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देखिए मैं
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वह कुर्सी में बैठे थे प्रधानमंत्री जी उनके पास जा जाकर के पुष्प से वर्षा करके उनका सम्मान कर रहे
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प्रयागराज में
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सफाई कर्मियों के पर प्रधानमंत्री जी ने अपने हाथों से दो
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यह पहली बार हुआ
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आखिर कांग्रेस में
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राहुल गांधी के
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पर नाना
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प्रधानमंत्री थे
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उनकी दादी प्रधानमंत्री थी उनके पिताजी प्रधानमंत्री थे
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और
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उसको उससे भी आक्रामक तरीके से
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2004 से 2014 तक
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उनकी माता जी
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सुपर पीएम के रूप में
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कार्य कर
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आखिर इस दौरान कभी इनको किसी
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गरीब के घर में
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जाने की बात तो तू किसी गरीब से संबंधित
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जिसने उनके जीवन में व्यापक परिवर्तन किया
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नहीं
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राहुल एंड कंपनी
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आलोक मंदिर क्या जाएंगे
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तो देखा था 20 गुजरात के चुनाव के दौरान
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उनको यह तक नहीं मालूम था कि मंदिर में जाना कैसे बैठता है
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ऐसे लगता था जैसे कोई नमाज पढ़ने पहली बार देश के अंदर एक आदिवासी महिला
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देश
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की
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किसके कारण
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प्रधानमंत्री मोदी जी के
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इनिशिएटिव लेने के
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मैं
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समाज के अंतिम पायदान पर बैठे हुए
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अंतोदय से
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अमृता डेकी
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यात्रा
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अंतिम पायदान पर बैठे हुए व्यक्ति को भी सट्टा की सिंहासन पर बैठने
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मैं पूछना चाहता हूं
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राहुल गांधी से पूछना
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मैं स्वयं की बात करता हूं
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मैं तो एक सामान्य परिवार में जन्म
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हमने कभी मुख्यमंत्री बनने की सोच ही नहीं
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आभारी हूं
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कभी नहीं सो
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कभी नहीं हम लोगों के मन में थे
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आज मुख्यमंत्री के रूप में जनता जनार्दन की सेवा कर रहे हैं
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ऐसी बात मैं कह रहा हूं
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निमंत्रण पत्र सबको दिया
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आदरणीय राष्ट्रपति जी को भी
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आदरणीय उपराष्ट्रपति जी को भी
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पूर्व राष्ट्रपति
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आदरणीय रामनाथ कोविंद जी को भी
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उन सभी का
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जिस सूची में
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हर टपके के
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अमिताभ बच्चन भी
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उसमें थे
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और मुझे लगता है कि हमें उनकी कला पर सम्मान का भार रखना उनकी दृष्टि ही वैसी है दृष्टि दोष ईसी को कहते
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दृष्टि दोष है अगर ऐश्वर्या राय जी भी रहती तो अच्छी बात
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भाई आखिर और भारत की नागरिक है
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क्या अमिताभ बच्चन की कला
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जिनको
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और कला जगत में उनके योगदान को आप विस्मित कर लें
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तो क्यों कांग्रेस ने उन्हें चुनाव लड़ाया था
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भारत
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की परंपरा
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सनातन धर्म की परंपरा
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राम और
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एक दूसरे
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भगवान राम ने रामचरितमानस में स्वयं ही इस बात को कहा है
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किसी को द्रोही
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यह यात्रा अच्छी लगती है
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अगर
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मेरे समीप आने का
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वह सपने में भी मेरी कृपा नहीं प्राप्त
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लंका में सेतुबंध का निर्माण करना था तो प्रभु राम ने
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पहले रामेश्वरम
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जब नामकरण की बात आई
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भगवान राम ने
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लेकिन शिव से पूछा गया तो भगवान शिव ने कहा नहीं नहीं
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जिसके ईश्वर नाम है
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देखो
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दोनों एक दूसरे को सम्मान दे रहे हैं
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यह भारत की परंपरा है
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कांग्रेस ने बांटने की राजनीति हमेशा की है पहले देश को बांटा
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इसके बाद क्षेत्र और भाषा के आधार पर देश को बांटने का कुछ चित प्रयास किया
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राष्ट्रवाद का अभियान
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आप सोचिए
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1947
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देश का विभाजन उन्होंने कराया
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उसे समय
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अंबेडकर रहे हो या बहुत सारे ऐसे महापुरुष थे जिन्होंने कहा कि भी देखो देश का बंटवारा नहीं हूं
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पापुलेशन
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जिसके भारत में आस्था न्यू भारत में क्यों रहे
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जिसके हम पथिक है
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जान को जाना है क्यों भारत में बोझ बन
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क्षेत्रफल दिया ज्यादा दिया गया
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आबादी कम
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ज्यादा क्षेत्रफल मिलने और भारत की
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उच्च उपजाऊ भूमि वहां जाने के बावजूद
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