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शिव विवाह के अलौकिक चित्रण से निहाल हुए विद्यापतिधाम वासी - Akhand Bharat News Home बिहार समस्तीपुर शिव विवाह के अलौकिक चित्रण से निहाल हुए विद्यापतिधाम वासी विघापतिनगर(समस्तीपुर)– शिवरात्री महापर्व को लेकर देवाधिदेव महादेव की नगरी विद्यापतिधाम मंदिर परिसर से गुरुवार को शिव विवाह को भव्य बारात की झांकी निकाली गयी| भव्यता की अनूठी प्रस्तुति के बीच विवाह झांकी वृन्दावन साहिट, राजा चौक, बाजिदपुर होते हुए मऊ बाजार, शेरपुर, बालकृष्णपुर मड़वा, सुभानीपुर होते हुए मैना नगरी विघापतिधाम मंदिर परिसर में पहुंची. इस दौरान इलाके में भक्तिमय वातावरण की अनूगूंज से माहौल सराबोर रहा| बारात में हाथी-घोड़ा, छागर, भूत-पिशाच, सैंकड़ों नर-नारी सहित भगवान भोलेशंकर के प्रतिरूप में राम चौरसिया, निराला पंडित (ब्रह्म), जितेंद्र कुमार (विष्णु), सुजीत गिरि (इंद्र), लुडेनसाह(आदिवासी), संजय, राजु, विकाश ने (भुत-प्रेत) ने श्रध्दालुओं का मन मोह लिया| मौके पर गणेश गिरि कवि, रत्न शंकर भारद्वाज, चंद्रमोहन सिंह, नन्हें गिरि, रंजू गिरि, संधीर गिरि, चतुरानंद गिरि, मनोहर गिरि, शुभम गिरि, योगेंद्र यादव, मनोज कुमार गिरी आदि मौजूद रहे |
2018/02/21 16:57:16
http://www.akhandbharatnews.com/supernatural-depicting-the-marriage-of-shiva-vidyaptidham-resident-nihal/
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बुधवार, 24 नवंबर 2021 (21:55 IST) मेरठ। भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार पिता बन गए हैं। भुवनेश्वर की पत्नी नूपुर ने बुधवार को दिल्ली के एक निजी अस्पताल में बेटी को जन्म दिया। मेरठ जिला क्रिकेट एसोसिएशन (एमडीसीए) के कोषाध्यक्ष राकेश गोयल ने यह जानकारी देते हुए बताया कि बुधवार को भुवनेश्वर कुमार की पत्नी ने बेटी को जन्म दिया। फिलहाल दोनों पूरी तरीके से स्वस्थ हैं। भुवनेश्वर के गुरुवार को मेरठ स्थित आवास पर आने की उम्मीद है। गोयल के अनुसार मंगलवार को नूपुर को दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। क्रिकेटर की शादी की सालगिरह के अगले दिन उनके घर बच्ची का जन्म हुआ है। भुवनेश्वर ने हाल में न्यूजीलैंड के खिलाफ तीन मैचों की टी-20 सीरीज में हिस्सा लिया था। उन्होंने सीरीज के सभी मैच खेले और तीन विकेट झटके। भुवनेश्वर और नूपुर दोनों बचपन से दोस्त थे और दोनों ने 23 नवंबर 2012 को शादी कर ली। भुवनेश्वर कुमार के पिता किरण पाल सिंह का इस साल 20 मई को निधन हो गया था। उनके पिता लंबे समय से लीवर संबंधी समस्याओं से पीड़ित थे।
2021/11/29 05:13:02
https://m-hindi.webdunia.com/latest-cricket-news/team-india-pacer-bhuvneshwar-kumar-and-wife-nupur-blessed-with-a-baby-girl-121112400124_1.html
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पांडवों ने माना था देव कमरूनाग को अपना अधिष्ठाता Home » मंडी • धर्म-संस्कृति » पांडवों ने माना था देव कमरूनाग को अपना अधिष्ठाता मंडी जिला के बड़ा देव माने जाते हैं देव कमरूनाग Update: Friday, March 8, 2019 @ 11:42 AM मंडी। देव कमरूनाग (Dev kamrunag) को मंडी जनपद का अराध्य देव माना गया है। मंडी जिला( Mandi district) में देव कमरूनाग के प्रति इतनी अटूट आस्था है कि इनके आगमन के बाद ही यहां का शिवरात्रि महोत्सव शुरू होता है। जानते हैं कौन हैं देव कमरूनाग और क्या है इनका इतिहास इन दिनों छोटी काशी मंडी अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव( International Shivratri Festival) के चलते भक्ति में डूबी है। यह भी पढ़ें : सपने में खुद को देखते हैं रोते हुए तो हाथ लग सकती है समृद्धि 200 के करीब देवी-देवता इन दिनों इस महोत्सव में शिरकत कर रहे हैं। देव आस्था के इस भव्य महाकुंभ एक देव ऐसे भी हैं जिनके दर्शनों के लिए कतारें लगी हुई हैं। बात हो रही है मंडी जनपद के आराध्य देव कमरूनाग की। इन्हें बड़ा देव भी कहा जाता है। देव कमरूनाग का मूल मंदिर मंडी जिला के रोहांडा की ऊंची चोटी पर मौजूद है जहां पर हर किसी का पहुंच पाना संभव नहीं होता। ऐसे में देव कमरूनाग की छड़ी को वर्ष में एक बार सिर्फ शिवरात्रि के मौके पर मंडी लाया जाता है और भक्तों इनके दर्शनों का सौभाग्य प्राप्त होता है। माना जाता है कि देव कमरूनाग के दरबार से कोई भक्त खाली हाथ नहीं जाता। देव कमरूनाग के इतिहास की अगर बात करें तो इनका वर्णन महाभारत ( Mahabharta) में राजा रत्न यक्ष के रूप में मिलता है। रत्न यक्ष भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र थे। यह काफी बलशाली थे और विष्णु के अनन्य भक्त थे। जब महाभारत का युद्ध हुआ तो इन्हें किसी ने भी युद्ध के लिए आमंत्रित नहीं किया। ऐसे में रत्न यक्ष ने निर्णय लिया कि वह स्वयं युद्ध में जाएंगे और जो हार रहा होगा उसका साथ देंगे। लेकिन यह युद्धक्षेत्र तक पहुंचते उससे पहले ही भगवान विष्णु ने गुरूदक्षिणा के रूप में उनका शीष मांग लिया। रत्न यक्ष ने अपना शीश देकर युद्ध देखने की इच्छा जताई। इनके शीश को एक डंडे पर टांग दिया गया। लेकिन इनका शीश भी इतना शक्तिशाली था कि वह जिस तरफ घुमता उस पक्ष का पलड़ा भारी हो जाता। ऐसे में भगवान श्रीकृष्ण ने इनके शीश को पत्थर से बांधकर पांडवो की तरफ कर दिया। पांडवों ने भी रत्न यक्ष को पूजा और जीत मिलने पर राज्याभिषेक इन्हीं के हाथों करवाने की बात कही। पांडवों की जीत हुई और फिर रत्न यक्ष को उन्होंने अपना अधिष्ठाता माना और मंडी जनपद की एक पहाड़ी पर इनकी स्थापना की और नाम दिया गया कमरूनाग। देव कमरूनाग को बारिश का देवता भी माना गया है। दंत कथाओं के अनुसार देव कमरूनाग की स्थापना के बाद इंद्र देवता रूष्ठ हो गए और उन्होंने इस इलाके में बारिश करना बंद कर दिया। ऐसे में देव कमरूनाग इंद्र देवता के पास गए और बादलों को ही चुरा लाए। इसी कारण इन्हें बारिश का देवता भी कहा गया। यदि कभी बारिश न हो और सूखा पड़ जाए तो इलाके के लोग इनके दरबार में जाकर बारिश की गुहार लगाते हैं और देव कमरूनाग बारिश की बौछारें कर देते हैं। देव कमरूनाग का मान-सम्मान और रूतवा इतना है कि जब यह मंडी आते हैं जो जिले के सबसे बड़े अधिकारी यानी डीसी इनका स्वागत करने के लिए खड़े होते हैं। देव कमरूनाग के प्रति न सिर्फ मंडी जिला या प्रदेश बल्कि उत्तरी भारत के लोगों की अटूट आस्था है। जून के महीने में इनके मूल स्थान पर मेला होता है जिसमें लाखों की संख्या में श्रद्धालु वहां आकर नतमस्तक होते हैं।
2019/05/24 04:58:41
https://himachalabhiabhi.com/culture-and-spirituality/story-of-dev-kamrunag-in-mandi-district.html
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Mandeep singh said after match- My father always used to tell me to remain not out in every game. | KXIP के ओपनर बोले- पापा कहते थे कि 100 बनाओ या 200, पर आउट मत होना - Dainik Bhaskar Mandeep Singh Said After Match My Father Always Used To Tell Me To Remain Not Out In Every Game. मनदीप ने पिता को डेडिकेट की फिफ्टी:KXIP के ओपनर बोले- पापा कहते थे कि 100 बनाओ या 200, पर आउट मत होना मैच में फिफ्टी लगाने के बाद मनदीप सिंह ने अपने पिता को इमोशनल ट्रिब्यूट दिया। IPL के 13वें सीजन में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के खिलाफ किंग्स इलेवन पंजाब के मनदीप सिंह ने मैच विनिंग पारी खेली। उन्होंने लीग में अपनी 6वीं फिफ्टी लगाई। मैच के बाद मनदीप ने कहा कि उनके पिता हमेशा उन्हें अंत तक बल्लेबाजी करने और मैच जीता कर लाने के लिए प्रेरित करते थे। वे कहते थे कि 100 रन बनाओ या 200, पर आउट मत हो। मनदीप ने यह इनिंग्स अपने दिवंगत पिता हरदेव सिंह को डेडिकेट की। ये पारी मेरे लिए खास : मनदीप मनदीप ने कहा, 'मेरे पिता मुझे हमेशा नॉट आउट रहने को कहा करते थे। पिछले मैच में मैं जल्दी रन बनाने के चक्कर में आउट हो गया था। ये पारी मेरे लिए खास है, क्योंकि मैं नॉट आउट रहा।' मैच से पहले कप्तान से की बात : मनदीप मनदीप ने कहा, 'इस मैच से पहले मैंने लोकेश राहुल से बात भी की। मैंने उनसे कहा कि अगर मैं अपना नैचुरल गेम खेलता हूं, तो मुझे विश्वास है कि मैं अपनी टीम को जीत दिला सकूंगा।' गेल ने भी फील्ड पर मुझे सपोर्ट किया : मनदीप मनदीप ने कहा, 'राहुल मेरी बातों से सहमत दिखे और उन्होंने मुझे काफी सपोर्ट किया। मैं आज की बैटिंग के बाद काफी खुश हूं।' मनदीप ने बताया कि गेल ने भी उन्हें अंत तक बैटिंग करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा, 'गेल काफी अच्छे हैं और हमलोग अगले मैच को लेकर काफी उत्साहित हैं।' एक्टर सुनील शेट्‌टी ने भी मनदीप की पारी को सराहा। When Dad blesses you from above 🖤... take a bow Mandeep Singh 🙏@mandeeps12 @klrahul11 @realpreityzinta @lionsdenkxip pic.twitter.com/qbww3FQPiF 23 अक्टूबर को हुआ था मनदीप के पिता का निधन बता दें कि मनदीप के पिता हरदेव सिंह पिछले लंबे समय से दिल की बीमारी से पीड़ित थे। बीते दिनों मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में उनका ऑप्रेशन भी किया गया था। लेकिन शुक्रवार रात उनकी काफी बिगड़ गई थी, जिसके बाद उनका देहांत हो गया।
2021/01/22 23:19:48
https://www.bhaskar.com/sports/cricket/ipl-2020/news/ipl-2020-kkr-vs-kxip-mandeep-singh-remembers-his-father-after-the-match-said-this-inning-is-special-127852531.html
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Know the right and safe ways to prevent unwanted pregnancy - अनचाहे गर्भाधान को रोकने के सही और सुरक्षित तरीकों के बारे में जानिए 18 नबम्बर, 2019|7:41|IST अनचाहे गर्भाधान को रोकने के सही और सुरक्षित तरीकों के बारे में जानिए Last updated: Fri, 08 Nov 2019 12:56 PM IST 1 / 2contraceptive pills 2 / 2male contraceptive pill परिवार में नन्हे-मुन्ने की किलकारियां कौन नहीं चाहता, लेकिन इसका एक समय होता है, जो पति-पत्नी के जोड़े को तय करना होता है। जिस अवधि में यह जोड़ा बच्चों को जन्म नहीं देना चाहता उस वक्त उन्हें बर्थ कंट्रोल के लिए (सहवास के समय) गर्भनिरोधक का इस्तेमाल करना जरूरी होता है। सही और सुरक्षित गर्भनिरोधक का इस्तेमाल करना एक समझदारी भरा काम होता है। लेकिन गर्भनिरोधकों के चुनाव और इस्तेमाल को लेकर कई तरह की भ्रांतियां हैं जिन्हें दूर करना बेहद जरूरी हैं। बीती 25 अक्तूबर को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अनचाहे गर्भाधान और गर्भनिरोधकों के इस्तेमाल (दुरुपयोग कहना ज्यादा ठीक होगा) पर 32 देशों में किए गए अध्ययन की रिपोर्ट जारी की। डब्ल्यूएचओ न्यूज द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक 56 प्रतिशत भागीदारों ने कहा कि गर्भवती होने से पहले पिछले पांच साल में उन्होंने किसी भी तरह के गर्भनिरोधक का इस्तेमाल नहीं किया। 10 प्रतिशत ने कहा कि वह अब भी परंपरागत तरीकों का ही इस्तेमाल करते हैं। डब्ल्यूएचओ के आंकड़े बताते हैं कि निम्न से मध्यम आय वाले देशों में 7.4 करोड़ महिलाएं अनचाहे गर्भाधान का शिकार होती हैं। परिणाम 2.5 करोड़ असुरक्षित गर्भपात और शिशु के जन्म के वक्त हर साल तकरीबन 47 हजार माताओं की मौत। myupchar.com से जुड़ी डॉ. शहनाज जफर के मुताबिक "अगर आप परिवार बढ़ाना नहीं चाहते, तो आपको एक नियमित गर्भनिरोधक तरीके का चयन करना चाहिए। समझने की कोशिश कीजिए कि अनवांटेड 72 (शारीरिक संबंध बनने के 12 से 72 घंटे बाद ली जाने वाली गोली) बार-बार लेने से आपके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। हां, हल्की ब्लीडिंग या स्पॉटिंग सामान्य है। अनवांटेड में हार्मोन्स होते हैं।" स्त्री रोग विशेषज्ञ (गायनेकॉलॉजिस्ट) डॉ. जफर दिन में दर्जनों बार टेलीफोन पर ऐसी सलाह देती रहती हैं। समस्या की जड़ है-गर्भनिरोधक के इस्तेमाल को लेकर सभी ओर फैली ढेर सारी भ्रांतियां। डॉ. जफर कहती हैं, "योजनाबद्ध तरीके से किया गया गर्भाधान खुशहाल और स्वस्थ संबंधों का प्रतीक हो सकता है। कंडोम, गर्भनिरोधक गोली, इंट्रायूटेरिन उपकरणों जैसे अनेक विकल्प मौजूद होते हुए भी लोग यही तय नहीं कर पाते कि उनके लिए क्या बेहतर होगा।" वह बताती हैं, "सच्चाई तो यह है कि हर तरीके के कुछ फायदे हैं।" तो देखें डॉ. जफर की राय में आज उपलब्ध लोकप्रिय गर्भनिरोधक तरीके कौन से हैं ताकि आपका चयन का काम आसान हो सकेः कॉपर टी के नाम से मशहूर यह पुर्जा कैसे और क्यों गर्भाधान रोकने के लिए इस्तेमाल किया जाता है इसके लिए इसे डॉक्टर से समझ लेना चाहिए। मामला थोड़ा तकनीकी है इसलिए डॉक्टर से इस संबंध में पूरी बात करनी चाहिए। अगर आपका अगले पांच साल तक गर्भवती होने का कोई इरादा न हो तो इंट्रायूटेरिन डिवाइस (आईयूडी) एक बेहतर विकल्प है। यह टी के आकार का प्लास्टिक का एक उपकरण होता है, जो आपके गर्भाशय के छिद्र (यूटेरिन कैविटी) में लगा दिया जाता है। आईयूडी दो तरह की होती हैं-कॉपर आईयूडी और हार्मोनल आईयूडी। कॉपर आईयूडी शुक्राणु को मारकर या उसके तैरने का तरीका बदलकर भ्रूण को पनपने से रोकती है। हार्मोनल आईयूडी में सर्विक्स में मकस को गाढ़ा करने के लिए प्रोजेस्टिन हार्मोन रिलीज करती है, ताकि शुक्राणु डिंब से न मिल सके या कुछ साल के लिए डिंबक्षरण (ओव्यूलेशन) को रोक देता है (यह आपके द्वारा इस्तेमाल उपकरण पर निर्भर है)। आईयूडी 99 प्रतिशत कारगर होते हैं। गर्भाशय के भीतर होने के कारण वह आपकी जरुरत के वक्त वहां मौजूद होते हैं। एक अन्य विकल्प बर्थ कंट्रोल इम्प्लांट्स है, जिसमें हार्मोन प्रोजेस्टिन होता है। यह ऊपरी बांह में इम्प्लांट किया जाता है। ठीक हार्मोनल आईयूडी की तरह गर्भनिरोधक गोलियों में हार्मोन, मुख्यतया प्रोजेस्टिन और एस्ट्रोजेन होते हैं। ये भी गर्भाधान को रोकने में 99 प्रतिशत तक कारगर होती हैं। आपकी जरूरत के मुताबिक स्त्री रोग विशेषज्ञ या गायनाकॉलॉजिस्ट आपको एक कॉम्बिनेशन (जिसमें प्रोजेस्टिन व एस्ट्रोजेन दोनों हो) या फिर मिनी पिल (केवल प्रोजेस्टिन) गोली दे सकता है। डॉ. जफर कहती हैं, "इन हार्मोन्स के प्रति संवेदनशील लोगों को हम कम डोज भी देते हैं। कई मर्तबा मरीज इन गोलियों के साइड इफेक्ट्स को लेकर चिंतित होते हैं। गर्भनिरोधक गोलियां 1950 के दशक से इस्तेमाल की जा रही हैं- इनमें बहुत ज्यादा रिसर्च उन्हें सुरक्षित बना रहा है।" गर्भनिरोधक गोलियां ओवेरियन कैंसर की आशंका को भी कम कर देती हैं। गायनेकॉलॉजिस्ट्स तो पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीओसीडी) के लक्षण वाली महिलाओं को भी यह गोलियां देती हैं। गर्भाधान और यौन संबंधों से होने वाली बीमारियों (एसटीडी) को रोकने के लिए कंडोम एक बाधा की तरह काम करता है। कंडोम की कामयाबी की दर थोड़ी कम यानी तकरीबन 98 प्रतिशत होती है, क्योंकि यौन संबंधों के दौरान सही तरीके से इस्तेमाल नहीं किए जाने पर यह फट भी सकता है। डॉ. जफर कहती हैं, "कृपया याद रखिए, कंडोम दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। गोली बनाम आईयूडी इन दोनों में किसका चयन किया जाना चाहिए। डॉ. जफर ने दोनों के नफे औऱ नुकसान का खुलासा किया है ताकि आप बेहतर विकल्प को चुन सकेंः - गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल स्तनों को नरम बना सकता है। आईयूडी नहीं। - आईयूडी के कारण मासिक धर्म दो-तीन महीने अनियमित हो सकता है-दरअसल वह गर्भाशय के भीतर अच्छी तरह से स्थापित होने के लिए कुछ वक्त लेते हैं। - आईयूडी के कारण आपको हर रोज याद रखने की जरूरत नहीं, जबकि गोलियों में तो आपको हर रोज तय समय पर गोली लेनी ही पड़ेगी। - अगर आप पेल्विक इन्फेक्शन, एसटीडी, यूटेरियन या सर्विकल कैंसर की शिकार हैं या अंतिम तिमाही में आपका गर्भपात हो चुका है तो आईयूडी लगाना आपके लिए ठीक नहीं है। - आईयूडी हाइपरटेंशन की मरीज महिलाओं के लिए बेहतर है, क्योंकि कुछ गर्भनिरोधक गोलियों से कार्डियोवेस्कुलर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। किसी भी तरीके के चयन से पहले अपनी गायनेकॉलॉजिस्ट की सलाह जरूर ले लें। - गोलियों या हार्मोनल आईयूडी से मिलने वाले अतिरिक्त हार्मोन नहीं चाहने वाली या सहन कर पाने वाली महिलाओं के लिए कॉपर आईयूडी ज्यादा प्रभावी तरीका है। आपका डॉक्टर कॉपर आईयूडी के बाद भी अतिरिक्त सावधानी के तौर पर आपको गर्भनिरोधक गोली दे सकता है। आप जो चाहें तरीका अपनाएं, लेकिन एसटीडी से बचने के लिए तो कंडोम का इस्तेमाल ही सबसे कारगर तरीका है। अधिक जानकारी के लिए देखें: https://www.myupchar.com/tips/emergency-contraceptive-pills-uses-benefits-side-effects-risks-in-hindi
2019/11/18 02:11:44
https://www.livehindustan.com/health/story-know-the-right-and-safe-ways-to-prevent-unwanted-pregnancy-2838176.html
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वुड का घोषणा-पत्र के उद्देश्य, मूल्यांकन, गुण एवं दोष – ABC Blogging वुड का घोषणा-पत्र के उद्देश्य, मूल्यांकन, गुण एवं दोष 1853 के वर्ष को आधुनिक भारतीय शिक्षा के विकास की 'किशोरावस्था' की संज्ञा प्रदान की जा सकते है, क्योंकि इस वर्ष में ईस्ट इण्डिया कम्पनी के आज्ञा-पत्र के नवीनीकरण (Renewal) के समय ब्रिटिश पार्लियामेन्ट ने भारत में कम्पनी द्वारा किये गये शिक्षा प्रयासों को और अधिक व्यापक बनाने पर जोर दिया। यद्यपि इसमें भी उनके साम्राज्यवादी स्वार्थी की पूर्ति ही अधिक थी, किन्तु इसने शिक्षा के चहूमुखी आयाम में सुधार हेतु पर्याप्त प्रयासों पर बल भी दिया गया। वुड घोषणा-पत्र के उद्देश्य शिक्षा का माध्यम: अंग्रेजी एवं क्षेत्रीय भाषाए (Medium of Instruction:English and Vernacular languages)- घोषणा-पत्र में अंग्रेजी एवं क्षेत्रीय भारतीय भाषाओं को शिक्षा प्रदान करने हेतु माध्यम के रूप में स्वीकारा गया है। घोषणा-पत्र में व्यक्त किया गया है कि यूरोपीय ज्ञान के प्रसार के लिए अंग्रेजी भाषा तथा अन्य परिस्थितियों में भारतीय भाषाओं को शिक्षा के रूप में साथ-साथ देखने की आशा व्यक्त की जाती है। सहायता अनुदान प्रणाली: सरकारी संस्थाओं का, स्थानीय निकायों का क्रमिक रूप से स्थानान्तरण (Grant-in-Aid System: Transfer of Government Institution to the Management of Local Bodies) – सहायता अनुदान प्रणाली की रूपरेखा के सम्बन्ध में वुड के घोषणा-पत्र में निम्नलिखित विचार व्यक्त किये गये हैं- इस प्रकार घोषणा-पत्र में यह व्यवस्था की गयी कि प्रान्तीय सरकारें इंग्लैण्ड की सहायता अनुदान प्रणाली को आदर्श रूप (Ideal form) में स्वीकार करें, उनकी नीतियों का कठौर अनुसरण करें। इसके साथ ही विद्यालयों में पुस्तकालय, विज्ञान प्रयोगशाला, खेलकूद, व्यायाम सामग्री, छात्रवृत्तियों, शिक्षकों के वेतन, भवन निर्माण आदि के लिए अतिरिक्त अनुदान प्रदान करें। इस अनुदान प्रणाली के फलस्वरूप हम व्यक्तिगत प्रबन्घन (Private Management ) को बल प्रदान करना चाहते हैं। फिर धीरे-धीरे सरकारी संस्थाओं को भी इन्हीं स्थानीय प्रबन्ध कमेटियों को हस्तान्तरित कर दिय जायेगा या आदर्श संस्थाओं के रूप में उन्हें जीवित रखा जायेगा। सरकारी संस्थाओं में स्वैच्छिक धार्मिक शिक्षा की व्यवस्था – समस्त सरकारी संस्थाओं में धर्म निरपेक्ष शिक्षा के स्वरूप की व्यवस्था की जानी आवश्यक है। अन्य पुस्तकों के साथ धर्मग्रन्थ बाइविल को भी पुस्तकालय में रखवा दिया जाय तथा छात्र जो भी चाहें स्वतन्त्रतापूर्वक उसका अध्ययन कर सकें। स्कूल के अवकाश के उपरान्त कोई भी छात्र उस धर्मग्रन्थ के सम्बन्ध में अपनी जिज्ञासाए अपने शिक्षकों से पूछ कर शान्त कर सकते हैं। शिक्षक-प्रशिक्षण– वुड.के.घोषणा-पत्र में यह संस्तुति की गयी थी कि इंग्लैण्ड के शिक्षक-प्रशिक्षण कॉलेजों के ही अनुरूप भारत के प्रत्येक प्रान्त में शिक्षक-प्रशिक्षण कॉलेजों की स्थापना की जाय। इस कार्य में अच्छे व्यक्तियों को आकृ"ट करने के लिए छात्रवृत्ति, उत्तम वेतन एवं सुविधाओं की व्यवस्था भी की जानी चाहिए, जिससे, जिससे कि शिक्षा के व्यवसाय को अन्य सरकारी व्यवसायों के समान सम्मान प्राप्त हो सके। इस विश्वविद्यालय के अनुरूप कुलपति, उप-कुलपति एवं कार्यकारिणी के सदस्य गण (Members of Executive Council) होंगे। ये सभी सम्मिलित रूप से सीनेट (Senate) का निर्माण करेंगे जो कि विश्वविद्यालय के लिए नियम बनायेगी तथा प्रबन्ध करेगी। जन शिक्षा का प्रसार– वुड के घोषणा-पत्र ने स्वीकार किया है कि शिक्षा में निस्यन्दन सिद्धान्त ने जन शिक्षा के प्रसार को बहुत आघात पहुचाया है। अत: वुड ने संस्तुति की कि सरकार को प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में अधिक धन लगाकर प्रत्येक जिले में इसकी उचित व्यवस्था करनी चाहिए। देशी विद्यालयों में सुधान करें, निर्धन छात्रों हेतु छात्रवृत्ति की व्यवस्था करें, ताकि ये उच्च शिक्षा की ओर अग्रसर हो सकें। वुड ने लिखा है- ''अब हमारा ध्यान इस महत्त्वपूर्ण प्रश्न की ओर केन्द्रित होना चाहिए जिसकी अभी तक अवहेलना की गयी है अर्थात् जीवन के सभी अंगों के लिए लाभदायक एवं व्यावहारिक शिक्षा, उस विशाल जनसमूह को शिक्षा किस प्रकार दी जाय? जो किसी सहायता के बिना स्वयं लाभदायक शिक्षा प्राप्त करने में पूर्णत: असमर्थ है।'' वुड के घोषणा-पत्र का मूल्यांकन वुड घोषणा-पत्र के गुण घोषणा-पत्र ने ईस्ट इण्डिया घोषणा-पत्र में सर्वप्रथम क्रमबद्ध स्कूलों (Graded Schools) व्यावसायिक शिक्षा (Vocational Education), स्त्री शिक्षा (Women's Education) तथा जन प्रसार शिक्षा विश्वविद्यालयी शिक्षा की संगठनात्मक रूपरेखा प्रस्तुत की तथा इंग्लैण्ड के कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों को आदर्श रूप में प्रस्तुत किया। वुड घोषणा-पत्र के दोष वुड का घोषणा-पत्र तथा आलोचकों के दृष्टिकोण परांजपे के अनुसार- (1) ''यद्यपि घोषणा-पत्र में अनेक अच्छे गुण विद्यमान हैं, किन्तु फिर भी इस शैक्षिक घोषणा-पत्र को शिक्षा का आज्ञा-पत्र नहीं कहा जा सकता जो कि एक सरकारी-पत्र की तरह कुछ अधिकार एवं सुविधाए प्रदान करता हो। घोषणा-पत्र कभी भी सार्वभौमिक शिक्षा की प्रत्याशा नहीं करता यद्यपि वह सहायता, अनुदान द्वारा उसके प्रसार की संस्तुति करता है।'' (2) ''शायद यह तथ्य तो क्षम्य है कि घोषणा-पत्र के प्रणेता को भारतीय महत्त्वाकांक्षाओं का एक शताब्दी बाद क्या स्वरूप बनेगा, इसका उचित ज्ञान नहीं था। किन्तु अपरोक्ष रूप से यह घोषणा-पत्र की अपूर्णता है। अन्त में 1854 के घोषणा-पत्र का चाहे जो कुछ महत्त्व हो पर इस समय उसको शिक्षा का अधिकार-पत्र (Educational Charter) कहना हास्यापद ही होगा।''(3) ''उनका उद्देश्य यह नहीं था कि शिक्षा नेतृत्व के लिए लिए हो, शिक्षा भारत की औद्यौगिक उन्नति के लिए हो, शिक्षा मातृभूमि की रक्षा के लिए हो। संक्षेप में, ऐसी शिक्षा हो, जिसकी आवश्यकता एक स्वतन्त्र rashtra के नागरिकों को हा।'' एस.एन.मुखर्जी के अनुसार – ''घोषणा-पत्र ने देश की प्राचीन परम्पराओं का पता नहीं लगाया और इस बात पर भी बिल्कुल विचार नहीं किया कि भारत में शिक्षा एक धार्मिक संस्कार थी।'' भगवान दयाल के अनुसार- ''वुड के घोषणा-पत्र का प्रमुख दोष-शिक्षा के उद्देश्य का गलत निर्धाण था। यह उद्देश्य पूर्व और पश्चिम की सर्वोत्त्ाम बातों का समन्वय न होकर, केवल यूरोपीय ज्ञान की प्राप्ति का था।'' ए.एन.बसु के अनुसार- ''इस घोषणा-पत्र को भारतीय शिक्षा की आधारशिला कहा जाता है। यह माना जाता है। कि आधुनिक भारतीय शिक्षा का शिलान्यास इसी ने किया।'' नुरूल्लाह एवं नायक के अनुसार – ''वुड के घोषणा-पत्र को 'भारतीय शिक्षा का महाधिकार-पत्र' (मैग्नाकार्टा) कहना तर्कसंगत नहीं है।'' फिलिप हारटॉग के अनुसार – ''वुड के घोषणा-पत्र द्वारा भारतीयों के कल्याण के लिए एक बुद्धिमता का विकास करने वाली नवीन नीति का निर्धारण सम्भव हो सका था।''
2021/04/21 02:06:11
http://abcblogging.com/%E0%A4%B5%E0%A5%81%E0%A4%A1-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%98%E0%A5%8B%E0%A4%B7%E0%A4%A3%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%89%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%87/
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अंतर्राष्ट्रीयवाद का संघर्ष | Progressive International जब तक हम खुद पूंजीवादी व्यवस्था को ख़तम नहीं करेंगे, तब तक मानव जाति एक मूलभूत दुविधा का सामना करती रहेगी । एक तरफ हम ऐसी नई महामारी का सामना कर रहे हैं जो हमें जीवन रक्षण के लिए "सामाजिक दूरी" जैसे उपाय करने पर मजबूर कर रही है | समकालीन पूंजीवादी अर्थव्यवस्थाओं में हमारी प्राकृतिक प्रणालियों के विनाश का एक परिणाम स्वरूप जैविक तंत्र में आए "मेटाबोलिक रिफ्ट" की वजह से नए रोग जनक विषाणु जन्म ले रहे हैं । दूसरी ओर, प्रजातियों के विकास और सामाजिक अस्तित्व को कायम रखने लिए हमारा नज़दीक आना और रहना निश्चित हैं क्योंकि प्रजनन के लिए निकटता जरूरी हैं । लेकिन मज़दूर विरोध करेंगे। श्रमिक वर्गों की नज़र में, इस तरह के शोषण और राज्य दमन अब भी उतने ही असहनीय हैं जितना कि वे महीनों पहले थे। हो सकता हैं की महामारी के दौरान श्रमिक वर्गों की पीड़ाओं की वजह से शासक वर्गों की नजर में लोगों के "मूल्य" की समझ बढ़ी हो । लेकिन सरकारी प्रयोजन से, बेबस और कमजोर लोगो की कीमत पर, महामारी को बढ़ावा देकर 'हर्ड इम्युनिटी" हासिल करने के प्रयासों के तहत "मानवता" की वो धनी मध्यवर्गीय कल्पना भी ढह गई है। दुनिया भर में मुनाफ़े पर आधारित इस आर्थिक शासन एवं पूंजीवादी वर्ग के वैचारिक अधिपत्य को जन-स्वास्थ्य संकट के इस समय में सामाजिक ज़रूरतों पूरी करने में विफल होने से गहरी चोट पहुंची है। व्यक्तिगत देश एवं पूरी दुनिया के इस विरोध के परिणाम पर हीं भविष्य टिका है | इतिहास का कोई "निरंकुषित शासन " हमारे पक्ष की जीत की गारंटी नहीं देता है। मानवता अभी भी पूंजीवाद के दायरे में रह सकती है और इसके परिणामस्वरूप उसकी प्राकृतिक व्यवस्था नष्ट हो सकती हैं | किंतु प्रयास कभी व्यर्थ नहीं होते। उनके परिणाम किसी भी रूप में मौजूद रहते हैं। श्रमिक वर्ग के लोगों के सार्वजनिक हितों के इतिहास के पुनर्निर्देशन की कल्पना, इच्छाशक्ति और कार्य करने का यही सही समय है। हम मानते हैं कि टायप एर्दोआन के अत्याचार और उसकी तुर्की-इस्लामी विचारधारा वाली तानाशाही के खिलाफ हमारी लड़ाई में हम पूरे यूरोप और अमेरिका में फासीवाद के खिलाफ लड़ रहे हैं। अपने इस्लामोफोबिक बयानबाज़ी के बावजूद, यूरोप की दक्षिणपंथी ताक़तें, यूरोप, एशिया और अमेरिका में लोकतांत्रिक और अंतर्राष्ट्रीयवादी मूल्यों को कमजोर करने के लिए एर्दोआन के साथ एकजुट हो रही हैं। यूरोप और उत्तरी अमेरिका की लोकतांत्रिक ताकतों की आलोचनाओं का सामना करने में नाटो गठबंधन की "तुष्टीकरण" नीतियों से एर्दोआन को हमेशा फायदा हुआ है। इसलिए, यहाँ का एक मजबूत लोकतांत्रिक और सामाजिक आंदोलन, दक्षिणपंथ के उदय का मुकाबला करने के लिए हर जगह अतिरिक्त आयाम साबित होगा | हम पहले से ही एचडीपी की चौथी कांग्रेस के फैसलों से लैस हैं, ताकि मजबूत अंतर्राष्ट्रीयवादी संबंधों को स्थापित करने, अंतरराष्ट्रीय एकजुटता नेटवर्क विकसित करने और अंतरराष्ट्रीय संघर्ष का हिस्सा बनने के लिए निर्णायक कदम उठाए जा सकें। इन फ़ैसलों के अनुसार ही एक ऐसे संगठन का विकास करना है जो दुनिया भर में सामाजिक और राजनीतिक लोकतांत्रिक आंदोलनों और संघर्षों को बढ़ावा दे |
2021/08/03 21:00:10
https://progressive.international/wire/2020-05-23-the-struggle-must-be-internationalist/hi/
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python - Df . से विशिष्ट तार निकालें - YoungGeeks.in Df . से विशिष्ट तार निकालें मैं अधिक पठनीय दिखने के लिए डेटा फ्रेम के परिणाम को प्रारूपित करना चाहता हूं। डीएफ इस तरह दिखता है: lack_of_minutes['Period'] = pd.to_datetime(lack_of_minutes['time']) - lack_of_minutes['START_TIME'] कमी_ऑफ_मिनट डीएफ टाइप टाइमडेल्टा64 [एनएस] है। त्रुटि से बचने के लिए TypeError: Timedelta('0 day 01:08:12') JSON serializable नहीं है मैंने इस तरह से json लौटाया: return json.dumps(data_load, indent=4, sort_keys=True, default=str) मूल रूप से यह सिर्फ उन सभी चीजों को परिवर्तित करता है जिन्हें वह स्ट्रिंग्स के बारे में नहीं जानता है लेकिन जिस प्रारूप में यह समय लौटा रहा है वह इस प्रकार है: 0 days 17:25:35 मैं 0 दिनों को बाहर करना चाहता हूं और केवल समय वापस करना चाहता हूं। 17:25:35 अधिक पठनीय होने के लिए। मेरा पहला विचार डीएफ को टुकड़ा करना था लेकिन काम नहीं किया। ऐसा करने का सही तरीका क्या है। मैं अजगर 2.x . का उपयोग कर रहा हूँ Ramona Daniela 21 नवम्बर 2017, 17:59 मुझे संदेह है कि आपके पास जो वस्तु है वह एक pandas._libs.tslib.Timedelta है, जो JSON क्रमबद्ध (AFAIK) नहीं है। यदि आप केवल 'दिन' भाग को हटाना चाहते हैं और केवल एचएच: एमएम: एसएस है, तो आप स्ट्रिंग मैनिपुलेशन का उपयोग करके ऐसा कर सकते हैं। # create a dummy Timedelta d = datetime.datetime(2017,11,21,12,30) - datetime.datetime(2017,11,20,23,59) print str(pd.to_timedelta(d))[-8:] '12:31:00' अपने डेटाफ़्रेम में, आप इस फ़ंक्शन को लागू करके अपने कॉलम को इस प्रारूप में एक स्ट्रिंग में बदल सकते हैं। मैं एक नया कॉलम बनाने की सलाह देता हूं (ओवरराइटिंग के बजाय) ताकि आप सुनिश्चित कर सकें कि आपका आउटपुट वही है जो आप उम्मीद करते हैं।
2022/01/27 12:31:42
https://younggeeks.in/questions/3681081/extract-specific-strings-from-the-df
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फिल्म के पोस्टर में अभी पंकज का लुक सामने से नहीं दिखाया गया है इस दिन रिलीज होगी पंकज त्रिपाठी स्टारर 'कागज', एक्टर ने पोस्टर शेयर कर लिखा- 'लाल बिहारी की कहानी है बड़ी अत्याचारी' पंकज त्रिपाठी की मोस्ट-अवेटिंग फिल्म 'कागज' जल्द ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दस्तक देने वाली है, फिल्म का पोस्टर भी आज मेकर्स द्वारा रिलीज किया गया है Poster of film Kaagaz shared by Pankaj Tripathi[Instagram] Dec 15, 2020 15:20 IST बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने हमेशा दर्शकों को अपने शानदार अभिनय प्रदर्शन से एंटरटेन किया है। पंकज लोगों के बीच बेहद पॉपुलर अभिनेता के रूप में जाने जाते हैं। इस साल उनकी दो वेब सीरीज 'मिर्जापुर 2' और 'लूडो' ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर धूम मचा दी है। अब पंकज की मोस्ट-अवेटिंग फिल्म 'कागज' भी जल्द ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दस्तक देने वाली है। फिल्म का पोस्टर भी आज मेकर्स द्वारा रिलीज किया गया है। फिल्म क्रिटिक तरण आदर्श ने अपने ट्विटर हैंडल पर पंकज स्टारर 'कागज' का पोस्टर शेयर करते हुए फिल्म की रिलीज डेट से पर्दा उठाया। 'कागज' अगले 7 जनवरी को ओटीटी चैनल Zee 5 रिलीज होगी। हालांकि फिल्म के पोस्टर में अभी पंकज का लुक सामने से नहीं दिखाया गया है। पंकज ने इस पोस्टर को शेयर करते हुए लिखा, 'कागज पर लाल बिहारी की कहानी है बड़ी अत्याचारी, एक सच्ची कहानी'। फिल्म 'कागज' को मशहूर निर्देशक सतीश कौशिक ने निर्देशित किया है जबकि बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान इस फिल्म को प्रोड्यूस कर रहे हैं। यह फिल्म ओटीटी चैनल Zee 5 के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के कुछ चुने हुए सिनेमाघरों में भी रिलीज होगी। इस फिल्म के अलावा अक्षय कुमार की फिल्म 'बच्चन पांडे' में भी नजर आएंगे। फिल्म 'बच्चन पांडे' को निर्देशक फरहाद सामजी डायरेक्ट करने वाले हैं। जबकि इसे साजिद नाडियाडवाला प्रोड्यूस कर रहे हैं। फिल्म की रिलीज डेट फिलहाल सामने नहीं आई हैं। साथ ही बताते चले कि पंकज त्रिपाठी स्टारर 'Criminal Justice: Behind Closed Doors' भी आगामी 24 दिसंबर को 'डिज्नी हॉटस्टार' पर रिलीज होगा।
2021/10/16 04:50:07
https://bollywoodupdates.live/news/2020/12/pankaj-tripathi-starrer-kaagaz-will-be-released-on-this-day-the-actor-wrote-lal-biharis-story-is-very-tyrannical
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नवजात बच्चियों के नाम रहा पांवटा का यह खास जनमंच, जानिए कैसे (Video) - this special gathering of the newborn girl named paonta नवजात बच्चियों के नाम रहा पांवटा का यह खास जनमंच, जानिए कैसे (Video) Updated: 06 Jan, 2019 02:50 PM नाहन (सतीश): सिरमौर जिला में जनमंच कार्यक्रम पांवटा विधानसभा क्षेत्र के पुरुवाला में आयोजित हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री राजीव सैजल ने की। कार्यक्रम के दौरान मंत्री राजीव सैजल ने मौजूद लोगों को 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' की शपथ दिलाई। इस दौरान 20 नवजात बच्चियों को सम्मानित भी किया गया। जिसमें से 10 बच्चियों के नाम प्रशासन द्वारा 10-10 हजार की एफडी करवाई गई जबकि 10 बच्चियों को सम्मान स्वरूप प्रशस्त्री पत्र व एक-एक पौधा भी दिया गया। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना के तहत 4 लोगों को लाभार्थी कार्ड भी वितरित किए। इस दौरान मंत्री ने जनसमस्याएं सुनी जिनमें से अधिकतर समस्याओं का मौके पर निपटारा किया गया। मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए लोगों से सीधा संवाद किया। उन्होंने कहा कि जनमंच सरकार का बेहद सफल कार्यक्रम है जिसके जरिए लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान हो रहा है।
2019/06/25 00:02:48
https://himachal.punjabkesari.in/himachal-pradesh/news/this-special-gathering-of-the-newborn-girl-named-paonta-931014
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गरमी का मौसम जारी है और विश्व के बहुत से देशों में सुख का सुख का साम्राज्य फैला हुआ है। कहते हैं कि सर्दी के बादलों से ढँके आकाश और छोटे दिनों के कारण जब ठंडे देशों में सूरज की रोशनी नहीं मिलती तो अनेक लोगों को दर्द, थकान और अवसाद की अनुभूति होती है। उनके लिए ग्रीष्म ऋतु वह सुहावना समय है, जब चित्त खुशी से भरा रहता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि सूरज का प्रकाश हमारे मस्तिष्क में एंडोरफ़ीन और सेरोटोनिन के निर्माण की प्रक्रिया को बढ़ा देता है। एंडोरफ़ीन में थकान और दर्द से लड़ने की स्वाभाविक शक्ति होती है इसलिए सूरज की रोशनी ठीक-ठाक न मिले तो थकान और दर्द बढ़ जाते हैं। सिरोटोनिन का असंतुलन हमारे मन में अवसाद पैदा करता है। सूरज के प्रकाश से इसमें संतुलन आते ही हमें सब कुछ अच्छा लगने लगता है। सूरज का प्रकाश हमारे जीवन का आवश्यक तत्त्व है और सर्दियों की दोपहर में रोज़ कुछ देर धूप सेंकने से रात में अच्छी नींद आती है। वैज्ञानिक कहते हैं कि धूप की पर्याप्त मात्रा लेने से रात में हमारे शरीर में मेलाटोनिन की मात्रा बढ़ जाती है। मेलाटोनिन वह हारमोन है जो शांतिपूर्ण नींद में सहायक होता है और बूढ़े होने की प्रक्रिया को धीमा कर देता है। सूर्य का प्रकाश शरीर के अनेक हारमोनों का संतुलन बनाने में सहायक होता है जिससे अनेक शारीरिक व मानसिक परेशानियों को दूर किया जा सकता है। धूप में निहित सूरज की पैराबैंगनी किरणें स्वाभाविक एंटीसेप्टिक का काम करती हैं। वे हवा, पानी और त्वचा सहित दूसरी अनेक सतहों पर पनपने वाले अनेक विषाणु, जीवाणु, फफूँद, कवक, खमीर, और दमकियों को स्वाभाविक रूप से नष्ट कर देती हैं। त्वचा पर नियमित रूप से धूप दिखाने से मुँहासे, फोड़ों, जोड़ों के दर्द त्वचा की एलर्जी, सोरेसिस और खुजली में आराम देखा गया है। धूप पीलिया का भी प्रभावशाली इलाज है। कुछ अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि धूप स्तन, बड़ी आँत और प्रोस्टेट कैंसर के इलाज में सहायक है। मालूम नहीं इस विषय पर भी शोध हुए हैं या नहीं कि जिन देशों में सूर्य की रोशनी अधिक होती है, दिन बड़े होते हैं, बादल शायद ही कभी दिखाई देते हैं और वर्षा लगभग नहीं होती वहाँ के लोगों में अधिक रोशनी और धूप का क्या प्रभाव पड़ता है। इमारात की धूप यूरोप जैसी निरापद नहीं है। इसकी तेजी त्वचा और आँखों को गहरा नुक्सान पहुँचाती है। दोपहर के तेज़ तापमान में बिना एअरकंडीशंड सवारी के घर से निकल पड़ना मौत का कारण बन सकता है। आज जब पर्यावरण के लगातार बिगड़ने से धरती की ओजोन परत में पैराबैंगनी किरणों को छानने की शक्ति कम हुई है, धूप से त्वचा के जल जाने, चकत्ते पड़ जाने और खुजली होने के लक्षण सामान्य सी बात है। बहुत कम आयु में बाल सफ़ेद हो जाने और आँखों में मोतियाबिंद हो जाने की शिकायतों का कारण भी धूप की तेज़ी को माना गया है। इनसे सुरक्षा के लिए जहाँ एक ओर सन शील्ड क्रीमों की बड़ी शृंखला बाज़ार में है वहीं यू वी किरणों को रोकने वाले काले चश्मों का प्रयोग भी आम हो गया है। तरबूज़, दही और खीरे के दैनिक सेवन को भी महत्त्व दिया गया है। कुल मिलाकर यह कि धूप से प्रेम रखना सभी परिस्थितियों में सबके लिए समान रूप से उचित नहीं ठहराया जा सकता, दादा कबीर भी तो कह गए हैं- अति की भली न धूप प्रस्तुतकर्ता पूर्णिमा वर्मन पर 8:06 am इसे ईमेल करेंइसे ब्लॉग करें! Twitter पर शेयर करेंFacebook पर शेयर करेंPinterest पर शेयर करें 7 टिप्‍पणियां: प्रवीण पाण्डेय ने कहा… धूप तो बेहाल किये हुयी है गर्मी से ही। 9 जून 2011 को 1:51 pm चंद्रमौलेश्वर प्रसाद ने कहा… अति तो कोई भी बली नहीं होती परंतु धूप नहीं तो हम सूख जाएंगे- जहां हम एक सप्ताह वर्षा का ताब नहीं ला सकते और कहते हैं बस अब तो धूप निकले, वहीं हम सारी ग्रीष्म हुश-हश कहके भी बिता देते हैं॥ 9 जून 2011 को 8:32 pm Rachana ने कहा… अति तो किसी चीज की भी भली नहीं होती है .हमने अपने ही हाथो अपनी बर्बादी की तैयारी कर ली हैl बहुत सुंदर लिखा है l जानकारी से भरपूर .दादा कबीर जी को याद करते हुए l saader rachana 9 जून 2011 को 10:04 pm Dr.Bhawna Kunwar ने कहा… Bahut acha likha hai aabhar.. 14 जून 2011 को 6:09 am यशवन्त माथुर (Yashwant Raj Bali Mathur) ने कहा… बहुत अच्छा लिखा है आपने.कुछ जानकारी भी मिली इस पोस्ट से. ------------------------------------ कल 17/06/2011 को आपकी कोई पोस्ट नयी-पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही है. आपके सुझावों का हार्दिक स्वागत है . धन्यवाद! नयी-पुरानी हलचल 16 जून 2011 को 1:31 pm यशवन्त माथुर (Yashwant Raj Bali Mathur) ने कहा… कल 17/06/2011 को आपकी कोई पोस्ट नयी-पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही है. आपके सुझावों का हार्दिक स्वागत है . धन्यवाद! नयी-पुरानी हलचल 16 जून 2011 को 2:04 pm Asha Joglekar ने कहा… अति सर्वत्र वर्जयेत । चाहे वह धूप ही क्यूं ना हो । पर आपने धूप से होने वाला काफी फायदे गिनाये हैं । इसके लिये आभार । 4 जुलाई 2011 को 6:20 am एक टिप्पणी भेजें नई पोस्ट पुरानी पोस्ट मुख्यपृष्ठ सदस्यता लें टिप्पणियाँ भेजें (Atom) फ़ेसबुक पर मेरे प्रिय चिट्ठे पूर्वाभास अतीत से वर्तमान : नवगीत वाङ्मय — डॉ रणजीत पटेल - ------------------------------ [पुस्तक : नवगीत वाङ्मय, संपादक : अवनीश सिंह चौहान, प्रकाशक : आथर्सप्रेस, नई दिल्ली, प्रकाशन वर्ष : 2021 (संस्करण प्रथम, ... 3 घंटे पहले अभिव्यक्ति अनुभूति - प्रवासी भारतीय बाल साहित्यकारों में पूर्णिमा वर्मन का नाम अत्यंत महत्वपूर्ण है। पूर्णिमा जी संयुक्त अरब अमीरात के शारजाह नामक नगर में निवास करती हैं। ... 5 हफ़्ते पहले सुनहरी कलम से... एक गीत -यह पुण्य देवभूमि है | राज्यगीत - काशी यह पुण्य देवभूमि है यह पुण्य देवभूमि है यहाँ न कोई क्लेश है । ध्वज लिए विकास का यह अग्रणी प्रदेश है यह उत्तर प्रदेश है, यह उत्तर प्रदेश है ।... 1 माह पहले वर्षा सिंह छोड़ गईं मां हमें अकेला | स्वर्गीय माता जी डॉ. विद्यावती "मालविका" की स्मृतियों को नमन | डॉ. वर्षा सिंह - *स्वर्गीय माता जी डॉ. विद्यावती "मालविका" की स्मृतियों को हृदय की गहराइयों से नमन* *स्व. डॉ. विद्यावती "मालविका"जन्म 13 मार्च 1928 - निधन 20 अप्रैैैल 2021... 7 माह पहले यू.ए.ई. से शुक्रवार चौपाल डॉ. शिबेनकृष्ण रैणा के सम्मान में काव्य गोष्ठी - शारजाह, शुक्रवार, 27 मई दोपहर 3 बजे आयोजित होने वाली गोष्ठी सफलतापूर्वक सम्पन्न हो गयी। गोष्ठी के मुख्य अतिथि थे भारत से पधारे डॉ. शिबेनकृष्ण रैणा और उनकी... 5 वर्ष पहले नवगीत की पाठशाला ९. बिन शाखाओं के - गीता पंडित - बिन शाखाओं के देखो तो बूढ़ा पीपल फफक रहा है नहीं वृक्ष ने कुछ चाहा वो जीवन देते आये हैं काट उन्हें करते अपंग हम कैसे अपने साये हैं ठूँठ हुए हैं बरग... 7 वर्ष पहले एक आँगन धूप बुदापैश्त - ४ - शाम रौशन काम से छुट्टी भीड़ गहमह छतरियों के झुंड अपनापन स्वजन का तश्तरी में स्वाद मन का 10 वर्ष पहले ਫੁਲਕਾਰੀ तुम साथ साथ हो ना/ ਤੁਸੀਂ ਨਾਲ-ਨਾਲ ਹੋ ਨਾ - कभी मिलना कभी खोना कभी साथ साथ चलना ये है जिंदगी का मेला तुम साथ-साथ हो ना कहीं भीड़ है घनेरी, कहीं राह है अँधेरी कहीं रौशनी की खुशियाँ, कहीं मछलियाँ स... 10 वर्ष पहले शब्द रचना समलैंगिकता की सनसनी और सच - पिछले कुछेक वर्षों से भारत में भी अमेरिकी तर्ज पर समलैंगिकों के अधिकारों को लेकर, बुद्धिजीवियों की एक खास बिरादरी संगठित होकर, समवेत-स्वर में लगातार माँग ... 10 वर्ष पहले Чайхана В поезде / रेलगाड़ी में - По небосводу плыли звезды. Деревушки оставались позади. Пассажиры вокруг покачивались, и почти дремали. Их взгляды следовали за звездами, и не чувст... 13 वर्ष पहले Min bopæl एक दीपक / Levende Lys - Kæmpe med besvær Kompromiser med skyggerne En lampes lys igennem natten. Så ofte har regnen og stormen brudt sandheden Tiden gav så mange rystelser Håbets... 13 वर्ष पहले अभिव्यक्ति: साहित्य का सुरुचिपूर्ण संसार लोड हो रहा है. . . मेरे बारे में मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें लोकप्रिय लेख हिन्दी अंक अंग्रेज़ी अंक हम सभी जानते हैं कि भारत की प्राचीन सभ्यता अत्यंत विकसित थी और हज़ारों वर्ष पूर्व अनेक ऐसे आविष्कार यहाँ हो चुके थे जिनको १६वीं शती के आसपा... धुंध में डूबा ग्रीष्माकाश जुलाई अगस्त के महीने मध्यपूर्व में गर्मी के होते हैं। कभी ऐसी गर्मी देखी है जब आसमान कोहरे से ढक जाए? इमारात म... तारों की चूनर आज का दिन अच्छा रहा। आज के ही दिन डॉ सत्यभूषण वर्मा का जन्म हुआ था 1932 में, वे हिन्दी हाइकु के पितामह माने जाते हैं। उनके सम्मान में हिंदी... चमकते सितारे उड़ते लश्कारे यह चेहरा कुछ पहचाना सा है न? अनिल कपूर ही तो हैं, शायद किसी भूमिका के लिए वज़न कुछ बढ़ाया गया है। मैंने भी पहली नज़र में यही सोचा था, लेकिन ... बदरिया सावन की बचपन की जो चीज़ें अभी तक मुझे याद हैं उसमें से एक है जूथिका राय की आवाज जो अक्सर छुट्टी के दिनों पिताजी के रेकार्ड चेंजर पर सुनाई देती थी। आ... अति की भली न धूप गरमी का मौसम जारी है और विश्व के बहुत से देशों में सुख का सुख का साम्राज्य फैला हुआ है। कहते हैं कि सर्दी के बादलों से ढँके आकाश और छोटे दिन... लखटकिया राजा और नैनोरानी एक था लखटकिया राजा। लखटकिया यानी जिसके पास एक लाख रुपये हों। बड़े राजों महाराजों के ख़ज़ानों में तो सैकड़ों नौलखे हार होते थे। नौलखे यानी न... आवारा वसंत पिछले दो दिनों से सर्दी की कड़की कम है, पंचांग कहता है कि वसंत पंचमी 11 फ़रवरी को है, यानी समय आगया वसंत की कविताओं की खोज का। पुरानी फ़ाइल... जानेमन नाराज़ ना हो पिछले दो दिन अभिव्यक्ति और अनुभूति का काफ़ी काम करना हुआ, सो यहाँ कुछ लिखा नहीं जा सका। आज प्रस्तुत है एक बहुत पुराना गीत-- जानेमन नाराज़ ... एक पुराना प्रमाण पत्र जो आज भी प्रेरित करता है इस बार लखनऊ गई तो पिताजी ने दादा जी का यह प्रमाण पत्र मुझे दिया। कागज पुराना होकर खराब हो गया है मगर इबारत साफ है। इस प्रमाण पत्र में दर्ज ह...
2021-11-28T02:18:59Z
https://purnimavarman.blogspot.com/2011/06/blog-post.html
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ओबामा ने की मोदी से मुलाकात, मैं स्वादिष्ट दाल बना सकता हूं : ओबामा – VIJAY NEWS ओबामा ने की मोदी से मुलाकात, मैं स्वादिष्ट दाल बना सकता हूं : ओबामा नयी दिल्ली। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अाज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और उन्हें ' अच्छा मित्र' बताया। श्री ओबामा एक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए यहां आए हैं। मुलाकात के बाद श्री मोदी ने ट्विटर पर कहा ,' पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा से मिलकर बहुुत प्रसन्नता हुई। 'मुलाकात के दौरान श्री ओबामा ने श्री मोदी को अपने 'ओबामा संस्थान' की गतिविधियों की जानकारी दी। दोनों नेताओं ने भारत- अमेरिका के संबंधों को और सुदृढ़ करने के बारे में भी चर्चा की।अमेरिका के 44 वें राष्ट्रपति के पद पर रहते हुए श्री आेबामा और श्री मोदी में मित्रता हुई थी। श्री ओबामा के 20 जनवरी को राष्ट्रपति पद से हटने के बाद दोनों नेताओं की यह पहली मुलाकात थी। सितंबर 2014 से सितंबर 2016 के बीच दोनों नेताओं ने आठ बार मुलाकात की थी। श्री ओबामा भारत, चीन और फांस की यात्रा पर हैं। भारत के बाद वह चीन की यात्रा पर जाएंगे। श्री ओबामा ने यहां तिब्बती आध्यात्मिक गुरू दलाई लामा से भी मुलाकात की। The Prime Minister, Shri Narendra Modi meeting with the former US President, Mr. Barack Obama, in New Delhi on December 01, 2017. मैं स्वादिष्ट दाल बना सकता हूं : ओबामा नयी दिल्ली, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि वह स्वादिष्ट दाल बना सकते हैं लेकिन रोटी बनाना बेहद मुश्किल है। श्री आेबामा ने आज यहां 'एचटी लीडरशिप समिट' में कहा कि कॉलेज के जमाने में होस्टल में साथ रहने वाले भारतीय और पाकिस्तानी साथियों की माताओं से उन्होंने बढ़िया दाल बनाने की विधि सीखी थी। उन्होंने कहा," मैं समझता हूं कि मैं इकलौता ऐसा अमेरिकी राष्ट्रपति रहा हूं जो दाल बनाना जानता है। मैं इसके अलावा कीमा और चिकेन भी बना लेता हूं। " श्री ओबामा ने चपाती बनाने के सवाल पर कहा कि यह बेहद कठिन है। उन्होंने इस दौरान अमेरिका और भारत के बीच मजबूत होते रिश्ते , धार्मिक सहिष्णुता ,आतंकवाद आदि मसलों पर भी बातचीत की। Tags: 2017, in New Delhi on December 01, Mr. Barack Obama, Shri Narendra Modi meeting with the former US President, The Prime Minister
2021/06/22 02:10:30
https://vijaynews.in/%E0%A4%93%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%BE/
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मुसाफ़िर / विक्रम शेखावत - Gadya Kosh - हिन्दी कहानियाँ, लेख, लघुकथाएँ, निबन्ध, नाटक, कहानी, गद्य, आलोचना, उपन्यास, बाल कथाएँ, प्रेरक कथाएँ, गद्य कोश मुसाफ़िर / विक्रम शेखावत ट्रेन से उतरते ही विजय को एक भिखारी औरत ने कोहनी से धक्का दिया, और फिर उसके पीछे पीछे मजदूर से दिखने वाले एक शख्स ने धक्का देने वाली भिखारी औरत को ज़ोर से धक्का मारा जिस से वो मुँह के बल गिरी। विजय उस शख्स को कुछ कह पाता उस से पहले ही वह विजय का सामान उठाते हुये बोल पड़ा,"कहाँ जाना है साहब? बस अड्डे या धर्मशाला? आइये तांगा बाहर खड़ा है" स्टेशन पर ज्यादा भीड़ नहीं थी, उतरने वाले मुसाफिरों मे विजय और इक्का दुक्का पैसेंजर ही थे। यहाँ दिनभर मे दो तीन ट्रेन ही आती थी। सुंदरगढ़ एक पहाड़ी स्टेशन था जहां सिर्फ गर्मियों मे ही सैलानी आते थे इसलिए सर्दियों मे प्राय सन्नाटा ही पसरा रहता था। "लेकिन तुमने उसे इतने ज़ोर से धक्का क्यों मारा?", विजय ने मुँह के बल गिरी उस भिखारी औरत की तरफ इशारा करते हुये गुस्से में धक्का देने वाले शख्स से पूछा। विजय ने एक पल उस मैले-कुचेले कपड़े पहने औरत की तरफ देखा और बाद में कुछ सोचते हुये उस शख्स के पीछे पीछे चल पड़ा जो उसका सामान उठाए बाहर की तरफ जा रहा था। गिरने वाली भिखारी औरत ने अपनी फटी हुई गंदी सी शॉल को संभाला और उन दोनों की तरफ देखते हुये बड़बड़ाने लगी। विजय पलट पलट कर उस भिखारी औरत की तरफ देखता जा रहा था जो लगातार उसी तरफ देखकर कुछ बड़बड़ाए जा रही थी। तांगा धर्मशाला के सामने रुक गया, विजय ने तांगे वाले को पैसे देते हुये पूछा,"कौन थी वो भिखारी औरत?" "अरे साहब वो पगली है, स्टेशन पर हर आने वाली मुसाफिर के ऐसे ही पीछे पड़ी रहती है।" विजय ने धर्मशाला मे अपने लिए कमरा लिया और अपना सामान कमरे मे रखकर अंधेरा होने से पहले शहर मे घूमने का इरादा कर धर्मशाला से बाहर आ गया। आज पच्चीस साल के लंबे अंतराल के बाद भी सुंदरगढ़ मे कोई खास तब्दीली नहीं आई थी। सड़के आज भी वैसी ही टूटी-फूटी और बाजार मे सड़क के किनारे वही पहले की तरह सामान बेचने वालों रेहड़ी और ठेले वालों की भीड़। हाँ कुछ बड़ी दुकाने और मॉल जरूर बन गए हैं। विजय टहलता हुआ शोरगुल से दूर एक कॉलेज के सामने जाकर खड़ा हो गया। वर्षों पहले इसी कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। बाहर से देखने पर लगता था कॉलेज मे अंदर की तरफ काफी निर्माण हो चुका है। कॉलेज का गेट भी पहले की अपेक्षा बहुत बड़ा बना दिया। कॉलेज के सामने खाली पड़ी जमीन पे अब काफी दुकाने खुल गई थी। कुछ देर घूमकर विजय धर्मशाला की तरफ चल पड़ा। रास्ते में उस रेस्टोरेस्ट के सामने ठिठक क रुक गया और फिर कुछ सोचकर अंदर चला गया। विजय अपनी उसी जानी पहचानी टेबल की तरफ बढ़ गया जहां कभी मधु के साथ बैठकर हसीं सपने बुने थे। रेस्टोरेन्ट के काउंटर पर पच्चीस छब्बीस साल का एक नौजवान बैठा था। विजय की नजरें काउंटर के आस पास मदन नामक उस शक्स को ढूंढ रही थी जो उन दिनों रेस्टोरेन्ट का मालिक हुआ करता था। उन दिनों मदन की उम्र भी लगभग उस नौजवान जितनी ही रही होगी, यानि उन दिनों विजय और मदन लगभग हमउम्र थे इसलिए विजय की उस से अच्छी जान पहचान थी। विजय, मदन और मधु अक्सर बैठकर बातें करते थे। चाय पीकर काउंटर पर पैसे देते वक्त विजय ने काउंटर के उस तरफ बैठे नौजवान से मदन के बारे मे पूछा। "यहाँ पहले मदन पारिक जी बैठा करते थे", विजय ने पूछा। "जी..., हाँ अंकल वो मेरे पापा है, दोपहर तक वो काउंटर संभालते हैं और उसके बाद में , आप कैसे जानते हैं पापा को? पहले कभी देखा नहीं आपको?" "हाँ, वो पहले में अक्सर यहाँ आता था, बहुत साल पहले... लगभग पच्चीस साल पहले की बात है.." "ओहो.... बहुत लंबा अरसा हो गया अंकल फिर तो आपको पापा से मिले, अब आप एक दूसरे को पहचान भी पाओगे?", नौजवान ने हँसकर पूछा। "सायद", विजय ने मुस्करा कर कहा और फिर कभी आने का वादा कर धर्मशाला की तरफ चल दिया। विजय रातभर मधु के बारे मे सोचता रहा। पच्चीस साल पहले का वो दृश्य उसकी आंखो के सामने किसी चलचित्र की भांति तैरने लगा। उस वक़्त ज़ुदा होने से पहले मधु उस से लिपट कर बहुत रोई थी। उसने ये कहकर मधु को सांत्वना दी की वो आगे की पढ़ाई के लिए भी यहीं दाखिला लेगा और दो महीने के भीतर ही वापिस आयेगा। मधु उसे विदा करने स्टेशन पर साथ आई थी। उस दिन मधु का खिला खिला चेहरा बिलकुल बुझ-सा गया था। गाड़ी छूटने के साथ ही मधु की आँखों से अश्रुधारा बह निकली। विजय का हाथ थामे वो कुछ देर ट्रेन के साथ चलती रही, फिर ट्रेन के रफ्तार पकड़ने पर विजय ने उसके हाथ को चूमा और अपना ख्याल रखने का वादा कर हाथ छुड़ा लिया। मधु का हाथ अब भी हवा मे था, वो देर तक ट्रेन के दरवाजे पर खड़ी विजय को निहारती रही जो खुद भी अपने आँसू पोंछ रहा था और मधु की तरफ हाथ हिला रहा था। वक़्त के क्रूर चेहरे पर क्रूरता और गहरा गई थी। विजय उसके बाद फिर पलटकर अपने उन पनपते ख्वाबों को पूरा करने फिर ना आ सका। पारिवारिक कारणों से उसने अपने ख्वाब वक़्त के हाथों तबाह होने के लिए छोड़ दिये। मगर इतने लंबे अरसे बाद भी विजय उस बिछोह का दर्द भुला नहीं पाया था और आज उस दर्द से निजात पाने फिर से वहीं आ गया था जहां से ज़िंदगी के मायने उसके लिए बदल गये थे। अगले चार से पाँच दिन मधु के मिलने की सभी संभावित जगहों को छान मारा मगर कोई सफलता नहीं मिली। मधु से मिलकर वो अपने किए की माफी मांगना चाहता था। मधु का परिवार अब उस घर मे नहीं था जहां वो उन दिनों रहते थे। मधु के मिलने की उम्मीद तो उसे पहले भी कम ही थी। वो जानता था की इतने दिनों तक भला कैसे कोई किसी के इंतज़ार मे बैठा रह सकता था। मगर उसका दिल ना जाने क्यों मधु के मिलने की आस पाले बैठा था। आखिरकार थक हारकर विजय ने वापिस गाँव जाने का इरादा किया और वापिस जाने से पहले एक बार मदन से मिलने का निश्चय किया। दूसरे दिन सुबह वापिस अपने गाँव चलने की तैयारी में अपना सूटकेस उठाया और स्टेशन की तरफ चल पड़ा। रास्ते मे मदन के रेस्टोरेन्ट मे पहुँच मदन के बारे मे पूछा तो उसके बेटे ने कहा,"अंकल पापा आज नहीं आए। रविवार को में ही पूरा दिन रेस्टोरेन्ट संभालता हूँ। आप कल इसी वक़्त आइये उस वक़्त पापा आपको जरूर मिलेंगे।" "ओहो... नहीं, कल तो में नहीं आ पाऊँगा, में आज वापिस जा रहा हूँ, एक काम करो बेटे, मुझे अपने पापा का मोबाइल नंबर दो में उनसे फुर्सत मे बात कर लूँगा।", मदन के बेटे से मदन के मोबाइल नंबर लेकर विजय स्टेशन की तरफ चल पड़ा। रास्ते भर वो सोचता रहा की काश उन दिनों मे भी मोबाइल होता तो आज मे मधु को यूँ न खोता। स्टेशन पर पहुँचने के बाद उस स्थान को देखकर ठिठक गया जहां मधु उस से बिछुड़ गई थी। वो आस पास देखकर उस जगह का सही अंदाजा लगाने लगा। स्टेशन पहले की अपेक्षा काफी बड़ा बना दिया गया था। तभी ट्रेन ने प्लेटफार्म पर आने का संकेत दिया तो विजय ने चौंककर उस तरफ देखा और अपना सूटकेस संभाले फिर से उस शहर से विदा लेने भारी कदमों से ट्रेन की तरफ बढ़ गया। कुछ देर बाद ट्रेन पटरियों पर रेंगने लगी। विजय ट्रेन के दरवाजे पे आकर खड़ा हो गया और पीछे छूटते प्लेटफार्म को देखकर बरसों पहले जुदाई के उस मज़र को याद कर फफक कर रो पड़ा। गाँव पहुँच एक दिन विजय को मदन की याद आई तो उसने बात करने लिए उसका नंबर डायल किया। दूसरी तरफ से आवाज आने पर विजय ने पूछा। "क्या में मदन पारिक जी से बात कर सकता हूँ?" "जी, हाँ बोलिए, में ही मदन पारिक हूँ", दूसरी तरफ से आवाज आई। "मदन !, में... . में विजय... विजय राज़दान... .. पहचाना?" दूसरी तरफ से कोई उत्तर नहीं मिलने पर विजय ने दुबारा कहा। "मैं विजय राज़दान... आज से करीब पच्चीस साल पहले आपके रेस्टोरेन्ट मे था... . मधु और में अक्सर आपके रेस्टोरेन्ट मे आते थे,आप मैं और मधु तीनों अक्सर बैठकर बातें करते थे।" "हाँ... हाँ... विजय .. अरे ! तुम कहाँ हो, कहाँ गायब हो गए थे, और मेरा नंबर कैसे मिला तुम्हें?" "में तुम्हारे रेस्टोरेन्ट मे गया था, तुम से मुलाक़ात तो हो नहीं पाई तुम्हारे बेटे से तुम्हारा नंबर लिया, और कैसे हो यार? बहुत साल हो गए मिले हुये।", विजय ने खुश होते हुये पूछा। "हाँ में ठीक हूँ, लेकिन तुम कहाँ गायब हो गए थे? आए क्यों नहीं?, मधु की खबर मिली?" "मेरे वहाँ वापिस ना आने का कारण तो मुझे खुद भी नहीं पता... . की में क्यों नहीं वहाँ वापिस जा सका, मधु को बहुत ढूंढा, उस से माफी मांगना चाहता था मगर कोई नामोनिशान नहीं मिला उसका। क्या तुम्हें उसकी कोई खबर है?", विजय ने मायूसी के साथ पूछा। "हाँ, तुम्हारे जाने के कुछ साल बाद तक वो तुम्हारे बारे मे पूछने आती थी। मगर पिछले बीस सालों से तो वो... ...", कहते कहते दूसरी तरफ से मदन ने बात बीच मे ही छोड़ दी। "क्या... क्या पिछले बीस साल से... कहाँ है वो, उसने शादी कर अपने घर तो बसाया लिया होगा ना ….. खुश तो है ना वो.... अपने पति और बच्चो के साथ....? हमारा मिलन तो सायद हम दोनों की किस्मत मे नहीं था", कहते कहते विजय की आवाज भर्रा गई। "नहीं विजय... कैसी शादी कैसा घर... .वो तो पिछले बीस सालों से तुम्हारे आने की राह में पागल होकर स्टेशन पे भिखारी सा जीवन जी रही है।"
2019/09/22 04:04:06
http://gadyakosh.org/gk/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%AB%E0%A4%BC%E0%A4%BF%E0%A4%B0_/_%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AE_%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%A4
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कांग्रेस उत्तराखंड में दलित को बना सकती है प्रदेश अध्यक्ष | Congress can make Dalit in Uttarakhand state president - Bhaskar Hindi Congress can make Dalit in Uttarakhand state president नई दिल्ली, 29 नवंबर (आईएएनएस)। उत्तराखंड चुनाव से पहले, कांग्रेस अपने मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष को बदल सकती है और पार्टी इसके स्थान पर एक दलित को प्रदेश की कमान सौंप सकती है।
2022/05/27 02:41:09
https://www.bhaskarhindi.com/national/news/congress-can-make-dalit-in-uttarakhand-state-president-190002
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भारत के साथ सभी विवादों का हल चाहता है पाक | जर्मन चुनाव 2017 | DW | 10.07.2010 भारत के साथ सभी विवादों का हल चाहता है पाक पाकिस्तान भारत के साथ कश्मीर समेत सभी विवादों को हल करना चाहता है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री युसूफ रज़ा गिलानी ने शुक्रवार को ये बयान दिया. अमेरिकी सांसदों के पाकिस्तान दौरे पर आए दल से मुलाकात में गिलानी ने ये बात कही. पाकिस्तान पश्चिमी हिस्से में अफगानिस्तान से लगती सीमा पर आतंकवाद को रोकने में अपना पूरा ध्यान लगाए इसके लिए जरूरी है कि भारत के साथ चल रहे सारे विवादों का हल हो. कम से कम पाकिस्तान के प्रधानमंत्री युसूफ रज़ा गिलानी तो यही मानते हैं. गिलानी के तरफ से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि पाकिस्तान भारत के साथ अच्छे रिश्ते कायम करना चाहता है. कश्मीर और नदियों के जल बंटवारे समेत सभी विवादों का हल होने के बाद ही वो अफगानिस्तान की सीमा पर जारी आतंकवादी गतिविधियों को रोकने पर अपना पूरा ध्यान लगा सकेगा. उधर पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा है कि भारत के साथ बातचीत में पाकिस्तान सकारात्मक रुख के साथ शामिल होगा और दोनों मुल्कों के आपसी विवाद को खत्म करने की दिशा में काम करेगा. भारत पाकिस्तान रिश्तों और राष्ट्रीय सुरक्षा पर बनी संसदीय समिति के सामने विदेशमंत्री ने कहा कि भारत के साथ बातचीत शुरू होना एक महत्वपूर्ण कदम है. कुरैशी ने ये भी कहा कि विदेश सचिव स्तर पर हुई बातचीत के बाद विदेशमंत्रियों के मुलाकात के लिए बढिया माहौल बना है. विदेशमंत्री का ये बयान भारतीय विदेशमंत्री के पाकिस्तान दौरे के ठीक पहले आया है. भारतीय विदेशमंत्री एसएम कृष्णा 15 जुलाई को पाकिस्तान दौरे पर जा रहे हैं. दोनों विदेशमंत्री आपसी बातचीत के जरिए दोनों मुल्कों के बीच बातचीत शुरू करने के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर चर्चा करेंगे.
2018/09/20 13:26:26
https://www.dw.com/hi/%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A5-%E0%A4%B8%E0%A4%AD%E0%A5%80-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A4%B2-%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%95/a-5780069
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rajnath singh press conference कश्मीर हमारा है और इस पर किसी ने बुरी नज़र रखी तो उसकी आँखें नोच लेंगे : राजनाथ सिंह 03/06/2017 03/06/2017 admin anamika singh rajnath singh, home minister, neeraj singh rajnath singh, pankaj singh, rajnath singh address, rajnath singh caste, rajnath singh family photo, rajnath singh news, rajnath singh son, savitri singh rajnath singh केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा है कि कश्मीर की हालात में काफी सुधार हुआ है। और इस समस्या का स्थायी समाधान किया जा रहा है। जिसके लिए सरकार तत्पर है। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने तीन साल के परफोर्मेंस पर बोलते हुए कहा कि जम्मू कश्मीर में पाक समर्थिक आतंकवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए सरकार कृत संकल्प है। सरकार ने आतंकियों के खिलाफ शानदार अभियान चलाया है। rajnath singh press conference नक्सली हमले पर भी उनकी ही जवाबदेही बनती है प्रदेश में मुस्लिमों की काफी संख्या है लेकिन इस्लामिक स्टेट को जड़ नहीं जमाने दिया गया। राजनाथ सिंह ने कहा कि इंडियन मुजाहिदीन के पांच आतंकियों को फांसी की सजा सुनाकर आंतक के खिलाफ कड़ा संदेश दिया गया है। उन्होंने कहा कि आईएसआईएस के खतरे को कंट्रोल करने में भी सरकार को बड़ी कामयाबी मिली है। rajnath singh press conference जम्मू कश्मीर में सैनिक कार्रवाई पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं अब तक नब्बे से अधिक इस्लामिक स्टेट समर्थक पकड़े गए हैं। साफ है कि सरकार किसी भी तरह से इस्लामिक स्टेट के नाम पर आतंक फैला रहे आतंकियों को नहीं बर्दाश्त करेगा। राजनाथ सिंह ने कहा कि यूपीए सरकार से कम हताहत हुए हैं। सरकार खास तौर पर जम्मू कश्मीर के मसले को ध्यान रखे हुए हैं। ताकि इसका स्थायी समाधान मिल सके। सरकार इस दिशा में आगे बढ़ रही है। अभी तक सेना को काफी सफलताएं हासिल हुए हैं। rajnath singh press conference सेना अपने कार्यों को पूर्ण करने में तत्परता से लगी है। राजनाथ सिंह के लिए यह काफी कठिन समय है जब जम्मू कश्मीर में सैनिक कार्रवाई पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। ऐसे में अपने तीन साल के कार्यकाल को वे जम्मू कश्मीर पर ही फोकस किए रहे। उन्हें पता है कि इस प्रदेश पर प्रश्न पूछे जाएंगें। जिसका जवाब देना होगा। वहीं इस बीच हुए नक्सली हमले पर भी उनकी ही जवाबदेही बनती है जिसको लेकर राजनाथ सिंह ने कहा कि नक्सलियों के नियंत्रण के लिए सरकार राज्यों से तालमेल बनाकर लगातार अभियान चला रही है। rajnath singh press conference ← मैंने कोई बेईमानी नहीं की है सब मेरी माता सोनिया गाँधी के आशीर्वाद से है : रोबर्ट वाड्रा मोदी को अब केवल पाक से नहीं बल्कि तीन देशों ( चीन, पाक और अमेरिका ) से है डर : चीनी मीडिया → 22/05/2017 admin Comments Off on यदि घाटी में हिंसा नहीं रुकी तो धारा 370 को हटाने पर विचार किया जा सकता है : राजनाथ सिंह
2018/06/23 23:16:38
http://mobilenews24.com/national-news/rajnath-singh-press-conference/
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आप में से लगभग लोग जानते होंगे कि देवकी के भाई कंस को जब पता चला था कि उसकी बहन की संतान के हाथों उसकी मृत्यु होगी तब से उसने एक एक करके अपनी बुन की सभी संतानों का मारना शुरू कर दिया था। इसी प्रकार जब माता देवकी की आठवीं संतान के रूप में श्री कृष्ण का जन्म हुआ तो कंस उसको मारने के लिए आगे बढ़ा। मगर जैसे कि कंस ने संतान को खत्म करने के लिए उस शिला पर पटका तो वह देवी के रूप में प्रकट होकर आकाश में चली गई। बहुत कम लोग होंगे जो जानते होंगे कि भगवान श्रीकृष्ण की बहन कहा जाने वाली इस देवी का राजस्थान में कैला देवी नामक मंदिर स्थापित है, जो न केवल देश में बल्कि विश्वभर में विख्यात है। बताया जाता है यहां नवरात्रि के दौरान भक्तों की अधिक भीड़ देखने को मिलती है। बता दें य‍ह उत्‍तर भारत के प्रसिद्ध दुर्गाधाम में से एक है। केश दान करते हैं लोग बताया जाता है मां कैला देवी के दरबार में लोग अपने बच्‍चे का पहली बार आकर मुंडन कराते हैं और मां को बाल समर्पित करते हैं। कहा जाता जिस किसी परिवार में विवाह होता है तो नवविवाहित जोड़ा जब तक आकर मां का आशीर्वाद नहीं ले लेता तब तक परिवार का कोई सदस्‍य यहां दर्शन करने नहीं आता। चमत्‍कारिक है काली सिल नदी मंदिर के समीप कालीसिल नदी के चमत्‍कार में पूरे विश्‍व में विख्‍यात हैं। प्रचलित मान्‍यताओं के अनुसार है यहां आने वालों के लिए कालीसिल नदी में स्‍नान करना आवश्यक माना जाता है। बता दें कालीसिल नदी में स्‍नान के बाद ही भक्‍त कैला देवी के दर्शन के लिए जाते हैं
2020/05/28 21:10:33
https://gallery.punjabkesari.in/gallery/%E0%A4%95%E0%A5%8C%E0%A4%A8-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%95%E0%A5%88%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A5%80-%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A3-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%87%E0%A4%A8%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A4%BE_9051
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बागपत में बढ़ता अपराध नही कोई कानून का डर - !! India Hone !! बागपत में बढ़ता अपराध नही कोई कानून का डर रिपोर्ट:---- वीरेंद्र तोमर बागपत यूपी के बागपत जिले में हुई बीजेपी नेता व पूर्व अध्यक्ष संजय खोखर की हत्या की वारदात के मामले ओर जनपद बागपत... यूपी के बागपत जिले में हुई बीजेपी नेता व पूर्व अध्यक्ष संजय खोखर की हत्या की वारदात के मामले ओर जनपद बागपत बढ़ते अपराधों को।लेकर कई बड़े सवाल खड़े करते हुए एसपी बागपत की मिलीभगत के चलते संजय खोखर की हत्या की वारदात के मामले में तिहाड़ जेल में बन्द पश्चिमी यूपी के कुख्यात बदमाश सुनील राठी पर टेरर फैलाने के लिए हत्या कराने का आरोप लगाते हुए प्रदेश सरकार से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है दरअसल बीजेपी के बागपत जिले की बागपत विधानसभा से विधायक योगेश धामा ने आज जिला पंचायत कार्यालय में एक प्रेसवार्ता बुलाई थी जिसमे उन्होंने मीडिया के कैमरों पर साफ - साफ बोलते हुए कहा है कि तिहाड़ जेल में बैठा कुख्यात अपराधी सुनील राठी जिले में टेरर फैलाने के लिए हत्याएं करा रहा है और वह जनपद में अवैध खनन समेत सभी अवैध काम कराना चाहता है जिसके साथ बागपत पुलिस के कप्तान अजय कुमार सिंह की भी मिली भगत है ओर सुनील राठी ने टेरर फैलाने के लिए पहले तो परमवीर ओर ईंट भट्ठा मालिक देशपाल की हत्या कराई ओर अब बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष संजय खोखर की भी हत्या कराने में सुनील राठी का ही हाथ है उन्होंने कहा कि जब से एसपी अजय कुमार बागपत में आये है तब से ही जिले में अपराध बढ़ते ही जा रहे है क्योंकि अपराधियो को कप्तान ने सरक्षण दे रखा है ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपराधियों के शस्त्र लाइसेंस को निरस्त करने के आदेश दिए हुए है लेकिन एसपी बागपत ने सुनील राठी की मां राजबाला का शस्त्र लाइसेंस निरस्त नही किया बल्कि उसे निलंबित किया है उन्होंने कहा कि संजय खिखर की हत्या के मामले में थाना अध्यक्ष दिनेश चिकारा ने पीड़ितों से गलत तरीके से बेगुनाह लोगो को नामजद कराया था इसलिए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने आपको बता दे कि छपरौली थाना क्षेत्र में 11 अगस्त की सुबह बीजेपी नेता व पूर्व जिला अध्यक्ष संजय खोखर की अज्ञात बदमाशों ने उस वक्त गोली मारकर हत्या कर दी थी जब वे मॉर्निंग वॉक पर खेतो की तरफ गए थे और उनकी हत्या की वारदात के बाद बागपत से लेकर लखनऊ तक हड़कम्प मच गया था ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 24 घण्टे में आरोपियो के विरुद्ध कार्रवाई करने के सख्त आदेशो के बाद पुलिस ने हत्या के मामले में नामजद दो आरोपियों मयंक व अंकुश को गिरफ्तार कर खुलासा कर दिया था
2021/04/14 02:32:15
https://www.indiahone.com/2020/08/bagpath.html
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चीन नए अमेरिकी कर के खिलाफ करेगा 'व्यापक उपाय' बीजिंग: चीनी वाणिज्य मंत्रालय (एमओसी) के एक प्रवक्ता ने कहा कि अगर अमेरिका चीनी उत्पादों पर अतिरिक्त कर लगाएगा, तो चीन के पास पीछे हटने के लिए मात्रात्मक और गुणात्मक रूप से 'व्यापक उपायों' को उठाने के सिवाय और कोई विकल्प नहीं बचेगा। 50 अरब अमेरिकी डॉलर के चीनी सामानों पर अतिरिक्त कर लगाने की योजना का खुलासा करने के बाद अमेरिका ने 200 अरब अमेरिकी डॉलर के चीनी माल पर भी कर लगाने की धमकी दी है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, प्रवक्ता ने कहा, "इस तरक का अत्यधिक दबाव और ब्लैकमेल करना, दोनों पक्षों के बीच परामर्श के कई दौर के बाद पहुंचे आम सहमति का विरोधाभाष है और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए निराशाजनक है।" प्रवक्ता ने कहा, "अमेरिका द्वारा शुरू किया गया ट्रेड वार बाजार के कानून और आज की दुनिया के विकास प्रवृत्तियों के विरुद्ध है। यह चीनी और अमेरिकी लोगों के हितों, कंपनियों और पूरी दुनिया के लोगों के हितों को नजरअंदाज करती है।" प्रवक्ता ने कहा कि चीन द्वारा अपनाई गई प्रतिक्रिया का उद्देश्य न केवल चीन के हितों की सुरक्षा और बचाव के लिए है, बल्कि मुक्त व्यापार शासन और आम लोगों के हितों के लिए है।
2022/06/25 16:39:37
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माँ बेटे की चोदाई कहानी में पढ़ें कि मॉम के नंगे जिस्म को देख मेरा लंड उसकी चूत में जाने के लिए तरह रहा था. वहां हालात ऐसे हो गए कि मैं और मॉम सेक्स … दोस्तो, मैं राजेश एक बार फिर से अपनी कहानी लेकर हाज़िर हूं. मेरी माँ बेटे की चोदाई कहानी के पहले भाग चूत में घुसी चींटी ने मॉम चुदवा दी- 1 में आपने पढ़ा था कि कैसे मैं अपनी मां के साथ एक निर्माणाधीन इमारत में फंस गया था. बारिश के कारण हम काफी देर तक वहीं फंसे रहे और फिर नंगे होकर अपने गीले कपड़े सुखाने लगे. मैं बाइक की चाबी नीचे लेने गया तो वहां पर मां का पैर फिसल गया और हम दोनों फिर से पानी और किचड़ में गीले हो गये. मैं ऊपर आकर मां के बदन को साफ करने लगा तो ज़मीन से कुछ चींटी मां की चूत में आ चढ़ीं और उसको चूत पर काट लिया. मां उछल कर मेरे सीने से आ सटी और उसकी चूचियां मेरे सीने से लग गयीं. अब आगे की माँ बेटे की चोदाई कहानी: कुछ पल तक मैं उसकी चूचियों को अपने सीने से सटाये रहा और मज़ा लेता रहा. फिर मैंने मां को अलग किया और उन कपड़ों को झाड़ दिया. मैं कपड़े झाड़ रहा था कि मां फिर से चिल्लाई- आऊच! मैंने कहा- क्या हुआ? वो बोली- अभी भी कोई चीटी चढ़ी हुई है शायद. मैं फिर से मां को लिटा कर उसकी चूत में टॉर्च मारने लगा. वो बोली- अंदर तक देख. एक हाथ में मैंने टॉर्च ली और दूसरे हाथ से उसकी चूत की फांकों को खोल कर देखने लगा. जब ध्यान से देखा तो मां की चूत की फांकों पर एक चींटी मसली जा चुकी थी. मैंने उसको चूत से हटाया तो मां सिसकार उठी- आह्ह … यहीं काटा हुआ है उसने। मैं बोला- मैं मसाज कर देता हूं फिर नहीं दुखेगा. ममेरे भाई ने मेरी कुंवारी चूत की चुदाई की-1 धीरे धीरे मैं अपनी मां की चूत पर उंगली से मसाज देने लगा. उसकी चूत की फांकों को सहलाते हुए मुझे इतना मजा आने लगा कि मैं तो उसकी चूत पर हाथ फेरता ही रहा. मां भी कुछ नहीं बोल रही थी. बस अपनी टांगों को खोले हुए लेट कर अपनी चूत को सहलवाने का मजा ले रही थी. थोड़ी ही देर में वो अपनी चूचियों को मसलने लगी. मेरा हाथ अभी भी उसकी चूत को पूरी सहला रहा था. उसकी चूत से पानी रिसना शुरू हो गया था और मुझे उसका गीलापन हथेली पर लगने लगा था. मेरे लंड का तनाव के कारण बुरा हाल था. मन कर रहा था कि मां को बुरी तरीके से चोद दूं लेकिन मैं इतनी हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था. उसकी नर्म-नर्म, गर्म व गीली चूत को सहलाते हुए मैं पागल हो रहा था और मेरा कंट्रोल मेरे हाथ से छूटता जा रहा था. इधर मां का भी बुरा हाल था. वो जोर जोर से अपनी चूचियों को मसलते हुए आह्ह … आह्ह … करके सिसकारें भर रही थी. जब मुझसे रहा न गया तो मैंने उसकी चूत में उंगली दे दी और अंदर बाहर करने लगा. मां ने कुछ नहीं कहा बल्कि वो और जोर से सिसकारते हुए अपने चूचे मसलने लगी. जब उससे रहा न गया तो वो एकदम से उठी और मुझे नीचे गिरा कर मेरे लंड पर झुक गयी और उसने मेरे लंड को मुंह में भर लिया. इससे पहले कि मैं कुछ समझ पाता, मां मेरे लंड को मुंह में पूरा भर कर चूसने लगी. मैं भी हैरान हो रहा था लेकिन मां के मुंह में लंड जाते ही मुझे मजा आने लगा. अब मैं आराम से नीचे लेट कर अपना लंड चुसवाने लगा और मां के बालों में हाथ फिराने लगा. वो मस्ती में लंड चूसते हुए अम्म … आह्ह … उम्म … मुच … आह्ह … पुच … पुच … की आवाज़ करते हुए लौड़े के रस को चूसने में लगी थी. सेक्सी मामी की धमाकेदार चुदाई लगभग 10 मिनट तक वो मेरे लंड को चूसती रही. अब मुझसे कंट्रोल करना मुश्किल होने लगा. मैं किसी भी वक्त स्खलित हो सकता था. मैंने मॉम को सचेत भी किया कि मेरा निकलने वाला है लेकिन जैसे मॉम मेरी बात को सुन ही नहीं रही थी. वो मेरी जांघों पर हाथ फेरते हुए गूं … गूं … की आवाज़ के साथ लंड को मुंह में चूसे जा रही थी. जब मैं बेकाबू हो गया तो मैंने उसके सिर को पकड़ कर जोर से अपने लंड पर दबा दिया. मेरा लंड पूरा उसके गले तक चला गया. अब मैं भी नीचे से गांड उठा उठाकर उसके मुंह को चोदने लगा. 15-20 धक्के मैंने जोर से मारते हुए मां के मुंह को चोद दिया और मेरा बदन अकड़ने लगा. मैंने उसके सिर को पूरा लंड पर दबा दिया और मेरे लंड से वीर्य की पिचकारी छूट कर मां के मुंह में जाने लगी. मैं झटके देता हुआ स्खलित हो गया और मैंने अपने माल से मां के मुंह को भर दिया. वो भी मेरे लंड से निकले हुए वीर्य को पूरा का पूरा अंदर ही गटक गयी. पूरा चूसने और चाटने के बाद ही मॉम ने मेरे लंड को मुंह से निकाला. फिर वो उठ गयी और उसका चेहरा उदास हो गया. मैं भी कुछ बोल नहीं पा रहा था. हम दोनों चुप हो गये थे. मेरा लंड भी वापस सिकुड़ने लगा था. फिर वो बोली- सॉरी बेटा. मैं ये सब नहीं करना चाहती थी. मगर मैं खुद को रोक नहीं पायी. मैंने उनको समझाया- मॉम, कोई बात नहीं. ये इस स्थिति के अनुसार हुआ है. आपके प्राइवेट पार्ट को छेड़ने से आपका मन कर गया होगा. मैं समझ रहा हूं. इस बात पर वो मेरी ओर देख कर मुस्कराने लगी. मैं बोला- अच्छा हुआ वो चींटी आपने मार दी. वरना अगर अंदर चली जाती तो फिर मुझे मेरा लंड घुसा कर ही मारनी पड़ती. इस बात पर हम दोनों जोर से हंसने लगे. फिर मां अपनी चूत को झुक कर देखने लगी. मैंने देखा कि उसकी चूत पूरी गीली हो चुकी थी और उसका रस चूत पर पूरा फैल गया था. उसकी झांटें भी चमकने लगी थीं. मैंने कहा- मां, ये इतनी गीली कैसे हो गयी? मां बोली- मर्द के लंड को हाथ में लेने से इसमें खुजली होने लगती है. उसके बाद ये उसको अंदर लेने के लिए तड़पने लगती है. मैं बहुत देर से तुम्हारे लंड को देख रही थी. तभी इसमें पानी आना शुरू हो गया था. मैं बोला- मॉम, मन तो मेरा बहुत मचल रहा था आपको नंगी देख कर। मगर मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी. वो मेरी ओर हवस भरी नज़र से देखने लगी. फिर मेरे लंड को देखने लगी. पता नहीं मेरे मन में क्या आया कि मैं मां के सामने ही अपने लंड को हाथ में लेकर हिलाने लगा. मेरे मुंह से आह्ह … स्स्स … मॉम … आह्ह … यू आर सो हॉट … जैसे कामुक शब्द निकलने लगे. मॉम भी अपनी चूचियों पर हाथ फिराने लगी और हम दोनों उत्तेजित होकर एक दूसरे को होंठों पर डीप किस करने लगे. मां ने मेरे लंड को हाथ में भर लिया और मैं उसकी चूत को जोर जोर से सहलाने लगा. हम दोनों बुरी तरह से एक दूसरे को बेतहाशा चूमने लगे. मेरा लंड तन कर लोहे जैसा हो गया था. वो मां की चूत को चोदने के लिए अब एक पल का भी विलम्ब बर्दाश्त नहीं कर सकता था. मैंने मां को वहीं पर फर्श पर गिरा लिया और उसकी चूचियों के ऊपर टूट पड़ा. उसके मोटे मोटे चूचों को बारी-बारी से मुंह में भर कर चूसने लगा. वो भी मेरे सिर को जोर-जोर से अपनी चूचियों पर दबाने लगी. उत्तेजित होने के कारण मॉम के मुंह से कुछ इस तरह की सिसकारें निकल रही थीं- आह्ह … राजेश … मेरी चूत को चोद दे बेटा … तेरे पापा का लंड मुझे बहुत दिनों से नहीं मिला है … आह्ह … तेरे लंड को देखकर मैं चुदने के लिए मचल उठी हूं … तू ही मेरी चूत की प्यास को बुझा दे. दोस्तो, दरअसल मेरे पापा बिजनेस के चलते कई कई दिनों तक घर से बाहर ही रहते थे. अब भी उनको गये हुए 10-15 दिन का वक्त हो गया था. मां मेरे पापा के लंड से चुदने को बहुत मिस कर रही थी. इसलिए अब उसको मेरा लंड चाहिए था. मैंने भी सिसकारते हुए कहा- हां मॉम, आज मैं आपकी चूत चोद कर आपको खुश कर दूंगा. मैं तो खुद आपकी चूत चुदाई के लिए कितने दिनों से तड़प रहा था. वो बोली- तो फिर देर किस बात की है! आह्ह … चोद दे बेटा … मेरी चूत लंड के लिए तड़प रही है। इतना सुनते ही मैंने चूचियों पर से मुंह को हटाया और उसकी चूत में दे दिया. मैं जोर जोर से जीभ डाल कर चूत को अंदर तक चाटने लगा. मॉम अब और जोर से सिसकारने लगी- आह्ह … ऊईई … याह … और तेज … आह्ह … और जोर से … चूस राजेश। अब मुझसे भी रुका नहीं जा रहा था और मैंने उनके पैर उठा कर अपने कंधों पर रखवा लिये और जांघों के बीच में जाकर अपने लंड को उसकी चूत पर टिका दिया. मैं उसकी चूत पर लंड को रगड़ने लगा और हम दोनों के मुंह से सिसकारियां फूटने लगीं. फिर मैंने धीरे से लंड पर दबाव दिया और मेरा लंड पक् … करके मेरी मां की चूत के अंदर चला गया. दोस्तो, क्या बताऊं आपको! जैसे ही मेरा लंड उसकी चूत में अंदर गया तो मुझे ऐसा लगा कि ये कोई जन्नत है. इतना आनंद आ रहा था मुझे. कुछ देर तक तो मैं लंड को डालने के मजे में ही खो गया और मॉम की चूत में लंड डाल कर उनको अपनी बांहों में कस लिया. फिर मैंने लेटे हुए नीचे से अपनी गांड हिलानी शुरू की और मेरा लंड उसकी चूत में अंदर बाहर होने लगा. मॉम मेरी पीठ पर हाथ फिराते हुए मुझे सहलाने लगी और अपनी चूत को मेरे लंड की ओर उकसाने लगी. धीरे धीरे मेरा लंड पूरा का पूरा उसकी चूत में अंदर बाहर होने लगा और मेरी स्पीड बढ़ती चली गयी. मैं तेजी से मां की चुदाई करने लगा. वो अब जोर जोर से सिसकारने लगी- आह्ह … ओह्ह … कमॉन … फक … आह्ह … फक हार्ड राजेश … माय सन … फक मी … फक मी माइ चाइल्ड (चोद मुझे मेरे बच्चे)। मैं भी जोश में आकर मां को गाली देता हुआ चोदने लगा- हां रंडी, आज जी भरकर चोदूंगा तुझे. चोद चोदकर तेरी चूत का भोसड़ा बना दूंगा मैं। इस तरह मैं पूरी ताकत के साथ उसकी चूत को अंदर तक पेलने लगा. फिर चोदते हुए बोला- क्यों, मजा आ रहा है ना मेरी रांड? बता कैसा लग रहा है मेरे लंड से चुदते हुए? वो भी सिसकारते हुए बोली- आह्ह … हां … बहुत मजा आ रहा है … साले … इतना मजा तो तेरे बाप का लंड भी नहीं देता. आह्ह … याह … और चोद … आह्ह … और जोर से। कुछ देर चुदने के बाद वो बोली- अब मुझे तेरे ऊपर आना है. मैं नीचे लेट गया और फिर मॉम मेरे लंड पर आकर बैठ गयी. उसने मेरे लंड को पूरा अपनी चूत में अंदर ले लिया और मेरी जांघों पर बैठ कर ऊपर नीचे कूदने लगी. मेरे लंड पर कूदते हुए वो अपनी चूचियों को भींचते हुए बोली- आह्ह … स्सस … राजेश … चोद दे अपनी मां की चूत को … आह्ह … इसे चोद चोद कर शांत कर दे … आह्ह। मैं भी नीचे से गांड उठा उठाकर उसकी चूत को जोर से पेल रहा था. कुछ ही देर के बाद मेरा निकलने को हो गया. मैंने कहा- मॉम, मैं झड़ने वाला हूं. वो बोली- हां तो निकाल दे अपना माल मेरी चूत के अंदर. मुझे तेरे बच्चे की मां बना दे. मैं तेरा बच्चा अपनी चूत में चाहती हूं. भर दे इसको अपने माल से मेरे लाल। फिर मैंने मां की गांड को थाम लिया और जोर जोर से नीचे से धक्के लगाने लगा. 8-10 धक्कों के बाद ही मेरे लंड से वीर्य छूट पड़ा और मैंने वीर्य को उसकी चूत में छोड़ दिया. फिर हम दोनों शांत हो गये और ऐसे ही पड़े रहे. कुछ देर तक लेटे रहने के बाद मां फिर से मेरे लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी. शायद वो अभी झड़ी नहीं थी इसलिए उसकी चूत की आग उसको चैन से नहीं बैठने दे रही थी. पांच मिनट में ही मां ने मेरे लंड को चूस चूसकर फिर से खड़ा कर दिया. अबकी बार मैंने मां को बालकनी में रेलिंग पर झुका लिया. उसकी टांग को हाथ में उठाया और पीछे से उसकी चूत में लंड को पेल दिया. मैं वहीं पर झुके हुए उसकी चूत में धक्के देने लगा. वो रेलिंग पर बाहर की ओर मुंडी निकाल कर मुझसे चुदने का मजा लेने लगी. उसके बाल हवा में लहरा रहे थे और उसका नंगा जिस्म मेरे लंड के धक्कों से लहरा रहा था. 20 मिनट की चुदाई के दैरान इस बार मां दो बार झड़ गयी. मगर मेरा अभी नहीं निकला था. मैं उसकी चूत को पेलता रहा और फिर पांच मिनट के बाद एक बार फिर से मैंने मॉम की चूत में वीर्य निकाल दिया. उसके बाद हम दोनों ही बुरी तरह से हाँफ रहे थे. अब तक रात के 12 बज गये थे और बारिश थम गयी थी. मां बोली- मुझे गांड में भी लेना है. मैंने कहा- मां, हमें घर चलना चाहिए पहले. उसके बाद कहीं भी ले लेना, मैं वहीं पर घुसा दूंगा. वो बोली- नहीं, यहां पर इस सुनसान बिल्डिंग में चुदने का मजा ही अलग आ रहा है. तेरे पापा ने मेरे साथ ऐसा रोमांचक सेक्स कभी नहीं किया. मैं तो यहीं पर अपनी गांड में भी लूंगी. वैसे मैं भी स्वयं ही मां की गांड चुदाई करने की बात सोच रहा था. अब जब मां ने खुद ही बोल दिया तो मुझे क्या समस्या हो सकती थी. वो मेरे लंड को हाथ में लेकर सहलाने लगी और मैं उसकी चूचियों को पीने लगा. एक बार फिर से मां ने मेरे लंड को चूस चूसकर खड़ा कर दिया. मैंने नीचे लेट गया और उससे कहा- अब आप मेरे ऊपर आ जाओ और मेरे लंड पर बैठ कर अपनी गांड में लो. हम दोनों गांड चुदाई का मजा लेने के लिए तैयार थे. मगर इस बात से अन्जान थे कि इस बिल्डिंग में चार लोग सिक्योरिटी का काम भी करते हैं. हमें नहीं पता था कि उन्होंने हमें बालकनी में देख लिया है और वो ऊपर आ रहे हैं. मॉम मेरे लंड पर बैठ चुकी थी. उसने मेरे लंड को अपनी गांड में ले लिया और उस पर चुदने लगी. चुदाई करते हुए 2 मिनट ही हुए थे कि तभी पीछे से कोई जोर से चिल्लाया- ये सब क्या चल रहा है? हम दोनों के पैरों तले से ज़मीन खिसक गयी. हमने उठ कर देखा तो चार लोग हमारे पीछे खड़े थे. मां उठी और अपने नंगे जिस्म को अपने हाथों से छिपाने की नाकाम कोशिश करने लगी. चूचियों को छिपाती तो चूत नंगी रह जाती और चूत को छिपाती तो चूचियां हवा में डोल जातीं. तभी वो बोले- अब क्या छुपा रही हो? इस लड़के से चुदने का मजा ले रही थी तू? फिर वो मेरे से बोले- क्यों रे? इतनी सेक्सी आंटी की चुदाई तू अकेले अकेले कर रहा है? तेरे घर में पता है कि तू यहां है और इस आंटी की चुदाई यहां पर ऐसी हालत में कर रहा है? मॉम घबरा गयी थी. वो चाहती थी कि इन लोगों को इस बात का पता नहीं लगना चाहिए कि हम दोनों मां-बेटा हैं. मैं भी डर के मारे कुछ नहीं बोल पा रहा था. फिर मॉम बोली- भैया गलती हो गयी. हम तो बस यहां से गुजर रहे थे कि बारिश होने लगी और हम यहां आ गये. हम यहां से चले जायेंगे अभी. तभी दूसरा आदमी मुझसे बोला- क्यों रे? तेरी बाइक का नम्बर हमारे पास है. अभी पुलिस में तेरी शिकायत करें कि तू एक सुनसान बिल्डिंग में एक आंटी की चुदाई कर रहा है? फिर तेरे मां-बाप को वो बुलायेंगे और तेरी अच्छी खबर लेंगे. मॉम डर गयी क्योंकि अगर पुलिस में बात चली जाती तो फिर मोहल्ले में भी पता चल जाता और पापा को भी पता लग जाता. वो गिड़गिड़ाते हुए बोली- नहीं नहीं भैया, इसके मां-पापा को ये बात नहीं पता लगनी चाहिए. मैं बोला- हां अंकल, प्लीज, आप किसी को मत बताना. हम यहां से चले जायेंगे. तीसरा आदमी बोला- ऐसे कैसे चले जाओगे? तूने अकेले अकेले मजे ले लिये. अगर तू चाहता है कि ये बात यहीं तक रहे तो हमें भी इस छमिया आंटी के मजे लेने दे. वो लोग मेरी मॉम को रंडी समझ रहे थे. इसमें मॉम की गलती नहीं थी क्योंकि उस वक्त वो रंडी ही लग रही थी. फिर एक आदमी मॉम के पास आया और उसको उठा कर दूसरे रूम में ले जाने लगा. मॉम शोर करने लगी तो उसने ये कहकर चुप करा दिया कि वो हमारे बारे में अभी पुलिस में बता देंगे. फिर मॉम चुप हो गयी. वो मॉम को अंदर ले गया और दो आदमी उसके पीछे चले गये. एक जो चौथा बच गया था वो मेरी पहरेदारी करने लगा ताकि मैं वहां से भाग न जाऊं. सामने मैं देख पा रहा था कि उसने मॉम को वहीं टाइल लगे फर्श पर लिटा लिया. फिर वो अपने कपड़े उतारने लगा. वो जल्दी से नंगा हुआ और नीचे लेट कर मॉम को अपने ऊपर खींच लिया. तब तक वो दो आदमी भी अपने आधे कपड़े खोल चुके थे. इतने में पहले वाले ने मॉम को पेट के बल ऊपर कर लिया और मेरी मां के चूचे उस आदमी के सीने पर दब गये. वो मेरी मां की गांड को दबाते हुए उसको जोर जोर से भींचने लगा और उसका तना हुआ लंड मेरी मां की चूत के पास बार बार टकराने लगा. फिर उसने अपने लंड को हाथ से पकड़ा और नीचे ही नीचे मां की चूत में घुसा दिया. बिना रुके वो जोर जोर से मॉम की चूत को चोदने लगा. इतने में ही वो बाकी के दोनों आदमी भी नंगे हो गये और एक ने मॉम के मुंह में लंड दे दिया और दूसरा पीछे आ गया. उसने नीचे बैठ कर मॉम की गांड में लंड पेल दिया और मॉम की चीख अंदर ही दब कर रह गयी क्योंकि उसके मुंह में दूसरे वाले का लंड था. वो तीनों मॉम को बुरी तरह से चोदने लगे. एक चूत की चुदाई करने लगा तो दूसरा मुंह में चुसाई करवाने लगा. जबकि तीसरा गांड की ठुकाई कर रहा था. उनको जैसे तीन छेद वाली एक डॉल मिल गयी थी और वो उससे मजा लेकर खेल रहे थे. फिर वो चौथा आदमी भी अंदर चला गया. मैं थका हुआ था और मेरी आंखें भारी हो रही थीं. इसलिए मैं चुपचाप लेटा हुआ मॉम को चुदते हुए देखता रहा. पहले तो मॉम उनको नहीं झेल पा रही थी मगर फिर वो आराम से चुदने लगी. चौथे आदमी ने जाकर मॉम के हाथ में लंड दिया और फिर वो उन दोनों के लंड को बारी बारी से चूसने लगी. अब मॉम के पास चार लंड थे और चारों के चारों ही दमदार लौड़े थे. वो चारों लौड़ों का मजा ले रही थी. बीच बीच में वो आदमी मॉम को थप्पड़ भी मार रहे थे. कभी गांड पर तो कभी गाल पर। कभी उसकी चूचियों को पकड़ कर खींच लेते थे तो कभी उसके बालों को खींच कर चोदने लगते थे. मॉम भी इस जबरदस्त चुदाई में जैसे मदहोश होती जा रही थी. रात के एक बजे का समय चुका था और मेरी मॉम चार लंडों से चुद रही थी. उस सुनसान बिल्डिंग में हम छह के अलावा कोई नहीं था. मैं सोच सोच कर थोड़ा रोमांचित भी हो रहा था. मां की चुदाई देखते देखते पता नहीं कब मुझे नींद आ गयी और मैं सो गया. जब मेरी आंख खुली तो मैं अंदर रूम में गया. मैंने देखा कि मॉम उन चारों के बीच में पड़ी हुई थी. उन आदमियों में से कोई मां की चूचियों पर मुंह रख कर सो रहा था तो कोई उसकी जांघों पर। एक ने मॉम के हाथ को लंड पर रखवाया हुआ था और चौथा उसके गाल पर लंड लगा कर सो रहा था. टाइम देखा तो सुबह के 5 बज गये थे. मॉम शायद रात भर चुदी थी इसलिए उसको गहरी नींद आ गयी थी. मैंने मॉम को जगाया तो उसने आंखें खोलीं. फिर वो धीरे से उनके हाथ को हटाते हुए उठ कर बाहर आ गयी. हमने जल्दी से अपने अपने कपड़े पहने और चुपचाप वहां से निकल आये. घर आकर हमने अच्छी तरह से अपने जिस्मों को साफ किया और एक दूसरे से वादा लिया कि ये बात हम दोनों के बीच में ही रहेगी. दोस्तो, ये थी मेरी माँ बेटे की चोदाई कहानी. आपको स्टोरी में मजा आया हो तो अपना फीडबैक जरूर दें. कोई कमी रह गयी हो तो वह भी बतायें. जल्दी ही मैं किसी और कहानी के साथ वापस आऊंगा. 106,764 देसी हॉट चुदाई वीडियोज: गाँव की छोटी सी सुन्दर देसी लड़की नें लौड़ा चूसकर पूरा मज़ा लिया। सेक्सी मोहिनी भाभी बॉस से ऑफिस में चुदवा रही है हिंदी गाली ऑडियो बेटे ने सोती हुई माँ को चोद दिया बेटी की चिकनी चूत में काला लंड Categories Family Sex Stories, माँ की चुदाई Tags Garam Kahani, Hindi Sex Kahani, Hot girl, Kamukta, Kamvasna, Mom Sex Stories, Nangi Ladki, कामवासना Post navigation चूत में घुसी चींटी ने मां चुदवा दी- 1 द जंगल क्वीन – कमसिन जवान लड़की की सेक्स स्टोरी Search Search for: कोरोना वायरस फिर से बढ़ रहा है. आप सभी अपने घर से कम से कम बाहर निकलें.. मास्क अवश्य पहनें, सुरक्षित रहें. 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2022-12-05T08:34:10Z
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OSCAR-2301
Former BJP mla say if someone slap, then dust him - Indore News in Hindi - भाजपा पूर्व विधायक के बिगड़े बोल... कोई मारे तो चटा दो उसे धूल | Patrika Hindi News Mohit Panchal | Publish: May, 10 2019 10:57:10 AM (IST) Indore, Indore, Madhya Pradesh, India राऊ विधानसभा के कार्यालय उद्घाटन में बोले भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष इंदौर। कांग्रेस की सहमति से नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री नहीं है, जनता ने उन्हें चुनकर भेजा है। कुछ लोग उनको गाली बक रहे हैं, नीच कह रहे हैं। एक लड़की उसे दुर्योधन कहती है। हमें ऐसे लोगों को करारा जवाब देना चाहिए। हमारे संस्कार ऐसे नहीं हैं, लेकिन ऐसे भी नहीं है कि एक गाल पर थप्पड़ मारा तो दूसरा गाल आगे कर देंगे। ऐसा तमाचा खींचकर दो कि जमीन पर गिर जाए। बदतमीजी करेंगे नहीं, सहन भी नहीं करेंगे। ये बात कल भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष जीतू जिराती ने राऊ विधानसभा चुनाव कार्यालय उद्घाटन में कहीं। मौके पर लोकसभा प्रभारी अरविंद कवठेकर, नगर अध्यक्ष गोपी नेमा, मधु वर्मा, रवि रावलिया, जेपी मूलचंदानी, नारायण पटेल, मंदीप बाजवा, घनश्याम नारोलिया, रामस्वरुप गेहलोद मौजूद थे। जिराती का कहना था कि देश का नाम दुनिया में हो, जिसके लिए मोदी १८ घंटे काम कर रहे हैं। इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री रहे, लेकिन हमारे कार्यकर्ता ने कभी तू करके संबोधित नहीं किया। ये लोग ऐसे हलके स्तर पर आ गए हैं। मोदी की सभा को लेकर जिराती ने बिजलपुर से दशहरा मैदान तक पैदल मार्च निकालकर पहुंचने का कहा। साथ में राजेंद्र नगर व अन्नपूर्णा वार्ड के कार्यकर्ताओं को भी वाहन के बजाए पैदल आने के लिए कहा। मौजूद लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन की भी जिराती ने जमकर तारीफ की। ताई ने कहा कि इंदौर के लिए हमेशा तैयार हूं, जब जहां आवश्यकता है, मैं खड़ी मिलूंगी। नेमा बोले कि कांग्रेस सरकार में इतने भ्रष्टाचार हुए कि उनके आगे जीरो लगाना मुश्किल थे, लेकिन मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार को जीरो कर दिया।
2019/10/22 17:00:50
https://www.patrika.com/indore-news/former-bjp-mla-say-if-someone-slap-then-dust-him-4547477/
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पोस्ट आफिस की इस स्कीम में कीजिए निवेश, हर महीने होगा फायदा HomeBusinessपोस्ट आफिस की इस स्कीम में कीजिए निवेश, हर महीने होगा फायदा पोस्ट आफिस में ऐसी कई स्कीमें हैं, जिसमें निवेश करने पर आपको फायदा मिल सकता है। पोस्ट आफिस में हर दिन, महीने व वर्ष के निवेश के लिए आरडी योजना, सुकन्‍या समृद्धि योजना या फिर बचत खाता की योजनाएं निवेश के लिए अच्‍छा माध्‍यम मानी जाती हैं। ये स्कीमें भरोसेमंद भी होती हैं। पोस्ट आफिस की योजनओं में निवेश करने पर अलग -अलग ब्‍याज दर से लाभ मिलता है। ऐसी ही योजनओं में एक पोस्ट आफिस मंथली इनकम स्कीम (POMIS) है। इस योजना में आप एक निश्चित राशि का निवेश कर सकते हैं और निश्चित ब्याज भी ले सकते हैं। इसकी गणना हर महीने के हिसाब से की जाती है। इसके तहत आप अपनी छोटी-छोटी जरुरतों को भी पूरा कर सकते हैं, साथ ही यह आपको हर महीने धनरा‍शि देने के लिए उपयोगी है। इस स्कीम के तहत आप निवेश कर मासिक आय के तौर पर इसका उपयोग कर सकते हैं। पोस्ट आफिस मंथली इनकम स्कीम की ब्याज दर अब 6.6% प्रति वर्ष है, जो मासिक देय है। कम से कम 1000 रुपया इसमें निवेश किया जा सकता है, जबकि अधिकतम आप 4.5 लाख से अधिक का भी निवेश कर सकते हैं। लेकिन आपके पास संयुक्‍त खाता है तो आप 9 लाख तक का निवेश कर सकते हैं। इस योजना के अंतर्गत मासिक ब्‍याज किसी भी सीबीएस पोस्ट आफिस में बचत खाते में जमा किया जा सकता है। यह भी पढ़ें:- रेलवे 15 अक्टूबर से चलाने जा रहा Special Train, कई गाड़ियों के फेरे भी बढ़ेगे, देखें लिस्ट इसमें 5 वर्ष की लॉक-इन अवधि दी जाती है और 1 वर्ष से पहले आप अपनी जमा राशि वापस नहीं ले सकते। हालाकि, खाता 1 वर्ष के बाद और 3 वर्ष से पहले बंद हो जाता है, तो मूलधन से प्रतिशत की कटौती कर ली जाती है और शेष राशि का भुगतान किया जाएगा। यदि आप 3 साल बाद और 5 साल से पहले खाता बंद करते हैं, तो मूलधन से 1% की कटौती की जाएगी। पूर्ण निवेश से पहले अगर खाताधारक की मृत्यु हो जाती है, तो खाता बंद किया जा सकता है और राशि नामांकित परिवार के सदस्‍य को दी जाएगी। पोस्ट आफिस मंथली इनकम स्कीम के लिए खाता आसानी से खोला जा सकता है। इस योजना के तहत 10 साल से उपर का नाबालिग भी खाता खोल सकता है। इस योजना में खाता खोलने के लिए पोस्ट आफिस की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर फॉर्म भरना होगा या आप नजदीकी पोस्ट आफिस में जाकर भी खाता खोल सकते हैं।
2021/10/17 22:31:40
https://articles.freearticleposting.com/2021/10/blog-post_368.html
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bollywood top stars then and now see pictures - बॉलीवुड पर राज करने वाले ये 9 सितारे अपने संघर्ष के दिनों दिखते थे ऐसे, देखें तस्वीरे | खजाना मस्ती blogid : 319 postid : 1396901 Posted On: 10 Sep, 2019 Bollywood में बॉलीवुड में सफलता पाने के लिए सालों लग जाते हैं। कई बार तो कुछ सितारे सफलता के इंतजार में अपनी पूरी उम्र गुजार देते हैं, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगती। ऐसे में आज हम आपको उन सितारों से के बारे में बताएंगे, जिन्होंने अपने शुरुआती दिनों में स्ट्रगल किया और आज बॉलीवुड में राज कर रहे हैं- आकाशवाणी में जब अमिताभ का चयन नहीं हुआ उसके बाद वह एक्टर बनने मुंबई आ गए, यहां पर भी सफलता उन्हें आसानी से नहीं मिली। करीब 7 साल तक मेहनत करने के बाद उन्हें सफलता हाथ लगी। देखें अपने पुराने दिनों में कुछ यूं दिखते थे शहंशाह। 'रोमांस किंग' शाहरुख आज करोडोंं के मालिक हैं, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब वो भूखे पेट सोया करते थे। इस दौरान शाहरुख कुछ टीवी सीरियल करते थे। तस्वीरों में आप एक युवा शाहरुख को देख सकते हैं। आज विद्या बालन के पास सबकुछ है जिसकी चाहत उन्हें थी। नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित विद्या के पास एक जमाने में काम नहीं होते थे। इसी दौरान उन्होंने मशहूर शो 'हम पांच' में अभिनय किया था। देखें तब और अब विद्या में कितना फर्क है। 'देसी गर्ल' आज भले ही विदेशों में धूम मचा रही हों, लेकिन उन्हें भी सफलता के लिए सालों इंतजार करना पड़ा। मिस वर्ल्‍ड बनने के बाद से प्रियंका का लुक कितना बदला है आप खुद देख सकते हैं। बॉलीवुड में 'दंबग' गर्ल के नाम से जानी जाने वाली मशहूर अभिनेत्री भले ही आज सफल हों, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब सोनाक्षी का वजन करीब 90 किलो हुआ करता था। इन तस्वीरों को देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं सोनाक्षी ने खुद को कितना फिट बनाया है। बॉलीवुड में अपने चुलबुले अंदाज के लिए मशहूर अनुष्का ने भले ही यश राज बैनर तले अपनी पहली फिल्म की थी, लेकिन इसके पहले वो फिल्म 'लगे रहो मुन्नाभाई' में दिख चुकी हैं। शाहिद एक अच्छे डांसर हैं ये तो हम सभी जानते है, लेकिन इस बात को बहुत कम लोग जानते हैं कि उन्हें फिल्मों में आने के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ा था। फिल्म 'ताल' के एक गाने में आप शाहिद को ऐश के साथ देख सकते हैं। 'धक-धक' गर्ल माधुरी की अदाओंं के क्या कहने, उनका डांस उनकी मुस्कान आज भी सबसे अलग है लेकिन उनका यह सफर इतना आसान ना था। 16 साल की उम्र में अदाकारी करते हुए माधुरी को लंबे समय बाद सफलता मिली थी। बॉलीवुड में अपनी एक्टिंग का लोहा मनवा चुके इरफान आज किसी परिचय के मोहताज नही हैं लेकिन उनका भी सफर बहुत मुश्किलों भरा रहा है। छोटे रोल करते हुए इरफान आगे बढ़े और खुद को एक बेहतर कलाकार के तौर पर सबके सामने पेश किया…Next Tags: bollywood celebrities old pic bollywood stars and struggle days struggle days of bollywood stars
2020/05/30 07:37:22
https://www.jagranjunction.com/entertainment/bollywood-top-stars-then-and-now-see-pictures/?src=cc
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Tea is being made even though the waist,neck is broken|KHABAR LAZMI वीडियो में देखा जा सकता है कि बुजुर्ग शख्स न तो ठीक है उठ पाते हैं और ही पूरी तरह से बैठ पाते हैं। साथ ही बाबा का तो एक हाथ भी टूटा हुआ है। जैसा कि आप जानते हैं कि कुछ ही दिन पहले सोशल मीडिया की ताकत से बाबा का ढाबा कितना मशहूर हुआ। ऐसे में आपको बता दे कि सोशल मीडिया का जादू अभी भी जारी है। हाल ही में एक पोस्ट वायरल हुई जिसमें एक 70 साल का बुजुर्ग जोड़ा टूटे हाथ और कमर के साथ सड़क के किनारे चाय बेचने पर मजबूर है। वह बताते हैं कि बेटे ने मार-पिटाई करके घर से बाहर निकाल दिया तो उनकी बेटी ने चाय की दुकान लगाने में उनकी मदद की, ताकि वो लोग किसी तरह अपना गुजारा कर सकें। बता दें कि यह कहानी है द्वारका सेक्टर-13 के पास चाय की दुकान लगाने वाले अम्मा-बाबा की। 70 साल के बुजुर्ग दंपत्ति सड़क किनारे चाय बेचने को मजबूर हैं। इस दंपत्ति की कहानी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @foodyvishal नाम के यूजर ने शेयर किया है। वीडियो में देखा जा सकता है कि बुजुर्ग शख्स न तो ठीक है उठ पाते हैं और ही पूरी तरह से बैठ पाते हैं। साथ ही बाबा का तो एक हाथ भी टूटा हुआ है। ऐसे में इस पोस्ट के द्वारा इस बुजुर्ग जोड़े के लिए सोशल मीडिया पर मदद मांगी जा रही है। खुशी की बात तो यह है कि इस पोस्ट के बाद बाबा और अम्मा को काफी मदद मिली। बहुत से लोगों ने इन दोनों के लिए खाने की सामग्री तक भेजी तो कई लोगों ने यह आश्वासन दिया है कि बाबा के हाथ का और कमर का इलाज भी करवाया जाएगा। Tags: #BABAKADHABABABAchai vle babadadi dada making chaineck is broken|KHABAR LAZMITea is being made even though the waistviral babaviral baba ammaviral video
2021/12/04 00:43:04
https://khabarlazmi.in/tea-is-being-made-even-though-the-waist-and-neck-is-broken-baba-will-make-ammas-video-emotional/
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बचपन जो था वो ही सुकून से भरा था मतलब की तलब नहीं थी किसी चीज की फ़िक्र नहीं थी सुकून था, ख़ुशी थी मुस्कान थी 0 comments 2 likes. Post not marked as liked2 Shayar Malang ये दिल एक चित्रकार है ये जो दिल है, वो चित्रकार है, उसके बस्ते में वो सारे रंग है जो आपके अहसासों के हिसाब से दुनियाँ के चित्रपटल पर उकेरे जाते हैं... पढ़िए कैसे 1 comment 8 likes. Post not marked as liked8 Shayar Malang कितनी भी कोशिश कर लो ज़िंदगी में कितनी भी कोशिश कर लो कुछ चीज़ें तभी मिलेंगी जब मिलनीं होंगी, मगर चाहे जो हो मुस्कुरा कर हमें ज़िंदगी को जीना नहीं छोड़ना ॥
2022-12-02T03:37:12Z
https://www.shayarmalang.com/home/tags/life
OSCAR-2301
फर्जी फेसबुक आईडी और पोस्ट पर 5 लाख का जुर्माना लगेगा – Live Halchal फर्जी फेसबुक आईडी और पोस्ट पर 5 लाख का जुर्माना लगेगा जर्मनी ने एक नया कानून पारित किया है, जिससे वह सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर हर फर्जी पोस्ट के लिए पांच लाख यूरो का जुर्माना लगाएगा। फेसबुक पर यह जुर्माना पोस्ट प्रसारित होने के 24 घंटे के अंदर न हटाए जाने की स्थिति में लगाया जाएगा। गौरतलब है कि फेसबुक ने एक दिन पहले ही घोषणा की है कि वह फर्जी खबरों और अफवाहों पर लगाम लगाने के लिए प्रभावी कदम उठा रहा है। आयरलैंड के समाचार-पत्र आइरिश टाइम्स के वेब संस्करण पर रविवार को प्रसारित रिपोर्ट में कहा गया है कि कई वर्षों से अमेरिकी सोशल नेटवर्किंग कंपनी से फर्जी खबरों और नफरत फैलाने वाली पोस्टों के खिलाफ तेजी से काम करने के लिए कहा जा रहा था, लेकिन बर्लिन ने अब स्पष्ट कर दिया है कि वह अब आत्म-नियंत्रण के भरोसे बैठा नहीं रहेगा।
2021/06/17 19:54:12
http://www.livehalchal.com/%E0%A4%AB%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9C%E0%A5%80-%E0%A4%AB%E0%A5%87%E0%A4%B8%E0%A4%AC%E0%A5%81%E0%A4%95-%E0%A4%86%E0%A4%88%E0%A4%A1%E0%A5%80-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A5%8B%E0%A4%B8%E0%A5%8D/28499
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June 22, 2021 • सत्यनारायण शर्मा देश की अग्रणी एग्रीटेक स्टार्टप कंपनी ग्रामोफ़ोन पिछले पांच साल से किसानों को स्मार्ट खेती करने के लिए आधुनिक तकनीकों के माध्यम से सशक्त करने के उद्देश्य से कार्यरत है और उनके जीवन में समृद्धि ला रही है। कोरोना महामारी के चलते पिछले २ साल सभी के लिए काफी मुश्किल रहे और किसान भाई भी इससे अछूते नहीं रहे हैं | लॉकडाउन की वजह से सभी सब्जी व् अनाज मंडियां बंद रहीं और किसान भाईयो को अपनी फसल बेंचने का कोई रास्ता नहीं दिख रहा था | उतना ही मुश्किल ये दौर हमारे अनाज व्यापारियों के लिए रहा, वो किसानो से किसी भी तरह जुड़ ना सके | कोरोना की दूसरी लहर के समय किसान अपनी रबी फसलों की कटाई में व्यस्त थे। फसलों की कटाई के बाद किसान लॉकडाउन में फसलों को कैसे बेच पाएंगे इसे लेकर फिक्रमंद थे। हर बार की तरह इस अभूतपूर्व समस्या को सुलझाने का बीड़ा ग्रामोफ़ोन ने उठाया और किसानों की उपज बेचने की प्रक्रिया को भी स्मार्ट बनाने के उद्देश्य से 'ग्राम व्यापार' की शुरुआत की। ग्राम व्यापार के माध्यम से किसान घर बैठे ही अपने ग्रामोफ़ोन मोबाइल ऍप के द्वारा अपनी फसलों को बेंच सकते है बस एक बिक्री सूचि बना कर और भरोसेमंद खरीददारों से डायरेक्ट बात करके | इसी ऐप पर कई व्यापारी खरीददार भी सक्रिय होते है जो खरीद सूचि बनाकर किसानो तक आसानी से पहुँच सकते हैं | ग्रामोफ़ोन के हेड ऑफ़ आउटपुट बिज़नेस श्री अतुल चौहान ने मीडिया से बातचीत में कहा - "ग्राम व्यापार की शुरुआत के साथ ही अब ग्रामोफ़ोन किसानों की हर जरूरत का साधन बन गया है। पहले किसान ग्रामोफ़ोन के माध्यम से फसल से उपज तो अच्छी निकाल रहे थे पर उन्हें उपज से अच्छा मुनाफा प्राप्त करने में समस्या होती थी। अब ग्राम व्यापार उनकी यह परेशानी भी दूर कर रहा है, उन्हें एप पर कई खरीददारों के विकल्प एक साथ मिल रहे हैं जिनसे वे घर बैठे बात कर के सौदा तय कर रहे हैं।"
2022/05/16 14:25:01
https://www.shabdsanchar.page/2021/06/blog-post_22.html
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धुरी पहलू iPhone मामले की समीक्षा – NCR Express News धुरी पहलू iPhone मामले की समीक्षा गजटियर आप जैसे पाठकों द्वारा समर्थित है! अगर आप हमारी साइट के लिंक से कुछ खरीदते हैं, तो हमें एफिलिएट कमीशन मिल सकता है। शुक्रिया! और अधिक जानें। समीक्षा – मुझे यकीन है कि आपके पास औसतन बहुत सारे फ़ोन केस हैं, लेकिन शायद कभी एक नहीं था खुद खाता है जब आप इसे फेंक देते हैं। लेकिन यह है ठीक है क्या धुरी पहलू iPhone मामला सक्षम है। वैज्ञानिक जादू टोना के इस टुकड़े को देखें! पिवेट एस्पेक्ट आईफोन केस एक पतला, पर्यावरण के अनुकूल आईफोन केस है जो मध्यम मात्रा में सुरक्षा प्रदान करता है। मामला एक "सेल्फ-साइकिल ™" रीसाइक्लिंग प्रक्रिया से घिरा हुआ है जो कीटाणुओं को तोड़ने और फेंकने पर मामले को पचाने के लिए उपयोग करता है। 2m / 6.6ft ड्रॉप सुरक्षा 2 मिमी / 0.08 "अल्ट्रा-स्लिम ऐप्पल मैगसेफ और क्यूई / वायरलेस चार्जिंग के साथ संगत टोटो-टोआ उन्नत सामग्री के साथ स्व-चक्र कोई रंग अवशोषण नहीं पिवेट के पहलू आईफोन मामले में मेरा ध्यान आकर्षित करने वाली अनूठी विशेषता ट्रेडमार्क-भारी, उन्नत स्व-पुनर्चक्रण सामग्री है। मैंने इस "टोटो-टोआ" सामग्री के बारे में कभी नहीं सुना था जो कि स्व-चक्र ™ प्रक्रिया के पीछे की तकनीक है। पूरी प्रक्रिया के बारे में बताया गया है पिवेट के अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न पृष्ठ, लेकिन अनिवार्य रूप से मामले में उपयोग किया जाने वाला प्लास्टिक एक ऐसी सामग्री से समृद्ध होता है जो रोगाणुओं को आकर्षित करती है, जो प्लास्टिक में निहित कार्बन को खाद्य स्रोत के रूप में उपयोग करती है और एसिड को स्रावित करती है जो बहुलक को बायोमास, मूल रूप से मिट्टी में तोड़ देती है। अब, मैं यह अनुमान लगाने जा रहा हूं कि लैंडफिल, जहां मामला अंततः समाप्त हो जाएगा, मेरे हाथ, डेस्कटॉप या जेब जैसे रोगाणुओं से अधिक समृद्ध है। नहीं तो बिखरने की प्रक्रिया किसी के मामले को छूने से शुरू हो जाती, लेकिन मेरा मानना ​​है कि यह अच्छा है। स्वाभाविक रूप से, मुझे भौतिक अपघटन मैकेनिक का परीक्षण करने का मौका नहीं मिला है, इसलिए मुझे विश्वास करना होगा कि पिवेट अपने दावों में सही है। अगर यह काम करता है जैसा कि वे कहते हैं, तो, यार, हमें वास्तव में इसका इस्तेमाल करना चाहिए प्रकार उपभोक्ता वस्तुओं। मैं देख रहा हूँ आप, डिस्पोजेबल पेय कंटेनर। मामला अपने आप में उन पतले, न्यूनतम, भद्दे प्लास्टिक प्रकार के फोन मामलों में से एक है जिसका मैं बहुत बड़ा प्रशंसक हूं। मैं अपनी तकनीक में बल्क जोड़ना पसंद नहीं करता, और अधिकांश स्थितियों में अपने iPhone को शून्य केस के साथ लॉक करना चाहूंगा। हालांकि, इस मामले में विकसित हुए खरोंच और खरोंच के आधार पर, मैं समझता हूं कि क्षति को अवशोषित करने के लिए सुरक्षा का स्तर होना एक अच्छी बात है। केस का फ्रंट लिप स्क्रीन के पीछे थोड़ा फैला हुआ है, इसके साथ फ्लश नहीं करता है, इसलिए जब आप फोन को समतल सतह पर फेस-डाउन करते हैं तो स्क्रीन खुद ही सुरक्षित हो जाती है। फोन के पिछले हिस्से पर कैमरा बंप के चारों ओर का लिप कैमरा लेंस के साथ फ्लश करने के लिए काफी ऊंचा है। यह पेशकश नहीं करता है उस बहुत सारी सुरक्षा है, और सपाट सतह पर रखे जाने पर भी फोन थोड़ा हिलता है, लेकिन मुझे इसे "उन चीजों में से एक" के लिए जांचना होगा जिसे आप आधुनिक मोबाइल कैमरा तकनीक से नहीं बचा सकते हैं। मामला कैमरा लेंस के साथ लगभग फ्लश है, इसलिए यह केवल हल्का सुरक्षा प्रदान करता है। पहलू मामले में स्पीकर, चार्जर और साइलेंट टॉगल के लिए विशिष्ट उद्घाटन हैं, हालांकि नीचे चार्जर छेद छोड़ देता है बहुत ज्यादा केस के ऊपर प्लास्टिक की एक पतली पट्टी जो पूरी स्क्रीन के किनारों की रक्षा करते हुए खराब दिखती है और होम स्क्रीन पर जाने के लिए "स्वाइप अप" मोशन करते समय उसके सामने एक उंगली ब्रश करने से चिढ़ जाती है। मुझे लगता है कि मैं चाहता हूं कि यह थोड़ा मोटा हो या बाएं और दाएं किनारों पर बस कट और गोल हो, जिससे स्वाइप करते समय लक्ष्य करने के लिए थोड़ी दूरी हो। यह इतनी छोटी सी शिकायत है कि इसका उल्लेख करना मूर्खतापूर्ण लगता है, लेकिन मुझे लगा कि यह समीक्षा में रखने के लिए पर्याप्त है। आप जो उम्मीद कर सकते हैं, वह यह है कि मैंने उन सभी ट्वीक्स को एक संकेतक के रूप में शॉट में रखा। माफ़ करना! एक आखिरी छोटी शिकायत पिवेट के इस दावे के बारे में है कि मामला मैगसेफ प्रासंगिक है। उस है वायरलेस चार्जिंग ऐप्पल के मैगसेफ चार्जर और किसी भी क्यूई वायरलेस चार्जिंग उपकरण जैसे कि काम करेगी, लेकिन इस मामले से मैग फ़ंक्शन में सुधार हुआ है। My MagSafe लेदर वॉलेट चिपकता नहीं है, या मेरे MagSafe में बैटरी पैक नहीं है, केस में कोई चुंबकीय कनेक्टर नहीं है, इसलिए चुंबकीय कनेक्शन बहुत कमजोर है … अपने फोन के पीछे। कुल मिलाकर, रक्षा-सकारात्मक बोनस के साथ एक सुंदर मामला। अंत में, रंग सुंदर है। मुझे ओशन ब्लू रंग भेजा गया था, जो डीप ब्लू की एक भव्य छाया होने के अलावा, कंपनी की परोपकारी शैली का फोन केस भी है। रंग स्वयं उस रंग के आधार पर तैयार किया जाता है जो प्रवाल समुद्र की गर्मी की लहरों से बचने के प्रयास में बदल जाता है। वह … कमाल है, कम से कम कहने के लिए। उनकी प्रत्येक ओशन ब्लू-स्टाइल खरीदारी द ओशन एजेंसी को बिक्री का एक प्रतिशत दान करती है, जो समुद्री संरक्षण प्रयासों का समर्थन करती है। मैं संरक्षण का बहुत समर्थन करता हूं, और जब मैं इससे छुटकारा पाने के लिए तैयार होता हूं, तो बस कीटाणुओं का भोजन बन जाता हूं, यह बहुत बढ़िया है। स्व-पुनर्नवीनीकरण! लगभग किसी का ध्यान नहीं गया आसान संचालन के लिए थोड़ी अतिरिक्त पकड़ देता है क्या सुधार करने की जरूरत है MagSafe अटैचमेंट चुंबकीय रूप से केस से चिपके नहीं रहेंगे अपनी समुद्री नीली रेखा के साथ पिवेट के रक्षा प्रयास उल्लेखनीय हैं, और फेंके जाने पर अनिवार्य रूप से खुद को खाने का मामला Sci-Fi जादू जैसा लगता है जिसे सभी में लागू किया जाना चाहिए। प्रकार प्लास्टिक की वस्तुएं। पहलू एक महान कारण के साथ एक महान मामला है, यदि आप प्रदान करते हैं सचमुच कोई मैगसेफ कार्यक्षमता की आवश्यकता नहीं है।
2022/05/29 02:28:31
https://ncrexpressnews.in/2021/11/162.html
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ऐसे में जेडीयू नीत जनता परिवार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। यूं तो जेडीयू और आरजेडी की अभी भी राज्य में तूती बोलती है लेकिन आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव बीते चुनाव में नीतिश से ही मात खा चुके हैं वहीं यादवों को छोड़ दिया जाए तो लालू के लालटेन की रोशनी अन्य वर्गों में कुछ धीमी पड़ गई है। फिर भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों बिहार को राहत पैकेज दिलवा दिया और कुछ घोषणाऐं करवा दीं। ऐसे में बिहार की जनता भी मोदी की कम मुरीद नहीं रही। वैसे जातिगत पृष्ठभूमि वाले राज्य में मोदी लहर का असर अधिक होने के आसार कम ही हैं लेकिन इस चुनाव में अल्पसंख्यकों का चेहरा बने एमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी राज्य में अपने पार्टी नेताओं को बतौर उम्मीदवार पेश करने की रणनीति बना रहे हैं। जिसके कारण एक बड़ा मुस्लिम वोट बैंक जनता परिवार से किनारा कर सकता है। ऐसे में जनता परिवार खासकर जेडीयू को सपा नेताओं की कमी जरूर खल सकती है। नतीजा कुछ भी हो लेकिन बिहार का यह चुनावी दंगल कांटा दंगल से कम नहीं कहा जा सकता। एक पार्टी की सरकार का तो राज्य में कोई अस्तित्व नज़र नहीं आ रहा लेकिन गठबंधन की खिचड़ी सरकार बनने के बाद कितनी चलेगी इस पर भी संशय है। • मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने एक वित्तवर्ष में सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेन्डरों की संख्या छह से बढ़ाकर नौ की. • 58वें आइडिया फिल्मफेयर अवार्ड में फिल्म कहानी हेतु विद्या बालन सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार से सम्मानित. • भारत और वियतनाम ने सूक्ष्म, लघु और मझौले उद्योगों के क्षेत्र में सहयोग के एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए. • भारत की बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल ने विश्व बैडमिंटन संघ की रैंकिंग में दूसरा स्थान प्राप्त किया. • ब्रिक्स देशों (ब्राजील,रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) के मध्य आपसी हित के विभिन्न मुद्दों के बारे में अपने कर विभागों के बीच सहयोग बढ़ाने पर सहमति. सांसद गुरुदास कामत को वर्ष 2011 की जनगणना संपन्न कराने में योगदान हेतु सेंसस 2011 गोल्ड मेडल पुरस्कार के लिए चुना गया।
2021-02-25T22:54:41Z
https://www.futurepointindia.com/article/hi/jaane-kya-girl-ka-manglik-hona-boy-ke-liye-sach-me-khatarnak-hai-9432
OSCAR-2109
वेब ब्राउजिंग करते समय मीडिया फाईल डाउनलोड करें अब Youtube और अन्य किसी भी वेबसाईट पर चलने वाले वीडियो और MP3 को डाउनलोड करना आसान हो गया है । इस Program को इंस्टाल करने के बाद जब भी आप अपने ब्राउजर को खोलेंगे यह अपने आप चालू हो जाएगा और किसी भी वीडियो .आया सावन झूम के सावन की गिरती बूंदे भिगो जाती हैं सर्वस्व तन- मन तृप्त कर जाती हैं धरती की प्यास और पपीहे की धड़कन बड़ा जाती हैं सजनी की आस पिया मिलन को धड़कता मन प्यासे खेत में टपकती बूंदों को देख लरजता है किसान का मन सावन... सम्मान का अपमान - देश के एक मंत्री इस हद तक मूर्खता भी कर सकते हैं, और वो भी जयराम रमेश… पता नहीं था। गांधीजी के वे तथाकथित अनुयायी जो गांधीजी की तरफ उंगली करने पर तलवारें ...दीप्ति परमार का आलेख : नारी विमर्श और नारी लेखन के सरोकार - आदिकाल से लेकर वर्तमान समय तक नारी पर चिंतन और बहस हो रही है। यह एक ऐसा चिंतन और बहस है जो निरंतर चलती ही आ रही है जो कभी थमने का नाम नहीं लेती। समाज का... यूँ ही एक कामना - कविता - .ये जहाँ खुशगवार यूँ ही रहेहर खुशी बरक़रार यूँ ही रहे वो हँसी बार-बार यूँ ही रहे ये खुशी बस उधार यूँ ही रहे उसके दिल में बहार यूँ ही रहेअपना उजडा मज़ार यूँ ह... हाथियों का हत्यारा कौन ? - * *पिछले दिनों दुधवा नेशनल पार्क में तीन हाथियों की बिजली की हाई टेंशन तारों के कारण दर्दनाक मौत हो गयी. कुछ समय पहले ही जलपाईगुड़ी जिले में रेल की चपेट मे... घर-आँगन गूँज उठी किलकारी! - हम सभी जानते हैं कि हर दिन उजालों का मेला नहीं होता। दुर्दिन हर आदमी को इस संसार की यथार्थता का ज्ञान देर सवेर करा ही देते हैं। मैं समझती हूँ इससे हमार... गुणवत्ता बरकरार रखते हुए चित्र का आकार छोटा करें - अक्सर कई ब्लॉग पढ़ते हुए आपने देखा होगा कि ब्लॉग पोस्ट में लगी फोटो काफी देर बाद खुलती है जब कभी नेट कनेक्शन की गति धीमी हो और ब्लॉग पोस्ट की फोटो खुलने ... सी बी आई की उपयोगिता ! - अपने रोज रोज के खुलते जा रहे काले कारनामो के तले दबी हमारी केंद्र सरकार अपनी बौखलाहट निकालने की सोचरही थी । कई दिनों से अखबार में देख रही हूँ । सी बी आई बा... कुत्ते,बच्चे और चिल्लर पार्टी - हमारे मोहल्ले में वैसे बहुत से कुत्ते थे लेकिन एक खास कुत्ता था जो रोज रात को हमारे घर आता था और पापा उसके लिये रोटी रखते थे. इसी तरह गांव में भी हर टोले... मतभेद ही चैतन्यता की निशानी है। - मेरा मानना है कि जिस धर्म के अनुयायियों में जितने अधिक मतभेद हैं वह धर्म उतना अधिक जागृत है, चैतन्य है या फिर उसमें मनुष्य मात्र के कल्याण की उतनी ही अ...
2021-02-26T18:33:21Z
https://www.amarujala.com/haryana/panchkula/a-pick-up-driver-in-a-crash-hit-the-bike-killing-a-police-employee-pkl-office-news-pkl40500568
OSCAR-2109
4 arrested for threatening to kill by firing in the air | हवाई फायरिंग कर जान से मारने की धमकी देने के मामले में 4 गिरफ्तार - RED NEWS INDIA 4 arrested for threatening to kill by firing in the air | हवाई फायरिंग कर जान से मारने की धमकी देने के मामले में 4 गिरफ्तार November 19, 2021 Red News IndiaLeave a Comment on 4 arrested for threatening to kill by firing in the air | हवाई फायरिंग कर जान से मारने की धमकी देने के मामले में 4 गिरफ्तार भिवानी| पुलिस की गिरफ्त में मकान के बाहर हवाई फायरिंग करने व जान से मारने की धमकी देने के अाराेपी। एक पिस्ताैल, पांच कारतूस व वारदात में इस्तेमाल गाड़ी भी कब्जे में ली बिधवान में एक व्यक्ति के मकान के सामने हवाई फायर करने व माेबाइल पर जान से मारने की धमकी देने के मामले में पुलिस ने चार आरोपियों काे गिरफ्तार किया है। आरोपियों से पुलिस ने एक पिस्ताैल 5 कारतूस व वारदात में प्रयाेग की गई एक गाड़ी बरामद की है। बिधवान निवासी सुमित ने पुलिस काे शिकायत दी थी कि 11 नवंबर को कुछ व्यक्तियों ने उसके घर के सामने हवाई फायर किए थे और फोन पर जान से मारने की धमकी दी थी। पुलिस ने केस दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू की। बुधवार रात काे सीआईए स्टाफ-टू की टीम ने मामले में शामिल चार आरोपियों काे गांव बिधवान से गिरफ्तार गिरफ्तार किया है। पुलिस पूछताछ में आरोपियों की पहचान फतेहचंद काॅलाेनी हिसार निवासी विक्रम, साहिल, बिधवान निवासी अनिल व विद्यानगर हिसार निवासी शकील के रूप में हुई है। पुलिस ने शकील से एक पिस्टल व 5 कारतूस बरामद किए गए हैं। वारदात में प्रयुक्त गाड़ी भी पुलिस ने कब्जे में ली है। जानिए…क्या है मामला पुलिस पूछताछ में आरोपी अनिल ने बताया कि शिकायतकर्ता सुमित के साथ करीब एक महीना पहले किसी बात पर झगड़ा हुअा था। इसमें अनिल के दोस्त का हाथ तोड़ दिया था जिसका बदला लेने के लिए आरोपियों ने सुमित के घर के बाहर हवाई फायर किया था। पुलिस ने आरोपी विक्रम व साहिल को अदालत में पेश कर जिला जेल भेज दिया है जबकि आरोपी अनिल व शकील को 2 दिन के पुलिस रिमांड पर पूछताछ के लिए लिया गया है। Inverter-battery stolen in Shiva temple | शिव मंदिर में इन्वर्टर-बैट्री किया चोरी Message given to Hisarians to stay fit through cycle rally | साइकिल रैली से हिसारियंस को फिट रहने का दिया मैसेज The young man said on the block – Papa is in the hospital, the police took the call and found out if the father is at home. | नाके पर युवक बोला- पापा अस्पताल में हैं, पुलिस ने नंबर ले कॉल की तो पता चला पापा तो घर पर ही हैं
2021/12/01 09:29:23
https://rednewsindia.com/2021/11/19/4-arrested-for-threatening-to-kill-by-firing-in-the-air-%E0%A4%B9%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%AB%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%97-%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%9C%E0%A4%BE/
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MP : ऐन मौके पर इस विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने बदला प्रत्याशी, बढ़ सकती है भाजपा की मुश्किलें भोपाल/विदिशा। विधानसभा चुनाव में अब कम ही वक्त बचा है। दोनों दलों भाजपा-कांग्रेस ने 230 सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है और बड़े ही दमखम से मैदान में उतरने को तैयार है। आज नामांकन के आखिरी दिन दोनों दलों के बड़े नेता अपना-अपना नामांकन फॉर्म भरेंगें। ऐसे में ऐन मौके पर कांग्रेस ने एक सीट से अपना प्रत्याशी बदल दिया है। कांग्रेस ने विदिशा की सिरोंज विधानसभा सीट से मसर्रत शाहिद को चुनाव लड़ाने की घोषणा की है, इसके पहले कांग्रेस ने अशोक त्यागी को मैदान में उतारा था। मसर्रत आज अपना नामांकन भरेंंगी। दरअसल, कांग्रेस ने तीन दिन पहले जारी सूची में पूर्व नगर कांग्रेस अध्यक्ष अशोक त्यागी को प्रत्याशी बनाया था। उनके नाम की घोषणा होते ही नगर कांग्रेस और ब्लाक कांग्रेस के नेताओ ने खुलकर विरोध जताया था। क्षेत्र के कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भोपाल पहुंचकर वरिष्ठ नेताओं से टिकट बदलने की मांग की थी।इसी के चलते कांग्रेस ने प्रत्याशी बदलते हुए मसर्रत शाहिद को उम्मीदवार बनाया। मसर्रत इसके पूर्व भी 2003 में इस क्षेत्र से चुनाव लड़ चुकी हैं। जिसमें उन्हें पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा से शिकस्त मिली थी। मसर्रत शाहिद ने 1982 में कांग्रेस संगठन से जुड़ कर राजनीति सफर की शुरूआत की थी। वे महिला कांग्रेस की प्रदेशाध्यक्ष, दिग्विजयसिंह सिंह सरकार में महिला वित्त एवं विकास निगम की अध्यक्ष, बैंक आफ बड़ौदा की डायरेक्टर एवं मनमोहनसिंह सरकार में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक वित्त विकास निगम की राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। मसर्रत शाहिद पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह की समर्थक मानी जाती है। वही दूसरी तरफ भाजपा ने सिरोंज विधानसभा की सीट पर पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा के भाई उमाकांत शर्मा को उम्मीदवार बनाया गया है। लक्ष्मीकांत शर्मा व्यापमं घोटाले के आरोप में लंबे समय तक जेल में रहे हैं। पार्टी ने इस कारण उन्हें टिकट नहीं दिया। सिरोंज, विदिशा जिले में आता है, यह जिला मुख्यमंत्री के व्यक्तिगत प्रभाव वाला क्षेत्र है।ऐसे में लक्ष्मीकांत शर्मा के परिवार से बाहर किसी को टिकट देकर पार्टी रिस्क नहीं लेना चाहती थी, इसलिए भाई उमाकांत शर्मा को मैदान मे उतारा है, इस बार मुकाबला रोचक होने वाला है, क्योंकि इस बार मसर्रत के सामने लक्ष्मीकांत के भाई उमाकांत है। अब देखना होगा कि क्या उमाकांत अपने भाई की तरह मसर्रत को मात दे पाते है या नही। हमेशा चर्चा में रही है यह सीट पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा के कारण एमपी की सिरोंज विधानसभा सीट बहुत ही खास मानी जाती है।यहां एससी-एसटी वर्ग के वोटरों की तादाद करीब 43 फीसदी है, वहीं 38 फीसदी ओबीसी औऱ 17 फीसदी मुस्लिम वोटर्स है। इस सीट पर 1990 से 2013 तक बीजेपी का कब्जा रहा। 1980 में पहली बार बीजेपी ने इस सीट पर जीत हासिल की थी, 1993 से सिरोंज विधानसभा क्षेत्र से लक्ष्मीकांत शर्मा लगातार चुनाव जीत रहे थे। इससे पहले 1990 में बीजेपी के ही भवानीसिंह ने जीत हासिल की थी।2013 के चुनाव में गोवर्धन ने बीजेपी के लक्ष्मीकांत को 1584 वोटों से हराया था, वहीं 2008 के चुनाव में बीजेपी के लक्ष्मीकांत शर्मा ने जीत हासिल की थी। उन्होंने कांग्रेस के बुंडेल सिंह यादव को 9 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था।
2019/05/24 04:10:45
http://mpbreakingnews.in/Breaking-News/congress-has-changed-candidate-in-sironj-seat-in-mp-40373
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उत्तराखंड डीएलएड प्रवेश परीक्षा पैटर्न और पाठ्यक्रम - दैनिक जाग्रति Home » ब्लॉग » उत्तराखंड डीएलएड प्रवेश परीक्षा पैटर्न और पाठ्यक्रम उत्तराखंड डीएलएड प्रवेश परीक्षा पैटर्न और पाठ्यक्रम December 21, 2020 by Bhupender Choudhary Leave a Comment उत्तराखंड डीएलएड (Uttarakhand DElEd) प्रवेश परीक्षा, उत्तराखंड बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (UBSE) द्वारा विभिन्न सरकारी या निजी विश्वविद्यालयों में उत्तराखंड में डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रदान करने के लिए आयोजित किया जाता है| परीक्षा प्रश्न पत्र में 200 प्रश्न होते हैं, प्रत्येक प्रश्न में 1 अंक होता है| न्यूनतम 50% अंकों के साथ स्नातक की डिग्री रखने वाले उम्मीदवार डीएलएड कोर्स के लिए ऑफलाइन मोड के माध्यम से प्रवेश के लिए आवेदन करने के पात्र हैं| उत्तराखंड डीएलएड प्रवेश परीक्षा उम्मीदवारों को परीक्षा की योजना के बारे में पता होना चाहिए जो उन्हें पूछे गए प्रश्नों की संख्या, समय अवधि, स्कोरिंग पैटर्न और पाठ्यक्रम आदि से परिचित कराएगा| उत्तराखंड डीएलएड प्रवेश परीक्षा पैटर्न और पाठ्यक्रम उम्मीदवारों को एक अच्छी तरह रणनीति तैयार करने में मदद करेंगे| जो प्रवेश परीक्षा क्रैक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे| उम्मीदवार नीचे उल्लेखित लेख में उत्तराखंड डीएलएड प्रवेश परीक्षा अंकन योजना, पैटर्न और पाठ्यक्रम की जांच कर सकते हैं| उत्तराखंड डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन परीक्षा के पूर्ण प्रश्न पत्र को समझने के लिए उम्मीदवार परीक्षा पैटर्न का उल्लेख कर सकते हैं| उत्तराखंड डीएलएड प्रवेश परीक्षा के प्रश्नपत्र में गणित, अंग्रेजी, सामान्य योग्यता, सामान्य ज्ञान जैसे विषयों को शामिल किया गया है| इसके अलावा प्रत्येक विषय से 50 प्रश्न होंगे| परीक्षा के लिए कुल अंक 200 हैं और प्रत्येक प्रश्न के लिए 1 अंक दिया जाएगा और किसी भी गलत उत्तर के लिए कोई नकारात्मक अंकन नहीं होगा| इसके अलावा, प्रश्न बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) के होंग| उत्तराखंड डीएलएड प्रवेश परीक्षा के विषय और अंक विभाजन इस प्रकार है, जैसे- गणित (Mathematics) 50 50 सामान्य योग्यता (General Aptitude) 50 50 सामान्य ज्ञान (General Knowledge) 50 50 उत्तराखंड डीएलएड प्रवेश परीक्षा में उम्मीदवारों से पूछे जाने वाले विषयों की सूची इस प्रकार है, जैसे- संबंध और कार्य, लघुगणक, जटिल आंकड़े, द्विघातीय समीकरण, अनुक्रम और श्रृंखला, त्रिकोणमिति, आयताकार निर्देशांक का कार्टेशियन सिस्टम, आंकड़े, भेदभाव, तीन आयामी ज्यामिति का परिचय, सीधी रेखाएं, मंडलियां, शंकुधारी अनुभाग, क्रमपरिवर्तन और संयोजन, वैक्टर, घातांक और लघुगणक श्रृंखला, सेट और थ्योरी, संभाव्यता समारोह, सीमा और निरंतरता, डेरिवेटिव के अनुप्रयोग, अनिश्चितकालीन एकीकरण द्विपद प्रमेय, मैट्रिसेस, निर्धारकों और निश्चित इंटीग्रल आदि समान विषय प्रमुख है| विषय- अंग्रेज़ी (English)- विलोम शब्द, सक्रिय और निष्क्रिय आवाज, प्रतिस्थापन, वाक्य सुधार, समानार्थक शब्द, अक्षर विन्यास परीक्षा, प्रतिस्थापन, पैसेज पूरा करना, मुहावरे और वाक्यांश, वाक्य, समापन, त्रुटि सुधार (रेखांकित भाग), परिवर्तन, पूर्वसर्ग, वाक्य व्यवस्था, रिक्त स्थान भरें, खोलना त्रुटियां, परा पूर्णता, वाक्य जुड़ना और त्रुटि सुधार (बोल्ड में वाक्यांश) आदि समान विषय प्रमुख है| विषय- योग्यता (Aptitude)- संभावना, समय और दूरी, द्विघातीय समीकरण, असंगत अलग करें, दौड़ और खेल, संख्या और युग, औसत, क्षेत्रमिति, लाभ और हानि, नंबरों पर समस्या, पाइप और सिस्टर्न, संकेत और प्रमाण, सरल समीकरण, क्रमपरिवर्तन और संयोजन, चक्रवृद्धि ब्याज, नाव और धाराएँ, सरलीकरण और अनुमोदन, मिश्रण और आरोप, साधारण ब्याज, एलसीएम और एचसीएफ पर समस्याएं, समय और कार्य साझेदारी, ट्रेनों पर समस्या, अनुपात और अनुपात, क्षेत्रों, संस्करणों और प्रतिशत आदि समान विषय प्रमुख है| विषय- सामान्य ज्ञान (GK)- राजधानियों, युद्धों और पड़ोसियों, सामयिकी, इतिहास, पुरस्कार, लेखकों, फूल, रक्षा, संस्कृति, धर्म, बोली, गान, महत्वपूर्ण राष्ट्रीय तथ्य, विरासत और कला, नृत्य, मुद्राओं, पक्षी, जानवर, लघुरूप, खोजों, रोग और पोषण, गीत, झंडा, स्मारकों, व्यक्तित्व, स्वतंत्रता आंदोलन, प्रतियोगिताओं, विजेताओं, मामले, सामान्य नाम, पूर्ण रूपों, संस्कृति, धर्म, नृत्य, विरासत और कला, मिट्टी, नदियों, पहाड़ों, बंदरगाहों, अंतर्देशीय हारबर्स और खिलाड़ियो की संख्या आदि समान विषय प्रमुख है|
2021/09/20 06:13:58
https://www.dainikjagrati.com/%E0%A4%89%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%96%E0%A4%82%E0%A4%A1-%E0%A4%A1%E0%A5%80%E0%A4%8F%E0%A4%B2%E0%A4%8F%E0%A4%A1/
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अपनी गिरफ्तारी पर एक्ट्रेस पूनम पांडे ने सफाई दी – Legend News May 12, 2020 LegendNews 0 Comments एक्‍ट्रेस, गिरफ्तारी, पूनम पांडे, लॉकडाउन मुंबई। पिछले दिनों खबर आई कि एक्ट्रेस पूनम पांडे लॉकडाउन के नियमों धज्जियां उड़ाकर कार से अपने बॉयफ्रेंड के साथ मरीन ड्राइन पर घूमने निकली थीं, जिसके बाद उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। अब पूनम पांडे ने वीडियो शेयर कर अपने गिरफ्तार होने की खबरों पर सफाई दी है। इस वीडियो में वह कहती नजर आ रही हैं कि इस खबर में कोई सच्चाई नहीं। पूनम वीडियो में कह रही हैं, 'मैंने बीती रात बहुत सारी फिल्में देखीं। मैंने बैक-टु-बैक तीन फिल्में देखीं, जो काफी मजेदार थीं। मुझे बीती रात से ही लोग यह जानने के लिए कॉल कर रहे हैं कि मैं अरेस्ट हो गई और फिर मैंने खबर भी देखी। प्लीज, मेरे बारे में ऐसी बातें न लिखें। मैं घर पर हूं और बिल्कुल ठीक हूं। आप सबको प्यार।' कहा जा रहा था कि लॉकडाउन का उल्लंघन करने के आरोप में मुंबई पुलिस ने पूनम पांडे को रविवार को गिरफ्तार किया गया है और उनकी BMW कार भी जब्त कर ली गई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि मुंबई पुलिस ने पूनम और उनके बॉयफ्रेंड सैम अहमद को रविवार शाम को मरीन ड्राइव के पास से गिरफ्तार किया गया। कहा जा रहा था कि ये दोनों लॉकडाउन के बावजूद अपनी कार से घूमने निकले थे। बताया गया था कि इन दोनों के खिलाफ नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। पूनम सोशल मीडिया अकाउंट पर अपनी सेंसेशनल तस्वीरों और वीडियो पोस्ट करने के लेकर हमेशा सुर्खियों में बनी रहती हैं।
2021/08/04 19:13:43
https://legendnews.in/actress-poonam-pandey-gave-clarification-on-her-arrest/
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Narendra Modi:shiv sena compares pm modi with alexander, napoleon|शिवसेना ने सिकंदर से की PM मोदी की तुलना - Navbharat Times शिवसेना ने सिकंदर से की PM मोदी की तुलना ANI | Updated: Apr 17, 2017, 05:45PM IST और जानें: नरेंद्र मोदी | Shiv Sena | Saamna | Prime Minister | PDP | Narendra Modi | Napolean | BJP | Amit Shah | Alexander PM मोदी पर शिवसेना का निशाना शिवसेना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना सिकंदर से की है। अपने मुखपत्र सामना में शिवसेना ने वर्तमान सरकार के कार्यकाल की तुलना सिकंदर और नेपोलियन जैसे शासकों से करते हुये मोदी पर निशाना साधा। सामना के संपादकीय में लिखा है, हमारा ऐसा मानना है कि स्वर्णिम युग किसी एक पार्टी के लिये नहीं, बल्कि पूरे राज्य या देश के लिये होना चाहिये। सिकंदर महान और नेपोलियन भी अपने राजनीतिक जीवन में दुनिया नहीं जीत पाये थे। मुखपत्र में जम्मू-कश्मीर की PDP-BJP गठबंधन की सरकार पर घाटी में हिंसा पर लगाम लगाने में असफल होने और लचर कानून-व्यवस्था का आरोप भी लगाया गया है। गठबंधन सरकार को हाल ही में श्रीनगर उपचुनाव में हुई हिंसा, मतदान का काफी कम प्रतिशत और भारतीय सेना के साथ दुर्व्यवहार के लिये दोषी ठहराया गया है। गौरतलब है कि पार्टी ने यह रुख प्रधानमंत्री मोदी के एक दिन पहले दिये गये इस बयान के बाद जाहिर किया है कि हम न केवल BJP का विकास चाहते हैं, बल्कि देश को आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से स्थिर बनाना भी हमारी प्राथमिकता है। हालांकि, शिवसेना ने आगामी चुनावों के लिये PM मोदी और BJP अध्यक्ष अमित शाह की कड़ी मेहनत और लगन की तारीफ करते हुये यह भी कहा ज्यादातर राज्यों में पार्टी को अच्छी और प्रेरणादायक जीत मिली है।
2017/10/23 00:25:41
https://navbharattimes.indiatimes.com/metro/mumbai/politics/shiv-sena-compares-pm-modi-with-alexander-napoleon/articleshow/58224092.cms
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muradabad gangrape | यूपी: छेड़खानी और रेप की धमकी देने की शिकायत का बदला गैंगरेप Wednesday, 8 April 2015 6:41 AM उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पुलिस की सुस्ती के चलते आरोपियों के हौसले बुलंद हैं. रामपुर की एक नर्स ने पिछले हफ्ते पांच लोगों के खिलाफ छेड़खानी और रेप की धमकी का केस दर्ज करवाया था, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की.
2017/08/18 01:06:24
http://abpnews.abplive.in/videos/muradabad-gangrape-2-170223
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Jammu & Kashmir: केंद्र सरकार पर निशाना साधने की कोशिश में बिगड़े महबूबा मुफ्ती के बोल, देने लगी धमकी, Mehbooba Mufti threatening to central government Again Home » देश » Jammu & Kashmir: केंद्र सरकार पर निशाना साधने की कोशिश में बिगड़े महबूबा मुफ्ती के बोल, देने लगी धमकी Written by: Newsroom Staff November 17, 2020 2:20 pm नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद से जहां एक ओर वहां के क्षेत्रीय राजनीतिक दल केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले खड़े हैं। वहीं पीडीपी की नेता महबूबा मुफ्ती अपनी नजरबंदी से रिहाई के बाद से लगातार ऐसा बयान दे रही हैं जो विवाद का कारण बन जा रहा है। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती प्रदेश की जनता को लगातार भड़का रही। अब महबूबा ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यहां के भौगोलिक स्थिति को बदलने का प्रयास किया जा रहा है। यहां के स्थानीय लोगों के साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। महबूबा ने तो लोगों को भड़काते हुए यह तक कह दिया कि केंद्र सरकार यह कोशिश कर रही है कि यहां के मुस्लिम बहुल इलाकों से मुसलमानों को बाहर किया जाए, इसके लिए ही इस तरह के कदम उठाए जा रहे हैं। भाजपा पर निशाना साधते हुए महबूबा मुफ्ती ने कहा कि केंद्र सरकार एक साजिश के तहत जम्मू-कश्मीर का डेमोग्राफी बदल देना चाहती है। महबूबा ने आगे इस पर बोलते हुए वहां के स्थानीय लोगों से कहा कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में बंटवारे की राजनीति के तहत ये सब कर रही है ताकि यहां की आवाम को आपस में लड़ाया जा सके। इतना ही नहीं केंद्र सरकार की यहां के लिए जारी नीतियों पर कटाक्ष करते हुए महबूबा ने कहा कि उनकी तरफ से यह प्रयास किया जा रहा है कि यहां के मुस्लिम बहुल इलाकों से मुसलमानों को समाप्त कर दिया जाए। आपको बता दें कि धारा 370 घाटी से हटाए जाने के एक साल बाद केंद्र सरकार की तरफ से एक नोटिफिकेशन जारी किया गया और बताया गया कि अब घाटी के बाहर के लोग भी यहां जमीन की खरीदी कर सकते हैं। Visited Gujjar families in Lidroo, Pahalgam today. J&K admin's 'demolition drive' has rendered them homeless & that too in peak winter time. The systematic targeting of Nomads throughout J&K is being justified under the guise of 'illegal occupation' https://t.co/zrNUgQbKci — Mehbooba Mufti (@MehboobaMufti) November 16, 2020 महबूबा मुफ्ती ही नहीं जिस गुज्जर बकरवाल समुदाय को वहां की लगभग हर क्षेत्रीय पार्टी ने अपने शासन में हमेशा हाशिए पर रखा। अब उनको लेकर वहां के क्षेत्रीय दलों के अलावा महबूबा मुफ्ती भी हमदर्दी दिखा रही हैं। महबूबा ने यहां के स्थानीय लोगों को डर दिखाते हुए कहा कि भारत के अन्य लोगों को यहां बसाने के लिए केंद्र सरकार नोटिफिकेशन ले आई है। जिसके जरिए केंद्र सरकार यहां के लोगों को भगाना चाहती है। उन्होंने आगे मुसलमानों को भड़काते हुए कहा कि केंद्र सरकार अगर अभी भी नहीं इससे बाहर निकली तो इसके खतरनाक अंजाम भुगतने पड़ सकते हैं। आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर में जिला विकास परिषद का चुनाव होना है। घाटी में होनेवाले स्थानीय निकाय चुनाव की तारीख 28 नवंबर से 19 दिसंबर तक निश्चित की गई है। वहीं घाटी में अगले कुछ दिनों में जिला विकास परिषद की सीटों के लिए मतदान कराया जाना है। इन चुनावों में महबूबा मुफ्ती की पीडीपी, फारूक अब्दुल्ला की एनसी और अन्य स्थानीय पार्टियों सहित कांग्रेस इस बार पीपल्स अलायंस फॉर गुपकार के घटक दल के रूप में इस चुनाव को लेकर मैदान में उतर रही हैं। ऐसे में इस अलायंस का सीधा मुकाबला बीजेपी से है।
2021/01/26 09:43:03
https://hindi.newsroompost.com/india/mehbooba-mufti-threatening-to-central-government-again/566912.html
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इजरायल चुनाव में किंगमेकर बनी इस्लामिक पार्टी, राम नाम ने किया हैरान - Islamic party Ram becomes kingmaker in Israel election इजरायल चुनाव में किंगमेकर बनी इस्लामिक पार्टी, 'राम' नाम ने किया हैरान इजरायल के चुनाव में बेंजामिन नेतन्याहू को बहुमत हासिल करने के लिए 61 सीटों की जरूरत होगी. इजरायल (Israel) की संसद में कुल 120 सीटें हैं. नेतन्याहू की पार्टी लिकुड और उसके सहयोगी दलों को 59 सीटें मिलती हुई दिख रही हैं. इस चुनाव में बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) को बहुमत हासिल करने के लिए 61 सीटों की जरूरत होगी. Last Updated: March 25, 2021, 10:23 AM IST तेल अवीव. इजरायल के चुनाव (Israeli Elections) से पहले जिस बात की संभावना जताई गई थी वैसा ही परिणाम भी सामने आया. चुनाव (Elections) में कांटे की टक्‍कर के बीच राम नाम की एक इस्‍लामिक पार्टी (Islamic Party) किंगमेकर बनकर उभरी है. बता दें कि इजरायल की संसद में कुल 120 सीटें हैं. गुरुवार सुबह तक 90 प्रतिशत वोटों की गिनती हो चुकी है और नेतन्याहू की पार्टी लिकुड और उसके सहयोगी दलों को 59 सीटें मिलती हुई दिख रही हैं. इस चुनाव में बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) को बहुमत हासिल करने के लिए 61 सीटों की जरूरत होगी. बता दें कि यूनाइटेड अरब लिस्ट को हिब्रू में राम कहा जाता है. इस बार के चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के गठबंधन और विरोध पार्टी के बीच कांटे की टक्‍कर देखने को मिल रही है. नेतन्‍याहू की पार्टी को जहां 59 सीट मिलती दिखाई दे रही है तो वहीं विरोध पार्टी को 56 सीटें मिलती दिख रहीं हैं. ऐसे में इजरायल की राम पार्टी पर दोनों बड़ी पार्टियों की नजर है. कहा जा रहा है कि चुनाव में राम पार्टी को कम से कम 5 सीटें मिल सकती हैं. ऐसे में अगर राम पार्टी नेतन्याहू की पार्टी लिकुड को समर्थन देती है तो प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू एक बार फिर सत्‍ता में वापसी कर सकते हैं. इसे भी पढ़ें :- इजराइल चुनाव में नेतन्याहू ने 'बड़ी जीत' का किया दावा, बहुमत पर संशय बरकरार प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की राह इतनी भी आसान नहीं इजरायल में जिस तरह के चुनावी समीकरण बन रहे हैं उसे देखने के बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की राह इतनी भी आसान नहीं दिखाई दे रही है. बेंजामिन नेतन्याहू अपने कट्टर राष्ट्रवादी विचारधारा के लिए जाने जाते हैं. नेतन्‍याहू फिलिस्‍तीनियों को अधिक छूट दिए जाने या फिर गाजा पट्टी में इजरायली कॉलोनियों के विस्‍तार को रोके जाने के खिलाफ रहे हैं. इसके विपरीत राम पार्टी का इन मुद्दों पर दूसरा नजरिया रहा है. ऐसे में दो अलग अलग विचारधारा की पार्टी साथ आएगी या नहीं ये तो आने वाला समय ही बताएगा. इजरायल में राम पार्टी का क्‍या है अस्तित्‍व इजरायल में किंगमेकर बनकर उभरी राम पार्टी मूलरूप से अरब के लोगों का नेतृत्व करने का दावा करती है. यहूदी बहुल इजरायल में मुस्लिमों की संख्‍या काफी कम है. मुस्लिमों में भी एकता की कमी है और वह अलग अलग पार्टी को समर्थन देते हैं. ऐसा पहली बार हुआ है जब इजरायल के चुनाव में फिलिस्तीन और अरब देशों के साथ अच्छे रिश्ते रखने के समर्थक राम पार्टी को पांच सीटों के मिलने के बराबर वोट मिला है और वह ऐसी स्थिति में है कि सरकार बनाने के लिए सभी पार्टियां उनकी ओर नजर जमाए हुए हैं.
2021/05/10 19:41:46
https://hindi.news18.com/news/world/islamic-party-ram-becomes-kingmaker-in-israel-election-3534508.html
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AMBA CHARAN VASHISHTHA | अम्बा चरण वशिष्ठ: हास्‍य–व्‍यंग पढि़ये विज्ञापन और त्‍यागिये आत्‍महत्‍या का इरादा हास्‍य–व्‍यंग पढि़ये विज्ञापन और त्‍यागिये आत्‍महत्‍या का इरादा पढि़ये विज्ञापन और त्‍यागिये आत्‍महत्‍या का इरादा रोज़ बढ़ रहे आत्‍महत्‍या के मामलों को पढ़ कर बड़ा दु:ख होता है। ऐसा लगता है कि ऐसा कायराना कदम उठाने वाले व्‍यक्ति टीवी नहीं देखते व अखबार नहीं पढ़ते। पर आज के युग में यह सम्‍भव नहीं लगता। तो फिर ऐसा लगता है कि वह लोग ध्‍यान से इन मीडिया माध्‍यमों में प्रकाशित व प्रसारित विज्ञापनों को नहीं पढ़ते या देखते। यदि देखते हैं तो ऐसा लगता है कि वह उन पर ध्‍यान नहीं देते। या फिर यह कह सकते हैं कि वह उनको ठीक तरह से समझ नहीं पाते। हमारे विज्ञापनों में तो हर मर्ज़ की दवा हाजि़र है। हर समस्‍या का हल है। विज्ञापनों में बताये रास्‍ते पर चल कर क्‍या वस्‍तु है जिसे आप पा नहीं सकते? मुझे तो दु:ख व हैरानी होती है जब मैं समाचार पढ़ता हूं कि किसी लड़के या लड़की ने आत्‍महत्‍या कर ली क्‍योंकि वह परीक्षा में पास न हो सके या उतने नम्‍बर नहीं आये जितनी कि उनको उम्‍मीद थी या चाहते थे। यह तब होता है जब बच्‍चों या उनके मां-बाप ने वह विज्ञापन नहीं पढ़ा-सुना होता जिसमें सौ प्रतिशत पास होने की गारण्‍टी दी होती है। कई तो मनचाहे नम्‍बर मिलने का भी वादा करते हैं। आपका बच्‍चा आठवीं में फेल हो गया तो क्‍या?अनेक संस्‍थाये उन्‍हें अगले ही साल मैट्रिक करवा देने की गारण्‍टी देती हैं। तो फिर माता-पिता और उनके अभिवावकों को और क्‍या चाहिये? वह क्‍यों उन संस्‍थाओं से सम्‍पर्क कर अपने बच्‍चों का भविष्‍य नहीं सुधार लेते और उनकी कीमती जीवन बचा लेते? कई लोगों को यह गिला रहता है कि जीवन नीरस है। तब मैं उनकी अज्ञानता पर हंसता हूं। कहां है जीवन नीरस। आप घर में, बाहर, सड़क पर, खेत में, खलिहान में, रैस्‍तरां में, होटल में, पूजास्‍थलों में, और कहां नहीं, गीत-संगीत ही तो है। आपके घर में रेडियो पर, टीवी पर, आपके मोबाइल फोन पर गाना और नाच ही तो है। वर्डसऐप और इन्‍स्‍टाग्राम पर तो आपको मनमोहक तस्‍वीरें, चुटकले, प्रेरणादाय‍क विचार भी मिलते हैं। तो आप कैसे कह सकते हैं कि आपका जीवन नीरस है? आजका जीवन जितना संगीतमय है उतना तो कभी रहा ही नहीं। आपने देखा नहीं कि लड़के-लड़कियां और अन्‍य लोग भी सड़क पर, स्‍कस्‍कॅटर-कार में, यहां तक कि स्‍कूल-कालिज में भी अपने कान में मोबाईल के प्रकरण लगा कर घूमते-फिरते संगीत का आनन्‍द लेते जाते हैं और किसी को डिस्‍टर्ब भी नहीं करते। यही तो उनकी शालीनता है। जो अपने आपको अकेला महसूस करते हैं, उनके लिये तो और भी आकर्षक ऑफर हैं। मोबाइल के माध्‍यम से आप सैंकड़े-हज़ारों दोस्‍त बना सकते हैं। वह तो बस आपके फोन की प्रतीक्षा में रहते हैं। आप लोगों से — आपकी मर्जी़ के अनुसार, महिला व पुरूषों से, लड़कों-लड़कियों से — मीठी-मीठी बातें कर सकते हैं। फलर्ट भी कर सकते हैं। कोई मनाही नहीं है। कुछ कम्‍पनियों ने तो ऐसा भी प्रावधान कर रखा है कि आप चाहें तो किसी भी पुरूष-महिला से अपना नम्‍बर छुपा कर भी उन पर अपना दिल उंडेल सकते हैं। । बस आपको इसके लिये कुछ शुल्‍क देना पड़ेगा। किसी होटल या डांस बार में चले जाइये, वहां किसी के साथ भी आप डांस कर सकते हैं। अभी कुछ सालों से और भी मज़े लग गये हैं। आप इसी एक जीवन में टू-इन-वन मज़े लूट सकते हैं। अब तो व्‍यक्ति के पास एक ही जीवन में दो-दो लाइफ हो गई हैं — एक डे-लाइफ और एक नाइट-लाइफ। दिन को दोपहर तक सोइये। बाद दोपहर काम कीजिये और नाइट-लाइफ का लुत्‍फ उठाकर रात को हसीन-रंगीन कीजिये। पहले कहते थे कि रात को तो चोर-डाकू और लुटेरे ही जागते और अपना धंधा करते हैं पर अब तो शालीन लोग भी रात के मज़े उठाते हैं। आप जवान हैं पर आपका कद छोटा रह गया। कोई चिन्‍ता नहीं। अनेकों व्‍यक्ति और संस्‍थान हैं जो आपका कद शर्तीया बढ़ाने वरन् पैसे लौटाने का वादा करते हैं। इसी प्रकार कई दुबले-पतले होते कई बिलकुल कमज़ोर। कई बहुत मोटे होते हैं। सब के लिये दवा का विज्ञापन आपको अनेकों ऑटो के पीछे लिखा मिलेगा। सबको ताक़त, स्‍फूर्ति और जवानी मिल जाती होगी। फिर चिन्‍ता किस बात की? समस्‍या यह है कि कइयों को तो चिन्‍ता होती है कि उन्‍हें ऋण चाहिये होता है और कइयों को लिया हुआ ऋण लौटाना होता है। कोई समस्‍या नहीं। आजकल तो बैंक विज्ञापन देते हैं और मोबाइल पर जनता से ऋण लेने के लिये स्‍वयं आग्रह करते हैं। आप बस किसी बैंक के कान में यह सूचना डलवा दीजिये कि कि आप कुछ लाख या करोड़ का ऋण लेना चाहते हैं। या महंगी कार या बड़े मकान के लिये उधार लेने की सोच रहे हैं। फिर देखिये कमाल। ऋण देने वालों की आप के घर के सामने कतार लग जायेगी। आपका माबाईल तो बस बजता ही रहेगा। आप परेशान हो जायेंगे। ब्‍याज की दर पर भी बैंकों में स्‍पर्धा रहती है। सब कहते हैं कि हमारे से सस्‍ते ब्‍याज पर कोई ऋण दे ही नहीं सकता। अब तो ऐसे ऐप भी निकल आये हैं जिससे आप स्‍वयं अन्‍दाजा लगा सकते हैं कि आपको कितना ऋण मिल सकता है। यदि आपने ऋण लिया हुआ है तब भी उसकी कोई परेशानी नहीं। समस्‍या यही है न कि आप ऋण वापस लौटा नहीं सकते और ब्‍याज की सूई है कि थमने का नाम नहीं लेती। आप चुनाव तक प्रतीक्षा कीजिये। सभी राजनीतिक दल आपका ऋण मॉफ करने का वादा करेंगे। यदि आपकी त्‍वचा का रंग काला है तो आप परेशान क्‍यों हैं? आपको अपना मुंह छुपाने की कोई ज़रूरत नहीं। बाज़ार में अनेकों क्रीमें उपलब्‍ध हैं जो आपके प्राकृतिक सौंदर्य पर काली परतों को हटा कर आपका असली रंग-रूप सामने ला देंगे। तब आप साधारण युवक व युवती नहीं कोई फिल्‍मी स्‍टार दिखेंगे। लोग तो क्‍या आप स्‍वयं भी अपने आपको पहचान न पायेंगे। तब आप स्‍वयं ही अपने आप को कोसने लगेंगे कि आपने अपनी सुन्‍दरता इतने सालों तक लोगों से छिपाई क्‍यों रखी। तब आपको उस क्रीम का ''थैंक यू'' तो करना ही पड़ेगा। यही नहीं। अब तो मर्दों व महिलाओं के लिये अलग-अलग क्रीमें ईजाद हो गई हैं। प्रतीक्षा तो केवल यह है कि आप कब इसका उपयोग करते हैं। आप बेकार हैं। आपको नौकरी नहीं मिल रही। आप परेशान हैं। आपको सारी रात नींद नहीं आती। आपके माता-पिता भी परेशान हैं। महाशय, मैं मानता हूं कि आप बेकार हैं पर आप परेशान भी बेकार में हैं। हमारे यहां तो अनेक ऐजैन्सियां हैं जो आपको आपकी मनचाही नौकरी दिलाने के लिये बेकरार बैठी हैं। आपको मुंह मांगा वेतन दिलाने को तैय्यार हैं वह भी अपके मनचाहे स्‍थान पर। यही नहीं। अब तो आपको घर बैठे काम करने की सुविधा भी मिल सकती है। काम का काम, आराम का आराम। जब चाहे तो काम कीजिये और जब आपका दिल चाहे तो आराम। आप उनसे सम्‍पर्क तो कीजिये। हां, जेब तो ढीली करनी ही पड़ेगी। शुभ कार्य केलिये ऐसा तो करना ही पड़ता है। आप किसी पूजास्‍थल पर कोई मन्‍नत मांगने जाईये वहां भी कुछ तो चढ़ावा चढ़ाना ही पड़ता पड़ता है। ऊपर से यह भी वादा करना पड़ता है कि काम हो गया तो फिर दर्शन करू़गा। इतने कंजूस और मक्‍खीचूस तो मत बनिये यदि आपको जीवन में कुछ पाना है, कुछ कर दिखाना है। यदि अभी तक आपकी शादी नहीं हुर्ई तो दु:खी रहने की क्‍या बात है? दुनिया में अनेक महानुभाव हैं जिनकी शादी हुई नहीं या जिन्‍होंने शादी करवाई नहीं। फिर उन्‍होंने अपनाभी खूब नाम बनाया है। हमारे महान् नेता राहुल गांधी जी और प्रसिद्ध अभिनेता सलमान खां को ही लीजिये। अभी तक उनकी शादी हुई नहीं या उन्‍होंने की नहीं, वह खुश हैं। मज़े में हैं। जब उनके चाहने वाले चिन्‍ता करते हैं और पूछते हैं तो वह खुश होकर कहते है कि समय आने पर करेंगे। तो आप स्‍वयं क्‍यों इतने परेशान हैं? पर यह भी सच है कि आप उनकी तरह बड़े और महान् तो हैं नहीं। उनके पीछे तो अनेक लोग हैं जो उनका जीवन साथी बन धन्‍य हो जाने के लिये तैय्यार बैठे हैं। उनकी हां की प्रतीक्षा सालों से कर रहे हैं। इसके लिये वह कुछ भी कुर्बानी देने को तैय्यार बैठे हैं। पर आप उनकी तरह बड़े दिल वाले हो नहीं सकते हैं। पर तब आपके लिये विभिन्‍न पत्र-पत्रिकाओं के मैट्रीमोनियल कालम खुले पड़े हैं। करिये उनका उपयोग। पा लीजिये अपने सपनों का जीवन साथी और सारे जीवन के लिये सुखी हो जाईेये। न हो तो आप अनेकों मैट्रीमोनियल साईटों पर जा सकते हैं। मनचाहा जीवन साथी ढूंढ सकते हैं। उनसे मिल सकते हैं। ठोक-बजा कर अपना निर्णय ले सकते हैं। आपके सारे सपने साकार हो जायेंगे। आप किसी बीमारी से ग्रसित हैं। बहुत दु:खी हैं तो व्‍यर्थ में। कौनसी बीमारी है जिसका इस दुनिया में इलाज नहीं है? आपके पास तो ढेर सारे विकल्‍प हैं। कई इश्‍तहार देकर दावा करते हैं कि वह बेइलाज बीमारियों को जड़ से उखाड़ कर फैंक देते हैं। जिन्‍हें डाक्‍टरों व अस्‍पतालों ने भी मना कर दिया है, कई लोग उनके जीवन में भी उम्‍मीद की आग जला देते हैं। टूटे हुये अंग जोड़ देने का विश्‍वास दिलाते हैं। कई लोगों को सन्‍तान न हो पाने के कारण न दिन को चैन है और न रात को नीन्‍द। परेशान वह लोग हैं जिन्‍होंने इश्‍तहार नहीं पढ़े। अनेकों व्‍यक्ति व संस्‍थान हैं जो उनकी दवाई खाने व उनके द्वारा उपाये सुझाने के बाद अपने आंगन में बच्‍चों की किलकारियां सुनने के सौभाग्‍यशाली हो चुके हैं। बात तो अच्‍छी राय सुनने और उस पर अमल करने की है। इस लिये मेरी तो सब महानुभावों से प्रार्थना है कि आत्‍महत्‍या की सोचने और अपने कीमती जीवन को गंवाने से पूर्व टीवी पर जो विज्ञापन प्रसारित होते हैं और विभिन्‍न पत्र-पत्रिकाओं में जो इश्‍तहार छपते हैं, उन्‍हें ध्‍यान से पढ़ने का कष्‍ट अवश्‍य करें। मुझे पूरा विश्‍वास है कि आप आत्‍महत्‍या का अपना इरादा ज़रूर बदल देंगे और इस देश और समाज की सेवा करते रहेंगे। ***
2022/05/19 09:51:24
http://www.acvashishtha.com/2017/06/blog-post.html
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क्यों अपने आप से युगल थेरेपी जा रहे हैं फिर भी मदद कर सकते हैं मनोविज्ञान दुनिया यह ब्लॉग अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन के मनोविश्लेषण (3 9) के डिवीजन की आवाज को बताता है। डैरेन हेबर, एमए, एमएफटी, लॉस एंजिल्स में मनोचिकित्सक, इस पोस्ट को प्रस्तुत करते हैं। स्रोत: ओलिंपिक / शटरस्टॉक ऐसा अक्सर होता है: एक संभावित ग्राहक, आमतौर पर महिला, यह देखने के लिए कि क्या मैं जोड़ों को परामर्श देता हूँ मैं कहता हूँ हाँ, हम एक नियुक्ति सेट करते हैं, वह रद्द करने के लिए वापस बुलाती हैं। कारण? उसके साथी का मानना ​​है कि परामर्श अनावश्यक है या आने के लिए तैयार नहीं है। अगर उसके साथी के दिल में बदलाव हो, तो वह फिर से संपर्क में आ जाएगी। आम तौर पर इसका अंत है, लेकिन कभी-कभी मैं अनुवर्ती हूं, और मुझे बताया गया है कि रिश्ते समाप्त हो गए हैं। अब मैं निश्चित निष्कर्ष पर आया हूं कि जिस व्यक्ति को कॉल किसी भी तरह से आने से लाभ होगा, उसके साथी के साथ या बिना। पर क्यों? आखिरकार, यह वह नहीं है जो वह चाहती है वह रिश्ते पर काम करना चाहती है- और ऐसा कैसे हो सकता है यदि उसका साथी उसके साथ नहीं जुड़ता? सिवाय इसके कि वह आधे रिश्ते हैं, इसलिए कोई भी परिवर्तन वह स्वयं में बना सकता है- यह नया व्यवहार, भावनाओं या व्यवहार-सीधे दूसरे व्यक्ति को प्रभावित करेगा, संभावित रूप से उसे नए गतिशील को समायोजित करने के लिए प्रेरित करेगा अमेरिकी मिथक व्यक्तिवाद केवल यही है- एक मिथक हमारे पास स्वायत्तता है, हाँ, लेकिन नि: शुल्क फ्लोटिंग, अलग "इकाइयां" नहीं हैं। हम दोस्तों, परिवार, सहकर्मियों, सहयोगियों, यहां तक ​​कि प्राकृतिक दुनिया के साथ भी संबंध में रहते हैं। हम कैसे प्रकृति, हम जिस तरह से चलते हैं या सार्वजनिक रूप से व्यवहार करते हैं, इसका सबका दूसरों पर पड़ता है और हम इसे आकर्षित करने के लिए करते हैं जो हम "बढ़ावा" करते हैं, होशपूर्वक या अन्यथा हमारे रिश्तों को अधिक दयालुता और संवेदनशीलता लाने का सबसे अच्छा तरीका दूसरों को दयालुता और सहानुभूति के साथ व्यवहार करना है, और उचित सीमाएं निर्धारित करते हैं, जब दूसरों ने हमें सम्मानपूर्वक व्यवहार करने में विफल रहता है आसान किया से कहा, विशेष रूप से जब आपको लगता है कि आपके प्रयासों के बावजूद आप सम्मान नहीं लौट रहे हैं। यही वजह है कि किसी के साथ उन प्रयासों के बारे में बात करना, वे कैसे और क्यों जारी रहें, इसके बारे में मददगार हो सकते हैं। क्योंकि चिकित्सक (या विश्वसनीय दोस्त या सलाहकार) अब "सिस्टम" का हिस्सा एक आउटलेट के रूप में है, और फैलाना तनाव में मदद कर सकता है। परिप्रेक्ष्य: यादें और अनुभव में अंतर निर्माता हम आज के एक दूसरे से जुड़ी दुनिया में एक-दूसरे के साथ मिलकर रहते हैं। एक सरल उदाहरण लेने के लिए, ऐसी स्थिति को याद करें जहां आपको किसी मित्र से गुस्सा आना पड़ा या किसी को पसंद किया गया था, यद्यपि आप यह नहीं समझ पाए हैं कि समस्या किसकी है मान लें कि आपने एक दोस्त को कुछ पैसे दिए हैं। वह उसे वापस भुगतान करने में विफल रहता है यह किसकी गलती है? क्या यह दूसरा व्यक्ति है, जो अक्सर ऋण लेता है और वापस भुगतान नहीं करता है या खुद को, यह भूलकर कि यह व्यक्ति कभी भी भुगतान नहीं करता है और एक अलग परिणाम की अपेक्षा करता है? क्या उन्होंने फायदा उठाया, या आप उदार थे? शायद यह कठोर होने की तरह लगता है, सिवाय इसके कि यह दूसरा व्यक्ति वास्तव में संघर्ष कर रहा है। तो क्या इसका मतलब यह है कि आप कंजूस होते हैं? सिवाय पैसा पेड़ों पर नहीं जाता है। और इसी तरह। । । एक और जटिल उदाहरण में आपके साथी के साथ यौन संबंध शामिल होता है: शायद हाल ही में इसमें बहुत कम है, इच्छा के अभाव में प्रतीत होने वाले कारण (कहें); किसी कारण से आप विशेष रूप से आपके साथी को आकर्षित नहीं महसूस कर रहे हैं। लेकिन शायद यही वजह है कि उनकी इच्छा अजीब तरह से अनुपस्थित रही है, और ये आपकी तरफ एक स्पंज के रूप में काम करते हैं। या उनकी इच्छा कम है क्योंकि आप ज्यादा दूर महसूस कर रहे हैं? कौन इसे शुरू किया? कौन इसे "ठीक" कर सकता है? और क्या तय करने की जरूरत है? और इसी तरह। । । मेरे काम की ज्यादातर चिंता व्यसनों के साथ संघर्ष करने वालों के साथ होती है। जब भी कोई व्यक्ति मुझे फोन करता है क्योंकि उनके साथी के पास ड्रग्स, अल्कोहल, अश्लील साहित्य आदि के साथ संभावित समस्या है, पहली बात मैं करता हूं कि वे आकर उनसे बात करें, भले ही भागीदार नहीं कर सकता या नहीं । ज्यादातर समय, यह विचार मजबूत प्रतिरोध से मिलता है: "मैं ठीक हूं, यह (या उसकी) है …" तो इसके साथ समस्या क्या है? सबसे पहले, व्यक्ति को कॉलिंग अक्सर बदलने के लिए अधिक प्रेरित है, कम से कम लत या संभावित लत के साथ एक से अधिक। इसके अलावा, जो कुछ भी कॉलर सुधारने या बंद करने के लिए कर रहा है, कहा जाता है कि व्यसन काम नहीं कर रहा है, या वे कॉल नहीं करेंगे, भले ही वे कोशिश करते रहें अजीब मजबूर महसूस करते हैं यह लगभग ऐसा ही है कि यह व्यवहार स्वयं नशे की लत है, जो साथी की लत को सुधारने या नियंत्रित करने के प्रयास में है। यह, बदले में, नशे की लत साथी को गुस्सा करता है, जो पीने या नशीली दवाओं के दुरुपयोग के लिए एक ट्रिगर बन जाता है। इससे दूसरे व्यक्ति को चोट लगी है और नाराज होता है, जिसके कारण अधिक बहस हो जाती है, अधिक मदिरा या प्रयोग होता है, तो अधिक दोष और क्रोध होता है और चक्र जारी रहता है। वही सच है, जहां एक व्यक्ति को क्रोध, PTSD, अवसाद, चिंता, या अन्य भावनात्मक संघर्षों के साथ कोई समस्या है, जो प्रभाव से संबंधित है। वास्तव में, क्योंकि हम परिचित (प्रोआइ और कॉन के दोनों तरीकों से) के लिए इतने आकर्षित हुए हैं, तो हम उन भागीदारों की तलाश कर सकते हैं जो हमारे ऐतिहासिक अनुभव से मेल खाते हैं; तो हमारा पार्टनर अनजाने में बचपन को ट्रिगर कर सकता है जिससे हम इतनी बुरी तरह से बचने और / या "सही" बनना चाहते हैं। कौन इसे शुरू किया? कौन इसे रखता है? कौन कौन कर रहा है? इन प्रश्नों में फंसना आसान है, और उत्तर पार्स करने के बारे में अंतहीन चर्चा है। अंत में, ज्यादातर जोड़ों का कहना है, "कौन परवाह करता है?" लेकिन बेहतर सवाल यह है, "इस स्थिति को बेहतर बनाने के लिए मैं खुद क्या कर सकता हूं? मैं समग्र रिश्ते, समर्थक और सहानुभूति में कैसे योगदान कर रहा हूं? "उन भागीदारों के साथ या बिना उन योगदानों को संबोधित करने के लिए-एक प्रभाव होगा घनिष्ठ संबंध जटिल हैं क्योंकि मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक ओवरलैप, ग़ैर-भाविक भावनाओं, अंतर, निहित या मिश्रित संदेश आदि के बीच बातचीत करने के लिए बहुत कुछ है। इसके अलावा, एक चार्ज की स्थिति से प्रतिक्रिया उत्पन्न होती है , जिससे कि प्रत्येक साथी दूसरे की प्रतिक्रिया पर प्रतिक्रिया लेना शुरू कर देता है, जिससे भ्रम पैदा हो जाता है। किसी भी नए व्यक्तिगत व्यवहार में चक्र को तोड़ने की क्षमता है उस चक्र को तोड़ने से, यहां तक ​​कि एक सूक्ष्म-राशि भी, हमारे इतिहास एक बार फिर से लिखा जाता है, एक पत्र। यही कारण है कि जोड़े सलाह लेने से पहले व्यक्तिगत काम कभी-कभी भी अनुशंसित होते हैं, ताकि प्रत्येक व्यक्ति अपने स्वयं के व्यक्तिपरक भावनात्मक भावनाओं और प्रतिक्रियाओं को समझने लगे। वे सीखते हैं कि वे नए व्यवहार कैसे कर सकते हैं, जिससे वे दोष, बचाव, और आलोचना को बनाए रखने के बजाय समाधान सुलझाने में सहायता कर सकते हैं। ये नकारात्मक व्यवहार अंतरंगता के लिए विनाशकारी हैं, जिसके लिए भेद्यता, कोमलता, अनिश्चितता की सहनशीलता और धैर्य की आवश्यकता होती है। अक्सर, उपचार के लिए नए लोगों को बाद में कठिनाई होती है, सिस्टम में परिसंचारी घबराहट, शर्मिंदगी और अन्य दर्दनाक भावनाओं की तीव्रता को देखते हुए। (और हम एक रोगी समाज नहीं हैं।) पुराने "पंख के पंछी" कह रहे हैं? तो अक्सर एक आदी (या अत्यधिक उदास या चिंतित) व्यक्ति के साथी मुझसे कहेंगे, "यह किसकी गलती है? मैं इस तरह के लोगों को बार-बार आकर्षित करता हूं, इसलिए शायद मैं दोषी हूं। "इसके अलावा, दोष कुछ भी नहीं समझता है और समझ-बूझ को समझता है और आत्म-घृणा बढ़ता है। इसके अलावा, भावनात्मक चुनौतियों या मनोदशा / व्यक्तित्व "झूलों" वाले किसी के पास कम से कम कुछ क्षण होते हैं, जब उनमें स्थिर और प्रेमपूर्ण भाग मौजूद होते हैं। इसलिए उनके साथी के लिए समस्या यह है कि उनके चारों ओर रहने का दर्द उनके लिए कुछ समय नहीं है, बल्कि सभी समय नहीं है। मुश्किल भाग दोलन है, अक्सर अस्थिर और असंगत है, जो अंतरंगता पर तनाव है। यह सब "परिचित की मांग" विशेष रूप से सच है जब बचपन का आघात मिश्रण में है व्यक्तिगत कार्य जो हमें अनुपलब्ध या पुनरावृत्त रूप से हानिकारक भागीदारों की तलाश करने और नई सीमाएं और हानिकारक भावनाओं को संसाधित करने के तरीकों, तनाव को कम करने और रिलेशनल विकल्पों को बढ़ाने के लिए हमें क्या प्रेरित करता है, की जड़ को प्राप्त करने में सहायता कर सकता है। हालांकि, यह सोचना बहुत मुश्किल हो सकता है कि अगर जीवन केवल पहले ही बदल जाएगा, तो जीवन इतना बेहतर होगा। अक्सर एक कॉलर कहते हैं, "मैं एक मलबे हूं और जब तक वह इसे एक साथ मिलती नहीं तब तक शांति में नहीं रह सकता।" लेकिन क्या होगा अगर महीने, साल भी हो? यह असंतोष का एक नुस्खा है। ज़िन्दगी के दौरान जीवन हमेशा अधिक कठिन होता है, इसलिए अब खुद का ख्याल नहीं करना शुरू कर दें, क्योंकि परिवर्तन एक प्रक्रिया है? यहां तक ​​कि अगर "सावधानी" व्यक्ति अकेले चिकित्सा के लिए आता है, तो वह स्वयं चक्र को तोड़ता है, नए परिप्रेक्ष्य और समाधान खोजने का अवसर प्रदान करता है। हम कम उम्र में अंतरंगता का नृत्य सीखते हैं और भूल जाते हैं कि किसी ने हमें यह सिखाया है। हालांकि, यदि आप अपने दम पर कुछ नई चालें सीखते हैं, तो आपके साथी को गति रखना होगा, अगर वह शामिल रहना चाहता है उदाहरण के लिए, किसी व्यक्ति को दोष या आलोचना की चिल्लाहट करने के बजाय, "आप सही कह रहे हैं, मैं गलती पर किया गया है और इस सब में एक हिस्सा है। मुझे खेद है और मैं इसे संबोधित कर रहा हूँ। यदि आप ऐसा करते हैं तो शायद यह हमारी मदद करेगा। " ध्यान दें कि "हमारी मदद करें" उंगली की ओर इशारा करते हुए अधिक आमंत्रित हो सकता है। पारिवारिक चिकित्सक अक्सर मोबाइल समानता का उपयोग करना चाहते हैं (जैसे कि मोबाइल में बच्चों को 'क्रिब्ज़ पर लटकना) यदि आप एक छोर या आकृति को दबाते हैं, तो दूसरे टुकड़े भी बढ़ते हैं। जब रिश्ते में एक व्यक्ति "सिस्टम" बदलता है, तो सारी चीज बदलती है कभी-कभी रोमांटिक रिश्ते, जैसा कि वे अक्सर हो सकते हैं, अद्भुत होते हैं, मोहभंग होने के लिए निकलते हैं। हमारे आदर्शों और उम्मीदें डैश्ड महसूस कर सकती हैं जब हमें पता चलता है कि अन्य व्यक्ति, केवल मानव ही है उनके पास कुछ ऐसे गुण भी हो सकते हैं, जो हम कम से कम एक पार्टनर में ढूंढना चाहते थे। लेकिन यह हमेशा परेशान नहीं करता है। इसका मतलब यह हो सकता है कि एक नया संबंधपरक अनुभव प्राप्त करने का अवसर है, हालांकि विश्वास करना शायद मुश्किल हो। मैं इसे अक्सर देखता हूं: जब एक पार्टनर अपने सर्वश्रेष्ठ शॉट को उपचार या परामर्श प्रदान करता है, तब बदलाव होते हैं-और दूसरी पार्टनर आम तौर पर समय के साथ सहमत होते हैं या किसी तरह से मदद लेते हैं। कुछ बदलाव; यह होना चाहिए। डैरेन हैबर, एमए, एमएफटी, लॉस एंजेल्स में मनोचिकित्सक ट्रामा सिटी अभूतपूर्व संख्या में महिला वयोवृद्धों की हत्या अवसाद: क्या इसके लिए एक स्मार्टफोन ऐप है? चिंता के लिए एक दार्शनिक चिकित्सा हमारे वेट्स का इलाज करने के लिए हमारे पशुपालन प्रशिक्षण वाशिंगटन, अटैचमेंट थ्योरी एंड माई मॉम पर महिला मार्च क्या कांग्रेस मानसिक स्वास्थ्य में विकार का इलाज कर सकती है? समकालीन मनोरोग निदान के साथ समस्या बच्चों में मनोवैज्ञानिक आघात के साथ व्यवहार, भाग 2 लांग रोड बैक राजनीतिक राय और व्यावसायिक नीतिशास्त्र अरोमाथेरेपी आपके वागस तंत्रिका के माध्यम से चिंता कम करती है फ्लाइंग का डर: कल्पना से पीड़ा हम दूसरों को देखने के लिए आशा करते हैं खेल में वर्दी रंग की समस्या क्या है? ग्रुजेस ब्रोक लिंडो के लिए खाली कैलोरी हैं "क्षमाशीलता ने मेरा जीवन बचाया" किशोर नशीली दवाओं के प्रयोग: एक चरण या एक नशे की लत में बढ़ रहा है द्वितीय-क्रम विलंब: जलवायु परिवर्तन से संबंधित एक और असुविधाजनक सत्य किसी और की दया पार्टी में भाग लेने से कैसे बचें क्या यह जीन ठीक है? किसको पूछना चाहिए और एक तिथि के लिए भुगतान करना चाहिए? क्या उसे फोस्टर-अपनाना या कुछ नहीं करना है? केवल सीरियल किलर के पास लॉबस्टर खाने की योग्यता है चिंता और आत्मकेंद्रित पर एक प्रथम-व्यक्ति परिप्रेक्ष्य लाइव इन द मोमेंट, जस्ट नॉट दिस मोमेंट ग्रह को बचाने से अच्छा लगता है कैसे जुनून आप जुआ के बारे में हैं?
2021/12/02 00:11:08
http://hi.psy.co/x9-2250.html
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Realme X2 को Android 10 बेस्ड Realme UI का अपडेट मिलना हुआ शुरू, जानिए क्या होंगे नए फीचर्स । Realme X2 in now Getting Android 10 Based Realme UI Update, All You need to Know- Hindi Gizbot Realme X2 को कुछ महीने पहले रियलमी कंपनी ने लॉन्च किया था। इस स्मार्टफोन ने लॉन्च होने के बाद यूज़र्स को काफी आकर्षित किया है। अब इस स्मार्टफोन में कंपनी ने एंड्रॉयड 10 पर आधारित Realme UI का अपडेट देना शुरू कर दिया है। पिछले कुछ महीनों में काफी सारे स्मार्टफोन्स में एंड्रॉयड 10 का अपडेट दिया गया है। अब Realme X2 में भी कंपनी ने Android 10 पर आधारित Realme UI का अपडेट दे दिया है। इस अपडेट के बाद इस स्मार्टफोन में कुछ बदलाव होगा। इसकी वजह से इस फोन में 3 फिंगर स्क्रीनशॉट जेस्चर सपोर्ट के साथ आता है। इसके अलावा इस फोन में कंपनी ने इस अपडेट के साथ लैंडस्केप मोड में जेस्चर के लिए सपोर्ट और नेविगेशन जेस्चर 3.0 को भी जोड़ा है। नए अपडेट के फीचर्स Realme X2 में इस नए अपडेट के आने के बाद स्क्रीन रिकॉर्डिंग फीचर, फोकस मोड, नया चार्जिंग एनिमेशन, पॉज करने का ऑप्शन जैसे कई खास फीचर्स आएंगे। इस फोन में आने वाले खास फीचर्स और स्पेसिफिकेशंस की बात करें तो इसमें कंपनी ने इसमें कंपनी ने 6.4 इंच का एक S-AMOLED display दिया है। इस फोन का डिस्प्ले वाटरड्रॉप नॉच के साथ आता है। यह भी पढ़ें:- कोरोना वायरस के लॉकडाउन में बेहद लोकप्रिय "रामायण और महाभारत" का प्रसारण हुआ शुरू इस फोन में कंपनी ने 8nm Snapdragon 730G chipset दिया है जिसकी क्लॉक्ड स्पीड 2.2 GHz है। आपको बता दें कि यह Android 9 Pie OS पर बेस्ड ColorOS 6.1 पर ऑपरेट होता है। इसके अलावा इस फोन को स्क्रीन टू बॉडी रेशियो भी 19.5:9 है। यह भी पढ़ें:- Disney+ की लॉन्चिंग भी कोरोना वायरस की वजह से हुई कैंसल Realme X2 was launched a few months ago by the Realme company. This smartphone has attracted a lot of users since its launch. Now in this smartphone, the company has started giving updates of Realme UI based on Android 10. Android 10 has been updated in many smartphones in the last few months. Now in Realme X2, the company has given the update of Realme UI based on Android 10.
2021/05/09 22:23:38
https://hindi.gizbot.com/news/realme-x2-in-now-getting-android-10-based-realme-ui-update-all-you-need-to-know-018973.html?utm_medium=Desktop&utm_source=GZ-HI&utm_campaign=Similar-Topic-Slider
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पहली कैबिनेट मीटिंग में लिया बड़ा फैसला, CM की कुर्सी संभालते ही एक्शन में जयराम, - News | Breaking News | Breaking News in India | Latest News Today | Today news in English Home single news पहली कैबिनेट मीटिंग में लिया बड़ा फैसला, CM की कुर्सी संभालते ही... पहली कैबिनेट मीटिंग में लिया बड़ा फैसला, CM की कुर्सी संभालते ही एक्शन में जयराम, पहले दिन ही नए सीएम जयराम एक्शन मोड में आ गए। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नेतृत्व के राज्य मंत्रिमंडल ने शपथ लेने के बाद बुधवार दोपहर को राज्य सचिवालय में पहली बैठक की। बुधवार शाम को इसमें पूर्व कांग्रेस सरकार की ओर से नियुक्त किए गए अध्यक्षों और उपाध्यक्षों की छुट्टी कर दी गई। हिमाचल मंत्रिमंडल ने फैसला लिया कि राज्य लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन आयोग के दायरे से बाहर की जा रही भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए। हालांकि, मेडिकल कॉलेज की साक्षात्कार प्रक्रिया को जारी रखने का निर्णय हुआ। इसमें विभिन्न बोर्डों और निगमों में समस्त अध्यक्षों तथा उपाध्यक्षों के साथ-साथ सदस्यों की नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का भी फैसला लिया गया। प्रदेश मंत्रिमंडल ने पूर्व सरकार की ओर से दिए गए सेवा विस्तार और पुनर्नियुक्तियों को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का भी फैसला लिया। पूर्व सरकार के अंतिम छह महीने के कार्यकाल के दौरान लिए गए निर्णयों की भी समीक्षा करने का निर्णय लिया गया। मंत्रिमंडल ने ऐसे स्थानांतरण आदेश जो अभी कार्यान्वित नहीं हुए हैं, उन पर यथास्थिति बनाए रखने का भी फैसला किया है। इस बैठक में ये भी तय हुआ कि भाजपा के स्वर्णिम हिमाचल दृष्टि पत्र 2017 को सरकार के नीति दस्तावेज के तौर पर अपनाया जाएगा। Previous articleस्वच्छता ऐप डाउनलोड करने वाले लोगों को शहर की किसी भी पार्किंग में नि:शुल्क वाहन पार्क करने की सुविधा देने का साफ असर देखने को मिल रहा है।
2021/09/27 08:15:20
http://eye1newschannel.com/archives/4287
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फसलों के अवशेष जलाने से दिल्ली में ही पड़ता है अलग-अलग प्रभाव - Hamara Metro फसलों के अवशेष जलाने से दिल्ली में ही पड़ता है अलग-अलग प्रभाव September 26, 2019 # दिल्ली # मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Delhi Cm Arvind Kejriwal) प्रदूषण को दूर करने के लिए पंजाब और हरियाणा में जलाए जा रहे फसलीय अवशेष को मानते हैं, लेकिन एक रिसर्च में सामने आया है कि फसलों के अवशेष जलाने का प्रभाव पूरी दिल्ली में एक समान नहीं होता है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) ने अपने अध्ययन में ये बात कही। संस्थान के सेंटर फॉर एटमासफेयरिक साइंसेज (सीएएस) के एसोसिएट प्रोफेसर विमलेश पंत ने 1 से 5 नवंबर 2017 और 20 से 25 अक्टूबर 2018 के दौरान पंजाब व हरियाणा में जलाए गए फसलीय अवशेष के दिल्ली में पर पड़ने वाले प्रभाव के संबंध में अध्ययन किया। दिल्ली के सभी जिलों में पड़ता है अलग प्रभाव विमलेश पंत ने बताया कि नवंबर और अक्टूबर में हमने जो समय अध्ययन के लिए चुना, उस दौरान पंजाब और हरियाणा में सबसे ज्यादा फसलीय अवशेष जलाए जाते हैं। दिल्ली के सभी जिलों में इसके प्रदूषण (प्रदूषित कण पीएम 2.5) का प्रभाव अलग-अलग होता है। सबसे ज्यादा प्रभाव उत्तरी दिल्ली, उत्तर पूर्वी दिल्ली, सेंट्रल और पूर्वी दिल्ली में पड़ता है। इससे कम प्रभाव बाहरी और पश्चिमी दिल्ली में पड़ता है। दक्षिणी दिल्ली और दक्षिण पूर्वी दिल्ली में सबसे कम प्रभाव पड़ता है। अध्ययन में किया डब्ल्यूआरएफ मॉडल प्रयोग विमलेश ने बताया कि अमेरिका के वेदर रिसर्च एंड फोरका¨स्टग (डब्ल्यूआरएफ) मॉडल और नासा के सेटेलाइट के डाटा की सहायता से हमने रिपोर्ट तैयार की। नासा के सेटेलाइट से हमें यह जानकारी मिली कि पंजाब और हरियाणा में कहां-कहां फसलीय अवशेष जलाए गए। डब्ल्यूआरएफ मॉडल से हवा की दिशा और मौसम की कई तरह की गतिविधियों के बारे में जानकारी मिली। डब्ल्यूआरएफ मॉडल का प्रयोग इसलिए किया गया क्योंकि यह अत्याधुनिक थ्रीडी तकनीक से लैस है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसका इस्तेमाल किया जाता है। क्यों पड़ता है अलग-अलग प्रभाव विमलेश पंत ने बताया कि पंजाब और हरियाणा में फसलीय अवशेष के प्रदूषण का प्रभाव दिल्ली में इसलिए अलग-अलग होता है क्योंकि मौसम की स्थिति सभी जगहों पर एक समान नहीं होती हैं। विभिन्न जगहों पर हवा की गति अलग-अलग होती है। नवंबर 2017 के पहले सप्ताह में और अक्टूबर 2018 के तीसरे सप्ताह में की गई स्टडी में हवा की गति कम थी। यह उत्तर पश्चिमी दिशा से होते हुए दक्षिण पूर्वी दिशा की तरफ चल रही थी। दिल्ली में इसकी गति स्थिर थी। हवा की गति तेज नहीं होने से पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 जैसे प्रदूषित कण आगे नहीं बढ़ सके। इससे दिल्ली में उन जगहों पर फसलीय अवशेष को जलाने से पैदा हुए प्रदूषण का असर सबसे ज्यादा रहा, जिन जगहों पर हवा की गति स्थिर थी। उन्होंने बताया कि अध्ययन के लिए सेंटर ऑफ एक्सिलेंस फॉर रिसर्च ऑन क्लीन एयर (सीईआरसीए) से फंड मिला है।
2020/12/05 09:02:42
http://www.hamarametro.com/?p=14979
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अर्जुन सिंह अलंकरण सम्मान मेरे लिए गौरव की बात: सुहैल बुखारी - MP Breaking News MP Board: 12वीं के छात्रों के लिए बड़ी खबर- 29 जुलाई… Home मध्यप्रदेश भोपाल अर्जुन सिंह अलंकरण सम्मान मेरे लिए गौरव की बात: सुहैल बुखारी अर्जुन सिंह अलंकरण सम्मान मेरे लिए गौरव की बात: सुहैल बुखारी भोपाल। क़तर के बड़े बिजनेस मैन सामाजिक कार्यकर्ता उर्दू अदब से बेपनाह मुहब्बत करने वाले बज़्म ए उर्दू क़तर के रूहे रवां भोपाल सरजमीं से दोहा क़तर में हिन्दुस्तान का परचम बुलंद करने वाले सबीह सुहैल बुखारी साहब को यादे अर्जुन सिंह मुशायरे में अर्जुन सिंह अलंकरण सम्मान से नवाज़ा गया। इकबाल मैदान के मुशयरे में सम्मान के बाद सुहैल बुखारी साहब ने कहा कि, 'मुझे दुनिया में कई जगह सम्मान मिला लेकिन जो सम्मान भोपाल में मिला वो मेरे लिए गौरव कि बात है।" उन्होंने कहा कि, जब भी वो भोपाल आते हैं तो हमें भोपाल में कोई बड़ा बदलाओं नहीं देखने को मिलता है। जैसे और शहरों में देखने को मिलता है वहीं सड़कें, वहीं गालियां, वहीं चौक वहीं चाय दुकानें इन सब में कोई बदलाओ नहीं हुआ। जिससे हमारी पुरानी यादें जुड़ी हैं। लेकिन 35 साल पहले की वो यादें जिसे हम भूल रहे हैं भोपाल में कि ज़ुबान और तहज़ीब यहां की जीवन शैली को हम भूलते जा रहें है। उन्होंने कहा कि भोपाल में एक चलन में बोला जाता था 'अपन' आज कल सुनने को नहीं मिलता। इस शब्द 'अपन' में जो अपना पन था वो खत्म हो रहा है। मैं यहां के लोगों से गुज़ारिश करता हूं कि मुझे वो 35 साल पुराना वाला भोपाल मुझे लौटा दो। हम रहते तो कतर में हैं लेकिन मेरा दिल हमेशा भोपाल में रहता है। इस लिए एक माह से ज़्यादा हम क़तर में रह नहीं पाते और कभी कभी महीने में दो तीन बार भी आना हो जाता है और जो सुकून भोपाल आकर मिलता है वो कहीं नहीं है और भोपाल की गंगा जमुनी तहजीब का तो कोई जवाब नहीं। इसे कायम रखना है वहीं बुखारी साहब ने कहा के हम जब भोपाल कतर में अदबी कोई प्रोग्राम करते हैं तो भोपाल कि नुमाइंदगी के लिए शायर और सामाजिक कार्यकर्ताओं को हम ज़रूर बुलाते हैं।
2021/07/26 14:52:03
https://mpbreakingnews.in/madhya-pradesh/bhopal/suhail-bukhari-felicitated-in-bhopal-55723/
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तलाक की संपत्ति: कॉलेज बचत योजना किसकी बनती है? कैसे का सवाल तलाक की संपत्ति विभाजित किया जाना चाहिए हमेशा जवाब देने के लिए एक आसान नहीं है। एक मुद्दे पर माता-पिता ने पहले से विचार नहीं किया होगा कि विवाह समाप्त होने के बाद कॉलेज बचत खाते कैसे विभाजित होंगे। लेकिन, यह ऐसी चीज है जिसे बच्चों की भविष्य की शिक्षा को खतरे में डालने से बचने के लिए सावधानी से विचार करने की आवश्यकता है। इन परिसंपत्तियों को विभाजित करने की योजना होने से तलाक से जुड़े वित्तीय व्यवधान को कम किया जा सकता है। जानिए कॉलेज डिवोर्स एसेट्स कहां स्थित हैं तलाक के लिए दोनों पक्षों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि कॉलेज की बचत संपत्तियों को कहां रखा जाए। उन संपत्तियों में शामिल हो सकते हैं: 529 की योजना यूजीएमए / यूटीएमए खाते हालांकि तकनीकी रूप से कॉलेज बचत वाहन नहीं है, फंड में ए रोथ व्यक्तिगत सेवानिवृत्ति खाता या पारंपरिक इरा उच्च शिक्षा खर्चों के भुगतान के लिए भी रखा जा सकता है। जैसा कि आप समीक्षा कर रहे हैं कि आपके शिक्षा बचत खाते कहां स्थित हैं, सूचीबद्ध खाते की शेष राशि पर ध्यान दें लाभार्थियों और खाता मालिकों, जब संपत्ति जमा हुई थी और योगदान देने के लिए कौन जिम्मेदार था। यदि आप और आपके जल्द ही होने वाले पूर्व पति-पत्नी दोनों ने योगदान दिया है, तो आप यह भी गणना करना चाह सकते हैं कि आप में से प्रत्येक ने योजना में कितना जोड़ा। विचार करने के लिए कुछ और है कि कौन उत्तराधिकारी मालिक या प्रत्येक खाते का लाभार्थी होगा यदि प्राथमिक मालिक दूर हो। आप यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि कॉलेज बचत खातों में परिसंपत्तियों को कैसे विभाजित किया जाए, भले ही आपके या आपके पूर्व पति या पत्नी के लिए कुछ भी हो, आपके बच्चे लाभार्थी बने रहेंगे। डिविजन प्लान पर निर्णय लें एक बार जब आप पहचान लेते हैं कि कॉलेज की बचत छत्र के तहत तलाक की संपत्ति क्या है, तो आप इस बात पर चर्चा कर सकते हैं कि उन्हें कैसे विभाजित किया जाएगा। सभी कॉलेज बचत खातों को समान रूप से विभाजित करने का सबसे सरल तरीका हो सकता है, लेकिन आप परिसंपत्तियों को एक ही खाते में एक साथ रखना पसंद कर सकते हैं। यदि ऐसा है, तो आप अलग-अलग खातों को बंद करने पर विचार कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, आप अपने बच्चे की 529 योजना को नियंत्रित करना जारी रख सकते हैं, जबकि आपका पूर्व पति अपने कवरडेल या कस्टोडियल खातों को नियंत्रित करता है। जब आप इन तलाक की संपत्ति को विभाजित करने की प्रक्रिया में हैं, तो आप अदालत से किसी भी पैसे को वापस लेने से रोकने के बारे में पूछने के बारे में सोचना चाह सकते हैं। कॉलेज बचत योजना जब तक तलाक फाइनल न हो जाए। यह आपके बच्चे की शिक्षा निधि की रक्षा करने में मदद कर सकता है जब तक कि आप और आपके पति इस बात पर सहमत नहीं हो सकते कि संपत्ति को कैसे विभाजित किया जाए। कैसे कॉलेज बचत आस्तियों का इस्तेमाल किया जाएगा रूपरेखा यदि आप कॉलेज के बचत खातों को साझा करने के तरीके के बारे में एक समझौते पर आए हैं, तो आप सबसे बड़ी बाधा बन गए हैं। इसके बाद, आपके तलाक की डिक्री को यह पता लगाना चाहिए कि इन संपत्तियों का उपयोग या तो माता-पिता द्वारा किया जा सकता है। आंतरिक राजस्व सेवा के पास विशिष्ट दिशानिर्देश हैं कि 529 योजना फंड और कवरडेल ईएसए फंड का उपयोग किस लिए किया जा सकता है। एक 529 योजना के लिए भुगतान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है योग्य उच्च शिक्षा खर्च, ट्यूशन, फीस, किताबें और कमरे और बोर्ड सहित। एक कवरडेल ईएसए का उपयोग योग्य उच्च शिक्षा खर्च, साथ ही माध्यमिक शिक्षा खर्च दोनों के लिए किया जा सकता है। योग्य शिक्षा खर्चों के अलावा किसी अन्य चीज के लिए निकासी पर कर जुर्माना लग सकता है। जबकि नियम स्पष्ट रूप से बताते हैं कि इन खातों का उपयोग कैसे किया जाना चाहिए, खाते के मालिक को उच्च शिक्षा के अलावा किसी अन्य चीज़ के लिए पैसे निकालने से प्रतिबंधित करने का कोई तरीका नहीं है। यदि आप अपने पूर्व पति या पत्नी को अपने स्वयं के उद्देश्यों के लिए अपने बच्चे के कॉलेज के पैसे का उपयोग करने के बारे में चिंतित हैं, तो आप अपने तलाक की डिक्री में भाषा को शामिल करना चाहते हैं यह निर्दिष्ट करते हुए कि आपको पहले सहमत होने की आवश्यकता है। यदि आप अब 529 योजना या किसी अन्य कॉलेज बचत खाते के मालिक नहीं हैं, तो आप अदालत से आपसे इच्छुक पक्ष के बयान उपलब्ध कराने के लिए भी कह सकते हैं। इस तरह, आप यह देख सकते हैं कि खाते से क्या आ रहा है और साथ ही साथ क्या हो रहा है। फ्यूचर कॉलेज बचत योगदान के लिए योजना कॉलेज के लिए तलाक की संपत्ति को संभालते समय पहेली का अंतिम टुकड़ा यह तय कर रहा है कि आप आगे जाने वाली बचत योजनाओं में कैसे योगदान करेंगे। उदाहरण के लिए, यदि आप समान रूप से 529 खाते को विभाजित कर रहे हैं, तो क्या आप दोनों मासिक या वार्षिक रूप से एक ही राशि का योगदान देंगे? या, क्या आप प्रत्येक अपनी आय की अनुमति के आधार पर एक निर्धारित राशि का योगदान करेंगे? आप यह भी बात करना चाह सकते हैं कि अपने अलावा अन्य लोगों के योगदान को कैसे संभाला जाएगा। उदाहरण के लिए, यदि आपके माता-पिता दोनों आपके बच्चे की ओर से अलग-अलग कॉलेज खातों में पैसे का योगदान कर रहे थे, क्या वे ऐसा करना जारी रखेंगे या वे केवल एक खाते में योगदान देंगे और दूसरे तलाक के बाद नहीं अंतिम? यह विशेष रूप से आपके तलाक के डिक्री में शामिल होने की आवश्यकता नहीं हो सकती है, लेकिन यह अच्छा है कि चर्चा जल्द ही हो, बजाय इसके बाद कि सभी को स्पष्ट अपेक्षाएं हों। एक अंतिम बात जिस पर आप चर्चा करना चाहते हैं वह यह है कि आपके बच्चे द्वारा उपयोग नहीं किए जाने वाले कॉलेज के किसी भी बचत धन का क्या होगा एक 529 योजना के साथ, आप कर सकते हैं खाते को नए लाभार्थी को हस्तांतरित करना जब तक नई लाभार्थी एक योग्य रिश्तेदार है, तब तक जितनी बार आपको जरूरत है। कवरडेल खातों को एक नए लाभार्थी को भी हस्तांतरित किया जा सकता है। यदि आपके पास केवल एक बच्चा है, तो आप कवर करना चाह सकते हैं कि कॉलेज की कोई भी बचत योजना आगे के लिए जाएगी यदि पैसे बचे हैं। आईयूएल बनाम तुलना सेवानिवृत्ति के लिए 401k यदि आप अधिकांश अमेरिकियों को पसंद करते हैं, तो आपने 401 (के) के बारे में सुना है। दूसरी ओर, अनुक्... तेजी से बचाव तेजी से क्रेडिट स्कोर बढ़ा सकते हैं यह आपके क्रेडिट को बेहतर बनाने में समय लगता है, लेकिन आपके पास लेनदारों और क्रेडिट रिपोर्टिंग एजे... IRA रोलओवर माना जाता है, और क्या एक IRA हस्तांतरण माना जाता है के बीच सूक्ष्म अंतर हैं। जानने के ...
2020/10/23 02:23:27
https://portalfamososbr.com/hi/pages/4103-divorce-assets-who-gets-the-college-savings-plan
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Lata Mangeshkar For The First Time Sung Which Classical Raag For All India Radio Mk | लता मंगेशकर ने ऑल इंडिया रेडियो के लिए पहली बार गाया था कौन सा शास्त्रीय राग? - Firstpost Hindi लता मंगेशकर ने ऑल इंडिया रेडियो के लिए पहली बार गाया था कौन सा शास्त्रीय राग? लता मंगेशकर ने छोटी उम्र में जब नारद बनकर मंच पर गीत गाया तो पूरी पब्लिक उन्हें देखती और सुनती रह गई. कहा जाता है कि लोगों की जुबां पर उसी दिन आ गया था- वंस मोर, वंस मोर Updated On: Jun 28, 2018 04:05 PM IST आज की कहानी की शुरूआत एक सवाल से करते हैं. क्या आप जानते हैं कि लता मंगेशकर ने जब पहली बार ऑल इंडिया रेडियो के लिए रिकॉर्डिंग की थी तो कौन सा शास्त्रीय राग गाया था. इस सवाल का जवाब देने के लिए आपको लता मंगेशकर के बचपन में ले चलते हैं. यह उस समय की बात है जब लता मंगेशकर की उम्र सिर्फ 11-12 साल थी. संगीत की विधिवत शिक्षा लेते हुए उन्हें करीब 5 साल बीत चुके थे. जाने-माने नाट्यकर्मी और संगीतकार पिता दीनानाथ मंगेशकर की देख-रेख में लता मंगेशकर ने कई मुश्किल राग बचपन में ही सीख लिए थे. लता मंगेशकर जब 9 साल से भी कम उम्र की थीं तो अपने पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर की नाट्यमंडली में काम करना शुरू कर चुकी थीं. पंडित दीनानाथ मंगेशकर की नाटक कंपनी का नाम था- बलवंत संगीत मंडली. पहली बार वो अपने पिता के साथ जिस नाटक के लिए मंच पर उतरीं उसका नाम था- सौभद्र. लता मंगेशकर को उनकी मां ने बड़े जतन से सजा धजा कर स्टेज पर भेजा था. कहते हैं कि उस दिन जब लता मंगेशकर ने नारद बनकर मंच पर गीत गाया तो पूरी पब्लिक उन्हें देखती और सुनती रह गई. कहा जाता है कि लोगों की जुबां पर उसी दिन आ गया था- वंस मोर, वंस मोर. इसके बाद 1940 के आस-पास लता मंगेशकर को पहली बार नई दिल्ली ऑल इंडिया रेडियो से बुलावा आया. तब लता मंगेशकर 10 साल की उम्र पार कर चुकी थीं. 10 साल की उम्र तो बच्चियों की ही होती है. लता मंगेशकर की उस रिकॉर्डिंग के लिए उनके पिता भी साथ में दिल्ली आए. लता मंगेशकर ने जब ऑल इंडिया रेडियो का माइक संभाला तो पहली बार गाया, शास्त्रीय राग खंभावती. लता मंगेशकर की गाई राग खंभावती की वो रिकॉर्डिंग तो मौजूद नहीं है लेकिन इस राग के बारे में समझाने के लिए आपको महान गायिका केसरबाई का गाया राग खंभावती सुनाते हैं. राग खंभावती की कहानी हम फिल्मी गानों की जुबानी इसलिए नहीं सुना रहे हैं क्योंकि इस शास्त्रीय राग की जमीन पर तैयार फिल्मी गानों का कोई साक्ष्य नहीं मिलता. बावजूद इसके यह राग इसलिए बहुत अहम है क्योंकि असल मायनों में यह पहला और आखिरी राग है जो लता मंगेशकर ने रेडियो के लिए रिकॉर्ड किया था. ऐसा इसलिए क्योंकि 1941 में हुई इस रिकॉर्डिंग के अगले ही साल यानी 1942 में लता मंगेशकर के पिता दीनानाथ मंगेशकर का असमय निधन हो गया. पंडित दीनानाथ मंगेशकर की मौत जब हुई तब उनकी उम्र सिर्फ 41-42 साल की थी. कहा जाता है कि पंडित दीनानाथ मंगेशकर को मुफलिसी के दिनों में शराब की बुरी लत लग गई थी. जो धीरे-धीरे उनकी जिंदगी को खा गई. खैर, पिता के जाने के बाद लता मंगेशकर के सामने अपने परिवार को चलाने की जिम्मेदारी आ गई. इसके बाद उन्होंने रेडियो के लिए कोई रिकॉर्डिंग नहीं की. इस दुखद किस्से से बाहर निकलने के लिए आपको राग खंभावती की एक शानदार रचना सुनाते हैं. जिसे गाया है कव्वाली के सम्राट कहे जाने वाले कलाकार उस्ताद नुसरत फतेह अली खान ने. पाकिस्तान के इस शानदार फनकार से जुड़ा एक और दर्दनाक किस्सा यह भी है कि नुसरत साहब भी सिर्फ 48-49 साल की उम्र में दुनिया छोड़ गए थे. राग खंभावती का फिल्मी संगीत में इस्तेमाल ज्यादा नहीं हुआ है. 1958 में रिलीज हुई फिल्म अमरदीप में लता मंगेशकर ने एक गाना गाया था, जिसके बोल थे- देख हमें आवाज ना देना ओ बेदर्दी जमाने. यह गाना राग खंभावती की जमीन पर तैयार किया गया था. जिसके संगीतकार थे सी रामचंद्र. इसके अलावा 1952 में रिलीज फिल्म दाग में लता जी की ही आवाज में एक गाना और था जो इसी राग की जमीन पर था. बोल थे- प्रीत ये कैसी बोल री दुनिया. इस फिल्म के निर्देशक थे अमीय चक्रवर्ती और संगीत शंकर जयकिशन ने तैयार किया था. इन फिल्मी गानों के अलावा इसी राग की जमीन पर कुछ गाने मराठी फिल्मों में भी तैयार किए गए. जिन्हें आशा भोंसले ने गाया था. फिलहाल आप राग खंभावती की जमीन पर तैयार किए गए लता मंगेशकर की आवाज में 2 फिल्मी गाने सुनिए. राग खंभावती के किस्से को आगे बढ़ाने के लिए आपको इस राग के शास्त्रीय पक्ष के बारे में बताते हैं. राग खंभावती खमाज थाट का राग है. इस राग की जाति संपूर्ण षाढव है. इस राग में वादी स्वर 'म' और संवादी संवर 'स' है. वादी और संवादी स्वर के बारे में हम आपको बताते आए हैं जैसे शतरंज के खेल में बादशाह और वजीर सबसे अहमियत रखते हैं वैसे ही किसी भी राग में वादी और संवादी स्वर का महत्व सबसे ज्यादा होता है. राग खंभावती को गाने-बजाने का समय रात का पहला प्रहर है. इस राग में 'नी' को छोड़कर बाकी सभी स्वर शुद्ध इस्तेमाल किए जाते हैं. 'नी' कोमल लगता है. इस राग में ज्यादातर ठुमरी और ख्याल गायकी होती है. ख्याल गायकी में ज्यादातर मौकों पर छोटा ख्याल राग खंभावती में गाया जाता है. इस राग में विलंबित ख्याल कम ही सुना जाता है. शास्त्रीय राग मांड, खमाज और सिंदूरा इस राग से मिलते-जुलते राग हैं. आइए आपको राग खंभावती का आरोह-अवरोह और पकड़ बताते हैं. आरोह- सा, रे म प ध नी S ध सां अवरोह- रें सां नी ध प, ध म प ग म सा पकड़- रे म प ध सां, नी ध प, ध म प ग म सा शास्त्रीय रागों की कहानियों पर आधारित इस सीरीज में हम हमेशा किस्से कहानियों के साथ-साथ राग की शास्त्रीयता पर बातचीत करते हैं. आपके साथ कुछ ऐसे दिग्गज शास्त्रीय कलाकारों के वीडियो क्लिप साझा करते हैं जिससे आपको राग की अदायगी का अंदाजा लगे. आज का राग खंभावती है, इसलिए आपको 2 वीडियो दिखा रहे हैं. पहला वीडियो भारतीय शास्त्रीय संगीत के दिग्गज कलाकार भारत रत्न से सम्मानित किराना घराने के पंडित भीमसेन जोशी का है. दूसरे वीडियो में आपको किशोरी ताई राग खंभावती गाती दिखेंगी. देश के दूसरे सर्वोच्च सम्मान पद्मविभूषण से सम्मानित किशोरी अमोनकर जयपुर घराने की थीं. पिछले साल ही उनका निधन हुआ था. राग खंभावती की कहानी में इतना ही. अगले हफ्ते एक और नई शास्त्रीय राग और उससे जुड़े किस्से कहानी लेकर आएंगे हम. Tags: All India Radioclassical raagdinanath mangeshkarfilmi songskishori amonkarLata Mangeshkarraag khambavatiraag khambhavatiraaggiriऑल इंडिया रेडियोकिशोरी अमोनकरदीनानाथ मंगेशकरफिल्मी गानोंराग खंभावतीरागगिरीरागगीरीलता मंगेशकरशास्त्रीय राग
2021/09/19 20:23:08
https://betahindi.firstpost.com/special/lata-mangeshkar-for-the-first-time-sung-which-classical-raag-for-all-india-radio-mk-120630.html
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मुंबई ब्लैकआउट: सच सामने आने पर तिलमिलाए चीन ने दी अपनी प्रतिक्रिया Home National मुंबई ब्लैकआउट: सच सामने आने पर तिलमिलाए चीन ने दी अपनी प्रतिक्रिया मुंबई ब्लैकआउट: सच सामने आने पर तिलमिलाए चीन ने दी अपनी प्रतिक्रिया – चीनी विदेश मंत्रालय ने सोमवार की शाम को एक रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया व्यक्त की जो आरोप लगाती थी कि पिछले साल अक्टूबर में मुंबई में बिजली गुल एक साइबर अटैक के कारण हुई थी और यह "सबोटेज" का एक कार्य था। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने रिपोर्ट को "अत्यधिक गैर जिम्मेदाराना" कहा और कहा कि इसके "पर्याप्त सबूत नहीं" हैं। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि साइबर सुरक्षा के कट्टर रक्षक के रूप में, चीन साइबर हमलों के सभी रूपों पर दृढ़ता से विरोध करता है। साइबर हमलों के मुद्दे पर अटकल और निर्माण की कोई भूमिका नहीं है। किसी विशेष पार्टी पर आरोप लगाने के लिए अत्यधिक गैर जिम्मेदाराना। यूएस ने भी किया चीन के होने का दावा इससे पहले, मैसाचुसेट्स स्थित एक कंपनी, रिकॉर्डेड फ्यूचर, जो राज्य के अभिनेताओं द्वारा इंटरनेट के उपयोग का अध्ययन करती है, ने अपनी हालिया रिपोर्ट में भारतीय बिजली क्षेत्र को लक्षित करने वाले चीन से जुड़े खतरे गतिविधि समूह RedEcho द्वारा किए गए अभियान को विस्तृत रूप से बताया। गतिविधि की पहचान बड़े पैमाने पर स्वचालित नेटवर्क ट्रैफ़िक एनालिटिक्स और विशेषज्ञ विश्लेषण के संयोजन के माध्यम से की गई थी। रविवार को रिकॉर्डेड फ्यूचर द्वारा रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इसमें कहा गया है कि इस खोज से यह सवाल उठता है कि क्या भारत के सीमावर्ती दावों को भी जोरदार तरीके से धकेला जाए तो बीजिंग के संदेश के रूप में मुंबई के बिजली आउटेज का क्या मतलब था। गलवान में चीनी झड़प के बाद हुई थी बिजली गुल पिछले साल 12 अक्टूबर को हुई बिजली चोरी, जून 2020 में गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच झड़प के महीनों बाद आई थी। मुंबई में ग्रिड की विफलता के कारण बिजली की भारी कमी हुई थी, जिससे ट्रेनों को पटरियो पर रोकना पड़ा था। Covid ​​-19 महामारी के बीच घर से काम करने वालों के लिए बाधा और आर्थिक गतिविधि को मुश्किलो का सामना करना पड़ा था। इस बीच, महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने सोमवार को कहा कि प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार बड़े पैमाने पर बिजली आउटेज "साइबर-तोड़फोड़" का प्रयास था। संवाददाताओं को संबोधित करते हुए देशमुख ने कहा कि महाराष्ट्र साइबर सेल ने एक प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत की है जिसके निष्कर्ष बताते हैं कि सबूत बताते हैं कि मुंबई में ग्रिड फेल होने की संभावना साइबर तोड़फोड़ थी।
2021/12/06 07:54:57
https://pratahkal.com/mumbai-blackout-china-reacted-when-stark-truth-came-to-light/
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सामान्य जनसंख्या के सापेक्ष दलित बालिकाओं का ड्राप आउट अंतर बहुत ज्यादा है। उच्च शिक्षा में भी दलित वर्ग की बालिकाओं अनुपात सामान्य वर्ग की बालिकाओं की तुलना में बहुत पीछे है। इस स्थिति में सुधार कैसे आ सकता है, बता रहे हैं चर्चित श‍िक्षाविद एवं लेखक सुशील कुमार शर्मा। दलित बालिकाओं की शिक्षा की स्थिति देश की सामाजिक बनावट व आर्थिक श्रेणीबद्धता 'सभी के लिए एक जैसी शिक्षा' के सिद्धांत के सामने हमेशा यक्ष प्रश्न रही है और शिक्षा हमेशा स्तरीय खांचो में बंटी रही है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद शिक्षा के मामले में दलित बालिकाओं की स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं आया है। अनुसूचित जाति एवं जनजाति की बालिकाएं शिक्षा के मामले में अपने वर्ग के बालकों एवं सामान्य वर्ग की बालिकाओं से बहुत पीछे हैं। शिक्षा में इस बात का महत्व है कि बालिकाओं का कितना अनुपात पढाई पूरी किये बगैर स्कूल छोड़ कर घर बैठ जाती हैं। शिक्षा के सभी स्तरों पर दलित बालिकाओं की ड्राप आउट दर सामान्य जनसँख्या के अनुपात में बहुत ज्यादा है। सामान्य जनसंख्या के सापेक्ष दलित बालिकाओं का ड्राप आउट अंतर बहुत ज्यादा है। उच्च शिक्षा में भी दलित वर्ग की बालिकाओं अनुपात सामान्य वर्ग की बालिकाओं की तुलना में बहुत पीछे है। उच्च शिक्षा में सकल नामांकन दर 13.8% है, जबकि अनुसूचित जाति की बालिकाओं की दर 1.8% एवं अनुसूचित जनजाति की बालिकाओं की दर 1.6% मात्र है। 6 से 14 आयु वर्ग के 35.1 लाख आदिवासी बच्चों में 54 प्रतिशत अभी भी स्कूलों से बाहर हैं। इस आयु वर्ग में 18.9 लाख बच्चे स्कूल नहीं जा रही हैं। आदिवासी एवं दलित समुदाय में बालिका शिक्षा की स्थिति काफी बुरी है। आदिवासी समुदाय की कुल 41.4 प्रतिशत लड़कियाँ शिक्षित हैं। सहरिया और बैगा समुदाय में यह स्थिति और भी बुरी है। मात्र 15.9 प्रतिशत सहरिया लड़कियों का प्रतिशत ज्यादा है। 45.36 प्रतिशत स्कूल के बाहर लड़कों की तुलना में 54.64 लड़कियां स्कूल से बाहर थी और कुल 10 प्रतिशत स्कूल से बाहर पाए गए। स्कूलों से बाहर निकलते बच्चों की संख्या स्कूलों में दर्ज न होने वाले बच्चों से ज्यादा थी। इससे यह पता चल रहा था कि बच्चों के नाम स्कूलों में दर्ज तो हो जा रहे थे पर वे काफी जल्दी बाहर हो जा रहे थे। स्कूलों से बाहर हो रहे बच्चों में भी लड़कियों की संख्या 60 प्रतिशत है वहीं लड़कों की दर 47.31 प्रतिशत है। 6 से 14 वर्ष की आयु वर्ग में शाला में दर्ज न होने वाले 186 बच्चों में 98 लड़कियां हैं। प्राथमिक स्तर पर प्रवेश लेने वाली बालिकाओं में से 24.82 प्रतिशत कक्षा 5 तक की पढ़ाई पूरी नहीं कर पातीं और उन्हें विद्यालय छोड़ना पड़ता है। उच्च प्राथमिक स्तर पर 50.76 प्रतिशत बालिकाओं को बीच में ही विद्यालय छोड़ कर घरेलू कार्यों में संलग्न होना पड़ता है। 5. आदिवासी इलाकों में चल रहे स्कूलों में अधोसंरचना एवं संसाधनों की कमी है। अधिकतर विद्यालययों में मात्र एक पूर्णकालिक योग्य शिक्षक है। अन्य सुविधायें जैसे पृथक शौचालय, चार दीवारी, कक्षा भवन आदि की कमी है। ये तो अधोसंरचनात्मक कमियां हैं लेकिन हम उन कमियों का क्या करें जो आदिवासी शिक्षा के लिए राज्य के खर्चे में आ गई है। संविधान के अनुच्छेद 46 के अनुसार- “राज्य विशेष सावधानी के साथ समाज के कमजोर वर्गों, विशेषकर अनुसूचित जाति/जनजातियों के शैक्षिक एवं आर्थिक हितों के उन्नयन को बढ़ावा देगा और सामाजिक अन्याय और सभी प्रकार के सामाजिक शोषण से उनकी रक्षा करेगा”। अनुच्छेद 330, 332, 335, 338 से 342 तथा संविधान के पांचवीं और छठवीं अनुसूची अनुच्छेद 46 में दिए गए लक्ष्य हेतु विशेष प्रावधानों के संबंध में कार्य करते हैं। समाज के कमजोर वर्ग के लाभार्थ इन प्रावधानों का पूर्ण उपयोग किए जाने की आवश्यकता है। 1. 2006 में शिक्षा के अधिकार अधिनियम में श्री वर्नर मुनोज ने सुझाव दिया की दलित बालिकाओं के स्कूल में नामांकन एवं स्थिर रहवास के लिए सभी बाधाओं को हटाने का संकल्प होना चाहिए। 3. UN फोरम आफ मायनरटीज इश्यूज की बैठक 2008 में बांग्लादेश में हुई थी जिसमें दलित एवं अल्पसंख्यक बालिकाओं की शिक्षा से पलायन एवं उनके शोषण के कारणों पर विस्तृत चर्चा कर संकल्प पारित किया गया। 1. शिक्षा का सिद्धांत एक बुद्धिवादी दृष्टिकोण पर आश्रित है कि सभी मनुष्यों मुक्त एवं समान अधिकार के साथ पैदा हुए हैं। और उस जाति व्यवस्था को आदमी ने अपने ही की सुविधा के लिए बनाया है। एक सामाजिक आदर्श के रूप में अस्पृश्यता को पूरी तरह से खत्म किया जाना चाहिए। स्कूलों और कॉलेजों में दलित बच्चों के साथ में अन्य बच्चों के समान व्यवहार किया जाना चाहिए। 2. पर प्रगतिशील निवेशअपवर्जित बच्चों, कमजोरस्कूलों और तहत प्रदर्शनक्षेत्रों समावेशी और न्यायसंगत शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक दृष्टिकोण 6. दलित बालिकाओं की शिक्षा शोषण मुक्त हो एवं उनके अधिकारों एवं लाभों का वे अधिकतम उपयोग कर सकें इसके लिए जमीनी स्तर पर योजनाओं का क्रियान्वयन होना चाहिए। लिंग संवेदीकरण (Gender sensitization) कार्यक्रम तैयार होने चाहिए। 7. शिक्षा बालिका सशक्तिकरण का एक प्रमुख हथियार है। दलित बालिकाओं केलिए रोजगारोन्मुख शिक्षा की व्यवस्था होनी चाहिए जिसमें विविध व्यावसायिक प्रशिक्षण जिनमे कुटीर उद्योग ,गांव शिल्प आदि प्रशिक्षण उन्हें उनके घर पर मिलना चाहिए। 13. विभिन्न प्रतियोगी परीक्षा में दलित बालिकाओं की सहभागिता बढ़ाने के लिए तहसील या गांव स्तर पर स्पेशल कोचिंग एवं आर्थिक सहायता दलित बालिकाओं को मिलना चाहिए। दलितों को शिक्षित करने की दिशा में राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी हम सभी को स्वीकार करना चाहिए। भारत में दलित बालिकाओं के लिए शिक्षा सुनिश्चित करना जहाँ जाति व्यवस्था, वर्ण व्यवस्था एवं सामाजिक श्रेष्ठताओं का बोल बाला हो एक बहुत बड़ी चुनौती है। दलित बालिकाओं का स्कूलों में नामांकन करवाना ही हमारा उद्देश्य नहीं होना चाहिए बल्कि उनकी पढाई को पूरा करवाने के लिए भी कोई उपाय हमारे पास होना चाहिए। अपरिवर्तित सामाजिक मूल्यों के चलते शिक्षा से दलित बालिकाओं का जुडाव नगण्य जैसा है। दलित बालिकाओं में आत्मविश्वास, अपने अधिकारों के बारे में जागरूकता एवं अन्याय से लड़ने की शक्ति शिक्षा से प्राप्त होती है। दलित बालिकाओं से शिक्षा में असमानता का व्यवहार, सामाजिक अश्यपृश्यता, मानसिक एवं शारीरिक प्रताड़ना समाज, परिवार एवं तन्त्र द्वारा किया जाना सर्व विदित है। सबसे बड़ी विडंबना ये है की ये सारी घटनाएँ जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों एवं जिम्मेदार लोगों के संज्ञान में होती हैं। आज आवश्यकता है की समाज, तंत्र और जनप्रतिनिधि इन दलित सपनों के प्रति ज्यादा संवेदनशील हों।
OSCAR-2019
सीरिया में तुर्की की सैन्य कार्रवाई रहेगी जारी, कर सकते है इराक में भी ऐसी ही कार्रवाई: एर्दोगान - Kohram Hindi News सीरिया में तुर्की की सैन्य कार्रवाई रहेगी जारी, कर सकते है इराक में भी ऐसी ही कार्रवाई: एर्दोगान तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैय्यब एर्दोगान ने सोमवार को कहा कि सीरिया के अफ्रिन इलाके को कब्जे में लेने के बाद तुर्की की अगुवाई वाली सैन्य कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी. उन्होंने बताया, तुर्की की ये कार्रवाई मणबीज, अन अल-अरब, तेल अबाद, रास अल-ऐन और कम्मिली तक जारी रहेगी. एर्दोगान ने कहा कि ने ऑपरेशन ओलिव शाखा का सबसे महत्वपूर्ण चरण अफ्रिन शहर केंद्र का नियंत्रण लेने के बाद पूरा हुआ. उन्होंने कहा, "हमने क्षेत्र के अधिकांश आतंक गलियारे का सफाया कर दिया है. इस दौरान एर्दोगान ने इराक़ी शहर सिन्जर में पीकेके आतंकवादी समूह के खिलाफ अभियान का भी संकेत दिया. राष्ट्रपति ने कहा, हम अचानक इराक के सिंजर में एक रात आ सकते हैं और वहां पीकेके आतंकवादियों को खत्म कर सकते हैं. अपने भाषण के दौरान, एर्दोगान ने यूरोपीय संघ के शरणार्थी सहायता के वादों को तोड़ने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह अगले सप्ताह बुल्गारिया में एक शिखर सम्मेलन के दौरान सीरियन शरणार्थियों के लिए € 3 अरब ($ 3.69 बिलियन) की दूसरी किश्त के बारे में सवाल उठाएंगे. राष्ट्रपति ने कहा किउनके देश को माइग्रेशन सौदा के दो साल बाद भी शेष € 3 अरब की राशि नहीं मिली है. एर्दोगान ने कहा कि उन्होंने वादा पूरा नहीं किया. उन्हें 3 अरब यूरो से अधिक सहायता के साथ 3 अरब यूरो का आवंटन भी करना है. लेकिन अभी तक 850 मिलियन यूरो हम तक पहुंचे है.
2022/05/21 05:46:16
https://kohraam.com/international/international-turkey-syria-iraq-erdogan-says-turkey-to-continue-military-operation-131085.html/
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भिलाई से रायपुर ग्रीन कारिडोर बनाकर दिल के मरीज को 45 मिनट में पहुंचाया अस्पताल,बच गई जान... भिलाई – पल्स अस्पताल नेहरू नगर में हार्ट स्पेशलिस्ट डा. जयराम अय्यर की देखरेख में खैरागढ़ के रहने वाले प्रदीप श्रीवास का इलाज चल रहा था। पिछले 7 दिनों से यहीं पर अस्पताल में एडमिट कर जांच की सारी प्रक्रियाएं की जा रही थी। बीती रात मरीज की तबीयत बिगड़ने पर उसे रायपुर बेहतर उपचार के लिए ले जाना था स्वजनों ने यातायात पुलिस से ग्रीन कॉरिडोर बनाने की मांग की। उसके बाद पुलिस ने तत्काल इसे बनाकर भिलाई से मरीज को रायपुर 45 मिनट में पहुंचा दिया सामान्य तौर पर ट्रैफिक के कारण भिलाई से रायपुर जाने में दो घंटे का समय लग जाता है। खैरागढ़ के रहने वाले प्रदीप श्रीवास की तबीयत पिछले सप्ताह खराब हुई थी। जिसके बाद सात दिनों से पल्स अस्पताल नेहरू नगर में उपचार चल रहा था। हार्ट स्पेशलिस्ट डा. जयराम अय्यर ने अपने देखरेख में बेहतर उपचार किया और दो स्टंट डालकर एंजियोग्राफी की। शुरू के दिनों में सुधार नजर आया, लेकिन बाद में तकलीफ बढ़ने लगी। ऐसे में बेहतर उपचार के लिए रायपुर के बड़े अस्पताल में रेफर करने का सुझाव दिया गया। इधर दुर्ग पुलिस के ट्रैफिक विभाग से संपर्क कर समन्वय बनाया। रात को एंबुलेंस पहुंच गई और बिना कोई देरी किए 45 मिनट में रायपुर के अस्पताल पहुंचा दिया गया।ग्रीन कारिडोर की वजह से तय समय से पहले मरीज अस्पताल पहुंच जाने और समय रहते उपचार होने की वजह से मरीज की जान बच गई।
2022/07/05 08:42:22
https://mynews36.com/by-making-bhilai-to-raipur-green-corridor-the-heart-patient-was-taken-to-the-hospital-in-45-minutes-his-life-was-saved/
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वैक्यूम घटक | दृष्टि ग्लास निर्माता - EFT दृश्य ग्लास / Everfit Technology CO., LTD. () EFT) एक निर्वात घटक, वैक्यूम फिटिंग, प्रसंस्करण उपकरण और 36 साल के अनुभव के साथ सिस्टम प्रदाता है घर वर्ग स्वच्छता वाल्व दृश्य ग्लास EFT की दृष्टि के चश्मे को मीडिया के दृश्य निरीक्षण के लिए डिज़ाइन किया गया है और उत्पाद वसूली प्रणालियों में / या सूअरों के निरीक्षण के लिए। आवास के अंदर बोरोसिलिकेट ग्लास बिना किसी तनाव के तय किया जाता है और कठोर दबाव और कंपन के झटके से बचाता है। EFT 's दृष्टि के चश्मे सटीक गेज ग्लास हैं जो डेयरी, खाद्य और पेय, व्यक्तिगत देखभाल और बायोफार्मा उद्योगों में उपयोग किए जाने वाले जहाजों के अंदर प्रत्यक्ष विरूपण-मुक्त दृश्य निरीक्षण प्रक्रिया की स्थिति, उत्पादों, तरल स्तर और सफाई की अनुमति देते हैं। 3 ए वेल्ड एंड साइट ग्लास एसएमएस वेल्ड एंड साइट ग्लास दीन वेल्ड एंड साइट ग्लास क्लैंप एंड साइट ग्लास वैक्यूम घटक | दृष्टि ग्लास निर्माता -EFT ताइवान में आधारित, EVERFIT TECHNOLOGY CO., LTD.अर्ध-कंडक्टर, फार्मास्युटिकल, जैव-प्रौद्योगिकी, सौंदर्य प्रसाधन, खाद्य प्रसंस्करण और संरचनात्मक इंजीनियरिंग सहित विभिन्न उद्योगों के लिए एक स्टेनलेस स्टील वैक्यूम घटक आपूर्तिकर्ता है। मुख्य उत्पाद: 316Ti स्टेनलेस स्टील पाइप, गुहा पंप भाग, पाइप टी फिटिंग, वाल्व actuator घटक, डायाफ्राम वाल्व, सामी, KF निकला हुआ किनारा, आदि।
2021/05/14 01:27:35
https://www.egtmake.com.tw/hi/category/PC_08.html
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; महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और शिवसेना सांसद संजय राउत की हुई मुलाकात , भाजपा ने कहा कुछ राजनीतिक नहीं - Rokthok Lekhani महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और शिवसेना सांसद संजय राउत की हुई मुलाकात , भाजपा ने कहा कुछ राजनीतिक नहीं On 26/09/2020 By Staff In Maharashtra, Mumbai मुंबई : महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और शिवसेना सांसद संजय राउत की शनिवार को यहां मुलाकात हुई। इसके बाद महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म हो गया। राउत ने यहां उपनगर स्थित एक होटल में फडणवीस से मुलाकात की। राउत पिछले साल विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता बंटवारे के फार्मूले को लेकर भाजपा विरोधी रुख के लिए सुर्खियों में थे। महाराष्ट्र भाजपा के मुख्य प्रवक्ता केशव उपाध्ये ने कहा कि इस मुलाकात के कोई राजनीतिक मायने नहीं है। उन्होंने ट्वीट किया, ' राउत ने (शिवसेना के मुखपत्र) सामना के लिए फडणवीस का साक्षात्कार लेने की इच्छा व्यक्त की थी और इसी बारे में चर्चा करने के लिए यह मुलाकात हुई थी।' प्रवक्ता ने कहा, ' फडणवीस ने राउत से कहा है कि वह बिहार में चुनाव प्रचार करके लौटने के बाद उन्हें साक्षात्कार देंगे। इस भेंट का कोई राजनीतिक संदर्भ नहीं है।' शिवसेना और भाजपा ने पिछले साल विधानसभा चुनाव मिलकर लड़ा था, लेकिन चुनाव के बाद सत्ता में साझेदारी को लेकर उद्धव ठाकरे नीत पार्टी भाजपा का साथ् छोड़ गई थी और राकांपा तथा कांग्रेस के साथ मिलकर महाराष्ट्र में सरकार बना ली थी।
2022/07/01 14:06:42
https://www.rokthoklekhaninews.com/news/mumbai/former-maharashtra-chief-minister-devendra-fadnavis-and-shiv-sena-mp-sanjay-raut-met-bjp-said-nothing-political/10213/
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► MCQ Exam ON : Basic Gk MCQ Q.) Milk tastes sour when kept in open for some time due to the formation of 1) citric acid 2) carbonic acid 3) lactic acid 4) malic acid 5) An element with atomic number 36 belongs to the Who among the following persons bought the sword of Tipu Sultan in London and brought it back to India ? Humus is a type of The bond which is present between water molecules is The Provision of Contingency Fund of India has been made under - Water is a good coolant and is used to cool the engines of cars, buses, trucks, etc. It is because water has a Which festival is celebrated on the first day of Chetra, after Holi festival? There are how many strains of H & N proteins that cumulatively make up the HN breed of flu virus (eg. being the presently famous H1N1 virus) Which one of the following is a water soluble vitamin? >कुम्भ का मेला उत्तर प्रदेश के किस नगर में लगता है ? >उत्तर प्रदेश का सबसे पुराना इंजीनियरिंग कॉलेज अवस्थित है ? >कौन-से अनुच्छेद में 'समता के अधिकार' का प्रावधान है ? >मछली कहाँ से श्वास लेती है ? >मल्लिका साराभाई किस क्षेत्र से जुड़ी हुई है ? >सूर्य का दिखाई देने वाला भाग क्या कहलाता है ? >सूर्य से बाहर की ओर गिनती करते हुए सौरमंडल का आठवां ग्रह कौन-सा है ? >वसुंधरा शिखर सम्मेलन कहां हुआ था ? >उत्तर प्रदेश को पूर्व में किस नाम से जाना जाता था ? >नैमिषारण्य कहाँ स्थित है ? >चण्डीगढ़ का वास्तुविद् ले कोर्बुजिया किस देश का नागरिक था ? >मूलभूत अधिकारों की सूची में से किस संविधान संशोधन द्वारा सम्पत्ति के अधिकार को हटाया गया ? >गुप्त स्थापत्य कला का सर्वोत्ड्डष्ट नमूना कौन-सा मन्दिर है ? >विश्व में सबसे लम्बा पौधा कौन-सा है ? >समुद्र के जल में लवण की औसत मात्रा क्या होती है ? >पीले रंग का पूरक रंग कौन-सा है ? >वर्तमान में 'सम्पत्ति का अधिकार' किस प्रकार का अधिकार है ? >कौन-सा देश सबसे अधिक टिंबर पैदा करता है ? >हड्डियों के जोड़ पर यूरिक ऐसिड क्रिस्टलों का एकत्र हो जाना किस रोग का कारण बनता है ? >अति लोकप्रिय धार्मिक पत्रिका 'कल्याण' कहाँ से प्रकाशित होती है ? >उत्तर प्रदेश में योजना आयोग का गठन कब किया गया ? >इकोलॉजी (पारिस्थितिकी) शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग किस वैज्ञानिक ने किया था ? >'मानस पशुविहार' किस राज्य में स्थित है ? >उत्तर प्रदेश कितने न्यायिक जिलों में बाँटा गया है ? >'सांडों की लड़ाई' किस देश का राष्ट्रीय खेल है ? >बैटरियों में कौन-सा अम्ल संगृहीत (स्टोर) होता है ? >भारतीय संविधान के 73वें संशोधन का सम्बन्ध किससे है ? >सुभाषचन्द्र बोस ने भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस से निकलने के बाद किस पार्टी की स्थापना की थी ? >विश्व में सबसे विशाल मरुभूमि कौनसी है ? >कंप्यूटर सिस्टम के किस भाग को भौतिक रूप से स्पर्श किया जा सकता है ? >'मीनाक्षी मन्दिर' कहाँ स्थित है ? >पुस्तक ''ग्रेट सोल.महात्मा गाँधी एण्ड हिज स्ट्रगल विद् इण्डिया'' किसने लिखी है ? >भारत का दक्षिणतम स्थान 'इन्दिरा प्वाॅइण्ट' कहाँ स्थित है ? >साँची के स्तूप का निर्माण किसने कराया था ? >'बगदाद' किस नदी के किनारे स्थित है ? >'साल्ट लेक स्टेडियम' कहाँ स्थित है ? >दिन और रात कहाँ बराबर होते हैं ? >'सतर्क आकाश.2012' किन देशों के बीच हुए संयुक्त सैन्य अभ्यास का नाम है ? >सूर्य का वार्षिक चक्कर लगाकर पृथ्वी कितने किलोमीटर की दूरी तय करती है ? >लोकसभा के अध्यक्ष का चुनाव किसके द्वारा किया जाता है ? >सम्पत्ति के बँटवारे (निपटारे) के सम्बन्ध में न्यायालय के आदेशों का यथोचित पालन हुआ है कि नहीं, यह देखने का दायित्व किसका है ? >विश्व का सबसे ऊँचा पर्वत शिखर 'माउण्ट एवरेस्ट' कहाँ स्थित है ? >युआन कहां की मुद्रा है ? >भारत का संविधान किसका प्रतिनिधित्व करने के लिए राष्ट्रपति द्वारा लोकसभा के दो सदस्यों के नामांकन के लिए मुहैया करता है ? >इस समय भारत में सर्वाधिक मात्रा में पाया जाने वाला खनिज पदार्थ कौन सा है ? >कौन-सा पुच्छल तारा 76 वर्ष बाद दिखाई देता है ? >राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा के सदस्यों के नामांकन का नियम किस देश के संविधान से लिया गया था ? >मेघनाद साहा किस क्षेत्र में अपने योगदान के लिए जाने जाते हैं ? >भारत सरकार द्वारा बालकों के कल्याण के लिए 'बाल नीति' की घोषणा कब की गई थी ? >भारत में प्रच्छन्न बेरोजगारी सामान्यतः किस क्षेत्र में दिखाई देती है ? >यूनेस्को ने किस वर्ष को विकलांगों का अन्तर्राष्ट्रीय वर्ष घोषित किया था ? >राष्ट्रपति राज्यसभा के लिए उन व्यक्तियों में से, जो कला, साहित्य, सामाजिक सेवा आदि के क्षेत्र में ख्यातिप्राप्त हैं, कितने व्यक्तियों का नामन कर सकते हैं ? >भारत में कार्यपालिका का अध्यक्ष कौन होता है ? >खाद्यान्नों/खाद्य पदार्थों को सुरक्षित रखने के लिए कौनसा रसायन प्रयुक्त किया जाता है ? >पोलो खेल का प्रचलन भारत के किस राज्य में हुआ ? >प्रति व्यक्ति आय निकालने के लिए राष्ट्रीय आय को किससे भाग किया जाता है ? >'कार्बिलान कप' किस खेल से सम्बन्धित है ? >पृथ्वी से दिखाई देने वाला सबसे चमकीला ग्रह कौन-सा है ? >'ड्यूश' शब्द किस खेल से सम्बन्धित है ? >पहला ड्डत्रिम उपग्रह कौनसा था ? >'बिहू' किस राज्य का प्रमुख लोक नृत्य है ? >कैला देवी का विश्व प्रसिध्द मन्दिर राजस्थान के किस जिले में स्थित है ? >चंद्रमा तारामंडल से वापस अपनी स्थिति में जाने में कितना समय लेता है ? >किस नृत्य शैली में कथा/भाव हमेशा महाभारत या रामायण से लिया जाता है ? >'द लॉस ऑफ इनहेरिटेन्स' किसकी ड्डति है ? >अहिंसा का चरम स्वरूप किस धर्म में सर्वाधिक पालन किया जाता है ? >राज्यों में राष्ट्रपति शासन की अधिकतम अवधि क्या है ? >उत्तर प्रदेश का सर्वाधिक प्राचीन संग्रहालय कहाँ स्थित है ? >भारत में पहला सफल यड्डत प्रत्यारोपण किसने किया ? >स्फिग्मोमैनोमीटर से क्या मापा जाता है ? >संसद के दोनों सदनों का संयुक्त सत्र कौन बुला सकता है ? >किसने सबसे पहले यह पता लगाया कि शुक्र ग्रह पूरी तरह से बादलों से घिरा हुआ है ? >भारतीय विदेश व्यापार संस्थान कहाँ स्थित है ? >एशियाटिक सोसायटी का संस्थापक कौन था ? >उत्तर प्रदेश में किस जनपद में सर्वाधिक मेले लगते हैं ? >'अजलान शाह कप' किस खेल से सम्बन्धित है ? >रामड्डष्ण मिशन की स्थापना किसने की ? >भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना के समय कौन भारत का वायसराय था ? >अक्टूबर और नवम्बर के महीनों में भारी वर्षा कहाँ होती है ? >सियाचिन जाने वाला पहला भारतीय प्रधानमंत्री कौन था ? >बॉक्साइट किसकी कच्ची धातु है ? >भारत का प्राचीनतम टूर्नामेन्ट कौन सा है ? >'गैम्बिट' शब्द किस खेल से सम्बन्धित है ? >सर्वप्रथम कागज का आविष्कार कहाँ हुआ था ? >'टु ए हंगर फ्री वल्र्ड' पुस्तक के लेखक कौन हैं ? >'गेकोएला गेपोरेन्सिस' किसकी प्रजाति का नाम है ? >'ऐन एरिया ऑफ डार्कनेस' किसकी रचना है ? >ओजोन परत को हानि पहुँचाने वाला घरेलू उपकरण कौन सा है ? >डबल रोटी में फुलाव कौनसी गैस से लाया जाता है ? >'अद्वैत वाद' मत का प्रवर्तन किसने किया था ? >डाइनामाइट बनाने में किस द्रव का प्रयोग किया जाता है ? >संविधान की कौनसी अनुसूची में केंद्र और राज्यों में विधायी शक्तियों का विभाजन किया गया है ? >विश्व का दूसरा सबसे बड़ा महाद्वीप कौनसा है ? >गीत सेठी का सम्बन्ध किस खेल से है ? >लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता कौन करता है ? >उर्दू कवि मिर्जा गालिब तथा संगीतज्ञ उस्ताद फैयाज खाँ का जन्म.स्थल कौन-सा है ? >श्रव्य परिसर में ध्वनि तरंगों की आवृत्ति क्या होती है ? >कंप्यूटर प्रोग्राम हाइ लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में लिखे जाते हैं, तथापि प्रोग्राम के मानव पठनीय पाठ को क्या कहते हैं ? >संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष कौन थे ? >एलोरा के 'कैलाश मन्दिर' का निर्माण किसने करवाया था ? >पल्लवों की राजधानी का नाम क्या था ? >'रॉकीज', 'एण्डीज', 'एटलस', 'आल्पस', 'हिमालय' आदि किस प्रकार के पर्वत हैं ? >भारत के किस कलाकार को 'मॉस्को च्वाॅइस प्राइज' से सम्मानित किया गया है ? >अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी का प्रतिनिधि कैप्टन हॉकिंस किसके राजदरबार में राजकीय अनुग्रह प्राप्त करने के लिए उपस्थित हुआ था ? >'गायत्री मन्त्र' का उल्लेख किस वेद में है ? >अमृतसर की संधि निम्नलिखित में से किसके और महाराजा रंजीत सिंह के बीच संपादित हुई ? >प्रथम अखिल भारतीय बुनियादी शिक्षा सम्मेलन का आयोजन वर्ष 1939 में कहाँ हुआ था ? >भारत में हरित क्रान्ति की शुरुआत कब हुई ? >कौन-सा दिन विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में मनाया जाता है ? >किस सिख गुरू ने स्वयं को सच्चा बादशाह कहा था ? >भारतीय अर्थव्यवस्था को सबसे अच्छे ढंग से किन शब्दों में व्यक्त किया जा सकता है ? >यू. जी. सी. की स्थापना किस वर्ष हुई थी ? >चाबी भरी घड़ी में कौनसी ऊर्जा होती है ? >नवयुवतियों हेतु राजीव गाँधी शक्तिकरण योजना 'सबला' किस आयु वर्ग की लड़कियों के लिए है ? >आईसी चिपों का निर्माण किससे किया जाता है ? >बेटल कन किस खेल से सम्बन्धित है ? >पुस्तक 'बैंकर टु द पुअर' के लेखक कौन हैं ? >'ई.ड्यूको' का क्या अर्थ है ? >रेडियो का आविष्कार किसने किया था ? >नीला थोथा का रासायनिक सूत्र क्या है ? >'डबल फॉल्ट' शब्द किस खेल से सम्बन्धित है ? >संसद किसके माध्यम से सार्वजनिक व्यय पर नियन्त्रण रखता है ? >दक्षिण ध्रुव की खोज किसने की थी ? >कंप्यूटर के घटक उचित रूप से जोड़े गए हैं तथा कार्यरत है, इसे सुनिश्चित करने वाली कौनसी जांच-प्रक्रिया है ? >किस पादप को 'शाकीय भारतीय डॉक्टर' कहते हैं ? >केन्द्र सरकार ने वर्ष 2013 को किस वर्ष के रूप में मनाने का फैसला लिया ? >राधास्वामी मत का मुख्य केन्द्र दयालबाग उत्तर प्रदेश के किस जिले में स्थित है ? >विश्व विकास रिपोर्ट किसका वार्षिक प्रकाशन है ? >'गोरखालैंड परिषद' कोलकाता के किस जिले हेतु प्रशासन के लिए स्थापित की गई है ? >लोकसभा हेतु उत्तर प्रदेश में निर्वाचित संसद सदस्यों की कुल संख्या क्या है ? >सौरमंडल का केंद्र कौन-सा है ? >किस ब्रिटिश प्रधानमंत्री के समय भारत स्वतन्त्र हुआ ? >अन्नपूर्णा योजना किस वर्ष कार्यन्वित की गई थी ? >सर्वश्रेष्ठ रस किसे माना जाता है ? >विश्व आर्थिक मंच का मुख्यालय कहाँ है ? >किस संग्रहालय को विश्व.कला संग्रहों का भण्डार कहा जाता है ? >प्रसिध्द तिलस्मी उपन्यास 'चन्द्रकान्ता' के लेखक कौन हैं ? >भारत में बीमा क्षेत्र किसके द्वारा नियन्त्रित किया जाता है ? >एक रुपये के नोट पर किसके हस्ताक्षर होते हैं ? >रवीन्द्रनाथ टैगोर ने किसके विराध में नाइटहुड का त्याग कर दिया था ? >यद्यपि एक ही समय में कई प्रोग्राम खोले जा सकते हैं, लेकिन कितने प्रोग्राम एक्टिव हो सकते हैं ? >वह विज्ञान जिसमें पशु/मानव शरीरिक संरचना का विच्छेदन द्वारा सीखा जाता है ? >समुद्र तल के ऊपर विश्व की सबसे बड़ी पर्वत श्रंखला कौनसी है ? >किस मुगल शासक ने अंग्रेजो को भारत में व्यापार करने की अनुमति दी थी ? >किस वर्ष के ओलम्पिक खेलों में भारत ने भाग नहीं लिया था ? >12वीं पंचवर्षीय योजना में उत्तर प्रदेश के किन दो शहरों में एम्स जैसे अस्तपाल खोलने की घोषणा केन्द्रीय स्वास्थ्य तथा परिवार कल्याण मंत्रालय ने की है ? >'थेवा कला' के लिए प्रसिध्द परिवार कौनसा है ? >समग्र रूप से भारतीय संविधान कब लागू हुआ था ? >किस बन्दरगाह को 'ऑफ स्प्रिंग ऑफ पार्टीशन' कहा जाता है, क्योंकि इसका विकास विभाजन के पश्चात् कराची बन्दरगाह की एवज में किया गया था ? >भारत में शून्य के संप्रत्यय सहित दशमिक संख्यात्मक प्रणाली की खोज कौन-से राजवंश के दौरान हुई ? Marathi Quiz
2016/12/04 02:06:47
https://upscgk.com/upsc-gk/473b5492-4d48-4179-a397-39c85a08ff37/milk-tastes-sour-when-kept-in-open-for-some-time-due-to-the-formation-of
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Mayawati Horoscope | Mayawati Kundli | Mayawati Birth Chart DATE OF BIRTH : 15 January 1956 TIME OF BIRTH : 07:50 PM PLACE OF BIRTH : Daulatpur, India मायावती जी का जीवन उतार-चड़ाव भरा रहा है यह सभी लोग जानते है l आज हम उनकी जन्मकुंडली पर प्रकाश डालेंगे और उनके भविष्य मे होने वाली घटनाओ के योग बताएँगे l मायावती जी का जन्म 15 जनवरी 1956 मे दिल्ली शहर मे मंगल की महादशा मे हुआ l वृश्चिक राशि के मंगल ने मायावती जी को आगे बढ़ने का मार्ग प्रदान किया l मायावती जी की जन्मकुंडली मे लग्नभाव मे बैठे गुरु ने उनको अच्छी शिक्षा और अच्छा भाग्य तो प्रदान किया किन्तु ग्रहस्थ जीवन के सुख से वंचित रखा l मायावती जी की जन्मकुंडली मे प्रथम भाव मे बैठे गुरु ने उनको परोपकार और नरम दिल इंसान बनाया मायावती जी की जन्म कुंडली में जैसे ही गुरु की महादशा का आगमन हुआ जो की उनको 16 साल तक प्रभावित करती रही इसी गुरु की महादशा में उनको एक शिक्षक के रूप में कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ l मायावती जी की जन्म कुंडली में बने बुध और शुक्र के योग के कारण उनको राजनीति की तरफ ज्यादा रुझान दिया और इसी समय के अंतराल में उन्होने कई तरह के आन्दोलनों में भी भाग लिया l मायावती जी की जन्म कुंडली में 1994 से 2013 तक शनि की महादशा चली l इसी शनि की महादशा ने उनको अनेकों ऊँचाईयों तक पहुचाया l 1991 में मायावती जी ने उच्च पद की प्राप्ति की और राजनीति में अपना मान-सम्मान प्राप्त किया और यह मान-सम्मान उनको मिलता रहा l मायावती जी की जन्म कुंडली में बुध की महादशा का समय चल रहा है l मायावती जी जन्म कुंडली में बने चन्द्र और बुध के मेल के कारण बिना सोचे-समझे कही हुई बात परेशानी का कारण बन सकती है, जिसके कारण उन्हे अपमानित भी होना पड़ सकता है, साथ राजनीतिक क्षेत्र में निराशा का सामना करना पड़ सकता है l मायावती की जन्म कुंडली में बुध की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा चल रही है क्योंकि शुक्र जन्म कुंडली में नीच का बैठा हुआ है जिसके कारण आने वाले भविष्य में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है इसलिए सही समय पर किए गये उपाए इन सारी आने वाली परेशानियों को दूर कर सकता हैl
2020/07/10 09:32:21
https://www.yesicanchange.com/kundali/mayawati-horoscope.aspx
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Chhattisgarh: पीएससी एवं भर्ती संबंधी मामला..khabar36 Home/छत्तीसगढ़/Chhattisgarh: पीएससी एवं भर्ती संबंधी मामला, लोक सेवा आयोग में गंभीर अनियमितताओं एवं भर्ती प्रक्रिया में धांधली के संबंध में पूर्व मुख्यमंत्री का वेबीनार Chhattisgarh: पीएससी एवं भर्ती संबंधी मामला, लोक सेवा आयोग में गंभीर अनियमितताओं एवं भर्ती प्रक्रिया में धांधली के संबंध में पूर्व मुख्यमंत्री का वेबीनार रायपुर। (Chhattisgarh) किसी भी अच्छे लोकतंत्र का तकाजा श्रेष्ठ भर्ती संस्था भी होती है। भारत में दूर दराज के गांवों में बैठे गरीब बच्चे भी बड़े पदों में पहुंचने के सपने के साथ पीएससी जैसी परीक्षाओं की तैयारी करते है। किसी के मां-बाप जमीन बेचकर, तो कभी गहने बेचकर भी अपने बेटे-बेटियों को पढ़ाते है। पीएससी जैसी संस्थायें, एक संस्थान मात्र नहीं है, (Chhattisgarh) बल्कि युवाओं के आशा और विश्वास के प्रतीक भी है। जब भर्ती में अनियमितता, भ्रष्टाचार, विलंब जैसी स्थितियां निर्मित होती है, तो पूरे राज्य के युवाओं के बीच हताशा और निराशा का वातावरण निर्मित हो जाता है, जो किसी भी राज्य के लिए अत्यंत दुर्भाग्यजनक स्थिति है। मैंने अपने 15 साल के मुख्यमंत्री काल में पूरी ईमानदारी से प्रयास किया कि छत्तीसगढ़ के मेरे युवा साथियों के लिए अधिकाधिक भर्ती सुनिश्चित कर सकूं। शुरू शुरू में हमारे समय में गड़बड़ियां सामने आई। मैं तत्काल सुधार हेतु ईमानदार प्रयास किये। हमने समय से पहले पीएससी के चेयरमैन को केबिनेट में विशेष निर्णय लेकर हटाने तक का काम किया। बाद में हमने पीएससी चेयरमैन के पद के लिए अच्छे से अच्छे व्यक्ति को खोजने का प्रयास किया। और मुझे इस बात का गर्व है कि जिन्हें मैंने पीएससी का चेयनमैन बनाया था, उनकी कर्मठता और ईमानदारी ऐसी थी कि बाद में उन्हें प्।ै की परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था यूपीएससी का पहले सदस्य बनाया गया और बाद में उन्हें यूपीएससी काचेयरमैन भी नियुक्त किया गया। 22012-13 के बाद से प्रत्येक संविधान दिवस अर्थात 26 नवम्बर को नियमित रूप से पीएससी का विज्ञापन निकालने की परिपाटी को मैंने प्रारंभ कराया। प्रत्येक वर्ष 26 नवम्बर से पहले प्रीलिम्स, मेन्स, इंटरव्यू पूरा कराकर अगली भर्ती के लिये रास्ता साफ कर दिया जाता था। इंटरव्यू खतम होने के आखिरी दिन ही रिजल्ट घोषित करने की परिपाटी को भी मैंने प्रारंभ कराया। हाल में सामने आई अनियमिततायें 1.छत्तीसगढ़ के पीएससी ने सारी हदों को पार करते हुए अभी अभी नियम 56.13 में परिवर्तन कर दिया। अभ्यर्थियोंको अब संशोधित माॅडल आंसर ही नहीं दिया जायेगा। इसी तरह नये नियम के तहत 20 प्रतिशत प्रश्नों के गलत होने की स्थिति में ही परीक्षा निरस्त की जायेगी, अन्यथा नहीं। पूरे भारत में 20 प्रतिशत का नियम बनाने वाली एक मात्र संस्था हमारे छत्तीसगढ़ की पीएससी ही होगी। 2.विभिन्न स्त्रोतों के अनुसार असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती परीक्षा में अलग-अलग विषयों से कुल 105 प्रश्नों को विलोपित करने की बात आई।अनेक अभ्यर्थियों का यह भी आरोप है कि दर्जन भर प्रामाणित स्त्रोतों के रिफरेंस को भी नजरअंदाज किया गया,नहीं तो विलोपित प्रश्नों की संख्या 200 से भी अधिक हो सकती थी। इस तरह की कार्यप्रणाली न्यायालय में याचिकाओं की स्थिति निर्मित कर सकती है और भर्ती प्रक्रिया में अनावश्यक विलम्ब हो सकता है। 3.इसी तरह सहायक संचालक-कृषि की परीक्षा में 150 से 14 प्रश्नों को विलोपित किये जाने कीजरूरत पड़ी थी। 4.पीएससी द्वारा गठित विशेषज्ञ समितियों द्वारा अड़ियल रवैया अपनाने के मामलेभी सामने आये है। दावा-आपत्ति के बाद भी माॅडल उत्तर में सुधार नहीं करने की स्थिति निर्मित हो रही है। 26 दिसंबर 2020 को स्वयं 3छत्तीसगढ़ पीएससी द्वारा ही एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई थी, जिससे स्पष्ट होता है कि 9 फरवरी 2020 को प्री-2019 की परीक्षा आयोजित हुई। दावा-आपत्ति के बाद संशोधित माॅडल आंसर 29 मई 2020 को जारी किया गया। दावा-आपत्ति में अनेक युवा भाई-बहनों के तर्को को नजरअंदाज किया गया, तभी वे माननीय उच्च न्यायालय की शरण में जाने को बाध्य हुये। उदयन एवं अन्य बनाम छत्तीसगढ़ शासन का केस चला। युवाओं का तर्क सही था, तभी माननीय उच्च न्यायालय में उनकी जीत हुई और फिर से 5 सदस्यीय समिति पीएससी को गठित करनी पड़ी। विशेषज्ञ समिति ने भी कई प्रश्नों में युवाओं के तर्कको सही पाया। विलोपित करनया मॉडल आंसर जारी करना पड़ा। 5.किसी भी परीक्षा के किसी प्रश्न-पत्र में न्यूनतम मानवीय भूल तो हो सकती है। लेकिन असिस्टेंट प्रोफेसर की परीक्षा में पूछा गया था कि तातापानी कहां है?माॅडल उत्तर में सूरजपुर लिया गया था। जबकि छत्तीसगढ़ के बच्चे-बच्चे को पता है कि तातापानी तो बलरामपुर जिले में है। इस स्तर की बड़ी गलतियां कदापिस्वीकार्य नहीं हो सकती। ऐसे बड़ी गलती करने वाले तथाकथित विशेषज्ञ का नाम सार्वजनिक किया जाना चाहिये और ऐसे तथाकथित विशेषज्ञ को आजीवन ब्लैक लिस्टेड किया जाना चाहिये था। 6.यूपीएससी हर साल विभिन्न परीक्षाओं का कैलेंडर पहले ही जारी कर देती है। इसी तर्जपर उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश जैसे अन्य राज्यों के लोक सेवा आयोगों ने भी अपने-अपने कैलेंडर जारी कर दिये है। लेकिन हमारे छत्तीसगढ़ के पीएससी ने कोई कैलेंडर ही जारी नहीं किया है। कैलेंडर फिक्स नहीं रहने से केन्द्र और राज्यों की अनेक परीक्षाओं के साथ डेट क्लैस भी होता है। कैलेंडर फिक्स रहने की स्थिति में अभ्यर्थी अपने परीक्षाओं का चयन पहले से ही कर सकते है। 47.वन विभाग से संबंधित ।ब्थ् और रेंजर के 178 पदों के विज्ञापन में परीक्षाओं का अता-पता ही नहीं है। कैलेंडर नहीं होने के कारण ही यह सब स्थितियां निर्मितहो रही है।8.अनेक मामलों में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग द्वारा त्ज्प् के अंतर्गत सूचना प्रदान न करने की स्थिति भी निर्मित होती रही है। अनेक सूचनाओं के लिए राज्य सूचना आयोग तक अभ्यर्थियों को जाना पड़ता है। इससे अनेक संदेह की परिस्थितियां निर्मित होती है।9.भूपेश बघेल की सरकार खुद की तारीफ करते फिर रही है कि उन्होंने 24 साल बाद शिक्षकों की नियमित भर्ती करा दी। शिक्षाकर्मियों का संविलियन मैंने कराया, उसी कारण से शिक्षाकर्मी का कैडर डेड हुआ और स्वभाविक था कि अगली भर्ती तकनीकी रूप से नियमित ही होनी थी।नियमित शिक्षक की व्यवस्था को बिगाड़ने का काम 1997 में दिग्विजय सिंह की कांग्रेस सरकार ने किया था। शिक्षाकर्मी व्यवस्था की शुरूआत करके वर्ग-3 को 800 रूपये, वर्ग-2 को 1000 रूपये और वर्ग-1 को 1200 रूपये वेतन देता था। उस व्यवस्था को मैंने अपने कार्यकाल में बेहतरबनाते-बनाते 40,000 से 50,000 तक वेतनकी व्यवस्था किया। संविलियन करके सभी शिक्षकों को नियमित बनाया और आगे के लिए भी नियमित भर्ती का रास्ता सुनिश्चित किया। आज इन लोग शून्य काम करके छत्तीसगढ़ के युवाओं को ढग रहे है।10.14,580 शिक्षकों की भर्ती के लिए2019 में इन्होंने विज्ञापन निकाला। जुलाई तक परीक्षा के परिणाम भी आ गये थे। लेकिन अलग-अलग बहानाबाजी करके आज दिनांक तक साढे़ बारह हजार शिक्षक साथियों को नियुक्ति पत्र नहीं दिये है। आज शिक्षक के रूप में चयनित युवाओं को भी रोजगार गारंटी योजना में मजदूरी करनी पड़ रही है। 5अनियमितताओं और गड़बड़ियों की सूची बहुत लम्बी है। आजछत्तीसगढ़ के मेरे युवा साथी हताश और निराश है। आप लोगों की सभी मांगे बिल्कुल जायज है। देखिये, हम लोगों के पास राजनीति करने के लिए सैकड़ो मुद्दे है। आप लोगों के विषय में हम लोग केवल यह चाहते है कि आप लोगों का काम हो जाये। जहां आप लोगों को लगे कि भारतीय जनता पार्टी के सहयोग से आप लोगों को मदद मिलेगी, वहां हम लोग हर स्तर का सहयोग प्रदान करेंगे। विधानसभा में प्रश्न पूछना हो, ध्यानाकर्षण लगाना हो, सड़क की लड़ाई लड़नी हो, हर मोर्चे पर भारतीय जनता पार्टी साथ रहेगी।प्रेषक,डाॅ.रमनसिंहपूर्व मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़
2021/06/12 12:07:34
https://khabar36.com/chhattisgarh-psc-and-recruitment-related-matter/
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सोनम कपूर ने क्वारंटीन में दिखाया अपना दिल्ली का आलीशान घर.. – CELEBSBOX बॉलीवुड की मशहूर एक्ट्रेस सोनम कपूर इन दिनों लॉकडाउन के कारण पति आनंद आहूजा अपने दिल्ली वाले घर में रुकी हैं. वह क्वारंटीन में रहते हुए भी अकसर सुर्खियों में छाई रहती हैं. इसके साथ ही एक्ट्रेस अकसर सोशल मीडिया पर भी खूब एक्टिव रहती हैं. हाल ही में सोनम कपूर ने दिल्ली में बने अपने आलीशान घर की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की हैं, जिसने लोगों का खूब ध्यान खींचा है. इन तस्वीरों में सोनम कपूर और आनंद आहूजा का घर देखने लायक है. एक्ट्रेस की इन फोटो के लिए फैंस खूब तारीफ भी कर रहे हैं. सोनम कपूर ने सबसे पहले इंस्टाग्राम पर अपने रूम की फोटो शेयर कीं, जिसमें उनका कमरा भी तारीफ के लायक था. इन फोटो में एक्ट्रेस और उनके पति दोनों ही पढ़ने में बिजी लग रहे थे. इसके बाद एक्ट्रेस ने घर में बने गार्डन की फोटो शेयर कीं, जिसमें उनके पति एक्ससाइज करते हुए नजर आ रहे थे. रूम के साथ-साथ सोनम कपूर के घर का गार्डन भी जबरदस्त लग रहा था. इसके बाद एक्ट्रेस ने घर में मौजूद स्टडी रूम की फोटो भी शेयर की, जिसमें उनके पति किताबों के साथ दिखाई दे रहे थे. इन सबके बीच सोनम कपूर ने अपना किचन भी दिखाया, जहां वह खुद खाना बनाती नजर आ रही थीं. सोनम कपूर ने अपने आलीशान घर की फोटो शेयर करते हुए लिखा, "क्वारंटीन का स्नैपशॉट्स." बता दें कि लॉकडाउन शुरू होने से पहले एक्ट्रेस और उनके पति लंदन से लौटे थे और तब से ही वह दिल्ली में रुके हुए हैं. एक्ट्रेस के वर्क फ्रंट की बात करें तो वह आखिरी बार फिल्म द जोया फैक्टर में नजर आई थीं. इस फिल्म में उनके साथ एक्टर दुल्कर सलमान ने भी मुख्य भूमिका अदा की थी. एक्ट्रेस की यह फिल्म पूरी तरह लक पर आधारित थी.
2022/05/20 01:27:49
https://www.celebsbox.in/sonam-kapoor-shares-photos/
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उत्तराखंड : आंकड़े बता रहे हैं गांवों में कोरोना की रफ्तार, ये है जांच का सच - Uttarakhand News Home » »Unlabelled » उत्तराखंड : आंकड़े बता रहे हैं गांवों में कोरोना की रफ्तार, ये है जांच का सच उत्तराखंड : आंकड़े बता रहे हैं गांवों में कोरोना की रफ्तार, ये है जांच का सच देहरादून: कोरोना के मामले भले ही तेजी से कम हो रहे हों, लेकिन पहाड़ी जिलों में अब भी कोरोना की स्थिति ठीक नहीं है। गांव में सरकार टेस्टिंग का दावा तो कर रही है। लेकिन, जो खबरें गांवों से मिल रही हैं, वह कुछ और ही बता रही है। गांवों में केवल लोगों के एंटीजन टेस्ट किए जा रहे हैं। जबकि सरकार खुद ही यह मानती है कि एंटीजन में निगेटिव आने के बाद भी आरटीपीसीआर में पाॅजिटिव आ सकते हैं। एक और बड़ी बात यह है कि गांवों में लोग खांसी, जुकाम और बुखार से पीड़ित तो हैं, लेकिन जांच कराने जब टीम गांव पहुंच रही है, तो कुछ ही लोग टेस्ट करा रहे हैं। इस तरह की रिपोर्ट गांवों में टेस्टिंग के लिए जा रही टीमें लगातार दे रही हैं। इससे जांच पर सवाल खड़े हो रहे हैं। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर राज्य के पर्वतीय जिलों में सबसे अधिक कहर बरपा रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार एक मई से 19 मई के बीच नौ पर्वतीय जिलों में 20 हजार से अधिक मामले आए हैं, जो राज्य के कुल मामलों का 27.6 फीसदी है पहाड़ों में कोरोना से मरने वालों की तादाद भी लगातार बढ़ रही है। इसके लिए सरकार के कुप्रबंधन, पूरा तंत्र नौकरशाही के हवाले छोड़ना और पहाड़ी जिलों में जांच की धीमी गति को जिम्मेदार माना जा रहा है। राज्य में एक मई से 19 मई तक कोरोना से मरने वालों में 19 प्रतिशत मरीज पर्वतीय जिलों के हैं। एक मई से 10 मई तक राज्य के नौ पर्वतीय जिलों में करीब 20 हजार लोग संक्रमित मिले, जो राज्य के कुल मामलों का 27.6 प्रतिशत हैं। इस हिसाब से राज्य में अब हर चैथा मामला उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों से आ रहा है। पहाड़ों की विषम भौगोलिक स्थिति के कारण एक टीम एक दिन में एक ही गांव में जांच कर पाती है। उस दिन वह चाहकर भी दूसरे गांव में नहीं जा पाती है। The post उत्तराखंड : आंकड़े बता रहे हैं गांवों में कोरोना की रफ्तार, ये है जांच का सच first appeared on Khabar Uttarakhand News.
2021/08/03 10:09:41
https://www.uttarakhandnews1.com/2021/05/blog-post_919.html
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गोवा भाजपा अलग राह पर चल रही है, जो मेरे पिता के रास्‍ते बिलकुल अलग: उत्पल पर्रिकर - Bjp on different path utpal parrikar on congress mlas induction - Latest News & Updates in Hindi at India.com Hindi गोवा भाजपा अलग राह पर चल रही है, जो मेरे पिता के रास्‍ते बिलकुल अलग: उत्पल पर्रिकर कांग्रेस विधायकों को बीजेपी में शामिल होने पर मनोहर पर्रिकर के बेटे समेत कुछ नेता नाराज Updated: July 11, 2019 7:38 PM IST उत्‍पल पर्रिकर ने कांग्रेस के 10 व‍िधायकों को बीजेपी में शा‍म‍िल किए पर न‍िराशा व्‍यक्‍त की है. पणजी: गोवा में कांग्रेस के 10 विधायकों के भाजपा में शामिल किए जाने के कदम की सत्तारूढ़ पार्टी के अंदर ही कुछ लोग निंदा कर रहे हैं, जिनमें दिवंगत मुख्यमंत्री मनोहर लाल पर्रिकर के पुत्र उत्पल भी शामिल हैं. इस घटनाक्रम पर निराशा जाहिर करते हुए उत्पल ने कहा कि जो कुछ भी हुआ है, वह निश्चित रूप से उनके पिता जो रास्ता अपनाते उससे बिल्कुल अलग है. उत्पल ने कहा कि उनके पिता के निधन के बाद गोवा भाजपा अब "नई दिशा" में मुड़ चुकी है. Also Read - Maharashtra Lockdown: महाराष्ट्र में लॉकडाउन जैसी पाबंदियों के बीच देवेंद्र फडणवीस ने की यह मांग... Also Read - बंगाल में भाजपा के सत्ता में आने के बाद गोरखा समस्या का समाधान हो जाएगा: अमित शाह उत्पल ने गुरुवार को कहा, इस साल 17 मार्च को मेरे पिता का निधन हुआ और मैं जानता था कि उनके जाने के बाद उस रास्ते का भी अंत हो गया. हालांकि गोवावासियों को कल इस बारे में पता चल गया. Also Read - WB Assembly Electons 2021: ममता बनर्जी के बाद अब भाजपा नेता राहुल सिन्हा पर EC का एक्शन, लगाना 48 घंटे का बैन गोवा के 10 कांग्रेस विधायकों ने जेपी नड्डा की मौजूदगी में ली बीजेपी की सदस्‍यता कांग्रेस के 10 विधायकों के भाजपा में शामिल होने पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा, 17 मार्च को ही भाजपा में प्रतिबद्धता और विश्वास जैसे शब्दों के मायने खत्म हो गए. उन्होंने कहा कि भाजपा अब "नई दिशा" में जा रही है और सिर्फ समय ही बताएगा कि वह सही पथ पर है या नहीं. उत्पल ने कहा कि वह भाजपा में ही बने रहेंगे और पार्टी कार्यकर्ताओं का समर्थन करेंगे. पर्रिकर के निधन के बाद उत्पल विधानसभा उपचुनाव में अपनी पिता की सीट से भाजपा की टिकट के दावेदार थे, हालांकि भाजपा ने उनके पिता की सीट से उन्हें नहीं उतारा. कर्नाटक के बाद अब गोवा में कांग्रेस पर संकट, भाजपा में शामिल हो गए 10 विधायक बुधवार को गोवा में विधानसभा में विपक्ष के नेता चंद्रकांत कावलेकर के नेतृत्व में कांग्रेस के 15 में से 10 विधायक पार्टी से अलग होकर भाजपा में शामिल हो गए, जिससे 40 सदस्यीय विधानसभा में अब सत्तारूढ़ पार्टी की संख्या बढ़कर 27 हो गई है. गोवा भाजपा के पूर्व प्रमुख राजेंद्र आर्लेकर ने भी कहा कि राज्य में मौजूदा राजनीति घटनाक्रम से वह भी व्यथित हैं. पणजी उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार सिद्धार्थ कुनकोलिंकर को हराने वाले अतानासियो मोंसेराटे के भाजपा में शामिल होने पर भी कुछ पार्टी नेताओं ने नाराजगी जताई, जिन पर 2016 में एक नाबालिग से बलात्कार का आरोप है. BJPCongressGoaManohar parrikarMLA'sutpal parrikar Published Date: July 11, 2019 7:36 PM IST Updated Date: July 11, 2019 7:38 PM IST वीड‍ियों में गालियां और धमकी देने वाले व‍िधायक प्रणव सिंह चैंपियन के ख‍िलाफ केस दर्ज मासूम बच्‍ची से रेप और मर्डर के दोषी को कोर्ट ने 32 दिन में सुनाई फांसी की सजा यूपी में बेकाबू हालात: लखनऊ में व्यापारियों ने तीन दिन के लिए बाज़ार बंद करने का किया ऐलान, 24 घंटे में 20 हज़ार नए केस Breaking News: दिल्ली: ITO स्थित केंद्रीय राजस्व भवन में लगी आग, 14 दमकल गाड़ियाँ मौके पर कोरोना पॉजिटिव हुए सीएम योगी और अखिलेश यादव के लिए प्रियंका गांधी ने किया Tweet, कहा- उम्मीद है वे... Covid-19 New Symptoms In India: देश भर में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर, ये हैं नए लक्षण, Note कर लें, बचकर रहें
2021/04/15 00:27:59
https://www.india.com/hindi-news/india-hindi/bjp-on-different-path-utpal-parrikar-on-congress-mlas-induction-3714806/
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Zai Whitaker कॉलम | मद्रास क्रोकोडाइल बैंक से ए (दूसरा) लॉकडाउन डिस्पैच - लिविंग न्यूज, फ़र्स्टपोस्ट - Home TECHNOLOGY Zai Whitaker कॉलम | मद्रास क्रोकोडाइल बैंक से ए (दूसरा) लॉकडाउन... Zai Whitaker कॉलम | मद्रास क्रोकोडाइल बैंक से ए (दूसरा) लॉकडाउन डिस्पैच – लिविंग न्यूज, फ़र्स्टपोस्ट हालांकि आठ महीने का लॉकडाउन चुनौतीपूर्ण रहा है (विशेष रूप से वित्तीय रूप से), क्रोक बैंक "सकारात्मक परीक्षण" करने में कामयाब रहा और कई नए विचारों और परिवर्तनों के साथ आया। <p><em>मद्रास क्रोक बैंक से पूर्ववर्ती लॉकडाउन डिस्पैच पढ़ें, <a href="https://www.firstpost.com/living/the-zai-whitaker-column-a-lockdown-despatch-from-the-madras-crocodile-bank-8724441.html" target="_blank" rel="noopener noreferrer">यहाँ</a>।</em> सर्पदंश के जूते (एलास!) मैं इमेल्डा मार्कोस नहीं हूं, लेकिन फिर भी, मेरा दिल उन जूतों को देखकर गाया जाता है: किसानों के लिए सर्पदंश-प्रूफ गमबूट, आईआईटी-चेन्नई की डिज़ाइन और रिसर्च टीम द्वारा बनाया गया। वे स्वास्थ्य और सामाजिक कारणों के लिए विशेष जूते पहनते हैं और इनमें से एक सर्पदंश है। हमारी स्नेबाइट मिटिगेशन टीम के समन्वयक उन्हें इस भयानक समस्या के आसपास की परिस्थितियों और आंकड़ों को समझने में मदद कर रहे हैं, जिससे भारत में 60,000 वार्षिक मौतें होती हैं। ज्यादातर पीड़ित नंगे पैर किसान हैं और आम तौर पर पैर या निचले पैर पर काटते हैं। डेकाथलॉन के एक दान की बदौलत, हम तिरुनेलवेली में किसानों को 150 गमबूट वितरित करने में सक्षम थे, जो कि उच्चतम संकटों वाले छह राज्यों में से एक सर्पदंश वाला एक गर्म स्थान है। यद्यपि वे रबर से बने थे और कम से कम दो बार नियमित जूते के रूप में वजन करते थे, लक्ष्य समूह ने जल्दी से उनका उपयोग करने का लाभ देखा। उनमें से अधिकांश ने पीड़ा, रुग्णता और मृत्यु को देखा था, कि सर्पदंश का कारण बनता है; और सुरक्षा के लिहाज से खेतों की ओर अपने चलने को धीमा करने के लिए तैयार थे। सबसे उत्साही उपयोगकर्ताओं में से एक महिला किसान लक्ष्मी थी, जो जूते के लिए एक वकील बन गई है। हमें पता था कि हम सही रास्ते पर हैं, लेकिन एक उपयुक्त प्रोटोटाइप के साथ आना महत्वपूर्ण था: एक जो सस्ती, टिकाऊ और फेंग-प्रूफ थी। 15 मिमी और उससे अधिक की दूरी पर, रसेल के वाइपर के नुकीले एक दुर्जेय सिरिंज हैं और ये सांप हमारे कृषि परिदृश्य में आम हैं। इसलिए, यह मेरा दिल गा रहा था। किसानों के लिए सही फुटवियर के विकास और बड़े पैमाने पर उत्पादन से हमारे कृषि क्षेत्र के इन बहादुर दिलों के जीवन में बहुत सुधार होगा। जिस प्रोटोटाइप को मैं देख रहा था, वह आशाजनक लग रहा था। यह हल्का था, यह आधा पिंडली को कवर करता था, यह पानी प्रतिरोधी था लेकिन पानी के सबूत नहीं था, और इस प्रकार जल निकासी की अनुमति देगा। और, अंतिम रूप से कम से कम, यह एक शांत साँप-त्वचा पैटर्न था, और संपूर्ण प्रभाव सुरुचिपूर्ण था। क्या एक अच्छा विचार है, कि हमारे किसानों को सर्पदंश से सुरक्षित नहीं होना चाहिए, लेकिन बूट करने के लिए सुरुचिपूर्ण! इस महत्वपूर्ण और उपेक्षित मुद्दे के अच्छे उपयोग के लिए अपनी शिक्षा और दिमाग लगाने के लिए, आईआईटी-चेन्नई में आदर्शवादी टीम को बहुत धन्यवाद। क्यूबांस के लिए नया घर क्यूबा के मगरमच्छों के लिए फैंसी सूअर। फोटो सौजन्य MCBT एक निश्चित डेसिबल स्तर से अधिक जोर शोर मनुष्यों और जानवरों दोनों के लिए हानिकारक है। यह गंभीर स्वास्थ्य मुद्दों और यहां तक ​​कि मृत्यु में परिणाम कर सकता है। हमारे क्यूबा के मगरमच्छों के बाड़े – जो कि IUCN की रेड लिस्ट के गंभीर रूप से लुप्तप्राय श्रेणी में शामिल हैं – एक कमजोर जगह पर थे, पड़ोसी रिसॉर्ट्स में शोर की घटनाओं से आग की लाइन में। हमने उन्हें वहां से बाहर ले जाने के लिए इस लॉकडाउन अवसर को लेने का फैसला किया। सौभाग्य से, हमें एक नया पेन बनाने के लिए चोलामंडलम फाइनेंस से अनुदान प्राप्त हुआ था और ऐसा करने का यह एकदम सही समय था: कोई आगंतुक, इतना समय और ऊर्जा हाथ पर काम करने के लिए नहीं। यह संलग्नक, और इससे सटे दो अन्य, अद्वितीय हैं। निवासियों – क्यूबाईन्स, दुबला पतला मगरमच्छों और सहयोगी मगरमच्छ – अपने नए घरों का आनंद ले रहे हैं, अपने स्वदेशी आवास और सह प्रजातियों के भित्ति चित्र के साथ। मैं और नहीं कहूंगा और इसे बिगाड़ने वाला बना दूंगा; तो, आओ और उन्हें अपने लिए देखें! यह हम मनुष्यों के लिए भी एक पुरस्कृत अनुभव रहा है। उदाहरण के लिए, हमने हुतिया के बारे में सीखा, एक गिनी-पिग जैसे जानवर जो क्यूबा के क्रोक के निवास स्थान को साझा करता है और कैरिबियन के लिए स्थानिक है। अपने दोस्त अजय कार्तिक के साथ सहयोगी। फोटो सौजन्य संदीप वर्मा लॉकडाउन ने हमें अपने पर्यावरण संवर्धन कार्यक्रम का विस्तार करने के लिए भी समय दिया। इसमें उत्तेजनाएं और गतिविधियां शामिल हैं जो एक चिड़ियाघर के जानवर को अपनी सामाजिक और संज्ञानात्मक क्षमता तक पहुंचने की अनुमति देती हैं। उदाहरण के लिए, प्राइमेट्स को उनके स्नैक या भोजन को अलग-अलग खुले / करीबी सिस्टम के साथ कंटेनरों में दिया जा सकता है, ताकि उनकी ग्रे कोशिकाओं का उपयोग किया जा सके, जैसे कि वे अपने शिकार / जंगल में जीवन शैली बनाने के लिए हैं। सरीसृपों को स्वभाव से आदिम माना जाता है, लेकिन संवर्धन कार्यक्रमों ने आश्चर्यजनक संज्ञानात्मक क्षमताओं को दिखाया है, क्लासिक उदाहरण मगरमच्छ हैं जो अपने कीपर की आवाज़ों को पहचानते हैं। संवर्धन और प्रशिक्षण भी रखवाले के लिए पति प्रक्रियाओं को सुरक्षित बनाते हैं। हमारे कोमोडो अंत में एक रंगीन गेंद के साथ लक्ष्य छड़ी के साथ भोजन को जोड़ना सीख रहे हैं – और सीखा है कि कीपर में कूदना एक उत्पादक अभ्यास नहीं है। हमारे सबसे चतुर जानवरों में से एक एलीगेटर सहयोगी है, जो अप, कम, डाउन और वाटर सहित कई कमांडों का जवाब देता है। लेकिन सभी छात्रों की तरह, उसके अच्छे और बुरे दिन हैं, और सबसे बुरे दिन आम तौर पर होते हैं जब हम मेहमानों को अपने कौशल दिखाने की कोशिश कर रहे होते हैं। स्मार्ट प्रजनन एक पीले एनाकोंडा शिशुओं में से एक के साथ सहायक क्यूरेटर अंबिका। फोटो सौजन्य ज्ञानेश्वर चौ तालाबंदी के दौरान चिड़ियाघर इतना शांत हो गया है: बाहर से कोई संगीत नहीं, कोई यातायात नहीं, कोई आगंतुक नहीं। घूमने का अच्छा समय था, सरीसृपों के लिए उठने वाली कुछ आकर्षक चीजों का आनंद लेना। इनमें से एक शुक्राणु प्रतिधारण है, जो क्षमता है कि कुछ जानवरों में अंडे के निषेचित होने से पहले प्रजनन पथ के एक विशिष्ट हिस्से के भीतर शुक्राणु का भंडारण होता है। हमारे पीले एनाकोंडा (Eunectes notaeus) पिछले चार वर्षों से शिशुओं का उत्पादन किया है, उस समय भी एक पुरुष को नहीं लगाया। उसने हाल ही में फिर से जन्म दिया और बच्चे उज्ज्वल और शिष्ट हैं (और उन्हें खिलाने वाले हाथ को काटने के लिए खुश हैं)। हमारे गंगा के कछुओं में से एक (निल्सोनिया गैंगेटिका) और भी बेहतर किया है। उसने एक पुरुष की पहुंच के बिना 10 वर्षों तक व्यवहार्य अंडे का उत्पादन किया है। सनकमन घर आता है अपने तमिल और कन्नड़ समकक्षों के साथ मूल Snakeman। फोटो सौजन्य फ़ैज़ अंसारी Snakeman, रोम की मेरी जीवनी [Romulus Whitaker], लॉकडाउन के दौरान एक उत्पादक समय था और – एक उदार दाता के लिए धन्यवाद – अब तमिल और कन्नड़ में उपलब्ध है। अनुवादकों, कमलालयन वी और एसवी श्रीनिवास, सभी खातों द्वारा एक सुपर काम किया गया है, क्योंकि प्रकाशक वनथी पथिप्पगम हैं। व्यापक पर्यावरणीय आपात स्थिति के इन दिनों में, भारत में संरक्षणवादियों की दूसरी पंक्ति बनाना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। रोम और उसके ilk के अनुभव बताते हैं कि अल्प वित्तीय संसाधनों के साथ बहुत कुछ किया जा सकता है। यह हमें बहुत खुश करता है, कि पुस्तक अब इन दो राज्यों में गैर-अंग्रेजी पाठकों के लिए उपलब्ध होगी, जहां उन्होंने अपने सबसे महत्वपूर्ण काम किए हैं। हमाद्रिद की वापसी (LR) हमाद्राद का पहला अंक … और वजनदार वैज्ञानिक पत्रिका ने इसे आकार दिया छोटे बलूत बड़े ओक बनाते हैं। Hamadryad मद्रास स्नेक पार्क में एक पुरानी साइक्लोस्टाइलिंग मशीन द्वारा "प्रकाशित" 1976 में सरीसृप संरक्षण के लिए 10-पेज के समाचार पत्र के रूप में शुरू किया गया था। हम लीवर को पैंतरेबाज़ी में बदल देते हैं जो रोलर को घुमाता है जो स्टैंसिल को काटता है जो पुराने गोदरेज टाइपराइटर पर अंकित किया गया था। स्टाइल्स पर ग्राफिक्स को स्टाइलस के साथ हाथ से खींचना पड़ता था, एक नुकीला धातु का उपकरण जो किसी उपकरण की तुलना में हथियार की तरह दिखता था। रोलर को एक खस्ता स्याही की एक नली से सूँघना पड़ता था, जो किसी के हाथ, कोहनी, माथे पर लग जाता था और उसे धोना आसान नहीं था। "मुद्रित" पृष्ठों को स्टैपल होने से पहले सूखने के लिए फैलाना पड़ता था। सामग्री में उपमहाद्वीप के बारे में समाचार और नोट्स शामिल थे और बहुत जल्दी कई देशों में एक व्यापक पाठक प्राप्त किया और सरीसृप-प्रकृतिवादियों के नेटवर्क का निर्माण किया। यह क्षेत्र सर्वेक्षण, डेटा संग्रह और क्रॉस-कंट्री पहल जैसे कि घड़ियाल पारिस्थितिकी परियोजना के दौरान एक बड़ा समर्थन बन गया। शरीर विज्ञान में रुचि रखने वाले छात्रों ने इस बारे में बात की कि उनके लेख या नोट को प्रकाशित करने के लिए कितना उत्साहजनक था Hamadryad। ठीक है, यह एक चमकदार पत्रिका बन गया, लेकिन 2018 में मुद्रण और डाक की बढ़ती लागत के कारण हमें इसके प्रकाशन को रोकना पड़ा। लॉकडाउन ने हमें अपने सिर को खरोंचने और सोचने के लिए समय दिया कि यह कैसे जीवन में वापस लाया जा सकता है। अब एक नया अवतार बनाने की योजना पर काम चल रहा है Hamadryad ऑनलाइन, पशु चिकित्सक यतिन कल्कि के साथ संपादक के रूप में। इतना रोमांचक है। तो सभी के सभी, हालांकि लॉकडाउन के आठ महीने चुनौतीपूर्ण रहे हैं (विशेष रूप से वित्तीय रूप से), क्रोक बैंक "सकारात्मक परीक्षण" करने में कामयाब रहा और हमारे पास बोर्ड पर मौजूद महान टीम के लिए कई नए विचारों और परिवर्तनों के साथ आया। हमारे स्टाफ और ट्रस्टियों का बहुत-बहुत धन्यवाद और हमें दान देने वाले कई लोग। लेखक और संरक्षणवादी Zai Whitaker ट्रस्टी का प्रबंधन कर रही है – मद्रास क्रोकोडाइल बैंक ट्रस्ट / सेंटर फॉर हर्पेटोलॉजी। फ़र्स्टपोस्ट के लिए उसके और कॉलम पढ़ें यहाँ। </div><p><em>ऑनलाइन पर नवीनतम और आगामी तकनीकी गैजेट खोजें <a href="https://www.firstpost.com/tech/gadgets" class="external-link" title="Tech2 Gadgets">टेक 2 गैजेट्स।</a> प्रौद्योगिकी समाचार, गैजेट समीक्षा और रेटिंग प्राप्त करें। लैपटॉप, टैबलेट और मोबाइल विनिर्देशों, सुविधाओं, कीमतों, तुलना सहित लोकप्रिय गैजेट।</em></p> Previous articleASUS VivoBook 15 K513 Thin & Light Laptop, 15.6" FHD Display, Intel i7-1165G7 CPU, NVIDIA GeForce MX350, 16GB DDR4, 256GB SSD + 1TB HDD, Fingerprint Reader, Windows 10 Home, Indie Black, K513EQ-PH77 Next articleयूएस एफडीए ने डोनाल्ड ट्रम्प को दिए गए रीजनरॉन एंटीबॉडी थेरेपी के लिए आपातकालीन उपयोग को अधिकृत किया – स्वास्थ्य समाचार, फ़र्स्टपोस्ट
2020/11/25 00:08:59
https://blazewebhost.in/2020/11/22/zai-whitaker-%E0%A4%95%E0%A5%89%E0%A4%B2%E0%A4%AE-%E0%A4%AE%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B8-%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%A1%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%B2-2/
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एयरटेल ने भारत की 5जी क्षमता से लैस पहली टैक्नोलॉजी Massive MIMO लगाने की घोषणा की - Best News Portal Home Breaking News एयरटेल ने भारत की 5जी क्षमता से लैस पहली टैक्नोलॉजी Massive MIMO... एयरटेल ने भारत की 5जी क्षमता से लैस पहली टैक्नोलॉजी Massive MIMO लगाने की घोषणा की नई टैक्नोलॉजी इसकी मौजूदा नेटवर्क क्षमता में 5 से 7 गुना बढ़ोतरी करेगी, तेज रफ्तार डेटा और बेहतर ग्राहक अनुभव सुनिश्चित करने में मिलेगी मदद Massive MIMO का इस्तेमाल करने वाले दुनिया के चुनींदा देषों में शामिल हुआ भारत, देश में दूरसंचार के क्षेत्र में जबर्दस्त प्रगति एयरटेल के ग्राहकों को अब अपने मौजूदा 4जी मोबाइल डिवाइसों पर बिना अपग्रेड या प्लान बदलवाए ही मिलेगा तेज रफ्तार डेटा स्पीड का लाभ बेंगलुरु तथा कोलकाता से शुरूआत कर एयरटेल ने देश के अन्य भागों में टैक्नोलॉजी को ले जाने की योजना बनायी लखनऊ : भारत के सबसे बड़े दूरसंचार सेवा प्रदाता भारती एयरटेल ¼"Airtel"½ ने भारत में पहली बार अत्याधुनिक मैसिव मल्टीपल-इनपुट मल्टीपल-आउटपुट (MIMO) टैक्नोलॉजी लगाने की घोषणा की है जो 5जी नेटवर्कों के लिए प्रमुख आधार है। अपने नेटवर्क को Massive MIMO बनाने के साथ ही एयरटेल के इस कदम से भारत आज दुनिया के उन चुनींदा देशों में शामिल हो चुका है जो इस टैक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर डिजिटल क्रांति को आगे ले जा रहे हैं। एयरटेल ने सबसे पहले बेंगलुरु और कोलकाता में इसकी शुरूआत की है जहां से जल्द ही देश के अन्य भागों में भी इसे पहुंचाने की योजना है। एयरटेल के मौजूदा नेटवर्क ट्रांसफॉर्मेशन प्रोग्राम – प्रोजेक्ट लीप के तहत्, Massive MIMO टैक्नोलॉजी मौजूदा स्पैक्ट्रम का इस्तेमाल कर नेटवर्क की वर्तमान क्षमता को पांच से सात गुना तक बढ़ाएगी और इस तरह स्पैक्ट्रल एफिशिएंसी को बेहतर बनाएगी। ग्राहकों को मौजूदा 4जी नेटवर्क पर ही दो से तीन गुना अधिक सुपरफास्ट स्पीड का लाभ मिलेगा। डेटा स्पीड भी बेहतर होगी जिससे इंडोर, भीड़-भाड़ वाली जगहों और बहुमंजिला इमारतों में भी यूज़र अनुभव में सुधार आएगा। इसके चलते, मल्टीपल यूज़र्स को बिना किसी कन्जेशन के मल्टीपल डिवाइसेज़ पर काम करने की सुविधा मिलेगी और खासतौर से हॉटस्पॉट लोकेशंस पर उनके अनुभव पहले से बेहतर होंगे। Massive MIMO आने वाले दौर में टैक्नोलॉजी के मोर्चे पर क्रांति रचने के लिए मजबूत आधार है। यह प्री-5ली टैक्नोलॉजी है जो भारत में डिजिटल क्रांति और डेटा विस्फोट के चलते पैदा होने वाली भारी मांग को पूरा करने के लिहाज से नेटवर्क को तैयार करेगी। ग्राहक बिना किसी अपग्रेड या प्लान बदलवाए हुए ही अपने मौजूदा 4जी मोबाइल डिवाइसों पर तेज रफ्तार डेटा स्पीड का आनंद ले सकते हैं। डेंपअम डप्डव् वास्तव में, ग्रीन टैक्नोलॉजी है जो कार्बन फुटप्रिंट कम करने में मददगार है। अभय सावरगांवकर, डायरेक्टर – नेटवर्क्स, भारती एयरटेल ने कहा, ''भारत तेजी से डेटा विस्तार की तरफ बढ़ रहा है।Massive MIMO टैक्नोलॉजी अपने कवरेज फुटप्रिंट के दायरे में स्थित यूज़र्स के लिए हॉरिज़ॉन्टल और वर्टिकल प्लेंस पर 3क् बीम्स उपलब्ध कराती है। इससे कवरेज में सुधार होता है और अलग-अलग बीम्स पर भी हस्तक्षेप भी कम होगा, जिसके परिणामस्वरूप सिग्नल क्वालिटी में सुधार आएगा। इस तरह, मौजूदा रिसोर्स ब्लॉक पर ही बेहतर सिग्नल क्वालिटी मिलने से यूज़र अनुभव, सैल क्षमता और स्पैक्ट्रम एफिषिएंसी में सुधार होता है। एयरटेल ने हाल में कोरियाई दूरसंचार सेवा प्रदाता एस के टेलीकॉम के साथ भी एक महत्वपूर्ण भागीदारी की घोॉाणा की है जो भारत में इसे सर्वाधिक उन्नत दूरसंचार नेटवर्क तैयार करने में मददगार साबित होगी। इस भागीदारी के तहत्, एयरटेल और एसकेटी मिलकर भारतीय संदर्भ में, 5जी के उन्नत मानक, नेटवर्क फंक्षंस वर्चुलाइज़ेषन (NFV) सॉफ्टवेयर-डिफाइंड नेटवर्किंग (SDN) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स के लिए परस्पर सहयोगपूर्वक काम करेंगे।
2018/02/22 02:59:58
http://www.bestnewsportal.com/airtel-announces-the-first-technology-massive-mimo-equipped-with-the-5g-capability-of-india/
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48 घंटे के भीतर पायलट गुट के 3 विधायकों के गहलोत खेमे में लौटने का दावा, BSP विधायकों के विलय की याचिका खारिज, पढ़ें 3 बड़े अपडेट्स • News Facto Home बड़ी खबरें भारत 48 घंटे के भीतर पायलट गुट के 3 विधायकों के गहलोत खेमे... Previous articleफर्श पर मरीज-कंधे पर ऑक्सीजन सिलेंडर…कोरोना संकट में बिहार के अस्पतालों का बुरा हाल Next articleसंविधान मार्च में कोरोना का डर भूल गए बिहार कांग्रेस के नेता, सोशल डिस्टेंसिंग की उड़ाई धज्जियां नई दिल्ली, जेएनएन। बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनोट ने इन दिनों कई बॉलीवुड हस्तियों को निशाने पर ले रखा है, जिसमें अब दीपिका पादुकोण...
2020/09/22 17:41:49
https://newsfacto.com/5447/
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छत्तीसढ़ में CM रमन सिंह के अधिकारियों की लापरवाही के कारण, कबाड़ बन गई हजारों नई साइकिलें Published on: August 1, 2018 9:25 AM छत्तीसढ़ में मुख्यमंत्री श्रम शक्ति योजना के तहत वितरित की जाने वाली हजारों साइकिलों को सरकारी उदासीनता ने कबाड़ के रूप में बदल दिया है. पिछले 2 महिनों से जशपुर के लाइवलीहुड कॉलेज में सरकारी अधिकारियों ने 4200 साइकिलें खड़ी कर छोड़ हैं जो बारिश, धूप, के चलते जंग खाकर कबाड़ में बदल चुकी हैं. रायपुरः छत्तीसढ़ में सरकारी लापरवाही का हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है जहां मजदूरों और अन्य गरीब जरूरतमंद लोगो को मुफ्त वितरण के लिए रखी गई हजरों साइकिलें आज कबाड़ का रूप ले चुकी हैं. मुख्यमंत्री रमन सिंह की सरकार ने पूरे राज्य में जरूरदमंदों को देने के लिए लाखों साइकिलें खरीदी थी लेकिन कुछ एक जिलों में बांटने के बाद ये काम रुक गया जिसका नतीजा हुआ कि जिले में कई सरकारी गोदामों में भरी हुई साइकिलें आज कबाड़ के रूप में बदल गई हैं. ऐसा ही एक गोदाम जशपुर से सामने आया है जहां लगभग चार हजार साइकिलें पड़े-पड़े कबाड़ में बदल गई हैं. मामला मीडिया में आने के बाद रमन सरकार ने इसकी जांच के आदेश दे दिए हैं. मामला छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में लाइवलीहुड कॉलेज का है जिसके गोदाम में रखी गई हजारों नई साइकिलें अब कबाड़ में बदल चुकी हैं. छत्तीगढ़ सराकर ने इन साइकिलों को जानीमानी कंपनी से इस जिले के लिए सात हजार आठ सौ साइकिलें खरीदी थीं जिनको वितरित किया जाना था लेकिन लापरवाही के चलते सिर्फ 3600 साइकिलें ही बांटी गई थीं. जिसके बाद बाकी बची चार हजार 200 साइकिलों को यहां कॉलेज परिसर के गोदाम में डाल दिया गया और महीनों तक इस गोदाम की कोई खबर नहीं ली गई जिसके चलते ये साइकिलें कबाड़ में बदल चुकी हैं. उसमें से ज्यादातर साइकिलों में जंग लग चुका है. साइकिलों को वितरित किए जाने की जिम्मेदारी छत्तीसढ़ में राज्य के श्रम विभाग की थी लेकिन विभाग की तरफ से बरती गई लापरवाही के कारण ये साइकिलें कूड़े में बदल गईं. मामला खुलने के बाद कांग्रेस ने राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए इसको सरकारी धन की बर्बादी बताते हुए योजनाओं में भारी लापरवाही बरतने का आरोप भी लगाया है. जिसके बाद राज्य सरकार की प्रवक्ता और विधायक श्रीचंद सुंदरानी ने इस मामले की जांच कराए जाने का आश्वासन देते हुए लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात भी कही है. ये लापरवाही का आलमप सिर्फ जशपुर जिले का नहीं है बल्कि छत्तीगढ़ के अन्य जिलों में भी इस सरकारी योजना का यही हाल है. राज्य सरकार प्रत्येक जिले के मजदूरों, स्कूली बच्चों और अन्य गरीब लोगों को मुफ्त साइकिल देना चाहती थी जिसके लिए मुख्यमंत्री श्रम शक्ति योजना को शुरु किया गया था. जिसके लिए प्रत्येक जिले में श्रम विभाग और ट्राइबल वेलफेयर को इन साइकिलों के वितरण की जिम्मेदारी दी गई थी. लेकिन सरकारी अधिकारियों की उदासीनता के चलते ये साइकिलें अब कबाड़ के ढ़ेर में बदल चुकी हैं. इंडिया न्यूज मंच पर बोले CM रमन सिंह, छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में 90 में से 65 से ज्यादा सीटें जीतेगी बीजेपी इंडिया न्यूज मंच पर बोले छत्तीसगढ़ के CM रमन सिंह- नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़कों का जाल बिछाया, नया रायपुर में देखें हमारा विकास Iran Ready for War with US: युद्ध की तरफ तेजी से बढ़ रहे अमेरिका और ईरान के बीच किसके साथ जाने में भारत का फायदा? Iran Ready for War with US: दुनियाभर में गहराया तीसरे विश्वयुद्ध का खतरा, ईरान ने मार गिराया अमेरिकी ड्रोन, तेल की कीमतों में लग सकती है आग Patient Beats Doctors And Nurses In Mumbai Hospital: कोलकाता के बाद मुंबई के डॉक्टरों के साथ जमकर हुई मारपीट, हड़ताल पर गया हॉस्पिटल स्टॉफ TDP Rajya Sabha MP Joins BJP: आंध्र प्रदेश के पूर्व सीएम चंद्रबाबू नायडू को बड़ा झटका, टीडीपी के 4 राज्यसभा सांसद बीजेपी में शामिल HP Vidhan Sabha Secretariat Recruitment 2019: हिमाचल प्रदेश विधान सभा सेक्रेटेरिएट में जूनियर ट्रांसलेटर-क्लर्क पदों पर बंपर वैकेंसी, www.evidhan.nic.in पर जाकर करें अप्लाई
2019/06/20 17:33:32
https://www.inkhabar.com/state/due-to-raman-singh-government-negligence-in-chhattisgarh-thousands-of-bicycles-became-junk/amp
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कौन से सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के तरीके सबसे ज्यादा कुशल हैं? – इंटरनेट विपणन इस लेख में कई SEO युक्तियाँ दी गई हैं जिनका उपयोग आप अपने ऑनलाइन व्यवसाय के लिए कर सकते हैं। इनमें से कुछ सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन टिप्स काफी मानक हैं जिन्हें आपने पहले सुना होगा। अन्य लोग आपके लिए अपरिचित हो सकते हैं और केवल वे संकेत जो आपको फर्क करने की आवश्यकता है। पढ़ें और देखें कि आप किनका उपयोग कर सकते हैं। अलग-अलग डोमेन एंडिंग्स का महत्व जानना सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन में मदद करने का एक अच्छा तरीका है। उदाहरण के लिए, अपने प्रयासों को उनके अनुरूप सामग्री लिखकर या उन्हें अपनी साइट से अवगत कराकर.edu वेबसाइटों से लिंक प्राप्त करने के प्रयास पर केंद्रित करें, क्योंकि खोज इंजन उन्हें अन्य अंत जैसे.com या.org की तुलना में अधिक महत्व देते हैं। सुनिश्चित करें कि आप robots.txt सेट को छोड़ना नहीं भूले। कई मामलों में, जब कोई साइट विकास में होती है, तो वेब डिज़ाइनर robots.txt फ़ाइल का उपयोग खोज इंजन को साइट को अनुक्रमित करने से रोकने के लिए करेंगे। इन्हीं वेब डिज़ाइनरों में से कुछ साइट के लाइव होने पर robots.txt फ़ाइल को हटाना भूल जाते हैं। यदि आप जानते हैं कि आपकी साइट किस तारीख को लाइव हो रही है, तो एक टिप एक क्रॉन जॉब बनाना है जो निर्दिष्ट तिथि पर स्वचालित रूप से robots.txt फ़ाइल को हटा देता है। याद रखें कि एसईओ परिणाम शायद ही कभी तत्काल होते हैं, इसलिए धैर्य रखें और निराश न होने का प्रयास करें। खोज इंजन एल्गोरिदम के काम करने के तरीके के कारण, आज के प्रभावों का प्रतिफल प्राप्त करने में कभी-कभी महीनों लग सकते हैं। जब तक आप जिस SEO तरीके का उपयोग कर रहे हैं, वह ठोस है, उस कार्य के बारे में सोचने की कोशिश करें जो आप आज कर रहे हैं, भविष्य के लिए दीर्घकालिक निवेश के रूप में। किसी उत्पाद की ऑनलाइन मार्केटिंग करते समय, सुनिश्चित करें कि आपकी साइट यथासंभव उपयोगी और सुलभ है। यदि आपकी वेबसाइट में कोड के साथ समस्या है या कुछ ब्राउज़रों द्वारा नहीं देखी जा सकती हैं, तो आप आगंतुकों और इसलिए बिक्री खो देंगे। बहुत कम लोगों को केवल आपकी साइट का उपयोग करने के लिए ब्राउज़र स्विच करने की समस्या का सामना करना पड़ेगा। यदि आप यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि आपकी वेबसाइट खोज इंजन में उच्च दृश्यता है, तो सुनिश्चित करें कि आप अपने पूरे पृष्ठ में प्रासंगिक कीवर्ड का उपयोग कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, यदि आपकी वेबसाइट शाकाहारी भोजन के बारे में है, तो आपको अपनी वेबसाइट पर "स्वस्थ शाकाहारी व्यंजन" या "मांस-रहित विकल्प" जैसे वाक्यांशों का उपयोग करना चाहिए। इस तरह, जो लोग इन विशिष्ट खोजशब्दों को खोजते हैं, उनकी आपकी साइट देखने की संभावना अधिक होगी। अपनी वेबसाइट पर, हमेशा एक पता शामिल करें जहां लोग आपकी कंपनी के बारे में पत्र, प्रश्न या चिंताएं भेज सकें। आपको जितना अधिक फीडबैक मिलेगा, आपको अपने ग्राहक की प्राथमिकताओं के बारे में उतनी ही बेहतर समझ होगी। यह आपको अपनी उत्पादकता को अधिकतम करने और अपने ग्राहक के हितों के लिए अपील करने की अनुमति देगा। अपनी वेबसाइट पर लगातार तरीके से नई सामग्री जोड़ें। यह आपकी खोज इंजन रैंकिंग को ऊपर रखेगा क्योंकि यह लोगों को आपकी साइट पर वापस आने के लिए यह देखने के लिए रखेगा कि आपके पृष्ठों पर क्या नया है। इसके अतिरिक्त, नई सामग्री जो अच्छी तरह से SEO को ध्यान में रखकर लिखी गई है, वह सर्च इंजन बॉट्स को आकर्षित करेगी। अपनी वेबसाइट पर बढ़िया सामग्री जोड़ना हर तरफ़ से फायदे का सौदा है। सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के बारे में आप और भी बहुत सी चीजें सीख सकते हैं, लेकिन ये कुछ टिप्स शुरू करने के लिए एक बेहतरीन जगह हैं। शायद आपने यहां कुछ युक्तियां पढ़ी हैं जिन्हें आप अपनी साइट पर लागू करना चाहेंगे। इस लेख में आपके द्वारा सीखे गए विचारों को शामिल करने का प्रयास करें, और आप निश्चित रूप से देखेंगे कि आपकी वेबसाइट रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
2022/07/01 13:05:00
https://instaance.com/%E0%A4%95%E0%A5%8C%E0%A4%A8-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9A-%E0%A4%87%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A4%A8-%E0%A4%91%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%87/
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हर कोई करे पृथ्वी को बचाने का काम घर-परिवार में किसी बच्चे को जरा सा भी बुखार आ जाए, तो माता-पिता सारे काम छोड़ कर उसे डॉक्टर के पास लेकर दौड़ते हैं। कीमत कुछ भी हो, डॉक्टर की लिखी दवाएं लेते हैं और बताए गए दूसरे उपाय भी करते हैं। लेकिन हैरत की बात यह है कि हम इस तरफ से आंखें मूंदे बैठे हैं कि हमारी धरती और हमारा पर्यावरण धीरे-धीरे मरता जा रहा है। धरती पर जीवन की संभावना ही खत्म होती जाएगी, तो हमारी भौतिक चमक-दमक का क्या होगा ? यह सवाल पता नहीं दुनिया के सभी बाशिंदों को परेशान क्यों नहीं करता ? हर साल पांच जून को पूरी दुनिया में पर्यावरण दिवस मनाया जाता है और इस दिन बहुत से औपचारिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। दुनिया भर की सरकारें संकल्प लेती हैं, कार्यक्रम घोषित किए जाते हैं, लेकिन ज्यादातर लोगों को लगता है कि इससे उनका कोई सरोकार नहीं है। सच्चाई यही है कि वैश्विक भूमंडल तब तक सेहतमंद नहीं रह सकता, जब तक धरती पर रहने वाले सारे मनुष्य अपनी नागरिकीय जिम्मेदारी निभाना शुरू नहीं करते। दुनिया की सेहत पर्यावरण और अन्य गंभीर विषयों पर शोधपरक सामग्री छापने वाली पत्रिका 'नेचर' के विशेषांक में वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि धरती पर इंसानी जीवन खत्म होने की तरफ बढ़ रहा है। ऐसा पहली-दूसरी नहीं, बल्कि छठी बार होने जा रहा है। चेतावनी यह भी दी गई है कि धरती पर रहने वाले स्तनधारियों तथा पानी और हवा में जीवन व्यतीत करने वाले जीवों के अस्तित्व पर संकट इस बार पिछली पांच बार के मुकाबले ज्यादा तेजी से नजदीक आ रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार ऑस्ट्रेलिया में 50 हज़ार साल पहले, उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका में 10 से 11 हज़ार साल पहले और यूरोप में तीन हज़ार से 12 हजार साल पहले इंसानी छेड़छाड़, शिकार, दूसरी कुदरती आपदाओं और जलवायु में बदलाव की वजह से बड़े पैमाने पर जीवन विलुप्त हुआ है। तीन हजार साल पहले तक दुनिया दुनिया में मौजूद स्तनधारी प्रजातियों में से करीब आधी समूल नष्ट हो चुकी हैं। धरती पर पिछले 50 साल के दौरान इंसानों की आबादी में 130 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2060 तक दुनिया की आबादी 10 अरब से ज्यादा होने का अनुमान है। दुनिया की आबादी बढ़ने के साथ ही लोगों की आवश्यकताएं पूरी करने के लिए हर स्तर पर संसाधनों में कमी आ रही है। खेती की जमीन लगातार कम होती जा रही है। जमीन के नीचे मौजूद पानी का स्तर लगातार नीचे गिर रहा है। जैविक संसाधनों का दोहन बहुत ज्यादा होने लगा है। खाद्यान्न के उत्पादन में असंतुलन आता जा रहा है। इस बारे में वैश्विक स्तर पर संकल्प नहीं किए गए, तो कुदरत से मिलने वाले सभी लाभों में भारी कमी हो जाएगी। ऐसा नहीं है कि लोगों ने इस तरफ सोचना और उस पर अमल करना शुरू नहीं किया है, लेकिन जितना काम होना चाहिए, उतना नहीं हो रहा है। इसके लिए हममें से हरेक नागरिक को अपने स्तर पर काम शुरू करना होगा। बहुत छोटे-छोटे काम करके, बहुत छोटे-छोटे फैसले कर हम धरती को बचाने का दायित्व निभा सकते हैं। सप्ताह में एक दिन व्रत रखें, एक दिन क्यारियों को न सींचें, एक दिन कूलरों में पानी न डालें, एक दिन सार्वजनिक वाहनों से ही चलने का संकल्प लें, एक दिन या कुछ घंटे ए.सी. न चलाएं, आसपास कूड़ा-कचरा न खुद जलाएं और न किसी को जलाने दें, ऐसे बहुत से काम हैं, जो आसानी से किए जा सकते हैं और इन्हें करने के लिए आपको किसी की मदद की भी नहीं लेनी होगी। हमारे समाज में एक और प्रवृत्ति घर करती जा रही है कि हम जरूरत से ज्यादा खाद्य सामग्री बना लेते हैं और अगले दिन उसे कूड़े में फेंक देते हैं। होटलों, रेस्टोरेंटों में भी बड़े पैमाने पर खाने की सामग्री की बर्बादी की जाती है। अभी बहुत सी संस्थाएं इस बेकार हो चुके खाने का इस्तेमाल रोटी बैंक या अन्य तरीकों से समाज के भूखे लोगों को खिलाने के लिए करने लगी हैं, लेकिन अगर हम घर पर ही स्वयं को संयत कर लें, तो बहुत सा खाना बचाया जा सकता है। खाना ज्यादा नहीं बनेगा, तो हो सकता है कि हम हफ्ते में एक दिन फ्रिज भी बंद रख सकें। ये ऐसे उपाय हैं, जिन्हें अपना कर हम दुनिया की सेहत सुधारने में योगदान दे सकते हैं। सोचेंगे, तो और भी बहुत से उपाय आपके जेहन में आएंगे। कहाँ हैं पक्षी लोगों को लगता है कि पर्यावरण दिवस का संदेश केवल वृक्षारोपण है। वृक्ष तो लगने ही चाहिए, लेकिन और भी बहुत कुछ करना होगा। सरकारें तो अपने स्तर पर कोशिशें करती ही हैं, लोग भी अगर अपनी जिम्मेदारी समझेंगे, तभी असली मकसद हासिल किया जा सकता है। गौर कीजिए, अपने घर के आसपास, मुंडेर पर, पेड़ों पर आपने किसी पक्षी की आवाज कितने दिनों से नहीं सुनी है ? पहले तो पक्षियों के मुंडेर पर बोलने को लेकर कहावतें भी थीं, लेकिन अब कहावतें छोड़िए, पक्षी ही दिखाई नहीं देते। पित्र पक्ष में कौवों को भोजन कराने का रिवाज है, लेकिन वे आसपास से गायब हो चुके हैं। पुराने घरों में गौरेया घोंसले बना लेती थीं, तो घर वाले उन्हें उड़ाते नहीं थे। छतों पर हरे-हरे तोतों के झुंड नजर आते थे। लेकिन अब यह सब बदलता जा रहा है। अगर हमें अपने इस घर यानी दुनिया को बचाना है, तो बहुत कुछ सोचना और करना होगा। चलिए आज से ही नई शुरूआत करते हैं।
2021/10/17 03:16:34
https://vijaygoel.in/pages/in-news-504
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किसानी की नई इबारत लिख रही, कभी खोजी पत्रकारिता करने वाली ये महिला पत्रकार | An Article On Bhoomika Kalam Written By Senior Journalist Alok Nandan Sharma - Samachar4media कुछ लोग जिंदगी में एक राह तय कर लेने के बाद उस पर मीलों चलते हैं, फिर उनके साथ कुछ ऐसा होता है कि उनकी राह अचानक बदल जाती है। गांव और खेत उन्हें अपनी ओर बुलाते हैं और वह भी अपने आपको नए रूप में देखने लगते हैं, अपनों के बीच। सही मायने में उन्हें अपने आप से साक्षात्कार हो जाता है। कलम छोड़कर खेती की राह पकड़ने वाली भूमिका कलम को ऐसे ही लोगों में शुमार किया किया जा सकता है। खोजी पत्रकारिता को अलविदा कर भूमिका कलम मध्य प्रदेश की युवा महिला किसान के रूप में अपनी पुश्तैनी जमीन से न सिर्फ एक बार कई-कई फसलें बो और काट रही हैं, बल्कि वहां के किसानों को भी लाभकारी खेती का नया अंदाज सिखा रही हैं। बुलंद इरादों के साथ खेती में हाथ डालने के बाद भूमिका कलम पहले की तुलना में तिगुनी कमाई कर रही हैं। वह बदलते हुए भारत की तस्वीर नहीं पेश कर रही हैं बल्कि खुद अपनी मजबूत हाथों और फौलादी इरादों से भारत को बदल रही हैं, यहां की खेती पद्धति बदल रही हैं और साथ ही किसानों के भविष्य को भी। अपनी दूरगामी नजर और अथक मेहनत की वजह से वह मध्य प्रदेश के किसानों का भविष्य गढ़ते हुए उदय भारत की कहानी बखूबी बयां कर रही हैं। एक अति आधुनिक पत्रकार के तौर पर कलम और कैमरा छोड़कर ट्रैक्टर थामने के बाद भूमिका फसलों में भी बेशुमार प्रयोग कर रहीं हैं। एक ही जमीन पर एक साथ कई फसलों को बो कर उसने खेती के पारंपपरिक तौर-तरीकों को पूरी तरह से बदल दिया है। उनकी प्रेरणा से अलग बगल के किसान भी उनके नक्शे कदम पर चलने लगे हैं। भूमिका कलम मध्य प्रदेश में सामुदायिक खेती को बहुत ही तरीके से तराश रही हैं। अपनी जमीन पर फसलों के बीच में बांस बो रहीं हैं। इन बासों को पहले ही बेच चुकी हैं। इसके अलावा एक साथ कई फसलें भी काट रहीं हैं। मंडी के व्याकरण को तोड़ने के लिए किसानों की हित वाली बात साफ अंदाज में समझाते हुए कहती हैं, 'पिछली बार किसानों ने गलती की थी। सभी किसानों ने अपनी खेतों में अरहर लगा दिया था। अरहर की पैदावार अचानक बढ़ जाने की वजह से मंडी में इसकी कद्र कम हो गई थी, इसका फायदा बिचौलियों और व्यापारियों ने उठाया। अरहर की कीमत उन्होंने कम लगाई। इसलिए इस मर्तबा यहां के सारे किसान अलग-अलग फसल लगा रहे हैं। हमलोगों ने आपस में बैठ कर निर्णय ले लिया है। थोड़ी सी सूझबूझ से काम ले तो मंडी किसानों के हिसाब से चलेगी। बस किसानों को भेड़चाल चलने से रुकना होगा।' भूमिका कलम का अचानक पत्रकारिता से किसानी की ओर रुख करना कम रोचक नहीं है। इन्वेस्टिगेटिंग जर्नलिज्म करने के इरादे से उन्होंने पत्रकारिता की दुनिया में पेशकदमी की थी, कुछ कर गुजरने के मजबूत इरादों से लबरेज होकर। अपने इंजीनियर पिता को कम उम्र में ही वह खो चुकी की थी। जब वह नौंवी कक्षा में थी तभी पिता जी एक दिन घर से ड्यूटी के लिए निकले फिर लौट कर नहीं आये। हर्टअटैक से उनकी मौत ड्यूटी पर ही हो गई थी। उसी समय भूमिका ने तय कर लिया था कि वह सरकारी नौकरी नहीं करेगी। उन्हें एक खोजी पत्रकार बनना है। उनकी खोजी पत्रकारिता को मध्य प्रदेश में महूसस किया गया। उन्हें भी यकीन हो गया था कि वह एक बेहतर खोजी पत्रकार बन चुकी है। खबरों की तलाश में वह जमकर पसीना बहाती थी और खबर मिल जाने के बाद उन्हें तरीके से परोसने का उनका सलीका भी उम्दा था। समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका के तमाम अहलकार भी भूमिका के मुरीद हो गए थे। टफ वर्किंग गर्ल के तौर पर वह स्थापित हो चुकीं थीं। थोड़ा और आजमाने के लिए उन्हें एक ऐसे बीट में हाथ डालने को कहा गया जिसके बारे में कहा जाता था कि इसमें पाठकों का अकाल रहता है। वह बीट थी कृर्षि की, खेती की, किसी और किसानों की। तमाम कारणों से प्रचलित मीडिया की नजरों से ओझल रहने वाले बीट कृषि में काम करने की चुनौती भूमिका के सामने पेश की गई। इस पर विचार करने के बाद उन्होंने इस काम को करने का निर्णय ले लिया और प्रबंधन के सामने एक शर्त रखते हुए कहा, 'पहले मैं किसानों से मिलूंगी, उन्हें समझूंगी और फिर तय करुंगी कि इस बीट में क्या करना है।' उनकी काबिलियत को देखते हुए उन्हें अपने तरीके से काम करने की इजाजत दे दी गई और फिर उनके कदम हमेशा के लिए गांव और किसानों की तरफ बढ़ चले। किसानों के साथ बदस्तूर राब्ता ने उनकी सोच को एक अलग दिशा में ढालना शुरू कर दिया, या यूं कहा जा सकता है उनकी जिंदगी की पुनरावृति होने लगी, कृषि के साथ जुड़े रहने की उनके मन में उनके दिवगंत पिता की इच्छाओं के जागृत हो उठने के रूप में। उनके पिता को खेत और खेती सी लगाव था। किसानों के नाम पता और फोन नंबर की फेहरिश्त बनाते हुए वह एक गांव से दूसरे गांव में भटकने लगी। उनसे मिलती, बातें करती और उनकी बातों पर स्टोरी बनाती। अखबार के पन्नों पर अपनी खबरें पढ़ते हुए किसान भूमिका की रपटों के माध्यम से एक दूसरे को जानने लगे। अब तक भूमिका किसानों को उनके नजरिये से देख रही थी और थोड़ा बहुत गुंजाइश होता तो खोजी पत्रकार वाली दृष्टि से भी टटोल लेती। इसी दौरान आर्टिसन एग्रो-टेक के देव मुखर्जी से मुलाकात ने उन्हें उनकी जिदंगी के वास्तविक स्टफ पर लाकर खड़ा कर दिया। देव मुखर्जी किसानों पर लंबे समय से काम कर रहे थे। एग्रो-टेक के साथ कदमताल उनके सफर का एक हिस्सा था। उनके संपर्क में आने के बाद कृषि की पैतृक समझ रखने वाली भूमिका की आंखों के सामने एक नई दुनिया उभरने लगी। कृषि के मूलमंत्र को उन्होंने आत्मसात कर लिया। इस बारे में वह कहती हैं, 'बड़ी सहजता से सबकुछ होता चला गया। बचपन में अपने पिता के मुंह से फसलों के बारे में सुना करती थी। एक बार उन्होंने खेतों में सोया लगाया था, जिसमें नुकसान हो गया था। इसके बाद वह लगातार इस बात पर चर्चा करते थे कि कैसे फसलों को लाभकारी बनाया जाये। पिता जी की बातों से मैं इतना तो समझ गई थी कि बाजारवाद के बदलते परिवेश में फसलों को लाभकारी बनाये बिना खेती की औचित्यता को सिद्ध नहीं किया जा सकता है। कुछ अलग शब्दों में देव मुखर्जी भी कमोबेश यही कह रही थे कि किसानी करनी है तो फसलों से अधिक से अधिक कमाई के बारे में सोचो। मेरे सामन फार्मूला खुल चुका था- किसानी से कमाई करने का।' इस मामले में राजस्थान पत्रिका में भूमिका कलम के इमीडिएट बॉस ने भी उन्हें पत्रकारिता से निकल कर कृषि कार्य के लिए प्रेरित किया। इससे उनके कॉन्फिडेंस में इजाफा हुआ और कृषि को लेकर उनकी हिचक टूटती चली गई। नौकरी को अलविदा कर किसानी करने के इरादे से उन्होंने अपने पैतृक गांव पढ़रकला की तरफ रुख किया, जो मध्य प्रदेश के हरबा जिले के सीराली तहसील में पड़ता है। कभी मानवीय संवेदनों से भरी हुई अपनी तीखी रपटों से लोगों को मुतासर करने वाली भूमिका इस संदर्भ में कहती हैं, 'एक खोजी पत्रकार के रूप में मैंने कई प्रतिष्ठित समाचार समूहों में काम किया। राजस्थान पत्रिका में करते हुए मुझे किसानी को समझने का मौका मिला। किसानों की बातों को सुनने और समझने के बाद, जब देव मुखर्जी से मेरी मुलाकात हुई है तो मैंने किसानी का पक्का इरादा कर लिया। लेकिन यह सब मेरे लिए आसान नहीं था। हम तीन बहने थीं। मैं बड़ी थी तो पिता जी की मौत के बाद मेरी जिम्मेदारी अधिक थी। मां नौकरी करती थी। घर को संभालना था। दोनों बहनों के साथ-साथ खुद की पढ़ाई को भी संभालना था। हम सब पढ़ने के लिए इंदौर में रहने लगे। सबकी पढ़ाई पूरी होती गई, नौकरी भी लग गई और शादी भी हो गई। मैं भी खोजी पत्रकारिता में अच्छा कर रही थी। पत्रकारिता को छोड़कर खेती करना मेरे लिए आसान नहीं था। दोनों बहने बाहर रहती थीं, और मैं भी बाहर ही नौकरी करती थी। पिता जी को इस बात का मलाल था कि यदि उन्हें बेटा होता तो खेती का काम आगे चलता। मुझे लगा कि अब यह काम मुझे करना है। मुझे ही अपने खेती को संभालना है। देव मुखर्जी के साथ मुलाकात के बाद तो मैं मानसिक तौर पर इसके लिए पूरी तरह से तैयार हो गई और इस तरह से किसानी शुरू हो गई है।' देव मुखर्जी की दिशा निर्देश में भूमिका कलम ने आर्टिसन एग्रो-टेक के साथ बांस उत्पादन को लेकर एक करार कर लिया। आर्टिसन एग्रो-टेक गन्ना के निर्धारित मूल्य पर बांस खरीदने के लिए तैयार हो गया। अपने खेतों बांस लगाकर भूमिका एक ही जमीन पर कृषि में मल्टीपल फसल प्रणाली (बहुफसलीय पद्धति) को व्यवस्थित तरीके से लागू करते हुए एक साथ कई फसलें लगा रही हैं। इस बाबत वह कहती हैं, 'अहम सवाल है कि किसानों को नुकसान क्यों होता है? खेत में सिर्फ एक फसल लगाने से यदि किसी कारणवश वह फसल मर जाती है तो किसान परेशान हो जाते हैं। इस स्थिति से बचने का सबसे अच्छा तरीका है एक ही जमीन पर एक साथ कई फसल लगाना। कुछ शॉर्ट टर्म की फसलें हो और कुछ लॉन्ग टर्म की। अरहर, मसूर, सोयाबीन आदि शॉर्ट टर्म की फसलें हो सकती हैं और बांस लॉन्ग टर्म की। खेती में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप अपनी फसलों को कैसे प्लान करते हैं। यदि किसान एक ही जमीन पर एक साथ कई उत्पादन हासिल करे और इनको बेचने का करार पहले ही कर ले तो उन्हें कभी भी अनचाहे नुकसान का सामना करना नहीं पड़ेगा। किसान तो देने वाला होता है उसे किसी से कुछ मांगने की जरूरत नहीं है, बस जमीन के मुताबिक अपनी फसलों को सही तरीके से प्लान करने की जरूरत है।' इतना ही नहीं भूमिका कलम खेती के व्यापारिक गणित को भी हौले-से बदलने की जुगत बना रही हैं। इस बाबत वह कहती हैं, 'अपना माल सीधे जरूरतमंद कृषि फर्मों को बेचकर हम मंडी की सौदेबादी से बाहर निकलने की योजना पर काम कर रहे हैं। आगे हम अपनी खेतों में तुलसी और अश्वगंधा लगाने जा रहे हैं। इनका इस्तेमाल चाय के साथ किया जाता है। इन फसलों को सीधे हम उन कंपनियों को बेचेंगे जो चाय बनाने के काम में लगे हुए हैं। इन्हें खेत में अन्य फसलों के साथ भी उपजाया जा सकता है। मंडी में बिचौलियों की वजह से किसानों को भी अपनी फसलों का उचित मूल्य नहीं मिलता है और कंपनियों को भी नुकसान होता है। और अंत में लोगों इस तरह के उत्पादनों की अधिक कीमत चुकानी पड़ती है। बिचौलियों को हटाकर किसानों की खुशी भी बढ़ेगी और लोगों को भी कम कीमत पर उत्पाद मिल सकेगा। यदि कंपनी किसी फसल का न्यूनतम मूल्य फिक्स कर देते हैं तो किसान भी निश्चिंत होकर अपना काम कर सकेंगे।'
2019/10/17 06:13:43
https://www.samachar4media.com/vicharmanch-news/an-article-on-bhoomika-kalam-written-by-senior-journalist-alok-nandan-sharma-37449.html
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अर्श गावडे रिलीज़ की तारीख - मार्च 8, 2018 नवंबर में, जापानी डिजिटल डिज़ाइन कंपनी के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने हैकर पर हमला किया। उन्होंने भुगतान चैनल का विश्लेषण करने के लिए स्थैतिक ब्लॉकचेन विश्लेषण का उपयोग किया एक ब्रोकर का चयन और जिस क्षण यह हमला हुआ, मोनाको टोकन के आंदोलन का अध्ययन करने के लिए हैकर के आईपी पते को सेट किया। आरोपी को पकड़ने वाले अधिकारी ने बताया कि फ्लाइट सिंगापुर से अहमदाबाद होते हुए बेंगलुरु आई थी. आरोपी तस्कर ने जिस समय विमान हवा में था उसी वक्त टॉयलेट में जाकर आरोपी ने सोना निकाल कर पैसा रख दिया था क्योंकि अहमदाबाद से यह डोमेस्टिक फ्लाइट बन गई. आने वाले डोमेस्टिक पैसेंजर्स के लिए किसी तरह की चेकिंग नहीं होती है. इसी बात का फायदा उठाकर आरोपी तस्कर आसानी से निकलने की फिराक में था। मुख्य बात यह है कि इंटरनेट की लत है के कारण होता व्यवहारिक और भावनात्मक परिवर्तन। अध्ययन से। अगर आपको भी फ्यूचर एंड ऑप्शन (एफएंडओ) कारोबार से आमदनी होती है तो हम आपको बता रहे हैं कि कैसे आप इस आमदनी को अपने आईटीआर में दिखा सकते हैं। एस / टीवी - शटर प्राथमिकता, कैमरा स्वचालित रूप से एपर्चर मान को सेट करेगा, यह उपयोग करने के लिए सुविधाजनक है जब आपको तेज में आंदोलन को पकड़ने की आवश्यकता होती है; पी - पहले एक्सपोज़र पैमाइश के लिए उपयुक्त प्रोग्राम, लगभग स्वचालित शूटिंग मोड। टिप 4: प्रोग्रामर के साथ Arduino प्रो मिनी प्रोग्राम कैसे करें। जीवन के कुछ सपने पूरा होने में बहुत समय लेते हैं, ऐसा ही एक सपना जो मेरे हृदय के समीप है, अब पूरा हो रहा है। पांच वर्षों में कंप्यूटर पर मूल्यह्रास त्वरित दरों में 100% तक की अनुमति है। बिटकॉइन लोगो के बीच एक चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि बित्कोइन ने बाज़ार में एक क्रांति ला दी है. बित्कोइन को जानना और समझना बहुत ही जरूरी है क्योंकि लोग बिटकॉइन कि मदद से बहुत पैसे कामा रहे है। पोम्पियो ने कहा एक ब्रोकर का चयन है कि अमरीका दक्षिण पूर्व एशिया में अपने सहयोगियों के अधिकारों और समंदर में तट से दूर संसाधनों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। पृष्ठभूमि की जांच करने के बाद, हंटेक ने अपने बचाव में कहा कि उसने अल फारूकी के खातों से कोई कमीशन नहीं लिया। यूके स्थित एफएक्स ट्रेडिंग ब्रांड ने भी इस आधार पर मुकदमे को खारिज करने की कोशिश की कि हेन्तेक के नियमों और शर्तों को स्वीकार करने के लिए एक संवाद बॉक्स पर टिक करने के बाद निवेशक अपने ट्रेडिंग खाते को स्थानांतरित करने के लिए सहमत हुए। ध्यान रहे एक Online Course बनाने के लिए आपको कोई शिक्षक या अध्यापक बनने की आवश्यकता नहीं है। लेकिन इस प्रकार के पाठ्यक्रम को तैयार करने के लिए आपके पास बढ़िया लेखन एवं सिखाने का कौशल होना अति आवश्यक है। यह इसलिए क्योंकि इस तरह के ये पाठ्यक्रम सरल होते हैं और आम तौर पर विदेशों में रहने वाले लोगों द्वारा भी इन्हें लिया जाता है। इसके अलावा उद्यमी को अपने ऑनलाइन कोर्स को सपोर्ट करने के लिए टुटोरिअल भी बनाने होंगे जिनकी विडियो उद्यमी खुद का यूट्यूब चैनल बनाकर प्रकाशित कर सकता है। तो आइये जानते हैं की कैसे व्यक्ति खुद का Online Course बना सकता है। कल्पना-1: इसरो द्वारा 12 सितंबर 2002 को प्रक्षेपित मौसम संबंधी उपग्रह, जिसका वास्तविक नाम "#मेटासैट" था का नाम बदलकर कल्पना-1 रख दिया गया था| इसरो का यह कदम कल्पना चावला के दुर्भाग्यपूर्ण निधन के कारण उसके योगदान को समर्पित था|। एक ब्रोकर का चयन - एमएसीडी - द्विआधारी विकल्प के लिए सूचक सॉफ्टवेयर डिजाइन, आर्कीटेक्‍चरल डिजाइन, यूजर इंटरफेस डिजाइन, फंक्‍शनल- ओरिएंटेड डिजाइन, SA/SD एक ब्रोकर का चयन घटक आधारित डिजाइन, डिजाइन मेट्रिक्‍स। लौटाने किसी नए स्थान में प्रवेश के पहले कुछ दिनों में होता है। आपराधिक मुकदमा चलाने, नैतिक चिंता और मानसिक पीड़ा का खतरा - जालसाज़ के लिए नकारात्मक अंक। दिसंबर में 1769 जी । गिनती पीसा में थी, जहां से उन्होंने यूनानियों और बाल्कन स्लावों को विद्रोह के लिए उत्साहित किया। इसके लिए, प्रिंस डोडागोरुकि को मोंटेनेग्रो भेजा गया था, जो किसीनजे गए और मोंटेनेग्रिंस को महारानी की शपथ दिलाई। हालांकि, जल्द ही उन्हें गुप्त रूप से वहां से सेवानिवृत्त होना पड़ा, क्योंकि तुर्क सभी पक्षों से आगे बढ़ रहे थे, और रूसी स्क्वाड्रन बहुत देर से पहुंचे। पहला एडमिरल स्पिरिडोव (नवंबर 1769 में) के स्क्वाड्रन में आया, दूसरा भूमध्य सागर में केवल 1770 के बाद के अप्रैल में दिखाई दिया। पैटर्न चार तत्वों से बाहर का गठन किया गया है: दो कंधों, एक सिर और एक neckline और समय से neckline तोड़ा जा रहा है, एक मापा चाल सिर और कंधे की पुष्टि. इस मापा कदम पूरा नहीं किया जाता है तो इसका मतलब है कि, सबसे अधिक संभावना सिर और कंधे मौजूद नहीं था, इसलिए एक उलट कार्ड में नहीं है। करेंसी ट्रेड ब्रोकरेज की बाद करे तो 5Paisa में किसी भी तरह का लेनदेन हो आप ₹ 10 Per Transaction Fees के साथ ट्रेड कर सकते है|।
2021/04/21 07:00:12
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बुधवार का राशिफल, चंद्र-मंगल का महालक्ष्मी योग बनने से 9 राशियों के लिए खास रहेगा दिन | CN24NEWS Homeराशिफलबुधवार का राशिफल, चंद्र-मंगल का महालक्ष्मी योग बनने से 9 राशियों के... बुधवार का राशिफल, चंद्र-मंगल का महालक्ष्मी योग बनने से 9 राशियों के लिए खास रहेगा दिन जीवन मंत्र डेस्क. बुधवार का राशिफल, आज चंद्रमा और मंगल का दृष्टि संबंध हो रहा है। जिससे महालक्ष्मी योग बन रहा है। इस शुभ योग के प्रभाव से धन लाभ होता है। निवेश में फायदा होता है। रुका हुअा पैसा मिल जाता है और प्रॉपर्टी के मामलों में भी किस्मत का साथ मिल जाता है। सितारों का ये शुभ असर मेष, वृष, कर्क, सिंह, कन्या, वृश्चिक, धनु, मकर और मीन राशि वाले लोगों पर पड़ेगा। इनके अलावा मिथुन, तुला और कुंभ राशि वाले लोगों के लिए दिन ठीक नहीं है। इन 3 राशि वाले लोगों को दिनभर संभलकर रहना होगा। बुधवार का राशिफल, 12 राशियों के लिए कुछ ऐसा रहेगा दिन पढ़ें पूरा राशिफल नेगेटिव – जल्दबाजी में प्रतिक्रिया देने से बचें। ऑफिस में कामकाज को लेकर टेंशन बढ़ सकती हैं। आज जो बदलाव हो रहे हैं उनको आप एकदम अपना नहीं सकेंगे। आधी-अधूरी और बेतुकी बातों में उलझने से बचें। आज आप जोश में आकर कोई डिसीजन न लें तो ही अच्छा है। इससे आपको नुकसान हो सकता है। Previous articleआज का पंचांग, 17 जुलाई, बुधवार के मुहूर्त, हिन्दू कैलेंडर के अनुसार दिन के शुभ-अशुभ समय और राहुकाल Next articleमौसम : बिहार, असम और उत्तर प्रदेश में बाढ़ से 65 की मौत, केरल में 24 घंटे में 20 सेमी बारिश की चेतावनी
2021/09/25 21:04:41
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टीपीएम (कुल उत्पादक रखरखाव) का क्या अर्थ है और इसका विवरण लाभ के साथ स्पष्टीकरण एल टीपीएम का इतिहास टीपीएम कैसे शुरू करें टीपीएम के आठ स्तंभ एल टीपीएम के लाभ टीपीएम के तत्व टीपीएम लक्ष्य एल 27/10/2022 27/10/2022 पर Sunil Rathod द्वारा प्रकाशित Table of Contents परिचय टोटल प्रोडक्टिव मेंटेनेंस (TPM) क्या है टीपीएम का इतिहास क्यों टीपीएम टीपीएम कैसे शुरू करें टीपीएम लक्ष्य टीपीएम के आठ स्तंभ 1.केंद्रित सुधार 3.स्वायत्त रखरखाव 4.प्रशिक्षण शिक्षा 5.प्रारंभिक: प्रशासन 6.गुणवत्ता रखरखाव 7.टीपीएम 8.सुरक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण टीपीएम के लाभ टीपीएम में पी क्यू सी डी एस एम टीपीएम के तत्व रखरखाव के प्रकार 1.ब्रेकडाउन रखरखाव 2.निवारक रखरखाव 3.सुधारात्मक रखरखाव 4.रखरखाव की रोकथाम 5.प्रागाक्ति रख – रखाव निष्कर्ष परिचय चूंकि उद्योग फोरम की स्थापना 1994 में ऑटोमोटिव निर्माण में निरंतर सुधार के तरीकों को चलाने के उद्देश्य से की गई थी, इसने वैश्विक स्तर पर विमानन पेट्रोकेमिकल इलेक्ट्रॉनिक्स खाद्य और पेय डिवीजनों का समर्थन करने के लिए सफलतापूर्वक विस्तार किया है। व्यापार समाधान के लिए एक अभिन्न दृष्टिकोण के रूप में टीपीएम (कुल उत्पादक रखरखाव) जापानी योजना रखरखाव संस्थान (जेआईपीएम) से संबद्ध एक मुख्य समर्थन कार्यक्रम है जिसे वैश्विक अग्रणी निकाय माना जाता है कुल उत्पादक रखरखाव (टीपीएम) केवल एक नहीं है पेशेवर रखरखाव दृष्टिकोण लेकिन एक सांस्कृतिक परिवर्तन कार्यक्रम भी। उद्योग मंच की टीमें अनुभवी व्यवसायी हैं और उन्हें आवेदन के विविध वातावरणों और आवेदन पर हाथों की गहरी समझ है। हमारी वरिष्ठ अनुभवी टीमों ने बड़े संगठनों में कॉर्पोरेट स्तर पर काम किया है और समग्र कार्यक्रम दृष्टिकोण को समझते हैं और पुरस्कार गतिविधियों के लिए जापानी योजना रखरखाव संस्थान (जेआईपीएम) के साथ सीधे काम किया है। हमारी टीमों के पास मुख्य विषय हैं, हालांकि उनके पास ज्ञान की एक विस्तृत श्रृंखला है, हमारा दृष्टिकोण मुख्य विषयों में अपनी विशेषज्ञता को बेहतर बनाना है ताकि आवेदन की गहराई सुनिश्चित हो। टोटल प्रोडक्टिव मेंटेनेंस (TPM) क्या है इसे मशीनों का चिकित्सा विज्ञान माना जा सकता है। कुल उत्पादक रखरखाव (टीपीएम) रखरखाव कार्यक्रम है जिसमें रखरखाव संयंत्रों और उपकरणों के लिए एक नई परिभाषित अवधारणा शामिल है। कुल उत्पादक रखरखाव (टीपीएम) कार्यक्रम का लक्ष्य उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि करना है, साथ ही साथ कर्मचारी मनोबल और नौकरी की संतुष्टि में वृद्धि करना है। टोटल द प्रोडक्टिव मेंटेनेंस (टीपीएम) व्यवसाय के एक आवश्यक और महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में रखरखाव को ध्यान में लाता है। इसे अब गैर-लाभकारी गतिविधि के रूप में नहीं माना जाता है। रखरखाव के लिए डाउन टाइम को निर्माण दिवस के एक भाग के रूप में और कुछ मामलों में निर्माण प्रक्रिया के एक अभिन्न अंग के रूप में निर्धारित किया जाता है। लक्ष्य आपातकाल और अनिर्धारित रखरखाव को न्यूनतम रखना है। What is TPM टीपीएम का इतिहास कुल उत्पादक रखरखाव (टीपीएम) एक अभिनव जापानी अवधारणा है। टोटल प्रोडक्टिव मेंटेनेंस (TPM) की उत्पत्ति का पता 1951 में लगाया जा सकता है जब जापान में निवारक रखरखाव शुरू किया गया था। हालांकि निवारक रखरखाव की अवधारणा संयुक्त राज्य अमेरिका से ली गई थी। निप्पोंडेंसो 1960 में प्लांट वाइड प्रिवेंटिव मेंटेनेंस शुरू करने वाली पहली कंपनी थी। प्रिवेंटिव मेंटेनेंस वह अवधारणा है जिसमें ऑपरेटर मशीनों का उपयोग करके माल का उत्पादन करते हैं और रखरखाव समूह उन मशीनों को बनाए रखने के काम के साथ समर्पित था, हालांकि निप्पोंडेंसो रखरखाव के स्वचालन के साथ एक समस्या बन गई। अधिक रखरखाव कर्मियों की आवश्यकता थी। इसलिए प्रबंधन ने फैसला किया कि ऑपरेटर उपकरणों का नियमित रखरखाव करेंगे। यह ऑटोनॉमस मेंटेनेंस है जो टोटल प्रोडक्टिव मेंटेनेंस (TPM) की विशेषताओं में से एक है। अनुरक्षण समूह ने केवल आवश्यक अनुरक्षण कार्य ही हाथ में लिया। इस प्रकार निप्पोंडेंसो, जो पहले से ही निवारक रखरखाव का पालन कर रहा था, ने उत्पादन ऑपरेटरों द्वारा किए गए स्वायत्त रखरखाव को भी जोड़ा। विश्वसनीयता में सुधार के लिए रखरखाव दल उपकरण संशोधन में चला गया। संशोधन किए गए थे या नए उपकरणों में शामिल किए गए थे। इससे रखरखाव की रोकथाम होती है। इस प्रकार रखरखाव की रोकथाम और रखरखाव में सुधार के साथ निवारक रखरखाव ने उत्पादक रखरखाव को जन्म दिया। उत्पादक रखरखाव का उद्देश्य संयंत्र और उपकरणों की प्रभावशीलता को अधिकतम करना था। तब तक निप्पॉन द डेंसो ने कर्मचारी की भागीदारी को शामिल करते हुए गुणवत्ता वाले मंडल बनाए थे। इस प्रकार सभी कर्मचारियों ने उत्पादक रखरखाव को लागू करने में भाग लिया। इन विकासों के आधार पर जापानी इंस्टीट्यूट ऑफ प्लांट इंजीनियर्स (जेआईपीई) द्वारा निप्पोंडेंसो को कुल उत्पादक रखरखाव (टीपीएम) के विकास और कार्यान्वयन के लिए विशिष्ट संयंत्र पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस प्रकार टोयोटा समूह की निप्पोंडेंसो कुल उत्पादक रखरखाव (टीपीएम) प्रमाणन प्राप्त करने वाली पहली कंपनी बन गई। क्यों टीपीएम निम्नलिखित उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए कुल उत्पादक रखरखाव (टीपीएम) शुरू किया गया था। महत्वपूर्ण लोगों को नीचे सूचीबद्ध किया गया है। तेजी से बदलते आर्थिक माहौल में बर्बादी से बचें। उत्पाद की गुणवत्ता को कम किए बिना माल का उत्पादन करना। लागत कम करें। जल्द से जल्द संभव समय में कम बैच मात्रा का उत्पादन करें। ग्राहकों को भेजा गया माल गैर-दोषपूर्ण होना चाहिए। टीपीएम कैसे शुरू करें समर्थन कार्यों में से एक से एक वरिष्ठ व्यक्ति वित्त के प्रमुख एमआईएस खरीद आदि को उप-समिति का नेतृत्व करना चाहिए। सभी समर्थन कार्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्यों और उत्पादन और गुणवत्ता के लोगों को उपसमिति में शामिल किया जाना चाहिए। टोटल प्रोडक्टिव मेंटेनेंस (टीपीएम) उपसमिति की योजनाओं और मार्गदर्शन का समन्वय करता है। सभी सहायक विभागों को कार्यालय कुल उत्पादक रखरखाव (टीपीएम) के बारे में जागरूकता प्रदान करना संयंत्र के प्रदर्शन के संबंध में प्रत्येक कार्य में पी, क्यू, सी, डी, एस, एम की पहचान करने में उनकी सहायता करना प्रत्येक कार्य में सुधार की गुंजाइश की पहचान करें प्रासंगिक डेटा एकत्र करें उनकी मंडलियों में समस्याओं को हल करने में उनकी सहायता करें गतिविधि बोर्ड बनाएं जहां कैसर के साथ परिणाम और कार्रवाई दोनों पक्षों की प्रगति की निगरानी की जाती है। सभी कार्यों में सभी कर्मचारियों और मंडलियों को कवर करने के लिए फैन आउट करें। TPM Workflow टीपीएम लक्ष्य न्यूनतम 90% OEE प्राप्त करें (समग्र उपकरण प्रभावशीलता) लंच के समय भी मशीनें चलाएं। लंच ऑपरेटरों के लिए है न कि मशीनों के लिए। इस तरह से काम करें कि ग्राहक को कोई शिकायत न हो। उत्पादन लागत को 30% तक कम करें। ग्राहक की आवश्यकता के अनुसार सामान पहुंचाने में 100% सफलता प्राप्त करें। दुर्घटना मुक्त वातावरण बनाए रखें। कर्मचारी कर्मचारियों के सुझावों को 3 गुना बढ़ाएँ। बहु-कुशल और लचीले श्रमिकों का विकास करना। टीपीएम के आठ स्तंभ केंद्रित सुधार स्वायत्त रखरखाव योजना बनाई रखरखाव प्रशिक्षण शिक्षा प्रारंभिक प्रबंधन गुणवत्ता रखरखाव टीपीएम सुरक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण 8 Piller of TPM 1.केंद्रित सुधार फोकस्ड इम्प्रूवमेंट टोटल प्रोडक्टिव मेंटेनेंस (TPM) का पहला स्तंभ है। यह किसी भी प्रक्रिया में विशेष रूप से पहचाने गए नुकसान के ड्राइव उन्मूलन के लिए एक संरचित टीम-आधारित दृष्टिकोण प्रदान करता है। 3.स्वायत्त रखरखाव स्वायत्त रखरखाव कुल उत्पादक रखरखाव (टीपीएम) के आठ स्तंभों में से दूसरा है। यह कर्मियों के कौशल स्तर को बढ़ाने के लिए एक संरचित दृष्टिकोण का अनुसरण करता है ताकि वे समझ सकें कि वे अपने उपकरणों और प्रक्रियाओं का प्रबंधन और सुधार कर सकें। लक्ष्य इष्टतम स्थितियों को प्राप्त करने के लिए ऑपरेटरों को प्रतिक्रियाशील होने से अधिक सक्रिय तरीके से काम करने के लिए बदलना है ताकि मामूली उपकरण को खत्म करने के साथ-साथ दोषों और टूटने को कम किया जा सके। 4.प्रशिक्षण शिक्षा प्रशिक्षण और शिक्षा कुल उत्पादक रखरखाव (टीपीएम) का चौथा स्तंभ है। यह सुनिश्चित करता है कि कर्मचारियों को उनके व्यक्तिगत विकास और संगठन के लक्ष्यों और उद्देश्यों के अनुरूप कुल उत्पादक रखरखाव (टीपीएम) की सफल तैनाती के लिए आवश्यक कौशल में प्रशिक्षित किया जाता है। 5.प्रारंभिक: प्रशासन अर्ली मैनेजमेंट टोटल प्रोडक्टिव मेंटेनेंस (टीपीएम) का पांचवां स्तंभ है और इसका उद्देश्य नए उत्पादों और प्रक्रियाओं को वर्टिकल रैंप अप और न्यूनतम विकास के साथ लागू करना है। यह आमतौर पर पहले चार स्तंभों के बाद तैनात किया जाता है क्योंकि यह अगली पीढ़ी के उत्पाद और उपकरणों के डिजाइन में सुधार को शामिल करते हुए अन्य स्तंभ टीमों से प्राप्त सीखने पर बनाता है। 6.गुणवत्ता रखरखाव गुणवत्ता रखरखाव कुल उत्पादक रखरखाव (टीपीएम) का छठा स्तंभ है और इसका उद्देश्य शून्य दोष स्थितियों को सुनिश्चित करना है। यह जनशक्ति सामग्री मशीनों और उन तरीकों के बीच प्रक्रिया अंतःक्रियाओं को समझने और नियंत्रित करने के द्वारा करता है जो दोषों को उत्पन्न करने में सक्षम हो सकते हैं। कुंजी यह है कि दोषों को उत्पन्न होने के बाद दोष का पता लगाने के लिए कठोर निरीक्षण प्रणाली स्थापित करने के बजाय पहले स्थान पर उत्पन्न होने से रोका जाए। 7.टीपीएम ऑफिस टोटल प्रोडक्टिव मेंटेनेंस (टीपीएम) सातवां स्तंभ है और संगठन में प्रशासनिक और समर्थन कार्यों को प्रदान करने वाले सभी क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करता है। यह स्तंभ विभागों से कचरे और नुकसान को खत्म करने में प्रमुख कुल उत्पादक रखरखाव (टीपीएम) सिद्धांतों को लागू करता है। स्तंभ यह सुनिश्चित करता है कि सभी प्रक्रियाएं विनिर्माण प्रक्रियाओं के अनुकूलन का समर्थन करती हैं और यह कि वे इष्टतम लागत पर पूरी की जाती हैं। 8.सुरक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण सुरक्षा स्वास्थ्य और पर्यावरण (एसएचई) अंतिम कुल उत्पादक रखरखाव (टीपीएम) स्तंभ है और शून्य दुर्घटनाओं की उपलब्धि की दिशा में ड्राइव करने के लिए एक पद्धति लागू करता है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह न केवल सुरक्षा से संबंधित है बल्कि शून्य दुर्घटनाओं को शून्य शारीरिक और मानसिक तनाव और कर्मचारियों पर तनाव और शून्य प्रदूषण को कवर करता है। टीपीएम के लाभ बेहतर संयंत्र प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित करने के लिए समर्थन कार्यों में सभी लोगों की भागीदारी बेहतर उपयोग किया गया कार्य क्षेत्र दोहराव वाले काम को कम करें कम प्रशासनिक लागत घटी हुई इन्वेंट्री वहन लागत फाइलों की संख्या में कमी समर्थन कार्यों में लोगों की उत्पादकता कार्यालय उपकरण के टूटने में कमी लॉजिस्टिक्स के कारण ग्राहकों की शिकायतों में कमी आपात स्थिति के कारण ख़र्चों में कमी ख़रीद को भेजती है जनशक्ति में कमी स्वच्छ और सुखद काम पर्यावरण। What is TPM टीपीएम में पी क्यू सी डी एस एम पी – सामग्री की कमी के कारण उत्पादन उत्पादन खो गया जनशक्ति उत्पादकता उपकरण की कमी के कारण उत्पादन उत्पादन खो गया। प्रश्न – चेक बिल इनवॉइस पेरोल तैयार करने में त्रुटियाँ ग्राहक रिटर्न वारंटी के कारण बीओपी के जॉब वर्क ऑफिस क्षेत्र में बीओपी रिजेक्शन रीवर्क का कारण बनता है। सी – क्रय लागत इकाई उत्पादित लॉजिस्टिक्स की लागत इनबाउंड आउटबाउंड कैरीइंग इन्वेंट्री की लागत संचार की लागत विलंब लागत। डी – लॉजिस्टिक्स लॉस लोडिंग अनलोडिंग में देरी। किसी भी सहायता कार्य के कारण वितरण में देरी आपूर्तिकर्ताओं को भुगतान में देरी सूचना में देरी एस – मटेरियल हैंडलिंग स्टोर्स लॉजिस्टिक्स में सुरक्षा सॉफ्ट और हार्ड डेटा की सुरक्षा। एम – कार्यालय क्षेत्रों में नागरिकों की संख्या। टीपीएम के तत्व स्वायत्त रखरखाव। दृश्य नियंत्रण। 6एस. प्रेडिक्टिव द टेक्नोलॉजीज का उपयोग करें। विश्वसनीयता कैंटर्ड रखरखाव (आरसीएम)। प्रूफिंग की गलती। स्थापना में कमी। आपको डाउनटाइम लॉस ओईई लॉस ट्री आदि को समझना। उपकरण और कार्यस्थल को आदर्श परिस्थितियों में लौटाएं। कार्यशालाएं। काइज़ेन स्मॉल निरंतर सुधार कर रहा है। रखरखाव के प्रकार 1.ब्रेकडाउन रखरखाव इस प्रकार के रखरखाव में मशीन के लिए तब तक कोई ध्यान नहीं रखा जाता है जब तक कि उपकरण विफल न हो जाए। मरम्मत का कार्य किया जाता है। इस प्रकार के रखरखाव का उपयोग तब किया जा सकता है जब उपकरण की विफलता संचालन या उत्पादन को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित नहीं करती है या लागत की मरम्मत के अलावा कोई महत्वपूर्ण नुकसान उत्पन्न नहीं करती है। हालांकि महत्वपूर्ण पहलू यह है कि एक बड़ी मशीन से एक घटक की विफलता ऑपरेटर के लिए हानिकारक हो सकती है। इसलिए ब्रेकडाउन मेंटेनेंस से बचना चाहिए। 2.निवारक रखरखाव यह उपकरण की स्वस्थ स्थिति को बनाए रखने के लिए दैनिक रखरखाव सफाई निरीक्षण तेल लगाने और फिर से कसने वाला डिज़ाइन है और गिरावट को मापने के लिए आवधिक निरीक्षण या उपकरण की स्थिति निदान की रोकथाम के माध्यम से विफलता को रोकता है। इसे आगे आवधिक रखरखाव और भविष्य कहनेवाला रखरखाव में विभाजित किया गया है। जैसे मानव जीवन निवारक दवा द्वारा बढ़ाया जाता है, वैसे ही उपकरण सेवा जीवन को निवारक रखरखाव करके बढ़ाया जा सकता है। 3.सुधारात्मक रखरखाव यह सुधार उपकरण और इसके घटक हैं ताकि निवारक रखरखाव मज़बूती से किया जा सके। विश्वसनीयता में सुधार या रखरखाव में सुधार के लिए डिजाइन की कमजोरी वाले उपकरणों को फिर से डिजाइन किया जाना चाहिए। यह शीतलक टैंक में गिरने वाली गड़गड़ाहट को रोकने के लिए एक गार्ड स्थापित करने वाले उपकरण उपयोगकर्ता स्तर पर होता है। 4.रखरखाव की रोकथाम यह कार्यक्रम नए उपकरणों के डिजाइन को इंगित करता है। वर्तमान मशीनों की कमजोरियों का पर्याप्त रूप से साइट पर अध्ययन किया जाता है, जिससे विफलता की रोकथाम आसान रखरखाव होती है और दोषों, सुरक्षा और निर्माण में आसानी से बचा जाता है। किए गए अवलोकन और अध्ययन को उपकरण निर्माता के साथ साझा किया जाता है और नई मशीन के डिजाइन में आवश्यक परिवर्तन किए जाते हैं। 5.प्रागाक्ति रख – रखाव यह एक ऐसी विधि है जिसमें निरीक्षण या निदान के आधार पर महत्वपूर्ण भाग के सेवा जीवन की भविष्यवाणी की जाती है ताकि भागों का उपयोग उनकी सेवा जीवन को सीमित करने के लिए किया जा सके। आवधिक रखरखाव की तुलना में भविष्य कहनेवाला रखरखाव स्थिति आधारित रखरखाव है। यह गिरावट के बारे में डेटा को मापने और विश्लेषण करके प्रवृत्ति मूल्यों का प्रबंधन करता है और ऑन-लाइन सिस्टम के माध्यम से स्थितियों की निगरानी के लिए डिज़ाइन की गई निगरानी प्रणाली को नियोजित करता है। निष्कर्ष आज उद्योग में एक सर्वकालिक उच्च प्रतिस्पर्धा के साथ कुल उत्पादक रखरखाव (टीपीएम) ही एकमात्र चीज हो सकती है जो कुछ कंपनियों के लिए सफलता और कुल विफलता के बीच है। यह काम करने वाला कार्यक्रम साबित हुआ है। इसे न केवल औद्योगिक संयंत्रों में बल्कि निर्माण भवन रखरखाव परिवहन और अन्य स्थितियों में काम के लिए अनुकूलित किया जा सकता है। कर्मचारियों को शिक्षित और आश्वस्त होना चाहिए कि कुल उत्पादक रखरखाव (टीपीएम) महीने का सिर्फ एक और कार्यक्रम नहीं है और प्रबंधन पूरी तरह से कार्यक्रम के लिए प्रतिबद्ध है और पूर्ण कार्यान्वयन के लिए आवश्यक विस्तारित समय सीमा है। यदि कुल उत्पादक रखरखाव (टीपीएम) कार्यक्रम में शामिल सभी लोग अपना हिस्सा करते हैं और निवेश किए गए संसाधनों की तुलना में असामान्य रूप से उच्च दर की वापसी अपेक्षित हो सकती है। https://intechnologies.in/wp-admin/post.php?post/https://intechnologies.in/?p=8468 Share this: Twitter Facebook LinkedIn Pinterest WhatsApp Like this: Like Loading... श्रेणी: यांत्रिक (मैकेनिकल (Mechanical)) 0 टिप्पणियाँ You must log in to post a comment. हाल के पोस्ट विस्तृत व्याख्या के साथ सिक्स स्ट्रोक इंजन का क्या अर्थ है l सिक्स स्ट्रोक इंजन का सिद्धांत l लाभ l नुकसान l सिक्स स्ट्रोक इंजन का कार्य l सिक्स स्ट्रोक इंजन के प्रकार l वाल्व टाइमिंग डायग्राम l प्लास्टिक मोल्ड विवरण के लिए डिजाइन और विकास l मोल्ड डिजाइन l डिजाइन विचार l इंजेक्शन मोल्ड स्टील चयन l विश्लेषण भरें एल मोल्डिंग दोष l टीपीएम (कुल उत्पादक रखरखाव) का क्या अर्थ है और इसका विवरण लाभ के साथ स्पष्टीकरण एल टीपीएम का इतिहास टीपीएम कैसे शुरू करें टीपीएम के आठ स्तंभ एल टीपीएम के लाभ टीपीएम के तत्व टीपीएम लक्ष्य एल रबर मोल्डिंग प्रक्रिया क्या है और विवरण के साथ इसके प्रकार क्या हैं l रबर की इंजेक्शन मोल्डिंग l रबर ट्रांसफर मोल्डिंग l मोल्ड डिज़ाइन l रबर शब्दावली l 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2022-12-02T22:02:12Z
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2022/01/23 22:21:50
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व्यक्ति की अगर सोच ठीक होगी तो उसकी इच्छायें भी ठीक होंगीं। इच्छायें यदि ठीक होंगी तो क्रियायें भी ठीक ही होंगी। सोच ही गलत है तो क्रियायें भी गलग हो जायेंगी। इसीलिये तो भगवान कहते हैं -- जो लोग निरन्तर बड़े प्यार के साथ मेरी सेवा करते रहते हैं, मैं उनको बुद्धि देता हूँ की आगे क्या करना है, सही निर्णय कैसे लेना है। अतः व्यक्ति की सोच ठीक होनी चाहिये। अब विचार करने की बात है कि हमारी सोच कैसी है? क्या हमारी सोच एक शरणागत भक्त जैसी है? इसके लिये महान वैष्णव आचार्य श्रील भक्ति विनोद ठाकुर जी ने बहुत से भजन लिखे। जैसे एक भजन में उन्होंने लिखा कि हे प्रभु मैं तो आपसे तो मोक्ष भी नहीं चाहता हूँ, आपने अगर मुझे दोबारा जन्म देना हो तो दे देना, कोई बात नहीं…अगर आपकी इच्छा हो मुझे दोबारा जन्म तो दे देना, बस मेरी प्रार्थना केवल इतनी है कि भक्त के घर में जन्म देना। आप पूछ सकते हैं कि उससे क्या होगा? तो उससे यह होगा कि भक्त के घर में जन्म लेने से छोटी उम्र में ही बच्चा भक्ति की क्रियायें अपने आप करने लगता है, उसके माता-पिता उसे प्रणाम कराते हैं। बचपन से ही माता-पिता उस बच्चे को कहते हैं, सिखाते हैं कि भगवान को प्रणाम कर, संतों को, गुरुजनों को प्रणाम कर, प्रसाद ले, चरणामृत ले, आदि। जन्म से ही ये संस्कार जब मिलेंगे और पिछली सुकृतियाँ भी होंगी तो बड़िया भक्त तो बनाना ही है। Posted by VINA HINDI at 1:02 pm इसे ईमेल करेंइसे ब्लॉग करें! Twitter पर शेयर करेंFacebook पर शेयर करेंPinterest पर शेयर करें कोई टिप्पणी नहीं: एक टिप्पणी भेजें नई पोस्ट पुरानी पोस्ट मुख्यपृष्ठ सदस्यता लें टिप्पणियाँ भेजें (Atom) विश्व वैष्णव राज सभा लेबल गुरु जो बोओगे प्रेम भगवान श्रीचैतन्य महाप्रभु यमुना रहन-सहन वही काटोगे शरणागति श्रद्धा श्रीनित्यानंद श्रील प्रभुपाद जी सनातन धर्म
2021-12-01T00:54:08Z
https://hindivina.blogspot.com/2020/01/blog-post_6.html
OSCAR-2201
सभी पापों से मुक्ति दिलाता है निर्जला एकादशी व्रत - Divya Himachal: No. 1 in Himachal news - News - Hindi news - Himachal news - latest Himachal news सभी पापों से मुक्ति दिलाता है निर्जला एकादशी व्रत निर्जला एकादशी का व्रत हिंदू धर्म में विशेष तौर पर मनाया जाता है। हिंदुओं में वर्ष में चौबीस एकादशियां आती हैं, किंतु इन सब एकादशियों में ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी सबसे बढ़कर फल देने वाली समझी जाती है क्योंकि इस एक एकादशी का व्रत रखने से वर्ष भर की एकादशियों के व्रत का फल प्राप्त होता है। निर्जला एकादशी का व्रत अत्यंत संयम साध्य है। कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष दोनों पक्षों की एकादशी में अन्न खाना वर्जित है… इस व्रत में एकादशी तिथि के सूर्योदय से अगले दिन द्वादशी तिथि के सूर्योदय तक जल और भोजन का त्याग किया जाता है। इसके बाद दान, पुण्य आदि कर इस व्रत का विधान पूर्ण होता है। धार्मिक महत्त्व की दृष्टि से इस व्रत का फल लंबी उम्र, स्वास्थ्य देने के साथ-साथ सभी पापों का नाश करने वाला माना गया है। एकादशी के दिन सर्वप्रथम भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करें। इसके पश्चात 'ओउम नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें। इस दिन व्रत करने वालों को चाहिए कि वह जल से कलश भरे व सफेद वस्त्र को उस पर ढककर रखें और उस पर चीनी तथा दक्षिणा रखकर ब्राह्मण को दान दें।
2019/09/18 09:54:45
https://www.divyahimachal.com/2019/06/%E0%A4%B8%E0%A4%AD%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%A4/
mC4
देश की सबसे बड़ी बियर कंपनी यूनाइटेड ब्रेवरीज को हाइनकेन के साथ किए करार से काफी फायदा होने की उम्मीद है। इस महीने की शुरुआत में हाइनकेन के साथ किए गए इस करार के तहत यूबी समूह उसके बियर ब्रांड हाइनकेन और कैनन 10,000 भारत में बनाएगी और उनका वितरण भी करेगी। बदले में हाइनकेन विदेशी बाजार में यूबी की सबसे अधिक बिकने वाली बियर ब्रांड किंगफिशर का उत्पादन और वितरण करेगी। लगभग 17 अरब डॉलर का कारोबार करने वाली दिग्गज बियर कंपनी हाइनकेन का मुख्यालय एम्सटर्डम में है। कंपनी के कार्यकारी मंडल के निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी जीन फ्रैंकोइस वैन बॉक्समीयर ने बताया, 'आने वाले समय में भारत में बियर की मांग में काफी इजाफा होने वाला है। इसे देखते भारतीय बाजार में आना एक अच्छा फैसला है।' भारत में प्रति व्यक्ति बियर की खपत मात्र 1.3 लीटर सालाना है, जबकि विकसित देशों में यह आंकड़ा 50 लीटर होता है। लगभग 3000 करोड़ रुपये के भारतीय बियर बाजार में सालाना 14.4 हेक्टोलीटर बियर की खपत होती है। भारतीय बियर बाजार में यूबी की हिस्सेदारी करीब 48 फीसदी है। उम्मीद है कि अगले साल गर्मियों में हाइनकेन भारतीय बाजार में आएगी। पिछले कुछ साल से यह बियर भारत में सिंगापुर के एक संयुक्त उपक्रम के तहत उपलब्ध थी लेकिन शुल्क रहित दुकानों पर ही उपलब्ध होने के कारण इसकी बिक्री काफी कम थी। यूबी के अधिकारी ने बताया कि हाइनकेन के ब्रांड को सुपर प्रीमियम श्रेणी में ही रखा जाएगा। हालांकि कई लोगों का मानना है कि इस करार से दोनों को कितना फायदा यह कहना मुश्किल है। कुल बियर बाजार में प्रीमियम बियर की हिस्सेदारी 6 फीसदी है। भारत के प्रीमियम बियर बाजार में हाइनकेन की पेरोनी, कार्ल्सबर्ग और टयूबोर्ग को काफी पसंद किया जाता है। लेकिन स्वतंत्र ब्रांड विश्लेषकों का मानना है कि भारत में आना हाइनकेन के लिए काफी फायदेमंद रहेगा क्योंकि यहां प्रीमियम श्रेणी में कंपनी के ब्रांड्स को काफी पसंद किया जाता है। नामी ब्रांड विश्लेषक हरीश बिजूर का कहना है, 'मुझे करीब 20 बियर ब्रांड्स के नाम याद हैं और इनमें से हाइनकेन की अपनी एक अलग श्रेणी है। मुझे लगता है कि भारतीय बाजार में इसकी मांग बढ़ने में 6-8 महीने का समय लगेगा। इसकी मार्केटिंग पर कंपनी काफी ध्यान देगी।' इस करार से जहां हाइनकेन को भारतीय बाजार में वितरण नेटवर्क मिलेगा वहीं यूबी के ब्रांड किंगफिशर को भी फायदा होगा। एक उद्योग विश्लेषक ने बताया, 'यूबी अपने बियर ब्रांड किंगफिशर को विदेशी बाजार में स्थापित करने की कोशिश काफी समय से कर रही है। इसके लिए स्कॉटिश ऐंड न्यूकैसल के साथ भी कंपनी ने करार किया था, लेकिन इसमें उसे सफलता नहीं मिली थी।' यूं तो पिछले वित्त वर्ष के दौरान करीब 8.2 करोड़ केस की बिक्री करने वाली यूबी के कुछ संयंत्र अमेरिका, ब्रिटेन और न्यूजीलैंड में भी हैं। विजय माल्या ने बताया, 'कंपनी की कुल कमाई में विदेशी बाजार से होने वाली कमाई की हिस्सेदारी काफी कम है लेकिन यह बढ़ रही है। हाइनकेन के संयंत्रों के इस्तेमाल और निर्यात को बढ़ाकर हम अपनी इस कमाई की हिस्सेदारी बढ़ाना चाहते हैं।' हालांकि उन्होंने विदेशी बाजार से होने वाली कंपनी की क माई के बारे में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। माल्या ने बताया, 'भारत एक बड़ा बाजार है और अभी तक हमने इसमें मौजूद सभी कारोबारी संभावनाओं को भी नहीं भुनाया है।' करार से जुड़ी बातें जनवरी 2008 में हाइनकेन ने परोक्ष तरीके से यूनाइटेड ब्रेवरीज लिमिटेड (यूबीएल) में 37.5 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी। इसके बाद हाइनकेन ने दुनिया भर में स्कॉटिश ऐंड न्यूजकैसल (एसऐंडएन) के ब्रेवरीज कारोबार का अधिग्रहण किया था। एसऐंडएन यूबीएल के साथ एक संयुक्त उपक्रम में बराबर की हिस्सेदार थी। इसके बाद यूबीएल ने हाइनकेन को अपने निदेशक मंडल में बराबर के अधिकार देने से मना कर दिया था क्योंकि हाइनकेन का एशिया पैसिफिक ब्रेवरीज के साथ भी साझा उपक्रम था। भारत में एशिया पैसिफिक ब्रेवरीज (एपीबी) की ब्रांड्स यूबी की ब्रांड्स के साथ प्रतिस्पर्धा करती हैं। विजय माल्या ने साफ कर दिया था कि हेनकेन यूबीएल के जरिए परिचालन कर दोनों कंपनियों के हितों का ध्यान रखे, अगर वह ऐसा नहीं करना चाहती है तो वह कंपनी में गैर सक्रिय शेयरधारक बन सकती है। एपीबी भारत में टाइगर, कैनन 10000 और हाइनकेन जैसे बियर ब्रांड बेचती थी। महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में कपंनी के ब्रीविंग संयंत्र भी हैं और इनकी क्षमता सालाना 4,60,000 हेक्टोलीटर है। एशिया पैसिफिक ब्रेवरीज सिंगापुर ने अपने पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी एशिया पैसिफिक ब्रेवरीज (औरंगाबाद) और आंध्र प्रदेश स्थित एशिया पैसिफिक ब्रेवरीज पर्ल 5.19 करोड़ डॉलर में हाइनकेनइंटरनैशनल को बेच दी थी। Keyword: united brewries, heinkein, kingfisher beer, vijay mallya, brand analyst harish bijoor, Advertisements Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month* Display Name Email-Id Post your comment Enter Code*: आपका मत क्या गुणवत्ता नियंत्रण आदेश से आयात पर लगेगा लगाम हां नहीं पढ़िये ईमेल पढ़िये ईमेल About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768 * Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. 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2022-12-05T02:02:29Z
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OSCAR-2301
फिक्स आपके पास अपग्रेड (गाइड) के बाद विंडोज 10 में इस स्थान को बचाने की अनुमति नहीं है - टेक | मार्च 2021 रुप से प्रदर्शितअनुदानघटनाक्रम, पॉडकास्ट, प्रारंभ-अपकैसे है, Instagramऐप्स और सॉफ्टवेयर, गैजेट्स, हार्डवेयर, हाउ टू, टेकऐप्स और सॉफ्टवेयर, मोबाइल, सॉफ्टवेयर, टेककैसेविशेष रुप से प्रदर्शितइवेंट्स, सोशल मीडिया, स्टार्ट-अप्स, टेकप्रेस, अफवाहें, सोशल मीडियाApple, एप्स और सॉफ्टवेयर, विंडोजएप्लिकेशन और सॉफ्टवेयर, समीक्षाखिड़कियाँकूल टेक नौकरियांएप्पल, टेक, विंडोज विंडोज 10 उपयोगकर्ताओं को एक समस्या का सामना करना पड़ रहा है जिसमें वे विंडोज़ 10 में अपग्रेड करने के बाद अपने पीसी में दस्तावेजों और फ़ाइलों को नहीं बचा सकते हैं। वे एक पॉपअप कहते हैं, 'आपको इस स्थान को बचाने की अनुमति नहीं है। यह समस्या फ़ाइल और फ़ोल्डर अनुमतियों से उपजी है, क्योंकि फ़ोल्डर केवल मोड पर पढ़ें और हार्ड डिस्क में परिवर्तन की अनुमति नहीं देते हैं। यहाँ कुछ हल करने के प्रभावी तरीके दिए गए हैं। आपके पास इस स्थान को विंडोज १० में सहेजने की अनुमति नहीं है। यदि आप विंडोज १० में अपग्रेड करने के बाद इस समस्या का सामना कर रहे हैं या इसे केवल खरोंच से सामना कर रहे हैं, तो नीचे दिए गए ये समाधान मुद्दों का ध्यान रखेंगे। । 1- विंडोज़ 10 में फाइलों को लिखना और सहेजना सभी अनुमतियों के बारे में है। डिस्क पर लिखने और सहेजने के लिए आपके पास अनुमति और प्रमाण होना आवश्यक है। सुनिश्चित करें कि आपके द्वारा सहेजा जा रहा फ़ोल्डर आपके स्वामित्व में है। फ़ाइल या फ़ोल्डर का 'स्वामी' होने या 'प्रशासक' होने के बीच एक अंतर है। इस लिंक की जाँच करें (https://www.tenforums.com/tutorials/3587-owner-files-folders-change-windows-10-a.html#option4) क्योंकि यह उन सभी तरीकों का विवरण देता है जिनके उपयोग से आप अपना स्वामित्व बदल सकते हैं विंडोज़ 10 समस्या में आपको इस स्थान पर सहेजने की अनुमति नहीं है, इसे ठीक करने के लिए फ़ाइलें या फ़ोल्डर। स्वामित्व बदलने के तरीकों में से एक नीचे दिया गया है। उस फ़ाइल या फ़ोल्डर पर राइट क्लिक करें जिसके लिए आप स्वामित्व का मौका चाहते हैं और 'गुण' पर क्लिक करें और फिर 'उन्नत' पर जाएं और फिर 'स्वामी' नामक बटन के सामने क्लिक करें और 'बदलें' पर क्लिक करें। अपना उपयोगकर्ता नाम टाइप करें और “चेक नाम: बटन” पर क्लिक करें और फिर ओके पर क्लिक करें। अब मालिक के नाम के तहत 'उप-मालिकों और वस्तुओं पर मालिक को बदलें' पर क्लिक करें और फिर से ओके पर क्लिक करें। आपको शायद यह कहते हुए एक संदेश दिखाई देगा कि 'क्या आप निर्देशिका अनुमतियों को पूर्ण नियंत्रण देने की अनुमति के साथ बदलना चाहते हैं'। बस हां पर क्लिक करें। संपादन बटन पर क्लिक करें और फिर सूची से उपयोगकर्ता नाम पर क्लिक करें। अब सूची के नीचे पूर्ण नियंत्रण की जाँच करें और ठीक पर क्लिक करें। एक्सेस टैब में, उपयोगकर्ता खाते में 'पूर्ण नियंत्रण' होना चाहिए। 2- कई उपयोगकर्ता OneDrive से छुटकारा पाकर विंडोज 10 में इस स्थान की त्रुटि को बचाने की अनुमति नहीं दे पाए। OneDrive शेयर फ़ोल्डर फ़ाइल अनुमतियों में समस्याएँ पैदा करते हैं। OneDrive को अक्षम करें और फिर सभी सिंक की गई फ़ाइलों और विकल्पों को अन-सिंक करें और अनचेक करें। अपने कंप्यूटर को पुनरारंभ करें और यदि यह आपको OneDrive फ़ाइलों या फ़ोल्डरों को फिर से बनाने के लिए कहता है, तो केवल NO पर क्लिक करें। OneDrive 'शेयर्स' के लिए, 'स्टॉप शेयरिंग' चुनें। कमांड यूजर अकाउंट्स सेटिंग बॉक्स खोलेगा। अब उस उपयोगकर्ता खाते का चयन करें जिस पर त्रुटि आ रही है। अब गुण बटन पर क्लिक करें और समूह सदस्यता टैब खोलें। यहां आप उपयोगकर्ता खाते को विशेषाधिकार प्रदान कर सकते हैं जो वर्तमान में फ़ाइलों को लिखने या सहेजने से रोक दिया गया है। बस व्यवस्थापक का चयन करें और लागू करें / ठीक क्लिक करें और बाहर निकलें। 4- स्वामित्व बदलने का सबसे अच्छा तरीका उपयोगकर्ता खाता फ़ोल्डर के लिए करना है। यह परिवर्तन प्रणाली को व्यापक बना देगा। बस सी ड्राइव पर जाएं और 'उपयोगकर्ता' फ़ोल्डर ढूंढें और उस पर राइट क्लिक करें। अब सिक्योरिटी एंड एडवांस में जाएं और यूजर अकाउंट बदलने और ओनरशिप देने की इसी प्रक्रिया को दोहराएं। यदि आप भ्रमित हैं, तो यहां एक अच्छा वीडियो है जो सभी प्रक्रिया को दिखा रहा है। यह ठीक करेगा कि आपके पास इस स्थान को विंडोज 10 में सहेजने की अनुमति नहीं है। 5- आपको सभी एंटीवायरस सॉफ्टवेयर और फायरवॉल को बंद कर देना चाहिए क्योंकि ये प्रोग्राम फाइल परमिशन में समस्या पैदा करने के लिए जाने जाते हैं। आप एंटीवायरस को अक्षम करके विंडोज 10 अनुमति की समस्याओं को ठीक कर सकते हैं।
2021-03-07T17:23:43Z
https://www.haribhoomi.com/madhya_pradesh/madhya-pradesh-governments-decision-to-raise-honorarium-of-journalists
OSCAR-2109
एक शांत नास्तिक संत प्रेमचंद : जैनेंद्र कुमार (संस्मरण) Ek Shant Nastik Sant Premchand : (Sansmaran) Jainendra Kumar एक शांत नास्तिक संत प्रेमचंद : जैनेंद्र कुमार (संस्मरण) मैं तब उनकी खाट के पास बराबर काफी-काफी देर तक बैठा रहा हूँ। उनके मन के भीतर कोई खीझ, कोई कड़वाहट, कोई मैल उस समय करकराता मैने नहीं देखा, देखके तो उस समय वह अपने समस्त अतीत जीवन पर पीछे की ओर भी होंगे और आगे अज्ञात में कुछ तो कल्पना बढ़ाकर देखते ही रहे होंगे लेकिन दोनों को देखते हुए वह संपूर्ण शांत भाव से खाट पर चुपचाप पड़े थे। शारीरिक व्यथा थी, पर मन निर्वीकार था। हाथ पीला क्या सफेद था और पूला हुआ था, मैं दाबने लगा। वह बोले नहीं, आँख मींचे पड़े रहे। रात के बारह बजे ' हंस' की बात हो चुकी थी। अपनी आशाएँ, अपनी अभिलाषाएँ, कुछ शब्दों से और अधिक आँखों से वह मुझपर प्रगट कर चुके थे। ' हंस' की और साहित्य की चिंता उन्हें तब भी दबाए थी। अपने बच्चों का भविष्य भी उनकी चेतना पर दबाब डाले हुए था। मुझसे उन्हें कुछ ढारस था। अब मुझे देखते, फिर बोले-आदर्श से काम नहीं चलेगा। मैने कहना चाहा...आदर्श, बोले-बहस न करो। कहकर करवट लेकर आँखें मींच लीं। उस समय मेरे मन पर व्यथा का पत्थर ही मानो रख गया। अनेकों प्रकार की चिंता-दुश्चिंता उस समय प्रेमचन्द जी के प्राणों पर बोझ बनकर बैठी हुयी थी। मैं या कोई उसको उस समय किसी तरह नहीं बटा सकता था। चिंता का केन्द्र यही था कि 'हंस' कैसे चलेगा? नहीं चलेगा तो क्या होगा? 'हंस' के लिए तब भी जीने की चाह उनके मन मं थी और ' हंस' न जियेगा, यह कल्पना उन्हें असह्य थी, पर हिन्दी-संसार का अनुभव उन्हें आश्वस्त न करता। 'हंस' के लिए न जाने उस समय वह कितना झुककर गिरने को तैयार थे। मुझे यह योग्य जान पड़ा कि कहूं ...' हंस' मरेगा नहीं, लेकिन वह बिना झुके भी क्यों न जिये? वह आपका अखबार है, तब वह बिना झुके ही जियेगा। लेकिन मैं कुछ भी न कह सका और कोई आश्वासन उस साहित्य-सम्राट को आश्वस्थ न कर सका।
2020/10/19 20:42:10
http://www.hindikahani.hindi-kavita.com/Ek-Shant-Nastik-Sant-Jainendra-Kumar.php
mC4
प्रेमरस: July 2010 उसने जल्दी-जल्दी पापा के बिस्तर को ठीक करना शुरू कर दिया। इतना छोटा होते हुए भी उसे पापा की पसंद-नापसंद याद आने लगी। पापा के पसंद की चादर पलंग पर बिछाई ही थी, कि नानी आकर उसपर बैठ गई। "नानी पलंग पर मत बैठिए, पापा आने वाले हैं, उनको सिलवट वाला बिस्तर पसंद नहीं है। मैंने पीली चादर बिछाई है, पता है यह उनको बहुत पसंद है!" बाबू की बात सुनकर नानी के आंखों में पानी आ गया। थोड़ी देर बाद घर में औरतों की भीड़ लगनी शुरू हो गई। बाबू परेशान होने लगा कि आखिर यह भीड़ घर में क्यों आ रहीं है। घर में बाबू को छोड़कर कोई भी खुश नज़र नहीं आ रहा था, उन्हे देखकर उसे लगा कि ज़रूर कोई गड़बढ़ है। थोड़ी देर में एक गाड़ी घर के सामने आकर रुकी, जिसे देखते ही सभी लोग झट से बाहर चले गए। थोड़ी देर में लोगों ने पापा को आँगन में लाकर लिटा दिया। बाबू परेशान था कि आखिर पापा ऐसे क्यों लेटे हुए हैं? उनको सफेद कप़ड़े में क्यों लपेटा हुआ है? आखिर वह बात क्यों नहीं करते? लेकिन उसके सवालो का जवाब किसी के पास नहीं था। उसके पापा को दो महीने पहले एक गाड़ी रौंदती हुई निकल गई थी, वह दो महीने तक ज़िंदगी की जंग लड़ते-लड़ते आज हार गए थे। बाबू जैसे कहीं गुम हो गया, उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है। पापा की कितनी ही यादें चलचित्र की तरह उसकी आंखों के सामने घूम रही थी। बाबू के साथ खेलने वाला, उसके ज़रा से दुख में परेशान हो जाने वाला आज किसी की ज़रा सी लापरवाही की भेंट चढ़ गया है। वहीं दूसरी तरफ उसकी ज़िदंगी में विरानियों को भरने वाला उसका गुनाहगार, उसकी हालत से बेपरवाह, आराम से अपने परिवार और ज़िदंगी की रंगीनियों में व्यस्त है। बाबू ने बड़ी ही मायूसी में छोटे भाई को बताया कि पापा अब वापिस नहीं आएंगे! उसने बड़ी ही मासूमियत से मालूम किया "तो अब हम किसके साथ खेलेंगे? मेरे खेल में 'अब पापा कौन बनेगा?' (ज़रा सी जल्दी अथवा मस्ती में गाड़ी चलाने के कारण लोग अन्जाने में ही कितने ही बाबू जैसे बच्चों की भावनाओं से खेलते हैं। आखिर कब लोग कानून का पालन करना शुरू करेंगे? क्या इस दौड़ की कोई हद भी है?) accident, Traffic, संवेदनहीनता जब भी चाँद आसमाँ में आता है तेरा चेहरा चुरा के लाता है जब कोई गीत नया लिखता हूँ मुझको तेरा ख्याल आता है भँवरे मद-मस्त हो कर चलते हैं फूल तेरी तरह मुस्काता है क्योंकि यह कारनामा ऐ हमदम यहाँ बस आपको ही आता है झरना तेरी तरह ही शीतल है धारा तेरी तरह ही अवकल है तेरी अंगडाईयाँ हैं दरिया में सबको तेरा हुनर ही आता है बादलों में तेरी रवानी है बारिशों में तेरी जवानी है बिजलियों में अदा तुम्हारी हैं मौसम तेरी तरह सताता है इश्क में जोश है तेरा हमदम हुस्न तेरी तरह शर्माता है दोस्ती में तेरी ही खुशबु है वफ़ा का तुझ से ही तो नाता है Keywords: Gazal, Ghazal, ग़ज़ल, हिंदी, hindi, poem इश्क के फंडे का सबसे अधिक फायदा उठाया है मोबाईल फोन कंपनियों ने। इधर इश्क के परवाने मोबाईल के ज़रिए रात दिन प्यार की पींगे बढ़ाते हैं और उधर इनका मीटर दौड़ता रहता है। आखिर दिल में बिल की परवाह कौन करता है? रोज़ ही प्रेम के परवानों को फांसने के लिए नए-नए फोन और लुभावने प्लान बाज़ार में उपलब्ध होते हैं। बेचारे प्रेमी! बज़ार में प्लान भी प्रेमिका के स्वभाव के अनुसार ही आते हैं। जैसे कि नींद कम आती है तो रात्रि में फ्री टॉकटाइम प्लान, पढ़ने का शौक है तो फ्री एसएमएस प्लान। नया फोन बाज़ार में आते ही धड़कन और भी तेज़ी से ब़ढ़ जाती हैं, कहीं इस फोन की डिमांड ना आ जाए! इसलिए फोन के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए जी-तोड़ कोशिश शुरू। दुकानदार बताना शुरू करता है "जी इसमें यह फीचर.....!" "अरररर! यह क्या बता रहे हो? सीधे-सीधे बताओ कि है कितने का?" प्रेमिका से अगर शिकायत कर दी कि "फोन क्यों नहीं किया?" बस प्रेमिका शुरू "फोन में बेलेंस होता तो करती ना।" इतना सुनने पर भी अगर प्रेमी बेलेंस ना डलवाए तो फिर प्रेमी ही कैसा? दौड़ पड़ते हैं रिचार्ज कूपन खरीदने। यह तो बाद में पता चलता है कि कॉलेज की फीस को प्रेमिका के नए मोबाईल में और जेबखर्च को रिचार्ज कराने में बंटाधार करा चुके है। जब फोन पर बातचीत करने का सिलसिला शुरू होता है, तो प्रेमी की धढ़कन बिल पर टिकी होती है। इधर प्रेमिका चाहती है कि खूब देर तक बातें होती रहें, उधर प्रेमी फोन काटने का बहाना ढ़ूंढ़ते रहते हैं। वैसे बहाना चलता नहीं है! प्रेमिका कहती है "सुनो, कल लंच पर मिलते हैं", इधर प्रेमी "लेक्चर अटेंड करना है।" प्रेमिका "अरे यार! यह लेक्चर तो मैं तुम्हे लंच पर ही समझा दुंगी।" अब बेचारा लेक्चर के कारण लंच पर आने से मना करता तो उसकी समझ में बात आती भी। कुछ कह दिया तो समझो कयामत आ गई, "फोन तो मैंने किया है और बिल की परवाह तुम कर रहे हो?" अब प्रेमिका को समझाए कौन कि बिल तो उसने ही देना है। खिसियाते हुए बोलता है "यार! बिल तुम्हारा हो या मेरा बात तो एक ही है" इस पर प्रेमिका खुश! हालांकि बात प्रेमी की एकदम सही है, क्योंकि खर्च चाहे प्रेमिका करे बिल तो प्रेमी के ही पल्ले पड़ना है। मतलब छुरी खरबू़ज़े पर गिरे या खरबूज़ा छुरी पर, कटता तो खरबूज़ा ही है। वैसे प्रेमिका की बातें भी अजीब ही होती हैं, लंच पर चलने का इसरार करते हुए कहती हैं कि "चलो आईसक्रीम मैं खिला दूंगी।" उसे पता है कि आप उसको बिल तो देने नहीं देंगे, चाहे अन्दर से कितना ही चाहें। इसलिए बोल दो, बोलने में क्या जाता है। बाद में तुर्रा यह कि आईसक्रीम तो उसकी तरफ से थी, पैसे आपने क्यों दिए? बेचारा मन ही मन खीजने के सिवा और कर भी क्या सकता है। एक अदद प्रेमिका रखना इतना आसान थोड़े ही है। दिल का बिल तो नहीं आता है लेकिन बिल के लिए दिल अवश्य ही चाहिए। (हरिभूमि के आज [19 जुलाई) के संस्करण में प्रष्ट न. 4 पर मेरा व्यंग्य) साहिल को ढूँढती है, मेरी डूबती नज़र, ना जाने कौन मेरा, समंदर के पार है। शायद नहीं उस पार है, मेरी वफा-ए-ज़िन्दगी, क्यूँ कर के फिर उस शख्स का, मुझे इंतज़ार है। नज़रें यह थक गई हैं, तेरे इंतज़ार में, हर शै गुज़र गई है, तेरे इंतज़ार में। आकर तो देख ले, मेरे बेचैन दिल का हाल, कहीं जाँ ना निकल जाए, तेरे इंतज़ार में। (दैनिक जागरण के आज (दिनांक 14 जुलाई) के राष्ट्रिय संस्करण के कॉलम "फिर से" में प्रकाशित) हमारी महान मातृभाषा हिंदी हमारे अपने ही देश हिंदुस्तान में रोजगार के अवसरों में बाधक है। हमारे देश की सरकार का यह रुख अभी कुछ दिन पहले ही सामने आया था। बोलने वालों की संख्या के हिसाब से दुनिया की दूसरे नंबर की भाषा हिंदी अगर अपने ही देश में रोजगार के अवसरों में बाधक बनी हुई है तो इसका कारण हमारी सोच है। हम अपनी भाषा को उचित स्थान नहीं देते हैं, बल्कि अंग्रेजी जैसी भाषा का प्रयोग करने में गर्व महसूस करते हैं। मेरे विचार से हमें अपना नजरिया बदलने की जरूरत है। हमें कार्यालयों में ज्यादा से ज्यादा हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देना चाहिए। कोरिया, जापान, चीन, तुर्की एवं अन्य यूरोपीय देशों की तरह हमें भी अपने देश की सर्वाधिक बोले जाने वाली जनभाषा हिंदी को कार्यालयी भाषा के रूप में स्थापित करना चाहिए और उसी स्थिति में अंग्रेजी प्रयोग करने की अनुमति होनी चाहिए, जबकि बैठक में कोई एक व्यक्ति ऐसा हो, जिसे हिंदी नहीं आती हो। कोरिया का उदहारण लें तो वह बिना इंग्लिश को अपनाए हुए ही विकसित हुआ है और हम समझते हैं की इंग्लिश के बिना आगे नहीं बढ़ा जा सकता। यह हमारा दुर्भाग्य है कि हम अपनी भाषा को छोड़कर दूसरी भाषाओं को अधिक महत्व देते हैं। अंग्रेजी जैसी भाषा को सीखना या प्रयोग करना गलत नहीं है, लेकिन अपनी भाषा की अनदेखी करना गलत ही नहीं, बल्कि देश से गद्दारी करने जैसा है। अपनी भाषा को छोड़कर प्रगति करने के सपने देखना बिलकुल ऐसा है, जैसे अपनी मां का हाथ छोड़ किसी दूसरी औरत का हाथ पकड़ कर चलना सीखने की कोशिश करना। हो तो सकता है कि हम चलना सीख जाएं, लेकिन जब गिरेंगे तो क्या मां के अलावा कोई और उसी तरह दिल में दर्द लेकर उठाने के लिए दौड़ेगी? हम दूसरा सहारा तो ढूंढ़ सकते हैं, लेकिन मां के जैसा प्रेम कहां से लाएंगे? पृथ्वी का कोई भी देश अपनी भाषा छोड़कर आगे बढ़ने के सपने नहीं देखता है। एक बात और, हिंदी किसी एक प्रांत, देश या समुदाय की जागीर नहीं है, यह तो उसकी है, जो इससे प्रेम करता है। भारत में तो अपने देश की संप्रभुता और एकता को सर्वाधिक महत्व देते हुए वार्तालाप करने में हिंदी को प्राथमिकता देनी चाहिए। कम से कम जहां तक हो सके, वहां तक प्रयास तो निश्चित रूप से करना चाहिए। उसके बाद क्षेत्रीय भाषा को भी अवश्य महत्व देना चाहिए, क्योंकि भारत की अनेक संस्कृतियां क्षेत्रीय आधार पर ही विकसित हुई हैं। आज महान भाषा हिंदी रोजगार के अवसरों में बाधक केवल इसलिए है, क्योंकि हमें अपनी भाषा का महत्व ही नहीं मालूम है। जब हमें अपनी भाषा, अपने देश, आम हिंदुस्तानियों पर गर्व होना शुरू हो जाएगा। हमारा भारत फिर से सोने की चिडि़या बन जाएगा। मूल लेख को पढने के लिए यहाँ चटका लगाएँ Hindi, दैनिक जागरण, मातृभाषा, हिंदी एक 21 साला यौवना को तलाश है एक सुयोग्य वर की. आपको बताते चलते हैं कि वह 2000 करोड़ की संपत्ति की मालकिन है. :-) अब सारा समय ख्वाब देखने में ही मत लगाइए, चलिए मैं आपको उसकी फोटो दिखा देता हूँ. जिसे देखकर आप स्वयं निर्णय ले सकते हैं कि........... परेशान क्यों हो रहे हैं? आगे भी बता रहा हूँ! इस युवती का नाम निशिता शाह है और यह फोर्ब्स में नाम पाने वाली भारतीय मूल की पहली महिला हैं। फोर्ब्स पत्रिका दुनिया के सबसे रईस लोगों की सूची बनाती है। उसने निशिता को आगामी पीढ़ी की एशियाई अरबपतियों की 40 नाम वाली सूची में 19वें नंबर पर रखा है। निशिता ने बोस्टन अमेरिका से बिजनस एडमिनिस्ट्रेशन का कोर्स पूरा किया है। उसके पास अपना प्लेन भी है और पायलट का लाइसेंस भी। सबसे दिलचस्ब बात यह है कि निशिता शाह को तलाश है मिस्टर राइट की। निशिता मूलत: गुजरात मूल की है तथा उसका मशहूर "शाह परिवार" इस समय थाईलैंड में बसा है और वहां के सबसे रईस परिवारों में से एक है। इनके जीपी ग्रुप के बिज़नस में 44 विशाल शिप भी हैं। शाह परिवार मूलत: कच्छ का है। 1868 में यह मुंबई आ बसा था। इसके बाद यह परिवार 1918 में बैंकॉक में सेटल हो गया। तीन संतानों में सबसे बड़ी निशिता कहती हैं कि उसके मां-बाप अब कहने लगे हैं कि वह शादी करके सेटल हो जाए। वहीँ वह सीक्रेट बताती हैं कि "मुझे अभी मेरा मिस्टर राइट नहीं मिला है।" अर्रर्रर्र!!!!!!!!! थाईलेंड की ओर आराम से भागो यार......... लड़ क्यों रहे हो??????????? इक रोज़ जब मैंने उसे हँसते हुए देखा, चेहरे पे कई बिजली चमकते हुए देखा। महसूस हो रहा था क़यामत है आ गई, रुखसार से घूँघट जो सरकते हुए देखा। अनजानी सी ख़ुशी से होंट काँप रहे थे, आंसू का एक कतरा छलकते हुए देखा। उसका करीब आना यूँ महसूस हो गया, हाथों में चूड़ियाँ जो खनकते हुए देखा। उसने यूँ रख दिया मेरे हाथो पे अपना हाथ अंगार जैसे कोई दहकते हुए देखा। Ghazal, Smyle, अंगार, ख़ुशी, चूड़ियाँ, बिजली, महसूस, हँसते हुए महबूब नींद, माशूक ख़्वाब और इश्क़ रात की तरह है। जिस तरह रात में नींद और ख़्वाब का मिलन अक्सर होता है, उसी तरह आशिक़ और माशूक़ का मिलन भी रातनुमा इश्क़ में होता है। मगर यह ज़रूरी नहीं कि हर रात की नींद में ख़्वाब आए! इसी तरह आशिक़ों का मिलन भी हर इक की किस्मत मैं नहीं होता। आजकल धर्म के खिलाफ बोलना फैशन समझा जाने लगा है। चाहे बात तर्कसंगत हो अथवा ना हो, लेकिन ऐसे विचारों के सर्मथन में हज़ारों लोग कूद पढ़ते हैं। ऐसे विचारकों को "सुधारवादी" जैसी उपाधियों से अलंकरित किया जाता है। जिस तरह आस्था के मामले में आमतौर पर तर्क को तरजीह नहीं दी जाती है, वैसे ही इस क्षेत्र में भी सिक्के के केवल एक पहलू को देख कर ही धारणा बना ली जाती है। धर्म के अंधविश्वासी समर्थकों की तरह ही धर्म के खिलाफ सोच रखने वालो के अंदर भी यही धारणा घर कर लेती हैं कि "उनकी सोच ही सत्य है"। इसलिए ऐसे लोग धामिर्क पक्ष में तर्क देने वालों की बात को कुतर्क का दर्जा देकर नकार देते है। अक्सर धार्मिक नियमों के खिलाफ बनी धारणा के मुकाबले कोई और बात सोचना गवारा नहीं किया जाता है। अगर कोई किसी ऐसे विचार अथवा सिद्धांत के खिलाफ तर्कसंगत बात करता भी है तो उसे "दकियानूसी" जैसे उच्चारणों से पुकारा जाता है। धार्मिक कुरीतियों के खिलाफ कार्य करना तो समझ में आता है, लेकिन अच्छी बातों के खिलाफ भी आवाज़ उठाना समझ से परे है। हालांकि निजी जीवन में यह तथाकथित नास्तिक स्वयं भी अनेकों धार्मिक कर्मकाण्डों में लिप्त दिखाई देंगे, लेकिन सार्वजनिक जीवन में सेकुलर बनने की कोशिश हृदय में बैठी आस्था की भावना को ज़बरदस्ती दबा देती है। अक्सर ऐसे लोग धर्म के मुकाबले विज्ञान को तरजीह देते हुए 'ईश्वर के दिखाई ना देने' अथवा 'ईश्वर को किसने बनाया' जैसी बातों पर धर्म का माखौल उड़ते नज़र आते हैं, लेकिन तर्क से निकले प्रश्नों का उत्तर स्वयं उनके पास भी नहीं होता है। यह लोग धर्म पर उत्तर ना होने का तो आरोप लगाते हैं लेकिन स्वयं उत्तर ना होने को भविष्य में होने वाली खोज की संभावना का बहाना देकर टाल देते हैं। या फिर ऐसे कमज़ोर उत्तर देते हैं जिनको कोई भी स्वस्थ मस्तिष्क कुबूल नहीं कर सकता है। इंसानी तर्को पर खुद तो हमेशा पूरा नहीं उतरते हैं लेकिन चाहते हैं कि धार्मिक नियम पूरे उतरें। हालांकि विज्ञान और धर्म एक दूसरे के पूरक है, लेकिन हमेशा धर्म को विज्ञान विरोधी घोषित किया जाता है ताकि विज्ञान को पसंद करने वाले लोग नास्तिक बन सकें। यह लोग विज्ञान को अंतिम सत्य मानते हैं और इसी सोच के कारणवश धर्म को महत्त्वहीन करार दे देते हैं। हालांकि विज्ञान को कभी भी अंतिम सत्य नहीं कहा जा सकता है, अनेकों ऐसे उदाहरण हैं जिनको विज्ञान ने पहले नकारा लेकिन बात में मान लिया। क्योंकि विज्ञान की मान्यताएं खोज और अनुमानों पर आधारित ही होती हैं, इसलिए हर नई खोज के बाद पुरानी मान्यता समाप्त हो जाती है तथा अनुमानों के गलत पाए जाने पर नए अनुमान लगाए जाते हैं। अर्थात अगर किसी एक नियम पर आज सारे वैज्ञानिक एकमत हैं तो यह ज़रूरी नहीं कि कल भी एकमत होंगे। क्या उस ज्ञान को पूरा कहा जा सकता है जिसकी स्वयं की मान्यताएं कुछ समय के उपरांत बदल जाती हो? यह बात इस ओर इशारा करती है कि कहीं ना कहीं कोई पूर्ण ज्ञान अवश्य है और वही धर्म है।
2018/04/21 17:15:43
http://www.premras.com/2010_07_01_archive.html
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ब्रिटेन : महंगाई ने तोड़ी कमर, गर्मी ने छुड़वाए पसीने - britain inflation broke the waist the heat got rid of the sweat-mobile punjabkesari.in Tuesday, Jun 21, 2022 - 06:02 AM (IST) ब्रिटेन इस वक्त महंगाई और गर्मी से त्रस्त है। दोनों का पारा दिन-ब-दिन चढ़ता जा रहा है। पिछले 40 वर्ष के रिकॉर्ड तोड़ते हुए महंगाई ने इन्फ्लेशन (मुद्रास्फीति) की दर 9 प्रतिशत तक पहुंचा दी है और गर्मी से तापमान 34 सैंटीग्रेड को छू गया है। इन्फ्लेशन अभी और बढ़ेगी, अगले महीने 11 प्रतिशत तक। गर्मी की गर्मी आने वाले कई दिनों तक यूं ही जारी रहेगी। जनता इन दोनों बातों से परेशान है क्योंकि महंगाई ने जनसाधारण की कमर तोड़ दी है और गर्मी ने पसीने छुड़वा दिए हैं। यहां के लोग इतनी गर्मी के आदी नहीं हैं। दिनचर्या की हर गतिविधि, हर पहलू पर दोनों का प्रभाव बड़ा गहरा है। खाद्य पदार्थ, बिजली, गैस, पैट्रोल-डीजल, यातायात, इत्यादि किसी भी वस्तु का नाम लीजिए, कीमतें हैं कि आसमान को छू रही हैं। आज कोई चीज किसी दुकान या स्टोर से लेकर आइए, कल वही वस्तु उसी जगह से खरीदने जाएं तो दाम बढ़े हुए होते हैं। तापमान का चढऩा-उतरना तो खैर कुदरत के हाथ है, परन्तु कीमतों के यूं उछलने, छलकने पर किसी का कोई नियंत्रण न होना जनता के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन रहा है। रोष-आक्रोश, प्रदर्शन और हड़तालें : रोष है, आक्रोश है, प्रदर्शन हो रहे हैं, हड़तालों की तैयारी है। शनिवार 18 जून को देश की सबसे बड़ी मजदूर जत्थेबंदी ट्रेड यूनियन कांग्रेस के आह्वान पर बढ़ती कीमतों के विरुद्ध लन्दन में एक प्रदर्शन किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में लोगों ने भाग लिया। महंगाई पर शीघ्र प्रभावी उपायों की मांग की गई और रोजमर्र्रा के बढ़ते खर्चों के अनुरूप वेतन बढ़ाए जाने की आवाज उठाई गई। बढ़ी हुई महंगाई के मुताबिक कर्मचारियों के वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर इस सप्ताह देशव्यापी रेल हड़ताल हो रही है। 21, 23 और 25 जून, तीनों दिन रेलगाडिय़ों का आना-जाना बिल्कुल ठप्प रहेगा। यह एक बहुत बड़ी हड़ताल होगी, जिससे जनजीवन बहुत बुरी तरह प्रभावित होगा। रोजाना 25-30 लाख लोग रेल द्वारा यात्रा करते हैं। रेल हड़ताल से कितनी असुविधा होगी, इसका अनुमान लगाया जा सकता है। मांगें पूरी न होने पर रेल कर्मचारी संगठनों द्वारा रेल हड़तालों का सिलसिला जारी रखने की चेतावनी दी गई है। बढ़ती मुश्किलें : यदि कहीं जाना आवश्यक ही है तो रेल हड़ताल से उत्पन्न कठिनाई से निपटने के लिए अपनी कार या टैक्सी का प्रयोग किया जा सकता है, लेकिन यह भी इतना आसान कहां? कार के लिए पैट्रोल की प्रति लीटर कीमत 200 रुपए हो चुकी है। पैट्रोल की बढ़ती कीमतों के दृष्टिगत सरकार ने लोगों को परामर्श दिया था कि वे यातायात की सरकारी सुविधाओं, बसों, रेलगाडिय़ों द्वारा यात्रा करें। इतना महंगा पैट्रोल खरीदना मुश्किल हो रहा है और अब ऊपर से रेलगाडिय़ों की यह हड़ताल। टैक्सी के किराए बहुत महंगे हो गए हैं। जनसाधारण की मुश्किलें बढ़ रही हैं। गर्मियां हैं। 'हॉलीडे' पर जाना यहां के लोगों की एक ऐसी परंपरा है, जिससे छुटकारा पा सकना मानो अपने-आप को बहुत बड़ी सजा देना है। कुछ भी हो, 'हॉलीडे' पर जरूर जाना है, उधार उठा कर या जिस किसी भी साधन से हो, गर्मी की छुट्टियां बिताने कहीं न कहीं, किसी न किसी पर्यटन स्थल, किसी सागर-तट पर जाए बिना चैन कहां। इन दिनों छोटे-बड़े हवाई अड्डे 'हॉलीडे मेकर्स' से भरे पड़े हैं। इतनी बड़ी संख्या में पर्यटकों से निपटने के लिए पर्याप्त स्टाफ जुटा पाना हवाई अड्डों के लिए मुश्किल हो रहा है। अधिकतर लोग ब्रिटेन के निकटवर्ती यूरोपीय देशों में जाने को बेताब हैं। विचित्र स्थिति : यह एक बड़ी विचित्र स्थिति है। एक तरफ तो सैर-सपाटे पर जाने को बेताब जमघट, दूसरी तरफ बढ़ती कीमतों, महंगाई से पीड़ित और प्रयाप्त जीवन-साधनों से वंचित अपार जनसाधारण, जिनके लिए भोजन सामग्री, खाने-पीने का सामान खरीद पाना एक बहुत बड़ी समस्या बन चुका है। यद्यपि इस देश में ऐसी व्यवस्था है कि मुश्किल भले ही कितनी बड़ी क्यों न हो, सरकार द्वारा उसकी सहायता करने के साधन मौजूद हैं और साधनों की कमी की वजह से कोई भूखा भी मर सकता है, ऐसी कल्पना स्वीकार्य नहीं। फिर भी ऐसा हो रहा है। स्वयं एक सरकारी संस्था फूड स्टैंडड्स एजैंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जिन लोगों को एक वक्त की रोटी नहीं मिल रही या सरकारी लंगरों से जो लोग भोजन लेते हैं, उन लोगों की संख्या पिछले वर्ष से चिंताजनक हद तक बढ़ गई है। इस संस्था ने अपने एक सर्वे में कहा है कि आने वाले 3 वर्षों में खाद्य सामग्री की कीमतें तीन-चौथाई आबादी (76 प्रतिशत) के लिए एक बहुत बड़ी समस्या बनने वाली हैं। इस संस्था का कहना है कि खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल आम लोग सावधानी और सत्कार से नहीं करते। भारी मात्रा में अन्न बेकार फैंक दिया जाता है। यदि सावधानी बरती जाए तो प्रतिवर्ष लगभग 2,00,000 टन अन्न बचाया जा सकता है, जो जरूरतमंद लोगों के काम आ सकता है।-लंदन से कृष्ण भाटिया
2022/07/03 00:04:42
https://m.punjabkesari.in/blogs/news/britain-inflation-broke-the-waist-the-heat-got-rid-of-the-sweat-1622551
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शिवपुरी। शिवपुरी शहर में जगह-जगह आईपीएल सट्टा चल रहा है। लोग प्रसारित होने वाले मैचों पर सट्टा लगा रहे हैं और इसकी खबर पुलिस को नहीं है। प्रसारित होने वाले मैचों पर रोजाना लाखों रुपए का सट्टा लगाया जा रहा है और मैच के भाव तय किए जा रहे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शहर के ठकुरपुरा क्षेत्र, कलाबार बाग, मैच चौराहा, दर्पण कॉलोनी, बछौरा आदि क्षेत्रों में आईपीएल सट्टे का कारोबार फल-फूल रहा है। यहां लोग आए दिन लाखों रुपए का सट्टा आने वाले मैचों पर लगा रहे हैं। ताज्जुब की बात तो यह है कि मैच शाम को प्रसारित किया जाता है और दिन में ही मैच के भाव तय होना शुरू हो जाते हैं। मामले में पुलिस से कार्रवाई की मांग की है।
OSCAR-2019
वासना कुतिया खुद को बकवास करने के लिए नहीं जानती थी, और एक दुर्गन्ध से खुद को संतुष्ट करने के बारे में सोचा। वह खुद को मुश्किल से चोदता है और अपनी बालों वाली चूत को कैमरे पर दिखाता है।
2022-12-09T16:55:01Z
https://indonesiaporn.info/hi/video/malaziyka-trahnula-sebya-dezodorantom/
OSCAR-2301
Home मध्यप्रदेश भोपाल उच्च शिक्षा विभाग में थोकबंद तबादले, देखिये सूची भोपाल। मध्य प्रदेश में तबादलों का दौर जारी है| राज्य शासन ने उच्च शिक्षा विभाग में तबादले किये हैं| विभाग ने प्राचार्य, प्राध्यापकों, सह प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापकों के तबादले किये हैं| शनिवार को उच्च शिक्षा विभाग ने तबादला आदेश जारी किये हैं|
2021/08/02 03:44:59
https://mpbreakingnews.in/madhya-pradesh/bhopal/bulk-transfer-in-higher-education-department-see-list-44962/
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कर्मचारी नेताओं ने किया 16-17 को हड़ताल का ऐलान - employees have announced 16 17 strike कर्मचारी नेताओं ने किया 16-17 को हड़ताल का ऐलान Updated: 03 Oct, 2018 10:26 AM पंचकूला(धरणी): एस्मा लगे होने के बाद भी हड़ताल पर जाने वाले कर्मचारियों पर सरकार ने कड़ी कार्रवाई की थी। प्रदेश में एस्मा लागू है और इसी बीच कर्मचारी नेताओं ने 16 व 17 अक्तूबर को हड़ताल का ऐलान कर दिया है। कर्मचारी नेताओ ने चेतावनी दी है कि हड़ताल के दौरान सरकार अगर 700 रूट परमिट और कर्मचारियों के सस्पैंशन के फैसले पर अटल रहती है तो 2 दिन की हड़ताल को अनिश्चितकालीन तक ले जाया जाएगा। आल हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन के जनरल सैक्रेटरी बलवान सिंह दोदवा ने कहा कि हड़ताल से पहले 6 अक्तूबर को परिवहन मंत्री के पानीपत स्थित आवास का घेराव किया जाएगा। बलवान सिंह ने दावा किया है कि इस बार सभी कर्मचारी इस हड़ताल में शामिल होंगे।
2019/04/26 08:39:24
https://haryana.punjabkesari.in/haryana/news/employees-have-announced-16-17-strike-883049
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*रामायण- संदर्शन: अक्तूबर 2008: आलेख - २ : ढोल गँवार सूद्र पसु नारी। सकल ताड़ना के अधिकारी।। अक्तूबर 2008: आलेख - २ : ढोल गँवार सूद्र पसु नारी। सकल ताड़ना के अधिकारी।। ढोल गँवार सूद्र पसु नारी। तुलसी-कृत 'रामचरितमानस' में प्रसंगवश कतिपय कथोपकथनों पर जब तब शंकाएँ और विवाद उठते रहे हैं। कभी-कभी विवादों को तूल देकर धार्मिक आस्थाओं को चोट पहुँचाने तथा रचनाकार के विवेक व विश्वसनीयता पर भी उँगली उठाने का काम भी किया जाता है। मानस के सुन्दरकाण्ड में राम व सिंधु के संवाद के अंतर्गत प्रयुक्त चौपाई ''ढोल गँवार सूद्र पसु नारी/सकल ताड़ना के अधिकारी।।'' पर विवाद इसका एक उदाहरण है। कहा जाता है कि नारी को ताड़ना का अधिकारी बता कर गोस्वामी जी ने समस्त नारी जाति का अपमान किया है। ऐसी शंका और विवाद चौपाई के अर्थ का अनर्थ करने तथा उसके निहितार्थ को सही परिप्रेक्ष्य में न समझ पाने के कारण पैदा हुआ है। वास्तव में इस चौपाई द्वारा ताड़ना के अधिकारी पाँच नहीं केवल तीन ही बताए गए हैं - प्रस्तुत चौपाई के द्वारा ये तीन ही ताड़ना के अधिकारी बताए गए हैं। शेष दो शब्द 'गँवार' और 'पसु' का प्रयोग चौपाई में शूद्र और नारी के विशेषण के रूप में किया गया है। यहाँ 'ताड़ना' शब्द पर भी ध्यान देना होगा। शब्द -कोश में ताड़ना का अर्थ मारना- पीटना ही नहीं 'डाँटना-डपटना' भी है। अस्तु 'गँवार-सूद्र' या 'पसु-नारी' को डाँट-डपट कर सुधारने का सुझाव देकर तुलसीदास जी ने कोई अन्याय नहीं किया। विस्तृत परिप्रेक्ष्य में विचार करने पर स्पष्ट हो जाता है कि गोस्वामी जी ने नारी को सदैव आदर व सम्मान ही दिया है। यथा ''अनुज-वधू भगिनी सुत-नारी। सुनु सठ कन्या सम ये चारी।।'' इसी प्रकार हनुमान जी को सागर बीच जब सुरसा उदरस्थ करने पर अड़ गई, तब भी उसे माता कहकर ही संबोधित किया गया है यथा - तब तव वदन पैठिहउँ आई। सत्य कहउँ मोहि जान दे माई। श्रीराम और शबरी के प्रसंग में शूद्र और नारी दोनों के प्रति जिस ममता, प्रेम व सम्मान का वर्णन है उससे स्पष्ट हो जाता है कि रचनाकार पर नारी या शूद्र को अपमानित करने का आरोप निराधार और अन्यायपूर्ण है।¨ -- सत्य नारायण शर्मा [ शूद्र और स्त्री को एक साँस में ढोल आदि के साथ रखने और ताडन का पात्र बताने वाली चौपाई की अनेक प्रकार से व्याख्याएं हो चुकी हैं। ''जड़'' जलधि के इस कथन का स्रोत गर्ग-संहिता आदि में पहले से उपलब्ध है. -- ''ताडनं मार्दवं यान्ति, शूद्राः पटहः स्त्रियः'' इसे उद्धृत करते हुए ,संभवतः, बाबा तुलसी के मन में उन संहिताओं की जड़ता पर व्यंग्य का भाव भी रहा हो जिन्होंने स्वयं बाबा को भी खूब सताया था. साथ ही तत्कालीन परिस्थितियों में बाबा के अपने अंतर्विरोधों से भी आँख नहीं फेरी जा सकती. सन्दर्भ-च्युत करके इस चौपाई के आधार पर जिसने भी जब भी तुलसी बाबा को स्त्री-विरोधी माना है, या शूद्र-शत्रु घोषित किया है ,उनके प्रति अन्याय ही किया है और अपनी संकुचित दृष्टि का प्रमाण दिया है. इसीलिये अनेक सहृदय जन इस चौपाई की अलग-अलग व्याख्या करते दिखाई देते हैं, जो स्वागतेय ही है --सं. ] अमित अग्रवाल Wednesday, October 22, 2008 12:12:00 AM रामचरितमानस की विवादित चौपाई पर अत्यन्त सुंदर व्याख्या है| हालाँकि मुझे इस पर कोई ख़ास आपत्ति नहीं रही है, क्योंकि मेरा मानना है की ये देश-काल और वातावरण के हिसाब से ली जानी चाहिए| किंतु जब आपने व्याख्या दी ही है तो मैं बाल की खाल निकालने कि कोशिश कर रहा हूँ| कृपया ये बताईये कि गोस्वामी जी ने पशु-नारी ही क्यों कहा? पशु-मानव क्यों नहीं? पशुवत आचरण करने वाले पुरूष के लिए क्या कोई दंड का प्रावधान नहीं था?? पश्चलेख: पुनः स्पष्ट करना चाहूँगा कि मुझे इस चौपाई पर कोई आपत्ति नहीं थी और ना है, इसका अर्थ स्त्रियों का अपमान करना नहीं है| ये बस देशकाल और वातावरण के सन्दर्भ में लिखी गई है| ऋषभ Wednesday, October 22, 2008 12:47:00 AM आदरणीय अमित अग्रवाल जी, धन्यवाद् कि आप हमारे यहाँ पधारे और टिप्पणी दी. जब संदर्भित चौपाई से न आपको शिकायत है, न हमें. तब भला बाल की और खाल क्या निकालें ! सत्य नारायण जी ने जो अर्थ निकाला है, हम तो इसे भी बचपन से सुनते आए हैं. फिर भी, सम्पादकीय मत उनके आलेख के अंत में कोष्ठक में दिया गया है. अब और ''का करि तरक बढ़ावहु साखा ''. संपर्क बना रहे. > ऋ. GS Bisht Wednesday, October 29, 2008 12:22:00 PM आप ने बड़ी सफाई से चौपाई के तात्पर्य को बदल कर दोषमुक्त करने का प्रयाश जरूर किया है परन्तु आप इस बात से इंकार नही कर सकते कि नारी के साथ आदि काल से ही पक्षपात होता रहा है . jitu bhaiya Sunday, April 05, 2015 12:09:00 AM मैं तो कहता हूँ तिलक तराजू और तलवार इनको मारो जूते चार Dinesh Yadav Saturday, September 03, 2016 3:01:00 PM mujhe n choupai se koi dikkt h n uske arth se.agar baat istry ki h to wo hamesa pujniya h aur rahegi,magar kon se istry jisme naariytwa ho.purush bhi wahi aadar ka patra h jo maryadit ho,anyatha bali prasang me bhagwan ne kaha h "anuj badhu,bhagini sut nari.......aage poori choupai aap sab jante h,ase purush ko marne se koi pap nahi lagta.to isse spast h ki aadarniya tulsidas ji ne nari aur purush me koi bhed nahi kiya h.use hi dandit karne ko btaya h jo apni maryadaon se hat gya h aur isme bina kisi pachhpat ke kisi ko dikkt nahi honi chahiye.darsal me ye samjhta hu ki jis prakar ek docter hi,beemari ke baare me jaan sakta h kiyoki usne is sambandh me padai ki h,ek engineer hi apne field ke baare me achhi tarah samjh sakta h.isi tarah dharmik grantho aur bhakti kaal ke kaviyon ko samjhane ke liye hame dharmik hona hoga..aur dharmik hone ka arth kripya sirf pooja path se mat leejiyega iska arth bahut bistrit h kabhi fir charcha hogi.kahne ka arth ye h ki in sab grantho ko samjh ne ke liye hamare pass uchit yogita honi chahiye aur wo h iswar ke prit sachchi bhkti bhawana.iske bina kuchh bhi samjh pana sambhaw nahi h. aur uske liye sirf ye choupai paryapt h BIN SATSANG VIVEK N HOEE,AUR RAM KRIPA BIN SULABH N SOEE. ME KOI BIDWAN NAHI HU AGAR MUJH SE YA MERI BAAT SE KISI KO KOI DIKKT HO GAYEE HO TO ME CHHAMA PRARTHI HU AASHA H MUJHE NIRBUDHI SAMAJH KAR AAP CHHAMA KAR DEGE.
2018/07/19 04:11:21
http://sandarshan.blogspot.com/2008/10/2008_21.html?showComment=1472895430195
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car may 2020 sales: Hyundai, Maruti Suzuki, कार बिक्री, मारूति, ह्यूंडई, लॉकडाउन maruti and hyundai sold more than 31000 cars in lockdown too लॉकडाउन में भी Maruti और Hyundai ने बेचीं 31,000 से ज्यादा कारें Shishir Chaurasia | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated: 01 Jun 2020, 02:10:00 PM मोटर वाहन बनाने वाली देश की शीर्ष दो कंपनी Maruti Suzuki और Hyundai ने बीते मई के दौरान 31,122 कारें बेच दी। हालांकि इनमें से कुछ कारें निर्यात की गई हैं। लेकिन यह महत्वपूर्ण है ​कि मई के दौरान देश भर में लॉकडाउन होने के बावजूद इतनी कारें बिक गईं। लॉकडाउन में भी बिकीं 31,000 से ज्यादा कारें बीते मई में Maruti ने बेची 18539 कारें इसी महीने Hyundai ने भी बेची 12583 कारें बीते मई में Maruti ने विदेशी बाजारों में 4651 कारें बेचीं इस महीने Hyundai ने 5700 कारें निर्यात की कोरोनावायरस की वजह से देश भर में हुए लॉकडाउन के बीच देश में कार बनाने वाली दो शीर्ष कंपनियों ने बीते मई में ही 31,000 से भी ज्यादा कारें बेच दीं। हालांकि इन दोनों ने 10,000 से ज्यादा कारें विदेशी बाजारों में बेची हैं। मारूति के सभी प्लांटों में काम शुरू मारूति ने कहा है कि उसने लॉकडाउन के बाद सरकार के नियमों एवं दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन करते हुए 12 मई से मानेसर कारखाने में और 18 मई से गुड़गांव संयंत्र में विनिर्माण कार्य शुरू कर दिया। इसके अलावा इसके गुजरात प्लांट में भी बीते 25 मई से उत्पादन शुरू हो गया है। देश से सबसे ज्यादा कार निर्यात करने वाली कंपनी Hyundai मोटर्स इंडिया लिमिटेड की तरफ से मिली जानकारी के अनुसार बीते मई में कंपनी ने कुल 12583 कारेंं बेची। इस दौरान घरेलू बाजार में 6883 कारें जबकि विदेशी बाजार में 5700 कारें बेची गईं। अडाणी पोर्ट ने डिबेंचर के जरिए 100 करोड़ रुपये जुटाए अगला लेख ह्यूंडई लॉकडाउन मारूति कार बिक्री Maruti Suzuki Hyundai car may 2020 sales News News in Hindi Latest News Headlines बिज़नस न्यूज़ Samachar
2020/08/14 12:10:49
https://navbharattimes.indiatimes.com/business/business-news/maruti-and-hyundai-sold-more-than-31000-cars-in-lockdown-too/articleshow/76132805.cms
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Coronavirus WHO Warns Against Use Of Ivermectin Meds In Treating Covid-19 - कोविड-19 के इलाज में Ivermectin दवा के इस्तेमाल को लेकर WHO ने दी फिर चेतावनी | India News In Hindi होमदेशकोविड-19 के इलाज में Ivermectin दवा के इस्तेमाल को लेकर WHO ने दी फिर चेतावनी विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक बार फिर कोविड-19 मरीजों के इलाज में इस्तेमाल की जा रही दवाई- Ivermectin - के इस्तेमाल को लेकर चेतावनी दी है. आइवरमेक्टिन पैरासिटिक संक्रमण में खाई जाने वाली दवाई है. इसका इस्तेमाल कोविड मरीजों के इलाज में हो रहा है. Edited by तूलिका कुशवाहा, (एजेंसी के इनपुट के साथ), Updated: 11 मई, 2021 1:57 PM गोवा ने Ivermectin को 18 से ऊपर के कोविड मरीजों के इलाज में इस्तेमाल की मंजूरी दी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मंगलवार को एक बार फिर कोविड-19 मरीजों के इलाज में इस्तेमाल की जा रही दवाई- Ivermectin - के इस्तेमाल को लेकर चेतावनी दी है. आइवरमेक्टिन पैरासिटिक संक्रमण में खाई जाने वाली दवाई है. इसका इस्तेमाल कोविड मरीजों के इलाज में हो रहा है. WHO की मुख्य वैज्ञानिक डॉक्टर सौम्या स्वामीनाथन ने एक ट्वीट कर कहा कि 'किसी भी नई बीमारी के लिए इस्तेमाल हो रही दवाइयों की सुरक्षा और प्रभावकारिता जरूरी होती है. WHO क्लीनिकल ट्रायल के इतर कोविड के इलाज में आइवरमेक्टिन के इस्तेमाल के खिलाफ है.' भारत में 70 दिनों में कोरोना वायरस के सबसे कम नए मामले, 4 हजार से ज्यादा की मौत जर्मन हेल्थकेयर एंड लाइफ साइंसेज़ Merck की ओर से भी इसे लेकर चेतावनी जारी की गई है. डॉक्टर स्वामीनाथन ने इसे भी अपने ट्वीट के साथ साझा किया. मर्क ने कहा है कि उसके वैज्ञानिक लगातार कोविड के इलाज में आइवरमेक्टिन के इस्तेमाल से आ रही स्टडीज़ का अध्ययन कर रहे हैं. एजेंसी ने कहा, '....हमारे विश्लेषण में पता चला है कि- प्री-क्लिनिकल स्टडीज़ में कोविड के इलाज में इसकी प्रभाविता को लेकर वैज्ञानिक आधार, कोई क्लीनिकल सुरक्षा या प्रभावकारिता नहीं है. वहीं स्टडीज़ में सुरक्षा पर भी बहुत आशाजनक डेटा नहीं है.' कोविड ड्रग्स और मेडिकल उपकरणों पर टैक्स में छूट, लेकिन संकट के वक्त में टैक्स लगा ही क्यों रही है सरकार? यह दूसरी बार है जब WHO ने आइवरमेक्टिन ने पिछले दो महीनों में इसके इस्तेमाल को लेकर चेतावनी दी है. मार्च में संगठन ने कहा था कि 'इसकी बहुत कम निश्चितता है कि इस दवा से बीमारी से मौत या फिर अस्पतालों में भर्ती होने की दर में कमी आती हो. कोविड-19 के इलाज में इसके एक्शन को लेकर हमें बहुत भरोसेमंद सबूत नहीं मिला है.' डॉक्टर स्वामीनाथन का यह ट्वीट तब आया है, जब एक दिन पहले ही गोवा ने आइवरमेक्टिन को कोविड के इलाज में सभी वयस्कों को दी जाने वाली दवा के रूप में मंजूरी दी है. गोवा के स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे ने बताया कि यूनाइटेड किंगडम, इटली, स्पेन और जापान के एक्सपर्ट पैनल्स की ओर से 'मृत्यु दर में कमी, रिकवरी टाइम में तेजी और संक्रमण से मुक्ति के अहम प्रमाण दिखने के बाद' मंजूरी मिली है, जिसके बाद इसे इलाज में हरी झंडी दिखाई दी गई है. गोवा में 18 साल से ऊपर के सभी मरीजों को पांच दिन तक रोज 12mg की आइवरमेक्टिन दिया जाएगा.
2021/06/12 13:56:33
https://ndtv.in/india-news/coronavirus-who-warns-against-use-of-ivermectin-meds-in-treating-covid-19-2439403?stky
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वायु प्रदूषण को लेकर दिल्ली में Odd-Even लागू, जाने क्या तय किए गए दिशा निर्देश 5AC423FB902F99F7B04A6C0E44CE75FA वायु प्रदूषण को लेकर दिल्ली में Odd-Even लागू, जाने क्या तय किए गए दिशा निर्देश, नियम तोड़ने पर… November 4, 2019- 1:08 PM 16 Views नई दिल्ली: Odd Even Scheme: पिछली बार की तरह दिल्ली सरकार ने इस बार फिर वायु प्रदूषण को देखते हुए अलर्ट जारी किया। जी हां आपको बतादें कि, दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने रविवार को लोगों से अपील की Odd-Even योजना आज सुबह आठ बजे से शुरू हो गई। दिल्ली की सड़कों पर पहले दिन केवल ऐसे निजी वाहन चल सकेंगे जिनके नंबर प्लेट का अंतिम अंक सम संख्या हो बतादें की केजरीवाल ने रविवार को लोगों को Odd-Even नियम का पालन करने की नसीहत दी। साथ ही उन्होंने कहा की, पाबंदी के चलते किसी को बेकार में सरकारी मशीनरी से कोई परेशानी ना हो। यह योजना 15 नवम्बर तक सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक लागू की गई है। इस योजना के तहत 4, 6, 8, 12 और 14 नवंबर को सड़कों पर विषम पंजीकरण संख्या (1, 3, 5, 7, 9) से समाप्त होने वाले चार पहिया निजी वाहनों को सड़कों पर निकलने की अनुमति नहीं दी जाएगी. इसी तरह, सम संख्या (0, 2, 4, 6, 8) के साथ समाप्त होने वाले रजिस्ट्रेशन नंबर वाली गाड़ियों को 5, 7, 9, 11, 13 और 15 नवंबर को सड़कों पर चलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ये हैं ऑड-ईवन (Odd Even) के नियम व दिशा-निर्देश उत्तराखंड- असिस्टेंट प्रोफेसर पर लगा यौन उत्पीड़न का आरोप, जांच के आदेश – ऑड-ईवन के दौरान इस बार दिल्ली में निजी CNG गाड़ियों को छूट नहीं मिलेगी.http://www.http://upkiran.org delhi car delhi ncr odd even delhi odd even Delhi Odd Even 2019 delhi odd even notification 2019 Even Odd In Delhi 2019 even odd in delhi Odd even scheme date Odd even Odd Even 2019 Odd Even Delhi odd even delhi timings Odd Even In Delhi Odd Even Rule odd even rule date odd even rule in delhi odd even scheme Odd Even Scheme 2019 Odd even scheme rules Odd even scheme time odd even timing Odd Even Today when odd even start in delhi 2019-11-04
2019/12/09 04:26:02
https://upkiran.org/odd-even-applicable-in-delhi-on-air-pollution-what-are-the-guidelines-broken-rules/
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बाइडेन का 'अमेरिका फर्स्ट'! - Naya India बतौर राष्ट्रपति जो बाइडेन के पहले 100 दिन में जिस एक बात के साफ संकेत मिले वह यह है कि इस दौर की विदेश नीति में भी अमेरिका पूर्व राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के कार्यकाल में अपनाई गई 'अमेरिका फर्स्ट' की नीति पर चल रहा है। गौरतलब है। चीन और ईरान के मामले में अमेरिका का सख्त रुख कायम है। चीन के खिलाफ वैश्विक गोलबंदी करने को बाइडेन प्रशासन अपनी प्राथमिकता में सबसे ऊपर रखा है। उधर ईरान के साथ परमाणु डील में तुरंत लौटने का वादा बाइडेन ने तोड़ दिया है। इसके विपरीत उसने इसके लिए नई शर्तें लगा दी हैं। शरणार्थियों को अमेरिका आने देने की नीति के मामले भी बाइडेन प्रशासन का रुख ट्रंप जैसा ही सख्त है। ट्रंप ने एक साल में सिर्फ 15 हजार शरणार्थियों को आने देने की नीति तय की थी। इसे बढ़ाने के अपने वादे को पलटे हुए अब बाइडेन ने कह दिया है कि ये सीमा जारी रहेगी। कोरोना वायरस की वैक्सीन दुनिया को उपलब्ध कराने में बाइडेन प्रशासन ने कोई रुचि नहीं ली है। इस मामले में भी उसकी नीति अमेरिका फर्स्ट है। वैक्सीन के मामले में बाइडेन ने संदेश देने कोशिश की है कि उनके प्रशासन के लिए अमेरिकी नागरिकों के हित ही सर्वोच्च हैं। अफगानिस्तान से सभी अमेरिकी फौजियों की वापसी के लिए ट्रंप प्रशासन ने तालिबान से समझौता किया था। बाइडेन को भी इस बात की चिंता नहीं है कि अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद क्या होगा। क्या वहां तालिबान का शासन लौट नहीं आएगा? इसकी फिक्र ना करते हुए बाइडेन ने अगले 11 सितंबर तक सभी अमेरिकी फौजियों की वापसी का एलान कर दिया गया है। बाइडेन के दौर में भी अमेरिका ने सीरिया पर बमबारी की। यह भी एक तरह से ट्रंप की नीति को जारी रखना ही है। सऊदी अरब के प्रति अमेरिका का नरम रुख बना हुआ है। ये बात पत्रकार अदनान खशोगी की हत्या के मामले में जाहिर हुई। बाइडेन प्रशासन ने ये माना कि इस हत्या में सऊदी युवराज सलमान का हाथ है। लेकिन बात जब सलमान पर प्रतिबंध लगाने की आई, तो बाइडेन प्रशासन ने सामरिक गणना को तरजीह दी। कोई पाबंदी नहीं लगाई गी। यानी अमेरिका फर्स्ट की नीति जारी रही। तो अमेरिका लौट आया है, जैसे शब्द बोले जरूर गए हैं। इनका कोई व्यावहारिक मतलब कम से कम अब तक सामने नहीं आया है।
2021/05/13 00:20:52
https://www.nayaindia.com/main-stories/biden-america-first-policy-148959.html
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भोजपुरी स्टार पवन सिंह का रोमांटिक गाना 'ए हो करेजा' रिलीज होते ही हुआ वायरल, देखिए VIDEO – सच्चा दोस्त न्यूज़ May 3, 2021 Ae Ho Kareja bhojpuri song, Ae Ho Kareja song, bawal bhojpuri, bhojpuri film, bhojpuri gaana, bhojpuri gana, bhojpuri ke gane, bhojpuri music, bhojpuri song, bhojpuri song 2021, bhojpuri song list, bhojpuri songs, bhojpuri songs 2021, pawan ka gana, pawan putra, pawan putra film, pawan singh, pawan singh film, pawan singh ka gana, pawan singh ke gana, pawan singh latest song, pawan singh new songs, pawan singh song, pawan singh song Ae Ho Kareja, pawan singh songs, pawan singh songs list, pawan singh superhit song, viral bhojpuri songs पवन सिंह का नया गाना यूट्यूब पर धूम मचा रहा है. पवन सिंह (Pawan Singh) की सुपरहिट भोजपुरी (Bhojpuri) फिल्म 'पवन पुत्र' (Pawan Putr) का फुल वीडियो सॉन्ग 'ए हो करेजा' (Ae Ho Kareja) वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड्स भोजपुरी के ऑफिशियल यूट्यूब चैनल पर रिलीज किया गया है. देखें Video. Pawan​ Singh | Ae Ho Kareja | Ritu Pandey | Pawan Putra | Bhojpuri Full Video Superhit Song 2021 | भोजपुरी (Bhojpuri) सिनेमा के पावर स्टार पवन सिंह (Power Star Pawan Singh) की सुपरहिट भोजपुरी फिल्म 'पवन पुत्र' (Pawan Putr) का फुल वीडियो सॉन्ग 'ए हो करेजा' (Ae Ho Kareja) वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड्स भोजपुरी के ऑफिशियल यूट्यूब चैनल पर रिलीज किया गया है. इस गाने में पवन सिंह (Pawan Singh) का रोमांटिक मिजाज बहुत अच्छा लग रहा है. इस सॉन्ग को पवन सिंह ने अपनी सुरीली आवाज़ दी है. जिसे काफी पसंद किया जा रहा है. पवन सिंह का कमाल डांस बहुत ही प्यारा लग रहा है. उनके साथ इस गाने में रितु पांडेय (Ritu Pandey) की केमिस्ट्री अच्छी दिख रही है. गाने के लोकेशन काफी बेहतरीन हैं. कॉस्ट्यूम बहुत आकर्षक हैं. आपको बता दें कि पवन सिंह की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म को सिनेमाघरों में काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिला था और फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता का परचम लहराया था. पवन सिंह के अभिनय, फाइट और डांस खूब पसंद किया गया. उन्हें कई शेड्स में परदे पर देखकर दर्शकों का खूब मनोरंजन हुआ है. फिल्म के सभी गाने बहुत ही मधुर बनाये गए हैं, जो संगीत प्रेमियों को खूब पसंद आए हैं. उल्लेखनीय है कि फिल्म पवन पुत्र का निर्माण वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड्स के ओनर रत्नाकर कुमार द्वारा किया गया है. फिल्म में केंद्रीय भूमिका में पवन सिंह हैं. साथ में काजल राघवानी, प्रियंका पंडित भी हैं. नवोदित अभिनेत्री प्रियंका रेवड़ी (Priyanka Rewri) और रितु पांडेय को भोजपुरी सिनेमा के रुपहले पर्दे पर लॉन्च किया गया है. वर्ल्डवाइड चैनल व जितेंद्र गुलाटी प्रस्तुत फिल्म 'पवन पुत्र' का निर्माण वर्ल्डवाइड चैनल के बैनर तले किया गया है. फिल्म 'पवन पुत्र' के निर्माता रत्नाकर कुमार और निर्देशक फिरोज खान हैं. लेखक राकेश त्रिपाठी, संगीतकार छोटे बाबा (बसही) हैं. कार्यकारी निर्माता इमरोज अख्तर (मुन्ना) हैं. कस्टयूम बादशाह खान का है. छायांकन इमरान आलम, मारधाड़ श्री श्रेष्ठा, नृत्य कानू मुखर्जी, कला शेरा का है. मुख्य कलाकार पवन सिंह, मीर सरवर, प्रियंका पंडित, प्रियंका रेवड़ी, रितु पांडेय, बृजेश त्रिपाठी, उमेश सिंह, अमित शुक्ला, अनूप अरोरा, संजय वर्मा, अयाज खान, राकेश त्रिपाठी, अमोल चौगले, उजैर खान, निशा झा, जया पांडेय, प्रेम दूबे, अजय अय्यर, संजीव मिश्रा हैं.
2021/07/31 09:34:13
https://sachchadost.in/archives/343
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यह मॉनीटर को अधिग्रहित करता है, इसलिए यदि इसे सिंक्रनाइज़ संदर्भ से कहा जाता है, तो कोई अन्य थ्रेड उस ब्लॉक या विधि में प्रवेश नहीं कर सकता है। यह वर्तमान थ्रेड का इंतजार तब तक करता है जब तक कि कोई अन्य थ्रेड अधिसूचना () विधि या अधिसूचना सभी () विधि को इस ऑब्जेक्ट के लिए आमंत्रित नहीं करता इसे सिंक्रनाइज़ संदर्भ से ब्लॉक या विधि से कहा जाना चाहिए। इसका मतलब है कि प्रतीक्षा () विधि कहने से पहले, वर्तमान थ्रेड उस ऑब्जेक्ट पर लॉक होना चाहिए। यह उस ऑब्जेक्ट पर लॉक जारी करता है जिस पर उसे कॉल किया जाता है और प्रतीक्षा सूची में जोड़ा जाता है, इसलिए कोई अन्य थ्रेड ऑब्जेक्ट पर लॉक प्राप्त कर सकता है। अभी तक एक महत्वपूर्ण अंतर का उल्लेख नहीं किया गया है कि थ्रेड सोते समय ताले को रिहा नहीं किया जाता है, जबकि प्रतीक्षा करने वाले ऑब्जेक्ट पर लॉक जारी करता है wait() को कॉल किया जाता है। आप सही हैं - नींद () धागे को "नींद" का कारण बनती है और सीपीयू बंद हो जाएगा और अन्य धागे को संसाधित करेगा (अन्यथा संदर्भ स्विचिंग के रूप में जाना जाता है) wheras मुझे विश्वास है कि सीपीयू वर्तमान थ्रेड को प्रोसेसिंग करता है। हमारे पास दोनों हैं क्योंकि यद्यपि आप इसका उपयोग नहीं कर रहे हैं, जबकि अन्य लोगों को सीपीयू का उपयोग करने के लिए समझदार लग सकता है, वास्तव में संदर्भ स्विचिंग के लिए एक ओवरहेड है - नींद के लिए कितनी देर तक निर्भर करता है, यह CPU चक्रों में अधिक महंगा हो सकता है धागे को स्विच करने के लिए बस अपने धागे को कुछ एमएस के लिए कुछ भी नहीं करना है। इसके अलावा - सामान्य रूप से संदर्भ स्विचिंग को नियंत्रित करना संभव नहीं है - प्रतीक्षा करें ओएस के दौरान (और लंबे समय तक प्रतीक्षा करेगा) अन्य धागे को संसाधित करने का चयन करें। एक wait थ्रेड द्वारा "जागृत" हो सकती है जिसे मॉनीटर पर notify किया जाता है, जिस पर इंतजार किया जा रहा है जबकि sleep नहीं हो सकती है। मॉनिटर ऑब्जेक्ट पर synchronized गए ब्लॉक में भी एक wait (और notify ) होना चाहिए जबकि sleep नहीं है: इस बिंदु पर वर्तमान में निष्पादित थ्रेड मॉनीटर की प्रतीक्षा करता है और रिलीज़ करता है । एक और धागा कर सकता है
2021-02-28T04:34:28Z
https://lyftpromocode.space/kat-2/page-149645.html
OSCAR-2109
बॉक्स ऑफ़िस पर हो रही इस वैडिंग का हिस्सा आप बन सकते हैं – aawaz.com 'वीरे दी वेडिंग' कालिंदी और उसकी गर्लफ़्रेंड की कहानी है। कालिंदी ( करीना कपूर) की ऋषभ (सुमित व्यास) के साथ शादी में उसके बचपन की तीनों दोस्त शामिल होती है और सारे तामझाम का हिस्सा बनती है, जो किसी शादी में होते हैं। फिल्म की कहानी आज की यंग जनरेशन को पसंद आएगी। कालिंदी और उसकी गर्ल गैंग इस फिल्म में करीना को लेने के लिए फिल्म की प्रोड्यूसर रिया कपूर ने एक साल इंतजार किया फिर में कालिंदी यानी करीना कपूर की कहानी मुख्य है, जिसके साथ साथ और धीरे-धीरे चारों सहेलियों की कहानी दर्शकों के सामने आती हैं। कालिंदी को ऋषभ से प्यार हो जाता है, वो शादी करती है, उस रिश्ते को पूरी तरह निभाने की कोशिश करती है। अवनी (सोनम कपूर) की ज़िंदगी में अभी तक ऐसा कोई नहीं आया, जिसे वह अपना जीवन साथी बना सके। साक्षी (स्वरा भास्कर) किसी रिश्ते में विश्वास नहीं रखती, वह रिश्तों के दायरे में बंधना भी नहीं चाहती। वहीं शिखा तलसानिया एक विदेशी से शादी कर चुकी है और उसका एक बच्चा भी है। फिल्म का अभिनय फिल्म का निर्माण सोनम की बहन रिया और एकता कपूर ने किया है। शशांक घोष निर्देशित इस फिल्म में चारों हीरोइनों की केमिस्ट्री बेहतरीन है। अपनी ही ज़रूरतों में उलझी और उसका जवाब ढूंढती करीना का किरदार बेहतरीन है, करीना का अभिनय भी लाजवाब है। अपने जीवन साथी की तलाश में लगी सोनम भी इस किरदार के लिए एकदम फिट है। बड़े बाप की बिगड़ी औलाद के किरदार में स्वरा भास्कर ने अपने रोल में जान डाल दी है। यह शिखा तलसानिया की पहली फिल्म है, लेकिन उन्होंने बता दिया कि वह इस इंडस्ट्री में टिकने के लिए है। फिल्म का संगीत और प्लस प्वाईंट फिल्म का 'तारीफ़ा' गीत काफी समय से सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है। फिल्म में चारों सहेलियों के बीच की बेबाक बातचीत ही फिल्म के बेस्ट मोमेंट्स हैं। शादी से पहले सेक्स, शादी के बाद सेक्स, सेक्स की ज़रुरत, रिश्ते और रिश्तेदारी जैसे कई मुद्दों पर लड़कियों की उलझन को खूबसूरती से पेश किया गया है। फिल्म में बहुत से लाइट मोमेंट्स भी है, तो कही कही फिल्म की कहानी आपको इमोश्नल भी कर देती है। फिल्म के हर सीन में चारों सहेलियां आपको पिक्चर परफेक्ट ही दिखेंगी। गर्ल गैंग की यह कहानी आपको ब्वॉय गैंग पर बनी फिल्म 'दिल चाहता है' कि याद दिला देगी। फिल्म का म्यूज़िक पहले से ही काफी हिट है। गीत 'तारीफ़ा' और 'भांगड़ा' फिल्म के बेस्ट गीत हैं। फिल्म में कुछ कमियां भी है। फिल्म की कहानी पर थोड़ा और काम किया जाता , और किरदार की बारीकियों पर और ध्यान दिया जाता, तो फिल्म और ज़्यादा खूबसूरत होती। दोस्ती, रिश्ते, रिश्तेदारों, सेक्स, इच्छाओं और लड़कियों की ज़रूरतों को कई जगह बेबाकी से, तो कई जगह हल्के फुल्के ढंग से दिखाती इस फिल्म को देखकर, आपके पैसे ज़रुर वसूल हो जाएंगे। हॉट फ्राइडे टॉक्स इस फिल्म को 3 स्टार देता हैं।
2020/09/29 11:54:06
https://www.aawaz.com/read/entertainment-read/veere-di-wedding-review/
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मुख्यमंत्री का पुतला दहन के दाैारन भाजपा का 'फाइटिंग शो', सांसद के खिलाफ नारेबाजी और आपस में घुसेबाजी – R 24 News मुख्यमंत्री का पुतला दहन के दाैारन भाजपा का 'फाइटिंग शो', सांसद के खिलाफ नारेबाजी और आपस में घुसेबाजी R24News : बोकारो जिला भाजपा का अंतर्कलह खुलकर सामने आ गया। आलम यह है कि भाजपा के नेता और कार्यकर्ता बीच सड़क पर भी फाइटिंग शो करने से बाज नहीं आ रहे हैं। उन्हें जरा भी इस बात की चिंता नहीं है कि अनुशासित कही जाने वाली पार्टी के बाबत लोक क्या करेंगे? वे बीच सड़क पर अपने सांसद पीएन सिंह और विधायक विरंची नारायण के खिलाफ नारेबाजी और गाली-गलाैज कर रहे हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन के दौरान ही हरला मंडल के पूर्व उपाध्यक्ष शैलेंद्र कुमार ने सोमवार को खुलेआम बोकारो बिरसा चौक पर खड़े होकर धनबाद के सांसद पीएन सिंह और बोकारो के विधायक विरंची नारायण के खिलाफ मुर्दाबाद जैसे नारे लगाए। धनबाद संसदीय क्षेत्र के तहत ही बोकारो भी आता है। सांसद और विधायक के खिलाफ नारेबाजी को भी जब भाजपा नेताओं ने अनसुना कर दिया तो वह गाली-गलौज पर उतर गया। पुतला दहन के बाद भड़के पार्टी नेताओं ने उसपर हमला बोल दिया। जवाब में उसने भी घुसेबाजी की। दोनों तरफ से हाथ और लात चले। इस लड़ाई में शैलेंद्र कमजोर पड़ गया। उसकी जमकर पिटाई हुई। पूरी घटना कैमरे में कैद होती देख भाजपाई मौके से हट गए हैं। सांसद प्रतिनिधि विद्या सागर सिंह का कहना है कि विधानसभा चुनाव में शैलेंद्र कुमार की गतिविधि पार्टी विरोधी थी। उसे पार्टी से निकाल दिया गया था। वह कांग्रेस नेताओं के बहकावे में आकर ऐसा कर रहा था।
2022/06/30 21:55:59
http://r24newsjharkhand.com/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%A4%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A4%B9%E0%A4%A8/
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केक के नाम पे नशीले पदार्थ बेचने वाले गिरफ्तार HomeStateMumbaiकेक के नाम पे नशीले पदार्थ बेचने वाले गिरफ्तार महाराष्ट्र मुंबई : ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स कंट्रोल (NCB) ने मलाड में केक और पेस्ट्री से ड्रग्स बेचने वाली एक बेकरी पर छापा मारा। इस दौरान तीन तस्करों को गिरफ्तार किया गया। 12 जून को एनसीबी ने एक बेकरी पर छापा मारा जिसमें एक केक बनाने वाला गांजा का इस्तेमाल कर रहा था और एक महिला समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया। इसी बेकरी के युवक सचिन तुपे को एनसीबी ने रविवार को मरोल इलाके से गिरफ्तार किया था। उसके पास से एलएसडी के 11 टुकड़े मिले थे। इसी मामले में एक अन्य व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। एनसीबी के अधिकारियों ने मलाड में बेकरी से 160 ग्राम गांजा जब्त किया था। पता चला कि केक को ड्रग्स से भरकर हाई प्रोफाइल एरिया में बेचा जा रहा था। इसी दौरान, एनसीबी ने रविवार को दो और अहम कार्रवाई की। गोरेगांव पश्चिम से अफसर खान नाम के एक रिक्शा चालक को गिरफ्तार किया गया है। उसके पास से 20 ग्राम कोकीन बरामद हुई थी। अधिकारी मीरा रोड इलाके में एक अफ्रीकी नागरिक को कोकीन पहुंचाने के लिए जा रहा था। यह अफ्रीकी नागरिक हर सुबह हाईब्रो उपभोक्ताओं से कोकीन की मांग को रिकॉर्ड करता है और तदनुसार आपूर्ति करता है। एक अन्य ऑपरेशन में माहिम के पास से 60 ग्राम मोफेडरेन और 360 ग्राम गांजा बरामद किया गया। मामले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया था।
2021/07/31 05:30:13
https://thefaceofindia.in/state/arrested-for-selling-narcotics-in-the-name-of-cake/
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आज भी मनी महाशिवरात्रि, मेले में पहुंचे हजारों » Narmadanchal.com | Itarsi | Hoshangabad | Harda | Betul | Seoni | Sohagpur | Pipariya आज भी मनी महाशिवरात्रि, मेले में पहुंचे हजारों इटारसी। दो तिथियों की वजह से श्रद्धालु महाशिवरात्रि का पर्व दो दिन मना रहे हैं। मंगलवार को कई भोले भक्तों ने सुबह से शिवालयों में पहुंचकर भगवान भोले शंकर की आराधना की। सुबह से जलाभिषेक का शुरू सिलसिला देर रात तक जारी रहा। दिन भर जयकारों के बीच घंटे घडिय़ाल की आवाज गूंजती रही। वहीं लोगों ने व्रत रखकर भगवान शिव की आराधना की। कई भक्तों ने आज बुधवार को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया और अनेक मंदिरों में आज शिव अभिषेक हुए और खीर का प्रसाद वितरित किया। कुछेक जगह भंडारे का आयोजन भी किया गया। तिलक सिंदूर में आज दूसरे दिन भी मेला लगा रहा। आज भी पहले दिन की तरह ही भीड़ रही। तिलक सिंदूर मेले में मौजूद सरकारी अमले ने आज भी उतनी ही मुस्तैदी से ड्यूटी निभाई, जितना कल निभाई थी। कल की तरह आज भी दोपहर दो बजे के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण तिलक सिंदूर पहुंचे और शाम अंधेरा होने तक भीड़ रही। इस तरह से एक अनुमान के अनुसार करीब सवा लाख श्रद्धालुओं ने तिलकसिंदूर पहुंचकर भगवान के दर्शन किये हैं। कल से आज तक भक्ति महाशिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। 13 जनवरी को पूरे दिन त्रयोदशी तिथि रही और मध्यरात्रि में 11 बजकर 35 मिनट से चतुर्दशी तिथि लगी है। 14 फरवरी को पूरे दिन और रात 12 बजकर 47 मिनट तक चतुर्दशी तिथि है। ऐसे में लोगों ने दोनों दिन भगवान शिव की भक्ति में गुजारे। स्थानीय स्तर पर ब्राह्मणों ने भी अपने जजमानों को स्थिति स्पष्ट करने के बाद त्योहार मनाना भक्तों पर ही छोड़ दिया था। इस तरह मंगलवार और बुधवार को भी महाशिवरात्रि पर्व मना और श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर भगवान की आराधना की और पूरे दिन व्रत रखा। शाम को पूजा अर्चना के बाद व्रत संपन्न किया।
2019/03/21 02:06:23
https://narmadanchal.com/?p=33511
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आपको तो पता ही है कि हम बचपन से ही बहार जाना शुरू करते है ओर वह पहली जगह होती है स्कूल। जँहा हमें हमारे परिवार से दूर ओर अकेले रहना पड़ता है। हम कभी भी हमारे स्कूल और कक्षा में अकेले रहना पसंद नहीं करते।
2021-03-05T20:19:41Z
https://www.newsplus24x7.com/neha-kakars-new-video-viral
OSCAR-2109
कश्मीर : शोपियां मुठभेड़ में 2 आतंकवादी ढेर Hindi News Jago Bhart - Hindi News, Latest News in Hindi, Breaking News, हिन्दी समाचार Jago Bhart Sujeet Maurya Nov 10 2020, 6:50am कश्मीर : शोपियां मुठभेड़ में 2 आतंकवादी ढेर Hindi News Jago Bhart श्रीनगर। दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले में आतंकवादियों और सुरक्षाबलों के बीच जारी मुठभेड़ में दो आतंकवादी मारे गए हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। पुलिस ने कहा, कुटपोरा में मारे गए दोनों आतंकवादियों की फिलहाल शिनाख्त नहीं हो पाई है। ऑपरेशन जारी है। आतंकवादियों की मौजूदगी की विशेष सूचना के आधार पर सुरक्षाबलों ने इलाके का घेराव कर तलाशी लेनी शुरू कर दी। जैसे ही सुरक्षाबल आंतकियों के ठिकाने के करीब पहुंचे आतंकियों ने हमला कर दिया जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई जिसमें दो आतंकी मारे गए।
2021/06/13 08:14:35
https://jagobhart.com/hindi-news-kashmir-2-terrorists-killed-in-shopian-encounter/
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Home/Lifestyle/नोरा फतेही ब्रालेट और जांघ-स्लिट लहंगे में रॉयल्टी से कम नहीं हैं, सभी तस्वीरें और वीडियो नोरा फतेही ब्रालेट और जांघ-स्लिट लहंगे में अबू जानी और संदीप खोसला की फैशन फिल्म के लिए पहले की तरह फैशन का जश्न मनाती हैं। वह अपने खास आइवरी आउटफिट में रॉयल्टी लग रही हैं। डांसर से अभिनेता बनी नोरा फतेही ने हाल ही में मशहूर डिजाइनरों अबू जानी और संदीप खोसला के साथ मिलकर अपनी पहली फैशन फिल्म इनटू द लाइट का हिस्सा बनाया। स्टार ने हाल ही में इंस्टाग्राम पर शूट से बीटीएस (पर्दे के पीछे) वीडियो और तस्वीरें साझा कीं। और यह कहना कि वह एक सपने की तरह दिखती है, एक ख़ामोशी होगी। फिल्म, अबू जानी संदीप खोसला के पतन और जुनून के लिए एक श्रद्धांजलि, नोरा को एक बीस्पोक ब्रैलेट और लहंगा सेट में एक केप और एक जीवन से बड़ा हेडपीस के साथ दिखाया गया है। नोरा अपने आकर्षक कूटर सेट में रॉयल्टी से कम नहीं लग रही थीं। अबू जानी और संदीप खोसला ने नोरा की विशेषता वाली अपनी फिल्म को साझा करने के लिए इंस्टाग्राम पर भी लिया, और इसे कैप्शन दिया, "एंटर द ड्रीम। रात, हमारे दिलों की तरह, एक युवा और जंगली चीज है। 'इनटू द लाइट – अबू जानी की एक फिल्म संदीप खोसला और जोसेफ राधिक जो पहले कभी नहीं की तरह वस्त्र का जश्न मनाते हैं।" अबू जानी और संदीप खोसला की फैशन फिल्म के लिए नोरा फतेही। _norafatehi_ (@norafatehi_fanzz) द्वारा साझा की गई एक पोस्ट यह भी पढ़ें: सफेद कट-आउट ड्रेस में नोरा फतेही का धमाकेदार लुक मुंबई में बदल गया, सभी तस्वीरें नोरा ने हाफ स्लीव की शीयर आइवरी ब्रालेट पहनी थी, जिसमें एक पट्टी बॉर्डर से अलंकृत एक प्लंजिंग नेकलाइन और ब्लाउज के ठीक बीच में एक मोती से सजी हुई लटकन थी। चिकनकारी, सीक्विन्ड गोटा पट्टी और शीशे के काम से सजा हुआ ब्रालेट भी आया। 29 वर्षीय अभिनेता ने आधुनिक मिलन-जातीय स्कर्ट के साथ ब्रैलेट पहना था जिसमें एक रिस्क जांघ-उच्च लेग-बारिंग स्लिट था। लहंगे को चिकनकारी, मिरर और सीक्विन्ड पैटर्न के साथ डिजाइन किया गया था। नोरा ने एक केप की तरह अपने कंधों पर लिपटा एक सरासर अलंकृत दुपट्टा के साथ पहनावा पूरा किया। उन्होंने अपने लुक को एम्बेलिश्ड पीप-टो पंप्स, एक विंटेज स्टोन-सजे हुए चोकर नेकलेस और मैचिंग इयररिंग्स के साथ ग्लैमरस किया। नोरा ने अपने बालों को साइड-पार्टेड और थोड़े गुदगुदे लो बन में बांधा। मेटैलिक न्यूड पिंक लिप शेड, शिमरी आई शैडो, मस्कारा से लदी लैशेज, ऑन-फ्लेक आइब्रो, ग्लोइंग स्किन और शार्प कॉन्टूर ने नोरा की ग्लैम को पूरा किया।
2021/10/21 07:43:02
https://dalynews.in/lifestyle/26/09/2021/%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%AB%E0%A4%A4%E0%A5%87%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%9F-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%82/
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बीकानेर में शासन-प्रशासन पर भारी पड़ रहे खनन माफिया - OmExpress बीकानेर में शासन-प्रशासन पर भारी पड़ रहे खनन माफिया बीकानेर। जिले में जहां देखो वहां अवैध जिप्सम-बजरी खनन और ओवरलोड ढुलाई का नजारा देखनें को मिल रही है। शासन-प्रशासन पर भारी पड़ रहे खनन माफियाओं ने बीकानेर को हॉट स्पॉट बना लिया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शहर के आस पास इलाकों के अलावा ंदतौर,बल्लर,गजनेर,नाल,नोखा,बज्जू,लूणकरणसर समेत अनेक इलाकों में बड़े पैमाने पर जिप्सम-बजरी का अवैध खनन और ओवरलोडिंग का खेल चल रहा है। इस मामले में खान के लीजधारक भी पीछे नहीं। कानून और नियम कायदे को ताक पर रखकर खनन स्थल कागजों में कहीं ओर वास्तविक खनन कहीं ओर किया जा रहा है। नाल इलाके के कई लीज धारक तो कुछ लीज धारक तो निर्धारित क्षेत्र से दुगुने दायरें में बजरी का खनन कर रहे है,दायरे में आने पर चरागाहों को भी नहीं बख्शा जा रहा। वहीं बल्लर, बज्जू, और दंतौर इलाके में सत्तारूढ कांग्र्रेस के नेता खनन माफिया बन कर जिप्सम का अवैध दोहन करने में जुटे है। इन माफियाओं में कांग्रेसी धत्तरवाल बंधूओं का नाम उजागर होने के बावजूद खान एवं खनन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी आंखे मूंदे बैठे है। इतना ही नहीं जिप्मस-बजरी से भरे ट्रकों के धर्मकांटा वजन में धांधली करने का भी लीजधारकों ने तोड़ निकाल लिया। इस तरह ओवरलोड वाहनों में जिप्सम बजरी का परिवहन करवाकर जबरदस्त चांदी कूटी जा रही है। इस मामले में राजस्व, पुलिस और खनन विभाग पंगु नजर आ रहे है। इनकी पंगुता पर आमजन कई बार सवालिया निशान खड़े करता है, लेकिन स्थि ति ढाक के तीन पात। खबर है कि बीकानेर मुख्यालय अवैध जिप्सम और बजरी खनन के गोरखधंधे में अनाप-शनाप पैसा कूटने की फिराक में सीकर, नागौर, डीडवाना जिले सहित कई क्षेत्र से आए खनन माफियाओं की शरण स्थली बन चुका है। इन पर प्रशासन का न तो अंकुश है ओर ना ही खनन विभाग कोई बड़ी कार्रवाई करने में असक्षम नजर आता है। खनन माफियाओं का खुफिया तंत्र पुख्ता सूत्रों की माने तो मुख्य चोराहों पर चाय की थडिय़ों पर अवैध जिप्सम और बजरी खनन माफियाओं के गुर्गों ने अपना केन्द्र बना रखा है। इस अवैध बजरी खनन में रसूखदारों के कई बड़े गिरोह सक्रिय है। इन गिरोह के सदस्यों ने स्थानीय गुर्गों को तुच्छ स्वार्थ के चलते सूचना तंत्र के रूप में काम लिया जाता है। इनका खुफिया तंत्र पुलिस, खनन और वन सहित अन्य सरकारी सूचनाओं से भी सुपर फास्ट है। यही वजह है कि कोई बड़ी कार्रवाई होने से पहले ही इन माफियाओं को पूर्व सूचना मिल जाती है और पकड़े जाते है छुट-फुट अवैध बजरी खनन करने वाले। ऐसे में सरकारी अमले की कार्यशैली पर भी कई सवालिया निशान खड़े होते हैं।
2020/09/29 03:21:24
http://omexpress.in/%E0%A4%AC%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A4%A8-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A4%A8/
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गर्लफ्रेंड की नाराजगी दूर करने के लिए लव-गुरु की इन ट्रिक्स को अपनाइए….. – Daily Tufaan Gaurav Singh 3 years ago 1.1k Views 'कोई हसीना जब रूठ जाती है तो और भी हसीन हो जाती हैं' यह बात तो बिलकुल सही है लेकिन सच में गर्लफ्रेंड रूठ जाये तो लडको के पसीने छुट जाते हैं| अकसर लडकियों का छोटी-छोटी बातों पर मूंड खराब हो जाता है, जिससे लडको को ये टेंशन हो जाती है कि गर्लफ्रेंड को कैसे मनाया जाये? लडकियों की आदत होती है छोटी-छोटी बातों पर नाराज हो जाना, लेकिन उनका दिल बहुत सॉफ्ट होता हैं और उन्हें मनाना भी आसान होता हैं| अगर लकड़े ये ट्रिक्स अपना ले तो लड़की जल्दी मान जायेंगी और बार-बार नाराज नहीं होगी| लड़की को भीड़-भाड से धूर कही शांत जगह ले जाए लडकियों को अपने बॉयफ्रेंड के साथ अकेले में समय बिताना बहुत अच्छा लगता हैं| उसको ऐसी जगह ले जाए जहा आप दोनों के अलावा कोई तीसरा ना हो| जितना आप अपनी गर्लफ्रेंड को समय देंगे उतने ही आपके रिश्ते मजबूत होंगे| गुदगुदी से लड़की का मूडफ्रेश करे अगर आप को अपनी गर्लफ्रेंड का मूंड ठीक करना है तो ये ट्रिक आपके बहुत काम कि है| लड़की के गुदगुदी करने से उनका गुस्सा शांत हो जाता है और चेहरे पर मुस्कान आ जाती हैं| बच्चों जैसी हरकत करे अगर आपकी गर्लफ्रेंड आपसे नाराज है और वो आपसे बात नहीं कर रही है, तो आप उनके सामने बच्चो जैसी हरकते करे| माना वो आप पे पहले चिलायेगी और आपको दूर होने को कहेगी लेकिन ऐसी हरकते उन्हें बहुत अच्छी लगती है और आखिर में वो मान जाती हैं| सरप्राइज लडकियों की कमजोरी होती है लडकियों को सरप्राइज से कुछ ज्यादा ही प्यार होता है| यह हर लड़की की खुवाहिश होती है की उसका पार्टनर उसे सरप्राइज दे| अपनी गर्लफ्रेंड को सरप्राइज देने से आप उनके दिल में अपने लिए एक अच्छी जगह बना सकते हैं| शॉपिंग करवाने में उनकी हेल्प करे शॉपिंग करने का शोक हर किसी को होता है, लेकिन लडकियों को इसका शोक कुछ ज्यादा ही होता हैं| अपने पार्टनर के साथ शॉपिंग करने से उन्हें स्पेशल फील होता है, इसे वो आपके ओर नजदीक आ जाती हैं| इस ट्रिक को अपनाने से पहले आप आपनी जेब को रुपयों से भर ले| उनके लिए खुद कुक्किंग करे अगर आप चाहते है की आपकी गर्लफ्रेंड आप से हमेशा खुश रहे तो आप उनकी पसंद का खाना बना कर उसे सरप्राइज दे सकते हैं| जी हां, लडकियों को वो लड़के बहुत अच्छे लगते है जो उनके लिए स्वादिस्ट खाना बनाते हो| उनकी हर बात ध्यान से सुने आपको हमेशा अपने पार्टनर की बात ध्यान से सुन्नी चाहिए और उन्हें कभी ये फील नहीं होना चाहिए कि आप उनकी बातों को इग्नोर कर रहे हो| लडकियों को केयर करने वाले पार्टनर बहुत अच्छे लगते है, जो उनकी परेशानियों को समजे और मुशकिल समय में उनका साथ दे| ऐसे करने से आपके पार्टनर को स्पेशल महसूस होगा| पिलो फाइट से उन्हें खुश करे आपने रोमांटिक मूवीज में देखा होगा की पार्टनर एक-दुसरे से पिलो फाइट करते है पर ये देखने में तो बहुत अजीब लगता है| लेकिन इस ट्रिक्स से आपके पार्टनर का बिगड़ा हुआ मूंड सही हो जाता हैं|
2019/12/06 19:11:26
http://www.dailytufaan.com/try-these-tips-of-love-guru-to-rescue-your-girlfriends-mood/
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दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड भर्ती DSSSB Bharti 2022, Apply For Recruitment of Group B and C and 168 Manager posts, Check full Notification Here DSSSB Bharti 2022: Check Full Detail about Eligibility, Salary, Admit Card, Exam Date, and Full Notification, Age Limit, Important Dates. DSSSB ग्रुप बी और सी पदों के लिए उम्मीदवारों की भर्ती करेगा। योग्य उम्मीदवार डीएसएसएसबी की आधिकारिक साइट dsssb.delhi.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। DSSSB Bharti 2022 Full Notification, Last Date, Eligibility, Last Date, Age Limit DSSSB Bharti 2022 Vacancy Details रिक्ति विवरण DSSSB Bharti 2022 Eligibility Details पात्रता मापदंड DSSSB Bharti 2022 Selection Procedure चयन प्रक्रिया DSSSB Bharti 2022 Application Fees आवेदन शुल्क दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड, DSSSB ने प्रबंधक Manager और अन्य पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। उम्मीदवार जो पदों के लिए आवेदन करना चाहते हैं, वे डीएसएसएसबी की आधिकारिक साइट dsssb.delhi.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 9 मई, 2022 है। पंजीकरण प्रक्रिया 20 अप्रैल, 2022 से शुरू होगी। यह भर्ती अभियान संगठन में 168 पदों को भरेगा। पात्रता, चयन प्रक्रिया और अन्य विवरणों के लिए नीचे पढ़ें। असिस्टेंट आर्काइविस्ट, ग्रेड- I: 6 पद मैनेजर Manager : 40 पद शिफ्ट इंचार्ज Shift Incharge : 8 पद प्रोटेक्शन ऑफिसर Protection Officer : 23 पद डिप्टी मैनेजर Deputy Manager : 3 पद पंप ड्राइवर / फिटर इलेक्ट्रिकल द्वितीय श्रेणी / इलेक्ट्रिक चालक द्वितीय श्रेणी / मोटरमैन / इलेक्ट्रिक मिस्त्री / एसबीओ: 68 पद फिल्टर सुपरवाइजर Filter Supervisor : 18 पद बैक्टीरियोलॉजिस्ट Bacteriologist : 2 पद उम्मीदवार जो पदों के लिए आवेदन करना चाहते हैं, वे देख सकते हैं विस्तृत अधिसूचना यहां उपलब्ध है शैक्षिक योग्यता और आयु सीमा के लिए। चयन वन टियर / टू टियर परीक्षा योजना और जहां कहीं लागू हो, स्किल टेस्ट के माध्यम से किया जाएगा। जो उम्मीदवार पदों के लिए आवेदन करना चाहते हैं उन्हें भुगतान करना होगा ₹100/- आवेदन शुल्क के रूप में। महिला उम्मीदवारों और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पीडब्ल्यूडी और भूतपूर्व सैनिक श्रेणी के उम्मीदवारों को आवेदन शुल्क का भुगतान करने से छूट दी गई है।
2022/05/18 19:55:03
https://govtkijobs.in/2022/04/dsssb-bharti-2022-gp-b-and-c-manager-post/
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लालू की जमानत पर सुनवाई आज, निकल सकते हैं जेल से बाहर – NEWSWING BiharBihar UpdatesCourt NewsDumkaJharkhandLead NewsNEWSRanchi चारा घोटाले से जुड़ा दुमका कोषागार का मामला Ranchi : बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के लिए आज का दिन अहम है. चारा घोटाला मामले में उनकी जमानत पर झारखंड हाई कोर्ट में आज (10 दिसंबर) सुनवाई होगी. दुमका कोषागार मामले में सजा की अवधि पूरी होने का हवाला देते हुए जमानत की मांग की गई है. यदि जमानत मिलती है तो वह जेल से बाहर आ सकते हैं. इस मामला की सुनवाई जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की अदालत में होनी है. मालूम हो कि इससे पूर्व तीन मामलों में उन्हें जमानत मिल चुकी है. सात साल की सुनाई गई है सजा लालू यादव को दुमका कोषागार मामले में सीबीआई कोर्ट ने 7 साल की सजा सुनाई है. लालू के वकील का कहना है कि वह 42 माह से ज्यादा समय जेल में बिता चके हैं. इधर, सीबीआई का कहना है कि लालू इस मामले में 34 माह ही जेल में रहे हैं. इसे भी पढ़ें : स्वच्छ भारत अभियान के तहत बना शौचालय धंसा, तीन बच्चे घायल, एक की हालत गंभीर लालू की तबीयत ठीक, जेल भेजा जाएः सीबीआई इस बीच सीबीआई की ओर से हाई कोर्ट में गुरुवार को एक पूरक शपथपत्र दाखिल किया गया है, जिसमें कहा गया है कि लालू प्रसाद की तबीयत स्थिर है और फोन प्रकरण में उनके खिलाफ पटना में प्राथमिकी भी दर्ज हो गई है. उन्होंने जेल मैन्युअल का उल्लंघन किया है. ऐसे में उन्हें रिम्स से बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा भेज देना चाहिए. पिछली सुनवाई के दौरान सीबीआई लालू के फोन प्रकरण का मुद्दा अदालत में उठा चुकी है. चाईबासा के दो व देवघर के एक मामले में मिल चुकी है जमानत बता दें कि लालू प्रसाद ने दुमका कोषागार मामले में सजा की आधी अवधि जेल में काटने, बढ़ती उम्र व बीमारियों का हवाला देते हुए जमानत की गुहार लगाई है. लालू के अधिवक्ता देवर्षि मंडल ने बताया कि दुमका कोषागार मामले में उन्होंने 42 माह 19 दिन जेल में बिताए हैं, जबकि सीबीआइ का दावा है कि दुमका वाले मामले में लालू प्रसाद सिर्फ 34 माह ही जेल में रहे हैं. मालूम हो कि लालू प्रसाद को कुल चार मामलों में सजा मिली है. इसमें से चाईबासा के दो और देवघर से जुड़े मामले में जमानत मिल चुकी है. अगर दुमका कोषागार वाले मामले में लालू प्रसाद को जमानत मिलती है तो वे जेल से बाहर निकल जाएंगे. इसे भी पढ़ें : लातेहार में मनरेगा योजनाओं की जांच करने पहुंची केंद्रीय टीम, ग्रामीण बोले- मजदूरी बढ़ाइये
2022/01/18 16:03:21
https://newswing.com/lalus-bail-hearing-today-can-be-released-out-of-jail/214109/
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फरीदाबाद: आज से हरियाणा में खुले स्कूल, देखे स्कूल का माहौल और छात्रों का जोश हरियाणा में आखिरकार स्कूलों में आफलाइन पढ़ाई का इंतजार खत्म हो गया है। आज मौजूदा शिक्षा सत्र में पहली बार सभी सरकारी और निजी स्कूलों में नौवीं से बारहवीं तक की कक्षाएं शुरू हो गईं हैं। सुबह साढ़े आठ से कक्षाएं शुरू हुईं और ये दोपहर साढे़ बारह बजे चलेंगी। इसके लिए गाइडलाइन्‍स जारी किए गए हैं। इस दौरान स्कूल में न बच्चों को लंच के लिए समय मिलेगा और न वे पानी पी ने के लिए बाहर जा सकेंगे। माता-पिता की लिखित अनुमति के बाद ही छात्रों को स्कूल में प्रवेश की अनुमति मिली है। अन्यथा वह पहले की तरह आनलाइन पढ़ाई जारी रख सकते हैं। वहीँ जब फरीदाबाद के स्कूलों का दौरा किया गया तो मालूम हुआ कि छात्रों में इतने दिन बाद स्कूल का अलग जोश दिखा और स्कूल परिसर में कोरोना एसओपी के अनुसार ही सरे इंतजाम किए गए। वहीँ छात्रों ने बताया कि स्कूल के दर्शन काफी लम्बे आरसे के बाद हुए अच्छा लग रहा है उम्मीद है कि हम ऐसे ही रोजाना स्कूल आए स्कूल में हमारा टेम्प्रेचर चेक हुआ हाथ को सेनीटाइज़ करके ही हमने आगे स्कूल परिसर में कदम रखा। वहीँ स्कूल के प्रधानाचार्य के अनुसार स्कूल का माहौल कोरोना महामारी से बचाव को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। जहां हर बच्चे को कोरोना से बचाव के नियमों का पालन करना होगा। ऐसे में स्कूल में आकर छात्र भी काफी उत्सुक नजर आ रही है। और साथ ही उन्होने सभी स्कूल प्रबंधकों से दरख्वास्त की कि वो सभी इस बात का विशेष ध्यान रखे कि फिर से स्कूल बंद करने की नौबत सामने न आए।
2021/12/01 06:01:41
https://www.khulikhabar.com/2021/07/blog-post_651.html
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ICC ने विराट कोहली को किया सलाम, शाहिद अफरीदी ने भी बताया महान | Shahid Afridi praises Virat Kohli, calls him 'great player', ICC also salutes | Hindi News, क्रिकेट विराट कोहली (बाएं) ने बुधवार को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में 72 रन बनाए. (फोटो: PTI) नई दिल्ली: विराट कोहली अपने करियर में जैसे-जैसे आगे बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे उनके मुरीद भी बढ़ रहं हैं. अब उनके मुरीदों में शाहिद अफरीदी (Shahid Afridi) का नाम भी जुड़ गया है. इस पाकिस्तानी दिग्गज ने विराट कोहली को महान खिलाड़ी करार दिया है. आईसीसी (ICC) ने भी कोहली को बधाई दी है. विराट कोहली दुनिया के एकमात्र क्रिकेटर हैं, जिनका औसत तीनों फॉर्मेट में 50 से अधिक है. मौजूदा समय में वनडे में उनका औसत 60.31, टेस्ट में 53.14 और टी20 क्रिकेट में 50.85 रन का है. भारतीय कप्तान विराट कोहली (Virat Kohli) ने बुधवार को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में 72 रन बनाए. वे अंत तक आउट नहीं हुए और टीम को जिताकर ही मैदान से बाहर आए. इस पारी के बाद उनका टी20 मैचों में औसत 50 से ऊपर पहुंच गया. विराट का वनडे और टेस्ट मैचों में भी 50 से अधिक औसत है. आईसीसी (ICC) ने विराट कोहली की इस पारी के दौरान ही ट्वीट कर उन्हें इस उपलब्धि के लिए बधाई दी. शाहिद अफरीदी ने भी ट्वीट किया. शाहिद अफरीदी ने लिखा, 'विराट कोहली आप महान खिलाड़ी हो. बधाई! ऐसे ही कामयाब होते रहो और दुनियाभर के क्रिकेटप्रेमियों का मनोरंजन करते रहो.' विराट कोहली ने इस मैच के दौरान दो विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किए. इत्तफाक से ये दोनों ही रिकॉर्ड पहले भारतीय उप कप्तान रोहित शर्मा (Rohit Sharma) के नाम थे. उन्होंने इस मैच में 72 रन की पारी खेलकर अपने कुल रनों की संख्या 2441 पहुंचा दी. इस तरह वे टी20 क्रिकेट में सबसे अधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी बन गए हैं. रोहित के नाम 2434 रन हैं. वे अब दूसरे नंबर पर हैं. विराट कोहली टी20 क्रिकेट में 50 रन से बड़ी पारी खेलने के मामले में भी पहले नंबर पर पहुंच गए हैं. उन्होंने 22वीं बार अर्धशतकीय पारी खेली. रोहित ने 21 बार 50 रन से बड़ी पारी खेली हैं. इनमें चार शतक और 17 अर्धशतक शामिल हैं. विराट कोहली को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दूसरे टी20 में मैन ऑफ द मैच चुना गया. उन्हें टी20 क्रिकेट में 11वीं बार यह अवॉर्ड मिला है. उनसे ज्यादा मैन ऑफ द अवॉर्ड सिर्फ मोहम्मद नबी (12) जीत सके हैं. विराट कोहली और शाहिद अफरीदी 11-11 अवॉर्ड के साथ संयुक्त रूप से दूसरे नंबर पर हैं.
2020/10/21 07:41:48
https://zeenews.india.com/hindi/sports/cricket/shahid-afridi-praises-virat-kohli-calls-him-great-player-icc-also-salutes/575454
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