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कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्तुत शोध प्रबंध मेरे प्राय 4 वर्षों के प्रखण्ड स्वाध्याय का प्रतिफल है । इस विषय पर काय करने की प्रेरणा मुझे सवप्रथम प्राचाय हजारीप्रसाद द्विवेदी जी के 'सूरमाहित्य के प्रथम निवन्ध को उन पक्तियों से मिली जिहै इस प्रबंध की 'अवतरणिका' मे उद्धृत किया गया है । वही मत्र बीज मेरे मन मे विस्मयजनत जिज्ञामा के अनगिन प्रतानो के साथ सर्वार्द्धत होकर इस विस्तृत प्रथम प्रतिफलित हुआ है। इस बीच प्राचाय प्रवर वे साथ हुई वार्ताओं में जो कई सूक्ष्म सवेत मिले, उनके लिए में उनका चिर अनुगृहीत हूँ । में सूर साहित्य के ममज्ञ विद्वान् डॉ० वजे वर वर्मा, निदेशव, हिन्दी शोध संस्थान, आगरा का भी परम आभारी हूँ जिन्होने प्रबन्ध की प्रतिज्ञा के स्थिरीकरण और व्याव हारिक सतुलन सम्बनी यथेष्ट महायता प्रदान की। इसी प्रमग मे डॉ० श्रीकृष्ण लाल (स्वर्गीय) रोडर हिन्दी विभाग, नाशी विश्वविद्यालय को अत्यत श्रद्धापूर करता हूँ जिहोंने मेरे वाशी-वास के दिनों में अपना बहुत समय देकर अनेकानेव शबाश्रो का समाधान किया। उनके साथ बई सलापों मे लेखक को जो स्नेह-मिश्रित सुझाव मिले, उस धनुग्रह को भुलाया नहीं जा सकता। काशी-वास के पुण्य अवसर पर विद्यावतार प० गोपीनाथ कविराज जी के दशन और विमश भी अविस्मरणीय है। अपनी रुग्णावस्था मे भो उ हाने जो सकेत दिये, वह उनकी विद्याव्यसनिता ही नहीं, सवसुलभता का प्रमाण है। इसी सिलमिले म मैं भगध विश्वविद्यालय के तत्कालीन हिन्दी विभागाध्यक्ष प० विश्वनाथ प्रसाद मिश्र, प्रयाग विश्वविद्यालय के तब प्रध्यक्ष डॉ० रामकुमार वर्मा भौर विहार राष्ट्रभाषा परिषद् के तत्कालीन सचालन डॉ० भुवनेश्वर मिश्र 'माधव जी का भी समवेत रूप से मनुगृहीत हूँ जिन्होने समय समय पर अपने अमुल्य ममय दक्र लेखक वो मूल्यवान सुझाव दिय । अपनी शोर यात्रा के कम म तय पुस्तकालय पटना के श्रीकृष्ण चतन्य जो तथा हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग, नागरी प्रचारिणी सभा, काशी, गीता प्रेम गोरखपुर और राष्ट्रीय पुस्तकालय, कलकत्ता के पुस्तकाध्यक्ष का भो में धाभार मानता हूँ निहोंने अपने संग्रहालयों को पात सामग्रियों की उपलब्धि परा पर मुझे यथेष्ट महायता दी। कि तु में सर्वाधिव वृतन हूँ अपने प्राचाय निर्देशन भोर मध्यन डॉ० श्री वोरै द श्रीवास्तव जो वा, जि होने श्रादि से म त तक इस गहन विषय मे तल्लीन होकर मनुम पान वरने की सतत प्रेरण दी। उनके पण्डित्यपूर्ण निर्देशो और परामर्शो के बिना यह काय पूरा होना कदाचित् असभव था । उ होने लेखन से प्रकाशन तक इस काम को अपना हो जान वर जो अमूल्य सुझाव व प्राक्कथन के मूल्यवान् शमुझे प्रदान किये, इनके लिए में उनका श्राजीवन ऋणी रहूँगा । लेखक प्रो० श्री विजयन्द्र स्नातक ( दिल्ली विश्वविद्यालय ) व प्रो० विनय मोहन गर्मा जी ( कुरक्षेत्र विश्विद्यानय ) जैसे यशस्वी विद्वानों का आभारी हूँ जिन्होंने अपनी सम्मति देवर इस प्रबंध की सवद्धना की है। अन्त म, अपने अग्रज तुल्य डॉ० श्री त्रिभुवन सिंह ( काशी विश्वविद्यालय ) तथा श्रीकृष्ण चन्द्र बेरी जी ( व्यवस्थापक, हिन्दी प्रचारक संस्थान पाशी ) के प्रति प्रामार प्रकट करना में अपना कत्तय समझता हूँ जिनकी प्रेरणा व सहयोग के बिना इस ग्राथ का मालोक्ति होग वठिन था । भस्तु भागलपुर शरपूर्णिमा २०२७ opo } तपेश्वरनाथ प्रसाद [ डॉ० वीरेन्द्र श्रीपास्टर एम० ए० ( द्वय ), डि० लिटू० ] प्रोफेसर एव अध्यक्ष, स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग भागलपुर विश्वविद्यालय हिन्दी साहित्य के इतिहास में कृष्णाश्रित काव्यधारा निरन्तर प्रवाहित होती रही । विद्यापति को पदावली से लेकर घमवीर को कनुप्रिया तक वह भविच्छि न धारा जनमानस के भनेक घरातलो को प्राप्लावित करती रही है । वृष्ण के जीवन चरित मे स्वत हो भनेव उपादानो का क्रमिक समावेश होता गया है। वैदिक साहित्य के वासुदेव कृष्ण महाभारत के कमयोगी कृष्ण और भागवत के गोपीवल्लभ कृष्ण ने एक प्रपूव व्यक्तित्व का निर्माण किया था। भाभीरों के बाल गोपाल ने इस 'गोपवेष विष्णु' के व्यक्तित्व मे अपना भी योगदान दिया। हिन्दी साहित्य के प्रारम्भ होने से पूर्व ही कृष्ण के व्यक्तित्व का यह सम वयात्मक रूप सस्कृत, प्राकृत और अपभ्रंश मापानी के वाङमय के माध्यम से पूणता को प्राप्त करवा था हि दी साहित्य के श्रादिकाल, मध्यकाल और माधुनिक काल ने अपने परिवेश के अनुकूल वृष्ण के उस रूप का वाध्य मे नियोजन किया । विद्यापति ने साम तो दरबार के अनुरूप कृष्ण को शृङ्गारदेव वनावर चित्रित किया । उ होने कीर्तिपताका मे अर्जुन राय को शृङ्गारकेलि को 'हरिकेलि' बताया व लिखत हैससाररत्न मृगशावकाक्षी, रत्न च शृगाररसो रसानाम् । तच्चानुभूया चिचरमर्जुनेन्द्र पुरानुभूत मधुसूदनेन ।। उनको दृष्टि मे राम ने कृष्ण का अवतार हो इसलिए लिया था कि वे सीता के वियोगदु ख को क्षतिपूर्ति कर सकें । उन्होने कोत्तिपताका मे विविध रमणियों (नायिकाओं) के समागम के ग्रामोद प्रमोद पूरण प्रसग वा हृदयग्राही अन किया है। पदावली मे वही शृङ्गारभूमि कृष्ण के चरित्र का भाघार है। कालान्तर मे विद्यापति के इमरदेव का पूरा पल्लवन रोतिकाल में हुआ । सूर, तुलसी, मीराबाई, रसखान इत्यादि कवियों ने विभिन्न भाचार्यो की छत्रछाया मे कृष्ण को भत्तिदव बनाकर अपने रमस्निग्ध पदों की रचना को 1 कृष्णु वारमल्य, सख्य, दास्य, माधुय और शान्त भक्ति के पालम्वन बने । रीतिकाल म पूर्वनिर्देशा नुसार कृष्ण शृङ्गारदेव हो रहे । श्राधुनिक काल में समाज को परिवत्तित विचारसरणि से प्रभावित होकर कृष्ण ने कुछ बौद्धिकता का प्राश्रय अवश्य लिया जसा कि हरिभोध के प्रियप्रवास मे है परंतु प्रधानत वे भावदेव ही बने रहे और अनुप्रिया उसकी चरम परिणति है । इस प्रकार लीलापुरुषोत्तम कृष्ण रति के प्रेम के सभी रूपो के उ मुक्त भालम्बन हिन्दी साहित्य में बनते रहे हैं । हिंदी वाव्य म कृष्णचरित के इस सम्पूर्ण विकास के गम्भीर विश्ने पणात्मक प्रध्ययन की आवश्यकता थी। डॉ० तपेश्वरनाथ प्रसाद ने उस श्रावश्यक्ता की पूर्ति 'हिन्दी काव्य में कृष्णचरित का भावात्मक स्वरूप शोषक अपने शोधप्रब घ मे की है। इसमें उनकी भावयित्री प्रतिभा का अच्छा निदशन है । उन्होने कृष्ण सम्बन्धी उपलब्ध सम्पूर्ण सामग्री का अच्छी तरह समाकलन किया है भौर ऐतिहासिक विवेतन के साथ तकसगत पद्धति मे अपने विषय का प्रतिपादन किया है । हिन्दी काव्य में अति कृष्ण के स्वरूप को समप्रता से मात्मसात् करने के लिए यह प्रबन्ध अभी तक सर्वोसृष्ट साधन है यह निर्विवाद कहा जा सकता है। आशा है हिंदी के पाठक इस प्रबध का खुले दिल से स्वागत करेंगे । भारतीय संस्कृति के उजायका मे राम और कृष्ण के नाम सर्वाधिक प्रज्ज्वल इन्होंने अपने गरिमामय एवं उदात्त चरित्र द्वारा भारतीय जन गण के भावो और विचारों को हिलकोर कर उसे एक नयी दिशा, नयी भास्था प्रदान की । परम्परा से विश्वासशील जनता ने हजारो वर्षों से का महिमाशालो प्रवपुरुषो का मुक्त कठ से यशोगान किया है । अपने प्रतापी पूजा के श्रादश कृत्यों का कोसन हो इस आस्थाशील परम्परा को नैसर्गिक शृङ्खला ही रही, जिसने उत्तरोत्तर नौविक वृत्त के स्थान पर अलोकिक चरित को प्रास्फूत किया । पलत मानवत्व म देवत्व को उद्बुद्धि हुई। भोर, लोवचित्त ने अपनी कल्पना और पूज्यबुद्धि षे भतिरेव से राम-कृष्ण के नाम रूपात्मक प्रस्तित्व का ईश्वरीय ऐश्वर्य और मानन्द म रूपातरित कर लिया। क्षीरमिधु में निवास करने वाले देवाधिदेव विष्णु भारतीय मनीषा की वैभवशालिनी चरित-चरपना के ही पुजीभूत प्रतीक है। हमारी श्रद्धा और कल्पना की इसी पीठिका पर राम-कृष्ण के ध्रुवतरण की साथकता को समझा जा सकता है । इसके अनुसार, राम त्रेतायुग की धम-वेदना की उत्पत्ति है । जि होने भक्तिस्वरूपा कौशल्या की वादना से अपने चतुर्भुज स्वरूप को तज पर मानवीय लीलाओ में अपना स्वरूप प्राकट्य किया । उमी प्रकार कृष्ण भी द्वापर युग के भक्तों की प्रेम-वेदना से वशीभूत हो कमलागृह तज कर मथुरा के कारागृह में प्रक्ट हुए और अपनी लीला का व्यापक प्रसार कर ब्रजमण्डल, मथुरा, द्वारका सभी को एक अद्भुत मानद लोक मे परिणत कर दिया । वैष्णवो का गोलाक इसी कल्पना का सुमधुर रूप है। सामासिक संस्कृति के इस देश म, जहाँ को जनता करोड़ों देवी देवतामो को जानती और मानती थी, उन समस्त प्राचीन देवताओं के स्थान पर विष्णु के उक्त दो अवतार - राम और कृष्ण लोक में प्रतिष्ठित और प्राराध्य बन गये। राम यदि मर्यादापुरुषोत्तम हैं तो कृष्ण लीलापुरुषोत्तम । अपनी लीला रजनकारिणो वृत्ति के हो वारण श्रीकृष्ण सर्वाधिक जनप्रिय और लोक भावना के मनिकट हैं। श्रीकृष्णचत्र को पूर्णावतार कहा गया है। उनमें समस्त कलाप्रो का स्पे विकास हुआ है। उनका वचपन गोष-जीवन म असाधारण प्रेम, उमग और उल्लास का स्मारव है तो उनका यौवन गोपीकृष्ण शृङ्गार लीलामो वा मरम सन्निधान । उसी प्रचार उनको प्रौढावस्या मादव बुल मे अलौकिक शक्ति, कुशाग्र बुद्धि और नेतृत्व क्षमता का दृष्टात है । यदि लोव चातुय से उन्होने सकटापन्न पाण्डवी का माग निर्देश किया तो भलो विक प्रतिभा से भजुन को रण-स्थत म हो गीता का तेजस्वी मम दिया। यदि वह द्वारकाधीश रूप में मनात एश्वर्यो के भोक्ता और असख्य रानियों के पतिदेव रहे तो साथ ही स्थितमन योगी भी। इस प्रकार, वृष्ण प्रेमी शोर चोर बानक है, कला-नोविद और शस्त्रासविद् युवक हैं। योद्धा मोर जेता सामन्त हैं, राजनीतिक भौर दार्शनिय यागी हैसब एक साथ हैं और सब म महान हैं । यही कारण है कि उनके सम्बंध में सर्वाधिक विवाद भी उठ सरे हुए हैं। प्रथि काश हिदुओ को पास्पा मे मनुसार वृष्ण भगवान् विष्णु म भाग्य - पूरा भार हैं। किन्तु, विद्वान् इस तथ्य को विषय तय ज्ञान को इयता नहीं मानो। इस सम्बध मे मने परिडत ( जिनम प्रो० मिटरनिल, भरडारवर मादि प्रमुख हैं ) रारमाध्यम से ऐतिहासिय कृष्ण के सम्बन्ध में विचिविला मरत हुए हम है कि वस्तुत कृष्ण नाम के तीन विभिन्न महापुरुष हुए ( १ ) वैदिन ऋषि वृष्ण ( २ ) गीतानाचक कृष्ण और, (३) गोपीजनवल्लभ वृष्ण बुछ बुद्धिवादी ( श्री टी० पी० सिंह- हिदू पासिंह बयामा के भौतिय अर्थ मे लेखक ) कृष्ण के ऐतिहासिक व्यक्तित्व पर स देह तु कृष्ण लीला व भोतिष पर्यापर भाग्रह रखते हैं। और बुछ ऐसे भी विद्वान् है जिन्होने कृष्ण के ऐतिहासिम व्यक्तित्व का और पौराणिक चरित्र को शृङ्खलाबद्ध गवेपणा में अपनी प्रतिभा मोर थम वा प्रथिवांश समर्पित किया है। श्री एस० एन० ताडपत्रीवर को गवेषणात्मक पुस्तप 'द कृष्ण प्रव लेम' इस दिशा में एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है। बुद्ध विद्वान को दव पुष्प कुछ ईदनर और मनुष्य के बीच भी कोई शक्ति और कुछ इ है भद्ध ऐतिहागिय मद्धपौराणिक रहस्यमय पात्र मानते हैं जो श्रव तक् पूणत बोधगम्म नही हो सके । इस मत के समयको में हू इच वृण' के लेखष प्रो० श्री क्षेत्रलाल साहा पाते हैं। और अधिकांश व्यक्ति उन्हें एक ऐसे मन मोजो निष्काम पुरुष के रूप में देखते हैं जिसका जीवनोद्देश्य इस जगत को एक विशाल फीडा भूमि के रूप मे अगीकार करता है । ऐतिहासिक व्यक्तित्व के अतिरिक्त बाल और किशोर का एक पौराणिक स्वरूप भी है जो अपने पल्पनाप्रवण रूप मे काण्यत्व के सनक्ट है। इस पौराणिक स्वरूप के एक पक्ष बाल कृष्ण के सम्मघ मे वेबर प्रियसन केनेडी, भएडारकर मादि विद्वानो को यह मान्यता रही कि यह ईसामसीह को क्या का भारतीय रूपांतरण है। प्राचाय हजारी प्रमाद द्विवेदी जी ने इस धारणा का उचित निरारा अपने सूर साहित्य के प्रति गवेषणात्मक प्रथम निर्बंध में बहुत पहले कर दिया था। उपयुक्त विवरण से यह सिद्ध है कि इतिहास पुराण भादि के विभिन्न स्रोतो मे विकीण कृष्ण चरित से सम्बद्ध श्राख्यान इतने बहुवणीं हैं कि इस विषय के नवीन अनु स धाताओ को एक बार पुन गम्भीरतापूर्वक सोच विचार करने को प्रेरित कर देते । वस्तुत भारतीय वाङमय के प्राचीन और प्रतिविस्तृत पट पर चाहे वह वैदिक हो या भौपनिषदिक, पौराणिक हो या लौकिक-कृष्ण की तरह गतिशील, बहुवर्णी, रगीन और माध्यात्मिक्ता सम्पन्न चरित्र कोई दूसरा नहीं दिखाई देता कृष्ण के व्यक्तित्व में अखिल ब्रह्माण्ड की संचालिका शक्ति है तो पूर्ण निस्सगता भी। क्रियाशीलता है तो शान्त निवि
[ 1, 32862, 41666, 33621, 227, 167, 161, 32094, 32573, 227, 167, 161, 32950, 13, 33134, 33785, 30702, 30475, 34181, 35013, 32695, 39341, 29871, 29946, 33319, 32001, 32988, 31667, 33841, 37233, 38743, 30640, 32008, 32305, 37100, 32004, 29871, 31...
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Во время Второй мировой войны промышленность нацистской Германии создала большое количество оригинальных и необычных проектов вооружения и техники. Пытаясь выполнить требования заказчика, конструкторы прибегали к нестандартным идеям и решением, результатом чего становилось оружие, способное удивлять даже сейчас. Одним из самых ярких примеров подобного подхода к созданию оружия является противопехотная мина Kugeltreibmine. Этот боеприпас имел оригинальную конструкцию и необычный способ применения. Kugeltreibmine उत्पाद (K. -Tr. Mi. ) मोबाइल खानों के एक अत्यंत दुर्लभ वर्ग के थे। यह माना गया था कि वेहरमाच सेनानी इन हथियारों को ढलान से रोल करेंगे और इस तरह दुश्मन की बढ़त का मुकाबला करेंगे। इस प्रकार, इस हथियार को शब्द के पूर्ण अर्थ में एक खदान नहीं माना जा सकता है। संभवतः इस कारण से, कुछ स्रोतों में के. टी. आर. एम. आई. बम (रोलबॉम्ब) कहा जाता है। इसी समय, इस तरह के एक असामान्य हथियार को अधिकतम आकार और वजन के साथ एक तरह का हैंड ग्रेनेड माना जा सकता है। एक तरह से या दूसरे, आधिकारिक दस्तावेजों में, कुगेल्ट्रेइम्बाइन उत्पाद को गेंद मोबाइल की खान के रूप में सूचीबद्ध किया गया था। खदान के विकास के समय की सटीक जानकारी K. Tr. Mi. अनुपस्थित हैं। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, यह हथियार 1942-43 वर्षों में बनाया गया था। इसी समय, एक्सएनयूएमएक्स वर्ष में, पूर्ण पैमाने पर उत्पादन पहले से ही चल रहा था, हालांकि समय के साथ, उत्पादन में कमी आई। एक्सएनयूएमएक्स में उत्पादन में कमी की जानकारी से पता चलता है कि पहला उत्पादन के. टी. आर. टी. आई. 1944 या उससे भी पहले सैनिकों के पास गया। पहले से ही 1942 में, जर्मन उद्योग कई महत्वपूर्ण संसाधनों की कमी से पीड़ित होने लगा। विशेष रूप से, धातुओं और मिश्र धातुओं के मौजूदा उत्पादन ने सभी उत्पादन के लिए कच्चे माल प्रदान करना संभव नहीं किया। विभिन्न खानों का उत्पादन पहले कम होने में से एक था, जिसके कारण लकड़ी, कंक्रीट, कांच और यहां तक कि कार्डबोर्ड मामलों में गोला-बारूद की उपस्थिति हुई। के। Tr. Mi के मामले में। कंक्रीट के मामले को बनाने का निर्णय लिया गया। उत्पाद के. टी. आर. एम. आई. दो हिस्सों से बना एक गोलाकार शरीर प्राप्त किया। कंक्रीट से गोला बारूद के निर्माण में, एक गुहा के साथ दो गोलार्ध डाले गए थे। हेमिस्फोरस को बोल्ट या स्टड का उपयोग करके जोड़ा गया था। स्वीकार्य विनाशकारी क्षमता प्रदान करने के लिए, विभिन्न विनाशकारी तत्वों को कंक्रीट में रखा गया था। उत्पादन को सरल बनाने की आवश्यकता के कारण, विभिन्न धातु की वस्तुओं का उपयोग तैयार किए गए टुकड़ों के रूप में किया जा सकता है, बियरिंग के लिए दोषपूर्ण गोलियों या गेंदों से लेकर कटा हुआ तार और छोटे नाखून तक। उत्पादन को सरल बनाने के उद्देश्य से खान परियोजना का विकास किया गया था, इसलिए निर्माता को "घटकों" का चयन करते समय कार्रवाई की बहुत स्वतंत्रता थी। गोलाकार शरीर के अंदर एक गुहा था जिसमें एक विस्फोटक चार्ज और एक फ्यूज लगाने का प्रस्ताव था। Sprengkörper 28 वजनी 232 g या मेल्टिनल के समान चार्ज के पांच ट्राइटिल ब्लॉक असेंबली के दौरान इस कैविटी में ढेर हो गए थे। आवरण में एक आयताकार चैनल प्रदान किया गया था, जो आंतरिक गुहा को बाहरी सतह से जोड़ता है। छेद के माध्यम से एक गोल के साथ एक लकड़ी के ब्लॉक को इस चैनल में डाला गया था। फ्यूज की स्थापना के लिए बार का इरादा था, और इसके अलावा, टीएनटी ब्लॉकों को स्थानांतरित करने की अनुमति नहीं दी थी। गोलाकार कंक्रीट की खान खोल में 25 सेमी का व्यास था। गोला बारूद का वजन 18-20 किलो तक पहुंच गया। उत्पादन प्रक्रिया की विभिन्न विशेषताओं के आधार पर, उत्पाद के आयाम और वजन कुछ सीमाओं के भीतर उतार-चढ़ाव कर सकते हैं। कई हिस्सों से इकट्ठे हुए फ्यूज को बार के छेद में रखा गया था। Kugeltreibmine खदान एक Zundschuranzünder 29 फ्यूज, एक Zeitzündschnur 30 लौ-कॉर्डेंट कॉर्ड के बारे में 10-12 लंबे समय से सुसज्जित था, और एक विशेष कुंडली में एक नंबर 8 स्प्रेंगकैपल डेटोनेटर कैप्सूल से लैस नहीं था। डेटोनेटर को एक चेकर के घोंसले में रखा गया था और आग प्रतिरोधी कॉर्ड का उपयोग करके फ्यूज के साथ जोड़ा गया था। बाद वाले को खदान की सतह पर बांध दिया गया था। खदान के हिस्से के रूप में इस्तेमाल किए गए फ्यूज में सबसे सरल निर्माण संभव था, और इग्नाइटर रिंग को हटाने के कुछ समय बाद प्रभारी के विस्फोट के लिए भी प्रदान किया गया था। अतः के. टी. आर. एम. आई. हैंड ग्रेनेड के फ़्यूज़ की याद ताजा करती है। ऐसा कोई भी साधन जो हानिरहित प्रस्तुत करने के लिए कठिन या असंभव बना था, अनुपस्थित था। विशिष्ट आवेदन प्रक्रिया के कारण स्व-परिसमापक प्रदान नहीं किया गया था। अन्य विरोधी कर्मियों खानों के विपरीत, उत्पाद K. Tr. Mi. जमीन में स्थापना के लिए इरादा नहीं है। इस हथियार का उपयोग करने की प्रक्रिया अलग थी और अद्वितीय थी। उपयोग की तैयारी में, खदान एक फ्यूज से सुसज्जित थी और एक पैरापेट पर रखी गई थी। मूल आवेदन विधि के कारण, बॉल खानों का उपयोग केवल ढलान के ऊपर या पहाड़ों में स्थित इकाइयों द्वारा किया जा सकता था। एक अलग व्यवस्था के साथ, ऐसे हथियारों के उपयोग को दुश्मन को गोला बारूद की असंभवता के कारण बाहर रखा गया था। दुश्मन के हमले के दौरान, लड़ाकू-खनिक को विस्तार कॉर्ड को हटाते हुए फ्यूज कवर और अंगूठी पर खींचना पड़ा। इसके लिए, 0,5-0,6 किलो से अधिक नहीं के प्रयास की आवश्यकता थी। इसके बाद खदान को दुश्मन की दिशा में पैरापेट से खदेड़ा जा सकता था। अपने स्वयं के वजन के तहत, गोला बारूद पहाड़ी के नीचे लुढ़क गया और कुछ सेकंड के बाद विस्फोट हो गया। निष्कर्षण के दौरान, निकास कॉर्ड को एक विशेष रचना के एक खंड के खिलाफ रगड़ा जाता है जो घर्षण के दौरान ज्वलनशील होता है। एक ज्वलनशील अभिकर्मक ने आग की हड्डी को प्रज्वलित किया, जो बदले में, 10-12 सेकंड में डेटोनेटर कैप्सूल को जला दिया और प्रज्वलित कर दिया। उसके बाद एक विस्फोट हुआ। Kugeltreibmine खदान का उपयोग करने का मुख्य तरीका ढलान को मैन्युअल रूप से रोल करना था। एक अन्य तकनीक को "खिंचाव" के रूप में गोला-बारूद के उपयोग से भी जाना जाता है। इस मामले में, गेंद की खान को अस्थिर स्थिति में ढलान पर रखा गया था, और तनाव कॉर्ड के सिरों में से एक फ्यूज रिंग से बंधा हुआ था। टेंशन कॉर्ड के संपर्क में आने पर, खदान को स्टॉप से स्लाइड करना पड़ता है और ढलान नीचे गिरती है। उसी समय, फ्यूज कॉर्ड को हटा दिया गया था। यह विश्वास करने का कारण है कि गेंद की खान के. टी. आर. एम. आई. काफी बड़ी शक्ति थी। टीएनटी का एक 1160 चार्ज या पिघला हुआ, तैयार किए गए हड़ताली तत्वों के साथ मिलकर एक ठोस मामले में डाला गया, जिससे 10 मीटर के दायरे में दुश्मन की जनशक्ति हिट हो सकती है। इसके अलावा, एक ढलान से 20-किलोग्राम किलोग्राम रोलिंग भी अपनी गतिज ऊर्जा के कारण एक निश्चित खतरा पैदा कर सकता है। । हालांकि, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि अग्रिम दुश्मन समय में खदान की "शुरुआत" को नोटिस कर सकता है और आवश्यक उपाय कर सकता है - सुरक्षित दूरी पर इससे दूर जाने के लिए। फ्यूज के डिजाइन और एक निश्चित सीमा तक खानों का उपयोग करने की विधि ने सैपर के काम को सुविधाजनक बनाया। सभी घटकों के मानक संचालन के साथ, खदान में विस्फोट हुआ। अस्पष्टीकृत आयुध पृथ्वी की सतह पर पड़ा रहा, जिससे उनकी खोज बेहद आसान हो गई। खानों की निकासी के लिए के. टी. आर. एम. आई. फ्यूज के साथ लकड़ी के ब्लॉक को हटाने और डेटोनेटर को हटाने के लिए आवश्यक था। हालांकि, यह हमेशा संभव नहीं था। यदि डेटोनेटर को निकालना असंभव था, तो ओवरहेड चार्ज का उपयोग करके खदान को नष्ट करने की सिफारिश की गई थी। Kugeltreibmine उत्पादों का उत्पादन वर्ष 1943 के आसपास शुरू हुआ। इन हथियारों का उत्पादन मात्रा छोटा था। जबकि अन्य खानों का उत्पादन हजारों के बैचों में किया गया था, के. टी. आर. एम. आई. एक महीने में कई सौ से अधिक नहीं हुआ। इसके अलावा, 1944 वर्ष में, ऐसे हथियारों का उत्पादन गंभीरता से कम हो गया थाः 800 से 250 इकाइयों के लिए प्रति माह। इस कारण से, सेना में मूल बॉल मोबाइल की खदानें व्यापक नहीं हैं। ऐसे हथियारों का उपयोग एपिसोडिक था और केवल पश्चिमी यूरोप में लड़ाई के लिए लागू होता है। के- Tr. Mi के उपयोग पर जानकारी। पूर्वी मोर्चे पर अनुपस्थित है। Kugeltreibmine मोबाइल बॉल को नाजी जर्मनी के सबसे दिलचस्प और असामान्य प्रकार के हथियारों में से एक के रूप में पहचाना जा सकता है। इसी समय, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि यह खदान सबसे असफल और बेकार घटनाओं में से एक थी। इस तरह के हथियारों में बेहद सीमित गुंजाइश थी, साथ ही साथ संदिग्ध युद्ध प्रभावशीलता भी थी। कुछ मामलों में, खानों के बजाय एक अलग उत्पादन के संगठन की आवश्यकता होती है, मौजूदा हैंड ग्रेनेड का उपयोग करना संभव था। खानों की मुख्य समस्या के. टी. आर. एम. आई. आवेदन की प्रस्तावित विधि में शामिल है। एक अग्रिम दुश्मन पर अपेक्षाकृत बड़े विस्फोटक चार्ज के साथ भारी गोला बारूद को रोल करने का विचार दिलचस्प लगता है। हालांकि, व्यवहार में, वह कई गंभीर समस्याओं का सामना करती है। सबसे पहले, यह परिदृश्य है। हमेशा नहीं जर्मन सैनिकों को ऊंचाई में एक फायदा था और एक ढलान पर आगे बढ़ने वाले दुश्मन से खुद की रक्षा करने की क्षमता थी। अन्य मामलों में, एक नियमित तरीके से खानों का उपयोग असंभव था। इसके अलावा, जिस ढलान पर खानों को रोल करने की योजना बनाई गई थी, उसमें ऐसा कोई भी धमाका नहीं होना चाहिए जो गोला-बारूद को रोक सके। खाइयों से थोड़ी दूरी पर स्थित धक्कों के कारण, बचाव बलों को अपनी खानों से कुछ नुकसान हो सकता है। ठोस मामले और विभिन्न धातु की वस्तुओं के रूप में हड़ताली तत्वों ने हथियारों के उत्पादन को सुविधाजनक और सस्ता किया, लेकिन उनके उपयोग को मुश्किल बना दिया। गेंद की खान काफी भारी हो गई, जो कुछ हद तक उपयोग और वास्तविक उपयोग के लिए इसकी तैयारी को जटिल बनाती है। संचालक के साथ फ्यूज के इस्तेमाल से ऑपरेशन में भी बाधा आ रही थी। जिस सेनानी ने K. Tr. Mi. का उपयोग किया था, उसे खानों के मार्ग की सही गणना करने के लिए आवश्यक था, साथ ही ढलान पर गिरावट के सटीक क्षण का भी निर्धारण करना था। पैरापेट के साथ असामयिक टक्कर के मामले में, खदान आगे की टुकड़ियों तक नहीं पहुंच सकती थी या दुश्मन के युद्ध संरचनाओं के पीछे विस्फोट कर सकती थी। इसके अलावा, हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि दुश्मन के पास सुरक्षित दूरी पर रिटायर होने और लेटने का समय हो सकता है। खानों का उपयोग करने की डिजाइन और विधि के. टी. आर. एम. आई. वे कहते हैं कि युद्ध की प्रभावशीलता के संदर्भ में इस तरह के हथियार न केवल धक्का कार्रवाई की खानों के लिए, बल्कि हथगोले को भी खो देते हैं। पूर्व ने दुश्मन से पर्याप्त रूप से बड़े क्षेत्र की रक्षा करना संभव बना दिया, और उत्तरार्द्ध, रक्षकों के नियत कौशल के साथ, दुश्मन के लड़ाकों को आगे बढ़ा सकते थे, प्रतिक्रिया के लिए लगभग कोई समय नहीं छोड़ा। इसके अलावा, हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि लड़ाई के दौरान खदानों और हथगोले रक्षकों के सहायक हथियार हैं और केवल छोटे हथियारों के पूरक हैं। जर्मन कमांड ने शायद समझा कि कुगेल्ट्रेइम्बाइन खदान में अस्पष्ट या यहां तक कि संदिग्ध संभावनाएं थीं, जिसके कारण इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन बहुत तेज नहीं था। समय के साथ, इस तरह के हथियारों का उत्पादन अन्य प्रणालियों के निर्माण के पक्ष में और कम हो गया। लगभग सभी बॉल मोबाइल की खदानों का इस्तेमाल या तो लड़ाई के दौरान किया गया था, या हिटलर विरोधी गठबंधन की विरोधी ताकतों को ट्राफियां के रूप में दिया गया था। इनमें से कई गोला-बारूद आज तक बच गए हैं। अब वे संग्रहालय प्रदर्शनी हैं। साइटों की सामग्री परः
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16 Jun 2023विश्व हिंदू परिषद (VHP) कर्नाटक में धर्मांतरण विरोधी कानून को रद्द करने के सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के फैसले पर हिंदू संगठनों में जबरदस्त नाराजगी दिख रही है। कर्नाटक में पिछले भाजपा सरकार द्वारा लाए गए गोहत्या विरोधी कानून पर सियासत गरमाई हुई है। कर्नाटक की कांग्रेस सरकार में कैबिनेट मंत्री एमबी पाटिल ने सोमवार को ट्वीट कर 'शांतिपूर्ण कर्नाटक' नाम से एक हेल्पलाइन शुरू करने का प्रस्ताव रखा। कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार का आज मंत्रिमंडल विस्तार हुआ, जिसमें 24 विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। कर्नाटक में कांग्रेस की सिद्धारमैया सरकार की मुफ्त घोषणाओं की आलोचना करना एक सरकारी स्कूल के शिक्षक को भारी पड़ गया। उनको सेवा से निलंबित कर दिया गया है। कर्नाटक में नवगठित सरकार की शनिवार को पहली कैबिनेट बैठक हुई। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू में शनिवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया और कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने क्रमशः मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। कर्नाटक चुनाव के नतीजे शनिवार को घोषित हुए, जिसमें कांग्रेस ने 135 सीटों पर जीत हासिल की है, जबकि भाजपा ने 66 सीटें जीती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कर्नाटक में मुस्लिम समुदाय के आरक्षण को लेकर दिये जा रहे राजनीतिक बयानों पर कड़ी आपत्ति जताई। मंगलवार को कर्नाटक सरकार के राज्य में 4 फीसदी मुस्लिम आरक्षण को खत्म करने के मामले में अहम घटनाक्रम हुआ। कर्नाटक में हाई कोर्ट ने एक नहर के काम के लिए सरकारी कार्यकारी अभियंता द्वारा 5 करोड़ रुपये भुगतान की मंजूरी पर हैरानी जताई। इस नहर का काम 3 दिन में पूरा हो गया था। चुनाव आयोग ने कर्नाटक में चुनावी तारीखों का ऐलान कर दिया है। राज्य की सभी सीटों पर 10 मई को एक ही चरण में मतदान होगा और 13 मई को नतीजे जारी किए जाएंगे। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के दिग्गज नेता बीएस येदियुरप्पा के घर पर सोमवार को हमला हो गया। कर्नाटक में जल्द ही विधानसभा चुनावों का ऐलान हो सकता है। इससे पहले लिंगायत समुदाय से जुड़ी दो बड़ी खबरें आई हैं। कर्नाटक में दूध की भारी किल्लत सामने आ रही है। इसके देखते हुए कर्नाटक सरकार ने दूध के दाम न बढ़ाकर अलग रास्ता अपनाया है और दूध की मात्रा कम कर दी। टीपू सुल्तान के एक वंशज ने राजनीतिक पार्टियों को चेतावनी देते हुए कहा कि वे टीपू के नाम का इस्तेमाल राजनीति के लिए न करें। कर्नाटक में दो वरिष्ठ महिला अधिकारियों के बीच व्यक्तिगत विवाद सामने आया है। भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी डी रूपा और भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी रोहिणी सिंधुरी ने एक-दूसरे पर जमकर निशाना साधा है। कर्नाटक हाई कोर्ट ने बुधवार को आदियोगी मूर्ति के अनावरण और बेंगलुरू के नंदी पहाड़ियों की तलहटी पर बने ईशा योग केंद्र के उद्घाटन पर रोक लगा दी। महाराष्ट्र-कर्नाटक के बीच चल रहे सीमा विवाद में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कर्नाटक के मंत्री जे मधु स्वामी की टिप्पणी पर खरा जवाब दिया है। कर्नाटक में जनता दल (सेक्यूलर) (JDS) की विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारास्वामी की पत्नी अनिथा कुमारास्वामी ने एक जनसभा में किसानों से कहा कि जितना चाहिए उतना लोन लो, उनकी सरकार आने पर सब माफ कर देंगे। चीन में कोरोना के कहर को देखते हुए केंद्र सरकार के अलावा राज्य सरकारें भी अपनी ओर से आदेश जारी कर रही हैं। कर्नाटक कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष सतीश लक्ष्मणराव जारकीहोली ने सोमवार को हिंदू शब्द पर कई तरह के सवाल खड़े करते हुए नए विवाद को जन्म दे दिया है। देशभर में आज दिवाली का त्योहार मनाया जा रहा है। लोग एक-दूसरे को उपहार देकर खुशियां मना रहे हैं, लेकिन कर्नाटक में पर्यटन मंत्री आनंद सिंह की ओर से दिए गए उपहार ने विवाद खड़ा कर दिया है। कर्नाटक सरकार में मंत्री वी सोमन्ना एक महिला को थप्पड़ मारकर विवादों में घिर गए हैं। कांग्रेस ने जहां मंत्री को पद से हटाने की मांग की है, वहीं मुख्यमंत्री बसवराज बोम्ममई ने उनसे सफाई मांगी है। चरमपंथी इस्लामिक संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) चौतरफा मुसीबतों में घिर गया है और कर्नाटक सरकार ने उस पर प्रतिबंध लगाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। कर्नाटक के मंत्री उमेश कट्टी की मंगलवार रात हार्ट अटैक से मौत हो गई। वह 61 साल के थे और राज्य सरकार में वन, खाद्य, सिविल सप्लाई और ग्राहकों से संबंधित मामलों के मंत्री थे। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू में रविवार रात आई बारिश के बाद शहर के हालत बिगड़े हुए हैं। कर्नाटक में दो धड़ों में बंटी कांग्रेस को एकजुट करने पहुंच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को चित्रदुर्ग में स्थित लिंगायत समुदाय के मुरुगराजेंद्र मठ का भी दौरा किया। कर्नाटक के राज्यपाल थावर चंद गहलोत ने मंगलवार को राज्य सरकार की ओर से गत दिनों पारित किए गए धर्मांतरण विरोधी विधेयक से संबंधित अध्यादेश को मंजूरी दे दी। देश में लाउडस्पीकर पर अजान के खिलाफ विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने की मांग उठाने के बाद अब कर्नाटक में भी इसकी आग पहुंच गई है। टोयोटा (Toyota) ने कर्नाटक सरकार के साथ किये अपने एक समझोते (MoU) की घोषणा की है। कर्नाटक में भाजपा विधायक बसनगौड़ा पाटिल यतनाल के 2,500 करोड़ रुपये में मुख्यमंत्री बनाने का ऑफर मिलने के दावे ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। कर्नाटक में एक ठेकेदार की मौत के मामले में राज्य के मंत्री केएस ईश्वरप्पा का नाम आने के बाद विवाद बढ़ गया। कर्नाटक में स्कूल और कॉलेजों में हिजाब पहनने को चल रहे विवाद के बीच कर्नाटक हाई कोर्ट की तीन जजों वाली पूर्ण पीठ ने शुक्रवार को सभी याचिकाओं पर सुनवाई पूरी कर ली है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद सरकारी नौकरी का सपना देखने वाले उम्मीदवारों के लिए अच्छी खबर है। कर्नाटक के शिवमोगा शहर में बजरंग दल के कार्यकर्ता की हत्या के बाद से हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। कर्नाटक के शिवमोगा शहर में बजरंग दल के कार्यकर्ता की हत्या के बाद तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। संगठन के सदस्यों ने आज शहर में कई जगहों पर विरोध-प्रदर्शन किया और कुछ जगहों पर पथराव भी किया गया। भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस के आंसू गैस के गोले छोड़ने की खबर भी है। कर्नाटक में चल रहे हिजाब विवाद मामले में सरकार और पुलिस की ओर से लगातार समझाइश करने के बाद भी विरोध-प्रदर्शन थम नहीं रहा है। कर्नाटक में चल रहे हिजाब विवाद को लेकर हाई कोर्ट की तीन जजों वाली बड़ी बेंच में लगातार सुनवाई चल रही है। कर्नाटक हाई कोर्ट की तीन जजों वाली बड़ी बेंच ने राज्य में चल रहे हिजाब विवाद मामले को लेकर गुरुवार को अहम सुनवाई की। कर्नाटक में मुस्लिम छात्राओं के हिजाब पहनकर कॉलेज आने पर विवाद के बीच बेंगलुरू में स्कूल और कॉलेजों के आसपास सभा या प्रदर्शन करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। ये प्रतिबंध दो हफ्ते तक लागू रहेगा। कर्नाटक में हिजाब पहनने को लेकर शुरु हुआ विवाद मंगलवार को उबाल पर आ गया। कर्नाटक में कक्षाओं में हिजाब पहनने को लेकर चल रहे विवाद के बीच राज्य सरकार ने ड्रेस कोड लागू कर दिया है। कर्नाटक में हिजाब पहनने को लेकर शुरु हुआ विवाद अभी तक थमने का नाम नहीं ले रहा है। उडुपी के सरकारी कॉलेज से शुरू हुआ यह विवाद अब अन्य कॉलेजों तक पहुंच गया है। कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वेरिएंट के प्रभाव के कारण देश में संक्रमण के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री के सुधाकर ने महिलाओं पर विवादत बयान दिया है। आज हुए एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि आधुनिक भारतीय महिलाएं अविवाहित रहना चाहती हैं और यदि शादी हो भी जाए तो बच्चे नहीं पैदा करना चाहती हैं, सरोगेसी से बच्चा चाहती हैं। कर्नाटक सरकार ने ट्रांसजेंडरों के प्रति भेदभाव को मिटाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। देश में कोरोना से ठीक हुए लोगों पर म्यूकरमायकोसिस यानी ब्लैक फंगस का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। ऐपल के लिए अनुबंध पर आईफोन का विनिर्माण करने वाली कंपनी विस्ट्रॉन के कर्नाटक के कोलार स्थित नरसापुरा प्लांट पर पिछले दिनों हुई हिंसा के मामले में कंपनी ने अपनी गलती स्वीकार कर ली है। कर्नाटक में कोरोना वायरस के संक्रमण की स्थिति को जांचने के लिए कराए गए सीरोलॉजिकल सर्वे में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। देश में लगातार बढ़ते कोरोना वायरस के संक्रमण ने अब चिकित्सा व्यवस्था पर भी असर डालना शुरू कर दिया है। कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए सरकार ने 25 मार्च से लागू लॉकडाउन में सभी धार्मिक स्थलों को भी बंद कर दिया था। कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए लागू लॉकडाउन के बीच सोमवार से घरेलू विमान सेवाएं फिर से शुरू हो गई हैं। PM केयर्स फंड के खिलाफ कांग्रेस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से किए गए कुछ ट्वीट्स के संबंध में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ कर्नाटक में एक मामला दर्ज किया गया है। कांग्रेस-JDS गठबंधन सरकार की दीवार को गिराकर फिर से सत्ता पर काबिज होने वाले मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को इसी माह अपने मंत्रीमंडल का विस्तार करना है, लेकिन उससे पहले उनके सामने परेशानियां खड़ी होना शुरू हो गई हैं। केंद्र सरकार के नए मोटर वाहन अधिनियम पर बहस के बीच कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री ने सड़क दुर्घटनाओं को लेकर अजीबोगरीब बयान दिया है। कांग्रेस 17 विधायकों की सदस्यता रद्द होने से खाली हुई सीटों पर उपचुनाव की तैयारियों में जुट गई है और इसे जनता दल (सेक्युलर) के साथ उसके गठबंधन के अंत के तौर पर देखा जा रहा है। कर्नाटक में सफलता के बाद मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार पर निशाना साधे बैठी भारतीय जनता पार्टी को तब बड़ा झटका लगा जब उसके 2 विधायकों ने पार्टी लाइन से अलग जाकर सरकार के एक बिल के समर्थन में वोट कर दिया। रोज लंबे होते इंतजार के बीच आज आखिरकार कर्नाटक विधानसभा में विश्वास मत पर वोटिंग हो गई, जिसमें एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली सरकार गिर गई। कर्नाटक में चल रहा सियासी नाटक थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को सदन को 22 जुलाई तक स्थगित कर दिया गया है। कर्नाटक में राज्यपाल वजुभाई वाला द्वारा मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी को दी गई शाम 6 बजे की दूसरी डेडलाइन भी खत्म हो गई है। विधायकों के इस्तीफे के कारण संकट से गुजर रही कर्नाटक सरकार गुरुवार को विधानसभा में अपना बहुमत साबित करेगी। मुंबई के होटल में ठहरे कर्नाटक के 14 बागी विधायकों ने फिर से मुंबई पुलिस को पत्र लिखकर कांग्रेस नेताओं ने गंभीर खतरा बताया है और सुरक्षा की मांग की है। शनिवार को कर्नाटक सरकार के 5 और बागी विधायक सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए और कहा कि विधानसभा स्पीकर उनके इस्तीफे स्वीकार नहीं कर रहे हैं। कर्नाटक में सियासी नाटक के बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धारमैया ने बागी कांग्रेस विधायकों को चेतावनी दी है। कर्नाटक की कांग्रेस-जनता दल (सेक्युलर) गठबंधन सरकार की मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं। पूर्व प्रधानमंत्री और जनता दल (सेक्युलर) प्रमुख एचडी देवगौड़ा ने कर्नाटक में मध्यावधि चुनाव होने की भविष्यवाणी की है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने भारतीय जनता पार्टी पर विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया है। कर्नाटक की सत्ता पर काबिज कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर) गठबंधन में मतभेद एक बार फिर से तब उजागर हुए, जब बुधवार को मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि वह हर दिन दर्द से गुजर रहे हैं। कर्नाटक के भाजपा नेता केएस ईश्वरप्पा ने विवादित बयान दिया है। कांग्रेस नेता और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की एक हरकत की वजह से पार्टी की मुसाबतें फिर से बढ़ सकती हैं। कर्नाटक में चल रहे सियासी नाटक में एक ऐसी घटना सामने आई है जो कांग्रेस की सिरदर्दी बढ़ा सकती है।
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"आमराज - नागभट्ट द्वितीय\nविक्रम की नौव(...TRUNCATED)
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