू भाषेचे महान विद्वान आणि कवी होते. तेनाली रामकृष्ण हे दरबारातील मंत्रीही होते.
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तेनेरीफ (स्पॅनिश: Tenerife) हे स्पेनच्या कॅनरी द्वीपसमूहातील सर्वात मोठे व सर्वाधिक लोकसंख्येचे बेट आहे. कॅनरी द्वीपसमूहाच्या दोन राजधान्यांपैकी एक - सांता क्रुझ दे तेनेरीफ ही ह्याच बेटावर आहे.
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तेमसुला आओ या इंग्लिश साहित्यिक आहेत.
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मूळच्या नागालॅंडच्या असलेल्या तेमसुला आओ यांच्या कविता आणि अन्य साहित्याचे भाषांतर आसामी, बंगाली आणि हिंदी या भारतीय भाषांमध्ये झालेले आहे. तर काही साहित्याचा जर्मन व फ्रेंच भाषेत अनुवाद करण्यात आला आहे. याशिवाय अनेक कविता आणि लघुकथा नागालॅंड विद्यापीठ व देशभरातील महाविद्यालये आणि विद्यापीठांच्या अभ्यासक्रमात आहेत.
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आदिवासींचा प्रदेश असलेल्या नागालॅंडमधील सोळा आदिवासी जमातींना एकत्र आणण्यात त्यांची महत्त्वाचे योगदान केले. २०१५ साली त्या कोहिमा येथील नागालॅंड राज्य महिला आयोगाच्या सन्माननीय अध्यक्षा होत्या.
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तेरखेडा हे भारताच्या महाराष्ट्र राज्यातील उस्मानाबाद जिल्ह्यातील वाशी तालुक्यातील एक गाव आहे.
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येथील वातावरण साधारणपणे उष्ण व कोरडे असते. पावसाळा जून महिन्याच्या मध्यापासून सुरू होऊन सप्टेंबरच्या शेवटी संपतो.ऑक्टोबर ते नोव्हेंबर मध्यापर्यंत दमट वातावरण असते. नोव्हेंबर मध्य ते जानेवारी हिवाळा असतो. फेब्रुवारी ते मार्च वातावरण कोरडे असते. एप्रिल ते जून उन्हाळा असतो.सरासरी वार्षिक पर्जन्यमान ६३० मिलीमीटर असते.
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तेरडा (गौर, गौरीची फुले, गुलमेंदी, गौरीहू, तेर, तेरणा)
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तेराडा, ज्याला लॅटिनमध्ये गार्डन बालसम, टच मी नॉट म्हणूनही ओळखले जाते, ही पूर्व तसेच दक्षिण आशियामध्ये आढळणारी वर्षायू वनस्पती आहे. हिच्या फांद्या जाड परंतु ठिसूळ असून या वनस्पतीची उंची २० ते ७५ सेमी उंचीपर्यंत असते. पानांची मांडणी सर्पिलाकारात असते . पाने २.५ ते ५ सेंमी लांब आणि १ ते २.५ सेमी रुंद असून पानांच्या कडा तलवारीच्या पात्यासारख्या व किंचित दातेरी असतात. फुलांचा रंग पांढरा, गुलाबी, लाल किंवा जांभळा दिसून येतो. फुलं अतिशय नाजूक असून पावसाळ्यात उगवतात. फुलांचं आयुष्य फक्त पाच दिवस असते.
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तेरणा नदी ही महाराष्ट्रातील उस्मानाबाद आणि लातूर जिल्ह्यातील एक नदी आहे.
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तेरणा नदी हा लेख अपूर्ण आहे आणि पूर्ण करण्यास आपण हातभार लावू शकता.
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हा लेख संपादित करण्यासाठी येथे टिचकी द्या.
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'विकिपीडिया' मध्ये अपूर्ण लेख संपादित करण्यासाठी मदतीचा लेख येथे उपलब्ध आहे.
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तेरवणमेढे हे भारतातील महाराष्ट्र राज्यातील दक्षिण कोकणातील सिंधुदुर्ग जिल्ह्यातील दोडामार्ग तालुक्यातील एक गाव आहे.
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पावसाळ्यात येथे भरपूर प्रमाणात पाऊस पडतो आणि हवामान समशीतोष्ण राहते. हिवाळ्यात येथील हवामान थंड असते व अनेकदा सकाळी धुके पडते. उन्हाळ्यात हवामान उष्ण असते. पावसाळ्यात येथे भातशेती केली जाते.
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१.https://villageinfo.in/
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२.https://www.census2011.co.in/
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३.http://tourism.gov.in/
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४.https://www.incredibleindia.org/
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५.https://www.india.gov.in/topics/travel-tourism
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६.https://www.mapsofindia.com/
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देशातील लोकांच्या आर्थिक आणि सामाजिक विकासासाठी दर पाच वर्षांनी केंद्र सरकारतर्फे पंचवार्षिक योजना राबवली जाते. भारतातील पंचवार्षिक योजनांमध्ये केंद्रीय एकात्मिक आर्थिक सुधार कार्यक्रम आहे ज्या अंतर्गत समाजातील लोकांच्या विकासाच्या योजनांमध्ये बदल केले जातात.
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आतापर्यंत या योजनेंतर्गत १२ पंचवार्षिक योजना राबविण्यात आल्या आहेत . जे बऱ्याच प्रमाणात यशस्वीही झाले आहे. तेराव्या पंचवार्षिक योजनेत देशात कृषी विकासासाठी, रोजगाराच्या संधी उपलब्ध करून देण्यासाठी, मानवी व भौतिक संसाधनांचा उपयोग करून उत्पादकता वाढीसाठी सुविधा पुरविल्या जात आहेत
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ही योजना सन 2017 ते 2022 पर्यंत सुरू केली जाईल. १३ व्या पंचवार्षिक योजनेत स्रोत पुस्तके, वर्ग खोल्या इ. दुरुस्त केल्या जातील आणि उपाय वर्गांतर्गत अनुसूचित जाती, अनुसूचित जमाती आणि इतर मागासवर्गीय दुर्बल घटकांना विशेष वर्ग देण्यात येईल. राष्ट्रीय व राज्यस्तरीय पात्रता परीक्षा, नागरी सेवा व इतर स्पर्धात्मक परीक्षांची तयारी करणाऱ्या विद्यार्थ्यांना मार्गदर्शन केले जाईल. विषय तज्ज्ञांना बोलावले जाईल. कारकीर्द समुपदेशनासाठी स्वतंत्र बजेट देखील उपलब्ध असेल.
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देशाच्या विकासासाठी पंचवार्षिक योजना सुरू केली. पंचवार्षिक योजनांचे मुख्य उद्दीष्ट म्हणजे विकास दर वाढविणे. या पंचवार्षिक योजनांच्या माध्यमातून गुंतवणूकीतही वाढ झाली आहे. यासह पंचवार्षिक योजनांमध्ये सामाजिक न्याय, दारिद्र्यमुक्ती, पूर्ण रोजगार, आधुनिकीकरण इत्यादींचीही काळजी घेतली जाते. आतापर्यंत आपल्या देशात 13 पंचवार्षिक योजना राबविल्या गेल्या आहेत. ज्याद्वारे सरकारने काही उद्दिष्टे निश्चित केली आहेत आणि त्यानंतर त्या उद्देशाने कार्य केले गेले आहे. या पंचवार्षिक योजनांच्या माध्यमातून देशाची आर्थिक स्थितीही बरीच सुधारली आहे.
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तेलंगणा तेलुगु, (तेलंगणा अपभाषा किंवा तेलंगणा यासा) अनेकदा हैदराबादी तेलगू ही तेलगू भाषेची बोली आहे. त्याचा स्वतःचा इतिहास आहे, मुख्यतः भारतातील तेलंगणा राज्यात बोलला जातो, तसेच कर्नाटक आणि महाराष्ट्रातील शेजारील जिल्हे पूर्वीच्या हैदराबाद राज्याचा भाग होते. [१] हैदराबाद प्रदेशात बोलल्या जाणाऱ्या या बोलीवर हैदराबादी उर्दूचा जास्त प्रभाव आहे, ज्याला दखानी किंवा दख्खनी उर्दू देखील म्हणतात, किमान शब्दसंग्रहात. [२]
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या बोलीभाषेत १३०० च्या जवळपास दिल्ली सल्तनतच्या स्थापनेपासूनचे अवशेष आहेत. नंतरच्या काळात तुघलक राजवंश, मलिक मकबुल तिलंगानी, बहमनी सल्तनत यांसारख्या इतर इस्लाम साम्राज्यांनी पूर्वीच्या हैदराबाद आणि आसपासच्या संस्कृतीवर प्रभाव टाकला. १५१८ मध्ये स्थापन झालेल्या कुतुबशाही राजघराण्याने हैदराबादी तेलुगुला आकार देण्यात महत्त्वाची भूमिका बजावली. हे साम्राज्य सध्याच्या महाराष्ट्र आणि कर्नाटकातील लहान भागात विस्तारले होते. त्यामुळे या प्रदेशात मराठी आणि कन्नड भाषांचा परिचय झाला. भाषेच्या उत्क्रांतीच्या इतर प्रमुख कारणांपैकी एक म्हणजे इस्लाम संस्कृतीचा प्रभाव ज्याने फारसी किंवा उर्दू भाषा बोलण्यास प्राधान्य दिले.
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हैदराबादी तेलुगु/तेलंगणा बोलीचे काही ऋणशब्द, प्रामुख्याने हैदराबाद प्रदेशात बोलले जातात.
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काही शब्द हैदराबादी तेलगू/तेलंगणा बोलीभाषेसाठी खास आहेत, जे प्रामुख्याने प्रत्येक प्रदेशाद्वारे बोलले जातात.
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बोलीभाषेत प्रादेशिक रूपे आहेत. स्थानिक गैर-तेलुगू हैदराबादी लोक जी बोली बोलतात त्यावर हैदराबादी उर्दूचा प्रभाव आहे. तेलंगणाच्या आतील भागात बोलल्या जाणाऱ्या बोलीचा स्थानिक प्रभाव आहे आणि समुदायानुसार ती बदलते. सीमावर्ती प्रदेशांचा सीमेच्या पलीकडे असलेल्या भाषांचा परस्पर प्रभाव आहे.
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हैदराबादी तेलुगू/तेलंगणा अपभाषाने तेलंगणाच्या संस्कृतीवर नेहमीच प्रभाव टाकला आहे. तेलंगणा राज्याची निर्मिती झाल्यानंतर ही बोली लक्षणीय ठरली. ते राजकारण, चित्रपट, [३] अर्थशास्त्र, कला आणि तेलंगणाशी संबंधित असलेल्या इतर क्षेत्रांमध्ये, मानक तेलुगू व्यतिरिक्त प्रभावशाली ठरले. [४]
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तेलंगणा विधानसभा (तेलुगू: తెలoగాణ రాష్ట్ర శాసన సభ) हे भारताच्या तेलंगणा राज्याच्या विधिमंडळाच्या दोन सभागृहांपैकी एक आहे (दुसरे: तेलंगणा विधान परिषद). ११९ आमदारसंख्या असलेल्या तेलंगणा विधानसभेचे कामकाज हैदराबादमधून चालते. तेलंगणा राष्ट्र समिती पक्षाचे मधूसुदन चारी विधानसभेचे सभापती असून मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव हे विधानसभेचे नेते आहेत.
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१९५६ साली आंध्र प्रदेश राज्याची निर्मिती झाल्यानंतर आंध्र प्रदेश विधानसभेमध्ये २९४ सदस्य होते. २०१४ साली तेलंगणा राज्य वेगळे करण्यात आले व ११९ जागा तेलंगणा विधानसभेमध्ये सामील केल्या गेल्या. भारताच्या इतर विधिमंडळांप्रमाणे तेलंगणा विधानसभेचा कालावधी ५ वर्षांचा असतो व आमदारांची निवड निवडणुकीद्वारे होते. सरकार स्थापनेसाठी राजकीय पक्षाला अथवा राजकीय आघाडीकडे ६० जागांचे बहुमत असणे अनिवार्य आहे. विद्यमान तेलंगणा विधानसभा २०१४ सालच्या निवडणुकीनंतर अस्तित्वात आली.
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तेलंगणा आणि आंध्र प्रदेशच्या अधिकृत विभाजनानंतर, राज्य विधान परिषद आणि विधानसभेसह द्विसदनी विधानसभा आहे .
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नवीन राज्य तेलंगणाला 119 जागा दिल्या आहेत आणि तिची पहिलीच निवडणूक एप्रिल 2014 मध्ये झाली. BRS ने निवडणुकीत जोरदार विजय मिळवला आणि मोठ्या बहुमताने सरकार स्थापन केले. विरोधी पक्ष म्हणून एआयएमआयएम, काँग्रेस तिसऱ्या क्रमांकावर आहे. त्यानंतर 2018 मध्ये विधानसभा लवकर बरखास्त झाली आणि 2018 च्या निवडणुकीत टीआरएसने मोठ्या बहुमताने विजय मिळवला.
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त्यानंतर 2019 मध्ये विधानसभेने आणखी एक आमदार जोडण्यास मान्यता दिली. आणि हा आमदार होण्याऐवजी अँग्लो-इंडिया समुदायातून सत्ताधारी पक्षाकडून नामनिर्देशित आमदार असेल. स्टीफेनोस एल्विस हे बीआरएस पक्षाचे विद्यमान नामनिर्देशित आमदार आहेत.
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विधानसभेत सध्या 120 आमदार आहेत. त्यापैकी 119 सदस्य लोकांद्वारे निवडले जातात आणि 1 अँग्लो-इंडिया समुदायातून नामनिर्देशित केला जातो. राज्य अंदाजे समान लोकसंख्या असलेल्या 119 मतदारसंघांमध्ये विभागले गेले आहे. दर 5 वर्षांनी विधानसभेची निवडणूक होते. तथापि निवडणूक लवकर होऊ शकते जर:
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1. राज्यघटनेनुसार राज्य चालवण्यात अपयश
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2. 1 महिन्यापेक्षा जास्त काळ सदनात बहुमताचा पाठिंबा मिळवण्यास कोणाचीही असमर्थता
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3. सभागृह विसर्जित करण्याचा मंत्रिमंडळाचा बिनविर���ध निर्णय.
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पोचारम श्रीनिवास रेड्डी (पासून 17/1/19)
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तेलकामठी हे भारताच्या महाराष्ट्र राज्यातील नागपूर जिल्ह्यातील कळमेश्वर तालुक्यातील एक गाव आहे.
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तेलताड हे नारळासारखी वनस्पती आहे.
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खाद्य तेलाचे उत्पन्न आणि उपयोगामध्ये नारळानंतर तेल-ताडाच्या तेलाचा दुसरा क्रमांक लागतो. या तेल-ताडाच्या शास्रीय नावातील पहिल्या नावाची उत्पत्ती ओलीया म्हणजे ऑलिव्ह या तेल देणाऱ्या वृक्षाच्या नावावरून झाली आहे. ऑलिव्ह्प्रमाणेच हाही वृक्ष फळापासून तेल देणारा आहे. त्याचे दुसरे नाव गियानेन्सिस हे त्याच्या तो प्रथम सापडलेल्या प्रदेश गिनी यावरून पडले आहे. परंतु याचे मूळ ठिकाण मध्य आफ्रिकेतील घनदाट अरण्यात पश्चिम आफ्रिकेच्या उत्तर भागात सेनेगल नदी किनाऱ्यापासून दक्षिणेकडे लोआंडा आणि बेनगुयेला या प्रदेशात असावे असे वनस्पतीशास्त्रज्ञाचे मत आहे. पोर्तुगाल, स्पेन इत्यादी दर्यावर्दी राष्ट्रांनी याचा फैलाव दक्षिण अमेरिकेत ब्राझील, वेस्ट इंडीज, कोस्टारिका इत्यादी ठिकाणी केला. तेथून या वृक्षाचा फैलाव जगभर झाला आहे. सोळाव्या शतकाच्या पुवार्धात काही पर्यटकांनी हा पाम-वृक्ष गिनीच्या किनाऱ्यावरप्रथम पाहिला. तेथे सर्व किनारपट्टीवर तो त्यांना मुक्तपणे वाढणारा आणि जंगली वृक्ष वाटला. तेथील स्थानिक हबशींना या वृक्षाचे तेल काढण्याची कला अवगत होती. भारतात आयात होणारे बरेचसे पाम-तेल आज मलेशियातून येते.
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तेल-ताडाच्या वृक्षाची उंची ३० ते ४५ फुटापर्यंत असते. काही ठिकाणी ही उंची ७० ते ८० फुट झाल्याचीही नोंद आहे. फुलावर येईपर्यंत याच्या वरच्या टोकाला पंधरा-वीस पिसाच्या आकाराची संयुक्त पाने असतात. या पानांची लांबी १० ते १५ फुट असून त्यावर शंभर-दीडशे पर्णिकाच्या जोड्या असतात. मध्यभागातील याच्या पर्णिका ३ फुटापर्यंत लंब असून २ इंच इतक्या रुंद असतात. पानाच्या दांड्यावर पर्णिकाची सुरुवात होण्याअगोदर त्यात पन्नास-साठ जोड्या तीक्ष्ण काटे आढळतात. हा वृक्ष मंद गतीने वाढतो आणि फुलोऱ्यावर येण्यास त्याला सहा-सात वर्षे लागतात.
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प्रत्येक फळ दीड-दोन इंच लंब अंडाकृती असून सोबत तीक्ष्ण काटे असतात. याची लालसर तुकतुकीत फळे पिकू लागली की नारिंगी होत जातात. आतला तंतुमय काथ्या तेलाने भरलेला असतो. पूर्ण वाढलेला वृक्ष ३०-४० किलो वजनाची फळे देतो.
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तेलताडाची दोन झाडे जिजामाता उद्यानात बघायला मिळतात. विद्यानगरी परिसरात मुंबई विद्यापीठाच्या पाम उद्यानात एक नमुना आहे. गोदरेज कंपनीच्या विक्रोळीच्या कारखान��याच्या मुख्य द्वारापाशी दोन तेलताड अतिशय डौलदारपणे शोभत आहेत.
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ग्रुप टेलिव्हिसा (Grupo Televisa, S.A.B. de C.V.) किंवा टेलिव्हिसा (Televisa) एक मेक्सिकन मीडिया कंपनी आहे आणि लॅटिन अमेरिका[१][२] आणि स्पॅनिश भाषिक जगातील सर्वात मोठी कंपनी आहे.[३] त्याच्या व्यवसायांमध्ये टेलिव्हिजन आणि रेडिओ कार्यक्रम निर्मिती आणि प्रसारण, मासिक वितरण इ.
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www.televisa.com,www.televisa.com/corporativo (Corporate)
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ज्ञानेश्वर आगाशे (१७ एप्रिल, १९४२ - २ जानेवारी, २००९) हे एक भारतीय उद्योजक, क्रिकेट खेळाडू आणि क्रिकेट प्रशासक होते. ते बृहन्महाराष्ट्र साखर सिंडिकेटचे अध्यक्ष आणि व्यवस्थापकीय संचालक होते. याशिवाय ते कोल्हापूर स्टीलचे अध्यक्ष तसेच सुवर्ण सहकारी बँकेचे आणि मंदार प्रिंटिंग प्रेसचे संस्थापक होते. आगाशे १९९५ ते १९९९ दरम्यान भारतीय क्रिकेट नियामक मंडळाचे उपाध्यक्ष होते. १९६९ साली ते महाराष्ट्र क्रिकेट असोसिएशनचे सदस्य झाले आणि १९८९ मध्ये ते संघाचे कार्यकारी अध्यक्ष बनले.[१]
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यष्टीरक्षक-फलंदाज असलेले आगाशे १९६२ आणि १९६८ दरम्यान महाराष्ट्रासाठी प्रथम वर्गीय क्रिकेट खेळले. त्यांनी १३ सामन्यांत दोन अर्धशतके काढली. यष्टिरक्षक म्हणून त्यांनी दहा झेल घेतले आणि दोन स्टम्पिंग केले.[२]
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यांचा मुलगा आशुतोष आगाशेही प्रथम वर्गीय क्रिकेट खेळला.
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आगाशे आणि त्यांचे कुटुंब सुवर्ण सहकारी बँकेतील घोटाळ्यामध्ये गोत्यात आले. यासंबंधी न्यायालयीन कोठडीत असताना, मधुमेहातून झालेल्या गुंतागुंतीमुळे आगाशे यांचा मृत्यू झाला.[३]
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तेलगु टायटन्स हा विशाखापट्टणम् आणि हैदराबाद स्थित एक कबड्डी संघ आहे जो प्रो कबड्डी लीगमध्ये खेळतो. सीझन ८ मध्ये संघाचे प्रशिक्षक श्री जगदीश कुंबळे (पूर्वी बंगाल वॉरियर्सचे) आहेत. तेलुगु टायटन्स ही वाया ग्रुपचे श्रीनिवास श्रीरामनेनी, एनईडी ग्रुपचे श्री गौतम रेड्डी नेदुरमल्ली आणि ग्रीनको ग्रुपचे श्री महेश कोल्ली यांच्या मालकीच्या वीरा स्पोर्ट्सची फ्रंचायजी आहे. [१]
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टायटन्स त्यांचे घरचे सामने विशाखापट्टणम् येथे राजीव गांधी इनडोअर स्टेडियमवर तर हैदराबाद मध्ये जी. एम्. सी. बालयोगी इनडोअर स्टेडियम येथे खेळतात. टायटन्सने प्रो कबड्डी लीग सीझन २ आणि सीझन ४च्या प्लेऑफमध्ये प्रवेश केला. सीझन २ मध्ये तेलुगु टायटन्स सेमीफायनल पर्यंत पहोचले परंतु त्यांना बंगळूर बुल्सकडून ३८-३९ असा पराभव पत्करावा लागला.
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ज्ञानेश्वर गणपत नाडकर्णी (२१ मे, इ.स. १९२८ - २३ डिसेंबर, इ. स. २०१०[१]) हे मराठी भाषेतील लेखक, समीक्षक होते. मौज, साधना वगैरे मासिकांतून यांचे बरेच नाट्यविषयक लिखाण प्रसिद्ध झाले आहे.
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मराठी व इंग्रजी भाषेतून कलासमीक्षेच्या क्षेत्रात त्यांनी पन्नासहून अधिक वर्षे कामगिरी केली. त्यांचा जन्म २१ मे १९२८ रोजी झाला. कला व नाटय़ क्षेत्रातील आस्वादपर समीक्षक म्हणून त्यांची ख्याती होती. त्यांची अनेक पुस्तके प्रसिद्ध झाली आहेत. इंग्रजीमध्ये एमए पूर्ण केल्यानंतर सन १९५१ मध्ये ज्ञानेश्वर नाडकर्णी लंडनच्या भारतीय दूतावासात रुजू झाले. दोन वर्षांतच ते भारतात परतले आणि मुंबईतील महाविद्यालयांमध्ये १९५६ पर्यंत त्यांनी इंग्रजीचे अध्यापन केले. त्यानंतरची चार वर्षे त्यांनी जाहिरातींचे कॉपीरायटिंग केले. प्रामुख्याने त्यांनी शिल्पी ऍडवरटायसिंग साठी कॉपीरायटर म्हणून काम केले. याच काळात त्यांनी फ्री प्रेस जर्नल साठी सहसंपादक म्हणून काम पाहण्यास सुरुवात केली. १९५९ ते १९६१ त्यांनी फ्री प्रेससाठी काम पाहिले तर १९६१ ते ६८ या काळात त्यांनी फिनान्शिअल एक्स्प्रेससाठी काम पाहिले. कलासमीक्षक या नात्याने त्यांनी इंग्रजी व मराठीत भरपूर लिखाण केले. साहित्य, चित्रकला, नाटक, चित्रपट आदी विविध कलाप्रकारांचा मागोवा घेताना याच काळात येऊ पाहणाऱ्या नवनव्या बदलांचा ते मनपूर्वक पाठपुरावा करीत असत. या विषयीचे लेखन त्यांनी भारतातील बहुतेक अग्रगण्य दैनिक व नियतकालिकांत सातत्याने केले. १९९६ साली त्यांच्या कलासमीक्षणाचा गौरव करणारे एक जंगी प्रदर्शन जहांगीर कलादालनात पार पडले. त्यावेळेस अनेक ज्येष्ठ- श्रेष्ठ कलावंतांनी त्यांच्या कलाकृती या प्रदर्शनासाठी त्यांच्या गौरवार्थ देऊ केल्या होत्या. त्यात एम. एफ. हुसेन, अकबर पदमसी यांचाही समावेश होता. याच प्रदर्शनप्रसंगी नाडकर्णीनी युवा कलाकांरांसाठी ज्येष्ठ कलावंतांच्या नावाने सुमारे १३ पारितोषिके जाहीर केली होती.
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त्यांच्या कलासमीक्षण लेखांना जगभरातून सन्मान मिळाले. फ्रांस सरकारने कलाक्षेत्रातील सर्वोच्च पुरस्कार देऊन १९८६ साली तर ब्रिटिश सरकारने १९९४ साली त्यांना गौरवचिन्ह बहाल केले. शिल्पकलेच्या प्रांतात नवकलेची सुरुवात करणाऱ्या शिल्पकार हेन्री मूर याच्या जन्मशताब्दी निमित्ताने ब्��िटिश सरकारने आयोजित केलेल्या प्रदर्शानच्या पूर्वतयारीमध्ये नाडकर्णी यांनी भूमिका बजावली होती. नाडकर्णी आर्टिस्ट्स सेंटर व बॉम्बे आर्ट सोसायटी या कलाक्षेत्रातील महत्त्वपूर्ण संस्थांचे अध्यक्ष होते. त्यांना फ्रेंच सरकारतर्फे ‘‘अक्षरांचे शिलेदार’‘ हा किताब देण्यात आला.
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ज्ञानेश्वर नाडकर्णी यांनी समीक्षक या नात्याने नियतकालिकांत जसे विपुल लिखाण केले; तसेच साहित्याच्या विविध प्रकारांतही त्यांच्या पुस्तकांनी आगळे स्थान मिळवले. पाऊस, भरती, चिद्घोष, प्रस्थान हे कथासंग्रह, दोन बहिणी, कोंडी, नजरबंदी, वलयांकित या कादंबऱ्या आदींबरोबरच विख्यात चित्रकार एम. एफ. हुसेन यांच्यावरील ‘अनवाणी’ तसेच पिकासो, गायतोंडे, डी. डी. दलाल व हिचकॉक यांच्यावरील चरित्रग्रंथांचे लेखनही त्यांनी केले. अश्वत्थाची सळसळ, अभिनय, प्रतिभेच्या पाऊलवाटा, प्रोग्रेसिव्ह आर्टिस्ट्स ग्रुप आदी समीक्षा ग्रंथांची त्यांनी निर्मिती केली. ‘विलायती वारी’ हे प्रवासवर्णनात्मक पुस्तक त्यांनी लिहिले. बालगंधर्वावरील इंग्रजी चरित्राचे लेखन करून त्यांनी मराठीतील या बुजुर्ग कलावंताची जागतिक पटावर ओळख करून दिली.
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ज्ञानेश्वर नाडकर्णी यांचे २३ डिसेंबर २०१० रोजी निधन झाले.
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तेळगव्हाण हे भारतातील महाराष्ट्र राज्यातील यवतमाळ जिल्ह्यातील दारव्हा तालुक्यातील एक गाव आहे.
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येथील हवामान उष्ण व कोरडे असून उन्हाळ्यात अतिउष्ण तर हिवाळ्यात अतिथंड असते.पावसाळ्यात मध्यम प्रमाणात पाऊस पडतो.
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३३ कोटि देव म्हणजे ३३ प्रकारचे उच्च देव. संस्कृत भाषेत 'कोटि' या शब्दाचा अर्थ करोड (१,००,००,०००) असा होत नाही तर हा शब्द 'उच्चतम, सर्वोच्च व अत्यंत' असा म्हणून वापरला जातो. शून्याच्या शोधानंतर भारतीय गणितज्ञांनी मोठ्यात मोठ्या संख्या लिहिणास सुरुवात केली, त्यांना नाव देताना मोठी संख्या म्हणून १,००,००,०००ला कोटी असे नाव रूढ झाले. पण हिंदू धर्मामध्ये ३३ कोटी (३३,००,००,०००) ही देवतांची संख्या नसून, ३३ प्रकारचे उच्च देव आहेत. सामान्य भाषेत कोटी शब्दाचा दुसरा अर्थ कोटी (१,००,००,०००) असल्यामुळे ३३ करोड देवी देवता असल्याची मान्यता प्रख्यात झाली.[१][२][३]
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या तेहेतीस कोटी/प्रकारच्या देवामध्ये आठ वासू, अकरा रुद्र, बारा आदित्य आणि दोन अश्विनीकुमारांचा समावेश होतो. काही ठिकाणी ३३ कोटी देवांमध्ये इंद्र आणि प्रजापतिला बारा आदित्यात न ठेवता दोन अश्विनीकुमारांऐवजी गणले गेले आहे.[४]
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पाच अमूर्तः १.आनंद, २. विज्ञान (ज्ञान), ३. मानस (विचार), ४. प्राण (श्वास किंवा जीवन), ५. वाक - (भाषण). अमुर्त म्हणजे निराकार, अप्रत्यक्ष, साकार नसलेला.
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शिवाची पाच नावेः १. ईशान (वैभव), २. तत्पुरुष, ३. सद्योजात (नवजात किंवा जन्म घेतलेला), ४. वामदेव, ५. अघोरा
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आणि आत्मा
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- असे एकूण: १२ (आदित्य) + ११ (रुद्र) + ८ (अष्टवसू) + २ (आश्विनीकुमार) = ३३.[१][२][३]
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बृहदारण्यकोपनिषदातील तिसऱ्या अध्यायातील नवव्या ब्राह्मणातील याज्ञवल्क आणि शाकल्य विदग्ध यांच्यामधील संवादामध्ये ३३ कोटी देवांचा उल्लेख आहे.[५][६]
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शाकल्य विदग्धला स्वःताचा फार अभिमान वाटे. अभिमानाने भरून आलेला तो याज्ञवल्क्याला प्रश्नोत्तर प्रश्न करू लागला?
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शाकल्यने तोच प्रश्न आणखी पाच वेळा पुन्हा पुन्हा विचारला. यावर याज्ञवल्क्यांनी प्रत्येक वेळी संख्या कमी करून देवतांची संख्या अनुक्रमे सहा, तीन, दोन, दीड आणि शेवटी एक अशी सांगितली.
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गुणक: 36°21′N 127°23′E / 36.350°N 127.383°E / 36.350; 127.383
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देजॉन हे दक्षिण कोरिया देशामधील पाचव्या क्रमांकाचे मोठे महानगर व विशेष केंद्रशासित शहरांपैकी एक आहे. देजॉन दक्षिण कोरियाच्या मध्य भागात वसले असून देशामधील वाहतूकीचे सर्वात मोठे केंद्र आहेत. कोरियामधील सर्व महत्त्वाचे व वर्दळीचे महामार्ग व दृतगती तसेच इतर रेल्वेमार्ग देजॉनमधून जातात.
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तैनाती फौज ही भारतातील संस्थानांवर ब्रिटिशांचा अधिकार वाढविण्यासाठी ब्रिटिश भारतातील गव्हर्नर जनरल लॉर्ड वेलस्ली याने इ.स. १७९८ मध्ये चालू केलेली एक योजना होती. तैनाती फौजेच्या अंतर्गत करार झालेल्या संस्थानांची जबाबदारी कंपनी घेत असे व त्याबदल्यात त्या संस्थानांकडून काही अटी मान्य करून घेतल्या जात.
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तैनाती फौजेच्या माध्यमातून कंपनीने मोठ्या प्रमाणात भारतात आपला राज्यविस्तार केला. तैनाती फौजेचा तह भारतात सर्वात आधी इ.स. १७९८ साली हैदराबादच्या निजामाने स्वीकारला. हैदराबादच्या निजामाने परत इ.स. १८०० साली तह करून वऱ्हाड प्रांत कंपनीला दिला. इ.स. १८०० साली बडोद्याच्या गायकवाडांनी हा तह स्वीकारला. म्हैसूरच्या वाडियार राजांनी इ.स. १७९९ साली तैनाती फौजेची पद्धत स्वीकारली. तंजावरच्या राजानेसुद्धा इ.स. १७९९ साली तैनाती फौज स्वीकारली. अवधच्या नवाबाने इ.स. १८०१ साली तर दुसऱ्या बाजीराव पेशव्याने इ.स. १८०२ साली वसईच्या तहाने तैनाती फौज स्वीकारली. त्याचप्रमाणे नागपूरच्या भोसल्यांनी इ.स. १८०३ ला, शिंद्यांनी इ.स. १८०४ला तसेच राजस्थानमधील जोधपूर, जयपूर, भरतपूर या संस्थानांनीसुद्धा तैनाती फौजेची पद्धत स्वीकारली होती.
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तैनाती फौजेच्या प्रकारामुळे संस्थानिकांचे स्वातंत्र्य नाहीसे झाले. इंग्रजांनी संस्थानिकांच्या संरक्षणाची जबाबदारी घेतल्यामुळे संस्थानिकांनी स्वतःची फौज ठेवणे बंद केल्यामुळे संस्थानात बंडाळी व लुटालूट वाढली. संस्थानातील जनतेला आणि उद्योगधंद्यांना असलेले संरक्षण नाहीसे झाले. संस्थानात ठेवलेली तैनाती फौज सर्व राज्यातील बंडाळीचा मोड करण्यास अपुरी होती. संस्थानातील राज्यकर्त्यांची कारभार करण्याची कार्यक्षमता कमी झाली.
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तोंडचीर हे भारताच्या महाराष्ट्र राज्यातील लातूर जिल्ह्यातील उदगीर तालुक्यातील एक गाव आहे.
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नारिता आंतरराष्ट्रीय विमानतळ (जपानी: 成田国際空港; IATA: NRT) हा जपानमधील तोक्यो महानगराला आंतरराष्टीय विमानसेवा पुरवणारा एक विमानतळ आहे. हा विमानतळ तोक्यो स्टेशनच्या ५७ किमी पूर्वेला चिबा प्रांतामधील नारिता ह्या शहरात स्थित आहे. जपानमधील बव्हंशी आंतरराष्ट्रीय विमान वाहतूक ह्या विमानतळातून होते. जपान एरलाइन्स, ऑल निप्पॉन एरलाइन्स आणि निप्पॉन कार्गो एरलाइन्स या कंपन्याचा आंतरराष्ट्रीय वाहतूकतळ तसेच जेटस्टार जपान, पीच आणि व्हॅनिला एर या कंपन्यांचा मुख्य वाहतूक तळ येथे आहे. या शिवाय डेल्टा एर लाइन्स आणि युनायटेड एरलाइन्सचा आशियाई वाहतूकतळ नारिता येथे आहे.
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प्रवासी वाहतूकीच्या दृष्टीने नारिता हा जपानमधील दुसऱ्या क्रमांकाचा वर्दळीचा विमानतळ आहे. तोक्यो आंतरराष्ट्रीय विमानतळ हा तोक्यो शहरामधील दुसरा विमानतळ आहे.
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गुणक: 35°45′53″N 140°23′11″E / 35.76472°N 140.38639°E / 35.76472; 140.38639
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खडका पासून चौकोनी चिरी बनवण्याच्या प्रक्रियेला तोडा केला असे म्हणतात. पारंपारिक बांधकामात वडार समाजातील मंडळी असा तोडा करून देण्याचे काम करायची. छिन्नी आणि हतोडा ही तोडा करण्यासाठी वापरली जाणारी मुख्य हत्यारे आहेत.
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गणितानुसार जिवा (अन्य मराठी नाव: ज्या फल ; इंग्लिश: Sine / Sine function, साइन, साइन फंक्शन ;) हे कोनाचे फल असते. काटकोन त्रिकोणामध्ये एखाद्या कोनाची ज्या म्हणजे कोनासमोरची बाजू व त्रिकोणाचा कर्ण यांचे गुणोत्तर असते. त्रिकोणमितीय फलांमधील प्रधान फलांपैकी हे एक मानले जाते.
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समजा, एका समतल काटकोन त्रिकोणाला A, B, C असे तीन कोन आणि त्यांना अनुक्रमे संमुख अश्या a, b, h या तीन बाजू असून कोन C काटकोन व बाजू h कर्ण असतील, तर A या कोनाची ज्या, म्हणजेच
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sin
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A
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{\displaystyle \sin A}
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खालील सूत्राने दर्शवली जाते :
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तोबियास फिग्वेरेदो (२ फेब्रुवारी, इ.स. १९९४ - ) हा पोर्तुगालचा फुटबॉल खेळाडू आहे.
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६ फेब्रुवारी, इ.स. २०११
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दुवा: CricketArchive (इंग्लिश मजकूर)
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साचा:Cricket squad2 player
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साचा:Cricket squad2 player
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साचा:Cricket squad2 player
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साचा:Cricket squad2 player
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साचा:Cricket squad2 player
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साचा:Cricket squad2 player
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साचा:Cricket squad2 player
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साचा:Cricket squad2 player
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साचा:Cricket squad2 player
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साचा:Cricket squad2 player
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साचा:Cricket squad2 player
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साचा:Cricket squad2 player
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साचा:Cricket squad2 player
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साचा:Cricket squad2 player
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साचा:Cricket squad2 player
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साचा:Cricket squad2 player
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साचा:Cricket squad2 player
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साचा:Cricket squad2 player
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साचा:Cricket squad2 player
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साचा:Cricket squad2 player
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साचा:Cricket squad2 player
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साचा:Cricket squad manager
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साचा:Cricket squad manager
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साचा:Cricket squad manager
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तोरनाळा हे भारतातील महाराष्ट्र राज्यातील वाशिम जिल्ह्यातील वाशिम तालुक्यातील एक गाव आहे.
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येथील हवामान उष्ण व कोरडे असून उन्हाळ्यात अतिउष्ण तर हिवाळ्यात अतिथंड असते.दिवसा उष्ण आणि रात्री थंड असे वर्षभर तापमान असते. पावसाळ्यात येथे मध्यम प्रमाणात पाऊस पडतो.
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तोळेवाडी हे भारतातील महाराष्ट्र राज्यातील सातारा जिल्ह्यातील पाटण तालुक्यातील एक गाव आहे.
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येथे ऑक्टोबर ते मार्च हा हिवाळा हंगाम असतो. हिवाळ्यात दिवसा तापमान ३० सेल्सियस तर रात्री तापमान ११ अंश सेल्सियस असते.जून ते सप्टेंबर हा पावसाळा हंगाम असतो. पावसाळ्यात दिवसा तापमान २८ अंश सेल्सियस तर रात्री तापमान २२ अंश सेल्सियस असते. पावसाळ्यात चांगल्या प्रमाणात पाऊस पडतो. एप्रिल ते जून हा उन्हाळा मोसम असतो. उन्हाळ्यात दिवसा तापमान ३८ अंश सेल्सियस तर रात्री तापमान २० अंश सेल्सियस असते.
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तौफीक उमर (पंजाबी:توفیق عمر; २० जून, १९८१ - ) हा पाकिस्तानकडून २००१ ते २०१४ पर्यंत ४३ कसोटी आणि २२ एकदिवसीय सामने खेळलेला क्रिकेट खेळाडू आहे.
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गुणक: 57°9′N 65°32′E / 57.150°N 65.533°E / 57.150; 65.533
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त्युमेन (रशियन: Екатеринбург) हे रशिया देशाच्या त्युमेन ओब्लास्तचे मुख्यालय व रशियामधील सर्वात मोठ्या शहरांपैकी एक आहे. आहे. त्युमेन शहर रशियाच्या दक्षिण-पश्चिम भागात उरल पर्वतरांगेच्या पूर्वेस तुरा नदीच्या काठावर वसले आहे. १५८६ साली स्थापन झालेले त्युमेन हे सायबेरियामधील रशियाचे पहिले शहर होते. २०१० सालच्या गणनेनुसार येथील लोकसंख्या ५.८ लाख होती.
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मॉस्को ते व्लादिवोस्तॉक दरम्यान धावणाऱ्या सायबेरियन रेल्वेवरील त्युमेन हे एक महत्त्वाचे स्थानक आहे.
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त्रिंकोमाली (तिरुकोणमलै) (तमिळ: திருகோணமலை, सिंहला: තිරිකුණාමළය तिंकुमलय) हे एक श्रीलंका देशामधील बंदराचे तसेच पर्यटनाचे प्रसिद्ध ठिकाण आहे व कॅंडी शहरापासून ११० किमी अंतरावर आहे.
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हे शहर त्रिंकोमाली जिल्ह्याचे प्रशासकीय केन्द्र आहे.
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तरेंगानू (देवनागरी लेखनभेद: तरंगानू, तेरेंगानू; भासा मलेशिया: Terengganu; जावी लिपी: ترڠڬانو ; चिनी: 登嘉楼 ; तमिळ: திரெங்கானு ; सन्मान्य नाव: दारुल ईमान (श्रद्धेचा प्रदेश);) हे मलेशियामधील एक राज्य असून द्वीपकल्पीय मलेशियाच्या पूर्व किनाऱ्यावर वसले आहे. तरेंगानू नदीच्या मुखाशी वसलेल्या क्वाला तरेंगानू येथे तरेंगानूची प्रशासकीय, तसेच शाही राजधानी आहे.
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कदा · कलांतान · जोहोर · तरेंगानू · नगरी संबिलान · पराक · पर्लिस · पाहांग · पेनांग · मलाक्का · सलांगोर · साबा · सारावाक
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क्वालालंपूर · पुत्रजय · लाबुआन
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त्रिंबक नारायण आत्रे (जन्म : ५ सप्टेंबर १८७२; - फेब्रुवारी १९३३) हे महाराष्ट्रातील ग्रामीण समाजाचे व मागासलेल्या जातिसंस्थांचे अभ्यासक तसेच ग्रामव्यवस्था व गुन्हेगारी जगत या विषयांचे तज्ज्ञ लेखक होते. मुंबई विद्यापीठातून आत्र्यांनी पदवी घेतली व नंतर त्यांनी मुंबई सरकारच्या महसूल खात्यात अव्वल कारकून म्हणून नोकरीस प्रारंभ केला. पुढे अहमदनगर जिल्ह्यात दुष्काळी कामांवर खास अंमलदार म्हणून त्यांची नेमणूक झाली, आणि शेवटी सबसज्ज म्हणून ते निवृत्त झाले..
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आपल्या कामाचा व्याप सांभाळून आत्र्यांनी लिखाण केले. त्यांचे 'गुन्हेगारी जाती' हे गाजलेले पुस्तक एम केनेडी यांच्या 'क्रिमिनल क्लासेस इन द प्रेसिडेन्सी ' यावर आधारित असून त्यात वंजारे, भामटे, कैकाडी, मांग - गारुडी, रामोशी या तत्कालीन गुन्हेगार जमाती, त्यांच्या भाषा, त्यांच्या चालीरिती, त्यांची गुन्हे करण्याची पद्धत, वेशभूषा, सांकेतिक चिन्हे या बद्दलची अभ्यासपूर्ण माहिती देण्यात आली आहे.
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मुलकी खात्यात नोकरीला असल्याने आत्र्यांनी महाराष्ट्रातील खेड्यापाड्यांचे जवळून व बारकाईने निरीक्षण केले, त्यांनी ग्रामीण भागातील सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक व्यवस्थेचा अभ्यास करून गावगाडा नावाचा ग्रंथ लिहिला. हा ग्रंथ १९१५ साली प्रसिद्ध झाला.
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प्रामुख्या[१]ने शेतकरी आणि शेतीचे अर्थशास्त्र हा या पुस्तकाचा विषय आहे. 'गावगाडा'मध्ये त्या काळची विशिष्ट लहेजा असलेली भाषा आहे. त्या काळाच्या अनेक म्हणी आणि वाक्प्रचारांचा समावेश या पुस्तकात आहे. त्यांतून मराठी ग्रामसंस्कृतीचा विविधांगी परिचय करून दिला आहे. ह्या पुस्तकाने मराठी सामाजिक शास्त्रीय वाड्मयात मोलाची भर घातली आहे.
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काळी, पांढरी, खेडे, मौजे, कसबा पेठ. कुणबी इ. विषयांबद्दलची माहिती या पुस्तकात आली आहे.
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सन १९३३मध्ये मधुमेहाच्या विकाराने त्रिंबक नारायण आत्रे यांचे निधन झाले.
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तृतीय तारांकित श्रेणी किंवा थ्री-स्टार रँक अधिकारी हा अनेक सशस्त्र सेवांमध्ये वरिष्ठ कमांडर असतो, ज्याच्याकडे OF-8 च्या NATO कोडने वर्णन केलेला दर्जा असतो. हा शब्द काही सशस्त्र दलांनी देखील वापरला आहे जे NATO सदस्य नाहीत.
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सामान्यतः, थ्री-स्टार अधिकारी हे व्हाईस अॅडमिरल, लेफ्टनंट जनरल किंवा वेगळ्या रँक स्ट्रक्चर असलेल्या हवाई दलाच्या बाबतीत, एर मार्शलचे पद धारण करतात.
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त्रिनिदाद (Trinidad) हे त्रिनिदाद आणि टोबॅगो देशाच्या दोन प्रमुख बेटांपैकी मोठे व प्रमुख बेट आहे (टोबॅगो हे दुसरे बेट). ४,७६८ चौ. किमी (१,८४१ चौ. मैल) इतके क्षेत्रफळ असलेले त्रिनिदाद बेट कॅरिबियन समुद्रात दक्षिण अमेरिकेमधील व्हेनेझुएला देशाच्या केवळ ११ किमी उत्तरेस वसले असून ते अँटिल्स द्वीपसमूहाच्या दक्षिण टोकाला स्थित आहे. त्रिनिदाद बेटाची लोकसंख्या सुमारे १३ लाख असून देशाची राजधानी पोर्ट ऑफ स्पेन ह्याच बेटावर स्थित आहे.
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त्रिनिदाद आणि टोबॅगो राष्ट्रीय क्रिकेट संघ हा त्रिनिदाद आणि टोबॅगो देशाचा क्रिकेट संघ आहे. हा संघ वेस्ट इंडीज मधील प्रादेशिक स्पर्धेत भाग घेतो.
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त्रिपुटी - अध्यात्म आणि तत्त्वज्ञानातील ही संज्ञा आहे.
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एकमेकांशी संबंधित असलेल्या तीन गोष्टींचा समुच्चय म्हणजे त्रिपुटी.
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त्रिपुटी अनेक आहेत.
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०१) ज्ञेय, ज्ञाता, ज्ञान
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०२) कर्म, कर्ता, क्रिया
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०३) ध्येय, ध्याता, ध्यान
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०४) दृश्य, द्रष्टा, दर्शन
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०५) भोग्य, भोक्ता, भोग
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०६) परमेश्वर, आत्मा, जगत
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०७) ब्रह्म, माया, जीव
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ध्यानामध्ये ध्यान करणारा ध्याता परमेश्वराशी एकरूप झाल्याने त्रिपुटी लोप पावते. [१]
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त्रिभुज प्रदेश म्हणजे नदीच्या मुखाजवळ नदीने वाहून आणलेल्या गाळामुळे तयार झालेला त्रिकोणी प्रदेश होय. मोठ्या नद्यांचे त्रिभुज प्रदेश नदीच्या पात्राला सहसा अनेक प्रवाहांमध्ये विभागतात.
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त्रिभुज प्रदेशाची निर्मिती ही नदीवर अवलंबून असते. या प्रदेशातील जमीन गाळाची व बहुधा दलदलयुक्त असते. एखाद्या नदीच्या मुखाजवळ तयार होणाऱ्या त्रिभुज प्रदेशाची निर्मिती खालील घटकांवर अवलंबून असते :
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नदी समुद्राला जाऊन मिळताना नदीच्या शेवटच्या टप्प्यात नदीप्रवाहाचा वेग कमी होतो. वेग मंदावलेल्या प्रवाहातील वाळू, माती, खडी, दगड इत्यादी नदीच्या मुखाशी जमा होत जातात. खडी आणि वाळू जड असल्यामुळे सहसा ते सर्वांत पहिल्यांदा जमा होतात. माती हलकी असल्यामुळे समुद्रात आतपर्यंत वाहून नेली जाते. खाऱ्या पाण्यामुळे मातीच्या गुठळ्या तयार होतात व त्या गुठळ्यांमुळे माती जड होते आणि तळाशी जाऊन साचू लागते. अशा गाळाचे एकावर एक थर साठून त्रिभुज प्रदेश तयार होतो. नंतर या प्रदेशावर वनस्पती वाढून त्याला स्थैर्य देतात. बऱ्याच वेळा त्रिभुज प्रदेशाचा आकार पक्ष्याच्या पायांप्रमाणे अनेक फाटे पडल्यासारखा असतो. उंचीच्या दृष्टिकोनातून हा प्रदेश सखल मैदानी असतो. त्याची समुद्रसपाटीपासून उंची सहसा २० मीटरांपेक्षा जास्त नसते. त्रिभुज प्रदेशावर लाटा किंवा भरती-ओहोटी यांचा फारसा परिणाम होताना आढळत नाही.
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सर्वांत प्रसिद्ध त्रिभुज प्रदेश नाईल नदीवर आहे. गंगा-ब्रह्मपुत्रा या नद्यांनी केलेले बांग्लादेशमधील त्रिभुजप्रदेश, अॅमेझॉन, मिसिसिपी, ऱ्हाइन, डॅन्यूब इत्यादी नद्यांचे त्रिभुज प्रदेश प्रसिद्ध आहेत. मिसिसिपी नदीचा त्रिभुज प्रदेश हा जगातील सर्वात विस्तृत त्रिभुज प्रदेश आहे. त्याचे क्षेत्रफळ ३१,००,००० किमी२ पेक्षा अधिक आहे. भारतीय उपखंडात कृष्णा, गोदावरी, कावेरी, महानदी,ओदिसा या नद्यांचे त्रिभुज प्रदेश विशेष लक्षणीय आहेत.
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संपूर्ण माहिती(Moin)
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त्रिभुज प्रदेश : नदी जेथे समुद्रास अथवा सरोवरास मिळते तेव्हा मुखाशी गाळाचा सपाट प्रदेश निर्माण होतो त्यास त्रिभुज प��रदेश म्हणतात. तो ग्रिक भाषेतील Δ डेल्टा या अक्षरासारखा दिसतो म्हणून इंग्रजी भाषेत त्यास डेल्टा म्हणतात तर मराठीत त्रिभुज (त्रिकोणी) प्रदेश म्हणतात. नदीच्या मुखाशी उतार कमी झाल्याने संथ वाहणारे पाणी सर्व गाळ वाहू शकत नाही. त्यामुळे पात्रातच गाळ साचल्याने मुख भरून येते आणि नदीचे पाणी दुसऱ्या मुखाने नवा मार्ग काढून समुद्रास मिळते व कालांतराने ते मुखही गाळाने भरून आल्याने नदी तिसऱ्या मुखाने समुद्रास मिळते, त्यामुळे नदी बहुमुखी बनते. नदीच्या अशा मुखप्रवाहांस उपमुख म्हणतात.
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नदीस जेथून उपमुख नद्या फुटतात तेथून त्रिभुज प्रदेश सुरू होतो. त्रिभुज प्रदेशातील जमीन सामान्यतः सखल असते. तिची उंची सहसा २० मी. पेक्षा जास्त नसते. काही उपमुख नद्या खोल पाण्याच्या, तर काही गाळाने भरलेल्या दिसतात. त्रिभुज प्रदेशाची निर्मिती नदीच्या गाळाचे प्रमाण, मुखाशी समुद्राची खोली, मुखाशी नदीचा वेग, समुद्रप्रवाह, पावसाचे प्रमाण व जलवाहन क्षेत्राची वैशिष्ट्ये इ. घटकांवर अवलंबून असते. म्हणूनच काही नद्यांस त्रिभुज प्रदेश नाहीत. उदा., ॲमेझॉन नदीचा वेग मुखाशी इतका जास्त आहे, की प्रवाह पुढे ५०० किमी. पर्यंत समुद्रात वाहतो. परिणामतः या नदीचा त्रिभुज प्रदेश लहान आहे. संथपणे उथळ कॅस्पियन समुद्रास मिळणाऱ्या व्होल्गाचा त्रिभुज प्रदेश विस्तीर्ण आहे. त्रिभुज प्रदेशाचे आकारावरून मुख्य तीन प्रकार पडतात. उथळ संथ पाण्यात परिपूर्ण सलग त्रिभुज प्रदेश बनतात त्यास ‘पंखा’ (कमानी) त्रिभुज प्रदेश म्हणतात. उदा., नाईलचा त्रिभुज प्रदेश. खोल समुद्रात तुटक विस्कळित त्रिभुज प्रदेश आढळतात त्यांस ‘खगपद’ त्रिभुज प्रदेश म्हणतात. उदा., मिसिसिपीचा त्रिभुज प्रदेश. मिसिसिपीचा त्रिभुज प्रदेश हा सर्वात मोठा (क्षेत्रफळ ३१,२०० चौ. किमी.) त्रिभुज प्रदेश आहे. तिसरा प्रकार ‘कुस्पेट डेल्टा’ नावाने ओळखला जातो. त्यात नदीमुखापासून शिंगासारखे दिसणारे संचयनाचे बांध वक्राकार दोन्ही बाजूंस वाढत जातात. उदा., टायबर नदीचा त्रिभुज प्रदेश. त्रिभुज प्रदेश सतत विस्तारत असतात आणि त्यामुळे नवीन जमीन तयार होते. व ती सुपीक असते. पूर व पाण्याचा निचरा ह्या त्रिभुज प्रदेशातील शेतीच्या समस्या होत. कराची, कलकत्ता, रंगून, बसरा, कैरो, न्यू ऑर्लीअन्स, ॲस्ट्राखान यांसारखी अनेक मोठी बंदरे आणि शहरे त्रिभुज प्र��ेशात आढळतात व नदीखोऱ्याचा व्यापार त्यांद्वारे चालतो
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बौद्ध धम्मात बुद्ध, धम्म, व संघ हे त्रिरत्न आहेत.
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बुद्ध म्हणजे जागृत व्यक्ती, ज्याने बुद्धत्व (ज्ञान) मिळवलेले आहे.
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बुद्धांच्या शिकवणुकीला धम्म असे म्हटले जाते.
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बुद्धांच्या शिकवणुकीचे आचरण करणाऱ्या भिक्खू-भिक्खूंनींच्या समूहास संघ असे म्हणतात.
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या त्रीरत्नाला शरण जाण्याला त्रिशरण असे म्हणतात.
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त्रिशूळ एक प्राचीन आयुध. याला लांब दांडा आणि पुढे तीन टोके असतात. हे प्रामुख्याने शिवाचे आयुध समजले जाते. त्वष्ट्याने सुर्याचे वैष्णव तेज कानशीने घासून त्रिशूल तयार केला, असे मत्स्य आणि विष्णू या पुराणांत म्हंटले आहे. त्रिशूल हे फार प्रभावी आयुध असून, ते प्रथम मोठ्या आवेशाने फिरवून नंतर प्रतिस्पध्याच्या अंगात खुपसता असा उल्लेख रामायणात आहे.
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त्रिशूळ हे एक शस्त्र असून हिंदू धर्मातील एक प्रमुख चिन्ह आहे.
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आकर्षी कश्यप (२४ ऑगस्ट, २००१:दुर्ग, छत्तीसगढ, भारत - ) ही एक भारतीय बॅडमिंटन खेळाडू आहे. हिने २०२२ राष्ट्रकुल खेळांमधील बॅडमिंटन स्पर्धेत भारताच्या मिश्र संघातून रजतपदक मिळवले.
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त्रु, त्रू आणि तृ यांतील तृ हे जोडाक्षर नाही. खाली दिलेल्या शब्दांत तृ दिसेल.
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जॉर्ज इवानोविच गुर्जेफ (रोमन : George Ivanovich Gurdjieff, आर्मिनिअन : Գեորգի Իվանովիչ Գյուրջիև, जॉर्जिअन : გიორგი გურჯიევი, ग्रीक : Γεώργιος Γεωργιάδης, रशियन : Гео́ргий Ива́нович Гюрджи́ев, जानेवारी १३, इ.स. १८६६ – ऑक्टोबर २९, इ.स. १९४९) हा विसाव्या शतकाच्या मध्यात होऊन गेलेला प्रभावी आध्यात्मिक गुरू होता. बरीचशी मानवजात ही संमोहित "जागत्या निद्रेत" आहे; चेतनेचे उच्चतर स्तर गाठणे आणि संपूर्ण मानवी क्षमता प्राप्त करणे शक्य आहे अशी त्याची शिकवण होती. असे करण्यासाठी गुर्जेफने एक पद्धत विकसित केली आणि तिला 'द वर्क'[१] किंवा 'द मेथड'[२] असे नाव दिले. या पद्धतीच्या तत्त्वांनुसार आणि सूचनांनुसार[३] ती फकिर, योगी किंवा साधू यांच्या चेतनाजागृतीच्या पद्धतीपेक्षा वेगळी आहे; म्हणून (मुळात) तिला "चौथा मार्ग"[४] असे म्हटले जाते.
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गुणक: 48°42′N 44°31′E / 48.700°N 44.517°E / 48.700; 44.517
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वोल्गोग्राद (रशियन: Волгоград; भूतपूर्व नावे: झारित्सिन (१५८९ - १९२५) व स्टालिनग्राड (१९२५ - १९६१)) ही रशिया देशाच्या वोल्गोग्राद ओब्लास्ताचे राजधानी व रशियामधील एक महत्त्वाचे औद्योगिक शहर आहे. वोल्गा नदीच्या पश्चिम तीरावर वसलेले वोल्गोग्राद लोकसंख्येच्या दृष्टीने रशियामधील १२व्या क्रमांकाचे शहर असून २०१० साली येथील लोकसंख्या १०,११,४१७ (इ.स. २००२ जनगणनेनुसार) आहे. इ.स. १५८९ ते इ.स. १९२५ या कालखंडात या शहराचे नाव त्सारित्सिन असे होते, तर इ.स. १९२५ ते इ.स. १९६१ या काळात जोसेफ स्टालिन याच्या नावावरून ठेवलेल्या स्तालिनग्राद या नावाने ते ओळखले जाई.
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दुसऱ्या महायुद्धादरम्यान नाझी जर्मनी व सोव्हिएत संघादरम्यान झालेल्या अत्यंत विध्वंसक लढाईसाठी स्टालिनग्राड इतिहासामध्ये ओळखले जाते. २३ ऑगस्ट १९४२ रोजी नाझी जर्मनीने प्रचंड मोठा बाँबहल्ला करून जवळजवळ पूर्ण स्टालिनग्राड शहर बेचिराख केले. त्यानंतर ह्या शहराचा ताबा मिळवण्यासाठी झालेली लढाई आजवरची सर्वात रक्तरंजित लढाई मानली जाते. नोव्हेंबर १९४२ मध्ये शहराच्या ९० टक्क्याहून अधिक भागावर नियंत्रण मिळवल्यानंतरदेखील जर्मनीला संपूर्ण लाल सैन्य येथून हुसकावून लावण्यात यश आले नाही. १८ नोव्हेंबर १९४२ रोजी सोव्हिएतने सुरू केलेल्या प्रतिहल्ल्यादरम्यान जर्मनीचे जवळजवळ सर्व सहावे सैन्य एकाकी पडले व सोव्हिएत संघाने ही लढाई जिंकली. ह्या लढाईमध्ये १२.५ ते १८ लाख सैनिक मृत्यूमुखी पडल्याचा अंदाज आहे.
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इ.स. १९६१ साली राष्ट्राध्यक्ष निकिता ख्रुश्चेव्हने ह्या शहराचे नाव बदलून वोल्गोग्राद असे ठेवले.
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हे कवी 'ग.दि. माडगूळकर' आणि गायक व संगीतकार 'सुधीर फडके' यांच्या सहयोगातून निर्माण झालेल्या कलाकृतींपैकी एक गाणे आहे.
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'जगाच्या पाठीवर' ह्या चित्रपटातील हे गीत 'आशा भोसले' ह्यांनी गायिले आहे.
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नाच नाचुनी अती मी दमले
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थकले रे नंदलाला
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निलाजरेपण कटीस नेसले, निसुगपणाचा शेला
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आत्मस्तुतीचे कुंडल कानी, गर्व जडविला भाला
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उपभोगाच्या शतकमलांची, कंठी घातली माला
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विषयवासना वाजे वीणा, अतृप्ती दे ताला
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अनय अनीती नुपूर पायी, कुसंगती कर ताला
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लोभ प्रलोभन नाणी फेकी, मजवर आला गेला
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स्वतःभोवती घेता गिरक्या, अंधपणा की आला
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तालाचा मज तोल कळेना, सादही गोठून गेला
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अंधारी मी उभी आंधळी, जीव जीवना भ्याला
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थडीपवनी हे भारताच्या महाराष्ट्र राज्यातील नागपूर जिल्ह्यातील नरखेड तालुक्यातील एक गाव आहे.
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थर्गूड मार्शल (२ जुलै, इ.स. १९०८:बाल्टिमोर, मेरीलंड, अमेरिका - २४ जानेवारी, इ.स. १९९३:बेथेस्डा, मेरीलंड) हा अमेरिकेच्या सर्वोच्च न्यायालयाचा न्यायाधीश होता. मार्शल या न्यायालयातील पहिला कृष्णवर्णीय तर एकूण ९६वा न्यायाधीश होता.
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याआधी मार्शल सर्वोच्च न्यायालयातच वकील होता. त्याने जिंकलेल्या अनेक खटल्यांमध्ये ब्राउन वि बोर्ड ऑफ एज्युकेशन हा खटला विशेष प्रसिद्ध आहे. याद्वारे अमेरिकेतील शाळांमधील वर्णविभागणी संपुष्टात आली.
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मार्शलचे पणजोबा कॉंगोमध्ये जन्मलेले होते व तेथून त्यांना पकडून आणून अमेरिकेत गुलाम म्हणून विकले गेले होते.
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बाल्टिमोरमधील आंतरराष्ट्रीय विमानतळास मार्शलचे नाव दिलेले आहे.
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थर्मिस्टीकलीस अथवा थेमिस्टोक्लीस ग्रीसचा एक सेनानी होता. याने ग्रीस-पर्शिया युद्धात ग्रीक सैन्याचे नेतृत्व केले व अतिप्रचंड सैन्याचा नौदलीय युद्धात पराभव केला. आजवरच्या महान सेनानींमध्ये थर्मिस्टीकलीसचा समावेश होतो. मॅरेथॉनच्या युद्धानंतर त्याने तत्परता दाखवून अथेन्सच्या नौदलाला पर्शियन सैन्याची दुसरी मोठी लाट येण्या आगोदरच सज्ज केले.
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