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|---|---|---|---|---|
0
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थोड़ा बहुत और अन मना पत्र व्यवहार हुआ, परिणाम वही अनिश्चितता, कैसे उसे अपने हाल पर छोड दूँ, मिनी तो एक नाज़ुक फ़र्न है, और मैं, एक घना शीरीष, मैं कटा, तो वह भी सूख जाएगी
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Female
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1
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स्वयं मेरा मन किया, कि साड़ी पहनूँ तो लाल बंधेज की शिफ़ॉन साड़ी बाँध ली, बालों को एक ढीले जूडे में बाँध, सुर्ख़ लाल कार्नेशन का एक फूल, वाज़ में से निकाल लगा लिया
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Female
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2
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कागज़ों पर हस्ताक्षर करने की अंतिम औपचारिकता पूरी कर, मानसी जब मुडी, तो उसे फिर याद आया, कि उसे आखिर जाना कहाँ है, वहाँ उसे यूँ जाना भी चाहिए या नहीं
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Female
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3
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वह इन्डियन एयरलाईन्स के इन्क्वायरी बूथ की ओर बढी, असमंजस अब भी था, फिर भी उसने गुवाहाटी की अगली फ़्लाइट का समय पूछ लिया, पता चला, रात तीन बजे है
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Female
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4
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बहुत अधीर हो रहा था, मैं जाकर पास के स्टॉल से, दो बड़े बड़े चॉकलेट्स ले आया
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Female
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5
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मैं उसके सपने का हू बहू टुकडा पेश करने की कोशिश में, अपनी खाकी वर्दी पहन कर, फ़ैल्ट हैट लगा कर, उसकी उस, किशोर वय का नायक बन जाता हूँ
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Female
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6
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एक तरफ़ आप किसी को भी बड़े मज़े से ढ़ूंढ़ सकते हैं, वहां सब कुछ है, जिसे सूंघते सूंघते लोग वहां तक आ जाते हैं
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Female
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7
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और सिद्धार्थ, जहां तक मैं तुमको समझ सकी हूं, अभिषप्त ही तो कहना चाहते हो तुम, लेकिन क्यों आधार पर स्वतः आधेय भी होता है, तो फिर, अभिशप्तता कैसी स्वसृष्ट तो अपने आपमें आनंदित होता है
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Female
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8
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मैंने हल्के हल्के सांस लेते फड फडाते नथुने देखे, उसके सांसों में भर आए तूफ़ान को, अपने में संभाले, और खद बदाती बेचैनी को अपने में भींचते
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Female
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9
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काल का प्रभाव तुम पर पड़े, औश्र फिर भी न पड़े, पद्मपत्र, विमांभसा काल निरपेक्ष हो जाता है, तब, और तब भी उस निरपेक्ष से साक्षात्कार होता है तुम्हारा
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Female
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व्यक्ति जब विषयों का चिंतन करता है, विषयों के प्रति आसक्ति पैदा होती है, तब, ध्यायतो, विषयान् पुंस:, और यही आसक्ति, समस्त कामनाओं की जड़ है, और अतृप्त कामनाएं, विकारों को जन्म देती हैं, इनसे ही तो हटना है
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Female
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11
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अत्यन्त विशाल एवं भव्य, द्वार के दोनो ओर, दो दीपस्तम्भ, जिन पर प्रतिस्थापित रत्नखचित दीपो का आकार, एवं व्यास अत्यन्त असामान्य रूप से वृहत था, में धृतादि से युक्त दिव्य प्रकाश, शोभायमान कर रहे थें
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Female
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12
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उन पर अद्भुद कारी गरी युक्त संस्कृति के उत्तम चिन्ह उकेरे हुए थे, द्वार पर जटित हीरक कणियां, उस द्वार में चकित कर देने वाली मोहक छवि निर्मित कर रही थी
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Female
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पट के उर्ध्व पक्ष पर, अत्यंत तीक्ष्ण नोक वाले एवं विषैले भाले लगे हुए थे, जो भी शत्रु को विचारों को परास्त करने में सक्षम थे
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Female
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महाभट नंदी के तीक्ष्ण नैत्र, मानो द्वार के सम्मुख सघन वन की वृक्षा वलियों को भेद रहित थे
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Female
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सम्मुख महासेना पति नंदी राक्षसेन्द्र, रावण महाबलि बाणासुर, एवं पौरुषपति सहस्त्रबाहु, काष्ठ सेतु के इस ओर आ रहे थे
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Female
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कुछ फ़ुरसत होती तो मम्मी कहतीं, अच्छा, वो वाली राईम सुना दो
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Female
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उस दिन चिडिया, एक टेलेफ़ोन नंबर रट रही थी, मम्मी ने हैरान होकर पूछा, तो वह पूरी कहानी सुनाने लगी
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Female
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मॉम, लिंडा के मॉम, और डैड ने, उसको इतना मारा, कि वह मर ही गई
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Female
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उसके मॉम और डैड को, पुलिस पकड क़र ले गई, मिस जॉनसन कहती हैं, कि ये टेलेफ़ोन नम्बर, चाइल्ड एब्यूज़ हैल्प का है
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Female
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चिडिया आत्म दया से भर उठी, कैसी एग्ज़िस्टेंस है हमारी, कि अपने सरवाईवल तक के लिये, दूसरों का मुँह जोहना पडता है
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Female
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वे, वहीं रेस्ट हाउस में पड़े पड़े क़ागज़ों को निपटाते रहते, उसे डांटते रहते, चाय और दारू पीते रहते, खाना खाते रहते
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Female
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गाँव श्रध्दालुओं का कुंभ हो गया था, और चढोत्री से सती का चौरा और ब्राह्मण परिवार का पक्का मकान बन गया था, जो कि, आज भी गाँव के दो चार अच्छे मकानों में गिना जाता है
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Female
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जब उम्र में कच्चापन था, तब, जब उसने जिस सर्वश्रेष्ठ की कल्पना की रही होगी, शायद वह पैतींस के लपेटे में है
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Female
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और उनके नाम के आगे, बड़ी बड़ी ड़िग्रियां लगी हुई हैं, तो चालीस से कम भी नहीं होंगे
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Female
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ज़्यादातर कैम्पस के ही टैक्नीशन्स, और परमानेन्ट लेबर्स थे, जो नये प्रोजेक्ट में होने वाले एम्प्लॉयमेन्ट के सिलसिले में, अविनाश के पास, अपने लडक़ों की सिफ़ारिश लेकर आये थे
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Female
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मैं सेवेंथ के बच्चों को पढ़ाती हूं, डांस और म्यूज़िक के लिए, मेरे पास, सातवीं, आठवीं, नवीं, दसवीं के बच्चे होते हैं
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Female
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मिलिट्री वाले ट्रक लेकर, उन्होंने कहा, सब ट्रक पर चढ़ जाओ, तो जान बच सकती है
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Female
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शाबाश बेटी, चादर से मुंह ढापते हुए, मैंने अपने आप से वादा किया, शाम को तेरी चोकलेट पक्की
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Female
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मध्यम वर्गीय स्कूल के अध्यापकों की, इस कॉलोनी में, स्वयं भी संस्कृत की अध्यापिका, तथा फ़िज़ीक्स के वरिष्ठ अध्यापक की पत्नी माधवी, अपने परिवार की प्रशंसा करने में निपुण है
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Female
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पुराणों की मान्यता है, कि जो व्यक्ति घर पर आए, अतिथि सत्कार में, समाज की भलाई में, गरीबों को दान करने में, धन का उपयोग करता है
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Female
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लक्ष्मी को स्वकेन्द्रित न करके, व्यष्टि समष्टि की ओर, लक्ष्मी को ले जाता है, उसी के पास, लक्ष्मी का स्थायी निवास होता है, अन्यथा, लक्ष्मी तो चं चला है
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Female
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घर में रोज़रोज़ की कलह से मैंने सोचा, यह एक अनन्य राहत भरी निजात थी, मगर मुझे ताज्जुब हुआ, जब किसी गुड्डे की तरह मुझे झिंझोड़कर, पिताजी, मिसमिसा पड़े
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Female
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अपनी शकल पर दाढ़ी बढ़ाने का कौल, उन्होंने इसलिए उठाया था, कि इस इम्तहान की मार्फ़त, ऐसे दूसरे इम्तहानों की खबर मुझे बाद में भी लगी, जिसमें शामिल थे
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Female
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उनके लिए भैया के बूढ़े होते, खिचड़ी दाढ़ी वाले अज नबी चेहरे से भी, बड़ी अड़चन, या प्राथमिकता, कार्टून नेटवर्क पर उस समय आते, पावर पफ़ गर्ल्स का, रिपीट शो था, जो उन्हें ज़्यादा अजीब था
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Female
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ट्री पर तो वह, खड़े खड़े जम्प मारकर चढ़ जाता था, और डाल पर चमगादड़ की तरह लटक कर मज़े से झूलता रहता था
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Female
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किसी काले, मूंड़वाली की गिरफ़्त में आकर उन्होंने, उस जंगल से ही तौबा कर ली, जिसमें बेबी ऊदबिलाव शहज़ादे की तरह बिचरता था
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Female
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इस दौरान भैया का एक खूबसूरत ग्रीटिंग कार्ड आया, जिसमें उन्होंने स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं प्रेषित की थी
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Female
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और पुनश्र्च में लिखा था, कि कुछ छुट्टियों की व्य वस्था करके, मुझे स परिवार दिल्ली घूमने आना चाहिए
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Female
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खासकर इसलिए, कि उस रोज़ हुई चुटकी सी मुलाकात के बाद, प्रतीकरागिनी उन्हें इतने अच्छे लगे थे, कि गाहे बगाहे, उन्हें खूब हिचकियां आती हैं
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Female
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कुछ दिनों बाद, दफ़्तर के दौरान ही, चीनू ने बूथ से फ़ोन करके सूचित किया, कि वैसे तो उसकी नौकरी ठीकठाक चल रही है
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Female
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सिवाय, एक दिक्कत के, कि प्रबंधन के एक ग्रेजुएट को पता नहीं, किस कूढ़मगज़ ने, डाटाएंट्री के सड़े से काम में लगा रखा था
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Female
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न चाहते हुए भी दयाल ने कह डाला, साहब, हम मेंहदीरत्ता साहब की बहुत इज़्ज़त करते हैं
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Female
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मगर जिस एमबीए को प्रशासन और प्रबंधन का किताबी फ़र्क नहीं पता हो, टेली के तहत, जिसे ट्रायल बैलेंस चेक करना नहीं आता हो, उसे कम्पनी प्रबंधकीय ज़िम्मेदारी में कैसे खपा सकती है
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Female
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मन्दी से दिनरात लड़ती कम्पनी, किसी को वह मकान कैसे बख्श दे, जो उसका बाज़ारभाव ही नहीं
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Female
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कहानियों से हम सब का पुराना रिश्ता है.
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Female
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बचपन में दादा-दादी, नाना-नानी, माँ-बाप, भाई-बहन हमें संसार की अच्छी और बुरी बातें कहानियों के माध्यम से हमें अवगत कराते थे.
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Female
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और कभी कभी हमें सपनों कि दुनिया में भी ले जाते थे, जिन्हें हम आज भी याद करके प्रसन्न हो जाते हैं.
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Female
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कहानियों के भी भिन्न भिन्न रूप होते हैं.
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Female
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जैसे कुछ कहानियाँ हमें प्रोत्साहित करती हैं.
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Female
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ऐसी ही कुछ कहानियाँ, मैं आप लोगो के समक्ष रख रहा हूँ.
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Female
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पक्षियों की सभा हो रही थी.
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Female
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सभा में तय होना था कि उनका राजा कौन बनेगा.
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Female
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इस मुद्दे पर कुछ पक्षी लड़ने लगे.
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Female
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यह देख कर सब से बुज़ुर्ग पक्षी, जिसे सभी लोग संत कहते थे, ने कहा.
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राजा वही बन सकता है जिसमें ताकत हो, सूझभूझ हो, और जो अपने समाज को एकजुट रख सके.
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यह सुन, सभी पक्षी एक दूसरे को देखने लगे.
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उसी समय एक पक्षी ने खड़े होकर कहा, मैं सबसे शक्तिशाली हूँ, इसलिए मैं राजा बनूँगा.
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उसकी बगल में पंख फैलाये दूसरे पक्षी ने कहा, तुमसे ज़्यादा शक्तिशाली और बुद्धिमान मैं हूँ.
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Female
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इसलिए राजा बनने का मौका मुझे मिलना चाहिए.
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जब सर्व सम्मति से तय नहीं हुआ कि राजा कौन बने, तो संत ने कहा.
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तुम दोनो लड़ो, जो जीत जाएगा वही राजा बनेगा.
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दोनो आपस में लड़ने लगे.
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Female
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पहले वाले पक्षी ने छल कपट से जीत हासिल कर ली.
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Female
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संत ने उसे विजयी घोषित कर दिया.
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Female
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सभी विजयी पक्षी के इर्द गिर्द जमा होकर उसका गुणगान करने लगे.
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विजयी पक्षी चाहता था कि उसके राजा बनने की बात आसपास के सभी पक्षी जान लें.
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Female
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इसलिए इतराता हुआ पेड़ की डाल पर बैठ गया और अकड़ कर ऊँची आवाज़ में बोला.
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Female
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सब लोग देखो मुझे, मैं हूँ विजयी पक्षी, मैं राजा बन गया हूँ.
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Female
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तभी ऊपर से एक चील ने उस पर झपटा मारा और उसे अपने पंजे में दबा कर उड़ गया.
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Female
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पक्षियों की सभा में हडकम्प मच गया और सब आँसू बहाने लगे.
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Female
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पक्षियों का संत बोला, तुम लोग आँसू क्यों बहा रहे हो, तुम्हें तो खुश होना चाहिए.
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Female
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संत ने कहा, तुम लोगों ने देखा होगा कि राजा बनने पर उसमें कितना अहंकार आ गया था.
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Female
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वह अहंकार वश अपना गुणगान खुद कर रहा था.
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Female
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एक अहंकारी राजा से हमें इतनी जल्दी मुक्ति मिल गई.
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Female
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यह तो हमारे समाज का सौभाग्य है.
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अहंकारी राजा कभी भी अपने समाज को सुरक्षा नहीं दे सकता.
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आज जो कहानी मैं लिखने जा रहा हूँ, वो बिल्कुल सत्य है.
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यह कहानी ज़्यादा पुरानी नहीं है
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Female
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एक परिवार था जिसमें पति-पत्नी और उनके तीन बच्चे थे.
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बहुत ही खुश थे वो लोग और अपनी ज़िन्दगी अच्छी तरह से व्यतित कर रहे थे.
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पति अपने दफ़्तर जाता, पत्नी घर पर रहती, और बच्चे भी अपने काम पर जाते.
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Female
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पर एक दिन पति को कुछ तकलीफ़ हुई और वो डॉक्टर के पास गया.
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Female
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डॉक्टर ने उन्हें कुछ टेस्ट कराने को कहा और उन्होंने कराये भी.
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Female
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उनको इसका अनुमान भी न था कि उनको हुआ क्या है.
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Female
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और तभी डॉक्टर ने कहा कि आप के पेट में एक मास का टुकड़ा है जिसका आकार एक गेंद की भांति है.
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पर वो इन्सान बिल्कुल भी नहीं डरा और घबराया क्योंकि उसको जीने की चाह थी.
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उसके कंधों पर ज़िम्मेदारी थी.
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Female
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उसने डॉक्टर को कहा, डॉक्टर साहब आप बस मुझे दवाई दीजिए, बाकी सब मैं संभाल लूँगा.
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फिर उस व्यक्ति ने दवाई लेनी शुरू कर दी और अपनी ज़िन्दगी व्यतीत करने लगा.
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जैसे उसको कुछ हुआ ही नहीं था, एक आम आदमी की तरह अपनी ज़िन्दगी व्यतीत कर रहा था.
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उसकी बेटी की शादी तो पहले ही हो चुकी थी, अब उसने अपने पहले बेटे की भी शादी कर दी.
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धीरे-धीरे वक़्त बीतता गया और साल बीत गए.
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अब वो अपनी सरकारी नौकरी से भी सेवानिर्वित हो चुका था.
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अब उस व्यक्ति ने अपने छोटे बेटे की शादी भी तय कर दी, पर अब उसकी हालत पहले जैसी नहीं थी.
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Female
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वो शरीर से बहुत ज़्यादा कमज़ोर हो चुका था.
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Female
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ज़्यादा घूम फिर नहीं सकता था, पर फिर भी उसने कभी किसी से इस बात का ज़िक्र नहीं किया.
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Female
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बस अपनी ज़िम्मेदारी घर के लिए और जिस संस्था से जुड़ा हुआ था, उसके लिए काम करता चला गया.
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Female
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उसने अपने छोटे बच्चे की भी शादी कर दी, पर उसकी हालत धीरे-धीरे और ख़राब होती चली गई.
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घरवालों के लाख कहने पर उसने फिर से किसी और डॉक्टर को दिखाया और कुछ टेस्ट करवाए.
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Female
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