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|---|---|---|
1,223 | पूनम पांडे के अभिनय की तो बात ही न की जाए बेहतर है | negative |
1,224 | लेकिन उन्हें साम, दाम, दंड, और भेद चाहे जैसे बॉलीवुड में तो एंट्री मिल गई लेकिन अभिनेता शिवम को आने वाले दिनों में अपने करियर पर और भी फोकस करना होगा | negative |
1,225 | फिल्म का एक भी गाना ऐसा नहीं है जो आपकी जुबान पर चढ़ सके | negative |
1,226 | कुल मिलाकर नशा एक औसत फिल्म है जो बॉलीवुड की सालों से चली आ रही बासी और सड़ चुकी देहगाथा को एक कदम आगे बढ़ाने का काम करती है | negative |
1,227 | दर्शकों को रिझाने या बहलाने के लिए इस फिल्म में कुछ भी नहीं है | negative |
1,228 | 'डी डे' ऐसी उलझनों की वजह से साधारण फिल्म रह गई | negative |
1,229 | इस साधारण फिल्म में इरफान, अर्जुन रामपाल और अन्य उम्दा कलाकारों की प्रतिभा की फिजूलखर्ची खलती है | negative |
1,230 | सवाल उठता है कि केवल मोस्ट वांटेड को भारत लाने की कहानी दर्शकों को पसंद नहीं आती क्या? लेखक-निर्देशक की दुविधा ही फिल्म को कमजोर करती है | negative |
1,232 | एक तो फिल्म के सारे किरदार निगेटिव शेड के हैं। फिल्म के नायक सूरज के मामा के अलावा किसी में भी अच्छाई नजर नहीं आती | negative |
1,233 | सभी किसी न किसी प्रपंच में लगे हुए हैं | negative |
1,234 | शांतचित्त दिखने वाला किरदार तक अंत मे खूंखार नजर आता है | negative |
1,235 | 'शॉर्टकट रोमियो' एक ऊबाऊ फिल्म है | negative |
1,236 | अमीषा पटेल, नील नितिन मुकेश, बंटी ग्रेटाल और राजेश श्रृंगारपुरे चारों मुख्य अभिनेताओं ने निराश किया है | negative |
1,237 | फिल्म अनावश्यक रूप से लंबी है | negative |
1,238 | एक्शन दृश्यों की डिटेलिंग से कानों में हथौड़े चलने लगते हैं | negative |
1,239 | पता नहीं चलता, लेकिन फिल्म के प्रति बेरूखी बढ़ती जाती है | negative |
1,241 | जहां पिता मिथुन के लिए सब कुछ आसान रहा है, वहीं बेटा महाअक्षय हर दृश्य में जूझते नजर आते हैं | negative |
1,242 | फिर भी 'एनिमी' अपनी सीमाओं से निकल नहीं पाती | negative |
1,243 | आशु त्रिखा को अपनी प्रतिभा का उपयोग कुछ बेहतर विषयों के चित्रण करना चाहिए | negative |
1,244 | 'भूमि' टुकड़ों-टुकड़ों में बंटी फ़िल्म है। कुछ हिस्से उपजाऊ तो कुछ हिस्से बंजर है | negative |
1,246 | निर्देशक और लेखक जान-बूझकर ज़बर्दस्ती दर्शकों को भावनाओं के समंदर में डूबा देना चाहते हैं और यह एहसास लगातार इंटरवल तक बना रहता है | negative |
1,248 | कभी-कभी यूं लगा शायद श्रद्धा की कास्टिंग इस फ़िल्म के लिए ठीक नहीं | negative |
1,250 | अभिनय की बात की जाए तो कुणाल राय कपूर अगर और मेहनत कर लेते तो उनके किरदार में और जान आ पाती | negative |
1,251 | फ़िल्म का स्क्रीनप्ले बहुत ही अच्छा लिखा गया है और कहानी भी मनोरंजक है | negative |
1,252 | अगर वह अपना वजन थोड़ा कम कर लेते तो एक कॉलेज स्टूडेंट या उसके आस-पास का उनका किरदार थोड़ा कन्विन्शिंग लगता | negative |
1,253 | कुल मिलाकर 'लखनऊ सेंट्रल' कोई महान फ़िल्म तो नहीं मगर एक बार देखी जा सकती है | negative |
1,254 | निराश करती है यह 'सिमरन' | negative |
1,255 | यह फ़िल्म अत्यंत साधारण फ़िल्म है | negative |
1,256 | फ़िल्म शुरू होने के कुछ समय तक तो आपको समझ ही नहीं आता कि आखिर हो क्या रहा है | negative |
1,257 | एडिटिंग बहुत ही कमजोर है | negative |
1,258 | स्टोरी और स्क्रीनप्ले पर बिल्कुल भी मेहनत नहीं की गई है | negative |
1,259 | फ़िल्म का संगीत साधारण है | negative |
1,260 | हंसल मेहता का निर्देशन इस बार कमजोर पड़ गया | negative |
1,261 | मगर आसिम इसे एक साधारण सी फ़िल्म के ऊपर नहीं ले जा पाए हैं | negative |
1,262 | यही इस फ़िल्म की सबसे बड़ी कमी है | negative |
1,263 | एडिटिंग पर थोड़ा और काम होना चाहिए था | negative |
1,264 | लेकिन, उसमें काफी कमियां नजर आती हैं। इन सबके बीच सबसे बड़ी कमी नजर आती है स्क्रिप्ट डिपार्टमेंट में | negative |
1,265 | मगर जैसे ही कहानी आगे बढ़ती है एक रेग्यूलर मसाला फ़िल्म की तरह ही नज़र आती है 'बादशाहो' | negative |
1,266 | क्लाइमेक्स पर आकर आप खुद को ठगा सा महसूस करते हैं | negative |
1,267 | इतनी बड़ी समस्या का ऐसा समाधान लेखन विभाग की असफलता दिखाती है | negative |
1,269 | कुल मिलाकर 'बादशाहो' एक औसत फ़िल्म है | negative |
1,270 | निर्देशक कृष्णा डीके और राज की फ़िल्म 'अ जेंटलमैन' एक औसत कमर्शियल फ़िल्म है | negative |
1,271 | जिसमें ज्यादा दिमाग लगाने की जरूरत नहीं होती | negative |
1,272 | निर्देशक द्वय ने फ़िल्म पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए काफी मशक्कत भी की है किंतु, वे सफलता हासिल नहीं कर सकें | negative |
1,273 | मगर कहानी में कोई ख़ास दम नहीं है | negative |
1,274 | गिने-चुने दृश्यों के अलावा फ़िल्म,दर्शकों पर पकड़ बरकरार नहीं रख पाती | negative |
1,277 | अभिनय की बात की जाए तो आधार जैन को अभी काफी मेहनत करने की जरूरत है | negative |
1,278 | उनमें संभावनाएं जरूर हैं मगर, उनके लॉन्चिंग में जल्दीबाजी की गई है | negative |
1,279 | उनका चित्रण बहुत ही फॉल्स है | negative |
1,280 | आप चाहे तो यह फ़िल्म छोड़ भी सकते हैं | negative |
1,281 | स्क्रीन पर आते ही उसकी हवा निकल गई है | negative |
1,282 | इस फ़िल्म का सबसे कमजोर हिस्सा इसका स्क्रीनप्ले और कहानी ही है | negative |
1,283 | कुल मिलाकर यह कहा जाए तो गलत नहीं होगा कि 'बाबूमोशाय बंदूकबाज' एक साधारण सी फ़िल्म है, जो उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती | negative |
1,284 | नवाजुद्दीन सिद्दीकी के चाहने वाले उनकी छवि को देखते हुए यह फ़िल्म को देखने जाएंगे निराश ही होंगे | negative |
1,285 | समय की कमी और इतना मुश्किल काम जल्द करने में असमर्थ रेडक्लिफ़ अपने हाथ खड़े कर देते हैं | negative |
1,286 | जो कभी-कभी फ़िल्म को उबाऊ कर देता है | negative |
1,288 | कुल मिलाकर पार्टीशन हमारे दौर की एक महत्वपूर्ण फ़िल्म तो है मगर इसका नज़रिया कहीं न कहीं एकतरफा लगता है | negative |
1,289 | फ़िल्म अनावश्यक रूप से काफी लंबी है | negative |
1,290 | इंटरवल तक फ़िल्म बोझिल हो जाती है | negative |
1,291 | स्क्रीनप्ले पर और मेहनत की जानी चाहिए थी | negative |
1,292 | सिनेमेटोग्राफी भी और बेहतर होती तो फ़िल्म दर्शनीय बन पाती | negative |
1,293 | जिनके दिमाग में शाह रुख़ ख़ान की फ़िल्म यानी भव्य, सुपरमैन की तरह का नायक और बड़े-बड़े सेट्स हैं वो इस फ़िल्म से शायद खुद को जोड़ न पाएं | negative |
1,294 | पूरी फ़िल्म में अपनी पकड़ बनाये रखने वाले इम्तियाज़ ने क्लाइमेक्स में अपनी फ़िल्मी लिबर्टी ले ली, जो कुछ छूट गया का अहसास कराती है | negative |
1,296 | हां, कुछ लॉजिकल फॉल्ट्स हैं फिल्म में जो हर कमर्शियल फिल्मों में अक्सर होते हैं | negative |
1,297 | उन्हें अभी दिखाना होगा कि वो अभिनय के कितने आयाम मौजूद हैं | negative |
1,298 | स्लो स्क्रीनप्ले और जरुरत से ज्यादा उलझी कहानी आप को बोर कर सकते हैं | negative |
1,299 | ढेर सारे ट्रेक्स ओनिर खोल देते है उसमें दर्शक कंफ्यूज हो जाता है कि आखिर चल क्या रहा है | negative |
1,300 | पेस एंड रीदम का फिल्म में अभाव है जिससे फिल्म का ग्राफ एक जैसा ग्रो नहीं करता | negative |
1,301 | फ़र्स्टहाफ थोड़ा खींच गया | negative |
1,302 | मिथुन के संगीत से सजी फिल्म चुस्त एडिटिंग में मात खाती है | negative |
1,303 | समर्थ कलाकारों के बावजूद दिक्कत लेखन से हो गई है | negative |
1,304 | संवादों में रचनात्मकता का पुट होने के बावजूद हंसी चेहरे पर नहीं पसर पाती है | negative |
1,306 | इससे यह आला दर्जे की थ्रिलर बनते-बनते रह गई है | negative |
1,307 | एक जमाने में सफल फिल्में दे चुके सुनील दर्शन की यह फिल्म उक्त कारणों के चलते असरहीन हो गई है | negative |
1,308 | दीम के संगीत को छोड़ दें तो यह लेष मात्र भी प्रभाव नहीं छोड़ती | negative |
1,309 | कहानी तो रिक्त स्थानों की पूर्ति भर कर रहे हैं | negative |
1,310 | थ्रिलर का स्तर धारावाहिकों सा हो गया है। वह कई मौकों पर हास्यास्पद सा लगा है | negative |
1,311 | बोल और भाव-भंगिमा में बड़ा फासला दिखता है | negative |
1,312 | ‘ट्यूबलाइट’ के इस महत्वपूर्ण संदेश में फिल्म थोड़ी फिसल जाती है | negative |
1,313 | यह फिल्म पूर्वार्द्ध में थोड़ी शिथिल पड़ी है | negative |
1,314 | अमजद खान के अवतार में विवेक ओबेरॉय जरा सी कसर छोड़ गए | negative |
1,315 | सीमित साधनों और बजट की अभिषेक सक्सेना निर्देशित ‘फुल्लू’ आरंभिक चमक के बाद क्रिएटिविटी में भी सीमित रह गई है | negative |
1,316 | नेक इरादे से बनाई गई इस फिल्म में घटनाएं इतनी कम हैं कि कथा विस्तार नहीं हो सका है | negative |
1,318 | इस वजह से फिल्म का संदेश प्रभावी तरीके से व्यक्त नहीे हो पाता | negative |
1,320 | फिल्म के बाकी किरदारों का रवैया भी स्पष्ट नहीं होता | negative |
1,321 | अकेल शारिब हाश्मी पर टिकी यह फिल्म पूरी होने के पहले ही हांफने लगती है | negative |
1,322 | साफ लगता है कि बोल्डनेस की चाह रखने वालों का खास ख्याल रखा गया है | negative |
1,323 | बहरहाल, दिक्कत अत्याधिक सरल पटकथा के चलते हो गई है | negative |
1,325 | साथ ही यह एक्शन से ज्यादा कॉमेडी की गलियों में गुम हो जाती है | negative |
1,326 | साइकोलॉजिकल बीमारियों के बारे में समुचित जानकारी का अभाव खटकता है | negative |
1,327 | खंडित शख्सियत के शिकार जय को चित्रित करने में प्रवीण कमजोर पड़े हैं | negative |
1,328 | हालांकि डायलाग वह सपाट तरीके से बोलती नजर आती हैं | negative |
1,329 | वह डर, परेशानी और द्वंद्व में फंसे शख्स के भावों को पूरी तरह उकेर नहीं पाए हैं | negative |
1,331 | वह भी प्रभावहीन लगी हैं | negative |
1,332 | उनके किरदारों को सही से गढ़ा नहीं गया है | negative |
1,333 | बाकी सहयोगी कलाकार खानापूर्ति करते दिखते हैं | negative |
1,334 | इस फिल्म पर थोड़ी और मेहनत की गई होती और सचिन तेंदुलकर के व्यक्त्त्वि को खंगाला गया होता तो यह फिल्म दूरगामी प्रभाव की हो जाती | negative |
1,335 | यों लगता है कि सचिन की तरफ से निर्माता-निर्देशक को भरपूर सहयोग नहीं मिला | negative |
1,336 | भाषा, परिवेश और माहौल में ‘हाफ गर्लफ्रेंड’ में कसर रह जाती है और उसके कारण अंतिम असर कमजोर होता है | negative |
1,337 | हाफ गर्लफ्रेंड’ में तर्क दरकिनार है और संयोगों की भरमार है | negative |
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