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|---|---|---|---|---|
वित्त में, अंश अथवा शेयर का अर्थ किसी कम्पनी में भाग या हिस्सा होता है। एक कंपनी के कुल स्वामित्व को लाखों करोड़ों टुकड़ों में बाँट दिया जाता है। स्वामित्व का हर एक टुकड़ा एक शेयर होता है। जिसके पास ऐसे जितने ज्यादा टुकड़े, यानी जितने ज्यादा शेयर होंगे, कंपनी में उसकी हिस्सेदारी उतनी ही ज्यादा होगी। लोग इस हिस्सेदारी क... | अर्थशास्त्र | 4,000 | null | 91 |
== परिभाषा == कंपनी अधिनियम 2013, की धारा 2(84) के अनुसार - "अंश का आशय कंपनी की अंश-पूँजी के अंश से है और उसमें स्कन्ध को शामिल किया जाता है, जब तक कि स्कन्ध और अंश में स्पष्टतया या गर्भित रूप से अंतर न किया गया हो।" | अर्थशास्त्र | 4,001 | null | 47 |
== प्रकार == प्रायः शेयर दो प्रकार के होते हैं: साधारण और वरीय शेयर। | अर्थशास्त्र | 4,002 | null | 14 |
=== साधारण शेयर्स === साधारण शेयर (ऑर्डिनरी शेयर) किसी भी औद्योगिक उपक्रम में निवेशक की आंशिक हिस्सेदारी का प्रतिनिधित्व करते हैं। आम शेयरधारक ने जिस कंपनी में निवेश किया है उसके लाभ से डिविडेंड पाता है। यदि वो कंपनी किसी वजह से बंद हो रही है तो पहले सारे हिस्सेदार जैसे कि सरकार, कर्मचारी, कर्जदाता, प्रिफरेंशियल शेयरधा... | अर्थशास्त्र | 4,003 | null | 91 |
== पार वैल्यु == पार वैल्यू किसी शेयर का अनुमानित मान (National वैल्यू) होता है, यानी कि वो कीमत जो उसे जारी करने वाली कंपनी की बैलेंस शीट में दर्ज होती है। आमतौर पर कंपनियाँ १० या १०० रुपये की पार वैल्यू रखती है। लेकिन कंपनियाँ कोई भी पार वैल्यू तय कर सकती हैं लेकिन वह १० के गुणक या अंश में होनी चाहिए जैसे कि १३.५। कं... | अर्थशास्त्र | 4,004 | null | 230 |
== शेयर का मूल्य == इनीशियल पब्लिक ऑफर के मामले में कंपनियाँ निम्न तीन तरीकों में से किसी एक तरीके का प्रयोग करते हुए शेयर का मूल्य तय करती हैं: | अर्थशास्त्र | 4,005 | null | 30 |
=== तय कीमत विधि === यानि फिक्स्ड प्राइस मेथड के अनुसार जिस मूल्य पर शेयर ऑफर किए जाते हैं उसे कंपनी तय कर देती है। ये काम इश्यू खुलने से पहले ही कर लिया जाता है। शेयरों की मांग कितनी है इसका पता कंपनी को तभी हो पाता है जब इश्यू बंद हो जाता है। इस विधि से शेयर्स प्रीमियम पर भी सूचित किए जा सकते हैं। | अर्थशास्त्र | 4,006 | null | 67 |
=== बुक बिल्डिंग विधि === इस विधि में निवेशक को ऑफर किए शेयर का शुद्ध मूल्य का अनुमान नहीं हो पाता है। इसकी बजाय कंपनी शेयर के लिए सांकेतिक मूल्य रेंज तय करती है। निवेशक अपनी क्षमता के अनुसार अलग-अलग शेयरों के लिए बोली लगाते हैं। ये बोली तय मूल्य परास के भीतर की कुछ भी हो सकती है। शेयरों के लिए आई बोली की मात्रा को देख... | अर्थशास्त्र | 4,007 | null | 134 |
=== ग्रीनहाउस- ग्रीनसु विकल्प === प्रायः अधिकांश दातर अच्छी कंपनियों के आई॰पी॰ओ॰ तय सीमा से कई गुना अधिक बिकते हैं यानी ओवरसब्सक्राइब हो जाते हैं। ऐसे में कंपनी ग्रीनहाउस विकल्प का प्रयोग भी कर सकती है। इसके द्वारा कंपनी अतिरिक्त शेयर जारी कर सकती है ताकि वो निवेशकों की मांग को पूरा पाये। हालाँकि ओवरसब्सक्रिप्शन के अनु... | अर्थशास्त्र | 4,008 | null | 94 |
== शेयर, अंश या हिस्सा == व्यक्ति की चलसंपत्ति दो प्रकार की होती है - भोगाधीन वस्तु (Chose in possession) और वादप्राप्य स्ववस्तु (Chose in action)। भोगाधीन वस्तु के मायने हैं वह संपत्ति जो आपके वास्तविक व्यक्तिगत अधिकार में है लेकिन वादप्राप्य स्ववस्तु के मायने वह संपत्ति है जो आपके तात्कालिक अधिकार में नहीं है। उसपर आ... | अर्थशास्त्र | 4,009 | null | 506 |
== इन्हें भी देखें == भागीदार या साझीदार या अंशधारक | अर्थशास्त्र | 4,010 | null | 10 |
== बाहरी कड़ियाँ == कार्पोरेट कार्य मंत्रालय कंपनी अधिनियम 2013 | अर्थशास्त्र | 4,011 | null | 10 |
व्यवसाय में, अधिग्रहण यानि एक कंपनी (अधिग्रहणकर्ता या बोलीदाता) द्वारा दूसरे कंपनी का खरीदा जाना। यूके में, यह शब्द एक सार्वजनिक कंपनी के अधिग्रहण को संदर्भित करता है, जिसके शेयर किसी निजी कंपनी के अधिग्रहण के विपरीत, स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध होते हैं। उपार्जित कंपनी का प्रबंधन, प्रस्तावित अधिग्रहण से सहमत हो सकता ह... | अर्थशास्त्र | 4,012 | null | 112 |
=== अनुकूल === अनुकूल अधिग्रहण एक ऐसा अधिग्रहण है जिसे अर्जित कंपनी के प्रबंधन द्वारा अनुमोदित किया जाता है। इससे पहले कि बोलीधारक दूसरी कंपनी के लिए ऑफर करे, वह पहले कंपनी के निदेशक मंडल(बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स) को सूचित करता है। आदर्श रूप से, अगर बोर्ड को लगता है कि प्रस्ताव को स्वीकार करने से शेयरधारकों को बेहतर लाभ ह... | अर्थशास्त्र | 4,013 | null | 145 |
=== शत्रुतापूर्ण === शत्रुतापूर्ण अधिग्रहण, बोलीदाता को ऐसी लक्ष्य कंपनी को संभालने की अनुमति देता है जिसका प्रबंधन विलय या अधिग्रहण के लिए सहमत होने के लिए तैयार नहीं है। यदि किसी लक्षित कंपनी का बोर्ड प्रस्ताव को अस्वीकार कर देता है, और फिरभी यदि बोलीदाता उसका पीछा करना जारी रखे, या बोलीदाता प्रस्ताव देने के अपने दृढ... | अर्थशास्त्र | 4,014 | null | 205 |
=== रिवर्स === रिवर्स टेकओवर, अधिग्रहण का एक प्रकार है, जहां एक निजी कंपनी किसी सार्वजनिक कंपनी का अधिग्रहण करती है। यह आमतौर पर निजी कंपनी की जिम्मेदारी पर किया जाता है, जिसका उद्देश्य निजी कंपनी के लिए प्रभावी रूप से खुद को फ्लोट करना है, जबकि पारंपरिक आईपीओ में शामिल कुछ खर्चों और समय से बचा जाता है। | अर्थशास्त्र | 4,015 | null | 59 |
=== बैक-फ्लिप === बैकफ्लिप अधिग्रहण किसी भी प्रकार का अधिग्रहण है जिसमें अधिग्रहण करने वाली कंपनी खुद को खरीदी गई कंपनी की सहायक कंपनी में बदल देती है। इस प्रकार का अधिग्रहण तब हो सकता है जब कोई बड़ी लेकिन कम जानी-मानी कंपनी किसी बहुत ही प्रसिद्ध ब्रांड के साथ संघर्ष करने वाली कंपनी को खरीद ले। | अर्थशास्त्र | 4,016 | null | 57 |
== बाहरी कड़ियाँ == "Takeovers and Leveraged Buyouts". Concise Encyclopedia of Economics (1st)। (2002)। संपादक: David R. Henderson। Library of Economics and Liberty। अभिगमन तिथि: 27 फ़रवरी 2020 OCLC 317650570, 50016270 and 163149563 Acquisition Financing | अर्थशास्त्र | 4,017 | null | 35 |
अनर्जक ऋण (non-performing loan या NPL) वह ऋण है जो वापस नहीं आ पा रहा हो। | अर्थशास्त्र | 4,018 | null | 16 |
उत्पादक संसाधनों और उपभोक्ता वरीयताओं में अन्तर्राष्ट्रीय अन्तर और उन्हें प्रभावित करने वाले अंतरराष्ट्रीय संस्थान अन्तर्राष्ट्रीय अर्थशास्त्र (इन्टरनेशनल इकनॉमिक्स) के अध्ययन के विषय हैं। यह व्यापार, निवेश और प्रवास सहित विभिन्न देशों के निवासियों के बीच लेनदेन और बातचीत के पैटर्न और परिणामों की व्याख्या करना चाहता है... | अर्थशास्त्र | 4,019 | null | 141 |
आर्थिक आकड़ों के विश्लेषण के लिये गणित एवं सांख्यिकी की विधियों का अनुप्रयोग अर्थमिति (econometrics) कहलाता है। | अर्थशास्त्र | 4,020 | null | 17 |
== बाहरी कड़ियाँ == Econometric Links Econometric Society The Econometrics Journal MERLOT Learning materials in Econometrics (US-based catalogue of materials) Teaching Econometrics (Index by the Economics Network (UK)) Applied Econometric Association "The Art and Science of Cause and Effect": a slide show and tutorial ... | अर्थशास्त्र | 4,021 | null | 71 |
अर्थव्यवस्था (Economy) उत्पादन, वितरण एवम खपत की एक सामाजिक व्यवस्था है। यह किसी देश या क्षेत्र विशेष में अर्थशास्त्र का गतित चित्र है। यह चित्र किसी विशेष अवधि का होता है। उदाहरण के लिए अगर हम कहते हैं ' समसामयिक भारतीय अर्थव्यवस्था ' तो इसका तात्पर्य होता है। वर्तमान समय में भारत की सभी आर्थिक गतिविधियों का वर्णन। | अर्थशास्त्र | 4,022 | null | 58 |
== इतिहास == अर्थशास्त्र से व्यक्ति वस्तु का विनिमिय तरीके से उपयोग करता है सन्धि विच्छेद करने पर यह दो शब्दो से मिलने पर बनता है: अर्थ एवम व्यवस्था। अर्थ का तात्पर्य है मुद्रा अर्थात् धन और व्यवस्था का मतलब है एक स्थापित कार्यप्रणाली। इस शब्द का सबसे प्राचीन उल्लेख कौटिल्य द्वारा लिखित ग्रन्थ अर्थशास्त्र में मिलता ... | अर्थशास्त्र | 4,023 | null | 124 |
धन का सही रूप में निवेश करना या धन की व्यवस्था करना ही अर्थशास्त्र है अर्थशास्त्र की दो शाखाएं हैं वयष्टि अर्थशास्त्र औरसमष्टि अर्थशास्त्र है, व्यष्टि अर्थशास्त्र का अर्थ व्यष्टि अर्थशास्त्र अंग्रेजी भाषा के शब्द माइक्रो गिरी भाषा के शब्द माइक्रोस्केल हिंदी रूपांतरण है व्यष्टि से अभिप्राय है अत्यंत छोटी इकाई अर्थात् व्... | अर्थशास्त्र | 4,024 | null | 115 |
सामान्य अर्थों में बचत का अर्थ धन को संरक्षित करने यथा- बैंक में रखने, पेंशन फंड में निवेश करने इत्यादि से लगाया जाता है। लेकिन व्यापक अर्थ में 'बचत' शब्द खर्च घटाने, संसाधन बचाने जैसी आर्थिक गतिविधियों के लिए प्रयुक्त होता है। | अर्थशास्त्र | 4,025 | null | 42 |
अर्थशास्त्र, उपयोगिता की विद्या है। उपयोगिता के अन्तर्गत लोगों की प्राथमिकता (पसन्द), वस्तुओं से मिलने वाली संतुष्टि, वस्तुओं को लोगों द्वारा प्रदत्त महत्त्व आदि आते हैं। इच्छाएँ अनन्त हैं और इसके साथ यह भी सत्य है कि एक ही वस्तु की अधिकाधिक मात्रा मिलने पर लोगों को उससे क्रमश: न्यून-से-न्यूनतर लाभ या संतुष्टि मिलती है... | अर्थशास्त्र | 4,026 | null | 67 |
संसाधनों की कमी का नियम (Scarcity of resources) मांग और पूर्ति का नियम (Law of demand and supply) ह्रासमान उपयोगिता का नियम (Law of diminishing utilities) श्रम विभाजन का नियम (Division of labour) स्पर्धात्मक लाभ का नियम (Law of competitive advantages) - व्यापार सदा ही परस्पर लाभकारी होता है। आर्थिक स्वतंत्रता का सिद्धा... | अर्थशास्त्र | 4,027 | null | 63 |
== बाहरी कड़ियाँ == Economics in Six Minutes Principles of Economics | अर्थशास्त्र | 4,028 | null | 11 |
एल्फ्रेड नोबल की याद में अर्थशास्त्र में स्वेरिजेस रिक्सबैंक पुरस्कार (आधिकारिक स्वीडिश: Sveriges riksbanks pris i ekonomisk vetenskap till Alfred Nobels minne), जिसे सामान्यतः अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार (अंग्रेज़ी: Nobel Prize in Economics) कहा जाता है, अर्थशास्त्र में असाधारण योगदान के लिए दिया जाने वाला इस क्षेत... | अर्थशास्त्र | 4,029 | null | 52 |
== निर्माण और धन == नोबल संस्थान के प्रशासनिक पुरस्कार से जुड़े खर्चों का भुगतान स्वेरिजेस रिक्सबैंक धन और पुरस्कार के लिए आवश्यक चीजों को देकर करती है। 2012 के बाद से इस पुरस्कार का मौद्रिक भाग 8 लाख स्वीडी क्रोनर हो गया। यह मूल नोबल पुरस्कार में मिलने वाली राशि के बराबर है। 2006 से स्वेरिजेस रिक्सबैंक हर वर्ष नोबल सं... | अर्थशास्त्र | 4,030 | null | 106 |
== बाहरी कड़ियाँ == Tom Coupé's list of the top 1000 contemporary economists, ranked by publication impact, at IDEAS/RePEc List of top 5% of contemporary economists, ranked by current research impact, at IDEAS/RePEc | अर्थशास्त्र | 4,031 | null | 33 |
अल्फ्रेड मार्शल (Alfred Marshall ; 26 जुलाई 1842 – 13 जुलाई 1924) अपने समय के सबसे प्रभावशाली अर्थशास्त्री थे। उनकी 'प्रिंसिपल्स ऑफ इकनॉमिक्स' (१८९०) अनेकों वर्षों तक इंग्लैण्ड में अर्थशास्त्र की पाठ्यपुस्तक के रूप में पढ़ायी जाती रही। इसमें मांग और आपूर्ति, मार्जिनल युटिलिटी तथा उत्पादन लागत को व्यवस्थित रूप दिया। मार... | अर्थशास्त्र | 4,032 | null | 62 |
अर्थशास्त्र को एक स्वतंत्र बौद्धिक अनुशासन के रूप में स्थापित करने का श्रेय अल्फ़्रेड मार्शल (1842-1924) को जाता है। 1885 से पहले अर्थशास्त्र एक विषय के रूप में दर्शनशास्त्र और इतिहास के पाठ्यक्रम का अंग हुआ करता था। इतिहासकार और दार्शनिक अपनी डिग्री लेने की मजबूरी में अध्ययन थे। मार्शल ने इसे न केवल एक स्वतंत्र संस्था... | अर्थशास्त्र | 4,033 | null | 1,532 |
== सन्दर्भ == 1. पीटर ग्रोइनवेगन (1995), अ सोरिंग ईगल : अल्फ़्रेड मार्शल 1842- 1924, एडवर्ड एल्गर, ब्रुकफ़ील्ड, वरमोंट. 2. मेनार्ड (1924), मार्शल 1842-1924’, इकॉनॉमिक जर्नल, 34, सितम्बर. 3. डेविड रीज़मेन (1990), द इकॉनॉमिक्स ऑफ़ अल्फ़्रेड मार्शल, सेंट मार्टिंस प्रेस, न्यूयॉर्क. 4. डेविड रीज़मेन (1990), अल्फ़्रेड मार्शल... | अर्थशास्त्र | 4,034 | null | 52 |
आकस्मिक निधि का उल्लेख अनुच्छेद- 267 में किया गया है। यह निधि राष्ट्रपति या कार्यपालिका या सरकार के अधीन होती है अर्थात् इस निधि से पैसा निकालने के लिए संसद की इजाजत की जरूरत नहीं होती है लेकिन इस निधि का गठन संसद ही करती है अर्थात् संसद ही तय करती है कि इस निधि में कितना पैसा होगा। इस कोष का निर्माण इसलिए किया जाता है... | अर्थशास्त्र | 4,035 | null | 170 |
आपूर्ति का नियम (law of supply) आर्थिक सिद्धांत का मूलभूत सिद्धांत है जिसके अनुसार अन्य कारकों को स्थिर रखते हुए बिक्री मूल्य में वृद्धि का परिणाम आपूर्ति की मात्रा में वृद्धि होती है। अन्य शब्दों में कीमत और मात्रा के बीच सीधा संबंध है: मात्राएँ उसी दिशा में प्रतिक्रिया करती हैं जिस दिशा में मूल्य परिवर्तन होता है। इस... | अर्थशास्त्र | 4,036 | null | 155 |
== परिभाषा == आपूर्ति ऐसी वस्तु या सेवा है जिसे निर्माता प्रदान करना चाहते हैं। आपूर्ति का नियम किसी दिए गए मूल्य पर आपूर्ति की मात्रा निर्धारित करता है। आपूर्ति और मांग के नियम के अनुसार किसी दिए गए उत्पाद के लिए, यदि मांग की गई मात्रा आपूर्ति की मात्रा से अधिक हो जाती है, तब कीमत बढ़ जाती है, उससे मांग कम हो जाती है ... | अर्थशास्त्र | 4,037 | null | 86 |
आय एक खपत और बचत है सभी मजदूरी, वेतन, लाभ, भुगतान, किराए आदि आय घर-परिवार, देश को चलाने में जिसका प्रयोग होता है। व्यापार आदि में इसका महत्त्व है, धन का निवेश कर आर्जित संपत्ति जिसमें लाभ कमाया जाता है वह आय कहला हैं | अर्थशास्त्र | 4,038 | null | 44 |
== प्रति व्यक्ति आय == प्रति व्यक्ति आय का उपयोग किसी एक देश के लोगों की संपत्ति का अनुमान लगाने के लिए किया जाता है, किसी अन्य देश की तुलना में। आमतौर पर यह किसी सर्वमान्य अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा जैसे यूरो या डॉलर में मापा जाता है। | अर्थशास्त्र | 4,039 | null | 46 |
== इन्हें भी देखें == सकल घरेलू उत्पाद भारतीय राज्यों की प्रति व्यक्ति आय | अर्थशास्त्र | 4,040 | null | 14 |
किसी भी तरह के उत्पादों को बाहर के किसी देश से अपने देश में लाने को आयात (इम्पोर्ट) कहते हैं। | अर्थशास्त्र | 4,041 | null | 20 |
== आयात का विलोम शब्द : == आयात का विलोम शब्द निर्यात होता है। आयात का अर्थ है “किसी देश में विदेशी देशों से वस्तुओं या सेवाओं को लाना।” निर्यात का अर्थ है “किसी देश से विदेशी देशों में वस्तुओं या सेवाओं को भेजना।” और पढ़ें | अर्थशास्त्र | 4,042 | null | 46 |
आर्थिक नीति (Economic policy) से आशय उन सरकारी नीतियों से होता है जिनके द्वारा किसी देश के आर्थिक क्रियाकलापों का नियमन होता है। आर्थिक नीति के अन्तर्गत करों के स्तर निर्धारित करना, सरकार का बजट, मुद्रा की आपूर्ति, ब्याज दर के साथ-साथ श्रम-बाजार, राष्ट्रीय स्वामित्व, तथा अर्थव्यवस्था में सरकार के हस्तक्षेप के अनेकानेक ... | अर्थशास्त्र | 4,043 | null | 191 |
== आर्थिक नीति का महत्त्व == आर्थिक नीति के महत्त्व को इस प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है : | अर्थशास्त्र | 4,044 | null | 19 |
कीमतों पर नियंत्रण - आर्थिक निति के द्वारा देश में बढ़ी कीमतों namaste नियंत्रण किया जा सकता है। इसका कारण यह है कि इसके अन्तर्गत केन्द्रीय एवं राज्य सरकार द्वारा यह ध्यान रखा जाता है कि अपने संसाधनों एवं कार्यक्रमों का कुशल संचालन एवं प्रबन्ध किया जाए। परिणामस्वरूप इससे न केवल लोगों को राहत मिलेगी, बल्कि हमारी नीति की... | अर्थशास्त्र | 4,045 | null | 492 |
== आर्थिक नीति की विशेषताएँ == आर्थिक नीति में निम्नलिखित विशेषताएँ देखी सकती हैः आर्थिक दर्शन : आर्थिक नीति किसी सरकार का एक आर्थिक दर्शन या विस्तृत विचारधारा है, जिसके माध्यम से वह अपने निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने का प्रयास करती है। मार्गदर्शक सूत्र : आर्थिक नीतियाँ, आर्थिक उद्देश्यों की प्राप्ति के लिये व्यापार,... | अर्थशास्त्र | 4,046 | null | 407 |
== आर्थिक नीति के उद्देश्य == आर्थिक नीति का मुख्य उद्देश्य देश में आर्थिक विकास की दर में वृद्धि करना है। इस उद्देश्य की प्राप्ति हेतु आर्थिक नीति के अन्य उद्देश्य निम्नलिखित हैः | अर्थशास्त्र | 4,047 | null | 33 |
आर्थिक विकास एवं दर में वृद्धि करना नियोजित विकास एवं प्रक्रिया पर बल देना देश में आर्थिक संकेन्द्रण को कम करना आर्थिक दृष्टि से कमजोर एवं पिछड़े लोगों की प्रगति पर ध्यान देना देश के औद्योगिक विकास की गति को तेज करना व्यापार संवर्द्धन की सम्भावनाओं का अवलोकन करते हुए निर्यात में अभिवृद्धि करना तेजी से कृषि विकास करना प... | अर्थशास्त्र | 4,048 | null | 102 |
== आर्थिक नीति के उपकरण == आर्थिक नीति, बहु-आयामी नीति है क्योंकि आर्थिक नीति के अनुरूप ही देश की अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों की नीति तैयार की जाती है। यदि विभिन्न नीतियाँ आर्थिक नीति के अनुरूप नहीं बनायी जाती है तो आर्थिक नीति के उद्देश्यों को प्राप्त करने में कठिनाई आयेगी। आर्थिक नीति एक व्यापक नीति है और इसमें अन... | अर्थशास्त्र | 4,049 | null | 104 |
=== राजकोषीय उपकरण === आर्थिक नीति के राजकोषीय उपकरण (Fiscal Instruments) के अन्तर्गत सरकार द्वारा वित्त एकत्र करने एवं उसको व्यय करने से सम्बन्धित क्रियाओं का अध्ययन किया जाता है। आर्थिक विकास, सामाजिक कल्याण में वृद्धि हेतु सरकार को नवीन सुविधाओं के विकास एवं विस्तार के लिए धन की आवश्यकता पड़ती है, जिसकी पूर्ति निम्न... | अर्थशास्त्र | 4,050 | null | 125 |
=== मौद्रिक उपकरण === मौद्रिक उपकरणों (Monetary instruments) का प्रयोग अर्थव्यवस्था में मुद्रा व साख की मात्रा को नियन्त्रित करने के उद्देश्य से किया जाता है। आर्थिक नीति के संचालन एवं सफलता के लिए जिन प्रमुख मौद्रिक उपकरणों को प्रयुक्त किया जाता है वे निम्नांकित है : 1. साख नियन्त्रण : इसका आशय साख की मात्रा को देश की... | अर्थशास्त्र | 4,051 | null | 177 |
=== व्यापारिक उपकरण === आर्थिक नीति में व्यापारिक उपकरणों की भूमिका को निम्न प्रकार से स्पष्ट किया जा सकता है : 1. मुक्त एवं प्रतिबन्धित व्यापार : वर्तमान में नियन्त्रित व्यापार को अधिक महत्त्व प्रदान किया गया है। सुव्यवस्थित आर्थिक विकास हेतु प्रतिबन्धित व्यापार का विशेष महत्त्व होता है। 2. राष्ट्रानुसार प्राथमिकताएँ ... | अर्थशास्त्र | 4,052 | null | 88 |
=== नियन्त्रण === आधुनिक अर्थव्यवस्थाओं में आर्थिक नियन्त्रणों का विशेष महत्त्व है। 1. निवेश नियन्त्रण : तीव्र उद्योगीकरण तथा पूर्ण रोजगार की प्राप्ति के लिए पूँजी निवेश नियन्त्रण का विशेष महत्त्व है। 2. मूल्य नियन्त्रण : आर्थिक नीति के मूल्य नियन्त्रण सम्बन्धी उपकरणों का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ता के हितों की रक्षा करना ... | अर्थशास्त्र | 4,053 | null | 114 |
== आर्थिक नीति के घटक == राष्ट्र की आर्थिक नीति की सफलता उसके संघटको (कम्पोनेन्ट्स) पर आश्रित होती है। सामान्यतः निम्न नीतियों का प्रयोग आर्थिक नीति के संघटकों के रूप में किया जाता है : 1. प्राकृतिक संसाधन नीति : आर्थिक नीति के लक्ष्यों के अनुरूप प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग एवं विदोहन करना उपयुक्त होता है। खेती, वनो क... | अर्थशास्त्र | 4,054 | null | 344 |
== इन्हें भी देखें == औद्योगिक नीति कृषि नीति १९९१ की नई आर्थिक नीति | अर्थशास्त्र | 4,055 | null | 14 |
आर्थिक भौमिकी, भौमिकी की वह शाखा है जो पृथ्वी की खनिज संपत्ति के संबंध में बृहत् ज्ञान कराती है। पृथ्वी से उत्पन्न समस्त धातुओं, पत्थर, कोयला, भूतैल (पेट्रोलियम) तथा अन्य अधातु खनिजों का अध्ययन तथा उनका आर्थिक विवेचन आर्थिक भौमिकी द्वारा ही होता है। प्रत्येक देश की समृद्धि वहाँ की खनिज संपत्ति पर बहुत कुछ निर्भर रहती ... | अर्थशास्त्र | 4,056 | null | 216 |
== भारत में खनन उद्योग का विकास == सन् १९०६ में भारत के संपूर्ण खनिज उत्पादन का मूल्य केवल १० करोड रुपया था। उस समय पाकिस्तान तथा बर्मा भी भारतीय साम्राज्य के ही भाग थे। इसके पश्चात् खनिज उद्योग निंरतर वृद्धि करता रहा तथा इसकी गति स्वतंत्रता के उपरांत और भी अधिक हो गई। यहाँ इस तथ्य को नहीं भूलना चाहिए कि २०वीं शताब्द... | अर्थशास्त्र | 4,057 | null | 418 |
नव औद्योगिक देश नए [औद्योगिक देश]। इनमें से कई 1997 के एशियाई आर्थिक संकट की चपेट में आ गए थे।]] देशों, क्षेत्रों या व्यक्तिओं की आर्थिक समृद्धि के वृद्धि को आर्थिक विकास कहते हैं। नीति निर्माण की दृष्टि से आर्थिक विकास उन सभी प्रयत्नों को कहते हैं जिनका लक्ष्य किसी जन-समुदाय की आर्थिक स्थिति व जीवन-स्तर के सुधार के लि... | अर्थशास्त्र | 4,058 | null | 240 |
== विकास का अर्थ एवं माप == विकास के अर्थ और माप को लेकर अर्थशास्त्र में एक बहस और विवाद चला आ रहा है। किन्तु इतनी लंबी बहस के बावजूद भी विकास का अर्थ ही स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। जब कोई अर्थशास्त्री विकास के बारे में अपना मंतव्य प्रकट करना चाहे तो वह विकास का अर्थ बताता है एवं उसकी परिभाषा देता है। किन्तु कुछ समय बाद ... | अर्थशास्त्र | 4,059 | null | 178 |
शब्दावली की दुविधा आर्थिक समृद्धि या आर्थिक विकास? आर्थिक समृद्धि कहें या आर्थिक विकास?- इन दोनों में से कौन-सी शब्दावली का प्रयोग करें- इसको लेकर भी अर्थशास्त्री दुविधा में हैं। साधारण बोलचाल की भाषा में तो आर्थिक समृद्धि और आर्थिक विकास इन दोनों शब्दों का एक ही अर्थ में प्रयोग किया जाता रहा है। लेकिन सबसे पहले प्रो. ... | अर्थशास्त्र | 4,060 | null | 261 |
== आर्थिक विकास के माप तथा विकास के सूचक == विकास-अर्थशास्त्र में विकास के अर्थ एवं परिभाषा से भी बड़ा विवाद और भ्रम विकास के माप एवं सूचकों (संकेतों) को लेकर है। यह भी कह सकते हैं कि विकास के माप या सूचकों के विवाद में से ही विकास का अर्थ व परिभाषा का विवाद उत्पन्न हुआ है। प्रश्न यह है कि क्या विकास को संख्यात्मक रूप ... | अर्थशास्त्र | 4,061 | null | 158 |
==== सकल घरेलू उत्पाद (जी.डी.पी.) ==== कुछ अर्थशास्त्री जैसे कुजनेट्स, मेयर एवं बाल्डविन, मीड आदि वास्तविक जी.डी.पी. को ही विकास का सर्वोत्तम सूचक मानते हैं। उनके अनुसार वास्तविक जी.डी.पी. में वृद्धि दर के आधार पर हम विकास की दर को माप सकते हैं। कुछ सीमा तक जी.डी.पी. को विकास का उपयोगी मापदंड होते हुए भी इसे समुचित माप... | अर्थशास्त्र | 4,062 | null | 69 |
(क) यदि किसी देश में जी.डी.पी. में हुई वृद्धि की तुलना में जनसंख्या में अधिक तीव्र दर से वृद्धि हो जाए तब प्रति व्यक्ति जी.डी.पी. एवं वस्तुओं व सेवाओं की उपलब्धि पहले की तुलना में घट जाएगी। ऐसी स्थिति होने पर यदि हम यह घोषणा करें कि उस देश का विकास हुआ है तो यह हास्यास्पद बात ही होगी। (ख) यह संभव है कि जी.डी.पी. में वृ... | अर्थशास्त्र | 4,063 | null | 116 |
==== प्रति व्यक्ति जी.डी.पी. ==== अधिकांश अर्थशास्त्री प्रति व्यक्ति वास्तविक जी.डी.पी. में वृद्धि को ही विकास का सर्वोत्तम, व्यावहारिक एवं सुविधाजनक मापदंड मानते हैं। किंडलबर्जर, मेयर, हिगीन्स, हार्वे लेबेन्स्टीन, डब्ल्यू.ए. लेविस, जेकब वाइनर आदि अर्थशास्त्री इसी मत के हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी इसी माप को स्वीकार... | अर्थशास्त्र | 4,064 | null | 114 |
(क) यदि किसी देश की जी.डी.पी. और जनसंख्या में समान दर से वृद्धि हो तब भी हमें यह कहना पड़ेगा कि उस देश का विकास नहीं हुआ है। इसी प्रकार यदि किसी कारण से किसी देश की जनसंख्या घट जाए किन्तु जी.डी.पी. स्थिर रहे तो कहना पड़ेगा कि उस देश का विकास हुआ है। (ख) चूंकि प्रति व्यक्ति जी.डी.पी. एक औसत माप है, अत: प्रति व्यक्ति जी.... | अर्थशास्त्र | 4,065 | null | 237 |
(क) जी.डी.पी. की अभी तक कोई सर्वमान्य परिभाषा नहीं बन सकी है। इसकी गणना में क्या शामिल किया जाए और क्या नहीं- अभी तक इस प्रश्न का कोई संतोषजनक हल नहीं निकल पाया है। (ख) विभिन्न देशों की जी.डी.पी. की गणना करते समय अमौद्रिक क्षेत्र की बहुत-सी वस्तुएं गणना से छूट जाती है। स्व-उपभोग तथा बाजार में विनिमय के लिए न लाई जाने व... | अर्थशास्त्र | 4,066 | null | 284 |
==== प्रति व्यक्ति उपभोग ==== कुछ विद्वानों का मत है कि विकास का अंतिम लक्ष्य लोगों के रहन-सहन व जीवन स्तर में वृद्धि करना होता है और रहन-सहन का स्तर उपभोग के लिए उपलब्ध वस्तुओं व सेवाओं की मात्रा पर निर्भर करता है। अत: प्रति व्यक्ति उपभोग का स्तर आर्थिक विकास का सर्वोत्तम मापदंड है। किन्तु इस माप की भी अपनी एक कठिनाई ... | अर्थशास्त्र | 4,067 | null | 188 |
==== आर्थिक कल्याण ==== कुछ विद्वानों के अनुसार आर्थिक कल्याण ही आर्थिक विकास का सर्वोत्तम मापदंड हो सकता है। आर्थिक कल्याण का विचार करते समय हम केवल यह नहीं देखेंगे कि क्या और कितना उत्पादन किया जा रहा यह किस प्रकार पैदा किया जा रहा है और इसका बंटवारा किस प्रकार हो रहा है। आर्थिक कल्याण में यह भी ध्यान में रखना होगा क... | अर्थशास्त्र | 4,068 | null | 160 |
==== समायोजित सकल राष्ट्रीय उत्पाद माप ==== विभिन्न देशों के बीच तुलनात्मक अध्ययन की सुविधा की दृष्टि से कुछ अर्थशास्त्रियों ने समायोजित सकल राष्ट्रीय उत्पाद को विकास के मापदंड के रूप में स्वीकार करने का सुझाव दिया है। इस माप के माध्यम से राष्ट्रीय आय के लेखों को समायोजित करने के लिए क्रयशक्ति समता () की अवधारणा का प्र... | अर्थशास्त्र | 4,069 | null | 96 |
==== अन्य मापदण्ड ==== उपर्युक्त मापदंडों के अलावा कुछ विद्वानों ने विकास के और भी कई मापदंडों के प्रयोग का सुझाव दिया है। उदाहरण के लिए, कुल जनसंख्या में निर्धन वर्ग का प्रतिशत कम होना आर्थिक विकास का एक अच्छा मापदंड हो सकता है। पर ये सभी मापदंड एकपक्षीय हैं। | अर्थशास्त्र | 4,070 | null | 50 |
=== गैरआर्थिक (सामाजिक) सूचक === सामाजिक सूचकों में मनुष्य की आधारभूत आवश्यकताओं के रूप में बताया गया है। मुख्य सामाजिक सूचकों में ये शामिल हैं- जीवन प्रत्याशा, केलौरी-पान, शिशु मृत्यु दर, विद्यालयों में प्राथमिक कक्षाओं में भर्ती संख्या, आवास, पोषण, स्वास्थ्य तथा ऐसी ही अन्य वे सब चीजें जो मनुष्य की मूलभूत आवश्यकताओं ... | अर्थशास्त्र | 4,071 | null | 57 |
==== सामाजिक लेखा प्रणाली ==== इस प्रणाली को स्टोन एवं सीयर्स ने दिया था। इसी क्रम में पियट्ट एवं राउंड ने भी सोशल एकाउंटिंग मैट्रिक्स के नाम से एक सूचक दिया था। किन्तु इस प्रकार की प्रणाली की सबसे बड़ी कमी विश्वसनीय एवं उपयोगी आंकड़ों का न मिल पाना है। इसके अलावा इसमें सामाजिक विकास के सब पहलुओं को सम्मिलित कर पाना भी... | अर्थशास्त्र | 4,072 | null | 66 |
==== संयुक्त सामाजिक विकास सूचक ==== इस सूचक का विकास सामाजिक विकास पर संयुक्त राष्ट्र के शोध संस्थान द्वारा किया गया था। प्रारंभ में 73 सूचकों को जांचा गया जिनमें से अंत में 16 सूचकों का चयन किया गया। ये सूचक हैं- | अर्थशास्त्र | 4,073 | null | 42 |
जन्म के समय जीवन प्रत्याशा 20,000 या उससे अधिक के क्षेत्रों में जनसंख्या वृद्धि का प्रतिशत प्रति व्यक्ति, प्रतिदिन पशु प्रोटीन का उपभोग प्राथमिक एवं द्वितीयक स्तर पर कुल मिलाकर भर्ती विद्यार्थियों की संख्या व्यावसायिक भर्ती अनुपात प्रति कमरा औसत व्यक्तियों की संख्या प्रति 1000 जनसंख्या पर समाचार पत्र बिजली, गैस, पानी आ... | अर्थशास्त्र | 4,074 | null | 143 |
=== भौतिक गुणवत्ता का जीवन सूचक === विकास के इस सूचक को 1979 में मोरिस डी. मोरिस ने दिया था। इसके अंतर्गत तीन सूचकों का प्रयोग करने की बात कही गई थी- | अर्थशास्त्र | 4,075 | null | 32 |
(क) एक वर्ष की आयु पर जीवन प्रत्याशा (ख) शिशु मृत्यु (ग) साक्षरता। यह सूचक भी अधूरा है। क्योंकि इसमें अनेक सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक सूचकों को शामिल ही नहीं किया गया है- जैसे सुरक्षा, न्याय, मानव अधिकार आदि। | अर्थशास्त्र | 4,076 | null | 38 |
== आधुनिक आर्थिक संवृद्धि की विशेषताओं के बारे में कुटनेट्स का विश्लेषण == कुटनेट्स ने आधुनिक आर्थिक संवृद्धि की सात मुख्य विशेषताएं बताई हैं- | अर्थशास्त्र | 4,077 | null | 24 |
(१) प्रति व्यक्ति उत्पादन में तीव्र दर से वृद्धि (२) उत्पादकता की ऊंची वृद्धि दर (३) संरचनात्मक परिवर्तन की ऊंची दर (४) शहरीकरण एवं औद्योगिकीकरण (५) तीव्र सामाजिक एवं वैचारिक परिवर्तन (६) आधुनिक देशों का बाहर की ओर देखने का दृष्टिकोण (७) भौतिक एवं मानवीय पूंजी का अंतरराष्ट्रीय प्रवाह। | अर्थशास्त्र | 4,078 | null | 49 |
== इन्हें भी देखें == सकल घरेलू उत्पाद सहस्राब्दी विकास लक्ष्य संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (United Nations Development Program) | अर्थशास्त्र | 4,079 | null | 19 |
== बाहरी कड़ियाँ == सामाजिक न्याय के साथ आर्थिक विकास आर्थिक विकास में पर्यावरण का योगदान आर्थिक विकास में ऊर्जा की भूमिका (डा. एस.सी. लाहिरी, प्रो. कुसुमलता तिवारी) | अर्थशास्त्र | 4,080 | null | 28 |
आर्थिक प्रगति के विभिन्न चरणों में विभिन्न आर्थिक विचारकों द्वारा जो आर्थिक विचार व्यक्त किये गये, उनका सामूहिक नाम ही आर्थिक विचारों का इतिहास है। मनुष्य की विचार-शक्ति के साथ ही आर्थिक विचारों का भी जन्म हुआ। प्रो. अलेक्जेण्डर ग्रे के अनुसार मानव विचार के इतिहास में अर्थशास्त्र के सिद्धान्त के विधिवत नियमों का विकास ... | अर्थशास्त्र | 4,081 | null | 145 |
=== मनु === मनु को प्राचीन भारतीय आर्थिक विचारकों में प्रथम स्थान दिया गया है। आर्थिक सुव्यवस्था द्वारा मनु ने प्रजावर्ग के कल्याणार्थ नियमों का प्रथम वार प्रतिपादन किया। अत: मनु को प्रथम नियम प्रवर्तक माना गया है। अर्थ जगत के व्यवहार के लिए आवश्यक है। अत: प्रथम आर्थिक विचारक मनु ने अर्थ प्राप्ति के साधनों की प्राप्ति ... | अर्थशास्त्र | 4,082 | null | 157 |
किसानों के खेतों में फसल काटने के पश्चात् छूटे हुए अन्न को पाना ऋत कहलाता है। बिना मांगे जो मिल जाये उसे अमृत कहते हैं। भिक्षा मांग कर जो मिलता है उसे मृत कहते हैं। कृषि से उत्पन्न होने वाले अर्थ को प्रमृत कहा गया है। | अर्थशास्त्र | 4,083 | null | 46 |
शुक्र का मानना है कि राज व्यवस्था के लिए धन अपरिहार्य है। उनके अनुसार सेना और प्रजा के संरक्षण के लिए यज्ञ करने हेतु कोष संग्रह किया जाना आवश्यक है। ऐसा कोष राजा के लिए इस लोक तथा परलोक में सुखदायी होता है। वहीं, भोग-विलास के लिए संग्रहीत कोष दुख का कारण बन जाता है। जो धन संग्रह स्त्री और पुत्रों के लिए ही किया गया है,... | अर्थशास्त्र | 4,084 | null | 309 |
== इन्हें भी देखें == श्रम का विभाजन अर्थशास्त्र चाणक्य तथा अर्थशास्त्र (ग्रन्थ) आदम स्मिथ तथा उनकी कृति द वेल्थ ऑफ नेशन्स गाँधीजी के आर्थिक विचार भारत का आर्थिक इतिहास | अर्थशास्त्र | 4,085 | null | 30 |
== बाहरी कड़ियाँ == The History of Economic Thought website Archive for the History of Economic Thought Biographies of economists Library of Economics and Liberty The Prehistory of Modern Economic Thought by Justin Ptak Chapter One and Chapter Sixteen from An Austrian Perspective on the History of Economic Thought by M... | अर्थशास्त्र | 4,086 | null | 52 |
किसी देश की प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में वृद्धि आर्थिक वृद्धि (Economic growth) कहलाती है। आर्थिक वृद्धि केवल उत्पादित वस्तुओं एवं सेवाओं का परिमाण बताती है। | अर्थशास्त्र | 4,087 | null | 28 |
=== लेख एवं व्याख्यान === Economic Growth by Paul Romer, The Concise Encyclopedia of Economics. "Economic growth." Encyclopædia Britannica. 2007. Encyclopædia Britannica Online. 17 नवम्बर 2007. Beyond Classical and Keynesian Macroeconomic Policy. Paul Romer's plain-English explanation of Endogenous Growth Theory. Does ... | अर्थशास्त्र | 4,088 | null | 138 |
=== आंकड़े === Historical data - since 1954 - comparing the US GDP growth rate versus the US Fed Funds Rate Angus Maddison's Historical Dataseries -Series for almost all countries on GDP, Population and GDP per capita from the year 0 up to 2003 OECD Economic growth statistics | अर्थशास्त्र | 4,089 | null | 48 |
किसी समाज के अन्दर या किसी भौगोलिक क्षेत्र के अन्दर उत्पादन, संसाधनों के नियतन (resource allocation), तथा वस्तुओं एवं सेवाओं के वितरण को आर्थिक व्यवस्था या आर्थिक प्रणाली (economic system) कहते हैं। | अर्थशास्त्र | 4,090 | null | 32 |
डिबेंचर यह एक ऋण का एक साधन है जिसके माध्यम से सरकार या कंपनियां धन जुटाती हैं। यह इक्विटी शेयरों से भिन्न होता है। डिबेंचर खरीदने वाला वास्तव में कर्जदाता होता है। डिबेंचर जारी करने वाली कंपनी या संस्थान गिरवी के तौर पर कुछ नहीं रखती, खरीदार उनकी साख और प्रतिष्ठा को देखते हुए डिबेंचर खरीदते हैं। डीबेंचर जारी करने वाली... | अर्थशास्त्र | 4,091 | null | 131 |
ऑफशोर फंड (Offshore Fund) जिस फंड के अंतर्गत म्युचुअल फंड कंपनियां विदेश से धन जुटा कर देश के भीतर विनियोजित करती हैं उसे ऑफशोर फंड कहते हैं। | अर्थशास्त्र | 4,092 | null | 27 |
वेंचर कैपिटल (Venture Capital) नये व्यवसाय की शुरुआत के लिए जुटाई जाने वाली पूंजी को वेंचर कैपिटल या साहस पूंजी या दायित्व पूंजी कहते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो निवेशकों द्वारा शुरु हो रही छोटी कंपनियों, भविष्य में जिनके विकास की प्रबल संभावना होती है, को उपलब्ध कराई जाने वाली पूंजी को वेंचर कैपिटल कहते हैं। कंपनिया... | अर्थशास्त्र | 4,093 | null | 68 |
फॉरवर्ड सौदा (Forward Contract) नकदी बाजार (शेयरों के मामले में) या हाजिर बाजार (कमोडिटी के मामले में) में किया जाने वाला सौदा जिसका निपटारा भविष्य की एक निश्चित तारीख को सुपुर्दगी के साथ निपटाया जाता है। | अर्थशास्त्र | 4,094 | null | 36 |
डेरिवेटिव (Derivative) वैसी प्रतिभूति जिसका मूल्य उसके अंतर्गत एक या एक से अधिक परिसंपत्तियों के ऊपर निर्भर करता है या उनसे प्राप्त किया जाता है। डेरिवेटिव दो या दो से अधिक पक्षों के बीच किया जाने वाला करार है। इसका मूल्य निर्धारण उन परिसंपत्तियों के मूल्यों में होने वाले उतार-चढ़ाव के आधार पर किया जाता है। आमतौर पर ऐस... | अर्थशास्त्र | 4,095 | null | 187 |
ओपेन एन्डेड फण्ड (Open Ended Fund) सतत खुली योजनाएंम्युचुअल फंडों की वैसी योजनाएं जिनकी कोई लॉक इन अवधि (वह पूर्व-निर्धारित अवधि जिससे पहले निवेश किए गए पैसों की निकासी की अनुमति नहीं होती है) नहीं होती है। इनके यूनिटों की खरीद-बिक्री तत्कालीन शुध्द परिसंपत्ति मूल्य (एनएवी) पर कभी भी की जा सकती है। | अर्थशास्त्र | 4,096 | null | 53 |
प्रतिभूतियां (Securities) प्रतिभूतियां लिखित प्रमाणपत्र होती हैं जो ऋण लेने के बदले दी जाती है। इनमें जारी करने के शर्र्तों एवं मूल्यों का उल्लेख होता है तथा इनका क्रय-विक्रय भी किया जाता है। सरकार द्वारा जारी किया जाने वाला बॉन्ड, तरजीही शेयर, ऋण पत्र आदि प्रतिभूतियों की श्रेणी में आते हैं। प्रतिभूति शब्द का इस्तेमाल ... | अर्थशास्त्र | 4,097 | null | 61 |
शेयर विभाजन (Stock Split) कोई कंपनी अपने महंगे शेयर को छोटे निवेशकों के लिए वहनीय बनाने और उसे आकर्षक बनाने के लिए शेयरों का विभाजन करती है। अगर कोई कंपनी अपने शेयरों का विभाजन 2:1 में करती है तो उसका मतलब होता है कि शेयरों की संख्या दोगुनी कर दी गई है और उसका मूल्य आधा कर दिया गया है। | अर्थशास्त्र | 4,098 | null | 60 |
जब देश की प्रचलित मुद्रा का मूल्य किसी विदेशी मुद्रा के साथ निर्धारित किया जाता है ताकि मुद्रा की अदला-बदली की जा सके तो इस मूल्य को मुद्रा का विनिमय मूल्य कहा जाता है। वह मूल्य दोनों देशों की मुद्राओं की आंतरिक क्रय शक्ति पर निर्भर करता है। | अर्थशास्त्र | 4,099 | null | 48 |
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