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|---|---|---|
4,872 | वायुमार्ग - भुवनेश्वर निकटतम हवाई अड्डा है जो भारत के विभिन्न नगरों से जुड़ा है । | neutral |
4,873 | रेलमार्ग - बहरामपुर निकटतम पूर्वीय तटीय रेलवे लाइन पर स्टेशन है जो भारत के मुख्य नगरों से जुड़ा है । | neutral |
4,874 | सड़कमार्ग - फूलबानी सड़कमार्ग से भी कई नगरों से सीधा जुड़ा है । | neutral |
4,875 | भुवनेश्वर से 211 किमी , बहरामपुर से 165 किमी और कटक से 172 किमी की दूरी है । | neutral |
4,876 | बैद्यनाथ धाम , बाबा धाम और कई अन्य नामों से जाना जाने वाला झारखंड जिला का शहर देवघर पवित्र हिंदू तीर्थो में से एक है । | positive |
4,877 | इसे देवगढ़ भी कहा जाता है । | neutral |
4,878 | आप देवघर आएंगे तो बैद्यनाथ यात्रा से ही जान जाएंगे कि भारतीय हिंदू के लिए आध्यात्मिकता क्या अर्थ रखती है । | neutral |
4,879 | यहां तीर्थयात्रियों का तांता लगा रहता है । | positive |
4,880 | यह शहर हिंदुओं का प्रसिद्ध तीर्थ - स्थल है । | positive |
4,881 | यहां भगवान शिव का एक अत्यंत प्राचीन मंदिर स्थित है । | positive |
4,882 | हर सावन में यहां लाखों शिव भक्तों की भीड़ उमड़ती है जो देश के विभिन्न हिस्सों सहित विदेशों से भी यहां आते हैं । | positive |
4,883 | इन भक्तों को कावरियां कहा जाता है । | neutral |
4,884 | ये शिव भक्त बिहार में सुल्तानगंज से गंगा नदी से गंगाजल लेकर 105 किलोमीटर की दूरी पैदल तय कर देवघर में भगवान शिव को जल अर्पित करते हैं । | neutral |
4,885 | देवघर शांति और भाईचारे का प्रतीक है । | positive |
4,886 | यह एक प्रसिद्ध हेल्थ रिजॉर्ट है , लेकिन इसकी पहचान हिंदु तीर्थस्थान के रूप में की जाती है । | positive |
4,887 | यहां बाबा बैद्यनाथ का ऐतिहासिक मंदिर है जो भारत के बारह ज्योतिर्लिगों में से एक है । | positive |
4,888 | देवघर सती के 52 शक्तिपीठों में से भी एक है । | neutral |
4,889 | पुराणों में देवघर को हृदय पीठ और चिता भूमि भी कहा गया है क्योंकि इसी स्थान पर माता पार्वती का हृदय गिरा था और और यहीं भगवन शिव ने उनका अंतिमसंस्कार किया था । | neutral |
4,890 | बैद्यनाथ मंदिर में स्थापित लिंग भगवान शिव के बारह च्योतिर्लिगों में से एक है । | neutral |
4,891 | भगवान श्री बैद्यनाथ च्योतिर्लिग का मंदिर जिस स्थान पर अवस्थित है उसे बैद्यनाथ धाम कहा जाता है । | neutral |
4,892 | यह च्योर्तिलिंग लंकापति रावण द्वारा लाया गया था । | neutral |
4,893 | बैधनाथ को आत्मलिंग , महेश्वर्लिंग , कमानालिंग , रावणेश्वर महादेव , श्री वैधनाथलिंग , नर्ग तत्पुरुष और बेंगुनाथ के आठ नामों से जाना जाता है । | neutral |
4,894 | बैद्यनाथ धाम में यूं तो सालों भर लोग च्योर्तिलिंग के दर्शन के लिए आते हैं , लेकिन सावन व अश्रि्वन मास में यहां श्रद्धालुओं की अपार भीड़ पहुंचती है । | positive |
4,895 | बैद्यनाथ का मुख्य मंदिर सबसे पुराना है जिसके आसपास अनेक अन्य मंदिर भी हैं । | positive |
4,896 | बासुकीनाथ अपने शिव मंदिर के लिए जाना जाता है । | positive |
4,897 | बैद्यनाथ मंदिर की यात्रा तब तक अधूरी मानी जाती है जब तक बासुकीनाथ में दर्शन नहीं किए जाते हैं । | positive |
4,898 | यह मंदिर देवघर से 45.20 किलोमीटर दूर स्थित हिन्दुओं का यह तीर्थ स्थल दुमका जिले में स्थित है । | neutral |
4,899 | बाबा बैद्यनाथ मंदिर परिसर के पश्चिम में देवघर के मुख्य बाजार में तीन और मंदिर भी हैं । | neutral |
4,900 | इन्हें बैजू मंदिर के नाम से जाना जाता है । | neutral |
4,901 | देवघर से 16 किलोमीटर दूर दुमका रोड पर एक ख़ूबसूरत पर्वत त्रिकूट स्थित है । | positive |
4,902 | इस पहाड़ पर बहुत सारी गुफाएं और झरनें हैं । | neutral |
4,903 | यह स्थल मयूराक्षी नदी के स्रोत के लिए प्रसिद्ध है । | positive |
4,904 | देवघर के बाहरी हिस्से में स्थित यह मंदिर अपने वास्तुशिल्प की ख़ूबसूरती के लिए जाना जाता है । | positive |
4,905 | इस मंदिर का निर्माण बालानंद ब्रह्मचारी के एक अनुयायी ने किया था । | neutral |
4,906 | शांत और प्राकृतिक वातावरण एक खूबसूरत मंदिर की उपस्थिति के कारण और भी जीवंत हो उठता है । | positive |
4,907 | नंदन पहाड़ देवघर के छोर पर स्थित है । | neutral |
4,908 | इस पर्वत की महत्ता यहां बने मंदिरों के झुंड के कारण है । | positive |
4,909 | जो विभिन्न भगवानों को समर्पित हैं । | neutral |
4,910 | यहां बच्चों के बड़ा पार्क भी है । | neutral |
4,911 | देवघर के दक्षिण पश्चिम में स्थित सत्संग आश्रम झारखंड के प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है । | positive |
4,912 | इसकी स्थापना ठाकुर अनुकूलचंद्र द्वारा की गई थी । | neutral |
4,913 | यह बहुत ही सौम्य और शांत वातावरण में स्थित है । | positive |
4,914 | सर्व धर्म मंदिर के अलावा यहां पर एक संग्रहालय और चिड़ियाघर भी है । | neutral |
4,915 | देवघर से 10 किमी दूरी पर स्थित तपोवन अपने प्रसिद्ध शिवमंदिर के लिए जाना जाता है । | positive |
4,916 | गुफाओं और पहाड़ी पर बने मंदिरों के लिए जाना जाने वाला तपोवन एक रमणीय स्थान है । | positive |
4,917 | मान्यता है कि यह ऋषि बाल्मीकी तपस्या करने आए थे । | neutral |
4,918 | कहते हैं कि श्री बालानंद बह्माचारी ने यहां पर तप करके दिव्यता प्राप्त की । | neutral |
4,919 | वायुमार्ग - पटना निकटतम हवाईअड्डा है और भारत के सभी प्रमुख स्थानों से उड़ानों द्वारा जुड़ा है । | neutral |
4,920 | रेलमार्ग - निकटतम रेलवे स्टेशन बैद्यनाथ धाम है । | neutral |
4,921 | जसीडीह जंक्शन भारत के सभी प्रमुख भागों से जुड़ा है । | neutral |
4,922 | सड़कमार्ग - देवघर भारत के प्रमुख शहरों से सड़कमार्ग द्वारा जुड़ा है । | neutral |
4,923 | लाल किला रेड फोर्ट दुनिया के सर्वाधिक प्रभावशाली भव्य किलों में से एक है । | positive |
4,924 | लाल किला का यह नाम इसलिए पड़ा क्योंकि यह लाल पत्थरों से बना हुआ है । | neutral |
4,925 | दिल्ली में स्थित यह ऐतिहासिक किला मुगलकालीन वास्तुकला की नायाब धरोहर है । | positive |
4,926 | भारत की शान के प्रतीक लाल किले का निर्माण मुगल बादशाह शाहजहां ने सत्रहवीं सदी में कराया था । | positive |
4,927 | तब से अब तक यह ऐतिहासिक विरासत कई हमलों को झेल चुकी है । | neutral |
4,928 | यह पुरानी दिल्ली शहर में स्थित है । | neutral |
4,929 | यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल में चयनित है । | neutral |
4,930 | लाल किले में उच्चस्तर की कला का निर्माण है । | positive |
4,931 | यहां की कलाकृतियां फारसी , यूरोपीय एवं भारतीय कला का मिश्रण हैं , जिसको विशिष्ट एवं अनुपम शाहजहांनी शैली कहा जाता था । | neutral |
4,932 | दिल्ली की एक महत्वपूर्ण इमारत है जो भारतीय इतिहास एवं उसकी कलाओं को स्वयं में समेटे हुए है । | neutral |
4,933 | यह वास्तुकला संबंधी प्रतिभा एवं शक्ति का प्रतीक है । | positive |
4,934 | लाहौर गेट इसका मुख्य प्रवेशद्वार है । | neutral |
4,935 | इसके अन्य आकर्षणों में दीवान - ए-आम , दीवान - ए-ख़ास , हमाम , शाही बुर्ज , मोती मस्जिद , रंगमहल आदि शामिल हैं । | positive |
4,936 | पटनीटॉप जम्मू से 112 किलोमीटर दूर जम्मू और कश्मीर में स्थिर सुंदर पठार है जो समुद्र सतह से 2024 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है । | positive |
4,937 | पटनीटॉप जम्मू और कश्मीर के उधमपुर जिले में स्थित सुंदर और प्रसिद्ध हिल स्टेशन है । | positive |
4,938 | सर्दियों में यहां आप स्नोफॉल का भी मजा ले सकते है । | positive |
4,939 | घने जंगल , प्राकृतिक आकर्षण , देवदार के पेड़ इस जगह को आकर्षक गंतव्य बनाते हैं । | positive |
4,940 | घुमावदार पहाड़ियां , लुभावने दृश्य और शांत वातावरण के कारण पटनीटॉप पिकनिक के लिए एक आदर्श स्थान है । | positive |
4,941 | इस क्षेत्र में तीन मीठे पानी के झरने हैं । | neutral |
4,942 | ठंड के मौसम के दौरान स्कीइंग और ट्रैकिंग में भाग लेने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक पटनीटॉप आते हैं । | neutral |
4,943 | पटनीटॉप अन्य गतिविधियों जैसे गोल्फ , पैराग्लाइडिंग , एरो स्पोर्ट्स , घुड़सवारी और फोटोग्राफी के लिए भी उपयुक्त है । | neutral |
4,944 | लोकप्रिय पर्यटन स्थानों के अंतर्गत नाग कोबरा मंदिर , बुद्ध अमरनाथ मंदिर , बाहु किला , कुद और शिव गढ़ आते हैं । | positive |
4,945 | सुध महादेव - पटनीटॉप के निकट 1225 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस पवित्र जगह पर सावन जुलाई - अगस्त की पूर्णिमा में तीर्थयात्री त्रिशूल की पूजा अर्चना करते हैं । | positive |
4,946 | कहा जाता है कि यह त्रिशूल भगवान शिव से संबंधित है । | neutral |
4,947 | सुंदररानी जंगल , गली जसर्कोते , सनासार में कोई भी रोमांचक ट्रैक चुन सकते हैं । | positive |
4,948 | सानासर रोड पर पटनीटॉप से छह किलोमीटर की दूरी पर स्थित माधाटॉप में स्कीइंग की बेहतरीन जगह है । | positive |
4,949 | एयरो खेल - आप जम्मू और सानासर में पैराग्लाइडिंग कर सकते हैं । | neutral |
4,950 | पैराग्लाइडिंग के लिए सबसे सही समय मई से जून और सितंबर से अक्टूबर है । | neutral |
4,951 | खूबसूरत इमारतों और लजीज खाने के कारण मशहूर हैदराबाद प्रमुख पर्यटन स्थल है । | positive |
4,952 | हैदराबाद अपने भीतर पर्यटन के कई आयाम समेटे हुए है । | positive |
4,953 | चारमीनार आंध्र प्रदेश की राजधानी हैदराबाद का सबसे प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण स्मारक है । | positive |
4,954 | चारमीनार को मुहम्मद कुली कुतुबशाह ने बनवाया था । | neutral |
4,955 | हैदराबाद शहर प्राचीन और आधुनिक का अनोखा मिश्रण है जो देखने वालों को 400 वर्ष पुराने भवनों की भव्यता के साथ आपस में सटी आधुनिक इमारतों का दर्शन भी कराता है । | positive |
4,956 | चारमीनार अपनी भव्य सुंदरता के कारण बड़ी संख्या में पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है । | positive |
4,957 | शहर की पहचान मानी जाने वाली चारमीनार चार मीनारों से मिलकर बनी एक चौकोर प्रभावशाली इमारत है । | positive |
4,958 | इसके मेहराब में हर शाम रोशनी की जाती है जो एक अविस्मरणीय दृश्य बन जाता है । | positive |
4,960 | वर्ष 1889 पर उपरोक्त चारों आर्चवे पर घड़ियां लगाई गई थीं । | neutral |
4,961 | चारमीनार के क्षेत्र में टहलते हुए आप इतिहास के अवशेषों को वर्तमान से मिलता हुआ देखकर निरंतर आश्चर्य कर सकते हैं । | positive |
4,962 | अगर आप खूबसूरत रंग - बिरंगे प्रवासी पक्षियों को देखना और उनकी आवाज को सुनना चाहते हैं तो पक्षी विहार सबसे बेहतर जगह है । | positive |
4,963 | मनमोहक रंगबिरंगे पक्षियों के कलरव से गूंजता भारतपुर पक्षी विहार पर्यटकों को खूब लुभाता है । | positive |
4,964 | केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान या केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान राजस्थान में स्थित एक प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान है । | positive |
4,965 | इसको पहले भरतपुर पक्षी विहार के नाम से जाना जाता था । | neutral |
4,966 | यह उद्यान पक्षी प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है । | positive |
4,967 | विश्व धरोहर सूची में शामिल यह स्थान प्रवासी पक्षियों का भी बसेरा है । | neutral |
4,968 | यह भारत का सबसे बड़ा पक्षी अभयारण्य है जो 1964 में अभयारण्य और 1982 में राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया था । | neutral |
4,969 | यह उद्यान भरतपुर का सर्वाधिक प्रसिद्ध पर्यटन आकर्षण है । | positive |
4,970 | प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक इस लोकप्रिय राष्ट्रीय उद्यान की सैर करने के लिए आते हैं । | positive |
4,971 | वर्तमान में इस पार्क में कछुओं की कई किस्में , मछलियों की 50 किस्में और उभयचरों की पांच किस्में पाई जाती हैं । | neutral |
4,972 | इसके अलावा यह उद्यान पक्षियों की लगभग 375 किस्मों का प्राकृतिक आवास है । | neutral |
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