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|---|---|---|---|---|
अभाव अर्थव्यवस्था (Shortage economy) किसी देश या प्रान्त की अर्थव्यवस्था में ऐसी परिस्थिति होती है जिसमें उपभोक्ताओं को बाज़ार में कई प्रकार के माल या सेवाओं का अभाव होता है, यानि वह चीज़ें बाज़ार में खरीदने के लिए पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं होती। यह स्थिति अक्सर नियोजित अर्थव्यवस्थाओं में उत्पन्न होती है। यह कई स... | अर्थशास्त्र | 5,400 | null | 94 |
== नामोत्पत्ति == "अभाव अर्थव्यवस्था" का सर्वप्रथम ज्ञात उल्लेख हंगरी के एक अर्थशास्त्री, यानोश कोरनाई (János Kornai) ने करा था। उनके कार्यकाल में हंगरी में साम्यवादी व्यवस्था थी। | अर्थशास्त्र | 5,401 | null | 28 |
ईएसओपी या नियुक्त स्वामित्व, कंपनी द्वारा स्वेच्छा से अपनाई जाने वाली योजना है जिसके द्वारा कंपनी अपने कर्मचारियों को कंपनी के कामकाजों में और अधिक भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करती है। शेयर जारीकर्ता आवश्यकता पड़ने पर कंपनी के कर्मचारियों के लिए कुल शेयरों का कुछ प्रतिशत शेयर आरक्षित कर सकते हैं। इन आरक्षित शेयरों की म... | अर्थशास्त्र | 5,402 | null | 84 |
कुज़्नेत्स वक्र (अंग्रेज़ी: Kuznets curve) आय असमानता और आर्थिक विकास (1955, 1963) के बीच सम्बन्ध दिखाने वाला उल्टे यू-आकार (U) का एक वक्र है। यह साइमन कुज़्नेत्स के सबसे महत्वपूर्ण सैद्धांतिक अनुसंधानों में से एक है। इस वक्र के अनुसार कोई देश जब विकास करता है तो बाजार की ताकतों द्वारा संचालित आर्थिक असमानता का एक प्रा... | अर्थशास्त्र | 5,403 | null | 517 |
1 99 1 से पर्यावरणीय कुजनेट्स वक्र (ईकेसी) पर्यावरण नीति के तकनीकी साहित्य में एक मानक विशेषता बन गई है, [6] हालांकि इसके आवेदन को दृढ़ता से चुनौती दी गई है | अर्थशास्त्र | 5,404 | null | 31 |
नियंत्रित बाज़ार (controlled market) या नियमित बाज़ार (regulated market) ऐसी आर्थिक व्यवस्था होती है जिसमें सरकार या अन्य आधिकारिक संगठन बाज़ार में माँग और आपूर्ति के बलों पर निगरानी या नियंत्रण रखता है। यह नियंत्रण कम या अधिक मात्रा का हो सकता है। नियोजित अर्थव्यवस्थाओं में यह नियंत्रण भारी दर्जे का होता है जबकि अन्य ... | अर्थशास्त्र | 5,405 | null | 126 |
== इन्हें भी देखें == आर्थिक संतुलन मुक्त बाज़ार नियोजित अर्थव्यवस्था | अर्थशास्त्र | 5,406 | null | 11 |
नियोजित अर्थव्यवस्था (planned economy) ऐसी आर्थिक व्यवस्था होती है जहाँ विभिन्न माल और सेवाओं से सम्बन्धित निवेश, उत्पादन और वितरण सरकार द्वारा बनाई योजनाओं के अनुसार होता है। यह नियोजन केन्द्रीय स्तर पर, प्रान्तीय स्तर पर या अन्य किसी विधि से हो सकता है। अक्सर ऐसी अर्थव्यवस्थाओं में बाज़ार में कीमतें भी सरकार द्वारा न... | अर्थशास्त्र | 5,407 | null | 80 |
== इन्हें भी देखें == अभाव अर्थव्यवस्था अर्थव्यवस्था आर्थिक संतुलन | अर्थशास्त्र | 5,408 | null | 10 |
पूँजीवाद सामान्यत: उस आर्थिक प्रणाली या तंत्र को कहते हैं जिसमें उत्पादन के साधन पर निजी स्वामित्व होता है। इसे कभी कभी "व्यक्तिगत स्वामित्व" के पर्यायवाची के तौर पर भी प्रयुक्त किया जाता है यद्यपि यहाँ "व्यक्तिगत" का अर्थ किसी एक व्यक्ति से भी हो सकता है और व्यक्तियों के समूह से भी। मोटे तौर पर कहा जा सकता है कि सरकार... | अर्थशास्त्र | 5,409 | null | 120 |
== इतिहास == पूँजीवाद का इतिहास मनुष्य के इतिहास जितना ही पुराना है; प्राचीन मिस्र, कार्थेज, रोम, बेबिलोनिया और यूनान में व्यक्तिगत संपत्ति और एकाधिकार पर आधारित समाजों का इतिहास मिलता है। दासप्रथा जैसी निजी स्वामित्व की चरम स्थिति रही है। मध्यकाल में यूरोप में इसका अधिक विकास हुआ; 21वीं शताब्दी के पश्चात पूँजीवाद ने स... | अर्थशास्त्र | 5,410 | null | 377 |
== पूँजीवाद का प्रभाव एवं इसकी प्रतिक्रिया == औद्योगिक क्रांति के आरंभिक दिनों में इंग्लैंड में ऐडम स्मिथ का अहस्तक्षेप का सिद्धांत (Laissez-Faire) वैयक्तिक स्वतंत्रता और अनियंत्रित आर्थिक व्यवस्था का आधार बन गया। किंतु इस औद्योगिक परिवर्तन से उत्पन्न परिस्थितियों ने सरकार को उद्योगपतियों और श्रमिकों की समस्याओं में हस... | अर्थशास्त्र | 5,411 | null | 257 |
बाज़ार अर्थव्यवस्था (market economy) ऐसी अर्थव्यवस्था होती है जिसमें निवेश, उत्पादन और वितरण के निर्णय उन मूल्य संकेतों द्वारा निर्धारित होते हैं जो प्राकृतिक रूप से स्वयं ही माँग और आपूर्ति कि स्थितियों से उत्पन्न हों। ऐसी अर्थव्यवस्था में किसी चीज़ की बाज़ार में क्या कीमत हैं, यह निर्णय उस चीज़ की ग्रहकों द्वारा माँग... | अर्थशास्त्र | 5,412 | null | 94 |
एक मिश्रित अर्थव्यवस्था एक ऐसी अर्थव्य्वस्था है जो अलग-अलग मार्केट एवं आर्थिक योजनाओं का मिश्र्ण है, जिस्में निजी क्षेत्र और राज्य अर्थ्व्य्वस्था का निर्देशन करते हैं; या फिर एक ऐसी अर्थव्यवस्था जिस्में सार्वजनिक स्वामित्व तथा निजी स्वामित्व का मिश्रण हो; या जिस्में आर्थिक हस्तक्षेपवाद का मिश्रण मुक्त मार्केटों के सहित... | अर्थशास्त्र | 5,413 | null | 233 |
== इतिहास == बाजार के पास खुद को सही करने के गुण और एडम स्मिथ के अदृश्य हाथ वाली अर्थव्यवस्था को 1929 की आर्थिक महामंदी में बड़ा झटका लगा । अमेरिका ही नही पश्चिम यूरोप के कई देशो को भी अपने चपेट में ले लिया था। जिसके चलते भारी बेरोजगारी, माँग और आर्थिक गतिविधियों में कमी और उधोग- धंधों पर ताला बंदी की स्तिथि उत्पन्न हो... | अर्थशास्त्र | 5,414 | null | 117 |
कई अर्थशास्त्रियों ने मिश्रित अर्थव्यवस्था की संकल्पना के वैधता को प्रश्न किया है जब उसे समाजवाद और पूंजीवाद का मिश्रण कहा जाता है। अपने प्रसिद्ध रचना Human Action में, लडविग वॉन मिसेस ने वाद किया था कि समाजवाद और पूंजीवाद का मिश्रण कभी नहीं हो सकता है- या तो बाज़ार तर्क या आर्थिक योजना एक अर्थव्यवस्था पर हावी होनी चाह... | अर्थशास्त्र | 5,415 | null | 257 |
अर्थशास्त्र में मुक्त बाज़ार (free market) ऐसी आर्थिक व्यवस्था होती है जिसमें माल और सेवाओं की कीमतें खुले बाज़ार में निर्धारित होती हैं। मुक्त बाज़ार में माँग और आपूर्ति सरकारी या अन्य आधिकारिक या कृत्रिम हस्तक्षेप से स्वतंत्र होते हैं और इनमें आर्थिक संतुलन बनने से बाज़ार में कीमतें तय होती हैं। इस से विपरीत नियंत्रि... | अर्थशास्त्र | 5,416 | null | 104 |
== इन्हें भी देखें == नियंत्रित बाज़ार माल और सेवाएँ अभाव अर्थव्यवस्था | अर्थशास्त्र | 5,417 | null | 12 |
रिपब्लिक ऑफ कांगो में रहने वाली आदिम शिकारी-फ़रमर या शिकारी-संचयी जनजाति " बेंजले बायका" के लिए नेविगेशन एक महत्वपूर्ण गुण हैं ! ये भोजन के लिए पूरी तरह से जंगलो पर निर्भर करती हैं ,ये आदिवासी जंगल मे घूम घूम कर भोजन जुटाते हैं! इन लोगो मे दिशा ज्ञान बहुत जल्द 6 वर्ष की उम्र से ही विकसित हो जाता हैं । इस समुदाय में लैं... | अर्थशास्त्र | 5,418 | null | 285 |
== अन्य भाषाओँ में == "शिकारी-संचयी" को अंग्रेज़ी में "हंटर-गैदरर" (hunter gatherer) कहते हैं। | अर्थशास्त्र | 5,419 | null | 14 |
== विशेषताएँ == शिकारी-संचयी गुटों को जगह-से-जगह खाना और शिकार खोजते हुए जाना पड़ता है, इसलिए अक्सर इनके कोई स्थाई ठिकाने नहीं होते। ऐसे समाजों के समूह छोटे हुआ करते हैं (लगभग १०-३० व्यक्तियों के) क्योंकि जंगली स्रोतों से एक मानव के योग्य खाना बटोरने के लिए बड़े क्षेत्रफल की ज़रुरत होती है। अगर खाने की भरमार हो तो अक्स... | अर्थशास्त्र | 5,420 | null | 190 |
== इन्हें भी देखें == पुरापाषाण काल भीमबेटका पाषाण आश्रय | अर्थशास्त्र | 5,421 | null | 10 |
सामाजिक स्वामित्व का सन्दर्भ समाजवादी आर्थिक प्रणालियों में उत्पादन के साधनों के लिए स्वामित्व के विभिन्न प्रकारों से हैं; इस में सार्वजनिक स्वामित्व, कर्मचारी स्वामित्व, सहकारी स्वामित्व, इक्विटी का नागरिक स्वामित्व, और आम स्वामित्व शामिल हैं। | अर्थशास्त्र | 5,422 | null | 36 |
साम्यवाद, कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स द्वारा प्रतिपादित तथा साम्यवादी घोषणापत्र में वर्णित समाजवाद की चरम परिणति है। साम्यवाद, सामाजिक-राजनीतिक दर्शन के अंतर्गत एक ऐसी विचारधारा के रूप में वर्णित है, जिसमें संरचनात्मक स्तर पर एक समतामूलक वर्गविहीन समाज की स्थापना की जाएगी। ऐतिहासिक और आर्थिक वर्चस्व के निजी प्रति... | अर्थशास्त्र | 5,423 | null | 174 |
== इतिहास == प्रथम विश्वयुद्ध, समाजवादी आंदोलन के लिए एक महत्वपूर्ण घटना थी। जहाँ एक ओर तो इसके आरंभ होते ही समाजवादी आंदोलन और उनका अंतरराष्ट्रीय संगठन प्राय: छिन्न-भिन्न हो गया वहीं दूसरी ओर इसके बीच रूस में बोल्शेविक क्रांति (अक्टूबर-नंवबर 1917) हुई और संसार में प्रथम सफल समाजवादी राज्य की नींव पड़ी जिसका संसार के स... | अर्थशास्त्र | 5,424 | null | 185 |
== रूस में साम्यवाद == बोल्शेविक दल रूस के कई समाजवादी दलों में से एक था। 1917 की विशेष परिस्थितियों में इसको सफलता प्राप्त हुई। रूसी समाजवाद की पार्श्वभूमि अन्य यूरोपीय समाजवादों की स्थिति से भिन्न थी। रूसी साम्राज्य यूरोप के अग्रणी देशों से उद्योग धंधों में पिछड़ा हुआ था, अत: यहाँ मजदूर वर्ग बहुसंख्यक और अधिक प्रभावश... | अर्थशास्त्र | 5,425 | null | 1,193 |
== समाजवाद (साम्यवाद) का प्रसार और कठिनाइयाँ == द्वितीय महायुद्ध के बीच और उसके बाद सोवियत सेनाओं की सफलता तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण संसार में समाजवाद (साम्यवाद सहित) का प्रभाव बढ़ा। युद्ध का अंत होने तक न केवल पूर्वी यूरोप सोवियत प्रभावक्षेत्र बन गया, वरन् सन् 1948 ई. तक इनमें से अधिकांश देशों में सा... | अर्थशास्त्र | 5,426 | null | 128 |
(१) मार्क्सवाद लेनिनवाद की धारणा थी कि साम्यवादी स्थापना क्रांति द्वारा ही संभव है परंतु यूगोस्लाविया और अल्बानिया को छोड़ कर शेष पूर्वीय यूरोप में युद्धकाल में साम्यवादी दलों का अस्तित्व नहीं के बराबर था और बाद में भी चेकोस्लोवाकिया को छोड़ कदाचित् किसी भी देश में इनका बहुमत नहीं था। पूर्वी यूरोप और उत्तरी कोरिया में ... | अर्थशास्त्र | 5,427 | null | 418 |
== विश्व के अन्य देशों में साम्यवाद == विश्व के अन्य देशों में साम्यवादी विचारधारा पर उपर्युक्त विचार परिवर्तन का गहरा प्रभाव पड़ा है। टीटो के विद्रोह के बाद पूर्व यूरोप के अन्य साम्यवादी देशों ने भी सोवियत प्रभाव से स्वतंत्र होने का प्रयत्न किया है। रूसी साम्यवादी ख्रुश्चेव के संशोधनों को अस्वीकार करते हैं और सोवियत त... | अर्थशास्त्र | 5,428 | null | 362 |
== बाहरी कड़ियाँ == साम्यवाद भूमिका समाजवाद के आधुनिक रूप "ब्रुसेल्स में साम्यवाद और फ़ासीवाद की तुलना को रूस ने बेहयाई बताया" | अर्थशास्त्र | 5,429 | null | 22 |
कोबरा इफ़ेक्ट या कोबरा प्रभाव तब होता है जब किसी समस्या का समाधान करने के लिए किया गया कोई प्रयास समस्या को बदतर बना देता है। यह एक प्रकार का अनपेक्षित परिणाम होता है। इस शब्द का उपयोग अक्सर अर्थव्यवस्था और राजनीति के संदर्भ में किया जाता है। | अर्थशास्त्र | 5,430 | null | 48 |
इसकी शब्द की उत्पत्ति ब्रिटिश भारत में हुई थी। ब्रिटिश सरकार दिल्ली में जहरीले कोबरा सांपों की बढ़ती संख्या को लेकर चिंतित थी। इसलिए सरकार ने हर मृत कोबरा के लिए एक इनाम की पेशकश की। प्रारंभ में यह रणनीति सफल रही क्योंकि इनाम के लिए लोगों ने बड़ी संख्या में सांप मार दिए। किंतु बाद में कुछ बुद्धिमान लोगों ने अधिक पैसा क... | अर्थशास्त्र | 5,431 | null | 117 |
=== वियतनाम में चूहे === फ्रांसीसी औपनिवेशिक शासन के वियतनाम के हनोई शहर में भी एक ऐसी ही एक घटना हुई। 1902 में चूहों की बढ़ी हुई संख्या को देखते हुए, औपनिवेशिक सरकार ने एक इनाम कार्यक्रम बनाया जिसमें मारे गए प्रत्येक चूहे के लिए ईनाम भुगतान का प्रबंध किया गया था। इसके लिए सबूत के तौर पर लोगों को चूहे की कटी हुई पूँछ ज... | अर्थशास्त्र | 5,432 | null | 115 |
=== चीन में माओ का चार कीट अभियान === 1958 में, माओत्से तुंग ने बीमारी के प्रसारण के लिए जिम्मेदार मच्छरों, कृन्तकों, मक्खियों और गौरैयों को मारने के लिए चीन में चार कीट अभियान शुरू किया। इस नीति ने चीन में गौरैयाओँ का लगभग सफाया कर दिया, लेकिन इसने भीषण चीनी अकाल में भी योगदान बन गया; गौरैया की अनुपस्थिति से कीटों का ... | अर्थशास्त्र | 5,433 | null | 73 |
== यह सभी देखें == ब्लोबैक - एक गुप्त ऑपरेशन के अनपेक्षित परिणाम जो आक्रामक सरकार की नागरिक आबादी द्वारा पीड़ित होते हैं कैंपबेल का नियम गुडहार्ट का नियम लियोपोल्ड II की कटे हाथों की नीति स्ट्रीसंड प्रभाव | अर्थशास्त्र | 5,434 | null | 38 |
आर्थिक भूगोल में फुटलूज़ उद्योग ऐसे उद्योगों को कहा जाता है जिनकी अवस्थिति पर कच्चे माल के स्रोत से दूरी (परिवहन लागत) का असर नहीं होता। ऐसे अधिकतर उद्योग कहीं भी स्थापित किया जा सकते हैं और इन्हें कच्चे माल के स्रोत के समीप लगाने की अनिवार्यता नहीं होती जैसे इलेक्ट्रॉनिक उद्योग Example automobile industry, engineering... | अर्थशास्त्र | 5,435 | null | 57 |
प्रमुख कृषि उत्पादों को मोटे तौर पर खाद्य पदार्थ, फाइबर, ईंधन और कच्चे माल में बांटा जा सकता है। | अर्थशास्त्र | 5,436 | null | 19 |
भू-आवरण द्वारा किसी क्षेत्र विशेष के धरातल पर वर्तमान अवघटनाओं, चाहे वे प्राकृतिक हों अथवा मानव कृत, को संसूचित किया जाता है। उपग्रह छाया चित्रों और हवाई चित्रों के अनुप्रयोग ने भू आवरण के अध्ययन को और अधिक सरल बनाया है एवं इसके अनुप्रयोग को बढ़ावा दिया है। | अर्थशास्त्र | 5,437 | null | 48 |
भूमि उपयोग पृथ्वी के किसी क्षेत्र का मनुष्य द्वारा उपयोग को सूचित करता है। सामान्यतः जमीन के हिस्से पर होने वाले आर्थिक क्रिया-कलाप को सूचित करते हुए उसे वन भूमि, कृषि भूमि, परती, चरागाह इत्यादि वर्गों में बाँटा जाता है। और अधिक तकनीकी भाषा में भूमि उपयोग को "किसी विशिष्ट भू-आवरण-प्रकार की रचना, परिवर्तन अथवा संरक्षण ह... | अर्थशास्त्र | 5,438 | null | 202 |
== भूमि उपयोग वर्गीकरण == भारत में ग्रामीण भूमि उपयोग की विभिन्न श्रेणियां इस प्रकार हैं- | अर्थशास्त्र | 5,439 | null | 16 |
== भूमि उपयोग नीति == भारत में पहली बार तत्कालीन प्रधानमन्त्री राजीव गाँधी के प्रयासों द्वारा सन् 1988 में एक राष्ट्रीय भूमि उपयोग नीति बनाई गयी। इसके द्वारा भूमि उपयोग में अवांछित परिवर्तन को अवैध क़रार दिया गया। हालाँकि सत्तर के दशक में ही ज्यादातर राज्यों ने भूमि उपयोग बोर्डों की स्थापना की थी किन्तु इनमें कार्य राष... | अर्थशास्त्र | 5,440 | null | 270 |
किसी भी भौगोलिक क्षेत्र के पर्यावरण और पारितन्त्रीय संतुलान में भूमि उपयोग की काफ़ी भूमिका होती है। प्राकृतिक पर्यावरण के भूदृश्य वर्तमान समय के मानुष आक्रांत भूदृश्यों से बहुत अलग हुआ करते थे। मनुष्य ने प्राकृतिक पर्यावरण और पारितंत्रों को तकनीकी और वैज्ञानिक ज्ञान द्वारा बदल कर नव्य पारितंत्रों की स्थापना की है। इन प... | अर्थशास्त्र | 5,441 | null | 107 |
== शहरीकरण == शहरीकरण पिछली सदी और वर्तमान काल की सर्वाधिक प्रमुख घटनाओं में से एक है जिससे भूमि उपयोग में वैश्विक स्तर पर व्यापक परिवर्तन आये हैं। नगर एक अत्यधिक संकुचित क्षेत्र में अत्यधिक संकेंद्रित ऊर्जा उपयोग का केन्द्र होता है और अपनी बहुत सी आवश्यकताओं के लिये अपने इर्द-गिर्द के क्षेत्र पर आश्रित होता है, अतः नग... | अर्थशास्त्र | 5,442 | null | 125 |
== सुदूर संवेदन अनुप्रयोग और भू-सूचना विज्ञान == आधुनिक सुदूर संवेदन तकनीकों का विकास और भौगोलिक सूचना तन्त्र तथा भूमितिकी के क्षेत्र में प्रगति भूमि उपयोग के ज्यादा सटीक मानचित्रण और विश्लेषण के मौके उपलब्ध करवा रहे हैं। हाल ही में नागपुर स्थित 'राष्ट्रीय मृदा सर्वेक्षण एवं भूमि उपयोग नियोजन ब्यूरो' और हैदराबाद स्थित ... | अर्थशास्त्र | 5,443 | null | 82 |
== बाहरी कड़ियाँ == भूमि संसाधन विभाग, ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार राष्ट्रीय मृदा सर्वेक्षण एवं भूमि उपयोग नियोजन ब्यूरो Land Use Plannning भारत में भूमि उपयोग नियोजन का पोर्टल Land Use Policy नामक जर्नल भारत की भूमि उपयोग नीति (2013) पूरा ड्राफ्ट नियोजन विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार | अर्थशास्त्र | 5,444 | null | 48 |
भूमि उपयोग नियोजन मनुष्य द्वारा भूमि के आर्थिक उपयोग को नियोजित करने की क्रिया के रूप में परिभाषित किया जाता है। | अर्थशास्त्र | 5,445 | null | 21 |
भौगोलिक उपदर्शन (Geographical indication) या जी आई (GI) ऐसा नाम या चिन्ह होता है जो विशेष रूप से किसी भौगोलिक स्थान या मूल स्थान (उदाहरण के लिए नगर, राज्य, क्षेत्र या देश) को इंगित करे। किसी उत्पादन के साथ प्रमाणित भौगोलिक उपदर्शन के प्रयोग से यह आश्वासन होता है कि वह वास्तव में अपने मूल स्थान में उन पारम्परिक विधियों ... | अर्थशास्त्र | 5,446 | null | 128 |
रबड़ के वृक्ष भूमध्य रेखीय सदाबहार वनों में पाए जाते हैं, इसके दूध, जिसे लेटेक्स कहते हैं से रबड़ तैयार किया जाता हैं। सबसे पहले यह अमेजन बेसिन में जंगली रूप में उगता था, वहीं से यह इंग्लैण्ड निवासियों द्वारा दक्षिणी-पूर्वी एशिया में ले जाया गया। पहले इसका प्रयोग पेन्सिल के निशान मिटाने के लिये किया जाता था। आज यह विश्... | अर्थशास्त्र | 5,447 | null | 322 |
== भौगोलिक दशाएं == रबड़ उष्ण कटिबन्धीय पौधा हैं। रबर का पौधा मूल रूप से भूमध्य जलवायु की उपज है l | अर्थशास्त्र | 5,448 | null | 21 |
विकासशील देश (developing country) शब्द का प्रयोग किसी ऐसे देश के लिए किया जाता है जिसके भौतिक सुखों का स्तर निम्न होता है (इस शब्द को लेकर 'तीसरी दुनिया के देशों' के साथ भ्रमित नहीं होना चाहिए)। चूंकि विकसित देश नामक शब्द की कोई भी एक परिभाषा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त नहीं है, अतः विकास के स्तर इन तथाकथित व... | अर्थशास्त्र | 5,449 | null | 116 |
== परिभाषा == संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव कोफी अन्नान ने विकसित देश की निम्न परिभाषा दी है। "एक विकसित देश वह होता है जो अपने सभी नागरिकों को सुरक्षित पर्यावरण में स्वतंत्र और स्वस्थ्य जीवन का आनंद लेने का अवसर देता है।" परन्तु संयुक्त राष्ट्र के सांख्यिकी प्रभाग के अनुसार, | अर्थशास्त्र | 5,450 | null | 51 |
संयुक्त राष्ट्र प्रणाली में "विकसित" और "विकाशील" देशों अथवा क्षेत्रों की उपाधि के लिए स्थापित संविद नहीं है। और यह इस तथ्य पर ध्यान देता है कि | अर्थशास्त्र | 5,451 | null | 27 |
उपाधियाँ जैसे "विकसित" और "विकासशील" मात्र सांख्यिकीय सुविधा के लिए बनाई जाती हैं और आवश्यक रूप से किसी देश अथवा क्षेत्र के विकास की प्रक्रिया में किसी विशेष स्थिति पर पहुंचने के निर्णय को नहीं बताती है। संयुक्त राष्ट्र इस तथ्य पर भी ध्यान देता है कि: | अर्थशास्त्र | 5,452 | null | 47 |
आम व्यवहार में एशिया में जापान, उत्तरी अमेरिका में कनाडा और संयुक्त राष्ट्र, ओशेनिका में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड और यूरोप को विकसित क्षेत्र माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार के आंकड़ों में, दक्षिणी अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ को भी विकसित क्षेत्र माना जाता है और इसराइल को विकसित देश माना जाता है, पूर्व यूगोस्लाविया में ... | अर्थशास्त्र | 5,453 | null | 315 |
निम्न आय वाले देशों की प्रति व्यक्ति जीएनआई 975 अमेरिकी डॉलर या उससे कम थी। निम्न मध्य आय वाले देशों की प्रति व्यक्ति जीएनआई 976 अमेरिकी डॉलर और 3,855 अमेरिकी डॉलर के बीच थी। उच्च मध्यम आय वाले देशों की प्रति व्यक्ति जीएनआई 3,856 अमेरिकी डॉलर और 11,905 अमेरिकी डॉलर के बीच थी। उच्च आय वाले देशों की प्रति व्यक्ति जीएनआई ... | अर्थशास्त्र | 5,454 | null | 148 |
== विकासशील देशों में इसकेउद्देश्य एवं सीमाओं की विवेचना कीजिए == एक देश के विकास को सांख्यिकीय सूचकांक जैसे प्रति व्यक्ति आय (जीडीपी), जीवन प्रत्याशा, साक्षरता दर, इत्यादि द्वारा मापा जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने एचडीआई विकसित किया है, जो कि ऊपर बताये गए सांख्यिकी का एक यौगिक सूचकांक है, जिसका प्रयोग उन देशों में मानव ... | अर्थशास्त्र | 5,455 | null | 318 |
== ' == विकासशील राष्ट्र की अवधारणा, किसी एक नाम से या अन्य नाम से, विविध प्रकार की सैधांतिक प्रणालियों में पाई जाती है - उदाहरण के लिए, उपनिवेशों को स्वतंत्र कराने के सिद्धांतों में, मुक्ति धर्मशास्त्र में, मार्क्सवाद में, साम्राज्यवाद विरोध में और राजनीतिक अर्थव्यवस्था में. 'विकासशील देश', शब्द के प्रयोग की आलोचना भी... | अर्थशास्त्र | 5,456 | null | 351 |
== अविकसित देशों की विशेषताएँ == अर्द्धविकसित देशों की मुख्य विशेषताओं को निम्नांकित लक्षणों के द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है जो इन देशों के विकास में बाधा का कार्य करते हैं: | अर्थशास्त्र | 5,457 | null | 32 |
=== विषम चक्र === विकास अर्थशास्त्रियों के अनुसार, अर्द्धविकसित देश ऐसे विषम चक्रों में घिरे रहते हैं जो इन देशों में विकास हेतु बाधा उत्पन्न करते हैं । इन चक्रों को निम्न प्रकार अभिव्यक्त किया जा सकता है: | अर्थशास्त्र | 5,458 | null | 38 |
निम्न आय निम्न बचतें → निम्न पूँजी निर्माण → निम्न उत्पादकता → निम्न आय, निम्न आय → बाजार का लघु आकार → विनियोग की प्रेरणा का अभाव → वृद्धि की न्यूनता → निम्न आय, निम्न आय → निम्न उपभोग → निम्न स्वास्थ्य स्तर → निम्न उत्पादकता → निम्न आय, निम्न आय → सरकार का कम आगम → शिक्षा एवं सामाजिक सेवाओं पर कम व्यय → निम्न उत्पादक... | अर्थशास्त्र | 5,459 | null | 108 |
=== कृषि पर निर्भरता एवं अनुत्पादक कृषि === मेयर एवं बाल्डविन के अनुसार- अर्द्धविकसित अर्थव्यवस्था मुख्यतः प्राथमिक अर्थव्यवस्था या कृषि-प्रधान अर्थव्यवस्था होती है अर्थात् आर्थिक व उत्पादक क्रियाओं में कृषि एक महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करती है । इन देशों में जनसंख्या का 70 प्रतिशत से अधिक भाग कृषि क्षेत्र पर निर्भर... | अर्थशास्त्र | 5,460 | null | 196 |
=== धीमी एवं असंतुलित औद्योगिक वृद्धि === अर्द्धविकसित देशों में औद्योगिक क्षेत्र में धीमी व असंतुलित वृद्धि होती है। इसका कारण है पूँजी, साहसवृति व नवप्रवर्तन योग्यता का अभाव, बेहतर व कारगर तकनीक का प्रयोग सम्भव न होना, औद्योगिक सुरक्षा का अभाव, प्रबंधकों व श्रमिक वर्ग के मध्य अच्छे संबंध विद्यमान न होना । इसके साथ ही... | अर्थशास्त्र | 5,461 | null | 136 |
=== निम्न श्रम उत्पादकता === निम्न श्रम उत्पादकता अर्द्धविकास का लक्षण एवं कारक है। अर्द्धविकसित देशों में कृषि व गैर कृषि क्षेत्र में श्रम उत्पादकता का स्तर अल्प होता है। इन देशों में जनसंख्या की वृद्धि के साथ भूमि पर दबाव बढ़ता चला जाता है। यद्यपि इसे सुधरी तकनीक, खादों के बेहतर प्रयोग, सिंचाई की बेहतर सुविधाओं के द्... | अर्थशास्त्र | 5,462 | null | 123 |
=== पूँजी निर्माण की निम्न दरें === प्रो. रागनर नर्क्से ने 'प्रॉबुलेम्स ऑफ कैपितल फॉर्मेशन इन अन्डरदेवेलप्ड कन्ट्रीज' (अल्पविकसित देशों में पूंजी-निर्माण की समस्या) में लिखा है कि एक अर्द्धविकसित देश वह है जहाँ जनसंख्या व प्राकृतिक संसाधनों के सापेक्ष पूँजी की कमी विद्यमान होती है। इनके अनुसार, अर्द्धविकास एवं धीमा औद्... | अर्थशास्त्र | 5,463 | null | 215 |
=== आय व सम्पत्ति वितरण में असमानताएँ === अर्द्धविकसित देशों में आय एवं सम्पत्ति के वितरण में असमानताएँ विद्यमान होती है अर्थात् समाज के एक छोटे वर्ग के पास देश की सम्पत्ति व संसाधनों का अधिकांश भाग विद्यमान होता है तथा समाज का अधिकांश भाग जीवन निर्वाह स्तर पर गुजारा करता है । यह ध्यान रखना आवश्यक है कि कोई भी देश आय क... | अर्थशास्त्र | 5,464 | null | 171 |
=== अर्न्तसंरचना का अभाव === अर्द्धविकसित देशों में सामाजिक उपरिमदों तथा विद्युत यातायात संवाद वहन के साधनों जिन्हें अग्रिम शृंखला कहा जाता है का अभाव होता है । अरचना के निर्माण हेतु भारी विनियोग की आवश्यकता होती है लेकिन इन देशों में पूँजी का अभाव इसके निर्माण हेतु अवरोध उत्पन्न करता है । अर्न्तसंरचना विकास हेतु निजी ... | अर्थशास्त्र | 5,465 | null | 99 |
=== बाजार की अपूर्णताएँ === अर्द्धविकसित देशों में बाजार की अपूर्णताएँ विद्यमान होने से अभिप्राय यह है कि उत्पादन के साधनों में गतिशीलता का अभाव होता है, श्रम विभाजन एवं विशिष्टीकरण का अदा निम्न होने के कारण उत्पादन के साधनों का पूर्ण ज्ञान न होने के कारण माँग के अनुरूप उत्पादन नहीं हो पाता कीमतों में तीव उच्चावचन की प... | अर्थशास्त्र | 5,466 | null | 101 |
=== द्वैत अर्थव्यवस्था === अर्द्धविकसित देशों की द्वैत प्रकृति से अभिप्राय है कि इन देशों में एक और सापेक्षिक रूप से बड़ा घरेलू क्षेत्र विद्यमान होता है और दूसरी ओर आधुनिक क्षेत्र संकुचित होता है। प्रो.जे.एच. बूके के अनुसार- अर्थव्यवस्था का धरेलू क्षेत्र सीमित आवश्यकताओं से एवं पूँजीवादी या आधुनिक क्षेत्र असीमित आवश्यक... | अर्थशास्त्र | 5,467 | null | 169 |
=== समर्थ व कुशल प्रशासन व संगठनात्मक ढांचे का अभाव === अर्द्धविकसित देशों में सामाजिक व राजनीतिक जागरूकता का अभाव होता है। मिचेल पी टोडारो के अनुसार- इन देशों का एक मुख्य लक्षण सापेक्षिक रूप से दुर्बल प्रशासनिक मशीनरी है। वस्तुत: इन देशों में प्रबन्ध व संगठनात्मक कुशलताओं की कमी होती है। कार्य से संबंधित नियम कानून व ... | अर्थशास्त्र | 5,468 | null | 99 |
=== अनार्थिक संस्कृति === सामान्यतः अर्द्धविकसित देशों में भौतिक समृद्धि को अधिक महत्व नहीं दिया जाता। इसी कारण अधिक आय प्राप्त करने की इच्छा व मनोवृत्ति विद्यमान नहीं होती । अनावश्यक उपभोग उचित नहीं माना जाता। व्यक्ति भाग्य व नियति को महत्वपूर्ण मानते हैं जिसका प्रभाव कार्य करने की स्थितियों पर पड़ता है। | अर्थशास्त्र | 5,469 | null | 53 |
=== मध्य वर्ग का कम या अस्तित्वहीन होना === अर्द्धविकसित देशों में प्राय: मध्य वर्ग की अनुपस्थिति दिखायी देती है । इसका मुख्य कारण यह है कि आय का मुख्य स्रोत कृषि क्षेत्र होता है । सामान्यत: कृषि भूमि धनी वर्ग के नियंत्रण व स्वामित्व में होती है व सामान्य कृषक के पास इतनी अल्प भूमि होती है कि उससे जीवन निर्वाह ही कठिना... | अर्थशास्त्र | 5,470 | null | 165 |
=== आर्थिक निर्भरता === अधिकांश अर्द्धविकसित देश लंबे समय तक गुलामी व औपनिवेशिक उत्पीड़न के शिकार रहे हैं। राजनीतिक स्वतंत्रता प्राप्त करने के उपरान्त भी यह आर्थिक रूप से विकसित देशों पर निर्भर रहे हैं। अल्पविकसित देशों द्वारा विकसित देशों का दृष्टिकोण एवं मूल्यों को अपनाया गया है। प्राय: इन देशों ने विकसित देशों के वि... | अर्थशास्त्र | 5,471 | null | 97 |
=== विदेशी व्यापार उन्मुखता === अर्द्धविकसित देश सामान्यत: विदेश व्यापार उन्मुख होते हैं। प्रायः इनके द्वारा कच्चे माल व प्राथमिक वस्तुओं का निर्यात एवं उपभोक्ता वस्तुओं व पूँजीगत वस्तुओं व मशीनरी का आयात किया जाता है। निर्यातों पर निर्भर होने के कारण अर्द्धविकसित देशों को कई बाधाओं का सामना करना पड़ता है । निर्यात क्ष... | अर्थशास्त्र | 5,472 | null | 284 |
== उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की सूची == अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की विश्व आर्थिक आउटलुक रिपोर्ट अप्रैल 2010 के अनुसार, निम्नलिखित को उभरती हुई और विकासशील अर्थव्यवस्था माना गया है। | अर्थशास्त्र | 5,473 | null | 30 |
=== वे विकासशील देश जो आईएमएफ द्वारा सूचीबद्ध नहीं किये गए हैं। === Cuba North Korea | अर्थशास्त्र | 5,474 | null | 16 |
=== उन विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की सूची (चार एशियन टाइगर्स और नए यूरो देश) जिन्हें अब उन्नत अर्थव्यवस्था माना जाता है। === Hong Kong (1997 के बाद) Singapore (1997 के बाद) South Korea (1997 के बाद) Taiwan (1997 के बाद) Cyprus (2001 के बाद) Slovenia (2007 के बाद) Malta (2008 के बाद) Czech Republic (2009 के बाद) Slovakia (... | अर्थशास्त्र | 5,475 | null | 60 |
== टाईपोलॉजी और देशों के नाम == देशों को अक्सर मोटे तौर पर विकास की चार श्रेणियों में रखा जाता है। प्रत्येक वर्ग में वे देश शामिल हैं जिन्हें उनसे सम्बंधित लेखों में सूचीबद्ध किया गया है। "विकासशील राष्ट्र" नामक शब्द किसी विशिष्ट, समान समस्या को निर्धारित करने के लिए कोई लेबल नहीं है। | अर्थशास्त्र | 5,476 | null | 54 |
नव औद्योगीकृत देश (एनआईसी) वे देश हैं जिनकी अर्थव्यवस्थाएं विकासशील देशों से अधिक उन्नत और विकसित हैं, परन्तु जिन्होंने अभी भी विकसित देश होने के सभी संकेत नहीं दिए हैं। एनआईसी विकसित और विकासशील देशों के बीच एक वर्ग है। इसमें ब्राजील, चीन, भारत, मलेशिया, मैक्सिको, फिलीपींस,दक्षिण अफ्रीका, थाईलैंड और [तुर्की|टर्की] शाम... | अर्थशास्त्र | 5,477 | null | 137 |
किसी देश की आर्थिक विचारधारा तब आर्थिक राष्ट्रवाद (Economic nationalism) कहलाती है जब वह अपने अर्थतंत्र, श्रमशक्ति और पूंजी-निर्माण पर घरेलू नियंत्रण पर बल देता है और आवश्यक होने पर कर (टैरिफ) तथा अन्य पाबन्दियाँ लगाने से नहीं हिचकता। कई दृष्टियों से आर्थिक राष्ट्रवाद और वैश्वीकरण एक-दूसरे के विरोधी हैं। आर्थिक राष्ट्र... | अर्थशास्त्र | 5,478 | null | 69 |
नियोजित अर्थव्यवस्था (planned economy) ऐसी आर्थिक व्यवस्था होती है जहाँ विभिन्न माल और सेवाओं से सम्बन्धित निवेश, उत्पादन और वितरण सरकार द्वारा बनाई योजनाओं के अनुसार होता है। यह नियोजन केन्द्रीय स्तर पर, प्रान्तीय स्तर पर या अन्य किसी विधि से हो सकता है। अक्सर ऐसी अर्थव्यवस्थाओं में बाज़ार में कीमतें भी सरकार द्वारा न... | अर्थशास्त्र | 5,479 | null | 80 |
== इन्हें भी देखें == अभाव अर्थव्यवस्था अर्थव्यवस्था आर्थिक संतुलन | अर्थशास्त्र | 5,480 | null | 10 |
बाज़ार अर्थव्यवस्था (market economy) ऐसी अर्थव्यवस्था होती है जिसमें निवेश, उत्पादन और वितरण के निर्णय उन मूल्य संकेतों द्वारा निर्धारित होते हैं जो प्राकृतिक रूप से स्वयं ही माँग और आपूर्ति कि स्थितियों से उत्पन्न हों। ऐसी अर्थव्यवस्था में किसी चीज़ की बाज़ार में क्या कीमत हैं, यह निर्णय उस चीज़ की ग्रहकों द्वारा माँग... | अर्थशास्त्र | 5,481 | null | 94 |
अर्थशास्त्र में मुक्त बाज़ार (free market) ऐसी आर्थिक व्यवस्था होती है जिसमें माल और सेवाओं की कीमतें खुले बाज़ार में निर्धारित होती हैं। मुक्त बाज़ार में माँग और आपूर्ति सरकारी या अन्य आधिकारिक या कृत्रिम हस्तक्षेप से स्वतंत्र होते हैं और इनमें आर्थिक संतुलन बनने से बाज़ार में कीमतें तय होती हैं। इस से विपरीत नियंत्रि... | अर्थशास्त्र | 5,482 | null | 104 |
== इन्हें भी देखें == नियंत्रित बाज़ार माल और सेवाएँ अभाव अर्थव्यवस्था | अर्थशास्त्र | 5,483 | null | 12 |
लोकतांत्रिक पूंजीवाद, जिसे कल्याण पूंजीवाद के रूप में भी जाना जाता है, एक आर्थिक प्रणाली है जो पूंजीवादी सिद्धांतों को एक मजबूत कल्याणकारी राज्य से जोड़ती है, ताकि व्यक्तिगत स्वतंत्रता की ज्यादतियों पर अंकुश लगाया जा सके। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद पूंजीवाद और लोकतंत्र (विशेष रूप से यूरोप में) सह-अस्तित्व में देखे गए थे... | अर्थशास्त्र | 5,484 | null | 84 |
== यह सभी देखें == लोकतांत्रिक समाजवाद मिश्रित अर्थव्यवस्था विनियामक पूंजीवाद राज्य का पूंजीवाद कल्याणकारी पूंजीवाद | अर्थशास्त्र | 5,485 | null | 16 |
== संदर्भ == Benne, Robert (1981), The Ethic of Democratic Capitalism: A Moral Reassessment, Philadelphia: Fortress Press, आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0-8006-1445-3 Benne, Robert (1981), The Ethic of Democratic Capitalism: A Moral Reassessment, Philadelphia: Fortress Press, आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0-8006-1445-3 J. Michael Miller, संपा॰ (1996), ... | अर्थशास्त्र | 5,486 | null | 96 |
वितरणवाद (Distributism अथवा distributionism एक आर्थिक विचारधारा है जो १९वीं सदी के अन्त में और २०वीं सदी की शुरुआत में पॉप लुई तेहरवाँ और पॉप लुई ग्याहरवें के शिक्षण से यूरोप में आरम्भ हुई। | अर्थशास्त्र | 5,487 | null | 34 |
सामाजिक स्वामित्व का सन्दर्भ समाजवादी आर्थिक प्रणालियों में उत्पादन के साधनों के लिए स्वामित्व के विभिन्न प्रकारों से हैं; इस में सार्वजनिक स्वामित्व, कर्मचारी स्वामित्व, सहकारी स्वामित्व, इक्विटी का नागरिक स्वामित्व, और आम स्वामित्व शामिल हैं। | अर्थशास्त्र | 5,488 | null | 36 |
सहचर पूँजीवाद या सुहृद पूँजीवाद या क्रोनी कैपिटलिज़्म (Crony Capitalism) अर्थव्यवस्था की उस अवस्था का सूचक है जहाँ व्यापार-वाणिज्य में सफलता व्यापारी और सरकारी अधिकारियों के आपसी संबंध से तय होने लगती है। इसके तहत सरकारी तंत्र द्वारा व्यापारियों-उद्योगपतियों को कानूनी स्वीकृति (legal permits) के आवंटन में पक्ष लेकर, उन... | अर्थशास्त्र | 5,489 | null | 87 |
== बाहरी कड़ियाँ == चीन ने फिर से भारत को पीछे छोड़ा... किन्तु इस बार भ्रष्टाचार में। (स्वामीनाथन एस. अंकलेसरिया अय्यर) सहचर पूंजीवाद | अर्थशास्त्र | 5,490 | null | 23 |
अर्थशास्त्र में अतिस्फीति या हाइपरइनफ्लेशन (hyperinflation) बहुत अधिक और तेज़ी से बढ़ती मुद्रास्फीति (महंगाई) की स्थिति को कहते है। यह मुद्रा के वास्तविक मूल्य को तेज़ गति से गिराती है, क्योंकि अधिकांश माल और सेवाओं की कीमतों में बेताहाशा वृद्धि होने लगती है। अतिस्फीति की हालात में लोगों को भयंकर आर्थिक कठिनाईयों का सा... | अर्थशास्त्र | 5,491 | null | 207 |
== इन्हें भी देखें == मुद्रा (विनिमय माध्यम) मुद्रा आपूर्ति | अर्थशास्त्र | 5,492 | null | 10 |
आर्थिक असार एक एसी स्थिति है जहां सम्पति कीमते अपनी आन्तरिक मूल्यो से ज़्यादा है और कभी भी किसी बुलबुले के समान फट सकती है। क्योंकि आन्तरिक मूल्यो का वास्तविक बाज़ारो पर्यवेक्षण करना कठिन है, आर्थिक असारे अक्सर पुनरवलोकन में ही जान सकते हैं जब कीमते गिरनी लगती है। सट्टेबाज़ी आर्थिक असारो क मुख्य कारण है। कुछ अर्थशास्त्... | अर्थशास्त्र | 5,493 | null | 67 |
== इतिहास == सन १६३७ में नेथरलैंड्स में सुर्खो की अनुबन्द कीमतें असाधारण उच्च स्तर पर रहीं और फिर ध्वन्स हो गईं। सुर्ख फूलो की कीमतें एक कुशल कारीगर के वार्षिक वेतन से १० गुना ज़्यादा थी और लोग बड़ी मात्रा में खरीदने लगे। जब कीमते गिरनी लगी तो बहुत से लोगों का नुकसान हुआ। इसलिए इस घटना को सुर्ख उन्माद भी कहा जाता है। | अर्थशास्त्र | 5,494 | null | 65 |
== प्रभाव == असारो का प्रभाव आर्थिक विचारों के कई स्कूलों के बीच बहस हुआ है; ये आम तौर पर फायदेमंद नहीं माना जाता है, लेकिन इनके निर्माण और विनाश कितान हानिकारक है, इस विषय पर अब भी चर्चा हो रही है। मुख्यधारा के अर्थशास्त्रियों का मान्ना है कि असारो की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती और इनके निर्माण का निवारण करना आर्थिक मन... | अर्थशास्त्र | 5,495 | null | 91 |
=== खर्च पर प्रभाव === अन्त में जब असारे टूट जाते हैं, तो जिन लोगो के पास अधिमूल्यांकित संपत्ति है, आमतौर पर कम धन की भावना का अनुभव करते हैं और विवेकाधीन खर्च में कटौती करते हैं और उसी समय आर्थिक विकास में बाधा उत्पन्न होता है या बदतर, आर्थिक मंदी को तीक्ष्ण करते हैं। | अर्थशास्त्र | 5,496 | null | 55 |
== संभावित कारण == आज तक, इस घटना की व्याख्या करने के लिए कोई व्यापक रूप से सिद्धांत स्वीकार करने के लिए नहीं है। हाल ही में कंप्यूटर जनित एजेंसी मॉडल अत्यधिक लाभ उठाने से असारो के पैदा होने का मुख्य कारक हो सकता है। | अर्थशास्त्र | 5,497 | null | 45 |
=== चलनिधि आधिक्य === असारो का एक संभावित कारण है अत्यधिक मौद्रिक तरलता वित्तीय प्रणाली में, जिसकी वजह से बैंकों अनुपयुक्त उधार देते हैं। सीधे शब्दों में कहें, जब बहुत ज्यादा पैसे भी कुछ संपत्ति पीछा कर रहा है, तब आर्थिक असार अक्सर होते हैं। अत्यधिक मौद्रिक तरलता इसका मुख्य कारण है। | अर्थशास्त्र | 5,498 | null | 52 |
=== सामाजिक मनोविज्ञान कारक === महत्तर मूर्ख सिद्धांत (Greater Fool Theory) हर्डिंग व्यावहारिक जोखिम (Moral Hazard) | अर्थशास्त्र | 5,499 | null | 16 |
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