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रश अवर ३ हा २००७ साली प्रदर्शित झालेला इंग्लिश चित्रपट आहे. यात जॅकी चॅन व क्रिस टकर यांनी अभिनय केला होता.
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dataset/scraper_8/batch_1/wiki_s8_10016.txt
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लँकेस्टर काउंटी, पेनसिल्व्हेनिया ही अमेरिकेच्या पेनसिल्व्हेनिया राज्यातील ३६ पैकी एक काउंटी आहे. याचे प्रशासकीय केन्द्र येथे आहे.
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२०२० च्या जनगणनेनुसार येथील लोकसंख्या इतकी होती.
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लँकेस्टर काउंटी, पेनसिल्व्हेनियाची रचना रोजी झाली. या काउंटीला यांचे नाव दिलेले आहे.
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लॅकावाना काउंटी, पेनसिल्व्हेनिया ही अमेरिकेच्या पेनसिल्व्हेनिया राज्यातील ३६ पैकी एक काउंटी आहे. याचे प्रशासकीय केन्द्र येथे आहे.
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२०२० च्या जनगणनेनुसार येथील लोकसंख्या इतकी होती.
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लॅकावाना काउंटी, पेनसिल्व्हेनियाची रचना रोजी झाली. या काउंटीला यांचे नाव दिलेले आहे.
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dataset/scraper_8/batch_1/wiki_s8_10031.txt
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लॅक्रॉस हा चेंडू आणि काठीने खेळला जाणारा सांघिक खेळ आहे. हा खेळ उत्तर अमेरिकेतील मूळ रहिवासी पहिल्यांदा खेळत असल्याची नोंद आहे. या खेळात रबराचा छोटा चेंडू वापरला जातो. काठीच्या एका टोकाला छोटी जाळी लावलेली असते. खेळाडू चेंडू ठेवून मैदानाच्या एका टोकापासून दुसऱ्या टोकास नेण्याचा प्रयत्न करतात. प्रतिस्पर्धी खेळाडू आपल्या हातातील काठीने हा चेंडू हिरावून घ्यायला बघतात.
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या खेळाला ओजिब्वे भाषेत बागाटावे (लढाईचा छोटा भाऊ) असे नाव आहे.
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dataset/scraper_8/batch_1/wiki_s8_10052.txt
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लॅमडा हे ग्रीक वर्णमालेतील अकरावे अक्षर आहे. रोमन लिपीमधील L ह्या अक्षराचा उगम लॅमडामधूनच झाला आहे.
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लेंगरेवाडी हे भारतातील महाराष्ट्र राज्यातील सांगली जिल्ह्यातील आटपाडी तालुक्यातील एक गाव आहे.
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येथील हवामान उष्ण व कोरडे आहे. येथे नोव्हेंबर ते फेब्रुवारी मध्य हा हिवाळा हंगाम असतो. हिवाळ्यात दिवसा तापमान २९ सेल्सियस पर्यंत वाढते आणि रात्री तापमान १७ अंश सेल्सियस पर्यंत खाली जाते. जून मध्य ते ऑक्टोबर हा पावसाळा हंगाम असतो. पावसाळ्यात दिवसा तापमान २८ अंश सेल्सियस पर्यंत वाढते आणि रात्री तापमान २२ अंश सेल्सियस पर्यंत खाली जाते. पावसाळ्यात मध्यम प्रमाणात पाऊस पडतो. वार्षिक पर्जन्यमान ७०० मिमी पर्यंत असते. फेब्रुवारी मध्य ते जून हा उन्हाळा मोसम असतो. उन्हाळ्यात दिवसा तापमान ४० अंश सेल्सियस पर्यंत वाढते आणि रात्री तापमान २४ अंश सेल्सियस पर्यंत खाली जाते.
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dataset/scraper_8/batch_1/wiki_s8_10104.txt
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लेओन कूपर (२८ फेब्रुवारी, इ.स. १९३०, न्यू यॉर्क) हे एक शास्त्रज्ञ आहेत.
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आ · हान्स आल्फव्हेन · झोर्स इव्हानोविच आल्फेरोव्ह · आल्बर्ट अब्राहम मिकेलसन · अल्बर्ट आइनस्टाइन ·
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ॲ · एडवर्ड ॲपलटन
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ए · लियो एसाकी
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ऑ · फ्रँक ऑपनहाइमर
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ओ · डग्लस डी. ओशेरॉफ · गेऑर्ग झिमॉन ओम
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क · प्यॉत्र लियोनिदोविच कपित्सा · प्योत्र कापित्सा · आल्फ्रेड कास्लर · गुस्टाफ किर्शहोफ · जॅक किल्बी · पॉलिकार्प कुश · लिओन कूपर · विल्यम डी. कूलिज · हाइके कॅमरलिंघ-ऑन्स · वोल्फगांग केटर्ले · हेन्री वे केन्डॉल · जॉन डग्लस कॉकक्रॉफ्ट · आर्थर कॉम्प्टन · कार्ल रुडॉल्फ कोनिग · गुस्ताव कोरियोलिस · एरिक अॅलिन कोर्नेल · मासातोशी कोशिबा · क्लॉड कोहेन-तनूद्जी · पिएर क्युरी · जेम्स वॉट्सन क्रोनिन · हर्बर्ट क्रोमर · अर्न्स्ट क्लाड्नी · क्लाउस फोन क्लित्झिंग
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ग · जोसियाह विलार्ड गिब्स · गॉर्डन गूल्ड · डेनिस गॅबॉर · डेनिस गॅबोर · मारिया गेप्पर्ट-मायर · मरे गेल-मान · पीटर ग्रुनबर्ग · डेव्हिड ग्रोस · शेल्डन ली ग्लाशो · डोनाल्ड ए. ग्लेसर · रॉय जे. ग्लॉबर · चार्ल्स एदुआर्द ग्वियॉमे · ऑट्टो फोन गेरिक
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च · जॉर्जेस चार्पाक · जेम्स चॅडविक · पावेल अलेक्सेयेविच चेरेंकोव्ह
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ज · व्हिताली जिन्झबर्ग · रिकार्दो जियाकोनी · आयव्हार जियेव्हर · जेम्स प्रेस्कॉट जूल · जे.जे. थॉमसन · पिएर-गिल्स दि जेन्स · जे. हान्स डी. जेन्सन · जे. हान्स डी. जेन्सेन · जेम्स क्लार्क मॅक्सवेल · जेम्स वॅट · जॉन फोन न्यूमन · रॉडनी जोरी · आयरिन जोलिये-क्युरी · ब्रायन डेव्हिड जोसेफसन · कार्ल जान्स्की
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झ · लिओ झिलार्ड · फ्रिट्स झेर्निके
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ट · चार्ल्स हार्ड टाउन्स · इगॉर टॅम · इगोर टॅम · जोसेफ हूटॉन टेलर, जुनियर · रिचर्ड ई. टेलर
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ड · जॉन डाल्टन · पॉल डिरॅक · रेमंड डेव्हिस जुनियर · क्लिंटन डेव्हिसन · हान्स जॉर्ज डेहमेल्ट · क्रिस्चियन डॉपलर
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त · सॅम्युएल चाओ चुंग तिंग · सिन-इतिरो तोमोनागा · सिन-इतिरो-तोमोनागा · डॅनियेल सी. त्सुइ
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थ · जॉर्ज पेजेट थॉमसन
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न · लुई युजीन फेलिक्स नेइल · आयझॅक न्यूटन
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प · मार्टिन लुईस पर्ल · एडवर्ड मिल्स पर्सेल · आर्नो अॅलन पेन्झियास · ज्याँ बॅप्टिस्ट पेरिन · वोल्फगांग पॉल · वोल्फगांग पॉली · सेसिल फ्रँक पॉवेल · एच. डेव्हिड पोलित्झर · अलेक्सांद्र मिखाइलोविच प्रोखोरोव्ह · जुलियस प्लकर · माक्स प्लांक
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फ · आल��बर्ट फर्ट · विल्यम आल्फ्रेड फाउलर · व्हाल लॉग्सडन फिच · विल्यम डॅनियेल फिलिप्स · डॅनियल फॅरनहाइट · इल्या फ्रँक · जेम्स फ्रांक · अलेक्झांडर अलेक्झांड्रोविच फ्रीडमन · जेरोम आय.फ्रीडमन · जॉन अँब्रोझ फ्लेमिंग
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ब · चार्ल्स ग्लोव्हर बार्कला · जॉन बार्डीन · निकोलाय बासोव्ह · ए.ई. बेकरेल · आंत्वान हेन्री बेकरेल · योहान्स जॉर्ज बेड्नोर्झ · हान्स बेथ · मॅक्स बॉर्न · वॉल्थर बोथ · लुडविग बोल्ट्झमन · आगे नील्स बोह्र · पर्सी विल्यम्स ब्रिजमन · वॉल्टर हाउझर ब्रॅटैन · बर्ट्राम ब्रॉकहाउस · लुई दि ब्रॉग्ली · कार्ल फर्डिनांड ब्रॉन · निकोलास ब्लूमबर्गेन · पॅट्रिक मेनार्ड स्टुअर्ट ब्लॅकेट · फेलिक्स ब्लॉक
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म · रॉबर्ट अँड्रुझ मिलिकन · जॉन सी. माथर · फ्रान्झ मेल्डे · नेव्हिल फ्रांसिस मॉट · बेन मॉटलसन · रुडॉल्फ मॉसबाउअर · कार्ल अलेक्झांडर म्युलर
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य · हिदेकी युकावा · योईचिरो नाम्बू
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र · मार्टिन राइल · फ्रेडरिक राईन्स · इसिदोर आयझॅक राबी · नॉर्मन फॉस्टर राम्से, जुनियर · ओवेन विलान्स रिचर्डसन · रॉबर्ट कोलमन रिचर्डसन · बर्टन रिश्टर · चार्ल्स थॉमसन रीस विल्सन · कार्ल डेव्हिड टॉल्मे रुंग · कार्लो रुब्बिया · अर्न्स्ट रुस्का · जेम्स रेनवॉटर · विल्हेम राँटजेन
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ल · लेव्ह लँडाउ · गॅब्रियेल लिपमन · जॉर्ज क्रिस्तॉफ लिश्टेनबर्ग · डेव्हिड ली · त्सुंग-दाओ ली · विलिस लॅम्ब · अँथोनी जेम्स लेगेट · लियॉन एम. लेडरमान · फिलिप लेनार्ड · लुइस फेदेरिको लेलवा · अर्नेस्ट लॉरेन्स
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व · स्टीवन वाईनबर्ग · युजीन विग्नर · विल्हेल्म वियेन · फ्रँक विल्चेक · केनेथ गेडीज विल्सन · रॉबर्ट वूड्रो विल्सन · कार्ल वीमन · मार्टिनस जे.जी. व्हेल्टमन · योहान्स डिडरिक व्हान डेर वाल्स · जॉन हॅसब्रूक व्हान व्लेक · विलेम जेकब व्हान स्टॉकम · अलेस्सांद्रो व्होल्टा
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श · विल्यम शॉकली · वॉल्टर शॉट्की · आर्थर लियोनार्ड शॉलो · जॉन रॉबर्ट श्रीफर · एर्विन श्र्यॉडिंगर · मेल्व्हिन श्वार्त्झ · जुलियन श्विंगर
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स · सायमन व्हान डेर मीर · अर्नेस्ट थॉमस · सिंटन वाल्टन · कै सीगबानमान सीगबान · थॉमस योहान सीबेक · एमिलियो जिनो सेग्रे · ऑट्टो स्टर्न · जॅक स्टाइनबर्गर · होर्स्ट लुडविग श्ट्यॉर्मर · जॉन स्ट्रट · जॉर्ज एफ. स्मूट
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लेऑन ट्रॉट्स्की (रशियन: Лeв Давидович Трóцкий) (नोव्हेंबर ७, इ.स. १८७९ - ऑगस्ट २१, इ.स. १९४०) हा युक्रेनमध्ये जन्मलेला मार्क्सवादी तत्त्वज्ञ होता. ट्रॉट्स्की बोल्शेविक क्रांतीतील एक नेता होता. ह्याने 'लाल सेने'ची स्थापना केली.
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याचे मूळ नाव लेव्ह डेव्हिडोविच ब्रॉन्स्टाइन असे होते.
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मॅनिफेस्टो
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मार्क्स · लेनिन
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कम्युनिस्ट पक्ष
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भाकप · माकप
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देशात
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सोवियत संघ
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चीन
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क्युबा
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व्हियेतनाम
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| 12 |
+
उत्तर कोरिया
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लाओस
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लेओनार्दो फिबोनाची तथा पिसाचा लियोनार्दो (मराठी लेखनभेद: लिओनार्डो फिबोनास्सी; इटालियन: Fibonacci) (इ.स. ११७०; पिसा - इ.स. १२४० [१]) हा बाराव्या शतकात होऊन गेलेला एक इटालियन गणितज्ञ होता.
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| 2 |
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फिबोनाचीने भारतीय अंकपद्धती अरब विद्वानांकडून शिकून घेऊन त्याचा युरोपामध्ये प्रसार केला. गणितात अंकांची नवी क्रमवारी शोधून त्याने प्रत्येक क्रमांक हा मागील दोन आकड्यांच्या बेरजेइतका असतो असे दाखवून दिले. फिबोनाचीने "लिबेर अबाची" (अर्थ: "मोजणीचे पुस्तक") आणि "लिबेर क्वाद्रातोरुम" (अर्थ: "वर्गांचे पुस्तक") या गणिती ग्रंथांची निर्मिती केली.
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| 3 |
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याने फिबोनाची श्रेणीचा शोध लावला.
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याला लियोनार्दो पिसानो, लियोनार्दो बोनाची किंवा लियोनार्दो फिबोनाची या नावाने ही ओळखत.
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लेक प्लॅसिड खालील संदर्भात वापरले जाऊ शकते.
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dataset/scraper_8/batch_1/wiki_s8_10167.txt
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लेक स्टेशन अमेरिकेच्या इंडियाना राज्यातील छोटे शहर आहे. लेक काउंटीमधील या शहराची लोकसंख्या २०१० च्या जनगणनेनुसार १२,५७२ होती.
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| 2 |
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१९०८ ते १९७७ दरम्यान या शहराचे नाव ईस्ट गॅरी होते.
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| 3 |
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आय-८० व आय-९० हे अमेरिकेतील दोन प्रमुख महामार्ग लेक स्टेशन पासून ओहायोतील एलिरिया शहरापर्यंत एकत्र धावतात.
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dataset/scraper_8/batch_1/wiki_s8_10171.txt
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लेकुरे उदंड झाली हे वसंत कानेटकर लिखित नाट्य आहे.
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dataset/scraper_8/batch_1/wiki_s8_10191.txt
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यशस्वीपणे वाचण्याकरिता अथवा समजण्याकरिता लेखन पद्धतीस संबंधित भाषां/भाषेचा आधार असावा लागतो या अर्थाने लेखन पद्धती इतर संकेतचिन्हपेक्षा वेगळी असते. जसे गणिती संकेतचिन्हास,माहिती संकेतचिन्ह,नकाशे संकेतचिन्ह भाषां/भाषेचा आधार आवश्यक नाही.
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भाषा हा मानवी समुदायाचा अंगभूत घटक आहे. परंतु सबंध मानवी इतिहासात लेखन पद्धतीचा विकास आणि वापर ही तुरळक प्रमाणातच झाला.
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लेखन पद्धतीचा एकदा वापर सुरू झाला कि मात्र संबंधित भाषेतील बदलापेक्षा लेखन पद्धती सावकाश बदलते. त्यामुळे लेखनपद्धती कालांतराने भाषेच्या वापरातून गेलेल्या पद्धती व नियमांचा, चिन्हांना बाळगून ठेवते. लेखन पद्धतीचा मोठा फायदा म्हणजे माहितीचे जतन होते.
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सर्व लेखन पद्धतीत खालील घटकांचा आधार लागतो:-
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dataset/scraper_8/batch_1/wiki_s8_10193.txt
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१९३८ मध्ये लास्झो ब्रियोने प्रथम बॉलपॉईंट पेन विकले, अगदी डब्लु.डब्लु.आए.च्या सुरुवातीच्या आधी. पेन तलवारपेक्षा अधिक शक्तिशाली असू शकतो परंतु १९३० च्या दशकात जर्सी-हंगेरियन पत्रकार लस्झो ब्रोएक बॉलपेप पेनवरील पहिले पेटंट 30 ऑक्टोबर 1888ला जॉन जे लाउड यांना जारी करण्यात आले. १९३८ साली हंगेरियन वृत्तपत्र संपादक हसेझो बियो यांनी आपल्या भावाला जॉर्ज नावाची एक रसायनशास्त्राच्या मदतीने नवीन प्रकारचे पेन तयार केले व त्यात एक लहानसा टोकचा समावेश होता, जो त्याच्या सॉकेटमध्ये चालू होता.
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एक लहान-कठिण गोलाका लगेचच सूप असते. बॉलपॉईंट पेन सामान्यतः विश्वासार्ह आहे आणि स्वस्त आणि महाग प्रकार दोन्हीमध्ये येतो. फाउंटन पेन हा रोजच्या लिखाणांसाठी सर्वात सामान्य साधन म्हणून बदलला आहे.एक रोलरबॉल पेनर, साधारणपणे 0.5-1.2 मिमी आणि पितळ, स्टील किंवा टंगस्टन कार्बाईड तयार करून तेल-आधारित शाई पुरवतो. कागदाच्या संपर्कात शाई जवळजवळ
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आधारित द्रव किंवा जेल शाई वितरीत करतो. कमी घट्ट व चिकट शाई अधिक सहजपणे तेल आधारित शाई पेक्षा पेपर द्वारे गढून गेलेला आहे, आणि पेन लेखन पृष्ठभागावर अधिक सहजपणे हलवेल. रोलरबॉल पेन सुरुवातीला एक बॉलपेप पेनची सोय एकत्रित करण्यासाठी डिझाइन करण्यात आली होती.फौन्ंट पेनच्या गुळगुळीत "ओल्या शाई" प्रभावासोबत जेल स्याही रंग विविध रंगांमध्ये उपलब्ध आहेत, धातूचा पेंट रंग, चमक इत्यादी, निऑन, धूसर झालेले प्रभाव, संतृप्त रंग, रंगीत रंगीत रंग, चमकदार रंगीबेरंगी, अंधुक रंग, अदृश्य शाई, दृश्य-प्रभाव, चमकदार रंग आणि चमक-इन गडद परिणाम आहेत.
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आधारित द्रव शाई वापरते. एक जलाशय पासून एक "फीड" माध्यमातून nib करण्यासाठी, नंतर केबिका क्रिया आणि गुरुत्व संपुष्टात nib द्वारे, एक जलाशय पासून वाहते. निबांना कोणतेही हलवलेले भाग नाहीत आणि ते शाईचे लेखन पृष्ठभागावर एक पातळ भोके टाकून देतात. फौन्टन पेन जलाशय रिफिल करण्यायोग्य किंवा डिस्पोजेबल असू शकते; डिस्पोजेबल प्रकार याला शाई कारतूस म्हणतात. एक रीफिलबल जलाशय असलेल्या पेनाने पिशवीसारख्या यंत्राजवळ एक बाटलीमधून शाई काढता येते, किंवा आईड्रोप्रायरने त्याला पुन्हा भरण्यासाठी आवश्यक असू शकते. रिफिल जलाशया, ज्याला काड्रिज कन्व्हर्टर्स देखील म्हणतात, काही पेनसाठी उपलब्ध आहेत जे डिस्पोजेबल कार्ट्रिज ��ापरतात. एक फॉन्टाइन पेन कायम किंवा कायमस्वरूपी शाई वापरली जाऊ शकते.
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एक टिप पेन, किंवा मार्कर,तंतुमय साहित्याचा एक सच्छिद्र टीप आहे. कागदावर लिहिण्यासाठी सर्वात छान, कसलेही इष्ट-टिप पेन वापरले जातात. मध्यम टिपलेल्या टिपांमुळं मुले रंगवण्याची आणि चित्र काढण्यासाठी वापरतात. मोठे प्रकार, ज्याला "मार्कर" असे म्हटले जाते, मोठ्या आकारात लिहिण्यासाठी वापरले जातात, सहसा इतर पृष्ठांवर जसे की नाला कोरलेले बक्से, व्हाइटबोर्ड आणि चॉकबोर्ड, ज्याला "तरल चाक" किंवा "चॉकबोर्ड मार्कर[१]" असे म्हटले जाते. ठळक टिपा आणि तेजस्वी पण पारदर्शी शाई असलेल्या मार्कर, ज्याला हायलाइट्स म्हटले जाते, हे आधीपासून लिहिलेले किंवा छापलेले मजकूर प्रकाशित करण्यासाठी वापरले जातात. मुलांसाठी डिझाइन केलेले पेन किंवा तात्पुरते लेखन (जसे की व्हाइटबोर्ड किंवा ओव्हरड प्रोजेक्टरसह) सामान्यत: गैर-स्थायी सत्तेचा वापर करतात. शिपिंग केस किंवा इतर पॅकेजसह लेबल करण्यासाठी वापरलेले मोठे चिन्हक हे सहसा कायम मार्कर असतात
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पाय चेंडू किंवा लेग क्रिकेट हा अकरा खेळाडूंच्या दोन संघांमध्ये खेळला जाणारा क्रिकेटचा एक प्रकार आहे.[१][२] हा खेळ ८० फूट (२४ मी) ते १२० फूट (३७ मी) त्रिज्या असलेल्या वर्तुळाकार मैदानावर खेळला जातो.[३] भारत, नेपाळ, भूतान आणि श्रीलंका या दक्षिण आशियाई देशांमध्ये हा खेळ खेळला जातो.[४][५][६]
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लेग क्रिकेटमध्ये चेंडू पुढे नेण्यासाठी बॅटऐवजी पाय वापरणे सक्तीचे असते. गोलंदाज हाताखाली जमिनीवर चेंडू फिरवतो. लेगमनला धावा काढण्यासाठी चेंडूला लाथ मारावी लागते. लेगसमन चेंडूला सीमारेषेच्या बाहेर लाथ मारून चार किंवा सहा धावा करू शकतो.[४]
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लेग क्रिकेट हा मनोरंजनाचा खेळ आहे. हा प्रामुख्याने भारतात विविध नियमांसह खेळले जातो. लेग क्रिकेटचा शोध बंगलोरमधील शारीरिक शिक्षण शिक्षक श्री. एस. नागराज यांनी लावला. शारीरिक तंदुरुस्तीचे साधन म्हणून त्यांनी शहरातील शाळकरी मुलांना या खेळाची ओळख करून दिली. दिल्लीतील शारीरिक शिक्षणाचे शिक्षक श्री जोगेंद्र प्रसाद वर्मा यांनी २०१० मध्ये लेग क्रिकेटचे अधिकृत नियम पुस्तक सादर केले. श्री. एस. नागराज यांना लेग क्रिकेटचे जनक म्हणून ओळखले जाते. श्री वर्मा हे आंतरराष्ट्रीय लेग क्रिकेट कौन्सिल आणि लेग क्रिकेट फेडरेशन ऑफ इंडियाचे सध्याचे सचिव आहेत.[२][७]
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११ खेळाडूंच्या दोन संघांमध्ये लेग क्रिकेट खेळले जाते. हे ८० ते १२० फूट त्रिज्या असलेल्या वर्तुळाकार मैदानावर खेळले जाते. खेळपट्टी ८ फूट (२.४ मी) रुंद आणि ४२ फूट (१३ मी) ते ४८ फूट (१५ मी)लांब, (खेळाडूंच्या वयोगट आणि श्रेणीनुसार) असते. स्टंपमधील अंतर १२ इंच (३०४.८ मिमी) असते.[८]
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आंतरराष्ट्रीय स्तरावर, आंतरराष्ट्रीय लेग क्रिकेट कौन्सिलद्वारे लेग क्रिकेटचे संचालन आणि प्रचार केला जातो. या आंतरराष्ट्रीय संस्थेचे अध्यक्ष म्हणून श्री सुरेंदर कुमार आणि सरचिटणीस म्हणून श्री जोगिंदर प्रसाद वर्मा आहेत. भारतात, लेग क्रिकेट फेडरेशन ऑफ इंडिया ही सर्वोच्च प्रशासकीय संस्था आहे, जी २०११ मध्ये स्थापन झाली. हे सोसायटी नोंदणी कायदा, १८६० अंतर्गत नोंदणीकृत आहे आणि आंतरराष्ट्रीय लेग क्रिकेट कौन्सिलशी संलग्न आहे.[३] भारताव्यतिरिक्त नेपाळ, भूतान, श्रीलंका, फ्लोरिडा, घाना आणि पाकिस्तानमध्ये लेग क्रिकेट प्रसिद्ध आहे.
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भारतातील राष्ट्रीय चॅम्पियनशिप: जुलै २०१२ मध्ये, लेग क्रिकेट फेडरेशन ऑफ इंडियाने बवाना, दिल्ली येथील राजीव गांधी स्टेडियम येथे सीनियर नॅशनल टी-१०, लेग क्रिकेट चॅम्पियनशिप आयोजित केली होती ज्यामध्ये एकूण २४ मुले आणि मुलींच्या संघांनी भाग घेतला होता. शे. सुरेंदर कुमार, आमदार आणि मुख्यमंत्र्यांचे संसदीय सचिव, दिल्ली उद्घाटन समारंभाचे प्रमुख पाहुणे होते[१] आणि सतपाल सिंग, ऑलिम्पिक कुस्तीपटू आणि भारतीय स्कूल गेम्स फेडरेशनचे अध्यक्ष दुसऱ्या दिवसाच्या चॅम्पियनशिपचे प्रमुख पाहुणे होते.[९] २०१२ पासून, लेग क्रिकेट फेडरेशन ऑफ इंडियाने दिल्ली, महाराष्ट्र, तामिळनाडू, झारखंड, हरियाणा, उत्तर प्रदेश आणि मध्य प्रदेश यासारख्या भारतातील विविध शहरे आणि राज्यांमध्ये ६ राष्ट्रीय खेळांचे आयोजन केले आहे.
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आंतरराष्ट्रीय चॅम्पियनशिप: भारत जुलै २०१३ मध्ये झालेल्या पहिल्या इंडो-नेपाळ T-१० लेग क्रिकेट मालिकेचा विजेता होता.[३][१०]
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५वी राष्ट्रीय T२० लेग क्रिकेट चॅम्पियनशिप उत्तर प्रदेशातील मथुरा येथे आयोजित करण्यात आली होती.[११]
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जानेवारी २०१७ मध्ये, कर्नाटकने २११ धावा मिळवून विजय मिळवला.[१२] नवी दिल्ली येथे झालेल्या ५व्या राष्ट्रीय T१० लेग क्रिकेट चॅम्पियनशिपमध्ये ओडिशाने तिसरे स्थान मिळविले.[१३] चंदन रे हा भारतीय लेग क्रिकेट संघाचा सध्याचा कर्णधार आहे.[१४][८][१५]
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पृष्ठीय क्षेत्र (लेग/ऑन साईड) हा क्रिकेटच्या मैदानाचा एक विभाग आहे.
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खेळपट्टीच्या लांब अक्षाच्या मधोमध काल्पनिक रेषा ओढून क्रिकेट मैदानाचे दोन भाग केले जातात. उजव्या हाताच्या फलंदाजाच्या संदर्भात, तो फलंदाजीसाठी पवित्रा (स्टान्स) घेऊन उभा असताना, त्याच्या पाठीकडची बाजू, म्हणजेच गोलंदाजाच्या आणि बिन-टोल्या टोकाच्या पंचाच्या उजव्या हाताकडील बाजू, म्हणजे पृष्ठीय क्षेत्र होय.
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लेझीम हे महाराष्ट्रातील एक लोकनृत्य आहे.[१] अलीकडच्या काळात हे विशेषतः गणेश चतुर्थीला मोठ्या प्रमाणात खेळले जाते. महाराष्ट्रात याचा उगम असला तरी जगभरात विविध ठिकाणी बऱ्याच वेळा लेझीम खेळली जाते.[२][३][४]२०१४ मध्ये सांगलीतील तब्बल ७,३३८ लोकांनी एकाच वेळी लेझीमचे सादरीकरण केले होते. याची नोंद गिनीज बुकात केली गेली.[५][६]
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काहीवेळा "लेझियम" म्हणून देखील याचे शब्दलेखन केले जाते. लेझिम नर्तक एक लहान वाद्य वाजवतात ज्याला झिंगल असते, त्याला लेझिम किंवा लेझियम म्हणतात. याच्याच नावावरून या नृत्य प्रकाराला हे नाव दिले गेले. लेझिममध्ये किमान २० नर्तक असतात. या नृत्याला लाकडी वाद्याचे नाव देण्यात आले आहे ज्यामध्ये पातळ धातूच्या चकती बसविल्या जातात. नर्तक नृत्य करताना याचा वापर करतात.
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यामध्ये ढोलकी हे मुख्य तालवाद्य म्हणून वापरले जाते. तसेच रंगीबेरंगी पोशाख परिधान केला जातो.[७] महाराष्ट्रातील शाळा आणि इतर संस्थांद्वारे नृत्याचा वारंवार वापर केला जातो, कारण त्यात अनेक हालचालींचा समावेश असतो आणि तो खूप कठीण देखील असू शकतो.[८]
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लेझिम हा नृत्यापेक्षा एक जोरदार शारीरिक व्यायाम आणि ड्रिल आहे; रचना ही दोन, चौकार आणि वर्तुळात देखील असू शकतात. ऐतिहासिकदृष्ट्या, महाराष्ट्रातील आणि गुजरातच्या काही भागांमध्ये लेझीमचे काही प्रकार प्रचलित होते, परंतु आज ते क्वचितच वापरले जातात. एका प्रकारात लोखंडी साखळी (धनुष्यसारखी) असलेला 2.5 फूट लांब बांबूचा खांब (रेध) वापरला गेला. लेझिम जड असल्याने नृत्यापेक्षा हा व्यायाम प्रकार म्हणून जास्त वापरला जात असे. अशा लेझीम नेहमी हाताने बनवल्या जात होत्या.[९]
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लेझिमच्या दुसऱ्या प्रकारात (ज्याला कोयंडे म्हणतात) लाकडी खांबाचा वापर केला, 15 ते 18 इंच लांब, दोन्ही टोके पंक्चर केली गेली आणि सुमारे 1 किलो वजनाची लोखंडी जोडलेली साखळी स्केल लोखंडी साखळी लिंक साखळीतून चालली. त्यांच्यामध्ये 6 इंच लांब हाताची साखळी (सळईसाखळी) देखील होती, ज्याद्वारे चार बोटे चोखपणे बसतात.[९]
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नृत्याच्या ग्रामीण स्वरूपामध्ये सामान्यत: दोन ओळींमध्ये लेझिम नर्तक असतात, चरणांचा क्रम पुनरावृत्ती करतात, प्रत्येक काही ठोके बदलत असतात. अशाप्रकारे, 5 मिनिटांच्या लेझिम सादरीकरणांत 25 वेगवेगळ्या स्टेप्सचा समावेश असू शकतो.
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या नृत्यामध्ये वापरल्या जाण��ऱ्या वस्तू:
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रशियन भाषा (रशियन: русский язык, रुस्की यिझिक) ही युरेशिया खंडामधील एक प्रमुख भाषा आहे. स्लाविक भाषांपैकी ही सर्वांत जास्त बोलली जाणारी भाषा आहे. रशियन भाषा इंडो-युरोपीय भाषाकुळातील स्लाविक भाषाकुळात गणली जाते. रशियन प्रथम भाषा असणाऱ्या भाषकांची जगभरातील संख्या सुमारे १६.४ कोटी (इ.स. २००६चा अंदाज) असून द्वितीय भाषा असणाऱ्या भाषकांची संख्या धरता एकूण भाषकसंख्या जगभरात २७.८ कोटी आहे.
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लेटाह काउंटी, आयडाहो ही अमेरिकेच्या आयडाहो राज्यातील ४४ पैकी एक काउंटी आहे. याचे प्रशासकीय केन्द्र येथे आहे.
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२०२० च्या जनगणनेनुसार येथील लोकसंख्या इतकी होती.
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लेट्युसचे झाड (वैज्ञानिक नाव: लॅक्टुका सॅटिवा) डेझी कुटूंबातील एस्टेरासीचे आहे. ही एक वार्षिक वनस्पती आहे जी उगवण्यापासून ते बियाणे तयार होईपर्यंत, एका उगवत्या हंगामात त्याचे जीवन चक्र पूर्ण करते आणि नंतर मरते. हे बहुतेकदा पालेभाजी म्हणून पिकविली जाते, परंतु कधीकधी त्याच्या देठासाठी आणि बियाण्यासाठी हे पीक घेतले जाते. लेट्युस बहुतेक वेळा सॅलडसाठी वापरली जाते. हे सूप, सँडविच आणि रॅप्स सारख्या इतर प्रकारच्या खाद्यपदार्थांमध्ये देखील वापरले जाते. ते कोळशावर भाजता (ग्रील्ड) देखील येते. [३] याचा एक प्रकार, वजू (莴苣) किंवा शतावरी लेट्यूस (सेल्टस), त्याच्या देठासाठी पिकवले जाते, ते एकतर कच्चे किंवा शिजवलेले खाल्ले जाते. हिरवी पालेभाजी म्हणून त्याच्या मुख्य वापर आहे. त्याव्यतिरिक्त शतकानुशतके मानवाने धार्मिक आणि औषधांसाठी देखील याचा वापर केला आहे. सुरुवातीला युरोपचे आणि उत्तर अमेरिकेचे लेट्युसच्या बाजारात वर्चस्व होते, परंतु २० व्या शतकाच्या उत्तरार्धात लेट्युस जगभर पसरले. २०१७ वर्षात लेट्युस आणि चिकोरीचे जागतिक उत्पादन २७ दशलक्ष टन होते, त्यातील ५६% उत्पादन चीनमध्ये झाले होते. [४]
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लेट्युस सर्वप्रथम प्राचीन इजिप्शियन लोकांनी वापरात आणेले. ते त्याच्या बियांपासून तेल तयार करत. त्याचे रसदार पाने आणि तेलाने भरलेल्या बियांमुळे याचे नंतर खाद्य वनस्पतीमध्ये रूपांतरण करण्यात आले. लेट्युस ग्रीक आणि रोमन लोकांमध्ये पसरले. त्यांनी त्याला लॅक्टुका असे नाव दिले ज्यापासून इंग्रजी शब्द लेट्युस आला. ५० एडी पर्यंत, याचे बरेच प्रकार वापरात आले. लेट्युसचा वापर अनेक वनौषधींमध्ये झालेला मध्ययुगीन काळात दिसून येतो. १६ व्या ते १८ व्या शतकात युरोपमधील अनेक जातींचा विकास झाला. १८ व्या शतकाच्या मध्यापर्यंत तयार झालेली झाडे आजही बागांमध्ये दिसून येतात.
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लेट्युसची लागवड सहज होते. कमी तपमानात याला फुले उशीरा येतात. याव फार पटकन रोग येता, तसेच याचे भक्षण कीटक आणि सस्तन प्राणी, बुरशी आणि बॅक्टेरिया करतात. एल. सॅटिव्हा प्रजातींमध्ये आणि काही इतर प्रजातींसह लॅक्टुका या जातीमध्ये सहजपणे दिसून येतो. यामूळे झाडातून बिया नष्ट होतात. हे गुणधर्म बियाणे वाचवण्याचा प्रयत्न करणाऱ्या लोकांना त्रासदायक ठरते, तरीही जीवशास्त्रज्ञांनी लेट्युसच्या बियांचे जनुकीय वर्ग विस्तृत ठेवला आहे. लेट्युसमध्ये जीवनसत्त्वे के आणि ए मोठ्या प्रमाणात आहेत. तसेच फोलेट आणि लोह हे मध्यम प्रमाणात सापडतात. दूषित लेट्युस बहुतेक वेळा ई. कोलाई आणि साल्मोनेला सह बॅक्टेरिया, विषाणूजन्य आणि परजीवी किटकांच स्रोत बनतो.
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लेट्यूसची मूळतः भूमध्य ते सायबेरिया पर्यंत सर्वत्र आढळते. सध्या हे जगातील बहुतेक भागात आढळते. या झाडांची साधारणत: उंची १५ ते ३० सेमी (६ ते १२ इंच) पर्यंत असते. [५] पाने रंगीबेरंगी असतात, मुख्यत: हिरव्या आणि लाल रंगाच्या छटांमध्ये असतात. [६] काही प्रकारच्या लेट्युसच्या झाडांना पिवळ्या, सोनेरी किंवा निळ्या छटांचीही पाने असतात. [७] लेट्युसमध्ये विविध आकार आणि पोत असतात. लेट्युसचे झाड वेगवेगळ्या प्रकारचे दिसते उदा, आईसबर्ग, घनदाट पाने, कुंपण, स्कॅलोपड, फ्रिली किंवा असभ्य पानांसारखे. [६] लेट्युसमध्ये एक मुख्य टप्रूट (मुळ) आणि लहान दुय्यम प्रकारची मुळे असतात. काही प्रकारांत, विशेषतः युनायटेड स्टेट्स आणि पश्चिम युरोपमध्ये आढळणाऱ्या जातींमध्ये लांब, अरुंद टप्रूट्स आणि गौण मुळांचा एक छोटासा समूह असतो. आशियामधील जातींमध्ये लांब टप्रूट आणि अधिक विस्तृत दुय्यम प्रणाली मुळे असणारी झाडे आढळतात. [७]
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प्रख्यात भारतीय नर्तकी लेडी लीला सोखी ह्या मेनका नावाने प्रसिद्ध होत्या. त्यांचा जन्म पूर्व बंगालमधील बारिसाल येथे उच्चकुलीन जमीनदार घराण्यात झाला. [१]शालेय जीवनात व्हायोलिनवादनात त्यांनी उत्तम प्रगती केली.
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इ.स. १९०९ मध्ये व्हायोलिन वादनाच्या पुढील अभ्यासासाठी त्या इंग्लंडला रवाना झाल्या. लंडनमधील ‘सेंट पॉल गर्ल्स स्कूल’ मध्ये त्यांनी प्रवेश घेतला. पुढे पॅरिसमध्ये कुचबिहारच्या राणीसमवेत रहात असताना खलील देउशी ह्या इराणी नर्तकाबरोबर मेनका ह्यांनी पौर्वात्य नृत्ये सादर केली. नंतर कथ्थक नृत्यशैलीकडे त्याचे मन आकृष्ट झाले. भारतात परतल्यावर लेडी मेनका ह्यांनी कथ्थकचे अध्ययन सुरू केले.
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पंडित सीताराम मिश्र, महाराज बिहारीलाल मिश्र, गुरू रामदत्त मिश्र, अच्छन महाराज व लच्छू महाराज ह्या गुरूंकडे त्यांनी कथ्थकची तालीम घेतली. तसेच कथ्थकमधील लखनौ घराण्यातील नृत्यशैलीत विशेष प्रावीण्य मिळविले. तेव्हाच त्यांनी गुरू करुणाकरन् मेनन यांच्याकडे कथकलीचे व गुरू नबकुमार सिन्हा यांच्याकडे मणिपुरीचे अध्ययन केले.त्यांनी आपल्या संगीताच्या अध्ययनाची पार्श्वभूमी आणि कथ्थक, कथकळी व मणीपुरी ह्या नृत्यशैलींचा व्यासंग ह्यांची सुरेख सांगड घालून स्वतःचे असे एक आगळे नृत्यनाट्याचे तंत्र व शैली निर्माण केली. कथ्थक हे मूलतः एकपात्री नृत्य समजले जाते. त्यात नाट्याची भर घालून त्यांनी कथ्थकवर आधारित असे पहिले नृत्यनाट्य तयार केले.मुंबई येथे इ.स १९२६ मध्ये त्यांनी पहिला नृत्यप्रयोग सादर केला. ह्या कार्यक्रमाला सुविख्यात रशियन नर्तकी आन्न पाव्हलॉव्ह ह्या हजर होत्या.
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कृष्णलिला, देव विजय नृत्य व मेनकालास्यम् ही त्यांची आंरभीची नृत्यनाट्ये होत. ही नृत्यनाट्ये प्रामुख्याने कथ्थकवर आधारित होती आणि ती ४५ मिनिटांची होती . नंतर त्यांनी सतत दोन वर्षे परिश्रम घेऊन मालविकाग्निमित्रम् हे संपूर्ण अडीच तासांचे नृत्यनाट्य सादर केले. त्यात त्यांनी कथ्थक, कथकळी व मणीपुरी ह्या शैलींचा मिलाफ केला होता. नृत्यनाट्यातील कथावस्तू, वेशभूषा, संगीत इ. विविध अंगांसाठी त्यांचे मार्गदर्शन घेऊन त्यांत परिपूर्णता साधण्याचात्यांचा प्रयत्न असे.
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मेनका यांनी इ.स. १९३८ मध्ये भारतीय नृत्यपरंपरांच्या सखोल अभ्यासासाठी खंडाळा येथे एक नृत्यालय स्थापन केले. कथ्थक, कथकळी व मणीपुरी ह्या परंपरांतील विद्वान गुरू व संगीतज्ञ यांना पाचारण करून त्यांनी ते एक आदर्श गुरुकुल बनविले होते. नृत्यशिक्षणाबरोबर आणखी इतर शिक्षणाचीही व्यवस्था तिथे करण्यात आली होती.
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त्यांनी त्याचे पती साहेबसिंग सोखी यांच्या प्रोत्साहनाने अभिजात भारतीय नृत्याच्या प्रसाराकरिता अविरत मेहनत घेतली.त्यांनी अनेकवेळा भारतभर नृत्यप्रसाराकरता दौरे केले. ‘बंगाल म्यूझिक असोसिएशन’ ने त्यांना सुवर्णपदक अर्पण करून त्यांचा नृत्यसेवेचा गौरव केला. कराची, हैदराबाद, लाहोर, कोलंबो इ. शहरातर्फे त्यांना मानपत्रे देण्यात आली. त्यानंतर त्यांनी ब्रह्मदेश, मलाया, इंडोनेशिया वगैरे देशात दौरे केले. इ.स. १९३६ मध्ये त्यांनी यूरोपमधील शहरांतून विपुल प्रमाणात नृत्यकार्यक्रम सादर केले व बर्लिनमधील आंतरराष्ट्रीय नृत्य ऑलिंपिकमध्ये तीन सन्मान पदके मिळवून आपल्या नृत्यजीवनातील यशाचा कळस गाठला. ह्या ऑलिंपिकमध्ये जगातील सतरा राष्ट्रांनी भाग घेतला होता. मेनका यांनी सर्वांत जास्त पदके पटकवण्याचा मान मिळवून भारताला मोठा गौरव प्राप्त करून दिला. युरोपच्या दौऱ्यानंतर भारतीय नृत्यात प्रथमच मेनका यांनी आकर्षक नेपथ्याचा सुयोग्य वापर केला.
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उदय शंकर यांच्या बरोबरीनेच मेनका ह्यांनी भारतीय नृत्याचा प्रसार भारतात व भारताबाहेर करण्यात हातभार लावला. नृत्यकलेचे शिक्षण घेण्यास घरंदाज मध्यमवर्गीय मुलींना त्याकाळी समाजामध्ये बराच विरोध होता. ह्याविरुद्ध जाऊन मेनका ह्यांनी बंड करून मध्यमवर्गातील घरंदाज स्त्रियांना नृत्याचे प्रांगण खुले केले. त्यांच्या बहुमोल कार्याचे खरे मूल्यमापन म्हणजे त्यांनी गुरू कृष्णन कुट्टी, गुरू बिपिन सिन्हा यांसारखे नर्तक, राम गांगुली यांसारखे संगीतदिग्दर्शक व विष्णू शिरोडकरांसारखे तबलावादक महाराष्ट्राला मिळवून दिले. तसेच दमयंती जोशी, शेवंती, मालती पांडे, कमला कीर्तिकर, शिरीन वजिफदार यांसारख्या नामंवत नर्तकींची परंपराही तयार केली. मेनका यांच्या कथ्थक नृत्यप्रणालीचा वारसा भारतात त्यांच्या दमयंती जोशी यासारख्या शिष्या चालवला.
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लेडो भारताच्या आसाम राज्यातील एक शहर आहे.
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स्टिलवेल रोड हा भारत, म्यानमार व चीन यांना जोडणारा रस्ता येथून सुरू होतो.
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लेणी म्हणजे डोंगर, टेकडी, पर्वत, खडक कोरून तयार केलेल्या गुहा होत. ज्यांच्या उपयोग संन्यासी, भिक्खूंना तपस्या,साधना करणे अथवा विश्रांती घेणे ह्यासाठी केला जाई. ही लेणी प्रामुख्याने सातवाहन, वाकाटक व राष्ट्रकूट या राजवंशाच्या काळात कोरली गेली आहेत. अशा वैशिष्ट्यपूर्ण लेण्यांमध्ये महाराष्ट्रातील अजिंठा, कार्ले, कान्हेरी, घारापुरी, पितळखोरे, भाजे, वेरूळ ही जगप्रसिद्ध लेणी आहेत.
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लेण्यांमध्ये चैत्यगृहे, विहार व मंदिर यांचा समावेश असतो. प्रारंभी या लेणी अनलंकृत असाव्यात; परंतु पुढे त्यामधे शिल्पे व मूर्ती खोदण्यात आल्या. तसेच लेण्यांतील भिंतीवर चित्रे कोरून त्या सुशोभित करण्यात आल्या. लेण्यांना शैलगृहे, शिलामंदिरे असेही म्हणतात. लेण हा शब्द संस्कृत लयन- गृह या शब्दावरून आला असावा.
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लेण्याच्या माहितीबाबत एक ढोबळमानाने असलेली गोष्ट अशी की, पुरातन काली बौद्ध भिक्खु हे धम्म प्रसारार्थ भारतभर फिरत असत. त्यांचे दिनचर्येचे पाळायचे नियम कडक असत. ते नियम पाळणे सुलभ व्हावे आणि धम्मप्रसारार्थ फिरणाऱ्या भिक्खुंची ध्यानधारणेची सोय सहज व्हावी ह्यासाठी तत्कालीन राजांनी अशी लेणी खोदून घेतली. अशी लेणी लेण्याद्री, जुन्नर परिसर, कार्ले, भाजे, नाशिक येथे पाहण्यास मिळतात. बहुतेक प्रत्येक लेण्यातते लेणे ज्याने खोदविले त्याच्या नावाचा उल्लेख शिलालेखातून सापडतो. कोकणात दापोली जवळ पन्हाळकाझी लेणी आहेत.
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सबंध भारतात आज माहिती असलेली सुमारे एक हजार लेणी असून त्यापैकी शंभर लेणी ही हिंदू व जैन आहेत. उरलेली ९०० ही बौद्धांची आहेत असे मानले जाते. सातवाहन काळ व त्यानंतर परदेशी व्यापाऱ्यांशी होणाऱ्या व्यापारामुळे आलेली भरभराट ही या लेण्यांच्या निर्मितीला मदत करणारी ठरली असे मानले जाते.
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कालानुसार लेण्यांचे तीन विभाग मानले गेले आहेत :
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लेण्यांच्या अभ्यासातून त्या त्या प्रांताचा राजकीय, सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक आणि सांस्कृतिक इतिहास आपल्याला माहिती होतो.[१]
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लेण्यांचे दोन प्रकार आहेत.
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ऐहिक लेणी - नाणेघाटात सातवाहनांचे देवकुळ म्हणजे कीर्तिमंदिर - पूर्वजांच्या प्रतिमांचे मंदिर. हे एकमेव लेणे ऐहिक लेणे म्हणून ज्ञात आहे.
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धार्मिक लेणी - बौद्ध, जैन, हिंदू ह्या धर्मियांसाठी त्या त्या काळातील शासकांनी तसेच काही प्रमुख व्यक्तींच्या दानातून ही लेणी बांधलेली असावीत. धार्मिक लेण्यांमध्ये त्या धर्माच्या तत्कालीन रूपाचे दर्शन घडते. तसेच धर्म आणि संस्कृती ह्यांचे चित्रण आपल्याला ह्या लेण्यांमधून पाहायला मिळते.
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लेत्झिग्रुंड हे स्वित्झर्लंडच्या झुरिक शहरातील फुटबॉल मैदान आहे.
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लेन काउंटी, ओरेगन ही अमेरिकेच्या ओरेगन राज्यातील ३६ पैकी एक काउंटी आहे. याचे प्रशासकीय केन्द्र येथे आहे.
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२०२० च्या जनगणनेनुसार येथील लोकसंख्या इतकी होती.
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लेन काउंटी, ओरेगनची रचना रोजी झाली. या काउंटीला यांचे नाव दिलेले आहे.
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गुणक: 59°57′N 30°19′E / 59.950°N 30.317°E / 59.950; 30.317
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सेंट पीटर्सबर्ग (रशियन: Санкт-Петербург) हे रशिया देशाच्या वायव्य भागातील एक प्रमुख शहर आहे.
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ह्या शहराची स्थापना झार पीटर द ग्रेटने २७ मे १७०३ रोजी केली. इ.स. १७१३ ते १७२८ व इ.स. १७३२ ते १९१८ ह्या दरम्यान सेंट पीटर्सबर्ग ही रशियन साम्राज्याची राजधानी होती. १९१४ साली ह्या शहराचे नाव पेट्रोग्राड (रशियन: Петроград), व १९२४ साली लेनिनग्राड (रशियन: Ленинград) ठेवण्यात आले. १९९२ साली सेंट पीटर्सबर्ग हे मूळ नाव पुन्हा शासकीय वापरात आणले गेले.
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नेव्हा नदीवर व फिनलंडच्या आखाताच्या मुखाजवळ वसलेले सेंट पीटर्सबर्ग हे रशियातील दुसऱ्या क्रमांकाचे शहर व बाल्टिक समुद्रावरील महत्त्वाचे बंदर आहे. येथील पुल्कोवो विमानतळ रशियामधील तिसऱ्या क्रमांकाच्या वर्दळीचा विमानतळ आहे.
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मॉस्को • सेंट पीटर्सबर्ग
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यान लेनार्डस लेनी लोव (१९ जून, १९५९:केपटाउन, दक्षिण आफ्रिका - हयात) हा नामिबियाकडून २००३ मध्ये १ आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय सामने खेळलेला क्रिकेट खेळाडू आहे. हा उजव्याहाताने फलंदाजी आणि डाव्या हाताने मध्यमगती तसेच मंदगती गोलंदाजी करीत असे.
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याने आपल्या एकमेव एकदिवसीय सामन्यात ६० धावा देउन १ बळी घेतला.
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लेन्वा काउंटी, नॉर्थ कॅरोलिना ही अमेरिकेच्या नॉर्थ कॅरोलिना राज्यातील १०० पैकी एक काउंटी आहे. याचे प्रशासकीय केन्द्र येथे आहे.
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२०२० च्या जनगणनेनुसार येथील लोकसंख्या इतकी होती.
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लेन्वा काउंटी, नॉर्थ कॅरोलिनाची रचना रोजी झाली. या काउंटीला यांचे नाव दिलेले आहे.
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{{{लोकसंख्या_गणना_वर्ष}}}
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लेबेनॉनचे प्रजासत्ताक (देवनागरी लेखनभेद: लेबनॉन; अरबी: اَلْجُمْهُورِيَّة اَللُّبْنَانِيَّة , अल्-जुम्हुरिया अल्-लुब्नानिया ; फ्रेंच: République libanaise, रेपुब्लिक लिबानेस ;) हा पश्चिम आशियातील भूमध्य समुद्राच्या पूर्व किनाऱ्यावर वसलेला एक देश आहे. लेबेनॉनच्या उत्तरेस व पूर्वेस सीरिया व दक्षिणेस इस्राएल या देशांच्या सीमा भिडल्या आहेत. भूमध्य सागरी प्रदेश व अरबी द्वीपकल्पाच्या सीमेवर वसल्यामुळे लेबेनॉनास समॄद्ध इतिहास व वैविध्यपूर्ण संस्कृतीचा वारसा लाभला आहे. बैरूत ही लेबेनॉनाची राजधानी व सर्वांत मोठे शहर आहे. त्रिपोली व सैदा ही येथील इतर मोठी शहरे आहेत.
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मानवी इतिहासाची नोंद होण्यापूर्वी लेबेनॉनमध्ये लोकवस्ती असल्याचे पुरावे सापडले आहेत. सुमारे इ.स. पूर्व १५५० ते इ.स.पूर्व ५४३ दरम्यान हा भूभाग फीनिशिया संस्कृतीचा भाग होता. इ.स.पूर्व ६४ मध्ये लेबेनॉन रोमन साम्राज्याच्या अधिपत्याखाली आला. त्यानंतरच्या अनेक शतकांमध्ये येथे ख्रिश्चन धर्माचा प्रभाव वाढत राहिला. मध्य युगाच्या सुरुवातीच्या काळात मुस्लिमांनी येथे आक्रमण करण्यास सुरुवात केली. इ.स. १५१६ ते इ.स. १९१८ ह्या दरम्यानच्या ४०० वर्षांच्या काळात लेबेनॉनवर ओस्मानी साम्राज्याची सत्ता होती. पहिल्या महायुद्धामध्ये ओस्मानी साम्राज्याचा अस्त झाल्यानंतर ओस्मानी भूभागाच्या वाटण्या करण्यात आल्या. लेबेनॉनवर १९२० ते १९४३ दरम्यान फ्रान्सची सत्ता होती. २२ नोव्हेंबर १९४३ रोजी लेबेनॉनने स्वातंत्र्याची घोषणा केली. १९४६ साली दुसऱ्या महायुद्धानंतर फ्रेंच सैन्य लेबेनॉनमधून बाहेर पडले.
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स्वातंत्र्यानंतर लेबेनॉनची अर्थव्यवस्था झपाट्याने सुधारत गेली व बैरूत जगातील सर्वात लोकप्रिय पर्यटनस्थळांपैकी एक बनले. १९७५ ते १९९० दरम्यान चालू असलेल्या गृहयुद्धामध्ये लेबेनॉनमधील पायाभुत सुविधांचे मोठ्या प्रमाणावर नुकसान झाले. युद्धानंतर पंतप्रधान रफिक हरिरीने लेबेनॉनला पुन्हा प्रगतीपथावर नेण्याचे प्रयत्न केले. २००५ मधील हरिरीच्या हत्येनंतर लेबेनॉनमध्ये झालेल्या क्रांतीमुळे सिरियाने लेबेनॉनमधील आपले सर्व सैन्य काढून घेतले व अनधिकृतपणे बळकावलेला भूभाग परत दिला. २००६ साली लेबेनॉनच्या हिझबुल्ला ह्या अतिरेकी पक्षाने इस्रायलसोबत पुकारलेल्या युद्धामध्ये लेबेनॉनची पुन्हा पडझड झाली.
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अनेक धर्मीय लोकांचे वास्तव्य असलेल्या लेबेनॉनमध्ये धर्मावर आधारित संसदीय लोकशाही पद्धतीचे सरकार अस्तित्वात आहे. संविधानानुसार देशामधील सर्व १८ धर्म व जातीच्या लोकांना सरकारमध्ये प्रतिनिधीत्व मिळते. लेबेनॉनचा राष्ट्राध्यक्ष मरोनाईट ख्रिश्चन, पंतप्रधान सुन्नी मुस्लिम, संसद अध्यक्ष शिया मुस्लिम तर उपपंतप्रधान व संसद-उपाध्यक्ष ईस्टर्न ऑर्थोडॉक्स ख्रिश्चन धर्मीय असणे बंधनकारक आहे.
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लेबेनॉनमधील धर्म (२००८)
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लेबेनॉनमध्ये १९३२ सालानंतर जनगणना घेण्यात आली नसल्यामुळे तेथील अचूक लोकसंख्या उपलब्ध नाही. परंतु २०१० मधील अंदाजानुसार लेबेनॉनची लोकसंख्या ४१,२५,२४७ इतकी होती. अरबी ही येथील राजकीय व अधिकृत भाषा असून फ्रेंच देखील वापरात आहे.
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बैरूत–रफिक हरिरी आंतरराष्ट्रीय विमानतळ हा लेबेनॉनमधील एकमेव विमानतळ असून सर्व आंतरराष्ट्रीय हवाई वाहतूक येथूनच हाताळली जाते.
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लेबेनॉनच्या वैशिष्टपूर्ण भौगोलिक स्थानामुळे येथे उन्हाळी व हिवाळी खेळ खेळले जातात. फुटबॉल हा लेबेनॉनमधील सर्वात लोकप्रिय खेळ आहे. लेबेनॉन फुटबॉल संघ आशियाच्या ए.एफ.सी. मंडळाचा सदस्य असून लेबेनॉनने २००० सालच्या ए.एफ.सी. आशिया चषक स्पर्धेचे आयोजन केले होते.
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व्हॉलीबॉल, बास्केटबॉल, रग्बी लीग हे खेळ देखील लेबेनॉनमध्ये लोकप्रिय आहेत.
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लेन कोल्डवेल (जानेवारी १०, इ.स. १९३३ - ऑगस्ट ६, इ.स. १९९६) हा इंग्लंडकडून १९६२ ती १९६४ दरम्यान सात कसोटी सामने खेळलेला क्रिकेट खेळाडू होता.
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मे ४, इ.स. २००७
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दुवा: [---] (इंग्लिश मजकूर)
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लेलँड होन (जानेवारी ३०, इ.स. १८५३:डब्लिन, आयर्लंड - डिसेंबर ३१, इ.स. १८९६:डब्लिन, आयर्लंड[१]) हा आयर्लंड आणि इंग्लंडकडून आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेळलेला खेळाडू होता.
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होन मॅरिलिबोन क्रिकेट क्लबकडूनही क्रिकेट खेळला.[२]
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लेविन डोमेन मैदान हे न्यू झीलंडच्या लेविन शहरातील एक मैदान होते. प्रामुख्याने हे मैदान क्रिकेट साठी वापरण्यात येत असे.
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२० जानेवारी १९९४ रोजी न्यू झीलंड आणि ऑस्ट्रेलिया या दोन संघांमध्ये या मैदानावरचा पहिला महिला आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय सामना खेळवला गेला.
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प्रारंभिक वर्षे
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22 जानेवारी 1 9 08 रोजी लँडौचा जन्म रशियन साम्राज्यामध्ये असलेल्या बाकू, अझरबैजानमध्ये ज्यूआय पालक [4] [5] [6] [7] झाला. लँडऊचे वडील स्थानिक तेल उद्योगाचे अभियंता होते आणि त्यांची आई डॉक्टर होती. गणितातील बालपणाची शिकवण त्यांनी 12 वर्षाच्या व 13 व्या वर्षी एकत्रितपणे शिकली. 1 9 20 साली लँडॉयूने व्यायामशाळेत 13 वर्षे वयोगटातील पदवी घेतली. त्यांच्या पालकांना त्यांनी युनिव्हर्सिटीला उपस्थित राहण्यासाठी खूपच तरुण मानले, म्हणून एक वर्षासाठी त्यांनी बाकू इकोनॉमिकल टेक्निकल स्कूलमध्ये प्रवेश घेतला. 1 9 22 मध्ये 1 9 22 मध्ये त्यांनी बाकू स्टेट युनिव्हर्सिटीमध्ये मॅट्रिक्युलेट केले. त्याचबरोबर दोन विभागांचे अभ्यास: फिजिक्स आणि मॅथेमॅटिक्सचे विभाग आणि रसायनशास्त्र विभाग. त्यानंतर त्यांनी रसायनशास्त्राचा अभ्यास थांबविला, परंतु त्यांच्या आयुष्यामध्ये त्यांनी रस घेतला.
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लेनिनग्राड आणि युरोप
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1 9 24 मध्ये ते सोव्हिएत भौतिकशास्त्राच्या मुख्य केंद्राकडे गेले: लेनिनग्राड स्टेट युनिव्हर्सिटीचे फिजिक्स विभाग, जिथे त्यांनी 1 9 27 मध्ये पदवीधर पदवी अभ्यास केला आणि स्वतःला सैद्धांतिक भौतिकशास्त्राचा अभ्यास करण्यास समर्पित केले. त्यानंतर लँडौने लेनिनग्राड येथे स्नातकोत्तर अभ्यासक्रम नोंदवले. फिजिको-टेक्निकल इंस्टिट्यूट जिथे 1 9 34 मध्ये त्यांनी अखेर भौतिक आणि गणिती विज्ञान विषयातील डॉक्टरेट प्राप्त केली. [8] 1 9 2 9 -1931च्या काळात रॉकफेलर फाऊंडेशन फेलोशिपने पूरक असलेल्या सोव्हिएत सरकार-पीपल्स कमिसरीएटसाठी शिक्षण-यात्रा फेरोशिपसाठी लँडऊ यांना परदेशात प्रवास करण्याची पहिली संधी मिळाली. त्यावेळेस ते जर्मन आणि फ्रेंच भाषेमध्ये प्रभावी होते आणि इंग्रजीमध्ये संवाद साधू शकले. [9] नंतर त्यांनी इंग्रजी सुधारली आणि डॅनिश शिकली. [10]
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गौटिंगेन आणि लीपझिग येथे थोडा वेळ राहिल्यानंतर, 8 एप्रिल 1 9 30 रोजी नेल्स बोहर संस्थेच्या सैद्धांतिक भौतिकशास्त्रात काम करण्यासाठी तो कोपेनहेगेनला गेला. त्याच वर्षी ते 3 मे पर्यंत तेथे राहिले. भेटीनंतर, लँडॅडो नेहमी स्वतःला नेल्स बोहरचा विद्यार्थी मानत असत आणि लँडोचा भौतिकशास्त्राचा दृष्टीकोन बोहरने फारच प्रभावित केला. कोपेनहेगेन येथे रहाल्यानंतर त्याने 1 9 30च्या सुमारास केंब्रिज (1 9 30च्या दरम्यान) येथे काम केले, [11] कोपेनहेगेन (सप्टेंबर ते नोव्हेंबर 1 9 30), [12] आणि झुरिच (डिसेंबर 1 9 30 ते जानेवारी 1 9 31), जेथे त्याने काम केले वुल्फगँग पॉली. [11] झुरिच लँडो पासून तिसऱ्यांदा कोपेनहेगेनला परतले [13] आणि त्याच वर्षी लेनिनग्राड परत येण्याआधी 25 फेब्रुवारी ते 1 9 मार्च 1 9 31 पर्यंत तेथे राहिले. [14]
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राष्ट्रीय वैज्ञानिक केंद्र खार्कीव्ह संस्था भौतिकी आणि तंत्रज्ञान, खार्कीव्ह
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1 9 32 आणि 1 9 37च्या दरम्यान लँडौ यांनी भौतिकशास्त्र आणि तंत्रज्ञानाच्या राष्ट्रीय वैज्ञानिक केंद्र खार्कीव्ह इंस्टीट्यूट ऑफ सैद्धांतिक भौतिकी विभागाचे नेतृत्व केले आणि त्यांनी खार्किव विद्यापीठ आणि खार्कीव्ह पॉलिटेक्निकल इन्स्टिट्यूटमध्ये भाषण दिले. त्याच्या सैद्धांतिक कामगिरीशिवाय, लँडौ हा खारकिव्ह, युक्रेन मधील सैद्धांतिक भौतिकशास्त्राच्या महान परंपरेचा प्रमुख संस्थापक होता, कधीकधी "लँडौ स्कूल" म्हणूनही ओळखला जातो. खारकिव्हमध्ये, त्याने आणि त्याचे मित्र आणि माजी विद्यार्थी, इव्हगेनी लिफ्शित्झ यांनी सैद्धांतिक भौतिकशास्त्राचा अभ्यासक्रम सुरू करण्यास सुरुवात केली, दहा खंड जो या विषयावर एकत्रितपणे एकत्रित होते आणि अद्यापही मोठ्या प्रमाणावर पदवीधर-स्तर भौतिकशास्त्राच्या ग्रंथ म्हणून वापरले जातात. ग्रेट पुर्ज दरम्यान, लँडऊची खार्कीव्हमधील यूपीटीआय प्रकरणात चौकशी करण्यात आली, परंतु मॉस्कोसाठी तो नवीन पोस्ट घेण्यास निघाला. [15]
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लँडौ ने "थियोरेटिकल मिनिमम" नामक एक प्रसिद्ध व्यापक परीक्षा विकसित केली जी विद्यार्थ्यांना शाळेत प्रवेश करण्यापूर्वी पास होण्याची अपेक्षा होती. या परीक्षेत सैद्धांतिक भौतिकशास्त्रातील सर्व पैलूंचा समावेश आहे आणि 1 9 34 आणि 1 9 61च्या दरम्यान फक्त 43 उमेदवार उत्तीर्ण झाले, परंतु नंतरचे लोक हे उल्लेखनीय सैद्धांतिक भौतिकशास्त्रज्ञ झाले. [16] [17]
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1 9 32 मध्ये लँडौने चंद्रशेखरची मर्यादा मोजली; [18] तथापि, त्यांनी पांढऱ्या बौद्ध तारेंकडे त्यास लागू केले नाही. [1 9]
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लँडॉऊच्या सिद्धांतांमध्ये क्वांटम मेकॅनिक्समध्ये (जॉन व्हॉन न्यूमॅनसह) घनतेच्या मॅट्रिक्स पद्धतीचे स्वतंत्र सह-शोध, हॅमॅनेटिझमचे क्वांटम यांत्रिक सिद्धांत, अतिप्रवाहता सिद्धांत, द्वितीय-ऑर्डर चरण संक्रमण सिद्धांत, गिन्झबर्ग-लँडौ सिद्धांत सुपरकंडक्टिव्हिटी, फर्मि द्रव सिद्धांत, प्लाझमा भौतिकशास्त्र���तील लँडॅओ डंपिंगची व्याख्या, क्वांटम इलेक्ट्रोडॉनेमिक्स मधील लँडोऊ पोल, न्यूट्रीनोचा दोन-घटक सिद्धांत आणि एस मॅट्रिक्स विलक्षणतेसाठी लँडॉऊ समीकरण.
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लँडौ यांना १९६२ मधील भौतिकशास्त्रातील नोबेल पारितोषिक अध्यापनक्षमतेच्या गणितीय सिद्धांतांच्या विकासासाठी प्राप्त झाले आहे जे 2.17 के (270.9 8 डिग्री सेल्सियस) खाली असलेल्या तापमानात द्रव हीलियम IIची गुणधर्मांबद्दल जबाबदार आहे. "[23]
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वैयक्तिक जीवन आणि दृश्ये
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१९३७ मध्ये, लारौऊने खारकिव येथून कोरा टी. ड्रोबानजेवाशी विवाह केला. [24] त्यांचा मुलगा इगोरचा जन्म १९४६ मध्ये झाला. लॅन्डोचा विश्वास मोनोगॅमीपेक्षा "मुक्त प्रेम" असा होता आणि त्याने पत्नी आणि विद्यार्थ्यांना "मुक्त प्रेम" करण्यास प्रोत्साहन दिले. तथापि, त्यांची पत्नी उत्साही नव्हती. [15]
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लॅन्डो नास्तिक होता. [25] [26] १९५७ मध्ये केजीबीने सीपीएसयू केंद्रीय समितीला एक लांब अहवाल दिला. १९५६ च्या हंगेरियन विद्रोह, व्लादिमीर लेनिन आणि त्याला "लाल फासीवाद" असे म्हणतात.
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गेल्या वर्ष
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त्याच्या संपूर्ण आयुष्यात लँडौ त्याच्या तीव्र विनोदाने ओळखले गेले होते, जे मनोचिकित्सक (पी) यांच्याशी खालील संभाषणाद्वारे स्पष्ट केले जाऊ शकते, ज्याने लॅन्डो (एल) कार अपघातातून पुनर्प्राप्ती करताना संभाव्य मेंदूच्या नुकसानीची चाचणी करण्याचा प्रयत्न केला: [10]
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१९६५ मध्ये लँडौच्या माजी विद्यार्थ्यांनी आणि सहकार्याने मॉस्कोजवळ चेर्नोगोलोव्हका शहरात स्थित थोरेटिकल फिजिक्ससाठी लँडॉ इंस्टीट्यूटची स्थापना केली आणि पुढील तीन दशकांमध्ये इसाक मार्कोविच खालातनिकोव्ह यांनी पुढाकार घेतला.
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जून १९६५ मध्ये लेव्ह लँडो आणि यवेसी लिबरॅन यांनी सोव्हिएत ज्यूरीसाठी विद्यार्थी संघटनेच्या वतीने यू.एस.च्या हस्तक्षेपाचा त्यांनी विरोध केला होता असे सांगून न्यू यॉर्क टाइम्समध्ये एक पत्र लिहिले. [2 9]मृत्यू
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१९६८ च्या 1 एप्रिल १९६८ रोजी लँडो यांचा मृत्यू झाला आणि 60 वर्षांपूर्वी कार दुर्घटनेत झालेल्या जखमांच्या गुंतागुंतांमुळे त्यांचा मृत्यू झाला. त्याला नोव्हेडेव्हिची कबरस्तान येथे दफन करण्यात आले. [30] [31]
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रशिया-तुर्कस्तान युद्ध (१६७६-१६८१) हे युद्ध रशियन साम्राज्य व तुर्की साम्राज्य यांच्यात लढले गेले. यात तुर्की साम्राज्याचा विजय झाला.
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तुर्कस्तान-रशिया युद्ध हे ओस्मानी साम्राज्य व रशियन साम्राज्य यांत लढले गेलेले युद्ध होते. यात रशियाचा विजय झाला.
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तुर्कस्तान-रशिया युद्ध हे ओस्मानी साम्राज्य व रशियन साम्राज्य यांत लढले गेलेले युद्ध होते. यात रशियाचा विजय झाला.
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लेस्टरशायर (इंग्लिश: Leicestershire) ही इंग्लंडच्या मध्य भागातील एक काउंटी आहे. लेस्टरशायरच्या पश्चिमेस स्टॅफर्डशायर, उत्तरेस नॉटिंगहॅमशायर, पूर्वेस रटलँड, आग्नेयेस नॉर्थअँप्टनशायर, दक्षिणेस बकिंगहॅमशायर, नैऋत्येस वॉरविकशायर, वायव्येस डर्बीशायर व ईशान्येस लिंकनशायर ह्या काउंट्या आहेत.
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रशियन फेडरेशन आणि युक्रेन सध्या युद्धाच्या स्थितीत आहेत: 2014 मध्ये युक्रेनमधून क्राइमियाच्या रशियन सामीलीकरणानंतर रशियन-युक्रेनियन युद्ध सुरू झाले. फेब्रुवारी 2022 मध्ये, रशियाने युक्रेनवर मोठ्या आघाडीवर आक्रमण केले.
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1991 मध्ये सोव्हिएत युनियनच्या पतनानंतर, उत्तराधिकारी राज्यांचे द्विपक्षीय संबंध संबंध, तणाव आणि पूर्णपणे शत्रुत्वाच्या काळात गेले. 1990च्या दशकाच्या सुरुवातीस, युक्रेनचे सार्वभौमत्व आणि स्वातंत्र्य सुनिश्चित करण्याच्या आकांक्षांचे वर्चस्व होते, त्यानंतर युरोपियन युनियन , रशिया आणि इतर सामर्थ्यशाली देशांशी समतोल सहकार्य करणारे परराष्ट्र धोरण होते.
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युक्रेनचे निर्वाचित अध्यक्ष व्हिक्टर यानुकोविच आणि त्यांच्या समर्थकांना पदच्युत करणाऱ्या रिव्होल्युशन ऑफ डिग्निटीपासून दोन्ही देशांमधील संबंध प्रतिकूल आहेत, कारण त्यांनी युक्रेनच्या संसदेत बहुमत असलेल्या युरोपियन युनियनशी राजकीय संघटना आणि मुक्त व्यापार करारावर स्वाक्षरी करण्यास नकार दिला. युक्रेनच्या क्रांतीनंतरच्या सरकारने रशिया, EU आणि NATO सदस्यांसोबत स्वतःचे आर्थिक आणि सुरक्षा हितसंबंध संतुलित ठेवण्याचा नाजूक राजनयिक खेळ खेळण्याऐवजी EU आणि NATO मधील भविष्यासाठी देशाला वचनबद्ध करण्याची इच्छा व्यक्त केली. 2004 मध्ये झेक प्रजासत्ताक, एस्टोनिया, हंगेरी, लाटविया, लिथुआनिया, पोलंड आणि स्लोव्हाकिया हे EU मध्ये सामील झाले होते, त्यानंतर 2007 मध्ये बल्गेरिया आणि रोमानिया (युरोपियन युनियनचे सदस्य राज्य पहा). रशियन सरकारला भीती होती की युक्रेनचे EU आणि NATOचे सदस्यत्व काळ्या समुद्रात रशियाच्या प्रवेशास प्रतिबंधित करून सहयोगी देशांची पश्चिम भिंत पूर्ण करेल. दक्षिण कोरिया आणि जपान अमेरिकेशी संलग्न असल्याने, रशियन सरकार चिंतित होते की रशियाला संभाव्य शत्रू शक्तींनी कुंपण घातले आहे. प्रतिष्ठेच्या क्रांतीच्या पार्श्वभूमीवर, रशियाने रशियाच्या पूर्वेकडील सीमेवर असलेल्या युक्रेनच्या आर्थिकदृष्ट्या महत्त्वाच्या डोनबास प्रदेशात युद्धात डोनेस्तक पीपल्स रिपब्लिक आणि लुहान्स्क पीपल्स रिपब्लिकमधील फुटीरतावादी मिलिशियाला पाठिंबा दिला. या प्रदेशात रशियन वांशिक बहुसंख्य आहेत. 2022च्या सुरुवातीस रशिया-युक्रेनियन युद्धात 13,000हून अधिक लोक मारले गेले आणि रशियावर काही पाश्चात्य निर्बंध आणले.
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लेस्व्होस हे ग्रीसमधील एक बेट आहे. याचे इंग्रजी स्पेलींग लेस्बोस असे असले तरी याचा उच्चार लेस्व्होस असा आहे. इंग्लिश भाषेत लेस्बियन (समलिंगी स्त्रीया) हा शब्द या बेटावरून आलेला आहे.
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लेहाकी खुर्द हे भारतातील महाराष्ट्र राज्यातील वर्धा जिल्ह्यातील सेलू तालुक्यातील एक गाव आहे.
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येथील हवामान वर्षभर कोरडे असते. उन्हाळ्यात अतिउष्ण असते.हिवाळा व उन्हाळा हे दोन्ही ऋतू तीव्र असतात. उन्हाळ्यात दिवसाच्या व रात्रीच्या तापमानात जास्त फरक असतो.मे हा अतिउष्णतेचा आणि जानेवारी हा कडाक्याच्या थंडीचा महिना असतो. वार्षिक सरासरी पर्जन्यमान १०९ सेंमी.पर्यंत असते.
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लैंगिक इच्छाशक्ती कमी करणे किंवा लैंगिक क्षमता काढणे किंवा लिंगाचे समूळ उच्चाटन करण्याला लैंगिक खच्चीकरण असे म्हणतात. पुरुषांचे वृषण काढणे अथवा स्त्रीचे जननक्षम अवयव निकामी करणे अशा रितीने हे केले जाते. लैंगिक खच्चीकरण करण्याची प्रथा प्राचीन आहे. ही प्रामुख्याने मध्य आशिया आणि दक्षिण आशियात दिसून येते. शत्रूवर विजय मिळाल्यावर शत्रूचे लैंगिक खच्चीकरण केले जात असे. हा एक शिक्षेचा प्रकार होता.
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मध्य युगात मुस्लिम व्यापारी गुलामांचा व्यापार करत. यामध्ये आफ्रिकेतून आणलेल्या गुलांमांचे लैंगिक खच्चीकरण करत असत. यामुळे त्यांची किंमत वाढत असे. कारण असे गुलाम घरात ठेवायला सुरक्षित असत असे मानले जात असे. त्यांनी बायकांना गर्भार करू नये म्हणून असे केले जात असे. बगदादच्या खलिफा कडे असे आठ हजार गुलाम होते.
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आधुनिक पद्धतीनुसार लैंगिक गुन्हेगारांना शिक्षा देण्यासाठी रासायनिक पद्धती वापरली जाते. यात गुन्हेगारांना काही रसायने ठराविक कालावधी नंतर टोचली जातात त्यामुळे त्यांची लैंगिक इच्छाशक्ती कमी होते. यात पुरूषांमधील टेस्टोस्टेरॉन या लैंगिक उत्तेजक संप्रेरकाची निर्मिती कमी होते. इ.स. १९६६ मध्ये प्रथम अमेरिकेत लैंगिक खच्चीकरणाची पद्धत वापरण्यात आली. या औषधांमध्ये सायप्रोटेरोन अॅसिटेट, डेपो प्रोव्हेरा, बेनपेरिडॉल, म्रेडोझायप्रोजेस्टेरोन अॅसिटेट, ल्युप्रोरेलिन(प्रोस्टॅप) यांचा समावेश होतो.
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लीला ग्रेस विल्यम्स (१८ मार्च, १९४७:जमैका - हयात) ही जमैकाच्या महिला क्रिकेट संघाकडून १९७३ मध्ये ५ महिला आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय सामने आणि वेस्ट इंडीजच्या महिला क्रिकेट संघाकडून १९७६ ते १९७९ दरम्यान ११ महिला कसोटी, १ महिला आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय सामने खेळलेली क्रिकेट खेळाडू आहे.
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लॉकेट चॅटर्जी हे भारतीय राजकारणी आहेत. हे १७व्या लोकसभेचे सदस्य आहेत.
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लॉत (फ्रेंच: Lot; ऑक्सितान: Òlt)) हा फ्रान्स देशाच्या मिदी-पिरेनीज प्रदेशातील एक विभाग आहे.
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०१ एन ·
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| 6 |
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०२ अएन ·
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०३ आल्ये ·
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०४ आल्प-दा-ऑत-प्रोव्हाँस ·
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| 9 |
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०५ ऑत-आल्प ·
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| 10 |
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०६ आल्प-मरितीम ·
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| 11 |
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०७ आर्देश ·
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| 12 |
+
०८ अॅर्देन ·
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| 13 |
+
०९ आर्येज ·
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| 14 |
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१० ऑब ·
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| 15 |
+
११ ऑद ·
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| 16 |
+
१२ अॅव्हेरों ·
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| 17 |
+
१३ बुश-द्यु-रोन ·
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| 18 |
+
१४ काल्व्हादोस ·
|
| 19 |
+
१५ कांतॅल ·
|
| 20 |
+
१६ शारांत ·
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| 21 |
+
१७ शारांत-मरितीम ·
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| 22 |
+
१८ शेर ·
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| 23 |
+
१९ कोरेझ ·
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| 24 |
+
२-ए कॉर्स-द्यु-सुद ·
|
| 25 |
+
२-बी ऑत-कॉर्स ·
|
| 26 |
+
२१ कोत-द'ओर ·
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| 27 |
+
२२ कोत-द'आर्मोर ·
|
| 28 |
+
२३ क्रूझ ·
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| 29 |
+
२४ दोर्दोन्य ·
|
| 30 |
+
२५ दूब ·
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| 31 |
+
२६ द्रोम ·
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| 32 |
+
२७ युर ·
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| 33 |
+
२८ युर-ए-लुआर ·
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| 34 |
+
२९ फिनिस्तर ·
|
| 35 |
+
३० गार्द ·
|
| 36 |
+
३१ ऑत-गारोन ·
|
| 37 |
+
३२ जेर ·
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| 38 |
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३३ जिरोंद ·
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| 39 |
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३४ एरॉ ·
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| 40 |
+
३५ इल-ए-व्हिलेन ·
|
| 41 |
+
३६ एंद्र ·
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| 42 |
+
३७ एंद्र-ए-लावार ·
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| 43 |
+
३८ इझेर ·
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| 44 |
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३९ श्युरॅ ·
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| 45 |
+
४० लांदेस ·
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| 46 |
+
४१ लुआर-ए-शेर ·
|
| 47 |
+
४२ लावार ·
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| 48 |
+
४३ ऑत-लावार ·
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| 49 |
+
४४ लावार-अतलांतिक ·
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| 50 |
+
४५ लुआरे ·
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| 51 |
+
४६ लॉत ·
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| 52 |
+
४७ लोत-एत-गारोन ·
|
| 53 |
+
४८ लोझेर ·
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| 54 |
+
४९ मेन-एत-लावार ·
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| 55 |
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५० मांच ·
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| 56 |
+
५१ मार्न ·
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| 57 |
+
५२ ऑत-मार्न ·
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| 58 |
+
५३ मायेन ·
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| 59 |
+
५४ म्युर्ते-ए-मोझेल ·
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| 60 |
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५५ म्युझ ·
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| 61 |
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५६ मॉर्बियां ·
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| 62 |
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५७ मोझेल ·
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| 63 |
+
५८ न्येव्र ·
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| 64 |
+
५९ नोर ·
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| 65 |
+
६० वाझ ·
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| 66 |
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६१ ऑर्न ·
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| 67 |
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६२ पा-द-कॅले ·
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| 68 |
+
६३ पुय-दे-दोम ·
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| 69 |
+
६४ पिरेने-अतलांतिक ·
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| 70 |
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६५ ऑत-पिरेने ·
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| 71 |
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६६ पिरेने-ओरिएंताल ·
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| 72 |
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६७ बास-ऱ्हिन ·
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| 73 |
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६८ ऑत-ऱ्हिन ·
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| 74 |
+
६९ रोन ·
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७० ऑत-सॉन ·
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| 76 |
+
७१ सॉन-ए-लावार ·
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| 77 |
+
७२ सार्त ·
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+
७३ साव्वा ·
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| 79 |
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७४ ऑत-साव्वा ·
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+
७५ पॅरिस ·
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| 81 |
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७६ सीन-मरितीम ·
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| 82 |
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७७ सीन-एत-मार्न ·
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| 83 |
+
७८ इव्हलिन ·
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| 84 |
+
७९ द्यू-सेव्र ·
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| 85 |
+
८० सोम ·
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| 86 |
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८१ तार्न ·
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| 87 |
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८२ तार्न-एत-गारोन ·
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| 88 |
+
८३ व्हार ·
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| 89 |
+
८४ व्हॉक्ल्युझ ·
|
| 90 |
+
८५ वांदे ·
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| 91 |
+
८६ व्हियेन ·
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| 92 |
+
८७ ऑत-व्हियेन ·
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| 93 |
+
८८ व्हॉझ ·
|
| 94 |
+
८९ योन ·
|
| 95 |
+
९० तेरितॉर दे बेल्फॉर ·
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| 96 |
+
९१ एसोन ·
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| 97 |
+
९२ ऑत-दे-सीन ·
|
| 98 |
+
९३ सीन-सेंत-देनिस ·
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| 99 |
+
९४ व्हाल-दे-मार्न ·
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| 100 |
+
९५ व्हाल-द्वाज
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| 101 |
+
परकीय विभाग:
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| 102 |
+
९७१ ग्वादेलोप ·
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| 103 |
+
९७२ मार्टिनिक ·
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| 104 |
+
९७३ फ्रेंच गयाना ·
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| 105 |
+
९७४ रेयूनियों ·
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| 106 |
+
९७६ मायोत
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तिसरा प्योत्र (रशियन: Пётр III Фёдорович, तिसरा प्योत्र फ्योदोरोविच;) (फेब्रुवारी २१, इ.स. १७२८ - जुलै १७, इ.स. १७६२) हा इ.स. १७६२ साली सहा महिने रशियाच्या झारपदावर राहिलेला सम्राट होता. बहुसंख्य इतिहासकारांच्या मते तो प्रशियाधार्जिणा व मानसिकदृष्ट्या कमकुवत होता, ज्यामुळे त्याच्या नेतृत्वास विरोध झाला. तिसऱ्या प्योत्राची पत्नी सम्राज्ञी दुसरी येकातेरिना हिने त्याची कारस्थान रचून हत्या घडवून आणली, असे मानले जाते. त्याच्या मृत्यूनंतर येकातेरिनेने राज्य चालवले.
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मजकुर वगळणे किंवा त्याचे विकिकरण करणे प्रस्तावित आहे. हा साचा एखाद्या लेखात आढळल्यास, लवकरात लवकर सदरहू जाहिरात काढून टाकावी अथवा मजकुरात सुधारणा करावी आणि नंतर {{जाहिरात}} हा साचा लेखातून काढून टाकावा.
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| 2 |
+
हा प्रतिबंधन संकेत केवळ हितसंबधा बद्दल आहे;एखाद्या लेख विषयाबद्दल व्यक्तिगत आत्मियता सहानुभूतीपूर्ण दृष्टीकोण (पूर्वग्रहीत नव्हे) असलेल्या विषयांवर तटस्थ लेखन करण्याच्या आड येत नाही.
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| 3 |
+
तसेच आपल्या लेखनाचे संदर्भ विकिपीडियात इतरांना सहज घेण्याजोगे करण्या करिता आपण स्वतःचे काही लेखन/छायाचित्रे प्रताधिकार मुक्त करू इच्छित असल्यास आपण तसे आपल्या संकेतस्थळावर उद्घोषित करून विकिपीडिया:कायदा आणि प्रताधिकारमुक्ती प्रकल्प येथे तशी नोंद करून ठेवण्याचे स्वागत आहे.
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| 4 |
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सर्वप्रथम, मराठी विकिपीडियावरील तुमच्या अलीकडील योगदानाबद्दल धन्यवाद. मराठी विकिपीडियावर सर्व विषयांतील तज्ज्ञ आणि जाणकारांच्या संपादनांचे स्वागतच आहे.
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वर नमुद केल्या प्रमाणे मराठी विकिपीडिया एक विश्वकोश आहे, त्यातील माहिती निष्पक्षता विश्वासार्हता आणि दर्जा जपण्याच्या दृष्टीने, जाहिरातसदृष्य मजकुर असणे,विशीष्ट वस्तुंच्या किमती नमूद करणे, कोणत्याही अव्यावसायिक किंवा व्यावसायिक, व्यक्तिगत किंवा संस्थात्मक प्रचाराचे, प्रबोधनाचे, वकिलीचे, जाहिरातीचे किंवा फायद्याच्या दृष्टीने प्रत्यक्ष किंवा अप्रत्यक्ष माहिती देण्याचे प्रयत्न करणे हे विकिपीडियाच्या उद्देश व आधारस्तंभ यांस सुसंगत ठरत नाही. अर्थात संबधित ज्ञानकोशीय उल्लेखनीयता असलेल्या माहितीची संदर्भासहीत तर्कसुसंगत योग्य नोंद घेण्याच्या आड हे धोरण नाही.
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मराठी विकिपीडिया हा एक विश्वकोश आहे. जाहिरातसदृष्य अथवा प्रचाराचे, प्रबोधनपर, वकिली (भलावण या अर्थाने), जाहिरात किंवा फायद्याच्या दृष्टीने (प्रत्यक्ष आणि अप्रत्यक्ष दोन्हीही) सहभाग टाळावा असा विकिपीडिया लेखन संकेत आहे. जाहीरात, प्रचार,प्रबोधन, भलावण करण्यासाठी लेखात/हे पानात किंवा विभागात, सपांदने केल्यास अथवा जाणीवपूर्वक करवून घेतल्यास औचित्यभंग होऊन मराठी विकिपीडिया विश्वकोशिय विश्वासार्हतेस तडा जाण्याची शक्यता असते. असा औचित्यभंग झालेला आढळल्यास प्रचारकाचे प्रसिद्धी मिळण्याचे ध्येय बाजूस राहून विकिपीडियाच�� गैर उपयोग केल्याचा ठपका येऊन पत ढासळू शकते हेही लक्षात घ्यावे.
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निनावी अथवा वेगवेगळ्या नावांनी केलेला औचित्यभंग लक्षात येतो का ? जाणीवपुर्वक झालेले प्रचार-औचित्यभंग सरावलेलेल्या ज्ञानकोशीय संपादकांना बऱ्याच अंशी लक्षात येतात. शिवाय लेखन विषयक औचित्य पाळले न गेलेले लेखन वारंवार झाल्यास त्यास उत्पात (spam) समजून असे लेखन/लेख इतर विकिपीडिया संपादकांकडून वगळले जाण्याची शक्यता असते.
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विकिपीडियाचा परीघ, आवाका आणि मर्यादांशी अद्याप आपण परिचित नसल्यास त्याबद्दल येथे माहिती घ्या. नवीन सदस्यांकडून होणार्या सर्वसाधारण संपादन चुकांवर एकदा नजर घाला.
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आपल्या सहकार्या बद्दल धन्यवाद !
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कृपया या संबंधीची चर्चा, या लेखाचे चर्चापानावर पहावी.
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स्थापना : १६ डिसेंबर, २०११
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संस्थापक : सागर मधुकर परदेशी
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विकास आणि इन्हांसमेंट : न्यूजमॅक्स मल्टिमिडिया प्रायव्हेट लिमीटेड - http://www.nmpl.biz/ Archived 2012-02-29 at the Wayback Machine.
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मजकुर लेखिका : मनाली दनैत
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न्युजमॅक्स मल्टिमिडिया ग्रुपच्या सागर मधुकर परदेशी, मनाली दनैत आणि सहकारी मिळून या नवीन कलाकारांसाठी सदर संकेतस्थळ उपलब्ध करून दिले आहे. कास्टडिरेक्टरला हे नवीन कलाकार परिचय व्हावा असा या संकेतस्थळाचा उद्देश आहे.
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लॉरा मारिया कॅटरीना बासी (२९ नोव्हेंबर, इ.स. १७११- २० फेब्रुवारी, इ.स. १७७८) ह्या इटलीच्या भौतिकविद होत्या. युरोपीय विद्यापीठात भौतिकशास्त्र शिकवणाऱ्या त्या पहिल्या स्त्री अध्यापक होत्या.[१]
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लॉरा ह्यांचा जन्म बोलोग्ना येथे झाला.त्यांच्या वडिलांचा व्यवसाय वकिली होती.त्यांचे खाजगी शिक्षण ७ वर्ष झाले. गेतानो तकॉनी ह्या त्यांच्या शिक्षिका होत्या. त्या विद्यापीठात अध्यापिका होत्या. जीवशास्त्र, वैद्यकशास्त्र, इतिहास या विषयांचे अध्यापन त्या करीत. कार्डिनल प्रॉस्परो लँबर्टिनी ह्यांनी तिला खूप प्रोत्साहित केले.
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इ.स. १७३१ मध्ये बोलोग्ना विद्यापीठात वयाच्या एकविसाव्या वर्षी त्यांना शरीररचनाशास्त्र ह्या विषयाच्या अध्यापिका म्हणून त्यांची निवड झाली होती. इ.स. १७३२ मध्ये "अकॅडेमी ऑफ द इंस्टिट्यूट फॉर सायन्सेस"मध्ये त्यांची निवड झाली व पुढच्याच वर्षी त्यांना तत्त्वज्ञान ह्या विषयाचे अध्यापकपद मिळाले. इ.स. १७३८ साली त्यांचा विवाह जिसप वेरात्ती या सह-अध्यापकासोबत झाला. या दांपत्याला बारा अपत्ये झाली.[२]
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न्यूटनप्रणित भौतिकीत लॉराला प्रामुख्याने रस होता आणि ह्या विषयावर तिने २८ वर्षे अध्यापन केले. भौतिकशास्त्र व नैसर्गिक तत्त्वज्ञान याबाबतचे न्यूटनचे विचार इटलीमध्ये आणण्यात तिचा मुख्य सहभाग होता. भौतिकशास्त्राच्या सर्व अंगांमध्ये तिने स्वतःहून अनेक प्रयोग केले. आपल्या आयुष्यकाळात तिने २८ शोधनिबंध प्रकाशित केले, कोणत्याही पुस्तकाचे लेखन मात्र तिच्याकडून झाले नाही.
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इ.स. १७४५ मध्ये लँबर्टिनीने (आताचे चौदावे पोप बेनडिक्ट) तत्कालीन २५ निवडक विद्वानांचा गट बनविला होता. या गटात निवड व्हावी म्हणून लॉराने बरेच प्रयत्न केले, अकॅडमी वर्तुळात यावर संमिश्र प्रतिक्रिया उमटल्या. अखेर गटातील एकमेव महिला सदस्य म्हणून तिची निवड झाली.
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शुक्र ग्रहावरील ३१ किमी व्यासाच्या एका विवराला लॉराचे नाव देण्यात आले आहे.[३]
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बोलोग्नामध्ये तिच्या नावाचे एक विद्यालय व रस्ता आहे.
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लॉरेंझो दे मेदिची (जानेवारी १, इ.स. १४४९ - मे २०, इ.स. १४९२) हा इटलीतील [[फ्लोरेन्सचे प्रजासत्ताक|फ्लोरेन्सचा]] अनभिषिक्त[१] शासक होता. लॉरेंझो पेशाने राजकारणी, राजदूत होता. याने अनेक महान विद्वान, कवी आणि कलाकारांना पोसले. त्याला त्याचे समकालीन लॉरेंझो इल मॅग्निफिको (महान लॉरेंझो, इंग्लिश:लॉरेंझो द मॅग्निफिसन्ट) असे संबोधत. लॉरेंझोचा शासनकाळ हा इटलीतील प्रबोधनाचा सर्वोच्चबिंदू होता. त्याच्या मृत्यूनंतर फ्लोरेन्सच्या प्रजासत्ताकाचा सुवर्णकाळ अस्तास जाण्यास सुरुवात झाली. त्याने मोठ्या प्रयत्नाने इटलीतील संस्थानांमध्ये घडवून आणलेले तह त्याच्या मृत्यूनंतर लगेचच कोसळले आणि पुन्हा यादवीस सुरुवात झाली.
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लॉरेंझोला फ्लोरेन्समधील मेदिची चॅपेलमध्ये दफन करण्यात आले आहे.
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लॉरेन गॉटलीब (८ जून, १९८८ - ) ही एक अमेरिकन नृत्यांगना आणि अभिनेत्री आहे.[१]
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