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फ़िर टुल्लु ने दरवाज़े को थोड़ा सा और | 34 | |
दस मिनट बाद भेड़िया बोला | 34 | |
तुम लोग कितने अच्छे हो कितने दयालु हो | 34 | |
अपनी अगली टाँगें भी सेक लूँगा | 34 | |
मैं खरगोशों को हाथ नहीं लगाता | 34 | |
अब स़िर्फ भेड़िए का मुँह घर से बाहर था | 34 | |
दस मिनट के बाद भेड़िया बोला | 34 | |
ओह कितना आराम मिल रहा है बस मेरी नाक को ठंड लग रही है प् | 34 | |
यारे दोस्तों दरवाज़ा थोड़ा सा और खोल दो | 34 | |
ठीक है टुल्लु ने कहा | 34 | |
तुम अपनी नाक भी गरम कर लो | 34 | |
भेड़िया पूरी तरह से घर में घुस आया मुड़ा और खरगोशों पर लपका | 34 | |
अईयईयई भेड़िया चीखा और बाहर भागा | 34 | |
मैं वापस आऊँगा जातेजाते वह चिल्लाया | 34 | |
और तुम्हें चीरफाड़ कर कच्चा खा जाऊँगा | 34 | |
चलो सीढ़ी बनाओ एक और भेड़िए ने कहा | 34 | |
अभी पकड़ते हैं उनको | 34 | |
जला हुआ भेड़िया सबसे नीचे था जैसे ही सीढ़ी छत तक पहुँचने लगी | 34 | |
डर के मारे जले हुए भेड़िए की जान निकल गई | 34 | |
नहीं नहीं मत फेंको वह चीखा और वहाँ से भागा | 34 | |
लँगड़ाते बड़बड़ाते वे चले गए और लौट कर कभी नहीं आए | 34 | |
टुल्लु और बुल्लु नीचे आए | 34 | |
क्या सोचते हो मुन्ने राजा तुम क्या सोचते हो | 34 | |
कभीकभी मैं सोचता हूँ कि बादल क्यों गरजते हैं | 34 | |
तो तुम इस सोच में डूबे रहते हो | 34 | |
अच्छा तुम बताओ | 34 | |
क्या लगता है तुम्हें बादल क्यों गरजते हैं | 34 | |
मुझे लगता है मुझे लगता है | 34 | |
बताओ भी न मुन्ने राजा क्या लगता है तुम्हें | 34 | |
मुझे लगता है कि आकाश में एक बड़ा दानव शायद कुंभकर्ण सोया हुआ है | 34 | |
बारिश की मूसलाधार बूँदें जब उस पर ज़ोरज़ोर से पड़ती हैं | 34 | |
और उसे गहरी नींद से झकझोर कर उठा देती हैं | 34 | |
तब वह गुस्से में आँखों से अंगारे उगलता हुआ उठता है | 34 | |
पैरों को ज़ोरज़ोर से पटकते हुए शेर जैसी दहाड़ मारता है | 34 | |
दीदी क्या उसकी अम्मी उसकी पिटाई नहीं करतीं | 34 | |
मेरे हिसाब से तो बादल तभी गरजते हैं | 34 | |
जब कुंभकर्ण दहाड़ता है | 34 | |
वही कुंभकर्ण जो स़िर्फ सोना चाहता है | 34 | |
और बारिश उसकी नींद में बाधा डालती है | 34 | |
अपनी मोटी मोटी किताबों में | 34 | |
पहले तुम बताओ मुन्ना | 34 | |
तुम क्या सोचते हो | 34 | |
मैं सोचता हूँ मैं सोचता हूँ | 34 | |
बोलो न मुन्ना क्या सोचा तुमने | 34 | |
दीदी ऐसा भी तो हो सकता है कि | 34 | |
आकाश में मोटर साइकिल चालकों का एक गुट है | 34 | |
वह काले जैकट स्टील से सजे जूते | 34 | |
और सिनेमा के हीरो की तरह काले चश्मे पहने | 34 | |
बारिश में मोटर साइकिल की दौड़ लगाते हैं | 34 | |
जब वह अपनी मोटर साइकिल पर चढ़ कर | 34 | |
अपनी मोटर को झटके से शुरू करते हैं | 34 | |
और फिर बिजली गिरती है | 34 | |
और जब यही चालक अपनी मोटर साइकिल | 34 | |
घर्रघर्र करके चलाते हैं | 34 | |
तभी बादलों से गड़गड़ाहट की आवाज़ आती है | 34 | |
अरे हाँ समझदार तो तुम हो ही | 34 | |
और शायद ठीक भी | 34 | |
पर किताबों से तो मैंने कुछ और ही सीखा है | 34 | |
क्या सीखा है दीदी बताओ तो | 34 | |
मुन्ना पहले तुम बताओ तुम क्या सोचते हो | 34 | |
मुझे लगता है कि | 34 | |
आसमान में रहने वाली | 34 | |
बूढ़ी दादी के पोतापोती | 34 | |
जब बारिश के समय | 34 | |
घर में रहकर बेचैन हो जाते हैं | 34 | |
और ज़िद पर उतर आते हैं | 34 | |
तब भी बूढ़ी दादी | 34 | |
उन्हें बाहर जाने की इजाज़त नहीं देती है | 34 | |
तब वह चौपड़ और बड़ासा पासा निकालती है | 34 | |
भूल जाते हैं कि वह कभी ऊबे भी थे | 34 | |
मुझे लगता है कि जब वह बड़ासा पासा | 34 | |
आसमान में ज़ोरों से लुढ़कता है | 34 | |
तब जो आवाज़ होती है | 34 | |
उसी को बादलों की गड़गड़ाहट कहते हैं | 34 | |
कैसा लगा दीदी ठीक कहा न मैंने | 34 | |
मुन्ने राजा क्या कहने तुम्हारी बातों के | 34 | |
पर मेरी किताबों में तो कुछ और ही लिखा है | 34 | |
दीदी बता दो क्या कहती हैं | 34 | |
बताती हूँ बताती हूँ | 34 | |
इधर आओ और ध्यान से सुनो | 34 | |
मैंने पढ़ा है कि | 34 | |
क्या दीदी क्या | 34 | |
बिजली के चमकने के बाद ही होता है | 34 | |
पर यह तो तुम्हें भी मालूम है है न | 34 | |
और यह भी पता होगा कि | 34 | |
बिजली ही बादलों में गड़गड़ाहट पैदा करती है | 34 | |
हमारे घर की बिजली की तरह ही है | 34 | |
हमारे घरों में रोशनी करती है | 34 | |
और हमारे टीवी में एक ही बटन दबाने पर | 34 | |
सचिन और सौरभ को दिखाती है | 34 | |
पर दादी तुम तो बिजली के बारे में बता रही हो | 34 | |
तो उसको छूने वाली हवा बहुत गर्म हो उठती है | 34 | |
धमाके की आवाज़ के साथ ज़ोर से फट जाती है | 34 | |
दीदी दीदी बादल क्यों गरजते हैं | 34 | |
आओ कुछ और जानें | 34 | |
ठीक वैसे ही जैसे हमारी धरती सूर्य के चक्कर काटती है | 34 | |
और इलेक्ट्रॉन में ॠणात्मक | 34 | |
अब क्योंकि हर परमाणु में प्रोटोनों की संख्या और | 34 | |
इलेक्ट्रॉनों की संख्या बराबर होती है परमाणु अनाविष्ट होता है | 34 | |
परन्तु जब दो परमाणु आपस में टकराते हैं | 34 |
Subsets and Splits
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