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शिवसेना पक्षाद्वारे मराठवाड्यातील औरंगाबाद या शहर/जिल्ह्यास संभाजीनगर असे संबोधले जाते.
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पुणे शहरातील डेक्कन जिमखाना भागाचेही अधिकृतरीत्या संभाजीनगर असे नामकरण झालेले आहे. या विभागात पुढील लेख आहेत.
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dataset/scraper_9/batch_5/wiki_s9_10050.txt
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संयुक्त प्रांत हा ब्रिटिश राजवटीतील उत्तर भारतातील एक प्रांत होता.
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संयुक्त प्रांताची राजधानी लखनौ ही होती.
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संयुक्त प्रांताची निर्मिती ही आग्रा व अवध (अयोध्या) या दोन प्रांतांच्या एकीकारणाने झाली.
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संयुक्त प्रांताचे प्रशासकीय विभाग आणि त्यातील जिल्हे :-
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मेरठ, देहरादून, ,सहारनपूर, मुझफ्फरनगर, बुलंदशहर, अलीगड.
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मथुरा, आग्रा, फरुखाबाद, मैनपुरी, इटावा, एटा.
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बिजनौर , मोरादाबाद, बदायू, बरेली, शाहजहानपूर, पिलीभीत.
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कानपूर, फत्तेहपूर सिक्री, बांदा, अलाहाबाद/प्रयागराज, हमीरपूर, झाशी, जालौन.
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मिर्झापूर, बनारस/वाराणसी, जौनपूर, गाझीपूर, बलिया.
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आझमगड, गोरखपूर, बस्ती.
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+
अलमोरा, नैनीताल, गढवाल.
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लखनौ, उन्नाव, रायबरेली, हरदोई, सीतापूर,लखीमपूर खिरी.
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फैझाबाद, बहराइच, गोंडा, सुलतानपूर, बाराबंकी, प्रतापगड.
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संयुक्त प्रांतातील संस्थाने:-
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+
१. रामपूर
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२. टिहरी गढवाल
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भारताच्या स्वातंत्र्यानंतर याचे नाव उत्तर प्रदेश असे झाले. सध्या हा भूभाग भारताच्या उत्तर प्रदेश आणि उत्तराखंड या राज्यात विभागाला आहे.
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dataset/scraper_9/batch_5/wiki_s9_10065.txt
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مجلس أمن الأمم المتحدة (अरबी)
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联合国安全理事会 (चिनी)
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Conseil de sécurité des Nations unies (फ्रेंच)
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+
Совет Безопасности Организации Объединённых Наций (रशियन)
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+
संयुक्त राष्ट्रे सुरक्षा परिषद हे संयुक्त राष्ट्रसंघाचे एक मुख्य अंग आहे. सुरक्षा समितीवर जागतिक सुरक्षा व शांतता राखण्याची जबाबदारी आहे.सुरक्षा परिषदेत एकूण पंधरा सभासद राष्ट्रे असतात.अमेरिका,फ्रान्स,इंग्लैंड, रशिया व चिन ही पाच राष्ट्रे सुरक्षा परिषदेची स्थायी सभासद आहेत.दहा अस्थायी सभासद राष्ट्रांची निवड इतर सदस्य राष्ट्रांमधून दोन वर्षासाठी केली जाते.सुरक्षा परिषदेच्या पाच स्थायी सभासदांना नकाराधिकार असतो.स्थायी सभासद राष्ट्रांच्या संमती नाकारण्याच्या अधिकाराला नकाराधिकार म्हणतात.कोणत्याही निर्णयात या पाच राष्ट्रांचा होकार असावा लागतो.यांपैकी एकाही राष्ट्राने संमती न दिल्यास निर्णय फेटाळला जातो.
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| 6 |
+
कार्ये : जागतिक शांतता व सुरक्षिततेची जोपासना करणे, वादग्रस्त आंतरराष्ट्रीय प्रश्नांची चौकशी करणे, आंतरराष्ट्रीय वाद सोडवण्याच्या दृष्टीने उपाय सुचवणे, गरज भासल्यास आक्रमक देशाविरुद्ध आर्थिक किंवा लष्करी कारवाई करणे इत्यादी कामे सुरक्षा परिषद पार पाडते.
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| 7 |
+
2006 ते 2016 54 सदस्य संख्या
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+
खालील ५ स्थायी सदस्यांना नकाराधिकार आहेत.
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| 9 |
+
सदस्य देश • आमसभा • सुरक्षा समिती • आर्थिक व सामाजिक परिषद • सचिवालय (सरचिटणीस) • आंतरराष्ट्रीय न्यायालय
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+
खाद्य व कृषी संस्था • आंतरराष्ट्रीय नागरी उड्डाण संस्था • आंतरराष्ट्रीय मजूर संस्था • आंतरराष्ट्रीय सागरी संस्था • IPCC • आंतरराष्ट्रीय अणुऊर्जा संस्था • संयुक्त राष्ट्रे औद्योगिक विकास संस्था • आंतरराष्ट्रीय दूरध्वनी संघ • संयुक्त राष्ट्रे एड्स कार्यक्रम • SCSL • UNCTAD • UNCITRAL • संयुक्त राष्ट्रे विकास समूह • संयुक्त राष्ट्रे विकास कार्यक्रम • UNDPI • संयुक्त राष्ट्रे पर्यावरण कार्यक्रम • युनेस्को • UNODC • UNFIP • संयुक्त राष्ट्रे लोकसंख्या निधी • संयुक्त राष्ट्रे मानवी हक्क उच्चायुक्त कार्यालय • संयुक्त राष्ट्रे निर्वासित उच्चायुक्त • संयुक्त राष्ट्रे मानवी हक्क समिती • UN-HABITAT • युनिसेफ • UNITAR • UNOSAT • UNRWA • UN Women • विश्व पर्यटन संस्था • जागतिक पोस्ट संघ • विश्व खाद्य कार्यक्रम • विश्व स्वास्थ्य संस्था • विश्व हवामान संस्था
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dataset/scraper_9/batch_5/wiki_s9_10071.txt
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संयुक्त राष्ट्रांचे सरचिटणीस (इंग्लिश: Secretary-General of the United Nations) हे संयुक्त राष्ट्रांच्या सचिवालय ह्या मुख्य अंगाचा प्रमुख आहे. सरचिटणीस संयुक्त राष्ट्रांचे प्रमुख व प्रवक्ता ही कामेही संभाळतात.
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| 2 |
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पोर्तुगालचे अँतोनियो गुतेरेस हे विद्यमान सरचिटणीस आहेत.
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सदस्य देश • आमसभा • सुरक्षा समिती • आर्थिक व सामाजिक परिषद • सचिवालय (सरचिटणीस) • आंतरराष्ट्रीय न्यायालय
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खाद्य व कृषी संस्था • आंतरराष्ट्रीय नागरी उड्डाण संस्था • आंतरराष्ट्रीय मजूर संस्था • आंतरराष्ट्रीय सागरी संस्था • IPCC • आंतरराष्ट्रीय अणुऊर्जा संस्था • संयुक्त राष्ट्रे औद्योगिक विकास संस्था • आंतरराष्ट्रीय दूरध्वनी संघ • संयुक्त राष्ट्रे एड्स कार्यक्रम • SCSL • UNCTAD • UNCITRAL • संयुक्त राष्ट्रे विकास समूह • संयुक्त राष्ट्रे विकास कार्यक्रम • UNDPI • संयुक्त राष्ट्रे पर्यावरण कार्यक्रम • युनेस्को • UNODC • UNFIP • संयुक्त राष्ट्रे लोकसंख्या निधी • संयुक्त राष्ट्रे मानवी हक्क उच्चायुक्त कार्यालय • संयुक्त राष्ट्रे निर्वासित उच्चायुक्त • संयुक्त राष्ट्रे मानवी हक्क समिती • UN-HABITAT • युनिसेफ • UNITAR • UNOSAT • UNRWA • UN Women • विश्व पर्यटन संस्था • जागतिक पोस्ट संघ • विश्व खाद्य कार्यक्रम • विश्व स्वास्थ्य संस्था • विश्व हवामान संस्था
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dataset/scraper_9/batch_5/wiki_s9_10078.txt
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@@ -0,0 +1 @@
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+
संयुक्त राष्ट्रे परियोजना कार्यालय हे संयुक्त राष्ट्रांचा एक भाग आहे.
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dataset/scraper_9/batch_5/wiki_s9_10089.txt
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संयुग (अनेकवचन:संयुगे) ही रसायनशास्त्रातील एक संज्ञा आहे. दोन किंवा त्यापेक्षा अधिक मूलद्रव्ये रासायनिक बंधनांनी जोडली गेली की संयुगाची निर्मिती होते. वेगवेगळ्या संयुगाचे रासायनिक व भौतिक गुणधर्म वेगवेगळे असतात. मूलद्रव्यांमध्ये विद्युतपरमाणुची देवाण-घेवाण किंवा विद्युतपरमाणुच्या भागीदारीमुळे संयुगे तयार होतात. धातू आणि अधातू मूलद्रव्यांमध्ये विद्युतपरमाणुची देवाण-घेवाण होते.
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संयुगाचे आयनिक संयुगे व सहसंयुज संयुगे असे प्रकार पडतात.
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१) आयनिक संयुगे- मूलद्रव्यांमध्ये विद्युतपरमाणुची देवाण-घेवाण मुळे ही संयुगे तयार होतात. आयनिक संयुगाचे धन प्रभारीत व ऋण प्रभारीत आयन असे दोन घटक असतात. दोन भिन्न प्रभारामुळे या दोन आयनांमध्ये आकर्षण बल कार्यरत असते यालाच "आयनिक बंध" असे म्हणतात. धन प्रभारीत कणांना कॅटायन आणि ऋण प्रभारीत कणांना ऍनायन असे म्हणतात.
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+
२) सहसंयुज संयुगे-मूलद्रव्यांमध्ये विद्युतपरमाणुची भागीदारीमुळे ही संयुगे तयार होतात. ह्या संयुगामध्ये दोन अणूंदरम्यान इलेक्ट्रॉन-जोड्यांनी बनणारा सहसंयुज बंध असतो. यात प्रत्येक अणू बंधासाठी लागणाऱ्या जोडीपैकी एक विद्युतपरमाणु देतो.
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| 5 |
+
ही संयुगे मेदात विरगळतात
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dataset/scraper_9/batch_5/wiki_s9_10100.txt
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भारताचा संरक्षणमंत्री हा भारत देशाच्या केंद्र सरकारमधील एक प्रमुख कॅबिनेट मंत्री व भारतीय संरक्षण मंत्रालयाचा प्रमुख आहे. भारत सरकारमधील सर्वात महत्त्वाच्या पदांपैकी एक असलेला संरक्षणमंत्री हा भारताचा लष्करप्रमुख असून भारतीय सशस्त्र सेना व भारतीय तटरक्षक दलासाठी सर्व निर्णय व धोरणे आखण्यासाठी जबाबदार आहे.
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संरक्षणमंत्री संसदेच्या लोकसभा अथवा राज्यसभेचा विद्यमान सदस्य असणे बंधनकारक असून त्याची निवड पंतप्रधानाद्वारे व पदनियुक्ती राष्ट्रपतीद्वारे केली जाते.
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dataset/scraper_9/batch_5/wiki_s9_10107.txt
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'संवत्सर (संवत) हा एक वर्षाचा किंवा बारा महिन्यांचा कालावधी असतो. चांद्र वर्षानुसार हा काळ सुमारे ३५४ दिवसांचा असतो. यास 'चांद्र वर्ष' असेही म्हणतात. गुढी पाडवा या दिवशी एक शक संवत्सर संपून दुसरे सुरू होते.[१]
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| 2 |
+
संवत्सर म्हणजे साठ वर्षाचे कालचक्र असेही एक कालमापन आहे.
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+
शालिवाहन शकाखेरीज अन्य बरीच संवत्सरे आहेत. त्यांची यादी या लेखाच्या शेवटी दिली आहे.
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+
६० वर्षांत सूर्याभोवती गुरूच्या ५ आणि शनीच्या २ प्रदक्षिणा पूर्ण होतात आणि दोघांच्या आकाशातील स्थितीची पुनरावृत्ती होते. गुरूच्या प्रदक्षिणेचा १/१२ काळ म्हणजे एक संवत्सर होय. गुरूला सूर्याभोवती प्रदक्षिणा करण्यास ११.८६२६ (सुमारे १२) वर्षे लागतात. म्हणजे १ संवत्सर म्हणजे ०.९८८५५ वर्ष होय. या फरकामुळे ८६ संवत्सरांमध्ये ८५ वर्षे पूर्ण होतात. जर संवत्सर आणि वर्षामध्ये एकास एक संबंध जोडायचा असेल तर ८५ वर्षांत एका संवत्सराचा लोप करावा लागतो.
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| 5 |
+
संवत्सर हा महाकालाचा एक भाग मानला जातो. सम्यक् वसन्ति मासादया:अस्मिन् (ज्यात मास आदी विभाग व्यवस्थित सामावतात त्याला संवत्सर असे म्हणतात).[२]
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+
ही नावे काही विशिष्ट घटनांची त्या त्या वर्षातील नोंद घेऊन केली असावीत. (भृगू संहिता - जातक खंड). हा काल दोन ते अडीच हजार वर्षांचा असावा. खाली देण्यात आलेली नावे 'चांद्र संवत्सरांची' आहेत. ही एकूण ६० संवत्सरे आहेत. ही साठ वर्षे संपली की (म्हणजे शेवटचे 'क्षय संवत्सर' झाल्यानंतर) पुन्हा प्रभव या नावाचे नवे संवत्सर सुरू होते. कंसात इसवी सनाचा क्रमांक दिला आहे.
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| 7 |
+
(ग्रेगोरियन)
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+
विक्रम संवत
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| 9 |
+
हीच नावे विक्रम संवत्सरांची आहेत, पण त्यांचा सन वेगळा असतो.
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| 10 |
+
१). शालिवाहन शकाच्या संख्येत १२ मिळवावे. या बेरजेला ६० ने भागावे जी बाकी राहील त्या अंकाइतक्या क्रमांकाचा संवत्सर, म्हणजे प्रभव संवत्सरापासून मोजल्यावर त्या क्रमांकावर जे नाव येईल ते त्या शकाचे नाव समजावे. बाकी शून्य राहिली तर क्षय संवत्सर.
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| 11 |
+
इ.स. २०१३सालच्या गुढीपाडव्याला शके १९३५ सुरू झाला.
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| 12 |
+
१९३५ + १२ = १९४७
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+
१९४७ला ६० ने भागितल्यास भागाकार ३२ आणि बाकी २७ राहील.
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| 14 |
+
या बाकी २७ अंकासाठी प्रथम संवत्सर ‘प्रभव’ पासून क्रमाने मोजल्यास २७ वे विजय संवत्सर येते. हे शके १९३५ या शकाचे नाव. इ.स. २०१४ च्या शकाचे नाव जय; आणि २०१५साली मन्मथ या नावाचा शक-संवत्सर होता.
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| 15 |
+
विक्रम संवत्सराच्या आकड्यात ९ मिळवावे. या बेरजेला ६० ने भागावे. उरलेल्या बाकी एवढे अंक प्रभव संवत्सरापासून मोजावे म्हणजे विक्रम संवत्सराचे नाव मिळेल. शून्य बाकी उरल्यास क्षय संवत्सर.
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| 16 |
+
२०१३साली दिवाळीच्या पाडव्याला विक्रम संवत २०७० सुरू झाला.
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| 17 |
+
२०७० + ९ = २०७९
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| 18 |
+
२०७९ला ६० ने भागल्यास भागाकार ३४ व बाकी ३९ उरते.
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| 19 |
+
३९वे संवत्सर ‘विश्वावसु’ आहे.
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| 20 |
+
म्हणून इ.स. २०१३साली दिवाळीच्या पाडव्यानंतर चालू झालेल्या विक्रम संवत्सराचे नाव विश्वावसु संवत्सर होते. इ.स. २०१४ला पराभव नावाचा विक्रम संवत होता, तर २०१५ सालच्या विक्रम संवत्सराचे नाव प्लवंग.
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| 21 |
+
खाली दिलेल्यापेक्षा काही वेगळी नावे वर्षारंभ या पानावर आहेत.
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| 22 |
+
(अपूर्ण)
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| 23 |
+
हे सुद्धा पहा : वर्षारंभ
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dataset/scraper_9/batch_5/wiki_s9_10141.txt
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संसद टीव्ही ही भारतातील एक सरकारी दूरदर्शन वाहिनी आहे, जी भारतीय संसदेच्या दोन्ही सभागृहांचे कार्यक्रम आणि इतर सार्वजनिक घडामोडींचे कार्यक्रम प्रसारित करते. मार्च २०२१ मध्ये विद्यमान गृह वाहिन्या, लोकसभा टीव्ही आणि राज्यसभा टीव्ही यांचे एकत्रीकरण करून त्याची स्थापना करण्यात आली. प्रत्येक सभागृहासाठी स्वतंत्र उपग्रह चॅनेल प्रसारित केले जातात.[१]
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| 2 |
+
तात्पुरते, चॅनेलमध्ये सुमारे 35 थीम असतील ज्यावर कार्यक्रम प्रसारित केले जातात आणि कार्यक्रम समान आहेत, जे हिंदी आणि इंग्रजी या भाषांमध्ये प्रसारित होतात. 15 सप्टेंबर 2021 रोजी भारताचे पंतप्रधान नरेंद्र मोदी, भारताचे उपराष्ट्रपती व्यंकय्या नायडू आणि लोकसभेचे अध्यक्ष ओम बिर्ला यांच्या हस्ते चॅनेल सुरू करण्यात आले. टीव्ही चॅनलमध्ये काही प्रमुख कार्यक्रमांसाठी पाहुणे अँकर म्हणून विविध क्षेत्रातील तज्ञ आहेत आणि त्यात बिबेक देबरॉय, करण सिंग, अमिताभ कांत, शशी थरूर, विकास स्वरूप, प्रियंका चतुर्वेदी, हेमंत बत्रा, मारूफ रझा आणि संजीव संन्याल यांचा समावेश आहे.
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dataset/scraper_9/batch_5/wiki_s9_10165.txt
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@@ -0,0 +1,42 @@
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संस्कृत ही एक सर्वात प्राचीन भाषा असून ती पृथ्वीवरील सर्वात प्राचीन, समृद्ध, अभिजात आणि शास्त्रीय भाषा मानली जाते. ही भाषा हिंदू, बौद्ध, आणि जैन धर्मांच्या उपासनेची भाषा असून ती भारताच्या २३ शासकीय राज्यभाषांपैकी एक आहे. नेपाळमध्येही या भाषेला अतिशय महत्त्व आहे. या भाषेत अनेक सुभाषिते आहेत. विख्यात व्याकरणतज्ज्ञ पाणिनीने इ.स. पूर्व काळात संस्कृत भाषेला प्रमाणित केले. संस्कृत भाषेतील अनेक शब्द भारतीय भाषांमध्ये जसेच्या तसे योजले जातात. त्यांना तत्सम शब्द म्हणतात. संस्कृतमधूनच उत्तर भारतीय भाषा जन्मल्या आहेत, म्हणूनच संस्कृत भाषेला सर्व भाषांची जननी म्हटले जाते.[ संदर्भ हवा ]
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संस्कृत भाषेला सुरभारती, देववाणी, देवीवाक्, देवभाषा, अमरभारती,इत्यादी अन्य नावे आहेत. संस्कृतमध्ये लिहिलेले शिलालेख सर्वात प्राचीन आहेत, पण काही कालांतलरांने संस्कृत भाषेचे महत्त्व संपुष्टात आले व इसवी सन १२०० नंतर संस्कृत भाषा प्रचलित झाली. आरुवर्तीय संस्कृत ही प्राचीन आहे आणि मेघवर्तिया संस्कृत ही प्राकृत नंतर विकसित झाली आहे.
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कवी वाल्मीकी हे संस्कृत भाषेचे आद्यकवी होत. त्यांनी रामायण हे महाकाव्य लिहिले. कवी कालिदासाचे मेघदूत हे खंडकाव्य, रघुवंशम्, कुमारसंभवम् आणि ऋतुसंहार ही महाकाव्ये, तसेच विक्रमोर्वशीयम्, अभिज्ञानशाकुन्तलम् आणि मालाविकाग्निमित्रम ही नाटके जगप्रसिद्ध आहेत.[ संदर्भ हवा ]
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भारताच्या सांस्कृतिक वारशात संस्कृतचा दर्जा, कार्य आणि स्थान भारताच्या आठव्या अनुसूची भाषांच्या संविधानात समाविष्ट करून ओळखले जाते. तथापि, पुनरुज्जीवनाचे प्रयत्न करूनही, भारतात संस्कृतचे प्रथम भाषक नाहीत. भारताच्या अलीकडील प्रत्येक दशवार्षिक जनगणनेमध्ये, हजारो नागरिकांनी संस्कृत ही त्यांची मातृभाषा असल्याचे नोंदवले आहे, परंतु ही संख्या भाषेच्या प्रतिष्ठेशी जुळवून घेण्याची इच्छा दर्शवते असे मानले जाते. प्राचीन काळापासून पारंपरिक गुरुकुलांमध्ये संस्कृत शिकवली जाते; हे आज माध्यमिक शाळा स्तरावर मोठ्या प्रमाणावर शिकवले जाते. ईस्ट इंडिया कंपनीच्या राजवटीत १७९१ मध्ये स्थापन केलेले बनारस संस्कृत महाविद्यालय हे सर्वात जुने संस्कृत महाविद्यालय आहे. हिंदू आणि बौद्ध स्तोत्रे आणि मंत्रांमध्ये संस्कृतचा मोठ्या प्रमाणावर औपचारिक ��णि धार्मिक भाषा म्हणून वापर केला जात आहे.
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पहिल्यांदा मानवाला आपल्या तोंडातून ध्वनी येतात, हे कळले. त्या ध्वनींचे धातुवाचक शब्द बनले. या धातूंपासूनच भाषेचे अन्य शब्द बनले असे संस्कृत पंडित मानतात.
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संस्कृत भाषेतील शब्द भांडार अतिशय समृद्ध आहे.धातूपासून शब्द,अनेक धतुसादिते आणि एका शब्दापासून अनेक शब्द अशी ही भाषा शब्द प्राचूर्याच्या शिखरावर दिसते.या भाषेमध्ये एका शब्दासाठी अनेक पर्यायी शब्द दिसून येतात.
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जसे :-
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‘स्त्री’ या शब्दाकरता नारी, अर्धांगिनी, वामांगिनी, वामा, योषिता, असे अनेक शब्द संस्कृतमध्ये आहेत. यांतील एकएक शब्द स्त्रीची सामाजिक, कौटुंबिक आणि धार्मिक भूमिका दर्शवतो. संस्कृत भाषेचे शब्दभांडार असे प्रचंड आहे.
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संस्कृत भाषेत एकेका देवाला ही अनेक नावे असतात. सूर्याची १२ नावे, विष्णूसहस्रनाम, गणेश सहस्रनाम ही अनेक जणांना मुखोद्गत असतात. त्यातील प्रत्येक नाम हे त्या त्या देवतेचे एकेक वैशिष्ट्यच सांगते.
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संस्कृतमध्ये प्राणी, वस्तू इत्यादींना अनेक प्रतिशब्द आहेत. उदा. बैलाला बलद, वृषभ, गोनाथ अशी ६० च्या वर; हत्तीला गज, कुंजर, हस्ती, दंती, वारण अशी १०० च्या वर; सिंहाला वनराज, केसरी, मृगेंद्र, शार्दूल अशी ८० च्या वर; पाण्याला जल, जीवन, उदक, पय, तोय, आप; सोन्याला स्वर्ण, कांचन, हेम, कनक, हिरण्य आदी प्रतिशब्द आहेत.
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संस्कृत भाषेचे मुख्य वेगळेपण म्हणजे वाक्यातील शब्द मागे पुढे जरी झाले तरी त्याचा अर्थ बदलत नाही.
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वाक्यात शब्द कोठेही असले, तरी वाक्याचा अर्थ बदलत नाही, उदा. ‘रामः आम्रं खादति।’ म्हणजे ‘राम आंबा खातो’, हे वाक्य पुढीलप्रमाणे कसेही लिहिले, तरी अर्थ तोच रहातो - ‘आम्रं खादति रामः।’ ‘खादति रामः आम्रम्।’ या उलट जगातील अन्य भाषांत, उदाहरणार्थ इंग्रजीत, वाक्यातील शब्दांचे स्थान बदलले की, निराळाच अर्थ होतो, उदा. ‘Ram eats mango.’ म्हणजे ‘राम आंबा खातो’, हे वाक्य ‘Mango eats Ram.’ (असे लिहिले, तर त्याचा अर्थ होतो, ‘आंबा रामाला खातो.’) याचं अर्थ निश्चिती मुळे ही भाषा अंतराल क्षेत्रात उपयोगी ठरू शकते.
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प्राचीन काळापासूनच संस्कृत ही अखिल भारताची भाषा म्हणून ओळखली जात होती. काश्मीरपासून श्रीलंकापर्यंत व गांधारपासून मगधापर्यंतचे विद्यार्थी नालंदा, तक्षशिला, काशी आदी विद्यापीठांतून अनेक शास्त्रे आणि विद्या यांचे अध्ययन करत. या भाषेमुळेच रुद्रट, क���य्यट, मम्मट या काश्मिरी पंडितांचे ग्रंथ थेट रामेश्वरपर्यंत प्रसिद्ध पावले. पाणिनी पाकिस्तानचा, आयुर्वेदातील चरक हा पंजाबचा, सुश्रुत वाराणसीचा, वाग्भट सिंधचा, कश्यप काश्मीरचा आणि वृंद महाराष्ट्राचा; पण संस्कृतमुळेच हे सर्व भारतमान्य झाले.
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राष्ट्रभाषा संस्कृत असती, तर राष्ट्रभाषेवरून भांडणे झाली नसती...
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‘राष्ट्रभाषा कोणती असावी’, याकरता संसदेत वाद झाला. दक्षिण भारताने हिंदीला कडाडून विरोध केला. एक फ्रेंच तत्त्वज्ञ म्हणाला, ``अरे, तुम्ही कशाकरता भांडता? संस्कृत ही तुमची राष्ट्रभाषा आहेच. तीच सुरू करा.’’ संस्कृतसारखी पवित्र देवभाषा तुम्ही घालविली. मग भांडणे होणार नाहीत तर काय ? डॉ.बाबासाहेब आंबेडकरांना संस्कृत ही भारताची राजभाषा, (संपर्क भाषा) व्हावी असे वाटे.[ संदर्भ हवा ]
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कोणी कितीही नाके मुरडली, तरी सर्व भाषांची जननी असलेली संस्कृत भाषा पौर्वात्यच नव्हे, तर पाश्चिमात्यांनाही आकर्षित करत आली आहे. उदाहरणार्थ इंग्रजी मधील i am तर संस्कृत मध्ये अहं अशा अनेक भाषांमध्ये आणि संस्कृत मध्ये साम्य दिसते, यावरून सिद्ध होते की संस्कृत ही सर्व भाषांची जननी आहे.
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ह्या भाषेत केवळ '।' (दंड) हे एकच वापरतात अन्य कोणतेही विरामचिन्ह या भाषेच्या लिपीत नाही.
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जगातील सर्वांत प्राचीन ग्रंथ ऋवेद हा संस्कृत भाषेत आहे.
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मोगलांनाही संस्कृतचा अभ्यास करावासा वाटे असे सांगणारे पुस्तक ‘कल्चर ऑफ एन्काउन्टर्स – संस्कृत अॅट द मुघल कोर्ट’ लेखिका ऑड्रे ट्रश्क यांनी लिहिले आहे.[ संदर्भ हवा ]
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पूर्वी संस्कृत लोकभाषा असावी. लोक संस्कृतमधून संभाषण करत असत, असे काही लोक मानतात.
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संस्कृत ही सर्व भाषांची मातृभाष, आहे असे सुद्धा काही लोक मानतात .
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संस्कृतची प्राचीन लिपी सरस्वती लिपी होती. कालांतराने ती ब्राह्मी लिपी झाली. आणि आता संस्कृत सर्वसाधारणपणे देवनागरी लिपीत लिहिली जाते. असे असले तरी भारताच्या राज्यांमध्ये राज्यभाषेच्या लिपीत किंवा रोमन लिपीत संस्कृत लिहिली जाते. पूर्वी हस्तलिखिते अनेक लिप्यांत लिहिलीले जात असत; परंतु आता मात्र संस्कृत ग्रंथांचे मुद्रण सर्वसामान्यपणे देवनागरी लिपीत होते.[ संदर्भ हवा ]
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ॐ हे एक स्वतंत्र अक्षर आहे.त्यात अ , उ , मचा समावेश केला आहे.
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अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ॠ, ऌ, ए, ऐ, ओ,औ
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क् ख् ग् घ् ङ्
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च् छ् ज् झ् ञ्
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ट् ठ् ड् ढ् ण्
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त् थ् द् ध् न्
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प् फ् ब् भ् ��्
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य् र् ल् व् श्
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ष् स् ह् ळ् क्ष् ज्ञ् (शेवटवी दोन जोडाक्षरे असली, तरी सातत्याने लागत असल्याने व्यंजने समजली जातात.)
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सूत्र - अकुहविसर्जनीयानां कण्ठः
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कण्ठ्यवर्ण - अ क् ख् ग् घ् ङ् ह्
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सूत्र - इचुयशानां तालुः
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तालव्यवर्ण - इ च् छ ज् झ् ञ य् श्
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सूत्र - ऋटुरषानां मूर्धा
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संस्कृतमध्ये एका धातूची काळानुसार अनेक रूपे होतात. प्रत्येक काळात प्रथमपुरुष (उत्तमपुरुष), द्वितीयपुरुष (मध्यमपुरुष) आणि तृतीयपुरुष असे तीन पुरुष आहेत.
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संस्कृतभाषेत उपसर्ग आहेत. प्र हा पहिला असल्याने उपसर्गांना प्रादि (प्र+आदि) म्हणतात.
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एके काळी भारताची ज्ञानभाषा संस्कृत होती. संस्कृत भाषेत भरपूर साहित्य निर्मिती झाली आहे. बाणभट्ट- कादंबरी; महाकवी कालिदास- अभिज्ञानशाकुन्तलम्, मेघदूत, कौटिल्य-अर्थशास्त्र, अश्वघोष-बुद्धचरितम् हे काही संस्कृत साहित्यामधील प्रसिद्ध साहित्यिक व त्यांचे ग्रंथ आहेत.
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२१व्या शतकात माहाराष्ट्रात संस्कृत भाषेची स्थिती अतिशय दयनीय झाली आहे. लोक संस्कृत भाषा शिकण्याचा फारसा प्रयत्न करत नाहीत, शाळेत केवळ एक विषय या हेतूने संस्कृत शिकली जाते.
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संस्कृत भाषेचे साहित्य सरस आहे. तसेच तिचे व्याकरण अगदी सुनियोजित आहे. ह्या भाषेचा शब्दकोष अतिविशाल आहे.
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इ.स. १९९६मध्ये उत्तर प्रदेशातून एकूण ४८ संस्कृत नियतकालिके प्रकाशित होत असत, त्यांमध्ये ३ दैनिके, ७ साप्ताहिके, ४ पाक्षिके, १५ मासिके, १३ त्रैमासिके आणि ६ अन्य प्रकारची नियतकालिके होती.
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संस्थान प्रजा परिषद हा माधव बागल, रत्नाप्पा कुंभार, दिनाकर देसाई, शंकरराव माने, चनगोंडा पाटील, काका देसाई, कुंडल देसाई, आय.ए. पाटील, व्यंकटेश देशपांडे, हरिबा बेनाडे, दत्तोबा ताबंट, ईश्वरा गोधडे माधव बागल इतर सहकाऱ्यांनी १९३८ सालाच्या दरम्यान स्थापलेला राजकीय पक्ष होता.
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सई देवधर ही एक भारतीय अभिनेत्री आहे जिने सारा आकाश आणि एक लडकी अंजनी सी सारख्या लोकप्रिय टेलिव्हिजन सोप ऑपेरामध्ये काम केले आहे.[१] अलीकडे, ती एनडीटीव्ही इमॅजिन वर काशी – अब ना रहे तेरा कागज कोरा मध्ये दिसली आहे, जिथे तिने ६ वर्षांच्या मुलीच्या आईची भूमिका केली आहे.
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सई तिचा पती शक्ती आनंद निर्मित एका अज्ञात चित्रपटाच्या शूटिंगमध्ये व्यस्त आहे.[२] १९९३ च्या मराठी चित्रपटात ती बालकलाकार म्हणून दिसली - लपंडाव, जिथे तिने नायकाच्या एका खोडकर तरुण बहिणीची भूमिका केली होती, जी चित्रपटात उलगडणाऱ्या त्रुटींची कॉमेडी सुरू करते.
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सैद अमीर हैदर कमाल नक्वी, ऊर्फ कमाल अमरोही (जानेवारी १७, इ.स. १९१८; अमरोहा, ब्रिटिश भारत - फेब्रुवारी ११, इ.स. १९९३; मुंबई, महाराष्ट्र) हे भारतीय चित्रपट दिग्दर्शक, निर्माते व पटकथालेखक होते. तसेच हे प्रथितयश उर्दू व हिंदी कवीसुद्धा होते. यांनी हिंदी चित्रपटांचे पटकथालेखन, दिग्दर्शन केले.
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पटकथालेखन
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सईदापूर हे भारतातील महाराष्ट्र राज्यातील वर्धा जिल्ह्यातील देवळी तालुक्यातील एक गाव आहे.
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येथील हवामान वर्षभर कोरडे असते. उन्हाळ्यात अतिउष्ण असते.हिवाळा व उन्हाळा हे दोन्ही ऋतू तीव्र असतात. उन्हाळ्यात दिवसाच्या व रात्रीच्या तापमानात जास्त फरक असतो. मे हा अतिउष्णतेचा आणि जानेवारी हा कडाक्याच्या थंडीचा महिना असतो. वार्षिक सरासरी पर्जन्यमान १०९ सेंमी.पर्यंत असते.
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सखाराम गणेश देऊसकर (जन्म - १७ डिसेंबर १८६९, करोग्राम मृत्यू - २३ नोव्हेंबर १९१२) हे क्रांतिकारक तसेच लेखक होते. [१]
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देऊसकर यांनी उपजीविकेसाठी कलकत्त्याच्या साप्ताहिक हितवादमध्ये नोकरी केली.
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भगिनी निवेदिता यांच्याकडून इंग्रजांकडून भारतीयांची आर्थिक पिळवणूक कशी होते, हे समजल्यानंतर 'भारताचे अर्थशास्त्र' हा विषय ते क्रांतिकारकांना शिकवत असत.[२]
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श्रीशिवछत्रपतींचा उत्सव बंगाल प्रांतात सुरू करण्याची मूळ कल्पना देऊसकर यांची होती. वंगदेश हा भवानीमातेचा उपासक आणि श्रीशिवछत्रपती देखील भवानी मातेचे निस्सीम भक्त हा अनुबंध लक्षात घेऊन बंगाल प्रांतामध्ये श्रीशिवछत्रपतींचा उत्सव सुरू करण्याची कल्पना यांनी मांडली. दि. ०४ जून १९०३ रोजी या उत्सवास प्रारंभ झाला. या उत्सवासाठी महाराष्ट्रातून लोकमान्य टिळक आणि डॉ.बाळकृष्ण शिवराम मुंजे, बिपिनचंद्र पाल इत्यादी मंडळी उपस्थित होती. रवींद्रनाथ टागोर यांच्या कवितेतून त्यांनी अखंड भारताचे रम्य चित्र उपस्थितांसमोर उभे केले. देऊसकर यांनी टागोरांकडून शिवाजी-उत्सव नावाची कविता लिहून घेतली. लोकमान्य टिळक यांनी या निमित्ताने मराठे आणि बंगाली यांच्या अनुबंधावर काही भाष्य केले. या संपूर्ण कार्यक्रमाच्या आखणीमध्ये भगिनी निवेदिता यांचा मोठा वाटा होता.[२]
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अहमदाबाद, मुंबई, वाराणसी येथील राष्ट्रीय सभेच्या अधिवेशनातून त्यांनी प्रतिकार, बहिष्कार, ग्रामीण विकास, राष्ट्रीय शिक्षण या तत्त्वांचा प्रचार केला. (१९०२-१९०५) परिस्थितीनुसार अप्रत्यक्ष प्रतिकार किंवा प्रत्यक्ष क्रांती हे त्यांचे साधनमार्ग होते. [३]
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सखारोव्ह प्राइज फॉर फ्रीडम ऑफ थॉट, ज्याला सामान्यतः सखारोव्ह पुरस्कार म्हणून ओळखले जाते, हा मानद पुरस्कार आहे जोमानवी हक्क आणि विचार स्वातंत्र्याच्या रक्षणासाठी आपले जीवन समर्पित केले आहे त्यांना प्रदान केला जातो.[१] रशियन शास्त्रज्ञ व नोबेल शांतता पारितोषिक विजेते आंद्रेई सखारोव्ह यांच्या नावावरून हा पुरस्कार डिसेंबर १९८८ मध्ये युरोपियन संसदेने स्थापित केला होता. [१]
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डिसेंबरमध्ये संसदेच्या स्ट्रासबर्ग हेमिसायकल (गोल चेंबर) येथे एका समारंभात पारितोषिक प्रदान केले जाते.[२] पुरस्कारामध्ये €५०,००० चा आर्थिक पुरस्काराचा समावेश आहे.[३]
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साखालिन ओब्लास्त (रशियन: Сахали́нская о́бласть ; साखालिन्स्काया ओब्लास्त) हे रशियाच्या संघातील एक ओब्लास्त आहे. या ओब्लास्तात साखालिन बेट व कुरिल बेटांचा समावेश होतो.
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साखालिन ओब्लास्तातील काही भूभागावर (कुरिल द्वीपसमूहातील दक्षिणेकडील चार बेटांवर) जपानचा दावा आहे.
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आपल्याला १००% कॉपीराइटमुक्त पब्लीक डॉमेन इतिहास संशोधनातील केवळ प्रमाण संशोधन साधने अथवा मूळ ग्रंथ इंटरनेटवर उपलब्ध करून देणे शक्य असल्यास विकिपीडियाच्या विकिस्रोत या मुक्तस्रोत बन्धू प्रकल्पात आपल्या अशा योगदानाचे आणि परिश्रमाचे स्वागत असेल.
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विकिस्रोतावर काय चालेल ?
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प्रताधिकारमुक्त दस्तऐवज
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महाराणी सगुणाबाई भोसले या छत्रपती शिवाजी महाराज यांच्या पत्नी होत्या. या शिर्के घराण्यातील होत्या. त्यांना राजकुवरबाई नावाची कन्या होती. तिचा विवाह महाराणी येसूबाई यांचे बंधू गणोजी शिर्के यांच्याशी झाला होता.
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सचिन गंगाधर लोकापुरे (इंग्रजी: Sachin G Lokapure ;) (११ ऑक्टोबर, १९८६:सोलापूर, महाराष्ट्र - ) हे एक भारतीय औषधनिर्माण शास्त्रज्ञ आहेत. त्यांनी शिवाजी विद्यापीठातून बीफार्म व राजीव गांधी आरोग्य विज्ञान विद्यापीठ, बंगळुरु मधून एम.फार्मा पदवी घेतली. त्यानंतर लोकापुरे यांनी श्री अप्पासाहेब बिरनाळे फार्मसी महाविद्यालयात अध्यापन आणि संशोधनाचे पायाभूत काम केले. तसेच त्यांनी सॅगलो रीसर्च इंडस्ट्रीची स्थापना केली.
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बॅक्टेरियाच्या हालचाली शोधण्याचे साधन, मायक्रोबियल इलेक्ट्रोलायझिस बॅटरी आणि डिजिटल मिक्रोस्कोपी अँड अडॅप्टर शोधणारा भारतीय शोधकर्ता आहे. २०१३ मध्ये त्यांच्या शोधासाठी त्यांना पेटंट मिळाला होता.त्यानंतर त्यांनी बॅक्टेरिया मूव्हमेंट डिटेक्शन डिव्हाइस[१], लवचिक मायक्रोबायल इंधन सेल आणि डिजिटल होलोग्राफिक मायक्रो-इमेजिंग डिव्हाइसचे १००हून अधिक भारतीय युटिलिटी आणि डिझाईन पेटंट्स प्राप्त केले. त्याच्या शोधाव्यतिरिक्त, ते संश्लेषण आणि फार्मास्युटिकल ड्रग्सच्या पॉलिमॉर्फिक फॉर्मसाठी नवीन शैली विकसित केले आहे.त्यांनी एकूण ४० शोधनिबंध लिहिले. [२]असून वेगवेगळली १०० पेक्षा अधिक व्याख्याने दिली आहेत.[३][४]
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भारतात वैद्यकीय क्षेत्रात अनेक रोगांचे सूक्ष्म निदान करण्यासाठी आज पॅथॉलॉजी लॅब गरजेची बनली आहे. हे सूक्ष्म निदान मायक्रोस्कोपीच्या उपकरणाद्वारे केले जाते. मात्र, भारतात असणारे मायक्रोस्कॉपी उपकरणे ही काही प्रमाणात परदेशातून म्हणजेच जपान आणि चीनमधून मागवली जातात. आयात केलेले हे उपकरणे महागडीसुद्धा आहेत. तर याद्वारे अहवाल बनवण्याच्या काही तांत्रिक त्रुटी देखील आहेत. यामुळे सांगलीच्या मिरजेतील सचिन गंगाधर लोकापुरे यांनी संशोधन करत स्वतः भारतीय बनावटीचे मायक्रोस्कॉपीची डिजिटल उपकरणे तयार केली आहेत. वयाच्या अवघ्या २२ व्या वर्षी लोकापुरे यांनी संशोधनाला सुरुवात केली आणि पहिले पेटंट दखल केले होते.[५] आज 32 व्या वर्षी वैद्यकीय क्षेत्रातील सूक्ष्म रोगनिदानात उपयोगात येणारी डिजिटल यंत्रे विकसित केली आहेत. इतकेच नव्हे तर सचिन यांनी याची नोंद सुद्धा भारतीय पेटंट कार्यालयाकडे केली आहेत. त्यामुळे त्यांच्या नावे तब्बल ७५ पेटंटची नोंद झाली आहे. मायक्रोस्कोपीमध्ये सुलभता आणण्याच्या दृष्टीने आणि भारतीय ���ायक्रोस्कोपीचे उपकरण निर्माण करण्याच्या उद्देशाने आधुनिक डिजिटल उपकरणे बनवली आहेत. त्यांच्या संशोधनातून भारतीय वैद्यकीय क्षेत्राला एक नवी दिशा मिळाली आहे. शिवाय आपल्या सर्वात जास्त पेंटट मिळवण्याचा बहुमानही मिळाला आहे.सचिन लोकापुरे यांनी आतापर्यंत तब्बल १७ उत्पादनांची निर्मिती करून या सर्वांची नोंद भारतीय पेटंट कार्यालयाकडे केली आहे. संशोधन हाच त्यांचा छंद आहे. दुसरा कुठलाच व्यवसाय असा आनंद देऊ शकत नाही, असे ते मानतात. न थकता काम हे त्यांचे वैशिष्टय़. ते कधीही सुटी घेत नाहीत.
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नुकतेच यांना त्यांच्या कामाबद्दल आणि त्यांचा पेटंट्सची इंडिया बुक ऑफ रेकॉड ने नोंद घेतली आहे.[६][७]
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डॉ. सच्चिदानंद शेवडे (जन्म १९६१ - हयात) हे मराठी लेखक, व्याख्याते, चरित्रकार आणि इतिहासकार आहेत. त्यांनी Historical and Cultural Studies of Kashmir या विषयावर डॉक्टरेट प्राप्त केली आहे.
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सच्चिदानंद शेवडे यांनी इतिहास आणि क्रांतिकारक या विषयांवर भारत देशात आणि परदेशात ५००० पेक्षा जास्त व्याख्याने दिली आहेत. स्विट्झर्लंडमधील माउंट टिटिलिस या युरोपातील सर्वोच्च शिखरावर छत्रपती शिवाजी महाराजांवर व्याख्यान देण्याचा अनोखा विक्रम त्यांच्या नांवावर जमा आहे. महाराष्ट्रातील क्रांतिकारकांना छत्रपती शिवाजी महाराजांची प्रेरणा होतीच, याशिवाय देशातील अन्य प्रांतांतील क्रांतिकारकांचेही प्रेरणास्थान छत्रपती शिवाजी महाराज होते यावर त्यांचा ठाम विश्वास आहे. [१]
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सटाणा उपविभाग हा नाशिक जिल्ह्यातील आठ उपविभागापैकी एक उपविभाग आहे.
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सटाणा उपविभागचे मुख्यालय सटाणा येथे आहे. सध्याचे प्रांत अधिकारी संजय बागडे आहेत.
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या उपविभागात खालील तालुके आहेत.
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साडेसांगवी हे भारताच्या महाराष्ट्र राज्यातील उस्मानाबाद जिल्ह्यातील भूम तालुक्यातील एक गाव आहे.
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येथील वातावरण साधारणपणे उष्ण व कोरडे असते. पावसाळा जून महिन्याच्या मध्यापासून सुरू होऊन सप्टेंबरच्या शेवटी संपतो.ऑक्टोबर ते नोव्हेंबर मध्यापर्यंत दमट वातावरण असते. नोव्हेंबर मध्य ते जानेवारी हिवाळा असतो. फेब्रुवारी ते मार्च वातावरण कोरडे असते. एप्रिल ते जून उन्हाळा असतो.सरासरी वार्षिक पर्जन्यमान ६८० मिलीमीटर असते.
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सतना हे भारताच्या मध्यप्रदेश राज्यातील एक शहर आहे.
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हे शहर सतना जिल्ह्याचे प्रशासकीय केंद्र आहे.
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विवेक रंजन अग्निहोत्री (२१ डिसेंबर, १९७३ - ) हा एक भारतीय राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त चित्रपट दिग्दर्शक, पटकथा लेखक, निर्माता, लेखक आणि कार्यकर्ता आहे. हा २०१९पर्यंत भारताच्या सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशनच्या बोर्डाचे सदस्य होता तसेच इंडियन काउन्सिल फॉर कल्चरल रिलेशन्समध्ये भारतीय सिनेमाचे सांस्कृतिक प्रतिनिधी आहेत. [१] ताश्कंद फाइल्स (२०१९) या चित्रपटा साठी त्याला सर्वोत्कृष्ट पटकथा-संवादांचा राष्ट्रीय चित्रपट पुरस्कार मिळाला आहे. अग्निहोत्रीने जाहिरात एजन्सींमधून आपल्या कारकिर्दीची सुरुवात केली आणि दूरचित्रवाणीमालिकांची निर्मिती आणि दिग्दर्शन केले. त्याने गुन्हेगारीवर आधारित चॉकलेट (२००५) हा पहिला बॉलीवूड चित्रपट दिग्दर्शित केला.
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अग्निहोत्री यांना माध्यमांनी वारंवार उजव्या पक्षाशी जोडले आहे. त्यांनी मोदी सरकारचा खंबीर समर्थक असल्याचा दावा केला आहे [२] . [३] अग्निहोत्री भाजपा सरकारच्या विरोधकांचा अर्बन नक्षल असा उल्लेख करतो.[४] [५]
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भारतातील डाव्या आणि साम्यवादी लोकांची इकोसिस्टिम उघडी पाडण्यात विवेक रंजन अग्निहोत्री यांनी महत्त्वाची भूमिका पार पाडली आहे. त्यांच्या अर्बन नक्षल या पुस्तकात नक्षल गुन्हेगारांना संरक्षण देण्यासाठी शहरी भागातील लोकांचे गट कसे पुढे येतात हे त्याने दाखवून दिले आहे. या गटात वार्ताहर, वकील, प्राध्यापक आणि समाजात प्रतिष्ठेचा बुरखा घतलेले अनेक लोक सामील असता किंवा सामील करून घेतले जातात. हे लोक त्यांना हव्या असलेल्याच बातम्या माध्यमात पेरतात. त्यांना हव्या असलेल्या दृष्टीनेच बातमीचे चित्रण केले जाते. मग गुन्हेगारांना बळी असल्याचे भासवले जाते. अशा रीतीने या गटाने दबाव निर्माण करायचा आणि सरकारला काम करू द्यायचे नाही असा साधारण डाव्या विचारधारेचा कामाची शैली असते. यामुळे पोलिसांना गुन्हेगारांवर कारवाया करणे अशक्य होते. मग परत नवीन गुन्हेगारी सुरू होते असा निष्कर्ष त्यांनी आपल्या संशोधन लेखनातून काढला आहे. यासाठी त्यांनी अनेक पुरावे आपल्या पुस्तकात दिले आहेत.
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आपली कार्य शैली उघडी पडल्याने अनेक डाव्या विचारधारेच्या लोकांनी अग्निहोत्री यांना प्रचंड विरोध केला आहे. त्यांची विश्वासार्हता नाही हे पटवून देण्याचा आतोकाट प्रयत्न केला जात आहे.
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हार्वर्ड एक्स्टेंशन स्कूलमध्ये अॅडमिनिस्ट्रेशन आणि मॅनेजमेंटमधील विशेष अभ्यासाच्या प्रमाणपत्रासाठी नोंदणी करण्यापूर्वी अग्निहोत्री यांनी इंडियन इन्स्टिट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशनमध्ये शिक्षण घेतले. [६] [७] प्रसारमाध्यमांच्या मुलाखतींमध्ये, त्यांनी भोपाळ स्कूल ऑफ सोशल सायन्सेस आणि जवाहरलाल नेहरू विद्यापीठाचा त्यांच्या अल्मा मातृंमध्ये उल्लेख केला आहे. [८] [९]
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अग्निहोत्रीने आपली कारकीर्द ओगिल्वी आणि मॅककॅन या जाहिरात एजन्सींमधून सुरू केली आणि जिलेट आणि कोका कोलाच्या मोहिमांसाठी क्रिएटिव्ह डायरेक्टर म्हणून काम केले. [६] [७] १९९४ मध्ये, तो अनेक टेलिव्हिजन मालिकांच्या दिग्दर्शन आणि निर्मितीमध्ये सामील झाला; त्याच्या कामाला सकारात्मक प्रतिसाद मिळाला. [६] [७] [१०] [११] [१२]
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अग्निहोत्रीने अनेक निराळ्या विचार धारेचे चित्रपट बनवले आहेत असे दिसून येते.
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अग्निहोत्रीने चॉकलेट (२००५) मधून बॉलिवूडमध्ये पदार्पण केले, जो १९९५ च्या हॉलिवूड निओ-नॉयर क्राइम थ्रिलर द यूझुअल सस्पेक्ट्सचा रिमेक आहे. चित्रपटाचा समीक्षकीय प्रतिसाद नकारात्मक होता, [१३] [१४] आणि चित्रपटाने बॉक्स ऑफिसवर खराब कामगिरी केली. [१५] [१६] बॉलिवूड अभिनेत्री तनुश्री दत्ताने अग्निहोत्रीवर चॉकलेटच्या चित्रीकरणादरम्यान अनुचित वर्तन केल्याचा आरोप केला आहे. क्लोज-अप शॉट दरम्यान तिचा पुरुष सह-कलाकार इरफान खानला अभिव्यक्ती संकेत देण्यासाठी त्याने तिला कपडे काढण्यास आणि नृत्य करण्यास सांगितले आणि इरफान आणि सुनील शेट्टीने त्याला नकार दिल्यानंतरच तो मागे हटला. अग्निहोत्री यांनी "खोटे आणि फालतू" असे आरोप नाकारले आणि दत्ता विरुद्ध मानहानीचा खटला दाखल केला. [१७] [१८] चित्रपटाचे सहाय्यक दिग्दर्शक सत्यजित गझमेर यांनीही तनुश्रीच्या आरोपांचे खंडन केले. [१९] [२०] [२१]
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धन धना धन गोल हा युनायटेड किंगडममधील सर्व-आशियाई फुटबॉल संघाविषयी आहे जो मैदानावरील भेदभावाशी लढताना ट्रॉफी जिंकतो आणि स्थानिक नगरपालिका ज्याला संघाचे मैदान विकायचे आहे. [२२] [२३] याला समीक्षकांकडून कमी प्रतिसाद मिळाला [२४] आणि बॉक्स ऑफिसवर "सरासरी" व्यवसाय केला. [२५] [२६] [१६]
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हेट स्टोरीला संमिश्र टीकात्मक प्रतिसाद मिळाला [२७] आणि बॉक्स ऑफिसवर माफक कामगिरी केली. [२८] बुद्ध इन ए ट्रॅफिक जॅममध्ये त्यांची पत्नी पल्लवी [२९] आणि २०१४ मध्ये मु���बई आंतरराष्ट्रीय चित्रपट महोत्सवात प्रीमियर झाला; [३०] समीक्षकांकडून तो प्रतिकूलपणे स्वीकारला गेला [३१] आणि बॉक्स ऑफिसवर अत्यंत कमी कामगिरी झाली. [३२] [३३] जुनूनियात देखील खराब पुनरावलोकनांच्या अधीन होते [३४] आणि त्याचप्रमाणे कामगिरी केली गेली. [३५]
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अग्निहोत्रीच्या २०१४ च्या कामुक थ्रिलर Zidला खराब पुनरावलोकने मिळाली [३६] परंतु बॉक्स ऑफिसवर सरासरी व्यवसाय केला. [३७] तथापि, अग्निहोत्रीने दिग्दर्शन आणि पटकथेचे श्रेय चुकीचे असल्याचा दावा केला आहे आणि तो चित्रपटाशी संबंधित नव्हता. [३८] ताश्कंद फाईल्सला समीक्षकांकडून संमिश्र प्रतिक्रिया मिळाल्या परंतु बॉक्स ऑफिसवर ती हिट ठरली. [३९] [४०] या चित्रपटासाठी अग्निहोत्री यांचा इंडियन फिल्म अँड टेलिव्हिजन डायरेक्टर्स असोसिएशनतर्फे सत्कार करण्यात आला. [४१] २०२१ मध्ये, अग्निहोत्रीने ताश्कंद फाइल्ससाठी संवाद श्रेणीतील सर्वोत्कृष्ट पटकथेचा राष्ट्रीय चित्रपट पुरस्कार जिंकला . [४२] त्यांनी सांगितले की त्यांनी "खूप त्याग" केला आहे; आणि हा पुरस्कार लाल बहादूर शास्त्री आणि "या चित्रपटाला पाठिंबा देणाऱ्या भारतातील सर्व सामान्य लोकांना" समर्पित केला. [४२]
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२०१८ मध्ये, अग्निहोत्रीने दावा केला होता की त्यांच्या मोहम्मद आणि उर्वशी या शॉर्ट फिल्ममध्ये मोहम्मद हे नाव वापरल्याबद्दल त्यांना धमक्या मिळाल्या आहेत. [४३] [४४]
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अग्निहोत्रीचा आगामी उपक्रम द काश्मीर फाईल्स हा चित्रपट, " काश्मिरी हिंदूंच्या अनरिपोर्टेड एक्सोडस"ची माहिती देणारा चित्रपट, ११ मार्च २०२२ रोजी रिलीज होणार आहे. [४५] [४६] [४७]
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२०१७ मध्ये, माहिती आणि प्रसारण मंत्रालयाने ४८ व्या आंतरराष्ट्रीय चित्रपट महोत्सवाच्या पूर्वावलोकन समितीमध्ये अग्निहोत्री यांची संयोजक म्हणून निवड केली होती. [४८] त्याच वर्षी, त्यांची भारताच्या सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशनच्या बोर्डावर सदस्य म्हणून निवड झाली. [४९] [५०]
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१५ सप्टेंबर २०२० रोजी, अग्निहोत्री यांची भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषदेत सांस्कृतिक प्रतिनिधी म्हणून नियुक्ती करण्यात आली. [५१] ते ICCR मध्ये भारतीय चित्रपटसृष्टीचे प्रतिनिधित्व करणार होते. [५२]
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२०१८ मध्ये, अग्निहोत्री यांनी <i id="mw0g">अर्बन नक्षल: द मेकिंग ऑफ बुद्ध इन अ ट्रॅफिक जॅम</i>, [५३] [५४] [५५] लिहिले ज्यामध्ये त्यांनी शैक्षणिक आणि माध्यमांमधील व्यक्तींचे वर्णन केले जे भारत सरकार उलथून टाकण्याच्या प्रयत्नात नक्षलवाद्यांशी हातमिळवणी करत होते. त्यामुळे ते "शहरी नक्षलवादी" म्हणून "भारताचे अदृश्य शत्रू" होते. [५६] [५७]
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त्याने हाताळलेले विषय अथवा त्याविषयी मुख्य सिनेमा बोलायला तयार होत नाही. किंवा त्याच्या चित्रपटांना अनुल्लेखाने मारले जाते असे दिसून येते. अथवा टीका केली जाते आणि चित्रपट चांगला नव्ह्ता असे दडपून सांगितले गेल्याचे दिसून येते.
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समीक्षकांनी सांगितले की हा शब्द "अस्पष्ट वक्तृत्व" आहे जो स्थापनेवर आणि राजकीय अधिकारांवर टीका करणाऱ्या बुद्धिजीवींना बदनाम करण्यासाठी आणि मतभेद रोखण्यासाठी डिझाइन केलेले आहे. [५८] [५९] ऑर्गनायझर आणि द न्यू इंडियन एक्स्प्रेसमधील पुनरावलोकनांनी या कामाची प्रशंसा केली होती. [५७] केंद्रीय मनुष्यबळ विकास मंत्री स्मृती इराणी यांनी अग्निहोत्री यांच्या जादवपूर विद्यापीठ आणि जवाहरलाल नेहरू विद्यापीठाच्या विचारांना अनुमोदन दिले कारण त्यांनी ट्रॅफिक जाममध्ये बुद्धाचे प्रदर्शन करण्यास नकार दिला होता. [६०]
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अग्निहोत्री वारंवार उजव्या विंग आणि भाजप समर्थक लोकांशी मीडियाद्वारे जोडले गेले आहेत परंतु त्यांनी ही वर्णने नाकारली आणि स्वतःला "इंडिया-विंग" म्हणून ओळखले. [६१] [६२] [६३] [६४]
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अग्निहोत्रीचे भारतीय अभिनेत्री पल्लवी जोशीशी लग्न झाले असून त्यांना दोन मुले आहेत. [५६] [७] त्यांनी स्वतःचे वर्णन नरेंद्र मोदींचे समर्थक म्हणून केले आहे, परंतु मोदी ज्या भारतीय जनता पक्षाचे आहेत त्या पक्षाचे नाही. [६५]
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वस्तुस्थिती तपासणाऱ्यांनी अग्निहोत्रीने त्याच्या ट्विटर अकाऊंटवरून दिशाभूल करणारा मजकूर शेअर केल्याचे नमूद केले आहे. [६६] [६७] सप्टेंबर २०१८ मध्ये, स्वरा भास्करला शिवीगाळ करणारे ट्वीट हटवण्याचे मान्य होईपर्यंत ट्विटरने त्याचे खाते लॉक केले. स्वराने एका कथित बलात्कार पीडितेला वेश्या म्हणणाऱ्या राजकारणी पीसी जॉर्जला हाक मारल्याच्या प्रत्युत्तरात, विवेकने ट्वीट केले "प्लेकार्ड कुठे आहे - '#MeTooProstituteNun'?" . या ट्विटचा अर्थ स्वराला वेश्या म्हणून संबोधण्यात आला. अग्निहोत्री यांनी त्यांच्या ट्विटचा बचाव केला आणि सांगितले की ते हिंदू समुदायाशी संबंधित कथित गुन्हेगारांच्या निवडक उदाहरणांवर उदारमतवाद्यांनी प्लेकार्डिंगबद्दल मुद्दा मांडत आहेत. [६८]
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ही बारव जालना जिल्ह्यातील अंबड येथे आहे. नारायण सूर्याजी ठोसर उर्फ समर्थ रामदास यांची वाग्दत्त वधू काशीबाई बदनापूरकर हिने या बारवेत आत्महत्या केली होती. त्यावरून तिला काशी सतीची बारव म्हटले जाते. नुसतेच सतीची बारव असाही तिचा उल्लेख केला जातो. [१][ संदर्भ हवा ]
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सतीगुडा हे भारताच्या महाराष्ट्र राज्यातील नांदेड जिल्ह्यातील माहूर तालुक्यातील एक गाव आहे.
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नैऋत्य मान्सूनमुळे पडणाऱ्या पावसाळ्याचा ऋतू वगळता येथील हवामान सर्वसाधारणपणे कोरडेच असते. येथे वर्षात चार ऋतू असतात. हिवाळा हा नोव्हेंबर ते फेब्रुवारी अखेरपर्यंत असतो. त्यानंतर येणारा उन्हाळा मात्र जूनच्या पहिल्या आठवड्यापर्यंत खेचला जातो. नैऋत्य मान्सूनचा पाऊस त्याच्या पाठोपाठ येतो आणि ऑक्टोबरच्या पहिल्या आठवड्यापर्यंत टिकतो. शेष ऑक्टोबर आणि नोव्हेंबरचा पूर्वार्ध हा मान्सूनोत्तर गरमीचा काळ असतो. सरासरी वार्षिक पर्जन्यमान ९८० मि.मी.आहे. नैऋत्य मोसमी वाऱ्यापासून पडणाऱ्या पावसाचे प्रमाण एकूण वार्षिक पर्जन्याच्या ८० टक्के आहे. जुलै आणि ऑगस्ट हे वर्षातील सर्वाधिक पर्जन्याचे महिने आहेत.
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विवेक गोम्बर हा एक भारतीय अभिनेता आणि निर्माता आहे ज्याने भारतीय, ब्रिटिश आणि अमेरिकन सिनेमांमध्ये योगदान दिले आहे. ते अनेक आंतरराष्ट्रीय पुरस्कारांसह राष्ट्रीय चित्रपट पुरस्काराचे प्राप्तकर्ता आहेत.[१]
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त्यांनी हिंदी टेलिव्हिजन डेली सोप अस्तित्व..एक प्रेम कहानी या मध्ये छोट्या भूमिकेतून सुरुवात केली.[२] त्यांनी प्रशंसनीय कायदेशीर नाटक कोर्ट (२०१४)[३] आणि रोमँटिक ड्रामा सर (२०१८)[४] सारख्या प्रकल्पांमध्ये उल्लेखनीय भूमिका साकारल्या.
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सतीश पुळेकर हे मराठी अभिनेते आहे. त्यांना राज्य पुरस्काराने सन्मानित केले आहे. [१][२]
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दत्तात्रेय शंकर सोमण (०१-ऑगस्ट-२०१६ते३०-जून-२०१८ मे, इ.स. १९३०) मुंबई, महाराष्ट्र) या कालखंडात महाराष्ट्र पोलीसदलाचे पोलीस महासंचालक होते
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सतीश व्यास (जन्मदिनांक अज्ञात - हयात) हे लोकप्रिय हिंदुस्तानी गायक आहेत.
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संगीत विषयाशी संबंधीत हा लेख अपूर्ण आहे आणि पूर्ण करण्यास आपण हातभार लावू शकता.
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हा लेख संपादित करण्यासाठी येथे टिचकी द्या.
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'विकिपीडिया' मध्ये अपूर्ण लेख संपादित करण्यासाठी मदतीचा लेख येथे उपलब्ध आहे.
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५७-सत्तावन्न ही एक संख्या आहे, ती ५६ नंतरची आणि ५८ पूर्वीची नैसर्गिक संख्या आहे.
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इंग्रजीत: 57 - fifty-seven.
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२७-सत्तावीस ही एक संख्या आहे, ती २६ नंतरची आणि २८ पूर्वीची नैसर्गिक संख्या आहे. इंग्रजीत: 27 - twenty-seven.
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सत्त्वशीला विठ्ठल सामंत (२५ मार्च, इ.स. १९४५:मुंबई, महाराष्ट्र - १ मे, इ.स. २०१३:पुणे, महाराष्ट्र) या मराठीतील एक भाषाशास्त्रज्ञ होत्या. त्यांच्या आईचे नाव सुनंदा देसाई व वडलांचे नाव परशुराम देसाई होते. सत्त्वशीलाबाईंनी संस्कृत-मराठी विषयात मुंबई विद्यापीठाची पदवी मिळवली. त्यानंतर त्यांनी मुंबई विद्यापीठातून एल्एल.बी आणि भाषाशास्त्र पदविका (डिप्लोमा इन लिन्ग्विस्टिक्स) हे अभ्यासक्रम पूर्ण केले. महाराष्ट्र सरकारच्या भाषा संचालनालयात त्या प्रथम अनुवादक आणि नंतर उप-संचालक होत्या.
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निवृत्तीनंतर त्यांनी भाषाविषयक विविध बौद्धिक उपक्रमांत भाग घेतला. मराठी शुद्धलेखन या विषयावर त्यांनी रुची, भाषा आणि जीवन या नियतकालिकांतून आणि मराठी वृत्तपत्रांतून लेख लिहिले, वाचकांच्या पत्रव्यवहारांत त्यांनी आपले विचार मांडले आणि इतरांच्या मतांमधील चुकीच्या कल्पना दुरुस्त करायचा प्रयत्न केला. मानस-सरोवर हे बरोबर असून मान-सरोवर चुकीचे शुद्धलेखन असल्याबद्दल त्यांनी लेख लिहून व भारत सरकारशी पत्रव्यवहार करून आपली मते ठामपणे मांडली.
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सामंत शुद्धलेखनाच्या जुन्या नियमांच्या पुरस्कर्त्या होत्या. शुद्धलेखनाचे नियम हे कृत्रिमरीत्या तयार करायचे नसतात, तर बांधायचे असतात असे त्यांचे मत होते. शुद्धलेखनाचे जुने नियम भाषेच्या विकासक्रमामध्ये घडत गेलेले असल्यामुळे त्या नियमांचा त्या पुरस्कार करीत. शुद्धलेखनाच्या नव्या नियमांना विरोध करण्यामागे त्यांची ही तात्त्विक भूमिका होती. या भूमिकेपायी त्यांनी अनेक वाद ओढवून घेतले . सरकारदरबारी पत्रव्यवहार केला. त्यांच्यावर टीकाही झाली. मात्र, त्या मागे हटल्या नाहीत. जुन्या नियमांबद्दल त्या आग्रही असल्या, तरी शुद्धलेखनाचे नियम अजिबातच नको, असे म्हणण्याला त्यांचा विरोध होता . शुद्धलेखनाचे नियम हद्दपार करणे भाषेसाठी घातक असल्याचे त्या आवर्जून सांगत. शुद्धलेखन म्हणजे भाषिक शिस्त आहे, असे नमूद करीत त्या या शिस्तीची तुलना वाहतुकीच्या नियमांशी करीत. ' वाहतुकीची शिस्त मोडली, की प्राणाशी गाठ पडते; त्याप्रमाणेच भाषिक शिस्त मोडली, की सांस्कृतिक मरण जवळ ओढवून घेतले जाते,' असे त्यांचे म्हणणे होते. म्हणूनच त्या सदैव शुद्धलेखनाच्या बाजूने झटत राहिल्या. भाषेबद्दलची कमालीची आस्था हीच त्यांची यामागची प्रेरणा होती. या प्रेरणेतूनच त्यांनी 'मराठी शुद्धलेखन प्रणाली' हे पुस्तक लिहिले. मराठी - हिंदी - इंग्रजी या तिन्ही भाषांमधील शब्दांचा व्यवहारोपयोगी कोशही त्यांनी ' शब्दानंद ' या नावाने सिद्ध केला. त्यांच्या या दोन्ही पुस्तकांची आवर्जून दखल घेतली गेली. त्यांना वेगवेगळे पुरस्कार मिळाले. भाषेबद्दलची अतिशय सूक्ष्म जाण त्यांना होती. म्हणूनच त्या याबाबत अतिशय संवेदनशील होत्या. भाषेची मोडतोड होताना दिसली, तंत्रज्ञानामुळे अक्षरांच्या वळणात बदल झालेले दिसले, की त्या व्यथित होत. भाषाविषयक बौद्धिक उपक्रमात त्या आवर्जून सहभागी होत. हा सहभाग मुक्तपणे व्हावा, यासाठी त्यांनी १९८६मध्ये प्रकृति-अस्वास्थ्याचे कारण सांगून स्वेच्छानिवृत्ती घेतली होती.
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निवृत्तीनंतर ऑक्टोबर १९९५मध्ये आपल्या पतीबरोबर पुण्यात येऊन स्थायिक झाल्लेल्या सत्त्वशीला सामंत यांचे १ मे २०१३ रोजी रात्री हृदयक्रिया बंद पडून निधन झाले.
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शब्दांच्या क्षेत्रातील धर्मयोद्ध्या
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सत्यकाम हा एक हिंदी भाषा भाषेतील चित्रपट आहे. या मध्ये धर्मेंद्र यांनी काम केले होते.
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सत्यनारायण गोयंका किंवा एस.एन. गोयंका (जन्म : ३० जानेवारी १९२४; - २९ सप्टेंबर २०१३) हे विपश्यना ध्यानपद्धतीचे जागतिक कीर्तीचे बर्मी-भारतीय आचार्य होते. म्यानमारमधील विसाव्या शतकातील विपश्यना आचार्य सयाग्यी यू बा खिन यांनी भारतात आणि इतर देशांत प्रसार करण्यात त्यांनी महत्त्वाची भूमिका बजावली.[१] एस.एन. गोयंका यांना भारत सरकारने सामाजिक कार्याबद्दल इ.स. २०१२ साली पद्मभूषण पुरस्कार देऊन गौरविले.
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सत्यनारायण गोयंका इ.स. १९६९ सालच्या जून महिन्यात विपश्यनेच्या आचार्य पदावर विराजमान झाल्यावर त्यांनी मुंबईत पहिले विपश्यना शिबिर ३ ते १४ जुलै इ.स. १९६९ या दिवसांत एका धर्मशाळेत भरविले.[२] त्यांनी महाराष्ट्राच्या नाशिक जिल्ह्यातील इगतपुरी येथे इ.स. १९७६ साली "विपश्यना विश्व विद्यापीठाची" स्थापना केली. इ.स. १९८५ साली त्यांनी इगतपुरीतच विपश्यना संशोधन केंद्राचीही स्थापना केली.[३][४]
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सत्यवानी मुथू (१५ फेब्रुवारी १९२३ - ११ नोव्हेंबर १९९९) [१] एक भारतीय राजकारणी आणि चेन्नई, तामिळनाडू येथील प्रभावशाली नेता होत्या. त्या तामिळनाडूच्या विधानसभेच्या सदस्या, राज्यसभेच्या सदस्या आणि केंद्रीय मंत्री होत्या. त्यांनी राजकीय कारकिर्दीची सुरुवात द्रविड मुन्नेत्र कळग्घमच्या सदस्या म्हणून केली, स्वतःचा पक्ष ताळ्तापट्टोर मुन्नेत्र कळघम सुरू केला आणि नंतर अण्णा द्रविड मुन्नेत्र कळघममध्ये सामील झाल्या. १९९० च्या उत्तरार्धात त्या पुन्हा द्रविड मुन्नेत्र कळघममध्ये सामील झाल्या.
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१९४९ पासून द्रविड मुन्नेत्र कळघम (डीएमके) च्या त्या सदस्य होत्या. १९५३ मध्ये, कुल कलवी थिट्टमच्या विरोधात डीएमकेच्या निषेधाचे नेतृत्व केल्याबद्दल त्यांना अटक करण्यात आली. १९५९-५८ दरम्यान त्या पक्षाच्या प्रचार सचिव होत्या. त्यांनी अन्नाई (अर्थ: आई) मासिकाच्या संपादक म्हणूनही काम केले [१] त्यांनी १९५७ ते १९७७ आणि १९८४ दरम्यानच्या सर्व विधानसभा निवडणुकांमध्ये पेरांबूर आणि उलुंडुरपेट मतदारसंघातून विधानसभा निवडणूक लढवली. तिने पेरांबूर मतदारसंघातून १९५७ च्या निवडणुकीत अपक्ष उमेदवार म्हणून, १९६७ आणि १९७१ च्या निवडणुकीत द्रविड मुन्नेत्र कळघम उमेदवार म्हणून तीन वेळा विजय मिळवला. [२] [३] [४] १९६२ ची निवडणूक पेरांबूरमधून आणि १९७७ ची निवडणूक उलुंदुरपेट मतदारसंघातून त्या हरल्या. [५] [६]
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१९६७ ते १९६९ या काळात तामिळनाडूमधील सीएन अन्नादुराई प्रशासनात हरिजन कल्याण आणि माहिती मंत्री म्हणून त्यांनी काम केले. एम. करुणानिधी प्रशासनात १९७४ पर्यंत त्यांनी पुन्हा हरिजन कल्याण मंत्री म्हणून काम केले.[७] [८]
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त्यांनी १९७४ मध्ये आपल्या मंत्रिपदाचा राजीनामा दिला आणि द्रविड मुनेत्र कळघम सोडला. त्यांनीदावा केला की सीएन अन्नादुराई यांच्या निधनानंतर द्रमुककडून हरिजनांना चांगली वागणूक दिली जात नाही आणि नवीन नेते एम. करुणानिधी हे हरिजनांबद्दल पूर्वग्रहदूषित होते. [८] त्या म्हणाली की, हरिजनांच्या हक्कासाठी लढण्यासाठी नवा पक्ष स्थापन करण्याची वेळ आली आहे. डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर नंतर कोणीही खऱ्या हे काम केले नाही व नवा पक्ष स्थापन करू, विरोधात बसून त्या अनुसूचित जातींच्या हक्कांसाठी लढणार.[८][९][१०]
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त्यांनी ताळ्तापट्टोर मुन्नेत्र कळघमची स्थापना केली. १९��७ च्या निवडणुकीत अण्णा द्रविड मुनेत्र कळघम जिंकून सत्तेवर आल्यानंतर त्यांनी आपला पक्ष विलीन केला. [११]
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३ एप्रिल १९७८ ते २ एप्रिल १९८४ पर्यंत त्यांनी अखिल भारतीय अण्णा द्रविड मुनेत्र कळघम प्रतिनिधी म्हणून राज्यसभा सदस्य म्हणून काम केले. १९ ऑगस्ट १९७९ ते २३ डिसेंबर १९७९ पर्यंत चौधरी चरण सिंह मंत्रालयात त्यांनी केंद्रीय मंत्री म्हणून काम केले. ए. बाला पजानोर यांच्यासह त्या केंद्रीय मंत्रालयात काम करणाऱ्या तामिळनाडूतील पहिल्या दोन बिगर-काँग्रेस द्रविड पक्षाच्या राजकारणी होत्या. [१२]
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महात्मा ज्योतिराव फुले यांची सत्यशोधक चळवळ व मुंबई व चेन्नई प्रांतात सुरू झालेली ब्राम्हणेतर चळवळ (१९१७ ते १९३७)पुढे नेण्याचे मोठे काम दिनकरराव जवळकर यांनी केले. ते हवेली तालुक्यातील म्हातोबाची आळंदी या गावचे शेतकरी होते. त्यांच्या शेतीचा शेवटचा तुकडा सन १९२५ सालीच गुजर सावकाराच्या घशात गेला.[१]
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छत्रपती शाहू महाराजांनी त्यांना ’कैवारी’ नावाचे वृत्तपत्र काढून दिले. ते त्याचे संपादकही होते. ब्राम्हणेतर चळवळीचे ते महाराष्टातील धडाडीचे नेते होते. पुण्यात त्यांनी व केशवराव जेधे यांनी छत्रपती मेळे काढून लोकमान्य टिळक यांना विरोध केला होता. लोकमान्य टिळक व कृष्णाशास्त्री चिपळूणकर हे देशाचे दुश्मन आहेत असे ते म्हणत. "टिळक हे तेल्यातांबोळ्यांचे नाही तर सनातनी ब्राम्हणाचे पुढारी होते. बहुजन समाजाला भटांनी पिळवणूक केली. त्यामुळे समाज मागे राहिला." अशी त्यांची मते होती.
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त्यांनी इ.स.१९२५ साली 'देशाचे दुश्मन' नावाचे पुस्तक लिहिले.[२] शेतकऱ्यांची कैफियत,जेधे-जवळकर, देशाचे दुश्मन (टिळक आगरकर टीका), जाहीर सवाल १ ला, सवाल २रा, मर्द हो नाके कापून घ्या, १९५० सालची ब्राह्मण परिषद, शेतकऱ्यांचे हिंदुस्थान, क्रांतीचे रणशिंग (शेतकऱ्यांना साम्यवादाचे महत्त्व), शिवस्मारक पुराण क्रांतीचे रणशिंग, असे विषय त्या पुस्तकात होते..
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देशाचे दुश्मन नावाच्या पुस्तकाबद्दल ल.ब. भोपटकर वकील यांनी जिल्हाधिकाऱ्याकडे फिर्याद केली. प्रकाशक केशवराव जेधे आणि प्रस्तावना-लेखक बागडे वकील या तिघांना ताबडतोब पकड वॉरंटाने कैद करून त्यांची येरवडा जेलमध्ये झटपट रवानगीही झाली. तिघाही आरोपींना शिक्षा झाल्या. त्यावर अपील झाले. अपील चालवण्यासाठी डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर धावून आले. त्यांनी आरोपींची बाजू लढवली आणि तिघाजणांची निर्दोष सुटका केली.
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दिनकरराव जवळकर यांच्या लेखणीला तलवारीची धार होती, हे त्यांचे साहित्य वाचल्यावर कळून येते. अवघे ३४ वर्षाचे जीवनमान लाभलेल्या या महापुरुषांचा पराक्रम छत्रपती संभाजी महाराजासारखाच धारदार होता. दिनकररावांचे शत्रू असलेले ब्राम्हण म्हणायचेच. हा माणूस जणू विषात बुडवून लेखणीने लिहितो आहे. एवढी जहरी लेखणी चालवणारे दिनकरराव जवळकर यांच्या म्हातोबाची आळंदी या गावी त्यांची जयंती व पुण्यतिथी परिवतर्न चळवळीचे पुरस्कर्ते स��हित्यिक लेखक पत्रकार दशरथ यादव यांनी २००४ साली सुरू केली. पहिली जयंती चावडीत चाळीस पन्नसा लोकांच्यात साजरी करून दिनकरराव जवळकरांचे महत्त्व लोकांना सांगितले. त्यानंतर ग्रामस्थांचा सहभागही वाढून दरवषी जयंती पुण्यतिथी साजरी होते. आळंदी हे सत्यशोथक चळवळीते शक्तीपीठ व्हावे असा प्रयत्न सुरू आहे. दहा कोटीचे दिनकररावांचे स्मारक व्हावे अशी मागणी श्री यादव यांनी केली. २००१ साली इंदूताई जवळकर यांना शिवाजीराव खैरे यांच्या सहकार्याने म्हातोबाच्या आळंदीत दिनकररावांचा मोठा उपक्रम राबविण्याचा यादव यांचा विचार होता. त्यावेळी गावातील लोकांना बोलावून बैठकही केली होती.....पण काही कारणामुळे ते घडू शकले नाही. पुढे जवळकारांची मात्र जयंती सुरू झाली. सत्यशोधक दिनकरराव जवळकर पत्रकारिता पुरस्कार दरवषी अखिल भारतीय मराठी साहित्य परिषदेच्यावतीने खानवडी येथे होणाऱ्या महात्मा फुले प्रबोधन मराठी साहित्य संमेलनात दिला जातो...
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विनय कोरे हे मराठी राजकारणी आहेत. यांनी जनसुराज्य पक्षाची स्थापना केली. या पक्षाकडून ते महाराष्ट्राच्या १२व्या आणि १४व्या विधानसभेवर निवडून गेले.
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ऑक्टोबर २००९ च्या शाहूवाडी विधानसभा मतदारसंघात राज्याचे अपारंपरिक ऊर्जामंत्री व जनसुराज्य शक्ती पक्षाचे संस्थापक अध्यक्ष विनय कोरे यांनी ८३११ मताधिक्याने विजय मिळविला. त्यांनी नजीकचे प्रतिस्पर्धी शिवसेना आमदार सत्यजित पाटील-सरुडकर यांचा पराभव केला. त्यामुळे राष्ट्रीय काँग्रेसचे उमेदवार कर्णसिंह गायकवाड हे तिसऱ्या स्थानावर फेकले गेले.
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९७-सत्त्याण्णव ही एक संख्या आहे, ती ९६ नंतरची आणि ९८ पूर्वीची नैसर्गिक संख्या आहे.
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इंग्रजीत: 97 - ninety-seven.
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सत्येंद्रनाथ बोस (बंगाली: সত্যেন্দ্রনাথ বসু) (१८९४-१९७४) भारतीय शास्त्रज्ञ सत्येंद्र नाथ बोस हे सैद्धांतिक भौतिकशास्त्रात तज्ञ असलेले भारतीय गणितज्ञ आणि भौतिकशास्त्रज्ञ होते. बोस सांख्यिकी आणि बोस कंडेन्सेटच्या सिद्धांताचा पाया विकसित करण्यासाठी १९२० च्या सुरुवातीच्या काळात क्वांटम मेकॅनिक्सवर केलेल्या कामासाठी ते प्रसिद्ध आहेत. रॉयल सोसायटीचे फेलो, त्यांना भारत सरकारकडून १९५४ मध्ये भारताचा दुसरा सर्वोच्च नागरी पुरस्कार, पद्मविभूषण, प्रदान करण्यात आला.
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बोस-आइन्स्टाईन जोडीतील विश्वविख्यात शास्त्रज्ञ सत्येंद्रनाथ यांचा जन्म १ जानेवारी १८९४ रोजी कोलकाता येथे झाला. त्यांचे वडील सुरेंद्रनाथ हे रेल्वेत नोकरीला होते.
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बोस यांचा जन्म कलकत्ता (आता कोलकाता) येथे झाला, जो बंगाली कायस्थ कुटुंबातील सात मुलांपैकी सर्वात मोठा होता. त्याच्या पश्चात सहा बहिणी असलेला तो एकुलता एक मुलगा होता. बंगाल प्रेसिडेन्सीमधील नादिया जिल्ह्यातील बारा जागुलिया गावात त्यांचे वडिलोपार्जित घर होते. त्यांचे शालेय शिक्षण वयाच्या पाचव्या वर्षी त्यांच्या घराजवळ सुरू झाले. जेव्हा त्यांचे कुटुंब गोबागन येथे गेले तेव्हा त्यांना न्यू इंडियन स्कूलमध्ये दाखल करण्यात आले. शाळेच्या शेवटच्या वर्षात त्याला हिंदू शाळेत प्रवेश मिळाला. १९०९ मध्ये त्यांनी प्रवेश परीक्षा (मॅट्रिक) उत्तीर्ण केली आणि गुणवत्तेच्या क्रमाने ते पाचव्या स्थानावर राहिले. पुढे ते प्रेसिडेन्सी कॉलेज, कलकत्ता येथे इंटरमिजिएट सायन्स कोर्समध्ये सामील झाले, जिथे त्यांच्या शिक्षकांमध्ये जगदीश चंद्र बोस, शारदा प्रसन्न दास आणि प्रफुल्ल चंद्र रे यांचा समावेश होता.
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बोस यांना प्रेसिडेन्सी कॉलेजमधून मिश्र गणित विषयात विज्ञान पदवी प्राप्त झाली, १९१३ मध्ये ते प्रथम आले. त्यानंतर त्यांनी सर आशुतोष मुखर्जी यांच्या नव्याने स्थापन झालेल्या विज्ञान महाविद्यालयात प्रवेश घेतला, जिथे ते पुन्हा १९१५ मध्ये एमएससी मिश्रित गणिताच्या परीक्षेत प्रथम आले. एमएस्सी परीक्षेत त्यांचे गुण निर्माण झाले. कलकत्ता विद्यापीठाच्या इतिहासात नवा विक्रम, जो अजून पार करायचा आहे.
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एमएससी पूर्ण केल्यानंतर, बोस १९१६ मध्ये कोलकाता विद्यापीठाच्या सायन्स कॉलेजमध्ये रिसर्च स्कॉलर म्हणून रुजू झाले आणि त्यांनी सापेक्षतेच्या सिद्धांतावर अभ्यास सुरू केला. वैज्ञानिक प्रगतीच्या इतिहासातील हा एक रोमांचक काळ होता. क्वांटम सिद्धांत नुकताच क्षितिजावर दिसला होता आणि महत्त्वाचे परिणाम दिसायला लागले होते.
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त्यांचे वडील, सुरेंद्रनाथ बोस, ईस्ट इंडियन रेल्वे कंपनीच्या अभियांत्रिकी विभागात काम करत होते. १९१४ मध्ये, वयाच्या २० व्या वर्षी, सत्येंद्र नाथ बोस यांनी कलकत्त्याच्या एका प्रख्यात वैद्याची ११ वर्षांची मुलगी उषाबती घोष यांच्याशी विवाह केला. त्यांना नऊ मुले होती, त्यापैकी दोन लहानपणीच मरण पावली. १९७४ मध्ये त्यांचे निधन झाले तेव्हा ते त्यांच्या मागे पत्नी, दोन मुले आणि पाच मुली सोडून गेले.
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बहुभाषिक म्हणून, बोस यांना बंगाली, इंग्रजी, फ्रेंच, जर्मन आणि संस्कृत तसेच लॉर्ड टेनिसन, रवींद्रनाथ टागोर आणि कालिदास यांच्या कविता यासारख्या अनेक भाषांमध्ये पारंगत होते. ते व्हायोलिनसारखे भारतीय वाद्य एसराज वाजवू शकत होते. वर्किंग मेन्स इन्स्टिट्यूट म्हणून ओळखल्या जाणाऱ्या रात्रीच्या शाळा चालवण्यात त्यांचा सक्रिय सहभाग होता.
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सत्येंद्रनाथ यांचे शालेय ते पदवी पर्यंतचे शिक्षण कोलकाता येथेच झाले. लहानपणापासूनच वर्गात पहिला क्रमांक मिळवून उत्तीर्ण होण्याचा जणू त्यांना छंदच होता. पहिला क्रमांक त्यांनी कधीच सोडला नाही. शाळेत असतांना एकदा त्यांना गणिताच्या परिक्षेत १०० पैकी ११० गुण देण्यात आले कारण सगळी गणिते त्यांनी वेगवेगळ्या पद्धतीने आणि अचूक सोडविली होती. त्यांचे मित्रच नव्हे तर इतरही विद्यार्थी म्हणत की सत्येंद्रनाथ शिकत असतांना पहिला क्रमांक सोडून देऊन इतर क्रमांकासाठीच प्रयत्न करता येतील. सत्येंद्रनाथ यांनी प्रेसीडेन्सी कॉलेज मधून १९१५ साली आपली पदवी प्राप्त करतांनाही पहिला क्रमांक सोडला नाहीच, यावेळी ते संपूर्ण विद्यापिठातून प्रथम आले होते. त्यांना जगदीशचंद्र बोस आणि प्रफुल्लचंद्र रॉय यांचे सतत मार्गदर्शन आणि उत्तेजन मिळाले. त्यांना अनेक भाषा येत होत्या आणि व्हायोलीन सारखे एसराज नावाचे वाद्य ते अतिशय उत्तमपणे वाजवु शकत.
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बोस यांनी कलकत्ता येथील हिंदू शाळेत शिक्षण घेतले आणि नंतर कोलकाता येथील प्रेसिडेन्सी कॉलेजमध्येही शिक्षण घेतले, प्रत्येक संस्थेत सर्वाधिक गुण मिळवले, तर सहकारी विद्यार्थी आणि भविष्यातील खगोलभौतिकशास्त्रज्ञ मेघनाद साहा द्वितीय आले. तो जगदीश चंद्र बोस, प्रफुल्ल चंद्र रे आणि नमन शर्मा या शिक्षकांच्या संपर्कात आला ज्यांनी जीवनात उच्च ध्येय ठेवण्याची प्रेरणा दिली. 1916 ते 1921 पर्यंत, ते कलकत्ता विद्यापीठाच्या राजाबाजार विज्ञान महाविद्यालयाच्या भौतिकशास्त्र विभागात व्याख्याते होते. साहा यांच्यासोबत, बोस यांनी 1919 मध्ये आइन्स्टाईनच्या विशेष आणि सामान्य सापेक्षतेवरील मूळ पेपर्सच्या जर्मन आणि फ्रेंच अनुवादांवर आधारित इंग्रजीतील पहिले पुस्तक तयार केले. 1921 मध्ये, ते नुकत्याच स्थापन झालेल्या ढाका विद्यापीठाच्या भौतिकशास्त्र विभागाचे वाचक म्हणून रुजू झाले. सध्याचा बांगलादेश). एमएससी आणि बीएससी ऑनर्ससाठी प्रगत अभ्यासक्रम शिकवण्यासाठी बोस यांनी प्रयोगशाळांसह संपूर्ण नवीन विभाग स्थापन केले आणि थर्मोडायनामिक्स तसेच जेम्स क्लर्क मॅक्सवेलचा इलेक्ट्रोमॅग्नेटिझमचा सिद्धांत शिकवला.
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सत्येंद्र नाथ बोस यांनी साहा यांच्यासमवेत 1918 पासून सैद्धांतिक भौतिकशास्त्र आणि शुद्ध गणितामध्ये अनेक पेपर्स सादर केले. 1924 मध्ये, ढाका विद्यापीठाच्या भौतिकशास्त्र विभागात वाचक (खुर्चीशिवाय प्राध्यापक) म्हणून काम करत असताना, बोस यांनी शास्त्रीय भौतिकशास्त्राचा कोणताही संदर्भ न घेता प्लँकच्या क्वांटम रेडिएशन कायद्याची व्युत्पन्न करणारा एक शोधनिबंध लिहिला. . क्वांटम स्टॅटिस्टिक्सचे महत्त्वाचे क्षेत्र तयार करण्यात हा पेपर महत्त्वाचा होता. प्रकाशनासाठी लगेच स्वीकारले नसले तरी त्यांनी तो लेख थेट जर्मनीतील अल्बर्ट आइनस्टाईन यांना पाठवला. आइन्स्टाईनने पेपरचे महत्त्व ओळखून स्वतः जर्मन भाषेत भाषांतर केले आणि बोस यांच्या वतीने प्रतिष्ठित Zeitschrift für Physik यांना सादर केले. या ओळखीचा परिणाम म्हणून, बोस युरोपियन क्ष-किरण आणि क्रिस्टलोग्राफी प्रयोगशाळांमध्ये दोन वर्षे काम करू शकले, ज्या दरम्यान त्यांनी लुईस डी ब्रोग्ली, मेरी क्युरी आणि आइन्स्टाईन यांच्यासोबत काम केले.
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१९१५ सालीच सत्येंद्रनाथांनी अल्बर्ट आइनस्टाइन यांचा मूळ जर्मन भाषेतील असलेला सापेक्षता सिद्धांत सर्वप्रथम इंग्लिश भाषेत भाषांतरित केला. १९१६ ते १९२१ या काळात सत्येंद्रनाथांनी कोलकाता येथील विद्यापिठात प्राध्यापक पदावर काम कले. १९२१ साली ते ढाका ��ेथील विद्यापिठातील भौतिक शास्त्राचे प्राध्यापक म्हणून रुजू झाले.
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१९२३ साली सत्येंद्रनाथांनी प्रसिद्ध गणिती मॉल्ट यांच्या समीकरणांशी संबंधित स्वतःचे शोध इंग्लंड येथून प्रकाशित होणारे मासिक फिलॉसॉफीकलकडे पाठविले पण ते शोध छापण्यास त्या मासिकाने नकार कळविला. या घटनेमुळे सत्येंद्रनाथ निराश झाले नाहीत, त्यांनी त्यांचा प्रबंध आइन्स्टाईन यांच्याकडे जर्मनीला पाठविला. आइन्स्टाईन यांनी तो लेख जर्मन भाषेत भाषांतरित करून तेथे तो छापून येण्यास मोलाची मदत केली. लेख जगभरातील गणितींच्या पसंतीस उतरला, त्यामुळे बोस प्रसिद्धिस आले. आपल्या कामाच्या व्यापातून सत्येंद्रनाथ यांनी सुट्टी काढून ते मादाम मेरी क्युरी यांच्यासह पॅरीस येथे १० महिने काम केले. हे काम आटोपून सत्येंद्रनाथ जर्मनीला गेले. तेथे त्यांचे भव्य स्वागत झाले. आइन्स्टाईन यांच्यामुळे इतर वैज्ञानिक जसे मॅक्स प्लांक, एर्विन श्रोडिंजर, वोल्फगांग पॉली, वर्नर हायझेनबर्ग, सोमरपॅण्ड यांच्याशी अनेक विषयांवर विस्तृत चर्चा करता आल्या.
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१९४५ साली सत्येंद्रनाथांनी आपली ढाका येथील नोकरी सोडून ते कोलकाता येथे १९५६ पर्यंत प्रोफेसर म्हणून काम केले. या कामातून सेवानिवृत्त झाल्यावर विश्व भारती विद्याल्याचे उपकुलपति म्हणून त्यांची नेमणूक झाली.
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भौतिकशास्त्र विषयाचे त्यांनी २४ लेख लिहिले. या विषयातील हे सर्व लेख अत्यंत महत्त्वाचे समजले जातात.
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१९५८ साली सत्येंद्रनाथांना भारत सरकारने पद्मविभूषण पुरस्कार देऊन गौरविले आणि त्यांना राष्ट्रीय प्रोफेसर म्हणण्यात येऊ लागले, त्याच वर्षी लंडन येथील रॉयल सोसयटीने त्यांना आपला
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सहकारी म्हणून जाहीर केले.
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दि. फेब्रुवारी ४ १९७४ रोजी सत्येंद्रनाथांचे हृदय रोगामुळे निधन झाले.
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जनगणना स्थल निर्देशांक ५२६६३६ असलेले सत्रासॆन हे गाव, जळगाव या जिल्ह्यातील २६८.७६ हेक्टर क्षेत्राचे गाव असून ह्या गावात ५९७ कुटुंबे आहेत व एकूण लोकसंख्या ३६६२ आहे.ह्याच्या सर्वात जवळचे शहर जळगाव हे ६५ किलोमीटर अंतरावर आहे.
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गावात असणाऱ्या सुविधा - पूर्व-प्राथमिक शाळा-५. प्राथमिक शाळा-१. कनिष्ठ माध्यमिक शाळा-१. माध्यमिक शाळा-१. उच्च माध्यमिक शाळा -१.
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स्थानिक नसलेल्या सुविधांची अंतरे -
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५ किमी पेक्षा कमी अंतरावर : काही नाही
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५ ते १० किमी अंतरावर : काही नाही
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१० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर : पदवी महाविद्यालय चोपडा येथे आहे. अभियांत्रिकी महाविद्यालय चोपडा येथे आहे. वैद्यकीय महाविद्यालय जळगाव येथे आहे. व्यावसायिक प्रशिक्षण शाळा जळगाव येथे आहे. अनौपचारिक प्रशिक्षण केन्द्र जळगाव येथे आहे. अपंगांसाठी खास शाळा जळगाव येथे आहे.
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असलेल्या सुविधा- प्राथमिक आरोग्य उपकेन्द्र, -१दवाखाने, -१
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नसलेल्या सुविधा - कम्युनिटी हेल्थ सेंटर, प्राथमिक आरोग्य केन्द्र, प्रसूति व शिशुसंगोपन केन्द्र, क्षयरोग रुग्णालय, अॅलोपॅथिक रुग्णालय, अन्य उपचार पद्धतीचे रुग्णालय, गुरांचे दवाखाने, फिरते दवाखाने, कुटुंब कल्याण केन्द्र,
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असलेल्या सुविधा- बाह्य रोगी विभाग, -१ इतर पदवीधर डॉक्टर, -१पदवी नसलेले डॉक्टर, -१ औषधाची दुकाने, -१
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नसलेल्या सुविधा - बाह्य व भरती असलेले रोगी विभाग, धर्मादाय बिगर-सरकारी रुग्णालय, एमबीबीएस पदवीधर डॉक्टर, पारंपरिक वैद्य व वैदू, इतर बिगरसरकारी वैद्यकीय सुविधा,
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असलेल्या सुविधा- शुद्ध केलेल्या पाण्याचा नळातून पुरवठा, झाकलेल्या विहिरीच्या पाण्याचा पुरवठा, न झाकलेल्या विहिरीच्या पाण्याचा पुरवठा, हँड पंपच्या पाण्याचा पुरवठा, बारमाही सुरू असलेल्या हँड पंपच्या पाण्याचा पुरवठा, बोअर वेलच्या पाण्याचा पुरवठा, बारमाही सुरू असलेल्या बोअरवेल पाण्याचा पुरवठा,
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नसलेल्या सुविधा - शुद्ध न केलेल्या पाण्याचा नळातून पुरवठा, झऱ्यांच्या पाण्याचा पुरवठा, नदी /कालवे यातील पाण्याचा पुरवठा, तलाव / तळी यातील पाण्याचा पुरवठा, इतर पाण्याचा पुरवठा,
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असलेल्या सुविधा- सांडपाणी शुद्धीकरणाच्या सयंत्रात सोडले जाते.उघडी गटारे,
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नसलेल्या सुविधा - न्हाणीघरासह सार्वजनिक स्वच्छता गृह, न्हाणीघर नसलेले सार्वजनिक स्वच्छता गृह, ग्रामीण सॅनिटरी हार्डवेरचे ���ुकान, सामूहिक बायोगॅस किंवा कचऱ्याच्या उत्पादक पुनर्वापराची व्यवस्था,
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गावात असणाऱ्या सुविधा - पोस्ट ऑफिस, मोबाइल फोन सुविधा, सार्वजनिक बस सेवा, ऑटो व टमटम, टॅक्सी, जिल्ह्यातील दुय्यम रस्त्याना जोडलेले रस्ते, डांबरी रस्ते, पाण्यासाठी नाल्या असणारे डांबरी रस्ते, बारमाही रस्ते,
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स्थानिक नसलेल्या सुविधांची अंतरे - उपपोस्ट ऑफिस, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. इंटरनेट कॅफे/सर्व्हिस सेंटर, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. खाजगी कूरियर, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. खाजगी बस सेवा, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. रेल्वे स्टेशन, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. ट्रॅक्टर - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. सायकल रिक्षा (पायचाकी), - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. बैल व इतर जनावरांनी ओढलेल्या गाड्या, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. राष्ट्रीय महामार्गाला जोडलेले रस्ते, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. राज्य महामार्गाला जोडलेले रस्ते, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. जिल्ह्यातील मुख्य रस्त्याला जोडलेले रस्ते, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. कच्चे रस्ते, - ५ किमी पेक्षा कमी अंतरावर.
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तळटीप- शिरगिणतीत असलेल्या पुढील सुविधांच्या उपलब्धततेची माहिती नाही - सायकल रिक्षा (यांत्रिक), समुद्र व नदीवरील बोट वाहतूक, बोट वाहतुकीयोग्य जलमार्ग,
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गावात असणाऱ्या सुविधा - शेतकी कर्ज संस्था, स्वसहाय्य गट (SHG), रेशनचे दुकान, आठवड्याचा बाजार, शेतमाल विक्री संस्था,
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स्थानिक नसलेल्या सुविधांची अंतरे - एटीएम - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. व्यापारी बँका, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. सहकारी बँका, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. मंडया / कायम बाजार, - ५ ते १० किमी अंतरावर. शेतमाल विक्री संस्था,
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गावात असणाऱ्या सुविधा - शिशुविकास पौष्टिक आहार केन्द्र (ICDS), अंगणवाडी पौष्टिक आहार केन्द्र, अंगणवाडी पौष्टिक आहार केन्द्र, इतर पौष्टिक आहार केन्द्र, आशा, समुदाय भवन (दूरचित्रवाणी सह अथवा विरहित), सार्वजनिक ग्रंथालय, सार्वजनिक वाचनालय, वृत्तपत्र पुरवठा, विधानसभा मतदान केन्द्र, जन्म व मृत्यु नोंदणी केन्द्र,
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स्थानिक नसलेल्या सुविधांची अंतरे - क्रीडांगण, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. खेळ / करमणूक क्लब, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर. सिनेमा/ व्हिडियो थियेटर, - १० किमी पेक्षा अधिक अंतरावर.
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घरगुती वापरासाठी वीजपुरवठा - आहे.
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शेतीसाठी वीजपुरवठा - आहे.
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व्यापारी वापरासाठी वीजपुरवठा - आहे.
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सर्व प्रकारच्या वापरासाठी वीजपुरवठा - आहे.
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या लेखातील माहिती २०११ च्या जनगणनेनुसार [१] आहे. जनगणनेत नसलेल्या माहितीसाठी वेगळा संदर्भ दिला आहे.
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सदर बझार विधानसभा मतदारसंघ हा दिल्लीमधील एक विधानसभा मतदारसंघ आहे. याची रचना १९९३मध्ये झाली.
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हा विधानसभा मतदारसंघ चांदनी चौक लोकसभा मतदारसंघाच्या क्षेत्रांतर्गत येतो.
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सदागोपान रमेश (रोमन लिपी: Sadagoppan Ramesh ;) (ऑक्टोबर १६, इ.स. १९७५; चेन्नई, तमिळनाडू - हयात) हा भारतीय राष्ट्रीय पुरुष क्रिकेट संघाकडून आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेळलेला खेळाडू आहे. तो प्रामुख्याने डाव्या हाताने खेळणारा फलंदाज म्हणून ओळखला जातो. फलंदाजीसोबत तो उजव्या हाताने लेगब्रेक गोलंदाजीदेखील करतो. एकदिवसीय सामन्यांच्या कारकिर्दीतील पहिल्या चेंडूवर बळी मिळवण्याचा विक्रम करणारा तो एकमेव भारतीय क्रिकेट खेळाडू आहे. वेस्ट इंडीजविरुद्ध झालेल्या सामन्यात निक्सन मॅक्लीन याचा बळी घेऊन त्याने हा विक्रम नोंदवला.
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सदाशिव आठवले (जन्म : सातघर-अलिबाग, २३ मार्च १९२३[१]; - ८ डिसेंबर २००१) हे मराठीभाषक संशोधक, इतिहासकार आणि लेखक होते. त्यांनी चार्वाकविषयक इतिहास आणि तत्त्वज्ञान तसेच भारतीय तसेच महाराष्ट्राच्या इतिहासाशी संबंधित विविध विषयांवर लेखन केले आहे. सदाशिव आठवले यांनी अनेक ऐतिहासिक व्यक्तींची चरित्रे लिहिली आहेत.
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सदाशिव आठवले ह्यांचा जन्म रायगड जिल्ह्यातील अलीबागपासून ८ मैलांवर असलेल्या सातघर ह्या लहान खेडेगावात झाला. त्यांनी पुणे येथील सर परशुरामभाऊ महाविद्यालय येथून[२] १९४६ ह्या वर्षी इतिहास व राज्यशास्त्र ह्या विषयातील मुंबई विद्यापीठाची एम. ए. ही पदवी मिळवली[१].
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१९४६ ते १९६२ ह्या काळात त्यांनी प्रथम सर परशुरामभाऊ महाविद्यालय, पुणे येथे इतिहास ह्या विषयाचे अध्यापन केले[३]. नंतर कोल्हापूर येथील राजाराम महाविद्यालय (१९५०-१९५८) आणि मुंबईतील एल्फिन्स्टन महाविद्यालय[१] (१९५८-१९६२)[२] येथेही त्यांनी इतिहास ह्या विषयाचे अध्यापन केले[४]. इतिहासकार त्र्यंबक शंकर शेजवलकर ह्यांच्या मार्गदर्शनाखाली त्यांनी नाना फडणवीस ह्या विषयावर पीएचडी ह्या पदवीसाठी अभ्यास केला[५]. परंतु त्यांना ती पदवी मिळू शकली नाही[६].
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१९६२ ते १९७० ह्या कालावधीत मराठी विश्वकोशात वरिष्ठ संपादक म्हणून त्यांनी काम पाहिले[१]. संपादनाचे काम त्यांनी केले. परंतु प्रमुख संपादकांशी कार्यपद्धतीबद्दल मतभेद झाल्याने त्यांनी ते काम सोडले.[७]
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नंतरच्या काळात ते कुर्डुवाडी येथील महाविद्यालयाचे (१९७०-१९७४) तसेच अहमदनगरच्या सारडा महाविद्यालयाचे प्राचार्य होते.
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आठवले ह्यांची इतिहासविषयक, तसेच कथा, लघुकादंबरी, नाटक कविता अशा विविध साहित्यप्रकारांतील अनेक पुस्तके प्रकाशित झाली असून त्यांपैकी काही पुस्तकांच्या एकाहून अधिक आवृत्त्याही निघाल्या आहेत.
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आठवले ह्यांनी दै. केसरी, चित्रमयजगत, नवभारत, भालचंद्र, युगवाणी, ललित, समाजप्रबोधनपत्रिका, सोबत, इत्यादी मराठी नियतकालिकांतून विविध विषयांवर लेख लिहिले आहेत.
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सदाशिव मार्तंड गर्गे (जन्म : लहुरी-बीड, ४ नोव्हेंबर १९२०; - ४ नोव्हेंबर २००५) हे मराठी पत्रकार, इतिहाससंशोधक, समाजशास्त्रज्ञ होते.
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गर्ग्यांना मराठी, फारसी व उर्दू या भाषा येत होत्या. त्यांनी मोडी लिपीही अभ्यासली होती. पेशाने पत्रकार असलेल्या गर्ग्यांनी नागपुरात 'तरुण भारत' आणि पुण्यात 'सकाळ' व 'विशाल सह्याद्री' या वृत्तपत्रांतून २७ वर्षे पत्रकारिता केली.
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मूळच्या मराठवाड्यातील अंबेजोगाईच्या असणा्या लीलाताई गर्गे या स.मा. गर्ग्यांच्या पत्नी होत्या. इ.स. २००९ साली लीलाताईंचा मृत्यू झाला.
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'भारतीय समाजविज्ञान कोश' हे गर्ग्यांचे महत्कार्य आहे. सुमारे आठ-दहा वर्षे प्रचंड परिश्रम करून, शंभराहून जास्त लेखकांकडून नोंदी लिहून घेऊन सहा खंडांत त्यांनी हा कोश प्रकाशित केला. यांचे खालील साहित्य प्रकाशित झाले आहे :
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स.मा. गर्गे हे अखिल भारतीय इतिहास अभ्यास परिषदेच्या अध्यक्षपदी काही काळ काम करत होते. 'मराठवाडा मित्रमंडळ' ही संस्थाही त्यांनी स्थापली.
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डॉ. सदाशिव सखाराम शिवदे ( जन्म : इ.स. १९३७; - पुणे, ७ एप्रिल २०१८) हे ऐतिहासिक विषयांवर लेखन करणारे मराठी साहित्यिक होते.
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डॉ. शिवदे हे व्यवसायाने पशुवैद्यक होते. इतिहासाच्या आवडीमुळे ते या क्षेत्रातील अभ्यासाकडे वळले. पशुवैद्यक सेवा पुरवितानाच त्यांनी मराठी, इतिहास विषयात एम. ए.ची पदवी घेतली. त्यांनी लिहिलेले 'ज्वलज्ज्वलनतेजस संभाजीराजे' हे छत्रपती संभाजी महाराज यांचे चरित्र प्रसिद्ध आहे. 'माझी गुरे, माझी माणसे' या ग्रामीण जीवनावर आधारित पुस्तकासह त्यांची इतिहासविषयक २६ पुस्तके प्रकाशित झाली असून त्यांच्या मृत्युसमयी त्यांची दोन पुस्तके प्रकाशनाच्या वाटेवर होती. भारत इतिहास संशोधन मंडळाचे ते विश्वस्त होते. तसेच महाराष्ट्र राज्य इतिहास परिषदेचे ते माजी अध्यक्ष होते.
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सदिश गुणाकार ही दोन सदिशांमधील द्विक्रिया आहे. येणाऱ्या गुणाकाराच्या प्रकारावरून सदिश गुणाकाराचे दोन प्रकार पडतात:
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बिंदू गुणाकाराची व्याख्या पुढील सूत्राने केली जाते.
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येथे θ हा a and b मधील सर्वात लहान कोन (०° ≤ θ ≤ १८०°) आहे, ‖a‖ आणि ‖b‖ ही a आणि b ह्या सदिशांच्या किंमती आहेत.
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फुली गुणाकाराची व्याख्या पुढील सूत्राने करतात.:[१][२]
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येथे θ हा a and b मधील सर्वात लहान कोन (०° ≤ θ ≤ १८०°) आहे, ‖a‖ आणि ‖b‖ ही a आणि b ह्या सदिशांच्या किंमती , आणि n हे एकक सदिश हे दोघेही a आणि b यांना सामावणाऱ्या प्रतलास(पातळीस) लंब आहेत.
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६७-सदुसष्ठ ही एक संख्या आहे, ती ६६ नंतरची आणि ६८ पूर्वीची नैसर्गिक संख्या आहे.
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इंग्रजीत: 67 - sixty-seven.
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इ-सकाळने http://www.namami.org/ १० लाख हस्तलिखितांचा खजिना ऑनलाइन स्वरूपात खुला झाल्याची बातमी दिली आहे.दैनिक सकाळ म्हणते-- "भारताने आज १० लाख हस्तलिखितांचा "कीर्तिसंपदा' हा इलेक्ट्रॉनिक डाटाबेस तयार करून विश्वविक्रम नोंदविला आहे. या डाटाबेसमध्ये कौटिल्याचे अर्थशास्त्र, गीतगोविंद व बाबरनामा यांसारख्या प्राचीन ग्रंथांचाही समावेश आहे." ......
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पर्यटन व सांस्कृतिक कार्यमंत्री अंबिका सोनी यांनी, "ही सुवर्णाक्षरात लिहून ठेवण्यासारखी घटना आहे,' असे या डाटाबेसच्या उद्घाटन प्रसंगी येथे सांगितल्याचे दैनिक सकाळ म्हणते, त्यामध्ये पुण्यातील भांडारकर प्राच्यविद्या संस्थेतील पाच हस्तलिखितांचा समावेश असल्याचेही दैनिक सकाळ नमूद करते.
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"नॅशनल मिशन फॉर मॅन्युस्क्रिप्ट' या संस्थेने तयार केलेला हा डाटाबेस http://www.namami.org/ या संकेतस्थळावर उपलब्ध आहे.
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[javascript:openWindow( "/esakal/02152007/71F7322A6D.htm") सौजन्य दैनिक इ-सकाळ]
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टाइम्स ऑफ इंडिया चे वार्ताहार चिदानंद राजदत्त यांनी विकिपीडियाचे संस्थापक संस्थापक जिंबो वेल्स यांची भेट घेऊन भारतीय भाषिक मराठी,कन्नड आणि बंगाली विकिपीडियांच्या प्रगतीबद्दल माहिती घेऊन तिचा उल्लेख 'वेजेस ऑफ लँग्वेजेस' आपल्या लेखात केला , त्या पाठोपाठ राष्टीय प्रमुख दैनिक द हिंदूच्या वार्ताहार 'प्रीति जे.' यांनी पण 'से इट इन युवर लींगो' या लेखात भारतीय भाषातील विकिपीडियांची दखल घेतली. आता आजच्या टाईम्स ऑफ इंडियाच्या अग्रलेखान जागतिक प्रभावी ब्रँड्सच्या यादीत गूगल,ॲपल, आणि यूट्युब या तिघांच्या पाठोपाठ विकिपीडिया एनसायक्लोपीडियाने चौथा क्रमांक पटकावल्याचा गौरवास्पद उल्लेख केला आहे.टाइम्स ऑफ इंडिया 'इट्स ईममटेरीअल' अग्रलेखात म्हणते की फक्त हे (गूगल,ॲपल,युट्यूब,विकिपीडिया) फक्त आंतरजालावरील तारेच नाहीत तर ग्राहकांच्या गरजा ओळखण्याचा आणि अंतिम उपभोक्त्यावर संपूर्ण लक्ष केंद्रित करण्यासारखा कमिटमेंटचा मोठा विचार (बिग आयडिया) यात दिसून येतो.
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गूगलची स्तुती करून टाइम्स ऑफ इंडिया पुढे म्हणते , विकिपीडियातर जवळजवळ उपयोगकर्त्या वाचकांनीच उभारला आहे, कल्पनेत शक्य असलेल्या प्रत्येक गोष्टीबद्दल संशोधनपूर्ण माहिती देतो. 'आंतरजालावरील या आभासी संकल्पनांनी, लोकांवर मूर्त वस्तूंपेक्षा अधिक प्रभाव टाकला आहे.जागतिक व्यापारातील चढाव उतारात ज्यां���ा 'आयडियाशनल' बाजू असेल अशाच वस्तू पुढे जाऊ शकतील. 'आयडिया' जेवढी 'प्युअर' तेवढीच 'ब्रँडच्या यशाची खात्री अधिक.
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सोप्या ,सुयोग्य व ग्राहकास मैत्रीपूर्ण वाटतील अशा सर्वकालीन मुद्यांचे महत्त्व या अग्रलेखात विषद केले आहे. हा अग्रलेख वाचकांकरिता इ पेपर सदरातसुद्धा उपलब्ध केला गेला आहे.
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विकिपीडियाचे संस्थापक जिंबो वेल्स यांच्या मतानुसार मराठी, कन्नड व बंगाली विकिपीडिया ह्या त्यांच्या संकेतस्थळावरील सर्वाधिक वाढत जाणाऱ्या आहेत. मराठी विकिने नुकतेच ७००० लेखांचा आकडा पार केला. (स्रोत -टाईम्स ऑफ इंडिया- चिदानंद राजघाट्टा यांचा लेख)
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[१]
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The Bengali Wikipedia, a web-based free-content multilingual encyclopaedia project, has crossed the landmark of 10,000 articles. It became the 50th language to do so and only the second from South Asia.
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Telugu wikipedia is on the top spot with over 15,000 articles.[२]
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More Indian languages on Wikipedia
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IANS
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Friday, September 01, 2006 10:40 IST
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BANGALORE: More and more Indians can contribute to the volunteer-edited Wikipedia encyclopedia project, now rated among the top 20 websites globally.
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१२ ऑगस्ट २००६ ला, महाराष्ट्र मंडळ (ममं) बे एरियाच्या वतीने श्री.अतुल तुळशीबागवाले आणि श्री.मिलिन्द भाण्डारकर यांनी, कॅलिफोर्नियातल्या सनिव्हेल नावाच्या गावात मराठी विकिपीडियाविषयी माहितीवर्ग घेतला. हा वर्ग महाराष्ट्र मंडळाच्या मंगळागौर कार्यक्रमाला संलग्न होता. त्यातच ममं ने उन्हाळ्यात येथे हमखास येणाऱ्या येथील संगणक तंत्रज्ञांच्या आईवडिलांसाठी एक संमेलन (ज्याला इंग्रजीत आपण गेट-टुगेदर म्हणतो) आयोजित केले होते. त्यामुळे मराठी आजी-आजोबांची संख्या अधिक, आणि मंगळागौरीचे खेळ खेळणाऱ्यांची कमी अशी परिस्थिती होती. आम्हालाही हेच हवे होते. कारण ह्या आजी-आजोबांचेच तर आम्हाला सहकार्य हवेय. त्यांना आपल्या मराठी संस्कृतीविषयी असलेली माहिती त्यांच्यासोबतच लुप्त होऊ नये, म्हणून तर मराठी विकिपीडियाचे प्रयोजन आहे.
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मिलिन्द भाण्डारकर मनोगतवर पुढे म्हणतातः
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"तर एकंदरीत कार्यक्रम (आमच्या अपेक्षेपेक्षाही) चांगला झाला. तुम्हाला आमचा हा कार्यक्रम आपल्या संस्थेत करायचा असल्यास आम्ही दोघे जिथवर चतुश्चक्रवाहन (ज्याला आपण मराठीत कार म्हणतो) चालवत येऊ शकू ( म्हणजे सॅन होझे पासून पन्नास मैलाच्या परिघात) तिथपर्यन्त येऊ. यापलीकडे तुम्ही तुमचे बघा. अतुलने एवढ्या कष्टाने तयार केलेले प्रेझेंटेशन आम्ही तुम्हाला मुक्त स्वरूपात वापरायला देतोय."
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मराठी विकीपीडियाचा वर्ग
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प्रेझेंटेशन
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न्युयॉर्क टाइम्स वरील बातमी
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[३] व��दागारातील आवृत्ती
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Hindi हा शब्द marathi पेक्षा खूप जास्त शोधला जातो. Font हा शब्द marathi पेक्षा थोडासाच कमी शोधला जातो.
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वृत्तपत्रांमध्ये Times of Indiaचा शोध सर्वाधिक आहे.त्या पाठोपाठ Indian Expressचा क्रमांक लागतो. मराठी वृत्तपत्रात 'esakal'पेक्षा sakal शब्दाचा शोध अधिक होता. pudhari चा खूप अत्यल्प, तर samana चा शब्दशोध २००५ नंतर थंडावल्याचे दिसते. 2006 मध्ये Lokmat शब्दशोध सर्वांत पुढे आला आहे. sakal+esakal क्र.२वर जात आहेत, loksatta क्र.३वर दिसतो. तर Maharashtra Times चा आलेख देखील चढता आहे.
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इतर मराठी संकेत स्थळांचा शब्दशोध गुगल ट्रेंडवर उपल्ब्ध होत नाही असे दिसते.
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भारत व इंग्लंड मध्ये bombay शब्दशोध कमी होत असून mumbai अधिक होत असल्याचे आढळते.तर उत्तर अमेरिका खंडात bombay शब्दशोध अधिक आहे.pune पेक्षा poona चा वापर नगण्य आहे तर अमराठी शहरात nasik जास्त तर महाराष्ट्रात nashik,nasik शब्दशोध सारखाच होतो.
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Mumbai चा सर्वाधिक त्याच्या ५०% pune तर nagpur च्या ५०% Aurangabad, nashik+nasik चे प्रमाण Aurangabadच्या बरोबरीने शब्दशोध होतो.त्या खालोखाल kolhapurचा
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शब्दशोध होतो.
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ऐतिहासिक व्यक्तींमध्ये 'shivaji'चा शब्दशोध सर्वाधिक आणि खास करून कोल्हापुरच्या लोकांकडून होतो.'sai baba'शब्द मुंबई आणि इतर अमहाराष्ट्रीय शहरातून होतो. सध्याच्या हयात व्यक्तींत नावघेण्याजोगा शोध sachin,सचिन तेंडुलकर शब्दांचा होतो. पण कोल्हापूरकरमात्र सचिनपेक्षा 'शिवाजी' शब्द अधिक शोधत असतात.
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इथे दिलेले वृत्त सर्वसमावेशक स्रोलेले असावे या दृष्टीने खालील स्रोतांचा उपयोग करावा.
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वृत्तसेवा
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महाराष्ट्रातील दैनिक
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प्रादेशिक आणि जिल्हानिहाय दैनिके आणि स्रोत
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महाराष्ट्र शासन वेबपेज वापरण्याचे नियम
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Content Disclaimer
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Copyright
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विचार करून ठेवा.
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वर्ग:संस्कृति
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