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नमस्कार दोस्तों आज का वीडियो एक ऐसी किताब पर है जो आपको सोचने के हर पुराने तरीके को फिर से परखने पर मजबूर कर देगी हम बात कर रहे हैं फ्रिडरिश नीच्षे की आइकॉनिक किताब बियॉंड गुड एड इवल की अब आप सोच रहे होंगे ये कौन सी किताब है इसका मतलब क्या है और हमें क्यों पढ़नी चाहिए | 0 | |
अब आप सोच रहे होंगे ये कौन सी किताब है इसका मतलब क्या है और हमें क्यों पढ़नी चाहिए तो चलिए सबसे पहले बात करते हैं इस किताब के बैकगराउंड की फ्रिडरिश नीच्षे जर्मनी के एक बहुत ही फेमस फिलोसफर थे उनका जन्म 1844 में हुआ था और उन्होंने 19-वी सदी में ऐसे ऐसे आइडियाज लिखे जो आज भी लोगों को हिला देते हैं नीचे उन लोगों मेंसे... | 0 | |
उन्होंने रिलीजिन, मॉरालिटी और हुमन साइकॉलजी पर ऐसे सवाल उठाए जो पहले किसी ने नहीं पूछे थे Beyond Good and Evil उनकी सबसे important किताबों में से एक मानी जाती है ये किताब 1886 में पबलिश हुई थी इसका नाम सुनते ही कुछ लोगों को लगता है कि ये सिर्फ अच्छाई और बुराई के बारे में है लेकिन असल में ये उस से कहीं ज्यादा गहराई ... | 0 | |
नीचे इस किताब में कहते हैं कि जो चीजें हम Good और Evil मानते हैं वो हमेशा से वैसे नहीं थी समाज ने, धर्म ने और इतिहास ने हमें सिखाया है कि क्या सही है और क्या गलत लेकिन नीचे पूछते हैं क्या आपने खुद कभी सोचा है कि ये Values कहां से आई क्या वाकई ये Universal है या ये किसी एक समय एक Culture के हिसाब से बनाई गई थी या... | 0 | |
नीचे कहते हैं कि हमें अपने दिमाग को आजात करना होगा हमें Free Spirits बनना होगा मतलब जो डर या गिल्ट के बिना सोच सके जो पुराने आइडियस को चैलेंज कर सके अब एक जरूरी बात ये किताब थोड़ी कठिन लग सकती है इसकी भाशा पोईटिक है बहुत सारे शब्द डीप मीनिंग रखते हैं लेकिन घबराईये मत इस वीडियो सीरीज में हम हर चैप्टर को एकदम सरल भ... | 0 | |
हर कॉंसेप्ट को तोड़ तोड़ कर आसानी से आपके सामने रखेंगे आप चाहे फिलोसफी में नए हो या पुराने ये सफर आपको जरूर पसंद आएगा नीचे की एक खास बात ये भी थी कि वो हमेशा टूथ को खुल कर बोलते थे चाहे वो समाज के बारे में हो, रिलीजिन के बारे में या फिर खुद फिलोसफी के बारे में उन्होंने खुद फिलोसफर्स की भी आलोचना की कहा की बहुत से... | 0 | |
यानि वो सच नहीं, अपनी पसंद या डर के हिसाब से आईडियाज बनाते हैं नीचे की फिलोसफी को हम मौडरन थौट की जड़ मान सकते हैं उन्होंने एक्सिस्टेंशलिजम और पोस्ट मौडरनिजम जैसे मूवमेंट्स को रास्ता दिखाया आज जो लोग फ्री थिंकिंग, इंडिपेंडन्ट माइंड और इंडिविज्विज्वालिटी की बात करते हैं उनकी सोच पर नीचे का बड़ा असर है अब बात करते ह... | 0 | |
बियॉंड गुड अन इवल को नीचे ने नौ पार्ट्स में डिवाइड किया है और अन्त में एक सुन्दर सी पोवम दी है जिसे आफ्टर सॉंग कहा जाता है इन नौ चैप्टर्स में वो अलग-अलग टॉपिक्स को एक्स्प्लोर करते हैं जैसे की टूथ क्या है, रिलीजिन का रोल क्या है, मौरल वैलियूस कैसे बनी, स्कॉलर्स की क्या जिम्मेदारी है और नोबल इनसान कैसा होता है हर ... | 0 | |
नीच्छे आपको एक ऐसे सफर पर ले जाते हैं जहां आप अपनी पुरानी सोच पर खुद सवाल करने लगते हैं इसलिए ये किताब सिर्फ पढ़ने की चीज नहीं है ये सोचने की चीज है अब आप सोच रहे होंगे क्या ये किताब हमारे लिए है? बिल्कुल है अगर आप वो इनसान हैं जो चीजों को गहराई से समझना चाहते हैं अगर आप कभी-कभी सोचते हैं कि जो समाज कहता है वो... | 0 | |
तो ये किताब आपके लिए है हमारी इस वीडियो में हम हर चैप्टर को एक-एक करके पढ़ेंगे समझेंगे और उसका रियल लाइफ से कनेक्शन निकालेंगे आप हर चैप्टर के बाद खुद से जुड़े कुछ नए सवाल लेकर उठेंगे तो चलिए तयार हो जाएए एक अलग तरह की सोच एक नई यात्रा और कुछ बोल्ड सवालों के लिए फ्रीडरिच नीच्चे की किताब Beyond Good and Evil की प्... | 0 | |
Beyond Good and Evil की प्रस्तावना यानी Preface इस किताब का दर्वाजा है यहां से नीच्चे हमें अपनी सोच की दुनिया में ले जाते हैं वो इस हिस्से में बताते हैं कि उनकी किताब क्यों लिखी गई और वो क्या कहना चाहते हैं Preface में नीच्चे का लहजा तीखा और गहरा है वो दर्शन, सच और इनसानी सोच की कमजोरियों पर सवाल उठाते हैं इस से... | 0 | |
और देखेंगे कि नीच्चे ने अपने विचारों को कैसे पेश किया नीच्चे Preface की शुरुात में कहते हैं कि सत्य की खोज करना आसान नहीं है लोग सोचते हैं कि सत्य कुछ ऐसा है जो हमेशा से मौझूद है लेकि नीच्चे इस से सहमत नहीं है उधारन के लिए हम मानते हैं कि कुछ चीज़ें अच्छी हैं और कुछ बुरी लेकिन नीचे पूछते हैं कि ये अच्छा बुरा किसन... | 0 | |
उनके लिए ये सिर्फ इन्सानी दिमाग का बनाया हुआ धाँचा है वो चाहते हैं कि हम इन धाँचों को तोड़ें और सत्य को नए सिरे से देखें इस हिस्से में नीचे दार्शनिकों पर भी निशाना साधते हैं वो कहते हैं कि ज्यादातर दार्शनिक सत्य की खोज करने का दावा तो करते हैं लेकिन असल में वो अपनी पुरानी मान्यताओं को ही सही ठहराते हैं वो सवाल नही... | 0 | |
वो मानते हैं कि ऐसे दार्शनिक सत्य को नहीं, बलकि अपने विश्वास को बचाने की कोशिश करते हैं. उनके लिए ये एक तरह की बेईमानी है. नीचे प्रीफिस में एक खास शब्द का जिकर करते हैं, फ्री स्पिरिट. ये वो लोग हैं जो पुराने नियमों और विश्वासों से आजात होते हैं. वो सवाल उठाते हैं, नई राह बनाते हैं और डरते नहीं हैं. नीचे कहते हैं क... | 0 | |
वो चाहते हैं कि रीडर्स उनकी बातों को सिर्फ पढ़ें नहीं, बलकि उन पर गहराई से सोचें. वो हमें चुनौती देते हैं कि हम अपनी सोच को परखें और देखें कि क्या हम सचमुच आजात हैं. एक और अहम बात जो नीचे यहां कहते हैं, वो है दर्शन की हालत. वो मानते हैं कि उनके समय में दर्शन कमजोर हो गया था. दर्शनिक लोग सच्चाई की बजाए छोटी छोटी बात... | 0 | |
नीचे इसे एक बीमारी की तरह देखते हैं. वो कहते हैं कि दर्शन को फिर से मजबूत करना होगा. इसके लिए हमें पुराने तरीकों को छोड़ना होगा और नए सवाल उठाने होगे. वो चाहते हैं कि दर्शन सिर्फ किताबों तक न रहे, बलकि जिन्दगी को बदलने की ताकत बने. प्रिफेस में नीचे धर्म पर भी बात करते हैं. वो कहते हैं कि धर्म ने इंसानों की सोच को... | 0 | |
नीचे के लिए ये एक तरह की गुलामी है. वो चाहते हैं कि लोग धर्म के नियमों पर सवाल उठाएं और देखें कि क्या ये नियम सचमुच सही है वो ये नहीं कहते कि धर्म गलत है लेकिन वो चाहते हैं कि हम उसे आँख बंद करके न माने नीचे का लेखन प्रिफिस में बहुत तीखा है वो मजाक और तंच का इस्तिमाल करते हैं उदाहरन के लिए वो दारशनिकों को ऐसे लोग क... | 0 | |
वो कहते हैं कि ये लोग असल दुनिया से दूर अपनी बनाई दुनिया में खोए रहते हैं उनका ये अंदाज हमें हसाता भी है और सोचने पर मजबूर करता है वो चाहते हैं कि हम उनके मजाक को समझें और उस में छुपे गहरे सवालों को देखें इस हिस्से में नीचे एक और बात पर जोड देते हैं नेतिकता वो कहते हैं कि हमारी नैतिकता यानि अच्छे बुरे के नियम हमेश... | 0 | |
नीच्छे पूछते हैं कि क्या हम इन नियमों को हमेशा मानते रहेंगे या इन पर सवाल उठाएंगे। वो चाहते हैं कि हम नैतिकता को नए नजरिये से देखें और पूछें कि ये नियम हमें आजात करते हैं या बांधते हैं। प्रिफिस में नीच्छे अपनी किताब का मकसद भी साफ करते हैं। हो चाहते हैं कि ये किताब उन लोगों के लिए है जो पुराने विचारों से थक चुके हैं... | 0 | |
वो अपनी किताब को एक तरह का हत्यार बताते हैं जो पुरानी सोच को तोड़ने के लिए है। वो चाहते हैं कि हम उनकी बातों से डरें नहीं बलकि उन्हें एक चुनौती की तरह लें। ुछ नीचे यहां एक कहानी का दिकर भी करते हैं, वो कहते हैं कि सत्य की खोज एक लंबा सफर है इस सफर में हमें कई बार गलत रास्तों पर जाना पड़ता हैं। लेकिन वो मानते हैं कि ग... | 0 | |
उनके लिए सत्य कोई ऐसी चीज नहीं जो हमें आसानी से मिल जाए। हमें उसे खोजना पड़ता है और इस खोज में हमें अपने आपको भी समझना पड़ता है। प्रेफिस का आखिरी हिस्सा बहुत गहरा है। नीचे कहते हैं कि उनकी किताब एक नई शुरुआत है। वो चाहते हैं कि ये किताब दर्शन को फिर से जीवन्त करे। वो अपने रीडर से कहते हैं कि वो उनकी बातों को सिर्फ... | 0 | |
वो चाहते हैं कि हम उनकी किताब को एक नक्षे की तरह देखें जो हमें नई मनजिलों तक ले जाएगा। इस तरह preface हमें नीच्छे की सोच का पहला स्वात देता है वो हमें बताते हैं कि उनकी किताब आसान नहीं होगी ये हमें सोचने, सवाल उठाने और पुरानी मान्यताओं को तोड़ने की चुनौती देती है वो हमें तयार करते हैं कि हम उनकी किताब को खुले दिमाग... | 0 | |
Beyond Good and Evil का पहला चैप्टर जिसका नाम है On the Prejudices of Philosophers नीचे की सबसे तीखी और गहरी सोच को सामने लाता है इस चैप्टर में वो दारशनिकों की कमजोरियों पर सवाल उठाते हैं वो कहते हैं कि दारशनिक जो सत्य की खोज करने का दावा करते हैं अक्सर अपनी मानियताagं के जाल में फंसे रहते हैं नीच शे इस चैप्टर में... | 0 | |
नीच शे इस चैप्टर में दरशन की दुनिया को हिलाने की कोशिश करते हैं वो हमें दिखाते हैं कि सत्य को खोजना इतना आसान नहीं जितना दरशनिक सोचते हैं नीच शे शुरुवात में ही एक बड़ा सवाल उठाते हैं क्या दार्षनिक वाकई सत्य की खोच करते हैं? उनके मुताबिक ज्यादातर दार्षनिक सत्य को नहीं, बलकि अपनी पुरानी मान्यताओं को बचाने की कोशिश क... | 0 | |
ये पक्षपात दार्षनिकों को सच्चाई से दूर रखता है. उदाहरण के लिए, अगर कोई दार्षनिक पहले से मानता है कि दुनिया में एक खास तरह का नियम है, तो वो उसी नियम को सही साबित करने की कोशिश करता है. नीच्चे कहते हैं कि ये सत्य की खोज नहीं, बलकि अपने विश्वास को मजबूत करना है. इस चैप्टर में नीच्चे एक और अहम बात कहते हैं. दार्षनिक ... | 0 | |
लेकि नीच्चे का मानना है कि सच्चाई तक पहुँचने के लिए हर चीज़ पर सवाल उठाना जरूरी है. वो कहते हैं कि दार्षनिकों को अपनी सोच को परखना चाहिए. अगर उनकी माननेताएं गलत साबित होती हैं तो उन्हें बदलने की हिम्मत दिखानी चाहिए. उनके लिए सच्च की खोज एक जंग की तरह है जिसमें डरने की कोई जगह नहीं. नीच्चे यहां टूथ के बारे में भी बा... | 0 | |
लेकिन नीच्चे इस से सहमत नहीं. वो मानते हैं कि सत्य इनसान की सोच पर निर्भर करता है. अलग-अलग लोग अलग-अलग समय में सत्य को अपने तरीके से देखते हैं उदाहरण के लिए पहले लोग मांनते थे कि अर्थ फ्लैट है वो उनके लिए सत्य था लेकिन बाद में पताचला कि प्रिथवी घोल है नीच्चे कहते हैं कि हमें सत्य को हमेशा परक्ते रहना चाहिए इस चै... | 0 | |
इस चैप्टर में नीच्चे दार्शनिकों के लौजिक पर भी सवाल उठाते हैं वो कहते हैं कि दार्शनिक सोचते हैं कि उनका तर्क यानि लौजिक सत्य तक ले जाएगा लेकिन नीचे पूछते हैं कि क्या ये तर्क हमेशा सही होते हैं? वो मानते हैं कि तर्क भी इनसान की बनाई हुई चीज है. कई बार ये तर्क हमें सच्चाई से दूर ले जाते हैं. वो चाहते हैं कि दार्शिनि... | 0 | |
दार्शनिक अक्सर अपनी भावनाओं को छुपाते हैं वो सोचते हैं कि सत्य की खोज सिर्फ दिमाग से होनी चाहिए दिल से नहीं लेकिन नीच्छे कहते हैं कि ये गलत है इनसान की भावनाएं, उसकी इच्छाएं और उसका जुनून भी सत्य की खोज में अहम है वो मानते हैं कि दार्शनिकों को अपनी भावनाओं को सुईकार करना चाहिए उदारण के लिए अगर कोई दार्शनिक किसी व... | 0 | |
इस चैप्टर में नीच्छे मेटाफिजिक्स की भी बात करते हैं मेटाफिजिक्स वो दर्षन है जो दुनिया के पीछे की सच्चाई को समझने की कोशिश करता है लेकिन नीच्छे को लगता है कि मेटाफिजिक्स में दार्षनिक अकसर खो जाते हैं वो ऐसी चीजों के बारे में सोचते हैं जो शायद असल में हैं ही नहीं नीच्छे कहते हैं कि हमें ऐसी खयाली बातों में नहीं उलजना... | 0 | |
नीच्छे यहां free spirit की बात फिर से उठाते हैं वो कहते हैं कि असली दार्शनिक वही है जो आजात सोच रखता है ऐसा दार्शनिक पुराने नियमों, धर्म या समाज के दबाव से नहीं डरता वो हर चीज़ पर सवाल उठाता है और नई राह बनाता है नीच्छे मानते हैं कि ऐसे दार्शनिक बहुत कम हैं ज्यादा तर लोग पुरानी सोच में ही भंसे रहते हैं वो चाहते ह... | 0 | |
इस चैप्टर में नीच्छे एक खास दार्शनिक प्लाटो की भी बात करते हैं प्लेटो का मानना था कि सट्य एक ऐसी दुनिया में है घ्राव सकिख्श हमें ही है हमें उसे यहां खोजना चाहिए न कि कि किसी दूसरी दुनिया में वो प्लेटो जैसे दार्शनिकों को सपने देखने वाला कहते हैं उनके लिए सत्य की खोज असल जिंदगी में होनी चाहिए नीचे इस चैप्टर में सा... | 0 | |
नीचे इस चैप्टर में साइंस पर भी टिपणी करते हैं वो कहते हैं कि विज्ञान ने बहुत कुछ सिखाया लेकिन वो भी सत्य की पूरी तविर नहीं देता विज्ञान हमें दुनिया के बारे में बताता है लेकिन ये नहीं बताता कि हमें कैसे जीना चाहिए नीचे मानते हैं कि सत्य की खोज सिर्फ विज्ञान से नहीं बलकि दर्शन, कला और भावनाओं से भी होनी चाहिए आखिर... | 0 | |
वो कहते हैं कि सत्य की खोज आसान नहीं है इसके लिए हिम्मत और सवाल उठाने की हिम्मत चाहिए वो चाहते हैं कि हम दर्शनिकों की गलतियों से सीखें हमें उनकी तरह पक्षपात में नहीं फसना चाहिए हमें हर चीज को नए सिरे से देखना चाहिए वो हमें बताते हैं कि सत्य की खोज एक लंबा और मुश्किल सफर है लेकिन ये सफर हमें बहतर इंसान बनाता है इ... | 0 | |
इस तरह ये चैप्टर हमें नीचे की सोच का पहला बड़ा जटका देता है वो हमें सिखाते हैं कि सत्य कोई ऐसी चीज नहीं जो आसानी से मिल जाए हमें उसे खोजना पड़ता है और इस खोज में हमें अपनी पुरानी सोच को छोड़ना पड़ सकता है ये चैप्टर हमें तयार करता है कि हम किताब के बाकी हिस्सों को खुले दिमाग से पढ़ें Beyond Good and Evil का दूसरा च... | 0 | |
यहां वो उस इनसान की बात करते हैं जिसे वो Free Spirit कहते हैं ये वो लोग हैं जो पुराने नियमों, विश्वासों और समाज के दबाव से आजाद होते हैं नीचे का मानना है कि ऐसे लोग ही सच्चाई की खोज कर सकते हैं और दुनिया को नए तरीके से देख सकते हैं इस चैप्टर में वो बताते हैं कि Free Spirit बनना क्या होता है और ये इतना मुश्किल क्यो... | 0 | |
नीचे इस चैप्टर की शुरुआत में कहते हैं कि ज्यादातर लोग अपनी सोच में जखड़े हुए हैं समाज, धर्म और परमपराएं हमें बताती हैं कि क्या सोचना है और क्या करना है लेकिन Free Spirit ऐसा इनसान है जो इन सब से उपर उठता है वो हर चीज को अपने दिमाग से परकता है उदाहरण के लिए अगर समाज कहता है कि कुछ करना गलत है तो Free Spirit पूछता ह... | 0 | |
इसके लिए बहुत हिम्मत चाहिए लोग अक्सर आजात सोच से डरते हैं क्योंकि ये उन्हें अकेला कर सकती है जब आप समाज के नियमों को तोड़ते हैं तो लोग आपको गलत समझ सकते हैं लेकि नीच्छे कहते हैं कि ये अकेला पन ही Free Spirit की ताकत है वो इस अकेले पन में अपनी असली ताकत और सच्चाई को खोचता है नीच्छे यहां एक और अहम बात कहते हैं Free... | 0 | |
वो सिर्फ नकारने के लिए नकारता नहीं बलकि वो हर चीज़ को गहराई से समझता है और फिर तै करता है कि क्या सही है उदाहरन के लिए अगर कोई पुराना विश्वास है तो Free Spirit उसे फेंकता नहीं वो पहले उस विश्वास को समझता है उसकी जड़ों तक जाता है और फिर तै करता है कि उसे रखना है या छोड़ना नीचे के लिए ये समझदारी ही Free Spirit की खास... | 0 | |
इस चैप्टर में नीचे ग्यान के बारे में भी बात करते हैं वो कहते हैं कि ज्यादातर लोग ग्यान को एक ऐसी चीज समझते हैं जो किताबों में मिलती है लेकिन Free Spirit के लिए ग्यान सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं वो अपनी जिंदगी, अपने अनुभव और अपनी सोच से ग्यान एकठा करता है नीच्षे मानते हैं कि असली ग्यान वही है जो हमें आजात करता है अ... | 0 | |
नीच्षे इस हिस्से में दार्शनिकों पर भी टिपणी करते हैं वो चाहते हैं कि दार्शनिक अपनी सोच को बार बार परखें और अगर जरूरी हो तो उसे बदलें उनके लिए फ्री स्पिरिट वही है जो हमेशा नया सीखने को तयार रहता है | 0 | |
इस चैप्टर में नीच्षे, मोरालिटी यानी नैतिक्ता की भी बात करते हैं वो कहते हैं कि समाज की नैतिक्ता अकसर हमें बान देती है लोग सोचते हैं कि नैतिक नियम हमेशा सही होते हैं लेकिन फ्री स्पिरिट इन नियमों पर सवाल उठाता है वो पूछता है कि ये नियम कहां से आये और क्या ये वाकई सही है नीच्छे मानते हैं कि free spirit अपनी नैतिकता ख... | 0 | |
वो दूसरों के बनाए नियमों को आँख बंद करके नहीं मानता नीच्छे यहां एक और गहरी बात कहते हैं free spirit हमेशा बदलता रहता है वो एक जगह रुकता नहीं जैसे नदी बहती है वैसे ही free spirit की सोच भी बहती है वो एक विचार को पकड़ कर नहीं बैठता अगर उसे लगता है कि उसका पुराना विचार गलत था तो वो उसे छोड़ देता है नीच्छे के लिए यह... | 0 | |
इस चैप्टर में नीच्छे, सोसाइटी यानी समाज पर भी सवाल उठाते है वो कहते हैं कि समाज हमें एक धांचे में ढालना चाहता है वो हमें बताता है कि क्या सोचना है, क्या करना है लेकिन Free Spirit इस धांचे को तोड़ता है वो समाज के दबाव से ढरता नहीं उधारन के लिए अगर समाज कहता है कि शादी करना जरूरी है तो Free Spirit पूछता है कि क्या ... | 0 | |
वो अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीता है नीचे इस हिस्से में Art यानी कला की भी बात करते हैं वो कहते हैं कि Free Spirit कला से बहुत कुछ सीखता है कला उसे नई सोच देती है Free Spirit कला को एक तरह का दर्शन मानता है वो कला में सच्चाई और सुन्दर तक होजता है नीचे मानते हैं कि कला हमें वो दिखाती है जो हमारी आँखों से छुपा रहत... | 0 | |
आखिर में नीच्षे इस चैप्टर को एक उम्मीद के साथ खत्म करते हैं वो कहते हैं कि फ्री स्पिरिट भविश्य की आशा है वो मानते हैं कि आने वाले समय में ऐसे लोग बढ़ेंगे जो आजात सोच रखते हैं वो चाहते हैं कि हम सब फ्री स्पिरिट बनने की कोशिश करें वो हमें सिखाते हैं कि आजादी सिर्फ बाहर की नहीं बलकि दिमाग की होती है यह चैप्टर हमें सो... | 0 | |
बियॉंड गुड और इवल का तीसरा चैप्टर दर रिलिजिस मूड नीच्चे की सोच का एक और गहरा हिस्सा है यहाँ वो धर्म और उससे जुड़ी इंसानी भावनाओं पर बात करते हैं नीच्चे का मानना है कि धर्म ने इनसान की सोच और जिन्दगी को बहुत प्रभावित किया है इस चैप्टर में वो धर्म की ताकत, उसकी कमजोरियों और इनसान के मन पर इसके असर को समझाते हैं वो धर... | 0 | |
वो धर्म को सिरफ नियमों के रूप में नहीं बलकि एक मनोदशा यानी मूड के रूप में देखते हैं नीच्चे इस चैप्टर में कहते हैं कि धर्म इसके जथे सिरफ विश्वास नहीं बलकि एक गहरी भावना है लोग धर्म को मानते हैं क्योंकि ये उन्हें सुकून देता है जब जिन्दगी में मुश्किलें आती हैं तो धर्म इनसान को सहारा देता है उदाहरण के लिए जब कोई बीमार... | 0 | |
कि ये भावना इंसान की जरूरत है लेकिन वो ये भी कहते हैं कि हमें इस भावना को समझना चाहिए न कि उसे बिना सोचे मान लेना चाहिए इस चैप्टर में नीच्षे धर्म के पीछे की मनोदशा पर सवाल उठाते हैं वो पूचते हैं कि लोग धर्म को क्यों मानते हैं। उनके मुताबक धर्म का आधार अखसर डर और उम्मीद होता है। लोग डरते हैं कि अगर उन्होंने धर्... | 0 | |
साथ ही वो उमीद करते हैं कि धर्म उन्हें बेहतर जिंदगी देगा नीचे कहते हैं कि ये डर और उमीद इनसान को कमजोर बनाते हैं वो चाहते हैं कि हम इन भावनाव को गहराई से देखें और बूछें कि क्या ये हमें आजात करते हैं नीचे यहाँ धर्म के नियमों पर भी बात करते हैं वो कहते हैं कि धर्म के नियम इंसान ने बनाये हैं ये नियम हर समाज और समय मे... | 0 | |
उदाहरण के लिए एक धर्म कहता है कि मांस नहीं खाना चाहिए जब्कि दूसरा धर्म इसे सही मानता है नीच्छे पूछते हैं कि अगर ये नियम इनसान ने बनाए तो क्या ये हमेशा सही है? वो मानते हैं कि हमें इन नियमों पर सवाल उठाना चाहिए उनके लिए धर्म के नियमों को आख बंद करके मानना एक तरह की गुलामी है इस चैप्टर में नीच्छे, फेथ यानि विश्वास क... | 0 | |
वो कहते हैं कि विश्वास इनसान के लिए ताकतवर हो सकता है लेकिन ये उसे अंधा भी कर सकता है जब लोग किसी चीज़ पर बहुत ज्यादा विश्वास करते हैं तो वो सवाल उठाना बंद कर देते हैं नीच्छे के लिए ये खतरनाक है वो चाहते हैं कि हम अपने विश्वास को परखे अगर हमारा विश्वास सवालों से डरता है तो वो � कमजोर है अ�acağım विश्वास वही है ... | 0 | |
वो कहते हैं की धर्म ने इनसान की नैतिकता को बहुत प्रभावित किया है धर्म हमें बताता है कि क्या अच्छा है और क्या बुरा लेकिन नीच्षे पूछते हैं कि क्या ये नइतिकता हमेशा सही है? वो मानते हैं कि धर्म की नातिकता अक्सर इंसान को दबाती है. उदारन के लिए कई धर्म कहते हैं कि अपनी इच्छाओं को दबाना अच्छा है. नीच्छे कहते हैं कि हमें... | 0 | |
इस चैप्टर में नीच्छे, suffering यानी दुख की भी बात करते हैं वो कहते हैं कि धर्म अकसर दुख को समझाने की कोशिश करता है लोग मानते हैं कि दुख भगवान की मर्जी है या पिछले कर्मों का फल है लेकिन नीच्छे इससे सह्मत नहीं वो कहते हैं कि दुख जिंदगी का हिस्सा है उमें इसे समझना चाहिए न कि इसे भगवान से जोड़ना चाहिए वो चाहते हैं क... | 0 | |
नीचे यहां धर्म के इतिहास पर भी नजर डालते हैं वो कहते हैं कि धर्म समय के साथ बदला है पहले लोग प्रकृती की ताकतों को पूछते थे बाद में बड़े बड़े धर्म बने जैसे हिंदु धर्म, इसाई धर्म और इसलाम नीचे मानते हैं कि हर धर्म अपनी समय की जरूरतों के हिसाब से बना वो पूछते हैं कि अगर धर्म समय के साथ बदल सकता है तो क्या हमें इसे ह... | 0 | |
वो चाहते हैं कि हम धर्म को आज के समय के हिसाब से परखे इस चैप्टर में नीच्षे, प्रीस्ट्स यानि धर्म के गुरुओं पर भी टिपणी करते हैं वो कहते हैं कि धर्म गुरु अकसर अपनी ताकत बनाये रखने के लिए डर और विश्वास का इस्तिमाल करते हैं वो लोगों को सिखाते हैं कि नीच्षे के लिए ये एक तरह का नियंतरन है वो चाहते हैं कि हम धर्म गुरुओं क... | 0 | |
नीजशे इस हिस्से में वो इनसान है जो अपनी अध्यात्मिक्ता को खुद खोचता है उसे मंदिर, मसजिद या गुरू की जरूरत नहीं वो अपनी जिंदगी और अनुभवों से अध्यात्मिक्ता को समझता है नीचे मानते हैं की असली आध्यात्मिकदा 보� juाथ कि पर राजाराशला है थो ज़ते हैं ऑफšते हैं हम फ्रजाराशला के साथ निकल सकते हैं हमें आजात करती है, | 0 | |
न कि हमें बांधती है. आखिर में, नीचे इस चैप्टर को एक गहरे सवाल के साथ खत्म करते हैं. वो पूछते हैं कि क्या हम धर्म की मनोदशा से बाहर निकल सकते हैं? वो मानते हैं कि धर्म ने इनसान को बहुत कुछ दिया, लेकिन इसने उसे जकड़ाबे. वो चाहते हैं कि हम धर्म को एक नए नजरिये से देखें. हमें उसकी अच्छी बातों को अपनाना चाहिए, ल... | 0 | |
ये चैप्टर हमें सिखाता है कि धर्म सिर्फ विश्वास नहीं, एंड, इंटर्लूड्स, बाकी चैप्टर से बिलकुल अलग है. यहां नीचे लंबी-लंबी बातों के बजाए छोटी-छोटी सुक्तियां, यानि एफ़ोरिजम्स लिखते हैं. ये सुक्तियां छोटे, तीखे और गहरे विचार हैं, | 0 | |
और गहरे विचार हैं, जो दिमाग को जखशोर देते हैं. इस चैप्टर में 188 छोटे-छोटे हिस्से हैं, जो अलग-अलग विशेयों पर हैं, जैसे नैतिक्ता, इंसानी स्वभाव, समाज और सत्य. नीचे यहां अपने विचारों को सीधे और मज़िदार तरीके से पेश करते हैं. इस चैप्टर की खास बात ये है, कि हर सुक्ती अपने आप में पूरी है. ये एक दूसरे से जुड़ी नहीं... | 0 | |
बलकि अलग-अलग दिशाओं में सोचने को मजबूर करती हैं. नीचे का मकसद है कि रीडर्स हर सुक्ती पर रुके, उस पर गहराई से सोचे और उसे अपनी जिंदगी से जोड़े. उदाहरण के लिए एक सुक्ती में वो कहते हैं कि लोग सच को सुनना पसंद नहीं करते, क्योंकि सच अकसर कड़वा होता है. ये छोटा सा विचार हमें सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम सच मुच सच ... | 0 | |
नीचे इस चैप्टर में इनसानी स्वभाव पर बहुत बात करते हैं. वो कहते हैं कि इनसान अकसर अपनी कमजोरियों को छुपाने की कोशिश करता है. लोग बाहर से मजbूट दिखते हैं लेकिन अंदर से डर और शक से भरे होते हैं. एक सुक्ती में वो लिखते हैं कि इनसान का सबसे बड़ा डर अपने आपको जानने का होता है. उनके मताबिक हम अपनी गलतियों और कमजोरियों से ... | 0 | |
नैतिकता यानि मोरालिटी इस चैप्टर का एक बड़ा विशह है नीचे कई सूक्तियों में अच्छे बुरे के नियमों पर सवाल उठाते हैं वो कहते हैं कि जो चीश एक समाज में अच्छी मानी जाती है वो दूसरे समाज में गलत हो सकती है उदाहरं के लिए एक जग़ा वो लिखते हैं कि धया करना अच्छा माना जाता है लेकिन कई बार धया कमजोर लोगों को और कमजोर बनाती है व... | 0 | |
उनकी ये बात हमें नैतिक्ता को नए नजरिये से देखने के लिए मजबूर करती है नीचे इस चैप्टर में औरतों और मर्दों के रिष्टों पर भी टिपणी करते हैं उनकी कुछ सूक्तियां आज के समय में विवादास्पद लग सकती हैं वो कहते हैं कि औरतें और मर्द अलग-अलग तरह से सोचते हैं और ये अंतर उनकी ताकत है लेकिन वो ये भी कहते हैं कि समाज ने औरतों को ए... | 0 | |
उनकी बातें उस समय के समाज को ध्यान में रखकर लिखी गई थी लेकिन वो हमें आज भी सोचने पर मजबूर करती हैं इस चैप्टर में नीच्छे, पावर यानि ताकत की बात भी करते हैं वो मानते हैं कि हर इंसान में ताकत की चाहत होती है एक सुकती में वो कहते हैं कि लोग ताकत को बाहर की चीज़ों में ढूंडते हैं जैसे पैसा या रुत्बा लेकिन असली ताकत अंद... | 0 | |
वो चाहते हैं कि हम अपनी अच्छाओं और जुनून को समझें उनके लिए ताकत का मतलब दूसरों पर हकूमत करना नहीं बलकि अपने आप पर काबू पाना है नीच्छे इस चैप्टर में जर्तर दूसरों के अच्छाओं घुज़ מת करते हैं एक सुक्ति में वो कहते हैं कि ज्यादा तर लोग सोचते हैं कि ये खुकर समझ़दार हैं लेकिन असल में वो सिर्फ दूसरों की नकल करते हैं उ... | 0 | |
वो चाहते हैं कि हम दूसरों की देखा देखी ना करें बलकि अपनी राह बनाएं इस चैप्टर में नीच्छे, टूथ यानी सत्य पर भी कई बार बात करते हैं वो कहते हैं कि सत्य कोई ऐसी चीज नहीं जो सब के लिए एक जैसी हो हर इनसान का सत्य अलग होता है एक सुकती में वो लिखते हैं कि सत्य ढूंटना आसान नहीं क्योंकि ये अकसर हमें परेशान करता है वो मानत... | 0 | |
वो मानते हैं कि सत्य कीखोज में हमें अपनी पुरानी मानिताओं को छोड़ना पड़ सकता है ये विचार हमें सिखाता है कि सत्य तक पहुँचने के लिए ہिम्मत चाहिए नीचे इस चैप्टर में कला और सुन्दर्ता की भी बात करते है वो कहते हैं कि कला इंसान को वो दिखाती है जो वो रोज मर्रा की जिन्दगी में नहीं देख पाता एक सूक्ती में वो लिखते हैं कि सुन्... | 0 | |
वो चाहते हैं कि हम कला को सिर्फ देखें नहीं, बलकि उसमें छुपे विचारों को समझें इस चैप्टर की कई सूक्तियां धर्म पर भी हैं नीचे कहते हैं कि धर्म ने इनसान को सुकून दिया लेकिन इसने उसे जकड भी लिया एक सूक्ती में वो लिखते हैं कि लोग भगवान को मानते हैं क्योंकि वो अकेले पन से डरते हैं वो पूछते हैं कि क्या हम बिना धर्म के भी ... | 0 | |
उनकी ये बात हमें धर्म को नए तरीके से देखने के लिए मजबूर करती है आखिर में नीचे इस चैप्टर को एक खुली चुनौती की तरह पेश करते हैं उनकी हर सूक्ती हमें सोचने के लिए एक नया रास्ता देती है वो चाहते हैं कि हम इन सूक्तियों को सिर्फ पढ़े नहीं बलकि उन्हें अपनी जिंदगी में उतारें ये चैप्टर हमें सिखाता है कि जिंदगी के बड़े सवालो... | 0 | |
Beyond Good and Evil का पांचवा चैप्टर Natural History of Morals नीचे की सोच का एक और गहरा हिस्सा है यहां वो नैतिकता यानि मोरालिटी के बारे में बात करते हैं वो पूछते हैं कि अच्छे बुरे के नियम कहां से आए और इनसान ने इन्हें क्यों बनाया नीचे का मानना है कि नैतिकता कोई ऐसी चीज नहीं जो हमेशा से थी ये इनसान की बनाई हुई है... | 0 | |
इस चैप्टर में वो नैतिकता के इतिहास और इसके पीछे की वजहों को समझाते हैं नीचे कहते हैं कि नैतिकता का जन्म इनसान की जरूरतों से हुआ हर समाज ने अपने लिए नियम बनाए ताकि लोग साथ रह सकें उदाहरन के लिए चोरी न करना एक नैतिक नियम है क्योंकि अगर सब चोरी करने लगें то समाज टूट जाएगा लेकिन नीचे पूचते हैं कि क्या ये नियम हमेशा सह... | 0 | |
वो मानते हैं कि अल intéressite और समाजों में अलَّग अल नियम होते हैं जो एक जगह सही है वो दूसरी जगह गलत हो सकता है। इससे पता चलता है कि नैतिकता कोई स्थिर चीज नहीं। इस चैप्टर में नीच्छे नैतिकता के पीछे की भावनाओं पर भी बात करते हैं। वो कहते हैं कि कई बार नैतिक नियम डर से बनते हैं। लोग डरते हैं कि अगर उन्होंने नियम तो... | 0 | |
उदाहरण के लिए कोई दान इसलिए देता है ताकि लोग उसे अच्छा कहें। नीचे के लिए ये भावनाएं नैतिकता की जड़ में पूरते हैं। नीचे यहां पावर यानी ताकत की बात भी करते हैं। वो कहते हैं कि नैतिकता अकसर उन लोगों ने बनाई जो ताकत वर थैं। ताकत वर लोग अपने फायदे के लिए नियम बनाते हैं। उदाहरण के लिए पुराने जमाने में राजा और धर्म गुरु ... | 0 | |
उदाहरण के लिए पुराने जमाने में राजा और धर्म गुरु नियम बनाते थे ताकि लोग उनकी बात मानें। नीचे मानते हैं कि हमें ये समझना चाहिए कि नैतिक्ता हमेशा निश्पक्ष नहीं होती। कई बार ये ताकतवर लोगों के हित में होती है। इस चैपoter में नीचे ढर्म और नैतिक्ता के इसदे अग्ष ने जमाते हैं वो कहते हैं कि धर्म ने जमें जटक्ष आ एक में बहु... | 0 | |
लेकिन नीच्छे पूछते हैं कि ये नियम किसने बनाये, वो मानते हैं कि धर्म के नियम इन्सान की बनाई हुई कहानिया हैं, वो चाहते हैं कि हम इन नियमों को अपने दिमाग से परखें और देखें कि क्या ये हमारे लिए सही हैं? नीच्छे इस हिस्से में गिल्ट यानि अपरादबोध की भी बात करते हैं वो कहते हैं कि नैतिक्ता ने इनसान को गिल्ट सिखाया लोग सोचते... | 0 | |
उदाहरन के लिए अगर कोई अपनी इच्छा़ों को मानता है तो उसे लगता है कि उसने गलत किया नीच्छे के लिए यह गिल्ट इंसान को कमजूर बनाता है वो चाहते हैं कि हम अपनी इच्छा़ों को समझें और उनसे डरें नहीं इस चैप्टर में नीचे नैतिक्ता के बदलाव पर भी नजर डालते हैं वो कहते हैं कि समय के साथ नैतिक्ता बदली है पहले लोग हिंसा को सही मानते ... | 0 | |
नीचे मानते हैं कि यह बदलाव दिखाता है कि नैतिक्ता कोई स्थिर चीज नहीं वो पूछते हैं कि क्या हम आज की नैतिक्ता को भी भविश्य में बदल सकते हैं नीचे यहां हर्ड मेंटालिटी यानी जुन्ड की सोच की बात करते हैं वो कहते हैं कि ज्यदा तर लोग समाज के नियमों को बिना सोचे मान लेते हैं。 लोग ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि आकेले नहीं रहना चा... | 0 | |
वो चाहते हैं कि हम free spirit की तरह सोचें और अपने नियम खुद बनाएं। उनके मुताबिक असली नैतिकता वही है जो इनसान अपनी समझ से बनाता है। इस चैप्टर में नीच्छे, वर्च्यू यानि गुण की भी बात करते हैं। वो कहते हैं कि समाज कुछ गुणों को बहुत उंचा मानता है, जैसे दया और इमानदारी। लेकिन नीच्छे पूछते हैं कि क्या ये गुण हमेशा अच्छे ... | 0 | |
वो मानते हैं कि कई बार ये गुण इनसान को कमजोर बनाते हैं। उदाहरण के लिए अगर कोई हमेशा दूसरों की मदद करता है, तो वो अपनी जरूरतों को भूल सकता है। नीच्छे चाहते हैं कि हम गुणों को नए नजरिये से देखें। नीच्छे इस हिस्से में नैतिकता और इनसान की प्रकृती पर भी विचार करते हैं। वो कहते हैं कि इनसान में अच्छाई और बुराई दोनों हैं।... | 0 | |
लेकिन नीच्छे मानते हैं कि हमें अपनी पूरी परकृती को सुविकार करना चाहिए। वो चाहते हैं कि हम अपनी ताकत और कमजोरियों को समझें। उनके लिए असली नैतिकता वही है जो इनसान को मजबूत बनाए। आखिर में नीचे इस चैप्टर को एक बड़े सवाल के साथ खत्म करते हैं। वो पूछते हैं कि क्या हम ऐसी नैतिकता बना सकते हैं जो हमें आजात करे। वो मानते ह... | 0 | |
वो चाहते हैं कि हम नैतिकता का नया इतिहास लिखे। यह chapter हमें सिखाता है कि नैतिकता कोई ऐसी चीज नहीं जो भगवान ने दी यह इंसान की बनाई हुई है और हम इसे बदल सकते हैं Beyond Good and Evil का छठा chapter We Scholars नीचे की विद्वानों और दार्षनिकों पर तीखी टिपणी है यहां वो उन लोगों की बात करते हैं जो खुद को विद्वान यानी... | 0 | |
यहां वो उन लोगों की बात करते हैं जो खुद को विद्वान यानी स्कॉलर कहते हैं नीचे का मानना है कि ज्यादातर विद्वान सच्चाई की खोज करने के बजाए पुरानी सोच में फशे रहते हैं वो इस चैप्टर में विद्वानों की कमजोरियों, उनकी सीमाओं और सच्चे दर्शन की जरूरत पर बात करते हैं नीचे कहते हैं कि विद्वान लोग अकसर अपनी किताबों और विचारों मे... | 0 | |
उनके मताबिक ये एक बड़ी कमी है उदाहरन के लिए कोई विद्वान नैतिकता पर किताबें पढ़ता है लेकिन वो कभी नहीं सोचता कि ये नियम उसकी जिन्दगी में कैसे लागू होते हैं नीच्षे मानते हैं कि असली विद्वान वही है जो अपनी सोच को जिन्दगी से जोड़े इस चैपटर में नीच्षे विद्वानों की objectivity यानी निश्पक्शता पर सवाल उठाते हैं कई विद्वा... | 0 | |
कई विद्वान दावा करते हैं कि वो निश्पक्ष होकर सत्य की खोज करते हैं लेकिन नीच्षे कहते हैं कि ये मुमकिन नहीं हर इंसान की अपनी भावनाएं, इच्छाएं और विश्वास होते हैं, ये चीजें उसकी सोच को प्रभावित करती हैं नीद्शे के लिए निश्पक्षता का मतलब अपनी भावनाओं को दबाना नहीं, बलकि उन्हें समझना है वो चाहते हैं कि विद्वान अपनी सीमाओ... | 0 | |
नीद्शे यहां विद्वानों और फ्री स्पिरिट की तुल्ना करते हैं, वो कहते हैं कि ज्यादातर विद्वान फ्री स्पिरिट नहीं होतें, वो पुराने विचारों और नियमों से बंदे रहते हैं उदाहरण के लिए कोई विद्वान किसी पुराने दार्शनिक की बात को सही मान लेता है और उस पर सवाल नहीं उठाता लेकिन free spirit हर चीज़ को परकता है नीच्षे मानते हैं कि अ... | 0 | |
इस chapter में नीच्षे, science यानी विज्वान पर भी बात करते हैं वो कहते हैं कि कई विद्वान विज्वान को सत्य का रास्ता मानते हैं लेकिन नीच्षे इस से सहमत नहीं वो मानते हैं कि विज्वान हमें दुनिया के बारे में बहुत कुछ बताता है लेकिन ये सत्य की पूरी तस्वीर नहीं देता उदाहरण के लिए विज्ञान हमें बता सकता है कि सूरज कैसे काम ... | 0 | |
नीचे इस हिस्से में विद्वानों की आलोचना करते हैं वो कहते हैं कि कई विद्वान छोटी छोटी बातों में उलज जाते हैं वो बड़े सवालों से बचते हैं क्योंकि ये सवाल उन्हें परेशान करते हैं। उदाहरण के लिए कोई विद्वान किसी पुराने गरंथ के एक शब्द का मतलब निकालने में सालों बिता देता है। लेकिन वो कभी नहीं पूछता कि उस गरंथ का आज के समय... | 0 | |
नीच्षे के लिए ये समय की बरबादी है। वो चाहते हैं कि विद्वान बड़े और गहरे सवालों का सामना करें। इस चैप्टर में नीच्षे, फिलोजफी यानि दर्शन की हालत पर भी विचार करते हैं। वो कहते हैं कि उनके समय में दर्शन कमजोर हो गया था। विद्वान लोग दर्शन को सिर्फ किताबों तक सीमित कर चुके थे। नीच्षे मानते हैं कि दर्शन को जिंदगी से जोड़... | 0 | |
वो चाहते हैं कि दर्शन सिर्फ विचारों का खेल न रहे, बलकि इनसान को बहतर बनाने में मदद करे। उनके लिए असली दार्शनिक वही है जो अपनी सोच से दुनिया को बदल दे। नीचे यहां विद्वानों के अहंकार पर भी टिपणी करते हैं। वो कहते हैं कि कई विद्वान सोचते हैं कि वो सबसे ज्यादा समझदार है। वो दूसरों की बात सुनना पसंद नहीं करते। नीचे के ... | 0 | |
वो मानते हैं कि असली विद्वान वही है जो हमेशा सीखने को तयार रहता है। वो चाहते हैं कि विद्वान अपनी गलतियों को स्विकार करें और नया सीखें। इस चैप्टर में नीच्षे, टूथ यानी सत्य की खोज पर भी बात करते हैं। वो कहते हैं कि सत्य कोई ऐसी चीज नहीं जो आसानी से मिल जाए। विद्वान अकसर सोचते हैं कि उनके पास सत्य है, लेकिन नीच्षे मान... | 0 | |
उदाहरण के लिए पहले लोग मानते थे कि प्रिथवी सूरज के चारों और नहीं घूमती, लेकिन बाद में ये सत्य बदल गया। नीच्षे चाहते हैं कि विद्वान सत्य को खुली सोच से देखें। नीच्षे इस हिस्से में आठ यानी कला की एहमियत की भी बात करते हैं। वो कहते हैं कि कला विद्वान को नई सोच दे सकती है। कला हमें वो दिखाती है जो किताबों में नहीं मिलत... | 0 | |
नीच्षे मानते हैं कि असली विद्वान वही है जो कला से सीखता है। आखिर में नीच्षे इस चैप्टर को एक चुनौती के साथ खत्म करते हैं। वो कहते हैं कि विद्वानों को अपनी सोच को बदलना होगा। उन्हें पुरानी किताबों और नियमों से बाहर निकलना होगा। वो चाहते हैं कि विद्वान फ्री स्पिरिट की तरह सोचें और सत्य की खोज में डरे नहीं। ये चैप्टर ... | 0 | |
ये चैप्टर हमें सिखाता है कि विद्वान होने का मतलब सिर्फ किताबें पढ़ना नहीं, बलकि जिन्दगी को गहराई से समझना है। एउन गुड और इवल का सात्वा चैप्टर आउर वर्चूस नीचे की नैतिकता और इंसानी गुणों पर गहरी सोच को दर्शाता है। यहां वो उन गुणों यानि वर्चूस की बात करते हैं जिने समाज अच्छा मानता है जैसे दया, इमानदारी और नम्रता। नीचे ... | 0 | |
नीचे पूछते हैं कि क्या ये गुण वाकई हमेशा अच्छे हैं। वो इन गुणों की जड़ों तक जाते हैं और दिखाते हैं कि ये अकसर इनसान की कमजोरियों से पैदा होते हैं। इस चैप्टर में वो हमें अपने गुणों को नए नजरिये से देखने की चुनौती देते हैं। नीचे कहते हैं कि समाज कुछ गुणों को बहुत उच्छा मानता है। उदाहरण के लिए दया को हर जगह अच्छा कहा ... | 0 | |
लेकि नीचे पूछते हैं कि क्या दया हमेशा फायदेमंद होती है। वो मानते हैं कि कई बार दया कमजोर लोगों को और कमजोर बनाती है। अगर हम किसी की हमेशा मदद करते हैं, तो वो खुद मजबूत बनना सीखता ही नहीं। नीच्छे के लिए असली गुण वो है जो इनसान को मजबूत बनाए, न कि उसे कमजोर करे। इस चैप्टर में नीच्छे, आनिस्टी यानि इमानदारी पर भी बात क... | 0 | |
समाज इमानदारी को बहुत बड़ा गुण मानता है, लेकिन नीच्छे कहते हैं कि कई बार इमानदारी इनसान को नुकसान पहुँचाती है। उदारन के लिए अगर कोई सच बोलकर अपनी जिन्दगी को मुश्किल में डाल देता है, तो क्या वो सच बोलना सही था। नीच्छे मानते हैं कि हमें हर गुण को परक्षना चाहिए। वो चाहते हैं कि हम सोचें कि क्या ये गुण हमारी जिन्दगी को ... | 0 | |
नीच्छे यहां पिटी यानि करुणा की भी चर्चा करते हैं। वो कहते हैं कि करुणा को अच्छा माना जाता है, लेकिन इसके पीछे अक्सर इनसान का अहंकार होता है। जब हम किसी पर करुणा दिखाते हैं, तो हमें लगता है कि हम उससे बहतर हैं। नीच्छे के लिए ये एक तरह की कमजोरी है। वो चाहते हैं कि हम करुणा के बज़ाए दूसरों की ताकत को बढ़ावा दें। उनक... | 0 | |
इस चैप्टर में नीच्छे सेलफलेस्नस यानी निस्वार्थता पर भी सवाल उठाते हैं। समाज सिखाता है कि दूसरों के लिए जीना अच्छा है। लेकिन नीच्छे पूछते हैं कि क्या ये हमेशा सही है। वो मानते हैं कि कई बार लोग निस्वार्थता का दिखावा करते हैं ताकि समाज उनकी तारीफ करे। उदाहरण के लिए कोई बड़ा दान देता है। लेकिन उसे सिर्फ नाम चाहिए। नी... | 0 | |
उनके लिए असली गुण वो है जो हमें अपनी ताकत दे। नीच्छे इस हिस्से में गुणों के इतिहास पर भी नज़र डालते हैं। वो कहते हैं कि गुण समय के साथ बदलते हैं। पहले लोग ताकत और हिम्मत को बड़ा गुण मानते थे, जैसे योध्धा का साहस, लेकिन बाद में धर्म और समाज ने नम्रता और दया को ज्यादा एहमियत दी. नीच्छे मानते हैं कि ये बदलाव समाज की ज... | 0 |
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