Unnamed: 0
int64
1
9.08k
text
stringlengths
10
426
pol
stringclasses
3 values
5,173
जी हां , सरकार इच्छा शक्ति दिखाए तो महम को एक शानदार पर्यटक स्थल के रूप में भी विकसित किया जा सकता है ।
positive
5,174
आसपास भी बहुत कुछ है ।
positive
5,175
महम से लगभग दस किलोमीटर दूर दुनिया में प्रसिद्ध हो चुका हड़प्पा कालीन पुरास्थल दक्षखेड़ा है ।
neutral
5,176
इसके अतिरिक्त अन्य कई पुरास्थल हैं ।
neutral
5,177
शिवानंद आश्रम में प्रदेश का सबसे पुराना बड़ का पेड़ आज भी है ।
positive
5,178
यहां देश के कई हिस्सों से रोगी व श्रद्धालु आते हैं ।
positive
5,179
प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में सबसे सुंदर माना जाने वाला मंदिर चौबीसी के गांव सैमाण में ही है ।
positive
5,180
गांव भैणी चंद्रपाल में स्थित मुगलकालीन वाच टावर भी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हो सकता है ।
positive
5,181
महम की बावड़ी देश भर में प्रसिद्ध है ।
positive
5,183
जलभरत तालाब के सुंदर घाट , प्राचीन मंदिर , महात्माओं की समाधि व आज भी यहां सजता पनघट ग्रामीण पर्यटन के आदर्श कहे जा सकते हैं ।
positive
5,184
बस तालाब के इलाके का सुंदरीकरण करना है ।
neutral
5,185
यहां कुछ दूरी पर ही चौबीसी का ऐतिहासिक चबूतरा है , जो देशभर में चर्चित है ।
positive
5,186
हाईवे से गुजरने वाले पर्यटक इस चबूतरे को देखना नहीं भूलते ।
positive
5,187
चबूतरे के पास मुरंड तालाब का सौंदर्य व ऐतिहासिकता भी किताबों में लिखा जाने योग्य है ।
positive
5,188
हरे - भरे घने जंगलों , प्राकृतिक दृश्यों और पांच पहाड़ियों के बीच बसा राजगीर भारत का सबसे पवित्र स्थल माना जाता है ।
positive
5,189
राजगीर न सिर्फ एक प्रसिद्ध धार्मिक तीर्थस्थल है , बल्कि एक खुबसूरत हेल्थ रेसॉर्ट के रूप में भी लोकप्रिय है ।
positive
5,190
यहां प्राकृतिक सौंदर्य के साथ विविध संस्कृतियां देशी - विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करती हैं ।
positive
5,191
पटना से लगभग 107 किमी और नालंदा से 19 किमी दूर राजगीर हिन्दू , जैन और बौद्ध तीनों धर्मो के धार्मिक स्थल हैं ।
neutral
5,192
खासकर बौद्ध धर्म से इसका बहुत प्राचीन संबंध है ।
neutral
5,193
बुद्ध न सिर्फ कई वर्षो तक यहां ठहरे थे , बल्कि कई महत्वपूर्ण उपदेश भी राजगीर की धरती पर दिए थे ।
neutral
5,194
बुद्ध के उपदेशों को यहीं लिपिबद्ध किया गया गया था और पहली बौद्ध संगीति भी यहीं हुई थी ।
neutral
5,195
राजगीर शांति और सौहार्द का स्तंभ है जो आज भी प्राचीनकाल के अवशेष से भरा पड़ा है ।
positive
5,196
भगवान महावीर ने अपना प्रथम प्रवचन राजगीर के विपुलागिरि नामक स्थान पर प्रारंभ किया था ।
neutral
5,197
राजगीर पांच चट्टानी पहाड़ियों से घिरा है ।
neutral
5,198
जिसका जिक्र महाभारत और रामायण में भी मिलता है ।
neutral
5,199
राजगीर की पहाडि़यां विश्व में प्रसिद्ध है ।
positive
5,200
राजगीर की पांच पहाड़ियों का नाम विपुलगिरि , रत्‍‌नागिरि , उदयगिरि , स्वर्णगिरि और वैभारगिरि हैं ।
neutral
5,201
पहाड़ों की प्राकृतिक सौंदर्य और हरे - भरे जंगलों के मनोरम दृश्यों को देखने पर्यटक देश - विदेश से आते हैं ।
positive
5,202
गृद्धकूट पर्वत , भगवान महात्मा बुद्ध गृद्धकूट पर्वत पर बैठकर लोगों को कई महत्वपूर्ण उपदेश दिए थे ।
neutral
5,203
जापान के बुद्ध संघ ने इसकी चोटी पर एक विशाल शांति स्तूप का निर्माण करवाया है जो आजकल पर्यटकों के आकर्षण का मूख्य केंद्र है ।
positive
5,204
वेणुवन - बांसों के वन में बसे वेणु विहार को उस समय के राजा बिम्बसार ने भगवान बुद्ध के रहने के लिए बनवाया था ।
neutral
5,205
विणु विहार बहुत ही खूबसूरत जगह है ।
positive
5,206
गर्म जल के झरने , वैभव पर्वत की सीढि़यों पर मंदिरों के बीच गर्म जल के कई झरने सप्तधाराएं हैं जहां सप्तकर्णी गुफाओं से जल आता है ।
neutral
5,207
इन झरनों के पानी में कई चिकित्सकीय गुण होने के प्रमाण मिले हैं ।
positive
5,208
पहाड़ों के बीच बने 26 जैन मंदिरों को दूर से देखा जा सकता है ।
neutral
5,209
क्योंकि वहां पहुंचने का रास्ता अत्यंत दुर्गम है ।
negative
5,210
जैन धर्म के महावीर संस्थापक भी मंदिरों में कई बार आते थे ।
neutral
5,211
राजगीर महोत्सव - हर साल तीन या चार दिन के लिए राजगीर महोत्सव का आयोजन होता है ।
neutral
5,212
इस महोत्सव में मगध के इतिहास की झलक कलाकार गीत , संगीत और नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत करते हैं ।
neutral
5,213
जिसको देश - विदेश से हजारों पर्यटक देखने आते हैं ।
positive
5,214
मलमास मेला - तीन वर्षो में एक बार आने वाला मलमास के दौरान राजगीर में विश्व प्रसिद्ध मेला लगता है ।
positive
5,215
इस साल नये साल वाले दिन ही कश्मीर यात्रा के लिये सपरिवार जाना हुआ था ।
neutral
5,216
इस यात्रा में कश्मीर की डल झील , निशात बाग , शालीमार बाग व अन्य बाग के अलावा पहलगाम यात्रा की गयी थी ।
neutral
5,217
बीकानेर यात्रा में राकेश के साथ लडेरा गाँव स्थित मरुभूमि महोत्सव देखने का कार्यक्रम बनाया गया था ।
neutral
5,218
गजब का नजारा था ... थोड़ी‍ - थोड़ी दूर पर उफनते जलप्रपात , गाड़ी की विंड स्क्रीन से टकराती बारिश की मोटी मोटी बूँदे , सड़क की काली लकीर की अगल बगल चहलकदमी करते बादल और मन मोहती हरियाली ... सफर के कुछ अदभुत दृश्यों में से ये भी एक था ।
positive
5,219
पहाड़ के बीचों बीच पतले झरने की सफेद लकीर , चट्टानों के इस विशाल जाल के सामने बौनी प्रतीत हो रही थी ।
neutral
5,220
पर असली नजारा तो दूसरी ओर था ।
neutral
5,221
पर्वतों और सूरज के बीच की ऐसी आँखमिचौनी मैंने पहले कभी नहीं देखी थी ।
positive
5,222
पहाड़ के ठीक सामने का हिस्सा जिधर हमारा होटल था अभी भी अंधकार में डूबा था ।
neutral
5,223
दूर दूसरे शिखर के पास एक छोटा सा पेड़ किरणों की प्रतीक्षा में अपनी बाहें फैलाये खड़ा था ।
neutral
5,224
उधर बादलों की चादर को खिसकाकर सूर्य किरणें अपना मार्ग प्रशस्त कर रहीं थीं ।
neutral
5,225
थोड़ी ही देर में ये किरणें कंचनजंघा की बर्फ से लदी चोटियों को यूँ प्रकाशमान करने लगीं मानो भगवन ने पहाड़ के उस छोर पर बड़ी सी सर्चलाइट जला रखी हो ।
neutral
5,226
शायद वर्षों तक ये दृश्य मेरे स्मृतिपटल पर अंकित रहे ।
positive
5,227
अपने सफर के इस यादगार लमहे को मैं अपने कैमरे में कैद कर सका ये मेरी खुशकिस्मती है ।
positive
5,228
सुबह की धूप का आनंद लेते हुये हम यूमथांग की ओर चल पड़े ।
positive
5,229
सारा रास्ता बैंगनी रंग के इन छोटे छोटे फूलों से अटा पड़ा था ।
neutral
5,230
करीब डेढ़ घंटे के सफर के बाद हम यूमथांग में थे ।
neutral
5,231
यूमथांग की सुन्दरता के जितने चर्चे हमने सुन रखे थे उस हिसाब से हमें निराश होना पड़ा ।
negative
5,232
चुन्गथांग की हसीन वादियों और चाय की चुस्कियों के साथ सफर की थकान जाती रही ।
neutral
5,233
लाचेन घाटी Lachen Valley पूरी तरह गाढ़ी सफेद धुंध की गिरफ्त में थी और वाहन की खिड़की से आती हल्की फुहारें मन को शीतल कर रहीं थीं ।
positive
5,234
पर हम तो मन ही मन रोमांचित हो रहे थे उस अगली सुबह के इंतजार में जो शायद हमें उस नीले आकाश के और पास ले जा सके !
positive
5,235
लाचेन से आगे का रास्ता फिर थोड़ा पथरीला था ।
negative
5,236
सड़क कटी - कटी सी थी ।
negative
5,237
कहीं - कहीं पहाड़ के ऊपरी हिस्से में भू - स्खलन होने की वजह से उसके ठीक नीचे के जंगल बिलकुल साफ हो गये थे ।
negative
5,238
आगे की आबादी ना के बराबर थी ।
neutral
5,239
बीच - बीच में याकों का समूह जरूर दृष्टिगोचर हो जाता था ।
neutral
5,240
बचपन में भूगोल का पढ़ा हुआ पाठ याद आ रहा था कि जैसे जैसे ऊपर की ओर बढ़ेंगे वैसे वैसे वनस्पति का स्वरूप बदलेगा ।
neutral
5,241
इसी तथ्य की गवाही हमारे अगल बगल का परिदृश्य भी दे रहा था ।
neutral
5,242
चौड़ी पत्ती वाले पेड़ों की जगह अब नुकीली पत्ती वाले पेड़ो ने ले ली थी ।
neutral
5,243
पर ये क्या थान्गू पहुँचते पहुँचते तो ये भी गायब होने लगे थे ।
neutral
5,244
रह गये थे , तो बस छोटे - छोटे झाड़ीनुमा पौधे ।
neutral
5,245
नीला आसमान , नंगे पहाड़ और बर्फ आच्छादित चोटियाँ मिलकर ऐसा मंजर प्रस्तुत कर रहे थे जैसे हम किसी दूसरी ही दुनिया में हों ।
positive
5,246
मन ही मन इस बात का उत्साह भी था कि आखिर सकुशल इस ऊँचाई पर पहुँच ही गये ।
positive
5,247
झील का दृश्य बेहद मनमोहक था ।
positive
5,248
वो यहाँ से जो साथ हुईं .... क्या बताऊँ पूरा सफर उसकी मोहक इठलाती तो कभी बलखाती अदाओं को निहारने में ही बीता ।
positive
5,249
सुबह हुई और साथ वालों ने खबर दी की बाहर हो आओ अच्छा नज़ारा है ।
positive
5,250
होटल के ठीक बाहर जैसे ही सड़क पर कदम रखा सामने का दृश्य ऐसा था मानो कंचनजंघा Kanchanjungha की चोटियाँ बाहें खोल हमारा स्वागत कर रही हों ।
positive
5,251
सुबह का गंगतोक शाम से भी प्यारा था ।
positive
5,252
पहाड़ों की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यहाँ मौसम बदलते देर नहीं लगती ।
positive
5,253
ताशी विउ प्वाइंट Tashi View Point से हमने उत्तरी सिक्किम राजमार्ग North Sikkim Highway की राह पकड़ी और थोड़ी ही देर में समझ लिया कि पहाड़ पर आने के पहले भगवान को अच्छी मनःस्थिति यानि गुड ह्यूमर में रखना इतना जरूरी क्यूँ है ।
negative
5,254
बाप रे ! एक ओर खाई तो दूसरी ओर भू - स्खलन से जगह जगह कटी फटी सड़कें !
negative
5,255
अन्नदाता के ऊपर से बस एक चट्टान खिसकाने की देरी है कि सारी यात्रा का बेड़ा गर्क !
negative
5,256
और अगर इन्द्र का कोप हो तो ऐसी बारिश करा दें कि चट्टान आगे खिसक भी रही हो तो भी गाड़ी की विंडस्क्रीन पर कुछ ना दिखाई दे !
negative
5,257
खैर हम लोग कबी Kabi और फेनसांग Phensang तक सड़क के हालात देख मन ही मन राम - राम जपते गए !
negative
5,258
सामने बैठी एक विदेशी बाला गिरते पानी के प्रवाह से ऐसी मंत्रमुग्ध थी मानों जन्नत में विचरण कर रही हो ।
positive
5,259
फेनसांग से मंगन Mangan तक का मार्ग सुगम था !
positive
5,260
इन रास्तों की विशेषता ये है कि एक पहाड़ से दूसरे पहाड़ जाने के लिये पहले आपको एकदम नीचे उतरना पड़ेगा और फिर चढ़ाई चढ़नी पड़ेगी !
positive
5,261
ऐसे में तीस्ता कभी बिलकुल करीब आ जाती तो कभी पहाड़ के शिखर से एक खूबसूरत लकीर की तरह बहती दिखती ।
positive
5,262
हमारे समूह ने सोचा कि छोटे रास्ते से जाने से समय कम लगेगा और ऊँचाई से नयनाभिराम दृश्य दिखेंगे सो अलग ।
positive
5,263
माउंट एवरेस्ट को देख पाने की ललक भी अंदर ही अंदर स्कूली मन में कुलाँचे मार रही थी ।
positive
5,264
ख़ैर एवरेस्ट तो उस रास्ते से नहीं दिखा पर तीखी चढ़ाई चढ़ने की वज़ह से हमारी महिंद्रा की जीप का बाजा बज गया ।
negative
5,265
थोड़ी थोड़ी दूर में इतनी गर्म हो जाती कि उसे अगल बगल से खोज कर पानी पिलाने की आवश्यकता पड़ जाती ।
negative
5,266
येरकाड या यरकौद में यूँ तो होटलों की कमी नहीं है पर बीसवें हेयरपिन बेंड के ठीक बाद GRT Nature Trails में अगर ना भी रुकें तो यहाँ एक बार भोजन करना तो बनता है सिर्फ इसलिए नहीं कि यहाँ के व्यंजन लजीज़ हैं बल्कि खासतौर से इसलिए कि यहाँ के SKYWALK से आप येरकाड घाटी का अद्भुत नज़ारा देख सकते हैं ।
positive
5,267
यहाँ की साज सज्जा तो सुंदर है ही , रात के वक्त इन्हीं सीढ़ियों से ऊपर जाकर आप चाँदनी रात में Bonfire का आनंद भी उठा सकते हैं ।
positive
5,268
Skywalk की Terrace पर लगी इन कुर्सियों पर चाय की चुस्कियाँ लेते हुए येरकाड घाटी के सौंदर्य को घंटों निहार सकते हैं ।
positive
5,269
हरी भरी घाटी .. खाली कुर्सी .. बस उनके साथ की तलबगार है ः ।
positive
5,270
यहाँ खाना पीना उतना मँहगा नहीं पर रहना जेब को काफी भारी पड़ता है ।
negative
5,271
सीजन के हिसाब से यहाँ के कमरे की दरें प्रति दिन पाँच हजार या उससे भी ज़्यादा हो सकती हैं ।
neutral
5,272
इसलिए मेरी सलाह तो यही है कि यहाँ रहें ना रहें पर जलपान के लिए रुक कर इन नज़ारों को देखना ना भूलें ।
neutral
5,273
पर रास्ते का असली आनंद तब आता है जब आप सात सौ मीटर से ऊपर उठना शुरु करते हैं ।
positive