Upload folder using huggingface_hub
Browse filesThis view is limited to 50 files because it contains too many changes. See raw diff
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10.txt +3 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10013.txt +2 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10041.txt +1 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10056.txt +3 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10063.txt +5 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10087.txt +1 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10115.txt +1 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10127.txt +69 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10131.txt +68 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10137.txt +3 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10139.txt +5 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10140.txt +1 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10149.txt +1 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10154.txt +2 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10179.txt +2 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10186.txt +34 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10192.txt +34 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10205.txt +1 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10222.txt +2 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10257.txt +3 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10291.txt +6 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10294.txt +11 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10309.txt +2 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10313.txt +8 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10322.txt +1 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10324.txt +2 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10327.txt +4 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10328.txt +4 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10338.txt +3 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10347.txt +2 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10352.txt +3 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10359.txt +4 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10389.txt +1 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10390.txt +3 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10398.txt +31 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10403.txt +7 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10404.txt +7 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10413.txt +2 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10416.txt +8 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10420.txt +1 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10436.txt +2 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10445.txt +1 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10455.txt +3 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10461.txt +1 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10492.txt +22 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10507.txt +2 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10522.txt +8 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10545.txt +1 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10561.txt +2 -0
- dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10571.txt +1 -0
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,3 @@
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
गुणक: 40°19′22″N 78°55′15″W / 40.32278°N 78.92083°W / 40.32278; -78.92083
|
| 2 |
+
|
| 3 |
+
जॉन्सटाऊन (इंग्लिश: Johnstown) हे अमेरिकेच्या पेन्सिल्व्हानिया राज्यामधील एक छोटे शहर आहे. हे शहर पेन्सिल्व्हानियाच्या पश्चिम भागात पिट्सबर्गपासून ६७ मैल अंतरावर वसले आहे. २०१० साली जॉन्सटाऊनची लोकसंख्या सुमरे २० हजार होती.
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10013.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,2 @@
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
तेजुर हे भारताच्या महाराष्ट्र राज्यातील पुणे जिल्ह्यातील जुन्नर तालुक्यातील एक गाव आहे.
|
| 2 |
+
येथील सर्वसाधारण हवामान उष्ण व कोरडे आहे. हवामानातील बदलानुसार प्रत्येक वर्षात मुख्यतः तीन ऋतू असतात.मार्च ते मे पर्यंत उन्हाळा, जून ते ऑक्टोबर पर्यंत पावसाळा आणि नोव्हेंबर ते फेब्रुवारी पर्यंत हिवाळा असतो. तालुक्यातील वार्षिक सरासरी पर्जन्यमान ७२० मिमी पर्यंत असते.
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10041.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1 @@
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
तेनाली विधानसभा मतदारसंघ - ९१ हा आंध्र प्रदेश राज्य विधानसभेच्या १७५ मतदारसंघांपैकी एक आहे. परिसीमन आदेश, १९५१ नुसार, हा मतदारसंघ १९५१ साली स्थापन केला गेला. तेनाली हा विधानसभा मतदारसंघ गुंटुर लोकसभा मतदारसंघात मोडतो.
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10056.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,3 @@
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
गुणक: 34°32′N 76°98′E / 34.533°N 77.633°E / 34.533; 77.633 गुणक: longitude minutes >= 60{{#coordinates:}}: अवैध रेखांश
|
| 2 |
+
|
| 3 |
+
तेमिसगाम हे भारताच्या लडाख केंद्रशासित प्रदेशातील लेह जिल्हातील खालसी तालुक्यातील एक गाव आहे.
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10063.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,5 @@
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
तेर हे धाराशिव जिल्ह्यातील एक पुरातत्त्वीय उत्खननस्थळ आहे. हे ठिकाण उस्मानाबादपासून ईशान्येला १८ किलोमीटर अंतरावर असून तेरणा नदीच्या दक्षिण काठावर वसलेले आहे. या नगराला प्राचीन काळी तगर या नावाने ओळखले जात होते.त्या पुर्वि सत्यपुरी हे नाव प्रचलित होते. तेर हे भारताच्या महाराष्ट्र राज्यातील उस्मानाबाद जिल्ह्यातील उस्मानाबाद तालुक्यातील एक गाव आहे.
|
| 2 |
+
येथील वातावरण साधारणपणे उष्ण व कोरडे असते. पावसाळा जून महिन्याच्या मध्यापासून सुरू होऊन सप्टेंबरच्या शेवटी संपतो.ऑक्टोबर ते नोव्हेंबर मध्यापर्यंत दमट वातावरण असते. नोव्हेंबर मध्य ते जानेवारी हिवाळा असतो. फेब्रुवारी ते मार्च वातावरण कोरडे असते. एप्रिल ते जून उन्हाळा असतो.सरासरी वार्षिक पर्जन्यमान ७५० मिलीमीटर असते.
|
| 3 |
+
'पेरीप्लस ऑफ द एरिथ्रीयन सी' या इ.स. ५० ते इ.स. १३० या काळात एका ग्रीक प्रवाशाने लिहिलेल्या ग्रंथाच्या ५१व्या प्रकरणामध्ये तेरचा तगर असा उल्लेख आलेला आहे. या प्राचीन महत्त्वपूर्ण ग्रंथात हा ग्रीक प्रवासी म्हणतो-
|
| 4 |
+
दक्षिणापथ या प्रदेशातील व्यापारी स्थळांमध्ये दोन स्थळांना महत्त्व आहे. यातील पहिले बॅरिगाझा (गुजरातमधील भरूच-भडोच) पासून दक्षिणेस वीस दिवसांच्या प्रवासाने गाठता येणारे पैठण आणि दुसरे म्हणजे तगर. तगर हे फार मोठे शहर असून तेथे पैठणहून पूर्वेस दहा दिवस प्रवास केल्यानंतर पोहोचता येते. पैठणहून बॅरिगाझा येथे माळरानातून मार्ग काढीत दगड आणला जातो. याउलट तगर येथून साधे कापड, विविध प्रकारची मलमल आणि गोणपाट बॅरिगाझा येथे पाठविले जाते. त्याचप्रमाणे समुद्रकिनारपट्टीच्या प्रदेशातून तगरला येणारा निरनिराळा मालही तगरहून बॅरिगाझा येथे पाठविला जातो.[१]पेरिप्लसव्यतिरिक्त तेरचा प्राचीन उल्लेख प्टॉलेमीने इ.स.च्या दुसऱ्या शतकात लिहिलेल्या प्रवासवर्णनातही आढळतो. या प्रवासवर्णनात त्याने तगर ही नगरी समुद्रकिनाऱ्यापासून आत असून अरियके प्रदेशात आहे असे सांगितले आहे. [२]
|
| 5 |
+
इ.स. ६१२ या काळातील पश्चिमी चालुक्यांच्या एका अभिलेखात ज्या ज्येष्ठशर्मन याला दान दिले तो तगरनिवासी होता असा उल्लेख आहे. अकोला जिल्ह्यात मिळालेल्या राष्ट्रकूट नृपती नन्नराज याच्या इ.स. ६९३च्या सांगळूद ताम्रपटात उम्बरिकाग्राम आणि वटपूरग्राम या दोन खेड्यातील जमीन तगरनिवासी हरगण द्विवेदी याला दान दिल्याचा उल्लेख आहे.
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10087.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1 @@
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
तेरा इ पैचाओ (पोर्तुगीज: Terra e Paixão) ही एक ब्राझिलियन दूरचित्रवाणी मालिका आहे. ही मालिका टीव्ही ग्लोबोवर ८ मे २०२३ रोजी पहिल्यांदा प्रदर्शित झाली. या मालिकेचे २२१ भाग सलग प्रसारित झाले.
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10115.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1 @@
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
तेलबिया वाफवून व मग त्या चरकात पिळून त्यातून निघणाऱ्या द्रव पदार्थास तेल अथवा खाद्यतेल असे म्हणतात. पृथ्वीच्या पोटातून निघणाऱ्या तेलास खनिज तेल असे म्हणतात.
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10127.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,69 @@
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
तेलंगण (लेखनभेद: तेलंगणा किंवा तेलंगाणा) भारताचे २९वे राज्य आहे. जून २, इ.स. २०१४ रोजी स्थापन झालेले हे राज्य पूर्वी आंध्र प्रदेशचा भाग होते. या प्रदेशाची प्राचीन नावे तेलिंगाण, तेलिंगा, त्रिलिंग अशी होती.
|
| 2 |
+
तेलंगण भौगोलिक दृष्ट्या मराठवाडा, विदर्भ आणि उत्तर कर्नाटक यांच्या सीमांलगत आहे. तांदूळ हे मुख्य पीक असलेला हा प्रदेश गोदावरी खोऱ्यात असून हा भाग ऐतिहासिक काळात सातवाहन (इ.स.पू. २२१ - इ.स. २१८), गोवळकोंड्याची कुतुबशाही (इ.स. १५२० - इ.स. १६८७) आणि हैदराबादचा निजाम (इ.स. १७२४ - इ.स. १९४८) यांच्या सत्तेखाली राहिला. इ.स.च्या विसाव्या व एकविसाव्या शतकात साम्यवाद आणि नक्षल विचारप्रणालींचा लक्षणीय प्रभाव या प्रदेशावर आढळतो. हैदराबाद मुक्तिसंग्रामानंतर इ.स. १९४८ साली हा भाग स्वतंत्र भारतीय संघराज्यात विलीन झाला. हैदराबाद ही तेलंगणाची राजधानी व सर्वात मोठे शहर आहे तर तेलगू ही प्रमुख भाषा आहे.
|
| 3 |
+
तेलंगण हे वेगळे राज्य घोषित करण्यात यावे, यासाठी अनेक वर्षे तेलंगण राष्ट्रीय समितीने लढा चालवला होता. डिसेंबर ९, २००९ रोजी या प्रयत्नांना यश येऊन भारत सरकारने तेलंगण हे वेगळे राज्य होणार असल्याचे जाहीर केले. तेलंगण राज्याच्या स्थापनेसाठीचे विधेयक १५ व्या लोकसभेत १८ फेब्रुवारी २०१४ला आणि राज्यसभा या वरिष्ठ सभागृहात २० फेब्रुवारी २०१४ला संमत करण्यात आले आणि राष्ट्रपतींच्या मान्यतेसाठी पाठविण्यात आले.
|
| 4 |
+
तेलंगण राज्यात पुढील जिल्हे आहेत. : आदिलाबाद, करीमनगर, कामारेड्डी, कुमारम् भीम आसिफाबाद, खम्माम, जगतियाळ, जयशंकर भूपालपल्ली, जानगाव, जोगुलांबा गडवाल, नागरकुर्नूल, नारायणपेट, नालगोंडा, निजामाबाद, निर्मल, पेद्दापल्ली, भद्राद्रि कोठागुंडम, मंचरियाल, महबूबनगर, महबूबाबाद, मेडक जिल्हा|मेडक]], मेडचल-मलकजगिरी, मुळुगू, यादाद्री भुवनगिरी[, रंगारेड्डी, राजन्ना सिरकिला, वनपर्थी, वरंगळ ग्रामीण, वरंगळ शहर, विकाराबाद, संगारेड्डी, सिद्दीपेट, सूर्यापेट, हैदराबाद.
|
| 5 |
+
]]||निजामाबाद|| style="text-align:right;" |3,11,152
|
| 6 |
+
हैदराबाद शहर हे तेलंगणमधील सर्वात मोठे वाहतूक केंद्र आहे. हैदराबाद आंतरराष्ट्रीय विमानतळ हा भारतामधील एक प्रमुख विमानतळ असून येथून देशातील सर्व मोठ्या शहरांसाठी तसेच अनेक आंतरराष्ट्रीय स्थानांसाठी थेट प्रवासी सेवा उपलब्ध आहे. भारतीय रेल्वेच्या दक्षिण मध्य रेल्वे ���्षेत्राचे मुख्यालय सिकंदराबाद रेल्वे स्थानक येथे असून हैदराबाद रेल्वे स्थानक, वरंगळ रेल्वे स्थानक इत्यादी मोठी स्थानके देशातील इतर भागांसोबत जोडली गेली आहेत. तेलंगण एक्सपेस, सिकंदराबाद राजधानी एक्सप्रेस इत्यादी जलद गाड्या हैदराबादला दिल्लीसोबत जोडतात. चारमिनार एक्सप्रेस, गोदावरी एक्सप्रेस, गोळकोंडा एक्सप्रेस इत्यादी येथील प्रसिद्ध गाड्या आहेत.
|
| 7 |
+
•
|
| 8 |
+
करीमनगर
|
| 9 |
+
•
|
| 10 |
+
कामारेड्डी
|
| 11 |
+
•
|
| 12 |
+
कुमुरम भीम आसिफाबाद
|
| 13 |
+
•
|
| 14 |
+
खम्मम
|
| 15 |
+
•
|
| 16 |
+
जगित्याल
|
| 17 |
+
•
|
| 18 |
+
जनगांव
|
| 19 |
+
•
|
| 20 |
+
जयशंकर भूपालपल्ली
|
| 21 |
+
•
|
| 22 |
+
जोगुलांबा गदवाल
|
| 23 |
+
•
|
| 24 |
+
नलगोंडा
|
| 25 |
+
•
|
| 26 |
+
नागरकर्नूल
|
| 27 |
+
•
|
| 28 |
+
नारायणपेट
|
| 29 |
+
•
|
| 30 |
+
निजामाबाद
|
| 31 |
+
•
|
| 32 |
+
निर्मल
|
| 33 |
+
•
|
| 34 |
+
पेद्दपल्ली
|
| 35 |
+
•
|
| 36 |
+
भद्राद्री कोठगुडम
|
| 37 |
+
•
|
| 38 |
+
मंचिर्याल
|
| 39 |
+
•
|
| 40 |
+
महबूबनगर
|
| 41 |
+
•
|
| 42 |
+
महबूबाबाद
|
| 43 |
+
•
|
| 44 |
+
मुलुगु
|
| 45 |
+
•
|
| 46 |
+
मेडचल-मलकाजगिरी
|
| 47 |
+
•
|
| 48 |
+
मेदक
|
| 49 |
+
•
|
| 50 |
+
यदाद्रि भुवनगिरी
|
| 51 |
+
•
|
| 52 |
+
रंगारेड्डी
|
| 53 |
+
•
|
| 54 |
+
राजन्ना सिरिसिल्ला
|
| 55 |
+
•
|
| 56 |
+
वनपर्ति
|
| 57 |
+
•
|
| 58 |
+
वरंगल
|
| 59 |
+
•
|
| 60 |
+
विकाराबाद
|
| 61 |
+
•
|
| 62 |
+
संगारेड्डी
|
| 63 |
+
•
|
| 64 |
+
सिद्दिपेट
|
| 65 |
+
•
|
| 66 |
+
सूर्यापेट
|
| 67 |
+
•
|
| 68 |
+
हनमकोंडा
|
| 69 |
+
•
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10131.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,68 @@
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
भारत देशाच्या तेलंगणा राज्यामध्ये एकूण ३३ जिल्हे आहेत. हे सर्व जिल्हे २०१४ सालापूर्वी आंध्र प्रदेश राज्याचा भाग होते.
|
| 2 |
+
हैदराबाद राज्याच्या तेलंगणा प्रदेशात १९४८ मध्ये ८ जिल्ह्यांचा समावेश होता, जेव्हा तो भारताच्या अधिराज्यात सामील झाला होता; ते हैदराबाद, महबूबनगर, मेदक, नलगोंडा, निजामाबाद, आदिलाबाद, करीमनगर आणि वरंगल जिल्हे आहेत.[१] १ ऑक्टोबर १९५३ रोजी वारंगल जिल्ह्याचे विभाजन करून खम्मम जिल्ह्याची निर्मिती करण्यात आली.[२] १ नोव्हेंबर १९५६ रोजी हैदराबाद राज्यातील तेलंगणा प्रदेश आणि आंध्राचे विलीनीकरण करून आंध्र प्रदेश राज्याची स्थापना झाली. प्रशासनाच्या सोयीसाठी भद्राचलम विभाग आणि अस्वराओपेट तालुका भाग गोदावरी जिल्ह्यांमधून खम्मम जिल्ह्यात विलीन करण्यात आले. हैदराबाद जिल्ह्याचे १५ ऑगस्ट १९७८ रोजी हैदराबाद शहरी जिल्हा आणि हैदराबाद ग्रामीण जिल्हा असे विभाजन करण्यात आले. हैदराबाद शहरी जिल्हा चारमिनार, गोलकोंडा, मुशिराबाद आणि सिकंदराबाद तालुक्यांद्वारे बनविला गेला आहे ज्यात फक्त हैदराबाद महानगरपालिकेचा क्षेत्र, सिकंदराबाद छावणी आणि उस्मानिया विद्यापीठ यांचा समावेश आहे. हैदराबाद ग्रामीण जिल्ह्याचे नंतर रंगारेड्डी जिल्हा असे नामकरण करण्यात आले. [३]
|
| 3 |
+
२०१४ मध्ये आंध्र प्रदेशातील १० जिल्हे वेगळे करून तेलंगणा हे नवीन राज्य तयार करण्यात आले. भद्राचलम विभागातील सात मंडळे पूर्व गोदावरी जिल्ह्याला परत देण्यात आली. ११ ऑक्टोबर २०१६ रोजी २१ नवीन जिल्हे निर्माण करण्यात आले, ज्यामुळे तेलंगणात ३१ जिल्हे बनले. १७ फेब्रुवारी २०१९ रोजी मुलुगु आणि नारायणपेट हे दोन नवीन जिल्हे निर्माण करण्यात आले आणि एकूण जिल्ह्यांची संख्या ३३ झाली.
|
| 4 |
+
तेलंगणामधील जिल्ह्याची यादी.
|
| 5 |
+
|
| 6 |
+
•
|
| 7 |
+
करीमनगर
|
| 8 |
+
•
|
| 9 |
+
कामारेड्डी
|
| 10 |
+
•
|
| 11 |
+
कुमुरम भीम आसिफाबाद
|
| 12 |
+
•
|
| 13 |
+
खम्मम
|
| 14 |
+
•
|
| 15 |
+
जगित्याल
|
| 16 |
+
•
|
| 17 |
+
जनगांव
|
| 18 |
+
•
|
| 19 |
+
जयशंकर भूपालपल्ली
|
| 20 |
+
•
|
| 21 |
+
जोगुलांबा गदवाल
|
| 22 |
+
•
|
| 23 |
+
नलगोंडा
|
| 24 |
+
•
|
| 25 |
+
नागरकर्नूल
|
| 26 |
+
•
|
| 27 |
+
नारायणपेट
|
| 28 |
+
•
|
| 29 |
+
निजामाबाद
|
| 30 |
+
•
|
| 31 |
+
निर्मल
|
| 32 |
+
•
|
| 33 |
+
पेद्दपल्ली
|
| 34 |
+
•
|
| 35 |
+
भद्राद्री कोठगुडम
|
| 36 |
+
•
|
| 37 |
+
मंचिर्याल
|
| 38 |
+
•
|
| 39 |
+
महबूबनगर
|
| 40 |
+
•
|
| 41 |
+
महबूबाबाद
|
| 42 |
+
•
|
| 43 |
+
मुलुगु
|
| 44 |
+
•
|
| 45 |
+
मेडचल-मलकाजगिरी
|
| 46 |
+
•
|
| 47 |
+
मेदक
|
| 48 |
+
•
|
| 49 |
+
यदाद्रि भुवनगिरी
|
| 50 |
+
•
|
| 51 |
+
रंगारेड्डी
|
| 52 |
+
•
|
| 53 |
+
राजन्ना सिरिसिल्ला
|
| 54 |
+
•
|
| 55 |
+
वनपर्ति
|
| 56 |
+
•
|
| 57 |
+
वरंगल
|
| 58 |
+
•
|
| 59 |
+
विकाराबाद
|
| 60 |
+
•
|
| 61 |
+
संगारेड्डी
|
| 62 |
+
•
|
| 63 |
+
सिद्दिपेट
|
| 64 |
+
•
|
| 65 |
+
सूर्य���पेट
|
| 66 |
+
•
|
| 67 |
+
हनमकोंडा
|
| 68 |
+
•
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10137.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,3 @@
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
तेलंगणा राज्य मार्ग परिवहन महामंडळ (इंग्रजी तेलंगणा स्टेट रोड ट्रान्सपोर्ट कॉर्पोरेशन - संक्षिप्त TSRTC) ही एक सरकारी मालकीची कॉर्पोरेशन आहे जी भारताच्या तेलंगणा राज्यात आणि तेथून बस वाहतूक सेवा चालवते. २०१४ मध्ये आंध्र प्रदेश राज्य मार्ग परिवहन महामंडळाचे विभाजन करून त्याची स्थापना करण्यात आली. आंध्र प्रदेश, तामिळनाडू, कर्नाटक, महाराष्ट्र, गोवा, ओडिशा आणि छत्तीसगडमधील इतर अनेक भारतीय मेट्रो शहरे देखील TSRTCच्या सेवांशी जोडलेली आहेत.
|
| 2 |
+
तेलंगणा सरकारने २७.०४.२०१६ रोजी, रस्ता परिवहन महामंडळ कायदा, १९५० अंतर्गत तेलंगणा राज्य मार्ग परिवहन महामंडळ (TSRTC)ची स्थापना केली.
|
| 3 |
+
विभाजनानंतर, TSRTC ने ९७ डेपोमधून तेलंगणातील विविध गंतव्यस्थानांसाठी आणि आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र राज्य, कर्नाटक राज्य, तामिळनाडू आणि छत्तीसगड या शेजारील राज्यांमध्ये दररोज सुमारे ९० लाख प्रवाशांची वाहतूक करणाऱ्या बसेस चालवण्यास सुरुवात केली. तेलंगणा राज्य मार्ग परिवहन महामंडळ आपली सेवा, ६८% बस ग्रामीण परिवहन आणि ३२% बस शहरी वाहतुकीसाठी पुरवत आहेत. आता, तेलंगणा राज्य मार्ग परिवहन महामंडळाकडे ९,७३४ बसेस आणि ११ प्रदेशांद्वारे प्रशासित ९६ डेपोमधील ४८,३०४ कर्मचारी आहेत. राज्यात ३६४ बसस्थानके आहेत.[१]
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10139.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,5 @@
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
भारत राष्ट्र समिती पूर्वी तेलंगणा राष्ट्र समिती (तेलुगू: తెలంగాణ రాష్ట్ర సమితి)(abbr. TRS) म्हणून ओळखली जात होती, हा भारत देशाच्या तेलंगणा राज्यामधील एक प्रादेशिक राजकीय पक्ष व तेलंगणा विधानसभेतील सत्ताधारी पक्ष आहे. तेलंगणा हे आंध्र प्रदेशमधून फोडून वेगळे राज्य बनवण्यात यावे ही भूमिका घेऊन तेलुगू देशम पक्षाचे नेते के. चंद्रशेखर राव ह्यांनी २००१ साली तेलुगू देशममधून बाहेर पडून तेलंगणा राष्ट्र समितीची स्थापना केली.
|
| 2 |
+
२०१४ साली भारत सरकारने तेलंगणाला स्वतंत्र राज्य बनवण्याचा निर्णय घेतला व २ जून २०१४ रोजी नवे तेलंगणा राज्य अस्तित्वात आले. २०१४ लोकसभा निवडणुकांसोबतच घेण्यात आलेल्या विधानसभा निवडणुकीत तेलंगणा राष्ट्र समितीने ११९ पैकी ९० जागा जिंकून बहुमत मिळवले. के. चंद्रशेखर राव हे २ जून २०१४ रोजी तेलंगणाचे पहिले मुख्यमंत्री बनले.
|
| 3 |
+
५ ऑक्टोबर २०२२ रोजी पक्षाचे नाव तेलंगणा राष्ट्र समितीवरून बदलून भारत राष्ट्र समिती असे करण्यात आले.
|
| 4 |
+
27 एप्रिल 2001 रोजी चंद्रशेखर राव यांनी तेलुगू देशम पक्षाच्या उपसभापतीपदाचा राजीनामा दिला.[१४] अविभाजित आंध्र प्रदेश राज्यात तेलंगणातील लोकांशी भेदभाव केला जात असल्याचे मत त्यांनी व्यक्त केले. परिणामी, राव यांनी असा युक्तिवाद केला की केवळ स्वतंत्र तेलंगणा राज्याची निर्मिती केल्याने लोकांची समस्या दूर होईल.[१५] त्यानुसार, केसीआर यांनी तेलंगणाला राज्याचा दर्जा मिळवून देण्याच्या उद्देशाने एप्रिल 2001 मध्ये जल द्रुष्यम, हैदराबाद येथे तेलंगणा राष्ट्र समिती (TRS) पक्षाची स्थापना केली.[१४] पक्षाच्या स्थापनेच्या साठ दिवसांत पक्षाने सुरुवातीला मंडल परिषद प्रादेशिक मतदारसंघ (MPTC) पैकी एक तृतीयांश आणि सिद्धीपेटमधील एक चतुर्थांश जिल्हा परिषद प्रादेशिक मतदारसंघ (ZPTC) जिंकले.[१६]
|
| 5 |
+
२००४ च्या आंध्र प्रदेश विधानसभेच्या निवडणुकीनंतर, पक्षाने २६ राज्य विधानसभेच्या जागा जिंकल्या आणि 5 संसदेच्या जागा जिंकल्या. टीआरएसने भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेससोबत युती केली आणि संयुक्त पुरोगामी आघाडीत सामील झाले. सप्टेंबर 2006 मध्ये पक्षाने तेलंगण निर्मितीचे निवडणूक आश्वासन पूर्ण केल्याच्या कारणास्तव केंद्र सरकारचा पाठिंबा काढून घेतला.[१७] १३ सप्टेंबर २००६ रोजी, राव यांनी त्यांच्या करीमनगर लोकसभा मतदारसंघात काँग्रे��च्या एका आमदाराने चिथावणी दिल्याचा दावा करून पोटनिवडणूक सुरू केली. त्यानंतर झालेल्या पोटनिवडणुकीत त्यांनी जोरदार बहुमताने विजय मिळवला. केंद्र सरकारने आपल्या ताज्या अर्थसंकल्पीय अधिवेशनात वेगळ्या राज्याची मागणी पूर्ण न केल्याने सर्व TRS आमदार आणि खासदारांनी एप्रिल २००८ मध्ये आपल्या पदांचा राजीनामा दिला. पोटनिवडणूक २९ मे २००८ रोजी झाली. पोटनिवडणुकीत, २००८ मध्ये, TRS ने १६ पैकी ७ विधानसभा क्षेत्र जिंकले आणि ४ लोकसभा मतदारसंघांपैकी २ जागा जिंकल्या, पक्षाचा एक महत्त्वपूर्ण पराभव. पोटनिवडणुकीत झालेल्या पराभवानंतर टीआरएस प्रमुख के. चंद्रशेखर राव यांनी राजीनामा देण्याची ऑफर दिली, परंतु त्याऐवजी ते पदावर राहिले.
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10140.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1 @@
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
तेलंगणा विधान परिषद (किंवा तेलंगणा शासन मंडली) हे भारताच्या तेलंगणा राज्याच्या तेलंगणा विधिमंडळाचे वरचे सभागृह आहे. तेलंगणा विधानसभा हे कनिष्ठ सभागृह आहे. हे हैदराबाद येथे वसले आहे आणि त्याचे ४० सदस्य आहेत. आंध्र प्रदेश राज्याचे विभाजन झाल्यानंतर २ जून २०१४ पासून विधान परिषद अस्तित्वात आहे.
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10149.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1 @@
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
तेलंगणाचे प्रतीक हे दक्षिण भारतातील तेलंगणाचे राज्य चिन्ह आहे. बाहूंमध्ये मध्यभागी काकतिया कला थोरानम आहे आणि त्याच्या आत चारमिनार आहे आणि हिरवी किनार आहे.[१] [२]
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10154.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,2 @@
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
तेलंगवाडी हे भारतातील महाराष्ट्र राज्यातील सोलापूर जिल्ह्यातील मोहोळ तालुक्यातील एक गाव आहे.
|
| 2 |
+
येथे मध्यम आणि चांगले हवामान असते. हे कोरड्या हवामान श्रेणीत येते. उन्हाळा, पावसाळा आणि हिवाळा हे ऋतू असतात. मार्च ते मे हे महिने उन्हाळ्याच्या काळात येतात आणि या काळात कमाल तापमान ३० ते ४० अंश सेल्सियस पर्यंत असते. एप्रिल आणि मे महिन्याचा कालावधी सर्वात उष्ण असतो. येथे पाऊस अल्प आणि अनिश्चित प्रमाणात पडतो. जूनच्या दुसऱ्या पंधरवड्यापासून ते सप्टेंबर अखेरपर्यंत मान्सूनचा कालावधी असतो. सरासरी ५४५ मि.मी. पाऊस पडतो. येथे हिवाळा नोव्हेंबरमध्ये सुरू होतो आणि फेब्रुवारी महिन्यात तापमान कधीकधी १० अंश सेल्सियसपेक्षा कमी होते. हिवाळ्याच्या हंगामातील किमान तापमान जानेवारीत सुमारे ९ अंश सेल्सियस असते.
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10179.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,2 @@
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
तेलवडे हे भारतातील महाराष्ट्र राज्यातील मध्य कोकणातील रायगड जिल्ह्यातील मुरूड तालुक्यातील एक गाव आहे.
|
| 2 |
+
पावसाळ्यात येथे भरपूर प्रमाणात पाऊस पडतो आणि हवामान समशीतोष्ण राहते. हिवाळ्यात येथील हवामान थंड असते व अनेकदा सकाळी धुके पडते.उन्हाळ्यात हवामान उष्ण असते.
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10186.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,34 @@
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
भारत
|
| 2 |
+
तेलुगू ही सुमारे ७.४ कोटी भाषकसंख्या असलेली व प्रामुख्याने भारतीय उपखंडात बोलली जाणारी, द्राविड भाषाकुळातील भाषा आहे. भारतातील आंध्र प्रदेश व तेलंगणा या राज्यांची ही राजभाषा असून भारतीय प्रजासत्ताकाच्या २२ अधिकृत अनुसूचित भाषांमधील एक भाषा आहे.
|
| 3 |
+
लोकसंख्येनुसार तेलुगू ही भारतातील बोलली जाणारी (हिंदी, मराठीच्या खालोखाल) तिसरी भाषा आहे. बंगालच्या विभाजनाआधी तेलुगू भाषेचा तिसरा क्रमांक होता . तेलुगू भाषेला भारत सरकारने अभिजात भाषा म्हणून मान्यता दिली आहे. अशी मान्यता मिळविणाऱ्या ओरिया, कन्नड, तमिळ, मल्याळम व संस्कृत या आणखी पाच भाषा आहेत.
|
| 4 |
+
तेलुगू भाषा भारतासह मॉरिशस , अमेरिका ,पाकिस्तान, सिंगापूर, जर्मनी, युनायटेड किंग्डम, ऑस्ट्रेलिया व न्यू झीलंड या देशांत बोलली जाते. भारतात ती मुख्यत्वे आंध्र प्रदेश राज्यात बोलली जाते. त्याचबरोबर केरळ, गोवा, कर्नाटक, गुजरात, मध्य प्रदेश, तमिळनाडू व छत्तीसगढ या राज्यांत, तसेच दमण आणि दीव, दादरा आणि नगर हवेली या केंद्रशासित प्रदेशांतील काही भागांत बोलली जाते.
|
| 5 |
+
१. अज्ञात काळ - इ.स. ५००ते १०००
|
| 6 |
+
२. पुराण काळ - इ.स. १००० ते १४००
|
| 7 |
+
३. काव्यप्रबंध काळ - इ.स. १४०० ते १६५०
|
| 8 |
+
४. ऱ्हास काळ - इ.स. १६५१ ते १८५०
|
| 9 |
+
या कालखंडात विजयनगरचे साम्राज्य मोडले. आंध्र प्रदेश छोट्या छोट्या राज्यांत विभागला गेला. साहित्य कृत्रिम आणि तकलुपी बनले. कवींना राजाश्रय नाकारला जाऊ लागला. तेलुगू भाषेत गद्यलेखन सुरू झाले. ऱ्हासाच्या काळातच वेंकट कृष्णप्पा नावाच्या पहिल्या गद्यकाराने ’जेमिनी भारत’ या नावाचा ग्रंथ लिहिला. असे असले तरी याच काळात त्यागराज आणि क्षेत्रय्या हे दोन कवीही झाले.
|
| 10 |
+
५. आधुनिक काळ - इ.स. १८५०पासून पुढे
|
| 11 |
+
१. अन्नमाचार्य (इसवी सनाचे १५वे शतक) : अन्नम्माचार्य या कवीने तेलुगूच्या बोलीभाषेत तिरुपतीच्या लीलावर्णनाची ३२००० पदे रचली असे सांगतात. त्या पदांपैकी १३०० पदे उपलब्ध आहेत.
|
| 12 |
+
२. अलसानि पेद्दन्ना (काव्यप्रबंध काळाचा उत्तरार्ध) : या कवीने 'मनुचरित्र' नावाचे काव्य रचले. ती कथा त्याने मार्कंडेय पुराणातून घेतली होती. सर्व दृष्टीने अप्रतिम वठलेल्या या काव्याने राजा कृष्णदेवराय इतका प्रभावित झाला की त्याने पेद्दन्नाला आंध्रकवितापितामह अशी पदवी प्रदान दिली.
|
| 13 |
+
३. तिक्कन्न सोमय्याजी (इ.स. १२२० ते १२९०) : नन्नय्याच्��ा महाभारताचे अपुरे काम १३व्या शतकातल्या तिक्कन्न सोमयाजी या महाकवीने पुढे नेले. तिक्कन्न हा गौतम गोत्री आपस्तंब ब्राह्मण होता. तो नेल्लोर जवळच्या रंगनाथस्वामींच्या मंदिराजवळ राहात असे. नेल्लोरचा राजा मनुमसिद्धीने तिक्कन्नाची विद्वत्ता पाहून त्याला आपल्या पदरी आश्रय दिला. तिक्कन्न राजाचा मंत्री, सेनापती व राजकवी झाला. या तिन्ही कामगिऱ्या त्याने यशस्वीरीत्या पार पाडल्या. राज्यावर आक्रमण झाले असता तिक्कन्नाने वरंगलच्या गणपतिदेव राजाच्या मदतीने आक्रमण परतून लावले.
|
| 14 |
+
तिक्कन्नाने सोमयाग केला म्हणून लोक त्याला तिक्कन्न सोमय्याजी म्हणू लागले. गणपती काकतीय या विद्वानाने आंध्रात एकदा एक वादसभा भरवली होती. तिक्कन्नाने त्या सभेत भाग घेऊन जैन आणि बौद्ध पंडितांचा पराभव करून वैदिक धर्माचे श्रेष्ठत्व सिद्ध केले.
|
| 15 |
+
तिक्कन्नाचे तेलुगू आणि संस्कृत या दोनही भाषांवर प्रभुत्व होते. सोमयाग केल्यावर तिक्कन्नाने, नन्नय्याने अपुरे ठेवलेल्या महाभारताच्या तेलुगू अनुवादाचे काम सुरू केले. नान्नय्या ज्याचा अनुवाद करता करता मरण पावला, ते वनपर्व हे अशुभ पर्व आहे या समजुतीने त्याने ते तसेच अर्धवट ठेवून विराट पर्वापासून ते शेवटच्या पर्वापर्यंतचे भाषांतर पूर्ण केले. तिक्कन्नाचा हा पराक्रम पाहून मनुमसिद्धी राजाने त्याला कविब्रह्म अशी पदवी दिली.
|
| 16 |
+
४. त्यागराज (इ.स. १७६७ ते १८४७)
|
| 17 |
+
५. नान्नय्यभट्ट (पुराणकाळ)
|
| 18 |
+
पुराणकाळाच्या प्रारंभी चालुक्य नरेश राजराज हा आंध्र प्रदेशावर राज्य करीत होता. संस्कृत आणि तेलुगू भाषेत पंडित असलेला नान्नय्यभट्ट, हा त्या राजराज राजाचा कुलगुरू होता. हा राजा जेव्हा गादीवर आला तेव्हा प्रजाजन वैदिक धर्मातील श्रेष्ठ तत्त्वे विसरून विकृत धर्मकल्पनांच्या आहारी गेले होते. या गोष्टीने चिताक्रांत झालेल्या राजाने नान्नय्यभट्टाला सल्ला विचारला. नान्नय्याने सुचवले की महाभारताचे तेलुगू भाषांतर करावे, म्हणजे ते वाचून लोकांना खऱ्या धर्माचे ज्ञान होईल. राजाने नान्नय्यानेच भाषांतर करावे अशी इच्छा व्यक्त केली. नान्नय्याला जाणवले की त्या काळची तेलुगू भाषेसाठी सुबद्ध व्याकरण नसल्याने महाभारताचा अनुवाद करण्यास असमर्थ आहे. तेव्हा नान्नय्याने ’आंध्रशब्दचिंतामणि’ आणि ’लक्षणसार’ हे दोन ग्रंथ निर्माण केले, आणि त्यांत तेल��गूमधील सगळी शब्दसंपदा एकत्र केली. नंतर नान्नय्यभट्ट महाभारताच्या अनुवादाच्या कामाला लागला. त्याने महाभारतातील आदिपर्व आणि सभापर्व याचे भाषांतर पूर्ण केले, मात्र तिसरे वनपर्व अर्धे झाले असतानाच नान्नय्याला मृत्यूने गाठले. महाभारत अर्धवट राहिले खरे, पण झालेला अनुवाद इतका सरस होता की नान्नय्याला तेलुगूचा आदिकवी अशी उपाधी प्राप्त झाली. अर्धवट राहिलेले भाषांतर पुढे तिक्कन्न सोमय्याजी आणि यर्रापगड यांनी पुरे केले.
|
| 19 |
+
६. पालकुरती सोमनाथ (इसवी सनाचे १४वे शतक)
|
| 20 |
+
७. पिंगळी सूरन्न (काव्यप्रबंध काळाचा उत्तरार्ध)
|
| 21 |
+
८. बम्मेर पोतन्न (इ.स. १४०५ ते १४७०)
|
| 22 |
+
९. भद्रभूती
|
| 23 |
+
१०. भास्कर कवी (इसवी सनाचे १४वे शतक) : भास्कर कवी आणि त्यांचे अनेक शिष्य यांनी १४व्या शतकात चंपू पद्धतीने रामायण कथा पूर्ण केली. या रामायणाला 'भास्कर रामायण' म्हणतात. आंध्रात गावोगावच्या मंदिरांतून आणि घरोघरीही हे रामायण वाचले जाते.
|
| 24 |
+
११. यर्राप्रगड (इसवी सनाचे १४वे शतक)
|
| 25 |
+
नान्नय्यभट्टाचे महाभारताचा तेलुगू अनुवाद करायचे अपुरे काम तिक्कन्न सोमय्याजीने १३व्या शतकात पुरे करत आणले. पण जे लिहीत असताना नान्नय्याचा मृत्यू ओढवला ते वनपर्व अशुभ असावे, अशा समजुतीने तिक्कन्न सोमय्याजीने वनपर्व अर्धवटच ठेवले. त्या पर्वातील २९०० पैकी १६०० श्लोकांचे भाषांतर झाले नव्हते. त्यासाठी १४ वे शतक उजाडावे लागले. त्या शतकात निपजलेल्या व अन्नवेम्मा रेड्डी या राजाच्या आश्रयाला असलेल्या यर्राप्रगड कवीने वनपर्वाचे काम पूर्ण केले. मात्र श्लोकरचना न करता त्याने वनपर्वाचा अनुवाद प्रबंधरचनेत (निर्मळ प्रासादिक अशा गद्यात) केला. तिक्कन्ना आणि यर्राप्रगड यांची भाषाशैली इतकी एकसारखी आहे.की, दोघांच्या रूपांतरातला फरक सांगणे कठीण आहे. यर्राप्रगडला लोक प्रबंधपरमेश्वर म्हणू लागले, आणि नन्नय्य, तिक्कन्न आणि यर्राप्रगड यांना कवित्रय असे नाव पडले.
|
| 26 |
+
१२. वेमन्न (इसवी सनाचे १५वे शतक)
|
| 27 |
+
१३. श्रीनाथ (इ.स. १३८० ते १४६०)
|
| 28 |
+
काव्यप्रबंध काळाचा मुकुटमणी. लहानपणीच श्रीनाथाने तेलुगू व संस्कृत भाषांवर प्रभुत्व मिळवले आणि तो थोडीफार कविताही करू लागला होता. तरुणपणी याने श्रीहर्ष कवीच्या नैषधीय या संस्कृत महाकाव्याचा तेलुगू अनुवाद केला. त्या अनुवादित ग्रंथाला ’शृंगार नैषध’ असे म्हणतात. तेलुगूतल्या पाच महाकाव्यातले हे एक आहे. या काव्याने श्रीनाथ कवीला खूप प्रसिद्धी मिळाली आणि कोंडविच्डू या राजाकडे आश्रयही. राजाने त्याची शिक्षणाधिकारी म्हणून नेमणूक केली.
|
| 29 |
+
इ.स. १४२५ च्या सुमारास श्रीनाथने राजाश्रय सोडला आणि तो देशाटनाला निघाला. प्रवासातच त्याने ’हरविलाससमु’ नावाचे काव्य रचले. त्या काव्यात शिवलीलांचे मनोहर वर्णन केले आहे. पुढे श्रीनाथ विजयनगरला गेला. त्यावेळी तेथे कृष्णदेवराय गादीवर होता. त्याच्या दरबारात असताना श्रीनाथने, गौड डिंडिमभट्ट नावाच्या कवीला शास्त्रार्थात हरविले. या विजयामुळे श्रीनाथला कविसार्वभौम ही पदवी मिळाली. राजाने त्याचा सुवर्णाभिषेकही केला.
|
| 30 |
+
त्यानंतर श्रीनाथ तेलंगणातील राचकोंडाचा राजा सर्वज्ञसिंगम याच्या दरबारी आणि नंतर राजमहेंद्रवरम्च्या वीरभद्र रेड्डी या राजाच्या आश्रयाला गेला. तेथे त्याने ’भीमखंड’,’काशीखंड’ आणि ’पल्नाडि वीरचरित्रमु’ ही काव्ये रचली. या शेवटच्या काव्यात श्रीनाथाची प्रतिभा सर्वोच्चबिंदूला पोचली होती. या कवीचे बहुतेक आयुष्य मानमरातबात आणि वैभवविलासात गेले.
|
| 31 |
+
१४. क्षेत्रय्या (इसवी सनावे १७वे शतक)
|
| 32 |
+
हा कृष्णा जिल्ह्यातल्या मौव नावाच्या गावात एका ब्राह्मण कुटुंबात जन्मला. लहानपणी याचे नाव वरदय्या होते. त्याला तेलुगू व संस्कृत या भाषांचे उत्तम ज्ञान होते. कुचिपुडी या गावाला येऊन त्याने संगीत आणि नाट्य या विषयांचे अध्ययन केले, व नंतर भारतातील प्रमुख तीर्थक्षेत्रांना भेटी दिल्या. त्यामुळे लोक त्याला क्षेत्रय्या म्हणू लागले.
|
| 33 |
+
पुढे तंजावरच्या विजयराघव नावाच्या राजाकडे क्षेत्रय्याला आश्रय मिळाला. तेथे राहून त्याने खूप काव्यरचना केली. तो पराकाष्ठेचा श्रीकृष्णभक्त होता. त्याची भक्ती अर्जुनाप्रमाणे सख्ख्या भावासारखी आणि त्याचवेळी राधेप्रमाणे पत्नीभावाची होती. आयुष्यभर त्याने श्रीकृष्णाची मधुराभक्ती केली. श्रीकृष्णाने क्षेत्रय्याला एकदा दर्शन दिले, असे म्हणतात.
|
| 34 |
+
आजही आंध्र प्रदेशात आणि तमिळनाडूत क्षेत्रय्याचे काव्य लोकप्रिय आहे. त्याने हजारो पदे रचली असली तरी त्याला शिष्यपरंपरा न लाभल्याने त्याची बरीचशी काव्यरचना काळाच्या ओघात लुप्त झाली.
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10192.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,34 @@
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
भारत
|
| 2 |
+
तेलुगू ही सुमारे ७.४ कोटी भाषकसंख्या असलेली व प्रामुख्याने भारतीय उपखंडात बोलली जाणारी, द्राविड भाषाकुळातील भाषा आहे. भारतातील आंध्र प्रदेश व तेलंगणा या राज्यांची ही राजभाषा असून भारतीय प्रजासत्ताकाच्या २२ अधिकृत अनुसूचित भाषांमधील एक भाषा आहे.
|
| 3 |
+
लोकसंख्येनुसार तेलुगू ही भारतातील बोलली जाणारी (हिंदी, मराठीच्या खालोखाल) तिसरी भाषा आहे. बंगालच्या विभाजनाआधी तेलुगू भाषेचा तिसरा क्रमांक होता . तेलुगू भाषेला भारत सरकारने अभिजात भाषा म्हणून मान्यता दिली आहे. अशी मान्यता मिळविणाऱ्या ओरिया, कन्नड, तमिळ, मल्याळम व संस्कृत या आणखी पाच भाषा आहेत.
|
| 4 |
+
तेलुगू भाषा भारतासह मॉरिशस , अमेरिका ,पाकिस्तान, सिंगापूर, जर्मनी, युनायटेड किंग्डम, ऑस्ट्रेलिया व न्यू झीलंड या देशांत बोलली जाते. भारतात ती मुख्यत्वे आंध्र प्रदेश राज्यात बोलली जाते. त्याचबरोबर केरळ, गोवा, कर्नाटक, गुजरात, मध्य प्रदेश, तमिळनाडू व छत्तीसगढ या राज्यांत, तसेच दमण आणि दीव, दादरा आणि नगर हवेली या केंद्रशासित प्रदेशांतील काही भागांत बोलली जाते.
|
| 5 |
+
१. अज्ञात काळ - इ.स. ५००ते १०००
|
| 6 |
+
२. पुराण काळ - इ.स. १००० ते १४००
|
| 7 |
+
३. काव्यप्रबंध काळ - इ.स. १४०० ते १६५०
|
| 8 |
+
४. ऱ्हास काळ - इ.स. १६५१ ते १८५०
|
| 9 |
+
या कालखंडात विजयनगरचे साम्राज्य मोडले. आंध्र प्रदेश छोट्या छोट्या राज्यांत विभागला गेला. साहित्य कृत्रिम आणि तकलुपी बनले. कवींना राजाश्रय नाकारला जाऊ लागला. तेलुगू भाषेत गद्यलेखन सुरू झाले. ऱ्हासाच्या काळातच वेंकट कृष्णप्पा नावाच्या पहिल्या गद्यकाराने ’जेमिनी भारत’ या नावाचा ग्रंथ लिहिला. असे असले तरी याच काळात त्यागराज आणि क्षेत्रय्या हे दोन कवीही झाले.
|
| 10 |
+
५. आधुनिक काळ - इ.स. १८५०पासून पुढे
|
| 11 |
+
१. अन्नमाचार्य (इसवी सनाचे १५वे शतक) : अन्नम्माचार्य या कवीने तेलुगूच्या बोलीभाषेत तिरुपतीच्या लीलावर्णनाची ३२००० पदे रचली असे सांगतात. त्या पदांपैकी १३०० पदे उपलब्ध आहेत.
|
| 12 |
+
२. अलसानि पेद्दन्ना (काव्यप्रबंध काळाचा उत्तरार्ध) : या कवीने 'मनुचरित्र' नावाचे काव्य रचले. ती कथा त्याने मार्कंडेय पुराणातून घेतली होती. सर्व दृष्टीने अप्रतिम वठलेल्या या काव्याने राजा कृष्णदेवराय इतका प्रभावित झाला की त्याने पेद्दन्नाला आंध्रकवितापितामह अशी पदवी प्रदान दिली.
|
| 13 |
+
३. तिक्कन्न सोमय्याजी (इ.स. १२२० ते १२९०) : नन्नय्याच्��ा महाभारताचे अपुरे काम १३व्या शतकातल्या तिक्कन्न सोमयाजी या महाकवीने पुढे नेले. तिक्कन्न हा गौतम गोत्री आपस्तंब ब्राह्मण होता. तो नेल्लोर जवळच्या रंगनाथस्वामींच्या मंदिराजवळ राहात असे. नेल्लोरचा राजा मनुमसिद्धीने तिक्कन्नाची विद्वत्ता पाहून त्याला आपल्या पदरी आश्रय दिला. तिक्कन्न राजाचा मंत्री, सेनापती व राजकवी झाला. या तिन्ही कामगिऱ्या त्याने यशस्वीरीत्या पार पाडल्या. राज्यावर आक्रमण झाले असता तिक्कन्नाने वरंगलच्या गणपतिदेव राजाच्या मदतीने आक्रमण परतून लावले.
|
| 14 |
+
तिक्कन्नाने सोमयाग केला म्हणून लोक त्याला तिक्कन्न सोमय्याजी म्हणू लागले. गणपती काकतीय या विद्वानाने आंध्रात एकदा एक वादसभा भरवली होती. तिक्कन्नाने त्या सभेत भाग घेऊन जैन आणि बौद्ध पंडितांचा पराभव करून वैदिक धर्माचे श्रेष्ठत्व सिद्ध केले.
|
| 15 |
+
तिक्कन्नाचे तेलुगू आणि संस्कृत या दोनही भाषांवर प्रभुत्व होते. सोमयाग केल्यावर तिक्कन्नाने, नन्नय्याने अपुरे ठेवलेल्या महाभारताच्या तेलुगू अनुवादाचे काम सुरू केले. नान्नय्या ज्याचा अनुवाद करता करता मरण पावला, ते वनपर्व हे अशुभ पर्व आहे या समजुतीने त्याने ते तसेच अर्धवट ठेवून विराट पर्वापासून ते शेवटच्या पर्वापर्यंतचे भाषांतर पूर्ण केले. तिक्कन्नाचा हा पराक्रम पाहून मनुमसिद्धी राजाने त्याला कविब्रह्म अशी पदवी दिली.
|
| 16 |
+
४. त्यागराज (इ.स. १७६७ ते १८४७)
|
| 17 |
+
५. नान्नय्यभट्ट (पुराणकाळ)
|
| 18 |
+
पुराणकाळाच्या प्रारंभी चालुक्य नरेश राजराज हा आंध्र प्रदेशावर राज्य करीत होता. संस्कृत आणि तेलुगू भाषेत पंडित असलेला नान्नय्यभट्ट, हा त्या राजराज राजाचा कुलगुरू होता. हा राजा जेव्हा गादीवर आला तेव्हा प्रजाजन वैदिक धर्मातील श्रेष्ठ तत्त्वे विसरून विकृत धर्मकल्पनांच्या आहारी गेले होते. या गोष्टीने चिताक्रांत झालेल्या राजाने नान्नय्यभट्टाला सल्ला विचारला. नान्नय्याने सुचवले की महाभारताचे तेलुगू भाषांतर करावे, म्हणजे ते वाचून लोकांना खऱ्या धर्माचे ज्ञान होईल. राजाने नान्नय्यानेच भाषांतर करावे अशी इच्छा व्यक्त केली. नान्नय्याला जाणवले की त्या काळची तेलुगू भाषेसाठी सुबद्ध व्याकरण नसल्याने महाभारताचा अनुवाद करण्यास असमर्थ आहे. तेव्हा नान्नय्याने ’आंध्रशब्दचिंतामणि’ आणि ’लक्षणसार’ हे दोन ग्रंथ निर्माण केले, आणि त्यांत तेल��गूमधील सगळी शब्दसंपदा एकत्र केली. नंतर नान्नय्यभट्ट महाभारताच्या अनुवादाच्या कामाला लागला. त्याने महाभारतातील आदिपर्व आणि सभापर्व याचे भाषांतर पूर्ण केले, मात्र तिसरे वनपर्व अर्धे झाले असतानाच नान्नय्याला मृत्यूने गाठले. महाभारत अर्धवट राहिले खरे, पण झालेला अनुवाद इतका सरस होता की नान्नय्याला तेलुगूचा आदिकवी अशी उपाधी प्राप्त झाली. अर्धवट राहिलेले भाषांतर पुढे तिक्कन्न सोमय्याजी आणि यर्रापगड यांनी पुरे केले.
|
| 19 |
+
६. पालकुरती सोमनाथ (इसवी सनाचे १४वे शतक)
|
| 20 |
+
७. पिंगळी सूरन्न (काव्यप्रबंध काळाचा उत्तरार्ध)
|
| 21 |
+
८. बम्मेर पोतन्न (इ.स. १४०५ ते १४७०)
|
| 22 |
+
९. भद्रभूती
|
| 23 |
+
१०. भास्कर कवी (इसवी सनाचे १४वे शतक) : भास्कर कवी आणि त्यांचे अनेक शिष्य यांनी १४व्या शतकात चंपू पद्धतीने रामायण कथा पूर्ण केली. या रामायणाला 'भास्कर रामायण' म्हणतात. आंध्रात गावोगावच्या मंदिरांतून आणि घरोघरीही हे रामायण वाचले जाते.
|
| 24 |
+
११. यर्राप्रगड (इसवी सनाचे १४वे शतक)
|
| 25 |
+
नान्नय्यभट्टाचे महाभारताचा तेलुगू अनुवाद करायचे अपुरे काम तिक्कन्न सोमय्याजीने १३व्या शतकात पुरे करत आणले. पण जे लिहीत असताना नान्नय्याचा मृत्यू ओढवला ते वनपर्व अशुभ असावे, अशा समजुतीने तिक्कन्न सोमय्याजीने वनपर्व अर्धवटच ठेवले. त्या पर्वातील २९०० पैकी १६०० श्लोकांचे भाषांतर झाले नव्हते. त्यासाठी १४ वे शतक उजाडावे लागले. त्या शतकात निपजलेल्या व अन्नवेम्मा रेड्डी या राजाच्या आश्रयाला असलेल्या यर्राप्रगड कवीने वनपर्वाचे काम पूर्ण केले. मात्र श्लोकरचना न करता त्याने वनपर्वाचा अनुवाद प्रबंधरचनेत (निर्मळ प्रासादिक अशा गद्यात) केला. तिक्कन्ना आणि यर्राप्रगड यांची भाषाशैली इतकी एकसारखी आहे.की, दोघांच्या रूपांतरातला फरक सांगणे कठीण आहे. यर्राप्रगडला लोक प्रबंधपरमेश्वर म्हणू लागले, आणि नन्नय्य, तिक्कन्न आणि यर्राप्रगड यांना कवित्रय असे नाव पडले.
|
| 26 |
+
१२. वेमन्न (इसवी सनाचे १५वे शतक)
|
| 27 |
+
१३. श्रीनाथ (इ.स. १३८० ते १४६०)
|
| 28 |
+
काव्यप्रबंध काळाचा मुकुटमणी. लहानपणीच श्रीनाथाने तेलुगू व संस्कृत भाषांवर प्रभुत्व मिळवले आणि तो थोडीफार कविताही करू लागला होता. तरुणपणी याने श्रीहर्ष कवीच्या नैषधीय या संस्कृत महाकाव्याचा तेलुगू अनुवाद केला. त्या अनुवादित ग्रंथाला ’शृंगार नैषध’ असे म्हणतात. तेलुगूतल्या पाच महाकाव्यातले हे एक आहे. या काव्याने श्रीनाथ कवीला खूप प्रसिद्धी मिळाली आणि कोंडविच्डू या राजाकडे आश्रयही. राजाने त्याची शिक्षणाधिकारी म्हणून नेमणूक केली.
|
| 29 |
+
इ.स. १४२५ च्या सुमारास श्रीनाथने राजाश्रय सोडला आणि तो देशाटनाला निघाला. प्रवासातच त्याने ’हरविलाससमु’ नावाचे काव्य रचले. त्या काव्यात शिवलीलांचे मनोहर वर्णन केले आहे. पुढे श्रीनाथ विजयनगरला गेला. त्यावेळी तेथे कृष्णदेवराय गादीवर होता. त्याच्या दरबारात असताना श्रीनाथने, गौड डिंडिमभट्ट नावाच्या कवीला शास्त्रार्थात हरविले. या विजयामुळे श्रीनाथला कविसार्वभौम ही पदवी मिळाली. राजाने त्याचा सुवर्णाभिषेकही केला.
|
| 30 |
+
त्यानंतर श्रीनाथ तेलंगणातील राचकोंडाचा राजा सर्वज्ञसिंगम याच्या दरबारी आणि नंतर राजमहेंद्रवरम्च्या वीरभद्र रेड्डी या राजाच्या आश्रयाला गेला. तेथे त्याने ’भीमखंड’,’काशीखंड’ आणि ’पल्नाडि वीरचरित्रमु’ ही काव्ये रचली. या शेवटच्या काव्यात श्रीनाथाची प्रतिभा सर्वोच्चबिंदूला पोचली होती. या कवीचे बहुतेक आयुष्य मानमरातबात आणि वैभवविलासात गेले.
|
| 31 |
+
१४. क्षेत्रय्या (इसवी सनावे १७वे शतक)
|
| 32 |
+
हा कृष्णा जिल्ह्यातल्या मौव नावाच्या गावात एका ब्राह्मण कुटुंबात जन्मला. लहानपणी याचे नाव वरदय्या होते. त्याला तेलुगू व संस्कृत या भाषांचे उत्तम ज्ञान होते. कुचिपुडी या गावाला येऊन त्याने संगीत आणि नाट्य या विषयांचे अध्ययन केले, व नंतर भारतातील प्रमुख तीर्थक्षेत्रांना भेटी दिल्या. त्यामुळे लोक त्याला क्षेत्रय्या म्हणू लागले.
|
| 33 |
+
पुढे तंजावरच्या विजयराघव नावाच्या राजाकडे क्षेत्रय्याला आश्रय मिळाला. तेथे राहून त्याने खूप काव्यरचना केली. तो पराकाष्ठेचा श्रीकृष्णभक्त होता. त्याची भक्ती अर्जुनाप्रमाणे सख्ख्या भावासारखी आणि त्याचवेळी राधेप्रमाणे पत्नीभावाची होती. आयुष्यभर त्याने श्रीकृष्णाची मधुराभक्ती केली. श्रीकृष्णाने क्षेत्रय्याला एकदा दर्शन दिले, असे म्हणतात.
|
| 34 |
+
आजही आंध्र प्रदेशात आणि तमिळनाडूत क्षेत्रय्याचे काव्य लोकप्रिय आहे. त्याने हजारो पदे रचली असली तरी त्याला शिष्यपरंपरा न लाभल्याने त्याची बरीचशी काव्यरचना काळाच्या ओघात लुप्त झाली.
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10205.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1 @@
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
तेलेगाव हे भारताच्या महाराष्ट्र राज्यातील नागपूर जिल्ह्यातील नरखेड तालुक्यातील एक गाव आहे.
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10222.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,2 @@
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
तिवसा विधानसभा मतदारसंघ - ३९ हा महाराष्ट्र राज्य विधानसभेच्या २८८ मतदारसंघांपैकी एक आहे. लोकसभा आणि विधानसभा मतदारसंघ परिसीमन आदेश, २००८ नुसार केलेल्या मतदारसंघांच्या रचनेनुसार, तिवसा मतदारसंघात अमरावती जिल्ह्यातील तिवसा तालुका, मोर्शी तालुक्यातील नेर पिंगळाई, धामणगांव ही महसूल मंडळे, अमरावती तालुक्यातील शिराळा, माहुली जहांगीर, नांदगांव पेठ आणि वालगांव ही महसूल मंडळे आणि भातकुली तालुक्यातील आष्टी, खोलापूर ही महसूल मंडळे यांचा समावेश होतो. तिवसा हा विधानसभा मतदारसंघ अमरावती लोकसभा मतदारसंघात मोडतो.[१]
|
| 2 |
+
भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस पक्षाच्या यशोमती चंद्रकांत ठाकूर ह्या तिवसा विधानसभा मतदारसंघाच्या विद्यमान आमदार आहेत.[२]
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10257.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,3 @@
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
|
| 2 |
+
|
| 3 |
+
तैपे विमानतळ या नावाने दोनपैकी एका विमानतळाचा उल्लेख होतो -
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10291.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,6 @@
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
|
| 2 |
+
तोंगिझा-नमोया सुवर्णपट्टा हा काँगोच्या लोकशाही प्रजासत्ताकाच्या पूर्वेस असलेला खनिज सोने सापडणारा एक प्रदेश आहे.
|
| 3 |
+
हा प्रदेश २१० किलोमीटर (१३० मैल) लांब पट्ट्यासारखा आहे. हा दक्षिण किवुपासून मनिएमापर्यंत पसरलेला आहे. [१] यातील तोंगिझा, दक्षिण किवुच्या ईशान्येल नमोया, मनिएमा, नैऋत्येस वर कमितुगा आणि लुगुष्वा येथेही खाणी आहेत. [२]
|
| 4 |
+
तोंगिझा-नमोया सुवर्णपट्टा प्रोटोझोइक काळात तयार झाला होता.
|
| 5 |
+
हा फेलिक आणि मफिक या आग्नेय खडकांचा क्रमाने तयार झाला असावा. येथील पॉलीफेज टेक्टोनो-मेटामॉर्फिक एपिसोड्सच्या दरम्यान हायड्रोथर्मल फ्लुईड एकत्रित झाल्यामुळे अनेकवेळा तो गरम झाला असावा. यामुळे "G4" ग्रेनाइट आणि पेगमाटीटस् तयार झाले. ही प्रक्रिया होण्यासाठी मेसोप्रोटेरोझिक ते निओप्रोटेरोझिक काळ लागला असावा. [३]
|
| 6 |
+
१९२० च्या दशकात येथे सोन्याचे साठे सापडले. [१] कामितुगा द्वारे येथे खोदकाम १९३२ साली सुरू झाले. [४] १९५५ सालापर्यंत एमजीएलचे एकूण उत्पादन ५४ टन झाले होते. [५]
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10294.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,11 @@
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
तोंडखुरी हा सहसा पाळीव/दुभत्या जनावरांना होणारा एक पशुरोग आहे.
|
| 2 |
+
लक्षणे:
|
| 3 |
+
या आजारामध्ये जनावरांना ताप येतो. जनावरांचे शारीरिक तापमान 102 ते 104 डि. फे. किंवा यापेक्षा जास्त राहू शकतो.
|
| 4 |
+
जनावरांच्या तोंडामध्ये हिरड्यांवर, जिभेवर तसेच गालाच्या आतील भागावर पाणी भरल्या सारखे फोड येतात. सोबतच पायांच्या दोन खुरान मधील भागावर फोड येतात व हे फोड लगेचच फुटतात. तेथे भाजल्यासारखे लाल चट्टे तयार होतात. यांची भयंकर आग होत असल्याने जनावरांच्या तोंडातून चिकटसर, तारे सारखी खूप लाड करते आणि जनावर लंगडत चालते.
|
| 5 |
+
तोंडाची, जिभेची खूप आग होत असल्याने जनावरे खाणे पिणे बंद करते.
|
| 6 |
+
तोंडातून मचमच असा आवाज येतो.
|
| 7 |
+
दुधाळ जनावरे दुध एकदम कमी किंवा पूर्णतः बंद करतात. वास्तविक पाहता हा आजार सहा ते सात दिवसांनी आपोआप बरा होतो. परंतु या आजारात ताप खूप येत असल्याने प्रतिकारशक्ती कमी होत जाते. त्यामुळे दुसऱ्या आजाराच्या जीवाणूंचा प्रादुर्भाव होऊन दुसरा एखादा आजार जडू शकतो.
|
| 8 |
+
तसेच खुरातील जखमांवर माशा बसल्यास आळ्या पाडून जखम ची घडल्यास खूर गळून पडू शकते. दुधाळ विदेशी तसेच संकरीत जनावरांमध्ये या रोगाची तीव्रता जास्त आढळते.
|
| 9 |
+
या आजारात मोठ्या प्रमाणात प्राणहानी होत नाही. परंतु या आजारामुळे दुधाळ जनावरांची दूध उत्पादकता जवळपास वीस टक्क्यांनी कमी होते आणि कष्टकरी जनावरांची काम करण्याची क्षमता 50 टक्क्यांनी कमी होते.
|
| 10 |
+
लहान वासरे या आजारात मृत्युमुखी पडू शकतात.
|
| 11 |
+
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10309.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,2 @@
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
तोंडळी हे भारतातील महाराष्ट्र राज्यातील ठाणे जिल्ह्यातील मुरबाड तालुक्यातील एक गाव आहे.
|
| 2 |
+
येथील हवामान उन्हाळ्यात फारच उष्ण व दमट असते. हिवाळ्यात शीतल व कोरडे असते. पावसाळ्यात भरपूर प्रमाणात पाऊस पडतो व हवामान समशीतोष्ण व दमट असते.पावसाळ्यात भरपूर पाऊस पडत असल्याने मुख्य खरीप पीक म्हणून भाताची लागवड केली जाते.
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10313.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,8 @@
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
तोंडवली हे भारतातील महाराष्ट्र राज्यातील दक्षिण कोकणातील सिंधुदुर्ग जिल्ह्यातील कणकवली तालुक्यातील एक गाव आहे.
|
| 2 |
+
पावसाळ्यात येथे भरपूर प्रमाणात पाऊस पडतो आणि हवामान समशीतोष्ण राहते. हिवाळ्यात येथील हवामान थंड असते व अनेकदा सकाळी धुके पडते. उन्हाळ्यात हवामान उष्ण असते. पावसाळ्यात येथे भातशेती केली जाते.
|
| 3 |
+
१.https://villageinfo.in/
|
| 4 |
+
२.https://www.census2011.co.in/
|
| 5 |
+
३.http://tourism.gov.in/
|
| 6 |
+
४.https://www.incredibleindia.org/
|
| 7 |
+
५.https://www.india.gov.in/topics/travel-tourism
|
| 8 |
+
६.https://www.mapsofindia.com/
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10322.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1 @@
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
तोंडैमंडल मुदलियार(तमिळ: தொண்டைமண்டல முதலியார்) ही तमिळनाडूमधील एक जात आहे.
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10324.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,2 @@
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
तोंडोशी हे भारतातील महाराष्ट्र राज्यातील सातारा जिल्ह्यातील पाटण तालुक्यातील एक गाव आहे.
|
| 2 |
+
येथे ऑक्टोबर ते मार्च हा हिवाळा हंगाम असतो. हिवाळ्यात दिवसा तापमान ३० सेल्सियस तर रात्री तापमान ११ अंश सेल्सियस असते.जून ते सप्टेंबर हा पावसाळा हंगाम असतो. पावसाळ्यात दिवसा तापमान २८ अंश सेल्सियस तर रात्री तापमान २२ अंश सेल्सियस असते. पावसाळ्यात चांगल्या प्रमाणात पाऊस पडतो. एप्रिल ते जून हा उन्हाळा मोसम असतो. उन्हाळ्यात दिवसा तापमान ३८ अंश सेल्सियस तर रात्री तापमान २० अंश सेल्सियस असते.
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10327.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,4 @@
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
तोकाइदो शिनकान्सेन (जपानी: 東海道新幹線) हा जपान देशामधील शिनकान्सेन ह्या द्रुतगती रेल्वे प्रणालीमधील एक मार्ग आहे. १९६४ सालापासून कार्यरत असलेला हा जगामधील सर्वप्रथम द्रुतगती रेल्वेमार्ग आहे. ५१५ किमी लांबीचा हा रेल्वेमार्ग जपानची राजधानी टोकियोला ओसाका ह्या प्रमुख शहरासोबत जोडतो. तसेच सॅन्यो शिनकान्सेन मार्गाद्वारे टोकियोपासून थेट फुकुओका शहरापर्यंत प्रवास करता येतो.
|
| 2 |
+
दुसऱ्या महायुद्धानंतरच्या काळात जपान देशाने झपाट्याने प्रगती केली व तेथील नॅरोगेजवर चालणारी रेल्वेसेवा अपूरी पडू लागली. टोकियो ते कोबेदरम्यान धावणारी तोकायदो मार्गिका १९५० च्या दशकामध्ये पूर्णपणे वापरली जात होती व जपान रेल्वेचा तत्कालीन अध्यक्ष शिंजी सोगा ह्याने विजेवर धावणाऱ्या द्रुतगती रेल्वेची कल्पना उचलून धरली. एप्रिल १९५९ मध्ये टोकियो ते ओसाकादरम्यान पहिल्या शिनकान्सेन रेल्वेच्या बांधकामाचे काम सुरू झाले. सुमारे २०,००० कोटी येन इतका खर्च अपेक्षित असलेल्या ह्या मार्गासाठी आलेला वास्तविक आलेला खर्च ४०,००० कोटी येन इतका होता. १ ऑक्टोबर १९६४ रोजी १९६४ उन्हाळी ऑलिंपिकच्या बरोबर १० दिवस आधी पहिली शिनकान्सेन रेल्वे धावली व तिने टोकियो ते ओसाकादरम्यानचे ५१५ किमी अंतर ४ तासांत पार केले, ज्यासाठी विद्यमान रेल्वेगाडीला ६ तास ४० मिनिटे लागत असत. १९६५ साली हा वेळ तीन तास १० मिनिटांवर आणण्यात आला. तोकाइदो शिनकान्सेनमुळे ह्या दोन शहरांदरम्यान वाहतूकीमध्ये अमुलाग्र बदल घडून आला ज्यामुळे व्यापाराला प्रचंड चालना मिळाली. जलदगतीने वेळेवर धावणारी व अत्यंत आरामदायी प्रवासाचा आनंद देणारी शिनकान्सेन जपानी जनतेमध्ये प्रचंड लोकप्रिय झाली व केवळ तीन वर्षांत सुमारे १० कोटी प्रवाशांनी शिनकान्सेनने प्रवास केला होता. २०१४ साली शिनकान्सेनच्या ५०व्या वर्धापन वर्षामध्ये तोकाईदो शिनकान्सेनवरील दैनंदिन प्रवासीसंख्या ३.९१ लाख इतकी होती.
|
| 3 |
+
तोकाइदो शिनकान्सेन मार्ग जपानच्या टोकियो, कानागावा, शिझुओका, ऐची, शिगा, गिफू, क्योतो व ओसाका ह्या राजकीय प्रदेशांमधून धावतो व जपानमधील खालील प्रमुख शहरांना राजधानी टोकियोसोबत जोडतो.
|
| 4 |
+
आजच्या घडीला तोकाइदो शिनकान्सेनवर १६ डबे असलेल्या ७०० प्रणालीच्या रेल्वेगाड्या वापरण्यात येतात. ह्या गाडीचा कमाल वेग ३०० किम��/तास इतका असून वळणावर देखील ही गाडी २७० किमी/तास इतक्या वेगाने जाऊ शकते. ह्यामुळे नोझोमी ही सर्वाधिक गतीची रेल्वेगाडी टोकियो ते ओसाकादरम्यानचे अंतर केवळ २ तास व २२ मिनिटांमध्ये पार करते.
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10328.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,4 @@
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
तोकाइदो शिनकान्सेन (जपानी: 東海道新幹線) हा जपान देशामधील शिनकान्सेन ह्या द्रुतगती रेल्वे प्रणालीमधील एक मार्ग आहे. १९६४ सालापासून कार्यरत असलेला हा जगामधील सर्वप्रथम द्रुतगती रेल्वेमार्ग आहे. ५१५ किमी लांबीचा हा रेल्वेमार्ग जपानची राजधानी टोकियोला ओसाका ह्या प्रमुख शहरासोबत जोडतो. तसेच सॅन्यो शिनकान्सेन मार्गाद्वारे टोकियोपासून थेट फुकुओका शहरापर्यंत प्रवास करता येतो.
|
| 2 |
+
दुसऱ्या महायुद्धानंतरच्या काळात जपान देशाने झपाट्याने प्रगती केली व तेथील नॅरोगेजवर चालणारी रेल्वेसेवा अपूरी पडू लागली. टोकियो ते कोबेदरम्यान धावणारी तोकायदो मार्गिका १९५० च्या दशकामध्ये पूर्णपणे वापरली जात होती व जपान रेल्वेचा तत्कालीन अध्यक्ष शिंजी सोगा ह्याने विजेवर धावणाऱ्या द्रुतगती रेल्वेची कल्पना उचलून धरली. एप्रिल १९५९ मध्ये टोकियो ते ओसाकादरम्यान पहिल्या शिनकान्सेन रेल्वेच्या बांधकामाचे काम सुरू झाले. सुमारे २०,००० कोटी येन इतका खर्च अपेक्षित असलेल्या ह्या मार्गासाठी आलेला वास्तविक आलेला खर्च ४०,००० कोटी येन इतका होता. १ ऑक्टोबर १९६४ रोजी १९६४ उन्हाळी ऑलिंपिकच्या बरोबर १० दिवस आधी पहिली शिनकान्सेन रेल्वे धावली व तिने टोकियो ते ओसाकादरम्यानचे ५१५ किमी अंतर ४ तासांत पार केले, ज्यासाठी विद्यमान रेल्वेगाडीला ६ तास ४० मिनिटे लागत असत. १९६५ साली हा वेळ तीन तास १० मिनिटांवर आणण्यात आला. तोकाइदो शिनकान्सेनमुळे ह्या दोन शहरांदरम्यान वाहतूकीमध्ये अमुलाग्र बदल घडून आला ज्यामुळे व्यापाराला प्रचंड चालना मिळाली. जलदगतीने वेळेवर धावणारी व अत्यंत आरामदायी प्रवासाचा आनंद देणारी शिनकान्सेन जपानी जनतेमध्ये प्रचंड लोकप्रिय झाली व केवळ तीन वर्षांत सुमारे १० कोटी प्रवाशांनी शिनकान्सेनने प्रवास केला होता. २०१४ साली शिनकान्सेनच्या ५०व्या वर्धापन वर्षामध्ये तोकाईदो शिनकान्सेनवरील दैनंदिन प्रवासीसंख्या ३.९१ लाख इतकी होती.
|
| 3 |
+
तोकाइदो शिनकान्सेन मार्ग जपानच्या टोकियो, कानागावा, शिझुओका, ऐची, शिगा, गिफू, क्योतो व ओसाका ह्या राजकीय प्रदेशांमधून धावतो व जपानमधील खालील प्रमुख शहरांना राजधानी टोकियोसोबत जोडतो.
|
| 4 |
+
आजच्या घडीला तोकाइदो शिनकान्सेनवर १६ डबे असलेल्या ७०० प्रणालीच्या रेल्वेगाड्या वापरण्यात येतात. ह्या गाडीचा कमाल वेग ३०० किम��/तास इतका असून वळणावर देखील ही गाडी २७० किमी/तास इतक्या वेगाने जाऊ शकते. ह्यामुळे नोझोमी ही सर्वाधिक गतीची रेल्वेगाडी टोकियो ते ओसाकादरम्यानचे अंतर केवळ २ तास व २२ मिनिटांमध्ये पार करते.
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10338.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,3 @@
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
नारिता आंतरराष्ट्रीय विमानतळ (जपानी: 成田国際空港; IATA: NRT) हा जपानमधील तोक्यो महानगराला आंतरराष्टीय विमानसेवा पुरवणारा एक विमानतळ आहे. हा विमानतळ तोक्यो स्टेशनच्या ५७ किमी पूर्वेला चिबा प्रांतामधील नारिता ह्या शहरात स्थित आहे. जपानमधील बव्हंशी आंतरराष्ट्रीय विमान वाहतूक ह्या विमानतळातून होते. जपान एरलाइन्स, ऑल निप्पॉन एरलाइन्स आणि निप्पॉन कार्गो एरलाइन्स या कंपन्याचा आंतरराष्ट्रीय वाहतूकतळ तसेच जेटस्टार जपान, पीच आणि व्हॅनिला एर या कंपन्यांचा मुख्य वाहतूक तळ येथे आहे. या शिवाय डेल्टा एर लाइन्स आणि युनायटेड एरलाइन्सचा आशियाई वाहतूकतळ नारिता येथे आहे.
|
| 2 |
+
प्रवासी वाहतूकीच्या दृष्टीने नारिता हा जपानमधील दुसऱ्या क्रमांकाचा वर्दळीचा विमानतळ आहे. तोक्यो आंतरराष्ट्रीय विमानतळ हा तोक्यो शहरामधील दुसरा विमानतळ आहे.
|
| 3 |
+
गुणक: 35°45′53″N 140°23′11″E / 35.76472°N 140.38639°E / 35.76472; 140.38639
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10347.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,2 @@
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
टोकियो आंतरराष्ट्रीय विमानतळ किंवा हानेडा विमानतळ (जपानी: 東京国際空港) (आहसंवि: HND, आप्रविको: RJTT) हा जपान देशाच्या टोकियो शहराला सेवा पुरवणाऱ्या दोन प्रमुख विमानतळांपैकी एक आहे (दुसरा: नारिता आंतरराष्ट्रीय विमानतळ). हा विमानतळ टोकियो रेल्वे स्थानकापासून १४ किमी दक्षिणेस स्थित आहे. १९३१ साली उघडण्यात आलेला हानेडा विमानतळ १९७८ पर्यंत टोकियोचा प्रमुख आंतरराष्ट्रीय विमानतळ होता. १९७८ ते २०१० दरम्यान सर्व देशांतर्गत विमानवाहतूक येथूनच होत असे.
|
| 2 |
+
२०१४ साली ७.२८ कोटी प्रवाशांची वाहतूक करणारा हानेडा हार्ट्सफील्ड-जॅक्सन अटलांटा आंतरराष्ट्रीय विमानतळ, बीजिंग राजधानी आंतरराष्ट्रीय विमानतळ व लंडन-हीथ्रो ह्यांच्या खालोखाल जगतील चौथ्या क्रमांकाच्या वर्दळीचा विमानतळ होता.
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10352.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,3 @@
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
तोचिगी (जपानी: 栃木県) हा जपान देशाचा एक प्रांत आहे. हा प्रांत होन्शू बेटाच्या मध्य भागात कांतो प्रदेशामध्ये वसला आहे.
|
| 2 |
+
उत्सुनोमिया ही तोचिगी प्रांताची राजधानी व सर्वात मोठे शहर आहे.
|
| 3 |
+
गुणक: 36°31′N 139°49′E / 36.517°N 139.817°E / 36.517; 139.817
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10359.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,4 @@
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
राजकारणात टिकून रहाण्यासाठी बऱ्याचदा तोडा, फोडा आणि झोडा या नीतीचा अवलंब केला जातो. हिंदुस्थानात ब्रिटिश राज्यकर्त्यांनी या नीतीचा उपयोग केला असे मानले जाते. ब्रिटिश लोक हिंदुस्थान सोडून गेल्याच्या नंतरच्या काळात भारतीय राजकारणी या तंत्रात अधिकच वाकबगार झाल्याचे मानले जाते. (क्षितिजसरांच्या सल्ल्यास अनुसरून या वाक्यासही संदर्भ देईन अथवा आवश्यक फेरफार करेन . तसे संदर्भ उपलब्ध होणे अवघड असणार नाही हे वेगळे सांगण्याची आवश्यकता असेल असे वाटत नाही. क्षितिजसर तुमच्या सल्ल्यास अनुसरून माझी मते वगळून खालील एक परिच्छेद बदलला त्याबद्दल तुमचे मत कळवा . गरजेनुसार अजून संदर्भ आणि बदल उपलब्ध करता येतील.)
|
| 2 |
+
Sep 24, 2009, 11.35PM IST महाराष्ट्र टाइम्स मधील "सोयरे सकळ " लेखात पत्रकार प्रकाश आसबे म्हणतात, "महाराष्ट्रातील ...... पुढारी केवळ सत्तेचे वाटेकरी नसून परस्परांशी बेटीव्यवहार करून त्यांनी आपली सत्ताधाऱ्यांची 'जमात'च बनवली आहे. परिणामी सत्ता कोणाकडेही गेली तरी ती सत्ताधारी जमातीतच राहते. त्यामुळे सत्ताधाऱ्यांची सत्तेची सोयरीक पिढ्यान्पिढ्या अबाधित राहते. निवडणुकीच्या राजकारणात उमेदवारही त्यांचे आणि बंडखोरही त्यांचेच असतात. अधिकृत उमेदवार निवडून आला तर तो त्यांचाच असतो आणि बंडखोर निवडून आला तरी तो त्यांचाच सोयरा असल्याने सत्तेच्या समीकरणात आपोआपच सामील होतो......". "सोयरे सकळ " लेखात बरीच उदाहरणे देऊन पत्रकार प्रकाश आसबे पुढे म्हणतात, ".... कोणाकडेही सत्ता गेली तरी ती सत्ताधारी जमातीतच राहते. सत्ताधारी आणि बंडखोर हे दोघेही सत्ताधारी जमातीचेच असतात. त्यामुळे सत्तेचा सूर्य सत्ताधारी जमातीतून कधीच मावळत नाही, असे म्हणतात, तेच खरे! "[१]
|
| 3 |
+
धर्मा शिवाय अनेक मुद्दे सत्ताधारी किंवा राजकारणी वापरतात.[ संदर्भ हवा ]
|
| 4 |
+
बऱ्याच वेळा राजकारणी एका पेक्षा अनेक तोडा फोडा मुद्य्यांचा वापर करतात.
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10389.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1 @@
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
टोबियास विसी (२१ जानेवारी, १९९१:हेग, नेदरलँड्स - हयात) हा नेदरलँड्सच्या क्रिकेट संघाकडून खेळणारा खेळाडू आहे.[१]
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10390.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,3 @@
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
तोमा पिकेती (इ.स. १९७१ - ) हे समाजातील आर्थिक उत्पन्न व संपत्तीच्या असमानतेचा अभ्यास करणारे एक फ्रेंच अर्थतज्ञ आहेत. ते पॅरिसमधल्या पॅरिस अर्थशास्त्र संस्थेत अर्थशास्त्राचे प्राध्यापक आहेत.
|
| 2 |
+
त्यांचे २०१३ साली प्रकाशित झालेले पुस्तक, “ल कापिताल ओ व्हुनेउनियेम सिएक्लं” (“एकविसाव्या शतकात भांडवल”) हे पुस्तक अनेक देशांत सर्वाधिक खपाचे पुस्तक ठरले. प्रगत देशांतली आजची आर्थिक असमानता बघितली तर परिस्थिती एकोणिसाव्या शतकातल्या सारखीच आहे असे पिकेती यांचे मत आहे. त्यामुळे कार्ल मार्क्स, डेव्हिड रिकार्डो, इत्यादिंसारख्या सामाजिक विषमतेवर विचार करणाऱ्या विसाव्या शतकाच्या आधी होऊन गेलेल्या अर्थतज्ञांचे विचार आज पुन्हा बघण्यासारखे आहेत. परंतु या तत्कालीन अर्थतज्ञांकडे सामाजिक व वैयक्तिक संपत्तीची अचूक आकडेवारी नसल्यामुळे त्यांचे निष्कर्ष तर्कशुद्ध नसून पुर्वग्रहदूषित असण्याची शक्यता आहे. त्याचबरोबर अचूक आकडेवारी असलेल्या सायमन कुझनेट्स सारख्या विसाव्या शतकातल्या अर्थतज्ञांकडे बघितले तर त्यांचे निष्कर्ष मार्क्स प्रभृतींच्या उलटच नाहीत तर विसाव्या शतकातील शीत युद्धाच्या पार्श्वभूमीमुळे वेगळ्याप्रकारे पुर्वग्रहदूषित आहेत. उदाहरणार्थ, मार्क्सच्या मते खासगी भांडवलदारी व्यवस्थेत सामाजिक संपत्ती काही थोड्या व्यक्तींच्या हातात—म्हणजेच खासगी भांडवलदारांच्या हातात—येऊन विषमता वाढत जाते व शेवटी भांडवलदारी व्यवस्थाच संपुष्टात येते. याउलट कुझनेट्सच्या मते खासगी भांडवलदारी व्यवस्थेत केवळ सुरुवातीस सामाजिक विषमता वाढते व काही वेळाने संपत्तीच्या देवाणघेवाणीतून साहजिकच अार्थिक समता अस्तित्वात येते. एकोणिसाव्या व विसाव्या शतकांतल्या भांडवलावरच्या या विरोधी कल्पनांचा पिकेती यांनी एकविसाव्या शतकात भांडवल या पुस्तकात एकविसाव्या शतकासाठी उहापोह केला आहे. पिकेतींकडे अचूक आकडेवारीचा सुकाळ असल्याने आधीच्या अर्थतज्ञांच्या तुलनेत त्यांच्या निष्कर्षांना विशेष धार आहे. या विश्लेषणातून पिकेती दाखवतात की जगात आज सर्वत्र आर्थिक विषमता वाढते आहे. ही विषमता कुझनेट्स-मार्गाने घटण्याची लक्षणे नाहीत. पुस्तकाच्या शेवटी ही वाढ रोखण्यासाठी कोणती पावले उचलावीत याबद्दल काही सल्ले आहेत.
|
| 3 |
+
ऑक्टोबर 2021 मध्ये, ���ॉमस पिकेट्टीने फ्रेंच भाषिक पश्चिम आफ्रिकेतील आणि फ्रेंच भाषिक मध्य आफ्रिकेत वापरलेल्या चलनावर घोषित केले "सीएफए फ्रँकचे 2021 मध्ये बोलणे चालू ठेवणे, हे एक विसंगती आहे". सीएफए फ्रँक हे खूपच विकृत चलन आहे.
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10398.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,31 @@
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
जनगणना स्थल निर्देशांक ५३८९३९ असलेले तोयागोंदी हे गाव, गडचिरोली या जिल्ह्यातील ८०९.० हेक्टर क्षेत्राचे गाव असून २०११ च्या जनगणनेनुसार [१] ह्या गावात २६ कुटुंबे आहेत व एकूण लोकसंख्या १२१ आहे.ह्याच्या सर्वात जवळचे शहर गडचिरोली हे ५८ किलोमीटर अंतरावर आहे.
|
| 2 |
+
गावात असणाऱ्या सुविधा - पूर्व-प्राथमिक शाळा-१. प्राथमिक शाळा-१. स्थानिक नसलेल्या सुविधांची अंतरे -
|
| 3 |
+
५ किमीपेक्षा कमी अंतरावर : कनिष्ठ माध्यमिक शाळा जपनकडी येथे आहे. ५ ते १० किमी अंतरावर : काही नाही१० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर : माध्यमिक शाळा धानोरा येथे आहे. उच्च माध्यमिक शाळा धानोरा येथे आहे. पदवी महाविद्यालय धानोरा येथे आहे. अभियांत्रिकी महाविद्यालय गडचिरोली येथे आहे. वैद्यकीय महाविद्यालय नागपूर येथे आहे. मॅनेजमेन्ट इन्स्टिट्युट धानोरा येथे आहे. पॉलिटेक्निक गडचिरोली येथे आहे. व्यावसायिक प्रशिक्षण शाळा गडचिरोली येथे आहे. अनौपचारिक प्रशिक्षण केन्द्र धानोरा येथे आहे. अपंगांसाठी खास शाळा धानोरा येथे आहे.
|
| 4 |
+
असलेल्या सुविधा- काही नाही
|
| 5 |
+
नसलेल्या सुविधा -
|
| 6 |
+
कम्युनिटी हेल्थ सेंटर, प्राथमिक आरोग्य केन्द्र, प्राथमिक आरोग्य उपकेन्द्र, प्रसूति व शिशुसंगोपन केन्द्र, क्षयरोग रुग्णालय, अॅलोपॅथिक रुग्णालय, अन्य उपचार पद्धतीचे रुग्णालय, दवाखाने, गुरांचे दवाखाने, फिरते दवाखाने, कुटुंब कल्याण केन्द्र,
|
| 7 |
+
असलेल्या सुविधा- काही नाही
|
| 8 |
+
नसलेल्या सुविधा -
|
| 9 |
+
बाह्य रोगी विभाग, बाह्य व भरती असलेले रोगी विभाग, धर्मादाय बिगर-सरकारी रुग्णालय, एमबीबीएस पदवीधर डॉक्टर, इतर पदवीधर डॉक्टर, पदवी नसलेले डॉक्टर, पारंपरिक वैद्य व वैदू, औषधाची दुकाने, इतर बिगरसरकारी वैद्यकीय सुविधा,
|
| 10 |
+
असलेल्या सुविधा-
|
| 11 |
+
झाकलेल्या विहिरीच्या पाण्याचा पुरवठा, न झाकलेल्या विहिरीच्या पाण्याचा पुरवठा, हँड पंपच्या पाण्याचा पुरवठा, बारमाही सुरू असलेल्या हँड पंपच्या पाण्याचा पुरवठा,
|
| 12 |
+
नसलेल्या सुविधा -
|
| 13 |
+
शुद्ध केलेल्या पाण्याचा नळातून पुरवठा, शुद्ध न केलेल्या पाण्याचा नळातून पुरवठा, बोअर वेलच्या पाण्याचा पुरवठा, बारमाही सुरू असलेल्या बोअरवेल पाण्याचा पुरवठा, झऱ्यांच्या पाण्याचा पुरवठा, नदी /कालवे यातील पाण्याचा पुरवठा, तलाव / तळी यातील पाण्याचा पुरवठा, इतर पाण्याचा पुरवठा,
|
| 14 |
+
असलेल्या सुविधा-
|
| 15 |
+
सांडपाणी शुद्धीकरणाच���या सयंत्रात सोडले जाते.
|
| 16 |
+
नसलेल्या सुविधा -
|
| 17 |
+
उघडी गटारे, न्हाणीघरासह सार्वजनिक स्वच्छता गृह, न्हाणीघर नसलेले सार्वजनिक स्वच्छता गृह, ग्रामीण सॅनिटरी हार्डवेरचे दुकान, सामूहिक बायोगॅस किंवा कचऱ्याच्या उत्पादक पुनर्वापराची व्यवस्था,
|
| 18 |
+
गावात असणाऱ्या सुविधा -
|
| 19 |
+
कच्चे रस्ते, पाण्यासाठी नाल्या असणारे डांबरी रस्ते, बारमाही रस्ते, स्थानिक नसलेल्या सुविधांची अंतरे -
|
| 20 |
+
पोस्ट ऑफिस, - ५ ते १० किमी अंतरावर. उपपोस्ट ऑफिस, - ५ ते १० किमी अंतरावर. मोबाइल फोन सुविधा, - ५ किमीपेक्षा कमी अंतरावर. इंटरनेट कॅफे / सर्व्हिस सेंटर, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. खाजगी कूरियर, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. सार्वजनिक बस सेवा, - ५ किमीपेक्षा कमी अंतरावर. खाजगी बस सेवा, - ५ किमीपेक्षा कमी अंतरावर. रेल्वे स्थानक, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. ऑटो व टमटम, - ५ किमीपेक्षा कमी अंतरावर. टॅक्सी, - ५ किमीपेक्षा कमी अंतरावर. ट्रॅक्टर - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. सायकल रिक्षा (पायचाकी), - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. बैल व इतर जनावरांनी ओढलेल्या गाड्या, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. राष्ट्रीय महामार्गाला जोडलेले रस्ते, - ५ किमीपेक्षा कमी अंतरावर. राज्य महामार्गाला जोडलेले रस्ते, - ५ किमीपेक्षा कमी अंतरावर. जिल्ह्यातील मुख्य रस्त्याला जोडलेले रस्ते, - ५ किमीपेक्षा कमी अंतरावर. जिल्ह्यातील दुय्यम रस्त्याना जोडलेले रस्ते, - ५ किमीपेक्षा कमी अंतरावर. डांबरी रस्ते, - ५ किमीपेक्षा कमी अंतरावर. तळटीप- शिरगिणतीत असलेल्या पुढील सुविधांच्या उपलब्धततेची माहिती नाही - सायकल रिक्षा (यांत्रिक), समुद्र व नदीवरील बोट वाहतूक, बोट वाहतुकीयोग्य जलमार्ग,
|
| 21 |
+
गावात असणाऱ्या सुविधा - शेतमाल विक्री संस्था,
|
| 22 |
+
स्थानिक नसलेल्या सुविधांची अंतरे -
|
| 23 |
+
ए टी एम, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. व्यापारी बँका, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. सहकारी बँका, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. शेतकी कर्ज संस्था, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. स्वसहाय्य गट (SHG), - ५ किमीपेक्षा कमी अंतरावर. रेशनचे दुकान, - ५ किमीपेक्षा कमी अंतरावर. मंडया / कायम बाजार, - ५ ते १० किमी अंतरावर. आठवड्याचा बाजार, - ५ ते १० किमी अंतरावर. शेतमाल विक्री संस्था,
|
| 24 |
+
गावात असणाऱ्या सुविधा -
|
| 25 |
+
शिशुविकास पौष्टिक आहार केन्द्र (ICDS), अंगणवाडी पौष्टिक आहार केन्द्र, अंगणवाडी पौष्टिक आहार केन्द्र, इतर पौष्टिक आहार केन्द्र, आशा,
|
| 26 |
+
स्थानिक नसलेल्या सुविधांची अंतरे -
|
| 27 |
+
समुदाय भवन (दूरचित्रवाणी सह अथवा विरहित), - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. क्रीडांगण, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. खेळ / करमणूक क्लब, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. सिनेमा/ व्हिडियो थियेटर, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. सार्वजनिक ग्रंथालय, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. सार्वजनिक वाचनालय, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. वृत्तपत्र पुरवठा, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. विधानसभा मतदान केन्द्र, - ५ ते १० किमी अंतरावर. जन्म व मृत्यु नोंदणी केन्द्र, - ५ किमीपेक्षा कमी अंतरावर.
|
| 28 |
+
घरगुती वापरासाठी वीजपुरवठा - आहे.
|
| 29 |
+
शेतीसाठी वीजपुरवठा - नाही.
|
| 30 |
+
व्यापारी वापरासाठी वीजपुरवठा - नाही.
|
| 31 |
+
सर्व प्रकारच्या वापरासाठी वीजपुरवठा - नाही.
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10403.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,7 @@
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
तोयो सुईसान कैशा लिमिटेड (東洋水産?) किंवा तोयो सुईसान कबुशिकी - गेशा ही एक जपानी कंपनी आहे. ही कंपनी तोयो सुईसान म्हणून प्रसिद्ध आहे. ही कंपनी तीच्या सीफूड, गोठविलेले आणि रेफ्रिजरेटेड खाद्यपदार्थांद्वारे तसेच मारुचान ब्रँडद्वारे विकल्या जाणाऱ्या रामेन नूडल्साठी विशेष प्रसिद्ध आहे.[५] ही चौथी सर्वात मोठी आंतरराष्ट्रीय सागरी खाद्य पुरवणारी कंपनी आहे.[६]
|
| 2 |
+
या कंपनीची स्थापना १९५३ मध्ये काझुओ मोरी यांनी सागरी उत्पादने निर्यातदार, देशांतर्गत खरेदीदार आणि वितरक म्हणून केली होती. १९५५ मध्ये कोल्ड-स्टोरेज व्यवसायात प्रवेश केला. १९५६ मध्ये फिश सॉसेजसारख्या प्रक्रिया केलेल्या समुद्री खाद्यपदार्थांचे उत्पादन आणि विक्री करण्यास या कंपनीने सुरुवात केली.
|
| 3 |
+
तोयो सुईसान आणि त्याच्या एकत्रित उपकंपन्यांनी नंतर झटपट नूडल्स, ताजे नूडल्स आणि फ्रोझन फूड्स यासह इतर व्यवसाय क्षेत्रात विस्तार केला.
|
| 4 |
+
ग्राहक-प्रत्यक्ष खाद्यपदार्थांव्यतिरिक्त, कंपनी व्यावसायिक खाद्य सेवा उद्योगासाठी विविध प्रकारच्या खाद्य उत्पादनांची विक्री करते, ज्यामध्ये रेस्टॉरंट्स, विशेष स्टोर्स आणि औद्योगिक खाद्य सेवा यांचा समावेश आहे. [५]
|
| 5 |
+
कंपनी युनायटेड स्टेट्समध्ये तीन पूर्णपणे मालकीच्या कंपन्या चालवते: मारुचान इंक, अर्वाईन, कॅलिफोर्निया स्थित, मारुचान व्हर्जिनिया इंक, रिचमंड स्थित आणि मारुचान टेक्सास इंक, वॉन ऑर्मी, टेक्सास स्थित आहेत. त्यांचा पोर्टलॅंड, ओरेगॉन येथील अजिनोमोटो फूड्स नॉर्थ अमेरिका, इंक. सोबत अजिनोमोटो टोयो फ्रोझन नूडल्स नावाचा संयुक्त उपक्रम आहे.[७]
|
| 6 |
+
झटपट (इन्स्टंट) नूडल्स : जपानी इन्स्टंट कप नूडल्सची मालिका, सर्वाधिक विकल्या जाणाऱ्या उत्पादनांपैकी एक आहे. इतर उत्पादनांमध्ये नॉन-फ्राईड नूडल्स आणि इन्स्टंट नूडल्सच्या उभ्या-प्रकार कप मालिका समाविष्ट आहेत.
|
| 7 |
+
ताज्या नूडल्स : तोयो सुईसानच्या ताज्या नूडल्सचा जपानमधील ताज्या नूडल मार्केटमध्ये सर्वाधिक वाटा आहे. १९७५ मध्ये सुरू केलेले, सान्शोकु (“थ्री पॅक”) याकिसोबा हे जपानमध्ये सर्वाधिक विकले जाणाऱ्या ताज्या नूडल्स आहेत. सान्शोकु उडॉन नूडल्स (शेल्फ लाइफ १५ दिवस), आणि मुकाशी नगारा नो चुका सोबा नूडल्स ही इतर उत्पादने आहेत.
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10404.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,7 @@
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
तोयो सुईसान कैशा लिमिटेड (東洋水産?) किंवा तोयो सुईसान कबुशिकी - गेशा ही एक जपानी कंपनी आहे. ही कंपनी तोयो सुईसान म्हणून प्रसिद्ध आहे. ही कंपनी तीच्या सीफूड, गोठविलेले आणि रेफ्रिजरेटेड खाद्यपदार्थांद्वारे तसेच मारुचान ब्रँडद्वारे विकल्या जाणाऱ्या रामेन नूडल्साठी विशेष प्रसिद्ध आहे.[५] ही चौथी सर्वात मोठी आंतरराष्ट्रीय सागरी खाद्य पुरवणारी कंपनी आहे.[६]
|
| 2 |
+
या कंपनीची स्थापना १९५३ मध्ये काझुओ मोरी यांनी सागरी उत्पादने निर्यातदार, देशांतर्गत खरेदीदार आणि वितरक म्हणून केली होती. १९५५ मध्ये कोल्ड-स्टोरेज व्यवसायात प्रवेश केला. १९५६ मध्ये फिश सॉसेजसारख्या प्रक्रिया केलेल्या समुद्री खाद्यपदार्थांचे उत्पादन आणि विक्री करण्यास या कंपनीने सुरुवात केली.
|
| 3 |
+
तोयो सुईसान आणि त्याच्या एकत्रित उपकंपन्यांनी नंतर झटपट नूडल्स, ताजे नूडल्स आणि फ्रोझन फूड्स यासह इतर व्यवसाय क्षेत्रात विस्तार केला.
|
| 4 |
+
ग्राहक-प्रत्यक्ष खाद्यपदार्थांव्यतिरिक्त, कंपनी व्यावसायिक खाद्य सेवा उद्योगासाठी विविध प्रकारच्या खाद्य उत्पादनांची विक्री करते, ज्यामध्ये रेस्टॉरंट्स, विशेष स्टोर्स आणि औद्योगिक खाद्य सेवा यांचा समावेश आहे. [५]
|
| 5 |
+
कंपनी युनायटेड स्टेट्समध्ये तीन पूर्णपणे मालकीच्या कंपन्या चालवते: मारुचान इंक, अर्वाईन, कॅलिफोर्निया स्थित, मारुचान व्हर्जिनिया इंक, रिचमंड स्थित आणि मारुचान टेक्सास इंक, वॉन ऑर्मी, टेक्सास स्थित आहेत. त्यांचा पोर्टलॅंड, ओरेगॉन येथील अजिनोमोटो फूड्स नॉर्थ अमेरिका, इंक. सोबत अजिनोमोटो टोयो फ्रोझन नूडल्स नावाचा संयुक्त उपक्रम आहे.[७]
|
| 6 |
+
झटपट (इन्स्टंट) नूडल्स : जपानी इन्स्टंट कप नूडल्सची मालिका, सर्वाधिक विकल्या जाणाऱ्या उत्पादनांपैकी एक आहे. इतर उत्पादनांमध्ये नॉन-फ्राईड नूडल्स आणि इन्स्टंट नूडल्सच्या उभ्या-प्रकार कप मालिका समाविष्ट आहेत.
|
| 7 |
+
ताज्या नूडल्स : तोयो सुईसानच्या ताज्या नूडल्सचा जपानमधील ताज्या नूडल मार्केटमध्ये सर्वाधिक वाटा आहे. १९७५ मध्ये सुरू केलेले, सान्शोकु (“थ्री पॅक”) याकिसोबा हे जपानमध्ये सर्वाधिक विकले जाणाऱ्या ताज्या नूडल्स आहेत. सान्शोकु उडॉन नूडल्स (शेल्फ लाइफ १५ दिवस), आणि मुकाशी नगारा नो चुका सोबा नूडल्स ही इतर उत्पादने आहेत.
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10413.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,2 @@
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
तोरणडोंगरी हे भारताच्या महाराष्ट्र राज्यातील नाशिक जिल्ह्यातील सुरगाणा तालुक्यातील एक गाव आहे.
|
| 2 |
+
येथे मार्चच्या मध्यापासून जूनच्या पूर्वार्धापर्यंत उन्हाळा असतो. उन्हाळ्यात हवामान सामान्यतः उष्ण असून तापमान ३८ ते ४० सेल्सियसपर्यंत असते.जून महिन्याच्या मध्यापासून पावसास सुरुवात होऊन ऑक्टोबरच्या मध्यापर्यंत पावसाळा असतो. सर्वसाधारण नोव्हेंबर ते फेब्रुवारी या काळात थंडी असते.वार्षिक सर्वसाधारण हवामान उष्ण व विषम असते.वार्षिक पर्जन्यमान २,००० मि.मी.पर्यंत असते.
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10416.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,8 @@
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
तोरणा हा भारताच्या महाराष्ट्र राज्यातील सह्याद्री पर्वतरांगांमधील डोंगरी किल्ला आहे.
|
| 2 |
+
|
| 3 |
+
तोरणा अथवा प्रचंडगड हा पुणे जिल्ह्यातला दुर्गकोटातील अतिदुर्गम व अतिविशाल म्हणून हा गड प्रसिद्ध आहे.
|
| 4 |
+
पुणे जिल्ह्याच्या वेल्हा तालुक्यातून गेलेल्या सह्याद्रीच्या रांगेतून दोन पदर निघून पूर्वेला पसरत गेलेले आहेत, त्यापैकी एका पदरावर तोरणा व राजगड आहेत. दुसऱ्या पदराला भुलेश्वर रांग असे म्हणतात. पुण्याच्या नैर्ऋत्येस असलेल्या पर्वतराजीमध्ये १८.२७६ उत्तर अक्षांश व ७३.६१३ पूर्व रेखांशावर हा किल्ला आहे. या गडाच्या दक्षिणेला वेळवंडी नदी असून उत्तरेला कानद नदीचे खोरे आहे. या गडाच्या पश्चिमेला कानद खिंड, पूर्वेला बामण व खरीव खिंडी आहेत. पुण्यापासून रस्त्याने तोरण्यापर्यंतचे अंतर ६० कि.मी. आहे.
|
| 5 |
+
छत्रपती शिवाजी महाराजांनी स्वराज्य स्थापना करीत असताना इ.स. १६४७ मध्ये सर्वप्रथम घेतलेला हा किल्ला आहे. छत्रपती शिवाजी महाराजांनी हा किल्ला घेऊन स्वराज्याचे तोरण बांधले म्हणून या किल्ल्याचे नाव तोरणा किल्ला[१] असे ठेवण्यात आले.[२] महाराजांनी गडाची पाहणी करताना त्याच्या प्रचंड विस्तारामुळे याचे नाव बदलून 'प्रचंडगड' असे ठेवले. या किल्ल्यावर सापडलेल्या धनाचा उपयोग शिवाजी महाराजांनी राजगडाच्या बांधणीसाठी केला.[३]
|
| 6 |
+
तोरणा किल्ला कधी आणि कोणी बांधला याचा पुरावा आज उपलब्ध नाही. येथील लेण्यांच्या आणि मंदिरांच्या अवशेषांवरून हा शैवपंथाचा आश्रम असावा. इ. स. १४७० ते १४८६ च्या दरम्यान बहामनी राजवटीसाठी मलिक अहमद याने हा किल्ला जिंकला. पुढे हा किल्ला निजामशाहीत गेला. नंतर तो शिवाजी महाराजांनी घेतला व याचे नाव प्रचंडगड ठेवले आणि गडावर काही इमारती बांधल्या. महाराजांनी आग्र्याहून आल्यावर अनेक गडांचा जीर्णोद्धार केला. त्यात ५ हजार होन इतका खर्च त्यांनी तोरण्यावर केला. संभाजी महाराजांची निर्घृण हत्या झाल्यावर हा किल्ला मोगलांकडे गेला. शंकराजी नारायण सचिवांनी तो परत मराठ्यांच्या ताब्यात आणला. पुढे इ. स. १७०४ मध्ये औरंगजेबाने याला वेढा घातला व लढाई करून आपल्या ताब्यात आणला व याचे नाव फुतुउल्गैब म्हणजे दैवी विजय ठेवले. पण परत चार वर्षांनी सरनोबत नागोजी कोकाटे यांनी गडावर लोक चढवून गड पुन्हा मराठ्यांच्या ताब्यात आणला व यानंतर तोरणा कायम स्वरा��्यातच राहिला. पुरंदरच्या तहात जे किल्ले मोगलांना दिले त्यामध्ये तोरणा महाराजांकडेच राहिला होता. विशेष म्हणजे औरंगजेब बादशहाने लढाई करून जिंकलेला असा हा मराठ्यांचा एकमेव किल्ला होय. तोरणा गडावर मेंगाई देवीचे प्राचीन मंदिर आहे.
|
| 7 |
+
पुणे जिल्ह्यातील वेल्हे हे तालुक्याचे गाव तोरणाच्या पायथ्याशी आहे. पुणे-वेल्हे अंतर ६० कि.मी आहे. पुणे-नसरापूर-वेल्हे, पुणे-पानशेत-वेल्हे व पुणे-खानापूर-पाबे मार्गे वेल्हे अशा मार्गांनी तोरणा गडाच्या पायथ्यापर्यंत जाता येते. शिवाजी महाराजांच्या काळातील वेल्हे-वेग्रे आळीमार्गे पाऊलवाटेने दीड-दोन तासात बिनी दरवाजातून तोरण्यावर जाता येते. हा मार्ग इतर मार्गांपेक्षा सोपा आहे. अवघड ठिकाणी पुरातत्त्व खात्याने लोखंडी संरक्षक कठडे बसवले आहेत. त्यामुळे सहज चढउतार करता येते. दुसरा मार्ग वेल्ह्यापासून ५ कि.मी अंतरावर असलेल्या भट्टी या गावातून आहे. गावाच्या पश्चिमेकडून वाळणजाई दरवाजातून बुधला माचीवर थेट वाट जाते. या वहिवाटीच्या वाटांशिवाय चोरवाटेने येणारे अन्य मार्ग अडचणीचे आणि धोकादायक बनले आहेत. वेल्हे गावातून चढताना दिसणारा तोरणा आणि गुंजवण्याकडून दिसणारा राजगड यात बरेच साम्य आहे.
|
| 8 |
+
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10420.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1 @@
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
तोरणागल्लू, किंवा तोरणागल, हे भारताच्या दक्षिणेकडील कर्नाटक राज्यातील एक गाव आहे.[१][२] हे कर्नाटकातील बेल्लारी जिल्ह्यातील सांडूर तालुक्यात आहे..
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10436.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,2 @@
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
|
| 2 |
+
तोरिजा किल्ला (स्पॅनिश भाषा: Castillo de Torija) हा स्पेन देशातला एक किल्ला आहे. या किल्ल्याला राष्ट्रीय स्मारकाचा दर्जा देण्यात आला आहे. युनेस्कोने या किल्ल्याला जागतिक वारसा म्हणून घोषित केले आहे।
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10445.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1 @@
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
तोलकाप्पियम (तमिळ: தொல்காப்பியம்) ही तमिळ साहित्यातील एक प्राचीन साहित्यकृती असून त्यात मुख्यत्वेकरून तमिळ भाषेच्या व्याकरणाचे विवरण दिले आहे.
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10455.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,3 @@
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
गुणक: 53°30′32″N 49°25′20″E / 53.50889°N 49.42222°E / 53.50889; 49.42222
|
| 2 |
+
|
| 3 |
+
तोल्याती (रशियन: Тольятти) हे रशिया देशाच्या समारा ओब्लास्तामधील एक प्रमुख शहर आहे. कोणत्याही प्रांताचे मुख्यालय नसलेले तोल्याती हे रशियामधील सर्वात मोठे शहर आहे. तोल्याती शहर रशियाच्या दक्षिण भागात मॉस्कोच्या १००० किमी आग्नेयेस वोल्गा नदीच्या काठावर वसले आहे. समारा ओब्लास्ताची राजधानी समारा तोल्यातीच्या ९५ किमी आग्नेयेस स्थित आहे. २०१८ साली तोल्यातीची लोकसंख्या सुमारे ७ लाख इतकी होती.
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10461.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1 @@
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
तोशिहिदे मस्कावा हे जपानी भौतिकशास्त्रज्ञ असून त्यांना माकोटो कोबायाशी व योईचिरो नाम्बू यांच्यासमवेत अणूअंतरंगातील मूलभूत कणांसंबंधित संशोधनाबद्दल इ.स. २००८चे भौतिकशास्त्रातील नोबेल पारितोषिक मिळाले.
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10492.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,22 @@
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
त्यागराज खाडिलकर (जन्मदिनांक ११ जून १९६७- हयात) हे मराठी, हिंदीतील प्रसिद्ध गायक व संगीतकार आहेत.
|
| 2 |
+
त्यागराज खाडीलकरांचा जन्म कोल्हापुरमध्ये झाला. त्यांनी आपले शाळेय शिक्षण कोल्हापुरमध्येच पूर्ण केले व पुढील शिक्षण पुणे येथे झाले.
|
| 3 |
+
त्यागराज यांची आई श्रीमती मंजुश्री खाडीलकर या ख्यातनाम किर्तनकार, त्यांनी ’किर्तन मंदाकिनी’ ही पदवी मिळविली. त्यांची आजी श्रीमती इंदिराबाई खाडिलकर ह्या गंधर्व गायकीसाठी प्रसिद्ध. स्वातंत्र सैनिक, पत्रकार, नाटककार श्री. कृष्णाजी प्रभाकर उर्फ काकासाहेब खाडिलकर हे त्यांचे पणजोबा.
|
| 4 |
+
बालपणी त्यांनी विख्यात गायक, नट कै. डॉ वसंतराव देशपांडे यांच्याबरोबर ’कट्यार काळजात घुसली’ या संगीत नाटकामध्ये काम केले. त्याचबरोबर कै. शरद तळवलकर यांच्याबरोबर बालकलाकार म्हणुन ’सखी शेजारणी’ या विनोदी नाटकामध्ये काम केले. तसेच अष्टपैलु व्यक्तिमहत्त्व असलेल्या कै. पु. ल. देशपांडे यांच्या ’वाऱ्यावरची वरात’ या चंद्रलेखाचे मोहन वाघ द्वारा निर्मीत नाटकातही काम केले. त्याचबरोबर त्यांनी ’निवडुन’ या दैनंदिन मालिकेतही अभिनय केला.
|
| 5 |
+
त्यांनी इंडीयन क्लासिक आणि नाट्य गीताचे शिक्षण आपल्या आजी कै. श्रीमती इंदिराबाई खाडिलकर आणि किरणा घराण्याचे गायक पंडित गंगाधरबुआ पिंपळखरे यांच्या कडून घेतले.
|
| 6 |
+
त्यांना ’गानहिरा’ हा सन्मान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषदेद्वारा आयोजित अंतर महाविद्यालयीन शास्त्रीय गायनाच्या स्पर्धेमध्ये मिळाला.
|
| 7 |
+
त्यांनी HMV, T-Series, Tips, Venus, Universal, Prism, Magna sound इं कंपन्यांबरोबर हिंदी आणि मराठी अल्बम केले आहेत. ’बिच्छू बाइट’(विंचु चावला) हा युनिवर्सल द्वारा निर्मित त्यांनी आवाज दिलेला अल्बम खूप गाजला.
|
| 8 |
+
ते मराठीतील एक आघाडीचे पार्श्वगायक आहेत. त्यांनी दत्ता डावजेकर, अनिल मोहिले, श्रीधर फडके, राम-लक्षम, अशोक पत्की, अवधुत गुप्ते या सारख्या सर्व विख्यात संगीतकारांबरोबर काम केले आहे. त्यांनी जवळ-जवळ ३५ मराठी चित्रपटांसाठी पार्श्वगायन केले आहे. त्यांनी सुपरस्टार भरत जाधव यांना ’चालु नवरा भोळी बायको’ व मकरंद अनासपुरे यांना ’काय द्याच बोला’ या चित्रपटांसाठी आवाज दिला. त्यांनी संगीतकार आनंद मोडक यांच्या मार्गदर्शनाखाली ’दिशा’ व संगीतकार बप्पी लहरी यांच्या मार्गदर्शनाखाली सदाबहार हिरो देव आनंद दिग्दर्शित ’मि. प्राय मिनिस्टर’ या हिंदी चित्रपटांसाठीही पाश्वगायन केले.
|
| 9 |
+
त्यांनी ६० पेक्षा ही जास्त मालिकांचो शीर्षक गीते गायिली आहेत (कोणत्याही गायकाने त्यांच्या इतपत मालिकांचे शीर्षक गीते गायिलेली नसतील.) त्यातील ’हम पांच’, ’चुटकी बजाके’, ’टिकल ते पॉलिटिकल’ या मालिकेचे शीर्षक गीते खुपच गाजली.
|
| 10 |
+
त्यांना TVS 'सा रे ग मा पा’चा (झी टी हिंदी) ’व्ह्युवर्स चॉइस अवार्ड’ मिळाला आहे.
|
| 11 |
+
त्यांना सुर सिंगर सनसदकडून ’लता मंगेशकर अवार्ड’ आणि अखिल भारतीय नाट्यपरिषदेकडून ’माणिक वर्मा अवार्ड’ मिळाले आहेत.
|
| 12 |
+
२००७ साली ’थैमान’ या मराठी चित्रपटासाठी त्यांना संस्कृती कला दर्पणचा उत्कृष्ठ पार्श्वगायकचा अवार्ड मिळाला आहे.
|
| 13 |
+
त्यांनी अनेक टीव्ही मालिकांचे सुत्रसंचालन केले आहे आहे जसे, ’आरोही’, ’गीताक्षरी’, ’नमन नटवरा’, ’टिकल ते पॉलिटिकल’ ह्या ई टीव्ही वाहिनी वरील काही मालिका तसेच, ’शेर-ए-नगमा’ ही ई टीव्ही उर्दु वाहीनी वरील मालिका होय.
|
| 14 |
+
त्यांनी अनेक टीव्ही मालिका व चित्रपटांसाठी संगीत दिग्दर्शन केले आहे.
|
| 15 |
+
आशाजी, ओ.पी. नय्यर, सोनु निगम, कविता कृष्णमुर्ती, जॉनी लिवर तसेच डान्स मास्टर पं. बिरजु महाराजजी व उस्ताद झाकीर हुसैन यांच्या बरोबर त्यांनी भारतभर व भारताबाहेर अनेक कार्यक्रम केले आहेत.
|
| 16 |
+
’ओठावरली गाणी’ ह्या त्यांच्या मराठी गीतसंगीताच्या कार्यक्रमाचे ५०० च्यावर प्रयोग झाले आहेत. तसेच ’दिल ने फिर याद किया’ या त्यांच्या हिंदी गीत संगीताच्या कार्यक्रमाचे ३०० च्या वर प्रयोग झाले आहेत.
|
| 17 |
+
ई. टीव्ही. वरील गाजलेल्या ’स्वर संग्राम’ या संगीताच्या कार्यक्रमामध्ये त्यांनी परिक्षक (गुरू) म्हणुन काम केले, तसेच सह्याद्री वाहिनी वरिल ’ट्रिक्स मिक्स रिमिक्स’ या कार्यक्रमाचे सुत्रसंचालन केले.
|
| 18 |
+
त्यांनी सुपरहिट मराठी चित्रपट ’काय द्याच बोला’ आणि ’जाऊ तिथे खाऊ’ साठी संगीत दिले आहे.
|
| 19 |
+
सोनी टीव्ही वरील उर्मिला मार्तोंडकर सुत्र संचालित रियालिटी शो ’वार परिवार’ या कार्यक्रमातील त्यांच्या अदाकारीची जबरदस्त तारिफ केली गेली.
|
| 20 |
+
ई टीव्ही वरील ’माय फेयर मेलोडी’ या संगीत कार्यक्रमातील त्यांचा सहभाग वाखनण्याजोगा होता.
|
| 21 |
+
मनिष राज या अमेरिकास्थित तरुणाने लिहिलेली गाणी व त्यांनी संगीत दिलेला ’मस्त....’ हा त्यांचा नुकताच रिलिझ झालेला मराठी रॉक अल्बम खूप गाजतो आहे.
|
| 22 |
+
http://www.zagmag.net/index.php/home/biography/tyagraj-khadilkar-bio.html
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10507.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,2 @@
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
त्राक्या (बल्गेरियन: Тракия, Trakiya, ग्रीक: Θράκη, Thráki, तुर्की: Trakya) हा आग्नेय युरोपामधील एक ऐतिहासिक भौगोलिक प्रदेश आहे. त्राक्याच्या उत्तरेला बाल्कन पर्वतरांग, दक्षिणेला एजियन समुद्र तर पूर्वेला काळा समुद्र व मार्माराचा समुद्र आहेत. सध्याच्या राजकीय सीमांनुसार त्राक्याचा बराचसा भाग बल्गेरिया देशात तर उर्वरित भाग तुर्कस्तान व ग्रीसमध्ये स्थित आहे. डॅन्यूब नदी त्राक्याची उत्तर सीमा ठरवण्यासाठी वपरली जाते.
|
| 2 |
+
इस्तंबूल, प्लॉव्हडिव्ह, बुर्गास, एदिर्ने, तेकिर्दा इत्यादी त्राक्यामधील मोठी शहरे आहेत.
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10522.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,8 @@
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
त्रिंबक हे भारतातील महाराष्ट्र राज्यातील दक्षिण कोकणातील सिंधुदुर्ग जिल्ह्यातील मालवण तालुक्यातील एक गाव आहे.
|
| 2 |
+
पावसाळ्यात येथे भरपूर प्रमाणात पाऊस पडतो आणि हवामान समशीतोष्ण राहते. हिवाळ्यात येथील हवामान थंड असते व अनेकदा सकाळी धुके पडते. उन्हाळ्यात हवामान उष्ण असते. पावसाळ्यात येथे भातशेती केली जाते.
|
| 3 |
+
१.https://villageinfo.in/
|
| 4 |
+
२.https://www.census2011.co.in/
|
| 5 |
+
३.http://tourism.gov.in/
|
| 6 |
+
४.https://www.incredibleindia.org/
|
| 7 |
+
५.https://www.india.gov.in/topics/travel-tourism
|
| 8 |
+
६.https://www.mapsofindia.com/
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10545.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1 @@
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
तिरुचिरापल्ली आंतरराष्ट्रीय विमानतळ (आहसंवि: TRZ, आप्रविको: VOTR) (तमिळ: திருச்சிராப்பள்ளி பன்னாட்டு வானூர்தி நிலையம்) हा भारताच्या तिरुचिरापल्ली शहराजवळील एक विमानतळ आहे. हा विमानतळ तिरुचिरापल्ली शहरापासून ५ किमी अंतरावर राष्ट्रीय महामार्ग २१० वर स्थित आहे.
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10561.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1,2 @@
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
त्रिनगर विधानसभा मतदारसंघ हा दिल्लीमधील एक विधानसभा मतदारसंघ आहे. याची रचना १९९३मध्ये झाली.
|
| 2 |
+
हा विधानसभा मतदारसंघ चांदनी चौक लोकसभा मतदारसंघाच्या क्षेत्रांतर्गत येतो.
|
dataset/scraper_4/batch_11/wiki_s4_10571.txt
ADDED
|
@@ -0,0 +1 @@
|
|
|
|
|
|
|
| 1 |
+
त्रिनिदाद आणि टोबॅगो फुटबॉल संघ हा त्रिनिदाद आणि टोबॅगो देशाचा राष्ट्रीय पुरुष फुटबॉल संघ आहे.
|