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औरंगाबाद जिल्हा या विषयावर खालील लेख उपलब्ध आहेत:
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आपल्याला १००% कॉपीराइटमुक्त पब्लीक डॉमेन इतिहास संशोधनातील केवळ प्रमाण संशोधन साधने अथवा मूळ ग्रंथ इंटरनेटवर उपलब्ध करून देणे शक्य असल्यास विकिपीडियाच्या विकिस्रोत या मुक्तस्रोत बन्धू प्रकल्पात आपल्या अशा योगदानाचे आणि परिश्रमाचे स्वागत असेल.
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विकिस्रोतावर काय चालेल ?
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प्रताधिकारमुक्त दस्तऐवज
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संभाजीराजे शहाजीराजे भोसले हे शहाजीराजे भोसले यांचे थोरले पुत्र व छत्रपती शिवाजीराजे भोसले यांचे थोरले बंधु होते.
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'संभाजी' यांचा जन्म इ.स.१६२३ साली झाला. जिजाऊने त्यांचे नाव जन्मानंतर सहा महिन्याने 'चुलत दीर संभाजीराजे' यांच्या नावावरून ठेवले होते.
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विजापूरच्या आदिलशाही तर्फे कर्नाटकातील कनकगिरीच्या लढाईत अफजल खानाकडुन दगाफटक्याने इ.स. १६५५ साली ठार झाले.
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(https://youtube.com/shorts/BEcfgB5h2Ig?feature=share)
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वनडे आणि टी२०आ किट
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संयुक्त अरब अमिराती क्रिकेट संघ (अरबी: فريق الإمارات الوطني للكريكيت) हा पश्चिम आशियातील संयुक्त अरब अमिराती देशाचा राष्ट्रीय पुरुष क्रिकेट संघ आहे. १९८९ सालापासून आय.सी.सी.चा असोसिएट सदस्य असलेला यू.ए.ई. आजवर १९९६ व २०१५ ह्या दोन क्रिकेट विश्वचषक स्पर्धांमध्ये खेळला आहे.
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+
यू.ए.ई. आपले सामने खालील तीन स्थानांहून खेळतो.
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ऑस्ट्रेलिया · इंग्लंड · दक्षिण आफ्रिका · भारत · न्यू झीलंड · वेस्ट इंडीज · पाकिस्तान · श्रीलंका · झिम्बाब्वे · बांगलादेश · अफगानिस्तान · आयर्लंड
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| 5 |
+
बर्म्युडा · कॅनडा · केन्या · नेदरलँड्स · स्कॉटलंड
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आर्जेन्टीना ·
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| 7 |
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डेन्मार्क ·
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नामिबियन ·
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युगांडा ·
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+
बेल्जियम · बोत्स्वाना · केमॅन आयलंड · फिजी · फ्रांस · जर्मनी · जिब्राल्टर · हॉंगकॉंग · इस्त्राईल · इटली · जपान · कुवैत · मलेशिया · नेपाळ · नायजेरिया · पापुआ न्यू गिनी · सिंगापूर · टांझानिया · थायलंड · संयुक्त अरब अमीरात · अमेरिका · झांबिया
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| 11 |
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ऑस्ट्रीया ·
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| 12 |
+
बहामास ·
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| 13 |
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बहरैन ·
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बेलिझ ·
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भुतान ·
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ब्राझिल ·
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ब्रुनै ·
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चिली ·
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चीन ·
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कूक आयलंड ·
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कोस्टा रिका ·
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क्रोएशिया ·
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क्युबा ·
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सायप्रस ·
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झेक प्रजासत्ताक ·
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फ़िनलंड ·
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गांबिया ·
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घाना ·
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ग्रीस ·
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गुर्नसी ·
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इंडोनेशिया ·
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इराण ·
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आइल ऑफ मान ·
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जर्सी ·
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लेसोथो ·
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| 36 |
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लक्झेंबर्ग ·
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मलावी ·
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मालदीव ·
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माली ·
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माल्टा ·
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मेक्सिको ·
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मोरोक्को ·
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मोझांबिक ·
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म्यानमार ·
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| 45 |
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नॉर्वे ·
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ओमान ·
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पनामा ·
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फिलिपाईन्स ·
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पोर्तुगाल ·
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र्वांडा ·
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कतार ·
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सामोआ ·
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सौदी अरब ·
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सियेरा लिओन ·
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| 55 |
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स्लोव्हेनिया ·
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दक्षिण कोरिया ·
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| 57 |
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स्पेन ·
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सेंट हेलन ·
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सुरिनम ·
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स्विडन ·
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स्विझर्लंड ·
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टोंगा ·
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तुर्क आणि कैकोस द्विपे ·
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वनुतु ·
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| 65 |
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पूर्व आफ्रिका ·
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पूर्व आणि मध्य आफ्रिका ·
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पश्चिम आफ्रिका
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बेलारूस ·
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बल्गेरिया ·
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एस्टोनिया ·
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| 71 |
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आइसलँड ·
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लात्व्हिया ·
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न्यू कॅलिडोनिया ·
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पोलंड ·
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रशिया ·
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स्लोव्हेकिया ·
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तुर्कस्तान ·
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युक्रेन ·
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उरुग्वे
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चुका उधृत करा: "lower-alpha" नावाच्या गटाकरिता <ref>खूणपताका उपलब्ध आहेत, पण संबंधीत <references group="lower-alpha"/> खूण मिळाली नाही.
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वनडे आणि टी२०आ किट
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संयुक्त अरब अमिराती क्रिकेट संघ (अरबी: فريق الإمارات الوطني للكريكيت) हा पश्चिम आशियातील संयुक्त अरब अमिराती देशाचा राष्ट्रीय पुरुष क्रिकेट संघ आहे. १९८९ सालापासून आय.सी.सी.चा असोसिएट सदस्य असलेला यू.ए.ई. आजवर १९९६ व २०१५ ह्या दोन क्रिकेट विश्वचषक स्पर्धांमध्ये खेळला आहे.
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यू.ए.ई. आपले सामने खालील तीन स्थानांहून खेळतो.
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ऑस्ट्रेलिया · इंग्लंड · दक्षिण आफ्रिका · भारत · न्यू झीलंड · वेस्ट इंडीज · पाकिस्तान · श्रीलंका · झिम्बाब्वे · बांगलादेश · अफगानिस्तान · आयर्लंड
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| 5 |
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बर्म्युडा · कॅनडा · केन्या · नेदरलँड्स · स्कॉटलंड
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आर्जेन्टीना ·
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डेन्मार्क ·
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नामिबियन ·
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युगांडा ·
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बेल्जियम · बोत्स्वाना · केमॅन आयलंड · फिजी · फ्रांस · जर्मनी · जिब्राल्टर · हॉंगकॉंग · इस्त्राईल · इटली · जपान · कुवैत · मलेशिया · नेपाळ · नायजेरिया · पापुआ न्यू गिनी · सिंगापूर · टांझानिया · थायलंड · संयुक्त अरब अमीरात · अमेरिका · झांबिया
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| 11 |
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ऑस्ट्रीया ·
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| 12 |
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बहामास ·
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बहरैन ·
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बेलिझ ·
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भुतान ·
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क्युबा ·
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लात्व्हिया ·
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न्यू कॅलिडोनिया ·
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पोलंड ·
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चुका उधृत करा: "lower-alpha" नावाच्या गटाकरिता <ref>खूणपताका उपलब्ध आहेत, पण संबंधीत <references group="lower-alpha"/> खूण मिळाली नाही.
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dataset/scraper_9/batch_12/wiki_s9_10066.txt
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संयुक्त राष्ट्रसंघ किंवा संयुक्त राष्ट्रे (संरा) (इंग्रजी: United Nations) ही आंतरराष्ट्रीय विधी, आंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगती, मानवाधिकार या बाबींमध्ये सहकार्य सुलभ करणे आणि विश्वशांती प्राप्त करणे अशी घोषित उद्दिष्टे असलेली एक आंतरराष्ट्रीय संस्था आहे. 'संरा'ची स्थापना दुसऱ्या महायुद्धानंतर राष्ट्रसंघाच्या जागी देशा-देशांमधील युद्धे थांबविण्यासाठी आणि संवादासाठी अधिष्ठान पुरविण्याच्या उद्देशाने झाली होती. ही संस्था स्थापन करण्यासाठी भारताने पुढाकार घेतला होता, पण भारताचे या संस्थेच्या कामापासून नेहमी अलिप्त राहण्याचे धोरण राहिले आहे. आपले कार्यक्रम रावबिण्यासाठी संयुक्त राष्ट्र संघटनेच्या अनेक दुय्यम संस्था आहेत.[ संदर्भ हवा ]
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जगातील बहुतांश सर्व सार्वभौम राज्यांचा समावेश असणारी १९३ राष्ट्रे सांप्रत तिची सदस्य आहेत. जगभरात असलेल्या कार्यालयांमधून वर्षभरात होणाऱ्या नियमित बैठकांमधून ’संरा’ आणि तिच्या खास संस्था सारलक्षी आणि प्रशासकीय बाबींवर निर्णय घेतात. संस्थेची सहा मुख्य उपांगे आहेत : आमसभा (मुख्य चर्चाकारी सभा); सुरक्षा परिषद (शांती आणि सुरक्षेसाठीचे विवक्षित ठराव करणारी); आर्थिक व सामाजिक परिषद (आंतरराष्ट्रीय आर्थिक आणि सामाजिक सहकार्य व विकासास चालना देण्यात सहकार्यासाठी); सचिवालय (’संरा’ला आवश्यक अभ्यासकार्ये, माहिती आणि सुविधा देण्यासाठी); आंतरराष्ट्रीय न्यायालय (प्रमुख न्यायिक अंग) आणि ’संरा’ विश्वस्त संस्था (सध्या अक्रिय). ’संरा’ व्यवस्थेतील इतर प्रमुख संस्थांमध्ये विश्व स्वास्थ्य संघटना, विश्व अन्न कार्यक्रम आणि युनिसेफ यांचा समावेश *होतो. महासचिव ही ’संरा’ची सर्वात ठळक व्यक्ती असते आणि २००७ मध्ये हे पद दक्षिण कोरियाचे बान की-मून यांनी मिळविले. सदस्य राष्ट्रांकडून मिळणाऱ्या निर्धारित आणि ऐच्छिक देणग्यांमधून संस्थेला वित्तपुरवठा होतो आणि अरेबिक, चिनी, इंग्रजी, फ्रेंच, रशियन आणि स्पॅनिश या तिच्या सहा अधिकृत भाषा आहेत. ही विश्वसंघटना आहे. सचिवालयातील मुख्य हा महासचिव आहेसयुक राज्यशांतता प्रशापित करतात.[ संदर्भ हवा ]
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राष्ट्रसंघ कशासाठी स्थापन झाला, त्याचे हेतू व उद्दिष्टे काय आहेत हे राष्ट्रसंघाच्या घटनेत स्पष्ट केले आहे. त्यानुसार त्यांची प्रमुख उद्दिष्���े पुढीलप्रमाणे-
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२०१५ला या संघटनेला ७० वर्ष पूर्ण झाले
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खालील १७ संयुक्त राष्ट्रांच्या विशेष समित्या आहेत.
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सदस्य देश • आमसभा • सुरक्षा समिती • आर्थिक व सामाजिक परिषद • सचिवालय (सरचिटणीस) • आंतरराष्ट्रीय न्यायालय
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खाद्य व कृषी संस्था • आंतरराष्ट्रीय नागरी उड्डाण संस्था • आंतरराष्ट्रीय मजूर संस्था • आंतरराष्ट्रीय सागरी संस्था • IPCC • आंतरराष्ट्रीय अणुऊर्जा संस्था • संयुक्त राष्ट्रे औद्योगिक विकास संस्था • आंतरराष्ट्रीय दूरध्वनी संघ • संयुक्त राष्ट्रे एड्स कार्यक्रम • SCSL • UNCTAD • UNCITRAL • संयुक्त राष्ट्रे विकास समूह • संयुक्त राष्ट्रे विकास कार्यक्रम • UNDPI • संयुक्त राष्ट्रे पर्यावरण कार्यक्रम • युनेस्को • UNODC • UNFIP • संयुक्त राष्ट्रे लोकसंख्या निधी • संयुक्त राष्ट्रे मानवी हक्क उच्चायुक्त कार्यालय • संयुक्त राष्ट्रे निर्वासित उच्चायुक्त • संयुक्त राष्ट्रे मानवी हक्क समिती • UN-HABITAT • युनिसेफ • UNITAR • UNOSAT • UNRWA • UN Women • विश्व पर्यटन संस्था • जागतिक पोस्ट संघ • विश्व खाद्य कार्यक्रम • विश्व स्वास्थ्य संस्था • विश्व हवामान संस्था
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ही संयुक्त राष्ट्रसंघाच्या (यूएन) द्वारे थेट प्रशासित किंवा एकेकाळी प्रशासित केलेल्या प्रदेशांची यादी आहे. हे संयुक्त राष्ट्रांच्या ट्रस्ट टेरिटरीज सोबत गोंधळून जाऊ नयेत, जे संयुक्त राष्ट्रांच्या आदेशानुसार एकाच देशाने चालवायचे आहे.
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Northern Cyprus
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द्वारे दावा केला - Serbia
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विवर हे भारतातील महाराष्ट्र राज्यातील सातारा जिल्ह्यातील जावळी तालुक्यातील एक गाव आहे.
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हा भाग डोंगराळ व वनाच्छादित असल्याने येथील हवामान थंड व आल्हाददायक आहे. जून ते सप्टेंबर या कालावधीत नैर्ऋत्य मोसमी वाऱ्यांपासून वर्षातील सर्वाधिक पाऊस पडतो. येथे ऑक्टोबर ते मार्च हा हिवाळा हंगाम असतो. जून ते सप्टेंबर हा पावसाळा हंगाम असतो.एप्रिल ते जून हा उन्हाळा मोसम असतो.
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संरचनात्मक समायोजन कार्यक्रमात आंतरराष्ट्रीय नाणेनिधी आणि जागतिक बँकेने आर्थिक संकटात सापडलेल्या देशांना दिलेल्या कर्जांचा समावेश होतो.[१] कोणतीही नवी कर्जे घेताना (किंवा सध्याचा व्याजदर कमी करण्यासाठी) कर्जे घेणाऱ्या देशांनी काही धोरणे राबवणे वरील दोन्ही ब्रेटन वूड्स संस्थांच्या नियमानुसार आवश्यक आहे. या कर्जांच्या शर्तींच्या कलमांवर टीका झाली कारण ती सामाजिक क्षेत्रावर परिणाम करतात.[१]
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या कार्यक्रमाद्वारे विकसनशील देशांच्या अर्थव्यवस्था अधिक बाजाराभिमुख बनवणे अपेक्षित आहे. ज्यामुळे देशांना व्यापार आणि उत्पादनावर जास्त लक्ष देणे भाग पडेल.[२]
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[सोप्या शब्दात लिहा]
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संवाक्य ( संस्कृत </link>, संवाक्य , Greek </link> , syllogismos, 'निष्कर्ष, अनुमान') हा एक प्रकारचा तार्किक युक्तिवाद आहे जो प्रतिपादन केलेल्या अथवा सत्य असल्याचे गृहित धरलेल्या दोन प्रस्तावांच्या आधारे अभ्युह्य तर्क वापरून निष्कर्षापर्यंत पोहोचतो ।
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पुरातन काळामध्ये, दोन प्रतिस्पर्धी सिलॉजिस्टिक सिद्धांत अस्तित्त्वात होते: ॲरिस्टोटेलियन सिलोजिझम आणि स्टोइक सिलोजिझम. [१]
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संवादिनी (हार्मोनियम/बाजाची पेटी/पेटी) हिचा शोध पॅरिस शहरातील अलेक्झांडर डिबेन यांनी इ.स. १७७० मध्ये लावला. भारतात हे वाद्य इ.स. १८००नंतर युरोपीय लोकांनी आणले.
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हाताने किंवा पायाने भात्याद्वारे हवा भरून पितळी कंपन तयार करणाऱ्या (सूर) शिट्ट्यांच्या मार्फत सुरेल ध्वनी निर्माण होतो. या वाद्यात डावीकडील बाजूकडून सुरुवात केल्यास प्रथम २ व नंतर ३ असे काळ्या पट्ट्यांचे तीन समूह असतात. भारतीय संगीतात या बाजाच्या पेटीचा गायकाला साथ देण्यासाठी किंवा एकलवादनासाठी उपयोग होतो. कीर्तने, सुगम संगीत इत्यादी ठिकाणी पेटी साथीला असते.
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हार्मोनियममध्ये दोन घटक महत्त्वाचे असतात : स्वराची पत्ती व हवेचा भाता. आवाज निघतो तो पत्तीतून. पत्तीत भरल्या जाणाऱ्या हवेला नियंत्रित करण्याचे काम भाता करतो. प्रत्येक स्वरासाठी एक लांबट चौकट असते. चौकटीच्या खाचेत पत्ती खाली-वर होऊ शकते. ह्या स्वरचौकटी एका ओळीत एक फळीवर चिकटवितात व ती फळी पेटीत अशा रीतीने बसवितात की, भात्यातून येणारी हवा त्या फळीतून शिरेल. उच्च प्रतीच्या स्वरचौकटी पूर्वी परदेशांतून, विशेषतः जर्मनी व फ्रान्समधून, मागवीत असत पण आता त्या भारतात तयार होऊ लागल्या असून पालिताणा( गुजरात) येथे मोठ्या प्रमाणावर तयार होतात. भाता दाबला म्हणजेे त्यातून निघालेली हवा स्वरपत्तिकेच्या खाली बंद असलेल्या चौकटीत कोंडली जाते. या चौकटीत चार-पाच मोठी छिद्रे अंतराअंतरावर असतात व ती छोट्या लाकडी पट्ट्यांनी बंद असतात. त्यांना लोखंडी सळ्या जोडून त्या सळ्यांची टोके पेटीच्या बाहेर काढलेली असतात. हार्मोनिअम वाजविताना ह्या सळ्या ओढून बंद चौकटीतील एक किंवा अधिक छिद्रे उघडतात त्यामुळे भात्यातून आलेली हवा या छिद्रांतून स्वरपत्तिकेत शिरते. स्वर-पत्तिकेच्या वर, पेटीच्या बाहेर, वरच्या चौकटीत प्रत्येक स्वरचौकटीला जोडणारी एक अशा खाचा केलेल्या असतात व त्यांवर प्रत्येक स्वराची एक अशा, समोर काळ्या व पांढऱ्या रंगांच्या आणि मागे टणक तारेनेदाबून धरलेल्या लांब पट्ट्या असतात. एक एक पट्टी बोटाने दाबलीकी, तिच्याखालची खाच उघडी पडते व तिच्यातून तसेच आतल्यास्वरचौकटीतून आलेली हवा बाहेर पडते. हवेच्या या संचलनामुळे स्वरचौकटीतील पत्ती कंपित होऊन आवाज निघतो. स्वरपट्टीवरून बोट काढले की, मागची खाच बंद होते व हवेला बाह���र पडण्यास वाव न मिळाल्यामुळे पत्ती कंपित होत नाही. यात साडेतीन सप्तकाचे स्वर मिळतात. हार्मोनियममध्ये स्वर टेंपर्ड स्केलमध्ये लावलेले असतात. टेंपर्ड स्केलमध्ये स्वरसप्तकातील कोमल व शुद्ध स्वरांचे स्वरूप सप्तकाचेसमान बारा भाग करून योजलेले असते कारण सप्तकात प्रमुख स्वरसात म्हणजे शुद्ध किंवा तीव्र व उपप्रमुख किंवा कोमल मिळून बारा, सात पट्ट्या पांढऱ्या व पाच काळ्या रंगाच्या असतात. स्वरभरणा आणि हाताळ-ण्यास सुलभता यांमुळे भारतात या वाद्याचा प्रसार व प्रचार झपाट्याने झाला.
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संवादिनी हे नाव भारतीय वाद्याचे आहे असे वाटते, पण ते तसे नाही. हार्मोनियम या मूळ पाश्चात्त्य वाद्याचे ते भारतीय नाव आहे. १७७० इ.स.च्या आसपास आँर्गन या रीङवाल्या वाद्यामध्ये काही नवे प्रयोग होण्यास सुरुवात झाली. मुळात तीन स्वरांचा मेळ जो पाश्चात्त्य संगीतात आवश्यक असतो, तो साध्य करण्याचे उद्दिष्ट ज्या वाद्याने साध्य होते, तशा वाद्यांची आवश्यकता नव्या रीङ वाद्यांमध्ये निर्माण होऊ लागली. त्या प्रयत्नांतूनच १८४० मध्ये फ्रान्समध्ये अलेक्झांर दिबेन याने अशा स्वरपट्ट्या असणारे हे हलक्या वजनाचे वाद्य शोधून काढले. हार्मनी म्हणजे स्वरांच्या मिश्रणाने साधला जाणारा संवाद. यालाच सहज भाषेत स्वरमिश्रण म्हणण्यास हरकत नाही. एकमेकास अनुकूल असणाऱ्या स्वरांच्या संवादामुळे भारतीय संगीतकारांनी या वाद्याचे नाव संवादिनी ठेवले.
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हार्मोनियम विदेशातून आलेले हे पहिलेच वाद्य नाही. यापूर्वी व्हायोलिन भारतात आले होते, आणि या वाद्याचा प्रवेश पहिल्यांदा दाक्षिणात्य संगीतात झाला, त्यानंतर ते वाद्य हिंदुस्तानी संगीतात आले.
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हिंदुस्तानी संगीतासाठी या वाद्याचा प्रथम प्रयोग मराठी संगीत नाटकांच्या माध्यमातून सुरू झाला तो १८८२ साली. संगीत शाकुंतल या पहिल्या संगीत नाटकाने आँर्गनचा उपयोग केला. त्यानंतर संगीत साैभद्र हे नाटकही त्यातल्या संगीतासाठी आणि
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ऑर्गनच्या साहाय्याने गाजले. मराठी संगीत नाटकानी शास्त्रीय संगीतातल्या बंदिशींचाही पदांसाठी उपयोग केला आणि त्यातूनच हार्मोनियमने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीतामधले आपले स्थान बळकट केले. नाट्यसंगीताच्या माध्यमातूनच एका स्वतंत्र स्वरवाद्याची देणगी भारतीय संगीताला मिळाली.
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भारतीय संगीत हे मूलतः बैठकीचे असल्यामुळे खाली बसून वाजिवण्यासाठी या वाद्यामध्ये मूलभूत बदल झाले ते बंगालच्या कारागिरानी बनविलेल्या हातपेटीमुळे. कलकत्त्याच्या द्वारिकानाथ घोष यांनी १८७५ मध्ये सर्वप्रथम भारतीय संगीताल उपयुक्त हार्मोनियमची निर्मिती केली. द्वारिका दास या त्यांच्या फर्मने आधुनिक हातपेटीची भारतात पहिल्यांदा निर्मिती आणि विक्री केली. त्यानंतर टी. एस्. रामचंद्र ॲन्ड कंपनीने महाराष्ट्रात याची निर्मिती सुरू केली. त्यानंतर गुजरातमध्ये अहमदाबाद येथे गणपतराव बर्वे यांनी हातपेट्या बनवल्या. दुसऱ्या महायुद्धानंतर युरोपमधून आँर्गनची आयातही बंद झाली. मग भावनगरमध्ये आणि पालिटाणामध्ये पेट्यांसहित ध्वनिपट्ट्यांचीही निर्मिती सुरू झाली. महाराष्ट्र, गुजरात, बंगाल आणि पंजाब प्रांतात दर्जेदार हार्मोनियम बनविले जाऊ लागल्या. बेळगावातही झीलु सुतार आणि रामचंद्र हुदलीकर यानी उत्तम दर्जाचे हार्मोनियम बनविलेया. २२ श्रुतियुक्त हार्मोनियम बनिवण्यात हुदलीकर यांचा हातखंडा होता.
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पाश्चात्त्य सुरावटींप्रमाणे बनलेले हार्मोनियम हिंदुस्तानी संगीतासाठी कधी उपयोगात आणले जाण्याची शक्यताच नव्हती. परंतु उस्ताद अब्दुल करीमखाँ यांचे शिष्य बाळकृष्णबुवा कपिलेश्वरी यानी गंधार ट्यून्ङ हार्मोनियम बनवून ते हिंदुस्तानी गायकीला योग्य बनविले. गं. बा. आचरेकर यानी श्रुति हार्मोनियम बनविले. त्यांचेच चिरंजीव बा. गं आच्ररेकर यानीही ते कार्य पुढे चालविले. ङाँ. विद्याधर ओक यानीही २२ श्रुतींची मेलोङियम बनविली आहे. बेळगावचेच हरी गोरे यानी पितळेचा रस तयार करून रीड्स बनविण्याचा कारखाना सुरू केला. स्वदेशी चळवळीला प्राधान्य देऊन त्यानी संपूर्ण भारतीय बनावटीचे हार्मोनियम बनविले. कलकत्ता, दिल्ली आणि इतर संगीतपेठांत त्यांच्या हार्मोनियमला मागणी होती. वाद्यसंगीताला आवश्यक स्वरपेट्याही ते उत्तम बनवीत. म्हैसूरच्या महाराजानी त्यांचा या कार्याबद्दल गौरवही केला होता. हरिभाऊ गोरे यांनी चार स्वर असणाऱ्या वाद्यांना षड्ज-पंचम- मध्यमाचा स्वरपुरवठा करणाऱ्या छोट्या तंबोरापेट्याही निर्माण केल्या. पंडित पन्नालाल घोष, पंडित व्ही जी. जोग या महान वादक कलाकारांनी या सुलभ तंबोरा पेट्यांचा वापर सुरू केला आणि वजनाने हलक्या व प्रवासात सहज नेऊ शकणाऱ्या या वाद्याला प्रतिष्ठा मिळवून दि���ी.
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पं.विश्वनाथ कान्हेरे ,अजय जोगळेकर, अप्पा जळगावकर (पुणे), अरविंद थत्ते, आदित्य ओक, एकनाथ ठाकुरदास, केदार नाफडे, गणपतराव पुरोहित, गुलाम रसुल बशीरखाँ (बडोदा), गोविंदराव टेंबे (कोल्हापूर-१८८१-१९५७), गुंडोपंत वालावलकर गोविंदराव पटवर्धन, चिन्मय कोल्हटकर, चैतन्य कुंटे, जयंत बोस, तन्मय देवचक्के,मिलिंद कुलकर्णी,वरद सोहनी तुळशीदास बोरकर, श्रीराम हसबनीस, दिनकर शर्मा, दीपक मराठे, नन्हेबाबू कुंवर (बिदर), निर्मला काकोडे, ङाॅ. पाबळकर, पी. मधुकर (मुंबई-१९१६-१९६७), पुट्टराज गवई, पुरुषोत्तम वालावलकर (मुंबई), पु. ल. देशपांडे, प्रमोद मराठे, बच्चुभाई भंडारे (मुंबई-१८७८-१९०९), बंडूभैय्या चाैघुले (इंदूर), बबन मांजरेकर, बलदेव मिश्र (वाराणसी), बाबुराव बोरकर (बेळगाव), बाबुसिंह (हैद्राबाद), बाळ माटे, भीष्मदेव चॅटर्जी, मनोहर चिमोटे (मुंबई), मुनेश्वर दयाल, मोहनलाल, रवींद्र काटोटी, रवींद्र माने, राजाभाऊ कोसके, राजेंद्र वेैशंपायन, रामभाऊ विजापुरे (बेळगाव- १९१७-२०१०), लक्ष्मणसिंंह, वसंत कनकापूर (धारवाड), वासंती म्हापसेकर, विजय घासकडवी, विठ्ठलराव कोरगावकर (बेळगाव-१८८४- १९७४), विनय मिश्र, शेषाद्री गवई, सारंग कुलकर्णी, सीमा शिरोडकर, सुधांशु कुलकर्णी, सुधीर नायक, अश्विन वालावलकर, सुयोग कुंडलकर, सुवेंदु बॅनर्जी, सोहनलाल, हणमंतराव वाळवेकर (धारवाड), ज्ञानप्रकाश घोष, पुंडलिक कोल्हटकर डोंबिवली
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संवादिनी हे साथीचे वाद्य म्हणून एकोणीसाव्या शतकाच्या आरंभापासून सर्वमान्य झालेले वाद्य आहे. सर्व ख्यालगायकानी या वाद्याला अगदी खुशीने अंगीकारिले. ज्यांचे गायन श्रुतियुक्त असे त्यानीही हार्मोनियम साथीला घेतले आणि गायकांचे कणसुर सहजपणे सामावून घेऊन त्याना जोरकसपणा देण्याचे कामही हार्मोनियमने केले. परंतु मींडकाम करता न येणे, गमक न निघणे अशा काही कारणांमुळे स्वतंत्र वाद्य म्हणून त्याची मान्यता आकाशवाणीने बाळकृष्ण केसकरांच्या केंद्रीय मंत्रिपदाच्या कारकिर्दीत रद्द केली. (केसकरांनी चित्रपट संगीत, क्रिकेट समालोचन यांनाही अकाशवाणीवरून बंद केले!) बेळगावचे हार्मोनियमवादक रामभाऊ विजापुरे यानी १९४५ साली हैदराबाद आकाशवाणीवर स्वतंत्र वादनाचा सर्वात पहिला कार्यक्रम केला. निजाम सरकारचे कायदे कानून इतर परगण्यांपेक्षा वेगळे असल्याने हे शक्य झाले. पण इतरत्र कुठेही आकाशवाणीवर हार्म��नियमला मान्यता नव्हतीच. पुण्याचे हार्मोनियमवादक डाँ. पाबळकर, बेळगावचे विठ्ठलराव कोरगावकर यांच्यासारख्यानी स्वतंत्र वादनाच्या मागणीसाठी केंद्रसरकारकडे जोर लावला होता. अनेक वर्षांनंतर (सुमारे २० वर्षांनंतर) त्या प्रयत्नांना यश मिळाले व १९७२मध्ये हार्मोनियमला आकाशवाणीची मान्यता मिळाली. त्यानंतर बऱ्याच वादकांचे स्वतंत्र वादनाचे कार्यक्रम आकाशवाणीच्या विविध केंद्रांवरून प्रसारित झाले. १९७२ आणि ७३ मध्ये रामभाऊ विजापुरे आणि वसंत कनकापूर यांचे धारवाड केंद्रावर अनेकवेळा वादन झाले. त्यानंतर एका वादकाच्या बेसुर वादनामुळे हार्मोनियमवर पुन्हा बंदी आली. त्यानंतर कित्येक वर्षांनी १ एप्रिल २०१८ रोजी बेळगावचे रविंद्र काटोटी यांचा रविवारच्या राष्ट्रीय संगीत प्रसारणात स्वतंत्र संवादिनीवादनाचा कार्यक्रम झाला.
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विद्वान बी. अरुणाचलप्पा, विद्वान टी. चौडय्या, विद्वान नरसिंहय्या, विद्वान पल्लदम वेंकटरमण राव, विद्वान आर. परमशिवन, एस. श्रीनिवास, सी. रामदास अशा अनेकांनी कर्नाटक संगीतासाठी संवादिनीचा प्रभावी उपयोग केला. कर्नाटक संगीत संवादिनीवर सादर करणारे कलाकार आकाशवाणीच्या ग्रेडेशन पासूनही वंचित नव्हते.
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१. भारतीय संगीत व संगीतशास्त्र-बा. गं. आचरेकर, महाराष्ट्र राज्य साहित्य संस्कृति मंङळ
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२. विश्व संवादिनी शृंग स्मरणिका ५,६,७ जाने. २०१८
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३. स्वरऋणी - लेखिका स्मिता सुनील नाईक
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रोग बरे करण्यासाठी देण्यात येणाऱ्या अनेक मसाजांच्या अनेक पद्धतींपैकी संवाहनशास्त्र अर्थात मसाज ही एक पद्धत आहे. आरोग्य रक्षणासाठी उपयुक्त अशी ही पद्धत आहे.
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अधिक माहिती येथे आहे
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भारताची संविधान सभा (अन्य नावे: भारताची संविधान समिती, भारताची घटना समिती, भारताची घटना परिषद) ही भारताचे संविधान निर्माण करण्यासाठी १९४६ मध्ये स्थापन करण्यात आली होती. इ.स.१९४७ मध्ये भारताला ब्रिटिशांकडून स्वातंत्र्य दिल्यानंतर, संविधान सभेने भारताची पहिली संसद म्हणूनही काम केले.
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भारतासाठी संविधान सभा बनविण्याची कल्पना सर्वप्रथम १९३४ मध्ये मानवेंद्रनाथ रॉय यांनी दिली होती, ते भारतातील साम्यवादी चळवळीचे अग्रणी आणि मूलगामी लोकशाहीचे पुरस्कर्ते होते. १९३५ मध्ये ही भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेसची अधिकृत मागणी बनली, सी. राजगोपालाचारी १५ नोव्हेंबर १९३९. रोजी प्रौढ मतदानावर आधारित संविधान सभा घेण्याच्या मागणीसंदर्भात आवाज उठविला आणि ब्रिटिशांनी ऑगस्ट १९४० मध्ये हे मान्य केले.
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८ ऑगस्ट १९४० रोजी राज्यपाल-जनरल कार्यकारी परिषद आणि युद्ध सल्लागार.
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परिषद स्थापना याबद्दल व्हायसरॉय लॉर्ड लिनलिथगो यांनी एक विधान केले. ऑगस्ट ऑफर म्हणून ओळखल्या जाणाऱ्या या ऑफरमध्ये अल्पसंख्यांकांच्या मतांना पूर्ण वजन देण्यात आले आणि भारतीयांना स्वतःची राज्यघटना तयार करण्याची परवानगी देण्यात आली. १९४६ च्या कॅबिनेट मिशन प्लॅनच्या अंतर्गत संविधानसभेसाठी प्रथमच निवडणुका घेण्यात आल्या. भारतीय राज्यघटनेचा मसुदा संविधानसभेने तयार केला आणि त्याची अंमलबजावणी १ मे १९४६ रोजी कॅबिनेट मिशन योजनेंतर्गत करण्यात आली. संविधान सभा सदस्य प्रांतीय संमेलनाद्वारे एकल, हस्तांतरणीय-मत द्वारे निवडले गेले. प्रमाणिक प्रतिनिधित्व प्रणाली. संविधान सभाचे एकूण सदस्यत्व ३८९ होते, त्यापैकी २९२ राज्यांचे प्रतिनिधी होते,९३ हे संस्थानाचे प्रतिनिधी होते आणि चार दिल्लीचे मुख्य आयुक्त प्रांत, अजमेर-मेरवाडा, कुर्ग आणि ब्रिटिश बलुचिस्तानचे होते.
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ऑगस्ट १९४६ पर्यंत ब्रिटीश भारतीय प्रांतांना देण्यात आलेल्या २९६ जागांसाठी झालेल्या निवडणुका पूर्ण झाल्या. काँग्रेसने २०८ जागा जिंकल्या आणि मुस्लिम लीगने ७३. जागा जिंकल्या. या निवडणुकीनंतर मुस्लिम लीगने काँग्रेसला सहकारण्यास नकार दिला. सप्टेंबर २०१}}} आणि राजकीय परिस्थिती ढासळली. हिंदू-मुस्लिम दंगल सुरू झाली आणि मुस्लिम लीगने भारतातील मुस्लिमांसाठी स्वतंत्र मतदार संघाची मागणी केली. ३ जून १९४७ रोजी लॉर्ड म��उंटबॅटन, भारताच्या शेवटच्या ब्रिटिश गव्हर्नर जनरलने कॅबिनेट मिशन योजनेला भंग करण्याचा आपला हेतू जाहीर केला; याचा शेवट भारतीय स्वातंत्र्य कायदा १९४७ आणि भारत आणि पाकिस्तानच्या स्वतंत्र राष्ट्रांमध्ये झाला. भारतीय स्वातंत्र्य कायदा १८ जुलै १९४७ रोजी संमत झाला आणि जून १९४७ मध्ये भारत स्वतंत्र होईल अशी घोषणा केली गेली असली तरी १५ ऑगस्ट १९४७ रोजी या घटनेने स्वातंत्र्य मिळवून दिले. संविधान सभा प्रथमच ९ डिसेंबर १९४६ रोजी पुन्हा एकत्र येऊन बैठक झाली. १४ ऑगस्ट १९४७ रोजी भारतातील ब्रिटिश संसदेच्या अधिकाराच्या सार्वभौम संस्था आणि उत्तराधिकारी म्हणून. फाळणीच्या परिणामी, माउंटबेटन योजनेत, ३ जून १९४७ रोजी स्वतंत्र पाकिस्तानची संविधान सभाची स्थापना केली गेली. पाकिस्तानमध्ये समाविष्ट झालेल्या क्षेत्रातील प्रतिनिधींनी भारतीय संविधान सभा सदस्य म्हणून काम करणे थांबवले. पश्चिम पंजाब आणि पूर्व बंगाल (जे पाकिस्तानचा एक भाग बनले, जरी पूर्व बंगाल नंतर नंतर] होण्यासाठी बांगलादेश) होण्यासाठी नवीन निवडणुका घेण्यात आल्या; पुनर्रचनेनंतर संविधान सभाचे सदस्यत्व २९९ होते आणि ३१ डिसेंबर १९४७ रोजी त्याची बैठक झाली.
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घटनेचा मसुदा वेगवेगळ्या जाती, प्रदेश धर्म, लिंग इत्यादींच्या २९९ प्रतिनिधींनी तयार केला होता. हे प्रतिनिधी ११४ दिवसांपर्यंत ३ वर्षात (२ वर्ष ११ महिने आणि १८ दिवसांचे) नेमके काय असावेत बसले आणि घटनेत काय असावे आणि काय काय काय कायदे यावर चर्चा केली..
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भारताची राज्यघटना ही जगातील सर्वात मोठी घटना आहे कारण त्यात इतर देशांच्या घटनांमधील कायद्यांचा समावेश आहे.
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अप्रत्यक्षपणे निवडलेल्या प्रतिनिधींचा समावेश असलेल्यासभेधान सभेची स्थापना भारताच्या घटनेच्या मसुद्यासाठी (आताचे पाकिस्तान आणि बांगलादेशातील स्वतंत्र देशांसह) केली गेली. १९४७ मध्ये स्वातंत्र्यानंतर तीन वर्षे, भारतातील पहिले संसद. सार्वभौम प्रौढ मताधिकारांच्या आधारे ही विधानसभा निवडली गेली नव्हती आणि मुस्लिम आणि शीख यांना अल्पसंख्याक म्हणून विशेष प्रतिनिधित्व प्राप्त झाले. मुस्लिम लीगने आपली निर्मिती रोखण्यात अपयशी ठरल्यानंतर विधानसभेवर बहिष्कार टाकला. मतदार संघाचा एक मोठा भाग काँग्रेस पक्षाकडून एकपक्षीय वातावरणात काढला गेला असला तरी काँग्रेस पक्षाने पु��ाणमतवादी उद्योगपतींपासून ते कट्टरपंथी मार्क्सवादी ते हिंदू पुनरुज्जीवनवादी अशा विविध मतांचा समावेश केला.
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९ डिसेंबर १९४६ रोजी दिल्लीत प्रथमच संविधान सभेची बैठक झाली आणि त्याचे शेवटचे अधिवेशन २४ जानेवारी १९५० रोजी झाले.[१]
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जवाहरलाल नेहरूंनी संविधान सभेबाबत आशा व्यक्त केली:
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या संमेलनाचे पहिले काम म्हणजे एका नवीन राज्यघटनेच्या माध्यमातून भारत मुक्त करणे, उपासमार लोकांना खायला घालणे, आणि नग्न लोकांना वस्त्रे घालणे आणि प्रत्येक भारतीयाला त्याच्या क्षमतेनुसार स्वत:चा विकास करण्याची संपूर्ण संधी देणे हे या विधानसभेचे पहिले काम आहे. हे नक्कीच एक उत्तम कार्य आहे. आज भारत बघा. आम्ही बऱ्याच ठिकाणी निराशेच्या ठिकाणी बसलो आहोत आणि बऱ्याच शहरांमध्ये अशांतता निर्माण झाली आहे. या भांडणे आणि कलहांद्वारे वातावरणात अधिग्रहण होते ज्याला जातीय त्रास होतो आणि दुर्दैवाने आम्ही कधीकधी त्या टाळू शकत नाही. पण सध्या गरीब आणि उपासमारची समस्या कशी सोडवायची हा भारतातील सर्वात मोठा आणि महत्त्वाचा प्रश्न आहे. आपण जिथे जिथे वळू तिथे आपण या समस्येचा सामना करतो. आम्ही लवकरच ही समस्या सोडवू शकत नसल्यास, आमची सर्व कागद घटने निरुपयोगी आणि निरुपयोगी ठरतील. हा मुद्दा लक्षात घेऊन पुढे ढकला आणि प्रतीक्षा करण्यास कोणी सुचवू शकेल?भारतीय नेते आणि ब्रिटनमधील १९४६ चे कॅबिनेट मिशनच्या सदस्यांमधील वाटाघाटीनंतर संविधान सभा स्थापन झाली तेव्हा भारत अजूनही ब्रिटिशांच्या अधिपत्याखाली होता. प्रांतिक विधानसभा निवडणुका १९४६ च्या मध्यावर घेण्यात आल्या. संविधान सभा सदस्य अप्रत्यक्षपणे नव्याने निवडलेल्या प्रांतीय असेंब्लीच्या सदस्यांद्वारे निवडले गेले आणि पाकिस्तानचा भाग बनविणाऱ्या प्रांतांसाठी प्रारंभी प्रतिनिधींचा समावेश होता. त्यातील काही आता बांग्लादेश मध्ये आहेत. संविधान सभेचे २९९ प्रतिनिधी होते, ज्यात पंधरा
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[२] महिला.
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अंतरिम सरकारची स्थापना २ सप्टेंबर १९४६ रोजी नवनिर्वाचित मतदार संघातून झाली. काँग्रेस पार्टी यांनी विधानसभेत (बहुतेक ६९ टक्के जागा) आणि बहुतेक जागा मुस्लिम लीग यांनी विधानसभेत राखीव ठेवली होती. मुसलमान. तेथे अनुसूचित जाती महासंघ, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी आणि युनियनवादी पार्टी सारख्या छोट्या पक्षांचे सदस्यही होते.
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जून १९४७ मध्ये सिंध, पूर्व बंगाल, बलुचिस्तान, पश्चिम पंजाब आणि उत्तर-पश्चिम फ्रंटियर प्रांत यांचे प्रतिनिधी मंडळे उत्तर पश्चिम फ्रंटियर प्रांत कराची मध्ये बैठक घेऊन पाकिस्तानची संविधान सभा स्थापन करण्यासाठी माघार घेतली. १५ ऑगस्ट १९४७. रोजी भारताचे वर्चस्व आणि पाकिस्तानचे वर्चस्व स्वतंत्र राष्ट्र बनले आणि कराचीमध्ये माघार न घेतलेल्या संविधान समितीचे सदस्य भारताचे संसद झाले. मुस्लिम लीगचे २८ सदस्य भारतीय विधानसभेत सहभागी झाले आणि नंतर संस्थानिकांची यादी मधून ९३ सदस्य नामित झाले; काँग्रेस पक्षाने बहुमत ८२ टक्के मिळविले.
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९ डिसेंबर १९४६ रोजी सकाळी ११ वाजता संविधान सभेचे पहिले अधिवेशन सुरू झाले, तेथे २११ सदस्य उपस्थित होते. १९४७ च्या सुरुवातीस, मुस्लिम लीग आणि संस्थानिकांचे प्रतिनिधी सामील झाले नव्हते आणि संविधान सभेने २६ नोव्हेंबर १९४९ रोजी राज्यघटनेच्या अंतिम मसुद्याला मंजुरी दिली. २४ जानेवारी १९५० रोजी राज्यघटनेचा परिणाम झाला ( प्रजासत्ताक दिन ) म्हणून आणि संविधान सभा ही भारताची अस्थायी संसद बनली (१९५२ मध्ये नव्या राज्यघटनेअंतर्गत झालेल्या पहिल्या निवडणुका होईपर्यंत सुरू).
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भारतीय स्वातंत्र्याचा कायदा १९४७ अन्वये, संविधान सभा सार्वभौम बनवली व आणि तिला कायदेमंडळाचा दर्जा सुद्धा प्राप्त झाला. यानुसार संविधान सभेला दोन प्रमुख कार्ये देण्यात आली ती म्हणजे : स्वतंत्र भारतासाठी घटना निर्मिती करणे आणि देशासाठी कायदे करणे. ही दोन्ही कामे वेगवेगळ्या दिवशी पार पाडली जात असे. जेव्हा संविधान सभा संविधान निर्मितीचे कार्य करत असे तेव्हा तिचे अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद असत आणि संविधान सभा कायदेमंडळ म्हणून कार्य करतांना ग.वा. मावळणकर तिचे अध्यक्ष म्हणून कार्य करत असत.
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वरील दोन कामांव्यतिरिक्त संविधान सभेने पुढील इतर कामे केली.
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डॉ. राजेंद्र प्रसाद यांची संविधान सभेचे अध्यक्ष म्हणून तर हरेंद्र कुमार मुखर्जी यांची उपाध्यक्ष म्हणून निवड झाली. आणि मुखर्जी हे बंगालमधील ख्रिश्चन आणि कलकत्ता विद्यापीठाचे माजी कुलगुरू होते. विधानसभेच्या अल्पसंख्यांक समितीचे अध्यक्षपदी, भारत प्रजासत्ताक झाल्यानंतर मुखर्जी यांना पश्चिम बंगालचा राज्यपाल म्हणून नियुक्त करण्यात आले. न्यायशास्त्रज्ञ बी.एन. राव विधानसभेचे घटनात्मक सल्लागार म्���णून नियुक्त केले गेले; बी.एन. राव यांनी घटनेचा मूळ मसुदा तयार केला आणि नंतर हेग मधील हेग मधील कायमस्वरुपी आंतरराष्ट्रीय न्यायालयात न्यायाधीश म्हणून नेमणूक केली.
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संविधान सभेच्या कामाचे पाच टप्पे होते:
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संविधान सभेने संविधान बनवण्याच्या वेगवेगळ्या कामांसाठी एकूण २२ समित्या नेमल्या होत्या. यापैकी आठ प्रमुख समित्या आणि इतर उपसमित्या होत्या.
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प्रमुख समित्या
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+
घटनेची अलीकडील काळात टीका केली गेली आहे की घटनात्मक सदस्यांची निवड सार्वभौम मताधिक्याने नव्हे तर उलट ते मुख्यत: काँग्रेस पक्षाचे सदस्य होते. असा युक्तिवाद केला जात आहे की काँग्रेस पक्षाने ब्रिटिश सत्ता उलथून टाकण्याचे नव्हे तर त्यांची सत्ता भारतीयांच्या हाती हस्तांतरित करण्याचे उद्दीष्ट ठेवले आहे. भारतीय संविधान: चमत्कारी, आत्मसमर्पण, आशा, ”या त्यांच्या पुस्तकात राजीव धवन यांनी असा युक्तिवाद केला आहे की राज्यघटना तयार करण्यात भारतीय लोकांचा फारसा विचार नव्हता जो त्यांना स्वीकारण्याशिवाय पर्याय नव्हता. संविधान सभासद हे बहुतेक प्रबळ जातींचे हिंदू पुरुष होते, ज्यांनी शेवटी घटनेतील काही विशिष्ट हिंदू, वर्चस्व-जाती आणि पुरुषप्रधान पक्षांना अंतर्भूत केले.
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+
[३]
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+
[४]
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+
एनी मस्करेन,
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+
ओ.व्ही.अलगेसन,
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+
सौ. अम्मू स्वामीनाथन,
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+
एम.अनंतहासं आयंगर,
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+
मोटुरी सत्यनारायण,
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| 31 |
+
सौ. दक्षयानी वलयुद्धन,
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| 32 |
+
श्रीमती जी. दुर्गाबाई,
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+
कला वेंकटराव,
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| 34 |
+
एन. गोपालास्वामी अय्यंगार,
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| 35 |
+
डी. गोविंदा दास,
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| 36 |
+
रेव्ह. जेरोम डिसोझा,
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| 37 |
+
पी. कक्कन,
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| 38 |
+
टी.एम. कालियानान गौंडर,
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| 39 |
+
के. कामराज,
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| 40 |
+
व्ही.सी. केसावा राव,
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| 41 |
+
टी.टी. कृष्णामचारी,
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| 42 |
+
अल्लादी कृष्णस्वामी अय्यर
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| 43 |
+
एल. कृष्णस्वामी भारती,
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| 44 |
+
पी.कुनिरामन,
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| 45 |
+
मोसालीकांती तिरुमाला राव,
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| 46 |
+
व्ही. आय. मुनुस्वामी पिल्लई,
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| 47 |
+
एम. ए. मुथिय्या चेटियार,
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| 48 |
+
व्ही. नादिमुथु पिल्लई,
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| 49 |
+
एस. नागप्पा,
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| 50 |
+
पी एल एल नरसिंह राजू,
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| 51 |
+
बी. पट्टाभी सितारामाया,
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| 52 |
+
सी. पेरूमलस्वामी रेड्डी,
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| 53 |
+
ट. प्रकाशन,
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| 54 |
+
एस. एच. प्रॅटर,
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| 55 |
+
बॉबीबिलीचा राजा स्वेताचलपती रामकृष्ण रेंगा रोआ,
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+
आर. के. शानमुखम चेट्टी,
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| 57 |
+
ट. उ. रामलिंगम चेतियार,
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रामनाथ गोएंका,
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| 59 |
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ओ.पी.रामास्वामी रेडियार,
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| 60 |
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एन. जी. रंगा,
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| 61 |
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नीलम संजीवा रेड्डी,
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| 62 |
+
शेक गॅलिब साहिब,
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| 63 |
+
के. संधानम,
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| 64 |
+
बी. शिवराव,,
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| 65 |
+
कल्लूर सुब्बा राव,
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| 66 |
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यू. श्रीनिवास मल्ल्या,
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| 67 |
+
पी. सुब्बारायण,
|
| 68 |
+
सी. सुब्रमण्यम,
|
| 69 |
+
व् सुब्रमण्यम,
|
| 70 |
+
एम. सी. वीरबाहू पिल्लई,
|
| 71 |
+
पी. एम. वलयुदापाणी,
|
| 72 |
+
ए. क��. मेनन,
|
| 73 |
+
टी. जे. एम. विल्सन,
|
| 74 |
+
कदे मिलथ मोहम्मद इस्माईल साहिब,
|
| 75 |
+
के. टी. एम. अहमद इब्राहिम,
|
| 76 |
+
महबूब अली बेग साहिब बहादूर,
|
| 77 |
+
बी. पोकर साहिब बहादूर,
|
| 78 |
+
पट्टम तनुपिल्लई
|
| 79 |
+
बालचंद्र महेश्वर गुप्ते,
|
| 80 |
+
हंस मेहता,
|
| 81 |
+
हरि विनायक पाटस्कर,
|
| 82 |
+
डॉ. बी. आर. आंबेडकर,
|
| 83 |
+
जोसेफ अल्बान डिसोझा,
|
| 84 |
+
कन्यालाल नानाभाई देसाई,
|
| 85 |
+
केशवराव मारुतीराव जेधे,
|
| 86 |
+
खंडूभाई कसनजी देसाई,
|
| 87 |
+
बाळ गंगाधर खेर,
|
| 88 |
+
एम.आर. मसाणी,
|
| 89 |
+
के.एम. मुंशी,
|
| 90 |
+
नरहर विष्णू गाडगीळ,
|
| 91 |
+
एस. निजलिंगप्पा,
|
| 92 |
+
एस. के. पाटील,
|
| 93 |
+
रामचंद्र मनोहर नलावडे,
|
| 94 |
+
आर. आर. दिवाकर,
|
| 95 |
+
शंकरराव देव,
|
| 96 |
+
जी. व्ही. मावळणकर,
|
| 97 |
+
वल्लभभाई पटेल,
|
| 98 |
+
अब्दुल कादर मोहम्मद शेख,
|
| 99 |
+
ए. खान
|
| 100 |
+
मोनो मोहन दास,
|
| 101 |
+
अरुण चंद्र गुहा,
|
| 102 |
+
लक्ष्मी कांता मैत्र,
|
| 103 |
+
मिहिर लाल चट्टोपाध्याय,
|
| 104 |
+
सतीस चंद्र सामंता,
|
| 105 |
+
सुरेशचंद्र मजूमदार,
|
| 106 |
+
उपेंद्रनाथ बर्मन,
|
| 107 |
+
प्रभुदयाल हिमसिंगका,
|
| 108 |
+
बसंत कुमार दास,
|
| 109 |
+
रेणुका रे,
|
| 110 |
+
एच. सी. मुखर्जी,
|
| 111 |
+
सुरेंद्र मोहन घोसे,
|
| 112 |
+
स्यामा प्रसाद मुखर्जी,
|
| 113 |
+
अरि बहादुर गुरूंग,
|
| 114 |
+
आर. ई. प्लॅटेल,
|
| 115 |
+
के. सी. नोगी,
|
| 116 |
+
रघिब अहसन,
|
| 117 |
+
सोमनाथ लाहिरी,
|
| 118 |
+
जसीमुद्दीन अहमद,
|
| 119 |
+
नजीरुद्दीन अहमद,
|
| 120 |
+
अब्दुल हमीद,
|
| 121 |
+
अब्दुल हलीम घुझनवी
|
| 122 |
+
मौलाना हिफझुर रहमान सेहोरवी,
|
| 123 |
+
अजित प्रसाद जैन,
|
| 124 |
+
अल्गु राय शास्त्री,
|
| 125 |
+
बाळकृष्ण शर्मा,
|
| 126 |
+
बंशी धर मिसरा,
|
| 127 |
+
भगवान दिन,
|
| 128 |
+
दामोदर स्वरूप सेठ,
|
| 129 |
+
दयाल दास भगत,
|
| 130 |
+
धर्म प्रकाश,
|
| 131 |
+
ए. धरम दास,
|
| 132 |
+
आर. व्ही. धुळेकर,
|
| 133 |
+
फिरोज गांधी,
|
| 134 |
+
गोपाल नारायण,
|
| 135 |
+
कृष्णचंद्र शर्मा,
|
| 136 |
+
गोविंद बल्लभ पंत,
|
| 137 |
+
गोविंद मालवीय,
|
| 138 |
+
हर गोविंद पंत,
|
| 139 |
+
हरिहर नाथ शास्त्री,
|
| 140 |
+
हृदय नाथ कुंजरू,
|
| 141 |
+
जसपत रॉय कपूर,
|
| 142 |
+
जगन्नाथ बक्षसिंग,
|
| 143 |
+
जवाहरलाल नेहरू,
|
| 144 |
+
जोगेंद्र सिंह,
|
| 145 |
+
जुगल किशोर,
|
| 146 |
+
ज्वाला प्रसाद श्रीवास्तव,
|
| 147 |
+
बी. व्ही. केसकर,
|
| 148 |
+
कमला चौधरी,
|
| 149 |
+
कमलापती त्रिपाठी,
|
| 150 |
+
जे. बी कृपलानी,
|
| 151 |
+
महावीर त्यागी,
|
| 152 |
+
खुर्शेद लाल,
|
| 153 |
+
मसूर्या दिन,
|
| 154 |
+
मोहन लाल सकसेना,
|
| 155 |
+
पदमपत सिंघानिया,
|
| 156 |
+
फूल सिंह,
|
| 157 |
+
परागी लाल,
|
| 158 |
+
पूर्णिमा बॅनर्जी,
|
| 159 |
+
पुरुषोत्तम दास टंडन,
|
| 160 |
+
हीरा वल्लभ त्रिपाठी,
|
| 161 |
+
राम चंद्र गुप्ता,
|
| 162 |
+
शिब्बन लाल सक्सेना,
|
| 163 |
+
सतीश चंद्र,
|
| 164 |
+
जॉन मठाई,
|
| 165 |
+
सुचेता कृपलानी,
|
| 166 |
+
सुंदर लॉल,
|
| 167 |
+
वेंकटेश नारायण तिवारी,
|
| 168 |
+
मोहनलाल गौतम,
|
| 169 |
+
विश्वभार दयाल त्रिपाठी,
|
| 170 |
+
विष्णू शरण दुब्लीश,
|
| 171 |
+
बेगम ऐजाज रसूल,
|
| 172 |
+
हैदर हुसेन,
|
| 173 |
+
हसरत मोहनी,
|
| 174 |
+
अबुल कलाम आझाद,
|
| 175 |
+
मुहम्मद इस्माईल खान,
|
| 176 |
+
रफी अहमद किदवई,
|
| 177 |
+
झेड एच लारी
|
| 178 |
+
बक्षी टेक चंद,
|
| 179 |
+
जयरामदास दौलतराम,
|
| 180 |
+
ठाकूरदास भार्गव,
|
| 181 |
+
बिक्रमलाल सोंधी,
|
| 182 |
+
यशवंत राय,
|
| 183 |
+
रणबीरसिंग हूडा,
|
| 184 |
+
लाला अचिंत राम,
|
| 185 |
+
नंद लाल,
|
| 186 |
+
बलदेव सिंह,
|
| 187 |
+
ज्ञानी गुरमुख सिंह मुसाफिर,
|
| 188 |
+
सरदार हुकम सिंह,
|
| 189 |
+
सरदार भोपिंदरसिंग मान,
|
| 190 |
+
सरदार रतनसिंग लोहगड
|
| 191 |
+
चौधरी सूरज माल
|
| 192 |
+
अमीयो कुमार घोष,
|
| 193 |
+
अनुग्रह नारायण सिन्हा,
|
| 194 |
+
बनारसी प्रसाद झुंझुनवाला,
|
| 195 |
+
भागवत प्रसाद,
|
| 196 |
+
बोनिफास लाकरा,
|
| 197 |
+
ब्रजेश्वर प्रसाद,
|
| 198 |
+
चंडिका राम,
|
| 199 |
+
के. टी. शाह,
|
| 200 |
+
देवेंद्र नाथ सामंता,
|
| 201 |
+
दिप नारायण सिन्हा,
|
| 202 |
+
गुप्तनाथ सिंह,
|
| 203 |
+
जादुबान सहाय,
|
| 204 |
+
जगत नारायण लाल,
|
| 205 |
+
जगजीवन राम,
|
| 206 |
+
जयपालसिंग मुंडा,
|
| 207 |
+
कामेश्वर सिंग दरभंगाचे,
|
| 208 |
+
कमलेश्वरी प्रसाद यादव,
|
| 209 |
+
महेश प्रसाद सिन्हा,
|
| 210 |
+
कृष्णा बल्लभ सहाय,
|
| 211 |
+
रघुनंदन प्रसाद,
|
| 212 |
+
राजेंद्र प्रसाद,
|
| 213 |
+
रामेश्वर प्रसाद सिन्हा,
|
| 214 |
+
रामनारायण सिंह,
|
| 215 |
+
सच्चिदानंद सिन्हा,
|
| 216 |
+
सारंगधर सिन्हा,
|
| 217 |
+
सत्यनारायण सिन्हा,
|
| 218 |
+
बिनोदानंद झा,
|
| 219 |
+
पी. के. सेन,
|
| 220 |
+
श्रीकृष्ण सिन्हा,
|
| 221 |
+
श्री नारायण महठा,
|
| 222 |
+
सायमानंदन मिश्रा,
|
| 223 |
+
हुसेन इमाम,
|
| 224 |
+
सय्यद जाफर इमाम,
|
| 225 |
+
लतीफुर रहमान,
|
| 226 |
+
मोहम्मद ताहिर,
|
| 227 |
+
ताजामुल हुसेन,
|
| 228 |
+
चौधरी आबिद हुसेन.
|
| 229 |
+
हरगोविंद मिश्रा
|
| 230 |
+
सरोजिनी नायडू
|
| 231 |
+
अंबिका चरण शुक्ला,
|
| 232 |
+
रघु विरा,
|
| 233 |
+
राजकुमारी अमृत कौर,
|
| 234 |
+
भगवंतराव मांडलोई,
|
| 235 |
+
बृजलाल बियाणी,
|
| 236 |
+
ठाकूर चीडीलाल,
|
| 237 |
+
सेठ गोविंद दास,
|
| 238 |
+
हरि सिंह गौर,
|
| 239 |
+
हरी विष्णू कामथ,
|
| 240 |
+
हेमचंद्र जागोबाजी खांडेकर,
|
| 241 |
+
रतनलाल किशोरीलाल मालवीय,
|
| 242 |
+
घनश्यामसिंह गुप्ता,
|
| 243 |
+
लक्ष्मण श्रावण भटकर,
|
| 244 |
+
पंजाबराव देशमुख,
|
| 245 |
+
रविशंकर शुक्ला,
|
| 246 |
+
आर. के. सिद्धवा,
|
| 247 |
+
दादा धर्माधिकारी,
|
| 248 |
+
फ्रँक अँथनी,
|
| 249 |
+
काजी सय्यद करीमुद्दीन,
|
| 250 |
+
गणपतराव दानी
|
| 251 |
+
निबरन चंद्र लस्कर,
|
| 252 |
+
धरणीधर बसू-मातारी,
|
| 253 |
+
गोपीनाथ बारदोलोई,
|
| 254 |
+
जे. जे. एम. निकोलस-रॉय,
|
| 255 |
+
कुलधर चालिहा,
|
| 256 |
+
रोहिणी कुमार चौधरी,
|
| 257 |
+
मुहम्मद सादुल्ला,
|
| 258 |
+
अब्दूर रौफ
|
| 259 |
+
विश्वनाथ दास,
|
| 260 |
+
कृष्णचंद्र गजपती नारायण देव,
|
| 261 |
+
हरेकृष्ण महताब,
|
| 262 |
+
लक्ष्मीनारायण साहू
|
| 263 |
+
लोकनाथ मिश्रा,
|
| 264 |
+
नंदकिशोर दास,
|
| 265 |
+
राजकृष्ण बोस,
|
| 266 |
+
संतानू कुमार दास,
|
| 267 |
+
युधिशिर मिश्रा
|
| 268 |
+
देशबंधू गुप्ता
|
| 269 |
+
मुकुट बिहारी लाल भार्गव
|
| 270 |
+
सी. एम. पूनाचा
|
| 271 |
+
के.सी. रेड्डी,
|
| 272 |
+
टी. सिद्दलिंगिया,
|
| 273 |
+
एच. आर. गुरूव रेड्डी,
|
| 274 |
+
एस. व्. कृष्णमूर्ती राव,
|
| 275 |
+
के. हनुमंथैया,
|
| 276 |
+
एच. सिद्धवीरप्पा,
|
| 277 |
+
टी. चन्न्या
|
| 278 |
+
शेख मुहम्मद अब्दुल्ला,
|
| 279 |
+
मोतीराम बैगरा,
|
| 280 |
+
मिर्झा मोहम्मद अफझल बेग,
|
| 281 |
+
मौलाना मोहम्मद सईद मसूदी
|
| 282 |
+
पाटम ए. थानू पिल्लई,
|
| 283 |
+
आर. शंकर,
|
| 284 |
+
पी. टी. चाको,
|
| 285 |
+
पानमपल्ली गोविंदा मेनन,
|
| 286 |
+
Ieनी मस्करेन,
|
| 287 |
+
पी.एस. नटराज पिल्लई,
|
| 288 |
+
के.ए. मोहम्मद,
|
| 289 |
+
पी.के.लक्ष्मणान
|
| 290 |
+
विनायक सीताराम सरवते,
|
| 291 |
+
बृजराज नारायण,
|
| 292 |
+
गोपीकृष्ण विजयवर्गीय,
|
| 293 |
+
राम सहाय,
|
| 294 |
+
कुसुम कांत जैन,
|
| 295 |
+
राधावल्लभ विजयवर्गीय,
|
| 296 |
+
सीताराम एस जाजू
|
| 297 |
+
बलवंत राय गोपाळजी मेहता,
|
| 298 |
+
जयसखलाल हठी,
|
| 299 |
+
अमृतलाल विठलदास ठक्कर,
|
| 300 |
+
चिमणलाल चकुभाई शाह,
|
| 301 |
+
समलदास लक्ष्मीदास गांधी
|
| 302 |
+
व्ही. टी. कृष्णामचारी,
|
| 303 |
+
हिरालाल शास्त्री,
|
| 304 |
+
खेत्रीचे सरदारसिंहजी,
|
| 305 |
+
जसवंतसिंगजी,
|
| 306 |
+
राज भादूर,
|
| 307 |
+
माणिक्य लाल वर्मा,
|
| 308 |
+
गोकुळ लाल आसावा,
|
| 309 |
+
रामचंद्र उपाध्याय,
|
| 310 |
+
बलवंत सिन्हा मेहता,
|
| 311 |
+
दलेल सिंग,
|
| 312 |
+
जैनारायण व्यास
|
| 313 |
+
रणजितसिंग,
|
| 314 |
+
सोचेत सिंग,
|
| 315 |
+
भगवंत रॉय
|
| 316 |
+
विनायकराव बलशंकर वैद्य,
|
| 317 |
+
बी. एन. मुनावल्ली,
|
| 318 |
+
गोकुळभाई दौलतराम भट्ट,
|
| 319 |
+
जीवराज नारायण मेहता,
|
| 320 |
+
गोपाळदास ए देसाई,
|
| 321 |
+
परानलाल ठाकूरलाल मुंशी,
|
| 322 |
+
बी.एच.खर्डेकर,
|
| 323 |
+
रत्नप्पा भारमप्पा कुंभार बी.एन.दातार
|
| 324 |
+
लाल मोहन पति,
|
| 325 |
+
एन. माधव राऊ,
|
| 326 |
+
राज कुंवर,
|
| 327 |
+
सारंगाधर दास,
|
| 328 |
+
युधिष्ठिर मिश्रा
|
| 329 |
+
आर.एल.मालवीय,
|
| 330 |
+
किशोरीमोहन त्रिपाठी,
|
| 331 |
+
रामप्रसाद पोटाई
|
| 332 |
+
बी. एच. जैदी,
|
| 333 |
+
कृष्णा सिंह
|
| 334 |
+
व्ही. रमायाह,
|
| 335 |
+
रामकृष्ण रंगराव]
|
| 336 |
+
अवदेश प्रताप सिंह,
|
| 337 |
+
शंभू नाथ शुक्ला,
|
| 338 |
+
राम सहाय तिवारी,
|
| 339 |
+
मन्नूलालजी द्विडेदी
|
| 340 |
+
महेश्वरी हिम्मतसिंग के
|
| 341 |
+
गिरजा शंकर गुहा
|
| 342 |
+
लालसिंग
|
| 343 |
+
भवानी अर्जुन खीमजी
|
| 344 |
+
यशवंतसिंग परमार
|
| 345 |
+
पूर्व बंगाल
|
| 346 |
+
अब्दुल्ला अल महमूद,
|
| 347 |
+
मौलाना मोहम्मद अब्दुल्ला अल बाकी,
|
| 348 |
+
अब्दुल हमीद,
|
| 349 |
+
अब्दुल कसीम खान,
|
| 350 |
+
मोहम्मद अक्रम खान,
|
| 351 |
+
ए.हमीद,
|
| 352 |
+
अझीझुद्दीन अहमद,
|
| 353 |
+
मुहम्मद हबीबुल्ला बहार,
|
| 354 |
+
प्रेम हरि बरमा,
|
| 355 |
+
राज कुमार चक्रवर्ती,
|
| 356 |
+
श्रीसचंद्र चट्टोपाध्याय,
|
| 357 |
+
अब्दुल मतीन चौधरी,
|
| 358 |
+
मुर्तजा रझा चौधरी,
|
| 359 |
+
हमीदुल हक चौधरी,
|
| 360 |
+
अक्षय कुमार दास,
|
| 361 |
+
धीरेंद्र नाथ दत्ता,
|
| 362 |
+
भूपेंद्र कुमार दत्ता,
|
| 363 |
+
इब्राहिम खान,
|
| 364 |
+
फजलुल हक,
|
| 365 |
+
फजलूर रहमान,
|
| 366 |
+
घायसुद्दीन पठाण,
|
| 367 |
+
बेगम शाइस्ता सोहरावर्दी इक्रमुल्ला,
|
| 368 |
+
लियाकत अली खान,
|
| 369 |
+
माफीझुद्दीन अहमद,
|
| 370 |
+
महमूद हुसेन,
|
| 371 |
+
ज्ञानेंद्रचंद्र मजुमदार,
|
| 372 |
+
ए. एम. मलिक,
|
| 373 |
+
बिराट चंद्र मंडळ,
|
| 374 |
+
जोगेंद्र नाथ मंडळ,
|
| 375 |
+
मोहम्मद अली,
|
| 376 |
+
ख्वाजा नाझीमुद्दीन,
|
| 377 |
+
एम.ए.बी.एल. नूर अहमद,
|
| 378 |
+
नूरुल अमीन,
|
| 379 |
+
इश्तियाक हुसेन कुरेशी,
|
| 380 |
+
श्री धनंजय एम.ए. बी.एल. रॉय,,
|
| 381 |
+
माऊडी भाकेश चंदा,
|
| 382 |
+
बी.एल. सेराजुल इस्लाम,
|
| 383 |
+
मौलाना शब्बीर अहमद उस्मानी,
|
| 384 |
+
शहाबुद्दीन ख्वाजा,
|
| 385 |
+
एच.एस. सुहरावर्डी,
|
| 386 |
+
हरेंद्र कुमार सुर,
|
| 387 |
+
तमीझुद्दीन खान,
|
| 388 |
+
कविवि केरवार दत्ता, गुलाम मोहम्मद
|
| 389 |
+
पश्चिम पंजाब
|
| 390 |
+
मियां मुमताज मोहम्मद खान दौलताना,
|
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गंगा सारण,
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जफरउल्ला खान,
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इफ्तिखार हुसेन खान,
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मियां मुहम्मद इफ्तिखरुद्दीन,
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| 395 |
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मुहम्मद अली जिन्ना,
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+
शेख करमत अली,
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| 397 |
+
नजीर अहमद खान,
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| 398 |
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सरदार अब्दुर रब निस्तार,
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| 399 |
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फिरोज खान नून,
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+
ओमर हयात मलिक,
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+
शाह नवाज बेगम जहां आरा,
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| 402 |
+
सरदार शौकत हयात खान,
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| 403 |
+
वायव्य सीमावर्ती प्रांत
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| 404 |
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खान अब्दुल गफर खान,
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| 405 |
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खान सरदार बहादूर खान,
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| 406 |
+
सरदार असद उल्लाह जान खान
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| 407 |
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सिंध
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| 408 |
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अब्दुस सत्तार अब्दुर रहमान,
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| 409 |
+
आल्हाज मुहम्मद हाशिम गॅझडर,
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| 410 |
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एम.ए. खुहरो
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बलुचिस्तान
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एस. बी. नवाब मोहम्मद खान जोगझई
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मद्रास
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दुर्गाबाई देशमुख
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बॉम्बे
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हंसा मेहता
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मध्य प्रांत आणि बेरार
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राजकुमारी अमृत कौर
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जवाहरलाल नेहरू आणि अन्य सदस्य १४ आणि १५ ऑगस्ट १९४७ रोजी आयोजित केलेल्या भारतीय संविधान सभेच्या मध्यरात्री अधिवेशनात प्रतिज्ञा घेत होते.
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डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अध्यक्ष, भारतीय संविधान सभेच्या मसुदा समितीच्या अन्य सदस्यांसह, २९ ऑगस्ट १९४७ रोजी.
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२५ नोव्हेंबर १९४९ रोजी डॉ. राजेंद्र प्रसाद यांना भारतीय राज्यघटनेचा अंतिम मसुदा सादर करताना मसुदा समितीचे अध्यक्ष डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर.
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भारताच्या संविधान सभेत डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर.
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जवाहरलाल नेहरू १९४६ मध्ये संविधान सभेला संबोधित करताना.
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संसद आदर्श ग्राम योजना (इं:Sansad Adarsh Gram Yojana)लघुरुप: SAGY) हा एक ग्रामीण विकास कार्यक्रम आहे ज्याचे लक्ष्य खेड्यांना विकसित करणे आहे. त्यात,सामाजिक विकास,सांस्कृतिक विकास व खेड्यातील समाजात जागरुकता आणणे याचा अंतर्भाव आहे.[१] हा कार्यक्रम दि.११ ऑक्टोबर २०१४ला जयप्रकाश नारायण यांच्या वाढदिवशी सुरू करण्यात आला.[२]
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या योजनेचे वैशिष्ट्य म्हणजे ही:
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या योजनेची कळीची ध्येये आहेत:
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संसद ग्राम योजनेत महिलांचा सहभाग आवश्यक आहे .
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संस्कृतमध्ये काव्यरचना करणाऱ्या अनेक कवयित्रींचा उल्लेख बनारसमध्ये राहणाऱ्या राजशेखर नावाच्या कवीने आपल्या काव्यमीमांसा नावाच्या ग्रंथात केला आहे. राजशेखरच्या समकालीन संस्कृत कवयित्री : अवंती (राजशेखराची पत्नी), कर्णाट देशाची विजयांका, लाट देशाची प्रभुदेवी, विकटनितंबा, शांकरी, पांचाली, शीलाभट्टारिका, सुभद्रा, वगैरे.
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सैद अमीर हैदर कमाल नक्वी, ऊर्फ कमाल अमरोही (जानेवारी १७, इ.स. १९१८; अमरोहा, ब्रिटिश भारत - फेब्रुवारी ११, इ.स. १९९३; मुंबई, महाराष्ट्र) हे भारतीय चित्रपट दिग्दर्शक, निर्माते व पटकथालेखक होते. तसेच हे प्रथितयश उर्दू व हिंदी कवीसुद्धा होते. यांनी हिंदी चित्रपटांचे पटकथालेखन, दिग्दर्शन केले.
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पटकथालेखन
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सईदा अरुब शाह (३१ डिसेंबर, २००३:कराची, पाकिस्तान - ) ही पाकिस्तानकडून क्रिकेट खेळणारी खेळाडू आहे.[१]
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सईदापूर हे भारतातील महाराष्ट्र राज्यातील सातारा जिल्ह्यातील सातारा तालुक्यातील एक गाव आहे.
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हे गाव समुद्रसपाटीपासून साधारणपणे ७०० मीटर उंचीवर वसलेले आहे. येथे उष्णकटिबंधीय वातावरण आहे. येथे पावसाळ्यात भरपूर पाऊस पडतो.वार्षिक पर्जन्यमान १०४२ मिलीमीटर आहे.हिवाळ्यात इथे सुखद गारवा असतो.सरासरी वार्षिक तापमान २४.४ अंश सेल्सियस आहे.येथील वाऱ्याचा सरासरी वेग २.८ मीटर प्रति सेकंद आहे.वाऱ्याचा कमाल वेग सुमारे १० मीटर प्रति सेकंद आहे.हिवाळ्यात तापमान १०.९ अंश सेल्सियसपर्यंत खाली जाते तर उन्हाळ्यात ते ३७.६ अंश सेल्सियसपर्यंत वर चढते.
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सईदुद्दीन डागर (जन्म : इ.स. १९३९; - ३१ जुलै २०१७) हे धृपद गाणाऱ्या डागर घराण्याचे १९वे वंशज होते. त्यांचे वास्तव्य पुणे शहरात असे. त्यांचे चिरंजीव नफीसुद्दीन आणि अनीसुद्दीन हेही धृपद गायक आहेत.
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सकलेशपूर विधानसभा मतदारसंघ कर्नाटक विधानसभेचा मतदारसंघ आहे. हा मतदारसंघ हासन लोकसभा मतदारसंघात असून हासन जिल्ह्यात मोडतो.
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सकळ ही मराठी भाषेची उपलिपी म्हणून संबोधली जाते. मराठी भाषेच्या सुवर्णकाळात सकळ लिपीचा उगम झाला. सकळ लिपी कर्ता म्हणजे सह्याद्रीवर्णन ग्रंथाचे कर्ते रवलोबास होय. ते महाराष्ट्रातील परभणी जिल्ह्यातील पाथरी या गावचे. रवळोबास हे हिराईसा यांचे शिष्य होते. त्यांनी तयार केलेल्या सकळ लिपीला नागरी लिपी म्हणून सुरुवातीला संबोधले जायचे परंतु सकळ आणि सकळीत हीच नावे पुढे प्रामुख्याने दृढ झाली. हरिबास आणि सोंगोबास यांच्या अन्वस्थळामध्ये ‘मग हिराइसाचिया रवळोबासाची नागरलिपी लिहून दोन प्रती केलिया’ असा उल्लेख आलेला आहे. तर कृष्णमुनींच्या अन्वस्थळामध्ये ‘लिपकृत्य त्याचेः नागरिक’ अशी नोंद आढळून येते. तिसरा अर्थ सर्वज्ञ श्रीचक्रधर स्वामींच्या सर्व अनुयायांना ही सकळ लिपी मान्य असून हे सर्व शास्त्र संकलनाचे काम या लिपितून होत होत आहे. म्हणून सकळ लिपी असे म्हटले गेले आहे. असा उल्लेख सह्याद्रीवर्णन नावाच्या ग्रंथात वि.भी.कोलते यांनी प्रस्तावनेत केला आहे.[१]
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सुरुवातीला या संप्रदायामध्ये ही एकच लिपी अस्तित्वात होती. परंतु महानुभाव वर्ग हा बुद्धिजीवी लोकांचा वर्ग होता. त्यांच्या आचरणाची आणि विचारांची बाजू ही फार कुशलतेची होती. म्हणून पुढे अनेक विद्वानांनी स्वतःची स्वतंत्र लिपी बनविण्याची प्रवृत्ती दृढ होत गेली.त्यामुळे सकळीलिपीप्रमाणे आणखी काही लिप्या याच एकमेव संप्रदायात निर्माण झाल्या. सुंदरी लिपी, पारमांडल्य लिपी, अंकलिपी, शून्यलिपी, सुभद्रालिपी, श्रीलिपी, वजलिपी, मनोहरालिपी, कवीशेरी लिपी इत्यादी लिप्या निर्माण झाल्या परंतु बरेच ग्रंथ प्रारंभीच्या सकळी लिपीतच बांधेले गेले आहे. अर्थात सकळी लिपीचा संकेतच पंथात विशेष रूढ आहे. क्वचित बाइंदेशकर किंवा तळेगावकर यांसारख्या परंपरांनी अनुक्रमे सुंदरी लिपी व अंकलिपी वापरल्या आहेत.
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सकळ लिपी प्रशिक्षण कार्यशाळा
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महानुभाव साहित्य व शैक्षणिज प्रतिष्ठान आणि कविकुलगुरू कालिदास संस्कृत विद्यापीठ रामटेक यांच्या वतीने सात दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित करण्यात आले होते.
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सकार्या (तुर्की: Sakarya ili) हा तुर्कस्तान देशामधील एक प्रांत आहे. तुर्कस्तानच्या उत्तर भागात काळ्या समुद्राच्या किनाऱ्यावर वसलेल्या ह्या प्रांताची लोकसंख्या सुमारे ९ लाख आहे. सकार्या ह्याच नावाचे शहर ह्या प्रांताची राजधानी आहे.
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सकार्याचा इतिहास इ.स.पू. ३७८पर्यंत मागे जातो. येथील जस्टिनियानस पूल इ.स. ५३३मध्ये सम्राट जस्टिनियनने बांधला होता.
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सगे सोयरे हा इ.स. १९८४मध्ये प्रदर्शित झालेला मराठी चित्रपट आहे. मुरलीधर कापडी दिग्दर्शित या चित्रपटात रंजना देशमुखची प्रमुख भूमिका आहे.[१]
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सच्चा दे अल्विस (जन्म ३० जानेवारी १९९२) हा एक श्रीलंकेचा क्रिकेट खेळाडू आहे.[१] त्याने ३ डिसेंबर २०१६ रोजी २०१६-१७ प्रीमियर लीग स्पर्धेत ब्लूमफील्ड क्रिकेट आणि ऍथलेटिक क्लबसाठी प्रथम श्रेणी पदार्पण केले.[२] त्याच्या प्रथम श्रेणी पदार्पणापूर्वी, त्याने २०१५ आयसीसी वर्ल्ड क्रिकेट लीग डिव्हिजन सिक्स स्पर्धेत केमन आयलँड्सचे प्रतिनिधित्व केले.[३]
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[[]], इ.स.
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दुवा: [] (इंग्लिश मजकूर)
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सचित शनका पतिराना श्रीलंकाकडून आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेळणारा खेळाडू आहे.
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सेनानायके मुदियांसेलागे सचित्र मधुशंका सेनानायके (फेब्रुवारी ९, इ.स. १९८५:कोलंबो, श्रीलंका - ) हा श्रीलंकाकडून आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेळणारा खेळाडू आहे.
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सच्चिदानंद बाबा यांनी प्रत्यक्ष ज्ञानेश्वर सांगत असलेली ज्ञानेश्वरी कागदावर उतरवली.
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गोष्ट तशी खुप जूनी. जवळपास आठशे वर्षांपूर्वीची.
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आताच्या आहमदनगर जिल्ह्यातील नेवासा नावाचं गाव. गावातील मोहिनीराजाचं मंदिर थेट समुद्रमंथनातील अमृतवाटप आणि विष्णूच्या मोहीनी अवताराच्या कथेशी निगडीत. या गावातील मुख्य रस्त्यातून एका सुंदर सकाळी संन्याशी वाटावीत अशी चार मुलं, तीन मुलगे आणि एक मुलगी मार्गक्रमण करत असतात. चौघांच्याही वयात थोडे थोडे अंतर असल्याचे जाणवत होते. एकमेकांच्या पाठीला पाठ लावून जन्माला आलेली सख्खी भावंडेच जणू. चौघांच्याही चेहऱ्यावर एक अतीव समाधान, शांती विलसताना दिसत होती. वाट चालत असताना या मुलांच्या समोरून एक प्रेतयात्रा येते. प्रेतयात्रेच्या पुढे चालणारी एक स्त्री यातील एका बाल संन्याशाच्या पायावर भक्तीभावाने डोके ठेवते."अष्टपुत्रा सौभाग्यवती भव", तो बाल संन्याशी स्त्रीच्या चेहऱ्यावर हात ठेवून डोळे मिटून म्हणतो. स्त्री दचकते. दोन पावले मागे सरकते. संन्याशालाही प्रश्न पडतो.
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+
"काय झालं माई? दचकलात का?" संन्याशी शांतपणे विचारतो.
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"महाराज, तुमचा हा आशीर्वाद या जन्मी लाभणे शक्य नाही. ही माझ्या नवऱ्याची प्रेतयात्रा आहे."
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संन्याशी क्षणभर विचारात पडतो. पुढच्या क्षणी तो खांदा देणाऱ्यांना तिरडी खाली उतरायला सांगतो. प्रेत कफनातून मोकळे करण्याची आज्ञा देतो. संन्याशाच्या चेहऱ्यावरील तेज पाहून त्याच्या शब्दाचा अव्हेर करण्याचे धाडस कुणालाच होत नाही. प्रेत कफनातून मोकळे केले जाते.
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"उठा सच्चिदानंद बाबा", तो बालसंन्याशी प्रेताच्या कपाळावर हात ठेवून म्हणतो.
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आणि काय आश्चर्य, ते प्रेत जिवंत होते. त्या बाल संन्याशाला नमस्कार करते. या सच्चिदानंद बाबांना पुढे हा बालसंन्याशी आपल्या भगवदगीतेवरील टीकेचा लेखक व्हायला सांगतो.
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ही त्या बालसंन्याशाची भगवदगीतेवरील टीका या सच्चिदानंद बाबांच्या उल्लेखाने संपते.
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शके बाराशते बारोत्तरे | तैं टीका केली ज्ञानेश्वरें ||
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सच्चिदानंद बाबा आदरें | लेखकु जाहला ||
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सर आयझॅक व्हिव्हियन अलेक्झांडर रिचर्ड्स हा वेस्ट इंडीजचा क्रिकेट खेळाडू आहे.
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१८ ऑगस्ट, इ.स. २००७
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दुवा: cricketarchive.com (इंग्लिश मजकूर)
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आपल्याला १००% कॉपीराइटमुक्त पब्लीक डॉमेन इतिहास संशोधनातील केवळ प्रमाण संशोधन साधने अथवा मूळ ग्रंथ इंटरनेटवर उपलब्ध करून देणे शक्य असल्यास विकिपीडियाच्या विकिस्रोत या मुक्तस्रोत बन्धू प्रकल्पात आपल्या अशा योगदानाचे आणि परिश्रमाचे स्वागत असेल.
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विकिस्रोतावर काय चालेल ?
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प्रताधिकारमुक्त दस्तऐवज
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सज्जनगड हा भारताच्या महाराष्ट्र राज्यातील सातारा जिल्ह्यातील एक किल्ला आहे.[१] आश्वलायन ऋषींचे वास्तव्याचे स्थान म्हणून आश्वलायनगड, अस्वलांची येथे वस्ती म्हणून अस्वलगड, नवरसतारा,अशी आणखीही काही नावे इतर कालखंडात याला लाभली आहेत.[२] परळी गावाकडील दरवाज्यातूनच किल्ल्यात प्रवेश करता येतो. इतर ठिकाणी उभा कडा किंवा बांधीव तटबंदीने प्रवेश दुष्कर केला आहे.
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प्रतापगडाच्या पायथ्यापासून सहयाद्रीची एक उपरांग शंभूमहादेव या नावाने पूर्वेकडे जाते. या रांगेचे तीन फाटे फुटतात. त्यापैकी एका रांगेवर समर्थ रामदासांच्या पदस्पर्शाने पावन झालेला सज्जनगड उर्फ परळीचा किल्ला वसलेला आहे. सातारा शहराच्या नैर्ऋत्येस अवघ्या दहा किलोमीटर अंतरावर उरमोडी उर्फ उर्वशी नदीच्या खोऱ्यात हा दुर्ग उभा आहे.
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हा किल्ला समुद्रसपाटीपासून सुमारे ३००० फूट उंच आहे, तर पठारापासून १००० फूट उंच आहे. किल्ल्याचा आकार शंखाकृती आहे. याचा परीघ १ कि.मीहून अधिक आहे. पश्चिमेस खेड - चिपळूण, उत्तरेस महाबळेश्वर, प्रतापगड, रायगड, दक्षिणेकडे कळंब, ईशान्येस सातारा शहर व अजिंक्यतारा आहे.
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+
प्राचीन काळी या डोंगरावर आश्वालायन ऋषींचे वास्तव्य होते, त्यामुळे या किल्ल्याला 'आश्वलायनगड' म्हणू लागले. या किल्ल्याची उभारणी शिलाहार राजा भोज ह्याने ११ व्या शतकात केली. २ एप्रिल १६७३ मध्ये शिवाजी राजांनी हा किल्ला आदिलशहाकडून जिंकून घेतला. शिवाजी महाराजांच्या विनंतीवरून समर्थ रामदास स्वामी गडावर कायमच्या वास्तव्यासाठी आले. किल्ल्याचे नाव सज्जनगङ झाले.[३] पुढे राज्याभिषेकानंतर इ.स.१६७९, पौष शुक्ल पौर्णिमेला शिवाजीराजे सज्जनगडावर समर्थांच्या दर्शनास आले.
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+
१८ जानेवारी, इ.स. १६८२ रोजी गडावर रामाच्या मूर्तीची स्थापना करण्यात आली. २२ जानेवारी, इ.स. १६८२ मध्ये रामदास स्वामींनी देह ठेवला. या नंतर पुढे २१ एप्रिल, इ.स. १७०० मध्ये फतेउल्लाखानाने सज्जनगडास वेढा घातला. ६ जून, इ.स. १७००ल�� सज्जनगड मोगलांच्या ताब्यात गेला व त्याचे 'नैरससातारा' म्हणून नामकरण झाले. इ.स. १७०९ मध्ये मराठ्यांनी पुन्हा किल्ला जिंकला. इ.स. १८१८ मध्ये किल्ला इंग्रजांच्या हाती पडला.
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गडावरील पहाण्यासारखी ठिकाणे -
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सज्जनगड : सातारा शहराच्या पश्चिमेस दहा किलोमीटरवर सज्जनगड आहे.
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समर्थ रामदास स्वामींच्या वास्तव्याने या गडास सांस्कृतिक महत्त्व प्राप्त झाले आहे. गड चढण्यासाठी पायऱ्या आहेत. अर्ध्या वाटेवर समर्थशिष्य कल्याण स्वामीयांचे मंदिर आहे. पुढे गेल्यावर एका बाजूस मारुतीचे व दुसऱ्या बाजूस गौतमीचे मंदिर आहे. किल्ल्याचा दरवाजात श्रीधर स्वामीयांनी स्थापन केलेल्या मारुती व वराहाच्या मूर्ती आहेत. प्रवेशद्वाराच्या डाव्या बुरुजाजवळ अंगलाई देवीचे मंदिर आहे. अंगापूरच्या कृष्णा नदीच्या डोहात रामादासांना रामाची मूर्ती व अंगलाईची मूर्ती सापडली होती. अंगलाई मंदिर समर्थांनी बांधले. शके १६०३ माघ नवमी (सन १६८२) रोजी रामदासांनी समाधी घेतली. म्हणून या तिथीला दासनवमी म्हणतात. समाधीवर राममूर्ती बसवून शिष्यांनी देऊळ बांधले. राम मंदिराच्या सभामंडपात सिद्धिविनायक व हनुमानाची मूर्ती आहे. मुख्य मंदिरात राम, लक्ष्मण, सीता यांच्या पंचधातूच्या मूर्ती आहेत. जवळच समर्थांची धातूची मूर्ती आहे. भुयारात समर्थांचे समाधिस्थान आहे. समाधीमागील कोनाड्यात पितळी पेटीत दत्तात्रेयाच्या पादुका आहेत. मंदिराबाहेर एका कोपऱ्यात मारुती आहे. दुसऱ्या कोपऱ्यात समर्थशिष्या वेणा हिचे वृंदावन आहे. मंदिरापुढे उत्तर बाजूस आणखी एक शिष्या आक्काबाई हिचे वृंदावन आहे. माघ वद्य प्रतिपदा ते नवमी या काळात दासनवमी साजरी करतात.
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आजही हे दरवाजे रात्री नऊ नंतर बंद होतात. दुसऱ्या दारातून शिरतांना समोरच एक शिलालेख आढळतो.
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फार्सी वाचन :
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दौलत झ दरत हमहरा रूए नुमायद हिम्मत झ कार ऊ हमह नुव्वार कुशायद तू कब्लह व मर हाजतमन्द हाजती हाजत हमह अझ दर कब्लह बर आयद बिनाए दरवाज इमारत किलआ परेली आमिर शुद बतारीख ३
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दर जमादी उल आखिर कार कर्द रेहान आदिलशाही
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त्याचा मराठी अर्थ खालील प्रमाणे :
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ज्या पायऱ्यांनी आपण गडावर प्रवेश करतो त्या पायऱ्या संपायच्या आधी एक झाड लागते. या झाडापासून एक वाट उजवीकडे जाते. या वाटेने ५ मिनिटे पुढे गेल्यावर एक रामघळ लागते. ही रामघळ समर्थांची एकांतात बसण्याची जागा होती. ��डावर प्रवेश केल्यावर डावीकडे वळावे. समोरच घोड्यांना पाणी पाजण्यासाठीचे घोडाळे तळे दिसते. घोडाळे तळ्याच्या मागच्या बाजूस एक मशीदवजा इमारत आहे, तर समोरच आंगलाई देवीचे मंदिर आहे. ही देवी समर्थांना चाफळच्या राममूर्ती बरोबरच अंगापूरच्या डोहात सापडली.
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गडावरील प्रमुख आकर्षण म्हणजे समर्थांचा मठ व श्रीरामाचे मंदिर. समर्थ रामदासांच्या निर्वाणानंतर संभाजी राजांच्या सांगण्यावरून भुयारातील स्मारक व त्यावर श्रीरामाचे मंदिर उभारले गेले.
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मंदिरालगतच अशोकवन, वेणाबाईचे वृंदावन, ओवऱ्या, अक्काबाइचे वृंदावन, आणि समर्थांचा मठ या वास्तु आहेत. जीर्णोद्धार केलेल्या मठात शेजघर नावाची खोली आहे. त्यामधे पितळी खुरांचा पलंग, तंजावर मठाच्या मेरुस्वामी यांनी समर्थांना प्रत्यक्ष पाहून काढलेले चित्र, समर्थांची कुबडी, गुप्ती, दंडा, सोटा, पाण्याचे दोन मोठे हंडे, पाणी पिण्याचा मोठा तांब्या, पिकदाणी, बदामी आकाराचा पानाचा डबा, वल्कले व प्रताप मारुतीची मूर्ती आहे. या गुप्तीमध्ये एक लांबच लांब धारदार तलवार आहे.
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राममंदिर व मठ यांच्या दरम्यान असलेल्या दरवाज्याने पश्चिमेकडे गेल्यास उजव्या हातास एक चौथरा व त्यावर शेंदूर फासलेला गोटा आहे. त्यास ब्रम्हपिसा म्हणतात. गडाच्या पश्चिम टोकावर एक मारुती मंदिर आहे त्यास धाब्याचा मारुती असे म्हणतात.
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गडाच्या उत्तरेस बाटेवरच गायमारुती व कल्याण स्वामी मंदिर आहे. गायमारुती देवळाजवळून कड्याच्या कडेकडेने एक पायवाट जाते, साधारणत: १०० मीटर अंतरावर एक गुहा आहे. त्याला रामघळ म्हणतात.
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सज्जनगडाच्या पायथ्याशी परळी गावालगतच केदारेश्वर महादेव व विरूपाक्ष मंदिर अशी २ प्राचीन शिवमंदिरे आहेत. तेथील कोरीव शिल्प पाहण्याजोगे आहे. कुस गावापासून जवळच मोरघळ नावाची गुहा प्रेक्षणीय आहे.
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गडावर जाण्यासाठी दोन मार्ग आहेत. त्यांपैकी एक गाडीमार्ग आहे.
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सातारा ते परळी अंतर १० किमीचे आहे. परळी हे पायथ्याचे गाव. परळी पासून गडावर जाण्यासाठी पायऱ्या आहेत. साधारण १८० पायऱ्यांनंतर गडाचा दरवाजा लागतो. गडावर जाण्यास परळीपासून एक तास पुरतो.
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सातारा परळी रस्त्यावर परळीच्या अलीकडे ३ किलोमीटरवर गजवाडी गाव लागते. तेथून थेट गडाच्या कातळ माथ्यापर्यंत गाडीने जाता येते. येथून पुढे १०० पायऱ्यांनंतर दरवाजा लागतो.रस्त्यापासून गडावर जाण्यास १५ ���िनिटे पुरतात.
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एस.टी. महामंडळाच्या बसने साताऱ्याहून जाता येते.सज्जनगडाच्या पायथ्याशी परळी गावालगतच केदारेश्वर महादेव व विरूपाक्ष मंदिर अशी २ प्राचीन शिवमंदिरे आहेत. तेथील कोरीव शिल्प पाहण्याजोगे आहे.
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गडावर राहण्यासाठी खोल्या उपलब्ध होतात. गडावर धर्मशाळा देखील आहेत. सज्जनगड खोल्याही राहण्यासाठी उपलब्ध होतात.[४]सज्जनगडाच्या पायथ्याशी परळी गावालगतच केदारेश्वर महादेव व विरूपाक्ष मंदिर अशी २ प्राचीन शिवमंदिरे आहेत. तेथील कोरीव शिल्प पाहण्याजोगे आहे.
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सटवाई देवी ही देवी नवजात शिशू बालकांचे भविष्यलेखन करणारी देवता आहे असा हिंदू पुराण कथांमध्ये लिहिले आहे.या आई सटवाई देवीस सटवी, सटुआई, सटवीका इत्यादी नावांनी ओळखले जाते. नशीब देवता असेही म्हणतात. सर्वसाधारण पणे बाल अथवा बालिकेचे जन्माचे सहावे दिवशी या देवीची पूजा करण्यात येते. असा एक समज आहे कि सटवाई देवी ही कोणत्याही रूपाने येऊन त्या बालकाचे विधीलिखित लिहिते.एक कोरा पांढरा कागद व टाक/पेन पूजेच्या ठिकाणी ठेवले जाते. झोपेत हसणाऱ्या बाळास 'सटवाई हसविते' असाही एक समज आहे. मराठवाड्यातील ग्रामीण भागात या देवीची पूजा जास्त प्रचलित आहे.
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ताई सटवाई देवी मराठवाड्यातील अनेक गावांची ग्रामदेवता आहे.हिच्या देवळाचे सहसा बांधकाम करीत नाहीत. फक्त आडोसा असतो.
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सटवाई देवीचे माहेर मराठवाड्यातील लातूर जिल्ह्यात असुन देवी जास्तीत जास्त लातूर जिल्ह्यात संचार करीत असते.
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देवी सटवाई हिच नशीब देवता , भाग्य देवता , मृत्यू देवता व आयुष्य देवता व भविष्य देवता या नावांनी ओळखली जाते.
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"सटीचा लेखाजोखा, न चुके ब्रम्हादिका" अशी एक म्हण या देवीबाबत प्रचलित आहे.
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देवी सटवाई ताई सटवीकेचे माहेर जन्मस्थान , मराठवाड्यातील लातूर जिल्ह्यात असुन ते आजही गुप्त रहस्य आहे. देवी सटवाई ही महार जातीतील आराध्यदैवता म्हणून ओळखली जाते. हिंदू पुराण कथांमध्ये भगवान ब्रह्मदेवाची बहिण हिच देवी सटवाई आहे. देवी सटवाई मातेचे कार्य व दैविक अधिकार खालीलप्रमाणे.-
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पवित्र हिंदू धर्म संहितेनुसार देवी सटवाई मातेला मानाचं स्थान आहे.
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गणेश अभ्यंकर तथा विवेक (१६ फेब्रुवारी, १९१८ - ९ जून, १९८८) हे मराठी कृष्णधवल चित्रपटांतील अभिनेता होते.
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विवेक हे मराठी कृष्णधवल चित्रपटांच्या काळातले अभिनेते होते. देखणे, प्रसन्न व्यक्तिमत्त्व आणि सहजसुंदर अभिनय यामुळे सिनेरसिकांमध्ये विवेक यांना आदराचे स्थान होते. १९४४ सालच्या भक्तीचा मळा या चित्रपटाद्वारे त्यांच्या कारकिर्दीची सुरुवात झाली. १९५० च्या बायको पाहिजे या चित्रपटात बाळ कुडतरकर यांनी अभ्यंकर यांना विवेक असे नाव दिले. हे नाव अभ्यंकरांनी पुढे वापरले. कुडतरकर आणि गणेश अभ्यंकर हे मुंबईतील जे.जे. स्कूल ऑफ आर्टचे एका बाकावर बसणारे सहाध्यायी होते.
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विवेक यांनी सुमारे ८० चित्रपटांमधून आणि १० नाटकांमधून भूमिका केल्या आहेत.
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अंबरनाथ येथील नवप्रकाश चित्र या चित्रसंस्थेच्या हमारी कहानी या हिंदी चित्रपटातील प्रमुख भूमिकेत विवेक यांची निवड झाली होती. या चित्रपटाचे निर्माते- लेखक- दिग्दर्शक भालचंद्र वासुदेव कुलकर्णी होते. हा चित्रपट प्रकाशित झाला नाही.
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(अपूर्ण यादी)
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चिचेक यांच्या कलाप्रवासाची कहाणी ‘अभिनेता विवेक’ या पुस्तकात सांगितली आहे. सांगाती प्रकाशनातर्फे २०१७ साली प्रकाशित झालेल्या या पुस्तकाचे संपादन रविप्रकाश कुलकर्णी, प्रकाश चांदे, प्रभाकर भिडे आणि भारती मोरे यांनी केले आहे.
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सडामिऱ्या हे भारतातील महाराष्ट्र राज्यातील दक्षिण कोकणातील रत्नागिरी जिल्ह्यातील रत्नागिरी तालुक्यातील एक गाव आहे.
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पावसाळ्यात येथे भरपूर प्रमाणात पाऊस पडतो आणि हवामान समशीतोष्ण राहते. हिवाळ्यात येथील हवामान थंड असते व अनेकदा सकाळी धुके पडते. उन्हाळ्यात हवामान उष्ण असते. पावसाळ्यात येथे भातशेती, नागलीशेती केली जाते.
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१.https://villageinfo.in/
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२.https://www.census2011.co.in/
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३.http://tourism.gov.in/
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४.https://www.incredibleindia.org/
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५.https://www.india.gov.in/topics/travel-tourism
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६.https://www.mapsofindia.com/
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13°43′12″N 80°13′49″E / 13.72000°N 80.23028°E / 13.72000; 80.23028
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सतीश धवन अंतराळ केंद्र हे आंध्र प्रदेश राज्यातील श्रीहरीकोटा येथे असलेले इस्रोचे उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र आहे. इ.स. २००२ साली इस्रोचे अध्यक्ष राहिलेले सतीश धवन यांच्या मृत्यूनंतर या प्रक्षेपण केंद्राला त्यांचे नाव देण्यात आले.
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सतीश चंद्र अग्रवाल (मृत्यू: सप्टेंबर १०, इ.स. १९९७) हे भारतीय जनता पक्षाचे ज्येष्ठ नेते होते.ते इ.स. १९७७ आणि इ.स. १९८०च्या लोकसभा निवडणुकांमध्ये राजस्थान राज्यातील जयपूर लोकसभा मतदारसंघातून लोकसभेवर निवडून गेले.तसेच ते राज्यसभेचेही सदस्य होते.
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सतीश मोटलिंग (जन्म : २ ऑक्टोबर १९८२) हा एक भारतीय चित्रपट दिग्दर्शक आहे. त्याने मॅटर आणि अगडबम या मराठी चित्रपटांचे दिग्दर्शन केले आहे.[१][२]
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सतीशने २००८ साली दिग्दर्शक म्हणून आपल्या कारकिर्दीची सुरुवात केली होती. २०१० मध्ये त्यांनी ज्या अगडबम चित्रपटाचे दिग्दर्शन केले जो त्या काळी सुपरहिट होता. २०१२-२०१४ दरम्यान त्यांनी मॅटर, पावडर आणि प्रियतमा या चित्रपटांचे दिग्दर्शन केले.[३]
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सतीश मोटलिंग आयएमडीबीवर
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सत्कारस्थळ हे भारताच्या महाराष्ट्र राज्यातील पुणे जिल्ह्यातील खेड तालुक्यातील एक गाव आहे.
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येथे जून, जुलै, ऑगस्ट आणि सप्टेंबर महिन्यात भरपूर पाऊस पडतो.जानेवारी, फेब्रुवारी, मार्च, एप्रिल, मे, नोव्हेंबर आणि डिसेंबर या कालावधीत कोरडे हवामान असते.जुलै महिना हा सर्वात आर्द्र महिना असतो.मार्च हा सर्वात शीतल महिना असतो. वार्षिक पर्जन्यमान २२६० मिमी.असते.
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भारतीय दर्शनशास्त्रात प्रत्येक दर्शनाने सृष्टीतील कार्य-कारण संबंधांचे वेगवेगळे सिद्धान्त मांडलेले आहेत. त्यापैकी महर्षी कपिलांच्या सांख्यदर्शनातील ‘सत्कार्यवादा’चा सिद्धांन्त हा विशेष महत्त्वपूर्ण आहे. कारणाची विकसित अवस्था म्हणजे कार्य होय. अर्थात् कार्य हे नव्याने उत्पन्न होत नसून ते कारणाच्या अवस्थेतील परिवर्तनच आहे, असे सत्कार्यवाद सांगतो.
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सांख्यकारिका ह्या सांख्यदर्शनाधारित प्रकरण ग्रंथात ईश्वरकृष्ण पुढील कारिकेद्वारे सत्कार्यवाद सिद्ध करतात.
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असदकरणादुपादानग्रहणात् सर्वसम्भवाभावात् ।
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शक्तस्य शक्यकरणात् कारणभावाच्च सत्कार्यम्।।९।।
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‘असत्’ म्हणजे जे अस्त्तित्वात नाही, असे कार्य निर्माण करता येणे शक्य नाही. म्हणून कार्य हे ‘सत्’ असते.
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सर्व कार्ये ही त्यांच्या उपादान कारणाशी नित्य संबंध ठेवून असतात. जसा घटाचा मातीशी असतो. त्यामुळे कार्याच्या उपादान कारणाचेच ग्रहण केले जाते.
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मात्र कोणतेही उपादान कारण कोणतेही कार्य उत्पन्न करु शकत नाही. जसे लाकडापासून घट निर्मिती होणे अशक्य आहे.
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उलट जे कार्य उत्पन्न करण्याची क्षमता कारणाची असते, तेच कार्य त्या कारणाद्वारे निर्माण हौ शकते. जसे आंब्याच्या बीजातून आंब्याचेच झाड उगवते.
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कार्यात कारणभाव हा मूलतःच विद्यमान असतो. अर्थात् कारणाचा सद्भाव हा कार्यात येणारच.
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वरील युक्तिवादाद्वारे ईश्वरकृष्ण सत्कार्यवादाचे समर्थन करतात.
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सत्ते पे सत्ता हा एक हिंदी भाषा भाषेतील चित्रपट आहे. या मध्ये अमिताभ बच्चन यांनी काम केले होते.
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सत्य ह्या शब्दाचा अर्थ खरेपणा, वास्तविकता, यथार्थता असा होतो. असत्य हा सत्याचा विरोधी अर्थाचा शब्द आहे.
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भारतीय घटनेत सत्याला अनन्यसाधारण महत्त्व आहे. भारताच्या राजकीय प्रतीकामध्ये सत्यमेव जयते (सत्याचा विजय होवो) हे शब्द वापरले आहेत.
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सत्य साईबाबा, जन्मनाव सत्यनारायण राजू, (तेलुगू: సత్య సాయిబాబా ;) (२३ नोव्हेंबर, इ.स. १९२६ - २४ एप्रिल, इ.स. २०११) हे अर्वाचीन भारतातील आध्यात्मिक गुरू आहेत. त्यांचे जगभरात पसरलेले भक्त त्यांना ईश्वरी व्यक्तिमत्त्व आणि शिर्डीच्या साईबाबांचा अवतार मानतात. भारतातील राजकीय, आर्थिक आणि इतर अनेक क्षेत्रात त्यांचे अनेक उच्चपदस्थ अनुयायी मोठ्या संख्येने आहेत. समाजसेवी संस्थांच्या माध्यमातून त्यांनी अनेक लोकोपयोगी कामे केली. मोफत किंवा अल्पखर्चात शिक्षण आणि वैद्यकीय सुविधा देत असलेल्या संस्था त्यांच्या प्रेरणेने सुरू झाल्या आंध्रप्रदेशात पुट्टपर्थी या गावी सत्य साईबाबांचा आश्रम आहे.
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हे तामिळनाडू राज्यात असलेले एक अभयारण्याहे. तसेच हा व्याघ्रप्रकल्पही आहे. या जंगलास २००८ मध्ये भारत सरकारने अभयारण्य म्हणून घोषीत केले. हे १४११ चौ. किमीटर मध्ये पसरले आहे. २०११ मध्ये याची व्याप्ती वाढविण्यात आली व २०१३ मध्ये त्याला व्याघ्रप्रकल्प म्हणून घोषित केले. ते सध्या तामिळनाडूचे सर्वात मोठे अभयारण्य आहे.
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प्राणी
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येथे वाघ, भारतीय हत्ती, गवे, हरणे, बिबटे,जंगली म्हषी आदि प्राणी आहेत.
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इतर माहिती
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वीरप्पन हा कुप्रसिद्ध चंदन तस्कर याच जंगलात रहात होता. येथे ईलुगा व सोलिगा या आदेवासी जमातीही राहतात.
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सत्यवान सावित्री ही झी मराठीवर प्रसारित झालेली एक मालिका आहे. या मालिकेची पहिली झलक १९ डिसेंबर २०२१ रोजी करण्यात आली होती, परंतु काही कारणांमुळे ही मालिका १२ जून २०२२ पासून प्रसारित झाली होती.
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सत्यवान सावित्री ही झी मराठीवर प्रसारित झालेली एक मालिका आहे. या मालिकेची पहिली झलक १९ डिसेंबर २०२१ रोजी करण्यात आली होती, परंतु काही कारणांमुळे ही मालिका १२ जून २०२२ पासून प्रसारित झाली होती.
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सत्यवेदु विधानसभा मतदारसंघ - १६९ हा आंध्र प्रदेश राज्य विधानसभेच्या १७५ मतदारसंघांपैकी एक आहे. परिसीमन आदेश, १९६२ नुसार, हा मतदारसंघ १९६२ साली स्थापन केला गेला. सत्यवेदु हा विधानसभा मतदारसंघ चित्तूर लोकसभा मतदारसंघात मोडतो.
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सत्य नादेला (जन्म : १९ ऑगस्ट, इ.स. १९६७ हैदराबाद-तेलंगणा) हे मायक्रोसॉफ्ट कंपनीचे मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) आहेत. कंपनीच्या कारकिर्दीतील ते तिसरे सीईओ आहेत.
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सत्या नाडेला यांचे शालेय शिक्षण हैद्राबाद पब्लिक स्कूलमध्ये झाले. त्यांचे वडील बी.एन. युंगधर हे भारतीय प्रशासकीय सेवेत अधिकारी होते.
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सत्य नादेला यांनी मणिपाल युनिव्हर्सिटीतून इलेक्ट्रानिक्स आणि टेलिकम्युनिकेशन या विषयात बी.ई., अमेरिकेतील व्हिस्कॉनसीन युनिव्हर्सिटीमधून एम.एस. आणि शिकागो युनिव्हर्सिट बूथ स्कूल ऑफ बिझनेस येथून एम.बी.ए. केले. इ.स. १९९२ मध्ये ते मायक्रोसॉफ्टमध्ये रुजू झाले. इ.स. २०११ पूर्वी नाडेला यांनी मायक्रोसॉफ्ट कंपनीच्या ऑनलाईन सेवेच्या संशोधन आणि विकास विभागाचे उपाध्यक्ष म्हणून तसेच मायक्रोसॉफ्टच्या व्यापार विभागाचे उपाध्यक्ष म्हणून देखील काम पाहिले आहे.
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२०११मध्ये मायक्रोसॉफ्टच्या क्लाउड अँड एन्टरप्राईज विभागाची धुरा हाती आल्यानंतर त्यांनी आपले कौशल्य आणि नेतृत्वगुणांच्या बळावर या विभागाच्या उत्पन्नात भरघोस वाढ करून दाखवली. त्यामुळेच नादेला यांची फेब्रुवारी २०१४ मध्ये "मायक्रोसॉफ्ट‘च्या प्रमुखपदी नियुक्ती झाली.
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सथ्या संदीपानी (२७ ऑगस्ट, १९९९:गाली, श्रीलंका - ) ही श्रीलंकाच्या महिला क्रिकेट संघाकडून खेळणारी खेळाडू आहे.
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जग्गी वासुदेव उर्फ सदगुरू हे एक योगी आणि दिव्यदर्शी आहे. ते इशा फाऊंडेशनचे संस्थापक आहेत. इशा फाऊंडेशन ही लोकहितासाठी काम करणारी लाभरहित संस्था आहे, जी योग शिबीर चालवते.[१] इशा फाऊंडेशन भारतासहित 'अमेरिका, इंग्लंड, लेबनन, सिंगापूर आणि आस्ट्रेलिया या देशातही योगा शिकविते. आणि त्याचबरोबर सामाजिक विकासासाठी योजना राबविते. युनायटेड नेशन्सच्या आर्थिक व सामाजिक परिषदेत (ECOSOC) इशा फाऊंडेशनला विशेष सल्लागार म्हणून मान्यता प्राप्त आहे.[२]
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जग्गी वासुदेव यांचा जन्म 3 सप्टेंबर 1957 रोजी कर्नाटक राज्यातील म्हैसूर शहरात एक तेलगू घराण्यात झाला. त्यांचे वडील डॉक्टरक्टर होते. त्यांच्या आर्इने एका ज्योतिषास त्यांचे भविष्य विचारले. तेव्हा त्यांनी सांगितले की, हया मुलाचे आयुष्य अतीशय भाग्यवान असेल म्हणून त्यांचे नाव जगदिश असे ठेवण्यात आले. जग्गी जसे जसे समजूतदार होत गेले तसे तसे त्यांची ओढ ही निसर्गाकडे वाढू लागली व ते जवळपासच्या जंगलात सहलीला जाऊ लागले. कधी कधी दोन तीन दिवसही त्यांचे वास्तव्य जंगलात असे. इतके ते निसर्गाशी एकरूप होत असत. वयाच्या 11व्या वर्षी जग्गी राघवेंद्र राव उर्फ मल्लाडीहल्ली स्वामी यांच्या सहवासात आले. त्यांच्या मार्गदर्शनाखाली त्यांनी योगाभ्यास सुरू केला व मनापासून तो आत्मसात केला.
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प्राथमिक शालेय शिक्षणानंतर त्यांनी म्हैसूर विश्वविदयालयातून इंग्रजी भाषा विषयात पदवी मिळवली. विश्वविदयालयात शिकत असताना त्यांना गिर्यारोहणात व मोटरसायकल चालवण्यात रूची वाढू लागली. म्हैसूरमधील चामुंडी टेकडी त्यांचे व त्यांच्या मित्रांचे आवडते ठिकाण होते. ते सर्व तिथे वारंवार जात असत. जग्गी भारतात ठिकठिकाणी मोटारसायकलवर प्रवास करत असत. भारत-नेपाळच्या सीमारेषेवर पासपार्ट नसल्यामुळे आडवण्यात आले तेव्हा त्यांच्या आयुष्याला वेगळी कलाटणी मिळाली व त्यांनी अर्थप्राप्ती करून स्वावलंबी होण्याचे ठरवले आणि त्यासाठी काही उदयोगही सुरू केले. उदा: पोल्ट्री फार्म, विटा बनवणे, बांधकाम इ.[ संदर्भ हवा ]
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वयाच्या पंचविसाव्या वर्षी 23 सप्टें. 1982 रोजी ते चामुंडी टेकडीवर एका दगडावर बसलेले असतांना त्यांना आध्यात्मिक अनुभूती झाली. त्या अनुभवासंदर्भात ते असे सांगतात की,"माझ्या आयुष्यात त्या क्षणा पर्यंत मी स्वतः व सृष्टीत फरक करू शकत होतो. पण त्या आत्मानुभूतीनंतर मी सृष्टीपासून वेगळा समजू शकत नव्हतो. जेथे तेथे मी स्वतःलाच बघू लागलो. जसे दगडात,आकाशात, सगळीकडे." हा अनुभव त्यांना वारंवार येऊ लागला. या घटनेनंतर त्यांची जीवनशैली पूर्णपणे बदलली. त्यांना आलेला अनुभव लोकांपर्यंत पोहोचवण्यासाठी त्यांनी आपले पूढील जीवन समर्पित करण्याचे ठरवले. त्यासाठी त्यांनी इशा फाऊंडेशन आणि इशा योगाची स्थापणा केली.[ संदर्भ हवा ]
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इशा फाऊंडेशन हे कोर्इंबतूर मधील वेलींगिरी पर्वताच्या पायथ्याशी एकशे पन्नास एकरमध्ये पसरलेले आहे. ही संस्था दोन लाखांपेक्षाही जास्त स्वयंसेवकांदवारे चालवली जाते. हया संस्थेने पर्यावरण संरक्षणासाठी प्रोजेक्ट ग्रीनहॅंन्डस योजना राबवली आहे. 17 आक्टो. 2006 मध्ये तमिळनाडूतील 27 जिल्हयात लोकांच्या मदतीने 8.52 लाख झाडे लावली. त्यामुळे गिनीजबुकमध्ये एक नवीन रेकार्ड बनले. 2008 मध्ये हया महत्त्वपूर्ण कार्यासाठी इंदिरा गांधी पर्यावरण पुरस्कारही मिळाला.[ संदर्भ हवा ]
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ध्यानलिंग इशा योगा केद्रात स्थापित करण्यात आले आहे. मनुष्याला उच्च स्तराच्या मानसिक पातळीवर पोहोचण्यासाठी याची स्थापणा करण्यात आली. इशा योगा केंद्र हे शक्तीशाली स्थान योगाच्या चार मार्गाने (ज्ञान, कर्म, क्रिया,भक्ती) मनुष्याला अंतरमुख होण्यास मदत करते. ध्यानलिंग योगमंदिराची प्रतिस्थापणा 1999 साली जग्गींनी पूर्ण केली. 13 फूट व 9 इंच असलेले ध्यान लिंग जगातील सर्वात मोठे लिंग आहे. ध्यानलिंग हे कुठल्याही एका संप्रदायाशी निगडीत नाही तर संपूर्ण मानवतेशी निगडीत आहे. ध्यान लिंगाच्या प्रवेशदवारावर सर्वधर्म स्तंभ स्थापित केले आहे ज्यात या स्तंभावर हिंदू, मुसिलम, इसार्इ, जैन, बौदध, शीख, ताओ, पारशी, यहूदि आणि शिन्तो धर्माचे प्रतिक कोरलेले आहे. हे धार्मिक मतभेदाच्या पलीकडे सर्व मानवतेला आमंत्रित करते.[ संदर्भ हवा ]
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कावेरी कॉलिंग प्रकल्पाचे उद्दीष्ट अग्रोफॉरेस्ट्रीच्या माध्यमातून अंदाजे २.४ अब्ज झाडे लावण्यात मदत करणे आहे, ज्यायोगे ते संवर्धनाचे साधन म्हणून कावेरी खोऱ्यात एक तृतीयांश झाडे झाडे व्यापतील. या प्रकल्पाला राजकारणी आणि चित्रपटसृष्टीतील सदस्यांकडून प्रशंसा मिळाली आहे.
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तथापि, पर्यावरणशास्त्रज्ञ आणि सार्वजनिक विचारवंतांचा असा आरोप आहे की हा कार्यक्रम नदी संवर्धनाचा साधेपणाचा दृष्टिकोन प्रस्तु�� करतो, सामाजिक प्रश्नांचा पाठपुरावा करतो आणि त्यात उपनद्या आणि वन्यजीव अधिवास हानी पोचविण्याची क्षमता आहे. कर्नाटक उच्च न्यायालयातही एक जनहित याचिका दाखल करण्यात आली असून या उपक्रमासाठी निधी उभारणीच्या पद्धतींच्या कायदेशीरपणाबद्दल, तसेच अभ्यासाला पाठिंबा न देता खासगी हेतूसाठी सरकारी मालकीच्या जमिनीचा वापर करण्यासंदर्भात प्रश्न विचारला गेला. जानेवारी २०२० मध्ये, हायकोर्टाने असा निर्णय दिला की फाउंडेशनला पुढाकाराशी संबंधित त्याच्या निधी उभारणीच्या पद्धतींचा तपशील जाहीर करण्याची आवश्यकता आहे.[ संदर्भ हवा ]
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टीकाकारांचा असा दावा आहे की वासुदेव भारतीय जनता पक्षाच्या हिंदू राष्ट्रवाद (हिंदुत्व) या विचारसरणीचे आहेत आणि त्यांच्या माध्यमांमधून ते "असहिष्णु राष्ट्रवादी" भूमिका घेत आहेत. ते संपूर्ण गोहत्या बंदीचे समर्थन करतात. वसुदेव यांनी बालाकोट हवाई हल्ला, सर्वसमावेशक जीएसटी लागू करणे आणि नागरिकत्व (सुधारणा)विधेयक, 2019च्या बाजूने देखील भाष्य केले आहे, तर थुथुकुडी प्रकरणाचा निषेध केला.[ संदर्भ हवा ]
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दक्षिणी तळलेली कोंबडी, ज्याला फक्त तळलेली कोंबडी म्हणूनही ओळखली जाते. यात कोंबडीचे तुकडे आवरण लावून तलात खोल तळतात किंवा पॅनमध्ये कमी तेलात तळतात किंवा उच्च दाब देउन तळतात. कोंबडीच्या बाह्य भागात ब्रेडक्रम्स लावल्याने कोंबडीच्या मांसांत रस टिकुन राहतो आणि आवरण मस्त कुरकुरीत होते. या पदार्थासाठी बहुधा ब्रॉयलर कोंबडीचा वापर केला जातो. गावठी कोंबडीत मांस कमी असल्याने तिचा वापर टाळतात.
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पाश्चिमात्य इतिहासात खोल तळलेले पदार्थ म्हणून ओळखली जाणारी प्रथम अन्नपदार्थ म्हणजे फ्रिटर्स, हे युरोपियन मध्ययुगात लोकप्रिय होते. तथापि, युरोपियन लोकांमध्ये स्कॉटिश लोकांनी प्रथम कोंबडी तेलामध्ये तळली होती. त्यावेळेस त्यांनी तिला कुठलेही आवरण न लावता तळली होती. त्या दरम्यान, पश्चिम आफ्रिकन लोकांपैकी बऱ्याचजणांना तळलेली कोंबडी हा अन्नपदार्थ अवगत होता. आफ्रिकन लोक यासाठी पाल्म तेल वापरत असे. अमेरिकेच्या दक्षिणेकडील गुलाम असलेल्या आफ्रिकन आणि आफ्रिकन-अमेरिकन लोकांद्वारे स्कॉटिश तळण्याचे तंत्र आणि पश्चिम आफ्रिकन आवरणाचे तंत्र एकत्र केले आणि हा नवीन अन्नपदार्थ बनवला.
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ॲपिसियस यांचे रोमन कूकबुक (चौथे शतक) मध्ये पुलम फ्रंटोनियनम नावाने खोल-तळलेल्या कोंबडीची पाककृती आहे. [१]
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अमेरिकन इतिहासात "तळलेली कोंबडी" (फ्राइड चिकन) प्रथम १८३० च्या दशकात दिसून येते. १८६० आणि १८७० च्या दशकाच्या अमेरिकन कूकबुकमध्ये याचे मोठ्या प्रमाणात संदर्भ सापडतात. [२] या पदार्थाची सुरुवात अमेरिकेतील दक्षिणेकडील भागात झाली आणि याचा उगम स्कॉटिश [३][४][५] आणि आफ्रिकेत [६][७][८][९] सापडतो. स्कॉटिश लोक कोंबडी चरबीमध्ये आवरण न लावता तळत होते [३][५] तर पश्चिम आफ्रिकन लोक आवरण लावून पाल्म तेलात कोंबडी तळत होते. [७][१०] अमेरिकन दक्षिण मध्ये आफ्रिकन गुलामांद्वारे स्कॉटिश तळण्याचे तंत्र आणि आफ्रिकन मसाला लावण्याचे तंत्र एकत्र वापरले गेले [३][४][५][९] तळलेल्या कोंबडीच्या या पदार्थाने गुलामगिरीत असलेल्या आफ्रिकन-अमेरिकन स्त्रियांसाठी स्व-कमाईचे साधन प्रदान केले. १७३० च्या दशकापर्यंत त्या जिवंत किंवा शिजवलेल्या कोंबडीच्या विक्रेत्या बनल्या. [११] यासाठी लागणारे साहित्य महाग असल्यामुळे, हा अन्नपदार्थ खास प्रसंगासाठी राखीव ठेवण्यात आला. [१०][८][९]
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तळलेल्या कोंबडीचे वर्णन "���साळ" [१२] आणि "कुरकुरीत" [१३] असे आहे. याव्यतिरिक्त, या पदार्थाला "मसालेदार" आणि "खारट" देखील म्हटले जाते. [१४] कधीकधी तळलेल्या कोंबडीला मसालेदार चव देण्यासाठी पपरीकासारखी मिरची किंवा हॉट सॉससह वाढली जाते. [१५] हे विशेषतः फास्ट फूड रेस्टॉरंट्स आणि केएफसीसारख्या साखळ्यांमध्ये दिसून येते. [१६] हा पदार्थ पारंपारिकपणे मॅश बटाटा, ग्रेव्ही, मॅकरोनी आणि चीज, कोलस्लॉ आणि बिस्किटसह दिले जाते. [१७]
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सदानंद दाते ( १४ डिसेंबर १९६६) हे भारतीय पोलीस सेवेतील अधिकारी आहेत. त्यांनी भारतीय पोलीस सेवेतील अनेक राष्ट्रीय आणि राजकिय पदांवर काम केले आहे.डॉ. दातेंनी केंद्रीय अन्वेषण विभागाचे उप महासंचालक म्हणून देखील काम पाहिले आहे. त्यांनी पुणे विद्यापीठातून पीएच.डी. पदवी मिळवली असून ते आय.सी.डब्लू.ए.चे ते अधिकृत सदस्य आहेत. सध्या ते मुंबईचे अप्पर पोलीस आयुक्त या पदावर कार्यरत आहेत. २००७ साली त्यांना राष्ट्रपती पुरस्कार देऊन गौरव करण्यात आला.
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विवेकसिंधु (मराठी लेखनभेद: विवेकसिंधू) हा मराठी भाषेतील काव्यग्रंथापैकी एक असलेला ग्रंथ, मुकुंदराज या कवीने लिहिला.
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हरिहरनाथ यांचे शिष्य रघुनाथ यांनी त्यांच्या मुकुंदराज या शिष्यास निवडून त्यास 'मराठी समाजास दिशा देणारा ग्रंथ हवा' अशा अपेक्षेने ग्रंथ साकार करण्यास सांगितले. त्यांनी रघुनाथांच्या समाधिस्थळी म्हणजे अंभोरा(सध्याच्या नागपूर जिल्ह्यात) येथे बसून हा ग्रंथ लिहिला. या ग्रंथाची निर्मिती शा.श. १११० (म्हणजेच इसवी सन ११८८) सालातील असावी.[१]
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या ग्रंथात शंकराचार्यांच्या वेदान्तावर निरूपणात्मक विवेचन केले आहे. ग्रंथात एकूण अठरा अध्याय आहेत. हा ग्रंथ ओवी या छंदात रचला आहे. ओव्यांची संख्या १७०० आहे.
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तरि चतुरीं परिमार्थु । कां नेघावा ॥१॥
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