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चीन में एक समय चोरों का बड़ा आतंक था. राज्य की राजधानी में ची युंग नामक एक व्यक्ति था जो किसी भी व्यक्ति का चेहरा देखकर यह बता देता था कि वह व्यक्ति चोर है या नहीं. सामनेवाले व्यक्ति के मुखमंडल के कुछ लक्षणों और उसके मन में चल रहे भावों को पढने में उसे महारत हासिल थी. उसका यह कौशल देखकर वहां के राजा ने उसे राज्य के नागरिकों के निरीक्षण में लगा दिया. ची युंग ने हजारों नागरिकों को देखा और उनमें से चोरों की पहचान कर ली. ची युंग ने चोरों को ढूंढ निकाला और राज्य में सर्वत्र खुशहाली छा गई.
राजा ने लाओ-त्ज़ु से ची युंग की बड़ी तारीफ की और कहा – “ची युंग ने अकेले ही राज्य को चोरों-डाकुओं से रिक्त कर दिया है. मेरे राज्य में अब हर तरफ शांति है. ची युंग के कारण मुझे न्याय-व्यवस्था पर कुछ भी खर्च नहीं करना पड़ता.”
लाओ-त्ज़ु ने कहा – “यदि आप जैसे शासक ऐसे व्यक्तियों को न्याय-व्यवस्था की कमान सौंप देंगे तो आपका राज्य चोरों और डाकुओं से कभी भी मुक्त नहीं हो पायेगा. इसके अतिरिक्त, ची युंग के इस तथाकथित गुण के कारण वह एक दिन घोर संकट में पड़ जायेगा. उसके प्राण भी जा सकते हैं.”
उसी समय राज्य में कहीं दूर चोरों और डाकुओं का एक दल ची युंग के विरुद्ध षड़यंत्र कर रहा था. उन्होंने उसे अपने मार्ग से हटाने की योजना बना ली. एक दिन उन्होंने ची युंग का अपहरण कर लिया और उसे मौत के घाट उतार दिया.
राजा ने जब यह सुना तो वह अत्यंत भयभीत हो गया. वह दौड़ा-दौड़ा लाओ-त्ज़ु के पास गया और उससे बोला – “आपकी आशंका सत्य सिद्ध हो गई. ची युंग की हत्या हो गई है. अब मेरे राज्य की सुरक्षा खतरे में है.”
लाओ-त्ज़ु ने कहा – “एक पुरानी कहावत है, ‘अथाह समुद्र के तल में मछली पकड़ने वाले और गुप्त रहस्यों को व्यर्थ ही ढूँढने वाले अपने विनाश को निमंत्रण देते हैं’. यदि आप चोरों और डाकुओं से मुक्ति पाना चाहते हैं तो प्रशासन में सज्जन व्यक्तियों की नियुक्ति करें. उन्हें निर्देश दें कि वे अपने से ऊपर वालों को मार्गदर्शन दें और अपने से नीचे वालों को शिक्षित करें. जब लोग विधि और नियमों का पालन करने लगेंगे तो आपके राज्य में चोरों-डाकुओं के बनने का मार्ग स्वतः बंद हो जायेगा.”
राजा ने लाओ-त्ज़ु के बताये अनुसार प्रशासन में सुधार किये और धीरे-धीरे उसका राज्य आदर्श राज्य बन गया.
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कोयला 'घोटाला' : सीएजी ने दी पीएम को सफाई
नई दिल्ली. 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले के बाद केंद्र सरकार कोयला खदानों के आवंटन को लेकर घिर गई दिखती है। एक अंग्रेजी अखबार में छपी खबर में सीएजी की ड्राफ्ट रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि कोयला खदानों की बिना नीलामी 'पहले आओ पहले पाओ' के आधार पर आवंटन किए जाने से सरकारी खजाने को 10.67 लाख करोड़ रुपये का 'चूना' लगा है। बताया जा रहा है कि यह 2 जी से 6 गुना बड़ा घोटाला है, जिसमें करीब 100 निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया है। ड्राफ्ट रिपोर्ट में कहा गया है कि 155 कोयला खदानों का आवंटन बिना नीलामी के किया गया। 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले में 1.76 लाख करोड़ रुपये का सरकारी खजाने का नुकसान पहुंचाने का आरोप लगा है।
इस बीच, सीएजी ने पीएमओ को चिट्ठी लिखकर सफाई दी है। सीएजी के मुताबिक ‘कोयला मंत्रालय की रिपोर्ट पर मीडिया में आई खबर गुमराह करने वाली है। नुकसान का सही आकलन नहीं है क्योंकि रिपोर्ट अभी तैयार की जा रही है। ये फाइनल ड्राफ्ट से भी पहले का दस्तावेज है।’ पीएमओ ने यह जानकारी देते हुए प्रेस रिलीज भी जारी किया है।
हालांकि सीएजी की इस ड्राफ्ट रिपोर्ट ने राजनैतिक रूप ले लिया है। बीजेपी, लेफ्ट और समाजवादी पार्टी ने लोकसभा में आज कार्यवाही शुरू होते ही इस मुद्दे पर हंगामा कर दिया। इसके बाद सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। राज्यसभा में भी इस मुद्दे पर हंगामा हुआ, जिसके बाद सदन की कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। बीजेपी और समाजवादी पार्टी ने आज प्रश्नकाल स्थगित कर इस मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग की है। पार्टी ने मांग की है कि प्रधानमंत्री खुद संसद में इस मुद्दे पर सफाई दें।
गौरतलब है कि सीएजी की ड्राफ्ट रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी खजाने को यह नुकसान 2004-09 के बीच हुआ। इस दौरान शिबू सोरेन कोयला मंत्री थे। हालांकि, कुछ समय के लिए यह मंत्रालय धानमंत्री के पास भी था। बीजेपी ने इसी को आधार बनाकर प्रधानमंत्री का इस्तीफा मांगा है। पार्टी के प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने संसद में प्रश्नकाल स्थगित करने के लिए नोटिस देने के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा है कि अब केंद्र सरकार को सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं रह गया है। वहीं, लेफ्ट के नेता सीताराम येचुरी ने भी कहा कि हम लोगों ने कोयला खदानों की नीलामी करने की मांग की थी, लेकिन सरकार ने उस पर अमल नहीं किया। समाजवादी पार्टी ने कहा है कि जो लोग भी घोटाले में शामिल हैं, वे खुद इस्तीफा दे दें।
संसद में हंगामे के बाद कांग्रेस 'डैमेज कंट्रोल' करने में जुट गई है। मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सपा नेता रेवती रमण सिंह से बात की है। वर्तमान में कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जयसवाल ने यह कहते हुए इस खबर पर टिप्पणी करने से मना कर दिया कि जब आधिकारिक तौर पर रिपोर्ट उनके सामने आएगी तो ही वे प्रतिक्रिया देंगे। जायसवाल ने कहा, 'मैं मीडिया में आ रही रिपोर्ट के आधार पर टिप्पणी नहीं कर सकता हूं। अगर हमें सीएजी रिपोर्ट मिलेगी तो हम उसका विश्लेषण कर कार्रवाई करेंगे। मैं सिर्फ यूपीए 2 में ही कोयला मंत्री रहा हूं और इस दौरान कोयला खदान का आवंटन किसी को भी नहीं किया गया है।'
कांग्रेस के नेता राजीव शुक्ला ने कहा है कि कोई घोटाला नहीं हुआ है। उन्होंने सरकार का बचाव करते हुए कहा है कि ड्राफ्ट रिपोर्ट संसद में नहीं रखी जाती है। शुक्ला ने कहा है कि नीलामी होती तो बोझ जनता पर पड़ता। गौरतलब है कि वहीं, कांग्रेस के प्रवक्ता शकील अहमद ने यह कहते हुए सरकार का बचाव करने की कोशिश की है कि यह कोई घोटाला नहीं है, बल्कि इसमें सिर्फ घाटा हो सकता है। गौरतलब है कि सीएजी ने अभी इस मामले में ड्राफ्ट रिपोर्ट ही तैयार की है। सीएजी को इस बाबत अंतिम रिपोर्ट अभी तैयार करना बाकी है।
सेकेंड, स्लीपर और एसी थ्री के किराए में बढ़ोतरी वापस
रेल मंत्री की संसद में हुई 'रैगिंग'
वीडियो: अब गुजरात विधानसभा में भी 'डर्टी पिक्चर'!
आज दिल्ली में होगा येदियुरप्पा पर फैसला
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बीमारी के चलते प्रैक्टिस से दूर रहे युवराज-रैना
कोलंबो. टी-20 वर्ल्ड कप में अब तक खराब खेल दिखा रही टीम इंडिया (पढ़ें, ऐसे तो जल्द बाहर हो जाएगा भारत) को बड़ा झटका लगा है। टीम के स्टार ऑलराउंडर युवराज सिंह और सुरेश रैना ने बीमार होने के कारण पी सारा ओवल मैदान में टीम के साथ अभ्यास सत्र में हिस्सा नहीं लिया (पढ़ें, भारत की क्या हो रणनीति) । भारत को रविवार को इंग्लैंड से भिडऩा है। टीम सूत्रों का कहना है कि अफगानिस्तान के खिलाफ शानदार गेंदबाजी करने वाले युवराज के गले में सूजन है जबकि रैना पेट में गड़बड़ी की समस्या से जूझ रहे हैं। दोनों खिलाड़ी टीम के मेडिकल स्टाफ की निगरानी में हैं।
भारतीय टीम ने टीम होटल में उसे दिए जा रहे भोजन की क्वालिटी के बारे में अपनी शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में संबंधित एजेंसी को इस मामले को देखने और समस्या को दूर करने को कहा गया है।
इससे पहले साउथ अफ्रीका के पांच खिलाड़ी फूड पॉइजनिंग और वाइरल फीवर के कारण बीमार पड़ गए थे। हालांकि, गुरुवार को हुए जिम्बाब्वे के खिलाफ मुकाबले से पहले वे फिट हो गए। न्यूजीलैंड के तीन क्रिकेटरों को भी पेट में गड़बड़ी की शिकायत हुई थी।
भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ खेले गए अभ्यास मैच और अफगानिस्तान से हुए मुकाबले में जो खेल दिखाया है, उसे लेकर टीम को पहले से ही जबरदस्त आलोचना झेलनी पड़ रही है। वैसे भी टीम के आधे खिलाड़ी 30 साल से ज्यादा के हैं।
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भारत से अहलेबैत समाचार एजेंसी (अबना) संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार भारत और पाकिस्तान के वाणिज्य मंत्रियों की बैठक तीन साल के अन्तराल के बाद अगले माह नई दिल्ली में होगी जिसमें आपसी व्यापार बढ़ाने तथा ग़ैर तटकर बाधाओं को समाप्त करने पर चर्चा की जाएगी। भारतीय वाणिज्य मंत्री श्री आनन्द शर्मा ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री मख़दूम अमीन फ़ाहिम को इस बैठक के लिए नई दिल्ली आने का न्योता दिया है।
उल्लेखनीय है कि अप्रेल में दोनो देशों के वाणिज्य सचिवों की बैठक इस्लामाबाद में हुई थी बैठक में पाकिस्तान ने भारत के साथ भेदभाव रहित व्यापार प्रणाली के कार्यान्वयन के लिए कदम उठाने पर सहमति जताई थी तथा दोनो पक्षों ने कहा था कि वे बिजली और पैट्रोलियम उत्पादों में व्यापार बढ़ाने के लिए कदम उठाएंगे। भारतीय अधिकारियों ने बताया कि पाकिस्तान ने भेदभाव रहित व्यापार प्रणाली ,शीघ्रातिशीघ्र लागू करते हुए एक तरह से भारत को व्यापार में सर्वाधिकवरीय देश (एम.एफ़.एन.) का दर्जा देने पर सहमति जताई है। हांलाकि पाकिस्तान पक्ष ने संकेत दिया है कि भारत को एम.एफ़.एन. का दर्जा देना ग़ैर प्रशुल्कीय बाधाओं की समाप्ति पर निर्भर करेगा। भारतीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ग़ैर प्रशुल्कीय बाधाओं में कपड़े के लिए लेबोरेटरी परीक्षण तथा सीमेंट के लिए निर्धारित मानक शामिल हैं केवल पाकिस्तान के उत्पादों के लिए ही नहीं बल्कि भारत के सभी व्यापारिक भागीदारों पर लागू होते हैं।
समाचार समाप्त
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अब दिल्ली में हुआ नाबालिग लडकियों को बेचने के धंधे का खुलासा
नई दिल्ली। घरेलू कामकाज के लिए दिल्ली लाई गई गुमला की 12 वर्षीय अरुणा (बदला हुआ नाम) को दिल्ली पुलिस और स्वयंसेवी संस्था शक्ति वाहिनी ने तिलक नगर इलाके से शनिवार को बचाया।
अपने घर में अरुणा से काम लेने वाले मालिक कुलदीप सिंह ने कहा कि मैं तुम्हें 20,000 रुपए में खरीद कर लाया हूं। सोमवार को अरुणा को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी), निर्मल छाया के समक्ष पेश किया गया।
सीडब्ल्यूसी ने अरुणा के प्रति मालिक के अमानवीय व्यवहार और प्लेसमेंट एंबेसी द्वारा उसके बेचे जाने की तथ्यों की जांच और कानूनी करवाई करने के आदेश दे दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई के लिए तिलक नगर पुलिस थाने के एसएचओ को 1 अक्टूबर तक समय दिया है। शेष आगे...
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होटल में चल रहा था जिस्मफरोशी का धंधा, तभी पड़ गया पुलिस का छापा
गुडग़ांव. गुडग़ांव-दिल्ली रोड स्थित होटल देवी पैलेस में चल रहे सैक्स रैकेट पर छापा मारकर पुलिस ने चार कॉलगर्ल को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने यहां ग्राहक फंसाकर लाने वाले दलाल और होटल मैनेजर को भी गिरफ्तार किया है।
जिस्मफरोशी में शामिल तीन युवतियां पश्चिम बंगाल के 24 परगना की और एक कर्नाटक की है। पुलिस ने सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर लिया है।
कैसे हुआ भंडाफोड़ : होटल देवी पैलेस में चल रहे जिस्मफरोशी के बारे में सेक्टर-14 चौकी पुलिस को कई बार शिकायत मिल चुकी थी। डीसीपी वेस्ट सुरेंद्र पाल सिंह के निर्देशानुसार शनिवार देर रात करीब 10 बजे सिविल लाइंस थाने की एडिशनल एसएचओ वरुण कुमारी और सेक्टर-14 चौकी इंचार्ज सकेंद्र कुमार की टीम तैयार की गई।
तीन जवानों को नकली ग्राहक बनाकर होटल में भेजा गया। सादे कपड़ों में पहुंचे तीनों पुलिसकर्मियों ने होटल मैनेजर से कॉलगर्ल की डिमांड की, तो मैनेजर निमेश अंसारी ने तीनों को खर्चा बताया। पैसे लेने के बाद मैनेजर ने सब को अलग-अलग कमरों में भेज दिया। जहां पहले से ही कॉलगर्ल आपत्तिजनक कपड़ों में बैठी थीं।
तीनों पुलिसकर्मियों ने अधिकारियों को फोन के जरिए सूचना देकर ऊपर बुला लिया। महिला व पुरुष पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और चारों कॉलगर्ल समेत होटल के मैनेजर व दलाल को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने कॉलगर्ल की पहचान कर ली है, जिनमें से एक दिल्ली के सुभाष नगर और अन्य तीन गुडग़ांव के ही राजीव नगर कॉलोनी में रहती हैं। आरोपी दलाल जुम्मे खां भरतपुर राजस्थान के गांव पहाड़ी का रहने वाला है।
आगे की तस्वीरों में जानिए कहां से आती थीं लड़कियां...
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Cash on Vote, LK Advani and Rajdeep Sardesai
आडवाणी जी… कांग्रेस और राजदीप सरदेसाई दोनों का गुनाह बराबरी का है…
कल संसद में जिस तरह से आडवाणी जी गरजे और बरसे उन्हें देखकर 1991 से 1999 के आडवाणी की याद हो आई। नोट फ़ॉर वोट के मुद्दे पर उन्होंने जिस तरह प्रणब मुखर्जी और चिदम्बरम को घेरा तथा कैश फ़ॉर वोट काण्ड में उन्हें भी गिरफ़्तार करने की चुनौती दी, उस समय उन दोनों की बेबसी देखते ही बनती थी। हालांकि बाकी के कांग्रेसी सांसद "अपनी वाली" पर आ गये थे और उन्होंने आडवाणी जैसे सदन के एक वरिष्ठतम सदस्य को बोलने नहीं दिया। ज़ाहिर है कि मामला आईने की तरह साफ़ है, जिन सांसदों ने वोट देने के लिए पाई गई रिश्वत को उजागर किया, वही जेल में हैं और उस रिश्वत का फ़ायदा जिन्हें मिला, और जिसने रिश्वत दी (यानी UPA सरकार बची) वे तो खुलेआम घूम रहे हैं। माना कि एक "दल्ला" अमरसिंह, लाख बहानों के बावजूद जेल में है, लेकिन अभी भी यह बात छुपी हुई है कि आखिर इतना पैसा दिया किसने? सरकार बचाई किसने? रिश्वत पहुँचाने वाला अभी तक दृश्य से बाहर है, जबकि रिश्वत को नकारकर उसे सरेआम लोकसभा में लहराने वाले जेल में हैं।
इस समूचे मामले में एक सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है IBN-7 का राजदीप सरदेसाई। नोट फ़ॉर वोट के पूरे स्टिंग ऑपरेशन की उसे न सिर्फ़ पल-पल की खबर थी, बल्कि उसी चैनल ने यह पूरा स्टिंग किया था। राजदीप सरदेसाई के पास पूरे सबूत मौजूद हैं कि पैसा कहाँ से आया, किसने दलाली की, पैसा किसे दिया, कब दिया और क्यों दिया? परन्तु न तो उस दिन राजदीप के चैनल ने यह स्टिंग ऑपरेशन अपने चैनल पर दिखाया और न ही इतना समय बीत जाने के बाद आज तक कभी किया। ये कैसी पत्रकारिता है?
गलती तो भाजपा की भी है कि उसने राजदीप सरदेसाई जैसे "सुपर कांग्रेसी दलाल" पर भरोसा कर लिया, IBN-7 को इस स्टिंग की जिम्मेदारी सौंपने और सरदेसाई के साथ मिलकर जाल बिछाने की क्या जरुरत थी? क्या बाकी के सारे चैनल वाले मर गये थे जो इस चर्च के मोहरे पर भरोसा किया? योजना तो यही थी, कि भाजपा के सांसद सदन में नोट लहराएंगे और सदन के बाहर IBN-7 पर इन वीडियो टेपों को प्रसारित किया जाएगा। परन्तु आडवाणी जी… आपने जिस पर भरोसा किया उसी ने आपके पीठ में छुरा भोंक दिया और उस दिन से आज तक वह सारे टेप्स और वीडियो दबाकर बैठा है, वरना उसी दिन UPA सरकार रफ़ा-दफ़ा हो गई होती।
ज़ाहिर है कि ऐसा "कृत्य" राजदीप ने मुफ़्त में तो नहीं किया होगा? जब उसे लगा होगा कि इस स्टिंग के जारी होने पर, इस पूरे मामले में कांग्रेस के "ठेठ ऊपर तक" के नेता फ़ँसेंगे तो उसने परदे के पीछे "समुचित डीलिंग" कर ली। भले ही जाँच का मूल विषय तो यही है कि आखिर वे चार करोड़ रुपये किसने दिये, लेकिन आडवाणी जी… इस बात की भी जाँच करवाईये कि राजदीप सरदेसाई कितने में बिका, किसके हाथों बिका? वह वीडियो प्रसारित न करने के बदले वह पद्मभूषण लेगा, कुछ करोड़ रुपये लेगा या कुछ और? तथा वह वीडियो टेप्स अभी भी सही-सलामत हैं या गायब कर दिये गए हैं? कांग्रेस ने तो जो किया उसे शायद जनता सजा देगी, परन्तु आपसे अनुरोध है कि आप इस "पत्रकारनुमा दलाल" को छोड़ना मत…।
हम तो सिर्फ़ अनुरोध ही कर सकते हैं, क्योंकि इतना बड़ा धोखा खाने के बावजूद आज भी देखा जाता है कि भाजपा के नेता और प्रवक्ता आये दिन राजदीप के IBN या करण थापर के टॉक-शो में अथवा धुर-भाजपा विरोधी NDTV पर अपना मुखड़ा दिखाने के लिए मरे जाते हैं…। आडवाणी जी, आप तो इतने अनुभवी हैं… सो यह बात तो जानते ही होंगे, कि यदि आप इन "मीडिया दलालों" को अपनी गोद में बैठाकर अपने हाथों से भोजन भी करवाएं तब भी ये कांग्रेस के ही गुण गाएंगे, तो फ़िर इनका बहिष्कार करके इन्हें "किसी और तरीके" से सबक क्यों नहीं सिखाते?
आडवाणी जी, विगत कुछ वर्षों में देखने में आया कि अत्यधिक भलमनसाहत दिखाने के चक्कर में आप इन सेकुलरों और कांग्रेसियों से "मधुर सम्बन्ध" बना रहे थे, लेकिन अब आपने इसका नतीजा देख लिया है कि ये "सेकुलर्स" किसी के सगे नहीं होते। आप इनके साथ चाय पार्टियाँ मनाएंगे, ये लोग कर्नाटक में सरकार गिरा देंगे… आप इनके साथ इफ़्तार पार्टियों में शामिल होंगे, ये लोग गुजरात में मनमाना लोकायुक्त थोप देंगे… आप मध्यस्थता करके अण्णा आंदोलन की "आँच" से इन्हें बचाने में मदद करेंगे, ये संसद में आपको बोलने नहीं देंगे…।
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नोट :- माननीय आडवाणी जी, माना कि मैं आपके कई निर्णयों से नाखुश हूँ (जैसे कंधार मामले में आत्मसमर्पण या जिन्ना की मज़ार पर सजदा करके उसे धर्मनिरपेक्ष बताना एवं स्विस बैंक अकाउंट मुद्दे पर सोनिया से खेद व्यक्त करना इत्यादि), मैंने अपने लेखों में कई बार इन निर्णयों की आलोचना भी की है। परन्तु आपका कट्टर विरोधी भी इस बात को मानेगा, कि कई-कई मनमोहनों, चिदम्बरों, सिब्बलों और दिग्गियों के मुकाबले आप कई गुना बेहतर हैं…। 83 वर्ष की आयु में भी कल जिस तरह से आप संसद में गरज रहे थे, बहुत दिनों बाद दिल खुश किया आपने…। सेकुलरों से दूरी बनाकर रखेंगे, कांग्रेसियों और दलालनुमा पत्रकारों को रगड़ेंगे, तो हम और भी अधिक खुश होंगे…
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शुक्रवार, 30 जनवरी 2009
बुधवार, 28 जनवरी 2009
बस्तर की दुर्लभ जैव विविधता के लिए खतरा लैण्टाना कैमरा
छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल और दुनिया के दुर्लभ जैव विविधताआें वाले क्षेत्र के रूप में मशहूर बस्तर में एक खतरनाक खरपतवार पनपने लगा है । इस खरपतवार का नाम लैण्टाना कैमरा है । लैण्टाना-कैमरा के विनाश के लिये कृषि विभाग ने प्रभावी नियंत्रण नीति अख्तियार करने पर बल दिया है । यह नींदा खरपतवार .लाटा. बूटा के नाम से भी जाना जाता है । यह उद्यानिकी और कृषि वानिकी के साथ अवांछित रूप से उगकर फसलों को भयानक क्षति पहुंचाता है । लैण्टाना कैमरा एक ऐसा खतरनाक खरपतवार है जो फसल के साथ साथ जंगल, उद्यान, अभयारण्य, सरंक्षित वनों, पार्क, घर और स्कूलों के आसपास तेजी से फैलकर उन्हें नुकसान पहुंचाता है । यह खरपतवार इसलिये भी विनाशकारी है कि इसके अधिक फैलाव से बस्तर जैसे वनाच्छादित और समूद्ध जैवविविधता (बायोडायवर्सिटी) वाले क्षेत्रों में अनेक बहुपयोगी पौधों और जीव जन्तुआें के अस्तित्व के लिये खतरा बन गया है । गैर कृषि क्षेत्रों में यह खरपतवार हानिकारक जीव जन्तुआें जैसे सांप चूहे और अन्य कीट रोग जनकों के लिये भी शरण स्थल बन जाता है । बस्तर अंचल में हजारों हेक्टेयर भूमि में इसका फैलाव खतरनाक तरीके से बढ़ता जा रहा है । जिसे कृषि वैज्ञानिकोंने बेहद चिंता का विषय बताया है । गौरतलब है कि लाटा बूटा यानी लैण्टाना कैमरा एक बहुवर्षीय सदाबहार झाडी है जो बीच और वानस्पतिक अंगों द्वारा तेजी से फैलता है । यहीं नही इसके बीजों का फैलाव पक्षियों विशेषकर भारतीय मैना द्वारा किया जाता है । यह खरपतवार मूलत: मध्य अमेरिका से आया हुआ बताया जाता हैै । इस पौधे का बहुरंगीय फूलों के कारण बाडियों, हेज के रूप में उपयोग किया जाता था । परन्तु अन्य उपयोगी स्थानों में इसका विस्तृत फैलाव अब संकट का कारण बन गया है । इसलिये इसका प्रभावशील ढंग से नियंत्रण किया जाना अब अत्यंत आवश्यक हो गया है ।
धरती के लिए खतरा बन सकती है सौर सक्रियता ऐसे में जब धरती पर जीवन का शाश्वत स्रोत सूर्य अपनी सौर सक्रियता के ११ वर्षीय चक्र की शुरूआत करने जा रहा है, धरती पर इसके संभावित कुप्रभाव का आकलन करने वाले वैज्ञानिक चिंतित है । इस कुदरती घटना से धरती को खतरा पहुंच सकता है । यह तय हो चुका है कि सौर सक्रियता भी धरती पर जलवायु परिवर्तन की वजह रही है । जाहिर है, आगामी दशक में सौर सक्रियता के कारण धरती की मुश्किलें बढ़ सकती है । उल्लेखनीय है कि इंसान ने इस परिघटना का आकलन करने के लिए पहली बार ४४० वर्ष पहले उपकरण तैयार किए थे । इन उपकरणों से इसकी पुष्टि हुई कि धरती सिर्फ सूर्यग्रहण नामक सौर परिघटना से ही प्रभावित नहीं होता । सौर धब्बे और सौर सक्रियता आदि जैसी कुदरती परिघटनाएं भी धरती को प्रभावित करती है । यहां तक कि इंसान के व्यवहार पर भी इनका असर पड़ता है । सौर विकिरण, सौर चुंबकीय तूफान या सौर प्रज्वलन जैसी रासायनिक क्रियाएं सौर सक्रियता के दायरे में आती है । ये परिघटनाए क्षीण या विनाशकारी दोनों हो सकती है । २८ अगस्त १८५९ को ध्रुवीय क्षेत्रों में अचानक सौर ताप बढ़ गया और शाम के वक्त पूरे अमेरिका महादेश में तेज धूप खिल उठी थी । कई लोगों को ऐसा महसूस हुआ जैसे उनके शहर में आग लग गई हो । शहर तेज धूप के कारण दहक उठे । इससे टेलीग्राप प्रणाली में गड़बड़ी पैदा हो गई । अगर आज के एटमी व अंतरिक्ष युग में ऐसा हो तो परिणाम भयावह होगा। रेडियो इलेक्ट्रानिक उपकरणों पर आज हम इतने निर्भर हो चुके हैकि अगर ऐसी घटना हुई तो पूरी दुनिया में जीवन-रक्षक प्रणालियां ध्वस्त हो जाएगी।
बढ़ते कचरे का संकट मनुष्य के लिए पेट भरने , तन ढंकने और सिर छिपाने लायक आच्छादन बनाने की समस्या अभी हल नहीं हो पाई थी कि बड़ी मात्रा में उत्पन्न होने वाले कचरे को ठिकाने लगाने की नई समस्या सामने आ गई । प्रकृति अपने उत्पादित कचरे को ठिकाने लगाती और उपयोगी बनाती रहती है । पशुआें के मल-मूत्र, पेड़ों से गिरे पत्ते आदि सड़ गल कर उपयोगी खाद बन जाते हैं और वनस्पति उत्पादन में काम आते हैं । मनुष्य का मल - मूत्र भी उतना ही उपयोगी है पर इसे दुर्भाग्य ही कहना चाहिए कि उससे खाद न बनाकर नदी - नालों में बहा दिया जाता है और पेय जल को दूषित कर दिया जाता है । इससे दुहरी हानि है, खाद से वंचित रहना और कचरे को नदियों में फेंककर बीमारियों को आमन्त्रित करना । सरकारी तथा गैर सरकारी स्तरों पर किए जा रहे अनेक प्रयासों के बावजूद इन दिनों कचरे में भयानक वृद्धि हो रही है । हर वस्तु कागज, प्लास्टिक की थैली, पत्तल, दोना, डिब्बा आदि में बंद करके बेची जाती है । वस्तु का उपयोग होते ही वह पेकिंग कचरा बन जाती है और उसे जहां - तहां सड़कों, गलियों में फेंक दिया जाता है । इसकी सफाई पर ढेरों खर्च तो होता है, विशेष समस्या यह है कि उसे डाला कहां जाए ? आजकल शहरों के नजदीक जो उबड़ खाबड़ जमीनें होती हैं वे इस कचरे से भर जाती हैं ।
गुगल अर्थ की सामग्री पर विवाद मुंबई की हाईकोर्ट में दाखिल एक जनहित याचिका में अदालत से अनुरोध किया गया है कि वह गूगल अर्थ सॉफ्टेवेयर से देश के सैटेलाइट चित्रों को हटाने के निर्देश दे । हाईकोर्ट ने यह याचिका स्वीकार कर ली है । मुंबई के अधिवक्ता अमित कारानी ने याचिका में अदालत से माँग की कि गूगल अर्थ सॉफ्टवेयर में आसानी से उपलब्ध देश के महत्वपूर्ण ठिकानों के चित्रों को हटाए जाने के निर्देश दिए जाएँ । श्री अमित ने गत दिनों मुंबई में आतंकी हमलों का हवाला देते हुए कहा-ऐसे तो हमारे यहाँ के परमाणु संयंत्र और रक्षा ठिकानों को भी निशाना बनाया जा सकता है । इतना ही नहीं, कई महत्वपूर्ण स्थानों व संसाधनों कें भी सैटेलाइट चित्र सॉफ्टवेयर में आसानी से उपलब्ध है, जिनका कोई भी गलत इस्तेमाल कर सकता है । सुरक्षा की दृष्टि से ऐसे चित्र सॉफ्टवेयर से हटाए जाने चाहिए । गूगल अर्थ सॉफ्टवेयर प्रमुख इंटरनेट सर्च सेवा प्रदाता कंपनी गूगल ने बनाया है । इस कंपनी का मुख्यालय अमेरिका में है और इस पर सभी देशों के रक्षा मंत्रालय, विज्ञान एवं तकनीकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग देखें जा सकते हैं । गूूगल अर्थ सॉफ्टवेयर में वेबसाइट के माध्यम से दुनिया के किसी भी स्थान को देखा जा सकता है ।
पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक में हम पीछे है विश्व भर में हो रहे पर्यावरण के साथ खिलवाड़ से प्रकृति में विनाशकारी बदलाव आ रहे हैं । नतीजन दूर तक फैले हरे-भरे पहाड़ों व मैदानों का रेगिस्तान में बदल जाने का ग्राफ भी ऊपर जा रहा है । वह चौतरफा अप्राकृतिक बदलाव मानव जाति की भावी पीढ़ी के लिए एक भयानक खतरा बन सकता है । दुनिया भर में पर्यावरण को बचाने की दिशा में हो रहे प्रयासों का जिक्र करें तो भारत परिस्थिकीय संतुलन को बनाए रखने में अभी काफी पीछे है । देश में पर्यावरण को बचाने में काफी पीछे है । देश में पर्यावरण को एक तरफ कर महज आर्थिक विकास की गति का प्राथमिकता दी जा रही है । संयुक्त राष्ट्र की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के हर भाग में शुष्क भूमि के हिस्से का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है । कुल भूमि का करीब ४० प्रतिशत हिस्सा शुष्क भूमि में तब्दील हो चुकाहै । सेंटर फॉर एनवायरमेंटल ला एंड पॉलिसी की एक रिपोर्ट के अनुसार पर्यावरण और परिस्थितिकी के संरक्षण से जुड़े प्रयासों में भारत का प्रदर्शन अपेक्षा से कहीं कम है । पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक (ई.पी.आई) में १३३ देशों के बीच भारत ११८ वें स्थान पर है जबकि चीन ९४ वें, श्रीलंका ६७ वें व पाकिस्तान १२३ वें स्थान पर है । रिपोर्ट के अनुसार न्यूजीलैंड, स्वीडन, फिनलैंड, चेक गणराज्य, ब्रिटेन व ऑस्टेलिया इस सूची मे शीर्ष पर आने वाले देशों में शमिल है । अमेरिका का स्थान २८ वां है । रिपोर्ट में सेंटर के निदेशक डॉ. डेनियल सी.एस्टी ने कहा है कि भारत पर्यावरण पर ध्यान दिए बिना आर्थिक विकास को तरजीह दे रहा है । उधर, वन विभाग के महानिदेशक जे.सी.काला का दावा है कि देश के वन क्षेत्र में कुछ वृद्धि हुई है । उन्होने देश में वनों के समुचित विकास के लिए वर्तमान में निर्धारित १६०० करोड़ रूपए का निवेश बढ़ाकर ८००० करोड़ करने की जरूरत बताई है ।
घटते जंगल और बढ़ती चिंताएं संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार हर साल धरती पर से एक प्रतिशत जंगल का सफाया किया जा रहा है जो पिछले दशक से पचास प्रतिशत ज्यादा है । शहरीकरण के दबाव, बढ़ती जनसंख्या और तीव्र विकास की लालसा ने हमें हरियाली से वंचित कर दिया है । घर के चौबारे में आम - नीम के पेड़ होना गुजरे वक्त की बात हो गई है । छोटे से फ्लैट में बोनसाई का एक पौधा लगाकर हम हरियाली को महसूस करने का भ्रम पालने लगे हैं । ऐसे समय में जब हमारे वैज्ञानिक हमें बार- बार ग्लोबल वार्मिंग की समस्या से चेता रहे हैं ..... भयावह भविष्य का चेहरा दिखा रहे हैं ... यह आंंकड़ा दिल दहला देने के लिए काफी है । रूस, इंडोनेशिया, अफ्रीका, चीन, भारत के कई अनछुए माने वाले जंगल भी कटाई का शिकार हो चुके हैं । ग्लोबल फॉरेस्ट वॉच को शुरू करने वाले डर्क ब्राएंट के अनुसार सिर्फ बीस सालों के अंदर दुनिया भर के ४० प्रतिशत जंगल काट दिए जाएंगें । दुनिया के सबसे बड़े जंगल के रूप में पहचाने जाने वाले ओकी- फिनोकी के जंगल भी इनसे जुदा नहीं । जितनी तेजी से जंगल कट रहे हैं उतनी ही तेजी से जीव-जंतुआें की कई प्रजातियां भी दुनिया से विलुप्त् होती जा रही हे । जंगलों के कटने से एक तरफ वातावरण में कार्बन डाई ऑक्साइड बढ रही है वही दूसरी ओर मिट्टी का कटाव भी तेजी से हो रहा है । भारतीय परिप्रेक्ष्य में बात करें तो तीसरी दुनिया से पहली दुनिया के देशोंमें शुमार होने को लालायित हमारे देश में जंगलों को तेजी से काटा जा रहा है । हिमालय पर्वत पर हो रही तेजी से कटाई के कारण भू-क्षरण तेजी से हो रहा है । एक शोध के मुताबिक हिमालयी क्षेत्र में भूक्षरण की दर प्रतिवर्ष सात मिमि तक पहुंच गई है । नतीजा कई बार ५०० से १००० प्रतिशत तक गाद घाटियों और झीलों में भर जाती है । जिसके कारण नदियों में जलभराव कम हो रहा है । भारत की जीवनरेखा कही जाने वाली कई नदियां गर्मियों में सूख जाती हैं , वहीं बारिश में इनमें बाढ़ आ जाती हैं । वनों की बेरहमी से हो रही कटाई कारण एक तरफ ग्लोबल वार्मिंग बढ़ रही है वहीं दूसरी ओर प्रकृति का संतुलन भी बिगड़ रहा है । कई जीव हमारी धरती से लुप्त् हो चुके हैं। सही तरह से आंका जाए तो प्रलय का वक्त नजदीक आता नजर आ रहा है । इस प्रलय से बचने के लिए हमें तेजी से प्रयास करने होंगें । अब हर व्यक्ति को एक दो नहीं कम से कम दस पेड़ लगाने का वादा नहीं, बल्कि पक्का इरादा करना होगा । चिपको आंदोलन को दिल से अपनाना होगा, तभी हम वक्त से पहले आने वाले इस प्रलय से बच सकते हैं ।
राष्ट्रपति भवन के प्रकृति पथ का उद्घाटन राष्ट्रपति भवन को जनता के करीब लाने के मकसद से पिछले दिनों जनता के लिए प्रकृति पथ सैर करने के लिए खोल दिया गया । ढाई किलोमीटर लंबा यह पथ तीन सौ एकड़ के विशाल भूभाग में फैला है । राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने इस प्रकृति पथ का उद्घाटन किया और भरोसा जताया कि आम जनता इस पथ पर सैर करके प्रकृति से रूबरू हो सकेगी। इससे पहले श्रीमती पाटिल ने हर शनिवार को चेंज ऑफ गार्ड के लिए होने वाले समरोेह को जनता के दर्शनार्थ खेलने का आदेश दिया था । वैसे तो राष्ट्रपति भवन का प्रसिद्ध मुगल गार्डन हर साल फरवरी में कुछ दिनों के लिए जनता के लिए खुलता है जिसकी खूबसूरती जनता का मन मोहने के साथ अखबारों की सुर्खी बनती रही है । अब सामान्यजन पूरे साल हर शनिवार को प्रकृति पथ पर चलकर राष्ट्रपति भवन के पीछे फैले वन क्षेत्र में बटर फ्लाई पार्क का आनंद उठा सकेगें जहाँ कई सौ तरह की तितलियाँ देखने को मिलेगी। इस पथ से गुजरते हुए आप पीकॉक प्वाइंर्ट, ग्रेपवाईन यार्ड, अमरूद और संतरे के बगीचे, कटहल के पेड़ सहित जैव विविधता को दर्शाने वाले प्राकृतिक माहौल से रूबरू हो सकते हैं । राष्ट्रपति भवन की प्रवक्ता अर्चना दत्ता के अनुसार राष्ट्रपति चाहती हैं कि राष्ट्रपति भवन को आम जनता के करीब लाया जाए । उनके ही प्रयासों से दिल्ली सरकार के वन एवं पर्यावरण विभाग की मदद से प्रकृति पथ तैयार कराया गया है । उनके अनुसार प्रसीडेंट एस्टेट को एक हरित क्षेत्र, ऊर्जा की बचत और बिना कचरे वाले टाउनशिप के रूप में विकसित किया जा रहा है । ***
सोमवार, 26 जनवरी 2009
खतरनाक हैं भूरे बादल चीन और भारत पर भूरे बादलों का प्रभाव कुछ ज्यादा ही देखने को मिल रहा है । संयुक्त राष्ट्र की पर्यावरण शाखा के लिए की गई एक शोध में साबित होता है कि एशियाई शहर खतरनाक भूरे बादलों की चपेट में आते जा रहे हैं । एनवायरमेंट न्यूज नेटवर्क की इस शोध से पता चला है कि अधिकतर एशियाई शहरों में सूरज की २५ प्रतिशत किरणें धरती तक पहुंच ही नहीं पाती हैं, क्योंकि प्रदूषण की वजह से बने भूरे बादल उन्हें आकाश में ही रोक देते हैं । ये बादल कभी - कभी तो ३ किलोमीटर गहरे होते हैं । इससे सबसे अधिक प्रभावित शहर चीन का ग्वानजाउ है, जो १९७० से ही धुएं के बादलों से घिरा हुआ है । इसके अलावा जिन शहरों पर सबसे अधिक खतरा है , वे हैं बैंकका, बीजिंग, ढाका, कराची, कोलकाता, मुम्बई, दिल्ली, सिओल, शंघाई, शेनजाउ और तेहरान । इस रिपोर्ट के अनुसार इन बादलों में मौजूद टॉक्सिक पदार्थोंा की वजह से चीन में प्रतिवर्ष ३,४०,००० लोग मारे जाते हैं । ये टॉक्सिक पदार्थ हिन्दूकुश और हिमालय पर्वत श्रृंखला के लिए भी खतरा हैं । इससे यहां के ग्लेशियर तेजी से पिघलते जा रहे हैं । ऐसा खतरा यूरोपीय और अमरीकी महाद्वीप के देशों पर भी है , परंतु वहां होने वाली शीतकालीन वर्षा और बर्फ की वर्षा इन बादलों को मिटा देती है लेकिन एशियाई शहरों में बर्फीली वर्षा नहीं होती है और वहां भूरे बादलों का खतरा लगातार बढ़ रहा है ।
पक्षियों का प्रेम गीत कुछ मनुष्य असीम आनंद पाने के लिए दवाइयों और अल्कोहल का सहारा लेते हैं । उसी तरह नर चिड़िया किसी मादा चिड़िया को रिझाने के लिए गाना गाते समय जिस आनंद की अनुभूति करती है, वह उसे शायद अकेले गाते हुए कभी प्राप्त् नहंी हेाता । जेब्रा फ्रिंच एक गाने वाली चिड़िया है, जो समूह में रहती है ।जापान के राइकेन ब्रेन साइन्स इंस्टीट्यूट के नील हेसलर और या-चुन हांग ने अपने अध्ययन में पाया कि जब नर जेब्रा फिंच किसी मनचाही संगिनी के लिए गाता है तो उसके दिमाग के एक विशेष हिस्से की तंत्रिकाएं सक्रिय हो जाती हैं । इस हिस्से को वीटीए कहते हैं । मानव मस्तिष्क का इसी के समतुल्य हिस्सा तब सक्रिय होता है जब वे कोकेन जैसी नशीली दवाईयों का सेवन करते हैं ।इससे दिमाग डोपामीन नामक एक पदार्थ बनाकर स्रावित करता है जिसे मस्तिष्क का पारितोषिक रसायन भी कहते हैं । फ्रिंच के मस्तिष्क में डोपामीन के स्रवण से वह क्षेत्र सक्रिय हो जाता है जो गायन और सीखने की प्रक्रिया का समन्वयन करता है ।दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि ऐसी स्थिति में गाना फिं्रच के लिए पारितोषिक की अनुभूति प्रदान करता है जिसके फलस्वरूप फिं्रच और गाने के लिए प्रोत्साहित होता है । हेसलर कहते हैं कि यह एक प्रत्यक्ष प्रमाण है कि मादा चिड़िया के लिए गीत गाना नर चिड़िया के लिए पारितोषिक पा लेने की भावना जगाता है। इसके साथ ही वह जोड़ते हैं कि यह कोई आश्चर्यजनक बात नहंी है क्योंकि पक्षियों में इस तरह की प्रणय प्रार्थना प्रजनन के समय बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है । नार्थ कैरोलिना के ड्यूक विश्वविद्यालय के पक्षी तंत्रिका विज्ञानी एरिक जारविस के अनुसर इस अध्ययन से पता चलता है कि नर पक्षी का गायन उसके तंत्रिका संचानर और वी.टी.ए. में स्थाय परिवर्तन कर सकता है । जारविस का मानना है कि अभी यह कहना कठिन है कि नर का मस्तिष्क क्या वाकई में ज़्यादा खुश होता है । दूमसरी ओर , हेसलर सोच रहे हैं कि इसी प्रकार के प्रयोग मादा फिंच के साथ करके यहदेखें कि इस प्रकार की प्रणय ' नप्रक्रिया क्या मादा को भी समान रूप से आनंदित करती है ।
उड़ान में सुविधा देते हैं ड्रेगन फ्लाई के पंख ड्रेगन फ्लाय को बच्च्े हेलिकॉप्टर कीड़े के नाम से भी जानते हैं। यह बिल्कुल हेलिकॉप्टर की तरह दिखता है । हाल ही में वैज्ञानिकों ने पाया कि इसकी उड़ान थोड़ी अनोखी है । इसके पंख लगभग पारदर्शी और काफी सख्त होते हैं । जॉर्ज वाशिंगटन विश्वविद्यालय के उड़ान इंजीनियर अबेल वर्गास और उनके सहयोगियों का विार है कि ड्रेगन फ्लाई के पंखों की अनोखी रचना उन्हें उड़ने मे विशेष सुविधा प्रदान करती है । दरअसल ड्रेगन फ्लाई के पंख ऐसे बिल्कुल नहीं दिखते कि वेउड़ान के लिए ज़रूरी स्ट्रीमलाइन्ड सांचे में ढले हैं जिसका उपयोग हवाईजहाज उद्योग बरसों से करता आ रहा है । ड्रेगन फ्लाई के पंख कोरूगेटेड होते हैं यानी इन पर उभरी हुई धारियां होती हैं । इन्हीं धारियों की वजह से इन पंखों को लंबाई में बिल्कुल मोड़ा नहीं जा सकता । यह बात को काफी समय से पता थी मगर यह किसी ने नहीं सोचा था कि इस तरह की रचना से उड़ान में क्या मदद मिलती होगी । यही पता करने के लिए अबेल वर्गास व साथियों ने ड्रेगन फ्लाई ईश्चना साएनिया के मॉडल तैयार किए । ये मॉडल कम्प्यूटर मॉडल थे । इन मॉडल्स को तरल गति साइमुलेटर में उड़ाया गया । यह एक ऐसा उपकरण होता है जिसमें तरल पदार्थोंा की गति की अनुकृति बनाई जा सकती है । ऐसा करने पर उन्होंने देखा कि ड्रेगन फ्लाई के पंख की धारियां उसे बढ़िया उठाव यानी लिफ्ट प्रदान करती हैं । आम तौर पर ग्लाइडिंग उड़ान भरते समय इतना उठाव नहीं मिलता । इन धारियों वाले पंखों में जितन उठाव मिलता है वह सामान्य स्ट्रीमलाइन्ड पंखों से भी बेहतर पाया गया। वर्गास का मत है कि इसका कारण यह है कि जब हवा इन पंखों पर गुजरती है , तो वह धारियों के बीच धंसे हुए हिस्सों में बहती है । इसका परिणाम यह होता है कि न्यूनतम ड्रेग वाले हिस्से बन जाते हैं जो उठाव को बढ़ावा देते हैं । ड्रेग वह बल है जो चीज़ों को पीछे की ओर धकेलता है । इस खोज से शोधकर्ता इतने उत्साहित है कि उनका कहना है कि छोटे साईज़ (यानी हाथ की साईज़) के टोही विमानों में इस तरह की संरचना का उपयोग करके उनकी उड़ान क्षमता बढ़ाई जा सकती है और उन्हें अधिक शक्तिशाली भी बनाया जा सकता है । ***
पर्यावरण सही
ए.बी.सिंह
पर्यावरण सही रहे, दुख कम हो तत्काल ।सुख से कटती जिन्दगी, ऐसे सालों साल ।।जब तक रहता सन्तुलन , प्रकृति दे सके साथ।पर्यावरण बिगाड़ कर , नहीं कटाओ हाथ ।।जीव जन्तु पलते रहें, पेड़ रहें हर ओर ।पर्यावरण तभी सही, जाये कोई छोर ।।पर्यावरण अगर सही, अच्छी हो बरसात ।दिन अच्छा कटने लगे, बीते अच्छी रात ।।धरती अच्छी दिख सके, जल रोके हर ओर ।पर्यावरण भला बने, मन में बढ़ता जोर ।।पर्यावरण जहां सही, बसते जा कर लोग ।उसी जगह जा कर लगे, मेला चलता भोर ।।रोग भगाने के लिये, रखो स्वच्छता ध्यान ।पर्यावरण सही रहे ,नहीं पड़े व्यवधान ।।पर्यावरण सभी तरह, यह देता है ज्ञान ।इसका जब नुकसान हो, सब का हो नुकसान ।।जहां जीव जल वन रहें, जीवों की भरमार ।पर्यावरण समझ सही, सब का जीवन पार ।।पर्यावरण सही रहे, अगर लगाओ पेड़ ।ऐसा होना चाहिये, हर खेतों की मेड़ ।।पर्यावरण सही अगर, प्रकृति न हो नाराज ।नहीं सुनामी का कभी, आ सकता तब राज ।।सब का तब अच्छा रहे, जग आचार विचार ।जब अच्छा पर्यावरण, हो अच्छी बौछार ।।सामाजिक जब चेतना, सब का हो तब ध्यान ।तब जग पर्यावरण की, राह सही आसान ।।परत सदा रखना सही, जो रहती ओजोन ।गलत जहां पर्यावरण, इसे बचाये कौन ।।शुद्ध मिले पानी हवा, घर का हो आटा दाल ।नहीं दिखावे में कभी , हरियाली को काट ।।
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गुजरात विद्यापीठ
गुजरात विद्यापीठ की स्थापना महात्मा गांधी ने १८ अक्टूबर सन् १९२० में की थी। यह गुजरात के अहमदाबाद नगर में स्थित है। इसकी स्थापना का उद्देश्य भारतीय युवकों को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त कराना था। गंधीजी इस बात को अच्छी तरह समझते थे कि मैकाले द्वारा रची गयी ब्रिटेन की औपनिवेशिक शिक्षा नीति का उद्देश्य दमनकारी ब्रिटिश साम्राज्य के लिये मानव संसाधन (क्लर्क?) तैयार करना है। उस शिक्षा नीति के विरुद्ध गांधीजी ने राष्ट्रीय पुनर्निर्माण व हिन्द स्वराज के लिये युवकों को तैयार करने के उद्देश्य से इस विद्यापीठ की स्थापना की।
सन् १९६३ में भारत सरकार ने इसे मानद विश्वविद्यालय का दर्जा दिया।
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तेज गेंदबाज अशोक डिंडा की शानदार गेंदबाजी की बदौलत भारत 'ए' ने यहां दूसरे और अंतिम टी-20 क्रिकेट मैच में वन ओवर एलिमिनेटर में वेस्टइंडीज 'ए' को हराकर दो मैचों की श्रृंखला 1-1 से बराबर कर दी।
टॉस हारकर बल्लेबाजी करने उतरे भारत ने 154 रन का स्कोर खड़ा किया था जिसके बाद मेजबान टीम मैच को टाई कराने में सफल रही। मैच के नतीजे के लिए वन ओवर एलिमिनेटर का सहारा लिया गया, जिसमें डिंडा के रन आउट निर्णायक साबित हुए।
वेस्टइंडीज ने एलिमिनिटेर में पांच गेंद में अपने दोनों विकेट खोकर चार रन बनाए जिसके जवाब में भारत 'ए' ने आसानी से तीन गेंद में सात रन बनाकर मैच जीत लिया। सुलेमान बेन ने इस दौरान दो वाइड भी फेंकी।
इस जीत के साथ भारत ए ने दो मैचों की श्रृंखला बराबर कर दी। इससे पहले मेहमान टीम को शनिवार को तीन विकेट से हार का सामना करना पड़ा था।
इससे पहले दौरे पर अब तक अच्छी शुरुआत पाने को विफल रहे भारत 'ए' की ओर से शिखर धवन (33) और अजिंक्य रहाणे (79) ने पहले विकेट के लिए 61 रन जोड़े। गैरी मथुरिन ने धवन को कीरन पावेल के हाथों कैच कराके भारत को पहला झटका दिया।
इसके बाद भारतीय बल्लेबाजी क्रम चरमरा गया। रहाणे ने हालांकि एक छोर संभाले रखा। उन्होंने 63 गेंद की अपनी पारी में चार चौके और एक छक्का मारा। भारत ए ने मध्यक्रम के नाकाम रहने के बाद 20 ओवर में पांच विकेट पर 154 रन बनाए।
लक्ष्य का पीछा करने उतरे वेस्टइंडीज 'ए' को एनक्रुमाह बोनेर (82) और पावेल (34) ने 72 रन जोड़कर शानदार शुरुआत दिलाई। पावेल के रन आउट होने से यह साझेदारी टूटी। उन्होंने 27 गेंद की अपनी पारी में दो चौके और एक छक्का मारा।
वेस्टइंडीज का मध्यक्रम भी विफल रहा लेकिन बोनेर ने टीम को संभाला। उन्होंने 65 गेंद का सामना करते हुए चार चौके और दो छक्के मारे। मैच टाई होने के बाद भारत ने एलिमिनेटर ओवर में डिंडा को गेंदबाजी सौंपी, जिन्होंने चार ओवर में 23 रन देकर एक विकेट चटकाया था।
डिंडा ने जोनाथन कार्टर और बोनेर दोनों को रन आउट किया। वेस्टइंडीज 'ए' की टीम सिर्फ चार रन ही बना सकी। पांच रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरे भारत ने पहली गेंद पर ही रोहित शर्मा का विकेट गंवा दिया लेकिन बेन की दो वाइड और धवन के चौके की मदद से मेहमान टीम ने आसानी से जीत दर्ज कर ली। (भाषा)
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लेखिका – नेहा वर्मा
सहयोगी – जो हंटर
शाम को जो ने सभी को जगाया और कॉफी पिलायी। समय देखा तो ५ बज रहे थे। हम सभी फ्रेश हो गये थे सो अब बीच पर दुबारा पहुँच गये। सभी ने स्वीमिंग सूट पहन लिए थे। मैं और लता कम कपडों में थी उसका फ़ायदा जो और विक्रम दोनों ही उठा रहे थे। जो तो पहले से ही मुझ पर मरता था। पर दिखाता ऐसे था कि जैसे सिर्फ़ दोस्त ही हो। वो मेरे शरीर के एक-एक अंग का भरपूर जायज़ा लेता था। मैं भी कपड़े ऐसे ही पहनती थी जिसमें जो मेरे उभार, कटाव और गहराईयों को नाप सके। आज फिर उसे मौका मिल गया। विक्रम और लता तो लहरों में खेलने लगे और मेरा पार्टनर जो बन गया। आज हम कुछ ज्यादा ही मस्ती कर रहे थे। एक दूसरे को छेड़ भी रहे थे। कुँवारेपन का मजा बहुत ही रोमांटिक होता है।
लहरें बढ़ने लगी थी… पानी का उछाल भी बढ़ रहा था। आकाश भी बादलों से ढक गया था। सुरक्षा गार्ड ने आगाह कर दिया कि अब बीच छोड़ दो… शाम ढलने लगी थी। हमने वापस लौटने का विचार किया। बादल चढ़ आए थे, किसी भी वक्त पानी बरस सकता था। हम लोग जल्दी से सामने वाले होटल में पहुँचने की कोशिश करने लगे। बूँदा-बाँदी शुरू हो चुकी थी… होटल में पहुँचते ही बरसात तेज़ होने लगी। जो ने कहा कि बरसात बन्द हो तब तक सभी लोग खाना खा लेते हैं। हमें जो का सुझाव पसन्द आया। डिनर करके जो ने बाहर का जायज़ा लिया तो बरसात तेज़ हो रही थी। होटल के मालिक ने जो को चाबी ला कर दे दी और कुछ समझाया।
जो ने कहा,”आज तो यहीं सोना पड़ेगा। रास्ता भी बन्द हो गया है…
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जर्मनी में बंधक बनाने वाले समेत पांच लोगों के शव बरामद
पुलिस प्रवक्ता जुएर्गन शेफर ने बताया कि यह बंधक संकट सुबह नौ बजे कार्ल्सरुहे स्थित एक इमारत में शुरू हुआ और दोपहर बाद सबसे ऊपरी फ्लैट से धुंआ आने के बाद कमांडो दल वहां दाखिल हुआ।
इमारत के अंदर पुलिस को पांच शव मिले, जिनमें संदिग्ध हमलावर के शव के अलावा अदालत के अमीन, एक महिला और मरम्मत करने वाले व्यक्ति के शव शामिल हैं।
ये लोग इस व्यक्ति की ओर से किराया नहीं दिए जाने के बाद उससे फ्लैट खाली कराने गए थे, जब गोलीबारी हुई।
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Surabaya Center में अच्छी जगह स्थित Hotel Keluarga Djagalan Raya सुरबाया में आपके भ्रमण के लिए एक प्रस्थान का एक आदर्श बिंदु है। यहाँ से, अतिथि शहर के उन सभी स्थानों पर आसानी से जा सकते हैं जो इस जीवंत शहर के पास हैं। इस आधुनिक होटल Semut Train Station, Pasar Atom, Taman Remaja Surabaya (THR) जैसे लोकप्रिय शहर आकर्षणों के पास है।
Hotel Keluarga Djagalan Raya द्वारा प्रदान की जाने वाली सुविधाएँ और सेवाएँ अतिथियों को एक सुखद प्रवास देती है। इस सुंदर स्थान पर ठहरते समय, अतिथि लाँड्री सेवा/ड्राई क्लीनिंग, रेस्टोरेंट, कक्ष सेवा, 24 घंटे कक्ष सेवा, होटल/हवाई अड्डा स्थानांतरण का आनंद ले सकते हैं।
सभी अतिथि प्रवास ऐसी शानदार सुविधाएँ देते हैं जो और कहीं नहीं मिलने वाले आराम का अनुभव देती हैं। इसके अलावा, होटल में मनोरंजन की कई सुविधाएँ हैं जो यह सुनिश्चित करता है कि आपके प्रवास के दौरान आपके पास करने के लिए बहुत सारी चीज़ें हो। Hotel Keluarga Djagalan Raya सुरबाया की यात्रा करने वालों के लिए एक स्मार्ट विकल्प है, जो हर बार आरामदेह और चिंतामुक्त प्रवास देता है।
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रीटेल रेंटल ग्रोथ में मुंबई अव्वल
मुंबई में रीटेल किराए में बढ़ोतरी पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा रही। प्रॉपर्टी कंसल्टेंट कुशमैन ऐंड वेकफील्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, शहर के कोलाबा कॉजवे में पिछले साल किराए में 75 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई। रीटेल रेंट में बढ़ोतरी में कोलकाता का पार्क स्ट्रीट और चेन्नई का खदेर नवाज खान रोड क्रमश: 5वें और 10वें स्थान पर रहा। 'टॉप 10-ग्लोबल हाईएस्ट रीटेल रेंटल ग्रोथ मार्केट्स 2012' नाम की इस रिपोर्ट में दुनिया के टॉप 10 रेंटल ग्रोथ वाले मार्केट का जिक्र है। रिपोर्ट के मुताबिक, खान मार्केट ने देश के सबसे महंगे मार्केट के तौर पर अपना स्थान बरकरार रखा है। हालांकि, ग्लोबल स्तर पर इसकी रैंकिंग 21 से घटकर 26 हो गई है।
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हम अक्सर मूर्ख विकल्प यद्यपि हम बेहतर पता होना चाहिए. तड़ित झंझा बुरी बात यह काला कर क्षितिज बादलों. हम फिर भी एक छतरी के बिना बाहर जाने की वजह से हम विचलित हैं और भूल जाते हैं. लेकिन हम करते हैं? पर Neurobiologists सॉल्क इंस्टीट्यूट ऑफ बायोलॉजिकल अध्ययन के लिए बाहर किए गए प्रयोगों है कि पहली बार है कि मस्तिष्क याद के लिए साबित भी अगर हम नहीं और छाता के पीछे रहता है. वे के अक्तूबर 20 वीं के अंक में अपने निष्कर्षों को रिपोर्ट न्यूरॉन .
"पहली बार के लिए, हम, एक रीसस बंदर के मस्तिष्क गतिविधि पर एक नज़र है और अनुमान जानवर क्या जानता है सकते हैं" नेतृत्व अन्वेषक थॉमस डी. अलब्राइट, विजन केंद्र प्रयोगशाला के निदेशक कहते हैं.
पहले लेखक एडम Messinger, अलब्राइट प्रयोगशाला में एक पूर्व स्नातक छात्र और अब बेथेस्डा में मानसिक स्वास्थ्य के राष्ट्रीय संस्थान में एक के बाद डॉक्टरेट शोधकर्ता, मोहम्मद अचेतन ज्ञान तुलना. यह वहाँ है, भले ही हमारी चेतना में प्रवेश नहीं करता है.
"तुम्हें पता है कि आप अपने काम सहयोगी की पत्नी से मुलाकात की है, लेकिन आप उसका चेहरा याद नहीं कर सकते," उन्होंने एक उदाहरण के रूप में देता है.
मानव स्मृति संघ पर ज्यादातर निर्भर करता है, जब हम जानकारी पुनः प्राप्त करने की कोशिश, एक बात हमें दूसरे की याद दिलाता है, जो हमें अभी तक एक और याद दिलाता है, और इतने पर. स्वाभाविक रूप से, neurobiologists कैसे साहचर्य स्मृति काम करता है समझने की कोशिश कर रहा में प्रयास के एक बहुत डाल रहे हैं.
एक साहचर्य स्मृति का अध्ययन करने के लिए रीसस बंदरों को प्रशिक्षित करने के लिए प्रतीकों के मनमाने ढंग से जोड़े याद है. (यानी काले बादलों) पहली प्रतीक दिखाया जा रहा है के बाद वे दो प्रतीकों, जिसमें से वे एक है कि प्रारंभिक क्यू (यानी छाता) के साथ संबद्ध किया गया है लेने के साथ प्रस्तुत कर रहे हैं. इनाम अपने पसंदीदा फलों का रस का एक घूंट है.
"हम बंदरों को पूरी तरह से इन परीक्षणों पर व्यवहार करने के लिए चाहते हैं, लेकिन उनमें से एक त्रुटियों की एक बहुत कुछ किया है" अलब्राइट याद करते हैं. "हमने सोचा कि क्या मस्तिष्क में हुआ जब बंदरों गलत चुनाव किया, हालांकि वे जाहिरा तौर पर प्रतीकों के सही बाँधना सीखा था."
तो, जबकि बंदरों को संघों को याद करने की कोशिश की और उनके त्रुटि प्रवण विकल्प बनाया है, वैज्ञानिकों ने मस्तिष्क के एक विशेष क्षेत्र में तंत्रिका कोशिकाओं से संकेत मनाया "अवर टेम्पोरल प्रांतस्था" (आईटीसी) कहा जाता है. इस क्षेत्र दृश्य पैटर्न मान्यता के लिए और स्मृति के इस प्रकार के भंडारण के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है.
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PICS: 857 साल की हुई स्वर्ण नगरी, जानिए कैसे बुलंदियों तक पहुंचा शहर
बुलंदियों को छू रहा है हमारा जैसलमेर
मैं आज (30 जुलाई 2012 ) 857 साल का हो गया हूं..। इन वर्षो में मैंने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। कदम-कदम पर चुनौतियां मिली, मगर मेरे अपने साथ थे जिसके चलते मेरी हमेशा जीत हुई। मेरी प्राचीनता, ऐतिहासिकता व सुंदरता को देखने सात समंदर पार से लाखों सैलानी आ चुके हैं। जैसे आपके पूर्वज मेरा ख्याल रखते थे वैसा आज की पीढ़ी नहीं रख रही है। जहां एक तरफ मैंने पर्यटन मानचित्र पर अपना स्थान बनाया है वहीं दूसरी ओर विकास की राह पर भी दौड़ रहा हूं। मुझे आप लोगों का सहयोग हमेशा ही मिले, इसी उम्मीद के साथ आगे बढ़ता रहूंगा।
अगली तस्वीर>कब-कब जैसलमेर में क्या आया
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एयरलाइंस सेक्टर में कभी नहीं उतरेगा टाटा ग्रुप: रतन टाटा
Agency | Dec 10, 2012, 16:36PM IST
भारत में कभी नागर विमानन सेवा की शुरुआत करने वाले टाटा समूह के निवर्तमान चेयरमैन रतन टाटा ने रविवार को संकेत दिया कि उनका समूह इस क्षेत्र में दोबारा शायद ही कदम रखे क्योंकि इस क्षेत्र में ‘विनाशकारी प्रतिस्पर्धा’ घर कर गयी है।
टाटा समूह की ओर से 1990 के दशक के मध्य में भारत में सिंगापुर इंटरनेशनल एयरलाइंस (एसआईए) के साथ मिल कर एयरलाइन शुरू करने के प्रस्ताव को याद करते हुए टाटा ने कहा, ‘उस समय की तुलना में आज यह क्षेत्र पूरी तरह अलग है।’
टाटा ने कहा, ‘यह बहुत कुछ दूरसंचार क्षेत्र की तरह बन गया है. इसमें कंपननियों की बाढ़ आ गयी और इनमें से कुछ ऑपरेटर वित्तीय संकट में हैं। आज की तारीख में मैं इस क्षेत्र में कदम रखने से हिचकूंगा, क्योंकि इस बात की संभावना रहेगी कि आपको इसमें बहुत हद तक ऐसी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा जो अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा होगी।’ यह पूछे जाने पर कि क्या वह ‘गला काट’ प्रतिस्पर्धा को लेकर चिंतित हैं, तो टाटा ने इसका न में जवाब दिया पर कहा, ‘गलाकाट प्रतिस्पर्धा आपको बाहर रखने के लिए हो तो वह विनाशकारी प्रतिस्पर्धा है।’
उन्होंने कहा, ‘विदेशों में लोग या कंपनियां दिवालिया हो जाती हैं। यहां वे ऐसा नहीं करते, बदहाल होने के बावजूद वे परिचालन करते रहते हैं। उसके बाद वे आपको खत्म करने के लिए परिचालन कर रहे हैं।’ इंटरव्यू के दौरान टाटा से जब यह पूछा गया कि क्या यह सही है कि किसी ने टाटा-सिंगापुर एयरलाइन के प्रस्ताव को मंजूर करने के लिए उनसे 15 करोड़ रुपये की रिश्वत की मांग की थी। इस पर टाटा ने कहा कि यह कहानी सही है, लेकिन उस समय के नागर विमानन मंत्री ने सीधे उनसे यह राशि नहीं मांगी थी।
टाटा ने कहा, ‘एक कारोबारी ने मुझसे कहा था कि आप पैसा क्यों नहीं दे देते हैं। मंत्री यही चाहते हैं’ कारोबारी को इस पर उन्होंने क्या जवाब दिया था, इस पर टाटा ने कहा, ‘मैंने उनसे कहा कि आप नहीं समझते हैं। हम इस तरह का काम नहीं करते हैं। उन्होंने मुझसे यही कहा था कि यदि आप एयरलाइन शुरू करना चाहते हैं तो आपको पैसा देना होगा। आप जानते हैं कि मंत्री यह चाहते हैं..15 करोड़ रुपये।’
टाटा ने कहा कि 1991 में समूह का चेयरमैन बनने के बाद उन्होंने रणनीतिक योजना बनाई थी। इसके तहत उनकी निगाह विमानन तथा रक्षा जैसे नए क्षेत्रों पर थी जिनमें निजी क्षेत्र बड़े तरीके से प्रवेश कर सकता है।
उन्होंने कहा, ‘तथ्य यह है कि कई वर्षों तक हम पर कई तरह के प्रतिबंध लगे थे और प्रौद्योगिकी नहीं मिल पा रही थी यह अपने आप में बड़ी चुनौती थी।’ लेकिन यह चुनौती देश के निजी क्षेत्र के सामने कभी नहीं रखी गयी जो ‘मेरे लिए कुछ निराशा की बात है।’
टाटा ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र और सरकारी प्रयोगशालाओं के निहित स्वार्थी तत्व इन क्षेत्रों में निजी कंपनियों का प्रवेश नहीं होने देना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि यही वजह है कि आज इन क्षेत्रों को खोल तो दिया गया पर अब भी इनमें निजी क्षेत्र की भागीदारी काफी सीमित है।
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PICS : इन 13 बेहतरीन चीजों का रहेगा नए साल में इंतजार
साइबर टेररिज्म
जीवन में कनेक्टिविटी के बढ़ते महत्व को देखते हुए इसमें कोई संदेह नहीं कि साइबर टेररिज्म भी बढ़ेगा। स्टक्सनेट और डेनियल ऑफ सर्विसेज जैसे वायरस के वेबसाइट्स पर हुए हमले ने इस तरह के खतरों का आभास करा दिया है। कोई देश, व्यवसाय या समुदाय इनकी सीमा से बाहर नहीं है। अंतरराष्ट्रीय समझौते की कमी ने इनके खतरे को और व्यापक बना दिया है। नए साल में नीति निर्माताओं के एजेंडे में यह जरूर शामिल रहेगा।
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WAR VIDEO: गोली लगने के बाद मिनटों तक चिल्लाता रहे अमेरिकी फौजी
Dainikbhaskar.com | Sep 29, 2012, 13:19PM IST
यह वीडियो यूट्यूब पर 26 सितंबर को पोस्ट किया गया। वीडियो स्वंय घायल सैनिक ने अपने हेलमेट कैमरा से बनाया था। वीडियो को अब तक लगभग 25 लाख बार देखा जा चुका है और इस पर 22 हजार से अधिक प्रतिक्रियाएं आईं हैं। यह वीडियो यूट्यूब पर ट्रेंड्स में भी शामिल है।
अफगानिस्तान के कुनार प्रांत में खुफिया जानकारी इकट्ठा कर रहे अमेरिकी सैनिक तालिबान फायरिंग की चपेट में आ गए। इस सैनिक को कई गोलियां लगी लेकिन कोई भी उसके द्वारा पहने गए रक्षा कवच को नहीं भेद सकी और वो सकुशल वापस अपने बेस पहुंच गया।
सैनिक के मुताबिक उसे कुल चार गोलियां लगी लेकिन कोई भी उसके रक्षा कवच को नहीं भेद सकी।
वीडियो में साफ दिख रहा है कि गोली लगने के बाद सैनिक जोर-जोर से चिल्ला कर कह रहा है- आई एम हर्ट, आई एम हर्ट (मैं घायल हो गया हूं, मैं घायल हो गया हूं)
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16 अगस्त 2012
in.com
सौम्यदीप्त बनर्जी
फिल्म: एक था टाइगर’
कलाकार: सलमान खान, कैटरीना कैफ, गिरीश कर्नाड, रणवीर शौरी
निर्देशक: कबीर खान
पिछले कुछ सालों में सलमान खान का कद बॉलीवुड में तेजी से बढ़ा है और इसके साथ ही उनके चाहनेवालों की तादाद भी काफी बढ़ी है। जब-जब सलमान खान फ्रेम में नजर आते हैं, फिल्म पैसा वसूल बन जाती है। फिर चाहे वे कॉमेडी कर रहे हो, या दुश्मनों की धुनाई कर रहे हों।
इस हफ्ते सलमान, कैटरीना कैफ की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'एक था टाइगर' प्रदर्शित हुई है।
फिल्म रेडी में सलमान साबित कर चुके हैं कि वे एक बुरी और कमजोर फिल्म को भी अपने कंधे पर उठा सकते हैं। लेकिन खुशी की बात यह है कि फिल्म 'एक था टाइगर' रेडी की तरह कमजोर फिल्म नहीं है।
सलमान खान ने एक रॉ एजेंट की भूमिका निभाई है, जिसका कोड-नाम टाइगर है। पिछले बारह सालों से उसने छुट्टी नहीं मनाई है और वह एक इंटरनेशनल असाइनमेंट से दूसरे में व्यस्त रहा है। गोपी (रनवीर शौरी) उसका सहायक है। दोनों जासूसों को एक भारतीय मिसाइल वैज्ञानिक का पता लगाने डब्लिन भेजा जाता है, जो अब एक यूनिवर्सिटी प्रोफेसर है। उनके घर में एक लड़की (कैटरीना कैफ) अक्सर नजर आती है। कैटरीना पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई से खुफिया तौर पर जुड़ी हुई हैं।
अगर आप सलमान के फैन है, तो यह फैन आपको निराश नहीं करेगी। हमारा मतलब है कि फिल्म में ऐसा कोई सीन नहीं है, जहां आपको सलमान की याद आएगी। वो हर जगह छाए हुए हैं। ऐसा लगता है कि कबीर खान को पता था कि उन्हें अगर फिल्म बेचनी है, तो सिर्फ एक ही आदमी है, जो यह कर सकता है। जब आपको लगता है कि फिल्म अब कैटरीना के इर्द-गिर्द घूमेगी, या फिल्म में कुछ नया होगा, सलमान वापस आ जाते हैं।
एक्शन सींस में सलमान पहले से धीमे हैं, लेकिन तकनीक तेज हो गई है। कई दृश्यों में सलमान के डुप्लीकेट का इस्तेमाल किया गया है। लेकिन यह काम इतना सफाई से किया गया है कि लगता नहीं कि इन दृश्यों में सलमान खान मौजूद नहीं हैं।
सलमान के रहते हुए भी कैटरीना की खूबसूरती ध्यान खींच लेती है। कबीर खान ने प्लॉट को इस खूबसूरती से तैयार किया है कि जहां-जहां सलमान है, वहां-वहां कैटरीना भी नजर आती हैं।
अगर आप सलमान के फैन है, तो यह फिल्म आपको निराश नहीं करेगी।
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पाठकों की राय
26 मई 2013
Aug 23, 2012
"EK THA TIGER" movie wud rock the box office,wid more than 200 crores profit,,salman is the only actor to rock diz boxoffice his d one man army,,every youngster loves to watch him..nd his film...
AKSHAY SUNIL RAIKWAR NAVI MUMBAI
Aug 23, 2012
. . . . 200 करोड़से जाड़ा बिजनेस करेगी क्योंकि टायगर सब तरफ च्चाए हुआ है सलमान को दर्शक जाड़ा पसांत करते है
Sunil Raikwar Navi Mumbai
Aug 22, 2012
हमारी राय है सलमान की ‘एक था टाइगर’ 200 करोड़ कमा पाएगी? ओक
gulfam saifi delhi
Aug 16, 2012
गुड मूवी फेमिली के साथ देखी जा सकती है! टेक्नीक, फोटोग्राफी द बेस्ट!
DINESH DELHI
Aug 16, 2012
Yuvraj movie much better for this movie, nothing is special, full bakwas movie ;ek tha tiger
Mann Delhi
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ऋतिक को फिर किस करेंगी कैटरीना
ऋतिक रोशन और कैटरीना कैफ एक बार फिर ऑनस्क्रीन किस से बड़े परदे पर आग लगते नजर आयेंगे। यह दोनों फिल्म 'नाइट एंड डे' के हिंदी एडाप्टेशन में एक बार फिर लिप लॉक करते नजर आएंगे।
दोनों एक्टर्स को इस बारे में बता दिया गया है और वह इसके लिए हामी भर चुके हैं। इससे पहले दोनों 'ज़िन्दगी न मिलेगी दोबारा' में भी एक जबरदस्त किसिंग सीन देकर सबको चौंका चुके हैं।
एक सूत्र की माने तो इस रीमेक कैट कैमरन डियाज़ और ऋतिक टॉम क्रूज की भूमिका में नजर आएंगे। दोनों का लुक बेहद स्टाइलिश और सेक्सी होगा और इसके लिए दोनों के ड्रेसेस विदेश से डिज़ाइन करवाए जाएंगे।
कैट ने हाल ही में फिल्म 'जब तक है जान' में शाहरुख़ खान के साथ किसिंग सीन दिया था।वहीं ऋतिक 'धूम 2' में ऐश्वर्या सहित कई अन्य एक्ट्रेसेस के साथ किसिंग सीन दे चुके हैं।
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इन्वेस्टमेंट के लिए प्रॉपर्टी चुनने में मुझे किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
इन्वेस्टमेंट के लिए प्रॉपर्टी चुनने में मुझे किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? इसके लिए प्रॉपर्टी की लोकेशन, इलाके या शहर में अप्रिसिएशन का ट्रैक रिकॉर्ड, भविष्य में सप्लाई की स्थिति और इन्वेस्टमेंट के लिए मौजूद फंड जैसी बातों पर सबसे पहले ध्यान देना चाहिए। इसके अलावा इलाके में सेल या रेंटिंग के लिए उपलब्ध स्पेस भी देखा जाना चाहिए। इनसे प्रॉपर्टी पर रिटर्न तय होता है। गुड़गांव के कौन से सेक्टर्स आने वाले वर्षों में अच्छा कर सकते हैं और क्यों? द्वारका एक्सप्रेसवे और सेक्टर 77, 78 और 79 के अच्छा परफॉर्म करने की उम्मीद है। इसकी वजह सदर्न पेरिफेरल रोड (एसपीआर), गोल्फ कोर्स रोड और एनएच-8 होगा। इन्वेस्टर्स के लिहाज से राज नगर एक्सटेंशन कैसा है? यहां पिछले कुछ समय में कीमतें कितनी बढ़ी हैं?
राज नगर एक्सटेंशन इन्वेस्टमेंट के नजरिए से काफी अच्छा है। यहां रिटर्न बहुत अच्छा मिलेगा क्योंकि मौजूदा डिमांड के मुकाबले में सप्लाई कम है। कीमतों में बढ़ोतरी प्रॉजक्ट्स में 70-80 फीसदी बिक्री होने के बाद ही होगा, जो अगले 2-3 वर्षों में हो सकती है। ऐसा कहा जाता है कि जमीन की कीमत फ्लैट की तुलना में तेजी से बढ़ती है। रेजिडेंशल प्लॉट या अपार्टमेंट में से इन्वेस्टमेंट के लिए कौन सा ऑप्शन बेहतर है? जमीन की कीमत आमतौर पर तेजी से बढ़ती है। लेकिन नोएडा प्लांड शहरों में अपार्टमेंट के मामले में भी अच्छा रिटर्न मिला है क्योंकि यहां एंड यूजर्स की डिमांड बहुत ज्यादा है। मेट्रो शहरों में अपार्टमेंट्स अच्छा रिटर्न दे सकते हैं। अगर आपका बजट है तो हाइराइज प्रॉजेक्ट में इन्वेस्ट करें क्योंकि इसमें लिमिटेड इनवेंटरी होती है। नोएडा एक्सटेंशन का भविष्य कैसा है? इस समय यहां दाम नोएडा से कम हैं? क्या निकट भविष्य में ये नोएडा के बराबर पहुंच सकते हैं? नोएडा एक्सटेंशन में कीमतें नोएडा के लेवल पर पहुंचनी मुश्किल हैं लेकिन इनमें बढ़ोतरी जारी रहेगी। नोएडा के मुकाबले नोएडा एक्सटेंशन 15-20 फीसदी सस्ता होगा क्योंकि यह पूरा इलाका अफोर्डेबल हाउज़िंग सेगमेंट के लिए प्लान किया गया है। यहां रिटर्न अच्छा मिलेगा और फ्लैट बेचने में दिक्कत नहीं होगी। क्या भविष्य में हाइराइज बिल्डिंग्स को लेकर चाहत बढ़ेगी? हाइराइज प्रॉजेक्ट्स की आने वाले समय में अच्छी डिमांड रहेगी क्योंकि जमीन लगातार कम होती जा रही है। मेट्रो शहरों में विशेषतौर पर जमीन की काफी कमी है। हाइराइज में स्पेस का ज्यादा इस्तेमाल होता है और इस वजह से सरकार भी आने वाले समय में ऐसे प्रॉजेक्ट्स को प्राथमिकता देगी। अधिक जानकारी के लिए आप magicbricks.com पर जा सकते हैं या advice@magicbricks पर मेल कर सकते हैं। डिसक्लेमर: दी गई सलाह, विचारों और सुझावों के लिए ईटी/एनबीटी जिम्मेदार नहीं होंगे। ऐसी सलाह, विचारों, सुझावों का इस्तेमाल सिर्फ रेफरेंस के लिए किया जाना चाहिए।
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|Balasaheb Thakre|
शिव सेना प्रमुख बाल ठाकरे ने समाजसेवी अन्ना हजारे के सहयोगियों किरन बेदी, अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया की आलोचना करते हुए इन्हें 'निर्थक एवं मतलबी लोगों के समूह' की संज्ञा दी।
ठाकरे ने कहा, ''वे मामूली कारणों से भूख हड़ताल पर चले जाते हैं। किसी की मांग करते हैं और उसे पूरा करने के लिए मजबूर करते हैं। यह 'राजनीतिक बलात्कार' के अलावा और कुछ नहीं। इस देश में यह क्या हो रहा है।''शिव सेना प्रमुख ने अन्ना पर हमला बोलते हुए उनके बहुप्रचारित लोकपाल विधेयक के विषय में जानना चाहा। ठाकरे ने पूछा कि क्या इस देश को लोकपाल विधेयक की जरूरत है। अन्ना के सहयोगियों पर ठाकरे ने कहा कि वे सरकार के साथ धोखा कर रहे हैं और शांति भूषण प्रकरण से यह सिद्ध भी हो गया।शिव सेना प्रमुख ने इन आंदोलनों का कारण केंद्र सरकार के मंत्रियों की शिथिलता को बताया। उन्होंने कहा, ''यह सब इसलिए हो रहा है क्योंकि केंद्र सरकार पंगु एवं कमजोर है। कौन हैं चिदम्बरम एवं एंटनी? क्या वे ऐसे उंचे पद के योग्य हैं।''ठाकरे ने कहा कि इन दिनों भूख हड़ताल पर बैठना कुछ लोगों के लिए फैशन हो गया। यह साक्षात्कार 23 जनवरी को ठाकरे के 86वें जन्म दिन के मद्देनजर लिया गया है।
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दिल्ली (ब्यूरो)। योगगुरु बाबा रामदेव दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान से जितना भी सरकार को धमकाने की कोशिश करें, चेतावनी दें पर सरकार उनसे डरने वाली नहीं है। सरकार की मंशा है कि वह जनलोकपाल और एसआईटी के गठन को लेकर जिस प्रकार से सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के आंदोलन को थका मारा उसी प्रकार से रामदेव के आंदोलन को भी थका दिया जाए जिससे वे बिना कुछ कहे ही मैदान छोड़ दें।
वैसे रामदेव के आंदोलन के रणनीतिकार भी इसी मौके की तलाश में हैं कि सरकार कोई रास्ता दे और वे आंदोलन की समाप्ति की घोषणा कर दे।
सूत्र बता रहे हैं कि रामदेव द्वारा बार बार धमकी और अपनी रणनीति के समय में परिवर्तन करने से वे अपने ही आंदोलन को कमजोर कर रहे हैं क्योंकि इससे सरकार में स्पष्ट संदेश जा रहा है कि बाबा रामदेव आंदोलन के मूड में नहीं हैं वे चाहते हैं कि एक रास्ता निकले और वे सम्मानीय तरीके से मैदान से धीरे से निकल जाएं।
सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस के प्रबंधकों ने सरकार को सलाह दी है कि अन्ना के आंदोलन की तरह ही रामदेव के आंदोलन को लंबा चलने दिया जाए जिससे लोग अपने धैर्य को खो दें औऱ मैदान में आना बंद कर दें जिससे रामदेव को अपने आप ही मैदान छोड़ देना पड़े औऱ यदि रामदेव अपने आंदोलन के अंतिम दिन सियासी जमीन खोजने की बात करते हैं तो सरकार की यह अपनी बड़ी जीत होगी।
यह इसलिये क्योंकि रामदेव के राजनीति में आने की घोषणा के साथ ही सरकार को यह प्रचार का मौका मिलेगा कि अन्ना की तरह ही रामदेव भी अपने आंदोलन के पीछे एक उद्देश्य लेकर चल रहे थे औऱ वह उद्देश्य राजनीतिक था। गौरतलब है कि बाबा रामदेव अपने आंदोलनों में हमेशा राजनीतिक दल के गठन की बात करते रहे हैं जिससे लोगों में संदेश जाता है कि रामदेव राजनीति में आना चाहते हैं।
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Wednesday, 13 July 2011
क्या यही डांस है...हाँ हाँ यही डांस है ....
मुझे नृत्य से बेहद लगाव है और इसलिए टीवी की शौकीन ना होने पर भी उस पर पर आने वाले नृत्य के रियलिटी कार्यक्रम मैं बड़े चाव से देखती हूँ ."नच बलिये" जैसे कार्यक्रमों में भारतीय नृत्य के अलावा सभी विदेशी और आधुनिक नृत्य शैली होने बाद भी वह डांस कार्यक्रम ही लगा करते थे.परन्तु
आजकल स्टार प्लस पर डांस का एक कार्यक्रम आ रहा है .जिसका उद्देश्य और नाम तो है " जस्ट डांस " पर उसमें सिर्फ डांस ही मुझे दिखाई नहीं पड़ता. नृत्य देसी हो या विदेशी भावों की, ताल की महत्ता होती है. हमने तो यही सुना था.परन्तु वहां हो रहे नृत्य को देखकर तो लगता है कि इनसे बेहतर वो रस्सी पर करतब दिखाने वाले होते हैं. उन्हें इस मंच पर ले आया जाये तो उस तबके की आर्थिक समस्या कम होने के साथ साथ उनकी कला और मेहनत को भी पहचान मिल जाये. जब अपने हाथ पैर तोड़ मोड़ कर, गर्दन में फंसाकर गुलाटी ही मारनी है नृत्य के नाम पर तो, फिर मदारी का वो जीव ही क्या बुरा है.कुछ बच्चे भी देख कर खुश हो लेंगे और उन्हें अपनी परम्पराओं से जुड़ने का भी मौका मिलेगा. या फिर इन प्रतियोगियों को ओलम्पिक सरीखी स्पर्धा के लिए भेजना और तैयार किया जाना चाहिए. जहाँ इनकी क्षमता और प्रतिभा का सही उपयोग हो और देश का भी कुछ फायदा हो. हमेशा अंडा मिलता है. शायद कुछ कुछ मैडल मिल जाएँ.
पर उस मंच पर गुलाटी या नटबाजी भी सबकी मान्य नहीं . यानि वह भी उसी की मान्य है जो ये सब आगे जाकर एफ्फोर्ड कर सके .किसी फल का ठेला लगाने वाले को या किसी ऐसी युवती को ये कला भी दिखाने का अधिकार नहीं जिसने ये कला विधिवत पैसे देकर ना सीखी हो.तो उनके तो निर्णायक महोदय एक टोकरी आम भी खा जाते हैं, और एक सलाम देकर चलता करते हैं. कि भैया तुम्हें दो बार इस मंच पर गुलाटी मारने का मौका दिया बस बहुत है तुम्हारे लिए. अब जाओ जाकर आम बेचो, सब मॉडर्न नर्तक बन जायेंगे तो हमें कौन पूछेगा .
ऐसी बात नहीं कि हमें विदेशी नृत्य कला से कोई दुश्मनी है.हालाँकि मैं ना तो नृत्य की ज्ञानी हूँ , ना कोई बिधिवत शिक्षा ही ली है. हाँ देश और विदेश में टैप से लेकर सालसा और लातिन से लेकर ,बेले और रूसी लोक नृत्य तक हर स्तर पर देखें जरुर हैं.माना कि हमारी भारतीय शैली में एक एक शब्द और भाव को नृत्य में अपनी भंगिमाओं से दर्शाने की जो अद्भुत शैली होती है उतनी वहां नहीं है .फिर भी सबमें लय, ताल, और संगीत के स्वरों पर किस नजाकत और प्राभावी ढंग से थिरक कर दर्शकों की रूह तक सन्देश पहुँचाया जाता है मुख्यत: इसी भाव की महत्ता देखी जाती है. फ्यूजन के नाम पर एक धीमी गति के संगीत पर जिमनास्ट करते हुए जमीं पर लुढ़कने को नृत्य कहा जाये ऐसा तो कभी नहीं देखा. अरे जब यही सब करना है तो हिंदी गीत के शब्द क्यों खराब करने? किसी भी संगीत पर उछल लो.इस मंच पर हो रहे नृत्य से गीत के एक भी शब्द का कोई लेना देना नहीं होता.
यहाँ तक कि "कभी कभी" की बेहद संजीदा शायरी रूप पर भी बिना उसके शब्दों को किसी भी रूप में भावों या मुद्राओं से दर्शाए हुए, बस हाथ पैर टेड़े करके उछल कूद की जाती है.अब इसमें नृत्य की कौन सी कला देखी गई पता नहीं. ओडिसी जैसी नाजुक नृत्यकला में फ्यूजन के नाम पर बेल्ली डांस किया जाता है. और फिर उसे उत्कृष्ट नृत्य के शैली में रखकर कहा जाता है कि हाँ हमें यही तो चाहिए .एक ऐसा कलाकार जो कुछ भी कर सके.कहीं भी फिट हो सके. पर वहीँ एक सधे हुए शुद्ध नर्तक को यह कह कर चलता कर दिया जाता है कि आप में वर्साटीलिटी नहीं है. अब हो सकता है निर्णायकों को नर्तक के साथ साथ कोई ऐसा भी चाहिए हो जो जिसे यदि जनता नर्तक मानने से इंकार कर दे तो बेचारा कम से कम नटबाजी करके अपनी रोटी कमा सके.
यूँ ज़माना खिचडी का ही है आजकल. हर चीज़ में मिलावट है.संगीत में मिलावट, लिबास में मिलावट, भाषा में मिलावट, खाने में मिलावट, यहाँ तक कि योग साधना में भी मिलावट तो नृत्य कैसे अछूता रहे .और फिर निर्णायक मंडल बड़े ,कुशल, व्यावसायिक ,सफल, और गुणी लोग होते हैं. वह किस चीज़ में "वाओ फेक्टर" ढूंढेंगे हम क्या कह सकते हैं . अपनी तो यूँ भी यह आदत है कि हम कुछ नहीं कहते:)
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व्यवसाय और विश्राम दोनों तरह की यात्राओं के लिए उपयुक्त, The Gabriella Bed and Breakfast आदर्श रूप से Tagbilaran City में स्थित है; जो शहर का एक सर्वाधिक लोकप्रिय स्थान है। शहर के केंद्र से केवल 2.5 Km दूर स्थित होने के कारण अतिथि कस्बे के आकर्षणों और गतिविधियों का आनंद लेने के लिए बहुत अच्छी जगह होते हैं। और आपमें से जिन्हें बाहर घूमना पसंद है, Island City Mall, Mag aso Falls, Bohol Museum वे कुछ आकर्षण हैं जो आगंतुकों को उपलब्ध हैं।
अतिथियों को श्रेष्ठ सेवाएँ और कई सुविधाएँ देने वाली The Gabriella Bed and Breakfast यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि आपका प्रवास यथासंभव आरामदायक हो। अतिथियों के आराम और सुविधा के लिए, होटल कार पार्क, यात्रायें, बैठक की सुविधायें , 24 घंटे कक्ष सेवा, लाँड्री सेवा/ड्राई क्लीनिंग देता है।
इसके अलावा, सभी अतिथिगृहों में बालकॉनी/टेरेस, इंटरनेट एक्सेस (वायरलेस), कमरे के भीतर सेफ, वायरलेस इंटरनेट एक्सेस (आदरस्वरूप), किचनेट जैसी कई सुविधाएँ हैं जो बारीकी देखने वाले अतिथियों को भू संतुष्ट करती हैं। बगीचा, मालिश सहित होटल की मनोरंजन सुविधाएँ तनाव कम करने और सुस्ताने के लिए बनाई गई हैं। जब आप बोहोल में आरामदेह और सुविधाजनक प्रवास चाहते हों, तो The Gabriella Bed and Breakfast में घर से दूर अपना दूसरा घर तलाशें।
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गंभीर ने किया मजाक, सामने आया टीम का SECRET
Dainikbhaskar.com
| Sep 24, 2012, 16:00PM IST
कोलंबो. टीम इंडिया ने न्यूजीलैंड, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज की शैली में खेलने के लिए एक नया फॉर्मूला बनाया है जिसे फॉर्मूला सिक्स कहा जा रहा है। इस फॉर्मूला के तहत बल्लेबाजों को कहा गया है कि वे बल्लेबाजी के दौरान छक्के मारने की भरपूर कोशिश करें।
आइए, तस्वीरों की जुबानी जानते हैं आईसीसी टी-20 वर्ल्ड कप में भारत और अन्य टीमों के खिलाड़ियों के खास किस्से...
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इस गोरिल्ला को ऐसा वैसा मत समझना, कारनामों ने इसे बनाया वर्ल्ड फेमस
किडोगो नाम के नर गोरिल्ले को इसी साल अप्रैल में डेनमार्क से क्रीफेल्ड चिडिय़ाघर में लाया गया है। वह अपनी खेलों के प्रति दीवानगी के लिए अब दुनियाभर में फेमस हो गया है। १२ साल के किडोगो ने असमान्य दक्षता का प्रदर्शन कर लोगों को चकित कर दिया। पश्चिमी जर्मनी में चिडिय़ाघर की पब्लिक रिलेशन्स डायरेक्टर पेट्रा शेविन कहती हैं कि वह धुरंधर एथलीट और एक्रोबेट है। वह सीधी रस्सी पर चल लेता है। चार मीटर ऊंचे पेड़ से सीधे कूद सकता है। एक प्रोफेशनल फोटोग्राफर ने मिड दिसंबर में रस्सी पर चल रहे किडोगो की तस्वीर को खींचा। इसके बाद फोटोग्राफर ने अपने दोस्तों को हॉली-डे ग्रीटिंग्स भेजे। इसके बाद गोरिल्ला के स्पेशल टैलेंट का पता लोगों को चला और वह फेमस हो गया।
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“सृजन और नयी मनुष्यता की समस्याएँ” विषयक वार्ता और विमर्श: श्री प्रकाश मिश्र
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के प्रांगण में यूँ तो नियमित अध्ययन-अध्यापन से इतर विशिष्ट विषयपरक गोष्ठियों, सेमिनारों व साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों को निरंतर आयोजित किये जाने की प्रेरणा वर्तमान कुलपति द्वारा सदैव दी जाती रही है, लेकिन इन सबमें ‘शुक्रवारी’ का आयोजन एक अनूठा प्रयास साबित हो रहा है।
परिसर में बौद्धिक विचार-विमर्श को सुव्यवस्थित रूप देने के लिए ‘शुक्रवारी’ नाम से एक समिति का गठन किया गया है। इस समिति के संयोजक हैं ख्यातिनाम स्तंभकार व विश्वविद्यालय के ‘राइटर इन रेजीडेंस’ राजकिशोर। यहाँ के कुछ शिक्षकों को इसमें सह-संयोजक की जिम्मेदारी भी सौंपी गयी है। विश्वविद्यालय परिवार के सभी सदस्य इस साप्ताहिक चर्चा शृंखला में भागीदारी के लिए सादर आमंत्रित होते हैं। शुक्रवारी की बैठक हर शुक्रवार को विश्वविद्यालय के परिसर में किसी उपयुक्त जगह पर होती है जो विशिष्ट वक्ता और वार्ता के विषय के चयन के साथ ही निर्धारित कर ली जाती है। इस अनौपचारिक विमर्श के मंच पर परिसर से बाहर के अनेक अतिथियों ने भी बहुत अच्छी वार्ताएँ दी हैं। वार्ता समाप्त होने के बाद खुले सत्र में उपस्थित विद्यार्थियों और अन्य सदस्यों द्वारा उठाये गये प्रश्नों पर भी वार्ताकार द्वारा उत्तर दिया जाता है और बहुत सजीव बहस उभर कर आती है।
गत दिवस मुझे भी ‘शुक्रवारी’ में भाग लेने का अवसर मिला। इस गोष्ठी में कुलपति जी स्वयं उपस्थित थे। इस बार के वार्ताकार थे प्रतिष्ठित कवि, उपन्यासकार, आलोचक व साहित्यिक पत्रिका ‘उन्नयन’ के संपादक श्रीप्रकाश मिश्र। उनकी वार्ता का विषय था “सृजन और नयी मनुष्यता की समस्याएँ”। उनकी वार्ता सुनने से पहले तो मुझे इस विषय को समझने में ही कठिनाई महसूस हो रही थी लेकिन जब मैं गोष्ठी समाप्त होने के बाद बाहर निकला तो बहुत सी नयी बातों से परिचित हो चुका था; साथ ही श्री मिश्र के विशद अध्ययन, विद्वता व वक्तृता से अभिभूत भी।
(बायें से दायें) मो.शीस खान (वित्ताधिकारी), शंभु गुप्त (आलोचक), प्रोफ़ेसर के.के.सिंह और श्री प्रकाश मिश्र
अबतक दो कविता संग्रह, दो उपन्यास और तीन आलोचना ग्रंथ प्रकाशित करा चुके श्री मिश्र का तीसरा काव्य संग्रह और दो उपन्यास शीघ्र ही छपकर आने वाले हैं। आप बीस से अधिक वर्षो से साहित्यिक पत्रिका ‘उन्नयन’ का सम्पादन कर रहे हैं जो साहित्यालोचना के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित स्थान पा चुकी है। आलोचना के लिए प्रतिवर्ष ‘रामविलास शर्मा आलोचना सम्मान’ इसी प्रकाशन द्वारा प्रायोजित किया जाता है। यह सारा सृजन श्रीप्रकाश जी द्वारा केंद्रीय पुलिस संगठन में उच्चपदों पर कार्यरत रहते हुए किया गया है।
अपने उद्बोधन में उन्होंने सृजन की अवधारणा को समझाते हुए कहा कि सृजन एक प्रक्रिया है- बनाने की प्रक्रिया- जिसे मनुष्य अपनाता है। उस बनाने की कुछ सामग्री होती है, कुछ उपकरण होते हैं और उसका एक उद्देश्य होता है। उद्देश्य के आधार पर वह कला की श्रेणी में आता है तो सामग्री और उपकरण के आधार पर संगीत, चित्र, मूर्ति, वास्तु, साहित्य -और साहित्य में भी काव्य, नाटक, कथा आदि - कहा जाता है। इसमें संगीत सबसे सूक्ष्म होता है और वास्तु सबसे स्थूल। सृजन मूल्यों की स्थापना करता है जो सौंदर्य के माध्यम से होती है। इसका उद्देश्य वृहत्तर मानवता का कल्याण होता है। साहित्य के माध्यम से यह कार्य अधिक होता है।
सृजन को चिंतन से भिन्न बताते हुए उन्होंने कहा कि चिंतन विवेक की देन होता है जबकि सृजन का आधार अनुभूति होती है। इस अनुभूति के आधार पर संवेदना के माध्यम से वहाँ एक चाहत की दुनिया रची जाती है जिसका संबंध मस्तिष्क से अधिक हृदय से होता है। लेकिन सृजन में अनुभूति के साथ-साथ विवेक और कल्पना की भूमिका भी कम महत्वपूर्ण नहीं होती है।
मूल्यों की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि इनका महत्व इसलिए नहीं होता कि वे जीवन में पूरे के पूरे उतार लिये जाते हैं; बल्कि इसलिए होता है कि एक पूरा समुदाय उन्हें महत्वपूर्ण मानता है, उन्हें जीवन का उद्देश्य मानता है- व्यक्ति के भी और समुदाय के भी- उससे भी बढ़कर इसे वह आचरण का मानदंड मानता है। मूल्य मनुष्य की गरिमा की प्रतिष्ठा करते हैं। सृजनकर्ता का दायित्व उस गरिमा में संवेदनाजन्य आत्मा की प्रतिष्ठा करना होता है जिसका निर्वाह बहुत वेदनापूर्ण होता है। सृजन के हर क्षण उसे इसका निर्वाह करना होता है।
मनुष्यता को अक्सर संकट में घिरा हुआ बताते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान में मनुष्यता पर जो संकट आया हुआ है वह दुनिया के एक-ध्रुवीय हो जाने से उत्पन्न हुआ है। उन्होंने रसेल होवान के उपन्यास ‘रिडले वाकर’, डेविड प्रिन के ‘पोस्टमैन’, कामार्क मेकॉर्थी के ‘द रोड’ का उल्लेख करते हुए बताया कि ज्ञानोदय द्वारा रचित मनुष्य की प्रगति और विकास की सभी योजनाएँ आज इतनी संकट में हैं कि उनका अंत ही आ गया है। सच पूछिए तो मनुष्य की मूलभूत अवधारणा ही संकट में है; और यह संकट वास्तविक है। जिस प्रौद्यौगिकी पर मनुष्य ने भरोसा करना सीखा है वह उसके विरुद्ध हो गयी है।
हमारी दुनिया वास्तविक न रहकर आभासित बन गयी है और आदमी मनुष्य न रहकर ‘साइबोर्ग’ बन गया है। साईबोर्ग यानि- “A human being prosthetically inhanced, or hybridized with electronic or mechanical components which interact with its own biological system.”
जलवायु वैज्ञानिक जेम्स लवलॉक का कहना है कि धरती को खोदकर, जल को सुखाकर, और वातावरण को प्रदू्षित कर हम कुछ इस तरह से जीने लगे हैं कि मनुष्य का जीवन बहुत तेजी से विनाश की ओर बढ़ने लगा है। धरती के किसी अन्य ग्रह से टकराने से पहले ही ओज़ोन की फटती हुई पर्त, समुद्र का बढ़ता हुआ पानी, धरती के पेट से निकलती हुई गैस और फटते हुए ज्वालामुखी मनुष्य जाति को विनष्ट कर देंगे।
जॉन ग्रे कहते हैं कि मनुष्य तमाम प्राणियों में एक प्राणी ही है; और उसे अलग से बचाकर रखने के लिए पृथ्वी के पास कोई कारण नहीं है। यदि मनुष्य के
कारन कारण पृथ्वी को खतरा उत्पन्न होगा तो वह मनुष्य का ही अंत कर सकती है। वह नहीं रहेगा तो पृथ्वी बच जाएगी। दूसरे प्राणियों का जीवन चलता रहेगा। इस प्रकार राष्ट्रों की आंतरिक नीतियों के कारण मनुष्य का जीवन खतरे में है।
इस खतरे के प्रति कौन आगाह करेगा, उससे कौन बचाएगा? सृजन ही न...!!!
श्री मिश्र ने विश्व की शक्तियों के ध्रुवीकरण और इस्लामिक और गैर-इस्लामिक खेमों के उभरने तथा विश्व की एकमात्र महाशक्ति द्वारा किसी न किसी बहाने अपने विरोधियों का क्रूर दमन करने की नीति का उल्लेख करते हुए भयंकर युद्ध की सम्भावना की ओर ध्यान दिलाया। आतंकवाद ही नहीं आणविक युद्ध की भयावहता धरती से आकाश तक घनीभूत होती जा रही है। पश्चिमी प्रचार तंत्र द्वारा यह दिखाया जा रहा है कि सभ्य दुनिया बर्बर दुनिया से लड़ने निकल पड़ी है।
अपने विस्तृत उद्बोधन में उन्होंने वर्तमान वैश्विक परिदृश्य के तमाम लक्षणों और दुनिया भर में रचे जा रहे साहित्य में उसकी छाया का उल्लेख करते हुए मनुष्यता की अनेक समस्याओं कि ओर ध्यान दिलाया और उनके समाधान की राह तलाशने की जिम्मेदारी सृजनशील बुद्धिजीवियों के ऊपर डालते हुए मिशेल फूको का उद्धरण दिया जिनके अनुसार पश्चिम का समकालीन सृजन मनुष्यता संबंधी इन तमाम चुनौतियों को स्वीकार करने में सक्षम नहीं दिख रहा है। लेकिन, उन्होंने
बताया कि अमेरिकन विचारक ब्राउन ली के मत से सहमत होते हुए कहा कि इतना निराश होने की जरूरत नहीं है। अभी भी एशिया, अफ़्रीका और लातिनी अमेरिका का सृजन संबंधी चिंतन मनुष्य को बचाये रखने में और मनुष्यता संबंधी मूल्यों की प्रगति में कुछ योग दे सकता है।
इस लम्बी वार्ता की सभी बातें इस ब्लॉग पोस्ट में समाहित नहीं की जा सकती। उनका पूर्ण आलेख शीघ्र ही विश्वविद्यालय की साहित्यिक वेब साइट (हिंदीसमय[डॉट]कॉम और त्रैमासिक बहुवचन में प्रकाशित किया जाएगा।
निश्चित रूप से शुक्रवारी की जो परंपरा शुरू की गयी है उससे अनेक मुद्दों पर विचार मंथन की प्रक्रिया तेज होने वाली है। वार्ता के बाद वहाँ उपस्थित विद्यार्थियों ने जिस प्रकार के गम्भीर प्रश्न पूछे और विद्वान वक्ता द्वारा जिस कुशलता से उनका समाधान किया गया वह चमत्कृत करने वाला था। हमारी कोशिश होगी कि शुक्रवारी में होने वाली चर्चा आपसे समय-समय पर विश्वविद्यालय के ब्लॉग के माध्यम से बाँटी जाय।
(सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी)
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यदि आप सेबू में सुविधाजनक स्थान पर स्थित होटल ढूँढ रहे हैं, तो San Francisco Hotel से बेहतर कुछ नहीं। यहाँ से, अतिथि शहर के उन सभी स्थानों पर आसानी से जा सकते हैं जो इस जीवंत शहर के पास हैं। आराम और तनाव मुक्ति का स्वर्ग, यह होटल Mactan Island Golf Club, मैकटान सेबूअन्तर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट, Fashion TV Asian HQ जैसे शहर के असंख्य आकर्षणों से केवल कुछ कदमों की दूरी पर संपूर्ण नवीनीकरण देता है।
San Francisco Hotel त्रुटिरहित सेवाएँ और यात्रियों को स्फूर्ति देने वाली सभी आवश्यक सुविधाएँ देती है। कार पार्क, सुरक्षित जमा बॉक्स, सार्वजनिक क्षेत्रों में वाई-फ़ाई, परिवार कक्ष वे कुछ सुविधाएँ हैं जो San Francisco Hotel को शहर के अन्य होटलों से अलग बनाती है।
San Francisco Hotel का परिवेश प्रत्येक अतिथि कक्ष में दिखाई देता है। इंटरनेट एक्सेस (वायरलेस), सेटेलाइट/केबल टी.वी., टेलीविजन, वातानुकूलन, शॉवर वे कुछ सुविधाएँ हैं जो आपको यहाँ मिलेंगी। इसके अलावा, होटल में मनोरंजन की कई सुविधाएँ हैं जो यह सुनिश्चित करता है कि आपके प्रवास के दौरान आपके पास करने के लिए बहुत सारी चीज़ें हो। सेबू की यात्रा का आपका उद्देश्य चाहे जो हो, San Francisco Hotel आनंद लेने और रोमांचक छुट्टी मनाने के लिए एक सही स्थान है।
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SHAME: जब जरा सी 'छेड़छाड़' ने सानिया मिर्जा को कर दिया 'बदनाम'
खेल डेस्क. देश की नंबर 1 महिला खिलाड़ी सानिया मिर्जा इस फरवरी इंटरनेशनल टेनिस में 10 साल पूरे कर रही हैं। 2003 में उन्होंने अपने इंटरनेशनल करियर की शुरुआत की थी।
इस दस साल के सफर में हैदराबादी कुड़ी सानिया ने कई उपलब्धियां हासिल की। जूनियर से लेकर सीनियर लेवल तक ग्रेड स्लेम जीतने का कारनामा भारतीय टेनिस में सिर्फ सानिया ही कर सकी हैं।
इन सभी कारनामो के बावजूद कुछ विरोधी तत्व उन्हें बदनाम करने की कई धूर्त चालें चलते रहे। एक फर्जी फ्लिम बना कर उसे सानिया की ब्लू फिल्म का नाम देकर प्रचलित किया गया। यही नहीं, सानिया की तस्वीर को अश्लील तस्वीरों से जोड़ कर इंटरनेट पर डाला गया।
आगे क्लिक कर जानिए, कैसे इन फिजूल कॉन्ट्रोवर्सीज से निकल कर सानिया ने बनाई खास पहचान...
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इस समय हमारे ब्लॉग जगत में दो तरह के लोग हैं। एक वो जो अपने अनुभवों की रोशनी में जीवन-जगत-समाज की गुत्थियों को सुलझाना चाहते हैं। ये लोग बेहद संजीदगी और ईमानदारी से लिखते हैं। इनके लिखे में कोई बनावट नहीं होती। कठिन से कठिन विषयों में भी गोता लगाते हैं तो कुछ ऐसा निकाल कर लाते हैं कि मामला सरल होता दिखता है। तकनीकी और दूसरी तरह की जानकारियां देनेवाले ब्लॉगर भी इसी श्रेणी में आते हैं। इस श्रेणी के ब्लॉगर निर्मोही होकर लिखते हैं।
दूसरी तरफ वो ब्लॉगर हैं जो किसी न किसी मोह से ग्रस्त हैं। यह मोह विचारधारा से भी हो सकता है, व्यक्ति से हो सकता है और खुद से भी। इन लोगों का व्यवहार से खास लेना-देना नहीं होता। इनको किसी नई चीज़ की तलाश नहीं होती। इनके पास बने-बनाए फॉर्मूले होते हैं। जो बातें व्यवहार में सुलझ रही होती हैं, उन्हें भी किताबों को उद्धृत करके इस अंदाज़ में पेश करते हैं कि सारा मामला और उलझ जाता है।
दिलचस्प बात ये है कि बोलने-लिखने वालों में यह खेमेबंदी, यह विभाजन आज से नहीं, सदियों से है। मुझे लगता है कि हमें साफ कर लेना चाहिए कि हम किस श्रेणी में आते हैं? कौन-सा खेमा हमारा है और कौन-सा उनका? क्योंकि दोनों का मन कभी एक नहीं हो सकता है।
संत कबीर यह बात बहुत पहले कह चुके हैं। अपने खिलाफ ज़बरदस्त लामबंदियों से शायद परेशान होकर उन्होंने लिखा था :
तेरा मेरा मनवा कैसे इक होई रे।
मैं कहता तू जागत रहियो, तू जाता है सोई रे।।
मैं कहता निर्मोही रहियो, तू जाता है मोही रे।
जुगन-जुगन समुझावत हारा, कहा न मानत कोई रे।।
मैं कहता आँखिन की देखी, तू कहता कागद की लेखी।
मैं कहता सुलझावन हारी, तू राख्यो उलझाई रे।।
सतगुरु धारा निर्मल बाहे, वा मय काया धोई रे।
कहत कबीर सुनो भई साधो, तब ही वैसा होई रे।।
लंपट (कहानी)
6 days ago
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'दि डर्टी पिक्चर' में विद्या बालन ने जो अदाएं दिखाई थीं उन्हें देख हर कोई उनका कायल हो गया। इस फिल्म से उन्हें बेस्ट एक्ट्रेस का अवार्ड भी मिला लेकिन हाल ही में रिलीज हुई हॉरर थ्रिलर राज़ 3 में बिपाशा ने विद्या को भी पीछे छोड़ दिया। फिल्म के रिलीज होने से पहले ही ये कयास लगाए जा रहे थे कि बिपाशा ने इस फिल्म में काफी बोल्ड एक्टिंग की है लेकिन किसी को अंदाजा भी नहीं था कि बिपाशा विद्या को भी पीछे छोड़ देंगी।
हाल ही में ट्रेड एनालिस्ट तरन आदर्श ने राज़ 3 के बिजनेस को बाकी फिल्मों से कंपेयर करते हुए लिखा मर्डर 2 पहला हफ्ता 36.5 करोड़, दि डर्टी पिक्चर 1हफ्ते 52.5 करोड़, जन्नत 2, राज़ 3 1हफ्ता 55.25 करोड़। यानी कि राज़ 3 ने दि डर्टी पिक्चर को भी पीछे छोड़ दिया। राज़ 3 में बिपाशा ने अपनी एक्टिंग से सभी को हैरान कर दिया। एक बार फिर से बंगाली बाला का जादू बॉक्स ऑफिस पर चल गया।
बिपाशा बसु के चलते राज़ 3 इस साल की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में शामिल हो गई है साथ ही राज़ 3 इमरान हाशमी और भट्ट कैंप की अब तक की सबसे बड़ी हिट साबित हुई है। अब तक राज़ 3 ने कुल 55 करोड़ से भी ज्यादा का बिजनेस किया है। अभी भी राज़ 3 बॉक्स ऑफिस पर लगातार अच्छा कलेक्शन कर रही है और कयास लगाए जा रहे हैं कि फिल्म इस हफ्ते तक 1 करोड़ तक का बिजनेस करेगी। फिल्हाल 14 सितंबर को बर्फी के रिलीज होने के बाद राज़ 3 के कलेक्शन में कुछ कमी जरुर आएगी।
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सुरबाया शहर के ख़रीदारी, दर्शनीय स्थल, व्यवसाय क्षेत्र में बेहतरीन स्थान पर मौजूद Hotel Paprica Dua आपको अपने व्यस्त दिनों से छुट्टी दिलाने के लिए एक सबसे सुखद स्थान देता है। शहर के केंद्र से केवल 1 km दूर और एयरपोर्ट से केवल 25. Km दूर, यह 1-तारा होटल हर वर्ष असंख्य यात्रियों को आकर्षित करती है। दर्शनीय स्थलों के देखने के विल्प और स्थानीय आकर्षणों के लिए, आपको बहुत दूर जाने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि होटल East Java Art & Culture Center, Museum Perjuangan Surabaya, Tunjungan Plaza के बहुत पास है।
Hotel Paprica Dua सुरबाया में आपके प्रवास को बेहतर बनाने के लिए कई सुविधाएँ प्रदान करता है। अतिथियों के आराम और सुविधा के लिए, होटल स्मोकिंग क्षेत्र, दुकानें, कक्ष सेवा, लाँड्री सेवा/ड्राई क्लीनिंग, बैठक की सुविधायें देता है।
46 कमरे 4 तलों पर फैले हैं जो घर से दूर गर्माहट और सुखद अहसास कराते हैं और शॉवर, वातानुकूलन, डेस्क, टेलीविजन एल.सी.डी./प्लाज्मा स्क्रीन, आदरस्वरूप पानी की बोतल जैसी आधुनिक सुविधाएँ देते हैं। इसके अलावा, होटल में मनोरंजन की कई सुविधाएँ हैं जो यह सुनिश्चित करता है कि आपके प्रवास के दौरान आपके पास करने के लिए बहुत सारी चीज़ें हो। बेहतरीन सुविधाएँ और शानदार स्थान होने के कारण Hotel Paprica Dua ठहरने का एक उपयुक्त स्थान है जहाँ से आप सुरबाया में अपने प्रवास का आनंद ले सकते हैं।
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