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BHT25_00201
এই যে পাঁচদিন না খেয়ে আছি, তা, দুর্ভাবনার চাপে একবার মনে হয়নি যে উপোস করে আছি
मैं पाँच दिनों से उपवास कर रही हूँ, पर मारे चिंता के भूख को भूल ही गई
నేను ఐదు రోజులుగా ఉపవాసం ఉన్నాను, కానీ ఆందోళన కారణంగా నా ఆకలి గురించి మర్చిపోయాను.
BHT25_00202
কিন্তু কৈ, ডাক ত তোমার কোন বোনকে দেখি কেমন—
तब कहा थी तुम्हारी बहन, फिर पूछो तो जरा
అప్పుడు మీ చెల్లి ఎక్కడ చెప్పింది, నన్ను మళ్ళీ అడగండి
BHT25_00203
নীলাম্বর তাড়াতাড়ি বাধা দিয়া বলিল, আবার! বিরাজ ববিল,
नीलाम्बर ने जल्दी उसे रोकते हुए कहा "बिराज फिर से तुम वही बोले"
నీలాంబర్ వెంటనే అతన్ని ఆపి, "బిరాజ్ నువ్వు మళ్ళీ అదే చెప్పావు" అన్నాడు.
BHT25_00204
তবে বল কেন
तो फिर क्यों कहा
మరి ఎందుకు అన్నావు?
BHT25_00205
পাগলামি করেচি সে আমি জানি, আর যে দেবতা আমার মুখ রেখেচেন, তিনিই জানেন
पागलपन मैंने क्या-क्या किया- यह मेरा दिल ही जानता है और जानते हा मेरे प्रभु, जिन्होंने मेरा मान रक्खा
నేను ఎన్ని పిచ్చి పనులు చేశానో - నా హృదయానికి మాత్రమే తెలుసు, నన్ను గౌరవించిన నా ప్రభువుకు కూడా తెలుసు.
BHT25_00206
যদি তোমার কিছু একটা হয়ে যেত
यदि तुम्हें कुछ भी हो जाता
మీకు ఏదైనా జరిగితే
BHT25_00207
আমি ত তাহলে একটি দিনও বাঁচতুম না,
तो मैं एक भी पल जिन्दा न रहती
అప్పుడు నేను ఒక్క క్షణం కూడా బతికి ఉండేవాడిని కాదు.
BHT25_00208
সিঁথির এ সিঁদুর তোলবার আগে এ সিঁথে পাথর দিয়ে চেঁচে ফেলতুম
मांग का सिन्दूर मिटने के पहले ही मैं अपना सिर फोड़ लेती...
నా నుదిటిపై ఉన్న సింధూరం మాయమయ్యేలోపు నేను నా తల పగలగొట్టుకుంటాను...
BHT25_00209
শুভযাত্রা করে লোকে মুখ দেখবে না, শুভকর্মে লোক ডেকে জিজ্ঞেস করবে না,
कोई भी शुभ-यात्रा में कोई मुंह नहीं देखना चाहेगा, शुभ-कर्म में कोई नहीं बुलाएगा
శుభ ప్రయాణంలో ఎవరూ ఎవరి ముఖాన్ని చూడాలని అనుకోరు, ఎవరూ మిమ్మల్ని మంచి పనికి ఆహ్వానించరు.
BHT25_00210
এ দুটো শুধু-হাত লোকের কাছে বার করতে পারব না, লজ্জায় এ মাথার আঁচল সরাতে পারব না, ছি ছি, সে বাঁচা কি আবার একটা বাঁচা
दोनों हाथ पल्लू से बाहर नहीं निकाल सकती, माथे से आंचल नहीं हटा सकती... छि:-छि:! यह जीवन भी कोई जीवन होता है!
నా రెండు చేతులను పల్లు నుండి తీయలేకపోతున్నాను, నా నుదిటి నుండి పల్లును తీయలేకపోతున్నాను... ఛీ! ఇది కూడా ఒక జీవితమేనా?
BHT25_00211
সেকালে যে পুড়িয়ে মারা ছিল, সে ছিল ঠিক কাজ
उड़ युग में लोग स्त्रियों को जलाकर मार डालते थे- वही ठीक था...
పురాతన కాలంలో స్త్రీలను దహనం చేసి చంపేవారు - అది నిజమే...
BHT25_00212
পুরুষমানুষে তখন মেয়েমানুষের দুঃখ-কষ্ট বুঝতো, এখন বোঝে না
तब के पुरुष स्त्री का दुख-दर्द समझते थे, अब वे नहीं समझते
ఆ రోజుల్లోని పురుషులు స్త్రీల బాధలను, బాధలను అర్థం చేసుకున్నారు, కానీ ఇప్పుడు అర్థం చేసుకోవడం లేదు.
BHT25_00213
নীলাম্বর কহিল, না, তুই বুঝিয়ে দি গে
नीलाम्बर ने कहा- “फिर जाकर तुम समझा दो"
నీలాంబర్ అన్నాడు- "వెళ్లి మళ్ళీ నాకు వివరించు"
BHT25_00214
বিরাজ বলিল, তা পারি
बिराज ने कहा- “मैं समझा सकती हूँ..."
బిరాజ్ అన్నాడు- "నేను వివరించగలను..."
BHT25_00215
আর শুধু আমিই কেন, তোমাকে পেয়ে যে-কেউ তোমাকে হারাবে, সেই বুঝিয়ে দিতে পারবে—আমি একলা নয়
और केवल मैं ही क्यों, जो तुम्हें पाकर खो देगी, वही समझा देगी
మరియు నిన్ను పొందిన తర్వాత నిన్ను కోల్పోయే నేను మాత్రమే దానిని నీకు ఎందుకు వివరిస్తాను?
BHT25_00216
আমি একলা নয়
अकेली सिर्फ मे नहीं
నేను మాత్రమే కాదు
BHT25_00217
যাক, কি সব বকে যাচ্ছি, বলিয়া হাসিয়া উঠিল
सहसा बिराज हंस पड़ी- “मैं भी क्या बक-बक किए जा रही हूँ"
అకస్మాత్తుగా బిరాజ్ నవ్వాడు- "నేను దేని గురించి మాట్లాడుతున్నాను?"
BHT25_00218
তার পর ঝুঁকিয়া পড়িয়া আর একবার স্বামীর বুকের উত্তাপ হাত দিয়া অনুভব করিয়া বলিল, গায়ে কোথাও ব্যথা নেই ত
फिर एकबार झुक कर अपने पति के सिने पे हात लगाकर बुखार देखते हुए पूछा बदन में कहीं दर्द तो नहीं है
తరువాత ఆమె మళ్ళీ వంగి తన భర్త ఛాతీని తాకి, అతని జ్వరాన్ని తనిఖీ చేసి, అతని శరీరంలో ఏదైనా నొప్పి ఉందా అని అడిగింది.
BHT25_00219
নীলাম্বর ঘাড় নাড়িয়া বলিল, না
नीलाम्बर ने ‘ना’ के लहजे में सिर हिलाकर कहा- “नहीं"
నీలాంబర్ 'వద్దు' అన్న స్వరంలో తల అడ్డంగా ఊపి- "వద్దు" అన్నాడు.
BHT25_00220
বিরাজ বলিল, তবে আর কোন ভয় নেই
बिराज से निश्चिन्त होते हुए कहा- “फिर कोई चिन्ता की बात नहीं"
బిరాజ్ ద్వారా భరోసా ఇవ్వబడిన అతను, "అప్పుడు చింతించాల్సిన పని లేదు" అన్నాడు.
BHT25_00221
আজ আমার ক্ষিদে পেয়েছে—যাই এইবার দুটো রাঁধবার যোগাড় করি গে—সত্যি বলচি তোমাকে, আজ কেউ যদি আমার একখানা হাত কেটে দেয়, তাহলেও বোধ করি রাগ হয় না
आज मुझे भूख लगी है, कुछ बनाने की तैयारी करुं! सच, आज तो मेरा कोई हाथ भी काट डाले तो क्रोध नहीं आएगा
నాకు ఈరోజు ఆకలిగా ఉంది, ఏదైనా సిద్ధం చేద్దాం! నిజంగా, ఈరోజు ఎవరైనా నా చేయి కోసినా నాకు కోపం రాదు.
BHT25_00222
যদু চাকর বাহির হইতে ডাকিয়া বলিল, মা, কবিরাজমশাইকে এখন ডেকে আনতে হবে কি
नौकर यदु ने फिर बहार से आवाज लगा कर पूछा- “माताजी, वैद्यजी को क्या अभी बुलाकर लाना होगा"
సేవకుడు యదువు బయటి నుండి పిలిచి, "మాతాజీ, మనం ఇప్పుడే వైద్యుడిని పిలవాలా?" అని అడిగాడు.
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নীলাম্বর কহিল, না না, আর আবশ্যক নেই
नीलाम्बर ने बीच में कहा- “ना"
నీలాంబర్ అడ్డుపడి- "లేదు" అన్నాడు.
BHT25_00224
যদু তথাপি গৃহিণীর অনুমতির জন্য দাঁড়াইয়া রহিল
यदु तब भी गृहिणी से अनुमति मिलने के इंतज़ार मे खड़ा रहा
యదు ఇంకా అక్కడే నిలబడి గృహిణి అనుమతి కోసం ఎదురు చూస్తున్నాడు.
BHT25_00225
বিরাজ তাহা দেখিতে পাইয়া বলিল, না যা ডেকে নিয়ে আয়, একবার ভাল করে দেখে যান
मगर बिराज ने कहा- “एक बार बुला ही ला... वे अच्छी तरह देख लेंगे तो चिन्ता मिट जाएगी"
కానీ బిరాజ్, "ఒక్కసారి అతనికి ఫోన్ చేయి... అతను ఒకసారి బాగా పరిశీలించిన తర్వాత, మీ చింత తొలగిపోతుంది" అన్నాడు.
BHT25_00226
দিন-তিনেক পরে আরোগ্যলাভ করিয়া নীলাম্বর বাহিরে চণ্ডীমণ্ডপে বসিয়া ছিল,
तीन-चार दिन बाद... नीलाम्बर स्वस्थ होकर चण्डी-मण्डप में बैठा था
మూడు-నాలుగు రోజుల తర్వాత... కోలుకున్న తర్వాత నీలంబర్ చండీ-మండపంలో కూర్చున్నాడు.
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মতি মোড়ল আসিয়া কাঁদিয়া পড়িল—দাঠাকুর, তুমি একবার না দেখলে ত আমার ছিমন্ত আর বাঁচে না
तभी मोती मोउल आकर रोने लगा- “दादा ठाकुर! यदि आपने मेरे बेटे छीमन्त को नहीं देखा तो वह नहीं बचेगा"
అప్పుడు మోతీ మౌల్ వచ్చి ఏడవడం మొదలుపెట్టాడు- "దాదా ఠాకూర్! మీరు నా కొడుకు ఛిమాంత్‌ను చూసుకోకపోతే, అతను బ్రతకలేడు"
BHT25_00228
একবার পায়ের ধূলো দাও দেব্‌তা, তাহলে যদি এ-যাত্রা সে বেঁচে—
देवता! आपकी चरण-धूलि के स्पर्श से ही वह स्वस्थ हो जाएगा
దేవుడు! మీ పాదాల దుమ్ము తాకడం ద్వారా అతను ఆరోగ్యంగా ఉంటాడు.
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আর সে বলিতে পারিল না—আকুলভাবে কাঁদিতে লাগিল
वो और बोल ना सका - फूट-फूट कर रोने लगा
అతను ఇంకేమీ మాట్లాడలేకపోయాడు - అతను విపరీతంగా ఏడవడం ప్రారంభించాడు.
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নীলাম্বর জিজ্ঞাসা করিল, গায়ে কি খুব বেশী বেরিয়েচে মতি
नीलाम्बर ने मोती से पूछा- “उसके शरीर में कुछ ज़्यादा ही दाने निकल आए है क्या"
నీలాంబర్ మోతీని అడిగాడు- “అతని శరీరం మీద చాలా మొటిమలు వచ్చాయా?”
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মতি চোখ মুছিতে মুছিতে বলিতে লাগিল, সে আর কি বলব! মা যেন একেবারে ঢেলে দিয়েচেন
मोती अपने अश्रु पोंछते हुए कहने लगा - “क्या बताऊं... माता ने बिलकुल भर भर के दिया है"
మోతీ కన్నీళ్లు తుడుచుకుంటూ, "నేను ఏమి చెప్పాలి... అమ్మ నాకు చాలా డబ్బు ఇచ్చింది." అన్నాడు.
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কিছু বোঝা যাচ্ছে না
कुछ पता नहीं चलता
ఏమీ తెలియదు
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ছোটজাত হয়ে জন্মেচি ঠাকুদ্দা, কিছুই ত জানি নে কি করতে হয়—একবার চল, বলিয়া সে দু’পা জড়াইয়া ধরিল
नीच जाति में जन्मा हूँ... मूढ़ हूँ, कुछ जानता ही नहीं कि क्या करुं... आप चलिए, उसने उसके दोनों पैर पकड़ लिए
నేను తక్కువ కులంలో పుట్టాను... నేను తెలివితక్కువవాడిని, ఏమి చేయాలో నాకు తెలియదు... నువ్వు రా, అని అతను తన రెండు కాళ్ళను పట్టుకున్నాడు.
BHT25_00234
নীলাম্বর ধীরে ধীরে পা ছাড়াইয়া লইয়া কোমলস্বরে বলিল, কিছু ভয় নেই মতি, তুই যা, আমি পরে যাব
नीलाम्बर ने पांव छुड़ाकर कोमल स्वर में कहा- “डर ने की ज़रुरत नहीं तू चल, मैं थोड़ी देर में आऊंगा"
నీలాంబర్ తన పాదాలను విడిపించి మెల్లని స్వరంతో- "భయపడాల్సిన అవసరం లేదు, నువ్వు వెళ్ళు, నేను కొద్దిసేపట్లో వస్తాను" అన్నాడు.
BHT25_00235
মতি মন্ডল চোখের জল মুছতে মুছতে বিদায় নিলো
मोती मोउल अपनी आँखें पोंछता हुआ चला गया
మోతీ మౌల్ కళ్ళు తుడుచుకుంటూ వెళ్ళిపోయాడు
BHT25_00236
নীলাম্বর চিন্তা করতে লাগলো, এমন অসুস্থ, দুর্বল শরীরে সে কি ভাবে যাবে
नीलाम्बर सोचने लगा कि वह अस्वस्थ है, दुर्बल है, वह कैसे कहीं जा पाएगा
నీలంబర్ తాను అనారోగ్యంగా ఉన్నానని, బలహీనంగా ఉన్నానని, ఎక్కడికైనా ఎలా వెళ్ళగలనని ఆలోచించడం ప్రారంభించాడు.
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তাহার কান্নাকাটির কাছে সে নিজের অসুখের কথা বলিতে পারিল না
उसका रोना देख कर खुद अपने बुखार के बारे मे कुछ बोल ना सका
ఆమె ఏడుపు చూసి నా జ్వరం గురించి నేను ఏమీ చెప్పలేకపోయాను.
BHT25_00238
বিশেষ, সকল রকম রোগের সেবা করিয়া এ বিষয়ে তাহার এত অধিক দক্ষতা জন্মিয়াছিল যে, আশপাশের গ্রামের মধ্যে কাহারও শক্ত অসুখ-বিসুখে তাহাকে একবার না দেখাইয়া, তাহার মুখের আশ্বাস-বাক্য না শুনিয়া রোগীর আত্মীয়-স্বজনেরা কিছুতেই ভরসা পাইত না
रोगियों की सेवा करके उतना लोकप्रिय हो गया है कि आसपास के गांवों के लोग भयंकर बीमारियों में भी उसे दिखाकर सांत्वना और आशीर्वचन लेते हैं, तभी उनके परिवारवालों को धैर्य होता है
రోగులకు సేవ చేయడం ద్వారా ఆయన ఎంతగా ప్రాచుర్యం పొందాడంటే, సమీప గ్రామాల ప్రజలు తీవ్ర అనారోగ్యంతో ఉన్నప్పుడు కూడా ఆయనను సందర్శించి ఆయన ఆశీర్వాదం మరియు ఓదార్పును కోరుకుంటారు. అప్పుడే వారి కుటుంబాలకు ఓపిక వస్తుంది.
BHT25_00239
নীলাম্বর এ কথা নিজেও জানিত, ডাক্তার কবিরাজের ঔষধের চেয়ে, দেশের অশিক্ষিত লোকের দল তাহার পায়ের ধূলা, তাহার হাতের জলপড়াকে যে অধিক শ্রদ্ধা করে, ইহা সে বুঝিত বলিয়াই কাহাকেও কোনদিন ফিরাইয়া দিতে পারিত না
नीलाम्बर यह भलीभांति जानता था कि ये अशिक्षित और भोले लोग डॉक्टर-वैद्य की दवाओं की अपेक्षा उसकी चरण-धूलि और मन्त्रबद्ध पानी में अधिक श्रद्धा रखते हैं! यही कारण था कि वह भी किसी को निराश नहीं करता था
ఈ చదువురాని అమాయక ప్రజలకు వైద్యులు, వైద్యుల మందుల కంటే తన పాదధూళి, మంత్రాలతో నింపబడిన నీరు మీదే ఎక్కువ నమ్మకం ఉందని నీలంబర్ కు బాగా తెలుసు. అందుకే అతను ఎవరినీ నిరాశపరచలేదు.
BHT25_00240
মতি চাঁড়াল আর একবার কাঁদিয়া, আর একবার পায়ের ধূলার দাবী জানাইয়া, চোখ মুছিতে মুছিতে চলিয়া গেল
चांडाल मोती एक आखिर बार रोते हुए फिरसे उसके चरण की धूल मिलने का अनुग्रह कर अंशु पोछते हुए चला गया
చందాల్ మోతీ చివరిసారిగా ఏడ్చి, తన పాదాల ధూళిని దయతో అర్పించిన తర్వాత కన్నీళ్లు తుడుచుకుంటూ వెళ్లిపోయాడు.
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নীলাম্বর উদ্বিগ্ন হইয়া ভাবিতে লাগিল
नीलाम्बर बेचैन हो कर सोच ने लगा
నీలాంబర్ అశాంతిగా మారి ఆలోచించడం మొదలుపెట్టాడు.
BHT25_00242
মোড়ল চলে যাবার পর সে বড়ো চিন্তায় পড়লো
मोउल के जाने के बाद वह काफी बेचैन हो गया
మౌల్ వెళ్ళిపోయిన తర్వాత అతను చాలా అశాంతికి గురయ్యాడు.
BHT25_00243
তাহার দেহ তখনও ঈষৎ দুর্বল ছিল বটে কিন্তু সে কিছুই নয়
तब भी उसका शरीर काफी कमज़ोर था लेकिन कोई बात नहीं
అయినప్పటికీ అతని శరీరం చాలా బలహీనంగా ఉంది కానీ అది పట్టింపు లేదు
BHT25_00244
সে ভাবিতে লাগিল, বাড়ির বাহির হইবে কি করিয়া
सोचना लगा कि बाहर कैसे निकले
నేను ఎలా బయటపడాలో ఆలోచించడం మొదలుపెట్టాను.
BHT25_00245
সে বিরাজকে অত্যন্ত ভয় করিত,
बिराज से वह काफी डरता था
అతను బిరాజ్ కి చాలా భయపడ్డాడు.
BHT25_00246
তাহার কাছে এ কথা সে মুখে আনিবে কি করিয়া
यह बात उसे कैसे कहे
అతనికి ఈ విషయం ఎలా చెప్పాలి?
BHT25_00247
ঠিক এই সময়ে ভিতরের উঠান হইতে হরিমতির সুতীক্ষ্ণ কন্ঠের ডাক আসিল, দাদা, —বৌদি ঘরে এসে শুতে বলচে
इसी समय हरिमती ने आवाज दी- “दादा! अंदर आ कर भाभी सोने के लिए कह रही है"
ఈ సమయంలో హరిమతి, "దాదా! భాభీ లోపలికి వచ్చి మనల్ని నిద్రపోమని అడుగుతున్నాడు" అని పిలిచింది.
BHT25_00248
নীলাম্বর জবাব দিল না
नीलाम्बर ने कोई जवाब नहीं दिया
నీలాంబర్ సమాధానం చెప్పలేదు.
BHT25_00249
মিনিট-খানেক পরেই হরিমতি নিজে আসিয়া হাজির হইল বলিল, শুনতে পাওনি দাদা
कुछ ही पल मे हरिमती ने समीप आकर कहा- “दादा, सुनाई नहीं पड़ा"
కొన్ని క్షణాల్లో హరిమతి దగ్గరికి వచ్చి- "నాన్నా, మీరు నా మాట వినలేదా?" అంది.
BHT25_00250
নীলাম্বর ঘাড় নাড়িয়া বলিল, না
नीलाम्बर ने सर हिलाते हुए कहा- “नहीं"
నీలాంబర్ తల అడ్డంగా ఊపి "లేదు" అన్నాడు.
BHT25_00251
হরিমতি কহিল, সেই চারটি খেয়ে বসে আছ,
हरिमती ने बताया- “थोड़ा सा खा कर तब से यहीं बैठी हो"
హరిమతి అంది- "నువ్వు కొంచెం తిన్నప్పటి నుంచి ఇక్కడే కూర్చున్నావు."
BHT25_00252
বৌদি বলচে, আর বসে থাকতে হবে না, একটু শোও গে
भाभी का हुक्म है कि बैठने की जरुरत नहीं है, जाकर सो जाओ
కూర్చోవడం, వెళ్లి పడుకోవడం అవసరం లేదని భాభి ఆదేశించింది.
BHT25_00253
নীলাম্বর আস্তে আস্তে জিজ্ঞাসা করিল, সে কি করচে রে পুঁটি
नीलाम्बर ने आहिस्ता से पूछा- “पूंटी! तुम्हारी भाभी क्या कर रही है"
నీలాంబర్ మెల్లగా అడిగాడు- "పూంటీ! మీ భాభీ ఏం చేస్తోంది?"
BHT25_00254
হরিমতি কহিল, এইবার ভাত খেতে বসেচে
हरिमति ने बताया " अभी भोजन करने बैठी ही है"
హరిమతి, "ఆమె ఇప్పుడే తినడానికి కూర్చుంది" అంది.
BHT25_00255
নীলাম্বর আদর করিয়া বলিল, লক্ষ্মী দিদি আমার, একটি কাজ করবি
नीलाम्बर ने खुशामद-भरे स्वर में कहा- “मेरी लाड़ली बहन, मेरा एक काम करेही"
నీలాంబర్ పొగిడే స్వరంతో అన్నాడు- "నా ప్రియమైన సోదరి, దయచేసి నా కోసం ఒక పని చేయండి"
BHT25_00256
পুঁটি মাথা নাড়িয়া বলিল, করব
पुटी सर हिलाते हुए कहाँ जरुर
నేను ఎక్కడ చెప్పాలి అని చెబుతూ పుట్టి తల ఊపాడు.
BHT25_00257
নীলাম্বর কন্ঠস্বর আরও কোমল করিয়া কহিল, আস্তে আস্তে আমার চাদর আর ছাতিটা নিয়ে আয় দেখি!
नीलाम्बर ने और थोड़ा धीरे से कहा- “चुपके से मेरी चादर और छाता ला दे"
నీలాంబర్ కొంచెం మెల్లగా, "నా దుప్పటి, గొడుగు నిశ్శబ్దంగా తీసుకురండి" అన్నాడు.
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চাদর আর ছাতি ?
चादर और छाता ?
షీట్ మరియు గొడుగు?
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নীলাম্বর কহিল, হুঁ
नीलाम्बर बोला हाँ
నీలాంబర్ అవును అన్నాడు.
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হরিমতি চোখ কপালে তুলিয়া বলিল, বাপ রে! বৌদি ঠিক এই দিকে মুখ করে খেতে বসেচে যে!
हरिमती की आँखे विस्फारित हो गई, बोली- “ना दादा ना, भाभी उधर ही मुंह करके बैठी है"
హరిమతి కళ్ళు పెద్దవి చేసి, "లేదు దాదా, భాభీ ఆ వైపు ఎదురుగా కూర్చుని ఉన్నాడు" అంది.
BHT25_00261
নীলাম্বর শেষ চেষ্টা করিয়া বলিল, পারবি নে আনতে
नीलाम्बर ने फिर पूछा- “तो तुम नहीं ला सकोगी"
నీలాంబర్ మళ్ళీ అడిగాడు- "కాబట్టి మీరు దానిని తీసుకురాలేరు"
BHT25_00262
হরিমতি অধর প্রসারিত করিয়া দুই-তিনবার মাথা নাড়িয়া বলিল,
हरिमति निराशा के साथ सर हिलाते हुए बोली "नहीं"
హరిమతి నిరాశగా తల అడ్డంగా ఊపి "లేదు" అంది.
BHT25_00263
না দাদা, দেখে ফেলবে; তুমি শোবে চল
नाराज हो जाएंगी, नहीं दादा, तुम चलकर सो जाओ
ఆమెకు కోపం వస్తుంది, వద్దు దాదా, నువ్వు వెళ్ళి పడుకో.
BHT25_00264
বেলা তখন প্রায় দুইটা,
उस समय दोपहर के दो बजे थे
మధ్యాహ్నం రెండు గంటలైంది
BHT25_00265
বাহিরের প্রচণ্ড রৌদ্রের দিকে চাহিয়া সে শুধু-মাথায় পথে বাহির হইবার কথা ভাবিতেও পারিল না,
धूप बहुत तेज थी, इसलिए उसका बिना छाता लिए जाने का साहस नहीं हुआ
ఎండ చాలా వేడిగా ఉంది, కాబట్టి అతను గొడుగు లేకుండా బయటకు వెళ్ళడానికి ధైర్యం చేయలేదు.
BHT25_00266
হতাশ হইয়া ছোটবোনের হাত ধরিয়া ঘরে আসিয়া শুইয়া পড়িল
अन्त में निराश होकर अपनी बहन का हाथ पकड़कर भीतर आकर लेट गया
చివరికి, నిరుత్సాహంగా భావించి, అతను తన చెల్లి చేయి పట్టుకుని లోపలికి వెళ్లి పడుకున్నాడు.
BHT25_00267
হরিমতি কিছুক্ষণ অনর্গল বকিতে বকিতে এক সময়ে ঘুমাইয়া পড়িল
हरिमती थोड़ी देर इधर-उधर की बातें करके सो गई
హరిమతి కాసేపు ఇదిగో అదిగో అని మాట్లాడి నిద్రపోయింది.
BHT25_00268
নীলাম্বর চুপ করিয়া মনে মনে নানারূপে আবৃত্তি করিয়া দেখিতে লাগিল, কথাটা ঠিক কি রকম করিয়া পাড়িতে পারিলে খুব সম্ভব বিরাজের করুণা উদ্রেক করিবে
मन ही मन नीलाम्बर सोचता रहा कि यह बात बिराज को कैसे कही जाए कि उसका हृदय पिघल जाए
బిరాజ్ హృదయం కరిగిపోయేలా ఈ విషయాన్ని ఎలా చెప్పాలో నీలంబర్ తన మనసులో ఆలోచిస్తూనే ఉన్నాడు.
BHT25_00269
বেলা প্রায় পড়িয়া আসিয়াছিল
दिन ढल गया था
రోజు ముగిసింది
BHT25_00270
বিরাজ ঘরের শীতল মসৃণ সিমেণ্টের উপর উপুড় হইয়া পড়িয়া বুকের তলায় একটা বালিশ দিয়া মগ্ন হইয়া মামা ও মামীকে চারপাতা-জোড়া পত্র লিখিতেছিল
बिराज अपने घर के चिकने और ठण्डे सीमेंट के फर्श पर छाती के नीचे तकिया दबाए अपने मामा-मामी को पत्र लिख रही थी
బిరాజ్ తన ఇంట్లోని నునుపుగా, చల్లగా ఉన్న సిమెంట్ నేలపై తన ఛాతీ కింద దిండు నొక్కి ఉంచుకుని తన మామ, అత్తలకు ఒక లేఖ రాస్తోంది.
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কি করিয়া এ বাড়িতে শুদ্ধমাত্র মা শীতলার কৃপায় মরা বাঁচিয়াছে, কি করিয়া যে এ যাত্রা সিঁথার সিঁদুর ও হাতের নোয়া বজায় রহিয়া গিয়াছে, লিখিয়া লিখিয়া ক্রমাগত লিখিয়াও সে কাহিনী শেষ হইতেছিল না,
कि किस तरह गाँव में शीतला माता का प्रकोप हुआ, कैसे उसी का घर मृत्यु की छाया से बचा, कैसे उसका सुहाग... उसकी चूड़ियां बची रहीं, यह लम्बी दास्तान लिखने से खत्म ही नहीं हो रही थी
శీతల మాత కోపం గ్రామాన్ని ఎలా తాకింది, ఆమె ఇల్లు మరణ నీడ నుండి ఎలా రక్షించబడింది, ఆమె భర్త... ఆమె గాజులు ఎలా రక్షించబడ్డాయి, నేను రాసినా ఈ పొడవైన కథ ముగియదు.
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এমন সময় খাটের উপর হইতে নীলাম্বর হঠাৎ ডাকিয়া বলিল, একটি কথা রাখবে বিরাজ
तभी नीलाम्बर ने लेटे-लेटे पुकारा- “बिराज! मेरी एक बात मानोगी"
అప్పుడే పడుకుని నీలాంబర్ పిలిచాడు- "బిరాజ్! ఒక్కసారి నా మాట వింటావా?"
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বিরাজ দোয়াতের মধ্যে কলমটা ছাড়িয়া দিয়া মুখ তুলিয়া বলিল, কি কথা
कलम को दवात में रखकर सिर उठाकर पूछा- “कौन-सी बात"
పెన్నును ఇంక్పాట్ లో పెట్టి, తల పైకెత్తి అడిగాడు- "ఏమిటి?"
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যদি রাখ ত বলি
अगर मानोगी तो ही बताऊंगा
మీరు అంగీకరిస్తేనే నేను మీకు చెప్తాను.
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নীলাম্বর ভাবতে লাগলো কিভাবে কথা টা সে বলবে
नीलाम्बर सोचने लगा कैसे कहूँ
నీలాంబర్ దానిని ఎలా చెప్పాలో ఆలోచించడం ప్రారంభించాడు.
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বিরাজ কহিল, রাখবার মত হলেই রাখবো—কি কথা
बिराज ने फिर कहा- “यदि बात मानने लायक हुई तो मैं जरुर मानूंगी - क्या बात है"
అప్పుడు బిరాజ్ ఇలా అన్నాడు- "అది అంగీకరించదగినది అయితే నేను ఖచ్చితంగా అంగీకరిస్తాను - అది ఏమిటి?"
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নীলাম্বর মুহূর্তকাল চিন্তা করিয়া বলিল, বলে লাভ নেই বিরাজ, তুমি কথা আমার রাখতে পারবে না
क्षणभर विचारकर नीलाम्बर ने कहा- “बिराज! तुम मेरी बात नहीं मानोगी, इसलिए कहने का कोई लाभ नहीं है"
ఒక్క క్షణం ఆలోచించిన తర్వాత, నీలంబర్ ఇలా అన్నాడు- "బిరాజ్! నువ్వు నా మాట వినవు, కాబట్టి చెప్పడం వల్ల ప్రయోజనం లేదు."
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বিরাজ আর প্রশ্ন করিল না,
बिराज चुप रही
బిరాజ్ మౌనంగా ఉండిపోయాడు
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কলমটা তুলিয়া লইয়া পত্রটা শেষ করিবার জন্য আর একবার ঝুঁকিয়া পড়িল
झुक कर कलम उठाकर चिट्‌ठी समाप्त करने के लिए फिर तैयार हुई,
ఆమె వంగి, పెన్ను తీసుకుని, ఉత్తరం పూర్తి చేయడానికి సిద్ధమైంది.
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কিন্তু চিঠিতে মন দিতে পারিল না—ভিতরে ভিতরে কৌতূহলটা তাহার প্রবল হইয়া উঠিল
पर दिल नहीं लगा चिट्‌ठी मे, उसके भीतर उत्सुकता बढ़ती गई
కానీ అతని హృదయం ఆ లేఖలో లేదు, అతని ఉత్సుకత పెరుగుతూనే ఉంది
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সে উঠিয়া বসিয়া বলিল, আচ্ছা বল, আমি কথা রাখব
वह अच्छी तरह बैठती हुई बोली- “अच्छा बताओ, मैं तुम्हारी बात मानूंगी"
ఆమె హాయిగా కూర్చుని, "సరే, చెప్పు, నేను నీ మాట వింటాను" అంది.
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নীলাম্বর একটুখানি হাসিল,
नीलाम्बर थोड़ा मुस्कुराया
నీలాంబర్ చిన్నగా నవ్వాడు.
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একটুখানি ইতস্ততঃ করিল, তাহার পরে বলিল, দুপুরবেলা মতি চাঁড়াল এসে আমার পা দুটো জড়িয়ে ধরেছিল
फिर सहमकर बोला- “आज दोपहर को मोती चांडाल आया था, मेरे पांव पकड़कर रोने लगा..."
అప్పుడు అతను భయంతో అన్నాడు- "ఈరోజు మధ్యాహ్నం మోతీ చందల్ వచ్చి నా కాళ్ళు పట్టుకుని ఏడవడం మొదలుపెట్టాడు..."
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তাদের বিশ্বাস, আমার পায়ের ধূলো না পড়লে তার ছিমন্ত বাঁচবে না—
उसको यकीन है कि जब तक उसके घर में मेरी चरण-धूलि नहीं पड़ेगी, तब तक उसका बेटा छीमन्त स्वस्थ नहीं होगा
నా అడుగులు తన ఇంటిపై పడనంత వరకు, తన కొడుకు ఛిమంత్ ఆరోగ్యంగా ఉండడని అతనికి ఖచ్చితంగా తెలుసు.
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আমাকে একবার যেতে হবে
मुझे एक बार वहाँ जाना है
నేను ఒకసారి అక్కడికి వెళ్లాలనుకుంటున్నాను.
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তাহার মুখপানে চাহিয়া বিরাজ স্তব্ধ হইয়া বসিয়া রহিল
बिराज उसका मुंह देखती रही
బిరాజ్ అతని ముఖం వైపు చూస్తూనే ఉన్నాడు
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খানিক পরে বলিল, এই রোগা দেহ নিয়ে তুমি যাবে
थोड़ी देर बाद बोली- “इस बीमारी में जाओगे"
కొంతకాలం తర్వాత ఆమె చెప్పింది- "నువ్వు ఈ వ్యాధితో బాధపడతావు"
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কি করব বিরাজ, কথা দিয়েচি—আমাকে একবার যেতেই হবে
एकबार जाना ही पड़ेगा बिराज, क्या करू - उसे वचन दे चुका हूँ
నేను ఒకసారి వెళ్ళాలి బిరాజ్, నేను ఏమి చేయాలి - నేను ఇప్పటికే ఆమెకు మాట ఇచ్చాను.
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কথা দিলে কেন
वचन क्यों दिया
మీరు ఎందుకు ప్రమాణం చేసారు?
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নীলাম্বর চুপ করিয়া বসিয়া রহিল
नीलाम्बर चुप चाप बैठा रहा
నీలాంబర్ మౌనంగా ఉండిపోయాడు
BHT25_00291
বিরাজ কঠিনভাবে বলিল, তুমি কি মনে কর, তোমার প্রাণটা তোমার একলার
बिराज ने तमककर कहा- “तुम समझते हो कि तुम्हारे जीवन पर केवल तुम्हारा ही अधिकार है"
బిరాజ్ కోపంగా అన్నాడు- "నీ జీవితం మీద నీకు మాత్రమే హక్కు ఉందని నువ్వు అనుకుంటున్నావు"
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ওতে কারও কিছু বলবার নেই
उसमें कोई भी दखल नहीं दे सकता
దానిలో ఎవరూ జోక్యం చేసుకోలేరు
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তুমি যা ইচ্ছে তাই করতে পার
तुम अपनी मर्जी का करोगे
మీరు మీ ఇష్టానుసారం చేస్తారు.
BHT25_00294
নীলাম্বর কথাটা লঘু করিয়া ফেলিবার জন্য হাসিবার চেষ্টা করিল, কিন্তু স্ত্রীর মুখের পানে চাহিয়া তাহার হাসি আসিল না
नीलाम्बर ने हंसकर कुछ कहना चाहा, पर पत्नी के बदले हुए तेवर देखकर वह हंस नहीं सका
నవ్వుతూ నీలాంబర్ ఏదో చెప్పాలనుకున్నాడు, కానీ తన భార్య మారిన వైఖరి చూసి అతను నవ్వలేకపోయాడు.
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কোনমতে বলিয়া ফেলিল, কিন্তু তার কান্না দেখলে—
किसी तरह इतना ही कह पाया- “उसका रोना देखकर..."
ఏదో ఒకవిధంగా నేను ఇంతే చెప్పగలిగాను- "ఆమె ఏడుపు చూసి..."
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বিরাজ কথার মাঝখানেই বলিয়া উঠিল, ঠিক ত!
बिराज बात को काटकर बोली- “ठीक ही तो है"
బిరాజ్ అడ్డుపడి- "సరేలే" అన్నాడు.
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তার কান্না দেখলে—কিন্তু আমার কান্না দেখবার লোক সংসারে আছে কি
उसका रोना तुमने देखा, पर मेरा रोना इस संसार में देखने वाला कोई नहीं है
అతను ఏడవడం నువ్వు చూశావు, కానీ ఈ ప్రపంచంలో ఎవరూ నేను ఏడవడం చూడలేరు.
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বলিয়া চারপাতা-জোড়া চিঠিখানা তুলিয়া লইয়া কুচিকুচি করিয়া ছিঁড়িয়া ফেলিতে ফেলিতে বলিল, উঃ! পুরুষমানুষেরা কি!
फिर चिट्‌ठी को पकड़कर फाड़ते हुए बोली- “उफ! ये मर्द कैसे होते हैं"
తర్వాత ఆమె ఆ ఉత్తరాన్ని చించి, "ఓహ్! వీళ్ళు ఎలాంటి మనుషులు?" అంది.
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চার দিন চার রাত না খেয়ে না ঘুমিয়ে কাটালুম—ও হাতে হাতে তার প্রতিফল দিতে চলল!
मैंने चार दिन, चार रातें बिना खाए गुजारीं, इसी का यह बदला मिल रहा है
నేను నాలుగు పగళ్లు, నాలుగు రాత్రులు తినకుండా గడిపాను, దానికి నేను పొందుతున్న శిక్ష ఇదే.
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ঘরে ঘরে জ্বর, ঘরে ঘরে বসন্ত—এই রোগা দেহ নিয়ে ও রোগী ঘাঁটতে চলল—আচ্ছা যাও; আমার ভগবান আছেন
घर-घर बीमारी फैली हुई है, शीतला माता का प्रकोप है और ये बीमारी और कमजोरी में भी रोगी देखने जाएंगे और उसे छूएंगे... जाओ... मेरे तो प्रभु हैं
అనారోగ్యం ఇంటింటికీ వ్యాపించింది, శిట్ల మాత కోపంగా ఉంది మరియు అనారోగ్యం మరియు బలహీనతలో కూడా, వారు రోగిని చూడటానికి మరియు అతనిని తాకడానికి వెళతారు... వెళ్ళండి... నాకు దేవుడు ఉన్నాడు