audio audioduration (s) 1.23 8.13 | text stringlengths 13 126 | source stringclasses 9 values |
|---|---|---|
मोती दिल में ऐंठकर रह गया। | Buddy | |
गया आ पहुँचा और दोनों को पकड़ कर ले चला। | Buddy | |
कुशल हुई कि उसने इस वक्त मारपीट न की, नहीं तो मोती भी पलट पड़ता। | Buddy | |
उसके तेवर देख कर गया और उसके सहायक समझ गए कि इस वक्त टाल जाना ही मसलहत है। | Buddy | |
आज दोनो के सामने। | Buddy | |
फिर वही सूखा भूसा लाया गया। | Buddy | |
दोनों चुपचाप खड़े रहे। | Buddy | |
घर में लोग भोजन करने लगे। | Buddy | |
उस वक्त छोटी सी लड़की, 2 रोटियां लिए निकली और दोनों के मुँह में देकर चली गई। | Buddy | |
उस 1 रोटी से इनकी भूख तो क्या शांत होती, पर दोनों के हृदय को मानो भोजन मिल गया। | Buddy | |
यहाँ भी किसी सज्जन का वास है। | Buddy | |
लड़की भैरो की थी, उसकी माँ मर चुकी थी, सौतेली माँ उसे मारती रहती थी। | Buddy | |
इसलिए इन बैलों से 1 प्रकार की आत्मीयता हो गई थी। | Buddy | |
दोनों दिन भर जोते जाते। | Buddy | |
मगर दोनों की आँखों में रोम। | Buddy | |
रोम में विद्रोह भरा हुआ था। | Buddy | |
1 दिन मोती ने मूक भाषा में कहा, अब तो नहीं सहा जाता हीरा क्या करना चाहते हो? | Buddy | |
एकाद को सींगों पर उठाकर फेंक दूंगा। | Buddy | |
वह प्यारी लड़की, जो हमें रोटियाँ खिलाती है, उसी की लड़की है, जो इस घर का मालिक है। | Buddy | |
यह बेचारी अनाथ हो जाएगी, तो मालकिन को न फेंक दूं। | Buddy | |
वही तो इस लड़की को मारती है, लेकिन औरत जात पर सींग चलाना मना है। | Buddy | |
तुम तो किसी तरह निकलने ही नहीं देते। | Buddy | |
बताओ, तुड़ाकर भाग चले। | Buddy | |
हाँ, यह मैं स्वीकार करता हूँ, लेकिन इतनी मोटी रस्सी टूटेगी कैसे? | Buddy | |
पहले रस्सी को थोड़ा सा चबा लो, फिर 1 झटके में जाती है। | Buddy | |
रात को जब बालिका रोटियाँ खिलाकर चली गई। | Buddy | |
दोनों रस्सियाँ चबाने लगे, पर मोटी रस्सी मुँह में न आती थी। | Buddy | |
बेचारे बार बार जोर लगाकर रह जाते थे। | Buddy | |
सहसा घर का द्वार खुला और वह लड़की निकली। | Buddy | |
दोनों सिर झुकाकर, उसका हाथ चाटने लगे। | Buddy | |
दोनों की पूंछें खड़ी हो गई। | Buddy | |
उसने उनके माथे सहलाए और बोली खोल देती हूँ चुपके से भाग जाओ। | Buddy | |
नहीं तो ये लोग मार डालेंगे। | Buddy | |
आज घर में सलाह हो रही है कि इनकी नाकों में नाथ डाल दी जाए। | Buddy | |
उसने गराम खोल दिया, पर दोनों चुप खड़े रहे। | Buddy | |
मोती ने अपनी भाषा में पूछा, अब चलते क्यूँ नहीं? | Buddy | |
हीरा ने कहा, चले तो, लेकिन कल इस अनाथ पर आफत? | Buddy | |
आएगी सब इसी पर संदेह करेंगे। | Buddy | |
सहसा बालिका चिल्लाई। | Buddy | |
दोनों फूफा वाले बैल भागे जे रहे हैं। | Buddy | |
दोनों बैल भागे जा रहे हैं। | Buddy | |
जल्दी दौड़ो गया। | Buddy | |
हड़बड़ा कर भीतर से निकला और बैलों को पकड़ने चला। | Buddy | |
गया ने पीछा किया और भी तेज हुए। | Buddy | |
फिर गाँव के कुछ आदमियों को भी साथ लेने के लिए लौटा। | Buddy | |
दोनों मित्रों को भागने का मौका मिल गया। | Buddy | |
सीधे दौड़ते चले गए। | Buddy | |
यहाँ तक कि मार्ग का ज्ञान न रहा। | Buddy | |
जिस परिचित मार्ग से आए थे, उसका यहाँ पता न था। | Buddy | |
नए नए गाँव मिलने लगे। | Buddy | |
तब दोनों ए 1 खेत के किनारे खड़े होकर सोचने लगे। | Buddy | |
हीरा ने कहा, मालूम होता है, राह भूल गए, तुम भी बेतहाशा भागे। | Buddy | |
वहीं उसे मार गिराना था, उसे मार गिराते, तो दुनिया क्या कहती? | Buddy | |
वह अपने धर्म छोड़ दे। | Buddy | |
लेकिन हम अपना धर्म क्यों छोड़े? | Buddy | |
दोनों भूख से व्याकुल हो रहे थे। | Buddy | |
खेत में मटर खड़ी थी, चरने लगे, रह रहकर आहट लेते रहे थे। | Buddy | |
जब पेट भर गया, दोनों ने आजादी का अनुभव किया, तो मस्त होकर उछलने कूदने लगे। | Buddy | |
पहले दोनों ने डकार ली, फिर सिंह, मिलाये और 1 दूसरे को ठेलने लगे। | Buddy | |
मोती ने हीरा को कई कदम पीछे हटा दिया। | Buddy | |
यहाँ तक कि वह खाई में गिर गया। | Buddy | |
तब उसे भी क्रोध आ गया। | Buddy | |
संभलकर उठा और मोती से भिड़ गया। | Buddy | |
मोती ने देखा, खेल में झगड़ा हुआ चाहता है, तो किनारे हट गया। | Buddy | |
अरे, यह क्या कोई सा ढोता चला आ रहा है। | Buddy | |
दोनों मित्र बगले झाँक रहे थे। | Buddy | |
सार पूरा हाथ ही था, उससे भिडना जान से हाथ धोना है। | Buddy | |
लेकिन न भिडने पर भी जान बचती नहीं नजर। | Buddy | |
इन्हीं की तरफ आ भी रहा है। | Buddy | |
कितनी भयंकर सूरत है। | Buddy | |
मोती ने मु भाषा में कहा, बुरे फँसे जान, बचेगी कोई उपाय सोचो। | Buddy | |
हीरा ने चिंतित स्वर में कहा। | Buddy | |
अपने घमंड में फूला हुआ है, आरजुविनती न सुनेगा, भाग क्यों न चले भागना कायरता है। | Buddy | |
तो फिर यही मरो बंदा तो 9, 2, 11 होता है। | Buddy | |
और जो दौड़ाए तो फिर कोई उपाय सोचो जल्द। | Buddy | |
उपाय यही है कि उस पर दोनों जने 1 साथ चोट करें। | Buddy | |
मैं आगे से लगता हूँ, तुम पीछे से रगेदो दोहरी। | Buddy | |
मार पड़ेगी तो भाग खड़ा होगा। | Buddy | |
तुम बगल से उसके पेट में सींग घुसेर देना जान, जोखिम है, पर दूसरा उपाय नहीं है। | Buddy | |
दोनों मित्र जान हथेलियों पर लेकर लपके। | Buddy | |
सार को भी संगठित शत्रुओं से लडने का तजुर्बा था। | Buddy | |
वो तो 1 शत्रु से मल्लयुद्ध करने का आदी था। | Buddy | |
यूँ ही हीरा पर झपटा। | Buddy | |
पर ये दोनों भी उस्ताद थे, उसे वो अवसर न देते थे। | Buddy | |
1 बार सर झल्लाकर हीरा का अंत कर देने के लिए चला। | Buddy | |
कि मोती ने बगल से आकर उसके पेट में सींग बोग दिया। | Buddy | |
सार क्रोध में आकर पीछे। | Buddy | |
फिरा तो हीरा ने दूसरे पहलू में सींगे चुभा दिया। | Buddy | |
आखिर बेचारा जख्मी होकर भागा और दोनों मित्रों ने दूर तक उसका पीछा किया। | Buddy | |
यहाँ तक कि सार बेदम होकर गिर पड़ा। | Buddy | |
तब दोनों ने उसे छोड़ दिया। | Buddy | |
दोनों मित्र जीत के नशे में झूमते चले जाते थे। | Buddy | |
मोती ने सांकृतिक भाषा में कहा, मेरा जी चाहता था के सार को मार ही डालू। | Buddy | |
हीरा ने तिरस्कार किया, गिरे हुए बैरी आर सी 2 न चलाना चाहिए। | Buddy | |
बैरी को ऐसा मानना चाहिए की फिर न उठे। | Buddy | |
वो सोचो पहले कुछ खा ले तो सोचे सामने मदर का खेत था। | Buddy | |
मोती उसमें घुस गया। | Buddy | |
हीरा मना करता रहा। | Buddy | |
हीरा तो मेर पर था, निकल गया। | Buddy | |
मोती सींचे हुए खेत में था, उसके खुर कीचर में धँसने लगे। | Buddy |
End of preview. Expand
in Data Studio
README.md exists but content is empty.
- Downloads last month
- 27