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1,338
‘हिंदी मीडियम’ जैसी बेहतरीन फिल्‍म का यह कमजोर अंश है
negative
1,339
कमी है तो ऐसे प्रसंगों और दृश्यों की जहां वे विस्तार और गहराई पा सकें
negative
1,340
हिंदी के प्रयोग में व्याकरण और व्यवहार की गलतियां आम होती जा रही हैं
negative
1,341
रामगोपाल वर्मा की ‘सरकार 3’ उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती
negative
1,342
फिल्म चारों खाने चित्त हो जाती है
negative
1,343
अफसोस, यह हमारे समय के समर्थ फिल्मकार का भयंकर भटकाव है
negative
1,344
अमिताभ बच्चकन, मनोज बाजपेयी और बाकी कलाकारों की उम्दा अदाकारी, रामकुमार सिंह के संवाद और तकनीकी टीम के प्रयत्नों के बावजूद फिल्म संभल नहीं पाती
negative
1,346
कहानी और पटकथा के स्तर की दिक्कतें फिल्म की गति और निष्‍पत्ति रोकती हैं
negative
1,347
रामगोपाल वर्मा सभी किरदारों को लेकर रोचक ड्रामा बुनने में चूकते हैं।
negative
1,348
‘सरकार 3’ रामगोपाल वर्मा की विफल फिल्मोंं की सूची में रहेगी
negative
1,349
उन दृश्यों में नवीनता नहीं है
negative
1,350
पर थोड़ा ठहरकर या सिनेमाघर से निकल कर सोचें तो यह आनंद मुट्ठी में बंधी रेत की तरह फिसल जाती है
negative
1,351
भारतीय फिल्‍मों का अावश्‍यक तत्व है इमोशन... इस फिल्‍म में इमोशन की कमी है
negative
1,352
वात्‍सल्‍य, प्रेम और ईर्ष्‍या के भावों को गहराई नहीं मिल पाती
negative
1,353
इस विस्‍तार में धीमी फिल्‍म और बोझिल हो जाती है
negative
1,354
अफसोस है कि नूर को पर्दे पर जीने की कोशिश में अपनी सीमाओं को लांघती सोनाक्षी सिन्‍हा का प्रयास बेअसर रह जाता है
negative
1,355
लेकिन लेखक और निर्देशक उनकी मेहनत पर पानी फेर देते हैं
negative
1,356
यह फिल्‍म अपने उद्देश्‍य तक नहीं पहुंच पाती
negative
1,357
अपने उपसंहार में यह फिल्म दुविधा की शिकार होती है
negative
1,358
अहम मुद्दे पर अहमकाना तो नहीं, लेकिन बहकी हुई फिल्म हमें मिलती है
negative
1,359
उनकी संवाद अदायगी और गुस्सैल अदाकारी बेहतर है
negative
1,360
रही-सही कसर उन सबको मिले कमजोर संवादों ने पूरी कर दी है
negative
1,361
यह उनके अब तक के करियर की सबसे कमजोर परफॉरमेंस कही जाएगी
negative
1,363
फ़िल्म का प्लॉट पेचीदा और उलझा हुआ है
negative
1,364
कहानी भागती और बिखरी हुई है, जो दर्शक को बांधकर नहीं रख पाती
negative
1,365
संवाद बेतरतीब और दार्शनिक भाव लिए हुए हैं, जिससे वो असरहीन प्रतीत होते हैं
negative
1,366
किरदारों की अदाकारी में गहराई का अभाव है
negative
1,367
अदाकारी में लापरवाही की झलक है
negative
1,368
अवधि लगभग दो घंटे होने की वजह से फ़िल्म थका सकती है
negative
1,369
हालांकि लंबे वक़्त तक फ़िल्म बांधे रखने में कामयाब नहीं होती
negative
1,370
कहानी इस पेंच तक आने के बाद उलझ जाती है
negative
1,371
लेखक और निर्देशक कभी रोमांस तो कभी राजनीति की गलियों में मिर्जा और जूलिएट के साथ भटकने लगते हैं
negative
1,372
बाकी किरदारों को स्‍पेस देने के चक्‍क्‍र में फिल्‍म का प्रवाह शिथिल और बाधित होता है
negative
1,373
दर्शन कुमार उनका साथ देने में कहीं-कहीं पिछड़ जाते हैं
negative
1,374
उनके किरदार के गठन की कमजोरी से उनका अभिनय प्रभावित होता है
negative
1,375
उद्दाम प्रेमी के रूप में वे निखर नहीं पाते
negative
1,376
लेकिन बाद में वही दोहराव लगने लगती है
negative
1,377
उनकी रिश्‍तेदारी और उनकी भाषा कहीं-कहीं खटकती है
negative
1,378
फिल्‍म में एक ही कमी है- कहानी
negative
1,379
अभी के समय के चित्रण में वही कौशल नहीं दिखा है
negative
1,380
‘मशीन’ अब्‍बास-मस्‍तान की सबसे कमजोर फिल्‍म के रूप में याद की जाएगी,जिसमें एक लोकेशन के अलावा सब कुछ फिसड्डी रहा
negative
1,382
दृश्‍य कमजोर हैं और अभिनेताओं का प्रदर्शन और भी कमजोर है
negative
1,383
रोमांटिक और नाटकीय संवादों में हंसी छूटती है
negative
1,384
फिल्‍म में कुछ कमियां भी हैं।
negative
1,385
कुछ दृश्‍य बेवजह लंबे हो गए हैं
negative
1,386
कुछ प्रसंग निरर्थक हैं।
negative
1,387
ईशा गुप्‍ता को दबंग किरदार मिला है, लेकिन वह इतनी समर्थ नहीं हैं कि मारिया को ढंग से निभा पाएं
negative
1,388
अभिनय और परफारमेंस के लिहाज से इस फिल्‍म में सभी निराश करते हैं
negative
1,389
केशव पानेरी निर्देशित ‘जीना इसी का नाम है’ एक मुश्किल फिल्‍म है। यह दर्शकों की भी मुश्किल बढ़ाती है
negative
1,390
स्क्रिप्‍ट की सीमा और कमजोरी ही उनकी हद बन गई है
negative
1,392
अनेक प्रतिभाओं के योगदान के बावजूद गीत-संगीत मामूली है
negative
1,393
सहकलाकारों की बदतरीन अदाकारी से सीक्वेंस हास्यास्पद हो गए हैं
negative
1,395
पर्दे पर वह देखना हताशाजनक था
negative
1,396
इस मूक-चूक और लापरवाही से फिल्म अपनी संभावनाओं को ही मार डालती है और एक औसत फिल्म रह जाती है
negative
1,398
किरदारों को गढ़ने में टीम का ढीलापन भरोसे और अन्य किरदारों में भी दिखता है
negative
1,399
अमित साध ने संवाद और भाषा का अभ्यास नहीं किया है
negative
1,400
फिल्मी रूपातंरण में वे तथ्यों को रोचक तरीके से नहीं रख पाए हैं
negative
1,401
ऐसा लगता है कि किरदार आपस में जुड़ नहीं पा रहे हैं
negative
1,403
‘रईस’ की यही खूबी और खामी है कि कमर्शियल मसाले डालकर मनोरंजन को रियलिस्टिक तरीके से परोसने की कोशिश की गई है
negative
1,405
मूल कथा और रईस के मिजाज के लिए जरूरी होने के बावजूद जोड़ा गया लगता है
negative
1,406
पारूल बनी अंजना सुखानी और गीत-संगीत, सब असरहीन हैं।
negative
1,407
स्क्रीन पर स्पष्ट नजर आता है कि उन्होंने आधे-अधूरे मन से अदायगी की है
negative
1,408
कई जगह हिंदी फिल्मों के प्रचलित घिटे पिटे डायलाग का उपयोग अखरता है
negative
1,409
रजनीश दुग्गल कहीं-कहीं नाटकीय लगे हैं
negative
1,410
जरीन खान डांस में निराश करती हैं
negative
1,411
फिल्म के आइटम सांग का फिल्मांकन प्रभावशाली नहीं है
negative
1,413
वह कहानी के मिजाज से मेल नहीं खाता
negative
1,414
शेखर के पास हर प्रसंग के लिए दर्शन है, लेकिन खुद भावनात्मक झंझावात में फंसने पर वह बिखर जाता है
negative
1,416
भाषा की अशुद्धियां खटकती हैं
negative
1,417
एनीमेशन उसी प्रकार आला दर्जे का नहीं है-
negative
1,418
फिल्म के साथ मेघालय का मुद्दा ढंग से मेल नहीं करता
negative
1,419
सब कुछ जबरदस्ती ठूंसा हुआ लगता है
negative
1,420
‘रॉक ऑन 2’ की पटकथा ढीली है
negative
1,421
संक्षेप में सीक्वल का संगीत पिछली फिल्म से कमजोर और साधारण है
negative
1,422
अर्जुन रामपाल का किरदार आध-अधूरा रह गया है, इसलिए पिछली फिल्म की तरह वे असरदार नहीं दिखते
negative
1,423
साथ ही किरदारों की भाषा पर खास ध्यान नहीं दिया गया है
negative
1,424
उनके किरदारों को सही परिप्रेक्ष्य नहीं मिला है। उनके चरित्रों के निर्वाह में ढीलापन है
negative
1,425
’31 अक्टूबर’ देखते हुए तकलीफ होती है कि एक जरूरी फिल्म सरोकारी जल्दबाजी और संसाधनों की कमी की शिकार हो गई
negative
1,426
तकनीकी रूप से यह कमजोर फिल्म है
negative
1,427
छायांकन से लेकर अन्य तकनीकी मामलों की कमियां फिल्म को बेअसर करती हैं
negative
1,428
यही वजह है कि निर्देशक रॉन होवार्ड की कोशिशों के बावजूद फिल्म साधारण ही रह जाती है
negative
1,429
फिल्म की कमजोरी इसकी पटकथा है, जो विश्वसनीयता पैदा नहीं कर पाती
negative
1,430
ज्यादातर दृश्य रोचक शुरूआत के बाद बीच में ही अटक और फिर भटक जाते हैं
negative
1,431
एक्शन और तकनीकी प्रभावों के बावजूद फिल्म प्रभावित नहीं करती
negative
1,432
फिल्म अतार्किक है
negative
1,433
घटनाओं और प्रसंगों में सामंजस्य नहीं है
negative
1,434
सभी की मेहनत के बावजूद कुछ छूट जाता है
negative
1,435
फिल्म बांध नहीं पाती है
negative
1,436
कमी है तो कंटेंट की
negative
1,437
गुलजार अपनी खासियत के बावजूद प्रभावित नहीं कर पाते
negative
1,438
दूसरे ट्रैक से भी कहानी भटकती है
negative
1,439
उस बोली को नहीं समझने वाले दर्शकों को थोड़ी दिक्कत हो सकती है
negative
1,440
सही मुद्दे पर व्यंग्यात्मक फिल्म बनाने की कोशिश में लेखक-निर्देशक असफल रह जाते हैं
negative
1,441
दृश्यों से संयोजन और चित्रण में बारीकी नहीं है
negative
1,443
विक्रम भट्ट के इस फार्मूले में अब कोई रस नहीं बचा है
negative
1,444
फिल्म शुरू होते ही समझ में आ जाता है कि विक्रम भट्ट कुछ नया नहीं दिखाने जाा रहे हैं
negative
1,445
बाकी विक्रम भट्ट ने हॉरर फिल्मों में घिस-पिट चुके दृश्यों को ही दोहराया है।
negative
1,446
विक्रम भट्ट की हॉरर फिल्में अब बिल्कुल नहीं डरा रहीं
negative
1,447
बाकी कलाकार भरपाई के लिए हैं
negative
1,448
अरबाज खान लंबे अनुभवों के बावजूद नवाज के साथ के दृश्यों में घिसटते ही नजर आते हैं
negative