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Narrator- बहुत समय पहले की बात है निमसाडिया गांव में ईश्वर नाथ नाम का एक सेठ रहता था ईश्वर नाथ बहुत ही लालची था, वह अपनी जमीन को ठेके में किसानों को देता था और उन गरीब किसानों से बहुत ही ज्यादा कर्ज वसूल करता था|
ईश्वर नाथ - इन किसानों की भी क्या जिंदगी है, बस दिन भर काम करते रहते हैं और वो भी सिर्फ दो वक्त की रोटी के लिए, और हमें देखो हम सिर्फ आदेश देते हैं और यह किसान हमारे लिए काम करते हैं, इसे कहते हैं सेठ ईश्वर नाथ का दिमाग|
Nokar- सेठ जी आप तो इस गांव के मालिक हो और सभी किसानों को मुट्ठी में बांध कर रखते हो|
Narrator- सेठ ईश्वर नाथ बहुत ही लालची है, किसानों को पहले बेहला फुसलाकर ठेके में काम करवाता है, और बाद में किसानों से ही शर्त रख देता|
Satish- सेठ जी मैंने सुना है कि आप किसानों को अपना जमीन ठेके पर देते हो|
Seth ईश्वर नाथ - हां भाई मैं किसानों को अपना जमीन ठेके पर देता हूं|
Satish- ठीक है सेठ जी, मुझे भी एक साल के लिए आपका जमीन ठेके पर चाहिए मेरा नाम सतीश है, और मैं पास ही के गांव रैसलपुर में रहता हूं,
ईश्वर नाथ - ठीक है सतीश मैं अपनी जमीन को ठेके में दे दूंगा, लेकिन एक साल के बाद तुम जो फसल उगाओगे उनमें से आधा फसल मेरा होगा और आधा फसल तुम्हारा होगा|
Narrator- इसी तरह सेठ ईश्वर नाथ अपनी जमीन को ठेके पर देता है, लेकिन किसानों के सामने एक शर्त रखता है, कि फसल का आधा हिस्सा मेरा और आधा हिस्सा तुम्हारा होगा|
Satish- चलो जमीन तो मिल गई अब इसमें खेती करता हूं, उम्मीद है इस साल अच्छी फसल होगी, पर मुझे बहुत मेहनत करना होगा तभी मेरे हिस्से में कुछ बच पाएगा|
Narrator- सतीश दिन भर कड़ी मेहनत से काम करता है, और फसल तैयार करता है, और फसल तैयार भी हो जाती है, सतीश फसल की कटाई भी शुरू कर देता है|
Satish- चलो भाई इस साल तो बहुत ही अच्छी फसल हुई है, आधा तो जमींदार ले जाएगा फिर भी मेरे हिस्से में कुछ आ ही जाएगा|
Nokar- अरे सेठ जी सुनते हो, क्या आपको पता है? सतीश अपने फसल की कटाई कर रहा है, इस साल तो सतीश की फसल बहुत ही अच्छी हुई है
ईश्वर नाथ - ऐसी बात है क्या? सतीश आज फसल की कटाई कर रहा है, चलो फिर चलकर देखते हैं, अरे सतीश फसल की कटाई पूरा हो गई है क्या?
Satish- हो गई है मालिक, इस बार मैंने गेहूं की फसल लगाई है, देख लो बहुत ही अच्छी फसल हुई है,
ईश्वर नाथ - वह तो दिख ही रहा है मुझे, मेरा खेत ही उपजाऊ है, इसकी वजह से इतनी अच्छी फसल हुई है|
Satish- नहीं मालिक खेत भले ही उपजाऊ हो, लेकिन वहां मेहनत नहीं होगी तो फसल कैसे होगी? मैंने इस साल इस खेत पर बहुत मेहनत किया हूं गेहूं की फसल तैयार करने में, मुझे कड़ी मेहनत से काम करना पड़ता था इसकी वजह से इतनी अच्छी फसल हुई है|
ईश्वर नाथ - क्या बात कर रहे हो यार, खेत नहीं होगा तो तुम मेहनत कहां करोगे और कैसे मेहनत करोगे यह खेत बहुत उपजाऊ है, इसलिए तुम यहां पर हो|
NARRATOR- इस तरह सतीश से शर्त लगाकर सेठ ईश्वर नाथ अच्छी फसल ले जाता है, और खराब फसल सतीश को दे देता है|
Satish- यह क्या? इतनी मेहनत करने पर भी बस इतनी ही फसल मिली? ऐसी जिंदगी से तो अच्छा मर जाना बेहतर है, हमेशा दूसरों के इशारे पर काम करो पता नहीं खुद की जमीन कब होगी?
Narrator- सतीश इस तरह जैसे तैसे अपनी जिंदगी काटे जा रहा था, फिर एक दिन सतीश का बेटा हर्ष शहर से अपनी पढ़ाई खत्म करके अपने गांव रैसलपुर आता है, और जब हर्ष गांव का नजारा देखता है, तो हर्ष बहुत दुखी हो जाता है,
HARSH- पिताजी क्या हुआ हमारे गांव तो बहुत सुना सुना लग रहा है?
Narrator- सतीश हरीश को सारी बातें बता देता है और गांव की सभी आपदा और गांव के जमींदार के बारे में भी बताता है, कि किस तरह ईश्वर नाथ किसानों को धोखे में रखकर किसानों की जमीन को लूटता है,
Harsh- चलो कोई बात नहीं पिताजी दुखी मत हो, इस बार मैं खेती करूंगा|
NARRATOR- हर्ष ने सेठ ईश्वर नाथ को सबक सिखाने और सभी किसानों को इंसाफ दिलाने की प्रतिज्ञा ली, फिर एक दिन हर्ष सेठ ईश्वर नाथ जी के घर जाता है|
Harsh- सेठ जी, पिताजी की जगह इस बार मैं खेती करूंगा, मुझे ठेके में कोई भी एक जमीन चाहिए|
ईश्वर नाथ - अरे तुम जाओ अभी तुम्हारे पास इतनी ताकत नहीं है बच्चे, कि तुम खेती कर पाओ|
Harsh- नहीं सेठ जी आप ऐसा मत बोलिए मैं पढ़ा लिखा हूं, लेकिन हूं तो एक किसान का बेटा ही ना, खेती मेरा धर्म है
ईश्वर नाथ - चलो ठीक है मैं मान लेता हूं, और वैसे भी आजकल क्या काम रखा है, अब पढ़ लिखकर वैसे भी तुम बेरोजगार घूम ही रहे हो, इससे अच्छा तुम थोडी खेतीबाड़ी भी सीख लो|
Harsh- आपका बहुत-बहुत धन्यवाद सेठ जी|
ईश्वर नाथ - धन्यवाद बाद में देना पहले मेरा नियम और शर्तें सुन लो|
Harsh- क्या शर्त है सेठ जी, आप बताए|
ईश्वर नाथ - अरे यह लड़का तो नया-नया खेतीबाड़ी कर रहा है, चलो इस बार कोई नई शर्त बता देता हूं, पिछले बार इसके बाप ने गेहूं की फसल लगाई थी, यह भी गेहूं कि ही फसल लगाएगा, अबकी बार मैं यह शर्त रख देता कि ऊपर का हिस्सा मेरा होगा और नीचे का हिस्सा इस लड़के का होगा, अच्छा हर्ष तो सुन लो, शर्त यह है कि तुम जो भी फसल लगाओगे उस...
HARSH- ठीक है सेठ जी मुझे मंजूर है, बिल्कुल ऐसा ही होगा जैसा आप चाहते हैं|
NARRATOR- फिर अगले ही दिन से हर्ष काम करना शुरू कर देता है, लेकिन हर्ष ने इस बार गेहूं के जगह मूली की फसल लगा दिया, और मूली की फसल बहुत ही अच्छी होती है|
ईश्वर नाथ - अरे हर्ष तुम्हें शर्त याद है ना, कि आधा फसल मेरा और आधा फसल तुम्हारा|
Harsh- हां सेठ जी मुझे सब कुछ अच्छे से याद है, आधा फसल मेरा और आधा फसल तुम्हारा, लेकिन आपने ये भी कहा था कि, ऊपर का हिस्सा मेरा और नीचे का हिस्सा तुम्हारा, तो सेठ जी आप ऊपर का हिस्सा ले जाए और नीचे का हिस्सा छोड़ दीजिए|
Nokar- अरे सेठ जी इस हर्ष ने तो चालाकी मार दी, यह गेहूं की फसल की जगह इस बार इसने मूली की फसल लगा दी|
ईश्वर नाथ - यह सच है क्या हर्ष, कि तुमने इस बार गेहूं की जगह मूली की फसल लगाए हो?
Harsh- हां सेठ जी गेहूं की फसल पिछले बार ही लगाई गेहूं कि फसल अच्छी नहीं हुई थी, ऐसा पिताजी बोल रहे थे, इसलिए मैंने इस बार मूली की फसल लगाई है, देखो ना मूली की फसल कितनी सुंदर है सेठ जी, आप ऊपर का हिस्सा ले जाए और नीचे का हिस्सा छोड़ दीजिए|
ईश्वर नाथ - अरे क्या करूं मैं इस घास फूस को लेकर, जब तुम सब मूली ले जा रहे हो, तो यह घास फूस भी ले जाओ|
Harsh- आपकी ही शर्त है सेठ जी, और आप ही शर्त मानने को तैयार नहीं है, मैं इस बारे में कुछ नहीं जानता हूं और आप ऊपर का हिस्सा ले जाए मैं नीचे का हिस्सा ले जाऊंगा|
Narrator- इस तरह हर्ष ने चालाकी के साथ सेठ ईश्वर नाथ को मुंह तोड़ जवाब दिया, और सभी मूली को लेकर घर आ गया, और सभी घास फूस को सेठ के हिस्से में छोड़ दिया|
Nokar- पूरे गांव में आज तक आपके सामने किसी ने चालाकी दिखाने की हिम्मत नहीं की है, और यह कल का आया हुआ लड़का आपको बेवकूफ बना दिया|
ईश्वर नाथ - अरे वह क्या बच्चा मुझे बेवकूफ बनाएगा? आने दो इस बार तो उसको ऐसा सबक सिखाऊंगा कि वह हमेशा हमेशा के लिए याद रखेगा|
Narrator- फिर कुछ महीनों के बाद हर्ष दोबारा सेठ ईश्वर नाथ के घर जाता है,
ईश्वर नाथ - अरे लड़के इस बार क्या चाहिए तुझे?
Harsh - ठेके पर जमीन चाहिए सेठ जी|
ईश्वर नाथ - फिर तो मेरा भी हिसाब सुन ले लड़के, इस बार कोई चालाकियां नहीं चलेगी, इस बार फसल का नीचे का भाग मेरा होगा और ऊपर का भाग तुम्हारा होगा, बोलो क्या तुम्हें यह शर्त मंजूर है?
Harsh- बिल्कुल मंजूर है सेठ जी इस बार फसल का ऊपर का भाग मेरा ही होगा और नीचे का भाग आपका होगा narrator- इस तरह हर्ष सेठ जी से बात करने के बाद अपने घर वापस लौट आता है, और फिर इस बार दोबारा से खेती करने की तैयारी में जुट जाता है, हर्ष इस बार गेहूं की फसल लगाता है, इस बार तो गेहूं का फसल खूब अच्छा हुआ है, मजा आ गया अब आने...
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