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|---|---|---|
1,573 | वे अपनी जिंदगी से संतुष्ट हैं। | positive |
1,574 | इस बीच मीरा के कहने पर गौतम को सबक सिखाने के लिए वेरोनिका उसकी चाल ही उस पर आजमाती है। | neutral |
1,575 | गौतम को वेरोनिका का अंदाज पसंद आता है। | positive |
1,576 | असमर्पित रिश्ते में यकीन रखने वाले दोनों मौज-मस्ती के लिए साथ रहने लगते हैं। | positive |
1,577 | मीरा उनके साथ एडजस्ट करती है। | positive |
1,578 | अरे हां, गौतम की मां और मामा भी हैं। | neutral |
1,579 | मां दिल्ली में रहती हैं और मामा लंदन में। | neutral |
1,580 | मामा का ही दिलफेंक मिजाज भांजे को मिला है। | neutral |
1,581 | कुछ दिनों के लिए भिड़ायी गयी यह तरकीब रिश्तों के नए मायने उजागर करती है। | neutral |
1,582 | तीनों मुख्य किरदारों के स्वभाव और सोच में परिवर्त्तन आता है। | neutral |
1,584 | थोड़ा खिंच भी जाता है। | neutral |
1,586 | उन्होंने दिल चाहता है से लेकर लव आज कल तक में निभाई भूमिकाओं में से थोड़ा-थोड़ा याद कर कॉकटेल के गौतम को भी निभा दिया है। | positive |
1,589 | दीपिका पादुकोण भी बिगड़ी हुई लड़की का किरदार निभाने के अनुभव बटोर चुकी हैं। | positive |
1,590 | यहां उनमें थोड़ा और निखार दिखाई देता है। | positive |
1,591 | खास कर छूट जाने, अकेले पड़ने और प्रेमरहित होने के एहसास, भाव और दृश्यों में वह प्रभावशाली लगी हैं। | positive |
1,592 | इस फिल्म में उन्हें चरित्र के मुताबिक आकर्षक कॉस्ट्यूम भी मिले हैं। | positive |
1,593 | वेरोनिका को उन्होंने बहुत अच्छी तरह जीवंत किया है। | positive |
1,594 | बोमन ईरानी और डिंपल कपाडि़या के किरदार घिसेपिटे हैं, इसलिए उनके अभिनय में नयापन भी नहीं है। | negative |
1,595 | रणदीप हुडा का चरित्र अविकसित रह गया है। | negative |
1,596 | कॉकटेल हिंदी फिल्मों की पीढि़यों पुरानी सोच को फिर से स्थापित करती है। | neutral |
1,597 | दीपिका पादुकोण जैसी आधुनिक लड़की को कथित भारतीय नारी में तब्दील करने की कोशिश लेखक-निर्देशक के वैचारिक दायरे को जाहिर करती है। | neutral |
1,598 | एक-दूसरे के लिए त्याग कर रही लड़कियों के व्यवहार को देख कर हंसी आती है। | negative |
1,600 | यह फिल्म हर हाल में गौतम यानी नायक के फैसलों को उचित ठहराती चलती है। | positive |
1,601 | फिल्म के कुछ संवाद अंग्रेजी में हैं। | neutral |
1,602 | हिंदीभाषी दर्शकों को दिक्कत हो सकती है। | negative |
1,603 | हिंदी में बच्चों पर केंद्रित फिल्में बहुत कम बनती हैं। | negative |
1,604 | चिल्ड्रेन फिल्म सोसायटी के सौजन्य से कुछ बनती भी हैं तो रेगुलर थिएटर में रिलीज नहीं हो पातीं। | negative |
1,605 | रुड़की शहर का गट्टू अपने चाचा के साथ रहता है। | neutral |
1,607 | गट्टू को चाचा की मार से फर्क नहीं पड़ता। | neutral |
1,608 | कबाड़ का काम सीखने में उसका ज्यादा मन नहीं लगता। | negative |
1,609 | उसे अपनी उम्र के दूसरे बच्चों की तरह पतंगाबजी का शौक है। | positive |
1,610 | वह पतंग उड़ाता है और सपने पालता है कि एक दिन शहर की काली पतंग वह जरूर काटेगा। | neutral |
1,611 | काली पतंग उड़ाने वाले की किसी को जानकारी नहीं है। | neutral |
1,612 | काली पतंग सभी पतंगों को काट कर आसमान में अकेली उड़ती रहती है। | neutral |
1,613 | गट्टू की समझ में आता है कि शहर की सबसे ऊंची छत से पतंग उड़ाई जाए तो काली पतंग को काटा जा सकता है। | neutral |
1,617 | अमूमन बाल फिल्मों में बड़ों के दृष्टिकोण के हावी होने का खतरा रहता है या फिर फिल्में उपदेशात्मक हो जाती हैं। | negative |
1,618 | गट्टू अत्यंत मासूम फिल्म है। | neutral |
1,619 | गट्टू का बचपन वंचित है, लेकिन उसके उत्साह और जोश में बच्चों की ढीठता है। | neutral |
1,620 | यही बात इस फिल्म को सुंदर बनाती है। | positive |
1,621 | राजन खोसा ने छोटे शहर का माहौल रचने के लिए इसे रुड़की में शूट किया है। | neutral |
1,622 | किसी भी पूर्वधारणा से बचाने के लिए फिल्म में परिचित कलाकारों को नहीं लिया गया है। | neutral |
1,623 | सारे कलाकार नए हैं और वे अपने किरदारों में जंचते हैं। | positive |
1,625 | वह आसानी से हर सिचुएशन में ढल जाता है। | positive |
1,626 | स्कूल के बच्चों ने मोहम्मद समद का पूरा साथ दिया है। | positive |
1,627 | लगता है राजन खोसा ने बच्चों के साथ एक्टिंग वर्कशॉप कर उन्हें साधा है। | positive |
1,629 | फिल्म की पटकथा और संवाद के लिए लेखकीय टीम राजन खोसा, के डी सत्यम और दिलीप शुक्ला को खास बधाई। | neutral |
1,630 | कैमरामैन से फिल्म का माहौल रचने में सहायता मिली है। | positive |
1,631 | छोटे शहर की गालियां, छतें और विहंगम दृश्य मोहक और विश्वसनीय हैं। | positive |
1,632 | पाओली दाम के बोल्ड सीन और निर्भीक संवादों की वजह से यह फिल्म चर्चा में थी। | positive |
1,633 | उससे आकर्षित होकर फिल्म देखने गए दर्शकों को निराशा नहीं होगी। | positive |
1,634 | हालांकि कुछ कामोत्तेजक दृश्य कट गए हैं, लेकिन हिंदी फिल्मों के हिसाब से बचे दृश्य भी कम नहीं हैं। | neutral |
1,636 | फिलहाल हेट स्टोरी में विवेक अग्निहोत्री ने बदले की कहानी में शरीर को अस्त्र के रूप में इस्तेमाल किया है। | neutral |
1,637 | इस अस्त्र के इस्तेमाल में खून नहीं बहता। | neutral |
1,638 | विरोधी खेमे के पुरुष निढाल और विवश हो जाते हैं। | negative |
1,639 | विवेक अग्निहोत्री की नायिका काव्या कृष्णा एक महत्वाकांक्षी पत्रकार है। | neutral |
1,640 | अपने फोटोग्राफर दोस्त की मदद से वह एकस्टिंग ऑपरेशन के जरिए एक स्थापित उद्योगपति को बेनकाब करती है। | positive |
1,642 | अपने स्वार्थ के लिए वह किसी हद तक जा सकता। | negative |
1,644 | काव्या अपनी खुन्नस और जिद में सिद्धार्थ को तबाह करने के लिए जिस्म को हथियार बनाती है। | negative |
1,645 | वह अपने उद्देश्य में सफल भी रहती है। | positive |
1,646 | फिल्म में एक संवाद है कि अगर औरत खुद को बेचने पर आए तो वह दुनिया के किसी भी मर्द को खरीद सकती है। | neutral |
1,647 | यों नैतिकता के दबाव में निर्देशक ने फिल्म का क्लाइमेक्स रचा है। | neutral |
1,648 | बदले की इस कहानी में शरीर को अस्त्र बनाने के बहाने निर्माता-निर्देशक आम दर्शकों को रिझाने के लिए बोल्ड दृश्य रखे हैं। | neutral |
1,649 | एक औरत के बदले की कहानी किसी और तरीके से भी कही जा सकती थी। | neutral |
1,650 | लेकिन विवेक अपनी नायिका को यह राह दी। | neutral |
1,651 | उन्होंने बदले की कहानी की कमान नायिका को सौंप दी है। | neutral |
1,652 | नायक सिर्फ साथ के लिए है। | positive |
1,653 | यह प्रतिनायक और नायिका की हेट स्टोरी है। | neutral |
1,654 | पाओली ने बोल्ड दृश्यों में बेझिझक दिखी हैं। | positive |
1,655 | इस फिल्म की उपलब्धि गुलशन देवैइया और सौरभ दूबे हैं। | neutral |
1,656 | दोनों ने अपनी भूमिकाओं को उनके चरित्र के अनुरूप निभाया है। | positive |
1,657 | देवैइया की अतिरिक्त मेहनत पर्दे पर अच्छा परिणाम देती है। | positive |
1,658 | बाकी कलाकार साधारण और स्थानपूर्ति के लिए हैं। | neutral |
1,659 | रजनीश ठाकुर की फिल्म मेरे दोस्त पिक्चर अभी है का विषय रोचक और प्रासंगिक है। | positive |
1,662 | रजनीश ठाकुर ने फिल्म के नायक के लिए बनारस के अमर जोशी को चुना है। | neutral |
1,663 | फिल्म निर्देशन सीखने के लिए अमर जोशी खुद के इंतजाम से पहले लंदन जाता है। | neutral |
1,664 | लंदन से फिल्म डायरेक्शन की पढ़ाई पूरी कर वह मुंबई लौटता है। | neutral |
1,665 | वह एक सारगर्भित आर्ट हाउस फिल्म बनाना चाहता है, लेकिन परिस्थितियां उसके अनुकूल नहीं बन पातीं। | negative |
1,666 | फिल्म बनाने के क्रम में वह भांति-भांति के निर्माताओं से मिलता है। | neutral |
1,667 | आखिरकार उसकी फिल्म पूरी होती है, लेकिन उसकी कहानी और प्रस्तुति बदल चुकी होती है। | neutral |
1,669 | फिल्म के अंत में हम देखते हैं कि अमर जोशी आर्ट, उद्देश्य, गंभीर सिनेमा को भूल कर कमर्शियल चपेट में आ चुका है। | neutral |
1,670 | और खुश भी है। | positive |
1,671 | इस उम्दा सोच की फिल्म को रजनीश ठाकुर उम्दा तरीके से पेश नहीं कर पाए हैं। | negative |
1,672 | उनके सामने भी अमर जोशी मजबूरियां रही होंगी। | neutral |
1,673 | तभी उन्हें अमर जोशी जैसे असहाय किरदार में सुनील शेट्टी को लेना पड़ा होगा। | neutral |
1,674 | सुनील शेट्टी की चाल-ढाल और छवि में अमर जोशी की बेचारगी नहीं है। | positive |
1,675 | पूरी फिल्म मुख्य रूप से सुनील शेट्टी और राजपाल यादव पर टिकी हुई। | positive |
1,677 | ओम पुरी और नीना गुप्ता समेत सभीे कलाकारों का अभिनय साधारण या उससे भी निचले स्तर का है। | negative |
1,678 | अच्छे व्यंग्य की संभावना की यह फिल्म कमजोर पटकटथा, अयोग्य कलाकारों और अकुशल निर्देशन की वजह से भटक गई है। | negative |
1,679 | एक निहायत कमजोर फिल्म बन सकी है। | negative |
1,680 | बैटमैन परंपरा की यह तीसरी और आखिरी फिल्म भव्यता व कथन के स्तर पर द डॉर्क नाइट के स्तर की लगती है। | neutral |
1,682 | हालांकि, अपनी पिछली फिल्मों मीमेन्टो और इन्सेप्शन में वे कुछ बेहतरीन दृश्य रच चुके हैं सो इसकी उम्मीद तो थी। | positive |
1,683 | लेकिन हिंदी सिनेमा के दर्शकों को शायद यह बात नहीं हजम हो। | negative |
1,685 | फिल्म की मूल कहानी में मास्क लगाए विलेन के किरदार में टॉमस हार्डी जो कि बेन के किरदार में पूरी फिल्म में बैटमैन बने क्रिस्टियन बेल पर हावी दिखते हैं, कई बार बुरी तरह नायक को पीटते हैं। | neutral |
1,686 | बैटमैन का चोला धारण करने से पहले क्रिस्टियन बेल वायेन इंटरप्राइजेस को बचाने की बहुत कोशिश करते हैं लेकिन उनके विरोधी बेन के साथ मिलकर न सिर्फ स्टॉक एक्सचेंज पर कब्जा करते हैं बल्कि परमाणु बम का नुस्खा भी हासिल कर लेते हैं। | neutral |
1,687 | इन सारे खतरों से शहर को बचाने के लिए बैटमैन खलनायक बेन के सामने आता है लेकिन बेन की ताकत का अंदाजा उसको नहीं होता है। | neutral |
1,688 | बैटमैन को एक किले के अंदर बनी जेल में बंद कर दिया जाता है। | negative |
1,689 | यह जेल देखने में तो अमेरिका के ही किसी ग्रामीण इलाके में स्थित लगती है लेकिन दरअसल इस जेल के सारे दृश्य हिंदुस्तान में फिल्माए गए हैं। | neutral |
1,690 | निर्देशक क्रिस्टोफर नोलान पिछले साल की गर्मियों में अपनी टीम के साथ जोधपुर के मेहरानगढ़ किले में फिल्म के जेल वाले हिस्से की शूटिंग करने आए थे। | neutral |
1,691 | बैटमैन को जेल के अंदर कुद परालौकिक चीजों का अनुभव होता है और वह लगातार कई प्रयासों के बाद जेल से बाहर निकलकर आता है। | positive |
1,692 | बैटमैन की मदद करती हैं एनी हेथेवे, जो कैट के किरदार में पहले उसे धोखा दे चुकी हैं। | negative |
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