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इस के लिए एक सारांश बनाएं: बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (Bihar School Examination Board) ने माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा (Secondary Teachers Eligibility Test,2019) के लिए एप्लीकेशन पोर्टल को एक बार फिर से खोला है. यह पोर्टल 24 दिसंबर तक के लिए खोला गया है. एक बार आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद आवेदकों को अपना फॉर्म एडिट करने के लिए वक्त भी दिया जाएगा. उम्मीदवार 25 और 26 दिसंबर को अपना फॉर्म एडिट कर सकते हैं. बीएसईबी (BSEB) ने माध्यमिक कक्षाओं के लिए 25270 और उच्च माध्यमिक कक्षाओं के 12065 शिक्षक पद विज्ञापित किए हैं.  बता दें कि इससे पहले सितंबर महीने में आवेदन की प्रक्रिया पूरी की गई थी. विषय के हिसाब से वैकेंसी देखने के लिए यहां क्लिक करें.  Bihar STET 2019 के लिए यहां से आवेदन करें  एसटीईटी (STET) परीक्षा में दो पेपर होंगे. पेपर 1 सेंकेंडरी स्कूल के शिक्षकों के लिए और पेपर 2 हायर सेकेंडरी स्कूल के शिक्षकों के चयन के लिए होगा. पेपर 1 के लिए उम्मीदवार के पास जिस विषय की परीक्षा देना चाहते हैं उस विषय में ग्रेजुएशन की डिग्री के साथ बीएड की डिग्री होनी चाहिए. वहीं पेपर 2 के लिए उम्मीदवार के पास संबंधित विषय में पोस्ट ग्रेजुएट और बीएड की डिग्री होनी चाहिए.  यह भी पढ़ें- Bihar Board Time Table: बिहार बोर्ड ने मैट्रिक और इंटर की परीक्षाओं के लिए जारी की डेट शीट, ऐसे करें चेक एसटीईटी परीक्षा पास करने के लिए सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों को 50 फीसद तो वहीं आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को 45 प्रतिशत अंक लाने होंगे. बता दें कि एसटीईटी परीक्षा का स्कोर सात साल तक मान्य होगा और इस बीच उम्मीदवार बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षक पद भर्ती के लिए आवेदन कर सकेंगे.  बीएसईबी ने फिजिकल एजुकेशन शिक्षक भर्ती की भी घोषणा की है. दिसंबर के पहले हफ्ते में होने वाले फिजिकल एजुकेशन एंड हेल्थ इंस्ट्रक्टर एबिलिटी टेस्ट के लिए एडमिट कार्ड भी जारी कर दिए गए हैं.
यहाँ एक सारांश है:बिहार बोर्ड ने एसटीईटी परीक्षा के लिए फिर से एप्लीकेशन पोर्टल खोला है यह पोर्टल 24 दिसंबर तक के लिए खोला गया है उम्मीदवार 25 और 26 दिसंबर को अपना फॉर्म एडिट कर सकते हैं
17
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: बिग बॉस 13 में धमाकेदार एंट्री मारने वाली पंजाबी मॉडल, एक्टर और सिंगर शहनाज गिल (Shehnaz Gill) ने यूट्यूब पर भी इन दिनों हंगामा मचा रखा है. 2 अक्टूबर को उनका पंजाबी सॉन्ग 'वहम (Veham)' रिलीज हुआ है, और इस सॉन्ग ने यूट्यूब (YouTube) पर धूम मचा रखी है. शहनाज गिल (Shehnaz Gill) का ये वीडियो यूट्यूब पर ट्रेंड कर रहा है, और खुद को पंजाबी कैटरीना कैफ बताने वाली शहनाज गिल का अंदाज काफी धांसू और उनका स्वैग देखने वाला है. इस वीडियो को यूट्यूब पर अभी तकर 20 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है.  शहनाज गिल (Shehnaz Gill) का पंजाबी सॉन्ग 'वहम (Veham)' खूब पसंद किया जा रहा है. इस सॉन्ग को शहनाज कौर गिल ने गाया है और इसके कंपोजर लाड्डी गिल हैं. इस सॉन्ग में शहनाज गिल के साथ जोरावर बरार नजर आ रहे हैं. शहनाज गिल के बोल बहुत ही कमाल के हैं, और इस वीडियो में उनके बॉयफ्रेंड उन्हें नो कह देते हैं, और शहनाज गिल इसका बहुत ही करारा जवाब भी देती हैं.  शहनाज गिल (Shehnaz Gill) ने बिग बॉस में बहुत ही धमाकेदार एंट्री की थी, और उनके अंदाज को सलमान खान ने भी पसंद किया था. दिलचस्प यह कि शहनाज गिल ने खुद को पंजाबी कैटरीना कैफ तक कह डाला था, और सलमान खान का इस पर बहुत ही बढ़िया रिस्पॉन्स भी आया था. वैसे भी शहनाज गिल बिग बॉस में बहुत ही बेबाकी के साथ खेल रही हैं, और पारस छाबड़ा के साथ उनकी नजदीकियां बढ़ती दिखाई जा रही हैं, टास्क के दौरान भी शहनाज गिल शानदार प्रदर्शन कर रही हैं.
संक्षिप्त पाठ: खुद को पंजाबी कैटरीना कैफ कहती हैं शहनाज यूट्यूब पर वायरल हो रहा है वीडियो धमाकेदार अंदाज में आईं नजर
14
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: भारत के लिए पहला वनडे वर्ल्ड कप जीतने वाले टीम इंडिया के पूर्व कप्तान और ऑलराउंड कपिल देव को भला कौन नहीं जानता. एक समय विश्व के बेस्ट ऑलराउंडर रहे कपिल देव का करियर भी मुश्किलों से भरा रहा. वह टीम में जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे. यहां तक कि टीम इंडिया के कई सीनियर क्रिकेटरों को भी उनकी प्रतिभा पर शक था और कपिल उनको प्रभावित नहीं कर पा रहे थे. फिर एक मैच में ऐसा हुआ कि इन सबकी धारणा बदल गई. इसके बाद कपिल देव ने टीम में अपना दावा मजबूती से रख दिया. वैसे टीम इंडिया को शुरुआती दौर से ही तेज गेंदबाज ऑलराउंडर की तलाश थी, जो कपिल देव पर जाकर खत्म हुई थी. हालांकि वर्तमान में भी उसे एक तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर की जरूरत है. कपिल देव एक समय पर वर्ल्ड में टेस्ट में सबसे अधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज रहे थे. आइए जानते हैं कि एक पूर्व भारतीय खिलाड़ी ने कपिल देव की प्रतिभा का कैसे बखान किया... पूर्व भारतीय टेस्ट खिलाड़ी यजुर्विंद्र सिंह ने शनिवार को क्रिकेट क्लब आफ इंडिया में पहला ‘राजसिंह डूंगरपुर स्प्रिट आफ क्रिकेट लेक्चर’ के दौरान कपिल देव का जिक्र करते हुए उनकी कहानी सुनाई. उन्होंने बताया कि किस तरह से पूर्वी अफ्रीका में 1978 में खेली गई एक पारी ने युवा खिलाड़ी कपिल देव की किस्मत बदल दी थी और कुछ शीर्ष भारतीय क्रिकेटरों की उनके बारे में राय भी बदल गई थी. यजुर्विंद्र ने हरियाणा के रहने वाले कपिल की राजस्थान क्रिकेट टीम के साथ अतिरिक्त सदस्य के रूप में पूर्वी अफ्रीका के दौरे का जिक्र किया. यजुर्विंद्र ने कहा कि राजसिंह डूंगरपुर ने कपिल देव को अतिरिक्त सदस्य के रूप में चुना था. यजुर्विंद्र ने आगे कहा, ‘हमारी टीम काफी मजबूत थी जिसमें टाइगर (पटौदी) सहित कई टेस्ट खिलाड़ी शामिल थे. जब कपिल बल्लेबाजी के लिए गया, तो हमारी टीम लगभग 270 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए नौ विकेट गंवा चुकी थी और संकट में थी. जिस तरह से कपिल बल्लेबाजी के लिए गया, तो टाइगर ने राजसिंह के पास कोई टिप्पणी की और संदेह जताया कि क्या यह टीम को बचा सकता है.’ उन्होंने बताया कि इस पारी में कपिल का साथ सैयद किरमानी ने दिया. उन्होंने कहा, ‘जब कपिल क्रीज पर उतरा तो सैयद किरमानी तीन रन पर खेल रहे थे और जब उन्होंने मैच समाप्त किया तो वह 53 रन पर नाबाद थे और किरमानी छह रन पर. कपिल ने मैदान पर जाने से पहले मुझसे कहा था कि मैं सीधे बल्ले से खेलूंगा. उन्होंने पहली गेंद ही छक्के लिए भेज दी थी.’ इस पारी ने दौरे पर गये क्रिकेटरों के मुंह बंद कर दिये थे और वे कपिल देव की प्रतिभा से अवगत हो गये थे.टिप्पणियां राजकोट में जन्में इस पूर्व क्रिकेटर ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हाल में समाप्त हुई टेस्ट सीरीज के दौरान खेल भावना नहीं दिखाने पर पर अफसोस भी जताया. इंग्लैंड के खिलाफ 1976.77 में बेंगलूर में अपने टेस्ट पदार्पण पर शॉर्ट लेग पर खड़े होकर सात कैच लेकर ऑस्ट्रेलिया के ग्रेग चैपल के रिकॉर्ड की बराबरी करने वाले यजुवेंद्र ने कहा, ‘खेल भावना खतरे में है और अधिकारियों को कुछ ठोस कदम उठाने की जरूरत है.’ अपनी उपलब्धि को याद करते हुए यजुवेंद्र ने कहा कि उनके मेंटर तथा बीसीसीआई और सीसीआई के पूर्व अध्यक्ष राजसिंह ने उनकी तारीफ करने के बजाय उनसे सवाल किया था कि उन्होंने आठवां कैच क्यों छोड़ दिया था. पूर्व भारतीय टेस्ट खिलाड़ी यजुर्विंद्र सिंह ने शनिवार को क्रिकेट क्लब आफ इंडिया में पहला ‘राजसिंह डूंगरपुर स्प्रिट आफ क्रिकेट लेक्चर’ के दौरान कपिल देव का जिक्र करते हुए उनकी कहानी सुनाई. उन्होंने बताया कि किस तरह से पूर्वी अफ्रीका में 1978 में खेली गई एक पारी ने युवा खिलाड़ी कपिल देव की किस्मत बदल दी थी और कुछ शीर्ष भारतीय क्रिकेटरों की उनके बारे में राय भी बदल गई थी. यजुर्विंद्र ने हरियाणा के रहने वाले कपिल की राजस्थान क्रिकेट टीम के साथ अतिरिक्त सदस्य के रूप में पूर्वी अफ्रीका के दौरे का जिक्र किया. यजुर्विंद्र ने कहा कि राजसिंह डूंगरपुर ने कपिल देव को अतिरिक्त सदस्य के रूप में चुना था. यजुर्विंद्र ने आगे कहा, ‘हमारी टीम काफी मजबूत थी जिसमें टाइगर (पटौदी) सहित कई टेस्ट खिलाड़ी शामिल थे. जब कपिल बल्लेबाजी के लिए गया, तो हमारी टीम लगभग 270 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए नौ विकेट गंवा चुकी थी और संकट में थी. जिस तरह से कपिल बल्लेबाजी के लिए गया, तो टाइगर ने राजसिंह के पास कोई टिप्पणी की और संदेह जताया कि क्या यह टीम को बचा सकता है.’ उन्होंने बताया कि इस पारी में कपिल का साथ सैयद किरमानी ने दिया. उन्होंने कहा, ‘जब कपिल क्रीज पर उतरा तो सैयद किरमानी तीन रन पर खेल रहे थे और जब उन्होंने मैच समाप्त किया तो वह 53 रन पर नाबाद थे और किरमानी छह रन पर. कपिल ने मैदान पर जाने से पहले मुझसे कहा था कि मैं सीधे बल्ले से खेलूंगा. उन्होंने पहली गेंद ही छक्के लिए भेज दी थी.’ इस पारी ने दौरे पर गये क्रिकेटरों के मुंह बंद कर दिये थे और वे कपिल देव की प्रतिभा से अवगत हो गये थे.टिप्पणियां राजकोट में जन्में इस पूर्व क्रिकेटर ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हाल में समाप्त हुई टेस्ट सीरीज के दौरान खेल भावना नहीं दिखाने पर पर अफसोस भी जताया. इंग्लैंड के खिलाफ 1976.77 में बेंगलूर में अपने टेस्ट पदार्पण पर शॉर्ट लेग पर खड़े होकर सात कैच लेकर ऑस्ट्रेलिया के ग्रेग चैपल के रिकॉर्ड की बराबरी करने वाले यजुवेंद्र ने कहा, ‘खेल भावना खतरे में है और अधिकारियों को कुछ ठोस कदम उठाने की जरूरत है.’ अपनी उपलब्धि को याद करते हुए यजुवेंद्र ने कहा कि उनके मेंटर तथा बीसीसीआई और सीसीआई के पूर्व अध्यक्ष राजसिंह ने उनकी तारीफ करने के बजाय उनसे सवाल किया था कि उन्होंने आठवां कैच क्यों छोड़ दिया था. यजुर्विंद्र ने कहा कि राजसिंह डूंगरपुर ने कपिल देव को अतिरिक्त सदस्य के रूप में चुना था. यजुर्विंद्र ने आगे कहा, ‘हमारी टीम काफी मजबूत थी जिसमें टाइगर (पटौदी) सहित कई टेस्ट खिलाड़ी शामिल थे. जब कपिल बल्लेबाजी के लिए गया, तो हमारी टीम लगभग 270 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए नौ विकेट गंवा चुकी थी और संकट में थी. जिस तरह से कपिल बल्लेबाजी के लिए गया, तो टाइगर ने राजसिंह के पास कोई टिप्पणी की और संदेह जताया कि क्या यह टीम को बचा सकता है.’ उन्होंने बताया कि इस पारी में कपिल का साथ सैयद किरमानी ने दिया. उन्होंने कहा, ‘जब कपिल क्रीज पर उतरा तो सैयद किरमानी तीन रन पर खेल रहे थे और जब उन्होंने मैच समाप्त किया तो वह 53 रन पर नाबाद थे और किरमानी छह रन पर. कपिल ने मैदान पर जाने से पहले मुझसे कहा था कि मैं सीधे बल्ले से खेलूंगा. उन्होंने पहली गेंद ही छक्के लिए भेज दी थी.’ इस पारी ने दौरे पर गये क्रिकेटरों के मुंह बंद कर दिये थे और वे कपिल देव की प्रतिभा से अवगत हो गये थे.टिप्पणियां राजकोट में जन्में इस पूर्व क्रिकेटर ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हाल में समाप्त हुई टेस्ट सीरीज के दौरान खेल भावना नहीं दिखाने पर पर अफसोस भी जताया. इंग्लैंड के खिलाफ 1976.77 में बेंगलूर में अपने टेस्ट पदार्पण पर शॉर्ट लेग पर खड़े होकर सात कैच लेकर ऑस्ट्रेलिया के ग्रेग चैपल के रिकॉर्ड की बराबरी करने वाले यजुवेंद्र ने कहा, ‘खेल भावना खतरे में है और अधिकारियों को कुछ ठोस कदम उठाने की जरूरत है.’ अपनी उपलब्धि को याद करते हुए यजुवेंद्र ने कहा कि उनके मेंटर तथा बीसीसीआई और सीसीआई के पूर्व अध्यक्ष राजसिंह ने उनकी तारीफ करने के बजाय उनसे सवाल किया था कि उन्होंने आठवां कैच क्यों छोड़ दिया था. उन्होंने बताया कि इस पारी में कपिल का साथ सैयद किरमानी ने दिया. उन्होंने कहा, ‘जब कपिल क्रीज पर उतरा तो सैयद किरमानी तीन रन पर खेल रहे थे और जब उन्होंने मैच समाप्त किया तो वह 53 रन पर नाबाद थे और किरमानी छह रन पर. कपिल ने मैदान पर जाने से पहले मुझसे कहा था कि मैं सीधे बल्ले से खेलूंगा. उन्होंने पहली गेंद ही छक्के लिए भेज दी थी.’ इस पारी ने दौरे पर गये क्रिकेटरों के मुंह बंद कर दिये थे और वे कपिल देव की प्रतिभा से अवगत हो गये थे.टिप्पणियां राजकोट में जन्में इस पूर्व क्रिकेटर ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हाल में समाप्त हुई टेस्ट सीरीज के दौरान खेल भावना नहीं दिखाने पर पर अफसोस भी जताया. इंग्लैंड के खिलाफ 1976.77 में बेंगलूर में अपने टेस्ट पदार्पण पर शॉर्ट लेग पर खड़े होकर सात कैच लेकर ऑस्ट्रेलिया के ग्रेग चैपल के रिकॉर्ड की बराबरी करने वाले यजुवेंद्र ने कहा, ‘खेल भावना खतरे में है और अधिकारियों को कुछ ठोस कदम उठाने की जरूरत है.’ अपनी उपलब्धि को याद करते हुए यजुवेंद्र ने कहा कि उनके मेंटर तथा बीसीसीआई और सीसीआई के पूर्व अध्यक्ष राजसिंह ने उनकी तारीफ करने के बजाय उनसे सवाल किया था कि उन्होंने आठवां कैच क्यों छोड़ दिया था. राजकोट में जन्में इस पूर्व क्रिकेटर ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हाल में समाप्त हुई टेस्ट सीरीज के दौरान खेल भावना नहीं दिखाने पर पर अफसोस भी जताया. इंग्लैंड के खिलाफ 1976.77 में बेंगलूर में अपने टेस्ट पदार्पण पर शॉर्ट लेग पर खड़े होकर सात कैच लेकर ऑस्ट्रेलिया के ग्रेग चैपल के रिकॉर्ड की बराबरी करने वाले यजुवेंद्र ने कहा, ‘खेल भावना खतरे में है और अधिकारियों को कुछ ठोस कदम उठाने की जरूरत है.’ अपनी उपलब्धि को याद करते हुए यजुवेंद्र ने कहा कि उनके मेंटर तथा बीसीसीआई और सीसीआई के पूर्व अध्यक्ष राजसिंह ने उनकी तारीफ करने के बजाय उनसे सवाल किया था कि उन्होंने आठवां कैच क्यों छोड़ दिया था. इंग्लैंड के खिलाफ 1976.77 में बेंगलूर में अपने टेस्ट पदार्पण पर शॉर्ट लेग पर खड़े होकर सात कैच लेकर ऑस्ट्रेलिया के ग्रेग चैपल के रिकॉर्ड की बराबरी करने वाले यजुवेंद्र ने कहा, ‘खेल भावना खतरे में है और अधिकारियों को कुछ ठोस कदम उठाने की जरूरत है.’ अपनी उपलब्धि को याद करते हुए यजुवेंद्र ने कहा कि उनके मेंटर तथा बीसीसीआई और सीसीआई के पूर्व अध्यक्ष राजसिंह ने उनकी तारीफ करने के बजाय उनसे सवाल किया था कि उन्होंने आठवां कैच क्यों छोड़ दिया था.
सारांश: भारत ने पहला वनडे वर्ल्ड कप कपिल देव की कप्तानी में जीता था कपिल देव ने एक समय टेस्ट में सबसे अधिक 434 विकेट लिए थे कपिल देव विश्व के महान ऑलराउंडर रहे हैं
20
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा का समर्थन हासिल कर चुके करमापा उग्येन त्रिनले दोरजी से पुलिस ने रविवार को पूछताछ की, जबकि उनके द्वारा समर्थित एक ट्रस्ट के कार्यालयों से 7.5 करोड़ रुपये मूल्य की विदेशी मुद्रा जब्त किए जाने के सिलसिले में दो और लोगों को गिरफ्तार किया गया है। करमापा ने चीन के साथ किसी तरह के संबंध होने की बात से इनकार करते हुए कहा है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निहायत काल्पनिक और बेबुनियाद हैं। राज्य के पुलिस अधिकारियों की एक टीम ने सिधबारी स्थित गयुतो मठ में करमापा से 50 सवाल पूछे, लेकिन उन्होंने विदेशी मुद्रा और वहां से बरामद दस्तावेजों से पूर्ण अनभिज्ञता जताई। पुलिस ने कहा कि उन्होंने करमापा को धन की बरामदगी और मठ के कामकाज से जुड़े प्रश्न पूछे, लेकिन उन्होंने इस घटनाक्रम से पूरी तरह से खुद को अलग करते हुए कहा कि ट्रस्ट का कामकाज शक्ति लामा और गोम्पु शेरिंग देखते हैं और उनकी भूमिका सिर्फ धार्मिक प्रमुख के रूप में शिक्षा देने की है। पुलिस महानिरीक्षक पीएल ठाकुर ने बताया कि उना के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक केजी कपूर के नेतृत्व में एक टीम ने अंग्रेजी में करमापा से प्रश्न पूछे, जिसका जवाब उन्होंने एक दुभाषिये के जरिये दिया। ठाकुर ने बताया कि जांच कार्य जारी है तथा और अधिक सूचना मिलने के बाद करमापा से दोबारा पूछताछ की जा सकती है। करमापा ने सभी आरोपों का खंडन किया और कहा कि यह धन श्रद्धालुओं ने दान में दिया था, जो समूची दुनिया से आते हैं और ट्रस्ट से जुड़े हैं। ठाकुर ने बताया कि धर्मशाला आधारित व्यवसायी केपी भारद्वाज के आवास और होटल पर छापा मारने के बाद उन्हें और कॉरपोरेशन बैंक के अंबाला शाखा के प्रबंधक डीके धर को शनिवार रात गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने बताया कि इस संबंध में भारद्वाज से पूछताछ के दौरान कुछ सुराग हाथ लगे हैं। उधर, बेंगलुरु में करमापा का समर्थन करते हुए दलाई लामा ने संवाददाताओं से कहा, वह (करमापा) एक महत्वपूर्ण लामा हैं। उन्होंने विदेशी मुद्रा जब्त किए जाने के मामले की गहन जांच की मांग की।  उन्होंने कहा, करमापा के चीन समेत विभिन्न स्थानों से अनेक भक्त हैं...उनसे कुछ धन स्वाभाविक तौर पर मिला होगा...कुछ लापरवाही हुई है। बेहतर होगा कि अब विस्तृत जांच कराई जाए। ठाकुर ने बताया, पुलिस अभी तक धन के स्रोत के बारे में किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाई है और करमापा के कंप्यूटर सहित सभी दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है।
सारांश: करमापा ने चीन के साथ किसी तरह के संबंध होने की बात से इनकार करते हुए कहा है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निहायत काल्पनिक हैं।
31
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: अमेरिकी विदेशमंत्री हिलेरी क्लिंटन ने शनिवार को कहा कि वाशिंगटन ने अफगानिस्तान को एक बड़ा गैर-नाटो सहयोगी देश नामित कर उसे विशेष दर्जा प्रदान किया है। अमेरिका यहां से 2014 में अपनी सेना हटाने की तैयारी कर रहा है। हिलेरी ने काबुल की यात्रा के दौरान कहा कि अफगानिस्तान को दिया गया यह विशेष दर्जा सुरक्षा और रक्षा सहयोग का एक दीर्घकालीन ढांचा मुहैया कराता है। अमेरिकी विदेशमंत्री ने काबुल में अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई के साथ वार्ता की। हिलेरी ने बैठक के बाद कहा, हम इसे अफगानिस्तान के भविष्य के लिए अपनी प्रतिबद्धता के मजबूत प्रतीक के रूप में देखते हैं। एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि तत्काल प्रभाव से लागू यह नया दर्जा इस देश के लिए अमेरिकी साजो-सामान की खरीद-फरोख्त को आसान बनाएगा।टिप्पणियां उन्होंने कहा, हमारे हटने पर, वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि वे इस विशेष तरजीह को जारी रखें। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रशासन की ओर से यह पहला ऐसा दर्जा है, जो अफगानिस्तान को उन विशेष देशों के समूह में शामिल कर देगा, जो अमेरिका के साथ विशेषाधिकार प्राप्त संबंधों का फायदा उठा रहे हैं। इस दर्जे को हासिल करने वाले अन्य देशों में पाकिस्तान, इस्राइल, मिस्र, जापान, जार्डन, कोरिया, अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड है। इस तरह का दर्जा सदस्य देशों को रक्षा सामग्रियां प्रदान करने में वरीयता देता है तथा अमेरिकी सैन्य उपकरणों को प्राप्त करने का अधिकार प्रदान करता है। गैर नाटो सदस्य देश (अफगानिस्तान को) अमेरिकी सरकार के ऋण गारंटी कार्यक्रम का भी लाभ प्राप्त करेंगे। लेकिन उन्हें सुरक्षा गारंटी का फायदा प्राप्त नहीं होगा, जो नाटो के सदस्य देशों को प्राप्त है। हिलेरी ने काबुल की यात्रा के दौरान कहा कि अफगानिस्तान को दिया गया यह विशेष दर्जा सुरक्षा और रक्षा सहयोग का एक दीर्घकालीन ढांचा मुहैया कराता है। अमेरिकी विदेशमंत्री ने काबुल में अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई के साथ वार्ता की। हिलेरी ने बैठक के बाद कहा, हम इसे अफगानिस्तान के भविष्य के लिए अपनी प्रतिबद्धता के मजबूत प्रतीक के रूप में देखते हैं। एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि तत्काल प्रभाव से लागू यह नया दर्जा इस देश के लिए अमेरिकी साजो-सामान की खरीद-फरोख्त को आसान बनाएगा।टिप्पणियां उन्होंने कहा, हमारे हटने पर, वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि वे इस विशेष तरजीह को जारी रखें। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रशासन की ओर से यह पहला ऐसा दर्जा है, जो अफगानिस्तान को उन विशेष देशों के समूह में शामिल कर देगा, जो अमेरिका के साथ विशेषाधिकार प्राप्त संबंधों का फायदा उठा रहे हैं। इस दर्जे को हासिल करने वाले अन्य देशों में पाकिस्तान, इस्राइल, मिस्र, जापान, जार्डन, कोरिया, अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड है। इस तरह का दर्जा सदस्य देशों को रक्षा सामग्रियां प्रदान करने में वरीयता देता है तथा अमेरिकी सैन्य उपकरणों को प्राप्त करने का अधिकार प्रदान करता है। गैर नाटो सदस्य देश (अफगानिस्तान को) अमेरिकी सरकार के ऋण गारंटी कार्यक्रम का भी लाभ प्राप्त करेंगे। लेकिन उन्हें सुरक्षा गारंटी का फायदा प्राप्त नहीं होगा, जो नाटो के सदस्य देशों को प्राप्त है। हिलेरी ने बैठक के बाद कहा, हम इसे अफगानिस्तान के भविष्य के लिए अपनी प्रतिबद्धता के मजबूत प्रतीक के रूप में देखते हैं। एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि तत्काल प्रभाव से लागू यह नया दर्जा इस देश के लिए अमेरिकी साजो-सामान की खरीद-फरोख्त को आसान बनाएगा।टिप्पणियां उन्होंने कहा, हमारे हटने पर, वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि वे इस विशेष तरजीह को जारी रखें। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रशासन की ओर से यह पहला ऐसा दर्जा है, जो अफगानिस्तान को उन विशेष देशों के समूह में शामिल कर देगा, जो अमेरिका के साथ विशेषाधिकार प्राप्त संबंधों का फायदा उठा रहे हैं। इस दर्जे को हासिल करने वाले अन्य देशों में पाकिस्तान, इस्राइल, मिस्र, जापान, जार्डन, कोरिया, अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड है। इस तरह का दर्जा सदस्य देशों को रक्षा सामग्रियां प्रदान करने में वरीयता देता है तथा अमेरिकी सैन्य उपकरणों को प्राप्त करने का अधिकार प्रदान करता है। गैर नाटो सदस्य देश (अफगानिस्तान को) अमेरिकी सरकार के ऋण गारंटी कार्यक्रम का भी लाभ प्राप्त करेंगे। लेकिन उन्हें सुरक्षा गारंटी का फायदा प्राप्त नहीं होगा, जो नाटो के सदस्य देशों को प्राप्त है। उन्होंने कहा, हमारे हटने पर, वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि वे इस विशेष तरजीह को जारी रखें। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रशासन की ओर से यह पहला ऐसा दर्जा है, जो अफगानिस्तान को उन विशेष देशों के समूह में शामिल कर देगा, जो अमेरिका के साथ विशेषाधिकार प्राप्त संबंधों का फायदा उठा रहे हैं। इस दर्जे को हासिल करने वाले अन्य देशों में पाकिस्तान, इस्राइल, मिस्र, जापान, जार्डन, कोरिया, अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड है। इस तरह का दर्जा सदस्य देशों को रक्षा सामग्रियां प्रदान करने में वरीयता देता है तथा अमेरिकी सैन्य उपकरणों को प्राप्त करने का अधिकार प्रदान करता है। गैर नाटो सदस्य देश (अफगानिस्तान को) अमेरिकी सरकार के ऋण गारंटी कार्यक्रम का भी लाभ प्राप्त करेंगे। लेकिन उन्हें सुरक्षा गारंटी का फायदा प्राप्त नहीं होगा, जो नाटो के सदस्य देशों को प्राप्त है। इस दर्जे को हासिल करने वाले अन्य देशों में पाकिस्तान, इस्राइल, मिस्र, जापान, जार्डन, कोरिया, अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड है। इस तरह का दर्जा सदस्य देशों को रक्षा सामग्रियां प्रदान करने में वरीयता देता है तथा अमेरिकी सैन्य उपकरणों को प्राप्त करने का अधिकार प्रदान करता है। गैर नाटो सदस्य देश (अफगानिस्तान को) अमेरिकी सरकार के ऋण गारंटी कार्यक्रम का भी लाभ प्राप्त करेंगे। लेकिन उन्हें सुरक्षा गारंटी का फायदा प्राप्त नहीं होगा, जो नाटो के सदस्य देशों को प्राप्त है।
संक्षिप्त पाठ: अमेरिकी विदेशमंत्री हिलेरी क्लिंटन ने शनिवार को कहा कि वाशिंगटन ने अफगानिस्तान को एक बड़ा गैर-नाटो सहयोगी देश नामित कर उसे विशेष दर्जा प्रदान किया है।
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['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे. जयललिता के चेन्नई अस्पताल में हुए निधन के दो माह बाद तमिलनाडु सरकार ने निधन को लेकर फैल रही अफवाहों को शांत करने के लिए इस प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करके उनके निधन के बारे में सफाई दी. प्रेस कॉन्फ्रेंस में लंदन के चिकित्स रिचर्ड बेले तथा अपोलो अस्पताल के अन्य चिकित्सकों को शामिल किया गया. यह संवाददाता सम्मेलन ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएके) की महासचिव वी.के.शशिकला के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करने से पहले आयोजित किया गया. उनका इलाज कर चुके ब्रिटिश चिकित्सक रिचर्ड बेले ने उनकी मौत से जुड़ी कई जानकारियां साझा कीं. जयललिता के निधन के पीछे किसी भी तरह की साजिश की बात खारिज करते हुए बेले ने कहा, "मैं यहां का निवासी नहीं हूं. कोई साजिश नहीं हुई. उन्हें (जयललिता) गंभीर संक्रमण था. उनकी अच्छे से देखभाल की गई." बेले ने कहा कि जयललिता के रक्त में सेप्सिस जीवाणु पाए गए थे. उन्होंने कहा कि सेप्सिस से पीड़ित व्यक्ति कुछ घंटों या दिनों में बीमार हो जाता है. उन्होंने कहा कि जयललिता के निधन की वजह सेप्सिस तथा मधुमेह था और उन्होंने कहा कि यह अनपेक्षित था, क्योंकि पहले चरण में उनके स्वास्थ्य में सुधार हो रहा था. बेले ने कहा कि इलाज के लिए जयललिता को लंदन ले जाने पर भी चर्चा हुई, लेकिन यह आगे नहीं बढ़ सकी, क्योंकि वह इसके लिए तैयार नहीं थीं और हर आवश्यक चिकित्सा सुविधा उन्हें मुहैया कराई गई. उन्होंने कहा कि जयललिता के शव के अंत्यपरीक्षण की बात हास्यास्पद है. तमिलनाडु सरकार के एक चिकित्सक पी.बालाजी के मुताबिक, जयललिता के इलाज पर कुल खर्च पांच से साढ़े पांच करोड़ रुपये के बीच आया. उन्होंने कहा, "मुझसे कहा गया कि बिल जयललिता के परिजनों द्वारा भरा जाएगा." अपोलो अस्पताल में श्वसन चिकित्सा विशेषज्ञ, बाबू के.अब्राहम के मुताबिक, जयललिता को पांच दिसंबर शाम पांच बजे के आसपास दिल का दौरा (कार्डियक अरेस्ट) पड़ा था. उन्होंने कहा, "दिल का दौरा पड़ने के तत्काल बाद उन्हें सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससाइटेशन) दिया गया. कुछ ही मिनटों में हृदय रोग विशेषज्ञ कमरे में आ गए. सीपीआर (प्रक्रिया) 20 मिनट तक चली, लेकिन उनके दिल में कोई हरकत नहीं हुई." उन्होंने कहा कि दिल के दोबारा काम करने की उम्मीद से अगले 24 घंटों तक जयललिता को एक अन्य मशीन (ईसीएमओ) पर रखा गया, लेकिन उनके दिल ने फिर से धड़कना शुरू नहीं  किया. चिकित्सक ने कहा कि 24 घंटे के बाद उस प्रक्रिया को बंद करने का फैसला किया गया और यह फैसला अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) तथा अस्पताल के चिकित्सकों के परामर्श से लिया गया. इस बारे में जयललिता के परिजनों को भी सूचित कर दिया गया था. जयललिता के अंतिम क्षणों के बारे में पूछने पर अब्राहम ने कहा कि दिवंगत मुख्यमंत्री ने एक चिकित्सक से कहा था कि उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही है. उन्होंने कहा कि पहले चरण में जयललिता की सेहत में सुधार हो रहा था. वह कुछ कदम चल सकने में सक्षम थीं और बातचीत भी कर रही थीं. जयललिता के स्वास्थ्य के बारे में शशिकला तथा सरकारी अधिकारियों को प्रतिदिन जानकारी दी जाती थी. अब्राहम ने कहा कि जयललिता अस्पताल में 75 दिनों तक रहीं और 25 दिनों तक वह बेहोशी हालत में रहीं.टिप्पणियां यह पूछे जाने पर कि क्या राज्य के राज्यपाल चौधरी विद्यासागर राव ने अस्पताल में जयललिता से मुलाकात की थी? बालाजी ने कहा कि दूसरी बार अस्पताल आने पर राज्यपाल ने उनसे मुलाकात की थी. बालाजी ने कहा, "जयललिता ने उन्हें अंगूठा दिखाकर अपने ठीक होने का संकेत दिया था." बेले ने कहा कि उन्होंने शशिकला से भी बातचीत की थी. चिकित्सकों ने कहा कि जयललिता के शरीर के किसी भी हिस्से को अलग नहीं किया गया था. चिकित्सकों के मुताबिक, जयललिता के निधन के बाद उनके शरीर पर सामान्य प्रक्रिया के अनुसार लेप किया गया था. उल्लेखनीय है कि शशिकला को रविवार को एआईएडीएके के विधायक दल का नेता चुन लिया गया. जयललिता को छह दिसंबर को यहां अपोलो अस्पताल में मृत घोषित किया गया था. बुखार तथा शरीर में पानी की कमी की वजह से 22 सितंबर को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था. जयललिता के निधन के बाद एक आधिकारिक बयान में चिकित्सकों ने कहा कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा था. जयललिता के निधन के पीछे किसी भी तरह की साजिश की बात खारिज करते हुए बेले ने कहा, "मैं यहां का निवासी नहीं हूं. कोई साजिश नहीं हुई. उन्हें (जयललिता) गंभीर संक्रमण था. उनकी अच्छे से देखभाल की गई." बेले ने कहा कि जयललिता के रक्त में सेप्सिस जीवाणु पाए गए थे. उन्होंने कहा कि सेप्सिस से पीड़ित व्यक्ति कुछ घंटों या दिनों में बीमार हो जाता है. उन्होंने कहा कि जयललिता के निधन की वजह सेप्सिस तथा मधुमेह था और उन्होंने कहा कि यह अनपेक्षित था, क्योंकि पहले चरण में उनके स्वास्थ्य में सुधार हो रहा था. बेले ने कहा कि इलाज के लिए जयललिता को लंदन ले जाने पर भी चर्चा हुई, लेकिन यह आगे नहीं बढ़ सकी, क्योंकि वह इसके लिए तैयार नहीं थीं और हर आवश्यक चिकित्सा सुविधा उन्हें मुहैया कराई गई. उन्होंने कहा कि जयललिता के शव के अंत्यपरीक्षण की बात हास्यास्पद है. तमिलनाडु सरकार के एक चिकित्सक पी.बालाजी के मुताबिक, जयललिता के इलाज पर कुल खर्च पांच से साढ़े पांच करोड़ रुपये के बीच आया. उन्होंने कहा, "मुझसे कहा गया कि बिल जयललिता के परिजनों द्वारा भरा जाएगा." अपोलो अस्पताल में श्वसन चिकित्सा विशेषज्ञ, बाबू के.अब्राहम के मुताबिक, जयललिता को पांच दिसंबर शाम पांच बजे के आसपास दिल का दौरा (कार्डियक अरेस्ट) पड़ा था. उन्होंने कहा, "दिल का दौरा पड़ने के तत्काल बाद उन्हें सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससाइटेशन) दिया गया. कुछ ही मिनटों में हृदय रोग विशेषज्ञ कमरे में आ गए. सीपीआर (प्रक्रिया) 20 मिनट तक चली, लेकिन उनके दिल में कोई हरकत नहीं हुई." उन्होंने कहा कि दिल के दोबारा काम करने की उम्मीद से अगले 24 घंटों तक जयललिता को एक अन्य मशीन (ईसीएमओ) पर रखा गया, लेकिन उनके दिल ने फिर से धड़कना शुरू नहीं  किया. चिकित्सक ने कहा कि 24 घंटे के बाद उस प्रक्रिया को बंद करने का फैसला किया गया और यह फैसला अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) तथा अस्पताल के चिकित्सकों के परामर्श से लिया गया. इस बारे में जयललिता के परिजनों को भी सूचित कर दिया गया था. जयललिता के अंतिम क्षणों के बारे में पूछने पर अब्राहम ने कहा कि दिवंगत मुख्यमंत्री ने एक चिकित्सक से कहा था कि उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही है. उन्होंने कहा कि पहले चरण में जयललिता की सेहत में सुधार हो रहा था. वह कुछ कदम चल सकने में सक्षम थीं और बातचीत भी कर रही थीं. जयललिता के स्वास्थ्य के बारे में शशिकला तथा सरकारी अधिकारियों को प्रतिदिन जानकारी दी जाती थी. अब्राहम ने कहा कि जयललिता अस्पताल में 75 दिनों तक रहीं और 25 दिनों तक वह बेहोशी हालत में रहीं.टिप्पणियां यह पूछे जाने पर कि क्या राज्य के राज्यपाल चौधरी विद्यासागर राव ने अस्पताल में जयललिता से मुलाकात की थी? बालाजी ने कहा कि दूसरी बार अस्पताल आने पर राज्यपाल ने उनसे मुलाकात की थी. बालाजी ने कहा, "जयललिता ने उन्हें अंगूठा दिखाकर अपने ठीक होने का संकेत दिया था." बेले ने कहा कि उन्होंने शशिकला से भी बातचीत की थी. चिकित्सकों ने कहा कि जयललिता के शरीर के किसी भी हिस्से को अलग नहीं किया गया था. चिकित्सकों के मुताबिक, जयललिता के निधन के बाद उनके शरीर पर सामान्य प्रक्रिया के अनुसार लेप किया गया था. उल्लेखनीय है कि शशिकला को रविवार को एआईएडीएके के विधायक दल का नेता चुन लिया गया. जयललिता को छह दिसंबर को यहां अपोलो अस्पताल में मृत घोषित किया गया था. बुखार तथा शरीर में पानी की कमी की वजह से 22 सितंबर को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था. जयललिता के निधन के बाद एक आधिकारिक बयान में चिकित्सकों ने कहा कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा था. उन्होंने कहा कि जयललिता के निधन की वजह सेप्सिस तथा मधुमेह था और उन्होंने कहा कि यह अनपेक्षित था, क्योंकि पहले चरण में उनके स्वास्थ्य में सुधार हो रहा था. बेले ने कहा कि इलाज के लिए जयललिता को लंदन ले जाने पर भी चर्चा हुई, लेकिन यह आगे नहीं बढ़ सकी, क्योंकि वह इसके लिए तैयार नहीं थीं और हर आवश्यक चिकित्सा सुविधा उन्हें मुहैया कराई गई. उन्होंने कहा कि जयललिता के शव के अंत्यपरीक्षण की बात हास्यास्पद है. तमिलनाडु सरकार के एक चिकित्सक पी.बालाजी के मुताबिक, जयललिता के इलाज पर कुल खर्च पांच से साढ़े पांच करोड़ रुपये के बीच आया. उन्होंने कहा, "मुझसे कहा गया कि बिल जयललिता के परिजनों द्वारा भरा जाएगा." अपोलो अस्पताल में श्वसन चिकित्सा विशेषज्ञ, बाबू के.अब्राहम के मुताबिक, जयललिता को पांच दिसंबर शाम पांच बजे के आसपास दिल का दौरा (कार्डियक अरेस्ट) पड़ा था. उन्होंने कहा, "दिल का दौरा पड़ने के तत्काल बाद उन्हें सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससाइटेशन) दिया गया. कुछ ही मिनटों में हृदय रोग विशेषज्ञ कमरे में आ गए. सीपीआर (प्रक्रिया) 20 मिनट तक चली, लेकिन उनके दिल में कोई हरकत नहीं हुई." उन्होंने कहा कि दिल के दोबारा काम करने की उम्मीद से अगले 24 घंटों तक जयललिता को एक अन्य मशीन (ईसीएमओ) पर रखा गया, लेकिन उनके दिल ने फिर से धड़कना शुरू नहीं  किया. चिकित्सक ने कहा कि 24 घंटे के बाद उस प्रक्रिया को बंद करने का फैसला किया गया और यह फैसला अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) तथा अस्पताल के चिकित्सकों के परामर्श से लिया गया. इस बारे में जयललिता के परिजनों को भी सूचित कर दिया गया था. जयललिता के अंतिम क्षणों के बारे में पूछने पर अब्राहम ने कहा कि दिवंगत मुख्यमंत्री ने एक चिकित्सक से कहा था कि उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही है. उन्होंने कहा कि पहले चरण में जयललिता की सेहत में सुधार हो रहा था. वह कुछ कदम चल सकने में सक्षम थीं और बातचीत भी कर रही थीं. जयललिता के स्वास्थ्य के बारे में शशिकला तथा सरकारी अधिकारियों को प्रतिदिन जानकारी दी जाती थी. अब्राहम ने कहा कि जयललिता अस्पताल में 75 दिनों तक रहीं और 25 दिनों तक वह बेहोशी हालत में रहीं.टिप्पणियां यह पूछे जाने पर कि क्या राज्य के राज्यपाल चौधरी विद्यासागर राव ने अस्पताल में जयललिता से मुलाकात की थी? बालाजी ने कहा कि दूसरी बार अस्पताल आने पर राज्यपाल ने उनसे मुलाकात की थी. बालाजी ने कहा, "जयललिता ने उन्हें अंगूठा दिखाकर अपने ठीक होने का संकेत दिया था." बेले ने कहा कि उन्होंने शशिकला से भी बातचीत की थी. चिकित्सकों ने कहा कि जयललिता के शरीर के किसी भी हिस्से को अलग नहीं किया गया था. चिकित्सकों के मुताबिक, जयललिता के निधन के बाद उनके शरीर पर सामान्य प्रक्रिया के अनुसार लेप किया गया था. उल्लेखनीय है कि शशिकला को रविवार को एआईएडीएके के विधायक दल का नेता चुन लिया गया. जयललिता को छह दिसंबर को यहां अपोलो अस्पताल में मृत घोषित किया गया था. बुखार तथा शरीर में पानी की कमी की वजह से 22 सितंबर को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था. जयललिता के निधन के बाद एक आधिकारिक बयान में चिकित्सकों ने कहा कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा था. तमिलनाडु सरकार के एक चिकित्सक पी.बालाजी के मुताबिक, जयललिता के इलाज पर कुल खर्च पांच से साढ़े पांच करोड़ रुपये के बीच आया. उन्होंने कहा, "मुझसे कहा गया कि बिल जयललिता के परिजनों द्वारा भरा जाएगा." अपोलो अस्पताल में श्वसन चिकित्सा विशेषज्ञ, बाबू के.अब्राहम के मुताबिक, जयललिता को पांच दिसंबर शाम पांच बजे के आसपास दिल का दौरा (कार्डियक अरेस्ट) पड़ा था. उन्होंने कहा, "दिल का दौरा पड़ने के तत्काल बाद उन्हें सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससाइटेशन) दिया गया. कुछ ही मिनटों में हृदय रोग विशेषज्ञ कमरे में आ गए. सीपीआर (प्रक्रिया) 20 मिनट तक चली, लेकिन उनके दिल में कोई हरकत नहीं हुई." उन्होंने कहा कि दिल के दोबारा काम करने की उम्मीद से अगले 24 घंटों तक जयललिता को एक अन्य मशीन (ईसीएमओ) पर रखा गया, लेकिन उनके दिल ने फिर से धड़कना शुरू नहीं  किया. चिकित्सक ने कहा कि 24 घंटे के बाद उस प्रक्रिया को बंद करने का फैसला किया गया और यह फैसला अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) तथा अस्पताल के चिकित्सकों के परामर्श से लिया गया. इस बारे में जयललिता के परिजनों को भी सूचित कर दिया गया था. जयललिता के अंतिम क्षणों के बारे में पूछने पर अब्राहम ने कहा कि दिवंगत मुख्यमंत्री ने एक चिकित्सक से कहा था कि उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही है. उन्होंने कहा कि पहले चरण में जयललिता की सेहत में सुधार हो रहा था. वह कुछ कदम चल सकने में सक्षम थीं और बातचीत भी कर रही थीं. जयललिता के स्वास्थ्य के बारे में शशिकला तथा सरकारी अधिकारियों को प्रतिदिन जानकारी दी जाती थी. अब्राहम ने कहा कि जयललिता अस्पताल में 75 दिनों तक रहीं और 25 दिनों तक वह बेहोशी हालत में रहीं.टिप्पणियां यह पूछे जाने पर कि क्या राज्य के राज्यपाल चौधरी विद्यासागर राव ने अस्पताल में जयललिता से मुलाकात की थी? बालाजी ने कहा कि दूसरी बार अस्पताल आने पर राज्यपाल ने उनसे मुलाकात की थी. बालाजी ने कहा, "जयललिता ने उन्हें अंगूठा दिखाकर अपने ठीक होने का संकेत दिया था." बेले ने कहा कि उन्होंने शशिकला से भी बातचीत की थी. चिकित्सकों ने कहा कि जयललिता के शरीर के किसी भी हिस्से को अलग नहीं किया गया था. चिकित्सकों के मुताबिक, जयललिता के निधन के बाद उनके शरीर पर सामान्य प्रक्रिया के अनुसार लेप किया गया था. उल्लेखनीय है कि शशिकला को रविवार को एआईएडीएके के विधायक दल का नेता चुन लिया गया. जयललिता को छह दिसंबर को यहां अपोलो अस्पताल में मृत घोषित किया गया था. बुखार तथा शरीर में पानी की कमी की वजह से 22 सितंबर को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था. जयललिता के निधन के बाद एक आधिकारिक बयान में चिकित्सकों ने कहा कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा था. उन्होंने कहा, "दिल का दौरा पड़ने के तत्काल बाद उन्हें सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससाइटेशन) दिया गया. कुछ ही मिनटों में हृदय रोग विशेषज्ञ कमरे में आ गए. सीपीआर (प्रक्रिया) 20 मिनट तक चली, लेकिन उनके दिल में कोई हरकत नहीं हुई." उन्होंने कहा कि दिल के दोबारा काम करने की उम्मीद से अगले 24 घंटों तक जयललिता को एक अन्य मशीन (ईसीएमओ) पर रखा गया, लेकिन उनके दिल ने फिर से धड़कना शुरू नहीं  किया. चिकित्सक ने कहा कि 24 घंटे के बाद उस प्रक्रिया को बंद करने का फैसला किया गया और यह फैसला अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) तथा अस्पताल के चिकित्सकों के परामर्श से लिया गया. इस बारे में जयललिता के परिजनों को भी सूचित कर दिया गया था. जयललिता के अंतिम क्षणों के बारे में पूछने पर अब्राहम ने कहा कि दिवंगत मुख्यमंत्री ने एक चिकित्सक से कहा था कि उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही है. उन्होंने कहा कि पहले चरण में जयललिता की सेहत में सुधार हो रहा था. वह कुछ कदम चल सकने में सक्षम थीं और बातचीत भी कर रही थीं. जयललिता के स्वास्थ्य के बारे में शशिकला तथा सरकारी अधिकारियों को प्रतिदिन जानकारी दी जाती थी. अब्राहम ने कहा कि जयललिता अस्पताल में 75 दिनों तक रहीं और 25 दिनों तक वह बेहोशी हालत में रहीं.टिप्पणियां यह पूछे जाने पर कि क्या राज्य के राज्यपाल चौधरी विद्यासागर राव ने अस्पताल में जयललिता से मुलाकात की थी? बालाजी ने कहा कि दूसरी बार अस्पताल आने पर राज्यपाल ने उनसे मुलाकात की थी. बालाजी ने कहा, "जयललिता ने उन्हें अंगूठा दिखाकर अपने ठीक होने का संकेत दिया था." बेले ने कहा कि उन्होंने शशिकला से भी बातचीत की थी. चिकित्सकों ने कहा कि जयललिता के शरीर के किसी भी हिस्से को अलग नहीं किया गया था. चिकित्सकों के मुताबिक, जयललिता के निधन के बाद उनके शरीर पर सामान्य प्रक्रिया के अनुसार लेप किया गया था. उल्लेखनीय है कि शशिकला को रविवार को एआईएडीएके के विधायक दल का नेता चुन लिया गया. जयललिता को छह दिसंबर को यहां अपोलो अस्पताल में मृत घोषित किया गया था. बुखार तथा शरीर में पानी की कमी की वजह से 22 सितंबर को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था. जयललिता के निधन के बाद एक आधिकारिक बयान में चिकित्सकों ने कहा कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा था. चिकित्सक ने कहा कि 24 घंटे के बाद उस प्रक्रिया को बंद करने का फैसला किया गया और यह फैसला अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) तथा अस्पताल के चिकित्सकों के परामर्श से लिया गया. इस बारे में जयललिता के परिजनों को भी सूचित कर दिया गया था. जयललिता के अंतिम क्षणों के बारे में पूछने पर अब्राहम ने कहा कि दिवंगत मुख्यमंत्री ने एक चिकित्सक से कहा था कि उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही है. उन्होंने कहा कि पहले चरण में जयललिता की सेहत में सुधार हो रहा था. वह कुछ कदम चल सकने में सक्षम थीं और बातचीत भी कर रही थीं. जयललिता के स्वास्थ्य के बारे में शशिकला तथा सरकारी अधिकारियों को प्रतिदिन जानकारी दी जाती थी. अब्राहम ने कहा कि जयललिता अस्पताल में 75 दिनों तक रहीं और 25 दिनों तक वह बेहोशी हालत में रहीं.टिप्पणियां यह पूछे जाने पर कि क्या राज्य के राज्यपाल चौधरी विद्यासागर राव ने अस्पताल में जयललिता से मुलाकात की थी? बालाजी ने कहा कि दूसरी बार अस्पताल आने पर राज्यपाल ने उनसे मुलाकात की थी. बालाजी ने कहा, "जयललिता ने उन्हें अंगूठा दिखाकर अपने ठीक होने का संकेत दिया था." बेले ने कहा कि उन्होंने शशिकला से भी बातचीत की थी. चिकित्सकों ने कहा कि जयललिता के शरीर के किसी भी हिस्से को अलग नहीं किया गया था. चिकित्सकों के मुताबिक, जयललिता के निधन के बाद उनके शरीर पर सामान्य प्रक्रिया के अनुसार लेप किया गया था. उल्लेखनीय है कि शशिकला को रविवार को एआईएडीएके के विधायक दल का नेता चुन लिया गया. जयललिता को छह दिसंबर को यहां अपोलो अस्पताल में मृत घोषित किया गया था. बुखार तथा शरीर में पानी की कमी की वजह से 22 सितंबर को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था. जयललिता के निधन के बाद एक आधिकारिक बयान में चिकित्सकों ने कहा कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा था. जयललिता के अंतिम क्षणों के बारे में पूछने पर अब्राहम ने कहा कि दिवंगत मुख्यमंत्री ने एक चिकित्सक से कहा था कि उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही है. उन्होंने कहा कि पहले चरण में जयललिता की सेहत में सुधार हो रहा था. वह कुछ कदम चल सकने में सक्षम थीं और बातचीत भी कर रही थीं. जयललिता के स्वास्थ्य के बारे में शशिकला तथा सरकारी अधिकारियों को प्रतिदिन जानकारी दी जाती थी. अब्राहम ने कहा कि जयललिता अस्पताल में 75 दिनों तक रहीं और 25 दिनों तक वह बेहोशी हालत में रहीं.टिप्पणियां यह पूछे जाने पर कि क्या राज्य के राज्यपाल चौधरी विद्यासागर राव ने अस्पताल में जयललिता से मुलाकात की थी? बालाजी ने कहा कि दूसरी बार अस्पताल आने पर राज्यपाल ने उनसे मुलाकात की थी. बालाजी ने कहा, "जयललिता ने उन्हें अंगूठा दिखाकर अपने ठीक होने का संकेत दिया था." बेले ने कहा कि उन्होंने शशिकला से भी बातचीत की थी. चिकित्सकों ने कहा कि जयललिता के शरीर के किसी भी हिस्से को अलग नहीं किया गया था. चिकित्सकों के मुताबिक, जयललिता के निधन के बाद उनके शरीर पर सामान्य प्रक्रिया के अनुसार लेप किया गया था. उल्लेखनीय है कि शशिकला को रविवार को एआईएडीएके के विधायक दल का नेता चुन लिया गया. जयललिता को छह दिसंबर को यहां अपोलो अस्पताल में मृत घोषित किया गया था. बुखार तथा शरीर में पानी की कमी की वजह से 22 सितंबर को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था. जयललिता के निधन के बाद एक आधिकारिक बयान में चिकित्सकों ने कहा कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा था. यह पूछे जाने पर कि क्या राज्य के राज्यपाल चौधरी विद्यासागर राव ने अस्पताल में जयललिता से मुलाकात की थी? बालाजी ने कहा कि दूसरी बार अस्पताल आने पर राज्यपाल ने उनसे मुलाकात की थी. बालाजी ने कहा, "जयललिता ने उन्हें अंगूठा दिखाकर अपने ठीक होने का संकेत दिया था." बेले ने कहा कि उन्होंने शशिकला से भी बातचीत की थी. चिकित्सकों ने कहा कि जयललिता के शरीर के किसी भी हिस्से को अलग नहीं किया गया था. चिकित्सकों के मुताबिक, जयललिता के निधन के बाद उनके शरीर पर सामान्य प्रक्रिया के अनुसार लेप किया गया था. उल्लेखनीय है कि शशिकला को रविवार को एआईएडीएके के विधायक दल का नेता चुन लिया गया. जयललिता को छह दिसंबर को यहां अपोलो अस्पताल में मृत घोषित किया गया था. बुखार तथा शरीर में पानी की कमी की वजह से 22 सितंबर को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था. जयललिता के निधन के बाद एक आधिकारिक बयान में चिकित्सकों ने कहा कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा था. जयललिता को छह दिसंबर को यहां अपोलो अस्पताल में मृत घोषित किया गया था. बुखार तथा शरीर में पानी की कमी की वजह से 22 सितंबर को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था. जयललिता के निधन के बाद एक आधिकारिक बयान में चिकित्सकों ने कहा कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा था.
सारांश: तमिलनाडु सरकार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करके दी सफाई शशिकला के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस ब्रिटिश चिकित्सक रिचर्ड बेले ने मौत से जुड़ी कई जानकारियां साझा कीं
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['hin']
एक सारांश बनाओ: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में छात्राओं को अश्लील विडियो क्लीपिंग दिखाने के आरोपी शिक्षक के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। कोरबा जिले के पुलिस अधिकारियों ने आज यहां बताया कि जिले के केंदई माध्यमिक शाला के छात्राओं को अश्लील विडियो क्लीपिंग दिखाने के मामले में पुलिस ने शिक्षक (शिक्षाकर्मी वर्ग दो) निशांत सोनी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। घटना के बाद से सोनी फरार है। अधिकारियों ने बताया कि छात्राओं ने सोनी की हरकतों की जानकारी अपने परिजनों को दी थी। बाद में परिजनों ने खंड शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार चंद्रकार से सोनी की शिकायत की थी।टिप्पणियां उन्होंने बताया कि इसके बाद छात्राओं के परिजनों ने संकुल केंद्र प्रभारी चमरा सिंह कंवर से सोनी की शिकायत की तब कंवर ने सोनी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने सोनी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस में शिकायत के बाद से आरोपी सोनी फरार है। पुलिस उसे तलाश कर रही है। कोरबा जिले के पुलिस अधिकारियों ने आज यहां बताया कि जिले के केंदई माध्यमिक शाला के छात्राओं को अश्लील विडियो क्लीपिंग दिखाने के मामले में पुलिस ने शिक्षक (शिक्षाकर्मी वर्ग दो) निशांत सोनी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। घटना के बाद से सोनी फरार है। अधिकारियों ने बताया कि छात्राओं ने सोनी की हरकतों की जानकारी अपने परिजनों को दी थी। बाद में परिजनों ने खंड शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार चंद्रकार से सोनी की शिकायत की थी।टिप्पणियां उन्होंने बताया कि इसके बाद छात्राओं के परिजनों ने संकुल केंद्र प्रभारी चमरा सिंह कंवर से सोनी की शिकायत की तब कंवर ने सोनी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने सोनी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस में शिकायत के बाद से आरोपी सोनी फरार है। पुलिस उसे तलाश कर रही है। अधिकारियों ने बताया कि छात्राओं ने सोनी की हरकतों की जानकारी अपने परिजनों को दी थी। बाद में परिजनों ने खंड शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार चंद्रकार से सोनी की शिकायत की थी।टिप्पणियां उन्होंने बताया कि इसके बाद छात्राओं के परिजनों ने संकुल केंद्र प्रभारी चमरा सिंह कंवर से सोनी की शिकायत की तब कंवर ने सोनी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने सोनी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस में शिकायत के बाद से आरोपी सोनी फरार है। पुलिस उसे तलाश कर रही है। उन्होंने बताया कि इसके बाद छात्राओं के परिजनों ने संकुल केंद्र प्रभारी चमरा सिंह कंवर से सोनी की शिकायत की तब कंवर ने सोनी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने सोनी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस में शिकायत के बाद से आरोपी सोनी फरार है। पुलिस उसे तलाश कर रही है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने सोनी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस में शिकायत के बाद से आरोपी सोनी फरार है। पुलिस उसे तलाश कर रही है।
यहाँ एक सारांश है:कोरबा जिले के पुलिस अधिकारियों ने आज यहां बताया कि जिले के केंदई माध्यमिक शाला के छात्राओं को अश्लील विडियो क्लीपिंग दिखाने के मामले में पुलिस ने शिक्षक निशांत सोनी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। घटना के बाद से सोनी फरार है।
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['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: अमेरिका और भारत (America and India) बुधवार को सुरक्षा व असैन्य परमाणु सहयोग को मजबूत करने और भारत में 6 अमेरिकी परमाणु ऊर्जा संयंत्र (Nuclear Plant) बनाने पर सहमत हुए हैं. दोनों देशों ने एक संयुक्त बयान में यह जानकारी दी है. आपको बता दें कि वाशिंगटन में दो दिनों तक चली बातचीत के बाद दोनों देश इस मसौदे पर सहमत हुए. भारत की तरफ से विदेश सचिव विजय गोखले और अमेरिका के स्टेट फॉर आर्म्स कंट्रोल एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी विभाग की अंडर सेक्रेटरी एंड्रिया थॉम्पसन ने बातचीत में हिस्सा लिया.  दोनों देशों के संयुक्त बयान में कहा गया है, ''हम द्विपक्षीय सुरक्षा और असैन्य परमाणु सहयोग को मजबूत करने के साथ-साथ भारत में 6 अमेरिकी परमाणु ऊर्जा संयंत्र (Nuclear Plant) के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध हैं''. हालांकि बयान में परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के बारे में और जानकारी नहीं दी गई है. गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रंप की अगुवाई में अमेरिका दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल खरीददार भारत में तमाम संभावनाएं देख रहा है और इसी कड़ी में वह भारत को और ऊर्जा उत्पाद बेचना चाहता है. आपको बता दें कि दोनों देश करीब एक दशक से भारत को अमेरिकी न्यूक्लियर रिएक्टर्स की आपूर्ति पर मंथन कर रहे थे. हालांकि नियम-कायदों की वजह से अभी तक बात पटरी पर नहीं आ सकी थी.
संक्षिप्त सारांश: भारत और अमेरिका के बीच सहमति अमेरिका करेगा छह परमाणु ऊर्जा संयंत्रों का निर्माण दो दिनों की बातचीत के बाद निर्णय
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['hin']
एक सारांश बनाओ: सार्वजनिक क्षेत्र के इंडियन बैंक ने गलत गतिविधियों में शामिल रहने के आरोपी एक अधिकारी को निलंबित कर दिया। ऑनलाइन पोर्टल के खुलासे के बाद बैंक ने यह कदम उठाया। बैंक ने इसके साथ ही सभी खातों को अपने ग्राहक को जानिए (केवाईसी) नियमों के अंतर्गत लाने की प्रक्रिया शुरू की है। इंडियन बैंक के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक टीएम भसीन ने यहां संवाददाताओं से कहा बैंक ने दक्षिण दिल्ली की शाखा में कार्यरत सहायक महाप्रबंधक आर मनोहर को लोगों को निर्थक सलाह देने को लेकर निलंबित कर दिया। भसीन ने कहा, ‘‘मुझे उस दिन करीब 11.30 मिनट पर सूचना मिली और तत्काल मैंने पूरी वेबकास्ट देखी। उन्होंने निर्थक सलाह दी, इस तरह की खोखली सलाह के जरिये उन्होंने गलत सूचना दी। इसके कारण हमने उन्हें निलंबित करने का निर्णय किया।’’ ऑनलाइन पोर्टल कोबरापोस्ट ने सोमवार को अपने दूसरे खुलासे में इंडियन बैंक के अलावा एसबीआई तथा एलआईसी समेत 23 सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों और बीमा कंपनियों पर मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल होने का आरोन लगाया है। टिप्पणियां कोबरापोस्ट के स्टिंग आपरेशन के बारे में भसीन ने कहा, ‘‘हमारी आज निदेशक मंडल की बैठक हुई जिसमें इस पर विस्तार से चर्चा हुई..।’’ उन्होंने कहा कि इंडियन बैंक ने अपने सभी परिचालन वाले खातों को अपने ग्राहक को जानो (केवाईसी) नियमों के अनुपालन करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। भसीन ने कहा कि फिलहाल 98 प्रतिशत खाते केवाईसी नियमों के अंतर्गत हैं और 30 जून तक इसे 100 प्रतिशत बनाने के लिए प्रयास किए जाएंगे। बैंक ने इसके साथ ही सभी खातों को अपने ग्राहक को जानिए (केवाईसी) नियमों के अंतर्गत लाने की प्रक्रिया शुरू की है। इंडियन बैंक के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक टीएम भसीन ने यहां संवाददाताओं से कहा बैंक ने दक्षिण दिल्ली की शाखा में कार्यरत सहायक महाप्रबंधक आर मनोहर को लोगों को निर्थक सलाह देने को लेकर निलंबित कर दिया। भसीन ने कहा, ‘‘मुझे उस दिन करीब 11.30 मिनट पर सूचना मिली और तत्काल मैंने पूरी वेबकास्ट देखी। उन्होंने निर्थक सलाह दी, इस तरह की खोखली सलाह के जरिये उन्होंने गलत सूचना दी। इसके कारण हमने उन्हें निलंबित करने का निर्णय किया।’’ ऑनलाइन पोर्टल कोबरापोस्ट ने सोमवार को अपने दूसरे खुलासे में इंडियन बैंक के अलावा एसबीआई तथा एलआईसी समेत 23 सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों और बीमा कंपनियों पर मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल होने का आरोन लगाया है। टिप्पणियां कोबरापोस्ट के स्टिंग आपरेशन के बारे में भसीन ने कहा, ‘‘हमारी आज निदेशक मंडल की बैठक हुई जिसमें इस पर विस्तार से चर्चा हुई..।’’ उन्होंने कहा कि इंडियन बैंक ने अपने सभी परिचालन वाले खातों को अपने ग्राहक को जानो (केवाईसी) नियमों के अनुपालन करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। भसीन ने कहा कि फिलहाल 98 प्रतिशत खाते केवाईसी नियमों के अंतर्गत हैं और 30 जून तक इसे 100 प्रतिशत बनाने के लिए प्रयास किए जाएंगे। इंडियन बैंक के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक टीएम भसीन ने यहां संवाददाताओं से कहा बैंक ने दक्षिण दिल्ली की शाखा में कार्यरत सहायक महाप्रबंधक आर मनोहर को लोगों को निर्थक सलाह देने को लेकर निलंबित कर दिया। भसीन ने कहा, ‘‘मुझे उस दिन करीब 11.30 मिनट पर सूचना मिली और तत्काल मैंने पूरी वेबकास्ट देखी। उन्होंने निर्थक सलाह दी, इस तरह की खोखली सलाह के जरिये उन्होंने गलत सूचना दी। इसके कारण हमने उन्हें निलंबित करने का निर्णय किया।’’ ऑनलाइन पोर्टल कोबरापोस्ट ने सोमवार को अपने दूसरे खुलासे में इंडियन बैंक के अलावा एसबीआई तथा एलआईसी समेत 23 सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों और बीमा कंपनियों पर मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल होने का आरोन लगाया है। टिप्पणियां कोबरापोस्ट के स्टिंग आपरेशन के बारे में भसीन ने कहा, ‘‘हमारी आज निदेशक मंडल की बैठक हुई जिसमें इस पर विस्तार से चर्चा हुई..।’’ उन्होंने कहा कि इंडियन बैंक ने अपने सभी परिचालन वाले खातों को अपने ग्राहक को जानो (केवाईसी) नियमों के अनुपालन करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। भसीन ने कहा कि फिलहाल 98 प्रतिशत खाते केवाईसी नियमों के अंतर्गत हैं और 30 जून तक इसे 100 प्रतिशत बनाने के लिए प्रयास किए जाएंगे। ऑनलाइन पोर्टल कोबरापोस्ट ने सोमवार को अपने दूसरे खुलासे में इंडियन बैंक के अलावा एसबीआई तथा एलआईसी समेत 23 सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों और बीमा कंपनियों पर मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल होने का आरोन लगाया है। टिप्पणियां कोबरापोस्ट के स्टिंग आपरेशन के बारे में भसीन ने कहा, ‘‘हमारी आज निदेशक मंडल की बैठक हुई जिसमें इस पर विस्तार से चर्चा हुई..।’’ उन्होंने कहा कि इंडियन बैंक ने अपने सभी परिचालन वाले खातों को अपने ग्राहक को जानो (केवाईसी) नियमों के अनुपालन करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। भसीन ने कहा कि फिलहाल 98 प्रतिशत खाते केवाईसी नियमों के अंतर्गत हैं और 30 जून तक इसे 100 प्रतिशत बनाने के लिए प्रयास किए जाएंगे। कोबरापोस्ट के स्टिंग आपरेशन के बारे में भसीन ने कहा, ‘‘हमारी आज निदेशक मंडल की बैठक हुई जिसमें इस पर विस्तार से चर्चा हुई..।’’ उन्होंने कहा कि इंडियन बैंक ने अपने सभी परिचालन वाले खातों को अपने ग्राहक को जानो (केवाईसी) नियमों के अनुपालन करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। भसीन ने कहा कि फिलहाल 98 प्रतिशत खाते केवाईसी नियमों के अंतर्गत हैं और 30 जून तक इसे 100 प्रतिशत बनाने के लिए प्रयास किए जाएंगे। भसीन ने कहा कि फिलहाल 98 प्रतिशत खाते केवाईसी नियमों के अंतर्गत हैं और 30 जून तक इसे 100 प्रतिशत बनाने के लिए प्रयास किए जाएंगे।
यहाँ एक सारांश है:सार्वजनिक क्षेत्र के इंडियन बैंक ने गलत गतिविधियों में शामिल रहने के आरोपी एक अधिकारी को निलंबित कर दिया। ऑनलाइन पोर्टल के खुलासे के बाद बैंक ने यह कदम उठाया।
15
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: सरकारी लेखापरीक्षक कैग का कहना है कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के पास वास्तव में कोई अधिशेष धन नहीं है और संगठन जिसे अतिरिक्त धन बता रहा है वह राशि उसे अंशधारकों के खाते में अभी डालनी है। कैग का कहना है कि 1,731 करोड़ रुपये की इसी बकाया राशि को संगठन 'गुप्त खजाना' बताते हुए अंशधारकों के लिए साढ़े नौ प्रतिशत की ब्याज दर की पेशकश कर रहा है। ईपीएफओ 2005-06 से ही अपने अंशधारकों को 8.5 प्रतिशत की दर से ब्याज दे रहा था। लेकिन उसने 1,731.57 करोड़ रुपये के अधिशेष का हवाला देते हुए 2010-11 के लिए दर को 9.5 प्रतिशत कर दिया। उधर, वित्त मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि ईपीएफओ के ब्याज निलंबन वाले खातों में (आईएसए) में अतिरिक्त राशि इसलिए एकत्रित हो गई क्योंकि संगठन ने मार्च 2010 तक 4.72 करोड़ अंशधारकों के खातों को अद्यतन ही नहीं किया है। ईपीएफओ के पास लगभग 10 करोड़ खाते हैं।
सारांश: कैग ने कहा कि ईपीएफओ के पास कोई अधिशेष धन नहीं है और संगठन जिसे अतिरिक्त धन बता रहा है वह राशि उसे अंशधारकों के खाते में अभी डालनी है।
7
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: इससे पहले सरोजा दिहाड़ी मजदूर थीं और ईंट उठाने का काम करती थीं. वह कहती हैं 'जब मुझे छाती में दर्द की शिकायत हुई तो मरियप्पन ने किसी से पांच सौ रुपए उधार लिए और मुझसे कहा कि मैं सब्जियां बेचने का काम कर लूं.' 1995 में जब मरियप्पन महज़ पांच साल के थे तब उनके स्कूल के पास एक सरकारी बस से टक्कर होने के बाद वह अपना पैर खो बैठे. लेकिन वह रुके नहीं, 17 साल की लंबी कानूनी  लड़ाई के बाद उनके परिवार को दो लाख रुपए का मुआवज़ा दिया गया. सरोजा ने कानूनी खर्चों के लिए लाख रुपए भरे और बाकी के एक लाख अपने बेटे के भविष्य के लिए जमा कर दिए.टिप्पणियां मरियप्पन के तीन भाई और एक बहन है जिसकी शादी हो गई है. गरीबी की वजह से बड़े भाई टी कुमार को पढ़ाई अधूरी छोड़नी पड़ी. दूसरा भाई स्कूल के आगे पढ़ ही नहीं पाया. सबसे छोटा भाई अभी 12वीं में है. उनकी मां कहती हैं कि अगर मदद मिले तो वह अपने बेटों को कॉलेज भेजना चाहेगी. पति के द्वारा परिवार को कथित तौर पर छोड़ देने के बाद सरोजा ने अकेले ही अपने बच्चों की परवरिश की है. काफी वक्त तक कोई भी इस परिवार को किराए पर मकान देने के लिए तैयार नहीं था. अभी भी मरियप्पन का परिवार पांच रुपए महीने के किराए पर एक छोटे से घर में रहता है. मरियप्पन के तीन भाई और एक बहन है जिसकी शादी हो गई है. गरीबी की वजह से बड़े भाई टी कुमार को पढ़ाई अधूरी छोड़नी पड़ी. दूसरा भाई स्कूल के आगे पढ़ ही नहीं पाया. सबसे छोटा भाई अभी 12वीं में है. उनकी मां कहती हैं कि अगर मदद मिले तो वह अपने बेटों को कॉलेज भेजना चाहेगी. पति के द्वारा परिवार को कथित तौर पर छोड़ देने के बाद सरोजा ने अकेले ही अपने बच्चों की परवरिश की है. काफी वक्त तक कोई भी इस परिवार को किराए पर मकान देने के लिए तैयार नहीं था. अभी भी मरियप्पन का परिवार पांच रुपए महीने के किराए पर एक छोटे से घर में रहता है. पति के द्वारा परिवार को कथित तौर पर छोड़ देने के बाद सरोजा ने अकेले ही अपने बच्चों की परवरिश की है. काफी वक्त तक कोई भी इस परिवार को किराए पर मकान देने के लिए तैयार नहीं था. अभी भी मरियप्पन का परिवार पांच रुपए महीने के किराए पर एक छोटे से घर में रहता है.
यह एक सारांश है: मरियप्पन तमिलनाडु के सालेम जिले से ताल्लुक रखते हैं उनकी मां सब्जी बेचने का काम करती हैं उनके भाईयों ने गरीबी की वजह से पढ़ाई बीच में छोड़ दी
9
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने लगातार दूसरी पारी में न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों को अपनी अंगुलियों पर नचाया, जिससे भारत पहला टेस्ट मैच बड़ी आसानी से पारी और 115 रन से जीतकर दो मैच की शृंखला में 1-0 की बढ़त बनाने में कामयाब रहा। पहली पारी में 31 रन देकर छह विकेट लेने वाले अश्विन ने दूसरी पारी में 54 रन देकर छह विकेट लिए। इस तरह से उन्होंने मैच में 85 रन देकर 12 विकेट लिए, जो उनके करियर का और न्यूजीलैंड के खिलाफ किसी भी भारतीय गेंदबाज का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। न्यूजीलैंड की टीम फॉलोऑन के बाद 164 रन पर ढेर हो गई। भारत ने अपनी पारी में 438 रन बनाए थे, जिसके जवाब में कीवी टीम पहली पारी में 159 रन सिमट गई थी। न्यूजीलैंड ने फॉलोऑन के बाद सुबह अपनी दूसरी पारी एक विकेट पर 41 रन से आगे बढ़ाई। उसके बल्लेबाज पहले सत्र में तो विकेट बचाए रखने में कामयाब रहे, लेकिन दूसरे और तीसरे सत्र में भारतीय स्पिनरों ने उन्हें अपने इशारों पर नचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। तीसरे सत्र में तो भारत ने आखिरी चार विकेट केवल 35 गेंद और 18 रन के अंदर लिए। कीवी टीम के आखिरी सात बल्लेबाज केवल सात रन के अंदर पैवेलियन लौटे। अश्विन को अपने साथी स्पिनर प्रज्ञान ओझा का भी अच्छा साथ मिला, जिन्होंने 48 रन देकर तीन विकेट लिए। भारत को पहली सफलता तेज गेंदबाज उमेश यादव ने दिलाई, लेकिन ब्रैंडन मैक्कुलम (42) को पगबाधा आउट दिया जाना विवादास्पद भी रहा। यादव की गेंद मैक्कुलम के बल्ले से लगकर पैड पर लगी थी, लेकिन भारतीयों की जोरदार अपील पर ऑस्ट्रेलियाई अंपायर स्टीव डेविस ने अंगुली उठा दी। मैक्कुलम बड़े बेमन और नाराज होकर पैवेलियन लौटे। इसके साथ ही मैक्कुलम और विलियमस्न के बीच दूसरे विकेट के लिए 72 रन की साझेदारी भी टूट गई। इसके बाद अश्विन और ओझा ने जिम्मेदारी संभाली। उन्हें सुबह के सत्र में पिच से अधिक मदद नहीं मिल रही थी, लेकिन दूसरे सत्र में उन्होंने न्यूजीलैंड की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। कीवी कप्तान टेलर (7) लगातार दूसरी पारी में नाकाम रहे। उन्होंने अश्विन की तेजी से स्पिन लेती गेंद को छोड़ने का गलत फैसला किया, जो उनके ऑफ स्टंप की गिल्ली उड़ाकर ले गई। भारतीय खेमे में तब चिंता बढ़ गई, जब शतकवीर चेतेश्वर पुजारा को क्षेत्ररक्षण करते समय दायें घुटने में चोट लग गई। उन्होंने पिछले साल लंदन में इसी जगह का ऑपरेशन करवाया था। पुजारा सहयोगी स्टाफ की मदद से मैदान के बाहर गए और उनके स्थान पर अजिंक्य रहाणे क्षेत्ररक्षण के लिए उतरे।टिप्पणियां न्यूजीलैंड ने तीसरे दिन के खेल की समाप्ति पर अपनी दूसरी पारी में मार्टिन गुपटिल (16) का विकेट गंवाकर 41 रन बनाए थे। इससे पहले, भारत की पहली पारी में बनाए गए 438 रन के जवाब में कीवी टीम 159 रन पर सिमट गई थी, जिसके बाद भारत ने मेहमान टीम को फॉलोऑन खेलने के लिए आमंत्रित किया। भारत ने चेतेश्वर पुजारा के शानदार 159 रन की बदौलत अपनी पहली पारी में 438 रन बनाए थे। इसके अलावा कप्तान महेंद्र सिंह धौनी ने 73 और विराट कोहली ने 58 रन जोड़े थे। पहली पारी में 31 रन देकर छह विकेट लेने वाले अश्विन ने दूसरी पारी में 54 रन देकर छह विकेट लिए। इस तरह से उन्होंने मैच में 85 रन देकर 12 विकेट लिए, जो उनके करियर का और न्यूजीलैंड के खिलाफ किसी भी भारतीय गेंदबाज का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। न्यूजीलैंड की टीम फॉलोऑन के बाद 164 रन पर ढेर हो गई। भारत ने अपनी पारी में 438 रन बनाए थे, जिसके जवाब में कीवी टीम पहली पारी में 159 रन सिमट गई थी। न्यूजीलैंड ने फॉलोऑन के बाद सुबह अपनी दूसरी पारी एक विकेट पर 41 रन से आगे बढ़ाई। उसके बल्लेबाज पहले सत्र में तो विकेट बचाए रखने में कामयाब रहे, लेकिन दूसरे और तीसरे सत्र में भारतीय स्पिनरों ने उन्हें अपने इशारों पर नचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। तीसरे सत्र में तो भारत ने आखिरी चार विकेट केवल 35 गेंद और 18 रन के अंदर लिए। कीवी टीम के आखिरी सात बल्लेबाज केवल सात रन के अंदर पैवेलियन लौटे। अश्विन को अपने साथी स्पिनर प्रज्ञान ओझा का भी अच्छा साथ मिला, जिन्होंने 48 रन देकर तीन विकेट लिए। भारत को पहली सफलता तेज गेंदबाज उमेश यादव ने दिलाई, लेकिन ब्रैंडन मैक्कुलम (42) को पगबाधा आउट दिया जाना विवादास्पद भी रहा। यादव की गेंद मैक्कुलम के बल्ले से लगकर पैड पर लगी थी, लेकिन भारतीयों की जोरदार अपील पर ऑस्ट्रेलियाई अंपायर स्टीव डेविस ने अंगुली उठा दी। मैक्कुलम बड़े बेमन और नाराज होकर पैवेलियन लौटे। इसके साथ ही मैक्कुलम और विलियमस्न के बीच दूसरे विकेट के लिए 72 रन की साझेदारी भी टूट गई। इसके बाद अश्विन और ओझा ने जिम्मेदारी संभाली। उन्हें सुबह के सत्र में पिच से अधिक मदद नहीं मिल रही थी, लेकिन दूसरे सत्र में उन्होंने न्यूजीलैंड की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। कीवी कप्तान टेलर (7) लगातार दूसरी पारी में नाकाम रहे। उन्होंने अश्विन की तेजी से स्पिन लेती गेंद को छोड़ने का गलत फैसला किया, जो उनके ऑफ स्टंप की गिल्ली उड़ाकर ले गई। भारतीय खेमे में तब चिंता बढ़ गई, जब शतकवीर चेतेश्वर पुजारा को क्षेत्ररक्षण करते समय दायें घुटने में चोट लग गई। उन्होंने पिछले साल लंदन में इसी जगह का ऑपरेशन करवाया था। पुजारा सहयोगी स्टाफ की मदद से मैदान के बाहर गए और उनके स्थान पर अजिंक्य रहाणे क्षेत्ररक्षण के लिए उतरे।टिप्पणियां न्यूजीलैंड ने तीसरे दिन के खेल की समाप्ति पर अपनी दूसरी पारी में मार्टिन गुपटिल (16) का विकेट गंवाकर 41 रन बनाए थे। इससे पहले, भारत की पहली पारी में बनाए गए 438 रन के जवाब में कीवी टीम 159 रन पर सिमट गई थी, जिसके बाद भारत ने मेहमान टीम को फॉलोऑन खेलने के लिए आमंत्रित किया। भारत ने चेतेश्वर पुजारा के शानदार 159 रन की बदौलत अपनी पहली पारी में 438 रन बनाए थे। इसके अलावा कप्तान महेंद्र सिंह धौनी ने 73 और विराट कोहली ने 58 रन जोड़े थे। न्यूजीलैंड की टीम फॉलोऑन के बाद 164 रन पर ढेर हो गई। भारत ने अपनी पारी में 438 रन बनाए थे, जिसके जवाब में कीवी टीम पहली पारी में 159 रन सिमट गई थी। न्यूजीलैंड ने फॉलोऑन के बाद सुबह अपनी दूसरी पारी एक विकेट पर 41 रन से आगे बढ़ाई। उसके बल्लेबाज पहले सत्र में तो विकेट बचाए रखने में कामयाब रहे, लेकिन दूसरे और तीसरे सत्र में भारतीय स्पिनरों ने उन्हें अपने इशारों पर नचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। तीसरे सत्र में तो भारत ने आखिरी चार विकेट केवल 35 गेंद और 18 रन के अंदर लिए। कीवी टीम के आखिरी सात बल्लेबाज केवल सात रन के अंदर पैवेलियन लौटे। अश्विन को अपने साथी स्पिनर प्रज्ञान ओझा का भी अच्छा साथ मिला, जिन्होंने 48 रन देकर तीन विकेट लिए। भारत को पहली सफलता तेज गेंदबाज उमेश यादव ने दिलाई, लेकिन ब्रैंडन मैक्कुलम (42) को पगबाधा आउट दिया जाना विवादास्पद भी रहा। यादव की गेंद मैक्कुलम के बल्ले से लगकर पैड पर लगी थी, लेकिन भारतीयों की जोरदार अपील पर ऑस्ट्रेलियाई अंपायर स्टीव डेविस ने अंगुली उठा दी। मैक्कुलम बड़े बेमन और नाराज होकर पैवेलियन लौटे। इसके साथ ही मैक्कुलम और विलियमस्न के बीच दूसरे विकेट के लिए 72 रन की साझेदारी भी टूट गई। इसके बाद अश्विन और ओझा ने जिम्मेदारी संभाली। उन्हें सुबह के सत्र में पिच से अधिक मदद नहीं मिल रही थी, लेकिन दूसरे सत्र में उन्होंने न्यूजीलैंड की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। कीवी कप्तान टेलर (7) लगातार दूसरी पारी में नाकाम रहे। उन्होंने अश्विन की तेजी से स्पिन लेती गेंद को छोड़ने का गलत फैसला किया, जो उनके ऑफ स्टंप की गिल्ली उड़ाकर ले गई। भारतीय खेमे में तब चिंता बढ़ गई, जब शतकवीर चेतेश्वर पुजारा को क्षेत्ररक्षण करते समय दायें घुटने में चोट लग गई। उन्होंने पिछले साल लंदन में इसी जगह का ऑपरेशन करवाया था। पुजारा सहयोगी स्टाफ की मदद से मैदान के बाहर गए और उनके स्थान पर अजिंक्य रहाणे क्षेत्ररक्षण के लिए उतरे।टिप्पणियां न्यूजीलैंड ने तीसरे दिन के खेल की समाप्ति पर अपनी दूसरी पारी में मार्टिन गुपटिल (16) का विकेट गंवाकर 41 रन बनाए थे। इससे पहले, भारत की पहली पारी में बनाए गए 438 रन के जवाब में कीवी टीम 159 रन पर सिमट गई थी, जिसके बाद भारत ने मेहमान टीम को फॉलोऑन खेलने के लिए आमंत्रित किया। भारत ने चेतेश्वर पुजारा के शानदार 159 रन की बदौलत अपनी पहली पारी में 438 रन बनाए थे। इसके अलावा कप्तान महेंद्र सिंह धौनी ने 73 और विराट कोहली ने 58 रन जोड़े थे। न्यूजीलैंड ने फॉलोऑन के बाद सुबह अपनी दूसरी पारी एक विकेट पर 41 रन से आगे बढ़ाई। उसके बल्लेबाज पहले सत्र में तो विकेट बचाए रखने में कामयाब रहे, लेकिन दूसरे और तीसरे सत्र में भारतीय स्पिनरों ने उन्हें अपने इशारों पर नचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। तीसरे सत्र में तो भारत ने आखिरी चार विकेट केवल 35 गेंद और 18 रन के अंदर लिए। कीवी टीम के आखिरी सात बल्लेबाज केवल सात रन के अंदर पैवेलियन लौटे। अश्विन को अपने साथी स्पिनर प्रज्ञान ओझा का भी अच्छा साथ मिला, जिन्होंने 48 रन देकर तीन विकेट लिए। भारत को पहली सफलता तेज गेंदबाज उमेश यादव ने दिलाई, लेकिन ब्रैंडन मैक्कुलम (42) को पगबाधा आउट दिया जाना विवादास्पद भी रहा। यादव की गेंद मैक्कुलम के बल्ले से लगकर पैड पर लगी थी, लेकिन भारतीयों की जोरदार अपील पर ऑस्ट्रेलियाई अंपायर स्टीव डेविस ने अंगुली उठा दी। मैक्कुलम बड़े बेमन और नाराज होकर पैवेलियन लौटे। इसके साथ ही मैक्कुलम और विलियमस्न के बीच दूसरे विकेट के लिए 72 रन की साझेदारी भी टूट गई। इसके बाद अश्विन और ओझा ने जिम्मेदारी संभाली। उन्हें सुबह के सत्र में पिच से अधिक मदद नहीं मिल रही थी, लेकिन दूसरे सत्र में उन्होंने न्यूजीलैंड की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। कीवी कप्तान टेलर (7) लगातार दूसरी पारी में नाकाम रहे। उन्होंने अश्विन की तेजी से स्पिन लेती गेंद को छोड़ने का गलत फैसला किया, जो उनके ऑफ स्टंप की गिल्ली उड़ाकर ले गई। भारतीय खेमे में तब चिंता बढ़ गई, जब शतकवीर चेतेश्वर पुजारा को क्षेत्ररक्षण करते समय दायें घुटने में चोट लग गई। उन्होंने पिछले साल लंदन में इसी जगह का ऑपरेशन करवाया था। पुजारा सहयोगी स्टाफ की मदद से मैदान के बाहर गए और उनके स्थान पर अजिंक्य रहाणे क्षेत्ररक्षण के लिए उतरे।टिप्पणियां न्यूजीलैंड ने तीसरे दिन के खेल की समाप्ति पर अपनी दूसरी पारी में मार्टिन गुपटिल (16) का विकेट गंवाकर 41 रन बनाए थे। इससे पहले, भारत की पहली पारी में बनाए गए 438 रन के जवाब में कीवी टीम 159 रन पर सिमट गई थी, जिसके बाद भारत ने मेहमान टीम को फॉलोऑन खेलने के लिए आमंत्रित किया। भारत ने चेतेश्वर पुजारा के शानदार 159 रन की बदौलत अपनी पहली पारी में 438 रन बनाए थे। इसके अलावा कप्तान महेंद्र सिंह धौनी ने 73 और विराट कोहली ने 58 रन जोड़े थे। अश्विन को अपने साथी स्पिनर प्रज्ञान ओझा का भी अच्छा साथ मिला, जिन्होंने 48 रन देकर तीन विकेट लिए। भारत को पहली सफलता तेज गेंदबाज उमेश यादव ने दिलाई, लेकिन ब्रैंडन मैक्कुलम (42) को पगबाधा आउट दिया जाना विवादास्पद भी रहा। यादव की गेंद मैक्कुलम के बल्ले से लगकर पैड पर लगी थी, लेकिन भारतीयों की जोरदार अपील पर ऑस्ट्रेलियाई अंपायर स्टीव डेविस ने अंगुली उठा दी। मैक्कुलम बड़े बेमन और नाराज होकर पैवेलियन लौटे। इसके साथ ही मैक्कुलम और विलियमस्न के बीच दूसरे विकेट के लिए 72 रन की साझेदारी भी टूट गई। इसके बाद अश्विन और ओझा ने जिम्मेदारी संभाली। उन्हें सुबह के सत्र में पिच से अधिक मदद नहीं मिल रही थी, लेकिन दूसरे सत्र में उन्होंने न्यूजीलैंड की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। कीवी कप्तान टेलर (7) लगातार दूसरी पारी में नाकाम रहे। उन्होंने अश्विन की तेजी से स्पिन लेती गेंद को छोड़ने का गलत फैसला किया, जो उनके ऑफ स्टंप की गिल्ली उड़ाकर ले गई। भारतीय खेमे में तब चिंता बढ़ गई, जब शतकवीर चेतेश्वर पुजारा को क्षेत्ररक्षण करते समय दायें घुटने में चोट लग गई। उन्होंने पिछले साल लंदन में इसी जगह का ऑपरेशन करवाया था। पुजारा सहयोगी स्टाफ की मदद से मैदान के बाहर गए और उनके स्थान पर अजिंक्य रहाणे क्षेत्ररक्षण के लिए उतरे।टिप्पणियां न्यूजीलैंड ने तीसरे दिन के खेल की समाप्ति पर अपनी दूसरी पारी में मार्टिन गुपटिल (16) का विकेट गंवाकर 41 रन बनाए थे। इससे पहले, भारत की पहली पारी में बनाए गए 438 रन के जवाब में कीवी टीम 159 रन पर सिमट गई थी, जिसके बाद भारत ने मेहमान टीम को फॉलोऑन खेलने के लिए आमंत्रित किया। भारत ने चेतेश्वर पुजारा के शानदार 159 रन की बदौलत अपनी पहली पारी में 438 रन बनाए थे। इसके अलावा कप्तान महेंद्र सिंह धौनी ने 73 और विराट कोहली ने 58 रन जोड़े थे। इसके साथ ही मैक्कुलम और विलियमस्न के बीच दूसरे विकेट के लिए 72 रन की साझेदारी भी टूट गई। इसके बाद अश्विन और ओझा ने जिम्मेदारी संभाली। उन्हें सुबह के सत्र में पिच से अधिक मदद नहीं मिल रही थी, लेकिन दूसरे सत्र में उन्होंने न्यूजीलैंड की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। कीवी कप्तान टेलर (7) लगातार दूसरी पारी में नाकाम रहे। उन्होंने अश्विन की तेजी से स्पिन लेती गेंद को छोड़ने का गलत फैसला किया, जो उनके ऑफ स्टंप की गिल्ली उड़ाकर ले गई। भारतीय खेमे में तब चिंता बढ़ गई, जब शतकवीर चेतेश्वर पुजारा को क्षेत्ररक्षण करते समय दायें घुटने में चोट लग गई। उन्होंने पिछले साल लंदन में इसी जगह का ऑपरेशन करवाया था। पुजारा सहयोगी स्टाफ की मदद से मैदान के बाहर गए और उनके स्थान पर अजिंक्य रहाणे क्षेत्ररक्षण के लिए उतरे।टिप्पणियां न्यूजीलैंड ने तीसरे दिन के खेल की समाप्ति पर अपनी दूसरी पारी में मार्टिन गुपटिल (16) का विकेट गंवाकर 41 रन बनाए थे। इससे पहले, भारत की पहली पारी में बनाए गए 438 रन के जवाब में कीवी टीम 159 रन पर सिमट गई थी, जिसके बाद भारत ने मेहमान टीम को फॉलोऑन खेलने के लिए आमंत्रित किया। भारत ने चेतेश्वर पुजारा के शानदार 159 रन की बदौलत अपनी पहली पारी में 438 रन बनाए थे। इसके अलावा कप्तान महेंद्र सिंह धौनी ने 73 और विराट कोहली ने 58 रन जोड़े थे। भारतीय खेमे में तब चिंता बढ़ गई, जब शतकवीर चेतेश्वर पुजारा को क्षेत्ररक्षण करते समय दायें घुटने में चोट लग गई। उन्होंने पिछले साल लंदन में इसी जगह का ऑपरेशन करवाया था। पुजारा सहयोगी स्टाफ की मदद से मैदान के बाहर गए और उनके स्थान पर अजिंक्य रहाणे क्षेत्ररक्षण के लिए उतरे।टिप्पणियां न्यूजीलैंड ने तीसरे दिन के खेल की समाप्ति पर अपनी दूसरी पारी में मार्टिन गुपटिल (16) का विकेट गंवाकर 41 रन बनाए थे। इससे पहले, भारत की पहली पारी में बनाए गए 438 रन के जवाब में कीवी टीम 159 रन पर सिमट गई थी, जिसके बाद भारत ने मेहमान टीम को फॉलोऑन खेलने के लिए आमंत्रित किया। भारत ने चेतेश्वर पुजारा के शानदार 159 रन की बदौलत अपनी पहली पारी में 438 रन बनाए थे। इसके अलावा कप्तान महेंद्र सिंह धौनी ने 73 और विराट कोहली ने 58 रन जोड़े थे। न्यूजीलैंड ने तीसरे दिन के खेल की समाप्ति पर अपनी दूसरी पारी में मार्टिन गुपटिल (16) का विकेट गंवाकर 41 रन बनाए थे। इससे पहले, भारत की पहली पारी में बनाए गए 438 रन के जवाब में कीवी टीम 159 रन पर सिमट गई थी, जिसके बाद भारत ने मेहमान टीम को फॉलोऑन खेलने के लिए आमंत्रित किया। भारत ने चेतेश्वर पुजारा के शानदार 159 रन की बदौलत अपनी पहली पारी में 438 रन बनाए थे। इसके अलावा कप्तान महेंद्र सिंह धौनी ने 73 और विराट कोहली ने 58 रन जोड़े थे। भारत ने चेतेश्वर पुजारा के शानदार 159 रन की बदौलत अपनी पहली पारी में 438 रन बनाए थे। इसके अलावा कप्तान महेंद्र सिंह धौनी ने 73 और विराट कोहली ने 58 रन जोड़े थे।
यह एक सारांश है: फॉलोऑन खेलने को मजबूर हुई न्यूजीलैंड की टीम दूसरी पारी में 164 रन पर ऑल आउट हो गई। अश्विन ने मैच की दोनों पारियों में कुल 12 विकेट झटके।
24
['hin']
एक सारांश बनाओ: जस्टिस चेलामेश्वर 22 जून को रिटायर होंगे लेकिन 18 मई को सुप्रीम कोर्ट में गर्मियों की छुट्टियां हो रही हैं. सुप्रीम कोर्ट की परंपरा के मुताबिक रिटायर होने वाले जज आखिरी दिन चीफ जस्टिस के साथ कोर्ट में बैठते हैं. लेकिन अब ये 18 जुलाई को ही तय होगा कि वे चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के साथ बैठेंगे या नहीं.टिप्पणियां जस्टिस चेलामेश्वर दूसरे जजों के विदाई समारोह में भी नहीं आते रहे हैं. यहां तक कि उन्होंने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में भी विदाई समारोह में जाने से इनकार कर दिया था. गुवाहाटी हाईकोर्ट में उन्होंने बार के दफ्तर में अनौपचारिक समारोह में भाग लिया था.  अक्तूबर 2016 में सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस सी नागप्पन ने भी बार को विदाई समारोह से इनकार कर दिया था. हालांकि जजों ने उनको जज लाउंज में विदाई पार्टी दी थी.  जस्टिस चेलामेश्वर दूसरे जजों के विदाई समारोह में भी नहीं आते रहे हैं. यहां तक कि उन्होंने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में भी विदाई समारोह में जाने से इनकार कर दिया था. गुवाहाटी हाईकोर्ट में उन्होंने बार के दफ्तर में अनौपचारिक समारोह में भाग लिया था.  अक्तूबर 2016 में सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस सी नागप्पन ने भी बार को विदाई समारोह से इनकार कर दिया था. हालांकि जजों ने उनको जज लाउंज में विदाई पार्टी दी थी.  अक्तूबर 2016 में सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस सी नागप्पन ने भी बार को विदाई समारोह से इनकार कर दिया था. हालांकि जजों ने उनको जज लाउंज में विदाई पार्टी दी थी.
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: बार एसोसिएशन ने करीब एक घंटे तक मनाने की कोशिश की वादा किया कि जुलाई में वे सब वकीलों से मिलेंगे 22 जून को रिटायर होंगे, 18 मई से सुप्रीम कोर्ट में छुट्टियां
32
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: सेना में ट्रक खरीद में घूस की पेशकश से जुड़े केस में सीबीआई ने टाट्रा वेक्ट्रा के सीईओ रवि ऋषि को तलब किया है। इसके अलावा सीबीआई ने रक्षा मंत्रालय को चिट्ठी लिखकर सेना और टाट्रा वेक्ट्रा के बीच हुए करार से जुड़े सभी दस्तावेज मुहैया करवाने को कहा है। सीबीआई ने इस मामले की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट दर्ज कर ली है।टिप्पणियां गौरतलब है कि सेनाध्यक्ष ने इसी कंपनी के ट्रकों की खरीरादी के लिए खुद को 14 करोड़ रुपये की रिश्वत की पेशकश किए जाने का दावा किया था और जानकारी आई थी कि उन्होंने तत्काल इसकी सूचना रक्षा मंत्री एके एंटनी को दी थी। सेनाध्यक्ष के खुलासे के बाद राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया और रक्षा मंत्री को सीबीआई जांच की घोषणा करनी पड़ी। इस संबंध में सीबीआई को आर्मी चीफ ने वीडियो टेप पहले ही सौंप दिए हैं। गौरतलब है कि सेनाध्यक्ष ने इसी कंपनी के ट्रकों की खरीरादी के लिए खुद को 14 करोड़ रुपये की रिश्वत की पेशकश किए जाने का दावा किया था और जानकारी आई थी कि उन्होंने तत्काल इसकी सूचना रक्षा मंत्री एके एंटनी को दी थी। सेनाध्यक्ष के खुलासे के बाद राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया और रक्षा मंत्री को सीबीआई जांच की घोषणा करनी पड़ी। इस संबंध में सीबीआई को आर्मी चीफ ने वीडियो टेप पहले ही सौंप दिए हैं। सेनाध्यक्ष के खुलासे के बाद राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया और रक्षा मंत्री को सीबीआई जांच की घोषणा करनी पड़ी। इस संबंध में सीबीआई को आर्मी चीफ ने वीडियो टेप पहले ही सौंप दिए हैं।
यहाँ एक सारांश है:सीबीआई ने टाट्रा ट्रक खरीद घोटाला मामले में आज एफआईआर दर्ज कर उसकी भूमिका की जांच शुरू कर दी है।
17
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: फिल्म 'चक्रव्यूह' से चमक-दमक भरी छवि को तोड़ने वाली बॉलीवुड अभिनेत्री ईशा गुप्ता अब एक्शन पर आधारित फिल्में करना चाहती हैं। 'ब्लेंडर्स प्राइड फैशन शो' के दौरान 26 वर्षीय ईशा ने कहा कि वह ऐसी फिल्म करना चाहेंगी, जो वास्तव में पूरी तरह से एक्शन फिल्म हो और उन्हें यह बिल्कुल नहीं पता कि उन्हें ऐसी फिल्में क्यों पसंद हैं?टिप्पणियां ईशा ने फिल्म 'जन्नत 2' से बॉलीवुड करियर की शुरुआत की थी और उनकी हालिया प्रदर्शित फिल्म 'राज-3' और 'चक्रव्यूह' थी। जब उनसे पूछा गया कि नकारात्मक किरदार निभाने वाले किस खास अभिनेता के साथ लड़ना चाहेंगी तो उन्होंने कहा, ऐसा कोई खास खलनायक नहीं है। फिल्मी पर्दे पर दिखने वाले ये खलनायक वास्तविक जिंदगी में काफी अच्छे होते हैं। जैसे कि 'चक्रव्यूह' के मनोज वाजपेयी। जब आप उनसे मिलेंगे तब आपको पता चलेगा कि उनसे ज्यादा मजाकिया कोई नहीं है। 'ब्लेंडर्स प्राइड फैशन शो' के दौरान 26 वर्षीय ईशा ने कहा कि वह ऐसी फिल्म करना चाहेंगी, जो वास्तव में पूरी तरह से एक्शन फिल्म हो और उन्हें यह बिल्कुल नहीं पता कि उन्हें ऐसी फिल्में क्यों पसंद हैं?टिप्पणियां ईशा ने फिल्म 'जन्नत 2' से बॉलीवुड करियर की शुरुआत की थी और उनकी हालिया प्रदर्शित फिल्म 'राज-3' और 'चक्रव्यूह' थी। जब उनसे पूछा गया कि नकारात्मक किरदार निभाने वाले किस खास अभिनेता के साथ लड़ना चाहेंगी तो उन्होंने कहा, ऐसा कोई खास खलनायक नहीं है। फिल्मी पर्दे पर दिखने वाले ये खलनायक वास्तविक जिंदगी में काफी अच्छे होते हैं। जैसे कि 'चक्रव्यूह' के मनोज वाजपेयी। जब आप उनसे मिलेंगे तब आपको पता चलेगा कि उनसे ज्यादा मजाकिया कोई नहीं है। ईशा ने फिल्म 'जन्नत 2' से बॉलीवुड करियर की शुरुआत की थी और उनकी हालिया प्रदर्शित फिल्म 'राज-3' और 'चक्रव्यूह' थी। जब उनसे पूछा गया कि नकारात्मक किरदार निभाने वाले किस खास अभिनेता के साथ लड़ना चाहेंगी तो उन्होंने कहा, ऐसा कोई खास खलनायक नहीं है। फिल्मी पर्दे पर दिखने वाले ये खलनायक वास्तविक जिंदगी में काफी अच्छे होते हैं। जैसे कि 'चक्रव्यूह' के मनोज वाजपेयी। जब आप उनसे मिलेंगे तब आपको पता चलेगा कि उनसे ज्यादा मजाकिया कोई नहीं है। जब उनसे पूछा गया कि नकारात्मक किरदार निभाने वाले किस खास अभिनेता के साथ लड़ना चाहेंगी तो उन्होंने कहा, ऐसा कोई खास खलनायक नहीं है। फिल्मी पर्दे पर दिखने वाले ये खलनायक वास्तविक जिंदगी में काफी अच्छे होते हैं। जैसे कि 'चक्रव्यूह' के मनोज वाजपेयी। जब आप उनसे मिलेंगे तब आपको पता चलेगा कि उनसे ज्यादा मजाकिया कोई नहीं है।
संक्षिप्त पाठ: 26 वर्षीय ईशा ने कहा कि वह ऐसी फिल्म करना चाहेंगी, जो वास्तव में पूरी तरह से एक्शन फिल्म हो और उन्हें यह बिल्कुल नहीं पता कि उन्हें ऐसी फिल्में क्यों पसंद हैं?
13
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) ने मंगलवार को कहा कि यदि हिंदुत्व विचारक वीर सावरकर उस समय देश के प्रधानमंत्री होते तो पाकिस्तान अस्तित्व में ही नहीं आता. उन्होंने वीर सावरकर को भारत रत्न से सम्मानित किये जाने की मांग की. ठाकरे ने एक आत्मकथा ‘‘सावरकर: इकोज फ्राम अ फॉरगाटेन पास्ट'' के विमोचन के मौके पर कहा, ‘‘सावरकर को भारत रत्न सम्मान से नवाजा जाना चाहिए. हम (महात्मा) गांधी और (पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल) नेहरू द्वारा किए गए काम से इनकार नहीं करते है, लेकिन देश ने दो से अधिक परिवारों को राजनीतिक परिदृश्य पर अवतरित होते हुए देखा.'' उद्धव ठाकरे ने कहा, ‘‘उन्हें नेहरू को वीर कहने में गुरेज नहीं होता यदि वह 14 मिनट भी जेल के भीतर सावरकर की तरह रहे होते. सावरकर 14 वर्षों तक जेल में रहे थे.'' उन्होंने राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष गांधी को इस किताब की एक प्रति दी जानी चाहिए. इससे पहले शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर बड़ा बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि जिस तरह केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाया उसी तरह उसे चाहिए कि वह अयोध्या में राम मंदिर बनाने का भी साहस दिखाए. उन्होंने कहा कि अब राम मंदिर के लिए इंतजार करने का कोई मतलब नहीं बनता है.
संक्षिप्त पाठ: शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने दिया बयान वीर सावरकर को भारत रत्न से सम्मानित किये जाने की मांग विमोचन के मौके पर कही ये बात
13
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: अगस्त 2019 से दिल्ली में वाहन चालकों को सावधान हो जाना होगा. इस माह से वाहन मालिक के मोबाइल पर चालान आएंगे. कैमरे वाहनों पर नजर रखेंगे. अगर दिल्ली में वाहन चलाने के दौरान ट्रैफिक के नियम तोड़े तो आने वाले वक्त में बच नहीं पाएंगे. अगस्त 2019 तक दिल्ली में इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लागू हो जाएगा. यानी शहर के  ट्रैफिक सिस्टम को ऐसी तकनीक से लैस कर दिया जाएगा कि कोई भी ट्रैफिक का नियम तोड़ेगा तो उसका बचना मुश्किल होगा. दिल्ली पुलिस की सालाना प्रेस वार्ता में ट्रैफिक पुलिस के स्पेशल कमिश्नर ताज हसन ने बताया कि अगर कोई रेड लाइट जम्प करता है तो उसका चालान जुलाई 2019 से 3 डी राडार पर आधारित रेड लाइट वॉयलेशन डिटेक्शन कैमरा करेगा, जो ऑटोमेटिक चालान करेगा और चालान सीधा रेड लाइट जम्प करने वाले के मोबाइल पर भेजेगा. ऐसे 96 कैमरे 24 मुख्य जंक्शनों पर लगाए जाएंगे. ये कैमरे अपने आप तस्वीर लेंगे और चालान करेंगे.इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम रात के अंधेरे में भी काम करेगा. शहर में वाहनों में ओवरस्पीड एक बड़ी समस्या है. इससे निपटने के लिए गेन्ट्री माउंटेड राडार बेस्ड ओवर स्पीड डिटेक्शन सिस्टम 100 जगहों पर लगाया जाएगा. इसमें लगे कैमरे एक साथ कई वाहनों की स्पीड डिटेक्ट कर सकते हैं. सिस्टम ओवरस्पीड चलने वालों का चालान अपने आप काटकर सीधा उनके मोबाइल पर एसएमएस के जरिए भेज देगा. यह प्रोजेक्ट 27 करोड़ का है जो जुलाई 2019 में शुरू हो जाएगा. इसी तरह ओवर स्पीड से चलने वालों के लिए 55 स्पीड गंस भी आ रही हैं जो पोर्टेबल माउंटेड राडार से जुड़ी होंगी और अपने आप चालान काटेंगी. चालान एसएमएस के जरिए पहुंच जाएगा. यह प्रोजेक्ट मार्च 2019 से शुरू हो जाएगा. ट्रैफिक पुलिस के अधिकारियों के मुताबिक आईटीएमएस यानी इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम अगस्त 2019 से लागू हो जाएगा. इसका एप्रूवल गृहमंत्रालय से आ गया है. इसके लिए कंसल्टेंट भी हायर किए जा रहे हैं. यानी अगस्त 2019 से ट्रैफिक पुलिस भी मॉडर्न हो जाएगी और ट्रैफिक सिस्टम पूरी तरह से तकनीक पर आधारित होगा.
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: तेज गति से वाहन चलाया तो कैमरे चालान काटकर भेज देंगे रेड लाइट जम्प करने वालों को भी नहीं बख्शेगा नया सिस्टम रात के अंधेरे में भी काम करेगा इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम
19
['hin']
एक सारांश बनाओ: श्रीलंका के पूर्व कप्तान महेला जयवर्धने का मानना है कि उपमहाद्वीप में खराब रिकॉर्ड के बावजूद अब भी दुनिया की सभी टीमों के बीच इंग्लैंड की टेस्ट टीम के प्रदर्शन में सबसे अधिक निरंतरता है। जयवर्धने का मानना है कि फिलहाल इंग्लैंड सर्वश्रेष्ठ टेस्ट टीम है विशेषकर जब वह अपने घर में खेल रही हो। इंग्लैंड के खिलाफ तीसरा टेस्ट खेल रही श्रीलंका की टीम में शामिल इस पूर्व कप्तान ने कहा, मुझे लगता है कि घरेलू हालातों में इंग्लैंड टेस्ट खेलने वाली सर्वश्रेष्ठ टीम है। उन्होंने काफी अच्छा क्रिकेट खेला है। मुझे लगता है कि उपमहाद्वीप में हालांकि उन्होंने इतना अच्छा प्रदर्शन नहीं किया। जयवर्धने ने आईसीसी क्रिकेट विश्व रेडियो शो से कहा, इंग्लैंड की टीम उपमहाद्वीप में भारत और श्रीलंका जैसी टीमों को नहीं हरा सकी है लेकिन कुल मिलाकर वह टेस्ट मैचों में सबसे अधिक निरंतर प्रदर्शन करने वाली टीम है और यहां आकर उन्हें चुनौती देना हमारे लिए बेहतरीन मौका है जिससे कि पता चल सके कि एक टीम के रूप में हम कहां हैं।
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: जयवर्धने का मानना है कि खराब रिकॉर्ड के बावजूद अब भी दुनिया की सभी टीमों के बीच इंग्लैंड की टेस्ट टीम के प्रदर्शन में सबसे अधिक निरंतरता है।
32
['hin']
एक सारांश बनाओ: गुजरात के एक रेलवे स्टेशन पर कभी चाय बेचने वाले नरेंद्र मोदी भारतीय राजनीति में धूमकेतु की तरह आगे बढ़े हैं। वर्ष 2001 में मुख्यमंत्री बनने के बाद सुर्खियों में आए मोदी महज 12 वर्ष में पार्टी की ओर से देश की सरकार के शीर्ष पद के प्रत्याशी बनाए गए हैं। धुर हिंदूवादी या हिंदू राष्ट्रवादी विचारधारा के पैरोकार मोदी (62) जनभावनाओं को उभारने में अपनी पार्टी के किसी भी नेता से आगे माने जाते हैं। उनके साथियों का कहना है कि सदैव लक्ष्य पर निगाह टिकाए रखने वाले मोदी हर विपरीत परिस्थिति को अवसर में बदलने में दक्ष हैं। गुजरात का मुख्यमंत्री चयनित होने से पहले मोदी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक रहे और जिस समय देश के सर्वाधिक विकसित राज्य की उन्हें कमान सौंपी गई थी उस समय तक उन्हें कोई प्रशासनिक अनुभव नहीं था। तीव्र गति से आगे बढ़ते जाने वाले मोदी पर उनके आलोचकों का आरोप है कि शिखर चढ़ने में मददगार रहे लोगों को ही वह ठिकाने लगाते रहे हैं। इस सूची में सबसे ताजा नाम भाजपा के कद्दावर नेता और कभी उनके (मोदी के) संरक्षक रहे लालकृष्ण आडवाणी का भी नाम जुड़ गया है। आडवाणी तब मोदी के मार्गदर्शक थे जब उन्हें कोई जानता तक नहीं था। मोदी को गहरे रूप से जानने वाले राजनीतिक विश्लेषक जीवीएल. नरसिम्हा राव ने कहा, "वह प्रतिबद्ध व्यक्ति हैं। वह अत्यंत ईमानदार और परिश्रमी हैं। चाहे जैसी भी परिस्थिति हो वह समझौता नहीं करते। और यहां तक कि मोदी एक अस्थायी विजय के लिए कभी नहीं झुकेंगे।" आज के मुकाबले मोदी का शुरुआती जीवन बेहद गौण रहा है। गुजरात के मेहसाणा जिले के एक निम्न मध्यम वर्गीय परिवार में 17 सितंबर 1950 को जन्मे मोदी अपने माता-पिता की चार संतानों में तीसरे हैं। उनके पिता दामोदरदास चाय की एक छोटी सी दुकान चलाते थे। गुजरात के वादनगर रेलवे स्टेशन पर उनके बेटे केतली में चाय लेकर रेलगाड़ियों में बेचा करते थे। इस परिवार का घर ऐसा था जिसमें खिड़कियों से पर्याप्त रोशनी भी नहीं पहुंचती थी। किरासन तेल पर जलनेवाली एकमात्र चिमनी धुआं और कालिख उगलती रहती थी। जो लोग मोदी को जानते हैं वह बताते हैं कि वह एक औसत दर्जे के छात्र थे। खुद उनके मुताबिक वह एक समर्पित हिंदू हैं। चार दशक तक वह नवरात्रि के दौरान केवल जल के सहारे उपवास रखते रहे। मोदी के जीवनीलेखक नीलांजन मुखोपाध्याय के मुताबिक, युवावस्था में ही मोदी की शादी हुई, लेकिन वह निभ नहीं सकी। प्रचारक बनने के लिए उन्होंने अपने विवाहित होने के सच को छिपाए रखा। इस सच के सामने आने पर अति शुद्धतावादी संघ का प्रचारक बनना मुश्किल था। स्कूली जीवन से ही मोदी अच्छे वक्ता रहे हैं। वह अक्सर महीनों अपने परिवार से गायब रहा करते थे। वह एकांत में रुकते या हिमालय में भटका करते थे। एक बार वह गिर के जंगलों में एक छोटे से मंदिर में ठहरे थे। 1967 में उन्होंने अपने परिवार से नाता तोड़ लिया। मोदी संघ में औपचारिक रूप से 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद शामिल हुए। वह दिल्ली के संघ कार्यालय में रहे जहां उनकी दिनचर्या कुछ इस तरह की थी। सुबह 4 बजे जगने के बाद पूरे कार्यालय में झाडू-बुहारू करना, वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के लिए चाय के साथ-साथ नाश्ता और शाम का नाश्ता बनाना और पत्रों का उत्तर देना उनका काम था। वह बर्तन भी साफ करते थे और पूरे भवन की साफ सफाई करते थे। मोदी अपना कपड़ा भी खुद धोते थे। जब इंदिरा गांधी ने देश पर आपातकाल थोपा था तब मोदी दिल्ली से गुजरात जाकर भूमिगत हो गए। एक बजाज स्कूटर पर अनवरत इधर-उधर घूमते रहते और कभी-कभी गुप्तरूप से और छपे हुए केंद्र सरकार विरोधी पर्चे बांटा करते थे। राजनीति को अंगीकार करने वाले मोदी ने दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक और गुजरात विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की शिक्षा ग्रहण की है। अपने परिश्रम के दम पर मोदी ने वरिष्ठों का ध्यान खींचा और उन्हें 1987-88 में भाजपा की गुजरात इकाई में संगठन मंत्री की कमान सौंपी गई। यहीं से उनके राजनीतिक सफर की औपचारिक शुरुआत हुई। मोदी ने आहिस्ता-आहिस्ता भाजपा पर नियंत्रण पाया और कार्यकर्ताओं के बीच पैठ बनाई। उन्होंने 1990 में तब महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जब आडवाणी ने राम मंदिर निर्माण के लिए सोमनाथ से अयोध्या तक रथ यात्रा निकाली थी। इसी रथ यात्रा ने भाजपा को राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज कराने में मदद दिलाई। लेकिन, राजनीतिक कद बढ़ते जाने के बीच मोदी की अपनी कुछ निजी कमजोरियां भी हैं। 1992 में उन्हें गुजरात भाजपा में दरकिनार कर दिया गया। पहले से जमे केशुभाई पटेल, शंकरसिंह वाघेला और कांशीराम राणा जैसे वरिष्ठ नेताओं को मोदी का 'उदय' नहीं पचा। समय बीता। मोदी पर आरोप है कि उन्होंने अपने लाभ के लिए समर्थकों को किनारे लगाने में भी परहेज नहीं किया। वर्ष 2001 में जिस मुख्यमंत्री पटेल की जगह उन्होंने ली कभी मोदी उनके विश्वासपात्र रह चुके थे।टिप्पणियां मोदी की आज की पहचान पर 2002 के गुजरात में हुई हिंसा की व्यापक छाया है। उस समय वहां उन्हीं की सरकार थी। उनकी सरकार पर एक समुदाय विशेष के लोगों को निशाना बनाने के लिए दूसरे समुदाय को प्रोत्साहन देने का आरोप है। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने गुजरात हिंसा पर गहरी नाराजगी जताई थी। तब मोदी के लिए आडवाणी संकटमोचक बने थे। उसके बाद 2002 के गुजरात विधानसभा चुनाव में मोदी विजेता बनकर उभरे और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। धुर हिंदूवादी या हिंदू राष्ट्रवादी विचारधारा के पैरोकार मोदी (62) जनभावनाओं को उभारने में अपनी पार्टी के किसी भी नेता से आगे माने जाते हैं। उनके साथियों का कहना है कि सदैव लक्ष्य पर निगाह टिकाए रखने वाले मोदी हर विपरीत परिस्थिति को अवसर में बदलने में दक्ष हैं। गुजरात का मुख्यमंत्री चयनित होने से पहले मोदी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक रहे और जिस समय देश के सर्वाधिक विकसित राज्य की उन्हें कमान सौंपी गई थी उस समय तक उन्हें कोई प्रशासनिक अनुभव नहीं था। तीव्र गति से आगे बढ़ते जाने वाले मोदी पर उनके आलोचकों का आरोप है कि शिखर चढ़ने में मददगार रहे लोगों को ही वह ठिकाने लगाते रहे हैं। इस सूची में सबसे ताजा नाम भाजपा के कद्दावर नेता और कभी उनके (मोदी के) संरक्षक रहे लालकृष्ण आडवाणी का भी नाम जुड़ गया है। आडवाणी तब मोदी के मार्गदर्शक थे जब उन्हें कोई जानता तक नहीं था। मोदी को गहरे रूप से जानने वाले राजनीतिक विश्लेषक जीवीएल. नरसिम्हा राव ने कहा, "वह प्रतिबद्ध व्यक्ति हैं। वह अत्यंत ईमानदार और परिश्रमी हैं। चाहे जैसी भी परिस्थिति हो वह समझौता नहीं करते। और यहां तक कि मोदी एक अस्थायी विजय के लिए कभी नहीं झुकेंगे।" आज के मुकाबले मोदी का शुरुआती जीवन बेहद गौण रहा है। गुजरात के मेहसाणा जिले के एक निम्न मध्यम वर्गीय परिवार में 17 सितंबर 1950 को जन्मे मोदी अपने माता-पिता की चार संतानों में तीसरे हैं। उनके पिता दामोदरदास चाय की एक छोटी सी दुकान चलाते थे। गुजरात के वादनगर रेलवे स्टेशन पर उनके बेटे केतली में चाय लेकर रेलगाड़ियों में बेचा करते थे। इस परिवार का घर ऐसा था जिसमें खिड़कियों से पर्याप्त रोशनी भी नहीं पहुंचती थी। किरासन तेल पर जलनेवाली एकमात्र चिमनी धुआं और कालिख उगलती रहती थी। जो लोग मोदी को जानते हैं वह बताते हैं कि वह एक औसत दर्जे के छात्र थे। खुद उनके मुताबिक वह एक समर्पित हिंदू हैं। चार दशक तक वह नवरात्रि के दौरान केवल जल के सहारे उपवास रखते रहे। मोदी के जीवनीलेखक नीलांजन मुखोपाध्याय के मुताबिक, युवावस्था में ही मोदी की शादी हुई, लेकिन वह निभ नहीं सकी। प्रचारक बनने के लिए उन्होंने अपने विवाहित होने के सच को छिपाए रखा। इस सच के सामने आने पर अति शुद्धतावादी संघ का प्रचारक बनना मुश्किल था। स्कूली जीवन से ही मोदी अच्छे वक्ता रहे हैं। वह अक्सर महीनों अपने परिवार से गायब रहा करते थे। वह एकांत में रुकते या हिमालय में भटका करते थे। एक बार वह गिर के जंगलों में एक छोटे से मंदिर में ठहरे थे। 1967 में उन्होंने अपने परिवार से नाता तोड़ लिया। मोदी संघ में औपचारिक रूप से 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद शामिल हुए। वह दिल्ली के संघ कार्यालय में रहे जहां उनकी दिनचर्या कुछ इस तरह की थी। सुबह 4 बजे जगने के बाद पूरे कार्यालय में झाडू-बुहारू करना, वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के लिए चाय के साथ-साथ नाश्ता और शाम का नाश्ता बनाना और पत्रों का उत्तर देना उनका काम था। वह बर्तन भी साफ करते थे और पूरे भवन की साफ सफाई करते थे। मोदी अपना कपड़ा भी खुद धोते थे। जब इंदिरा गांधी ने देश पर आपातकाल थोपा था तब मोदी दिल्ली से गुजरात जाकर भूमिगत हो गए। एक बजाज स्कूटर पर अनवरत इधर-उधर घूमते रहते और कभी-कभी गुप्तरूप से और छपे हुए केंद्र सरकार विरोधी पर्चे बांटा करते थे। राजनीति को अंगीकार करने वाले मोदी ने दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक और गुजरात विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की शिक्षा ग्रहण की है। अपने परिश्रम के दम पर मोदी ने वरिष्ठों का ध्यान खींचा और उन्हें 1987-88 में भाजपा की गुजरात इकाई में संगठन मंत्री की कमान सौंपी गई। यहीं से उनके राजनीतिक सफर की औपचारिक शुरुआत हुई। मोदी ने आहिस्ता-आहिस्ता भाजपा पर नियंत्रण पाया और कार्यकर्ताओं के बीच पैठ बनाई। उन्होंने 1990 में तब महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जब आडवाणी ने राम मंदिर निर्माण के लिए सोमनाथ से अयोध्या तक रथ यात्रा निकाली थी। इसी रथ यात्रा ने भाजपा को राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज कराने में मदद दिलाई। लेकिन, राजनीतिक कद बढ़ते जाने के बीच मोदी की अपनी कुछ निजी कमजोरियां भी हैं। 1992 में उन्हें गुजरात भाजपा में दरकिनार कर दिया गया। पहले से जमे केशुभाई पटेल, शंकरसिंह वाघेला और कांशीराम राणा जैसे वरिष्ठ नेताओं को मोदी का 'उदय' नहीं पचा। समय बीता। मोदी पर आरोप है कि उन्होंने अपने लाभ के लिए समर्थकों को किनारे लगाने में भी परहेज नहीं किया। वर्ष 2001 में जिस मुख्यमंत्री पटेल की जगह उन्होंने ली कभी मोदी उनके विश्वासपात्र रह चुके थे।टिप्पणियां मोदी की आज की पहचान पर 2002 के गुजरात में हुई हिंसा की व्यापक छाया है। उस समय वहां उन्हीं की सरकार थी। उनकी सरकार पर एक समुदाय विशेष के लोगों को निशाना बनाने के लिए दूसरे समुदाय को प्रोत्साहन देने का आरोप है। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने गुजरात हिंसा पर गहरी नाराजगी जताई थी। तब मोदी के लिए आडवाणी संकटमोचक बने थे। उसके बाद 2002 के गुजरात विधानसभा चुनाव में मोदी विजेता बनकर उभरे और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। गुजरात का मुख्यमंत्री चयनित होने से पहले मोदी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक रहे और जिस समय देश के सर्वाधिक विकसित राज्य की उन्हें कमान सौंपी गई थी उस समय तक उन्हें कोई प्रशासनिक अनुभव नहीं था। तीव्र गति से आगे बढ़ते जाने वाले मोदी पर उनके आलोचकों का आरोप है कि शिखर चढ़ने में मददगार रहे लोगों को ही वह ठिकाने लगाते रहे हैं। इस सूची में सबसे ताजा नाम भाजपा के कद्दावर नेता और कभी उनके (मोदी के) संरक्षक रहे लालकृष्ण आडवाणी का भी नाम जुड़ गया है। आडवाणी तब मोदी के मार्गदर्शक थे जब उन्हें कोई जानता तक नहीं था। मोदी को गहरे रूप से जानने वाले राजनीतिक विश्लेषक जीवीएल. नरसिम्हा राव ने कहा, "वह प्रतिबद्ध व्यक्ति हैं। वह अत्यंत ईमानदार और परिश्रमी हैं। चाहे जैसी भी परिस्थिति हो वह समझौता नहीं करते। और यहां तक कि मोदी एक अस्थायी विजय के लिए कभी नहीं झुकेंगे।" आज के मुकाबले मोदी का शुरुआती जीवन बेहद गौण रहा है। गुजरात के मेहसाणा जिले के एक निम्न मध्यम वर्गीय परिवार में 17 सितंबर 1950 को जन्मे मोदी अपने माता-पिता की चार संतानों में तीसरे हैं। उनके पिता दामोदरदास चाय की एक छोटी सी दुकान चलाते थे। गुजरात के वादनगर रेलवे स्टेशन पर उनके बेटे केतली में चाय लेकर रेलगाड़ियों में बेचा करते थे। इस परिवार का घर ऐसा था जिसमें खिड़कियों से पर्याप्त रोशनी भी नहीं पहुंचती थी। किरासन तेल पर जलनेवाली एकमात्र चिमनी धुआं और कालिख उगलती रहती थी। जो लोग मोदी को जानते हैं वह बताते हैं कि वह एक औसत दर्जे के छात्र थे। खुद उनके मुताबिक वह एक समर्पित हिंदू हैं। चार दशक तक वह नवरात्रि के दौरान केवल जल के सहारे उपवास रखते रहे। मोदी के जीवनीलेखक नीलांजन मुखोपाध्याय के मुताबिक, युवावस्था में ही मोदी की शादी हुई, लेकिन वह निभ नहीं सकी। प्रचारक बनने के लिए उन्होंने अपने विवाहित होने के सच को छिपाए रखा। इस सच के सामने आने पर अति शुद्धतावादी संघ का प्रचारक बनना मुश्किल था। स्कूली जीवन से ही मोदी अच्छे वक्ता रहे हैं। वह अक्सर महीनों अपने परिवार से गायब रहा करते थे। वह एकांत में रुकते या हिमालय में भटका करते थे। एक बार वह गिर के जंगलों में एक छोटे से मंदिर में ठहरे थे। 1967 में उन्होंने अपने परिवार से नाता तोड़ लिया। मोदी संघ में औपचारिक रूप से 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद शामिल हुए। वह दिल्ली के संघ कार्यालय में रहे जहां उनकी दिनचर्या कुछ इस तरह की थी। सुबह 4 बजे जगने के बाद पूरे कार्यालय में झाडू-बुहारू करना, वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के लिए चाय के साथ-साथ नाश्ता और शाम का नाश्ता बनाना और पत्रों का उत्तर देना उनका काम था। वह बर्तन भी साफ करते थे और पूरे भवन की साफ सफाई करते थे। मोदी अपना कपड़ा भी खुद धोते थे। जब इंदिरा गांधी ने देश पर आपातकाल थोपा था तब मोदी दिल्ली से गुजरात जाकर भूमिगत हो गए। एक बजाज स्कूटर पर अनवरत इधर-उधर घूमते रहते और कभी-कभी गुप्तरूप से और छपे हुए केंद्र सरकार विरोधी पर्चे बांटा करते थे। राजनीति को अंगीकार करने वाले मोदी ने दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक और गुजरात विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की शिक्षा ग्रहण की है। अपने परिश्रम के दम पर मोदी ने वरिष्ठों का ध्यान खींचा और उन्हें 1987-88 में भाजपा की गुजरात इकाई में संगठन मंत्री की कमान सौंपी गई। यहीं से उनके राजनीतिक सफर की औपचारिक शुरुआत हुई। मोदी ने आहिस्ता-आहिस्ता भाजपा पर नियंत्रण पाया और कार्यकर्ताओं के बीच पैठ बनाई। उन्होंने 1990 में तब महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जब आडवाणी ने राम मंदिर निर्माण के लिए सोमनाथ से अयोध्या तक रथ यात्रा निकाली थी। इसी रथ यात्रा ने भाजपा को राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज कराने में मदद दिलाई। लेकिन, राजनीतिक कद बढ़ते जाने के बीच मोदी की अपनी कुछ निजी कमजोरियां भी हैं। 1992 में उन्हें गुजरात भाजपा में दरकिनार कर दिया गया। पहले से जमे केशुभाई पटेल, शंकरसिंह वाघेला और कांशीराम राणा जैसे वरिष्ठ नेताओं को मोदी का 'उदय' नहीं पचा। समय बीता। मोदी पर आरोप है कि उन्होंने अपने लाभ के लिए समर्थकों को किनारे लगाने में भी परहेज नहीं किया। वर्ष 2001 में जिस मुख्यमंत्री पटेल की जगह उन्होंने ली कभी मोदी उनके विश्वासपात्र रह चुके थे।टिप्पणियां मोदी की आज की पहचान पर 2002 के गुजरात में हुई हिंसा की व्यापक छाया है। उस समय वहां उन्हीं की सरकार थी। उनकी सरकार पर एक समुदाय विशेष के लोगों को निशाना बनाने के लिए दूसरे समुदाय को प्रोत्साहन देने का आरोप है। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने गुजरात हिंसा पर गहरी नाराजगी जताई थी। तब मोदी के लिए आडवाणी संकटमोचक बने थे। उसके बाद 2002 के गुजरात विधानसभा चुनाव में मोदी विजेता बनकर उभरे और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। तीव्र गति से आगे बढ़ते जाने वाले मोदी पर उनके आलोचकों का आरोप है कि शिखर चढ़ने में मददगार रहे लोगों को ही वह ठिकाने लगाते रहे हैं। इस सूची में सबसे ताजा नाम भाजपा के कद्दावर नेता और कभी उनके (मोदी के) संरक्षक रहे लालकृष्ण आडवाणी का भी नाम जुड़ गया है। आडवाणी तब मोदी के मार्गदर्शक थे जब उन्हें कोई जानता तक नहीं था। मोदी को गहरे रूप से जानने वाले राजनीतिक विश्लेषक जीवीएल. नरसिम्हा राव ने कहा, "वह प्रतिबद्ध व्यक्ति हैं। वह अत्यंत ईमानदार और परिश्रमी हैं। चाहे जैसी भी परिस्थिति हो वह समझौता नहीं करते। और यहां तक कि मोदी एक अस्थायी विजय के लिए कभी नहीं झुकेंगे।" आज के मुकाबले मोदी का शुरुआती जीवन बेहद गौण रहा है। गुजरात के मेहसाणा जिले के एक निम्न मध्यम वर्गीय परिवार में 17 सितंबर 1950 को जन्मे मोदी अपने माता-पिता की चार संतानों में तीसरे हैं। उनके पिता दामोदरदास चाय की एक छोटी सी दुकान चलाते थे। गुजरात के वादनगर रेलवे स्टेशन पर उनके बेटे केतली में चाय लेकर रेलगाड़ियों में बेचा करते थे। इस परिवार का घर ऐसा था जिसमें खिड़कियों से पर्याप्त रोशनी भी नहीं पहुंचती थी। किरासन तेल पर जलनेवाली एकमात्र चिमनी धुआं और कालिख उगलती रहती थी। जो लोग मोदी को जानते हैं वह बताते हैं कि वह एक औसत दर्जे के छात्र थे। खुद उनके मुताबिक वह एक समर्पित हिंदू हैं। चार दशक तक वह नवरात्रि के दौरान केवल जल के सहारे उपवास रखते रहे। मोदी के जीवनीलेखक नीलांजन मुखोपाध्याय के मुताबिक, युवावस्था में ही मोदी की शादी हुई, लेकिन वह निभ नहीं सकी। प्रचारक बनने के लिए उन्होंने अपने विवाहित होने के सच को छिपाए रखा। इस सच के सामने आने पर अति शुद्धतावादी संघ का प्रचारक बनना मुश्किल था। स्कूली जीवन से ही मोदी अच्छे वक्ता रहे हैं। वह अक्सर महीनों अपने परिवार से गायब रहा करते थे। वह एकांत में रुकते या हिमालय में भटका करते थे। एक बार वह गिर के जंगलों में एक छोटे से मंदिर में ठहरे थे। 1967 में उन्होंने अपने परिवार से नाता तोड़ लिया। मोदी संघ में औपचारिक रूप से 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद शामिल हुए। वह दिल्ली के संघ कार्यालय में रहे जहां उनकी दिनचर्या कुछ इस तरह की थी। सुबह 4 बजे जगने के बाद पूरे कार्यालय में झाडू-बुहारू करना, वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के लिए चाय के साथ-साथ नाश्ता और शाम का नाश्ता बनाना और पत्रों का उत्तर देना उनका काम था। वह बर्तन भी साफ करते थे और पूरे भवन की साफ सफाई करते थे। मोदी अपना कपड़ा भी खुद धोते थे। जब इंदिरा गांधी ने देश पर आपातकाल थोपा था तब मोदी दिल्ली से गुजरात जाकर भूमिगत हो गए। एक बजाज स्कूटर पर अनवरत इधर-उधर घूमते रहते और कभी-कभी गुप्तरूप से और छपे हुए केंद्र सरकार विरोधी पर्चे बांटा करते थे। राजनीति को अंगीकार करने वाले मोदी ने दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक और गुजरात विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की शिक्षा ग्रहण की है। अपने परिश्रम के दम पर मोदी ने वरिष्ठों का ध्यान खींचा और उन्हें 1987-88 में भाजपा की गुजरात इकाई में संगठन मंत्री की कमान सौंपी गई। यहीं से उनके राजनीतिक सफर की औपचारिक शुरुआत हुई। मोदी ने आहिस्ता-आहिस्ता भाजपा पर नियंत्रण पाया और कार्यकर्ताओं के बीच पैठ बनाई। उन्होंने 1990 में तब महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जब आडवाणी ने राम मंदिर निर्माण के लिए सोमनाथ से अयोध्या तक रथ यात्रा निकाली थी। इसी रथ यात्रा ने भाजपा को राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज कराने में मदद दिलाई। लेकिन, राजनीतिक कद बढ़ते जाने के बीच मोदी की अपनी कुछ निजी कमजोरियां भी हैं। 1992 में उन्हें गुजरात भाजपा में दरकिनार कर दिया गया। पहले से जमे केशुभाई पटेल, शंकरसिंह वाघेला और कांशीराम राणा जैसे वरिष्ठ नेताओं को मोदी का 'उदय' नहीं पचा। समय बीता। मोदी पर आरोप है कि उन्होंने अपने लाभ के लिए समर्थकों को किनारे लगाने में भी परहेज नहीं किया। वर्ष 2001 में जिस मुख्यमंत्री पटेल की जगह उन्होंने ली कभी मोदी उनके विश्वासपात्र रह चुके थे।टिप्पणियां मोदी की आज की पहचान पर 2002 के गुजरात में हुई हिंसा की व्यापक छाया है। उस समय वहां उन्हीं की सरकार थी। उनकी सरकार पर एक समुदाय विशेष के लोगों को निशाना बनाने के लिए दूसरे समुदाय को प्रोत्साहन देने का आरोप है। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने गुजरात हिंसा पर गहरी नाराजगी जताई थी। तब मोदी के लिए आडवाणी संकटमोचक बने थे। उसके बाद 2002 के गुजरात विधानसभा चुनाव में मोदी विजेता बनकर उभरे और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। मोदी को गहरे रूप से जानने वाले राजनीतिक विश्लेषक जीवीएल. नरसिम्हा राव ने कहा, "वह प्रतिबद्ध व्यक्ति हैं। वह अत्यंत ईमानदार और परिश्रमी हैं। चाहे जैसी भी परिस्थिति हो वह समझौता नहीं करते। और यहां तक कि मोदी एक अस्थायी विजय के लिए कभी नहीं झुकेंगे।" आज के मुकाबले मोदी का शुरुआती जीवन बेहद गौण रहा है। गुजरात के मेहसाणा जिले के एक निम्न मध्यम वर्गीय परिवार में 17 सितंबर 1950 को जन्मे मोदी अपने माता-पिता की चार संतानों में तीसरे हैं। उनके पिता दामोदरदास चाय की एक छोटी सी दुकान चलाते थे। गुजरात के वादनगर रेलवे स्टेशन पर उनके बेटे केतली में चाय लेकर रेलगाड़ियों में बेचा करते थे। इस परिवार का घर ऐसा था जिसमें खिड़कियों से पर्याप्त रोशनी भी नहीं पहुंचती थी। किरासन तेल पर जलनेवाली एकमात्र चिमनी धुआं और कालिख उगलती रहती थी। जो लोग मोदी को जानते हैं वह बताते हैं कि वह एक औसत दर्जे के छात्र थे। खुद उनके मुताबिक वह एक समर्पित हिंदू हैं। चार दशक तक वह नवरात्रि के दौरान केवल जल के सहारे उपवास रखते रहे। मोदी के जीवनीलेखक नीलांजन मुखोपाध्याय के मुताबिक, युवावस्था में ही मोदी की शादी हुई, लेकिन वह निभ नहीं सकी। प्रचारक बनने के लिए उन्होंने अपने विवाहित होने के सच को छिपाए रखा। इस सच के सामने आने पर अति शुद्धतावादी संघ का प्रचारक बनना मुश्किल था। स्कूली जीवन से ही मोदी अच्छे वक्ता रहे हैं। वह अक्सर महीनों अपने परिवार से गायब रहा करते थे। वह एकांत में रुकते या हिमालय में भटका करते थे। एक बार वह गिर के जंगलों में एक छोटे से मंदिर में ठहरे थे। 1967 में उन्होंने अपने परिवार से नाता तोड़ लिया। मोदी संघ में औपचारिक रूप से 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद शामिल हुए। वह दिल्ली के संघ कार्यालय में रहे जहां उनकी दिनचर्या कुछ इस तरह की थी। सुबह 4 बजे जगने के बाद पूरे कार्यालय में झाडू-बुहारू करना, वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के लिए चाय के साथ-साथ नाश्ता और शाम का नाश्ता बनाना और पत्रों का उत्तर देना उनका काम था। वह बर्तन भी साफ करते थे और पूरे भवन की साफ सफाई करते थे। मोदी अपना कपड़ा भी खुद धोते थे। जब इंदिरा गांधी ने देश पर आपातकाल थोपा था तब मोदी दिल्ली से गुजरात जाकर भूमिगत हो गए। एक बजाज स्कूटर पर अनवरत इधर-उधर घूमते रहते और कभी-कभी गुप्तरूप से और छपे हुए केंद्र सरकार विरोधी पर्चे बांटा करते थे। राजनीति को अंगीकार करने वाले मोदी ने दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक और गुजरात विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की शिक्षा ग्रहण की है। अपने परिश्रम के दम पर मोदी ने वरिष्ठों का ध्यान खींचा और उन्हें 1987-88 में भाजपा की गुजरात इकाई में संगठन मंत्री की कमान सौंपी गई। यहीं से उनके राजनीतिक सफर की औपचारिक शुरुआत हुई। मोदी ने आहिस्ता-आहिस्ता भाजपा पर नियंत्रण पाया और कार्यकर्ताओं के बीच पैठ बनाई। उन्होंने 1990 में तब महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जब आडवाणी ने राम मंदिर निर्माण के लिए सोमनाथ से अयोध्या तक रथ यात्रा निकाली थी। इसी रथ यात्रा ने भाजपा को राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज कराने में मदद दिलाई। लेकिन, राजनीतिक कद बढ़ते जाने के बीच मोदी की अपनी कुछ निजी कमजोरियां भी हैं। 1992 में उन्हें गुजरात भाजपा में दरकिनार कर दिया गया। पहले से जमे केशुभाई पटेल, शंकरसिंह वाघेला और कांशीराम राणा जैसे वरिष्ठ नेताओं को मोदी का 'उदय' नहीं पचा। समय बीता। मोदी पर आरोप है कि उन्होंने अपने लाभ के लिए समर्थकों को किनारे लगाने में भी परहेज नहीं किया। वर्ष 2001 में जिस मुख्यमंत्री पटेल की जगह उन्होंने ली कभी मोदी उनके विश्वासपात्र रह चुके थे।टिप्पणियां मोदी की आज की पहचान पर 2002 के गुजरात में हुई हिंसा की व्यापक छाया है। उस समय वहां उन्हीं की सरकार थी। उनकी सरकार पर एक समुदाय विशेष के लोगों को निशाना बनाने के लिए दूसरे समुदाय को प्रोत्साहन देने का आरोप है। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने गुजरात हिंसा पर गहरी नाराजगी जताई थी। तब मोदी के लिए आडवाणी संकटमोचक बने थे। उसके बाद 2002 के गुजरात विधानसभा चुनाव में मोदी विजेता बनकर उभरे और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज के मुकाबले मोदी का शुरुआती जीवन बेहद गौण रहा है। गुजरात के मेहसाणा जिले के एक निम्न मध्यम वर्गीय परिवार में 17 सितंबर 1950 को जन्मे मोदी अपने माता-पिता की चार संतानों में तीसरे हैं। उनके पिता दामोदरदास चाय की एक छोटी सी दुकान चलाते थे। गुजरात के वादनगर रेलवे स्टेशन पर उनके बेटे केतली में चाय लेकर रेलगाड़ियों में बेचा करते थे। इस परिवार का घर ऐसा था जिसमें खिड़कियों से पर्याप्त रोशनी भी नहीं पहुंचती थी। किरासन तेल पर जलनेवाली एकमात्र चिमनी धुआं और कालिख उगलती रहती थी। जो लोग मोदी को जानते हैं वह बताते हैं कि वह एक औसत दर्जे के छात्र थे। खुद उनके मुताबिक वह एक समर्पित हिंदू हैं। चार दशक तक वह नवरात्रि के दौरान केवल जल के सहारे उपवास रखते रहे। मोदी के जीवनीलेखक नीलांजन मुखोपाध्याय के मुताबिक, युवावस्था में ही मोदी की शादी हुई, लेकिन वह निभ नहीं सकी। प्रचारक बनने के लिए उन्होंने अपने विवाहित होने के सच को छिपाए रखा। इस सच के सामने आने पर अति शुद्धतावादी संघ का प्रचारक बनना मुश्किल था। स्कूली जीवन से ही मोदी अच्छे वक्ता रहे हैं। वह अक्सर महीनों अपने परिवार से गायब रहा करते थे। वह एकांत में रुकते या हिमालय में भटका करते थे। एक बार वह गिर के जंगलों में एक छोटे से मंदिर में ठहरे थे। 1967 में उन्होंने अपने परिवार से नाता तोड़ लिया। मोदी संघ में औपचारिक रूप से 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद शामिल हुए। वह दिल्ली के संघ कार्यालय में रहे जहां उनकी दिनचर्या कुछ इस तरह की थी। सुबह 4 बजे जगने के बाद पूरे कार्यालय में झाडू-बुहारू करना, वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के लिए चाय के साथ-साथ नाश्ता और शाम का नाश्ता बनाना और पत्रों का उत्तर देना उनका काम था। वह बर्तन भी साफ करते थे और पूरे भवन की साफ सफाई करते थे। मोदी अपना कपड़ा भी खुद धोते थे। जब इंदिरा गांधी ने देश पर आपातकाल थोपा था तब मोदी दिल्ली से गुजरात जाकर भूमिगत हो गए। एक बजाज स्कूटर पर अनवरत इधर-उधर घूमते रहते और कभी-कभी गुप्तरूप से और छपे हुए केंद्र सरकार विरोधी पर्चे बांटा करते थे। राजनीति को अंगीकार करने वाले मोदी ने दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक और गुजरात विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की शिक्षा ग्रहण की है। अपने परिश्रम के दम पर मोदी ने वरिष्ठों का ध्यान खींचा और उन्हें 1987-88 में भाजपा की गुजरात इकाई में संगठन मंत्री की कमान सौंपी गई। यहीं से उनके राजनीतिक सफर की औपचारिक शुरुआत हुई। मोदी ने आहिस्ता-आहिस्ता भाजपा पर नियंत्रण पाया और कार्यकर्ताओं के बीच पैठ बनाई। उन्होंने 1990 में तब महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जब आडवाणी ने राम मंदिर निर्माण के लिए सोमनाथ से अयोध्या तक रथ यात्रा निकाली थी। इसी रथ यात्रा ने भाजपा को राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज कराने में मदद दिलाई। लेकिन, राजनीतिक कद बढ़ते जाने के बीच मोदी की अपनी कुछ निजी कमजोरियां भी हैं। 1992 में उन्हें गुजरात भाजपा में दरकिनार कर दिया गया। पहले से जमे केशुभाई पटेल, शंकरसिंह वाघेला और कांशीराम राणा जैसे वरिष्ठ नेताओं को मोदी का 'उदय' नहीं पचा। समय बीता। मोदी पर आरोप है कि उन्होंने अपने लाभ के लिए समर्थकों को किनारे लगाने में भी परहेज नहीं किया। वर्ष 2001 में जिस मुख्यमंत्री पटेल की जगह उन्होंने ली कभी मोदी उनके विश्वासपात्र रह चुके थे।टिप्पणियां मोदी की आज की पहचान पर 2002 के गुजरात में हुई हिंसा की व्यापक छाया है। उस समय वहां उन्हीं की सरकार थी। उनकी सरकार पर एक समुदाय विशेष के लोगों को निशाना बनाने के लिए दूसरे समुदाय को प्रोत्साहन देने का आरोप है। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने गुजरात हिंसा पर गहरी नाराजगी जताई थी। तब मोदी के लिए आडवाणी संकटमोचक बने थे। उसके बाद 2002 के गुजरात विधानसभा चुनाव में मोदी विजेता बनकर उभरे और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। इस परिवार का घर ऐसा था जिसमें खिड़कियों से पर्याप्त रोशनी भी नहीं पहुंचती थी। किरासन तेल पर जलनेवाली एकमात्र चिमनी धुआं और कालिख उगलती रहती थी। जो लोग मोदी को जानते हैं वह बताते हैं कि वह एक औसत दर्जे के छात्र थे। खुद उनके मुताबिक वह एक समर्पित हिंदू हैं। चार दशक तक वह नवरात्रि के दौरान केवल जल के सहारे उपवास रखते रहे। मोदी के जीवनीलेखक नीलांजन मुखोपाध्याय के मुताबिक, युवावस्था में ही मोदी की शादी हुई, लेकिन वह निभ नहीं सकी। प्रचारक बनने के लिए उन्होंने अपने विवाहित होने के सच को छिपाए रखा। इस सच के सामने आने पर अति शुद्धतावादी संघ का प्रचारक बनना मुश्किल था। स्कूली जीवन से ही मोदी अच्छे वक्ता रहे हैं। वह अक्सर महीनों अपने परिवार से गायब रहा करते थे। वह एकांत में रुकते या हिमालय में भटका करते थे। एक बार वह गिर के जंगलों में एक छोटे से मंदिर में ठहरे थे। 1967 में उन्होंने अपने परिवार से नाता तोड़ लिया। मोदी संघ में औपचारिक रूप से 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद शामिल हुए। वह दिल्ली के संघ कार्यालय में रहे जहां उनकी दिनचर्या कुछ इस तरह की थी। सुबह 4 बजे जगने के बाद पूरे कार्यालय में झाडू-बुहारू करना, वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के लिए चाय के साथ-साथ नाश्ता और शाम का नाश्ता बनाना और पत्रों का उत्तर देना उनका काम था। वह बर्तन भी साफ करते थे और पूरे भवन की साफ सफाई करते थे। मोदी अपना कपड़ा भी खुद धोते थे। जब इंदिरा गांधी ने देश पर आपातकाल थोपा था तब मोदी दिल्ली से गुजरात जाकर भूमिगत हो गए। एक बजाज स्कूटर पर अनवरत इधर-उधर घूमते रहते और कभी-कभी गुप्तरूप से और छपे हुए केंद्र सरकार विरोधी पर्चे बांटा करते थे। राजनीति को अंगीकार करने वाले मोदी ने दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक और गुजरात विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की शिक्षा ग्रहण की है। अपने परिश्रम के दम पर मोदी ने वरिष्ठों का ध्यान खींचा और उन्हें 1987-88 में भाजपा की गुजरात इकाई में संगठन मंत्री की कमान सौंपी गई। यहीं से उनके राजनीतिक सफर की औपचारिक शुरुआत हुई। मोदी ने आहिस्ता-आहिस्ता भाजपा पर नियंत्रण पाया और कार्यकर्ताओं के बीच पैठ बनाई। उन्होंने 1990 में तब महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जब आडवाणी ने राम मंदिर निर्माण के लिए सोमनाथ से अयोध्या तक रथ यात्रा निकाली थी। इसी रथ यात्रा ने भाजपा को राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज कराने में मदद दिलाई। लेकिन, राजनीतिक कद बढ़ते जाने के बीच मोदी की अपनी कुछ निजी कमजोरियां भी हैं। 1992 में उन्हें गुजरात भाजपा में दरकिनार कर दिया गया। पहले से जमे केशुभाई पटेल, शंकरसिंह वाघेला और कांशीराम राणा जैसे वरिष्ठ नेताओं को मोदी का 'उदय' नहीं पचा। समय बीता। मोदी पर आरोप है कि उन्होंने अपने लाभ के लिए समर्थकों को किनारे लगाने में भी परहेज नहीं किया। वर्ष 2001 में जिस मुख्यमंत्री पटेल की जगह उन्होंने ली कभी मोदी उनके विश्वासपात्र रह चुके थे।टिप्पणियां मोदी की आज की पहचान पर 2002 के गुजरात में हुई हिंसा की व्यापक छाया है। उस समय वहां उन्हीं की सरकार थी। उनकी सरकार पर एक समुदाय विशेष के लोगों को निशाना बनाने के लिए दूसरे समुदाय को प्रोत्साहन देने का आरोप है। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने गुजरात हिंसा पर गहरी नाराजगी जताई थी। तब मोदी के लिए आडवाणी संकटमोचक बने थे। उसके बाद 2002 के गुजरात विधानसभा चुनाव में मोदी विजेता बनकर उभरे और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। खुद उनके मुताबिक वह एक समर्पित हिंदू हैं। चार दशक तक वह नवरात्रि के दौरान केवल जल के सहारे उपवास रखते रहे। मोदी के जीवनीलेखक नीलांजन मुखोपाध्याय के मुताबिक, युवावस्था में ही मोदी की शादी हुई, लेकिन वह निभ नहीं सकी। प्रचारक बनने के लिए उन्होंने अपने विवाहित होने के सच को छिपाए रखा। इस सच के सामने आने पर अति शुद्धतावादी संघ का प्रचारक बनना मुश्किल था। स्कूली जीवन से ही मोदी अच्छे वक्ता रहे हैं। वह अक्सर महीनों अपने परिवार से गायब रहा करते थे। वह एकांत में रुकते या हिमालय में भटका करते थे। एक बार वह गिर के जंगलों में एक छोटे से मंदिर में ठहरे थे। 1967 में उन्होंने अपने परिवार से नाता तोड़ लिया। मोदी संघ में औपचारिक रूप से 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद शामिल हुए। वह दिल्ली के संघ कार्यालय में रहे जहां उनकी दिनचर्या कुछ इस तरह की थी। सुबह 4 बजे जगने के बाद पूरे कार्यालय में झाडू-बुहारू करना, वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के लिए चाय के साथ-साथ नाश्ता और शाम का नाश्ता बनाना और पत्रों का उत्तर देना उनका काम था। वह बर्तन भी साफ करते थे और पूरे भवन की साफ सफाई करते थे। मोदी अपना कपड़ा भी खुद धोते थे। जब इंदिरा गांधी ने देश पर आपातकाल थोपा था तब मोदी दिल्ली से गुजरात जाकर भूमिगत हो गए। एक बजाज स्कूटर पर अनवरत इधर-उधर घूमते रहते और कभी-कभी गुप्तरूप से और छपे हुए केंद्र सरकार विरोधी पर्चे बांटा करते थे। राजनीति को अंगीकार करने वाले मोदी ने दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक और गुजरात विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की शिक्षा ग्रहण की है। अपने परिश्रम के दम पर मोदी ने वरिष्ठों का ध्यान खींचा और उन्हें 1987-88 में भाजपा की गुजरात इकाई में संगठन मंत्री की कमान सौंपी गई। यहीं से उनके राजनीतिक सफर की औपचारिक शुरुआत हुई। मोदी ने आहिस्ता-आहिस्ता भाजपा पर नियंत्रण पाया और कार्यकर्ताओं के बीच पैठ बनाई। उन्होंने 1990 में तब महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जब आडवाणी ने राम मंदिर निर्माण के लिए सोमनाथ से अयोध्या तक रथ यात्रा निकाली थी। इसी रथ यात्रा ने भाजपा को राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज कराने में मदद दिलाई। लेकिन, राजनीतिक कद बढ़ते जाने के बीच मोदी की अपनी कुछ निजी कमजोरियां भी हैं। 1992 में उन्हें गुजरात भाजपा में दरकिनार कर दिया गया। पहले से जमे केशुभाई पटेल, शंकरसिंह वाघेला और कांशीराम राणा जैसे वरिष्ठ नेताओं को मोदी का 'उदय' नहीं पचा। समय बीता। मोदी पर आरोप है कि उन्होंने अपने लाभ के लिए समर्थकों को किनारे लगाने में भी परहेज नहीं किया। वर्ष 2001 में जिस मुख्यमंत्री पटेल की जगह उन्होंने ली कभी मोदी उनके विश्वासपात्र रह चुके थे।टिप्पणियां मोदी की आज की पहचान पर 2002 के गुजरात में हुई हिंसा की व्यापक छाया है। उस समय वहां उन्हीं की सरकार थी। उनकी सरकार पर एक समुदाय विशेष के लोगों को निशाना बनाने के लिए दूसरे समुदाय को प्रोत्साहन देने का आरोप है। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने गुजरात हिंसा पर गहरी नाराजगी जताई थी। तब मोदी के लिए आडवाणी संकटमोचक बने थे। उसके बाद 2002 के गुजरात विधानसभा चुनाव में मोदी विजेता बनकर उभरे और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। मोदी के जीवनीलेखक नीलांजन मुखोपाध्याय के मुताबिक, युवावस्था में ही मोदी की शादी हुई, लेकिन वह निभ नहीं सकी। प्रचारक बनने के लिए उन्होंने अपने विवाहित होने के सच को छिपाए रखा। इस सच के सामने आने पर अति शुद्धतावादी संघ का प्रचारक बनना मुश्किल था। स्कूली जीवन से ही मोदी अच्छे वक्ता रहे हैं। वह अक्सर महीनों अपने परिवार से गायब रहा करते थे। वह एकांत में रुकते या हिमालय में भटका करते थे। एक बार वह गिर के जंगलों में एक छोटे से मंदिर में ठहरे थे। 1967 में उन्होंने अपने परिवार से नाता तोड़ लिया। मोदी संघ में औपचारिक रूप से 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद शामिल हुए। वह दिल्ली के संघ कार्यालय में रहे जहां उनकी दिनचर्या कुछ इस तरह की थी। सुबह 4 बजे जगने के बाद पूरे कार्यालय में झाडू-बुहारू करना, वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के लिए चाय के साथ-साथ नाश्ता और शाम का नाश्ता बनाना और पत्रों का उत्तर देना उनका काम था। वह बर्तन भी साफ करते थे और पूरे भवन की साफ सफाई करते थे। मोदी अपना कपड़ा भी खुद धोते थे। जब इंदिरा गांधी ने देश पर आपातकाल थोपा था तब मोदी दिल्ली से गुजरात जाकर भूमिगत हो गए। एक बजाज स्कूटर पर अनवरत इधर-उधर घूमते रहते और कभी-कभी गुप्तरूप से और छपे हुए केंद्र सरकार विरोधी पर्चे बांटा करते थे। राजनीति को अंगीकार करने वाले मोदी ने दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक और गुजरात विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की शिक्षा ग्रहण की है। अपने परिश्रम के दम पर मोदी ने वरिष्ठों का ध्यान खींचा और उन्हें 1987-88 में भाजपा की गुजरात इकाई में संगठन मंत्री की कमान सौंपी गई। यहीं से उनके राजनीतिक सफर की औपचारिक शुरुआत हुई। मोदी ने आहिस्ता-आहिस्ता भाजपा पर नियंत्रण पाया और कार्यकर्ताओं के बीच पैठ बनाई। उन्होंने 1990 में तब महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जब आडवाणी ने राम मंदिर निर्माण के लिए सोमनाथ से अयोध्या तक रथ यात्रा निकाली थी। इसी रथ यात्रा ने भाजपा को राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज कराने में मदद दिलाई। लेकिन, राजनीतिक कद बढ़ते जाने के बीच मोदी की अपनी कुछ निजी कमजोरियां भी हैं। 1992 में उन्हें गुजरात भाजपा में दरकिनार कर दिया गया। पहले से जमे केशुभाई पटेल, शंकरसिंह वाघेला और कांशीराम राणा जैसे वरिष्ठ नेताओं को मोदी का 'उदय' नहीं पचा। समय बीता। मोदी पर आरोप है कि उन्होंने अपने लाभ के लिए समर्थकों को किनारे लगाने में भी परहेज नहीं किया। वर्ष 2001 में जिस मुख्यमंत्री पटेल की जगह उन्होंने ली कभी मोदी उनके विश्वासपात्र रह चुके थे।टिप्पणियां मोदी की आज की पहचान पर 2002 के गुजरात में हुई हिंसा की व्यापक छाया है। उस समय वहां उन्हीं की सरकार थी। उनकी सरकार पर एक समुदाय विशेष के लोगों को निशाना बनाने के लिए दूसरे समुदाय को प्रोत्साहन देने का आरोप है। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने गुजरात हिंसा पर गहरी नाराजगी जताई थी। तब मोदी के लिए आडवाणी संकटमोचक बने थे। उसके बाद 2002 के गुजरात विधानसभा चुनाव में मोदी विजेता बनकर उभरे और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। स्कूली जीवन से ही मोदी अच्छे वक्ता रहे हैं। वह अक्सर महीनों अपने परिवार से गायब रहा करते थे। वह एकांत में रुकते या हिमालय में भटका करते थे। एक बार वह गिर के जंगलों में एक छोटे से मंदिर में ठहरे थे। 1967 में उन्होंने अपने परिवार से नाता तोड़ लिया। मोदी संघ में औपचारिक रूप से 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद शामिल हुए। वह दिल्ली के संघ कार्यालय में रहे जहां उनकी दिनचर्या कुछ इस तरह की थी। सुबह 4 बजे जगने के बाद पूरे कार्यालय में झाडू-बुहारू करना, वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के लिए चाय के साथ-साथ नाश्ता और शाम का नाश्ता बनाना और पत्रों का उत्तर देना उनका काम था। वह बर्तन भी साफ करते थे और पूरे भवन की साफ सफाई करते थे। मोदी अपना कपड़ा भी खुद धोते थे। जब इंदिरा गांधी ने देश पर आपातकाल थोपा था तब मोदी दिल्ली से गुजरात जाकर भूमिगत हो गए। एक बजाज स्कूटर पर अनवरत इधर-उधर घूमते रहते और कभी-कभी गुप्तरूप से और छपे हुए केंद्र सरकार विरोधी पर्चे बांटा करते थे। राजनीति को अंगीकार करने वाले मोदी ने दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक और गुजरात विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की शिक्षा ग्रहण की है। अपने परिश्रम के दम पर मोदी ने वरिष्ठों का ध्यान खींचा और उन्हें 1987-88 में भाजपा की गुजरात इकाई में संगठन मंत्री की कमान सौंपी गई। यहीं से उनके राजनीतिक सफर की औपचारिक शुरुआत हुई। मोदी ने आहिस्ता-आहिस्ता भाजपा पर नियंत्रण पाया और कार्यकर्ताओं के बीच पैठ बनाई। उन्होंने 1990 में तब महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जब आडवाणी ने राम मंदिर निर्माण के लिए सोमनाथ से अयोध्या तक रथ यात्रा निकाली थी। इसी रथ यात्रा ने भाजपा को राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज कराने में मदद दिलाई। लेकिन, राजनीतिक कद बढ़ते जाने के बीच मोदी की अपनी कुछ निजी कमजोरियां भी हैं। 1992 में उन्हें गुजरात भाजपा में दरकिनार कर दिया गया। पहले से जमे केशुभाई पटेल, शंकरसिंह वाघेला और कांशीराम राणा जैसे वरिष्ठ नेताओं को मोदी का 'उदय' नहीं पचा। समय बीता। मोदी पर आरोप है कि उन्होंने अपने लाभ के लिए समर्थकों को किनारे लगाने में भी परहेज नहीं किया। वर्ष 2001 में जिस मुख्यमंत्री पटेल की जगह उन्होंने ली कभी मोदी उनके विश्वासपात्र रह चुके थे।टिप्पणियां मोदी की आज की पहचान पर 2002 के गुजरात में हुई हिंसा की व्यापक छाया है। उस समय वहां उन्हीं की सरकार थी। उनकी सरकार पर एक समुदाय विशेष के लोगों को निशाना बनाने के लिए दूसरे समुदाय को प्रोत्साहन देने का आरोप है। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने गुजरात हिंसा पर गहरी नाराजगी जताई थी। तब मोदी के लिए आडवाणी संकटमोचक बने थे। उसके बाद 2002 के गुजरात विधानसभा चुनाव में मोदी विजेता बनकर उभरे और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह दिल्ली के संघ कार्यालय में रहे जहां उनकी दिनचर्या कुछ इस तरह की थी। सुबह 4 बजे जगने के बाद पूरे कार्यालय में झाडू-बुहारू करना, वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के लिए चाय के साथ-साथ नाश्ता और शाम का नाश्ता बनाना और पत्रों का उत्तर देना उनका काम था। वह बर्तन भी साफ करते थे और पूरे भवन की साफ सफाई करते थे। मोदी अपना कपड़ा भी खुद धोते थे। जब इंदिरा गांधी ने देश पर आपातकाल थोपा था तब मोदी दिल्ली से गुजरात जाकर भूमिगत हो गए। एक बजाज स्कूटर पर अनवरत इधर-उधर घूमते रहते और कभी-कभी गुप्तरूप से और छपे हुए केंद्र सरकार विरोधी पर्चे बांटा करते थे। राजनीति को अंगीकार करने वाले मोदी ने दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक और गुजरात विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की शिक्षा ग्रहण की है। अपने परिश्रम के दम पर मोदी ने वरिष्ठों का ध्यान खींचा और उन्हें 1987-88 में भाजपा की गुजरात इकाई में संगठन मंत्री की कमान सौंपी गई। यहीं से उनके राजनीतिक सफर की औपचारिक शुरुआत हुई। मोदी ने आहिस्ता-आहिस्ता भाजपा पर नियंत्रण पाया और कार्यकर्ताओं के बीच पैठ बनाई। उन्होंने 1990 में तब महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जब आडवाणी ने राम मंदिर निर्माण के लिए सोमनाथ से अयोध्या तक रथ यात्रा निकाली थी। इसी रथ यात्रा ने भाजपा को राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज कराने में मदद दिलाई। लेकिन, राजनीतिक कद बढ़ते जाने के बीच मोदी की अपनी कुछ निजी कमजोरियां भी हैं। 1992 में उन्हें गुजरात भाजपा में दरकिनार कर दिया गया। पहले से जमे केशुभाई पटेल, शंकरसिंह वाघेला और कांशीराम राणा जैसे वरिष्ठ नेताओं को मोदी का 'उदय' नहीं पचा। समय बीता। मोदी पर आरोप है कि उन्होंने अपने लाभ के लिए समर्थकों को किनारे लगाने में भी परहेज नहीं किया। वर्ष 2001 में जिस मुख्यमंत्री पटेल की जगह उन्होंने ली कभी मोदी उनके विश्वासपात्र रह चुके थे।टिप्पणियां मोदी की आज की पहचान पर 2002 के गुजरात में हुई हिंसा की व्यापक छाया है। उस समय वहां उन्हीं की सरकार थी। उनकी सरकार पर एक समुदाय विशेष के लोगों को निशाना बनाने के लिए दूसरे समुदाय को प्रोत्साहन देने का आरोप है। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने गुजरात हिंसा पर गहरी नाराजगी जताई थी। तब मोदी के लिए आडवाणी संकटमोचक बने थे। उसके बाद 2002 के गुजरात विधानसभा चुनाव में मोदी विजेता बनकर उभरे और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। जब इंदिरा गांधी ने देश पर आपातकाल थोपा था तब मोदी दिल्ली से गुजरात जाकर भूमिगत हो गए। एक बजाज स्कूटर पर अनवरत इधर-उधर घूमते रहते और कभी-कभी गुप्तरूप से और छपे हुए केंद्र सरकार विरोधी पर्चे बांटा करते थे। राजनीति को अंगीकार करने वाले मोदी ने दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक और गुजरात विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की शिक्षा ग्रहण की है। अपने परिश्रम के दम पर मोदी ने वरिष्ठों का ध्यान खींचा और उन्हें 1987-88 में भाजपा की गुजरात इकाई में संगठन मंत्री की कमान सौंपी गई। यहीं से उनके राजनीतिक सफर की औपचारिक शुरुआत हुई। मोदी ने आहिस्ता-आहिस्ता भाजपा पर नियंत्रण पाया और कार्यकर्ताओं के बीच पैठ बनाई। उन्होंने 1990 में तब महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जब आडवाणी ने राम मंदिर निर्माण के लिए सोमनाथ से अयोध्या तक रथ यात्रा निकाली थी। इसी रथ यात्रा ने भाजपा को राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज कराने में मदद दिलाई। लेकिन, राजनीतिक कद बढ़ते जाने के बीच मोदी की अपनी कुछ निजी कमजोरियां भी हैं। 1992 में उन्हें गुजरात भाजपा में दरकिनार कर दिया गया। पहले से जमे केशुभाई पटेल, शंकरसिंह वाघेला और कांशीराम राणा जैसे वरिष्ठ नेताओं को मोदी का 'उदय' नहीं पचा। समय बीता। मोदी पर आरोप है कि उन्होंने अपने लाभ के लिए समर्थकों को किनारे लगाने में भी परहेज नहीं किया। वर्ष 2001 में जिस मुख्यमंत्री पटेल की जगह उन्होंने ली कभी मोदी उनके विश्वासपात्र रह चुके थे।टिप्पणियां मोदी की आज की पहचान पर 2002 के गुजरात में हुई हिंसा की व्यापक छाया है। उस समय वहां उन्हीं की सरकार थी। उनकी सरकार पर एक समुदाय विशेष के लोगों को निशाना बनाने के लिए दूसरे समुदाय को प्रोत्साहन देने का आरोप है। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने गुजरात हिंसा पर गहरी नाराजगी जताई थी। तब मोदी के लिए आडवाणी संकटमोचक बने थे। उसके बाद 2002 के गुजरात विधानसभा चुनाव में मोदी विजेता बनकर उभरे और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। राजनीति को अंगीकार करने वाले मोदी ने दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक और गुजरात विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की शिक्षा ग्रहण की है। अपने परिश्रम के दम पर मोदी ने वरिष्ठों का ध्यान खींचा और उन्हें 1987-88 में भाजपा की गुजरात इकाई में संगठन मंत्री की कमान सौंपी गई। यहीं से उनके राजनीतिक सफर की औपचारिक शुरुआत हुई। मोदी ने आहिस्ता-आहिस्ता भाजपा पर नियंत्रण पाया और कार्यकर्ताओं के बीच पैठ बनाई। उन्होंने 1990 में तब महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जब आडवाणी ने राम मंदिर निर्माण के लिए सोमनाथ से अयोध्या तक रथ यात्रा निकाली थी। इसी रथ यात्रा ने भाजपा को राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज कराने में मदद दिलाई। लेकिन, राजनीतिक कद बढ़ते जाने के बीच मोदी की अपनी कुछ निजी कमजोरियां भी हैं। 1992 में उन्हें गुजरात भाजपा में दरकिनार कर दिया गया। पहले से जमे केशुभाई पटेल, शंकरसिंह वाघेला और कांशीराम राणा जैसे वरिष्ठ नेताओं को मोदी का 'उदय' नहीं पचा। समय बीता। मोदी पर आरोप है कि उन्होंने अपने लाभ के लिए समर्थकों को किनारे लगाने में भी परहेज नहीं किया। वर्ष 2001 में जिस मुख्यमंत्री पटेल की जगह उन्होंने ली कभी मोदी उनके विश्वासपात्र रह चुके थे।टिप्पणियां मोदी की आज की पहचान पर 2002 के गुजरात में हुई हिंसा की व्यापक छाया है। उस समय वहां उन्हीं की सरकार थी। उनकी सरकार पर एक समुदाय विशेष के लोगों को निशाना बनाने के लिए दूसरे समुदाय को प्रोत्साहन देने का आरोप है। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने गुजरात हिंसा पर गहरी नाराजगी जताई थी। तब मोदी के लिए आडवाणी संकटमोचक बने थे। उसके बाद 2002 के गुजरात विधानसभा चुनाव में मोदी विजेता बनकर उभरे और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। अपने परिश्रम के दम पर मोदी ने वरिष्ठों का ध्यान खींचा और उन्हें 1987-88 में भाजपा की गुजरात इकाई में संगठन मंत्री की कमान सौंपी गई। यहीं से उनके राजनीतिक सफर की औपचारिक शुरुआत हुई। मोदी ने आहिस्ता-आहिस्ता भाजपा पर नियंत्रण पाया और कार्यकर्ताओं के बीच पैठ बनाई। उन्होंने 1990 में तब महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जब आडवाणी ने राम मंदिर निर्माण के लिए सोमनाथ से अयोध्या तक रथ यात्रा निकाली थी। इसी रथ यात्रा ने भाजपा को राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज कराने में मदद दिलाई। लेकिन, राजनीतिक कद बढ़ते जाने के बीच मोदी की अपनी कुछ निजी कमजोरियां भी हैं। 1992 में उन्हें गुजरात भाजपा में दरकिनार कर दिया गया। पहले से जमे केशुभाई पटेल, शंकरसिंह वाघेला और कांशीराम राणा जैसे वरिष्ठ नेताओं को मोदी का 'उदय' नहीं पचा। समय बीता। मोदी पर आरोप है कि उन्होंने अपने लाभ के लिए समर्थकों को किनारे लगाने में भी परहेज नहीं किया। वर्ष 2001 में जिस मुख्यमंत्री पटेल की जगह उन्होंने ली कभी मोदी उनके विश्वासपात्र रह चुके थे।टिप्पणियां मोदी की आज की पहचान पर 2002 के गुजरात में हुई हिंसा की व्यापक छाया है। उस समय वहां उन्हीं की सरकार थी। उनकी सरकार पर एक समुदाय विशेष के लोगों को निशाना बनाने के लिए दूसरे समुदाय को प्रोत्साहन देने का आरोप है। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने गुजरात हिंसा पर गहरी नाराजगी जताई थी। तब मोदी के लिए आडवाणी संकटमोचक बने थे। उसके बाद 2002 के गुजरात विधानसभा चुनाव में मोदी विजेता बनकर उभरे और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। मोदी ने आहिस्ता-आहिस्ता भाजपा पर नियंत्रण पाया और कार्यकर्ताओं के बीच पैठ बनाई। उन्होंने 1990 में तब महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जब आडवाणी ने राम मंदिर निर्माण के लिए सोमनाथ से अयोध्या तक रथ यात्रा निकाली थी। इसी रथ यात्रा ने भाजपा को राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज कराने में मदद दिलाई। लेकिन, राजनीतिक कद बढ़ते जाने के बीच मोदी की अपनी कुछ निजी कमजोरियां भी हैं। 1992 में उन्हें गुजरात भाजपा में दरकिनार कर दिया गया। पहले से जमे केशुभाई पटेल, शंकरसिंह वाघेला और कांशीराम राणा जैसे वरिष्ठ नेताओं को मोदी का 'उदय' नहीं पचा। समय बीता। मोदी पर आरोप है कि उन्होंने अपने लाभ के लिए समर्थकों को किनारे लगाने में भी परहेज नहीं किया। वर्ष 2001 में जिस मुख्यमंत्री पटेल की जगह उन्होंने ली कभी मोदी उनके विश्वासपात्र रह चुके थे।टिप्पणियां मोदी की आज की पहचान पर 2002 के गुजरात में हुई हिंसा की व्यापक छाया है। उस समय वहां उन्हीं की सरकार थी। उनकी सरकार पर एक समुदाय विशेष के लोगों को निशाना बनाने के लिए दूसरे समुदाय को प्रोत्साहन देने का आरोप है। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने गुजरात हिंसा पर गहरी नाराजगी जताई थी। तब मोदी के लिए आडवाणी संकटमोचक बने थे। उसके बाद 2002 के गुजरात विधानसभा चुनाव में मोदी विजेता बनकर उभरे और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। लेकिन, राजनीतिक कद बढ़ते जाने के बीच मोदी की अपनी कुछ निजी कमजोरियां भी हैं। 1992 में उन्हें गुजरात भाजपा में दरकिनार कर दिया गया। पहले से जमे केशुभाई पटेल, शंकरसिंह वाघेला और कांशीराम राणा जैसे वरिष्ठ नेताओं को मोदी का 'उदय' नहीं पचा। समय बीता। मोदी पर आरोप है कि उन्होंने अपने लाभ के लिए समर्थकों को किनारे लगाने में भी परहेज नहीं किया। वर्ष 2001 में जिस मुख्यमंत्री पटेल की जगह उन्होंने ली कभी मोदी उनके विश्वासपात्र रह चुके थे।टिप्पणियां मोदी की आज की पहचान पर 2002 के गुजरात में हुई हिंसा की व्यापक छाया है। उस समय वहां उन्हीं की सरकार थी। उनकी सरकार पर एक समुदाय विशेष के लोगों को निशाना बनाने के लिए दूसरे समुदाय को प्रोत्साहन देने का आरोप है। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने गुजरात हिंसा पर गहरी नाराजगी जताई थी। तब मोदी के लिए आडवाणी संकटमोचक बने थे। उसके बाद 2002 के गुजरात विधानसभा चुनाव में मोदी विजेता बनकर उभरे और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। समय बीता। मोदी पर आरोप है कि उन्होंने अपने लाभ के लिए समर्थकों को किनारे लगाने में भी परहेज नहीं किया। वर्ष 2001 में जिस मुख्यमंत्री पटेल की जगह उन्होंने ली कभी मोदी उनके विश्वासपात्र रह चुके थे।टिप्पणियां मोदी की आज की पहचान पर 2002 के गुजरात में हुई हिंसा की व्यापक छाया है। उस समय वहां उन्हीं की सरकार थी। उनकी सरकार पर एक समुदाय विशेष के लोगों को निशाना बनाने के लिए दूसरे समुदाय को प्रोत्साहन देने का आरोप है। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने गुजरात हिंसा पर गहरी नाराजगी जताई थी। तब मोदी के लिए आडवाणी संकटमोचक बने थे। उसके बाद 2002 के गुजरात विधानसभा चुनाव में मोदी विजेता बनकर उभरे और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। मोदी की आज की पहचान पर 2002 के गुजरात में हुई हिंसा की व्यापक छाया है। उस समय वहां उन्हीं की सरकार थी। उनकी सरकार पर एक समुदाय विशेष के लोगों को निशाना बनाने के लिए दूसरे समुदाय को प्रोत्साहन देने का आरोप है। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने गुजरात हिंसा पर गहरी नाराजगी जताई थी। तब मोदी के लिए आडवाणी संकटमोचक बने थे। उसके बाद 2002 के गुजरात विधानसभा चुनाव में मोदी विजेता बनकर उभरे और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने गुजरात हिंसा पर गहरी नाराजगी जताई थी। तब मोदी के लिए आडवाणी संकटमोचक बने थे। उसके बाद 2002 के गुजरात विधानसभा चुनाव में मोदी विजेता बनकर उभरे और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
यहाँ एक सारांश है:गुजरात के एक रेलवे स्टेशन पर कभी चाय बेचने वाले नरेंद्र मोदी भारतीय राजनीति में धूमकेतु की तरह आगे बढ़े हैं। वर्ष 2001 में मुख्यमंत्री बनने के बाद सुर्खियों में आए मोदी महज 12 वर्ष में पार्टी की ओर से देश की सरकार के शीर्ष पद के प्रत्याशी बनाए गए हैं।
15
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: मणिपुर से कठोर कानून सशस्त्र बल अधिनियम (एएफएसपीए) को हटाने की मांग को लेकर लगातार 16 वर्षों तक अनशन कर चुकीं इरोम शर्मिला ने राज्य के मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह के खिलाफ विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा की है. इरोम ने बीते साल नौ अगस्त को अपना अनशन खत्म करके अक्टूबर महीने में 'पीपुल्स रिसर्जेस एंड जस्टिस अलायंस' नामक पार्टी का गठन किया है.टिप्पणियां इरोम ने आरोप लगाया कि 15 सालों के कार्यकाल के दौरान मुख्यमंत्री राज्य से एएफएसपीए हटाने को लेकर कुछ भी नहीं किया है. उन्होंने कहा कि उन्होंने महसूस किया कि इसे कोई भी राजनेता नहीं हटाएगा और इसलिए वे अब चुनाव लड़कर मुख्यमंत्री बनेंगी और इस कठोर कानून को हटाएंगी. कठोर कानून हो हटाने के लिए अपना जीवन कुर्बान करने की ओर इशारा करते हुए इरोम ने कहा कि इसे हटाना उनका दृढ़ संकल्प है. उधर, मुख्यमंत्री इबोबी सिंह ने कहा कि इंफाल नगर निगम के सात विधानसभा क्षेत्रों से एएफएसपीए हटा दिया गया है और वादा किया गया है कि अगर हालात सकारात्मक रहे, तो अन्य इलाकों से भी इसे हटा दिया जाएगा. ओकराम इबोबी सिंह लगातार तीन कार्यकाल से मुख्यमंत्री हैं और थुबल विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित होते आ रहे हैं. इरोम ने बीते साल नौ अगस्त को अपना अनशन खत्म करके अक्टूबर महीने में 'पीपुल्स रिसर्जेस एंड जस्टिस अलायंस' नामक पार्टी का गठन किया है.टिप्पणियां इरोम ने आरोप लगाया कि 15 सालों के कार्यकाल के दौरान मुख्यमंत्री राज्य से एएफएसपीए हटाने को लेकर कुछ भी नहीं किया है. उन्होंने कहा कि उन्होंने महसूस किया कि इसे कोई भी राजनेता नहीं हटाएगा और इसलिए वे अब चुनाव लड़कर मुख्यमंत्री बनेंगी और इस कठोर कानून को हटाएंगी. कठोर कानून हो हटाने के लिए अपना जीवन कुर्बान करने की ओर इशारा करते हुए इरोम ने कहा कि इसे हटाना उनका दृढ़ संकल्प है. उधर, मुख्यमंत्री इबोबी सिंह ने कहा कि इंफाल नगर निगम के सात विधानसभा क्षेत्रों से एएफएसपीए हटा दिया गया है और वादा किया गया है कि अगर हालात सकारात्मक रहे, तो अन्य इलाकों से भी इसे हटा दिया जाएगा. ओकराम इबोबी सिंह लगातार तीन कार्यकाल से मुख्यमंत्री हैं और थुबल विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित होते आ रहे हैं. इरोम ने आरोप लगाया कि 15 सालों के कार्यकाल के दौरान मुख्यमंत्री राज्य से एएफएसपीए हटाने को लेकर कुछ भी नहीं किया है. उन्होंने कहा कि उन्होंने महसूस किया कि इसे कोई भी राजनेता नहीं हटाएगा और इसलिए वे अब चुनाव लड़कर मुख्यमंत्री बनेंगी और इस कठोर कानून को हटाएंगी. कठोर कानून हो हटाने के लिए अपना जीवन कुर्बान करने की ओर इशारा करते हुए इरोम ने कहा कि इसे हटाना उनका दृढ़ संकल्प है. उधर, मुख्यमंत्री इबोबी सिंह ने कहा कि इंफाल नगर निगम के सात विधानसभा क्षेत्रों से एएफएसपीए हटा दिया गया है और वादा किया गया है कि अगर हालात सकारात्मक रहे, तो अन्य इलाकों से भी इसे हटा दिया जाएगा. ओकराम इबोबी सिंह लगातार तीन कार्यकाल से मुख्यमंत्री हैं और थुबल विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित होते आ रहे हैं. उधर, मुख्यमंत्री इबोबी सिंह ने कहा कि इंफाल नगर निगम के सात विधानसभा क्षेत्रों से एएफएसपीए हटा दिया गया है और वादा किया गया है कि अगर हालात सकारात्मक रहे, तो अन्य इलाकों से भी इसे हटा दिया जाएगा. ओकराम इबोबी सिंह लगातार तीन कार्यकाल से मुख्यमंत्री हैं और थुबल विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित होते आ रहे हैं.
सारांश: अफस्फा के खिलाफ पिछले 16 साल भूख हड़ताल पर बैंठी थीं इरोम शर्मिला बीते साल 9 अगस्त को खत्म किया था इरोम ने अपना आमरण अनशन पीपल्स रीसर्जेन्स एंड जस्टिस एलायन्स (प्रजा) नाम से राजनीति दल का गठन किय
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['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने मंगलवार को कहा कि उनके साथी बुधवार को पाकिस्तान के साथ होने वाले महामुकाबले के लिए पूरी तरह तैयार हैं। कप्तान ने कहा कि इस मैच को लेकर दोनों देशों में जबरदस्त चर्चा और उत्साह है, लेकिन उनके साथी इन तमाम चर्चाओं से 'बेखबर' अभ्यास पर ध्यान लगाए हुए हैं। धोनी ने पाकिस्तान के साथ पंजाब क्रिकेट संघ (पीसीए) के मैदान पर होने वाले आईसीसी विश्व कप-2011 के सेमीफाइनल मैच की पूर्व संध्या पर संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "निश्चित तौर पर यह हमारे लिए बड़ा मैच है। एक तो यह सेमीफाइनल है और दूसरे, हमारा सामना पाकिस्तान से होना है। इस मैच को लेकर जबरदस्त चर्चा हो रही है, लेकिन हम इससे प्रभावित नहीं हैं। हमारा ध्यान अपने काम पर है। हम मैच दर मैच रणनीति पर बनाए हुए हैं। मीडिया के माध्यम से जो बातें सामने आ रही हैं, उससे बेखबर मेरे सभी साथी अपनी भूमिका को श्रेष्ठता से अंजाम तक पहुंचाने में जुटे हुए हैं।" धोनी ने कहा कि इस मैच को लेकर जो 'हाइप' हुआ है, वह मीडिया और प्रायोजकों द्वारा तैयार किया गया है। इससे टीम को कोई फर्क नहीं पड़ता। बकौल धोनी, "देखिए मैं साफ कर देना चाहता हूं कि जो हाइप मीडिया और प्रायोजकों ने बनाया है, हम उसमें शामिल नहीं हैं। अब तक कुल सात सवाल इसी हाइप को लेकर पूछे जा चुके हैं। हम अच्छा क्रिकेट खेलने का वादा करते हैं। हम मैदान में यही कर सकते हैं। चर्चा में शामिल होना हमारा काम नहीं, क्योंकि इससे हमें कुछ नहीं हासिल होगा।" कप्तान ने कहा कि टीम के सभी सदस्य फिट हैं और मंगलवार दोपहर के अभ्यास के बाद वे सीधे मैच के लिए ही मैदान में उतरेंगे। धोनी बोले, "हमारे लिए अच्छी खबर यह है कि हमारे सभी खिलाड़ी फिट हैं। इस मैच के लिए हम पूरी तरह अपनी क्षमताओं पर ध्यान दे रहे हैं और उन्हें मांजने के लिए मेहनत कर रहे हैं। हम अपनी फिटनेस और तकनीक पर आश्रित हैं और हमें उम्मीद है कि इससे हमें जरूर सकारात्मक नतीजा मिलेगा।" पाकिस्तानी टीम के बारे में पूछे जाने पर भारतीय कप्तान ने कहा कि बीते दिनों में इस टीम ने शानदार प्रदर्शन किया है और खुद को खिताब के दावेदारों में शामिल किया है। कप्तान के मुताबिक पाक टीम के पास कुछ अच्छे हरफनमौला खिलाड़ी हैं, जो उसे शानदार संतुलन प्रदान करते हैं। कप्तान बोले, "पाकिस्तान टीम के पास कुछ अच्छे हरफनमौला खिलाड़ी हैं। इससे उसे पांच गेंदबाजों के साथ मैदान में उतरने की आजादी मिलती है। यह टीम काफी संतुलित और एकीकृत दिखाई दे रही है। हम उम्मीद करते हैं कि बुधवार को जोरदार मुकाबला खेला जाएगा।" भारत और पाकिस्तान की टीमें 28,000 क्षमता वाले स्टेडियम में बुधवार को आमने-सामने होंगी। इस मैच को देखने के लिए दोनों देशों के प्रधानमंत्री भी मोहाली पहुंच रहे हैं। इस सम्बंध में धोनी ने कहा, "राजनीतिक तौर पर दोनों देशों के बीच बीते 40-45 दिनों में क्या-क्या हुआ है, इसकी मुझे जानकारी नहीं लेकिन यह जानकर अच्छा लगा कि दोनों देशों के प्रधानमंत्री यह मैच देखने पहुंचेंगे। क्रिकेट ने हमेशा दोनों देशों के बीच दोस्ती के पुल का काम किया है। मैं उम्मीद करता हूं कि मोहाली का यह मैच एक बार फिर दोनों के बीच दोस्ती के रिश्ते को कायम करने के साथ-साथ उसे बढ़ाएगा भी। यह दोनों देशों के साथ-साथ क्रिकेट के भी हित में होगा।"
सारांश: धोनी ने मंगलवार को कहा कि उनके साथी बुधवार को पाकिस्तान के साथ होने वाले महामुकाबले के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
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['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: लोकसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस के अंदर उठापटक का दौर जारी है. इस बीच पार्टी की कर्नाटक प्रदेश इकाई को भंग होने के एक दिन बाद पार्टी सूत्रों ने गुरुवार को बताया कि कुछ और प्रदेशों की इकाइयों में बदलाव किया जा सकता है. लोकसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद यह कार्रवाई की जा रही है. पार्टी के वरिष्ठ सूत्रों ने बताया कि आने वाले दिनों में कुछ और कार्रवाई की जा सकती है. उन्होंने इस बात का संकेत दिया कि आम चुनाव में खराब प्रदर्शन को लेकर बिहार और उत्तर प्रदेश की इकायों को भी भंग किया जा सकता है. बता दें कि बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मदन मोहन झा और प्रदेश प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल ने पहले ही पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी को अपना इस्तीफा भेज दिया है.   उत्तर प्रदेश कांग्रेस इकाई के प्रमुख राज बब्बर ने भी लोकसभा चुनाव हारने के बाद अपना इस्तीफा प्रदेश अध्यक्ष को भेज दिया है. कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में 542 सीटों में से महज 52 सीटों पर जीत दर्ज की। पार्टी को बिहार और उत्तर प्रदेश में एक-एक सीटें प्राप्त हुईं, जबकि दोनों प्रदेशों से क्रमश: 40 और 80 सदस्य लोकसभा के लिए चुने जाते हैं. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने अपनी मां और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की चेयरपर्सन सोनिया गांधी के साथ 13 जून को अपने राय बरेली के दौरे के दौरान इस बात का संकेत दिया था कि चुनाव में समर्पणन से काम नहीं करने को लेकर पार्टी के नेताओं व कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है. प्रदेश में सोनिया गांधी अपने निर्वाचन क्षेत्र रायबरेली से चुनाव जीतने में कामयाब रहीं, लेकिन राहुल गांधी अमेठी से चुनाव हार गए. उनको केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने 55,000 मतों से शिकस्त दी.
संक्षिप्त सारांश: चुनाव में कांग्रेस को झेलनी पड़ी थी करारी हार अब कई प्रदेश इकाईयों को भंग करने की तैयारी यूपी-बिहार की इकाई पर गिर सकती है गाज
23
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: फर्जी मुठभेड़ में दो व्यवसायियों की मौत के 14 साल बाद दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय से पीड़ित परिवारों को 15-15 लाख रुपये का हर्जाना देने के लिए कहा। न्यायाधीश एस. मुरलीधर ने अपने फैसले में कहा, "दोनों परिवारों को 15-15 लाख रुपये दिए जाएंगे। मुआवजे की राशि का मारे गए व्यवसायी की विधवा और उनके बच्चों के बीच समान रूप से वितरण किया जाएगा।" न्यायाधीश मुरलीधर के अनुसार, चूंकि दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन है, इसलिए हर्जाना उसके द्वारा ही दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "मुठभेड़ कनाट प्लेस में हुई, जो दिल्ली सरकार के क्षेत्राधिकार में है, लेकिन दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन है और इसलिए मुआवजे की रकम का वहन मंत्रालय द्वारा ही किया जाएगा।" गौरतलब है कि 31 मार्च, 1997 को व्यवसायी प्रदीप गोयल और जगजीत सिंह को तत्कालीन सहायक पुलिस उपायुक्त (अब निलम्बित) एसएस राठी और नौ अन्य पुलिसकर्मियों ने कनाट प्लेस में गोली मार दी थी। उन्होंने उनके अपराधी होने का दावा किया था।इस बीच, यह मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया गया, जिसने सभी 10 पुलिस कर्मियों पर हत्या का अभियोग लगाया और कहा कि पुलिसकर्मियों ने पदोन्नति पाने के लिए मारे गए व्यवसायियों को गैंगस्टर बताया। उस वक्त राठी दिल्ली पुलिस के मुठभेड़ विशेषज्ञ माने जाते थे। सीबीआई ने राठी पर खुद को निर्दोष बताने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को गलत सूचना देने का आरोप भी लगाया।
सारांश: फर्जी मुठभेड़ में दो व्यवसायियों की मौत के 14 साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार गृह मंत्रालय से पीड़ित परिवारों को 15-15 लाख रुपये देने को कहा।
31
['hin']
एक सारांश बनाओ: अमेरिकी श्रम विभाग ने कहा कि पिछले सप्ताह बेरोजगारी भत्तों के लिए दावा करने वालों की संख्या में पहली बार 5,000 की वृद्धि हुई है और इसके साथ ही बेरोजगारों की संख्या 417,000 हो गई है। समाचार एजेंसी ईएफई के अनुसार, शुरुआती बेरोजगारी दावों की संख्या, एक महीने के दौरान औसतन 4,000 की वृद्धि के साथ बढ़कर 407,500 हो गई। बेरोजगारी दावों का 400,000 से नीचे का कोई भी आंकड़ा रोजगार बाजार में सुधार का संकेत समझा जाता है। छह अगस्त को समाप्त हुए सप्ताह में राज्य या संघीय बेरोजगारी भत्तों को प्राप्त करने वाले अमेरिकी नागरिकों की संख्या में लगभग 46,000 की कमी आई और इस तरह यह संख्या 72.9 लाख पर आ गई। राज्य स्तरीय भत्ते आमतौर पर 26 सप्ताहों बाद बंद हो जाते हैं, लेकिन संघीय आपात कार्यक्रम के तहत 99 सप्ताहों तक भत्ते प्रदान किए जाते हैं। इस कार्यक्रम को 1930 के दशक में भयानक आर्थिक संकट के मद्देनजर मंजूरी दी गई थी। अमेरिकी अर्थव्यवस्था ने जुलाई में कुल 117,000 नई नौकरियां सृजित की थी। इससे आधिकारिक बेरोजगारी दर 9.1 प्रतिशत पर आ गई थी। मंदी के बाद दो वर्षों से अधिक समय तक लगभग 1.40 करोड़ लोग बेरोजगार बने रहे। मंदी के कारण 84 लाख नौकरियां समाप्त हो गई थीं।
अमेरिकी श्रम विभाग ने कहा कि पिछले सप्ताह बेरोजगारी भत्तों के लिए दावा करने वालों की संख्या में पहली बार 5,000 की वृद्धि हुई है।
26
['hin']
एक सारांश बनाओ: नोटबंदी के आलोचकों को खारिज करते वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को कहा कि बड़े मूल्य के पुराने नोटों को बंद करने प्रभाव उतना प्रतिकूल नहीं है, जैसा कहा जा रहा था. उन्होंने यह भी कहा कि कर संग्रह, रबी की बुवाई समेत विभिन्न प्रकार की आर्थिक गतिविधियों में तीव्र वृद्धि हुई है. पुराने 500 और 1,000 रुपये के नोटों को बैंकों में जमा करने की 50 दिन की समयसीमा कल समाप्त होने से पहले उन्होंने कहा कि नए नोटों को चलन में डालने के काम में बहुत प्रगति हो चुकी है. उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण बात यह है कि नोटबंदी को लेकर कहीं कोई उपद्रव नहीं हुआ. वित्त मंत्री ने जीडीपी वृद्धि पर असर या राजस्व संग्रह में वृद्धि के कारण उनके 2017-18 के बजट में कर प्रस्तावों पर संभावित प्रभाव के बारे में कुछ भी अनुमान जताने से मना कर दिया. यह पूछे जाने पर कि नकद निकासी पर लगी सीमा कब हटेगी, उन्होंने कहा, 'इस बारे में निर्णय केंद्रीय बैंक विभिन्न पक्षों से परामर्श करके करेगा' नोटबंदी से अर्थव्यवस्था तथा जीडीपी वृद्धि पर पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को लेकर आलोचकों की आशंका के बारे में पूछे जाने पर वित्त मंत्री जेटली ने कहा, 'मुझे लगता है कि इस बारे में चीजें साफ है कि एक तिमाही या कुछ थोड़े समय के लिए इसका कुछ विपरीत प्रभाव पड़ेगा, लेकिन इसका इतना प्रतिकूल प्रभाव नहीं होगा जैसा कि कहा जा रहा था'. जेटली ने कहा, 'लेकिन दीर्घकाल में आपको अर्थव्यवस्था के लिए योजना बनानी होगी. प्रणाली में जो बदलाव आ रहे हैं, इसका निश्चित तौर पर मतलब है कि बैंकों के पास और धन होगा, राजस्व बढ़ेगा और संभवत: जीडीपी का आकार बड़ा और साफ होगा'. यह पूछे जाने पर कि राजस्व संग्रह में वृद्धि से आने वाले बजट में कराधान पर कोई प्रभाव पड़ेगा, उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि आपको उसके लिए इंतजार करना होगा'.टिप्पणियां जब उनसे यह पूछा गया कि क्या सरकार नए नोटों को चलन में लाने की प्रक्रिया में मुद्रा की मात्रा कम करने के बारे में निर्णय करेगी, वित्त मंत्री ने कहा, 'इस बारे में रिजर्व बैंक को फैसला करना है और वे निश्चित तौर बाजार की जरूरतों से निर्देशित होंगे'. उन्होंने कहा, 'लेकिन जहां तक सरकार का संबंध है निश्चित तौर पर कागजी मुद्रा कम होनी चाहिए और व्यापार का बड़ा हिस्सा वैकल्पिक डिजिटल और चैक के जरिए होना चाहिए. डिजिटल माध्यमों का उपयोग करने वालों की बढ़ती संख्या को देखते हुए ऐसा लगता है कि हम सही दिशा में बढ़ रहे हैं'.(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) पुराने 500 और 1,000 रुपये के नोटों को बैंकों में जमा करने की 50 दिन की समयसीमा कल समाप्त होने से पहले उन्होंने कहा कि नए नोटों को चलन में डालने के काम में बहुत प्रगति हो चुकी है. उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण बात यह है कि नोटबंदी को लेकर कहीं कोई उपद्रव नहीं हुआ. वित्त मंत्री ने जीडीपी वृद्धि पर असर या राजस्व संग्रह में वृद्धि के कारण उनके 2017-18 के बजट में कर प्रस्तावों पर संभावित प्रभाव के बारे में कुछ भी अनुमान जताने से मना कर दिया. यह पूछे जाने पर कि नकद निकासी पर लगी सीमा कब हटेगी, उन्होंने कहा, 'इस बारे में निर्णय केंद्रीय बैंक विभिन्न पक्षों से परामर्श करके करेगा' नोटबंदी से अर्थव्यवस्था तथा जीडीपी वृद्धि पर पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को लेकर आलोचकों की आशंका के बारे में पूछे जाने पर वित्त मंत्री जेटली ने कहा, 'मुझे लगता है कि इस बारे में चीजें साफ है कि एक तिमाही या कुछ थोड़े समय के लिए इसका कुछ विपरीत प्रभाव पड़ेगा, लेकिन इसका इतना प्रतिकूल प्रभाव नहीं होगा जैसा कि कहा जा रहा था'. जेटली ने कहा, 'लेकिन दीर्घकाल में आपको अर्थव्यवस्था के लिए योजना बनानी होगी. प्रणाली में जो बदलाव आ रहे हैं, इसका निश्चित तौर पर मतलब है कि बैंकों के पास और धन होगा, राजस्व बढ़ेगा और संभवत: जीडीपी का आकार बड़ा और साफ होगा'. यह पूछे जाने पर कि राजस्व संग्रह में वृद्धि से आने वाले बजट में कराधान पर कोई प्रभाव पड़ेगा, उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि आपको उसके लिए इंतजार करना होगा'.टिप्पणियां जब उनसे यह पूछा गया कि क्या सरकार नए नोटों को चलन में लाने की प्रक्रिया में मुद्रा की मात्रा कम करने के बारे में निर्णय करेगी, वित्त मंत्री ने कहा, 'इस बारे में रिजर्व बैंक को फैसला करना है और वे निश्चित तौर बाजार की जरूरतों से निर्देशित होंगे'. उन्होंने कहा, 'लेकिन जहां तक सरकार का संबंध है निश्चित तौर पर कागजी मुद्रा कम होनी चाहिए और व्यापार का बड़ा हिस्सा वैकल्पिक डिजिटल और चैक के जरिए होना चाहिए. डिजिटल माध्यमों का उपयोग करने वालों की बढ़ती संख्या को देखते हुए ऐसा लगता है कि हम सही दिशा में बढ़ रहे हैं'.(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) वित्त मंत्री ने जीडीपी वृद्धि पर असर या राजस्व संग्रह में वृद्धि के कारण उनके 2017-18 के बजट में कर प्रस्तावों पर संभावित प्रभाव के बारे में कुछ भी अनुमान जताने से मना कर दिया. यह पूछे जाने पर कि नकद निकासी पर लगी सीमा कब हटेगी, उन्होंने कहा, 'इस बारे में निर्णय केंद्रीय बैंक विभिन्न पक्षों से परामर्श करके करेगा' नोटबंदी से अर्थव्यवस्था तथा जीडीपी वृद्धि पर पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को लेकर आलोचकों की आशंका के बारे में पूछे जाने पर वित्त मंत्री जेटली ने कहा, 'मुझे लगता है कि इस बारे में चीजें साफ है कि एक तिमाही या कुछ थोड़े समय के लिए इसका कुछ विपरीत प्रभाव पड़ेगा, लेकिन इसका इतना प्रतिकूल प्रभाव नहीं होगा जैसा कि कहा जा रहा था'. जेटली ने कहा, 'लेकिन दीर्घकाल में आपको अर्थव्यवस्था के लिए योजना बनानी होगी. प्रणाली में जो बदलाव आ रहे हैं, इसका निश्चित तौर पर मतलब है कि बैंकों के पास और धन होगा, राजस्व बढ़ेगा और संभवत: जीडीपी का आकार बड़ा और साफ होगा'. यह पूछे जाने पर कि राजस्व संग्रह में वृद्धि से आने वाले बजट में कराधान पर कोई प्रभाव पड़ेगा, उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि आपको उसके लिए इंतजार करना होगा'.टिप्पणियां जब उनसे यह पूछा गया कि क्या सरकार नए नोटों को चलन में लाने की प्रक्रिया में मुद्रा की मात्रा कम करने के बारे में निर्णय करेगी, वित्त मंत्री ने कहा, 'इस बारे में रिजर्व बैंक को फैसला करना है और वे निश्चित तौर बाजार की जरूरतों से निर्देशित होंगे'. उन्होंने कहा, 'लेकिन जहां तक सरकार का संबंध है निश्चित तौर पर कागजी मुद्रा कम होनी चाहिए और व्यापार का बड़ा हिस्सा वैकल्पिक डिजिटल और चैक के जरिए होना चाहिए. डिजिटल माध्यमों का उपयोग करने वालों की बढ़ती संख्या को देखते हुए ऐसा लगता है कि हम सही दिशा में बढ़ रहे हैं'.(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) यह पूछे जाने पर कि नकद निकासी पर लगी सीमा कब हटेगी, उन्होंने कहा, 'इस बारे में निर्णय केंद्रीय बैंक विभिन्न पक्षों से परामर्श करके करेगा' नोटबंदी से अर्थव्यवस्था तथा जीडीपी वृद्धि पर पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को लेकर आलोचकों की आशंका के बारे में पूछे जाने पर वित्त मंत्री जेटली ने कहा, 'मुझे लगता है कि इस बारे में चीजें साफ है कि एक तिमाही या कुछ थोड़े समय के लिए इसका कुछ विपरीत प्रभाव पड़ेगा, लेकिन इसका इतना प्रतिकूल प्रभाव नहीं होगा जैसा कि कहा जा रहा था'. जेटली ने कहा, 'लेकिन दीर्घकाल में आपको अर्थव्यवस्था के लिए योजना बनानी होगी. प्रणाली में जो बदलाव आ रहे हैं, इसका निश्चित तौर पर मतलब है कि बैंकों के पास और धन होगा, राजस्व बढ़ेगा और संभवत: जीडीपी का आकार बड़ा और साफ होगा'. यह पूछे जाने पर कि राजस्व संग्रह में वृद्धि से आने वाले बजट में कराधान पर कोई प्रभाव पड़ेगा, उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि आपको उसके लिए इंतजार करना होगा'.टिप्पणियां जब उनसे यह पूछा गया कि क्या सरकार नए नोटों को चलन में लाने की प्रक्रिया में मुद्रा की मात्रा कम करने के बारे में निर्णय करेगी, वित्त मंत्री ने कहा, 'इस बारे में रिजर्व बैंक को फैसला करना है और वे निश्चित तौर बाजार की जरूरतों से निर्देशित होंगे'. उन्होंने कहा, 'लेकिन जहां तक सरकार का संबंध है निश्चित तौर पर कागजी मुद्रा कम होनी चाहिए और व्यापार का बड़ा हिस्सा वैकल्पिक डिजिटल और चैक के जरिए होना चाहिए. डिजिटल माध्यमों का उपयोग करने वालों की बढ़ती संख्या को देखते हुए ऐसा लगता है कि हम सही दिशा में बढ़ रहे हैं'.(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) नोटबंदी से अर्थव्यवस्था तथा जीडीपी वृद्धि पर पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को लेकर आलोचकों की आशंका के बारे में पूछे जाने पर वित्त मंत्री जेटली ने कहा, 'मुझे लगता है कि इस बारे में चीजें साफ है कि एक तिमाही या कुछ थोड़े समय के लिए इसका कुछ विपरीत प्रभाव पड़ेगा, लेकिन इसका इतना प्रतिकूल प्रभाव नहीं होगा जैसा कि कहा जा रहा था'. जेटली ने कहा, 'लेकिन दीर्घकाल में आपको अर्थव्यवस्था के लिए योजना बनानी होगी. प्रणाली में जो बदलाव आ रहे हैं, इसका निश्चित तौर पर मतलब है कि बैंकों के पास और धन होगा, राजस्व बढ़ेगा और संभवत: जीडीपी का आकार बड़ा और साफ होगा'. यह पूछे जाने पर कि राजस्व संग्रह में वृद्धि से आने वाले बजट में कराधान पर कोई प्रभाव पड़ेगा, उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि आपको उसके लिए इंतजार करना होगा'.टिप्पणियां जब उनसे यह पूछा गया कि क्या सरकार नए नोटों को चलन में लाने की प्रक्रिया में मुद्रा की मात्रा कम करने के बारे में निर्णय करेगी, वित्त मंत्री ने कहा, 'इस बारे में रिजर्व बैंक को फैसला करना है और वे निश्चित तौर बाजार की जरूरतों से निर्देशित होंगे'. उन्होंने कहा, 'लेकिन जहां तक सरकार का संबंध है निश्चित तौर पर कागजी मुद्रा कम होनी चाहिए और व्यापार का बड़ा हिस्सा वैकल्पिक डिजिटल और चैक के जरिए होना चाहिए. डिजिटल माध्यमों का उपयोग करने वालों की बढ़ती संख्या को देखते हुए ऐसा लगता है कि हम सही दिशा में बढ़ रहे हैं'.(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) जेटली ने कहा, 'लेकिन दीर्घकाल में आपको अर्थव्यवस्था के लिए योजना बनानी होगी. प्रणाली में जो बदलाव आ रहे हैं, इसका निश्चित तौर पर मतलब है कि बैंकों के पास और धन होगा, राजस्व बढ़ेगा और संभवत: जीडीपी का आकार बड़ा और साफ होगा'. यह पूछे जाने पर कि राजस्व संग्रह में वृद्धि से आने वाले बजट में कराधान पर कोई प्रभाव पड़ेगा, उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि आपको उसके लिए इंतजार करना होगा'.टिप्पणियां जब उनसे यह पूछा गया कि क्या सरकार नए नोटों को चलन में लाने की प्रक्रिया में मुद्रा की मात्रा कम करने के बारे में निर्णय करेगी, वित्त मंत्री ने कहा, 'इस बारे में रिजर्व बैंक को फैसला करना है और वे निश्चित तौर बाजार की जरूरतों से निर्देशित होंगे'. उन्होंने कहा, 'लेकिन जहां तक सरकार का संबंध है निश्चित तौर पर कागजी मुद्रा कम होनी चाहिए और व्यापार का बड़ा हिस्सा वैकल्पिक डिजिटल और चैक के जरिए होना चाहिए. डिजिटल माध्यमों का उपयोग करने वालों की बढ़ती संख्या को देखते हुए ऐसा लगता है कि हम सही दिशा में बढ़ रहे हैं'.(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) जब उनसे यह पूछा गया कि क्या सरकार नए नोटों को चलन में लाने की प्रक्रिया में मुद्रा की मात्रा कम करने के बारे में निर्णय करेगी, वित्त मंत्री ने कहा, 'इस बारे में रिजर्व बैंक को फैसला करना है और वे निश्चित तौर बाजार की जरूरतों से निर्देशित होंगे'. उन्होंने कहा, 'लेकिन जहां तक सरकार का संबंध है निश्चित तौर पर कागजी मुद्रा कम होनी चाहिए और व्यापार का बड़ा हिस्सा वैकल्पिक डिजिटल और चैक के जरिए होना चाहिए. डिजिटल माध्यमों का उपयोग करने वालों की बढ़ती संख्या को देखते हुए ऐसा लगता है कि हम सही दिशा में बढ़ रहे हैं'.(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: महत्वपूर्ण बात यह है कि नोटबंदी को लेकर कहीं कोई उपद्रव नहीं हुआ- जेटली विभिन्न प्रकार की आर्थिक गतिविधियों में तीव्र वृद्धि हुई है- वित्‍त मंत्र नए नोटों को चलन में डालने के काम में बहुत प्रगति हो चुकी है- अरुण जेटली
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['hin']
एक सारांश बनाओ: गुजरात में 13 जनवरी 2003 को हुए एक अन्य एनकाउंटर को सीबीआई कथित रूप से अपनी जांच में फर्जी बता रही है। सूत्र बता रहे हैं कि सीबीआई जांच में यह बात सामने आ रही है कि इस मामले में पुलिस ने न केवल फर्जी एनकाउंटर किया बल्कि आईबी ने भी पुलिस की इस साजिश में उसका साथ दिया। सीबीआई ने अपनी जांच में छह आईबी के अधिकारियों से पूछताछ की है। और अब सीबीआई कह रही है कि पूछताछ में कुछ अलग ही कहानी निकलकर सामने आ रही है। सीबीआई के सूत्रों के अनुसार सादिक के बारे में आईबी को तीन जगहों से रिपोर्ट मिली थी। पहली रिपोर्ट मुंबई के गुरुराज सावदत्ती स्टेशन से अक्टूबर 2002 में आई, इसके बाद दूसरी रिपोर्ट आईबी मुख्यालय से उसी वर्ष 24 नवंबर को मिली और फिर अंतिम रिपोर्ट अहमदाबाद के आई विभाग से मिली जहां पर राजिंद्र कुमार तैनात थे। यह वही, राजिंद्र कुमाह हैं जिनपर इशरत जहां फर्जी एनकाउंटर मामले में उंगली उठ रही हैं। सीबीआई की वर्तमान जांच रिपोर्ट कहती है कि सादिक के बारे में आईबी की रिपोर्ट के चरित्र से मेल नहीं खाती। सादिक के गृहनगर भावनगर में 1996 में एक झगड़े का मामला दर्ज है और दूसरा नवंबर 2002 में जुएं के मामला दर्ज हुआ था। इस मामले में उसे जमानत मिल गई थी। आईबी की तमाम रिपोर्टों के बाद मुंबई पुलिस ने 19 दिसंबर 2002 को हिरासत में लिया और आईबी ने एक हफ्ते तक उससे पूछताछ की। मुंबई विभाग के आईबी प्रमुख अबंड़ी गोपीनाथन सीबीआई को बताया है कि सादिक से पूछताछ में उन्हें कुछ भी खास नहीं मिला। 'पूछताछ में मुंबई के आईबी विभाग ने पाया कि सादिक के बारे में जो भी प्रारंभिक सूचना (वीवीआईपी पर हमले के संबंध में) थी सत्यापित नहीं हो रही थी'। सूत्रों के अनुसार गोपीनाथन ने सीबीआई को बताया कि सादिक को क्लीनचिट की दिल्ली में आईबी मुख्यालय को भेज दी गई थी। बावजूद इसके 3 जनवरी 2013 को सादिक को अहमदाबाद के काइम ब्रांच को सौंप दिया गया था। इसके बाद की कहानी और भी भ्रामक है। जबकि मुंबई आईबी से सादिक को क्लीनचिट दे दी गई थी और 6 जनवरी को गुजरात को सौंप दिया गया। वहीं, राजिंद्र कुमार ने एक रिपोर्ट में कहा कि सादिक को अभी पकड़ा नहीं गया है और उसे तलाशने के प्रयास जारी हैं। इसके बाद आईबी के पश्चिमी विभाग के विशेष निदेशक ने कहा कि उसे खोजने के प्रयास जारी रखे जाएं।टिप्पणियां वहीं, 13 जनवरी 2003 को सादिक के एनकाउंटर की खबर आई। पुलिस ने उस वक्त दावा किया था कि सादिक एक आतंकी है और वह मोदी के अलावा विश्व हिंदू परिषद के नेता प्रवीण भाई तोगड़िया की हत्या करना चाहता था। सादिक के भाई साबिर ने इस मामले में आईबी के तत्कालीन संयुक्त निदेशक राजिंद्र कुमार, राज्य के पूर्व गृहराज्य मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री मोदी की भूमिका की जांच की मांग की है जिसके बाद कोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। सीबीआई ने अपनी जांच में छह आईबी के अधिकारियों से पूछताछ की है। और अब सीबीआई कह रही है कि पूछताछ में कुछ अलग ही कहानी निकलकर सामने आ रही है। सीबीआई के सूत्रों के अनुसार सादिक के बारे में आईबी को तीन जगहों से रिपोर्ट मिली थी। पहली रिपोर्ट मुंबई के गुरुराज सावदत्ती स्टेशन से अक्टूबर 2002 में आई, इसके बाद दूसरी रिपोर्ट आईबी मुख्यालय से उसी वर्ष 24 नवंबर को मिली और फिर अंतिम रिपोर्ट अहमदाबाद के आई विभाग से मिली जहां पर राजिंद्र कुमार तैनात थे। यह वही, राजिंद्र कुमाह हैं जिनपर इशरत जहां फर्जी एनकाउंटर मामले में उंगली उठ रही हैं। सीबीआई की वर्तमान जांच रिपोर्ट कहती है कि सादिक के बारे में आईबी की रिपोर्ट के चरित्र से मेल नहीं खाती। सादिक के गृहनगर भावनगर में 1996 में एक झगड़े का मामला दर्ज है और दूसरा नवंबर 2002 में जुएं के मामला दर्ज हुआ था। इस मामले में उसे जमानत मिल गई थी। आईबी की तमाम रिपोर्टों के बाद मुंबई पुलिस ने 19 दिसंबर 2002 को हिरासत में लिया और आईबी ने एक हफ्ते तक उससे पूछताछ की। मुंबई विभाग के आईबी प्रमुख अबंड़ी गोपीनाथन सीबीआई को बताया है कि सादिक से पूछताछ में उन्हें कुछ भी खास नहीं मिला। 'पूछताछ में मुंबई के आईबी विभाग ने पाया कि सादिक के बारे में जो भी प्रारंभिक सूचना (वीवीआईपी पर हमले के संबंध में) थी सत्यापित नहीं हो रही थी'। सूत्रों के अनुसार गोपीनाथन ने सीबीआई को बताया कि सादिक को क्लीनचिट की दिल्ली में आईबी मुख्यालय को भेज दी गई थी। बावजूद इसके 3 जनवरी 2013 को सादिक को अहमदाबाद के काइम ब्रांच को सौंप दिया गया था। इसके बाद की कहानी और भी भ्रामक है। जबकि मुंबई आईबी से सादिक को क्लीनचिट दे दी गई थी और 6 जनवरी को गुजरात को सौंप दिया गया। वहीं, राजिंद्र कुमार ने एक रिपोर्ट में कहा कि सादिक को अभी पकड़ा नहीं गया है और उसे तलाशने के प्रयास जारी हैं। इसके बाद आईबी के पश्चिमी विभाग के विशेष निदेशक ने कहा कि उसे खोजने के प्रयास जारी रखे जाएं।टिप्पणियां वहीं, 13 जनवरी 2003 को सादिक के एनकाउंटर की खबर आई। पुलिस ने उस वक्त दावा किया था कि सादिक एक आतंकी है और वह मोदी के अलावा विश्व हिंदू परिषद के नेता प्रवीण भाई तोगड़िया की हत्या करना चाहता था। सादिक के भाई साबिर ने इस मामले में आईबी के तत्कालीन संयुक्त निदेशक राजिंद्र कुमार, राज्य के पूर्व गृहराज्य मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री मोदी की भूमिका की जांच की मांग की है जिसके बाद कोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। सीबीआई के सूत्रों के अनुसार सादिक के बारे में आईबी को तीन जगहों से रिपोर्ट मिली थी। पहली रिपोर्ट मुंबई के गुरुराज सावदत्ती स्टेशन से अक्टूबर 2002 में आई, इसके बाद दूसरी रिपोर्ट आईबी मुख्यालय से उसी वर्ष 24 नवंबर को मिली और फिर अंतिम रिपोर्ट अहमदाबाद के आई विभाग से मिली जहां पर राजिंद्र कुमार तैनात थे। यह वही, राजिंद्र कुमाह हैं जिनपर इशरत जहां फर्जी एनकाउंटर मामले में उंगली उठ रही हैं। सीबीआई की वर्तमान जांच रिपोर्ट कहती है कि सादिक के बारे में आईबी की रिपोर्ट के चरित्र से मेल नहीं खाती। सादिक के गृहनगर भावनगर में 1996 में एक झगड़े का मामला दर्ज है और दूसरा नवंबर 2002 में जुएं के मामला दर्ज हुआ था। इस मामले में उसे जमानत मिल गई थी। आईबी की तमाम रिपोर्टों के बाद मुंबई पुलिस ने 19 दिसंबर 2002 को हिरासत में लिया और आईबी ने एक हफ्ते तक उससे पूछताछ की। मुंबई विभाग के आईबी प्रमुख अबंड़ी गोपीनाथन सीबीआई को बताया है कि सादिक से पूछताछ में उन्हें कुछ भी खास नहीं मिला। 'पूछताछ में मुंबई के आईबी विभाग ने पाया कि सादिक के बारे में जो भी प्रारंभिक सूचना (वीवीआईपी पर हमले के संबंध में) थी सत्यापित नहीं हो रही थी'। सूत्रों के अनुसार गोपीनाथन ने सीबीआई को बताया कि सादिक को क्लीनचिट की दिल्ली में आईबी मुख्यालय को भेज दी गई थी। बावजूद इसके 3 जनवरी 2013 को सादिक को अहमदाबाद के काइम ब्रांच को सौंप दिया गया था। इसके बाद की कहानी और भी भ्रामक है। जबकि मुंबई आईबी से सादिक को क्लीनचिट दे दी गई थी और 6 जनवरी को गुजरात को सौंप दिया गया। वहीं, राजिंद्र कुमार ने एक रिपोर्ट में कहा कि सादिक को अभी पकड़ा नहीं गया है और उसे तलाशने के प्रयास जारी हैं। इसके बाद आईबी के पश्चिमी विभाग के विशेष निदेशक ने कहा कि उसे खोजने के प्रयास जारी रखे जाएं।टिप्पणियां वहीं, 13 जनवरी 2003 को सादिक के एनकाउंटर की खबर आई। पुलिस ने उस वक्त दावा किया था कि सादिक एक आतंकी है और वह मोदी के अलावा विश्व हिंदू परिषद के नेता प्रवीण भाई तोगड़िया की हत्या करना चाहता था। सादिक के भाई साबिर ने इस मामले में आईबी के तत्कालीन संयुक्त निदेशक राजिंद्र कुमार, राज्य के पूर्व गृहराज्य मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री मोदी की भूमिका की जांच की मांग की है जिसके बाद कोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। सीबीआई की वर्तमान जांच रिपोर्ट कहती है कि सादिक के बारे में आईबी की रिपोर्ट के चरित्र से मेल नहीं खाती। सादिक के गृहनगर भावनगर में 1996 में एक झगड़े का मामला दर्ज है और दूसरा नवंबर 2002 में जुएं के मामला दर्ज हुआ था। इस मामले में उसे जमानत मिल गई थी। आईबी की तमाम रिपोर्टों के बाद मुंबई पुलिस ने 19 दिसंबर 2002 को हिरासत में लिया और आईबी ने एक हफ्ते तक उससे पूछताछ की। मुंबई विभाग के आईबी प्रमुख अबंड़ी गोपीनाथन सीबीआई को बताया है कि सादिक से पूछताछ में उन्हें कुछ भी खास नहीं मिला। 'पूछताछ में मुंबई के आईबी विभाग ने पाया कि सादिक के बारे में जो भी प्रारंभिक सूचना (वीवीआईपी पर हमले के संबंध में) थी सत्यापित नहीं हो रही थी'। सूत्रों के अनुसार गोपीनाथन ने सीबीआई को बताया कि सादिक को क्लीनचिट की दिल्ली में आईबी मुख्यालय को भेज दी गई थी। बावजूद इसके 3 जनवरी 2013 को सादिक को अहमदाबाद के काइम ब्रांच को सौंप दिया गया था। इसके बाद की कहानी और भी भ्रामक है। जबकि मुंबई आईबी से सादिक को क्लीनचिट दे दी गई थी और 6 जनवरी को गुजरात को सौंप दिया गया। वहीं, राजिंद्र कुमार ने एक रिपोर्ट में कहा कि सादिक को अभी पकड़ा नहीं गया है और उसे तलाशने के प्रयास जारी हैं। इसके बाद आईबी के पश्चिमी विभाग के विशेष निदेशक ने कहा कि उसे खोजने के प्रयास जारी रखे जाएं।टिप्पणियां वहीं, 13 जनवरी 2003 को सादिक के एनकाउंटर की खबर आई। पुलिस ने उस वक्त दावा किया था कि सादिक एक आतंकी है और वह मोदी के अलावा विश्व हिंदू परिषद के नेता प्रवीण भाई तोगड़िया की हत्या करना चाहता था। सादिक के भाई साबिर ने इस मामले में आईबी के तत्कालीन संयुक्त निदेशक राजिंद्र कुमार, राज्य के पूर्व गृहराज्य मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री मोदी की भूमिका की जांच की मांग की है जिसके बाद कोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। आईबी की तमाम रिपोर्टों के बाद मुंबई पुलिस ने 19 दिसंबर 2002 को हिरासत में लिया और आईबी ने एक हफ्ते तक उससे पूछताछ की। मुंबई विभाग के आईबी प्रमुख अबंड़ी गोपीनाथन सीबीआई को बताया है कि सादिक से पूछताछ में उन्हें कुछ भी खास नहीं मिला। 'पूछताछ में मुंबई के आईबी विभाग ने पाया कि सादिक के बारे में जो भी प्रारंभिक सूचना (वीवीआईपी पर हमले के संबंध में) थी सत्यापित नहीं हो रही थी'। सूत्रों के अनुसार गोपीनाथन ने सीबीआई को बताया कि सादिक को क्लीनचिट की दिल्ली में आईबी मुख्यालय को भेज दी गई थी। बावजूद इसके 3 जनवरी 2013 को सादिक को अहमदाबाद के काइम ब्रांच को सौंप दिया गया था। इसके बाद की कहानी और भी भ्रामक है। जबकि मुंबई आईबी से सादिक को क्लीनचिट दे दी गई थी और 6 जनवरी को गुजरात को सौंप दिया गया। वहीं, राजिंद्र कुमार ने एक रिपोर्ट में कहा कि सादिक को अभी पकड़ा नहीं गया है और उसे तलाशने के प्रयास जारी हैं। इसके बाद आईबी के पश्चिमी विभाग के विशेष निदेशक ने कहा कि उसे खोजने के प्रयास जारी रखे जाएं।टिप्पणियां वहीं, 13 जनवरी 2003 को सादिक के एनकाउंटर की खबर आई। पुलिस ने उस वक्त दावा किया था कि सादिक एक आतंकी है और वह मोदी के अलावा विश्व हिंदू परिषद के नेता प्रवीण भाई तोगड़िया की हत्या करना चाहता था। सादिक के भाई साबिर ने इस मामले में आईबी के तत्कालीन संयुक्त निदेशक राजिंद्र कुमार, राज्य के पूर्व गृहराज्य मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री मोदी की भूमिका की जांच की मांग की है जिसके बाद कोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। सूत्रों के अनुसार गोपीनाथन ने सीबीआई को बताया कि सादिक को क्लीनचिट की दिल्ली में आईबी मुख्यालय को भेज दी गई थी। बावजूद इसके 3 जनवरी 2013 को सादिक को अहमदाबाद के काइम ब्रांच को सौंप दिया गया था। इसके बाद की कहानी और भी भ्रामक है। जबकि मुंबई आईबी से सादिक को क्लीनचिट दे दी गई थी और 6 जनवरी को गुजरात को सौंप दिया गया। वहीं, राजिंद्र कुमार ने एक रिपोर्ट में कहा कि सादिक को अभी पकड़ा नहीं गया है और उसे तलाशने के प्रयास जारी हैं। इसके बाद आईबी के पश्चिमी विभाग के विशेष निदेशक ने कहा कि उसे खोजने के प्रयास जारी रखे जाएं।टिप्पणियां वहीं, 13 जनवरी 2003 को सादिक के एनकाउंटर की खबर आई। पुलिस ने उस वक्त दावा किया था कि सादिक एक आतंकी है और वह मोदी के अलावा विश्व हिंदू परिषद के नेता प्रवीण भाई तोगड़िया की हत्या करना चाहता था। सादिक के भाई साबिर ने इस मामले में आईबी के तत्कालीन संयुक्त निदेशक राजिंद्र कुमार, राज्य के पूर्व गृहराज्य मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री मोदी की भूमिका की जांच की मांग की है जिसके बाद कोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। इसके बाद की कहानी और भी भ्रामक है। जबकि मुंबई आईबी से सादिक को क्लीनचिट दे दी गई थी और 6 जनवरी को गुजरात को सौंप दिया गया। वहीं, राजिंद्र कुमार ने एक रिपोर्ट में कहा कि सादिक को अभी पकड़ा नहीं गया है और उसे तलाशने के प्रयास जारी हैं। इसके बाद आईबी के पश्चिमी विभाग के विशेष निदेशक ने कहा कि उसे खोजने के प्रयास जारी रखे जाएं।टिप्पणियां वहीं, 13 जनवरी 2003 को सादिक के एनकाउंटर की खबर आई। पुलिस ने उस वक्त दावा किया था कि सादिक एक आतंकी है और वह मोदी के अलावा विश्व हिंदू परिषद के नेता प्रवीण भाई तोगड़िया की हत्या करना चाहता था। सादिक के भाई साबिर ने इस मामले में आईबी के तत्कालीन संयुक्त निदेशक राजिंद्र कुमार, राज्य के पूर्व गृहराज्य मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री मोदी की भूमिका की जांच की मांग की है जिसके बाद कोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। वहीं, 13 जनवरी 2003 को सादिक के एनकाउंटर की खबर आई। पुलिस ने उस वक्त दावा किया था कि सादिक एक आतंकी है और वह मोदी के अलावा विश्व हिंदू परिषद के नेता प्रवीण भाई तोगड़िया की हत्या करना चाहता था। सादिक के भाई साबिर ने इस मामले में आईबी के तत्कालीन संयुक्त निदेशक राजिंद्र कुमार, राज्य के पूर्व गृहराज्य मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री मोदी की भूमिका की जांच की मांग की है जिसके बाद कोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। पुलिस ने उस वक्त दावा किया था कि सादिक एक आतंकी है और वह मोदी के अलावा विश्व हिंदू परिषद के नेता प्रवीण भाई तोगड़िया की हत्या करना चाहता था। सादिक के भाई साबिर ने इस मामले में आईबी के तत्कालीन संयुक्त निदेशक राजिंद्र कुमार, राज्य के पूर्व गृहराज्य मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री मोदी की भूमिका की जांच की मांग की है जिसके बाद कोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी।
यह एक सारांश है: सीबीआई ने अपनी जांच में छह आईबी के अधिकारियों से पूछताछ की है। और अब सीबीआई कह रही है कि पूछताछ में कुछ अलग ही कहानी निकलकर सामने आ रही है।
21
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: पिछले कुछ दिनों से अलग-अलग मुद्दों को लेकर नकारात्मक प्रचार का सामना कर रहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आक्रामक रवैया अपनाते हुए शुक्रवार को कहा कि उनके खिलाफ चाहे कितना भी नकारात्मक प्रचार क्यों न किया जाए, जनता के लिए विकास करने के उनके लक्ष्य से उन्हें कोई नहीं रोक सकता। मीडिया के एक धड़े पर अपनी सरकार की नकारात्मक छवि पेश करने का आरोप लगाते हुए ममता ने कहा, "आपके (जनता के) लिए काम करने से ममता बनर्जी को कोई नहीं रोक सकता। वे लोग, जो झूठे और गलत अभियान के द्वारा हमारी सरकार की छवि धूमिल करने में लगे हैं, मैं उनके सामने यह बात साबित करके रहूंगी। इस तरह के नकरात्मक प्रचार का कोई फायदा उन लोगों को नहीं मिलने जा रहा।"टिप्पणियां दूसरी ओर, राज्य में अगले वर्ष होने वाले पंचायत चुनावों के लिए अल्पसंख्यकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि मुस्लिम ओबीसी को नौकरियों में आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए सर्वेक्षण का आदेश दिया गया है। उन्होंने बताया कि पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री उपेंद्रनाथ बिस्वास ने निर्देश दिए हैं कि इस सर्वेक्षण पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी और महीने भर के अंदर विधानसभा में यह कानून पारित किया जाएगा। इस बीच अहमदाबाद से मिली ख़बर के मुताबिक गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को 'टाइम' पत्रिका द्वारा सर्वाधिक प्रभावशाली 100 व्यक्तियों की सूची में शामिल किए जाने पर बधाई दी। मोदी ने माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर लिखा है, "पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को टाइम पत्रिका द्वारा दुनिया के सर्वाधिक प्रभावशाली 100 व्यक्तियों की सूची में शामिल किए जाने पर मैं बधाई देता हूं।" मीडिया के एक धड़े पर अपनी सरकार की नकारात्मक छवि पेश करने का आरोप लगाते हुए ममता ने कहा, "आपके (जनता के) लिए काम करने से ममता बनर्जी को कोई नहीं रोक सकता। वे लोग, जो झूठे और गलत अभियान के द्वारा हमारी सरकार की छवि धूमिल करने में लगे हैं, मैं उनके सामने यह बात साबित करके रहूंगी। इस तरह के नकरात्मक प्रचार का कोई फायदा उन लोगों को नहीं मिलने जा रहा।"टिप्पणियां दूसरी ओर, राज्य में अगले वर्ष होने वाले पंचायत चुनावों के लिए अल्पसंख्यकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि मुस्लिम ओबीसी को नौकरियों में आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए सर्वेक्षण का आदेश दिया गया है। उन्होंने बताया कि पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री उपेंद्रनाथ बिस्वास ने निर्देश दिए हैं कि इस सर्वेक्षण पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी और महीने भर के अंदर विधानसभा में यह कानून पारित किया जाएगा। इस बीच अहमदाबाद से मिली ख़बर के मुताबिक गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को 'टाइम' पत्रिका द्वारा सर्वाधिक प्रभावशाली 100 व्यक्तियों की सूची में शामिल किए जाने पर बधाई दी। मोदी ने माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर लिखा है, "पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को टाइम पत्रिका द्वारा दुनिया के सर्वाधिक प्रभावशाली 100 व्यक्तियों की सूची में शामिल किए जाने पर मैं बधाई देता हूं।" दूसरी ओर, राज्य में अगले वर्ष होने वाले पंचायत चुनावों के लिए अल्पसंख्यकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि मुस्लिम ओबीसी को नौकरियों में आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए सर्वेक्षण का आदेश दिया गया है। उन्होंने बताया कि पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री उपेंद्रनाथ बिस्वास ने निर्देश दिए हैं कि इस सर्वेक्षण पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी और महीने भर के अंदर विधानसभा में यह कानून पारित किया जाएगा। इस बीच अहमदाबाद से मिली ख़बर के मुताबिक गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को 'टाइम' पत्रिका द्वारा सर्वाधिक प्रभावशाली 100 व्यक्तियों की सूची में शामिल किए जाने पर बधाई दी। मोदी ने माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर लिखा है, "पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को टाइम पत्रिका द्वारा दुनिया के सर्वाधिक प्रभावशाली 100 व्यक्तियों की सूची में शामिल किए जाने पर मैं बधाई देता हूं।" इस बीच अहमदाबाद से मिली ख़बर के मुताबिक गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को 'टाइम' पत्रिका द्वारा सर्वाधिक प्रभावशाली 100 व्यक्तियों की सूची में शामिल किए जाने पर बधाई दी। मोदी ने माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर लिखा है, "पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को टाइम पत्रिका द्वारा दुनिया के सर्वाधिक प्रभावशाली 100 व्यक्तियों की सूची में शामिल किए जाने पर मैं बधाई देता हूं।"
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि मुस्लिम ओबीसी को नौकरियों में आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए सर्वेक्षण का आदेश दे दिया गया है।
3
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: जयपुर साहित्य समारोह में सलमान रुश्दी के शामिल होने या न होने पर ऊहापोह की स्थिति शुक्रवार को समाप्त हो गई, जब उन्होंने स्वयं आयोजकों को इसमें शामिल नहीं होने की लिखित जानकारी दी। रुश्दी ने अपने संदेश में कहा है कि अपनी जान को खतरे की आशंका के मद्देनजर उन्होंने जयपुर यात्रा रद्द की है। विवादास्पद पुस्तक 'सैटेनिक वर्सेस' के लेखक रुश्दी का संदेश शुक्रवार से शुरू हुए साहित्य समारोह में आयोजकों ने पढ़कर सुनाया, जिसमें उन्होंने लिखा है, "पिछले कई दिन से मैंने जयपुर प्रशासन के अनुरोध पर अपनी यात्रा को लेकर कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया। मुझे उम्मीद थी कि वे एहतियातन ऐसे आवश्यक उपाय करेंगे, जिससे मैं यात्रा कर सकूंगा और यहां सौहार्दपूर्ण एवं सुरक्षित माहौल में साहित्य प्रेमियों के बीच अपनी बात रख सकूंगा।" अपने संदेश में उन्होंने लिखा, "महाराष्ट्र और राजस्थान में खुफिया ब्यूरो के सूत्रों ने मुझे सूचित किया कि मुम्बई अंडरवर्ल्ड से कुछ लोग मुझे मारने के लिए आ रहे हैं, जिन्हें इस काम के लिए पैसे दिए गए हैं।" अपनी यात्रा को लेकर कुछ मुसलमान कट्टरपंथियों के विरोध पर निराशा जताते हुए रुश्दी ने कहा, "हालांकि मुझे इस खुफिया जानकारी की सच्चाई पर कुछ संदेह है, फिर भी ऐसी परिस्थिति में इस समारोह में शामिल होना मेरे, मेरे परिवार, समारोह के दर्शकों और सहयोगी लेखकों के लिए गैर-जिम्मेदाराना होगा। इसलिए मैं जयपुर की यात्रा नहीं करूंगा, जैसा कि पूर्व में निर्धारित था।" वर्ष 2007 के साहित्य समारोह में भाग ले चुके रुश्दी ने अपनी नाराजगी ट्विटर पर भी जाहिर की। उन्होंने लिखा, "जयपुर नहीं आना बेहद निराशाजनक है। मुझे बताया गया है कि मुम्बई के अंडरवर्ल्ड माफिया को मुझे मारने के लिए सुपारी दी गई है।"टिप्पणियां अपने प्रति समर्थन और सहानुभूति जताने वालों का उन्होंने धन्यवाद किया। उन्होंने अपने लेखन से लोगों को पहुंची भावनात्क ठेस के लिए खेद जताया और मुसलमानों द्वारा ट्विटर के विरोध को भी चिंताजनक बताया। रुश्दी की जयपुर यात्रा का मुसलमान शुरू से ही विरोध करते रहे हैं। देवबंद ने भी इस सम्बंध में अपना विरोध जताया था। शुक्रवार को भी मुसलमानों के एक दल ने समारोह स्थल के बाहर उनके विरोध की योजना बनाई थी, लेकिन उनके जयपुर नहीं आने की खबर के बाद इसे रद्द कर दिया गया। विवादास्पद पुस्तक 'सैटेनिक वर्सेस' के लेखक रुश्दी का संदेश शुक्रवार से शुरू हुए साहित्य समारोह में आयोजकों ने पढ़कर सुनाया, जिसमें उन्होंने लिखा है, "पिछले कई दिन से मैंने जयपुर प्रशासन के अनुरोध पर अपनी यात्रा को लेकर कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया। मुझे उम्मीद थी कि वे एहतियातन ऐसे आवश्यक उपाय करेंगे, जिससे मैं यात्रा कर सकूंगा और यहां सौहार्दपूर्ण एवं सुरक्षित माहौल में साहित्य प्रेमियों के बीच अपनी बात रख सकूंगा।" अपने संदेश में उन्होंने लिखा, "महाराष्ट्र और राजस्थान में खुफिया ब्यूरो के सूत्रों ने मुझे सूचित किया कि मुम्बई अंडरवर्ल्ड से कुछ लोग मुझे मारने के लिए आ रहे हैं, जिन्हें इस काम के लिए पैसे दिए गए हैं।" अपनी यात्रा को लेकर कुछ मुसलमान कट्टरपंथियों के विरोध पर निराशा जताते हुए रुश्दी ने कहा, "हालांकि मुझे इस खुफिया जानकारी की सच्चाई पर कुछ संदेह है, फिर भी ऐसी परिस्थिति में इस समारोह में शामिल होना मेरे, मेरे परिवार, समारोह के दर्शकों और सहयोगी लेखकों के लिए गैर-जिम्मेदाराना होगा। इसलिए मैं जयपुर की यात्रा नहीं करूंगा, जैसा कि पूर्व में निर्धारित था।" वर्ष 2007 के साहित्य समारोह में भाग ले चुके रुश्दी ने अपनी नाराजगी ट्विटर पर भी जाहिर की। उन्होंने लिखा, "जयपुर नहीं आना बेहद निराशाजनक है। मुझे बताया गया है कि मुम्बई के अंडरवर्ल्ड माफिया को मुझे मारने के लिए सुपारी दी गई है।"टिप्पणियां अपने प्रति समर्थन और सहानुभूति जताने वालों का उन्होंने धन्यवाद किया। उन्होंने अपने लेखन से लोगों को पहुंची भावनात्क ठेस के लिए खेद जताया और मुसलमानों द्वारा ट्विटर के विरोध को भी चिंताजनक बताया। रुश्दी की जयपुर यात्रा का मुसलमान शुरू से ही विरोध करते रहे हैं। देवबंद ने भी इस सम्बंध में अपना विरोध जताया था। शुक्रवार को भी मुसलमानों के एक दल ने समारोह स्थल के बाहर उनके विरोध की योजना बनाई थी, लेकिन उनके जयपुर नहीं आने की खबर के बाद इसे रद्द कर दिया गया। अपने संदेश में उन्होंने लिखा, "महाराष्ट्र और राजस्थान में खुफिया ब्यूरो के सूत्रों ने मुझे सूचित किया कि मुम्बई अंडरवर्ल्ड से कुछ लोग मुझे मारने के लिए आ रहे हैं, जिन्हें इस काम के लिए पैसे दिए गए हैं।" अपनी यात्रा को लेकर कुछ मुसलमान कट्टरपंथियों के विरोध पर निराशा जताते हुए रुश्दी ने कहा, "हालांकि मुझे इस खुफिया जानकारी की सच्चाई पर कुछ संदेह है, फिर भी ऐसी परिस्थिति में इस समारोह में शामिल होना मेरे, मेरे परिवार, समारोह के दर्शकों और सहयोगी लेखकों के लिए गैर-जिम्मेदाराना होगा। इसलिए मैं जयपुर की यात्रा नहीं करूंगा, जैसा कि पूर्व में निर्धारित था।" वर्ष 2007 के साहित्य समारोह में भाग ले चुके रुश्दी ने अपनी नाराजगी ट्विटर पर भी जाहिर की। उन्होंने लिखा, "जयपुर नहीं आना बेहद निराशाजनक है। मुझे बताया गया है कि मुम्बई के अंडरवर्ल्ड माफिया को मुझे मारने के लिए सुपारी दी गई है।"टिप्पणियां अपने प्रति समर्थन और सहानुभूति जताने वालों का उन्होंने धन्यवाद किया। उन्होंने अपने लेखन से लोगों को पहुंची भावनात्क ठेस के लिए खेद जताया और मुसलमानों द्वारा ट्विटर के विरोध को भी चिंताजनक बताया। रुश्दी की जयपुर यात्रा का मुसलमान शुरू से ही विरोध करते रहे हैं। देवबंद ने भी इस सम्बंध में अपना विरोध जताया था। शुक्रवार को भी मुसलमानों के एक दल ने समारोह स्थल के बाहर उनके विरोध की योजना बनाई थी, लेकिन उनके जयपुर नहीं आने की खबर के बाद इसे रद्द कर दिया गया। अपनी यात्रा को लेकर कुछ मुसलमान कट्टरपंथियों के विरोध पर निराशा जताते हुए रुश्दी ने कहा, "हालांकि मुझे इस खुफिया जानकारी की सच्चाई पर कुछ संदेह है, फिर भी ऐसी परिस्थिति में इस समारोह में शामिल होना मेरे, मेरे परिवार, समारोह के दर्शकों और सहयोगी लेखकों के लिए गैर-जिम्मेदाराना होगा। इसलिए मैं जयपुर की यात्रा नहीं करूंगा, जैसा कि पूर्व में निर्धारित था।" वर्ष 2007 के साहित्य समारोह में भाग ले चुके रुश्दी ने अपनी नाराजगी ट्विटर पर भी जाहिर की। उन्होंने लिखा, "जयपुर नहीं आना बेहद निराशाजनक है। मुझे बताया गया है कि मुम्बई के अंडरवर्ल्ड माफिया को मुझे मारने के लिए सुपारी दी गई है।"टिप्पणियां अपने प्रति समर्थन और सहानुभूति जताने वालों का उन्होंने धन्यवाद किया। उन्होंने अपने लेखन से लोगों को पहुंची भावनात्क ठेस के लिए खेद जताया और मुसलमानों द्वारा ट्विटर के विरोध को भी चिंताजनक बताया। रुश्दी की जयपुर यात्रा का मुसलमान शुरू से ही विरोध करते रहे हैं। देवबंद ने भी इस सम्बंध में अपना विरोध जताया था। शुक्रवार को भी मुसलमानों के एक दल ने समारोह स्थल के बाहर उनके विरोध की योजना बनाई थी, लेकिन उनके जयपुर नहीं आने की खबर के बाद इसे रद्द कर दिया गया। वर्ष 2007 के साहित्य समारोह में भाग ले चुके रुश्दी ने अपनी नाराजगी ट्विटर पर भी जाहिर की। उन्होंने लिखा, "जयपुर नहीं आना बेहद निराशाजनक है। मुझे बताया गया है कि मुम्बई के अंडरवर्ल्ड माफिया को मुझे मारने के लिए सुपारी दी गई है।"टिप्पणियां अपने प्रति समर्थन और सहानुभूति जताने वालों का उन्होंने धन्यवाद किया। उन्होंने अपने लेखन से लोगों को पहुंची भावनात्क ठेस के लिए खेद जताया और मुसलमानों द्वारा ट्विटर के विरोध को भी चिंताजनक बताया। रुश्दी की जयपुर यात्रा का मुसलमान शुरू से ही विरोध करते रहे हैं। देवबंद ने भी इस सम्बंध में अपना विरोध जताया था। शुक्रवार को भी मुसलमानों के एक दल ने समारोह स्थल के बाहर उनके विरोध की योजना बनाई थी, लेकिन उनके जयपुर नहीं आने की खबर के बाद इसे रद्द कर दिया गया। अपने प्रति समर्थन और सहानुभूति जताने वालों का उन्होंने धन्यवाद किया। उन्होंने अपने लेखन से लोगों को पहुंची भावनात्क ठेस के लिए खेद जताया और मुसलमानों द्वारा ट्विटर के विरोध को भी चिंताजनक बताया। रुश्दी की जयपुर यात्रा का मुसलमान शुरू से ही विरोध करते रहे हैं। देवबंद ने भी इस सम्बंध में अपना विरोध जताया था। शुक्रवार को भी मुसलमानों के एक दल ने समारोह स्थल के बाहर उनके विरोध की योजना बनाई थी, लेकिन उनके जयपुर नहीं आने की खबर के बाद इसे रद्द कर दिया गया। रुश्दी की जयपुर यात्रा का मुसलमान शुरू से ही विरोध करते रहे हैं। देवबंद ने भी इस सम्बंध में अपना विरोध जताया था। शुक्रवार को भी मुसलमानों के एक दल ने समारोह स्थल के बाहर उनके विरोध की योजना बनाई थी, लेकिन उनके जयपुर नहीं आने की खबर के बाद इसे रद्द कर दिया गया।
संक्षिप्त सारांश: जयपुर साहित्य समारोह में सलमान रुश्दी के शामिल होने या न होने पर ऊहापोह की स्थिति समाप्त हो गई, जब उन्होंने स्वयं आयोजकों को इसमें शामिल नहीं होने की लिखित जानकारी दी।
0
['hin']
एक सारांश बनाओ: मध्य प्रदेश के प्रवास के दौरान योग गुरु बाबा रामदेव और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बीच हुई मुलाकात पर चुटकी लेते हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह ने इसे ठग और पप्पू की मुलाकात करार दिया है। राज्य के प्रवास पर आए दिग्विजय ने रविवार को कहा कि उन्होंने आज अखबारों में रामदेव व शिवराज की तस्वीर देखी है। रामदेव की विश्वसनीयता नहीं रही है, ठगी साबित हो चुकी है, उनका तथा उनके साथी बालकृष्ण का पासपोर्ट फर्जी निकला है। वहीं, शिवराज को रामदेव का प्रमाण-पत्र हासिल करने की जरूरत पड़ गई है। मुझे तो तब बड़ी खुशी हुई, जब मैंने एक ठग रामदेव और शिवराज पप्पू की तस्वीर देखी है। पिछले दिनों किए गए ट्वीट पर भी दिग्विजय सिंह ने सफाई दी। उनका कहना है कि उन्होंने ट्वीट किया था कि बच्चा बच्चा राम का, राघवजी के काम का। जिन लोगों के दिमाग में फितूर होता है, उसे गलत काम से जोड़ने वाले हैं। उन्होंने कहा कि भगवान राघवजी (राम) उनके आराध्य हैं। राघौगढ़ का रहने वाला हूं, घर में राम का मंदिर है, जहां चार बार पूजा होती है। टिप्पणियां कांग्रेस विधायक चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी के भाजपा में शामिल होने पर सिंह ने कहा कि चौधरी की रात को एक बजे किससे कहां मुलाकात हुई, इसकी कांग्रेस जांच करा रही है। यहां बता दें कि शनिवार को बाबा रामदेव और मुख्यमंत्री चौहान की मुलाकात हुई थी। इस मौके पर रामदेव ने चौहान की जमकर तारीफ की थी और कहा था कि करोड़ों लोगों में से एक चौहान जैसा व्यक्ति हेाता है। वहीं उन्होंने कहा था कि सोशल मीडिया पर राहुल गांधी को पप्पू कहा जाता है। राज्य के प्रवास पर आए दिग्विजय ने रविवार को कहा कि उन्होंने आज अखबारों में रामदेव व शिवराज की तस्वीर देखी है। रामदेव की विश्वसनीयता नहीं रही है, ठगी साबित हो चुकी है, उनका तथा उनके साथी बालकृष्ण का पासपोर्ट फर्जी निकला है। वहीं, शिवराज को रामदेव का प्रमाण-पत्र हासिल करने की जरूरत पड़ गई है। मुझे तो तब बड़ी खुशी हुई, जब मैंने एक ठग रामदेव और शिवराज पप्पू की तस्वीर देखी है। पिछले दिनों किए गए ट्वीट पर भी दिग्विजय सिंह ने सफाई दी। उनका कहना है कि उन्होंने ट्वीट किया था कि बच्चा बच्चा राम का, राघवजी के काम का। जिन लोगों के दिमाग में फितूर होता है, उसे गलत काम से जोड़ने वाले हैं। उन्होंने कहा कि भगवान राघवजी (राम) उनके आराध्य हैं। राघौगढ़ का रहने वाला हूं, घर में राम का मंदिर है, जहां चार बार पूजा होती है। टिप्पणियां कांग्रेस विधायक चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी के भाजपा में शामिल होने पर सिंह ने कहा कि चौधरी की रात को एक बजे किससे कहां मुलाकात हुई, इसकी कांग्रेस जांच करा रही है। यहां बता दें कि शनिवार को बाबा रामदेव और मुख्यमंत्री चौहान की मुलाकात हुई थी। इस मौके पर रामदेव ने चौहान की जमकर तारीफ की थी और कहा था कि करोड़ों लोगों में से एक चौहान जैसा व्यक्ति हेाता है। वहीं उन्होंने कहा था कि सोशल मीडिया पर राहुल गांधी को पप्पू कहा जाता है। पिछले दिनों किए गए ट्वीट पर भी दिग्विजय सिंह ने सफाई दी। उनका कहना है कि उन्होंने ट्वीट किया था कि बच्चा बच्चा राम का, राघवजी के काम का। जिन लोगों के दिमाग में फितूर होता है, उसे गलत काम से जोड़ने वाले हैं। उन्होंने कहा कि भगवान राघवजी (राम) उनके आराध्य हैं। राघौगढ़ का रहने वाला हूं, घर में राम का मंदिर है, जहां चार बार पूजा होती है। टिप्पणियां कांग्रेस विधायक चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी के भाजपा में शामिल होने पर सिंह ने कहा कि चौधरी की रात को एक बजे किससे कहां मुलाकात हुई, इसकी कांग्रेस जांच करा रही है। यहां बता दें कि शनिवार को बाबा रामदेव और मुख्यमंत्री चौहान की मुलाकात हुई थी। इस मौके पर रामदेव ने चौहान की जमकर तारीफ की थी और कहा था कि करोड़ों लोगों में से एक चौहान जैसा व्यक्ति हेाता है। वहीं उन्होंने कहा था कि सोशल मीडिया पर राहुल गांधी को पप्पू कहा जाता है। कांग्रेस विधायक चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी के भाजपा में शामिल होने पर सिंह ने कहा कि चौधरी की रात को एक बजे किससे कहां मुलाकात हुई, इसकी कांग्रेस जांच करा रही है। यहां बता दें कि शनिवार को बाबा रामदेव और मुख्यमंत्री चौहान की मुलाकात हुई थी। इस मौके पर रामदेव ने चौहान की जमकर तारीफ की थी और कहा था कि करोड़ों लोगों में से एक चौहान जैसा व्यक्ति हेाता है। वहीं उन्होंने कहा था कि सोशल मीडिया पर राहुल गांधी को पप्पू कहा जाता है। यहां बता दें कि शनिवार को बाबा रामदेव और मुख्यमंत्री चौहान की मुलाकात हुई थी। इस मौके पर रामदेव ने चौहान की जमकर तारीफ की थी और कहा था कि करोड़ों लोगों में से एक चौहान जैसा व्यक्ति हेाता है। वहीं उन्होंने कहा था कि सोशल मीडिया पर राहुल गांधी को पप्पू कहा जाता है।
संक्षिप्त पाठ: मध्य प्रदेश के प्रवास के दौरान योग गुरु बाबा रामदेव और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बीच हुई मुलाकात पर चुटकी लेते हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह ने इसे ठग और पप्पू की मुलाकात करार दिया है।
30
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: देश के शेयर बाजारों में मंगलवार को तेजी का रुख देखा गया। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 84.38 अंकों की तेजी के साथ 18,793.36 पर और निफ्टी 28.60 अंकों की तेजी के साथ 5,704.60 पर बंद हुआ। बम्बई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स सुबह 87.27 अंकों की तेजी के साथ 18,796.25 पर खुला और 84.38 अंकों या 0.45 फीसदी तेजी के साथ 18,793.36 पर बंद हुआ। सेंसेक्स ने 18,885.84 के ऊपरी और 18,722.05 के निचले स्तर को छुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक निफ्टी सुबह 32.15 अंकों की तेजी के साथ 5,708.15 पर खुला और 28.60 अंकों या 0.50 फीसदी तेजी के साथ 5,704.60 पर बंद हुआ।टिप्पणियां बीएसई के मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी तेजी रही। मिडकैप 31.42 अंकों की तेजी के साथ 6,680.80 पर और स्मॉलकैप 23.31 अंकों की तेजी के साथ 7,157.38 पर बंद हुआ। बीएसई के 13 में से 10 सेक्टरों में तेजी रही। गिरावट वाले तीन सेक्टरों में रहे तेल एवं गैस (0.45 फीसदी), बिजली (0.08 फीसदी) और वाहन (0.04 फीसदी)। बम्बई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स सुबह 87.27 अंकों की तेजी के साथ 18,796.25 पर खुला और 84.38 अंकों या 0.45 फीसदी तेजी के साथ 18,793.36 पर बंद हुआ। सेंसेक्स ने 18,885.84 के ऊपरी और 18,722.05 के निचले स्तर को छुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक निफ्टी सुबह 32.15 अंकों की तेजी के साथ 5,708.15 पर खुला और 28.60 अंकों या 0.50 फीसदी तेजी के साथ 5,704.60 पर बंद हुआ।टिप्पणियां बीएसई के मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी तेजी रही। मिडकैप 31.42 अंकों की तेजी के साथ 6,680.80 पर और स्मॉलकैप 23.31 अंकों की तेजी के साथ 7,157.38 पर बंद हुआ। बीएसई के 13 में से 10 सेक्टरों में तेजी रही। गिरावट वाले तीन सेक्टरों में रहे तेल एवं गैस (0.45 फीसदी), बिजली (0.08 फीसदी) और वाहन (0.04 फीसदी)। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक निफ्टी सुबह 32.15 अंकों की तेजी के साथ 5,708.15 पर खुला और 28.60 अंकों या 0.50 फीसदी तेजी के साथ 5,704.60 पर बंद हुआ।टिप्पणियां बीएसई के मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी तेजी रही। मिडकैप 31.42 अंकों की तेजी के साथ 6,680.80 पर और स्मॉलकैप 23.31 अंकों की तेजी के साथ 7,157.38 पर बंद हुआ। बीएसई के 13 में से 10 सेक्टरों में तेजी रही। गिरावट वाले तीन सेक्टरों में रहे तेल एवं गैस (0.45 फीसदी), बिजली (0.08 फीसदी) और वाहन (0.04 फीसदी)। बीएसई के मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी तेजी रही। मिडकैप 31.42 अंकों की तेजी के साथ 6,680.80 पर और स्मॉलकैप 23.31 अंकों की तेजी के साथ 7,157.38 पर बंद हुआ। बीएसई के 13 में से 10 सेक्टरों में तेजी रही। गिरावट वाले तीन सेक्टरों में रहे तेल एवं गैस (0.45 फीसदी), बिजली (0.08 फीसदी) और वाहन (0.04 फीसदी)। बीएसई के 13 में से 10 सेक्टरों में तेजी रही। गिरावट वाले तीन सेक्टरों में रहे तेल एवं गैस (0.45 फीसदी), बिजली (0.08 फीसदी) और वाहन (0.04 फीसदी)।
संक्षिप्त पाठ: देश के शेयर बाजारों में मंगलवार को तेजी का रुख देखा गया। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 84.38 अंकों की तेजी के साथ 18,793.36 पर और निफ्टी 28.60 अंकों की तेजी के साथ 5,704.60 पर बंद हुआ।
14
['hin']
एक सारांश बनाओ: टी-20 का सबसे विस्फोटक बल्लेबाज क्रिस गेल और इस फॉर्मैट का सबसे कामयाब गेंदबाज सुनील नरेन अगर किसी टीम में हों, तो उनकी ताकत अपने आप दोगुनी हो जाती है। लेकिन वेस्ट इंडीज को इस बार बेहद खास बना रहे हैं ड्वैन ब्रावो, किरॉन पोलार्ड, आन्द्रे रसल जैसे ऑलराउंडर खिलाड़ी। ऑलराउंडरों की इस तिकड़ी के चलते वेस्ट इंडीज की टीम शायद पूरे विश्वकप में सबसे संतुलित नजर आ रही है और दशकों के बाद ऐसा हुआ है कि किसी भी विश्वकप में वेस्ट इंडीज को एक बड़ा दावेदार समझा जा रहा है। ये तीनों खिलाड़ी अलग-अलग देशों की टी-20 लीग में खेलते हैं, लेकिन अनुभव और हुनर का इनमें गजब का मिश्रण है। पोलार्ड के लंबे छक्के हों या फिर आन्द्रे रसल का कभी न हार मानने की जज्बा या आखिरी ओवरों में बल्ले और गेंद के साथ ब्रावो का कमाल, इस बार ये खिलाड़ी विश्वकप को कैरेबियाई रंग में रंगने के लिए तैयार हैं। ये तीनों खिलाड़ी अलग-अलग देशों की टी-20 लीग में खेलते हैं, लेकिन अनुभव और हुनर का इनमें गजब का मिश्रण है। पोलार्ड के लंबे छक्के हों या फिर आन्द्रे रसल का कभी न हार मानने की जज्बा या आखिरी ओवरों में बल्ले और गेंद के साथ ब्रावो का कमाल, इस बार ये खिलाड़ी विश्वकप को कैरेबियाई रंग में रंगने के लिए तैयार हैं।
संक्षिप्त पाठ: भारत की बल्लेबाजी का दम हर कोई जानता है, तो पाकिस्तान की गेंदबाजी का जवाब नहीं और वेस्ट इंडीज के पास है दुनिया का सबसे खतरनाक ऑलराउंडर...
30
['hin']
एक सारांश बनाओ: अभिनेत्री मनीषा कोइराला इलाज के लिए जल्द ही अमेरिका जाएंगी। वह पिछले कुछ दिन से बीमार हैं। तबीयत खराब होने के कारण मनीषा पिछले दिनों  मुंबई के जसलोक अस्पताल में तीन के लिए भर्ती हुई थी, जहां से उन्हें छुट्टी दे दी गई है।टिप्पणियां अस्पताल के एक सूत्र के मुताबिक, उनकी हालत ठीक है। आगे इलाज के लिए वह परिवार के साथ अमेरिका जा रही हैं और जल्द ही अच्छी हो जाएंगी। मरीज के निजता के अधिकार का हवाला देते हुए सूत्र ने अधिक जानकारी देने से इनकार कर दिया। 28 नवम्बर को अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया था। अस्पताल के एक सूत्र के मुताबिक, उनकी हालत ठीक है। आगे इलाज के लिए वह परिवार के साथ अमेरिका जा रही हैं और जल्द ही अच्छी हो जाएंगी। मरीज के निजता के अधिकार का हवाला देते हुए सूत्र ने अधिक जानकारी देने से इनकार कर दिया। 28 नवम्बर को अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया था। मरीज के निजता के अधिकार का हवाला देते हुए सूत्र ने अधिक जानकारी देने से इनकार कर दिया। 28 नवम्बर को अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया था।
यहाँ एक सारांश है:अभिनेत्री मनीषा कोइराला इलाज के लिए जल्द ही अमेरिका जाएंगी। तबीयत खराब होने के कारण मनीषा पिछले दिनों मुंबई के जसलोक अस्पताल में भर्ती हुई थी, जहां से उन्हें छुट्टी दे दी गई है।
15
['hin']
एक सारांश बनाओ: दिल्ली सरकार सोमवार से राजधानी में 12 दिन तक वाहनों को सम-विषम (Odd Even) के आधार पर चलाने की योजना के लिए तैयार है और इसके लिए 2000 अतिरिक्त बसें लगाई गयी हैं. यात्रियों की सुविधा के लिए मेट्रो भी 61 अतिरिक्त फेरे लगाएगी. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा (Odd Even) बैठक की. उन्होंने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि सम-विषम (Odd Even) योजना के तहत किसी को असुविधा नहीं हो. सरकार के अनुसार ओला, उबर जैसी कैब कंपनियों को परामर्श जारी किये गये हैं कि योजना के दौरान दामों में इजाफा नहीं किया जाए. ऑटो और ई-रिक्शा चालकों से भी अतिरिक्त किराया नहीं वसूलने को कहा गया है. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को स्वीकार किया कि इस योजना के दौरान स्कूली बच्चों को लेकर जाने वाले वाहनों को लेकर थोड़ी भ्रम की स्थिति है. हालांकि विश्वास के आधार पर ऐसे वाहनों को चलने की इजाजत होगी। ऐसा ही रोगियों को लेकर जा रहे वाहनों के मामले में होगा. स्कूली बच्चों के वाहनों के मुद्दे के अलावा विशेषज्ञों और कुछ दिल्लीवासियों ने सार्वजनिक परिवहन प्रणाली की खराब हालत, सीएनजी वाहनों पर प्रतिबंध तथा दो पहिया वाहनों को दी गयी छूट को लेकर सरकार की आलोचना की. केजरीवाल ने योजना की अधिसूचना जारी करने के दौरान संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘स्कूली बच्चों के वाहनों को लेकर थोड़ी भ्रम की स्थिति है. स्कूल सुबह 8 बजे से पहले खुलते हैं और हमारा मानना है कि अभिभावक सुबह आठ बजे से पहले लौट सकते हैं. अगर वे बच्चों को लेने दोपहर में जाते हैं तो हम उन्हें विश्वास के आधार पर अनुमति देंगे. ऐसा ही रोगियों को लेकर जा रहे वाहनों के मामले में होगा.'' हालांकि कुछ अभिभावकों ने विश्वास आधारित व्यवस्था को लेकर आशंका जताई. एक महिला ने इस संबंध में कहा कि इस मामले में अधिक स्पष्टता होनी चाहिए. यातायात पुलिसकर्मी को कैसे पता चलेगा कि आप अभिभावक हैं और बच्चे को स्कूल छोड़कर लौट रहे हैं.
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: ऑड ईवन के लिए तैयार है दिल्ली 2000 अतिरिक्त बसें तैनात मेट्रो 61 अतिरिक्त फेरे लगाएगी
32
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: फिल्म निर्माता-निर्देशक राकेश रोशन ने घोषणा की है कि उनकी फिल्म 'क्रिश 3' का प्रदर्शन 3 नवंबर को दीवाली के अवसर पर होगा। ज्ञात हो कि यह फिल्म वर्ष 2003 में राकेश रोशन के निर्देशन में बनी 'कोई मिल गया' का तीसरा संस्करण है। इससे पहले इसका दूसरा संस्करण फिल्म 'क्रिश' के रूप में वर्ष 2006 में रिलीज़ हुआ था।टिप्पणियां राकेश रोशन ने पुष्टि करते हुए कहा, "3 नवंबर एक शुभ दिन है। लिहाजा, हम अपनी फिल्म 'क्रिश 3' को इसी दिन प्रदर्शित करेंगे।" रोशन द्वारा निर्देशित फिल्म 'क्रिश 3' में सुपर हीरो का किरदार उनके अभिनेता बेटे ऋतिक रोशन निभा रहे हैं। उनके अलावा फिल्म में अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा, कंगना रानावत और विवेक ओबेरॉय भी अभिनय कर रहे हैं। ज्ञात हो कि यह फिल्म वर्ष 2003 में राकेश रोशन के निर्देशन में बनी 'कोई मिल गया' का तीसरा संस्करण है। इससे पहले इसका दूसरा संस्करण फिल्म 'क्रिश' के रूप में वर्ष 2006 में रिलीज़ हुआ था।टिप्पणियां राकेश रोशन ने पुष्टि करते हुए कहा, "3 नवंबर एक शुभ दिन है। लिहाजा, हम अपनी फिल्म 'क्रिश 3' को इसी दिन प्रदर्शित करेंगे।" रोशन द्वारा निर्देशित फिल्म 'क्रिश 3' में सुपर हीरो का किरदार उनके अभिनेता बेटे ऋतिक रोशन निभा रहे हैं। उनके अलावा फिल्म में अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा, कंगना रानावत और विवेक ओबेरॉय भी अभिनय कर रहे हैं। राकेश रोशन ने पुष्टि करते हुए कहा, "3 नवंबर एक शुभ दिन है। लिहाजा, हम अपनी फिल्म 'क्रिश 3' को इसी दिन प्रदर्शित करेंगे।" रोशन द्वारा निर्देशित फिल्म 'क्रिश 3' में सुपर हीरो का किरदार उनके अभिनेता बेटे ऋतिक रोशन निभा रहे हैं। उनके अलावा फिल्म में अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा, कंगना रानावत और विवेक ओबेरॉय भी अभिनय कर रहे हैं। रोशन द्वारा निर्देशित फिल्म 'क्रिश 3' में सुपर हीरो का किरदार उनके अभिनेता बेटे ऋतिक रोशन निभा रहे हैं। उनके अलावा फिल्म में अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा, कंगना रानावत और विवेक ओबेरॉय भी अभिनय कर रहे हैं।
सारांश: फिल्म निर्माता-निर्देशक राकेश रोशन ने घोषणा की है कि उनकी फिल्म 'क्रिश 3' का प्रदर्शन 3 नवंबर को दीवाली के अवसर पर होगा।
7
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: भारत की सर्वोच्च वरीयता प्राप्त महिला बैडमिंटन खिलाड़ी सायना नेहवाल ने रविवार को शानदार प्रदर्शन करते हुए स्विस ओपन बैडमिंटन टूर्नामेंट का महिलाओं का एकल खिताब अपने नाम कर लिया है। सायना ने लगातार दूसरे साल यह खिताब जीता है। टूर्नामेंट की तीसरी और विश्व की चौथी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी सायना ने रविवार को खेले गए फाइनल में दूसरी वरीयता प्राप्त चीनी खिलाड़ी शिजियान वांग को 21-19, 21-16 से हराया। सायना ने यह मैच 48 मिनट में अपने नाम किया।टिप्पणियां सायना और शिजियान के बीच तीसरी भिड़ंत थी, जिसमें सायना ने दो मौकों पर जीत हासिल की है। शिजियान ने 2010 वर्ल्ड चैम्पियनशिप के दौरान सायना को हराया था जबकि सायना इससे पहले 2010 हांगकांग ओपन सुपर सीरीज में हरा चुकी हैं। सायना ने सेमीफाइनल में जापान की मिनात्सू मितानी को 21-16, 21-18 से पराजित किया था। सायना ने पहले दौर के मुकाबले में जापान के सायाका सातो को जबकि दूसरे दौर में नीदरलैंड्स की जूडिथ मेऊलेंडिजक्स को वहीं क्वार्टर फाइनल में चीन की जिन लियू को हराया था। टूर्नामेंट की तीसरी और विश्व की चौथी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी सायना ने रविवार को खेले गए फाइनल में दूसरी वरीयता प्राप्त चीनी खिलाड़ी शिजियान वांग को 21-19, 21-16 से हराया। सायना ने यह मैच 48 मिनट में अपने नाम किया।टिप्पणियां सायना और शिजियान के बीच तीसरी भिड़ंत थी, जिसमें सायना ने दो मौकों पर जीत हासिल की है। शिजियान ने 2010 वर्ल्ड चैम्पियनशिप के दौरान सायना को हराया था जबकि सायना इससे पहले 2010 हांगकांग ओपन सुपर सीरीज में हरा चुकी हैं। सायना ने सेमीफाइनल में जापान की मिनात्सू मितानी को 21-16, 21-18 से पराजित किया था। सायना ने पहले दौर के मुकाबले में जापान के सायाका सातो को जबकि दूसरे दौर में नीदरलैंड्स की जूडिथ मेऊलेंडिजक्स को वहीं क्वार्टर फाइनल में चीन की जिन लियू को हराया था। सायना और शिजियान के बीच तीसरी भिड़ंत थी, जिसमें सायना ने दो मौकों पर जीत हासिल की है। शिजियान ने 2010 वर्ल्ड चैम्पियनशिप के दौरान सायना को हराया था जबकि सायना इससे पहले 2010 हांगकांग ओपन सुपर सीरीज में हरा चुकी हैं। सायना ने सेमीफाइनल में जापान की मिनात्सू मितानी को 21-16, 21-18 से पराजित किया था। सायना ने पहले दौर के मुकाबले में जापान के सायाका सातो को जबकि दूसरे दौर में नीदरलैंड्स की जूडिथ मेऊलेंडिजक्स को वहीं क्वार्टर फाइनल में चीन की जिन लियू को हराया था। सायना ने सेमीफाइनल में जापान की मिनात्सू मितानी को 21-16, 21-18 से पराजित किया था। सायना ने पहले दौर के मुकाबले में जापान के सायाका सातो को जबकि दूसरे दौर में नीदरलैंड्स की जूडिथ मेऊलेंडिजक्स को वहीं क्वार्टर फाइनल में चीन की जिन लियू को हराया था।
यहाँ एक सारांश है:भारत की सर्वोच्च वरीयता प्राप्त महिला बैडमिंटन खिलाड़ी सायना नेहवाल ने रविवार को शानदार प्रदर्शन करते हुए स्विस ओपन बैडमिंटन टूर्नामेंट का महिलाओं का एकल खिताब अपने नाम कर लिया है।
17
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: सनी लियोन (Sunny Leone) और यो यो हनी सिंह (Yo Yo Honey Singh) ने ‘चार बोतल वोदका' सॉन्ग से जमकर गरदा उड़ाया था. सनी लियोन (Sunny Leone) और यो यो हनी सिंह की जोड़ी 'झूठा कहीं का (Jhootha Kahin Ka)' में फिर से जुगलबंदी करने जा रहे है और दोनों कमाल-धमाल करते देखा जा सकेगा. हनी सिंह (Honey Singh) और सनी लियोन (Sunny Leone) की जोड़ी म्यूजिक प्रेमियों को सरप्राइज देने के लिए तैयार हैं. हनी सिंह और सनी लियोन ने हाल ही में थाईलैंड में एक्टर सनी सिंह और ओंकार कपूर के साथ इस सॉन्ग की शूटिंग पूरी की है. सनी लियोन के म्यूजिक वीडियो ने कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर तहलका मचाया है. सनी लियोन (Sunny Leone) और यो यो हनी सिंह (Yo Yo Honey Singh) के इस सॉन्ग को पॉपुलर नर्सरी राइम 'मछली जल की रानी है'  से तैयार किया गया है. इस गाने में सनी लियोन जलपरी के अवतार में दिखेंगी, और यह ऐसा अवतार होगा जिसमें उन्हें पहले कभी नहीं देखा गया है. सनी बताती हैं, "यह कुछ ऐसा है जो मैंने पहले कभी नहीं किया है और मेरे फैन्स इस नए लुक को जरूर पसंद करेंगे, मैं भी बहुत बेसब्री से इस सॉन्ग का इंतजार कर रही हूं." सनी लियोन (Sunny Leone) बताती हैं, 'सनी और ओंकार के साथ शूटिंग करना बहुत ही मस्ती भरा अनुभव था. वे बहुत ही शानदार एक्टर हैं और हनी सिंह (Honey Singh) ने हमेशा की तरह शानदार काम किया है. हर किसी को इसे देखकर मजा आएगा.' बॉलीवुड फिल्म 'झूठा कहीं का' 15 मार्च को रिलीज होगी. फिल्म को समीप कांग ने डायरेक्ट किया है और इसमें ऋषि कपूर, सनी सिंह, ओंकार कपूर, जिम्मी शेरगिल और लिलेट दुबे.  इस तरह सनी लियोन और यो यो हनी सिंह की जोरदार जुगलबंदी फिर से देखने मिलेगी.
सारांश: हनी सिंह के साथ नजर आएंगी सनी लियोन नया धमाल करने जा रहे हैं दोनों 'झूठा कहीं का' फिल्म में दिखेगा सॉन्ग
33
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: देश में हर 4 मिनट में कोई एक अपनी जान दे देता है और ऐसा करने वाले तीन लोगों में से एक युवा होता है यानी देश में हर 12 मिनट में 30 वर्ष से कम आयु का एक युवा अपनी जान ले लेता है। ऐसा कहना है राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो का। हाल ही में आए दुर्घटनाओं और आत्महत्या के कारण मौतों पर वर्ष 2009 के रिकार्ड के मुताबिक 2009 में कुल 1,27,151 लोगों ने आत्महत्या की, जिनमें 68.7 प्रतिशत 15 से 44 वर्ष की उम्र वर्ग के थे। दिल्ली और अरुणाचल प्रदेश में आत्महत्या करने वालों में 55 प्रतिशत से ज्यादा 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के थे। दिल्ली में आत्महत्या करने वाले 110 में से 62 तथा अरुणाचल प्रदेश में आत्महत्या करने वाले 1,477 में से 817 इस उम्र वर्ग के थे। रिपोर्ट के मुताबिक, आत्महत्या करने वालों में 34.5 प्रतिशत की उम्र 15 से 29 साल के बीच थी, जबकि 34.2 प्रतिशत की उम्र 30 से 44 साल के बीच थी। इसके अनुसार, देश में रोज 223 पुरुष और 125 महिलाएं आत्महत्या करती हैं। इन महिलाओं में 69 घरेलू महिलाएं हैं। एक दिन में 73 लोग बीमारी के कारण और 10 लोग प्यार-मोहब्बत के चक्कर में आत्महत्या करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 2009 में आत्महत्या के मामलों में 1.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। 2008 में आत्महत्या के 1,22,902 मामले थे, जो वर्ष 2009 में बढ़कर 1,27,151 हो गए।2009 में देश में सबसे ज्यादा आत्महत्याएं पश्चिम बंगाल में हुईं। वहां एक साल में 14,648 लोगों ने अपनी जान ले ली। उसके बाद आंध्र प्रदेश का स्थान आता है, जहां 14,500 लोगों ने अपनी जान दे दी। फिर नंबर आता है तमिलनाडु (14,424), महाराष्ट्र (14,300) और कर्नाटक (12,195) का। इन पांच राज्यों में आत्महत्या करने वालों की कुल संख्या देश में आत्महत्या करने वालों की कुल संख्या का 55.1 प्रतिशत है। दक्षिण भारत के राज्यों आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल को मिलाकर देश में कुल आत्महत्या का 32.2 प्रतिशत इन्हीं राज्यों में होता है। 2009 में दिल्ली में 1,477 लोगों ने आत्महत्या की। वहीं उत्तर प्रदेश में आत्महत्या करने वालों की संख्या काफी कम रही। देश की 16.7 प्रतिशत जनसंख्या वाले राज्य में आत्महत्याओं का प्रतिशत केवल 3.3 रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 1999 के मुकाबले वर्ष 2009 में आत्महत्याओं की संख्या में 15 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 1999 में आत्महत्या करने वालों की संख्या 1,10,587 थी, जो वर्ष 2009 में बढ़कर 1,27,151 हो गई। आत्महत्या के कारणों में पारिवारिक परेशानियां और बीमारियां सबसे ऊपर हैं। देश में 23.7 प्रतिशत लोग पारिवारिक परेशानी और 21 प्रतिशत बीमारियों के कारण आत्महत्या करते हैं। प्यार-मोहब्बत के चक्कर में सिर्फ 2.9 प्रतिशत और दहेज झगड़ों, ड्रग्स और गरीबी के कारण 2.3 प्रतिशत लोग आत्महत्या करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पुरुष सामाजिक और आर्थिक परेशानियों के कारण तथा महिलाएं व्यक्तिगत और भावनात्मक कारणों से आत्महत्या करती हैं।
देश में हर 4 मिनट में कोई एक अपनी जान दे देता है और ऐसा करने वाले तीन लोगों में से एक युवा होता है यानी देश में हर 12 मिनट में 30 वर्ष से कम आयु का एक युवा अपनी जान ले लेता है।
1
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: वर्ष पहले मुंबई के भीड़-भाड़ वाले इलाके में हुए दो तीन बम धमाकों के आरोपी को इंडियन मुजाहिद्दीन के कथित प्रमुख यासीन भटकल ने पहचान लिया है।टिप्पणियां मुंबई में जुलाई 2011 में हुए तीन धमाकों के मामले में एक आरोपी भटकल से पुलिस पूछताछ कर रही है। यह तीन धमाके जवेरी बाजार, ओपेरा हाउस और दादर इलाके में हुए थे। इन धमाकों में 27 लोगों की मौत हुई थी और करीब 130 लोग घायल हुए थे। सूत्रों का कहना है कि भटकल ने मुंबई में हुए धमाकों के मामले में वांछित व्यक्ति की पहचान वकास के रूप में की है। वकास को सीसीटीवी में जवेरी बाजार वाले इलाके में देखा गया था। कहा जा रहा है कि जवेरी बाजार में हुए धमाके में वकास ने बम रखा था। सूत्र यह भी बता रहै हैं कि पाकिस्तानी मूल का वकास अब भी भारत में है। सीसीटीवी में कैद वकास ने हरी कमीज पहन रखी है और एक सफेद प्लास्टिक बैग लिए है। कुछ ही देर बाद उसे बिना बैग के देखा गया।   करीब 30 वर्षीय भटकल को बिहार से गिरफ्तार होने से पहले भारत के 12 सबसे वांछित लोगों में गिना जा रहा था। भटकल से राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए पूछताछ कर रही है। उससे पूछा जा रहा है कि पिछले कुछ सालों में उसने किस तरह से खतरनाक बम धमाकों को अंजाम दिया। मुंबई में जुलाई 2011 में हुए तीन धमाकों के मामले में एक आरोपी भटकल से पुलिस पूछताछ कर रही है। यह तीन धमाके जवेरी बाजार, ओपेरा हाउस और दादर इलाके में हुए थे। इन धमाकों में 27 लोगों की मौत हुई थी और करीब 130 लोग घायल हुए थे। सूत्रों का कहना है कि भटकल ने मुंबई में हुए धमाकों के मामले में वांछित व्यक्ति की पहचान वकास के रूप में की है। वकास को सीसीटीवी में जवेरी बाजार वाले इलाके में देखा गया था। कहा जा रहा है कि जवेरी बाजार में हुए धमाके में वकास ने बम रखा था। सूत्र यह भी बता रहै हैं कि पाकिस्तानी मूल का वकास अब भी भारत में है। सीसीटीवी में कैद वकास ने हरी कमीज पहन रखी है और एक सफेद प्लास्टिक बैग लिए है। कुछ ही देर बाद उसे बिना बैग के देखा गया।   करीब 30 वर्षीय भटकल को बिहार से गिरफ्तार होने से पहले भारत के 12 सबसे वांछित लोगों में गिना जा रहा था। भटकल से राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए पूछताछ कर रही है। उससे पूछा जा रहा है कि पिछले कुछ सालों में उसने किस तरह से खतरनाक बम धमाकों को अंजाम दिया। सूत्रों का कहना है कि भटकल ने मुंबई में हुए धमाकों के मामले में वांछित व्यक्ति की पहचान वकास के रूप में की है। वकास को सीसीटीवी में जवेरी बाजार वाले इलाके में देखा गया था। कहा जा रहा है कि जवेरी बाजार में हुए धमाके में वकास ने बम रखा था। सूत्र यह भी बता रहै हैं कि पाकिस्तानी मूल का वकास अब भी भारत में है। सीसीटीवी में कैद वकास ने हरी कमीज पहन रखी है और एक सफेद प्लास्टिक बैग लिए है। कुछ ही देर बाद उसे बिना बैग के देखा गया।   करीब 30 वर्षीय भटकल को बिहार से गिरफ्तार होने से पहले भारत के 12 सबसे वांछित लोगों में गिना जा रहा था। भटकल से राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए पूछताछ कर रही है। उससे पूछा जा रहा है कि पिछले कुछ सालों में उसने किस तरह से खतरनाक बम धमाकों को अंजाम दिया।
सारांश: सूत्रों का कहना है कि भटकल ने मुंबई में हुए धमाकों के मामले में वांछित व्यक्ति की पहचान वकास के रूप में की है। वकास को सीसीटीवी में जवेरी बाजार वाले इलाके में देखा गया था। कहा जा रहा है कि जवेरी बाजार में हुए धमाके में वकास ने बम रखा था।
7
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: कैंसर से उबरकर फिटनेस हासिल करने में जुटे हरफनमौला खिलाड़ी युवराज सिंह आईसीसी ट्वेंटी-20 क्रिकेट विश्व कप टूर्नामेंट के लिए चुनी गई भारत की 30 सदस्यीय सम्भावित टीम में वापसी करने में सफल रहे हैं। इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट का आयोजन इस वर्ष श्रीलंका में 18 सितम्बर से होगा। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने सम्भावित खिलाड़ियों की टीम बुधवार को घोषित की जिसमें मनदीप सिंह, अम्बाती रायडू और खराब फॉर्म के कारण टीम से बाहर किए गए ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह को भी शामिल किया गया है। पिछले वर्ष विश्व कप में 'मैन ऑफ द सीरीज' रहे युवराज हाल में कैंसर की जंग जीतने के बाद इन दिनों बेंगलुरू स्थित नेशनल क्रिकेट अकादमी में फिटनेस हासिल कर प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में लौटने की तैयारी कर रहे हैं। युवराज ने अंतिम बार नवम्बर, 2011 में वेस्टइंडीज के साथ कोलकाता में टेस्ट मैच में खेला था। मुख्य चयनकर्ता कृष्णामाचारी श्रीकांत ने कहा, मुझे लगता है कि जिस खिलाड़ी ने हमारे लिए विश्व कप जीता है, वह वापसी का हकदार है। मध्य गति के गेंदबाज लक्ष्मीपति बालाजी को सम्भावित टीम में शामिल करना हैरान कर देने वाला फैसला रहा। बालाजी ने अपना अंतिम अंतर्राष्ट्रीय मुकाबला वर्ष 2009 में श्रीलंका के खिलाफ खेला था।टिप्पणियां बालाजी ने राष्ट्रीय टीम की ओर से अब तक एक भी ट्वेंटी-20 अंतर्राष्ट्रीय मैच नहीं खेला है। उन्हें इंडियन प्रिमियर लीग (आईपीएल) के पांचवें संस्करण में कोलकाता नाइटराइडर्स की ओर से बेहतर प्रदर्शन करने का इनाम मिला है। भारत के अंडर-19 टीम के पूर्व कप्तान मनदीप का प्रदर्शन भी आईपीएल में शानदार रहा था। पंजाब के मनदीप आईपीएल में किंग्स इलेवन पंजाब टीम की ओर से खेलते हैं। इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट का आयोजन इस वर्ष श्रीलंका में 18 सितम्बर से होगा। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने सम्भावित खिलाड़ियों की टीम बुधवार को घोषित की जिसमें मनदीप सिंह, अम्बाती रायडू और खराब फॉर्म के कारण टीम से बाहर किए गए ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह को भी शामिल किया गया है। पिछले वर्ष विश्व कप में 'मैन ऑफ द सीरीज' रहे युवराज हाल में कैंसर की जंग जीतने के बाद इन दिनों बेंगलुरू स्थित नेशनल क्रिकेट अकादमी में फिटनेस हासिल कर प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में लौटने की तैयारी कर रहे हैं। युवराज ने अंतिम बार नवम्बर, 2011 में वेस्टइंडीज के साथ कोलकाता में टेस्ट मैच में खेला था। मुख्य चयनकर्ता कृष्णामाचारी श्रीकांत ने कहा, मुझे लगता है कि जिस खिलाड़ी ने हमारे लिए विश्व कप जीता है, वह वापसी का हकदार है। मध्य गति के गेंदबाज लक्ष्मीपति बालाजी को सम्भावित टीम में शामिल करना हैरान कर देने वाला फैसला रहा। बालाजी ने अपना अंतिम अंतर्राष्ट्रीय मुकाबला वर्ष 2009 में श्रीलंका के खिलाफ खेला था।टिप्पणियां बालाजी ने राष्ट्रीय टीम की ओर से अब तक एक भी ट्वेंटी-20 अंतर्राष्ट्रीय मैच नहीं खेला है। उन्हें इंडियन प्रिमियर लीग (आईपीएल) के पांचवें संस्करण में कोलकाता नाइटराइडर्स की ओर से बेहतर प्रदर्शन करने का इनाम मिला है। भारत के अंडर-19 टीम के पूर्व कप्तान मनदीप का प्रदर्शन भी आईपीएल में शानदार रहा था। पंजाब के मनदीप आईपीएल में किंग्स इलेवन पंजाब टीम की ओर से खेलते हैं। पिछले वर्ष विश्व कप में 'मैन ऑफ द सीरीज' रहे युवराज हाल में कैंसर की जंग जीतने के बाद इन दिनों बेंगलुरू स्थित नेशनल क्रिकेट अकादमी में फिटनेस हासिल कर प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में लौटने की तैयारी कर रहे हैं। युवराज ने अंतिम बार नवम्बर, 2011 में वेस्टइंडीज के साथ कोलकाता में टेस्ट मैच में खेला था। मुख्य चयनकर्ता कृष्णामाचारी श्रीकांत ने कहा, मुझे लगता है कि जिस खिलाड़ी ने हमारे लिए विश्व कप जीता है, वह वापसी का हकदार है। मध्य गति के गेंदबाज लक्ष्मीपति बालाजी को सम्भावित टीम में शामिल करना हैरान कर देने वाला फैसला रहा। बालाजी ने अपना अंतिम अंतर्राष्ट्रीय मुकाबला वर्ष 2009 में श्रीलंका के खिलाफ खेला था।टिप्पणियां बालाजी ने राष्ट्रीय टीम की ओर से अब तक एक भी ट्वेंटी-20 अंतर्राष्ट्रीय मैच नहीं खेला है। उन्हें इंडियन प्रिमियर लीग (आईपीएल) के पांचवें संस्करण में कोलकाता नाइटराइडर्स की ओर से बेहतर प्रदर्शन करने का इनाम मिला है। भारत के अंडर-19 टीम के पूर्व कप्तान मनदीप का प्रदर्शन भी आईपीएल में शानदार रहा था। पंजाब के मनदीप आईपीएल में किंग्स इलेवन पंजाब टीम की ओर से खेलते हैं। मुख्य चयनकर्ता कृष्णामाचारी श्रीकांत ने कहा, मुझे लगता है कि जिस खिलाड़ी ने हमारे लिए विश्व कप जीता है, वह वापसी का हकदार है। मध्य गति के गेंदबाज लक्ष्मीपति बालाजी को सम्भावित टीम में शामिल करना हैरान कर देने वाला फैसला रहा। बालाजी ने अपना अंतिम अंतर्राष्ट्रीय मुकाबला वर्ष 2009 में श्रीलंका के खिलाफ खेला था।टिप्पणियां बालाजी ने राष्ट्रीय टीम की ओर से अब तक एक भी ट्वेंटी-20 अंतर्राष्ट्रीय मैच नहीं खेला है। उन्हें इंडियन प्रिमियर लीग (आईपीएल) के पांचवें संस्करण में कोलकाता नाइटराइडर्स की ओर से बेहतर प्रदर्शन करने का इनाम मिला है। भारत के अंडर-19 टीम के पूर्व कप्तान मनदीप का प्रदर्शन भी आईपीएल में शानदार रहा था। पंजाब के मनदीप आईपीएल में किंग्स इलेवन पंजाब टीम की ओर से खेलते हैं। मध्य गति के गेंदबाज लक्ष्मीपति बालाजी को सम्भावित टीम में शामिल करना हैरान कर देने वाला फैसला रहा। बालाजी ने अपना अंतिम अंतर्राष्ट्रीय मुकाबला वर्ष 2009 में श्रीलंका के खिलाफ खेला था।टिप्पणियां बालाजी ने राष्ट्रीय टीम की ओर से अब तक एक भी ट्वेंटी-20 अंतर्राष्ट्रीय मैच नहीं खेला है। उन्हें इंडियन प्रिमियर लीग (आईपीएल) के पांचवें संस्करण में कोलकाता नाइटराइडर्स की ओर से बेहतर प्रदर्शन करने का इनाम मिला है। भारत के अंडर-19 टीम के पूर्व कप्तान मनदीप का प्रदर्शन भी आईपीएल में शानदार रहा था। पंजाब के मनदीप आईपीएल में किंग्स इलेवन पंजाब टीम की ओर से खेलते हैं। बालाजी ने राष्ट्रीय टीम की ओर से अब तक एक भी ट्वेंटी-20 अंतर्राष्ट्रीय मैच नहीं खेला है। उन्हें इंडियन प्रिमियर लीग (आईपीएल) के पांचवें संस्करण में कोलकाता नाइटराइडर्स की ओर से बेहतर प्रदर्शन करने का इनाम मिला है। भारत के अंडर-19 टीम के पूर्व कप्तान मनदीप का प्रदर्शन भी आईपीएल में शानदार रहा था। पंजाब के मनदीप आईपीएल में किंग्स इलेवन पंजाब टीम की ओर से खेलते हैं। भारत के अंडर-19 टीम के पूर्व कप्तान मनदीप का प्रदर्शन भी आईपीएल में शानदार रहा था। पंजाब के मनदीप आईपीएल में किंग्स इलेवन पंजाब टीम की ओर से खेलते हैं।
कैंसर से उबरकर फिटनेस हासिल करने में जुटे हरफनमौला खिलाड़ी युवराज सिंह आईसीसी ट्वेंटी-20 क्रिकेट विश्व कप टूर्नामेंट के लिए चुनी गई भारत की 30 सदस्यीय सम्भावित टीम में वापसी करने में सफल रहे हैं।
28
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: सीबीआई ने पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा से अक्टूबर 2007 और 2008 के बीच 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में कुछ कंपनियों को कथित तौर पर तरजीह देने को लेकर तीसरी बार पूछताछ की। पिछले साल 24 दिसंबर और 25 दिसंबर को पूछताछ से गुजरे राजा को सुबह सीबीआई कार्यालय बुलाकर नौ घंटे की पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान द्रमुक सांसद से कारपोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया के साथ बातचीत और 2007 में स्पेक्ट्रम आवंटन की तिथि को आगे बढ़ाने संबंधी कारणों के बारे में सवाल किए गए। सीबीआई के कुछ सवाल पूर्व मंत्री के कुछ परिजनों की कुछ कंपनियों की भूमिका से भी संबंधित थे। सूत्रों ने कहा कि राजा के सामने अक्टूबर 2009 के दौरान दूरसंचार विभाग के कार्यालयों में छापों के दौरान एजेंसी द्वारा बरामद किए गए कुछ दस्तावेज भी पेश किए गए। इससे पहले, विभाग और दूरसंचार कंपनियों के अनाम अधिकारियों के खिलाफ एक मामला दर्ज किया गया था।
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: पूछताछ के दौरान राजा से नीरा राडिया के साथ बातचीत और 2007 में स्पेक्ट्रम आवंटन की तिथि आगे बढ़ाने संबंधी कारणों के बारे में सवाल किए गए।
25
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने चुनाव आयोग के प्रशासनिक नियंत्रण पर अपने एक बयान से उठे विवाद पर सफाई देते हुए शनिवार को कहा कि आयोग और उनके मंत्रालय के बीच कोई ‘टकराव’ नहीं है तथा यह संवैधानिक संस्था पूरी तरह से स्वतंत्र एवं स्वायत्त है। भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष न्यायमूर्ति मार्कंडेय काट्जू की पुस्तक ‘जस्टिस विद उर्दू’ के विमोचन के बाद खुर्शीद ने कहा, ‘यह बात पूरी तरह से निराधार है कि कानून मंत्रालय चुनाव आयोग की कामकाजी प्रक्रिया में किसी तरह का दखल दे रहा है। ये बातें मनगढ़ंत हैं और इन्हें मीडिया ने तूल दिया है।’टिप्पणियां उन्होंने कहा, ‘चुनाव आयोग पूरी तरह से स्वतंत्र और स्वायत्त है। उसकी स्वायत्तता और स्वतंत्रता पर कोई सवाल ही नहीं खड़ा होता। हां, कुछ निश्चित दायरा होता है, जिसमें मंत्रालय अथवा अन्य विभागों को भी काम करना होता है। इसका मतलब यह नहीं है कि आयोग के काम में कोई दखल दे रहा है।’ मंत्रालय और चुनाव आयोग के बीच कथित टकराव के बारे में पूछे जाने पर खुर्शीद ने कहा, ‘इसमें कोई सच्चाई नहीं है। कानून मंत्रालय और चुनाव आयोग के बीच टकराव का सवाल ही नहीं उठता। दोनों के बीच टकराव के लिए कोई स्थान नहीं है।’ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कल आयोग को आश्वस्त किया था कि संविधान की ओर से इस संस्था की कामकाजी स्वायत्तता की गारंटी बनायी रखी जायेगी और सरकार उसकी संवैधानिक स्थिति एवं कामकाज की स्वायत्तता का सम्मान करती है। भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष न्यायमूर्ति मार्कंडेय काट्जू की पुस्तक ‘जस्टिस विद उर्दू’ के विमोचन के बाद खुर्शीद ने कहा, ‘यह बात पूरी तरह से निराधार है कि कानून मंत्रालय चुनाव आयोग की कामकाजी प्रक्रिया में किसी तरह का दखल दे रहा है। ये बातें मनगढ़ंत हैं और इन्हें मीडिया ने तूल दिया है।’टिप्पणियां उन्होंने कहा, ‘चुनाव आयोग पूरी तरह से स्वतंत्र और स्वायत्त है। उसकी स्वायत्तता और स्वतंत्रता पर कोई सवाल ही नहीं खड़ा होता। हां, कुछ निश्चित दायरा होता है, जिसमें मंत्रालय अथवा अन्य विभागों को भी काम करना होता है। इसका मतलब यह नहीं है कि आयोग के काम में कोई दखल दे रहा है।’ मंत्रालय और चुनाव आयोग के बीच कथित टकराव के बारे में पूछे जाने पर खुर्शीद ने कहा, ‘इसमें कोई सच्चाई नहीं है। कानून मंत्रालय और चुनाव आयोग के बीच टकराव का सवाल ही नहीं उठता। दोनों के बीच टकराव के लिए कोई स्थान नहीं है।’ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कल आयोग को आश्वस्त किया था कि संविधान की ओर से इस संस्था की कामकाजी स्वायत्तता की गारंटी बनायी रखी जायेगी और सरकार उसकी संवैधानिक स्थिति एवं कामकाज की स्वायत्तता का सम्मान करती है। उन्होंने कहा, ‘चुनाव आयोग पूरी तरह से स्वतंत्र और स्वायत्त है। उसकी स्वायत्तता और स्वतंत्रता पर कोई सवाल ही नहीं खड़ा होता। हां, कुछ निश्चित दायरा होता है, जिसमें मंत्रालय अथवा अन्य विभागों को भी काम करना होता है। इसका मतलब यह नहीं है कि आयोग के काम में कोई दखल दे रहा है।’ मंत्रालय और चुनाव आयोग के बीच कथित टकराव के बारे में पूछे जाने पर खुर्शीद ने कहा, ‘इसमें कोई सच्चाई नहीं है। कानून मंत्रालय और चुनाव आयोग के बीच टकराव का सवाल ही नहीं उठता। दोनों के बीच टकराव के लिए कोई स्थान नहीं है।’ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कल आयोग को आश्वस्त किया था कि संविधान की ओर से इस संस्था की कामकाजी स्वायत्तता की गारंटी बनायी रखी जायेगी और सरकार उसकी संवैधानिक स्थिति एवं कामकाज की स्वायत्तता का सम्मान करती है। मंत्रालय और चुनाव आयोग के बीच कथित टकराव के बारे में पूछे जाने पर खुर्शीद ने कहा, ‘इसमें कोई सच्चाई नहीं है। कानून मंत्रालय और चुनाव आयोग के बीच टकराव का सवाल ही नहीं उठता। दोनों के बीच टकराव के लिए कोई स्थान नहीं है।’ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कल आयोग को आश्वस्त किया था कि संविधान की ओर से इस संस्था की कामकाजी स्वायत्तता की गारंटी बनायी रखी जायेगी और सरकार उसकी संवैधानिक स्थिति एवं कामकाज की स्वायत्तता का सम्मान करती है।
सारांश: सलमान खुर्शीद ने चुनाव आयोग के प्रशासनिक नियंत्रण पर अपने एक बयान से उठे विवाद पर सफाई देते हुए कहा कि आयोग और उनके मंत्रालय के बीच कोई ‘टकराव’ नहीं है तथा यह संवैधानिक संस्था पूरी तरह से स्वतंत्र एवं स्वायत्त है।
33
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: देश के शेयर बाजारों में गुरुवार को तेजी का रुख रहा। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 94.94 अंकों की तेजी के साथ 19,486.80 पर और निफ्टी 30.40 अंकों की तेजी के साथ 5,930.90 पर बंद हुआ।           बम्बई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 83.23 अंकों की तेजी के साथ 19,475.09 पर खुला और 94.94 अंकों यानी 0.49 फीसदी की तेजी के साथ 19,486.80 पर बंद हुआ। दिन के कारोबार में सेंसेक्स ने 19,523.25 के ऊपरी और 19,186.24 के निचले स्तर को छुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी 25.80 अंकों की तेजी के साथ 5926.30 पर खुला और 30.40 अंकों यानी 0.52 फीसदी की तेजी के साथ 5,930.90 पर बंद हुआ। दिन के कारोबार में निफ्टी ने 5,942.55 के ऊपरी और 5,838.90 के निचले स्तर को छुआ।   मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी तेजी का रुख रहा। मिडकैप 51.21 अंकों की तेजी के साथ 7,075.92 पर और स्मॉलकैप 33.95 अंकों की तेजी के साथ 7,453.77 पर बंद हुआ।             बीएसई के 13 में से 10 सेक्टरों में तेजी दर्ज की गई। सूचना प्रौद्योगिकी (1.37 फीसदी), प्रौद्योगिकी (1.05 फीसदी) और स्वास्थ्य सेवा (0.04 फीसदी) में गिरावट दर्ज की गई। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी 25.80 अंकों की तेजी के साथ 5926.30 पर खुला और 30.40 अंकों यानी 0.52 फीसदी की तेजी के साथ 5,930.90 पर बंद हुआ। दिन के कारोबार में निफ्टी ने 5,942.55 के ऊपरी और 5,838.90 के निचले स्तर को छुआ।   मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी तेजी का रुख रहा। मिडकैप 51.21 अंकों की तेजी के साथ 7,075.92 पर और स्मॉलकैप 33.95 अंकों की तेजी के साथ 7,453.77 पर बंद हुआ।             बीएसई के 13 में से 10 सेक्टरों में तेजी दर्ज की गई। सूचना प्रौद्योगिकी (1.37 फीसदी), प्रौद्योगिकी (1.05 फीसदी) और स्वास्थ्य सेवा (0.04 फीसदी) में गिरावट दर्ज की गई।
यहाँ एक सारांश है:सेंसेक्स 94.94 अंकों की तेजी के साथ 19,486.80 पर और निफ्टी 30.40 अंकों की तेजी के साथ 5,930.90 पर बंद हुआ।
18
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ओबामा शासन में अमेरिका और भारत के बीच के रक्षा संबंधों में जबर्दस्त प्रगति हुई है और वाशिंगटन को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की यात्रा से काफी उम्मीदें हैं।टिप्पणियां अधिकारी ने कहा, वास्तव में दोनों देशों के बीच रक्षा संबंध, व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति बराक ओबामा और प्रधानमंत्री सिंह के बीच 27 सितंबर को होने वाली वार्ता का अहम मुद्दा होने की संभावना है। एशिया एवं प्रशांत सुरक्षा मामलों के कार्यवाहक सहायक मंत्री पीटर लैवोय ने कहा, भारत, अमेरिका का बेहद अच्छा दोस्त है। बीते एक दशक में दोनों के रिश्तों में काफी प्रगति हुई है। ओबामा प्रशासन में हमने काफी प्रगति की है। अधिकारी ने कहा, वास्तव में दोनों देशों के बीच रक्षा संबंध, व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति बराक ओबामा और प्रधानमंत्री सिंह के बीच 27 सितंबर को होने वाली वार्ता का अहम मुद्दा होने की संभावना है। एशिया एवं प्रशांत सुरक्षा मामलों के कार्यवाहक सहायक मंत्री पीटर लैवोय ने कहा, भारत, अमेरिका का बेहद अच्छा दोस्त है। बीते एक दशक में दोनों के रिश्तों में काफी प्रगति हुई है। ओबामा प्रशासन में हमने काफी प्रगति की है। एशिया एवं प्रशांत सुरक्षा मामलों के कार्यवाहक सहायक मंत्री पीटर लैवोय ने कहा, भारत, अमेरिका का बेहद अच्छा दोस्त है। बीते एक दशक में दोनों के रिश्तों में काफी प्रगति हुई है। ओबामा प्रशासन में हमने काफी प्रगति की है।
अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ओबामा शासन में अमेरिका और भारत के बीच के रक्षा संबंधों में जबर्दस्त प्रगति हुई है।
34
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: निलंबित आईएएस अधिकारी दुर्गाशक्ति नागपाल ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश सरकार के आरोपपत्र पर अपना जवाब सौंपा। उत्तर प्रदेश सरकार ने गौतमबुद्ध नगर में निर्माणाधीन मस्जिद की एक दीवार ढहाने को लेकर उन्हें आरोपपत्र दिया था। सूत्रों के मुताबिक 28-वर्षीय आईएएस अधिकारी ने शुक्रवार शाम सौंपे अपने जवाब में कहा है कि वह निर्दोष हैं। वह जीबी नगर की एसडीएम थीं।टिप्पणियां अखिलेश यादव सरकार ने 4 अगस्त को उन्हें आरोपपत्र दिया था। बालू माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करने वाली नागपाल को उचित प्रक्रिया का पालन किए बगैर ही कदालपुर गांव में निर्माणाधीन एक मस्जिद की दीवार ढहाने का आदेश देने को लेकर निलंबित कर दिया गया था। नागपाल ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव जावेद उस्मानी और मुख्यमंत्री की सचिव अनीता सिंह से मिलकर सफाई दी थीं। उनके निलंबन पर पूरे देश में कड़ी प्रतिक्रिया हुई थी। सूत्रों के मुताबिक 28-वर्षीय आईएएस अधिकारी ने शुक्रवार शाम सौंपे अपने जवाब में कहा है कि वह निर्दोष हैं। वह जीबी नगर की एसडीएम थीं।टिप्पणियां अखिलेश यादव सरकार ने 4 अगस्त को उन्हें आरोपपत्र दिया था। बालू माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करने वाली नागपाल को उचित प्रक्रिया का पालन किए बगैर ही कदालपुर गांव में निर्माणाधीन एक मस्जिद की दीवार ढहाने का आदेश देने को लेकर निलंबित कर दिया गया था। नागपाल ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव जावेद उस्मानी और मुख्यमंत्री की सचिव अनीता सिंह से मिलकर सफाई दी थीं। उनके निलंबन पर पूरे देश में कड़ी प्रतिक्रिया हुई थी। अखिलेश यादव सरकार ने 4 अगस्त को उन्हें आरोपपत्र दिया था। बालू माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करने वाली नागपाल को उचित प्रक्रिया का पालन किए बगैर ही कदालपुर गांव में निर्माणाधीन एक मस्जिद की दीवार ढहाने का आदेश देने को लेकर निलंबित कर दिया गया था। नागपाल ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव जावेद उस्मानी और मुख्यमंत्री की सचिव अनीता सिंह से मिलकर सफाई दी थीं। उनके निलंबन पर पूरे देश में कड़ी प्रतिक्रिया हुई थी। नागपाल ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव जावेद उस्मानी और मुख्यमंत्री की सचिव अनीता सिंह से मिलकर सफाई दी थीं। उनके निलंबन पर पूरे देश में कड़ी प्रतिक्रिया हुई थी।
संक्षिप्त सारांश: निलंबित आईएएस अधिकारी दुर्गाशक्ति नागपाल ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश सरकार के आरोपपत्र पर अपना जवाब सौंपा। राज्य सरकार ने गौतमबुद्ध नगर में निर्माणाधीन मस्जिद की एक दीवार ढहाने को लेकर उन्हें आरोपपत्र दिया था।
29
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: इंग्लैंड के कप्तान इयोन मोर्गन का मानना है कि उनकी टीम सोमवार को कार्डिफ के साउथम्पटन में होने वाले शृंखला के पांचवें और अंतिम एक-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच में विजयी लय को जारी रखेगी। कार्यवाहक कप्तान ने भरोसा जताया कि माइकल क्लार्क की अगुवाई वाली टीम पर तीन विकेट की जीत दर्ज करने के बाद उनकी टीम का मनोबल बढ़ा हुआ होगा।टिप्पणियां मोर्गन ने कहा, ‘इस मैच से पहले हमारा मनोबल बढ़ा होगा और हमें लग रहा है कि हम शृंखला जीतेंगे। हमें इस मौके का फायदा उठाकर शृंखला में जीतना ही चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘अगर हम पांचवां मैच जीत लेते हैं तो यह हमारे लिए काफी अच्छा सत्र होगा। हमारी एशेज टीम ने भी खिताब अपने नाम किया। इसलिए यह हमारे लिए बड़ा मैच होगा।’ कार्यवाहक कप्तान ने भरोसा जताया कि माइकल क्लार्क की अगुवाई वाली टीम पर तीन विकेट की जीत दर्ज करने के बाद उनकी टीम का मनोबल बढ़ा हुआ होगा।टिप्पणियां मोर्गन ने कहा, ‘इस मैच से पहले हमारा मनोबल बढ़ा होगा और हमें लग रहा है कि हम शृंखला जीतेंगे। हमें इस मौके का फायदा उठाकर शृंखला में जीतना ही चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘अगर हम पांचवां मैच जीत लेते हैं तो यह हमारे लिए काफी अच्छा सत्र होगा। हमारी एशेज टीम ने भी खिताब अपने नाम किया। इसलिए यह हमारे लिए बड़ा मैच होगा।’ मोर्गन ने कहा, ‘इस मैच से पहले हमारा मनोबल बढ़ा होगा और हमें लग रहा है कि हम शृंखला जीतेंगे। हमें इस मौके का फायदा उठाकर शृंखला में जीतना ही चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘अगर हम पांचवां मैच जीत लेते हैं तो यह हमारे लिए काफी अच्छा सत्र होगा। हमारी एशेज टीम ने भी खिताब अपने नाम किया। इसलिए यह हमारे लिए बड़ा मैच होगा।’ उन्होंने कहा, ‘अगर हम पांचवां मैच जीत लेते हैं तो यह हमारे लिए काफी अच्छा सत्र होगा। हमारी एशेज टीम ने भी खिताब अपने नाम किया। इसलिए यह हमारे लिए बड़ा मैच होगा।’
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: इंग्लैंड के कप्तान इयोन मोर्गन का मानना है कि उनकी टीम सोमवार को कार्डिफ के साउथम्पटन में होने वाले शृंखला के पांचवें और अंतिम एक-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच में विजयी लय को जारी रखेगी।
19
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: हाल ही में नासा के ‘स्पेस एंड रॉकेट सेन्टर’ से ट्रेनिंग लेकर लौटे सुशांत सिंह राजपूत अब अंतरिक्ष यात्री के रूप में अपनी अगली फिल्म ‘चंदा मामा दूर के’ की शूटिंग के लिए परफेक्ट हो गए हैं. अंतरिक्ष यात्रा पर बननेवाली यह फिल्म भारत की पहली स्पेस पर बननेवाली फिल्म है. फिल्म का डायरेक्शन संजय पूरन सिंह चौहान कर रहे हैं. यह एक ऐसा अंतरिक्ष मिशन है जिसकी वजह से पूरा देश एकजुट हो जाता है.  स्वदेश और जानेमन जैसी फिल्मों की वजह से बॉलीवुड का नासा के साथ एक संबंध बना है, जिसे ‘चंदा मामा दूर के’ आगे लेकर जाएगी. लेकिन यह पहला मौका होगा कि नासा की टीम ने एक बॉलीवुड एक्टर को नासा में बुलाकर उसे ट्रेनिंग दी हो.टिप्पणियां इस बारे में सुशांत कहते हैं कि “यह कमाल का अनुभव था. पिछले बीस साल से मेरे दिमाग में सिर्फ फॉर्मूला और थ्योरी ही थीं. लेकिन पहली बार, मैने ढेरों अनुभव लिए. जीरो ग्रैविटी क्या होती है. स्पेस में जाना क्या होता है, इसका अनुभव पहली बार लिया. मैंने जो सिर्फ किताबों में पढ़ा था, उसे सच में महसूस किया. वह दुनिया ही, काफी अलग है. यह ट्रेनिंग हमेशा यादगार रहेगी.“ फिजिक्स में सुशांत अच्छे मार्क्स लाते थे और उनकी स्पेस फिजिक्स में दिलचस्पी भी रही है. उनके पास अंतरिक्ष निहारने का टेलीस्कोप भी है. जिससे वे तारे देखते हैं. सुशांत कहते हैं, "यह उन टेलीस्कोप में से है, जो बहुत दूर तक देख लेता है." स्वदेश और जानेमन जैसी फिल्मों की वजह से बॉलीवुड का नासा के साथ एक संबंध बना है, जिसे ‘चंदा मामा दूर के’ आगे लेकर जाएगी. लेकिन यह पहला मौका होगा कि नासा की टीम ने एक बॉलीवुड एक्टर को नासा में बुलाकर उसे ट्रेनिंग दी हो.टिप्पणियां इस बारे में सुशांत कहते हैं कि “यह कमाल का अनुभव था. पिछले बीस साल से मेरे दिमाग में सिर्फ फॉर्मूला और थ्योरी ही थीं. लेकिन पहली बार, मैने ढेरों अनुभव लिए. जीरो ग्रैविटी क्या होती है. स्पेस में जाना क्या होता है, इसका अनुभव पहली बार लिया. मैंने जो सिर्फ किताबों में पढ़ा था, उसे सच में महसूस किया. वह दुनिया ही, काफी अलग है. यह ट्रेनिंग हमेशा यादगार रहेगी.“ फिजिक्स में सुशांत अच्छे मार्क्स लाते थे और उनकी स्पेस फिजिक्स में दिलचस्पी भी रही है. उनके पास अंतरिक्ष निहारने का टेलीस्कोप भी है. जिससे वे तारे देखते हैं. सुशांत कहते हैं, "यह उन टेलीस्कोप में से है, जो बहुत दूर तक देख लेता है." इस बारे में सुशांत कहते हैं कि “यह कमाल का अनुभव था. पिछले बीस साल से मेरे दिमाग में सिर्फ फॉर्मूला और थ्योरी ही थीं. लेकिन पहली बार, मैने ढेरों अनुभव लिए. जीरो ग्रैविटी क्या होती है. स्पेस में जाना क्या होता है, इसका अनुभव पहली बार लिया. मैंने जो सिर्फ किताबों में पढ़ा था, उसे सच में महसूस किया. वह दुनिया ही, काफी अलग है. यह ट्रेनिंग हमेशा यादगार रहेगी.“ फिजिक्स में सुशांत अच्छे मार्क्स लाते थे और उनकी स्पेस फिजिक्स में दिलचस्पी भी रही है. उनके पास अंतरिक्ष निहारने का टेलीस्कोप भी है. जिससे वे तारे देखते हैं. सुशांत कहते हैं, "यह उन टेलीस्कोप में से है, जो बहुत दूर तक देख लेता है." फिजिक्स में सुशांत अच्छे मार्क्स लाते थे और उनकी स्पेस फिजिक्स में दिलचस्पी भी रही है. उनके पास अंतरिक्ष निहारने का टेलीस्कोप भी है. जिससे वे तारे देखते हैं. सुशांत कहते हैं, "यह उन टेलीस्कोप में से है, जो बहुत दूर तक देख लेता है."
संक्षिप्त सारांश: डिटेक्टिव ब्योमकेश बख्शी बन चुके हैं सुशांत एम.एस. धोनी का भी निभाया है किरदार संजय पूरन सिंह चौहान कर रहे हैं डायरेक्ट
0
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: वहीं आईएमटी गाजियाबाद का कहना है कि उसके साथ नाइंसाफी की जा रही है. जमीन के पेमेंट को लेकर एक विवाद है शायद उस जमीन का भुगतान आईएमटी गाजियाबाद नहीं कर पाया और गाजियाबाद विकास प्राधिकरण को लीज डीड और भुगतान की रसीद नहीं दिखा पाया जिसके बाद ये गलत फैसला लिया गया है. आईएमटी गाजियाबाद का कहना है कि वो अब कोर्ट जाएंगे. IMT गाजियाबाद के डायरेक्टर ए के भट्टाचार्य ने कहा, 'जमीन आवंटन रद्द होना गलत है. जमीन के पेमेंट को लेकर विवाद है, हम लीज डीड जीडीए को नहीं दिखा पाए. इस बारे में आखिरी बार बात 1994 में हुई थी. उस समय जीडीए ने हमको कहा था कि 15 दिन के अंदर अगर पैसा नहीं दिया जाएगा तो अलॉटमेंट रद्द कर दिया जाएगा. जबकि आवंटन 20 साल तक रद्द नहीं हुआ. अचानक यह कहना कि आपका अलॉटमेंट रद्द है यह गलत बात है. क्योंकि यहां पर एक शैक्षिक संस्थान चल रहा है जो कि अपने आप में बहुत ऊंचा माना जाता है. जीडीए की भी गलती है कि उन्होंने 1994 के बाद फॉलोअप क्यों नहीं किया. न्याय संगत बात होनी चाहिए.' भट्टाचार्य ने कहा, 'जीडीए के पास भी ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे पता चले कि 1994 के बाद उन्होंने कोई नोटिस दिया. अगर पेमेंट नहीं हुआ तो आईएमटी जरूर पेमेंट करेगी. हम लोग इंतजार कर रहे थे कि जीडीए से पेमेंट के लिए नोटिस आएगा लेकिन हमें मीडिया से पता चला कि आवंटन ही रद्द कर दिया है. अभी तक हमें कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है. हमें कानून पर भरोसा है, हम कोर्ट जाएंगे. जीडीए को जमीन वापस नहीं लेने देंगे.
यह एक सारांश है: नामी बिजनेस स्कूल IMT गाजियाबाद की मुश्किलें बढ़ीं बीजेपी के पार्षद राजेंद्र त्यागी की शिकायत पर हुई कार्रवाई कमलनाथ के छोटे बेटे बकुल नाथ IMT की गवर्निंग काउंसिल के प्रेसिडेंट है
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['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: बड़े मूल्य के प्रतिबंधित नोटों के जरिए समानांतर अर्थव्यवस्था चलाने के गोरखधंधे पर अंकुश के लिए 1000 और 500 रुपये के पुराने नोटों के लेन-देन करने और अपने पास एक निश्चित सीमा से अधिक संख्या में रखने को गैरकानूनी एवं दंडनीय अपराध बनाने संबंधी अध्यादेश को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मंजूरी प्रदान कर दी है. विनिर्दिष्ट बैंक नोट (दायित्व का समापन) अध्यादेश-2016 के तहत चलन से बाहर किए गए बड़े मूल्य के नोटों को रखना और उनका लेन-देन करना कानूनी अपराध है जिसमें न्यूनतम 10,000 रुपये के जुर्माने का प्रावधान है. सरकार के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि पुराने प्रतिबंधित नोटों को कारोबार के लिए इस्तेमाल से रोकने के लिए यह अध्यादेश जरूरी था. उन्होंने कहा, ‘‘हम नहीं चाहते कि प्रतिबंधित नोटों के माध्यम से कोई समानांतर अर्थव्यवस्था चले.’’ सरकार ने विदेश से आने वाले प्रवासी भारतीयों को चलन से बाहर किए गए नोटों को बदलवाने के लिए 30 जून तक मौका दिया है. वे इन्हें रिजर्व बैंक के विनिर्दिष्ट कार्यालयों पर बदलवा सकेंगे. इसके लिए उन्हें अपने साथ लाए गए पुराने प्रतिबंधित नोटों के बारे में हवाईअड्डों पर सीमा शुल्क विभाग को संख्या सहित पूरा ब्यौरा देना होगा. वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि ऐसे प्रवासी भारतीयों को रिजर्व बैंक की विनिर्दिष्ट शाखाओं में बंद किए गए नोट जमा कराते समय सीमा शुल्क विभाग में दाखिल ब्यौरा भी प्रस्तुत करना होगा, झूठा ब्यौरा देने पर न्यूनतम 50,000 रुपये या प्रस्तुत नोटों के कुल मूल्य में से जो भी अधिक होगा, उतना जुर्माना देना होगा. सरकार ने आठ नवंबर को नोटबंदी की घोषणा के समय जनता को प्रतिबंधित नोट बैंकों में जमा करवाने के लिए 50 दिन का समय दिया था. यह अवधि शुक्रवार 30 दिसंबर को पूरी हो गई. कुछ शर्तों के साथ इन नोटों को रिजर्व बैंक के काउंटरों पर 31 मार्च तक अभी भी बदलवाया जा सकता है, लेकिन प्रवासी भारतीयों को 30 जून तक का मौका दिया गया है. इस अध्यादेश के तहत जुर्माने का प्रावधान 31 मार्च 2016 के बाद प्रभावी होगा. उसी दिन देश में रहने वालों के लिए नोट बदलने की अवधि पूर्णतया समाप्त हो जाएगी. बयान में कहा गया है कि इस अध्यादेश के जरिये भारतीय रिजर्व बैंक कानून-1934 में संशोधन किया गया है. इस संशोधन के जरिये चलन से बाहर किये गये बैंक नोटों को समाप्त करने की घोषणा को विधायी समर्थन मिल गया है. इस अध्यादेश से केन्द्रीय बैंक विनिर्दिष्ट तिथि के बाद प्रतिबंधित नोटों के मूल्य को चुकाने के दायित्व से मुक्त हो जाएगा.टिप्पणियां भविष्य में इन नोटों को लेकर किसी तरह का कोई विवाद खड़ा नहीं हो इसलिये मात्र नोटबंदी की अधिसूचना जारी करने को काफी नहीं माना गया और यह अध्यादेश लाया गया. बंद किए गए 500, 1000 रुपये के पुराने बंद नोट 31 मार्च के बाद भी एक निश्चित सीमा से अधिक रखने को कानून के तहत जुर्म माना जायेगा जिस पर 10,000 रपये अथवा रखी गई राशि के पांच गुणा का जुर्माना इनमें जो भी अधिक होगा लगाया जायेगा. अध्ययन एवं अनुसंधान करने वाले शोधार्थी अधिक से अधिक 25 की संख्या में यह नोट अपने पास रख सकते हैं. वर्ष 1978 में जब मोरारजी देसाई सरकार थी तब भी 1,000 रुपये, 5,000 रुपये और 10,000 रपये के नोट अमान्य करने के बाद सरकार और रिजर्व बैंक को अमान्य नोटों के दायित्व को समाप्त करने के लिये इसी तरह का अध्यादेश लाया गया था. सूत्रों ने बताया कि जब भी सरकार किसी भी कानूनी तौर पर मान्य नोट को समाप्त करेगी, उसके दायित्व से मुक्त होने के लिये इस प्रकार के संशोधन की जरूरत होती है. विनिर्दिष्ट बैंक नोट (दायित्व का समापन) अध्यादेश-2016 के तहत चलन से बाहर किए गए बड़े मूल्य के नोटों को रखना और उनका लेन-देन करना कानूनी अपराध है जिसमें न्यूनतम 10,000 रुपये के जुर्माने का प्रावधान है. सरकार के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि पुराने प्रतिबंधित नोटों को कारोबार के लिए इस्तेमाल से रोकने के लिए यह अध्यादेश जरूरी था. उन्होंने कहा, ‘‘हम नहीं चाहते कि प्रतिबंधित नोटों के माध्यम से कोई समानांतर अर्थव्यवस्था चले.’’ सरकार ने विदेश से आने वाले प्रवासी भारतीयों को चलन से बाहर किए गए नोटों को बदलवाने के लिए 30 जून तक मौका दिया है. वे इन्हें रिजर्व बैंक के विनिर्दिष्ट कार्यालयों पर बदलवा सकेंगे. इसके लिए उन्हें अपने साथ लाए गए पुराने प्रतिबंधित नोटों के बारे में हवाईअड्डों पर सीमा शुल्क विभाग को संख्या सहित पूरा ब्यौरा देना होगा. वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि ऐसे प्रवासी भारतीयों को रिजर्व बैंक की विनिर्दिष्ट शाखाओं में बंद किए गए नोट जमा कराते समय सीमा शुल्क विभाग में दाखिल ब्यौरा भी प्रस्तुत करना होगा, झूठा ब्यौरा देने पर न्यूनतम 50,000 रुपये या प्रस्तुत नोटों के कुल मूल्य में से जो भी अधिक होगा, उतना जुर्माना देना होगा. सरकार ने आठ नवंबर को नोटबंदी की घोषणा के समय जनता को प्रतिबंधित नोट बैंकों में जमा करवाने के लिए 50 दिन का समय दिया था. यह अवधि शुक्रवार 30 दिसंबर को पूरी हो गई. कुछ शर्तों के साथ इन नोटों को रिजर्व बैंक के काउंटरों पर 31 मार्च तक अभी भी बदलवाया जा सकता है, लेकिन प्रवासी भारतीयों को 30 जून तक का मौका दिया गया है. इस अध्यादेश के तहत जुर्माने का प्रावधान 31 मार्च 2016 के बाद प्रभावी होगा. उसी दिन देश में रहने वालों के लिए नोट बदलने की अवधि पूर्णतया समाप्त हो जाएगी. बयान में कहा गया है कि इस अध्यादेश के जरिये भारतीय रिजर्व बैंक कानून-1934 में संशोधन किया गया है. इस संशोधन के जरिये चलन से बाहर किये गये बैंक नोटों को समाप्त करने की घोषणा को विधायी समर्थन मिल गया है. इस अध्यादेश से केन्द्रीय बैंक विनिर्दिष्ट तिथि के बाद प्रतिबंधित नोटों के मूल्य को चुकाने के दायित्व से मुक्त हो जाएगा.टिप्पणियां भविष्य में इन नोटों को लेकर किसी तरह का कोई विवाद खड़ा नहीं हो इसलिये मात्र नोटबंदी की अधिसूचना जारी करने को काफी नहीं माना गया और यह अध्यादेश लाया गया. बंद किए गए 500, 1000 रुपये के पुराने बंद नोट 31 मार्च के बाद भी एक निश्चित सीमा से अधिक रखने को कानून के तहत जुर्म माना जायेगा जिस पर 10,000 रपये अथवा रखी गई राशि के पांच गुणा का जुर्माना इनमें जो भी अधिक होगा लगाया जायेगा. अध्ययन एवं अनुसंधान करने वाले शोधार्थी अधिक से अधिक 25 की संख्या में यह नोट अपने पास रख सकते हैं. वर्ष 1978 में जब मोरारजी देसाई सरकार थी तब भी 1,000 रुपये, 5,000 रुपये और 10,000 रपये के नोट अमान्य करने के बाद सरकार और रिजर्व बैंक को अमान्य नोटों के दायित्व को समाप्त करने के लिये इसी तरह का अध्यादेश लाया गया था. सूत्रों ने बताया कि जब भी सरकार किसी भी कानूनी तौर पर मान्य नोट को समाप्त करेगी, उसके दायित्व से मुक्त होने के लिये इस प्रकार के संशोधन की जरूरत होती है. उन्होंने कहा, ‘‘हम नहीं चाहते कि प्रतिबंधित नोटों के माध्यम से कोई समानांतर अर्थव्यवस्था चले.’’ सरकार ने विदेश से आने वाले प्रवासी भारतीयों को चलन से बाहर किए गए नोटों को बदलवाने के लिए 30 जून तक मौका दिया है. वे इन्हें रिजर्व बैंक के विनिर्दिष्ट कार्यालयों पर बदलवा सकेंगे. इसके लिए उन्हें अपने साथ लाए गए पुराने प्रतिबंधित नोटों के बारे में हवाईअड्डों पर सीमा शुल्क विभाग को संख्या सहित पूरा ब्यौरा देना होगा. वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि ऐसे प्रवासी भारतीयों को रिजर्व बैंक की विनिर्दिष्ट शाखाओं में बंद किए गए नोट जमा कराते समय सीमा शुल्क विभाग में दाखिल ब्यौरा भी प्रस्तुत करना होगा, झूठा ब्यौरा देने पर न्यूनतम 50,000 रुपये या प्रस्तुत नोटों के कुल मूल्य में से जो भी अधिक होगा, उतना जुर्माना देना होगा. सरकार ने आठ नवंबर को नोटबंदी की घोषणा के समय जनता को प्रतिबंधित नोट बैंकों में जमा करवाने के लिए 50 दिन का समय दिया था. यह अवधि शुक्रवार 30 दिसंबर को पूरी हो गई. कुछ शर्तों के साथ इन नोटों को रिजर्व बैंक के काउंटरों पर 31 मार्च तक अभी भी बदलवाया जा सकता है, लेकिन प्रवासी भारतीयों को 30 जून तक का मौका दिया गया है. इस अध्यादेश के तहत जुर्माने का प्रावधान 31 मार्च 2016 के बाद प्रभावी होगा. उसी दिन देश में रहने वालों के लिए नोट बदलने की अवधि पूर्णतया समाप्त हो जाएगी. बयान में कहा गया है कि इस अध्यादेश के जरिये भारतीय रिजर्व बैंक कानून-1934 में संशोधन किया गया है. इस संशोधन के जरिये चलन से बाहर किये गये बैंक नोटों को समाप्त करने की घोषणा को विधायी समर्थन मिल गया है. इस अध्यादेश से केन्द्रीय बैंक विनिर्दिष्ट तिथि के बाद प्रतिबंधित नोटों के मूल्य को चुकाने के दायित्व से मुक्त हो जाएगा.टिप्पणियां भविष्य में इन नोटों को लेकर किसी तरह का कोई विवाद खड़ा नहीं हो इसलिये मात्र नोटबंदी की अधिसूचना जारी करने को काफी नहीं माना गया और यह अध्यादेश लाया गया. बंद किए गए 500, 1000 रुपये के पुराने बंद नोट 31 मार्च के बाद भी एक निश्चित सीमा से अधिक रखने को कानून के तहत जुर्म माना जायेगा जिस पर 10,000 रपये अथवा रखी गई राशि के पांच गुणा का जुर्माना इनमें जो भी अधिक होगा लगाया जायेगा. अध्ययन एवं अनुसंधान करने वाले शोधार्थी अधिक से अधिक 25 की संख्या में यह नोट अपने पास रख सकते हैं. वर्ष 1978 में जब मोरारजी देसाई सरकार थी तब भी 1,000 रुपये, 5,000 रुपये और 10,000 रपये के नोट अमान्य करने के बाद सरकार और रिजर्व बैंक को अमान्य नोटों के दायित्व को समाप्त करने के लिये इसी तरह का अध्यादेश लाया गया था. सूत्रों ने बताया कि जब भी सरकार किसी भी कानूनी तौर पर मान्य नोट को समाप्त करेगी, उसके दायित्व से मुक्त होने के लिये इस प्रकार के संशोधन की जरूरत होती है. वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि ऐसे प्रवासी भारतीयों को रिजर्व बैंक की विनिर्दिष्ट शाखाओं में बंद किए गए नोट जमा कराते समय सीमा शुल्क विभाग में दाखिल ब्यौरा भी प्रस्तुत करना होगा, झूठा ब्यौरा देने पर न्यूनतम 50,000 रुपये या प्रस्तुत नोटों के कुल मूल्य में से जो भी अधिक होगा, उतना जुर्माना देना होगा. सरकार ने आठ नवंबर को नोटबंदी की घोषणा के समय जनता को प्रतिबंधित नोट बैंकों में जमा करवाने के लिए 50 दिन का समय दिया था. यह अवधि शुक्रवार 30 दिसंबर को पूरी हो गई. कुछ शर्तों के साथ इन नोटों को रिजर्व बैंक के काउंटरों पर 31 मार्च तक अभी भी बदलवाया जा सकता है, लेकिन प्रवासी भारतीयों को 30 जून तक का मौका दिया गया है. इस अध्यादेश के तहत जुर्माने का प्रावधान 31 मार्च 2016 के बाद प्रभावी होगा. उसी दिन देश में रहने वालों के लिए नोट बदलने की अवधि पूर्णतया समाप्त हो जाएगी. बयान में कहा गया है कि इस अध्यादेश के जरिये भारतीय रिजर्व बैंक कानून-1934 में संशोधन किया गया है. इस संशोधन के जरिये चलन से बाहर किये गये बैंक नोटों को समाप्त करने की घोषणा को विधायी समर्थन मिल गया है. इस अध्यादेश से केन्द्रीय बैंक विनिर्दिष्ट तिथि के बाद प्रतिबंधित नोटों के मूल्य को चुकाने के दायित्व से मुक्त हो जाएगा.टिप्पणियां भविष्य में इन नोटों को लेकर किसी तरह का कोई विवाद खड़ा नहीं हो इसलिये मात्र नोटबंदी की अधिसूचना जारी करने को काफी नहीं माना गया और यह अध्यादेश लाया गया. बंद किए गए 500, 1000 रुपये के पुराने बंद नोट 31 मार्च के बाद भी एक निश्चित सीमा से अधिक रखने को कानून के तहत जुर्म माना जायेगा जिस पर 10,000 रपये अथवा रखी गई राशि के पांच गुणा का जुर्माना इनमें जो भी अधिक होगा लगाया जायेगा. अध्ययन एवं अनुसंधान करने वाले शोधार्थी अधिक से अधिक 25 की संख्या में यह नोट अपने पास रख सकते हैं. वर्ष 1978 में जब मोरारजी देसाई सरकार थी तब भी 1,000 रुपये, 5,000 रुपये और 10,000 रपये के नोट अमान्य करने के बाद सरकार और रिजर्व बैंक को अमान्य नोटों के दायित्व को समाप्त करने के लिये इसी तरह का अध्यादेश लाया गया था. सूत्रों ने बताया कि जब भी सरकार किसी भी कानूनी तौर पर मान्य नोट को समाप्त करेगी, उसके दायित्व से मुक्त होने के लिये इस प्रकार के संशोधन की जरूरत होती है. सरकार ने आठ नवंबर को नोटबंदी की घोषणा के समय जनता को प्रतिबंधित नोट बैंकों में जमा करवाने के लिए 50 दिन का समय दिया था. यह अवधि शुक्रवार 30 दिसंबर को पूरी हो गई. कुछ शर्तों के साथ इन नोटों को रिजर्व बैंक के काउंटरों पर 31 मार्च तक अभी भी बदलवाया जा सकता है, लेकिन प्रवासी भारतीयों को 30 जून तक का मौका दिया गया है. इस अध्यादेश के तहत जुर्माने का प्रावधान 31 मार्च 2016 के बाद प्रभावी होगा. उसी दिन देश में रहने वालों के लिए नोट बदलने की अवधि पूर्णतया समाप्त हो जाएगी. बयान में कहा गया है कि इस अध्यादेश के जरिये भारतीय रिजर्व बैंक कानून-1934 में संशोधन किया गया है. इस संशोधन के जरिये चलन से बाहर किये गये बैंक नोटों को समाप्त करने की घोषणा को विधायी समर्थन मिल गया है. इस अध्यादेश से केन्द्रीय बैंक विनिर्दिष्ट तिथि के बाद प्रतिबंधित नोटों के मूल्य को चुकाने के दायित्व से मुक्त हो जाएगा.टिप्पणियां भविष्य में इन नोटों को लेकर किसी तरह का कोई विवाद खड़ा नहीं हो इसलिये मात्र नोटबंदी की अधिसूचना जारी करने को काफी नहीं माना गया और यह अध्यादेश लाया गया. बंद किए गए 500, 1000 रुपये के पुराने बंद नोट 31 मार्च के बाद भी एक निश्चित सीमा से अधिक रखने को कानून के तहत जुर्म माना जायेगा जिस पर 10,000 रपये अथवा रखी गई राशि के पांच गुणा का जुर्माना इनमें जो भी अधिक होगा लगाया जायेगा. अध्ययन एवं अनुसंधान करने वाले शोधार्थी अधिक से अधिक 25 की संख्या में यह नोट अपने पास रख सकते हैं. वर्ष 1978 में जब मोरारजी देसाई सरकार थी तब भी 1,000 रुपये, 5,000 रुपये और 10,000 रपये के नोट अमान्य करने के बाद सरकार और रिजर्व बैंक को अमान्य नोटों के दायित्व को समाप्त करने के लिये इसी तरह का अध्यादेश लाया गया था. सूत्रों ने बताया कि जब भी सरकार किसी भी कानूनी तौर पर मान्य नोट को समाप्त करेगी, उसके दायित्व से मुक्त होने के लिये इस प्रकार के संशोधन की जरूरत होती है. बयान में कहा गया है कि इस अध्यादेश के जरिये भारतीय रिजर्व बैंक कानून-1934 में संशोधन किया गया है. इस संशोधन के जरिये चलन से बाहर किये गये बैंक नोटों को समाप्त करने की घोषणा को विधायी समर्थन मिल गया है. इस अध्यादेश से केन्द्रीय बैंक विनिर्दिष्ट तिथि के बाद प्रतिबंधित नोटों के मूल्य को चुकाने के दायित्व से मुक्त हो जाएगा.टिप्पणियां भविष्य में इन नोटों को लेकर किसी तरह का कोई विवाद खड़ा नहीं हो इसलिये मात्र नोटबंदी की अधिसूचना जारी करने को काफी नहीं माना गया और यह अध्यादेश लाया गया. बंद किए गए 500, 1000 रुपये के पुराने बंद नोट 31 मार्च के बाद भी एक निश्चित सीमा से अधिक रखने को कानून के तहत जुर्म माना जायेगा जिस पर 10,000 रपये अथवा रखी गई राशि के पांच गुणा का जुर्माना इनमें जो भी अधिक होगा लगाया जायेगा. अध्ययन एवं अनुसंधान करने वाले शोधार्थी अधिक से अधिक 25 की संख्या में यह नोट अपने पास रख सकते हैं. वर्ष 1978 में जब मोरारजी देसाई सरकार थी तब भी 1,000 रुपये, 5,000 रुपये और 10,000 रपये के नोट अमान्य करने के बाद सरकार और रिजर्व बैंक को अमान्य नोटों के दायित्व को समाप्त करने के लिये इसी तरह का अध्यादेश लाया गया था. सूत्रों ने बताया कि जब भी सरकार किसी भी कानूनी तौर पर मान्य नोट को समाप्त करेगी, उसके दायित्व से मुक्त होने के लिये इस प्रकार के संशोधन की जरूरत होती है. भविष्य में इन नोटों को लेकर किसी तरह का कोई विवाद खड़ा नहीं हो इसलिये मात्र नोटबंदी की अधिसूचना जारी करने को काफी नहीं माना गया और यह अध्यादेश लाया गया. बंद किए गए 500, 1000 रुपये के पुराने बंद नोट 31 मार्च के बाद भी एक निश्चित सीमा से अधिक रखने को कानून के तहत जुर्म माना जायेगा जिस पर 10,000 रपये अथवा रखी गई राशि के पांच गुणा का जुर्माना इनमें जो भी अधिक होगा लगाया जायेगा. अध्ययन एवं अनुसंधान करने वाले शोधार्थी अधिक से अधिक 25 की संख्या में यह नोट अपने पास रख सकते हैं. वर्ष 1978 में जब मोरारजी देसाई सरकार थी तब भी 1,000 रुपये, 5,000 रुपये और 10,000 रपये के नोट अमान्य करने के बाद सरकार और रिजर्व बैंक को अमान्य नोटों के दायित्व को समाप्त करने के लिये इसी तरह का अध्यादेश लाया गया था. सूत्रों ने बताया कि जब भी सरकार किसी भी कानूनी तौर पर मान्य नोट को समाप्त करेगी, उसके दायित्व से मुक्त होने के लिये इस प्रकार के संशोधन की जरूरत होती है. अध्ययन एवं अनुसंधान करने वाले शोधार्थी अधिक से अधिक 25 की संख्या में यह नोट अपने पास रख सकते हैं. वर्ष 1978 में जब मोरारजी देसाई सरकार थी तब भी 1,000 रुपये, 5,000 रुपये और 10,000 रपये के नोट अमान्य करने के बाद सरकार और रिजर्व बैंक को अमान्य नोटों के दायित्व को समाप्त करने के लिये इसी तरह का अध्यादेश लाया गया था. सूत्रों ने बताया कि जब भी सरकार किसी भी कानूनी तौर पर मान्य नोट को समाप्त करेगी, उसके दायित्व से मुक्त होने के लिये इस प्रकार के संशोधन की जरूरत होती है.
संक्षिप्त सारांश: पुराने नोटों को लेकर अध्यादेश को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मंजूरी दी यह है विनिर्दिष्ट बैंक नोट (दायित्व का समापन) अध्यादेश-2016 निश्चित सीमा से अधिक रखने को गैरकानूनी-दंडनीय अपराध बनाने को लेकर है यह
0
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: भारतीय पुरुष हॉकी को ओलिंपिक  में 12 साल बाद शुरुआती मैच में जीत दर्ज करने के बाद कल पूल ‘बी’ के अपने दूसरे मैच में मौजूदा ओलिंपिक चैम्पियन जर्मनी की ताकत की चुनौती से पार पाना है तो खिलाड़ियों को अपने खेल में सुधार करना होगा. भारत को शनिवार को कमजोर आयरलैंड ने कड़ी टक्कर दी, जिसके खिलाफ उसने 3-2 से जीत दर्ज की जो ओलिंपिक  में 12 साल बाद उनकी पहली जीत थी. विश्व रैंकिंग से देखा जाये तो भारत (पांचवीं रैंकिंग) आयरलैंड (12वीं रैंकिंग) के खिलाफ दबदबा बनाने के लिये स्पष्ट दावेदार था लेकिन पीआर श्रीजेश की अगुवाई वाली टीम ने अच्छी शुरुआत के बाद अंतिम क्वार्टर में अपने प्रतिद्वंद्वियों को मौके दे दिये. ड्रैग फ्लिकर रूपिंदर पाल सिंह (दो गोल) और वी आर रघुनाथ (एक गोल) ने पेनल्टी कार्नर के जरिये गोल दागे, लेकिन इस मैच के दौरान फारवर्ड पंक्ति उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी और गोल करने के कई मौके गंवा दिये. श्रीजेश हमेशा की तरह सतर्क थे, उन्होंने कुछ बचाव भी किये. लेकिन रक्षात्मक पंक्ति की समस्या कायम रही, जिससे आयरलैंड ने अंतिम क्वार्टर में दबाव बना दिया. इससे टीम ने आठ पेनल्टी कार्नर गंवा दिये. लेकिन सोमवार को भारतीय टीम जर्मनी के खिलाफ इसी तरह की गलतियां करने का जोखिम नहीं उठा सकती, विपक्षी टीम ओलिंपिक  स्वर्ण की हैट्रिक बनाने पर निगाह लगाए है. वह पिछले 2008 बीजिंग और 2012 लंदन ओलिंपिक  में स्वर्ण पदक जीत चुकी है.  जर्मनी के खिलाफ ओलिंपिक  में भारत का रिकॉर्ड भी उनके पक्ष में नहीं है. भारत ने जर्मनी के खिलाफ ओलिंपिक  में अंतिम मैच 1996 अटलांटा खेलों में जीता था जिसमें उन्होंने शुरुआती मैच में 3-0 से जीत दर्ज की थी. सिडनी और एथेंस में भारत,  जर्मनी से नहीं खेला था क्योंकि वह अलग पूल में था. हालांकि चार साल पहले लंदन में जर्मनी ने भारत को 5-2 से शिकस्त दी थी. हाल में भारत को जर्मनी के खिलाफ मिश्रित परिणाम मिले हैं. लंदन में एफआईएच चैम्पियंस ट्राफी में जर्मनी के खिलाफ भारत ने 3-1 की बढ़त बना ली थी लेकिन अंत में डिफेंस की गलतियों के कारण मुकाबला 3-3 से ड्रॉ कराया था. भारत ने चैम्पियंस ट्राफी में ऐतिहासिक रजत पदक जीता था. वेलेंसिया में हाल में आयोजित किये गये छह देशों के टूर्नामेंट में उसे जर्मनी से 0 -4 से पराजय मिली थी. जर्मनी की टीम में लंदन के पांच ओलिंपिक  स्वर्ण पदकधारी खिलाड़ी हैं और मिडफील्डर से डिफेंडर बने मोरिट्ज फुर्तसे भी शामिल हैं जो दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में शामिल हैं. उनकी टीम में 22 वर्षीय स्ट्राइकर क्रिस्टोफर रूअर और फ्लोरियन फाक्स ऐसे अन्य खिलाड़ी हैं जो विश्व रैंकिंग में तीसरी रैंकिंग पर काबिज हैं. जर्मनी ने अपना अभियान कनाडा को 6 -2 से हराकर शुरू किया है.टिप्पणियां  (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) विश्व रैंकिंग से देखा जाये तो भारत (पांचवीं रैंकिंग) आयरलैंड (12वीं रैंकिंग) के खिलाफ दबदबा बनाने के लिये स्पष्ट दावेदार था लेकिन पीआर श्रीजेश की अगुवाई वाली टीम ने अच्छी शुरुआत के बाद अंतिम क्वार्टर में अपने प्रतिद्वंद्वियों को मौके दे दिये. ड्रैग फ्लिकर रूपिंदर पाल सिंह (दो गोल) और वी आर रघुनाथ (एक गोल) ने पेनल्टी कार्नर के जरिये गोल दागे, लेकिन इस मैच के दौरान फारवर्ड पंक्ति उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी और गोल करने के कई मौके गंवा दिये. श्रीजेश हमेशा की तरह सतर्क थे, उन्होंने कुछ बचाव भी किये. लेकिन रक्षात्मक पंक्ति की समस्या कायम रही, जिससे आयरलैंड ने अंतिम क्वार्टर में दबाव बना दिया. इससे टीम ने आठ पेनल्टी कार्नर गंवा दिये. लेकिन सोमवार को भारतीय टीम जर्मनी के खिलाफ इसी तरह की गलतियां करने का जोखिम नहीं उठा सकती, विपक्षी टीम ओलिंपिक  स्वर्ण की हैट्रिक बनाने पर निगाह लगाए है. वह पिछले 2008 बीजिंग और 2012 लंदन ओलिंपिक  में स्वर्ण पदक जीत चुकी है.  जर्मनी के खिलाफ ओलिंपिक  में भारत का रिकॉर्ड भी उनके पक्ष में नहीं है. भारत ने जर्मनी के खिलाफ ओलिंपिक  में अंतिम मैच 1996 अटलांटा खेलों में जीता था जिसमें उन्होंने शुरुआती मैच में 3-0 से जीत दर्ज की थी. सिडनी और एथेंस में भारत,  जर्मनी से नहीं खेला था क्योंकि वह अलग पूल में था. हालांकि चार साल पहले लंदन में जर्मनी ने भारत को 5-2 से शिकस्त दी थी. हाल में भारत को जर्मनी के खिलाफ मिश्रित परिणाम मिले हैं. लंदन में एफआईएच चैम्पियंस ट्राफी में जर्मनी के खिलाफ भारत ने 3-1 की बढ़त बना ली थी लेकिन अंत में डिफेंस की गलतियों के कारण मुकाबला 3-3 से ड्रॉ कराया था. भारत ने चैम्पियंस ट्राफी में ऐतिहासिक रजत पदक जीता था. वेलेंसिया में हाल में आयोजित किये गये छह देशों के टूर्नामेंट में उसे जर्मनी से 0 -4 से पराजय मिली थी. जर्मनी की टीम में लंदन के पांच ओलिंपिक  स्वर्ण पदकधारी खिलाड़ी हैं और मिडफील्डर से डिफेंडर बने मोरिट्ज फुर्तसे भी शामिल हैं जो दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में शामिल हैं. उनकी टीम में 22 वर्षीय स्ट्राइकर क्रिस्टोफर रूअर और फ्लोरियन फाक्स ऐसे अन्य खिलाड़ी हैं जो विश्व रैंकिंग में तीसरी रैंकिंग पर काबिज हैं. जर्मनी ने अपना अभियान कनाडा को 6 -2 से हराकर शुरू किया है.टिप्पणियां  (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) लेकिन सोमवार को भारतीय टीम जर्मनी के खिलाफ इसी तरह की गलतियां करने का जोखिम नहीं उठा सकती, विपक्षी टीम ओलिंपिक  स्वर्ण की हैट्रिक बनाने पर निगाह लगाए है. वह पिछले 2008 बीजिंग और 2012 लंदन ओलिंपिक  में स्वर्ण पदक जीत चुकी है.  जर्मनी के खिलाफ ओलिंपिक  में भारत का रिकॉर्ड भी उनके पक्ष में नहीं है. भारत ने जर्मनी के खिलाफ ओलिंपिक  में अंतिम मैच 1996 अटलांटा खेलों में जीता था जिसमें उन्होंने शुरुआती मैच में 3-0 से जीत दर्ज की थी. सिडनी और एथेंस में भारत,  जर्मनी से नहीं खेला था क्योंकि वह अलग पूल में था. हालांकि चार साल पहले लंदन में जर्मनी ने भारत को 5-2 से शिकस्त दी थी. हाल में भारत को जर्मनी के खिलाफ मिश्रित परिणाम मिले हैं. लंदन में एफआईएच चैम्पियंस ट्राफी में जर्मनी के खिलाफ भारत ने 3-1 की बढ़त बना ली थी लेकिन अंत में डिफेंस की गलतियों के कारण मुकाबला 3-3 से ड्रॉ कराया था. भारत ने चैम्पियंस ट्राफी में ऐतिहासिक रजत पदक जीता था. वेलेंसिया में हाल में आयोजित किये गये छह देशों के टूर्नामेंट में उसे जर्मनी से 0 -4 से पराजय मिली थी. जर्मनी की टीम में लंदन के पांच ओलिंपिक  स्वर्ण पदकधारी खिलाड़ी हैं और मिडफील्डर से डिफेंडर बने मोरिट्ज फुर्तसे भी शामिल हैं जो दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में शामिल हैं. उनकी टीम में 22 वर्षीय स्ट्राइकर क्रिस्टोफर रूअर और फ्लोरियन फाक्स ऐसे अन्य खिलाड़ी हैं जो विश्व रैंकिंग में तीसरी रैंकिंग पर काबिज हैं. जर्मनी ने अपना अभियान कनाडा को 6 -2 से हराकर शुरू किया है.टिप्पणियां  (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) हाल में भारत को जर्मनी के खिलाफ मिश्रित परिणाम मिले हैं. लंदन में एफआईएच चैम्पियंस ट्राफी में जर्मनी के खिलाफ भारत ने 3-1 की बढ़त बना ली थी लेकिन अंत में डिफेंस की गलतियों के कारण मुकाबला 3-3 से ड्रॉ कराया था. भारत ने चैम्पियंस ट्राफी में ऐतिहासिक रजत पदक जीता था. वेलेंसिया में हाल में आयोजित किये गये छह देशों के टूर्नामेंट में उसे जर्मनी से 0 -4 से पराजय मिली थी. जर्मनी की टीम में लंदन के पांच ओलिंपिक  स्वर्ण पदकधारी खिलाड़ी हैं और मिडफील्डर से डिफेंडर बने मोरिट्ज फुर्तसे भी शामिल हैं जो दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में शामिल हैं. उनकी टीम में 22 वर्षीय स्ट्राइकर क्रिस्टोफर रूअर और फ्लोरियन फाक्स ऐसे अन्य खिलाड़ी हैं जो विश्व रैंकिंग में तीसरी रैंकिंग पर काबिज हैं. जर्मनी ने अपना अभियान कनाडा को 6 -2 से हराकर शुरू किया है.टिप्पणियां  (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)  (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
संक्षिप्त सारांश: सोमवार को ओलिंपिक चैंपियन जर्मन टीम से करना है मुकाबला अंतिम क्‍वार्टर में आयरलैंड को काफी मौके दिये थे भारतीय टीम ने रक्षा पंक्ति में दिखी दरार, जिससे आयरलैंड ने बनाया था दबाव
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['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: पाकिस्तान की विदेशमंत्री हिना रब्बानी खार ने मानवाधिकार कार्यकर्ता किशोरी मलाला यूसुफजई पर तालिबान द्वारा किए गए हमले को आंखें खोलने वाली घटना करार देते हुए कहा है कि उनके देश के लिए संभवत: यह निर्णायक हो सकता है। उन्होंने कहा, आज हमारे (पाकिस्तान) लिए यह (मलाला पर हमला) एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। इसके लिए मैं अल्लाह से दुआ करती हूं। खार ने सीएनएन के साथ एक साक्षात्कार में कहा, आज हमारे सामने भविष्य की दो अलग-अलग स्थितियां हैं। इसमें से एक का प्रतिनिधित्व उज्ज्वल, युवा, प्रगतिशील लड़की मलाला यूसुफजई कर रही हैं, जो अपने शिक्षा के अधिकार और एक सामान्य नागरिक की तरह जीने के अधिकार की खातिर लड़ रही हैं। और दूसरी है एक खास तरह का थोपा गया तरीका, जो उग्रवादी और एक आतंकवादी तरीका है।टिप्पणियां खार ने कहा, पाकिस्तान में मलाया यूसुफजई ने जो कर दिखाया है, ऐसा कई सैन्य कार्रवाइयों से भी नहीं किया जा सका। उन्होंने इसे एक ज्वलंत सवाल के रूप में पेश किया है। उन्होंने इसे इस तरह रखा है कि आप उस भविष्य के साथ हैं, जिसका वह प्रतिनिधित्व करती हैं अथवा उस भविष्य के साथ, जो वे थोपने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, आप जो देख रहे हैं वह यह कि कुछ गिने-चुने तत्व इसे जायज ठहराने की कोशिश कर रहे हैं। मेरे लिहाज से यहां खतरनाक संकेत यह है कि ये लोग उस पर हमला करने के बाद महसूस करते हैं कि उनके पास इस तरह की कार्रवाई के लिए सही तर्क हैं। इसे सभी पाकिस्तानियों ने ठुकरा दिया है। उन्होंने कहा, आज हमारे (पाकिस्तान) लिए यह (मलाला पर हमला) एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। इसके लिए मैं अल्लाह से दुआ करती हूं। खार ने सीएनएन के साथ एक साक्षात्कार में कहा, आज हमारे सामने भविष्य की दो अलग-अलग स्थितियां हैं। इसमें से एक का प्रतिनिधित्व उज्ज्वल, युवा, प्रगतिशील लड़की मलाला यूसुफजई कर रही हैं, जो अपने शिक्षा के अधिकार और एक सामान्य नागरिक की तरह जीने के अधिकार की खातिर लड़ रही हैं। और दूसरी है एक खास तरह का थोपा गया तरीका, जो उग्रवादी और एक आतंकवादी तरीका है।टिप्पणियां खार ने कहा, पाकिस्तान में मलाया यूसुफजई ने जो कर दिखाया है, ऐसा कई सैन्य कार्रवाइयों से भी नहीं किया जा सका। उन्होंने इसे एक ज्वलंत सवाल के रूप में पेश किया है। उन्होंने इसे इस तरह रखा है कि आप उस भविष्य के साथ हैं, जिसका वह प्रतिनिधित्व करती हैं अथवा उस भविष्य के साथ, जो वे थोपने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, आप जो देख रहे हैं वह यह कि कुछ गिने-चुने तत्व इसे जायज ठहराने की कोशिश कर रहे हैं। मेरे लिहाज से यहां खतरनाक संकेत यह है कि ये लोग उस पर हमला करने के बाद महसूस करते हैं कि उनके पास इस तरह की कार्रवाई के लिए सही तर्क हैं। इसे सभी पाकिस्तानियों ने ठुकरा दिया है। खार ने कहा, पाकिस्तान में मलाया यूसुफजई ने जो कर दिखाया है, ऐसा कई सैन्य कार्रवाइयों से भी नहीं किया जा सका। उन्होंने इसे एक ज्वलंत सवाल के रूप में पेश किया है। उन्होंने इसे इस तरह रखा है कि आप उस भविष्य के साथ हैं, जिसका वह प्रतिनिधित्व करती हैं अथवा उस भविष्य के साथ, जो वे थोपने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, आप जो देख रहे हैं वह यह कि कुछ गिने-चुने तत्व इसे जायज ठहराने की कोशिश कर रहे हैं। मेरे लिहाज से यहां खतरनाक संकेत यह है कि ये लोग उस पर हमला करने के बाद महसूस करते हैं कि उनके पास इस तरह की कार्रवाई के लिए सही तर्क हैं। इसे सभी पाकिस्तानियों ने ठुकरा दिया है। उन्होंने कहा, आप जो देख रहे हैं वह यह कि कुछ गिने-चुने तत्व इसे जायज ठहराने की कोशिश कर रहे हैं। मेरे लिहाज से यहां खतरनाक संकेत यह है कि ये लोग उस पर हमला करने के बाद महसूस करते हैं कि उनके पास इस तरह की कार्रवाई के लिए सही तर्क हैं। इसे सभी पाकिस्तानियों ने ठुकरा दिया है।
संक्षिप्त सारांश: पाकिस्तानी विदेशमंत्री ने 14 साल की मानवाधिकार कार्यकर्ता मलाला यूसुफजई पर तालिबान के हमले को आंखें खोलने वाली घटना बताते हुए कहा कि उनके देश के लिए यह निर्णायक हो सकता है।
10
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: बोर्ड दो अहम मुद्दों पर अपनी रणनीति बनाएगा. पहली यह कि अगर मस्जिद के पक्षकार केस जीत जाते हैं तो उस हालत में उनका रुख क्या हो. अभी गुरुवार को ही लखनऊ में मुस्लिम बुद्धिजीवियों के एक सम्मेलन में यह प्रस्ताव पास हुआ है कि विवादित जमीन सुलह करके हिंदुओं को भगवान राम का मंदिर बनाने के लिए दे दी जाए. और अगर किसी वजह से समझौता न हो पाए या अगर मुसलमान मुक़दमा जीत भी जाएं तो भी वो उस जमीन को हिंदुओं को गिफ्ट कर दें. अब मुसलमान यह समझने लगे हैं कि अगर वे मुकदमा जीत भी जाएं तो भी अब वहां से रामलला की मूर्तियां हटाकर मस्जिद बनाना मुमकिन नहीं है. बैठक में ऐसे हालात के लिए बोर्ड अपना रुख तय करेगा. दूसरा मसला यह है कि अगर मंदिर पक्ष मुकदमा जीत जाता है तो उसके बाद देश भर में जिस तरह के विजय जुलूस और जश्न होंगे उसके नतीजे में हिंसा का अंदेशा है. इन हालात से कैसे निपटा जाए, बोर्ड इस पर भी अपनी राय कायम करेगा. एक ऐसे वक्त में जब मुसलमानों का एक बड़ा तबका चाहता है कि आपसी भाईचारे के लिए विवादित जमीन भगवान राम का मंदिर बनाने के लिए हिंदुओं को दे दी जाए, बोर्ड पर इसका भी दबाव जरूर होगा.
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड दो अहम मुद्दों पर अपनी रणनीति बनाएगा अगर मस्जिद के पक्षकार केस जीते तो उस हालत में रुख क्या हो? यदि मंदिर पक्ष जीता तो उसके बाद देश में बनने वाले हालात में क्या रुख हो?
3
['hin']
एक सारांश बनाओ: उद्योग जगत की तरक्की की राह में पर्यावरण नियमों के अवरोध पैदा करने संबंधी उद्योगपतियों की चिंताओं को दूर करने की कोशिश के तहत पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि उनका मंत्रालय तेज औद्योगिकी विकास में खलल पैदा नहीं कर रहा है लेकिन साफ कर दिया कि नियमों का पालन करते हुए ही सारे फैसले किए जाएंगे। रमेश ने यह भी कहा कि यह धारणा गलत है कि वह बड़ी कंपनियों और बड़ी परियोजनाओं के मामले ही हस्तक्षेप कर रहे हैं और उन्हें निशाने पर ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनका मंत्रालय उन्हीं मामलों में हस्तक्षेप करता है, जिनके बारे में जनता की ओर से सवाल उठाए जाते हैं। रमेश ने उद्योग जगत की आशंकाओं को दूर करने की कोशिश के तहत भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। वह 24 जनवरी को फिक्की के सदस्यों से भी चर्चा करने वाले हैं। पर्यावरण मंत्री ने सीआईआई के साथ बैठक के बाद संवाददाताओं को बताया, मैं यह साफ कर देना चाहता हूं कि पर्यावरण मंत्रालय तेज औद्योगिक विकास की राह में खलल पैदा नहीं कर रहा है। लेकिन मंत्रालय सभी निर्णय नियमों के मुताबिक और उचित तरीके से करेगा। कंपनियों को वन संरक्षण कानून, पर्यावरण संरक्षण कानून, वनाधिकार कानून, वन्यजीव संरक्षण कानून और तटीय नियमन क्षेत्र अधिसूचना 2011 के अनुसार ही चलना होगा। उन्होंने कहा, मैं उद्योग जगत की चिंताओं को दूर करने की कोशिश कर रहा हूं लेकिन इसके ये मायने कतई नहीं हैं कि कानूनों में कोई नरमी लाई जाएगी या उन्हें खत्म कर दिया जाएगा।
संक्षिप्त पाठ: रमेश ने कहा कि उनका मंत्रालय तेज विकास में खलल पैदा नहीं कर रहा है लेकिन साफ किया कि नियमों का पालन करते हुए ही सारे फैसले किए जाएंगे।
30
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: खराब फॉर्म के कारण टेस्ट टीम से बाहर किए गए भारत 'ए' के कप्तान गौतम गंभीर शनिवार को जब ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीन-दिवसीय अभ्यास मैच में टीम की अगुवाई करेंगे, तो उनकी कोशिश खुद को साबित करने की होगी। बाएं हाथ के स्पिनर ने तीन साल से टेस्ट शतक नहीं जड़ा है और उन्हें 22 फरवरी से ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शुरू हो रही चार टेस्ट मैचों की शृंखला के लिए टीम में नहीं चुना गया। उनकी जगह शिखर धवन को लिया गया, जिन्हें पहले 'ए' टीम का कप्तान बनाया गया था।टिप्पणियां गंभीर को एक समय सीनियर राष्ट्रीय टीम में कप्तान की भूमिका की दौड़ में देखा जा रहा था, लेकिन खराब फॉर्म के कारण उन्हें टीम से बाहर होना पड़ा। भारत 'ए' लाइन अप में वह अब भी बड़े स्टार हैं और बोर्ड अध्यक्ष एकादश के खिलाफ शुरुआती अभ्यास मैच में ठीकठाक प्रदर्शन करने वाली ऑस्ट्रेलिया की टीम के खिलाफ खुद को साबित करना चाहेंगे। ऑस्ट्रेलिया के शीर्ष खिलाड़ी, जिसमें कप्तान माइकल क्लार्क भी शामिल हैं, वेस्टइंडीज के खिलाफ घरेलू सीमित ओवरों की शृंखला में खेल रहे थे, जिससे वह पहले अभ्यास मैच में नहीं खेल पाए थे। शुरुआती दो-दिवसीय मैच यहीं खेला गया था, जो ड्रॉ हुआ था। बाएं हाथ के स्पिनर ने तीन साल से टेस्ट शतक नहीं जड़ा है और उन्हें 22 फरवरी से ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शुरू हो रही चार टेस्ट मैचों की शृंखला के लिए टीम में नहीं चुना गया। उनकी जगह शिखर धवन को लिया गया, जिन्हें पहले 'ए' टीम का कप्तान बनाया गया था।टिप्पणियां गंभीर को एक समय सीनियर राष्ट्रीय टीम में कप्तान की भूमिका की दौड़ में देखा जा रहा था, लेकिन खराब फॉर्म के कारण उन्हें टीम से बाहर होना पड़ा। भारत 'ए' लाइन अप में वह अब भी बड़े स्टार हैं और बोर्ड अध्यक्ष एकादश के खिलाफ शुरुआती अभ्यास मैच में ठीकठाक प्रदर्शन करने वाली ऑस्ट्रेलिया की टीम के खिलाफ खुद को साबित करना चाहेंगे। ऑस्ट्रेलिया के शीर्ष खिलाड़ी, जिसमें कप्तान माइकल क्लार्क भी शामिल हैं, वेस्टइंडीज के खिलाफ घरेलू सीमित ओवरों की शृंखला में खेल रहे थे, जिससे वह पहले अभ्यास मैच में नहीं खेल पाए थे। शुरुआती दो-दिवसीय मैच यहीं खेला गया था, जो ड्रॉ हुआ था। गंभीर को एक समय सीनियर राष्ट्रीय टीम में कप्तान की भूमिका की दौड़ में देखा जा रहा था, लेकिन खराब फॉर्म के कारण उन्हें टीम से बाहर होना पड़ा। भारत 'ए' लाइन अप में वह अब भी बड़े स्टार हैं और बोर्ड अध्यक्ष एकादश के खिलाफ शुरुआती अभ्यास मैच में ठीकठाक प्रदर्शन करने वाली ऑस्ट्रेलिया की टीम के खिलाफ खुद को साबित करना चाहेंगे। ऑस्ट्रेलिया के शीर्ष खिलाड़ी, जिसमें कप्तान माइकल क्लार्क भी शामिल हैं, वेस्टइंडीज के खिलाफ घरेलू सीमित ओवरों की शृंखला में खेल रहे थे, जिससे वह पहले अभ्यास मैच में नहीं खेल पाए थे। शुरुआती दो-दिवसीय मैच यहीं खेला गया था, जो ड्रॉ हुआ था। ऑस्ट्रेलिया के शीर्ष खिलाड़ी, जिसमें कप्तान माइकल क्लार्क भी शामिल हैं, वेस्टइंडीज के खिलाफ घरेलू सीमित ओवरों की शृंखला में खेल रहे थे, जिससे वह पहले अभ्यास मैच में नहीं खेल पाए थे। शुरुआती दो-दिवसीय मैच यहीं खेला गया था, जो ड्रॉ हुआ था।
यहाँ एक सारांश है:खराब फॉर्म के कारण टेस्ट टीम से बाहर किए गए भारत 'ए' के कप्तान गौतम गंभीर शनिवार को जब ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीन-दिवसीय अभ्यास मैच में टीम की अगुवाई करेंगे, तो उनकी कोशिश खुद को साबित करने की होगी।
12
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: देश के शेयर बाजारों में सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन मिलाजुला रुख देखने को मिला। सुबह तेजी के साथ शुरुआत करने वाला सेंसेक्स 16.90 अंक गिरकर 17301.91 और निफ्टी नौ अंक गिरकर 5239.15 पर बंद हुआ।टिप्पणियां सुबह सेंसेक्स 52.12 अंकों की बढ़त के साथ 17370.93 पर जबकि निफ्टी 18.20 अंकों की तेजी के साथ 5266.35 पर खुला था। वहीं करीब 10.00 बजे बम्बई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्स 63.74 अंकों की बढ़त के साथ 17382.55 पर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 17.65 अंकों की तेजी के साथ 5266.80 पर कारोबार कर रहा था। बीएसई के मिडकैप एवं स्मॉलकैप सूचकांकों में भी तेजी का रुख रहा था। सुबह सेंसेक्स 52.12 अंकों की बढ़त के साथ 17370.93 पर जबकि निफ्टी 18.20 अंकों की तेजी के साथ 5266.35 पर खुला था। वहीं करीब 10.00 बजे बम्बई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्स 63.74 अंकों की बढ़त के साथ 17382.55 पर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 17.65 अंकों की तेजी के साथ 5266.80 पर कारोबार कर रहा था। बीएसई के मिडकैप एवं स्मॉलकैप सूचकांकों में भी तेजी का रुख रहा था। वहीं करीब 10.00 बजे बम्बई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्स 63.74 अंकों की बढ़त के साथ 17382.55 पर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 17.65 अंकों की तेजी के साथ 5266.80 पर कारोबार कर रहा था। बीएसई के मिडकैप एवं स्मॉलकैप सूचकांकों में भी तेजी का रुख रहा था।
यहाँ एक सारांश है:सेंसेक्स आज 16.90 अंक गिरकर 17301.91 और निफ्टी नौ अंक गिरकर 5239.15 पर बंद हुआ।
18
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: नरेंद्र मोदी द्वारा गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर सहारा और बिड़ला से पैसा लेने के बारे में कांग्रेस उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी के आरोपों को 'पूरी तरह से आधारहीन और शर्मनाक' करार देते हुए भाजपा ने बुधवार को कहा कि प्रधानमंत्री गंगा की तरह से पवित्र हैं और अगस्ता वेस्टलैंड मामले की जांच से ध्यान बांटने का प्रयास है, जिसमें कांग्रेस नेताओं और 'परिवार' के नाम आ रहे हैं. राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि ये आरोप कांग्रेस नेता की हताशा को प्रदर्शित करते हैं और यह अगस्ता वेस्टलैंड मामले की जांच से ध्यान बांटने का प्रयास है, जिसमें कांग्रेस नेताओं और 'परिवार' के नाम आ रहे हैं. प्रसाद ने भाजपा मुख्यालय में संवाददाताओं से कहा, 'प्रधानमंत्री के खिलाफ लगाए गए आरोप आधारहीन, गलत, शर्मनाक और दुर्भावना से प्रेरित हैं और यह पार्टी के नेतृत्व करने में राहुल गांधी की हताशा को प्रदर्शित कर रहा है, क्योंकि एक राज्य के बाद दूसरे राज्य में उनकी पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ रहा है'. रविशंकर प्रसाद ने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि राहुल गांधी ने संप्रग सरकार के दौरान हुए घोटालों को लेकर आवाज क्यों नहीं उठाई. उन्होंने कहा कि देश के लोग कांग्रेस उपाध्यक्ष को गंभीरता से नहीं लेते हैं. भाजपा नेता ने कहा, 'राहुल गांधी खुद संप्रग सरकार के 10 सालों के शासनकाल के दौरान भ्रष्टाचार के सबसे बड़ सहयोगी रहे.. तब उन्होंने एक शब्द भी नहीं कहा जब कांग्रेस के शासन के दौरान करोड़ों रुपये की लूट हो रही थी'. प्रसाद ने कहा, 'हमारे प्रधानमंत्री गंगा नदी की तरह पवित्र हैं'. उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने भी कहा है कि इन आरोपों का कोई आधार नहीं है. रविशंकर प्रसाद उस मामले का जिक्र कर रहे थे, जिसमें उच्चतम न्यायालय ने मोदी के खिलाफ आरोपों की विशेष जांच टीम से जांच कराने की मांग को अस्वीकार कर दिया था. इसमें आरोप लगाया गया था कि मोदी को 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले दो कंपनियों से 65 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था. पार्टी प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्ह राव ने कहा कि राहुल गांधी अपरिवक्व हैं और केवल झूठ बोलने में लगे हैं और उनके झूठ के कारण ही जनता उन्हें गंभीरता से नहीं लेती है.टिप्पणियां उन्होंने कहा, 'देश के लोगों ने उन्हें गंभीरता से लेना छोड़ दिया है. राहुल गांधी झूठ बोलते हैं और झूठे हैं. वे जो कहते हैं, उसमें कोई तथ्य नहीं है. वे केवल अपनी और अपनी पार्टी की अक्षमता को ही प्रदर्शित कर रहे हैं'. उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी ने बुधवार को आरोप लगाया कि गुजरात के प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी ने सहारा और बिड़ला समूहों से पैसे लिए थे और इसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए.(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि ये आरोप कांग्रेस नेता की हताशा को प्रदर्शित करते हैं और यह अगस्ता वेस्टलैंड मामले की जांच से ध्यान बांटने का प्रयास है, जिसमें कांग्रेस नेताओं और 'परिवार' के नाम आ रहे हैं. प्रसाद ने भाजपा मुख्यालय में संवाददाताओं से कहा, 'प्रधानमंत्री के खिलाफ लगाए गए आरोप आधारहीन, गलत, शर्मनाक और दुर्भावना से प्रेरित हैं और यह पार्टी के नेतृत्व करने में राहुल गांधी की हताशा को प्रदर्शित कर रहा है, क्योंकि एक राज्य के बाद दूसरे राज्य में उनकी पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ रहा है'. रविशंकर प्रसाद ने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि राहुल गांधी ने संप्रग सरकार के दौरान हुए घोटालों को लेकर आवाज क्यों नहीं उठाई. उन्होंने कहा कि देश के लोग कांग्रेस उपाध्यक्ष को गंभीरता से नहीं लेते हैं. भाजपा नेता ने कहा, 'राहुल गांधी खुद संप्रग सरकार के 10 सालों के शासनकाल के दौरान भ्रष्टाचार के सबसे बड़ सहयोगी रहे.. तब उन्होंने एक शब्द भी नहीं कहा जब कांग्रेस के शासन के दौरान करोड़ों रुपये की लूट हो रही थी'. प्रसाद ने कहा, 'हमारे प्रधानमंत्री गंगा नदी की तरह पवित्र हैं'. उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने भी कहा है कि इन आरोपों का कोई आधार नहीं है. रविशंकर प्रसाद उस मामले का जिक्र कर रहे थे, जिसमें उच्चतम न्यायालय ने मोदी के खिलाफ आरोपों की विशेष जांच टीम से जांच कराने की मांग को अस्वीकार कर दिया था. इसमें आरोप लगाया गया था कि मोदी को 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले दो कंपनियों से 65 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था. पार्टी प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्ह राव ने कहा कि राहुल गांधी अपरिवक्व हैं और केवल झूठ बोलने में लगे हैं और उनके झूठ के कारण ही जनता उन्हें गंभीरता से नहीं लेती है.टिप्पणियां उन्होंने कहा, 'देश के लोगों ने उन्हें गंभीरता से लेना छोड़ दिया है. राहुल गांधी झूठ बोलते हैं और झूठे हैं. वे जो कहते हैं, उसमें कोई तथ्य नहीं है. वे केवल अपनी और अपनी पार्टी की अक्षमता को ही प्रदर्शित कर रहे हैं'. उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी ने बुधवार को आरोप लगाया कि गुजरात के प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी ने सहारा और बिड़ला समूहों से पैसे लिए थे और इसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए.(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) प्रसाद ने भाजपा मुख्यालय में संवाददाताओं से कहा, 'प्रधानमंत्री के खिलाफ लगाए गए आरोप आधारहीन, गलत, शर्मनाक और दुर्भावना से प्रेरित हैं और यह पार्टी के नेतृत्व करने में राहुल गांधी की हताशा को प्रदर्शित कर रहा है, क्योंकि एक राज्य के बाद दूसरे राज्य में उनकी पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ रहा है'. रविशंकर प्रसाद ने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि राहुल गांधी ने संप्रग सरकार के दौरान हुए घोटालों को लेकर आवाज क्यों नहीं उठाई. उन्होंने कहा कि देश के लोग कांग्रेस उपाध्यक्ष को गंभीरता से नहीं लेते हैं. भाजपा नेता ने कहा, 'राहुल गांधी खुद संप्रग सरकार के 10 सालों के शासनकाल के दौरान भ्रष्टाचार के सबसे बड़ सहयोगी रहे.. तब उन्होंने एक शब्द भी नहीं कहा जब कांग्रेस के शासन के दौरान करोड़ों रुपये की लूट हो रही थी'. प्रसाद ने कहा, 'हमारे प्रधानमंत्री गंगा नदी की तरह पवित्र हैं'. उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने भी कहा है कि इन आरोपों का कोई आधार नहीं है. रविशंकर प्रसाद उस मामले का जिक्र कर रहे थे, जिसमें उच्चतम न्यायालय ने मोदी के खिलाफ आरोपों की विशेष जांच टीम से जांच कराने की मांग को अस्वीकार कर दिया था. इसमें आरोप लगाया गया था कि मोदी को 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले दो कंपनियों से 65 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था. पार्टी प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्ह राव ने कहा कि राहुल गांधी अपरिवक्व हैं और केवल झूठ बोलने में लगे हैं और उनके झूठ के कारण ही जनता उन्हें गंभीरता से नहीं लेती है.टिप्पणियां उन्होंने कहा, 'देश के लोगों ने उन्हें गंभीरता से लेना छोड़ दिया है. राहुल गांधी झूठ बोलते हैं और झूठे हैं. वे जो कहते हैं, उसमें कोई तथ्य नहीं है. वे केवल अपनी और अपनी पार्टी की अक्षमता को ही प्रदर्शित कर रहे हैं'. उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी ने बुधवार को आरोप लगाया कि गुजरात के प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी ने सहारा और बिड़ला समूहों से पैसे लिए थे और इसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए.(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) भाजपा नेता ने कहा, 'राहुल गांधी खुद संप्रग सरकार के 10 सालों के शासनकाल के दौरान भ्रष्टाचार के सबसे बड़ सहयोगी रहे.. तब उन्होंने एक शब्द भी नहीं कहा जब कांग्रेस के शासन के दौरान करोड़ों रुपये की लूट हो रही थी'. प्रसाद ने कहा, 'हमारे प्रधानमंत्री गंगा नदी की तरह पवित्र हैं'. उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने भी कहा है कि इन आरोपों का कोई आधार नहीं है. रविशंकर प्रसाद उस मामले का जिक्र कर रहे थे, जिसमें उच्चतम न्यायालय ने मोदी के खिलाफ आरोपों की विशेष जांच टीम से जांच कराने की मांग को अस्वीकार कर दिया था. इसमें आरोप लगाया गया था कि मोदी को 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले दो कंपनियों से 65 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था. पार्टी प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्ह राव ने कहा कि राहुल गांधी अपरिवक्व हैं और केवल झूठ बोलने में लगे हैं और उनके झूठ के कारण ही जनता उन्हें गंभीरता से नहीं लेती है.टिप्पणियां उन्होंने कहा, 'देश के लोगों ने उन्हें गंभीरता से लेना छोड़ दिया है. राहुल गांधी झूठ बोलते हैं और झूठे हैं. वे जो कहते हैं, उसमें कोई तथ्य नहीं है. वे केवल अपनी और अपनी पार्टी की अक्षमता को ही प्रदर्शित कर रहे हैं'. उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी ने बुधवार को आरोप लगाया कि गुजरात के प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी ने सहारा और बिड़ला समूहों से पैसे लिए थे और इसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए.(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) रविशंकर प्रसाद उस मामले का जिक्र कर रहे थे, जिसमें उच्चतम न्यायालय ने मोदी के खिलाफ आरोपों की विशेष जांच टीम से जांच कराने की मांग को अस्वीकार कर दिया था. इसमें आरोप लगाया गया था कि मोदी को 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले दो कंपनियों से 65 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था. पार्टी प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्ह राव ने कहा कि राहुल गांधी अपरिवक्व हैं और केवल झूठ बोलने में लगे हैं और उनके झूठ के कारण ही जनता उन्हें गंभीरता से नहीं लेती है.टिप्पणियां उन्होंने कहा, 'देश के लोगों ने उन्हें गंभीरता से लेना छोड़ दिया है. राहुल गांधी झूठ बोलते हैं और झूठे हैं. वे जो कहते हैं, उसमें कोई तथ्य नहीं है. वे केवल अपनी और अपनी पार्टी की अक्षमता को ही प्रदर्शित कर रहे हैं'. उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी ने बुधवार को आरोप लगाया कि गुजरात के प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी ने सहारा और बिड़ला समूहों से पैसे लिए थे और इसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए.(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) उन्होंने कहा, 'देश के लोगों ने उन्हें गंभीरता से लेना छोड़ दिया है. राहुल गांधी झूठ बोलते हैं और झूठे हैं. वे जो कहते हैं, उसमें कोई तथ्य नहीं है. वे केवल अपनी और अपनी पार्टी की अक्षमता को ही प्रदर्शित कर रहे हैं'. उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी ने बुधवार को आरोप लगाया कि गुजरात के प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी ने सहारा और बिड़ला समूहों से पैसे लिए थे और इसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए.(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
संक्षिप्त पाठ: यह अगस्ता वेस्टलैंड मामले की जांच से ध्यान बांटने का प्रयास- रविशंकर देश के लोग कांग्रेस उपाध्यक्ष को गंभीरता से नहीं लेते- केंद्रीय मंत्री राहुल गांधी अपरिवक्व हैं - जीवीएल नरसिम्ह राव
14
['hin']
एक सारांश बनाओ: पश्चिम बंगाल के नए कृषि राज्यमंत्री बीआर मन्ना को सिंगूर में भूमि गंवाने वाले किसानों के आक्रोशपूर्ण विरोध का सामना करना पड़ा। किसानों का कहना था कि अगर उन्हें मालूम होता कि उन्हें उनके भाग्य के सहारे छोड़ दिया जाएगा, तो वे टाटा नैनो परियोजना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं होते। सिंगूर आंदोलन से नजदीक से जुड़े जिले के हरिपाल से तृणमूल कांग्रेस के विधायक मन्ना से लोगों की शिकायत थी, नैनो कार फैक्टरी के लिए हमसे ली गई जमीन के एवज में हम धन चाहते हैं। हमने डेढ़ साल (जब से तृणमूल कांग्रेस सत्ता में आई) तक मुआवजा मिलने का इंतजार किया, लेकिन अब हमें इसके बारे में सुनने को भी नहीं मिलता। अब हमें भीख मांगने के लिए छोड़ दिया गया है। ये लोग भूमि गंवाने वालों में से थे जिन्होंने अपने जमीन के लिए पूर्ववर्ती वाम मोर्चा सरकार से न तो किसी मुआवजे के लिए दस्तखत किया और न ही कोई मुआवजा लिया है। परियोजना स्थल में शामिल किए गए जमीन वाले स्थान गोपालनगर, बेराबेरी और खासेरबेरी गांव के ये लोग राज्य सरकार द्वारा दिए जाने वाले चावल के कूपन को लेने के लिए बीडीओ कार्यालय के सामने इकट्ठा हुए थे। कूपन वितरण की देखभाल करने आए मन्ना ने लोगों से कहा कि प्रदेश सरकार सिंगूर के भूमि गंवाने वाले लोगों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के बारे में गंभीर है। उन्होंने कहा, यह तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद प्रभावित लोगों के लिए भूमि पुनर्वास योजना पर पहले मंत्रिमंडलीय फैसले में परिलक्षित है।टिप्पणियां मन्ना ने वादा किया, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आपके दुख-दर्द को नहीं भूली हैं। वह शुक्रवार को यहां होंगी...मुझे पूरा विश्वास है कि एक दिन सब कुछ सही हो जाएगा। प्रदेश सरकार ने सिंगूर भूमि पुनर्वास एवं विकास कानून, 2011 को पारित किया है, लेकिन कलकत्ता उच्च न्यायालय के एक खंडपीठ द्वारा इसे अमान्य घोषित कर दिया गया, जिसके बाद प्रदेश सरकार ने उच्चतम न्यायालय में मामले के संदर्भ में अपील की है, जहां यह मामला लंबित है। तृणमूल कांग्रेस ने ममता बनर्जी की पहल पर इस कानून को पारित किया था, जिसके तहत अनिच्छुक किसानों के 400 एकड़ भूमि लौटाने की बात की गई थी, जिन किसानों ने छोटी कार परियोजना के लिए अपनी जमीन दी थी। इन अनिच्छुक किसानों ने सिंगूर में अपनी जमीन के लिए कोई मुआवजा भी स्वीकार नहीं किया था। सिंगूर आंदोलन से नजदीक से जुड़े जिले के हरिपाल से तृणमूल कांग्रेस के विधायक मन्ना से लोगों की शिकायत थी, नैनो कार फैक्टरी के लिए हमसे ली गई जमीन के एवज में हम धन चाहते हैं। हमने डेढ़ साल (जब से तृणमूल कांग्रेस सत्ता में आई) तक मुआवजा मिलने का इंतजार किया, लेकिन अब हमें इसके बारे में सुनने को भी नहीं मिलता। अब हमें भीख मांगने के लिए छोड़ दिया गया है। ये लोग भूमि गंवाने वालों में से थे जिन्होंने अपने जमीन के लिए पूर्ववर्ती वाम मोर्चा सरकार से न तो किसी मुआवजे के लिए दस्तखत किया और न ही कोई मुआवजा लिया है। परियोजना स्थल में शामिल किए गए जमीन वाले स्थान गोपालनगर, बेराबेरी और खासेरबेरी गांव के ये लोग राज्य सरकार द्वारा दिए जाने वाले चावल के कूपन को लेने के लिए बीडीओ कार्यालय के सामने इकट्ठा हुए थे। कूपन वितरण की देखभाल करने आए मन्ना ने लोगों से कहा कि प्रदेश सरकार सिंगूर के भूमि गंवाने वाले लोगों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के बारे में गंभीर है। उन्होंने कहा, यह तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद प्रभावित लोगों के लिए भूमि पुनर्वास योजना पर पहले मंत्रिमंडलीय फैसले में परिलक्षित है।टिप्पणियां मन्ना ने वादा किया, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आपके दुख-दर्द को नहीं भूली हैं। वह शुक्रवार को यहां होंगी...मुझे पूरा विश्वास है कि एक दिन सब कुछ सही हो जाएगा। प्रदेश सरकार ने सिंगूर भूमि पुनर्वास एवं विकास कानून, 2011 को पारित किया है, लेकिन कलकत्ता उच्च न्यायालय के एक खंडपीठ द्वारा इसे अमान्य घोषित कर दिया गया, जिसके बाद प्रदेश सरकार ने उच्चतम न्यायालय में मामले के संदर्भ में अपील की है, जहां यह मामला लंबित है। तृणमूल कांग्रेस ने ममता बनर्जी की पहल पर इस कानून को पारित किया था, जिसके तहत अनिच्छुक किसानों के 400 एकड़ भूमि लौटाने की बात की गई थी, जिन किसानों ने छोटी कार परियोजना के लिए अपनी जमीन दी थी। इन अनिच्छुक किसानों ने सिंगूर में अपनी जमीन के लिए कोई मुआवजा भी स्वीकार नहीं किया था। ये लोग भूमि गंवाने वालों में से थे जिन्होंने अपने जमीन के लिए पूर्ववर्ती वाम मोर्चा सरकार से न तो किसी मुआवजे के लिए दस्तखत किया और न ही कोई मुआवजा लिया है। परियोजना स्थल में शामिल किए गए जमीन वाले स्थान गोपालनगर, बेराबेरी और खासेरबेरी गांव के ये लोग राज्य सरकार द्वारा दिए जाने वाले चावल के कूपन को लेने के लिए बीडीओ कार्यालय के सामने इकट्ठा हुए थे। कूपन वितरण की देखभाल करने आए मन्ना ने लोगों से कहा कि प्रदेश सरकार सिंगूर के भूमि गंवाने वाले लोगों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के बारे में गंभीर है। उन्होंने कहा, यह तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद प्रभावित लोगों के लिए भूमि पुनर्वास योजना पर पहले मंत्रिमंडलीय फैसले में परिलक्षित है।टिप्पणियां मन्ना ने वादा किया, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आपके दुख-दर्द को नहीं भूली हैं। वह शुक्रवार को यहां होंगी...मुझे पूरा विश्वास है कि एक दिन सब कुछ सही हो जाएगा। प्रदेश सरकार ने सिंगूर भूमि पुनर्वास एवं विकास कानून, 2011 को पारित किया है, लेकिन कलकत्ता उच्च न्यायालय के एक खंडपीठ द्वारा इसे अमान्य घोषित कर दिया गया, जिसके बाद प्रदेश सरकार ने उच्चतम न्यायालय में मामले के संदर्भ में अपील की है, जहां यह मामला लंबित है। तृणमूल कांग्रेस ने ममता बनर्जी की पहल पर इस कानून को पारित किया था, जिसके तहत अनिच्छुक किसानों के 400 एकड़ भूमि लौटाने की बात की गई थी, जिन किसानों ने छोटी कार परियोजना के लिए अपनी जमीन दी थी। इन अनिच्छुक किसानों ने सिंगूर में अपनी जमीन के लिए कोई मुआवजा भी स्वीकार नहीं किया था। कूपन वितरण की देखभाल करने आए मन्ना ने लोगों से कहा कि प्रदेश सरकार सिंगूर के भूमि गंवाने वाले लोगों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के बारे में गंभीर है। उन्होंने कहा, यह तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद प्रभावित लोगों के लिए भूमि पुनर्वास योजना पर पहले मंत्रिमंडलीय फैसले में परिलक्षित है।टिप्पणियां मन्ना ने वादा किया, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आपके दुख-दर्द को नहीं भूली हैं। वह शुक्रवार को यहां होंगी...मुझे पूरा विश्वास है कि एक दिन सब कुछ सही हो जाएगा। प्रदेश सरकार ने सिंगूर भूमि पुनर्वास एवं विकास कानून, 2011 को पारित किया है, लेकिन कलकत्ता उच्च न्यायालय के एक खंडपीठ द्वारा इसे अमान्य घोषित कर दिया गया, जिसके बाद प्रदेश सरकार ने उच्चतम न्यायालय में मामले के संदर्भ में अपील की है, जहां यह मामला लंबित है। तृणमूल कांग्रेस ने ममता बनर्जी की पहल पर इस कानून को पारित किया था, जिसके तहत अनिच्छुक किसानों के 400 एकड़ भूमि लौटाने की बात की गई थी, जिन किसानों ने छोटी कार परियोजना के लिए अपनी जमीन दी थी। इन अनिच्छुक किसानों ने सिंगूर में अपनी जमीन के लिए कोई मुआवजा भी स्वीकार नहीं किया था। मन्ना ने वादा किया, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आपके दुख-दर्द को नहीं भूली हैं। वह शुक्रवार को यहां होंगी...मुझे पूरा विश्वास है कि एक दिन सब कुछ सही हो जाएगा। प्रदेश सरकार ने सिंगूर भूमि पुनर्वास एवं विकास कानून, 2011 को पारित किया है, लेकिन कलकत्ता उच्च न्यायालय के एक खंडपीठ द्वारा इसे अमान्य घोषित कर दिया गया, जिसके बाद प्रदेश सरकार ने उच्चतम न्यायालय में मामले के संदर्भ में अपील की है, जहां यह मामला लंबित है। तृणमूल कांग्रेस ने ममता बनर्जी की पहल पर इस कानून को पारित किया था, जिसके तहत अनिच्छुक किसानों के 400 एकड़ भूमि लौटाने की बात की गई थी, जिन किसानों ने छोटी कार परियोजना के लिए अपनी जमीन दी थी। इन अनिच्छुक किसानों ने सिंगूर में अपनी जमीन के लिए कोई मुआवजा भी स्वीकार नहीं किया था। तृणमूल कांग्रेस ने ममता बनर्जी की पहल पर इस कानून को पारित किया था, जिसके तहत अनिच्छुक किसानों के 400 एकड़ भूमि लौटाने की बात की गई थी, जिन किसानों ने छोटी कार परियोजना के लिए अपनी जमीन दी थी। इन अनिच्छुक किसानों ने सिंगूर में अपनी जमीन के लिए कोई मुआवजा भी स्वीकार नहीं किया था।
सारांश: किसानों का कहना था कि अगर उन्हें मालूम होता कि उन्हें उनके भाग्य के सहारे छोड़ दिया जाएगा, तो वे टाटा नैनो परियोजना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं होते।
5
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: बटला हाउस मुठभेड़ कांड के एकमात्र दोषी इंडियन मुजाहिदीन के शहजाद अहमद के लिए अभियोजन पक्ष ने मौत की सजा की मांग की है। अभियोजन पक्ष ने इसे 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' मामला करार दिया है। फैसला मंगलवार को सुनाया जाएगा। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजेंद्र कुमार शास्त्री के सामने अहमद को फांसी देने की मांग की गई। शास्त्री ने ही उत्तर प्रदेश के निवासी शहजाद को दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा के इंस्पेक्टर मोहन चंद्र शर्मा की हत्या का दोषी ठहराया था। अदालत अब मंगलवार दोपहर 2 बजे फैसला सुनाएगी। अहमद उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ का रहने वाला है। दिल्ली में 13 सितंबर, 2008 में हुए सिलसिलेवार बम विस्फोटों के छह दिन बाद पुलिस ने इंस्पेक्टर शर्मा के नेतृत्व में खुफिया सूचना के आधार पर 19 सितंबर, 2008 को जब दक्षिणी दिल्ली के जामिया नगर इलाके में स्थित बटला हाउस में छापा मारा था तो उस वक्त वहां मौजूद लोगों में अहमद भी था। बम विस्फोट करोल बाग, कनाट प्लेस, ग्रेटर कैलाश तथा इंडिया गेट इलाके में हुए थे, जिसमें इंडियन मुजाहिदीन का हाथ होने की बात कही जा रही है। इस आतंकवादी वारदात में 26 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 133 घायल हो गए थे। पुलिस को सूचना मिली थी कि बम विस्फोटों के लिए वांछित संदिग्ध जामिया नगर के चारमंजिला बटला हाउस की फ्लैट संख्या एल-18 में छिपे हुए हैं। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की और 19 सितंबर, 2008 को उसकी टीम सुबह 10.30 बजे बटला हाउस की दूसरी मंजिल पर पहुंची। इस दौरान दोनों के बीच गोलीबारी हुई। आतंकवादियों की ओर से चली गोली इंस्पेक्टर शर्मा को लगी। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।टिप्पणियां पुलिस की इस कार्रवाई में दो संदिग्ध आतंकवादी आतिफ अमीन तथा मोहम्मद साजिद मारे गए, जबकि दो अन्य संदिग्ध मोहम्मद सैफ और जीशान को गिरफ्तार कर लिया गया। एक अन्य आतंकवादी भागने में सफल रहा। पुलिस ने इस मामले में अहमद के खिलाफ 28 अप्रैल, 2010 को आरोपपत्र दाखिल किया गया था। अभियोजन पक्ष ने 70 गवाहों को पेश किया, जिसमें पुलिस की छापेमारी टीम में शामिल छह प्रत्यक्षदर्शी भी थे। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजेंद्र कुमार शास्त्री के सामने अहमद को फांसी देने की मांग की गई। शास्त्री ने ही उत्तर प्रदेश के निवासी शहजाद को दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा के इंस्पेक्टर मोहन चंद्र शर्मा की हत्या का दोषी ठहराया था। अदालत अब मंगलवार दोपहर 2 बजे फैसला सुनाएगी। अहमद उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ का रहने वाला है। दिल्ली में 13 सितंबर, 2008 में हुए सिलसिलेवार बम विस्फोटों के छह दिन बाद पुलिस ने इंस्पेक्टर शर्मा के नेतृत्व में खुफिया सूचना के आधार पर 19 सितंबर, 2008 को जब दक्षिणी दिल्ली के जामिया नगर इलाके में स्थित बटला हाउस में छापा मारा था तो उस वक्त वहां मौजूद लोगों में अहमद भी था। बम विस्फोट करोल बाग, कनाट प्लेस, ग्रेटर कैलाश तथा इंडिया गेट इलाके में हुए थे, जिसमें इंडियन मुजाहिदीन का हाथ होने की बात कही जा रही है। इस आतंकवादी वारदात में 26 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 133 घायल हो गए थे। पुलिस को सूचना मिली थी कि बम विस्फोटों के लिए वांछित संदिग्ध जामिया नगर के चारमंजिला बटला हाउस की फ्लैट संख्या एल-18 में छिपे हुए हैं। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की और 19 सितंबर, 2008 को उसकी टीम सुबह 10.30 बजे बटला हाउस की दूसरी मंजिल पर पहुंची। इस दौरान दोनों के बीच गोलीबारी हुई। आतंकवादियों की ओर से चली गोली इंस्पेक्टर शर्मा को लगी। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।टिप्पणियां पुलिस की इस कार्रवाई में दो संदिग्ध आतंकवादी आतिफ अमीन तथा मोहम्मद साजिद मारे गए, जबकि दो अन्य संदिग्ध मोहम्मद सैफ और जीशान को गिरफ्तार कर लिया गया। एक अन्य आतंकवादी भागने में सफल रहा। पुलिस ने इस मामले में अहमद के खिलाफ 28 अप्रैल, 2010 को आरोपपत्र दाखिल किया गया था। अभियोजन पक्ष ने 70 गवाहों को पेश किया, जिसमें पुलिस की छापेमारी टीम में शामिल छह प्रत्यक्षदर्शी भी थे। अहमद उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ का रहने वाला है। दिल्ली में 13 सितंबर, 2008 में हुए सिलसिलेवार बम विस्फोटों के छह दिन बाद पुलिस ने इंस्पेक्टर शर्मा के नेतृत्व में खुफिया सूचना के आधार पर 19 सितंबर, 2008 को जब दक्षिणी दिल्ली के जामिया नगर इलाके में स्थित बटला हाउस में छापा मारा था तो उस वक्त वहां मौजूद लोगों में अहमद भी था। बम विस्फोट करोल बाग, कनाट प्लेस, ग्रेटर कैलाश तथा इंडिया गेट इलाके में हुए थे, जिसमें इंडियन मुजाहिदीन का हाथ होने की बात कही जा रही है। इस आतंकवादी वारदात में 26 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 133 घायल हो गए थे। पुलिस को सूचना मिली थी कि बम विस्फोटों के लिए वांछित संदिग्ध जामिया नगर के चारमंजिला बटला हाउस की फ्लैट संख्या एल-18 में छिपे हुए हैं। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की और 19 सितंबर, 2008 को उसकी टीम सुबह 10.30 बजे बटला हाउस की दूसरी मंजिल पर पहुंची। इस दौरान दोनों के बीच गोलीबारी हुई। आतंकवादियों की ओर से चली गोली इंस्पेक्टर शर्मा को लगी। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।टिप्पणियां पुलिस की इस कार्रवाई में दो संदिग्ध आतंकवादी आतिफ अमीन तथा मोहम्मद साजिद मारे गए, जबकि दो अन्य संदिग्ध मोहम्मद सैफ और जीशान को गिरफ्तार कर लिया गया। एक अन्य आतंकवादी भागने में सफल रहा। पुलिस ने इस मामले में अहमद के खिलाफ 28 अप्रैल, 2010 को आरोपपत्र दाखिल किया गया था। अभियोजन पक्ष ने 70 गवाहों को पेश किया, जिसमें पुलिस की छापेमारी टीम में शामिल छह प्रत्यक्षदर्शी भी थे। बम विस्फोट करोल बाग, कनाट प्लेस, ग्रेटर कैलाश तथा इंडिया गेट इलाके में हुए थे, जिसमें इंडियन मुजाहिदीन का हाथ होने की बात कही जा रही है। इस आतंकवादी वारदात में 26 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 133 घायल हो गए थे। पुलिस को सूचना मिली थी कि बम विस्फोटों के लिए वांछित संदिग्ध जामिया नगर के चारमंजिला बटला हाउस की फ्लैट संख्या एल-18 में छिपे हुए हैं। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की और 19 सितंबर, 2008 को उसकी टीम सुबह 10.30 बजे बटला हाउस की दूसरी मंजिल पर पहुंची। इस दौरान दोनों के बीच गोलीबारी हुई। आतंकवादियों की ओर से चली गोली इंस्पेक्टर शर्मा को लगी। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।टिप्पणियां पुलिस की इस कार्रवाई में दो संदिग्ध आतंकवादी आतिफ अमीन तथा मोहम्मद साजिद मारे गए, जबकि दो अन्य संदिग्ध मोहम्मद सैफ और जीशान को गिरफ्तार कर लिया गया। एक अन्य आतंकवादी भागने में सफल रहा। पुलिस ने इस मामले में अहमद के खिलाफ 28 अप्रैल, 2010 को आरोपपत्र दाखिल किया गया था। अभियोजन पक्ष ने 70 गवाहों को पेश किया, जिसमें पुलिस की छापेमारी टीम में शामिल छह प्रत्यक्षदर्शी भी थे। पुलिस को सूचना मिली थी कि बम विस्फोटों के लिए वांछित संदिग्ध जामिया नगर के चारमंजिला बटला हाउस की फ्लैट संख्या एल-18 में छिपे हुए हैं। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की और 19 सितंबर, 2008 को उसकी टीम सुबह 10.30 बजे बटला हाउस की दूसरी मंजिल पर पहुंची। इस दौरान दोनों के बीच गोलीबारी हुई। आतंकवादियों की ओर से चली गोली इंस्पेक्टर शर्मा को लगी। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।टिप्पणियां पुलिस की इस कार्रवाई में दो संदिग्ध आतंकवादी आतिफ अमीन तथा मोहम्मद साजिद मारे गए, जबकि दो अन्य संदिग्ध मोहम्मद सैफ और जीशान को गिरफ्तार कर लिया गया। एक अन्य आतंकवादी भागने में सफल रहा। पुलिस ने इस मामले में अहमद के खिलाफ 28 अप्रैल, 2010 को आरोपपत्र दाखिल किया गया था। अभियोजन पक्ष ने 70 गवाहों को पेश किया, जिसमें पुलिस की छापेमारी टीम में शामिल छह प्रत्यक्षदर्शी भी थे। पुलिस की इस कार्रवाई में दो संदिग्ध आतंकवादी आतिफ अमीन तथा मोहम्मद साजिद मारे गए, जबकि दो अन्य संदिग्ध मोहम्मद सैफ और जीशान को गिरफ्तार कर लिया गया। एक अन्य आतंकवादी भागने में सफल रहा। पुलिस ने इस मामले में अहमद के खिलाफ 28 अप्रैल, 2010 को आरोपपत्र दाखिल किया गया था। अभियोजन पक्ष ने 70 गवाहों को पेश किया, जिसमें पुलिस की छापेमारी टीम में शामिल छह प्रत्यक्षदर्शी भी थे। पुलिस ने इस मामले में अहमद के खिलाफ 28 अप्रैल, 2010 को आरोपपत्र दाखिल किया गया था। अभियोजन पक्ष ने 70 गवाहों को पेश किया, जिसमें पुलिस की छापेमारी टीम में शामिल छह प्रत्यक्षदर्शी भी थे।
संक्षिप्त पाठ: बटला हाउस मुठभेड़ कांड के एकमात्र दोषी इंडियन मुजाहिदीन के शहजाद अहमद के लिए अभियोजन पक्ष ने मौत की सजा की मांग की है। अभियोजन पक्ष ने इसे 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' मामला करार दिया है। फैसला मंगलवार को सुनाया जाएगा।
27
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: इस वर्ष लंदन में होने वाले ओलम्पिक खेलों के लिए गुरुवार को प्राचीन ओलिम्पिक आयोजन स्थल पर मशाल प्रज्वलित की गई। हारा के प्राचीन मंदिर के अवशेष के सामने एक अभिनेत्री ने पुजारन की भूमिका निभाई और पैराबोलिक कांच की मदद से सूर्य की रोशनी से ओलिम्पिक मशाल जलाई। इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय ओलिम्पिक समिति के प्रमुख जैक्स रॉग और लंदन ओलिम्पिक आयोजन समिति के प्रमुख सबास्टियन कोए मौजूद थे।टिप्पणियां मशाल को पहले धारक-ग्रीस के विश्व तैराकी चैम्पियन स्पाइरोस गियानियोटिस को सौंप दिया गया। इसी के साथ इस मशाल की 1800 मील की यात्रा शुरू हो गई। इस दौरान कुल 490 धारक इसे लेकर दौड़ेंगे। 17 मई को इस मशाल को एथेंस के पानाथिनियाक स्टेडियम में लंदन ओलिम्पिक आयोजन समिति को सौंप दिया जाएगा। इसके बाद इस मशाल की 70 दिनों की ब्रिटेन यात्रा शुरू होगी। हारा के प्राचीन मंदिर के अवशेष के सामने एक अभिनेत्री ने पुजारन की भूमिका निभाई और पैराबोलिक कांच की मदद से सूर्य की रोशनी से ओलिम्पिक मशाल जलाई। इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय ओलिम्पिक समिति के प्रमुख जैक्स रॉग और लंदन ओलिम्पिक आयोजन समिति के प्रमुख सबास्टियन कोए मौजूद थे।टिप्पणियां मशाल को पहले धारक-ग्रीस के विश्व तैराकी चैम्पियन स्पाइरोस गियानियोटिस को सौंप दिया गया। इसी के साथ इस मशाल की 1800 मील की यात्रा शुरू हो गई। इस दौरान कुल 490 धारक इसे लेकर दौड़ेंगे। 17 मई को इस मशाल को एथेंस के पानाथिनियाक स्टेडियम में लंदन ओलिम्पिक आयोजन समिति को सौंप दिया जाएगा। इसके बाद इस मशाल की 70 दिनों की ब्रिटेन यात्रा शुरू होगी। इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय ओलिम्पिक समिति के प्रमुख जैक्स रॉग और लंदन ओलिम्पिक आयोजन समिति के प्रमुख सबास्टियन कोए मौजूद थे।टिप्पणियां मशाल को पहले धारक-ग्रीस के विश्व तैराकी चैम्पियन स्पाइरोस गियानियोटिस को सौंप दिया गया। इसी के साथ इस मशाल की 1800 मील की यात्रा शुरू हो गई। इस दौरान कुल 490 धारक इसे लेकर दौड़ेंगे। 17 मई को इस मशाल को एथेंस के पानाथिनियाक स्टेडियम में लंदन ओलिम्पिक आयोजन समिति को सौंप दिया जाएगा। इसके बाद इस मशाल की 70 दिनों की ब्रिटेन यात्रा शुरू होगी। मशाल को पहले धारक-ग्रीस के विश्व तैराकी चैम्पियन स्पाइरोस गियानियोटिस को सौंप दिया गया। इसी के साथ इस मशाल की 1800 मील की यात्रा शुरू हो गई। इस दौरान कुल 490 धारक इसे लेकर दौड़ेंगे। 17 मई को इस मशाल को एथेंस के पानाथिनियाक स्टेडियम में लंदन ओलिम्पिक आयोजन समिति को सौंप दिया जाएगा। इसके बाद इस मशाल की 70 दिनों की ब्रिटेन यात्रा शुरू होगी। 17 मई को इस मशाल को एथेंस के पानाथिनियाक स्टेडियम में लंदन ओलिम्पिक आयोजन समिति को सौंप दिया जाएगा। इसके बाद इस मशाल की 70 दिनों की ब्रिटेन यात्रा शुरू होगी।
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: इस वर्ष लंदन में होने वाले ओलम्पिक खेलों के लिए गुरुवार को प्राचीन ओलिम्पिक आयोजन स्थल पर मशाल प्रज्वलित की गई।
19
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: सचिन तेंदुलकर ने आखिरकार अपने नए आशियाने में रहने का सर्टिफिकेट हासिल करने के लिए बीएमसी को 4.35 लाख रुपये का जुर्माना भर दिया है। अब बीएमसी ने उन्हें घर में रहने के लिए हरी झंडी दे दी है। सचिन ने बांद्रा (वेस्‍ट) में पेरी क्रॉस रोड पर बने चार मंजिले आलीशान घर में हाल ही में गृह प्रवेश किया था। एक अंग्रेजी अखबार ने 29 सितंबर को पहली बार खबर प्रकाशित की कि बिना 'ऑक्‍युपेंसी सर्टिफिकेट (ओसी)' हासिल किए बिना ही तेंडुलकर अपने नए घर में गए हैं। इस रिपोर्ट के बाद बीएमसी ने बीएमसी एक्‍ट की धारा 350 (ए) के तहत तेंडुलकर को नोटिस जारी किया और 4.35 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। बीएमसी में डिप्‍टी चीफ इंजीनियर बी हरीदास ने तेंडुलकर की ओर से जुर्माना भरे जाने की पुष्टि की है। उन्‍होंने कहा कि हमें तेंडुलकर की ओर से सभी तरह के कागजात और जुर्माना मिल गया है। उनके नए बंगले के लिए ओसी जारी कर दिया गया है।
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: सचिन तेंदुलकर ने आखिरकार अपने नए आशियाने में रहने का सर्टिफिकेट हासिल करने के लिए बीएमसी को 4.35 लाख का जुर्माना भर दिया है।
3
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: ऑस्ट्रेलियाई सलामी बल्लेबाज डेविड वार्नर का मानना है कि हाल के परिणामों से भारतीय टीम दबाव में है और उनकी टीम आगामी चार टेस्ट मैचों की सीरीज में महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई वाली टीम को हरा सकती है।टिप्पणियां वार्नर ने कहा, निश्चिततौर पर हमारे पास भारत को हराने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं। हाल के परिणामों से धोनी पर दबाव रहेगा। हमारा तेज गेंदबाजी विभाग मजबूत है और हमारे बल्लेबाज अच्छी फॉर्म में हैं। अब भी चोट से पूरी तरह नहीं उबर पाने वाले वार्नर ने कहा, यदि हम भारत को हरा देते हैं तो यह एशेज सीरीज से पहले बहुत बड़ी उपलब्धि होगी। हालांकि सीरीज का फैसला भारतीय स्पिनरों के सामने हमारे प्रदर्शन पर निर्भर करता है। अपने साथी खिलाड़ियों शेन वाटसन और एड कोवान की तरह वार्नर को भी लगता है कि ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को भारतीय स्पिनरों के सामने आक्रामक रवैया अपनाना होगा। उन्होंने कहा, मैंने भारत में इंग्लैंड की टेस्ट सीरीज (टीवी पर) देखी थी। हमें भारतीय स्पिनरों को दबाव में लाना होगा। हमें उनकी लय बिगाड़नी होगी। हमारी रणनीति उनके खिलाफ आक्रामक रवैया अपनाने की है। वार्नर ने कहा, निश्चिततौर पर हमारे पास भारत को हराने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं। हाल के परिणामों से धोनी पर दबाव रहेगा। हमारा तेज गेंदबाजी विभाग मजबूत है और हमारे बल्लेबाज अच्छी फॉर्म में हैं। अब भी चोट से पूरी तरह नहीं उबर पाने वाले वार्नर ने कहा, यदि हम भारत को हरा देते हैं तो यह एशेज सीरीज से पहले बहुत बड़ी उपलब्धि होगी। हालांकि सीरीज का फैसला भारतीय स्पिनरों के सामने हमारे प्रदर्शन पर निर्भर करता है। अपने साथी खिलाड़ियों शेन वाटसन और एड कोवान की तरह वार्नर को भी लगता है कि ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को भारतीय स्पिनरों के सामने आक्रामक रवैया अपनाना होगा। उन्होंने कहा, मैंने भारत में इंग्लैंड की टेस्ट सीरीज (टीवी पर) देखी थी। हमें भारतीय स्पिनरों को दबाव में लाना होगा। हमें उनकी लय बिगाड़नी होगी। हमारी रणनीति उनके खिलाफ आक्रामक रवैया अपनाने की है। अपने साथी खिलाड़ियों शेन वाटसन और एड कोवान की तरह वार्नर को भी लगता है कि ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को भारतीय स्पिनरों के सामने आक्रामक रवैया अपनाना होगा। उन्होंने कहा, मैंने भारत में इंग्लैंड की टेस्ट सीरीज (टीवी पर) देखी थी। हमें भारतीय स्पिनरों को दबाव में लाना होगा। हमें उनकी लय बिगाड़नी होगी। हमारी रणनीति उनके खिलाफ आक्रामक रवैया अपनाने की है।
यहाँ एक सारांश है:ऑस्ट्रेलियाई सलामी बल्लेबाज डेविड वार्नर का मानना है कि हाल के परिणामों से भारतीय टीम दबाव में है और उनकी टीम आगामी चार टेस्ट मैचों की सीरीज में महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई वाली टीम को हरा सकती है।
17
['hin']
एक सारांश बनाओ: नासा वैज्ञानिकों द्वारा वैश्विक तापमान के मासिक विश्लेषण के अनुसार, 136 वर्षों में विश्व अगस्त, 2016 में सबसे ज्यादा गर्म रहा. नासा ने सोमवार को एक बयान में कहा, पिछले सबसे ज्यादा गर्म रहे अगस्त 2014 की तुलना में बीते महीने तापमान 0.16 सेल्सियस ज्यादा दर्ज किया गया. इसमें कहा गया है कि मौसमी तापमान चक्र जुलाई में आमतौर पर शिखर पर होता है. अगस्त, 2016 को जुलाई, 2016 से जोड़ा जा रहा है, जो अब तक का सबसे ज्यादा गर्म महीना रिकॉर्ड किया गया.टिप्पणियां बीता महीना, साल 1951-1980 तक अगस्त के औसत तापमान की तुलना में 0.98 सेल्सियस अधिक गर्म दर्ज किया गया. अगस्त की रिकॉर्ड गर्मी ने अक्टूबर 2015 से लगातार 11 महीनों ने मासिक उच्चतम तापमान का नया रिकॉर्ड बनाया. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) इसमें कहा गया है कि मौसमी तापमान चक्र जुलाई में आमतौर पर शिखर पर होता है. अगस्त, 2016 को जुलाई, 2016 से जोड़ा जा रहा है, जो अब तक का सबसे ज्यादा गर्म महीना रिकॉर्ड किया गया.टिप्पणियां बीता महीना, साल 1951-1980 तक अगस्त के औसत तापमान की तुलना में 0.98 सेल्सियस अधिक गर्म दर्ज किया गया. अगस्त की रिकॉर्ड गर्मी ने अक्टूबर 2015 से लगातार 11 महीनों ने मासिक उच्चतम तापमान का नया रिकॉर्ड बनाया. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) बीता महीना, साल 1951-1980 तक अगस्त के औसत तापमान की तुलना में 0.98 सेल्सियस अधिक गर्म दर्ज किया गया. अगस्त की रिकॉर्ड गर्मी ने अक्टूबर 2015 से लगातार 11 महीनों ने मासिक उच्चतम तापमान का नया रिकॉर्ड बनाया. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: अगस्त 2014 की तुलना में बीते महीने तापमान 0.16 सेल्सियस ज्यादा रहा 136 वर्षों में विश्व अगस्त, 2016 में सबसे ज्यादा गर्म रहा अक्टूबर 2015 से लगातार 11 महीनों ने मासिक उच्चतम तापमान का नया रिकॉर्ड
32
['hin']
एक सारांश बनाओ: भारत-पाकिस्तान मुक़ाबला हमेशा से दोनों देशों के क्रिकेट फ़ैन्स के अलावा दुनियाभर के क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में रोमांच पैदा करता है. ऐसा ही मुक़ाबला चैंपियंस ट्रॉफ़ी 2017 के फ़ाइनल में देखने को रविवार को मिलेगा.टिप्पणियां भारत ने बांग्लादेश को हराकर फ़ाइनल में जगह बनाई तो पड़ोसी देश पाकिस्तान की टीम ख़िताब की मज़बूत दावेदार इंग्लैंड को मात देकर फ़ाइनल में पहुंची. मुक़ाबले से पहले दोनों देशों के फ़ैन्स अपनी-अपनी जीत की उम्मीद लगाए बैठ हैं... लेकिन यहां टीम इंडिया का एक खिलाड़ी है जो इतिहास रच सकता है. जी हां, वो खिलाड़ी हैं टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली.   कोहली पहली बार किसी आईसीसी के इवेंट में भारत की अगुवाई कर रहे हैं और अगर वो इसमें जीत हासिल करते हैं तो वो महेंद्र सिंह धोनी की तरह अपने पहले ही आईसीसी इवेंट को जीतकर इतिहास रच सकते हैं. 10 साल पहले दक्षिण अफ़्रीका में 2007 में हुए आईसीसी वर्ल्ड T20 कप में धोनी ने पहली बार किसी आईसीसी इवेंट में टीम इंडिया की कमान संभाली और फ़ाइनल में पाकिस्तान को 5 रन से हराकर भारत को आईसीसी वर्ल्ड T20 कप का ख़िताब दिलाया.   विराट अपने शानदार प्रदर्शन और बेहतरीन कप्तानी से टीम इंडिया को चैंपियंस ट्रॉफ़ी के फ़ाइनल में ले गए हैं. अगर वो चैंपियंस ट्रॉफ़ी में भारत को पाकिस्तान के ख़िलाफ़ जीत दिलाते हैं तो वो धोनी की तरह इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करवा सकते हैं.   10 साल बाद एक बार फिर भारत और पाकिस्तान की टीम फ़ाइनल में है और विराट के पास मौक़ा है धोनी के कारनामे को दोहराने का. भारत ने बांग्लादेश को हराकर फ़ाइनल में जगह बनाई तो पड़ोसी देश पाकिस्तान की टीम ख़िताब की मज़बूत दावेदार इंग्लैंड को मात देकर फ़ाइनल में पहुंची. मुक़ाबले से पहले दोनों देशों के फ़ैन्स अपनी-अपनी जीत की उम्मीद लगाए बैठ हैं... लेकिन यहां टीम इंडिया का एक खिलाड़ी है जो इतिहास रच सकता है. जी हां, वो खिलाड़ी हैं टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली.   कोहली पहली बार किसी आईसीसी के इवेंट में भारत की अगुवाई कर रहे हैं और अगर वो इसमें जीत हासिल करते हैं तो वो महेंद्र सिंह धोनी की तरह अपने पहले ही आईसीसी इवेंट को जीतकर इतिहास रच सकते हैं. 10 साल पहले दक्षिण अफ़्रीका में 2007 में हुए आईसीसी वर्ल्ड T20 कप में धोनी ने पहली बार किसी आईसीसी इवेंट में टीम इंडिया की कमान संभाली और फ़ाइनल में पाकिस्तान को 5 रन से हराकर भारत को आईसीसी वर्ल्ड T20 कप का ख़िताब दिलाया.   विराट अपने शानदार प्रदर्शन और बेहतरीन कप्तानी से टीम इंडिया को चैंपियंस ट्रॉफ़ी के फ़ाइनल में ले गए हैं. अगर वो चैंपियंस ट्रॉफ़ी में भारत को पाकिस्तान के ख़िलाफ़ जीत दिलाते हैं तो वो धोनी की तरह इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करवा सकते हैं.   10 साल बाद एक बार फिर भारत और पाकिस्तान की टीम फ़ाइनल में है और विराट के पास मौक़ा है धोनी के कारनामे को दोहराने का. 10 साल पहले दक्षिण अफ़्रीका में 2007 में हुए आईसीसी वर्ल्ड T20 कप में धोनी ने पहली बार किसी आईसीसी इवेंट में टीम इंडिया की कमान संभाली और फ़ाइनल में पाकिस्तान को 5 रन से हराकर भारत को आईसीसी वर्ल्ड T20 कप का ख़िताब दिलाया.   विराट अपने शानदार प्रदर्शन और बेहतरीन कप्तानी से टीम इंडिया को चैंपियंस ट्रॉफ़ी के फ़ाइनल में ले गए हैं. अगर वो चैंपियंस ट्रॉफ़ी में भारत को पाकिस्तान के ख़िलाफ़ जीत दिलाते हैं तो वो धोनी की तरह इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करवा सकते हैं.   10 साल बाद एक बार फिर भारत और पाकिस्तान की टीम फ़ाइनल में है और विराट के पास मौक़ा है धोनी के कारनामे को दोहराने का.
संक्षिप्त सारांश: चैंपियंस ट्रॉफ़ी 2017 के फ़ाइनल में भारत-पाकिस्‍तान की टीमें भिड़ेंगीं. कोहली पहली बार किसी आईसीसी के इवेंट में भारत की अगुवाई कर रहे हैं. धोनी की तरह अपने पहले ही आईसीसी इवेंट को जीतकर इतिहास रच सकते हैं कोहली.
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['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: बीते 48 घण्टे में दिल्ली में 2 एनकाउंटर हुए हैं. पहला एनकाउंटर शुक्रवार देर रात शहादरा इलाके के सीमापुरी में हुआ जिसमे एक इनामी बदमाश को गिरफ्तार किया गया है. पकड़े गए आरोपी का नाम आशिफ उर्फ आशु है. जिस पर 25 हजार का इनाम था. उसके कब्जे से अवैध हथियार और कई राउंड कारतूस बरामद किए गए हैं. आरोपी पर हत्या, लूट और डकैती के 40 मामले दर्ज हैं. पुलिस को एक जानकारी हाथ लगी थी की आशु अपनी बाइक से सीमापुरी इलाके में आने वाला है जिसके बाद जब उसे रोकने की कोशिश की नई तो उसने पुलिस पार्टी पर फायरिंग की. जवाबी फायरिंग में आरोपी को पकड़ लिया गया.  दिल्ली: चोरी के आरोप में महिला की पीट-पीटकर हत्या, 2 लोग गिरफ्तार वहीं दूसरी मुठभेड़ शनिवार रात द्वारका इलाके के कैर गांव में हुई. नंदू गैंग के आने की सूचना के बाद उन्हें गिरफ्तार करने पहुंची पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़ हो गई. इस मुठभेड़ में एक बदमाश घायल हो गया. जबकि एक गोली पुलिसकर्मी को भी लगी, लेकिन बुलैटप्रूफ जैकेट होने के चलते पुलिसकर्मी की जान बच गई.  गोली लगने के बाद घायल हुए विक्की यादव को पुलिस ने अस्पताल में भर्ती किया है. जबकि उसके साथ मौजूद दो बदमाशों आकाश और टिंकू उर्फ चोर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. फिलहाल मामले में बाबा हरिदास थाना पुलिस जांच कर रही है.  कचरा फैलाने और थूकने वालों से रेलवे ने वसूला 5.52 लाख रुपये का जुर्माना पुलिस उपायुक्त आंटो अल्फोंस ने बताया कि द्वारका इलाके में हुई एक 4 लाख लूट के मामले और व्यापारी को फिरौती के लिए फोन कर धमकाने के मामले में स्पेशल स्टाफ की टीम जांच कर रही थी. पुलिस की जांच में सामने आया है कि विक्की और दोनों बदमाश नंदू गैंग से जुड़े हुए हैं. विक्की करीब 1 महीने से एक व्यापारी से रंगदारी की मांग कर रहा था. आरोपी ने पैसे न मिलने पर दो बार व्यापारी के घर व ऑफिस पर फायरिंग भी की थी.
संक्षिप्त सारांश: दिल्ली में बीते 48 घंटे में 2 एनकाउंटर 25 हजार का इनामी बदमाश गिरफ्तार नंदू गैंग के 3 बदमाशों को भी दबोचा
23
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा( Yashwant Sinha) ने बुधवार को झारखंड के हजारीबाग में अहम बयान दिया है. उन्होंने कहा है किसीट बंटवारे के फार्मूला पर विपक्षी दलों के फैसले के बाद ही राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तावित महागठबंधन पर अंतिम निर्णय हो सकता है. तब तक तस्वीर साफ नहीं होती. भाजपा के पूर्व नेता और अटल विहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री रहे यशवंत सिन्हा ने कहा, ‘‘भाजपा नीत राजग के खिलाफ महागठबंधन का मूर्त रूप लेना अभी बाकी है....'' पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा (Yashwant Sinha) ने कहा, ‘‘अब तक सिर्फ राज्य स्तरीय गठबंधन हो रहा है. राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दलों के गठबंधन का फैसला अभी नहीं किया गया है.'' पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा (Yashwant Sinha) ने उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी(सपा) और बहुजन समाज पार्टी(बसपा) के बीच गठबंधन का उदाहरण देते हुए यह बात कही.यह पूछे जाने पर कि क्या वह महागठबंधन के लिए प्रचार करेंगे, सिन्हा ने कहा कि वह राष्ट्रीय स्तर पर महागठबंधन के अंतिम रूप लेने तक किसी चीज की गारंटी नहीं दे सकते.यह पूछे जाने पर कि क्या वह हजारीबाग में किसी रैली को संबोधित करेंगे, उन्होंने कहा, ‘‘इस सवाल का जवाब देने का अभी वक्त नहीं आया है.''दरअसल, वहां से सिन्हा के बेटे एवं केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा के भाजपा से चुनाव लड़ने की उम्मीद है.
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने महागठबंधन को लेकर दिया बड़ा बयान यशवंत सिन्हा बोले- नहीं ले सकते प्रचार की गारंटी राष्ट्रीय स्तर पर महागठबंधन की तस्वीर को अभी बताया अस्पष्ट
3
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: अगर आपने अब तक आधार कार्ड नहीं बनवाया है तो जल्दी करें, क्योंकि आने वाले दिनों में इनकम टैक्स रिटर्न भरने के लिए भी आधार जरूरी हो जाएगा. यही नहीं, पैन कार्ड के आवेदन के लिए भी आधार कार्ड अनिवार्य होने जा रहा है. सरकार ने वित्त विधेयक में एक अहम संशोधन का प्रस्ताव किया है. अगर यह प्रस्ताव मंजूर हो गया तो आयकर रिटर्न फाइल करते समय आधार नंबर जरूरी होगा। बिना आधार नंबर के आयकर रिटर्न वैध नहीं माने जाएंगे. रिटर्न भरने के लिए बेशक, आधार एनरोलमेंट नंबर का भी फौरी इस्तेमाल हो सकता है. पिछले काफी वक्त से कई जरूरी सेवाओं के लिए सरकार आधार को जरूरी करती जा रही है. इससे पहले बैंकों ने भी अपने खाताधारकों को आधार की अहमियत बताते हुए कहा था कि बैंक में आधार कार्ड और मोबाइल फोन नंबर दर्ज न कराने का स्थिति में बचत खाता धारकों को 31 मार्च के बाद परेशानी झेलनी पड़ेगी. इस बारे में केंद्र सरकार की ओर से बैंकों को निर्देश जारी किए गए हैं. खाताधारकों को 31 मार्च तक यह प्रक्रिया आवश्यक रूप से पूरी कर लेने का निर्देश दिया गया है.टिप्पणियां पिछले दिनों सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत मुफ्त रसोई गैस कनेक्शन प्राप्त करने को लेकर आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया था. यही नहीं सरकार ने स्कूलों में मिड डे मील के लिए भी आधार कार्ड को जरूरी बनाने का फैसला किया था, लेकिन इसे लेकर हुई तीखी आलोचना के बाद सरकार ने अपना निर्णय बदल लिया और स्पष्ट किया कि किसी को भी आधार संख्या के अभाव में सब्सिडी योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं रखा जाएगा और अन्य पहचान प्रमाण पत्र स्वीकार किए जाएंगे. विभिन्न विपक्षी दलों ने इस पर आपत्ति जताई थी. मिड डे मील के लिए आधार कार्ड को जरूरी बनाने के केंद्र के फैसले के खिलाफ दो राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने मोर्चा खोल दिया था. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन ने इस फैसले की आलोचना करते हुए इसे वापस लेने की मांग की थी. इस बीच, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकार (यूआईडीएआई) ने कहा है कि आधार प्रमाणीकरण का इस्तेमाल करने वाले सभी उपकरणों को 1 जून से नए इनक्रिप्शन मानकों का पालन करना होगा. इस कदम का उद्देश्य हार्डवेयर में एक और सुरक्षा उपाय करना है जबकि इस तरह के उपकरण बायोमेट्रिक आधारित डिजिटल भुगतान के केंद्र में आ रहे हैं. यूआईडीएआई देश में आधार के कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार नोडल निकाय है. इससे पहले बैंकों ने भी अपने खाताधारकों को आधार की अहमियत बताते हुए कहा था कि बैंक में आधार कार्ड और मोबाइल फोन नंबर दर्ज न कराने का स्थिति में बचत खाता धारकों को 31 मार्च के बाद परेशानी झेलनी पड़ेगी. इस बारे में केंद्र सरकार की ओर से बैंकों को निर्देश जारी किए गए हैं. खाताधारकों को 31 मार्च तक यह प्रक्रिया आवश्यक रूप से पूरी कर लेने का निर्देश दिया गया है.टिप्पणियां पिछले दिनों सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत मुफ्त रसोई गैस कनेक्शन प्राप्त करने को लेकर आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया था. यही नहीं सरकार ने स्कूलों में मिड डे मील के लिए भी आधार कार्ड को जरूरी बनाने का फैसला किया था, लेकिन इसे लेकर हुई तीखी आलोचना के बाद सरकार ने अपना निर्णय बदल लिया और स्पष्ट किया कि किसी को भी आधार संख्या के अभाव में सब्सिडी योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं रखा जाएगा और अन्य पहचान प्रमाण पत्र स्वीकार किए जाएंगे. विभिन्न विपक्षी दलों ने इस पर आपत्ति जताई थी. मिड डे मील के लिए आधार कार्ड को जरूरी बनाने के केंद्र के फैसले के खिलाफ दो राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने मोर्चा खोल दिया था. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन ने इस फैसले की आलोचना करते हुए इसे वापस लेने की मांग की थी. इस बीच, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकार (यूआईडीएआई) ने कहा है कि आधार प्रमाणीकरण का इस्तेमाल करने वाले सभी उपकरणों को 1 जून से नए इनक्रिप्शन मानकों का पालन करना होगा. इस कदम का उद्देश्य हार्डवेयर में एक और सुरक्षा उपाय करना है जबकि इस तरह के उपकरण बायोमेट्रिक आधारित डिजिटल भुगतान के केंद्र में आ रहे हैं. यूआईडीएआई देश में आधार के कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार नोडल निकाय है. पिछले दिनों सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत मुफ्त रसोई गैस कनेक्शन प्राप्त करने को लेकर आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया था. यही नहीं सरकार ने स्कूलों में मिड डे मील के लिए भी आधार कार्ड को जरूरी बनाने का फैसला किया था, लेकिन इसे लेकर हुई तीखी आलोचना के बाद सरकार ने अपना निर्णय बदल लिया और स्पष्ट किया कि किसी को भी आधार संख्या के अभाव में सब्सिडी योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं रखा जाएगा और अन्य पहचान प्रमाण पत्र स्वीकार किए जाएंगे. विभिन्न विपक्षी दलों ने इस पर आपत्ति जताई थी. मिड डे मील के लिए आधार कार्ड को जरूरी बनाने के केंद्र के फैसले के खिलाफ दो राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने मोर्चा खोल दिया था. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन ने इस फैसले की आलोचना करते हुए इसे वापस लेने की मांग की थी. इस बीच, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकार (यूआईडीएआई) ने कहा है कि आधार प्रमाणीकरण का इस्तेमाल करने वाले सभी उपकरणों को 1 जून से नए इनक्रिप्शन मानकों का पालन करना होगा. इस कदम का उद्देश्य हार्डवेयर में एक और सुरक्षा उपाय करना है जबकि इस तरह के उपकरण बायोमेट्रिक आधारित डिजिटल भुगतान के केंद्र में आ रहे हैं. यूआईडीएआई देश में आधार के कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार नोडल निकाय है. इस बीच, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकार (यूआईडीएआई) ने कहा है कि आधार प्रमाणीकरण का इस्तेमाल करने वाले सभी उपकरणों को 1 जून से नए इनक्रिप्शन मानकों का पालन करना होगा. इस कदम का उद्देश्य हार्डवेयर में एक और सुरक्षा उपाय करना है जबकि इस तरह के उपकरण बायोमेट्रिक आधारित डिजिटल भुगतान के केंद्र में आ रहे हैं. यूआईडीएआई देश में आधार के कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार नोडल निकाय है.
बिना आधार नंबर के आयकर रिटर्न वैध नहीं माने जाएंगे सरकार ने वित्त विधेयक में अहम संशोधन का प्रस्ताव किया जरूरी सेवाओं के लिए सरकार आधार को लगातार जरूरी करती जा रही है
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['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: बॉलीवुड अभिनेत्री नफीसा उर्फ जिया खान की मौत से स्तब्ध फिल्मकार रामगोपाल वर्मा ने कहा कि जिया अपने करियर और अपने भविष्य को लेकर गहरे अवसाद में थीं, क्योंकि पिछले तीन सालों में उन्होंने एक भी फिल्म में काम नहीं किया था। वर्मा ने साल 2007 में अपनी फिल्म 'निशब्द' के माध्यम से बॉलीवुड में उन्हें सबसे पहले मौका दिया था। जिया (25) द्वारा जुहू स्थित अपने फ्लैट में सोमवार देर रात फांसी लगा लेने की खबर मिलने के बाद वर्मा ने दुख व्यक्त करते हुए ट्विटर पर लिखा, जब आखिरी बार मैं जिया से मिला था तो उसने मुझे बताया था कि हर कोई उसके साथ ऐसा बर्ताव करता है, जैसे वह असफल अभिनेत्री हो। उन्होंने लिखा, फिल्म 'निशब्द' में काफी सराहे जाने और 'गजनी' जैसी सफलतम फिल्म में काम करने के बावजूद पिछले तीन साल से उसे एक भी फिल्म नहीं मिली थी। मुझे नहीं मालूम कि जिया ने किस वजह से आत्महत्या जैसा कदम उठाया, लेकिन वह अपने करियर और भविष्य को लेकर गहरे अवसाद में थी।टिप्पणियां वर्मा ने कहा उन्होंने किसी भी नई अभिनेत्री में जिया जितना हौसला और उत्साह नहीं देखा। जिया ने अपनी पहली फिल्म 'निशब्द' में एक 18 साल की युवती की भूमिका निभाई थी, जो 60 साल के व्यक्ति से प्रेम करती है। हालांकि फिल्म विवादों में रही थी और बॉक्स ऑफिस पर बहुत सफल नहीं हो पाई, लेकिन इंडस्ट्री में जिया के काम को काफी सराहना मिली थी। वर्मा एक खूबसूरत और जीवंत युवती के रूप में जिया को याद करते हैं। जिया (25) द्वारा जुहू स्थित अपने फ्लैट में सोमवार देर रात फांसी लगा लेने की खबर मिलने के बाद वर्मा ने दुख व्यक्त करते हुए ट्विटर पर लिखा, जब आखिरी बार मैं जिया से मिला था तो उसने मुझे बताया था कि हर कोई उसके साथ ऐसा बर्ताव करता है, जैसे वह असफल अभिनेत्री हो। उन्होंने लिखा, फिल्म 'निशब्द' में काफी सराहे जाने और 'गजनी' जैसी सफलतम फिल्म में काम करने के बावजूद पिछले तीन साल से उसे एक भी फिल्म नहीं मिली थी। मुझे नहीं मालूम कि जिया ने किस वजह से आत्महत्या जैसा कदम उठाया, लेकिन वह अपने करियर और भविष्य को लेकर गहरे अवसाद में थी।टिप्पणियां वर्मा ने कहा उन्होंने किसी भी नई अभिनेत्री में जिया जितना हौसला और उत्साह नहीं देखा। जिया ने अपनी पहली फिल्म 'निशब्द' में एक 18 साल की युवती की भूमिका निभाई थी, जो 60 साल के व्यक्ति से प्रेम करती है। हालांकि फिल्म विवादों में रही थी और बॉक्स ऑफिस पर बहुत सफल नहीं हो पाई, लेकिन इंडस्ट्री में जिया के काम को काफी सराहना मिली थी। वर्मा एक खूबसूरत और जीवंत युवती के रूप में जिया को याद करते हैं। उन्होंने लिखा, फिल्म 'निशब्द' में काफी सराहे जाने और 'गजनी' जैसी सफलतम फिल्म में काम करने के बावजूद पिछले तीन साल से उसे एक भी फिल्म नहीं मिली थी। मुझे नहीं मालूम कि जिया ने किस वजह से आत्महत्या जैसा कदम उठाया, लेकिन वह अपने करियर और भविष्य को लेकर गहरे अवसाद में थी।टिप्पणियां वर्मा ने कहा उन्होंने किसी भी नई अभिनेत्री में जिया जितना हौसला और उत्साह नहीं देखा। जिया ने अपनी पहली फिल्म 'निशब्द' में एक 18 साल की युवती की भूमिका निभाई थी, जो 60 साल के व्यक्ति से प्रेम करती है। हालांकि फिल्म विवादों में रही थी और बॉक्स ऑफिस पर बहुत सफल नहीं हो पाई, लेकिन इंडस्ट्री में जिया के काम को काफी सराहना मिली थी। वर्मा एक खूबसूरत और जीवंत युवती के रूप में जिया को याद करते हैं। वर्मा ने कहा उन्होंने किसी भी नई अभिनेत्री में जिया जितना हौसला और उत्साह नहीं देखा। जिया ने अपनी पहली फिल्म 'निशब्द' में एक 18 साल की युवती की भूमिका निभाई थी, जो 60 साल के व्यक्ति से प्रेम करती है। हालांकि फिल्म विवादों में रही थी और बॉक्स ऑफिस पर बहुत सफल नहीं हो पाई, लेकिन इंडस्ट्री में जिया के काम को काफी सराहना मिली थी। वर्मा एक खूबसूरत और जीवंत युवती के रूप में जिया को याद करते हैं। जिया ने अपनी पहली फिल्म 'निशब्द' में एक 18 साल की युवती की भूमिका निभाई थी, जो 60 साल के व्यक्ति से प्रेम करती है। हालांकि फिल्म विवादों में रही थी और बॉक्स ऑफिस पर बहुत सफल नहीं हो पाई, लेकिन इंडस्ट्री में जिया के काम को काफी सराहना मिली थी। वर्मा एक खूबसूरत और जीवंत युवती के रूप में जिया को याद करते हैं।
यह एक सारांश है: रामगोपाल वर्मा ने लिखा, फिल्म 'निशब्द' में काफी सराहे जाने और 'गजनी' जैसी सफलतम फिल्म में काम करने के बावजूद पिछले तीन साल से उसे एक भी फिल्म नहीं मिली थी।
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['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: राजधानी दिल्ली में सोमवार को जगह-जगह NDMC के कर्मचारी जेट प्रेशर के ज़रिये पानी का छिड़काव करते नज़र आए. मेट्रो कंस्ट्रक्शन साइट्स तक सफाई शुरू हो गई. बिना प्रदूषण सर्टिफिकेट वाले ट्रकों का चालान किया जा रहा है. स्कूल बंद किए गए हैं.   दिल्ली सरकार के पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन कहते हैं, दिल्ली सरकार ने अब ऑड-ईवेन योजना पर फिर सोचना शुरू कर दिया है.  इमरान ने एनडीटीवी से कहा, "ऑड-इवेन स्कीम एक विकल्प है. इसकी बहुत तैयारी करनी पड़ती है. सरकार इसकी तैयारी कर रही है. अगर ज़रूरत पड़ेगी तो इसे लागू करेंगे".  टिप्पणियां दिल्ली सरकार को भारत सरकार का भी समर्थन मिलता दिख रहा है. पर्यावरण मंत्री अनिल दवे ने एनडीटीवी से कहा, "प्रदूषण को रोकने के लिए हमें सारे प्रयोग करने चाहिये. लेकिन प्रयोग और राजनीति को अलग रखना चाहिये". ये सब मान रहे हैं कि हालात इमरजेंसी जैसे हैं. इनसे निबटने के लिए हर किसी को कोशिश करनी होगी. हर साल इस सीज़न में प्रदूषण का स्तर बढ़ता है. लेकिन इस बार जिस तरह से प्रदूषण ने भयावह रूप ले लिया. उसके बाद ये सवाल उठने लगा है कि समय रहते भारत सरकार ने राज्य सरकारों के साथ मिलकर इससे निपटने के लिए रोडमैप तैयार क्यों नहीं किया. जिसकी तैयारी अब की जा रही है. दिल्ली सरकार के पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन कहते हैं, दिल्ली सरकार ने अब ऑड-ईवेन योजना पर फिर सोचना शुरू कर दिया है.  इमरान ने एनडीटीवी से कहा, "ऑड-इवेन स्कीम एक विकल्प है. इसकी बहुत तैयारी करनी पड़ती है. सरकार इसकी तैयारी कर रही है. अगर ज़रूरत पड़ेगी तो इसे लागू करेंगे".  टिप्पणियां दिल्ली सरकार को भारत सरकार का भी समर्थन मिलता दिख रहा है. पर्यावरण मंत्री अनिल दवे ने एनडीटीवी से कहा, "प्रदूषण को रोकने के लिए हमें सारे प्रयोग करने चाहिये. लेकिन प्रयोग और राजनीति को अलग रखना चाहिये". ये सब मान रहे हैं कि हालात इमरजेंसी जैसे हैं. इनसे निबटने के लिए हर किसी को कोशिश करनी होगी. हर साल इस सीज़न में प्रदूषण का स्तर बढ़ता है. लेकिन इस बार जिस तरह से प्रदूषण ने भयावह रूप ले लिया. उसके बाद ये सवाल उठने लगा है कि समय रहते भारत सरकार ने राज्य सरकारों के साथ मिलकर इससे निपटने के लिए रोडमैप तैयार क्यों नहीं किया. जिसकी तैयारी अब की जा रही है. दिल्ली सरकार को भारत सरकार का भी समर्थन मिलता दिख रहा है. पर्यावरण मंत्री अनिल दवे ने एनडीटीवी से कहा, "प्रदूषण को रोकने के लिए हमें सारे प्रयोग करने चाहिये. लेकिन प्रयोग और राजनीति को अलग रखना चाहिये". ये सब मान रहे हैं कि हालात इमरजेंसी जैसे हैं. इनसे निबटने के लिए हर किसी को कोशिश करनी होगी. हर साल इस सीज़न में प्रदूषण का स्तर बढ़ता है. लेकिन इस बार जिस तरह से प्रदूषण ने भयावह रूप ले लिया. उसके बाद ये सवाल उठने लगा है कि समय रहते भारत सरकार ने राज्य सरकारों के साथ मिलकर इससे निपटने के लिए रोडमैप तैयार क्यों नहीं किया. जिसकी तैयारी अब की जा रही है. ये सब मान रहे हैं कि हालात इमरजेंसी जैसे हैं. इनसे निबटने के लिए हर किसी को कोशिश करनी होगी. हर साल इस सीज़न में प्रदूषण का स्तर बढ़ता है. लेकिन इस बार जिस तरह से प्रदूषण ने भयावह रूप ले लिया. उसके बाद ये सवाल उठने लगा है कि समय रहते भारत सरकार ने राज्य सरकारों के साथ मिलकर इससे निपटने के लिए रोडमैप तैयार क्यों नहीं किया. जिसकी तैयारी अब की जा रही है.
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: दिल्ली में 20 फीसदी प्रदूषण पराली की वजह से 80 फीसदी दिल्ली के अंदरूनी वजह से केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने संबंधित पांच राज्‍यों के साथ की बैठक
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['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: लंदन ओलिम्पिक में क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय करने वाले भारत के स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पारुपल्ली कश्यप ने कहा कि पुलेगा गोपीचंद को भारतीय बैडमिंटन की सफलता का श्रेय मिलना चाहिए। कश्यप ने कहा, "गोपीचंद की बदौलत ही भारत में बैडमिंटन के क्षेत्र में सुधार हुआ। अब हमारे पास बेहतर मूलभूत सुविधा है। बीते 10 साल में इस तरह की सुविधा नहीं थी। गोपीचंद ने अपने अनुभव के दम पर यह बदलाव कायम किया है।" दूसरी ओर, भारतीय टीम को सफलता दिलाने वाले गोपीचंद निजी बैडमिंटन अकादमी चलाने को लेकर विवादों के घेरे में हैं। बम्बई उच्च न्ययालय ने इस सम्बंध में गोपीचंद की खिंचाई भी की थी। न्यायालय ने कहा था कि गोपीचंद जो कर रहे हैं वह नैतिक रूप से सही नहीं है क्योंकि राष्ट्रीय कोच रहते हुए उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। न्यायालय के मुताबिक गोपीचंद ऐसे पद पर हैं, जहां वह चयन को प्रभावित कर सकते हैं और इस कारण उनका निजी अकादमी चलाना ठीक नहीं है।टिप्पणियां बम्बई उच्च न्यायालय का यह आदेश बैडमिंटन खिलाड़ी प्राजक्ता सावंत की याचिका पर आया है। प्राजक्ता ने नवम्बर में एक याचिका दायर करते हुए कहा था कि उन्हें राष्ट्रीय शिविर में हिस्सा नहीं लेने दिया गया और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। कश्यप ने कहा कि राष्ट्रीय कोच पर लगे तमाम आरोप गलत हैं। कश्यप बोले, "मैं इस तरह के आरोपों से निराश हूं। गोपीचंद ने भारतीय बैडमिंटन के लिए इतना कुछ किया है और खिलाड़ियों पर बहुत ध्यान देते हैं।" कश्यप ने कहा, "गोपीचंद की बदौलत ही भारत में बैडमिंटन के क्षेत्र में सुधार हुआ। अब हमारे पास बेहतर मूलभूत सुविधा है। बीते 10 साल में इस तरह की सुविधा नहीं थी। गोपीचंद ने अपने अनुभव के दम पर यह बदलाव कायम किया है।" दूसरी ओर, भारतीय टीम को सफलता दिलाने वाले गोपीचंद निजी बैडमिंटन अकादमी चलाने को लेकर विवादों के घेरे में हैं। बम्बई उच्च न्ययालय ने इस सम्बंध में गोपीचंद की खिंचाई भी की थी। न्यायालय ने कहा था कि गोपीचंद जो कर रहे हैं वह नैतिक रूप से सही नहीं है क्योंकि राष्ट्रीय कोच रहते हुए उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। न्यायालय के मुताबिक गोपीचंद ऐसे पद पर हैं, जहां वह चयन को प्रभावित कर सकते हैं और इस कारण उनका निजी अकादमी चलाना ठीक नहीं है।टिप्पणियां बम्बई उच्च न्यायालय का यह आदेश बैडमिंटन खिलाड़ी प्राजक्ता सावंत की याचिका पर आया है। प्राजक्ता ने नवम्बर में एक याचिका दायर करते हुए कहा था कि उन्हें राष्ट्रीय शिविर में हिस्सा नहीं लेने दिया गया और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। कश्यप ने कहा कि राष्ट्रीय कोच पर लगे तमाम आरोप गलत हैं। कश्यप बोले, "मैं इस तरह के आरोपों से निराश हूं। गोपीचंद ने भारतीय बैडमिंटन के लिए इतना कुछ किया है और खिलाड़ियों पर बहुत ध्यान देते हैं।" दूसरी ओर, भारतीय टीम को सफलता दिलाने वाले गोपीचंद निजी बैडमिंटन अकादमी चलाने को लेकर विवादों के घेरे में हैं। बम्बई उच्च न्ययालय ने इस सम्बंध में गोपीचंद की खिंचाई भी की थी। न्यायालय ने कहा था कि गोपीचंद जो कर रहे हैं वह नैतिक रूप से सही नहीं है क्योंकि राष्ट्रीय कोच रहते हुए उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। न्यायालय के मुताबिक गोपीचंद ऐसे पद पर हैं, जहां वह चयन को प्रभावित कर सकते हैं और इस कारण उनका निजी अकादमी चलाना ठीक नहीं है।टिप्पणियां बम्बई उच्च न्यायालय का यह आदेश बैडमिंटन खिलाड़ी प्राजक्ता सावंत की याचिका पर आया है। प्राजक्ता ने नवम्बर में एक याचिका दायर करते हुए कहा था कि उन्हें राष्ट्रीय शिविर में हिस्सा नहीं लेने दिया गया और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। कश्यप ने कहा कि राष्ट्रीय कोच पर लगे तमाम आरोप गलत हैं। कश्यप बोले, "मैं इस तरह के आरोपों से निराश हूं। गोपीचंद ने भारतीय बैडमिंटन के लिए इतना कुछ किया है और खिलाड़ियों पर बहुत ध्यान देते हैं।" न्यायालय ने कहा था कि गोपीचंद जो कर रहे हैं वह नैतिक रूप से सही नहीं है क्योंकि राष्ट्रीय कोच रहते हुए उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। न्यायालय के मुताबिक गोपीचंद ऐसे पद पर हैं, जहां वह चयन को प्रभावित कर सकते हैं और इस कारण उनका निजी अकादमी चलाना ठीक नहीं है।टिप्पणियां बम्बई उच्च न्यायालय का यह आदेश बैडमिंटन खिलाड़ी प्राजक्ता सावंत की याचिका पर आया है। प्राजक्ता ने नवम्बर में एक याचिका दायर करते हुए कहा था कि उन्हें राष्ट्रीय शिविर में हिस्सा नहीं लेने दिया गया और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। कश्यप ने कहा कि राष्ट्रीय कोच पर लगे तमाम आरोप गलत हैं। कश्यप बोले, "मैं इस तरह के आरोपों से निराश हूं। गोपीचंद ने भारतीय बैडमिंटन के लिए इतना कुछ किया है और खिलाड़ियों पर बहुत ध्यान देते हैं।" बम्बई उच्च न्यायालय का यह आदेश बैडमिंटन खिलाड़ी प्राजक्ता सावंत की याचिका पर आया है। प्राजक्ता ने नवम्बर में एक याचिका दायर करते हुए कहा था कि उन्हें राष्ट्रीय शिविर में हिस्सा नहीं लेने दिया गया और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। कश्यप ने कहा कि राष्ट्रीय कोच पर लगे तमाम आरोप गलत हैं। कश्यप बोले, "मैं इस तरह के आरोपों से निराश हूं। गोपीचंद ने भारतीय बैडमिंटन के लिए इतना कुछ किया है और खिलाड़ियों पर बहुत ध्यान देते हैं।" कश्यप ने कहा कि राष्ट्रीय कोच पर लगे तमाम आरोप गलत हैं। कश्यप बोले, "मैं इस तरह के आरोपों से निराश हूं। गोपीचंद ने भारतीय बैडमिंटन के लिए इतना कुछ किया है और खिलाड़ियों पर बहुत ध्यान देते हैं।"
लंदन ओलिम्पिक में क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय करने वाले भारत के स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पारुपल्ली कश्यप ने कहा कि पुलेगा गोपीचंद को भारतीय बैडमिंटन की सफलता का श्रेय मिलना चाहिए।
34
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: भारतीय रिजर्व बैंक ने गुरुवार को कहा कि वह रुपये के अवमूल्यन पर रोक लगाएगा। रिजर्व बैंक के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने संवाददाताओं से कहा, "पिछले तीन महीनों में रुपये का अवमूल्यन चिंता का विषय है। यह विदेशों में हो रही गतिविधियों का नतीजा है। देश में पूंजी की आवक कम होने के कारण विदेशी बाजार में रुपये की विनिमय दर घट गई है।" इस साल रुपये के मूल्य में 14 फीसदी तक गिरावट आ गई है और एशिया की सभी मुद्राओं में इसका सबसे खराब प्रदर्शन चल रहा है। सुब्बाराव ने कहा कि रुपये का मूल्य बढ़ाने के लिए देश में पूंजी का प्रवाह बढ़ाया जाएगा। रिजर्व बैंक ने भारतीय बैंकों में प्रवासी भारतीयों द्वारा जमा की जाने वाली रकम पर ब्याज की ऊपरी सीमा बढ़ा दी है। साथ ही स्थानीय कम्पनियों को ऋण लेने में सुविधा देने के लिए भी ऋण पर ब्याज दर की सीमा बढ़ा दी है। उन्होंने कहा, "और भी कुछ जरूरी हुआ तो हम वह करेंगे।" रिजर्व बैंक ने कहा कि वह नीति के आधार पर यह तय करता है कि वह बाजार में हस्तक्षेप करेगा या नहीं। बैंक ने कहा, "हम विनिमय दर और आर्थिक अस्थिरता कम करने के लिए बाजार में हस्तक्षेप कर सकते हैं।" नकद आरक्षी अनुपात में कमी किए जाने की सम्भावना पर पूछे गए सवाल पर रिजर्व बैंक ने बगैर कुछ स्पष्ट किए कहा कि इसके लिए मध्य-तिमाही समीक्षा तक इंतजार करना चाहिए। बैंक 16 दिसम्बर को मध्य तिमाही समीक्षा जारी करेगा।
सारांश: इस साल रुपये के मूल्य में 14 फीसदी तक गिरावट आ गई है और एशिया की सभी मुद्राओं में इसका सबसे खराब प्रदर्शन चल रहा है।
31
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: यशराज फिल्म्स की आने वाली फिल्म का नाम 'शुद्ध देसी रोमांस' रखा गया है। मनीष शर्मा के निर्देशन में बन रही फिल्म में अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत और अभिनेत्री परिणिति चोपड़ा को मुख्य भूमिका में लिया गया है। वाईआरएफ द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, फिल्म प्रेम, आकर्षण और प्रतिबद्धता के बीच उपजे स्वभाविक प्रेम और अड़चनों की कहानी है।टिप्पणियां फिल्म में सुशांत और परिणिति की प्रेम कहानी के अलावा अनुभवी अभिनेता ऋषि कपूर और नवोदित अभिनेत्री वाणी कपूर की भी प्रेम कहानी है। फिल्म 13 सितम्बर को प्रदर्शित होगी। पटकथा जयदीप साहनी ने लिखी है और फिल्म के निर्माता आदित्य चोपड़ा हैं। फिल्म में संगीत सचिन-जिगर का और गीत साहनी के हैं। वाईआरएफ द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, फिल्म प्रेम, आकर्षण और प्रतिबद्धता के बीच उपजे स्वभाविक प्रेम और अड़चनों की कहानी है।टिप्पणियां फिल्म में सुशांत और परिणिति की प्रेम कहानी के अलावा अनुभवी अभिनेता ऋषि कपूर और नवोदित अभिनेत्री वाणी कपूर की भी प्रेम कहानी है। फिल्म 13 सितम्बर को प्रदर्शित होगी। पटकथा जयदीप साहनी ने लिखी है और फिल्म के निर्माता आदित्य चोपड़ा हैं। फिल्म में संगीत सचिन-जिगर का और गीत साहनी के हैं। फिल्म में सुशांत और परिणिति की प्रेम कहानी के अलावा अनुभवी अभिनेता ऋषि कपूर और नवोदित अभिनेत्री वाणी कपूर की भी प्रेम कहानी है। फिल्म 13 सितम्बर को प्रदर्शित होगी। पटकथा जयदीप साहनी ने लिखी है और फिल्म के निर्माता आदित्य चोपड़ा हैं। फिल्म में संगीत सचिन-जिगर का और गीत साहनी के हैं। फिल्म 13 सितम्बर को प्रदर्शित होगी। पटकथा जयदीप साहनी ने लिखी है और फिल्म के निर्माता आदित्य चोपड़ा हैं। फिल्म में संगीत सचिन-जिगर का और गीत साहनी के हैं।
संक्षिप्त पाठ: फिल्म में सुशांत और परिणिति की प्रेम कहानी के अलावा अनुभवी अभिनेता ऋषि कपूर और नवोदित अभिनेत्री वाणी कपूर की भी प्रेम कहानी है।
14
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: देश के शेयर बाजारों के प्रमुख सूचकांकों में गत सप्ताह डेढ़ फीसदी से अधिक तेजी रही। बम्बई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स गत साप्ताहिक कारोबार में सुधार के अनुकूल असर की उम्मीद में 1.56 फीसदी या 288.56 अंकों की तेजी के साथ 14 महीने के ऊपरी स्तर 18,752.83 पर बंद हुआ। सेंसेक्स इससे पिछले सप्ताह भी 4.03 फीसदी या 714.62 अंकों की तेजी के साथ 18,464.27 पर बंद हुआ था। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक निफ्टी गत साप्ताहिक कारोबार में 2.03 फीसदी या 113.50 अंकों की तेजी के साथ 5,691.15 पर बंद हुआ। निफ्टी इससे पिछले सप्ताह भी 4.08 फीसदी या 218.95 अंकों की तेजी के साथ 5,577.65 पर बंद हुआ था। आलोच्य अवधि में बीएसई के मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में ढाई फीसदी से अधिक तेजी रही। मिडकैप 3.00 फीसदी या 187.53 अंकों की तेजी के साथ 6,432.43 पर बंद हुआ। मिडकैप में पिछले सप्ताह भी 1.66 फीसदी तेजी रही थी। स्मॉलकैप आलोच्य अवधि में 2.81 फीसदी या 186.09 अंकों की तेजी के साथ 6,809.21 पर बंद हुआ। स्मॉलकैप में पिछले सप्ताह भी 1.95 फीसदी तेजी रही थी। सेंसेक्स में तेजी में रहने वाले प्रमुख शेयरों में रहे जिंदल स्टील (14.60 फीसदी), भेल (13.54 फीसदी), भारतीय स्टेट बैंक (12.28 फीसदी), भारती एयरटेल (9.41 फीसदी) और एलएंडटी (6.54 फीसदी)। सेंसेक्स में गिरावट वाले शेयरों में प्रमुख रहे टीसीएस (7.70 फीसदी), डॉ. रेड्डीज लैब (5.87 फीसदी), हिंदुस्तान यूनिलीवर (3.26 फीसदी), विप्रो (3.22 फीसदी) और कोल इंडिया (2.73) में गिरावट रही। बीएसई के 13 में से 9 सेक्टरों में तेजी रही। रियल्टी (8.84 फीसदी), बैंकिंग (6.96 फीसदी), पूंजीगत वस्तु (6.88 फीसदी), बिजली (5.82 फीसदी) और सार्वजनिक कम्पनियां (4.22 फीसदी) में सर्वाधिक तेजी रही। बीएसई के चार सेक्टरों सूचना प्रौद्योगिकी (3.56 फीसदी), स्वास्थ्य सेवा (2.18 फीसदी), तेज खपत वाली उपभोक्ता वस्तु (2.05 फीसदी) और प्रौद्योगिकी (1.28 फीसदी) में गिरावट रही। गत सप्ताह सिर्फ चार कारोबारी सत्र संचालित हुआ। गणेश चतुर्थी उत्सव के अवसर पर भारतीय शेयर बाजार बुधवार को बंद रहे। सप्ताह के महत्वपूर्ण घटनाक्रमों में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोमवार को ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करते हुए नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में 0.25 फीसदी कटौती कर दी। सीआरआर में इस कटौती से अर्थव्यवस्था में 17,000 करोड़ रुपये की तरलता जारी होने का अनुमान जताया गया है। सीआरआर में 25 आधार अंक की कटौती कर इसे 4.50 फीसदी कर दिया गया। गुरुवार को विपक्षी पार्टियों ने डीजल मूल्य वृद्धि और बहुब्रांड खुदरा कारोबार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को अनुमति देने के सरकार के फैसले के विरुद्ध देश व्यापी हड़ताल आयोजित की। कारोबारी संघों के मुताबिक हालांकि देशव्यापी हड़ताल से गुरुवार को देशभर में आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुईं। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने कहा कि देशव्यापी हड़ताल से भारतीय अर्थव्यवस्था को 12,500 करोड़ रुपये (2.25 अरब डॉलर) का नुकसान होने का अनुमान है। औद्योगिक संगठनों ने सरकार को सलाह दी कि राजनीकि दबाव में उन्हें सुधार के फैसले से पीछे नहीं हटना चाहिए।टिप्पणियां आर्थिक सुधार की प्रक्रिया पर आगे बढ़कर केंद्र सरकार ने घरेलू कम्पनियों द्वारा लिए जाने वाले विदेशी ऋण पर कर को शुक्रवार को 20 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी कर दिया। केंद्रिय वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम ने कहा कि घटा हुआ कर जुलाई 2012 और जून 2015 के बीच लिए गए ऋण पर लागू होगा। चिदम्बरम ने शुक्रवार को ही कहा कि आम लोगों को राहत देने के लिए सरकार गैर-रियायती रसोई गैस की बिक्री पर से सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क और मूल्य वर्धित कर (वैट) हटा देगी। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी शुक्रवार को देश को सम्बोधित करते हुए कहा कि घाटे की भरपाई के लिए डीजल मूल्य में प्रति लीटर 17 रुपये की वृद्धि करने की जरूरत थी और सरकार ने इसका कुछ ही हिस्सा आम आदमी के कंधे पर डाला है। सेंसेक्स इससे पिछले सप्ताह भी 4.03 फीसदी या 714.62 अंकों की तेजी के साथ 18,464.27 पर बंद हुआ था। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक निफ्टी गत साप्ताहिक कारोबार में 2.03 फीसदी या 113.50 अंकों की तेजी के साथ 5,691.15 पर बंद हुआ। निफ्टी इससे पिछले सप्ताह भी 4.08 फीसदी या 218.95 अंकों की तेजी के साथ 5,577.65 पर बंद हुआ था। आलोच्य अवधि में बीएसई के मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में ढाई फीसदी से अधिक तेजी रही। मिडकैप 3.00 फीसदी या 187.53 अंकों की तेजी के साथ 6,432.43 पर बंद हुआ। मिडकैप में पिछले सप्ताह भी 1.66 फीसदी तेजी रही थी। स्मॉलकैप आलोच्य अवधि में 2.81 फीसदी या 186.09 अंकों की तेजी के साथ 6,809.21 पर बंद हुआ। स्मॉलकैप में पिछले सप्ताह भी 1.95 फीसदी तेजी रही थी। सेंसेक्स में तेजी में रहने वाले प्रमुख शेयरों में रहे जिंदल स्टील (14.60 फीसदी), भेल (13.54 फीसदी), भारतीय स्टेट बैंक (12.28 फीसदी), भारती एयरटेल (9.41 फीसदी) और एलएंडटी (6.54 फीसदी)। सेंसेक्स में गिरावट वाले शेयरों में प्रमुख रहे टीसीएस (7.70 फीसदी), डॉ. रेड्डीज लैब (5.87 फीसदी), हिंदुस्तान यूनिलीवर (3.26 फीसदी), विप्रो (3.22 फीसदी) और कोल इंडिया (2.73) में गिरावट रही। बीएसई के 13 में से 9 सेक्टरों में तेजी रही। रियल्टी (8.84 फीसदी), बैंकिंग (6.96 फीसदी), पूंजीगत वस्तु (6.88 फीसदी), बिजली (5.82 फीसदी) और सार्वजनिक कम्पनियां (4.22 फीसदी) में सर्वाधिक तेजी रही। बीएसई के चार सेक्टरों सूचना प्रौद्योगिकी (3.56 फीसदी), स्वास्थ्य सेवा (2.18 फीसदी), तेज खपत वाली उपभोक्ता वस्तु (2.05 फीसदी) और प्रौद्योगिकी (1.28 फीसदी) में गिरावट रही। गत सप्ताह सिर्फ चार कारोबारी सत्र संचालित हुआ। गणेश चतुर्थी उत्सव के अवसर पर भारतीय शेयर बाजार बुधवार को बंद रहे। सप्ताह के महत्वपूर्ण घटनाक्रमों में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोमवार को ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करते हुए नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में 0.25 फीसदी कटौती कर दी। सीआरआर में इस कटौती से अर्थव्यवस्था में 17,000 करोड़ रुपये की तरलता जारी होने का अनुमान जताया गया है। सीआरआर में 25 आधार अंक की कटौती कर इसे 4.50 फीसदी कर दिया गया। गुरुवार को विपक्षी पार्टियों ने डीजल मूल्य वृद्धि और बहुब्रांड खुदरा कारोबार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को अनुमति देने के सरकार के फैसले के विरुद्ध देश व्यापी हड़ताल आयोजित की। कारोबारी संघों के मुताबिक हालांकि देशव्यापी हड़ताल से गुरुवार को देशभर में आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुईं। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने कहा कि देशव्यापी हड़ताल से भारतीय अर्थव्यवस्था को 12,500 करोड़ रुपये (2.25 अरब डॉलर) का नुकसान होने का अनुमान है। औद्योगिक संगठनों ने सरकार को सलाह दी कि राजनीकि दबाव में उन्हें सुधार के फैसले से पीछे नहीं हटना चाहिए।टिप्पणियां आर्थिक सुधार की प्रक्रिया पर आगे बढ़कर केंद्र सरकार ने घरेलू कम्पनियों द्वारा लिए जाने वाले विदेशी ऋण पर कर को शुक्रवार को 20 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी कर दिया। केंद्रिय वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम ने कहा कि घटा हुआ कर जुलाई 2012 और जून 2015 के बीच लिए गए ऋण पर लागू होगा। चिदम्बरम ने शुक्रवार को ही कहा कि आम लोगों को राहत देने के लिए सरकार गैर-रियायती रसोई गैस की बिक्री पर से सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क और मूल्य वर्धित कर (वैट) हटा देगी। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी शुक्रवार को देश को सम्बोधित करते हुए कहा कि घाटे की भरपाई के लिए डीजल मूल्य में प्रति लीटर 17 रुपये की वृद्धि करने की जरूरत थी और सरकार ने इसका कुछ ही हिस्सा आम आदमी के कंधे पर डाला है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक निफ्टी गत साप्ताहिक कारोबार में 2.03 फीसदी या 113.50 अंकों की तेजी के साथ 5,691.15 पर बंद हुआ। निफ्टी इससे पिछले सप्ताह भी 4.08 फीसदी या 218.95 अंकों की तेजी के साथ 5,577.65 पर बंद हुआ था। आलोच्य अवधि में बीएसई के मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में ढाई फीसदी से अधिक तेजी रही। मिडकैप 3.00 फीसदी या 187.53 अंकों की तेजी के साथ 6,432.43 पर बंद हुआ। मिडकैप में पिछले सप्ताह भी 1.66 फीसदी तेजी रही थी। स्मॉलकैप आलोच्य अवधि में 2.81 फीसदी या 186.09 अंकों की तेजी के साथ 6,809.21 पर बंद हुआ। स्मॉलकैप में पिछले सप्ताह भी 1.95 फीसदी तेजी रही थी। सेंसेक्स में तेजी में रहने वाले प्रमुख शेयरों में रहे जिंदल स्टील (14.60 फीसदी), भेल (13.54 फीसदी), भारतीय स्टेट बैंक (12.28 फीसदी), भारती एयरटेल (9.41 फीसदी) और एलएंडटी (6.54 फीसदी)। सेंसेक्स में गिरावट वाले शेयरों में प्रमुख रहे टीसीएस (7.70 फीसदी), डॉ. रेड्डीज लैब (5.87 फीसदी), हिंदुस्तान यूनिलीवर (3.26 फीसदी), विप्रो (3.22 फीसदी) और कोल इंडिया (2.73) में गिरावट रही। बीएसई के 13 में से 9 सेक्टरों में तेजी रही। रियल्टी (8.84 फीसदी), बैंकिंग (6.96 फीसदी), पूंजीगत वस्तु (6.88 फीसदी), बिजली (5.82 फीसदी) और सार्वजनिक कम्पनियां (4.22 फीसदी) में सर्वाधिक तेजी रही। बीएसई के चार सेक्टरों सूचना प्रौद्योगिकी (3.56 फीसदी), स्वास्थ्य सेवा (2.18 फीसदी), तेज खपत वाली उपभोक्ता वस्तु (2.05 फीसदी) और प्रौद्योगिकी (1.28 फीसदी) में गिरावट रही। गत सप्ताह सिर्फ चार कारोबारी सत्र संचालित हुआ। गणेश चतुर्थी उत्सव के अवसर पर भारतीय शेयर बाजार बुधवार को बंद रहे। सप्ताह के महत्वपूर्ण घटनाक्रमों में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोमवार को ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करते हुए नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में 0.25 फीसदी कटौती कर दी। सीआरआर में इस कटौती से अर्थव्यवस्था में 17,000 करोड़ रुपये की तरलता जारी होने का अनुमान जताया गया है। सीआरआर में 25 आधार अंक की कटौती कर इसे 4.50 फीसदी कर दिया गया। गुरुवार को विपक्षी पार्टियों ने डीजल मूल्य वृद्धि और बहुब्रांड खुदरा कारोबार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को अनुमति देने के सरकार के फैसले के विरुद्ध देश व्यापी हड़ताल आयोजित की। कारोबारी संघों के मुताबिक हालांकि देशव्यापी हड़ताल से गुरुवार को देशभर में आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुईं। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने कहा कि देशव्यापी हड़ताल से भारतीय अर्थव्यवस्था को 12,500 करोड़ रुपये (2.25 अरब डॉलर) का नुकसान होने का अनुमान है। औद्योगिक संगठनों ने सरकार को सलाह दी कि राजनीकि दबाव में उन्हें सुधार के फैसले से पीछे नहीं हटना चाहिए।टिप्पणियां आर्थिक सुधार की प्रक्रिया पर आगे बढ़कर केंद्र सरकार ने घरेलू कम्पनियों द्वारा लिए जाने वाले विदेशी ऋण पर कर को शुक्रवार को 20 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी कर दिया। केंद्रिय वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम ने कहा कि घटा हुआ कर जुलाई 2012 और जून 2015 के बीच लिए गए ऋण पर लागू होगा। चिदम्बरम ने शुक्रवार को ही कहा कि आम लोगों को राहत देने के लिए सरकार गैर-रियायती रसोई गैस की बिक्री पर से सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क और मूल्य वर्धित कर (वैट) हटा देगी। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी शुक्रवार को देश को सम्बोधित करते हुए कहा कि घाटे की भरपाई के लिए डीजल मूल्य में प्रति लीटर 17 रुपये की वृद्धि करने की जरूरत थी और सरकार ने इसका कुछ ही हिस्सा आम आदमी के कंधे पर डाला है। आलोच्य अवधि में बीएसई के मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में ढाई फीसदी से अधिक तेजी रही। मिडकैप 3.00 फीसदी या 187.53 अंकों की तेजी के साथ 6,432.43 पर बंद हुआ। मिडकैप में पिछले सप्ताह भी 1.66 फीसदी तेजी रही थी। स्मॉलकैप आलोच्य अवधि में 2.81 फीसदी या 186.09 अंकों की तेजी के साथ 6,809.21 पर बंद हुआ। स्मॉलकैप में पिछले सप्ताह भी 1.95 फीसदी तेजी रही थी। सेंसेक्स में तेजी में रहने वाले प्रमुख शेयरों में रहे जिंदल स्टील (14.60 फीसदी), भेल (13.54 फीसदी), भारतीय स्टेट बैंक (12.28 फीसदी), भारती एयरटेल (9.41 फीसदी) और एलएंडटी (6.54 फीसदी)। सेंसेक्स में गिरावट वाले शेयरों में प्रमुख रहे टीसीएस (7.70 फीसदी), डॉ. रेड्डीज लैब (5.87 फीसदी), हिंदुस्तान यूनिलीवर (3.26 फीसदी), विप्रो (3.22 फीसदी) और कोल इंडिया (2.73) में गिरावट रही। बीएसई के 13 में से 9 सेक्टरों में तेजी रही। रियल्टी (8.84 फीसदी), बैंकिंग (6.96 फीसदी), पूंजीगत वस्तु (6.88 फीसदी), बिजली (5.82 फीसदी) और सार्वजनिक कम्पनियां (4.22 फीसदी) में सर्वाधिक तेजी रही। बीएसई के चार सेक्टरों सूचना प्रौद्योगिकी (3.56 फीसदी), स्वास्थ्य सेवा (2.18 फीसदी), तेज खपत वाली उपभोक्ता वस्तु (2.05 फीसदी) और प्रौद्योगिकी (1.28 फीसदी) में गिरावट रही। गत सप्ताह सिर्फ चार कारोबारी सत्र संचालित हुआ। गणेश चतुर्थी उत्सव के अवसर पर भारतीय शेयर बाजार बुधवार को बंद रहे। सप्ताह के महत्वपूर्ण घटनाक्रमों में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोमवार को ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करते हुए नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में 0.25 फीसदी कटौती कर दी। सीआरआर में इस कटौती से अर्थव्यवस्था में 17,000 करोड़ रुपये की तरलता जारी होने का अनुमान जताया गया है। सीआरआर में 25 आधार अंक की कटौती कर इसे 4.50 फीसदी कर दिया गया। गुरुवार को विपक्षी पार्टियों ने डीजल मूल्य वृद्धि और बहुब्रांड खुदरा कारोबार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को अनुमति देने के सरकार के फैसले के विरुद्ध देश व्यापी हड़ताल आयोजित की। कारोबारी संघों के मुताबिक हालांकि देशव्यापी हड़ताल से गुरुवार को देशभर में आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुईं। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने कहा कि देशव्यापी हड़ताल से भारतीय अर्थव्यवस्था को 12,500 करोड़ रुपये (2.25 अरब डॉलर) का नुकसान होने का अनुमान है। औद्योगिक संगठनों ने सरकार को सलाह दी कि राजनीकि दबाव में उन्हें सुधार के फैसले से पीछे नहीं हटना चाहिए।टिप्पणियां आर्थिक सुधार की प्रक्रिया पर आगे बढ़कर केंद्र सरकार ने घरेलू कम्पनियों द्वारा लिए जाने वाले विदेशी ऋण पर कर को शुक्रवार को 20 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी कर दिया। केंद्रिय वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम ने कहा कि घटा हुआ कर जुलाई 2012 और जून 2015 के बीच लिए गए ऋण पर लागू होगा। चिदम्बरम ने शुक्रवार को ही कहा कि आम लोगों को राहत देने के लिए सरकार गैर-रियायती रसोई गैस की बिक्री पर से सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क और मूल्य वर्धित कर (वैट) हटा देगी। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी शुक्रवार को देश को सम्बोधित करते हुए कहा कि घाटे की भरपाई के लिए डीजल मूल्य में प्रति लीटर 17 रुपये की वृद्धि करने की जरूरत थी और सरकार ने इसका कुछ ही हिस्सा आम आदमी के कंधे पर डाला है। सेंसेक्स में तेजी में रहने वाले प्रमुख शेयरों में रहे जिंदल स्टील (14.60 फीसदी), भेल (13.54 फीसदी), भारतीय स्टेट बैंक (12.28 फीसदी), भारती एयरटेल (9.41 फीसदी) और एलएंडटी (6.54 फीसदी)। सेंसेक्स में गिरावट वाले शेयरों में प्रमुख रहे टीसीएस (7.70 फीसदी), डॉ. रेड्डीज लैब (5.87 फीसदी), हिंदुस्तान यूनिलीवर (3.26 फीसदी), विप्रो (3.22 फीसदी) और कोल इंडिया (2.73) में गिरावट रही। बीएसई के 13 में से 9 सेक्टरों में तेजी रही। रियल्टी (8.84 फीसदी), बैंकिंग (6.96 फीसदी), पूंजीगत वस्तु (6.88 फीसदी), बिजली (5.82 फीसदी) और सार्वजनिक कम्पनियां (4.22 फीसदी) में सर्वाधिक तेजी रही। बीएसई के चार सेक्टरों सूचना प्रौद्योगिकी (3.56 फीसदी), स्वास्थ्य सेवा (2.18 फीसदी), तेज खपत वाली उपभोक्ता वस्तु (2.05 फीसदी) और प्रौद्योगिकी (1.28 फीसदी) में गिरावट रही। गत सप्ताह सिर्फ चार कारोबारी सत्र संचालित हुआ। गणेश चतुर्थी उत्सव के अवसर पर भारतीय शेयर बाजार बुधवार को बंद रहे। सप्ताह के महत्वपूर्ण घटनाक्रमों में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोमवार को ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करते हुए नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में 0.25 फीसदी कटौती कर दी। सीआरआर में इस कटौती से अर्थव्यवस्था में 17,000 करोड़ रुपये की तरलता जारी होने का अनुमान जताया गया है। सीआरआर में 25 आधार अंक की कटौती कर इसे 4.50 फीसदी कर दिया गया। गुरुवार को विपक्षी पार्टियों ने डीजल मूल्य वृद्धि और बहुब्रांड खुदरा कारोबार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को अनुमति देने के सरकार के फैसले के विरुद्ध देश व्यापी हड़ताल आयोजित की। कारोबारी संघों के मुताबिक हालांकि देशव्यापी हड़ताल से गुरुवार को देशभर में आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुईं। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने कहा कि देशव्यापी हड़ताल से भारतीय अर्थव्यवस्था को 12,500 करोड़ रुपये (2.25 अरब डॉलर) का नुकसान होने का अनुमान है। औद्योगिक संगठनों ने सरकार को सलाह दी कि राजनीकि दबाव में उन्हें सुधार के फैसले से पीछे नहीं हटना चाहिए।टिप्पणियां आर्थिक सुधार की प्रक्रिया पर आगे बढ़कर केंद्र सरकार ने घरेलू कम्पनियों द्वारा लिए जाने वाले विदेशी ऋण पर कर को शुक्रवार को 20 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी कर दिया। केंद्रिय वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम ने कहा कि घटा हुआ कर जुलाई 2012 और जून 2015 के बीच लिए गए ऋण पर लागू होगा। चिदम्बरम ने शुक्रवार को ही कहा कि आम लोगों को राहत देने के लिए सरकार गैर-रियायती रसोई गैस की बिक्री पर से सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क और मूल्य वर्धित कर (वैट) हटा देगी। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी शुक्रवार को देश को सम्बोधित करते हुए कहा कि घाटे की भरपाई के लिए डीजल मूल्य में प्रति लीटर 17 रुपये की वृद्धि करने की जरूरत थी और सरकार ने इसका कुछ ही हिस्सा आम आदमी के कंधे पर डाला है। बीएसई के 13 में से 9 सेक्टरों में तेजी रही। रियल्टी (8.84 फीसदी), बैंकिंग (6.96 फीसदी), पूंजीगत वस्तु (6.88 फीसदी), बिजली (5.82 फीसदी) और सार्वजनिक कम्पनियां (4.22 फीसदी) में सर्वाधिक तेजी रही। बीएसई के चार सेक्टरों सूचना प्रौद्योगिकी (3.56 फीसदी), स्वास्थ्य सेवा (2.18 फीसदी), तेज खपत वाली उपभोक्ता वस्तु (2.05 फीसदी) और प्रौद्योगिकी (1.28 फीसदी) में गिरावट रही। गत सप्ताह सिर्फ चार कारोबारी सत्र संचालित हुआ। गणेश चतुर्थी उत्सव के अवसर पर भारतीय शेयर बाजार बुधवार को बंद रहे। सप्ताह के महत्वपूर्ण घटनाक्रमों में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोमवार को ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करते हुए नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में 0.25 फीसदी कटौती कर दी। सीआरआर में इस कटौती से अर्थव्यवस्था में 17,000 करोड़ रुपये की तरलता जारी होने का अनुमान जताया गया है। सीआरआर में 25 आधार अंक की कटौती कर इसे 4.50 फीसदी कर दिया गया। गुरुवार को विपक्षी पार्टियों ने डीजल मूल्य वृद्धि और बहुब्रांड खुदरा कारोबार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को अनुमति देने के सरकार के फैसले के विरुद्ध देश व्यापी हड़ताल आयोजित की। कारोबारी संघों के मुताबिक हालांकि देशव्यापी हड़ताल से गुरुवार को देशभर में आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुईं। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने कहा कि देशव्यापी हड़ताल से भारतीय अर्थव्यवस्था को 12,500 करोड़ रुपये (2.25 अरब डॉलर) का नुकसान होने का अनुमान है। औद्योगिक संगठनों ने सरकार को सलाह दी कि राजनीकि दबाव में उन्हें सुधार के फैसले से पीछे नहीं हटना चाहिए।टिप्पणियां आर्थिक सुधार की प्रक्रिया पर आगे बढ़कर केंद्र सरकार ने घरेलू कम्पनियों द्वारा लिए जाने वाले विदेशी ऋण पर कर को शुक्रवार को 20 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी कर दिया। केंद्रिय वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम ने कहा कि घटा हुआ कर जुलाई 2012 और जून 2015 के बीच लिए गए ऋण पर लागू होगा। चिदम्बरम ने शुक्रवार को ही कहा कि आम लोगों को राहत देने के लिए सरकार गैर-रियायती रसोई गैस की बिक्री पर से सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क और मूल्य वर्धित कर (वैट) हटा देगी। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी शुक्रवार को देश को सम्बोधित करते हुए कहा कि घाटे की भरपाई के लिए डीजल मूल्य में प्रति लीटर 17 रुपये की वृद्धि करने की जरूरत थी और सरकार ने इसका कुछ ही हिस्सा आम आदमी के कंधे पर डाला है। गत सप्ताह सिर्फ चार कारोबारी सत्र संचालित हुआ। गणेश चतुर्थी उत्सव के अवसर पर भारतीय शेयर बाजार बुधवार को बंद रहे। सप्ताह के महत्वपूर्ण घटनाक्रमों में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोमवार को ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करते हुए नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में 0.25 फीसदी कटौती कर दी। सीआरआर में इस कटौती से अर्थव्यवस्था में 17,000 करोड़ रुपये की तरलता जारी होने का अनुमान जताया गया है। सीआरआर में 25 आधार अंक की कटौती कर इसे 4.50 फीसदी कर दिया गया। गुरुवार को विपक्षी पार्टियों ने डीजल मूल्य वृद्धि और बहुब्रांड खुदरा कारोबार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को अनुमति देने के सरकार के फैसले के विरुद्ध देश व्यापी हड़ताल आयोजित की। कारोबारी संघों के मुताबिक हालांकि देशव्यापी हड़ताल से गुरुवार को देशभर में आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुईं। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने कहा कि देशव्यापी हड़ताल से भारतीय अर्थव्यवस्था को 12,500 करोड़ रुपये (2.25 अरब डॉलर) का नुकसान होने का अनुमान है। औद्योगिक संगठनों ने सरकार को सलाह दी कि राजनीकि दबाव में उन्हें सुधार के फैसले से पीछे नहीं हटना चाहिए।टिप्पणियां आर्थिक सुधार की प्रक्रिया पर आगे बढ़कर केंद्र सरकार ने घरेलू कम्पनियों द्वारा लिए जाने वाले विदेशी ऋण पर कर को शुक्रवार को 20 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी कर दिया। केंद्रिय वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम ने कहा कि घटा हुआ कर जुलाई 2012 और जून 2015 के बीच लिए गए ऋण पर लागू होगा। चिदम्बरम ने शुक्रवार को ही कहा कि आम लोगों को राहत देने के लिए सरकार गैर-रियायती रसोई गैस की बिक्री पर से सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क और मूल्य वर्धित कर (वैट) हटा देगी। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी शुक्रवार को देश को सम्बोधित करते हुए कहा कि घाटे की भरपाई के लिए डीजल मूल्य में प्रति लीटर 17 रुपये की वृद्धि करने की जरूरत थी और सरकार ने इसका कुछ ही हिस्सा आम आदमी के कंधे पर डाला है। गुरुवार को विपक्षी पार्टियों ने डीजल मूल्य वृद्धि और बहुब्रांड खुदरा कारोबार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को अनुमति देने के सरकार के फैसले के विरुद्ध देश व्यापी हड़ताल आयोजित की। कारोबारी संघों के मुताबिक हालांकि देशव्यापी हड़ताल से गुरुवार को देशभर में आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुईं। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने कहा कि देशव्यापी हड़ताल से भारतीय अर्थव्यवस्था को 12,500 करोड़ रुपये (2.25 अरब डॉलर) का नुकसान होने का अनुमान है। औद्योगिक संगठनों ने सरकार को सलाह दी कि राजनीकि दबाव में उन्हें सुधार के फैसले से पीछे नहीं हटना चाहिए।टिप्पणियां आर्थिक सुधार की प्रक्रिया पर आगे बढ़कर केंद्र सरकार ने घरेलू कम्पनियों द्वारा लिए जाने वाले विदेशी ऋण पर कर को शुक्रवार को 20 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी कर दिया। केंद्रिय वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम ने कहा कि घटा हुआ कर जुलाई 2012 और जून 2015 के बीच लिए गए ऋण पर लागू होगा। चिदम्बरम ने शुक्रवार को ही कहा कि आम लोगों को राहत देने के लिए सरकार गैर-रियायती रसोई गैस की बिक्री पर से सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क और मूल्य वर्धित कर (वैट) हटा देगी। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी शुक्रवार को देश को सम्बोधित करते हुए कहा कि घाटे की भरपाई के लिए डीजल मूल्य में प्रति लीटर 17 रुपये की वृद्धि करने की जरूरत थी और सरकार ने इसका कुछ ही हिस्सा आम आदमी के कंधे पर डाला है। औद्योगिक संगठनों ने सरकार को सलाह दी कि राजनीकि दबाव में उन्हें सुधार के फैसले से पीछे नहीं हटना चाहिए।टिप्पणियां आर्थिक सुधार की प्रक्रिया पर आगे बढ़कर केंद्र सरकार ने घरेलू कम्पनियों द्वारा लिए जाने वाले विदेशी ऋण पर कर को शुक्रवार को 20 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी कर दिया। केंद्रिय वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम ने कहा कि घटा हुआ कर जुलाई 2012 और जून 2015 के बीच लिए गए ऋण पर लागू होगा। चिदम्बरम ने शुक्रवार को ही कहा कि आम लोगों को राहत देने के लिए सरकार गैर-रियायती रसोई गैस की बिक्री पर से सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क और मूल्य वर्धित कर (वैट) हटा देगी। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी शुक्रवार को देश को सम्बोधित करते हुए कहा कि घाटे की भरपाई के लिए डीजल मूल्य में प्रति लीटर 17 रुपये की वृद्धि करने की जरूरत थी और सरकार ने इसका कुछ ही हिस्सा आम आदमी के कंधे पर डाला है। आर्थिक सुधार की प्रक्रिया पर आगे बढ़कर केंद्र सरकार ने घरेलू कम्पनियों द्वारा लिए जाने वाले विदेशी ऋण पर कर को शुक्रवार को 20 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी कर दिया। केंद्रिय वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम ने कहा कि घटा हुआ कर जुलाई 2012 और जून 2015 के बीच लिए गए ऋण पर लागू होगा। चिदम्बरम ने शुक्रवार को ही कहा कि आम लोगों को राहत देने के लिए सरकार गैर-रियायती रसोई गैस की बिक्री पर से सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क और मूल्य वर्धित कर (वैट) हटा देगी। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी शुक्रवार को देश को सम्बोधित करते हुए कहा कि घाटे की भरपाई के लिए डीजल मूल्य में प्रति लीटर 17 रुपये की वृद्धि करने की जरूरत थी और सरकार ने इसका कुछ ही हिस्सा आम आदमी के कंधे पर डाला है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी शुक्रवार को देश को सम्बोधित करते हुए कहा कि घाटे की भरपाई के लिए डीजल मूल्य में प्रति लीटर 17 रुपये की वृद्धि करने की जरूरत थी और सरकार ने इसका कुछ ही हिस्सा आम आदमी के कंधे पर डाला है।
यहाँ एक सारांश है:बम्बई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स गत साप्ताहिक कारोबार में सुधार के अनुकूल असर की उम्मीद में 1.56 फीसदी या 288.56 अंकों की तेजी के साथ 14 महीने के ऊपरी स्तर 18,752.83 पर बंद हुआ।
12
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल परीक्षा के नतीजे शनिवार को घोषित कर दिए गए। इस वर्ष कुल 86.63 प्रतिशत परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए। छात्राओं ने एक बार फिर छात्रों को पीछे छोड़ दिया। छात्राओं की सफलता का प्रतिशत जहां 91.25 फीसदी रहा वहीं 82.87 प्रतिशत छात्र बोर्ड परीक्षा में सफल रहे। प्रदेश के शिक्षा निदेशक बासुदेव यादव ने शनिवार को दोपहर साढ़े बारह बजे परिणाम की घोषणा की। उन्होंने बताया कि इस वर्ष का परीक्षा परिणाम पूर्व के वर्षों की तुलना में काफी बेहतर है। इस वर्ष 38,03,412 विद्याथिर्यों ने हाईस्कूल परीक्षा के लिए पंजीकरण करवाया था, जिसमें 33,31,904 विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हुए तथा 28,86,379 परीक्षार्थियों ने परीक्षा में सफलता अर्जित की। इस वर्ष की परीक्षा में कुल 18,38,314 छात्र सम्मिलित हुए थे, जिनमें 15,23,447 उत्तीर्ण हुए हैं। वहीं 14,93,590 छात्राओं में 13,62,932 सफल घोषित की गईं। टिप्पणियां बाराबंकी के लखपेड़ाबाग स्थित एस. साईं इंटर कालेज के आशुतोष मिश्र 97.33 प्रतिशत अंक हासिल कर पूरे प्रदेश में प्रथम घोषित किए गए हैं। इसी जिले के महारानी लक्ष्मीबाई इंटर कालेज की आराधना शुक्ला 97 प्रतिशत अंक पाकर दूसरे स्थान पर रही। तीसरे स्थान पर इलाहाबाद के एसबीसिंह हायर सेकेंड्री स्कूल, कालिंदीपुरम की छात्रा श्रेया श्रीवास्तव को 96.17 प्रतिशत अंक मिले। खास बात यह कि इस परीक्षा में जेल में बंद 127 कैदी भी शामिल हुए थे जिनमें दो महिलाएं भी थीं। इनमें से 114 उत्तीर्ण हुए हैं। बरेली जिले से सर्वाधिक 17 कैदी परीक्षा में बैठे थे, ये सभी उत्तीर्ण हुए हैं। प्रदेश के शिक्षा निदेशक बासुदेव यादव ने शनिवार को दोपहर साढ़े बारह बजे परिणाम की घोषणा की। उन्होंने बताया कि इस वर्ष का परीक्षा परिणाम पूर्व के वर्षों की तुलना में काफी बेहतर है। इस वर्ष 38,03,412 विद्याथिर्यों ने हाईस्कूल परीक्षा के लिए पंजीकरण करवाया था, जिसमें 33,31,904 विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हुए तथा 28,86,379 परीक्षार्थियों ने परीक्षा में सफलता अर्जित की। इस वर्ष की परीक्षा में कुल 18,38,314 छात्र सम्मिलित हुए थे, जिनमें 15,23,447 उत्तीर्ण हुए हैं। वहीं 14,93,590 छात्राओं में 13,62,932 सफल घोषित की गईं। टिप्पणियां बाराबंकी के लखपेड़ाबाग स्थित एस. साईं इंटर कालेज के आशुतोष मिश्र 97.33 प्रतिशत अंक हासिल कर पूरे प्रदेश में प्रथम घोषित किए गए हैं। इसी जिले के महारानी लक्ष्मीबाई इंटर कालेज की आराधना शुक्ला 97 प्रतिशत अंक पाकर दूसरे स्थान पर रही। तीसरे स्थान पर इलाहाबाद के एसबीसिंह हायर सेकेंड्री स्कूल, कालिंदीपुरम की छात्रा श्रेया श्रीवास्तव को 96.17 प्रतिशत अंक मिले। खास बात यह कि इस परीक्षा में जेल में बंद 127 कैदी भी शामिल हुए थे जिनमें दो महिलाएं भी थीं। इनमें से 114 उत्तीर्ण हुए हैं। बरेली जिले से सर्वाधिक 17 कैदी परीक्षा में बैठे थे, ये सभी उत्तीर्ण हुए हैं। इस वर्ष की परीक्षा में कुल 18,38,314 छात्र सम्मिलित हुए थे, जिनमें 15,23,447 उत्तीर्ण हुए हैं। वहीं 14,93,590 छात्राओं में 13,62,932 सफल घोषित की गईं। टिप्पणियां बाराबंकी के लखपेड़ाबाग स्थित एस. साईं इंटर कालेज के आशुतोष मिश्र 97.33 प्रतिशत अंक हासिल कर पूरे प्रदेश में प्रथम घोषित किए गए हैं। इसी जिले के महारानी लक्ष्मीबाई इंटर कालेज की आराधना शुक्ला 97 प्रतिशत अंक पाकर दूसरे स्थान पर रही। तीसरे स्थान पर इलाहाबाद के एसबीसिंह हायर सेकेंड्री स्कूल, कालिंदीपुरम की छात्रा श्रेया श्रीवास्तव को 96.17 प्रतिशत अंक मिले। खास बात यह कि इस परीक्षा में जेल में बंद 127 कैदी भी शामिल हुए थे जिनमें दो महिलाएं भी थीं। इनमें से 114 उत्तीर्ण हुए हैं। बरेली जिले से सर्वाधिक 17 कैदी परीक्षा में बैठे थे, ये सभी उत्तीर्ण हुए हैं। बाराबंकी के लखपेड़ाबाग स्थित एस. साईं इंटर कालेज के आशुतोष मिश्र 97.33 प्रतिशत अंक हासिल कर पूरे प्रदेश में प्रथम घोषित किए गए हैं। इसी जिले के महारानी लक्ष्मीबाई इंटर कालेज की आराधना शुक्ला 97 प्रतिशत अंक पाकर दूसरे स्थान पर रही। तीसरे स्थान पर इलाहाबाद के एसबीसिंह हायर सेकेंड्री स्कूल, कालिंदीपुरम की छात्रा श्रेया श्रीवास्तव को 96.17 प्रतिशत अंक मिले। खास बात यह कि इस परीक्षा में जेल में बंद 127 कैदी भी शामिल हुए थे जिनमें दो महिलाएं भी थीं। इनमें से 114 उत्तीर्ण हुए हैं। बरेली जिले से सर्वाधिक 17 कैदी परीक्षा में बैठे थे, ये सभी उत्तीर्ण हुए हैं। खास बात यह कि इस परीक्षा में जेल में बंद 127 कैदी भी शामिल हुए थे जिनमें दो महिलाएं भी थीं। इनमें से 114 उत्तीर्ण हुए हैं। बरेली जिले से सर्वाधिक 17 कैदी परीक्षा में बैठे थे, ये सभी उत्तीर्ण हुए हैं।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल परीक्षा के नतीजे शनिवार को घोषित कर दिए गए। इस वर्ष कुल 86.63 प्रतिशत परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए। छात्राओं ने एक बार फिर छात्रों को पीछे छोड़ दिया।
28
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: अमेरिका  (America) के राज्य अल्बामा (Alabama) में अब रेप के खिलाफ सख्त कार्रवाही की जाएगी. इस राज्य में यौन शोषण करने वाले दोषी को नपुंसक बनाने वाला इंजेक्शन लगाया जाएगा. अल्बामा के गर्वनर काय इवे ने इस लॉ पर दस्तखत किए. 'केमिकल कैस्ट्रेशन' (Chemically Castrated) विधेयक में 13 साल से कम उम्र के बच्चों के खिलाफ यौन शोषण के दोषियों को नपुंसक बनाने का प्रावधान है. इस विधेयक के मुताबिक, नपुंसक बनाने के इंजेक्शन या दवा दी जा सकती है.   ये इंजेक्शन टेस्टोस्टेरोन पैदा होने से रोकेगा. अपराधियों को जेल से पैरोल देने से पहले दवा प्राप्त करनी होगी. जज फैसला करेंगे कि मेडिकेशन को कब रोकना है. जो दोषी इंजेक्शन लेने से मना कर देगा उसे जेल से नहीं छोड़ा जाएगा.  अल्बामा के अलावा यूएस के 7 राज्य ऐसे हैं जहां 'केमिकल कैस्ट्रेशन' का इस्तेमाल होता है. लूसिआना और फ्लोरिडा में भी ये प्रावधान है. बता दें, नपुंसक बनाने की सजा दक्षिण कोरिया और इंडोनेशिया में भी दी जाती हैं.
यह एक सारांश है: अल्बामा में अब रेप के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाही. यौन शोषण करने वाले दोषी को नपुंसक बनाने वाला इंजेक्शन लगाया जाएगा. अल्बामा के गर्वनर काय इवे ने इस लॉ पर दस्तखत किए.
24
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: अब ट्रेन में किसी ठेकेदार के खाने से शायद आपका सफ़र बदजायका नहीं होगा. रेलों में खाने-पीने को लेकर मिल रही लगातार शिकायतों के बाद किसी ठेकेदार को नए लाइसेंस न जारी करने का फ़ैसला हुआ है. इसकी जगह आईआरसीटीसी को ये ज़िम्मेदारी दे दी गई है. दिल्ली में सोमवार को रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने भारतीय रेल में नई कैटरिंग पॉलिसी को लागू करने का ऐलान किया. रेल मंत्री ने पिछले साल अपने रेल बजट भाषण में इसका प्रस्ताव रखा था. सुरेश प्रभु ने कहा, 'हम रेल यात्रियों को अच्छा, साफ सुथरा खाना मुहैया कराना चाहते हैं. हम चाहते हैं कि चलती गाड़ियों में उन्हें स्वादिष्ट और पौष्टिक खाना सप्लाई किया जा सके.' रेलों का खानपान बेहतर करने के लिए रेल मंत्रालय की कई योजनाएं हैं जिनके अनुसार रेल के किचन को आधुनिक शक्ल दी जाएगी. खाना पकाने और खाना पहुंचाने का काम अलग-अलग किया जाएगा. धीरे-धीरे चलती ट्रेनों में खाना पकाने का काम बंद हो सकता है. इसकी जगह अलग-अलग स्टेशनों पर खाना पकेगा जो ट्रेनों में जाएगा. मंत्रालय का मानना है कि नई कैटरिंग पॉलिसी से एक ओर जहां ठेकेदारों की मनमानी ख़त्म होगी तो वहीं दूसरी ओर खानपान भी बेहतर होगा. चलती ट्रेनों में खाने की गुणवत्ता को लेकर बढ़ते सवालों और शिकायतों के बाद अब रेल मंत्री नई कैटरिंग पॉलिसी के ज़रिये यात्रियों को साफ-सुथरा और बेहतर पौष्टिक खाना मुहैया कराना चाहते हैं. अब अगली चुनौती इस नई कैटरिंग व्यवस्था को कारगर तरीके से लागू करने की होगी. टिप्पणियां आईआरसीटीसी को अधिकतर ट्रेन में केटरिंग की जिम्मेदारी देने वाली नई नीति सात साल पुरानी नीति के स्थान पर लाई जा रही है. साल, 2010 में ममता बनर्जी के रेल मंत्री रहते हुए आईआरसीटीसी को केटरिंग की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया था. प्रभु ने 2016 के बजट में कहा था, ‘आईआरसीटीसी चरणबद्ध तरीके से केटरिंग सेवा को संभालना शुरू करेगी. यह खाना पकाने और इसके वितरण को अलग अलग रखते हुए केटरिंग सेवा संचालित करेगी.’ रेलवे केटरिंग नीति-2017 आईआरसीटीसी को खाने का मेन्यू तय करने और इसके लिए राशि निर्धारित करने का अधिकार होगा, हालांकि इसके लिए उसे रेलवे बोर्ड से परामर्श लेना होगा. सामाजिक उद्देश्य को हासिल करने के मकसद से इस नीति के तहत स्टाल के आवंटन में महिलाओं को 33 फीसदी का उप कोटा दिया जाएगा. मंत्रालय का मानना है कि नई कैटरिंग पॉलिसी से एक ओर जहां ठेकेदारों की मनमानी ख़त्म होगी तो वहीं दूसरी ओर खानपान भी बेहतर होगा. चलती ट्रेनों में खाने की गुणवत्ता को लेकर बढ़ते सवालों और शिकायतों के बाद अब रेल मंत्री नई कैटरिंग पॉलिसी के ज़रिये यात्रियों को साफ-सुथरा और बेहतर पौष्टिक खाना मुहैया कराना चाहते हैं. अब अगली चुनौती इस नई कैटरिंग व्यवस्था को कारगर तरीके से लागू करने की होगी. टिप्पणियां आईआरसीटीसी को अधिकतर ट्रेन में केटरिंग की जिम्मेदारी देने वाली नई नीति सात साल पुरानी नीति के स्थान पर लाई जा रही है. साल, 2010 में ममता बनर्जी के रेल मंत्री रहते हुए आईआरसीटीसी को केटरिंग की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया था. प्रभु ने 2016 के बजट में कहा था, ‘आईआरसीटीसी चरणबद्ध तरीके से केटरिंग सेवा को संभालना शुरू करेगी. यह खाना पकाने और इसके वितरण को अलग अलग रखते हुए केटरिंग सेवा संचालित करेगी.’ रेलवे केटरिंग नीति-2017 आईआरसीटीसी को खाने का मेन्यू तय करने और इसके लिए राशि निर्धारित करने का अधिकार होगा, हालांकि इसके लिए उसे रेलवे बोर्ड से परामर्श लेना होगा. सामाजिक उद्देश्य को हासिल करने के मकसद से इस नीति के तहत स्टाल के आवंटन में महिलाओं को 33 फीसदी का उप कोटा दिया जाएगा. आईआरसीटीसी को अधिकतर ट्रेन में केटरिंग की जिम्मेदारी देने वाली नई नीति सात साल पुरानी नीति के स्थान पर लाई जा रही है. साल, 2010 में ममता बनर्जी के रेल मंत्री रहते हुए आईआरसीटीसी को केटरिंग की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया था. प्रभु ने 2016 के बजट में कहा था, ‘आईआरसीटीसी चरणबद्ध तरीके से केटरिंग सेवा को संभालना शुरू करेगी. यह खाना पकाने और इसके वितरण को अलग अलग रखते हुए केटरिंग सेवा संचालित करेगी.’ रेलवे केटरिंग नीति-2017 आईआरसीटीसी को खाने का मेन्यू तय करने और इसके लिए राशि निर्धारित करने का अधिकार होगा, हालांकि इसके लिए उसे रेलवे बोर्ड से परामर्श लेना होगा. सामाजिक उद्देश्य को हासिल करने के मकसद से इस नीति के तहत स्टाल के आवंटन में महिलाओं को 33 फीसदी का उप कोटा दिया जाएगा. रेलवे केटरिंग नीति-2017 आईआरसीटीसी को खाने का मेन्यू तय करने और इसके लिए राशि निर्धारित करने का अधिकार होगा, हालांकि इसके लिए उसे रेलवे बोर्ड से परामर्श लेना होगा. सामाजिक उद्देश्य को हासिल करने के मकसद से इस नीति के तहत स्टाल के आवंटन में महिलाओं को 33 फीसदी का उप कोटा दिया जाएगा.
संक्षिप्त पाठ: योजना के अनुसार रेल के किचन को आधुनिक शक्ल दी जाएगी खाना पकाने और खाना पहुंचाने का काम अलग-अलग किया जाएगा धीरे-धीरे चलती ट्रेनों में खाना पकाने का काम बंद हो सकता है
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['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: पंजाब (Punjab) के शहरी विकास मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) और मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह (Amarinder Singh) के बीच विवाद गहराता जा रहा है. कैप्टन ने जहां सिद्धू से उनका विभाग छीनने का ऐलान कर दिया है वहीं आज सिद्धू ने अपने कामकाज को लेकर सफाई दी और साथ में कैप्टन अमरिंदर सिंह पर निशाना भी साधा. उन्होंने कहा कि उनको पार्टी (Congress) के लोगों से गालियां दिलाई जा रही हैं लेकिन वे इस पर भी चुप हैं. सिद्धू ने शहरी विकास मंत्रालय के कामकाज का ब्यौरा दिया और कहा कि सीएम जो भी फैसला लें, उनकी मर्जी, वे अपने विभाग की रिपोर्ट जारी करेंगे.     पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह (Amarinder Singh) द्वारा हाल ही में दिए गए वक्तव्य कि वे अपने मंत्रिमंडल सहयोगी नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) का विभाग बदलना चाहते हैं क्योंकि वह स्थानीय निकाय विभाग को कुशलतापूर्वक नहीं संभाल पा रहे हैं, पर नवजोत सिंह सिद्धू ने आज सफाई दी. उन्होंने चंडीगढ़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीएम अमरिंदर सिंह के आरोपों पर सफाई दी. सिद्धू ने कहा कि उनके खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है. सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) ने कहा कि 'मुझ पर जो विभाग के आरोप लगाए गए उनका जवाब दे रहा हूं. उन्होंने कहा कि सीएम साहब (Amarinder Singh) ने आरोप लगाए मुझसे किसी ने नहीं पूछा कि वे क्या करते हैं.' सिद्धू ने कहा कि उनके विभाग के पास कुछ नहीं था, सिर्फ सीएलयू साइन किए गए हैं लेकिन पूर्व के दो वर्षों में समय की पाबंदी के साथ काम शुरू हुए हैं. पाइन वाला पानी हो या स्मार्ट सिटी, उसमें अमृत स्कीम के तहत  कोई राशि नहीं दी गई. इसमें आधी राशि राज्य व आधी राशि केंद्र देता है. पैसा नहीं मिलने के कारण काम नहीं हुआ. 'मैने उस पर काम शुरू करवाए. हर क्षेत्र में मैंने अपने विभाग के काम शुरू करवाए. सीवरेज, पानी, फायर ब्रिगेड, विज्ञापन, सब पर काम शुरू हुआ. विज्ञापन में 64 शहर 18 करोड़ कमाते थे, लेकिन  अब केवल लुधियाना ही करीब 34 करोड़ रुपये की कमाई दे रहा है.' उन्होंने कहा कि 'जब मैं आया था उसमें एक एसटीपी नहीं चलता था, लेकिन मैंने शुरू करवाए. तीन हजार करोड़ रुपये सीएम से लेकर काम शुरू करवाए.' सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) ने कहा कि यह सब विजन की वजह से हुआ है. इसमें पंजाब के तमाम बफे शहर शामिल हैं. उन्होंने कहा कि 'आज हमारे पास सरप्लस फंड है.' उन्होंने कहा कि 'जब नाजायज इमारतों पर कार्रवाई करने गया तो मेरा विरोध किया, मैं फिर भी नहीं बोला. मेरा एक भी काम ऐसा नहीं है जिसमें ट्रांसपेरेंसी न हो. वे (Amarinder Singh) जो भी फैसला लें उनकी मर्जी, मैं अपने विभाग की रिपोर्ट जारी करूंगा. नहरों का जो पानी शहरों को देने जा रहे हैं, वह कहां से हो रहा है? मैंने पूरा योगदान दिया है, पर उंगली किसी पर नहीं उठाई.' सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) ने कहा कि 'मैंने आज तक कांग्रेस के किसी वर्कर के खिलाफ नहीं बोला, जबकि उनसे मुझे गालियां दिलाई जाती हैं. मैनें बठिंडा में स्टेज पर जो कहा उसमें किसी का नाम नहीं लिया, सिर्फ इतना कहा कि कांग्रेस की पीठ पर जो छुरा मार रहा है, उसको ठोक दो. बस यही कहा, मैं अपनी बात से नहीं मुकरता. बठिंडा में 40 वर्ष में देखें तो सबसे कम वोट से हम हर हैं. वहां से कैप्टन (Amarinder Singh) के बेटे भी हारे हैं. मैंने कैप्टन के खिलाफ कभी कुछ नहीं कहा. पहले मैं 55 सीटों पर गया जिसमें 53 जीतीं लेकिन कोई नहीं बोला. सीएम साहब ने यह कहा था कि जो मंत्री अपने क्षेत्र से हारेंगे उन पर कार्रवाई होगी.' सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) ने कहा कि 'मुझे कई बार गालियां दी गईं लेकिन मैंने कभी कुछ नहीं कहा क्योंकि सत्ता विपक्षियों के खिलाफ बोलने की होती है.' उन्होंने कहा कि 'जो मंत्री मेरा विरोध करते हैं उनके खिलाफ कुछ नही कहूंगा. सभी मेरे भाई हैं.  मैंने टीवी पर 20 वर्ष काम किया. आज पंजाब के लिए खड़ा हूं. डिपार्टमेंट अगर बदल जाता है तो यह कैप्टन (Amarinder Singh) का फैसला होगा.' मोदी की शपथ पर सिद्धू ने कहा कि जो जनता का फैसला है उस पर हमें अभिवादन करना होता है. गौरतलब है कि पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह (Amarinder Singh) ने हाल ही में कहा था कि चुनाव के दौरान धर्मग्रंथों की बेअदबी पर सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) की टिप्पणी को लेकर वह कांग्रेस आलाकमान से संपर्क करेंगे. चुनाव से एक दिन पहले सिद्धू ने 2015 में धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी की जांच पर सवाल उठाए थे. मुख्यमंत्री ने कहा था कि सिद्धू के बयान से बठिंडा में पार्टी के प्रदर्शन पर असर पड़ा होगा और चुनाव परिणामों के बाद वह पार्टी आलाकमान से संपर्क करेंगे.     कैप्टन (Amarinder Singh) ने एक बयान में कहा था, ‘मैं सिद्धू का विभाग बदलना चाहता हूं क्योंकि वह अपने विभाग को कुशलतापूर्वक नहीं संभाल पा रहे हैं.'' मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब के शहरी इलाकों में कांग्रेस का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा और सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) शहरी विकास मंत्री हैं. उन्होंने कहा कि उन्होंने विवादास्पद बयान देकर गलती की है. मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्री इस बात को नहीं समझ पाए कि धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी के मुद्दे की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया था.     अमरिंदर सिंह (Amarinder Singh) ने यह भी कहा था कि सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) की पाकिस्तान के सेना प्रमुख से ‘यारी और झप्पी' को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और खासकर सेना इसे बर्दाश्त नहीं करेगी जिसे आईएसआई समर्थक आतंकवादी निशाना बनाते हैं.
यहाँ एक सारांश है:सिद्धू के खिलाफ पार्टी आलाकमान से संपर्क साधेंगे अमरिंदर स्थानीय निकाय विभाग को कुशलतापूर्वक नहीं संभालने का आरोप सिद्धू ने कहा कि उन्हें गालियां दी जा रही हैं, लेकिन वे चुप रहेंगे
17
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: संसद में आज कार्यवाही आरंभ होते ही विपक्ष ने सेना प्रमुख के अहम खुलासे की खबर एक अखबार में छपने के बाद जोददार हंगामा किया और संसद के दोनों सदनों को दोपहर बारह बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।     टिप्पणियां सेना प्रमुख के खुलासे पर रक्षा मंत्री एके एंटनी ने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया है। गौरतलब है कि सेना प्रमुख ने एक अखबार को दिए साक्षात्कार में कहा कि एक डीलर ने उन्हें 600  खराब वाहन की खरीद के लिए 14 करोड़ रुपये की रिश्वत की पेशकश की थी। उन्होंने इस बात की जानकारी रक्षा मंत्री एके एंटनी को दी थी। सेना प्रमुख के खुलासे पर रक्षा मंत्री एके एंटनी ने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया है। गौरतलब है कि सेना प्रमुख ने एक अखबार को दिए साक्षात्कार में कहा कि एक डीलर ने उन्हें 600  खराब वाहन की खरीद के लिए 14 करोड़ रुपये की रिश्वत की पेशकश की थी। उन्होंने इस बात की जानकारी रक्षा मंत्री एके एंटनी को दी थी। गौरतलब है कि सेना प्रमुख ने एक अखबार को दिए साक्षात्कार में कहा कि एक डीलर ने उन्हें 600  खराब वाहन की खरीद के लिए 14 करोड़ रुपये की रिश्वत की पेशकश की थी। उन्होंने इस बात की जानकारी रक्षा मंत्री एके एंटनी को दी थी।
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: संसद में आज कार्यवाही आरंभ होते ही विपक्ष ने सेना प्रमुख के अहम खुलासे की खबर एक अखबार में छपने के बाद जोददार हंगामा किया और संसद के दोनों सदनों को दोपहर बारह बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।
11
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: असम के हिंसा प्रभावित चार जिलों के लिए सेना ने बुधवार को एक हजार जवानों को रवाना किया और वहां फ्लैग मार्च किया गया ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। भारतीय सेना के अधिकारियों ने कहा, ‘‘असम के हिंसा प्रभावित कोकराझार, चिरांगुरी, धुबरी और बोंगाईगांव में शांति बहाल करने के लिए सेना की 13 टुकड़ियां रवाना की गई हैं। जवान इन इलाकों में फ्लैग मार्च भी कर रहे हैं।’’ पिछले कुछ दिनों से इन इलाकों में जातीय संघर्ष छिड़ने के बाद से करीब दो लाख लोग इन चार जिलों में अपना घर-बार छोड़कर फरार हो चुके हैं। राज्य सरकार ने कई इलाकों में करीब 70 हजार लोगों के लिए 120 से ज्यादा राहत शिविर स्थापित किए हैं जिन्होंने सुरक्षित इलाके की तलाश में अपने गांव छोड़ दिए हैं। इन शिविरों की रक्षा केंद्रीय अर्धसैनिक बल के जवान कर रहे हैं। अधिकारियों ने कहा कि इन 13 टुकड़ियों में एक हजार से ज्यादा जवान हैं जो दंगा सहित हर तरह की स्थिति से निपटने को तैयार हैं। उन्होंने कहा, ‘‘तीन टुकड़ियों को किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षित रखा गया है।’’ दंगा विरोधी अभ्यास के अलावा सेना के जवान इन इलाकों में नियमित तौर पर आतंकवाद निरोधक और उग्रवाद निरोधक अभियानों में संलग्न हैं। उन्होंने कहा, ‘‘इनमें से अधिकतर इलाके आतंकवाद और उग्रवाद से अब भी ग्रस्त हैं। हमें सुनिश्चित करना है कि वहां स्थिति और नहीं बिगड़े।’’ हिंसा में 41 लोगों के मारे जाने की खबर के बाद असम के कई इलाकों में देखते ही गोली मारने के आदेश दिए गए हैं। इन इलाकों में स्थिति का आकलन करने के लिए राज्य सरकार ने कई बैठकें की हैं और सुरक्षा बलों को सतर्क कर दिया गया है। सेना ने आज असम के हिंसा प्रभावित चार जिलों में तैनाती के लिए लगभग एक हजार सैनिकों को भेज दिया जो वहां लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए फ्लैग मार्च कर रहे हैं। गुवाहाटी में मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने स्थिति की समीक्षा के लिए मुख्य सचिव सहित सरकारी अधिकारियों की बैठक की। असम के पुलिस महानिरीक्षक (कानून एवं व्यवस्था) एलआर बिश्नोई ने प्रेट्र को बताया, ‘‘कोकराझार जले में अब तक 25 लोग मारे जा चुके हैं, जबकि चिरांग जिले में 15 लोगों की जान गई है।’’ कोकराझार में निश्चितकालीन कफ्र्यू जारी है, जबकि चिरांग और धुबरी जिलों में रात का कफ्र्यू लगा है। बिश्नोई ने कहा, ‘‘स्थिति स्थिर हो रही है।’’ पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के प्रवक्ता नृपेंद्र भट्टाचार्जी ने कहा कि आज दोपहर बाद यात्री गाड़ी और माल गाड़ी सेवाओं को आंशिक रूप से शुरू कर दिया गया, जबकि रुकी पड़ी ट्रेनें स्थिति में सुधार होने पर चलेंगी। न्यू बोंगाईगांव, कामाख्यागुड़ी और न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशनों पर फंसे 30 हजार से अधिक यात्रियों ने भोजन एवं पानी की किल्लत की शिकायत की। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘हम उम्मीद करते हैं कि ट्रेन सेवाएं शुरू होने के साथ फंसे यात्रियों को धीरे-धीरे उनके गंतव्यों पर ले जाया जाएगा।’’ गृह विभाग के संयुक्त सचिव और पूर्वोत्तर मामलों के प्रभारी शंभू सिंह तथा आंतरिक सुरक्षा मामलों के विशेष सचिव अजय चड्ढा ने स्थिति का जायजा लेने के लिए कोकराझार के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। सिंह ने बाद में कहा, ‘‘अब तक इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि घटना में बांग्लादेशी प्रवासी शामिल हैं। बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ है और इसलिए घुसपैठ की संभावनाएं कम हुई हैं।’’ उन्होंने भी लोगों को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने का आश्वासन दिया। सर्वदलीय टीम ने राहत शिविरों में प्रभावित लोगों से मुलाकात की और विभिन्न स्थानों पर शांति बैठकें कर आश्वासन दिया कि सभी तबके के लोगों को सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी। पश्चिम बंगाल में जलपाईगुड़ी के पुलिस अधीक्षक सुगातो सेन ने बताया कि करीब दो हजार लोगों ने जिले के बारोविसा, कुमारग्राम, बाकसिरहाट और अलीपुरदूआर जंक्शन स्टेशन पर शरण ली है। उन्होंने बताया कि इन लोगों को शिविरों में रखा गया है। अलीपुरदूआर में एक शिविर रेलवे ने खोला है, जबकि अन्य शिविर राज्य सरकार द्वारा खोले गए हैं। अलीपुरदूआर जंक्शन शिविर में करीब 250 लोगों ने शरण ली है। सेन ने बताया कि शरण लेने वालों में से कुछ लोग कोकराझार में स्थिति में सुधार के बाद वहां लौट गए हैं। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के अलीपुरदूआर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक अनिरबन दत्ता ने कहा कि सेना से आश्वासन मिलने के बाद अलीपुरदूआर और न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशनों से तीन ट्रेनों को चलने की अनुमति दी गई।टिप्पणियां असम विधानसभा की 20 सदस्यीय सर्वदलीय टीम ने उपाध्यक्ष भीमानंद तांती के नेतृत्व में निचले असम के हिंसा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और लोगों तथा विभिन्न स्थानीय नेताओं से मुलाकात की। उधर, माकपा पोलित ब्यूरो ने दिल्ली में जारी एक बयान में आरोप लगाया कि असम सरकार हिंसा को रोकने के लिए समय पर कार्रवाई करने में पूरी तरह विफल रही। पार्टी ने कहा कि विभिन्न समुदायों के बीच अविश्वास और तनाव के शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज किया गया। केंद्र सरकार को इस बात का जवाब देना चाहिए कि उसने हिंसा को लेकर कार्रवाई करने में इतना विलम्ब क्यों किया। भारतीय सेना के अधिकारियों ने कहा, ‘‘असम के हिंसा प्रभावित कोकराझार, चिरांगुरी, धुबरी और बोंगाईगांव में शांति बहाल करने के लिए सेना की 13 टुकड़ियां रवाना की गई हैं। जवान इन इलाकों में फ्लैग मार्च भी कर रहे हैं।’’ पिछले कुछ दिनों से इन इलाकों में जातीय संघर्ष छिड़ने के बाद से करीब दो लाख लोग इन चार जिलों में अपना घर-बार छोड़कर फरार हो चुके हैं। राज्य सरकार ने कई इलाकों में करीब 70 हजार लोगों के लिए 120 से ज्यादा राहत शिविर स्थापित किए हैं जिन्होंने सुरक्षित इलाके की तलाश में अपने गांव छोड़ दिए हैं। इन शिविरों की रक्षा केंद्रीय अर्धसैनिक बल के जवान कर रहे हैं। अधिकारियों ने कहा कि इन 13 टुकड़ियों में एक हजार से ज्यादा जवान हैं जो दंगा सहित हर तरह की स्थिति से निपटने को तैयार हैं। उन्होंने कहा, ‘‘तीन टुकड़ियों को किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षित रखा गया है।’’ दंगा विरोधी अभ्यास के अलावा सेना के जवान इन इलाकों में नियमित तौर पर आतंकवाद निरोधक और उग्रवाद निरोधक अभियानों में संलग्न हैं। उन्होंने कहा, ‘‘इनमें से अधिकतर इलाके आतंकवाद और उग्रवाद से अब भी ग्रस्त हैं। हमें सुनिश्चित करना है कि वहां स्थिति और नहीं बिगड़े।’’ हिंसा में 41 लोगों के मारे जाने की खबर के बाद असम के कई इलाकों में देखते ही गोली मारने के आदेश दिए गए हैं। इन इलाकों में स्थिति का आकलन करने के लिए राज्य सरकार ने कई बैठकें की हैं और सुरक्षा बलों को सतर्क कर दिया गया है। सेना ने आज असम के हिंसा प्रभावित चार जिलों में तैनाती के लिए लगभग एक हजार सैनिकों को भेज दिया जो वहां लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए फ्लैग मार्च कर रहे हैं। गुवाहाटी में मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने स्थिति की समीक्षा के लिए मुख्य सचिव सहित सरकारी अधिकारियों की बैठक की। असम के पुलिस महानिरीक्षक (कानून एवं व्यवस्था) एलआर बिश्नोई ने प्रेट्र को बताया, ‘‘कोकराझार जले में अब तक 25 लोग मारे जा चुके हैं, जबकि चिरांग जिले में 15 लोगों की जान गई है।’’ कोकराझार में निश्चितकालीन कफ्र्यू जारी है, जबकि चिरांग और धुबरी जिलों में रात का कफ्र्यू लगा है। बिश्नोई ने कहा, ‘‘स्थिति स्थिर हो रही है।’’ पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के प्रवक्ता नृपेंद्र भट्टाचार्जी ने कहा कि आज दोपहर बाद यात्री गाड़ी और माल गाड़ी सेवाओं को आंशिक रूप से शुरू कर दिया गया, जबकि रुकी पड़ी ट्रेनें स्थिति में सुधार होने पर चलेंगी। न्यू बोंगाईगांव, कामाख्यागुड़ी और न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशनों पर फंसे 30 हजार से अधिक यात्रियों ने भोजन एवं पानी की किल्लत की शिकायत की। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘हम उम्मीद करते हैं कि ट्रेन सेवाएं शुरू होने के साथ फंसे यात्रियों को धीरे-धीरे उनके गंतव्यों पर ले जाया जाएगा।’’ गृह विभाग के संयुक्त सचिव और पूर्वोत्तर मामलों के प्रभारी शंभू सिंह तथा आंतरिक सुरक्षा मामलों के विशेष सचिव अजय चड्ढा ने स्थिति का जायजा लेने के लिए कोकराझार के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। सिंह ने बाद में कहा, ‘‘अब तक इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि घटना में बांग्लादेशी प्रवासी शामिल हैं। बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ है और इसलिए घुसपैठ की संभावनाएं कम हुई हैं।’’ उन्होंने भी लोगों को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने का आश्वासन दिया। सर्वदलीय टीम ने राहत शिविरों में प्रभावित लोगों से मुलाकात की और विभिन्न स्थानों पर शांति बैठकें कर आश्वासन दिया कि सभी तबके के लोगों को सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी। पश्चिम बंगाल में जलपाईगुड़ी के पुलिस अधीक्षक सुगातो सेन ने बताया कि करीब दो हजार लोगों ने जिले के बारोविसा, कुमारग्राम, बाकसिरहाट और अलीपुरदूआर जंक्शन स्टेशन पर शरण ली है। उन्होंने बताया कि इन लोगों को शिविरों में रखा गया है। अलीपुरदूआर में एक शिविर रेलवे ने खोला है, जबकि अन्य शिविर राज्य सरकार द्वारा खोले गए हैं। अलीपुरदूआर जंक्शन शिविर में करीब 250 लोगों ने शरण ली है। सेन ने बताया कि शरण लेने वालों में से कुछ लोग कोकराझार में स्थिति में सुधार के बाद वहां लौट गए हैं। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के अलीपुरदूआर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक अनिरबन दत्ता ने कहा कि सेना से आश्वासन मिलने के बाद अलीपुरदूआर और न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशनों से तीन ट्रेनों को चलने की अनुमति दी गई।टिप्पणियां असम विधानसभा की 20 सदस्यीय सर्वदलीय टीम ने उपाध्यक्ष भीमानंद तांती के नेतृत्व में निचले असम के हिंसा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और लोगों तथा विभिन्न स्थानीय नेताओं से मुलाकात की। उधर, माकपा पोलित ब्यूरो ने दिल्ली में जारी एक बयान में आरोप लगाया कि असम सरकार हिंसा को रोकने के लिए समय पर कार्रवाई करने में पूरी तरह विफल रही। पार्टी ने कहा कि विभिन्न समुदायों के बीच अविश्वास और तनाव के शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज किया गया। केंद्र सरकार को इस बात का जवाब देना चाहिए कि उसने हिंसा को लेकर कार्रवाई करने में इतना विलम्ब क्यों किया। पिछले कुछ दिनों से इन इलाकों में जातीय संघर्ष छिड़ने के बाद से करीब दो लाख लोग इन चार जिलों में अपना घर-बार छोड़कर फरार हो चुके हैं। राज्य सरकार ने कई इलाकों में करीब 70 हजार लोगों के लिए 120 से ज्यादा राहत शिविर स्थापित किए हैं जिन्होंने सुरक्षित इलाके की तलाश में अपने गांव छोड़ दिए हैं। इन शिविरों की रक्षा केंद्रीय अर्धसैनिक बल के जवान कर रहे हैं। अधिकारियों ने कहा कि इन 13 टुकड़ियों में एक हजार से ज्यादा जवान हैं जो दंगा सहित हर तरह की स्थिति से निपटने को तैयार हैं। उन्होंने कहा, ‘‘तीन टुकड़ियों को किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षित रखा गया है।’’ दंगा विरोधी अभ्यास के अलावा सेना के जवान इन इलाकों में नियमित तौर पर आतंकवाद निरोधक और उग्रवाद निरोधक अभियानों में संलग्न हैं। उन्होंने कहा, ‘‘इनमें से अधिकतर इलाके आतंकवाद और उग्रवाद से अब भी ग्रस्त हैं। हमें सुनिश्चित करना है कि वहां स्थिति और नहीं बिगड़े।’’ हिंसा में 41 लोगों के मारे जाने की खबर के बाद असम के कई इलाकों में देखते ही गोली मारने के आदेश दिए गए हैं। इन इलाकों में स्थिति का आकलन करने के लिए राज्य सरकार ने कई बैठकें की हैं और सुरक्षा बलों को सतर्क कर दिया गया है। सेना ने आज असम के हिंसा प्रभावित चार जिलों में तैनाती के लिए लगभग एक हजार सैनिकों को भेज दिया जो वहां लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए फ्लैग मार्च कर रहे हैं। गुवाहाटी में मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने स्थिति की समीक्षा के लिए मुख्य सचिव सहित सरकारी अधिकारियों की बैठक की। असम के पुलिस महानिरीक्षक (कानून एवं व्यवस्था) एलआर बिश्नोई ने प्रेट्र को बताया, ‘‘कोकराझार जले में अब तक 25 लोग मारे जा चुके हैं, जबकि चिरांग जिले में 15 लोगों की जान गई है।’’ कोकराझार में निश्चितकालीन कफ्र्यू जारी है, जबकि चिरांग और धुबरी जिलों में रात का कफ्र्यू लगा है। बिश्नोई ने कहा, ‘‘स्थिति स्थिर हो रही है।’’ पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के प्रवक्ता नृपेंद्र भट्टाचार्जी ने कहा कि आज दोपहर बाद यात्री गाड़ी और माल गाड़ी सेवाओं को आंशिक रूप से शुरू कर दिया गया, जबकि रुकी पड़ी ट्रेनें स्थिति में सुधार होने पर चलेंगी। न्यू बोंगाईगांव, कामाख्यागुड़ी और न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशनों पर फंसे 30 हजार से अधिक यात्रियों ने भोजन एवं पानी की किल्लत की शिकायत की। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘हम उम्मीद करते हैं कि ट्रेन सेवाएं शुरू होने के साथ फंसे यात्रियों को धीरे-धीरे उनके गंतव्यों पर ले जाया जाएगा।’’ गृह विभाग के संयुक्त सचिव और पूर्वोत्तर मामलों के प्रभारी शंभू सिंह तथा आंतरिक सुरक्षा मामलों के विशेष सचिव अजय चड्ढा ने स्थिति का जायजा लेने के लिए कोकराझार के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। सिंह ने बाद में कहा, ‘‘अब तक इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि घटना में बांग्लादेशी प्रवासी शामिल हैं। बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ है और इसलिए घुसपैठ की संभावनाएं कम हुई हैं।’’ उन्होंने भी लोगों को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने का आश्वासन दिया। सर्वदलीय टीम ने राहत शिविरों में प्रभावित लोगों से मुलाकात की और विभिन्न स्थानों पर शांति बैठकें कर आश्वासन दिया कि सभी तबके के लोगों को सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी। पश्चिम बंगाल में जलपाईगुड़ी के पुलिस अधीक्षक सुगातो सेन ने बताया कि करीब दो हजार लोगों ने जिले के बारोविसा, कुमारग्राम, बाकसिरहाट और अलीपुरदूआर जंक्शन स्टेशन पर शरण ली है। उन्होंने बताया कि इन लोगों को शिविरों में रखा गया है। अलीपुरदूआर में एक शिविर रेलवे ने खोला है, जबकि अन्य शिविर राज्य सरकार द्वारा खोले गए हैं। अलीपुरदूआर जंक्शन शिविर में करीब 250 लोगों ने शरण ली है। सेन ने बताया कि शरण लेने वालों में से कुछ लोग कोकराझार में स्थिति में सुधार के बाद वहां लौट गए हैं। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के अलीपुरदूआर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक अनिरबन दत्ता ने कहा कि सेना से आश्वासन मिलने के बाद अलीपुरदूआर और न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशनों से तीन ट्रेनों को चलने की अनुमति दी गई।टिप्पणियां असम विधानसभा की 20 सदस्यीय सर्वदलीय टीम ने उपाध्यक्ष भीमानंद तांती के नेतृत्व में निचले असम के हिंसा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और लोगों तथा विभिन्न स्थानीय नेताओं से मुलाकात की। उधर, माकपा पोलित ब्यूरो ने दिल्ली में जारी एक बयान में आरोप लगाया कि असम सरकार हिंसा को रोकने के लिए समय पर कार्रवाई करने में पूरी तरह विफल रही। पार्टी ने कहा कि विभिन्न समुदायों के बीच अविश्वास और तनाव के शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज किया गया। केंद्र सरकार को इस बात का जवाब देना चाहिए कि उसने हिंसा को लेकर कार्रवाई करने में इतना विलम्ब क्यों किया। इन शिविरों की रक्षा केंद्रीय अर्धसैनिक बल के जवान कर रहे हैं। अधिकारियों ने कहा कि इन 13 टुकड़ियों में एक हजार से ज्यादा जवान हैं जो दंगा सहित हर तरह की स्थिति से निपटने को तैयार हैं। उन्होंने कहा, ‘‘तीन टुकड़ियों को किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षित रखा गया है।’’ दंगा विरोधी अभ्यास के अलावा सेना के जवान इन इलाकों में नियमित तौर पर आतंकवाद निरोधक और उग्रवाद निरोधक अभियानों में संलग्न हैं। उन्होंने कहा, ‘‘इनमें से अधिकतर इलाके आतंकवाद और उग्रवाद से अब भी ग्रस्त हैं। हमें सुनिश्चित करना है कि वहां स्थिति और नहीं बिगड़े।’’ हिंसा में 41 लोगों के मारे जाने की खबर के बाद असम के कई इलाकों में देखते ही गोली मारने के आदेश दिए गए हैं। इन इलाकों में स्थिति का आकलन करने के लिए राज्य सरकार ने कई बैठकें की हैं और सुरक्षा बलों को सतर्क कर दिया गया है। सेना ने आज असम के हिंसा प्रभावित चार जिलों में तैनाती के लिए लगभग एक हजार सैनिकों को भेज दिया जो वहां लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए फ्लैग मार्च कर रहे हैं। गुवाहाटी में मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने स्थिति की समीक्षा के लिए मुख्य सचिव सहित सरकारी अधिकारियों की बैठक की। असम के पुलिस महानिरीक्षक (कानून एवं व्यवस्था) एलआर बिश्नोई ने प्रेट्र को बताया, ‘‘कोकराझार जले में अब तक 25 लोग मारे जा चुके हैं, जबकि चिरांग जिले में 15 लोगों की जान गई है।’’ कोकराझार में निश्चितकालीन कफ्र्यू जारी है, जबकि चिरांग और धुबरी जिलों में रात का कफ्र्यू लगा है। बिश्नोई ने कहा, ‘‘स्थिति स्थिर हो रही है।’’ पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के प्रवक्ता नृपेंद्र भट्टाचार्जी ने कहा कि आज दोपहर बाद यात्री गाड़ी और माल गाड़ी सेवाओं को आंशिक रूप से शुरू कर दिया गया, जबकि रुकी पड़ी ट्रेनें स्थिति में सुधार होने पर चलेंगी। न्यू बोंगाईगांव, कामाख्यागुड़ी और न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशनों पर फंसे 30 हजार से अधिक यात्रियों ने भोजन एवं पानी की किल्लत की शिकायत की। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘हम उम्मीद करते हैं कि ट्रेन सेवाएं शुरू होने के साथ फंसे यात्रियों को धीरे-धीरे उनके गंतव्यों पर ले जाया जाएगा।’’ गृह विभाग के संयुक्त सचिव और पूर्वोत्तर मामलों के प्रभारी शंभू सिंह तथा आंतरिक सुरक्षा मामलों के विशेष सचिव अजय चड्ढा ने स्थिति का जायजा लेने के लिए कोकराझार के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। सिंह ने बाद में कहा, ‘‘अब तक इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि घटना में बांग्लादेशी प्रवासी शामिल हैं। बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ है और इसलिए घुसपैठ की संभावनाएं कम हुई हैं।’’ उन्होंने भी लोगों को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने का आश्वासन दिया। सर्वदलीय टीम ने राहत शिविरों में प्रभावित लोगों से मुलाकात की और विभिन्न स्थानों पर शांति बैठकें कर आश्वासन दिया कि सभी तबके के लोगों को सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी। पश्चिम बंगाल में जलपाईगुड़ी के पुलिस अधीक्षक सुगातो सेन ने बताया कि करीब दो हजार लोगों ने जिले के बारोविसा, कुमारग्राम, बाकसिरहाट और अलीपुरदूआर जंक्शन स्टेशन पर शरण ली है। उन्होंने बताया कि इन लोगों को शिविरों में रखा गया है। अलीपुरदूआर में एक शिविर रेलवे ने खोला है, जबकि अन्य शिविर राज्य सरकार द्वारा खोले गए हैं। अलीपुरदूआर जंक्शन शिविर में करीब 250 लोगों ने शरण ली है। सेन ने बताया कि शरण लेने वालों में से कुछ लोग कोकराझार में स्थिति में सुधार के बाद वहां लौट गए हैं। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के अलीपुरदूआर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक अनिरबन दत्ता ने कहा कि सेना से आश्वासन मिलने के बाद अलीपुरदूआर और न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशनों से तीन ट्रेनों को चलने की अनुमति दी गई।टिप्पणियां असम विधानसभा की 20 सदस्यीय सर्वदलीय टीम ने उपाध्यक्ष भीमानंद तांती के नेतृत्व में निचले असम के हिंसा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और लोगों तथा विभिन्न स्थानीय नेताओं से मुलाकात की। उधर, माकपा पोलित ब्यूरो ने दिल्ली में जारी एक बयान में आरोप लगाया कि असम सरकार हिंसा को रोकने के लिए समय पर कार्रवाई करने में पूरी तरह विफल रही। पार्टी ने कहा कि विभिन्न समुदायों के बीच अविश्वास और तनाव के शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज किया गया। केंद्र सरकार को इस बात का जवाब देना चाहिए कि उसने हिंसा को लेकर कार्रवाई करने में इतना विलम्ब क्यों किया। उन्होंने कहा, ‘‘तीन टुकड़ियों को किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षित रखा गया है।’’ दंगा विरोधी अभ्यास के अलावा सेना के जवान इन इलाकों में नियमित तौर पर आतंकवाद निरोधक और उग्रवाद निरोधक अभियानों में संलग्न हैं। उन्होंने कहा, ‘‘इनमें से अधिकतर इलाके आतंकवाद और उग्रवाद से अब भी ग्रस्त हैं। हमें सुनिश्चित करना है कि वहां स्थिति और नहीं बिगड़े।’’ हिंसा में 41 लोगों के मारे जाने की खबर के बाद असम के कई इलाकों में देखते ही गोली मारने के आदेश दिए गए हैं। इन इलाकों में स्थिति का आकलन करने के लिए राज्य सरकार ने कई बैठकें की हैं और सुरक्षा बलों को सतर्क कर दिया गया है। सेना ने आज असम के हिंसा प्रभावित चार जिलों में तैनाती के लिए लगभग एक हजार सैनिकों को भेज दिया जो वहां लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए फ्लैग मार्च कर रहे हैं। गुवाहाटी में मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने स्थिति की समीक्षा के लिए मुख्य सचिव सहित सरकारी अधिकारियों की बैठक की। असम के पुलिस महानिरीक्षक (कानून एवं व्यवस्था) एलआर बिश्नोई ने प्रेट्र को बताया, ‘‘कोकराझार जले में अब तक 25 लोग मारे जा चुके हैं, जबकि चिरांग जिले में 15 लोगों की जान गई है।’’ कोकराझार में निश्चितकालीन कफ्र्यू जारी है, जबकि चिरांग और धुबरी जिलों में रात का कफ्र्यू लगा है। बिश्नोई ने कहा, ‘‘स्थिति स्थिर हो रही है।’’ पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के प्रवक्ता नृपेंद्र भट्टाचार्जी ने कहा कि आज दोपहर बाद यात्री गाड़ी और माल गाड़ी सेवाओं को आंशिक रूप से शुरू कर दिया गया, जबकि रुकी पड़ी ट्रेनें स्थिति में सुधार होने पर चलेंगी। न्यू बोंगाईगांव, कामाख्यागुड़ी और न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशनों पर फंसे 30 हजार से अधिक यात्रियों ने भोजन एवं पानी की किल्लत की शिकायत की। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘हम उम्मीद करते हैं कि ट्रेन सेवाएं शुरू होने के साथ फंसे यात्रियों को धीरे-धीरे उनके गंतव्यों पर ले जाया जाएगा।’’ गृह विभाग के संयुक्त सचिव और पूर्वोत्तर मामलों के प्रभारी शंभू सिंह तथा आंतरिक सुरक्षा मामलों के विशेष सचिव अजय चड्ढा ने स्थिति का जायजा लेने के लिए कोकराझार के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। सिंह ने बाद में कहा, ‘‘अब तक इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि घटना में बांग्लादेशी प्रवासी शामिल हैं। बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ है और इसलिए घुसपैठ की संभावनाएं कम हुई हैं।’’ उन्होंने भी लोगों को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने का आश्वासन दिया। सर्वदलीय टीम ने राहत शिविरों में प्रभावित लोगों से मुलाकात की और विभिन्न स्थानों पर शांति बैठकें कर आश्वासन दिया कि सभी तबके के लोगों को सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी। पश्चिम बंगाल में जलपाईगुड़ी के पुलिस अधीक्षक सुगातो सेन ने बताया कि करीब दो हजार लोगों ने जिले के बारोविसा, कुमारग्राम, बाकसिरहाट और अलीपुरदूआर जंक्शन स्टेशन पर शरण ली है। उन्होंने बताया कि इन लोगों को शिविरों में रखा गया है। अलीपुरदूआर में एक शिविर रेलवे ने खोला है, जबकि अन्य शिविर राज्य सरकार द्वारा खोले गए हैं। अलीपुरदूआर जंक्शन शिविर में करीब 250 लोगों ने शरण ली है। सेन ने बताया कि शरण लेने वालों में से कुछ लोग कोकराझार में स्थिति में सुधार के बाद वहां लौट गए हैं। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के अलीपुरदूआर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक अनिरबन दत्ता ने कहा कि सेना से आश्वासन मिलने के बाद अलीपुरदूआर और न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशनों से तीन ट्रेनों को चलने की अनुमति दी गई।टिप्पणियां असम विधानसभा की 20 सदस्यीय सर्वदलीय टीम ने उपाध्यक्ष भीमानंद तांती के नेतृत्व में निचले असम के हिंसा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और लोगों तथा विभिन्न स्थानीय नेताओं से मुलाकात की। उधर, माकपा पोलित ब्यूरो ने दिल्ली में जारी एक बयान में आरोप लगाया कि असम सरकार हिंसा को रोकने के लिए समय पर कार्रवाई करने में पूरी तरह विफल रही। पार्टी ने कहा कि विभिन्न समुदायों के बीच अविश्वास और तनाव के शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज किया गया। केंद्र सरकार को इस बात का जवाब देना चाहिए कि उसने हिंसा को लेकर कार्रवाई करने में इतना विलम्ब क्यों किया। उन्होंने कहा, ‘‘इनमें से अधिकतर इलाके आतंकवाद और उग्रवाद से अब भी ग्रस्त हैं। हमें सुनिश्चित करना है कि वहां स्थिति और नहीं बिगड़े।’’ हिंसा में 41 लोगों के मारे जाने की खबर के बाद असम के कई इलाकों में देखते ही गोली मारने के आदेश दिए गए हैं। इन इलाकों में स्थिति का आकलन करने के लिए राज्य सरकार ने कई बैठकें की हैं और सुरक्षा बलों को सतर्क कर दिया गया है। सेना ने आज असम के हिंसा प्रभावित चार जिलों में तैनाती के लिए लगभग एक हजार सैनिकों को भेज दिया जो वहां लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए फ्लैग मार्च कर रहे हैं। गुवाहाटी में मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने स्थिति की समीक्षा के लिए मुख्य सचिव सहित सरकारी अधिकारियों की बैठक की। असम के पुलिस महानिरीक्षक (कानून एवं व्यवस्था) एलआर बिश्नोई ने प्रेट्र को बताया, ‘‘कोकराझार जले में अब तक 25 लोग मारे जा चुके हैं, जबकि चिरांग जिले में 15 लोगों की जान गई है।’’ कोकराझार में निश्चितकालीन कफ्र्यू जारी है, जबकि चिरांग और धुबरी जिलों में रात का कफ्र्यू लगा है। बिश्नोई ने कहा, ‘‘स्थिति स्थिर हो रही है।’’ पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के प्रवक्ता नृपेंद्र भट्टाचार्जी ने कहा कि आज दोपहर बाद यात्री गाड़ी और माल गाड़ी सेवाओं को आंशिक रूप से शुरू कर दिया गया, जबकि रुकी पड़ी ट्रेनें स्थिति में सुधार होने पर चलेंगी। न्यू बोंगाईगांव, कामाख्यागुड़ी और न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशनों पर फंसे 30 हजार से अधिक यात्रियों ने भोजन एवं पानी की किल्लत की शिकायत की। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘हम उम्मीद करते हैं कि ट्रेन सेवाएं शुरू होने के साथ फंसे यात्रियों को धीरे-धीरे उनके गंतव्यों पर ले जाया जाएगा।’’ गृह विभाग के संयुक्त सचिव और पूर्वोत्तर मामलों के प्रभारी शंभू सिंह तथा आंतरिक सुरक्षा मामलों के विशेष सचिव अजय चड्ढा ने स्थिति का जायजा लेने के लिए कोकराझार के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। सिंह ने बाद में कहा, ‘‘अब तक इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि घटना में बांग्लादेशी प्रवासी शामिल हैं। बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ है और इसलिए घुसपैठ की संभावनाएं कम हुई हैं।’’ उन्होंने भी लोगों को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने का आश्वासन दिया। सर्वदलीय टीम ने राहत शिविरों में प्रभावित लोगों से मुलाकात की और विभिन्न स्थानों पर शांति बैठकें कर आश्वासन दिया कि सभी तबके के लोगों को सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी। पश्चिम बंगाल में जलपाईगुड़ी के पुलिस अधीक्षक सुगातो सेन ने बताया कि करीब दो हजार लोगों ने जिले के बारोविसा, कुमारग्राम, बाकसिरहाट और अलीपुरदूआर जंक्शन स्टेशन पर शरण ली है। उन्होंने बताया कि इन लोगों को शिविरों में रखा गया है। अलीपुरदूआर में एक शिविर रेलवे ने खोला है, जबकि अन्य शिविर राज्य सरकार द्वारा खोले गए हैं। अलीपुरदूआर जंक्शन शिविर में करीब 250 लोगों ने शरण ली है। सेन ने बताया कि शरण लेने वालों में से कुछ लोग कोकराझार में स्थिति में सुधार के बाद वहां लौट गए हैं। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के अलीपुरदूआर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक अनिरबन दत्ता ने कहा कि सेना से आश्वासन मिलने के बाद अलीपुरदूआर और न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशनों से तीन ट्रेनों को चलने की अनुमति दी गई।टिप्पणियां असम विधानसभा की 20 सदस्यीय सर्वदलीय टीम ने उपाध्यक्ष भीमानंद तांती के नेतृत्व में निचले असम के हिंसा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और लोगों तथा विभिन्न स्थानीय नेताओं से मुलाकात की। उधर, माकपा पोलित ब्यूरो ने दिल्ली में जारी एक बयान में आरोप लगाया कि असम सरकार हिंसा को रोकने के लिए समय पर कार्रवाई करने में पूरी तरह विफल रही। पार्टी ने कहा कि विभिन्न समुदायों के बीच अविश्वास और तनाव के शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज किया गया। केंद्र सरकार को इस बात का जवाब देना चाहिए कि उसने हिंसा को लेकर कार्रवाई करने में इतना विलम्ब क्यों किया। इन इलाकों में स्थिति का आकलन करने के लिए राज्य सरकार ने कई बैठकें की हैं और सुरक्षा बलों को सतर्क कर दिया गया है। सेना ने आज असम के हिंसा प्रभावित चार जिलों में तैनाती के लिए लगभग एक हजार सैनिकों को भेज दिया जो वहां लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए फ्लैग मार्च कर रहे हैं। गुवाहाटी में मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने स्थिति की समीक्षा के लिए मुख्य सचिव सहित सरकारी अधिकारियों की बैठक की। असम के पुलिस महानिरीक्षक (कानून एवं व्यवस्था) एलआर बिश्नोई ने प्रेट्र को बताया, ‘‘कोकराझार जले में अब तक 25 लोग मारे जा चुके हैं, जबकि चिरांग जिले में 15 लोगों की जान गई है।’’ कोकराझार में निश्चितकालीन कफ्र्यू जारी है, जबकि चिरांग और धुबरी जिलों में रात का कफ्र्यू लगा है। बिश्नोई ने कहा, ‘‘स्थिति स्थिर हो रही है।’’ पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के प्रवक्ता नृपेंद्र भट्टाचार्जी ने कहा कि आज दोपहर बाद यात्री गाड़ी और माल गाड़ी सेवाओं को आंशिक रूप से शुरू कर दिया गया, जबकि रुकी पड़ी ट्रेनें स्थिति में सुधार होने पर चलेंगी। न्यू बोंगाईगांव, कामाख्यागुड़ी और न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशनों पर फंसे 30 हजार से अधिक यात्रियों ने भोजन एवं पानी की किल्लत की शिकायत की। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘हम उम्मीद करते हैं कि ट्रेन सेवाएं शुरू होने के साथ फंसे यात्रियों को धीरे-धीरे उनके गंतव्यों पर ले जाया जाएगा।’’ गृह विभाग के संयुक्त सचिव और पूर्वोत्तर मामलों के प्रभारी शंभू सिंह तथा आंतरिक सुरक्षा मामलों के विशेष सचिव अजय चड्ढा ने स्थिति का जायजा लेने के लिए कोकराझार के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। सिंह ने बाद में कहा, ‘‘अब तक इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि घटना में बांग्लादेशी प्रवासी शामिल हैं। बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ है और इसलिए घुसपैठ की संभावनाएं कम हुई हैं।’’ उन्होंने भी लोगों को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने का आश्वासन दिया। सर्वदलीय टीम ने राहत शिविरों में प्रभावित लोगों से मुलाकात की और विभिन्न स्थानों पर शांति बैठकें कर आश्वासन दिया कि सभी तबके के लोगों को सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी। पश्चिम बंगाल में जलपाईगुड़ी के पुलिस अधीक्षक सुगातो सेन ने बताया कि करीब दो हजार लोगों ने जिले के बारोविसा, कुमारग्राम, बाकसिरहाट और अलीपुरदूआर जंक्शन स्टेशन पर शरण ली है। उन्होंने बताया कि इन लोगों को शिविरों में रखा गया है। अलीपुरदूआर में एक शिविर रेलवे ने खोला है, जबकि अन्य शिविर राज्य सरकार द्वारा खोले गए हैं। अलीपुरदूआर जंक्शन शिविर में करीब 250 लोगों ने शरण ली है। सेन ने बताया कि शरण लेने वालों में से कुछ लोग कोकराझार में स्थिति में सुधार के बाद वहां लौट गए हैं। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के अलीपुरदूआर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक अनिरबन दत्ता ने कहा कि सेना से आश्वासन मिलने के बाद अलीपुरदूआर और न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशनों से तीन ट्रेनों को चलने की अनुमति दी गई।टिप्पणियां असम विधानसभा की 20 सदस्यीय सर्वदलीय टीम ने उपाध्यक्ष भीमानंद तांती के नेतृत्व में निचले असम के हिंसा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और लोगों तथा विभिन्न स्थानीय नेताओं से मुलाकात की। उधर, माकपा पोलित ब्यूरो ने दिल्ली में जारी एक बयान में आरोप लगाया कि असम सरकार हिंसा को रोकने के लिए समय पर कार्रवाई करने में पूरी तरह विफल रही। पार्टी ने कहा कि विभिन्न समुदायों के बीच अविश्वास और तनाव के शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज किया गया। केंद्र सरकार को इस बात का जवाब देना चाहिए कि उसने हिंसा को लेकर कार्रवाई करने में इतना विलम्ब क्यों किया। असम के पुलिस महानिरीक्षक (कानून एवं व्यवस्था) एलआर बिश्नोई ने प्रेट्र को बताया, ‘‘कोकराझार जले में अब तक 25 लोग मारे जा चुके हैं, जबकि चिरांग जिले में 15 लोगों की जान गई है।’’ कोकराझार में निश्चितकालीन कफ्र्यू जारी है, जबकि चिरांग और धुबरी जिलों में रात का कफ्र्यू लगा है। बिश्नोई ने कहा, ‘‘स्थिति स्थिर हो रही है।’’ पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के प्रवक्ता नृपेंद्र भट्टाचार्जी ने कहा कि आज दोपहर बाद यात्री गाड़ी और माल गाड़ी सेवाओं को आंशिक रूप से शुरू कर दिया गया, जबकि रुकी पड़ी ट्रेनें स्थिति में सुधार होने पर चलेंगी। न्यू बोंगाईगांव, कामाख्यागुड़ी और न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशनों पर फंसे 30 हजार से अधिक यात्रियों ने भोजन एवं पानी की किल्लत की शिकायत की। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘हम उम्मीद करते हैं कि ट्रेन सेवाएं शुरू होने के साथ फंसे यात्रियों को धीरे-धीरे उनके गंतव्यों पर ले जाया जाएगा।’’ गृह विभाग के संयुक्त सचिव और पूर्वोत्तर मामलों के प्रभारी शंभू सिंह तथा आंतरिक सुरक्षा मामलों के विशेष सचिव अजय चड्ढा ने स्थिति का जायजा लेने के लिए कोकराझार के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। सिंह ने बाद में कहा, ‘‘अब तक इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि घटना में बांग्लादेशी प्रवासी शामिल हैं। बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ है और इसलिए घुसपैठ की संभावनाएं कम हुई हैं।’’ उन्होंने भी लोगों को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने का आश्वासन दिया। सर्वदलीय टीम ने राहत शिविरों में प्रभावित लोगों से मुलाकात की और विभिन्न स्थानों पर शांति बैठकें कर आश्वासन दिया कि सभी तबके के लोगों को सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी। पश्चिम बंगाल में जलपाईगुड़ी के पुलिस अधीक्षक सुगातो सेन ने बताया कि करीब दो हजार लोगों ने जिले के बारोविसा, कुमारग्राम, बाकसिरहाट और अलीपुरदूआर जंक्शन स्टेशन पर शरण ली है। उन्होंने बताया कि इन लोगों को शिविरों में रखा गया है। अलीपुरदूआर में एक शिविर रेलवे ने खोला है, जबकि अन्य शिविर राज्य सरकार द्वारा खोले गए हैं। अलीपुरदूआर जंक्शन शिविर में करीब 250 लोगों ने शरण ली है। सेन ने बताया कि शरण लेने वालों में से कुछ लोग कोकराझार में स्थिति में सुधार के बाद वहां लौट गए हैं। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के अलीपुरदूआर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक अनिरबन दत्ता ने कहा कि सेना से आश्वासन मिलने के बाद अलीपुरदूआर और न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशनों से तीन ट्रेनों को चलने की अनुमति दी गई।टिप्पणियां असम विधानसभा की 20 सदस्यीय सर्वदलीय टीम ने उपाध्यक्ष भीमानंद तांती के नेतृत्व में निचले असम के हिंसा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और लोगों तथा विभिन्न स्थानीय नेताओं से मुलाकात की। उधर, माकपा पोलित ब्यूरो ने दिल्ली में जारी एक बयान में आरोप लगाया कि असम सरकार हिंसा को रोकने के लिए समय पर कार्रवाई करने में पूरी तरह विफल रही। पार्टी ने कहा कि विभिन्न समुदायों के बीच अविश्वास और तनाव के शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज किया गया। केंद्र सरकार को इस बात का जवाब देना चाहिए कि उसने हिंसा को लेकर कार्रवाई करने में इतना विलम्ब क्यों किया। बिश्नोई ने कहा, ‘‘स्थिति स्थिर हो रही है।’’ पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के प्रवक्ता नृपेंद्र भट्टाचार्जी ने कहा कि आज दोपहर बाद यात्री गाड़ी और माल गाड़ी सेवाओं को आंशिक रूप से शुरू कर दिया गया, जबकि रुकी पड़ी ट्रेनें स्थिति में सुधार होने पर चलेंगी। न्यू बोंगाईगांव, कामाख्यागुड़ी और न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशनों पर फंसे 30 हजार से अधिक यात्रियों ने भोजन एवं पानी की किल्लत की शिकायत की। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘हम उम्मीद करते हैं कि ट्रेन सेवाएं शुरू होने के साथ फंसे यात्रियों को धीरे-धीरे उनके गंतव्यों पर ले जाया जाएगा।’’ गृह विभाग के संयुक्त सचिव और पूर्वोत्तर मामलों के प्रभारी शंभू सिंह तथा आंतरिक सुरक्षा मामलों के विशेष सचिव अजय चड्ढा ने स्थिति का जायजा लेने के लिए कोकराझार के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। सिंह ने बाद में कहा, ‘‘अब तक इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि घटना में बांग्लादेशी प्रवासी शामिल हैं। बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ है और इसलिए घुसपैठ की संभावनाएं कम हुई हैं।’’ उन्होंने भी लोगों को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने का आश्वासन दिया। सर्वदलीय टीम ने राहत शिविरों में प्रभावित लोगों से मुलाकात की और विभिन्न स्थानों पर शांति बैठकें कर आश्वासन दिया कि सभी तबके के लोगों को सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी। पश्चिम बंगाल में जलपाईगुड़ी के पुलिस अधीक्षक सुगातो सेन ने बताया कि करीब दो हजार लोगों ने जिले के बारोविसा, कुमारग्राम, बाकसिरहाट और अलीपुरदूआर जंक्शन स्टेशन पर शरण ली है। उन्होंने बताया कि इन लोगों को शिविरों में रखा गया है। अलीपुरदूआर में एक शिविर रेलवे ने खोला है, जबकि अन्य शिविर राज्य सरकार द्वारा खोले गए हैं। अलीपुरदूआर जंक्शन शिविर में करीब 250 लोगों ने शरण ली है। सेन ने बताया कि शरण लेने वालों में से कुछ लोग कोकराझार में स्थिति में सुधार के बाद वहां लौट गए हैं। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के अलीपुरदूआर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक अनिरबन दत्ता ने कहा कि सेना से आश्वासन मिलने के बाद अलीपुरदूआर और न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशनों से तीन ट्रेनों को चलने की अनुमति दी गई।टिप्पणियां असम विधानसभा की 20 सदस्यीय सर्वदलीय टीम ने उपाध्यक्ष भीमानंद तांती के नेतृत्व में निचले असम के हिंसा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और लोगों तथा विभिन्न स्थानीय नेताओं से मुलाकात की। उधर, माकपा पोलित ब्यूरो ने दिल्ली में जारी एक बयान में आरोप लगाया कि असम सरकार हिंसा को रोकने के लिए समय पर कार्रवाई करने में पूरी तरह विफल रही। पार्टी ने कहा कि विभिन्न समुदायों के बीच अविश्वास और तनाव के शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज किया गया। केंद्र सरकार को इस बात का जवाब देना चाहिए कि उसने हिंसा को लेकर कार्रवाई करने में इतना विलम्ब क्यों किया। न्यू बोंगाईगांव, कामाख्यागुड़ी और न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशनों पर फंसे 30 हजार से अधिक यात्रियों ने भोजन एवं पानी की किल्लत की शिकायत की। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘हम उम्मीद करते हैं कि ट्रेन सेवाएं शुरू होने के साथ फंसे यात्रियों को धीरे-धीरे उनके गंतव्यों पर ले जाया जाएगा।’’ गृह विभाग के संयुक्त सचिव और पूर्वोत्तर मामलों के प्रभारी शंभू सिंह तथा आंतरिक सुरक्षा मामलों के विशेष सचिव अजय चड्ढा ने स्थिति का जायजा लेने के लिए कोकराझार के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। सिंह ने बाद में कहा, ‘‘अब तक इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि घटना में बांग्लादेशी प्रवासी शामिल हैं। बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ है और इसलिए घुसपैठ की संभावनाएं कम हुई हैं।’’ उन्होंने भी लोगों को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने का आश्वासन दिया। सर्वदलीय टीम ने राहत शिविरों में प्रभावित लोगों से मुलाकात की और विभिन्न स्थानों पर शांति बैठकें कर आश्वासन दिया कि सभी तबके के लोगों को सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी। पश्चिम बंगाल में जलपाईगुड़ी के पुलिस अधीक्षक सुगातो सेन ने बताया कि करीब दो हजार लोगों ने जिले के बारोविसा, कुमारग्राम, बाकसिरहाट और अलीपुरदूआर जंक्शन स्टेशन पर शरण ली है। उन्होंने बताया कि इन लोगों को शिविरों में रखा गया है। अलीपुरदूआर में एक शिविर रेलवे ने खोला है, जबकि अन्य शिविर राज्य सरकार द्वारा खोले गए हैं। अलीपुरदूआर जंक्शन शिविर में करीब 250 लोगों ने शरण ली है। सेन ने बताया कि शरण लेने वालों में से कुछ लोग कोकराझार में स्थिति में सुधार के बाद वहां लौट गए हैं। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के अलीपुरदूआर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक अनिरबन दत्ता ने कहा कि सेना से आश्वासन मिलने के बाद अलीपुरदूआर और न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशनों से तीन ट्रेनों को चलने की अनुमति दी गई।टिप्पणियां असम विधानसभा की 20 सदस्यीय सर्वदलीय टीम ने उपाध्यक्ष भीमानंद तांती के नेतृत्व में निचले असम के हिंसा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और लोगों तथा विभिन्न स्थानीय नेताओं से मुलाकात की। उधर, माकपा पोलित ब्यूरो ने दिल्ली में जारी एक बयान में आरोप लगाया कि असम सरकार हिंसा को रोकने के लिए समय पर कार्रवाई करने में पूरी तरह विफल रही। पार्टी ने कहा कि विभिन्न समुदायों के बीच अविश्वास और तनाव के शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज किया गया। केंद्र सरकार को इस बात का जवाब देना चाहिए कि उसने हिंसा को लेकर कार्रवाई करने में इतना विलम्ब क्यों किया। गृह विभाग के संयुक्त सचिव और पूर्वोत्तर मामलों के प्रभारी शंभू सिंह तथा आंतरिक सुरक्षा मामलों के विशेष सचिव अजय चड्ढा ने स्थिति का जायजा लेने के लिए कोकराझार के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। सिंह ने बाद में कहा, ‘‘अब तक इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि घटना में बांग्लादेशी प्रवासी शामिल हैं। बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ है और इसलिए घुसपैठ की संभावनाएं कम हुई हैं।’’ उन्होंने भी लोगों को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने का आश्वासन दिया। सर्वदलीय टीम ने राहत शिविरों में प्रभावित लोगों से मुलाकात की और विभिन्न स्थानों पर शांति बैठकें कर आश्वासन दिया कि सभी तबके के लोगों को सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी। पश्चिम बंगाल में जलपाईगुड़ी के पुलिस अधीक्षक सुगातो सेन ने बताया कि करीब दो हजार लोगों ने जिले के बारोविसा, कुमारग्राम, बाकसिरहाट और अलीपुरदूआर जंक्शन स्टेशन पर शरण ली है। उन्होंने बताया कि इन लोगों को शिविरों में रखा गया है। अलीपुरदूआर में एक शिविर रेलवे ने खोला है, जबकि अन्य शिविर राज्य सरकार द्वारा खोले गए हैं। अलीपुरदूआर जंक्शन शिविर में करीब 250 लोगों ने शरण ली है। सेन ने बताया कि शरण लेने वालों में से कुछ लोग कोकराझार में स्थिति में सुधार के बाद वहां लौट गए हैं। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के अलीपुरदूआर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक अनिरबन दत्ता ने कहा कि सेना से आश्वासन मिलने के बाद अलीपुरदूआर और न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशनों से तीन ट्रेनों को चलने की अनुमति दी गई।टिप्पणियां असम विधानसभा की 20 सदस्यीय सर्वदलीय टीम ने उपाध्यक्ष भीमानंद तांती के नेतृत्व में निचले असम के हिंसा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और लोगों तथा विभिन्न स्थानीय नेताओं से मुलाकात की। उधर, माकपा पोलित ब्यूरो ने दिल्ली में जारी एक बयान में आरोप लगाया कि असम सरकार हिंसा को रोकने के लिए समय पर कार्रवाई करने में पूरी तरह विफल रही। पार्टी ने कहा कि विभिन्न समुदायों के बीच अविश्वास और तनाव के शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज किया गया। केंद्र सरकार को इस बात का जवाब देना चाहिए कि उसने हिंसा को लेकर कार्रवाई करने में इतना विलम्ब क्यों किया। उन्होंने भी लोगों को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने का आश्वासन दिया। सर्वदलीय टीम ने राहत शिविरों में प्रभावित लोगों से मुलाकात की और विभिन्न स्थानों पर शांति बैठकें कर आश्वासन दिया कि सभी तबके के लोगों को सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी। पश्चिम बंगाल में जलपाईगुड़ी के पुलिस अधीक्षक सुगातो सेन ने बताया कि करीब दो हजार लोगों ने जिले के बारोविसा, कुमारग्राम, बाकसिरहाट और अलीपुरदूआर जंक्शन स्टेशन पर शरण ली है। उन्होंने बताया कि इन लोगों को शिविरों में रखा गया है। अलीपुरदूआर में एक शिविर रेलवे ने खोला है, जबकि अन्य शिविर राज्य सरकार द्वारा खोले गए हैं। अलीपुरदूआर जंक्शन शिविर में करीब 250 लोगों ने शरण ली है। सेन ने बताया कि शरण लेने वालों में से कुछ लोग कोकराझार में स्थिति में सुधार के बाद वहां लौट गए हैं। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के अलीपुरदूआर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक अनिरबन दत्ता ने कहा कि सेना से आश्वासन मिलने के बाद अलीपुरदूआर और न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशनों से तीन ट्रेनों को चलने की अनुमति दी गई।टिप्पणियां असम विधानसभा की 20 सदस्यीय सर्वदलीय टीम ने उपाध्यक्ष भीमानंद तांती के नेतृत्व में निचले असम के हिंसा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और लोगों तथा विभिन्न स्थानीय नेताओं से मुलाकात की। उधर, माकपा पोलित ब्यूरो ने दिल्ली में जारी एक बयान में आरोप लगाया कि असम सरकार हिंसा को रोकने के लिए समय पर कार्रवाई करने में पूरी तरह विफल रही। पार्टी ने कहा कि विभिन्न समुदायों के बीच अविश्वास और तनाव के शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज किया गया। केंद्र सरकार को इस बात का जवाब देना चाहिए कि उसने हिंसा को लेकर कार्रवाई करने में इतना विलम्ब क्यों किया। पश्चिम बंगाल में जलपाईगुड़ी के पुलिस अधीक्षक सुगातो सेन ने बताया कि करीब दो हजार लोगों ने जिले के बारोविसा, कुमारग्राम, बाकसिरहाट और अलीपुरदूआर जंक्शन स्टेशन पर शरण ली है। उन्होंने बताया कि इन लोगों को शिविरों में रखा गया है। अलीपुरदूआर में एक शिविर रेलवे ने खोला है, जबकि अन्य शिविर राज्य सरकार द्वारा खोले गए हैं। अलीपुरदूआर जंक्शन शिविर में करीब 250 लोगों ने शरण ली है। सेन ने बताया कि शरण लेने वालों में से कुछ लोग कोकराझार में स्थिति में सुधार के बाद वहां लौट गए हैं। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के अलीपुरदूआर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक अनिरबन दत्ता ने कहा कि सेना से आश्वासन मिलने के बाद अलीपुरदूआर और न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशनों से तीन ट्रेनों को चलने की अनुमति दी गई।टिप्पणियां असम विधानसभा की 20 सदस्यीय सर्वदलीय टीम ने उपाध्यक्ष भीमानंद तांती के नेतृत्व में निचले असम के हिंसा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और लोगों तथा विभिन्न स्थानीय नेताओं से मुलाकात की। उधर, माकपा पोलित ब्यूरो ने दिल्ली में जारी एक बयान में आरोप लगाया कि असम सरकार हिंसा को रोकने के लिए समय पर कार्रवाई करने में पूरी तरह विफल रही। पार्टी ने कहा कि विभिन्न समुदायों के बीच अविश्वास और तनाव के शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज किया गया। केंद्र सरकार को इस बात का जवाब देना चाहिए कि उसने हिंसा को लेकर कार्रवाई करने में इतना विलम्ब क्यों किया। सेन ने बताया कि शरण लेने वालों में से कुछ लोग कोकराझार में स्थिति में सुधार के बाद वहां लौट गए हैं। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के अलीपुरदूआर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक अनिरबन दत्ता ने कहा कि सेना से आश्वासन मिलने के बाद अलीपुरदूआर और न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशनों से तीन ट्रेनों को चलने की अनुमति दी गई।टिप्पणियां असम विधानसभा की 20 सदस्यीय सर्वदलीय टीम ने उपाध्यक्ष भीमानंद तांती के नेतृत्व में निचले असम के हिंसा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और लोगों तथा विभिन्न स्थानीय नेताओं से मुलाकात की। उधर, माकपा पोलित ब्यूरो ने दिल्ली में जारी एक बयान में आरोप लगाया कि असम सरकार हिंसा को रोकने के लिए समय पर कार्रवाई करने में पूरी तरह विफल रही। पार्टी ने कहा कि विभिन्न समुदायों के बीच अविश्वास और तनाव के शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज किया गया। केंद्र सरकार को इस बात का जवाब देना चाहिए कि उसने हिंसा को लेकर कार्रवाई करने में इतना विलम्ब क्यों किया। असम विधानसभा की 20 सदस्यीय सर्वदलीय टीम ने उपाध्यक्ष भीमानंद तांती के नेतृत्व में निचले असम के हिंसा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और लोगों तथा विभिन्न स्थानीय नेताओं से मुलाकात की। उधर, माकपा पोलित ब्यूरो ने दिल्ली में जारी एक बयान में आरोप लगाया कि असम सरकार हिंसा को रोकने के लिए समय पर कार्रवाई करने में पूरी तरह विफल रही। पार्टी ने कहा कि विभिन्न समुदायों के बीच अविश्वास और तनाव के शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज किया गया। केंद्र सरकार को इस बात का जवाब देना चाहिए कि उसने हिंसा को लेकर कार्रवाई करने में इतना विलम्ब क्यों किया। पार्टी ने कहा कि विभिन्न समुदायों के बीच अविश्वास और तनाव के शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज किया गया। केंद्र सरकार को इस बात का जवाब देना चाहिए कि उसने हिंसा को लेकर कार्रवाई करने में इतना विलम्ब क्यों किया।
संक्षिप्त सारांश: हिंसा में 41 लोगों के मारे जाने की खबर के बाद असम के कई इलाकों में देखते ही गोली मारने के आदेश दिए गए हैं।
23
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: मध्य प्रदेश के संजय जगदाले सोमवार को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के 82वीं महासभा की बैठक में सचिव का पदभार सम्भालेंगे। जगदाले नारायणस्वामी श्रीनिवासन की जगह लेंगे। श्रीनिवासन शशांक मनोहर की जगह बीसीसीआई के अध्यक्ष का पद सम्भालेंगे। जगदाले इससे पहले बीसीसीआई के संयुक्त सचिव थे। सचिव पद के लिए सिर्फ जगदाले ने नामांकन भरा था। उड़ीसा के रंजीव बिस्वाल भी सचिव पद के लिए नामांकन करने को उत्सुक थे लेकिन उनकी उम्मीदवारी का पूर्वी भारत के कुछ प्रतिनिधियों ने विरोध किया था। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के युवा नेता व हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर नए संयुक्त सचिव होंगे जबकि कोषाध्यक्ष के पद पर पुणे के व्यवसायी अजय शिर्के विराजमान होंगे। बीसीसीआई की ओर से रविवार दोपहर इन शीर्ष पदों के लिए नामांकन करने वालों के नामों की घोषणा की गई। सभी नामांकान करने वालों का सोमवार को निर्विरोध चुना जाना तय है क्योंकि उनके विरोध में कोई उम्मीदवार नहीं है। महासभा की बैठक में इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के वर्तमान कमिश्नर चिरायु अमीन की जगह केंद्रीय संसदीय मामलों के राज्यमंत्री राजीव शुक्ला को नया कमिश्नर बनाए जाने की उम्मीद है। राष्ट्रीय चयन समिति में भी कुछ बदलाव हो सकते हैं। श्रीनिवासन चूंकि कृष्णामाचारी श्रीकांत को चयन समिति का अध्यक्ष बनाए रखने पर अड़े हुए हैं इसलिए उम्मीद की जा रही है कि समिति में उत्तर व पश्चिम क्षेत्र के प्रतिनिधियों में बदलाव हो सकता है। उत्तर के प्रतिनिधि यशपाल शर्मा का कार्यकाल पूरा हो चुका है इसलिए पूर्व सलामी बल्लेबाज विक्रम राठौर की उनकी जगह ले सकते हैं। वह पंजाब से हैं। हालांकि दिल्ली की कोशिश पूर्व अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी संजीव शर्मा को चयन समिति में शामिल कराने की है। निम्नलिखित उम्मीदवारों ने निम्न पदों के लिए अपना नामांकन किया है। सचिव : संजय जगदाले संयुक्त सचिव : अनुराग ठाकुर कोषाध्यक्ष : अजय शिर्के उपाध्यक्ष उत्तर क्षेत्र : अरुण जेटली दक्षिण क्षेत्र : शिवलाल यादव पूर्वी क्षेत्र : चित्रक मित्रा पश्चिम क्षेत्र : निरंजन शाह मध्य क्षेत्र : सुधीर डाबीर
संक्षिप्त सारांश: मध्य प्रदेश के संजय जगदाले सोमवार को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के 82वीं महासभा की बैठक में सचिव का पदभार सम्भालेंगे।
23
['hin']
एक सारांश बनाओ: सुपरमॉडल मिरांडा केर का कहना है कि वह अपने पति अभिनेता ऑरलैण्डो ब्लूम को संतुष्ट व प्रसन्न रखने और अपने वैवाहिक जीवन में खुशियों को लम्बे समय तक बनाए रखने के लिए अपनी दादी के बताए तौर-तरीकों का इस्तेमाल करती हैं।टिप्पणियां यूएस मैगज़ीन के मुताबिक, 29-वर्षीय ऑस्ट्रेलियाई मॉडल मिरांडा केर ने कहा, "मेरी दादी ने पुरुषों को अच्छी लगने वाली चीज़ों के बारे में मुझे बताया था और कहा था कि इन्हें कभी नहीं भूलना। उन्होंने बताया था कि रोज़ाना थोड़ा-सा मेकअप करना, अच्छी दिखना, और कुछ अच्छे अंडरगार्मेन्ट पहनना, और इस तरह आप अपने पति को हमेशा खुश रख सकोगी।" वर्ष 2007 में विक्टोरिया'ज़ सीक्रेट एन्जेल के रूप में प्रसिद्धि पाने वाली मिरांडा केर ने जुलाई, 2010 में 'किंगडम ऑफ हेवन' तथा 'लॉर्ड ऑफ द रिंग्स' के अभिनेता ऑरलैण्डो ब्लूम से शादी की थी। यूएस मैगज़ीन के मुताबिक, 29-वर्षीय ऑस्ट्रेलियाई मॉडल मिरांडा केर ने कहा, "मेरी दादी ने पुरुषों को अच्छी लगने वाली चीज़ों के बारे में मुझे बताया था और कहा था कि इन्हें कभी नहीं भूलना। उन्होंने बताया था कि रोज़ाना थोड़ा-सा मेकअप करना, अच्छी दिखना, और कुछ अच्छे अंडरगार्मेन्ट पहनना, और इस तरह आप अपने पति को हमेशा खुश रख सकोगी।" वर्ष 2007 में विक्टोरिया'ज़ सीक्रेट एन्जेल के रूप में प्रसिद्धि पाने वाली मिरांडा केर ने जुलाई, 2010 में 'किंगडम ऑफ हेवन' तथा 'लॉर्ड ऑफ द रिंग्स' के अभिनेता ऑरलैण्डो ब्लूम से शादी की थी। वर्ष 2007 में विक्टोरिया'ज़ सीक्रेट एन्जेल के रूप में प्रसिद्धि पाने वाली मिरांडा केर ने जुलाई, 2010 में 'किंगडम ऑफ हेवन' तथा 'लॉर्ड ऑफ द रिंग्स' के अभिनेता ऑरलैण्डो ब्लूम से शादी की थी।
सारांश: सुपरमॉडल मिरांडा केर का कहना है कि वह अपने पति अभिनेता ऑरलैण्डो ब्लूम को संतुष्ट व प्रसन्न रखने के लिए अपनी दादी के बताए तौर-तरीकों का इस्तेमाल करती हैं।
5
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा (Taarak Mehta Ka Ooltah Chashmah)' में नया धमाल होने के लिए तैयार है. बताया जा रहा है कि जल्द ही शो में जेठालाल की पत्नी दयाबेन की एंट्री होने वाली है. 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा (Taarak Mehta Ka Ooltah Chashmah)' के मेकर्स ने यह भी तय ह कर लिया है कि दयाबेन की एंट्री कैसे होगी और खास बात यह है कि दयाबेन का किरदार दिशा वकानी (Disha Vakani) ही निभाएंगी. गोकुलधाम सोसाइटी (Gokuldham Society) में एक बार फिर से दयाबेन के ठहाके गूंजने वाले हैं और उनकी एंट्री की बहुत ही जोर-शोर से तैयारियां भी की गई हैं. इस तरह फैन्स का दयाबेन को लेकर लंबे समय से चला आ रहा इंतजार अब जल्द ही खत्म होने वाला है.  बॉलीवुड लाइफ डॉट कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक, दिशा वकानी की 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा (Taarak Mehta Ka Ooltah Chashmah)' में धमाकेदार एंट्री होगी. इन दिनों शो में नवरात्रि का जश्न चल रहा है और हर कोई दयाबेन को मिस भी कर रहा है, क्योंकि उनके जैसा गरबा तो कोई कर ही नहीं सकता. जेठालाल भी उन्हें मिस कर रहे हैं और वह देवी मां के आगे कसम खाते हैं कि वे तभी गरबा खेलेंगे जब तक दयाबेन नहीं आएंगी और उनके साथ गरबा नहीं खेलेंगी. बताया जा रहा है कि दयाबेन की वापसी के लिए इसे बेहतरीन मौका माना जा रहा है.  'तारक मेहता का उल्टा चश्मा (Taarak Mehta Ka Ooltah Chashmah)' की दयाबेन को लेकर यह भी कयास लगाए जा रहे थे कि दिशा वकानी को रिप्लेस किया जा सकता है. लेकिन शो के प्रोड्यूसर असित कुमार मोदी इन कयासों पर विराम लगा चुके हैं. बॉलीवुडलाइफ से बातचीत में दिलीप जोशी उर्फ जेठालाल ने बताया कि दिशा ने साढ़े नौ साल तक बेहतरीन काम किया है. जाहिर है ऐसे में कोई भी एक्ट्रेस उनको रिप्लेस नहीं कर सकती है. दिशा वकानी ने 2015 में मयूर पांड्या के साथ शादी की थी. उसके बाद से ही वे शो में नजर नहीं आ रही हैं.
यहाँ एक सारांश है:तारक मेहता...को लेकर आई बड़ी खबर जेठालाल ने खाई है ऐसी कसम हो सकती हैं दयाबेन की एंट्री
18
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: बॉलीवुड अभिनेता बोमन ईरानी ने फिल्म निर्देशक राजुकमार हीरानी की हर फिल्म में काम किया है और उनका कहना है कि वह उनकी फिल्म के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं।टिप्पणियां बोमन ने ट्विटर पर लिखा, "मैं राजू हीरानी की फिल्म 'पी.के.' में काम कर रहा हूं। इस फिल्म में मैं कुछ भी करने को तैयार हूं। चाहे वो अभिनय हो, सहायक, स्पॉट ब्यॉव, या खाना परोसने का काम हो।" 53 वर्षीय बोमन इससे पहले हीरानी की फिल्म 'मुन्ना भाई एम.बी.बी.एस', 'लगे रहो मुन्ना भाई' और 'थ्री इडियट्स' में दिख चुके हैं। बोमन ने ट्विटर पर लिखा, "मैं राजू हीरानी की फिल्म 'पी.के.' में काम कर रहा हूं। इस फिल्म में मैं कुछ भी करने को तैयार हूं। चाहे वो अभिनय हो, सहायक, स्पॉट ब्यॉव, या खाना परोसने का काम हो।" 53 वर्षीय बोमन इससे पहले हीरानी की फिल्म 'मुन्ना भाई एम.बी.बी.एस', 'लगे रहो मुन्ना भाई' और 'थ्री इडियट्स' में दिख चुके हैं। 53 वर्षीय बोमन इससे पहले हीरानी की फिल्म 'मुन्ना भाई एम.बी.बी.एस', 'लगे रहो मुन्ना भाई' और 'थ्री इडियट्स' में दिख चुके हैं।
संक्षिप्त पाठ: बॉलीवुड अभिनेता बोमन ईरानी ने फिल्म निर्देशक राजुकमार हीरानी की हर फिल्म में काम किया है और उनका कहना है कि वह उनकी फिल्म के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं।
14
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने बाबा रामदेव से आग्रह किया कि बिगड़ते स्वास्थ्य को देखते हुए वह अपना अनशन समाप्त कर दें। भागवत ने कहा, मैं बाबा रामदेव से प्रार्थना करता हूं कि वह अपना अनशन शीघ्र समाप्त करके राष्ट्र के पुनरूद्धार आंदोलन में सक्रिय हो जाएं। मेरी यह अपील देश के लाखों लोगों की भावना के अनुरूप है। मुझे आशा है कि बाबा निश्चित तौर पर उनकी भावनाओं के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया देंगे। उन्होंने कहा कि रामदेव के बिगड़ते स्वास्थ्य और उन्हें अस्पताल में भर्ती किए जाने की खबरों से पूरा देश चिंतित है। संघ प्रमुख ने कहा कि भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ सतत अभियान चलाने और इस बारे में लाखों लोगों को जागरूक बनाने के लिए देश उनका आभारी है। अपील में उन्होंने कहा, भ्रष्टाचार के विरूद्ध शुरू युद्ध में देश को रामदेव के सक्रिय नेतृत्व की आवश्यकता है और इसलिए उन्हें अपना अनशन समाप्त कर देना चाहिए।
यह एक सारांश है: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने बाबा रामदेव से आग्रह किया कि बिगड़ते स्वास्थ्य को देखते हुए वह अपना अनशन समाप्त कर दें।
2
['hin']
एक सारांश बनाओ: रिलायंस कम्यूनिकेशंस ने आज कहा कि उसने जीएसएम और सीडीएमए प्री-पेड दोनों किस्म के ग्राहकों के लिए मोबाइल कॉल दरें 30 फीसदी तक बढ़ा दी हैं ताकि मुनाफा बढ़ाया जा सके।टिप्पणियां आरकॉम के मुख्य कार्यकारी (वायरलेस कारोबार) गुरदीप सिंह ने एक बयान में कहा, हमने पूरे देश में सभी तय योजनाओं में संशोधन किए हैं और कॉल दरें 20 से 30 फीसदी बढ़ा दी गई हैं। नए शुल्क तुरंत प्रभावी हो गए हैं। इस पहल का उद्देश्य है प्रति मिनट आय और मुनाफा बढ़ाना है। सिंह ने कहा, भारतीय दूरसंचार उद्योग अब पुनर्गठन के दौर की ओर बढ़ रहा है। यहां अब छोटी कंपनियां अपना कारोबार या तो बंद कर रही हैं या सीमित कर रही हैं। इससे अत्यधिक प्रतिस्पर्धात्मकता का दबाव कम हो रहा है। आरकॉम के मुख्य कार्यकारी (वायरलेस कारोबार) गुरदीप सिंह ने एक बयान में कहा, हमने पूरे देश में सभी तय योजनाओं में संशोधन किए हैं और कॉल दरें 20 से 30 फीसदी बढ़ा दी गई हैं। नए शुल्क तुरंत प्रभावी हो गए हैं। इस पहल का उद्देश्य है प्रति मिनट आय और मुनाफा बढ़ाना है। सिंह ने कहा, भारतीय दूरसंचार उद्योग अब पुनर्गठन के दौर की ओर बढ़ रहा है। यहां अब छोटी कंपनियां अपना कारोबार या तो बंद कर रही हैं या सीमित कर रही हैं। इससे अत्यधिक प्रतिस्पर्धात्मकता का दबाव कम हो रहा है। सिंह ने कहा, भारतीय दूरसंचार उद्योग अब पुनर्गठन के दौर की ओर बढ़ रहा है। यहां अब छोटी कंपनियां अपना कारोबार या तो बंद कर रही हैं या सीमित कर रही हैं। इससे अत्यधिक प्रतिस्पर्धात्मकता का दबाव कम हो रहा है।
रिलायंस कम्यूनिकेशंस ने आज कहा कि उसने जीएसएम और सीडीएमए प्री-पेड दोनों किस्म के ग्राहकों के लिए मोबाइल कॉल दरें 30 फीसदी तक बढ़ा दी हैं ताकि मुनाफा बढ़ाया जा सके।
26
['hin']
एक सारांश बनाओ: चारा घोटाले के मामले में सुप्रीम कोर्ट से आज लालू प्रसाद यादव को झटका लगा है. कोर्ट ने लालू के खिलाफ आपराधिक साजिश का केस चलाने की इजाजत दे दी है. पिछले कुछ दिनों से लालू यादव के कथित घोटाले उजागर करने वाले सुशील मोदी ने एनडीटीवी से खास बातचीत की. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार दरअसल मुकदमों में फंसे 'कमजोर' लालू का साथ पसंद करेंगे. लालू कमजोर रहेंगे तो नीतीश के लिए सरकार चलाना आसान होगा. लालू के कमजोर होने पर सरकार में हस्तक्षेप कम हो जाएगा. लालू के बेटे घुटने टेककर नीतीश के सामने रहेंगे. नीतीश बीजेपी के साथ अच्छे थे आरजेडी के साथ नहीं? इस सवाल के जवाब पर सुशील मोदी ने कहा कि यह तो जनता और खुद नीतीश कुमार दोनों ही जानते हैं. बीजेपी के साथ उनके जीवन का स्वर्णिम समय था. गठबंधन टूटने के बाद बिहार की क्या दुर्दशा हो रही है यह सब जानते हैं. लालू यादव कई घोटालों और शहाबुद्दीन से बातचीत का टेप सामने आने को लेकर फंसे हैं. नीतीश यह अच्छी तरह जानते हैं कि लालू अब दबे रहेंगे.यह उनके लिए फायदेमंद है. अगर नीतीश कुमार लालू यादव का साथ छोड़ देंगे तो क्या बीजेपी समर्थन देगी? इस सवाल के जवाब में सुशील मोदी ने कहा कि लालू का साथ नीतीश कभी नहीं छोड़ेंगे. लालू अपने मुकदमों में फंसे रहेंगे और नीतीश को कमजोर अलायंस चाहिए. उन्हें मजबूत पार्टनर नहीं चाहिए. आरजेडी से कमजोर पार्टनर उन्हें नहीं मिल सकता.  आप आरजेडी को कमजोर कह रहे हैं, लेकिन आप भी लालू को ही निशाना बनाते दिख रहे हैं, नीतीश या जेडीयू को नहीं... इस सवाल के जवाब में सुशील मोदी ने कहा कि  ऐसा नहीं है. हम नीतीश के सुशासन और विकास की पोल हर रोज खोलते हैं. टिप्पणियां क्या लालू यादव पर घोटाले के आरोपों से जुड़े सभी दस्तावजे सरकार से ही आ रहे हैं? इस पर सुशील मोदी बोले कि ऐसा नहीं है कि सारे दस्तावेज वहीं से आ रहे हैं, हां कुछ दस्तावेज सरकार के अंदर से आ रहे हैं.    नीतीश बीजेपी के साथ अच्छे थे आरजेडी के साथ नहीं? इस सवाल के जवाब पर सुशील मोदी ने कहा कि यह तो जनता और खुद नीतीश कुमार दोनों ही जानते हैं. बीजेपी के साथ उनके जीवन का स्वर्णिम समय था. गठबंधन टूटने के बाद बिहार की क्या दुर्दशा हो रही है यह सब जानते हैं. लालू यादव कई घोटालों और शहाबुद्दीन से बातचीत का टेप सामने आने को लेकर फंसे हैं. नीतीश यह अच्छी तरह जानते हैं कि लालू अब दबे रहेंगे.यह उनके लिए फायदेमंद है. अगर नीतीश कुमार लालू यादव का साथ छोड़ देंगे तो क्या बीजेपी समर्थन देगी? इस सवाल के जवाब में सुशील मोदी ने कहा कि लालू का साथ नीतीश कभी नहीं छोड़ेंगे. लालू अपने मुकदमों में फंसे रहेंगे और नीतीश को कमजोर अलायंस चाहिए. उन्हें मजबूत पार्टनर नहीं चाहिए. आरजेडी से कमजोर पार्टनर उन्हें नहीं मिल सकता.  आप आरजेडी को कमजोर कह रहे हैं, लेकिन आप भी लालू को ही निशाना बनाते दिख रहे हैं, नीतीश या जेडीयू को नहीं... इस सवाल के जवाब में सुशील मोदी ने कहा कि  ऐसा नहीं है. हम नीतीश के सुशासन और विकास की पोल हर रोज खोलते हैं. टिप्पणियां क्या लालू यादव पर घोटाले के आरोपों से जुड़े सभी दस्तावजे सरकार से ही आ रहे हैं? इस पर सुशील मोदी बोले कि ऐसा नहीं है कि सारे दस्तावेज वहीं से आ रहे हैं, हां कुछ दस्तावेज सरकार के अंदर से आ रहे हैं.    अगर नीतीश कुमार लालू यादव का साथ छोड़ देंगे तो क्या बीजेपी समर्थन देगी? इस सवाल के जवाब में सुशील मोदी ने कहा कि लालू का साथ नीतीश कभी नहीं छोड़ेंगे. लालू अपने मुकदमों में फंसे रहेंगे और नीतीश को कमजोर अलायंस चाहिए. उन्हें मजबूत पार्टनर नहीं चाहिए. आरजेडी से कमजोर पार्टनर उन्हें नहीं मिल सकता.  आप आरजेडी को कमजोर कह रहे हैं, लेकिन आप भी लालू को ही निशाना बनाते दिख रहे हैं, नीतीश या जेडीयू को नहीं... इस सवाल के जवाब में सुशील मोदी ने कहा कि  ऐसा नहीं है. हम नीतीश के सुशासन और विकास की पोल हर रोज खोलते हैं. टिप्पणियां क्या लालू यादव पर घोटाले के आरोपों से जुड़े सभी दस्तावजे सरकार से ही आ रहे हैं? इस पर सुशील मोदी बोले कि ऐसा नहीं है कि सारे दस्तावेज वहीं से आ रहे हैं, हां कुछ दस्तावेज सरकार के अंदर से आ रहे हैं.    आप आरजेडी को कमजोर कह रहे हैं, लेकिन आप भी लालू को ही निशाना बनाते दिख रहे हैं, नीतीश या जेडीयू को नहीं... इस सवाल के जवाब में सुशील मोदी ने कहा कि  ऐसा नहीं है. हम नीतीश के सुशासन और विकास की पोल हर रोज खोलते हैं. टिप्पणियां क्या लालू यादव पर घोटाले के आरोपों से जुड़े सभी दस्तावजे सरकार से ही आ रहे हैं? इस पर सुशील मोदी बोले कि ऐसा नहीं है कि सारे दस्तावेज वहीं से आ रहे हैं, हां कुछ दस्तावेज सरकार के अंदर से आ रहे हैं.    क्या लालू यादव पर घोटाले के आरोपों से जुड़े सभी दस्तावजे सरकार से ही आ रहे हैं? इस पर सुशील मोदी बोले कि ऐसा नहीं है कि सारे दस्तावेज वहीं से आ रहे हैं, हां कुछ दस्तावेज सरकार के अंदर से आ रहे हैं.
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: मुकदमों में फंसे 'कमजोर' लालू का साथ पसंद करेंगे इससे नीतीश को सरकार चलाने में आसानी नीतीश जानते हैं लालू दबे रहेंगे
32
['hin']
एक सारांश बनाओ: उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) ने अफगानिस्तान के पूर्वी पकतिया प्रांत में हक्कानी नेटवर्क के एक बड़े नेता इस्माइल जान को मार गिराने का दावा किया है। उसकी मौत की फिलहाल स्वतंत्र सूत्रों से पुष्टि नहीं हो सकी है। इस्माइल पर काबुल स्थित इंटरकांटिनेंटल होटल पर हाल के आतंकवादी हमले में संलिप्तता का आरोप था। 'बीबीसी' के अनुसार, नाटो ने इस्माइल को मार गिराने का दावा किया है। बताया जाता है कि वह इस संगठन का सक्रिय नेता था, जिसके सम्बंध तालिबान और अल-कायदा से थे। उसके खिलाफ काबुल स्थित इंटरकांटिनेंटल होटल पर आतंकवादी हमले में संलिप्तता का आरोप था। नाटो और अफगान खुफिया एजेंसियों का दावा है कि हक्कानी नेटवर्क के सदस्यों ने होटल पर हमले में हमलावरों की मदद की, जिसमें कम से कम 20 लोग मारे गए। तालिबान ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी। लेकिन नाटो का कहना है कि यह हमला हक्कानी नेटवर्क के साथ मिलकर किया गया।
यहाँ एक सारांश है:नाटो ने अफगानिस्तान के पूर्वी पकतिया प्रांत में हक्कानी नेटवर्क के एक बड़े नेता इस्माइल जान को मार गिराने का दावा किया है।
15
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी पार्टी के वरिष्‍ठ नेताओं से कहा कि राष्ट्रवाद हमारी पहचान है और उनको राष्‍ट्रवाद के संदेश और एजेंडे पर फोकस करना चाहिए क्‍योंकि दो साल पहले उनकी रिकॉर्ड जीत में यह प्रमुख कारण रहा है. पीएम मोदी ने बीजेपी कोर ग्रुप से यह भी कहा कि पार्टी को इस धारणा और आरोपों के खिलाफ भी डटकर मुकाबला करना चाहिए कि यह समाज के कमजोर और वंचित तबकों की सुरक्षा प्रदान करने और उनके हक की लड़ाई लड़ने में नाकाम रही है. पीएम ने अपनी टीम से कहा, ''80 प्रतिशत पार्टी के सदस्‍य एससी/एसटी और ओबीसी कैटेगरी से ताल्‍लुक रखते हैं. ऐसे में ये भ्रामक धारणाएं सफल नहीं होनी चाहिए.'' इसके साथ ही पीएम मोदी ने कहा, ''गरीबों का कल्याण ही हमारा उद्देश्य होना चाहिए. दीनदयाल जी ने इसी उद्देश्य के लिए अंत्योदय सामने रख जनसंघ की स्थापना की थी. चुनाव तो हमें जीतने ही हैं मगर गरीबों के कल्याण के हमारे मूल उद्देश्य को भी पूरा करना है.'' इसके साथ ही उन्‍होंने जोड़ा कि चुनाव जीतना राष्ट्रीय कर्तव्य है क्योंकि करीब तीस साल के लंबे समय तक अनिश्तितता वाली सरकारें रहीं. भ्रष्टाचार, कुशासन का बोलबाला रहा. इसलिए लंबे समय तक भारत के उत्थान और गरीबों के कल्याण के लिए 30-35 साल संघर्ष करना है. कई प्रकल्प चलाए गए हैं इसलिए सभी प्रकल्पों को पूरा करने के लिए देश हित में चुनाव जीतना राष्ट्रीय कर्तव्य है. उल्‍लेखनीय है कि हाल में दलितों पर अत्‍याचार की कई घटनाओं के बाद विपक्ष ये आरोप लगा रहा है कि बीजेपी समाज के सबसे कमजोर, वंचित तबकों के बुनियादी अधिकारों की सुरक्षा करने में विफल रही है.टिप्पणियां जुलाई की शुरुआत में बीजेपी शासित गुजरात के उना कस्‍बे में चार दलित युवकों के कपड़े उतारकर कार से बांधा गया और उनकी पिटाई की गई. दरअसल गौरक्षकों ने उनको कथित रूप से गो-हत्‍या का जिम्‍मेदार माना था. बाद में यह सूचना गलत साबित हुई. कुछ सप्‍ताह पहले पीएम ने इस तरह की हिंसा करने वालों को चेतावनी दी थी. इसी जनवरी में हैदराबाद यूनिवर्सिटी के दलित छात्र रोहित वेमुला ने आत्‍महत्‍या कर ली थी. उससे पहले उन्‍होंने आरोप लगाया था कि जातिगत आधार पर अधिकारियों द्वारा उनका उत्‍पीड़न किया जा रहा था. पीएम मोदी ने बीजेपी कोर ग्रुप से यह भी कहा कि पार्टी को इस धारणा और आरोपों के खिलाफ भी डटकर मुकाबला करना चाहिए कि यह समाज के कमजोर और वंचित तबकों की सुरक्षा प्रदान करने और उनके हक की लड़ाई लड़ने में नाकाम रही है. पीएम ने अपनी टीम से कहा, ''80 प्रतिशत पार्टी के सदस्‍य एससी/एसटी और ओबीसी कैटेगरी से ताल्‍लुक रखते हैं. ऐसे में ये भ्रामक धारणाएं सफल नहीं होनी चाहिए.'' इसके साथ ही पीएम मोदी ने कहा, ''गरीबों का कल्याण ही हमारा उद्देश्य होना चाहिए. दीनदयाल जी ने इसी उद्देश्य के लिए अंत्योदय सामने रख जनसंघ की स्थापना की थी. चुनाव तो हमें जीतने ही हैं मगर गरीबों के कल्याण के हमारे मूल उद्देश्य को भी पूरा करना है.'' इसके साथ ही उन्‍होंने जोड़ा कि चुनाव जीतना राष्ट्रीय कर्तव्य है क्योंकि करीब तीस साल के लंबे समय तक अनिश्तितता वाली सरकारें रहीं. भ्रष्टाचार, कुशासन का बोलबाला रहा. इसलिए लंबे समय तक भारत के उत्थान और गरीबों के कल्याण के लिए 30-35 साल संघर्ष करना है. कई प्रकल्प चलाए गए हैं इसलिए सभी प्रकल्पों को पूरा करने के लिए देश हित में चुनाव जीतना राष्ट्रीय कर्तव्य है. उल्‍लेखनीय है कि हाल में दलितों पर अत्‍याचार की कई घटनाओं के बाद विपक्ष ये आरोप लगा रहा है कि बीजेपी समाज के सबसे कमजोर, वंचित तबकों के बुनियादी अधिकारों की सुरक्षा करने में विफल रही है.टिप्पणियां जुलाई की शुरुआत में बीजेपी शासित गुजरात के उना कस्‍बे में चार दलित युवकों के कपड़े उतारकर कार से बांधा गया और उनकी पिटाई की गई. दरअसल गौरक्षकों ने उनको कथित रूप से गो-हत्‍या का जिम्‍मेदार माना था. बाद में यह सूचना गलत साबित हुई. कुछ सप्‍ताह पहले पीएम ने इस तरह की हिंसा करने वालों को चेतावनी दी थी. इसी जनवरी में हैदराबाद यूनिवर्सिटी के दलित छात्र रोहित वेमुला ने आत्‍महत्‍या कर ली थी. उससे पहले उन्‍होंने आरोप लगाया था कि जातिगत आधार पर अधिकारियों द्वारा उनका उत्‍पीड़न किया जा रहा था. इसके साथ ही पीएम मोदी ने कहा, ''गरीबों का कल्याण ही हमारा उद्देश्य होना चाहिए. दीनदयाल जी ने इसी उद्देश्य के लिए अंत्योदय सामने रख जनसंघ की स्थापना की थी. चुनाव तो हमें जीतने ही हैं मगर गरीबों के कल्याण के हमारे मूल उद्देश्य को भी पूरा करना है.'' इसके साथ ही उन्‍होंने जोड़ा कि चुनाव जीतना राष्ट्रीय कर्तव्य है क्योंकि करीब तीस साल के लंबे समय तक अनिश्तितता वाली सरकारें रहीं. भ्रष्टाचार, कुशासन का बोलबाला रहा. इसलिए लंबे समय तक भारत के उत्थान और गरीबों के कल्याण के लिए 30-35 साल संघर्ष करना है. कई प्रकल्प चलाए गए हैं इसलिए सभी प्रकल्पों को पूरा करने के लिए देश हित में चुनाव जीतना राष्ट्रीय कर्तव्य है. उल्‍लेखनीय है कि हाल में दलितों पर अत्‍याचार की कई घटनाओं के बाद विपक्ष ये आरोप लगा रहा है कि बीजेपी समाज के सबसे कमजोर, वंचित तबकों के बुनियादी अधिकारों की सुरक्षा करने में विफल रही है.टिप्पणियां जुलाई की शुरुआत में बीजेपी शासित गुजरात के उना कस्‍बे में चार दलित युवकों के कपड़े उतारकर कार से बांधा गया और उनकी पिटाई की गई. दरअसल गौरक्षकों ने उनको कथित रूप से गो-हत्‍या का जिम्‍मेदार माना था. बाद में यह सूचना गलत साबित हुई. कुछ सप्‍ताह पहले पीएम ने इस तरह की हिंसा करने वालों को चेतावनी दी थी. इसी जनवरी में हैदराबाद यूनिवर्सिटी के दलित छात्र रोहित वेमुला ने आत्‍महत्‍या कर ली थी. उससे पहले उन्‍होंने आरोप लगाया था कि जातिगत आधार पर अधिकारियों द्वारा उनका उत्‍पीड़न किया जा रहा था. इसके साथ ही उन्‍होंने जोड़ा कि चुनाव जीतना राष्ट्रीय कर्तव्य है क्योंकि करीब तीस साल के लंबे समय तक अनिश्तितता वाली सरकारें रहीं. भ्रष्टाचार, कुशासन का बोलबाला रहा. इसलिए लंबे समय तक भारत के उत्थान और गरीबों के कल्याण के लिए 30-35 साल संघर्ष करना है. कई प्रकल्प चलाए गए हैं इसलिए सभी प्रकल्पों को पूरा करने के लिए देश हित में चुनाव जीतना राष्ट्रीय कर्तव्य है. उल्‍लेखनीय है कि हाल में दलितों पर अत्‍याचार की कई घटनाओं के बाद विपक्ष ये आरोप लगा रहा है कि बीजेपी समाज के सबसे कमजोर, वंचित तबकों के बुनियादी अधिकारों की सुरक्षा करने में विफल रही है.टिप्पणियां जुलाई की शुरुआत में बीजेपी शासित गुजरात के उना कस्‍बे में चार दलित युवकों के कपड़े उतारकर कार से बांधा गया और उनकी पिटाई की गई. दरअसल गौरक्षकों ने उनको कथित रूप से गो-हत्‍या का जिम्‍मेदार माना था. बाद में यह सूचना गलत साबित हुई. कुछ सप्‍ताह पहले पीएम ने इस तरह की हिंसा करने वालों को चेतावनी दी थी. इसी जनवरी में हैदराबाद यूनिवर्सिटी के दलित छात्र रोहित वेमुला ने आत्‍महत्‍या कर ली थी. उससे पहले उन्‍होंने आरोप लगाया था कि जातिगत आधार पर अधिकारियों द्वारा उनका उत्‍पीड़न किया जा रहा था. उल्‍लेखनीय है कि हाल में दलितों पर अत्‍याचार की कई घटनाओं के बाद विपक्ष ये आरोप लगा रहा है कि बीजेपी समाज के सबसे कमजोर, वंचित तबकों के बुनियादी अधिकारों की सुरक्षा करने में विफल रही है.टिप्पणियां जुलाई की शुरुआत में बीजेपी शासित गुजरात के उना कस्‍बे में चार दलित युवकों के कपड़े उतारकर कार से बांधा गया और उनकी पिटाई की गई. दरअसल गौरक्षकों ने उनको कथित रूप से गो-हत्‍या का जिम्‍मेदार माना था. बाद में यह सूचना गलत साबित हुई. कुछ सप्‍ताह पहले पीएम ने इस तरह की हिंसा करने वालों को चेतावनी दी थी. इसी जनवरी में हैदराबाद यूनिवर्सिटी के दलित छात्र रोहित वेमुला ने आत्‍महत्‍या कर ली थी. उससे पहले उन्‍होंने आरोप लगाया था कि जातिगत आधार पर अधिकारियों द्वारा उनका उत्‍पीड़न किया जा रहा था. जुलाई की शुरुआत में बीजेपी शासित गुजरात के उना कस्‍बे में चार दलित युवकों के कपड़े उतारकर कार से बांधा गया और उनकी पिटाई की गई. दरअसल गौरक्षकों ने उनको कथित रूप से गो-हत्‍या का जिम्‍मेदार माना था. बाद में यह सूचना गलत साबित हुई. कुछ सप्‍ताह पहले पीएम ने इस तरह की हिंसा करने वालों को चेतावनी दी थी. इसी जनवरी में हैदराबाद यूनिवर्सिटी के दलित छात्र रोहित वेमुला ने आत्‍महत्‍या कर ली थी. उससे पहले उन्‍होंने आरोप लगाया था कि जातिगत आधार पर अधिकारियों द्वारा उनका उत्‍पीड़न किया जा रहा था. इसी जनवरी में हैदराबाद यूनिवर्सिटी के दलित छात्र रोहित वेमुला ने आत्‍महत्‍या कर ली थी. उससे पहले उन्‍होंने आरोप लगाया था कि जातिगत आधार पर अधिकारियों द्वारा उनका उत्‍पीड़न किया जा रहा था.
यहाँ एक सारांश है:बीजेपी कोर ग्रुप से अपने एजेंडे पर फोकस करने को कहा विपक्ष के आरोपों के खिलाफ डटकर मुकाबला करने को कहा हाल में दलितों पर अत्‍याचार की कई घटनाएं हुईं
17
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: हरियाणा में जिस वक्त माही को 70 फीट गहरे बोरवेल से निकाला जा रहा था लगभग उसी समय पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में एक किशोर 30 फीट गहरे कुएं में गिर गया। एक मंत्री ने बताया कि बचाव अभियान शुरू हो गया है।टिप्पणियां एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि पेशे से श्रमिक रोशन (17 वर्ष) लगभग चार बजे एकसारा इलाके में पानी निकालने के दौरान कुएं में गिर गया। आपदा प्रबंधन, अग्निशमन एवं आपातकालीन मंत्री जावेद खान ने कहा, "अग्निशमन कर्मी किशोर को बचाने के सभी प्रयास कर रहे हैं। आपदा प्रबंधन कर्मियों को भी बुलाया गया है।" एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि पेशे से श्रमिक रोशन (17 वर्ष) लगभग चार बजे एकसारा इलाके में पानी निकालने के दौरान कुएं में गिर गया। आपदा प्रबंधन, अग्निशमन एवं आपातकालीन मंत्री जावेद खान ने कहा, "अग्निशमन कर्मी किशोर को बचाने के सभी प्रयास कर रहे हैं। आपदा प्रबंधन कर्मियों को भी बुलाया गया है।" आपदा प्रबंधन, अग्निशमन एवं आपातकालीन मंत्री जावेद खान ने कहा, "अग्निशमन कर्मी किशोर को बचाने के सभी प्रयास कर रहे हैं। आपदा प्रबंधन कर्मियों को भी बुलाया गया है।"
संक्षिप्त सारांश: हरियाणा में जिस वक्त माही को 70 फीट गहरे बोरवेल से निकाला जा रहा था लगभग उसी समय पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में एक किशोर 30 फीट गहरे कुएं में गिर गया। एक मंत्री ने बताया कि बचाव अभियान शुरू हो गया है।
29
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: सुकमा नक्‍सली हमले के दो हफ्ते बाद नक्सलवाद पर नकेल कसने के लिए केन्द्र सरकार सोमवार को दिल्ली में बड़ी बैठक करने जा रही है. केन्द्रीय गृहमंत्री की अगुवाई में होने वाली इस बैठक में इस बात पर चर्चा होगी कि कैसे माओवादियों से निपटा जाए और कैसे नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास की गति तेज की जाए. सुकमा में हुए नक्सली हमले में सीआरपीएफ के 25 जवानों की मौत के बाद केन्द्र सरकार हरकत में आ चुकी है. नक्सलियों के खिलाफ एक बार फिर से ठोस रणनीति बनाने के लिए दिल्ली में सोमवार को बैठक होगी. बैठक में नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ-साथ तमाम गृह मंत्री और आला अधिकारी मौजूद होंगे. इसमें नक्सलियों के खिलाफ बड़े अभियान को अंजाम देने की रणनीति को अंतिम रूप देने की कोशिश होगी. नक्सल प्रभावित 10 राज्यों के मुख्यमंत्री बैठक में हिस्सा लेंगे. इन राज्यों में आंध्रप्रदेश, बिहार, छतीसगढ़, झारखंड, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, ओडिशा, उत्तरप्रदेश, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल शामिल हैं. मुख्यमंत्रियों के अलावा कई केन्द्रीय मंत्री भी इस बैठक में मौजूद रहेंगे ताकि हालात का बेहतर तरीके से जायजा लिया सके. खासकर सुरक्षा, विकास और ढांचागत निमार्ण पर खासा जोर होगा. टिप्पणियां इसके अलावा नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यसचिव, प्रभावित राज्यों के पुलिस प्रमुख, अर्धसैनिक बलों और खुफिया विभाग के प्रमुख और नक्सलवाद से बुरी तरह प्रभावित करीब 35 जिलों के पुलिस अधीक्षकों को भी बुलाया गया है. खुफिया जानकारियों को बेहतर तरीके से साझा करना, मौजूदा नक्सल विरोधी अभियानों में तेजी लाना, समस्या की पहचान करना और विकास कार्यों में तेजी लाने जैसे मुद्दे एजेंडा में शामिल हैं. केन्द्र राज्यों को अपनी स्पेशल रिजर्व बटालियन बनाने और उन्हें ट्रेनिंग देने के साथ-साथ आधुनिक हथियारों जैसी तमाम सुविधायें देगी ताकि वो माओवादियों का डटकर सामना कर सकें. नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई में सुरक्षाबलों को पूरी छूट दिए जाने की उम्मीद है. साथ ही सभी नक्सल प्रभावित सारे राज्य एक रणनीति के तहत काम करेंगे और तब तक कार्रवाई जारी रहेगी जब तक नक्सलियों का अंत नहीं हो जाता. नक्सल प्रभावित 10 राज्यों के मुख्यमंत्री बैठक में हिस्सा लेंगे. इन राज्यों में आंध्रप्रदेश, बिहार, छतीसगढ़, झारखंड, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, ओडिशा, उत्तरप्रदेश, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल शामिल हैं. मुख्यमंत्रियों के अलावा कई केन्द्रीय मंत्री भी इस बैठक में मौजूद रहेंगे ताकि हालात का बेहतर तरीके से जायजा लिया सके. खासकर सुरक्षा, विकास और ढांचागत निमार्ण पर खासा जोर होगा. टिप्पणियां इसके अलावा नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यसचिव, प्रभावित राज्यों के पुलिस प्रमुख, अर्धसैनिक बलों और खुफिया विभाग के प्रमुख और नक्सलवाद से बुरी तरह प्रभावित करीब 35 जिलों के पुलिस अधीक्षकों को भी बुलाया गया है. खुफिया जानकारियों को बेहतर तरीके से साझा करना, मौजूदा नक्सल विरोधी अभियानों में तेजी लाना, समस्या की पहचान करना और विकास कार्यों में तेजी लाने जैसे मुद्दे एजेंडा में शामिल हैं. केन्द्र राज्यों को अपनी स्पेशल रिजर्व बटालियन बनाने और उन्हें ट्रेनिंग देने के साथ-साथ आधुनिक हथियारों जैसी तमाम सुविधायें देगी ताकि वो माओवादियों का डटकर सामना कर सकें. नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई में सुरक्षाबलों को पूरी छूट दिए जाने की उम्मीद है. साथ ही सभी नक्सल प्रभावित सारे राज्य एक रणनीति के तहत काम करेंगे और तब तक कार्रवाई जारी रहेगी जब तक नक्सलियों का अंत नहीं हो जाता. इसके अलावा नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यसचिव, प्रभावित राज्यों के पुलिस प्रमुख, अर्धसैनिक बलों और खुफिया विभाग के प्रमुख और नक्सलवाद से बुरी तरह प्रभावित करीब 35 जिलों के पुलिस अधीक्षकों को भी बुलाया गया है. खुफिया जानकारियों को बेहतर तरीके से साझा करना, मौजूदा नक्सल विरोधी अभियानों में तेजी लाना, समस्या की पहचान करना और विकास कार्यों में तेजी लाने जैसे मुद्दे एजेंडा में शामिल हैं. केन्द्र राज्यों को अपनी स्पेशल रिजर्व बटालियन बनाने और उन्हें ट्रेनिंग देने के साथ-साथ आधुनिक हथियारों जैसी तमाम सुविधायें देगी ताकि वो माओवादियों का डटकर सामना कर सकें. नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई में सुरक्षाबलों को पूरी छूट दिए जाने की उम्मीद है. साथ ही सभी नक्सल प्रभावित सारे राज्य एक रणनीति के तहत काम करेंगे और तब तक कार्रवाई जारी रहेगी जब तक नक्सलियों का अंत नहीं हो जाता. केन्द्र राज्यों को अपनी स्पेशल रिजर्व बटालियन बनाने और उन्हें ट्रेनिंग देने के साथ-साथ आधुनिक हथियारों जैसी तमाम सुविधायें देगी ताकि वो माओवादियों का डटकर सामना कर सकें. नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई में सुरक्षाबलों को पूरी छूट दिए जाने की उम्मीद है. साथ ही सभी नक्सल प्रभावित सारे राज्य एक रणनीति के तहत काम करेंगे और तब तक कार्रवाई जारी रहेगी जब तक नक्सलियों का अंत नहीं हो जाता.
सारांश: मुख्यमंत्रियों के अलावा कई केन्द्रीय मंत्री भी इस बैठक में मौजूद रहेंगे नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षाबलों को पूरी छूट दिए जाने की उम्मीद नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्री और गृहमंत्री भी रहेंगे मौजूद
31
['hin']
एक सारांश बनाओ: योजना आयोग की चली तो अब सरकार की ओर से दी जाने वाली प्राथमिक चिकित्सा सुविधाओं में प्राइवेट सेक्टर का बड़ा रोल हो जाएगा।टिप्पणियां 12वीं पंचवर्षीय योजना के तहत यह फैसला लिया गया है कि प्राथमिक सुविधाओं  में प्राइवेट सेक्टर का रोल बढ़ाया जाए। यानी गरीबो को दी जाने वाली सरकारी बीमा जैसे सुविधाओं का फायदा लेने के लिए उन्हें निजी अस्पताल में जाना होगा। इसके लागू होने से प्राइवेट अस्पतालों को फायदा होगा। इधर, स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने योजना आयोग के इस फैसले पर कड़ी नाराजगी जताई है। स्वास्थ्य मंत्री ने योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह को चिट्ठी लिखकर कहा है कि स्वास्थ्य सुविधाओं का निजीकरण नहीं होना चाहिए। 12वीं पंचवर्षीय योजना के तहत यह फैसला लिया गया है कि प्राथमिक सुविधाओं  में प्राइवेट सेक्टर का रोल बढ़ाया जाए। यानी गरीबो को दी जाने वाली सरकारी बीमा जैसे सुविधाओं का फायदा लेने के लिए उन्हें निजी अस्पताल में जाना होगा। इसके लागू होने से प्राइवेट अस्पतालों को फायदा होगा। इधर, स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने योजना आयोग के इस फैसले पर कड़ी नाराजगी जताई है। स्वास्थ्य मंत्री ने योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह को चिट्ठी लिखकर कहा है कि स्वास्थ्य सुविधाओं का निजीकरण नहीं होना चाहिए। इधर, स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने योजना आयोग के इस फैसले पर कड़ी नाराजगी जताई है। स्वास्थ्य मंत्री ने योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह को चिट्ठी लिखकर कहा है कि स्वास्थ्य सुविधाओं का निजीकरण नहीं होना चाहिए।
योजना आयोग की चली तो अब सरकार की ओर से दी जाने वाली प्राथमिक चिकित्सा सुविधाओं में प्राइवेट सेक्टर का बड़ा रोल हो जाएगा।
26
['hin']
एक सारांश बनाओ: अमेरिका ने सोमवार को कहा कि भारत के प्रधानमंत्री को पाकिस्तान आमंत्रित करने का नवाज शरीफ का निर्णय एक ‘सकारात्मक संकेत’ है। दूसरी ओर अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि अमेरिका के विदेशमंत्री जॉन केरी ने पाकिस्तान के नव निर्वाचित नेता नवाज शरीफ को फोन कर उन्हें उनकी चुनावी सफलता पर बधाई दी है।टिप्पणियां विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता पद संभालने के बाद अपने पहले संवाददाता सम्मेलन में जेन सकी ने कहा, ‘‘हमने वह टिप्पणियां देखी हैं। मैं उनका बहुत ज्यादा विश्लेषण नहीं करना चाहती लेकिन यह एक सकारात्मक कदम है। नई सरकार बनने के बाद हम उसके साथ काम करने को उत्सुक हैं।’’ शरीफ द्वारा अपने शपथ ग्रहण समारोह में मनमोहन सिंह को बुलाए जाने पर पूछे गए सवालों के जवाब में जेन ने यह बातें कहीं। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री ने कल शरीफ को फोन कर उन्हें चुनाव में शानदार जीत पर बधाई दी थी। दूसरी ओर अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि अमेरिका के विदेशमंत्री जॉन केरी ने पाकिस्तान के नव निर्वाचित नेता नवाज शरीफ को फोन कर उन्हें उनकी चुनावी सफलता पर बधाई दी है।टिप्पणियां विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता पद संभालने के बाद अपने पहले संवाददाता सम्मेलन में जेन सकी ने कहा, ‘‘हमने वह टिप्पणियां देखी हैं। मैं उनका बहुत ज्यादा विश्लेषण नहीं करना चाहती लेकिन यह एक सकारात्मक कदम है। नई सरकार बनने के बाद हम उसके साथ काम करने को उत्सुक हैं।’’ शरीफ द्वारा अपने शपथ ग्रहण समारोह में मनमोहन सिंह को बुलाए जाने पर पूछे गए सवालों के जवाब में जेन ने यह बातें कहीं। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री ने कल शरीफ को फोन कर उन्हें चुनाव में शानदार जीत पर बधाई दी थी। विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता पद संभालने के बाद अपने पहले संवाददाता सम्मेलन में जेन सकी ने कहा, ‘‘हमने वह टिप्पणियां देखी हैं। मैं उनका बहुत ज्यादा विश्लेषण नहीं करना चाहती लेकिन यह एक सकारात्मक कदम है। नई सरकार बनने के बाद हम उसके साथ काम करने को उत्सुक हैं।’’ शरीफ द्वारा अपने शपथ ग्रहण समारोह में मनमोहन सिंह को बुलाए जाने पर पूछे गए सवालों के जवाब में जेन ने यह बातें कहीं। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री ने कल शरीफ को फोन कर उन्हें चुनाव में शानदार जीत पर बधाई दी थी। शरीफ द्वारा अपने शपथ ग्रहण समारोह में मनमोहन सिंह को बुलाए जाने पर पूछे गए सवालों के जवाब में जेन ने यह बातें कहीं। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री ने कल शरीफ को फोन कर उन्हें चुनाव में शानदार जीत पर बधाई दी थी।
संक्षिप्त पाठ: दूसरी ओर अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि अमेरिका के विदेशमंत्री जॉन केरी ने पाकिस्तान के नव निर्वाचित नेता नवाज शरीफ को फोन कर उन्हें उनकी चुनावी सफलता पर बधाई दी है।
30
['hin']
एक सारांश बनाओ: इंग्लैंड के कप्तान एलिस्टेयर कुक भारत के खिलाफ तीसरे टेस्ट मैच में शुक्रवार को 190 रन पर आउट होने के कारण विवियन रिचर्ड्स और वीरेंद्र सहवाग के विशिष्ट क्लब में शामिल हो गए। टेस्ट क्रिकेट में रिचर्ड्स, सहवाग और कुक केवल तीन बल्लेबाज ही ऐसे हैं जो 90, 190 और 290 रन या उससे पार पहुंचने के बावजूद क्रमश: शतक, दोहरा शतक और तिहरा शतक पूरा नहीं कर पाए। कुक पिछले साल बर्मिंघम में भारत के खिलाफ 294 रन बनाकर आउट हुए थे। वह अब तक पांच बार नर्वस नाइंटीज के शिकार भी बन चुके हैं। रिचर्ड्स 1976 में इंग्लैंड के खिलाफ ओवल में 291 रन बनाकर पवेलियन लौटे थे। वह भारत के खिलाफ 1984 में 192 रन बनाकर नाबाद रहे। इसके अलावा तीन अवसरों पर वह 90 रन के पार पहुंचने के बाद आउट हुए। इन तीनों में केवल सहवाग ही ऐसे बल्लेबाज हैं जो दो तिहरे शतक जड़ चुके हैं।टिप्पणियां यह भारतीय बल्लेबाज हालांकि श्रीलंका के खिलाफ 2009 में मुंबई में 293 रन बनाकर आउट हुआ था। उन्होंने 2003 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मेलबर्न में 195 रन बनाए थे। सहवाग इसके अलावा पांच बार नर्वस नाइंटीज के शिकार बने हैं। कुक रन आउट होकर पवेलियन लौटे। वह इस तरह से अपने प्रथम श्रेणी करियर में पहली बार रन आउट हुए। कुक की यह प्रथम श्रेणी मैचों में 312वीं पारी थी। टेस्ट मैचों में उनकी 151वीं पारी थी। अपने टेस्ट करियर में कभी रन आउट नहीं होने का रिकॉर्ड पूर्व भारतीय कप्तान कपिल देव (184 पारियां) के नाम पर है। टेस्ट क्रिकेट में रिचर्ड्स, सहवाग और कुक केवल तीन बल्लेबाज ही ऐसे हैं जो 90, 190 और 290 रन या उससे पार पहुंचने के बावजूद क्रमश: शतक, दोहरा शतक और तिहरा शतक पूरा नहीं कर पाए। कुक पिछले साल बर्मिंघम में भारत के खिलाफ 294 रन बनाकर आउट हुए थे। वह अब तक पांच बार नर्वस नाइंटीज के शिकार भी बन चुके हैं। रिचर्ड्स 1976 में इंग्लैंड के खिलाफ ओवल में 291 रन बनाकर पवेलियन लौटे थे। वह भारत के खिलाफ 1984 में 192 रन बनाकर नाबाद रहे। इसके अलावा तीन अवसरों पर वह 90 रन के पार पहुंचने के बाद आउट हुए। इन तीनों में केवल सहवाग ही ऐसे बल्लेबाज हैं जो दो तिहरे शतक जड़ चुके हैं।टिप्पणियां यह भारतीय बल्लेबाज हालांकि श्रीलंका के खिलाफ 2009 में मुंबई में 293 रन बनाकर आउट हुआ था। उन्होंने 2003 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मेलबर्न में 195 रन बनाए थे। सहवाग इसके अलावा पांच बार नर्वस नाइंटीज के शिकार बने हैं। कुक रन आउट होकर पवेलियन लौटे। वह इस तरह से अपने प्रथम श्रेणी करियर में पहली बार रन आउट हुए। कुक की यह प्रथम श्रेणी मैचों में 312वीं पारी थी। टेस्ट मैचों में उनकी 151वीं पारी थी। अपने टेस्ट करियर में कभी रन आउट नहीं होने का रिकॉर्ड पूर्व भारतीय कप्तान कपिल देव (184 पारियां) के नाम पर है। कुक पिछले साल बर्मिंघम में भारत के खिलाफ 294 रन बनाकर आउट हुए थे। वह अब तक पांच बार नर्वस नाइंटीज के शिकार भी बन चुके हैं। रिचर्ड्स 1976 में इंग्लैंड के खिलाफ ओवल में 291 रन बनाकर पवेलियन लौटे थे। वह भारत के खिलाफ 1984 में 192 रन बनाकर नाबाद रहे। इसके अलावा तीन अवसरों पर वह 90 रन के पार पहुंचने के बाद आउट हुए। इन तीनों में केवल सहवाग ही ऐसे बल्लेबाज हैं जो दो तिहरे शतक जड़ चुके हैं।टिप्पणियां यह भारतीय बल्लेबाज हालांकि श्रीलंका के खिलाफ 2009 में मुंबई में 293 रन बनाकर आउट हुआ था। उन्होंने 2003 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मेलबर्न में 195 रन बनाए थे। सहवाग इसके अलावा पांच बार नर्वस नाइंटीज के शिकार बने हैं। कुक रन आउट होकर पवेलियन लौटे। वह इस तरह से अपने प्रथम श्रेणी करियर में पहली बार रन आउट हुए। कुक की यह प्रथम श्रेणी मैचों में 312वीं पारी थी। टेस्ट मैचों में उनकी 151वीं पारी थी। अपने टेस्ट करियर में कभी रन आउट नहीं होने का रिकॉर्ड पूर्व भारतीय कप्तान कपिल देव (184 पारियां) के नाम पर है। वह भारत के खिलाफ 1984 में 192 रन बनाकर नाबाद रहे। इसके अलावा तीन अवसरों पर वह 90 रन के पार पहुंचने के बाद आउट हुए। इन तीनों में केवल सहवाग ही ऐसे बल्लेबाज हैं जो दो तिहरे शतक जड़ चुके हैं।टिप्पणियां यह भारतीय बल्लेबाज हालांकि श्रीलंका के खिलाफ 2009 में मुंबई में 293 रन बनाकर आउट हुआ था। उन्होंने 2003 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मेलबर्न में 195 रन बनाए थे। सहवाग इसके अलावा पांच बार नर्वस नाइंटीज के शिकार बने हैं। कुक रन आउट होकर पवेलियन लौटे। वह इस तरह से अपने प्रथम श्रेणी करियर में पहली बार रन आउट हुए। कुक की यह प्रथम श्रेणी मैचों में 312वीं पारी थी। टेस्ट मैचों में उनकी 151वीं पारी थी। अपने टेस्ट करियर में कभी रन आउट नहीं होने का रिकॉर्ड पूर्व भारतीय कप्तान कपिल देव (184 पारियां) के नाम पर है। यह भारतीय बल्लेबाज हालांकि श्रीलंका के खिलाफ 2009 में मुंबई में 293 रन बनाकर आउट हुआ था। उन्होंने 2003 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मेलबर्न में 195 रन बनाए थे। सहवाग इसके अलावा पांच बार नर्वस नाइंटीज के शिकार बने हैं। कुक रन आउट होकर पवेलियन लौटे। वह इस तरह से अपने प्रथम श्रेणी करियर में पहली बार रन आउट हुए। कुक की यह प्रथम श्रेणी मैचों में 312वीं पारी थी। टेस्ट मैचों में उनकी 151वीं पारी थी। अपने टेस्ट करियर में कभी रन आउट नहीं होने का रिकॉर्ड पूर्व भारतीय कप्तान कपिल देव (184 पारियां) के नाम पर है। कुक रन आउट होकर पवेलियन लौटे। वह इस तरह से अपने प्रथम श्रेणी करियर में पहली बार रन आउट हुए। कुक की यह प्रथम श्रेणी मैचों में 312वीं पारी थी। टेस्ट मैचों में उनकी 151वीं पारी थी। अपने टेस्ट करियर में कभी रन आउट नहीं होने का रिकॉर्ड पूर्व भारतीय कप्तान कपिल देव (184 पारियां) के नाम पर है।
संक्षिप्त सारांश: इंग्लैंड के कप्तान एलिस्टेयर कुक भारत के खिलाफ तीसरे टेस्ट मैच में शुक्रवार को 190 रन पर आउट होने के कारण विवियन रिचर्ड्स और वीरेंद्र सहवाग के विशिष्ट क्लब में शामिल हो गए।
8
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: पाकिस्तान की संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने अमेरिका पर सीधा हमला किया। गिलानी ने पूछा कि अल कायदा और ओसामा बिन लादेन को किसने पैदा किया है। गिलानी ने कहा पाकिस्तान अपने सम्मान की रक्षा करना जानता है। इसलिए कोई भी इस तरह के ऑपरेशन दोबारा करने की ना सोचे। उनके अनुसार देश की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। अपने बयान में उन्होंने कहा कि ओसामा बिन लादेन के मारे जाने से वाकई इंसाफ हुआ है लेकिन पाकिस्तान जीत का जश्न मनाने की जल्दबाजी में नहीं है। गिलानी ने कहा कि लादेन को शरण देने और अक्षमता के लगाए गए आरोप बेतुके हैं। इस हमले को लेकर पाकिस्तान की भूमिका पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या लादेन की मौजूदगी की पाकिस्तान को जानकारी थी, हालांकि ऑपरेशन के बारे में पाकिस्तान की सरकार पहले ही कह चुकी है कि उसे अमेरिका ने कोई जानकारी नहीं दी। अब प्रधानमंत्री गिलानी ने बयान देकर देश को भरोसे में लेने की कोशिश की है।(कुछ अंश भाषा से)
सारांश: पाक संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री गिलानी ने अमेरिका पर सीधा हमला किया। गिलानी ने पूछा कि अल कायदा और लादेन को किसने पैदा किया है।
33
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: बंगाली अभिनेता और तृणमूल कांग्रेस के विधायक चिरंजीत ऊर्फ दीपक चक्रवर्ती ने शनिवार को कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र उत्तरी 24 परगना जिले में छोटे कपड़े पहनने के कारण महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की घटना बढ़ रही है। बरासात के विधायक चक्रवर्ती ने कहा, "छेड़छाड़ की घटनाएं काफी दिनों से हो रही हैं। छेड़छाड़ की घटना बढ़ने का एक प्रमुख कारण महिलाओं द्वारा पहने जाने वाले छोटे कपड़े और छोटे स्कर्ट होते हैं।"टिप्पणियां उनके क्षेत्र में एक लड़की के साथ बदतमीजी की एक घटना के बाद उनका यह बयान आया है। चक्रवर्ती ने कहा, "छेड़छाड़ उचित नहीं है। हम इसकी निंदा करते हैं। लेकिन यह भी देखने की जरूरत है कि बिना रावण के कोई रामायण नहीं हो सकता है।" बरासात के विधायक चक्रवर्ती ने कहा, "छेड़छाड़ की घटनाएं काफी दिनों से हो रही हैं। छेड़छाड़ की घटना बढ़ने का एक प्रमुख कारण महिलाओं द्वारा पहने जाने वाले छोटे कपड़े और छोटे स्कर्ट होते हैं।"टिप्पणियां उनके क्षेत्र में एक लड़की के साथ बदतमीजी की एक घटना के बाद उनका यह बयान आया है। चक्रवर्ती ने कहा, "छेड़छाड़ उचित नहीं है। हम इसकी निंदा करते हैं। लेकिन यह भी देखने की जरूरत है कि बिना रावण के कोई रामायण नहीं हो सकता है।" उनके क्षेत्र में एक लड़की के साथ बदतमीजी की एक घटना के बाद उनका यह बयान आया है। चक्रवर्ती ने कहा, "छेड़छाड़ उचित नहीं है। हम इसकी निंदा करते हैं। लेकिन यह भी देखने की जरूरत है कि बिना रावण के कोई रामायण नहीं हो सकता है।" चक्रवर्ती ने कहा, "छेड़छाड़ उचित नहीं है। हम इसकी निंदा करते हैं। लेकिन यह भी देखने की जरूरत है कि बिना रावण के कोई रामायण नहीं हो सकता है।"
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: बंगाली अभिनेता और तृणमूल कांग्रेस के विधायक चिरंजीत ऊर्फ दीपक चक्रवर्ती ने शनिवार को कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र उत्तरी 24 परगना जिले में छोटे कपड़े पहनने के कारण महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की घटना बढ़ रही है।
25
['hin']
एक सारांश बनाओ: केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की खबरों के बीच कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के निवास स्थान पर सुबह से हलचल तेज़ है। मंत्रिमंडल में फेरबदल की चर्चा के बीच कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सोमवार को कुछ केन्द्रीय मंत्रियों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से विचार-विमर्श किया। सोनिया के 10 जनपथ स्थित निवास पर उनसे मुलाकात करने वालों में केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्री सीपी जोशी शामिल थे। तृणमूल कांग्रेस के संप्रग से नाता तोड़ने और मुकुल रॉय सहित उसके मंत्रियों के इस्तीफा देने के बाद जोशी को रेल मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। जोशी ने आज ही रेल मंत्रालय का कामकाज संभाला है। सोनिया ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण से भी मुलाकात की। चव्हाण का नाम भी कैबिनेट में शामिल होने वाले नए मंत्रियों के रूप में लिया जा रहा है। कांग्रेस के महाराष्ट्र मामलों के प्रभारी मोहन प्रकाश भी सोनिया गांधी से मिले। कांग्रेस अध्यक्ष ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री गुलाम नबी आजाद, पार्टी के कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा और अपने राजनीतिक सचिव अहमद पटेल से भी चर्चा की।टिप्पणियां तृणमूल कांग्रेस के छह मंत्रियों के इस्तीफा दिए जाने के बाद पश्चिम बंगाल के दो-तीन कांग्रेस नेताओं को केन्द्रीय मंत्रिपरिषद में जगह मिलने की उम्मीद की जा रही है। मंत्रिमंडल में कई ऐसे वरिष्ठ मंत्री हैं जो दो-दो मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं इनमें कपिल सिब्बल, बेनी प्रसाद वर्मा, सीपी जोशी, व्यालार रवि और वीरप्पा मोइली शामिल हैं। संभावित फेरबदल में इन मंत्रियों की जिम्मेदारियों को कम किया जा सकता है। मंत्रिमंडल में फेरबदल की चर्चा के बीच कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सोमवार को कुछ केन्द्रीय मंत्रियों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से विचार-विमर्श किया। सोनिया के 10 जनपथ स्थित निवास पर उनसे मुलाकात करने वालों में केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्री सीपी जोशी शामिल थे। तृणमूल कांग्रेस के संप्रग से नाता तोड़ने और मुकुल रॉय सहित उसके मंत्रियों के इस्तीफा देने के बाद जोशी को रेल मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। जोशी ने आज ही रेल मंत्रालय का कामकाज संभाला है। सोनिया ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण से भी मुलाकात की। चव्हाण का नाम भी कैबिनेट में शामिल होने वाले नए मंत्रियों के रूप में लिया जा रहा है। कांग्रेस के महाराष्ट्र मामलों के प्रभारी मोहन प्रकाश भी सोनिया गांधी से मिले। कांग्रेस अध्यक्ष ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री गुलाम नबी आजाद, पार्टी के कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा और अपने राजनीतिक सचिव अहमद पटेल से भी चर्चा की।टिप्पणियां तृणमूल कांग्रेस के छह मंत्रियों के इस्तीफा दिए जाने के बाद पश्चिम बंगाल के दो-तीन कांग्रेस नेताओं को केन्द्रीय मंत्रिपरिषद में जगह मिलने की उम्मीद की जा रही है। मंत्रिमंडल में कई ऐसे वरिष्ठ मंत्री हैं जो दो-दो मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं इनमें कपिल सिब्बल, बेनी प्रसाद वर्मा, सीपी जोशी, व्यालार रवि और वीरप्पा मोइली शामिल हैं। संभावित फेरबदल में इन मंत्रियों की जिम्मेदारियों को कम किया जा सकता है। सोनिया के 10 जनपथ स्थित निवास पर उनसे मुलाकात करने वालों में केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्री सीपी जोशी शामिल थे। तृणमूल कांग्रेस के संप्रग से नाता तोड़ने और मुकुल रॉय सहित उसके मंत्रियों के इस्तीफा देने के बाद जोशी को रेल मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। जोशी ने आज ही रेल मंत्रालय का कामकाज संभाला है। सोनिया ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण से भी मुलाकात की। चव्हाण का नाम भी कैबिनेट में शामिल होने वाले नए मंत्रियों के रूप में लिया जा रहा है। कांग्रेस के महाराष्ट्र मामलों के प्रभारी मोहन प्रकाश भी सोनिया गांधी से मिले। कांग्रेस अध्यक्ष ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री गुलाम नबी आजाद, पार्टी के कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा और अपने राजनीतिक सचिव अहमद पटेल से भी चर्चा की।टिप्पणियां तृणमूल कांग्रेस के छह मंत्रियों के इस्तीफा दिए जाने के बाद पश्चिम बंगाल के दो-तीन कांग्रेस नेताओं को केन्द्रीय मंत्रिपरिषद में जगह मिलने की उम्मीद की जा रही है। मंत्रिमंडल में कई ऐसे वरिष्ठ मंत्री हैं जो दो-दो मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं इनमें कपिल सिब्बल, बेनी प्रसाद वर्मा, सीपी जोशी, व्यालार रवि और वीरप्पा मोइली शामिल हैं। संभावित फेरबदल में इन मंत्रियों की जिम्मेदारियों को कम किया जा सकता है। सोनिया ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण से भी मुलाकात की। चव्हाण का नाम भी कैबिनेट में शामिल होने वाले नए मंत्रियों के रूप में लिया जा रहा है। कांग्रेस के महाराष्ट्र मामलों के प्रभारी मोहन प्रकाश भी सोनिया गांधी से मिले। कांग्रेस अध्यक्ष ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री गुलाम नबी आजाद, पार्टी के कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा और अपने राजनीतिक सचिव अहमद पटेल से भी चर्चा की।टिप्पणियां तृणमूल कांग्रेस के छह मंत्रियों के इस्तीफा दिए जाने के बाद पश्चिम बंगाल के दो-तीन कांग्रेस नेताओं को केन्द्रीय मंत्रिपरिषद में जगह मिलने की उम्मीद की जा रही है। मंत्रिमंडल में कई ऐसे वरिष्ठ मंत्री हैं जो दो-दो मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं इनमें कपिल सिब्बल, बेनी प्रसाद वर्मा, सीपी जोशी, व्यालार रवि और वीरप्पा मोइली शामिल हैं। संभावित फेरबदल में इन मंत्रियों की जिम्मेदारियों को कम किया जा सकता है। कांग्रेस अध्यक्ष ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री गुलाम नबी आजाद, पार्टी के कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा और अपने राजनीतिक सचिव अहमद पटेल से भी चर्चा की।टिप्पणियां तृणमूल कांग्रेस के छह मंत्रियों के इस्तीफा दिए जाने के बाद पश्चिम बंगाल के दो-तीन कांग्रेस नेताओं को केन्द्रीय मंत्रिपरिषद में जगह मिलने की उम्मीद की जा रही है। मंत्रिमंडल में कई ऐसे वरिष्ठ मंत्री हैं जो दो-दो मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं इनमें कपिल सिब्बल, बेनी प्रसाद वर्मा, सीपी जोशी, व्यालार रवि और वीरप्पा मोइली शामिल हैं। संभावित फेरबदल में इन मंत्रियों की जिम्मेदारियों को कम किया जा सकता है। तृणमूल कांग्रेस के छह मंत्रियों के इस्तीफा दिए जाने के बाद पश्चिम बंगाल के दो-तीन कांग्रेस नेताओं को केन्द्रीय मंत्रिपरिषद में जगह मिलने की उम्मीद की जा रही है। मंत्रिमंडल में कई ऐसे वरिष्ठ मंत्री हैं जो दो-दो मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं इनमें कपिल सिब्बल, बेनी प्रसाद वर्मा, सीपी जोशी, व्यालार रवि और वीरप्पा मोइली शामिल हैं। संभावित फेरबदल में इन मंत्रियों की जिम्मेदारियों को कम किया जा सकता है। मंत्रिमंडल में कई ऐसे वरिष्ठ मंत्री हैं जो दो-दो मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं इनमें कपिल सिब्बल, बेनी प्रसाद वर्मा, सीपी जोशी, व्यालार रवि और वीरप्पा मोइली शामिल हैं। संभावित फेरबदल में इन मंत्रियों की जिम्मेदारियों को कम किया जा सकता है।
यह एक सारांश है: केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की खबरों के बीच कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के निवास स्थान पर सुबह से हलचल तेज़ है।
21
['hin']
एक सारांश बनाओ: रोजर फेडरर ने बुधवार को पेरिस ग्रैंडस्लैम में रिकार्ड 234वीं जीत दर्ज करके फ्रेंच ओपन टेनिस टूर्नामेंट के अंतिम 32 में जगह बनायी जबकि दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी नोवाक जोकोविच ने लगातार चारों ग्रैंडस्लैम जीतने की तरफ मजबूत कदम बढ़ाये। तीसरी वरीयता प्राप्त फेडरर ने तीसरा सेट गंवाया लेकिन वह रोमानिया के एड्रियन उनगुर को 6-3, 6-2, 6-7, 6-3 से हराने में कामयाब रहे। इस जीत से फेडरर ने जिमी कोनोर्स के ग्रैंडस्लैम में 233 जीत के लंबे समय से चले आ रहे रिकार्ड को भी तोड़ दिया। शीर्ष वरीयता प्राप्त जोकोविच ने स्लोवाकिया के ब्लाज कावसिच पर 6-0, 6-4, 6-4 से जीत दर्ज की। वह डान बज और राड लीवर के बाद एक ही समय में चारों ग्रैंडस्लैम खिताब रखने वाला तीसरा खिलाड़ी बनने की कवायद में हैं। उन्होंने दुनिया के 99वें नंबर के खिलाड़ी कावसिच की एक नहीं चलने दी। सर्बियाई खिलाड़ी जोकोविच ने 41 विनर लगाये और चौथे मैच प्वाइंट पर जीत दर्ज करके पहले दौर में आस्ट्रेलियाई लेटिन हेविट को हराने वाले कावसिच को बाहर का रास्ता दिखाया। जोकोविच का अगला मुकाबला फ्रांस के निकोलस डेविलडर से होगा जिन्होंने जर्मनी के माइकल बेरर को 7-6, 6-4, 6-2 से पराजित किया। पुरुष वर्ग में सातवीं वरीयता प्राप्त टामस बर्डिच, नौवीं वरीय जुआन मार्टिन डेल पोत्रो, 21वीं वरीय मारिन सिलिच और 22वीं वरीय आंद्रियास सेपी भी तीसरे दौर में पहुंच गये हैं। अजारेंका ने जनवरी में आस्ट्रेलियाई ओपन जीता था और वह जेनिफर कैप्रियाती के बाद पहले दोनों ग्रैंडस्लैम जीतने वाली पहली महिला खिलाड़ी बनना चाहती हैं। कैप्रियाती ने 2001 में यह कारनामा किया था और तब से कोई महिला खिलाड़ी उसे दोहरा नहीं पायी।टिप्पणियां इस बीच चीन की 31वीं वरीयता प्राप्त च्यांगी झी को हार का सामना करना पड़ा। उन्हें कनाडा की अलेक्सांद्रा वोजनियाक ने 6-2, 6-4 से हराया। उन्हें तीसरे दौर में अजारेंका से भिड़ना होगा। स्लोवेकिया की तीसरी वरीयता प्राप्त डोमिनिका चिबुलकोवा ने अमेरिका की वानिया किंग को 6-0, 6-2 से जबकि इटली की 21वीं वरीय सारा इरानी ने अमेरिका की मेलेनी ओडिन को 6-2, 6-3 से पराजित किया। रूस की 27वीं वरीय नादिया पेत्रोवा ने हमवतन चानेल शीपर्स को 6-3, 6-3 से जबकि स्पेन की 29वीं वरीय अनाबेल मेडिना गारिगेज ने फ्रांस की इरेना पावलोविच को 6-3, 6-2 से हराया। सर्बिया की अन्ना इवानोविच ने इस्राइल की सहर पीर को 6-2, 6-2 से हराकर तीसरे दौर में कदम रखा। तीसरी वरीयता प्राप्त फेडरर ने तीसरा सेट गंवाया लेकिन वह रोमानिया के एड्रियन उनगुर को 6-3, 6-2, 6-7, 6-3 से हराने में कामयाब रहे। इस जीत से फेडरर ने जिमी कोनोर्स के ग्रैंडस्लैम में 233 जीत के लंबे समय से चले आ रहे रिकार्ड को भी तोड़ दिया। शीर्ष वरीयता प्राप्त जोकोविच ने स्लोवाकिया के ब्लाज कावसिच पर 6-0, 6-4, 6-4 से जीत दर्ज की। वह डान बज और राड लीवर के बाद एक ही समय में चारों ग्रैंडस्लैम खिताब रखने वाला तीसरा खिलाड़ी बनने की कवायद में हैं। उन्होंने दुनिया के 99वें नंबर के खिलाड़ी कावसिच की एक नहीं चलने दी। सर्बियाई खिलाड़ी जोकोविच ने 41 विनर लगाये और चौथे मैच प्वाइंट पर जीत दर्ज करके पहले दौर में आस्ट्रेलियाई लेटिन हेविट को हराने वाले कावसिच को बाहर का रास्ता दिखाया। जोकोविच का अगला मुकाबला फ्रांस के निकोलस डेविलडर से होगा जिन्होंने जर्मनी के माइकल बेरर को 7-6, 6-4, 6-2 से पराजित किया। पुरुष वर्ग में सातवीं वरीयता प्राप्त टामस बर्डिच, नौवीं वरीय जुआन मार्टिन डेल पोत्रो, 21वीं वरीय मारिन सिलिच और 22वीं वरीय आंद्रियास सेपी भी तीसरे दौर में पहुंच गये हैं। अजारेंका ने जनवरी में आस्ट्रेलियाई ओपन जीता था और वह जेनिफर कैप्रियाती के बाद पहले दोनों ग्रैंडस्लैम जीतने वाली पहली महिला खिलाड़ी बनना चाहती हैं। कैप्रियाती ने 2001 में यह कारनामा किया था और तब से कोई महिला खिलाड़ी उसे दोहरा नहीं पायी।टिप्पणियां इस बीच चीन की 31वीं वरीयता प्राप्त च्यांगी झी को हार का सामना करना पड़ा। उन्हें कनाडा की अलेक्सांद्रा वोजनियाक ने 6-2, 6-4 से हराया। उन्हें तीसरे दौर में अजारेंका से भिड़ना होगा। स्लोवेकिया की तीसरी वरीयता प्राप्त डोमिनिका चिबुलकोवा ने अमेरिका की वानिया किंग को 6-0, 6-2 से जबकि इटली की 21वीं वरीय सारा इरानी ने अमेरिका की मेलेनी ओडिन को 6-2, 6-3 से पराजित किया। रूस की 27वीं वरीय नादिया पेत्रोवा ने हमवतन चानेल शीपर्स को 6-3, 6-3 से जबकि स्पेन की 29वीं वरीय अनाबेल मेडिना गारिगेज ने फ्रांस की इरेना पावलोविच को 6-3, 6-2 से हराया। सर्बिया की अन्ना इवानोविच ने इस्राइल की सहर पीर को 6-2, 6-2 से हराकर तीसरे दौर में कदम रखा। शीर्ष वरीयता प्राप्त जोकोविच ने स्लोवाकिया के ब्लाज कावसिच पर 6-0, 6-4, 6-4 से जीत दर्ज की। वह डान बज और राड लीवर के बाद एक ही समय में चारों ग्रैंडस्लैम खिताब रखने वाला तीसरा खिलाड़ी बनने की कवायद में हैं। उन्होंने दुनिया के 99वें नंबर के खिलाड़ी कावसिच की एक नहीं चलने दी। सर्बियाई खिलाड़ी जोकोविच ने 41 विनर लगाये और चौथे मैच प्वाइंट पर जीत दर्ज करके पहले दौर में आस्ट्रेलियाई लेटिन हेविट को हराने वाले कावसिच को बाहर का रास्ता दिखाया। जोकोविच का अगला मुकाबला फ्रांस के निकोलस डेविलडर से होगा जिन्होंने जर्मनी के माइकल बेरर को 7-6, 6-4, 6-2 से पराजित किया। पुरुष वर्ग में सातवीं वरीयता प्राप्त टामस बर्डिच, नौवीं वरीय जुआन मार्टिन डेल पोत्रो, 21वीं वरीय मारिन सिलिच और 22वीं वरीय आंद्रियास सेपी भी तीसरे दौर में पहुंच गये हैं। अजारेंका ने जनवरी में आस्ट्रेलियाई ओपन जीता था और वह जेनिफर कैप्रियाती के बाद पहले दोनों ग्रैंडस्लैम जीतने वाली पहली महिला खिलाड़ी बनना चाहती हैं। कैप्रियाती ने 2001 में यह कारनामा किया था और तब से कोई महिला खिलाड़ी उसे दोहरा नहीं पायी।टिप्पणियां इस बीच चीन की 31वीं वरीयता प्राप्त च्यांगी झी को हार का सामना करना पड़ा। उन्हें कनाडा की अलेक्सांद्रा वोजनियाक ने 6-2, 6-4 से हराया। उन्हें तीसरे दौर में अजारेंका से भिड़ना होगा। स्लोवेकिया की तीसरी वरीयता प्राप्त डोमिनिका चिबुलकोवा ने अमेरिका की वानिया किंग को 6-0, 6-2 से जबकि इटली की 21वीं वरीय सारा इरानी ने अमेरिका की मेलेनी ओडिन को 6-2, 6-3 से पराजित किया। रूस की 27वीं वरीय नादिया पेत्रोवा ने हमवतन चानेल शीपर्स को 6-3, 6-3 से जबकि स्पेन की 29वीं वरीय अनाबेल मेडिना गारिगेज ने फ्रांस की इरेना पावलोविच को 6-3, 6-2 से हराया। सर्बिया की अन्ना इवानोविच ने इस्राइल की सहर पीर को 6-2, 6-2 से हराकर तीसरे दौर में कदम रखा। जोकोविच का अगला मुकाबला फ्रांस के निकोलस डेविलडर से होगा जिन्होंने जर्मनी के माइकल बेरर को 7-6, 6-4, 6-2 से पराजित किया। पुरुष वर्ग में सातवीं वरीयता प्राप्त टामस बर्डिच, नौवीं वरीय जुआन मार्टिन डेल पोत्रो, 21वीं वरीय मारिन सिलिच और 22वीं वरीय आंद्रियास सेपी भी तीसरे दौर में पहुंच गये हैं। अजारेंका ने जनवरी में आस्ट्रेलियाई ओपन जीता था और वह जेनिफर कैप्रियाती के बाद पहले दोनों ग्रैंडस्लैम जीतने वाली पहली महिला खिलाड़ी बनना चाहती हैं। कैप्रियाती ने 2001 में यह कारनामा किया था और तब से कोई महिला खिलाड़ी उसे दोहरा नहीं पायी।टिप्पणियां इस बीच चीन की 31वीं वरीयता प्राप्त च्यांगी झी को हार का सामना करना पड़ा। उन्हें कनाडा की अलेक्सांद्रा वोजनियाक ने 6-2, 6-4 से हराया। उन्हें तीसरे दौर में अजारेंका से भिड़ना होगा। स्लोवेकिया की तीसरी वरीयता प्राप्त डोमिनिका चिबुलकोवा ने अमेरिका की वानिया किंग को 6-0, 6-2 से जबकि इटली की 21वीं वरीय सारा इरानी ने अमेरिका की मेलेनी ओडिन को 6-2, 6-3 से पराजित किया। रूस की 27वीं वरीय नादिया पेत्रोवा ने हमवतन चानेल शीपर्स को 6-3, 6-3 से जबकि स्पेन की 29वीं वरीय अनाबेल मेडिना गारिगेज ने फ्रांस की इरेना पावलोविच को 6-3, 6-2 से हराया। सर्बिया की अन्ना इवानोविच ने इस्राइल की सहर पीर को 6-2, 6-2 से हराकर तीसरे दौर में कदम रखा। अजारेंका ने जनवरी में आस्ट्रेलियाई ओपन जीता था और वह जेनिफर कैप्रियाती के बाद पहले दोनों ग्रैंडस्लैम जीतने वाली पहली महिला खिलाड़ी बनना चाहती हैं। कैप्रियाती ने 2001 में यह कारनामा किया था और तब से कोई महिला खिलाड़ी उसे दोहरा नहीं पायी।टिप्पणियां इस बीच चीन की 31वीं वरीयता प्राप्त च्यांगी झी को हार का सामना करना पड़ा। उन्हें कनाडा की अलेक्सांद्रा वोजनियाक ने 6-2, 6-4 से हराया। उन्हें तीसरे दौर में अजारेंका से भिड़ना होगा। स्लोवेकिया की तीसरी वरीयता प्राप्त डोमिनिका चिबुलकोवा ने अमेरिका की वानिया किंग को 6-0, 6-2 से जबकि इटली की 21वीं वरीय सारा इरानी ने अमेरिका की मेलेनी ओडिन को 6-2, 6-3 से पराजित किया। रूस की 27वीं वरीय नादिया पेत्रोवा ने हमवतन चानेल शीपर्स को 6-3, 6-3 से जबकि स्पेन की 29वीं वरीय अनाबेल मेडिना गारिगेज ने फ्रांस की इरेना पावलोविच को 6-3, 6-2 से हराया। सर्बिया की अन्ना इवानोविच ने इस्राइल की सहर पीर को 6-2, 6-2 से हराकर तीसरे दौर में कदम रखा। इस बीच चीन की 31वीं वरीयता प्राप्त च्यांगी झी को हार का सामना करना पड़ा। उन्हें कनाडा की अलेक्सांद्रा वोजनियाक ने 6-2, 6-4 से हराया। उन्हें तीसरे दौर में अजारेंका से भिड़ना होगा। स्लोवेकिया की तीसरी वरीयता प्राप्त डोमिनिका चिबुलकोवा ने अमेरिका की वानिया किंग को 6-0, 6-2 से जबकि इटली की 21वीं वरीय सारा इरानी ने अमेरिका की मेलेनी ओडिन को 6-2, 6-3 से पराजित किया। रूस की 27वीं वरीय नादिया पेत्रोवा ने हमवतन चानेल शीपर्स को 6-3, 6-3 से जबकि स्पेन की 29वीं वरीय अनाबेल मेडिना गारिगेज ने फ्रांस की इरेना पावलोविच को 6-3, 6-2 से हराया। सर्बिया की अन्ना इवानोविच ने इस्राइल की सहर पीर को 6-2, 6-2 से हराकर तीसरे दौर में कदम रखा। रूस की 27वीं वरीय नादिया पेत्रोवा ने हमवतन चानेल शीपर्स को 6-3, 6-3 से जबकि स्पेन की 29वीं वरीय अनाबेल मेडिना गारिगेज ने फ्रांस की इरेना पावलोविच को 6-3, 6-2 से हराया। सर्बिया की अन्ना इवानोविच ने इस्राइल की सहर पीर को 6-2, 6-2 से हराकर तीसरे दौर में कदम रखा।
सारांश: रोजर फेडरर ने बुधवार को पेरिस ग्रैंडस्लैम में रिकार्ड 234वीं जीत दर्ज करके फ्रेंच ओपन टेनिस टूर्नामेंट के अंतिम 32 में जगह बनायी जबकि दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी नोवाक जोकोविच ने लगातार चारों ग्रैंडस्लैम जीतने की तरफ मजबूत कदम बढ़ाये।
5
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: बॉम्बे हाईकोर्ट ने शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के शिवाजी पार्क में शपथ ग्रहण समारोह पर चिंता जताई है. उच्च न्यायालय ने बुधवार को सुरक्षा संबंधी चिंता जताते हुए कि सार्वजनिक मैदानों पर इस किस्म के कार्यक्रमों को आयोजित करने का यह नियमित सिलसिला नहीं होना चाहिए. न्यायमूर्ति एससी धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति आरआई छागला की खंडपीठ ने कहा कि अन्यथा हर कोई इस तरह के कार्यक्रम के लिए मैदान को इस्तेमाल करना चाहेगा. ठाकरे बृहस्पतिवार शाम को दादर के शिवाजी पार्क में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे.  अदालत गैर सरकारी संगठन ‘वीकम ट्रस्ट' की याचिका पर सुनवाई कर रही थी. इस मामले में सवाल उठाया गया कि शिवाजी पार्क खेल का मैदान है या मनोरंजन का स्थल. इस पर अदालत ने कहा, ‘‘कल के कार्यक्रम के बारे में हम कुछ नहीं कहना चाहते...हम केवल यह प्रार्थना कर रहे हैं कि कुछ अप्रिय न घटे.'' अदालत ने कहा, ‘‘दरअसल होगा यह कि यह (कार्यक्रम आयोजन) एक परंपरा बन जाएगा और फिर हर कोई इस तरह के कार्यक्रमों के लिए मैदान का इस्तेमाल करना चाहेगा.'' इसी संगठन की जनहित याचिका पर वर्ष 2010 में उच्च न्यायालय ने इस क्षेत्र को ‘साइलेंस जोन' घोषित कर दिया था.
यहाँ एक सारांश है:उच्च न्यायालय ने बुधवार को सुरक्षा संबंधी चिंता जताई कहा, हर कोई ऐसे कार्यक्रम के लिए मैदान को इस्तेमाल करना चाहेगा गैर सरकारी संगठन ‘वीकम ट्रस्ट’ की याचिका पर की सुनवाई
17
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: सैम क्वेरी ने बुधवार को यहां क्वार्टरफाइनल में उलटफेर करते हुए गत चैम्पियन एंडी मरे को हराकर विंबलडन ग्रैंडस्लैम टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में प्रवेश किया, जिसमें उनकी भिड़ंत मारिन सिलिच से होगी. क्वेरी ने पिछले साल 2015 के चैंपियन नोवाक जोकोविच को तीसरे दौर में हराकर टूर्नामेंट से बाहर किया था और अब इस 29 वर्षीय खिलाड़ी ने दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी पर 3-6, 6-4, 6-7 (4/7), 6-1, 6-1 से जीत दर्ज की. इस तरह उन्होंने 42वें प्रयास में ग्रैंडस्लैम के अंतिम चार में पहली बार जगह सुनिश्चित की. दो बार के चैंपियन मरे हाल के दिनों में कूल्हे की समस्या से जूझ रहे हैं. वह इसी के कारण परेशानी में दिखे जिससे उनका मूवमेंट काफी प्रभावित हुआ. उन्होंने कहा, "मुझे लंबे समय से कूल्हे में परेशानी हो रही थी, इसमें सूजन है. लेकिन मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ करने का प्रयास किया. लेकिन हारना निराशाजनक था. मुझे इसका दुख है." क्वेरी अब फाइनल में जगह बनाने के लिए सिलिच से भिड़ेंगे, जिन्होंने भी पहली बार विबंलडन के सेमीफाइनल में जगह बनाई. सिलिच ने जाइल्स मुलर पर 3-6, 7-6 (8/6), 7-5, 5-7, 6-1 से जीत दर्ज की जिन्होंने अंतिम 16 में राफेल नडाल को हराकर टूर्नामेंट से बाहर किया था. दुनिया के छठे नंबर के खिलाड़ी सिलिच विबंलडन में तीन बार खेल चुके हैं जिसमें वह क्वार्टरफाइनल में हार गए थे. लेकिन इस पूर्व अमेरिकी ओपन चैम्पियन ने आखिरकार अंतिम चार में प्रवेश कर लिया और अब वह मेजर टूर्नामेंट के दूसरे फाइनल में पहुंचने की उम्मीद करेंगे. सिलिच हालांकि क्वेरी के खिलाफ अपनी चारों भिड़ंत में जीत चुके हैं, जिसमें 2009, 2012 और 2015 विबंलडन के तीन मैच शामिल हैं. एंडी रॉडिक के 2009 में विबंलडन में उप विजेता रहने के बाद क्वेरी किसी ग्रैंडस्लैम के सेमीफाइनल में पहुंचने वाले पहले अमेरिकी खिलाड़ी हैं. क्वेरी ने कहा, "यह शानदार है. विबंलडन के सेमीफाइनल में पहुंचकर सपना सच हो गया, यह काफी खास है." हालांकि मैच शुरू होने के समय मरे को कोई परेशानी नहीं दिख रही थी. पहले सेट में एंडी मरे ने शानदार खेल दिखाते हुए 2-0 की बढ़त बनायी और दो अनफोर्स्ड गलतियों के बाद इसे अपने नाम कर लिया.टिप्पणियां दूसरे में स्काटलैंड के खिलाड़ी ने 4-3 से बढ़त बना ली, लेकिन क्वेरी ने वापसी करते हुए तीन लगातार गेम से सेट जीतकर बराबरी हासिल की. तीसरे सेट में टाईब्रेक में क्वेरी के लचर खेल से मरे ने वापसी करते हुए 2-1 से बढ़त हासिल कर ली. इसके बाद मरे के मूवमेंट सीमित होते गये, 22 मिनट तक चले चौथे सेट में तीन बार उनकी सर्विस टूटी. पांचवां सेट भी इसी तर्ज पर चला और 27 मिनट में खत्म हुआ जिसमें मरे ने केवल एक अंक अपने नाम किया.(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) दो बार के चैंपियन मरे हाल के दिनों में कूल्हे की समस्या से जूझ रहे हैं. वह इसी के कारण परेशानी में दिखे जिससे उनका मूवमेंट काफी प्रभावित हुआ. उन्होंने कहा, "मुझे लंबे समय से कूल्हे में परेशानी हो रही थी, इसमें सूजन है. लेकिन मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ करने का प्रयास किया. लेकिन हारना निराशाजनक था. मुझे इसका दुख है." क्वेरी अब फाइनल में जगह बनाने के लिए सिलिच से भिड़ेंगे, जिन्होंने भी पहली बार विबंलडन के सेमीफाइनल में जगह बनाई. सिलिच ने जाइल्स मुलर पर 3-6, 7-6 (8/6), 7-5, 5-7, 6-1 से जीत दर्ज की जिन्होंने अंतिम 16 में राफेल नडाल को हराकर टूर्नामेंट से बाहर किया था. दुनिया के छठे नंबर के खिलाड़ी सिलिच विबंलडन में तीन बार खेल चुके हैं जिसमें वह क्वार्टरफाइनल में हार गए थे. लेकिन इस पूर्व अमेरिकी ओपन चैम्पियन ने आखिरकार अंतिम चार में प्रवेश कर लिया और अब वह मेजर टूर्नामेंट के दूसरे फाइनल में पहुंचने की उम्मीद करेंगे. सिलिच हालांकि क्वेरी के खिलाफ अपनी चारों भिड़ंत में जीत चुके हैं, जिसमें 2009, 2012 और 2015 विबंलडन के तीन मैच शामिल हैं. एंडी रॉडिक के 2009 में विबंलडन में उप विजेता रहने के बाद क्वेरी किसी ग्रैंडस्लैम के सेमीफाइनल में पहुंचने वाले पहले अमेरिकी खिलाड़ी हैं. क्वेरी ने कहा, "यह शानदार है. विबंलडन के सेमीफाइनल में पहुंचकर सपना सच हो गया, यह काफी खास है." हालांकि मैच शुरू होने के समय मरे को कोई परेशानी नहीं दिख रही थी. पहले सेट में एंडी मरे ने शानदार खेल दिखाते हुए 2-0 की बढ़त बनायी और दो अनफोर्स्ड गलतियों के बाद इसे अपने नाम कर लिया.टिप्पणियां दूसरे में स्काटलैंड के खिलाड़ी ने 4-3 से बढ़त बना ली, लेकिन क्वेरी ने वापसी करते हुए तीन लगातार गेम से सेट जीतकर बराबरी हासिल की. तीसरे सेट में टाईब्रेक में क्वेरी के लचर खेल से मरे ने वापसी करते हुए 2-1 से बढ़त हासिल कर ली. इसके बाद मरे के मूवमेंट सीमित होते गये, 22 मिनट तक चले चौथे सेट में तीन बार उनकी सर्विस टूटी. पांचवां सेट भी इसी तर्ज पर चला और 27 मिनट में खत्म हुआ जिसमें मरे ने केवल एक अंक अपने नाम किया.(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) दुनिया के छठे नंबर के खिलाड़ी सिलिच विबंलडन में तीन बार खेल चुके हैं जिसमें वह क्वार्टरफाइनल में हार गए थे. लेकिन इस पूर्व अमेरिकी ओपन चैम्पियन ने आखिरकार अंतिम चार में प्रवेश कर लिया और अब वह मेजर टूर्नामेंट के दूसरे फाइनल में पहुंचने की उम्मीद करेंगे. सिलिच हालांकि क्वेरी के खिलाफ अपनी चारों भिड़ंत में जीत चुके हैं, जिसमें 2009, 2012 और 2015 विबंलडन के तीन मैच शामिल हैं. एंडी रॉडिक के 2009 में विबंलडन में उप विजेता रहने के बाद क्वेरी किसी ग्रैंडस्लैम के सेमीफाइनल में पहुंचने वाले पहले अमेरिकी खिलाड़ी हैं. क्वेरी ने कहा, "यह शानदार है. विबंलडन के सेमीफाइनल में पहुंचकर सपना सच हो गया, यह काफी खास है." हालांकि मैच शुरू होने के समय मरे को कोई परेशानी नहीं दिख रही थी. पहले सेट में एंडी मरे ने शानदार खेल दिखाते हुए 2-0 की बढ़त बनायी और दो अनफोर्स्ड गलतियों के बाद इसे अपने नाम कर लिया.टिप्पणियां दूसरे में स्काटलैंड के खिलाड़ी ने 4-3 से बढ़त बना ली, लेकिन क्वेरी ने वापसी करते हुए तीन लगातार गेम से सेट जीतकर बराबरी हासिल की. तीसरे सेट में टाईब्रेक में क्वेरी के लचर खेल से मरे ने वापसी करते हुए 2-1 से बढ़त हासिल कर ली. इसके बाद मरे के मूवमेंट सीमित होते गये, 22 मिनट तक चले चौथे सेट में तीन बार उनकी सर्विस टूटी. पांचवां सेट भी इसी तर्ज पर चला और 27 मिनट में खत्म हुआ जिसमें मरे ने केवल एक अंक अपने नाम किया.(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) सिलिच हालांकि क्वेरी के खिलाफ अपनी चारों भिड़ंत में जीत चुके हैं, जिसमें 2009, 2012 और 2015 विबंलडन के तीन मैच शामिल हैं. एंडी रॉडिक के 2009 में विबंलडन में उप विजेता रहने के बाद क्वेरी किसी ग्रैंडस्लैम के सेमीफाइनल में पहुंचने वाले पहले अमेरिकी खिलाड़ी हैं. क्वेरी ने कहा, "यह शानदार है. विबंलडन के सेमीफाइनल में पहुंचकर सपना सच हो गया, यह काफी खास है." हालांकि मैच शुरू होने के समय मरे को कोई परेशानी नहीं दिख रही थी. पहले सेट में एंडी मरे ने शानदार खेल दिखाते हुए 2-0 की बढ़त बनायी और दो अनफोर्स्ड गलतियों के बाद इसे अपने नाम कर लिया.टिप्पणियां दूसरे में स्काटलैंड के खिलाड़ी ने 4-3 से बढ़त बना ली, लेकिन क्वेरी ने वापसी करते हुए तीन लगातार गेम से सेट जीतकर बराबरी हासिल की. तीसरे सेट में टाईब्रेक में क्वेरी के लचर खेल से मरे ने वापसी करते हुए 2-1 से बढ़त हासिल कर ली. इसके बाद मरे के मूवमेंट सीमित होते गये, 22 मिनट तक चले चौथे सेट में तीन बार उनकी सर्विस टूटी. पांचवां सेट भी इसी तर्ज पर चला और 27 मिनट में खत्म हुआ जिसमें मरे ने केवल एक अंक अपने नाम किया.(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) दूसरे में स्काटलैंड के खिलाड़ी ने 4-3 से बढ़त बना ली, लेकिन क्वेरी ने वापसी करते हुए तीन लगातार गेम से सेट जीतकर बराबरी हासिल की. तीसरे सेट में टाईब्रेक में क्वेरी के लचर खेल से मरे ने वापसी करते हुए 2-1 से बढ़त हासिल कर ली. इसके बाद मरे के मूवमेंट सीमित होते गये, 22 मिनट तक चले चौथे सेट में तीन बार उनकी सर्विस टूटी. पांचवां सेट भी इसी तर्ज पर चला और 27 मिनट में खत्म हुआ जिसमें मरे ने केवल एक अंक अपने नाम किया.(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
संक्षिप्त सारांश: सैम कुर्रे ने क्वार्टरफाइनल में उलटफेर करते हुए मर्रे को हराया टूर्नामेंट क्वे सेमीफाइनल में कुर्रे की मारिन सिलिच से होगी भिड़ंत कुर्रे ने मर्रे को 3-6, 6-4, 6-7 (4/7), 6-1, 6-1 से हराया
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['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: अंतरराष्ट्रीय सुपरमॉडल केट मॉस, गर्ट एल्फरिंग द्वारा आयोजित 'द केट मॉस कलैक्शन' प्रदर्शनी में शिरकत करने के लिए भारत दौरे पर आएंगी। एक बयान के मुताबिक, इस प्रदर्शनी में विश्वभर के चर्चित फोटोग्राफर और कलाकारों द्वारा बनाई गई उनकी आकृति और लगभग 50 फोटो प्रदर्शित की जाएगी। इसमें अल्बर्ट वाट्सन, निक नाइट और मर्ट एंड मार्कस, एलेन जोन्स, डिनो और जैक चैपमन का काम शामिल किया जाएगा। चार दिन चलने वाली प्रदर्शनी 25 अप्रैल को इम्पीरियल में आयोजित की जाएगी और इसके बाद बॉलीवुड अभिनेता अर्जुन रामपाल के आलीशान नाइटक्लब 'एलएपी' में दावत दी जाएगी।टिप्पणियां बयान के मुताबिक मॉस, एल्फ्रिंग के साथ प्रदर्शनी के अलावा दावत में भी हिस्सा लेंगी। दावत कार्यक्रम को लेकर अर्जुन बेहद उत्साहित हैं और उन्होंने कहा, "मॉस और एल्फेरिंग की दावत की मेजबानी करना बेहद उत्साहपूर्ण है जो भारत में एक बेहतरीन कार्यक्रम का आयोजन कर रहे हैं। फैशन और कला का संगम हो रहा है और यह 'एलएपी' के लिए बिल्कुल उपयुक्त है।" एक बयान के मुताबिक, इस प्रदर्शनी में विश्वभर के चर्चित फोटोग्राफर और कलाकारों द्वारा बनाई गई उनकी आकृति और लगभग 50 फोटो प्रदर्शित की जाएगी। इसमें अल्बर्ट वाट्सन, निक नाइट और मर्ट एंड मार्कस, एलेन जोन्स, डिनो और जैक चैपमन का काम शामिल किया जाएगा। चार दिन चलने वाली प्रदर्शनी 25 अप्रैल को इम्पीरियल में आयोजित की जाएगी और इसके बाद बॉलीवुड अभिनेता अर्जुन रामपाल के आलीशान नाइटक्लब 'एलएपी' में दावत दी जाएगी।टिप्पणियां बयान के मुताबिक मॉस, एल्फ्रिंग के साथ प्रदर्शनी के अलावा दावत में भी हिस्सा लेंगी। दावत कार्यक्रम को लेकर अर्जुन बेहद उत्साहित हैं और उन्होंने कहा, "मॉस और एल्फेरिंग की दावत की मेजबानी करना बेहद उत्साहपूर्ण है जो भारत में एक बेहतरीन कार्यक्रम का आयोजन कर रहे हैं। फैशन और कला का संगम हो रहा है और यह 'एलएपी' के लिए बिल्कुल उपयुक्त है।" इसमें अल्बर्ट वाट्सन, निक नाइट और मर्ट एंड मार्कस, एलेन जोन्स, डिनो और जैक चैपमन का काम शामिल किया जाएगा। चार दिन चलने वाली प्रदर्शनी 25 अप्रैल को इम्पीरियल में आयोजित की जाएगी और इसके बाद बॉलीवुड अभिनेता अर्जुन रामपाल के आलीशान नाइटक्लब 'एलएपी' में दावत दी जाएगी।टिप्पणियां बयान के मुताबिक मॉस, एल्फ्रिंग के साथ प्रदर्शनी के अलावा दावत में भी हिस्सा लेंगी। दावत कार्यक्रम को लेकर अर्जुन बेहद उत्साहित हैं और उन्होंने कहा, "मॉस और एल्फेरिंग की दावत की मेजबानी करना बेहद उत्साहपूर्ण है जो भारत में एक बेहतरीन कार्यक्रम का आयोजन कर रहे हैं। फैशन और कला का संगम हो रहा है और यह 'एलएपी' के लिए बिल्कुल उपयुक्त है।" चार दिन चलने वाली प्रदर्शनी 25 अप्रैल को इम्पीरियल में आयोजित की जाएगी और इसके बाद बॉलीवुड अभिनेता अर्जुन रामपाल के आलीशान नाइटक्लब 'एलएपी' में दावत दी जाएगी।टिप्पणियां बयान के मुताबिक मॉस, एल्फ्रिंग के साथ प्रदर्शनी के अलावा दावत में भी हिस्सा लेंगी। दावत कार्यक्रम को लेकर अर्जुन बेहद उत्साहित हैं और उन्होंने कहा, "मॉस और एल्फेरिंग की दावत की मेजबानी करना बेहद उत्साहपूर्ण है जो भारत में एक बेहतरीन कार्यक्रम का आयोजन कर रहे हैं। फैशन और कला का संगम हो रहा है और यह 'एलएपी' के लिए बिल्कुल उपयुक्त है।" बयान के मुताबिक मॉस, एल्फ्रिंग के साथ प्रदर्शनी के अलावा दावत में भी हिस्सा लेंगी। दावत कार्यक्रम को लेकर अर्जुन बेहद उत्साहित हैं और उन्होंने कहा, "मॉस और एल्फेरिंग की दावत की मेजबानी करना बेहद उत्साहपूर्ण है जो भारत में एक बेहतरीन कार्यक्रम का आयोजन कर रहे हैं। फैशन और कला का संगम हो रहा है और यह 'एलएपी' के लिए बिल्कुल उपयुक्त है।" दावत कार्यक्रम को लेकर अर्जुन बेहद उत्साहित हैं और उन्होंने कहा, "मॉस और एल्फेरिंग की दावत की मेजबानी करना बेहद उत्साहपूर्ण है जो भारत में एक बेहतरीन कार्यक्रम का आयोजन कर रहे हैं। फैशन और कला का संगम हो रहा है और यह 'एलएपी' के लिए बिल्कुल उपयुक्त है।"
अंतरराष्ट्रीय सुपरमॉडल केट मॉस, गर्ट एल्फरिंग द्वारा आयोजित 'द केट मॉस कलैक्शन' प्रदर्शनी में शिरकत करने के लिए भारत दौरे पर आएंगी।
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['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: हरियाणा सरकार ने राबर्ट वाड्रा एवं डीएलएफ को लेकर अरविंद केजरीवाल द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया। केजरीवाल ने कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर कायम रहते हुए मंगलवार को हरियाणा सरकार को लपेटे में लिया और उसे डीएलएफ के एजेंट की संज्ञा दे डाली। उन्होंने हरियाणा सरकार से डीएलएफ को लाभ पहुंचाए जाने के विषय में श्वेत पत्र लाने की भी मांग की।टिप्पणियां केजरीवाल के आरोपों पर सफाई देते हुए हरियाणा टाउन प्लानिंग के निदेशक टीसी गुप्ता ने मंगलवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "हरियाणा सरकार ने डीएलएफ की कोई मदद नहीं की। केजरीवाल ने हरियाणा सरकार पर डीएलएफ को फ्लोर एरिया रेशियो बढ़ाने की गैर वाजिब अनुमति देने का आरोप लगाया था।" उन्होंने कहा कि घनत्व इसलिए बढ़ गया क्योंकि जमीन को हेक्टेयर से एकड़ में बदल दिया गया। गुप्ता ने गुड़गांव की 30 एकड़ वाली अस्पताल की भूमि को डीएलएफ को देने के केजरीवाल के आरोप को झूठा बताया। उनके मुताबिक यह सरकार की भूमि नहीं थी और इसे 16 साल पहले ही डीएलएफ को बेच दिया गया था। उन्होंने कहा, "गुड़गांव में 37 एकड़ भूमि ईस्ट इंडिया होटल्स को 1984 में अस्पताल बनाने के लिए दी गई थी। कम्पनी ने हरियाणा सरकार की अनुमति से इसमें से 30 एकड़ भूमि डीएलएफ को 1995 में बेच दी थी।" केजरीवाल ने कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर कायम रहते हुए मंगलवार को हरियाणा सरकार को लपेटे में लिया और उसे डीएलएफ के एजेंट की संज्ञा दे डाली। उन्होंने हरियाणा सरकार से डीएलएफ को लाभ पहुंचाए जाने के विषय में श्वेत पत्र लाने की भी मांग की।टिप्पणियां केजरीवाल के आरोपों पर सफाई देते हुए हरियाणा टाउन प्लानिंग के निदेशक टीसी गुप्ता ने मंगलवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "हरियाणा सरकार ने डीएलएफ की कोई मदद नहीं की। केजरीवाल ने हरियाणा सरकार पर डीएलएफ को फ्लोर एरिया रेशियो बढ़ाने की गैर वाजिब अनुमति देने का आरोप लगाया था।" उन्होंने कहा कि घनत्व इसलिए बढ़ गया क्योंकि जमीन को हेक्टेयर से एकड़ में बदल दिया गया। गुप्ता ने गुड़गांव की 30 एकड़ वाली अस्पताल की भूमि को डीएलएफ को देने के केजरीवाल के आरोप को झूठा बताया। उनके मुताबिक यह सरकार की भूमि नहीं थी और इसे 16 साल पहले ही डीएलएफ को बेच दिया गया था। उन्होंने कहा, "गुड़गांव में 37 एकड़ भूमि ईस्ट इंडिया होटल्स को 1984 में अस्पताल बनाने के लिए दी गई थी। कम्पनी ने हरियाणा सरकार की अनुमति से इसमें से 30 एकड़ भूमि डीएलएफ को 1995 में बेच दी थी।" केजरीवाल के आरोपों पर सफाई देते हुए हरियाणा टाउन प्लानिंग के निदेशक टीसी गुप्ता ने मंगलवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "हरियाणा सरकार ने डीएलएफ की कोई मदद नहीं की। केजरीवाल ने हरियाणा सरकार पर डीएलएफ को फ्लोर एरिया रेशियो बढ़ाने की गैर वाजिब अनुमति देने का आरोप लगाया था।" उन्होंने कहा कि घनत्व इसलिए बढ़ गया क्योंकि जमीन को हेक्टेयर से एकड़ में बदल दिया गया। गुप्ता ने गुड़गांव की 30 एकड़ वाली अस्पताल की भूमि को डीएलएफ को देने के केजरीवाल के आरोप को झूठा बताया। उनके मुताबिक यह सरकार की भूमि नहीं थी और इसे 16 साल पहले ही डीएलएफ को बेच दिया गया था। उन्होंने कहा, "गुड़गांव में 37 एकड़ भूमि ईस्ट इंडिया होटल्स को 1984 में अस्पताल बनाने के लिए दी गई थी। कम्पनी ने हरियाणा सरकार की अनुमति से इसमें से 30 एकड़ भूमि डीएलएफ को 1995 में बेच दी थी।" गुप्ता ने गुड़गांव की 30 एकड़ वाली अस्पताल की भूमि को डीएलएफ को देने के केजरीवाल के आरोप को झूठा बताया। उनके मुताबिक यह सरकार की भूमि नहीं थी और इसे 16 साल पहले ही डीएलएफ को बेच दिया गया था। उन्होंने कहा, "गुड़गांव में 37 एकड़ भूमि ईस्ट इंडिया होटल्स को 1984 में अस्पताल बनाने के लिए दी गई थी। कम्पनी ने हरियाणा सरकार की अनुमति से इसमें से 30 एकड़ भूमि डीएलएफ को 1995 में बेच दी थी।"
सारांश: हरियाणा सरकार ने राबर्ट वाड्रा एवं डीएलएफ को लेकर अरविंद केजरीवाल द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया।
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एक सारांश बनाओ: ऐसी शिकायतें मिली थीं कि मुंबई महानगरपालिका चुनाव में लाखों लोग अपने मताधिकार का इस्तेमाल नहीं कर पाए. जहां विपक्षी दलों को इसमें सियासी साजिश नज़र आ रही है, वहीं महाराष्ट्र चुनाव आयोग ने कहा कि उसने कोई फेरबदल नहीं किया है. केंद्रीय चुनाव आयोग की सूची को जस का तस रखा है. कई मतदाताओं ने भी इस मुद्दे पर नाराज़गी ज़ाहिर की लेकिन जब मतदाता सूची को लेकर शिकायत दर्ज कराने की बात आई तो सिर्फ 63 लोग अब तक महानगरपालिका चुनाव कार्यालय पहुंचे हैं, यह जानकारी सूचना के अधिकार के तहत मिली है। मुंबई महानगरपालिका चुनाव के दौरान इस बार वोटिंग का रिकॉर्ड टूटा था, मतदान में लगभग 11 फीसदी का इजाफा हुआ था. 92 लाख मतदाताओं में से 56 फीसदी ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया. हालांकि इस दौरान यह शिकायत भी आई कि 11 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से गायब थे. क्या आम और क्या खास, सभी ने मतदाता सूची में नाम न मिलने की शिकायत की. बॉलीवुड एक्‍टर वरुण धवन ने भी कहा था कि उन्होंने पिछले साल वोट दिया था लेकिन इस साल उनका नाम गायब है. वे इसकी शिकायत करेंगे. लेकिन जब महानगरपालिका के चुनावी कार्यालय में शिकायत करने की बात आई तो पहुंचे सिर्फ 63 लोग, आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली की अर्जी पर मुंबई महानगरपालिका चुनाव आयोग ने उन्हें ये जानकारी दी. गलगली का कहना है "साल 2012 में कुल वोटरों की तादाद 1,02,86,579 थी जबकि 2017 में 91,80,555 साल.  2012 की तुलना में 2017 में 11 लाख 24 हज़ार वोटरों के नाम नदारद थे.  राजनीतिक दलों का आरोप है कि 7000 से ज्यादा बूथों में से हर एक में औसतन 100 मतदाताओं के नाम गायब थे. कई राजनीतिक दलों ने महाराष्ट्र चुनाव आयोग में इसकी शिकायत भी की लेकिन अब शिकायत करने वाले गायब हैं. साफ है क‍ि मुंबई जैसे महानगर में मतदाता अब भी अपने अधिकारों को लेकर जागरूक नहीं हैं. मुंबई महानगरपालिका चुनाव के दौरान इस बार वोटिंग का रिकॉर्ड टूटा था, मतदान में लगभग 11 फीसदी का इजाफा हुआ था. 92 लाख मतदाताओं में से 56 फीसदी ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया. हालांकि इस दौरान यह शिकायत भी आई कि 11 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से गायब थे. क्या आम और क्या खास, सभी ने मतदाता सूची में नाम न मिलने की शिकायत की. बॉलीवुड एक्‍टर वरुण धवन ने भी कहा था कि उन्होंने पिछले साल वोट दिया था लेकिन इस साल उनका नाम गायब है. वे इसकी शिकायत करेंगे. लेकिन जब महानगरपालिका के चुनावी कार्यालय में शिकायत करने की बात आई तो पहुंचे सिर्फ 63 लोग, आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली की अर्जी पर मुंबई महानगरपालिका चुनाव आयोग ने उन्हें ये जानकारी दी. गलगली का कहना है "साल 2012 में कुल वोटरों की तादाद 1,02,86,579 थी जबकि 2017 में 91,80,555 साल.  2012 की तुलना में 2017 में 11 लाख 24 हज़ार वोटरों के नाम नदारद थे.  राजनीतिक दलों का आरोप है कि 7000 से ज्यादा बूथों में से हर एक में औसतन 100 मतदाताओं के नाम गायब थे. कई राजनीतिक दलों ने महाराष्ट्र चुनाव आयोग में इसकी शिकायत भी की लेकिन अब शिकायत करने वाले गायब हैं. साफ है क‍ि मुंबई जैसे महानगर में मतदाता अब भी अपने अधिकारों को लेकर जागरूक नहीं हैं.
संक्षिप्त पाठ: आरटीआई के तहत मिली जानकारी में हुआ खुलासा विपक्षी दलों ने इस मामले में साजिश की आशंका जताई थी एमसीडी चुनाव में इस बार वोटिंग का रिकॉर्ड टूटा था
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['hin']