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a6d2ca605a061e559f0651904e6a1a3b2c31121ec1614c2444846b6e50e61bac | जिस समय प्रिया प्रियतम पारस्परिक परिरम्भण-जन्य रस में निमग्न होते हैं, उसी काल में तीव्रातितीव्र वियोग-जन्य ताप का भी अनुभव करते हैं ।
सारस-पत्नी लक्ष्मणा केवल सम्प्रयोग-जन्य रस का ही अनुभव करती है और चक्रवाकी विप्रयोग-जन्य तीव्र ताप के अनन्तर सहृदय-हृदय-वेद्य सम्प्रयोग-जम्य अनुपम रस का आस्वादन करती है, परन्तु वह भी वि... | pdf |
497539ef638deaa9ef4d25d4a1e0c50b9e37bc69 | उपनिषदों में परम सत्व ब्रह्म पूर्ण माना गया है और कहते है कि आत्मा परमात्मा का ही अंश है। यदि परमात्मा पूर्ण स्वरूप है तो पूर्ण का अंश आत्मा भी पूर्ण ही मानी जा सकती है। और अगर आत्मा पूर्ण है तो ...पूर्ण को तृप्ति क्या अतृप्ति क्या...... ?
पच्चीसवीं मंजिल की ऊँचाई से समुद्र का नज़ारा काफी साफ और खूबसूरत हुआ करता है। जह... | web |
48cc5c1e1e1b24e19f26b1c2360e926061459674 | "चाक डोले, चकबन्ना डोले,
हमारे गांव के बाहर जो वाम्हनपार का सिवान है, वहीं एक दुबला-पतला पुराना पीपल हुआ करता था। पता नहीं अब वह पेड़ है या नहीं। बचपन में जब हम गाय-भैंसें चराने सिवान की ओर जाते थे तब उसी पेड़ के नीचे चिकई, कबड्डी या कभी-कभार ओल्हापाती खेला करते थे।
गांव में लोग ऐसा मानते थे कि हमारे सिवान का यह पीपल ह... | web |
d3dfd534a21c87e59cc7bee536b5a27482e59349 | ये किताब मैं मेरी मां स्वर्गीय श्रीमती अनिमा भट्टाचार्या को समर्पित करती हुं।
राजू दसवीं में पढ़ता था और सबका बहुत ही दुलारा था।राजू को किसी तरह की कोई कमी नहीं थी। उसके घर में दो काम करने वाले थे एक था दिनेश काका दूसरी कृष्णा वाई। कृष्णा वाई की एक बेटी थी आनंदी जैसा नाम वैसा काम। बहुत ही खूबसूरत, खुश मिजाज वाली लड़की ... | web |
e513127d6e6473a249c671501b40d9387709f8254a4cef234b1a24fa8895f7ab | अनासक्ति हो पूर्ण आत्मत्याग है
साथ वे तदाकार होकर स्पंदित हो सकें, कभी कभी सैकड़ों वर्ष तक लग सकते हैं । अतएव यह नितान्त सम्भव है कि हमारा यह वायुमण्डल अच्छी और वुरी, दोनों प्रकार की विचार-तरंगों से व्याप्त हो । प्रत्येक मस्तिष्क से निकला हुआ प्रत्येक विचार योग्य आधार प्राप्त हो जाने तक मानो इसी प्रकार भ्रमण करता रहता ... | pdf |
07d99282ff935b7c9a7a3f73c8d07ccdbb9c59aa274a420005106fd358476c3a | अगर तुम ईमानदारी से जीवन का रूपांतरण चाहते हो तो उनके पास जाना जो तसल्ली बंधाते न हों; जो तुम्हारे जीवन का निदान सीधा कर के रख देते हों सामने--चाहे चोट भी लगती हो; चाहे तुम्हारा घाव भी छू जाता हो और तुम्हारी मलहम-पट्टी उखड़ जाती हो; चाहे तुम्हारे नासूर से मवाद निकल आती हो। लेकिन उनके पास जाना जो तसल्ली बंधाने के आदी नह... | pdf |
54dd68ead4808deb8c61cebb393abca639e2d86e | लड़की गहरी साँवली थी। एक दिन अपने साँवलेपन से आजिज आकर वह तीन हफ्ते में गोरेपन का दावा करने वाली एक फेयरनेस क्रीम बाजार से ले आयी। हालाँकि वह तीस हफ्ते तक इंतजार कर सकने के धैर्य से उसे लेकर आयी थी, पर हुआ ये कि पहले हफ्ते के आखिर में ही उसकी त्वचा कुछ निखर गयी। बात यहीं से शुरू होती है। उसे लगने लगा कि जिंदगी को अब वह... | web |
81f583c7a17536e9abc001757c163bf702af0b3d | यूँ तो सरसरी तौर पर यह एक सनसनीखेज फिल्मी पटकथा है जिसे पढ़ते हुए डर है कि कहीं लोग किसी ब्लू फिल्म का आनंद न लेने लगें। हालाँकि ब्लू फिल्म में भी कहीं कोई आनंद होता है, यह एक अलग विवाद का विषय है। फिलहाल इस कहानी में कहीं-न-कहीं, कुछ-न-कुछ तो ऐसा है जो इस अनजान अबोध लेखक को बाध्य कर रहा है लिखने को, और लिखना भी ऐसा कि... | web |
1c6631a1f85dc1e1f1a523944ae263ae01422f5c | नरेंद्र ने तो मोबाइल नंबर देने के लिए ही हिमानी को फोन किया था। यही सोच कर कि कभी इमरजेंसी में मौसी कहां - कहां लैंडलाइन पर फोन पर फोन करके उसे खोजेगी, वह एक जगह तो बैठता नहीं, सौ जगहें, और सौ काम हैं उसके पास।
यह ठीक है कि घर जाने को उसका मन नहीं होता, बचपन से ही घर में कोई आकर्षण नहीं रहा। मां नहीं थी, मौसी थी, मां ज... | web |
2003204ec0f798352cf5a903f8dc9ddcc9186a30a4afd7828400a6fd90c6f594 | की सहायता से पहुॅचा । साहित्यालोचन का विज्ञान अब भी अपने सञ्चित ज्ञान को क्रमबद्ध कर रहा है और अभी दूसरी अवस्था से आगे नहीं बढा । वह अपनी तीसरी अवस्था को तभी प्राप्त होगा जब वह उन नियमो का अन्वेषरण कर लेगा जो इस बात को स्पष्ट करेगे कि तरह-तरह की साहित्यिक कृतियाँ किस प्रकार अपने प्रभावो को पैदा करती है । इस बीच मे साहि... | pdf |
2952c3fc170c9f94df8467784c1878a600ee8680ac5d43dce02f623b7d2da40f | मेरी एक संन्यासिनी है -- माधुरी । उसकी मां भी संन्यासिनी है। उसकी मां ने मुझे कहा कि उसके तो आपरेशन में दोनों स्तन उसे गंवाने पड़े। लेकिन डाक्टरों ने कहा, चिंता न करो, अब तुम्हें कोई नया विवाह तो करना भी नहीं है, उम्र भी तुम्हारी ज्यादा हो गई। और झूठे रबर के स्तन मिलते हैं, वे तुम अंदर पहन लो, बाहर से तो वैसे ही दिखाई ... | pdf |
56094a5b214bae1211e8650f36bcd1eabfa9a3ce | तांत्रिक चंद्रा ने अपने अनुष्ठान का समापन किया ही था कि तभी अश्वारोही सैनिकों के दल ने उसे चारों ओर से आकर घेर लिया। 'चंद्रा...!' दल के नायक का अवज्ञापूर्ण स्वर गूंजा-'सेनापति ने तुझे स्मरण किया है...तत्काल हमारे साथ चल!' अपमानबोध से आहत चंद्रा ने संयम खो दिया। क्रोधाग्नि में उसका रोम-रोम जल उठा। स्वयं से उसने कहा-धृष्... | web |
7432a2349dce916ee406d78632890049c5f4b36f40a32af25c578a3806f8936c | सत्रहवाँ अध्याय
हमारे विकास में प्रकृतिका नियम विभिन्नता में एकता, विधि (Law) और स्वाधीनता
पृथ्वीके सब प्राणियोमेसे अकेले मनुष्यको ही ठीक ढगसे जीवन-यापन करनेके लिये ठीक ज्ञान प्राप्त करनेकी आवश्यकता पडती है, चाहे यह ज्ञान वह, जैसा कि बुद्धिवादका कहना है, अपनी बुद्धिके एकमात्र या प्रधान साधनद्वारा प्राप्त करे अथवा अधिक ... | pdf |
f1858f105e28a0bfba335a8b3498630b9c7ed263 | सबसे आग्रह था कथा के श्रवण हेतु ऊंच-नीच, धनी-निर्धन, पंडित-अपढ़ का कोई भेद नहीं. सब समकक्ष हो कर श्रवण करें.
उछाह भरे प्रजा- जन उमड़ आये. सम्राट् को अपने पास, समान आसन पर पा कर अभिभूत हो गये.
सबकी सुख-सुविधा हेतु चारों भाई सजग हैं,
कोई किसी को बता रहा है -' इस आयोजन में भोग हेतु प्रसाद साम्राज्ञी को स्वयं बनाना है '
वि... | web |
c2069928a13888e6a9ef147f8ac4beab43bd3d5c | कल इस पर वापस काम करना।
हे भगवान।
हर्ड।
उन्हें लहूलुहान कर दो! वह ठीक हो जाना चाहिए लुटेरे! भागो! नहीं! रुक जाओ! उसे मारो।
शाबाश, लड़के।
तुमने हर्ड का सिर गर्व से ऊँचा किया।
नाम से डरना सिखाओ।
कोई पहरेदार नहीं है। कोई हरकत नहीं हो रही।
जो तुमने सपने में देखी थी?
कई बार प्रदर्शन किया है।
पर पुराने गानों के दीवाने होते ह... | speech |
5c2a33bfca369b67a82a58c57e65c5dfc0ebec9f | तुम कब्रिस्तान नहीं गई।
नहीं, मुझे पता है। माफ़ करना।
क्या तुम मुझे बताओगी क्या चल रहा है?
आपने क्विनतानिया को ना क्यों कहा?
तुम्हें कैसे पता?
उन्होंने मुझे बताया।
खैर, मुझे उनके ऑफ़िस में अँगूठी मिली।
तुमने कुछ क्यों नहीं कहा?
आपने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया।
मैंने मना कर दिया और यह मेरा फैसला था।
यह मेरी ... | speech |
80b68cbc75cc649fe8af83ad535b98314c80810e | और फिर नैना अविनाश के पास आकर बोलती हैं, " हां अवि, अब बोलो क्या हुआ, कुछ काम था क्या तुम्हें" ,
अविनाश उसकी बात सुनकर हंसता हैं और फिर उससे बोलता हैं, " काम और मुझे , नहीं तो मैं तो यहां पर तुम्हें तुम्हारे काम से ही बुलाया था" ,
" मेरे काम से लेकिन मेरा कौन सा काम हैं जिसके लिए तुमने मुझे ही बुलाया हैं यहां पर" , नैन... | web |
d95fcb5ae5dbd52f82b9e609435619e2b6ae24f6e124096e7d6168445d42fa98 | amera TerBall de Model Rai anno fa ar MukandminSEMIndant UmdatLundellHukum
घर पहुँचकर पता लगा मेरे पतिदेव प्रयाग नहीं आये हैं। दादा आशंका से बेचैन हो गये । सबसे अधिक खतरा लड़ाई के रँगरूटोंमें शामिल हो जाने का था। मेरी सास बीच-बीच में छिप-छिप कर रोया करती थीं। मैं उन्हें समझाती पर उनकी समझ में कैसे आता । बुढ़ापे की इकलौ... | pdf |
f085a1092f46ea1ca968fc52d05621e088b6c25a95c905c252a2334ca26f8dc9 | पता नहीं था। आप वापस नहीं लौट सकते परन्तुआप कुछ समय के लिए वर्तमान भूल सकते हैं और अपनी स्मृति, अपने मनमें ही अतीत को पुनः जी सकते हैं
आदमी पशुत्व के तल पर गिर सकता है। वह आनंदपूर्ण होगा, किन्तु अस्थायीयही कारण है कि नशीले पदार्थ, शराब आदि का इतना आकर्षण है। जब आपकिसी मादक द्रव्य के कारण बेहोशा हो जाते हैं तो थोडी देर ... | pdf |
a3a2a2dffaff11c462eae920ea1081196f862fec | श्यामलाल एक क्षण ठिठके, फिर नाले में उतर पड़े। नाले में कीचड़ नहीं था; उसमें सूखी पत्तियाँ, अद्धे, गुम्मे, चीथड़े और एक खास तरह की धूल थी जो मोहल्ले के लोगों ने अपने-अपने घरों से बुहार कर सरकारी नाली में धकेल दी थी। पायँचे चढ़ा कर, दामन समेट कर वह उठकुरवाँ बैठ गए और पुलिया के नीचे झाँकने के लिए अपना सिर नाले की उसी अज्... | web |
0a91dccb4d252e9a48e46de8e27491ed1aae33a0 | शेखर का जीवन बहुत सूना हो गया था, और इसीलिए जीवन में जो कुछ आता था, वह मानो उसके रस की अन्तिम बूँद तक निचोड़ लेना चाहता था। हँसी की बात होती, तो आवश्यकता से अधिक हँसता था; घूमने निकलता, तो पागल कुत्ते की तरह दौड़ता था; लड़ता, तो लड़ाई का कारण भूल जाने पर भी विरोध बनाये रखता...उसके जीवन में इससे एक झूठी तेजी आ गयी थी, ग... | web |
22b6d2e6104e3d70f7cf99b8add744105224c011d57a6fa61adaae93189328e6 | एक बच्चा सुंदर होता है, क्योंकि उसके पास अहंकार नहीं है। एक बूढ़ा व्यक्ति कुरूप होता है, इसलिए नहीं कि वह वृद्ध हो गया है बल्कि इसलिए कि उसके पास बहुत अधिक अतीत होता है, बहुत अधिक अहंकार होता है। एक वृद्ध व्यक्ति फिर से सुंदर हो सकता है, वह एक बच्चे की तुलना में कहीं अधिक सुंदर हो सकता है, यदि वह अपना अहंकार छोड़ सके, ... | pdf |
b192413b77191991cdc0a191c5c5dc3eb6247fd0 | तुम्हें क्या मिला?
पुरानी भाषा की एक भविष्यवाणी।
लैनफियर। फिर हमारी दुनिया में आ गई।
लैन पर भरोसा कर सकते हैं?
महारत के लिए मशहूर थी।
स्वप्न लोक।
आख़िरकार।
मैं फ़िदाबक्ष से प्यार करने का नाटक करूँ?
कि वह क्या चाहता है।
मैट को चोट नहीं आने दूँगी।
तुम्हारे श्राप से मुक्ति दिलाऊँ?
उसे सियारहीन लेकर आओ।
जिसे तुमने अगवा किय... | speech |
f6d1d02d2632c240cc01f1cdcf0172bfaad05d53 | मैं अपनी ज़िंदगी की बैलेंसशीट बना रहा हूँ। मेरी समझ में नहीं आ रहा कि क्लोजिंग बैलेंस पर आकर मैं बार बार क्यों गलती कर जाता हूँ।
'हानि' वाले कॉलम भरते हुए मेरे मन में आता है कि मैं अपने आप को गालियाँ बकूँ। कमीना, घटिया और अन्य अपशब्दों से अपने आप को संबोधित करूँ। मॉर्क्स के चित्र के सामने हाथ जोड़कर सिर निवा कर कहूँ, "... | web |
59062a78741769222bd5ee38192cae1e7a32477785ab7d226930fb6ce17e7d7f | नहीं। तुम धोखा दे सकते हो, बेईमानी कर सकते हो, सिर्फ इसलिए कि प्रेम का अभाव है। समस्त पाप प्रेम की गैर-मौजूदगी में पैदा होते हैं। जैसे प्रकाश न हो तो अंधेरे घर में सांप, बिच्छू, चोर, बेईमान, लुटेरे सभी का आगमन हो जाता है। मकड़ियां जाले बुन लेती हैं। सांप अपने घर बना लेते हैं। चमगादड़ निवास कर लेते हैं । रोशनी आ जाए, सब... | pdf |
2a23f33a0ed928f911527c19bbb14b9ca65dab027c8f0c85cc33832731c15e97 | बहुत ही खुश हुये। पास में बिठाकर बड़े ही प्यार से बातें करते हुये मुझे खूब तरक्की करने को प्रोत्साहित करने लगे। बाद में मुझे मालूम हुआ कि प्रधान शिक्षक से मेरे बारे में वे बहुत सी बातें पूछ रहे थे । हाँ, तो मिडिल फर्स्ट डिविजन में मैंने पास किया। कुछ ही दिनों बाद मेरे हेड मास्टर साहब के यहाँ उनका पत्र थाया कि मुझे अंग्... | pdf |
370c7c0089899174a79a4e83613833f12290359f | ।इस लेख का पुनरीक्षण एवं सम्पादन होना आवश्यक है। आप इसमें सहायता कर सकते हैं। "सुझाव"
आज मैं अकेला जाकर मोदी के यहाँ खड़ा हो गया। परिचय पाकर मोदी ने एक छोटा-सा पुराना चिथड़ा बाहर निकाला और गाँठ खोलकर उसमें से दो सोने की बालियाँ और पाँच रुपये निकाले। उन्हें मेरे हाथ में देकर वह बोला, "बहू ये दो बालियाँ मुझे इकतीस रुपये ... | web |
1e555d847de8a3e16ea4ca8dff7e82023b2397470c958e59d15c8bfb10458061 | तो वह भी वहाँ सो जाता था और हम भी सो जाते थे। अब जंगल में वह बेचारा कहाँ जाए ? उसे जहाँ जगह मिल जाए, वहीं पर उसका घर । उसका कोई ससुराल नहीं है न ! हम तो दो- एक दिन ससुराल भी जा आते हैं !
इसलिए हमने 'व्यवस्थित' कहा है न, 'एक्ज़ेक्टनेस' है। उसमें नाम मात्र भी गलती नहीं है ।
प्रत्येक पर्याय में से गुज़रकर
ये सब तो मेरी पृ... | pdf |
478fb39a2fe752b35b742b9a432ae9a3b56b40b4 | डॉक्टर जयपाल ने प्रथम श्रेणी की सनद पायी थी, पर इसे भाग्य ही कहिए या व्यावसायिक सिद्धान्तों का अज्ञान कि उन्हें अपने व्यवसाय में कभी उन्नत अवस्था न मिली। उनका घर सँकरी गली में था; पर उनके जी में खुली जगह में घर लेने का विचार तक न उठा। औषधालय की आलमारियाँ, शीशियाँ और डाक्टरी यंत्र आदि भी साफ-सुथरे न थे। मितव्ययिता के सि... | web |
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