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कांग्रेस दल का नेता कौन है ?
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"भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस\n1947 में भारत की स्वतन्त्रता के बाद से भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस भारत के मुख्य राजनैतिक दलों में से एक रही है। इस दल के कई प्रमुख नेता भारत के प्रधानमन्त्री रह चुके हैं। जवाहरलाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री,पण्डित नेहरू की पुत्री इन्दिरा गाँधी एवं उनके नाती राजीव गाँधी इसी दल से थे। राजीव गाँधी के बाद सीताराम केसरी काँग्रेस के अध्यक्ष बने जिन्हे सोनिया गाँधी के समर्थकों ने नामंजूर कर दिया तथा सोनिया गाँधी को हाईकमान बनाया, राजीव गाँधी की पत्नी सोनिया गाँधी काँग्रेस की अध्यक्ष तथा यूपीए की चेयरपर्सन भी रह चुकी हैं। कपिल सिब्बल, काँग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह, अहमद पटेल, राशिद अल्वी, राज बब्बर, मनीष तिवारी आदि काँग्रेस के वरिष्ट नेता हैं। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ॰ मनमोहन सिंह भी काँग्रेस से ताल्लुक रखते हैं।",
"गरम दल\nगरम दल भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के अन्दर ही सदस्यों के मतभेद के कारण उपजा एक धड़ा था जिसके नेता लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक और विपिनचंद्र पाल थे। बंगाल विभाजन के बाद काँग्रेस के नरम दल के लोगों के साथ इस दल के स्पष्ट विरोध सामने आये।स्वदेशी आंदोलन की शुरूआत बंगाल विभाजन के परिणामस्वरूप (1905ई) हुई जिसमें ब्रिटिश वस्तुओं का बहिष्कार किया गया और स्वदेशी उत्पादन को प्रोत्साहित किया गया। गरम दल नेता अरविंद घोष, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, विपिन चंद्र पाल तथा लाल लाजपत राय स्वदेशी आंदोलन को पूरे देश में लागू करना चाहतें थे जबकि नरमपंथ सिर्फ इसे बंगाल तक सीमित रखना चाहतें थे। मतभेद बढ़तें गये तथा 1907 के कांग्रेस के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस ’नरमदल’ व गरमदल’ में विभाजित हो गई। गरम दल वाले वन्देमातरम् को राष्ट्र गान बनाना चाहते थे जबकि नरम दल वाले जन गण मन के समर्थक थे।",
"प्रणब मुखर्जी\nसन 1985 के बाद से वह कांग्रेस की पश्चिम बंगाल राज्य इकाई के भी अध्यक्ष हैं। सन 2004 में, जब कांग्रेस ने गठबन्धन सरकार के अगुआ के रूप में सरकार बनायी, तो कांग्रेस के प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह सिर्फ एक राज्यसभा सांसद थे। इसलिए जंगीपुर (लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र) से पहली बार लोकसभा चुनाव जीतने वाले प्रणव मुखर्जी को लोकसभा में सदन का नेता बनाया गया। उन्हें रक्षा, वित्त, विदेश विषयक मन्त्रालय, राजस्व, नौवहन, परिवहन, संचार, आर्थिक मामले, वाणिज्य और उद्योग, समेत विभिन्न महत्वपूर्ण मन्त्रालयों के मन्त्री होने का गौरव भी हासिल है। वह कांग्रेस संसदीय दल और कांग्रेस विधायक दल के नेता रह चुके हैं, जिसमें देश के सभी कांग्रेस सांसद और विधायक शामिल होते हैं। इसके अतिरिक्त वे लोकसभा में सदन के नेता, बंगाल प्रदेश कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष, कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की मंत्रिपरिषद में केन्द्रीय वित्त मन्त्री भी रहे। लोकसभा चुनावों से पहले जब प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह ने अपनी बाई-पास सर्जरी कराई, प्रणव दा विदेश मन्त्रालय में केन्द्रीय मंत्री होने के बावजूद राजनैतिक मामलों की कैबिनेट समिति के अध्यक्ष और वित्त मन्त्रालय में केन्द्रीय मन्त्री का अतिरिक्त प्रभार लेकर मन्त्रिमण्डल के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे।"
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"जनता दल (सेक्युलर)\nजनता दल (सेक्युलर) भारत का एक राजनैतिक दल है जिसके नेता भारत के पूर्व प्रधानमन्त्री एच. डी. देवेगौड़ा हैं। यह दल कर्नाटक और केरल में प्रान्तीय दल के रूप में पंजीकृत है। इसकी स्थापना १९९९ में जनता दल से टूटकर हुई।",
"उत्तराखण्ड क्रान्ति दल\nपार्टी के वर्तमान चेहरे काशी सिंह ऐरी, उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के एक प्रमुख नेता, उत्तर प्रदेश विधान सभा में तीन बार (१९८५-१९८९, १९८९-१९९१, १९९३-१९९६) विधायक और उत्तराखण्ड क्रान्ति दल के एक वरिष्ठ नेता हैं जो प्रथम उत्तराखण्ड विधान सभा २००२ में विधायक और उक्राद के अध्यक्ष भी रहे हैं। पार्टी के वर्तमान उपाध्यक्ष भुवन चंद्र जोशी और बीना बहुगुणा, वरिष्ठ राज्य आन्दोलनकारी और उत्तराखण्ड राज्य के गठन में सबसे आगे से संघर्ष करने वाले उत्तराखण्ड राज्य निर्माण आंदोलन के प्रमुख चेहरे हैं। जसवंत सिंह बिष्ट रानीखेत निर्वाचन क्षेत्र से पहली बार निर्वाचित विधायक थे। अन्य विभूतियों में बिपिन चन्द्र त्रिपाठी, इन्द्रमणि बडोनी जो अलग राज्य आन्दोलन के लिए उक्राद के संस्थापक सदस्यों और लंबे समय से राज्य आन्दोलनकारियों में से एक थे, शामिल हैं।",
"नरम दल\nउदारवादी नेताओं का यह विश्वास था कि ब्रिटिश शासन न्यायप्रिय है। टी. माधवराव ने कांग्रेस के तीसरे अधिवेशन में स्वागत-समिति के अध्यक्ष पद से भाषण देते हुए कहा था कि, कांग्रेस ब्रिटिश शासन का यश शिखर है और ब्रिटिश जाति की कीर्ति मुकुट है।",
"भारतीय चुनाव\nभारतीय लोक दल के नेता चौधरी चरण सिंह और जगजीवन राम, जिन्होंने कांग्रेस छोड़ दी थी, जनता गठबंधन के सदस्य थे, लेकिन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के से वे खुश नहीं थे।",
"भारतीय क्रांति दल\nभारतीय क्रांति दल भारत का एक राजनैतिक दल था जिसकी स्थापना १९६७ में चौधरी कुम्भाराम आर्य , चौधरी चरण सिंह ने की थी। सन १९७७ के आम चुनावों के बाद यह दल जनता पार्टी में विलय कर दिया गया। 1966 में राजस्थान के किसान नेता चौधरी कुंभाराम आर्य राजस्थान व मुख्यमंत्री मोहन लाल सुखाड़िया से भूमि सुधार कानून, पंचायती राज, व सहकरिक्ता के सबंध में गंभीर मतभेद उतपन्न होने के बाद 27 दिसम्बर 1966 में कांग्रेस पार्टी के सभी पदों व मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। उत्तरप्रदेश में चौधरी चरणसिंह कांग्रेस से वर्ष 1967 में अलग हो गए उसके बाद चौधरी कुम्भाराम आर्य व चौधरी चरण सिंह ने साथ मिलकर भारतीय क्रांति दल की स्थापना की थी चौधरी चरण सिंह को भारतीय क्रांति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष,चौधरी कुम्भाराम आर्य राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बने, उसके बाद उत्तर प्रदेश एवं बिहार में भारतीय क्रांति दल अपनी सरकार बनाने में सफल रहा चौधरी चरण सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने हेमवंती नंदन बहगुणा को कार्यकारी अध्यक्ष चुना गया तथा महामाया प्रसाद सिंह बिहार के मुख्यमंत्री बने, 1968 में चौधरी कुंभाराम आर्य भारतीय क्रांति दल के टिकट पर राज्यसभा सदस्य चुने गए राजस्थान से। 1975 में प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरागांधी ने देश में फैली अशांति व अराजकता से निपटने के लिए आपात स्थिति लागू कर दी। देश में आपातकाल की घोषणा के बाद देशभर के विरोधी दलों के नेता एवं कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया उसी समय भारतीय क्रांति दल के नेताओं को भी जेल में बंद कर दिए गया, उसके बाद 1977 में सभी गैर कांग्रेसी दलों ने मिलकर जनता पार्टी के नाम से साझा मोर्चा बनाया था,संयुक्त रूप से कांग्रेस के विरुद्ध चुनाव लड़ा जिसमें भारतीय क्रांतिदल का विलय जनता पार्टी में हो गया, जनसंघ, तथा अन्य दल भी शामिल थे।",
"झलनाथ खनाल\nझलनाथ खनाल (जन्म:१९ मार्च १९५०, साँखेजुङ (इलाम जिला) नेपाली कम्युनिस्ट आन्दोलन के एक शीर्ष नेता और नेपाल के वर्तमान प्रधानमंत्री है। ३ फ़रवरी २०११ को निर्वाचित हुए खनाल नेकपा (एमाले) के अध्यक्ष भी है। खनाल हाल ही में इलाम जिला क्षेत्र नं. १ से संविधान सभा सदस्य के रूप में चुने गए। इसके पहले वे कई बार मन्त्री भी बन चुके हैं। विद्यार्थी जीवन से भूमिगत कम्युनिष्ट राजनीति में लगे खनाल तत्कालीन नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माले) के पोलित ब्यूरो सदस्य बनने के बाद महासचिव पद पर आसीन हुए। २०४७ साल में नेकपा मार्क्सवादी और नेकपा माले मिलकर नेकपा (एकिकृत माक्सवादी लेनिनवादी) बनने के बाद वे उस पार्टी के स्थायी समिति सदस्य हुए। २०६६ साल के बुटवल अधिवेशन के बाद वे एमाले के अध्यक्ष में निर्वाचित हुए। खनाल ने २०६७ माघ २३ गते राष्ट्रपति रामवरण यादवके सामु पद और गोपनीयताके सपथ ग्रहण किया। नेपाल के सबसे असफल प्रधानमंत्री बनने का रेकॉर्ड हैं इनके पास।",
"भारतीय चुनाव\nप्रथम आम चुनाव से ठीक पहले नेहरू के दो पूर्व कैबिनेट सहयोगियों ने कांग्रेस के वर्चस्व को चुनौती देने के लिए अलग राजनीतिक दलों की स्थापना कर ली थी। जहां एक ओर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अक्टूबर 1951 में जनसंघ की स्थापना की, वहीं दूसरी ओर दलित नेता भीमाराव अम्बेडकर ने अनुसूचित जाति महासंघ (जिसे बाद में रिपब्लिकन पार्टी का नाम दिया गया) को पुनर्जीवित किया। जो अन्य दल उस समय आगे आए उनमें आचार्य कृपालनी की किसान मजदूर प्रजा परिषद, राममनोहर लोहिया और जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी शामिल हैं। हालांकि, इन छोटे दलों को पता था कि वे वास्तव में कांग्रेस के खिलाफ कहीं खड़े नहीं होते हैं।"
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पाकिस्तान में कोनसा धर्म सबसे बढ़ा है?
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"सिन्धी लोग\nइस्लामी विजय से पहले हिंदू धर्म सिंध में प्रमुख धर्म था। पाकिस्तान की 1998 की जनगणना के अनुसार, हिंदुओं ने सिंध प्रांत की कुल आबादी का लगभग 8% हिस्सा बनाया था। उनमें से ज्यादातर कराची, हैदराबाद, सुक्कुर और मीरपुर खास जैसे शहरी इलाकों में रहते हैं। हैदराबाद पाकिस्तान में सिंधी हिंदुओं का सबसे बड़ा केंद्र है, जहाँ 100,000-150,000 लोग रहते हैं। 1947 में पाकिस्तान की स्वतंत्रता से पहले हिंदुओं का अनुपात अधिक था।"
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"पंजाब, पाकिस्तान में हिंदू धर्म\nपाकिस्तान के पंजाब प्रांत में हिंदू धर्म अल्पसंख्यक धर्म है, जिसके बाद इसकी आबादी लगभग 0.2% है। हिंदू धर्म मुख्य रूप से रहीम यार खान और बहावलपुर के दक्षिणी पंजाब जिलों में पालन किया जाता है।",
"पाकिस्तान में सिख धर्म\nपाकिस्तान में सबसे बड़ी सिख जनसंख्या पेशावर में ख़ैबर पख़्तूनख़्वा में पाई जाती है, जहाँ \"नानावती\" (संरक्षण) के पश्तून कानून ने हिंसा के पैमाने को बचाया जो पंजाब के सिंधु नदी में था। दक्षिण एशिया में सिख और मुस्लिम समुदायों के बीच लंबे समय तक तनाव के बावजूद, पश्तून सिखों के धार्मिक अल्पसंख्यक के प्रति सहिष्णु थे |",
"पाकिस्तान में हिन्दू धर्म\nहिंदू धर्म, बौद्ध धर्म और सिख धर्म की जनसंख्या का पाकिस्तान में ऐतिहासिक अधःपतन देखा गया है। ये होने की पृष्ठिभूमि में कई प्रकार के कारण हैं, फिर भी पाकिस्तान के पूर्वीय सीमा क्षेत्रों में इनका विकास अविरत चल रहा है। भी इन धर्मों के लिए जारी रखा है पनपने से परे पूर्वी सीमाओं का पाकिस्तान है। दिल्ली सल्तनत और बाद में मुगल साम्राज्य के कालखण्ड में मिशनरी सूफी संतों के कारण ये धर्म मुख्य रूप से मुस्लिम बन गये, जिनकी दरगाह पाकिस्तान और अन्य दक्षिण एशिया में हैं। मुख्य रूप से मुस्लिम जनता ने मुस्लिम लीग और पाकिस्तान आंदोलन का समर्थन किया। 1947 में स्वतंत्रता के पश्चात् पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदुओं और सिखों ने भारत की ओर स्थानान्तरण किया। जबकि मुसलमानों ने भारत को छोड़ कर पाकिस्तान को अपना लिया। लगभग 6 लाख हिंदुओं और सिखों ने स्थानान्तरण किया, जबकि लगभग समान संख्या में मुसलमान पाकिस्तान में चले गये। कुछ हिन्दूओं को पाकिस्तान में लगता कि उनके साथ द्वितीय श्रेणी के नागरिके समान व्यवहार होता है, अतः उन्होंने भारत की ओर स्थानान्तरण कर लिया।",
"पाकिस्तान में धर्म\nआधुनिक पाकिस्तान के क्षेत्र में सिख धर्म की व्यापक विरासत और इतिहास है, हालांकि सिख वर्तमान रूप से पाकिस्तान में एक छोटा सा समुदाय बनाते हैं। अधिकांश सिख पंजाब प्रांत में रहते हैं, जो बड़े पंजाब क्षेत्र का हिस्सा है जहाँ से यह धर्म मध्य युग में पैदा हुआ था, और ख़ैबर पख़्तूनख़्वा प्रांत में पेशावर। ननकाना साहिब, सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी का जन्मस्थान पंजाब प्रांत में स्थित है। 18 वीं और 19वीं शताब्दी में, सिख समुदाय एक शक्तिशाली राजनीतिक ताकत बन गया, सिख नेता रणजीत सिंह ने पहला सिख साम्राज्य स्थापित किया, जिसकी राजधानी लाहौर में हुई थी, जो आज पाकिस्तान का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। सिखों की महत्वपूर्ण आबादी पंजाब के सबसे बड़े शहरों जैसे लाहौर, रावलपिंडी और फैसलाबाद में बसे। 1947 में भारत के विभाजन के बाद, अल्पसंख्यक हिंदू और सिख भारत चले गए जबकि भारत के कई मुस्लिम शरणार्थियों ने पाकिस्तान में बसना पसंद किया था। पाकिस्तान में हिंदु धर्म का अनुसरण करने वाले कुल जनसंख्या के लगभग 2% है। पूर्वतन जनगणना के समय पाकिस्तानी हिंदुओं को \"जाति\" (1.6%) और अनुसूचित जाति (0.25%) में विभाजित किया गया। पाकिस्तान को ब्रिटेन से स्वतन्त्रता 14 अगस्त, 1947 मिली उसके बाद 44 लाख हिंदुओं और सिखों ने आज के भारत की ओर स्थानान्तरण किया, जबकि भारत से 4.1 करोड़ मुसलमानों ने पाकिस्तान में रहने के लिये स्थानातरण किया। 1951 की जनगणना के अनुसार पश्चिमी पाकिस्तान में 1.6% भारतीय जनसंख्या थी, जबकि पूर्वी पाकिस्तान (आधुनिक बांग्लादेश) में 22.05% थी। सैतालिस वर्षों के पश्चात् 1997 में पाकिस्तान की हिन्दू जनसंख्या में वृद्धि नहीं हुई, अतः 1.6% हिन्दु थे और बांगलादेश में हिन्दू-जनसंख्या भारी गिरावट आयी और केवल 10.2% हिन्दु ही बचे। 1998 की पाकिस्तान की जनगणना में अभिलिखित है कि, 2.5 लाख हिन्दु जनसंख्या पाकिस्तान में बची है। अधिकतर हिंदु पाकिस्तान के सिंध प्रांत में रहते हैं। पाकिस्तान में दशकों से अल्पसंख्यक हिन्दु और क्रिश्चन आदि उत्पीड़न सह रहे हैं। जो 2014 तक अत्यन्त गम्भीर स्तर पर पहोंच गया था।",
"पाकिस्तान में सिख धर्म\nआधुनिक पाकिस्तान के क्षेत्र में सिख धर्म की व्यापक विरासत और इतिहास है, हालांकि सिख वर्तमान रूप से पाकिस्तान में एक छोटा सा समुदाय बनाते हैं। अधिकांश सिख पंजाब प्रांत में रहते हैं, जो बड़े पंजाब क्षेत्र का हिस्सा है जहाँ से यह धर्म मध्य युग में पैदा हुआ था, और ख़ैबर पख़्तूनख़्वा प्रांत में पेशावर। ननकाना साहिब, सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी का जन्मस्थान पंजाब प्रांत में स्थित है।",
"पाकिस्तान में बौद्ध धर्म\nपाकिस्तान की असली बौद्ध खजाना पहाड़ के पार तक्षशिला में है जो आधुनिक शहर इस्लामाबाद से 35 किलोमीटर दूर है। तक्षशिला के अधिकांश पुरातात्विक स्थल तक्षशिला संग्रहालय के आसपास स्थित हैं जो ज्यादातर बौद्ध धर्म से जुड़े हैं। सबसे महत्वपूर्ण स्थलों में से कुछ हैं: धर्मराजिका स्तूप और मठ, भीर टीला (600-200 ईसा पूर्व), सिरकप, जंडियाल मंदिर और जुलियन मठ।",
"एशिया में धर्म\n(हिंदू धर्म) सनातन धर्म 1 अरब से अधिक अनुयायियों के साथ हिंदू धर्म एशिया का दूसरा सबसे बड़ा और सबसे पुराना धर्म है | जनसांख्यिकीय, यह [भारत] में सबसे बड़ा धर्म (80%), नेपाल (81%), और बाली द्वीप (83.5%), [भूटान], फिजी, इंडोनेशिया, मलेशिया, [बांग्लादेश] के एशियाई देशों में मजबूत अल्पसंख्यकों के साथ है। [पाकिस्तान], सिंगापुर, श्रीलंका, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, यमन, रूस, सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत, कतर, म्यांमार, फिलीपींस और अफगानिस्तान। आज सनातन धर्म को हिंदू धर्म कहा जाता है।",
"पाकिस्तान में जैन धर्म\nइस देश भर में कई प्राचीन जैन मंदिर बिखरे पड़े हुए हैं। बाबा धरम दास एक संत व्यक्ति थे जिनकी समाधि पाकिस्तान के पंजाब में सियालकोट शहर के पास, पसरूर में कृषि मुख्य कार्यालय के पीछे, चावंडा फाटिक के पास एक नाले के किनारे स्थित है जिसे देओका या देओके या देग नाम से भी जाना जाता हैं। इस क्षेत्र के एक अन्य प्रमुख जैन भिक्षु गुजरांवाला के विजयनंदसूरी थे, जिनकी समाधि (स्मारक मंदिर) आज भी शहर में उपस्थित है।",
"एशिया में धर्म\nलगभग 30 मिलियन अनुयायियों के साथ सिख धर्म दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा संगठित धर्म है। और यह धर्म बड़ी तेजी से बढ़ रहा है। यह 1500 के दशक में गुरु नानक देव द्वारा स्थापित एक एकेश्वरवादी धर्म है। धर्म पंजाब के क्षेत्र में अपनी जड़ों का दावा करता है, जिनके क्षेत्र भारत और पाकिस्तान का हिस्सा हैं।"
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गूगल की खोज किसने की थी ?
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"गूगल खोज\nगूगल खोज या गूगल वेब खोज वेब पर खोज का एक इंजन है, जिसका स्वामित्व गूगल इंक के पास है और यह वेब पर सबसे ज्यादा उपयोग किया जाने वाला खोज इंजन है। अपनी विभिन्न सेवाओं के जरिये गूगल प्रति दिन कई सौ लाख विभिन्न प्रश्न प्राप्त करता है। गूगल खोज का मुख्य उद्देश्य अन्य सामग्रियों, जैसे गूगल चित्र खोज के मुकाबले वेबपृष्ठों से सामग्री की खोज करना है। मूलतः गूगल खोज का विकास 1997 में लैरी पेज और सेर्गेई ब्रिन ने किया।"
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"गूगल खोज\nअगस्त 2009 में गूगल ने एक नई खोज प्रणाली की घोषणा की, जिसका कूट नाम \"कैफीन\" था। नई प्रणाली परिणामों को तेजी से दिख्नाने फेसबुक और ट्विटर सहित सेवाओं की शीघ्रता से अद्यतन सूचना से बेहतर तरीके से निपटने के लिए डिजाईन की गई है। गूगल के डेवलपर्स ने कहा कि अधिकतर उपयोगकर्ताओं ने तत्काल परिवर्तन पर थोड़ा ही ध्यान दिया, लेकिन डेवलपर्स को अपने सैंडबॉक्स में नई खोज का परीक्षण करने के लिए आमंत्रित किया। भारी खोज शब्द और डोमेन की उम्र के महत्व को शामिल करते हुए खोज इंजन अनुकूलन पर उनके प्रभाव को लेकर मतभेद दर्ज किये गये। कुछ हलकों में इस पहल को माइक्रोसॉफ्ट की हाल की अपनी खोज सेवा, जिसे बिंग के रूप में पुनर्नानामित किया गया, के उन्नत संस्करण जारी करने की प्रतिक्रिया के रूप में व्याख्यायित किया गया। 8 जून 2010 को गूगल ने कैफीन के पूरा होने की घोषणा करते हुए यह दावा किया कि अपनी अनुक्रमणिका को निरंतर अद्यतन करते रहने के कारण 50% नये परिणाम दिखे. कैफीन के साथ गूगल ने पीछे की ओर खत्म होने वाली अनुक्रमण प्रणाली को मैपरिड्युस से अलग ले जाकर बिग टेबल की ओर मोड़ दिया, जो कंपनी का वितरित डेटाबेस आधार है। कैफीन कोलोसस या जीएसफएस2 (GFS2) पर भी आधारित है, जो जीएफएस (GFS) द्वारा वितरित फाइल प्रणाली की पूरी तरह मरम्मत की गई प्रणाली है।",
"गूगल समूह\nडेजा न्यूज़ रिसर्च सर्विसेस एक यूज़नेट चर्चा समूह के लिए पोस्टेड संदेशों का एक संग्रह था, जिसकी शुरूआत ऑस्टिन, टेक्सास में स्टीव मडेरे द्वारा मार्च 1995 में हुआ था। इसके शक्तिशाली खोज इंजन की क्षमताओं ने सेवा प्रशंसा हासिल की, विवाद उत्पन्न किया और ऑनलाइन चर्चा के कथित प्रकृति में काफी बदलाव को हासिल किया।",
"गूगल\nमार्च 1999 में कम्पनी ने अपने कार्यालयों को पालो अल्टो, कैलिफ़ोर्निया में स्थानान्तरित किया, जो कि कई अन्य बड़ी सिलिकॉन वैली कम्पनियों का ठिकाना है। इसके एक वर्ष बाद पेज और ब्रिन के शुरूआती विमुखता के बावजूद, गूगल ने खोज-शब्दों/संकेतशब्द (Keywords) से जुड़े विज्ञापनों को बेचना शुरू किया। खोज-पृष्ठ को साफ-सुथरा तथा गति बनाये रखने के लिए, विज्ञापन केवल पाठ आधारित थे। संकेतशब्द की बिक्री उसकी बोली तथा क्लिकों के संयोजन के आधार पर की जाती थी। इसके लिए न्यूनतम बोली पाँच सेन्ट प्रति क्लिक थी। संकेतशब्द से विज्ञापनों को बेचने का यह मॉडल पहली बार गोटू.कॉम (Goto.com)—आइडियालैब के बिल ग्रौस का एक उपोत्पाद द्वारा किया गया। इस कम्पनी ने अपना नाम ओवरचर सर्विसेस रख लिया और गूगल पर उसके ॠण-प्रति-क्लिक और बोली के पेटेंट्स का कथित उल्लंघन करने का मुकदमा किया। ओवरचर सर्विसेस बाद में याहू द्वारा खरीद लिया गया और इसका नया नाम याहू! सर्च मार्केटिंग रखा गया। पेटेंट्स के उल्लंघन का मामला आपस में सुलझा लिया गया। इसके लिए गूगल ने अपने सामान्य शेयरों में से कुछ की हिस्सेदारी याहू! को दी और उसके बदले पेटेंट्स का शाश्वत लाईसेंस अपने नाम करवा लिया।",
"गूगल समूह\n2001 तक खोज सेवा बंद हो गई थी। फरवरी 2001 में, गूगल ने डेजा न्यूज़ का अधिग्रहण किया और इसकी संपत्ति को groups.google.com में परिवर्तित किया। उस समय प्रयोक्ता नए गूगल ग्रुप इंटरफ़ेस के माध्यम से इन यूज़नेट समाचारसमूह का उपयोग कर सकते थे।",
"गूगल\nगूगल बुक्स्, एक और विवादास्पद खोज सेवा है जिसकी गूगल मेज़बानी करता है। कम्पनी ने पुस्तकों की स्कैनिंग तथा सीमित पूर्वावलोकन और अनुमति के साथ पुस्तकों की पूर्ण अपलोडिंग अपने नये पुस्तक खोज इंजन में चालू किया। 2005 में, ऑथर्स गिल्ड, एक समूह जो 8000 अमेरिकी लेखकों का प्रतिनिधित्व करता है, ने न्यूयॉर्क शहर के एक संघीय अदालत में इस नयी सेवा पर गूगल के खिलाफ एक वर्ग कार्रवाई मुकदमा दायर किया। पुस्तकों के सम्बन्ध में गूगल ने कहा है कि यह सेवा कॉपीराइट कानून के सभी मौजूदा और ऐतिहासिक अनुप्रयोगों का अनुपालन करती है। अंततः एक संशोधित निपटान के लिए 2009 में गूगल ने स्कैनिंग अमेरीका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा की किताबों तक सीमित कर दिया। इसके अलावा, पेरिस सिविल कोर्ट ने 2009 के अन्त में गूगल के खिलाफ़ उसके डेटाबेस से ला मार्टिनियर () का काम हटाने का फ़ैसला सुनाया। अमेज़न.कॉम (Amazon.com) से आगे निकलने के लिए गूगल नयी किताबों का डिजिटल संस्करण बेचने की योजना कर रहा है। इसी तरह, नवागंतुक बिंग के जवाब में, 21 जुलाई 2010 को गूगल ने अपने छवि खोज में का प्रवाहित क्रम चालू किया, जो इंगित करने पर फ़ैल (बड़े हो) जाते हैं। हालाँकि वेब खोज अभी भी एक थोक (बैच) प्रति पृष्ठ के प्रारूप के अनुसार दिखाई देते हैं, 23 जुलाई 2010 से, कुछ अंग्रेजी शब्दों के शब्दकोश परिभाषा वेब खोजों के लिए लिंक किये गये परिणामों के ऊपर दिखने लगे। उच्च-गुणवत्ता को महत्त्व देते हुए मार्च 2011 में गूगल ने अपना एल्गोरिथम परिवर्तित किया।",
"गूगल\nगूगल का उद्यम बाज़ार में प्रवेश फरवरी 2002 में के साथ हुआ गूगल खोज उपकरण, जो बड़े संगठनों को खोज तकनीक प्रदान करने की ओर लक्षित है। गूगल ने छोटे संगठनों को ध्यान में रखते हुए मिनी तीन साल बाद बाज़ार में उतारा। 2006 के अन्त में गूगल ने परिपाटी (कस्टम) खोज व्यवसाय संस्करण बेचना चालू किया, जिससे ग्राहकों को Google.com के सूची में विज्ञापन मुक्त विंडो उपलब्ध होता है। 2008 में इस सेवा का नाम गूगल साइट सर्च रख दिया गया। गूगल के उद्यम उत्पादों में से एक उत्पाद गूगल ऐप्स प्रीमियर संस्करण है। यह सेवा और उसके साथ गूगल ऐप्स शिक्षण संस्करण तथा सामान्य संस्करण, कम्पनियों, विद्यालयों और अन्य संगठनों को गूगल के ऑनलाइन अनुप्रयोगों को, जैसे कि जीमेल और गूगल डॉक्यूमेंट्स, अपने डोमेन में डालने की अनुमति देते हैं। प्रीमियर संस्करण, विशेष रूप से सामान्य संस्करण से अधिक सुविधाएँ, जैसे कि अधिक डिस्क स्पेस, एपीआई का उपयोग और प्रीमियम सहायता 50 डॉलर प्रति उपयोगकर्ता प्रति वर्ष के दर से प्रदान करता है। गूगल ऐप्स का एक बड़ा कार्यान्वयन 38,000 उपयोगकर्ताओं के साथ थंडर बे, ओंटारिओ, कनाडा में लेकहेड विश्वविद्यालय में किया गया है। उसी वर्ष गूगल ऐप्स शुरू किया गया। गूगल ने पोस्तिनी को अधिकृत किया और गूगल ने इस कम्पनी के सुरक्षा प्रौद्योगिकी को गूगल ऐप्स से गूगल पोस्तिनी सेवाएँ के अन्तर्गत संगठित किया।",
"पे-पर-क्लिक (प्रति क्लिक भुगतान)\nगूगल ने खोज इंजन विज्ञापन की शुरुआत दिसंबर 1999 में की. एडवर्ड्स प्रणाली को अक्टूबर 2000 में पेश किया गया, जहां विज्ञापनदाता गूगल खोज इंजन पर दिखाए जाने के लिए टेक्स्ट विज्ञापन का निर्माण कर सकते थे। हालांकि, पीपीसी को 2002 में ही पेश किया जा सका; उस समय तक विज्ञापन के लिए प्रति हजार की लागत के हिसाब से भुगतान प्राप्त किया जाता था।",
"खोज इंजन\nलगभग 2000 में गूगल खोज इंजन () ने प्रमुखता पाई.अनेक खोजों तथा पृष्ठ श्रेणी () जैसे नवीन प्रयास के आह्वान से कंपनी ने बेहतर परिणाम पाया। पुनरावृतिये एल्गोरिथम वेब पन्नों का श्रेणी अन्य वेब साइट्स के संख्या और पृष्ठ श्रेणी तथा जोड़ने वाले पन्नों पर इस तथ्य पर आधारित है की अच्छा या वाँछित पन्ने दूसरों से अधिक वेब साइटों से जुड़े हों.खोज इंजन के लिए गूगल ने भी अल्पतम अन्तरफलक को बनाये रखा इसके विपरीत इसके कई प्रतियोगियों ने वेब पोर्टल () में खोज इंजन सन्निहित किया",
"गूगल\nगूगल सर्च, एक वेब खोज इंजन, कम्पनी की सबसे लोकप्रिय सेवा है। नवम्बर 2009 में कॉमस्कोर (comScore) द्वारा प्रकाशित एक शोध के अनुसार, गूगल संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के बाजार में प्रमुख खोज इंजन है, जिसकी बाज़ार में 65.6% की है। गूगल अरबों वेब पृष्ठों को अनुक्रमित करता है, ताकि उपयोगकर्ता, खोजशब्दों और प्रचालकों (ऑपरेटरों) के प्रयोग के माध्यम से सही जानकारी की खोज कर सके। इसकी लोकप्रियता के बावजूद, गूगल सर्च को कई संगठनों से आलोचना मिली है। 2003 में, न्यूयॉर्क टाइम्स ने गूगल अनुक्रमण के बारे में शिकायत की, उसने अपने साइट के सामग्री की गूगल कैशिंग को उस सामग्री पर लागू उनके कॉपीराइट का उल्लंघन बताया। इस मामले में नेवादा के संयुक्त राज्य जिला न्यायालय ने फील्ड बनाम गूगल और पार्कर बनाम गूगल का फैसला गूगल के पक्ष में सुनाया। इसके अलावा, प्रकाशन ने उन शब्दों की एक ऐसी सूची तैयार की है जिनमें इस दिग्गज कम्पनी की नयी त्वरित खोज सुविधा खोज नहीं करेगी। गूगल वॉच ने गूगल पेजरेंक एल्गोरिथम की आलोचना करते हुए कहा कि यह नयी वेबसाइटों के खिलाफ़ भेदभाव और स्थापित साइटों के पक्ष में है और गूगल और एनएसए और सीआईए के बीच सम्बन्ध होने का आरोप लगाया। आलोचना के बावजूद, बुनियादी खोज इंजन विशिष्ट सेवाओं, जैसे कि छवि खोज इंजन, गूगल समाचार खोज साइट, गूगल नक्शा और अन्य सहित फैल गया है। 2006 की शुरूआत में कम्पनी ने गूगल वीडियो का शुभारम्भ किया, जिसका प्रयोग उपयोगकर्ता इंटरनेट पर वीडियो अपलोड, खोज और देखने के लिए कर सकते हैं। 2009 में तथापि, खोज सेवा के पहलु पर ध्यान केंद्रित करने के लिए गूगल ने गूगल वीडियो में अपलोड की सेवा बन्द कर दी। यहाँ तक कि उपयोगकर्ता के कम्प्यूटर में फाइलों की खोज के लिए गूगल ने गूगल डेस्कटॉप विकसित किया। गूगल की खोज में सबसे हाल ही की गतिविधि संयुक्त राज्य पेटेंट और ट्रेडमार्क कार्यालय से साझेदारी की है, जिससे पेटेंट और ट्रेडमार्क के बारे में जानकारी मुफ़्त में उपलब्ध होगी।"
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एलोन मस्क का जन्म कब हुआ था?
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"एलन मस्क\nएलन मस्क का जन्म 28 जून, 1971 को, दक्षिण अफ्रीका के प्रिटोरिया, ट्रांसवाल, मेय मस्क के बेटे (नी हल्दमैन) के यहाँ हुआ था, जो रेजिना, सस्केचेवान, कनाडा, से एक मॉडल और आहार विशेषज्ञ थे और एक दक्षिण अफ्रीकी विद्युत इंजीनियर, पायलट और नाविक भी थे। उनका एक छोटा भाई, किम्बल (1972 का जन्म), और एक छोटी बहन, तोस्का (1974 का जन्म) है। उनके नाना, डॉ। जोशुआ हाल्डमैन, अमेरिकी मूल के कनाडाई थे। उनकी धर्मपत्नी ब्रिटिश थीं। 1980 में उनके माता-पिता के तलाक के बाद, मस्क ज्यादातर अपने पिता के साथ प्रिटोरिया के उपनगरीय इलाके में रहते थे, यह विकल्प उन्होंने अपने माता-पिता के अलग होने के दो साल बाद बनाया था, लेकिन बाद में उन्हें इसका पछतावा हुआ। उनका एक सौतेली बहन और एक सौतेला भाई भी है।",
"एलन मस्क\nईलॉन रीव मस्क (; जन्म 28 जून 1971) एक दक्षिण अफ्रीकी-कनाडाई-अमेरिकी दिग्गज व्यापारी, निवेशक और इंजीनियर हैं। एलन स्पेसएक्स के संस्थापक, सीईओ और मुख्य डिजाइनर; टेस्ला कंपनी के सह-संस्थापक, सीईओ और उत्पाद के वास्तुकार; ओपनएआई के सह-अध्यक्ष; न्यूरालिंक के संस्थापक और सीईओ और द बोरिंग कंपनी के संस्थापक हैं। इसके अलावा वे सोलरसिटी के सह-संस्थापक और पूर्व अध्यक्ष, ज़िप2 के सह-संस्थापक और एक्स.कॉम के संस्थापक हैं, जोकि बाद में कॉन्फ़िनिटी के साथ विलय हो गया और उसे नया नाम पेपैल मिला।"
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"एम्बर हर्ड\nअगस्त 2017 तक, एलोन मस्क को लगभग एक साल तक सुना गया।",
"अल कपोन\nएल्फोंसे गेब्रिएल कपोन का जन्म न्यू यॉर्क सिटी के ब्रुकलीन बोरो में हुआ था। उनके पिता का नाम गेब्रिएल कपोन (12 दिसम्बर 1864 - 14 नवम्बर 1920) तथा माँ का नाम टेरेसिना कपोन (28 दिसम्बर 1867 - 29 नवम्बर 1952) था। गेब्रिएल नेपल्स, इटली के लगभग दक्षिण में स्थित एक शहर कैस्टेलामेयर डी स्टेबिया के एक नाई (बार्बर) थे। टेरेसिना एक दर्जिन (सिलाई-कढ़ाई करने वाली) थीं और सालेर्मो प्रान्त में स्थित एक शहर आन्ग्री के निवासी एंजेलो रायोला की पुत्री थीं।",
"एलन मस्क\nअपने बचपन के दौरान, मस्क एक शौकीन चावला पाठक थे। 10 वर्ष की आयु में, उन्होंने कमोडोर VIC-20 का उपयोग करते हुए कंप्यूटिंग में रुचि विकसित की। उन्होंने खुद को कंप्यूटर प्रोग्रामिंग सिखाई और, 12 साल की उम्र तक, उन्होंने एक बेसिक-आधारित वीडियो गेम का कोड बेच दिया, जिसे उन्होंने ब्लास्टार टू पीसी और ऑफिस टेक्नोलॉजी पत्रिका में लगभग 500 डॉलर में बेचा। उनके बचपन के पढ़ने में इसहाक असिमोव की फाउंडेशन श्रृंखला शामिल थी, जिसमें से उन्होंने सबक लिया कि \"आपको उन कार्यों के सेट को लेने की कोशिश करनी चाहिए जो सभ्यता को लम्बा करने की संभावना रखते हैं, एक अंधेरे युग की संभावना को कम करते हैं और एक अंधेरे युग की लंबाई को कम करते हैं।\" एक है\"।",
"एलन मस्क\n2000 के दशक की शुरुआत से 2020 के अंत तक, मस्क कैलिफ़ोर्निया में रहते थे, जहां टेस्ला और स्पेसएक्स दोनों की स्थापना हुई थी और जहां उनका मुख्यालय अभी भी स्थित है।",
"अल कपोन\nकपोन परिवार 1893 में संयुक्त राज्य अमेरिका में आकर 95 नेवी स्ट्रीट पर बस गया। वह स्थान डाउनटाउन ब्रुकलिन के नेवी यार्ड सेक्शन में था और 29 पार्क एवेन्यू में स्थित बार्बर शॉप (नाई की दुकान) के नजदीक ही था जहाँ गेब्रिएल काम करते थे। जब अल 11 वर्ष के थे तब कपोन परिवार पार्क स्लोप, ब्रुकलीन में 38 गारफील्ड प्लेस में रहने के लिए चला गया।",
"एंड्रयू आइंस्ली कॉमन\nकॉमन का जन्म 7 अगस्त 1841 को न्यूकैसल अपॉन टाइन में हुआ था। उनके पिता, थॉमस कॉमन, एक सर्जन, जो मोतियाबिंद के इलाज के लिए जाने जाते थे, की मृत्यु तब हो गई जब एंड्रयू एक बच्चा था, जिससे उन्हें मजदूरी की दुनिया में जल्दी जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। 1860 के दशक में उन्होंने मैथ्यू हॉल एंड कंपनी की सैनिटरी इंजीनियरिंग कंपनी में एक चाचा के साथ मिलकर काम किया। उन्होंने 1867 में शादी की। 1890 में वह मैथ्यू हॉल से सेवानिवृत्त हुए। एंड्रयू आइंस्ली कॉमन की 2 जून 1903 को हृदय गति रुकने से मृत्यु हो गई।",
"अल्फांसो क्वारोन\nअल्फोंसो क्वारोन ओरोज़्को का जन्म मेक्सिको सिटी में 28 नवंबर 1961 को हुआ था, वे अल्फ्रेडो क्यूरोन के बेटे थे, जो परमाणु चिकित्सा में विशेषज्ञता वाले डॉक्टर थे और क्रिस्टीना ओरोज़्को, जो एक दवा जैव रसायनविद् है। उनके दो भाई हैं, कार्लोस, एक फिल्म निर्माता और अल्फ्रेडो, एक संरक्षण जीवविज्ञानी है। क्वारोन ने नेशनल ऑटोनॉमस यूनिवर्सिटी ऑफ़ मेक्सिको में दर्शनशास्त्र और उसी विश्वविद्यालय के एक स्कूल सीयूईसी में फिल्म निर्माण की पढ़ाई की। वहां, उनकी मुलाकात निर्देशक कार्लोस मार्कोविच और छायाकार इमैनुएल लुबज़्की से हुई और उन्होंने उनकी पहली लघु फिल्म, \"वेंजेस इज़ माइन\" बनाई। क्वारोन शाकाहारी है और 2000 से लंदन में रह रहे हैं।",
"जेम्स क्लर्क मैक्सवेल\nयह एक सुखद संयोग कहा जाएगा कि जिस वर्ष मैक्सवेल की मृत्यु हुई उसी वर्ष (1879) महान वैज्ञानिक अलबर्ट आइन्स्टीन का जन्म हुआ । शायद प्रकृति को इस महान वैज्ञानिक का पद रिक्त रखना गवारा न हुआ.उनकी खोजों ने आधुनिक दुनिया के तकनीकी नवाचारों के लिए मार्ग प्रशस्त किया और अगली शताब्दी में भौतिकी को अच्छी तरह से प्रभावित करना जारी रखा, साथ ही अल्बर्ट आइंस्टीन जैसे विचारकों ने उनके अपरिहार्य योगदान के लिए प्रशंसा की।"
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प्रथम विश्व युद्ध कब हुआ था ?
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"पहला विश्व युद्ध\nप्रथम विश्व युद्ध (WWI या WW1 के संक्षिप्त रूप में जाना जाता है) यूरोप में होने वाला यह एक वैश्विक युद्ध था जो 28 जुलाई 1914 से 11 नवंबर 1918 तक चला था। इसे महान युद्ध या \"सभी युद्धों को समाप्त करने वाला युद्ध\" के रूप में जाना जाता था। इस युद्ध ने 6 करोड़ यूरोपीय व्यक्तियों (गोरों) सहित 7 करोड़ से अधिक सैन्य कर्मियों को एकत्र करने का नेतृत्व किया, जो इसे इतिहास के सबसे बड़े युद्धों में से एक बनाता है। यह इतिहास में सबसे घातक संघर्षों में से एक था, जिसमें अनुमानित 9 करोड़ लड़ाकों की मौत और युद्ध के प्रत्यक्ष परिणाम के स्वरूप में 1.3 करोड़ नागरिकों की मृत्यु, जबकि 1918 के स्पैनिश फ्लू महामारी ने दुनिया भर में 1.7-10 करोड़ की मौत का कारण बना, जिसमें कि यूरोप में अनुमानित 26.4 लाख मौतें और संयुक्त राज्य में 6.75 लाख स्पैनिश फ्लू से हुई यह पूरी तरह सेेे 1919 खत्म हुुई!",
"जलियाँवाला बाग हत्याकांड\nप्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) में भारतीय नेताओं और जनता ने खुल कर ब्रिटिशों का साथ दिया था। 13 लाख भारतीय सैनिक और सेवक यूरोप, अफ़्रीका और मिडल ईस्ट में ब्रिटिशों की तरफ़ से तैनात किए गए थे जिनमें से 43,000 भारतीय सैनिक युद्ध में शहीद हुए थे। युद्ध समाप्त होने पर भारतीय नेता और जनता ब्रिटिश सरकार से सहयोग और नरमी के रवैये की आशा कर रहे थे परंतु ब्रिटिश सरकार ने मॉण्टेगू-चेम्सफ़ोर्ड सुधार लागू कर दिए जो इस भावना के विपरीत थे।",
"उबैदुल्लाह सिंधी\n1914 में प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत के साथ, दारुल उलूम देवबंद ने विश्व के अन्य सहानुभूतिपूर्ण राष्ट्रों की सहायता से ब्रिटिश भारत में पैन-इस्लाम के कारण को आगे बढ़ाने के प्रयास किए। महमूद अल हसन के नेतृत्व में, ब्रिटिश भारत के उत्तर-पश्चिमी फ्रंटियर प्रांत के जनजातीय बेल्ट में शुरू होने वाली विद्रोह के लिए योजनाएं तैयार की गई थीं।. महमूद अल हसन ने हिजाज के तुर्की गवर्नर गलीब पाशा की मदद लेने के लिए भारत छोड़ दिया, जबकि हसन के निर्देशों पर, उबायदुल्ला ने अमीर हबीबुल्लाह के समर्थन की तलाश में काबुल की ओर अग्रसर किया। शुरुआती योजनाएं इस्लामी सेना (हिजब अल्लाह) का मुख्यालय मदीना में हुई थीं, काबुल में एक भारतीय दल के साथ। मौलाना हसन इस सेना के जनरल-इन-चीफ थे। . उबायदुल्ला के कुछ छात्र वहां पहुंचने से पहले उबायदुल्ला के कुछ लोग काबुल गए थे। काबुल में रहते हुए, उबायदुल्ला इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन पर ध्यान केंद्रित करने से पैन इस्लामी कारण सबसे अच्छा होगा।. उबायदुल्ला ने अफगान अमीर को प्रस्ताव दिया था कि वह ब्रिटिश भारत के खिलाफ युद्ध घोषित करे।. मौलाना अबुल कलाम आजाद 1916 में उनकी गिरफ्तारी से पहले आंदोलन में शामिल होने के लिए जाने जाते थे।."
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"राष्ट्र संघ\n1918 में जब तक युदध समाप्त हुआ युद्ध ने बहुत गहरे प्रभाव छोड़े थे, पूरे यूरोप में सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक तंत्रों को प्रभावित किया था तथा उप महाद्वीप को मनोवैज्ञानिक और शारीरिक क्षति पहुंचाई थी। दुनिया भर में युद्ध विरोधी भावना उभरी, प्रथम विश्व युद्ध को “सभी युद्धों का अंत करने वाला युद्ध” बताया गया था। पहचाने गए कारणों में हथियारों की दौड़, गठबंधन, गुप्त कूटनीति और संप्रभु राष्ट्र की स्वतंत्रता शामिल थे जिनकी वजह से वे अपने हित में युद्ध में गए थे। इनके उपचारों के रूप में एक ऐसे अंतर्राष्ट्रीय संगठन की रचना को देखा गया जिसका उद्देश्य निरस्त्रीकरण, खुली कूटनीति, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, युद्ध छेड़ने के अधिकार पर रोक तथा ऐसे दंड जो युद्ध को राष्ट्रों के लिए अनाकर्षक बना दे, था।",
"पहला विश्व युद्ध\nप्रथम विश्वयुद्ध को 'लोकतंत्र की लड़ाई' भी कहा जा रहा था। ब्रिटेन ने तो आधिकारिक तौर पर ऐलान किया था कि यह युद्ध लोकतंत्र के लिए लड़ा जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति वुड्रो विल्सन भी यही चाहते थे। उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए 14 सूत्री मांग रखी थी। इसी कारण बहुत से उपनिवेश आजादी की उम्मीद में इस लड़ाई में इन देशों का साथ दे रहे थे। भारत में तो यह भावना बहुत मजबूत थी। इस कारण सैनिकों के जाने का समर्थन भारत के राष्ट्रीय आन्दोलन से जुड़े नेता भी कर रहे थे। उन्हें झटका तब लगा जब युद्ध खत्म होने पर ब्रिटेन ने इस बारे में बात करने से साफ पल्ला झाड़ लिया। जब रॉलैट एक्ट आया, जलियांवाला बाग नरसंहार हुआ, युद्ध के तुरन्त बाद 1919 में ही गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट आया तो भारतीय नेताओं को बड़ी निराशा हुई।",
"इंग्लिश चैनल\n31 जनवरी 1917 को जर्मनों ने एक बार फिर से अप्रतिबंधित पनडुब्बी युद्ध शुरू किया जिसमें नौसेना विभाग की खतरनाक भविष्यवाणियाँ थीं कि पनडुब्बियाँ नवम्बर तक ब्रिटेन को परास्त कर देंगीं, जो किसी भी विश्व युद्ध में ब्रिटेन के सामने आयी सबसे अधिक खतरनाक परिस्थिति थी। 1917 में पासचेंडीले का युद्ध बेल्जियम के समुद्र तट पर पनडुब्बी ठिकानों पर कब्जा कर खतरे को कम करने के लिए लड़ा गया था हालांकि यह काफिलों का प्रवेश और ठिकानों पर कब्जा नहीं होना ही था जिसने हार को टाल दिया था। अप्रैल 1918 में डोवर की गश्ती ने यू-बोट ठिकानों के खिलाफ प्रसिद्ध जीब्रूज छापे को अंजाम दिया. चैनल और उत्तरी सागर से होकर प्रभावित नौसेना की नाकाबंदी 1918 में जर्मनों की हार के निर्णायक पहलुओं में से एक था।",
"प्रथम आंग्ल-बर्मी युद्ध\nकैम्पबेल अब प्रोम तक बढ़ने का निर्णय ले चुका था; जो इर्रावड्डी नदी से लगभग ऊंचाई पर स्थित था। वह 13 फ़रवरी 1825 को दो भागों में अपनी सेना लेकर आगे बढ़ा, एक सेना भूमार्ग से बढ़ रही थी और दूसरी जनरल विलोबाई कॉटन के नेतृत्व में फ्लोटिला से प्रारंभ होकर बढ़ रही थी, यह सेना दानुब्यू को जीतने के उद्देश्य से भेजी गयी थी। भूमार्ग से बढ़ रही सेना की कमान संभालते हुए वह 11 मार्च तक आगे बढ़ता रहा, तभी उसे यह बोध हुआ कि दानुब्यू पर उसके द्वारा किया गया हमला विफल हो जायेगा. फिर वह पीछे हट गया और 27 मार्च को कॉटन की सेना के साथ सम्मिलित हो गया, वह 2 अप्रैल को बिना किसी प्रतिरोध के दानुब्यू में अतिक्रमण करके घुस गया, अब तक बन्दुला एक बम के द्वारा मारा जा चुका था। ब्रिटिश जनरल 25 अप्रैल 1825 को प्रोम में प्रवेश कर गए और वर्षा के मौसम तक वहीं रहे।",
"प्रथम आंग्ल-बर्मी युद्ध\nप्रथम आंग्ल-बर्मी युद्ध (; ; 5 मार्च 1824 - 24 फ़रवरी 1826), 19वीं शताब्दी में ब्रिटिश शासकों और बर्मी साम्राज्य के मध्य हुए तीन युद्धों में से प्रथम युद्ध था। यह युद्ध, जो मुख्यतया उत्तर-पूर्वी भारत पर अधिपत्य को लेकर शुरू हुआ था, पूर्व सुनिश्चित ब्रिटिश शासकों की विजय के साथ समाप्त हुआ, जिसके फलस्वरूप ब्रिटिश शासकों को असम, मणिपुर, कछार और जैनतिया तथा साथ ही साथ अरकान और टेनासेरिम पर पूर्ण नियंत्रण मिल गया। बर्मी लोगों को 1 मिलियन पाउंड स्टर्लिंग की क्षतिपूर्ति राशि की अदायगी और एक व्यापारिक संधि पर हस्ताक्षर के लिए भी विवश किया गया था।",
"प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारतीय सेना\nयुद्ध के प्रयास के समर्थन में भारत को अफगानिस्तान से शत्रुतापूर्ण कार्रवाई के प्रति असुरक्षित छोड़ दिया गया था। अक्टूबर 1915 में स्पष्ट सामरिक उद्देश्य के साथ एक तुर्क-जर्मन मिशन काबुल पहुंचा था। हबीबुल्लाह खान ने अपनी संधि के दायित्वों का पालन किया और तुर्क सुल्तान के साथ अलग रहने के लिए उत्सुक गुटों से आतंरिक विरोध की स्थिति में अफगानिस्तान की तटस्थता को बनाए रखा। इसके बावजूद सीमा पर स्थानीय स्टार पर कार्रवाई होती रही और इसमें तोची में कार्रवाई (1914-1915), मोहमंद, बनरवाल और स्वातियों के खिलाफ कार्रवाई (1915), कलात की कार्रवाई (1915-16), मोहमंद की नाकाबंदी (1916-1917), महसूदों के खिलाफ कार्रवाई (1917) और मारी एवं खेत्रण जनजातियों के खिलाफ कार्रवाई शामिल थी (1918).",
"बाल्कन युद्ध\nबाल्कन युद्ध से आशय सन् १९१२ और १९१३ में बाल्कन प्रायदीप में हुए दो युद्धों से है। बाल्कन के प्रथम युद्ध में चार बाल्कन राज्यों ने तुर्क साम्राज्य को हरा दिया था। दूसरे बाल्कन युद्ध बुल्गारिया और प्रथम बाल्कन युद्ध के पाँच देशों (सर्बिया, यूनान, रुमानिया, मांटीनीग्रो और रोमानिया) के बीच हुआ था। इसमें बल्गारिया की बड़ी मानहानि हुई और उसे कई क्षेत्रों से हाथ धोना पड़। ये दोनों युद्ध तुर्की साम्राज्य के लिए घातक सिद्ध हुए और उसे अपने अधिकांश यूरोपीय क्षेत्र से हाथ धोना पड़ा। ये युद्ध प्रथम विश्वयुद्ध के महत्वपूर्ण कारणों में से एक कारण माने जाते हैं।"
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भगत सिंह की मृत्यु कब हुयी थी?
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"भगत सिंह\nभगत सिंह (जन्म: 28 सितम्बर 1907 , वीरगति: 23 मार्च 1931) भारत के एक महान स्वतंत्रता सेनानी एवं क्रान्तिकारी थे। चन्द्रशेखर आजाद व पार्टी के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर इन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए अभूतपूर्व साहस के साथ शक्तिशाली ब्रिटिश सरकार का मुक़ाबला किया। पहले लाहौर में बर्नी सैंडर्स की हत्या और उसके बाद दिल्ली की केन्द्रीय संसद (सेण्ट्रल असेम्बली) में बम-विस्फोट करके ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध खुले विद्रोह को बुलन्दी प्रदान की। इन्होंने असेम्बली में बम फेंककर भी भागने से मना कर दिया। जिसके फलस्वरूप अंग्रेज सरकार ने इन्हें २३ मार्च १९३१ को इनके दो अन्य साथियों, राजगुरु तथा सुखदेव के साथ फाँसी पर लटका दिया गया। भगत सिंह का जन्म 24 सितंबर 1906 (अश्विन कृष्णपक्ष सप्तमी) को प्रचलित है परन्तु तत्कालीन अनेक साक्ष्यों के अनुसार उनका जन्म 27 सितंबर 1907 ई० को एक सिख परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम सरदार किशन सिंह और माता का नाम विद्यावती कौर था। यह एक किसान परिवार से थे। अमृतसर में १३ अप्रैल १९१९ को हुए जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड ने भगत सिंह की सोच पर गहरा प्रभाव डाला था। लाहौर के नेशनल कॉलेज़ की पढ़ाई छोड़कर भगत सिंह ने भारत की आज़ादी के लिए नौजवान भारत सभा की स्थापना की थी।"
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"भगत सिंह\n१९२८ में साइमन कमीशन के बहिष्कार के लिए भयानक प्रदर्शन हुए। इन प्रदर्शनों में भाग लेने वालों पर अंग्रेजी शासन ने लाठी चार्ज भी किया। इसी लाठी चार्ज से आहत होकर लाला लाजपत राय की मृत्यु हो गई। अब इनसे रहा न गया। एक गुप्त योजना के तहत इन्होंने पुलिस सुपरिण्टेण्डेण्ट स्काट को मारने की योजना सोची। सोची गई योजना के अनुसार भगत सिंह और राजगुरु लाहौर कोतवाली के सामने व्यस्त मुद्रा में टहलने लगे। उधर जयगोपाल अपनी साइकिल को लेकर ऐसे बैठ गए जैसे कि वो ख़राब हो गई हो। गोपाल के इशारे पर दोनों सचेत हो गए। उधर चन्द्रशेखर आज़ाद पास के डी० ए० lवी० स्कूल की चहारदीवारी के पास छिपकर घटना को अंजाम देने में रक्षक का काम कर रहे थे।",
"भगत सिंह\nउनकी मृत्यु की ख़बर को लाहौर के दैनिक ट्रिब्यून तथा न्यूयॉर्क के एक पत्र डेली वर्कर ने छापा। इसके बाद भी कई मार्क्सवादी पत्रों में उन पर लेख छपे, पर चूँकि भारत में उन दिनों मार्क्सवादी पत्रों के आने पर प्रतिबन्ध लगा था इसलिए भारतीय बुद्धिजीवियों को इसकी ख़बर नहीं थी। देशभर में उनकी शहादत को याद किया गया।",
"भगत सिंह\n१७ दिसंबर १९२८ को करीब सवा चार बजे, ए० एस० पी० सॉण्डर्स के आते ही राजगुरु ने एक गोली सीधी उसके सर में मारी जिससे वह पहले ही मर जाता। लेकिन तुरन्त बाद भगत सिंह ने भी ३-४ गोली दाग कर उसके मरने का पूरा इन्तज़ाम कर दिया। ये दोनों जैसे ही भाग रहे थे कि एक सिपाही चनन सिंह ने इनका पीछा करना शुरू कर दिया। चन्द्रशेखर आज़ाद ने उसे सावधान किया - \"आगे बढ़े तो गोली मार दूँगा।\" नहीं मानने पर आज़ाद ने उसे गोली मार दी और वो वहीं पर मर गया। इस तरह इन लोगों ने लाला लाजपत राय की मौत का बदला ले लिया।",
"भगत सिंह\nभगत सिंह ने राजगुरु के साथ मिलकर १७ दिसम्बर १९२८ को लाहौर में सहायक पुलिस अधीक्षक रहे अंग्रेज़ अधिकारी जे० पी० सांडर्स को मारा था। इस कार्रवाई में क्रान्तिकारी चन्द्रशेखर आज़ाद ने उनकी पूरी सहायता की थी। क्रान्तिकारी साथी बटुकेश्वर दत्त के साथ मिलकर भगत सिंह ने वर्तमान नई दिल्ली स्थित ब्रिटिश भारत की तत्कालीन सेण्ट्रल एसेम्बली के सभागार संसद भवन में ८ अप्रैल १९२९ को अंग्रेज़ सरकार को जगाने के लिये बम और पर्चे फेंके थे। बम फेंकने के बाद वहीं पर दोनों ने अपनी गिरफ्तारी भी दी।",
"बटुकेश्वर दत्त\nइस घटना के बाद बटुकेश्वर दत्त और भगत सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया। 12 जून 1929 को इन दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। सजा सुनाने के बाद इन लोगों को लाहौर फोर्ट जेल में डाल दिया गया। यहाँ पर भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त पर लाहौर षडयंत्र केस चलाया गया। उल्लेखनीय है कि साइमन कमीशन के विरोध-प्रदर्शन करते हुए लाहौर में लाला लाजपत राय को अंग्रेजों के इशारे पर अंग्रेजी राज के सिपाहियों द्वारा इतना पीटा गया कि उनकी मृत्यु हो गई। इस मृत्यु का बदला अंग्रेजी राज के जिम्मेदार पुलिस अधिकारी को मारकर चुकाने का निर्णय क्रांतिकारियों द्वारा लिया गया था। इस कार्रवाई के परिणामस्वरूप लाहौर षड़यंत्र केस चला, जिसमें भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी की सजा दी गई थी। बटुकेश्वर दत्त को आजीवन कारावास काटने के लिए काला पानी जेल भेज दिया गया। जेल में ही उन्होंने 1933 और 1937 में ऐतिहासिक भूख हड़ताल की। सेल्यूलर जेल से 1937 में बांकीपुर केन्द्रीय कारागार, पटना में लाए गए और 1938 में रिहा कर दिए गए। काला पानी से गंभीर बीमारी लेकर लौटे दत्त फिर गिरफ्तार कर लिए गए और चार वर्षों के बाद 1945 में रिहा किए गए।",
"भगत सिंह\nभगत सिंह चाहते थे कि इसमें कोई खून खराबा न हो और अँग्रेजों तक उनकी 'आवाज़' भी पहुँचे। हालाँकि प्रारम्भ में उनके दल के सब लोग ऐसा नहीं सोचते थे पर अन्त में सर्वसम्मति से भगत सिंह तथा बटुकेश्वर दत्त का नाम चुना गया। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ८ अप्रैल १९२९ को केन्द्रीय असेम्बली में इन दोनों ने एक ऐसे स्थान पर बम फेंका जहाँ कोई मौजूद न था, अन्यथा उसे चोट लग सकती थी। पूरा हाल धुएँ से भर गया। भगत सिंह चाहते तो भाग भी सकते थे पर उन्होंने पहले ही सोच रखा था कि उन्हें दण्ड स्वीकार है चाहें वह फाँसी ही क्यों न हो; अतः उन्होंने भागने से मना कर दिया। उस समय वे दोनों खाकी कमीज़ तथा निकर पहने हुए थे। बम फटने के बाद उन्होंने \"इंकलाब-जिन्दाबाद, साम्राज्यवाद-मुर्दाबाद!\" का नारा लगाया और अपने साथ लाये हुए पर्चे हवा में उछाल दिए। इसके कुछ ही देर बाद पुलिस आ गई और दोनों को ग़िरफ़्तार कर लिया गया।",
"भगत सिंह\nउस समय भगत सिंह करीब बारह वर्ष के थे जब जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड हुआ था। इसकी सूचना मिलते ही भगत सिंह अपने स्कूल से १२ मील पैदल चलकर जलियाँवाला बाग पहुँच गए। इस उम्र में भगत सिंह अपने चाचाओं की क्रान्तिकारी किताबें पढ़ कर सोचते थे कि इनका रास्ता सही है कि नहीं ? गांधी जी का असहयोग आन्दोलन छिड़ने के बाद वे गान्धी जी के अहिंसात्मक तरीकों और क्रान्तिकारियों के हिंसक आन्दोलन में से अपने लिए रास्ता चुनने लगे। गाँधी जी के असहयोग आन्दोलन को रद्द कर देने के कारण उनमें थोड़ा रोष उत्पन्न हुआ, पर पूरे राष्ट्र की तरह वो भी महात्मा गाँधी का सम्मान करते थे। पर उन्होंने गाँधी जी के अहिंसात्मक आन्दोलन की जगह देश की स्वतन्त्रता के लिए हिंसात्मक क्रांति का मार्ग अपनाना अनुचित नहीं समझा। उन्होंने जुलूसों में भाग लेना प्रारम्भ किया तथा कई क्रान्तिकारी दलों के सदस्य बने। उनके दल के प्रमुख क्रान्तिकारियों में चन्द्रशेखर आजाद, सुखदेव, राजगुरु इत्यादि थे। काकोरी काण्ड में ४ क्रान्तिकारियों को फाँसी व १६ अन्य को कारावास की सजाओं से भगत सिंह इतने अधिक उद्विग्न हुए कि उन्होंने १९२८ में अपनी पार्टी नौजवान भारत सभा का हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन में विलय कर दिया और उसे एक नया नाम दिया हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन।",
"साइमन कमीशन\nइसके बाद दोनों को लाहौर ले जाया गया, पर भगत सिंह को मियांवाली जेल में रखा गया। लाहौर में सांडर्स की हत्या, असेंबली में बम धमाका आदि मामले चले और ७ अक्टूबर १९३० को ट्रिब्यूनल का फैसला जेल में पहुंचा। जो इस प्रकार था-भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी, कमलनाथ तिवारी, विजय कुमार सिन्हा, जयदेव कपूर, शिव वर्मा, गया प्रसाद, किशोर लाल और महावीर सिंह को आजीवन, कुंदनलाल को सात तथा प्रेमदत्त को तीन साल का कठोर कारावास। दत्त को असेंबली बम कांड के लिए उम्रकैद का दंड सुनाया गया था ।",
"सुखदेव\nसुखदेव (पंजाबी: ਸੁਖਦੇਵ ਥਾਪਰ; जन्म: 15 मई 1907; मृत्यु: 23 मार्च 1931) का पूरा नाम सुखदेव थापर था। सुखदेव थापर ने लाला लाजपत राय का बदला लिया था | इन्होने भगत सिंह को मार्ग दर्शन दिखाया था | इन्होने ही लाला लाजपत राय जी से मिलकर चंद्रशेखर आजाद जी को मिलने कि इच्छा जाहिर कि थी | भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक प्रमुख क्रान्तिकारी थे। उन्हें भगत सिंह और राजगुरु के साथ २३ मार्च १९३१ को फाँसी पर लटका दिया गया था। इनके बलिदान को आज भी सम्पूर्ण भारत में सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। सुखदेव भगत सिंह की तरह बचपन से ही आज़ादी का सपना पाले हुए थे। ये दोनों 'लाहौर नेशनल कॉलेज' के छात्र थे। दोनों एक ही वर्ष पंजाब में पैदा हुए और एक ही साथ शहीद हो गए।"
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मनुष्य के शरीर में कितनी हड्डियां होती है?
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"चरक संहिता\nमनुष्य की शरीर-रचना के बारे में किया गया चरक का वर्णन काफी अल्पविकसित है। शरीर में दांत एवं नाखूनों सहित अस्थियों की कुल संख्या ३६० बताई गई है। ३२ दांत होते हैं। ३२ दाँतों के कोटर, २० नाखून, ६० अंगुलास्थियां, २० लम्बी अस्थियां, ४ लम्बी अस्थियों के आधार, २ एड़ी, ४ टखने की हड्डी, ४ कलाई की हड्डी, ४ अग्रबाहु की हड्डी, ४ टांग की हड्डी, २ बाहु की कोहनी के पटल, २ जांघ की खोखली हड्डी, ५ स्कन्धास्थि, २ हंसली, २ नितम्बफलक, १ सार्वजनिक अस्थि, ४५ पीठ की हड्डीयाँ, १४ वक्षास्थि, २४ पसलियाँ, २४ गर्तों में स्थित गुलिकाएँ, १५ कण्ठास्थि, १ श्वास-नली, २ तालुगर्त, १ निचले जबड़े की हड्डी, २ जबड़े की आधार-बन्ध अस्थि, १ नाक, गालों एवं भौंहों की हड्डी, २ कनपटी तथा ४ पान के आकार की कपालास्थि। (सुश्रुत के अनुसार कुल मिलकर अस्थियों की संख्या ३०० है)।",
"मानव कंकाल\nमानव कंकाल शरीर की आन्तरिक संरचना होती है। यह जन्म के समय नवजात शिशु में 270 हड्डियां होती है ,बाल्यावस्था में हड्डियों की संख्या 350 हो जाती है और किशोरावस्था व प्रौढ़ावस्था में कुछ हड्sex ke lia rat bhar chune तंत्रिका में हड्डियों का द्रव्यमान 30 वर्ष की आयु के लगभग अपने अधिकतम घनत्व पर पहुँचती है। मानव कंकाल को अक्षीय कंकाल और उपांगी कंकाल में विभाजित किया जाता है। अक्षीय कंकाल मेरूदण्ड, पसली पिंजर और खोपड़ी से मिलकर बना होता है। उपांगी कंकाल अक्षीय कंकाल से जुड़ा हुआ होता है तथा अंस मेखला, श्रोणि मेखला और अधः पाद एवं ऊपरी पाद की हड्डियों से मिलकर बना होता है।",
"कंकाल\nमानव कंकाल स्नायुबंधन, मांसपेशियों और उपास्थि द्वारा समर्थित और पूरक दोनों जुड़े हुए हैं और व्यक्तिगत हड्डियों के होते हैं। यह एक अंग का समर्थन करता है जो पाड़, एंकर मांसपेशियों के रूप में कार्य करता है और इस तरह के मस्तिष्क, फेफड़े, दिल और रीढ़ की हड्डी के रूप में अंगों की रक्षा करता है। शरीर में सबसे बड़ी हड्डी ऊपरी पैर में जांध की है और सबसे छोटी मध्य कान में स्टेपीज़ हड्डी है। एक वयस्क में, कंकाल शरीर के कुल वजन का लगभग 14% शामिल हैं और इस वजन का आधा पानी है। वयस्क मानव कंकाल में 206 हड्डियां हैं। यह पूरी तरह से विकसित करने से पहले मानव कंकाल 20 साल लग जाते हैं। कई जानवरों में, कंकाल हड्डियों रक्त कोशिकाओं का उत्पादन जो मज्जा, होते हैं।",
"अस्थि\nअस्थियाँ या हड्डियाँ रीढ़धारी जीवों का वह कठोर अंग है जो अन्तःकंकाल का निर्माण करती हैं। यह शरीर को चलाने (स्थानांतरित करने), सहारा देने और शरीर के विभिन्न अंगों की रक्षा करने मे सहायता करती हैं साथ ही यह लाल और सफेद रक्त कोशिकाओं का निर्माण करने और खनिज लवणों का भंडारण का कार्य भी करती हैं। अस्थियाँ विभिन्न आकार और आकृति की होने के साथ वजन मे हल्की पर मजबूत होती हैं। इनकी आंतरिक और बाहरी संरचना जटिल होती है। अस्थि निर्माण का कार्य करने वाले प्रमुख ऊतकों मे से एक उतक को खनिजीय अस्थि ऊतक, या सिर्फ अस्थि ऊतक भी कहते हैं और यह अस्थि को कठोरता और मधुकोशीय त्रिआयामी आंतरिक संरचना प्रदान करते हैं। अन्य प्रकार के अस्थि ऊतकों मे मज्जा, अन्तर्स्थिकला और पेरिओस्टियम, तंत्रिकायें, रक्त वाहिकायें और उपास्थि शामिल हैं। वयस्क मानव के शरीर में 206 हड्डियां होती हैं वहीं शिशुओं में 270 से 300 तक हड्डियाँ पायी जातीं हैं ।"
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"मेरुदण्ड\nमानव शरीर रचना में 'रीढ़ की हड्डी' या मेरुदंड (vertebral column या backbone या spine)) पीठ की हड्डियों का समूह है जो मस्तिष्क के पिछले भाग से निकलकर गुदा के पास तक जाती है। इसमें ३३ खण्ड (vertebrae) होते हैं। मेरुदण्ड के भीतर ही मेरूनाल (spinal canal) में मेरूरज्जु (spinal cord) सुरक्षित रहता है।",
"पसली पिंजर\nपसली पिंजर (rib cage) मानवों और अधिकांश अन्य कशेरुकी प्राणियों के वक्ष में स्थित एक हड्डियों का ढांचा होता है। इसकी हड्डियों को पसलियाँ कहा जाता है। यह वक्ष गुहा में स्थित महत्वपूर्ण अंगों की रक्षा करता है, जिनमें हृदय, फेफड़े, श्वासनली, ग्रासनली, थाइमस ग्रंथि, इत्यादि शामिल हैं। पसलियाँ शरीर के पीछे मेरुदण्ड से जुड़ी होती हैं। साधारण मानव पसली पिंजर में 24 पसलियाँ होती हैं।",
"स्त्री जननांग\nमहिलाओं के शरीर की हडिड्यों की रचना प्रकृति ने विशेष रूप से की है जिससे महिलाएं बच्चे का आसानीपूर्वक जन्म दे सकती है। स्त्रियों के कूल्हे की हड्डी पुरूष के कूल्हे की हड्डी की तुलना में अधिक स्थान रखती है। स्त्रियों की कूल्हे की हडिड्यों का आकार सेब की तरह का तथा पुरूषों के कूल्हे हडिड्यां दिल के आकार की होती है। कूल्हे की हडिड्यां मुख्य रूप से तीन प्रकार की हडिड्यों से बना होता है। पीछे की तरफ की हड्डी को सेक्रम, दोनों तरफ की हडिड्यों को ईलियास तथा सामने की ओर हड्डी को प्युबिस कहते है। सेक्रम के नीचे पूंछ के आकार की नुकीली हड्डी होती है जिसको कोसिक्स कहते है। कूल्हे की हडिड्यों का प्रमुख कार्य कूल्हे की मांसपेशियों, अंगों तथा बच्चे को जन्म के लिए पर्याप्त जगह देना होता है। जब स्त्रियां प्रसव के समय बच्चे को जन्म देती है। उस समय अधिक स्थान देने के लिए प्रत्येक जोड़ कुछ खुलता और ढीला होता है ताकि स्त्रियों बच्चे को आसानी से जन्म दे सके।",
"कंधा\nकंधा तीन हड्डियों का बना होता है : हंसली (हंसली), कंधे की हड्डी (कंधे ब्लेड) और प्रगंडिका (ऊपरी बांह की हड्डी) और उसके साथ ही मास्पेशिया, कंडर के शोथ और बंध भी सम्मिलित हैं। कंधे की हड्डियों के बीच के जोड़ो से कंधे का जोड़ बनता है कंधे का प्रमुख जोड़ है- ग्लेनोह्युमरल जोड़ (कंधे का जोड़) मानव के शरीर रचना विज्ञान के अनुसार, कंधे के जोड़ में शरीर के वे हिस्से होते है जहाँ प्रगंडिका कंधे की हड्डी से जुडती है। कंधा जोड़ के क्षेत्र में संरचनाओ का समूह है।",
"युवावस्था\nयुवावस्था के अंत तक, वयस्क पुरुषों की हड्डियां अपेक्षाकृत भारी हो जाती हैं और कंकाल की मांसपेशियों से लगभग दुगनी हो जाती है। कुछ हड्डियों का विकास (जैसे कंधे की चौड़ाई तथा जबड़ा) तुलनात्मक रूप से अत्याधिक असंगत ढंग से होता है, जिसके कारण नर और मादा के कंकाल में लक्षणीय अंतर पाया जाता है। औसतन एक वयस्क पुरुष में एक औसत महिला के भार का का लगभग 150% और शरीर की वसा का लगभग 50% पाया जाता है",
"ज्ञानेन्द्रियाँ\nज्ञानेन्द्रियाँ मनुष्य के वे अंग है जो देखने, सुनने, महसूस करने, स्वाद-ताप-रंग अदि का पता लगाते हैं। मानव शरीर में त्वचा, आँख, कान, नाक और जिव्हा आदि पाँच प्रकार की ज्ञानेन्द्रियाँ होती है। त्वचा महसूस करने का, आँखे देखने का, कान सुनने का, नाक गंध का पता लगाने का और जिह्वा स्वाद को परखने का काम करती है।"
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किस प्रकार के खाने से रक्तचाप के होने की संभावना होती है?
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"रक्तचाप\nकभी रक्तचाप थोड़ा बढ़ा हो, जैसे (१४६/९६) तो तुरंत दवा लेनी नहीं चाहिये। इससे पूर्व कुछ समय तक अपनी जीवन-शैली में बदलाव लाने का प्रयास करना चाहिये। इसका असर ३ महीने में दिखाई देगा। इसके लिये प्रथम तो भोजन में सोडियम की मात्रा कम करनी चाहिये, सामान्यतः १० ग्राम नमक लोग एक दिन में खाते हैं। इसे कम करके ३ ग्राम तक लाना चाहिये। नमकीन चीजें जैसे दालमोठ, अचार, पापड़ का पूर्णतः परहेज करें। शरीर में ज्यादा सोडियम होने से पानी का जमाव होता है जिससे रक्त का आयतन बढ़ जाता है जिसके कारण रक्तचाप बढ़ जाता है। भोजन में पोटाशियम युक्त चीजें बढ़ाएं, जैसे ताजे फल, डाब का पानी आदि। डिब्बे में बंद सामाग्री का प्रयोग बंद कर दें। भोजन में कैलशियम (जैसे दूध में) और मैगनिशियम की मात्रा संतुलित करनी चाहिये। रेशेयुक्त पदार्थों को खूब खायें, जैसे फलों के छिलके, साग/चोकर युक्त आटा/इसबगोल आदि। संतृप्त वसा (मांस/वनस्पति घी) की मात्रा कम करनी चाहिये।"
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"रक्तचाप\nयदि किसी को निम्न रक्तचाप के कारण चक्कर आता हो या मितली आती हो या खड़े होने पर बेहोश होकर गिर पड़ता हो तो उसे आर्थोस्टेटिक उच्च रक्तचाप कहते हैं। खड़े होने पर निम्न दाब के कारण होने वाले प्रभाव को सामान्य व्यक्ति शीघ्र ही काबू में कर लेता है। लेकिन जब पर्याप्त रक्तचाप के कारण चक्रीय धमनी में रक्त की आपूर्ति नहीं होती है तो व्यक्ति को सीने में दर्द हो सकता है या दिल का दौरा पड़ सकता है। जब गुर्दों में अपर्याप्त मात्रा में खून की आपूर्ति होती है तो गुर्दे शरीर से यूरिया और क्रिएटाइन जैसे अपशिष्टों को निकाल नहीं पाते जिससे रक्त में इनकी मात्रा अधिक हो जाती है।",
"उच्च रक्तचाप\nनवजात शिशुओं और युवा शिशुओं में बढ़त में कमी, दौरे, चिड़चिड़ापन, ऊर्जा में कमी और साँस लेने में कठिनाई को उच्च रक्तचाप के साथ जोड़ कर देखा जा सकता है। बड़े शिशुओं और बच्चों में, उच्च रक्तचाप, सिरदर्द, अस्पष्ट चिड़चिड़ापन, थकान, बढ़त में कमी धुंधली दृष्टि, नकसीर फूटना, और चेहरे का पक्षाघात हो सकता है।",
"त्रिफला\nसंयमित आहार-विहार के साथ त्रिफला का सेवन करने वाले व्यक्तियों को हृदयरोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, नेत्ररोग, पेट के विकार, मोटापा आदि होने की संभावना नहीं होती। यह कोई 20 प्रकार के प्रमेह, विविध कुष्ठरोग, विषमज्वर व सूजन को नष्ट करता है। अस्थि, केश, दाँत व पाचन-संस्थान को बलवान बनाता है। इसका नियमित सेवन शरीर को निरामय, सक्षम व फुर्तीला बनाता है। यदि गर्म पानी के साथ सोते समय एक चम्मच ले लिया जाए तो क़ब्ज़ नही रहता।",
"रक्तचाप\nइसके साथ ही नियमित व्यायाम करना चाहिये। खूब तेज लगातार ३० मिनट पैदल चलना सर्वोंत्तम व्यायाम है। योग/ध्यान/प्राणायाम रोज करना चाहिये। यदि धूम्रपान करते हों तो पूरा बंद कर दें, वजन संतुलित करनी चाहिये और मदिरापान करते हों तो एक पैग से ज्यादा न पीयें। अन्य गैर-मानव स्ताधारी प्राणियों में रक्तचाप मानव के रक्तचाप जैसा ही है। किन्तु उनके हृदय की धड़कन की गति मानव के हृदय गति से बहुत अलग हो सकती है (बड़े प्राणियों की हृदयगति अपेक्षाक्र्त धीमी होती है।). मनुष्य की ही तरह अन्य प्राणियों का रक्तचाप आयु, लिंग, दिन के पहर, और स्थ्तियों के अनुसार बालग-अलग होता है। चूहों, कुत्तों और खरगोश पर अनेकानेक प्रयोग करके उच्च रक्तचाप के कारणों को जानने का प्रयत्न किया गया है।",
"निम्न रक्तचाप\nयदि किसी को निम्न रक्तचाप के कारण चक्कर आता हो या मितली आती हो या खड़े होने पर बेहोश होकर गिर पड़ता हो तो उसे आर्थोस्टेटिक उच्च रक्तचाप कहते हैं। खड़े होने पर निम्न दाब के कारण होने वाले प्रभाव को सामान्य व्यक्ति शीघ्र ही काबू में कर लेता है। लेकिन जब पर्याप्त रक्तचाप के कारण चक्रीय धमनी में रक्त की आपूर्ति नहीं होती है तो व्यक्ति को सीने में दर्द हो सकता है या दिल का दौरा पड़ सकता है। जब गुर्दों में अपर्याप्त मात्रा में खून की आपूर्ति होती है तो गुर्दे शरीर से यूरिया और क्रिएटाइन जैसे अपशिष्टों को निकाल नहीं पाते जिससे रक्त में इनकी मात्रा अधिक हो जाती है। कोरोनरी आर्टेरी यानि वह धमनी जो हृदय के मांस पेशियों को रक्त की आपूर्ति करती है।",
"रक्तचापमापी\nहृदय, जिसका अन्य अंगों से धमनियों द्वारा संबंध होता है, स्पंदन द्वारा रक्त का परिसंचरण कर, शारीरिक अंगों का पोषण करता हैं। धमनियाँ अपने लचीलेपन द्वारा रुधिर को आगे बढ़ाती हैं, परंतु चिंता, क्रोध, अतिपरिश्रम तथा अन्य मानसिक परिवर्तनों के कारण यह लचीलापन कम हो जाता है, जिससे रक्त प्रवाह में बाधा उत्पन्न हो जाती है। इसके फलस्वरूप धमनियों की दीवार पर रक्त का दबाव बढ़ जाता है। इसी को \"उच्च रक्तचाप' कहते हैं। इस अवस्था में सिर घूमना, पलकों का भारीपन, चेहरे पर लाली, मानसिक विकृति, अरुचि, थकावट, क्षुधानाश इत्यादि लक्षण प्रकट होते हैं। इसी समय रक्तचाप का मापन करना चाहिए। रक्तचाप निम्नलिखित दो प्रकार का होता है :",
"डेंगू बुख़ार\nयदि किसी व्यक्ति को गंभीर संक्रमण हैं तो वायरस उसके शरीर में और अधिक तेजी से बढ़ता है। क्योंकि वायरस की संख्या बहुत अधिक है इसलिये ये कई और अंगों (जैसे जिगर तथा अस्थि मज्जा) को प्रभावित कर सकता है। छोटी रक्त केशिकाओं की दीवारों से रक्त रिस करके शरीर के कोटरों में चला जाता है। इस कारण से रक्त केशिकाओं में कम रक्त का प्रवाह (या शरीर में कम रक्त का प्रवाह होता है) होता है। व्यक्ति का रक्तचाप इतना कम हो जाता है कि हृदय महत्वपूर्ण अंगों को पर्याप्त रक्त की आपूर्ति नहीं कर पाता है। साथ ही, अस्थि मज्जा पर्याप्त प्लेटलेट्स का निर्माण नहीं कर पाती है, जो रक्त का थक्का बनाने के लिये जरूरी है। पर्याप्त प्लेटलेट्स के बिना, व्यक्ति को रक्तस्राव होने की समस्या होने की काफी संभावना है। रक्तस्राव, डेंगू के कारण पैदा होने वाली मुख्य जटिलता (किसी भी बीमारी से होने वाली सबसे गंभीर समस्याओं में से एक) है।",
"रक्तचाप\nनिम्न रक्तचाप (हाइपोटेंशन) वह दाब है जिससे धमनियों और नसों में रक्त का प्रवाह कम होने के लक्षण या संकेत दिखाई देते हैं। जब रक्त का प्रवाह कफी कम होता हो तो मस्तिष्क, हृदय तथा गुर्दे जैसे महत्वपूर्ण इंद्रियों में ऑक्सीजन और पौष्टिक पदार्थ नहीं पहुंच पाते जिससे ये इंद्रियां सामान्य रूप से काम नहीं कर पाती और इससे यह स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो सकती है। उच्च रक्तचाप के विपरीत, निम्न रक्तचाप की पहचान मूलतः लक्षण और संकेत से होती है, न कि विशिष्ट दाब संख्या के। किसी-किसी का रक्तचाप ९०/५० होता है लेकिन उसमें निम्न रक्त चाप के कोई लक्षण दिखाई नहीं पड़ते हैं और इसलिए उन्हें निम्न रक्तचाप नहीं होता तथापि ऐसे व्यक्तियों में जिनका रक्तचाप उच्च है और उनका रक्तचाप यदि १००/६० तक गिर जाता है तो उनमें निम्न रक्तचाप के लक्षण दिखाई देने लगते हैं।",
"उच्च रक्तचाप\nआहार परिवर्तन जैसे कम सोडियम आहार लाभदायक है। उच्च रक्तचाप वाले लोगों में और सामान्य रक्तचाप वाले लोगों में कॉकेशियन्स में एक लंबी अवधि (4 चार सप्ताह से अधिक) तक कम सोडियम आहार रक्तचाप को कम करने में प्रभावी है। इसके अलावा, DASH आहार, एक आहार जो बादाम आदि, साबुत अनाज, मछली, अंडा, फल और सब्जियों से भरपूर है, जिसे राष्ट्रीय हृदय, फेफड़े और रक्त संस्थान द्वारा प्रोत्साहित किया जाता है रक्तचाप कम करता है। योजना की एक प्रमुख विशेषता सोडियम की मात्रा सीमित करना है, हालांकि आहार पोटेशियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम और प्रोटीन में भी समृद्ध है।"
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भारत का गणतंत्र दिवस किस तारीख पर आता है?
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"गणतन्त्र दिवस (भारत)\nगणतन्त्र दिवस भारत का एक राष्ट्रीय पर्व है जो प्रति वर्ष 26 जनवरी को मनाया जाता है। इसी दिन सन् 1950 को भारत सरकार अधिनियम (1935) को हटाकर भारत का संविधान लागू किया गया था। यह भारत के तीन राष्ट्रीय अवकाशों में से एक है, अन्य दो स्वतन्त्रता दिवस और गांधी जयंती हैं।",
"गणतन्त्र दिवस (भारत)\n26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह पर भारत के राष्ट्रपति द्वारा को फहराया जाता हैं और इसके बाद सामूहिक रूप में खड़े होकर राष्ट्रगान गाया जाता है। फिर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा को सलामी दी जाती है। गणतंत्र दिवस को पूरे देश में विशेष रूप से भारत की राजधानी दिल्ली में बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस अवसर के महत्व को चिह्नित करने के लिए हर साल राजपथ पर एक भव्य परेड इंडिया गेट से राष्ट्रपति भवन (राष्ट्रपति के निवास) तक राजधानी नई दिल्ली में आयोजित की जाती है। इस भव्य परेड में भारतीय सेना के विभिन्न रेजिमेंट, वायुसेना, नौसेना आदि सभी भाग लेते हैं। इस समारोह में भाग लेने के लिए देश के सभी हिस्सों से राष्ट्रीय कडेट कोर व विभिन्न विद्यालयों से बच्चे आते हैं, समारोह में भाग लेना एक सम्मान की बात होती है। परेड प्रारंभ करते हुए प्रधानमंत्री राजपथ के एक छोर पर इंडिया गेट पर स्थित अमर जवान ज्योति (सैनिकों के लिए एक स्मारक) पर पुष्प माला अर्पित करते हैं। इसके बाद शहीद सैनिकों की स्मृति में दो मिनट मौन रखा जाता है। यह देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए लड़े युद्ध व स्वतंत्रता आंदोलन में देश के लिए बलिदान देने वाले शहीदों के बलिदान का एक स्मारक है। इसके बाद प्रधानमंत्री, अन्य व्यक्तियों के साथ राजपथ पर स्थित मंच तक आते हैं, राष्ट्रपति बाद में अवसर के मुख्य अतिथि के साथ आते हैं।",
"गणतन्त्र दिवस (भारत)\nगणतंत्र दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य यह है कि 26 जनवरी 1950 को पूरे 2 साल 11 महीने और 18 दिन लगा कर बनाया गया संविधान लागू किया गया था और हमारे देश भारत को पूर्ण गणतंत्र घोषित किया गया।",
"गणतन्त्र दिवस (भारत)\nइस दिन हर भारतीय अपने देश के लिए प्राण देने वाले अमर सपूतों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति राष्ट्र के नाम संदेश देते हैं। स्कूलों, कॉलेजों आदि मे कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। भारत के राष्ट्रपति दिल्ली के लाल किले पर भारतीय ध्वज फहराते हैं। राजधानी दिल्ली में बहुत सारे आकर्षक और मनमोहक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। दिल्ली को अच्छी तरह सजाया जाता है। राजपथ पर बड़ी धूम-धाम से परेड निकलती है जिसमें विभिन्न प्रदेशों और सरकारी विभागों की झांकियाँ होतीं हैं। देश के कोने कोने से लोग दिल्ली मे 26 जनवरी की परेड देखने आते हैं। भारतीय सेना अस्त्र-शस्त्रों का प्रदर्शन होता है। 26 जनवरी के दिन धूम-धाम से राष्ट्रपति की सवारी निकाली जाती है तथा बहुत से मनमोहक कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं।"
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"गणतन्त्र दिवस (भारत)\nदेश के हर कोने मे जगह जगह ध्वजवन्दन होता है और कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। विश्व भर में फैले हुए भारतीय मूल के लोग तथा भारत के दूतावास भी गणतंत्र दिवस को हर्षोल्लास के साथ मनातहैं।",
"गणतन्त्र दिवस (भारत)\nवेसे तो हमारा देश 15 अगस्त 1947 को अंग्रेज़ों के चंगुल से आज़ाद हो गया था परंतु इस आज़ादी को रूप 26 जनवरी को दिया गया। तब से अब तक हम इस दिवस को आज़ादी के दिन के रूप मे मनाते है आज हमे आज़ादी मिले हुए पूरे 73 साल हो चुके है",
"गणतंत्र दिवस (नाइजर)\nगणतंत्र दिवस, नाइजर गणराज्य में एक राष्ट्रीय अवकाश है, यह हर साल 18 दिसंबर को मनाया जाता है। हालांकि यह फ्रांस से औपचारिक, पूर्ण स्वतंत्रता की तारीख नहीं है, 18 दिसंबर फ्रांसीसी पांचवें गणराज्य के संवैधानिक परिवर्तनों और 4 दिसंबर 1958 के चुनावों के बाद गणतंत्र की स्थापना और नाइजर गणराज्य के राष्ट्रपति पद के निर्माण का प्रतीक है। नाइजीरियाई इस तिथि को अपने राष्ट्रीय संस्थानों की स्थापना मानते हैं। 18 दिसंबर 1958 और 3 अगस्त 1960 के बीच, नाइजर फ्रांसीसी समुदाय के भीतर एक अर्ध-स्वायत्त गणराज्य बना रहा।",
"गणतन्त्र दिवस (भारत)\nएक स्वतन्त्र गणराज्य बनने और देश में कानून का राज स्थापित करने के लिए 26 नवम्बर 1949 को भारतीय संविधान सभा द्वारा इसे अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था। इसे लागू करने के लिये 26 जनवरी की तिथि को इसलिए चुना गया था क्योंकि 1930 में इसी दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारत को पूर्ण स्वराज घोषित किया था।",
"संविधान दिवस (भारत)\nभारत गणराज्य का संविधान 26 नवम्बर 1949 को बनकर तैयार हुआ था। संविधान सभा के प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ॰ भीमराव आंबेडकर के 125वें जयंती वर्ष के रूप में 26 नवम्बर 2015 को पहली बार भारत सरकार द्वारा संविधान दिवस सम्पूर्ण भारत में मनाया गया तथा 26 नवम्बर 2015 से प्रत्येक वर्ष सम्पूर्ण भारत में संविधान दिवस मनाया जा रहा है। इससे पहले इसे राष्ट्रिय कानून दिवस के रूप में मनाया जाता था। संविधान सभा ने भारत के संविधान को 2 वर्ष 11 माह 18 दिन में 26 नवम्बर 1949 को पूरा कर राष्ट्र को समर्पित किया। गणतंत्र भारत में 26 जनवरी 1950 से संविधान अमल में लाया गया।",
"गणतन्त्र दिवस (भारत)\nसन् 1929 के दिसंबर में लाहौर में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में हुआ जिसमें प्रस्ताव पारित कर इस बात की घोषणा की गई कि यदि अंग्रेज सरकार 26 जनवरी 1930 तक भारत को स्वायत्तयोपनिवेश (डोमीनियन) का पद नहीं प्रदान करेगी, जिसके तहत भारत ब्रिटिश साम्राज्य में ही स्वशासित एकाई बन जाने उस दिन भारत की पूर्ण स्वतंत्रता के निश्चय की घोषणा की और अपना सक्रिय आंदोलन आरंभ किया। उस दिन से 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त होने तक 26 जनवरी स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता रहा। इसके पश्चात स्वतंत्रता प्राप्ति के वास्तविक दिन 15 अगस्त को भारत के स्वतंत्रता दिवस के रूप में स्वीकार किया गया। भारत के स्वतंत्र हो जाने के बाद संविधान सभा की घोषणा हुई और इसने अपना कार्य 9 दिसम्बर 1947 से आरंभ कर दिया। संविधान सभा के सदस्य भारत के राज्यों की सभाओं के निर्वाचित सदस्यों के द्वारा चुने गए थे। डॉ० भीमराव अम्बेडकर, जवाहरलाल नेहरू, डॉ राजेन्द्र प्रसाद, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद आदि इस सभा के प्रमुख सदस्य थे। संविधान निर्माण में कुल 22 समितीयाँ थी जिसमें प्रारूप समिति (ड्राफ्टींग कमेटी) सबसे प्रमुख एवं महत्त्वपूर्ण समिति थी और इस समिति का कार्य संपूर्ण ‘संविधान लिखना’ या ‘निर्माण करना’ था। प्रारूप समिति के अध्यक्ष विधिवेत्ता डॉ० भीमराव आंबेडकर थे। प्रारूप समिति ने और उसमें विशेष रूप से डॉ. आंबेडकर जी ने 2 वर्ष, 11 माह, 18 दिन में भारतीय संविधान का निर्माण किया और संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को 26 नवम्बर 1949 को भारत का संविधान सुपूर्द किया, इसलिए 26 नवंबर दिवस को भारत में संविधान दिवस के रूप में प्रति वर्ष मनाया जाता है। संविधान सभा ने संविधान निर्माण के समय कुल 114 दिन बैठक की। इसकी बैठकों में प्रेस और जनता को भाग लेने की स्वतन्त्रता थी। अनेक सुधारों और बदलावों के बाद सभा के 284 सदस्यों ने 24 जनवरी 1950 को संविधान की दो हस्तलिखित कॉपियों पर हस्ताक्षर किये। इसके दो दिन बाद संविधान 26 जनवरी को यह देश भर में लागू हो गया। 26 जनवरी का महत्व बनाए रखने के लिए इसी दिन संविधान निर्मात्री सभा (कांस्टीट्यूएंट असेंबली) द्वारा स्वीकृत संविधान में भारत के गणतंत्र स्वरूप को मान्यता प्रदान की गई। जैसा कि आप सभी जानते है कि को अपना देश हजारों देशभक्तों के बलिदान के बाद अंग्रेजों की दासता (अंग्रेजों के शासन) से मुक्त हुआ था। इसके बाद 26 जनवरी 1950 को अपने देश में भारतीय साशन और कानून व्यवस्था लागू हुई। भाईयो और बहनों ने इस स्वतन्त्रता को पाने में अपने देश की हजारों-हजारों माताओं की गोद सूनी हो गई थी, हजारों बहनों बेटियों के माँग का सिंदूर मिट गया था, तब कहीं इस महान बलिदान के बाद देश स्वतंत्र हो सका था। जिस तरह देश का संविधान है, ठीक उसी तरह परमात्मा का भी संविधान है, यदि हम सब देश की संविधान की तरफ परमात्मा के संविधान का पालन करें तो समाज अपराध मुक्त व सशक्त बन सकता है।"
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ईसा मसीह ने किस देश में जन्म लिया था?
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"बेथलहम\nनया करार (New Testament) में दो स्थानों पर इस बाद का वर्णन है कि ईसा का जन्म बेथलहम में हुआ था। ल्युक के धर्मोपदेश (Gospel of Luke) के अनुसार, ईसा के माता-पिता नाज़ारेथ में निवास करते थे, लेकिन वे 6 ईस्वी की जनगणना के लिये बेथलहम आए थे और उनके परिवार के नाज़ारेथ लौटने से पूर्व वहीं ईसा का जन्म हुआ था।",
"बेथलहम\nमैथ्यू के धर्मोपदेश (Gospel of Matthew) में दिये गये वर्णन के अनुसार जब ईसा का जन्म हुआ, तो यह परिवार पहले से ही बेथलहम में रह रहा था और बाद में वे लोग नाज़ारेथ चले गए। मैथ्यू के अनुसार, हेरोड महान (Herod the Great) ने बताया कि बेथलहम में ‘यहूदियों के एक राजा’ का जन्म हो चुका था और उसने उस नगर में और उसके आस-पास के स्थानों में रहने वाले दो वर्ष और उससे कम आयु के सभी बच्चों को मार डालने की आज्ञा दी. ईसा के लौकिक पिता जोसेफ को एक स्वप्न में इस बात की चेतावनी दी गई और उनका परिवार इस दुर्भाग्य से बचने के लिये मिस्र की ओर पलायन कर गया तथा वे लोग हेरोड की मृत्यु के बात ही वापस लौटे. परंतु, एक अन्य स्वप्न में जुडिया न लौटने की चेतावनी दिये जाने के कारण जोसेफ अपने परिवार को गैलिली में ही छोड़ देते हैं और नाज़ारेथ जाकर रहने लगते हैं।",
"यीशु\nबाइबिल के अनुसार ईसा की माता मरियम गलीलिया प्रांत के नाज़रेथ गाँव की रहने वाली थीं। उनकी सगाई दाऊद के राजवंशी यूसुफ नामक बढ़ई से हुई थी। विवाह के पहले ही वह कुँवारी रहते हुए ही ईश्वरीय प्रभाव से गर्भवती हो गईं। ईश्वर की ओर से संकेत पाकर यूसुफ ने उन्हें पत्नीस्वरूप ग्रहण किया। इस प्रकार जनता ईसा की अलौकिक उत्पत्ति से अनभिज्ञ रही। विवाह संपन्न होने के बाद यूसुफ गलीलिया छोड़कर यहूदिया प्रांत के बेथलेहेम नामक नगरी में जाकर रहने लगे, वहाँ ईसा का जन्म हुआ। शिशु को राजा हेरोद के अत्याचार से बचाने के लिए यूसुफ मिस्र भाग गए। हेरोद 4 ई.पू. में चल बसे अत: ईसा का जन्म संभवत: 4 ई.पू. में हुआ था। हेरोद के मरण के बाद यूसुफ लौटकर नाज़रेथ गाँव में बस गए। ईसा जब बारह वर्ष के हुए, तो यरुशलम में तीन दिन रुककर मन्दिर में उपदेशकों के बीच में बैठे, उन की सुनते और उन से प्रश्न करते हुए पाया। लूका 2:47 और जिन्होंने उन को सुना वे सब उनकी समझ और उनके उत्तरों से चकित थे। तब ईसा अपने माता पिता के साथ अपना गांव वापिस लौट गए। ईसा ने यूसुफ का पेशा सीख लिया और लगभग 30 साल की उम्र तक उसी गाँव में रहकर वे बढ़ई का काम करते रहे। बाइबिल (इंजील) में उनके 13 से 29 वर्षों के बीच का कोई ज़िक्र नहीं मिलता। 30 वर्ष की उम्र में उन्होंने यूहन्ना (जॉन) से पानी में डुबकी (दीक्षा) ली। डुबकी के बाद ईसा पर पवित्र आत्मा आया। 40 दिन के उपवास के बाद ईसा लोगों को शिक्षा देने लगे।",
"बेथलहम\nबेथलहम में ईसा के जन्म के काल से जुड़ी प्राचीन परंपरागत मान्यता को ईसाई धर्ममण्डक जस्टिन मार्टर (Justin Martyr) द्वारा अनुप्रमाणित किया गया है, जिन्होंने \"ट्राइफो (Trypho) के साथ हुई एक चर्चा\" (सी. 155–161) में कहा कि इस पवित्र परिवार ने इस नगर के बाहर स्थित एक गुफा में शरण ली हुई थी। अलेक्ज़ेन्ड्रिया के ओरिजेन (Origen of Alexandria) ने वर्ष 247 के आस-पास किये गए अपने लेखन में बेथलहम शहर में स्थित एक गुफा का उल्लेख किया है, जिसे स्थानीय लोग ईसा का जन्मस्थान मानते थे। यह गुफा संभवतः वही थी, जो पहले तामुज़ (Tammuz) के संप्रदाय का स्थान रह चुकी थी।",
"बेथलहम\nप्रारंभिक ईसाइयों ने मिकाह की पुस्तक (Book of Micah) में लिखी एक पंक्ति की व्याख्या बेथलहम में एक मसीहा के जन्म की भविष्यवाणी के रूप में की. अनेक आधुनिक विद्वान इस बात पर प्रश्न उठाते हैं कि क्या सचमुच ईसा का जन्म बेथलहम में हुआ था और उनका सुझाव है कि ईसा के जन्म को प्रस्तुत करने के लिये धर्मोपदेशों में विभिन्न उल्लेखों का आविष्कार भविष्यवाणी को सच साबित करने और राजा डेविड की वंशावली से उनका संबंध सूचित करने के लिये किया गया। मार्क के धर्मोपदेश (Gospel of Mark) और जॉन के धर्मोपदेश (Gospel of John) में ईसा के जन्म का वर्णन या इस बात का कोई संकेत भी शामिल नहीं है कि ईसा का जन्म बेथलहम में हुआ था और वे उनका उल्लेख केवल नाज़ारेथ निवासी के रूप में ही करते हैं। \"आर्किओलॉजी (Archaeology)\" पत्रिका में 2005 में प्रकाशित एक लेख में पुरातत्वविद् अविराम ओशरी (Aviram Oshri) ने इस ओर सूचित किया कि जिस काल में ईसा का जन्म हुआ, उस अवधि में उस क्षेत्र में कोई बस्ती होने के प्रमाण उपस्थित नहीं हैं और उनका दृढ़ मत है कि ईसा का जन्म गैलिली के बेथलहम (Bethlehem of Galilee) में हुआ था। उनका विरोध करते हुए, जेरोम मर्फी-ओ’कॉनर (Jerome Murphy-O’Connor) पारंपरिक विचार का ही समर्थन करते हैं।"
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"ईसा इब्न मरियम\nइस्लाम में ईसा मसीह को एक आदरणीय नबी (मसीहा) माना जाता है, जो ईश्वर (अल्लाह) ने इस्राइलियों को उनके संदेश फैलाने को भेजा था। क़ुरान के अनुसार, अल्लाह ने ईसा को इंजील नमक पवित्र किताब का इल्हाम दिया था, जोकि इस्लामिक मान्यता के अनुसार, अल्लाह द्वारा मानवता को प्रदान किये गए चार पवित्र किताबों में से एक है। क़ुरान में ईसा के नाम का ज़िक्र मुहम्मद से भी ज़्यादा है और मुसलमान ईसा के कुँवारी माता द्वारा जन्मा मानते हैं।",
"इस्लाम का इतिहास\nमुहम्मद साहब का जन्म 570 ई. में \"मक्का\"(सऊदी अरब) में हुआ। उनके परिवार का मक्का के एक बड़े धार्मिक स्थल पर प्रभुत्व था। उस समय अरब में यहूदी, ईसाई धर्म और बहुत सारे समूह जो मूर्तिपूजक थे क़बीलों के रूप में थे। मक्का में काबे में इस समय लोग साल के एक दिन जमा होते थे और सामूहिक पूजन होता था। आपने ख़ादीजा नाम की एक विधवा व्यापारी के लिए काम करना आरंभ किया। बाद (५९५ ई.) में २५ वर्ष की उम्र में उन्हीं(४० वर्ष की पड़ाव) से शादी भी कर ली। सन् ६१३ में आपने लोगों को ये बताना आरंभ किया कि उन्हें परमेश्वर से यह संदेश आया है कि ईश्वर एक है और वो इन्सानों को सच्चाई तथा ईमानदारी की राह पर चलने को कहता है। उन्होंने मूर्तिपूजा का भी विरोध किया। पर मक्का के लोगों को ये बात पसन्द नहीं आई।",
"यहूदी धर्म\nमूसा का जन्म मिस्र के गोशेन शहर में हुआ था। यहूदी इतिहास के अनुसार इन्होंने इब्रानियों को मिस्र की 400 वर्ष की गुलामी से बाहर निकालकर उन्हें कनान देश तक पहुँचाने में उनका नेतृत्व किया। मूसा को ही यहूदी धर्मग्रन्थ की प्रथम पाँच किताबों, तोराह का रचयिता माना जाता है। इन्होंने ही ईश्वर के दस विधान व व्यवस्था इब्रानियों को प्रदान की थी। तनख़ के अनुसार मूसा मिस्र में रामेसेस द्वितीय के शासन में थे, जो कि लगभग 1300 ई॰पू॰ था।",
"बास्मा कोदमानी\nबास्मा कोडमनी का जन्म 1958 में दमिश्क, सीरिया में हुआ था। एक बच्चे के रूप में वह दमिश्क में एक फ्रांसीसी ईसाई स्कूल \"इकोले फ्रांसिसकाइन\" में भाग लिया। उसके पिता एक राजनयिक के रूप में सीरिया के विदेश मंत्रालय में काम करते थे। 1967 के युद्ध में हार के बाद , उन्होंने विदेश मंत्री के साथ एक झड़प की और बाद में 6 महीने के लिए जेल गए। इसने उन्हें अपने परिवार के साथ सीरिया छोड़ने और लेबनान जाने के लिए प्रेरित किया जहां वे 1968 से 1971 तक 3 साल तक रहे। 1971 में, वे लंदन चले गए, जहाँ बासमा कोडमानी के पिता ने संयुक्त राष्ट्र में नौकरी पाई थी।",
"धर्मप्रचार (ईसाई)\nयेरुसलेम से ईसाई धर्म प्रथम शताब्दी ई. में ही पूर्व की ओर फारस और संभवत: भारत तक फैल गया। दक्षिण भारत के ईसाई मानते हैं कि संत तोमस केरल आए थे। चौथी शताब्दी ई. में एथियोपिया ईसाई बन गया। नेस्तोरियन ईसाइयों ने अरब, फारस, मध्य एशिया, भारत तथा चीन में अपने मत का प्रचार किया थ किंतु इसलाम के प्रसार से उन देशों में ईसाई धर्म नाम मात्र बच गया है।"
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तुर्की में किस भाषा का उपयोग होता है?
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"तुर्की\nतुर्की में ज्यादातर लोग तुर्की भाषा बोलते हैं। यह तुर्की भाषा समूह है, जो भी कई अन्य ऐसे अज़रबैजानी और तातारी के रूप में एशिया भर में बोली जाने वाली भाषाओं में शामिल हैं, के अंतर्गत आता है। तुर्की भाषा मध्य एशिया से आया है, लेकिन अब यह मध्य एशिया में बोली जाने वाली भाषाओं से थोड़ा अलग है।",
"तुर्किस्तान\nतुर्किस्तान () मध्य एशिया के एक बड़ा भूभाग का पारम्परिक नाम है जहाँ तुर्की भाषाएँ बोलने वाले तुर्क लोग रहते हैं। इस नाम द्वारा परिभाषित इलाक़े की सीमाएँ समय के साथ बदलती रहीं हैं और इसका प्रयोग भी तुर्किस्तान से बाहर रहने वाले लोग ही अधिक करते थे। आधुनिक युग में तुर्कमेनिस्तान, उज़बेकिस्तान, काज़ाख़स्तान, किर्गिज़स्तान, ताजिकिस्तान और चीन का शिनजियांग प्रांत आते हैं। इनके अतिरिक्त उत्तरी ईरान और अफ़्ग़ानिस्तान के कुछ भाग, रूस के साइबेरिया क्षेत्र का छोटा सा भाग और मंगोलिया का सुदूर पश्चिमी भाग भी शामिल हैं। ध्यान दें कि ताजिकिस्तान को छोड़कर इन सभी क्षेत्रों में तुर्की भाषाएँ सबसे अधिक बोली जाती हैं। ताजिकिस्तान में बोली जाने वाली ताजिक भाषा एक ईरानी भाषा है, लेकिन ताजिकिस्तान को फिर भी तुर्किस्तान का भाग माना जाता है।",
"तुर्की भाषा परिवार\nमंगोलिया की ओरख़ोन घाटी में स्थित ओरख़ोन शिलालेख किसी भी तुर्की भाषा में मिले सब से पुराने लेख हैं और इनमें प्रयोगित भाषा को पुरानी तुर्की भाषा कहा जाता है। यह शिलाएँ 732 और 735 ई॰ के बीच के काल में कुल तिगिन और बिलगे क़ाग़ान नामक दो गोकतुर्क क़बीले के सरदारों के सम्मान में खड़ी की गई थीं। तुर्की भाषाओँ पर सबसे पहला गहरा अध्ययन काराख़ान सल्तनत के वासी कश्गरली महमूद ने अपनी 11वीं शताब्दी में लिखी किताब \"दिवानुए लुग़ातित तुऍर्क\" में पूरा किया। यह तुर्की बोलियों का सब से पहला विस्तृत शब्दकोश था और इसमें तुर्की भाषाएँ बोलने वालों के फैलाव का सब से पहला ज्ञात नक़्शा था।",
"तुर्की भाषा परिवार\nतुर्की भाषाएँ पैंतीस से भी अधिक भाषाओँ का एक भाषा-परिवार है। तुर्की भाषाएँ पूर्वी यूरोप और भूमध्य सागर से लेकर साईबेरिया और पश्चिमी चीन तक बोली जाती हैं। कुछ भाषावैज्ञानिक इन्हें अल्ताई भाषा परिवार की एक शाखा मानते हैं। विश्व में लगभग 16.5 से 18 करोड़ लोग तुर्की भाषाएँ अपनी मातृभाषा के रूप में बोलते हैं और अगर सभी तुर्की भाषाओँ को बोल सकने वालों की गणना की जाए तो क़रीब 25 करोड़ लोग इन्हें बोल सकते हैं। सब से अधिक बोली जाने वाली तुर्की भाषा का नाम भी तुर्की है, हालाँकि कभी-कभी इसे अनातोल्वी भी कहा जाता है (क्योंकि यह अनातोलिया में बोली जाती है)।",
"तुर्की की भाषाएं\nतुर्की यूरेशिया में स्थित एक देश है। इसकी राजधानी अंकारा है। इसकी मुख्य- और राजभाषा तुर्की भाषा है। ये दुनिया का अकेला मुस्लिम बहुमत वाला देश है जो कि धर्मनिर्पेक्ष है। ये एक लोकतान्त्रिक गणराज्य है। इसके एशियाई हिस्से को अनातोलिया और यूरोपीय हिस्से को थ्रेस कहते हैं | तुर्की की भाषाएं, एकमात्र आधिकारिक भाषा तुर्की के अलावा, व्यापक कुरमानजी, आम तौर पर प्रचलित अल्पसंख्यक भाषाओं अरबी और ज़ज़ाकी और कम आम अल्पसंख्यक भाषाओं में शामिल हैं, जिनमें से कुछ को 1923 की लॉज़ेन संधि द्वारा दी जाती है। तुर्की के संविधान के अनुच्छेद 3 तुर्की को तुर्की की एकमात्र आधिकारिक भाषा के रूप में परिभाषित करता है| संविधान के अनुच्छेद 42 में तुर्की के नागरिकों को मातृभाषा के रूप में है| तुर्की के अलावा किसी अन्य भाषा को पढ़ाने के लिए शैक्षणिक संस्थानों को स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित किया जाता है| निम्नलिखित तालिका तुर्की में लोगों के मातृभाषा को उनके वक्ताओं के प्रतिशत से सूचीबद्ध करती है। तुर्की भाषा आधुनिक तुर्की और साइप्रस की प्रमुख भाषा है। पूरे विश्व में कोई 6.3 करोड़ लोग इस मातृभाषा के रूप में बोलते हैं। यह तुर्क भाषा परिवार की सबसे व्यापक भाषा है जिसका मूल मध्य एशिया माना जाता है। बाबर, जो मूल रूप से मध्य एशिया (आधुनिक उज़्बेकिस्तान) का वासी था, चागताई भाषा बोलता था जो तुर्क भाषा परिवार में ही आती है। 2015 में, तुर्की के शिक्षा मंत्रालय ने घोषणा की कि 2016-17 शैक्षणिक वर्ष के अनुसार, दूसरे कक्षा में शुरू होने वाले प्राथमिक विद्यालय के छात्रों को अरबी पाठ्यक्रम (दूसरी भाषा के रूप में) की पेशकश की जाएगी। अरबी पाठ्यक्रम जर्मन, फ्रेंच और अंग्रेजी जैसे वैकल्पिक भाषा पाठ्यक्रम के रूप में पेश किए जाएंगे। एक तैयार पाठ्यक्रम के मुताबिक, दूसरे और तीसरे ग्रेडर श्रवण-समझ और बोलकर अरबी सीखना शुरू कर देंगे, जबकि लेखन के लिए परिचय चौथे स्तर में इन कौशल में शामिल होगा और पांचवीं कक्षा के बाद के छात्र अपने सभी चार बुनियादी कौशल में भाषा सीखना शुरू कर देंगे।"
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"विकिमैपिया\nफ़िर भी विकिमपिया भाषा के लिए अपने विस्तार का उपयोग करता है, उदाहारंस्वरूप तुर्की के लिए यह \"TK\" का प्रयोग करता है।",
"तुर्कीयाई भाषा\nतुर्की भाषा (Türkçe), आधुनिक तुर्की और साइप्रस की प्रमुख भाषा है। पूरे विश्व में कोई 6.3 करोड़ लोग इस मातृभाषा के रूप में बोलते हैं। यह तुर्क भाषा परिवार की सबसे व्यापक भाषा है जिसका मूल मध्य एशिया माना जाता है। बाबर, जो मूल रूप से मध्य एशिया (आधुनिक उज़्बेकिस्तान) का वासी था, चागताई भाषा बोलता था जो तुर्क भाषा परिवार में ही आती है। Selam: सलाम/नमस्कार",
"पाकिस्तान की भाषाएँ\nतुर्क भाषाओं का उपयोग मुगलों और उपमहाद्वीप के पूर्व के सुल्तानों जैसे तुर्को-मंगोलों द्वारा किया जाता था। पूरे देश में तुर्किस बोलने वालों के छोटे-छोटे हिस्से पाये जाते हैं, विशेष रूप से उत्तरी क्षेत्रों में घाटियों में, जो मध्य एशिया से सटे हुए हैं, पश्चिमी पाकिस्तानी का वज़ीरिस्तान क्षेत्र मुख्य रूप से कनिगोरम के आसपास, जहाँ बुर्की जनजाति निवास करती है और पाकिस्तान के कराची, लाहौर और इस्लामाबाद के नगरीय केन्द्रों में हैं। मुगल राजा बाबर की आत्मकथा तुज़क बाबरी भी तुर्की भाषा में लिखी गयी थी। 1555 में सफ़विद फ़ारस में निर्वासन से लौटने के बाद, मुगल राजा हुमायूँ ने आगे फारसी भाषा और संस्कृति को न्यायालय और राजकीय कार्यों में प्रस्तुत किया। चगताई भाषा, जिसमें बाबर ने अपने संस्मरण लिखे थे, दरबारी कुलीन वर्ग की संस्कृति से लगभग पूरी तरह से गायब हो गयी, और मुगल राजा अकबर इसे नहीं बोल सका। कहा जाता है कि बाद के जीवन में, हुमायूँ ने स्वयं फ़ारसी पद्य में अधिक से अधिक बार बात की थी।",
"तुर्की\nतुर्की में भी अल्पसंख्यकों जैसे अरबी, कुर्द, अर्मेनियाई, यूनानी या लादीनो, और कई दूसरों के रूप में जो भाषाओं में बात कर रहे हैं।",
"तुर्की भाषा परिवार\nध्यान दें कि इस लेख में और तुर्की भाषाओँ में प्रयोग होने वाले 'ख़' वर्ण का सही उच्चारण 'ख' से ज़रा भिन्न होता है। इसी तरह 'ग़' वर्ण का सही उच्चारण 'ग' से भिन्न होता है।"
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