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हो सकता है, एक रात, गुप्त सूचना के आधार पर, अर्द्धसैनिक बलों की एक टुकड़ी ने, इसके एक बदकिस्मत घर के दरवाज़े पर, कुछ किशोर उग्रवादियों की, चिथड़ियाँ उड़ा दी हों
2
Male
1
यह भी विडम्बना है, कि क्राँतिकारी इस इलाके के नहीं थे, वे तो वहाँ एक पार्टी में आ गए थे
2
Male
2
अजीब दिखते हुए, उस बुढ्ढे, और उसकी बीवी को मार डाला
2
Male
3
लेकिन ऐसे इलाकों की संख्या बढ़ रही है, मानो आशंकाएँ पाल पोस रही हों
2
Male
4
अच्छी पुस्तकें छापना, अलग तरह की पुस्तकें छापना, भारतीय भाषाओं के, साहित्य के प्रकाशन के स्तर को, ऊँचा उठाना, और स्तरीय अनुवाद के ज़रिये, अँग्रेज़ी और अन्य भारतीय भाषाओं के, साहित्य को, हिंदी में लाना, प्रकाशन का काम शुरू करने के पीछे, शुरुआती कारण, यही थे
2
Male
5
तब आप लोगों का, हिंदी साहित्य के बाज़ार के बारे में, क्या आकलन था
2
Male
6
इसकी समझ या परवाह होने के बदले, अपने प्रतिद्वंदियों, हिंदी के स्थापित प्रकाशकों, राजकमल, वाणी, यानपीठ के बारे में, क्या राय थी
2
Male
7
इन सब बातों के लिए, मेरे पास उनके लिए, ढेर सारी तारीफ़ है, लेकिन लेखकों के साथ, उनके जिस तरह के संबंध हैं, जो सुनने में आते हैं, वे मेरे लिए चिंता के विषय हैं
2
Male
8
यात्रा पेंगुइन की मुख्य उपलब्धियां, क्या हैं आपकी नज़र में
2
Male
9
अनुवाद के लिए हमारे पास, पेंगुइन की अच्छी किताबों की लंबी लिस्ट का होना, और किताबों, या लेखकों के बारे में, खुला नज़रिया रखना, हमारी सबसे बड़ी ताकत है
2
Male
10
इसके अलावा, बिल्कुल नए और अलग या ज्वलंत मुद्दों पर भी, हमने किताबें छापी हैं
2
Male
11
कुछ बेहद ख़ास शोधों को भी छापा है, बनारसीदास द्वारा लिखित किताब, अर्धकथानक, जो कि हिंदी की पहली आत्मकथा है, उसे बाज़ार की चिंता किए बग़ैर छापा है
2
Male
12
इन चार बरसों में, हिंदी में दुर्भाग्य से मज़बूत लाइब्रेरी, संस्कृति है
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Male
13
उसकी प्रसिद्धि का कारण यह तथ्य है, कि उसे, एक प्रदर्शनवादी, टीवी प्रस्तोता, गुनर बेनेर की हत्या के लिये, ज़िम्मेवार माना जाता है
2
Male
14
अपनी अभद्र टिप्पणियों और अशिक्षितों के बारे में, अपने जोक्स के लिये विख्यात, और भडकीले सूट पहनने वाला, यह प्रस्तोता, एक बार लाईव शो के दौरान, पैगंबर मुहम्मद के बारे में, एक आपत्तिजनक टिप्पणी कर बैठता है
2
Male
15
एक ऐसी भयंकर भूल, जिसे अधिकांश ऊंघते दर्शक तो शायद इग्नोर कर जाते हैं
2
Male
16
रमेश इस्ताम्बुल प्रेस को एक ख़त भेजता है
2
Male
17
शनिवार को, काम निपटाने में देरी हो जाने के कारण, मनीषा कार्यालय में, अकेली रह गई थी
2
Male
18
लिफ़्ट द्वारा, छटी मंज़िल से नीचे जाते हुए, उसे एक तूफ़ान से गुज़रना पडा था
2
Male
19
लिफ़्ट मैन, अक्सर नशे में रहता है
2
Male
20
आज भी, सरदार महिन्द्र सिंह को देखती हूँ, तो रीढ़ की हड्डी पर, छिपकलियां सी रेंगने लगती हैं
2
Male
21
ये सैट आधे अधूरे रूप में, आज भी मौजूद है
2
Male
22
जहां तक लिनक्स का सवाल था, लिनक्स का प्रयोग भी खूब किया गया, लेकिन, इसका उपयोग, अधिकतर सर्वर पर ही किया, डेस्क टाप पर नहीं
2
Male
23
हम लोग, काम करते थे, तो युनिक्स पर, हाथ साफ़ था
2
Male
24
लिनक्स को, डैस्क टाप में केवल प्रयोग के लिये ही इस्तेमाल किया, और लगभग, सभी फ़्लेवर पर काम किया, जैसे पी सी यू लिनक्स, रेड हेट, सूसे, डैबियन, युबंटू, और भी बहुत सारे
2
Male
25
पूरा का पूरा मेल सिस्टम लिनक्स पर बदला
2
Male
26
फ़ायर वाल के लिये, पहले चैक पाईट, और फिर,सूसे फ़ायरवाल का प्रयोग किया, प्राक्सी सर्वर के लिये, स्क्विड का प्रयोग किया
2
Male
27
ये सम्पादकीय, ऐसी सामाजिक वैयक्तिक महात्वकांक्षाओं से लबरेज़ होते हैं, कि हमें अपने साथ गिरा लेते हैं
2
Male
28
हम यह बात यद्यपि मूलतः साहित्य, कला आदि की, और उनमे भी, गैर सांस्थायिक किस्म की पत्रिकाओं के सन्दर्भ में कह रहे हैं, लेकिन, अन्य अनुशासनों में भी, रचनात्मक प्रयत्न अपनी शुरुआत में, लगभग एक जैसी वैज्ञानिक निश्चात्मकता, और बीमा कंपनियों जैसी, भविष्य दृष्टि के साथ, अवतरित होते हैं
2
Male
29
अविनाश पहुँचते ही फ़ोन कर देना, वरना तुम्हारी माँ को, चिन्ता हो जाएगी
2
Male
30
बस मामा जी, और माँ ही की ज़िद है, उसका तो बिलकुल, मन नहीं था, माऊन्टआबू जाने का
2
Male
31
वहाँ मेरे दोस्त, ब्रिगेडियर सिन्हा का घर, और बाग हैं, वहाँ तू बस उनके परिवार के साथ, छुट्टियाँ बिताने जा रहा है
2
Male
32
उन्होंने तुझे, बचपन में देखा था, बडा बुला रहे थे, मैं अगले सप्ताह पोहुँच जाऊंगा
2
Male
33
बस चलते ही, अच्छा मौसम होने के बावजूद, यह बात सोच, अविनाश का मन, कडवी स्मृतियों से भर गया, आँखे जलने लगीं, और उस अपमान को याद कर, पूरा ही वजूद, तिलमिला गया
2
Male
34
वे बहुत सारे लेखक किसी भी अनुशासन के जिन्होंने कभी कोई पत्रिका नहीं निकाली, न प्रयत्न किए, लेकिन बहुत सारी पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं, उनमें भी, जिन्हें वे अच्छा नहीं मानते, उन्हें कम से कम, एक बार, एक पत्रिका निकालने की, जेनुइन कोशिश करनी चाहिए
2
Male
35
हालांकि, पहली ही शादी, शादी न थी, कोर्ट में शून्य साबित कर दी गई थी
2
Male
36
हिन्दी में सब कवियों की पुस्तकें, तीन सौ, चार सौ छपती हैं, पर हिन्दी में हर वर्ष, चार सौ से हज़ार काव्य पुस्तकें छपती हैं
2
Male
37
पर मन मे छाले हैं कि, सूखते नहीं, बल्कि बार बार फूट कर, उसे आहत करते हैं, उसका क्या गुनाह था
2
Male
38
कितने अरमानों के साथ, उसकी विधवा माँ ने, स्कूल में टीचिंग कर उसे अच्छे आदर्शों के साथ पाला, और फलस्वरूप उसका एन डी ए में सेलेक्शन हुआ
2
Male
39
उसने बडे चाव से, ढेरों रिश्तों में से, एक बेह तरीन रिश्ता चुना था उसके लिये, एक बहुत बडे आई ए एस अधिकारी की बेटी, अल्पना
2
Male
40
माँ तो बस घर बार और लडक़ी की सुन्दरता पर, और उनकी शानदार मेहमाननवाज़ी पर, रीझ गईं
2
Male
41
देखने दिखाने की रस्म के बाद, सबके कहने पर, एकांत में उसने, एक संक्षिप्त बात की, और वह, अचानक उठ कर चली गई, तब उसे लगा था कि शर्मा रही होगी
2
Male
42
शादी के ताम झाम के बाद, जब अपनी जीवन संगिनी से मिलने की, एक दूसरे को जानने की रात आई, तो शादी के शानदार पलंग पर, फूलों की सजावट के बीच, उसे लाल जोडे में, अपनी दुल्हन नहीं मिली
2
Male
43
मुझे छूना मत, यह शादी नहीं है, अविनाश समझौता है
2
Male
44
वह सुन्दर चेहरा, वितृष्णा से भर गया था
2
Male
45
उसके बाद जब वह अगले दिन मायके गई, तो उसकी जगह लौट कर, विवाह को शून्य साबित करने के लिये, उसके वकील का नोटिस आया, जिसमें आरोप था कि, वह नपुंसक है, और विवाह के योग्य नहीं
2
Male
46
वह जड होकर रह गया
2
Male
47
उसके बाद, उसने अपनी पोस्टिंग, लेह करवा ली थी, वहाँ से भी, लगातार फ़ील्ड पोस्टिंग लेता रहा, जानबूझ कर, और मां की दूसरे विवाह की ज़िद को, टाल गया था
2
Male
48
पर अब माँ की अस्वस्थता की वजह से, उसे जोधपुर पोस्टिंग करवानी पडी
2
Male
49
पिछले कई दिनों से, यह माऊंट आबू प्रकरण, माँ और मामा चलाए जा रहे थे
2
Male
50
इस बार, मामा, छाछ भी फूंक फूंक कर पीना चाहते थे, सो वह उसे, लड़की और उस के परिवार के साथ, पूरे पन्द्रह बीस दिन, छोडना चाह रहे थे
2
Male
51
ब्रिगेडियर सिन्हा, मामा के कलीग रह चुके हैं, उनकी एक बहन है, अविवाहित, उसने भी, किन्हीं कारणों से, शादी नहीं की
2
Male
52
उसे मलाल हो रहा है, उसने सोचा था, कि इस बार, एनुअल लीव लेकर, माँ के साथ, ज़्यादा से ज़्यादा समय बिताएगा, और माँ के साथ, लम्बी यात्राओं पर जाएगा, पूरा भारत घूमेगा
2
Male
53
पर माँ ने ही, कह दिया, कि ओ मेरे श्रवणकुमार, मैं तो तीर्थ कर ही लूंगी, पहले तेरी शादी करके, गंगा नहा लूं
2
Male
54
बहुत सारे ख्यालों से, उसका मन भारी हो चला है, वह, सर झटक कर बस के बाहर झांकता है, शाम का झुटपुटा रास्तों, और पहाडियों पर उतर आया है
2
Male
55
झुण्ड का झुण्ड, तोते शोर मचाते हुए, लौट रहे हैं, हवा में सर्दी के आगमन की खुनकी महसूस होने लगी है, वह पूरी खुली खिडक़ी ज़रा सी सरका देता है, बस के अन्दर, नज़र डालता है
2
Male
56
सामने वाली सीट पर, एक विदेशी युवति बैठी है, उसे देख, मुस्कुरा देती है
2
Male
57
वह उस बेबाक निश्छल मुस्कान पर, जवाब में मुस्कुराए बिना, नहीं रह पाता
2
Male
58
अपनी इस कॉलेज के लडक़ों जैसी हरकत पर, उसे स्वयं, हसी आ जाती है, और उसे दबाने के लिये, खिडक़ी के बाहर देखने लगता है
2
Male
59
मन हल्का हो गया है, वैसे आज़ादी में, कितना सुकून है
2
Male
60
अब उम्र के, पैंतीस साल मुक्त रह कर, विवाह के पक्ष में, वह ज़रा भी नहीं, पर यहाँ भारत में, जिस तरह बडी उमर की लडक़ियों का कुवारा रहना संदिग्ध होता है, वही बडे उम्र के कुवारे भी, संदेहों से अछूते, नहीं रह पाते
2
Male
61
वह बस अपनी नौकरी के बीस साल पूरे करते ही, अब्रोड चला जाएगा
2
Male
62
शाम ढलने लगी थी, लगता है, आबू रोड से उपर, माऊंट आबू पहुँचते पहुँचते, दो घंटे और लग जाएंगे, और वह रात आठ बजे से पहले, नहीं पहुँचेगा
2
Male
63
ठण्ड गहराने लगी थी, उसने मां की, ज़बरदस्ती रखी हुई जैकेट निकाल कर पेहन ली
2
Male
64
पहाडों, पेडों की सब्ज़ आकृतियां, धीरे धीरे स्याही में बदल रही थीं, उसके मन पर, अन्यमनस्कता के साये, फिर घिर आए
2
Male
65
मामा क्यों कहते हैं, कि शारीरिक ज़रूरतें तो हैं ही, एक साथी के लिये, मानसिक ज़रूरत भी होती है
2
Male
66
पर वह किसी किस्म की, गलतफ़हमी उसे नहीं पालने देना चाहता
2
Male
67
बसस्टॉप पर उतर कर, वह अपना सामान डिक्की से, निकलवा रहा है
2
Male
68
आपने क्यों तकलीफ़ की सर, मैं पोहंच जाता
2
Male
69
तुम हमारे मेहमान हो आखिर, रामसिंग, सामान गाडी में रखो
2
Male
70
यार, इतने सारे यात्रियों में, एक फ़ौजी अफसर को पहचानना, क्या मुश्किल है
2
Male
71
सारे रास्ते वे बोलते रहे, वह सुनता रहा, कि कैसे फ़ौज छोड क़र, वे यहाँ सैटल हुए, यहाँ उनका फ़ार्म हाउस भी है
2
Male
72
फ़ार्मिंग में, उनकी शुरू से रुचि रही है, वे उसमें, स्ट्राबैरीज़ उगाना चाह रहे हैं इस बार
2
Male
73
उनके बंगले के गेट से, पोर्च तक, एक मिनट की ड्राईव से, लग रहा था कि, खूब बडी जगह लेकर, घर बनाया गया है
2
Male
74
अन्दर पोहंच कर, रामसिंग को उनका सामान, गेस्टरूम में रखने का आदेश देकर, उसे हालनुमा ड्रोईंग रूम में बिठा कर, वे अन्दर कहीं गायब हो गये
2
Male
75
किसी के हाथ से बनी सुन्दर पेन्टिंग्स, जिनमें ज़्यादातर, राजस्थानी स्त्रियों के चेहरे थे
2
Male
76
अविनाश ये मेरी बेटी नीलांजना है
2
Male
77
बी एस सी सैकेण्ड ईयर में पढती है
2
Male
78
बेटा जाओ, मम्मी को भेजो, और किचन में चाय और स्नैक्स के लिये कहना
2
Male
79
श्री मति सिन्हा के साथ साथ, अर्दली चाय का, टीमटाम लेकर आ गया
2
Male
80
श्री मति सिन्हा, एक सुन्दर व सभ्रान्त महिला लगी
2
Male
81
चाय की औपचारिकता के बाद, वह फ़र्स्ट फ़्लोर पर बने गेस्ट रूम में आ गया
2
Male
82
रूम क्या था, एक छोटा मोटा सा, समस्त सुविधाओं से युक्त, फ़्लैट ही था
2
Male
83
पूरा घूमघाम कर देख कर, उसे याद आया, दस बजे डिनर के लिये, नीचे उतरना है
2
Male
84
अविनाश, अंजना, मेरी वाईफ़ से तुम मिल चुके हो
2
Male
85
ये सुधा है मेरी बहन, जे जे आर्टस में, फ़ाईन आर्टस की लैक्चरर है, वैसे बॉम्बे रहती है, पर अभी मेरे साथ, वेकेशन्स बिताने आई है
2
Male
86
मयंक मेरा बेटा, आई आई टी बॉम्बे से, इलेक्ट्रानिक्स में इंजीनियरिंग कर रहा है
2
Male
87
यह सभी, लास्ट वीक यहाँ थे, कल जा रहे हैं
2
Male
88
और ये हैं, मेजर अविनाश, मेरे कलीग और दोस्त, लेफ़्टनेंट कर्नल चौहान के भतीजे
2
Male
89
औपचारिक अभिवादन के बाद, हल्के फुल्के ड्रिंक्स, सूप के साथ, औपचारिक बातचीत होने लगी
2
Male
90
उसने पहली बार सुधा को गौर से देखा, ताम्बई रंग, स्निग्ध त्वचा, बडी बडी क़ाजल से लदी आँखें, भरे होंठ, और थोडी चौडी नाक, चेहरे पर बहुत परिपक्व सधा हुआ भाव
2
Male
91
भरे सानुपातिक जिस्म पर, बाटिक प्रिन्ट का भरा कुर्ता, और जीन्स, घने काले लम्बे बालों को, आकर्षक, मगर बेतरतीब जूडे में लपेटा हुआ
2
Male
92
बात करने के ढंग, और शब्दों के चयन से लगता है, कि बुध्दिजीवी और कलाकार बात कर रहा है
2
Male
93
फिर नज़र घूमी, तो नीला पर जा टिकी, चम्पई रंग, बुआ की सी ही बडी बडी लम्बी आँखें, पर नाक और होंठ, मां जैसी सुघढ
2
Male
94
सुबह वह देर से उठ सका, उठते ही खिडक़ी में आया, तो देखा, नीचे मयंक, और उसका दोस्त, जिप्सी में सामान रख रहे थे
2
Male
95
वह, नहा धोकर नीचे उतर आया, नीलांजना जल्दी जल्दी ब्रेकफ़ास्ट कर, कॉलेज जाने की तैयारी मे थी, उसके लिये भी, वही चाय आ गई
2
Male
96
मेरा मन नहीं कर रहा कॉलेज जाने का, पर आज मेरा, प्रेक्टिकल्स पीरीयड है, बाहर बुआ एक पेन्टिंग बना रही है, देखते रहियेगा, बोर नहीं होंगे
2
Male
97
सुधा, सचमुच एक पेन्टिंग में व्यस्त थी, वह पीछे जाकर, खडा हो गया
2
Male
98
इसके बीच न जाने कितनी पेन्टिंग्स बना डाली
2
Male
99
यह अटकी हुई है, दरअसल बॉम्बे होती तो, पूरा हो जाती, इसे नीला, ले नहीं जाने देती है
2
Male
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