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दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: अरविंद केजरीवाल के प्रदर्शन को लेकर पांच मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें दंगा फैलाने का मामला भी दर्ज किया गया है। केजरीवाल और उनके समर्थक कोयला आवंटन को लेकर पीएम, सोनिया और गडकरी के घर का घेराव करने निकले थे। इस प्रदर्शन में केजरीवाल समर्थकों की पुलिस से झड़प भी हुई और लाठीचार्ज भी हुआ। केजरीवाल और उनके सहयोगियों को हिरासत में भी लिया गया। अब पुलिस तोड़-फोड़ का वीडियो फुटेज देख रही है जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी हो सकती है। इससे पहले टीम अन्ना पर कभी मामला दर्ज नहीं हुआ है। ध्यान रहे, गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की अनुपस्थिति में अरविंद केजरीवाल ने रविवार को दिल्ली सहित देशभर के कई राज्यों में शक्ति प्रदर्शन किया। उनके नेतृत्व में भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास के पास जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और पानी की बौछारें करनी पड़ी। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान केजरीवाल और किरन बेदी के बीच मतभेद भी खुलकर सामने आए। किरन जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ प्रदर्शन के विरोध में थीं वहीं केजरीवाल कांग्रेस के साथ भाजपा पर भी हमला करने से नहीं चूके। केजरीवाल ने यहां तक तक कह दिया कि देश में विपक्ष है ही नहीं। कांग्रेस और भाजपा दोनों भ्रष्टाचार में लिप्त हैं जबकि बेदी का भाजपा के प्रति रुख थोड़ा नरम रहा। हालांकि बेदी ने बाद में इस आरोप को खारिज भी किया। उन्होंने यह भी कहा कि आईएसी एकाएक देश के लिए विकल्प नहीं हो सकता। छिटपुट तरीके से शुरू हुए केजरीवाल व उनके सहयोगियों के इस विरोध प्रदर्शन ने दोपहर बाद चमत्कारिक ढंग से विकराल रूप धारण कर लिया। इंडिया अगेंस्ट करप्शन (आईएसी) के कार्यकर्ताओं की इतनी बड़ी संख्या देख पुलिस दंग रह गई। ये कार्यकर्ता मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी और भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी के आवास का घेराव करने की अपनी घोषणा को अमली जामा पहनाने निकले थे। गडकरी के आवास के आसपास का क्षेत्र जहां अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण था, वहीं सोनिया के 10 जनपथ और प्रधानमंत्री के सात रेसकोर्स मार्ग स्थित आवास के पास जोरदार शक्ति प्रदर्शन हुआ। जब घंटों चले नाटक के बाद नारेबाजी करते हुए प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड तोड़ दिए तो पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछारें छोड़ी और आंसू गैस के गोले दागे। केजरीवाल और अधिवक्ता व आईएसी नेता प्रशांत भूषण ने पुलिस पर आरोप लगाया कि उसने बगैर किसी उकसावे के बल प्रयोग किया। भूषण ने एक बस के अंदर से कहा, "यह सब करने की कोई आवश्यकता नहीं थी। उन्होंने अनावश्यक रूप से पानी की बौछारों और आंसू गैस का प्रयोग किया।" केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन को सफल बताया और कहा कि आईएसी इस मुद्दे को घर-घर तक पहुंचाने में सफल रही है कि कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले के लिए कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), दोनों जिम्मेदार हैं। केजरीवाल ने उत्साही भीड़ को सम्बोधित करते हुए कहा, "हमने सरकार के असली चेहरे को बेनकाब किया है। हमने बताया है कि कांग्रेस और भाजपा ने इस देश को लूटा है।" विरोध प्रदर्शन शुरू होने के सात घंटे से अधिक समय बाद लगभग 2.30 बजे केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन समाप्त करने की घोषणा की। पुलिस ने यह कहते हुए बल प्रयोग को जायज ठहराया कि वीआईपी इलाकों में आईएसी का विरोध प्रदर्शन अनधिकृत था। इसके पहले, रविवार तड़के पुलिस ने केजरीवाल और छह अन्य कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया था, लेकिन थाने के बाहर जब सैकड़ों समर्थकों ने जुटकर नारेबाजी शुरू की तो लगभग दो घंटे बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। केजरीवाल को मनमोहन सिंह के आवास के करीब एक पुलिस बैरिकेड के पास दो अन्य सहयोगियों के साथ रोक दिया गया था। आईएसी के अन्य नेता, मनीष सिसोदिया को सहयोगियों के साथ 10 जनपथ के बाहर हिरासत में ले लिया गया था। आईएसी के एक प्रवक्ता ने कहा, "हिरासत में लिए गए कुछ कार्यकर्ताओं के साथ हाथापाई की गई।" पूरे समूह को जब रिहा कर दिया गया तो केजरीवाल और अन्य कार्यकर्ता जंतर मंतर पहुंचे और मनमोहन सिंह के आवास पर दोबारा लौटने का संकल्प लिया, जिसे उन्होंने पूरा किया। केजरीवाल ने सवाल किया कि सरकार आखिर उन्हें क्यों रोक रही है। केजरीवाल ने कहा, "हमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन से आखिर क्यों रोका जा रहा है? कांग्रेस और भाजपा इतने विरोध प्रदर्शन करती है। उन्हें कभी नहीं रोका जाता। जब राज ठाकरे बगैर पुलिस अनुमति के रैली आयोजित करते हैं, हजारों लोग उसमें हिस्सा लेते हैं, तब उन्हें नहीं रोका जाता, अलबत्ता उन्हें पुलिस सुरक्षा दी जाती है। यदि हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हैं तो फिर हमें क्यों हिरासत में लिया जाता है?" दोपहर तक सैकड़ों कार्यकर्ता हाथों में राष्ट्रध्वज लिए प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष के आवास की ओर बढ़े। इसे देखकर मुट्ठीभर पुलिसकर्मी दंग रह गए। केजरीवाल जहां मनमोहन सिंह के आवास के पास थे, तो भूषण सोनिया के आवास के पास। एक समय पुलिस ने कार्यकर्ताओं को पीछे धकेलने की कोशिश की, जिसके बाद दोनों पक्षों में टकराव की नौबत आ गई। भीड़ 'हल्ला बोल' और 'वी वांट जस्टिस' का नारा लगाते हुए आगे बढ़ने की कोशिश कर रही थी।टिप्पणियां केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन को लम्बे समय तक जारी रखने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा, "यदि वे यह सोचते हैं कि वे भ्रष्टाचार करते रहेंगे तो हम भी विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। हम निश्चिततौर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह हमारी क्रांति है।" एक चकित करने वाले कदम के तहत दिल्ली मेट्रो ने घोषणा की कि वे सभी छह स्टेशन खुले रहेंगे, जिन्हें विरोध प्रदर्शन को नाकाम करने के क्रम में रविवार को सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक बंद रखने की घोषणा की गई थी। केजरीवाल और उनके समर्थक कोयला आवंटन को लेकर पीएम, सोनिया और गडकरी के घर का घेराव करने निकले थे। इस प्रदर्शन में केजरीवाल समर्थकों की पुलिस से झड़प भी हुई और लाठीचार्ज भी हुआ। केजरीवाल और उनके सहयोगियों को हिरासत में भी लिया गया। अब पुलिस तोड़-फोड़ का वीडियो फुटेज देख रही है जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी हो सकती है। इससे पहले टीम अन्ना पर कभी मामला दर्ज नहीं हुआ है। ध्यान रहे, गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की अनुपस्थिति में अरविंद केजरीवाल ने रविवार को दिल्ली सहित देशभर के कई राज्यों में शक्ति प्रदर्शन किया। उनके नेतृत्व में भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास के पास जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और पानी की बौछारें करनी पड़ी। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान केजरीवाल और किरन बेदी के बीच मतभेद भी खुलकर सामने आए। किरन जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ प्रदर्शन के विरोध में थीं वहीं केजरीवाल कांग्रेस के साथ भाजपा पर भी हमला करने से नहीं चूके। केजरीवाल ने यहां तक तक कह दिया कि देश में विपक्ष है ही नहीं। कांग्रेस और भाजपा दोनों भ्रष्टाचार में लिप्त हैं जबकि बेदी का भाजपा के प्रति रुख थोड़ा नरम रहा। हालांकि बेदी ने बाद में इस आरोप को खारिज भी किया। उन्होंने यह भी कहा कि आईएसी एकाएक देश के लिए विकल्प नहीं हो सकता। छिटपुट तरीके से शुरू हुए केजरीवाल व उनके सहयोगियों के इस विरोध प्रदर्शन ने दोपहर बाद चमत्कारिक ढंग से विकराल रूप धारण कर लिया। इंडिया अगेंस्ट करप्शन (आईएसी) के कार्यकर्ताओं की इतनी बड़ी संख्या देख पुलिस दंग रह गई। ये कार्यकर्ता मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी और भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी के आवास का घेराव करने की अपनी घोषणा को अमली जामा पहनाने निकले थे। गडकरी के आवास के आसपास का क्षेत्र जहां अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण था, वहीं सोनिया के 10 जनपथ और प्रधानमंत्री के सात रेसकोर्स मार्ग स्थित आवास के पास जोरदार शक्ति प्रदर्शन हुआ। जब घंटों चले नाटक के बाद नारेबाजी करते हुए प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड तोड़ दिए तो पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछारें छोड़ी और आंसू गैस के गोले दागे। केजरीवाल और अधिवक्ता व आईएसी नेता प्रशांत भूषण ने पुलिस पर आरोप लगाया कि उसने बगैर किसी उकसावे के बल प्रयोग किया। भूषण ने एक बस के अंदर से कहा, "यह सब करने की कोई आवश्यकता नहीं थी। उन्होंने अनावश्यक रूप से पानी की बौछारों और आंसू गैस का प्रयोग किया।" केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन को सफल बताया और कहा कि आईएसी इस मुद्दे को घर-घर तक पहुंचाने में सफल रही है कि कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले के लिए कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), दोनों जिम्मेदार हैं। केजरीवाल ने उत्साही भीड़ को सम्बोधित करते हुए कहा, "हमने सरकार के असली चेहरे को बेनकाब किया है। हमने बताया है कि कांग्रेस और भाजपा ने इस देश को लूटा है।" विरोध प्रदर्शन शुरू होने के सात घंटे से अधिक समय बाद लगभग 2.30 बजे केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन समाप्त करने की घोषणा की। पुलिस ने यह कहते हुए बल प्रयोग को जायज ठहराया कि वीआईपी इलाकों में आईएसी का विरोध प्रदर्शन अनधिकृत था। इसके पहले, रविवार तड़के पुलिस ने केजरीवाल और छह अन्य कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया था, लेकिन थाने के बाहर जब सैकड़ों समर्थकों ने जुटकर नारेबाजी शुरू की तो लगभग दो घंटे बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। केजरीवाल को मनमोहन सिंह के आवास के करीब एक पुलिस बैरिकेड के पास दो अन्य सहयोगियों के साथ रोक दिया गया था। आईएसी के अन्य नेता, मनीष सिसोदिया को सहयोगियों के साथ 10 जनपथ के बाहर हिरासत में ले लिया गया था। आईएसी के एक प्रवक्ता ने कहा, "हिरासत में लिए गए कुछ कार्यकर्ताओं के साथ हाथापाई की गई।" पूरे समूह को जब रिहा कर दिया गया तो केजरीवाल और अन्य कार्यकर्ता जंतर मंतर पहुंचे और मनमोहन सिंह के आवास पर दोबारा लौटने का संकल्प लिया, जिसे उन्होंने पूरा किया। केजरीवाल ने सवाल किया कि सरकार आखिर उन्हें क्यों रोक रही है। केजरीवाल ने कहा, "हमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन से आखिर क्यों रोका जा रहा है? कांग्रेस और भाजपा इतने विरोध प्रदर्शन करती है। उन्हें कभी नहीं रोका जाता। जब राज ठाकरे बगैर पुलिस अनुमति के रैली आयोजित करते हैं, हजारों लोग उसमें हिस्सा लेते हैं, तब उन्हें नहीं रोका जाता, अलबत्ता उन्हें पुलिस सुरक्षा दी जाती है। यदि हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हैं तो फिर हमें क्यों हिरासत में लिया जाता है?" दोपहर तक सैकड़ों कार्यकर्ता हाथों में राष्ट्रध्वज लिए प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष के आवास की ओर बढ़े। इसे देखकर मुट्ठीभर पुलिसकर्मी दंग रह गए। केजरीवाल जहां मनमोहन सिंह के आवास के पास थे, तो भूषण सोनिया के आवास के पास। एक समय पुलिस ने कार्यकर्ताओं को पीछे धकेलने की कोशिश की, जिसके बाद दोनों पक्षों में टकराव की नौबत आ गई। भीड़ 'हल्ला बोल' और 'वी वांट जस्टिस' का नारा लगाते हुए आगे बढ़ने की कोशिश कर रही थी।टिप्पणियां केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन को लम्बे समय तक जारी रखने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा, "यदि वे यह सोचते हैं कि वे भ्रष्टाचार करते रहेंगे तो हम भी विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। हम निश्चिततौर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह हमारी क्रांति है।" एक चकित करने वाले कदम के तहत दिल्ली मेट्रो ने घोषणा की कि वे सभी छह स्टेशन खुले रहेंगे, जिन्हें विरोध प्रदर्शन को नाकाम करने के क्रम में रविवार को सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक बंद रखने की घोषणा की गई थी। इस प्रदर्शन में केजरीवाल समर्थकों की पुलिस से झड़प भी हुई और लाठीचार्ज भी हुआ। केजरीवाल और उनके सहयोगियों को हिरासत में भी लिया गया। अब पुलिस तोड़-फोड़ का वीडियो फुटेज देख रही है जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी हो सकती है। इससे पहले टीम अन्ना पर कभी मामला दर्ज नहीं हुआ है। ध्यान रहे, गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की अनुपस्थिति में अरविंद केजरीवाल ने रविवार को दिल्ली सहित देशभर के कई राज्यों में शक्ति प्रदर्शन किया। उनके नेतृत्व में भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास के पास जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और पानी की बौछारें करनी पड़ी। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान केजरीवाल और किरन बेदी के बीच मतभेद भी खुलकर सामने आए। किरन जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ प्रदर्शन के विरोध में थीं वहीं केजरीवाल कांग्रेस के साथ भाजपा पर भी हमला करने से नहीं चूके। केजरीवाल ने यहां तक तक कह दिया कि देश में विपक्ष है ही नहीं। कांग्रेस और भाजपा दोनों भ्रष्टाचार में लिप्त हैं जबकि बेदी का भाजपा के प्रति रुख थोड़ा नरम रहा। हालांकि बेदी ने बाद में इस आरोप को खारिज भी किया। उन्होंने यह भी कहा कि आईएसी एकाएक देश के लिए विकल्प नहीं हो सकता। छिटपुट तरीके से शुरू हुए केजरीवाल व उनके सहयोगियों के इस विरोध प्रदर्शन ने दोपहर बाद चमत्कारिक ढंग से विकराल रूप धारण कर लिया। इंडिया अगेंस्ट करप्शन (आईएसी) के कार्यकर्ताओं की इतनी बड़ी संख्या देख पुलिस दंग रह गई। ये कार्यकर्ता मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी और भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी के आवास का घेराव करने की अपनी घोषणा को अमली जामा पहनाने निकले थे। गडकरी के आवास के आसपास का क्षेत्र जहां अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण था, वहीं सोनिया के 10 जनपथ और प्रधानमंत्री के सात रेसकोर्स मार्ग स्थित आवास के पास जोरदार शक्ति प्रदर्शन हुआ। जब घंटों चले नाटक के बाद नारेबाजी करते हुए प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड तोड़ दिए तो पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछारें छोड़ी और आंसू गैस के गोले दागे। केजरीवाल और अधिवक्ता व आईएसी नेता प्रशांत भूषण ने पुलिस पर आरोप लगाया कि उसने बगैर किसी उकसावे के बल प्रयोग किया। भूषण ने एक बस के अंदर से कहा, "यह सब करने की कोई आवश्यकता नहीं थी। उन्होंने अनावश्यक रूप से पानी की बौछारों और आंसू गैस का प्रयोग किया।" केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन को सफल बताया और कहा कि आईएसी इस मुद्दे को घर-घर तक पहुंचाने में सफल रही है कि कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले के लिए कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), दोनों जिम्मेदार हैं। केजरीवाल ने उत्साही भीड़ को सम्बोधित करते हुए कहा, "हमने सरकार के असली चेहरे को बेनकाब किया है। हमने बताया है कि कांग्रेस और भाजपा ने इस देश को लूटा है।" विरोध प्रदर्शन शुरू होने के सात घंटे से अधिक समय बाद लगभग 2.30 बजे केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन समाप्त करने की घोषणा की। पुलिस ने यह कहते हुए बल प्रयोग को जायज ठहराया कि वीआईपी इलाकों में आईएसी का विरोध प्रदर्शन अनधिकृत था। इसके पहले, रविवार तड़के पुलिस ने केजरीवाल और छह अन्य कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया था, लेकिन थाने के बाहर जब सैकड़ों समर्थकों ने जुटकर नारेबाजी शुरू की तो लगभग दो घंटे बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। केजरीवाल को मनमोहन सिंह के आवास के करीब एक पुलिस बैरिकेड के पास दो अन्य सहयोगियों के साथ रोक दिया गया था। आईएसी के अन्य नेता, मनीष सिसोदिया को सहयोगियों के साथ 10 जनपथ के बाहर हिरासत में ले लिया गया था। आईएसी के एक प्रवक्ता ने कहा, "हिरासत में लिए गए कुछ कार्यकर्ताओं के साथ हाथापाई की गई।" पूरे समूह को जब रिहा कर दिया गया तो केजरीवाल और अन्य कार्यकर्ता जंतर मंतर पहुंचे और मनमोहन सिंह के आवास पर दोबारा लौटने का संकल्प लिया, जिसे उन्होंने पूरा किया। केजरीवाल ने सवाल किया कि सरकार आखिर उन्हें क्यों रोक रही है। केजरीवाल ने कहा, "हमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन से आखिर क्यों रोका जा रहा है? कांग्रेस और भाजपा इतने विरोध प्रदर्शन करती है। उन्हें कभी नहीं रोका जाता। जब राज ठाकरे बगैर पुलिस अनुमति के रैली आयोजित करते हैं, हजारों लोग उसमें हिस्सा लेते हैं, तब उन्हें नहीं रोका जाता, अलबत्ता उन्हें पुलिस सुरक्षा दी जाती है। यदि हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हैं तो फिर हमें क्यों हिरासत में लिया जाता है?" दोपहर तक सैकड़ों कार्यकर्ता हाथों में राष्ट्रध्वज लिए प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष के आवास की ओर बढ़े। इसे देखकर मुट्ठीभर पुलिसकर्मी दंग रह गए। केजरीवाल जहां मनमोहन सिंह के आवास के पास थे, तो भूषण सोनिया के आवास के पास। एक समय पुलिस ने कार्यकर्ताओं को पीछे धकेलने की कोशिश की, जिसके बाद दोनों पक्षों में टकराव की नौबत आ गई। भीड़ 'हल्ला बोल' और 'वी वांट जस्टिस' का नारा लगाते हुए आगे बढ़ने की कोशिश कर रही थी।टिप्पणियां केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन को लम्बे समय तक जारी रखने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा, "यदि वे यह सोचते हैं कि वे भ्रष्टाचार करते रहेंगे तो हम भी विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। हम निश्चिततौर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह हमारी क्रांति है।" एक चकित करने वाले कदम के तहत दिल्ली मेट्रो ने घोषणा की कि वे सभी छह स्टेशन खुले रहेंगे, जिन्हें विरोध प्रदर्शन को नाकाम करने के क्रम में रविवार को सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक बंद रखने की घोषणा की गई थी। केजरीवाल और उनके सहयोगियों को हिरासत में भी लिया गया। अब पुलिस तोड़-फोड़ का वीडियो फुटेज देख रही है जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी हो सकती है। इससे पहले टीम अन्ना पर कभी मामला दर्ज नहीं हुआ है। ध्यान रहे, गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की अनुपस्थिति में अरविंद केजरीवाल ने रविवार को दिल्ली सहित देशभर के कई राज्यों में शक्ति प्रदर्शन किया। उनके नेतृत्व में भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास के पास जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और पानी की बौछारें करनी पड़ी। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान केजरीवाल और किरन बेदी के बीच मतभेद भी खुलकर सामने आए। किरन जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ प्रदर्शन के विरोध में थीं वहीं केजरीवाल कांग्रेस के साथ भाजपा पर भी हमला करने से नहीं चूके। केजरीवाल ने यहां तक तक कह दिया कि देश में विपक्ष है ही नहीं। कांग्रेस और भाजपा दोनों भ्रष्टाचार में लिप्त हैं जबकि बेदी का भाजपा के प्रति रुख थोड़ा नरम रहा। हालांकि बेदी ने बाद में इस आरोप को खारिज भी किया। उन्होंने यह भी कहा कि आईएसी एकाएक देश के लिए विकल्प नहीं हो सकता। छिटपुट तरीके से शुरू हुए केजरीवाल व उनके सहयोगियों के इस विरोध प्रदर्शन ने दोपहर बाद चमत्कारिक ढंग से विकराल रूप धारण कर लिया। इंडिया अगेंस्ट करप्शन (आईएसी) के कार्यकर्ताओं की इतनी बड़ी संख्या देख पुलिस दंग रह गई। ये कार्यकर्ता मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी और भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी के आवास का घेराव करने की अपनी घोषणा को अमली जामा पहनाने निकले थे। गडकरी के आवास के आसपास का क्षेत्र जहां अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण था, वहीं सोनिया के 10 जनपथ और प्रधानमंत्री के सात रेसकोर्स मार्ग स्थित आवास के पास जोरदार शक्ति प्रदर्शन हुआ। जब घंटों चले नाटक के बाद नारेबाजी करते हुए प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड तोड़ दिए तो पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछारें छोड़ी और आंसू गैस के गोले दागे। केजरीवाल और अधिवक्ता व आईएसी नेता प्रशांत भूषण ने पुलिस पर आरोप लगाया कि उसने बगैर किसी उकसावे के बल प्रयोग किया। भूषण ने एक बस के अंदर से कहा, "यह सब करने की कोई आवश्यकता नहीं थी। उन्होंने अनावश्यक रूप से पानी की बौछारों और आंसू गैस का प्रयोग किया।" केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन को सफल बताया और कहा कि आईएसी इस मुद्दे को घर-घर तक पहुंचाने में सफल रही है कि कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले के लिए कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), दोनों जिम्मेदार हैं। केजरीवाल ने उत्साही भीड़ को सम्बोधित करते हुए कहा, "हमने सरकार के असली चेहरे को बेनकाब किया है। हमने बताया है कि कांग्रेस और भाजपा ने इस देश को लूटा है।" विरोध प्रदर्शन शुरू होने के सात घंटे से अधिक समय बाद लगभग 2.30 बजे केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन समाप्त करने की घोषणा की। पुलिस ने यह कहते हुए बल प्रयोग को जायज ठहराया कि वीआईपी इलाकों में आईएसी का विरोध प्रदर्शन अनधिकृत था। इसके पहले, रविवार तड़के पुलिस ने केजरीवाल और छह अन्य कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया था, लेकिन थाने के बाहर जब सैकड़ों समर्थकों ने जुटकर नारेबाजी शुरू की तो लगभग दो घंटे बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। केजरीवाल को मनमोहन सिंह के आवास के करीब एक पुलिस बैरिकेड के पास दो अन्य सहयोगियों के साथ रोक दिया गया था। आईएसी के अन्य नेता, मनीष सिसोदिया को सहयोगियों के साथ 10 जनपथ के बाहर हिरासत में ले लिया गया था। आईएसी के एक प्रवक्ता ने कहा, "हिरासत में लिए गए कुछ कार्यकर्ताओं के साथ हाथापाई की गई।" पूरे समूह को जब रिहा कर दिया गया तो केजरीवाल और अन्य कार्यकर्ता जंतर मंतर पहुंचे और मनमोहन सिंह के आवास पर दोबारा लौटने का संकल्प लिया, जिसे उन्होंने पूरा किया। केजरीवाल ने सवाल किया कि सरकार आखिर उन्हें क्यों रोक रही है। केजरीवाल ने कहा, "हमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन से आखिर क्यों रोका जा रहा है? कांग्रेस और भाजपा इतने विरोध प्रदर्शन करती है। उन्हें कभी नहीं रोका जाता। जब राज ठाकरे बगैर पुलिस अनुमति के रैली आयोजित करते हैं, हजारों लोग उसमें हिस्सा लेते हैं, तब उन्हें नहीं रोका जाता, अलबत्ता उन्हें पुलिस सुरक्षा दी जाती है। यदि हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हैं तो फिर हमें क्यों हिरासत में लिया जाता है?" दोपहर तक सैकड़ों कार्यकर्ता हाथों में राष्ट्रध्वज लिए प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष के आवास की ओर बढ़े। इसे देखकर मुट्ठीभर पुलिसकर्मी दंग रह गए। केजरीवाल जहां मनमोहन सिंह के आवास के पास थे, तो भूषण सोनिया के आवास के पास। एक समय पुलिस ने कार्यकर्ताओं को पीछे धकेलने की कोशिश की, जिसके बाद दोनों पक्षों में टकराव की नौबत आ गई। भीड़ 'हल्ला बोल' और 'वी वांट जस्टिस' का नारा लगाते हुए आगे बढ़ने की कोशिश कर रही थी।टिप्पणियां केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन को लम्बे समय तक जारी रखने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा, "यदि वे यह सोचते हैं कि वे भ्रष्टाचार करते रहेंगे तो हम भी विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। हम निश्चिततौर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह हमारी क्रांति है।" एक चकित करने वाले कदम के तहत दिल्ली मेट्रो ने घोषणा की कि वे सभी छह स्टेशन खुले रहेंगे, जिन्हें विरोध प्रदर्शन को नाकाम करने के क्रम में रविवार को सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक बंद रखने की घोषणा की गई थी। ध्यान रहे, गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की अनुपस्थिति में अरविंद केजरीवाल ने रविवार को दिल्ली सहित देशभर के कई राज्यों में शक्ति प्रदर्शन किया। उनके नेतृत्व में भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास के पास जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और पानी की बौछारें करनी पड़ी। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान केजरीवाल और किरन बेदी के बीच मतभेद भी खुलकर सामने आए। किरन जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ प्रदर्शन के विरोध में थीं वहीं केजरीवाल कांग्रेस के साथ भाजपा पर भी हमला करने से नहीं चूके। केजरीवाल ने यहां तक तक कह दिया कि देश में विपक्ष है ही नहीं। कांग्रेस और भाजपा दोनों भ्रष्टाचार में लिप्त हैं जबकि बेदी का भाजपा के प्रति रुख थोड़ा नरम रहा। हालांकि बेदी ने बाद में इस आरोप को खारिज भी किया। उन्होंने यह भी कहा कि आईएसी एकाएक देश के लिए विकल्प नहीं हो सकता। छिटपुट तरीके से शुरू हुए केजरीवाल व उनके सहयोगियों के इस विरोध प्रदर्शन ने दोपहर बाद चमत्कारिक ढंग से विकराल रूप धारण कर लिया। इंडिया अगेंस्ट करप्शन (आईएसी) के कार्यकर्ताओं की इतनी बड़ी संख्या देख पुलिस दंग रह गई। ये कार्यकर्ता मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी और भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी के आवास का घेराव करने की अपनी घोषणा को अमली जामा पहनाने निकले थे। गडकरी के आवास के आसपास का क्षेत्र जहां अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण था, वहीं सोनिया के 10 जनपथ और प्रधानमंत्री के सात रेसकोर्स मार्ग स्थित आवास के पास जोरदार शक्ति प्रदर्शन हुआ। जब घंटों चले नाटक के बाद नारेबाजी करते हुए प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड तोड़ दिए तो पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछारें छोड़ी और आंसू गैस के गोले दागे। केजरीवाल और अधिवक्ता व आईएसी नेता प्रशांत भूषण ने पुलिस पर आरोप लगाया कि उसने बगैर किसी उकसावे के बल प्रयोग किया। भूषण ने एक बस के अंदर से कहा, "यह सब करने की कोई आवश्यकता नहीं थी। उन्होंने अनावश्यक रूप से पानी की बौछारों और आंसू गैस का प्रयोग किया।" केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन को सफल बताया और कहा कि आईएसी इस मुद्दे को घर-घर तक पहुंचाने में सफल रही है कि कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले के लिए कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), दोनों जिम्मेदार हैं। केजरीवाल ने उत्साही भीड़ को सम्बोधित करते हुए कहा, "हमने सरकार के असली चेहरे को बेनकाब किया है। हमने बताया है कि कांग्रेस और भाजपा ने इस देश को लूटा है।" विरोध प्रदर्शन शुरू होने के सात घंटे से अधिक समय बाद लगभग 2.30 बजे केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन समाप्त करने की घोषणा की। पुलिस ने यह कहते हुए बल प्रयोग को जायज ठहराया कि वीआईपी इलाकों में आईएसी का विरोध प्रदर्शन अनधिकृत था। इसके पहले, रविवार तड़के पुलिस ने केजरीवाल और छह अन्य कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया था, लेकिन थाने के बाहर जब सैकड़ों समर्थकों ने जुटकर नारेबाजी शुरू की तो लगभग दो घंटे बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। केजरीवाल को मनमोहन सिंह के आवास के करीब एक पुलिस बैरिकेड के पास दो अन्य सहयोगियों के साथ रोक दिया गया था। आईएसी के अन्य नेता, मनीष सिसोदिया को सहयोगियों के साथ 10 जनपथ के बाहर हिरासत में ले लिया गया था। आईएसी के एक प्रवक्ता ने कहा, "हिरासत में लिए गए कुछ कार्यकर्ताओं के साथ हाथापाई की गई।" पूरे समूह को जब रिहा कर दिया गया तो केजरीवाल और अन्य कार्यकर्ता जंतर मंतर पहुंचे और मनमोहन सिंह के आवास पर दोबारा लौटने का संकल्प लिया, जिसे उन्होंने पूरा किया। केजरीवाल ने सवाल किया कि सरकार आखिर उन्हें क्यों रोक रही है। केजरीवाल ने कहा, "हमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन से आखिर क्यों रोका जा रहा है? कांग्रेस और भाजपा इतने विरोध प्रदर्शन करती है। उन्हें कभी नहीं रोका जाता। जब राज ठाकरे बगैर पुलिस अनुमति के रैली आयोजित करते हैं, हजारों लोग उसमें हिस्सा लेते हैं, तब उन्हें नहीं रोका जाता, अलबत्ता उन्हें पुलिस सुरक्षा दी जाती है। यदि हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हैं तो फिर हमें क्यों हिरासत में लिया जाता है?" दोपहर तक सैकड़ों कार्यकर्ता हाथों में राष्ट्रध्वज लिए प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष के आवास की ओर बढ़े। इसे देखकर मुट्ठीभर पुलिसकर्मी दंग रह गए। केजरीवाल जहां मनमोहन सिंह के आवास के पास थे, तो भूषण सोनिया के आवास के पास। एक समय पुलिस ने कार्यकर्ताओं को पीछे धकेलने की कोशिश की, जिसके बाद दोनों पक्षों में टकराव की नौबत आ गई। भीड़ 'हल्ला बोल' और 'वी वांट जस्टिस' का नारा लगाते हुए आगे बढ़ने की कोशिश कर रही थी।टिप्पणियां केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन को लम्बे समय तक जारी रखने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा, "यदि वे यह सोचते हैं कि वे भ्रष्टाचार करते रहेंगे तो हम भी विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। हम निश्चिततौर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह हमारी क्रांति है।" एक चकित करने वाले कदम के तहत दिल्ली मेट्रो ने घोषणा की कि वे सभी छह स्टेशन खुले रहेंगे, जिन्हें विरोध प्रदर्शन को नाकाम करने के क्रम में रविवार को सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक बंद रखने की घोषणा की गई थी। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान केजरीवाल और किरन बेदी के बीच मतभेद भी खुलकर सामने आए। किरन जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ प्रदर्शन के विरोध में थीं वहीं केजरीवाल कांग्रेस के साथ भाजपा पर भी हमला करने से नहीं चूके। केजरीवाल ने यहां तक तक कह दिया कि देश में विपक्ष है ही नहीं। कांग्रेस और भाजपा दोनों भ्रष्टाचार में लिप्त हैं जबकि बेदी का भाजपा के प्रति रुख थोड़ा नरम रहा। हालांकि बेदी ने बाद में इस आरोप को खारिज भी किया। उन्होंने यह भी कहा कि आईएसी एकाएक देश के लिए विकल्प नहीं हो सकता। छिटपुट तरीके से शुरू हुए केजरीवाल व उनके सहयोगियों के इस विरोध प्रदर्शन ने दोपहर बाद चमत्कारिक ढंग से विकराल रूप धारण कर लिया। इंडिया अगेंस्ट करप्शन (आईएसी) के कार्यकर्ताओं की इतनी बड़ी संख्या देख पुलिस दंग रह गई। ये कार्यकर्ता मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी और भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी के आवास का घेराव करने की अपनी घोषणा को अमली जामा पहनाने निकले थे। गडकरी के आवास के आसपास का क्षेत्र जहां अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण था, वहीं सोनिया के 10 जनपथ और प्रधानमंत्री के सात रेसकोर्स मार्ग स्थित आवास के पास जोरदार शक्ति प्रदर्शन हुआ। जब घंटों चले नाटक के बाद नारेबाजी करते हुए प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड तोड़ दिए तो पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछारें छोड़ी और आंसू गैस के गोले दागे। केजरीवाल और अधिवक्ता व आईएसी नेता प्रशांत भूषण ने पुलिस पर आरोप लगाया कि उसने बगैर किसी उकसावे के बल प्रयोग किया। भूषण ने एक बस के अंदर से कहा, "यह सब करने की कोई आवश्यकता नहीं थी। उन्होंने अनावश्यक रूप से पानी की बौछारों और आंसू गैस का प्रयोग किया।" केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन को सफल बताया और कहा कि आईएसी इस मुद्दे को घर-घर तक पहुंचाने में सफल रही है कि कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले के लिए कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), दोनों जिम्मेदार हैं। केजरीवाल ने उत्साही भीड़ को सम्बोधित करते हुए कहा, "हमने सरकार के असली चेहरे को बेनकाब किया है। हमने बताया है कि कांग्रेस और भाजपा ने इस देश को लूटा है।" विरोध प्रदर्शन शुरू होने के सात घंटे से अधिक समय बाद लगभग 2.30 बजे केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन समाप्त करने की घोषणा की। पुलिस ने यह कहते हुए बल प्रयोग को जायज ठहराया कि वीआईपी इलाकों में आईएसी का विरोध प्रदर्शन अनधिकृत था। इसके पहले, रविवार तड़के पुलिस ने केजरीवाल और छह अन्य कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया था, लेकिन थाने के बाहर जब सैकड़ों समर्थकों ने जुटकर नारेबाजी शुरू की तो लगभग दो घंटे बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। केजरीवाल को मनमोहन सिंह के आवास के करीब एक पुलिस बैरिकेड के पास दो अन्य सहयोगियों के साथ रोक दिया गया था। आईएसी के अन्य नेता, मनीष सिसोदिया को सहयोगियों के साथ 10 जनपथ के बाहर हिरासत में ले लिया गया था। आईएसी के एक प्रवक्ता ने कहा, "हिरासत में लिए गए कुछ कार्यकर्ताओं के साथ हाथापाई की गई।" पूरे समूह को जब रिहा कर दिया गया तो केजरीवाल और अन्य कार्यकर्ता जंतर मंतर पहुंचे और मनमोहन सिंह के आवास पर दोबारा लौटने का संकल्प लिया, जिसे उन्होंने पूरा किया। केजरीवाल ने सवाल किया कि सरकार आखिर उन्हें क्यों रोक रही है। केजरीवाल ने कहा, "हमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन से आखिर क्यों रोका जा रहा है? कांग्रेस और भाजपा इतने विरोध प्रदर्शन करती है। उन्हें कभी नहीं रोका जाता। जब राज ठाकरे बगैर पुलिस अनुमति के रैली आयोजित करते हैं, हजारों लोग उसमें हिस्सा लेते हैं, तब उन्हें नहीं रोका जाता, अलबत्ता उन्हें पुलिस सुरक्षा दी जाती है। यदि हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हैं तो फिर हमें क्यों हिरासत में लिया जाता है?" दोपहर तक सैकड़ों कार्यकर्ता हाथों में राष्ट्रध्वज लिए प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष के आवास की ओर बढ़े। इसे देखकर मुट्ठीभर पुलिसकर्मी दंग रह गए। केजरीवाल जहां मनमोहन सिंह के आवास के पास थे, तो भूषण सोनिया के आवास के पास। एक समय पुलिस ने कार्यकर्ताओं को पीछे धकेलने की कोशिश की, जिसके बाद दोनों पक्षों में टकराव की नौबत आ गई। भीड़ 'हल्ला बोल' और 'वी वांट जस्टिस' का नारा लगाते हुए आगे बढ़ने की कोशिश कर रही थी।टिप्पणियां केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन को लम्बे समय तक जारी रखने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा, "यदि वे यह सोचते हैं कि वे भ्रष्टाचार करते रहेंगे तो हम भी विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। हम निश्चिततौर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह हमारी क्रांति है।" एक चकित करने वाले कदम के तहत दिल्ली मेट्रो ने घोषणा की कि वे सभी छह स्टेशन खुले रहेंगे, जिन्हें विरोध प्रदर्शन को नाकाम करने के क्रम में रविवार को सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक बंद रखने की घोषणा की गई थी। केजरीवाल ने यहां तक तक कह दिया कि देश में विपक्ष है ही नहीं। कांग्रेस और भाजपा दोनों भ्रष्टाचार में लिप्त हैं जबकि बेदी का भाजपा के प्रति रुख थोड़ा नरम रहा। हालांकि बेदी ने बाद में इस आरोप को खारिज भी किया। उन्होंने यह भी कहा कि आईएसी एकाएक देश के लिए विकल्प नहीं हो सकता। छिटपुट तरीके से शुरू हुए केजरीवाल व उनके सहयोगियों के इस विरोध प्रदर्शन ने दोपहर बाद चमत्कारिक ढंग से विकराल रूप धारण कर लिया। इंडिया अगेंस्ट करप्शन (आईएसी) के कार्यकर्ताओं की इतनी बड़ी संख्या देख पुलिस दंग रह गई। ये कार्यकर्ता मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी और भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी के आवास का घेराव करने की अपनी घोषणा को अमली जामा पहनाने निकले थे। गडकरी के आवास के आसपास का क्षेत्र जहां अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण था, वहीं सोनिया के 10 जनपथ और प्रधानमंत्री के सात रेसकोर्स मार्ग स्थित आवास के पास जोरदार शक्ति प्रदर्शन हुआ। जब घंटों चले नाटक के बाद नारेबाजी करते हुए प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड तोड़ दिए तो पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछारें छोड़ी और आंसू गैस के गोले दागे। केजरीवाल और अधिवक्ता व आईएसी नेता प्रशांत भूषण ने पुलिस पर आरोप लगाया कि उसने बगैर किसी उकसावे के बल प्रयोग किया। भूषण ने एक बस के अंदर से कहा, "यह सब करने की कोई आवश्यकता नहीं थी। उन्होंने अनावश्यक रूप से पानी की बौछारों और आंसू गैस का प्रयोग किया।" केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन को सफल बताया और कहा कि आईएसी इस मुद्दे को घर-घर तक पहुंचाने में सफल रही है कि कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले के लिए कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), दोनों जिम्मेदार हैं। केजरीवाल ने उत्साही भीड़ को सम्बोधित करते हुए कहा, "हमने सरकार के असली चेहरे को बेनकाब किया है। हमने बताया है कि कांग्रेस और भाजपा ने इस देश को लूटा है।" विरोध प्रदर्शन शुरू होने के सात घंटे से अधिक समय बाद लगभग 2.30 बजे केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन समाप्त करने की घोषणा की। पुलिस ने यह कहते हुए बल प्रयोग को जायज ठहराया कि वीआईपी इलाकों में आईएसी का विरोध प्रदर्शन अनधिकृत था। इसके पहले, रविवार तड़के पुलिस ने केजरीवाल और छह अन्य कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया था, लेकिन थाने के बाहर जब सैकड़ों समर्थकों ने जुटकर नारेबाजी शुरू की तो लगभग दो घंटे बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। केजरीवाल को मनमोहन सिंह के आवास के करीब एक पुलिस बैरिकेड के पास दो अन्य सहयोगियों के साथ रोक दिया गया था। आईएसी के अन्य नेता, मनीष सिसोदिया को सहयोगियों के साथ 10 जनपथ के बाहर हिरासत में ले लिया गया था। आईएसी के एक प्रवक्ता ने कहा, "हिरासत में लिए गए कुछ कार्यकर्ताओं के साथ हाथापाई की गई।" पूरे समूह को जब रिहा कर दिया गया तो केजरीवाल और अन्य कार्यकर्ता जंतर मंतर पहुंचे और मनमोहन सिंह के आवास पर दोबारा लौटने का संकल्प लिया, जिसे उन्होंने पूरा किया। केजरीवाल ने सवाल किया कि सरकार आखिर उन्हें क्यों रोक रही है। केजरीवाल ने कहा, "हमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन से आखिर क्यों रोका जा रहा है? कांग्रेस और भाजपा इतने विरोध प्रदर्शन करती है। उन्हें कभी नहीं रोका जाता। जब राज ठाकरे बगैर पुलिस अनुमति के रैली आयोजित करते हैं, हजारों लोग उसमें हिस्सा लेते हैं, तब उन्हें नहीं रोका जाता, अलबत्ता उन्हें पुलिस सुरक्षा दी जाती है। यदि हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हैं तो फिर हमें क्यों हिरासत में लिया जाता है?" दोपहर तक सैकड़ों कार्यकर्ता हाथों में राष्ट्रध्वज लिए प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष के आवास की ओर बढ़े। इसे देखकर मुट्ठीभर पुलिसकर्मी दंग रह गए। केजरीवाल जहां मनमोहन सिंह के आवास के पास थे, तो भूषण सोनिया के आवास के पास। एक समय पुलिस ने कार्यकर्ताओं को पीछे धकेलने की कोशिश की, जिसके बाद दोनों पक्षों में टकराव की नौबत आ गई। भीड़ 'हल्ला बोल' और 'वी वांट जस्टिस' का नारा लगाते हुए आगे बढ़ने की कोशिश कर रही थी।टिप्पणियां केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन को लम्बे समय तक जारी रखने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा, "यदि वे यह सोचते हैं कि वे भ्रष्टाचार करते रहेंगे तो हम भी विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। हम निश्चिततौर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह हमारी क्रांति है।" एक चकित करने वाले कदम के तहत दिल्ली मेट्रो ने घोषणा की कि वे सभी छह स्टेशन खुले रहेंगे, जिन्हें विरोध प्रदर्शन को नाकाम करने के क्रम में रविवार को सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक बंद रखने की घोषणा की गई थी। छिटपुट तरीके से शुरू हुए केजरीवाल व उनके सहयोगियों के इस विरोध प्रदर्शन ने दोपहर बाद चमत्कारिक ढंग से विकराल रूप धारण कर लिया। इंडिया अगेंस्ट करप्शन (आईएसी) के कार्यकर्ताओं की इतनी बड़ी संख्या देख पुलिस दंग रह गई। ये कार्यकर्ता मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी और भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी के आवास का घेराव करने की अपनी घोषणा को अमली जामा पहनाने निकले थे। गडकरी के आवास के आसपास का क्षेत्र जहां अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण था, वहीं सोनिया के 10 जनपथ और प्रधानमंत्री के सात रेसकोर्स मार्ग स्थित आवास के पास जोरदार शक्ति प्रदर्शन हुआ। जब घंटों चले नाटक के बाद नारेबाजी करते हुए प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड तोड़ दिए तो पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछारें छोड़ी और आंसू गैस के गोले दागे। केजरीवाल और अधिवक्ता व आईएसी नेता प्रशांत भूषण ने पुलिस पर आरोप लगाया कि उसने बगैर किसी उकसावे के बल प्रयोग किया। भूषण ने एक बस के अंदर से कहा, "यह सब करने की कोई आवश्यकता नहीं थी। उन्होंने अनावश्यक रूप से पानी की बौछारों और आंसू गैस का प्रयोग किया।" केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन को सफल बताया और कहा कि आईएसी इस मुद्दे को घर-घर तक पहुंचाने में सफल रही है कि कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले के लिए कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), दोनों जिम्मेदार हैं। केजरीवाल ने उत्साही भीड़ को सम्बोधित करते हुए कहा, "हमने सरकार के असली चेहरे को बेनकाब किया है। हमने बताया है कि कांग्रेस और भाजपा ने इस देश को लूटा है।" विरोध प्रदर्शन शुरू होने के सात घंटे से अधिक समय बाद लगभग 2.30 बजे केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन समाप्त करने की घोषणा की। पुलिस ने यह कहते हुए बल प्रयोग को जायज ठहराया कि वीआईपी इलाकों में आईएसी का विरोध प्रदर्शन अनधिकृत था। इसके पहले, रविवार तड़के पुलिस ने केजरीवाल और छह अन्य कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया था, लेकिन थाने के बाहर जब सैकड़ों समर्थकों ने जुटकर नारेबाजी शुरू की तो लगभग दो घंटे बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। केजरीवाल को मनमोहन सिंह के आवास के करीब एक पुलिस बैरिकेड के पास दो अन्य सहयोगियों के साथ रोक दिया गया था। आईएसी के अन्य नेता, मनीष सिसोदिया को सहयोगियों के साथ 10 जनपथ के बाहर हिरासत में ले लिया गया था। आईएसी के एक प्रवक्ता ने कहा, "हिरासत में लिए गए कुछ कार्यकर्ताओं के साथ हाथापाई की गई।" पूरे समूह को जब रिहा कर दिया गया तो केजरीवाल और अन्य कार्यकर्ता जंतर मंतर पहुंचे और मनमोहन सिंह के आवास पर दोबारा लौटने का संकल्प लिया, जिसे उन्होंने पूरा किया। केजरीवाल ने सवाल किया कि सरकार आखिर उन्हें क्यों रोक रही है। केजरीवाल ने कहा, "हमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन से आखिर क्यों रोका जा रहा है? कांग्रेस और भाजपा इतने विरोध प्रदर्शन करती है। उन्हें कभी नहीं रोका जाता। जब राज ठाकरे बगैर पुलिस अनुमति के रैली आयोजित करते हैं, हजारों लोग उसमें हिस्सा लेते हैं, तब उन्हें नहीं रोका जाता, अलबत्ता उन्हें पुलिस सुरक्षा दी जाती है। यदि हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हैं तो फिर हमें क्यों हिरासत में लिया जाता है?" दोपहर तक सैकड़ों कार्यकर्ता हाथों में राष्ट्रध्वज लिए प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष के आवास की ओर बढ़े। इसे देखकर मुट्ठीभर पुलिसकर्मी दंग रह गए। केजरीवाल जहां मनमोहन सिंह के आवास के पास थे, तो भूषण सोनिया के आवास के पास। एक समय पुलिस ने कार्यकर्ताओं को पीछे धकेलने की कोशिश की, जिसके बाद दोनों पक्षों में टकराव की नौबत आ गई। भीड़ 'हल्ला बोल' और 'वी वांट जस्टिस' का नारा लगाते हुए आगे बढ़ने की कोशिश कर रही थी।टिप्पणियां केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन को लम्बे समय तक जारी रखने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा, "यदि वे यह सोचते हैं कि वे भ्रष्टाचार करते रहेंगे तो हम भी विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। हम निश्चिततौर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह हमारी क्रांति है।" एक चकित करने वाले कदम के तहत दिल्ली मेट्रो ने घोषणा की कि वे सभी छह स्टेशन खुले रहेंगे, जिन्हें विरोध प्रदर्शन को नाकाम करने के क्रम में रविवार को सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक बंद रखने की घोषणा की गई थी। गडकरी के आवास के आसपास का क्षेत्र जहां अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण था, वहीं सोनिया के 10 जनपथ और प्रधानमंत्री के सात रेसकोर्स मार्ग स्थित आवास के पास जोरदार शक्ति प्रदर्शन हुआ। जब घंटों चले नाटक के बाद नारेबाजी करते हुए प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड तोड़ दिए तो पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछारें छोड़ी और आंसू गैस के गोले दागे। केजरीवाल और अधिवक्ता व आईएसी नेता प्रशांत भूषण ने पुलिस पर आरोप लगाया कि उसने बगैर किसी उकसावे के बल प्रयोग किया। भूषण ने एक बस के अंदर से कहा, "यह सब करने की कोई आवश्यकता नहीं थी। उन्होंने अनावश्यक रूप से पानी की बौछारों और आंसू गैस का प्रयोग किया।" केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन को सफल बताया और कहा कि आईएसी इस मुद्दे को घर-घर तक पहुंचाने में सफल रही है कि कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले के लिए कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), दोनों जिम्मेदार हैं। केजरीवाल ने उत्साही भीड़ को सम्बोधित करते हुए कहा, "हमने सरकार के असली चेहरे को बेनकाब किया है। हमने बताया है कि कांग्रेस और भाजपा ने इस देश को लूटा है।" विरोध प्रदर्शन शुरू होने के सात घंटे से अधिक समय बाद लगभग 2.30 बजे केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन समाप्त करने की घोषणा की। पुलिस ने यह कहते हुए बल प्रयोग को जायज ठहराया कि वीआईपी इलाकों में आईएसी का विरोध प्रदर्शन अनधिकृत था। इसके पहले, रविवार तड़के पुलिस ने केजरीवाल और छह अन्य कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया था, लेकिन थाने के बाहर जब सैकड़ों समर्थकों ने जुटकर नारेबाजी शुरू की तो लगभग दो घंटे बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। केजरीवाल को मनमोहन सिंह के आवास के करीब एक पुलिस बैरिकेड के पास दो अन्य सहयोगियों के साथ रोक दिया गया था। आईएसी के अन्य नेता, मनीष सिसोदिया को सहयोगियों के साथ 10 जनपथ के बाहर हिरासत में ले लिया गया था। आईएसी के एक प्रवक्ता ने कहा, "हिरासत में लिए गए कुछ कार्यकर्ताओं के साथ हाथापाई की गई।" पूरे समूह को जब रिहा कर दिया गया तो केजरीवाल और अन्य कार्यकर्ता जंतर मंतर पहुंचे और मनमोहन सिंह के आवास पर दोबारा लौटने का संकल्प लिया, जिसे उन्होंने पूरा किया। केजरीवाल ने सवाल किया कि सरकार आखिर उन्हें क्यों रोक रही है। केजरीवाल ने कहा, "हमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन से आखिर क्यों रोका जा रहा है? कांग्रेस और भाजपा इतने विरोध प्रदर्शन करती है। उन्हें कभी नहीं रोका जाता। जब राज ठाकरे बगैर पुलिस अनुमति के रैली आयोजित करते हैं, हजारों लोग उसमें हिस्सा लेते हैं, तब उन्हें नहीं रोका जाता, अलबत्ता उन्हें पुलिस सुरक्षा दी जाती है। यदि हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हैं तो फिर हमें क्यों हिरासत में लिया जाता है?" दोपहर तक सैकड़ों कार्यकर्ता हाथों में राष्ट्रध्वज लिए प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष के आवास की ओर बढ़े। इसे देखकर मुट्ठीभर पुलिसकर्मी दंग रह गए। केजरीवाल जहां मनमोहन सिंह के आवास के पास थे, तो भूषण सोनिया के आवास के पास। एक समय पुलिस ने कार्यकर्ताओं को पीछे धकेलने की कोशिश की, जिसके बाद दोनों पक्षों में टकराव की नौबत आ गई। भीड़ 'हल्ला बोल' और 'वी वांट जस्टिस' का नारा लगाते हुए आगे बढ़ने की कोशिश कर रही थी।टिप्पणियां केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन को लम्बे समय तक जारी रखने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा, "यदि वे यह सोचते हैं कि वे भ्रष्टाचार करते रहेंगे तो हम भी विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। हम निश्चिततौर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह हमारी क्रांति है।" एक चकित करने वाले कदम के तहत दिल्ली मेट्रो ने घोषणा की कि वे सभी छह स्टेशन खुले रहेंगे, जिन्हें विरोध प्रदर्शन को नाकाम करने के क्रम में रविवार को सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक बंद रखने की घोषणा की गई थी। जब घंटों चले नाटक के बाद नारेबाजी करते हुए प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड तोड़ दिए तो पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछारें छोड़ी और आंसू गैस के गोले दागे। केजरीवाल और अधिवक्ता व आईएसी नेता प्रशांत भूषण ने पुलिस पर आरोप लगाया कि उसने बगैर किसी उकसावे के बल प्रयोग किया। भूषण ने एक बस के अंदर से कहा, "यह सब करने की कोई आवश्यकता नहीं थी। उन्होंने अनावश्यक रूप से पानी की बौछारों और आंसू गैस का प्रयोग किया।" केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन को सफल बताया और कहा कि आईएसी इस मुद्दे को घर-घर तक पहुंचाने में सफल रही है कि कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले के लिए कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), दोनों जिम्मेदार हैं। केजरीवाल ने उत्साही भीड़ को सम्बोधित करते हुए कहा, "हमने सरकार के असली चेहरे को बेनकाब किया है। हमने बताया है कि कांग्रेस और भाजपा ने इस देश को लूटा है।" विरोध प्रदर्शन शुरू होने के सात घंटे से अधिक समय बाद लगभग 2.30 बजे केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन समाप्त करने की घोषणा की। पुलिस ने यह कहते हुए बल प्रयोग को जायज ठहराया कि वीआईपी इलाकों में आईएसी का विरोध प्रदर्शन अनधिकृत था। इसके पहले, रविवार तड़के पुलिस ने केजरीवाल और छह अन्य कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया था, लेकिन थाने के बाहर जब सैकड़ों समर्थकों ने जुटकर नारेबाजी शुरू की तो लगभग दो घंटे बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। केजरीवाल को मनमोहन सिंह के आवास के करीब एक पुलिस बैरिकेड के पास दो अन्य सहयोगियों के साथ रोक दिया गया था। आईएसी के अन्य नेता, मनीष सिसोदिया को सहयोगियों के साथ 10 जनपथ के बाहर हिरासत में ले लिया गया था। आईएसी के एक प्रवक्ता ने कहा, "हिरासत में लिए गए कुछ कार्यकर्ताओं के साथ हाथापाई की गई।" पूरे समूह को जब रिहा कर दिया गया तो केजरीवाल और अन्य कार्यकर्ता जंतर मंतर पहुंचे और मनमोहन सिंह के आवास पर दोबारा लौटने का संकल्प लिया, जिसे उन्होंने पूरा किया। केजरीवाल ने सवाल किया कि सरकार आखिर उन्हें क्यों रोक रही है। केजरीवाल ने कहा, "हमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन से आखिर क्यों रोका जा रहा है? कांग्रेस और भाजपा इतने विरोध प्रदर्शन करती है। उन्हें कभी नहीं रोका जाता। जब राज ठाकरे बगैर पुलिस अनुमति के रैली आयोजित करते हैं, हजारों लोग उसमें हिस्सा लेते हैं, तब उन्हें नहीं रोका जाता, अलबत्ता उन्हें पुलिस सुरक्षा दी जाती है। यदि हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हैं तो फिर हमें क्यों हिरासत में लिया जाता है?" दोपहर तक सैकड़ों कार्यकर्ता हाथों में राष्ट्रध्वज लिए प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष के आवास की ओर बढ़े। इसे देखकर मुट्ठीभर पुलिसकर्मी दंग रह गए। केजरीवाल जहां मनमोहन सिंह के आवास के पास थे, तो भूषण सोनिया के आवास के पास। एक समय पुलिस ने कार्यकर्ताओं को पीछे धकेलने की कोशिश की, जिसके बाद दोनों पक्षों में टकराव की नौबत आ गई। भीड़ 'हल्ला बोल' और 'वी वांट जस्टिस' का नारा लगाते हुए आगे बढ़ने की कोशिश कर रही थी।टिप्पणियां केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन को लम्बे समय तक जारी रखने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा, "यदि वे यह सोचते हैं कि वे भ्रष्टाचार करते रहेंगे तो हम भी विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। हम निश्चिततौर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह हमारी क्रांति है।" एक चकित करने वाले कदम के तहत दिल्ली मेट्रो ने घोषणा की कि वे सभी छह स्टेशन खुले रहेंगे, जिन्हें विरोध प्रदर्शन को नाकाम करने के क्रम में रविवार को सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक बंद रखने की घोषणा की गई थी। केजरीवाल और अधिवक्ता व आईएसी नेता प्रशांत भूषण ने पुलिस पर आरोप लगाया कि उसने बगैर किसी उकसावे के बल प्रयोग किया। भूषण ने एक बस के अंदर से कहा, "यह सब करने की कोई आवश्यकता नहीं थी। उन्होंने अनावश्यक रूप से पानी की बौछारों और आंसू गैस का प्रयोग किया।" केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन को सफल बताया और कहा कि आईएसी इस मुद्दे को घर-घर तक पहुंचाने में सफल रही है कि कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले के लिए कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), दोनों जिम्मेदार हैं। केजरीवाल ने उत्साही भीड़ को सम्बोधित करते हुए कहा, "हमने सरकार के असली चेहरे को बेनकाब किया है। हमने बताया है कि कांग्रेस और भाजपा ने इस देश को लूटा है।" विरोध प्रदर्शन शुरू होने के सात घंटे से अधिक समय बाद लगभग 2.30 बजे केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन समाप्त करने की घोषणा की। पुलिस ने यह कहते हुए बल प्रयोग को जायज ठहराया कि वीआईपी इलाकों में आईएसी का विरोध प्रदर्शन अनधिकृत था। इसके पहले, रविवार तड़के पुलिस ने केजरीवाल और छह अन्य कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया था, लेकिन थाने के बाहर जब सैकड़ों समर्थकों ने जुटकर नारेबाजी शुरू की तो लगभग दो घंटे बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। केजरीवाल को मनमोहन सिंह के आवास के करीब एक पुलिस बैरिकेड के पास दो अन्य सहयोगियों के साथ रोक दिया गया था। आईएसी के अन्य नेता, मनीष सिसोदिया को सहयोगियों के साथ 10 जनपथ के बाहर हिरासत में ले लिया गया था। आईएसी के एक प्रवक्ता ने कहा, "हिरासत में लिए गए कुछ कार्यकर्ताओं के साथ हाथापाई की गई।" पूरे समूह को जब रिहा कर दिया गया तो केजरीवाल और अन्य कार्यकर्ता जंतर मंतर पहुंचे और मनमोहन सिंह के आवास पर दोबारा लौटने का संकल्प लिया, जिसे उन्होंने पूरा किया। केजरीवाल ने सवाल किया कि सरकार आखिर उन्हें क्यों रोक रही है। केजरीवाल ने कहा, "हमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन से आखिर क्यों रोका जा रहा है? कांग्रेस और भाजपा इतने विरोध प्रदर्शन करती है। उन्हें कभी नहीं रोका जाता। जब राज ठाकरे बगैर पुलिस अनुमति के रैली आयोजित करते हैं, हजारों लोग उसमें हिस्सा लेते हैं, तब उन्हें नहीं रोका जाता, अलबत्ता उन्हें पुलिस सुरक्षा दी जाती है। यदि हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हैं तो फिर हमें क्यों हिरासत में लिया जाता है?" दोपहर तक सैकड़ों कार्यकर्ता हाथों में राष्ट्रध्वज लिए प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष के आवास की ओर बढ़े। इसे देखकर मुट्ठीभर पुलिसकर्मी दंग रह गए। केजरीवाल जहां मनमोहन सिंह के आवास के पास थे, तो भूषण सोनिया के आवास के पास। एक समय पुलिस ने कार्यकर्ताओं को पीछे धकेलने की कोशिश की, जिसके बाद दोनों पक्षों में टकराव की नौबत आ गई। भीड़ 'हल्ला बोल' और 'वी वांट जस्टिस' का नारा लगाते हुए आगे बढ़ने की कोशिश कर रही थी।टिप्पणियां केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन को लम्बे समय तक जारी रखने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा, "यदि वे यह सोचते हैं कि वे भ्रष्टाचार करते रहेंगे तो हम भी विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। हम निश्चिततौर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह हमारी क्रांति है।" एक चकित करने वाले कदम के तहत दिल्ली मेट्रो ने घोषणा की कि वे सभी छह स्टेशन खुले रहेंगे, जिन्हें विरोध प्रदर्शन को नाकाम करने के क्रम में रविवार को सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक बंद रखने की घोषणा की गई थी। भूषण ने एक बस के अंदर से कहा, "यह सब करने की कोई आवश्यकता नहीं थी। उन्होंने अनावश्यक रूप से पानी की बौछारों और आंसू गैस का प्रयोग किया।" केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन को सफल बताया और कहा कि आईएसी इस मुद्दे को घर-घर तक पहुंचाने में सफल रही है कि कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले के लिए कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), दोनों जिम्मेदार हैं। केजरीवाल ने उत्साही भीड़ को सम्बोधित करते हुए कहा, "हमने सरकार के असली चेहरे को बेनकाब किया है। हमने बताया है कि कांग्रेस और भाजपा ने इस देश को लूटा है।" विरोध प्रदर्शन शुरू होने के सात घंटे से अधिक समय बाद लगभग 2.30 बजे केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन समाप्त करने की घोषणा की। पुलिस ने यह कहते हुए बल प्रयोग को जायज ठहराया कि वीआईपी इलाकों में आईएसी का विरोध प्रदर्शन अनधिकृत था। इसके पहले, रविवार तड़के पुलिस ने केजरीवाल और छह अन्य कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया था, लेकिन थाने के बाहर जब सैकड़ों समर्थकों ने जुटकर नारेबाजी शुरू की तो लगभग दो घंटे बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। केजरीवाल को मनमोहन सिंह के आवास के करीब एक पुलिस बैरिकेड के पास दो अन्य सहयोगियों के साथ रोक दिया गया था। आईएसी के अन्य नेता, मनीष सिसोदिया को सहयोगियों के साथ 10 जनपथ के बाहर हिरासत में ले लिया गया था। आईएसी के एक प्रवक्ता ने कहा, "हिरासत में लिए गए कुछ कार्यकर्ताओं के साथ हाथापाई की गई।" पूरे समूह को जब रिहा कर दिया गया तो केजरीवाल और अन्य कार्यकर्ता जंतर मंतर पहुंचे और मनमोहन सिंह के आवास पर दोबारा लौटने का संकल्प लिया, जिसे उन्होंने पूरा किया। केजरीवाल ने सवाल किया कि सरकार आखिर उन्हें क्यों रोक रही है। केजरीवाल ने कहा, "हमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन से आखिर क्यों रोका जा रहा है? कांग्रेस और भाजपा इतने विरोध प्रदर्शन करती है। उन्हें कभी नहीं रोका जाता। जब राज ठाकरे बगैर पुलिस अनुमति के रैली आयोजित करते हैं, हजारों लोग उसमें हिस्सा लेते हैं, तब उन्हें नहीं रोका जाता, अलबत्ता उन्हें पुलिस सुरक्षा दी जाती है। यदि हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हैं तो फिर हमें क्यों हिरासत में लिया जाता है?" दोपहर तक सैकड़ों कार्यकर्ता हाथों में राष्ट्रध्वज लिए प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष के आवास की ओर बढ़े। इसे देखकर मुट्ठीभर पुलिसकर्मी दंग रह गए। केजरीवाल जहां मनमोहन सिंह के आवास के पास थे, तो भूषण सोनिया के आवास के पास। एक समय पुलिस ने कार्यकर्ताओं को पीछे धकेलने की कोशिश की, जिसके बाद दोनों पक्षों में टकराव की नौबत आ गई। भीड़ 'हल्ला बोल' और 'वी वांट जस्टिस' का नारा लगाते हुए आगे बढ़ने की कोशिश कर रही थी।टिप्पणियां केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन को लम्बे समय तक जारी रखने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा, "यदि वे यह सोचते हैं कि वे भ्रष्टाचार करते रहेंगे तो हम भी विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। हम निश्चिततौर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह हमारी क्रांति है।" एक चकित करने वाले कदम के तहत दिल्ली मेट्रो ने घोषणा की कि वे सभी छह स्टेशन खुले रहेंगे, जिन्हें विरोध प्रदर्शन को नाकाम करने के क्रम में रविवार को सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक बंद रखने की घोषणा की गई थी। केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन को सफल बताया और कहा कि आईएसी इस मुद्दे को घर-घर तक पहुंचाने में सफल रही है कि कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले के लिए कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), दोनों जिम्मेदार हैं। केजरीवाल ने उत्साही भीड़ को सम्बोधित करते हुए कहा, "हमने सरकार के असली चेहरे को बेनकाब किया है। हमने बताया है कि कांग्रेस और भाजपा ने इस देश को लूटा है।" विरोध प्रदर्शन शुरू होने के सात घंटे से अधिक समय बाद लगभग 2.30 बजे केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन समाप्त करने की घोषणा की। पुलिस ने यह कहते हुए बल प्रयोग को जायज ठहराया कि वीआईपी इलाकों में आईएसी का विरोध प्रदर्शन अनधिकृत था। इसके पहले, रविवार तड़के पुलिस ने केजरीवाल और छह अन्य कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया था, लेकिन थाने के बाहर जब सैकड़ों समर्थकों ने जुटकर नारेबाजी शुरू की तो लगभग दो घंटे बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। केजरीवाल को मनमोहन सिंह के आवास के करीब एक पुलिस बैरिकेड के पास दो अन्य सहयोगियों के साथ रोक दिया गया था। आईएसी के अन्य नेता, मनीष सिसोदिया को सहयोगियों के साथ 10 जनपथ के बाहर हिरासत में ले लिया गया था। आईएसी के एक प्रवक्ता ने कहा, "हिरासत में लिए गए कुछ कार्यकर्ताओं के साथ हाथापाई की गई।" पूरे समूह को जब रिहा कर दिया गया तो केजरीवाल और अन्य कार्यकर्ता जंतर मंतर पहुंचे और मनमोहन सिंह के आवास पर दोबारा लौटने का संकल्प लिया, जिसे उन्होंने पूरा किया। केजरीवाल ने सवाल किया कि सरकार आखिर उन्हें क्यों रोक रही है। केजरीवाल ने कहा, "हमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन से आखिर क्यों रोका जा रहा है? कांग्रेस और भाजपा इतने विरोध प्रदर्शन करती है। उन्हें कभी नहीं रोका जाता। जब राज ठाकरे बगैर पुलिस अनुमति के रैली आयोजित करते हैं, हजारों लोग उसमें हिस्सा लेते हैं, तब उन्हें नहीं रोका जाता, अलबत्ता उन्हें पुलिस सुरक्षा दी जाती है। यदि हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हैं तो फिर हमें क्यों हिरासत में लिया जाता है?" दोपहर तक सैकड़ों कार्यकर्ता हाथों में राष्ट्रध्वज लिए प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष के आवास की ओर बढ़े। इसे देखकर मुट्ठीभर पुलिसकर्मी दंग रह गए। केजरीवाल जहां मनमोहन सिंह के आवास के पास थे, तो भूषण सोनिया के आवास के पास। एक समय पुलिस ने कार्यकर्ताओं को पीछे धकेलने की कोशिश की, जिसके बाद दोनों पक्षों में टकराव की नौबत आ गई। भीड़ 'हल्ला बोल' और 'वी वांट जस्टिस' का नारा लगाते हुए आगे बढ़ने की कोशिश कर रही थी।टिप्पणियां केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन को लम्बे समय तक जारी रखने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा, "यदि वे यह सोचते हैं कि वे भ्रष्टाचार करते रहेंगे तो हम भी विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। हम निश्चिततौर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह हमारी क्रांति है।" एक चकित करने वाले कदम के तहत दिल्ली मेट्रो ने घोषणा की कि वे सभी छह स्टेशन खुले रहेंगे, जिन्हें विरोध प्रदर्शन को नाकाम करने के क्रम में रविवार को सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक बंद रखने की घोषणा की गई थी। केजरीवाल ने उत्साही भीड़ को सम्बोधित करते हुए कहा, "हमने सरकार के असली चेहरे को बेनकाब किया है। हमने बताया है कि कांग्रेस और भाजपा ने इस देश को लूटा है।" विरोध प्रदर्शन शुरू होने के सात घंटे से अधिक समय बाद लगभग 2.30 बजे केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन समाप्त करने की घोषणा की। पुलिस ने यह कहते हुए बल प्रयोग को जायज ठहराया कि वीआईपी इलाकों में आईएसी का विरोध प्रदर्शन अनधिकृत था। इसके पहले, रविवार तड़के पुलिस ने केजरीवाल और छह अन्य कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया था, लेकिन थाने के बाहर जब सैकड़ों समर्थकों ने जुटकर नारेबाजी शुरू की तो लगभग दो घंटे बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। केजरीवाल को मनमोहन सिंह के आवास के करीब एक पुलिस बैरिकेड के पास दो अन्य सहयोगियों के साथ रोक दिया गया था। आईएसी के अन्य नेता, मनीष सिसोदिया को सहयोगियों के साथ 10 जनपथ के बाहर हिरासत में ले लिया गया था। आईएसी के एक प्रवक्ता ने कहा, "हिरासत में लिए गए कुछ कार्यकर्ताओं के साथ हाथापाई की गई।" पूरे समूह को जब रिहा कर दिया गया तो केजरीवाल और अन्य कार्यकर्ता जंतर मंतर पहुंचे और मनमोहन सिंह के आवास पर दोबारा लौटने का संकल्प लिया, जिसे उन्होंने पूरा किया। केजरीवाल ने सवाल किया कि सरकार आखिर उन्हें क्यों रोक रही है। केजरीवाल ने कहा, "हमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन से आखिर क्यों रोका जा रहा है? कांग्रेस और भाजपा इतने विरोध प्रदर्शन करती है। उन्हें कभी नहीं रोका जाता। जब राज ठाकरे बगैर पुलिस अनुमति के रैली आयोजित करते हैं, हजारों लोग उसमें हिस्सा लेते हैं, तब उन्हें नहीं रोका जाता, अलबत्ता उन्हें पुलिस सुरक्षा दी जाती है। यदि हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हैं तो फिर हमें क्यों हिरासत में लिया जाता है?" दोपहर तक सैकड़ों कार्यकर्ता हाथों में राष्ट्रध्वज लिए प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष के आवास की ओर बढ़े। इसे देखकर मुट्ठीभर पुलिसकर्मी दंग रह गए। केजरीवाल जहां मनमोहन सिंह के आवास के पास थे, तो भूषण सोनिया के आवास के पास। एक समय पुलिस ने कार्यकर्ताओं को पीछे धकेलने की कोशिश की, जिसके बाद दोनों पक्षों में टकराव की नौबत आ गई। भीड़ 'हल्ला बोल' और 'वी वांट जस्टिस' का नारा लगाते हुए आगे बढ़ने की कोशिश कर रही थी।टिप्पणियां केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन को लम्बे समय तक जारी रखने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा, "यदि वे यह सोचते हैं कि वे भ्रष्टाचार करते रहेंगे तो हम भी विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। हम निश्चिततौर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह हमारी क्रांति है।" एक चकित करने वाले कदम के तहत दिल्ली मेट्रो ने घोषणा की कि वे सभी छह स्टेशन खुले रहेंगे, जिन्हें विरोध प्रदर्शन को नाकाम करने के क्रम में रविवार को सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक बंद रखने की घोषणा की गई थी। विरोध प्रदर्शन शुरू होने के सात घंटे से अधिक समय बाद लगभग 2.30 बजे केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन समाप्त करने की घोषणा की। पुलिस ने यह कहते हुए बल प्रयोग को जायज ठहराया कि वीआईपी इलाकों में आईएसी का विरोध प्रदर्शन अनधिकृत था। इसके पहले, रविवार तड़के पुलिस ने केजरीवाल और छह अन्य कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया था, लेकिन थाने के बाहर जब सैकड़ों समर्थकों ने जुटकर नारेबाजी शुरू की तो लगभग दो घंटे बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। केजरीवाल को मनमोहन सिंह के आवास के करीब एक पुलिस बैरिकेड के पास दो अन्य सहयोगियों के साथ रोक दिया गया था। आईएसी के अन्य नेता, मनीष सिसोदिया को सहयोगियों के साथ 10 जनपथ के बाहर हिरासत में ले लिया गया था। आईएसी के एक प्रवक्ता ने कहा, "हिरासत में लिए गए कुछ कार्यकर्ताओं के साथ हाथापाई की गई।" पूरे समूह को जब रिहा कर दिया गया तो केजरीवाल और अन्य कार्यकर्ता जंतर मंतर पहुंचे और मनमोहन सिंह के आवास पर दोबारा लौटने का संकल्प लिया, जिसे उन्होंने पूरा किया। केजरीवाल ने सवाल किया कि सरकार आखिर उन्हें क्यों रोक रही है। केजरीवाल ने कहा, "हमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन से आखिर क्यों रोका जा रहा है? कांग्रेस और भाजपा इतने विरोध प्रदर्शन करती है। उन्हें कभी नहीं रोका जाता। जब राज ठाकरे बगैर पुलिस अनुमति के रैली आयोजित करते हैं, हजारों लोग उसमें हिस्सा लेते हैं, तब उन्हें नहीं रोका जाता, अलबत्ता उन्हें पुलिस सुरक्षा दी जाती है। यदि हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हैं तो फिर हमें क्यों हिरासत में लिया जाता है?" दोपहर तक सैकड़ों कार्यकर्ता हाथों में राष्ट्रध्वज लिए प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष के आवास की ओर बढ़े। इसे देखकर मुट्ठीभर पुलिसकर्मी दंग रह गए। केजरीवाल जहां मनमोहन सिंह के आवास के पास थे, तो भूषण सोनिया के आवास के पास। एक समय पुलिस ने कार्यकर्ताओं को पीछे धकेलने की कोशिश की, जिसके बाद दोनों पक्षों में टकराव की नौबत आ गई। भीड़ 'हल्ला बोल' और 'वी वांट जस्टिस' का नारा लगाते हुए आगे बढ़ने की कोशिश कर रही थी।टिप्पणियां केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन को लम्बे समय तक जारी रखने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा, "यदि वे यह सोचते हैं कि वे भ्रष्टाचार करते रहेंगे तो हम भी विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। हम निश्चिततौर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह हमारी क्रांति है।" एक चकित करने वाले कदम के तहत दिल्ली मेट्रो ने घोषणा की कि वे सभी छह स्टेशन खुले रहेंगे, जिन्हें विरोध प्रदर्शन को नाकाम करने के क्रम में रविवार को सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक बंद रखने की घोषणा की गई थी। पुलिस ने यह कहते हुए बल प्रयोग को जायज ठहराया कि वीआईपी इलाकों में आईएसी का विरोध प्रदर्शन अनधिकृत था। इसके पहले, रविवार तड़के पुलिस ने केजरीवाल और छह अन्य कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया था, लेकिन थाने के बाहर जब सैकड़ों समर्थकों ने जुटकर नारेबाजी शुरू की तो लगभग दो घंटे बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। केजरीवाल को मनमोहन सिंह के आवास के करीब एक पुलिस बैरिकेड के पास दो अन्य सहयोगियों के साथ रोक दिया गया था। आईएसी के अन्य नेता, मनीष सिसोदिया को सहयोगियों के साथ 10 जनपथ के बाहर हिरासत में ले लिया गया था। आईएसी के एक प्रवक्ता ने कहा, "हिरासत में लिए गए कुछ कार्यकर्ताओं के साथ हाथापाई की गई।" पूरे समूह को जब रिहा कर दिया गया तो केजरीवाल और अन्य कार्यकर्ता जंतर मंतर पहुंचे और मनमोहन सिंह के आवास पर दोबारा लौटने का संकल्प लिया, जिसे उन्होंने पूरा किया। केजरीवाल ने सवाल किया कि सरकार आखिर उन्हें क्यों रोक रही है। केजरीवाल ने कहा, "हमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन से आखिर क्यों रोका जा रहा है? कांग्रेस और भाजपा इतने विरोध प्रदर्शन करती है। उन्हें कभी नहीं रोका जाता। जब राज ठाकरे बगैर पुलिस अनुमति के रैली आयोजित करते हैं, हजारों लोग उसमें हिस्सा लेते हैं, तब उन्हें नहीं रोका जाता, अलबत्ता उन्हें पुलिस सुरक्षा दी जाती है। यदि हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हैं तो फिर हमें क्यों हिरासत में लिया जाता है?" दोपहर तक सैकड़ों कार्यकर्ता हाथों में राष्ट्रध्वज लिए प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष के आवास की ओर बढ़े। इसे देखकर मुट्ठीभर पुलिसकर्मी दंग रह गए। केजरीवाल जहां मनमोहन सिंह के आवास के पास थे, तो भूषण सोनिया के आवास के पास। एक समय पुलिस ने कार्यकर्ताओं को पीछे धकेलने की कोशिश की, जिसके बाद दोनों पक्षों में टकराव की नौबत आ गई। भीड़ 'हल्ला बोल' और 'वी वांट जस्टिस' का नारा लगाते हुए आगे बढ़ने की कोशिश कर रही थी।टिप्पणियां केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन को लम्बे समय तक जारी रखने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा, "यदि वे यह सोचते हैं कि वे भ्रष्टाचार करते रहेंगे तो हम भी विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। हम निश्चिततौर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह हमारी क्रांति है।" एक चकित करने वाले कदम के तहत दिल्ली मेट्रो ने घोषणा की कि वे सभी छह स्टेशन खुले रहेंगे, जिन्हें विरोध प्रदर्शन को नाकाम करने के क्रम में रविवार को सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक बंद रखने की घोषणा की गई थी। इसके पहले, रविवार तड़के पुलिस ने केजरीवाल और छह अन्य कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया था, लेकिन थाने के बाहर जब सैकड़ों समर्थकों ने जुटकर नारेबाजी शुरू की तो लगभग दो घंटे बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। केजरीवाल को मनमोहन सिंह के आवास के करीब एक पुलिस बैरिकेड के पास दो अन्य सहयोगियों के साथ रोक दिया गया था। आईएसी के अन्य नेता, मनीष सिसोदिया को सहयोगियों के साथ 10 जनपथ के बाहर हिरासत में ले लिया गया था। आईएसी के एक प्रवक्ता ने कहा, "हिरासत में लिए गए कुछ कार्यकर्ताओं के साथ हाथापाई की गई।" पूरे समूह को जब रिहा कर दिया गया तो केजरीवाल और अन्य कार्यकर्ता जंतर मंतर पहुंचे और मनमोहन सिंह के आवास पर दोबारा लौटने का संकल्प लिया, जिसे उन्होंने पूरा किया। केजरीवाल ने सवाल किया कि सरकार आखिर उन्हें क्यों रोक रही है। केजरीवाल ने कहा, "हमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन से आखिर क्यों रोका जा रहा है? कांग्रेस और भाजपा इतने विरोध प्रदर्शन करती है। उन्हें कभी नहीं रोका जाता। जब राज ठाकरे बगैर पुलिस अनुमति के रैली आयोजित करते हैं, हजारों लोग उसमें हिस्सा लेते हैं, तब उन्हें नहीं रोका जाता, अलबत्ता उन्हें पुलिस सुरक्षा दी जाती है। यदि हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हैं तो फिर हमें क्यों हिरासत में लिया जाता है?" दोपहर तक सैकड़ों कार्यकर्ता हाथों में राष्ट्रध्वज लिए प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष के आवास की ओर बढ़े। इसे देखकर मुट्ठीभर पुलिसकर्मी दंग रह गए। केजरीवाल जहां मनमोहन सिंह के आवास के पास थे, तो भूषण सोनिया के आवास के पास। एक समय पुलिस ने कार्यकर्ताओं को पीछे धकेलने की कोशिश की, जिसके बाद दोनों पक्षों में टकराव की नौबत आ गई। भीड़ 'हल्ला बोल' और 'वी वांट जस्टिस' का नारा लगाते हुए आगे बढ़ने की कोशिश कर रही थी।टिप्पणियां केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन को लम्बे समय तक जारी रखने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा, "यदि वे यह सोचते हैं कि वे भ्रष्टाचार करते रहेंगे तो हम भी विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। हम निश्चिततौर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह हमारी क्रांति है।" एक चकित करने वाले कदम के तहत दिल्ली मेट्रो ने घोषणा की कि वे सभी छह स्टेशन खुले रहेंगे, जिन्हें विरोध प्रदर्शन को नाकाम करने के क्रम में रविवार को सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक बंद रखने की घोषणा की गई थी। केजरीवाल को मनमोहन सिंह के आवास के करीब एक पुलिस बैरिकेड के पास दो अन्य सहयोगियों के साथ रोक दिया गया था। आईएसी के अन्य नेता, मनीष सिसोदिया को सहयोगियों के साथ 10 जनपथ के बाहर हिरासत में ले लिया गया था। आईएसी के एक प्रवक्ता ने कहा, "हिरासत में लिए गए कुछ कार्यकर्ताओं के साथ हाथापाई की गई।" पूरे समूह को जब रिहा कर दिया गया तो केजरीवाल और अन्य कार्यकर्ता जंतर मंतर पहुंचे और मनमोहन सिंह के आवास पर दोबारा लौटने का संकल्प लिया, जिसे उन्होंने पूरा किया। केजरीवाल ने सवाल किया कि सरकार आखिर उन्हें क्यों रोक रही है। केजरीवाल ने कहा, "हमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन से आखिर क्यों रोका जा रहा है? कांग्रेस और भाजपा इतने विरोध प्रदर्शन करती है। उन्हें कभी नहीं रोका जाता। जब राज ठाकरे बगैर पुलिस अनुमति के रैली आयोजित करते हैं, हजारों लोग उसमें हिस्सा लेते हैं, तब उन्हें नहीं रोका जाता, अलबत्ता उन्हें पुलिस सुरक्षा दी जाती है। यदि हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हैं तो फिर हमें क्यों हिरासत में लिया जाता है?" दोपहर तक सैकड़ों कार्यकर्ता हाथों में राष्ट्रध्वज लिए प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष के आवास की ओर बढ़े। इसे देखकर मुट्ठीभर पुलिसकर्मी दंग रह गए। केजरीवाल जहां मनमोहन सिंह के आवास के पास थे, तो भूषण सोनिया के आवास के पास। एक समय पुलिस ने कार्यकर्ताओं को पीछे धकेलने की कोशिश की, जिसके बाद दोनों पक्षों में टकराव की नौबत आ गई। भीड़ 'हल्ला बोल' और 'वी वांट जस्टिस' का नारा लगाते हुए आगे बढ़ने की कोशिश कर रही थी।टिप्पणियां केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन को लम्बे समय तक जारी रखने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा, "यदि वे यह सोचते हैं कि वे भ्रष्टाचार करते रहेंगे तो हम भी विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। हम निश्चिततौर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह हमारी क्रांति है।" एक चकित करने वाले कदम के तहत दिल्ली मेट्रो ने घोषणा की कि वे सभी छह स्टेशन खुले रहेंगे, जिन्हें विरोध प्रदर्शन को नाकाम करने के क्रम में रविवार को सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक बंद रखने की घोषणा की गई थी। आईएसी के एक प्रवक्ता ने कहा, "हिरासत में लिए गए कुछ कार्यकर्ताओं के साथ हाथापाई की गई।" पूरे समूह को जब रिहा कर दिया गया तो केजरीवाल और अन्य कार्यकर्ता जंतर मंतर पहुंचे और मनमोहन सिंह के आवास पर दोबारा लौटने का संकल्प लिया, जिसे उन्होंने पूरा किया। केजरीवाल ने सवाल किया कि सरकार आखिर उन्हें क्यों रोक रही है। केजरीवाल ने कहा, "हमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन से आखिर क्यों रोका जा रहा है? कांग्रेस और भाजपा इतने विरोध प्रदर्शन करती है। उन्हें कभी नहीं रोका जाता। जब राज ठाकरे बगैर पुलिस अनुमति के रैली आयोजित करते हैं, हजारों लोग उसमें हिस्सा लेते हैं, तब उन्हें नहीं रोका जाता, अलबत्ता उन्हें पुलिस सुरक्षा दी जाती है। यदि हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हैं तो फिर हमें क्यों हिरासत में लिया जाता है?" दोपहर तक सैकड़ों कार्यकर्ता हाथों में राष्ट्रध्वज लिए प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष के आवास की ओर बढ़े। इसे देखकर मुट्ठीभर पुलिसकर्मी दंग रह गए। केजरीवाल जहां मनमोहन सिंह के आवास के पास थे, तो भूषण सोनिया के आवास के पास। एक समय पुलिस ने कार्यकर्ताओं को पीछे धकेलने की कोशिश की, जिसके बाद दोनों पक्षों में टकराव की नौबत आ गई। भीड़ 'हल्ला बोल' और 'वी वांट जस्टिस' का नारा लगाते हुए आगे बढ़ने की कोशिश कर रही थी।टिप्पणियां केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन को लम्बे समय तक जारी रखने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा, "यदि वे यह सोचते हैं कि वे भ्रष्टाचार करते रहेंगे तो हम भी विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। हम निश्चिततौर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह हमारी क्रांति है।" एक चकित करने वाले कदम के तहत दिल्ली मेट्रो ने घोषणा की कि वे सभी छह स्टेशन खुले रहेंगे, जिन्हें विरोध प्रदर्शन को नाकाम करने के क्रम में रविवार को सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक बंद रखने की घोषणा की गई थी। पूरे समूह को जब रिहा कर दिया गया तो केजरीवाल और अन्य कार्यकर्ता जंतर मंतर पहुंचे और मनमोहन सिंह के आवास पर दोबारा लौटने का संकल्प लिया, जिसे उन्होंने पूरा किया। केजरीवाल ने सवाल किया कि सरकार आखिर उन्हें क्यों रोक रही है। केजरीवाल ने कहा, "हमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन से आखिर क्यों रोका जा रहा है? कांग्रेस और भाजपा इतने विरोध प्रदर्शन करती है। उन्हें कभी नहीं रोका जाता। जब राज ठाकरे बगैर पुलिस अनुमति के रैली आयोजित करते हैं, हजारों लोग उसमें हिस्सा लेते हैं, तब उन्हें नहीं रोका जाता, अलबत्ता उन्हें पुलिस सुरक्षा दी जाती है। यदि हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हैं तो फिर हमें क्यों हिरासत में लिया जाता है?" दोपहर तक सैकड़ों कार्यकर्ता हाथों में राष्ट्रध्वज लिए प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष के आवास की ओर बढ़े। इसे देखकर मुट्ठीभर पुलिसकर्मी दंग रह गए। केजरीवाल जहां मनमोहन सिंह के आवास के पास थे, तो भूषण सोनिया के आवास के पास। एक समय पुलिस ने कार्यकर्ताओं को पीछे धकेलने की कोशिश की, जिसके बाद दोनों पक्षों में टकराव की नौबत आ गई। भीड़ 'हल्ला बोल' और 'वी वांट जस्टिस' का नारा लगाते हुए आगे बढ़ने की कोशिश कर रही थी।टिप्पणियां केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन को लम्बे समय तक जारी रखने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा, "यदि वे यह सोचते हैं कि वे भ्रष्टाचार करते रहेंगे तो हम भी विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। हम निश्चिततौर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह हमारी क्रांति है।" एक चकित करने वाले कदम के तहत दिल्ली मेट्रो ने घोषणा की कि वे सभी छह स्टेशन खुले रहेंगे, जिन्हें विरोध प्रदर्शन को नाकाम करने के क्रम में रविवार को सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक बंद रखने की घोषणा की गई थी। केजरीवाल ने सवाल किया कि सरकार आखिर उन्हें क्यों रोक रही है। केजरीवाल ने कहा, "हमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन से आखिर क्यों रोका जा रहा है? कांग्रेस और भाजपा इतने विरोध प्रदर्शन करती है। उन्हें कभी नहीं रोका जाता। जब राज ठाकरे बगैर पुलिस अनुमति के रैली आयोजित करते हैं, हजारों लोग उसमें हिस्सा लेते हैं, तब उन्हें नहीं रोका जाता, अलबत्ता उन्हें पुलिस सुरक्षा दी जाती है। यदि हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हैं तो फिर हमें क्यों हिरासत में लिया जाता है?" दोपहर तक सैकड़ों कार्यकर्ता हाथों में राष्ट्रध्वज लिए प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष के आवास की ओर बढ़े। इसे देखकर मुट्ठीभर पुलिसकर्मी दंग रह गए। केजरीवाल जहां मनमोहन सिंह के आवास के पास थे, तो भूषण सोनिया के आवास के पास। एक समय पुलिस ने कार्यकर्ताओं को पीछे धकेलने की कोशिश की, जिसके बाद दोनों पक्षों में टकराव की नौबत आ गई। भीड़ 'हल्ला बोल' और 'वी वांट जस्टिस' का नारा लगाते हुए आगे बढ़ने की कोशिश कर रही थी।टिप्पणियां केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन को लम्बे समय तक जारी रखने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा, "यदि वे यह सोचते हैं कि वे भ्रष्टाचार करते रहेंगे तो हम भी विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। हम निश्चिततौर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह हमारी क्रांति है।" एक चकित करने वाले कदम के तहत दिल्ली मेट्रो ने घोषणा की कि वे सभी छह स्टेशन खुले रहेंगे, जिन्हें विरोध प्रदर्शन को नाकाम करने के क्रम में रविवार को सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक बंद रखने की घोषणा की गई थी। दोपहर तक सैकड़ों कार्यकर्ता हाथों में राष्ट्रध्वज लिए प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष के आवास की ओर बढ़े। इसे देखकर मुट्ठीभर पुलिसकर्मी दंग रह गए। केजरीवाल जहां मनमोहन सिंह के आवास के पास थे, तो भूषण सोनिया के आवास के पास। एक समय पुलिस ने कार्यकर्ताओं को पीछे धकेलने की कोशिश की, जिसके बाद दोनों पक्षों में टकराव की नौबत आ गई। भीड़ 'हल्ला बोल' और 'वी वांट जस्टिस' का नारा लगाते हुए आगे बढ़ने की कोशिश कर रही थी।टिप्पणियां केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन को लम्बे समय तक जारी रखने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा, "यदि वे यह सोचते हैं कि वे भ्रष्टाचार करते रहेंगे तो हम भी विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। हम निश्चिततौर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह हमारी क्रांति है।" एक चकित करने वाले कदम के तहत दिल्ली मेट्रो ने घोषणा की कि वे सभी छह स्टेशन खुले रहेंगे, जिन्हें विरोध प्रदर्शन को नाकाम करने के क्रम में रविवार को सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक बंद रखने की घोषणा की गई थी। एक समय पुलिस ने कार्यकर्ताओं को पीछे धकेलने की कोशिश की, जिसके बाद दोनों पक्षों में टकराव की नौबत आ गई। भीड़ 'हल्ला बोल' और 'वी वांट जस्टिस' का नारा लगाते हुए आगे बढ़ने की कोशिश कर रही थी।टिप्पणियां केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन को लम्बे समय तक जारी रखने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा, "यदि वे यह सोचते हैं कि वे भ्रष्टाचार करते रहेंगे तो हम भी विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। हम निश्चिततौर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह हमारी क्रांति है।" एक चकित करने वाले कदम के तहत दिल्ली मेट्रो ने घोषणा की कि वे सभी छह स्टेशन खुले रहेंगे, जिन्हें विरोध प्रदर्शन को नाकाम करने के क्रम में रविवार को सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक बंद रखने की घोषणा की गई थी। केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन को लम्बे समय तक जारी रखने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा, "यदि वे यह सोचते हैं कि वे भ्रष्टाचार करते रहेंगे तो हम भी विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। हम निश्चिततौर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह हमारी क्रांति है।" एक चकित करने वाले कदम के तहत दिल्ली मेट्रो ने घोषणा की कि वे सभी छह स्टेशन खुले रहेंगे, जिन्हें विरोध प्रदर्शन को नाकाम करने के क्रम में रविवार को सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक बंद रखने की घोषणा की गई थी। एक चकित करने वाले कदम के तहत दिल्ली मेट्रो ने घोषणा की कि वे सभी छह स्टेशन खुले रहेंगे, जिन्हें विरोध प्रदर्शन को नाकाम करने के क्रम में रविवार को सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक बंद रखने की घोषणा की गई थी।
यह एक सारांश है: अरविंद केजरीवाल के प्रदर्शन को लेकर पांच मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें दंगा फैलाने का मामला भी दर्ज किया गया है। केजरीवाल और उनके समर्थक कोयला आवंटन को लेकर पीएम, सोनिया और गडकरी के घर का घेराव करने निकले थे।
9
['hin']
एक सारांश बनाओ: टीम इंडिया के पूर्व ओपनर वीरेंद्र सहवाग जिस तरह की धमाकेदार बल्‍लेबाजी करते थे, उसी अंदाज में वे अपने विचार व्‍यक्‍त करते हैं. भारत और ऑस्‍ट्रेलिया के बीच शुरू हो रही टेस्‍ट सीरीज को लेकर उन्‍होंने अनुमान लगाया है कि विराट कोहली के नेतृत्‍व वाली टीम इंडिया 3-0 या 3-1 के अंतर से कंगारू टीम को हराने में कामयाब रहेगी. बल्‍लेबाजी और गेंदबाजी में भारतीय टीम के संतुलन और टीम के हालिया प्रदर्शन के आधार पर उन्‍होंने यह भविष्‍यवाणी की है. आईपीएल में महेंद्र सिंह धोनी को राइजिंग पुणे सुपरजाइंट्स के कप्तान पद से हटाने के फैसले के बारे में उन्होंने कहा कि यह दुखद फैसला था. सहवाग ने कहा, ‘मुझे खुशी है कि वह अब कप्तान नहीं हैं क्योंकि अब मेरी टीम किंग्स इलेवन पंजाब पुणे की टीम को हरा सकती है. अगर इस पर गंभीरता से बात करूं तो यह फ्रेंचाइजी का फैसला है लेकिन वह भारत के सर्वश्रेष्ठ कप्तानों में से एक हैं.’टिप्पणियां सहवाग ने कहा, ‘कप्‍तान विराट कोहली अब काफी परिपक्‍व हो गए हैं. वे विश्वस्तरीय खिलाड़ी है और मुझे लगता है कि जब वह संन्यास लेंगे, तब तक किसी एक प्रारूप के सभी रिकॉर्ड तोड़ देंगे.’यहां ‘स्पोरटेल’ महोत्सव के दौरान अपनी यह राय जताते हुए वीरू ने कहा, ‘टीम इंडिया संतुलित है. उसके पास कुशल तेज गेंदबाज और स्पिनर हैं और इसके साथ ही बेहतरीन बल्लेबाज हैं जिससे यह सर्वश्रेष्ठ भारतीय टीम बन गई है. सहवाग ने कहा कि यह टीम विदेशों में भी टेस्ट सीरीज जीतने की क्षमता रखती है.’ लेकिन अपनी इस राय के साथ उन्‍होंने टीम इंडिया को आगाज भी किया कि बाजी पलटने में देर नहीं लगती और टीम को अपनी क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन करना होगा. दिल्‍ली के इस पूर्व बल्‍लेबाज ने कहा, ‘यह टीम बेहतरीन क्रिकेट खेल रही है. उसने नौ टेस्ट मैचों में से आठ में जीत दर्ज की और यह बड़ी उपलब्धि है लेकिन पासा पलटने में देर नहीं लगती है और मेरे हिसाब से इस सीरीज में एक टेस्ट ऐसा होगा जिसमें या तो गेंदबाज नहीं चलेंगे या फिर बल्लेबाज. ’उन्होंने भारतीय कप्तान विराट कोहली की भी तारीफ की और उन्हें वर्तमान समय में तीनों प्रारूपों का सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर करार दिया. उन्होंने कहा कि ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन के पास भी टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक विकेट लेने वाला गेंदबाज बनने का मौका रहेगा लेकिन इसके लिये उन्हें अपनी फिटनेस बनाए रखनी होगी. सहवाग ने कहा, ‘कप्‍तान विराट कोहली अब काफी परिपक्‍व हो गए हैं. वे विश्वस्तरीय खिलाड़ी है और मुझे लगता है कि जब वह संन्यास लेंगे, तब तक किसी एक प्रारूप के सभी रिकॉर्ड तोड़ देंगे.’यहां ‘स्पोरटेल’ महोत्सव के दौरान अपनी यह राय जताते हुए वीरू ने कहा, ‘टीम इंडिया संतुलित है. उसके पास कुशल तेज गेंदबाज और स्पिनर हैं और इसके साथ ही बेहतरीन बल्लेबाज हैं जिससे यह सर्वश्रेष्ठ भारतीय टीम बन गई है. सहवाग ने कहा कि यह टीम विदेशों में भी टेस्ट सीरीज जीतने की क्षमता रखती है.’ लेकिन अपनी इस राय के साथ उन्‍होंने टीम इंडिया को आगाज भी किया कि बाजी पलटने में देर नहीं लगती और टीम को अपनी क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन करना होगा. दिल्‍ली के इस पूर्व बल्‍लेबाज ने कहा, ‘यह टीम बेहतरीन क्रिकेट खेल रही है. उसने नौ टेस्ट मैचों में से आठ में जीत दर्ज की और यह बड़ी उपलब्धि है लेकिन पासा पलटने में देर नहीं लगती है और मेरे हिसाब से इस सीरीज में एक टेस्ट ऐसा होगा जिसमें या तो गेंदबाज नहीं चलेंगे या फिर बल्लेबाज. ’उन्होंने भारतीय कप्तान विराट कोहली की भी तारीफ की और उन्हें वर्तमान समय में तीनों प्रारूपों का सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर करार दिया. उन्होंने कहा कि ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन के पास भी टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक विकेट लेने वाला गेंदबाज बनने का मौका रहेगा लेकिन इसके लिये उन्हें अपनी फिटनेस बनाए रखनी होगी. दिल्‍ली के इस पूर्व बल्‍लेबाज ने कहा, ‘यह टीम बेहतरीन क्रिकेट खेल रही है. उसने नौ टेस्ट मैचों में से आठ में जीत दर्ज की और यह बड़ी उपलब्धि है लेकिन पासा पलटने में देर नहीं लगती है और मेरे हिसाब से इस सीरीज में एक टेस्ट ऐसा होगा जिसमें या तो गेंदबाज नहीं चलेंगे या फिर बल्लेबाज. ’उन्होंने भारतीय कप्तान विराट कोहली की भी तारीफ की और उन्हें वर्तमान समय में तीनों प्रारूपों का सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर करार दिया. उन्होंने कहा कि ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन के पास भी टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक विकेट लेने वाला गेंदबाज बनने का मौका रहेगा लेकिन इसके लिये उन्हें अपनी फिटनेस बनाए रखनी होगी.
यह एक सारांश है: टेस्‍ट सीरीज में भारत के 3-0 या 3-1 से जीतने की उम्‍मीद जताई कहा-टीम इंडिया अब विदेश में भी सीरीज जीतने में सक्षम है अश्विन फिट रहे तो टेस्‍ट में सबसे ज्‍यादा विकेट ले सकते हैं
21
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मायावती सरकार पर नोएडा आवासीय योजना में 8,000 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप लगाते हुए सोमवार को लोकायुक्त से इसकी शिकायत कर जांच की मांग की। भाजपा के राष्ट्रीय सचिव किरीट सोमैया ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "वर्ष 2009 से 2011 के बीच में नोएडा हाउसिंग स्कीम में कुल 38.22 लाख वर्ग मीटर भूमि को बाजार मूल्य को नजरअंदाज कर 8,131 करोड़ रुपये में बेच दिया गया जबकि इसका वास्तविक दाम 16,000 करोड़ रुपये है।" उन्होंने कहा कि बोली प्रक्रिया में गड़बड़ियां की गईं और कुछ चुने बिल्डरों को गैर पारदर्शी तरीके से बाजार भाव से कम दाम में जमीन बेच दी गई जिससे सरकारी खजाने को 8,000 करोड़ रुपये की हानि हुई। सोमैया ने कहा, "इस घोटाले के सम्बंध में साक्ष्य और जरूरी कागजात के साथ हमारा एक प्रतिनिधिमंडल आज लोकायुक्त एन.के.मेहरोत्रा से मिला और नोएडा विकास प्राधिकरण के तत्कालीन अध्यक्ष मोहिंदर सिंह, विशेष कार्यपालक अधिकारी राधा रमण, प्राधिकरण के तत्कालीन ओएसडी यशपाल त्यागी और राज्य उद्योग मंत्रालय के तत्कालीन सचिवों के खिलाफ शिकायत कर उनसे पूरे मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कारवाई की मांग की।"  भाजपा नेता ने कहा कि उनके पास मायावती के सबसे करीबी मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी के खिलाफ काफी शिकायतें हैं। उन्होंने कहा, "हम दीवापली के बाद सिद्दीकी के खिलाफ लोकायुक्त से शिकायत करेंगे।"
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: भाजपा ने माया सरकार पर नोएडा आवासीय योजना में 8,000 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप लगाते हुए लोकायुक्त से इसकी शिकायत कर जांच की मांग की।
11
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: बॉलीवुड के किंग शाहरुख खान (Shah Rukh Khan) की फिल्म 'जीरो' (Zero) बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप हुई. जिसके बाद वह अपनी अगली फिल्म 'सारे जहां से अच्छा' (Saare Jahaan Se Achcha) में लीड रोल के तौर पर तैयारी करने लगे थे. हालांकि अब मीडिया में खबरें आना शुरू हो गई हैं कि शाहरुख खान की जगह 'उरी' फिल्म से फेम पाने वाले एक्टर विक्की कौशल (Vicky Kaushal) जगह ले सकते हैं. 'सारे जहां से अच्छा' फिल्म अंतरिक्ष में पहली बार यात्रा करने वाले भारतीय राकेश शर्मा (Rakesh Sharma) के जीवन पर आधारित बायोपिक होगी. इसे फिल्ममेकर्स सिद्धार्थ रॉय कपूर और रॉनी स्क्रूवाला बना रहे हैं. सोशल मीडिया व अन्य मीडिया द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार अब शाहरुख खान की जगह इस फिल्म में विक्की कौशल हो सकते हैं. हालांकि अभी तक इसकी कोई भी आधाकारिक पुष्टि नहीं हुई है. विक्की कौशल (Vicky Kaushal) पूर्व भारतीय एयरफोर्स पायलट राकेश शर्मा के किरदार में दिखाई दे सकते हैं. फिल्म के निर्देशक महेश मथाई ने इसके निर्माण की योजना बहुत पहले ही बना ली थी, लेकिन निर्माता पहले इस सोच में पड़े थे कि राकेश शर्मा के रोल के लिए शाहरुख खान और आमिर खान में किसे अप्रोच किया जाए. कहा जा रहा है कि विक्की कौशल स्टारर फिल्म 'उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक' को बड़ी सफलता मिलने के बाद अब रोनी स्क्रूवाला ने मन बदल लिया है. 'उरी' फिल्म को रोनी ने ही प्रोड्यूस किया था, जो 'सारे जहां से अच्छा' (Saare Jahaan Se Achcha) फिल्म प्रोड्यूस करने जा रहे हैं.   फिलहाल अब देखना होगा कि 'सारे जहां से अच्छा' (Saare Jahaan Se Achcha) फिल्म के लिए निर्माता किस अभिनेता का नाम फाइनल करेंगे. बता दें, विक्की कौशल (Vicky Kaushal) की 'उरी: द सर्जीकल स्ट्राइक' (Uri: The Surgical Strike)'  को लेकर अच्छे रिव्यू आए थे, जिसके बाद बॉक्स ऑफिस (Uri: The Surgical Strikes Box Office Collection) पर अच्छे नतीजे देखने को मिले. 'उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक' को अच्छे पब्लिक रिव्यू भी मिले. विक्की कौशल (Vicky Kaushal) और  यामी गौतम (Yami Gautam) की 'उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक' (URI The Surgical Strikes) 25 करोड़ के बजट में बनी है और इसे लगभग 800 स्क्रीन पर रिलीज किया गया था.
संक्षिप्त पाठ: विक्की कौशल के लिए खुशखबरी शाहरुख को कर सकते हैं रिप्लेस 'सारे जहां से अच्छा' में हो सकते हैं लीड एक्टर
14
['hin']
एक सारांश बनाओ: मुंबई में गैंगरेप की शिकार एक 10 साल की लड़की ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। उसके साथ चार युवकों ने कई बार गैंगरेप किया था। माना जा रहा है कि आरोपियों ने लड़की को रोजमर्रा का काम करने के लिए 10 रुपये देने का वादा किया था लेकिन वह उसे एक सुनसान जगह ले गए। हादसा 16 जून को हनुमान नगर इलाके में हुआ। थाने के अधिकारी ने कहा, लड़की को 10 रुपये का लालच देकर कुछ काम करवाने के बहाने एक एकांत जगह ले जाकर उसके साथ गैंगरेप किया गया। घटना के बाद वह लड़की अपने घर गई और इसकी जानकारी अपने माता-पिता को दी। उसके माता-पिता ने उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती करवाया।टिप्पणियां अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों की उम्र 13 से 16 वर्ष है। चार आरोपियों में से दो लड़की के भाई हैं और एक ने पहले भी उसके साथ रेप किया था। अधिकारी ने कहा, चारों आरोपी और पीड़िता आपस में एक-दूसरे को जानते थे। उन्होंने बार-बार उसके साथ रेप किया। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। माना जा रहा है कि आरोपियों ने लड़की को रोजमर्रा का काम करने के लिए 10 रुपये देने का वादा किया था लेकिन वह उसे एक सुनसान जगह ले गए। हादसा 16 जून को हनुमान नगर इलाके में हुआ। थाने के अधिकारी ने कहा, लड़की को 10 रुपये का लालच देकर कुछ काम करवाने के बहाने एक एकांत जगह ले जाकर उसके साथ गैंगरेप किया गया। घटना के बाद वह लड़की अपने घर गई और इसकी जानकारी अपने माता-पिता को दी। उसके माता-पिता ने उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती करवाया।टिप्पणियां अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों की उम्र 13 से 16 वर्ष है। चार आरोपियों में से दो लड़की के भाई हैं और एक ने पहले भी उसके साथ रेप किया था। अधिकारी ने कहा, चारों आरोपी और पीड़िता आपस में एक-दूसरे को जानते थे। उन्होंने बार-बार उसके साथ रेप किया। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। हादसा 16 जून को हनुमान नगर इलाके में हुआ। थाने के अधिकारी ने कहा, लड़की को 10 रुपये का लालच देकर कुछ काम करवाने के बहाने एक एकांत जगह ले जाकर उसके साथ गैंगरेप किया गया। घटना के बाद वह लड़की अपने घर गई और इसकी जानकारी अपने माता-पिता को दी। उसके माता-पिता ने उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती करवाया।टिप्पणियां अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों की उम्र 13 से 16 वर्ष है। चार आरोपियों में से दो लड़की के भाई हैं और एक ने पहले भी उसके साथ रेप किया था। अधिकारी ने कहा, चारों आरोपी और पीड़िता आपस में एक-दूसरे को जानते थे। उन्होंने बार-बार उसके साथ रेप किया। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना के बाद वह लड़की अपने घर गई और इसकी जानकारी अपने माता-पिता को दी। उसके माता-पिता ने उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती करवाया।टिप्पणियां अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों की उम्र 13 से 16 वर्ष है। चार आरोपियों में से दो लड़की के भाई हैं और एक ने पहले भी उसके साथ रेप किया था। अधिकारी ने कहा, चारों आरोपी और पीड़िता आपस में एक-दूसरे को जानते थे। उन्होंने बार-बार उसके साथ रेप किया। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों की उम्र 13 से 16 वर्ष है। चार आरोपियों में से दो लड़की के भाई हैं और एक ने पहले भी उसके साथ रेप किया था। अधिकारी ने कहा, चारों आरोपी और पीड़िता आपस में एक-दूसरे को जानते थे। उन्होंने बार-बार उसके साथ रेप किया। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। अधिकारी ने कहा, चारों आरोपी और पीड़िता आपस में एक-दूसरे को जानते थे। उन्होंने बार-बार उसके साथ रेप किया। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
संक्षिप्त सारांश: मुंबई में गैंगरेप की शिकार एक 10 साल की लड़की ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। उसके साथ चार युवकों ने कई बार गैंगरेप किया था।
8
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: अंडमान में आदिवासी लड़कियों को आधे कपड़ों में जबरन नचाने का मामला सामने आया है। ब्रिटिश अखबार 'द गार्जियन'ने अपनी वेबसाइट पर एक वीडियो जारी किया है जिसमें एक पुलिसवाला आदिवासी लड़कियों को सैलानियों के सामने नंगे बदन नाचने के लिए मजबूर कर रहा है। गृह मंत्रालय ने इस बाबत अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह के प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है। उधर, आदिवासी मामलों के मंत्री केसी देव ने कहा है कि यह वीडियो दस साल पुराना है जबकि गार्जियन के पत्रकार ने इसक खंडन करते हुए कहा है कि यह वीडियो पुराना नहीं बल्कि नया है।टिप्पणियां 'द गार्जियन' ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस पुलिसवाले को वहां इसलिए तैनात किया गया था कि वह आदिवासियों को बाहरी लोगों से बचाए, लेकिन उसने 200 पाउंड के लिए अपना ईमान बेच दिया। इस वीडियो में पुलिसवाला लड़कियों से कह रहा है कि अगर वो नाचेंगी तो वह उन्हें खाना देगा। ये सैलानी जरावा आदिवासियों की दुनिया देखने गए थे। दक्षिणी अंडमान के जंगलों में रहने वाले 403 आदिवासियों का ये समुदाय आज के आधुनिक समाज से काफी कटा हुआ है। 'द गार्जियन' ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस पुलिसवाले को वहां इसलिए तैनात किया गया था कि वह आदिवासियों को बाहरी लोगों से बचाए, लेकिन उसने 200 पाउंड के लिए अपना ईमान बेच दिया। इस वीडियो में पुलिसवाला लड़कियों से कह रहा है कि अगर वो नाचेंगी तो वह उन्हें खाना देगा। ये सैलानी जरावा आदिवासियों की दुनिया देखने गए थे। दक्षिणी अंडमान के जंगलों में रहने वाले 403 आदिवासियों का ये समुदाय आज के आधुनिक समाज से काफी कटा हुआ है। इस वीडियो में पुलिसवाला लड़कियों से कह रहा है कि अगर वो नाचेंगी तो वह उन्हें खाना देगा। ये सैलानी जरावा आदिवासियों की दुनिया देखने गए थे। दक्षिणी अंडमान के जंगलों में रहने वाले 403 आदिवासियों का ये समुदाय आज के आधुनिक समाज से काफी कटा हुआ है।
संक्षिप्त सारांश: 'द गार्जियन' की वेबसाइट पर अंडमान में एक पुलिसवाले को आदिवासी लड़कियों को कपड़े उतारकर नाचने के लिए मजबूर करते दिखाया गया है।
10
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने सीनियर बल्लेबाज मिसबाह उल हक को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ आगामी वनडे और टेस्ट शृंखला के लिए कप्तान बरकरार रखा है। पीसीबी ने 38 बरस के मिसबाह को धीमी गति से रन बनाने के लिए पिछले साल टी-20 टीम की कप्तानी से हटा दिया था।टिप्पणियां पीसीबी सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रीय चयनकर्ताओं को बोर्ड ने बताया है कि मिसबाह दोनों प्रारूपों में कप्तान बने रहेंगे, जबकि टी-20 टीम की कप्तानी मोहम्मद हफीज ही करेंगे। पाकिस्तानी टीम तीन टेस्ट, पांच वन-डे और दो टी-20 मैचों के दौरे के लिए 20 जनवरी को दक्षिण अफ्रीका रवाना हो रही है। पीसीबी ने 38 बरस के मिसबाह को धीमी गति से रन बनाने के लिए पिछले साल टी-20 टीम की कप्तानी से हटा दिया था।टिप्पणियां पीसीबी सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रीय चयनकर्ताओं को बोर्ड ने बताया है कि मिसबाह दोनों प्रारूपों में कप्तान बने रहेंगे, जबकि टी-20 टीम की कप्तानी मोहम्मद हफीज ही करेंगे। पाकिस्तानी टीम तीन टेस्ट, पांच वन-डे और दो टी-20 मैचों के दौरे के लिए 20 जनवरी को दक्षिण अफ्रीका रवाना हो रही है। पीसीबी सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रीय चयनकर्ताओं को बोर्ड ने बताया है कि मिसबाह दोनों प्रारूपों में कप्तान बने रहेंगे, जबकि टी-20 टीम की कप्तानी मोहम्मद हफीज ही करेंगे। पाकिस्तानी टीम तीन टेस्ट, पांच वन-डे और दो टी-20 मैचों के दौरे के लिए 20 जनवरी को दक्षिण अफ्रीका रवाना हो रही है। पाकिस्तानी टीम तीन टेस्ट, पांच वन-डे और दो टी-20 मैचों के दौरे के लिए 20 जनवरी को दक्षिण अफ्रीका रवाना हो रही है।
संक्षिप्त सारांश: पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने सीनियर बल्लेबाज मिसबाह उल हक को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ आगामी वनडे और टेस्ट शृंखला के लिए कप्तान बरकरार रखा है।
23
['hin']
एक सारांश बनाओ: बजट प्रक्रिया संपन्न होने के साथ ही राज्यसभा को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया। उच्च सदन के 222वें सत्र को अनिश्चित काल के लिए स्थगित करने से पूर्व परंपरानुसार सदन में राष्ट्रगीत वंदे मातरम की धुन बजाई गई। सदन की बैठक शून्यकाल के फौरन बाद ही अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई। आम तौर पर सदन की बैठक को भोजनावकाश के बाद अनिश्चित काल के लिए स्थगित किया जाता है। गौरतलब है कि सदन की बैठक को अनिश्चित काल के लिए स्थगित करने से पहले भी कार्यवाही को 15 मिनट के लिए स्थगित करना पड़ा था। शुंगलू समिति की रिपोर्ट पेश किए जाने और उस पर कार्रवाई की मांग को लेकर विपक्ष ने भारी हंगामा किया। इसके कारण सुबह बैठक 15 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी थी। बैठक अनिश्चित काल के लिए स्थगित करने से पहले सभापति मोहम्मद हामिद अंसारी ने अपने पारंपरिक भाषण में कहा कि 21 फरवरी से शुरू हुए बजट सत्र के दौरान राष्ट्रपति अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा हुई। साथ ही सदन में रेलवे और आम बजट को चर्चा के बाद लौटाया गया।
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: शुंगलू समिति की रिपोर्ट पेश किए जाने और उस पर कार्रवाई की मांग को लेकर विपक्ष ने भारी हंगामा किया।
32
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री तथा राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव भी सोनिया गांधी के भोज में शिरकत करने के लिए दिल्ली में मौजूद हैं, और उन्होंने पुष्टि की है कि राष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष का संयुक्त प्रत्याशी तय करना इस बैठक के एजेंडे में शामिल है. सभी विपक्षी नेता अगले सप्ताह चेन्नई में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) प्रमुख एम करुणानिधि की 94वीं वर्षगांठ के अवसर पर फिर मिलेंगे. राष्ट्रपति पद के लिए सर्मसम्मत प्रत्याशी का सुझाव देते हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा था कि राष्ट्रपति डॉ प्रणब मुखर्जी को दूसरे कार्यकाल के लिए चुना जाना चाहिए, और सरकार को इस सुझाव पर पहल करनी चाहिए, लेकिन वह सोनिया गांधी के भोज में शिरकत नहीं कर रहे हैं. उनकी पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ नेता शरद यादव करेंगे.टिप्पणियां राष्ट्रपति डॉ प्रणब मुखर्जी, जिनका कार्यकाल जुलाई में खत्म हो रहा है, ने गुरुवार को संकेत दिया था कि वह दूसरे कार्यकाल के लिए दौड़ में नहीं हैं. एक समारोह के दौरान राष्ट्रपति ने गुरुवार को कहा, "मेरे पास ठीक दो महीने बचे हैं... 25 जुलाई को एक नया राष्ट्रपति कार्यभार संभाल लेगा... जिन अधिकारियों ने मेरे साथ काम किया है, मैं उन्हें उनके मंत्रालयों तथा विभागों में वापस भेज रहा हूं..." माना जाता है कि राष्ट्रपति ने ऐसे संकेत दिए हैं कि वह दूसरे कार्यकाल के लिए तभी विचार कर सकते हैं, जब उनका नाम सरकार की ओर से दिया जाए. केंद्र में सत्तासीन एनडीए ने फिलहाल किसी प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है, लेकिन बीजेपी अपने किसी नेता को राष्ट्रपति भवन में पहुंचाने की इच्छुक है. प्रसिद्ध विज्ञानी रहे डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के अलावा देश के सभी राष्ट्रपति पद पर पहुंचने से पहले कांग्रेस से ही संबद्ध रहे हैं. राष्ट्रपति पद के लिए सर्मसम्मत प्रत्याशी का सुझाव देते हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा था कि राष्ट्रपति डॉ प्रणब मुखर्जी को दूसरे कार्यकाल के लिए चुना जाना चाहिए, और सरकार को इस सुझाव पर पहल करनी चाहिए, लेकिन वह सोनिया गांधी के भोज में शिरकत नहीं कर रहे हैं. उनकी पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ नेता शरद यादव करेंगे.टिप्पणियां राष्ट्रपति डॉ प्रणब मुखर्जी, जिनका कार्यकाल जुलाई में खत्म हो रहा है, ने गुरुवार को संकेत दिया था कि वह दूसरे कार्यकाल के लिए दौड़ में नहीं हैं. एक समारोह के दौरान राष्ट्रपति ने गुरुवार को कहा, "मेरे पास ठीक दो महीने बचे हैं... 25 जुलाई को एक नया राष्ट्रपति कार्यभार संभाल लेगा... जिन अधिकारियों ने मेरे साथ काम किया है, मैं उन्हें उनके मंत्रालयों तथा विभागों में वापस भेज रहा हूं..." माना जाता है कि राष्ट्रपति ने ऐसे संकेत दिए हैं कि वह दूसरे कार्यकाल के लिए तभी विचार कर सकते हैं, जब उनका नाम सरकार की ओर से दिया जाए. केंद्र में सत्तासीन एनडीए ने फिलहाल किसी प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है, लेकिन बीजेपी अपने किसी नेता को राष्ट्रपति भवन में पहुंचाने की इच्छुक है. प्रसिद्ध विज्ञानी रहे डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के अलावा देश के सभी राष्ट्रपति पद पर पहुंचने से पहले कांग्रेस से ही संबद्ध रहे हैं. राष्ट्रपति डॉ प्रणब मुखर्जी, जिनका कार्यकाल जुलाई में खत्म हो रहा है, ने गुरुवार को संकेत दिया था कि वह दूसरे कार्यकाल के लिए दौड़ में नहीं हैं. एक समारोह के दौरान राष्ट्रपति ने गुरुवार को कहा, "मेरे पास ठीक दो महीने बचे हैं... 25 जुलाई को एक नया राष्ट्रपति कार्यभार संभाल लेगा... जिन अधिकारियों ने मेरे साथ काम किया है, मैं उन्हें उनके मंत्रालयों तथा विभागों में वापस भेज रहा हूं..." माना जाता है कि राष्ट्रपति ने ऐसे संकेत दिए हैं कि वह दूसरे कार्यकाल के लिए तभी विचार कर सकते हैं, जब उनका नाम सरकार की ओर से दिया जाए. केंद्र में सत्तासीन एनडीए ने फिलहाल किसी प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है, लेकिन बीजेपी अपने किसी नेता को राष्ट्रपति भवन में पहुंचाने की इच्छुक है. प्रसिद्ध विज्ञानी रहे डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के अलावा देश के सभी राष्ट्रपति पद पर पहुंचने से पहले कांग्रेस से ही संबद्ध रहे हैं. माना जाता है कि राष्ट्रपति ने ऐसे संकेत दिए हैं कि वह दूसरे कार्यकाल के लिए तभी विचार कर सकते हैं, जब उनका नाम सरकार की ओर से दिया जाए. केंद्र में सत्तासीन एनडीए ने फिलहाल किसी प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है, लेकिन बीजेपी अपने किसी नेता को राष्ट्रपति भवन में पहुंचाने की इच्छुक है. प्रसिद्ध विज्ञानी रहे डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के अलावा देश के सभी राष्ट्रपति पद पर पहुंचने से पहले कांग्रेस से ही संबद्ध रहे हैं.
संक्षिप्त पाठ: विपक्ष के संयुक्त प्रत्याशी पर चर्चा के लिए सोनिया ने बैठक बुलाई है तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने गुरुवार को PM से मुलाकात की ममता ने ऐसे प्रत्याशी की वकालत की, जिसे सरकार-विपक्ष का समर्थन मिले
27
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: बुधवार रात 8.00 बजे सीबीआई द्वारा नाटकीय ढंग से गिरफ्तारी के बाद चिदंबरम एजेंसी के मुख्यालय में सारी रात लगभग जागते हुए गुजारी, क्योंकि उनसे वहां आधी रात के बाद पूछताछ की गई. जांच में शामिल अधिकारियों ने नाम नहीं छापने का अनुरोध करते हुए कहा कि चिदंबरम से औपचारिक पूछताछ गुरुवार रात 12 बजे के बाद शुरू हुई. सीबीआई के निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला खुद शीर्ष एजेंसी के सभी अधिकारियों के साथ मुख्यालय में मौजूद थे. चिदंबरम ने ज्यादातर सवालों के जवाब अधूरे दिए, कई के जवाब में मालूम नहीं कहा और कई के जवाब ही नहीं दिए. 73 वर्षीय चिदंबरम को पहले सीबीआई अधिकारियों ने खाना देने की पेशकश की, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया. इसके बाद पूछताछ शुरू हुई. इस सूची में शामिल 20 सवाल उनकी आईएनएक्स मीडिया की सह-संस्थापक इंद्राणी मुखर्जी से हुई बैठक से संबंधित हैं. इंद्राणी फिलहाल अपनी बेटी शीना बोरा हत्या के मुकदमे में जेल में बंद है और इस मामले की गवाह बन गई है. सूत्रों ने बताया कि चिदंबरम और उसके बेटे के खिलाफ मामला उसकी गवाही के आधार पर ही तैयार किया गया है. (इनपुट आईएएनएस से)
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: चिदंबरम ने सीबीआई अधिकारियों की डिनर की पेशकश ठुकराई चिदंबरम सीबीआई मुख्यालय में करीब सारी रात जागते रहे सीबीआई निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला भी पूछताछ के दौरान रहे मौजूद
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['hin']
एक सारांश बनाओ: 10 सेकंड के इस वीडियो में देखा जा सकता है कि देखा जा सकता है कि जैसे बच्चे अंडों से बाहर निकलते हैं तो अलग रंग के हो जाते हैं. वर्जीनिया एक्वैरियम एंड मरीन साइंस सेंटर ने बताया- ''ऑक्टोपस में क्रोमाटोफर्स होते हैं जो रंग बदलने में मदद करते हैं. ऐसा लगता है कि अंडों से बाहर निकलते ही किसी ने उन पर आग लगा दी हो.'' मिलियन व्यूज के अलावा वीडियो को 1200 से ज्यादा रिएक्शन मिल चुके हैं और 63 हजार से ज्यादा शेयर्स हो चुके हैं. सोशल मीडिया पर ये वीडियो वायरल हो रहा है. 10 सेकंड के इस वीडियो में देखा जा सकता है कि देखा जा सकता है कि जैसे बच्चे अंडों से बाहर निकलते हैं तो अलग रंग के हो जाते हैं. वर्जीनिया एक्वैरियम एंड मरीन साइंस सेंटर ने बताया- ''ऑक्टोपस में क्रोमाटोफर्स होते हैं जो रंग बदलने में मदद करते हैं. ऐसा लगता है कि अंडों से बाहर निकलते ही किसी ने उन पर आग लगा दी हो.'' मिलियन व्यूज के अलावा वीडियो को 1200 से ज्यादा रिएक्शन मिल चुके हैं और 63 हजार से ज्यादा शेयर्स हो चुके हैं. सोशल मीडिया पर ये वीडियो वायरल हो रहा है.
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: वीडियो में ऑक्टोपस के अंडों से बच्चे निकलते नजर आ रहे हैं. इस वीडियो को 7 फरवरी को फेसबुक पर पोस्ट किया था. अब तक 2.5 मिलियन से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं.
32
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: लाखों मुम्बईकरों के बीच यहां के शिवाजी पार्क में शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे रविवार की शाम पंचतत्व में विलीन हो गए। उनकी अंत्येष्टि पूरे राजकीय सम्मान के साथ की गई। बेटे उद्धव ठाकरे ने शाम 6.17 बजे अपने पिता को मुखाग्नि दी। इससे पहले उनके समर्थकों एवं आमजनों ने पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन किए और उन्हें श्रद्धांजलि दी। ठाकरे की चिता को अग्नि को समर्पित किए जाते समय उद्धव के चचेरे भाई और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने उन्हें सहारा दिया। पिता को मुखाग्नि देते समय उद्धव करुणा और गरिमा का प्रतीक नजर आ रहे थे। इससे पहले अंत्येष्टि प्रक्रिया शुरू होते ही वह फूट-फूट कर रो पड़े। वैदिक मंत्रों के बीच अंत्येष्टि शुरू होते समय शोक की इस घड़ी में उद्धव ने राज का हाथ थाम लिया, जैसे वह पिता की इच्छा पूरी कर रहे हों, जो उन्होंने कुछ महीने पहले व्यक्त की थी। ठाकरे की चिता को अग्नि को समर्पित किए जाने से कुछ मिनट पहले राज भी रो पड़े। आंसू उनके गालों पर टपक रहे थे। ठाकरे की अंत्येष्टि जिस तरह सार्वजनिक रूप से की गई, ऐसा मुम्बई में पहली बार देखा गया। बंदूकों की सलामी सहित उनकी अंत्येष्टि पूरे राजकीय सम्मान के साथ की गई। मध्य मुम्बई के दादर स्थित शिवाजी पार्क में जनसैलाब उमड़ पड़ा। ठाकरे की कोठी मातोश्री से जब अंतिम यात्रा शुरू हुई तो लग रहा था, सभी सड़कें शिवाजी पार्क की ओर जा रही हैं। सड़कों पर हजारों लोग ठाकरे के पार्थिव शरीर के साथ चल रहे थे। मातोश्री से शिवाजी पार्क तक सात किलोमीटर की अंतिम यात्रा सात घंटे में पूरी हुई। अंत्येष्टि के समय ठाकरे के व्यक्तिगत चिकित्सक जलील पारकर भी मौजूद थे। इस मुस्लिम डॉक्टर को इस अवसर पर आमंत्रित कर हिंदूवादी ठाकरे परिवार ने उन्हें अनूठा सम्मान दिया। पारकर पिछले चार साल से ठाकरे परिवार को व्यक्तिगत चिकित्सक के रूप में सेवा देते रहे हैं। ठाकरे के पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि देने के लिए हिंदी और मराठी फिल्म जगत की हस्तियों और राजनेताओं सहित कई अति विशिष्ट व्यक्ति तथा व्यापारी एवं उद्योगपति शिवाजी पार्क पहुंचे। 'टाइगर' के नाम से चर्चित शिवसेना प्रमुख को क्षत्रीय एवं राष्ट्रीय दलों के वरिष्ठ नेताओं ने भी भावभीनी श्रद्धांजलि दी। बाल ठाकरे के निधन के बाद शनिवार से लेकर रविवार तक समूचे मुम्बई में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। मुम्बई पुलिस के अनुमान के मुताबिक शिवाजी पार्क में जुटे लोगों सहित 19 लाख से अधिक लोगों ने ठाकरे को श्रद्धांजलि दी। उनकी अंतिम यात्रा में लगभग दो लाख लोग शामिल हुए। शिवसेना प्रमुख की अंतिम यात्रा उनके बांद्रा स्थित आवास मातोश्री से शुरू हुई। उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए लाखों की भीड़ उमड़ पड़ी। मुम्बई पुलिस के अनुसार, कड़ी सुरक्षा और हिदायतों के बावजूद लाखों लोग घरों से निकल पड़े। शिवाजी पार्क में भी बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए, जहां ठाकरे का अंतिम संस्कार किया जाना था। महाराष्ट्र के ठाणे, रायगढ़, पुणे, औरंगाबाद तथा कोंकण क्षेत्र से भी हजारों की तादाद में शिव सैनिक मुम्बई पहुंचे। पुलिस का कहना है कि अंतिम यात्रा के दौरान जगह-जगह लोग घर की छतों, पेड़, पानी के पाइपों पर चढ़कर ठाकरे की एक झलक पाने की कोशिश करते दिखे। जुलूस के माहिम पहुंचने पर बहुत सी मुस्लिम महिलाओं को रोते हुए देखा गया। माहिम में चर्च जाने वाले बहुत से लोग भी ठाकरे की अंतिम यात्रा में शामिल हो गए। तिरंगे में लिपटा ठाकरे का पार्थिव शरीर सुबह नौ बजे उनके घर से बाहर निकाला गया। उनकी अंतिम यात्रा शुरू होते ही बेटे उद्धव रो पड़े। 86 वर्षीय ठाकरे का पार्थिव शरीर शीशे के बॉक्स में था जिसे फूलों से सजे ट्रक पर रखा गया। उद्धव, उनकी पत्नी रश्मि तथा उनके बेटे आदित्य के साथ-साथ ट्रक पर मनसे प्रमुख व ठाकरे के भतीजे राज ठाकरे, उनकी पत्नी शर्मिला और उनके बच्चे भी ट्रक पर थे। राज हालांकि बाद में ट्रक से उतर गए और उसके पीछे-पीछे चलने लगे। ठाकरे का पार्थिव शरीर पहले दादर स्थित शिवसेना कार्यालय 'सेना भवन' में रखा गया। इसके बाद अंतिम संस्कार के लिए शिवाजी पार्क ले जाया गया। जुलूस बहुत धीरे-धीरे चल रहा था। पुलिस भगदड़ को रोकने की कोशिश में जुटी रही।टिप्पणियां इस दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। 20,000 पुलिसकर्मी, राज्य आरक्षी बल की 15 कम्पनियां तथा त्वरित कार्य बल की तीन टुकड़ियां तैनात की गईं। मुम्बई के पुलिस आयुक्त सत्यपाल सिंह ने अपनी बेटी की शादी की रिसेप्शन पार्टी ठाकरे के सम्मान में रद्द कर दी। बेटे उद्धव ठाकरे ने शाम 6.17 बजे अपने पिता को मुखाग्नि दी। इससे पहले उनके समर्थकों एवं आमजनों ने पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन किए और उन्हें श्रद्धांजलि दी। ठाकरे की चिता को अग्नि को समर्पित किए जाते समय उद्धव के चचेरे भाई और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने उन्हें सहारा दिया। पिता को मुखाग्नि देते समय उद्धव करुणा और गरिमा का प्रतीक नजर आ रहे थे। इससे पहले अंत्येष्टि प्रक्रिया शुरू होते ही वह फूट-फूट कर रो पड़े। वैदिक मंत्रों के बीच अंत्येष्टि शुरू होते समय शोक की इस घड़ी में उद्धव ने राज का हाथ थाम लिया, जैसे वह पिता की इच्छा पूरी कर रहे हों, जो उन्होंने कुछ महीने पहले व्यक्त की थी। ठाकरे की चिता को अग्नि को समर्पित किए जाने से कुछ मिनट पहले राज भी रो पड़े। आंसू उनके गालों पर टपक रहे थे। ठाकरे की अंत्येष्टि जिस तरह सार्वजनिक रूप से की गई, ऐसा मुम्बई में पहली बार देखा गया। बंदूकों की सलामी सहित उनकी अंत्येष्टि पूरे राजकीय सम्मान के साथ की गई। मध्य मुम्बई के दादर स्थित शिवाजी पार्क में जनसैलाब उमड़ पड़ा। ठाकरे की कोठी मातोश्री से जब अंतिम यात्रा शुरू हुई तो लग रहा था, सभी सड़कें शिवाजी पार्क की ओर जा रही हैं। सड़कों पर हजारों लोग ठाकरे के पार्थिव शरीर के साथ चल रहे थे। मातोश्री से शिवाजी पार्क तक सात किलोमीटर की अंतिम यात्रा सात घंटे में पूरी हुई। अंत्येष्टि के समय ठाकरे के व्यक्तिगत चिकित्सक जलील पारकर भी मौजूद थे। इस मुस्लिम डॉक्टर को इस अवसर पर आमंत्रित कर हिंदूवादी ठाकरे परिवार ने उन्हें अनूठा सम्मान दिया। पारकर पिछले चार साल से ठाकरे परिवार को व्यक्तिगत चिकित्सक के रूप में सेवा देते रहे हैं। ठाकरे के पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि देने के लिए हिंदी और मराठी फिल्म जगत की हस्तियों और राजनेताओं सहित कई अति विशिष्ट व्यक्ति तथा व्यापारी एवं उद्योगपति शिवाजी पार्क पहुंचे। 'टाइगर' के नाम से चर्चित शिवसेना प्रमुख को क्षत्रीय एवं राष्ट्रीय दलों के वरिष्ठ नेताओं ने भी भावभीनी श्रद्धांजलि दी। बाल ठाकरे के निधन के बाद शनिवार से लेकर रविवार तक समूचे मुम्बई में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। मुम्बई पुलिस के अनुमान के मुताबिक शिवाजी पार्क में जुटे लोगों सहित 19 लाख से अधिक लोगों ने ठाकरे को श्रद्धांजलि दी। उनकी अंतिम यात्रा में लगभग दो लाख लोग शामिल हुए। शिवसेना प्रमुख की अंतिम यात्रा उनके बांद्रा स्थित आवास मातोश्री से शुरू हुई। उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए लाखों की भीड़ उमड़ पड़ी। मुम्बई पुलिस के अनुसार, कड़ी सुरक्षा और हिदायतों के बावजूद लाखों लोग घरों से निकल पड़े। शिवाजी पार्क में भी बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए, जहां ठाकरे का अंतिम संस्कार किया जाना था। महाराष्ट्र के ठाणे, रायगढ़, पुणे, औरंगाबाद तथा कोंकण क्षेत्र से भी हजारों की तादाद में शिव सैनिक मुम्बई पहुंचे। पुलिस का कहना है कि अंतिम यात्रा के दौरान जगह-जगह लोग घर की छतों, पेड़, पानी के पाइपों पर चढ़कर ठाकरे की एक झलक पाने की कोशिश करते दिखे। जुलूस के माहिम पहुंचने पर बहुत सी मुस्लिम महिलाओं को रोते हुए देखा गया। माहिम में चर्च जाने वाले बहुत से लोग भी ठाकरे की अंतिम यात्रा में शामिल हो गए। तिरंगे में लिपटा ठाकरे का पार्थिव शरीर सुबह नौ बजे उनके घर से बाहर निकाला गया। उनकी अंतिम यात्रा शुरू होते ही बेटे उद्धव रो पड़े। 86 वर्षीय ठाकरे का पार्थिव शरीर शीशे के बॉक्स में था जिसे फूलों से सजे ट्रक पर रखा गया। उद्धव, उनकी पत्नी रश्मि तथा उनके बेटे आदित्य के साथ-साथ ट्रक पर मनसे प्रमुख व ठाकरे के भतीजे राज ठाकरे, उनकी पत्नी शर्मिला और उनके बच्चे भी ट्रक पर थे। राज हालांकि बाद में ट्रक से उतर गए और उसके पीछे-पीछे चलने लगे। ठाकरे का पार्थिव शरीर पहले दादर स्थित शिवसेना कार्यालय 'सेना भवन' में रखा गया। इसके बाद अंतिम संस्कार के लिए शिवाजी पार्क ले जाया गया। जुलूस बहुत धीरे-धीरे चल रहा था। पुलिस भगदड़ को रोकने की कोशिश में जुटी रही।टिप्पणियां इस दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। 20,000 पुलिसकर्मी, राज्य आरक्षी बल की 15 कम्पनियां तथा त्वरित कार्य बल की तीन टुकड़ियां तैनात की गईं। मुम्बई के पुलिस आयुक्त सत्यपाल सिंह ने अपनी बेटी की शादी की रिसेप्शन पार्टी ठाकरे के सम्मान में रद्द कर दी। ठाकरे की चिता को अग्नि को समर्पित किए जाते समय उद्धव के चचेरे भाई और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने उन्हें सहारा दिया। पिता को मुखाग्नि देते समय उद्धव करुणा और गरिमा का प्रतीक नजर आ रहे थे। इससे पहले अंत्येष्टि प्रक्रिया शुरू होते ही वह फूट-फूट कर रो पड़े। वैदिक मंत्रों के बीच अंत्येष्टि शुरू होते समय शोक की इस घड़ी में उद्धव ने राज का हाथ थाम लिया, जैसे वह पिता की इच्छा पूरी कर रहे हों, जो उन्होंने कुछ महीने पहले व्यक्त की थी। ठाकरे की चिता को अग्नि को समर्पित किए जाने से कुछ मिनट पहले राज भी रो पड़े। आंसू उनके गालों पर टपक रहे थे। ठाकरे की अंत्येष्टि जिस तरह सार्वजनिक रूप से की गई, ऐसा मुम्बई में पहली बार देखा गया। बंदूकों की सलामी सहित उनकी अंत्येष्टि पूरे राजकीय सम्मान के साथ की गई। मध्य मुम्बई के दादर स्थित शिवाजी पार्क में जनसैलाब उमड़ पड़ा। ठाकरे की कोठी मातोश्री से जब अंतिम यात्रा शुरू हुई तो लग रहा था, सभी सड़कें शिवाजी पार्क की ओर जा रही हैं। सड़कों पर हजारों लोग ठाकरे के पार्थिव शरीर के साथ चल रहे थे। मातोश्री से शिवाजी पार्क तक सात किलोमीटर की अंतिम यात्रा सात घंटे में पूरी हुई। अंत्येष्टि के समय ठाकरे के व्यक्तिगत चिकित्सक जलील पारकर भी मौजूद थे। इस मुस्लिम डॉक्टर को इस अवसर पर आमंत्रित कर हिंदूवादी ठाकरे परिवार ने उन्हें अनूठा सम्मान दिया। पारकर पिछले चार साल से ठाकरे परिवार को व्यक्तिगत चिकित्सक के रूप में सेवा देते रहे हैं। ठाकरे के पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि देने के लिए हिंदी और मराठी फिल्म जगत की हस्तियों और राजनेताओं सहित कई अति विशिष्ट व्यक्ति तथा व्यापारी एवं उद्योगपति शिवाजी पार्क पहुंचे। 'टाइगर' के नाम से चर्चित शिवसेना प्रमुख को क्षत्रीय एवं राष्ट्रीय दलों के वरिष्ठ नेताओं ने भी भावभीनी श्रद्धांजलि दी। बाल ठाकरे के निधन के बाद शनिवार से लेकर रविवार तक समूचे मुम्बई में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। मुम्बई पुलिस के अनुमान के मुताबिक शिवाजी पार्क में जुटे लोगों सहित 19 लाख से अधिक लोगों ने ठाकरे को श्रद्धांजलि दी। उनकी अंतिम यात्रा में लगभग दो लाख लोग शामिल हुए। शिवसेना प्रमुख की अंतिम यात्रा उनके बांद्रा स्थित आवास मातोश्री से शुरू हुई। उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए लाखों की भीड़ उमड़ पड़ी। मुम्बई पुलिस के अनुसार, कड़ी सुरक्षा और हिदायतों के बावजूद लाखों लोग घरों से निकल पड़े। शिवाजी पार्क में भी बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए, जहां ठाकरे का अंतिम संस्कार किया जाना था। महाराष्ट्र के ठाणे, रायगढ़, पुणे, औरंगाबाद तथा कोंकण क्षेत्र से भी हजारों की तादाद में शिव सैनिक मुम्बई पहुंचे। पुलिस का कहना है कि अंतिम यात्रा के दौरान जगह-जगह लोग घर की छतों, पेड़, पानी के पाइपों पर चढ़कर ठाकरे की एक झलक पाने की कोशिश करते दिखे। जुलूस के माहिम पहुंचने पर बहुत सी मुस्लिम महिलाओं को रोते हुए देखा गया। माहिम में चर्च जाने वाले बहुत से लोग भी ठाकरे की अंतिम यात्रा में शामिल हो गए। तिरंगे में लिपटा ठाकरे का पार्थिव शरीर सुबह नौ बजे उनके घर से बाहर निकाला गया। उनकी अंतिम यात्रा शुरू होते ही बेटे उद्धव रो पड़े। 86 वर्षीय ठाकरे का पार्थिव शरीर शीशे के बॉक्स में था जिसे फूलों से सजे ट्रक पर रखा गया। उद्धव, उनकी पत्नी रश्मि तथा उनके बेटे आदित्य के साथ-साथ ट्रक पर मनसे प्रमुख व ठाकरे के भतीजे राज ठाकरे, उनकी पत्नी शर्मिला और उनके बच्चे भी ट्रक पर थे। राज हालांकि बाद में ट्रक से उतर गए और उसके पीछे-पीछे चलने लगे। ठाकरे का पार्थिव शरीर पहले दादर स्थित शिवसेना कार्यालय 'सेना भवन' में रखा गया। इसके बाद अंतिम संस्कार के लिए शिवाजी पार्क ले जाया गया। जुलूस बहुत धीरे-धीरे चल रहा था। पुलिस भगदड़ को रोकने की कोशिश में जुटी रही।टिप्पणियां इस दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। 20,000 पुलिसकर्मी, राज्य आरक्षी बल की 15 कम्पनियां तथा त्वरित कार्य बल की तीन टुकड़ियां तैनात की गईं। मुम्बई के पुलिस आयुक्त सत्यपाल सिंह ने अपनी बेटी की शादी की रिसेप्शन पार्टी ठाकरे के सम्मान में रद्द कर दी। वैदिक मंत्रों के बीच अंत्येष्टि शुरू होते समय शोक की इस घड़ी में उद्धव ने राज का हाथ थाम लिया, जैसे वह पिता की इच्छा पूरी कर रहे हों, जो उन्होंने कुछ महीने पहले व्यक्त की थी। ठाकरे की चिता को अग्नि को समर्पित किए जाने से कुछ मिनट पहले राज भी रो पड़े। आंसू उनके गालों पर टपक रहे थे। ठाकरे की अंत्येष्टि जिस तरह सार्वजनिक रूप से की गई, ऐसा मुम्बई में पहली बार देखा गया। बंदूकों की सलामी सहित उनकी अंत्येष्टि पूरे राजकीय सम्मान के साथ की गई। मध्य मुम्बई के दादर स्थित शिवाजी पार्क में जनसैलाब उमड़ पड़ा। ठाकरे की कोठी मातोश्री से जब अंतिम यात्रा शुरू हुई तो लग रहा था, सभी सड़कें शिवाजी पार्क की ओर जा रही हैं। सड़कों पर हजारों लोग ठाकरे के पार्थिव शरीर के साथ चल रहे थे। मातोश्री से शिवाजी पार्क तक सात किलोमीटर की अंतिम यात्रा सात घंटे में पूरी हुई। अंत्येष्टि के समय ठाकरे के व्यक्तिगत चिकित्सक जलील पारकर भी मौजूद थे। इस मुस्लिम डॉक्टर को इस अवसर पर आमंत्रित कर हिंदूवादी ठाकरे परिवार ने उन्हें अनूठा सम्मान दिया। पारकर पिछले चार साल से ठाकरे परिवार को व्यक्तिगत चिकित्सक के रूप में सेवा देते रहे हैं। ठाकरे के पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि देने के लिए हिंदी और मराठी फिल्म जगत की हस्तियों और राजनेताओं सहित कई अति विशिष्ट व्यक्ति तथा व्यापारी एवं उद्योगपति शिवाजी पार्क पहुंचे। 'टाइगर' के नाम से चर्चित शिवसेना प्रमुख को क्षत्रीय एवं राष्ट्रीय दलों के वरिष्ठ नेताओं ने भी भावभीनी श्रद्धांजलि दी। बाल ठाकरे के निधन के बाद शनिवार से लेकर रविवार तक समूचे मुम्बई में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। मुम्बई पुलिस के अनुमान के मुताबिक शिवाजी पार्क में जुटे लोगों सहित 19 लाख से अधिक लोगों ने ठाकरे को श्रद्धांजलि दी। उनकी अंतिम यात्रा में लगभग दो लाख लोग शामिल हुए। शिवसेना प्रमुख की अंतिम यात्रा उनके बांद्रा स्थित आवास मातोश्री से शुरू हुई। उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए लाखों की भीड़ उमड़ पड़ी। मुम्बई पुलिस के अनुसार, कड़ी सुरक्षा और हिदायतों के बावजूद लाखों लोग घरों से निकल पड़े। शिवाजी पार्क में भी बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए, जहां ठाकरे का अंतिम संस्कार किया जाना था। महाराष्ट्र के ठाणे, रायगढ़, पुणे, औरंगाबाद तथा कोंकण क्षेत्र से भी हजारों की तादाद में शिव सैनिक मुम्बई पहुंचे। पुलिस का कहना है कि अंतिम यात्रा के दौरान जगह-जगह लोग घर की छतों, पेड़, पानी के पाइपों पर चढ़कर ठाकरे की एक झलक पाने की कोशिश करते दिखे। जुलूस के माहिम पहुंचने पर बहुत सी मुस्लिम महिलाओं को रोते हुए देखा गया। माहिम में चर्च जाने वाले बहुत से लोग भी ठाकरे की अंतिम यात्रा में शामिल हो गए। तिरंगे में लिपटा ठाकरे का पार्थिव शरीर सुबह नौ बजे उनके घर से बाहर निकाला गया। उनकी अंतिम यात्रा शुरू होते ही बेटे उद्धव रो पड़े। 86 वर्षीय ठाकरे का पार्थिव शरीर शीशे के बॉक्स में था जिसे फूलों से सजे ट्रक पर रखा गया। उद्धव, उनकी पत्नी रश्मि तथा उनके बेटे आदित्य के साथ-साथ ट्रक पर मनसे प्रमुख व ठाकरे के भतीजे राज ठाकरे, उनकी पत्नी शर्मिला और उनके बच्चे भी ट्रक पर थे। राज हालांकि बाद में ट्रक से उतर गए और उसके पीछे-पीछे चलने लगे। ठाकरे का पार्थिव शरीर पहले दादर स्थित शिवसेना कार्यालय 'सेना भवन' में रखा गया। इसके बाद अंतिम संस्कार के लिए शिवाजी पार्क ले जाया गया। जुलूस बहुत धीरे-धीरे चल रहा था। पुलिस भगदड़ को रोकने की कोशिश में जुटी रही।टिप्पणियां इस दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। 20,000 पुलिसकर्मी, राज्य आरक्षी बल की 15 कम्पनियां तथा त्वरित कार्य बल की तीन टुकड़ियां तैनात की गईं। मुम्बई के पुलिस आयुक्त सत्यपाल सिंह ने अपनी बेटी की शादी की रिसेप्शन पार्टी ठाकरे के सम्मान में रद्द कर दी। ठाकरे की अंत्येष्टि जिस तरह सार्वजनिक रूप से की गई, ऐसा मुम्बई में पहली बार देखा गया। बंदूकों की सलामी सहित उनकी अंत्येष्टि पूरे राजकीय सम्मान के साथ की गई। मध्य मुम्बई के दादर स्थित शिवाजी पार्क में जनसैलाब उमड़ पड़ा। ठाकरे की कोठी मातोश्री से जब अंतिम यात्रा शुरू हुई तो लग रहा था, सभी सड़कें शिवाजी पार्क की ओर जा रही हैं। सड़कों पर हजारों लोग ठाकरे के पार्थिव शरीर के साथ चल रहे थे। मातोश्री से शिवाजी पार्क तक सात किलोमीटर की अंतिम यात्रा सात घंटे में पूरी हुई। अंत्येष्टि के समय ठाकरे के व्यक्तिगत चिकित्सक जलील पारकर भी मौजूद थे। इस मुस्लिम डॉक्टर को इस अवसर पर आमंत्रित कर हिंदूवादी ठाकरे परिवार ने उन्हें अनूठा सम्मान दिया। पारकर पिछले चार साल से ठाकरे परिवार को व्यक्तिगत चिकित्सक के रूप में सेवा देते रहे हैं। ठाकरे के पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि देने के लिए हिंदी और मराठी फिल्म जगत की हस्तियों और राजनेताओं सहित कई अति विशिष्ट व्यक्ति तथा व्यापारी एवं उद्योगपति शिवाजी पार्क पहुंचे। 'टाइगर' के नाम से चर्चित शिवसेना प्रमुख को क्षत्रीय एवं राष्ट्रीय दलों के वरिष्ठ नेताओं ने भी भावभीनी श्रद्धांजलि दी। बाल ठाकरे के निधन के बाद शनिवार से लेकर रविवार तक समूचे मुम्बई में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। मुम्बई पुलिस के अनुमान के मुताबिक शिवाजी पार्क में जुटे लोगों सहित 19 लाख से अधिक लोगों ने ठाकरे को श्रद्धांजलि दी। उनकी अंतिम यात्रा में लगभग दो लाख लोग शामिल हुए। शिवसेना प्रमुख की अंतिम यात्रा उनके बांद्रा स्थित आवास मातोश्री से शुरू हुई। उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए लाखों की भीड़ उमड़ पड़ी। मुम्बई पुलिस के अनुसार, कड़ी सुरक्षा और हिदायतों के बावजूद लाखों लोग घरों से निकल पड़े। शिवाजी पार्क में भी बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए, जहां ठाकरे का अंतिम संस्कार किया जाना था। महाराष्ट्र के ठाणे, रायगढ़, पुणे, औरंगाबाद तथा कोंकण क्षेत्र से भी हजारों की तादाद में शिव सैनिक मुम्बई पहुंचे। पुलिस का कहना है कि अंतिम यात्रा के दौरान जगह-जगह लोग घर की छतों, पेड़, पानी के पाइपों पर चढ़कर ठाकरे की एक झलक पाने की कोशिश करते दिखे। जुलूस के माहिम पहुंचने पर बहुत सी मुस्लिम महिलाओं को रोते हुए देखा गया। माहिम में चर्च जाने वाले बहुत से लोग भी ठाकरे की अंतिम यात्रा में शामिल हो गए। तिरंगे में लिपटा ठाकरे का पार्थिव शरीर सुबह नौ बजे उनके घर से बाहर निकाला गया। उनकी अंतिम यात्रा शुरू होते ही बेटे उद्धव रो पड़े। 86 वर्षीय ठाकरे का पार्थिव शरीर शीशे के बॉक्स में था जिसे फूलों से सजे ट्रक पर रखा गया। उद्धव, उनकी पत्नी रश्मि तथा उनके बेटे आदित्य के साथ-साथ ट्रक पर मनसे प्रमुख व ठाकरे के भतीजे राज ठाकरे, उनकी पत्नी शर्मिला और उनके बच्चे भी ट्रक पर थे। राज हालांकि बाद में ट्रक से उतर गए और उसके पीछे-पीछे चलने लगे। ठाकरे का पार्थिव शरीर पहले दादर स्थित शिवसेना कार्यालय 'सेना भवन' में रखा गया। इसके बाद अंतिम संस्कार के लिए शिवाजी पार्क ले जाया गया। जुलूस बहुत धीरे-धीरे चल रहा था। पुलिस भगदड़ को रोकने की कोशिश में जुटी रही।टिप्पणियां इस दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। 20,000 पुलिसकर्मी, राज्य आरक्षी बल की 15 कम्पनियां तथा त्वरित कार्य बल की तीन टुकड़ियां तैनात की गईं। मुम्बई के पुलिस आयुक्त सत्यपाल सिंह ने अपनी बेटी की शादी की रिसेप्शन पार्टी ठाकरे के सम्मान में रद्द कर दी। मध्य मुम्बई के दादर स्थित शिवाजी पार्क में जनसैलाब उमड़ पड़ा। ठाकरे की कोठी मातोश्री से जब अंतिम यात्रा शुरू हुई तो लग रहा था, सभी सड़कें शिवाजी पार्क की ओर जा रही हैं। सड़कों पर हजारों लोग ठाकरे के पार्थिव शरीर के साथ चल रहे थे। मातोश्री से शिवाजी पार्क तक सात किलोमीटर की अंतिम यात्रा सात घंटे में पूरी हुई। अंत्येष्टि के समय ठाकरे के व्यक्तिगत चिकित्सक जलील पारकर भी मौजूद थे। इस मुस्लिम डॉक्टर को इस अवसर पर आमंत्रित कर हिंदूवादी ठाकरे परिवार ने उन्हें अनूठा सम्मान दिया। पारकर पिछले चार साल से ठाकरे परिवार को व्यक्तिगत चिकित्सक के रूप में सेवा देते रहे हैं। ठाकरे के पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि देने के लिए हिंदी और मराठी फिल्म जगत की हस्तियों और राजनेताओं सहित कई अति विशिष्ट व्यक्ति तथा व्यापारी एवं उद्योगपति शिवाजी पार्क पहुंचे। 'टाइगर' के नाम से चर्चित शिवसेना प्रमुख को क्षत्रीय एवं राष्ट्रीय दलों के वरिष्ठ नेताओं ने भी भावभीनी श्रद्धांजलि दी। बाल ठाकरे के निधन के बाद शनिवार से लेकर रविवार तक समूचे मुम्बई में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। मुम्बई पुलिस के अनुमान के मुताबिक शिवाजी पार्क में जुटे लोगों सहित 19 लाख से अधिक लोगों ने ठाकरे को श्रद्धांजलि दी। उनकी अंतिम यात्रा में लगभग दो लाख लोग शामिल हुए। शिवसेना प्रमुख की अंतिम यात्रा उनके बांद्रा स्थित आवास मातोश्री से शुरू हुई। उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए लाखों की भीड़ उमड़ पड़ी। मुम्बई पुलिस के अनुसार, कड़ी सुरक्षा और हिदायतों के बावजूद लाखों लोग घरों से निकल पड़े। शिवाजी पार्क में भी बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए, जहां ठाकरे का अंतिम संस्कार किया जाना था। महाराष्ट्र के ठाणे, रायगढ़, पुणे, औरंगाबाद तथा कोंकण क्षेत्र से भी हजारों की तादाद में शिव सैनिक मुम्बई पहुंचे। पुलिस का कहना है कि अंतिम यात्रा के दौरान जगह-जगह लोग घर की छतों, पेड़, पानी के पाइपों पर चढ़कर ठाकरे की एक झलक पाने की कोशिश करते दिखे। जुलूस के माहिम पहुंचने पर बहुत सी मुस्लिम महिलाओं को रोते हुए देखा गया। माहिम में चर्च जाने वाले बहुत से लोग भी ठाकरे की अंतिम यात्रा में शामिल हो गए। तिरंगे में लिपटा ठाकरे का पार्थिव शरीर सुबह नौ बजे उनके घर से बाहर निकाला गया। उनकी अंतिम यात्रा शुरू होते ही बेटे उद्धव रो पड़े। 86 वर्षीय ठाकरे का पार्थिव शरीर शीशे के बॉक्स में था जिसे फूलों से सजे ट्रक पर रखा गया। उद्धव, उनकी पत्नी रश्मि तथा उनके बेटे आदित्य के साथ-साथ ट्रक पर मनसे प्रमुख व ठाकरे के भतीजे राज ठाकरे, उनकी पत्नी शर्मिला और उनके बच्चे भी ट्रक पर थे। राज हालांकि बाद में ट्रक से उतर गए और उसके पीछे-पीछे चलने लगे। ठाकरे का पार्थिव शरीर पहले दादर स्थित शिवसेना कार्यालय 'सेना भवन' में रखा गया। इसके बाद अंतिम संस्कार के लिए शिवाजी पार्क ले जाया गया। जुलूस बहुत धीरे-धीरे चल रहा था। पुलिस भगदड़ को रोकने की कोशिश में जुटी रही।टिप्पणियां इस दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। 20,000 पुलिसकर्मी, राज्य आरक्षी बल की 15 कम्पनियां तथा त्वरित कार्य बल की तीन टुकड़ियां तैनात की गईं। मुम्बई के पुलिस आयुक्त सत्यपाल सिंह ने अपनी बेटी की शादी की रिसेप्शन पार्टी ठाकरे के सम्मान में रद्द कर दी। अंत्येष्टि के समय ठाकरे के व्यक्तिगत चिकित्सक जलील पारकर भी मौजूद थे। इस मुस्लिम डॉक्टर को इस अवसर पर आमंत्रित कर हिंदूवादी ठाकरे परिवार ने उन्हें अनूठा सम्मान दिया। पारकर पिछले चार साल से ठाकरे परिवार को व्यक्तिगत चिकित्सक के रूप में सेवा देते रहे हैं। ठाकरे के पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि देने के लिए हिंदी और मराठी फिल्म जगत की हस्तियों और राजनेताओं सहित कई अति विशिष्ट व्यक्ति तथा व्यापारी एवं उद्योगपति शिवाजी पार्क पहुंचे। 'टाइगर' के नाम से चर्चित शिवसेना प्रमुख को क्षत्रीय एवं राष्ट्रीय दलों के वरिष्ठ नेताओं ने भी भावभीनी श्रद्धांजलि दी। बाल ठाकरे के निधन के बाद शनिवार से लेकर रविवार तक समूचे मुम्बई में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। मुम्बई पुलिस के अनुमान के मुताबिक शिवाजी पार्क में जुटे लोगों सहित 19 लाख से अधिक लोगों ने ठाकरे को श्रद्धांजलि दी। उनकी अंतिम यात्रा में लगभग दो लाख लोग शामिल हुए। शिवसेना प्रमुख की अंतिम यात्रा उनके बांद्रा स्थित आवास मातोश्री से शुरू हुई। उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए लाखों की भीड़ उमड़ पड़ी। मुम्बई पुलिस के अनुसार, कड़ी सुरक्षा और हिदायतों के बावजूद लाखों लोग घरों से निकल पड़े। शिवाजी पार्क में भी बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए, जहां ठाकरे का अंतिम संस्कार किया जाना था। महाराष्ट्र के ठाणे, रायगढ़, पुणे, औरंगाबाद तथा कोंकण क्षेत्र से भी हजारों की तादाद में शिव सैनिक मुम्बई पहुंचे। पुलिस का कहना है कि अंतिम यात्रा के दौरान जगह-जगह लोग घर की छतों, पेड़, पानी के पाइपों पर चढ़कर ठाकरे की एक झलक पाने की कोशिश करते दिखे। जुलूस के माहिम पहुंचने पर बहुत सी मुस्लिम महिलाओं को रोते हुए देखा गया। माहिम में चर्च जाने वाले बहुत से लोग भी ठाकरे की अंतिम यात्रा में शामिल हो गए। तिरंगे में लिपटा ठाकरे का पार्थिव शरीर सुबह नौ बजे उनके घर से बाहर निकाला गया। उनकी अंतिम यात्रा शुरू होते ही बेटे उद्धव रो पड़े। 86 वर्षीय ठाकरे का पार्थिव शरीर शीशे के बॉक्स में था जिसे फूलों से सजे ट्रक पर रखा गया। उद्धव, उनकी पत्नी रश्मि तथा उनके बेटे आदित्य के साथ-साथ ट्रक पर मनसे प्रमुख व ठाकरे के भतीजे राज ठाकरे, उनकी पत्नी शर्मिला और उनके बच्चे भी ट्रक पर थे। राज हालांकि बाद में ट्रक से उतर गए और उसके पीछे-पीछे चलने लगे। ठाकरे का पार्थिव शरीर पहले दादर स्थित शिवसेना कार्यालय 'सेना भवन' में रखा गया। इसके बाद अंतिम संस्कार के लिए शिवाजी पार्क ले जाया गया। जुलूस बहुत धीरे-धीरे चल रहा था। पुलिस भगदड़ को रोकने की कोशिश में जुटी रही।टिप्पणियां इस दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। 20,000 पुलिसकर्मी, राज्य आरक्षी बल की 15 कम्पनियां तथा त्वरित कार्य बल की तीन टुकड़ियां तैनात की गईं। मुम्बई के पुलिस आयुक्त सत्यपाल सिंह ने अपनी बेटी की शादी की रिसेप्शन पार्टी ठाकरे के सम्मान में रद्द कर दी। ठाकरे के पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि देने के लिए हिंदी और मराठी फिल्म जगत की हस्तियों और राजनेताओं सहित कई अति विशिष्ट व्यक्ति तथा व्यापारी एवं उद्योगपति शिवाजी पार्क पहुंचे। 'टाइगर' के नाम से चर्चित शिवसेना प्रमुख को क्षत्रीय एवं राष्ट्रीय दलों के वरिष्ठ नेताओं ने भी भावभीनी श्रद्धांजलि दी। बाल ठाकरे के निधन के बाद शनिवार से लेकर रविवार तक समूचे मुम्बई में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। मुम्बई पुलिस के अनुमान के मुताबिक शिवाजी पार्क में जुटे लोगों सहित 19 लाख से अधिक लोगों ने ठाकरे को श्रद्धांजलि दी। उनकी अंतिम यात्रा में लगभग दो लाख लोग शामिल हुए। शिवसेना प्रमुख की अंतिम यात्रा उनके बांद्रा स्थित आवास मातोश्री से शुरू हुई। उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए लाखों की भीड़ उमड़ पड़ी। मुम्बई पुलिस के अनुसार, कड़ी सुरक्षा और हिदायतों के बावजूद लाखों लोग घरों से निकल पड़े। शिवाजी पार्क में भी बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए, जहां ठाकरे का अंतिम संस्कार किया जाना था। महाराष्ट्र के ठाणे, रायगढ़, पुणे, औरंगाबाद तथा कोंकण क्षेत्र से भी हजारों की तादाद में शिव सैनिक मुम्बई पहुंचे। पुलिस का कहना है कि अंतिम यात्रा के दौरान जगह-जगह लोग घर की छतों, पेड़, पानी के पाइपों पर चढ़कर ठाकरे की एक झलक पाने की कोशिश करते दिखे। जुलूस के माहिम पहुंचने पर बहुत सी मुस्लिम महिलाओं को रोते हुए देखा गया। माहिम में चर्च जाने वाले बहुत से लोग भी ठाकरे की अंतिम यात्रा में शामिल हो गए। तिरंगे में लिपटा ठाकरे का पार्थिव शरीर सुबह नौ बजे उनके घर से बाहर निकाला गया। उनकी अंतिम यात्रा शुरू होते ही बेटे उद्धव रो पड़े। 86 वर्षीय ठाकरे का पार्थिव शरीर शीशे के बॉक्स में था जिसे फूलों से सजे ट्रक पर रखा गया। उद्धव, उनकी पत्नी रश्मि तथा उनके बेटे आदित्य के साथ-साथ ट्रक पर मनसे प्रमुख व ठाकरे के भतीजे राज ठाकरे, उनकी पत्नी शर्मिला और उनके बच्चे भी ट्रक पर थे। राज हालांकि बाद में ट्रक से उतर गए और उसके पीछे-पीछे चलने लगे। ठाकरे का पार्थिव शरीर पहले दादर स्थित शिवसेना कार्यालय 'सेना भवन' में रखा गया। इसके बाद अंतिम संस्कार के लिए शिवाजी पार्क ले जाया गया। जुलूस बहुत धीरे-धीरे चल रहा था। पुलिस भगदड़ को रोकने की कोशिश में जुटी रही।टिप्पणियां इस दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। 20,000 पुलिसकर्मी, राज्य आरक्षी बल की 15 कम्पनियां तथा त्वरित कार्य बल की तीन टुकड़ियां तैनात की गईं। मुम्बई के पुलिस आयुक्त सत्यपाल सिंह ने अपनी बेटी की शादी की रिसेप्शन पार्टी ठाकरे के सम्मान में रद्द कर दी। बाल ठाकरे के निधन के बाद शनिवार से लेकर रविवार तक समूचे मुम्बई में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। मुम्बई पुलिस के अनुमान के मुताबिक शिवाजी पार्क में जुटे लोगों सहित 19 लाख से अधिक लोगों ने ठाकरे को श्रद्धांजलि दी। उनकी अंतिम यात्रा में लगभग दो लाख लोग शामिल हुए। शिवसेना प्रमुख की अंतिम यात्रा उनके बांद्रा स्थित आवास मातोश्री से शुरू हुई। उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए लाखों की भीड़ उमड़ पड़ी। मुम्बई पुलिस के अनुसार, कड़ी सुरक्षा और हिदायतों के बावजूद लाखों लोग घरों से निकल पड़े। शिवाजी पार्क में भी बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए, जहां ठाकरे का अंतिम संस्कार किया जाना था। महाराष्ट्र के ठाणे, रायगढ़, पुणे, औरंगाबाद तथा कोंकण क्षेत्र से भी हजारों की तादाद में शिव सैनिक मुम्बई पहुंचे। पुलिस का कहना है कि अंतिम यात्रा के दौरान जगह-जगह लोग घर की छतों, पेड़, पानी के पाइपों पर चढ़कर ठाकरे की एक झलक पाने की कोशिश करते दिखे। जुलूस के माहिम पहुंचने पर बहुत सी मुस्लिम महिलाओं को रोते हुए देखा गया। माहिम में चर्च जाने वाले बहुत से लोग भी ठाकरे की अंतिम यात्रा में शामिल हो गए। तिरंगे में लिपटा ठाकरे का पार्थिव शरीर सुबह नौ बजे उनके घर से बाहर निकाला गया। उनकी अंतिम यात्रा शुरू होते ही बेटे उद्धव रो पड़े। 86 वर्षीय ठाकरे का पार्थिव शरीर शीशे के बॉक्स में था जिसे फूलों से सजे ट्रक पर रखा गया। उद्धव, उनकी पत्नी रश्मि तथा उनके बेटे आदित्य के साथ-साथ ट्रक पर मनसे प्रमुख व ठाकरे के भतीजे राज ठाकरे, उनकी पत्नी शर्मिला और उनके बच्चे भी ट्रक पर थे। राज हालांकि बाद में ट्रक से उतर गए और उसके पीछे-पीछे चलने लगे। ठाकरे का पार्थिव शरीर पहले दादर स्थित शिवसेना कार्यालय 'सेना भवन' में रखा गया। इसके बाद अंतिम संस्कार के लिए शिवाजी पार्क ले जाया गया। जुलूस बहुत धीरे-धीरे चल रहा था। पुलिस भगदड़ को रोकने की कोशिश में जुटी रही।टिप्पणियां इस दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। 20,000 पुलिसकर्मी, राज्य आरक्षी बल की 15 कम्पनियां तथा त्वरित कार्य बल की तीन टुकड़ियां तैनात की गईं। मुम्बई के पुलिस आयुक्त सत्यपाल सिंह ने अपनी बेटी की शादी की रिसेप्शन पार्टी ठाकरे के सम्मान में रद्द कर दी। शिवसेना प्रमुख की अंतिम यात्रा उनके बांद्रा स्थित आवास मातोश्री से शुरू हुई। उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए लाखों की भीड़ उमड़ पड़ी। मुम्बई पुलिस के अनुसार, कड़ी सुरक्षा और हिदायतों के बावजूद लाखों लोग घरों से निकल पड़े। शिवाजी पार्क में भी बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए, जहां ठाकरे का अंतिम संस्कार किया जाना था। महाराष्ट्र के ठाणे, रायगढ़, पुणे, औरंगाबाद तथा कोंकण क्षेत्र से भी हजारों की तादाद में शिव सैनिक मुम्बई पहुंचे। पुलिस का कहना है कि अंतिम यात्रा के दौरान जगह-जगह लोग घर की छतों, पेड़, पानी के पाइपों पर चढ़कर ठाकरे की एक झलक पाने की कोशिश करते दिखे। जुलूस के माहिम पहुंचने पर बहुत सी मुस्लिम महिलाओं को रोते हुए देखा गया। माहिम में चर्च जाने वाले बहुत से लोग भी ठाकरे की अंतिम यात्रा में शामिल हो गए। तिरंगे में लिपटा ठाकरे का पार्थिव शरीर सुबह नौ बजे उनके घर से बाहर निकाला गया। उनकी अंतिम यात्रा शुरू होते ही बेटे उद्धव रो पड़े। 86 वर्षीय ठाकरे का पार्थिव शरीर शीशे के बॉक्स में था जिसे फूलों से सजे ट्रक पर रखा गया। उद्धव, उनकी पत्नी रश्मि तथा उनके बेटे आदित्य के साथ-साथ ट्रक पर मनसे प्रमुख व ठाकरे के भतीजे राज ठाकरे, उनकी पत्नी शर्मिला और उनके बच्चे भी ट्रक पर थे। राज हालांकि बाद में ट्रक से उतर गए और उसके पीछे-पीछे चलने लगे। ठाकरे का पार्थिव शरीर पहले दादर स्थित शिवसेना कार्यालय 'सेना भवन' में रखा गया। इसके बाद अंतिम संस्कार के लिए शिवाजी पार्क ले जाया गया। जुलूस बहुत धीरे-धीरे चल रहा था। पुलिस भगदड़ को रोकने की कोशिश में जुटी रही।टिप्पणियां इस दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। 20,000 पुलिसकर्मी, राज्य आरक्षी बल की 15 कम्पनियां तथा त्वरित कार्य बल की तीन टुकड़ियां तैनात की गईं। मुम्बई के पुलिस आयुक्त सत्यपाल सिंह ने अपनी बेटी की शादी की रिसेप्शन पार्टी ठाकरे के सम्मान में रद्द कर दी। पुलिस का कहना है कि अंतिम यात्रा के दौरान जगह-जगह लोग घर की छतों, पेड़, पानी के पाइपों पर चढ़कर ठाकरे की एक झलक पाने की कोशिश करते दिखे। जुलूस के माहिम पहुंचने पर बहुत सी मुस्लिम महिलाओं को रोते हुए देखा गया। माहिम में चर्च जाने वाले बहुत से लोग भी ठाकरे की अंतिम यात्रा में शामिल हो गए। तिरंगे में लिपटा ठाकरे का पार्थिव शरीर सुबह नौ बजे उनके घर से बाहर निकाला गया। उनकी अंतिम यात्रा शुरू होते ही बेटे उद्धव रो पड़े। 86 वर्षीय ठाकरे का पार्थिव शरीर शीशे के बॉक्स में था जिसे फूलों से सजे ट्रक पर रखा गया। उद्धव, उनकी पत्नी रश्मि तथा उनके बेटे आदित्य के साथ-साथ ट्रक पर मनसे प्रमुख व ठाकरे के भतीजे राज ठाकरे, उनकी पत्नी शर्मिला और उनके बच्चे भी ट्रक पर थे। राज हालांकि बाद में ट्रक से उतर गए और उसके पीछे-पीछे चलने लगे। ठाकरे का पार्थिव शरीर पहले दादर स्थित शिवसेना कार्यालय 'सेना भवन' में रखा गया। इसके बाद अंतिम संस्कार के लिए शिवाजी पार्क ले जाया गया। जुलूस बहुत धीरे-धीरे चल रहा था। पुलिस भगदड़ को रोकने की कोशिश में जुटी रही।टिप्पणियां इस दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। 20,000 पुलिसकर्मी, राज्य आरक्षी बल की 15 कम्पनियां तथा त्वरित कार्य बल की तीन टुकड़ियां तैनात की गईं। मुम्बई के पुलिस आयुक्त सत्यपाल सिंह ने अपनी बेटी की शादी की रिसेप्शन पार्टी ठाकरे के सम्मान में रद्द कर दी। तिरंगे में लिपटा ठाकरे का पार्थिव शरीर सुबह नौ बजे उनके घर से बाहर निकाला गया। उनकी अंतिम यात्रा शुरू होते ही बेटे उद्धव रो पड़े। 86 वर्षीय ठाकरे का पार्थिव शरीर शीशे के बॉक्स में था जिसे फूलों से सजे ट्रक पर रखा गया। उद्धव, उनकी पत्नी रश्मि तथा उनके बेटे आदित्य के साथ-साथ ट्रक पर मनसे प्रमुख व ठाकरे के भतीजे राज ठाकरे, उनकी पत्नी शर्मिला और उनके बच्चे भी ट्रक पर थे। राज हालांकि बाद में ट्रक से उतर गए और उसके पीछे-पीछे चलने लगे। ठाकरे का पार्थिव शरीर पहले दादर स्थित शिवसेना कार्यालय 'सेना भवन' में रखा गया। इसके बाद अंतिम संस्कार के लिए शिवाजी पार्क ले जाया गया। जुलूस बहुत धीरे-धीरे चल रहा था। पुलिस भगदड़ को रोकने की कोशिश में जुटी रही।टिप्पणियां इस दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। 20,000 पुलिसकर्मी, राज्य आरक्षी बल की 15 कम्पनियां तथा त्वरित कार्य बल की तीन टुकड़ियां तैनात की गईं। मुम्बई के पुलिस आयुक्त सत्यपाल सिंह ने अपनी बेटी की शादी की रिसेप्शन पार्टी ठाकरे के सम्मान में रद्द कर दी। उद्धव, उनकी पत्नी रश्मि तथा 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टुकड़ियां तैनात की गईं। मुम्बई के पुलिस आयुक्त सत्यपाल सिंह ने अपनी बेटी की शादी की रिसेप्शन पार्टी ठाकरे के सम्मान में रद्द कर दी। इस दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। 20,000 पुलिसकर्मी, राज्य आरक्षी बल की 15 कम्पनियां तथा त्वरित कार्य बल की तीन टुकड़ियां तैनात की गईं। मुम्बई के पुलिस आयुक्त सत्यपाल सिंह ने अपनी बेटी की शादी की रिसेप्शन पार्टी ठाकरे के सम्मान में रद्द कर दी। मुम्बई के पुलिस आयुक्त सत्यपाल सिंह ने अपनी बेटी की शादी की रिसेप्शन पार्टी ठाकरे के सम्मान में रद्द कर दी।
लाखों मुम्बईकरों के बीच यहां के शिवाजी पार्क में शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे रविवार की शाम पंचतत्व में विलीन हो गए। उनकी अंत्येष्टि पूरे राजकीय सम्मान के साथ की गई।
28
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: लंदन ओलिंपिक की यात्रा रद्द करने के लिए दबाव का सामना कर रहे सुरेश कलमाडी ने शनिवार को अजय माकन पर पलटवार करते हुए उनपर खुद के खिलाफ अभियान चलाने का आरोप लगाया और साथ ही माकन के इस्तीफे की भी मांग की। दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को कलमाडी को लंदन ओलिंपिक जाने की स्वीकृति दे दी थी। कलमाडी ने कहा कि अदालत के फैसले के खिलाफ माकन को इस तरह की प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए थी और उन्होंने प्रधानमंत्री से खेल मंत्री से इस्तीफा मांगने का आग्रह  किया है। कलमाडी ने कहा, आगामी ओलिंपिक के लिए मुझे लंदन यात्रा की स्वीकृति देने के अदालत के फैसले पर अजय माकन की प्रतिक्रिया पढ़कर मैं स्तब्ध हूं।टिप्पणियां माकन का अदालत के फैसले के खिलाफ जाना खेल मंत्री के लिए अनुचित है जिसे देखते हुए मैं प्रधानमंत्री से आग्रह करता हूं कि वह इस तरह की टिप्पणी और बयान के लिए माकन से इस्तीफा मांगे। कलमाडी ने माकन पर खेल महासंघों की कार्यशैली में हस्तक्षेप और ‘गुटबाजी’ पैदा करने का आरोप लगाया, जिससे अंतत: ओलिंपिक में खिलाड़ियों का प्रदर्शन प्रभावित होगा। दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को कलमाडी को लंदन ओलिंपिक जाने की स्वीकृति दे दी थी। कलमाडी ने कहा कि अदालत के फैसले के खिलाफ माकन को इस तरह की प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए थी और उन्होंने प्रधानमंत्री से खेल मंत्री से इस्तीफा मांगने का आग्रह  किया है। कलमाडी ने कहा, आगामी ओलिंपिक के लिए मुझे लंदन यात्रा की स्वीकृति देने के अदालत के फैसले पर अजय माकन की प्रतिक्रिया पढ़कर मैं स्तब्ध हूं।टिप्पणियां माकन का अदालत के फैसले के खिलाफ जाना खेल मंत्री के लिए अनुचित है जिसे देखते हुए मैं प्रधानमंत्री से आग्रह करता हूं कि वह इस तरह की टिप्पणी और बयान के लिए माकन से इस्तीफा मांगे। कलमाडी ने माकन पर खेल महासंघों की कार्यशैली में हस्तक्षेप और ‘गुटबाजी’ पैदा करने का आरोप लगाया, जिससे अंतत: ओलिंपिक में खिलाड़ियों का प्रदर्शन प्रभावित होगा। कलमाडी ने कहा, आगामी ओलिंपिक के लिए मुझे लंदन यात्रा की स्वीकृति देने के अदालत के फैसले पर अजय माकन की प्रतिक्रिया पढ़कर मैं स्तब्ध हूं।टिप्पणियां माकन का अदालत के फैसले के खिलाफ जाना खेल मंत्री के लिए अनुचित है जिसे देखते हुए मैं प्रधानमंत्री से आग्रह करता हूं कि वह इस तरह की टिप्पणी और बयान के लिए माकन से इस्तीफा मांगे। कलमाडी ने माकन पर खेल महासंघों की कार्यशैली में हस्तक्षेप और ‘गुटबाजी’ पैदा करने का आरोप लगाया, जिससे अंतत: ओलिंपिक में खिलाड़ियों का प्रदर्शन प्रभावित होगा। माकन का अदालत के फैसले के खिलाफ जाना खेल मंत्री के लिए अनुचित है जिसे देखते हुए मैं प्रधानमंत्री से आग्रह करता हूं कि वह इस तरह की टिप्पणी और बयान के लिए माकन से इस्तीफा मांगे। कलमाडी ने माकन पर खेल महासंघों की कार्यशैली में हस्तक्षेप और ‘गुटबाजी’ पैदा करने का आरोप लगाया, जिससे अंतत: ओलिंपिक में खिलाड़ियों का प्रदर्शन प्रभावित होगा। कलमाडी ने माकन पर खेल महासंघों की कार्यशैली में हस्तक्षेप और ‘गुटबाजी’ पैदा करने का आरोप लगाया, जिससे अंतत: ओलिंपिक में खिलाड़ियों का प्रदर्शन प्रभावित होगा।
यह एक सारांश है: लंदन ओलिंपिक की यात्रा रद्द करने के लिए दबाव का सामना कर रहे सुरेश कलमाडी ने शनिवार को अजय माकन पर पलटवार करते हुए खेलमंत्री पर उनके खिलाफ अभियान चलाने का आरोप लगाया और साथ ही माकन के इस्तीफे की भी मांग की।
16
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) का एक दल शुक्रवार को यहां पहुंचा, जो अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के साथ ही विध्वंसक गतिविधियों और लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हाफिज सईद से पैसा लेने में शामिल होने के आरोपी तीन अन्य लोगों से पूछताछ कर सकती है. जांच एजेंसी ने गिलानी और नईम खान, फारूक अहमद डार उर्फ बिट्टा कराटे तथा तहरीक-ए-हुर्रियत के गाजी जावेद बाबा के खिलाफ प्राथमिक जांच शुरू की है. नईम को टेलीविजन पर एक स्टिंग ऑपरेशन में कथित तौर पर पाकिस्तान के आतंकी संगठनों से पैसा लेने की बात कबूलते देखा गया था. एनआईए के एक प्रवक्ता ने कहा कि अलगाववादियों को कश्मीर घाटी में सुरक्षा बलों पर पथराव करने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और स्कूलों तथा अन्य सरकारी प्रतिष्ठानों को जलाने समेत विध्वंसक गतिविधियों के लिए पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख सईद से धन मिल रहा है.टिप्पणियां उन्होंने कहा कि एनआईए ने एक टीवी संवाददाता और कश्मीर घाटी में गतिविधियां चला रहे अलगाववादी संगठनों के नेताओं के बीच इस संबंध में बातचीत की रिकॉर्डिंग से जुड़ी एक खबर का संज्ञान भी लिया है. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) जांच एजेंसी ने गिलानी और नईम खान, फारूक अहमद डार उर्फ बिट्टा कराटे तथा तहरीक-ए-हुर्रियत के गाजी जावेद बाबा के खिलाफ प्राथमिक जांच शुरू की है. नईम को टेलीविजन पर एक स्टिंग ऑपरेशन में कथित तौर पर पाकिस्तान के आतंकी संगठनों से पैसा लेने की बात कबूलते देखा गया था. एनआईए के एक प्रवक्ता ने कहा कि अलगाववादियों को कश्मीर घाटी में सुरक्षा बलों पर पथराव करने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और स्कूलों तथा अन्य सरकारी प्रतिष्ठानों को जलाने समेत विध्वंसक गतिविधियों के लिए पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख सईद से धन मिल रहा है.टिप्पणियां उन्होंने कहा कि एनआईए ने एक टीवी संवाददाता और कश्मीर घाटी में गतिविधियां चला रहे अलगाववादी संगठनों के नेताओं के बीच इस संबंध में बातचीत की रिकॉर्डिंग से जुड़ी एक खबर का संज्ञान भी लिया है. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) एनआईए के एक प्रवक्ता ने कहा कि अलगाववादियों को कश्मीर घाटी में सुरक्षा बलों पर पथराव करने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और स्कूलों तथा अन्य सरकारी प्रतिष्ठानों को जलाने समेत विध्वंसक गतिविधियों के लिए पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख सईद से धन मिल रहा है.टिप्पणियां उन्होंने कहा कि एनआईए ने एक टीवी संवाददाता और कश्मीर घाटी में गतिविधियां चला रहे अलगाववादी संगठनों के नेताओं के बीच इस संबंध में बातचीत की रिकॉर्डिंग से जुड़ी एक खबर का संज्ञान भी लिया है. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) उन्होंने कहा कि एनआईए ने एक टीवी संवाददाता और कश्मीर घाटी में गतिविधियां चला रहे अलगाववादी संगठनों के नेताओं के बीच इस संबंध में बातचीत की रिकॉर्डिंग से जुड़ी एक खबर का संज्ञान भी लिया है. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
सारांश: लश्‍कर ए तैयबा प्रमुख से फंड लेने का आरोप एनआईए ने प्राथमिक जांच दर्ज की तीन अन्‍य लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज
20
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: शाह ने इसके साथ ही सूरत में सशस्त्र बलों के साहस पर ‘शक' करने और भारतीय वायु सेना के हवाई हमले का सबूत मांगने पर रविवार को विपक्षी पार्टियों पर निशाना साधा और कहा कि उनके ऐसे बयान पाकिस्तान के चेहरे पर ‘मुकुराहट' लाए. शाह ने कहा कि अगर ये पार्टियां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देश के सशस्त्र बलों द्वारा पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकानों पर हवाई हमले के जरिए हासिल की गई उपलब्धि की प्रशंसा नहीं कर सकतीं तो उन्हें ‘चुप रहना' चाहिए. प्रधानमंत्री के नेतृत्व की सराहना करते हुए, शाह ने दावा किया कि मोदी ने अपना नियमित कार्य जारी रखा और इस दौरान वह 14 फरवरी को पुलवामा हमले के गुनाहगारों को सजा देने के बारे में भी योजना तैयार करते रहे. इस हमले में सीआरपीएफ के 40 कर्मियों की मौत हो गई थी. उन्होंने दावा किया कि मोदी ने सर्जिकल स्ट्राइक और हवाई हमले का आदेश देकर देश को समझाया कि आतंक को ‘कतई बर्दाश्त' नहीं करने का मतलब क्या होता है.  शाह ने कहा, ‘विपक्षी नेता यह नहीं जानते हैं कि क्या हुआ. ममता दी ने सबूत मांगा है. राहुल बाबा कह रहे हैं कि इसका राजनीतिकरण किया जा रहा है. अखिलेश ने जांच की मांग की है. शर्म आनी चाहिए कि आपके बयान पाकिस्तान के चेहरे पर मुस्कुराहट लाए है.' भाजपा अध्यक्ष ने दावा किया कि, ‘पाकिस्तान विपक्षी नेताओं की प्रेस वार्ता के बाद मुस्कुराया जिसमें नेताओं ने सशस्त्र बलों के साहस पर सवाल उठाया. हम समझ सकते हैं कि आपमें मोदी जी जैसा साहस नहीं है, लेकिन अगर आप मोदी जी और सशस्त्र बलों द्वारा किये गए कार्य की प्रशंसा नहीं कर सकते तो कम से कम चुप ही रहिये.'
यह एक सारांश है: पाकिस्तान के बालाकोट में की थी सर्जिकल स्ट्राइक अमित शाह ने बताया, 250 आतंकी हुई ढेर सरकार ने जारी नहीं किया कोई आंकड़ा
24
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: हैदराबाद हाईकोर्ट ने अनुशासनहीनता के आधार पर नौ न्यायाधीशों को निलंबित कर दिया। वहीं, हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ तेलंगाना में कार्यरत 100 से ज्यादा जज मंगलवार से 15 दिन के सामूहिक आकस्मिक अवकाश पर चले गए। इनकी मांग न्यायाधीशों का निलंबन रद्द करने की है। यह विवाद उस समय खड़ा हुआ, जब तेलंगाना ने आंध्र के जजों की नियुक्तियां जिला अदालतों में किए जाने पर आपत्ति जताई। ‘तेलंगाना जजेज एसोसिएशन’ के बैनर तले सौ से अधिक न्यायाधीशों ने रविवार को गन पार्क से राजभवन तक जुलूस निकाला था और राज्यपाल को न्यायिक अधिकारियों के अस्थायी आवंटन के खिलाफ ज्ञापन सौंपा था। हैदराबाद हाईकोर्ट ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए अनुशासनहीनता के आधार पर निचली अदालत के नौ और न्यायाधीशों को निलंबित कर दिया। बता दें कि इस नवगठित राज्य के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव जल्द ही दिल्ली में धरना देने जा रहे हैं, ताकि हैदराबाद में तेलंगाना के लिए अलग से हाईकोर्ट की स्थापना की मांग पर ज़ोर दिया जा सके। उनकी सरकार का कहना है कि तेलंगाना के लिए अलग हाईकोर्ट राज्य की स्वायत्तता के लिए ज़रूरी है। तेलंगाना का गठन वर्ष 2014 में आंध्र प्रदेश से अलग कर किया गया था। तभी से दोनों पड़ोसी राज्य एक-दूसरे पर निशाने साधते रहे हैं। अक्सर पानी के मुद्दे पर, और कभी-कभी हैदराबाद में ज़मीन-जायदाद को लेकर, जो फिलहाल 2024 तक दोनों ही राज्यों की राजधानी है, और उसके बाद वह तेलंगाना की राजधानी हो जाएगी।टिप्पणियां केसीआर के नाम से पुकारे जाने वाले मुख्यमंत्री की पुत्री तथा सांसद के. कविता के मुताबिक, यह 'तेलंगाना पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश है...' उन्होंने मंगलवार को NDTV से बातचीत करते हुए कहा कि आंध्र के जज वहां की अदालतों में तैनाती लेने की जगह तेलंगाना में पदों को चुन रहे हैं, ताकि नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों को 'परेशान किया जा सके, दंडित किया जा सके', क्योंकि आंध्र सरकार अपने प्रतिद्वंद्वी राज्य में राजनीति और प्रशासन पर नियंत्रण करना चाहती है। उन्होंने कहा कि हैदराबाद हाईकोर्ट का तुरंत बंटवारा किया जाना चाहिए, जिसके लिए "उनके पिता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लगभग 10 बार बात की है..." कविता का आरोप है कि केंद्र भी आंध्र प्रदेश का ही पक्ष ले रहा है, क्योंकि आंध्र में सत्तारूढ़ दल उनका केंद्र में सहयोगी है। यह विवाद उस समय खड़ा हुआ, जब तेलंगाना ने आंध्र के जजों की नियुक्तियां जिला अदालतों में किए जाने पर आपत्ति जताई। ‘तेलंगाना जजेज एसोसिएशन’ के बैनर तले सौ से अधिक न्यायाधीशों ने रविवार को गन पार्क से राजभवन तक जुलूस निकाला था और राज्यपाल को न्यायिक अधिकारियों के अस्थायी आवंटन के खिलाफ ज्ञापन सौंपा था। हैदराबाद हाईकोर्ट ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए अनुशासनहीनता के आधार पर निचली अदालत के नौ और न्यायाधीशों को निलंबित कर दिया। बता दें कि इस नवगठित राज्य के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव जल्द ही दिल्ली में धरना देने जा रहे हैं, ताकि हैदराबाद में तेलंगाना के लिए अलग से हाईकोर्ट की स्थापना की मांग पर ज़ोर दिया जा सके। उनकी सरकार का कहना है कि तेलंगाना के लिए अलग हाईकोर्ट राज्य की स्वायत्तता के लिए ज़रूरी है। तेलंगाना का गठन वर्ष 2014 में आंध्र प्रदेश से अलग कर किया गया था। तभी से दोनों पड़ोसी राज्य एक-दूसरे पर निशाने साधते रहे हैं। अक्सर पानी के मुद्दे पर, और कभी-कभी हैदराबाद में ज़मीन-जायदाद को लेकर, जो फिलहाल 2024 तक दोनों ही राज्यों की राजधानी है, और उसके बाद वह तेलंगाना की राजधानी हो जाएगी।टिप्पणियां केसीआर के नाम से पुकारे जाने वाले मुख्यमंत्री की पुत्री तथा सांसद के. कविता के मुताबिक, यह 'तेलंगाना पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश है...' उन्होंने मंगलवार को NDTV से बातचीत करते हुए कहा कि आंध्र के जज वहां की अदालतों में तैनाती लेने की जगह तेलंगाना में पदों को चुन रहे हैं, ताकि नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों को 'परेशान किया जा सके, दंडित किया जा सके', क्योंकि आंध्र सरकार अपने प्रतिद्वंद्वी राज्य में राजनीति और प्रशासन पर नियंत्रण करना चाहती है। उन्होंने कहा कि हैदराबाद हाईकोर्ट का तुरंत बंटवारा किया जाना चाहिए, जिसके लिए "उनके पिता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लगभग 10 बार बात की है..." कविता का आरोप है कि केंद्र भी आंध्र प्रदेश का ही पक्ष ले रहा है, क्योंकि आंध्र में सत्तारूढ़ दल उनका केंद्र में सहयोगी है। बता दें कि इस नवगठित राज्य के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव जल्द ही दिल्ली में धरना देने जा रहे हैं, ताकि हैदराबाद में तेलंगाना के लिए अलग से हाईकोर्ट की स्थापना की मांग पर ज़ोर दिया जा सके। उनकी सरकार का कहना है कि तेलंगाना के लिए अलग हाईकोर्ट राज्य की स्वायत्तता के लिए ज़रूरी है। तेलंगाना का गठन वर्ष 2014 में आंध्र प्रदेश से अलग कर किया गया था। तभी से दोनों पड़ोसी राज्य एक-दूसरे पर निशाने साधते रहे हैं। अक्सर पानी के मुद्दे पर, और कभी-कभी हैदराबाद में ज़मीन-जायदाद को लेकर, जो फिलहाल 2024 तक दोनों ही राज्यों की राजधानी है, और उसके बाद वह तेलंगाना की राजधानी हो जाएगी।टिप्पणियां केसीआर के नाम से पुकारे जाने वाले मुख्यमंत्री की पुत्री तथा सांसद के. कविता के मुताबिक, यह 'तेलंगाना पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश है...' उन्होंने मंगलवार को NDTV से बातचीत करते हुए कहा कि आंध्र के जज वहां की अदालतों में तैनाती लेने की जगह तेलंगाना में पदों को चुन रहे हैं, ताकि नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों को 'परेशान किया जा सके, दंडित किया जा सके', क्योंकि आंध्र सरकार अपने प्रतिद्वंद्वी राज्य में राजनीति और प्रशासन पर नियंत्रण करना चाहती है। उन्होंने कहा कि हैदराबाद हाईकोर्ट का तुरंत बंटवारा किया जाना चाहिए, जिसके लिए "उनके पिता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लगभग 10 बार बात की है..." कविता का आरोप है कि केंद्र भी आंध्र प्रदेश का ही पक्ष ले रहा है, क्योंकि आंध्र में सत्तारूढ़ दल उनका केंद्र में सहयोगी है। तेलंगाना का गठन वर्ष 2014 में आंध्र प्रदेश से अलग कर किया गया था। तभी से दोनों पड़ोसी राज्य एक-दूसरे पर निशाने साधते रहे हैं। अक्सर पानी के मुद्दे पर, और कभी-कभी हैदराबाद में ज़मीन-जायदाद को लेकर, जो फिलहाल 2024 तक दोनों ही राज्यों की राजधानी है, और उसके बाद वह तेलंगाना की राजधानी हो जाएगी।टिप्पणियां केसीआर के नाम से पुकारे जाने वाले मुख्यमंत्री की पुत्री तथा सांसद के. कविता के मुताबिक, यह 'तेलंगाना पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश है...' उन्होंने मंगलवार को NDTV से बातचीत करते हुए कहा कि आंध्र के जज वहां की अदालतों में तैनाती लेने की जगह तेलंगाना में पदों को चुन रहे हैं, ताकि नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों को 'परेशान किया जा सके, दंडित किया जा सके', क्योंकि आंध्र सरकार अपने प्रतिद्वंद्वी राज्य में राजनीति और प्रशासन पर नियंत्रण करना चाहती है। उन्होंने कहा कि हैदराबाद हाईकोर्ट का तुरंत बंटवारा किया जाना चाहिए, जिसके लिए "उनके पिता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लगभग 10 बार बात की है..." कविता का आरोप है कि केंद्र भी आंध्र प्रदेश का ही पक्ष ले रहा है, क्योंकि आंध्र में सत्तारूढ़ दल उनका केंद्र में सहयोगी है। केसीआर के नाम से पुकारे जाने वाले मुख्यमंत्री की पुत्री तथा सांसद के. कविता के मुताबिक, यह 'तेलंगाना पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश है...' उन्होंने मंगलवार को NDTV से बातचीत करते हुए कहा कि आंध्र के जज वहां की अदालतों में तैनाती लेने की जगह तेलंगाना में पदों को चुन रहे हैं, ताकि नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों को 'परेशान किया जा सके, दंडित किया जा सके', क्योंकि आंध्र सरकार अपने प्रतिद्वंद्वी राज्य में राजनीति और प्रशासन पर नियंत्रण करना चाहती है। उन्होंने कहा कि हैदराबाद हाईकोर्ट का तुरंत बंटवारा किया जाना चाहिए, जिसके लिए "उनके पिता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लगभग 10 बार बात की है..." कविता का आरोप है कि केंद्र भी आंध्र प्रदेश का ही पक्ष ले रहा है, क्योंकि आंध्र में सत्तारूढ़ दल उनका केंद्र में सहयोगी है। उन्होंने कहा कि हैदराबाद हाईकोर्ट का तुरंत बंटवारा किया जाना चाहिए, जिसके लिए "उनके पिता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लगभग 10 बार बात की है..." कविता का आरोप है कि केंद्र भी आंध्र प्रदेश का ही पक्ष ले रहा है, क्योंकि आंध्र में सत्तारूढ़ दल उनका केंद्र में सहयोगी है।
यहाँ एक सारांश है:तेलंगाना को आंध्र के जजों की नियुक्तियां जिला अदालतों में करने पर आपत्ति इन नियुक्तियों के विरोध में तेलंगाना के जजों ने हैदराबाद में मार्च निकाला अलग हाईकोर्ट की मांग को लेकर दिल्ली में धरना देंगे तेलंगाना के सीएम
12
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: ड्रोन हमले के बाद नाटो का आपूर्ति मार्ग बंद करने वाली पाकिस्तानी सरकार अब अपने इस रुख में बदलाव कर सकती हैं, हालांकि वह नई शर्तों के साथ आपूर्ति का रास्ता खोलेगी। नाटो के हर ट्रक पर पाकिस्तानी सेना एक हजार डॉलर का शुल्क ले सकती है।टिप्पणियां आपूर्ति मार्ग को फिर से खोलने पर विचार कर रही पाकिस्तानी सरकार ‘नेशनल लॉजिस्टिक सेल’ (एनएलसी) के जरिए शुल्क वसूल सकती है। बीते साल नवंबर में ड्रोन हमले के बाद पाकिस्तान की सरकार ने आपूर्ति मार्ग बंद कर दिया था। इस हमले में 24 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे। स्थानीय समाचार पत्र ‘द न्यूज’ के मुताबिक सूत्रों ने बताया कि संघीय राजस्व ब्यूरो की ओर से ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं दिया गया है कि आईएसएएफ और नाटो से उनकी आपूर्ति को लेकर पारगमन शुल्क लिया जाए, हालांकि यहां की सरकार ने एनएलसी को ऐसा करने की इजाजत दे सकती है। अधिकारियों का कहना है कि नाटो के ट्रकों को अनापत्ति प्रमाण पत्र मुहैया कराने की एवज में यह शुल्क वसूला जाएगा। आपूर्ति मार्ग को फिर से खोलने पर विचार कर रही पाकिस्तानी सरकार ‘नेशनल लॉजिस्टिक सेल’ (एनएलसी) के जरिए शुल्क वसूल सकती है। बीते साल नवंबर में ड्रोन हमले के बाद पाकिस्तान की सरकार ने आपूर्ति मार्ग बंद कर दिया था। इस हमले में 24 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे। स्थानीय समाचार पत्र ‘द न्यूज’ के मुताबिक सूत्रों ने बताया कि संघीय राजस्व ब्यूरो की ओर से ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं दिया गया है कि आईएसएएफ और नाटो से उनकी आपूर्ति को लेकर पारगमन शुल्क लिया जाए, हालांकि यहां की सरकार ने एनएलसी को ऐसा करने की इजाजत दे सकती है। अधिकारियों का कहना है कि नाटो के ट्रकों को अनापत्ति प्रमाण पत्र मुहैया कराने की एवज में यह शुल्क वसूला जाएगा। स्थानीय समाचार पत्र ‘द न्यूज’ के मुताबिक सूत्रों ने बताया कि संघीय राजस्व ब्यूरो की ओर से ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं दिया गया है कि आईएसएएफ और नाटो से उनकी आपूर्ति को लेकर पारगमन शुल्क लिया जाए, हालांकि यहां की सरकार ने एनएलसी को ऐसा करने की इजाजत दे सकती है। अधिकारियों का कहना है कि नाटो के ट्रकों को अनापत्ति प्रमाण पत्र मुहैया कराने की एवज में यह शुल्क वसूला जाएगा।
ड्रोन हमले के बाद नाटो का आपूर्ति मार्ग बंद करने वाली पाकिस्तानी सरकार अब अपने इस रुख में बदलाव कर सकती हैं, हालांकि वह नई शर्तों के साथ आपूर्ति का रास्ता खोलेगी।
1
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: भोपाल की आरटीआई कार्यकर्ता शहला महसूद हत्याकांड को लेकर अब बीजेपी के राज्यसभा सदस्य तरुण विजय से पूछताछ होगी। 15 अगस्त को शहला और तरुण विजय की फोन पर बात हुई थी और 16 अगस्त को शहला की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। शहला उस वक्त अन्ना के समर्थन में रैली करने जा रही थी। बृहस्पतिवार को ही सरकार ने शहला के कातिलों की जानकारी देने वाले को 1 लाख के इनाम की घोषणा की है। हालांकि शहला के पिता को नहीं लगता कि इस मामले से तरुण विजय का कोई लेना-देना है लेकिन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके दिग्विजय सिंह चाहते हैं कि खुद तरुण विजय आगे आएं और सीबीआई जांच के लिए कहें। वहीं तरुण विजय ने कहा कि शहला महसूद को इंसाफ मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि वो शहला से इवेंट मैनेजमेंट के ज़रिए संपर्क में थे। तरुण विजय ने कहा कि 16 अगस्त को उन्होंने अन्ना की गिरफ्तारी को लेकर शहला से बात की थी कि किस तरह से आंदोलन करना है।
यहाँ एक सारांश है:15 अगस्त को शहला और तरुण विजय की फोन पर बात हुई थी और 16 अगस्त को शहला की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
4
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: जयपुर में आज से कांग्रेस का चिंतन शिविर शुरू हो रहा है। 20 जनवरी तक चलने वाले इस शिविर में पार्टी के तमाम बड़े नेता शामिल होंगे। पार्टी के इस रणनीतिक सत्र के दौरान आम चुनाव, संगठन की मजबूती, विदेश मामले और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। चिंतन शिविर के पहले दो दिन में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की शुरुआत करेंगी और 20 जनवरी को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पार्टी महासचिव राहुल गांधी सत्र को संबोधित करेंगे। शिविर के आखिर में इस वर्ष नौ राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों और 2014 के लोकसभा चुनाव के संबंध में दिशा निर्देश जारी किए जा सकते हैं।टिप्पणियां कांग्रेस के चिंतन शिविर के लिए गुलाबी शहर जयपुर को खूब सजाया गया है। पार्टी के आला नेताओं के आने से पहले शहर की सड़कों को दुरस्त कर दिया गया है और साफ-सफाई की जा रही है। देशभर से जुटने वाले नेताओं की सुरक्षा को लेकर भी खास इंतजाम किए गए हैं। शिविर के आसपास के इलाकों को आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया है। इंतजामों पर किए जा रहे खर्च के बारे में राज्य सरकार ने कहा है कि इसका पूरा खर्च कांग्रेस पार्टी की ओर से वहन किया जा रहा है। चिंतन शिविर के पहले दो दिन में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की शुरुआत करेंगी और 20 जनवरी को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पार्टी महासचिव राहुल गांधी सत्र को संबोधित करेंगे। शिविर के आखिर में इस वर्ष नौ राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों और 2014 के लोकसभा चुनाव के संबंध में दिशा निर्देश जारी किए जा सकते हैं।टिप्पणियां कांग्रेस के चिंतन शिविर के लिए गुलाबी शहर जयपुर को खूब सजाया गया है। पार्टी के आला नेताओं के आने से पहले शहर की सड़कों को दुरस्त कर दिया गया है और साफ-सफाई की जा रही है। देशभर से जुटने वाले नेताओं की सुरक्षा को लेकर भी खास इंतजाम किए गए हैं। शिविर के आसपास के इलाकों को आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया है। इंतजामों पर किए जा रहे खर्च के बारे में राज्य सरकार ने कहा है कि इसका पूरा खर्च कांग्रेस पार्टी की ओर से वहन किया जा रहा है। कांग्रेस के चिंतन शिविर के लिए गुलाबी शहर जयपुर को खूब सजाया गया है। पार्टी के आला नेताओं के आने से पहले शहर की सड़कों को दुरस्त कर दिया गया है और साफ-सफाई की जा रही है। देशभर से जुटने वाले नेताओं की सुरक्षा को लेकर भी खास इंतजाम किए गए हैं। शिविर के आसपास के इलाकों को आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया है। इंतजामों पर किए जा रहे खर्च के बारे में राज्य सरकार ने कहा है कि इसका पूरा खर्च कांग्रेस पार्टी की ओर से वहन किया जा रहा है। देशभर से जुटने वाले नेताओं की सुरक्षा को लेकर भी खास इंतजाम किए गए हैं। शिविर के आसपास के इलाकों को आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया है। इंतजामों पर किए जा रहे खर्च के बारे में राज्य सरकार ने कहा है कि इसका पूरा खर्च कांग्रेस पार्टी की ओर से वहन किया जा रहा है।
सारांश: 20 जनवरी तक चलने वाले इस शिविर में पार्टी के तमाम बड़े नेता शामिल होंगे। पार्टी के इस रणनीतिक सत्र के दौरान आम चुनाव, संगठन की मजबूती, विदेश मामले और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।
33
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: राष्ट्रपति पद के चुनाव में विपक्षी एनडीए को गुरुवार को एक और झटका लगा, जब शिवसेना के बाद उसके दूसरे प्रमुख घटक जनता दल यूनाइटेड ने भी यूपीए उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी को समर्थन देने की घोषणा की। बीजेपी द्वारा राष्ट्रपति चुनाव के लिए पीए संगमा को समर्थन देने की घोषणा किए जाने के कुछ ही देर बाद जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और एनडीए संयोजक शरद यादव ने अपनी पार्टी के रुख का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि देश के इस सर्वोच्च संवैधानिक पद का चुनाव आम सहमति से होना चाहिए और उनकी पार्टी अब इस पद के लिए किसी चुनाव के खिलाफ है।टिप्पणियां शरद यादव ने कहा, जब तक एपीजे अब्दुल कलाम का नाम चल रहा था, हम चुनाव लड़ने के लिए तैयार थे, लेकिन कलाम चुनाव लड़ने को तैयार नहीं हुए। उन्होंने कहा कि हम कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन नहीं कर रहे हैं, बल्कि मौजूदा परिस्थिति में हम यूपीए उम्मीदवार का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने इस बात पर खेद जताया कि सत्तारूढ़ गठबंधन यूपीए ने राष्ट्रपति पद के चुनाव में आम सहमति बनाने के लिए सभी दलों से विचार-विमर्श नहीं किया। अपने उम्मीदवार की घोषणा करने के बाद उसने दूसरे दलों से बातचीत की। अच्छा होता पहले बातचीत करते, तो शायद आम सहमति बनने में कोई दिक्कत नहीं होती। उन्होंने कहा कि कलाम के नाम पर एनडीए में आम सहमति थी, लेकिन कलाम के मैदान में न उतरने की घोषाणा के बाद अलग-अलग राय और नाम सामने आए। बीजेपी द्वारा राष्ट्रपति चुनाव के लिए पीए संगमा को समर्थन देने की घोषणा किए जाने के कुछ ही देर बाद जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और एनडीए संयोजक शरद यादव ने अपनी पार्टी के रुख का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि देश के इस सर्वोच्च संवैधानिक पद का चुनाव आम सहमति से होना चाहिए और उनकी पार्टी अब इस पद के लिए किसी चुनाव के खिलाफ है।टिप्पणियां शरद यादव ने कहा, जब तक एपीजे अब्दुल कलाम का नाम चल रहा था, हम चुनाव लड़ने के लिए तैयार थे, लेकिन कलाम चुनाव लड़ने को तैयार नहीं हुए। उन्होंने कहा कि हम कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन नहीं कर रहे हैं, बल्कि मौजूदा परिस्थिति में हम यूपीए उम्मीदवार का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने इस बात पर खेद जताया कि सत्तारूढ़ गठबंधन यूपीए ने राष्ट्रपति पद के चुनाव में आम सहमति बनाने के लिए सभी दलों से विचार-विमर्श नहीं किया। अपने उम्मीदवार की घोषणा करने के बाद उसने दूसरे दलों से बातचीत की। अच्छा होता पहले बातचीत करते, तो शायद आम सहमति बनने में कोई दिक्कत नहीं होती। उन्होंने कहा कि कलाम के नाम पर एनडीए में आम सहमति थी, लेकिन कलाम के मैदान में न उतरने की घोषाणा के बाद अलग-अलग राय और नाम सामने आए। शरद यादव ने कहा, जब तक एपीजे अब्दुल कलाम का नाम चल रहा था, हम चुनाव लड़ने के लिए तैयार थे, लेकिन कलाम चुनाव लड़ने को तैयार नहीं हुए। उन्होंने कहा कि हम कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन नहीं कर रहे हैं, बल्कि मौजूदा परिस्थिति में हम यूपीए उम्मीदवार का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने इस बात पर खेद जताया कि सत्तारूढ़ गठबंधन यूपीए ने राष्ट्रपति पद के चुनाव में आम सहमति बनाने के लिए सभी दलों से विचार-विमर्श नहीं किया। अपने उम्मीदवार की घोषणा करने के बाद उसने दूसरे दलों से बातचीत की। अच्छा होता पहले बातचीत करते, तो शायद आम सहमति बनने में कोई दिक्कत नहीं होती। उन्होंने कहा कि कलाम के नाम पर एनडीए में आम सहमति थी, लेकिन कलाम के मैदान में न उतरने की घोषाणा के बाद अलग-अलग राय और नाम सामने आए। उन्होंने इस बात पर खेद जताया कि सत्तारूढ़ गठबंधन यूपीए ने राष्ट्रपति पद के चुनाव में आम सहमति बनाने के लिए सभी दलों से विचार-विमर्श नहीं किया। अपने उम्मीदवार की घोषणा करने के बाद उसने दूसरे दलों से बातचीत की। अच्छा होता पहले बातचीत करते, तो शायद आम सहमति बनने में कोई दिक्कत नहीं होती। उन्होंने कहा कि कलाम के नाम पर एनडीए में आम सहमति थी, लेकिन कलाम के मैदान में न उतरने की घोषाणा के बाद अलग-अलग राय और नाम सामने आए।
संक्षिप्त पाठ: राष्ट्रपति पद के चुनाव में विपक्षी एनडीए को गुरुवार को एक और झटका लगा, जब शिवसेना के बाद उसके दूसरे प्रमुख घटक जनता दल यूनाइटेड ने भी यूपीए उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी को समर्थन देने की घोषणा की।
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['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: संसद का तीन महीने तक चला बजट सत्र निर्धारित समय से दो दिन पूर्व ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। इस दौरान विभिन्न मुद्दों को लेकर हंगामे के कारण संसद का बहुमूल्य समय नष्ट हुआ। लोकसभा और राज्यसभा में सदस्यों के आचरण और व्यवहार संबंधी एक विशेष निर्देशिका है, जिसका सदस्यों को पालन करना होता है। इस निर्देशिका का सबसे पहला ही नियम कहता है, ‘कार्यवाही की गरिमा और गंभीरता को दृष्टि में रखते हुए किसी भी सदस्य को किसी भी प्रकार का नारा नहीं लगाना चाहिए और सदन के मध्यस्थल यानी आसन के समक्ष धरना नहीं देना चाहिए।’ दो चरणों में चले संसद के इस बजट सत्र में ये नियम जमकर टूटे। पहले चरण में ही तेलंगाना राष्ट्र समिति की विजयाशांति अलग तेलंगाना राष्ट्र के मुद्दे को लेकर आसन के समक्ष धरना देकर बैठ गईं थीं। 22 अप्रैल से शुरू हुए बजट सत्र के दूसरे चरण में मुख्य विपक्षी दल भाजपा, अकाली दल, अन्नाद्रमुक, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और वाम दलों के सदस्यों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर जबरदस्त हंगामा और नारेबाजी की। गौरतलब है कि कोयला ब्लाक आवंटन, सीबीआई रिपोर्ट में हस्तक्षेप, रेलवे रिश्वत जैसे मामलों को लेकर प्रधानमंत्री, विधि मंत्री और रेलमंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़ी भाजपा के सदस्यों ने बजट सत्र के दूसरे चरण में जमकर हंगामा और नारेबाजी की। वाम दलों ने भी भाजपा की मांग से सहमति जताते हुए आसन के समक्ष आकर नारे लगाए। हंगामे के कारण इस चरण में लोकसभा का 92 घंटे से अधिक समय और राज्यसभा का भी 82 घंटे से अधिक कामकाजी समय बरबाद हुआ। इसी प्रकार अकाली दल के सदस्यों ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को बरी किए जाने के अदालत के फैसले को लेकर इन दंगों की उच्चतम न्यायालय की निगरानी में विशेष जांच दल से जांच कराने की मांग को लेकर संसद की कार्यवाही नहीं चलने दी। इस दौरान अन्नाद्रमुक ने श्रीलंकाई तमिलों, समाजवादी पार्टी ने सच्चर समिति की सिफारिशों को लागू करने और बसपा ने उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन की मांग करते हुए नारेबाजी की।टिप्पणियां निर्देशिका का ही एक अन्य नियम कहता है कि प्रदर्शनीय वस्तुओं का सदन में प्रदर्शन नहीं किया जाएगा लेकिन पिछले कुछ सत्रों की कार्यवाही को देखा जाए तो विभिन्न दलों के सदस्यों ने दोनों ही सदनों में जमकर ‘प्लेकार्ड’ का प्रदर्शन किया। निर्देशिका में एक परंपरा का भी उल्लेख है कि जब कोई सदस्य आसन की अनुमति से भाषण कर रहा हो तो अन्य सदस्य उसमें बाधा नहीं डालेंगे, लेकिन यह परंपरा तो पूरी तरह समाप्त होती दिख रही है क्योंकि दूसरे पक्ष के सदस्यों के भाषण में बाधा डालना अब आम बात हो गई है। लोकसभा और राज्यसभा में सदस्यों के आचरण और व्यवहार संबंधी एक विशेष निर्देशिका है, जिसका सदस्यों को पालन करना होता है। इस निर्देशिका का सबसे पहला ही नियम कहता है, ‘कार्यवाही की गरिमा और गंभीरता को दृष्टि में रखते हुए किसी भी सदस्य को किसी भी प्रकार का नारा नहीं लगाना चाहिए और सदन के मध्यस्थल यानी आसन के समक्ष धरना नहीं देना चाहिए।’ दो चरणों में चले संसद के इस बजट सत्र में ये नियम जमकर टूटे। पहले चरण में ही तेलंगाना राष्ट्र समिति की विजयाशांति अलग तेलंगाना राष्ट्र के मुद्दे को लेकर आसन के समक्ष धरना देकर बैठ गईं थीं। 22 अप्रैल से शुरू हुए बजट सत्र के दूसरे चरण में मुख्य विपक्षी दल भाजपा, अकाली दल, अन्नाद्रमुक, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और वाम दलों के सदस्यों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर जबरदस्त हंगामा और नारेबाजी की। गौरतलब है कि कोयला ब्लाक आवंटन, सीबीआई रिपोर्ट में हस्तक्षेप, रेलवे रिश्वत जैसे मामलों को लेकर प्रधानमंत्री, विधि मंत्री और रेलमंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़ी भाजपा के सदस्यों ने बजट सत्र के दूसरे चरण में जमकर हंगामा और नारेबाजी की। वाम दलों ने भी भाजपा की मांग से सहमति जताते हुए आसन के समक्ष आकर नारे लगाए। हंगामे के कारण इस चरण में लोकसभा का 92 घंटे से अधिक समय और राज्यसभा का भी 82 घंटे से अधिक कामकाजी समय बरबाद हुआ। इसी प्रकार अकाली दल के सदस्यों ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को बरी किए जाने के अदालत के फैसले को लेकर इन दंगों की उच्चतम न्यायालय की निगरानी में विशेष जांच दल से जांच कराने की मांग को लेकर संसद की कार्यवाही नहीं चलने दी। इस दौरान अन्नाद्रमुक ने श्रीलंकाई तमिलों, समाजवादी पार्टी ने सच्चर समिति की सिफारिशों को लागू करने और बसपा ने उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन की मांग करते हुए नारेबाजी की।टिप्पणियां निर्देशिका का ही एक अन्य नियम कहता है कि प्रदर्शनीय वस्तुओं का सदन में प्रदर्शन नहीं किया जाएगा लेकिन पिछले कुछ सत्रों की कार्यवाही को देखा जाए तो विभिन्न दलों के सदस्यों ने दोनों ही सदनों में जमकर ‘प्लेकार्ड’ का प्रदर्शन किया। निर्देशिका में एक परंपरा का भी उल्लेख है कि जब कोई सदस्य आसन की अनुमति से भाषण कर रहा हो तो अन्य सदस्य उसमें बाधा नहीं डालेंगे, लेकिन यह परंपरा तो पूरी तरह समाप्त होती दिख रही है क्योंकि दूसरे पक्ष के सदस्यों के भाषण में बाधा डालना अब आम बात हो गई है। दो चरणों में चले संसद के इस बजट सत्र में ये नियम जमकर टूटे। पहले चरण में ही तेलंगाना राष्ट्र समिति की विजयाशांति अलग तेलंगाना राष्ट्र के मुद्दे को लेकर आसन के समक्ष धरना देकर बैठ गईं थीं। 22 अप्रैल से शुरू हुए बजट सत्र के दूसरे चरण में मुख्य विपक्षी दल भाजपा, अकाली दल, अन्नाद्रमुक, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और वाम दलों के सदस्यों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर जबरदस्त हंगामा और नारेबाजी की। गौरतलब है कि कोयला ब्लाक आवंटन, सीबीआई रिपोर्ट में हस्तक्षेप, रेलवे रिश्वत जैसे मामलों को लेकर प्रधानमंत्री, विधि मंत्री और रेलमंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़ी भाजपा के सदस्यों ने बजट सत्र के दूसरे चरण में जमकर हंगामा और नारेबाजी की। वाम दलों ने भी भाजपा की मांग से सहमति जताते हुए आसन के समक्ष आकर नारे लगाए। हंगामे के कारण इस चरण में लोकसभा का 92 घंटे से अधिक समय और राज्यसभा का भी 82 घंटे से अधिक कामकाजी समय बरबाद हुआ। इसी प्रकार अकाली दल के सदस्यों ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को बरी किए जाने के अदालत के फैसले को लेकर इन दंगों की उच्चतम न्यायालय की निगरानी में विशेष जांच दल से जांच कराने की मांग को लेकर संसद की कार्यवाही नहीं चलने दी। इस दौरान अन्नाद्रमुक ने श्रीलंकाई तमिलों, समाजवादी पार्टी ने सच्चर समिति की सिफारिशों को लागू करने और बसपा ने उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन की मांग करते हुए नारेबाजी की।टिप्पणियां निर्देशिका का ही एक अन्य नियम कहता है कि प्रदर्शनीय वस्तुओं का सदन में प्रदर्शन नहीं किया जाएगा लेकिन पिछले कुछ सत्रों की कार्यवाही को देखा जाए तो विभिन्न दलों के सदस्यों ने दोनों ही सदनों में जमकर ‘प्लेकार्ड’ का प्रदर्शन किया। निर्देशिका में एक परंपरा का भी उल्लेख है कि जब कोई सदस्य आसन की अनुमति से भाषण कर रहा हो तो अन्य सदस्य उसमें बाधा नहीं डालेंगे, लेकिन यह परंपरा तो पूरी तरह समाप्त होती दिख रही है क्योंकि दूसरे पक्ष के सदस्यों के भाषण में बाधा डालना अब आम बात हो गई है। 22 अप्रैल से शुरू हुए बजट सत्र के दूसरे चरण में मुख्य विपक्षी दल भाजपा, अकाली दल, अन्नाद्रमुक, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और वाम दलों के सदस्यों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर जबरदस्त हंगामा और नारेबाजी की। गौरतलब है कि कोयला ब्लाक आवंटन, सीबीआई रिपोर्ट में हस्तक्षेप, रेलवे रिश्वत जैसे मामलों को लेकर प्रधानमंत्री, विधि मंत्री और रेलमंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़ी भाजपा के सदस्यों ने बजट सत्र के दूसरे चरण में जमकर हंगामा और नारेबाजी की। वाम दलों ने भी भाजपा की मांग से सहमति जताते हुए आसन के समक्ष आकर नारे लगाए। हंगामे के कारण इस चरण में लोकसभा का 92 घंटे से अधिक समय और राज्यसभा का भी 82 घंटे से अधिक कामकाजी समय बरबाद हुआ। इसी प्रकार अकाली दल के सदस्यों ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को बरी किए जाने के अदालत के फैसले को लेकर इन दंगों की उच्चतम न्यायालय की निगरानी में विशेष जांच दल से जांच कराने की मांग को लेकर संसद की कार्यवाही नहीं चलने दी। इस दौरान अन्नाद्रमुक ने श्रीलंकाई तमिलों, समाजवादी पार्टी ने सच्चर समिति की सिफारिशों को लागू करने और बसपा ने उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन की मांग करते हुए नारेबाजी की।टिप्पणियां निर्देशिका का ही एक अन्य नियम कहता है कि प्रदर्शनीय वस्तुओं का सदन में प्रदर्शन नहीं किया जाएगा लेकिन पिछले कुछ सत्रों की कार्यवाही को देखा जाए तो विभिन्न दलों के सदस्यों ने दोनों ही सदनों में जमकर ‘प्लेकार्ड’ का प्रदर्शन किया। निर्देशिका में एक परंपरा का भी उल्लेख है कि जब कोई सदस्य आसन की अनुमति से भाषण कर रहा हो तो अन्य सदस्य उसमें बाधा नहीं डालेंगे, लेकिन यह परंपरा तो पूरी तरह समाप्त होती दिख रही है क्योंकि दूसरे पक्ष के सदस्यों के भाषण में बाधा डालना अब आम बात हो गई है। गौरतलब है कि कोयला ब्लाक आवंटन, सीबीआई रिपोर्ट में हस्तक्षेप, रेलवे रिश्वत जैसे मामलों को लेकर प्रधानमंत्री, विधि मंत्री और रेलमंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़ी भाजपा के सदस्यों ने बजट सत्र के दूसरे चरण में जमकर हंगामा और नारेबाजी की। वाम दलों ने भी भाजपा की मांग से सहमति जताते हुए आसन के समक्ष आकर नारे लगाए। हंगामे के कारण इस चरण में लोकसभा का 92 घंटे से अधिक समय और राज्यसभा का भी 82 घंटे से अधिक कामकाजी समय बरबाद हुआ। इसी प्रकार अकाली दल के सदस्यों ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को बरी किए जाने के अदालत के फैसले को लेकर इन दंगों की उच्चतम न्यायालय की निगरानी में विशेष जांच दल से जांच कराने की मांग को लेकर संसद की कार्यवाही नहीं चलने दी। इस दौरान अन्नाद्रमुक ने श्रीलंकाई तमिलों, समाजवादी पार्टी ने सच्चर समिति की सिफारिशों को लागू करने और बसपा ने उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन की मांग करते हुए नारेबाजी की।टिप्पणियां निर्देशिका का ही एक अन्य नियम कहता है कि प्रदर्शनीय वस्तुओं का सदन में प्रदर्शन नहीं किया जाएगा लेकिन पिछले कुछ सत्रों की कार्यवाही को देखा जाए तो विभिन्न दलों के सदस्यों ने दोनों ही सदनों में जमकर ‘प्लेकार्ड’ का प्रदर्शन किया। निर्देशिका में एक परंपरा का भी उल्लेख है कि जब कोई सदस्य आसन की अनुमति से भाषण कर रहा हो तो अन्य सदस्य उसमें बाधा नहीं डालेंगे, लेकिन यह परंपरा तो पूरी तरह समाप्त होती दिख रही है क्योंकि दूसरे पक्ष के सदस्यों के भाषण में बाधा डालना अब आम बात हो गई है। वाम दलों ने भी भाजपा की मांग से सहमति जताते हुए आसन के समक्ष आकर नारे लगाए। हंगामे के कारण इस चरण में लोकसभा का 92 घंटे से अधिक समय और राज्यसभा का भी 82 घंटे से अधिक कामकाजी समय बरबाद हुआ। इसी प्रकार अकाली दल के सदस्यों ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को बरी किए जाने के अदालत के फैसले को लेकर इन दंगों की उच्चतम न्यायालय की निगरानी में विशेष जांच दल से जांच कराने की मांग को लेकर संसद की कार्यवाही नहीं चलने दी। इस दौरान अन्नाद्रमुक ने श्रीलंकाई तमिलों, समाजवादी पार्टी ने सच्चर समिति की सिफारिशों को लागू करने और बसपा ने उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन की मांग करते हुए नारेबाजी की।टिप्पणियां निर्देशिका का ही एक अन्य नियम कहता है कि प्रदर्शनीय वस्तुओं का सदन में प्रदर्शन नहीं किया जाएगा लेकिन पिछले कुछ सत्रों की कार्यवाही को देखा जाए तो विभिन्न दलों के सदस्यों ने दोनों ही सदनों में जमकर ‘प्लेकार्ड’ का प्रदर्शन किया। निर्देशिका में एक परंपरा का भी उल्लेख है कि जब कोई सदस्य आसन की अनुमति से भाषण कर रहा हो तो अन्य सदस्य उसमें बाधा नहीं डालेंगे, लेकिन यह परंपरा तो पूरी तरह समाप्त होती दिख रही है क्योंकि दूसरे पक्ष के सदस्यों के भाषण में बाधा डालना अब आम बात हो गई है। इसी प्रकार अकाली दल के सदस्यों ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को बरी किए जाने के अदालत के फैसले को लेकर इन दंगों की उच्चतम न्यायालय की निगरानी में विशेष जांच दल से जांच कराने की मांग को लेकर संसद की कार्यवाही नहीं चलने दी। इस दौरान अन्नाद्रमुक ने श्रीलंकाई तमिलों, समाजवादी पार्टी ने सच्चर समिति की सिफारिशों को लागू करने और बसपा ने उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन की मांग करते हुए नारेबाजी की।टिप्पणियां निर्देशिका का ही एक अन्य नियम कहता है कि प्रदर्शनीय वस्तुओं का सदन में प्रदर्शन नहीं किया जाएगा लेकिन पिछले कुछ सत्रों की कार्यवाही को देखा जाए तो विभिन्न दलों के सदस्यों ने दोनों ही सदनों में जमकर ‘प्लेकार्ड’ का प्रदर्शन किया। निर्देशिका में एक परंपरा का भी उल्लेख है कि जब कोई सदस्य आसन की अनुमति से भाषण कर रहा हो तो अन्य सदस्य उसमें बाधा नहीं डालेंगे, लेकिन यह परंपरा तो पूरी तरह समाप्त होती दिख रही है क्योंकि दूसरे पक्ष के सदस्यों के भाषण में बाधा डालना अब आम बात हो गई है। निर्देशिका का ही एक अन्य नियम कहता है कि प्रदर्शनीय वस्तुओं का सदन में प्रदर्शन नहीं किया जाएगा लेकिन पिछले कुछ सत्रों की कार्यवाही को देखा जाए तो विभिन्न दलों के सदस्यों ने दोनों ही सदनों में जमकर ‘प्लेकार्ड’ का प्रदर्शन किया। निर्देशिका में एक परंपरा का भी उल्लेख है कि जब कोई सदस्य आसन की अनुमति से भाषण कर रहा हो तो अन्य सदस्य उसमें बाधा नहीं डालेंगे, लेकिन यह परंपरा तो पूरी तरह समाप्त होती दिख रही है क्योंकि दूसरे पक्ष के सदस्यों के भाषण में बाधा डालना अब आम बात हो गई है। निर्देशिका में एक परंपरा का भी उल्लेख है कि जब कोई सदस्य आसन की अनुमति से भाषण कर रहा हो तो अन्य सदस्य उसमें बाधा नहीं डालेंगे, लेकिन यह परंपरा तो पूरी तरह समाप्त होती दिख रही है क्योंकि दूसरे पक्ष के सदस्यों के भाषण में बाधा डालना अब आम बात हो गई है।
सारांश: निर्देशिका का सबसे पहला ही नियम कहता है, ‘कार्यवाही की गरिमा और गंभीरता को दृष्टि में रखते हुए किसी भी सदस्य को किसी भी प्रकार का नारा नहीं लगाना चाहिए और सदन के मध्यस्थल यानी आसन के समक्ष धरना नहीं देना चाहिए।’
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['hin']
एक सारांश बनाओ: आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले में शनिवार सुबह एक कृषि-रसायन संयंत्र में आग लगने की घटना में वहां के 17 कर्मचारी घायल हो गए। कुछ कर्मचारियों के संयंत्र में फंसे होने की आशंका है।टिप्पणियां नागार्जुन एग्रीकेम लिमिटेड संयंत्र के पांचवें ब्लॉक में एक विस्फोट के बाद यह आग लग गई। संयंत्र में कृषि रसायनों का उत्पादन होता है। यहां से 700 किलोमीटर दूर उत्तरी तटीय आंध्र के श्रीकाकुलम जिले के चिल्कापालेम में यह संयंत्र स्थित है। घायलों को श्रीकाकुलम के राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडीकल साइंसेज (आरआईएमएस) में दाखिल कराया गया। घटना के समय संयंत्र में करीब 200 कर्मचारी काम कर रहे थे। रसायन संयंत्र में विस्फोट के बाद कर्मचारियों के बीच भगदड़ मच गई। पूरे इलाके में काला घना धुआं फैल गया। समीप के गांवों व राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी धुआं फैल गया। नागार्जुन एग्रीकेम लिमिटेड संयंत्र के पांचवें ब्लॉक में एक विस्फोट के बाद यह आग लग गई। संयंत्र में कृषि रसायनों का उत्पादन होता है। यहां से 700 किलोमीटर दूर उत्तरी तटीय आंध्र के श्रीकाकुलम जिले के चिल्कापालेम में यह संयंत्र स्थित है। घायलों को श्रीकाकुलम के राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडीकल साइंसेज (आरआईएमएस) में दाखिल कराया गया। घटना के समय संयंत्र में करीब 200 कर्मचारी काम कर रहे थे। रसायन संयंत्र में विस्फोट के बाद कर्मचारियों के बीच भगदड़ मच गई। पूरे इलाके में काला घना धुआं फैल गया। समीप के गांवों व राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी धुआं फैल गया। घायलों को श्रीकाकुलम के राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडीकल साइंसेज (आरआईएमएस) में दाखिल कराया गया। घटना के समय संयंत्र में करीब 200 कर्मचारी काम कर रहे थे। रसायन संयंत्र में विस्फोट के बाद कर्मचारियों के बीच भगदड़ मच गई। पूरे इलाके में काला घना धुआं फैल गया। समीप के गांवों व राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी धुआं फैल गया।
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले में शनिवार सुबह एक कृषि-रसायन संयंत्र में आग लगने की घटना में वहां के 17 कर्मचारी घायल हो गए। कुछ कर्मचारियों के संयंत्र में फंसे होने की आशंका है।
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['hin']
एक सारांश बनाओ: नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने कहा है कि उसकी एक लेखापरीक्षा रपट के हवाले से कोयला खानों के आवंटन के लिए नीलामी न करने के कारण सरकारी खजाने को 10.76 लाख करोड़ रुपए के नुकसान की मीडिया रपट ‘बेहतद भ्रामक’ है। सीएजी ने कहा है कि जिस रपट के आधार पर यह खबर बनाई गई है वह उसकी ‘अंतिम रपट से पहले बनाई जाने वाली रपट का मसौदा भी नहीं है।’ खबर आने के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने एक आधिकारिक विज्ञप्ति जारी की जिसमें कैग की ओर से आज ही दोपहर को भेजे गए एक पत्र का हवाला दिया गया है जिसमें कैग ने स्पष्ट किया है कि ‘मौजूदा मामले में जो ब्यौरे सामने आए हैं वे कुछ टिप्पणियां हैं जिन पर अभी बेहद शुरुआती दौर की चर्चा हो रही है। यह रपट हमारी अंतिम रपट के पहले की रपट का मसौदे भी नहीं कही जा सकती।’ कैग ने इस पर आधारित मीडिया की रपटों को ‘अति भ्रामक’ करार दिया है।टिप्पणियां प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार कैग ने अपने पत्र में कहा है कि रिपोर्ट तैयार करने के सिलसिले में कोयला मंत्रालय के साथ नौ फरवरी 2012, और तीन मार्च 2012 को हुई बैठकों के बाद हमने अपनी सोच बदली है। प्रधानमंत्री कार्यालय की विज्ञप्ति में इस पत्र के हवाले से कहा गया है ‘दरअसल हमारा यह मानना भी नहीं है कि आवंटियों को अनायास जो फायदा हुआ है वह सरकारी खजाने के नुकसान के समान है। आरंभिक मसौदे के लीक होने से शर्मिंदगी की हालत पैदा हुई है क्योंकि लेखापरीक्षा रपट अभी तैयार की जा रही है। इस तरह की रपटों का लीक होना पीड़ादायक है होता है।’ सीएजी ने कहा है कि जिस रपट के आधार पर यह खबर बनाई गई है वह उसकी ‘अंतिम रपट से पहले बनाई जाने वाली रपट का मसौदा भी नहीं है।’ खबर आने के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने एक आधिकारिक विज्ञप्ति जारी की जिसमें कैग की ओर से आज ही दोपहर को भेजे गए एक पत्र का हवाला दिया गया है जिसमें कैग ने स्पष्ट किया है कि ‘मौजूदा मामले में जो ब्यौरे सामने आए हैं वे कुछ टिप्पणियां हैं जिन पर अभी बेहद शुरुआती दौर की चर्चा हो रही है। यह रपट हमारी अंतिम रपट के पहले की रपट का मसौदे भी नहीं कही जा सकती।’ कैग ने इस पर आधारित मीडिया की रपटों को ‘अति भ्रामक’ करार दिया है।टिप्पणियां प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार कैग ने अपने पत्र में कहा है कि रिपोर्ट तैयार करने के सिलसिले में कोयला मंत्रालय के साथ नौ फरवरी 2012, और तीन मार्च 2012 को हुई बैठकों के बाद हमने अपनी सोच बदली है। प्रधानमंत्री कार्यालय की विज्ञप्ति में इस पत्र के हवाले से कहा गया है ‘दरअसल हमारा यह मानना भी नहीं है कि आवंटियों को अनायास जो फायदा हुआ है वह सरकारी खजाने के नुकसान के समान है। आरंभिक मसौदे के लीक होने से शर्मिंदगी की हालत पैदा हुई है क्योंकि लेखापरीक्षा रपट अभी तैयार की जा रही है। इस तरह की रपटों का लीक होना पीड़ादायक है होता है।’ प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार कैग ने अपने पत्र में कहा है कि रिपोर्ट तैयार करने के सिलसिले में कोयला मंत्रालय के साथ नौ फरवरी 2012, और तीन मार्च 2012 को हुई बैठकों के बाद हमने अपनी सोच बदली है। प्रधानमंत्री कार्यालय की विज्ञप्ति में इस पत्र के हवाले से कहा गया है ‘दरअसल हमारा यह मानना भी नहीं है कि आवंटियों को अनायास जो फायदा हुआ है वह सरकारी खजाने के नुकसान के समान है। आरंभिक मसौदे के लीक होने से शर्मिंदगी की हालत पैदा हुई है क्योंकि लेखापरीक्षा रपट अभी तैयार की जा रही है। इस तरह की रपटों का लीक होना पीड़ादायक है होता है।’ प्रधानमंत्री कार्यालय की विज्ञप्ति में इस पत्र के हवाले से कहा गया है ‘दरअसल हमारा यह मानना भी नहीं है कि आवंटियों को अनायास जो फायदा हुआ है वह सरकारी खजाने के नुकसान के समान है। आरंभिक मसौदे के लीक होने से शर्मिंदगी की हालत पैदा हुई है क्योंकि लेखापरीक्षा रपट अभी तैयार की जा रही है। इस तरह की रपटों का लीक होना पीड़ादायक है होता है।’
सीएजी ने कहा है कि जिस रपट के आधार पर यह खबर बनाई गई है वह उसकी ‘अंतिम रपट से पहले बनाई जाने वाली रपट का मसौदा भी नहीं है।
26
['hin']
एक सारांश बनाओ: देश के बेहद कड़े ईशनिन्दा कानूनों का उल्लंघन करने के आरोप में पाकिस्तानी अधिकारियों ने 11-वर्षीय एक ईसाई लड़की को उस समय गिरफ्तार किया, जब गुस्साए पड़ोसियों ने उसके घर को घेरकर पुलिस से कार्रवाई की मांग की। पुलिस अधिकारी जबी उल्लाह ने सोमवार को जानकारी दी कि इस्लामाबाद में इस लड़की को गुरुवार को गिरफ्तार किया गया था, क्योंकि सैकड़ों पड़ोसियों ने इस खबर को सुनने के बाद उसके घर को चारों तरफ से घेर लिया था कि उसने धार्मिक कागजात जला डाले हैं। उन्होंने कहा कि लड़की को 14 दिन के लिए पकड़ा गया है, जब तक पुलिस मामले की जांच कर रही है।टिप्पणियां जबी उल्लाह के मुताबिक उस लड़की के घर को करीब 500-600 बेहद गुस्साए लोगों ने घेर लिया था, और यदि पुलिस ने उसे (लड़की को) गिरफ्तार न किया होता तो वे उसे नुकसान भी पहुंचा सकते थे। इलाके के कुछ लोगों का आरोप है कि उस लड़की ने कुरान के पन्ने जलाए हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है, और फिलहाल किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है। पाकिस्तान में कानून के मुताबिक इस्लाम के पैगम्बर मोहम्मद अथवा पवित्र पुस्तक कुरान का अपमान करने का दोषी पाए जाने पर किसी को भी सजा-ए-मौत सुनाई जा सकती है, और इस बच्ची की गिरफ्तारी तथा स्थानीय लोगों में उपजे गुस्से को देखते हुए साफ समझा जा सकता है कि ईशनिन्दा के नाम पर पाकिस्तान में भावनाओं को आसानी से भड़काया जा सकता है, जिसके कारण अल्पसंख्यक समुदाय अक्सर यहां डर के साये में ही जीते हैं। पुलिस अधिकारी जबी उल्लाह ने सोमवार को जानकारी दी कि इस्लामाबाद में इस लड़की को गुरुवार को गिरफ्तार किया गया था, क्योंकि सैकड़ों पड़ोसियों ने इस खबर को सुनने के बाद उसके घर को चारों तरफ से घेर लिया था कि उसने धार्मिक कागजात जला डाले हैं। उन्होंने कहा कि लड़की को 14 दिन के लिए पकड़ा गया है, जब तक पुलिस मामले की जांच कर रही है।टिप्पणियां जबी उल्लाह के मुताबिक उस लड़की के घर को करीब 500-600 बेहद गुस्साए लोगों ने घेर लिया था, और यदि पुलिस ने उसे (लड़की को) गिरफ्तार न किया होता तो वे उसे नुकसान भी पहुंचा सकते थे। इलाके के कुछ लोगों का आरोप है कि उस लड़की ने कुरान के पन्ने जलाए हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है, और फिलहाल किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है। पाकिस्तान में कानून के मुताबिक इस्लाम के पैगम्बर मोहम्मद अथवा पवित्र पुस्तक कुरान का अपमान करने का दोषी पाए जाने पर किसी को भी सजा-ए-मौत सुनाई जा सकती है, और इस बच्ची की गिरफ्तारी तथा स्थानीय लोगों में उपजे गुस्से को देखते हुए साफ समझा जा सकता है कि ईशनिन्दा के नाम पर पाकिस्तान में भावनाओं को आसानी से भड़काया जा सकता है, जिसके कारण अल्पसंख्यक समुदाय अक्सर यहां डर के साये में ही जीते हैं। जबी उल्लाह के मुताबिक उस लड़की के घर को करीब 500-600 बेहद गुस्साए लोगों ने घेर लिया था, और यदि पुलिस ने उसे (लड़की को) गिरफ्तार न किया होता तो वे उसे नुकसान भी पहुंचा सकते थे। इलाके के कुछ लोगों का आरोप है कि उस लड़की ने कुरान के पन्ने जलाए हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है, और फिलहाल किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है। पाकिस्तान में कानून के मुताबिक इस्लाम के पैगम्बर मोहम्मद अथवा पवित्र पुस्तक कुरान का अपमान करने का दोषी पाए जाने पर किसी को भी सजा-ए-मौत सुनाई जा सकती है, और इस बच्ची की गिरफ्तारी तथा स्थानीय लोगों में उपजे गुस्से को देखते हुए साफ समझा जा सकता है कि ईशनिन्दा के नाम पर पाकिस्तान में भावनाओं को आसानी से भड़काया जा सकता है, जिसके कारण अल्पसंख्यक समुदाय अक्सर यहां डर के साये में ही जीते हैं। पाकिस्तान में कानून के मुताबिक इस्लाम के पैगम्बर मोहम्मद अथवा पवित्र पुस्तक कुरान का अपमान करने का दोषी पाए जाने पर किसी को भी सजा-ए-मौत सुनाई जा सकती है, और इस बच्ची की गिरफ्तारी तथा स्थानीय लोगों में उपजे गुस्से को देखते हुए साफ समझा जा सकता है कि ईशनिन्दा के नाम पर पाकिस्तान में भावनाओं को आसानी से भड़काया जा सकता है, जिसके कारण अल्पसंख्यक समुदाय अक्सर यहां डर के साये में ही जीते हैं।
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: पुलिस के मुताबिक लड़की के घर को 500-600 गुस्साए लोगों ने घेर लिया था, और यदि पुलिस ने उसे गिरफ्तार न किया होता तो वे उसे नुकसान भी पहुंचा सकते थे। लड़की पर कुरान के पन्ने जलाने का आरोप है।
32
['hin']
एक सारांश बनाओ: अफगानिस्तान में सैंकड़ों लोगों ने बुधवार को सरकार की शांति परिषद के अध्यक्ष और पूर्व राष्ट्रपति बुरहानुद्दीन रब्बानी की हत्या के विरोध में प्रदर्शन किया। उनकी हत्या से देश में हालात के और खराब होने की आशंका पैदा हो गई है। अफगानिस्तान में 1992-96 के दौरान खूनी जंगी हालात में देश के राष्ट्रपति पद की कमान संभालने वाले और शानदार मानवाधिकार रिकार्ड के लिए विख्यात 71 वर्षीय रब्बानी की मंगलवार को एक तालिबानी आत्मघाती हमलावर ने हत्या कर दी। यह हमलावर अपनी पगड़ी में विस्फोटक छुपाए हुए था। तालिबान की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन रब्बानी की मौत 10 साल से संघर्ष कर रहे अफगानिस्तान के शांति प्रयासों को एक करारा झटका है। देश इस्लामी उग्रवादियों और पश्चिमी बलों समर्थित अफगान सरकार के बीच झूल रहा है। राष्ट्रपति हामिद करजई, रब्बानी की हत्या के चलते न्यूयॉर्क में अपना संयुक्त राष्ट्र महासभा का दौरा बीच में ही छोड़कर बुधवार को रब्बानी के अंतिम संस्कार की तैयारियों के लिए देश लौट रहे हैं। न्यूयॉर्क में उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से मुलाकात की थी। 2001 में अमेरिका की अगुवाई में अंतरराष्ट्रीय बलों द्वारा तालिबान को सत्ता से खदेड़े जाने के बाद से रब्बानी की हत्या सबसे बड़ी राजनीतिक हत्या मानी जा रही है।
सारांश: अफगानिस्तान में सैकड़ों लोगों ने बुधवार को सरकार की शांति परिषद के अध्यक्ष व पूर्व राष्ट्रपति बुरहानुद्दीन रब्बानी की हत्या के विरोध में प्रदर्शन किया।
5
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: लीबिया सरकार ने कहा है कि गद्दाफी समर्थक सेना घेरे जा चुके विद्रोहियों के गढ़ मिसराता से हट जाएगी और बल प्रयोग अथवा बातचीत के जरिये संघर्ष का समाधान निकालने का विकल्प स्थानीय कबीलों पर ही छोड़ दिया जाएगा। लीबिया सरकार की इस घोषणा के बीच नाटो ने त्रिपोली पर हवाई हमले किए, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई। लीबिया के उप विदेश मंत्री खालिद कैम ने कहा, मिसराता के हालात से वहां के कबीले तथा स्थानीय लोग ही निपटेंगे, लीबिया की सेना नहीं। उन्होंने कहा, हम हालात से बल प्रयोग या बातचीत के जरिये निपटने का जिम्मा मिसराता के आसपास मौजूद कबीलों और स्थानीय लोगों पर छोड़ देंगे। कैम ने कहा कि राजधानी त्रिपोली से करीब 200 किमी पूर्व में स्थित मिसराता में बगावत खत्म कराने के लिए सेना को अल्टीमेटम दे दिया गया है। अल जजीरा के अनुसार, उप विदेश मंत्री ने कहा कि लीबियाई सेना से कहा गया है कि यदि वह मिसराता में समस्या का हल नहीं निकाल सकती, तो आसपास के शहरों- ज्लीतेन, तारहुना, बानी वालिद और तवारगा के लोग वहां जाकर विद्रोहियों से बात करेंगे। यदि वे समर्पण नहीं करते हैं, तो फिर उनके साथ संघर्ष होगा।
सारांश: लीबिया के उप विदेश मंत्री खालिद कैम ने कहा, मिसराता के हालात से वहां के कबीले तथा स्थानीय लोग ही निपटेंगे, लीबिया की सेना नहीं।
31
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: बॉलीवुड की 'मस्तानी' एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone) और रणवीर सिंह (Ranveer Singh) की शादी को अब एक साल पूरा होने वाला है. बता दें, दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह की शादी 14 और 15 नवंबर को कोंकणी और सिंधी रीति-रिवाजों द्वारा हुई थी. दीपिका और रणवीर की शादी (Ranveer And Deepika Marriage Anniversary) किसी परियों की कहानी से कम नहीं थी. बॉलीवुड की सबसे फेमस इस जोड़ी की शादी की फोटो और वीडियो पूरी दुनिया में खूब वायरल हुई थीं. अब रणवीर और दीपिका की शादी को एक साल पूरा होने वाला है. ऐसे में रणवीर सिंह बन ठन कर अपनी बीवी को इंप्रेस करने की कोशिश कर रहे हैं.  तैमूर अली खान का Video हुआ वायरल, छोटे नवाब ने फिर दिखाया एटीट्यूड, बोले- मैं नहीं करूंगा... एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone) ने रणवीर सिंह (Ranveer Singh) की अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक फोटो शेयर की है. इस फोटो में एक्टर फेस मास्क लगाए, शादी की पहली सालगिरह पर हैंडसम दिखने की तैयारी कर रहे हैं. रणवीर सिंह को फोटो शेयर करते हुए दीपिका ने लिखा, 'अपनी पहली वेडिंग एनिवर्सरी की तैयारी करते हुए.' दीपिका पादुकोण के इस पोस्ट पर लोग खूब कमेंट कर रहे हैं.  बॉलीवुड एक्ट्रेस का Tweet हुआ वायरल, कहा- किस पार्टी को सपोर्ट कर रहे हैं, मायने नहीं रखता, हम मर रहे हैं...  वहीं, अगर वर्क फ्रंट की बात करें, तो जल्द ही दीपिका (Deepika Padukone) मेघना गुलजार की फिल्म 'छपाक (Chhapak)' में नजर आने वाली हैं, इस फिल्म में एक्ट्रेस 'एसिड अटैक सर्वाइवर' के किरदार को बड़े पर्दे पर उतारेंगी. इसके अलावा दीपिका पादुकोण रणवीर सिंह के साथ फिल्म '83' में कपिल देव (Kapil Dev) की बीवी का किरदार निभाएंगी. रणवीर सिंह '83' के अलावा 'बैजू बावरा' फिल्म में मुख्य किरदार निभाते नजर आएंगे.
यह एक सारांश है: दीपिका पादुकोण ने शेयर की फोटो रणवीर सिंह इस तरह शादी की पहली सालगिरह पर हो रहे हैं तैयार सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है फोटो
9
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: जयपुर की एक अधीनस्थ अदालत ने फिल्म अभिनेता और कोलकाता नाइट राइडर्स टीम के मालिक शाहरुख खान को सार्वजनिक स्थल पर ध्रूमपान करने के मामले में संज्ञान लेते हुए 26 मई को तलब किया है।टिप्पणियां अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) शिल्पा समीर ने राजस्थान क्रिकेट अकादमी के निदेशक आनंद सिंह राठौड़ की ओर से राजस्थान ध्रूमपान प्रतिशेध अधिनियम 2000 की धारा 5:11 के तहत पेश किए परिवाद पर बुधवार और गुरुवार को सुनवाई करने के बाद शाहरुख खान को सार्वजनिक स्थल पर ध्रूमपान करने के मामले में 26 मई को हाजिर होने के लिए समन जारी किए हैं। राठौड़ की ओर से 9 अप्रैल को अदालत में पेश परिवाद में कहा गया है कि शाहरुख खान ने 8 अप्रैल को जयपुर के सवाई मान सिंह स्टेडियम में राजस्थान रॉयल्स और कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम के बीच मैच के दौरान केंद्रीय मंत्रियों, गणमान्य नागरिकों, विद्यार्थियों की मौजूदगी में सार्वजनिक स्थल पर ध्रूमपान कर राजस्थान ध्रूमपान प्रतिशेध अधिनियम 2000 का उल्लघंन किया है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) शिल्पा समीर ने राजस्थान क्रिकेट अकादमी के निदेशक आनंद सिंह राठौड़ की ओर से राजस्थान ध्रूमपान प्रतिशेध अधिनियम 2000 की धारा 5:11 के तहत पेश किए परिवाद पर बुधवार और गुरुवार को सुनवाई करने के बाद शाहरुख खान को सार्वजनिक स्थल पर ध्रूमपान करने के मामले में 26 मई को हाजिर होने के लिए समन जारी किए हैं। राठौड़ की ओर से 9 अप्रैल को अदालत में पेश परिवाद में कहा गया है कि शाहरुख खान ने 8 अप्रैल को जयपुर के सवाई मान सिंह स्टेडियम में राजस्थान रॉयल्स और कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम के बीच मैच के दौरान केंद्रीय मंत्रियों, गणमान्य नागरिकों, विद्यार्थियों की मौजूदगी में सार्वजनिक स्थल पर ध्रूमपान कर राजस्थान ध्रूमपान प्रतिशेध अधिनियम 2000 का उल्लघंन किया है। राठौड़ की ओर से 9 अप्रैल को अदालत में पेश परिवाद में कहा गया है कि शाहरुख खान ने 8 अप्रैल को जयपुर के सवाई मान सिंह स्टेडियम में राजस्थान रॉयल्स और कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम के बीच मैच के दौरान केंद्रीय मंत्रियों, गणमान्य नागरिकों, विद्यार्थियों की मौजूदगी में सार्वजनिक स्थल पर ध्रूमपान कर राजस्थान ध्रूमपान प्रतिशेध अधिनियम 2000 का उल्लघंन किया है।
जयपुर की एक अदालत ने अभिनेता और कोलकाता नाइट राइडर्स टीम के मालिक शाहरुख खान को सार्वजनिक स्थल पर ध्रूमपान करने के मामले में संज्ञान लेते हुए 26 मई को तलब किया है।
28
['hin']
एक सारांश बनाओ: महाराष्ट्र में महिला और बाल विकास के काम करने वाली सरकारी और समाजसेवी संस्थाओं में समन्वय की जिम्मेदारी है महिला एवं बाल विकास आयुक्तालय की, लेकिन इस दफ्तर में अफसरों के 67 फीसदी पद खाली पड़े हैं. यहां तक कि आयुक्त और सचिव तक का पद एक ही अधिकारी के पास है. यह जानकारी सूचना के अधिकार के तहत मिली है. महाराष्ट्र सरकार समेकित बाल विकास योजना यानी आईसीडीएस के बजट में भी 31 फीसदी की कटौती कर चुकी है. यह सब तब हो रहा है जब राज्य में हजारों बच्चों की कुपोषण से मौत हो चुकी है.        महाराष्ट्र में जून 1993 में महिला एवं बाल विकास विभाग स्वतंत्र प्रशासकीय विभाग बना. इसका मकसद था महिलाओं-बच्चों का जीवन उन्नत करना, सुरक्षा देना और विकास व समाज में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना. लेकिन महकमे को शासन से ही समुचित भागीदारी नहीं मिली है. विभाग में अफसरों के 67 फीसदी पद खाली हैं. आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली के मुताबिक "वर्ग एक में महिला एवं बाल विकास अधिकारी जिला परिषद के 34 में से 32 पद खाली हैं. वर्ग एक के अंतर्गत बाल विकास योजना अधिकारी नागरी योजना के 104 में से 71 पद रिक्त हैं. वहीं वर्ग दो में बाल विकास योजना अधिकारी, ग्रामीण के 554 में से 429 पद खाली हैं. ऐसे में समन्वय साधना तो दूर सारा कामकाज कागज पर ही हो रहा है."      विधान परिषद में एक सवाल के जवाब में सरकार ने खुद माना कि अप्रैल 2016 से अगस्त 2016 के बीच 6148 नवजातों की मौत हुई. इस अवधि में छह साल से कम आयु के 6380 बच्चों की मौत हुई. जबकि अप्रैल 2016 से नवंबर 2016 के बीच 881 मांओं ने दम तोड़ा. हालांकि जब महिला बाल विकास मंत्री पंकजा मुंडे से सवाल पूछे गए तो उन्होंने कहा सारी मौतें कुपोषण से नहीं हुई हैं. कुछ मौतों के लिए टीबी और अन्य रोग भी जिम्मेदार हैं.      इस सब के बावजूद सरकार ने लगातार दूसरे साल समेकित बाल विकास योजना के बजट में 31 फीसदी यानी लगभग 914 करोड़ रुपये तक की कटौती कर दी है. जबकि राज्य में लगभग छह लाख बच्चे कुपोषित हैं. यानी बजट नहीं, महकमे में अधिकारी नहीं, ऐसे में महिला-बाल विकास पर महाराष्ट्र सरकार की प्राथमिकता समझी जा सकती है. लगभग चार लाख करोड़ रुपये के कर्ज में डूबी सरकार की प्राथमिकताओं में जब मूर्तियां और पार्क बनाना हो तब ऐसी उदासीनता की वजह सियासी असंवेदनशीलता ही है, क्योंकि बच्चे वोट बैंक नहीं हैं.
यह एक सारांश है: अप्रैल 2016 से अगस्त 2016 के बीच 6148 नवजातों की मौत हुई अप्रैल 2016 से नवंबर 2016 के बीच 881 मांओं ने दम तोड़ा बजट में 31 फीसदी, लगभग 914 करोड़ रुपये तक की कटौती
21
['hin']
एक सारांश बनाओ: पाकिस्तान की सोशल मीडिया स्टार कंदील बलोच का गला उसके भाई ने नहीं बल्कि उसके चचेरे भाई ने घोंटा था. यह खुलासा एक पॉलीग्राफ टेस्ट में हुआ है. इससे पहले मामले के मुख्य आरोपी मोहम्मद वसीम ने माना था कि उसने अपनी 26 वर्षीय बहन का गला घोंटा है. लेकिन दोनों संदिग्धों के पॉलीग्राफ टेस्ट से यह दावा खारिज हो गया. टेस्ट के अनुसार, सोशल मीडिया स्टार को इस साल 15 जुलाई को उसके चचेरे भाई हक नवाज ने गला घोंट कर मार डाला था, न कि उसके भाई ने. जियो न्यूज की खबर में कहा गया है कि वसीम ने कंदील के हाथ और पैर पकड़े थे, जबकि हक नवाज ने उसका गला घोंटा था. खबर में यह भी कहा गया है कि हत्या से पहले संदिग्धों ने उसे और उसके अभिभावकों को कोई नशीला पदार्थ खिला दिया था.टिप्पणियां खबर में बताया गया है कि जांच के दौरान पता चला है कि कंदील के सउदी अरब में रह रहे बड़े भाई आरिफ ने वसीम पर दबाव डाला था कि 'परिवार के मान सम्मान को ताक पर रखने के कारण' वह बहन कंदील को मार डाले. (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) इससे पहले मामले के मुख्य आरोपी मोहम्मद वसीम ने माना था कि उसने अपनी 26 वर्षीय बहन का गला घोंटा है. लेकिन दोनों संदिग्धों के पॉलीग्राफ टेस्ट से यह दावा खारिज हो गया. टेस्ट के अनुसार, सोशल मीडिया स्टार को इस साल 15 जुलाई को उसके चचेरे भाई हक नवाज ने गला घोंट कर मार डाला था, न कि उसके भाई ने. जियो न्यूज की खबर में कहा गया है कि वसीम ने कंदील के हाथ और पैर पकड़े थे, जबकि हक नवाज ने उसका गला घोंटा था. खबर में यह भी कहा गया है कि हत्या से पहले संदिग्धों ने उसे और उसके अभिभावकों को कोई नशीला पदार्थ खिला दिया था.टिप्पणियां खबर में बताया गया है कि जांच के दौरान पता चला है कि कंदील के सउदी अरब में रह रहे बड़े भाई आरिफ ने वसीम पर दबाव डाला था कि 'परिवार के मान सम्मान को ताक पर रखने के कारण' वह बहन कंदील को मार डाले. (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) जियो न्यूज की खबर में कहा गया है कि वसीम ने कंदील के हाथ और पैर पकड़े थे, जबकि हक नवाज ने उसका गला घोंटा था. खबर में यह भी कहा गया है कि हत्या से पहले संदिग्धों ने उसे और उसके अभिभावकों को कोई नशीला पदार्थ खिला दिया था.टिप्पणियां खबर में बताया गया है कि जांच के दौरान पता चला है कि कंदील के सउदी अरब में रह रहे बड़े भाई आरिफ ने वसीम पर दबाव डाला था कि 'परिवार के मान सम्मान को ताक पर रखने के कारण' वह बहन कंदील को मार डाले. (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) खबर में बताया गया है कि जांच के दौरान पता चला है कि कंदील के सउदी अरब में रह रहे बड़े भाई आरिफ ने वसीम पर दबाव डाला था कि 'परिवार के मान सम्मान को ताक पर रखने के कारण' वह बहन कंदील को मार डाले. (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के मुल्तान में कंदील हत्या कर दी गई थी कंदील के भाई ने हत्या का आरोप कबूल किया था पॉलीग्राफ टेस्ट में पता चला कि कंदील के चचेरे भाई ने उसका गला घोंटा था
26
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट शृंखला से पहले भारतीयों की तेज और उछाल वाली पिचों पर खेलने की कमजोरी को लेकर पूर्व क्रिकेटर और विशेषज्ञ भले ही सवाल उठा रहे हों, लेकिन आंकड़े इस बात के गवाह हैं कि भारत के शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों का ऑस्ट्रेलियाई पिचों पर शानदार प्रदर्शन रहा है। वीरेंद्र सहवाग, राहुल द्रविड़, सचिन तेंदुलकर और वीवीएस लक्ष्मण भारतीय शीर्ष क्रम के चार मुख्य स्तंभ हैं और इन चारों का ही ऑस्ट्रेलियाई सरजमीं पर शानदार रिकॉर्ड रहा है। ये चारों ही 26 दिसंबर से मेलबर्न में शुरू होने वाली चार टेस्ट मैचों की शृंखला में अपने इस रिकार्ड को और बेहतर करने की कोशिश करेंगे। तेंदुलकर और लक्ष्मण दो ऐसे भारतीय बल्लेबाज हैं, जो ऑस्ट्रेलियाई पिचों पर 1,000 से अधिक रन बना चुके हैं, जबकि द्रविड़ को इस मुकाम पर पहुंचने के लिए केवल 51 रन की दरकार है। सहवाग भी 250 रन बनाते ही ऑस्ट्रेलियाई धरती पर 1000 रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में शामिल हो जाएंगे। ऑस्ट्रेलियाई धरती पर तेंदुलकर ने अब तक 16 टेस्ट मैच की 30 पारियों में 58.53 की औसत से 1522 रन बना चुके हैं, जिसमें छह शतक और पांच अर्धशतक शामिल हैं। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हमेशा अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले लक्ष्मण ने अपने इस प्रिय प्रतिद्वंद्वी के घर में 11 टेस्ट मैच की 21 पारियों में 54.05 की औसत तथा चार शतक और तीन अर्धशतक की मदद से 1081 रन बनाए हैं। भारत ने अब तक ऑस्ट्रेलिया में पांच मैच जीते हैं, जिनमें से दो मैच में उसने तेंदुलकर, द्रविड़ और लक्ष्मण की मौजूदगी में जीत दर्ज की है। इन दो मैचों में द्रविड़ ने 133.66 की औसत से 401, जबकि लक्ष्मण ने 71.50 की औसत से 286 रन बनाए हैं। तेंदुलकर हालांकि इन दोनों मैच में 30.50 की औसत से 122 रन ही बना पाए हैं, जिनमें कोई शतक दर्ज नहीं है। भारत आगामी शृंखला में जिन मैदानों पर खेलेगा, यदि उनकी बात की जाए तो मेलबर्न तेंदुलकर ही नहीं, सहवाग का भी पसंदीदा मैदान है। तेंदुलकर ने एमसीजी पर चार मैच में 344 रन, जबकि सहवाग ने एक मैच में 206 रन बनाए हैं। इनमें 195 रन की एक पारी भी शामिल है। द्रविड़ और लक्ष्मण अभी तक इस मैदान पर अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं। तेंदुलकर और लक्ष्मण को तो सिडनी क्रिकेट ग्राउंड का बादशाह कहा जा सकता है। इस मैदान पर तेंदुलकर ने चार मैच में तीन शतकों की मदद से 664 रन बनाए हैं। उन्होंने नाबाद 241 रन की पारी इसी मैदान पर खेली थी। लक्ष्मण ने एससीजी पर लगातार तीन शतक ठोकने का कीर्तिमान बनाया है। इस कलात्मक बल्लेबाज ने एससीजी पर तीन मैच में 481 रन बनाए हैं। द्रविड़ ने सिडनी में तीन मैच में 249 और सहवाग ने एक मैच में 119 रन बनाए हैं। इन दोनों को ही इस मैदान पर अपने पहले शतक का इंतजार है। भारत शृंखला का तीसरा टेस्ट मैच पर्थ के वाका मैदान पर खेलेगा, जिसकी पिच तेज गेंदबाजों को मदद देती रही है। इस पिच पर तेंदुलकर ने दो मैच में 203 रन बनाए हैं, जिसमें 1992 में खेली गई 114 रन की जोरदार पारी भी शामिल है। लक्ष्मण, द्रविड़ और सहवाग ने पर्थ में अब तक एक-एक मैच खेला है, जिसमें उन्होंने क्रमश: 106, 96 और 72 रन बनाए हैं। इन तीनों को ही इस मैदान पर शतक का इंतजार है। एडिलेड में हालांकि तेंदुलकर, द्रविड़, लक्ष्मण और सहवाग चारों ने शतक ठोके हैं। द्रविड़ को एडिलेड ओवल की पिच खासी प्रिय है, जहां 24 जनवरी से चौथा टेस्ट मैच खेला जाएगा। द्रविड़ ने इस मैदान पर तीन मैच में 93.75 की औसत से 375 रन बनाए हैं, जिसमें 233 रन की एक पारी भी शामिल है। सहवाग ने एडिलेड में दो मैच में 308 रन, तेंदुलकर ने चार मैच में 288 रन और लक्ष्मण ने तीन मैच में 284 रन बनाए हैं।
यह एक सारांश है: सहवाग, द्रविड़, तेंदुलकर और लक्ष्मण भारतीय शीर्ष क्रम के चार मुख्य स्तंभ हैं और इन चारों का ही ऑस्ट्रेलियाई सरजमीं पर शानदार रिकॉर्ड रहा है।
24
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में रानवाही की खतरनाक पहाड़ियों में करीब 80 फुट ऊंचाई पर एक संकरी गुफा में 60 घंटे से फंसे ग्रामीण रामप्रसाद को शनिवार शाम पांच बजे सुरक्षित निकाल लिया गया। रामप्रसाद बुधवार से ही पत्थरों के बीच फंसा हुआ था। पत्थरों के बीच से निकलने के बाद राम प्रसाद बिलकुल डरा सहमा सा था और कुछ बता पाने की स्थिति में नहीं था। चिकित्सकों ने उसे आराम करने देने और अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी है।टिप्पणियां चीफ फायर ऑफिसर एमएफ दस्तूर ने बताया कि 60 घंटे के अथक प्रयास और हाइड्रोलिक जैक के नाकाम रहने के बाद अहमदाबाद से फायर ब्रिगेड की टीम बुलाई गई। शनिवार सुबह पहाड़ी पर पहुंची अहमदाबाद फायर ब्रिगेड की 13 सदस्यीय टीम रामप्रसाद को निकालने में जुट गई। राहत एवं बचाव कार्य में जंगल वॉर कॉलेज कांकेर, होमगार्ड रायपुर के अलावा स्थानीय पुलिस की टीम लगातार जुटी रही। पत्थरों के बीच से निकलने के बाद राम प्रसाद बिलकुल डरा सहमा सा था और कुछ बता पाने की स्थिति में नहीं था। चिकित्सकों ने उसे आराम करने देने और अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी है।टिप्पणियां चीफ फायर ऑफिसर एमएफ दस्तूर ने बताया कि 60 घंटे के अथक प्रयास और हाइड्रोलिक जैक के नाकाम रहने के बाद अहमदाबाद से फायर ब्रिगेड की टीम बुलाई गई। शनिवार सुबह पहाड़ी पर पहुंची अहमदाबाद फायर ब्रिगेड की 13 सदस्यीय टीम रामप्रसाद को निकालने में जुट गई। राहत एवं बचाव कार्य में जंगल वॉर कॉलेज कांकेर, होमगार्ड रायपुर के अलावा स्थानीय पुलिस की टीम लगातार जुटी रही। चीफ फायर ऑफिसर एमएफ दस्तूर ने बताया कि 60 घंटे के अथक प्रयास और हाइड्रोलिक जैक के नाकाम रहने के बाद अहमदाबाद से फायर ब्रिगेड की टीम बुलाई गई। शनिवार सुबह पहाड़ी पर पहुंची अहमदाबाद फायर ब्रिगेड की 13 सदस्यीय टीम रामप्रसाद को निकालने में जुट गई। राहत एवं बचाव कार्य में जंगल वॉर कॉलेज कांकेर, होमगार्ड रायपुर के अलावा स्थानीय पुलिस की टीम लगातार जुटी रही। राहत एवं बचाव कार्य में जंगल वॉर कॉलेज कांकेर, होमगार्ड रायपुर के अलावा स्थानीय पुलिस की टीम लगातार जुटी रही।
यहाँ एक सारांश है:छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में रानवाही की खतरनाक पहाड़ियों में करीब 80 फुट ऊंचाई पर एक संकरी गुफा में 60 घंटे से फंसे ग्रामीण रामप्रसाद को शनिवार शाम पांच बजे सुरक्षित निकाल लिया गया। रामप्रसाद बुधवार से ही पत्थरों के बीच फंसा हुआ था।
12
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: दो दिन के अवकाश के बाद शुक्रवार को खुले शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन तेजी जारी रही। मुद्रास्फीति में बढ़त और वैश्विक बाजारों में कमजोरी के बावजूद विदेशी निवेशकों की लिवाली से बीएसई सेंसेक्स 145 अंक चढ़कर बंद हुआ। पिछले दो कारोबारी सत्रों में करीब 828 अंक बढ़त हासिल कर चुका सेंसेक्स शुक्रवार को और 144.71 अंक मजबूत होकर 16,821.46 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह दिन के उच्च स्तर 16,989.86 को छू गया था। इसी तरह, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 39 अंक की बढ़त लेकर 5,040 अंक पर बंद हुआ। बुधवार को बाजार ईद और गुरुवार को गणेश चतुर्थी के उपलक्ष्य में बंद था। ब्रोकरों ने कहा कि पिछले कुछ सत्रों में तेज गिरावट के बाद मजबूत कंपनियों के शेयर आकर्षक भाव पर आ गए थे, जिसका फायदा उठाने के लिए निवेशक पिछले तीन कारोबारी सत्रों में लिवाली कर रहे हैं। यही वजह है कि बाजार ने खाद्य मुद्रास्फीति में तेजी, जीडीपी वृद्धि दर में नरमी और वैश्विक बाजारों में कमजोर रुख को नकार दिया। 20 अगस्त को समाप्त सप्ताह में खाद्य मुद्रास्फीति दहाई अंक में पहुंच गई।
यहाँ एक सारांश है:मुद्रास्फीति में बढ़त और वैश्विक बाजारों में कमजोरी के बावजूद विदेशी निवेशकों की लिवाली से बीएसई सेंसेक्स 145 अंक चढ़कर बंद हुआ।
12
['hin']
एक सारांश बनाओ: पंजाब के ख़िलाफ़ डेविड वॉर्नर शानदार फ़ॉर्म में दिखे लेकिन उनके सामने अब दिल्ली की चुनौती है. टीम इंडिया के पूर्व तेज गेंदबाज ज़हीर ख़ान की अगुवाई में दिल्ली ने मैच दर मैच अपना दम दिखाया है. कई मौक़ों पर अच्छा खेलने के बाद भी जीत नसीब नहीं हुई है.टिप्पणियां दिल्ली के खाते में 4 मैचों में 2 में जीत तो 2 में हार है. बैंगलोर के ख़िलाफ़ ऋषभ पंत के 57 रन बनाने के बाद भी 15 रन से दिल्ली को हार मिली तो कोलकाता के ख़िलाफ़ आख़िरी ओवर में मनीष पांडे के छक्के ने दिल्ली से जीत छीन ली. सीज़न 10 में दिल्ली की गेंदबाज़ी दमदार दिखी है. गेंदबाज़ों ने अहम मौक़ों पर कप्तान ज़हीर को निराश नहीं किया है. क्रिस मॉरिस ने 8, पैट कमिंस ने 7, अमित मिश्रा ने 5, शाहबाज़ नदीम ने 4 और ख़ुद कप्तान ज़हीर ने 7 विकेट झटके हैं. दिल्ली की मुश्किल की बात करें तो टीम के बल्लेबाज़ों को कमर कसने की ज़रूरत है. संजू सैम्सन (173 रन), ऋषभ पंत (141 रन) और सैम बिलिंग्स (125 रन) कुछ मैचों में अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन श्रेयस अय्यर (2 मैच, 48 रन), करुण नायर (4 मैच, 25 रन) और कोरी एंडरसन (2 मैच, 41 रन) कुछ ख़ास नहीं कर सके हैं. दूसरी तरफ़ कप्तान वॉर्नर और भुवनेश्वर कुमार की गेंदबाज़ी की वजह से हैदराबाद की टीम काफ़ी संतुलित नज़र आ रही है. कप्तान वॉर्नर धमाकेदार फ़ॉर्म में हैं. कप्तान ने 5 मैचों में 253 रन बटोरे हैं. हैदराबाद के बाक़ी बल्लेबाज़ों ने ज़रूरत पड़ने पर मोर्चा संभाला है.गेंदबाज़ों की बात करे पंजाब के ख़िलाफ़ भुवनेश्वर कुमार शानदार लय में दिखे, वहीं राशिद ख़ान को सीज़न 10 का खोज कहना ग़लत नहीं होगा.  भुवी ने 5 मैचों में 15 विकेट झटके हैं तो राशिद ने 9 विकेट अपने नाम किए हैं. मनन वोहरा के हाथों पिटने के बाद बरिंदर सरां को दिल्ली के ख़िलाफ़ बाहर बैठना पड़ सकता है. उनकी जगह आशीष नेहरा को शामिल करने की उम्मीद है. दोनों टीमों के फ़ॉर्म को देखे तो दिल्ली को हैदराबाद के घरेलू मैदान पर कड़ी टक्कर मिलने की उम्मीद है. दिल्ली के खाते में 4 मैचों में 2 में जीत तो 2 में हार है. बैंगलोर के ख़िलाफ़ ऋषभ पंत के 57 रन बनाने के बाद भी 15 रन से दिल्ली को हार मिली तो कोलकाता के ख़िलाफ़ आख़िरी ओवर में मनीष पांडे के छक्के ने दिल्ली से जीत छीन ली. सीज़न 10 में दिल्ली की गेंदबाज़ी दमदार दिखी है. गेंदबाज़ों ने अहम मौक़ों पर कप्तान ज़हीर को निराश नहीं किया है. क्रिस मॉरिस ने 8, पैट कमिंस ने 7, अमित मिश्रा ने 5, शाहबाज़ नदीम ने 4 और ख़ुद कप्तान ज़हीर ने 7 विकेट झटके हैं. दिल्ली की मुश्किल की बात करें तो टीम के बल्लेबाज़ों को कमर कसने की ज़रूरत है. संजू सैम्सन (173 रन), ऋषभ पंत (141 रन) और सैम बिलिंग्स (125 रन) कुछ मैचों में अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन श्रेयस अय्यर (2 मैच, 48 रन), करुण नायर (4 मैच, 25 रन) और कोरी एंडरसन (2 मैच, 41 रन) कुछ ख़ास नहीं कर सके हैं. दूसरी तरफ़ कप्तान वॉर्नर और भुवनेश्वर कुमार की गेंदबाज़ी की वजह से हैदराबाद की टीम काफ़ी संतुलित नज़र आ रही है. कप्तान वॉर्नर धमाकेदार फ़ॉर्म में हैं. कप्तान ने 5 मैचों में 253 रन बटोरे हैं. हैदराबाद के बाक़ी बल्लेबाज़ों ने ज़रूरत पड़ने पर मोर्चा संभाला है.गेंदबाज़ों की बात करे पंजाब के ख़िलाफ़ भुवनेश्वर कुमार शानदार लय में दिखे, वहीं राशिद ख़ान को सीज़न 10 का खोज कहना ग़लत नहीं होगा.  भुवी ने 5 मैचों में 15 विकेट झटके हैं तो राशिद ने 9 विकेट अपने नाम किए हैं. मनन वोहरा के हाथों पिटने के बाद बरिंदर सरां को दिल्ली के ख़िलाफ़ बाहर बैठना पड़ सकता है. उनकी जगह आशीष नेहरा को शामिल करने की उम्मीद है. दोनों टीमों के फ़ॉर्म को देखे तो दिल्ली को हैदराबाद के घरेलू मैदान पर कड़ी टक्कर मिलने की उम्मीद है. दूसरी तरफ़ कप्तान वॉर्नर और भुवनेश्वर कुमार की गेंदबाज़ी की वजह से हैदराबाद की टीम काफ़ी संतुलित नज़र आ रही है. कप्तान वॉर्नर धमाकेदार फ़ॉर्म में हैं. कप्तान ने 5 मैचों में 253 रन बटोरे हैं. हैदराबाद के बाक़ी बल्लेबाज़ों ने ज़रूरत पड़ने पर मोर्चा संभाला है.गेंदबाज़ों की बात करे पंजाब के ख़िलाफ़ भुवनेश्वर कुमार शानदार लय में दिखे, वहीं राशिद ख़ान को सीज़न 10 का खोज कहना ग़लत नहीं होगा.  भुवी ने 5 मैचों में 15 विकेट झटके हैं तो राशिद ने 9 विकेट अपने नाम किए हैं. मनन वोहरा के हाथों पिटने के बाद बरिंदर सरां को दिल्ली के ख़िलाफ़ बाहर बैठना पड़ सकता है. उनकी जगह आशीष नेहरा को शामिल करने की उम्मीद है. दोनों टीमों के फ़ॉर्म को देखे तो दिल्ली को हैदराबाद के घरेलू मैदान पर कड़ी टक्कर मिलने की उम्मीद है.
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: दिल्‍ली टीम के खाते में इस समय दो जीत और दो हार हैं दिल्‍ली के लिए बल्‍ले से अच्‍छा प्रदर्शन कर रहे संजू और ऋषभ पंत वॉर्नर और भुवनेश्‍वर ने हैदराबाद को संतुलन प्रदान किया
32
['hin']
एक सारांश बनाओ: अमेरिका ने बेनगाजी में हुए हमले में अपने राजदूत के मारे जाने के बाद दो युद्धपोत लीबिया भेजे और त्रिपोली में अपने दूतावास की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 50-सदस्यीय मरीन दल को मुस्तैद कर दिया है। मंगलवार को बेनगाजी में वाणिज्य दूतावास पर हुए हमले में अमेरिकी राजदूत क्रिस्टोफर स्टीवन्स तथा तीन अन्य अमेरिकी कर्मचारी मारे गए। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बुधवार को बताया कि दो युद्धपोतों को लीबिया के आसपास रहने के लिए भेजा गया है। यह महज सुरक्षा के लिए उठाया गया कदम है।टिप्पणियां पेंटागन के प्रवक्ता जॉर्ज लिटल ने कहा कि सुरक्षा के लिए उठाए गए यह कदम न सिर्फ तार्किक हैं, बल्कि दूरदर्शी भी हैं। राष्ट्रपति बराक ओबामा ने तुरंत दुनिया भर में अमेरिकी दूतावासों की सुरक्षा बढ़ाने के आदेश दे दिए और बेनगाजी में हुए हमले की निंदा की। यह हमला 2001 में न्यूयॉर्क और वाशिंगटन पर हुए हमले की बरसी के दिन किया गया। नाम न बताने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि सेना आंतकवाद निरोधक सुरक्षा दस्ते के एक बेड़े (फ्लीट एंटी टेरेरिज्म सिक्योरिटी टीम) को लीबिया भेज रही है। मंगलवार को बेनगाजी में वाणिज्य दूतावास पर हुए हमले में अमेरिकी राजदूत क्रिस्टोफर स्टीवन्स तथा तीन अन्य अमेरिकी कर्मचारी मारे गए। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बुधवार को बताया कि दो युद्धपोतों को लीबिया के आसपास रहने के लिए भेजा गया है। यह महज सुरक्षा के लिए उठाया गया कदम है।टिप्पणियां पेंटागन के प्रवक्ता जॉर्ज लिटल ने कहा कि सुरक्षा के लिए उठाए गए यह कदम न सिर्फ तार्किक हैं, बल्कि दूरदर्शी भी हैं। राष्ट्रपति बराक ओबामा ने तुरंत दुनिया भर में अमेरिकी दूतावासों की सुरक्षा बढ़ाने के आदेश दे दिए और बेनगाजी में हुए हमले की निंदा की। यह हमला 2001 में न्यूयॉर्क और वाशिंगटन पर हुए हमले की बरसी के दिन किया गया। नाम न बताने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि सेना आंतकवाद निरोधक सुरक्षा दस्ते के एक बेड़े (फ्लीट एंटी टेरेरिज्म सिक्योरिटी टीम) को लीबिया भेज रही है। पेंटागन के प्रवक्ता जॉर्ज लिटल ने कहा कि सुरक्षा के लिए उठाए गए यह कदम न सिर्फ तार्किक हैं, बल्कि दूरदर्शी भी हैं। राष्ट्रपति बराक ओबामा ने तुरंत दुनिया भर में अमेरिकी दूतावासों की सुरक्षा बढ़ाने के आदेश दे दिए और बेनगाजी में हुए हमले की निंदा की। यह हमला 2001 में न्यूयॉर्क और वाशिंगटन पर हुए हमले की बरसी के दिन किया गया। नाम न बताने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि सेना आंतकवाद निरोधक सुरक्षा दस्ते के एक बेड़े (फ्लीट एंटी टेरेरिज्म सिक्योरिटी टीम) को लीबिया भेज रही है। यह हमला 2001 में न्यूयॉर्क और वाशिंगटन पर हुए हमले की बरसी के दिन किया गया। नाम न बताने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि सेना आंतकवाद निरोधक सुरक्षा दस्ते के एक बेड़े (फ्लीट एंटी टेरेरिज्म सिक्योरिटी टीम) को लीबिया भेज रही है।
संक्षिप्त पाठ: अमेरिका ने बेनगाजी में हुए हमले में अपने राजदूत के मारे जाने के बाद दो युद्धपोत लीबिया भेजे और त्रिपोली में दूतावास की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मरीन दल को मुस्तैद कर दिया है।
30
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए उनका देश वह सबकुछ करेगा जो उसे करना चाहिए।टिप्पणियां आगामी छह नवंबर को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले अपने अंतिम बड़े अंतरराष्ट्रीय संबोधन में ओबामा ने कहा कि ईरान फिर से यह साबित करने में नाकाम रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्य के लिए है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा, ‘‘अमेरिका कूटनीति के जरिये इस मुद्दे को सुलझाना चाहता है और हमारा मानना है कि अब भी इसके लिए समय है। परंतु यह समय असीमित नहीं है।’’ ईरान को सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद का समर्थक करार देते हुए ओबामा ने कहा, ‘‘ईरानी सरकार ने दमिश्क में एक तानाशाह को सहारा दे रखा है और बाहर आतंकवादी संगठनों को सहयोग देती है।’’ आगामी छह नवंबर को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले अपने अंतिम बड़े अंतरराष्ट्रीय संबोधन में ओबामा ने कहा कि ईरान फिर से यह साबित करने में नाकाम रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्य के लिए है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा, ‘‘अमेरिका कूटनीति के जरिये इस मुद्दे को सुलझाना चाहता है और हमारा मानना है कि अब भी इसके लिए समय है। परंतु यह समय असीमित नहीं है।’’ ईरान को सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद का समर्थक करार देते हुए ओबामा ने कहा, ‘‘ईरानी सरकार ने दमिश्क में एक तानाशाह को सहारा दे रखा है और बाहर आतंकवादी संगठनों को सहयोग देती है।’’ उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा, ‘‘अमेरिका कूटनीति के जरिये इस मुद्दे को सुलझाना चाहता है और हमारा मानना है कि अब भी इसके लिए समय है। परंतु यह समय असीमित नहीं है।’’ ईरान को सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद का समर्थक करार देते हुए ओबामा ने कहा, ‘‘ईरानी सरकार ने दमिश्क में एक तानाशाह को सहारा दे रखा है और बाहर आतंकवादी संगठनों को सहयोग देती है।’’
सारांश: अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए उनका देश वह सबकुछ करेगा जो उसे करना चाहिए।
7
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: भारतीय रिजर्व बैंक ने मंगलवार को आशंका जताई कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें तथा जिंस के दाम, मुद्रास्फीति पर नियंत्रण के प्रयासों को पटरी से उतार सकते हैं। मुद्रास्फीति अब सामान्य या नरम होती नजर आ रही है। रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर सुबीर गोकर्ण ने संवाददाताओं से कहा कि हमारे मौद्रिक कदमों के चलते मुद्रास्फीति नीचे आ रही है। लेकिन खाद्य तथा ऊर्जा कीमतों के कारण इसके 'फिर बढने का जोखिम' बना हुआ है। उन्होंने कहा कि इस समय कच्चे तेल की कीमतें बड़ा जोखिम हैं क्योंकि हम नहीं कर सकते कि तेल कीमतें कहां तक बढेंगी और कब स्थिर होंगी। भारतीय रिजर्व बैंक मुद्रास्फीति पर नियंत्रण के लिए मार्च 2010 के बाद नीतिगत दरों में सात बार बढोतरी कर चुका है जो जनवरी में घटकर 8.23 प्रतिशत रह गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम 116 डालर प्रति बैरल से उपर बने हुए हैं। गोकर्ण ने कहा कि केंद्रीय बैंक ने सोच समझकर तथा धीरे धीरे जो कदम उठाए हैं उनका 'इच्छित असर मुख्य मुद्रास्फीति पर देखा गया।'
सारांश: रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर सुबीर गोकर्ण ने कहा कि हमारे मौद्रिक कदमों के चलते मुद्रास्फीति नीचे आ रही है।
7
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: सरकार ने गुरुवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि स्पेक्ट्रम आवंटन के लिये पहले आओ-पहले पाओ का विवादास्पद तरीका जनवरी 2001 में लागू किया गया। उच्चतम न्यायालय ने सरकार से यह सवाल किया था कि यह अवधारणा कब से अपनायी गयी। इसी पर सरकार की ओर से यह जवाब आया है। टू-जी स्पेक्ट्रम आवंटन की जांच कर रही एजेंसियों के अनुसार, पहले आओ-पहले पाओ की नीति में 2-जी लाइसेंस और स्पेक्ट्रम दिलाने में कुछ कंपनियों को अन्य की तुलना में फायदा पहुंचाने के लिये बदलाव किया गया। सरकार की ओर से हाजिर एटॉर्नी जनरल गुलाम ई वाहनवती ने उच्चतम न्यायालय को जानकारी दी कि शीर्ष अदालत की निगरानी के दायरे में आयी यह प्रक्रिया दूरसंचार विभाग ने शुरू की थी ताकि वर्ष 2001 से स्पेक्ट्रम की शुरुआत के साथ ही दूरसंचार लाइसेंसों का आवंटन किया जा सके। यह मामला सलाह-मशविरे के लिये कभी भी ट्राई को नहीं भेजा गया। वाहनवती ने पीठ से कहा, पहले आओ-पहले पाओ से संबंधित यह मुद्दा कभी भी ट्राई के पास नहीं भेजा गया। उन्होंने कहा कि सरकार ने इसे सबसे पहले 21 जनवरी 2001 को मूल सेवा प्रदाताओं को दूरसंचार स्पेक्ट्रम आवंटित करने के लिये अपनाया था। याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि टीआरएआई ने 122 लाइसेंसों में से 69 को रद्द करने की अनुशंसा की है क्योंकि लाइसेंस देने की शर्तों के मुताबिक वे निश्चित समय सीमा के भीतर सेवा शुरू नहीं कर सके। इससे पहले पीठ ने 11 निजी दूरसंचार कंपनियों को नोटिस जारी किया था जिन्हें कथित तौर पर अयोग्य होने के बावजूद लाइसेंस दिया गया था या निश्चित समय सीमा के अंदर वे सेवा शुरू करने में विफल रहे। जिन निजी दूरसंचार कंपनियों को नोटिस जारी किये गये उनमें इटीसालट यूनिनोर, लूप टेलीकॉम, वीडियोकॉन, एस-टेल, अलायंज इन्फ्रा, आइडिया सेलुलर, टाटा टेलीसर्विसेज, सिस्टेमा श्याम टेलीसर्विसेज, डिशनेट वायरलेस, वोडाफोन-एस्सार के साथ ही टीआरएआई भी शामिल है। टू जी आवंटन घोटाले से फायदे में रहने वाली दूरसंचार कंपनियों ने स्पेक्ट्रम आवंटन में किसी तरह की अवैधता से इनकार किया और उच्चतम न्यायालय से कहा कि अगर राजा के कार्यकाल में पहले आओ पहले पाओ नीति को अवैध माना जाता है तो वर्ष 2003 से सभी आवंटनों को निरस्त किया जाये। मामले में अदालती सुनवाई ने वस्तुत: पुराने सेवा प्रदाताओं के साथ लड़ाई का रूप ले लिया जिन्होंने तर्क दिया कि उनको आवंटित स्पेक्ट्रम वैध हैं और नयी कंपनियों के साथ उनकी तुलना नहीं की जानी चाहिए जिनके लाइसेंस न्यायिक निगरानी के दायरे में हैं।
संक्षिप्त पाठ: सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि स्पेक्ट्रम आवंटन के लिये पहले आओ-पहले पाओ का विवादास्पद तरीका जनवरी 2001 में लागू किया गया।
14
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा मराठाओं को दिए गए आरक्षण को जायज़ करार दिया है, लेकिन उसे घटाकर शिक्षण संस्थानों में 12 फीसदी तथा सरकारी नौकरियों में 13 फीसदी करने के लिए कहा है. कोर्ट ने महाराष्ट्र में सरकारी नौकरियों और शिक्षा में मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की वैधता को बरकरार रखते हुए कहा कि मराठा आरक्षण को 16 प्रतिशत से घटाकर 12 या 13 प्रतिशत करना चाहिए. आपको बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा ने पिछले साल नवंबर में सर्वसम्मति से मराठा समुदाय को शिक्षा और नौकरियों में 16 प्रतिशत आरक्षण देने वाला विधेयक पारित किया था.  इससे पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मराठाओं की काफी समय से लंबित मांग पर राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिशों पर कार्यवाही रिपोर्ट (एटीआर) पेश करते हुए कहा था कि सरकार ने एक नई सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग (एसईबीसी) श्रेणी के तहत मराठाओं को 16 फीसदी आरक्षण देने का प्रस्ताव रखा है. यह विधेयक बिना किसी चर्चा के दोनों सदनों में सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया था.  बता दें कि राज्य में पिछली कांग्रेस-राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की सरकार ने भी इसकी प्रकार से 16 फीसदी आरक्षण का प्रस्ताव दिया था, जिस पर बंबई उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी थी.  चुनाव से पहले मरा
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: हाईकोर्ट ने आरक्षण को जायज करार दिया सरकारी नौकरियों और शिक्षा में मराठा समुदाय को आरक्षण कोर्ट ने आरक्षण को 16 प्रतिशत से घटाने को कहा
19
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: साल 2019 का नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize 2019) पाने वाले भारतीय मूल के अमेरिकी अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी (Abhijit Banerjee) ने बताया कि जब उन्हें नोबेल पुरस्कार मिलने की खबर मिली तो वह सोने के लिए चले गए. अभिजीत बनर्जी ने कहा कि सोमवार की सुबह स्टॉकहोम से नोबेल पुरस्कार प्राप्त होने की खबर मिलते ही वह सोने चले गए. बता दें कि अभिजीत बनर्जी को उनकी पत्नी एस्थर डुफ्लो (Esther Duflo) और हार्वर्ड के प्रोफेसर माइकल क्रेमर (Michael Kremer) के साथ अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित करने का फैसला किया गया है.  बनर्जी ने नोबेलप्राइज डॉट ऑर्ग को दिए एक इंटरव्यू में कहा, ‘हां, अहले सुबह की बात है. मैं इतनी सुबह नहीं जगता. मैंने सोचा कि अगर मैं सोया नहीं तो गड़बड़ हो जाएगी.' न्यूयॉर्क के समय के मुताबिक सोमवार सुबह छह बजे तीनों को 2019 के अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की गई. उन्होंने कहा कि वह ज्यादा नहीं सो पाए, क्योंकि उनको सम्मानित करने की खबर भारत से यूरोप तक फैल गई और उन्हें फोन आने लगे. यह पूछने पर कि बनर्जी और डुफ्लो को विवाहित दंपति के तौर पर नोबेल हासिल हुआ है तो उन्होंने इसे ‘विशेष' करार दिया. बता दें कि नोबेल पुरस्कार के इतिहास में केवल पांच अन्य विवाहित दंपतियों को यह प्राप्त हुआ है.
संक्षिप्त पाठ: नोबेल पुरस्कार मिलने की खबर मिली तो सोने के लिए चले गए थे अभिजीत कहा, ‘हां, अहले सुबह की बात है. मैं इतनी सुबह नहीं जगता केवल पांच अन्य विवाहित दंपतियों को यह मिला है यह पुरस्कार
22
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: जम्मू-कश्मीर से धारा 370 (Article 370) हटा दिया गया है. इससे जम्मू-कश्मीर को मिला विशेष राज्य का दर्जा भी खत्म हो गया है. संसद ने जम्मू कश्मीर पुनर्गठन बिल भी पारित कर दिया है. इस बिल के पास होने के बाद बाद जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटा जाएगा. इसके अनुसार जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाएगा. जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के सरकार के कदम की कांग्रेस सहित कई पार्टियां विरोध कर रही है. इस बीच जम्मू-कश्मीर से खबर है कि वहां पत्थरबाजी की छिटपुट घटनाओं को छोड़कर जम्मू-कश्मीर के तीनों क्षेत्रों में हालात 'सहज' हैं.  अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी.   अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा बलों ने राजनीतिक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं समेत 100 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है क्योंकि उनसे कश्मीर घाटी में शांति भंग होने का खतरा था. यह गिरफ्तारियां केन्द्र द्वारा जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाये जाने के ऐलान के कुछ घंटों बाद की गई हैं. घाटी में संचार सेवाएं बंद हैं और कई तरह की पाबंदियां लागू हैं. अधिकारियों ने कहा कि, 'पत्थरबाजी की कुछ घटनाओं की जानकारी मिली है.' राज्य प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि श्रीनगर में कुछ दुकानें खुलीं और पाबंदियों के बावजूद सड़कों पर लोगों की आवाजाही बढ़ी है. उन्होंने कहा कि अब हालात ‘सहज' हैं.
अधिकारियों के मुताबिक घाटी में हालात सामान्य हैं पत्थरबाजी की छिटपुट घटनाएं हुई हैं 100 से ज्यादा नेता और कार्यकर्ता गिरफ्तार किये गए हैं
34
['hin']
एक सारांश बनाओ: बार्सिलोना के पांच सत्र में चौथे ला लिगा और इतिहास में इस टूर्नामेंट के 22वें खिताब की पुष्टि तब हो गई जब रियाल मैड्रिड की टीम ने इस्पानयोल से 1-1 से ड्रॉ खेला। इस्पानयोल ने शनिवार को क्रिस्टियन स्टुआनी के 22वें मिनट में किए गोल से बढ़त बना ली। दूसरे हॉफ में क्रिस्टियानो रोनाल्डो को उतारने के बाद रियाल मैड्रिड ने गोंजालो हिगुएन की मदद से 60वें मिनट से पहले लुका मोड्रिक की फ्री किक को गोल में तब्दील कर बराबरी हासिल की।टिप्पणियां लेकिन रियाल मैड्रिड की टीम विजयी गोल नहीं कर सकी, जिसकी उन्हें खिताब की दौड़ में खुद को बनाये रखने के लिये दरकार थी। इस ड्रॉ से वह बार्सिलोना से सात अंक पीछे हो गया है जबकि उसके बस दो मैच ही बचे हैं। रियाल मैड्रिड के मिडफील्डर जावी अलोंसो ने कहा, ‘‘उन्हें (बार्सिलोना) बधाई देने के अलावा कुछ और नहीं बचा है।’’ बार्सिलोना की टीम आज एटलेटिको से भिड़ेगी और टीम अगर बचे हुए अपने चारों मैच जीत लेती है तो वह रियाल मैड्रिड के पिछले साल के 100 अंक के रिकार्ड की बराबरी कर सकती है। इस्पानयोल ने शनिवार को क्रिस्टियन स्टुआनी के 22वें मिनट में किए गोल से बढ़त बना ली। दूसरे हॉफ में क्रिस्टियानो रोनाल्डो को उतारने के बाद रियाल मैड्रिड ने गोंजालो हिगुएन की मदद से 60वें मिनट से पहले लुका मोड्रिक की फ्री किक को गोल में तब्दील कर बराबरी हासिल की।टिप्पणियां लेकिन रियाल मैड्रिड की टीम विजयी गोल नहीं कर सकी, जिसकी उन्हें खिताब की दौड़ में खुद को बनाये रखने के लिये दरकार थी। इस ड्रॉ से वह बार्सिलोना से सात अंक पीछे हो गया है जबकि उसके बस दो मैच ही बचे हैं। रियाल मैड्रिड के मिडफील्डर जावी अलोंसो ने कहा, ‘‘उन्हें (बार्सिलोना) बधाई देने के अलावा कुछ और नहीं बचा है।’’ बार्सिलोना की टीम आज एटलेटिको से भिड़ेगी और टीम अगर बचे हुए अपने चारों मैच जीत लेती है तो वह रियाल मैड्रिड के पिछले साल के 100 अंक के रिकार्ड की बराबरी कर सकती है। लेकिन रियाल मैड्रिड की टीम विजयी गोल नहीं कर सकी, जिसकी उन्हें खिताब की दौड़ में खुद को बनाये रखने के लिये दरकार थी। इस ड्रॉ से वह बार्सिलोना से सात अंक पीछे हो गया है जबकि उसके बस दो मैच ही बचे हैं। रियाल मैड्रिड के मिडफील्डर जावी अलोंसो ने कहा, ‘‘उन्हें (बार्सिलोना) बधाई देने के अलावा कुछ और नहीं बचा है।’’ बार्सिलोना की टीम आज एटलेटिको से भिड़ेगी और टीम अगर बचे हुए अपने चारों मैच जीत लेती है तो वह रियाल मैड्रिड के पिछले साल के 100 अंक के रिकार्ड की बराबरी कर सकती है। रियाल मैड्रिड के मिडफील्डर जावी अलोंसो ने कहा, ‘‘उन्हें (बार्सिलोना) बधाई देने के अलावा कुछ और नहीं बचा है।’’ बार्सिलोना की टीम आज एटलेटिको से भिड़ेगी और टीम अगर बचे हुए अपने चारों मैच जीत लेती है तो वह रियाल मैड्रिड के पिछले साल के 100 अंक के रिकार्ड की बराबरी कर सकती है।
यहाँ एक सारांश है:बार्सिलोना के पांच सत्र में चौथे ला लिगा और इतिहास में इस टूर्नामेंट के 22वें खिताब की पुष्टि तब हो गई जब रियाल मैड्रिड टीम ने इस्पानयोल से 1-1 से ड्रॉ खेला।
15
['hin']
एक सारांश बनाओ: राष्ट्रमंडल खेलों से जुड़ी परियोजनाओं में कथित अनियमितताओं का संकेत करने वाली कैग की रिपोर्ट पर गुरुवार को मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों और आला अधिकारियों से विचार-विमर्श किया। इस रिपोर्ट पर कार्रवाई को लेकर दिल्ली सरकार पर खासा दबाव पड़ रहा है। शीला के आधिकारिक निवास पर हुई इस बैठक में लोकनिर्माण मंत्री राज कुमार चौहान, परिवहन और शिक्षा मंत्री अरविंदर सिंह लवली, बिजली मंत्री हारुन यूसुफ और मुख्य सचिव पीके त्रिपाठी समेत प्रदेश सरकार के कई आला अधिकारियों ने भाग लिया। इसके बाद उन्होंने कई और अधिकारियों के साथ भी बैठक की। समझा जा रहा है कि इन बैठकों में उन्होंने रिपोर्ट के बाद उन पर और सरकार पर लग रहे आरोपों के बारे में चर्चा की। सूत्रों के मुताबिक, सरकार कैग रिपोर्ट के संसद में रखे जाने की स्थिति में ही उस पर कार्रवाई करेगी। आरोपों से विचलित हुए बिना शीला ने कहा कि उन्होंने और उनकी सरकार ने कुछ भी गलत नहीं किया है और सब कुछ राष्ट्रीय हितों और सम्मान को ध्यान में रखते हुए ही किया गया है।
कैग की रिपोर्ट पर मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों और आला अधिकारियों से विचार-विमर्श किया।
26
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: भारत की बैडमिंटन खिलाड़ी पीसी तुलसी, अरुंधति पंटावने और बी. साई प्रणीत ने अपने-अपने वर्ग के क्वलीफाइंग मुकाबलों में जीत हासिल करते हुए मंगलवार को सिंगापुर ओपन सुपर सीरीज बैडमिंटन टूर्नामेंट के मुख्य दौर में जगह बना ली है। बीते सप्ताह महान खिलाड़ी तौफीक हिदायत को हराने वाले प्रणीत ने पुरुष एकल के क्वालीफाईंग में दोनों मैच जीते। पहले दौर में प्रणीत ने मलेशिया के मोहम्मद हाफिज हाशिम को 21-13, 21-15 से हराने के बाद दूसरे दौर में जापान के रिची ताकेशिता को 36 मिनट में 21-12, 22-20 से हराया। बुधवार को होने वाले मुख्य दौर के मुकाबले में प्रणीत का सामना हांगकांग के दूसरे वरीय खिलाड़ी युन हू से होगा।टिप्पणियां अरुंधति और तुलसी ने महिला एकल के मुख्य दौर में जगह बनाई है। अरुंधति ने पहले रूस की अना ए. को 21-15, 21-10 से हराया और फिर स्थानीय खिलाड़ी जी. लियांग को 21-14, 21-16 से पराजित किया। तुलसी ने वियतनाम की थी त्रांग को 21-18, 21-17 से हराने के बाद दूसरे दौर में थाईलैंड की सी. पोर्नपवारे को 18-21, 21-13, 21-8 से मात दी। बीते सप्ताह महान खिलाड़ी तौफीक हिदायत को हराने वाले प्रणीत ने पुरुष एकल के क्वालीफाईंग में दोनों मैच जीते। पहले दौर में प्रणीत ने मलेशिया के मोहम्मद हाफिज हाशिम को 21-13, 21-15 से हराने के बाद दूसरे दौर में जापान के रिची ताकेशिता को 36 मिनट में 21-12, 22-20 से हराया। बुधवार को होने वाले मुख्य दौर के मुकाबले में प्रणीत का सामना हांगकांग के दूसरे वरीय खिलाड़ी युन हू से होगा।टिप्पणियां अरुंधति और तुलसी ने महिला एकल के मुख्य दौर में जगह बनाई है। अरुंधति ने पहले रूस की अना ए. को 21-15, 21-10 से हराया और फिर स्थानीय खिलाड़ी जी. लियांग को 21-14, 21-16 से पराजित किया। तुलसी ने वियतनाम की थी त्रांग को 21-18, 21-17 से हराने के बाद दूसरे दौर में थाईलैंड की सी. पोर्नपवारे को 18-21, 21-13, 21-8 से मात दी। पहले दौर में प्रणीत ने मलेशिया के मोहम्मद हाफिज हाशिम को 21-13, 21-15 से हराने के बाद दूसरे दौर में जापान के रिची ताकेशिता को 36 मिनट में 21-12, 22-20 से हराया। बुधवार को होने वाले मुख्य दौर के मुकाबले में प्रणीत का सामना हांगकांग के दूसरे वरीय खिलाड़ी युन हू से होगा।टिप्पणियां अरुंधति और तुलसी ने महिला एकल के मुख्य दौर में जगह बनाई है। अरुंधति ने पहले रूस की अना ए. को 21-15, 21-10 से हराया और फिर स्थानीय खिलाड़ी जी. लियांग को 21-14, 21-16 से पराजित किया। तुलसी ने वियतनाम की थी त्रांग को 21-18, 21-17 से हराने के बाद दूसरे दौर में थाईलैंड की सी. पोर्नपवारे को 18-21, 21-13, 21-8 से मात दी। बुधवार को होने वाले मुख्य दौर के मुकाबले में प्रणीत का सामना हांगकांग के दूसरे वरीय खिलाड़ी युन हू से होगा।टिप्पणियां अरुंधति और तुलसी ने महिला एकल के मुख्य दौर में जगह बनाई है। अरुंधति ने पहले रूस की अना ए. को 21-15, 21-10 से हराया और फिर स्थानीय खिलाड़ी जी. लियांग को 21-14, 21-16 से पराजित किया। तुलसी ने वियतनाम की थी त्रांग को 21-18, 21-17 से हराने के बाद दूसरे दौर में थाईलैंड की सी. पोर्नपवारे को 18-21, 21-13, 21-8 से मात दी। अरुंधति और तुलसी ने महिला एकल के मुख्य दौर में जगह बनाई है। अरुंधति ने पहले रूस की अना ए. को 21-15, 21-10 से हराया और फिर स्थानीय खिलाड़ी जी. लियांग को 21-14, 21-16 से पराजित किया। तुलसी ने वियतनाम की थी त्रांग को 21-18, 21-17 से हराने के बाद दूसरे दौर में थाईलैंड की सी. पोर्नपवारे को 18-21, 21-13, 21-8 से मात दी। तुलसी ने वियतनाम की थी त्रांग को 21-18, 21-17 से हराने के बाद दूसरे दौर में थाईलैंड की सी. पोर्नपवारे को 18-21, 21-13, 21-8 से मात दी।
संक्षिप्त सारांश: भारत की बैडमिंटन खिलाड़ी पीसी तुलसी, अरुंधति पंटावने और बी. साई प्रणीत ने अपने-अपने वर्ग के क्वलीफाइंग मुकाबलों में जीत हासिल करते हुए मंगलवार को सिंगापुर ओपन सुपर सीरीज बैडमिंटन टूर्नामेंट के मुख्य दौर में जगह बना ली है।
10
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: शनिवार सुबह सवेरे दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय के बाहर ढोल नगाड़े और श्लोकों के उच्चारण से गूंज उठा। सैकड़ों की तादाद में मौजूद कार्यकर्ताओं का उत्साह कुछ ऐसा था कि मानो कांग्रेस को कोई बड़ी चुनावी कामयाबी मिली हो। हालांकि ये मौक़ा उत्तर प्रदेश के लिए कांग्रेसी नेताओं की बस यात्रा के शुरुआत की थी। ख़ुद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बस को फ्लैग ऑफ किया। मंच पर राहुल गांधी भी मौजूद रहे। बस में सवार नेताओं में उत्तर प्रदेश के प्रभारी ग़ुलाम नबी आज़ाद, प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर, सीएम उम्मीदवार शीला दीक्षित, समन्वय समिति के चेयरमैन प्रमोद तिवारी और प्रचार समिति के चेयरमैन संजय सिंह समेत टीम यूपी के कई और नेता सवार हैं। बस के साथ साथ नेताओं और कार्यकर्ताओं की क़रीब सौ गाड़ियों का ये काफ़िला अगले तीन दिनों तक उत्तर प्रदेश के अलग अलग ज़िलों से गुज़रता हुआ कानपुर तक जाएगा। क़रीब 600 किलोमीटर की दूरी तय की जाएगी। रास्ते में नेताओं के रोड शो भी हो रहे हैं और भाषण भी। अहम पड़ावों पर प्रशांत किशोर की टीम के लोग नेताओं के साथ समन्वय करेंगे ताकि उनको साथ-साथ फीडबैक भी मिलता रहे। मक़सद उत्तर प्रदेश में ज़मीन खो चुकी कांग्रेस को दुबारा ज़िंदा करने का है। नारा दिया गया है '27 साल यूपी बेहाल'। ज्ञात हो कि 1989 में यूपी में सत्ता खोने के बाद कांग्रेस फिर कभी इस पर काबिज़ नहीं हो पायी। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले 2017 में यूपी चुनाव कांग्रेस के लिए बड़ा इम्तिहान है। इसलिए पार्टी कोई कोर क़सर छोड़ना नहीं चाहती। आमतौर पर कांग्रेस चुनावी समर में उतरने से पहले अपनी लेट लतीफी के लिए जानी जाती है। लेकिन इस बार अपने नए रणनीतिकार प्रशांत किशोर की सलाह पर पार्टी हाथ में समय लेकर चल रही है। हालांकि कई मानते हैं कि पार्टी ने फिर भी देर कर दी है लेकिन नेता कम से कम अब आगे का समय नहीं गंवाना चाहते। इस यात्रा के ज़रिए कांग्रेस जहां अखिलेश यादव की सरकार को निशाना बनाएगी वहीं लोगों से ये भी बताएगी की यूपी के लिए कांग्रेस क्यों ज़रूरी है। जैसा कि ग़ुलाम नबी आज़ाद ने यात्रा शुरू होने से ठीक पहले कहा कि बीजेपी समेत सभी पार्टियां लोगों को धर्म और संप्रदाय के आधार पर बांट कर सत्ता पर काबिज़ होना चाहती हैं, वहीं कांग्रेस सबको साथ लेकर चलना चाहती है। वे ये भी कहते हैं कि यूपी के लिए कांग्रेस ही सबसे सही विकल्प है। टिप्पणियां लेकिन पिछले चुनाव में 403 में से सिर्फ 28 सीट जीतने वाली कांग्रेस इस बार कितनी सीटें हासिल करती है ये देखने वाली बात होगी। वैसे तो कांग्रेस अपने बूते सत्ता में आने का दावा कर रही है, लेकिन अंदरखाने की बात ये है कि कांग्रेस की कोशिश किसी तरह सौ सीटें जीतने की होगी ताकि सरकार बनाने में उसकी अहम भूमिका हो सके। 29 जुलाई को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ख़ुद लखनऊ पहुंचने वाले हैं। कहा ये भी जा रहा है कि प्रियंका गांधी भी लखनऊ पहुंच कर पार्टी की स्थिति सुधारने और जोश भरने के लिए कार्यकर्ताओं से बात करेंगी। कांग्रेस की रणनीति प्रियंका को प्रचार की बड़ी ज़िम्मेदारी देने की है जिसका ऐलान चुनाव के ऐलान के आसपास किया जा सकता है। प्रमोद तिवारी कहते हैं कि हर कांग्रेसी नेता और कार्यकर्ता दिल से चाहता है कि प्रियंका अमेठी और रायबरेली के बाहर भी चुनाव प्रचार करें। ज़ाहिर है तमाम नेता फिलहाल अपने स्तर पर चुनाव प्रचार में जुट गए हैं लेकिन स्टार प्रचारक के तौर पर उन्हें प्रियंका का ही इंतज़ार है। बस में सवार नेताओं में उत्तर प्रदेश के प्रभारी ग़ुलाम नबी आज़ाद, प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर, सीएम उम्मीदवार शीला दीक्षित, समन्वय समिति के चेयरमैन प्रमोद तिवारी और प्रचार समिति के चेयरमैन संजय सिंह समेत टीम यूपी के कई और नेता सवार हैं। बस के साथ साथ नेताओं और कार्यकर्ताओं की क़रीब सौ गाड़ियों का ये काफ़िला अगले तीन दिनों तक उत्तर प्रदेश के अलग अलग ज़िलों से गुज़रता हुआ कानपुर तक जाएगा। क़रीब 600 किलोमीटर की दूरी तय की जाएगी। रास्ते में नेताओं के रोड शो भी हो रहे हैं और भाषण भी। अहम पड़ावों पर प्रशांत किशोर की टीम के लोग नेताओं के साथ समन्वय करेंगे ताकि उनको साथ-साथ फीडबैक भी मिलता रहे। मक़सद उत्तर प्रदेश में ज़मीन खो चुकी कांग्रेस को दुबारा ज़िंदा करने का है। नारा दिया गया है '27 साल यूपी बेहाल'। ज्ञात हो कि 1989 में यूपी में सत्ता खोने के बाद कांग्रेस फिर कभी इस पर काबिज़ नहीं हो पायी। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले 2017 में यूपी चुनाव कांग्रेस के लिए बड़ा इम्तिहान है। इसलिए पार्टी कोई कोर क़सर छोड़ना नहीं चाहती। आमतौर पर कांग्रेस चुनावी समर में उतरने से पहले अपनी लेट लतीफी के लिए जानी जाती है। लेकिन इस बार अपने नए रणनीतिकार प्रशांत किशोर की सलाह पर पार्टी हाथ में समय लेकर चल रही है। हालांकि कई मानते हैं कि पार्टी ने फिर भी देर कर दी है लेकिन नेता कम से कम अब आगे का समय नहीं गंवाना चाहते। इस यात्रा के ज़रिए कांग्रेस जहां अखिलेश यादव की सरकार को निशाना बनाएगी वहीं लोगों से ये भी बताएगी की यूपी के लिए कांग्रेस क्यों ज़रूरी है। जैसा कि ग़ुलाम नबी आज़ाद ने यात्रा शुरू होने से ठीक पहले कहा कि बीजेपी समेत सभी पार्टियां लोगों को धर्म और संप्रदाय के आधार पर बांट कर सत्ता पर काबिज़ होना चाहती हैं, वहीं कांग्रेस सबको साथ लेकर चलना चाहती है। वे ये भी कहते हैं कि यूपी के लिए कांग्रेस ही सबसे सही विकल्प है। टिप्पणियां लेकिन पिछले चुनाव में 403 में से सिर्फ 28 सीट जीतने वाली कांग्रेस इस बार कितनी सीटें हासिल करती है ये देखने वाली बात होगी। वैसे तो कांग्रेस अपने बूते सत्ता में आने का दावा कर रही है, लेकिन अंदरखाने की बात ये है कि कांग्रेस की कोशिश किसी तरह सौ सीटें जीतने की होगी ताकि सरकार बनाने में उसकी अहम भूमिका हो सके। 29 जुलाई को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ख़ुद लखनऊ पहुंचने वाले हैं। कहा ये भी जा रहा है कि प्रियंका गांधी भी लखनऊ पहुंच कर पार्टी की स्थिति सुधारने और जोश भरने के लिए कार्यकर्ताओं से बात करेंगी। कांग्रेस की रणनीति प्रियंका को प्रचार की बड़ी ज़िम्मेदारी देने की है जिसका ऐलान चुनाव के ऐलान के आसपास किया जा सकता है। प्रमोद तिवारी कहते हैं कि हर कांग्रेसी नेता और कार्यकर्ता दिल से चाहता है कि प्रियंका अमेठी और रायबरेली के बाहर भी चुनाव प्रचार करें। ज़ाहिर है तमाम नेता फिलहाल अपने स्तर पर चुनाव प्रचार में जुट गए हैं लेकिन स्टार प्रचारक के तौर पर उन्हें प्रियंका का ही इंतज़ार है। आमतौर पर कांग्रेस चुनावी समर में उतरने से पहले अपनी लेट लतीफी के लिए जानी जाती है। लेकिन इस बार अपने नए रणनीतिकार प्रशांत किशोर की सलाह पर पार्टी हाथ में समय लेकर चल रही है। हालांकि कई मानते हैं कि पार्टी ने फिर भी देर कर दी है लेकिन नेता कम से कम अब आगे का समय नहीं गंवाना चाहते। इस यात्रा के ज़रिए कांग्रेस जहां अखिलेश यादव की सरकार को निशाना बनाएगी वहीं लोगों से ये भी बताएगी की यूपी के लिए कांग्रेस क्यों ज़रूरी है। जैसा कि ग़ुलाम नबी आज़ाद ने यात्रा शुरू होने से ठीक पहले कहा कि बीजेपी समेत सभी पार्टियां लोगों को धर्म और संप्रदाय के आधार पर बांट कर सत्ता पर काबिज़ होना चाहती हैं, वहीं कांग्रेस सबको साथ लेकर चलना चाहती है। वे ये भी कहते हैं कि यूपी के लिए कांग्रेस ही सबसे सही विकल्प है। टिप्पणियां लेकिन पिछले चुनाव में 403 में से सिर्फ 28 सीट जीतने वाली कांग्रेस इस बार कितनी सीटें हासिल करती है ये देखने वाली बात होगी। वैसे तो कांग्रेस अपने बूते सत्ता में आने का दावा कर रही है, लेकिन अंदरखाने की बात ये है कि कांग्रेस की कोशिश किसी तरह सौ सीटें जीतने की होगी ताकि सरकार बनाने में उसकी अहम भूमिका हो सके। 29 जुलाई को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ख़ुद लखनऊ पहुंचने वाले हैं। कहा ये भी जा रहा है कि प्रियंका गांधी भी लखनऊ पहुंच कर पार्टी की स्थिति सुधारने और जोश भरने के लिए कार्यकर्ताओं से बात करेंगी। कांग्रेस की रणनीति प्रियंका को प्रचार की बड़ी ज़िम्मेदारी देने की है जिसका ऐलान चुनाव के ऐलान के आसपास किया जा सकता है। प्रमोद तिवारी कहते हैं कि हर कांग्रेसी नेता और कार्यकर्ता दिल से चाहता है कि प्रियंका अमेठी और रायबरेली के बाहर भी चुनाव प्रचार करें। ज़ाहिर है तमाम नेता फिलहाल अपने स्तर पर चुनाव प्रचार में जुट गए हैं लेकिन स्टार प्रचारक के तौर पर उन्हें प्रियंका का ही इंतज़ार है। लेकिन पिछले चुनाव में 403 में से सिर्फ 28 सीट जीतने वाली कांग्रेस इस बार कितनी सीटें हासिल करती है ये देखने वाली बात होगी। वैसे तो कांग्रेस अपने बूते सत्ता में आने का दावा कर रही है, लेकिन अंदरखाने की बात ये है कि कांग्रेस की कोशिश किसी तरह सौ सीटें जीतने की होगी ताकि सरकार बनाने में उसकी अहम भूमिका हो सके। 29 जुलाई को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ख़ुद लखनऊ पहुंचने वाले हैं। कहा ये भी जा रहा है कि प्रियंका गांधी भी लखनऊ पहुंच कर पार्टी की स्थिति सुधारने और जोश भरने के लिए कार्यकर्ताओं से बात करेंगी। कांग्रेस की रणनीति प्रियंका को प्रचार की बड़ी ज़िम्मेदारी देने की है जिसका ऐलान चुनाव के ऐलान के आसपास किया जा सकता है। प्रमोद तिवारी कहते हैं कि हर कांग्रेसी नेता और कार्यकर्ता दिल से चाहता है कि प्रियंका अमेठी और रायबरेली के बाहर भी चुनाव प्रचार करें। ज़ाहिर है तमाम नेता फिलहाल अपने स्तर पर चुनाव प्रचार में जुट गए हैं लेकिन स्टार प्रचारक के तौर पर उन्हें प्रियंका का ही इंतज़ार है। 29 जुलाई को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ख़ुद लखनऊ पहुंचने वाले हैं। कहा ये भी जा रहा है कि प्रियंका गांधी भी लखनऊ पहुंच कर पार्टी की स्थिति सुधारने और जोश भरने के लिए कार्यकर्ताओं से बात करेंगी। कांग्रेस की रणनीति प्रियंका को प्रचार की बड़ी ज़िम्मेदारी देने की है जिसका ऐलान चुनाव के ऐलान के आसपास किया जा सकता है। प्रमोद तिवारी कहते हैं कि हर कांग्रेसी नेता और कार्यकर्ता दिल से चाहता है कि प्रियंका अमेठी और रायबरेली के बाहर भी चुनाव प्रचार करें। ज़ाहिर है तमाम नेता फिलहाल अपने स्तर पर चुनाव प्रचार में जुट गए हैं लेकिन स्टार प्रचारक के तौर पर उन्हें प्रियंका का ही इंतज़ार है।
यहाँ एक सारांश है:ख़ुद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बस को फ्लैग ऑफ किया पिछले चुनाव में कांग्रेस को 403 में से सिर्फ 28 सीटें मिली थी पार्टी कार्यकर्ताओं को स्टार प्रचारक के तौर पर प्रियंका का इंतज़ार
17
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: पश्चिमोत्तर पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में आतंकवादियों के हमले में अर्धसैनिक बल के 14 जवानों की मौत हो गई। प्रतिबंधित बलूच लिबरेशन फ्रंट ने बुधवार रात तुरबत जिले के नवानो इलाके में फ्रंटियर कोर पर किए गए हमले की जिम्मेदारी ली है।टिप्पणियां बीती रात अर्धसैनिक बल के जवान दो वाहनों में सवार होकर गश्त कर रहे थे। समीपवर्ती पहाड़ियों में छिपे उग्रवादियों ने उन पर तीन ओर से रॉकेटों ओर स्वचालित हथियारों से हमला कर दिया। अधिकारियों ने बताया कि वाहन पर कई रॉकेट गिरे, जिससे 12 सैनिकों और दो गैर-कमीशन अधिकारियों की मौत हो गई। आतंकी रॉकेट दागने के बाद पहाड़ियों से नीचे आए और वाहनों पर गोलियों की बौछार कर दी। खबरों में कहा गया है कि हमला इतना तेज था कि अर्धसैनिक बल के जवान जवाबी कार्रवाई नहीं कर सके। बाद में सुरक्षा बलों की एक बड़ी टुकड़ी मौके पर पहुंची और अर्धसैनिक बल के जवानों के शव वापस तुरबत शहर लाए गए। खुद को बीएलएफ का प्रवक्ता गोहराम बलूच बता रहे एक व्यक्ति ने संवाददाताओं को फोन कर हमले की जिम्मेदारी ली है। बीती रात अर्धसैनिक बल के जवान दो वाहनों में सवार होकर गश्त कर रहे थे। समीपवर्ती पहाड़ियों में छिपे उग्रवादियों ने उन पर तीन ओर से रॉकेटों ओर स्वचालित हथियारों से हमला कर दिया। अधिकारियों ने बताया कि वाहन पर कई रॉकेट गिरे, जिससे 12 सैनिकों और दो गैर-कमीशन अधिकारियों की मौत हो गई। आतंकी रॉकेट दागने के बाद पहाड़ियों से नीचे आए और वाहनों पर गोलियों की बौछार कर दी। खबरों में कहा गया है कि हमला इतना तेज था कि अर्धसैनिक बल के जवान जवाबी कार्रवाई नहीं कर सके। बाद में सुरक्षा बलों की एक बड़ी टुकड़ी मौके पर पहुंची और अर्धसैनिक बल के जवानों के शव वापस तुरबत शहर लाए गए। खुद को बीएलएफ का प्रवक्ता गोहराम बलूच बता रहे एक व्यक्ति ने संवाददाताओं को फोन कर हमले की जिम्मेदारी ली है। आतंकी रॉकेट दागने के बाद पहाड़ियों से नीचे आए और वाहनों पर गोलियों की बौछार कर दी। खबरों में कहा गया है कि हमला इतना तेज था कि अर्धसैनिक बल के जवान जवाबी कार्रवाई नहीं कर सके। बाद में सुरक्षा बलों की एक बड़ी टुकड़ी मौके पर पहुंची और अर्धसैनिक बल के जवानों के शव वापस तुरबत शहर लाए गए। खुद को बीएलएफ का प्रवक्ता गोहराम बलूच बता रहे एक व्यक्ति ने संवाददाताओं को फोन कर हमले की जिम्मेदारी ली है।
सारांश: पश्चिमोत्तर पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में आतंकवादियों के हमले में अर्धसैनिक बल के 14 जवानों की मौत हो गई।
33
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: सरकार नकदी संकट से जूझ रही विमानन कंपनियों में विदेशी विमानन कंपनियों को 49 फीसद तक हिस्सेदारी खरीदने की अनुमति देने के संबंध में शुक्रवार को फैसला कर सकती है। सूत्र बता रहे हैं कि सरकार ने इस बारे में अनुमति देने का मन बना लिया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने कहा ‘‘यह एजेंडे में सूचीबद्ध है।’’ आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) कल इस मामले पर चर्चा कर सकती है। सूत्रों के मुताबिक वित्त मंत्रालय और नागर विमानन मंत्रालय ने विमानन क्षेत्र के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से जुड़े दिशा-निर्देश में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। कुछ अन्य मंत्रालयों की इस पर मंजूरी मिलनी बाकी है। औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) ने इस संबंध में मंत्रिमंडल नोट जारी किया है।टिप्पणियां फिलहाल भारत में विमानन क्षेत्र से बाहर के विदेशी निवेशकों को घरेलू विमानन कंपनियों में 49 फीसद तक हिस्सेदारी खरीदने की मंजूरी है लेकिन विदेशी विमानन कंपनियों को इसमें निवेश की मंजूरी नहीं है। नकदी संकट से जूझ रहे विमानन उद्योग की मांग के मद्देनजर सरकार ने जनवरी में यह प्रक्रिया शुरू की थी। विदेशी विमानन कंपनियों को घरेलू विमानन कंपनियों में हिस्सेदारी खरीदने की मंजूरी मिलने से किंगफिशर एयरलाइन्स को फायदा पहुंचने की उम्मीद है जिस पर 7,000 करोड़ रुपये के ऋण का बोझ है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने कहा ‘‘यह एजेंडे में सूचीबद्ध है।’’ आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) कल इस मामले पर चर्चा कर सकती है। सूत्रों के मुताबिक वित्त मंत्रालय और नागर विमानन मंत्रालय ने विमानन क्षेत्र के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से जुड़े दिशा-निर्देश में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। कुछ अन्य मंत्रालयों की इस पर मंजूरी मिलनी बाकी है। औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) ने इस संबंध में मंत्रिमंडल नोट जारी किया है।टिप्पणियां फिलहाल भारत में विमानन क्षेत्र से बाहर के विदेशी निवेशकों को घरेलू विमानन कंपनियों में 49 फीसद तक हिस्सेदारी खरीदने की मंजूरी है लेकिन विदेशी विमानन कंपनियों को इसमें निवेश की मंजूरी नहीं है। नकदी संकट से जूझ रहे विमानन उद्योग की मांग के मद्देनजर सरकार ने जनवरी में यह प्रक्रिया शुरू की थी। विदेशी विमानन कंपनियों को घरेलू विमानन कंपनियों में हिस्सेदारी खरीदने की मंजूरी मिलने से किंगफिशर एयरलाइन्स को फायदा पहुंचने की उम्मीद है जिस पर 7,000 करोड़ रुपये के ऋण का बोझ है। सूत्रों के मुताबिक वित्त मंत्रालय और नागर विमानन मंत्रालय ने विमानन क्षेत्र के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से जुड़े दिशा-निर्देश में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। कुछ अन्य मंत्रालयों की इस पर मंजूरी मिलनी बाकी है। औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) ने इस संबंध में मंत्रिमंडल नोट जारी किया है।टिप्पणियां फिलहाल भारत में विमानन क्षेत्र से बाहर के विदेशी निवेशकों को घरेलू विमानन कंपनियों में 49 फीसद तक हिस्सेदारी खरीदने की मंजूरी है लेकिन विदेशी विमानन कंपनियों को इसमें निवेश की मंजूरी नहीं है। नकदी संकट से जूझ रहे विमानन उद्योग की मांग के मद्देनजर सरकार ने जनवरी में यह प्रक्रिया शुरू की थी। विदेशी विमानन कंपनियों को घरेलू विमानन कंपनियों में हिस्सेदारी खरीदने की मंजूरी मिलने से किंगफिशर एयरलाइन्स को फायदा पहुंचने की उम्मीद है जिस पर 7,000 करोड़ रुपये के ऋण का बोझ है। फिलहाल भारत में विमानन क्षेत्र से बाहर के विदेशी निवेशकों को घरेलू विमानन कंपनियों में 49 फीसद तक हिस्सेदारी खरीदने की मंजूरी है लेकिन विदेशी विमानन कंपनियों को इसमें निवेश की मंजूरी नहीं है। नकदी संकट से जूझ रहे विमानन उद्योग की मांग के मद्देनजर सरकार ने जनवरी में यह प्रक्रिया शुरू की थी। विदेशी विमानन कंपनियों को घरेलू विमानन कंपनियों में हिस्सेदारी खरीदने की मंजूरी मिलने से किंगफिशर एयरलाइन्स को फायदा पहुंचने की उम्मीद है जिस पर 7,000 करोड़ रुपये के ऋण का बोझ है। नकदी संकट से जूझ रहे विमानन उद्योग की मांग के मद्देनजर सरकार ने जनवरी में यह प्रक्रिया शुरू की थी। विदेशी विमानन कंपनियों को घरेलू विमानन कंपनियों में हिस्सेदारी खरीदने की मंजूरी मिलने से किंगफिशर एयरलाइन्स को फायदा पहुंचने की उम्मीद है जिस पर 7,000 करोड़ रुपये के ऋण का बोझ है।
संक्षिप्त सारांश: सरकार नकदी संकट से जूझ रही विमानन कंपनियों में विदेशी विमानन कंपनियों को 49 फीसद तक हिस्सेदारी खरीदने की अनुमति देने के संबंध में शुक्रवार को फैसला कर सकती है।
10
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: मार्टिन गुपटिल (105) और ब्रेंडन मैक्लम (87) की शानदार पारियों की मदद से न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम ने हरारे स्पोर्ट्स क्लब मैदान पर शनिवार को खेले गए दूसरे एकदिवसीय मुकाबले में जिम्बाब्वे को चार विकेट से हरा दिया। 121 गेंदों की पारी में नौ चौके लगाने वाले गुपटिल ने 99 गेंदों पर तीन चौके और चार छक्के जड़ने वाले मैक्लम के साथ दूसरे विकेट के लिए 157 रन जोड़कर अपनी टीम की जीत पक्की कर दी। गुपटिल ने रॉब निकोल (9) के साथ पहले विकेट के लिए 49 रन जोड़े थे। गुपटिल और मैक्लम के विकेट पर रहते हुए कीवी टीम बड़ी आसानी से जीत हासिल करती दिख रही थी लेकिन उनकी विदाई के बाद मेहमान बल्लेबाजों को जीत के लिए एक लिहाज से संघर्ष करना पड़ा। मैक्लम 206 रनों के कुल योग पर आउट हुए थे। इसके बाद कीवी टीम ने 222 रन के कुल योग पर रॉस टेलर (11), इसी योग पर गुपटिल, 253 रनों के कुल योग पर बीजे वॉटलिंग (19) और 257 रन के कुल योग पर जेम्स फ्रेंकलिन (1) के विकेट गंवा दिए। केन विलियमसन 19 रन बनाकर नाबाद लौटे जबकि जैकब ओरम चार रन पर अविजित रहे। विलियमसन ने 17 गेंदों पर तीन चौके लगाए। जिम्बाब्वे की ओर से कीगन मेथ ने दो विकेट लिए। कीवी टीम को 10 गेंद शेष रहते जीत मिल सकी। इससे पहले, कप्तान ब्रेंडन टेलर (नाबाद 107) की शानदार पारी की बदौलत जिम्बाब्वे क्रिकेट टीम ने न्यूजीलैंड के सामने 250 रनों का लक्ष्य रखा। टॉस हारने के बाद पहले बल्लेबाजी करते हुए मेजबान टीम ने निर्धारित 50 ओवरों में आठ विकेट पर 259 रन बनाए। टेलर ने अपनी नाबाद पारी में 105 गेंदों पर 12 चौके और एक छक्का लगाया। उनके अलावा मैल्कम वॉलर ने 42 रनों का योगदान दिया। टेलर और वॉलर ने 83 रनों के कुल योग पर चार विकेट गिर जाने के बाद पांचवें विकेट के लिए 83 रन जोड़कर अपनी टीम को खराब दौर से निकाला। टेलर ने एल्टन चिगुम्बुरा (14) के साथ छठे विकेट के लिए 40 और कीगन मेथ (20) के साथ सातवें विकेट के लिए 29 रन जोड़े। न्यूजीलैंड की ओर से एंडी मैके ने चार विकेट लिए जबकि हरफनमौला जैकब ओरम को तीन सफलता मिली। एक विकेट अपना पहला मैच खेल रहे ग्राहम एल्ड्रिज को मिला। तीन मैचों की श्रृंखला में न्यूजीलैंड टीम 2-0 की बढ़त हासिल कर चुकी है। उसने गुरुवार को खेले गए पहले एकदिवसीय मुकाबले में जिम्बाब्वे को नौ विकेट से हरा दिया था। इससे पहले खेली गई दो मैचों की ट्वेंटी-20 श्रृंखला में भी कीवी टीम ने 2-0 से जीत हासिल की थी। इस श्रृंखला के अंतर्गत दोनों टीमों के बीच एक टेस्ट मैच भी खेला जाएगा। यह मैच बुलावायो में होगा।
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: एक समय कीवी टीम बड़ी आसानी से जीत हासिल करती दिख रही थी लेकिन अंत में मेहमान बल्लेबाजों को जीत के लिए एक लिहाज से संघर्ष करना पड़ा।
19
['hin']
एक सारांश बनाओ: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) ने शनिवार को उपनगर विले पार्ले में भगवान गणेश के दर्शन किए. महाराष्ट्र के एक दिवसीय दौरे पर पहुंचे मोदी ने यहां मनाए जा रहे गणेश उत्सव में हिस्सा लिया और लोकमान्य सेवा संघ (एलएसएस) के मंडप में भगवान गणेश के दर्शन किए. अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरने के बाद मोदी सीधा यहां पहुंचे. महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) हवाई अड्डे पर मोदी का स्वागत करने पहुंचे. कोश्यारी और फडणवीस के अलावा भाजपा की राज्य इकाई के अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल भी मोदी के साथ यहां पूजा अर्चना करने पहुंचे. प्रधानमंत्री ने एलएसएस के अधिकारियों के साथ बातचीत की, जिन्होंने उन्हें स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की एक तस्वीर और एलएसएस की गतिविधियों से संबंधित पुस्तकें भेंट कीं. मोदी ने एलएसएस परिसर में लोकमान्य की आवक्ष प्रतिमा पर माल्यार्पण किया. लोकमान्य ने ब्रितानी शासन के खिलाफ जाकर सार्वजनिक तौर पर गणेश उत्सव मनाने की शुरुआत की थी. एलएसएस 96 वर्ष पुराना एक गैर सरकार संगठन है. मोदी यहां मुम्बई और औरंगाबाद में कई समारोहों में हिस्सा लेंगे.
संक्षिप्त पाठ: पीएम मोदी ने किये भगवान गणेश के दर्शन मुंबई में गणेश उत्सव में लिया हिस्सा बीजेपी के कई बड़े नेता मौके पर मौजूद
30
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा ने आज कहा कि वह अपनी राजनीतिक योजनाओं का जल्द ही खुलासा करेंगे लेकिन बिना किसी हो−हल्ला के।टिप्पणियां अपने जन्मदिन के मौके पर मंदिर गए येदियुरप्पा ने कहा कि उनके समर्थक चाहते हैं कि वह मुख्यमंत्री बनें लेकिन उनका ऐसा कोई इरादा नहीं है हाल ही में येदियुरप्पा ने पार्टी पर मुख्यमंत्री पद के लिए दबाव बनाया था लेकिन बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने खारिज कर दिया। येदियुरप्पा आज अपने घर पर समर्थकों के साथ बैठक करने वाले हैं जिसमें पार्टी के कई विधायक और सांसद शामिल होंगे। बताया जा रहा कि इस बैठक में वह समर्थकों से आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे और इसके बाद वह प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकते हैं। उधर, केन्द्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि कांग्रेस कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा को अपनी पार्टी में शामिल करने को तैयार हैं हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि येदियुरप्पा से मिली जानकारियों की ठीक से जांच करने के बाद ही उन्हें पार्टी में शामिल किया जाएगा। येदियुरप्पा पिछले कुछ दिनों से फिर से मुख्यमंत्री बनने के लिए पार्टी पर दबाव बना रहे थे लेकिन पिछले हफ्ते बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने उनकी मांग खारिज कर दी। इसके बाद येदियुरप्पा और बीजेपी केन्द्रीय नेतृत्व के बीच तनाव बना हुआ है। इस बीच ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि येदियुरप्पा अपनी पार्टी बना सकते हैं या फिर किसी और पार्टी का हाथ थाम सकते हैं। अपने जन्मदिन के मौके पर मंदिर गए येदियुरप्पा ने कहा कि उनके समर्थक चाहते हैं कि वह मुख्यमंत्री बनें लेकिन उनका ऐसा कोई इरादा नहीं है हाल ही में येदियुरप्पा ने पार्टी पर मुख्यमंत्री पद के लिए दबाव बनाया था लेकिन बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने खारिज कर दिया। येदियुरप्पा आज अपने घर पर समर्थकों के साथ बैठक करने वाले हैं जिसमें पार्टी के कई विधायक और सांसद शामिल होंगे। बताया जा रहा कि इस बैठक में वह समर्थकों से आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे और इसके बाद वह प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकते हैं। उधर, केन्द्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि कांग्रेस कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा को अपनी पार्टी में शामिल करने को तैयार हैं हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि येदियुरप्पा से मिली जानकारियों की ठीक से जांच करने के बाद ही उन्हें पार्टी में शामिल किया जाएगा। येदियुरप्पा पिछले कुछ दिनों से फिर से मुख्यमंत्री बनने के लिए पार्टी पर दबाव बना रहे थे लेकिन पिछले हफ्ते बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने उनकी मांग खारिज कर दी। इसके बाद येदियुरप्पा और बीजेपी केन्द्रीय नेतृत्व के बीच तनाव बना हुआ है। इस बीच ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि येदियुरप्पा अपनी पार्टी बना सकते हैं या फिर किसी और पार्टी का हाथ थाम सकते हैं। उधर, केन्द्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि कांग्रेस कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा को अपनी पार्टी में शामिल करने को तैयार हैं हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि येदियुरप्पा से मिली जानकारियों की ठीक से जांच करने के बाद ही उन्हें पार्टी में शामिल किया जाएगा। येदियुरप्पा पिछले कुछ दिनों से फिर से मुख्यमंत्री बनने के लिए पार्टी पर दबाव बना रहे थे लेकिन पिछले हफ्ते बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने उनकी मांग खारिज कर दी। इसके बाद येदियुरप्पा और बीजेपी केन्द्रीय नेतृत्व के बीच तनाव बना हुआ है। इस बीच ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि येदियुरप्पा अपनी पार्टी बना सकते हैं या फिर किसी और पार्टी का हाथ थाम सकते हैं।
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा ने आज कहा कि वह अपनी राजनीतिक योजनाओं का जल्द ही खुलासा करेंगे लेकिन बिना किसी हो−हल्ला के।
3
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: ग्रीस में लगभग दो दशक पहले खोले गए 'सांता क्लॉज डाक घर' में पहली बार बच्चों ने सांता से तोहफे में खिलौनों के साथ-साथ अपने बेरोजगार माता-पिता के लिए नौकरियां मांगी हैं। गौरतलब है कि ग्रीस के ऋण ग्रस्त होने के कारण नौकरियों का संकट पैदा हो गया है। एथेन्स स्थित हेलेनिक डाक मुख्यालय के अधिकारी सांता क्लॉज को भेजे गए पत्र पढ़कर अवाक रह गए। इस मुख्यालय में ही सांता को भेजे गए पत्रों को लाल रंग के विशेष डिब्बों में एकत्रित किया जाता है। क्रेते के दक्षिणी ऐजेएन द्वीप के प्राथामिक स्कूल में पढ़ने वाली छोटी सी मारिया नाम की बच्ची ने अपने पत्र में लिखा, "प्यारे सांता क्लॉज इस साल आप मुझे तोहफे में दो बेबी पैम्पर, दूध, एक पेसिफायर, एक बैंगनी ब्रश और मेरी बहन के लिए नौकरी भेजें।" हालांकि पारम्परिक रूप से बच्चों के लिए क्रिसमस का मतलब मौज-मस्ती है, लेकिन ग्रीस में आर्थिक मंदी के चलते बहुत सारे परिवारों इस बार क्रिसमस पर मौज-मस्ती नहीं कर पा रहे हैं। वेतन में कटौती और आपातकालीन करों की वजह से लोग महंगें तोहफे और दिल खोलकर खर्चा नहीं कर पा रहे हैं। बहुत सारे बच्चों ने सांता को लिखा है कि वह उनके माता-पिता के लिए नौकरियां दें और महंगें खिलौने भेजने की बजाय छुट्टियों के दौरान उनकी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पैसा भेजें। उल्लेखनीय है कि बढ़ता कर्ज ग्रीस के लिए आर्थिक संकट का कारण बना हुआ है। देश का बजट घाटा उसके सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 13 प्रतिशत हो गया है।
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: ग्रीस में लगभग दो दशक पहले खोले गए 'सांता क्लॉज डाक घर' में पहली बार बच्चों ने सांता से तोहफे में खिलौनों के साथ-साथ अपने बेरोजगार माता-पिता के लिए नौकरियां मांगी हैं।
11
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: मायावती सरकार के पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के घर आज सीबीआई के छापे पड़ने शुरू हो गए। उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हो गई है। उन्हें बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने पार्टी से निकाल दिया था और कल ही उन्होंने बीजेपी में शामिल होने का ऐलान किया था। सीबीआई ने यह छापे उत्तर प्रदेश में एनआरएचएम यानी राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के कार्यक्रम में हुए घपले की जांच के सिलसिले में मारे हैं। सीबीआई ने कुछ नए मामले दर्ज किए हैं और दिल्ली और यूपी में करीब 50 जगहों पर छापेमारी कर रही है। बीते साल जब एक के बाद एक यूपी के दो सीएमओ और एक डिप्युटी सीएमओ मारे गए, तो अचानक एनआरएचएम यानी राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन से जुड़े घपले सामने आए। यह बात खुली कि इस मिशन में जो हजारों करोड़ का घोटाला हुआ, उसी को लेकर ये हत्याएं हो रही हैं। मामला सीबीआई के पास गया, जो राज्य में 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के आवंटन की जांच कर रही है। उसे एंबुलेंस, दवाओं और दूसरे सामानों की खरीद में बड़े पैमाने पर घपले मिले हैं। जिन दुकानों और कंपनियों से दवाएं खरीदी गईं, उनका कोई वजूद ही नहीं मिला। इस मामले में यूपी के कई बड़े मंत्री और अफसर जांच के घेरे में है। आज लखनऊ, कानपुर मुरादाबाद और दिल्ली में इसी सिलसिले में सीबीआई ने छापे मारे हैं।
संक्षिप्त सारांश: मायावती सरकार के पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के घर आज सीबीआई के छापे पड़ने शुरू हो गए। उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हो गई है।
0
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में 'जाको राखे साइयां मार सके न कोय' वाली कहावत चरितार्थ साबित हुई है क्योंकि यहां जमीन में दफनाई गई नवजात बालिका को जिंदा बचा लिया गया है। पुलिस के मुताबिक मामला बुरहानपुर जिले के शिकारपुरा थाना क्षेत्र के बोहरड़ा गांव का है। इस गांव के एक किसान वासुदेव रघुनाथ गुरुवार को अपने खेत में काम कर रहे थे तभी उन्हें एक बच्ची के रोने के आवाज सुनाई दी। रघुनाथ ने मौके पर जाकर देखा तो जमीन में बच्ची का सिर नजर आया। नवजात बच्ची अभी जीवित थी। वासुदेव ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बच्ची को निकालकर अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज चल रहा है। बच्ची का जन्म एक दिन पहले का ही बताया जा रहा है। बच्ची को देखने अस्पताल पहुंची स्कूली शिक्षा मंत्री अर्चना चिटनीस ने कहा कि समाज बेटी के जिम्मेदारी का निर्वहन करने से कतराने लगा है और यह घटना इसका उदाहरण है। अस्पताल के एक चिकित्सक ने बताया कि बच्ची सही सलामत है और खतरे से बाहर है। शिकारपुरा थाने के प्रभारी अमित तिवारी ने बताया कि अज्ञात माता-पिता के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और बच्ची को उपचार के लिए बुरहानपुर से इंदौर ले जाया जा रहा है। ज्ञात हो कि राज्य में शिशु लिंगानुपात में आ रही गिरावट के चलते ही सरकार ने पांच अक्टूबर से 'बेटी बचाओ अभियान' शुरू किया है।
यहाँ एक सारांश है:मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में जमीन में दफनाई गई नवजात बालिका को जिंदा बचा लिया गया है।
4
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: भोजपुरी सिनेमा (Bhojpuri Cinema) के धुरंधर एक्टर और सिंगर रितेश पांडे (Ritesh Pandey) ने इन दिनों यूट्यूब (YouTube) पर धमाल मचा रखा है. उनकी फिल्म 'नाचे नागिन गली गली (Nache Nagin Gali Gali)' यूट्यूब पर कहरा बरपाए हुए है. रितेश पांडे की फिल्म 'नाचे नागिन गली गली' को यूट्यूब (YouTube) पर खूब देखा जा रहा है, और इस फिल्म ने गरदा उड़ा कर रखा हुआ है. भोजपुरी फिल्म 'नाचे नागिन गली गली' में रितेश पांडे (Ritesh Pandey) के अलावा भोजपुरी एक्ट्रेस प्रियंका पंडित (Priyanka Pandit) और निशा दुबे (Nisha Dubey) भी लीड रोल में हैं. रितेश पांडेय की भोजपुरी फिल्म (Bhojpuri Film) की कहानी इच्छाधारी नागों को लेकर हो रहा है, और इसे खूब पसंद किया जा रहा है.   रितेश पांडे (Ritesh Pandey) प्रियंका पंडित (Priyanka Pandit) और निशा दुबे (Nisha Dubey) की भोजपुरी फिल्म (Bhojpuri Film) 'नाचे नागिन गली गली (Nache Nagin Gali Gali)' 24 अगस्त को यूट्यूब पर रिलीज हुई थी, और पिछले 24 दिन में इसे 1.41 करोड़ बार देखा जा चुका है. इसी बात से इस फिल्म की लोकप्रियता का अंदाज लगाया जा सकात है. इसको जबरदस्त अंदाज में लाइक्स भी मिल रहे हैं. वैसे भी रितेश पांडे के सॉन्ग भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल होते हैं, और सिंगिंग की जबरदस्त फैन फॉलोइंग भी है. इस बात का इशारा उनके कई सॉन्ग से मिल जाता है. रितेश पांडे (Ritesh Pandey) कुछ समय पहले भोजपुरी की यूट्यूब क्वीन आम्रपाली दुबे के साथ 'सैंया थानेदार' फिल्म में भी नजर आए थे.
संक्षिप्त सारांश: भोजपुरी फिल्म का यूट्यूब पर हंगामा रितेश पांडे हैं लीड रोल में प्रियंका पंडित और निशा दुबे भी हैं फिल्म में
29
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने रविवार को संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार पर देश को असुरक्षा और दुख में धकेलने का आरोप लगाते हुए जनता से अगले साल प्रस्तावित लोकसभा चुनाव में निर्णायक फेरबदल करने का आह्वान किया। बीजेपी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में रविवार को स्वीकृत राजनीतिक प्रस्ताव में यूपीए सरकार पर भ्रष्टाचार में डूबे होने और देश को असुरिक्षत तथा दुखी माहौल देने का आरोप लगाया गया। पार्टी ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के विस्तार की आवश्यकता पर भी बदल दिया। प्रस्ताव में कहा गया है, यूपीए 'असुरक्षित भारत' और 'पीड़ित भारत' की विरासत छोड़ रही है। देश को बीजेपी के नेतृत्व में एनडीए द्वारा इस स्थिति से उबारने की आवश्यकता है। यह देश के जागने का वक्त है। वक्त आ गया है कि एनडीए को मजबूत बनाया जाए और निर्णायक बदलाव लाए जाएं, चाहे जब भी चुनाव हों।टिप्पणियां इसमें कहा गया है कि लोग पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार को याद करते हैं, जिसने देश में उम्मीद, उत्साह, विकास, भागीदारी, महंगाई पर नियंत्रण और अच्छा महसूस करने का माहौल दिया। प्रस्ताव में कहा गया है कि एनडीए शासित अधिकतर राज्यों ने रिकॉर्ड 10 प्रतिशत से अधिक विकास दर हासिल की है। युवाओं को संबोधित करते हुए इसमें कहा गया है कि बीजेपी देश को सभी क्षेत्रों में संपूर्ण विकास के साथ भद्र देशों की श्रेणी में उचित स्थान दिलाएगा। इसमें कहा गया है, विकल्प स्पष्ट हैं- देश को कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए सरकार के कुशासन से मुक्ति दिलाने के लिए बीजेपी के नेतृत्व में एनडीए ही एकमात्र विकल्प है। राष्ट्रीय परिषद सभी पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील करती है कि वे इस उद्देश्य के लिए स्वयं को समर्पित करें। बीजेपी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में रविवार को स्वीकृत राजनीतिक प्रस्ताव में यूपीए सरकार पर भ्रष्टाचार में डूबे होने और देश को असुरिक्षत तथा दुखी माहौल देने का आरोप लगाया गया। पार्टी ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के विस्तार की आवश्यकता पर भी बदल दिया। प्रस्ताव में कहा गया है, यूपीए 'असुरक्षित भारत' और 'पीड़ित भारत' की विरासत छोड़ रही है। देश को बीजेपी के नेतृत्व में एनडीए द्वारा इस स्थिति से उबारने की आवश्यकता है। यह देश के जागने का वक्त है। वक्त आ गया है कि एनडीए को मजबूत बनाया जाए और निर्णायक बदलाव लाए जाएं, चाहे जब भी चुनाव हों।टिप्पणियां इसमें कहा गया है कि लोग पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार को याद करते हैं, जिसने देश में उम्मीद, उत्साह, विकास, भागीदारी, महंगाई पर नियंत्रण और अच्छा महसूस करने का माहौल दिया। प्रस्ताव में कहा गया है कि एनडीए शासित अधिकतर राज्यों ने रिकॉर्ड 10 प्रतिशत से अधिक विकास दर हासिल की है। युवाओं को संबोधित करते हुए इसमें कहा गया है कि बीजेपी देश को सभी क्षेत्रों में संपूर्ण विकास के साथ भद्र देशों की श्रेणी में उचित स्थान दिलाएगा। इसमें कहा गया है, विकल्प स्पष्ट हैं- देश को कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए सरकार के कुशासन से मुक्ति दिलाने के लिए बीजेपी के नेतृत्व में एनडीए ही एकमात्र विकल्प है। राष्ट्रीय परिषद सभी पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील करती है कि वे इस उद्देश्य के लिए स्वयं को समर्पित करें। प्रस्ताव में कहा गया है, यूपीए 'असुरक्षित भारत' और 'पीड़ित भारत' की विरासत छोड़ रही है। देश को बीजेपी के नेतृत्व में एनडीए द्वारा इस स्थिति से उबारने की आवश्यकता है। यह देश के जागने का वक्त है। वक्त आ गया है कि एनडीए को मजबूत बनाया जाए और निर्णायक बदलाव लाए जाएं, चाहे जब भी चुनाव हों।टिप्पणियां इसमें कहा गया है कि लोग पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार को याद करते हैं, जिसने देश में उम्मीद, उत्साह, विकास, भागीदारी, महंगाई पर नियंत्रण और अच्छा महसूस करने का माहौल दिया। प्रस्ताव में कहा गया है कि एनडीए शासित अधिकतर राज्यों ने रिकॉर्ड 10 प्रतिशत से अधिक विकास दर हासिल की है। युवाओं को संबोधित करते हुए इसमें कहा गया है कि बीजेपी देश को सभी क्षेत्रों में संपूर्ण विकास के साथ भद्र देशों की श्रेणी में उचित स्थान दिलाएगा। इसमें कहा गया है, विकल्प स्पष्ट हैं- देश को कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए सरकार के कुशासन से मुक्ति दिलाने के लिए बीजेपी के नेतृत्व में एनडीए ही एकमात्र विकल्प है। राष्ट्रीय परिषद सभी पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील करती है कि वे इस उद्देश्य के लिए स्वयं को समर्पित करें। इसमें कहा गया है कि लोग पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार को याद करते हैं, जिसने देश में उम्मीद, उत्साह, विकास, भागीदारी, महंगाई पर नियंत्रण और अच्छा महसूस करने का माहौल दिया। प्रस्ताव में कहा गया है कि एनडीए शासित अधिकतर राज्यों ने रिकॉर्ड 10 प्रतिशत से अधिक विकास दर हासिल की है। युवाओं को संबोधित करते हुए इसमें कहा गया है कि बीजेपी देश को सभी क्षेत्रों में संपूर्ण विकास के साथ भद्र देशों की श्रेणी में उचित स्थान दिलाएगा। इसमें कहा गया है, विकल्प स्पष्ट हैं- देश को कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए सरकार के कुशासन से मुक्ति दिलाने के लिए बीजेपी के नेतृत्व में एनडीए ही एकमात्र विकल्प है। राष्ट्रीय परिषद सभी पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील करती है कि वे इस उद्देश्य के लिए स्वयं को समर्पित करें। युवाओं को संबोधित करते हुए इसमें कहा गया है कि बीजेपी देश को सभी क्षेत्रों में संपूर्ण विकास के साथ भद्र देशों की श्रेणी में उचित स्थान दिलाएगा। इसमें कहा गया है, विकल्प स्पष्ट हैं- देश को कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए सरकार के कुशासन से मुक्ति दिलाने के लिए बीजेपी के नेतृत्व में एनडीए ही एकमात्र विकल्प है। राष्ट्रीय परिषद सभी पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील करती है कि वे इस उद्देश्य के लिए स्वयं को समर्पित करें।
संक्षिप्त सारांश: बीजेपी ने यूपीए सरकार पर देश को असुरक्षा और दुख में धकेलने का आरोप लगाते हुए जनता से अगले साल प्रस्तावित लोकसभा चुनाव में निर्णायक फेरबदल करने का आह्वान किया।
10
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: देश के शेयर बाजारों में सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिवस शुक्रवार को तेजी का रुख देखा गया। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 117.11 अंकों की बढ़त के साथ 16154.62 पर जबकि निफ्टी 34.75 अंकों की बढ़त के साथ 4866.00 पर बंद हुआ। सुबह बम्बई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 107.06 अंकों की बढ़त के साथ 16144.57 पर जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 30.70 अंकों की बढ़त के साथ 4861.95 पर खुला। कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने 16257.34 के ऊपरी और 16049.78 के निचले स्तर को छुआ। निफ्टी ने 4898.85 के ऊपरी और 4834.20 के निचले स्तर तक कारोबार किया। सेंसेक्स में शामिल टाटा स्टील (7.11 फीसदी), कोल इंडिया (5.56 फीसदी), एल एंड टी (3.84 फीसदी), एनटीपीसी (3.11 फीसदी) और जिंदल स्टील (3.07 फीसदी) के शेयरों में तीन फीसदी से अधिक की तेजी जबकि गेल इंडिया (3.19 फीसदी), बजाज ऑटो (2.96 फीसदी), मारुति सुजुकी (1.89 फीसदी), हीरो होंडा (1.25 फीसदी) और सन फार्मा (1.19 फीसदी) के शेयरों में एक फीसदी से अधिक की गिरावट आई। बीएसई के कुल 13 सेक्टरों में से केवल तीन में गिरावट जबकि 10 में तेजी का रुख देखा गया। धातु (3.21 फीसदी), पूंजीगत वस्तु (2.86 फीसदी), ऊर्जा (2.39 फीसदी) और रियल्टी (2.12 फीसदी) में सबसे अधिक तेजी जबकि उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु (0.40 फीसदी), तेल एवं गैस (0.38 फीसदी) और सूचना प्रौद्योगिकी (0.04 फीसदी) सेक्टर में गिरावट दर्ज की गई। कारोबार का रुख सकारात्मक रहा। कुल 1897 कम्पनियों के शेयरों में तेजी जबकि 903 कम्पनियों के शेयरों में गिरावट आई। बीएसई के मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी तेजी का रुख देखा गया। मिडकैप 62.75 अंकों की तेजी के साथ 5582.34 पर जबकि स्मॉलकैप 87.48 अंकों की गिरावट के साथ 6171.75 पर बंद हुआ।
यह एक सारांश है: प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 117.11 अंकों की बढ़त के साथ 16154.62 पर जबकि निफ्टी 34.75 अंकों की बढ़त के साथ 4866.00 पर बंद हुआ।
16
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: रूस, भारत के साथ हुए सौदे के तहत इस साल भारतीय वायु सेना (आईएएफ) को 4 प्लस प्लस पीढ़ी के छह और जेट लड़ाकू विमानों की आपूर्ति करेगा। यह जानकारी विमानन कंपनी एमआईजी ने बुधवार को दी। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, एमआईजी के महानिदेशक सर्गेई कोरोटकोव ने एमएकेएस हवाई शो के दौरान संवाददाताओं से कहा,  भारत के पास फिलहाल 21 विमान हैं। इस सौदे के तहत 2015 तक 29 और विमानों की आपूर्ति की जाएगी। पिछले साल हमने चार विमानों की आपूर्ति की थी। इस साल हमने एक विमान सौंप दिया है और छह शेष सौंपे जाने हैं। छह दिन चलने वाला एमएकेएस शो मॉस्को के बाहर स्थित जुकोवस्की शहर में मंगलवार को शुरू हुआ है।टिप्पणियां एमआईजी ने 2010 में भारत के साथ 1.5 अरब डॉलर का सौदा किया था जिसके अंतर्गत 29 एमआईजी-29के-केयूबी लड़ाकू विमान देने की सहमति बनी थी। कंपनी की प्रवक्ता एलेना फेदोरोवा ने बताया कि एमएकेएस शो के दौरान रूसी कंपनी ने भारत के साथ 5.5 करोड़ डॉलर के दो और सौदे किए जिसके अंतर्गत यह भारत में एमआईजी के विमानों और भारी मशीनों के रखरखाव के लिए केंद्र स्थापित करेगा। इसने यह सौदा अपने साझीदार बसंत एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड के साथ मिलकर किया है। एमआईजी ने 2005 में 4 प्लस प्लस पीढ़ी के इस विमान का उत्पादन शुरू किया था। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, एमआईजी के महानिदेशक सर्गेई कोरोटकोव ने एमएकेएस हवाई शो के दौरान संवाददाताओं से कहा,  भारत के पास फिलहाल 21 विमान हैं। इस सौदे के तहत 2015 तक 29 और विमानों की आपूर्ति की जाएगी। पिछले साल हमने चार विमानों की आपूर्ति की थी। इस साल हमने एक विमान सौंप दिया है और छह शेष सौंपे जाने हैं। छह दिन चलने वाला एमएकेएस शो मॉस्को के बाहर स्थित जुकोवस्की शहर में मंगलवार को शुरू हुआ है।टिप्पणियां एमआईजी ने 2010 में भारत के साथ 1.5 अरब डॉलर का सौदा किया था जिसके अंतर्गत 29 एमआईजी-29के-केयूबी लड़ाकू विमान देने की सहमति बनी थी। कंपनी की प्रवक्ता एलेना फेदोरोवा ने बताया कि एमएकेएस शो के दौरान रूसी कंपनी ने भारत के साथ 5.5 करोड़ डॉलर के दो और सौदे किए जिसके अंतर्गत यह भारत में एमआईजी के विमानों और भारी मशीनों के रखरखाव के लिए केंद्र स्थापित करेगा। इसने यह सौदा अपने साझीदार बसंत एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड के साथ मिलकर किया है। एमआईजी ने 2005 में 4 प्लस प्लस पीढ़ी के इस विमान का उत्पादन शुरू किया था। छह दिन चलने वाला एमएकेएस शो मॉस्को के बाहर स्थित जुकोवस्की शहर में मंगलवार को शुरू हुआ है।टिप्पणियां एमआईजी ने 2010 में भारत के साथ 1.5 अरब डॉलर का सौदा किया था जिसके अंतर्गत 29 एमआईजी-29के-केयूबी लड़ाकू विमान देने की सहमति बनी थी। कंपनी की प्रवक्ता एलेना फेदोरोवा ने बताया कि एमएकेएस शो के दौरान रूसी कंपनी ने भारत के साथ 5.5 करोड़ डॉलर के दो और सौदे किए जिसके अंतर्गत यह भारत में एमआईजी के विमानों और भारी मशीनों के रखरखाव के लिए केंद्र स्थापित करेगा। इसने यह सौदा अपने साझीदार बसंत एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड के साथ मिलकर किया है। एमआईजी ने 2005 में 4 प्लस प्लस पीढ़ी के इस विमान का उत्पादन शुरू किया था। एमआईजी ने 2010 में भारत के साथ 1.5 अरब डॉलर का सौदा किया था जिसके अंतर्गत 29 एमआईजी-29के-केयूबी लड़ाकू विमान देने की सहमति बनी थी। कंपनी की प्रवक्ता एलेना फेदोरोवा ने बताया कि एमएकेएस शो के दौरान रूसी कंपनी ने भारत के साथ 5.5 करोड़ डॉलर के दो और सौदे किए जिसके अंतर्गत यह भारत में एमआईजी के विमानों और भारी मशीनों के रखरखाव के लिए केंद्र स्थापित करेगा। इसने यह सौदा अपने साझीदार बसंत एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड के साथ मिलकर किया है। एमआईजी ने 2005 में 4 प्लस प्लस पीढ़ी के इस विमान का उत्पादन शुरू किया था। कंपनी की प्रवक्ता एलेना फेदोरोवा ने बताया कि एमएकेएस शो के दौरान रूसी कंपनी ने भारत के साथ 5.5 करोड़ डॉलर के दो और सौदे किए जिसके अंतर्गत यह भारत में एमआईजी के विमानों और भारी मशीनों के रखरखाव के लिए केंद्र स्थापित करेगा। इसने यह सौदा अपने साझीदार बसंत एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड के साथ मिलकर किया है। एमआईजी ने 2005 में 4 प्लस प्लस पीढ़ी के इस विमान का उत्पादन शुरू किया था।
संक्षिप्त पाठ: रूस, भारत के साथ हुए सौदे के तहत इस साल भारतीय वायु सेना को 4 प्लस प्लस पीढ़ी के छह और जेट लड़ाकू विमानों की आपूर्ति करेगा। यह जानकारी विमानन कंपनी एमआईजी ने बुधवार को दी।
22
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: सचिन तेंदुलकर के संन्यास को लेकर बढ़ रही बहस के बीच इंग्लैंड के पूर्व बल्लेबाज जैफरी बायकॉट ने कहा कि इस स्टार बल्लेबाज के पास फॉर्म दोबारा हासिल करने के लिए पर्याप्त अनुभव और परिपक्वता मौजूद है। बायकॉट से जब यह पूछा गया कि क्या तेंदुलकर को रिकी पोंटिंग की तरह संन्यास ले लेना चाहिए, बायकॉट ने कहा, एक क्रिकेटर के रूप में हम सभी को रन बनाने होते हैं। यह खेल की प्रकृति है कि गेंदबाज विकेट चटकाते हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप 21 बरस के हैं या 39 बरस के। उसके पास रन बनाने के लिए अनुभव और परिपक्वता मौजूद है। उसे सिर्फ कुछ रनों की जरूरत है। इंग्लैंड के खिलाफ शुरू हो रहे तीसरे क्रिकेट टेस्ट के बारे में पूछने पर बायकॉट ने कहा कि भारत को घरेलू हालात का फायदा मिलेगा। बायकॉट से जब यह पूछा गया कि क्या तेंदुलकर को रिकी पोंटिंग की तरह संन्यास ले लेना चाहिए, बायकॉट ने कहा, एक क्रिकेटर के रूप में हम सभी को रन बनाने होते हैं। यह खेल की प्रकृति है कि गेंदबाज विकेट चटकाते हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप 21 बरस के हैं या 39 बरस के। उसके पास रन बनाने के लिए अनुभव और परिपक्वता मौजूद है। उसे सिर्फ कुछ रनों की जरूरत है। इंग्लैंड के खिलाफ शुरू हो रहे तीसरे क्रिकेट टेस्ट के बारे में पूछने पर बायकॉट ने कहा कि भारत को घरेलू हालात का फायदा मिलेगा।
यह एक सारांश है: सचिन तेंदुलकर के संन्यास को लेकर बढ़ रही बहस के बीच इंग्लैंड के पूर्व बल्लेबाज जैफरी बायकॉट ने कहा कि इस स्टार बल्लेबाज के पास फॉर्म दोबारा हासिल करने के लिए पर्याप्त अनुभव और परिपक्वता मौजूद है।
2
['hin']
एक सारांश बनाओ: हाशिम अमला (नाबाद 116) और मोर्न वान वेक (56) की उम्दा बल्लेबाजी की बदौलत दक्षिण अफ्रीका ने सुपर स्पोर्ट मैदान पर खेले जा रहे पांचवें और निर्णायक एकदिवसीय मुकाबले में भारत के सामने जीत के लिए 268 रन का लक्ष्य रखा है। बारिश से बाधित इस मैच में यूं तो दक्षिण अफ्रीका ने पहले पहले बल्लेबाजी करते हुए 46 ओवरों में नौ विकेट के नुकसान पर 250 रन बनाए लेकिन डकवर्थ लुईस पद्धति के अनुसार भारत को 46 ओवरों को जीत के लिए 268 रनों का लक्ष्य दिया गया। बारिश के चलते मैच लगभग 45 मिनट बाधित रहा। बारिश के कारण कुल ओवरों में कटौती कर दी गई और मैच 46-46 ओवरों का कर दिया गया। सलामी बल्लेबाज ग्रीम स्मिथ के रूप में अफ्रीका का पहला विकेट गिरा। वह सात रन के निजी योग पर जहीर खान की गेंद पर यूसुफ पठान के हाथों लपके गए। स्मिथ का विकेट 16 के योग पर गिरा। मोर्न वान वेक ने 63 गेंदों पर आठ चौकों की मदद से 56 रन बनाए। वेक को युवराज सिंह ने अपनी गेंद पर कैच आउट किया। वेक ने दूसरे विकेट के लिए अमला के साथ मिलकर 97 रनों की साझेदारी की। अमला ने 132 गेंदों पर नौ चौके लगाए जबकि वेक ने 63 गेंदों पर आठ चौके लगाए। अब्राहम डिविलियर्स 12 गेंदों पर एक चौके की मदद से 11 रन बनाकर युवराज की गेंद पर धोनी के हाथों स्टम्प आउट हुए। जेपी ड्यूमिनी ने 44 गेंदों पर एक चौके की मदद से 35 रन बनाए। ड्यूमिनी को मुनाफ पटेल ने अपनी गेंद पर कैच आउट किया। ड्यूमिनी ने अमला के साथ मिलकर चौथे विकेट के लिए 102 रनों की साझेदारी की। इसके बाद फाफ डू प्लेसी (8), रॉबिन पीटरसन (4) और जोहान बोथा (2) ने निराश किए जबकि डेल स्टेन और मोर्न मोर्कल बिना खाता खोले आउट हुए। लोनवाबो त्सोत्सोबे बिना कोई रन बनाए नाबाद लौटे। भारत की ओर से मुनाफ पटेल ने सर्वाधिक तीन विकेट चटकाए जबकि जहीर खान ओर युवराज सिंह ने दो-दो विकेट झटके। भारत ने टॉस जीतकर पहले क्षेत्ररक्षण का फैसला किया। इस श्रृंखला में दोनों टीमें 2-2 की बराबरी पर हैं। भारत की ओर से आशीष नेहरा की जगह पीयूष चावला को टीम में शामिल किया गया है जबकि दक्षिण अफ्रीका की टीम में कोई भी बदलाव नहीं किया गया है।
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: द. अफ्रीका ने सुपर स्पोर्ट मैदान पर खेले जा रहे पांचवें और निर्णायक एकदिवसीय मुकाबले में भारत के सामने जीत के लिए 268 रन का लक्ष्य रखा है।
32
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: थाइलैंड में सात प्रेमी जोड़ों ने चुंबन लेने का अपने किस्म का अनोखा विश्व रिकॉर्ड बनाया है। इन प्रेमी जोड़ों ने लगातार 32 घंटे से अधिक समय तक अपने साथी का चुंबन लिया। हालांकि ये थक कर चूर हो चुके थे लेकिन इनके लब अलग होने का नाम नहीं ले रहे थे और नया रिकॉर्ड बनने के बाद भी चुंबन लेने का सिलसिला जारी था। इससे पहले इस प्रकार का विश्व रिकार्ड 32 घंटे , सात मिनट और 14 सेकेंड का था जिसे जर्मनी में बनाया गया था। नया रिकार्ड बनाने वाले जोड़ों को इस प्रतियोगिता में 3250 डालर और एक हीरे की अंगूठी इनाम में दी गई। पटाया के रिजार्ट में लुईस तुसाद वैक्सवर्क्‍स के प्रबंधक निदेशक सोमपोर्न नाक्सूट्रोंग ने बताया, हमें इस बात की खुशी है कि हमने एक नया रिकार्ड बनाया। वेलेंटाइन डे पर इस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। उन्होंने कहा, लेकिन साथ ही मैं अपने प्रतिभागियों को लेकर चिंतित हूं। वे बहुत थके हुए लग रहे थे। हमने उनके लिए चिकित्सा सुविधा तैयार रखी है, जैसे ही आयोजन खत्म होगा, डाक्टर उन्हें चिकित्सा सुविधा मुहैया कराएंगे। उन्होंने बताया कि वह विशेष रूप से एक 51 वर्षीय महिला और उनके 37 वर्षीय पति को लेकर अधिक चिंतित हैं। उन्होंने बताया,पत्नी थक चुकी है लेकिन हार मानने को तैयार नहीं है। वह बुरी तरह थकी हुई है लेकिन पहले ही एक नोट लिखकर हमें दे चुकी है कि वह चुंबन लेने का सिलसिला बंद करने वाली अंतिम जोड़ी होगी। मुझे लगता है कि वे बेहोश होने तक जुटे रहेंगे। इस प्रतियोगिता में 14 जोड़े शामिल हुए और वे बिना रूके रात में भी चुंबन लेते रहे और पाइप से तरल पदार्थ लेने या अपने साथी के साथ बाथरूम जाने के दौरान भी यह सिलसिला थमा नहीं। इसमें से सात जोड़े अगले चरण में पहुंचने में विफल रहे।
सारांश: प्रेमी जोड़ों ने लगातार 32 घंटे से अधिक समय तक अपने साथी का चुंबन लिया। हालांकि ये थक कर चूर हो चुके थे लेकिन इनके लब अलग होने का नाम नहीं ले रहे थे।
33
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: शराब पीकर गाड़ी चलाने की बढ़ती प्रवृत्ति के चलते एक अदालत ने शहर पुलिस प्रमुख को वाहन दुर्घटनाओं में शामिल वाहन चालकों का श्वास परीक्षण करना जरूरी किए जाने का आदेश दिया है। वाहन दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण :एमएसीटी: की न्यायाधीश न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने इस बारे में दिल्ली पुलिस आयुक्त से कहा कि इस संबंध में पहले भी कई बार दिशानिर्देश जारी किए गए, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। न्यायाधीश ने कहा, एक बार फिर यह निर्देश दिया जाता है कि ऐसे मामलों की जांच कर रहे सभी पुलिस थानों को जरूरी दिशानिर्देश दिए जाएं, खास तौर पर एमएसीटी से जुड़ी शाखाओं में.. कि ऐसे परीक्षण जरूरी किए जाएं और दुर्घटना की विस्तृत रिपोर्ट के साथ इसकी रिपोर्ट भी जमा की जाए। अदालत के मुताबिक, इस आदेश की प्रति आज ही पुलिस आयुक्त को भेजी जाए और इन दिशानिर्देशों को सभी संबंधित डीसीपी स्तर के अधिकारियों तक भेज दिया जाए.. ताकि वे जरूरी कार्रवाई कर सकें। न्यायाधीश ने इस बारे में डीसीपी, मध्य जिले को इस संबंध में 10 दिन में रिपोर्ट जमा करने को कहा है।
यहाँ एक सारांश है:एक अदालत ने शहर पुलिस प्रमुख को वाहन दुर्घटनाओं में शामिल वाहन चालकों का श्वास परीक्षण करना जरूरी किए जाने का आदेश दिया है।
17
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: दर्जन भर अमेरिकी कारोबारी समूहों ने अमेरिकी वित्त मंत्री टिमोथी गीथनर से कहा है कि वह भारत के सामने उनकी यह चिंता रखें कि भारत में कर कानूनों में कुछ प्रस्तावित बदलावों से उनके लिए निवेश का माहौल खराब होगा। कारोबारी समूहों ने मंगलवार को गीथनर को एक पत्र लिखकर कहा, "प्रस्तावित संशोधनों का हमारी कम्पनी, ग्राहकों और शेयरधारकों और भारत में निवेश करने वालों पर नकारात्मक असर होगा।" केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के सामने उनकी चिंता रखने के लिए कहने वालों में अमेरिका चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स, अमेरिका-भारत व्यापार परिषद, फाइनेंशियल सर्विसेज फोरम जैसे समूह शामिल हैं। मुखर्जी इस समय विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की सलाना वसंत बैठक में हिस्सा लेने के लिए वाशिंगटन में हैं। उनकी गुरुवार को गीथनर से द्विपक्षीय बैठक तय है। कारोबारी समूहों ने कहा कि भारत के नए संशोधन प्रस्तावों में शामिल प्रतिगामी प्रभाव से कर वसूली, व्यापक और अस्पष्ट जनरल एंटी-एब्यूज रूल (जीएएआर) और परोक्ष शेयर हस्तांतरण पर करारोपण अंतर्राष्ट्रीय कर नीति और मानकों के अनुरूप नहीं है और इससे कानून के शासन की सोच को नुकसान पहुंचेगा। उन्होंने कहा, "हम आपको इस सप्ताह विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की बैठक के दौरान यह मुद्दा उठाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।"टिप्पणियां उन्होंने यह माना कि हर देश को कानून बनाने का अधिकार है लेकिन साथ ही कहा कि नए भारतीय कानून से कई तरह की समस्या आएगी। उन्होंने कहा कि वित्त विधेयक 2012 में दो दर्जन संशोधन होने हैं और इससे कम्पनियों के लिए 50 साल पीछे तक कर देयता पैदा हो सकती है। उन्होंने भारतीय अधिकारियों के इस तर्क को गलत कहा कि प्रतिगामी प्रावधान वैश्विक कर प्रचलन के अनुरूप है और कहा संशोधनों का दायरा काफी व्यापक है और यह काफी पुरानी अवधि तक के लिए प्रभावी हो सकता है। कारोबारी समूहों ने मंगलवार को गीथनर को एक पत्र लिखकर कहा, "प्रस्तावित संशोधनों का हमारी कम्पनी, ग्राहकों और शेयरधारकों और भारत में निवेश करने वालों पर नकारात्मक असर होगा।" केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के सामने उनकी चिंता रखने के लिए कहने वालों में अमेरिका चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स, अमेरिका-भारत व्यापार परिषद, फाइनेंशियल सर्विसेज फोरम जैसे समूह शामिल हैं। मुखर्जी इस समय विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की सलाना वसंत बैठक में हिस्सा लेने के लिए वाशिंगटन में हैं। उनकी गुरुवार को गीथनर से द्विपक्षीय बैठक तय है। कारोबारी समूहों ने कहा कि भारत के नए संशोधन प्रस्तावों में शामिल प्रतिगामी प्रभाव से कर वसूली, व्यापक और अस्पष्ट जनरल एंटी-एब्यूज रूल (जीएएआर) और परोक्ष शेयर हस्तांतरण पर करारोपण अंतर्राष्ट्रीय कर नीति और मानकों के अनुरूप नहीं है और इससे कानून के शासन की सोच को नुकसान पहुंचेगा। उन्होंने कहा, "हम आपको इस सप्ताह विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की बैठक के दौरान यह मुद्दा उठाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।"टिप्पणियां उन्होंने यह माना कि हर देश को कानून बनाने का अधिकार है लेकिन साथ ही कहा कि नए भारतीय कानून से कई तरह की समस्या आएगी। उन्होंने कहा कि वित्त विधेयक 2012 में दो दर्जन संशोधन होने हैं और इससे कम्पनियों के लिए 50 साल पीछे तक कर देयता पैदा हो सकती है। उन्होंने भारतीय अधिकारियों के इस तर्क को गलत कहा कि प्रतिगामी प्रावधान वैश्विक कर प्रचलन के अनुरूप है और कहा संशोधनों का दायरा काफी व्यापक है और यह काफी पुरानी अवधि तक के लिए प्रभावी हो सकता है। केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के सामने उनकी चिंता रखने के लिए कहने वालों में अमेरिका चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स, अमेरिका-भारत व्यापार परिषद, फाइनेंशियल सर्विसेज फोरम जैसे समूह शामिल हैं। मुखर्जी इस समय विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की सलाना वसंत बैठक में हिस्सा लेने के लिए वाशिंगटन में हैं। उनकी गुरुवार को गीथनर से द्विपक्षीय बैठक तय है। कारोबारी समूहों ने कहा कि भारत के नए संशोधन प्रस्तावों में शामिल प्रतिगामी प्रभाव से कर वसूली, व्यापक और अस्पष्ट जनरल एंटी-एब्यूज रूल (जीएएआर) और परोक्ष शेयर हस्तांतरण पर करारोपण अंतर्राष्ट्रीय कर नीति और मानकों के अनुरूप नहीं है और इससे कानून के शासन की सोच को नुकसान पहुंचेगा। उन्होंने कहा, "हम आपको इस सप्ताह विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की बैठक के दौरान यह मुद्दा उठाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।"टिप्पणियां उन्होंने यह माना कि हर देश को कानून बनाने का अधिकार है लेकिन साथ ही कहा कि नए भारतीय कानून से कई तरह की समस्या आएगी। उन्होंने कहा कि वित्त विधेयक 2012 में दो दर्जन संशोधन होने हैं और इससे कम्पनियों के लिए 50 साल पीछे तक कर देयता पैदा हो सकती है। उन्होंने भारतीय अधिकारियों के इस तर्क को गलत कहा कि प्रतिगामी प्रावधान वैश्विक कर प्रचलन के अनुरूप है और कहा संशोधनों का दायरा काफी व्यापक है और यह काफी पुरानी अवधि तक के लिए प्रभावी हो सकता है। मुखर्जी इस समय विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की सलाना वसंत बैठक में हिस्सा लेने के लिए वाशिंगटन में हैं। उनकी गुरुवार को गीथनर से द्विपक्षीय बैठक तय है। कारोबारी समूहों ने कहा कि भारत के नए संशोधन प्रस्तावों में शामिल प्रतिगामी प्रभाव से कर वसूली, व्यापक और अस्पष्ट जनरल एंटी-एब्यूज रूल (जीएएआर) और परोक्ष शेयर हस्तांतरण पर करारोपण अंतर्राष्ट्रीय कर नीति और मानकों के अनुरूप नहीं है और इससे कानून के शासन की सोच को नुकसान पहुंचेगा। उन्होंने कहा, "हम आपको इस सप्ताह विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की बैठक के दौरान यह मुद्दा उठाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।"टिप्पणियां उन्होंने यह माना कि हर देश को कानून बनाने का अधिकार है लेकिन साथ ही कहा कि नए भारतीय कानून से कई तरह की समस्या आएगी। उन्होंने कहा कि वित्त विधेयक 2012 में दो दर्जन संशोधन होने हैं और इससे कम्पनियों के लिए 50 साल पीछे तक कर देयता पैदा हो सकती है। उन्होंने भारतीय अधिकारियों के इस तर्क को गलत कहा कि प्रतिगामी प्रावधान वैश्विक कर प्रचलन के अनुरूप है और कहा संशोधनों का दायरा काफी व्यापक है और यह काफी पुरानी अवधि तक के लिए प्रभावी हो सकता है। कारोबारी समूहों ने कहा कि भारत के नए संशोधन प्रस्तावों में शामिल प्रतिगामी प्रभाव से कर वसूली, व्यापक और अस्पष्ट जनरल एंटी-एब्यूज रूल (जीएएआर) और परोक्ष शेयर हस्तांतरण पर करारोपण अंतर्राष्ट्रीय कर नीति और मानकों के अनुरूप नहीं है और इससे कानून के शासन की सोच को नुकसान पहुंचेगा। उन्होंने कहा, "हम आपको इस सप्ताह विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की बैठक के दौरान यह मुद्दा उठाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।"टिप्पणियां उन्होंने यह माना कि हर देश को कानून बनाने का अधिकार है लेकिन साथ ही कहा कि नए भारतीय कानून से कई तरह की समस्या आएगी। उन्होंने कहा कि वित्त विधेयक 2012 में दो दर्जन संशोधन होने हैं और इससे कम्पनियों के लिए 50 साल पीछे तक कर देयता पैदा हो सकती है। उन्होंने भारतीय अधिकारियों के इस तर्क को गलत कहा कि प्रतिगामी प्रावधान वैश्विक कर प्रचलन के अनुरूप है और कहा संशोधनों का दायरा काफी व्यापक है और यह काफी पुरानी अवधि तक के लिए प्रभावी हो सकता है। उन्होंने कहा, "हम आपको इस सप्ताह विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की बैठक के दौरान यह मुद्दा उठाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।"टिप्पणियां उन्होंने यह माना कि हर देश को कानून बनाने का अधिकार है लेकिन साथ ही कहा कि नए भारतीय कानून से कई तरह की समस्या आएगी। उन्होंने कहा कि वित्त विधेयक 2012 में दो दर्जन संशोधन होने हैं और इससे कम्पनियों के लिए 50 साल पीछे तक कर देयता पैदा हो सकती है। उन्होंने भारतीय अधिकारियों के इस तर्क को गलत कहा कि प्रतिगामी प्रावधान वैश्विक कर प्रचलन के अनुरूप है और कहा संशोधनों का दायरा काफी व्यापक है और यह काफी पुरानी अवधि तक के लिए प्रभावी हो सकता है। उन्होंने यह माना कि हर देश को कानून बनाने का अधिकार है लेकिन साथ ही कहा कि नए भारतीय कानून से कई तरह की समस्या आएगी। उन्होंने कहा कि वित्त विधेयक 2012 में दो दर्जन संशोधन होने हैं और इससे कम्पनियों के लिए 50 साल पीछे तक कर देयता पैदा हो सकती है। उन्होंने भारतीय अधिकारियों के इस तर्क को गलत कहा कि प्रतिगामी प्रावधान वैश्विक कर प्रचलन के अनुरूप है और कहा संशोधनों का दायरा काफी व्यापक है और यह काफी पुरानी अवधि तक के लिए प्रभावी हो सकता है। उन्होंने भारतीय अधिकारियों के इस तर्क को गलत कहा कि प्रतिगामी प्रावधान वैश्विक कर प्रचलन के अनुरूप है और कहा संशोधनों का दायरा काफी व्यापक है और यह काफी पुरानी अवधि तक के लिए प्रभावी हो सकता है।
यह एक सारांश है: दर्जन भर अमेरिकी कारोबारी समूहों ने अमेरिकी वित्त मंत्री टिमोथी गीथनर से कहा है कि वह भारत के सामने उनकी यह चिंता रखें कि भारत में कर कानूनों में कुछ प्रस्तावित बदलावों से उनके लिए निवेश का माहौल खराब होगा।
24
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: यूनान के राष्ट्रीय चुनाव में प्रोत्साहन पैकेज समर्थक पार्टी न्यू डेमोक्रेसी पार्टी पहले स्थान पर आई है और यूरोक्षेत्र में अपने देश को बनाये रखने के लिये पर्याप्त समर्थन जुटा सकती है। यूनान में छह मई को हुये चुनाव के बेनतीजा रहने के बाद छह सप्ताह के अंदर दूसरे राष्ट्रीय चुनाव के तहत एक नयी सरकार बनाये जाने का प्रयास किया जायेगा। यूनान, यूरोप और दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण चुनाव के बारे में आज कराये गये एक्जिट पोल के अनुसार यूनान में दो शीर्ष दावेदारों के बीच कांटे का मुकाबला है। आज के मतदान से यह भी तय हो सकता है कि यूनान यूरो में बना रहेगा या उसे साभा मुद्रा को छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया जायेगा। इस कदम से न केवल यूरोपीय देश बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी विपरीत असर पड़ेगा। यूनान के यूरोपीय संघ से बाहर किए जाने की आशंका के बीच मितव्यतता को लेकर नाराज यूनानवासियों ने आज देश में नया नेतृत्व चुनने और भविष्य सुखद बनाने की उम्मीदों से मतदान किया। यह मतदान इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि बाहरी देश यूनानी जनता से कट्टरपंथी वामपंथी गठबंधन के पक्ष में मतदान न करने की अभूतपूर्व अपील कर चुके हैं। इस वजह से यूरो जोन में दूसरे देशों से सहायता को लेकर यूनान का भविष्य इस चुनाव पर निर्भर करता है। इन चुनावों में मुख्य लड़ाई सीरिजा गठबंधन के नेता तसिप्रास और रूढ़िवादी दल न्यू डेमोक्रेसी पार्टी के 62 वर्षीय नेता एंटोनिस समारास के बीच है।टिप्पणियां तसिप्रास ने कहा कि उनकी पार्टी जीतेगी और यूनान बदलते यूरोप में अपनी सदस्यता बरकरार रखेगा। मतदान से ठीक पहले जर्मनी की चासंलर एंजेला मार्केल ने कहा कि यूनानवासियों को ऐसे सांसदों को चुनना चाहिए जो विवादास्पद बेल आउट पैकेज का समर्थन करते हों। यूरोसमूह के प्रमुख जयां क्लोड जंकर ने भी चेतावनी देते हुए कहा कि सीरिजा की जीत का यूरोजोन और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर अप्रत्याशित प्रभाव पड़ेगा। यूनान में छह मई को हुए चुनाव में सरकार के गठन के लिए किसी गठबंधन को बहुमत नहीं मिलने पर दोबारा मतदान कराया गया है। यूनान में छह मई को हुये चुनाव के बेनतीजा रहने के बाद छह सप्ताह के अंदर दूसरे राष्ट्रीय चुनाव के तहत एक नयी सरकार बनाये जाने का प्रयास किया जायेगा। यूनान, यूरोप और दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण चुनाव के बारे में आज कराये गये एक्जिट पोल के अनुसार यूनान में दो शीर्ष दावेदारों के बीच कांटे का मुकाबला है। आज के मतदान से यह भी तय हो सकता है कि यूनान यूरो में बना रहेगा या उसे साभा मुद्रा को छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया जायेगा। इस कदम से न केवल यूरोपीय देश बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी विपरीत असर पड़ेगा। यूनान के यूरोपीय संघ से बाहर किए जाने की आशंका के बीच मितव्यतता को लेकर नाराज यूनानवासियों ने आज देश में नया नेतृत्व चुनने और भविष्य सुखद बनाने की उम्मीदों से मतदान किया। यह मतदान इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि बाहरी देश यूनानी जनता से कट्टरपंथी वामपंथी गठबंधन के पक्ष में मतदान न करने की अभूतपूर्व अपील कर चुके हैं। इस वजह से यूरो जोन में दूसरे देशों से सहायता को लेकर यूनान का भविष्य इस चुनाव पर निर्भर करता है। इन चुनावों में मुख्य लड़ाई सीरिजा गठबंधन के नेता तसिप्रास और रूढ़िवादी दल न्यू डेमोक्रेसी पार्टी के 62 वर्षीय नेता एंटोनिस समारास के बीच है।टिप्पणियां तसिप्रास ने कहा कि उनकी पार्टी जीतेगी और यूनान बदलते यूरोप में अपनी सदस्यता बरकरार रखेगा। मतदान से ठीक पहले जर्मनी की चासंलर एंजेला मार्केल ने कहा कि यूनानवासियों को ऐसे सांसदों को चुनना चाहिए जो विवादास्पद बेल आउट पैकेज का समर्थन करते हों। यूरोसमूह के प्रमुख जयां क्लोड जंकर ने भी चेतावनी देते हुए कहा कि सीरिजा की जीत का यूरोजोन और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर अप्रत्याशित प्रभाव पड़ेगा। यूनान में छह मई को हुए चुनाव में सरकार के गठन के लिए किसी गठबंधन को बहुमत नहीं मिलने पर दोबारा मतदान कराया गया है। यूनान, यूरोप और दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण चुनाव के बारे में आज कराये गये एक्जिट पोल के अनुसार यूनान में दो शीर्ष दावेदारों के बीच कांटे का मुकाबला है। आज के मतदान से यह भी तय हो सकता है कि यूनान यूरो में बना रहेगा या उसे साभा मुद्रा को छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया जायेगा। इस कदम से न केवल यूरोपीय देश बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी विपरीत असर पड़ेगा। यूनान के यूरोपीय संघ से बाहर किए जाने की आशंका के बीच मितव्यतता को लेकर नाराज यूनानवासियों ने आज देश में नया नेतृत्व चुनने और भविष्य सुखद बनाने की उम्मीदों से मतदान किया। यह मतदान इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि बाहरी देश यूनानी जनता से कट्टरपंथी वामपंथी गठबंधन के पक्ष में मतदान न करने की अभूतपूर्व अपील कर चुके हैं। इस वजह से यूरो जोन में दूसरे देशों से सहायता को लेकर यूनान का भविष्य इस चुनाव पर निर्भर करता है। इन चुनावों में मुख्य लड़ाई सीरिजा गठबंधन के नेता तसिप्रास और रूढ़िवादी दल न्यू डेमोक्रेसी पार्टी के 62 वर्षीय नेता एंटोनिस समारास के बीच है।टिप्पणियां तसिप्रास ने कहा कि उनकी पार्टी जीतेगी और यूनान बदलते यूरोप में अपनी सदस्यता बरकरार रखेगा। मतदान से ठीक पहले जर्मनी की चासंलर एंजेला मार्केल ने कहा कि यूनानवासियों को ऐसे सांसदों को चुनना चाहिए जो विवादास्पद बेल आउट पैकेज का समर्थन करते हों। यूरोसमूह के प्रमुख जयां क्लोड जंकर ने भी चेतावनी देते हुए कहा कि सीरिजा की जीत का यूरोजोन और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर अप्रत्याशित प्रभाव पड़ेगा। यूनान में छह मई को हुए चुनाव में सरकार के गठन के लिए किसी गठबंधन को बहुमत नहीं मिलने पर दोबारा मतदान कराया गया है। आज के मतदान से यह भी तय हो सकता है कि यूनान यूरो में बना रहेगा या उसे साभा मुद्रा को छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया जायेगा। इस कदम से न केवल यूरोपीय देश बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी विपरीत असर पड़ेगा। यूनान के यूरोपीय संघ से बाहर किए जाने की आशंका के बीच मितव्यतता को लेकर नाराज यूनानवासियों ने आज देश में नया नेतृत्व चुनने और भविष्य सुखद बनाने की उम्मीदों से मतदान किया। यह मतदान इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि बाहरी देश यूनानी जनता से कट्टरपंथी वामपंथी गठबंधन के पक्ष में मतदान न करने की अभूतपूर्व अपील कर चुके हैं। इस वजह से यूरो जोन में दूसरे देशों से सहायता को लेकर यूनान का भविष्य इस चुनाव पर निर्भर करता है। इन चुनावों में मुख्य लड़ाई सीरिजा गठबंधन के नेता तसिप्रास और रूढ़िवादी दल न्यू डेमोक्रेसी पार्टी के 62 वर्षीय नेता एंटोनिस समारास के बीच है।टिप्पणियां तसिप्रास ने कहा कि उनकी पार्टी जीतेगी और यूनान बदलते यूरोप में अपनी सदस्यता बरकरार रखेगा। मतदान से ठीक पहले जर्मनी की चासंलर एंजेला मार्केल ने कहा कि यूनानवासियों को ऐसे सांसदों को चुनना चाहिए जो विवादास्पद बेल आउट पैकेज का समर्थन करते हों। यूरोसमूह के प्रमुख जयां क्लोड जंकर ने भी चेतावनी देते हुए कहा कि सीरिजा की जीत का यूरोजोन और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर अप्रत्याशित प्रभाव पड़ेगा। यूनान में छह मई को हुए चुनाव में सरकार के गठन के लिए किसी गठबंधन को बहुमत नहीं मिलने पर दोबारा मतदान कराया गया है। यूनान के यूरोपीय संघ से बाहर किए जाने की आशंका के बीच मितव्यतता को लेकर नाराज यूनानवासियों ने आज देश में नया नेतृत्व चुनने और भविष्य सुखद बनाने की उम्मीदों से मतदान किया। यह मतदान इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि बाहरी देश यूनानी जनता से कट्टरपंथी वामपंथी गठबंधन के पक्ष में मतदान न करने की अभूतपूर्व अपील कर चुके हैं। इस वजह से यूरो जोन में दूसरे देशों से सहायता को लेकर यूनान का भविष्य इस चुनाव पर निर्भर करता है। इन चुनावों में मुख्य लड़ाई सीरिजा गठबंधन के नेता तसिप्रास और रूढ़िवादी दल न्यू डेमोक्रेसी पार्टी के 62 वर्षीय नेता एंटोनिस समारास के बीच है।टिप्पणियां तसिप्रास ने कहा कि उनकी पार्टी जीतेगी और यूनान बदलते यूरोप में अपनी सदस्यता बरकरार रखेगा। मतदान से ठीक पहले जर्मनी की चासंलर एंजेला मार्केल ने कहा कि यूनानवासियों को ऐसे सांसदों को चुनना चाहिए जो विवादास्पद बेल आउट पैकेज का समर्थन करते हों। यूरोसमूह के प्रमुख जयां क्लोड जंकर ने भी चेतावनी देते हुए कहा कि सीरिजा की जीत का यूरोजोन और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर अप्रत्याशित प्रभाव पड़ेगा। यूनान में छह मई को हुए चुनाव में सरकार के गठन के लिए किसी गठबंधन को बहुमत नहीं मिलने पर दोबारा मतदान कराया गया है। यह मतदान इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि बाहरी देश यूनानी जनता से कट्टरपंथी वामपंथी गठबंधन के पक्ष में मतदान न करने की अभूतपूर्व अपील कर चुके हैं। इस वजह से यूरो जोन में दूसरे देशों से सहायता को लेकर यूनान का भविष्य इस चुनाव पर निर्भर करता है। इन चुनावों में मुख्य लड़ाई सीरिजा गठबंधन के नेता तसिप्रास और रूढ़िवादी दल न्यू डेमोक्रेसी पार्टी के 62 वर्षीय नेता एंटोनिस समारास के बीच है।टिप्पणियां तसिप्रास ने कहा कि उनकी पार्टी जीतेगी और यूनान बदलते यूरोप में अपनी सदस्यता बरकरार रखेगा। मतदान से ठीक पहले जर्मनी की चासंलर एंजेला मार्केल ने कहा कि यूनानवासियों को ऐसे सांसदों को चुनना चाहिए जो विवादास्पद बेल आउट पैकेज का समर्थन करते हों। यूरोसमूह के प्रमुख जयां क्लोड जंकर ने भी चेतावनी देते हुए कहा कि सीरिजा की जीत का यूरोजोन और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर अप्रत्याशित प्रभाव पड़ेगा। यूनान में छह मई को हुए चुनाव में सरकार के गठन के लिए किसी गठबंधन को बहुमत नहीं मिलने पर दोबारा मतदान कराया गया है। तसिप्रास ने कहा कि उनकी पार्टी जीतेगी और यूनान बदलते यूरोप में अपनी सदस्यता बरकरार रखेगा। मतदान से ठीक पहले जर्मनी की चासंलर एंजेला मार्केल ने कहा कि यूनानवासियों को ऐसे सांसदों को चुनना चाहिए जो विवादास्पद बेल आउट पैकेज का समर्थन करते हों। यूरोसमूह के प्रमुख जयां क्लोड जंकर ने भी चेतावनी देते हुए कहा कि सीरिजा की जीत का यूरोजोन और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर अप्रत्याशित प्रभाव पड़ेगा। यूनान में छह मई को हुए चुनाव में सरकार के गठन के लिए किसी गठबंधन को बहुमत नहीं मिलने पर दोबारा मतदान कराया गया है। यूरोसमूह के प्रमुख जयां क्लोड जंकर ने भी चेतावनी देते हुए कहा कि सीरिजा की जीत का यूरोजोन और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर अप्रत्याशित प्रभाव पड़ेगा। यूनान में छह मई को हुए चुनाव में सरकार के गठन के लिए किसी गठबंधन को बहुमत नहीं मिलने पर दोबारा मतदान कराया गया है।
सारांश: यूनान के राष्ट्रीय चुनाव में प्रोत्साहन पैकेज समर्थक पार्टी न्यू डेमोक्रेसी पार्टी पहले स्थान पर आई है और यूरोक्षेत्र में अपने देश को बनाये रखने के लिये पर्याप्त समर्थन जुटा सकती है।
7
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: केंद्रीय गृह सचिव आरके सिंह ने सोमवार को कहा कि नक्सली लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास नहीं करते और हिंसा पर उतारू हो जाते हैं, ऐसे में उनसे बातचीत से नहीं निपटा जा सकता। पटना में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीपी) के क्षेत्रीय मुख्यालय के उद्घाटन समारोह को सम्बोधित करते हुए सिंह ने कहा कि नक्सली समस्या आज देश की बहुत बड़ी समस्या है। इस समस्या का समाधान अब बातचीत से सम्भव नहीं है। उन्होंने कहा, "वे (नक्सली) हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास नहीं करते। वे हिंसा के जरिये इस व्यवस्था को बदलना चाहते हैं।"टिप्पणियां सिंह ने कहा, "वे कहते हैं कि गरीबों और आदिवासियों की लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन यह एक बहाना है। उनके द्वारा मारे गए लोगों में अधिकांश लोग गरीब और आदिवासी ही हैं। उन्होंने कहा कि नक्सलियों से निपटने के लिए लड़ाई जारी है।" सिंह ने आईटीबीपी की तारीफ करते हुए कहा कि आज देश के लिए यह बल काफी महत्वपूर्ण है। देश की सीमा पर सुरक्षा की बात हो या आंतरिक मामला, आज अधिकारियों की पहली पसंद आईटीबीपी बन गई है। पटना में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीपी) के क्षेत्रीय मुख्यालय के उद्घाटन समारोह को सम्बोधित करते हुए सिंह ने कहा कि नक्सली समस्या आज देश की बहुत बड़ी समस्या है। इस समस्या का समाधान अब बातचीत से सम्भव नहीं है। उन्होंने कहा, "वे (नक्सली) हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास नहीं करते। वे हिंसा के जरिये इस व्यवस्था को बदलना चाहते हैं।"टिप्पणियां सिंह ने कहा, "वे कहते हैं कि गरीबों और आदिवासियों की लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन यह एक बहाना है। उनके द्वारा मारे गए लोगों में अधिकांश लोग गरीब और आदिवासी ही हैं। उन्होंने कहा कि नक्सलियों से निपटने के लिए लड़ाई जारी है।" सिंह ने आईटीबीपी की तारीफ करते हुए कहा कि आज देश के लिए यह बल काफी महत्वपूर्ण है। देश की सीमा पर सुरक्षा की बात हो या आंतरिक मामला, आज अधिकारियों की पहली पसंद आईटीबीपी बन गई है। सिंह ने कहा, "वे कहते हैं कि गरीबों और आदिवासियों की लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन यह एक बहाना है। उनके द्वारा मारे गए लोगों में अधिकांश लोग गरीब और आदिवासी ही हैं। उन्होंने कहा कि नक्सलियों से निपटने के लिए लड़ाई जारी है।" सिंह ने आईटीबीपी की तारीफ करते हुए कहा कि आज देश के लिए यह बल काफी महत्वपूर्ण है। देश की सीमा पर सुरक्षा की बात हो या आंतरिक मामला, आज अधिकारियों की पहली पसंद आईटीबीपी बन गई है। सिंह ने आईटीबीपी की तारीफ करते हुए कहा कि आज देश के लिए यह बल काफी महत्वपूर्ण है। देश की सीमा पर सुरक्षा की बात हो या आंतरिक मामला, आज अधिकारियों की पहली पसंद आईटीबीपी बन गई है।
यह एक सारांश है: केंद्रीय गृह सचिव आरके सिंह ने सोमवार को कहा कि नक्सली लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास नहीं करते और हिंसा पर उतारू हो जाते हैं, ऐसे में उनसे बातचीत से नहीं निपटा जा सकता।
2
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: उसकी हत्या का शक तब दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल के पद पर तैनात बृजपाल पर गया. बृजपाल उस केस में जेल भी गए लेकिन 2002 में उन्हें क्लीन चिट मिल गई. पुलिस के मुताबिक जेल से निकलते ही बृजपाल पर सुरेश दीवान गैंग ने हमला भी किया. इस हमले में बृजपाल तो बच गए लेकिन इस खूनी खेल में 5 लोग मारे गए. कुछ दिन बाद बृजपाल पुलिस की नौकरी छोड़कर राजनीति में आ गए. दोनों पक्षों के बीच रंजिश और बढ़ती चली गए. उधर सुरेश दीवान की हत्या का बदला लेने के लिए राकेश हसनपुरिया भी उसके पीछे था. सन 2003 में गाजियाबाद पुलिस ने राकेश हसनपुरिया को एक विवादित मुठभेड़ में मार गिराया. मुठभेड़ पर राकेश की पत्नी सुनीता ने सवाल उठाते हुए बृजपाल तेवतिया पर मुखबिरी करने का आरोप लगाया. सुनीता यूपी पुलिस में कांस्टेबल थी. बाद में सुनीता को भी आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहने के आरोप में बर्खास्त कर दिया गया था. बाद में वह हाइकोर्ट गई और उसे दुबारा पुलिस की नौकरी मिल गई. सुनीता फिलहाल बागपत में तैनात है और इस हत्याकांड के सिलसिले में उससे भी पूछताछ चल रही है. हालांकि अभी तक उसके इस शूटआउट में शामिल होने के सबूत नहीं मिले हैं. सन 2003 में गाजियाबाद पुलिस ने राकेश हसनपुरिया को एक विवादित मुठभेड़ में मार गिराया. मुठभेड़ पर राकेश की पत्नी सुनीता ने सवाल उठाते हुए बृजपाल तेवतिया पर मुखबिरी करने का आरोप लगाया. सुनीता यूपी पुलिस में कांस्टेबल थी. बाद में सुनीता को भी आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहने के आरोप में बर्खास्त कर दिया गया था. बाद में वह हाइकोर्ट गई और उसे दुबारा पुलिस की नौकरी मिल गई. सुनीता फिलहाल बागपत में तैनात है और इस हत्याकांड के सिलसिले में उससे भी पूछताछ चल रही है. हालांकि अभी तक उसके इस शूटआउट में शामिल होने के सबूत नहीं मिले हैं.
सुरेश दीवान की हत्या का बदला लेने के लिए 17 साल बाद हमला 12 जून 1999 को दिल्ली के शकरपुर में हुई थी सुरेश की हत्या वारदात में शामिल 12 में से सात ने किया बृजपाल पर हमला
34
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: शिया मुसलमानों के पवित्र दिन आशूरा (मुहर्रम का दसवां दिन) पर अफगानिस्तान में दो मस्जिदों में हुए बम धमाकों में कम से कम 60 व्यक्तियों की मौत हो गई है। और 100 लोगों के घायल होने की खबर मिली है। एएफपी के एक फोटाग्राफर ने देखा कि मध्य काबुल में एक मस्जिद में आशूरा का शोक मनाने के लिए शिया समुदाय के लोग एकत्र हुए थे तभी उसके गेट के पास विस्फोट हो गया जिसमें कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई। काबुल पुलिस ने एक बयान में कहा, एक आत्मघाती हमलावर ने स्वयं को अबू-उल फाजिल मस्जिद के पास उड़ा लिया। नाम न बताने की शर्त पर एक सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि आशंका है कि हमलावर काबुल के दक्षिण में स्थित लोगर प्रांत से शिया समुदाय के लोगों के साथ आया था। मजार-ए-शरीफ में एक अन्य मस्जिद में हुए एक अन्य विस्फोट में चार लोगों की मौत हो गई। अभी इस बात की पुष्टी नहीं हुई है कि इस हमले में शिया समुदाय को निशाना बनाया गया था या नहीं। उत्तरी अफगानिस्तान में पुलिस के प्रवक्ता लाल मोहम्म्द अहमदजई ने कहा, यह एक विस्फोट था, आत्मघाती हमला नहीं। विस्फोटक को एक साइकिल में छिपा कर रखा गया था। उन्होंने बताया कि घटना में चार लोगों की मौत हुई है जबकि चार घायल हो गए। तालिबान के शासन में वर्ष 2001 तक शिया समुदाय के लिए सार्वजनिक तौर पर आशूरा मनाना प्रतिबंधित था। आम सालों के मुकाबले इस साल ज्यादा जुलूस आदि निकाले गए। अभी तक तालिबान या अफगानिस्तान में सक्रिय किसी अन्य आतंकवादी समूह ने विस्फोटों की जिम्मेदारी नहीं ली है। विस्फोट अफगानिस्तान के भविष्य पर विचार करने के लिए जर्मनी के शहर बान में आयोजित हुए सम्मेलन के ठीक बाद हुए हैं। इस्लामी कैलेंडर के पहले महीने मुहर्रम की 10वीं तारीख आशूरा सच्चाई के लिए लड़ने और इंसानियत का झंडा हमेशा बुलंद रखने की कोशिश करने का पैगाम देती है। इसी पैगाम को लेकर हजरत हुसैन भी आगे बढ़े थे और कर्बला के मैदान में शहादत पाई।
यह एक सारांश है: शिया मुसलमानों के पवित्र दिन आशूरा पर अफगानिस्तान में दो मस्जिदों में हुए बम धमाकों में कम से कम 50 व्यक्तियों की मौत हो गई है।
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['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: देश के राष्ट्रपति पद के लिए पर्चा भरकर प्रणब मुखर्जी जिंदगी और सियासत के एक अहम मुकाम पर पहुंच गए। इस मौके पर पूरी यूपीए एकजुट देखने को मिली। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत सहयोगी दलों के नेता भी दिखे। इसे प्रणब का जादू ही कहा जाएगा कि जब उनका पर्चा भरा गया, तो समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी भी एक साथ बैठी दिखी। एक ऐसी शख्सियत, जिसके लिए राजनीतिक पार्टियां गठबंधन को दरकिनार करती दिखीं। अब इसे दादा का दम कहिए या फिर उनकी लोकप्रियता, जिसका अहसास हर किसी को है। तभी तो जब रायसीना की रेस में नामों को लेकर अटकलें लगनी लगीं, तो कांग्रेस ने प्रणब को उतारने का फैसला किया। एक ऐसा नाम, जिस पर सहयोगियों के ऐतराज की गुंजाइश सबसे कम थी। लिहाजा यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने राष्ट्रपति पद के लिए प्रणब मुखर्जी के नाम का ऐलान किया। इसके साथ ही देश के सबसे अनुभवी और कद्दावर नेता प्रणब मुखर्जी रायसीना की राह पर चल पड़े। प्रणब मुखर्जी के लंबे राजनीतिक करियर और अनुभवों का हवाला देते हुए यूपीए गठबंधन ने देश की सभी पार्टियों के सांसदों और विधायकों से भी समर्थन की अपील भी की है। और खुद प्रणब मुखर्जी को भी इस बात का पूरा यकीन है कि उन्हें हर तरफ से मदद मिलेगी। बीते 30 सालों में वक्त का असर भले ही देखने को मिला हो, लेकिन प्रणब के अंदाज जस के तस हैं। प्रणब के बजट भाषणों पर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने एक बार कहा था कि भारत के सबसे छोटे वित्तमंत्री ने सबसे लंबा भाषण दिया। जहां तक पढ़ाई की बात है प्रणब मुखर्जी ने इतिहास, राजनीति शास्त्र और कानून की पढ़ाई की है। लेकिन बजट मैनेज करने का काम वह शुरुआत से ही करते रहे हैं। उनके बड़े भाई के मुताबिक बचपन में मां सामान लाने के लिए गिनकर पैसे देतीं, फिर भी प्रणब उसमें से मिठाइयां खरीद लाते थे। एक बार जब बड़े भाई ने पूछा, तो प्रणब का जवाब मिला, मां पैसे तो हमेशा गिन कर देती है, लेकिन सामान को हमेशा तोलती थोड़े ही है। नपे-तुले संसाधनों में कटौती के जरिए दूसरी जरूरतें पूरी करने का यह तरीका प्रणब आज भी लागू करते हैं। प्रणब अपने तीन भाई बहनों में सबसे छोटे हैं। पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के एक छोटे से गांव मिराती में पले-बढ़े प्रणब के पिता एक शिक्षक थे, जो कांग्रेस से भी जुड़े रहे। उनके पिता स्वतंत्रता सेनानी थे, जो आजादी से पहले जेल भी गए। प्रणब मुखर्जी को घर के बड़े बुजुर्ग प्यार से पोल्टू पुकारते हैं। हर किसी को इस बात पर हैरानी होती कि प्रणब अगर किसी चीज को एक बार देख लेते, तो वह उन्हें हमेशा के लिए याद हो जाती। तभी तो आज की तारीख में उनके करीबी प्रणब मुखर्जी की तुलना किसी चलते फिरते इनसाइक्लोपीडिया से करते हैं। प्रणब दा ने राजनीति की शुरुआत 60 के दशक में बांग्ला कांग्रेस से की। और जल्द ही यानी 1969 में वह राज्यसभा के सदस्य बनकर पहली बार दिल्ली पहुंचे। तब दिल्ली में उनकी कोई खास पहचान नहीं थी और वह सदन की पिछली लाइन में बैठने वालों में थे, लेकिन सदन में उनका दूसरा भाषण ही लाजवाब रहा। खचाखच भरे सदन में बैंकों के राष्ट्रीयकरण के मुद्दे पर भाषण देते प्रणब को देखकर इंदिरा गांधी प्रभावित हो गईं और इसके बाद इंदिरा तथा प्रणब की पहली मुलाकात हुई। फिर 1972 में जब बांग्ला कांग्रेस टूटकर कांग्रेस से जा मिली, तो प्रणब मुखर्जी, इंदिरा गांधी के करीबी और भरोसेमंद लोगों में शुमार हो गए। इसके अगले ही साल यानी 1973 में वह उद्योग उपमंत्री बने। तब से लेकर अभीतक अगर अपवाद के तौर पर राजीव सरकार को छोड़े दें, तो जब भी कांग्रेस सत्ता में रही, प्रणब मुखर्जी के पास अहम मंत्रालय रहे सिर्फ गृह मंत्रालय को छोड़कर। अपने लंबे सियासी करियर और बेशुमार अनुभवों की वजह से प्रणब अक्सर सेकेंड प्राइम मिनिस्टर कहे जाते हैं और कई बार प्रधानमंत्री की जिम्मेदारियां भी उठाई है, लेकिन खुद कभी प्रधानमंत्री नहीं बन सके। हो सकता है प्रणब दा इसे अपनी हसरत के तौर पर देखें, लेकिन उनके परिवार को इस बात का जरा भी मलाल नहीं रहा। बेटे का कहना है कि वह तो उनके लिए हमेशा से ही पीएम रहे हैं। और जब मौका उनके राष्ट्रपति बनने का आया, तो घर से लेकर गांव तक हर तरफ खुशी की लहर दौड़ गई। रायसीना की रेस में उतरते ही दादा नंबर वन पर आ गए। जब चाहने वाले इतने खुश हैं, तो घर वालों की पूछिये ही मत। देश के सबसे हाईप्रोफाइल पदों को संभालने वाले प्रणब मुखर्जी का परिवार बेहद लो प्रोफाइल रहता है। इस बात से भी पर्दा उठा कि कभी-कभार अगर दादा अपने गुस्से को लेकर चर्चा में आए, तो इसके पीछे की वजह उनका जिम्मेदारियों की वजह से खानपान और आराम से हुए समझौते रहे हैं। प्रणब के बेटे अभिजीत सरकारी नौकरी छोड़कर राजनीति में कूदे हैं। पिता की वजह से राजनीति की डगर इतनी कठिन नहीं रही, लेकिन राजनीतिक रिश्तों को बनाए रखने की अहमियत खूब समझते हैं। पर सवाल सिर्फ सियासी रिश्तों को बनाए रखने का ही नहीं, अपनी जमीन से जुड़ाव का भी है, जिसमें कभी कोई बदलाव नहीं आया। राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने के बाद प्रणब जब वक्त निकालकर अपने गांव पहुंचे, तो वहां उनका जोरदार स्वागत हुआ। कतार में खड़े बच्चे बूढ़े और महिलाओं ने फूल बरसाकर उनका स्वागत किया। बात आस्था और विश्वास की भी है, तभी तो गांव के शिवमंदिर में इस दौरान प्रणब दा के नाम से पूजा जारी रही। देश की बड़ी जिम्मेदारियां निभा रहे प्रणब न तो अपने गांव को कभी भूले और न ही गांववालों को। स्कूल के दिनों के दोस्त रहे बलदेव राय बताते हैं कि प्रणब जब भी गांव आते हैं, उनका हालचाल जरूर लेते हैं। प्रणब मुखर्जी ने किन्नरहाता शिवचंद्र स्कूल से अपनी पढ़ाई की। और बाद में इसकी नई इमारत बनवाने में मदद भी दी। स्कूल ने भी अपने होनहार छात्र से जुड़े दस्तावेज बचा कर रखे हैं। रिकार्ड्स के मुताबिक 3 जुलाई, 1948 को प्रणब मुखर्जी ने यहां दाखिला लिया था। स्कूल का फैसला अब सही साबित हो रहा है। उनके बीच पला-पढ़ा पोल्टू अब प्रणब मुखर्जी के नाम से देश का पहला नागरिक बनने वाला है। हालांकि कायदे से देखा जाए, तो यह काम पांच साल पहले यानी 2007 में ही हो जाना चाहिए था। लेकिन माना जाता है कि कुछ पुरानी गांठे रास्ते का रोड़ा बन गई। कांग्रेस यही कहती रही कि वह पार्टी के ऐसे संकटमोचक हैं, जिनके बिना काम चलना मुश्किल है। अगर किसी नेता की अहमियत को उसकी ज़िम्मेदारियों से तौला जाए, तो कांग्रेस में प्रणब दा के आस−पास भी कोई नहीं है। यूपीए के द्वारा अब तक बनाए गए 183 मंत्री समूह यानी मंत्रियों के समूह में से 80 की अध्यक्षता प्रणब मुखर्जी ने की है। सबसे विवादित माने जाने वाले मुद्दों जैसे लोकपाल और तेलंगाना पर बनाए गए मंत्रियों के समूह की अगुवाई भी प्रणब मुखर्जी ने की है। और प्रणब मुखर्जी हमेशा से सरकार के संकटमोचक रहे हैं। उन्हें विपक्षी पार्टियों में कांग्रेस के सबसे स्वीकार्य चेहरे का दर्जा भी हासिल है। यह सही है कि राजनीतिक दलों के बीच प्रणब मुखर्जी की लोकप्रियता का कोई मुकाबला नहीं है, लेकिन कहीं न कहीं अपनी ही पार्टी की टॉप लीडरशिप के साथ उनके संबधों में कोई पेंच जरूर रहा है। कांग्रेसी भी मानते हैं कि सोनिया गांधी ने मुश्किल राजनीतिक हालात में हमेशा प्रणब पर भरोसा किया, लेकिन उन्हें कभी प्रधानमंत्री का पद नहीं देंगी। लेकिन अब वक्त बदल रहा है। आने वाले दिनों में बतौर राष्ट्रपति उनकी चुनौतियां बिल्कुल नई तरह की होंगी, लेकिन इस बात पर भी शक नहीं कि हमेशा की तरह वह आगे भी कामयाब रहेंगे। रायसीना की रेस में प्रणब मुखर्जी सबसे आगे हैं, जिन्हें यूपीए गठबंधन के अलावा दूसरे दलों से भी समर्थन हासिल है। गठबंधन में अगर किसी का विरोध है, तो वह नाम ममता बनर्जी का है, जिसे लेकर प्रणब ने अभी तक उम्मीद नहीं छोड़ी है। उधर, दूसरी तरफ प्रणब के मुकाबले में पीए संगमा मैदान में हैं, जिन्हें बीजेपी, बीजेडी और जयललिता की एआईएडीएमके का समर्थन हासिल है। लेकिन ममता को लेकर दोतरफा खींचतान जारी है। दरअसल इस बार के राष्ट्रपति चुनावों की बात करें तो शुरुआत ही धमाकेदार रही, जिसकी शायद ही किसी को उम्मीद रही हो। मुलायम और ममता ने जब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के सुझाए नाम खारिज कर अपने तीन विकल्प दिए, तो देश में एक तरह से सियासी सुनामी आ गई। गठबंधन सरकार के हिलते-डुलते रिश्तों से मीडिया के कैमरे चिपक गए। ममता ने तो बाकायदा कलाम को जीत की बधाई तक दे दी। यह अलग बात है कि कलाम ने रेस में उतरना मंजूर ही नहीं किया। हकीकत तो यह है कि राष्ट्रपति के नाम पर सारी अटकलबाजियां तभी तक रहीं, जबतक प्रणब मुखर्जी के नाम का ऐलान नहीं हुआ। उसके फौरन बाद ही तस्वीर साफ होने लगी। मुलायम ने फौरन प्रणब के नाम पर मुहर लगा दी। हालात के मुताबिक फैसला लेना प्रणब मुखर्जी की खासियत रही है। खासकर कब, कहां और क्या बोलना है, इसमें भी उनका जवाब नहीं। प्रणब दा को हिन्दी बोलते लोगों ने शायद ही कभी सुना हो, पर चुनाव प्रचार इलाहाबाद में करना हो तो बंगाली या अंग्रेजी बोलने का कोई मतलब नहीं बनता। इसलिए दादा ने हिन्दी में भाषण दिया। यह वही दादा हैं, जिन्होंने एक बार कहा था कि वह प्रधानमंत्री नहीं बन सकते, क्योंकि उन्हें हिन्दी नहीं आती। वैसे हिन्दी आना, न आना अलग बात है, पर उन्हें बोलना आता है, जो सबसे पते की बात है। लंबे और नजदीकी रिश्ते के बावजूद ममता बनर्जी के कड़े विरोध को देखकर जहां घरवाले तक हैरान दिखे, उतने पर भी प्रणब मुखर्जी का बड़ा ही संजीदा और नपा-तुला बयान आया कि वह मेरी छोटी बहन जैसी हैं। मौजूदा आंकड़ों के तहत प्रणब की राह बहुत मुश्किल नहीं दिखती। दरअसल यूपीए के 42 फीसदी वोट हैं, जिनमें तृणमूल के 4.4 फीसदी वोट शामिल हैं। अगर उसे हटाकर समाजवादी पार्टी के 6.2 फीसदी जोड़ दें, तो आंकड़ा 43.8 फीसदी होगा। इसमें लेफ्ट के 4.7 फीसदी जोड़ने पर 48.5 फीसदी वोट हो जाते हैं। और अब बीएसपी के 3.8 फीसदी का समर्थन मिलने से समर्थन 52.3 फीसदी यानी प्रणब की जीत पक्की हो जाती है। जबकि एनडीए के पास सिर्फ 28 फीसदी वोट है।टिप्पणियां हालांकि इन आंकड़ों में थोड़ी बहुत फेरबदल हो सकती है, क्योंकि आंध्र प्रदेश में हुए उपचुनावों के नए नतीजों से इसमें थोड़ा बदलाव आएगा। लेकिन जो बड़ा बदलाव आएगा, वह है प्रणब का रुतबा। वैसे सच कहा जाए तो मौजूदा हालात में प्रणब के लिए राष्ट्रपति भवन सबसे माकूल जगह है। वक्त के साथ उनका सब्र भी कहीं न कहीं जवाब दे रहा था। इस दौरान वह कई बार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर साफ कर चुके थे कि अब वह अगला चुनाव नहीं लड़ेंगे। साथ ही 77 साल की उम्र में अब वह टीम राहुल का भी हिस्सा नहीं बन सकते। ऐसे में गठबंधन की इस राजनीति में काफी कम विकल्प बचते हैं। और सबसे अहम बात यह कि मौजूदा हालात में प्रणब मुखर्जी जैसी स्वीकायर्ता किसी और की नहीं है। इसे प्रणब का जादू ही कहा जाएगा कि जब उनका पर्चा भरा गया, तो समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी भी एक साथ बैठी दिखी। एक ऐसी शख्सियत, जिसके लिए राजनीतिक पार्टियां गठबंधन को दरकिनार करती दिखीं। अब इसे दादा का दम कहिए या फिर उनकी लोकप्रियता, जिसका अहसास हर किसी को है। तभी तो जब रायसीना की रेस में नामों को लेकर अटकलें लगनी लगीं, तो कांग्रेस ने प्रणब को उतारने का फैसला किया। एक ऐसा नाम, जिस पर सहयोगियों के ऐतराज की गुंजाइश सबसे कम थी। लिहाजा यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने राष्ट्रपति पद के लिए प्रणब मुखर्जी के नाम का ऐलान किया। इसके साथ ही देश के सबसे अनुभवी और कद्दावर नेता प्रणब मुखर्जी रायसीना की राह पर चल पड़े। प्रणब मुखर्जी के लंबे राजनीतिक करियर और अनुभवों का हवाला देते हुए यूपीए गठबंधन ने देश की सभी पार्टियों के सांसदों और विधायकों से भी समर्थन की अपील भी की है। और खुद प्रणब मुखर्जी को भी इस बात का पूरा यकीन है कि उन्हें हर तरफ से मदद मिलेगी। बीते 30 सालों में वक्त का असर भले ही देखने को मिला हो, लेकिन प्रणब के अंदाज जस के तस हैं। प्रणब के बजट भाषणों पर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने एक बार कहा था कि भारत के सबसे छोटे वित्तमंत्री ने सबसे लंबा भाषण दिया। जहां तक पढ़ाई की बात है प्रणब मुखर्जी ने इतिहास, राजनीति शास्त्र और कानून की पढ़ाई की है। लेकिन बजट मैनेज करने का काम वह शुरुआत से ही करते रहे हैं। उनके बड़े भाई के मुताबिक बचपन में मां सामान लाने के लिए गिनकर पैसे देतीं, फिर भी प्रणब उसमें से मिठाइयां खरीद लाते थे। एक बार जब बड़े भाई ने पूछा, तो प्रणब का जवाब मिला, मां पैसे तो हमेशा गिन कर देती है, लेकिन सामान को हमेशा तोलती थोड़े ही है। नपे-तुले संसाधनों में कटौती के जरिए दूसरी जरूरतें पूरी करने का यह तरीका प्रणब आज भी लागू करते हैं। प्रणब अपने तीन भाई बहनों में सबसे छोटे हैं। पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के एक छोटे से गांव मिराती में पले-बढ़े प्रणब के पिता एक शिक्षक थे, जो कांग्रेस से भी जुड़े रहे। उनके पिता स्वतंत्रता सेनानी थे, जो आजादी से पहले जेल भी गए। प्रणब मुखर्जी को घर के बड़े बुजुर्ग प्यार से पोल्टू पुकारते हैं। हर किसी को इस बात पर हैरानी होती कि प्रणब अगर किसी चीज को एक बार देख लेते, तो वह उन्हें हमेशा के लिए याद हो जाती। तभी तो आज की तारीख में उनके करीबी प्रणब मुखर्जी की तुलना किसी चलते फिरते इनसाइक्लोपीडिया से करते हैं। प्रणब दा ने राजनीति की शुरुआत 60 के दशक में बांग्ला कांग्रेस से की। और जल्द ही यानी 1969 में वह राज्यसभा के सदस्य बनकर पहली बार दिल्ली पहुंचे। तब दिल्ली में उनकी कोई खास पहचान नहीं थी और वह सदन की पिछली लाइन में बैठने वालों में थे, लेकिन सदन में उनका दूसरा भाषण ही लाजवाब रहा। खचाखच भरे सदन में बैंकों के राष्ट्रीयकरण के मुद्दे पर भाषण देते प्रणब को देखकर इंदिरा गांधी प्रभावित हो गईं और इसके बाद इंदिरा तथा प्रणब की पहली मुलाकात हुई। फिर 1972 में जब बांग्ला कांग्रेस टूटकर कांग्रेस से जा मिली, तो प्रणब मुखर्जी, इंदिरा गांधी के करीबी और भरोसेमंद लोगों में शुमार हो गए। इसके अगले ही साल यानी 1973 में वह उद्योग उपमंत्री बने। तब से लेकर अभीतक अगर अपवाद के तौर पर राजीव सरकार को छोड़े दें, तो जब भी कांग्रेस सत्ता में रही, प्रणब मुखर्जी के पास अहम मंत्रालय रहे सिर्फ गृह मंत्रालय को छोड़कर। अपने लंबे सियासी करियर और बेशुमार अनुभवों की वजह से प्रणब अक्सर सेकेंड प्राइम मिनिस्टर कहे जाते हैं और कई बार प्रधानमंत्री की जिम्मेदारियां भी उठाई है, लेकिन खुद कभी प्रधानमंत्री नहीं बन सके। हो सकता है प्रणब दा इसे अपनी हसरत के तौर पर देखें, लेकिन उनके परिवार को इस बात का जरा भी मलाल नहीं रहा। बेटे का कहना है कि वह तो उनके लिए हमेशा से ही पीएम रहे हैं। और जब मौका उनके राष्ट्रपति बनने का आया, तो घर से लेकर गांव तक हर तरफ खुशी की लहर दौड़ गई। रायसीना की रेस में उतरते ही दादा नंबर वन पर आ गए। जब चाहने वाले इतने खुश हैं, तो घर वालों की पूछिये ही मत। देश के सबसे हाईप्रोफाइल पदों को संभालने वाले प्रणब मुखर्जी का परिवार बेहद लो प्रोफाइल रहता है। इस बात से भी पर्दा उठा कि कभी-कभार अगर दादा अपने गुस्से को लेकर चर्चा में आए, तो इसके पीछे की वजह उनका जिम्मेदारियों की वजह से खानपान और आराम से हुए समझौते रहे हैं। प्रणब के बेटे अभिजीत सरकारी नौकरी छोड़कर राजनीति में कूदे हैं। पिता की वजह से राजनीति की डगर इतनी कठिन नहीं रही, लेकिन राजनीतिक रिश्तों को बनाए रखने की अहमियत खूब समझते हैं। पर सवाल सिर्फ सियासी रिश्तों को बनाए रखने का ही नहीं, अपनी जमीन से जुड़ाव का भी है, जिसमें कभी कोई बदलाव नहीं आया। राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने के बाद प्रणब जब वक्त निकालकर अपने गांव पहुंचे, तो वहां उनका जोरदार स्वागत हुआ। कतार में खड़े बच्चे बूढ़े और महिलाओं ने फूल बरसाकर उनका स्वागत किया। बात आस्था और विश्वास की भी है, तभी तो गांव के शिवमंदिर में इस दौरान प्रणब दा के नाम से पूजा जारी रही। देश की बड़ी जिम्मेदारियां निभा रहे प्रणब न तो अपने गांव को कभी भूले और न ही गांववालों को। स्कूल के दिनों के दोस्त रहे बलदेव राय बताते हैं कि प्रणब जब भी गांव आते हैं, उनका हालचाल जरूर लेते हैं। प्रणब मुखर्जी ने किन्नरहाता शिवचंद्र स्कूल से अपनी पढ़ाई की। और बाद में इसकी नई इमारत बनवाने में मदद भी दी। स्कूल ने भी अपने होनहार छात्र से जुड़े दस्तावेज बचा कर रखे हैं। रिकार्ड्स के मुताबिक 3 जुलाई, 1948 को प्रणब मुखर्जी ने यहां दाखिला लिया था। स्कूल का फैसला अब सही साबित हो रहा है। उनके बीच पला-पढ़ा पोल्टू अब प्रणब मुखर्जी के नाम से देश का पहला नागरिक बनने वाला है। हालांकि कायदे से देखा जाए, तो यह काम पांच साल पहले यानी 2007 में ही हो जाना चाहिए था। लेकिन माना जाता है कि कुछ पुरानी गांठे रास्ते का रोड़ा बन गई। कांग्रेस यही कहती रही कि वह पार्टी के ऐसे संकटमोचक हैं, जिनके बिना काम चलना मुश्किल है। अगर किसी नेता की अहमियत को उसकी ज़िम्मेदारियों से तौला जाए, तो कांग्रेस में प्रणब दा के आस−पास भी कोई नहीं है। यूपीए के द्वारा अब तक बनाए गए 183 मंत्री समूह यानी मंत्रियों के समूह में से 80 की अध्यक्षता प्रणब मुखर्जी ने की है। सबसे विवादित माने जाने वाले मुद्दों जैसे लोकपाल और तेलंगाना पर बनाए गए मंत्रियों के समूह की अगुवाई भी प्रणब मुखर्जी ने की है। और प्रणब मुखर्जी हमेशा से सरकार के संकटमोचक रहे हैं। उन्हें विपक्षी पार्टियों में कांग्रेस के सबसे स्वीकार्य चेहरे का दर्जा भी हासिल है। यह सही है कि राजनीतिक दलों के बीच प्रणब मुखर्जी की लोकप्रियता का कोई मुकाबला नहीं है, लेकिन कहीं न कहीं अपनी ही पार्टी की टॉप लीडरशिप के साथ उनके संबधों में कोई पेंच जरूर रहा है। कांग्रेसी भी मानते हैं कि सोनिया गांधी ने मुश्किल राजनीतिक हालात में हमेशा प्रणब पर भरोसा किया, लेकिन उन्हें कभी प्रधानमंत्री का पद नहीं देंगी। लेकिन अब वक्त बदल रहा है। आने वाले दिनों में बतौर राष्ट्रपति उनकी चुनौतियां बिल्कुल नई तरह की होंगी, लेकिन इस बात पर भी शक नहीं कि हमेशा की तरह वह आगे भी कामयाब रहेंगे। रायसीना की रेस में प्रणब मुखर्जी सबसे आगे हैं, जिन्हें यूपीए गठबंधन के अलावा दूसरे दलों से भी समर्थन हासिल है। गठबंधन में अगर किसी का विरोध है, तो वह नाम ममता बनर्जी का है, जिसे लेकर प्रणब ने अभी तक उम्मीद नहीं छोड़ी है। उधर, दूसरी तरफ प्रणब के मुकाबले में पीए संगमा मैदान में हैं, जिन्हें बीजेपी, बीजेडी और जयललिता की एआईएडीएमके का समर्थन हासिल है। लेकिन ममता को लेकर दोतरफा खींचतान जारी है। दरअसल इस बार के राष्ट्रपति चुनावों की बात करें तो शुरुआत ही धमाकेदार रही, जिसकी शायद ही किसी को उम्मीद रही हो। मुलायम और ममता ने जब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के सुझाए नाम खारिज कर अपने तीन विकल्प दिए, तो देश में एक तरह से सियासी सुनामी आ गई। गठबंधन सरकार के हिलते-डुलते रिश्तों से मीडिया के कैमरे चिपक गए। ममता ने तो बाकायदा कलाम को जीत की बधाई तक दे दी। यह अलग बात है कि कलाम ने रेस में उतरना मंजूर ही नहीं किया। हकीकत तो यह है कि राष्ट्रपति के नाम पर सारी अटकलबाजियां तभी तक रहीं, जबतक प्रणब मुखर्जी के नाम का ऐलान नहीं हुआ। उसके फौरन बाद ही तस्वीर साफ होने लगी। मुलायम ने फौरन प्रणब के नाम पर मुहर लगा दी। हालात के मुताबिक फैसला लेना प्रणब मुखर्जी की खासियत रही है। खासकर कब, कहां और क्या बोलना है, इसमें भी उनका जवाब नहीं। प्रणब दा को हिन्दी बोलते लोगों ने शायद ही कभी सुना हो, पर चुनाव प्रचार इलाहाबाद में करना हो तो बंगाली या अंग्रेजी बोलने का कोई मतलब नहीं बनता। इसलिए दादा ने हिन्दी में भाषण दिया। यह वही दादा हैं, जिन्होंने एक बार कहा था कि वह प्रधानमंत्री नहीं बन सकते, क्योंकि उन्हें हिन्दी नहीं आती। वैसे हिन्दी आना, न आना अलग बात है, पर उन्हें बोलना आता है, जो सबसे पते की बात है। लंबे और नजदीकी रिश्ते के बावजूद ममता बनर्जी के कड़े विरोध को देखकर जहां घरवाले तक हैरान दिखे, उतने पर भी प्रणब मुखर्जी का बड़ा ही संजीदा और नपा-तुला बयान आया कि वह मेरी छोटी बहन जैसी हैं। मौजूदा आंकड़ों के तहत प्रणब की राह बहुत मुश्किल नहीं दिखती। दरअसल यूपीए के 42 फीसदी वोट हैं, जिनमें तृणमूल के 4.4 फीसदी वोट शामिल हैं। अगर उसे हटाकर समाजवादी पार्टी के 6.2 फीसदी जोड़ दें, तो आंकड़ा 43.8 फीसदी होगा। इसमें लेफ्ट के 4.7 फीसदी जोड़ने पर 48.5 फीसदी वोट हो जाते हैं। और अब बीएसपी के 3.8 फीसदी का समर्थन मिलने से समर्थन 52.3 फीसदी यानी प्रणब की जीत पक्की हो जाती है। जबकि एनडीए के पास सिर्फ 28 फीसदी वोट है।टिप्पणियां हालांकि इन आंकड़ों में थोड़ी बहुत फेरबदल हो सकती है, क्योंकि आंध्र प्रदेश में हुए उपचुनावों के नए नतीजों से इसमें थोड़ा बदलाव आएगा। लेकिन जो बड़ा बदलाव आएगा, वह है प्रणब का रुतबा। वैसे सच कहा जाए तो मौजूदा हालात में प्रणब के लिए राष्ट्रपति भवन सबसे माकूल जगह है। वक्त के साथ उनका सब्र भी कहीं न कहीं जवाब दे रहा था। इस दौरान वह कई बार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर साफ कर चुके थे कि अब वह अगला चुनाव नहीं लड़ेंगे। साथ ही 77 साल की उम्र में अब वह टीम राहुल का भी हिस्सा नहीं बन सकते। ऐसे में गठबंधन की इस राजनीति में काफी कम विकल्प बचते हैं। और सबसे अहम बात यह कि मौजूदा हालात में प्रणब मुखर्जी जैसी स्वीकायर्ता किसी और की नहीं है। एक ऐसा नाम, जिस पर सहयोगियों के ऐतराज की गुंजाइश सबसे कम थी। लिहाजा यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने राष्ट्रपति पद के लिए प्रणब मुखर्जी के नाम का ऐलान किया। इसके साथ ही देश के सबसे अनुभवी और कद्दावर नेता प्रणब मुखर्जी रायसीना की राह पर चल पड़े। प्रणब मुखर्जी के लंबे राजनीतिक करियर और अनुभवों का हवाला देते हुए यूपीए गठबंधन ने देश की सभी पार्टियों के सांसदों और विधायकों से भी समर्थन की अपील भी की है। और खुद प्रणब मुखर्जी को भी इस बात का पूरा यकीन है कि उन्हें हर तरफ से मदद मिलेगी। बीते 30 सालों में वक्त का असर भले ही देखने को मिला हो, लेकिन प्रणब के अंदाज जस के तस हैं। प्रणब के बजट भाषणों पर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने एक बार कहा था कि भारत के सबसे छोटे वित्तमंत्री ने सबसे लंबा भाषण दिया। जहां तक पढ़ाई की बात है प्रणब मुखर्जी ने इतिहास, राजनीति शास्त्र और कानून की पढ़ाई की है। लेकिन बजट मैनेज करने का काम वह शुरुआत से ही करते रहे हैं। उनके बड़े भाई के मुताबिक बचपन में मां सामान लाने के लिए गिनकर पैसे देतीं, फिर भी प्रणब उसमें से मिठाइयां खरीद लाते थे। एक बार जब बड़े भाई ने पूछा, तो प्रणब का जवाब मिला, मां पैसे तो हमेशा गिन कर देती है, लेकिन सामान को हमेशा तोलती थोड़े ही है। नपे-तुले संसाधनों में कटौती के जरिए दूसरी जरूरतें पूरी करने का यह तरीका प्रणब आज भी लागू करते हैं। प्रणब अपने तीन भाई बहनों में सबसे छोटे हैं। पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के एक छोटे से गांव मिराती में पले-बढ़े प्रणब के पिता एक शिक्षक थे, जो कांग्रेस से भी जुड़े रहे। उनके पिता स्वतंत्रता सेनानी थे, जो आजादी से पहले जेल भी गए। प्रणब मुखर्जी को घर के बड़े बुजुर्ग प्यार से पोल्टू पुकारते हैं। हर किसी को इस बात पर हैरानी होती कि प्रणब अगर किसी चीज को एक बार देख लेते, तो वह उन्हें हमेशा के लिए याद हो जाती। तभी तो आज की तारीख में उनके करीबी प्रणब मुखर्जी की तुलना किसी चलते फिरते इनसाइक्लोपीडिया से करते हैं। प्रणब दा ने राजनीति की शुरुआत 60 के दशक में बांग्ला कांग्रेस से की। और जल्द ही यानी 1969 में वह राज्यसभा के सदस्य बनकर पहली बार दिल्ली पहुंचे। तब दिल्ली में उनकी कोई खास पहचान नहीं थी और वह सदन की पिछली लाइन में बैठने वालों में थे, लेकिन सदन में उनका दूसरा भाषण ही लाजवाब रहा। खचाखच भरे सदन में बैंकों के राष्ट्रीयकरण के मुद्दे पर भाषण देते प्रणब को देखकर इंदिरा गांधी प्रभावित हो गईं और इसके बाद इंदिरा तथा प्रणब की पहली मुलाकात हुई। फिर 1972 में जब बांग्ला कांग्रेस टूटकर कांग्रेस से जा मिली, तो प्रणब मुखर्जी, इंदिरा गांधी के करीबी और भरोसेमंद लोगों में शुमार हो गए। इसके अगले ही साल यानी 1973 में वह उद्योग उपमंत्री बने। तब से लेकर अभीतक अगर अपवाद के तौर पर राजीव सरकार को छोड़े दें, तो जब भी कांग्रेस सत्ता में रही, प्रणब मुखर्जी के पास अहम मंत्रालय रहे सिर्फ गृह मंत्रालय को छोड़कर। अपने लंबे सियासी करियर और बेशुमार अनुभवों की वजह से प्रणब अक्सर सेकेंड प्राइम मिनिस्टर कहे जाते हैं और कई बार प्रधानमंत्री की जिम्मेदारियां भी उठाई है, लेकिन खुद कभी प्रधानमंत्री नहीं बन सके। हो सकता है प्रणब दा इसे अपनी हसरत के तौर पर देखें, लेकिन उनके परिवार को इस बात का जरा भी मलाल नहीं रहा। बेटे का कहना है कि वह तो उनके लिए हमेशा से ही पीएम रहे हैं। और जब मौका उनके राष्ट्रपति बनने का आया, तो घर से लेकर गांव तक हर तरफ खुशी की लहर दौड़ गई। रायसीना की रेस में उतरते ही दादा नंबर वन पर आ गए। जब चाहने वाले इतने खुश हैं, तो घर वालों की पूछिये ही मत। देश के सबसे हाईप्रोफाइल पदों को संभालने वाले प्रणब मुखर्जी का परिवार बेहद लो प्रोफाइल रहता है। इस बात से भी पर्दा उठा कि कभी-कभार अगर दादा अपने गुस्से को लेकर चर्चा में आए, तो इसके पीछे की वजह उनका जिम्मेदारियों की वजह से खानपान और आराम से हुए समझौते रहे हैं। प्रणब के बेटे अभिजीत सरकारी नौकरी छोड़कर राजनीति में कूदे हैं। पिता की वजह से राजनीति की डगर इतनी कठिन नहीं रही, लेकिन राजनीतिक रिश्तों को बनाए रखने की अहमियत खूब समझते हैं। पर सवाल सिर्फ सियासी रिश्तों को बनाए रखने का ही नहीं, अपनी जमीन से जुड़ाव का भी है, जिसमें कभी कोई बदलाव नहीं आया। राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने के बाद प्रणब जब वक्त निकालकर अपने गांव पहुंचे, तो वहां उनका जोरदार स्वागत हुआ। कतार में खड़े बच्चे बूढ़े और महिलाओं ने फूल बरसाकर उनका स्वागत किया। बात आस्था और विश्वास की भी है, तभी तो गांव के शिवमंदिर में इस दौरान प्रणब दा के नाम से पूजा जारी रही। देश की बड़ी जिम्मेदारियां निभा रहे प्रणब न तो अपने गांव को कभी भूले और न ही गांववालों को। स्कूल के दिनों के दोस्त रहे बलदेव राय बताते हैं कि प्रणब जब भी गांव आते हैं, उनका हालचाल जरूर लेते हैं। प्रणब मुखर्जी ने किन्नरहाता शिवचंद्र स्कूल से अपनी पढ़ाई की। और बाद में इसकी नई इमारत बनवाने में मदद भी दी। स्कूल ने भी अपने होनहार छात्र से जुड़े दस्तावेज बचा कर रखे हैं। रिकार्ड्स के मुताबिक 3 जुलाई, 1948 को प्रणब मुखर्जी ने यहां दाखिला लिया था। स्कूल का फैसला अब सही साबित हो रहा है। उनके बीच पला-पढ़ा पोल्टू अब प्रणब मुखर्जी के नाम से देश का पहला नागरिक बनने वाला है। हालांकि कायदे से देखा जाए, तो यह काम पांच साल पहले यानी 2007 में ही हो जाना चाहिए था। लेकिन माना जाता है कि कुछ पुरानी गांठे रास्ते का रोड़ा बन गई। कांग्रेस यही कहती रही कि वह पार्टी के ऐसे संकटमोचक हैं, जिनके बिना काम चलना मुश्किल है। अगर किसी नेता की अहमियत को उसकी ज़िम्मेदारियों से तौला जाए, तो कांग्रेस में प्रणब दा के आस−पास भी कोई नहीं है। यूपीए के द्वारा अब तक बनाए गए 183 मंत्री समूह यानी मंत्रियों के समूह में से 80 की अध्यक्षता प्रणब मुखर्जी ने की है। सबसे विवादित माने जाने वाले मुद्दों जैसे लोकपाल और तेलंगाना पर बनाए गए मंत्रियों के समूह की अगुवाई भी प्रणब मुखर्जी ने की है। और प्रणब मुखर्जी हमेशा से सरकार के संकटमोचक रहे हैं। उन्हें विपक्षी पार्टियों में कांग्रेस के सबसे स्वीकार्य चेहरे का दर्जा भी हासिल है। यह सही है कि राजनीतिक दलों के बीच प्रणब मुखर्जी की लोकप्रियता का कोई मुकाबला नहीं है, लेकिन कहीं न कहीं अपनी ही पार्टी की टॉप लीडरशिप के साथ उनके संबधों में कोई पेंच जरूर रहा है। कांग्रेसी भी मानते हैं कि सोनिया गांधी ने मुश्किल राजनीतिक हालात में हमेशा प्रणब पर भरोसा किया, लेकिन उन्हें कभी प्रधानमंत्री का पद नहीं देंगी। लेकिन अब वक्त बदल रहा है। आने वाले दिनों में बतौर राष्ट्रपति उनकी चुनौतियां बिल्कुल नई तरह की होंगी, लेकिन इस बात पर भी शक नहीं कि हमेशा की तरह वह आगे भी कामयाब रहेंगे। रायसीना की रेस में प्रणब मुखर्जी सबसे आगे हैं, जिन्हें यूपीए गठबंधन के अलावा दूसरे दलों से भी समर्थन हासिल है। गठबंधन में अगर किसी का विरोध है, तो वह नाम ममता बनर्जी का है, जिसे लेकर प्रणब ने अभी तक उम्मीद नहीं छोड़ी है। उधर, दूसरी तरफ प्रणब के मुकाबले में पीए संगमा मैदान में हैं, जिन्हें बीजेपी, बीजेडी और जयललिता की एआईएडीएमके का समर्थन हासिल है। लेकिन ममता को लेकर दोतरफा खींचतान जारी है। दरअसल इस बार के राष्ट्रपति चुनावों की बात करें तो शुरुआत ही धमाकेदार रही, जिसकी शायद ही किसी को उम्मीद रही हो। मुलायम और ममता ने जब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के सुझाए नाम खारिज कर अपने तीन विकल्प दिए, तो देश में एक तरह से सियासी सुनामी आ गई। गठबंधन सरकार के हिलते-डुलते रिश्तों से मीडिया के कैमरे चिपक गए। ममता ने तो बाकायदा कलाम को जीत की बधाई तक दे दी। यह अलग बात है कि कलाम ने रेस में उतरना मंजूर ही नहीं किया। हकीकत तो यह है कि राष्ट्रपति के नाम पर सारी अटकलबाजियां तभी तक रहीं, जबतक प्रणब मुखर्जी के नाम का ऐलान नहीं हुआ। उसके फौरन बाद ही तस्वीर साफ होने लगी। मुलायम ने फौरन प्रणब के नाम पर मुहर लगा दी। हालात के मुताबिक फैसला लेना प्रणब मुखर्जी की खासियत रही है। खासकर कब, कहां और क्या बोलना है, इसमें भी उनका जवाब नहीं। प्रणब दा को हिन्दी बोलते लोगों ने शायद ही कभी सुना हो, पर चुनाव प्रचार इलाहाबाद में करना हो तो बंगाली या अंग्रेजी बोलने का कोई मतलब नहीं बनता। इसलिए दादा ने हिन्दी में भाषण दिया। यह वही दादा हैं, जिन्होंने एक बार कहा था कि वह प्रधानमंत्री नहीं बन सकते, क्योंकि उन्हें हिन्दी नहीं आती। वैसे हिन्दी आना, न आना अलग बात है, पर उन्हें बोलना आता है, जो सबसे पते की बात है। लंबे और नजदीकी रिश्ते के बावजूद ममता बनर्जी के कड़े विरोध को देखकर जहां घरवाले तक हैरान दिखे, उतने पर भी प्रणब मुखर्जी का बड़ा ही संजीदा और नपा-तुला बयान आया कि वह मेरी छोटी बहन जैसी हैं। मौजूदा आंकड़ों के तहत प्रणब की राह बहुत मुश्किल नहीं दिखती। दरअसल यूपीए के 42 फीसदी वोट हैं, जिनमें तृणमूल के 4.4 फीसदी वोट शामिल हैं। अगर उसे हटाकर समाजवादी पार्टी के 6.2 फीसदी जोड़ दें, तो आंकड़ा 43.8 फीसदी होगा। इसमें लेफ्ट के 4.7 फीसदी जोड़ने पर 48.5 फीसदी वोट हो जाते हैं। और अब बीएसपी के 3.8 फीसदी का समर्थन मिलने से समर्थन 52.3 फीसदी यानी प्रणब की जीत पक्की हो जाती है। जबकि एनडीए के पास सिर्फ 28 फीसदी वोट है।टिप्पणियां हालांकि इन आंकड़ों में थोड़ी बहुत फेरबदल हो सकती है, क्योंकि आंध्र प्रदेश में हुए उपचुनावों के नए नतीजों से इसमें थोड़ा बदलाव आएगा। लेकिन जो बड़ा बदलाव आएगा, वह है प्रणब का रुतबा। वैसे सच कहा जाए तो मौजूदा हालात में प्रणब के लिए राष्ट्रपति भवन सबसे माकूल जगह है। वक्त के साथ उनका सब्र भी कहीं न कहीं जवाब दे रहा था। इस दौरान वह कई बार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर साफ कर चुके थे कि अब वह अगला चुनाव नहीं लड़ेंगे। साथ ही 77 साल की उम्र में अब वह टीम राहुल का भी हिस्सा नहीं बन सकते। ऐसे में गठबंधन की इस राजनीति में काफी कम विकल्प बचते हैं। और सबसे अहम बात यह कि मौजूदा हालात में प्रणब मुखर्जी जैसी स्वीकायर्ता किसी और की नहीं है। प्रणब मुखर्जी के लंबे राजनीतिक करियर और अनुभवों का हवाला देते हुए यूपीए गठबंधन ने देश की सभी पार्टियों के सांसदों और विधायकों से भी समर्थन की अपील भी की है। और खुद प्रणब मुखर्जी को भी इस बात का पूरा यकीन है कि उन्हें हर तरफ से मदद मिलेगी। बीते 30 सालों में वक्त का असर भले ही देखने को मिला हो, लेकिन प्रणब के अंदाज जस के तस हैं। प्रणब के बजट भाषणों पर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने एक बार कहा था कि भारत के सबसे छोटे वित्तमंत्री ने सबसे लंबा भाषण दिया। जहां तक पढ़ाई की बात है प्रणब मुखर्जी ने इतिहास, राजनीति शास्त्र और कानून की पढ़ाई की है। लेकिन बजट मैनेज करने का काम वह शुरुआत से ही करते रहे हैं। उनके बड़े भाई के मुताबिक बचपन में मां सामान लाने के लिए गिनकर पैसे देतीं, फिर भी प्रणब उसमें से मिठाइयां खरीद लाते थे। एक बार जब बड़े भाई ने पूछा, तो प्रणब का जवाब मिला, मां पैसे तो हमेशा गिन कर देती है, लेकिन सामान को हमेशा तोलती थोड़े ही है। नपे-तुले संसाधनों में कटौती के जरिए दूसरी जरूरतें पूरी करने का यह तरीका प्रणब आज भी लागू करते हैं। प्रणब अपने तीन भाई बहनों में सबसे छोटे हैं। पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के एक छोटे से गांव मिराती में पले-बढ़े प्रणब के पिता एक शिक्षक थे, जो कांग्रेस से भी जुड़े रहे। उनके पिता स्वतंत्रता सेनानी थे, जो आजादी से पहले जेल भी गए। प्रणब मुखर्जी को घर के बड़े बुजुर्ग प्यार से पोल्टू पुकारते हैं। हर किसी को इस बात पर हैरानी होती कि प्रणब अगर किसी चीज को एक बार देख लेते, तो वह उन्हें हमेशा के लिए याद हो जाती। तभी तो आज की तारीख में उनके करीबी प्रणब मुखर्जी की तुलना किसी चलते फिरते इनसाइक्लोपीडिया से करते हैं। प्रणब दा ने राजनीति की शुरुआत 60 के दशक में बांग्ला कांग्रेस से की। और जल्द ही यानी 1969 में वह राज्यसभा के सदस्य बनकर पहली बार दिल्ली पहुंचे। तब दिल्ली में उनकी कोई खास पहचान नहीं थी और वह सदन की पिछली लाइन में बैठने वालों में थे, लेकिन सदन में उनका दूसरा भाषण ही लाजवाब रहा। खचाखच भरे सदन में बैंकों के राष्ट्रीयकरण के मुद्दे पर भाषण देते प्रणब को देखकर इंदिरा गांधी प्रभावित हो गईं और इसके बाद इंदिरा तथा प्रणब की पहली मुलाकात हुई। फिर 1972 में जब बांग्ला कांग्रेस टूटकर कांग्रेस से जा मिली, तो प्रणब मुखर्जी, इंदिरा गांधी के करीबी और भरोसेमंद लोगों में शुमार हो गए। इसके अगले ही साल यानी 1973 में वह उद्योग उपमंत्री बने। तब से लेकर अभीतक अगर अपवाद के तौर पर राजीव सरकार को छोड़े दें, तो जब भी कांग्रेस सत्ता में रही, प्रणब मुखर्जी के पास अहम मंत्रालय रहे सिर्फ गृह मंत्रालय को छोड़कर। अपने लंबे सियासी करियर और बेशुमार अनुभवों की वजह से प्रणब अक्सर सेकेंड प्राइम मिनिस्टर कहे जाते हैं और कई बार प्रधानमंत्री की जिम्मेदारियां भी उठाई है, लेकिन खुद कभी प्रधानमंत्री नहीं बन सके। हो सकता है प्रणब दा इसे अपनी हसरत के तौर पर देखें, लेकिन उनके परिवार को इस बात का जरा भी मलाल नहीं रहा। बेटे का कहना है कि वह तो उनके लिए हमेशा से ही पीएम रहे हैं। और जब मौका उनके राष्ट्रपति बनने का आया, तो घर से लेकर गांव तक हर तरफ खुशी की लहर दौड़ गई। रायसीना की रेस में उतरते ही दादा नंबर वन पर आ गए। जब चाहने वाले इतने खुश हैं, तो घर वालों की पूछिये ही मत। देश के सबसे हाईप्रोफाइल पदों को संभालने वाले प्रणब मुखर्जी का परिवार बेहद लो प्रोफाइल रहता है। इस बात से भी पर्दा उठा कि कभी-कभार अगर दादा अपने गुस्से को लेकर चर्चा में आए, तो इसके पीछे की वजह उनका जिम्मेदारियों की वजह से खानपान और आराम से हुए समझौते रहे हैं। प्रणब के बेटे अभिजीत सरकारी नौकरी छोड़कर राजनीति में कूदे हैं। पिता की वजह से राजनीति की डगर इतनी कठिन नहीं रही, लेकिन राजनीतिक रिश्तों को बनाए रखने की अहमियत खूब समझते हैं। पर सवाल सिर्फ सियासी रिश्तों को बनाए रखने का ही नहीं, अपनी जमीन से जुड़ाव का भी है, जिसमें कभी कोई बदलाव नहीं आया। राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने के बाद प्रणब जब वक्त निकालकर अपने गांव पहुंचे, तो वहां उनका जोरदार स्वागत हुआ। कतार में खड़े बच्चे बूढ़े और महिलाओं ने फूल बरसाकर उनका स्वागत किया। बात आस्था और विश्वास की भी है, तभी तो गांव के शिवमंदिर में इस दौरान प्रणब दा के नाम से पूजा जारी रही। देश की बड़ी जिम्मेदारियां निभा रहे प्रणब न तो अपने गांव को कभी भूले और न ही गांववालों को। स्कूल के दिनों के दोस्त रहे बलदेव राय बताते हैं कि प्रणब जब भी गांव आते हैं, उनका हालचाल जरूर लेते हैं। प्रणब मुखर्जी ने किन्नरहाता शिवचंद्र स्कूल से अपनी पढ़ाई की। और बाद में इसकी नई इमारत बनवाने में मदद भी दी। स्कूल ने भी अपने होनहार छात्र से जुड़े दस्तावेज बचा कर रखे हैं। रिकार्ड्स के मुताबिक 3 जुलाई, 1948 को प्रणब मुखर्जी ने यहां दाखिला लिया था। स्कूल का फैसला अब सही साबित हो रहा है। उनके बीच पला-पढ़ा पोल्टू अब प्रणब मुखर्जी के नाम से देश का पहला नागरिक बनने वाला है। हालांकि कायदे से देखा जाए, तो यह काम पांच साल पहले यानी 2007 में ही हो जाना चाहिए था। लेकिन माना जाता है कि कुछ पुरानी गांठे रास्ते का रोड़ा बन गई। कांग्रेस यही कहती रही कि वह पार्टी के ऐसे संकटमोचक हैं, जिनके बिना काम चलना मुश्किल है। अगर किसी नेता की अहमियत को उसकी ज़िम्मेदारियों से तौला जाए, तो कांग्रेस में प्रणब दा के आस−पास भी कोई नहीं है। यूपीए के द्वारा अब तक बनाए गए 183 मंत्री समूह यानी मंत्रियों के समूह में से 80 की अध्यक्षता प्रणब मुखर्जी ने की है। सबसे विवादित माने जाने वाले मुद्दों जैसे लोकपाल और तेलंगाना पर बनाए गए मंत्रियों के समूह की अगुवाई भी प्रणब मुखर्जी ने की है। और प्रणब मुखर्जी हमेशा से सरकार के संकटमोचक रहे हैं। उन्हें विपक्षी पार्टियों में कांग्रेस के सबसे स्वीकार्य चेहरे का दर्जा भी हासिल है। यह सही है कि राजनीतिक दलों के बीच प्रणब मुखर्जी की लोकप्रियता का कोई मुकाबला नहीं है, लेकिन कहीं न कहीं अपनी ही पार्टी की टॉप लीडरशिप के साथ उनके संबधों में कोई पेंच जरूर रहा है। कांग्रेसी भी मानते हैं कि सोनिया गांधी ने मुश्किल राजनीतिक हालात में हमेशा प्रणब पर भरोसा किया, लेकिन उन्हें कभी प्रधानमंत्री का पद नहीं देंगी। लेकिन अब वक्त बदल रहा है। आने वाले दिनों में बतौर राष्ट्रपति उनकी चुनौतियां बिल्कुल नई तरह की होंगी, लेकिन इस बात पर भी शक नहीं कि हमेशा की तरह वह आगे भी कामयाब रहेंगे। रायसीना की रेस में प्रणब मुखर्जी सबसे आगे हैं, जिन्हें यूपीए गठबंधन के अलावा दूसरे दलों से भी समर्थन हासिल है। गठबंधन में अगर किसी का विरोध है, तो वह नाम ममता बनर्जी का है, जिसे लेकर प्रणब ने अभी तक उम्मीद नहीं छोड़ी है। उधर, दूसरी तरफ प्रणब के मुकाबले में पीए संगमा मैदान में हैं, जिन्हें बीजेपी, बीजेडी और जयललिता की एआईएडीएमके का समर्थन हासिल है। लेकिन ममता को लेकर दोतरफा खींचतान जारी है। दरअसल इस बार के राष्ट्रपति चुनावों की बात करें तो शुरुआत ही धमाकेदार रही, जिसकी शायद ही किसी को उम्मीद रही हो। मुलायम और ममता ने जब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के सुझाए नाम खारिज कर अपने तीन विकल्प दिए, तो देश में एक तरह से सियासी सुनामी आ गई। गठबंधन सरकार के हिलते-डुलते रिश्तों से मीडिया के कैमरे चिपक गए। ममता ने तो बाकायदा कलाम को जीत की बधाई तक दे दी। यह अलग बात है कि कलाम ने रेस में उतरना मंजूर ही नहीं किया। हकीकत तो यह है कि राष्ट्रपति के नाम पर सारी अटकलबाजियां तभी तक रहीं, जबतक प्रणब मुखर्जी के नाम का ऐलान नहीं हुआ। उसके फौरन बाद ही तस्वीर साफ होने लगी। मुलायम ने फौरन प्रणब के नाम पर मुहर लगा दी। हालात के मुताबिक फैसला लेना प्रणब मुखर्जी की खासियत रही है। खासकर कब, कहां और क्या बोलना है, इसमें भी उनका जवाब नहीं। प्रणब दा को हिन्दी बोलते लोगों ने शायद ही कभी सुना हो, पर चुनाव प्रचार इलाहाबाद में करना हो तो बंगाली या अंग्रेजी बोलने का कोई मतलब नहीं बनता। इसलिए दादा ने हिन्दी में भाषण दिया। यह वही दादा हैं, जिन्होंने एक बार कहा था कि वह प्रधानमंत्री नहीं बन सकते, क्योंकि उन्हें हिन्दी नहीं आती। वैसे हिन्दी आना, न आना अलग बात है, पर उन्हें बोलना आता है, जो सबसे पते की बात है। लंबे और नजदीकी रिश्ते के बावजूद ममता बनर्जी के कड़े विरोध को देखकर जहां घरवाले तक हैरान दिखे, उतने पर भी प्रणब मुखर्जी का बड़ा ही संजीदा और नपा-तुला बयान आया कि वह मेरी छोटी बहन जैसी हैं। मौजूदा आंकड़ों के तहत प्रणब की राह बहुत मुश्किल नहीं दिखती। दरअसल यूपीए के 42 फीसदी वोट हैं, जिनमें तृणमूल के 4.4 फीसदी वोट शामिल हैं। अगर उसे हटाकर समाजवादी पार्टी के 6.2 फीसदी जोड़ दें, तो आंकड़ा 43.8 फीसदी होगा। इसमें लेफ्ट के 4.7 फीसदी जोड़ने पर 48.5 फीसदी वोट हो जाते हैं। और अब बीएसपी के 3.8 फीसदी का समर्थन मिलने से समर्थन 52.3 फीसदी यानी प्रणब की जीत पक्की हो जाती है। जबकि एनडीए के पास सिर्फ 28 फीसदी वोट है।टिप्पणियां हालांकि इन आंकड़ों में थोड़ी बहुत फेरबदल हो सकती है, क्योंकि आंध्र प्रदेश में हुए उपचुनावों के नए नतीजों से इसमें थोड़ा बदलाव आएगा। लेकिन जो बड़ा बदलाव आएगा, वह है प्रणब का रुतबा। वैसे सच कहा जाए तो मौजूदा हालात में प्रणब के लिए राष्ट्रपति भवन सबसे माकूल जगह है। वक्त के साथ उनका सब्र भी कहीं न कहीं जवाब दे रहा था। इस दौरान वह कई बार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर साफ कर चुके थे कि अब वह अगला चुनाव नहीं लड़ेंगे। साथ ही 77 साल की उम्र में अब वह टीम राहुल का भी हिस्सा नहीं बन सकते। ऐसे में गठबंधन की इस राजनीति में काफी कम विकल्प बचते हैं। और सबसे अहम बात यह कि मौजूदा हालात में प्रणब मुखर्जी जैसी स्वीकायर्ता किसी और की नहीं है। जहां तक पढ़ाई की बात है प्रणब मुखर्जी ने इतिहास, राजनीति शास्त्र और कानून की पढ़ाई की है। लेकिन बजट मैनेज करने का काम वह शुरुआत से ही करते रहे हैं। उनके बड़े भाई के मुताबिक बचपन में मां सामान लाने के लिए गिनकर पैसे देतीं, फिर भी प्रणब उसमें से मिठाइयां खरीद लाते थे। एक बार जब बड़े भाई ने पूछा, तो प्रणब का जवाब मिला, मां पैसे तो हमेशा गिन कर देती है, लेकिन सामान को हमेशा तोलती थोड़े ही है। नपे-तुले संसाधनों में कटौती के जरिए दूसरी जरूरतें पूरी करने का यह तरीका प्रणब आज भी लागू करते हैं। प्रणब अपने तीन भाई बहनों में सबसे छोटे हैं। पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के एक छोटे से गांव मिराती में पले-बढ़े प्रणब के पिता एक शिक्षक थे, जो कांग्रेस से भी जुड़े रहे। उनके पिता स्वतंत्रता सेनानी थे, जो आजादी से पहले जेल भी गए। प्रणब मुखर्जी को घर के बड़े बुजुर्ग प्यार से पोल्टू पुकारते हैं। हर किसी को इस बात पर हैरानी होती कि प्रणब अगर किसी चीज को एक बार देख लेते, तो वह उन्हें हमेशा के लिए याद हो जाती। तभी तो आज की तारीख में उनके करीबी प्रणब मुखर्जी की तुलना किसी चलते फिरते इनसाइक्लोपीडिया से करते हैं। प्रणब दा ने राजनीति की शुरुआत 60 के दशक में बांग्ला कांग्रेस से की। और जल्द ही यानी 1969 में वह राज्यसभा के सदस्य बनकर पहली बार दिल्ली पहुंचे। तब दिल्ली में उनकी कोई खास पहचान नहीं थी और वह सदन की पिछली लाइन में बैठने वालों में थे, लेकिन सदन में उनका दूसरा भाषण ही लाजवाब रहा। खचाखच भरे सदन में बैंकों के राष्ट्रीयकरण के मुद्दे पर भाषण देते प्रणब को देखकर इंदिरा गांधी प्रभावित हो गईं और इसके बाद इंदिरा तथा प्रणब की पहली मुलाकात हुई। फिर 1972 में जब बांग्ला कांग्रेस टूटकर कांग्रेस से जा मिली, तो प्रणब मुखर्जी, इंदिरा गांधी के करीबी और भरोसेमंद लोगों में शुमार हो गए। इसके अगले ही साल यानी 1973 में वह उद्योग उपमंत्री बने। तब से लेकर अभीतक अगर अपवाद के तौर पर राजीव सरकार को छोड़े दें, तो जब भी कांग्रेस सत्ता में रही, प्रणब मुखर्जी के पास अहम मंत्रालय रहे सिर्फ गृह मंत्रालय को छोड़कर। अपने लंबे सियासी करियर और बेशुमार अनुभवों की वजह से प्रणब अक्सर सेकेंड प्राइम मिनिस्टर कहे जाते हैं और कई बार प्रधानमंत्री की जिम्मेदारियां भी उठाई है, लेकिन खुद कभी प्रधानमंत्री नहीं बन सके। हो सकता है प्रणब दा इसे अपनी हसरत के तौर पर देखें, लेकिन उनके परिवार को इस बात का जरा भी मलाल नहीं रहा। बेटे का कहना है कि वह तो उनके लिए हमेशा से ही पीएम रहे हैं। और जब मौका उनके राष्ट्रपति बनने का आया, तो घर से लेकर गांव तक हर तरफ खुशी की लहर दौड़ गई। रायसीना की रेस में उतरते ही दादा नंबर वन पर आ गए। जब चाहने वाले इतने खुश हैं, तो घर वालों की पूछिये ही मत। देश के सबसे हाईप्रोफाइल पदों को संभालने वाले प्रणब मुखर्जी का परिवार बेहद लो प्रोफाइल रहता है। इस बात से भी पर्दा उठा कि कभी-कभार अगर दादा अपने गुस्से को लेकर चर्चा में आए, तो इसके पीछे की वजह उनका जिम्मेदारियों की वजह से खानपान और आराम से हुए समझौते रहे हैं। प्रणब के बेटे अभिजीत सरकारी नौकरी छोड़कर राजनीति में कूदे हैं। पिता की वजह से राजनीति की डगर इतनी कठिन नहीं रही, लेकिन राजनीतिक रिश्तों को बनाए रखने की अहमियत खूब समझते हैं। पर सवाल सिर्फ सियासी रिश्तों को बनाए रखने का ही नहीं, अपनी जमीन से जुड़ाव का भी है, जिसमें कभी कोई बदलाव नहीं आया। राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने के बाद प्रणब जब वक्त निकालकर अपने गांव पहुंचे, तो वहां उनका जोरदार स्वागत हुआ। कतार में खड़े बच्चे बूढ़े और महिलाओं ने फूल बरसाकर उनका स्वागत किया। बात आस्था और विश्वास की भी है, तभी तो गांव के शिवमंदिर में इस दौरान प्रणब दा के नाम से पूजा जारी रही। देश की बड़ी जिम्मेदारियां निभा रहे प्रणब न तो अपने गांव को कभी भूले और न ही गांववालों को। स्कूल के दिनों के दोस्त रहे बलदेव राय बताते हैं कि प्रणब जब भी गांव आते हैं, उनका हालचाल जरूर लेते हैं। प्रणब मुखर्जी ने किन्नरहाता शिवचंद्र स्कूल से अपनी पढ़ाई की। और बाद में इसकी नई इमारत बनवाने में मदद भी दी। स्कूल ने भी अपने होनहार छात्र से जुड़े दस्तावेज बचा कर रखे हैं। रिकार्ड्स के मुताबिक 3 जुलाई, 1948 को प्रणब मुखर्जी ने यहां दाखिला लिया था। स्कूल का फैसला अब सही साबित हो रहा है। उनके बीच पला-पढ़ा पोल्टू अब प्रणब मुखर्जी के नाम से देश का पहला नागरिक बनने वाला है। हालांकि कायदे से देखा जाए, तो यह काम पांच साल पहले यानी 2007 में ही हो जाना चाहिए था। लेकिन माना जाता है कि कुछ पुरानी गांठे रास्ते का रोड़ा बन गई। कांग्रेस यही कहती रही कि वह पार्टी के ऐसे संकटमोचक हैं, जिनके बिना काम चलना मुश्किल है। अगर किसी नेता की अहमियत को उसकी ज़िम्मेदारियों से तौला जाए, तो कांग्रेस में प्रणब दा के आस−पास भी कोई नहीं है। यूपीए के द्वारा अब तक बनाए गए 183 मंत्री समूह यानी मंत्रियों के समूह में से 80 की अध्यक्षता प्रणब मुखर्जी ने की है। सबसे विवादित माने जाने वाले मुद्दों जैसे लोकपाल और तेलंगाना पर बनाए गए मंत्रियों के समूह की अगुवाई भी प्रणब मुखर्जी ने की है। और प्रणब मुखर्जी हमेशा से सरकार के संकटमोचक रहे हैं। उन्हें विपक्षी पार्टियों में कांग्रेस के सबसे स्वीकार्य चेहरे का दर्जा भी हासिल है। यह सही है कि राजनीतिक दलों के बीच प्रणब मुखर्जी की लोकप्रियता का कोई मुकाबला नहीं है, लेकिन कहीं न कहीं अपनी ही पार्टी की टॉप लीडरशिप के साथ उनके संबधों में कोई पेंच जरूर रहा है। कांग्रेसी भी मानते हैं कि सोनिया गांधी ने मुश्किल राजनीतिक हालात में हमेशा प्रणब पर भरोसा किया, लेकिन उन्हें कभी प्रधानमंत्री का पद नहीं देंगी। लेकिन अब वक्त बदल रहा है। आने वाले दिनों में बतौर राष्ट्रपति उनकी चुनौतियां बिल्कुल नई तरह की होंगी, लेकिन इस बात पर भी शक नहीं कि हमेशा की तरह वह आगे भी कामयाब रहेंगे। रायसीना की रेस में प्रणब मुखर्जी सबसे आगे हैं, जिन्हें यूपीए गठबंधन के अलावा दूसरे दलों से भी समर्थन हासिल है। गठबंधन में अगर किसी का विरोध है, तो वह नाम ममता बनर्जी का है, जिसे लेकर प्रणब ने अभी तक उम्मीद नहीं छोड़ी है। उधर, दूसरी तरफ प्रणब के मुकाबले में पीए संगमा मैदान में हैं, जिन्हें बीजेपी, बीजेडी और जयललिता की एआईएडीएमके का समर्थन हासिल है। लेकिन ममता को लेकर दोतरफा खींचतान जारी है। दरअसल इस बार के राष्ट्रपति चुनावों की बात करें तो शुरुआत ही धमाकेदार रही, जिसकी शायद ही किसी को उम्मीद रही हो। मुलायम और ममता ने जब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के सुझाए नाम खारिज कर अपने तीन विकल्प दिए, तो देश में एक तरह से सियासी सुनामी आ गई। गठबंधन सरकार के हिलते-डुलते रिश्तों से मीडिया के कैमरे चिपक गए। ममता ने तो बाकायदा कलाम को जीत की बधाई तक दे दी। यह अलग बात है कि कलाम ने रेस में उतरना मंजूर ही नहीं किया। हकीकत तो यह है कि राष्ट्रपति के नाम पर सारी अटकलबाजियां तभी तक रहीं, जबतक प्रणब मुखर्जी के नाम का ऐलान नहीं हुआ। उसके फौरन बाद ही तस्वीर साफ होने लगी। मुलायम ने फौरन प्रणब के नाम पर मुहर लगा दी। हालात के मुताबिक फैसला लेना प्रणब मुखर्जी की खासियत रही है। खासकर कब, कहां और क्या बोलना है, इसमें भी उनका जवाब नहीं। प्रणब दा को हिन्दी बोलते लोगों ने शायद ही कभी सुना हो, पर चुनाव प्रचार इलाहाबाद में करना हो तो बंगाली या अंग्रेजी बोलने का कोई मतलब नहीं बनता। इसलिए दादा ने हिन्दी में भाषण दिया। यह वही दादा हैं, जिन्होंने एक बार कहा था कि वह प्रधानमंत्री नहीं बन सकते, क्योंकि उन्हें हिन्दी नहीं आती। वैसे हिन्दी आना, न आना अलग बात है, पर उन्हें बोलना आता है, जो सबसे पते की बात है। लंबे और नजदीकी रिश्ते के बावजूद ममता बनर्जी के कड़े विरोध को देखकर जहां घरवाले तक हैरान दिखे, उतने पर भी प्रणब मुखर्जी का बड़ा ही संजीदा और नपा-तुला बयान आया कि वह मेरी छोटी बहन जैसी हैं। मौजूदा आंकड़ों के तहत प्रणब की राह बहुत मुश्किल नहीं दिखती। दरअसल यूपीए के 42 फीसदी वोट हैं, जिनमें तृणमूल के 4.4 फीसदी वोट शामिल हैं। अगर उसे हटाकर समाजवादी पार्टी के 6.2 फीसदी जोड़ दें, तो आंकड़ा 43.8 फीसदी होगा। इसमें लेफ्ट के 4.7 फीसदी जोड़ने पर 48.5 फीसदी वोट हो जाते हैं। और अब बीएसपी के 3.8 फीसदी का समर्थन मिलने से समर्थन 52.3 फीसदी यानी प्रणब की जीत पक्की हो जाती है। जबकि एनडीए के पास सिर्फ 28 फीसदी वोट है।टिप्पणियां हालांकि इन आंकड़ों में थोड़ी बहुत फेरबदल हो सकती है, क्योंकि आंध्र प्रदेश में हुए उपचुनावों के नए नतीजों से इसमें थोड़ा बदलाव आएगा। लेकिन जो बड़ा बदलाव आएगा, वह है प्रणब का रुतबा। वैसे सच कहा जाए तो मौजूदा हालात में प्रणब के लिए राष्ट्रपति भवन सबसे माकूल जगह है। वक्त के साथ उनका सब्र भी कहीं न कहीं जवाब दे रहा था। इस दौरान वह कई बार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर साफ कर चुके थे कि अब वह अगला चुनाव नहीं लड़ेंगे। साथ ही 77 साल की उम्र में अब वह टीम राहुल का भी हिस्सा नहीं बन सकते। ऐसे में गठबंधन की इस राजनीति में काफी कम विकल्प बचते हैं। और सबसे अहम बात यह कि मौजूदा हालात में प्रणब मुखर्जी जैसी स्वीकायर्ता किसी और की नहीं है। नपे-तुले संसाधनों में कटौती के जरिए दूसरी जरूरतें पूरी करने का यह तरीका प्रणब आज भी लागू करते हैं। प्रणब अपने तीन भाई बहनों में सबसे छोटे हैं। पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के एक छोटे से गांव मिराती में पले-बढ़े प्रणब के पिता एक शिक्षक थे, जो कांग्रेस से भी जुड़े रहे। उनके पिता स्वतंत्रता सेनानी थे, जो आजादी से पहले जेल भी गए। प्रणब मुखर्जी को घर के बड़े बुजुर्ग प्यार से पोल्टू पुकारते हैं। हर किसी को इस बात पर हैरानी होती कि प्रणब अगर किसी चीज को एक बार देख लेते, तो वह उन्हें हमेशा के लिए याद हो जाती। तभी तो आज की तारीख में उनके करीबी प्रणब मुखर्जी की तुलना किसी चलते फिरते इनसाइक्लोपीडिया से करते हैं। प्रणब दा ने राजनीति की शुरुआत 60 के दशक में बांग्ला कांग्रेस से की। और जल्द ही यानी 1969 में वह राज्यसभा के सदस्य बनकर पहली बार दिल्ली पहुंचे। तब दिल्ली में उनकी कोई खास पहचान नहीं थी और वह सदन की पिछली लाइन में बैठने वालों में थे, लेकिन सदन में उनका दूसरा भाषण ही लाजवाब रहा। खचाखच भरे सदन में बैंकों के राष्ट्रीयकरण के मुद्दे पर भाषण देते प्रणब को देखकर इंदिरा गांधी प्रभावित हो गईं और इसके बाद इंदिरा तथा प्रणब की पहली मुलाकात हुई। फिर 1972 में जब बांग्ला कांग्रेस टूटकर कांग्रेस से जा मिली, तो प्रणब मुखर्जी, इंदिरा गांधी के करीबी और भरोसेमंद लोगों में शुमार हो गए। इसके अगले ही साल यानी 1973 में वह उद्योग उपमंत्री बने। तब से लेकर अभीतक अगर अपवाद के तौर पर राजीव सरकार को छोड़े दें, तो जब भी कांग्रेस सत्ता में रही, प्रणब मुखर्जी के पास अहम मंत्रालय रहे सिर्फ गृह मंत्रालय को छोड़कर। अपने लंबे सियासी करियर और बेशुमार अनुभवों की वजह से प्रणब अक्सर सेकेंड प्राइम मिनिस्टर कहे जाते हैं और कई बार प्रधानमंत्री की जिम्मेदारियां भी उठाई है, लेकिन खुद कभी प्रधानमंत्री नहीं बन सके। हो सकता है प्रणब दा इसे अपनी हसरत के तौर पर देखें, लेकिन उनके परिवार को इस बात का जरा भी मलाल नहीं रहा। बेटे का कहना है कि वह तो उनके लिए हमेशा से ही पीएम रहे हैं। और जब मौका उनके राष्ट्रपति बनने का आया, तो घर से लेकर गांव तक हर तरफ खुशी की लहर दौड़ गई। रायसीना की रेस में उतरते ही दादा नंबर वन पर आ गए। जब चाहने वाले इतने खुश हैं, तो घर वालों की पूछिये ही मत। देश के सबसे हाईप्रोफाइल पदों को संभालने वाले प्रणब मुखर्जी का परिवार बेहद लो प्रोफाइल रहता है। इस बात से भी पर्दा उठा कि कभी-कभार अगर दादा अपने गुस्से को लेकर चर्चा में आए, तो इसके पीछे की वजह उनका जिम्मेदारियों की वजह से खानपान और आराम से हुए समझौते रहे हैं। प्रणब के बेटे अभिजीत सरकारी नौकरी छोड़कर राजनीति में कूदे हैं। पिता की वजह से राजनीति की डगर इतनी कठिन नहीं रही, लेकिन राजनीतिक रिश्तों को बनाए रखने की अहमियत खूब समझते हैं। पर सवाल सिर्फ सियासी रिश्तों को बनाए रखने का ही नहीं, अपनी जमीन से जुड़ाव का भी है, जिसमें कभी कोई बदलाव नहीं आया। राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने के बाद प्रणब जब वक्त निकालकर अपने गांव पहुंचे, तो वहां उनका जोरदार स्वागत हुआ। कतार में खड़े बच्चे बूढ़े और महिलाओं ने फूल बरसाकर उनका स्वागत किया। बात आस्था और विश्वास की भी है, तभी तो गांव के शिवमंदिर में इस दौरान प्रणब दा के नाम से पूजा जारी रही। देश की बड़ी जिम्मेदारियां निभा रहे प्रणब न तो अपने गांव को कभी भूले और न ही गांववालों को। स्कूल के दिनों के दोस्त रहे बलदेव राय बताते हैं कि प्रणब जब भी गांव आते हैं, उनका हालचाल जरूर लेते हैं। प्रणब मुखर्जी ने किन्नरहाता शिवचंद्र स्कूल से अपनी पढ़ाई की। और बाद में इसकी नई इमारत बनवाने में मदद भी दी। स्कूल ने भी अपने होनहार छात्र से जुड़े दस्तावेज बचा कर रखे हैं। रिकार्ड्स के मुताबिक 3 जुलाई, 1948 को प्रणब मुखर्जी ने यहां दाखिला लिया था। स्कूल का फैसला अब सही साबित हो रहा है। उनके बीच पला-पढ़ा पोल्टू अब प्रणब मुखर्जी के नाम से देश का पहला नागरिक बनने वाला है। हालांकि कायदे से देखा जाए, तो यह काम पांच साल पहले यानी 2007 में ही हो जाना चाहिए था। लेकिन माना जाता है कि कुछ पुरानी गांठे रास्ते का रोड़ा बन गई। कांग्रेस यही कहती रही कि वह पार्टी के ऐसे संकटमोचक हैं, जिनके बिना काम चलना मुश्किल है। अगर किसी नेता की अहमियत को उसकी ज़िम्मेदारियों से तौला जाए, तो कांग्रेस में प्रणब दा के आस−पास भी कोई नहीं है। यूपीए के द्वारा अब तक बनाए गए 183 मंत्री समूह यानी मंत्रियों के समूह में से 80 की अध्यक्षता प्रणब मुखर्जी ने की है। सबसे विवादित माने जाने वाले मुद्दों जैसे लोकपाल और तेलंगाना पर बनाए गए मंत्रियों के समूह की अगुवाई भी प्रणब मुखर्जी ने की है। और प्रणब मुखर्जी हमेशा से सरकार के संकटमोचक रहे हैं। उन्हें विपक्षी पार्टियों में कांग्रेस के सबसे स्वीकार्य चेहरे का दर्जा भी हासिल है। यह सही है कि राजनीतिक दलों के बीच प्रणब मुखर्जी की लोकप्रियता का कोई मुकाबला नहीं है, लेकिन कहीं न कहीं अपनी ही पार्टी की टॉप लीडरशिप के साथ उनके संबधों में कोई पेंच जरूर रहा है। कांग्रेसी भी मानते हैं कि सोनिया गांधी ने मुश्किल राजनीतिक हालात में हमेशा प्रणब पर भरोसा किया, लेकिन उन्हें कभी प्रधानमंत्री का पद नहीं देंगी। लेकिन अब वक्त बदल रहा है। आने वाले दिनों में बतौर राष्ट्रपति उनकी चुनौतियां बिल्कुल नई तरह की होंगी, लेकिन इस बात पर भी शक नहीं कि हमेशा की तरह वह आगे भी कामयाब रहेंगे। रायसीना की रेस में प्रणब मुखर्जी सबसे आगे हैं, जिन्हें यूपीए गठबंधन के अलावा दूसरे दलों से भी समर्थन हासिल है। गठबंधन में अगर किसी का विरोध है, तो वह नाम ममता बनर्जी का है, जिसे लेकर प्रणब ने अभी तक उम्मीद नहीं छोड़ी है। उधर, दूसरी तरफ प्रणब के मुकाबले में पीए संगमा मैदान में हैं, जिन्हें बीजेपी, बीजेडी और जयललिता की एआईएडीएमके का समर्थन हासिल है। लेकिन ममता को लेकर दोतरफा खींचतान जारी है। दरअसल इस बार के राष्ट्रपति चुनावों की बात करें तो शुरुआत ही धमाकेदार रही, जिसकी शायद ही किसी को उम्मीद रही हो। मुलायम और ममता ने जब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के सुझाए नाम खारिज कर अपने तीन विकल्प दिए, तो देश में एक तरह से सियासी सुनामी आ गई। गठबंधन सरकार के हिलते-डुलते रिश्तों से मीडिया के कैमरे चिपक गए। ममता ने तो बाकायदा कलाम को जीत की बधाई तक दे दी। यह अलग बात है कि कलाम ने रेस में उतरना मंजूर ही नहीं किया। हकीकत तो यह है कि राष्ट्रपति के नाम पर सारी अटकलबाजियां तभी तक रहीं, जबतक प्रणब मुखर्जी के नाम का ऐलान नहीं हुआ। उसके फौरन बाद ही तस्वीर साफ होने लगी। मुलायम ने फौरन प्रणब के नाम पर मुहर लगा दी। हालात के मुताबिक फैसला लेना प्रणब मुखर्जी की खासियत रही है। खासकर कब, कहां और क्या बोलना है, इसमें भी उनका जवाब नहीं। प्रणब दा को हिन्दी बोलते लोगों ने शायद ही कभी सुना हो, पर चुनाव प्रचार इलाहाबाद में करना हो तो बंगाली या अंग्रेजी बोलने का कोई मतलब नहीं बनता। इसलिए दादा ने हिन्दी में भाषण दिया। यह वही दादा हैं, जिन्होंने एक बार कहा था कि वह प्रधानमंत्री नहीं बन सकते, क्योंकि उन्हें हिन्दी नहीं आती। वैसे हिन्दी आना, न आना अलग बात है, पर उन्हें बोलना आता है, जो सबसे पते की बात है। लंबे और नजदीकी रिश्ते के बावजूद ममता बनर्जी के कड़े विरोध को देखकर जहां घरवाले तक हैरान दिखे, उतने पर भी प्रणब मुखर्जी का बड़ा ही संजीदा और नपा-तुला बयान आया कि वह मेरी छोटी बहन जैसी हैं। मौजूदा आंकड़ों के तहत प्रणब की राह बहुत मुश्किल नहीं दिखती। दरअसल यूपीए के 42 फीसदी वोट हैं, जिनमें तृणमूल के 4.4 फीसदी वोट शामिल हैं। अगर उसे हटाकर समाजवादी पार्टी के 6.2 फीसदी जोड़ दें, तो आंकड़ा 43.8 फीसदी होगा। इसमें लेफ्ट के 4.7 फीसदी जोड़ने पर 48.5 फीसदी वोट हो जाते हैं। और अब बीएसपी के 3.8 फीसदी का समर्थन मिलने से समर्थन 52.3 फीसदी यानी प्रणब की जीत पक्की हो जाती है। जबकि एनडीए के पास सिर्फ 28 फीसदी वोट है।टिप्पणियां हालांकि इन आंकड़ों में थोड़ी बहुत फेरबदल हो सकती है, क्योंकि आंध्र प्रदेश में हुए उपचुनावों के नए नतीजों से इसमें थोड़ा बदलाव आएगा। लेकिन जो बड़ा बदलाव आएगा, वह है प्रणब का रुतबा। वैसे सच कहा जाए तो मौजूदा हालात में प्रणब के लिए राष्ट्रपति भवन सबसे माकूल जगह है। वक्त के साथ उनका सब्र भी कहीं न कहीं जवाब दे रहा था। इस दौरान वह कई बार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर साफ कर चुके थे कि अब वह अगला चुनाव नहीं लड़ेंगे। साथ ही 77 साल की उम्र में अब वह टीम राहुल का भी हिस्सा नहीं बन सकते। ऐसे में गठबंधन की इस राजनीति में काफी कम विकल्प बचते हैं। और सबसे अहम बात यह कि मौजूदा हालात में प्रणब मुखर्जी जैसी स्वीकायर्ता किसी और की नहीं है। प्रणब मुखर्जी को घर के बड़े बुजुर्ग प्यार से पोल्टू पुकारते हैं। हर किसी को इस बात पर हैरानी होती कि प्रणब अगर किसी चीज को एक बार देख लेते, तो वह उन्हें हमेशा के लिए याद हो जाती। तभी तो आज की तारीख में उनके करीबी प्रणब मुखर्जी की तुलना किसी चलते फिरते इनसाइक्लोपीडिया से करते हैं। प्रणब दा ने राजनीति की शुरुआत 60 के दशक में बांग्ला कांग्रेस से की। और जल्द ही यानी 1969 में वह राज्यसभा के सदस्य बनकर पहली बार दिल्ली पहुंचे। तब दिल्ली में उनकी कोई खास पहचान नहीं थी और वह सदन की पिछली लाइन में बैठने वालों में थे, लेकिन सदन में उनका दूसरा भाषण ही लाजवाब रहा। खचाखच भरे सदन में बैंकों के राष्ट्रीयकरण के मुद्दे पर भाषण देते प्रणब को देखकर इंदिरा गांधी प्रभावित हो गईं और इसके बाद इंदिरा तथा प्रणब की पहली मुलाकात हुई। फिर 1972 में जब बांग्ला कांग्रेस टूटकर कांग्रेस से जा मिली, तो प्रणब मुखर्जी, इंदिरा गांधी के करीबी और भरोसेमंद लोगों में शुमार हो गए। इसके अगले ही साल यानी 1973 में वह उद्योग उपमंत्री बने। तब से लेकर अभीतक अगर अपवाद के तौर पर राजीव सरकार को छोड़े दें, तो जब भी कांग्रेस सत्ता में रही, प्रणब मुखर्जी के पास अहम मंत्रालय रहे सिर्फ गृह मंत्रालय को छोड़कर। अपने लंबे सियासी करियर और बेशुमार अनुभवों की वजह से प्रणब अक्सर सेकेंड प्राइम मिनिस्टर कहे जाते हैं और कई बार प्रधानमंत्री की जिम्मेदारियां भी उठाई है, लेकिन खुद कभी प्रधानमंत्री नहीं बन सके। हो सकता है प्रणब दा इसे अपनी हसरत के तौर पर देखें, लेकिन उनके परिवार को इस बात का जरा भी मलाल नहीं रहा। बेटे का कहना है कि वह तो उनके लिए हमेशा से ही पीएम रहे हैं। और जब मौका उनके राष्ट्रपति बनने का आया, तो घर से लेकर गांव तक हर तरफ खुशी की लहर दौड़ गई। रायसीना की रेस में उतरते ही दादा नंबर वन पर आ गए। जब चाहने वाले इतने खुश हैं, तो घर वालों की पूछिये ही मत। देश के सबसे हाईप्रोफाइल पदों को संभालने वाले प्रणब मुखर्जी का परिवार बेहद लो प्रोफाइल रहता है। इस बात से भी पर्दा उठा कि कभी-कभार अगर दादा अपने गुस्से को लेकर चर्चा में आए, तो इसके पीछे की वजह उनका जिम्मेदारियों की वजह से खानपान और आराम से हुए समझौते रहे हैं। प्रणब के बेटे अभिजीत सरकारी नौकरी छोड़कर राजनीति में कूदे हैं। पिता की वजह से राजनीति की डगर इतनी कठिन नहीं रही, लेकिन राजनीतिक रिश्तों को बनाए रखने की अहमियत खूब समझते हैं। पर सवाल सिर्फ सियासी रिश्तों को बनाए रखने का ही नहीं, अपनी जमीन से जुड़ाव का भी है, जिसमें कभी कोई बदलाव नहीं आया। राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने के बाद प्रणब जब वक्त निकालकर अपने गांव पहुंचे, तो वहां उनका जोरदार स्वागत हुआ। कतार में खड़े बच्चे बूढ़े और महिलाओं ने फूल बरसाकर उनका स्वागत किया। बात आस्था और विश्वास की भी है, तभी तो गांव के शिवमंदिर में इस दौरान प्रणब दा के नाम से पूजा जारी रही। देश की बड़ी जिम्मेदारियां निभा रहे प्रणब न तो अपने गांव को कभी भूले और न ही गांववालों को। स्कूल के दिनों के दोस्त रहे बलदेव राय बताते हैं कि प्रणब जब भी गांव आते हैं, उनका हालचाल जरूर लेते हैं। प्रणब मुखर्जी ने किन्नरहाता शिवचंद्र स्कूल से अपनी पढ़ाई की। और बाद में इसकी नई इमारत बनवाने में मदद भी दी। स्कूल ने भी अपने होनहार छात्र से जुड़े दस्तावेज बचा कर रखे हैं। रिकार्ड्स के मुताबिक 3 जुलाई, 1948 को प्रणब मुखर्जी ने यहां दाखिला लिया था। स्कूल का फैसला अब सही साबित हो रहा है। उनके बीच पला-पढ़ा पोल्टू अब प्रणब मुखर्जी के नाम से देश का पहला नागरिक बनने वाला है। हालांकि कायदे से देखा जाए, तो यह काम पांच साल पहले यानी 2007 में ही हो जाना चाहिए था। लेकिन माना जाता है कि कुछ पुरानी गांठे रास्ते का रोड़ा बन गई। कांग्रेस यही कहती रही कि वह पार्टी के ऐसे संकटमोचक हैं, जिनके बिना काम चलना मुश्किल है। अगर किसी नेता की अहमियत को उसकी ज़िम्मेदारियों से तौला जाए, तो कांग्रेस में प्रणब दा के आस−पास भी कोई नहीं है। यूपीए के द्वारा अब तक बनाए गए 183 मंत्री समूह यानी मंत्रियों के समूह में से 80 की अध्यक्षता प्रणब मुखर्जी ने की है। सबसे विवादित माने जाने वाले मुद्दों जैसे लोकपाल और तेलंगाना पर बनाए गए मंत्रियों के समूह की अगुवाई भी प्रणब मुखर्जी ने की है। और प्रणब मुखर्जी हमेशा से सरकार के संकटमोचक रहे हैं। उन्हें विपक्षी पार्टियों में कांग्रेस के सबसे स्वीकार्य चेहरे का दर्जा भी हासिल है। यह सही है कि राजनीतिक दलों के बीच प्रणब मुखर्जी की लोकप्रियता का कोई मुकाबला नहीं है, लेकिन कहीं न कहीं अपनी ही पार्टी की टॉप लीडरशिप के साथ उनके संबधों में कोई पेंच जरूर रहा है। कांग्रेसी भी मानते हैं कि सोनिया गांधी ने मुश्किल राजनीतिक हालात में हमेशा प्रणब पर भरोसा किया, लेकिन उन्हें कभी प्रधानमंत्री का पद नहीं देंगी। लेकिन अब वक्त बदल रहा है। आने वाले दिनों में बतौर राष्ट्रपति उनकी चुनौतियां बिल्कुल नई तरह की होंगी, लेकिन इस बात पर भी शक नहीं कि हमेशा की तरह वह आगे भी कामयाब रहेंगे। रायसीना की रेस में प्रणब मुखर्जी सबसे आगे हैं, जिन्हें यूपीए गठबंधन के अलावा दूसरे दलों से भी समर्थन हासिल है। गठबंधन में अगर किसी का विरोध है, तो वह नाम ममता बनर्जी का है, जिसे लेकर प्रणब ने अभी तक उम्मीद नहीं छोड़ी है। उधर, दूसरी तरफ प्रणब के मुकाबले में पीए संगमा मैदान में हैं, जिन्हें बीजेपी, बीजेडी और जयललिता की एआईएडीएमके का समर्थन हासिल है। लेकिन ममता को लेकर दोतरफा खींचतान जारी है। दरअसल इस बार के राष्ट्रपति चुनावों की बात करें तो शुरुआत ही धमाकेदार रही, जिसकी शायद ही किसी को उम्मीद रही हो। मुलायम और ममता ने जब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के सुझाए नाम खारिज कर अपने तीन विकल्प दिए, तो देश में एक तरह से सियासी सुनामी आ गई। गठबंधन सरकार के हिलते-डुलते रिश्तों से मीडिया के कैमरे चिपक गए। ममता ने तो बाकायदा कलाम को जीत की बधाई तक दे दी। यह अलग बात है कि कलाम ने रेस में उतरना मंजूर ही नहीं किया। हकीकत तो यह है कि राष्ट्रपति के नाम पर सारी अटकलबाजियां तभी तक रहीं, जबतक प्रणब मुखर्जी के नाम का ऐलान नहीं हुआ। उसके फौरन बाद ही तस्वीर साफ होने लगी। मुलायम ने फौरन प्रणब के नाम पर मुहर लगा दी। हालात के मुताबिक फैसला लेना प्रणब मुखर्जी की खासियत रही है। खासकर कब, कहां और क्या बोलना है, इसमें भी उनका जवाब नहीं। प्रणब दा को हिन्दी बोलते लोगों ने शायद ही कभी सुना हो, पर चुनाव प्रचार इलाहाबाद में करना हो तो बंगाली या अंग्रेजी बोलने का कोई मतलब नहीं बनता। इसलिए दादा ने हिन्दी में भाषण दिया। यह वही दादा हैं, जिन्होंने एक बार कहा था कि वह प्रधानमंत्री नहीं बन सकते, क्योंकि उन्हें हिन्दी नहीं आती। वैसे हिन्दी आना, न आना अलग बात है, पर उन्हें बोलना आता है, जो सबसे पते की बात है। लंबे और नजदीकी रिश्ते के बावजूद ममता बनर्जी के कड़े विरोध को देखकर जहां घरवाले तक हैरान दिखे, उतने पर भी प्रणब मुखर्जी का बड़ा ही संजीदा और नपा-तुला बयान आया कि वह मेरी छोटी बहन जैसी हैं। मौजूदा आंकड़ों के तहत प्रणब की राह बहुत मुश्किल नहीं दिखती। दरअसल यूपीए के 42 फीसदी वोट हैं, जिनमें तृणमूल के 4.4 फीसदी वोट शामिल हैं। अगर उसे हटाकर समाजवादी पार्टी के 6.2 फीसदी जोड़ दें, तो आंकड़ा 43.8 फीसदी होगा। इसमें लेफ्ट के 4.7 फीसदी जोड़ने पर 48.5 फीसदी वोट हो जाते हैं। और अब बीएसपी के 3.8 फीसदी का समर्थन मिलने से समर्थन 52.3 फीसदी यानी प्रणब की जीत पक्की हो जाती है। जबकि एनडीए के पास सिर्फ 28 फीसदी वोट है।टिप्पणियां हालांकि इन आंकड़ों में थोड़ी बहुत फेरबदल हो सकती है, क्योंकि आंध्र प्रदेश में हुए उपचुनावों के नए नतीजों से इसमें थोड़ा बदलाव आएगा। लेकिन जो बड़ा बदलाव आएगा, वह है प्रणब का रुतबा। वैसे सच कहा जाए तो मौजूदा हालात में प्रणब के लिए राष्ट्रपति भवन सबसे माकूल जगह है। वक्त के साथ उनका सब्र भी कहीं न कहीं जवाब दे रहा था। इस दौरान वह कई बार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर साफ कर चुके थे कि अब वह अगला चुनाव नहीं लड़ेंगे। साथ ही 77 साल की उम्र में अब वह टीम राहुल का भी हिस्सा नहीं बन सकते। ऐसे में गठबंधन की इस राजनीति में काफी कम विकल्प बचते हैं। और सबसे अहम बात यह कि मौजूदा हालात में प्रणब मुखर्जी जैसी स्वीकायर्ता किसी और की नहीं है। प्रणब दा ने राजनीति की शुरुआत 60 के दशक में बांग्ला कांग्रेस से की। और जल्द ही यानी 1969 में वह राज्यसभा के सदस्य बनकर पहली बार दिल्ली पहुंचे। तब दिल्ली में उनकी कोई खास पहचान नहीं थी और वह सदन की पिछली लाइन में बैठने वालों में थे, लेकिन सदन में उनका दूसरा भाषण ही लाजवाब रहा। खचाखच भरे सदन में बैंकों के राष्ट्रीयकरण के मुद्दे पर भाषण देते प्रणब को देखकर इंदिरा गांधी प्रभावित हो गईं और इसके बाद इंदिरा तथा प्रणब की पहली मुलाकात हुई। फिर 1972 में जब बांग्ला कांग्रेस टूटकर कांग्रेस से जा मिली, तो प्रणब मुखर्जी, इंदिरा गांधी के करीबी और भरोसेमंद लोगों में शुमार हो गए। इसके अगले ही साल यानी 1973 में वह उद्योग उपमंत्री बने। तब से लेकर अभीतक अगर अपवाद के तौर पर राजीव सरकार को छोड़े दें, तो जब भी कांग्रेस सत्ता में रही, प्रणब मुखर्जी के पास अहम मंत्रालय रहे सिर्फ गृह मंत्रालय को छोड़कर। अपने लंबे सियासी करियर और बेशुमार अनुभवों की वजह से प्रणब अक्सर सेकेंड प्राइम मिनिस्टर कहे जाते हैं और कई बार प्रधानमंत्री की जिम्मेदारियां भी उठाई है, लेकिन खुद कभी प्रधानमंत्री नहीं बन सके। हो सकता है प्रणब दा इसे अपनी हसरत के तौर पर देखें, लेकिन उनके परिवार को इस बात का जरा भी मलाल नहीं रहा। बेटे का कहना है कि वह तो उनके लिए हमेशा से ही पीएम रहे हैं। और जब मौका उनके राष्ट्रपति बनने का आया, तो घर से लेकर गांव तक हर तरफ खुशी की लहर दौड़ गई। रायसीना की रेस में उतरते ही दादा नंबर वन पर आ गए। जब चाहने वाले इतने खुश हैं, तो घर वालों की पूछिये ही मत। देश के सबसे हाईप्रोफाइल पदों को संभालने वाले प्रणब मुखर्जी का परिवार बेहद लो प्रोफाइल रहता है। इस बात से भी पर्दा उठा कि कभी-कभार अगर दादा अपने गुस्से को लेकर चर्चा में आए, तो इसके पीछे की वजह उनका जिम्मेदारियों की वजह से खानपान और आराम से हुए समझौते रहे हैं। प्रणब के बेटे अभिजीत सरकारी नौकरी छोड़कर राजनीति में कूदे हैं। पिता की वजह से राजनीति की डगर इतनी कठिन नहीं रही, लेकिन राजनीतिक रिश्तों को बनाए रखने की अहमियत खूब समझते हैं। पर सवाल सिर्फ सियासी रिश्तों को बनाए रखने का ही नहीं, अपनी जमीन से जुड़ाव का भी है, जिसमें कभी कोई बदलाव नहीं आया। राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने के बाद प्रणब जब वक्त निकालकर अपने गांव पहुंचे, तो वहां उनका जोरदार स्वागत हुआ। कतार में खड़े बच्चे बूढ़े और महिलाओं ने फूल बरसाकर उनका स्वागत किया। बात आस्था और विश्वास की भी है, तभी तो गांव के शिवमंदिर में इस दौरान प्रणब दा के नाम से पूजा जारी रही। देश की बड़ी जिम्मेदारियां निभा रहे प्रणब न तो अपने गांव को कभी भूले और न ही गांववालों को। स्कूल के दिनों के दोस्त रहे बलदेव राय बताते हैं कि प्रणब जब भी गांव आते हैं, उनका हालचाल जरूर लेते हैं। प्रणब मुखर्जी ने किन्नरहाता शिवचंद्र स्कूल से अपनी पढ़ाई की। और बाद में इसकी नई इमारत बनवाने में मदद भी दी। स्कूल ने भी अपने होनहार छात्र से जुड़े दस्तावेज बचा कर रखे हैं। रिकार्ड्स के मुताबिक 3 जुलाई, 1948 को प्रणब मुखर्जी ने यहां दाखिला लिया था। स्कूल का फैसला अब सही साबित हो रहा है। उनके बीच पला-पढ़ा पोल्टू अब प्रणब मुखर्जी के नाम से देश का पहला नागरिक बनने वाला है। हालांकि कायदे से देखा जाए, तो यह काम पांच साल पहले यानी 2007 में ही हो जाना चाहिए था। लेकिन माना जाता है कि कुछ पुरानी गांठे रास्ते का रोड़ा बन गई। कांग्रेस यही कहती रही कि वह पार्टी के ऐसे संकटमोचक हैं, जिनके बिना काम चलना मुश्किल है। अगर किसी नेता की अहमियत को उसकी ज़िम्मेदारियों से तौला जाए, तो कांग्रेस में प्रणब दा के आस−पास भी कोई नहीं है। यूपीए के द्वारा अब तक बनाए गए 183 मंत्री समूह यानी मंत्रियों के समूह में से 80 की अध्यक्षता प्रणब मुखर्जी ने की है। सबसे विवादित माने जाने वाले मुद्दों जैसे लोकपाल और तेलंगाना पर बनाए गए मंत्रियों के समूह की अगुवाई भी प्रणब मुखर्जी ने की है। और प्रणब मुखर्जी हमेशा से सरकार के संकटमोचक रहे हैं। उन्हें विपक्षी पार्टियों में कांग्रेस के सबसे स्वीकार्य चेहरे का दर्जा भी हासिल है। यह सही है कि राजनीतिक दलों के बीच प्रणब मुखर्जी की लोकप्रियता का कोई मुकाबला नहीं है, लेकिन कहीं न कहीं अपनी ही पार्टी की टॉप लीडरशिप के साथ उनके संबधों में कोई पेंच जरूर रहा है। कांग्रेसी भी मानते हैं कि सोनिया गांधी ने मुश्किल राजनीतिक हालात में हमेशा प्रणब पर भरोसा किया, लेकिन उन्हें कभी प्रधानमंत्री का पद नहीं देंगी। लेकिन अब वक्त बदल रहा है। आने वाले दिनों में बतौर राष्ट्रपति उनकी चुनौतियां बिल्कुल नई तरह की होंगी, लेकिन इस बात पर भी शक नहीं कि हमेशा की तरह वह आगे भी कामयाब रहेंगे। रायसीना की रेस में प्रणब मुखर्जी सबसे आगे हैं, जिन्हें यूपीए गठबंधन के अलावा दूसरे दलों से भी समर्थन हासिल है। गठबंधन में अगर किसी का विरोध है, तो वह नाम ममता बनर्जी का है, जिसे लेकर प्रणब ने अभी तक उम्मीद नहीं छोड़ी है। उधर, दूसरी तरफ प्रणब के मुकाबले में पीए संगमा मैदान में हैं, जिन्हें बीजेपी, बीजेडी और जयललिता की एआईएडीएमके का समर्थन हासिल है। लेकिन ममता को लेकर दोतरफा खींचतान जारी है। दरअसल इस बार के राष्ट्रपति चुनावों की बात करें तो शुरुआत ही धमाकेदार रही, जिसकी शायद ही किसी को उम्मीद रही हो। मुलायम और ममता ने जब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के सुझाए नाम खारिज कर अपने तीन विकल्प दिए, तो देश में एक तरह से सियासी सुनामी आ गई। गठबंधन सरकार के हिलते-डुलते रिश्तों से मीडिया के कैमरे चिपक गए। ममता ने तो बाकायदा कलाम को जीत की बधाई तक दे दी। यह अलग बात है कि कलाम ने रेस में उतरना मंजूर ही नहीं किया। हकीकत तो यह है कि राष्ट्रपति के नाम पर सारी अटकलबाजियां तभी तक रहीं, जबतक प्रणब मुखर्जी के नाम का ऐलान नहीं हुआ। उसके फौरन बाद ही तस्वीर साफ होने लगी। मुलायम ने फौरन प्रणब के नाम पर मुहर लगा दी। हालात के मुताबिक फैसला लेना प्रणब मुखर्जी की खासियत रही है। खासकर कब, कहां और क्या बोलना है, इसमें भी उनका जवाब नहीं। प्रणब दा को हिन्दी बोलते लोगों ने शायद ही कभी सुना हो, पर चुनाव प्रचार इलाहाबाद में करना हो तो बंगाली या अंग्रेजी बोलने का कोई मतलब नहीं बनता। इसलिए दादा ने हिन्दी में भाषण दिया। यह वही दादा हैं, जिन्होंने एक बार कहा था कि वह प्रधानमंत्री नहीं बन सकते, क्योंकि उन्हें हिन्दी नहीं आती। वैसे हिन्दी आना, न आना अलग बात है, पर उन्हें बोलना आता है, जो सबसे पते की बात है। लंबे और नजदीकी रिश्ते के बावजूद ममता बनर्जी के कड़े विरोध को देखकर जहां घरवाले तक हैरान दिखे, उतने पर भी प्रणब मुखर्जी का बड़ा ही संजीदा और नपा-तुला बयान आया कि वह मेरी छोटी बहन जैसी हैं। मौजूदा आंकड़ों के तहत प्रणब की राह बहुत मुश्किल नहीं दिखती। दरअसल यूपीए के 42 फीसदी वोट हैं, जिनमें तृणमूल के 4.4 फीसदी वोट शामिल हैं। अगर उसे हटाकर समाजवादी पार्टी के 6.2 फीसदी जोड़ दें, तो आंकड़ा 43.8 फीसदी होगा। इसमें लेफ्ट के 4.7 फीसदी जोड़ने पर 48.5 फीसदी वोट हो जाते हैं। और अब बीएसपी के 3.8 फीसदी का समर्थन मिलने से समर्थन 52.3 फीसदी यानी प्रणब की जीत पक्की हो जाती है। जबकि एनडीए के पास सिर्फ 28 फीसदी वोट है।टिप्पणियां हालांकि इन आंकड़ों में थोड़ी बहुत फेरबदल हो सकती है, क्योंकि आंध्र प्रदेश में हुए उपचुनावों के नए नतीजों से इसमें थोड़ा बदलाव आएगा। लेकिन जो बड़ा बदलाव आएगा, वह है प्रणब का रुतबा। वैसे सच कहा जाए तो मौजूदा हालात में प्रणब के लिए राष्ट्रपति भवन सबसे माकूल जगह है। वक्त के साथ उनका सब्र भी कहीं न कहीं जवाब दे रहा था। इस दौरान वह कई बार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर साफ कर चुके थे कि अब वह अगला चुनाव नहीं लड़ेंगे। साथ ही 77 साल की उम्र में अब वह टीम राहुल का भी हिस्सा नहीं बन सकते। ऐसे में गठबंधन की इस राजनीति में काफी कम विकल्प बचते हैं। और सबसे अहम बात यह कि मौजूदा हालात में प्रणब मुखर्जी जैसी स्वीकायर्ता किसी और की नहीं है। फिर 1972 में जब बांग्ला कांग्रेस टूटकर कांग्रेस से जा मिली, तो प्रणब मुखर्जी, इंदिरा गांधी के करीबी और भरोसेमंद लोगों में शुमार हो गए। इसके अगले ही साल यानी 1973 में वह उद्योग उपमंत्री बने। तब से लेकर अभीतक अगर अपवाद के तौर पर राजीव सरकार को छोड़े दें, तो जब भी कांग्रेस सत्ता में रही, प्रणब मुखर्जी के पास अहम मंत्रालय रहे सिर्फ गृह मंत्रालय को छोड़कर। अपने लंबे सियासी करियर और बेशुमार अनुभवों की वजह से प्रणब अक्सर सेकेंड प्राइम मिनिस्टर कहे जाते हैं और कई बार प्रधानमंत्री की जिम्मेदारियां भी उठाई है, लेकिन खुद कभी प्रधानमंत्री नहीं बन सके। हो सकता है प्रणब दा इसे अपनी हसरत के तौर पर देखें, लेकिन उनके परिवार को इस बात का जरा भी मलाल नहीं रहा। बेटे का कहना है कि वह तो उनके लिए हमेशा से ही पीएम रहे हैं। और जब मौका उनके राष्ट्रपति बनने का आया, तो घर से लेकर गांव तक हर तरफ खुशी की लहर दौड़ गई। रायसीना की रेस में उतरते ही दादा नंबर वन पर आ गए। जब चाहने वाले इतने खुश हैं, तो घर वालों की पूछिये ही मत। देश के सबसे हाईप्रोफाइल पदों को संभालने वाले प्रणब मुखर्जी का परिवार बेहद लो प्रोफाइल रहता है। इस बात से भी पर्दा उठा कि कभी-कभार अगर दादा अपने गुस्से को लेकर चर्चा में आए, तो इसके पीछे की वजह उनका जिम्मेदारियों की वजह से खानपान और आराम से हुए समझौते रहे हैं। प्रणब के बेटे अभिजीत सरकारी नौकरी छोड़कर राजनीति में कूदे हैं। पिता की वजह से राजनीति की डगर इतनी कठिन नहीं रही, लेकिन राजनीतिक रिश्तों को बनाए रखने की अहमियत खूब समझते हैं। पर सवाल सिर्फ सियासी रिश्तों को बनाए रखने का ही नहीं, अपनी जमीन से जुड़ाव का भी है, जिसमें कभी कोई बदलाव नहीं आया। राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने के बाद प्रणब जब वक्त निकालकर अपने गांव पहुंचे, तो वहां उनका जोरदार स्वागत हुआ। कतार में खड़े बच्चे बूढ़े और महिलाओं ने फूल बरसाकर उनका स्वागत किया। बात आस्था और विश्वास की भी है, तभी तो गांव के शिवमंदिर में इस दौरान प्रणब दा के नाम से पूजा जारी रही। देश की बड़ी जिम्मेदारियां निभा रहे प्रणब न तो अपने गांव को कभी भूले और न ही गांववालों को। स्कूल के दिनों के दोस्त रहे बलदेव राय बताते हैं कि प्रणब जब भी गांव आते हैं, उनका हालचाल जरूर लेते हैं। प्रणब मुखर्जी ने किन्नरहाता शिवचंद्र स्कूल से अपनी पढ़ाई की। और बाद में इसकी नई इमारत बनवाने में मदद भी दी। स्कूल ने भी अपने होनहार छात्र से जुड़े दस्तावेज बचा कर रखे हैं। रिकार्ड्स के मुताबिक 3 जुलाई, 1948 को प्रणब मुखर्जी ने यहां दाखिला लिया था। स्कूल का फैसला अब सही साबित हो रहा है। उनके बीच पला-पढ़ा पोल्टू अब प्रणब मुखर्जी के नाम से देश का पहला नागरिक बनने वाला है। हालांकि कायदे से देखा जाए, तो यह काम पांच साल पहले यानी 2007 में ही हो जाना चाहिए था। लेकिन माना जाता है कि कुछ पुरानी गांठे रास्ते का रोड़ा बन गई। कांग्रेस यही कहती रही कि वह पार्टी के ऐसे संकटमोचक हैं, जिनके बिना काम चलना मुश्किल है। अगर किसी नेता की अहमियत को उसकी ज़िम्मेदारियों से तौला जाए, तो कांग्रेस में प्रणब दा के आस−पास भी कोई नहीं है। यूपीए के द्वारा अब तक बनाए गए 183 मंत्री समूह यानी मंत्रियों के समूह में से 80 की अध्यक्षता प्रणब मुखर्जी ने की है। सबसे विवादित माने जाने वाले मुद्दों जैसे लोकपाल और तेलंगाना पर बनाए गए मंत्रियों के समूह की अगुवाई भी प्रणब मुखर्जी ने की है। और प्रणब मुखर्जी हमेशा से सरकार के संकटमोचक रहे हैं। उन्हें विपक्षी पार्टियों में कांग्रेस के सबसे स्वीकार्य चेहरे का दर्जा भी हासिल है। यह सही है कि राजनीतिक दलों के बीच प्रणब मुखर्जी की लोकप्रियता का कोई मुकाबला नहीं है, लेकिन कहीं न कहीं अपनी ही पार्टी की टॉप लीडरशिप के साथ उनके संबधों में कोई पेंच जरूर रहा है। कांग्रेसी भी मानते हैं कि सोनिया गांधी ने मुश्किल राजनीतिक हालात में हमेशा प्रणब पर भरोसा किया, लेकिन उन्हें कभी प्रधानमंत्री का पद नहीं देंगी। लेकिन अब वक्त बदल रहा है। आने वाले दिनों में बतौर राष्ट्रपति उनकी चुनौतियां बिल्कुल नई तरह की होंगी, लेकिन इस बात पर भी शक नहीं कि हमेशा की तरह वह आगे भी कामयाब रहेंगे। रायसीना की रेस में प्रणब मुखर्जी सबसे आगे हैं, जिन्हें यूपीए गठबंधन के अलावा दूसरे दलों से भी समर्थन हासिल है। गठबंधन में अगर किसी का विरोध है, तो वह नाम ममता बनर्जी का है, जिसे लेकर प्रणब ने अभी तक उम्मीद नहीं छोड़ी है। उधर, दूसरी तरफ प्रणब के मुकाबले में पीए संगमा मैदान में हैं, जिन्हें बीजेपी, बीजेडी और जयललिता की एआईएडीएमके का समर्थन हासिल है। लेकिन ममता को लेकर दोतरफा खींचतान जारी है। दरअसल इस बार के राष्ट्रपति चुनावों की बात करें तो शुरुआत ही धमाकेदार रही, जिसकी शायद ही किसी को उम्मीद रही हो। मुलायम और ममता ने जब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के सुझाए नाम खारिज कर अपने तीन विकल्प दिए, तो देश में एक तरह से सियासी सुनामी आ गई। गठबंधन सरकार के हिलते-डुलते रिश्तों से मीडिया के कैमरे चिपक गए। ममता ने तो बाकायदा कलाम को जीत की बधाई तक दे दी। यह अलग बात है कि कलाम ने रेस में उतरना मंजूर ही नहीं किया। हकीकत तो यह है कि राष्ट्रपति के नाम पर सारी अटकलबाजियां तभी तक रहीं, जबतक प्रणब मुखर्जी के नाम का ऐलान नहीं हुआ। उसके फौरन बाद ही तस्वीर साफ होने लगी। मुलायम ने फौरन प्रणब के नाम पर मुहर लगा दी। हालात के मुताबिक फैसला लेना प्रणब मुखर्जी की खासियत रही है। खासकर कब, कहां और क्या बोलना है, इसमें भी उनका जवाब नहीं। प्रणब दा को हिन्दी बोलते लोगों ने शायद ही कभी सुना हो, पर चुनाव प्रचार इलाहाबाद में करना हो तो बंगाली या अंग्रेजी बोलने का कोई मतलब नहीं बनता। इसलिए दादा ने हिन्दी में भाषण दिया। यह वही दादा हैं, जिन्होंने एक बार कहा था कि वह प्रधानमंत्री नहीं बन सकते, क्योंकि उन्हें हिन्दी नहीं आती। वैसे हिन्दी आना, न आना अलग बात है, पर उन्हें बोलना आता है, जो सबसे पते की बात है। लंबे और नजदीकी रिश्ते के बावजूद ममता बनर्जी के कड़े विरोध को देखकर जहां घरवाले तक हैरान दिखे, उतने पर भी प्रणब मुखर्जी का बड़ा ही संजीदा और नपा-तुला बयान आया कि वह मेरी छोटी बहन जैसी हैं। मौजूदा आंकड़ों के तहत प्रणब की राह बहुत मुश्किल नहीं दिखती। दरअसल यूपीए के 42 फीसदी वोट हैं, जिनमें तृणमूल के 4.4 फीसदी वोट शामिल हैं। अगर उसे हटाकर समाजवादी पार्टी के 6.2 फीसदी जोड़ दें, तो आंकड़ा 43.8 फीसदी होगा। इसमें लेफ्ट के 4.7 फीसदी जोड़ने पर 48.5 फीसदी वोट हो जाते हैं। और अब बीएसपी के 3.8 फीसदी का समर्थन मिलने से समर्थन 52.3 फीसदी यानी प्रणब की जीत पक्की हो जाती है। जबकि एनडीए के पास सिर्फ 28 फीसदी वोट है।टिप्पणियां हालांकि इन आंकड़ों में थोड़ी बहुत फेरबदल हो सकती है, क्योंकि आंध्र प्रदेश में हुए उपचुनावों के नए नतीजों से इसमें थोड़ा बदलाव आएगा। लेकिन जो बड़ा बदलाव आएगा, वह है प्रणब का रुतबा। वैसे सच कहा जाए तो मौजूदा हालात में प्रणब के लिए राष्ट्रपति भवन सबसे माकूल जगह है। वक्त के साथ उनका सब्र भी कहीं न कहीं जवाब दे रहा था। इस दौरान वह कई बार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर साफ कर चुके थे कि अब वह अगला चुनाव नहीं लड़ेंगे। साथ ही 77 साल की उम्र में अब वह टीम राहुल का भी हिस्सा नहीं बन सकते। ऐसे में गठबंधन की इस राजनीति में काफी कम विकल्प बचते हैं। और सबसे अहम बात यह कि मौजूदा हालात में प्रणब मुखर्जी जैसी स्वीकायर्ता किसी और की नहीं है। अपने लंबे सियासी करियर और बेशुमार अनुभवों की वजह से प्रणब अक्सर सेकेंड प्राइम मिनिस्टर कहे जाते हैं और कई बार प्रधानमंत्री की जिम्मेदारियां भी उठाई है, लेकिन खुद कभी प्रधानमंत्री नहीं बन सके। हो सकता है प्रणब दा इसे अपनी हसरत के तौर पर देखें, लेकिन उनके परिवार को इस बात का जरा भी मलाल नहीं रहा। बेटे का कहना है कि वह तो उनके लिए हमेशा से ही पीएम रहे हैं। और जब मौका उनके राष्ट्रपति बनने का आया, तो घर से लेकर गांव तक हर तरफ खुशी की लहर दौड़ गई। रायसीना की रेस में उतरते ही दादा नंबर वन पर आ गए। जब चाहने वाले इतने खुश हैं, तो घर वालों की पूछिये ही मत। देश के सबसे हाईप्रोफाइल पदों को संभालने वाले प्रणब मुखर्जी का परिवार बेहद लो प्रोफाइल रहता है। इस बात से भी पर्दा उठा कि कभी-कभार अगर दादा अपने गुस्से को लेकर चर्चा में आए, तो इसके पीछे की वजह उनका जिम्मेदारियों की वजह से खानपान और आराम से हुए समझौते रहे हैं। प्रणब के बेटे अभिजीत सरकारी नौकरी छोड़कर राजनीति में कूदे हैं। पिता की वजह से राजनीति की डगर इतनी कठिन नहीं रही, लेकिन राजनीतिक रिश्तों को बनाए रखने की अहमियत खूब समझते हैं। पर सवाल सिर्फ सियासी रिश्तों को बनाए रखने का ही नहीं, अपनी जमीन से जुड़ाव का भी है, जिसमें कभी कोई बदलाव नहीं आया। राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने के बाद प्रणब जब वक्त निकालकर अपने गांव पहुंचे, तो वहां उनका जोरदार स्वागत हुआ। कतार में खड़े बच्चे बूढ़े और महिलाओं ने फूल बरसाकर उनका स्वागत किया। बात आस्था और विश्वास की भी है, तभी तो गांव के शिवमंदिर में इस दौरान प्रणब दा के नाम से पूजा जारी रही। देश की बड़ी जिम्मेदारियां निभा रहे प्रणब न तो अपने गांव को कभी भूले और न ही गांववालों को। स्कूल के दिनों के दोस्त रहे बलदेव राय बताते हैं कि प्रणब जब भी गांव आते हैं, उनका हालचाल जरूर लेते हैं। प्रणब मुखर्जी ने किन्नरहाता शिवचंद्र स्कूल से अपनी पढ़ाई की। और बाद में इसकी नई इमारत बनवाने में मदद भी दी। स्कूल ने भी अपने होनहार छात्र से जुड़े दस्तावेज बचा कर रखे हैं। रिकार्ड्स के मुताबिक 3 जुलाई, 1948 को प्रणब मुखर्जी ने यहां दाखिला लिया था। स्कूल का फैसला अब सही साबित हो रहा है। उनके बीच पला-पढ़ा पोल्टू अब प्रणब मुखर्जी के नाम से देश का पहला नागरिक बनने वाला है। हालांकि कायदे से देखा जाए, तो यह काम पांच साल पहले यानी 2007 में ही हो जाना चाहिए था। लेकिन माना जाता है कि कुछ पुरानी गांठे रास्ते का रोड़ा बन गई। कांग्रेस यही कहती रही कि वह पार्टी के ऐसे संकटमोचक हैं, जिनके बिना काम चलना मुश्किल है। अगर किसी नेता की अहमियत को उसकी ज़िम्मेदारियों से तौला जाए, तो कांग्रेस में प्रणब दा के आस−पास भी कोई नहीं है। यूपीए के द्वारा अब तक बनाए गए 183 मंत्री समूह यानी मंत्रियों के समूह में से 80 की अध्यक्षता प्रणब मुखर्जी ने की है। सबसे विवादित माने जाने वाले मुद्दों जैसे लोकपाल और तेलंगाना पर बनाए गए मंत्रियों के समूह की अगुवाई भी प्रणब मुखर्जी ने की है। और प्रणब मुखर्जी हमेशा से सरकार के संकटमोचक रहे हैं। उन्हें विपक्षी पार्टियों में कांग्रेस के सबसे स्वीकार्य चेहरे का दर्जा भी हासिल है। यह सही है कि राजनीतिक दलों के बीच प्रणब मुखर्जी की लोकप्रियता का कोई मुकाबला नहीं है, लेकिन कहीं न कहीं अपनी ही पार्टी की टॉप लीडरशिप के साथ उनके संबधों में कोई पेंच जरूर रहा है। कांग्रेसी भी मानते हैं कि सोनिया गांधी ने मुश्किल राजनीतिक हालात में हमेशा प्रणब पर भरोसा किया, लेकिन उन्हें कभी प्रधानमंत्री का पद नहीं देंगी। लेकिन अब वक्त बदल रहा है। आने वाले दिनों में बतौर राष्ट्रपति उनकी चुनौतियां बिल्कुल नई तरह की होंगी, लेकिन इस बात पर भी शक नहीं कि हमेशा की तरह वह आगे भी कामयाब रहेंगे। रायसीना की रेस में प्रणब मुखर्जी सबसे आगे हैं, जिन्हें यूपीए गठबंधन के अलावा दूसरे दलों से भी समर्थन हासिल है। गठबंधन में अगर किसी का विरोध है, तो वह नाम ममता बनर्जी का है, जिसे लेकर प्रणब ने अभी तक उम्मीद नहीं छोड़ी है। उधर, दूसरी तरफ प्रणब के मुकाबले में पीए संगमा मैदान में हैं, जिन्हें बीजेपी, बीजेडी और जयललिता की एआईएडीएमके का समर्थन हासिल है। लेकिन ममता को लेकर दोतरफा खींचतान जारी है। दरअसल इस बार के राष्ट्रपति चुनावों की बात करें तो शुरुआत ही धमाकेदार रही, जिसकी शायद ही किसी को उम्मीद रही हो। मुलायम और ममता ने जब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के सुझाए नाम खारिज कर अपने तीन विकल्प दिए, तो देश में एक तरह से सियासी सुनामी आ गई। गठबंधन सरकार के हिलते-डुलते रिश्तों से मीडिया के कैमरे चिपक गए। ममता ने तो बाकायदा कलाम को जीत की बधाई तक दे दी। यह अलग बात है कि कलाम ने रेस में उतरना मंजूर ही नहीं किया। हकीकत तो यह है कि राष्ट्रपति के नाम पर सारी अटकलबाजियां तभी तक रहीं, जबतक प्रणब मुखर्जी के नाम का ऐलान नहीं हुआ। उसके फौरन बाद ही तस्वीर साफ होने लगी। मुलायम ने फौरन प्रणब के नाम पर मुहर लगा दी। हालात के मुताबिक फैसला लेना प्रणब मुखर्जी की खासियत रही है। खासकर कब, कहां और क्या बोलना है, इसमें भी उनका जवाब नहीं। प्रणब दा को हिन्दी बोलते लोगों ने शायद ही कभी सुना हो, पर चुनाव प्रचार इलाहाबाद में करना हो तो बंगाली या अंग्रेजी बोलने का कोई मतलब नहीं बनता। इसलिए दादा ने हिन्दी में भाषण दिया। यह वही दादा हैं, जिन्होंने एक बार कहा था कि वह प्रधानमंत्री नहीं बन सकते, क्योंकि उन्हें हिन्दी नहीं आती। वैसे हिन्दी आना, न आना अलग बात है, पर उन्हें बोलना आता है, जो सबसे पते की बात है। लंबे और नजदीकी रिश्ते के बावजूद ममता बनर्जी के कड़े विरोध को देखकर जहां घरवाले तक हैरान दिखे, उतने पर भी प्रणब मुखर्जी का बड़ा ही संजीदा और नपा-तुला बयान आया कि वह मेरी छोटी बहन जैसी हैं। मौजूदा आंकड़ों के तहत प्रणब की राह बहुत मुश्किल नहीं दिखती। दरअसल यूपीए के 42 फीसदी वोट हैं, जिनमें तृणमूल के 4.4 फीसदी वोट शामिल हैं। अगर उसे हटाकर समाजवादी पार्टी के 6.2 फीसदी जोड़ दें, तो आंकड़ा 43.8 फीसदी होगा। इसमें लेफ्ट के 4.7 फीसदी जोड़ने पर 48.5 फीसदी वोट हो जाते हैं। और अब बीएसपी के 3.8 फीसदी का समर्थन मिलने से समर्थन 52.3 फीसदी यानी प्रणब की जीत पक्की हो जाती है। जबकि एनडीए के पास सिर्फ 28 फीसदी वोट है।टिप्पणियां हालांकि इन आंकड़ों में थोड़ी बहुत फेरबदल हो सकती है, क्योंकि आंध्र प्रदेश में हुए उपचुनावों के नए नतीजों से इसमें थोड़ा बदलाव आएगा। लेकिन जो बड़ा बदलाव आएगा, वह है प्रणब का रुतबा। वैसे सच कहा जाए तो मौजूदा हालात में प्रणब के लिए राष्ट्रपति भवन सबसे माकूल जगह है। वक्त के साथ उनका सब्र भी कहीं न कहीं जवाब दे रहा था। इस दौरान वह कई बार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर साफ कर चुके थे कि अब वह अगला चुनाव नहीं लड़ेंगे। साथ ही 77 साल की उम्र में अब वह टीम राहुल का भी हिस्सा नहीं बन सकते। ऐसे में गठबंधन की इस राजनीति में काफी कम विकल्प बचते हैं। और सबसे अहम बात यह कि मौजूदा हालात में प्रणब मुखर्जी जैसी स्वीकायर्ता किसी और की नहीं है। रायसीना की रेस में उतरते ही दादा नंबर वन पर आ गए। जब चाहने वाले इतने खुश हैं, तो घर वालों की पूछिये ही मत। देश के सबसे हाईप्रोफाइल पदों को संभालने वाले प्रणब मुखर्जी का परिवार बेहद लो प्रोफाइल रहता है। इस बात से भी पर्दा उठा कि कभी-कभार अगर दादा अपने गुस्से को लेकर चर्चा में आए, तो इसके पीछे की वजह उनका जिम्मेदारियों की वजह से खानपान और आराम से हुए समझौते रहे हैं। प्रणब के बेटे अभिजीत सरकारी नौकरी छोड़कर राजनीति में कूदे हैं। पिता की वजह से राजनीति की डगर इतनी कठिन नहीं रही, लेकिन राजनीतिक रिश्तों को बनाए रखने की अहमियत खूब समझते हैं। पर सवाल सिर्फ सियासी रिश्तों को बनाए रखने का ही नहीं, अपनी जमीन से जुड़ाव का भी है, जिसमें कभी कोई बदलाव नहीं आया। राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने के बाद प्रणब जब वक्त निकालकर अपने गांव पहुंचे, तो वहां उनका जोरदार स्वागत हुआ। कतार में खड़े बच्चे बूढ़े और महिलाओं ने फूल बरसाकर उनका स्वागत किया। बात आस्था और विश्वास की भी है, तभी तो गांव के शिवमंदिर में इस दौरान प्रणब दा के नाम से पूजा जारी रही। देश की बड़ी जिम्मेदारियां निभा रहे प्रणब न तो अपने गांव को कभी भूले और न ही गांववालों को। स्कूल के दिनों के दोस्त रहे बलदेव राय बताते हैं कि प्रणब जब भी गांव आते हैं, उनका हालचाल जरूर लेते हैं। प्रणब मुखर्जी ने किन्नरहाता शिवचंद्र स्कूल से अपनी पढ़ाई की। और बाद में इसकी नई इमारत बनवाने में मदद भी दी। स्कूल ने भी अपने होनहार छात्र से जुड़े दस्तावेज बचा कर रखे हैं। रिकार्ड्स के मुताबिक 3 जुलाई, 1948 को प्रणब मुखर्जी ने यहां दाखिला लिया था। स्कूल का फैसला अब सही साबित हो रहा है। उनके बीच पला-पढ़ा पोल्टू अब प्रणब मुखर्जी के नाम से देश का पहला नागरिक बनने वाला है। हालांकि कायदे से देखा जाए, तो यह काम पांच साल पहले यानी 2007 में ही हो जाना चाहिए था। लेकिन माना जाता है कि कुछ पुरानी गांठे रास्ते का रोड़ा बन गई। कांग्रेस यही कहती रही कि वह पार्टी के ऐसे संकटमोचक हैं, जिनके बिना काम चलना मुश्किल है। अगर किसी नेता की अहमियत को उसकी ज़िम्मेदारियों से तौला जाए, तो कांग्रेस में प्रणब दा के आस−पास भी कोई नहीं है। यूपीए के द्वारा अब तक बनाए गए 183 मंत्री समूह यानी मंत्रियों के समूह में से 80 की अध्यक्षता प्रणब मुखर्जी ने की है। सबसे विवादित माने जाने वाले मुद्दों जैसे लोकपाल और तेलंगाना पर बनाए गए मंत्रियों के समूह की अगुवाई भी प्रणब मुखर्जी ने की है। और प्रणब मुखर्जी हमेशा से सरकार के संकटमोचक रहे हैं। उन्हें विपक्षी पार्टियों में कांग्रेस के सबसे स्वीकार्य चेहरे का दर्जा भी हासिल है। यह सही है कि राजनीतिक दलों के बीच प्रणब मुखर्जी की लोकप्रियता का कोई मुकाबला नहीं है, लेकिन कहीं न कहीं अपनी ही पार्टी की टॉप लीडरशिप के साथ उनके संबधों में कोई पेंच जरूर रहा है। कांग्रेसी भी मानते हैं कि सोनिया गांधी ने मुश्किल राजनीतिक हालात में हमेशा प्रणब पर भरोसा किया, लेकिन उन्हें कभी प्रधानमंत्री का पद नहीं देंगी। लेकिन अब वक्त बदल रहा है। आने वाले दिनों में बतौर राष्ट्रपति उनकी चुनौतियां बिल्कुल नई तरह की होंगी, लेकिन इस बात पर भी शक नहीं कि हमेशा की तरह वह आगे भी कामयाब रहेंगे। रायसीना की रेस में प्रणब मुखर्जी सबसे आगे हैं, जिन्हें यूपीए गठबंधन के अलावा दूसरे दलों से भी समर्थन हासिल है। गठबंधन में अगर किसी का विरोध है, तो वह नाम ममता बनर्जी का है, जिसे लेकर प्रणब ने अभी तक उम्मीद नहीं छोड़ी है। उधर, दूसरी तरफ प्रणब के मुकाबले में पीए संगमा मैदान में हैं, जिन्हें बीजेपी, बीजेडी और जयललिता की एआईएडीएमके का समर्थन हासिल है। लेकिन ममता को लेकर दोतरफा खींचतान जारी है। दरअसल इस बार के राष्ट्रपति चुनावों की बात करें तो शुरुआत ही धमाकेदार रही, जिसकी शायद ही किसी को उम्मीद रही हो। मुलायम और ममता ने जब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के सुझाए नाम खारिज कर अपने तीन विकल्प दिए, तो देश में एक तरह से सियासी सुनामी आ गई। गठबंधन सरकार के हिलते-डुलते रिश्तों से मीडिया के कैमरे चिपक गए। ममता ने तो बाकायदा कलाम को जीत की बधाई तक दे दी। यह अलग बात है कि कलाम ने रेस में उतरना मंजूर ही नहीं किया। हकीकत तो यह है कि राष्ट्रपति के नाम पर सारी अटकलबाजियां तभी तक रहीं, जबतक प्रणब मुखर्जी के नाम का ऐलान नहीं हुआ। उसके फौरन बाद ही तस्वीर साफ होने लगी। मुलायम ने फौरन प्रणब के नाम पर मुहर लगा दी। हालात के मुताबिक फैसला लेना प्रणब मुखर्जी की खासियत रही है। खासकर कब, कहां और क्या बोलना है, इसमें भी उनका जवाब नहीं। प्रणब दा को हिन्दी बोलते लोगों ने शायद ही कभी सुना हो, पर चुनाव प्रचार इलाहाबाद में करना हो तो बंगाली या अंग्रेजी बोलने का कोई मतलब नहीं बनता। इसलिए दादा ने हिन्दी में भाषण दिया। यह वही दादा हैं, जिन्होंने एक बार कहा था कि वह प्रधानमंत्री नहीं बन सकते, क्योंकि उन्हें हिन्दी नहीं आती। वैसे हिन्दी आना, न आना अलग बात है, पर उन्हें बोलना आता है, जो सबसे पते की बात है। लंबे और नजदीकी रिश्ते के बावजूद ममता बनर्जी के कड़े विरोध को देखकर जहां घरवाले तक हैरान दिखे, उतने पर भी प्रणब मुखर्जी का बड़ा ही संजीदा और नपा-तुला बयान आया कि वह मेरी छोटी बहन जैसी हैं। मौजूदा आंकड़ों के तहत प्रणब की राह बहुत मुश्किल नहीं दिखती। दरअसल यूपीए के 42 फीसदी वोट हैं, जिनमें तृणमूल के 4.4 फीसदी वोट शामिल हैं। अगर उसे हटाकर समाजवादी पार्टी के 6.2 फीसदी जोड़ दें, तो आंकड़ा 43.8 फीसदी होगा। इसमें लेफ्ट के 4.7 फीसदी जोड़ने पर 48.5 फीसदी वोट हो जाते हैं। और अब बीएसपी के 3.8 फीसदी का समर्थन मिलने से समर्थन 52.3 फीसदी यानी प्रणब की जीत पक्की हो जाती है। जबकि एनडीए के पास सिर्फ 28 फीसदी वोट है।टिप्पणियां हालांकि इन आंकड़ों में थोड़ी बहुत फेरबदल हो सकती है, क्योंकि आंध्र प्रदेश में हुए उपचुनावों के नए नतीजों से इसमें थोड़ा बदलाव आएगा। लेकिन जो बड़ा बदलाव आएगा, वह है प्रणब का रुतबा। वैसे सच कहा जाए तो मौजूदा हालात में प्रणब के लिए राष्ट्रपति भवन सबसे माकूल जगह है। वक्त के साथ उनका सब्र भी कहीं न कहीं जवाब दे रहा था। इस दौरान वह कई बार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर साफ कर चुके थे कि अब वह अगला चुनाव नहीं लड़ेंगे। साथ ही 77 साल की उम्र में अब वह टीम राहुल का भी हिस्सा नहीं बन सकते। ऐसे में गठबंधन की इस राजनीति में काफी कम विकल्प बचते हैं। और सबसे अहम बात यह कि मौजूदा हालात में प्रणब मुखर्जी जैसी स्वीकायर्ता किसी और की नहीं है। पर सवाल सिर्फ सियासी रिश्तों को बनाए रखने का ही नहीं, अपनी जमीन से जुड़ाव का भी है, जिसमें कभी कोई बदलाव नहीं आया। राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने के बाद प्रणब जब वक्त निकालकर अपने गांव पहुंचे, तो वहां उनका जोरदार स्वागत हुआ। कतार में खड़े बच्चे बूढ़े और महिलाओं ने फूल बरसाकर उनका स्वागत किया। बात आस्था और विश्वास की भी है, तभी तो गांव के शिवमंदिर में इस दौरान प्रणब दा के नाम से पूजा जारी रही। देश की बड़ी जिम्मेदारियां निभा रहे प्रणब न तो अपने गांव को कभी भूले और न ही गांववालों को। स्कूल के दिनों के दोस्त रहे बलदेव राय बताते हैं कि प्रणब जब भी गांव आते हैं, उनका हालचाल जरूर लेते हैं। प्रणब मुखर्जी ने किन्नरहाता शिवचंद्र स्कूल से अपनी पढ़ाई की। और बाद में इसकी नई इमारत बनवाने में मदद भी दी। स्कूल ने भी अपने होनहार छात्र से जुड़े दस्तावेज बचा कर रखे हैं। रिकार्ड्स के मुताबिक 3 जुलाई, 1948 को प्रणब मुखर्जी ने यहां दाखिला लिया था। स्कूल का फैसला अब सही साबित हो रहा है। उनके बीच पला-पढ़ा पोल्टू अब प्रणब मुखर्जी के नाम से देश का पहला नागरिक बनने वाला है। हालांकि कायदे से देखा जाए, तो यह काम पांच साल पहले यानी 2007 में ही हो जाना चाहिए था। लेकिन माना जाता है कि कुछ पुरानी गांठे रास्ते का रोड़ा बन गई। कांग्रेस यही कहती रही कि वह पार्टी के ऐसे संकटमोचक हैं, जिनके बिना काम चलना मुश्किल है। अगर किसी नेता की अहमियत को उसकी ज़िम्मेदारियों से तौला जाए, तो कांग्रेस में प्रणब दा के आस−पास भी कोई नहीं है। यूपीए के द्वारा अब तक बनाए गए 183 मंत्री समूह यानी मंत्रियों के समूह में से 80 की अध्यक्षता प्रणब मुखर्जी ने की है। सबसे विवादित माने जाने वाले मुद्दों जैसे लोकपाल और तेलंगाना पर बनाए गए मंत्रियों के समूह की अगुवाई भी प्रणब मुखर्जी ने की है। और प्रणब मुखर्जी हमेशा से सरकार के संकटमोचक रहे हैं। उन्हें विपक्षी पार्टियों में कांग्रेस के सबसे स्वीकार्य चेहरे का दर्जा भी हासिल है। यह सही है कि राजनीतिक दलों के बीच प्रणब मुखर्जी की लोकप्रियता का कोई मुकाबला नहीं है, लेकिन कहीं न कहीं अपनी ही पार्टी की टॉप लीडरशिप के साथ उनके संबधों में कोई पेंच जरूर रहा है। कांग्रेसी भी मानते हैं कि सोनिया गांधी ने मुश्किल राजनीतिक हालात में हमेशा प्रणब पर भरोसा किया, लेकिन उन्हें कभी प्रधानमंत्री का पद नहीं देंगी। लेकिन अब वक्त बदल रहा है। आने वाले दिनों में बतौर राष्ट्रपति उनकी चुनौतियां बिल्कुल नई तरह की होंगी, लेकिन इस बात पर भी शक नहीं कि हमेशा की तरह वह आगे भी कामयाब रहेंगे। रायसीना की रेस में प्रणब मुखर्जी सबसे आगे हैं, जिन्हें यूपीए गठबंधन के अलावा दूसरे दलों से भी समर्थन हासिल है। गठबंधन में अगर किसी का विरोध है, तो वह नाम ममता बनर्जी का है, जिसे लेकर प्रणब ने अभी तक उम्मीद नहीं छोड़ी है। उधर, दूसरी तरफ प्रणब के मुकाबले में पीए संगमा मैदान में हैं, जिन्हें बीजेपी, बीजेडी और जयललिता की एआईएडीएमके का समर्थन हासिल है। लेकिन ममता को लेकर दोतरफा खींचतान जारी है। दरअसल इस बार के राष्ट्रपति चुनावों की बात करें तो शुरुआत ही धमाकेदार रही, जिसकी शायद ही किसी को उम्मीद रही हो। मुलायम और ममता ने जब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के सुझाए नाम खारिज कर अपने तीन विकल्प दिए, तो देश में एक तरह से सियासी सुनामी आ गई। गठबंधन सरकार के हिलते-डुलते रिश्तों से मीडिया के कैमरे चिपक गए। ममता ने तो बाकायदा कलाम को जीत की बधाई तक दे दी। यह अलग बात है कि कलाम ने रेस में उतरना मंजूर ही नहीं किया। हकीकत तो यह है कि राष्ट्रपति के नाम पर सारी अटकलबाजियां तभी तक रहीं, जबतक प्रणब मुखर्जी के नाम का ऐलान नहीं हुआ। उसके फौरन बाद ही तस्वीर साफ होने लगी। मुलायम ने फौरन प्रणब के नाम पर मुहर लगा दी। हालात के मुताबिक फैसला लेना प्रणब मुखर्जी की खासियत रही है। खासकर कब, कहां और क्या बोलना है, इसमें भी उनका जवाब नहीं। प्रणब दा को हिन्दी बोलते लोगों ने शायद ही कभी सुना हो, पर चुनाव प्रचार इलाहाबाद में करना हो तो बंगाली या अंग्रेजी बोलने का कोई मतलब नहीं बनता। इसलिए दादा ने हिन्दी में भाषण दिया। यह वही दादा हैं, जिन्होंने एक बार कहा था कि वह प्रधानमंत्री नहीं बन सकते, क्योंकि उन्हें हिन्दी नहीं आती। वैसे हिन्दी आना, न आना अलग बात है, पर उन्हें बोलना आता है, जो सबसे पते की बात है। लंबे और नजदीकी रिश्ते के बावजूद ममता बनर्जी के कड़े विरोध को देखकर जहां घरवाले तक हैरान दिखे, उतने पर भी प्रणब मुखर्जी का बड़ा ही संजीदा और नपा-तुला बयान आया कि वह मेरी छोटी बहन जैसी हैं। मौजूदा आंकड़ों के तहत प्रणब की राह बहुत मुश्किल नहीं दिखती। दरअसल यूपीए के 42 फीसदी वोट हैं, जिनमें तृणमूल के 4.4 फीसदी वोट शामिल हैं। अगर उसे हटाकर समाजवादी पार्टी के 6.2 फीसदी जोड़ दें, तो आंकड़ा 43.8 फीसदी होगा। इसमें लेफ्ट के 4.7 फीसदी जोड़ने पर 48.5 फीसदी वोट हो जाते हैं। और अब बीएसपी के 3.8 फीसदी का समर्थन मिलने से समर्थन 52.3 फीसदी यानी प्रणब की जीत पक्की हो जाती है। जबकि एनडीए के पास सिर्फ 28 फीसदी वोट है।टिप्पणियां हालांकि इन आंकड़ों में थोड़ी बहुत फेरबदल हो सकती है, क्योंकि आंध्र प्रदेश में हुए उपचुनावों के नए नतीजों से इसमें थोड़ा बदलाव आएगा। लेकिन जो बड़ा बदलाव आएगा, वह है प्रणब का रुतबा। वैसे सच कहा जाए तो मौजूदा हालात में प्रणब के लिए राष्ट्रपति भवन सबसे माकूल जगह है। वक्त के साथ उनका सब्र भी कहीं न कहीं जवाब दे रहा था। इस दौरान वह कई बार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर साफ कर चुके थे कि अब वह अगला चुनाव नहीं लड़ेंगे। साथ ही 77 साल की उम्र में अब वह टीम राहुल का भी हिस्सा नहीं बन सकते। ऐसे में गठबंधन की इस राजनीति में काफी कम विकल्प बचते हैं। और सबसे अहम बात यह कि मौजूदा हालात में प्रणब मुखर्जी जैसी स्वीकायर्ता किसी और की नहीं है। देश की बड़ी जिम्मेदारियां निभा रहे प्रणब न तो अपने गांव को कभी भूले और न ही गांववालों को। स्कूल के दिनों के दोस्त रहे बलदेव राय बताते हैं कि प्रणब जब भी गांव आते हैं, उनका हालचाल जरूर लेते हैं। प्रणब मुखर्जी ने किन्नरहाता शिवचंद्र स्कूल से अपनी पढ़ाई की। और बाद में इसकी नई इमारत बनवाने में मदद भी दी। स्कूल ने भी अपने होनहार छात्र से जुड़े दस्तावेज बचा कर रखे हैं। रिकार्ड्स के मुताबिक 3 जुलाई, 1948 को प्रणब मुखर्जी ने यहां दाखिला लिया था। स्कूल का फैसला अब सही साबित हो रहा है। उनके बीच पला-पढ़ा पोल्टू अब प्रणब मुखर्जी के नाम से देश का पहला नागरिक बनने वाला है। हालांकि कायदे से देखा जाए, तो यह काम पांच साल पहले यानी 2007 में ही हो जाना चाहिए था। लेकिन माना जाता है कि कुछ पुरानी गांठे रास्ते का रोड़ा बन गई। कांग्रेस यही कहती रही कि वह पार्टी के ऐसे संकटमोचक हैं, जिनके बिना काम चलना मुश्किल है। अगर किसी नेता की अहमियत को उसकी ज़िम्मेदारियों से तौला जाए, तो कांग्रेस में प्रणब दा के आस−पास भी कोई नहीं है। यूपीए के द्वारा अब तक बनाए गए 183 मंत्री समूह यानी मंत्रियों के समूह में से 80 की अध्यक्षता प्रणब मुखर्जी ने की है। सबसे विवादित माने जाने वाले मुद्दों जैसे लोकपाल और तेलंगाना पर बनाए गए मंत्रियों के समूह की अगुवाई भी प्रणब मुखर्जी ने की है। और प्रणब मुखर्जी हमेशा से सरकार के संकटमोचक रहे हैं। उन्हें विपक्षी पार्टियों में कांग्रेस के सबसे स्वीकार्य चेहरे का दर्जा भी हासिल है। यह सही है कि राजनीतिक दलों के बीच प्रणब मुखर्जी की लोकप्रियता का कोई मुकाबला नहीं है, लेकिन कहीं न कहीं अपनी ही पार्टी की टॉप लीडरशिप के साथ उनके संबधों में कोई पेंच जरूर रहा है। कांग्रेसी भी मानते हैं कि सोनिया गांधी ने मुश्किल राजनीतिक हालात में हमेशा प्रणब पर भरोसा किया, लेकिन उन्हें कभी प्रधानमंत्री का पद नहीं देंगी। लेकिन अब वक्त बदल रहा है। आने वाले दिनों में बतौर राष्ट्रपति उनकी चुनौतियां बिल्कुल नई तरह की होंगी, लेकिन इस बात पर भी शक नहीं कि हमेशा की तरह वह आगे भी कामयाब रहेंगे। रायसीना की रेस में प्रणब मुखर्जी सबसे आगे हैं, जिन्हें यूपीए गठबंधन के अलावा दूसरे दलों से भी समर्थन हासिल है। गठबंधन में अगर किसी का विरोध है, तो वह नाम ममता बनर्जी का है, जिसे लेकर प्रणब ने अभी तक उम्मीद नहीं छोड़ी है। उधर, दूसरी तरफ प्रणब के मुकाबले में पीए संगमा मैदान में हैं, जिन्हें बीजेपी, बीजेडी और जयललिता की एआईएडीएमके का समर्थन हासिल है। लेकिन ममता को लेकर दोतरफा खींचतान जारी है। दरअसल इस बार के राष्ट्रपति चुनावों की बात करें तो शुरुआत ही धमाकेदार रही, जिसकी शायद ही किसी को उम्मीद रही हो। मुलायम और ममता ने जब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के सुझाए नाम खारिज कर अपने तीन विकल्प दिए, तो देश में एक तरह से सियासी सुनामी आ गई। गठबंधन सरकार के हिलते-डुलते रिश्तों से मीडिया के कैमरे चिपक गए। ममता ने तो बाकायदा कलाम को जीत की बधाई तक दे दी। यह अलग बात है कि कलाम ने रेस में उतरना मंजूर ही नहीं किया। हकीकत तो यह है कि राष्ट्रपति के नाम पर सारी अटकलबाजियां तभी तक रहीं, जबतक प्रणब मुखर्जी के नाम का ऐलान नहीं हुआ। उसके फौरन बाद ही तस्वीर साफ होने लगी। मुलायम ने फौरन प्रणब के नाम पर मुहर लगा दी। हालात के मुताबिक फैसला लेना प्रणब मुखर्जी की खासियत रही है। खासकर कब, कहां और क्या बोलना है, इसमें भी उनका जवाब नहीं। प्रणब दा को हिन्दी बोलते लोगों ने शायद ही कभी सुना हो, पर चुनाव प्रचार इलाहाबाद में करना हो तो बंगाली या अंग्रेजी बोलने का कोई मतलब नहीं बनता। इसलिए दादा ने हिन्दी में भाषण दिया। यह वही दादा हैं, जिन्होंने एक बार कहा था कि वह प्रधानमंत्री नहीं बन सकते, क्योंकि उन्हें हिन्दी नहीं आती। वैसे हिन्दी आना, न आना अलग बात है, पर उन्हें बोलना आता है, जो सबसे पते की बात है। लंबे और नजदीकी रिश्ते के बावजूद ममता बनर्जी के कड़े विरोध को देखकर जहां घरवाले तक हैरान दिखे, उतने पर भी प्रणब मुखर्जी का बड़ा ही संजीदा और नपा-तुला बयान आया कि वह मेरी छोटी बहन जैसी हैं। मौजूदा आंकड़ों के तहत प्रणब की राह बहुत मुश्किल नहीं दिखती। दरअसल यूपीए के 42 फीसदी वोट हैं, जिनमें तृणमूल के 4.4 फीसदी वोट शामिल हैं। अगर उसे हटाकर समाजवादी पार्टी के 6.2 फीसदी जोड़ दें, तो आंकड़ा 43.8 फीसदी होगा। इसमें लेफ्ट के 4.7 फीसदी जोड़ने पर 48.5 फीसदी वोट हो जाते हैं। और अब बीएसपी के 3.8 फीसदी का समर्थन मिलने से समर्थन 52.3 फीसदी यानी प्रणब की जीत पक्की हो जाती है। जबकि एनडीए के पास सिर्फ 28 फीसदी वोट है।टिप्पणियां हालांकि इन आंकड़ों में थोड़ी बहुत फेरबदल हो सकती है, क्योंकि आंध्र प्रदेश में हुए उपचुनावों के नए नतीजों से इसमें थोड़ा बदलाव आएगा। लेकिन जो बड़ा बदलाव आएगा, वह है प्रणब का रुतबा। वैसे सच कहा जाए तो मौजूदा हालात में प्रणब के लिए राष्ट्रपति भवन सबसे माकूल जगह है। वक्त के साथ उनका सब्र भी कहीं न कहीं जवाब दे रहा था। इस दौरान वह कई बार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर साफ कर चुके थे कि अब वह अगला चुनाव नहीं लड़ेंगे। साथ ही 77 साल की उम्र में अब वह टीम राहुल का भी हिस्सा नहीं बन सकते। ऐसे में गठबंधन की इस राजनीति में काफी कम विकल्प बचते हैं। और सबसे अहम बात यह कि मौजूदा हालात में प्रणब मुखर्जी जैसी स्वीकायर्ता किसी और की नहीं है। हालांकि कायदे से देखा जाए, तो यह काम पांच साल पहले यानी 2007 में ही हो जाना चाहिए था। लेकिन माना जाता है कि कुछ पुरानी गांठे रास्ते का रोड़ा बन गई। कांग्रेस यही कहती रही कि वह पार्टी के ऐसे संकटमोचक हैं, जिनके बिना काम चलना मुश्किल है। अगर किसी नेता की अहमियत को उसकी ज़िम्मेदारियों से तौला जाए, तो कांग्रेस में प्रणब दा के आस−पास भी कोई नहीं है। यूपीए के द्वारा अब तक बनाए गए 183 मंत्री समूह यानी मंत्रियों के समूह में से 80 की अध्यक्षता प्रणब मुखर्जी ने की है। सबसे विवादित माने जाने वाले मुद्दों जैसे लोकपाल और तेलंगाना पर बनाए गए मंत्रियों के समूह की अगुवाई भी प्रणब मुखर्जी ने की है। और प्रणब मुखर्जी हमेशा से सरकार के संकटमोचक रहे हैं। उन्हें विपक्षी पार्टियों में कांग्रेस के सबसे स्वीकार्य चेहरे का दर्जा भी हासिल है। यह सही है कि राजनीतिक दलों के बीच प्रणब मुखर्जी की लोकप्रियता का कोई मुकाबला नहीं है, लेकिन कहीं न कहीं अपनी ही पार्टी की टॉप लीडरशिप के साथ उनके संबधों में कोई पेंच जरूर रहा है। कांग्रेसी भी मानते हैं कि सोनिया गांधी ने मुश्किल राजनीतिक हालात में हमेशा प्रणब पर भरोसा किया, लेकिन उन्हें कभी प्रधानमंत्री का पद नहीं देंगी। लेकिन अब वक्त बदल रहा है। आने वाले दिनों में बतौर राष्ट्रपति उनकी चुनौतियां बिल्कुल नई तरह की होंगी, लेकिन इस बात पर भी शक नहीं कि हमेशा की तरह वह आगे भी कामयाब रहेंगे। रायसीना की रेस में प्रणब मुखर्जी सबसे आगे हैं, जिन्हें यूपीए गठबंधन के अलावा दूसरे दलों से भी समर्थन हासिल है। गठबंधन में अगर किसी का विरोध है, तो वह नाम ममता बनर्जी का है, जिसे लेकर प्रणब ने अभी तक उम्मीद नहीं छोड़ी है। उधर, दूसरी तरफ प्रणब के मुकाबले में पीए संगमा मैदान में हैं, जिन्हें बीजेपी, बीजेडी और जयललिता की एआईएडीएमके का समर्थन हासिल है। लेकिन ममता को लेकर दोतरफा खींचतान जारी है। दरअसल इस बार के राष्ट्रपति चुनावों की बात करें तो शुरुआत ही धमाकेदार रही, जिसकी शायद ही किसी को उम्मीद रही हो। मुलायम और ममता ने जब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के सुझाए नाम खारिज कर अपने तीन विकल्प दिए, तो देश में एक तरह से सियासी सुनामी आ गई। गठबंधन सरकार के हिलते-डुलते रिश्तों से मीडिया के कैमरे चिपक गए। ममता ने तो बाकायदा कलाम को जीत की बधाई तक दे दी। यह अलग बात है कि कलाम ने रेस में उतरना मंजूर ही नहीं किया। हकीकत तो यह है कि राष्ट्रपति के नाम पर सारी अटकलबाजियां तभी तक रहीं, जबतक प्रणब मुखर्जी के नाम का ऐलान नहीं हुआ। उसके फौरन बाद ही तस्वीर साफ होने लगी। मुलायम ने फौरन प्रणब के नाम पर मुहर लगा दी। हालात के मुताबिक फैसला लेना प्रणब मुखर्जी की खासियत रही है। खासकर कब, कहां और क्या बोलना है, इसमें भी उनका जवाब नहीं। प्रणब दा को हिन्दी बोलते लोगों ने शायद ही कभी सुना हो, पर चुनाव प्रचार इलाहाबाद में करना हो तो बंगाली या अंग्रेजी बोलने का कोई मतलब नहीं बनता। इसलिए दादा ने हिन्दी में भाषण दिया। यह वही दादा हैं, जिन्होंने एक बार कहा था कि वह प्रधानमंत्री नहीं बन सकते, क्योंकि उन्हें हिन्दी नहीं आती। वैसे हिन्दी आना, न आना अलग बात है, पर उन्हें बोलना आता है, जो सबसे पते की बात है। लंबे और नजदीकी रिश्ते के बावजूद ममता बनर्जी के कड़े विरोध को देखकर जहां घरवाले तक हैरान दिखे, उतने पर भी प्रणब मुखर्जी का बड़ा ही संजीदा और नपा-तुला बयान आया कि वह मेरी छोटी बहन जैसी हैं। मौजूदा आंकड़ों के तहत प्रणब की राह बहुत मुश्किल नहीं दिखती। दरअसल यूपीए के 42 फीसदी वोट हैं, जिनमें तृणमूल के 4.4 फीसदी वोट शामिल हैं। अगर उसे हटाकर समाजवादी पार्टी के 6.2 फीसदी जोड़ दें, तो आंकड़ा 43.8 फीसदी होगा। इसमें लेफ्ट के 4.7 फीसदी जोड़ने पर 48.5 फीसदी वोट हो जाते हैं। और अब बीएसपी के 3.8 फीसदी का समर्थन मिलने से समर्थन 52.3 फीसदी यानी प्रणब की जीत पक्की हो जाती है। जबकि एनडीए के पास सिर्फ 28 फीसदी वोट है।टिप्पणियां हालांकि इन आंकड़ों में थोड़ी बहुत फेरबदल हो सकती है, क्योंकि आंध्र प्रदेश में हुए उपचुनावों के नए नतीजों से इसमें थोड़ा बदलाव आएगा। लेकिन जो बड़ा बदलाव आएगा, वह है प्रणब का रुतबा। वैसे सच कहा जाए तो मौजूदा हालात में प्रणब के लिए राष्ट्रपति भवन सबसे माकूल जगह है। वक्त के साथ उनका सब्र भी कहीं न कहीं जवाब दे रहा था। इस दौरान वह कई बार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर साफ कर चुके थे कि अब वह अगला चुनाव नहीं लड़ेंगे। साथ ही 77 साल की उम्र में अब वह टीम राहुल का भी हिस्सा नहीं बन सकते। ऐसे में गठबंधन की इस राजनीति में काफी कम विकल्प बचते हैं। और सबसे अहम बात यह कि मौजूदा हालात में प्रणब मुखर्जी जैसी स्वीकायर्ता किसी और की नहीं है। अगर किसी नेता की अहमियत को उसकी ज़िम्मेदारियों से तौला जाए, तो कांग्रेस में प्रणब दा के आस−पास भी कोई नहीं है। यूपीए के द्वारा अब तक बनाए गए 183 मंत्री समूह यानी मंत्रियों के समूह में से 80 की अध्यक्षता प्रणब मुखर्जी ने की है। सबसे विवादित माने जाने वाले मुद्दों जैसे लोकपाल और तेलंगाना पर बनाए गए मंत्रियों के समूह की अगुवाई भी प्रणब मुखर्जी ने की है। और प्रणब मुखर्जी हमेशा से सरकार के संकटमोचक रहे हैं। उन्हें विपक्षी पार्टियों में कांग्रेस के सबसे स्वीकार्य चेहरे का दर्जा भी हासिल है। यह सही है कि राजनीतिक दलों के बीच प्रणब मुखर्जी की लोकप्रियता का कोई मुकाबला नहीं है, लेकिन कहीं न कहीं अपनी ही पार्टी की टॉप लीडरशिप के साथ उनके संबधों में कोई पेंच जरूर रहा है। कांग्रेसी भी मानते हैं कि सोनिया गांधी ने मुश्किल राजनीतिक हालात में हमेशा प्रणब पर भरोसा किया, लेकिन उन्हें कभी प्रधानमंत्री का पद नहीं देंगी। लेकिन अब वक्त बदल रहा है। आने वाले दिनों में बतौर राष्ट्रपति उनकी चुनौतियां बिल्कुल नई तरह की होंगी, लेकिन इस बात पर भी शक नहीं कि हमेशा की तरह वह आगे भी कामयाब रहेंगे। रायसीना की रेस में प्रणब मुखर्जी सबसे आगे हैं, जिन्हें यूपीए गठबंधन के अलावा दूसरे दलों से भी समर्थन हासिल है। गठबंधन में अगर किसी का विरोध है, तो वह नाम ममता बनर्जी का है, जिसे लेकर प्रणब ने अभी तक उम्मीद नहीं छोड़ी है। उधर, दूसरी तरफ प्रणब के मुकाबले में पीए संगमा मैदान में हैं, जिन्हें बीजेपी, बीजेडी और जयललिता की एआईएडीएमके का समर्थन हासिल है। लेकिन ममता को लेकर दोतरफा खींचतान जारी है। दरअसल इस बार के राष्ट्रपति चुनावों की बात करें तो शुरुआत ही धमाकेदार रही, जिसकी शायद ही किसी को उम्मीद रही हो। मुलायम और ममता ने जब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के सुझाए नाम खारिज कर अपने तीन विकल्प दिए, तो देश में एक तरह से सियासी सुनामी आ गई। गठबंधन सरकार के हिलते-डुलते रिश्तों से मीडिया के कैमरे चिपक गए। ममता ने तो बाकायदा कलाम को जीत की बधाई तक दे दी। यह अलग बात है कि कलाम ने रेस में उतरना मंजूर ही नहीं किया। हकीकत तो यह है कि राष्ट्रपति के नाम पर सारी अटकलबाजियां तभी तक रहीं, जबतक प्रणब मुखर्जी के नाम का ऐलान नहीं हुआ। उसके फौरन बाद ही तस्वीर साफ होने लगी। मुलायम ने फौरन प्रणब के नाम पर मुहर लगा दी। हालात के मुताबिक फैसला लेना प्रणब मुखर्जी की खासियत रही है। खासकर कब, कहां और क्या बोलना है, इसमें भी उनका जवाब नहीं। प्रणब दा को हिन्दी बोलते लोगों ने शायद ही कभी सुना हो, पर चुनाव प्रचार इलाहाबाद में करना हो तो बंगाली या अंग्रेजी बोलने का कोई मतलब नहीं बनता। इसलिए दादा ने हिन्दी में भाषण दिया। यह वही दादा हैं, जिन्होंने एक बार कहा था कि वह प्रधानमंत्री नहीं बन सकते, क्योंकि उन्हें हिन्दी नहीं आती। वैसे हिन्दी आना, न आना अलग बात है, पर उन्हें बोलना आता है, जो सबसे पते की बात है। लंबे और नजदीकी रिश्ते के बावजूद ममता बनर्जी के कड़े विरोध को देखकर जहां घरवाले तक हैरान दिखे, उतने पर भी प्रणब मुखर्जी का बड़ा ही संजीदा और नपा-तुला बयान आया कि वह मेरी छोटी बहन जैसी हैं। मौजूदा आंकड़ों के तहत प्रणब की राह बहुत मुश्किल नहीं दिखती। दरअसल यूपीए के 42 फीसदी वोट हैं, जिनमें तृणमूल के 4.4 फीसदी वोट शामिल हैं। अगर उसे हटाकर समाजवादी पार्टी के 6.2 फीसदी जोड़ दें, तो आंकड़ा 43.8 फीसदी होगा। इसमें लेफ्ट के 4.7 फीसदी जोड़ने पर 48.5 फीसदी वोट हो जाते हैं। और अब बीएसपी के 3.8 फीसदी का समर्थन मिलने से समर्थन 52.3 फीसदी यानी प्रणब की जीत पक्की हो जाती है। जबकि एनडीए के पास सिर्फ 28 फीसदी वोट है।टिप्पणियां हालांकि इन आंकड़ों में थोड़ी बहुत फेरबदल हो सकती है, क्योंकि आंध्र प्रदेश में हुए उपचुनावों के नए नतीजों से इसमें थोड़ा बदलाव आएगा। लेकिन जो बड़ा बदलाव आएगा, वह है प्रणब का रुतबा। वैसे सच कहा जाए तो मौजूदा हालात में प्रणब के लिए राष्ट्रपति भवन सबसे माकूल जगह है। वक्त के साथ उनका सब्र भी कहीं न कहीं जवाब दे रहा था। इस दौरान वह कई बार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर साफ कर चुके थे कि अब वह अगला चुनाव नहीं लड़ेंगे। साथ ही 77 साल की उम्र में अब वह टीम राहुल का भी हिस्सा नहीं बन सकते। ऐसे में गठबंधन की इस राजनीति में काफी कम विकल्प बचते हैं। और सबसे अहम बात यह कि मौजूदा हालात में प्रणब मुखर्जी जैसी स्वीकायर्ता किसी और की नहीं है। उन्हें विपक्षी पार्टियों में कांग्रेस के सबसे स्वीकार्य चेहरे का दर्जा भी हासिल है। यह सही है कि राजनीतिक दलों के बीच प्रणब मुखर्जी की लोकप्रियता का कोई मुकाबला नहीं है, लेकिन कहीं न कहीं अपनी ही पार्टी की टॉप लीडरशिप के साथ उनके संबधों में कोई पेंच जरूर रहा है। कांग्रेसी भी मानते हैं कि सोनिया गांधी ने मुश्किल राजनीतिक हालात में हमेशा प्रणब पर भरोसा किया, लेकिन उन्हें कभी प्रधानमंत्री का पद नहीं देंगी। लेकिन अब वक्त बदल रहा है। आने वाले दिनों में बतौर राष्ट्रपति उनकी चुनौतियां बिल्कुल नई तरह की होंगी, लेकिन इस बात पर भी शक नहीं कि हमेशा की तरह वह आगे भी कामयाब रहेंगे। रायसीना की रेस में प्रणब मुखर्जी सबसे आगे हैं, जिन्हें यूपीए गठबंधन के अलावा दूसरे दलों से भी समर्थन हासिल है। गठबंधन में अगर किसी का विरोध है, तो वह नाम ममता बनर्जी का है, जिसे लेकर प्रणब ने अभी तक उम्मीद नहीं छोड़ी है। उधर, दूसरी तरफ प्रणब के मुकाबले में पीए संगमा मैदान में हैं, जिन्हें बीजेपी, बीजेडी और जयललिता की एआईएडीएमके का समर्थन हासिल है। लेकिन ममता को लेकर दोतरफा खींचतान जारी है। दरअसल इस बार के राष्ट्रपति चुनावों की बात करें तो शुरुआत ही धमाकेदार रही, जिसकी शायद ही किसी को उम्मीद रही हो। मुलायम और ममता ने जब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के सुझाए नाम खारिज कर अपने तीन विकल्प दिए, तो देश में एक तरह से सियासी सुनामी आ गई। गठबंधन सरकार के हिलते-डुलते रिश्तों से मीडिया के कैमरे चिपक गए। ममता ने तो बाकायदा कलाम को जीत की बधाई तक दे दी। यह अलग बात है कि कलाम ने रेस में उतरना मंजूर ही नहीं किया। हकीकत तो यह है कि राष्ट्रपति के नाम पर सारी अटकलबाजियां तभी तक रहीं, जबतक प्रणब मुखर्जी के नाम का ऐलान नहीं हुआ। उसके फौरन बाद ही तस्वीर साफ होने लगी। मुलायम ने फौरन प्रणब के नाम पर मुहर लगा दी। हालात के मुताबिक फैसला लेना प्रणब मुखर्जी की खासियत रही है। खासकर कब, कहां और क्या बोलना है, इसमें भी उनका जवाब नहीं। प्रणब दा को हिन्दी बोलते लोगों ने शायद ही कभी सुना हो, पर चुनाव प्रचार इलाहाबाद में करना हो तो बंगाली या अंग्रेजी बोलने का कोई मतलब नहीं बनता। इसलिए दादा ने हिन्दी में भाषण दिया। यह वही दादा हैं, जिन्होंने एक बार कहा था कि वह प्रधानमंत्री नहीं बन सकते, क्योंकि उन्हें हिन्दी नहीं आती। वैसे हिन्दी आना, न आना अलग बात है, पर उन्हें बोलना आता है, जो सबसे पते की बात है। लंबे और नजदीकी रिश्ते के बावजूद ममता बनर्जी के कड़े विरोध को देखकर जहां घरवाले तक हैरान दिखे, उतने पर भी प्रणब मुखर्जी का बड़ा ही संजीदा और नपा-तुला बयान आया कि वह मेरी छोटी बहन जैसी हैं। मौजूदा आंकड़ों के तहत प्रणब की राह बहुत मुश्किल नहीं दिखती। दरअसल यूपीए के 42 फीसदी वोट हैं, जिनमें तृणमूल के 4.4 फीसदी वोट शामिल हैं। अगर उसे हटाकर समाजवादी पार्टी के 6.2 फीसदी जोड़ दें, तो आंकड़ा 43.8 फीसदी होगा। इसमें लेफ्ट के 4.7 फीसदी जोड़ने पर 48.5 फीसदी वोट हो जाते हैं। और अब बीएसपी के 3.8 फीसदी का समर्थन मिलने से समर्थन 52.3 फीसदी यानी प्रणब की जीत पक्की हो जाती है। जबकि एनडीए के पास सिर्फ 28 फीसदी वोट है।टिप्पणियां हालांकि इन आंकड़ों में थोड़ी बहुत फेरबदल हो सकती है, क्योंकि आंध्र प्रदेश में हुए उपचुनावों के नए नतीजों से इसमें थोड़ा बदलाव आएगा। लेकिन जो बड़ा बदलाव आएगा, वह है प्रणब का रुतबा। वैसे सच कहा जाए तो मौजूदा हालात में प्रणब के लिए राष्ट्रपति भवन सबसे माकूल जगह है। वक्त के साथ उनका सब्र भी कहीं न कहीं जवाब दे रहा था। इस दौरान वह कई बार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर साफ कर चुके थे कि अब वह अगला चुनाव नहीं लड़ेंगे। साथ ही 77 साल की उम्र में अब वह टीम राहुल का भी हिस्सा नहीं बन सकते। ऐसे में गठबंधन की इस राजनीति में काफी कम विकल्प बचते हैं। और सबसे अहम बात यह कि मौजूदा हालात में प्रणब मुखर्जी जैसी स्वीकायर्ता किसी और की नहीं है। रायसीना की रेस में प्रणब मुखर्जी सबसे आगे हैं, जिन्हें यूपीए गठबंधन के अलावा दूसरे दलों से भी समर्थन हासिल है। गठबंधन में अगर किसी का विरोध है, तो वह नाम ममता बनर्जी का है, जिसे लेकर प्रणब ने अभी तक उम्मीद नहीं छोड़ी है। उधर, दूसरी तरफ प्रणब के मुकाबले में पीए संगमा मैदान में हैं, जिन्हें बीजेपी, बीजेडी और जयललिता की एआईएडीएमके का समर्थन हासिल है। लेकिन ममता को लेकर दोतरफा खींचतान जारी है। दरअसल इस बार के राष्ट्रपति चुनावों की बात करें तो शुरुआत ही धमाकेदार रही, जिसकी शायद ही किसी को उम्मीद रही हो। मुलायम और ममता ने जब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के सुझाए नाम खारिज कर अपने तीन विकल्प दिए, तो देश में एक तरह से सियासी सुनामी आ गई। गठबंधन सरकार के हिलते-डुलते रिश्तों से मीडिया के कैमरे चिपक गए। ममता ने तो बाकायदा कलाम को जीत की बधाई तक दे दी। यह अलग बात है कि कलाम ने रेस में उतरना मंजूर ही नहीं किया। हकीकत तो यह है कि राष्ट्रपति के नाम पर सारी अटकलबाजियां तभी तक रहीं, जबतक प्रणब मुखर्जी के नाम का ऐलान नहीं हुआ। उसके फौरन बाद ही तस्वीर साफ होने लगी। मुलायम ने फौरन प्रणब के नाम पर मुहर लगा दी। हालात के मुताबिक फैसला लेना प्रणब मुखर्जी की खासियत रही है। खासकर कब, कहां और क्या बोलना है, इसमें भी उनका जवाब नहीं। प्रणब दा को हिन्दी बोलते लोगों ने शायद ही कभी सुना हो, पर चुनाव प्रचार इलाहाबाद में करना हो तो बंगाली या अंग्रेजी बोलने का कोई मतलब नहीं बनता। इसलिए दादा ने हिन्दी में भाषण दिया। यह वही दादा हैं, जिन्होंने एक बार कहा था कि वह प्रधानमंत्री नहीं बन सकते, क्योंकि उन्हें हिन्दी नहीं आती। वैसे हिन्दी आना, न आना अलग बात है, पर उन्हें बोलना आता है, जो सबसे पते की बात है। लंबे और नजदीकी रिश्ते के बावजूद ममता बनर्जी के कड़े विरोध को देखकर जहां घरवाले तक हैरान दिखे, उतने पर भी प्रणब मुखर्जी का बड़ा ही संजीदा और नपा-तुला बयान आया कि वह मेरी छोटी बहन जैसी हैं। मौजूदा आंकड़ों के तहत प्रणब की राह बहुत मुश्किल नहीं दिखती। दरअसल यूपीए के 42 फीसदी वोट हैं, जिनमें तृणमूल के 4.4 फीसदी वोट शामिल हैं। अगर उसे हटाकर समाजवादी पार्टी के 6.2 फीसदी जोड़ दें, तो आंकड़ा 43.8 फीसदी होगा। इसमें लेफ्ट के 4.7 फीसदी जोड़ने पर 48.5 फीसदी वोट हो जाते हैं। और अब बीएसपी के 3.8 फीसदी का समर्थन मिलने से समर्थन 52.3 फीसदी यानी प्रणब की जीत पक्की हो जाती है। जबकि एनडीए के पास सिर्फ 28 फीसदी वोट है।टिप्पणियां हालांकि इन आंकड़ों में थोड़ी बहुत फेरबदल हो सकती है, क्योंकि आंध्र प्रदेश में हुए उपचुनावों के नए नतीजों से इसमें थोड़ा बदलाव आएगा। लेकिन जो बड़ा बदलाव आएगा, वह है प्रणब का रुतबा। वैसे सच कहा जाए तो मौजूदा हालात में प्रणब के लिए राष्ट्रपति भवन सबसे माकूल जगह है। वक्त के साथ उनका सब्र भी कहीं न कहीं जवाब दे रहा था। इस दौरान वह कई बार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर साफ कर चुके थे कि अब वह अगला चुनाव नहीं लड़ेंगे। साथ ही 77 साल की उम्र में अब वह टीम राहुल का भी हिस्सा नहीं बन सकते। ऐसे में गठबंधन की इस राजनीति में काफी कम विकल्प बचते हैं। और सबसे अहम बात यह कि मौजूदा हालात में प्रणब मुखर्जी जैसी स्वीकायर्ता किसी और की नहीं है। दरअसल इस बार के राष्ट्रपति चुनावों की बात करें तो शुरुआत ही धमाकेदार रही, जिसकी शायद ही किसी को उम्मीद रही हो। मुलायम और ममता ने जब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के सुझाए नाम खारिज कर अपने तीन विकल्प दिए, तो देश में एक तरह से सियासी सुनामी आ गई। गठबंधन सरकार के हिलते-डुलते रिश्तों से मीडिया के कैमरे चिपक गए। ममता ने तो बाकायदा कलाम को जीत की बधाई तक दे दी। यह अलग बात है कि कलाम ने रेस में उतरना मंजूर ही नहीं किया। हकीकत तो यह है कि राष्ट्रपति के नाम पर सारी अटकलबाजियां तभी तक रहीं, जबतक प्रणब मुखर्जी के नाम का ऐलान नहीं हुआ। उसके फौरन बाद ही तस्वीर साफ होने लगी। मुलायम ने फौरन प्रणब के नाम पर मुहर लगा दी। हालात के मुताबिक फैसला लेना प्रणब मुखर्जी की खासियत रही है। खासकर कब, कहां और क्या बोलना है, इसमें भी उनका जवाब नहीं। प्रणब दा को हिन्दी बोलते लोगों ने शायद ही कभी सुना हो, पर चुनाव प्रचार इलाहाबाद में करना हो तो बंगाली या अंग्रेजी बोलने का कोई मतलब नहीं बनता। इसलिए दादा ने हिन्दी में भाषण दिया। यह वही दादा हैं, जिन्होंने एक बार कहा था कि वह प्रधानमंत्री नहीं बन सकते, क्योंकि उन्हें हिन्दी नहीं आती। वैसे हिन्दी आना, न आना अलग बात है, पर उन्हें बोलना आता है, जो सबसे पते की बात है। लंबे और नजदीकी रिश्ते के बावजूद ममता बनर्जी के कड़े विरोध को देखकर जहां घरवाले तक हैरान दिखे, उतने पर भी प्रणब मुखर्जी का बड़ा ही संजीदा और नपा-तुला बयान आया कि वह मेरी छोटी बहन जैसी हैं। मौजूदा आंकड़ों के तहत प्रणब की राह बहुत मुश्किल नहीं दिखती। दरअसल यूपीए के 42 फीसदी वोट हैं, जिनमें तृणमूल के 4.4 फीसदी वोट शामिल हैं। अगर उसे हटाकर समाजवादी पार्टी के 6.2 फीसदी जोड़ दें, तो आंकड़ा 43.8 फीसदी होगा। इसमें लेफ्ट के 4.7 फीसदी जोड़ने पर 48.5 फीसदी वोट हो जाते हैं। और अब बीएसपी के 3.8 फीसदी का समर्थन मिलने से समर्थन 52.3 फीसदी यानी प्रणब की जीत पक्की हो जाती है। जबकि एनडीए के पास सिर्फ 28 फीसदी वोट है।टिप्पणियां हालांकि इन आंकड़ों में थोड़ी बहुत फेरबदल हो सकती है, क्योंकि आंध्र प्रदेश में हुए उपचुनावों के नए नतीजों से इसमें थोड़ा बदलाव आएगा। लेकिन जो बड़ा बदलाव आएगा, वह है प्रणब का रुतबा। वैसे सच कहा जाए तो मौजूदा हालात में प्रणब के लिए राष्ट्रपति भवन सबसे माकूल जगह है। वक्त के साथ उनका सब्र भी कहीं न कहीं जवाब दे रहा था। इस दौरान वह कई बार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर साफ कर चुके थे कि अब वह अगला चुनाव नहीं लड़ेंगे। साथ ही 77 साल की उम्र में अब वह टीम राहुल का भी हिस्सा नहीं बन सकते। ऐसे में गठबंधन की इस राजनीति में काफी कम विकल्प बचते हैं। और सबसे अहम बात यह कि मौजूदा हालात में प्रणब मुखर्जी जैसी स्वीकायर्ता किसी और की नहीं है। हकीकत तो यह है कि राष्ट्रपति के नाम पर सारी अटकलबाजियां तभी तक रहीं, जबतक प्रणब मुखर्जी के नाम का ऐलान नहीं हुआ। उसके फौरन बाद ही तस्वीर साफ होने लगी। मुलायम ने फौरन प्रणब के नाम पर मुहर लगा दी। हालात के मुताबिक फैसला लेना प्रणब मुखर्जी की खासियत रही है। खासकर कब, कहां और क्या बोलना है, इसमें भी उनका जवाब नहीं। प्रणब दा को हिन्दी बोलते लोगों ने शायद ही कभी सुना हो, पर चुनाव प्रचार इलाहाबाद में करना हो तो बंगाली या अंग्रेजी बोलने का कोई मतलब नहीं बनता। इसलिए दादा ने हिन्दी में भाषण दिया। यह वही दादा हैं, जिन्होंने एक बार कहा था कि वह प्रधानमंत्री नहीं बन सकते, क्योंकि उन्हें हिन्दी नहीं आती। वैसे हिन्दी आना, न आना अलग बात है, पर उन्हें बोलना आता है, जो सबसे पते की बात है। लंबे और नजदीकी रिश्ते के बावजूद ममता बनर्जी के कड़े विरोध को देखकर जहां घरवाले तक हैरान दिखे, उतने पर भी प्रणब मुखर्जी का बड़ा ही संजीदा और नपा-तुला बयान आया कि वह मेरी छोटी बहन जैसी हैं। मौजूदा आंकड़ों के तहत प्रणब की राह बहुत मुश्किल नहीं दिखती। दरअसल यूपीए के 42 फीसदी वोट हैं, जिनमें तृणमूल के 4.4 फीसदी वोट शामिल हैं। अगर उसे हटाकर समाजवादी पार्टी के 6.2 फीसदी जोड़ दें, तो आंकड़ा 43.8 फीसदी होगा। इसमें लेफ्ट के 4.7 फीसदी जोड़ने पर 48.5 फीसदी वोट हो जाते हैं। और अब बीएसपी के 3.8 फीसदी का समर्थन मिलने से समर्थन 52.3 फीसदी यानी प्रणब की जीत पक्की हो जाती है। जबकि एनडीए के पास सिर्फ 28 फीसदी वोट है।टिप्पणियां हालांकि इन आंकड़ों में थोड़ी बहुत फेरबदल हो सकती है, क्योंकि आंध्र प्रदेश में हुए उपचुनावों के नए नतीजों से इसमें थोड़ा बदलाव आएगा। लेकिन जो बड़ा बदलाव आएगा, वह है प्रणब का रुतबा। वैसे सच कहा जाए तो मौजूदा हालात में प्रणब के लिए राष्ट्रपति भवन सबसे माकूल जगह है। वक्त के साथ उनका सब्र भी कहीं न कहीं जवाब दे रहा था। इस दौरान वह कई बार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर साफ कर चुके थे कि अब वह अगला चुनाव नहीं लड़ेंगे। साथ ही 77 साल की उम्र में अब वह टीम राहुल का भी हिस्सा नहीं बन सकते। ऐसे में गठबंधन की इस राजनीति में काफी कम विकल्प बचते हैं। और सबसे अहम बात यह कि मौजूदा हालात में प्रणब मुखर्जी जैसी स्वीकायर्ता किसी और की नहीं है। प्रणब दा को हिन्दी बोलते लोगों ने शायद ही कभी सुना हो, पर चुनाव प्रचार इलाहाबाद में करना हो तो बंगाली या अंग्रेजी बोलने का कोई मतलब नहीं बनता। इसलिए दादा ने हिन्दी में भाषण दिया। यह वही दादा हैं, जिन्होंने एक बार कहा था कि वह प्रधानमंत्री नहीं बन सकते, क्योंकि उन्हें हिन्दी नहीं आती। वैसे हिन्दी आना, न आना अलग बात है, पर उन्हें बोलना आता है, जो सबसे पते की बात है। लंबे और नजदीकी रिश्ते के बावजूद ममता बनर्जी के कड़े विरोध को देखकर जहां घरवाले तक हैरान दिखे, उतने पर भी प्रणब मुखर्जी का बड़ा ही संजीदा और नपा-तुला बयान आया कि वह मेरी छोटी बहन जैसी हैं। मौजूदा आंकड़ों के तहत प्रणब की राह बहुत मुश्किल नहीं दिखती। दरअसल यूपीए के 42 फीसदी वोट हैं, जिनमें तृणमूल के 4.4 फीसदी वोट शामिल हैं। अगर उसे हटाकर समाजवादी पार्टी के 6.2 फीसदी जोड़ दें, तो आंकड़ा 43.8 फीसदी होगा। इसमें लेफ्ट के 4.7 फीसदी जोड़ने पर 48.5 फीसदी वोट हो जाते हैं। और अब बीएसपी के 3.8 फीसदी का समर्थन मिलने से समर्थन 52.3 फीसदी यानी प्रणब की जीत पक्की हो जाती है। जबकि एनडीए के पास सिर्फ 28 फीसदी वोट है।टिप्पणियां हालांकि इन आंकड़ों में थोड़ी बहुत फेरबदल हो सकती है, क्योंकि आंध्र प्रदेश में हुए उपचुनावों के नए नतीजों से इसमें थोड़ा बदलाव आएगा। लेकिन जो बड़ा बदलाव आएगा, वह है प्रणब का रुतबा। वैसे सच कहा जाए तो मौजूदा हालात में प्रणब के लिए राष्ट्रपति भवन सबसे माकूल जगह है। वक्त के साथ उनका सब्र भी कहीं न कहीं जवाब दे रहा था। इस दौरान वह कई बार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर साफ कर चुके थे कि अब वह अगला चुनाव नहीं लड़ेंगे। साथ ही 77 साल की उम्र में अब वह टीम राहुल का भी हिस्सा नहीं बन सकते। ऐसे में गठबंधन की इस राजनीति में काफी कम विकल्प बचते हैं। और सबसे अहम बात यह कि मौजूदा हालात में प्रणब मुखर्जी जैसी स्वीकायर्ता किसी और की नहीं है। मौजूदा आंकड़ों के तहत प्रणब की राह बहुत मुश्किल नहीं दिखती। दरअसल यूपीए के 42 फीसदी वोट हैं, जिनमें तृणमूल के 4.4 फीसदी वोट शामिल हैं। अगर उसे हटाकर समाजवादी पार्टी के 6.2 फीसदी जोड़ दें, तो आंकड़ा 43.8 फीसदी होगा। इसमें लेफ्ट के 4.7 फीसदी जोड़ने पर 48.5 फीसदी वोट हो जाते हैं। और अब बीएसपी के 3.8 फीसदी का समर्थन मिलने से समर्थन 52.3 फीसदी यानी प्रणब की जीत पक्की हो जाती है। जबकि एनडीए के पास सिर्फ 28 फीसदी वोट है।टिप्पणियां हालांकि इन आंकड़ों में थोड़ी बहुत फेरबदल हो सकती है, क्योंकि आंध्र प्रदेश में हुए उपचुनावों के नए नतीजों से इसमें थोड़ा बदलाव आएगा। लेकिन जो बड़ा बदलाव आएगा, वह है प्रणब का रुतबा। वैसे सच कहा जाए तो मौजूदा हालात में प्रणब के लिए राष्ट्रपति भवन सबसे माकूल जगह है। वक्त के साथ उनका सब्र भी कहीं न कहीं जवाब दे रहा था। इस दौरान वह कई बार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर साफ कर चुके थे कि अब वह अगला चुनाव नहीं लड़ेंगे। साथ ही 77 साल की उम्र में अब वह टीम राहुल का भी हिस्सा नहीं बन सकते। ऐसे में गठबंधन की इस राजनीति में काफी कम विकल्प बचते हैं। और सबसे अहम बात यह कि मौजूदा हालात में प्रणब मुखर्जी जैसी स्वीकायर्ता किसी और की नहीं है। हालांकि इन आंकड़ों में थोड़ी बहुत फेरबदल हो सकती है, क्योंकि आंध्र प्रदेश में हुए उपचुनावों के नए नतीजों से इसमें थोड़ा बदलाव आएगा। लेकिन जो बड़ा बदलाव आएगा, वह है प्रणब का रुतबा। वैसे सच कहा जाए तो मौजूदा हालात में प्रणब के लिए राष्ट्रपति भवन सबसे माकूल जगह है। वक्त के साथ उनका सब्र भी कहीं न कहीं जवाब दे रहा था। इस दौरान वह कई बार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर साफ कर चुके थे कि अब वह अगला चुनाव नहीं लड़ेंगे। साथ ही 77 साल की उम्र में अब वह टीम राहुल का भी हिस्सा नहीं बन सकते। ऐसे में गठबंधन की इस राजनीति में काफी कम विकल्प बचते हैं। और सबसे अहम बात यह कि मौजूदा हालात में प्रणब मुखर्जी जैसी स्वीकायर्ता किसी और की नहीं है। साथ ही 77 साल की उम्र में अब वह टीम राहुल का भी हिस्सा नहीं बन सकते। ऐसे में गठबंधन की इस राजनीति में काफी कम विकल्प बचते हैं। और सबसे अहम बात यह कि मौजूदा हालात में प्रणब मुखर्जी जैसी स्वीकायर्ता किसी और की नहीं है।
सारांश: इसे प्रणब का जादू ही कहा जाएगा कि जब उनका पर्चा भरा गया, तो समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी एक साथ दिखीं। ऐसी शख्सियत, जिसके लिए पार्टियां गठबंधन को दरकिनार करती दिखीं।
7
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: सायना नेहवाल क्वार्टर फाइनल में हारने का मिथक तोड़ने में नाकाम रही लेकिन ज्वाला गुटा और अश्विनी पोनप्पा ने विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप के महिला युगल के सेमीफाइनल में पहुंचकर नया इतिहास रचा। विश्व में नंबर छह सायना इससे पहले भी दो बार क्वार्टर फाइनल से आगे नहीं बढ़ पाई थीं और चीन की तीसरी वरीय वांग झिन फिर से इस भारतीय खिलाड़ी का अभियान अंतिम आठ में रोक दिया। सायना को केवल 30 मिनट में 15-21, 10-21 से हार का सामना करना पड़ा। लेकिन राष्ट्रमंडल खेलों की स्वर्ण पदक जीतने वाली ज्वाला और अश्विनी की जोड़ी ने विटा मारिसा और नादिया मेलाती की इंडोनेशियाई जोड़ी को 47 मिनट में 17-21, 21-10, 21-17 से हराकर भारतीय उम्मीदें कायम रखी। ज्वाला और अश्विनी इस चैंपियनशिप के सेमीफाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय जोड़ी है। दुनिया में 21वें नंबर की भारतीय जोड़ी का अगला मुकाबला चीन की क्विंग तियान और युनलेई झाओं की पांचवीं वरीय चीनी जोड़ी से होगा जिन्होंने एक अन्य क्वार्टर फाइनल मैच में मिजुकी फुजी और रीका काकिवा की चौथी वरीय जापानी जोड़ी को 21-16, 21-10 से हराया। भारतीय जोड़ी को पहले गेम में लय हासिल करने में वक्त लगा। इंडोनेशिया की खिलाड़ियों ने शुरू में ही 6-1 की बढ़त हासिल कर ली थी। भारतीय जोड़ी हालांकि 17-17 से बराबरी पर आ गई थी लेकिन वह यह गेम जीतने में नाकाम रही।
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: ज्वाला-अश्विनी की जोड़ी ने विटा मारिसा-नादिया मेलाती की इंडोनेशियाई जोड़ी को 47 मिनट में 17-21, 21-10, 21-17 से हराकर भारतीय उम्मीदें कायम रखी।
19
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डीयूएसयू) व जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) के लिए शुक्रवार को यहां मतदान जारी है। जेएनयू में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव व संयुक्त सचिव पदों पर चुनाव के लिए करीब 30 उम्मीदवार मैदान में हैं। इन्हीं पदों के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय में 38 उम्मीदवार मैदान में हैं। जेएनयूएसयू चुनाव इस साल दूसरी बार हो रहे हैं। नए सत्र की शुरुआत पर 30 जुलाई को अंतरिम छात्रसंघ को भंग कर दिया गया था। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संघ (एनएसयूआई), स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए) व अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने अपने-अपने उम्मीदवार चुनाव में उतारे हैं। पिछले चुनाव में वामपंथ से सम्बद्ध एआईएसए ने सभी चार पदों पर जीत हासिल की थी।टिप्पणियां दिल्ली विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समर्थित एबीवीपी व कांग्रेस समर्थित एनएसयूआई के बीच मुख्य टक्कर है। एआईएसए एक और मजबूत प्रतियोगी है। वर्ष 2011 में एबीवीपी को डीयूएसयू के चार में से तीन पदों पर जीत मिली थी जबकि एनएसयूआई को अध्यक्ष पद पर ही जीत मिल सकी थी। दोनों जगहों के चुनावों के परिणामों की घोषणा शनिवार को होगी। जेएनयू में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव व संयुक्त सचिव पदों पर चुनाव के लिए करीब 30 उम्मीदवार मैदान में हैं। इन्हीं पदों के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय में 38 उम्मीदवार मैदान में हैं। जेएनयूएसयू चुनाव इस साल दूसरी बार हो रहे हैं। नए सत्र की शुरुआत पर 30 जुलाई को अंतरिम छात्रसंघ को भंग कर दिया गया था। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संघ (एनएसयूआई), स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए) व अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने अपने-अपने उम्मीदवार चुनाव में उतारे हैं। पिछले चुनाव में वामपंथ से सम्बद्ध एआईएसए ने सभी चार पदों पर जीत हासिल की थी।टिप्पणियां दिल्ली विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समर्थित एबीवीपी व कांग्रेस समर्थित एनएसयूआई के बीच मुख्य टक्कर है। एआईएसए एक और मजबूत प्रतियोगी है। वर्ष 2011 में एबीवीपी को डीयूएसयू के चार में से तीन पदों पर जीत मिली थी जबकि एनएसयूआई को अध्यक्ष पद पर ही जीत मिल सकी थी। दोनों जगहों के चुनावों के परिणामों की घोषणा शनिवार को होगी। जेएनयूएसयू चुनाव इस साल दूसरी बार हो रहे हैं। नए सत्र की शुरुआत पर 30 जुलाई को अंतरिम छात्रसंघ को भंग कर दिया गया था। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संघ (एनएसयूआई), स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए) व अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने अपने-अपने उम्मीदवार चुनाव में उतारे हैं। पिछले चुनाव में वामपंथ से सम्बद्ध एआईएसए ने सभी चार पदों पर जीत हासिल की थी।टिप्पणियां दिल्ली विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समर्थित एबीवीपी व कांग्रेस समर्थित एनएसयूआई के बीच मुख्य टक्कर है। एआईएसए एक और मजबूत प्रतियोगी है। वर्ष 2011 में एबीवीपी को डीयूएसयू के चार में से तीन पदों पर जीत मिली थी जबकि एनएसयूआई को अध्यक्ष पद पर ही जीत मिल सकी थी। दोनों जगहों के चुनावों के परिणामों की घोषणा शनिवार को होगी। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संघ (एनएसयूआई), स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए) व अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने अपने-अपने उम्मीदवार चुनाव में उतारे हैं। पिछले चुनाव में वामपंथ से सम्बद्ध एआईएसए ने सभी चार पदों पर जीत हासिल की थी।टिप्पणियां दिल्ली विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समर्थित एबीवीपी व कांग्रेस समर्थित एनएसयूआई के बीच मुख्य टक्कर है। एआईएसए एक और मजबूत प्रतियोगी है। वर्ष 2011 में एबीवीपी को डीयूएसयू के चार में से तीन पदों पर जीत मिली थी जबकि एनएसयूआई को अध्यक्ष पद पर ही जीत मिल सकी थी। दोनों जगहों के चुनावों के परिणामों की घोषणा शनिवार को होगी। दिल्ली विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समर्थित एबीवीपी व कांग्रेस समर्थित एनएसयूआई के बीच मुख्य टक्कर है। एआईएसए एक और मजबूत प्रतियोगी है। वर्ष 2011 में एबीवीपी को डीयूएसयू के चार में से तीन पदों पर जीत मिली थी जबकि एनएसयूआई को अध्यक्ष पद पर ही जीत मिल सकी थी। दोनों जगहों के चुनावों के परिणामों की घोषणा शनिवार को होगी। वर्ष 2011 में एबीवीपी को डीयूएसयू के चार में से तीन पदों पर जीत मिली थी जबकि एनएसयूआई को अध्यक्ष पद पर ही जीत मिल सकी थी। दोनों जगहों के चुनावों के परिणामों की घोषणा शनिवार को होगी।
सारांश: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डीयूएसयू) व जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) के लिए शुक्रवार को यहां मतदान जारी है।
31
['hin']
एक सारांश बनाओ: अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के चार साल बाद पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने क्रिकेट के सभी स्तर से अलविदा कह दिया। उन्होंने अब आईपीएल भी नहीं खेलने का फैसला किया। पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज ने बंगाल के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट में खेलना जारी रखा था ताकि वह अपनी आईपीएल फ्रेंचाइजी पुणे वारियर्स के लिए फॉर्म में रह सकें, लेकिन पिछले साल के लचर प्रदर्शन के बाद गांगुली ने अंतत: इसके खिलाफ का फैसला किया।टिप्पणियां गांगुली ने कहा, आईपीएल छह जब खत्म होगा, तब तक मैं करीब 41 साल का हो जाऊंगा। ट्वेंटी-20 में शारीरिक रूप से पूरी तरह फिट रहना होता है। इसमें खेलना शरीर के लिए काफी मुश्किल हो जाता है। बायें हाथ के इस बल्लेबाज ने कहा कि उन्होंने पिछले सत्र में ही पुणे अधिकारियों को अपनी इच्छा स्पष्ट कर दी थी। उन्होंने कहा, आईपीएल में कप्तानी करना, बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। आपको कई सवालों के जवाब देने होते हैं। इससे तो देश का कप्तान होना बेहतर है। कम से कम आपको कोई फोन करके नहीं पूछेगा कि क्या चीज गलत हुई। पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज ने बंगाल के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट में खेलना जारी रखा था ताकि वह अपनी आईपीएल फ्रेंचाइजी पुणे वारियर्स के लिए फॉर्म में रह सकें, लेकिन पिछले साल के लचर प्रदर्शन के बाद गांगुली ने अंतत: इसके खिलाफ का फैसला किया।टिप्पणियां गांगुली ने कहा, आईपीएल छह जब खत्म होगा, तब तक मैं करीब 41 साल का हो जाऊंगा। ट्वेंटी-20 में शारीरिक रूप से पूरी तरह फिट रहना होता है। इसमें खेलना शरीर के लिए काफी मुश्किल हो जाता है। बायें हाथ के इस बल्लेबाज ने कहा कि उन्होंने पिछले सत्र में ही पुणे अधिकारियों को अपनी इच्छा स्पष्ट कर दी थी। उन्होंने कहा, आईपीएल में कप्तानी करना, बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। आपको कई सवालों के जवाब देने होते हैं। इससे तो देश का कप्तान होना बेहतर है। कम से कम आपको कोई फोन करके नहीं पूछेगा कि क्या चीज गलत हुई। गांगुली ने कहा, आईपीएल छह जब खत्म होगा, तब तक मैं करीब 41 साल का हो जाऊंगा। ट्वेंटी-20 में शारीरिक रूप से पूरी तरह फिट रहना होता है। इसमें खेलना शरीर के लिए काफी मुश्किल हो जाता है। बायें हाथ के इस बल्लेबाज ने कहा कि उन्होंने पिछले सत्र में ही पुणे अधिकारियों को अपनी इच्छा स्पष्ट कर दी थी। उन्होंने कहा, आईपीएल में कप्तानी करना, बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। आपको कई सवालों के जवाब देने होते हैं। इससे तो देश का कप्तान होना बेहतर है। कम से कम आपको कोई फोन करके नहीं पूछेगा कि क्या चीज गलत हुई। उन्होंने कहा, आईपीएल में कप्तानी करना, बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। आपको कई सवालों के जवाब देने होते हैं। इससे तो देश का कप्तान होना बेहतर है। कम से कम आपको कोई फोन करके नहीं पूछेगा कि क्या चीज गलत हुई।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के चार साल बाद पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने क्रिकेट के सभी स्तर से अलविदा कह दिया। उन्होंने अब आईपीएल भी नहीं खेलने का फैसला किया।
26
['hin']
एक सारांश बनाओ: राज्‍यसभा सदस्यता से इस्‍तीफा देने के बाद क्रिकेटर कम राजनेता नवजोत सिद्धू किस पार्टी से जुड़ेंगे, इस बारे में चल रही अटकलों पर आखिरकार विराम लग गया है. नवजोत पंजाब में नए राजनीतिक फ्रंट आवाज-ए-पंजाब  का नेतृत्‍व करेंगे. पंजाब में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं. फ्रंट आवाज-ए-पंजाब का गठन 9 सितंबर से पहले हो जाएगा. इसका बड़ा पोस्‍टर फेसबुक पर सिद्धू की पत्‍नी नवजोत कौर सिद्धू ने शेयर किया है. नवजोत कौर पंजाब विधानसभा में बीजेपी विधायक हैं. शुक्रवार को शेयर किए गए इस पोस्‍टर में सिद्धू को पूर्व हॉकी खिलाड़ी परगट सिंह और लुधियाना से निर्दलीय विधायक सिमरजीत सिंह बैंस के साथ दिखाया गया है. बैंस ने NDTV को बताया कि नवजोत सिंह सिद्धू संभवत: नए फ्रंट की ओर से मुख्‍यमंत्री पद के संभावित उम्‍मीदवार होंगे. उन्‍होंने कहा कि हम गैर अकाली, गैर कांग्रेस और गैर आप,  राजनीतिक फ्रंट के गठन के लिए अपने जैसा खुला दिमाग रखने वाले सभी लोगों से बातचीत कर रहे हैं. उन्‍होंने आरोप लगाया कि पंजाब के लोगों के लिए विकल्‍प उपलब्‍ध कराने का दावा करने वाले आम आदमी पार्टी को उसके अपने ही लोगों ने बेनकाब कर दिया है. पूर्व हॉकी खिलाड़ी परगट सिंह ने भी फेसबुक पर इस पोस्‍टर को शेयर किया है. गौरतलब है कि बीजेपी से नवजोत सिंह सिद्धू ने राज्‍यसभा की सदस्‍यता से इस्‍तीफा दे दिया था. सिद्धू इससे पहले अमृतसर लोकसभा सीट से सांसद भी रह चुके हैं. पिछले कुछ समय से नवजोत के बीजेपी के साथ रिश्‍तों में खटास आ गई थी. दरअसल प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्‍व वाली पंजाब सरकार के खिलाफ सिद्धू बेहद मुखर थे और इस सरकार में सहयोगी अपनी पार्टी की मुश्किलें बढ़ा रहे थे. 2014 के आम चुनाव में जब अमृतसर सीट से सिद्धू की जगह अरुण जेटली को टिकट दिया गया तो इन रिश्‍तों की खटास बढ़ी. ऐसे में स्‍वाभाविक है कि जेटली के चुनाव हारने पर आरोपों के कुछ 'छीटें' सिद्धू पर भी आए.टिप्पणियां पंजाब में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बीजेपी आलाकमान ने  सिद्धू को राज्‍यसभा सदस्‍यता देकर संतुष्‍ट करने का प्रयास किया था. लेकिन सिद्धू तो सिद्धू ठहरे. राज्‍यसभा से इस्‍तीफा देकर उन्‍होंने बड़ा धमाका कर डाला था. बाद में एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में अपना पक्ष रखते हुए उन्‍होंने कहा था, 'मैंने इस्तीफा दिया क्योंकि मुझसे कहा गया कि पंजाब की तरफ मुंह नहीं करोगे. आखिर मैं अपनी जड़, अपना वतन कैसे छोड़ दूं.' बीजेपी नेतृत्‍व पर निशाना साधते हुए सिद्धू ने कहा था कि चार इलेक्शन जीतने के बाद राज्यसभा सीट देकर कहा जाता है कि सिद्धू पंजाब से दूर रहो, लेकिन पंछी भी शाम को घोंसले में लौटता है. राष्ट्रभक्त पक्षी भी अपने पेड़ नहीं छोड़ते. दुनिया की कोई भी पार्टी पंजाब से ऊपर नहीं है और कोई भी नफा-नुकसान हो उसे झेलने के लिए नवजोत सिंह सिद्धू तैयार है. बीजेपी से दूरी बनाने के बाद सिद्धू के आम आदमी पार्टी अथवा कांग्रेस पार्टी से जुड़ने की चर्चाएं भी थीं, लेकिन सूत्रों के अनुसार, कुछ मुद्दों पर बात अटकने के कारण ऐसा नहीं हो सका. फ्रंट आवाज-ए-पंजाब का गठन 9 सितंबर से पहले हो जाएगा. इसका बड़ा पोस्‍टर फेसबुक पर सिद्धू की पत्‍नी नवजोत कौर सिद्धू ने शेयर किया है. नवजोत कौर पंजाब विधानसभा में बीजेपी विधायक हैं. शुक्रवार को शेयर किए गए इस पोस्‍टर में सिद्धू को पूर्व हॉकी खिलाड़ी परगट सिंह और लुधियाना से निर्दलीय विधायक सिमरजीत सिंह बैंस के साथ दिखाया गया है. बैंस ने NDTV को बताया कि नवजोत सिंह सिद्धू संभवत: नए फ्रंट की ओर से मुख्‍यमंत्री पद के संभावित उम्‍मीदवार होंगे. उन्‍होंने कहा कि हम गैर अकाली, गैर कांग्रेस और गैर आप,  राजनीतिक फ्रंट के गठन के लिए अपने जैसा खुला दिमाग रखने वाले सभी लोगों से बातचीत कर रहे हैं. उन्‍होंने आरोप लगाया कि पंजाब के लोगों के लिए विकल्‍प उपलब्‍ध कराने का दावा करने वाले आम आदमी पार्टी को उसके अपने ही लोगों ने बेनकाब कर दिया है. पूर्व हॉकी खिलाड़ी परगट सिंह ने भी फेसबुक पर इस पोस्‍टर को शेयर किया है. गौरतलब है कि बीजेपी से नवजोत सिंह सिद्धू ने राज्‍यसभा की सदस्‍यता से इस्‍तीफा दे दिया था. सिद्धू इससे पहले अमृतसर लोकसभा सीट से सांसद भी रह चुके हैं. पिछले कुछ समय से नवजोत के बीजेपी के साथ रिश्‍तों में खटास आ गई थी. दरअसल प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्‍व वाली पंजाब सरकार के खिलाफ सिद्धू बेहद मुखर थे और इस सरकार में सहयोगी अपनी पार्टी की मुश्किलें बढ़ा रहे थे. 2014 के आम चुनाव में जब अमृतसर सीट से सिद्धू की जगह अरुण जेटली को टिकट दिया गया तो इन रिश्‍तों की खटास बढ़ी. ऐसे में स्‍वाभाविक है कि जेटली के चुनाव हारने पर आरोपों के कुछ 'छीटें' सिद्धू पर भी आए.टिप्पणियां पंजाब में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बीजेपी आलाकमान ने  सिद्धू को राज्‍यसभा सदस्‍यता देकर संतुष्‍ट करने का प्रयास किया था. लेकिन सिद्धू तो सिद्धू ठहरे. राज्‍यसभा से इस्‍तीफा देकर उन्‍होंने बड़ा धमाका कर डाला था. बाद में एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में अपना पक्ष रखते हुए उन्‍होंने कहा था, 'मैंने इस्तीफा दिया क्योंकि मुझसे कहा गया कि पंजाब की तरफ मुंह नहीं करोगे. आखिर मैं अपनी जड़, अपना वतन कैसे छोड़ दूं.' बीजेपी नेतृत्‍व पर निशाना साधते हुए सिद्धू ने कहा था कि चार इलेक्शन जीतने के बाद राज्यसभा सीट देकर कहा जाता है कि सिद्धू पंजाब से दूर रहो, लेकिन पंछी भी शाम को घोंसले में लौटता है. राष्ट्रभक्त पक्षी भी अपने पेड़ नहीं छोड़ते. दुनिया की कोई भी पार्टी पंजाब से ऊपर नहीं है और कोई भी नफा-नुकसान हो उसे झेलने के लिए नवजोत सिंह सिद्धू तैयार है. बीजेपी से दूरी बनाने के बाद सिद्धू के आम आदमी पार्टी अथवा कांग्रेस पार्टी से जुड़ने की चर्चाएं भी थीं, लेकिन सूत्रों के अनुसार, कुछ मुद्दों पर बात अटकने के कारण ऐसा नहीं हो सका. बैंस ने NDTV को बताया कि नवजोत सिंह सिद्धू संभवत: नए फ्रंट की ओर से मुख्‍यमंत्री पद के संभावित उम्‍मीदवार होंगे. उन्‍होंने कहा कि हम गैर अकाली, गैर कांग्रेस और गैर आप,  राजनीतिक फ्रंट के गठन के लिए अपने जैसा खुला दिमाग रखने वाले सभी लोगों से बातचीत कर रहे हैं. उन्‍होंने आरोप लगाया कि पंजाब के लोगों के लिए विकल्‍प उपलब्‍ध कराने का दावा करने वाले आम आदमी पार्टी को उसके अपने ही लोगों ने बेनकाब कर दिया है. पूर्व हॉकी खिलाड़ी परगट सिंह ने भी फेसबुक पर इस पोस्‍टर को शेयर किया है. गौरतलब है कि बीजेपी से नवजोत सिंह सिद्धू ने राज्‍यसभा की सदस्‍यता से इस्‍तीफा दे दिया था. सिद्धू इससे पहले अमृतसर लोकसभा सीट से सांसद भी रह चुके हैं. पिछले कुछ समय से नवजोत के बीजेपी के साथ रिश्‍तों में खटास आ गई थी. दरअसल प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्‍व वाली पंजाब सरकार के खिलाफ सिद्धू बेहद मुखर थे और इस सरकार में सहयोगी अपनी पार्टी की मुश्किलें बढ़ा रहे थे. 2014 के आम चुनाव में जब अमृतसर सीट से सिद्धू की जगह अरुण जेटली को टिकट दिया गया तो इन रिश्‍तों की खटास बढ़ी. ऐसे में स्‍वाभाविक है कि जेटली के चुनाव हारने पर आरोपों के कुछ 'छीटें' सिद्धू पर भी आए.टिप्पणियां पंजाब में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बीजेपी आलाकमान ने  सिद्धू को राज्‍यसभा सदस्‍यता देकर संतुष्‍ट करने का प्रयास किया था. लेकिन सिद्धू तो सिद्धू ठहरे. राज्‍यसभा से इस्‍तीफा देकर उन्‍होंने बड़ा धमाका कर डाला था. बाद में एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में अपना पक्ष रखते हुए उन्‍होंने कहा था, 'मैंने इस्तीफा दिया क्योंकि मुझसे कहा गया कि पंजाब की तरफ मुंह नहीं करोगे. आखिर मैं अपनी जड़, अपना वतन कैसे छोड़ दूं.' बीजेपी नेतृत्‍व पर निशाना साधते हुए सिद्धू ने कहा था कि चार इलेक्शन जीतने के बाद राज्यसभा सीट देकर कहा जाता है कि सिद्धू पंजाब से दूर रहो, लेकिन पंछी भी शाम को घोंसले में लौटता है. राष्ट्रभक्त पक्षी भी अपने पेड़ नहीं छोड़ते. दुनिया की कोई भी पार्टी पंजाब से ऊपर नहीं है और कोई भी नफा-नुकसान हो उसे झेलने के लिए नवजोत सिंह सिद्धू तैयार है. बीजेपी से दूरी बनाने के बाद सिद्धू के आम आदमी पार्टी अथवा कांग्रेस पार्टी से जुड़ने की चर्चाएं भी थीं, लेकिन सूत्रों के अनुसार, कुछ मुद्दों पर बात अटकने के कारण ऐसा नहीं हो सका. गौरतलब है कि बीजेपी से नवजोत सिंह सिद्धू ने राज्‍यसभा की सदस्‍यता से इस्‍तीफा दे दिया था. सिद्धू इससे पहले अमृतसर लोकसभा सीट से सांसद भी रह चुके हैं. पिछले कुछ समय से नवजोत के बीजेपी के साथ रिश्‍तों में खटास आ गई थी. दरअसल प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्‍व वाली पंजाब सरकार के खिलाफ सिद्धू बेहद मुखर थे और इस सरकार में सहयोगी अपनी पार्टी की मुश्किलें बढ़ा रहे थे. 2014 के आम चुनाव में जब अमृतसर सीट से सिद्धू की जगह अरुण जेटली को टिकट दिया गया तो इन रिश्‍तों की खटास बढ़ी. ऐसे में स्‍वाभाविक है कि जेटली के चुनाव हारने पर आरोपों के कुछ 'छीटें' सिद्धू पर भी आए.टिप्पणियां पंजाब में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बीजेपी आलाकमान ने  सिद्धू को राज्‍यसभा सदस्‍यता देकर संतुष्‍ट करने का प्रयास किया था. लेकिन सिद्धू तो सिद्धू ठहरे. राज्‍यसभा से इस्‍तीफा देकर उन्‍होंने बड़ा धमाका कर डाला था. बाद में एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में अपना पक्ष रखते हुए उन्‍होंने कहा था, 'मैंने इस्तीफा दिया क्योंकि मुझसे कहा गया कि पंजाब की तरफ मुंह नहीं करोगे. आखिर मैं अपनी जड़, अपना वतन कैसे छोड़ दूं.' बीजेपी नेतृत्‍व पर निशाना साधते हुए सिद्धू ने कहा था कि चार इलेक्शन जीतने के बाद राज्यसभा सीट देकर कहा जाता है कि सिद्धू पंजाब से दूर रहो, लेकिन पंछी भी शाम को घोंसले में लौटता है. राष्ट्रभक्त पक्षी भी अपने पेड़ नहीं छोड़ते. दुनिया की कोई भी पार्टी पंजाब से ऊपर नहीं है और कोई भी नफा-नुकसान हो उसे झेलने के लिए नवजोत सिंह सिद्धू तैयार है. बीजेपी से दूरी बनाने के बाद सिद्धू के आम आदमी पार्टी अथवा कांग्रेस पार्टी से जुड़ने की चर्चाएं भी थीं, लेकिन सूत्रों के अनुसार, कुछ मुद्दों पर बात अटकने के कारण ऐसा नहीं हो सका. पंजाब में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बीजेपी आलाकमान ने  सिद्धू को राज्‍यसभा सदस्‍यता देकर संतुष्‍ट करने का प्रयास किया था. लेकिन सिद्धू तो सिद्धू ठहरे. राज्‍यसभा से इस्‍तीफा देकर उन्‍होंने बड़ा धमाका कर डाला था. बाद में एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में अपना पक्ष रखते हुए उन्‍होंने कहा था, 'मैंने इस्तीफा दिया क्योंकि मुझसे कहा गया कि पंजाब की तरफ मुंह नहीं करोगे. आखिर मैं अपनी जड़, अपना वतन कैसे छोड़ दूं.' बीजेपी नेतृत्‍व पर निशाना साधते हुए सिद्धू ने कहा था कि चार इलेक्शन जीतने के बाद राज्यसभा सीट देकर कहा जाता है कि सिद्धू पंजाब से दूर रहो, लेकिन पंछी भी शाम को घोंसले में लौटता है. राष्ट्रभक्त पक्षी भी अपने पेड़ नहीं छोड़ते. दुनिया की कोई भी पार्टी पंजाब से ऊपर नहीं है और कोई भी नफा-नुकसान हो उसे झेलने के लिए नवजोत सिंह सिद्धू तैयार है. बीजेपी से दूरी बनाने के बाद सिद्धू के आम आदमी पार्टी अथवा कांग्रेस पार्टी से जुड़ने की चर्चाएं भी थीं, लेकिन सूत्रों के अनुसार, कुछ मुद्दों पर बात अटकने के कारण ऐसा नहीं हो सका. बीजेपी नेतृत्‍व पर निशाना साधते हुए सिद्धू ने कहा था कि चार इलेक्शन जीतने के बाद राज्यसभा सीट देकर कहा जाता है कि सिद्धू पंजाब से दूर रहो, लेकिन पंछी भी शाम को घोंसले में लौटता है. राष्ट्रभक्त पक्षी भी अपने पेड़ नहीं छोड़ते. दुनिया की कोई भी पार्टी पंजाब से ऊपर नहीं है और कोई भी नफा-नुकसान हो उसे झेलने के लिए नवजोत सिंह सिद्धू तैयार है. बीजेपी से दूरी बनाने के बाद सिद्धू के आम आदमी पार्टी अथवा कांग्रेस पार्टी से जुड़ने की चर्चाएं भी थीं, लेकिन सूत्रों के अनुसार, कुछ मुद्दों पर बात अटकने के कारण ऐसा नहीं हो सका.
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: नए राजनीतिक फ्रंट की घोषणा 9 सितंबर को की जाएगी फ्रंट का पोस्‍टर सिद्धू की पत्‍नी नवजोत कौर ने फेसबुक पर शेयर किया पोस्‍टर में सिद्धू को पूर्व हॉकी खिलाड़ी परगट के साथ दिखाया गया है
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['hin']
एक सारांश बनाओ: लोकायुक्त के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट तक मात खा चुके गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नया लोकायुक्त बिल पास कराया है। विपक्ष के भारी हंगामे और वॉकआउट के बीच विधानसभा ने यह बिल पास कर दिया। नए बिल के तहत गुजरात में लोकायुक्त की नियुक्ति में अब राज्यपाल की कोई भूमिका नहीं रह गई है। गुजरात में अब लोकायुक्त के अलावा चार उप−लोकायुक्त भी होंगे जिनका चयन मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली एक कमेटी करेगी। जहां कांग्रेस मोदी सरकार पर मनमानी का आरोप लगा रही है वहीं बीजेपी की दलील है कि जो प्रक्रिया केन्द्र सरकार लोकपाल की नियुक्ति के लिए अपना रही है वही प्रक्रिया गुजरात सरकार लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए अपना रही है तो इसमें हर्ज ही क्या है। कांग्रेस ने गुजरात लोकायुक्त आयोग विधेयक 2013 को नरेंद्र मोदी सरकार का भ्रष्टाचार छिपाने का प्रयास करार दिया। कांग्रेस द्वारा सदन का बहिर्गमन करने के बाद यह विधेयक बहुमत से पारित हुआ। राज्यपाल और मुख्य न्यायाधीश की शक्तियां सीमित करने के अलावा इस विधेयक का स्वरूप वर्तमान लोकायुक्त अधिनियम 1986 की तरह ही बना हुआ है जिसे कुछ कानूनी विशेषज्ञों ने ‘शक्तिहीन कानून’ करार दिया था। इस विधेयक के पारित होने से दो वर्ष पहले राज्यपाल कमला बेनीवाल ने लोकायुक्त संशोधन विधेयक को वापस कर दिया था जिसमें नियुक्ति की सभी शक्तियां मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली चयन समिति को देने का प्रस्ताव था और जिसमें कहा गया था कि राज्यपाल उसकी सिफारिश पर काम करे। मुख्य न्यायाधीश को नए विधेयक में लगभग कोई भूमिका नहीं दी गई है।टिप्पणियां वर्तमान लोकायुक्त कानून में लोकायुक्त के चयन की शक्ति राज्यपाल और राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पास है। इस विधेयक से पूर्व प्रदेश सरकार इस मसले पर कानूनी और राजनीतिक लड़ाई हार गई थी। राज्यपाल कमला बेनीवाल ने राज्य सरकार की अनदेखी करते हुए न्यायाधीश आरए मेहता को प्रदेश का लोकायुक्त नियुक्त किया था। इस वर्ष जनवरी में उच्च न्यायालय तथा उच्चतम न्यायालय ने भी इस नियुक्ति को सही ठहराया था। नए बिल के तहत गुजरात में लोकायुक्त की नियुक्ति में अब राज्यपाल की कोई भूमिका नहीं रह गई है। गुजरात में अब लोकायुक्त के अलावा चार उप−लोकायुक्त भी होंगे जिनका चयन मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली एक कमेटी करेगी। जहां कांग्रेस मोदी सरकार पर मनमानी का आरोप लगा रही है वहीं बीजेपी की दलील है कि जो प्रक्रिया केन्द्र सरकार लोकपाल की नियुक्ति के लिए अपना रही है वही प्रक्रिया गुजरात सरकार लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए अपना रही है तो इसमें हर्ज ही क्या है। कांग्रेस ने गुजरात लोकायुक्त आयोग विधेयक 2013 को नरेंद्र मोदी सरकार का भ्रष्टाचार छिपाने का प्रयास करार दिया। कांग्रेस द्वारा सदन का बहिर्गमन करने के बाद यह विधेयक बहुमत से पारित हुआ। राज्यपाल और मुख्य न्यायाधीश की शक्तियां सीमित करने के अलावा इस विधेयक का स्वरूप वर्तमान लोकायुक्त अधिनियम 1986 की तरह ही बना हुआ है जिसे कुछ कानूनी विशेषज्ञों ने ‘शक्तिहीन कानून’ करार दिया था। इस विधेयक के पारित होने से दो वर्ष पहले राज्यपाल कमला बेनीवाल ने लोकायुक्त संशोधन विधेयक को वापस कर दिया था जिसमें नियुक्ति की सभी शक्तियां मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली चयन समिति को देने का प्रस्ताव था और जिसमें कहा गया था कि राज्यपाल उसकी सिफारिश पर काम करे। मुख्य न्यायाधीश को नए विधेयक में लगभग कोई भूमिका नहीं दी गई है।टिप्पणियां वर्तमान लोकायुक्त कानून में लोकायुक्त के चयन की शक्ति राज्यपाल और राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पास है। इस विधेयक से पूर्व प्रदेश सरकार इस मसले पर कानूनी और राजनीतिक लड़ाई हार गई थी। राज्यपाल कमला बेनीवाल ने राज्य सरकार की अनदेखी करते हुए न्यायाधीश आरए मेहता को प्रदेश का लोकायुक्त नियुक्त किया था। इस वर्ष जनवरी में उच्च न्यायालय तथा उच्चतम न्यायालय ने भी इस नियुक्ति को सही ठहराया था। गुजरात में अब लोकायुक्त के अलावा चार उप−लोकायुक्त भी होंगे जिनका चयन मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली एक कमेटी करेगी। जहां कांग्रेस मोदी सरकार पर मनमानी का आरोप लगा रही है वहीं बीजेपी की दलील है कि जो प्रक्रिया केन्द्र सरकार लोकपाल की नियुक्ति के लिए अपना रही है वही प्रक्रिया गुजरात सरकार लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए अपना रही है तो इसमें हर्ज ही क्या है। कांग्रेस ने गुजरात लोकायुक्त आयोग विधेयक 2013 को नरेंद्र मोदी सरकार का भ्रष्टाचार छिपाने का प्रयास करार दिया। कांग्रेस द्वारा सदन का बहिर्गमन करने के बाद यह विधेयक बहुमत से पारित हुआ। राज्यपाल और मुख्य न्यायाधीश की शक्तियां सीमित करने के अलावा इस विधेयक का स्वरूप वर्तमान लोकायुक्त अधिनियम 1986 की तरह ही बना हुआ है जिसे कुछ कानूनी विशेषज्ञों ने ‘शक्तिहीन कानून’ करार दिया था। इस विधेयक के पारित होने से दो वर्ष पहले राज्यपाल कमला बेनीवाल ने लोकायुक्त संशोधन विधेयक को वापस कर दिया था जिसमें नियुक्ति की सभी शक्तियां मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली चयन समिति को देने का प्रस्ताव था और जिसमें कहा गया था कि राज्यपाल उसकी सिफारिश पर काम करे। मुख्य न्यायाधीश को नए विधेयक में लगभग कोई भूमिका नहीं दी गई है।टिप्पणियां वर्तमान लोकायुक्त कानून में लोकायुक्त के चयन की शक्ति राज्यपाल और राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पास है। इस विधेयक से पूर्व प्रदेश सरकार इस मसले पर कानूनी और राजनीतिक लड़ाई हार गई थी। राज्यपाल कमला बेनीवाल ने राज्य सरकार की अनदेखी करते हुए न्यायाधीश आरए मेहता को प्रदेश का लोकायुक्त नियुक्त किया था। इस वर्ष जनवरी में उच्च न्यायालय तथा उच्चतम न्यायालय ने भी इस नियुक्ति को सही ठहराया था। जहां कांग्रेस मोदी सरकार पर मनमानी का आरोप लगा रही है वहीं बीजेपी की दलील है कि जो प्रक्रिया केन्द्र सरकार लोकपाल की नियुक्ति के लिए अपना रही है वही प्रक्रिया गुजरात सरकार लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए अपना रही है तो इसमें हर्ज ही क्या है। कांग्रेस ने गुजरात लोकायुक्त आयोग विधेयक 2013 को नरेंद्र मोदी सरकार का भ्रष्टाचार छिपाने का प्रयास करार दिया। कांग्रेस द्वारा सदन का बहिर्गमन करने के बाद यह विधेयक बहुमत से पारित हुआ। राज्यपाल और मुख्य न्यायाधीश की शक्तियां सीमित करने के अलावा इस विधेयक का स्वरूप वर्तमान लोकायुक्त अधिनियम 1986 की तरह ही बना हुआ है जिसे कुछ कानूनी विशेषज्ञों ने ‘शक्तिहीन कानून’ करार दिया था। इस विधेयक के पारित होने से दो वर्ष पहले राज्यपाल कमला बेनीवाल ने लोकायुक्त संशोधन विधेयक को वापस कर दिया था जिसमें नियुक्ति की सभी शक्तियां मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली चयन समिति को देने का प्रस्ताव था और जिसमें कहा गया था कि राज्यपाल उसकी सिफारिश पर काम करे। मुख्य न्यायाधीश को नए विधेयक में लगभग कोई भूमिका नहीं दी गई है।टिप्पणियां वर्तमान लोकायुक्त कानून में लोकायुक्त के चयन की शक्ति राज्यपाल और राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पास है। इस विधेयक से पूर्व प्रदेश सरकार इस मसले पर कानूनी और राजनीतिक लड़ाई हार गई थी। राज्यपाल कमला बेनीवाल ने राज्य सरकार की अनदेखी करते हुए न्यायाधीश आरए मेहता को प्रदेश का लोकायुक्त नियुक्त किया था। इस वर्ष जनवरी में उच्च न्यायालय तथा उच्चतम न्यायालय ने भी इस नियुक्ति को सही ठहराया था। कांग्रेस ने गुजरात लोकायुक्त आयोग विधेयक 2013 को नरेंद्र मोदी सरकार का भ्रष्टाचार छिपाने का प्रयास करार दिया। कांग्रेस द्वारा सदन का बहिर्गमन करने के बाद यह विधेयक बहुमत से पारित हुआ। राज्यपाल और मुख्य न्यायाधीश की शक्तियां सीमित करने के अलावा इस विधेयक का स्वरूप वर्तमान लोकायुक्त अधिनियम 1986 की तरह ही बना हुआ है जिसे कुछ कानूनी विशेषज्ञों ने ‘शक्तिहीन कानून’ करार दिया था। इस विधेयक के पारित होने से दो वर्ष पहले राज्यपाल कमला बेनीवाल ने लोकायुक्त संशोधन विधेयक को वापस कर दिया था जिसमें नियुक्ति की सभी शक्तियां मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली चयन समिति को देने का प्रस्ताव था और जिसमें कहा गया था कि राज्यपाल उसकी सिफारिश पर काम करे। मुख्य न्यायाधीश को नए विधेयक में लगभग कोई भूमिका नहीं दी गई है।टिप्पणियां वर्तमान लोकायुक्त कानून में लोकायुक्त के चयन की शक्ति राज्यपाल और राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पास है। इस विधेयक से पूर्व प्रदेश सरकार इस मसले पर कानूनी और राजनीतिक लड़ाई हार गई थी। राज्यपाल कमला बेनीवाल ने राज्य सरकार की अनदेखी करते हुए न्यायाधीश आरए मेहता को प्रदेश का लोकायुक्त नियुक्त किया था। इस वर्ष जनवरी में उच्च न्यायालय तथा उच्चतम न्यायालय ने भी इस नियुक्ति को सही ठहराया था। राज्यपाल और मुख्य न्यायाधीश की शक्तियां सीमित करने के अलावा इस विधेयक का स्वरूप वर्तमान लोकायुक्त अधिनियम 1986 की तरह ही बना हुआ है जिसे कुछ कानूनी विशेषज्ञों ने ‘शक्तिहीन कानून’ करार दिया था। इस विधेयक के पारित होने से दो वर्ष पहले राज्यपाल कमला बेनीवाल ने लोकायुक्त संशोधन विधेयक को वापस कर दिया था जिसमें नियुक्ति की सभी शक्तियां मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली चयन समिति को देने का प्रस्ताव था और जिसमें कहा गया था कि राज्यपाल उसकी सिफारिश पर काम करे। मुख्य न्यायाधीश को नए विधेयक में लगभग कोई भूमिका नहीं दी गई है।टिप्पणियां वर्तमान लोकायुक्त कानून में लोकायुक्त के चयन की शक्ति राज्यपाल और राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पास है। इस विधेयक से पूर्व प्रदेश सरकार इस मसले पर कानूनी और राजनीतिक लड़ाई हार गई थी। राज्यपाल कमला बेनीवाल ने राज्य सरकार की अनदेखी करते हुए न्यायाधीश आरए मेहता को प्रदेश का लोकायुक्त नियुक्त किया था। इस वर्ष जनवरी में उच्च न्यायालय तथा उच्चतम न्यायालय ने भी इस नियुक्ति को सही ठहराया था। इस विधेयक के पारित होने से दो वर्ष पहले राज्यपाल कमला बेनीवाल ने लोकायुक्त संशोधन विधेयक को वापस कर दिया था जिसमें नियुक्ति की सभी शक्तियां मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली चयन समिति को देने का प्रस्ताव था और जिसमें कहा गया था कि राज्यपाल उसकी सिफारिश पर काम करे। मुख्य न्यायाधीश को नए विधेयक में लगभग कोई भूमिका नहीं दी गई है।टिप्पणियां वर्तमान लोकायुक्त कानून में लोकायुक्त के चयन की शक्ति राज्यपाल और राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पास है। इस विधेयक से पूर्व प्रदेश सरकार इस मसले पर कानूनी और राजनीतिक लड़ाई हार गई थी। राज्यपाल कमला बेनीवाल ने राज्य सरकार की अनदेखी करते हुए न्यायाधीश आरए मेहता को प्रदेश का लोकायुक्त नियुक्त किया था। इस वर्ष जनवरी में उच्च न्यायालय तथा उच्चतम न्यायालय ने भी इस नियुक्ति को सही ठहराया था। वर्तमान लोकायुक्त कानून में लोकायुक्त के चयन की शक्ति राज्यपाल और राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पास है। इस विधेयक से पूर्व प्रदेश सरकार इस मसले पर कानूनी और राजनीतिक लड़ाई हार गई थी। राज्यपाल कमला बेनीवाल ने राज्य सरकार की अनदेखी करते हुए न्यायाधीश आरए मेहता को प्रदेश का लोकायुक्त नियुक्त किया था। इस वर्ष जनवरी में उच्च न्यायालय तथा उच्चतम न्यायालय ने भी इस नियुक्ति को सही ठहराया था। इस विधेयक से पूर्व प्रदेश सरकार इस मसले पर कानूनी और राजनीतिक लड़ाई हार गई थी। राज्यपाल कमला बेनीवाल ने राज्य सरकार की अनदेखी करते हुए न्यायाधीश आरए मेहता को प्रदेश का लोकायुक्त नियुक्त किया था। इस वर्ष जनवरी में उच्च न्यायालय तथा उच्चतम न्यायालय ने भी इस नियुक्ति को सही ठहराया था।
संक्षिप्त सारांश: लोकायुक्त के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट तक मात खा चुके गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नया लोकायुक्त बिल पास कराया है। विपक्ष के भारी हंगामे और वॉकआउट के बीच विधानसभा ने यह बिल पास कर दिया।
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['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: हरियाणा के शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा ने कहा कि राज्य के छात्रों को गीता और विभिन्न धर्मों की पवित्र पुस्तकों के ज्ञान के अलावा नैतिक शिक्षा के तहत जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी और स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर के बारे में पढ़ाया जाएगा। छठवीं से बारहवीं कक्षा तक के पाठ्यक्रम में बदलाव के विवादित कदम पर बात करते हुए मंत्री ने कहा कि वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े रहे हैं, जहां व्यक्तित्व विकास के लिए नैतिक शिक्षा पढ़ाई जाती है और यह छात्र की शिक्षा में बड़ी भूमिका निभाती है। शर्मा ने कहा, 'राज्य शिक्षा विभाग नैतिक शिक्षा पाठ्यक्रम जोड़ने जा रहा है, जिसमें भगवद् गीता, कुरान जैसी धार्मिक पवित्र पुस्तकें और बौद्ध, ईसाई धर्म से जुड़ी पुस्तकें... स्वतंत्रता सेनानी श्यामा प्रसाद मुखर्जी, वीर सावरकर, चंद्रशेखर आजाद, उधम सिंह, भगत सिंह तथा अन्य शामिल हैं।' उन्होंने कहा, 'उन्हें व्यक्तित्व विकास के लिए जीवन में सूर्य के महत्व तथा नैतिक कर्तव्य पढ़ाए जाएंगे, ताकि वे परिपक्व नागरिक की तरह बढे हों तथा उनके अंदर राष्ट्रवाद एवं देशभक्ति की भावना हो।' मुखर्जी और सावरकर हिन्दुत्व का चेहरा रहे हैं। इससे पहले, पाठ्यक्रम में गीता को शामिल करने को लेकर विपक्ष ने हरियाणा सरकार की कड़ी आलोचना की थी, जिसके बाद सरकार ने कहा था कि पाठ्यक्रम में विभिन्न धर्मों की बातों को शामिल किया जाएगा। विपक्ष ने शिक्षा के 'भगवाकरण' का आरोप लगाते हुए केंद्र तथा राज्यों में बीजेपी सरकार की आलोचना की थी। शर्मा ने कहा, 'हमने सभी सरकारी स्कूलों में नई मसौदा पुस्तकें वितरित कर दी हैं और हरियाणा शिक्षा विभाग एवं बोर्ड पाठ्यक्रम के तहत एक जुलाई 2016 से स्कूल फिर से खुलने के बाद से सभी सरकारी, निजी एवं पब्लिक स्कूलों में यह शुरू किया जाएगा।' केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, आरएसएस सदस्य स्वामी ज्ञानेंद्र तथा अन्य चर्चित लोग कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में 'छात्र जीवन में नैतिक शिक्षा का महत्व' विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम में इसकी आधिकारिक रूप से घोषणा करेंगे।टिप्पणियां शर्मा ने कहा कि आरएसएस द्वारा दी जाने वाली नैतिक शिक्षा छात्रों के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसी तरह से नये पाठ्यक्रम के उद्देश्य छात्रों को अच्छा नागरिक बनाना है। सूत्रों ने कहा कि नैतिक शिक्षा पर इन नई मसौदा पुस्तकों और पाठ्यक्रम को बाद में बीजेपी शासित अन्य राज्यों में शुरू किया जा सकता है।(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) छठवीं से बारहवीं कक्षा तक के पाठ्यक्रम में बदलाव के विवादित कदम पर बात करते हुए मंत्री ने कहा कि वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े रहे हैं, जहां व्यक्तित्व विकास के लिए नैतिक शिक्षा पढ़ाई जाती है और यह छात्र की शिक्षा में बड़ी भूमिका निभाती है। शर्मा ने कहा, 'राज्य शिक्षा विभाग नैतिक शिक्षा पाठ्यक्रम जोड़ने जा रहा है, जिसमें भगवद् गीता, कुरान जैसी धार्मिक पवित्र पुस्तकें और बौद्ध, ईसाई धर्म से जुड़ी पुस्तकें... स्वतंत्रता सेनानी श्यामा प्रसाद मुखर्जी, वीर सावरकर, चंद्रशेखर आजाद, उधम सिंह, भगत सिंह तथा अन्य शामिल हैं।' उन्होंने कहा, 'उन्हें व्यक्तित्व विकास के लिए जीवन में सूर्य के महत्व तथा नैतिक कर्तव्य पढ़ाए जाएंगे, ताकि वे परिपक्व नागरिक की तरह बढे हों तथा उनके अंदर राष्ट्रवाद एवं देशभक्ति की भावना हो।' मुखर्जी और सावरकर हिन्दुत्व का चेहरा रहे हैं। इससे पहले, पाठ्यक्रम में गीता को शामिल करने को लेकर विपक्ष ने हरियाणा सरकार की कड़ी आलोचना की थी, जिसके बाद सरकार ने कहा था कि पाठ्यक्रम में विभिन्न धर्मों की बातों को शामिल किया जाएगा। विपक्ष ने शिक्षा के 'भगवाकरण' का आरोप लगाते हुए केंद्र तथा राज्यों में बीजेपी सरकार की आलोचना की थी। शर्मा ने कहा, 'हमने सभी सरकारी स्कूलों में नई मसौदा पुस्तकें वितरित कर दी हैं और हरियाणा शिक्षा विभाग एवं बोर्ड पाठ्यक्रम के तहत एक जुलाई 2016 से स्कूल फिर से खुलने के बाद से सभी सरकारी, निजी एवं पब्लिक स्कूलों में यह शुरू किया जाएगा।' केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, आरएसएस सदस्य स्वामी ज्ञानेंद्र तथा अन्य चर्चित लोग कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में 'छात्र जीवन में नैतिक शिक्षा का महत्व' विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम में इसकी आधिकारिक रूप से घोषणा करेंगे।टिप्पणियां शर्मा ने कहा कि आरएसएस द्वारा दी जाने वाली नैतिक शिक्षा छात्रों के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसी तरह से नये पाठ्यक्रम के उद्देश्य छात्रों को अच्छा नागरिक बनाना है। सूत्रों ने कहा कि नैतिक शिक्षा पर इन नई मसौदा पुस्तकों और पाठ्यक्रम को बाद में बीजेपी शासित अन्य राज्यों में शुरू किया जा सकता है।(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) शर्मा ने कहा, 'राज्य शिक्षा विभाग नैतिक शिक्षा पाठ्यक्रम जोड़ने जा रहा है, जिसमें भगवद् गीता, कुरान जैसी धार्मिक पवित्र पुस्तकें और बौद्ध, ईसाई धर्म से जुड़ी पुस्तकें... स्वतंत्रता सेनानी श्यामा प्रसाद मुखर्जी, वीर सावरकर, चंद्रशेखर आजाद, उधम सिंह, भगत सिंह तथा अन्य शामिल हैं।' उन्होंने कहा, 'उन्हें व्यक्तित्व विकास के लिए जीवन में सूर्य के महत्व तथा नैतिक कर्तव्य पढ़ाए जाएंगे, ताकि वे परिपक्व नागरिक की तरह बढे हों तथा उनके अंदर राष्ट्रवाद एवं देशभक्ति की भावना हो।' मुखर्जी और सावरकर हिन्दुत्व का चेहरा रहे हैं। इससे पहले, पाठ्यक्रम में गीता को शामिल करने को लेकर विपक्ष ने हरियाणा सरकार की कड़ी आलोचना की थी, जिसके बाद सरकार ने कहा था कि पाठ्यक्रम में विभिन्न धर्मों की बातों को शामिल किया जाएगा। विपक्ष ने शिक्षा के 'भगवाकरण' का आरोप लगाते हुए केंद्र तथा राज्यों में बीजेपी सरकार की आलोचना की थी। शर्मा ने कहा, 'हमने सभी सरकारी स्कूलों में नई मसौदा पुस्तकें वितरित कर दी हैं और हरियाणा शिक्षा विभाग एवं बोर्ड पाठ्यक्रम के तहत एक जुलाई 2016 से स्कूल फिर से खुलने के बाद से सभी सरकारी, निजी एवं पब्लिक स्कूलों में यह शुरू किया जाएगा।' केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, आरएसएस सदस्य स्वामी ज्ञानेंद्र तथा अन्य चर्चित लोग कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में 'छात्र जीवन में नैतिक शिक्षा का महत्व' विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम में इसकी आधिकारिक रूप से घोषणा करेंगे।टिप्पणियां शर्मा ने कहा कि आरएसएस द्वारा दी जाने वाली नैतिक शिक्षा छात्रों के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसी तरह से नये पाठ्यक्रम के उद्देश्य छात्रों को अच्छा नागरिक बनाना है। सूत्रों ने कहा कि नैतिक शिक्षा पर इन नई मसौदा पुस्तकों और पाठ्यक्रम को बाद में बीजेपी शासित अन्य राज्यों में शुरू किया जा सकता है।(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) इससे पहले, पाठ्यक्रम में गीता को शामिल करने को लेकर विपक्ष ने हरियाणा सरकार की कड़ी आलोचना की थी, जिसके बाद सरकार ने कहा था कि पाठ्यक्रम में विभिन्न धर्मों की बातों को शामिल किया जाएगा। विपक्ष ने शिक्षा के 'भगवाकरण' का आरोप लगाते हुए केंद्र तथा राज्यों में बीजेपी सरकार की आलोचना की थी। शर्मा ने कहा, 'हमने सभी सरकारी स्कूलों में नई मसौदा पुस्तकें वितरित कर दी हैं और हरियाणा शिक्षा विभाग एवं बोर्ड पाठ्यक्रम के तहत एक जुलाई 2016 से स्कूल फिर से खुलने के बाद से सभी सरकारी, निजी एवं पब्लिक स्कूलों में यह शुरू किया जाएगा।' केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, आरएसएस सदस्य स्वामी ज्ञानेंद्र तथा अन्य चर्चित लोग कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में 'छात्र जीवन में नैतिक शिक्षा का महत्व' विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम में इसकी आधिकारिक रूप से घोषणा करेंगे।टिप्पणियां शर्मा ने कहा कि आरएसएस द्वारा दी जाने वाली नैतिक शिक्षा छात्रों के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसी तरह से नये पाठ्यक्रम के उद्देश्य छात्रों को अच्छा नागरिक बनाना है। सूत्रों ने कहा कि नैतिक शिक्षा पर इन नई मसौदा पुस्तकों और पाठ्यक्रम को बाद में बीजेपी शासित अन्य राज्यों में शुरू किया जा सकता है।(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) शर्मा ने कहा, 'हमने सभी सरकारी स्कूलों में नई मसौदा पुस्तकें वितरित कर दी हैं और हरियाणा शिक्षा विभाग एवं बोर्ड पाठ्यक्रम के तहत एक जुलाई 2016 से स्कूल फिर से खुलने के बाद से सभी सरकारी, निजी एवं पब्लिक स्कूलों में यह शुरू किया जाएगा।' केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, आरएसएस सदस्य स्वामी ज्ञानेंद्र तथा अन्य चर्चित लोग कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में 'छात्र जीवन में नैतिक शिक्षा का महत्व' विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम में इसकी आधिकारिक रूप से घोषणा करेंगे।टिप्पणियां शर्मा ने कहा कि आरएसएस द्वारा दी जाने वाली नैतिक शिक्षा छात्रों के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसी तरह से नये पाठ्यक्रम के उद्देश्य छात्रों को अच्छा नागरिक बनाना है। सूत्रों ने कहा कि नैतिक शिक्षा पर इन नई मसौदा पुस्तकों और पाठ्यक्रम को बाद में बीजेपी शासित अन्य राज्यों में शुरू किया जा सकता है।(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, आरएसएस सदस्य स्वामी ज्ञानेंद्र तथा अन्य चर्चित लोग कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में 'छात्र जीवन में नैतिक शिक्षा का महत्व' विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम में इसकी आधिकारिक रूप से घोषणा करेंगे।टिप्पणियां शर्मा ने कहा कि आरएसएस द्वारा दी जाने वाली नैतिक शिक्षा छात्रों के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसी तरह से नये पाठ्यक्रम के उद्देश्य छात्रों को अच्छा नागरिक बनाना है। सूत्रों ने कहा कि नैतिक शिक्षा पर इन नई मसौदा पुस्तकों और पाठ्यक्रम को बाद में बीजेपी शासित अन्य राज्यों में शुरू किया जा सकता है।(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) शर्मा ने कहा कि आरएसएस द्वारा दी जाने वाली नैतिक शिक्षा छात्रों के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसी तरह से नये पाठ्यक्रम के उद्देश्य छात्रों को अच्छा नागरिक बनाना है। सूत्रों ने कहा कि नैतिक शिक्षा पर इन नई मसौदा पुस्तकों और पाठ्यक्रम को बाद में बीजेपी शासित अन्य राज्यों में शुरू किया जा सकता है।(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: हरियाणा का शिक्षा विभाग नैतिक शिक्षा पाठ्यक्रम जोड़ने जा रहा है इसमें सभी धर्मों की पवित्र पुस्तकें भी पढ़ाई जाएंगी 1 जुलाई से सभी सरकारी और निजी स्कूलों में लागू होगा नया पाठ्यक्रम
11
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: इस समय राजेन्द्र पाल गौतम दिल्ली में जल मंत्रालय संभाल रहे हैं लेकिन केजरीवाल के खुद ये मंत्रालय संभालने से साफ़ है कि राजेन्द्र पाल गौतम के काम से केजरीवाल संतुष्ट नहीं. राजेन्द्र पाल गौतम से पहले कपिल मिश्रा जल मंत्री थे जिनको मई 2017 में मंत्री मंडल से हटा दिया गया था ये दलील देकर कि वो ठीक से काम नही कर रहे थे, बहुत शिकायतें आ रही थीं. हालांकि ये दलील किसी के गले नहीं उतरी. कपिल मिश्रा से पहले मनीष सिसोदिया ने ये मंत्रालय संभाला और पूर्व में दिल्ली में सीएम रहते खुद शीला दीक्षित ये मंत्रालय संभालती थीं. 2012 में केजरीवाल ने राजनीति की शुरुआत ही बिजली पानी जैसे मुद्दों को उछालकर की थी. 2013 में सत्ता में आते ही हर महीने 20,000 लीटर पानी हर महीने मुफ़्त करने का ऐलान किया था और दिल्ली के हर घर में पीने का साफ पानी पहुंचाने का आम आदमी पार्टी का चुनावी वादा भी था जिसको पूरा करने के लिए भी लगता है केजरीवाल को खुद के मंत्रालय संभालना होगा. माना जा रहा है कि जल्द ही केजरीवाल राजेन्द्र पाल गौतम से ये मंत्रालय अपने पास ले लेंगे. 2012 में केजरीवाल ने राजनीति की शुरुआत ही बिजली पानी जैसे मुद्दों को उछालकर की थी. 2013 में सत्ता में आते ही हर महीने 20,000 लीटर पानी हर महीने मुफ़्त करने का ऐलान किया था और दिल्ली के हर घर में पीने का साफ पानी पहुंचाने का आम आदमी पार्टी का चुनावी वादा भी था जिसको पूरा करने के लिए भी लगता है केजरीवाल को खुद के मंत्रालय संभालना होगा. माना जा रहा है कि जल्द ही केजरीवाल राजेन्द्र पाल गौतम से ये मंत्रालय अपने पास ले लेंगे.
यहाँ एक सारांश है:राजेन्द्र पाल गौतम के काम से केजरीवाल संतुष्ट नहीं थे लोगों पानी को लेकर लगातार शिकायतें आ रही थीं शीला दीक्षित ने भी सीएम रहते यह विभाग रखा था अपने पास
12
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने मंगलवार को कहा कि रिजर्व बैंक द्वारा कीमत वृद्धि पर अंकुश लगाने के लिए नीतिगत ब्याज दरों में वृद्धि से आर्थिक वृद्धि पर कुछ असर जरूर पड़ेगा। मुखर्जी ने कहा, मैं उम्मीद करता हूं कि रेपो और रिवर्स रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि का मुद्रास्फीति पर कुछ असर पड़ेगा। साथ ही इसका आर्थिक वृद्धि पर भी कुछ प्रभाव जरूर पड़ेगा। रिजर्व बैंक ने आज अपनी मौद्रिक नीति की छमाही समीक्षा में नीतिगत ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि की इससे रेपो (जिस ब्याज दर पर बैंकों को रिजर्व बैंक से एक दो दिन के लिए उधार मिलता है) बढ़कर 8.5 प्रतिशत तथा रिवर्स रेपो दर (जिस दर पर केंद्रीय बैंक फौरी तौर पर नकदी लेता है) 7.5 प्रतिशत हो गई है। केंद्रीय बैंक ने आर्थिक वृद्धि के अनुमान को भी 8 प्रतिशत से घटाकर 7.6 प्रतिशत कर दिया है। बाद में बयान जारी कर मुखर्जी ने कहा कि रिजर्व बैंक की नीति से जल्दी ही मुद्रास्फीति सामान्य स्तर पर लाने में मदद मिलेगी साथ ही इसमें चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में आर्थिक वृद्धि को गति मिलने की भी गुंजाइश छोड़ी गई है। उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक का निर्णय मुद्रास्फीति से निपटने को लेकर उसकी प्रतिबद्धता को स्पष्ट करता है। सकल मुद्रास्फीति दिसंबर 2010 से लेकर अबतक 9 प्रतिशत के स्तर से ऊपर है। इस वृद्धि के साथ रिजर्व बैंक उच्च मुद्रास्फीति पर काबू पाने के लिए मार्च 2010 से लेकर अबतक नीतिगत ब्याज दरों में 13 बार वृद्धि कर चुका है। मुखर्जी ने कहा कि दरों में वृद्धि का कर्ज की लागत और निवेश वृद्धि पर प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा, हम आने वाले महीनों में निवेश धारणा को मजबूत बनाने के लिए सभी विकल्पों पर गौर कर रहे हैं।
सारांश: मुखर्जी ने कहा कि रिजर्व बैंक द्वारा कीमत वृद्धि पर अंकुश लगाने के लिए नीतिगत ब्याज दरों में वृद्धि से आर्थिक वृद्धि पर कुछ असर जरूर पड़ेगा।
20
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: मध्यम गति के गेंदबाज ईश्वर पांडे और मोहम्मद शमी के उम्दा प्रदर्शन से भारत ए ने पहले अनधिकृत टेस्ट क्रिकेट मैच में दक्षिण अफ्रीका 'ए' को पारी और 13 रन से हराकर दो मैचों की शृंखला में 1-0 से बढ़त बनाई। भारत 'ए' ने अपनी पहली पारी नौ विकेट पर 582 रन बनाकर समाप्त घोषित की थी, जिसके जवाब में दक्षिण अफ्रीका ए ने 357 रन बनाए। दक्षिण अफ्रीकी टीम को मैच के चौथे और आखिरी दिन फॉलोऑन के लिए मजबूर होना पड़ा, लेकिन भारत के तेज और स्पिन मिश्रित आक्रमण के सामने उसकी टीम दूसरी पारी में 212 रन पर ढेर हो गई। ईश्वर पांडे भारतीय जीत के नायक रहे।टिप्पणियां उन्होंने पहली पारी में 46 रन देकर चार और दूसरी पारी में 25 रन देकर तीन विकेट लिए। पांडे और शमी (33 रन देकर तीन विकेट) ने दूसरी पारी में दक्षिण अफ्रीका का शीर्ष क्रम झकझोरा, जबकि स्पिनरों ने मध्य और निचले क्रम को समेटा। कामचलाऊ ऑफ स्पिनर रोहित शर्मा ने 19 रन देकर दो विकेट लिए। दक्षिण अफ्रीकी टीम से केवल तेम्बा बाउमा (65) ही भारतीय आक्रमण का अच्छी तरह से सामना कर पाए। भारत की सीनियर टीम के इस साल नवंबर में होने वाले दौरे को देखते हुए भारतीय खिलाड़ी इस जीत से मनोवैज्ञानिक लाभ लेने की कोशिश करेंगे। भारत 'ए' ने इससे पहले त्रिकोणीय एक-दिवसीय शृंखला का खिताब भी जीता था। टेस्ट शृंखला का दूसरा मैच 24 अगस्त से प्रिटोरिया में खेला जाएगा। भारत 'ए' ने अपनी पहली पारी नौ विकेट पर 582 रन बनाकर समाप्त घोषित की थी, जिसके जवाब में दक्षिण अफ्रीका ए ने 357 रन बनाए। दक्षिण अफ्रीकी टीम को मैच के चौथे और आखिरी दिन फॉलोऑन के लिए मजबूर होना पड़ा, लेकिन भारत के तेज और स्पिन मिश्रित आक्रमण के सामने उसकी टीम दूसरी पारी में 212 रन पर ढेर हो गई। ईश्वर पांडे भारतीय जीत के नायक रहे।टिप्पणियां उन्होंने पहली पारी में 46 रन देकर चार और दूसरी पारी में 25 रन देकर तीन विकेट लिए। पांडे और शमी (33 रन देकर तीन विकेट) ने दूसरी पारी में दक्षिण अफ्रीका का शीर्ष क्रम झकझोरा, जबकि स्पिनरों ने मध्य और निचले क्रम को समेटा। कामचलाऊ ऑफ स्पिनर रोहित शर्मा ने 19 रन देकर दो विकेट लिए। दक्षिण अफ्रीकी टीम से केवल तेम्बा बाउमा (65) ही भारतीय आक्रमण का अच्छी तरह से सामना कर पाए। भारत की सीनियर टीम के इस साल नवंबर में होने वाले दौरे को देखते हुए भारतीय खिलाड़ी इस जीत से मनोवैज्ञानिक लाभ लेने की कोशिश करेंगे। भारत 'ए' ने इससे पहले त्रिकोणीय एक-दिवसीय शृंखला का खिताब भी जीता था। टेस्ट शृंखला का दूसरा मैच 24 अगस्त से प्रिटोरिया में खेला जाएगा। उन्होंने पहली पारी में 46 रन देकर चार और दूसरी पारी में 25 रन देकर तीन विकेट लिए। पांडे और शमी (33 रन देकर तीन विकेट) ने दूसरी पारी में दक्षिण अफ्रीका का शीर्ष क्रम झकझोरा, जबकि स्पिनरों ने मध्य और निचले क्रम को समेटा। कामचलाऊ ऑफ स्पिनर रोहित शर्मा ने 19 रन देकर दो विकेट लिए। दक्षिण अफ्रीकी टीम से केवल तेम्बा बाउमा (65) ही भारतीय आक्रमण का अच्छी तरह से सामना कर पाए। भारत की सीनियर टीम के इस साल नवंबर में होने वाले दौरे को देखते हुए भारतीय खिलाड़ी इस जीत से मनोवैज्ञानिक लाभ लेने की कोशिश करेंगे। भारत 'ए' ने इससे पहले त्रिकोणीय एक-दिवसीय शृंखला का खिताब भी जीता था। टेस्ट शृंखला का दूसरा मैच 24 अगस्त से प्रिटोरिया में खेला जाएगा। दक्षिण अफ्रीकी टीम से केवल तेम्बा बाउमा (65) ही भारतीय आक्रमण का अच्छी तरह से सामना कर पाए। भारत की सीनियर टीम के इस साल नवंबर में होने वाले दौरे को देखते हुए भारतीय खिलाड़ी इस जीत से मनोवैज्ञानिक लाभ लेने की कोशिश करेंगे। भारत 'ए' ने इससे पहले त्रिकोणीय एक-दिवसीय शृंखला का खिताब भी जीता था। टेस्ट शृंखला का दूसरा मैच 24 अगस्त से प्रिटोरिया में खेला जाएगा।
सारांश: ईश्वर पांडे और मोहम्मद शमी के उम्दा प्रदर्शन से भारत 'ए' ने पहले अनधिकृत टेस्ट क्रिकेट मैच में दक्षिण अफ्रीका 'ए' को पारी और 13 रन से हराकर दो मैचों की शृंखला में 1-0 से बढ़त बना ली।
33
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: दिल्ली में परिवहन प्रणाली को सुधारने और सड़कों से निजी वाहनों का बोझ कम करने के मकसद से दिल्ली सरकार ने 2,000 गैर एसी, स्टैंडर्ड फ्लोर बसें खरीदने का फैसला किया है. इसकी जानकारी परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने दी. दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में बीते चार सालों में कोई बस नहीं जोड़ी गई है. गहलोत ने कहा कि 2000 बसों में से 1,000 बसें राज्य के दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) और 1,000 कलस्टर बसों में शामिल होंगी. उन्होंने कहा कि नई बसों की खरीद से यह संदेश जाएगा कि डीटीसी कोई मरता हुआ संगठन नहीं है. कलस्टर बसें 10 महीने में आएंगी और डीटीसी की बसें 12 महीने में आएंगी. मंत्री ने कहा कि सरकार मिनी बसों को शामिल करने की भी योजना बना रही है.टिप्पणियां दिल्ली सरकार ने इससे पूर्व भी सड़कों से भीड़ कम करने और प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए कई कदम उठाए हैं, ऑड-ईवन उन्हीं में से एक है. (इनपुट आईएएनएस से) उन्होंने कहा कि नई बसों की खरीद से यह संदेश जाएगा कि डीटीसी कोई मरता हुआ संगठन नहीं है. कलस्टर बसें 10 महीने में आएंगी और डीटीसी की बसें 12 महीने में आएंगी. मंत्री ने कहा कि सरकार मिनी बसों को शामिल करने की भी योजना बना रही है.टिप्पणियां दिल्ली सरकार ने इससे पूर्व भी सड़कों से भीड़ कम करने और प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए कई कदम उठाए हैं, ऑड-ईवन उन्हीं में से एक है. (इनपुट आईएएनएस से) दिल्ली सरकार ने इससे पूर्व भी सड़कों से भीड़ कम करने और प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए कई कदम उठाए हैं, ऑड-ईवन उन्हीं में से एक है. (इनपुट आईएएनएस से) (इनपुट आईएएनएस से)
यहाँ एक सारांश है:मिनी बस भी शामिल की जाएंगी डीटीसी के बेड़े में सरकार द्वारा पिछले चार सालों ने नहीं खरीदी गईं नई बसें सरकार का सड़कों से निजी वाहनों का बोझ कम करने पर जोर
12
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: पेट्रोल और डीजल की कीमतों के बीच बढ़ते अंतर को देखते हुए वित्त मंत्रालय डीजल कारों पर उत्पाद शुल्क बढ़ाने की संभावना तलाश रहा है। डीजल कारों पर शुल्क वृद्धि का सुझाव पेट्रोलियम मंत्रालय ने बहुत पहले दिया था। वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, डीजल कारों पर उत्पाद शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव अब भी एजेंडा में शामिल है। इसे बजट के दौरान नहीं लिया जा सका। इसमें कुछ समय लगेगा, लेकिन यह होगा। व्यक्तिगत वाहन मालिकों द्वारा सब्सिडी पर डीजल के उपभोग को हतोत्साहित करने के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय को डीजल कारों पर अधिक शुल्क लगाने का सुझाव दिया था।टिप्पणियां हालांकि, भारी उद्योग मंत्रालय डीजल कारों पर शुल्क वृद्धि के प्रस्ताव के खिलाफ है। सूत्रों ने कहा, प्रस्ताव को लेकर दो मत हैं। हम आम सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं। बजट सत्र अभी अभी बीता है और कोई बदलाव में कुछ समय लग सकता है। हाल ही में पेट्रोल के दाम में 7.50 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि किए जाने से पेट्रोल और डीजल के दामों के बीच अंतर और बढ़ गया। जहां दिल्ली में प्रति लीटर डीजल का मूल्य करीब 40 रुपये है, पेट्रोल 74 रुपये लीटर है। देश में डीजल की खपत सबसे अधिक है, लेकिन इसे आयातित लागत से भी कम मूल्य पर बेचा जाता है। सरकार तेल विपणन कंपनियों को बाजार मूल्य से कम पर डीजल की बिक्री करने के लिए 15.35 रुपये प्रति लीटर की सब्सिडी उपलब्ध करा रही है। वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, डीजल कारों पर उत्पाद शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव अब भी एजेंडा में शामिल है। इसे बजट के दौरान नहीं लिया जा सका। इसमें कुछ समय लगेगा, लेकिन यह होगा। व्यक्तिगत वाहन मालिकों द्वारा सब्सिडी पर डीजल के उपभोग को हतोत्साहित करने के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय को डीजल कारों पर अधिक शुल्क लगाने का सुझाव दिया था।टिप्पणियां हालांकि, भारी उद्योग मंत्रालय डीजल कारों पर शुल्क वृद्धि के प्रस्ताव के खिलाफ है। सूत्रों ने कहा, प्रस्ताव को लेकर दो मत हैं। हम आम सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं। बजट सत्र अभी अभी बीता है और कोई बदलाव में कुछ समय लग सकता है। हाल ही में पेट्रोल के दाम में 7.50 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि किए जाने से पेट्रोल और डीजल के दामों के बीच अंतर और बढ़ गया। जहां दिल्ली में प्रति लीटर डीजल का मूल्य करीब 40 रुपये है, पेट्रोल 74 रुपये लीटर है। देश में डीजल की खपत सबसे अधिक है, लेकिन इसे आयातित लागत से भी कम मूल्य पर बेचा जाता है। सरकार तेल विपणन कंपनियों को बाजार मूल्य से कम पर डीजल की बिक्री करने के लिए 15.35 रुपये प्रति लीटर की सब्सिडी उपलब्ध करा रही है। हालांकि, भारी उद्योग मंत्रालय डीजल कारों पर शुल्क वृद्धि के प्रस्ताव के खिलाफ है। सूत्रों ने कहा, प्रस्ताव को लेकर दो मत हैं। हम आम सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं। बजट सत्र अभी अभी बीता है और कोई बदलाव में कुछ समय लग सकता है। हाल ही में पेट्रोल के दाम में 7.50 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि किए जाने से पेट्रोल और डीजल के दामों के बीच अंतर और बढ़ गया। जहां दिल्ली में प्रति लीटर डीजल का मूल्य करीब 40 रुपये है, पेट्रोल 74 रुपये लीटर है। देश में डीजल की खपत सबसे अधिक है, लेकिन इसे आयातित लागत से भी कम मूल्य पर बेचा जाता है। सरकार तेल विपणन कंपनियों को बाजार मूल्य से कम पर डीजल की बिक्री करने के लिए 15.35 रुपये प्रति लीटर की सब्सिडी उपलब्ध करा रही है। हाल ही में पेट्रोल के दाम में 7.50 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि किए जाने से पेट्रोल और डीजल के दामों के बीच अंतर और बढ़ गया। जहां दिल्ली में प्रति लीटर डीजल का मूल्य करीब 40 रुपये है, पेट्रोल 74 रुपये लीटर है। देश में डीजल की खपत सबसे अधिक है, लेकिन इसे आयातित लागत से भी कम मूल्य पर बेचा जाता है। सरकार तेल विपणन कंपनियों को बाजार मूल्य से कम पर डीजल की बिक्री करने के लिए 15.35 रुपये प्रति लीटर की सब्सिडी उपलब्ध करा रही है।
यहाँ एक सारांश है:वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, डीजल कारों पर उत्पाद शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव एजेंडा में शामिल है। इसे बजट के दौरान नहीं लिया जा सका। इसमें कुछ समय लगेगा, लेकिन यह होगा।
12
['hin']
एक सारांश बनाओ: दक्षिण अफ्रीका ने अपने कप्तान एबी डिविलियर्स की नाबाद 95 रन की पारी से पाकिस्तान को पांचवें और अंतिम एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच में छह विकेट से हराकर शृंखला 3-2 से अपने नाम की। मैन ऑफ द मैच और मैन ऑफ द सीरीज डिविलियर्स को एक रन पर जीवनदान मिला था, उन्होंने पाकिस्तानी गेंदबाजों का डटकर सामना करते हुए 111 गेंद की पारी में नौ चौके और एक छक्का जमाया। उनके शानदार अर्द्धशतक से दक्षिण अफ्रीका ने छह ओवर रहते चार विकेट पर 208 रन बनाकर जीत दर्ज की। डिविलियर्स और फरहान बेहारडियन (35) ने चौथे विकेट के लिए 88 गेंद में 87 रन की साझेदारी निभाई। पाकिस्तान के गेंदबाज मोहम्मद इरफान और जुनैद खान ने हालांकि शुरू में पिच के उछाल से बल्लेबाजों को परेशान किया था। लेकिन दक्षिण अफ्रीका के बल्लेबाजों ने बाद में उन्हें संभलकर खेला। डेविड मिलर 20 रन बनाकर नाबाद रहे जबकि हाशिम अमला ने 22 रन का योगदान दिया। टिप्पणियां इससे पहले, पाकिस्तानी टीम रेयान मैकलारेन के 13 गेंद में तीन विकेट चटकाने से 205 रन पर सिमट गई। पाकिस्तानी टीम 35वें ओवर में चार विकेट पर 151 रन बनाकर अच्छी स्थिति में थी लेकिन मैकलारेन ने इसी ओवर में शोएब मलिक को आउट किया और तीन गेंद बाद शाहिद अफरीदी को डीप मिडविकेट पर कैच आउट कराया। मैन ऑफ द मैच और मैन ऑफ द सीरीज डिविलियर्स को एक रन पर जीवनदान मिला था, उन्होंने पाकिस्तानी गेंदबाजों का डटकर सामना करते हुए 111 गेंद की पारी में नौ चौके और एक छक्का जमाया। उनके शानदार अर्द्धशतक से दक्षिण अफ्रीका ने छह ओवर रहते चार विकेट पर 208 रन बनाकर जीत दर्ज की। डिविलियर्स और फरहान बेहारडियन (35) ने चौथे विकेट के लिए 88 गेंद में 87 रन की साझेदारी निभाई। पाकिस्तान के गेंदबाज मोहम्मद इरफान और जुनैद खान ने हालांकि शुरू में पिच के उछाल से बल्लेबाजों को परेशान किया था। लेकिन दक्षिण अफ्रीका के बल्लेबाजों ने बाद में उन्हें संभलकर खेला। डेविड मिलर 20 रन बनाकर नाबाद रहे जबकि हाशिम अमला ने 22 रन का योगदान दिया। टिप्पणियां इससे पहले, पाकिस्तानी टीम रेयान मैकलारेन के 13 गेंद में तीन विकेट चटकाने से 205 रन पर सिमट गई। पाकिस्तानी टीम 35वें ओवर में चार विकेट पर 151 रन बनाकर अच्छी स्थिति में थी लेकिन मैकलारेन ने इसी ओवर में शोएब मलिक को आउट किया और तीन गेंद बाद शाहिद अफरीदी को डीप मिडविकेट पर कैच आउट कराया। डिविलियर्स और फरहान बेहारडियन (35) ने चौथे विकेट के लिए 88 गेंद में 87 रन की साझेदारी निभाई। पाकिस्तान के गेंदबाज मोहम्मद इरफान और जुनैद खान ने हालांकि शुरू में पिच के उछाल से बल्लेबाजों को परेशान किया था। लेकिन दक्षिण अफ्रीका के बल्लेबाजों ने बाद में उन्हें संभलकर खेला। डेविड मिलर 20 रन बनाकर नाबाद रहे जबकि हाशिम अमला ने 22 रन का योगदान दिया। टिप्पणियां इससे पहले, पाकिस्तानी टीम रेयान मैकलारेन के 13 गेंद में तीन विकेट चटकाने से 205 रन पर सिमट गई। पाकिस्तानी टीम 35वें ओवर में चार विकेट पर 151 रन बनाकर अच्छी स्थिति में थी लेकिन मैकलारेन ने इसी ओवर में शोएब मलिक को आउट किया और तीन गेंद बाद शाहिद अफरीदी को डीप मिडविकेट पर कैच आउट कराया। डेविड मिलर 20 रन बनाकर नाबाद रहे जबकि हाशिम अमला ने 22 रन का योगदान दिया। टिप्पणियां इससे पहले, पाकिस्तानी टीम रेयान मैकलारेन के 13 गेंद में तीन विकेट चटकाने से 205 रन पर सिमट गई। पाकिस्तानी टीम 35वें ओवर में चार विकेट पर 151 रन बनाकर अच्छी स्थिति में थी लेकिन मैकलारेन ने इसी ओवर में शोएब मलिक को आउट किया और तीन गेंद बाद शाहिद अफरीदी को डीप मिडविकेट पर कैच आउट कराया। इससे पहले, पाकिस्तानी टीम रेयान मैकलारेन के 13 गेंद में तीन विकेट चटकाने से 205 रन पर सिमट गई। पाकिस्तानी टीम 35वें ओवर में चार विकेट पर 151 रन बनाकर अच्छी स्थिति में थी लेकिन मैकलारेन ने इसी ओवर में शोएब मलिक को आउट किया और तीन गेंद बाद शाहिद अफरीदी को डीप मिडविकेट पर कैच आउट कराया। पाकिस्तानी टीम 35वें ओवर में चार विकेट पर 151 रन बनाकर अच्छी स्थिति में थी लेकिन मैकलारेन ने इसी ओवर में शोएब मलिक को आउट किया और तीन गेंद बाद शाहिद अफरीदी को डीप मिडविकेट पर कैच आउट कराया।
यहाँ एक सारांश है:दक्षिण अफ्रीका ने अपने कप्तान एबी डिविलियर्स की नाबाद 95 रन की पारी से पाकिस्तान को पांचवें और अंतिम एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच में छह विकेट से हराकर शृंखला 3-2 से अपने नाम की।
15
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी शुक्रवार को कंपनी के शेयरधारकों को संबोधित करते समय गठजोड़ तथा संभावित अधिग्रहण के जरिये नए कारोबार में कदम रखने की घोषणा कर सकते हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरधारकों की 37वीं वार्षिक बैठक में अंबानी कंपनी के वित्तीय सेवा, दूरसंचार तथा बिजली जैसे नए क्षेत्रों में प्रवेश के साथ उर्जा, कपड़ा तथा खुदरा जैसे मौजूदा कारोबार के विस्तार की की योजना का खुलासा कर सकते हैं। ज्ञात सूत्रों के अनुसार अंबानी वित्तीय सेवा समेत विभिन्न उद्यमों के लिए नए सहयोगी पर ध्यान दे सकते हैं। फिलहाल वैश्विक निजी इक्विटी कंपनी डीई शॉ को बतौर सहयोगी शामिल किया गया है लेकिन पूरे कारोबार के लिए केवल यही कंपनी नहीं रहेगी बल्कि अन्य कंपनियों के साथ भी गठजोड़ किया जा सकता है। रिलायंस इंडस्ट्रीज की फिलहाल 1,50,000 करोड़ रुपये निवेश की योजना है और जल्दी ही इस बारे में कुछ घोषणा हो सकती है। पिछले सप्ताह वैश्विक वित्तीय सेवा कंपनी एचएसबीसी ने एक रिपोर्ट में कहा था कि पर्याप्त नकदी वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज विदेशों में अधिग्रहण तथा दूरसंचार सेवा शुरू करने की घोषणा कर सकती है। इससे पहले अप्रैल में कंपनी ने कहा था कि वह विस्तार और अधिग्रहण दोनों रास्तों से अपने कारोबार को आगे बढ़ाएगी। इसके अलावा आरआईएल ने पेट्रो-रसायन कारोबार में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए 10 अरब डॉलर के निवेश कार्यक्रम की भी घोषणा की। फरवरी में निवेशकों के सम्मेलन में आरआईएल ने अगले पांच साल में उर्जा और दूरसंचार सहित विभिन्न क्षेत्रों में 25 से 30 अरब डॉलर के निवेश का अनुमान व्यक्त किया था।
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: फिलहाल वैश्विक निजी इक्विटी कंपनी डीई शॉ को बतौर सहयोगी शामिल किया गया है लेकिन पूरे कारोबार के लिए केवल यही कंपनी नहीं रहेगी।
3
['hin']
एक सारांश बनाओ: छत्तीसगढ़ के छात्रों को मौसम विभाग में पवीएचडी करने अब बाहर नहीं जाना पड़ेगा, क्योंकि छत्तीसगढ़ के कृषि विश्वविद्यालय में अब इस विषय पर पीएचडी की शुरुआत हो गई है. शुरुआत में विश्वविद्यालय ने सिर्फ दो सीटें ही बनाई हैं, लेकिन जैसे-जैसे इस विषय की उत्सुकता छात्रों में बढ़ेगी, सीटों की संख्या बढ़ा दी जाएगी. प्रदेश के राज्यपाल बलरामदास टंडन ने इस पहल के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को बधाई दी है.  इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी कृष्ण कुमार साहू ने बताया कि इस विषय पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के विद्या परिषद की बैठक की अनुशंसा के आधार पर 30 मई को शुरू करने का निर्णय लिया गया. उल्लेखनीय है कि इससे पहले विश्वविद्यालय के छात्रों को मौसम विज्ञान में पीएचडी करने के लिए अन्य प्रांतों में जाना पड़ता था. कृष्ण कुमार साहू ने बताया किए वर्तमान में ग्लोबल वार्मिग के कारण प्रदेश में बदलते जलवायु को देखते हुए कुलपति डॉ. एस.के. पाटिल ने मौसम विज्ञान में पीएचडी को काफी गंभीरता से लिया और यह प्रस्ताव विद्या परिषद को भेजा. परिषद ने इसे अनुमोदित कर विषय शुरू करने की घोषणा की.  साहू ने कहा कि वर्तमान में बदलते जलवायु को देखते हुए किसानों को मौसम की जानकारी देना बहुत ही आवश्यक है. अब का युग परंपरागत कृषि से उठकर वैज्ञानिक कृषि करने का है. मौसम की जानकारी कृषि का महत्वपूर्ण अंग है. देश के प्रत्येक किसान को कृषि के लिए हवा, पानी और तापमान की जानकारी रखना अति आवश्यक है. टिप्पणियां उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक कृषि करने के लिए मानव संसाधनों की प्रचुर आवश्यकता होती है.  (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी कृष्ण कुमार साहू ने बताया कि इस विषय पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के विद्या परिषद की बैठक की अनुशंसा के आधार पर 30 मई को शुरू करने का निर्णय लिया गया. उल्लेखनीय है कि इससे पहले विश्वविद्यालय के छात्रों को मौसम विज्ञान में पीएचडी करने के लिए अन्य प्रांतों में जाना पड़ता था. कृष्ण कुमार साहू ने बताया किए वर्तमान में ग्लोबल वार्मिग के कारण प्रदेश में बदलते जलवायु को देखते हुए कुलपति डॉ. एस.के. पाटिल ने मौसम विज्ञान में पीएचडी को काफी गंभीरता से लिया और यह प्रस्ताव विद्या परिषद को भेजा. परिषद ने इसे अनुमोदित कर विषय शुरू करने की घोषणा की.  साहू ने कहा कि वर्तमान में बदलते जलवायु को देखते हुए किसानों को मौसम की जानकारी देना बहुत ही आवश्यक है. अब का युग परंपरागत कृषि से उठकर वैज्ञानिक कृषि करने का है. मौसम की जानकारी कृषि का महत्वपूर्ण अंग है. देश के प्रत्येक किसान को कृषि के लिए हवा, पानी और तापमान की जानकारी रखना अति आवश्यक है. टिप्पणियां उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक कृषि करने के लिए मानव संसाधनों की प्रचुर आवश्यकता होती है.  (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) उल्लेखनीय है कि इससे पहले विश्वविद्यालय के छात्रों को मौसम विज्ञान में पीएचडी करने के लिए अन्य प्रांतों में जाना पड़ता था. कृष्ण कुमार साहू ने बताया किए वर्तमान में ग्लोबल वार्मिग के कारण प्रदेश में बदलते जलवायु को देखते हुए कुलपति डॉ. एस.के. पाटिल ने मौसम विज्ञान में पीएचडी को काफी गंभीरता से लिया और यह प्रस्ताव विद्या परिषद को भेजा. परिषद ने इसे अनुमोदित कर विषय शुरू करने की घोषणा की.  साहू ने कहा कि वर्तमान में बदलते जलवायु को देखते हुए किसानों को मौसम की जानकारी देना बहुत ही आवश्यक है. अब का युग परंपरागत कृषि से उठकर वैज्ञानिक कृषि करने का है. मौसम की जानकारी कृषि का महत्वपूर्ण अंग है. देश के प्रत्येक किसान को कृषि के लिए हवा, पानी और तापमान की जानकारी रखना अति आवश्यक है. टिप्पणियां उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक कृषि करने के लिए मानव संसाधनों की प्रचुर आवश्यकता होती है.  (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) कृष्ण कुमार साहू ने बताया किए वर्तमान में ग्लोबल वार्मिग के कारण प्रदेश में बदलते जलवायु को देखते हुए कुलपति डॉ. एस.के. पाटिल ने मौसम विज्ञान में पीएचडी को काफी गंभीरता से लिया और यह प्रस्ताव विद्या परिषद को भेजा. परिषद ने इसे अनुमोदित कर विषय शुरू करने की घोषणा की.  साहू ने कहा कि वर्तमान में बदलते जलवायु को देखते हुए किसानों को मौसम की जानकारी देना बहुत ही आवश्यक है. अब का युग परंपरागत कृषि से उठकर वैज्ञानिक कृषि करने का है. मौसम की जानकारी कृषि का महत्वपूर्ण अंग है. देश के प्रत्येक किसान को कृषि के लिए हवा, पानी और तापमान की जानकारी रखना अति आवश्यक है. टिप्पणियां उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक कृषि करने के लिए मानव संसाधनों की प्रचुर आवश्यकता होती है.  (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) साहू ने कहा कि वर्तमान में बदलते जलवायु को देखते हुए किसानों को मौसम की जानकारी देना बहुत ही आवश्यक है. अब का युग परंपरागत कृषि से उठकर वैज्ञानिक कृषि करने का है. मौसम की जानकारी कृषि का महत्वपूर्ण अंग है. देश के प्रत्येक किसान को कृषि के लिए हवा, पानी और तापमान की जानकारी रखना अति आवश्यक है. टिप्पणियां उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक कृषि करने के लिए मानव संसाधनों की प्रचुर आवश्यकता होती है.  (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक कृषि करने के लिए मानव संसाधनों की प्रचुर आवश्यकता होती है.  (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
संक्षिप्त सारांश: शुरुआत में विश्वविद्यालय ने सिर्फ दो सीटें ही बनाई हैं. सीटों की संख्या बढ़ा दी जाएगी. कृषि करने के लिए मानव संसाधनों की प्रचुर आवश्यकता होती है.
8
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: वैश्विक उतार-चढ़ाव के बीच देश के शेयर बाजारों में इस सप्ताह लगभग पांच फीसदी की गिरावट देखी गई। अमेरिका के फेडरल रिजर्व के प्रमुख के यह कहने पर कि दुनिया को एक बार फिर से मंदी का सामना करना पड़ सकता है दुनिया भर के शेयर बाजारों में इस सप्ताह गिरावट देखी गई। बम्बई स्टॉक एक्सचेंज  (बीएसई) का 30 शेयरों वाले संवेदी सूचकांक सेंसेक्स में साप्ताहिक कारोबार में 4.56 फीसदी या 771.77 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। शुक्रवार को सेंसेक्स 1.22 फीसदी गिरावट के साथ 16,162.06 अंक पर बंद हुआ। पिछले चार सप्ताहों में सेंसेक्स की यह पहली गिरावट है। सोमवार को सेंसेक्स में गिरावट देखी गई। मंगलवार को इसमें तेजी आई और बुधवार को मामूली गिरावट आई। गुरुवार को सेंसेक्स में  4.13 फीसदी या 704 अंकों की भारी गिरावट आई। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के प्रमुख द्वारा अमेरिकी और वैश्विक अर्थव्यवस्था के एक बार फिर से मंदी के शिकार हो जाने की सम्भावना जताने के बाद गुरुवार को सेंसेक्स में दो सालों की सबसे बड़ी गिरावट आई। शुक्रवार को भी दुनियाभर के शेयर बाजारों में गिरावट जारी रही। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों वाले संवेदी सूचकांक निफ्टी में भी इस सप्ताह लगभग पांच फीसदी की गिरावट रही। निफ्टी में गुरुवार को 4.08 फीसदी की गिरावट रही। शुक्रवार को निफ्टी 1.14 फीसदी गिरावट के साथ 4,867.75 पर बंद हुआ। पूंजी बाजार शोध कम्पनी सीएनआई रिसर्च लिमिटेड के अध्यक्ष और महाप्रबंधक किशोर पी. ओस्टवाल ने कहा, "निफ्टी का रुझान नकारात्मक है। इसे 4,700 अंक पर समर्थन मिल सकता है। यदि यह स्तर टूट गया, तो हमें 4,300 के लिए भी तैयार रहना चाहिए।" उन्होंने कहा कि ऊपर की ओर इसे 5,170 पर प्रतिरोध का सामना करना पड़ सकता है। यदि यह इसको पार करता है तो निफ्टी 5,500 तक पहुंच सकता है। शुक्रवार को सेंसेक्स में गिरावट में रहने वाले प्रमुख शेयरों में रहे टाटा मोटर्स (4.81 फीसदी), एचडीएफसी बैंक (3.1 फीसदी), एलएंडटी (2.7 फीसदी), हीरो मोटोकॉर्प (2.45 फीसदी)। जिन शेयरों में तेजी रही उनमें प्रमुख रहे सिप्ला (2.09 फीसदी), एसबीआई (1.03 फीसदी), भारती एयरटेल (0.77 फीसदी), सन फार्मा (0.59 फीसदी)। एशिया के प्रमुख बाजारों में हांगकांग का हैंग सैंग शुक्रवार को 1.36 फीसदी की गिरावट के साथ 17,668.83 पर बंद हुआ। गुरुवार को इसमें लगभग पांच फीसद की गिरावट आई थी। चीन का शंघाई कम्पोजिट इंडेक्स शुक्रवार को 0.41 फीसदी की गिरावट के साथ 2,433.16 अंक पर बंद हुआ। गुरुवार को इसमें लगभग तीन फीसदी की गिरावट आई थी। जापान को निक्के ई गुरुवार को 2.07 फीसदी की गिरावट के साथ 8,560.26 पर बंद हुआ। शुक्रवार को निक्के ई अवकाश का दिन होने के कारण बंद था। अमेरिकी और यूरोपीय शेयर बाजारों में भी बुधवार और गुरुवार को गिरावट रही। अमेरिकी शेयर बाजारों में 2008 के बाद सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट देखी गई। इस सप्ताह डाऊजोंस में 6.4 फीसदी और एसएंडपी में 6.5 फीसदी की गिरावट रही। शुक्रवार को हालांकि इनमें तेजी देखी गई। शुक्रवार को ब्रिटेन का फुटसी100 0.50 फीसदी तेजी के साथ 5,066.81 पर, जर्मनी का डैक्स 0.63फीसदी तेजी के साथ 5,196.56 पर और फ्रांस का सीएसी40 1.02 फीसदी तेजी के साथ 2,810.11 पर बंद हुआ।
वैश्विक उतार-चढ़ाव के बीच देश के शेयर बाजारों में इस सप्ताह लगभग पांच फीसदी की गिरावट देखी गई।
34
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: चैंपियंस ट्रॉफी के लीग चरण के आखिरी मैच के बाद भारतीय कप्तान विराट कोहली आईसीसी वनडे बल्लेबाजों की रैंकिंग में फिर शीर्ष पर पहुंच गए हैं. पाकिस्तान के खिलाफ 81 नाबाद और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ नाबाद 76 रन बनाकर कोहली ने एबी डिविलियर्स और डेविड वॉर्नर को पछाड़कर फिर से टॉप रैंकिंग हासिल की. टूर्नामेंट से पहले वह दक्षिण अफ्रीका के डिविलियर्स से 22 और ऑस्ट्रेलिया के वॉर्नर से 19 अंक पीछे थे. शिखर धवन ने एक बार फिर शीर्ष 10 में वापसी की है. वह पांच पायदान चढ़कर 10वें स्थान पर पहुंच गए हैं. रोहित शर्मा और पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी एक-एक पायदान खिसककर क्रमश: 13वें और 14वें स्थान पर हैं, जबकि युवराज सिंह छह पायदान चढ़कर 88वें स्थान पर हैं.टिप्पणियां गेंदबाजों में भुवनेश्वर कुमार 13 पायदान चढ़कर 23वें स्थान पर पहुंच गए. उमेश यादव दो पायदान चढ़कर 41वें स्थान पर हैं, जबकि जसप्रीत बुमराह 43वें स्थान पर हैं. स्पिनरों में आर. अश्विन दो पायदान खिसककर 20वें और रवींद्र जडेजा तीन पायदान नीचे 29वें स्थान पर आ गए हैं. ऑस्ट्रेलिया के जोश हेजलवुड करियर में पहली बार गेंदबाजों की रैंकिंग में शीर्ष पर हैं. ऑलराउंडरों की सूची में बांग्लादेश के शाकिब अल हसन पहले स्थान पर हैं. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) शिखर धवन ने एक बार फिर शीर्ष 10 में वापसी की है. वह पांच पायदान चढ़कर 10वें स्थान पर पहुंच गए हैं. रोहित शर्मा और पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी एक-एक पायदान खिसककर क्रमश: 13वें और 14वें स्थान पर हैं, जबकि युवराज सिंह छह पायदान चढ़कर 88वें स्थान पर हैं.टिप्पणियां गेंदबाजों में भुवनेश्वर कुमार 13 पायदान चढ़कर 23वें स्थान पर पहुंच गए. उमेश यादव दो पायदान चढ़कर 41वें स्थान पर हैं, जबकि जसप्रीत बुमराह 43वें स्थान पर हैं. स्पिनरों में आर. अश्विन दो पायदान खिसककर 20वें और रवींद्र जडेजा तीन पायदान नीचे 29वें स्थान पर आ गए हैं. ऑस्ट्रेलिया के जोश हेजलवुड करियर में पहली बार गेंदबाजों की रैंकिंग में शीर्ष पर हैं. ऑलराउंडरों की सूची में बांग्लादेश के शाकिब अल हसन पहले स्थान पर हैं. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) गेंदबाजों में भुवनेश्वर कुमार 13 पायदान चढ़कर 23वें स्थान पर पहुंच गए. उमेश यादव दो पायदान चढ़कर 41वें स्थान पर हैं, जबकि जसप्रीत बुमराह 43वें स्थान पर हैं. स्पिनरों में आर. अश्विन दो पायदान खिसककर 20वें और रवींद्र जडेजा तीन पायदान नीचे 29वें स्थान पर आ गए हैं. ऑस्ट्रेलिया के जोश हेजलवुड करियर में पहली बार गेंदबाजों की रैंकिंग में शीर्ष पर हैं. ऑलराउंडरों की सूची में बांग्लादेश के शाकिब अल हसन पहले स्थान पर हैं. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
संक्षिप्त पाठ: रोहित शर्मा और महेंद्र सिंह धोनी क्रमश: 13वें और 14वें स्थान पर हैं गेंदबाजों में भुवनेश्वर कुमार 13 पायदान चढ़कर 23वें स्थान पर पहुंच गए ऑलराउंडरों की सूची में बांग्लादेश के शाकिब अल हसन पहले स्थान पर हैं
13
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: सफलता की ओर एक और कदम बढ़ाते हुए नासा के क्यूरियॉसिटी रोवर ने मंगल की सतह से पहली बार रिकॉर्ड की गई मानव आवाज को वापस धरती पर भेजा है। यह आवाज रेडियो तरंगों के जरिये धरती से मंगल तक पहुंचाई गई थी, जिसे क्यूरियॉसिटी ने वहां पर रिकॉर्ड करके नासा के डीप स्पेस नेटवर्क को वापस भेजा है। यह आवाज इस अंतरिक्ष एजेंसी के प्रबंधक चार्ल्स बोल्डेन की है, जिसमें वह क्यूरियॉसिटी के सफलतापूर्वक मंगल पर उतर जाने के बाद नासा के कर्मियों और सहयोगियों को बधाई दे रहे हैं। नासा द्वारा जारी इस संदेश में बोल्डेन ने कहा, हमें आशा है कि गेल क्रेटर पर हमारे निरीक्षणों और विश्लेषणों के जरिये हम मंगल पर जीवन की संभावना का पता लगा सकेंगे। साथ ही हमें हमारे अपने ग्रह के लिए भी भूत और भविष्य की संभावनाओं को समझने में आसानी होगी। क्यूरियॉसिटी पृथ्वी के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा। यह वैज्ञानिकों और खोजकर्ताओं की एक नई पीढ़ी को प्रेरित करेगा। यह निकट भविष्य में मानव अभियान के लिए भी रास्ता तैयार कर रहा है।टिप्पणियां बोल्डेन ने कहा कि मानव का कौतूहल शुरू से ही हमें क्षितिज के पार जाकर नया जीवन और नई संभावनाएं खोजने के लिए प्रेरित करता रहा है। क्यूरियॉसिटी  की इस उपलब्धि को एक इंसानी मौजूदगी का एक और नन्हा कदम बताते हुए क्यूरियॉसिटी  कार्यक्रम के प्रबंधकर्ता डेव लेवरी ने कहा, हमें आशा है कि ये शब्द उस व्यक्ति के लिए जरूर प्रेरणा का स्रोत रहेंगे, जो मंगल की सतह पर सबसे पहला कदम रखेगा। नील आर्मस्ट्रांग की तरह वह भी इंसानी खोज की इस लंबी छलांग के बारे में कह सकेगा। इस रिकॉर्डेड संदेश के अलावा क्यूरियॉसिटी ने रोवर पर लगे 100 मिलीमीटर के टेलीफोटो लेंस वाले मास्टकैमेरा यंत्र की मदद से मंगल पर स्थित माउंट शार्प नामक पर्वत के आसपास सतही उठाव और गड्ढों की साफ तस्वीरें भी भेजी हैं। यह क्यूरियॉसिटी की यात्रा वाला क्षेत्र है। नासा के अधिकारियों के अनुसार यह रोवर चुनिंदा इलाकों में जाकर वहां पर सूक्ष्मजीवीय जीवन के अनुकूल पर्यावरण की स्थितियां तलाशेगा। यह आवाज रेडियो तरंगों के जरिये धरती से मंगल तक पहुंचाई गई थी, जिसे क्यूरियॉसिटी ने वहां पर रिकॉर्ड करके नासा के डीप स्पेस नेटवर्क को वापस भेजा है। यह आवाज इस अंतरिक्ष एजेंसी के प्रबंधक चार्ल्स बोल्डेन की है, जिसमें वह क्यूरियॉसिटी के सफलतापूर्वक मंगल पर उतर जाने के बाद नासा के कर्मियों और सहयोगियों को बधाई दे रहे हैं। नासा द्वारा जारी इस संदेश में बोल्डेन ने कहा, हमें आशा है कि गेल क्रेटर पर हमारे निरीक्षणों और विश्लेषणों के जरिये हम मंगल पर जीवन की संभावना का पता लगा सकेंगे। साथ ही हमें हमारे अपने ग्रह के लिए भी भूत और भविष्य की संभावनाओं को समझने में आसानी होगी। क्यूरियॉसिटी पृथ्वी के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा। यह वैज्ञानिकों और खोजकर्ताओं की एक नई पीढ़ी को प्रेरित करेगा। यह निकट भविष्य में मानव अभियान के लिए भी रास्ता तैयार कर रहा है।टिप्पणियां बोल्डेन ने कहा कि मानव का कौतूहल शुरू से ही हमें क्षितिज के पार जाकर नया जीवन और नई संभावनाएं खोजने के लिए प्रेरित करता रहा है। क्यूरियॉसिटी  की इस उपलब्धि को एक इंसानी मौजूदगी का एक और नन्हा कदम बताते हुए क्यूरियॉसिटी  कार्यक्रम के प्रबंधकर्ता डेव लेवरी ने कहा, हमें आशा है कि ये शब्द उस व्यक्ति के लिए जरूर प्रेरणा का स्रोत रहेंगे, जो मंगल की सतह पर सबसे पहला कदम रखेगा। नील आर्मस्ट्रांग की तरह वह भी इंसानी खोज की इस लंबी छलांग के बारे में कह सकेगा। इस रिकॉर्डेड संदेश के अलावा क्यूरियॉसिटी ने रोवर पर लगे 100 मिलीमीटर के टेलीफोटो लेंस वाले मास्टकैमेरा यंत्र की मदद से मंगल पर स्थित माउंट शार्प नामक पर्वत के आसपास सतही उठाव और गड्ढों की साफ तस्वीरें भी भेजी हैं। यह क्यूरियॉसिटी की यात्रा वाला क्षेत्र है। नासा के अधिकारियों के अनुसार यह रोवर चुनिंदा इलाकों में जाकर वहां पर सूक्ष्मजीवीय जीवन के अनुकूल पर्यावरण की स्थितियां तलाशेगा। नासा द्वारा जारी इस संदेश में बोल्डेन ने कहा, हमें आशा है कि गेल क्रेटर पर हमारे निरीक्षणों और विश्लेषणों के जरिये हम मंगल पर जीवन की संभावना का पता लगा सकेंगे। साथ ही हमें हमारे अपने ग्रह के लिए भी भूत और भविष्य की संभावनाओं को समझने में आसानी होगी। क्यूरियॉसिटी पृथ्वी के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा। यह वैज्ञानिकों और खोजकर्ताओं की एक नई पीढ़ी को प्रेरित करेगा। यह निकट भविष्य में मानव अभियान के लिए भी रास्ता तैयार कर रहा है।टिप्पणियां बोल्डेन ने कहा कि मानव का कौतूहल शुरू से ही हमें क्षितिज के पार जाकर नया जीवन और नई संभावनाएं खोजने के लिए प्रेरित करता रहा है। क्यूरियॉसिटी  की इस उपलब्धि को एक इंसानी मौजूदगी का एक और नन्हा कदम बताते हुए क्यूरियॉसिटी  कार्यक्रम के प्रबंधकर्ता डेव लेवरी ने कहा, हमें आशा है कि ये शब्द उस व्यक्ति के लिए जरूर प्रेरणा का स्रोत रहेंगे, जो मंगल की सतह पर सबसे पहला कदम रखेगा। नील आर्मस्ट्रांग की तरह वह भी इंसानी खोज की इस लंबी छलांग के बारे में कह सकेगा। इस रिकॉर्डेड संदेश के अलावा क्यूरियॉसिटी ने रोवर पर लगे 100 मिलीमीटर के टेलीफोटो लेंस वाले मास्टकैमेरा यंत्र की मदद से मंगल पर स्थित माउंट शार्प नामक पर्वत के आसपास सतही उठाव और गड्ढों की साफ तस्वीरें भी भेजी हैं। यह क्यूरियॉसिटी की यात्रा वाला क्षेत्र है। नासा के अधिकारियों के अनुसार यह रोवर चुनिंदा इलाकों में जाकर वहां पर सूक्ष्मजीवीय जीवन के अनुकूल पर्यावरण की स्थितियां तलाशेगा। बोल्डेन ने कहा कि मानव का कौतूहल शुरू से ही हमें क्षितिज के पार जाकर नया जीवन और नई संभावनाएं खोजने के लिए प्रेरित करता रहा है। क्यूरियॉसिटी  की इस उपलब्धि को एक इंसानी मौजूदगी का एक और नन्हा कदम बताते हुए क्यूरियॉसिटी  कार्यक्रम के प्रबंधकर्ता डेव लेवरी ने कहा, हमें आशा है कि ये शब्द उस व्यक्ति के लिए जरूर प्रेरणा का स्रोत रहेंगे, जो मंगल की सतह पर सबसे पहला कदम रखेगा। नील आर्मस्ट्रांग की तरह वह भी इंसानी खोज की इस लंबी छलांग के बारे में कह सकेगा। इस रिकॉर्डेड संदेश के अलावा क्यूरियॉसिटी ने रोवर पर लगे 100 मिलीमीटर के टेलीफोटो लेंस वाले मास्टकैमेरा यंत्र की मदद से मंगल पर स्थित माउंट शार्प नामक पर्वत के आसपास सतही उठाव और गड्ढों की साफ तस्वीरें भी भेजी हैं। यह क्यूरियॉसिटी की यात्रा वाला क्षेत्र है। नासा के अधिकारियों के अनुसार यह रोवर चुनिंदा इलाकों में जाकर वहां पर सूक्ष्मजीवीय जीवन के अनुकूल पर्यावरण की स्थितियां तलाशेगा। इस रिकॉर्डेड संदेश के अलावा क्यूरियॉसिटी ने रोवर पर लगे 100 मिलीमीटर के टेलीफोटो लेंस वाले मास्टकैमेरा यंत्र की मदद से मंगल पर स्थित माउंट शार्प नामक पर्वत के आसपास सतही उठाव और गड्ढों की साफ तस्वीरें भी भेजी हैं। यह क्यूरियॉसिटी की यात्रा वाला क्षेत्र है। नासा के अधिकारियों के अनुसार यह रोवर चुनिंदा इलाकों में जाकर वहां पर सूक्ष्मजीवीय जीवन के अनुकूल पर्यावरण की स्थितियां तलाशेगा।
सफलता की ओर एक और कदम बढ़ाते हुए नासा के क्यूरियॉसिटी रोवर ने मंगल की सतह से पहली बार रिकॉर्ड की गई मानव आवाज को वापस धरती पर भेजा है।
28
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: Kumkum Bhagya Written Update: जी टीवी के शो 'कुमकुम भाग्य (Kumkum Bhagya)' में इन दिनों काफी हंगामा चल रहा है. 'कुमकुम भाग्य (Kumkum Bhagya)' के पिछले एपिसोड में दिखाया गया कि प्राची के बयान पर पुलिस आलिया को गिरफ्तार कर लेती है. रिया, प्राची की बात सुनकर हैरान रह जाती है और आलिया से कहती है कि वह अपनी ऊपर लगे आरोपों से इंकार कर दें. हालांकि, बाद में पुलिस आलिया को ले जाती है. रिया के गिरफ्तार होने पर रिया काफी गुस्सा हो जाती है और वह प्राची (Mugdha Chapekar) को सबक सिखाने का फैसला लेती है.  रणवीर सिंह की फिल्म 'जयेश भाई जोरदार' का पोस्टर हुआ रिलीज, तो फैंस ने तुरंत पकड़ ली यह गलती सृति झा (Sriti Jha) और शब्बीर आहलुवालिया (Shabir Ahluwalia) के शो 'कुमकुम भाग्य (Kumkum Bhagya)' के पिछले एपिसोड में दिखाया गया कि जब प्राची को पता चलता है कि मधु पर किसी ने हमला किया है तो वह वापस चली जाती है. घर जाकर उसे यह भी पता चलता है कि सरिता की भी तबियत खराब है. दूसरी ओर रिया, यह देखकर हैरान है कि हर कोई दिशा को लेकर परेशान है और प्राची (Mugdha Chapekar) को सपोर्ट कर रहा है. रिया घर के सभी सदस्यों को प्राची से बात करने से रोकती है और बाद में खुद जाकर प्राची से बात करती है.  अक्षय कुमार ने किया खुलासा, बोले- बड़े डायरेक्टर्स मुझे अपनी फिल्म में नहीं लेते इसलिए... सीरियल 'कुमकुम भाग्य (Kumkum Bhagya)' का आज का एपिसोड काफी दिलचस्प होने वाला है. आज के एपिसोड में दिखाया जाएगा कि प्राची और रिया में बहस हो जाएगी. प्राची (Mugdha Chapekar), रिया को फटकार लगाएगी, क्योंकि उसने मधू के साथ बुरा बर्ताव किया. उसके बाद प्राची, रिया को कहेगी कि अगर उसका बर्ताव ऐसा ही रहा तो वह उसे थप्पड़ लगा देगी. अब देखना होगा कि रिया और प्राची की इस दुश्मनी का क्या अंजाम होगा.
संक्षिप्त सारांश: साीरियल 'कुमकुम भाग्य' में जानिए क्या होगा प्राची और रिया में हुआ जोरदार झगड़ा सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है वीडियो
10
['hin']
एक सारांश बनाओ: पोंटी चड्ढा और उसके भाई हरदीप चड्ढा की गोलीबारी में मौत के मामले में एक नया मोड़ आ गया है। पुलिस के दावों को झुठलाते हुए उनके सम्बंधियों का कहना है कि दोनों भाइयों के बीच सम्पत्ति को लेकर कोई विवाद नहीं था। हरदीप चड्ढा के ससुर हरविंदर सिंह सरना ने कहा, "दोनों भाइयों के बीच सम्पत्ति को लेकर कोई विवाद नहीं था। दोनों के बीच कुछ विवाद थे, लेकिन हमने मध्यस्थता कर उन्हें सुलझा दिया था।" हरविंदर दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना के छोटे भाई हैं। उन्होंने कहा, "दोनों भाइयों का अलग-अलग व्यवसाय था। हरदीप का पंजाब के हरगोबिंदपुर में शराब का ठेका और पेपर मिल था।" परमजीत सिंह सरना ने भी अपने छोटे भाई के विचारों का समर्थन करते हुए कहा, "उनके बीच सम्पत्ति को लेकर कोई विवाद नहीं था।" टिप्पणियां जब उनसे झगड़े के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "मुझे इस बारे में मालूम नहीं है।" दोनों भाइयों की शनिवार को गोलीबारी में मौत हो गई थी। पुलिस का कहना है कि आपस में सम्पत्ति विवाद के कारण ये हत्याएं हुईं। हरदीप चड्ढा के ससुर हरविंदर सिंह सरना ने कहा, "दोनों भाइयों के बीच सम्पत्ति को लेकर कोई विवाद नहीं था। दोनों के बीच कुछ विवाद थे, लेकिन हमने मध्यस्थता कर उन्हें सुलझा दिया था।" हरविंदर दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना के छोटे भाई हैं। उन्होंने कहा, "दोनों भाइयों का अलग-अलग व्यवसाय था। हरदीप का पंजाब के हरगोबिंदपुर में शराब का ठेका और पेपर मिल था।" परमजीत सिंह सरना ने भी अपने छोटे भाई के विचारों का समर्थन करते हुए कहा, "उनके बीच सम्पत्ति को लेकर कोई विवाद नहीं था।" टिप्पणियां जब उनसे झगड़े के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "मुझे इस बारे में मालूम नहीं है।" दोनों भाइयों की शनिवार को गोलीबारी में मौत हो गई थी। पुलिस का कहना है कि आपस में सम्पत्ति विवाद के कारण ये हत्याएं हुईं। हरविंदर दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना के छोटे भाई हैं। उन्होंने कहा, "दोनों भाइयों का अलग-अलग व्यवसाय था। हरदीप का पंजाब के हरगोबिंदपुर में शराब का ठेका और पेपर मिल था।" परमजीत सिंह सरना ने भी अपने छोटे भाई के विचारों का समर्थन करते हुए कहा, "उनके बीच सम्पत्ति को लेकर कोई विवाद नहीं था।" टिप्पणियां जब उनसे झगड़े के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "मुझे इस बारे में मालूम नहीं है।" दोनों भाइयों की शनिवार को गोलीबारी में मौत हो गई थी। पुलिस का कहना है कि आपस में सम्पत्ति विवाद के कारण ये हत्याएं हुईं। परमजीत सिंह सरना ने भी अपने छोटे भाई के विचारों का समर्थन करते हुए कहा, "उनके बीच सम्पत्ति को लेकर कोई विवाद नहीं था।" टिप्पणियां जब उनसे झगड़े के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "मुझे इस बारे में मालूम नहीं है।" दोनों भाइयों की शनिवार को गोलीबारी में मौत हो गई थी। पुलिस का कहना है कि आपस में सम्पत्ति विवाद के कारण ये हत्याएं हुईं। जब उनसे झगड़े के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "मुझे इस बारे में मालूम नहीं है।" दोनों भाइयों की शनिवार को गोलीबारी में मौत हो गई थी। पुलिस का कहना है कि आपस में सम्पत्ति विवाद के कारण ये हत्याएं हुईं। दोनों भाइयों की शनिवार को गोलीबारी में मौत हो गई थी। पुलिस का कहना है कि आपस में सम्पत्ति विवाद के कारण ये हत्याएं हुईं।
यह एक सारांश है: पोंटी चड्ढा और उसके भाई हरदीप चड्ढा की गोलीबारी में मौत के मामले में एक नया मोड़ आ गया है। पुलिस के दावों को झुठलाते हुए उनके सम्बंधियों का कहना है कि दोनों भाइयों के बीच सम्पत्ति को लेकर कोई विवाद नहीं था।
21
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: कल्पना कीजिए एक ऐसे कंप्यूटर की, जिसमें मानव मस्तिष्क की तरह चीजों को समझने की क्षमता हो और वह बिना कुछ बताए चीजों को देखते ही उसके बारे में प्रतिक्रिया देता हो। जी हां, यह कल्पना अब हकीकत का रूप ले रही है और दिग्गज अमेरिकी कंपनी गूगल ने कहा है कि वह मानव मस्तिष्क की समझने की क्षमता की नकल करने की कंप्यूटरों की क्षमता को दोगुना कर रही है।टिप्पणियां गूगल के फेलो जेफ डीन एंड्रयू एनजी ने अपने ब्लॉग में कहा कि इस प्रकार प्रोग्राम किए गए कंप्यूटरों को जब यू-ट्यूब पर वीडियो दिखाया गया, तो उन्होंने बिल्ली को पहचान लिया। शोधकर्ताओं ने कहा, हमारी अवधारणा थी कि कंप्यूटर इन वीडियो को देखकर सामान्य चीजों को पहचानना सीख लेगा। उन्होंने कहा, वास्तव में हमारे एक कृत्रिम न्यूरोन्स ने बिल्ली की तस्वीर देखने पर बहुत तेजी से प्रतिक्रिया देना सीख लिया है। ध्यान रखने वाली बात यह है कि इस नेटवर्क को कभी भी यह नहीं बताया गया था कि बिल्ली क्या होती है या ऐसी कोई तस्वीर नहीं दी गई थी, जिस पर लिखा हो कि यह एक बिल्ली है। डीन ने कहा कि कंप्यूटर ने अपने आप ही यह सीख लिया कि बिल्ली कैसी दिखती है। गूगल के फेलो जेफ डीन एंड्रयू एनजी ने अपने ब्लॉग में कहा कि इस प्रकार प्रोग्राम किए गए कंप्यूटरों को जब यू-ट्यूब पर वीडियो दिखाया गया, तो उन्होंने बिल्ली को पहचान लिया। शोधकर्ताओं ने कहा, हमारी अवधारणा थी कि कंप्यूटर इन वीडियो को देखकर सामान्य चीजों को पहचानना सीख लेगा। उन्होंने कहा, वास्तव में हमारे एक कृत्रिम न्यूरोन्स ने बिल्ली की तस्वीर देखने पर बहुत तेजी से प्रतिक्रिया देना सीख लिया है। ध्यान रखने वाली बात यह है कि इस नेटवर्क को कभी भी यह नहीं बताया गया था कि बिल्ली क्या होती है या ऐसी कोई तस्वीर नहीं दी गई थी, जिस पर लिखा हो कि यह एक बिल्ली है। डीन ने कहा कि कंप्यूटर ने अपने आप ही यह सीख लिया कि बिल्ली कैसी दिखती है। उन्होंने कहा, वास्तव में हमारे एक कृत्रिम न्यूरोन्स ने बिल्ली की तस्वीर देखने पर बहुत तेजी से प्रतिक्रिया देना सीख लिया है। ध्यान रखने वाली बात यह है कि इस नेटवर्क को कभी भी यह नहीं बताया गया था कि बिल्ली क्या होती है या ऐसी कोई तस्वीर नहीं दी गई थी, जिस पर लिखा हो कि यह एक बिल्ली है। डीन ने कहा कि कंप्यूटर ने अपने आप ही यह सीख लिया कि बिल्ली कैसी दिखती है।
यह एक सारांश है: गूगल के फेलो जेफ डीन एंड्रयू एनजी ने अपने ब्लॉग में कहा कि इस प्रकार प्रोग्राम किए गए कंप्यूटरों को जब यू-ट्यूब पर वीडियो दिखाया गया, तो उन्होंने बिल्ली को पहचान लिया।
16
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: मुंबई की एक लोकल ट्रेन के महिला कोच में आज सुबह एक व्यक्ति ने एक महिला का बलात्कार करने की कोशिश की और कामयाब नहीं होने पर उसे मारने का प्रयास किया। राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने 28 वर्षीय व्यक्ति को उस समय गिरफ्तार कर लिया जब एक स्टेशन पर रेलगाड़ी रुकने पर महिला मदद के लिए चिल्लाई। जीआरपी के अनुसार, 23 वर्षीय पीड़िता दादर जाने के लिए सुबह 5 बजकर 41 मिनट पर मुंबई मध्य स्टेशन से रेलगाड़ी के द्वितीय श्रेणी के महिला कोच में चढ़ी थी। जीआरपी के वरिष्ठ निरीक्षक राजेंद्र त्रिवेदी ने कहा, आरोपी महालक्ष्मी स्टेशन पर कोच में घुसा और पीड़िता को अकेले देखकर उसके साथ अभद्र व्यवहार किया और उसका बलात्कार करने की कोशिश की। पीड़िता ने जब मदद के लिए अपना मोबाइल फोन बाहर निकाला तो आरोपी ने गला घोंटकर उसे मारने की कोशिश की। रेलगाड़ी जब अगले स्टेशन लोअर पारेल पर रकी तो महिला मदद के लिए चिल्लाई, जिसके बाद प्लेटफार्म पर खड़े यात्रियों और जीआरपी के जवानों ने आरोपी को पकड़ लिया। त्रिवेदी ने कहा, घटना के समय आरोपी देवराज हनुमंत कनापा ने शराब पी रखी थी। वह उपनगर कुर्ला का निवासी है। आरोपी को चिकित्सकीय जांच के लिए ले जाया गया है, जिसके बाद उसे हिरासत के लिए मजिस्ट्रेट की एक अदालत में पेश किया जाएगा। उन्होंने बताया कि उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं 307 और 354 के तहत मामला दर्ज किया गया है। टिप्पणियां यह पूछने पर कि नियमानुसार आवश्यक होने के बावजूद महिला कोच में कोई पुलिस अधिकारी मौजूद क्यों नहीं था, त्रिवेदी ने कहा कि इस संबंध में जांच की जा रही है। उन्होंने कहा, जीआरपी बोरीवली के एक कांस्टेबल को रेलगाड़ी में तैनात होना था। उसे काम में लापरवाही बरतने के कारण निलंबित कर दिया गया है। प्रारंभिक जांच से यह भी पता चला है कि देवराज के खिलाफ कल्याण में चेन खींचने के दो मामले दर्ज हैं। राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने 28 वर्षीय व्यक्ति को उस समय गिरफ्तार कर लिया जब एक स्टेशन पर रेलगाड़ी रुकने पर महिला मदद के लिए चिल्लाई। जीआरपी के अनुसार, 23 वर्षीय पीड़िता दादर जाने के लिए सुबह 5 बजकर 41 मिनट पर मुंबई मध्य स्टेशन से रेलगाड़ी के द्वितीय श्रेणी के महिला कोच में चढ़ी थी। जीआरपी के वरिष्ठ निरीक्षक राजेंद्र त्रिवेदी ने कहा, आरोपी महालक्ष्मी स्टेशन पर कोच में घुसा और पीड़िता को अकेले देखकर उसके साथ अभद्र व्यवहार किया और उसका बलात्कार करने की कोशिश की। पीड़िता ने जब मदद के लिए अपना मोबाइल फोन बाहर निकाला तो आरोपी ने गला घोंटकर उसे मारने की कोशिश की। रेलगाड़ी जब अगले स्टेशन लोअर पारेल पर रकी तो महिला मदद के लिए चिल्लाई, जिसके बाद प्लेटफार्म पर खड़े यात्रियों और जीआरपी के जवानों ने आरोपी को पकड़ लिया। त्रिवेदी ने कहा, घटना के समय आरोपी देवराज हनुमंत कनापा ने शराब पी रखी थी। वह उपनगर कुर्ला का निवासी है। आरोपी को चिकित्सकीय जांच के लिए ले जाया गया है, जिसके बाद उसे हिरासत के लिए मजिस्ट्रेट की एक अदालत में पेश किया जाएगा। उन्होंने बताया कि उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं 307 और 354 के तहत मामला दर्ज किया गया है। टिप्पणियां यह पूछने पर कि नियमानुसार आवश्यक होने के बावजूद महिला कोच में कोई पुलिस अधिकारी मौजूद क्यों नहीं था, त्रिवेदी ने कहा कि इस संबंध में जांच की जा रही है। उन्होंने कहा, जीआरपी बोरीवली के एक कांस्टेबल को रेलगाड़ी में तैनात होना था। उसे काम में लापरवाही बरतने के कारण निलंबित कर दिया गया है। प्रारंभिक जांच से यह भी पता चला है कि देवराज के खिलाफ कल्याण में चेन खींचने के दो मामले दर्ज हैं। जीआरपी के अनुसार, 23 वर्षीय पीड़िता दादर जाने के लिए सुबह 5 बजकर 41 मिनट पर मुंबई मध्य स्टेशन से रेलगाड़ी के द्वितीय श्रेणी के महिला कोच में चढ़ी थी। जीआरपी के वरिष्ठ निरीक्षक राजेंद्र त्रिवेदी ने कहा, आरोपी महालक्ष्मी स्टेशन पर कोच में घुसा और पीड़िता को अकेले देखकर उसके साथ अभद्र व्यवहार किया और उसका बलात्कार करने की कोशिश की। पीड़िता ने जब मदद के लिए अपना मोबाइल फोन बाहर निकाला तो आरोपी ने गला घोंटकर उसे मारने की कोशिश की। रेलगाड़ी जब अगले स्टेशन लोअर पारेल पर रकी तो महिला मदद के लिए चिल्लाई, जिसके बाद प्लेटफार्म पर खड़े यात्रियों और जीआरपी के जवानों ने आरोपी को पकड़ लिया। त्रिवेदी ने कहा, घटना के समय आरोपी देवराज हनुमंत कनापा ने शराब पी रखी थी। वह उपनगर कुर्ला का निवासी है। आरोपी को चिकित्सकीय जांच के लिए ले जाया गया है, जिसके बाद उसे हिरासत के लिए मजिस्ट्रेट की एक अदालत में पेश किया जाएगा। उन्होंने बताया कि उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं 307 और 354 के तहत मामला दर्ज किया गया है। टिप्पणियां यह पूछने पर कि नियमानुसार आवश्यक होने के बावजूद महिला कोच में कोई पुलिस अधिकारी मौजूद क्यों नहीं था, त्रिवेदी ने कहा कि इस संबंध में जांच की जा रही है। उन्होंने कहा, जीआरपी बोरीवली के एक कांस्टेबल को रेलगाड़ी में तैनात होना था। उसे काम में लापरवाही बरतने के कारण निलंबित कर दिया गया है। प्रारंभिक जांच से यह भी पता चला है कि देवराज के खिलाफ कल्याण में चेन खींचने के दो मामले दर्ज हैं। जीआरपी के वरिष्ठ निरीक्षक राजेंद्र त्रिवेदी ने कहा, आरोपी महालक्ष्मी स्टेशन पर कोच में घुसा और पीड़िता को अकेले देखकर उसके साथ अभद्र व्यवहार किया और उसका बलात्कार करने की कोशिश की। पीड़िता ने जब मदद के लिए अपना मोबाइल फोन बाहर निकाला तो आरोपी ने गला घोंटकर उसे मारने की कोशिश की। रेलगाड़ी जब अगले स्टेशन लोअर पारेल पर रकी तो महिला मदद के लिए चिल्लाई, जिसके बाद प्लेटफार्म पर खड़े यात्रियों और जीआरपी के जवानों ने आरोपी को पकड़ लिया। त्रिवेदी ने कहा, घटना के समय आरोपी देवराज हनुमंत कनापा ने शराब पी रखी थी। वह उपनगर कुर्ला का निवासी है। आरोपी को चिकित्सकीय जांच के लिए ले जाया गया है, जिसके बाद उसे हिरासत के लिए मजिस्ट्रेट की एक अदालत में पेश किया जाएगा। उन्होंने बताया कि उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं 307 और 354 के तहत मामला दर्ज किया गया है। टिप्पणियां यह पूछने पर कि नियमानुसार आवश्यक होने के बावजूद महिला कोच में कोई पुलिस अधिकारी मौजूद क्यों नहीं था, त्रिवेदी ने कहा कि इस संबंध में जांच की जा रही है। उन्होंने कहा, जीआरपी बोरीवली के एक कांस्टेबल को रेलगाड़ी में तैनात होना था। उसे काम में लापरवाही बरतने के कारण निलंबित कर दिया गया है। प्रारंभिक जांच से यह भी पता चला है कि देवराज के खिलाफ कल्याण में चेन खींचने के दो मामले दर्ज हैं। त्रिवेदी ने कहा, घटना के समय आरोपी देवराज हनुमंत कनापा ने शराब पी रखी थी। वह उपनगर कुर्ला का निवासी है। आरोपी को चिकित्सकीय जांच के लिए ले जाया गया है, जिसके बाद उसे हिरासत के लिए मजिस्ट्रेट की एक अदालत में पेश किया जाएगा। उन्होंने बताया कि उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं 307 और 354 के तहत मामला दर्ज किया गया है। टिप्पणियां यह पूछने पर कि नियमानुसार आवश्यक होने के बावजूद महिला कोच में कोई पुलिस अधिकारी मौजूद क्यों नहीं था, त्रिवेदी ने कहा कि इस संबंध में जांच की जा रही है। उन्होंने कहा, जीआरपी बोरीवली के एक कांस्टेबल को रेलगाड़ी में तैनात होना था। उसे काम में लापरवाही बरतने के कारण निलंबित कर दिया गया है। प्रारंभिक जांच से यह भी पता चला है कि देवराज के खिलाफ कल्याण में चेन खींचने के दो मामले दर्ज हैं। यह पूछने पर कि नियमानुसार आवश्यक होने के बावजूद महिला कोच में कोई पुलिस अधिकारी मौजूद क्यों नहीं था, त्रिवेदी ने कहा कि इस संबंध में जांच की जा रही है। उन्होंने कहा, जीआरपी बोरीवली के एक कांस्टेबल को रेलगाड़ी में तैनात होना था। उसे काम में लापरवाही बरतने के कारण निलंबित कर दिया गया है। प्रारंभिक जांच से यह भी पता चला है कि देवराज के खिलाफ कल्याण में चेन खींचने के दो मामले दर्ज हैं। उन्होंने कहा, जीआरपी बोरीवली के एक कांस्टेबल को रेलगाड़ी में तैनात होना था। उसे काम में लापरवाही बरतने के कारण निलंबित कर दिया गया है। प्रारंभिक जांच से यह भी पता चला है कि देवराज के खिलाफ कल्याण में चेन खींचने के दो मामले दर्ज हैं।
सारांश: मुंबई की लोकल ट्रेन में एक लड़की के साथ छेड़छाड़ करने वाले शख्स को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। यह घटना सुबह साढ़े पांच बजे की है।
31
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: चीन के दक्षिणपश्चिम सिचुआन प्रांत के बिचुआन काउंटी में 4.3 की तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए। चीन की संवाद समिति शिन्हुआ ने चाइना अर्थक्वेक नेटवर्क्‍स सेंटर के हवाले से बताया कि शनिवार की शाम आए भूकंप का केंद्र जमीन से 18 किलोमीटर नीचे स्थित था।टिप्पणियां बिचुआन पश्चिमोत्तर सिचुआन में स्थित है। बिचुआन 12 मई 2008 को सिचुआन के वेंचुआन काउंटी में आए भूकंप से सबसे अधिक प्रभावित हुआ था जिसमें 87 हजार लोग मारे गए थे या लापता हो गए। भूकंप के झटके सिचुआन की राजधानी चेंगदू से 160 किलोमीटर दूर तक महसूस किए गए। सिचुआन के भूकंप बचाव एवं आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने कहा कि उन्हें अभी हताहत या क्षति की जानकारी नहीं मिली हैं। चीन की संवाद समिति शिन्हुआ ने चाइना अर्थक्वेक नेटवर्क्‍स सेंटर के हवाले से बताया कि शनिवार की शाम आए भूकंप का केंद्र जमीन से 18 किलोमीटर नीचे स्थित था।टिप्पणियां बिचुआन पश्चिमोत्तर सिचुआन में स्थित है। बिचुआन 12 मई 2008 को सिचुआन के वेंचुआन काउंटी में आए भूकंप से सबसे अधिक प्रभावित हुआ था जिसमें 87 हजार लोग मारे गए थे या लापता हो गए। भूकंप के झटके सिचुआन की राजधानी चेंगदू से 160 किलोमीटर दूर तक महसूस किए गए। सिचुआन के भूकंप बचाव एवं आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने कहा कि उन्हें अभी हताहत या क्षति की जानकारी नहीं मिली हैं। बिचुआन पश्चिमोत्तर सिचुआन में स्थित है। बिचुआन 12 मई 2008 को सिचुआन के वेंचुआन काउंटी में आए भूकंप से सबसे अधिक प्रभावित हुआ था जिसमें 87 हजार लोग मारे गए थे या लापता हो गए। भूकंप के झटके सिचुआन की राजधानी चेंगदू से 160 किलोमीटर दूर तक महसूस किए गए। सिचुआन के भूकंप बचाव एवं आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने कहा कि उन्हें अभी हताहत या क्षति की जानकारी नहीं मिली हैं। भूकंप के झटके सिचुआन की राजधानी चेंगदू से 160 किलोमीटर दूर तक महसूस किए गए। सिचुआन के भूकंप बचाव एवं आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने कहा कि उन्हें अभी हताहत या क्षति की जानकारी नहीं मिली हैं।
यह एक सारांश है: चीन के दक्षिणपश्चिम सिचुआन प्रांत के बिचुआन काउंटी में 4.3 की तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए।
16
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: द्वितीय 'भारत अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव' की रोचक गतिविधियों का समापन हो गया है. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने रविवार को 'डीएसटी इंस्पायर' नाम से प्रोग्राम चलाया गया. इसके तहत देश में शोध और नई पद्धति पर जोर दिया गया. पांच दिन तक चले इस विज्ञान महोत्सव में एनपीएल के वैज्ञानिक डॉ.आर.के.कोटनाला और उनकी सहयोगी डॉ.ज्योति शाह के एक आविष्कार ने लोगों का ध्यान खींचा. 'हाइड्रोइलेक्ट्रिक सेल्स' के सहारे सामान्य कमरे के तापमान पर पानी से बिजली पैदा की जा सकती है. इस प्रणाली में नैनोपोरस मैग्नीशियम फेराइट से पानी को हाइड्रोनियम (एच30) और हाइड्रॉक्साइड(ओएच) में तोड़ा जाता है, फिर चांदी और जस्ता इलेक्ट्रोड से इसे सेल की तरह उपयोग कर बिजली उत्पन्न की जाती है. डॉ.कोटनाला ने कहा, "जब हम 2 इंच व्यास के चार सेल्स को सीरीज में जोड़ते हैं, तब इससे 3.6 वोल्ट 80 मिली एम्पियर की बिजली पैदा होती है. इतनी बिजली से हम एलईडी जला सकते हैं." विज्ञान महोत्सव में देश भर के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से आए 600 छात्रों ने अपनी परियोजनाओं की झांकी दिखाई. सभी छात्रों का चयन देश भर के अलग-अलग राज्यों और जिले से हुआ. इनमें से तीन छात्रों को राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार से सम्मानित किया गया. विजेताओं को अगले वर्ष राष्ट्रपति भवन में इन परियोजनाओं को प्रस्तुत करना होगा. 57 छात्रों को सांत्वना पुरस्कार दिया गया. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो.आशुतोष शर्मा ने इस कार्यक्रम का उद्घाटन किया.टिप्पणियां इस बार के विज्ञान महोत्सव का आयोजन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा, सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (एनपीएल) के पूसा रोड स्थित परिसर में किया गया. इसमें विज्ञान आधारित कार्यशाला, मेगा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी शो, अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल, औद्योगिक-अकादमी सहयोग और विशिष्ट विज्ञान विलेज को सम्मिलित किया गया. विज्ञान मेले में 'अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान फिल्म महोत्सव' के दौरान कई फिल्मों का आयोजन किया गया. इस दौरान कई युवा फिल्मकारों को सम्मानित किया गया. कश्मीर के रहने वाले जलालुद्दीन बाबा को उनकी फिल्म 'सेविंग द सेवायर' के लिए पुरस्कृत किया गया. अगले विज्ञान महोत्सव का आयोजन दिल्ली से बाहर किया जाएगा.  डॉ.कोटनाला ने कहा, "जब हम 2 इंच व्यास के चार सेल्स को सीरीज में जोड़ते हैं, तब इससे 3.6 वोल्ट 80 मिली एम्पियर की बिजली पैदा होती है. इतनी बिजली से हम एलईडी जला सकते हैं." विज्ञान महोत्सव में देश भर के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से आए 600 छात्रों ने अपनी परियोजनाओं की झांकी दिखाई. सभी छात्रों का चयन देश भर के अलग-अलग राज्यों और जिले से हुआ. इनमें से तीन छात्रों को राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार से सम्मानित किया गया. विजेताओं को अगले वर्ष राष्ट्रपति भवन में इन परियोजनाओं को प्रस्तुत करना होगा. 57 छात्रों को सांत्वना पुरस्कार दिया गया. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो.आशुतोष शर्मा ने इस कार्यक्रम का उद्घाटन किया.टिप्पणियां इस बार के विज्ञान महोत्सव का आयोजन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा, सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (एनपीएल) के पूसा रोड स्थित परिसर में किया गया. इसमें विज्ञान आधारित कार्यशाला, मेगा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी शो, अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल, औद्योगिक-अकादमी सहयोग और विशिष्ट विज्ञान विलेज को सम्मिलित किया गया. विज्ञान मेले में 'अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान फिल्म महोत्सव' के दौरान कई फिल्मों का आयोजन किया गया. इस दौरान कई युवा फिल्मकारों को सम्मानित किया गया. कश्मीर के रहने वाले जलालुद्दीन बाबा को उनकी फिल्म 'सेविंग द सेवायर' के लिए पुरस्कृत किया गया. अगले विज्ञान महोत्सव का आयोजन दिल्ली से बाहर किया जाएगा.  विज्ञान महोत्सव में देश भर के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से आए 600 छात्रों ने अपनी परियोजनाओं की झांकी दिखाई. सभी छात्रों का चयन देश भर के अलग-अलग राज्यों और जिले से हुआ. इनमें से तीन छात्रों को राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार से सम्मानित किया गया. विजेताओं को अगले वर्ष राष्ट्रपति भवन में इन परियोजनाओं को प्रस्तुत करना होगा. 57 छात्रों को सांत्वना पुरस्कार दिया गया. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो.आशुतोष शर्मा ने इस कार्यक्रम का उद्घाटन किया.टिप्पणियां इस बार के विज्ञान महोत्सव का आयोजन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा, सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (एनपीएल) के पूसा रोड स्थित परिसर में किया गया. इसमें विज्ञान आधारित कार्यशाला, मेगा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी शो, अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल, औद्योगिक-अकादमी सहयोग और विशिष्ट विज्ञान विलेज को सम्मिलित किया गया. विज्ञान मेले में 'अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान फिल्म महोत्सव' के दौरान कई फिल्मों का आयोजन किया गया. इस दौरान कई युवा फिल्मकारों को सम्मानित किया गया. कश्मीर के रहने वाले जलालुद्दीन बाबा को उनकी फिल्म 'सेविंग द सेवायर' के लिए पुरस्कृत किया गया. अगले विज्ञान महोत्सव का आयोजन दिल्ली से बाहर किया जाएगा.  इस बार के विज्ञान महोत्सव का आयोजन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा, सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (एनपीएल) के पूसा रोड स्थित परिसर में किया गया. इसमें विज्ञान आधारित कार्यशाला, मेगा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी शो, अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल, औद्योगिक-अकादमी सहयोग और विशिष्ट विज्ञान विलेज को सम्मिलित किया गया. विज्ञान मेले में 'अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान फिल्म महोत्सव' के दौरान कई फिल्मों का आयोजन किया गया. इस दौरान कई युवा फिल्मकारों को सम्मानित किया गया. कश्मीर के रहने वाले जलालुद्दीन बाबा को उनकी फिल्म 'सेविंग द सेवायर' के लिए पुरस्कृत किया गया. अगले विज्ञान महोत्सव का आयोजन दिल्ली से बाहर किया जाएगा.  विज्ञान मेले में 'अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान फिल्म महोत्सव' के दौरान कई फिल्मों का आयोजन किया गया. इस दौरान कई युवा फिल्मकारों को सम्मानित किया गया. कश्मीर के रहने वाले जलालुद्दीन बाबा को उनकी फिल्म 'सेविंग द सेवायर' के लिए पुरस्कृत किया गया. अगले विज्ञान महोत्सव का आयोजन दिल्ली से बाहर किया जाएगा.
सारांश: यूनेस्को ने माना भारतीय वैज्ञानिका आशुतोष का लोहा भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रोफेसर हैं आशुतोष आशुताष शर्मा ने पानी की बूंद से तैयार की है बिजली
7
['hin']
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: ऑस्ट्रेलियाई कप्तान माइकल क्लार्क भले ही सचिन तेंदुलकर की बल्लेबाजी का भरपूर लुत्फ उठाते हैं, लेकिन भारत के खिलाफ चार टेस्ट मैचों की शृंखला में उनकी प्राथमिकता इस स्टार बल्लेबाज को ज्यादा रन बनाने से रोकना होगी। क्लार्क ने कहा, आप सचिन तेंदुलकर के लिए जितने संभव हो, उतनी रणनीति बना सकते हैं, लेकिन वह महान खिलाड़ी हैं। मैंने जितने खिलाड़ी देखे हैं, उनमें वह महानतम हैं और मुझे हमेशा उनके खिलाफ खेलने में मजा आया। लंबे समय तक खेलना और लगातार अच्छा प्रदर्शन करना उनकी महानता की निशानी है। उन्होंने कहा, मैंने ईरानी कप मैच में उनका शतक देखा। मैं उनकी बल्लेबाजी का मजा लेता हूं, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई कप्तान होने के नाते मैं यह सुनिश्चित करना चाहूंगा कि वह अधिक रन नहीं बनाएं। ऑस्ट्रेलियाई कप्तान को खुशी है कि उनकी टीम को इस शृंखला में राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण को गेंदबाजी नहीं करनी होगी, जो पहले उनके खिलाफ अच्छा प्रदर्शन करते रहे हैं। क्लार्क का मानना है कि भारत के युवा खिलाड़ी इस शृंखला में अपनी छाप छोड़ना चाहेंगे। उन्होंने कहा, हमारे लिए यह अच्छा है कि राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण जैसे महान खिलाड़ियों ने संन्यास ले लिया है। यह अच्छा है कि हमारे गेंदबाजों को उन्हें गेंदबाजी नहीं करनी पड़ेगी, लेकिन नए खिलाड़ी भी अपनी छाप छोड़ना चाहेंगे। क्लार्क से पूछा गया कि क्या वह इंग्लैंड के भारत में प्रदर्शन से प्रेरणा लेना चाहेंगे, उन्होंने कहा, हमारे कई खिलाड़ियों ने उस सीरीज के मैच देखे थे, लेकिन हम जानते हैं कि भारत की टीम कितनी मजबूत है। जिस टीम में सचिन तेंदुलकर जैसा खिलाड़ी हो, उसे उसकी सरजमीं पर हराना आसान नहीं है। लेकिन मैंने उपमहाद्वीप में खेलने को लेकर एक बात सीखी है कि चाहे आप नंबर एक गेंदबाज हो या अपना पहला मैच खेल रहे हो, संयम और निरंतरता आप की सफलता की कुंजी होगी।टिप्पणियां क्लार्क ने स्वीकार किया कि भारत के खिलाफ टेस्ट शृंखला में ऑस्ट्रेलिया की सफलता इस पर निर्भर करती है कि हम कैसे स्पिन खेलते हैं और कैसे स्पिन करते हैं। उन्होंने कहा, उनके पास अश्विन, ओझा, जडेजा हैं और मैं जानता हूं कि हरभजन की टीम में वापसी हुई है। उनके पास प्रतिभा की कमी नहीं है। हमें अश्विन पर करीबी नजर रखनी होगी, क्योंकि वह गेंद और बल्ले दोनों से अच्छा प्रदर्शन करता है। क्लार्क इस बात से सहमत नहीं थे कि उनकी स्पिन तिकड़ी नाथन लियोन, जेवियर डोहर्टी और ग्लेन मैक्सवेल इंग्लैंड के ग्रीम स्वान और मोंटी पनेसर की तुलना में कमजोर है। उन्होंने कहा, मैं वास्तव में उत्साहित हूं कि हमारे पास लियोन, डोहर्टी और मैक्सवेल जैसे स्पिनर हैं। वे इस तरह की परिस्थितियों में निश्चित तौर पर अच्छा प्रदर्शन करेंगे। क्लार्क ने कहा, आप सचिन तेंदुलकर के लिए जितने संभव हो, उतनी रणनीति बना सकते हैं, लेकिन वह महान खिलाड़ी हैं। मैंने जितने खिलाड़ी देखे हैं, उनमें वह महानतम हैं और मुझे हमेशा उनके खिलाफ खेलने में मजा आया। लंबे समय तक खेलना और लगातार अच्छा प्रदर्शन करना उनकी महानता की निशानी है। उन्होंने कहा, मैंने ईरानी कप मैच में उनका शतक देखा। मैं उनकी बल्लेबाजी का मजा लेता हूं, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई कप्तान होने के नाते मैं यह सुनिश्चित करना चाहूंगा कि वह अधिक रन नहीं बनाएं। ऑस्ट्रेलियाई कप्तान को खुशी है कि उनकी टीम को इस शृंखला में राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण को गेंदबाजी नहीं करनी होगी, जो पहले उनके खिलाफ अच्छा प्रदर्शन करते रहे हैं। क्लार्क का मानना है कि भारत के युवा खिलाड़ी इस शृंखला में अपनी छाप छोड़ना चाहेंगे। उन्होंने कहा, हमारे लिए यह अच्छा है कि राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण जैसे महान खिलाड़ियों ने संन्यास ले लिया है। यह अच्छा है कि हमारे गेंदबाजों को उन्हें गेंदबाजी नहीं करनी पड़ेगी, लेकिन नए खिलाड़ी भी अपनी छाप छोड़ना चाहेंगे। क्लार्क से पूछा गया कि क्या वह इंग्लैंड के भारत में प्रदर्शन से प्रेरणा लेना चाहेंगे, उन्होंने कहा, हमारे कई खिलाड़ियों ने उस सीरीज के मैच देखे थे, लेकिन हम जानते हैं कि भारत की टीम कितनी मजबूत है। जिस टीम में सचिन तेंदुलकर जैसा खिलाड़ी हो, उसे उसकी सरजमीं पर हराना आसान नहीं है। लेकिन मैंने उपमहाद्वीप में खेलने को लेकर एक बात सीखी है कि चाहे आप नंबर एक गेंदबाज हो या अपना पहला मैच खेल रहे हो, संयम और निरंतरता आप की सफलता की कुंजी होगी।टिप्पणियां क्लार्क ने स्वीकार किया कि भारत के खिलाफ टेस्ट शृंखला में ऑस्ट्रेलिया की सफलता इस पर निर्भर करती है कि हम कैसे स्पिन खेलते हैं और कैसे स्पिन करते हैं। उन्होंने कहा, उनके पास अश्विन, ओझा, जडेजा हैं और मैं जानता हूं कि हरभजन की टीम में वापसी हुई है। उनके पास प्रतिभा की कमी नहीं है। हमें अश्विन पर करीबी नजर रखनी होगी, क्योंकि वह गेंद और बल्ले दोनों से अच्छा प्रदर्शन करता है। क्लार्क इस बात से सहमत नहीं थे कि उनकी स्पिन तिकड़ी नाथन लियोन, जेवियर डोहर्टी और ग्लेन मैक्सवेल इंग्लैंड के ग्रीम स्वान और मोंटी पनेसर की तुलना में कमजोर है। उन्होंने कहा, मैं वास्तव में उत्साहित हूं कि हमारे पास लियोन, डोहर्टी और मैक्सवेल जैसे स्पिनर हैं। वे इस तरह की परिस्थितियों में निश्चित तौर पर अच्छा प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा, मैंने ईरानी कप मैच में उनका शतक देखा। मैं उनकी बल्लेबाजी का मजा लेता हूं, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई कप्तान होने के नाते मैं यह सुनिश्चित करना चाहूंगा कि वह अधिक रन नहीं बनाएं। ऑस्ट्रेलियाई कप्तान को खुशी है कि उनकी टीम को इस शृंखला में राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण को गेंदबाजी नहीं करनी होगी, जो पहले उनके खिलाफ अच्छा प्रदर्शन करते रहे हैं। क्लार्क का मानना है कि भारत के युवा खिलाड़ी इस शृंखला में अपनी छाप छोड़ना चाहेंगे। उन्होंने कहा, हमारे लिए यह अच्छा है कि राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण जैसे महान खिलाड़ियों ने संन्यास ले लिया है। यह अच्छा है कि हमारे गेंदबाजों को उन्हें गेंदबाजी नहीं करनी पड़ेगी, लेकिन नए खिलाड़ी भी अपनी छाप छोड़ना चाहेंगे। क्लार्क से पूछा गया कि क्या वह इंग्लैंड के भारत में प्रदर्शन से प्रेरणा लेना चाहेंगे, उन्होंने कहा, हमारे कई खिलाड़ियों ने उस सीरीज के मैच देखे थे, लेकिन हम जानते हैं कि भारत की टीम कितनी मजबूत है। जिस टीम में सचिन तेंदुलकर जैसा खिलाड़ी हो, उसे उसकी सरजमीं पर हराना आसान नहीं है। लेकिन मैंने उपमहाद्वीप में खेलने को लेकर एक बात सीखी है कि चाहे आप नंबर एक गेंदबाज हो या अपना पहला मैच खेल रहे हो, संयम और निरंतरता आप की सफलता की कुंजी होगी।टिप्पणियां क्लार्क ने स्वीकार किया कि भारत के खिलाफ टेस्ट शृंखला में ऑस्ट्रेलिया की सफलता इस पर निर्भर करती है कि हम कैसे स्पिन खेलते हैं और कैसे स्पिन करते हैं। उन्होंने कहा, उनके पास अश्विन, ओझा, जडेजा हैं और मैं जानता हूं कि हरभजन की टीम में वापसी हुई है। उनके पास प्रतिभा की कमी नहीं है। हमें अश्विन पर करीबी नजर रखनी होगी, क्योंकि वह गेंद और बल्ले दोनों से अच्छा प्रदर्शन करता है। क्लार्क इस बात से सहमत नहीं थे कि उनकी स्पिन तिकड़ी नाथन लियोन, जेवियर डोहर्टी और ग्लेन मैक्सवेल इंग्लैंड के ग्रीम स्वान और मोंटी पनेसर की तुलना में कमजोर है। उन्होंने कहा, मैं वास्तव में उत्साहित हूं कि हमारे पास लियोन, डोहर्टी और मैक्सवेल जैसे स्पिनर हैं। वे इस तरह की परिस्थितियों में निश्चित तौर पर अच्छा प्रदर्शन करेंगे। क्लार्क का मानना है कि भारत के युवा खिलाड़ी इस शृंखला में अपनी छाप छोड़ना चाहेंगे। उन्होंने कहा, हमारे लिए यह अच्छा है कि राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण जैसे महान खिलाड़ियों ने संन्यास ले लिया है। यह अच्छा है कि हमारे गेंदबाजों को उन्हें गेंदबाजी नहीं करनी पड़ेगी, लेकिन नए खिलाड़ी भी अपनी छाप छोड़ना चाहेंगे। क्लार्क से पूछा गया कि क्या वह इंग्लैंड के भारत में प्रदर्शन से प्रेरणा लेना चाहेंगे, उन्होंने कहा, हमारे कई खिलाड़ियों ने उस सीरीज के मैच देखे थे, लेकिन हम जानते हैं कि भारत की टीम कितनी मजबूत है। जिस टीम में सचिन तेंदुलकर जैसा खिलाड़ी हो, उसे उसकी सरजमीं पर हराना आसान नहीं है। लेकिन मैंने उपमहाद्वीप में खेलने को लेकर एक बात सीखी है कि चाहे आप नंबर एक गेंदबाज हो या अपना पहला मैच खेल रहे हो, संयम और निरंतरता आप की सफलता की कुंजी होगी।टिप्पणियां क्लार्क ने स्वीकार किया कि भारत के खिलाफ टेस्ट शृंखला में ऑस्ट्रेलिया की सफलता इस पर निर्भर करती है कि हम कैसे स्पिन खेलते हैं और कैसे स्पिन करते हैं। उन्होंने कहा, उनके पास अश्विन, ओझा, जडेजा हैं और मैं जानता हूं कि हरभजन की टीम में वापसी हुई है। उनके पास प्रतिभा की कमी नहीं है। हमें अश्विन पर करीबी नजर रखनी होगी, क्योंकि वह गेंद और बल्ले दोनों से अच्छा प्रदर्शन करता है। क्लार्क इस बात से सहमत नहीं थे कि उनकी स्पिन तिकड़ी नाथन लियोन, जेवियर डोहर्टी और ग्लेन मैक्सवेल इंग्लैंड के ग्रीम स्वान और मोंटी पनेसर की तुलना में कमजोर है। उन्होंने कहा, मैं वास्तव में उत्साहित हूं कि हमारे पास लियोन, डोहर्टी और मैक्सवेल जैसे स्पिनर हैं। वे इस तरह की परिस्थितियों में निश्चित तौर पर अच्छा प्रदर्शन करेंगे। क्लार्क से पूछा गया कि क्या वह इंग्लैंड के भारत में प्रदर्शन से प्रेरणा लेना चाहेंगे, उन्होंने कहा, हमारे कई खिलाड़ियों ने उस सीरीज के मैच देखे थे, लेकिन हम जानते हैं कि भारत की टीम कितनी मजबूत है। जिस टीम में सचिन तेंदुलकर जैसा खिलाड़ी हो, उसे उसकी सरजमीं पर हराना आसान नहीं है। लेकिन मैंने उपमहाद्वीप में खेलने को लेकर एक बात सीखी है कि चाहे आप नंबर एक गेंदबाज हो या अपना पहला मैच खेल रहे हो, संयम और निरंतरता आप की सफलता की कुंजी होगी।टिप्पणियां क्लार्क ने स्वीकार किया कि भारत के खिलाफ टेस्ट शृंखला में ऑस्ट्रेलिया की सफलता इस पर निर्भर करती है कि हम कैसे स्पिन खेलते हैं और कैसे स्पिन करते हैं। उन्होंने कहा, उनके पास अश्विन, ओझा, जडेजा हैं और मैं जानता हूं कि हरभजन की टीम में वापसी हुई है। उनके पास प्रतिभा की कमी नहीं है। हमें अश्विन पर करीबी नजर रखनी होगी, क्योंकि वह गेंद और बल्ले दोनों से अच्छा प्रदर्शन करता है। क्लार्क इस बात से सहमत नहीं थे कि उनकी स्पिन तिकड़ी नाथन लियोन, जेवियर डोहर्टी और ग्लेन मैक्सवेल इंग्लैंड के ग्रीम स्वान और मोंटी पनेसर की तुलना में कमजोर है। उन्होंने कहा, मैं वास्तव में उत्साहित हूं कि हमारे पास लियोन, डोहर्टी और मैक्सवेल जैसे स्पिनर हैं। वे इस तरह की परिस्थितियों में निश्चित तौर पर अच्छा प्रदर्शन करेंगे। क्लार्क ने स्वीकार किया कि भारत के खिलाफ टेस्ट शृंखला में ऑस्ट्रेलिया की सफलता इस पर निर्भर करती है कि हम कैसे स्पिन खेलते हैं और कैसे स्पिन करते हैं। उन्होंने कहा, उनके पास अश्विन, ओझा, जडेजा हैं और मैं जानता हूं कि हरभजन की टीम में वापसी हुई है। उनके पास प्रतिभा की कमी नहीं है। हमें अश्विन पर करीबी नजर रखनी होगी, क्योंकि वह गेंद और बल्ले दोनों से अच्छा प्रदर्शन करता है। क्लार्क इस बात से सहमत नहीं थे कि उनकी स्पिन तिकड़ी नाथन लियोन, जेवियर डोहर्टी और ग्लेन मैक्सवेल इंग्लैंड के ग्रीम स्वान और मोंटी पनेसर की तुलना में कमजोर है। उन्होंने कहा, मैं वास्तव में उत्साहित हूं कि हमारे पास लियोन, डोहर्टी और मैक्सवेल जैसे स्पिनर हैं। वे इस तरह की परिस्थितियों में निश्चित तौर पर अच्छा प्रदर्शन करेंगे। क्लार्क इस बात से सहमत नहीं थे कि उनकी स्पिन तिकड़ी नाथन लियोन, जेवियर डोहर्टी और ग्लेन मैक्सवेल इंग्लैंड के ग्रीम स्वान और मोंटी पनेसर की तुलना में कमजोर है। उन्होंने कहा, मैं वास्तव में उत्साहित हूं कि हमारे पास लियोन, डोहर्टी और मैक्सवेल जैसे स्पिनर हैं। वे इस तरह की परिस्थितियों में निश्चित तौर पर अच्छा प्रदर्शन करेंगे।
सारांश: ऑस्ट्रेलियाई कप्तान माइकल क्लार्क भले ही सचिन तेंदुलकर की बल्लेबाजी का भरपूर लुत्फ उठाते हैं, लेकिन भारत के खिलाफ चार टेस्ट मैचों की शृंखला में उनकी प्राथमिकता इस स्टार बल्लेबाज को ज्यादा रन बनाने से रोकना होगी।
20
['hin']
एक सारांश बनाओ: जेसिका लाल हत्याकांड में झूठी गवाही देने को लेकर मॉडल शायन मुंशी पर मुकदमा चलेगा। दिल्ली हाईकोर्ट ने एफएसएल के अधिकारी प्रेम सागर मनोचा पर भी केस चलाने के आदेश दिए हैं हालांकि इस मामले में अपने बयान से मुकरने वाले बाकी 17 लोगों पर मुकदमा नहीं चलेगा।टिप्पणियां कोर्ट ने इस मामले में खुद संज्ञान लिया था और अभियोजन पक्ष से सवाल किया था कि सभी गवाहों ने सुनवाई के दौरान अपना रुख कैसे बदल लिया। 4 मई 2011 को हाइकोर्ट ने पुलिस और बयान से मुकरने वाले आरोपी गवाहों की जिरह सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था। जेसिका की अप्रैल 1999 में हरियाणा कांग्रेस के नेता विनोद शर्मा के बेटे मनु शर्मा ने गोली मारकर हत्या कर दी थी क्योंकि जेसिका ने एक पार्टी में उसे शराब देने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने इस मामले में खुद संज्ञान लिया था और अभियोजन पक्ष से सवाल किया था कि सभी गवाहों ने सुनवाई के दौरान अपना रुख कैसे बदल लिया। 4 मई 2011 को हाइकोर्ट ने पुलिस और बयान से मुकरने वाले आरोपी गवाहों की जिरह सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था। जेसिका की अप्रैल 1999 में हरियाणा कांग्रेस के नेता विनोद शर्मा के बेटे मनु शर्मा ने गोली मारकर हत्या कर दी थी क्योंकि जेसिका ने एक पार्टी में उसे शराब देने से इनकार कर दिया था। 4 मई 2011 को हाइकोर्ट ने पुलिस और बयान से मुकरने वाले आरोपी गवाहों की जिरह सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था। जेसिका की अप्रैल 1999 में हरियाणा कांग्रेस के नेता विनोद शर्मा के बेटे मनु शर्मा ने गोली मारकर हत्या कर दी थी क्योंकि जेसिका ने एक पार्टी में उसे शराब देने से इनकार कर दिया था।
सारांश: दिल्ली हाईकोर्ट ने जेसिका लाल हत्याकांड के मामले की सुनवाई के दौरान अपने बयान से कथित तौर पर मुकरने वाले मॉडल शायन मुंशी और प्रेमसागर मनोचा पर केस चलाने का फैसला किया है।
5
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: भारत के टेबल टेनिस खिलाड़ी एंथोनी अमलराज ब्राजील ओपन टेबल टेनिस टूर्नामेंट के फाइनल में हार गए हैं. उन्हें फाइनल मुकाबले में ब्राजील के काल्ड्रामो हुगो ने 1-4 (12-14, 11-9, 7-11, 7-11, 5-11) से हराकर खिताब जीती. इससे पहले, चिली ओपन के फाइनल में अमलराज को हमवतन खिलाड़ी सौम्यजीत घोष ने मात दी थी, लेकिन वह घोष के साथ इस टूर्नामेंट के पुरुष युगल वर्ग का खिताब जीतने में सफल रहे. ब्राजील ओपन में आठवें वरीय अमलराज को पहले गेम में हुगो ने 12-14 से हराया. इसके बाद दूसरे गेम में अच्छा प्रदर्शन कर अमलराज ने 11-9 से जीत हासिल की लेकिन इसके बाद वह लय हासिल नहीं कर पाए और लगातार तीन गेम हार गए. अमलराज को भले ही दोनों टूर्नामेंटों के फाइनल में हार का सामना करना पड़ा हो, लेकिन इन प्रतियोगिताओं का अनुभव उनके लिए किसी जीत से कम नहीं है. चिली ओपन में उन्होंने तीसरे वरीय और ब्राजील ओपन में आठवें वरीय रहते हुए अपनी प्रतिस्पर्धाओं की शुरुआत की थी.टिप्पणियां अमलराज ने कहा, "ब्राजील ओपन शानदार रहा. फाइनल मैच मेरे लिए बहुत मुश्किल था और सेमीफाइनल भी. हुगो शनदार फॉर्म में थे और उनके खिलाफ प्रतिस्पर्धा आसान नहीं थी, लेकिन मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दिया." (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) ब्राजील ओपन में आठवें वरीय अमलराज को पहले गेम में हुगो ने 12-14 से हराया. इसके बाद दूसरे गेम में अच्छा प्रदर्शन कर अमलराज ने 11-9 से जीत हासिल की लेकिन इसके बाद वह लय हासिल नहीं कर पाए और लगातार तीन गेम हार गए. अमलराज को भले ही दोनों टूर्नामेंटों के फाइनल में हार का सामना करना पड़ा हो, लेकिन इन प्रतियोगिताओं का अनुभव उनके लिए किसी जीत से कम नहीं है. चिली ओपन में उन्होंने तीसरे वरीय और ब्राजील ओपन में आठवें वरीय रहते हुए अपनी प्रतिस्पर्धाओं की शुरुआत की थी.टिप्पणियां अमलराज ने कहा, "ब्राजील ओपन शानदार रहा. फाइनल मैच मेरे लिए बहुत मुश्किल था और सेमीफाइनल भी. हुगो शनदार फॉर्म में थे और उनके खिलाफ प्रतिस्पर्धा आसान नहीं थी, लेकिन मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दिया." (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) अमलराज ने कहा, "ब्राजील ओपन शानदार रहा. फाइनल मैच मेरे लिए बहुत मुश्किल था और सेमीफाइनल भी. हुगो शनदार फॉर्म में थे और उनके खिलाफ प्रतिस्पर्धा आसान नहीं थी, लेकिन मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दिया." (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
यह एक सारांश है: फाइनल में ब्राजील के काल्ड्रामो हुगो ने पराजित किया हार के बाद अमलराज बोले-अपनी ओर से सर्वश्रेष्‍ठ प्रदर्शन दिया अमलराज ने सौम्‍यजीत के साथ डबल्‍स खिताब जीता
16
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: आम आदमी पार्टी ने शुक्रवार को दावा किया कि पूर्वी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से भाजपा के प्रत्याशी गौतम गंभीर का नाम मतदाता सूची में दो बार दर्ज है और आप ने उनके खिलाफ इस मामले में तीस हजारी अदालत में आपराधिक शिकायत दर्ज की है. पूर्वी दिल्ली से आप की उम्मीदवार आतिशी ने कहा कि यह आपराधिक मामला है और गंभीर को तत्काल अयोग्य करार दिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘‘हमने इस मामले में गंभीर के खिलाफ तीस हजारी अदालत में आपराधिक शिकायत दर्ज कराई है.'' आतिशी ने आरोप लगाया कि गंभीर के पास राजेंद्र नगर और करोल बाग के दो मतदाता पहचान पत्र हैं और उन्हें इस अपराध के लिए एक साल तक की कैद की सजा का सामना करना पड़ सकता है. क्रिकेट से राजनीति में आये गंभीर की तरफ से इस मामले में अभी प्रतिक्रिया नहीं मिली है. बता दें, दिल्ली में बीजेपी के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ रहे पूर्व क्रिकेटर गौतम गंभीर सालाना कमाई के मामले में सबसे अमीर उम्मीदवार हैं. नामांकन के दौरान लगाए गए हलफनामे से इसका पता चलता है. क्रिकेट के ग्राउंड से पहली बार राजनीति के मैदान में उतरे गौतम गंभीर की सालाना कमाई 12 करोड़ रुपये से अधिक है. पूर्वी दिल्ली से बीजेपी उम्मीदवार गौतम गंभीर के खिलाफ आम आदमी पार्टी ने आतिशी मार्लेना को चुनाव मैदान में उतारा है.  गंभीर ने 2017-18 में भरे गए इनकम टैक्स रिटर्न मुताबिक अपनी वार्षिक कमाई 12.4 करोड़ रुपये दिखाई है.वहीं दिल्ली उत्तर-पश्चिम सीट से बीजेपी के घोषित उम्मीदवार हंसराज हंस करीब 9.28 लाख रुपये सालाना कमाते हैं. यह विवरण 2017-18 में भरे आइटी रिटर्न के अनुसार है.
यहाँ एक सारांश है:गौतम गंभीर पर आरोप अतिशी ने दर्ज की शिकायत ये है पूरा मामला
18
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: पाकिस्तान की ओर से समझौता एक्सप्रेस बंद करने के बाद अब भारतीय रेलवे ने भी इसे अपनी ओर से बंद कर दिया है. रेलवे ने रविवार को घोषणा की कि अंतरराष्ट्रीय सीमा तक समझौता एक्सप्रेस ट्रेन का परिचालन बंद कर दिया गया है. उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी दीपक कुमार ने कहा, “लाहौर और अटारी के बीच चलने वाली समझौता एक्सप्रेस 14607/ 14608 को रद्द किए जाने के पाकिस्तान के फैसले के परिणामस्वरूप दिल्ली से अटारी के बीच चलने वाली लिंक एक्सप्रेस ट्रेन संख्या 14001/14002 भी रद्द की जाती है.” अधिकारियों ने बताया कि रविवार की सेवा के लिए दो यात्रियों ने टिकट बुक कराये थे.  इससे पहले गुरुवार को पाकिस्तान ने अपने क्षेत्र में इस ट्रेन की सेवाएं रोक दी थी. पाकिस्तान के रेल मंत्री शेख राशिद ने  समझौता एक्सप्रेस ट्रेन को रद्द करने का ऐलान किया था. गुरुवार को पाकिस्तान ने वाघा बॉर्डर पर इसे रोक दिया गया और अपने ट्रेन ड्राइवर और गार्ड को समझौता एक्सप्रेस के साथ भारत भेजने से मना कर दिया था बता दें भारतीय रेलवे दिल्ली से अटारी और अटारी से दिल्ली के बीच इस ट्रेन का परिचालन करता था जबकि पाकिस्तान में यह ट्रेन लाहौर से अटारी के बीच चलाई जाती थी. यात्री अटारी स्टेशन पर ट्रेन बदलते थे.
संक्षिप्त सारांश: भारत ने पाकिस्तान को दिया करार जवाब भारतीय रेलवे ने भी सस्पेंड की समझौता एक्सप्रेस गुरुवार को पाकिस्तान ने बंद किया था परिचालन
0
['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: बल्लेबाजों के लिए कब्रगाह बनी रिलायंस स्टेडियम की पिच पर पिनाल शाह की नाबाद 72 रन की कप्तानी पारी से बड़ौदा रणजी ट्रॉफी के दूसरे सेमीफाइनल में कर्नाटक पर पहली पारी में महत्वपूर्ण बढ़त हासिल करने में सफल रहा। कप्तान पिनाल ने ऐसे विकेट पर साहसिक बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया, जिस पर कर्नाटक की पूरी टीम टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए केवल 44.2 ओवर में 107 रन पर ढेर हो गई थी। बड़ौदा के बल्लेबाजों को भी पिच से सामंजस्य बिठाने में परेशानी हुई, लेकिन विकेटकीपर बल्लेबाज पिनाल की बेहतरीन पारी से उसने पहले दिन का खेल समाप्त होने तक आठ विकेट पर 133 रन बनाकर 26 रन की बढ़त हासिल कर ली है। विकेट शुरू से ही गेंदबाजों को मदद दे रहा था और इस पर दिन भर में 18 विकेट उखड़े। यदि पिनाल की पारी को छोड़ दिया जाए तो दिन भर में केवल गेंदबाजों का बोलबाला रहा। बड़ौदा की तरफ से यदि मुर्तजा वाहोरा ने 34 रन देकर पांच और भार्गव भट ने 33 रन देकर तीन विकेट लेकर कर्नाटक को सस्ते में ढेर करने में अहम भूमिका निभाई, तो कर्नाटक की तरफ से यह काम अनुभवी सुनील जोशी (46 रन पर चार विकेट) ने किया। उनके अलावा अभिमन्यु मिथुन को दो विकेट मिले हैं। पिनाल की पारी हालांकि दोनों टीमों के बीच अंतर पैदा कर गई। उन्होंने तब क्रीज पर कदम रखा, जबकि बड़ौदा का स्कोर चार विकेट पर 30 रन था। उन्होंने बिना किसी दबाव के बल्लेबाजी और अब तक अपनी पारी में 97 गेंद का सामना करके पांच चौके और एक छक्का लगाया है। उनके अलावा बड़ौदा की तरफ से केवल जयकिशन कोलसावाला (18) ही दोहरे अंक में पहुंच पाए।
दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: पिनाल शाह की नाबाद 72 रन की कप्तानी पारी से बड़ौदा रणजी ट्रॉफी के दूसरे सेमीफाइनल में कर्नाटक पर पहली पारी में महत्वपूर्ण बढ़त हासिल करने में सफल रहा।
3
['hin']
इस पाठ का सारांश बनाएं: पाकिस्तानी अभिनेत्री वीना मलिक को अगर अमिताभ बच्चन सरीखा कोई पुरुष मिले तो वह उससे शादी करने में जरा भी नहीं सोचेंगी। वीना इन दिनों भारतीय टेलीविजन पर अपने रिएलिटी कार्यक्रम 'वीना का विवाह' को लेकर चर्चा में हैं। वीना ने टेलीविजन टॉक-शो 'मूवर्स एंड शेकर्स' में कहा, "मुझे अगर कोई ऐसा इंसान मिल जाए, जिसमें अमिताभ जैसी कोई एक खूबी भी हो तो मुझे उससे विवाह करने में कोई दिक्कत नहीं। मैं चाहती हूं कि मेरे होने वाले जीवनसाथी की आवाज और व्यक्तित्व अमिताभ जैसी हो।"टिप्पणियां वीना हमेशा विवादों में घिरी रहती हैं। इस बारे में पूछे जाने पर वीना ने कहा कि वह लोगों को सम्भालना अच्छी तरह जानती हैं। वीना ने कहा, "बाहरी चीजें मुझे पर असर नहीं डाल सकतीं। मैं अपनी खुशी और गम के लिए खुद उत्तरदायी हूं। मेरे आसपास की कोई भी घटना मुझ पर असर नहीं डाल सकती।" वीना इन दिनों भारतीय टेलीविजन पर अपने रिएलिटी कार्यक्रम 'वीना का विवाह' को लेकर चर्चा में हैं। वीना ने टेलीविजन टॉक-शो 'मूवर्स एंड शेकर्स' में कहा, "मुझे अगर कोई ऐसा इंसान मिल जाए, जिसमें अमिताभ जैसी कोई एक खूबी भी हो तो मुझे उससे विवाह करने में कोई दिक्कत नहीं। मैं चाहती हूं कि मेरे होने वाले जीवनसाथी की आवाज और व्यक्तित्व अमिताभ जैसी हो।"टिप्पणियां वीना हमेशा विवादों में घिरी रहती हैं। इस बारे में पूछे जाने पर वीना ने कहा कि वह लोगों को सम्भालना अच्छी तरह जानती हैं। वीना ने कहा, "बाहरी चीजें मुझे पर असर नहीं डाल सकतीं। मैं अपनी खुशी और गम के लिए खुद उत्तरदायी हूं। मेरे आसपास की कोई भी घटना मुझ पर असर नहीं डाल सकती।" वीना ने टेलीविजन टॉक-शो 'मूवर्स एंड शेकर्स' में कहा, "मुझे अगर कोई ऐसा इंसान मिल जाए, जिसमें अमिताभ जैसी कोई एक खूबी भी हो तो मुझे उससे विवाह करने में कोई दिक्कत नहीं। मैं चाहती हूं कि मेरे होने वाले जीवनसाथी की आवाज और व्यक्तित्व अमिताभ जैसी हो।"टिप्पणियां वीना हमेशा विवादों में घिरी रहती हैं। इस बारे में पूछे जाने पर वीना ने कहा कि वह लोगों को सम्भालना अच्छी तरह जानती हैं। वीना ने कहा, "बाहरी चीजें मुझे पर असर नहीं डाल सकतीं। मैं अपनी खुशी और गम के लिए खुद उत्तरदायी हूं। मेरे आसपास की कोई भी घटना मुझ पर असर नहीं डाल सकती।" वीना हमेशा विवादों में घिरी रहती हैं। इस बारे में पूछे जाने पर वीना ने कहा कि वह लोगों को सम्भालना अच्छी तरह जानती हैं। वीना ने कहा, "बाहरी चीजें मुझे पर असर नहीं डाल सकतीं। मैं अपनी खुशी और गम के लिए खुद उत्तरदायी हूं। मेरे आसपास की कोई भी घटना मुझ पर असर नहीं डाल सकती।" वीना ने कहा, "बाहरी चीजें मुझे पर असर नहीं डाल सकतीं। मैं अपनी खुशी और गम के लिए खुद उत्तरदायी हूं। मेरे आसपास की कोई भी घटना मुझ पर असर नहीं डाल सकती।"
संक्षिप्त पाठ: पाकिस्तानी अभिनेत्री वीना मलिक को अगर अमिताभ बच्चन सरीखा कोई पुरुष मिले तो वह उससे शादी करने में जरा भी नहीं सोचेंगी।
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['hin']
इस पाठ का सारांश बनाओ: जरा सोचिए, आपसे कोई कहे कि दुनिया में एक ऐसी जगह है जहां हीरे यूं ही पड़े रहते हैं, तो शायद ही आप यकीन करें. आपको जानकर ताज्जुब होगा कि अमेरिका में एक ऐसी है जहां से कोई भी हीरा ला सकता है. इससे भी ज्यादा दिलचस्प बात यह है कि यहां जिस शख्स को हीरा मिल जाए वह उसका मालिक हो जाता है. इसके लिए उसे सरकार या किसी और को कोई टैक्स नहीं देना पड़ता है. दरअसल, अमेरिका के अरकांसास स्टेट में हीरे के खादान हैं, यहां किसी को जाने की इजाजत होती है. पहली नजर में अरकांसास नेशनल पार्क में मौजूद ये खदान किसी खेत की तरह दिखते हैं. 37.5 एकड़ में फैली इस खदान के पास जाएंगे तो यहां यूं ही आपको करोड़ों के हीरे पड़े हुए मिल जाएंगे.सीएनएन की खबर के मुताबिक इसी साल मार्च में एक 14 वर्षीय युवक कालेल लैंडफोर्ड को 7.44 कैरेट को हीरा मिला था. इससे भी ज्यादा हैरत की बात यह है कि इतने बड़े हीरे को पाने के लिए युवक को महज 30 मिनट यानी आधे घंटे की मेहनत करनी पड़ी. कालेल ने बताया कि वह यहां से गुजर रहा था तभी उसकी नजर भूरे रंग के एक पत्थर पर पड़ी, लेकिन पास जाकर देखा तो लगा कोई खास चीज है.  टिप्पणियां इनसे पहले अक्टूबर 2016 में डेन फ्रेडरिक और उनकी बेटी ने यहां से  2.03 कैरेट का हीरा ढूंढा था. ये दोनों भी यहां पहली बार आए थे. जून 2015  में यहां घूमने आए एक शख्स को  8.52 कैरेट का हीरा मिला था. अप्रैल 2015 में ही सुसी क्लार्क को यहां शाम को घुमने के दौरान 3.69 कैरेट का हीरा मिला था. इसके अलावा फरवरी 2015 में ही डीन फिलपुला को  2.01 कैरेट का हीरा मिला था.  बताया जाता है कि अमेरिका के इस इलाके से अब तक 75, 000 हीरे मिल चुके हैं. पहली बार 1906 में यहां से हीरा मिला था. 1906 में जॉन हडलेस्टोन नामक आदमी को इसी जगह दो चमकते हुए क्रिस्टल मिले. दोनों क्रिस्टल की जांच करवाई गई तो पता चला कि ये कीमती हीरा हैं. इसके बाद इस जगह का नाम द क्रेटर ऑफ डायमंड रखा गया. इसके बाद जॉन ने अपनी 243 एकड़ जमीन डायमंड कंपनी को ऊंची कीमत पर बेच दिया. साल 1972 में यह जमीन नेशनल पार्क में आ गई. 1906 से ही इस जमीन को डायमंड उत्पादन क्षेत्र बनाने की कोशिशें की जाती रहीं, लेकिन इसे आम लोगों के लिए खोल दिया गया. सीएनएन की खबर के मुताबिक इसी साल मार्च में एक 14 वर्षीय युवक कालेल लैंडफोर्ड को 7.44 कैरेट को हीरा मिला था. इससे भी ज्यादा हैरत की बात यह है कि इतने बड़े हीरे को पाने के लिए युवक को महज 30 मिनट यानी आधे घंटे की मेहनत करनी पड़ी. कालेल ने बताया कि वह यहां से गुजर रहा था तभी उसकी नजर भूरे रंग के एक पत्थर पर पड़ी, लेकिन पास जाकर देखा तो लगा कोई खास चीज है.  टिप्पणियां इनसे पहले अक्टूबर 2016 में डेन फ्रेडरिक और उनकी बेटी ने यहां से  2.03 कैरेट का हीरा ढूंढा था. ये दोनों भी यहां पहली बार आए थे. जून 2015  में यहां घूमने आए एक शख्स को  8.52 कैरेट का हीरा मिला था. अप्रैल 2015 में ही सुसी क्लार्क को यहां शाम को घुमने के दौरान 3.69 कैरेट का हीरा मिला था. इसके अलावा फरवरी 2015 में ही डीन फिलपुला को  2.01 कैरेट का हीरा मिला था.  बताया जाता है कि अमेरिका के इस इलाके से अब तक 75, 000 हीरे मिल चुके हैं. पहली बार 1906 में यहां से हीरा मिला था. 1906 में जॉन हडलेस्टोन नामक आदमी को इसी जगह दो चमकते हुए क्रिस्टल मिले. दोनों क्रिस्टल की जांच करवाई गई तो पता चला कि ये कीमती हीरा हैं. इसके बाद इस जगह का नाम द क्रेटर ऑफ डायमंड रखा गया. इसके बाद जॉन ने अपनी 243 एकड़ जमीन डायमंड कंपनी को ऊंची कीमत पर बेच दिया. साल 1972 में यह जमीन नेशनल पार्क में आ गई. 1906 से ही इस जमीन को डायमंड उत्पादन क्षेत्र बनाने की कोशिशें की जाती रहीं, लेकिन इसे आम लोगों के लिए खोल दिया गया. इनसे पहले अक्टूबर 2016 में डेन फ्रेडरिक और उनकी बेटी ने यहां से  2.03 कैरेट का हीरा ढूंढा था. ये दोनों भी यहां पहली बार आए थे. जून 2015  में यहां घूमने आए एक शख्स को  8.52 कैरेट का हीरा मिला था. अप्रैल 2015 में ही सुसी क्लार्क को यहां शाम को घुमने के दौरान 3.69 कैरेट का हीरा मिला था. इसके अलावा फरवरी 2015 में ही डीन फिलपुला को  2.01 कैरेट का हीरा मिला था.  बताया जाता है कि अमेरिका के इस इलाके से अब तक 75, 000 हीरे मिल चुके हैं. पहली बार 1906 में यहां से हीरा मिला था. 1906 में जॉन हडलेस्टोन नामक आदमी को इसी जगह दो चमकते हुए क्रिस्टल मिले. दोनों क्रिस्टल की जांच करवाई गई तो पता चला कि ये कीमती हीरा हैं. इसके बाद इस जगह का नाम द क्रेटर ऑफ डायमंड रखा गया. इसके बाद जॉन ने अपनी 243 एकड़ जमीन डायमंड कंपनी को ऊंची कीमत पर बेच दिया. साल 1972 में यह जमीन नेशनल पार्क में आ गई. 1906 से ही इस जमीन को डायमंड उत्पादन क्षेत्र बनाने की कोशिशें की जाती रहीं, लेकिन इसे आम लोगों के लिए खोल दिया गया. बताया जाता है कि अमेरिका के इस इलाके से अब तक 75, 000 हीरे मिल चुके हैं. पहली बार 1906 में यहां से हीरा मिला था. 1906 में जॉन हडलेस्टोन नामक आदमी को इसी जगह दो चमकते हुए क्रिस्टल मिले. दोनों क्रिस्टल की जांच करवाई गई तो पता चला कि ये कीमती हीरा हैं. इसके बाद इस जगह का नाम द क्रेटर ऑफ डायमंड रखा गया. इसके बाद जॉन ने अपनी 243 एकड़ जमीन डायमंड कंपनी को ऊंची कीमत पर बेच दिया. साल 1972 में यह जमीन नेशनल पार्क में आ गई. 1906 से ही इस जमीन को डायमंड उत्पादन क्षेत्र बनाने की कोशिशें की जाती रहीं, लेकिन इसे आम लोगों के लिए खोल दिया गया.
यह एक सारांश है: अमेरिका में एक ऐसी जगह है जहां यूं ही पड़ा रहता है हीरा यहां से कोई भी ढूंढकर ला सकता है हीरा, नहीं देना पड़ता कोई टैक्स अमेरिका के अरकांसास स्टेट में किसी को भी जाने की है इजाजत
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['hin']
एक सारांश बनाओ: रेटिंग एजेन्सी स्टैंडर्ड एंड पुअर्स (एसएंडपी) द्वारा नौ यूरोपीय देशों की साख घटाए जाने के बाद अन्य एशियाई बाजारों में नरमी के रुख के बीच फंडों की बिकवाली से बंबई शेयर बाजार (बीएसई) सेंसेक्स 65 अंक नीचे खुला। तीस शेयरों वाला सेंसेक्स 64.50 अंक की गिरावट के साथ 16,090.12 अंक पर खुला। पिछले सत्र में यह 117.11 अंक मजबूत हुआ था। इसी तरह, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 19.45 अंक कमजोर होकर 4,846.55 अंक पर खुला। ब्रोकरों ने कहा कि निवेशकों द्वारा धातु, कैपिटल गुड्स, आटो और बैंकिंग शेयरों में मुनाफा वसूली किए जाने से सेंसेक्स में यह गिरावट आई। तीस शेयरों वाला सेंसेक्स 64.50 अंक की गिरावट के साथ 16,090.12 अंक पर खुला। पिछले सत्र में यह 117.11 अंक मजबूत हुआ था। इसी तरह, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 19.45 अंक कमजोर होकर 4,846.55 अंक पर खुला। ब्रोकरों ने कहा कि निवेशकों द्वारा धातु, कैपिटल गुड्स, आटो और बैंकिंग शेयरों में मुनाफा वसूली किए जाने से सेंसेक्स में यह गिरावट आई।
एसएंडपी द्वारा नौ यूरोपीय देशों की साख घटाए जाने के बाद अन्य एशियाई बाजारों में नरमी के रुख के बीच फंडों की बिकवाली से सेंसेक्स 65 अंक नीचे खुला।
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['hin']
इस के लिए एक सारांश बनाएं: ऑस्ट्रेलिया के वेस्ट कोस्ट के आकाश में रविवार को अचानक कुछ ऐसी भयंकर गड़बड़ हुई जिससे लंबे समय तक दहशत का माहौल बना रहा. आकाश में उड़ते एयर एशिया एक्स के हवाई जहाज में बैठे यात्रियों की आंखों से आंसू बह रहे थे और वे ईश्वर से जीवन बचाने की कामना कर रहे थे. प्लेन में बैठे यात्री 90 मिनट तक मौत से जूझते रहे.  वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक - सबसे पहले एयर एशिया एक्स के यात्रियों ने पर्थ और कुछ अन्य स्थानों पर सूचना दी कि  कुआलालंपुर की उड़ान के दौरान करीब 90 मिनट तक सिर पर खतरा मंडराता रहा. विमान में अचानक झटके लगने लगे जिससे लोगों का नींद खुल गई. एक यात्री निकोलस के मुताबिक प्लेन के बाएं विंग में एक विस्फोट हुआ था. डेव पैरी ने कहा कि झटकों के दौरान केबिन से एक अजीब गंध आ रही थी. ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कार्पोरेशन से एक यात्री ने कहा कि झटके और अंतहीन झटके...ऊपर-नीचे हो रहा था प्लेन. ऐसा लग रहा था जैसे कि आप वाशिंग मशीन पर बैठे हैं. झटकों का यह भयावह सिलसिला 90 मिनट तक चला. प्लेन में मौजूद सभी लोगों की आंखों में आंसू थे.. प्रार्थनाएं की जा रही थीं. टिप्पणियां ब्रेंटन एटकिंसन ने ब्रॉडकास्टिंग स्टेशन को बताया कि वह खिड़की से देख सकता था. इंजन और विंग के बीच कुछ गड़बड़ हुई थी. हवाई जहाज के अंदर सीट बैक हिल रहे थे. घबराए हुए कई यात्री दांतों को भींचे थे. कई हाथों को बांधे प्रार्थना कर रहे थे. पर्थ वापसी के साथ यात्रियों की जान में जान आई. प्लेन के कैप्टेन ने यात्रियों को बताया कि एक ब्लेड के कारण एक इंजन बंद हो गया था. हालांकि अब तक झटकों का कारण स्पष्ट नहीं हुआ. यह भी कहा जा रहा है कि यह तकनीकी गड़बड़ी थी. पर्थ एयरपोर्ट के एक अधिकारी के मुताबिक हवाई जहाज में तकनीकी गड़बड़ी का पता चला था. इसके बाद उसे वापस पर्थ लाया गया. वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक - सबसे पहले एयर एशिया एक्स के यात्रियों ने पर्थ और कुछ अन्य स्थानों पर सूचना दी कि  कुआलालंपुर की उड़ान के दौरान करीब 90 मिनट तक सिर पर खतरा मंडराता रहा. विमान में अचानक झटके लगने लगे जिससे लोगों का नींद खुल गई. एक यात्री निकोलस के मुताबिक प्लेन के बाएं विंग में एक विस्फोट हुआ था. डेव पैरी ने कहा कि झटकों के दौरान केबिन से एक अजीब गंध आ रही थी. ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कार्पोरेशन से एक यात्री ने कहा कि झटके और अंतहीन झटके...ऊपर-नीचे हो रहा था प्लेन. ऐसा लग रहा था जैसे कि आप वाशिंग मशीन पर बैठे हैं. झटकों का यह भयावह सिलसिला 90 मिनट तक चला. प्लेन में मौजूद सभी लोगों की आंखों में आंसू थे.. प्रार्थनाएं की जा रही थीं. टिप्पणियां ब्रेंटन एटकिंसन ने ब्रॉडकास्टिंग स्टेशन को बताया कि वह खिड़की से देख सकता था. इंजन और विंग के बीच कुछ गड़बड़ हुई थी. हवाई जहाज के अंदर सीट बैक हिल रहे थे. घबराए हुए कई यात्री दांतों को भींचे थे. कई हाथों को बांधे प्रार्थना कर रहे थे. पर्थ वापसी के साथ यात्रियों की जान में जान आई. प्लेन के कैप्टेन ने यात्रियों को बताया कि एक ब्लेड के कारण एक इंजन बंद हो गया था. हालांकि अब तक झटकों का कारण स्पष्ट नहीं हुआ. यह भी कहा जा रहा है कि यह तकनीकी गड़बड़ी थी. पर्थ एयरपोर्ट के एक अधिकारी के मुताबिक हवाई जहाज में तकनीकी गड़बड़ी का पता चला था. इसके बाद उसे वापस पर्थ लाया गया. ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कार्पोरेशन से एक यात्री ने कहा कि झटके और अंतहीन झटके...ऊपर-नीचे हो रहा था प्लेन. ऐसा लग रहा था जैसे कि आप वाशिंग मशीन पर बैठे हैं. झटकों का यह भयावह सिलसिला 90 मिनट तक चला. प्लेन में मौजूद सभी लोगों की आंखों में आंसू थे.. प्रार्थनाएं की जा रही थीं. टिप्पणियां ब्रेंटन एटकिंसन ने ब्रॉडकास्टिंग स्टेशन को बताया कि वह खिड़की से देख सकता था. इंजन और विंग के बीच कुछ गड़बड़ हुई थी. हवाई जहाज के अंदर सीट बैक हिल रहे थे. घबराए हुए कई यात्री दांतों को भींचे थे. कई हाथों को बांधे प्रार्थना कर रहे थे. पर्थ वापसी के साथ यात्रियों की जान में जान आई. प्लेन के कैप्टेन ने यात्रियों को बताया कि एक ब्लेड के कारण एक इंजन बंद हो गया था. हालांकि अब तक झटकों का कारण स्पष्ट नहीं हुआ. यह भी कहा जा रहा है कि यह तकनीकी गड़बड़ी थी. पर्थ एयरपोर्ट के एक अधिकारी के मुताबिक हवाई जहाज में तकनीकी गड़बड़ी का पता चला था. इसके बाद उसे वापस पर्थ लाया गया. टिप्पणियां ब्रेंटन एटकिंसन ने ब्रॉडकास्टिंग स्टेशन को बताया कि वह खिड़की से देख सकता था. इंजन और विंग के बीच कुछ गड़बड़ हुई थी. हवाई जहाज के अंदर सीट बैक हिल रहे थे. घबराए हुए कई यात्री दांतों को भींचे थे. कई हाथों को बांधे प्रार्थना कर रहे थे. पर्थ वापसी के साथ यात्रियों की जान में जान आई. प्लेन के कैप्टेन ने यात्रियों को बताया कि एक ब्लेड के कारण एक इंजन बंद हो गया था. हालांकि अब तक झटकों का कारण स्पष्ट नहीं हुआ. यह भी कहा जा रहा है कि यह तकनीकी गड़बड़ी थी. पर्थ एयरपोर्ट के एक अधिकारी के मुताबिक हवाई जहाज में तकनीकी गड़बड़ी का पता चला था. इसके बाद उसे वापस पर्थ लाया गया. ब्रेंटन एटकिंसन ने ब्रॉडकास्टिंग स्टेशन को बताया कि वह खिड़की से देख सकता था. इंजन और विंग के बीच कुछ गड़बड़ हुई थी. हवाई जहाज के अंदर सीट बैक हिल रहे थे. घबराए हुए कई यात्री दांतों को भींचे थे. कई हाथों को बांधे प्रार्थना कर रहे थे. पर्थ वापसी के साथ यात्रियों की जान में जान आई. प्लेन के कैप्टेन ने यात्रियों को बताया कि एक ब्लेड के कारण एक इंजन बंद हो गया था. हालांकि अब तक झटकों का कारण स्पष्ट नहीं हुआ. यह भी कहा जा रहा है कि यह तकनीकी गड़बड़ी थी. पर्थ एयरपोर्ट के एक अधिकारी के मुताबिक हवाई जहाज में तकनीकी गड़बड़ी का पता चला था. इसके बाद उसे वापस पर्थ लाया गया. प्लेन के कैप्टेन ने यात्रियों को बताया कि एक ब्लेड के कारण एक इंजन बंद हो गया था. हालांकि अब तक झटकों का कारण स्पष्ट नहीं हुआ. यह भी कहा जा रहा है कि यह तकनीकी गड़बड़ी थी. पर्थ एयरपोर्ट के एक अधिकारी के मुताबिक हवाई जहाज में तकनीकी गड़बड़ी का पता चला था. इसके बाद उसे वापस पर्थ लाया गया.
सारांश: एयर एशिया एक्स की फ्लाइट पर्थ से कुआलालंपुर जा रही थी एक ब्लेड के कारण विमान का एक इंजन बंद हो गया था, कप्तान ने बताया हवाई जहाज में 90 मिनट तक झटके लगे; यात्री रोते रहे, प्रार्थना करते रहे
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