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एक सारांश बनाओ: राइजिंग पुणे सुपरजाइंट के वाशिंगटन सुंदर ने रविवार को आईपीएल के फाइनल में मुंबई इंडिया के खिलाफ मैच में उतरते ही रिकॉर्ड बुक में नाम दर्ज करा लिया. आईपीएल का फाइनल मैच हैदराबाद के राजीव गांधी स्टेडियम में खेला जा रहा है. इससे पहले, सुंदर ने मुंबई के खिलाफ क्वालिफायर 1 में भी कमाल किया था. इस मैच में सुंदर ने 16 रन देकर तीन विकेट लिए थे और उनके इस प्रदर्शन की बदौलत पुणे ने मुंबई को 20 रन से हराकर फाइनल में जगह बनाई थी. बहरहाल, फाइनल मैच में वाशिंगटन सुंदर का रिकॉर्ड अलग ही तरह का था. आईपीएल के फाइनल में खेलने वाले सुंदर सबसे कम उम्र के खिलाड़ी हैं. वाशिंगटन की उम्र 17 वर्ष 228 दिन है. वाशिंगटन सुंदर अपनी गेंदों को बहुत ज्यादा टर्न नहीं कराते हैं. वे गेंदों को ज्यादा फ्लाइट भी नहीं करते लेकिन अपनी सटीक गेंदबाजी से वे बल्लेबाजी की कठिन परीक्षा लेने में सफल होते हैं. आईपीएल10 में वाशिंगटन सुंदर ने फाइनल सहित 11 मैच पुणे की टीम की ओर से खेले.
उनसे पहले यह रिकॉर्ड रवींद्र जडेजा के नाम पर था. जडेजा वर्ष 2008 में जब राजस्थान रायल्स टीम की ओर से फाइनल खेलने उतरे थे तो उनकी उम्र 19 वर्ष 178 दिन थी. इसी तरह मनीष पांडे जब 2009 में आईपीएल फाइनल में उतरे तो उनकी उम्र 19 वर्ष 256 दिन थी. इसी तरह मयंक अग्रवाल ने 2011 में जब फाइनल खेला था तो उनकी उम्र 20 वर्ष 101 दिन थी.
उनसे पहले यह रिकॉर्ड रवींद्र जडेजा के नाम पर था. जडेजा वर्ष 2008 में जब राजस्थान रायल्स टीम की ओर से फाइनल खेलने उतरे थे तो उनकी उम्र 19 वर्ष 178 दिन थी. इसी तरह मनीष पांडे जब 2009 में आईपीएल फाइनल में उतरे तो उनकी उम्र 19 वर्ष 256 दिन थी. इसी तरह मयंक अग्रवाल ने 2011 में जब फाइनल खेला था तो उनकी उम्र 20 वर्ष 101 दिन थी. | आईपीएल फाइनल खेलने वाले सबसे कम्र उम्र के खिलाड़ी बने
आरपीएस के वाशिंगटन सुंदर की उम्र है 17 वर्ष 228 दिन
रवींद्र जडेजा के 19 वर्ष 178 दिन के रिकॉर्ड को तोड़ा | 26 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: अमेरिका में मंदी की आशंका और यूरो क्षेत्र में ऋण संकट गहराने से बीते सप्ताह देश के शेयर बाजारों में भारी गिरावट दर्ज हुई। सप्ताह के दौरान टीसीएस, आरआईएल और इंफोसिस जैसी ब्लूचिप कंपनियों के शेयरों का बाजार पूंजीकरण घट गया। बीते सप्ताह बंबई शेयर बाजार के सेंसेक्स में 900 से अधिक अंक की गिरावट दर्ज हुई। शुक्रवार को एक ही दिन में सेंसेक्स 387 अंक नीचे आ गया। इसका असर शेयरों के मूल्य पर भी पड़ा। सप्ताह के दौरान देश की 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से आठ का बाजार पूंजीकरण 73,396.47 करोड़ रुपये घट गया। सबसे ज्यादा नुकसान आईटी निर्यातक टीसीएस को हुआ। टीसीएस और इंफोसिस जैसी आईटी कंपनियों की कुल आमदनी में 60 फीसदी योगदान अमेरिका और यूरोपीय बाजारों का रहता है। टीसीएस का बाजार पूंजीकरण सप्ताह के दौरान 15,217.23 करोड़ रुपये घटकर 2,06,817.32 करोड़ रुपये रह गया। वहीं इंफोसिस को 10,119.92 करोड़ रुपये का घाटा हुआ और उसका बाजार पूंजीकरण 1,48,744.2 करोड़ रुपये रह गया। सप्ताह के दौरान टीसीएस के शेयर में सात प्रतिशत तथा इंफोसिस में छह फीसदी की गिरावट आई। देश की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज का बाजार पूंजीकरण 11,803.75 करोड़ रुपये घटकर 2,59,207.58 करोड़ रुपये रह गया। एफएमसीजी कंपनी आईटीसी का बाजार पूंजीकरण 9,143.7 करोड़ रुपये घटकर 1,52,265.89 करोड़ रुपये रह गया। | यह एक सारांश है: टीसीएस का बाजार पूंजीकरण 15,217.23 करोड़ रुपये घटकर 2,06,817.32 करोड़ रुपये रह गया। इंफोसिस को 10,119.92 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। | 21 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: चिकित्सा संस्थानों के संगठन ‘मेडस्केप इंडिया’ ने बालीवुड अभिनेता आमिर खान से टीवी शो ‘सत्यमेव जयते’ में डॉक्टरों को ‘बदनाम’ करने पर माफी मांगने के लिए कहा है।
आमिर को लिखे खुले पत्र में 21 चिकित्सा संस्थानों के इस समूह ने कहा कि यह ‘शर्मनाक’ है कि डाक्टरों की एकतरफा जांच की गई। पत्र में कहा गया कि डॉक्टरों के कदाचार को पेश करना ‘दुख’ की बात है।
पत्र में कहा गया कि डॉक्टर उसी सामाजिक-वैधानिक माहौल में काम करते हैं जिसमें सभी करते हैं और वे भी आज के समाज का हिस्सा हैं। इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं कि बेईमानी, भ्रष्टाचार, घोटाले इस पेशे में भी हैं। इसलिए उन्हें समाज से अलग नहीं किया जा सकता।
इसमें कहा गया कि डॉक्टरों की भगवान से तुलना करने की वर्षों पुरानी रीति, जिस बयान के साथ मिस्टर खान अपने शो की शुरूआत करते हैं, अब सच नहीं है। डॉक्टर समाज की सेवा करने के लिए पेशेवर प्रशिक्षण लेते हैं और इस प्रक्रिया के जरिये आजीविका कमाते हैं। टिप्पणियां
पत्र में कहा गया कि डॉक्टरों को भी इस देश में अन्य नागरिकों की तरह लाइसेंस हासिल करने के लिए रिश्वत देने के लिए मजबूर किया जाता है। पत्र में कहा गया कि देशभर के करीब एक अरब दर्शकों को डाक्टरों के बारे में नकारात्मक छवि बनाकर मिस्टर खान ने स्वास्थ्यसेवाओं के मौलिक आदेशों पर शक पैदा कर दिया है जिसे इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने कमाया था।
गौरतलब है कि आमिर खान के शो सत्यमेव जयते के चौथे भाग में चिकित्सा पेशे में कदाचार और भ्रष्टाचार पर प्रकाश डाला गया था।
आमिर को लिखे खुले पत्र में 21 चिकित्सा संस्थानों के इस समूह ने कहा कि यह ‘शर्मनाक’ है कि डाक्टरों की एकतरफा जांच की गई। पत्र में कहा गया कि डॉक्टरों के कदाचार को पेश करना ‘दुख’ की बात है।
पत्र में कहा गया कि डॉक्टर उसी सामाजिक-वैधानिक माहौल में काम करते हैं जिसमें सभी करते हैं और वे भी आज के समाज का हिस्सा हैं। इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं कि बेईमानी, भ्रष्टाचार, घोटाले इस पेशे में भी हैं। इसलिए उन्हें समाज से अलग नहीं किया जा सकता।
इसमें कहा गया कि डॉक्टरों की भगवान से तुलना करने की वर्षों पुरानी रीति, जिस बयान के साथ मिस्टर खान अपने शो की शुरूआत करते हैं, अब सच नहीं है। डॉक्टर समाज की सेवा करने के लिए पेशेवर प्रशिक्षण लेते हैं और इस प्रक्रिया के जरिये आजीविका कमाते हैं। टिप्पणियां
पत्र में कहा गया कि डॉक्टरों को भी इस देश में अन्य नागरिकों की तरह लाइसेंस हासिल करने के लिए रिश्वत देने के लिए मजबूर किया जाता है। पत्र में कहा गया कि देशभर के करीब एक अरब दर्शकों को डाक्टरों के बारे में नकारात्मक छवि बनाकर मिस्टर खान ने स्वास्थ्यसेवाओं के मौलिक आदेशों पर शक पैदा कर दिया है जिसे इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने कमाया था।
गौरतलब है कि आमिर खान के शो सत्यमेव जयते के चौथे भाग में चिकित्सा पेशे में कदाचार और भ्रष्टाचार पर प्रकाश डाला गया था।
पत्र में कहा गया कि डॉक्टर उसी सामाजिक-वैधानिक माहौल में काम करते हैं जिसमें सभी करते हैं और वे भी आज के समाज का हिस्सा हैं। इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं कि बेईमानी, भ्रष्टाचार, घोटाले इस पेशे में भी हैं। इसलिए उन्हें समाज से अलग नहीं किया जा सकता।
इसमें कहा गया कि डॉक्टरों की भगवान से तुलना करने की वर्षों पुरानी रीति, जिस बयान के साथ मिस्टर खान अपने शो की शुरूआत करते हैं, अब सच नहीं है। डॉक्टर समाज की सेवा करने के लिए पेशेवर प्रशिक्षण लेते हैं और इस प्रक्रिया के जरिये आजीविका कमाते हैं। टिप्पणियां
पत्र में कहा गया कि डॉक्टरों को भी इस देश में अन्य नागरिकों की तरह लाइसेंस हासिल करने के लिए रिश्वत देने के लिए मजबूर किया जाता है। पत्र में कहा गया कि देशभर के करीब एक अरब दर्शकों को डाक्टरों के बारे में नकारात्मक छवि बनाकर मिस्टर खान ने स्वास्थ्यसेवाओं के मौलिक आदेशों पर शक पैदा कर दिया है जिसे इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने कमाया था।
गौरतलब है कि आमिर खान के शो सत्यमेव जयते के चौथे भाग में चिकित्सा पेशे में कदाचार और भ्रष्टाचार पर प्रकाश डाला गया था।
इसमें कहा गया कि डॉक्टरों की भगवान से तुलना करने की वर्षों पुरानी रीति, जिस बयान के साथ मिस्टर खान अपने शो की शुरूआत करते हैं, अब सच नहीं है। डॉक्टर समाज की सेवा करने के लिए पेशेवर प्रशिक्षण लेते हैं और इस प्रक्रिया के जरिये आजीविका कमाते हैं। टिप्पणियां
पत्र में कहा गया कि डॉक्टरों को भी इस देश में अन्य नागरिकों की तरह लाइसेंस हासिल करने के लिए रिश्वत देने के लिए मजबूर किया जाता है। पत्र में कहा गया कि देशभर के करीब एक अरब दर्शकों को डाक्टरों के बारे में नकारात्मक छवि बनाकर मिस्टर खान ने स्वास्थ्यसेवाओं के मौलिक आदेशों पर शक पैदा कर दिया है जिसे इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने कमाया था।
गौरतलब है कि आमिर खान के शो सत्यमेव जयते के चौथे भाग में चिकित्सा पेशे में कदाचार और भ्रष्टाचार पर प्रकाश डाला गया था।
पत्र में कहा गया कि डॉक्टरों को भी इस देश में अन्य नागरिकों की तरह लाइसेंस हासिल करने के लिए रिश्वत देने के लिए मजबूर किया जाता है। पत्र में कहा गया कि देशभर के करीब एक अरब दर्शकों को डाक्टरों के बारे में नकारात्मक छवि बनाकर मिस्टर खान ने स्वास्थ्यसेवाओं के मौलिक आदेशों पर शक पैदा कर दिया है जिसे इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने कमाया था।
गौरतलब है कि आमिर खान के शो सत्यमेव जयते के चौथे भाग में चिकित्सा पेशे में कदाचार और भ्रष्टाचार पर प्रकाश डाला गया था।
गौरतलब है कि आमिर खान के शो सत्यमेव जयते के चौथे भाग में चिकित्सा पेशे में कदाचार और भ्रष्टाचार पर प्रकाश डाला गया था। | यहाँ एक सारांश है:चिकित्सा संस्थानों के संगठन ‘मेडस्केप इंडिया’ ने बालीवुड अभिनेता आमिर खान से टीवी शो ‘सत्यमेव जयते’ में डॉक्टरों को ‘बदनाम’ करने पर माफी मांगने के लिए कहा है। | 12 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: पाकिस्तान पुलिस ने पंजाब प्रांत में कथित रूप से कुरान को अपवित्र करने के आरोप में आठ लोगों के खिलाफ विवादास्पद ईशनिंदा कानून के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
अधिकारियों ने बताया कि प्राथमिकी के अनुसार, पीएमएलएन विधायक आतिफ खान के भाई मुशर्रफ मजारी की अगुवाई में कई लोगों ने डेरा गाजी खान जिले में गुलाम फरीद नामक व्यक्ति की दुकान को आग लगा दी। इस कार्रवाई के दौरान पवित्र कुरान की एक प्रति भी कथित रूप से जल गई।टिप्पणियां
अधिकारियों ने बताया कि इलाके में एक शादी समारोह को लेकर किए जाने वाले प्रबंधों के बारे में फरीद द्वारा मजारी के निर्देशों का पालन नहीं किए जाने पर मजारी ने उसके खिलाफ कार्रवाई की। हमलावरों ने कथित रूप से कुछ महिलाओं को भी पीटा।
पुलिस ने मजारी समेत आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है लेकिन इस संबंध में अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि प्राथमिकी के अनुसार, पीएमएलएन विधायक आतिफ खान के भाई मुशर्रफ मजारी की अगुवाई में कई लोगों ने डेरा गाजी खान जिले में गुलाम फरीद नामक व्यक्ति की दुकान को आग लगा दी। इस कार्रवाई के दौरान पवित्र कुरान की एक प्रति भी कथित रूप से जल गई।टिप्पणियां
अधिकारियों ने बताया कि इलाके में एक शादी समारोह को लेकर किए जाने वाले प्रबंधों के बारे में फरीद द्वारा मजारी के निर्देशों का पालन नहीं किए जाने पर मजारी ने उसके खिलाफ कार्रवाई की। हमलावरों ने कथित रूप से कुछ महिलाओं को भी पीटा।
पुलिस ने मजारी समेत आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है लेकिन इस संबंध में अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि इलाके में एक शादी समारोह को लेकर किए जाने वाले प्रबंधों के बारे में फरीद द्वारा मजारी के निर्देशों का पालन नहीं किए जाने पर मजारी ने उसके खिलाफ कार्रवाई की। हमलावरों ने कथित रूप से कुछ महिलाओं को भी पीटा।
पुलिस ने मजारी समेत आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है लेकिन इस संबंध में अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है।
पुलिस ने मजारी समेत आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है लेकिन इस संबंध में अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। | सारांश: पाकिस्तान पुलिस ने पंजाब प्रांत में कथित रूप से कुरान को अपवित्र करने के आरोप में आठ लोगों के खिलाफ विवादास्पद ईशनिंदा कानून के तहत मुकदमा दर्ज किया है। | 31 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: कनाडा के पश्चिमी तटों के पास क्वीन शारलौटे द्वीपसमूह में 7.7 तीव्रता का भूकंप का जोरदार झटका महसूस किया गया। यह जानकारी अमेरिकी सरकार के अनुसंधानकर्ताओं ने दी।टिप्पणियां
अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण ने कहा कि स्थानीय समयानुसार सुबह आठ बजकर चार मिनट पर (अंतरराष्ट्रीय समयानुसार तड़के तीन बज कर चार मिनट पर) आए इस भूकंप का केंद्र मासेट शहर के दक्षिण में 139 किलोमीटर दूरी पर था।
प्रशांत सुनामी चेतावनी केंद्र ने कहा कि फिलहाल सुनामी का कोई खतरा नहीं है। जानमाल के नुकसान की भी अभी कोई खबर नहीं है। भूकंप की तीव्रता अमेरिकी भूकंप.विज्ञानियों द्वारा इस्तेमाल मोमेंट मैग्नीच्यूड पैमाने की पद्धति से मापी गई।
अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण ने कहा कि स्थानीय समयानुसार सुबह आठ बजकर चार मिनट पर (अंतरराष्ट्रीय समयानुसार तड़के तीन बज कर चार मिनट पर) आए इस भूकंप का केंद्र मासेट शहर के दक्षिण में 139 किलोमीटर दूरी पर था।
प्रशांत सुनामी चेतावनी केंद्र ने कहा कि फिलहाल सुनामी का कोई खतरा नहीं है। जानमाल के नुकसान की भी अभी कोई खबर नहीं है। भूकंप की तीव्रता अमेरिकी भूकंप.विज्ञानियों द्वारा इस्तेमाल मोमेंट मैग्नीच्यूड पैमाने की पद्धति से मापी गई।
प्रशांत सुनामी चेतावनी केंद्र ने कहा कि फिलहाल सुनामी का कोई खतरा नहीं है। जानमाल के नुकसान की भी अभी कोई खबर नहीं है। भूकंप की तीव्रता अमेरिकी भूकंप.विज्ञानियों द्वारा इस्तेमाल मोमेंट मैग्नीच्यूड पैमाने की पद्धति से मापी गई। | कनाडा के पश्चिमी तटों के पास क्वीन शारलौटे द्वीपसमूह में 7.7 तीव्रता का भूकंप का जोरदार झटका महसूस किया गया। जानमाल के नुकसान की भी अभी कोई खबर नहीं है। | 1 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: भारतीय रेल ने यात्रियों के लिए बुनियादी सुविधाओं में इजाफा करने के अपने प्रयास के तहत यात्री डिब्बों में जल्द ही वाटर प्यूरीफायर लगाने का फैसला किया है, ताकि लोगों को सफर के दौरान शुद्ध पानी मिल सके।
रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, वाटर प्यूरीफायर की सुविधा वाले डिब्बे जालंधर में जगाधरी रेल कार्यशाला में तैयार किए जा रहे हैं और जल्द ही ये लंबी दूरी की एक्सप्रेस ट्रेनों में लगाए जाएंगे।टिप्पणियां
उन्होंने कहा, रेलगाड़ियों में पानी की आपूर्ति स्टेशनों से की जाती है और कई इलाकों में पानी में लौह तत्व की अशुद्धता के कारण पानी की गुणवत्ता प्रभावित होती है। मौजूदा समय में सिर्फ लक्जरी रेलगाड़ियों में वाटर प्यूरीफायर की सुविधा उपलब्ध है। राजधानी और शताब्दी की पैंट्री में पहले से ही वाटर प्यूरीफायर लगा हुआ है।
अधिकारी ने कहा, हमारा मकसद रेलगाड़ियों में स्वच्छ पानी उपलब्ध कराना है और हम एलएचबी डिब्बे में इस सुविधा की शुरुआत कर रहे हैं और बाद में अन्य डिब्बों में भी यह सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, वाटर प्यूरीफायर की सुविधा वाले डिब्बे जालंधर में जगाधरी रेल कार्यशाला में तैयार किए जा रहे हैं और जल्द ही ये लंबी दूरी की एक्सप्रेस ट्रेनों में लगाए जाएंगे।टिप्पणियां
उन्होंने कहा, रेलगाड़ियों में पानी की आपूर्ति स्टेशनों से की जाती है और कई इलाकों में पानी में लौह तत्व की अशुद्धता के कारण पानी की गुणवत्ता प्रभावित होती है। मौजूदा समय में सिर्फ लक्जरी रेलगाड़ियों में वाटर प्यूरीफायर की सुविधा उपलब्ध है। राजधानी और शताब्दी की पैंट्री में पहले से ही वाटर प्यूरीफायर लगा हुआ है।
अधिकारी ने कहा, हमारा मकसद रेलगाड़ियों में स्वच्छ पानी उपलब्ध कराना है और हम एलएचबी डिब्बे में इस सुविधा की शुरुआत कर रहे हैं और बाद में अन्य डिब्बों में भी यह सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
उन्होंने कहा, रेलगाड़ियों में पानी की आपूर्ति स्टेशनों से की जाती है और कई इलाकों में पानी में लौह तत्व की अशुद्धता के कारण पानी की गुणवत्ता प्रभावित होती है। मौजूदा समय में सिर्फ लक्जरी रेलगाड़ियों में वाटर प्यूरीफायर की सुविधा उपलब्ध है। राजधानी और शताब्दी की पैंट्री में पहले से ही वाटर प्यूरीफायर लगा हुआ है।
अधिकारी ने कहा, हमारा मकसद रेलगाड़ियों में स्वच्छ पानी उपलब्ध कराना है और हम एलएचबी डिब्बे में इस सुविधा की शुरुआत कर रहे हैं और बाद में अन्य डिब्बों में भी यह सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
अधिकारी ने कहा, हमारा मकसद रेलगाड़ियों में स्वच्छ पानी उपलब्ध कराना है और हम एलएचबी डिब्बे में इस सुविधा की शुरुआत कर रहे हैं और बाद में अन्य डिब्बों में भी यह सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। | यह एक सारांश है: रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, वाटर प्यूरीफायर की सुविधा वाले डिब्बे जालंधर में जगाधरी रेल कार्यशाला में तैयार किए जा रहे हैं और जल्द ही ये लंबी दूरी की एक्सप्रेस ट्रेनों में लगाए जाएंगे। | 16 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: हॉस्टल से पढ़ाई पूरी करके घर लौटी अरुणिमा के ज़ेहन में बार-बार एक ही सवाल उठता है कि उसकी मां की मौत कैसे हुई। धीरे-धीरे अरुणा के शक की सुई अपने ओवरप्रोटेक्टिव और कभी-कभार एग्रेसिव होने वाले पिता पर घूमने लगती है और फिर एक ऐसा मोड़ आता है जब मां के कत्ल की गुत्थी सुलझाती बेटी अपने बाप के सामने आ जाती है। फिल्म 'ये फासले' की कई खूबियां हैं। जैसे शुरू से अंत तक फिल्म इसी सस्पेंस के बीच झूलती है कि खून किसने किया। अरुणा के पिता ने या किसी और ने जब लगने लगता है कि हत्यारा मिल गया तब उसे निर्दोष साबित करने की जद्दोजहद शुरू हो जाती है। अच्छा बैकग्राउंड म्यूज़िक रोमांच को ऊंचाई देता है और फिर एकदम नीचे ले आता है। अनुपम खेर, पवन मल्होत्रा और टीना देसाई की परफॉरमेंस अच्छी है। हालांकि कुछ कमियां हैं जिन पर ज़रा भी यकीन नहीं किया जा सकता। वकीलों की ज़िरह सुनते-सुनते अचानक जज आरोपी को फांसी की सजा सुना देती है। अरुणिमा क्यों नहीं जानती कि वह राजघराने से है। दरअसल, डायरेक्टर योगेश मित्तल की ये फासले रियेलिटी और फिक्शन के बीच घूमती है। इसीलिए सिर्फ रियेलिटी और फैक्ट्स ढूंढने वालों को थोड़ी निराशा हो सकती है। सस्पेंस और थ्रिलर का ये ड्रामा दिमाग से ज्यादा दिल को छूता है। 'ये फासले' के लिए मेरी रेटिंग है 3 स्टार। | संक्षिप्त सारांश: हॉस्टल से पढ़ाई पूरी करके घर लौटी अरुणिमा के ज़ेहन में बार-बार एक ही सवाल उठता है कि उसकी मां की मौत कैसे हुई? | 23 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: सृति झा (Sriti Jha) और शब्बीर आहलुवालिया (Shabir Ahluwalia) स्टारर जी टीवी के नंबर वन सीरियल 'कुमकुम भाग्य (Kumkum Bhagya)' के पिछले एपिसोड में आपने देखा कि रिया, रणवीर को अपना प्यार साबित करने के लिए एक चौंका देने वाली मांग रखती है. रिया, रणवीर को कहती है कि तुम पहले प्राची (Mugdha Chapekar) को अपने प्यार में दीवाना बनाओ और फिर उसका दिल तोड़ दो. पहले तो रणवीर रिया की मांग को स्वीकार नहीं करता लेकिन बाद में उसके मनाने पर रणवीर मान जाता है. दूसरी तरफ प्रज्ञा, अभी को काफी मिस कर रही होती है.
सीरियल 'कुमकुम भाग्य (Kumkum Bhagya)' के आज के एपिसोड में आप देखेंगे कि सरिता, अभी को फोन करके बताती है कि प्राची (Mugdha Chapekar) की मां अपने पति को याद करके रो रही है. सरिता की बात सुनकर अभी (Shabir Ahluwalia), प्राची की मां से बात करने को तैयार तो हो जाएगा लेकिन एक शर्त पर कि वो उससे शादी नहीं करेगा. दूसरी ओर रिया, प्राची को फंसाने के लिए जाल बिछाएगी. और अपने दोस्तों को बताएगी कि एक बार प्राची ड्रग्स के साथ पकड़ी जाए तो वो रिया के घर के साथ-साथ कॉलेज से भी हमेशा के लिए निकल जाएगी. अब देखना होगा कि क्या रिया अपने प्लेन में सफल हो पाएगी या नहीं? | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: सीरियल 'कुमकुम भाग्य' में जानें आज क्या होगा
अभी, प्राची की मां से बात करने को होगा तैयार
रिया, प्राची के लिए बिछाएगी जाल | 32 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: गोवा और उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने अपनी सरकारें बना ली हैं. यहां सरकारों के मुखिया जो बने हैं वह सांसद हैं. गोवा में मनोहर पर्रिकर मुख्यमंत्री बने हैं और उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने हैं. साथ ही केशव प्रसाद मौर्य उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बने हैं. खास बात यह है कि तीनों राज्यों में नई जिम्मेदारियां उठा रहे हैं और क्योंकि तीनों संसद के सदस्य है तो इन तीनों सांसदों को संसद सदस्यता छोड़नी होगी.
लेकिन छह महीने के भीतर राष्ट्रपति चुनाव होना है. मौजूदा राष्ट्रपति डॉ प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल इसी साल 24 जुलाई को समाप्त हो रहा है, और राष्ट्रपति चुनाव के लिए अधिसूचना जून में किसी भी वक्त जारी की जा सकती है. ऐसे में राष्ट्रपति पद की गरिमा और महत्ता को समझते हुए बीजेपी ने नई रणनीति बनाई है. माना जा रहा है कि जुलाई में होने जा रहे राष्ट्रपति चुनाव से पहले अब ये सांसद संसद सदस्यता नहीं छोड़ेंगे.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने योगी आदित्यनाथ और राज्य के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य गोरखपुर और फुलपुर से लोकसभा के संसद सदस्य हैं जबकि गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रीकर यूपी से ही राज्यसभा के सदस्य हैं. जबकि, उत्तर प्रदेश के दूसरे उप-मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा पहले ही लखनऊ के मेयर पद से अपना इस्तीफा दे चुके हैं.
नियमानुसार इन तीनों बीजेपी नेताओं को पद पर नियुक्ति के छह महीने के भीतर चुनाव जीतना होगा. इन लोगों का यह छह महीने सितंबर तक पूरा होता है जबकि राष्ट्रपति का चुनाव जुलाई में होना तय किया गया है. बीजेपी नेताओं का कहना है कि वह अपने इन सांसदों को राष्ट्रपति चुनाव तक इस्तीफा नहीं देने देगी. इसके अलावा बीजेपी कुछ और बातों पर भी ध्यान दे रही है ताकि जो थोड़ी बहुत कमी है पड़ रही है उसे भी पूरा कर लिया जाए.
बीजेपी नेताओं का कहना है कि अब इन चुनावों के बाद पार्टी ने अपना पूरा ध्यान राष्ट्रपति चुनाव पर केंद्रित किया है. कहा जा रहा है कि बीजेपी हालिया विधानसभा चुनाव में मिली प्रचंड जीत के बाद अपनी पसंद का राष्ट्रपति बनाना चाह रही है
जानकारी के लिए बता दें कि आदित्यनाथ योगी और केशव प्रसाद मौर्य के पास दो विकल्प हैं. अगर वे चाहें तो विधानसभा का उप-चुनाव लड़ सकते हैं या फिर विधान परिषद में भी चुने जा सकते हैं. योगी आदित्यनाथ से पहले अखिलेश यादव और मायावती दोनों ही विधान परिषद के सदस्यता के साथ मुख्यमंत्री पद पर रहे थे. यानि यह साफ है कि राज्य के इन दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों ने विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ा था.
उल्लेखनीय है कि मंगलवार को संसद में बतौर सांसद योगी आदित्यनाथ अपना अंतिम भाषण दिया. वैसे राज्य के कई विधायक योगी आदित्यनाथ के लिए अपनी सीट छोड़ने को तैयार हैं ताकि वह उस सीट से विधानसभा चुनाव लड़ सकें.
हमारे देश में राष्ट्रपति का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के ज़रिये होता है, और राष्ट्रपति निर्वाचक मंडल में निर्वाचित सांसद और राज्य विधानसभाओं के सदस्य होते हैं. इस निर्वाचक मंडल में 4,120 विधायकों और 776 निर्वाचित सांसदों सहित कुल 4,896 मतदाता होते हैं. जहां लोकसभा अध्यक्ष निर्वाचित सदस्य होने के नाते मतदान कर सकते हैं, वहीं लोकसभा में मनोनीत दो एंग्लो-इंडियन समुदाय के सदस्य और राज्यसभा में 12 मनोनीत सदस्य मतदान नहीं कर सकते.
विधायकों के मत का मूल्य उस राज्य के आकार पर निर्भर करता है, जिसका वे प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन सांसदों के मत का मूल्य समान रहता है और उसमें कोई परिवर्तन नहीं होता. निर्वाचक मंडल के कुल मतों का मूल्य 10,98,882 होता है. चुनाव आयोग के एक अधिकारी का कहना है कि हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव से पहले केंद्र में सत्तासीन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पास 75,076 मतों की कमी थी, लेकिन अब उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मणिपुर में बीजेपी के शानदार प्रदर्शन के बाद यह फासला घटकर 20,000 मतों पर आ जाएगा. अगर बीजेपी ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) के 134 और बीजू जनता दल (बीजद) के 117 विधायकों का समर्थन हासिल करने में कामयाब रहती है, तो वह अपनी पसंद के व्यक्ति को आसानी से राष्ट्रपति बना सकती है.टिप्पणियां
राज्यसभा में बीजेपी के फिलहाल 56 सदस्य हैं, जबकि कांग्रेस 59 सदस्यों के साथ यहां सबसे बड़ी पार्टी है. शनिवार की जीत के बाद अगले साल बीजेपी राज्यसभा में सबसे बड़ी पार्टी बन जाएगी और एनडीए के कुल सदस्यों की संख्या 100 के करीब हो जाएगी. हालांकि, तब भी वह संसद के उच्च सदन में बहुमत से दूर ही रहेगी.
उधर, अब उत्तर प्रदेश की बीएसपी अपनी नेता मायावती को दोबारा राज्यसभा में भेजने में सक्षम नहीं रही है. बसपा इस बार 403-सदस्यीय विधानसभा में मात्र 19 सीटें जीत सकी है, जिससे वह अपने दम पर मायावती को दोबारा राज्यसभा में भेजने की स्थिति में नहीं रह गई है. मायावती का राज्यसभा में मौजूदा कार्यकाल अगले साल समाप्त हो रहा है.
लेकिन छह महीने के भीतर राष्ट्रपति चुनाव होना है. मौजूदा राष्ट्रपति डॉ प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल इसी साल 24 जुलाई को समाप्त हो रहा है, और राष्ट्रपति चुनाव के लिए अधिसूचना जून में किसी भी वक्त जारी की जा सकती है. ऐसे में राष्ट्रपति पद की गरिमा और महत्ता को समझते हुए बीजेपी ने नई रणनीति बनाई है. माना जा रहा है कि जुलाई में होने जा रहे राष्ट्रपति चुनाव से पहले अब ये सांसद संसद सदस्यता नहीं छोड़ेंगे.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने योगी आदित्यनाथ और राज्य के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य गोरखपुर और फुलपुर से लोकसभा के संसद सदस्य हैं जबकि गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रीकर यूपी से ही राज्यसभा के सदस्य हैं. जबकि, उत्तर प्रदेश के दूसरे उप-मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा पहले ही लखनऊ के मेयर पद से अपना इस्तीफा दे चुके हैं.
नियमानुसार इन तीनों बीजेपी नेताओं को पद पर नियुक्ति के छह महीने के भीतर चुनाव जीतना होगा. इन लोगों का यह छह महीने सितंबर तक पूरा होता है जबकि राष्ट्रपति का चुनाव जुलाई में होना तय किया गया है. बीजेपी नेताओं का कहना है कि वह अपने इन सांसदों को राष्ट्रपति चुनाव तक इस्तीफा नहीं देने देगी. इसके अलावा बीजेपी कुछ और बातों पर भी ध्यान दे रही है ताकि जो थोड़ी बहुत कमी है पड़ रही है उसे भी पूरा कर लिया जाए.
बीजेपी नेताओं का कहना है कि अब इन चुनावों के बाद पार्टी ने अपना पूरा ध्यान राष्ट्रपति चुनाव पर केंद्रित किया है. कहा जा रहा है कि बीजेपी हालिया विधानसभा चुनाव में मिली प्रचंड जीत के बाद अपनी पसंद का राष्ट्रपति बनाना चाह रही है
जानकारी के लिए बता दें कि आदित्यनाथ योगी और केशव प्रसाद मौर्य के पास दो विकल्प हैं. अगर वे चाहें तो विधानसभा का उप-चुनाव लड़ सकते हैं या फिर विधान परिषद में भी चुने जा सकते हैं. योगी आदित्यनाथ से पहले अखिलेश यादव और मायावती दोनों ही विधान परिषद के सदस्यता के साथ मुख्यमंत्री पद पर रहे थे. यानि यह साफ है कि राज्य के इन दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों ने विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ा था.
उल्लेखनीय है कि मंगलवार को संसद में बतौर सांसद योगी आदित्यनाथ अपना अंतिम भाषण दिया. वैसे राज्य के कई विधायक योगी आदित्यनाथ के लिए अपनी सीट छोड़ने को तैयार हैं ताकि वह उस सीट से विधानसभा चुनाव लड़ सकें.
हमारे देश में राष्ट्रपति का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के ज़रिये होता है, और राष्ट्रपति निर्वाचक मंडल में निर्वाचित सांसद और राज्य विधानसभाओं के सदस्य होते हैं. इस निर्वाचक मंडल में 4,120 विधायकों और 776 निर्वाचित सांसदों सहित कुल 4,896 मतदाता होते हैं. जहां लोकसभा अध्यक्ष निर्वाचित सदस्य होने के नाते मतदान कर सकते हैं, वहीं लोकसभा में मनोनीत दो एंग्लो-इंडियन समुदाय के सदस्य और राज्यसभा में 12 मनोनीत सदस्य मतदान नहीं कर सकते.
विधायकों के मत का मूल्य उस राज्य के आकार पर निर्भर करता है, जिसका वे प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन सांसदों के मत का मूल्य समान रहता है और उसमें कोई परिवर्तन नहीं होता. निर्वाचक मंडल के कुल मतों का मूल्य 10,98,882 होता है. चुनाव आयोग के एक अधिकारी का कहना है कि हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव से पहले केंद्र में सत्तासीन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पास 75,076 मतों की कमी थी, लेकिन अब उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मणिपुर में बीजेपी के शानदार प्रदर्शन के बाद यह फासला घटकर 20,000 मतों पर आ जाएगा. अगर बीजेपी ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) के 134 और बीजू जनता दल (बीजद) के 117 विधायकों का समर्थन हासिल करने में कामयाब रहती है, तो वह अपनी पसंद के व्यक्ति को आसानी से राष्ट्रपति बना सकती है.टिप्पणियां
राज्यसभा में बीजेपी के फिलहाल 56 सदस्य हैं, जबकि कांग्रेस 59 सदस्यों के साथ यहां सबसे बड़ी पार्टी है. शनिवार की जीत के बाद अगले साल बीजेपी राज्यसभा में सबसे बड़ी पार्टी बन जाएगी और एनडीए के कुल सदस्यों की संख्या 100 के करीब हो जाएगी. हालांकि, तब भी वह संसद के उच्च सदन में बहुमत से दूर ही रहेगी.
उधर, अब उत्तर प्रदेश की बीएसपी अपनी नेता मायावती को दोबारा राज्यसभा में भेजने में सक्षम नहीं रही है. बसपा इस बार 403-सदस्यीय विधानसभा में मात्र 19 सीटें जीत सकी है, जिससे वह अपने दम पर मायावती को दोबारा राज्यसभा में भेजने की स्थिति में नहीं रह गई है. मायावती का राज्यसभा में मौजूदा कार्यकाल अगले साल समाप्त हो रहा है.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने योगी आदित्यनाथ और राज्य के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य गोरखपुर और फुलपुर से लोकसभा के संसद सदस्य हैं जबकि गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रीकर यूपी से ही राज्यसभा के सदस्य हैं. जबकि, उत्तर प्रदेश के दूसरे उप-मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा पहले ही लखनऊ के मेयर पद से अपना इस्तीफा दे चुके हैं.
नियमानुसार इन तीनों बीजेपी नेताओं को पद पर नियुक्ति के छह महीने के भीतर चुनाव जीतना होगा. इन लोगों का यह छह महीने सितंबर तक पूरा होता है जबकि राष्ट्रपति का चुनाव जुलाई में होना तय किया गया है. बीजेपी नेताओं का कहना है कि वह अपने इन सांसदों को राष्ट्रपति चुनाव तक इस्तीफा नहीं देने देगी. इसके अलावा बीजेपी कुछ और बातों पर भी ध्यान दे रही है ताकि जो थोड़ी बहुत कमी है पड़ रही है उसे भी पूरा कर लिया जाए.
बीजेपी नेताओं का कहना है कि अब इन चुनावों के बाद पार्टी ने अपना पूरा ध्यान राष्ट्रपति चुनाव पर केंद्रित किया है. कहा जा रहा है कि बीजेपी हालिया विधानसभा चुनाव में मिली प्रचंड जीत के बाद अपनी पसंद का राष्ट्रपति बनाना चाह रही है
जानकारी के लिए बता दें कि आदित्यनाथ योगी और केशव प्रसाद मौर्य के पास दो विकल्प हैं. अगर वे चाहें तो विधानसभा का उप-चुनाव लड़ सकते हैं या फिर विधान परिषद में भी चुने जा सकते हैं. योगी आदित्यनाथ से पहले अखिलेश यादव और मायावती दोनों ही विधान परिषद के सदस्यता के साथ मुख्यमंत्री पद पर रहे थे. यानि यह साफ है कि राज्य के इन दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों ने विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ा था.
उल्लेखनीय है कि मंगलवार को संसद में बतौर सांसद योगी आदित्यनाथ अपना अंतिम भाषण दिया. वैसे राज्य के कई विधायक योगी आदित्यनाथ के लिए अपनी सीट छोड़ने को तैयार हैं ताकि वह उस सीट से विधानसभा चुनाव लड़ सकें.
हमारे देश में राष्ट्रपति का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के ज़रिये होता है, और राष्ट्रपति निर्वाचक मंडल में निर्वाचित सांसद और राज्य विधानसभाओं के सदस्य होते हैं. इस निर्वाचक मंडल में 4,120 विधायकों और 776 निर्वाचित सांसदों सहित कुल 4,896 मतदाता होते हैं. जहां लोकसभा अध्यक्ष निर्वाचित सदस्य होने के नाते मतदान कर सकते हैं, वहीं लोकसभा में मनोनीत दो एंग्लो-इंडियन समुदाय के सदस्य और राज्यसभा में 12 मनोनीत सदस्य मतदान नहीं कर सकते.
विधायकों के मत का मूल्य उस राज्य के आकार पर निर्भर करता है, जिसका वे प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन सांसदों के मत का मूल्य समान रहता है और उसमें कोई परिवर्तन नहीं होता. निर्वाचक मंडल के कुल मतों का मूल्य 10,98,882 होता है. चुनाव आयोग के एक अधिकारी का कहना है कि हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव से पहले केंद्र में सत्तासीन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पास 75,076 मतों की कमी थी, लेकिन अब उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मणिपुर में बीजेपी के शानदार प्रदर्शन के बाद यह फासला घटकर 20,000 मतों पर आ जाएगा. अगर बीजेपी ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) के 134 और बीजू जनता दल (बीजद) के 117 विधायकों का समर्थन हासिल करने में कामयाब रहती है, तो वह अपनी पसंद के व्यक्ति को आसानी से राष्ट्रपति बना सकती है.टिप्पणियां
राज्यसभा में बीजेपी के फिलहाल 56 सदस्य हैं, जबकि कांग्रेस 59 सदस्यों के साथ यहां सबसे बड़ी पार्टी है. शनिवार की जीत के बाद अगले साल बीजेपी राज्यसभा में सबसे बड़ी पार्टी बन जाएगी और एनडीए के कुल सदस्यों की संख्या 100 के करीब हो जाएगी. हालांकि, तब भी वह संसद के उच्च सदन में बहुमत से दूर ही रहेगी.
उधर, अब उत्तर प्रदेश की बीएसपी अपनी नेता मायावती को दोबारा राज्यसभा में भेजने में सक्षम नहीं रही है. बसपा इस बार 403-सदस्यीय विधानसभा में मात्र 19 सीटें जीत सकी है, जिससे वह अपने दम पर मायावती को दोबारा राज्यसभा में भेजने की स्थिति में नहीं रह गई है. मायावती का राज्यसभा में मौजूदा कार्यकाल अगले साल समाप्त हो रहा है.
नियमानुसार इन तीनों बीजेपी नेताओं को पद पर नियुक्ति के छह महीने के भीतर चुनाव जीतना होगा. इन लोगों का यह छह महीने सितंबर तक पूरा होता है जबकि राष्ट्रपति का चुनाव जुलाई में होना तय किया गया है. बीजेपी नेताओं का कहना है कि वह अपने इन सांसदों को राष्ट्रपति चुनाव तक इस्तीफा नहीं देने देगी. इसके अलावा बीजेपी कुछ और बातों पर भी ध्यान दे रही है ताकि जो थोड़ी बहुत कमी है पड़ रही है उसे भी पूरा कर लिया जाए.
बीजेपी नेताओं का कहना है कि अब इन चुनावों के बाद पार्टी ने अपना पूरा ध्यान राष्ट्रपति चुनाव पर केंद्रित किया है. कहा जा रहा है कि बीजेपी हालिया विधानसभा चुनाव में मिली प्रचंड जीत के बाद अपनी पसंद का राष्ट्रपति बनाना चाह रही है
जानकारी के लिए बता दें कि आदित्यनाथ योगी और केशव प्रसाद मौर्य के पास दो विकल्प हैं. अगर वे चाहें तो विधानसभा का उप-चुनाव लड़ सकते हैं या फिर विधान परिषद में भी चुने जा सकते हैं. योगी आदित्यनाथ से पहले अखिलेश यादव और मायावती दोनों ही विधान परिषद के सदस्यता के साथ मुख्यमंत्री पद पर रहे थे. यानि यह साफ है कि राज्य के इन दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों ने विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ा था.
उल्लेखनीय है कि मंगलवार को संसद में बतौर सांसद योगी आदित्यनाथ अपना अंतिम भाषण दिया. वैसे राज्य के कई विधायक योगी आदित्यनाथ के लिए अपनी सीट छोड़ने को तैयार हैं ताकि वह उस सीट से विधानसभा चुनाव लड़ सकें.
हमारे देश में राष्ट्रपति का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के ज़रिये होता है, और राष्ट्रपति निर्वाचक मंडल में निर्वाचित सांसद और राज्य विधानसभाओं के सदस्य होते हैं. इस निर्वाचक मंडल में 4,120 विधायकों और 776 निर्वाचित सांसदों सहित कुल 4,896 मतदाता होते हैं. जहां लोकसभा अध्यक्ष निर्वाचित सदस्य होने के नाते मतदान कर सकते हैं, वहीं लोकसभा में मनोनीत दो एंग्लो-इंडियन समुदाय के सदस्य और राज्यसभा में 12 मनोनीत सदस्य मतदान नहीं कर सकते.
विधायकों के मत का मूल्य उस राज्य के आकार पर निर्भर करता है, जिसका वे प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन सांसदों के मत का मूल्य समान रहता है और उसमें कोई परिवर्तन नहीं होता. निर्वाचक मंडल के कुल मतों का मूल्य 10,98,882 होता है. चुनाव आयोग के एक अधिकारी का कहना है कि हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव से पहले केंद्र में सत्तासीन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पास 75,076 मतों की कमी थी, लेकिन अब उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मणिपुर में बीजेपी के शानदार प्रदर्शन के बाद यह फासला घटकर 20,000 मतों पर आ जाएगा. अगर बीजेपी ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) के 134 और बीजू जनता दल (बीजद) के 117 विधायकों का समर्थन हासिल करने में कामयाब रहती है, तो वह अपनी पसंद के व्यक्ति को आसानी से राष्ट्रपति बना सकती है.टिप्पणियां
राज्यसभा में बीजेपी के फिलहाल 56 सदस्य हैं, जबकि कांग्रेस 59 सदस्यों के साथ यहां सबसे बड़ी पार्टी है. शनिवार की जीत के बाद अगले साल बीजेपी राज्यसभा में सबसे बड़ी पार्टी बन जाएगी और एनडीए के कुल सदस्यों की संख्या 100 के करीब हो जाएगी. हालांकि, तब भी वह संसद के उच्च सदन में बहुमत से दूर ही रहेगी.
उधर, अब उत्तर प्रदेश की बीएसपी अपनी नेता मायावती को दोबारा राज्यसभा में भेजने में सक्षम नहीं रही है. बसपा इस बार 403-सदस्यीय विधानसभा में मात्र 19 सीटें जीत सकी है, जिससे वह अपने दम पर मायावती को दोबारा राज्यसभा में भेजने की स्थिति में नहीं रह गई है. मायावती का राज्यसभा में मौजूदा कार्यकाल अगले साल समाप्त हो रहा है.
बीजेपी नेताओं का कहना है कि अब इन चुनावों के बाद पार्टी ने अपना पूरा ध्यान राष्ट्रपति चुनाव पर केंद्रित किया है. कहा जा रहा है कि बीजेपी हालिया विधानसभा चुनाव में मिली प्रचंड जीत के बाद अपनी पसंद का राष्ट्रपति बनाना चाह रही है
जानकारी के लिए बता दें कि आदित्यनाथ योगी और केशव प्रसाद मौर्य के पास दो विकल्प हैं. अगर वे चाहें तो विधानसभा का उप-चुनाव लड़ सकते हैं या फिर विधान परिषद में भी चुने जा सकते हैं. योगी आदित्यनाथ से पहले अखिलेश यादव और मायावती दोनों ही विधान परिषद के सदस्यता के साथ मुख्यमंत्री पद पर रहे थे. यानि यह साफ है कि राज्य के इन दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों ने विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ा था.
उल्लेखनीय है कि मंगलवार को संसद में बतौर सांसद योगी आदित्यनाथ अपना अंतिम भाषण दिया. वैसे राज्य के कई विधायक योगी आदित्यनाथ के लिए अपनी सीट छोड़ने को तैयार हैं ताकि वह उस सीट से विधानसभा चुनाव लड़ सकें.
हमारे देश में राष्ट्रपति का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के ज़रिये होता है, और राष्ट्रपति निर्वाचक मंडल में निर्वाचित सांसद और राज्य विधानसभाओं के सदस्य होते हैं. इस निर्वाचक मंडल में 4,120 विधायकों और 776 निर्वाचित सांसदों सहित कुल 4,896 मतदाता होते हैं. जहां लोकसभा अध्यक्ष निर्वाचित सदस्य होने के नाते मतदान कर सकते हैं, वहीं लोकसभा में मनोनीत दो एंग्लो-इंडियन समुदाय के सदस्य और राज्यसभा में 12 मनोनीत सदस्य मतदान नहीं कर सकते.
विधायकों के मत का मूल्य उस राज्य के आकार पर निर्भर करता है, जिसका वे प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन सांसदों के मत का मूल्य समान रहता है और उसमें कोई परिवर्तन नहीं होता. निर्वाचक मंडल के कुल मतों का मूल्य 10,98,882 होता है. चुनाव आयोग के एक अधिकारी का कहना है कि हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव से पहले केंद्र में सत्तासीन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पास 75,076 मतों की कमी थी, लेकिन अब उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मणिपुर में बीजेपी के शानदार प्रदर्शन के बाद यह फासला घटकर 20,000 मतों पर आ जाएगा. अगर बीजेपी ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) के 134 और बीजू जनता दल (बीजद) के 117 विधायकों का समर्थन हासिल करने में कामयाब रहती है, तो वह अपनी पसंद के व्यक्ति को आसानी से राष्ट्रपति बना सकती है.टिप्पणियां
राज्यसभा में बीजेपी के फिलहाल 56 सदस्य हैं, जबकि कांग्रेस 59 सदस्यों के साथ यहां सबसे बड़ी पार्टी है. शनिवार की जीत के बाद अगले साल बीजेपी राज्यसभा में सबसे बड़ी पार्टी बन जाएगी और एनडीए के कुल सदस्यों की संख्या 100 के करीब हो जाएगी. हालांकि, तब भी वह संसद के उच्च सदन में बहुमत से दूर ही रहेगी.
उधर, अब उत्तर प्रदेश की बीएसपी अपनी नेता मायावती को दोबारा राज्यसभा में भेजने में सक्षम नहीं रही है. बसपा इस बार 403-सदस्यीय विधानसभा में मात्र 19 सीटें जीत सकी है, जिससे वह अपने दम पर मायावती को दोबारा राज्यसभा में भेजने की स्थिति में नहीं रह गई है. मायावती का राज्यसभा में मौजूदा कार्यकाल अगले साल समाप्त हो रहा है.
जानकारी के लिए बता दें कि आदित्यनाथ योगी और केशव प्रसाद मौर्य के पास दो विकल्प हैं. अगर वे चाहें तो विधानसभा का उप-चुनाव लड़ सकते हैं या फिर विधान परिषद में भी चुने जा सकते हैं. योगी आदित्यनाथ से पहले अखिलेश यादव और मायावती दोनों ही विधान परिषद के सदस्यता के साथ मुख्यमंत्री पद पर रहे थे. यानि यह साफ है कि राज्य के इन दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों ने विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ा था.
उल्लेखनीय है कि मंगलवार को संसद में बतौर सांसद योगी आदित्यनाथ अपना अंतिम भाषण दिया. वैसे राज्य के कई विधायक योगी आदित्यनाथ के लिए अपनी सीट छोड़ने को तैयार हैं ताकि वह उस सीट से विधानसभा चुनाव लड़ सकें.
हमारे देश में राष्ट्रपति का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के ज़रिये होता है, और राष्ट्रपति निर्वाचक मंडल में निर्वाचित सांसद और राज्य विधानसभाओं के सदस्य होते हैं. इस निर्वाचक मंडल में 4,120 विधायकों और 776 निर्वाचित सांसदों सहित कुल 4,896 मतदाता होते हैं. जहां लोकसभा अध्यक्ष निर्वाचित सदस्य होने के नाते मतदान कर सकते हैं, वहीं लोकसभा में मनोनीत दो एंग्लो-इंडियन समुदाय के सदस्य और राज्यसभा में 12 मनोनीत सदस्य मतदान नहीं कर सकते.
विधायकों के मत का मूल्य उस राज्य के आकार पर निर्भर करता है, जिसका वे प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन सांसदों के मत का मूल्य समान रहता है और उसमें कोई परिवर्तन नहीं होता. निर्वाचक मंडल के कुल मतों का मूल्य 10,98,882 होता है. चुनाव आयोग के एक अधिकारी का कहना है कि हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव से पहले केंद्र में सत्तासीन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पास 75,076 मतों की कमी थी, लेकिन अब उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मणिपुर में बीजेपी के शानदार प्रदर्शन के बाद यह फासला घटकर 20,000 मतों पर आ जाएगा. अगर बीजेपी ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) के 134 और बीजू जनता दल (बीजद) के 117 विधायकों का समर्थन हासिल करने में कामयाब रहती है, तो वह अपनी पसंद के व्यक्ति को आसानी से राष्ट्रपति बना सकती है.टिप्पणियां
राज्यसभा में बीजेपी के फिलहाल 56 सदस्य हैं, जबकि कांग्रेस 59 सदस्यों के साथ यहां सबसे बड़ी पार्टी है. शनिवार की जीत के बाद अगले साल बीजेपी राज्यसभा में सबसे बड़ी पार्टी बन जाएगी और एनडीए के कुल सदस्यों की संख्या 100 के करीब हो जाएगी. हालांकि, तब भी वह संसद के उच्च सदन में बहुमत से दूर ही रहेगी.
उधर, अब उत्तर प्रदेश की बीएसपी अपनी नेता मायावती को दोबारा राज्यसभा में भेजने में सक्षम नहीं रही है. बसपा इस बार 403-सदस्यीय विधानसभा में मात्र 19 सीटें जीत सकी है, जिससे वह अपने दम पर मायावती को दोबारा राज्यसभा में भेजने की स्थिति में नहीं रह गई है. मायावती का राज्यसभा में मौजूदा कार्यकाल अगले साल समाप्त हो रहा है.
उल्लेखनीय है कि मंगलवार को संसद में बतौर सांसद योगी आदित्यनाथ अपना अंतिम भाषण दिया. वैसे राज्य के कई विधायक योगी आदित्यनाथ के लिए अपनी सीट छोड़ने को तैयार हैं ताकि वह उस सीट से विधानसभा चुनाव लड़ सकें.
हमारे देश में राष्ट्रपति का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के ज़रिये होता है, और राष्ट्रपति निर्वाचक मंडल में निर्वाचित सांसद और राज्य विधानसभाओं के सदस्य होते हैं. इस निर्वाचक मंडल में 4,120 विधायकों और 776 निर्वाचित सांसदों सहित कुल 4,896 मतदाता होते हैं. जहां लोकसभा अध्यक्ष निर्वाचित सदस्य होने के नाते मतदान कर सकते हैं, वहीं लोकसभा में मनोनीत दो एंग्लो-इंडियन समुदाय के सदस्य और राज्यसभा में 12 मनोनीत सदस्य मतदान नहीं कर सकते.
विधायकों के मत का मूल्य उस राज्य के आकार पर निर्भर करता है, जिसका वे प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन सांसदों के मत का मूल्य समान रहता है और उसमें कोई परिवर्तन नहीं होता. निर्वाचक मंडल के कुल मतों का मूल्य 10,98,882 होता है. चुनाव आयोग के एक अधिकारी का कहना है कि हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव से पहले केंद्र में सत्तासीन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पास 75,076 मतों की कमी थी, लेकिन अब उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मणिपुर में बीजेपी के शानदार प्रदर्शन के बाद यह फासला घटकर 20,000 मतों पर आ जाएगा. अगर बीजेपी ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) के 134 और बीजू जनता दल (बीजद) के 117 विधायकों का समर्थन हासिल करने में कामयाब रहती है, तो वह अपनी पसंद के व्यक्ति को आसानी से राष्ट्रपति बना सकती है.टिप्पणियां
राज्यसभा में बीजेपी के फिलहाल 56 सदस्य हैं, जबकि कांग्रेस 59 सदस्यों के साथ यहां सबसे बड़ी पार्टी है. शनिवार की जीत के बाद अगले साल बीजेपी राज्यसभा में सबसे बड़ी पार्टी बन जाएगी और एनडीए के कुल सदस्यों की संख्या 100 के करीब हो जाएगी. हालांकि, तब भी वह संसद के उच्च सदन में बहुमत से दूर ही रहेगी.
उधर, अब उत्तर प्रदेश की बीएसपी अपनी नेता मायावती को दोबारा राज्यसभा में भेजने में सक्षम नहीं रही है. बसपा इस बार 403-सदस्यीय विधानसभा में मात्र 19 सीटें जीत सकी है, जिससे वह अपने दम पर मायावती को दोबारा राज्यसभा में भेजने की स्थिति में नहीं रह गई है. मायावती का राज्यसभा में मौजूदा कार्यकाल अगले साल समाप्त हो रहा है.
हमारे देश में राष्ट्रपति का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के ज़रिये होता है, और राष्ट्रपति निर्वाचक मंडल में निर्वाचित सांसद और राज्य विधानसभाओं के सदस्य होते हैं. इस निर्वाचक मंडल में 4,120 विधायकों और 776 निर्वाचित सांसदों सहित कुल 4,896 मतदाता होते हैं. जहां लोकसभा अध्यक्ष निर्वाचित सदस्य होने के नाते मतदान कर सकते हैं, वहीं लोकसभा में मनोनीत दो एंग्लो-इंडियन समुदाय के सदस्य और राज्यसभा में 12 मनोनीत सदस्य मतदान नहीं कर सकते.
विधायकों के मत का मूल्य उस राज्य के आकार पर निर्भर करता है, जिसका वे प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन सांसदों के मत का मूल्य समान रहता है और उसमें कोई परिवर्तन नहीं होता. निर्वाचक मंडल के कुल मतों का मूल्य 10,98,882 होता है. चुनाव आयोग के एक अधिकारी का कहना है कि हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव से पहले केंद्र में सत्तासीन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पास 75,076 मतों की कमी थी, लेकिन अब उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मणिपुर में बीजेपी के शानदार प्रदर्शन के बाद यह फासला घटकर 20,000 मतों पर आ जाएगा. अगर बीजेपी ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) के 134 और बीजू जनता दल (बीजद) के 117 विधायकों का समर्थन हासिल करने में कामयाब रहती है, तो वह अपनी पसंद के व्यक्ति को आसानी से राष्ट्रपति बना सकती है.टिप्पणियां
राज्यसभा में बीजेपी के फिलहाल 56 सदस्य हैं, जबकि कांग्रेस 59 सदस्यों के साथ यहां सबसे बड़ी पार्टी है. शनिवार की जीत के बाद अगले साल बीजेपी राज्यसभा में सबसे बड़ी पार्टी बन जाएगी और एनडीए के कुल सदस्यों की संख्या 100 के करीब हो जाएगी. हालांकि, तब भी वह संसद के उच्च सदन में बहुमत से दूर ही रहेगी.
उधर, अब उत्तर प्रदेश की बीएसपी अपनी नेता मायावती को दोबारा राज्यसभा में भेजने में सक्षम नहीं रही है. बसपा इस बार 403-सदस्यीय विधानसभा में मात्र 19 सीटें जीत सकी है, जिससे वह अपने दम पर मायावती को दोबारा राज्यसभा में भेजने की स्थिति में नहीं रह गई है. मायावती का राज्यसभा में मौजूदा कार्यकाल अगले साल समाप्त हो रहा है.
विधायकों के मत का मूल्य उस राज्य के आकार पर निर्भर करता है, जिसका वे प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन सांसदों के मत का मूल्य समान रहता है और उसमें कोई परिवर्तन नहीं होता. निर्वाचक मंडल के कुल मतों का मूल्य 10,98,882 होता है. चुनाव आयोग के एक अधिकारी का कहना है कि हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव से पहले केंद्र में सत्तासीन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पास 75,076 मतों की कमी थी, लेकिन अब उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मणिपुर में बीजेपी के शानदार प्रदर्शन के बाद यह फासला घटकर 20,000 मतों पर आ जाएगा. अगर बीजेपी ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) के 134 और बीजू जनता दल (बीजद) के 117 विधायकों का समर्थन हासिल करने में कामयाब रहती है, तो वह अपनी पसंद के व्यक्ति को आसानी से राष्ट्रपति बना सकती है.टिप्पणियां
राज्यसभा में बीजेपी के फिलहाल 56 सदस्य हैं, जबकि कांग्रेस 59 सदस्यों के साथ यहां सबसे बड़ी पार्टी है. शनिवार की जीत के बाद अगले साल बीजेपी राज्यसभा में सबसे बड़ी पार्टी बन जाएगी और एनडीए के कुल सदस्यों की संख्या 100 के करीब हो जाएगी. हालांकि, तब भी वह संसद के उच्च सदन में बहुमत से दूर ही रहेगी.
उधर, अब उत्तर प्रदेश की बीएसपी अपनी नेता मायावती को दोबारा राज्यसभा में भेजने में सक्षम नहीं रही है. बसपा इस बार 403-सदस्यीय विधानसभा में मात्र 19 सीटें जीत सकी है, जिससे वह अपने दम पर मायावती को दोबारा राज्यसभा में भेजने की स्थिति में नहीं रह गई है. मायावती का राज्यसभा में मौजूदा कार्यकाल अगले साल समाप्त हो रहा है.
राज्यसभा में बीजेपी के फिलहाल 56 सदस्य हैं, जबकि कांग्रेस 59 सदस्यों के साथ यहां सबसे बड़ी पार्टी है. शनिवार की जीत के बाद अगले साल बीजेपी राज्यसभा में सबसे बड़ी पार्टी बन जाएगी और एनडीए के कुल सदस्यों की संख्या 100 के करीब हो जाएगी. हालांकि, तब भी वह संसद के उच्च सदन में बहुमत से दूर ही रहेगी.
उधर, अब उत्तर प्रदेश की बीएसपी अपनी नेता मायावती को दोबारा राज्यसभा में भेजने में सक्षम नहीं रही है. बसपा इस बार 403-सदस्यीय विधानसभा में मात्र 19 सीटें जीत सकी है, जिससे वह अपने दम पर मायावती को दोबारा राज्यसभा में भेजने की स्थिति में नहीं रह गई है. मायावती का राज्यसभा में मौजूदा कार्यकाल अगले साल समाप्त हो रहा है.
उधर, अब उत्तर प्रदेश की बीएसपी अपनी नेता मायावती को दोबारा राज्यसभा में भेजने में सक्षम नहीं रही है. बसपा इस बार 403-सदस्यीय विधानसभा में मात्र 19 सीटें जीत सकी है, जिससे वह अपने दम पर मायावती को दोबारा राज्यसभा में भेजने की स्थिति में नहीं रह गई है. मायावती का राज्यसभा में मौजूदा कार्यकाल अगले साल समाप्त हो रहा है. | सारांश: मनोहर पर्रिकर, योगी आदित्यनाथ, केशव प्रसाद मौर्य सांसद हैं.
तीनों को ही संसद सदस्यता छोड़नी है.
राष्ट्रपति चुनाव जुलाई से पहले होने हैं. | 20 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: उत्तर प्रदेश सरकार ने परिवार कल्याण विभाग के मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) डॉक्टर बीपी सिंह हत्याकांड के मुख्य अभियुक्त डिप्टी सीएमओ डाक्टर वाईएस सचान की जिला जेल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत को प्रथम दृष्ट्या आत्महत्या का मामला बताते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि मामले की न्यायिक जांच हो रही है जिसके बाद ही किसी नतीजे पर पहुंचा जा सकेगा। प्रदेश के मंत्रिमण्डलीय सचिव शशांक शेखर सिंह ने कहा डाक्टर सचान के शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक उनकी मृत्यु अत्यधिक खून बहने की वजह से हुई। साथ ही मृत्यु के एक दिन के अंदर ही पोस्टमार्टम हुआ। प्रथम दृष्टया यह आत्महत्या का मामला लगता है। उन्होंने बताया, मृतक के शरीर पर कुल नौ चोटें हैं जिनमें आठ चोटें धारदार हथियारों से हुई हैं। इनमें से दो गर्दन पर, दो दाईं कोहनी पर, दो बाई कोहनी पर, एक दाई जांच के ऊपरी हिस्से और एक बाईं कलाई पर थी। इसके अलावा गले में फंदे का निशान भी पाया गया। सिंह ने बताया कि ऐसा लगता है कि मौत से पहले सचान ने अपनी नसें काटी थीं। मौके पर एक बहुत तेज ब्लेड भी मिला है जिसे कब्जे में ले लिया गया है। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सचान की मौत का कारण स्पष्ट नहीं हुआ है। कानून के मुताबिक न्यायिक मजिस्ट्रेट ने जांच शुरू कर दी है। गौरतलब है कि सीएमओ बीपी सिंह हत्याकांड के मुख्य आरोपी डाक्टर सचान कल रात जिला जेल के अस्पताल के शौचालय में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाए गए थे। | यह एक सारांश है: सिंह ने कहा, डाक्टर सचान के शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक उनकी मृत्यु अत्यधिक खून बहने की वजह से हुई।' | 21 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: भारतीय जनता पार्टी की सांसद रमा देवी से अभद्र बात कहने पर सपा सांसद आजम खान ने लोकसभा में माफी मांग ली है. आजम खान ने सोमवार को लोकसभा में अपने बया को लेकर माफी मांगी है. इस पर राम देवी ने कहा कि आजम खान की आदत बिगड़ी हुई है. साथ ही उन्होंने अखिलेश यादव से सवाल किया कि आप आजम खान का समर्थन क्यों कर रहे हैं. न्यूज एजेंसी एएनआई की मुताबिक सोमवार को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और सांसद आजम खान ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की. इस दौरान बैठक में रमा देवी भी मौजूद थीं. बता दें, 25 जुलाई को आजम खान ने रमा देवी को लेकर आपत्तिजनक बयान दिया था.
आजम खान ने बिना शर्त के माफी मांगते हुए कहा, 'आसन के लिये मेरी कोई गलत भावना हो, ऐसा संभव ही नहीं है, फिर भी आसन को लगता है कि मुझसे कोई गलती हुई है तो मैं क्षमा मांगता हूं.'
बता दें, भाजपा सांसद रमा देवी ने कहा था कि उनके खिलाफ की गई टिप्पणियों के लिए समाजवादी पार्टी के सांसद आजम खान को लोकसभा से पांच साल के लिए निलंबित किया जाना चाहिए, सिर्फ माफी से काम नहीं चलेगा. खान ने गुरुवार को जिस समय आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, उस समय रमा देवी पीठासीन सभापति का दायित्व निभा रही थीं. देवी ने कहा था, ‘उन्हें (आजम खान) कड़ी सजा दी जानी चाहिए और पांच साल के लिए निलंबित किया जाना चाहिए.' बिहार से सांसद रमा देवी ने कहा कि यदि आजम खान ने तत्काल माफी मांगी होती तो वह उन्हें माफ कर देतीं, लेकिन वह बाहर चले गए.
देवी ने कहा कि अब खान के महज माफी मांगने से काम नहीं चलेगा. रिकॉर्ड से हटाई गईं उनकी टिप्पणियां संसद और सभी सदस्यों का अपमान थीं. विभिन्न दलों के सदस्यों के साथ बैठक के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने खान से कहा है कि या तो वह माफी मांगें, अन्यथा वह उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे. लोकसभा में सदस्यों ने पार्टी लाइन से हटकर शुक्रवार को खान की टिप्पणियों की निन्दा की थी और साथ ही उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने की मांग की थी. | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: आजम खान ने की थी अभद्र टिप्पणी
लोकसभा में हुआ था जमकर हंगामा
आजम खान ने बिना शर्त मांगी माफी | 32 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: यूरो को बचाने की मुहिम के तहत 23 यूरोपीय देश अपनी अर्थव्यवस्थाओं को एक-दूसरे के और नजदीक लाने के लिए नई संधि की ओर बढ़े हैं, पर वे इसमें ब्रिटेन तथा संघ के तीन अन्य सदस्यों को शामिल करवा पाने में विफल रहे हैं। रात भर चली मैराथन बातचीत के बाद 23 देशों ने इस नई संधि का समर्थन करने का फैसला किया है, जिसके तहत राष्ट्रीय बजट पर कड़ी निगाह रखी जाएगी। इन देशों का मकसद बाजारों को यह भरोसा दिलाना है कि बढ़ते नकदी संकट के बावजूद यूरो का भविष्य है। इस संधि पर दुनिया भर की सरकारों और बाजारों की निगाह है। यूरोपीय नेताओं के समक्ष अभी भी कई तरह की बाधाएं हैं। उनके बीच इस मुद्दे पर आज एक और बैठक होगी, जिसमें यह तय किया जाएगा कि इस संधि में किन बातों का समावेश किया जाए और किस तरह कड़े बजट नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई हो। वे चाहते हैं कि इसे मार्च तक लिख दिया जाए। ब्रिटेन में यूरो मुद्रा का इस्तेमाल नहीं होता। उसने इस संधि का विरोध करते हुए कहा है कि इससे उसकी राष्ट्रीय अखंडता और लंदन का प्रतिष्ठित वित्तीय सेवा उद्योग प्रभावित होगा। | सारांश: यूरो को बचाने की मुहिम के तहत 23 यूरोपीय देश अपनी अर्थव्यवस्थाओं को एक-दूसरे के और नजदीक लाने के लिए नई संधि की ओर बढ़े हैं। | 33 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: गोवा सरकार ने राज्य में चल रही सभी खदानों को बंद करने की अधिसूचना जारी की है। यह फैसला जस्टिस एमबी शाह की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया।टिप्पणियां
गोवा में करीब 90 खदाने चलती हैं, जिनसे हो रही खुदाई को लेकर काफी बवाल मचा था। अब राज्य सरकार के इस आदेश से राज्य में हो रहे अवैध खनन पर लगाम लगने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री मनोहर पार्रिकर ने इस बारे में कहा कि अगर खदान में बिना आवश्यक अनुमति के काम हो रहा है तो उन्हें संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी।
गोवा में करीब 90 खदाने चलती हैं, जिनसे हो रही खुदाई को लेकर काफी बवाल मचा था। अब राज्य सरकार के इस आदेश से राज्य में हो रहे अवैध खनन पर लगाम लगने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री मनोहर पार्रिकर ने इस बारे में कहा कि अगर खदान में बिना आवश्यक अनुमति के काम हो रहा है तो उन्हें संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी।
मुख्यमंत्री मनोहर पार्रिकर ने इस बारे में कहा कि अगर खदान में बिना आवश्यक अनुमति के काम हो रहा है तो उन्हें संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी। | गोवा सरकार ने राज्य में चल रही सभी खदानों को बंद करने की अधिसूचना जारी की है। यह फैसला जस्टिस एमबी शाह की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया। | 6 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: फिल्म धोबी घाट की स्क्रीनिंग से मिलने वाली राशि द्वितीय विश्व युद्ध में अपने अद्भुत शौर्य का प्रदर्शन करने वाली भारतीय मूल की नूर इनायत खान के लंदन स्मारक को दान की जाएगी। धोबी घाट जाने-माने अभिनेता आमिर खान की पत्नी किरण राव की निर्माता के तौर पर पहली फिल्म है। किरण ने घोषणा की है कि यहां फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग के दौरान मिलने वाली राशि को स्मारक के लिए दान किया जाएगा। इस स्क्रीनिंग में ब्रिटेन के उच्च और निम्न दोनों सदनों के सदस्यों के उपस्थित होने की संभावना है। किरण ने एक बयान में कहा, मैं बहुत खुश हूं कि हमारी फिल्म 'धोबी घाट' नूर इनायत खान की स्मृति में बनने वाले लंदन के गार्डन स्क्वायर के लिए धनराशि इकट्ठा करने वालों में से एक है। उसकी प्रेरणास्पद गाथा सदैव स्मरणीय रहेगी। मैं यह स्क्रीनिंग नूर और उसके अद्भुत शौर्य को समर्पित करतीं हूं। उन्होंने कहा, मुझे उम्मीद है कि आपको फिल्म पसंद आएगी। फिल्म का बेसब्री से इंतजार कर रहे लोगों के लिए धोबी घाट (मुंबई डायरी) 21 जनवरी को रिलीज होगी। उल्लेखनीय है कि नूर की स्मृति में बनने वाला लंदन का गार्डन स्क्वायर ब्रिटेन में किसी भारतीय महिला और किसी मुस्लिम महिला की स्मृति में बनने वाला पहला स्मारक होगा। | संक्षिप्त सारांश: धोबी घाट की स्क्रीनिंग से मिलने वाली राशि द्वितीय विश्व युद्ध में अपने अद्भुत शौर्य का प्रदर्शन करने वाली भारतीय मूल की नूर इनायत खान के लंदन स्मारक को दान की जाएगी। | 23 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: ऑस्ट्रेलिया के सीनियर बल्लेबाज माइकल हस्सी भारत के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच से पहले थोड़ा नर्वस हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि सचिन तेंदुलकर की अगुवाई में भारतीय बल्लेबाज मंगलवार से शुरू होने वाले इस मैच में जबर्दस्त प्रदर्शन करेंगे।
हस्सी ने कहा, ‘‘मैं थोड़ा नर्वस हूं। तेंदुलकर को (अपने 100वें शतक के लिए) केवल एक शतक की दरकार है और सिडनी में उन्होंने ढेर सारे रन बनाए हैं। यह हमारे लिए शुभ नहीं है। ’’ ऑस्ट्रेलिया ने मेलबर्न पर पहले टेस्ट मैच में 122 रन से जीत दर्ज की जिसमें हस्सी ने दूसरी पारी में 89 रन बनाकर अहम योगदान दिया। बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई टीम को पता है कि भारत दमदार वापसी करेगा। उन्होंने कहा, ‘‘वे अपने खेल को अच्छी तरह जानते हैं। वे ऑस्ट्रेलिया में खेले हैं और वापसी कर सकते हैं।’’ हस्सी हालांकि ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाजों के प्रदर्शन से काफी प्रभावित हैं और उनको लगता है कि यदि सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर तेज गेंदबाजों को मदद मिलती है तो भारतीयों के लिए रन बनाना मुश्किल होगा।
उन्होंने कहा, ‘‘ हम अगले दो दिन परिस्थितियों पर गौर करेंगे। हाल के वर्षों में इस पिच में विशेषकर पहले दिन काफी कुछ हुआ है। मेलबर्न में केवल ऑफ स्टंप के बाहर अतिरिक्त उछाल और सीम मूवमेंट से कई विकेट निकले थे।’’ | हस्सी को लगता है कि सचिन तेंदुलकर की अगुवाई में भारतीय बल्लेबाज मंगलवार से शुरू होने वाले मैच में जबर्दस्त प्रदर्शन करेंगे। | 28 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के तहत बुधवार को शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न हुए तीसरे चरण के मतदान में 57 से 58 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकर का इस्तेमाल किया।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी उमेश सिन्हा ने आईएएनएस को बताया कि अनुमान है कि 57 से 58 फीसदी मतदान हुआ है। यह आंकड़ा पिछले चुनाव की तुलना में अधिक है। पिछले विधानसभा चुनाव में 42.6 फीसदी मतदान हुआ था।
इस तरह कुल 1,018 प्रत्याशियों की किस्मत इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) में कैद हो गई। तीसरे चरण में 10 जिलों की 56 सीटों के लिए मतदान हुआ।टिप्पणियां
जिन 10 जिलों में मतदान संपन्न हुआ उनमें छत्रपति शाहूजी महाराजनगर, सुल्तानपुर, कौशाम्बी, जौनपुर, वाराणसी, सोनभद्र, मिर्जापुर, इलाहबाद, भदोही और चंदौली शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि पहले चरण में 62 फीसदी और दूसरे चरण में 59 फीसदी मतदान हुआ था।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी उमेश सिन्हा ने आईएएनएस को बताया कि अनुमान है कि 57 से 58 फीसदी मतदान हुआ है। यह आंकड़ा पिछले चुनाव की तुलना में अधिक है। पिछले विधानसभा चुनाव में 42.6 फीसदी मतदान हुआ था।
इस तरह कुल 1,018 प्रत्याशियों की किस्मत इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) में कैद हो गई। तीसरे चरण में 10 जिलों की 56 सीटों के लिए मतदान हुआ।टिप्पणियां
जिन 10 जिलों में मतदान संपन्न हुआ उनमें छत्रपति शाहूजी महाराजनगर, सुल्तानपुर, कौशाम्बी, जौनपुर, वाराणसी, सोनभद्र, मिर्जापुर, इलाहबाद, भदोही और चंदौली शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि पहले चरण में 62 फीसदी और दूसरे चरण में 59 फीसदी मतदान हुआ था।
इस तरह कुल 1,018 प्रत्याशियों की किस्मत इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) में कैद हो गई। तीसरे चरण में 10 जिलों की 56 सीटों के लिए मतदान हुआ।टिप्पणियां
जिन 10 जिलों में मतदान संपन्न हुआ उनमें छत्रपति शाहूजी महाराजनगर, सुल्तानपुर, कौशाम्बी, जौनपुर, वाराणसी, सोनभद्र, मिर्जापुर, इलाहबाद, भदोही और चंदौली शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि पहले चरण में 62 फीसदी और दूसरे चरण में 59 फीसदी मतदान हुआ था।
जिन 10 जिलों में मतदान संपन्न हुआ उनमें छत्रपति शाहूजी महाराजनगर, सुल्तानपुर, कौशाम्बी, जौनपुर, वाराणसी, सोनभद्र, मिर्जापुर, इलाहबाद, भदोही और चंदौली शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि पहले चरण में 62 फीसदी और दूसरे चरण में 59 फीसदी मतदान हुआ था।
उल्लेखनीय है कि पहले चरण में 62 फीसदी और दूसरे चरण में 59 फीसदी मतदान हुआ था। | उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के तहत बुधवार को शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न हुए तीसरे चरण के मतदान में 57 से 58 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकर का इस्तेमाल किया। | 34 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: यह पहली बार नहीं है जब देश में बड़े नोटों को वापस लिया गया हो और फिर मार्केट में नए सिरे से हजार, पांच हजार और दस हजार के रुपए लाए गए हों. 1946 में में भी हज़ार रुपए और 10 हज़ार रुपए के नोट वापस लिए गए थे. फिर 1954 में हज़ार, पांच हज़ार और दस हज़ार रुपए के नोट वापस लाए गए. उसके बाद जनवरी 1978 में इन्हें फिर बंद कर दिया गया.बीबीसी में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, 1978 में 16 जनवरी को एक अध्यादेश जारी कर हज़ार, पांच हज़ार और 10 हज़ार के नोट वापस लेने का फ़ैसला लिया गया था. आरबीआई) के ऐतिहासिक दस्तावेज़ (थर्ड वॉल्यूम) में पूरी प्रक्रिया का ब्यौरा दिया गया है. 14 जनवरी 1978 को रिज़र्व बैंक के चीफ़ अकाउटेंट ऑफ़िस के वरिष्ठ अधिकारी आर जानकी रमन को फ़ोन कर दिल्ली बुलाया गया. रमन दिल्ली पहुंचे तो उनसे एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि सरकार बड़े नोट वापस लेने का मन बना चुकी है और इससे संबंधित ज़रूरी अध्यदेश वो एक दिन में बनाएं. इस दौरान रिज़र्व बैंक के मुंबई स्थित केंद्रीय दफ़्तर से किसी भी तरह की बातचीत के लिए सख्त मना किया गया क्योंकि इससे बेवजह की अटकलों के फैलने का डर था. तय समय पर ये अध्यादेश तैयार हो गया और इसे तत्कालीन राष्ट्रपति नीलम संजीवा रेड्डी के पास अनुमोदन के लिए भेजा गया.टिप्पणियां
16 जनवरी की सुबह नौ बजे आकाशवाणी के बुलेटिन में इन बड़े नोटों के बंद होने की ख़बर का प्रसारण हो गया. अध्यादेश के मुताबिक़ अगले दिन यानी 17 जनवरी को सभी बैंकों के बंद रहने का ऐलान कर दिया गया. जॉइन लोगों के सामने रखते आर्थिक मामलों के सचिव शशि कांत दास (बाएं) और रिज़र्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल उस वक़्त के रिज़र्व बैंक के गवर्नर आईजी पटेल ने अपनी एक किताब में इस घटना के बारे में विस्तार से बताया है.
पटेल ने लिखा है कि वह सरकार के इस फ़ैसले के पक्ष में नहीं थे. उनके मुताबिक़ जनता पार्टी की सरकार के ही कुछ सदस्य मानते थे कि पिछली सरकार के कथित भ्रष्ट लोगों को निशाना बनाने के लिए ये क़दम उठाया गया है. पटेल ने ये भी लिखा कि जब तत्कालीन वित्त मंत्री एचएम पटेल ने उनसे नोट वापस लेने को कहा तो उन्होंने, वित्त मंत्री को साफ़ कहा था कि इस तरह के फ़ैसलों से मनमाफ़िक परिणाम कम ही मिलते हैं. आईजी पटेल ने लिखा कि काले धन को नक़द के रूप में बहुत कम लोग लंबे समय तक अपने पास रखते हैं. पटेल के मुताबिक़, सूटकेस और तकिए में बड़ी रकम छुपाकर रखने का आइडिया ही बड़ा बचकाना किस्म का है और जिनके पास बड़ी रक़म कैश के तौर पर है भी वो भी अपने एजेंट्स के ज़रिए उन्हें बदलवा लेंगे.
बीबीसी में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, 1978 में 16 जनवरी को एक अध्यादेश जारी कर हज़ार, पांच हज़ार और 10 हज़ार के नोट वापस लेने का फ़ैसला लिया गया था. आरबीआई) के ऐतिहासिक दस्तावेज़ (थर्ड वॉल्यूम) में पूरी प्रक्रिया का ब्यौरा दिया गया है. 14 जनवरी 1978 को रिज़र्व बैंक के चीफ़ अकाउटेंट ऑफ़िस के वरिष्ठ अधिकारी आर जानकी रमन को फ़ोन कर दिल्ली बुलाया गया. रमन दिल्ली पहुंचे तो उनसे एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि सरकार बड़े नोट वापस लेने का मन बना चुकी है और इससे संबंधित ज़रूरी अध्यदेश वो एक दिन में बनाएं. इस दौरान रिज़र्व बैंक के मुंबई स्थित केंद्रीय दफ़्तर से किसी भी तरह की बातचीत के लिए सख्त मना किया गया क्योंकि इससे बेवजह की अटकलों के फैलने का डर था. तय समय पर ये अध्यादेश तैयार हो गया और इसे तत्कालीन राष्ट्रपति नीलम संजीवा रेड्डी के पास अनुमोदन के लिए भेजा गया.टिप्पणियां
16 जनवरी की सुबह नौ बजे आकाशवाणी के बुलेटिन में इन बड़े नोटों के बंद होने की ख़बर का प्रसारण हो गया. अध्यादेश के मुताबिक़ अगले दिन यानी 17 जनवरी को सभी बैंकों के बंद रहने का ऐलान कर दिया गया. जॉइन लोगों के सामने रखते आर्थिक मामलों के सचिव शशि कांत दास (बाएं) और रिज़र्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल उस वक़्त के रिज़र्व बैंक के गवर्नर आईजी पटेल ने अपनी एक किताब में इस घटना के बारे में विस्तार से बताया है.
पटेल ने लिखा है कि वह सरकार के इस फ़ैसले के पक्ष में नहीं थे. उनके मुताबिक़ जनता पार्टी की सरकार के ही कुछ सदस्य मानते थे कि पिछली सरकार के कथित भ्रष्ट लोगों को निशाना बनाने के लिए ये क़दम उठाया गया है. पटेल ने ये भी लिखा कि जब तत्कालीन वित्त मंत्री एचएम पटेल ने उनसे नोट वापस लेने को कहा तो उन्होंने, वित्त मंत्री को साफ़ कहा था कि इस तरह के फ़ैसलों से मनमाफ़िक परिणाम कम ही मिलते हैं. आईजी पटेल ने लिखा कि काले धन को नक़द के रूप में बहुत कम लोग लंबे समय तक अपने पास रखते हैं. पटेल के मुताबिक़, सूटकेस और तकिए में बड़ी रकम छुपाकर रखने का आइडिया ही बड़ा बचकाना किस्म का है और जिनके पास बड़ी रक़म कैश के तौर पर है भी वो भी अपने एजेंट्स के ज़रिए उन्हें बदलवा लेंगे.
16 जनवरी की सुबह नौ बजे आकाशवाणी के बुलेटिन में इन बड़े नोटों के बंद होने की ख़बर का प्रसारण हो गया. अध्यादेश के मुताबिक़ अगले दिन यानी 17 जनवरी को सभी बैंकों के बंद रहने का ऐलान कर दिया गया. जॉइन लोगों के सामने रखते आर्थिक मामलों के सचिव शशि कांत दास (बाएं) और रिज़र्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल उस वक़्त के रिज़र्व बैंक के गवर्नर आईजी पटेल ने अपनी एक किताब में इस घटना के बारे में विस्तार से बताया है.
पटेल ने लिखा है कि वह सरकार के इस फ़ैसले के पक्ष में नहीं थे. उनके मुताबिक़ जनता पार्टी की सरकार के ही कुछ सदस्य मानते थे कि पिछली सरकार के कथित भ्रष्ट लोगों को निशाना बनाने के लिए ये क़दम उठाया गया है. पटेल ने ये भी लिखा कि जब तत्कालीन वित्त मंत्री एचएम पटेल ने उनसे नोट वापस लेने को कहा तो उन्होंने, वित्त मंत्री को साफ़ कहा था कि इस तरह के फ़ैसलों से मनमाफ़िक परिणाम कम ही मिलते हैं. आईजी पटेल ने लिखा कि काले धन को नक़द के रूप में बहुत कम लोग लंबे समय तक अपने पास रखते हैं. पटेल के मुताबिक़, सूटकेस और तकिए में बड़ी रकम छुपाकर रखने का आइडिया ही बड़ा बचकाना किस्म का है और जिनके पास बड़ी रक़म कैश के तौर पर है भी वो भी अपने एजेंट्स के ज़रिए उन्हें बदलवा लेंगे.
पटेल ने लिखा है कि वह सरकार के इस फ़ैसले के पक्ष में नहीं थे. उनके मुताबिक़ जनता पार्टी की सरकार के ही कुछ सदस्य मानते थे कि पिछली सरकार के कथित भ्रष्ट लोगों को निशाना बनाने के लिए ये क़दम उठाया गया है. पटेल ने ये भी लिखा कि जब तत्कालीन वित्त मंत्री एचएम पटेल ने उनसे नोट वापस लेने को कहा तो उन्होंने, वित्त मंत्री को साफ़ कहा था कि इस तरह के फ़ैसलों से मनमाफ़िक परिणाम कम ही मिलते हैं. आईजी पटेल ने लिखा कि काले धन को नक़द के रूप में बहुत कम लोग लंबे समय तक अपने पास रखते हैं. पटेल के मुताबिक़, सूटकेस और तकिए में बड़ी रकम छुपाकर रखने का आइडिया ही बड़ा बचकाना किस्म का है और जिनके पास बड़ी रक़म कैश के तौर पर है भी वो भी अपने एजेंट्स के ज़रिए उन्हें बदलवा लेंगे. | यह एक सारांश है: यह पहली बार नहीं है जब देश में बड़े नोटों को वापस लिया गया हो
1946 में में भी हज़ार रुपए और 10 हज़ार रुपए के नोट वापस लिए गए
1954 में हज़ार, पांच हज़ार और दस हज़ार रुपए के नोट वापस लिए | 16 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: दक्षिण पाकिस्तान के कराची शहर में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के आवास के बाहर एक संदिग्ध कार बम धमाके में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। सुबह 7:30 बजे हुए धमाके में रिहायशी रक्षा इलाके में अपराध जांच शाखा के विशेष अधीक्षक चौधरी असलम के आवास को निशाना बनाया गया। पुलिस अधिकारियों के हवाले से जियो समाचार चैनल ने बताया कि शक्तिशाली धमाके में सात लोग मारे गए। धमाके में असलम बच गए और मीडिया को उन्होंने बताया कि मरने वालों में उनके कई पुलिस गार्ड शामिल हैं। अधिकारी के घर के करीब कई स्कूल और शैक्षणिक संस्थान स्थित हैं। धमाके के बाद यातायात जाम हो गया, क्योंकि अभिभावक अपने बच्चों को लेने के लिए सड़कों पर निकल पड़े। मृतकों और घायलों को पास के जिन्ना अस्पताल ले जाया गया। कराची में कई आतंकी हमले हो चुके हैं, जिनमें मई में मेहरान नौसैनिक हवाई बेड़े पर हुआ हमला शामिल है, जिसमें 10 सुरक्षाकर्मी मारे गए थे। | यह एक सारांश है: कराची में एक पुलिस अधिकारी के घर के बाहर संदिग्ध कार बम धमाके में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। | 16 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: खादी इंडिया के राजधानी स्थित कनॉट प्लेस के प्रमुख स्टोर ने दो अक्टूबर यानी गांधी जयंती के दिन 1.27 करोड़ रुपये की रिकार्ड तोड़ बिक्री की. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने खादी को देश की आजादी के आंदोलन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया था. इससे पहले पिछले साल 13 अक्टूबर को इस स्टोर ने एक दिन में सबसे अधिक 1.25 करोड़ रुपये की बिक्री की थी.
खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने बयान में कहा कि खादी इंडिया के कनॉट प्लेस के प्रमुख स्टोर ने दो अक्टूबर को एक दिन में 1.27 करोड़ रुपये की बिक्री का रिकॉर्ड बनाया है. केवीआईसी द्वारा परंपरागत रूप से दो अक्टूबर से देशभर में खादी उत्पादों पर छूट दी जाती है. केवीआईसी ने कहा कि कनॉट प्लेस स्थित खादी के बिक्री केन्द्र में बुधवार को 16,870 खादी प्रेमी आए. इस दिन कुल 2,720 बिल जारी किए गए. बयान में कहा गया है कि कुल 127.57 लाख रुपये की बिक्री में खादी उत्पादों का हिस्सा 114.11 लाख रुपये और ग्रामोद्योग उत्पादों का हिस्सा 13.46 लाख रुपये रहा.
केवीआईसी के चेयरमैन विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि इस रिकॉर्ड बिक्री से पता चलता है कि कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खादी के जरिए आर्थिक बदलाव की अपनी सोच को लोगों के बीच पहुंचाया है.
(इनपुट भाषा से भी) | यह एक सारांश है: कनॉट प्लेस के खादी भवन में 16,870 खादी प्रेमी आए
एक दिन में कुल 2,720 बिल जारी किए गए
ग्रामोद्योग उत्पाद 13.46 लाख रुपये के बिके | 2 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: लीबिया की राजधानी त्रिपोली में जहरीली शराब पीने से मरने वालों की संख्या बढ़कर 51 हो गई और अन्य 40 लोगों की आंख की रौशनी चली गई। अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि लोगों ने स्थानीय निर्मित शराब, जिसे वहां बोखा कहते हैं, पी थी।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने स्वास्थ्य मंत्री के प्रवक्ता अमर सुरमणि के हवाले से बताया है कि जहरीली शराब पीने से 550 अन्य लोग जहर के दुष्प्रभाव से पीड़ित हैं। उन्होंने कहा कि कुछ पीड़ितों के परिवार वालों ने बेहतर इलाज के लिए उन्हें ट्यूनिशिया भेजने का आग्रह किया लेकिन ट्यूनिशिया जाते हुए रास्ते में ही 13 मरीजों ने दम तोड़ दिया।
सुरमणि ने बताया कि शराब में मेथेनाल पाई गई जिसके कारण अंधापन, गुर्दे का निष्क्रिय हो जाने या मिरगी के दौरे की शिकायत हो सकती है। कुछ पीड़ितों की हालत नाजुक बताई जा रही है।टिप्पणियां
पूरे त्रिपोली शहर तथा उसके आस-पास के इलाकों में चिकित्सक अपात सेवा पर हैं।
लीबिया में शराब बेचने और पीने पर प्रतिबंध है, लेकिन बाजार में चोरी से इसे बेचा-खरीदा जाता है। देश में ही निर्मित यह शराब, बोखा, त्रिपोली और उसके उपनगरीय इलाकों में बेची जाती है।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने स्वास्थ्य मंत्री के प्रवक्ता अमर सुरमणि के हवाले से बताया है कि जहरीली शराब पीने से 550 अन्य लोग जहर के दुष्प्रभाव से पीड़ित हैं। उन्होंने कहा कि कुछ पीड़ितों के परिवार वालों ने बेहतर इलाज के लिए उन्हें ट्यूनिशिया भेजने का आग्रह किया लेकिन ट्यूनिशिया जाते हुए रास्ते में ही 13 मरीजों ने दम तोड़ दिया।
सुरमणि ने बताया कि शराब में मेथेनाल पाई गई जिसके कारण अंधापन, गुर्दे का निष्क्रिय हो जाने या मिरगी के दौरे की शिकायत हो सकती है। कुछ पीड़ितों की हालत नाजुक बताई जा रही है।टिप्पणियां
पूरे त्रिपोली शहर तथा उसके आस-पास के इलाकों में चिकित्सक अपात सेवा पर हैं।
लीबिया में शराब बेचने और पीने पर प्रतिबंध है, लेकिन बाजार में चोरी से इसे बेचा-खरीदा जाता है। देश में ही निर्मित यह शराब, बोखा, त्रिपोली और उसके उपनगरीय इलाकों में बेची जाती है।
सुरमणि ने बताया कि शराब में मेथेनाल पाई गई जिसके कारण अंधापन, गुर्दे का निष्क्रिय हो जाने या मिरगी के दौरे की शिकायत हो सकती है। कुछ पीड़ितों की हालत नाजुक बताई जा रही है।टिप्पणियां
पूरे त्रिपोली शहर तथा उसके आस-पास के इलाकों में चिकित्सक अपात सेवा पर हैं।
लीबिया में शराब बेचने और पीने पर प्रतिबंध है, लेकिन बाजार में चोरी से इसे बेचा-खरीदा जाता है। देश में ही निर्मित यह शराब, बोखा, त्रिपोली और उसके उपनगरीय इलाकों में बेची जाती है।
पूरे त्रिपोली शहर तथा उसके आस-पास के इलाकों में चिकित्सक अपात सेवा पर हैं।
लीबिया में शराब बेचने और पीने पर प्रतिबंध है, लेकिन बाजार में चोरी से इसे बेचा-खरीदा जाता है। देश में ही निर्मित यह शराब, बोखा, त्रिपोली और उसके उपनगरीय इलाकों में बेची जाती है।
लीबिया में शराब बेचने और पीने पर प्रतिबंध है, लेकिन बाजार में चोरी से इसे बेचा-खरीदा जाता है। देश में ही निर्मित यह शराब, बोखा, त्रिपोली और उसके उपनगरीय इलाकों में बेची जाती है। | सारांश: लीबिया की राजधानी त्रिपोली में जहरीली शराब पीने से मरने वालों की संख्या बढ़कर 51 हो गई और अन्य 40 लोगों की आंख की रौशनी चली गई। अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि लोगों ने स्थानीय निर्मित शराब, जिसे वहां बोखा कहते हैं, पी थी। | 33 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: बॉलीवुड अभिनेता अभिषेक बच्चन ने अभी तक अपनी पत्नी ऐश्वर्या राय बच्चन की 'ऐ दिल है मुश्किल' नहीं देखी है. यह बात उन्होंने संदीप खोसला और अबू जानी के फैशन शो के दौरान कही, जहां वह अपनी बहन श्वेता बच्चन नंदा को चियर करने पहुंचे थे.
अभिषेक ने बताया, "इस बीच मैं फिल्म सिटी में शूटिंग में काफी व्यस्त हो गया था, लेकिन सुबह श्वेता से बात हुई तो वह काफी नर्वस लग रही थीं इसलिए मैं यहां आया." श्वेता का उत्साहवर्धन करने के लिए उनके माता-पिता जया और अमिताभ बच्चन भी पहुंचे थे.टिप्पणियां
जब अभिषेक से यह पूछा गया कि उन्हें ऐश्वर्या की फिल्म 'ऐ दिल है मुश्किल' कैसी लगी तो उन्होंने कहा कि उन्होंने यह फिल्म अब तक नहीं देखी है. उन्होंने कहा, "बेशक, मुझे उन पर गर्व है. अब तक मैंने 'ऐ दिल है मुश्किल' नहीं देखी है. मैं अपनी टीम के साथ लगातार सफर कर रहा हूं. सेट पर क्या-क्या हुआ इस संबंध में ऐश्वर्या ने जो कुछ शेयर किया है वह मैंने देखा है."
अभिषेक ने बताया कि ऐश्वर्या और उनकी चार साल की बेटी आराध्या ने इवेंट के लिए उनका आउटफिट चुनने में मदद की थी. पिछले सप्ताह रिलीज़ हुई 'ऐ दिल है मुश्किल' बॉक्स ऑफिस पर अच्छा कारोबार कर रही है. फिल्म में अनुष्का शर्मा, रणबीर कपूर और फवाद खान मुख्य भूमिका निभा रहे हैं. फिल्म अजय देवगन की 'शिवाय' के साथ दिवाली के मौके पर रिलीज़ हुई थी.
अभिषेक ने बताया, "इस बीच मैं फिल्म सिटी में शूटिंग में काफी व्यस्त हो गया था, लेकिन सुबह श्वेता से बात हुई तो वह काफी नर्वस लग रही थीं इसलिए मैं यहां आया." श्वेता का उत्साहवर्धन करने के लिए उनके माता-पिता जया और अमिताभ बच्चन भी पहुंचे थे.टिप्पणियां
जब अभिषेक से यह पूछा गया कि उन्हें ऐश्वर्या की फिल्म 'ऐ दिल है मुश्किल' कैसी लगी तो उन्होंने कहा कि उन्होंने यह फिल्म अब तक नहीं देखी है. उन्होंने कहा, "बेशक, मुझे उन पर गर्व है. अब तक मैंने 'ऐ दिल है मुश्किल' नहीं देखी है. मैं अपनी टीम के साथ लगातार सफर कर रहा हूं. सेट पर क्या-क्या हुआ इस संबंध में ऐश्वर्या ने जो कुछ शेयर किया है वह मैंने देखा है."
अभिषेक ने बताया कि ऐश्वर्या और उनकी चार साल की बेटी आराध्या ने इवेंट के लिए उनका आउटफिट चुनने में मदद की थी. पिछले सप्ताह रिलीज़ हुई 'ऐ दिल है मुश्किल' बॉक्स ऑफिस पर अच्छा कारोबार कर रही है. फिल्म में अनुष्का शर्मा, रणबीर कपूर और फवाद खान मुख्य भूमिका निभा रहे हैं. फिल्म अजय देवगन की 'शिवाय' के साथ दिवाली के मौके पर रिलीज़ हुई थी.
जब अभिषेक से यह पूछा गया कि उन्हें ऐश्वर्या की फिल्म 'ऐ दिल है मुश्किल' कैसी लगी तो उन्होंने कहा कि उन्होंने यह फिल्म अब तक नहीं देखी है. उन्होंने कहा, "बेशक, मुझे उन पर गर्व है. अब तक मैंने 'ऐ दिल है मुश्किल' नहीं देखी है. मैं अपनी टीम के साथ लगातार सफर कर रहा हूं. सेट पर क्या-क्या हुआ इस संबंध में ऐश्वर्या ने जो कुछ शेयर किया है वह मैंने देखा है."
अभिषेक ने बताया कि ऐश्वर्या और उनकी चार साल की बेटी आराध्या ने इवेंट के लिए उनका आउटफिट चुनने में मदद की थी. पिछले सप्ताह रिलीज़ हुई 'ऐ दिल है मुश्किल' बॉक्स ऑफिस पर अच्छा कारोबार कर रही है. फिल्म में अनुष्का शर्मा, रणबीर कपूर और फवाद खान मुख्य भूमिका निभा रहे हैं. फिल्म अजय देवगन की 'शिवाय' के साथ दिवाली के मौके पर रिलीज़ हुई थी.
अभिषेक ने बताया कि ऐश्वर्या और उनकी चार साल की बेटी आराध्या ने इवेंट के लिए उनका आउटफिट चुनने में मदद की थी. पिछले सप्ताह रिलीज़ हुई 'ऐ दिल है मुश्किल' बॉक्स ऑफिस पर अच्छा कारोबार कर रही है. फिल्म में अनुष्का शर्मा, रणबीर कपूर और फवाद खान मुख्य भूमिका निभा रहे हैं. फिल्म अजय देवगन की 'शिवाय' के साथ दिवाली के मौके पर रिलीज़ हुई थी. | संक्षिप्त पाठ: अभिषेक बच्चन ने अब तक नहीं देखी ऐश्वर्या राय की फिल्म.
पिछले सप्ताह रिलीज़ हुई है 'ऐ दिल है मुश्किल'.
शूटिंग में व्यस्त होने की वजह से फिल्म नहीं देख पाए अभिषेक. | 22 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: प्रसिद्ध नाटककार विलियम शेक्सपियर के कालजयी उपन्यास 'मैकबेथ' पर आधारित आने वाली नई फिल्म में अब अमेरिकी-इस्राइली अभिनेत्री नटाली पोर्टमैन के स्थान पर फ्रांसीसी मूल की अभिनेत्री मैरियन कॉटिलार्ड को लिया गया है, और वह लेडी मैकबेथ की भूमिका निभाएंगी।टिप्पणियां
वेबसाइट डेडलाइन.कॉम के अनुसार, 'किंग्स स्पीच एंड शेम प्रोड्यूसर्स सी सॉ' द्वारा बनाई जा रही तथा ऑस्ट्रेलियाई जस्टिन कुरज़ेल द्वारा निर्देशित फिल्म में दिखाई देंगे जर्मन-आयरिश अभिनेता माइकल फैसबेंडर, जो मैकबेथ की भूमिका निभाएंगे। मैरियन कॉटिलार्ड उनके साथ लेडी मैकबेथ के किरदार में नज़र आएंगी, जो स्कॉटलैंड के रईस जमींदार मैकबेथ की पत्नी है।
फिल्म के सह-निर्माता इयान कैनिंग एवं एमिली शेरमैन होंगे, और 'मैकबेथ' की शूटिंग ब्रिटेन में अगले साल, यानि 2014 की जनवरी में शुरू होगी।
वेबसाइट डेडलाइन.कॉम के अनुसार, 'किंग्स स्पीच एंड शेम प्रोड्यूसर्स सी सॉ' द्वारा बनाई जा रही तथा ऑस्ट्रेलियाई जस्टिन कुरज़ेल द्वारा निर्देशित फिल्म में दिखाई देंगे जर्मन-आयरिश अभिनेता माइकल फैसबेंडर, जो मैकबेथ की भूमिका निभाएंगे। मैरियन कॉटिलार्ड उनके साथ लेडी मैकबेथ के किरदार में नज़र आएंगी, जो स्कॉटलैंड के रईस जमींदार मैकबेथ की पत्नी है।
फिल्म के सह-निर्माता इयान कैनिंग एवं एमिली शेरमैन होंगे, और 'मैकबेथ' की शूटिंग ब्रिटेन में अगले साल, यानि 2014 की जनवरी में शुरू होगी।
फिल्म के सह-निर्माता इयान कैनिंग एवं एमिली शेरमैन होंगे, और 'मैकबेथ' की शूटिंग ब्रिटेन में अगले साल, यानि 2014 की जनवरी में शुरू होगी। | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: ऑस्ट्रेलियाई जस्टिन कुरज़ेल द्वारा निर्देशित 'मैकबेथ' में जर्मन-आयरिश अभिनेता माइकल फैसबेंडर मैकबेथ की भूमिका निभाएंगे, और मैरियन कॉटिलार्ड उनके साथ लेडी मैकबेथ के किरदार में नज़र आएंगी। | 25 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: कश्मीर के केरन सेक्टर में नियंत्रण रेखा पर सेना ने आज घुसपैठ की बड़ी कोशिश नाकाम करते हुए चार आतंकवादियों को मार गिराया।
केरल सेक्टर में आज 12 वें दिन भी सेना का आतंकवादियों की घुसपैठ के खिलाफ अभियान जारी है।
एक रक्षा प्रवक्ता ने बताया, शालभाटी गांव से करीब 25 किमी दूर पश्चिम में केरन सेक्टर के फतह गली इलाके में घुसपैठ की कोशिश नाकाम कर दी गई। अभियान में चार आतंकवादी मारे गए। प्रवक्ता ने बताया कि घटनास्थल से छह एके रायफलें बरामद की गई हैं।टिप्पणियां
इलाके में सैनिकों और आतंकवादियों के बीच रुक-रुक कर गोलीबारी होती रही।
हथियार लिए हुए आतंकवादियों ने कश्मीर में 24 सितंबर को केरन सेक्टर से घुसपैठ की कोशिश की थी, लेकिन सेना ने उनकी कोशिश नाकाम कर दी थी।
केरल सेक्टर में आज 12 वें दिन भी सेना का आतंकवादियों की घुसपैठ के खिलाफ अभियान जारी है।
एक रक्षा प्रवक्ता ने बताया, शालभाटी गांव से करीब 25 किमी दूर पश्चिम में केरन सेक्टर के फतह गली इलाके में घुसपैठ की कोशिश नाकाम कर दी गई। अभियान में चार आतंकवादी मारे गए। प्रवक्ता ने बताया कि घटनास्थल से छह एके रायफलें बरामद की गई हैं।टिप्पणियां
इलाके में सैनिकों और आतंकवादियों के बीच रुक-रुक कर गोलीबारी होती रही।
हथियार लिए हुए आतंकवादियों ने कश्मीर में 24 सितंबर को केरन सेक्टर से घुसपैठ की कोशिश की थी, लेकिन सेना ने उनकी कोशिश नाकाम कर दी थी।
एक रक्षा प्रवक्ता ने बताया, शालभाटी गांव से करीब 25 किमी दूर पश्चिम में केरन सेक्टर के फतह गली इलाके में घुसपैठ की कोशिश नाकाम कर दी गई। अभियान में चार आतंकवादी मारे गए। प्रवक्ता ने बताया कि घटनास्थल से छह एके रायफलें बरामद की गई हैं।टिप्पणियां
इलाके में सैनिकों और आतंकवादियों के बीच रुक-रुक कर गोलीबारी होती रही।
हथियार लिए हुए आतंकवादियों ने कश्मीर में 24 सितंबर को केरन सेक्टर से घुसपैठ की कोशिश की थी, लेकिन सेना ने उनकी कोशिश नाकाम कर दी थी।
इलाके में सैनिकों और आतंकवादियों के बीच रुक-रुक कर गोलीबारी होती रही।
हथियार लिए हुए आतंकवादियों ने कश्मीर में 24 सितंबर को केरन सेक्टर से घुसपैठ की कोशिश की थी, लेकिन सेना ने उनकी कोशिश नाकाम कर दी थी।
हथियार लिए हुए आतंकवादियों ने कश्मीर में 24 सितंबर को केरन सेक्टर से घुसपैठ की कोशिश की थी, लेकिन सेना ने उनकी कोशिश नाकाम कर दी थी। | कश्मीर के केरन सेक्टर में नियंत्रण रेखा पर सेना ने आज घुसपैठ की बड़ी कोशिश नाकाम करते हुए चार आतंकवादियों को मार गिराया। | 34 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: पब्लिक इश्युओं में निवेश करने वाले छोटे निवेशकों को आवेदन फॉर्म भरने में अब ज्यादा परेशानी नहीं होगी। नए इश्युओं में शेयर खरीद के लिए जल्द ही नया सरल आवेदन फॉर्म जारी होगा। पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने नए पब्लिक इश्युओं (आईपीओ) के लिए नया छोटा और सरल फॉर्म जारी करने का फैसला किया है। सेबी का मानना है कि इससे पूंजी बाजार में खुदरा निवेशकों का योगदान बढ़ाया जा सकेगा। सेबी अध्यक्ष यूके सिन्हा ने कहा कि आईपीओ में आवेदन करने का मौजूदा फॉर्म निवेशकों के अनुकूल नहीं है। इसे समझने में बहुत समय लगता है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए पूरा फॉर्म बदला जा रहा है, और नया आवेदन पत्र मौजूदा दस्तावेज के मुकाबले काफी छोटा होगा। सेबी निदेशक मंडल की बैठक के बाद सिन्हा ने कहा कि इसका मकसद शेयरों के लिए आवेदन करने वाले पत्र को सरल और समझने लायक बनाना है, ताकि आम खुदरा निवेशक की भागीदारी इसमें बढ़े और पूंजी बाजार से उन्हें ज्यादा जोड़ा जा सके। बोर्ड ने यह भी तय किया कि नए आवेदन फॉर्म में समूह की अन्य कंपनियों, प्रति शेयर अर्जित मूल्य औसत (पीई रेशियो), कंपनी के पिछले रिकॉर्ड, आईपीओ के लीड मैनेजर के रिकॉर्ड की भी जानकारी दी जाएगी। पब्लिक इश्युओं के मौजूदा आवेदन फॉर्म काफी बड़े और कई पन्नों में होता है। इसमें कई ऐसी जानकारियां भी देनी होती हैं, जिन्हें हटाया जा सकता है। ये फॉर्म 15 से 20 पन्नों के होते हैं, जबकि केवल शुरुआती दो-तीन पेज ही भरने होते हैं। | संक्षिप्त पाठ: सेबी ने नए आईपीओ के लिए नया सरल फॉर्म जारी करने का फैसला किया है। इससे पूंजी बाजार में खुदरा निवेशकों का योगदान बढ़ाया जा सकेगा। | 13 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: हिमालय की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट पर विजय पताका फहराने वाली अरुणिमा सिन्हा जुनून को एवरेस्ट से भी बड़ा मनती हैं। उनका जुनून ही है, जिसने बायां पैर न रहते हुए भी उन्हें एवरेस्ट की ऊंचाई छूने में कामयाबी दिलाई। पेश है, उनकी बहादुरी और कामयाबी की दास्तान उन्हीं की जुबानी -:
"मैं सफलता के आसमान पर हूं, एवरेस्ट के ऊपर हूं। मैं जो चाहती थी वह मैंने पाया है। मेरे पैरों ने भी मेरा पूरा साथ दिया। क्या हुआ जो मेरे पास मेरा अपना बायां पैर नहीं है..पराए पैर ने पराएपन का अहसास तक नहीं होने दिया..एक पैर क्या, मेरे पास और भी कुछ न होता तब भी मैं यहीं पर होती। ऊंचाई ही मुझे पुकारती है, मेरे बुलंद इरादों को कोई छू भी नहीं सकता, मुझे कोई रोक भी नहीं सकता।
मैं वॉलीबॉल-फुटबॉल खेलना चाहती थी, हॉकी चैंपियन बनना चाहती थी, लेकिन मेरी कटी हुई टांग ने मुझे नियम-कानून से बंधे खेलों में जाने से रोक दिया। लोग कहते हैं कि कानून पैरों में बंधी हुई बेड़ियों के समान होते हैं, मेरे पास तो एक पैर भी नहीं था, लेकिन पर्वत पर चढ़ने से मुझे कौन रोक सकता था।
जब मैंने पहली बार एवरेस्ट फतह करने की अपने दिल की इच्छा जताई थी तो लोगों ने कैसा मजाक उड़ाया था। आज वे ही लोग देख लें कि मैं कहां पर हूं.. अरे, पैरों से चलकर मंजिल मिलती होती तो अरबों लोग अपनी मंजिलों पर पहुंच गए होते, यह तो हौसला होता है जो आपको कहीं भी पंहुचा देता है। जैसे मैं आज यहां पर हूं श्वेत बर्फ से ढकी पहाड़ियों और स्वच्छ नीले आकाश के नीचे, जय बजरंगबली..!
नाम मेरा है अरुणिमा सिन्हा। मुझे लोग सोनू भी कहते हैं। मैं बहुत प्रसिद्ध नहीं हूं लेकिन दो साल पहले मेरे साथ जो हादसा हुआ था, उससे मुझे पहचान मिली। वह पहचान कोई नेकनामी वाली नहीं थी और न ही मैंने कोई अच्छा काम किया था। वह बदनामी थी। मगर मेरी क्या गलती थी?
मैं उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर जिले के क्षेत्राना (शाजादपुर) मोहल्ले की हूं। सच तो यह है कि हम लोग मूलत: बिहार के हैं। पिता फौज में थे और हम लोग सुल्तानपुर आ गए थे। लेकिन जब मैं चार साल की थी, तभी मेरे पिताजी का स्वर्गवास हो गया। मेरा एक छोटा भाई है और बड़ी बहन लक्ष्मी। आप समझ सकते हैं कि बिना पिता के परिवार की क्या हालत होती है।
मेरी मां अंबेडकरनगर आ गईं और स्वास्थ्य विभाग में उन्हें नौकरी मिल गई। किसी तरह जीवन की गाड़ी आगे बढ़ने लगी। मुझे भी पढ़ाई के लिए स्कूल भेजा गया लेकिन मेरा खेलने में ज्यादा मन लगता था। हमारे समाज में लड़कियों को घर के काम में निपुण करने की परंपरा है, खेलने वाली लड़कियां कम ही दिखाई पड़ती हैं। लोगों ने मना भी किया लेकिन मैं कहां मानने वाली थी। मेरी मां भी मुझे नहीं टोकती थी और मेरी मां जैसी दीदी लक्ष्मी तो जैसे मेरे पीछे दीवार बनकर खड़ी रहती थीं।
मैंने फुटबॉल, वॉलीबॉल और हॉकी खेली। हॉकी खेलने के लिए स्टिक लेकर जब निकलती थी तो मोहल्ले के लड़के कहां बाज आने वाले। वे मेरी खिल्ली उड़ाते थे। कहते थे, देखो जा रही है झांसी की रानी बनकर खेलने, बड़ी आई स्टिक लेकर चलने वाली। मैं वैसे तो लड़कों की परवाह भी नहीं करती थी, लेकिन जब बात अखरने वाली लगती थी तो मैं घूरकर उनकी तरफ देखती थी, तो वे उड़न-छू हो जाते थे।
मुझे याद है कि एक बार जब मैं 14 बरस की रही होऊंगी और साइकिल से हम दोनों बहनें कहीं जा रहे थे तो एक जगह पर लक्ष्मी दीदी रुककर किसी से बात करने लगीं और मैं थोड़ा आगे निकलकर वहां पर उनका इंतजार करने लगी। उस दौरान कुछ लड़के साइकिल से उधर से गुजरे तो मुझसे रास्ता छोड़ने को कहा। मैंने मना कर दिया और कहा कि आगे जगह है, उधर से निकल जाओ।
वे अपनी बात पर अड़े रहे और मैं अपनी बात पर। इस बीच जब लक्ष्मी दीदी आ गईं और हम चलने लगे तो किसी लड़के ने झापड़ मारा जो मेरी दीदी के गाल पर लग गया। भीड़ का लाभ उठाकर लड़के भाग गए। दीदी के गाल पर चांटा देखकर मुझे बहुत क्रोध आया। मैंने दीदी से कहा कि चलो उस लड़के को ढूंढ़कर सबक सिखाते हैं। दीदी ने मना किया लेकिन मेरे ऊपर तो जैसे चंडी सवार थी। हम दोनों उन लड़कों को काफी देर तक तलाशते रहे और घूम-फिर कर उसी जगह आ गए। वहां पर पान की दुकान पर खड़े एक लड़के की शर्ट का कालर देखकर दीदी ने कहा कि यही वह लड़का है। बस फिर क्या था, मैंने दौड़कर उस लड़के को दबोच लिया और दीदी से कहा, "मार दीदी, छोड़ना नहीं।"
भीड़ लग गई, काफी बवाल हुआ लेकिन मैंने छोड़ा नहीं। अंत में उस लड़के के घर वाले आए और माफी मांगी तब जाकर मैंने उसे छोड़ा। उसके बाद फिर किसी ने मेरी तरफ या मेरी दीदी की तरफ नजर उठाकर भी नहीं देखा। लक्ष्मी दीदी की शादी हो गई लेकिन मेरे प्रति उनका इतना प्यार रहता है कि वह ससुराल से ज्यादा मायके में ही रहती हैं और मेरी और मेरी मां-भाई की मदद करने के लिए हमेशा जान दिए रहती हैं। मेरे जीजा ओम प्रकाश जी भी हमारे लिए देवता की तरह हैं। बजरंगबली ने उन्हें जैसे हमारे लिए ही बनाया था। उन्हीं की छत्रछाया ने मुझे मेरा सपना पूरा करने में मदद की है।
मैंने इंटर किया, एलएलबी किया लेकिन खेलना मेरे लिए जुनून के समान ही था। मैंने आस-पास के जिलों में वॉलीबॉल-फुटबॉल खेला, कई पुरस्कार जीते, लेकिन मेरा जुनून बढ़ता ही गया। मैंने राष्ट्रीय स्तर पर भी खेलों में भाग लिया लेकिन मुझे मेरा हक नहीं मिला। मेरे पास हाथ-पैर थे, जुनून था लेकिन कोई सीढ़ी नहीं थी, कोई छत नहीं थी जो मुझे आगे बढ़ने देती, मुझे महफूज रखती।
मैंने सोचा कि कहीं पर नौकरी कर लूं ताकि उसी के साथ आगे बढ़ती जाऊं। कई जगह फार्म डाले। सीआईएसएफ में भी कोशिश की और एक दिन नोएडा में सीआईएसएफ के दफ्तर में जाने के लिए घर से निकल पड़ी, अकेली।
वह दिन था 11 अप्रैल 2011 का। मुझे नहीं मालूम था कि मेरी दुनिया बदलने जा रही है। पद्मावती एक्सप्रेस ट्रेन के चालू डिब्बे में खिड़की के किनारे एक सीट पर बैठी रात के अंधेरे में जुगनू जैसी किसी रोशनी की तलाश कर रही थी कि तभी कुछ 'लोफर टाइप' के लड़के आए और उन्होंने मेरे गले में पड़ी चेन पर झपट्टा मारा। मुझे हंसी आ गई। इन लड़कों की क्या औकात कि मुझसे मेरी चीज छीन लें? मैंने लड़के का हाथ पकड़कर मरोड़ दिया। लेकिन तभी दूसरे लड़के ने मेरे गले में हाथ डाला तो मेरे गरदन हटा लेने पर उसके हाथ में चेन की जगह मेरी शर्ट का कालर आ गया। उसने कालर पकड़कर घसीटा और दो-तीन लड़कों ने मुझे पकड़कर दरवाजे के पास खींच लिया।
मेरे लिए उनसे निबटना मुश्किल काम नहीं था लेकिन तभी लड़कों ने मेरे ऊपर ऐसी लात मारी कि मैं चलती ट्रेन से बाहर गिट्टियों के बीच लोटती सी नजर आई..। पता नहीं क्या हुआ, मुझे कुछ पता नहीं कि मेरे पैर के ऊपर से ट्रेन के कितने पहिए गुजरते चले गए। वे पहिए पद्मावत एक्सप्रेस के थे या दूसरी पटरी के ऊपर से गुजरने वाली ट्रेनों के? उस समय रात के डेढ़ बजे थे और ट्रेन बरेली के पास थी। लेकिन कुछ सोचने-समझने से पहले दर्द के आवेग ने मुझे बेसुध कर दिया।
बीच-बीच में मेरी तंद्रा टूटती तो देखती कि मैं ट्रेन की पटरियों के किनारे पड़ी हूं, मेरी एक टांग कट गई थी बस कुछ मांस भर ने उसे मेरे शरीर से जोड़े रखा था। बगल की पटरी से रह-रहकर ट्रेनें गुजर रही थीं। पटरी और मेरे बीच मात्र कुछ इंचों का ही फासला था। मैं अपने को पटरी से दूर करना चाहती थी लेकिन मेरे पास इतना दम कहां था, उस पर भीषण दर्द। मैं उस बीहड़ रात में उसी तरह पड़ी रही। जब मुझे होश आता तो बजरंगबली को याद करके यही कहती कि जय बजरंगबली..यह क्या हो रहा है मेरी जिंदगी के साथ..और अब क्या शेष रह गया है होने को? आंखों के सामने कभी मां की तस्वीर आती तो कभी भाई तो कभी लक्ष्मी दीदी की तो कभी जीजा की..।
पौ फटने पर जब लोग शौच के लिए रेलवे की पटरियों की तरफ आए तो मुझे पड़ा पाया। गांव वाले आए। मेरा नाम-पता पूछा। शायद आधी बेहोशी में मैंने घर का टेलीफोन नंबर बता दिया था। जीजा ने उनसे कहा कि इतनी मदद और कर दीजिए कि अरुणिमा को किसी अस्पताल तक पंहुचा दीजिए।
सुबह के सात बजे के करीब मुझे अस्पताल पंहुचाया गया। मेरी बाईं टांग काट दी गई। मीडिया द्वारा शोर मचाने पर मुझे लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। वहां से फिर मुझे एम्स ले जाया गया। डाक्टरों ने मुझे बचा लिया। सीआईएसफ ने नौकरी देने की घोषणा की। तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी ने भी नौकरी देने की घोषणा की। तत्कालीन खेल मंत्री अजय माकन ने काफी राहतें दीं।
समाज को ये बातें हजम नहीं हुईं। इलाज के साथ ही विवाद भी शुरू हो गया कि मैं राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी नहीं हूं। मैंने इंटर भी पास नहीं किया है। मैं किसी के साथ भाग रही थी। मेरी शादी हो चुकी है। मैंने किसी प्रतियोगिता में भाग नहीं लिया। मैं झूठी हूं, फरेबी हूं। यूपी के एडीजी रेल एके जैन ने तो बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस करके मुझे झूठा साबित किया और कहा कि मैंने ट्रेन से कूदकर आत्महत्या की कोशिश की थी या फिर मैं उस बीहड़ सुनसान इलाके में अकेले आधी रात को रेलवे लाइन पार कर रही थी, जब यह दुर्घटना घटी।
मैंने गुस्से में एके जैन को फोन लगाकर खूब सुनाया कि क्या आपका कोई सिपाही ट्रेन में मौजूद था जो बताता कि उस दिन ट्रेन में मुझे लूटने की कोशिश नहीं की गई थी? क्या रातभर पटरियों पर पड़े होने के बावजूद जीआरपी ने मेरी कोई मदद की? मन करता था कि मैं एके जैन के पास जाकर उनका मुंह नोच लूं।
एम्स में मेरी मां, मेरी बहन और जीजा ने मुझे समझाया कि और लड़कियों के साथ क्या-क्या नहीं होता, लोग तेजाब तक डाल देते हैं, तुम्हारा तो बस एक पैर ही गया है, अब आगे की योजना बनाओ। बहन की प्रेरणा ने मेरे मन में यह बात ला दी कि कुछ ऐसा करूं जिसे दुनिया देखे। क्यों न एवरेस्ट पर चढ़ जाऊं? बिना पैर के एवरेस्ट पर चढ़ना ही मुझे सबसे बेहतर विचार लगा। असली चुनौती यही है।
आसान काम तो हर कोई कर लेता है। मेरी मुश्किल को आसान कर दिया अमेरिका निवासी डॉ राकेश श्रीवास्तव और उनके भाई शैलेश श्रीवास्तव ने जो इनोवेटिव नाम से एक संस्था चलाते हैं। उन्होंने मेरे लिए एक कृत्रिम पैर बनवाया जिसको पहनकर मैं चलती हूं।
मुझे अजय माकन ने इतनी सहूलियतें दीं और वह भी तब, जब उत्तर प्रदेश की सरकार मुझे मुल्जिम बताने के लिए उतारू थी और मीडिया मेरे पीछे पड़ गया था। खिलाड़ियों का संगठन 'साई' भी मुझे खिलाड़ी नहीं मानता था। मैं चीख-चीख कर कहा करती थी कि "मैं जिंदा हूं, मुझसे आकर पूछो, मैं झूठी नहीं हूं।"
लेकिन मुसीबतों और परीक्षाओं का अंत अभी नहीं हुआ था। चार महीने एम्स में गुजारने के बाद जब मैं वापस लौटी तो मेरी बदनामी मेरा पीछा कर रही थी। मुझे विकलांगता का प्रमाण पत्र मिल गया था और रेल से पास भी। लेकिन मुझे ट्रेन के सेंकड क्लास की आरक्षित बोगी में चलने के लिए टिकट नहीं मिलता था। मुझे दौड़ाया जाता, शक किया जाता। मेरे लिए विकलांग बोगी में चलना भी अपमान के कड़वे घूंट पीने के समान ही था।
आरपीएफ के सिपाही मेरी टांग खुलवाकर देखते और फिर पास मांगकर उसकी जांच करते। एक बार तो हरिद्वार में जब मुझे टिकट नहीं मिला तो स्टेशन मास्टर ने बहुत मदद की। उन्होंने काउंटर क्लर्क से टिकट देने को कहा लेकिन उसने कहा कि उसे मेरे पास पर उसे शक है। उसमें हस्ताक्षर ठीक नहीं हैं। अंत में स्टेशन मास्टर ने अपने दम पर मुझे जबरदस्ती ट्रेन में बैठाया।
ममता बनर्जी ने नौकरी देने की घोषणा की थी। जब मैं कृत्रिम टांगों से चलकर रेल मंत्रालय पंहुची तो उनके पीए ने मिलाने से मना कर दिया। तीन बार निराश होकर मैं लौट आई। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विवेक सहाय से मिलने में मैं किसी तरह कामयाब हो गई तो उनका जवाब सुनकर हैरत हुई। उन्होंने सारे कागजात देखे और फिर कहा कि पहले जीआरपी से बढ़िया सी रिपोर्ट लगवाकर लाओ। ये थी रेलवे के मंत्री और अध्यक्ष की मानवीयता।
मैंने हिम्मत नहीं हारी। कहा कि इन सबको अपनी ताकत दिखाऊंगी, ये सब मुझे पहचानेंगे और खुद चलकर मेरे पास आएंगे। मुझे बछेंद्री पाल ने काफी प्रोत्साहित किया। उन्हीं के प्रशिक्षण की बदौलत मैं आज आसमान के इतने करीब हूं। मैं माउंट एवरेस्ट की चोटी पर हूं जहां पर हर कोई नहीं पंहुच पाता है। ऐसा लगता है कि बस हाथ उठाऊं और छू लूं।टिप्पणियां
मुझे बुखार आ गया। और नीचे भी लौटना था उस दुनिया में जो नहीं चाहती थी कि मैं यहां तक पहुंचूं। लेकिन कुछ लोग थे जिनका मेरे पर विश्वास था और उन्हीं के भरोसे मैं यहां तक पहुंची हूं। मेरी इच्छा अपने जैसे विकलांग लोगों की मदद करने की है, जिन्हें समाज ठुकराता है। मैं चाहती हूं कि उनके लिए कोई खेल अकादमी बनाऊं, उन्नाव में साढ़े सात बीघा जमीन मिल गई है। साढ़े तीन बीघा और खरीदनी है।
इस अकादमी से जब मेरी जैसी ऊंची चाहत रखने वाले निकलेंगे तब मुझे लगेगा कि मेरे साथ जो कुछ हुआ वह सब ठीक था क्योंकि अगर ये सब न होता तो आने वाली पीढ़ी को हौसला कौन दे पाता..! अगले महीने की 10 तारीख को मैं 27 वर्ष की हो जाऊंगी। मुझमें अभी बहुत सी ऊंचाइयों को छूने का हौसला बाकी है। बस, मुझे कोई चुनौती दे दीजिए..!"
"मैं सफलता के आसमान पर हूं, एवरेस्ट के ऊपर हूं। मैं जो चाहती थी वह मैंने पाया है। मेरे पैरों ने भी मेरा पूरा साथ दिया। क्या हुआ जो मेरे पास मेरा अपना बायां पैर नहीं है..पराए पैर ने पराएपन का अहसास तक नहीं होने दिया..एक पैर क्या, मेरे पास और भी कुछ न होता तब भी मैं यहीं पर होती। ऊंचाई ही मुझे पुकारती है, मेरे बुलंद इरादों को कोई छू भी नहीं सकता, मुझे कोई रोक भी नहीं सकता।
मैं वॉलीबॉल-फुटबॉल खेलना चाहती थी, हॉकी चैंपियन बनना चाहती थी, लेकिन मेरी कटी हुई टांग ने मुझे नियम-कानून से बंधे खेलों में जाने से रोक दिया। लोग कहते हैं कि कानून पैरों में बंधी हुई बेड़ियों के समान होते हैं, मेरे पास तो एक पैर भी नहीं था, लेकिन पर्वत पर चढ़ने से मुझे कौन रोक सकता था।
जब मैंने पहली बार एवरेस्ट फतह करने की अपने दिल की इच्छा जताई थी तो लोगों ने कैसा मजाक उड़ाया था। आज वे ही लोग देख लें कि मैं कहां पर हूं.. अरे, पैरों से चलकर मंजिल मिलती होती तो अरबों लोग अपनी मंजिलों पर पहुंच गए होते, यह तो हौसला होता है जो आपको कहीं भी पंहुचा देता है। जैसे मैं आज यहां पर हूं श्वेत बर्फ से ढकी पहाड़ियों और स्वच्छ नीले आकाश के नीचे, जय बजरंगबली..!
नाम मेरा है अरुणिमा सिन्हा। मुझे लोग सोनू भी कहते हैं। मैं बहुत प्रसिद्ध नहीं हूं लेकिन दो साल पहले मेरे साथ जो हादसा हुआ था, उससे मुझे पहचान मिली। वह पहचान कोई नेकनामी वाली नहीं थी और न ही मैंने कोई अच्छा काम किया था। वह बदनामी थी। मगर मेरी क्या गलती थी?
मैं उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर जिले के क्षेत्राना (शाजादपुर) मोहल्ले की हूं। सच तो यह है कि हम लोग मूलत: बिहार के हैं। पिता फौज में थे और हम लोग सुल्तानपुर आ गए थे। लेकिन जब मैं चार साल की थी, तभी मेरे पिताजी का स्वर्गवास हो गया। मेरा एक छोटा भाई है और बड़ी बहन लक्ष्मी। आप समझ सकते हैं कि बिना पिता के परिवार की क्या हालत होती है।
मेरी मां अंबेडकरनगर आ गईं और स्वास्थ्य विभाग में उन्हें नौकरी मिल गई। किसी तरह जीवन की गाड़ी आगे बढ़ने लगी। मुझे भी पढ़ाई के लिए स्कूल भेजा गया लेकिन मेरा खेलने में ज्यादा मन लगता था। हमारे समाज में लड़कियों को घर के काम में निपुण करने की परंपरा है, खेलने वाली लड़कियां कम ही दिखाई पड़ती हैं। लोगों ने मना भी किया लेकिन मैं कहां मानने वाली थी। मेरी मां भी मुझे नहीं टोकती थी और मेरी मां जैसी दीदी लक्ष्मी तो जैसे मेरे पीछे दीवार बनकर खड़ी रहती थीं।
मैंने फुटबॉल, वॉलीबॉल और हॉकी खेली। हॉकी खेलने के लिए स्टिक लेकर जब निकलती थी तो मोहल्ले के लड़के कहां बाज आने वाले। वे मेरी खिल्ली उड़ाते थे। कहते थे, देखो जा रही है झांसी की रानी बनकर खेलने, बड़ी आई स्टिक लेकर चलने वाली। मैं वैसे तो लड़कों की परवाह भी नहीं करती थी, लेकिन जब बात अखरने वाली लगती थी तो मैं घूरकर उनकी तरफ देखती थी, तो वे उड़न-छू हो जाते थे।
मुझे याद है कि एक बार जब मैं 14 बरस की रही होऊंगी और साइकिल से हम दोनों बहनें कहीं जा रहे थे तो एक जगह पर लक्ष्मी दीदी रुककर किसी से बात करने लगीं और मैं थोड़ा आगे निकलकर वहां पर उनका इंतजार करने लगी। उस दौरान कुछ लड़के साइकिल से उधर से गुजरे तो मुझसे रास्ता छोड़ने को कहा। मैंने मना कर दिया और कहा कि आगे जगह है, उधर से निकल जाओ।
वे अपनी बात पर अड़े रहे और मैं अपनी बात पर। इस बीच जब लक्ष्मी दीदी आ गईं और हम चलने लगे तो किसी लड़के ने झापड़ मारा जो मेरी दीदी के गाल पर लग गया। भीड़ का लाभ उठाकर लड़के भाग गए। दीदी के गाल पर चांटा देखकर मुझे बहुत क्रोध आया। मैंने दीदी से कहा कि चलो उस लड़के को ढूंढ़कर सबक सिखाते हैं। दीदी ने मना किया लेकिन मेरे ऊपर तो जैसे चंडी सवार थी। हम दोनों उन लड़कों को काफी देर तक तलाशते रहे और घूम-फिर कर उसी जगह आ गए। वहां पर पान की दुकान पर खड़े एक लड़के की शर्ट का कालर देखकर दीदी ने कहा कि यही वह लड़का है। बस फिर क्या था, मैंने दौड़कर उस लड़के को दबोच लिया और दीदी से कहा, "मार दीदी, छोड़ना नहीं।"
भीड़ लग गई, काफी बवाल हुआ लेकिन मैंने छोड़ा नहीं। अंत में उस लड़के के घर वाले आए और माफी मांगी तब जाकर मैंने उसे छोड़ा। उसके बाद फिर किसी ने मेरी तरफ या मेरी दीदी की तरफ नजर उठाकर भी नहीं देखा। लक्ष्मी दीदी की शादी हो गई लेकिन मेरे प्रति उनका इतना प्यार रहता है कि वह ससुराल से ज्यादा मायके में ही रहती हैं और मेरी और मेरी मां-भाई की मदद करने के लिए हमेशा जान दिए रहती हैं। मेरे जीजा ओम प्रकाश जी भी हमारे लिए देवता की तरह हैं। बजरंगबली ने उन्हें जैसे हमारे लिए ही बनाया था। उन्हीं की छत्रछाया ने मुझे मेरा सपना पूरा करने में मदद की है।
मैंने इंटर किया, एलएलबी किया लेकिन खेलना मेरे लिए जुनून के समान ही था। मैंने आस-पास के जिलों में वॉलीबॉल-फुटबॉल खेला, कई पुरस्कार जीते, लेकिन मेरा जुनून बढ़ता ही गया। मैंने राष्ट्रीय स्तर पर भी खेलों में भाग लिया लेकिन मुझे मेरा हक नहीं मिला। मेरे पास हाथ-पैर थे, जुनून था लेकिन कोई सीढ़ी नहीं थी, कोई छत नहीं थी जो मुझे आगे बढ़ने देती, मुझे महफूज रखती।
मैंने सोचा कि कहीं पर नौकरी कर लूं ताकि उसी के साथ आगे बढ़ती जाऊं। कई जगह फार्म डाले। सीआईएसएफ में भी कोशिश की और एक दिन नोएडा में सीआईएसएफ के दफ्तर में जाने के लिए घर से निकल पड़ी, अकेली।
वह दिन था 11 अप्रैल 2011 का। मुझे नहीं मालूम था कि मेरी दुनिया बदलने जा रही है। पद्मावती एक्सप्रेस ट्रेन के चालू डिब्बे में खिड़की के किनारे एक सीट पर बैठी रात के अंधेरे में जुगनू जैसी किसी रोशनी की तलाश कर रही थी कि तभी कुछ 'लोफर टाइप' के लड़के आए और उन्होंने मेरे गले में पड़ी चेन पर झपट्टा मारा। मुझे हंसी आ गई। इन लड़कों की क्या औकात कि मुझसे मेरी चीज छीन लें? मैंने लड़के का हाथ पकड़कर मरोड़ दिया। लेकिन तभी दूसरे लड़के ने मेरे गले में हाथ डाला तो मेरे गरदन हटा लेने पर उसके हाथ में चेन की जगह मेरी शर्ट का कालर आ गया। उसने कालर पकड़कर घसीटा और दो-तीन लड़कों ने मुझे पकड़कर दरवाजे के पास खींच लिया।
मेरे लिए उनसे निबटना मुश्किल काम नहीं था लेकिन तभी लड़कों ने मेरे ऊपर ऐसी लात मारी कि मैं चलती ट्रेन से बाहर गिट्टियों के बीच लोटती सी नजर आई..। पता नहीं क्या हुआ, मुझे कुछ पता नहीं कि मेरे पैर के ऊपर से ट्रेन के कितने पहिए गुजरते चले गए। वे पहिए पद्मावत एक्सप्रेस के थे या दूसरी पटरी के ऊपर से गुजरने वाली ट्रेनों के? उस समय रात के डेढ़ बजे थे और ट्रेन बरेली के पास थी। लेकिन कुछ सोचने-समझने से पहले दर्द के आवेग ने मुझे बेसुध कर दिया।
बीच-बीच में मेरी तंद्रा टूटती तो देखती कि मैं ट्रेन की पटरियों के किनारे पड़ी हूं, मेरी एक टांग कट गई थी बस कुछ मांस भर ने उसे मेरे शरीर से जोड़े रखा था। बगल की पटरी से रह-रहकर ट्रेनें गुजर रही थीं। पटरी और मेरे बीच मात्र कुछ इंचों का ही फासला था। मैं अपने को पटरी से दूर करना चाहती थी लेकिन मेरे पास इतना दम कहां था, उस पर भीषण दर्द। मैं उस बीहड़ रात में उसी तरह पड़ी रही। जब मुझे होश आता तो बजरंगबली को याद करके यही कहती कि जय बजरंगबली..यह क्या हो रहा है मेरी जिंदगी के साथ..और अब क्या शेष रह गया है होने को? आंखों के सामने कभी मां की तस्वीर आती तो कभी भाई तो कभी लक्ष्मी दीदी की तो कभी जीजा की..।
पौ फटने पर जब लोग शौच के लिए रेलवे की पटरियों की तरफ आए तो मुझे पड़ा पाया। गांव वाले आए। मेरा नाम-पता पूछा। शायद आधी बेहोशी में मैंने घर का टेलीफोन नंबर बता दिया था। जीजा ने उनसे कहा कि इतनी मदद और कर दीजिए कि अरुणिमा को किसी अस्पताल तक पंहुचा दीजिए।
सुबह के सात बजे के करीब मुझे अस्पताल पंहुचाया गया। मेरी बाईं टांग काट दी गई। मीडिया द्वारा शोर मचाने पर मुझे लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। वहां से फिर मुझे एम्स ले जाया गया। डाक्टरों ने मुझे बचा लिया। सीआईएसफ ने नौकरी देने की घोषणा की। तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी ने भी नौकरी देने की घोषणा की। तत्कालीन खेल मंत्री अजय माकन ने काफी राहतें दीं।
समाज को ये बातें हजम नहीं हुईं। इलाज के साथ ही विवाद भी शुरू हो गया कि मैं राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी नहीं हूं। मैंने इंटर भी पास नहीं किया है। मैं किसी के साथ भाग रही थी। मेरी शादी हो चुकी है। मैंने किसी प्रतियोगिता में भाग नहीं लिया। मैं झूठी हूं, फरेबी हूं। यूपी के एडीजी रेल एके जैन ने तो बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस करके मुझे झूठा साबित किया और कहा कि मैंने ट्रेन से कूदकर आत्महत्या की कोशिश की थी या फिर मैं उस बीहड़ सुनसान इलाके में अकेले आधी रात को रेलवे लाइन पार कर रही थी, जब यह दुर्घटना घटी।
मैंने गुस्से में एके जैन को फोन लगाकर खूब सुनाया कि क्या आपका कोई सिपाही ट्रेन में मौजूद था जो बताता कि उस दिन ट्रेन में मुझे लूटने की कोशिश नहीं की गई थी? क्या रातभर पटरियों पर पड़े होने के बावजूद जीआरपी ने मेरी कोई मदद की? मन करता था कि मैं एके जैन के पास जाकर उनका मुंह नोच लूं।
एम्स में मेरी मां, मेरी बहन और जीजा ने मुझे समझाया कि और लड़कियों के साथ क्या-क्या नहीं होता, लोग तेजाब तक डाल देते हैं, तुम्हारा तो बस एक पैर ही गया है, अब आगे की योजना बनाओ। बहन की प्रेरणा ने मेरे मन में यह बात ला दी कि कुछ ऐसा करूं जिसे दुनिया देखे। क्यों न एवरेस्ट पर चढ़ जाऊं? बिना पैर के एवरेस्ट पर चढ़ना ही मुझे सबसे बेहतर विचार लगा। असली चुनौती यही है।
आसान काम तो हर कोई कर लेता है। मेरी मुश्किल को आसान कर दिया अमेरिका निवासी डॉ राकेश श्रीवास्तव और उनके भाई शैलेश श्रीवास्तव ने जो इनोवेटिव नाम से एक संस्था चलाते हैं। उन्होंने मेरे लिए एक कृत्रिम पैर बनवाया जिसको पहनकर मैं चलती हूं।
मुझे अजय माकन ने इतनी सहूलियतें दीं और वह भी तब, जब उत्तर प्रदेश की सरकार मुझे मुल्जिम बताने के लिए उतारू थी और मीडिया मेरे पीछे पड़ गया था। खिलाड़ियों का संगठन 'साई' भी मुझे खिलाड़ी नहीं मानता था। मैं चीख-चीख कर कहा करती थी कि "मैं जिंदा हूं, मुझसे आकर पूछो, मैं झूठी नहीं हूं।"
लेकिन मुसीबतों और परीक्षाओं का अंत अभी नहीं हुआ था। चार महीने एम्स में गुजारने के बाद जब मैं वापस लौटी तो मेरी बदनामी मेरा पीछा कर रही थी। मुझे विकलांगता का प्रमाण पत्र मिल गया था और रेल से पास भी। लेकिन मुझे ट्रेन के सेंकड क्लास की आरक्षित बोगी में चलने के लिए टिकट नहीं मिलता था। मुझे दौड़ाया जाता, शक किया जाता। मेरे लिए विकलांग बोगी में चलना भी अपमान के कड़वे घूंट पीने के समान ही था।
आरपीएफ के सिपाही मेरी टांग खुलवाकर देखते और फिर पास मांगकर उसकी जांच करते। एक बार तो हरिद्वार में जब मुझे टिकट नहीं मिला तो स्टेशन मास्टर ने बहुत मदद की। उन्होंने काउंटर क्लर्क से टिकट देने को कहा लेकिन उसने कहा कि उसे मेरे पास पर उसे शक है। उसमें हस्ताक्षर ठीक नहीं हैं। अंत में स्टेशन मास्टर ने अपने दम पर मुझे जबरदस्ती ट्रेन में बैठाया।
ममता बनर्जी ने नौकरी देने की घोषणा की थी। जब मैं कृत्रिम टांगों से चलकर रेल मंत्रालय पंहुची तो उनके पीए ने मिलाने से मना कर दिया। तीन बार निराश होकर मैं लौट आई। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विवेक सहाय से मिलने में मैं किसी तरह कामयाब हो गई तो उनका जवाब सुनकर हैरत हुई। उन्होंने सारे कागजात देखे और फिर कहा कि पहले जीआरपी से बढ़िया सी रिपोर्ट लगवाकर लाओ। ये थी रेलवे के मंत्री और अध्यक्ष की मानवीयता।
मैंने हिम्मत नहीं हारी। कहा कि इन सबको अपनी ताकत दिखाऊंगी, ये सब मुझे पहचानेंगे और खुद चलकर मेरे पास आएंगे। मुझे बछेंद्री पाल ने काफी प्रोत्साहित किया। उन्हीं के प्रशिक्षण की बदौलत मैं आज आसमान के इतने करीब हूं। मैं माउंट एवरेस्ट की चोटी पर हूं जहां पर हर कोई नहीं पंहुच पाता है। ऐसा लगता है कि बस हाथ उठाऊं और छू लूं।टिप्पणियां
मुझे बुखार आ गया। और नीचे भी लौटना था उस दुनिया में जो नहीं चाहती थी कि मैं यहां तक पहुंचूं। लेकिन कुछ लोग थे जिनका मेरे पर विश्वास था और उन्हीं के भरोसे मैं यहां तक पहुंची हूं। मेरी इच्छा अपने जैसे विकलांग लोगों की मदद करने की है, जिन्हें समाज ठुकराता है। मैं चाहती हूं कि उनके लिए कोई खेल अकादमी बनाऊं, उन्नाव में साढ़े सात बीघा जमीन मिल गई है। साढ़े तीन बीघा और खरीदनी है।
इस अकादमी से जब मेरी जैसी ऊंची चाहत रखने वाले निकलेंगे तब मुझे लगेगा कि मेरे साथ जो कुछ हुआ वह सब ठीक था क्योंकि अगर ये सब न होता तो आने वाली पीढ़ी को हौसला कौन दे पाता..! अगले महीने की 10 तारीख को मैं 27 वर्ष की हो जाऊंगी। मुझमें अभी बहुत सी ऊंचाइयों को छूने का हौसला बाकी है। बस, मुझे कोई चुनौती दे दीजिए..!"
मैं वॉलीबॉल-फुटबॉल खेलना चाहती थी, हॉकी चैंपियन बनना चाहती थी, लेकिन मेरी कटी हुई टांग ने मुझे नियम-कानून से बंधे खेलों में जाने से रोक दिया। लोग कहते हैं कि कानून पैरों में बंधी हुई बेड़ियों के समान होते हैं, मेरे पास तो एक पैर भी नहीं था, लेकिन पर्वत पर चढ़ने से मुझे कौन रोक सकता था।
जब मैंने पहली बार एवरेस्ट फतह करने की अपने दिल की इच्छा जताई थी तो लोगों ने कैसा मजाक उड़ाया था। आज वे ही लोग देख लें कि मैं कहां पर हूं.. अरे, पैरों से चलकर मंजिल मिलती होती तो अरबों लोग अपनी मंजिलों पर पहुंच गए होते, यह तो हौसला होता है जो आपको कहीं भी पंहुचा देता है। जैसे मैं आज यहां पर हूं श्वेत बर्फ से ढकी पहाड़ियों और स्वच्छ नीले आकाश के नीचे, जय बजरंगबली..!
नाम मेरा है अरुणिमा सिन्हा। मुझे लोग सोनू भी कहते हैं। मैं बहुत प्रसिद्ध नहीं हूं लेकिन दो साल पहले मेरे साथ जो हादसा हुआ था, उससे मुझे पहचान मिली। वह पहचान कोई नेकनामी वाली नहीं थी और न ही मैंने कोई अच्छा काम किया था। वह बदनामी थी। मगर मेरी क्या गलती थी?
मैं उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर जिले के क्षेत्राना (शाजादपुर) मोहल्ले की हूं। सच तो यह है कि हम लोग मूलत: बिहार के हैं। पिता फौज में थे और हम लोग सुल्तानपुर आ गए थे। लेकिन जब मैं चार साल की थी, तभी मेरे पिताजी का स्वर्गवास हो गया। मेरा एक छोटा भाई है और बड़ी बहन लक्ष्मी। आप समझ सकते हैं कि बिना पिता के परिवार की क्या हालत होती है।
मेरी मां अंबेडकरनगर आ गईं और स्वास्थ्य विभाग में उन्हें नौकरी मिल गई। किसी तरह जीवन की गाड़ी आगे बढ़ने लगी। मुझे भी पढ़ाई के लिए स्कूल भेजा गया लेकिन मेरा खेलने में ज्यादा मन लगता था। हमारे समाज में लड़कियों को घर के काम में निपुण करने की परंपरा है, खेलने वाली लड़कियां कम ही दिखाई पड़ती हैं। लोगों ने मना भी किया लेकिन मैं कहां मानने वाली थी। मेरी मां भी मुझे नहीं टोकती थी और मेरी मां जैसी दीदी लक्ष्मी तो जैसे मेरे पीछे दीवार बनकर खड़ी रहती थीं।
मैंने फुटबॉल, वॉलीबॉल और हॉकी खेली। हॉकी खेलने के लिए स्टिक लेकर जब निकलती थी तो मोहल्ले के लड़के कहां बाज आने वाले। वे मेरी खिल्ली उड़ाते थे। कहते थे, देखो जा रही है झांसी की रानी बनकर खेलने, बड़ी आई स्टिक लेकर चलने वाली। मैं वैसे तो लड़कों की परवाह भी नहीं करती थी, लेकिन जब बात अखरने वाली लगती थी तो मैं घूरकर उनकी तरफ देखती थी, तो वे उड़न-छू हो जाते थे।
मुझे याद है कि एक बार जब मैं 14 बरस की रही होऊंगी और साइकिल से हम दोनों बहनें कहीं जा रहे थे तो एक जगह पर लक्ष्मी दीदी रुककर किसी से बात करने लगीं और मैं थोड़ा आगे निकलकर वहां पर उनका इंतजार करने लगी। उस दौरान कुछ लड़के साइकिल से उधर से गुजरे तो मुझसे रास्ता छोड़ने को कहा। मैंने मना कर दिया और कहा कि आगे जगह है, उधर से निकल जाओ।
वे अपनी बात पर अड़े रहे और मैं अपनी बात पर। इस बीच जब लक्ष्मी दीदी आ गईं और हम चलने लगे तो किसी लड़के ने झापड़ मारा जो मेरी दीदी के गाल पर लग गया। भीड़ का लाभ उठाकर लड़के भाग गए। दीदी के गाल पर चांटा देखकर मुझे बहुत क्रोध आया। मैंने दीदी से कहा कि चलो उस लड़के को ढूंढ़कर सबक सिखाते हैं। दीदी ने मना किया लेकिन मेरे ऊपर तो जैसे चंडी सवार थी। हम दोनों उन लड़कों को काफी देर तक तलाशते रहे और घूम-फिर कर उसी जगह आ गए। वहां पर पान की दुकान पर खड़े एक लड़के की शर्ट का कालर देखकर दीदी ने कहा कि यही वह लड़का है। बस फिर क्या था, मैंने दौड़कर उस लड़के को दबोच लिया और दीदी से कहा, "मार दीदी, छोड़ना नहीं।"
भीड़ लग गई, काफी बवाल हुआ लेकिन मैंने छोड़ा नहीं। अंत में उस लड़के के घर वाले आए और माफी मांगी तब जाकर मैंने उसे छोड़ा। उसके बाद फिर किसी ने मेरी तरफ या मेरी दीदी की तरफ नजर उठाकर भी नहीं देखा। लक्ष्मी दीदी की शादी हो गई लेकिन मेरे प्रति उनका इतना प्यार रहता है कि वह ससुराल से ज्यादा मायके में ही रहती हैं और मेरी और मेरी मां-भाई की मदद करने के लिए हमेशा जान दिए रहती हैं। मेरे जीजा ओम प्रकाश जी भी हमारे लिए देवता की तरह हैं। बजरंगबली ने उन्हें जैसे हमारे लिए ही बनाया था। उन्हीं की छत्रछाया ने मुझे मेरा सपना पूरा करने में मदद की है।
मैंने इंटर किया, एलएलबी किया लेकिन खेलना मेरे लिए जुनून के समान ही था। मैंने आस-पास के जिलों में वॉलीबॉल-फुटबॉल खेला, कई पुरस्कार जीते, लेकिन मेरा जुनून बढ़ता ही गया। मैंने राष्ट्रीय स्तर पर भी खेलों में भाग लिया लेकिन मुझे मेरा हक नहीं मिला। मेरे पास हाथ-पैर थे, जुनून था लेकिन कोई सीढ़ी नहीं थी, कोई छत नहीं थी जो मुझे आगे बढ़ने देती, मुझे महफूज रखती।
मैंने सोचा कि कहीं पर नौकरी कर लूं ताकि उसी के साथ आगे बढ़ती जाऊं। कई जगह फार्म डाले। सीआईएसएफ में भी कोशिश की और एक दिन नोएडा में सीआईएसएफ के दफ्तर में जाने के लिए घर से निकल पड़ी, अकेली।
वह दिन था 11 अप्रैल 2011 का। मुझे नहीं मालूम था कि मेरी दुनिया बदलने जा रही है। पद्मावती एक्सप्रेस ट्रेन के चालू डिब्बे में खिड़की के किनारे एक सीट पर बैठी रात के अंधेरे में जुगनू जैसी किसी रोशनी की तलाश कर रही थी कि तभी कुछ 'लोफर टाइप' के लड़के आए और उन्होंने मेरे गले में पड़ी चेन पर झपट्टा मारा। मुझे हंसी आ गई। इन लड़कों की क्या औकात कि मुझसे मेरी चीज छीन लें? मैंने लड़के का हाथ पकड़कर मरोड़ दिया। लेकिन तभी दूसरे लड़के ने मेरे गले में हाथ डाला तो मेरे गरदन हटा लेने पर उसके हाथ में चेन की जगह मेरी शर्ट का कालर आ गया। उसने कालर पकड़कर घसीटा और दो-तीन लड़कों ने मुझे पकड़कर दरवाजे के पास खींच लिया।
मेरे लिए उनसे निबटना मुश्किल काम नहीं था लेकिन तभी लड़कों ने मेरे ऊपर ऐसी लात मारी कि मैं चलती ट्रेन से बाहर गिट्टियों के बीच लोटती सी नजर आई..। पता नहीं क्या हुआ, मुझे कुछ पता नहीं कि मेरे पैर के ऊपर से ट्रेन के कितने पहिए गुजरते चले गए। वे पहिए पद्मावत एक्सप्रेस के थे या दूसरी पटरी के ऊपर से गुजरने वाली ट्रेनों के? उस समय रात के डेढ़ बजे थे और ट्रेन बरेली के पास थी। लेकिन कुछ सोचने-समझने से पहले दर्द के आवेग ने मुझे बेसुध कर दिया।
बीच-बीच में मेरी तंद्रा टूटती तो देखती कि मैं ट्रेन की पटरियों के किनारे पड़ी हूं, मेरी एक टांग कट गई थी बस कुछ मांस भर ने उसे मेरे शरीर से जोड़े रखा था। बगल की पटरी से रह-रहकर ट्रेनें गुजर रही थीं। पटरी और मेरे बीच मात्र कुछ इंचों का ही फासला था। मैं अपने को पटरी से दूर करना चाहती थी लेकिन मेरे पास इतना दम कहां था, उस पर भीषण दर्द। मैं उस बीहड़ रात में उसी तरह पड़ी रही। जब मुझे होश आता तो बजरंगबली को याद करके यही कहती कि जय बजरंगबली..यह क्या हो रहा है मेरी जिंदगी के साथ..और अब क्या शेष रह गया है होने को? आंखों के सामने कभी मां की तस्वीर आती तो कभी भाई तो कभी लक्ष्मी दीदी की तो कभी जीजा की..।
पौ फटने पर जब लोग शौच के लिए रेलवे की पटरियों की तरफ आए तो मुझे पड़ा पाया। गांव वाले आए। मेरा नाम-पता पूछा। शायद आधी बेहोशी में मैंने घर का टेलीफोन नंबर बता दिया था। जीजा ने उनसे कहा कि इतनी मदद और कर दीजिए कि अरुणिमा को किसी अस्पताल तक पंहुचा दीजिए।
सुबह के सात बजे के करीब मुझे अस्पताल पंहुचाया गया। मेरी बाईं टांग काट दी गई। मीडिया द्वारा शोर मचाने पर मुझे लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। वहां से फिर मुझे एम्स ले जाया गया। डाक्टरों ने मुझे बचा लिया। सीआईएसफ ने नौकरी देने की घोषणा की। तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी ने भी नौकरी देने की घोषणा की। तत्कालीन खेल मंत्री अजय माकन ने काफी राहतें दीं।
समाज को ये बातें हजम नहीं हुईं। इलाज के साथ ही विवाद भी शुरू हो गया कि मैं राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी नहीं हूं। मैंने इंटर भी पास नहीं किया है। मैं किसी के साथ भाग रही थी। मेरी शादी हो चुकी है। मैंने किसी प्रतियोगिता में भाग नहीं लिया। मैं झूठी हूं, फरेबी हूं। यूपी के एडीजी रेल एके जैन ने तो बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस करके मुझे झूठा साबित किया और कहा कि मैंने ट्रेन से कूदकर आत्महत्या की कोशिश की थी या फिर मैं उस बीहड़ सुनसान इलाके में अकेले आधी रात को रेलवे लाइन पार कर रही थी, जब यह दुर्घटना घटी।
मैंने गुस्से में एके जैन को फोन लगाकर खूब सुनाया कि क्या आपका कोई सिपाही ट्रेन में मौजूद था जो बताता कि उस दिन ट्रेन में मुझे लूटने की कोशिश नहीं की गई थी? क्या रातभर पटरियों पर पड़े होने के बावजूद जीआरपी ने मेरी कोई मदद की? मन करता था कि मैं एके जैन के पास जाकर उनका मुंह नोच लूं।
एम्स में मेरी मां, मेरी बहन और जीजा ने मुझे समझाया कि और लड़कियों के साथ क्या-क्या नहीं होता, लोग तेजाब तक डाल देते हैं, तुम्हारा तो बस एक पैर ही गया है, अब आगे की योजना बनाओ। बहन की प्रेरणा ने मेरे मन में यह बात ला दी कि कुछ ऐसा करूं जिसे दुनिया देखे। क्यों न एवरेस्ट पर चढ़ जाऊं? बिना पैर के एवरेस्ट पर चढ़ना ही मुझे सबसे बेहतर विचार लगा। असली चुनौती यही है।
आसान काम तो हर कोई कर लेता है। मेरी मुश्किल को आसान कर दिया अमेरिका निवासी डॉ राकेश श्रीवास्तव और उनके भाई शैलेश श्रीवास्तव ने जो इनोवेटिव नाम से एक संस्था चलाते हैं। उन्होंने मेरे लिए एक कृत्रिम पैर बनवाया जिसको पहनकर मैं चलती हूं।
मुझे अजय माकन ने इतनी सहूलियतें दीं और वह भी तब, जब उत्तर प्रदेश की सरकार मुझे मुल्जिम बताने के लिए उतारू थी और मीडिया मेरे पीछे पड़ गया था। खिलाड़ियों का संगठन 'साई' भी मुझे खिलाड़ी नहीं मानता था। मैं चीख-चीख कर कहा करती थी कि "मैं जिंदा हूं, मुझसे आकर पूछो, मैं झूठी नहीं हूं।"
लेकिन मुसीबतों और परीक्षाओं का अंत अभी नहीं हुआ था। चार महीने एम्स में गुजारने के बाद जब मैं वापस लौटी तो मेरी बदनामी मेरा पीछा कर रही थी। मुझे विकलांगता का प्रमाण पत्र मिल गया था और रेल से पास भी। लेकिन मुझे ट्रेन के सेंकड क्लास की आरक्षित बोगी में चलने के लिए टिकट नहीं मिलता था। मुझे दौड़ाया जाता, शक किया जाता। मेरे लिए विकलांग बोगी में चलना भी अपमान के कड़वे घूंट पीने के समान ही था।
आरपीएफ के सिपाही मेरी टांग खुलवाकर देखते और फिर पास मांगकर उसकी जांच करते। एक बार तो हरिद्वार में जब मुझे टिकट नहीं मिला तो स्टेशन मास्टर ने बहुत मदद की। उन्होंने काउंटर क्लर्क से टिकट देने को कहा लेकिन उसने कहा कि उसे मेरे पास पर उसे शक है। उसमें हस्ताक्षर ठीक नहीं हैं। अंत में स्टेशन मास्टर ने अपने दम पर मुझे जबरदस्ती ट्रेन में बैठाया।
ममता बनर्जी ने नौकरी देने की घोषणा की थी। जब मैं कृत्रिम टांगों से चलकर रेल मंत्रालय पंहुची तो उनके पीए ने मिलाने से मना कर दिया। तीन बार निराश होकर मैं लौट आई। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विवेक सहाय से मिलने में मैं किसी तरह कामयाब हो गई तो उनका जवाब सुनकर हैरत हुई। उन्होंने सारे कागजात देखे और फिर कहा कि पहले जीआरपी से बढ़िया सी रिपोर्ट लगवाकर लाओ। ये थी रेलवे के मंत्री और अध्यक्ष की मानवीयता।
मैंने हिम्मत नहीं हारी। कहा कि इन सबको अपनी ताकत दिखाऊंगी, ये सब मुझे पहचानेंगे और खुद चलकर मेरे पास आएंगे। मुझे बछेंद्री पाल ने काफी प्रोत्साहित किया। उन्हीं के प्रशिक्षण की बदौलत मैं आज आसमान के इतने करीब हूं। मैं माउंट एवरेस्ट की चोटी पर हूं जहां पर हर कोई नहीं पंहुच पाता है। ऐसा लगता है कि बस हाथ उठाऊं और छू लूं।टिप्पणियां
मुझे बुखार आ गया। और नीचे भी लौटना था उस दुनिया में जो नहीं चाहती थी कि मैं यहां तक पहुंचूं। लेकिन कुछ लोग थे जिनका मेरे पर विश्वास था और उन्हीं के भरोसे मैं यहां तक पहुंची हूं। मेरी इच्छा अपने जैसे विकलांग लोगों की मदद करने की है, जिन्हें समाज ठुकराता है। मैं चाहती हूं कि उनके लिए कोई खेल अकादमी बनाऊं, उन्नाव में साढ़े सात बीघा जमीन मिल गई है। साढ़े तीन बीघा और खरीदनी है।
इस अकादमी से जब मेरी जैसी ऊंची चाहत रखने वाले निकलेंगे तब मुझे लगेगा कि मेरे साथ जो कुछ हुआ वह सब ठीक था क्योंकि अगर ये सब न होता तो आने वाली पीढ़ी को हौसला कौन दे पाता..! अगले महीने की 10 तारीख को मैं 27 वर्ष की हो जाऊंगी। मुझमें अभी बहुत सी ऊंचाइयों को छूने का हौसला बाकी है। बस, मुझे कोई चुनौती दे दीजिए..!"
जब मैंने पहली बार एवरेस्ट फतह करने की अपने दिल की इच्छा जताई थी तो लोगों ने कैसा मजाक उड़ाया था। आज वे ही लोग देख लें कि मैं कहां पर हूं.. अरे, पैरों से चलकर मंजिल मिलती होती तो अरबों लोग अपनी मंजिलों पर पहुंच गए होते, यह तो हौसला होता है जो आपको कहीं भी पंहुचा देता है। जैसे मैं आज यहां पर हूं श्वेत बर्फ से ढकी पहाड़ियों और स्वच्छ नीले आकाश के नीचे, जय बजरंगबली..!
नाम मेरा है अरुणिमा सिन्हा। मुझे लोग सोनू भी कहते हैं। मैं बहुत प्रसिद्ध नहीं हूं लेकिन दो साल पहले मेरे साथ जो हादसा हुआ था, उससे मुझे पहचान मिली। वह पहचान कोई नेकनामी वाली नहीं थी और न ही मैंने कोई अच्छा काम किया था। वह बदनामी थी। मगर मेरी क्या गलती थी?
मैं उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर जिले के क्षेत्राना (शाजादपुर) मोहल्ले की हूं। सच तो यह है कि हम लोग मूलत: बिहार के हैं। पिता फौज में थे और हम लोग सुल्तानपुर आ गए थे। लेकिन जब मैं चार साल की थी, तभी मेरे पिताजी का स्वर्गवास हो गया। मेरा एक छोटा भाई है और बड़ी बहन लक्ष्मी। आप समझ सकते हैं कि बिना पिता के परिवार की क्या हालत होती है।
मेरी मां अंबेडकरनगर आ गईं और स्वास्थ्य विभाग में उन्हें नौकरी मिल गई। किसी तरह जीवन की गाड़ी आगे बढ़ने लगी। मुझे भी पढ़ाई के लिए स्कूल भेजा गया लेकिन मेरा खेलने में ज्यादा मन लगता था। हमारे समाज में लड़कियों को घर के काम में निपुण करने की परंपरा है, खेलने वाली लड़कियां कम ही दिखाई पड़ती हैं। लोगों ने मना भी किया लेकिन मैं कहां मानने वाली थी। मेरी मां भी मुझे नहीं टोकती थी और मेरी मां जैसी दीदी लक्ष्मी तो जैसे मेरे पीछे दीवार बनकर खड़ी रहती थीं।
मैंने फुटबॉल, वॉलीबॉल और हॉकी खेली। हॉकी खेलने के लिए स्टिक लेकर जब निकलती थी तो मोहल्ले के लड़के कहां बाज आने वाले। वे मेरी खिल्ली उड़ाते थे। कहते थे, देखो जा रही है झांसी की रानी बनकर खेलने, बड़ी आई स्टिक लेकर चलने वाली। मैं वैसे तो लड़कों की परवाह भी नहीं करती थी, लेकिन जब बात अखरने वाली लगती थी तो मैं घूरकर उनकी तरफ देखती थी, तो वे उड़न-छू हो जाते थे।
मुझे याद है कि एक बार जब मैं 14 बरस की रही होऊंगी और साइकिल से हम दोनों बहनें कहीं जा रहे थे तो एक जगह पर लक्ष्मी दीदी रुककर किसी से बात करने लगीं और मैं थोड़ा आगे निकलकर वहां पर उनका इंतजार करने लगी। उस दौरान कुछ लड़के साइकिल से उधर से गुजरे तो मुझसे रास्ता छोड़ने को कहा। मैंने मना कर दिया और कहा कि आगे जगह है, उधर से निकल जाओ।
वे अपनी बात पर अड़े रहे और मैं अपनी बात पर। इस बीच जब लक्ष्मी दीदी आ गईं और हम चलने लगे तो किसी लड़के ने झापड़ मारा जो मेरी दीदी के गाल पर लग गया। भीड़ का लाभ उठाकर लड़के भाग गए। दीदी के गाल पर चांटा देखकर मुझे बहुत क्रोध आया। मैंने दीदी से कहा कि चलो उस लड़के को ढूंढ़कर सबक सिखाते हैं। दीदी ने मना किया लेकिन मेरे ऊपर तो जैसे चंडी सवार थी। हम दोनों उन लड़कों को काफी देर तक तलाशते रहे और घूम-फिर कर उसी जगह आ गए। वहां पर पान की दुकान पर खड़े एक लड़के की शर्ट का कालर देखकर दीदी ने कहा कि यही वह लड़का है। बस फिर क्या था, मैंने दौड़कर उस लड़के को दबोच लिया और दीदी से कहा, "मार दीदी, छोड़ना नहीं।"
भीड़ लग गई, काफी बवाल हुआ लेकिन मैंने छोड़ा नहीं। अंत में उस लड़के के घर वाले आए और माफी मांगी तब जाकर मैंने उसे छोड़ा। उसके बाद फिर किसी ने मेरी तरफ या मेरी दीदी की तरफ नजर उठाकर भी नहीं देखा। लक्ष्मी दीदी की शादी हो गई लेकिन मेरे प्रति उनका इतना प्यार रहता है कि वह ससुराल से ज्यादा मायके में ही रहती हैं और मेरी और मेरी मां-भाई की मदद करने के लिए हमेशा जान दिए रहती हैं। मेरे जीजा ओम प्रकाश जी भी हमारे लिए देवता की तरह हैं। बजरंगबली ने उन्हें जैसे हमारे लिए ही बनाया था। उन्हीं की छत्रछाया ने मुझे मेरा सपना पूरा करने में मदद की है।
मैंने इंटर किया, एलएलबी किया लेकिन खेलना मेरे लिए जुनून के समान ही था। मैंने आस-पास के जिलों में वॉलीबॉल-फुटबॉल खेला, कई पुरस्कार जीते, लेकिन मेरा जुनून बढ़ता ही गया। मैंने राष्ट्रीय स्तर पर भी खेलों में भाग लिया लेकिन मुझे मेरा हक नहीं मिला। मेरे पास हाथ-पैर थे, जुनून था लेकिन कोई सीढ़ी नहीं थी, कोई छत नहीं थी जो मुझे आगे बढ़ने देती, मुझे महफूज रखती।
मैंने सोचा कि कहीं पर नौकरी कर लूं ताकि उसी के साथ आगे बढ़ती जाऊं। कई जगह फार्म डाले। सीआईएसएफ में भी कोशिश की और एक दिन नोएडा में सीआईएसएफ के दफ्तर में जाने के लिए घर से निकल पड़ी, अकेली।
वह दिन था 11 अप्रैल 2011 का। मुझे नहीं मालूम था कि मेरी दुनिया बदलने जा रही है। पद्मावती एक्सप्रेस ट्रेन के चालू डिब्बे में खिड़की के किनारे एक सीट पर बैठी रात के अंधेरे में जुगनू जैसी किसी रोशनी की तलाश कर रही थी कि तभी कुछ 'लोफर टाइप' के लड़के आए और उन्होंने मेरे गले में पड़ी चेन पर झपट्टा मारा। मुझे हंसी आ गई। इन लड़कों की क्या औकात कि मुझसे मेरी चीज छीन लें? मैंने लड़के का हाथ पकड़कर मरोड़ दिया। लेकिन तभी दूसरे लड़के ने मेरे गले में हाथ डाला तो मेरे गरदन हटा लेने पर उसके हाथ में चेन की जगह मेरी शर्ट का कालर आ गया। उसने कालर पकड़कर घसीटा और दो-तीन लड़कों ने मुझे पकड़कर दरवाजे के पास खींच लिया।
मेरे लिए उनसे निबटना मुश्किल काम नहीं था लेकिन तभी लड़कों ने मेरे ऊपर ऐसी लात मारी कि मैं चलती ट्रेन से बाहर गिट्टियों के बीच लोटती सी नजर आई..। पता नहीं क्या हुआ, मुझे कुछ पता नहीं कि मेरे पैर के ऊपर से ट्रेन के कितने पहिए गुजरते चले गए। वे पहिए पद्मावत एक्सप्रेस के थे या दूसरी पटरी के ऊपर से गुजरने वाली ट्रेनों के? उस समय रात के डेढ़ बजे थे और ट्रेन बरेली के पास थी। लेकिन कुछ सोचने-समझने से पहले दर्द के आवेग ने मुझे बेसुध कर दिया।
बीच-बीच में मेरी तंद्रा टूटती तो देखती कि मैं ट्रेन की पटरियों के किनारे पड़ी हूं, मेरी एक टांग कट गई थी बस कुछ मांस भर ने उसे मेरे शरीर से जोड़े रखा था। बगल की पटरी से रह-रहकर ट्रेनें गुजर रही थीं। पटरी और मेरे बीच मात्र कुछ इंचों का ही फासला था। मैं अपने को पटरी से दूर करना चाहती थी लेकिन मेरे पास इतना दम कहां था, उस पर भीषण दर्द। मैं उस बीहड़ रात में उसी तरह पड़ी रही। जब मुझे होश आता तो बजरंगबली को याद करके यही कहती कि जय बजरंगबली..यह क्या हो रहा है मेरी जिंदगी के साथ..और अब क्या शेष रह गया है होने को? आंखों के सामने कभी मां की तस्वीर आती तो कभी भाई तो कभी लक्ष्मी दीदी की तो कभी जीजा की..।
पौ फटने पर जब लोग शौच के लिए रेलवे की पटरियों की तरफ आए तो मुझे पड़ा पाया। गांव वाले आए। मेरा नाम-पता पूछा। शायद आधी बेहोशी में मैंने घर का टेलीफोन नंबर बता दिया था। जीजा ने उनसे कहा कि इतनी मदद और कर दीजिए कि अरुणिमा को किसी अस्पताल तक पंहुचा दीजिए।
सुबह के सात बजे के करीब मुझे अस्पताल पंहुचाया गया। मेरी बाईं टांग काट दी गई। मीडिया द्वारा शोर मचाने पर मुझे लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। वहां से फिर मुझे एम्स ले जाया गया। डाक्टरों ने मुझे बचा लिया। सीआईएसफ ने नौकरी देने की घोषणा की। तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी ने भी नौकरी देने की घोषणा की। तत्कालीन खेल मंत्री अजय माकन ने काफी राहतें दीं।
समाज को ये बातें हजम नहीं हुईं। इलाज के साथ ही विवाद भी शुरू हो गया कि मैं राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी नहीं हूं। मैंने इंटर भी पास नहीं किया है। मैं किसी के साथ भाग रही थी। मेरी शादी हो चुकी है। मैंने किसी प्रतियोगिता में भाग नहीं लिया। मैं झूठी हूं, फरेबी हूं। यूपी के एडीजी रेल एके जैन ने तो बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस करके मुझे झूठा साबित किया और कहा कि मैंने ट्रेन से कूदकर आत्महत्या की कोशिश की थी या फिर मैं उस बीहड़ सुनसान इलाके में अकेले आधी रात को रेलवे लाइन पार कर रही थी, जब यह दुर्घटना घटी।
मैंने गुस्से में एके जैन को फोन लगाकर खूब सुनाया कि क्या आपका कोई सिपाही ट्रेन में मौजूद था जो बताता कि उस दिन ट्रेन में मुझे लूटने की कोशिश नहीं की गई थी? क्या रातभर पटरियों पर पड़े होने के बावजूद जीआरपी ने मेरी कोई मदद की? मन करता था कि मैं एके जैन के पास जाकर उनका मुंह नोच लूं।
एम्स में मेरी मां, मेरी बहन और जीजा ने मुझे समझाया कि और लड़कियों के साथ क्या-क्या नहीं होता, लोग तेजाब तक डाल देते हैं, तुम्हारा तो बस एक पैर ही गया है, अब आगे की योजना बनाओ। बहन की प्रेरणा ने मेरे मन में यह बात ला दी कि कुछ ऐसा करूं जिसे दुनिया देखे। क्यों न एवरेस्ट पर चढ़ जाऊं? बिना पैर के एवरेस्ट पर चढ़ना ही मुझे सबसे बेहतर विचार लगा। असली चुनौती यही है।
आसान काम तो हर कोई कर लेता है। मेरी मुश्किल को आसान कर दिया अमेरिका निवासी डॉ राकेश श्रीवास्तव और उनके भाई शैलेश श्रीवास्तव ने जो इनोवेटिव नाम से एक संस्था चलाते हैं। उन्होंने मेरे लिए एक कृत्रिम पैर बनवाया जिसको पहनकर मैं चलती हूं।
मुझे अजय माकन ने इतनी सहूलियतें दीं और वह भी तब, जब उत्तर प्रदेश की सरकार मुझे मुल्जिम बताने के लिए उतारू थी और मीडिया मेरे पीछे पड़ गया था। खिलाड़ियों का संगठन 'साई' भी मुझे खिलाड़ी नहीं मानता था। मैं चीख-चीख कर कहा करती थी कि "मैं जिंदा हूं, मुझसे आकर पूछो, मैं झूठी नहीं हूं।"
लेकिन मुसीबतों और परीक्षाओं का अंत अभी नहीं हुआ था। चार महीने एम्स में गुजारने के बाद जब मैं वापस लौटी तो मेरी बदनामी मेरा पीछा कर रही थी। मुझे विकलांगता का प्रमाण पत्र मिल गया था और रेल से पास भी। लेकिन मुझे ट्रेन के सेंकड क्लास की आरक्षित बोगी में चलने के लिए टिकट नहीं मिलता था। मुझे दौड़ाया जाता, शक किया जाता। मेरे लिए विकलांग बोगी में चलना भी अपमान के कड़वे घूंट पीने के समान ही था।
आरपीएफ के सिपाही मेरी टांग खुलवाकर देखते और फिर पास मांगकर उसकी जांच करते। एक बार तो हरिद्वार में जब मुझे टिकट नहीं मिला तो स्टेशन मास्टर ने बहुत मदद की। उन्होंने काउंटर क्लर्क से टिकट देने को कहा लेकिन उसने कहा कि उसे मेरे पास पर उसे शक है। उसमें हस्ताक्षर ठीक नहीं हैं। अंत में स्टेशन मास्टर ने अपने दम पर मुझे जबरदस्ती ट्रेन में बैठाया।
ममता बनर्जी ने नौकरी देने की घोषणा की थी। जब मैं कृत्रिम टांगों से चलकर रेल मंत्रालय पंहुची तो उनके पीए ने मिलाने से मना कर दिया। तीन बार निराश होकर मैं लौट आई। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विवेक सहाय से मिलने में मैं किसी तरह कामयाब हो गई तो उनका जवाब सुनकर हैरत हुई। उन्होंने सारे कागजात देखे और फिर कहा कि पहले जीआरपी से बढ़िया सी रिपोर्ट लगवाकर लाओ। ये थी रेलवे के मंत्री और अध्यक्ष की मानवीयता।
मैंने हिम्मत नहीं हारी। कहा कि इन सबको अपनी ताकत दिखाऊंगी, ये सब मुझे पहचानेंगे और खुद चलकर मेरे पास आएंगे। मुझे बछेंद्री पाल ने काफी प्रोत्साहित किया। उन्हीं के प्रशिक्षण की बदौलत मैं आज आसमान के इतने करीब हूं। मैं माउंट एवरेस्ट की चोटी पर हूं जहां पर हर कोई नहीं पंहुच पाता है। ऐसा लगता है कि बस हाथ उठाऊं और छू लूं।टिप्पणियां
मुझे बुखार आ गया। और नीचे भी लौटना था उस दुनिया में जो नहीं चाहती थी कि मैं यहां तक पहुंचूं। लेकिन कुछ लोग थे जिनका मेरे पर विश्वास था और उन्हीं के भरोसे मैं यहां तक पहुंची हूं। मेरी इच्छा अपने जैसे विकलांग लोगों की मदद करने की है, जिन्हें समाज ठुकराता है। मैं चाहती हूं कि उनके लिए कोई खेल अकादमी बनाऊं, उन्नाव में साढ़े सात बीघा जमीन मिल गई है। साढ़े तीन बीघा और खरीदनी है।
इस अकादमी से जब मेरी जैसी ऊंची चाहत रखने वाले निकलेंगे तब मुझे लगेगा कि मेरे साथ जो कुछ हुआ वह सब ठीक था क्योंकि अगर ये सब न होता तो आने वाली पीढ़ी को हौसला कौन दे पाता..! अगले महीने की 10 तारीख को मैं 27 वर्ष की हो जाऊंगी। मुझमें अभी बहुत सी ऊंचाइयों को छूने का हौसला बाकी है। बस, मुझे कोई चुनौती दे दीजिए..!"
नाम मेरा है अरुणिमा सिन्हा। मुझे लोग सोनू भी कहते हैं। मैं बहुत प्रसिद्ध नहीं हूं लेकिन दो साल पहले मेरे साथ जो हादसा हुआ था, उससे मुझे पहचान मिली। वह पहचान कोई नेकनामी वाली नहीं थी और न ही मैंने कोई अच्छा काम किया था। वह बदनामी थी। मगर मेरी क्या गलती थी?
मैं उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर जिले के क्षेत्राना (शाजादपुर) मोहल्ले की हूं। सच तो यह है कि हम लोग मूलत: बिहार के हैं। पिता फौज में थे और हम लोग सुल्तानपुर आ गए थे। लेकिन जब मैं चार साल की थी, तभी मेरे पिताजी का स्वर्गवास हो गया। मेरा एक छोटा भाई है और बड़ी बहन लक्ष्मी। आप समझ सकते हैं कि बिना पिता के परिवार की क्या हालत होती है।
मेरी मां अंबेडकरनगर आ गईं और स्वास्थ्य विभाग में उन्हें नौकरी मिल गई। किसी तरह जीवन की गाड़ी आगे बढ़ने लगी। मुझे भी पढ़ाई के लिए स्कूल भेजा गया लेकिन मेरा खेलने में ज्यादा मन लगता था। हमारे समाज में लड़कियों को घर के काम में निपुण करने की परंपरा है, खेलने वाली लड़कियां कम ही दिखाई पड़ती हैं। लोगों ने मना भी किया लेकिन मैं कहां मानने वाली थी। मेरी मां भी मुझे नहीं टोकती थी और मेरी मां जैसी दीदी लक्ष्मी तो जैसे मेरे पीछे दीवार बनकर खड़ी रहती थीं।
मैंने फुटबॉल, वॉलीबॉल और हॉकी खेली। हॉकी खेलने के लिए स्टिक लेकर जब निकलती थी तो मोहल्ले के लड़के कहां बाज आने वाले। वे मेरी खिल्ली उड़ाते थे। कहते थे, देखो जा रही है झांसी की रानी बनकर खेलने, बड़ी आई स्टिक लेकर चलने वाली। मैं वैसे तो लड़कों की परवाह भी नहीं करती थी, लेकिन जब बात अखरने वाली लगती थी तो मैं घूरकर उनकी तरफ देखती थी, तो वे उड़न-छू हो जाते थे।
मुझे याद है कि एक बार जब मैं 14 बरस की रही होऊंगी और साइकिल से हम दोनों बहनें कहीं जा रहे थे तो एक जगह पर लक्ष्मी दीदी रुककर किसी से बात करने लगीं और मैं थोड़ा आगे निकलकर वहां पर उनका इंतजार करने लगी। उस दौरान कुछ लड़के साइकिल से उधर से गुजरे तो मुझसे रास्ता छोड़ने को कहा। मैंने मना कर दिया और कहा कि आगे जगह है, उधर से निकल जाओ।
वे अपनी बात पर अड़े रहे और मैं अपनी बात पर। इस बीच जब लक्ष्मी दीदी आ गईं और हम चलने लगे तो किसी लड़के ने झापड़ मारा जो मेरी दीदी के गाल पर लग गया। भीड़ का लाभ उठाकर लड़के भाग गए। दीदी के गाल पर चांटा देखकर मुझे बहुत क्रोध आया। मैंने दीदी से कहा कि चलो उस लड़के को ढूंढ़कर सबक सिखाते हैं। दीदी ने मना किया लेकिन मेरे ऊपर तो जैसे चंडी सवार थी। हम दोनों उन लड़कों को काफी देर तक तलाशते रहे और घूम-फिर कर उसी जगह आ गए। वहां पर पान की दुकान पर खड़े एक लड़के की शर्ट का कालर देखकर दीदी ने कहा कि यही वह लड़का है। बस फिर क्या था, मैंने दौड़कर उस लड़के को दबोच लिया और दीदी से कहा, "मार दीदी, छोड़ना नहीं।"
भीड़ लग गई, काफी बवाल हुआ लेकिन मैंने छोड़ा नहीं। अंत में उस लड़के के घर वाले आए और माफी मांगी तब जाकर मैंने उसे छोड़ा। उसके बाद फिर किसी ने मेरी तरफ या मेरी दीदी की तरफ नजर उठाकर भी नहीं देखा। लक्ष्मी दीदी की शादी हो गई लेकिन मेरे प्रति उनका इतना प्यार रहता है कि वह ससुराल से ज्यादा मायके में ही रहती हैं और मेरी और मेरी मां-भाई की मदद करने के लिए हमेशा जान दिए रहती हैं। मेरे जीजा ओम प्रकाश जी भी हमारे लिए देवता की तरह हैं। बजरंगबली ने उन्हें जैसे हमारे लिए ही बनाया था। उन्हीं की छत्रछाया ने मुझे मेरा सपना पूरा करने में मदद की है।
मैंने इंटर किया, एलएलबी किया लेकिन खेलना मेरे लिए जुनून के समान ही था। मैंने आस-पास के जिलों में वॉलीबॉल-फुटबॉल खेला, कई पुरस्कार जीते, लेकिन मेरा जुनून बढ़ता ही गया। मैंने राष्ट्रीय स्तर पर भी खेलों में भाग लिया लेकिन मुझे मेरा हक नहीं मिला। मेरे पास हाथ-पैर थे, जुनून था लेकिन कोई सीढ़ी नहीं थी, कोई छत नहीं थी जो मुझे आगे बढ़ने देती, मुझे महफूज रखती।
मैंने सोचा कि कहीं पर नौकरी कर लूं ताकि उसी के साथ आगे बढ़ती जाऊं। कई जगह फार्म डाले। सीआईएसएफ में भी कोशिश की और एक दिन नोएडा में सीआईएसएफ के दफ्तर में जाने के लिए घर से निकल पड़ी, अकेली।
वह दिन था 11 अप्रैल 2011 का। मुझे नहीं मालूम था कि मेरी दुनिया बदलने जा रही है। पद्मावती एक्सप्रेस ट्रेन के चालू डिब्बे में खिड़की के किनारे एक सीट पर बैठी रात के अंधेरे में जुगनू जैसी किसी रोशनी की तलाश कर रही थी कि तभी कुछ 'लोफर टाइप' के लड़के आए और उन्होंने मेरे गले में पड़ी चेन पर झपट्टा मारा। मुझे हंसी आ गई। इन लड़कों की क्या औकात कि मुझसे मेरी चीज छीन लें? मैंने लड़के का हाथ पकड़कर मरोड़ दिया। लेकिन तभी दूसरे लड़के ने मेरे गले में हाथ डाला तो मेरे गरदन हटा लेने पर उसके हाथ में चेन की जगह मेरी शर्ट का कालर आ गया। उसने कालर पकड़कर घसीटा और दो-तीन लड़कों ने मुझे पकड़कर दरवाजे के पास खींच लिया।
मेरे लिए उनसे निबटना मुश्किल काम नहीं था लेकिन तभी लड़कों ने मेरे ऊपर ऐसी लात मारी कि मैं चलती ट्रेन से बाहर गिट्टियों के बीच लोटती सी नजर आई..। पता नहीं क्या हुआ, मुझे कुछ पता नहीं कि मेरे पैर के ऊपर से ट्रेन के कितने पहिए गुजरते चले गए। वे पहिए पद्मावत एक्सप्रेस के थे या दूसरी पटरी के ऊपर से गुजरने वाली ट्रेनों के? उस समय रात के डेढ़ बजे थे और ट्रेन बरेली के पास थी। लेकिन कुछ सोचने-समझने से पहले दर्द के आवेग ने मुझे बेसुध कर दिया।
बीच-बीच में मेरी तंद्रा टूटती तो देखती कि मैं ट्रेन की पटरियों के किनारे पड़ी हूं, मेरी एक टांग कट गई थी बस कुछ मांस भर ने उसे मेरे शरीर से जोड़े रखा था। बगल की पटरी से रह-रहकर ट्रेनें गुजर रही थीं। पटरी और मेरे बीच मात्र कुछ इंचों का ही फासला था। मैं अपने को पटरी से दूर करना चाहती थी लेकिन मेरे पास इतना दम कहां था, उस पर भीषण दर्द। मैं उस बीहड़ रात में उसी तरह पड़ी रही। जब मुझे होश आता तो बजरंगबली को याद करके यही कहती कि जय बजरंगबली..यह क्या हो रहा है मेरी जिंदगी के साथ..और अब क्या शेष रह गया है होने को? आंखों के सामने कभी मां की तस्वीर आती तो कभी भाई तो कभी लक्ष्मी दीदी की तो कभी जीजा की..।
पौ फटने पर जब लोग शौच के लिए रेलवे की पटरियों की तरफ आए तो मुझे पड़ा पाया। गांव वाले आए। मेरा नाम-पता पूछा। शायद आधी बेहोशी में मैंने घर का टेलीफोन नंबर बता दिया था। जीजा ने उनसे कहा कि इतनी मदद और कर दीजिए कि अरुणिमा को किसी अस्पताल तक पंहुचा दीजिए।
सुबह के सात बजे के करीब मुझे अस्पताल पंहुचाया गया। मेरी बाईं टांग काट दी गई। मीडिया द्वारा शोर मचाने पर मुझे लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। वहां से फिर मुझे एम्स ले जाया गया। डाक्टरों ने मुझे बचा लिया। सीआईएसफ ने नौकरी देने की घोषणा की। तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी ने भी नौकरी देने की घोषणा की। तत्कालीन खेल मंत्री अजय माकन ने काफी राहतें दीं।
समाज को ये बातें हजम नहीं हुईं। इलाज के साथ ही विवाद भी शुरू हो गया कि मैं राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी नहीं हूं। मैंने इंटर भी पास नहीं किया है। मैं किसी के साथ भाग रही थी। मेरी शादी हो चुकी है। मैंने किसी प्रतियोगिता में भाग नहीं लिया। मैं झूठी हूं, फरेबी हूं। यूपी के एडीजी रेल एके जैन ने तो बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस करके मुझे झूठा साबित किया और कहा कि मैंने ट्रेन से कूदकर आत्महत्या की कोशिश की थी या फिर मैं उस बीहड़ सुनसान इलाके में अकेले आधी रात को रेलवे लाइन पार कर रही थी, जब यह दुर्घटना घटी।
मैंने गुस्से में एके जैन को फोन लगाकर खूब सुनाया कि क्या आपका कोई सिपाही ट्रेन में मौजूद था जो बताता कि उस दिन ट्रेन में मुझे लूटने की कोशिश नहीं की गई थी? क्या रातभर पटरियों पर पड़े होने के बावजूद जीआरपी ने मेरी कोई मदद की? मन करता था कि मैं एके जैन के पास जाकर उनका मुंह नोच लूं।
एम्स में मेरी मां, मेरी बहन और जीजा ने मुझे समझाया कि और लड़कियों के साथ क्या-क्या नहीं होता, लोग तेजाब तक डाल देते हैं, तुम्हारा तो बस एक पैर ही गया है, अब आगे की योजना बनाओ। बहन की प्रेरणा ने मेरे मन में यह बात ला दी कि कुछ ऐसा करूं जिसे दुनिया देखे। क्यों न एवरेस्ट पर चढ़ जाऊं? बिना पैर के एवरेस्ट पर चढ़ना ही मुझे सबसे बेहतर विचार लगा। असली चुनौती यही है।
आसान काम तो हर कोई कर लेता है। मेरी मुश्किल को आसान कर दिया अमेरिका निवासी डॉ राकेश श्रीवास्तव और उनके भाई शैलेश श्रीवास्तव ने जो इनोवेटिव नाम से एक संस्था चलाते हैं। उन्होंने मेरे लिए एक कृत्रिम पैर बनवाया जिसको पहनकर मैं चलती हूं।
मुझे अजय माकन ने इतनी सहूलियतें दीं और वह भी तब, जब उत्तर प्रदेश की सरकार मुझे मुल्जिम बताने के लिए उतारू थी और मीडिया मेरे पीछे पड़ गया था। खिलाड़ियों का संगठन 'साई' भी मुझे खिलाड़ी नहीं मानता था। मैं चीख-चीख कर कहा करती थी कि "मैं जिंदा हूं, मुझसे आकर पूछो, मैं झूठी नहीं हूं।"
लेकिन मुसीबतों और परीक्षाओं का अंत अभी नहीं हुआ था। चार महीने एम्स में गुजारने के बाद जब मैं वापस लौटी तो मेरी बदनामी मेरा पीछा कर रही थी। मुझे विकलांगता का प्रमाण पत्र मिल गया था और रेल से पास भी। लेकिन मुझे ट्रेन के सेंकड क्लास की आरक्षित बोगी में चलने के लिए टिकट नहीं मिलता था। मुझे दौड़ाया जाता, शक किया जाता। मेरे लिए विकलांग बोगी में चलना भी अपमान के कड़वे घूंट पीने के समान ही था।
आरपीएफ के सिपाही मेरी टांग खुलवाकर देखते और फिर पास मांगकर उसकी जांच करते। एक बार तो हरिद्वार में जब मुझे टिकट नहीं मिला तो स्टेशन मास्टर ने बहुत मदद की। उन्होंने काउंटर क्लर्क से टिकट देने को कहा लेकिन उसने कहा कि उसे मेरे पास पर उसे शक है। उसमें हस्ताक्षर ठीक नहीं हैं। अंत में स्टेशन मास्टर ने अपने दम पर मुझे जबरदस्ती ट्रेन में बैठाया।
ममता बनर्जी ने नौकरी देने की घोषणा की थी। जब मैं कृत्रिम टांगों से चलकर रेल मंत्रालय पंहुची तो उनके पीए ने मिलाने से मना कर दिया। तीन बार निराश होकर मैं लौट आई। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विवेक सहाय से मिलने में मैं किसी तरह कामयाब हो गई तो उनका जवाब सुनकर हैरत हुई। उन्होंने सारे कागजात देखे और फिर कहा कि पहले जीआरपी से बढ़िया सी रिपोर्ट लगवाकर लाओ। ये थी रेलवे के मंत्री और अध्यक्ष की मानवीयता।
मैंने हिम्मत नहीं हारी। कहा कि इन सबको अपनी ताकत दिखाऊंगी, ये सब मुझे पहचानेंगे और खुद चलकर मेरे पास आएंगे। मुझे बछेंद्री पाल ने काफी प्रोत्साहित किया। उन्हीं के प्रशिक्षण की बदौलत मैं आज आसमान के इतने करीब हूं। मैं माउंट एवरेस्ट की चोटी पर हूं जहां पर हर कोई नहीं पंहुच पाता है। ऐसा लगता है कि बस हाथ उठाऊं और छू लूं।टिप्पणियां
मुझे बुखार आ गया। और नीचे भी लौटना था उस दुनिया में जो नहीं चाहती थी कि मैं यहां तक पहुंचूं। लेकिन कुछ लोग थे जिनका मेरे पर विश्वास था और उन्हीं के भरोसे मैं यहां तक पहुंची हूं। मेरी इच्छा अपने जैसे विकलांग लोगों की मदद करने की है, जिन्हें समाज ठुकराता है। मैं चाहती हूं कि उनके लिए कोई खेल अकादमी बनाऊं, उन्नाव में साढ़े सात बीघा जमीन मिल गई है। साढ़े तीन बीघा और खरीदनी है।
इस अकादमी से जब मेरी जैसी ऊंची चाहत रखने वाले निकलेंगे तब मुझे लगेगा कि मेरे साथ जो कुछ हुआ वह सब ठीक था क्योंकि अगर ये सब न होता तो आने वाली पीढ़ी को हौसला कौन दे पाता..! अगले महीने की 10 तारीख को मैं 27 वर्ष की हो जाऊंगी। मुझमें अभी बहुत सी ऊंचाइयों को छूने का हौसला बाकी है। बस, मुझे कोई चुनौती दे दीजिए..!"
मैं उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर जिले के क्षेत्राना (शाजादपुर) मोहल्ले की हूं। सच तो यह है कि हम लोग मूलत: बिहार के हैं। पिता फौज में थे और हम लोग सुल्तानपुर आ गए थे। लेकिन जब मैं चार साल की थी, तभी मेरे पिताजी का स्वर्गवास हो गया। मेरा एक छोटा भाई है और बड़ी बहन लक्ष्मी। आप समझ सकते हैं कि बिना पिता के परिवार की क्या हालत होती है।
मेरी मां अंबेडकरनगर आ गईं और स्वास्थ्य विभाग में उन्हें नौकरी मिल गई। किसी तरह जीवन की गाड़ी आगे बढ़ने लगी। मुझे भी पढ़ाई के लिए स्कूल भेजा गया लेकिन मेरा खेलने में ज्यादा मन लगता था। हमारे समाज में लड़कियों को घर के काम में निपुण करने की परंपरा है, खेलने वाली लड़कियां कम ही दिखाई पड़ती हैं। लोगों ने मना भी किया लेकिन मैं कहां मानने वाली थी। मेरी मां भी मुझे नहीं टोकती थी और मेरी मां जैसी दीदी लक्ष्मी तो जैसे मेरे पीछे दीवार बनकर खड़ी रहती थीं।
मैंने फुटबॉल, वॉलीबॉल और हॉकी खेली। हॉकी खेलने के लिए स्टिक लेकर जब निकलती थी तो मोहल्ले के लड़के कहां बाज आने वाले। वे मेरी खिल्ली उड़ाते थे। कहते थे, देखो जा रही है झांसी की रानी बनकर खेलने, बड़ी आई स्टिक लेकर चलने वाली। मैं वैसे तो लड़कों की परवाह भी नहीं करती थी, लेकिन जब बात अखरने वाली लगती थी तो मैं घूरकर उनकी तरफ देखती थी, तो वे उड़न-छू हो जाते थे।
मुझे याद है कि एक बार जब मैं 14 बरस की रही होऊंगी और साइकिल से हम दोनों बहनें कहीं जा रहे थे तो एक जगह पर लक्ष्मी दीदी रुककर किसी से बात करने लगीं और मैं थोड़ा आगे निकलकर वहां पर उनका इंतजार करने लगी। उस दौरान कुछ लड़के साइकिल से उधर से गुजरे तो मुझसे रास्ता छोड़ने को कहा। मैंने मना कर दिया और कहा कि आगे जगह है, उधर से निकल जाओ।
वे अपनी बात पर अड़े रहे और मैं अपनी बात पर। इस बीच जब लक्ष्मी दीदी आ गईं और हम चलने लगे तो किसी लड़के ने झापड़ मारा जो मेरी दीदी के गाल पर लग गया। भीड़ का लाभ उठाकर लड़के भाग गए। दीदी के गाल पर चांटा देखकर मुझे बहुत क्रोध आया। मैंने दीदी से कहा कि चलो उस लड़के को ढूंढ़कर सबक सिखाते हैं। दीदी ने मना किया लेकिन मेरे ऊपर तो जैसे चंडी सवार थी। हम दोनों उन लड़कों को काफी देर तक तलाशते रहे और घूम-फिर कर उसी जगह आ गए। वहां पर पान की दुकान पर खड़े एक लड़के की शर्ट का कालर देखकर दीदी ने कहा कि यही वह लड़का है। बस फिर क्या था, मैंने दौड़कर उस लड़के को दबोच लिया और दीदी से कहा, "मार दीदी, छोड़ना नहीं।"
भीड़ लग गई, काफी बवाल हुआ लेकिन मैंने छोड़ा नहीं। अंत में उस लड़के के घर वाले आए और माफी मांगी तब जाकर मैंने उसे छोड़ा। उसके बाद फिर किसी ने मेरी तरफ या मेरी दीदी की तरफ नजर उठाकर भी नहीं देखा। लक्ष्मी दीदी की शादी हो गई लेकिन मेरे प्रति उनका इतना प्यार रहता है कि वह ससुराल से ज्यादा मायके में ही रहती हैं और मेरी और मेरी मां-भाई की मदद करने के लिए हमेशा जान दिए रहती हैं। मेरे जीजा ओम प्रकाश जी भी हमारे लिए देवता की तरह हैं। बजरंगबली ने उन्हें जैसे हमारे लिए ही बनाया था। उन्हीं की छत्रछाया ने मुझे मेरा सपना पूरा करने में मदद की है।
मैंने इंटर किया, एलएलबी किया लेकिन खेलना मेरे लिए जुनून के समान ही था। मैंने आस-पास के जिलों में वॉलीबॉल-फुटबॉल खेला, कई पुरस्कार जीते, लेकिन मेरा जुनून बढ़ता ही गया। मैंने राष्ट्रीय स्तर पर भी खेलों में भाग लिया लेकिन मुझे मेरा हक नहीं मिला। मेरे पास हाथ-पैर थे, जुनून था लेकिन कोई सीढ़ी नहीं थी, कोई छत नहीं थी जो मुझे आगे बढ़ने देती, मुझे महफूज रखती।
मैंने सोचा कि कहीं पर नौकरी कर लूं ताकि उसी के साथ आगे बढ़ती जाऊं। कई जगह फार्म डाले। सीआईएसएफ में भी कोशिश की और एक दिन नोएडा में सीआईएसएफ के दफ्तर में जाने के लिए घर से निकल पड़ी, अकेली।
वह दिन था 11 अप्रैल 2011 का। मुझे नहीं मालूम था कि मेरी दुनिया बदलने जा रही है। पद्मावती एक्सप्रेस ट्रेन के चालू डिब्बे में खिड़की के किनारे एक सीट पर बैठी रात के अंधेरे में जुगनू जैसी किसी रोशनी की तलाश कर रही थी कि तभी कुछ 'लोफर टाइप' के लड़के आए और उन्होंने मेरे गले में पड़ी चेन पर झपट्टा मारा। मुझे हंसी आ गई। इन लड़कों की क्या औकात कि मुझसे मेरी चीज छीन लें? मैंने लड़के का हाथ पकड़कर मरोड़ दिया। लेकिन तभी दूसरे लड़के ने मेरे गले में हाथ डाला तो मेरे गरदन हटा लेने पर उसके हाथ में चेन की जगह मेरी शर्ट का कालर आ गया। उसने कालर पकड़कर घसीटा और दो-तीन लड़कों ने मुझे पकड़कर दरवाजे के पास खींच लिया।
मेरे लिए उनसे निबटना मुश्किल काम नहीं था लेकिन तभी लड़कों ने मेरे ऊपर ऐसी लात मारी कि मैं चलती ट्रेन से बाहर गिट्टियों के बीच लोटती सी नजर आई..। पता नहीं क्या हुआ, मुझे कुछ पता नहीं कि मेरे पैर के ऊपर से ट्रेन के कितने पहिए गुजरते चले गए। वे पहिए पद्मावत एक्सप्रेस के थे या दूसरी पटरी के ऊपर से गुजरने वाली ट्रेनों के? उस समय रात के डेढ़ बजे थे और ट्रेन बरेली के पास थी। लेकिन कुछ सोचने-समझने से पहले दर्द के आवेग ने मुझे बेसुध कर दिया।
बीच-बीच में मेरी तंद्रा टूटती तो देखती कि मैं ट्रेन की पटरियों के किनारे पड़ी हूं, मेरी एक टांग कट गई थी बस कुछ मांस भर ने उसे मेरे शरीर से जोड़े रखा था। बगल की पटरी से रह-रहकर ट्रेनें गुजर रही थीं। पटरी और मेरे बीच मात्र कुछ इंचों का ही फासला था। मैं अपने को पटरी से दूर करना चाहती थी लेकिन मेरे पास इतना दम कहां था, उस पर भीषण दर्द। मैं उस बीहड़ रात में उसी तरह पड़ी रही। जब मुझे होश आता तो बजरंगबली को याद करके यही कहती कि जय बजरंगबली..यह क्या हो रहा है मेरी जिंदगी के साथ..और अब क्या शेष रह गया है होने को? आंखों के सामने कभी मां की तस्वीर आती तो कभी भाई तो कभी लक्ष्मी दीदी की तो कभी जीजा की..।
पौ फटने पर जब लोग शौच के लिए रेलवे की पटरियों की तरफ आए तो मुझे पड़ा पाया। गांव वाले आए। मेरा नाम-पता पूछा। शायद आधी बेहोशी में मैंने घर का टेलीफोन नंबर बता दिया था। जीजा ने उनसे कहा कि इतनी मदद और कर दीजिए कि अरुणिमा को किसी अस्पताल तक पंहुचा दीजिए।
सुबह के सात बजे के करीब मुझे अस्पताल पंहुचाया गया। मेरी बाईं टांग काट दी गई। मीडिया द्वारा शोर मचाने पर मुझे लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। वहां से फिर मुझे एम्स ले जाया गया। डाक्टरों ने मुझे बचा लिया। सीआईएसफ ने नौकरी देने की घोषणा की। तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी ने भी नौकरी देने की घोषणा की। तत्कालीन खेल मंत्री अजय माकन ने काफी राहतें दीं।
समाज को ये बातें हजम नहीं हुईं। इलाज के साथ ही विवाद भी शुरू हो गया कि मैं राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी नहीं हूं। मैंने इंटर भी पास नहीं किया है। मैं किसी के साथ भाग रही थी। मेरी शादी हो चुकी है। मैंने किसी प्रतियोगिता में भाग नहीं लिया। मैं झूठी हूं, फरेबी हूं। यूपी के एडीजी रेल एके जैन ने तो बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस करके मुझे झूठा साबित किया और कहा कि मैंने ट्रेन से कूदकर आत्महत्या की कोशिश की थी या फिर मैं उस बीहड़ सुनसान इलाके में अकेले आधी रात को रेलवे लाइन पार कर रही थी, जब यह दुर्घटना घटी।
मैंने गुस्से में एके जैन को फोन लगाकर खूब सुनाया कि क्या आपका कोई सिपाही ट्रेन में मौजूद था जो बताता कि उस दिन ट्रेन में मुझे लूटने की कोशिश नहीं की गई थी? क्या रातभर पटरियों पर पड़े होने के बावजूद जीआरपी ने मेरी कोई मदद की? मन करता था कि मैं एके जैन के पास जाकर उनका मुंह नोच लूं।
एम्स में मेरी मां, मेरी बहन और जीजा ने मुझे समझाया कि और लड़कियों के साथ क्या-क्या नहीं होता, लोग तेजाब तक डाल देते हैं, तुम्हारा तो बस एक पैर ही गया है, अब आगे की योजना बनाओ। बहन की प्रेरणा ने मेरे मन में यह बात ला दी कि कुछ ऐसा करूं जिसे दुनिया देखे। क्यों न एवरेस्ट पर चढ़ जाऊं? बिना पैर के एवरेस्ट पर चढ़ना ही मुझे सबसे बेहतर विचार लगा। असली चुनौती यही है।
आसान काम तो हर कोई कर लेता है। मेरी मुश्किल को आसान कर दिया अमेरिका निवासी डॉ राकेश श्रीवास्तव और उनके भाई शैलेश श्रीवास्तव ने जो इनोवेटिव नाम से एक संस्था चलाते हैं। उन्होंने मेरे लिए एक कृत्रिम पैर बनवाया जिसको पहनकर मैं चलती हूं।
मुझे अजय माकन ने इतनी सहूलियतें दीं और वह भी तब, जब उत्तर प्रदेश की सरकार मुझे मुल्जिम बताने के लिए उतारू थी और मीडिया मेरे पीछे पड़ गया था। खिलाड़ियों का संगठन 'साई' भी मुझे खिलाड़ी नहीं मानता था। मैं चीख-चीख कर कहा करती थी कि "मैं जिंदा हूं, मुझसे आकर पूछो, मैं झूठी नहीं हूं।"
लेकिन मुसीबतों और परीक्षाओं का अंत अभी नहीं हुआ था। चार महीने एम्स में गुजारने के बाद जब मैं वापस लौटी तो मेरी बदनामी मेरा पीछा कर रही थी। मुझे विकलांगता का प्रमाण पत्र मिल गया था और रेल से पास भी। लेकिन मुझे ट्रेन के सेंकड क्लास की आरक्षित बोगी में चलने के लिए टिकट नहीं मिलता था। मुझे दौड़ाया जाता, शक किया जाता। मेरे लिए विकलांग बोगी में चलना भी अपमान के कड़वे घूंट पीने के समान ही था।
आरपीएफ के सिपाही मेरी टांग खुलवाकर देखते और फिर पास मांगकर उसकी जांच करते। एक बार तो हरिद्वार में जब मुझे टिकट नहीं मिला तो स्टेशन मास्टर ने बहुत मदद की। उन्होंने काउंटर क्लर्क से टिकट देने को कहा लेकिन उसने कहा कि उसे मेरे पास पर उसे शक है। उसमें हस्ताक्षर ठीक नहीं हैं। अंत में स्टेशन मास्टर ने अपने दम पर मुझे जबरदस्ती ट्रेन में बैठाया।
ममता बनर्जी ने नौकरी देने की घोषणा की थी। जब मैं कृत्रिम टांगों से चलकर रेल मंत्रालय पंहुची तो उनके पीए ने मिलाने से मना कर दिया। तीन बार निराश होकर मैं लौट आई। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विवेक सहाय से मिलने में मैं किसी तरह कामयाब हो गई तो उनका जवाब सुनकर हैरत हुई। उन्होंने सारे कागजात देखे और फिर कहा कि पहले जीआरपी से बढ़िया सी रिपोर्ट लगवाकर लाओ। ये थी रेलवे के मंत्री और अध्यक्ष की मानवीयता।
मैंने हिम्मत नहीं हारी। कहा कि इन सबको अपनी ताकत दिखाऊंगी, ये सब मुझे पहचानेंगे और खुद चलकर मेरे पास आएंगे। मुझे बछेंद्री पाल ने काफी प्रोत्साहित किया। उन्हीं के प्रशिक्षण की बदौलत मैं आज आसमान के इतने करीब हूं। मैं माउंट एवरेस्ट की चोटी पर हूं जहां पर हर कोई नहीं पंहुच पाता है। ऐसा लगता है कि बस हाथ उठाऊं और छू लूं।टिप्पणियां
मुझे बुखार आ गया। और नीचे भी लौटना था उस दुनिया में जो नहीं चाहती थी कि मैं यहां तक पहुंचूं। लेकिन कुछ लोग थे जिनका मेरे पर विश्वास था और उन्हीं के भरोसे मैं यहां तक पहुंची हूं। मेरी इच्छा अपने जैसे विकलांग लोगों की मदद करने की है, जिन्हें समाज ठुकराता है। मैं चाहती हूं कि उनके लिए कोई खेल अकादमी बनाऊं, उन्नाव में साढ़े सात बीघा जमीन मिल गई है। साढ़े तीन बीघा और खरीदनी है।
इस अकादमी से जब मेरी जैसी ऊंची चाहत रखने वाले निकलेंगे तब मुझे लगेगा कि मेरे साथ जो कुछ हुआ वह सब ठीक था क्योंकि अगर ये सब न होता तो आने वाली पीढ़ी को हौसला कौन दे पाता..! अगले महीने की 10 तारीख को मैं 27 वर्ष की हो जाऊंगी। मुझमें अभी बहुत सी ऊंचाइयों को छूने का हौसला बाकी है। बस, मुझे कोई चुनौती दे दीजिए..!"
मेरी मां अंबेडकरनगर आ गईं और स्वास्थ्य विभाग में उन्हें नौकरी मिल गई। किसी तरह जीवन की गाड़ी आगे बढ़ने लगी। मुझे भी पढ़ाई के लिए स्कूल भेजा गया लेकिन मेरा खेलने में ज्यादा मन लगता था। हमारे समाज में लड़कियों को घर के काम में निपुण करने की परंपरा है, खेलने वाली लड़कियां कम ही दिखाई पड़ती हैं। लोगों ने मना भी किया लेकिन मैं कहां मानने वाली थी। मेरी मां भी मुझे नहीं टोकती थी और मेरी मां जैसी दीदी लक्ष्मी तो जैसे मेरे पीछे दीवार बनकर खड़ी रहती थीं।
मैंने फुटबॉल, वॉलीबॉल और हॉकी खेली। हॉकी खेलने के लिए स्टिक लेकर जब निकलती थी तो मोहल्ले के लड़के कहां बाज आने वाले। वे मेरी खिल्ली उड़ाते थे। कहते थे, देखो जा रही है झांसी की रानी बनकर खेलने, बड़ी आई स्टिक लेकर चलने वाली। मैं वैसे तो लड़कों की परवाह भी नहीं करती थी, लेकिन जब बात अखरने वाली लगती थी तो मैं घूरकर उनकी तरफ देखती थी, तो वे उड़न-छू हो जाते थे।
मुझे याद है कि एक बार जब मैं 14 बरस की रही होऊंगी और साइकिल से हम दोनों बहनें कहीं जा रहे थे तो एक जगह पर लक्ष्मी दीदी रुककर किसी से बात करने लगीं और मैं थोड़ा आगे निकलकर वहां पर उनका इंतजार करने लगी। उस दौरान कुछ लड़के साइकिल से उधर से गुजरे तो मुझसे रास्ता छोड़ने को कहा। मैंने मना कर दिया और कहा कि आगे जगह है, उधर से निकल जाओ।
वे अपनी बात पर अड़े रहे और मैं अपनी बात पर। इस बीच जब लक्ष्मी दीदी आ गईं और हम चलने लगे तो किसी लड़के ने झापड़ मारा जो मेरी दीदी के गाल पर लग गया। भीड़ का लाभ उठाकर लड़के भाग गए। दीदी के गाल पर चांटा देखकर मुझे बहुत क्रोध आया। मैंने दीदी से कहा कि चलो उस लड़के को ढूंढ़कर सबक सिखाते हैं। दीदी ने मना किया लेकिन मेरे ऊपर तो जैसे चंडी सवार थी। हम दोनों उन लड़कों को काफी देर तक तलाशते रहे और घूम-फिर कर उसी जगह आ गए। वहां पर पान की दुकान पर खड़े एक लड़के की शर्ट का कालर देखकर दीदी ने कहा कि यही वह लड़का है। बस फिर क्या था, मैंने दौड़कर उस लड़के को दबोच लिया और दीदी से कहा, "मार दीदी, छोड़ना नहीं।"
भीड़ लग गई, काफी बवाल हुआ लेकिन मैंने छोड़ा नहीं। अंत में उस लड़के के घर वाले आए और माफी मांगी तब जाकर मैंने उसे छोड़ा। उसके बाद फिर किसी ने मेरी तरफ या मेरी दीदी की तरफ नजर उठाकर भी नहीं देखा। लक्ष्मी दीदी की शादी हो गई लेकिन मेरे प्रति उनका इतना प्यार रहता है कि वह ससुराल से ज्यादा मायके में ही रहती हैं और मेरी और मेरी मां-भाई की मदद करने के लिए हमेशा जान दिए रहती हैं। मेरे जीजा ओम प्रकाश जी भी हमारे लिए देवता की तरह हैं। बजरंगबली ने उन्हें जैसे हमारे लिए ही बनाया था। उन्हीं की छत्रछाया ने मुझे मेरा सपना पूरा करने में मदद की है।
मैंने इंटर किया, एलएलबी किया लेकिन खेलना मेरे लिए जुनून के समान ही था। मैंने आस-पास के जिलों में वॉलीबॉल-फुटबॉल खेला, कई पुरस्कार जीते, लेकिन मेरा जुनून बढ़ता ही गया। मैंने राष्ट्रीय स्तर पर भी खेलों में भाग लिया लेकिन मुझे मेरा हक नहीं मिला। मेरे पास हाथ-पैर थे, जुनून था लेकिन कोई सीढ़ी नहीं थी, कोई छत नहीं थी जो मुझे आगे बढ़ने देती, मुझे महफूज रखती।
मैंने सोचा कि कहीं पर नौकरी कर लूं ताकि उसी के साथ आगे बढ़ती जाऊं। कई जगह फार्म डाले। सीआईएसएफ में भी कोशिश की और एक दिन नोएडा में सीआईएसएफ के दफ्तर में जाने के लिए घर से निकल पड़ी, अकेली।
वह दिन था 11 अप्रैल 2011 का। मुझे नहीं मालूम था कि मेरी दुनिया बदलने जा रही है। पद्मावती एक्सप्रेस ट्रेन के चालू डिब्बे में खिड़की के किनारे एक सीट पर बैठी रात के अंधेरे में जुगनू जैसी किसी रोशनी की तलाश कर रही थी कि तभी कुछ 'लोफर टाइप' के लड़के आए और उन्होंने मेरे गले में पड़ी चेन पर झपट्टा मारा। मुझे हंसी आ गई। इन लड़कों की क्या औकात कि मुझसे मेरी चीज छीन लें? मैंने लड़के का हाथ पकड़कर मरोड़ दिया। लेकिन तभी दूसरे लड़के ने मेरे गले में हाथ डाला तो मेरे गरदन हटा लेने पर उसके हाथ में चेन की जगह मेरी शर्ट का कालर आ गया। उसने कालर पकड़कर घसीटा और दो-तीन लड़कों ने मुझे पकड़कर दरवाजे के पास खींच लिया।
मेरे लिए उनसे निबटना मुश्किल काम नहीं था लेकिन तभी लड़कों ने मेरे ऊपर ऐसी लात मारी कि मैं चलती ट्रेन से बाहर गिट्टियों के बीच लोटती सी नजर आई..। पता नहीं क्या हुआ, मुझे कुछ पता नहीं कि मेरे पैर के ऊपर से ट्रेन के कितने पहिए गुजरते चले गए। वे पहिए पद्मावत एक्सप्रेस के थे या दूसरी पटरी के ऊपर से गुजरने वाली ट्रेनों के? उस समय रात के डेढ़ बजे थे और ट्रेन बरेली के पास थी। लेकिन कुछ सोचने-समझने से पहले दर्द के आवेग ने मुझे बेसुध कर दिया।
बीच-बीच में मेरी तंद्रा टूटती तो देखती कि मैं ट्रेन की पटरियों के किनारे पड़ी हूं, मेरी एक टांग कट गई थी बस कुछ मांस भर ने उसे मेरे शरीर से जोड़े रखा था। बगल की पटरी से रह-रहकर ट्रेनें गुजर रही थीं। पटरी और मेरे बीच मात्र कुछ इंचों का ही फासला था। मैं अपने को पटरी से दूर करना चाहती थी लेकिन मेरे पास इतना दम कहां था, उस पर भीषण दर्द। मैं उस बीहड़ रात में उसी तरह पड़ी रही। जब मुझे होश आता तो बजरंगबली को याद करके यही कहती कि जय बजरंगबली..यह क्या हो रहा है मेरी जिंदगी के साथ..और अब क्या शेष रह गया है होने को? आंखों के सामने कभी मां की तस्वीर आती तो कभी भाई तो कभी लक्ष्मी दीदी की तो कभी जीजा की..।
पौ फटने पर जब लोग शौच के लिए रेलवे की पटरियों की तरफ आए तो मुझे पड़ा पाया। गांव वाले आए। मेरा नाम-पता पूछा। शायद आधी बेहोशी में मैंने घर का टेलीफोन नंबर बता दिया था। जीजा ने उनसे कहा कि इतनी मदद और कर दीजिए कि अरुणिमा को किसी अस्पताल तक पंहुचा दीजिए।
सुबह के सात बजे के करीब मुझे अस्पताल पंहुचाया गया। मेरी बाईं टांग काट दी गई। मीडिया द्वारा शोर मचाने पर मुझे लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। वहां से फिर मुझे एम्स ले जाया गया। डाक्टरों ने मुझे बचा लिया। सीआईएसफ ने नौकरी देने की घोषणा की। तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी ने भी नौकरी देने की घोषणा की। तत्कालीन खेल मंत्री अजय माकन ने काफी राहतें दीं।
समाज को ये बातें हजम नहीं हुईं। इलाज के साथ ही विवाद भी शुरू हो गया कि मैं राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी नहीं हूं। मैंने इंटर भी पास नहीं किया है। मैं किसी के साथ भाग रही थी। मेरी शादी हो चुकी है। मैंने किसी प्रतियोगिता में भाग नहीं लिया। मैं झूठी हूं, फरेबी हूं। यूपी के एडीजी रेल एके जैन ने तो बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस करके मुझे झूठा साबित किया और कहा कि मैंने ट्रेन से कूदकर आत्महत्या की कोशिश की थी या फिर मैं उस बीहड़ सुनसान इलाके में अकेले आधी रात को रेलवे लाइन पार कर रही थी, जब यह दुर्घटना घटी।
मैंने गुस्से में एके जैन को फोन लगाकर खूब सुनाया कि क्या आपका कोई सिपाही ट्रेन में मौजूद था जो बताता कि उस दिन ट्रेन में मुझे लूटने की कोशिश नहीं की गई थी? क्या रातभर पटरियों पर पड़े होने के बावजूद जीआरपी ने मेरी कोई मदद की? मन करता था कि मैं एके जैन के पास जाकर उनका मुंह नोच लूं।
एम्स में मेरी मां, मेरी बहन और जीजा ने मुझे समझाया कि और लड़कियों के साथ क्या-क्या नहीं होता, लोग तेजाब तक डाल देते हैं, तुम्हारा तो बस एक पैर ही गया है, अब आगे की योजना बनाओ। बहन की प्रेरणा ने मेरे मन में यह बात ला दी कि कुछ ऐसा करूं जिसे दुनिया देखे। क्यों न एवरेस्ट पर चढ़ जाऊं? बिना पैर के एवरेस्ट पर चढ़ना ही मुझे सबसे बेहतर विचार लगा। असली चुनौती यही है।
आसान काम तो हर कोई कर लेता है। मेरी मुश्किल को आसान कर दिया अमेरिका निवासी डॉ राकेश श्रीवास्तव और उनके भाई शैलेश श्रीवास्तव ने जो इनोवेटिव नाम से एक संस्था चलाते हैं। उन्होंने मेरे लिए एक कृत्रिम पैर बनवाया जिसको पहनकर मैं चलती हूं।
मुझे अजय माकन ने इतनी सहूलियतें दीं और वह भी तब, जब उत्तर प्रदेश की सरकार मुझे मुल्जिम बताने के लिए उतारू थी और मीडिया मेरे पीछे पड़ गया था। खिलाड़ियों का संगठन 'साई' भी मुझे खिलाड़ी नहीं मानता था। मैं चीख-चीख कर कहा करती थी कि "मैं जिंदा हूं, मुझसे आकर पूछो, मैं झूठी नहीं हूं।"
लेकिन मुसीबतों और परीक्षाओं का अंत अभी नहीं हुआ था। चार महीने एम्स में गुजारने के बाद जब मैं वापस लौटी तो मेरी बदनामी मेरा पीछा कर रही थी। मुझे विकलांगता का प्रमाण पत्र मिल गया था और रेल से पास भी। लेकिन मुझे ट्रेन के सेंकड क्लास की आरक्षित बोगी में चलने के लिए टिकट नहीं मिलता था। मुझे दौड़ाया जाता, शक किया जाता। मेरे लिए विकलांग बोगी में चलना भी अपमान के कड़वे घूंट पीने के समान ही था।
आरपीएफ के सिपाही मेरी टांग खुलवाकर देखते और फिर पास मांगकर उसकी जांच करते। एक बार तो हरिद्वार में जब मुझे टिकट नहीं मिला तो स्टेशन मास्टर ने बहुत मदद की। उन्होंने काउंटर क्लर्क से टिकट देने को कहा लेकिन उसने कहा कि उसे मेरे पास पर उसे शक है। उसमें हस्ताक्षर ठीक नहीं हैं। अंत में स्टेशन मास्टर ने अपने दम पर मुझे जबरदस्ती ट्रेन में बैठाया।
ममता बनर्जी ने नौकरी देने की घोषणा की थी। जब मैं कृत्रिम टांगों से चलकर रेल मंत्रालय पंहुची तो उनके पीए ने मिलाने से मना कर दिया। तीन बार निराश होकर मैं लौट आई। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विवेक सहाय से मिलने में मैं किसी तरह कामयाब हो गई तो उनका जवाब सुनकर हैरत हुई। उन्होंने सारे कागजात देखे और फिर कहा कि पहले जीआरपी से बढ़िया सी रिपोर्ट लगवाकर लाओ। ये थी रेलवे के मंत्री और अध्यक्ष की मानवीयता।
मैंने हिम्मत नहीं हारी। कहा कि इन सबको अपनी ताकत दिखाऊंगी, ये सब मुझे पहचानेंगे और खुद चलकर मेरे पास आएंगे। मुझे बछेंद्री पाल ने काफी प्रोत्साहित किया। उन्हीं के प्रशिक्षण की बदौलत मैं आज आसमान के इतने करीब हूं। मैं माउंट एवरेस्ट की चोटी पर हूं जहां पर हर कोई नहीं पंहुच पाता है। ऐसा लगता है कि बस हाथ उठाऊं और छू लूं।टिप्पणियां
मुझे बुखार आ गया। और नीचे भी लौटना था उस दुनिया में जो नहीं चाहती थी कि मैं यहां तक पहुंचूं। लेकिन कुछ लोग थे जिनका मेरे पर विश्वास था और उन्हीं के भरोसे मैं यहां तक पहुंची हूं। मेरी इच्छा अपने जैसे विकलांग लोगों की मदद करने की है, जिन्हें समाज ठुकराता है। मैं चाहती हूं कि उनके लिए कोई खेल अकादमी बनाऊं, उन्नाव में साढ़े सात बीघा जमीन मिल गई है। साढ़े तीन बीघा और खरीदनी है।
इस अकादमी से जब मेरी जैसी ऊंची चाहत रखने वाले निकलेंगे तब मुझे लगेगा कि मेरे साथ जो कुछ हुआ वह सब ठीक था क्योंकि अगर ये सब न होता तो आने वाली पीढ़ी को हौसला कौन दे पाता..! अगले महीने की 10 तारीख को मैं 27 वर्ष की हो जाऊंगी। मुझमें अभी बहुत सी ऊंचाइयों को छूने का हौसला बाकी है। बस, मुझे कोई चुनौती दे दीजिए..!"
मैंने फुटबॉल, वॉलीबॉल और हॉकी खेली। हॉकी खेलने के लिए स्टिक लेकर जब निकलती थी तो मोहल्ले के लड़के कहां बाज आने वाले। वे मेरी खिल्ली उड़ाते थे। कहते थे, देखो जा रही है झांसी की रानी बनकर खेलने, बड़ी आई स्टिक लेकर चलने वाली। मैं वैसे तो लड़कों की परवाह भी नहीं करती थी, लेकिन जब बात अखरने वाली लगती थी तो मैं घूरकर उनकी तरफ देखती थी, तो वे उड़न-छू हो जाते थे।
मुझे याद है कि एक बार जब मैं 14 बरस की रही होऊंगी और साइकिल से हम दोनों बहनें कहीं जा रहे थे तो एक जगह पर लक्ष्मी दीदी रुककर किसी से बात करने लगीं और मैं थोड़ा आगे निकलकर वहां पर उनका इंतजार करने लगी। उस दौरान कुछ लड़के साइकिल से उधर से गुजरे तो मुझसे रास्ता छोड़ने को कहा। मैंने मना कर दिया और कहा कि आगे जगह है, उधर से निकल जाओ।
वे अपनी बात पर अड़े रहे और मैं अपनी बात पर। इस बीच जब लक्ष्मी दीदी आ गईं और हम चलने लगे तो किसी लड़के ने झापड़ मारा जो मेरी दीदी के गाल पर लग गया। भीड़ का लाभ उठाकर लड़के भाग गए। दीदी के गाल पर चांटा देखकर मुझे बहुत क्रोध आया। मैंने दीदी से कहा कि चलो उस लड़के को ढूंढ़कर सबक सिखाते हैं। दीदी ने मना किया लेकिन मेरे ऊपर तो जैसे चंडी सवार थी। हम दोनों उन लड़कों को काफी देर तक तलाशते रहे और घूम-फिर कर उसी जगह आ गए। वहां पर पान की दुकान पर खड़े एक लड़के की शर्ट का कालर देखकर दीदी ने कहा कि यही वह लड़का है। बस फिर क्या था, मैंने दौड़कर उस लड़के को दबोच लिया और दीदी से कहा, "मार दीदी, छोड़ना नहीं।"
भीड़ लग गई, काफी बवाल हुआ लेकिन मैंने छोड़ा नहीं। अंत में उस लड़के के घर वाले आए और माफी मांगी तब जाकर मैंने उसे छोड़ा। उसके बाद फिर किसी ने मेरी तरफ या मेरी दीदी की तरफ नजर उठाकर भी नहीं देखा। लक्ष्मी दीदी की शादी हो गई लेकिन मेरे प्रति उनका इतना प्यार रहता है कि वह ससुराल से ज्यादा मायके में ही रहती हैं और मेरी और मेरी मां-भाई की मदद करने के लिए हमेशा जान दिए रहती हैं। मेरे जीजा ओम प्रकाश जी भी हमारे लिए देवता की तरह हैं। बजरंगबली ने उन्हें जैसे हमारे लिए ही बनाया था। उन्हीं की छत्रछाया ने मुझे मेरा सपना पूरा करने में मदद की है।
मैंने इंटर किया, एलएलबी किया लेकिन खेलना मेरे लिए जुनून के समान ही था। मैंने आस-पास के जिलों में वॉलीबॉल-फुटबॉल खेला, कई पुरस्कार जीते, लेकिन मेरा जुनून बढ़ता ही गया। मैंने राष्ट्रीय स्तर पर भी खेलों में भाग लिया लेकिन मुझे मेरा हक नहीं मिला। मेरे पास हाथ-पैर थे, जुनून था लेकिन कोई सीढ़ी नहीं थी, कोई छत नहीं थी जो मुझे आगे बढ़ने देती, मुझे महफूज रखती।
मैंने सोचा कि कहीं पर नौकरी कर लूं ताकि उसी के साथ आगे बढ़ती जाऊं। कई जगह फार्म डाले। सीआईएसएफ में भी कोशिश की और एक दिन नोएडा में सीआईएसएफ के दफ्तर में जाने के लिए घर से निकल पड़ी, अकेली।
वह दिन था 11 अप्रैल 2011 का। मुझे नहीं मालूम था कि मेरी दुनिया बदलने जा रही है। पद्मावती एक्सप्रेस ट्रेन के चालू डिब्बे में खिड़की के किनारे एक सीट पर बैठी रात के अंधेरे में जुगनू जैसी किसी रोशनी की तलाश कर रही थी कि तभी कुछ 'लोफर टाइप' के लड़के आए और उन्होंने मेरे गले में पड़ी चेन पर झपट्टा मारा। मुझे हंसी आ गई। इन लड़कों की क्या औकात कि मुझसे मेरी चीज छीन लें? मैंने लड़के का हाथ पकड़कर मरोड़ दिया। लेकिन तभी दूसरे लड़के ने मेरे गले में हाथ डाला तो मेरे गरदन हटा लेने पर उसके हाथ में चेन की जगह मेरी शर्ट का कालर आ गया। उसने कालर पकड़कर घसीटा और दो-तीन लड़कों ने मुझे पकड़कर दरवाजे के पास खींच लिया।
मेरे लिए उनसे निबटना मुश्किल काम नहीं था लेकिन तभी लड़कों ने मेरे ऊपर ऐसी लात मारी कि मैं चलती ट्रेन से बाहर गिट्टियों के बीच लोटती सी नजर आई..। पता नहीं क्या हुआ, मुझे कुछ पता नहीं कि मेरे पैर के ऊपर से ट्रेन के कितने पहिए गुजरते चले गए। वे पहिए पद्मावत एक्सप्रेस के थे या दूसरी पटरी के ऊपर से गुजरने वाली ट्रेनों के? उस समय रात के डेढ़ बजे थे और ट्रेन बरेली के पास थी। लेकिन कुछ सोचने-समझने से पहले दर्द के आवेग ने मुझे बेसुध कर दिया।
बीच-बीच में मेरी तंद्रा टूटती तो देखती कि मैं ट्रेन की पटरियों के किनारे पड़ी हूं, मेरी एक टांग कट गई थी बस कुछ मांस भर ने उसे मेरे शरीर से जोड़े रखा था। बगल की पटरी से रह-रहकर ट्रेनें गुजर रही थीं। पटरी और मेरे बीच मात्र कुछ इंचों का ही फासला था। मैं अपने को पटरी से दूर करना चाहती थी लेकिन मेरे पास इतना दम कहां था, उस पर भीषण दर्द। मैं उस बीहड़ रात में उसी तरह पड़ी रही। जब मुझे होश आता तो बजरंगबली को याद करके यही कहती कि जय बजरंगबली..यह क्या हो रहा है मेरी जिंदगी के साथ..और अब क्या शेष रह गया है होने को? आंखों के सामने कभी मां की तस्वीर आती तो कभी भाई तो कभी लक्ष्मी दीदी की तो कभी जीजा की..।
पौ फटने पर जब लोग शौच के लिए रेलवे की पटरियों की तरफ आए तो मुझे पड़ा पाया। गांव वाले आए। मेरा नाम-पता पूछा। शायद आधी बेहोशी में मैंने घर का टेलीफोन नंबर बता दिया था। जीजा ने उनसे कहा कि इतनी मदद और कर दीजिए कि अरुणिमा को किसी अस्पताल तक पंहुचा दीजिए।
सुबह के सात बजे के करीब मुझे अस्पताल पंहुचाया गया। मेरी बाईं टांग काट दी गई। मीडिया द्वारा शोर मचाने पर मुझे लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। वहां से फिर मुझे एम्स ले जाया गया। डाक्टरों ने मुझे बचा लिया। सीआईएसफ ने नौकरी देने की घोषणा की। तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी ने भी नौकरी देने की घोषणा की। तत्कालीन खेल मंत्री अजय माकन ने काफी राहतें दीं।
समाज को ये बातें हजम नहीं हुईं। इलाज के साथ ही विवाद भी शुरू हो गया कि मैं राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी नहीं हूं। मैंने इंटर भी पास नहीं किया है। मैं किसी के साथ भाग रही थी। मेरी शादी हो चुकी है। मैंने किसी प्रतियोगिता में भाग नहीं लिया। मैं झूठी हूं, फरेबी हूं। यूपी के एडीजी रेल एके जैन ने तो बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस करके मुझे झूठा साबित किया और कहा कि मैंने ट्रेन से कूदकर आत्महत्या की कोशिश की थी या फिर मैं उस बीहड़ सुनसान इलाके में अकेले आधी रात को रेलवे लाइन पार कर रही थी, जब यह दुर्घटना घटी।
मैंने गुस्से में एके जैन को फोन लगाकर खूब सुनाया कि क्या आपका कोई सिपाही ट्रेन में मौजूद था जो बताता कि उस दिन ट्रेन में मुझे लूटने की कोशिश नहीं की गई थी? क्या रातभर पटरियों पर पड़े होने के बावजूद जीआरपी ने मेरी कोई मदद की? मन करता था कि मैं एके जैन के पास जाकर उनका मुंह नोच लूं।
एम्स में मेरी मां, मेरी बहन और जीजा ने मुझे समझाया कि और लड़कियों के साथ क्या-क्या नहीं होता, लोग तेजाब तक डाल देते हैं, तुम्हारा तो बस एक पैर ही गया है, अब आगे की योजना बनाओ। बहन की प्रेरणा ने मेरे मन में यह बात ला दी कि कुछ ऐसा करूं जिसे दुनिया देखे। क्यों न एवरेस्ट पर चढ़ जाऊं? बिना पैर के एवरेस्ट पर चढ़ना ही मुझे सबसे बेहतर विचार लगा। असली चुनौती यही है।
आसान काम तो हर कोई कर लेता है। मेरी मुश्किल को आसान कर दिया अमेरिका निवासी डॉ राकेश श्रीवास्तव और उनके भाई शैलेश श्रीवास्तव ने जो इनोवेटिव नाम से एक संस्था चलाते हैं। उन्होंने मेरे लिए एक कृत्रिम पैर बनवाया जिसको पहनकर मैं चलती हूं।
मुझे अजय माकन ने इतनी सहूलियतें दीं और वह भी तब, जब उत्तर प्रदेश की सरकार मुझे मुल्जिम बताने के लिए उतारू थी और मीडिया मेरे पीछे पड़ गया था। खिलाड़ियों का संगठन 'साई' भी मुझे खिलाड़ी नहीं मानता था। मैं चीख-चीख कर कहा करती थी कि "मैं जिंदा हूं, मुझसे आकर पूछो, मैं झूठी नहीं हूं।"
लेकिन मुसीबतों और परीक्षाओं का अंत अभी नहीं हुआ था। चार महीने एम्स में गुजारने के बाद जब मैं वापस लौटी तो मेरी बदनामी मेरा पीछा कर रही थी। मुझे विकलांगता का प्रमाण पत्र मिल गया था और रेल से पास भी। लेकिन मुझे ट्रेन के सेंकड क्लास की आरक्षित बोगी में चलने के लिए टिकट नहीं मिलता था। मुझे दौड़ाया जाता, शक किया जाता। मेरे लिए विकलांग बोगी में चलना भी अपमान के कड़वे घूंट पीने के समान ही था।
आरपीएफ के सिपाही मेरी टांग खुलवाकर देखते और फिर पास मांगकर उसकी जांच करते। एक बार तो हरिद्वार में जब मुझे टिकट नहीं मिला तो स्टेशन मास्टर ने बहुत मदद की। उन्होंने काउंटर क्लर्क से टिकट देने को कहा लेकिन उसने कहा कि उसे मेरे पास पर उसे शक है। उसमें हस्ताक्षर ठीक नहीं हैं। अंत में स्टेशन मास्टर ने अपने दम पर मुझे जबरदस्ती ट्रेन में बैठाया।
ममता बनर्जी ने नौकरी देने की घोषणा की थी। जब मैं कृत्रिम टांगों से चलकर रेल मंत्रालय पंहुची तो उनके पीए ने मिलाने से मना कर दिया। तीन बार निराश होकर मैं लौट आई। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विवेक सहाय से मिलने में मैं किसी तरह कामयाब हो गई तो उनका जवाब सुनकर हैरत हुई। उन्होंने सारे कागजात देखे और फिर कहा कि पहले जीआरपी से बढ़िया सी रिपोर्ट लगवाकर लाओ। ये थी रेलवे के मंत्री और अध्यक्ष की मानवीयता।
मैंने हिम्मत नहीं हारी। कहा कि इन सबको अपनी ताकत दिखाऊंगी, ये सब मुझे पहचानेंगे और खुद चलकर मेरे पास आएंगे। मुझे बछेंद्री पाल ने काफी प्रोत्साहित किया। उन्हीं के प्रशिक्षण की बदौलत मैं आज आसमान के इतने करीब हूं। मैं माउंट एवरेस्ट की चोटी पर हूं जहां पर हर कोई नहीं पंहुच पाता है। ऐसा लगता है कि बस हाथ उठाऊं और छू लूं।टिप्पणियां
मुझे बुखार आ गया। और नीचे भी लौटना था उस दुनिया में जो नहीं चाहती थी कि मैं यहां तक पहुंचूं। लेकिन कुछ लोग थे जिनका मेरे पर विश्वास था और उन्हीं के भरोसे मैं यहां तक पहुंची हूं। मेरी इच्छा अपने जैसे विकलांग लोगों की मदद करने की है, जिन्हें समाज ठुकराता है। मैं चाहती हूं कि उनके लिए कोई खेल अकादमी बनाऊं, उन्नाव में साढ़े सात बीघा जमीन मिल गई है। साढ़े तीन बीघा और खरीदनी है।
इस अकादमी से जब मेरी जैसी ऊंची चाहत रखने वाले निकलेंगे तब मुझे लगेगा कि मेरे साथ जो कुछ हुआ वह सब ठीक था क्योंकि अगर ये सब न होता तो आने वाली पीढ़ी को हौसला कौन दे पाता..! अगले महीने की 10 तारीख को मैं 27 वर्ष की हो जाऊंगी। मुझमें अभी बहुत सी ऊंचाइयों को छूने का हौसला बाकी है। बस, मुझे कोई चुनौती दे दीजिए..!"
मुझे याद है कि एक बार जब मैं 14 बरस की रही होऊंगी और साइकिल से हम दोनों बहनें कहीं जा रहे थे तो एक जगह पर लक्ष्मी दीदी रुककर किसी से बात करने लगीं और मैं थोड़ा आगे निकलकर वहां पर उनका इंतजार करने लगी। उस दौरान कुछ लड़के साइकिल से उधर से गुजरे तो मुझसे रास्ता छोड़ने को कहा। मैंने मना कर दिया और कहा कि आगे जगह है, उधर से निकल जाओ।
वे अपनी बात पर अड़े रहे और मैं अपनी बात पर। इस बीच जब लक्ष्मी दीदी आ गईं और हम चलने लगे तो किसी लड़के ने झापड़ मारा जो मेरी दीदी के गाल पर लग गया। भीड़ का लाभ उठाकर लड़के भाग गए। दीदी के गाल पर चांटा देखकर मुझे बहुत क्रोध आया। मैंने दीदी से कहा कि चलो उस लड़के को ढूंढ़कर सबक सिखाते हैं। दीदी ने मना किया लेकिन मेरे ऊपर तो जैसे चंडी सवार थी। हम दोनों उन लड़कों को काफी देर तक तलाशते रहे और घूम-फिर कर उसी जगह आ गए। वहां पर पान की दुकान पर खड़े एक लड़के की शर्ट का कालर देखकर दीदी ने कहा कि यही वह लड़का है। बस फिर क्या था, मैंने दौड़कर उस लड़के को दबोच लिया और दीदी से कहा, "मार दीदी, छोड़ना नहीं।"
भीड़ लग गई, काफी बवाल हुआ लेकिन मैंने छोड़ा नहीं। अंत में उस लड़के के घर वाले आए और माफी मांगी तब जाकर मैंने उसे छोड़ा। उसके बाद फिर किसी ने मेरी तरफ या मेरी दीदी की तरफ नजर उठाकर भी नहीं देखा। लक्ष्मी दीदी की शादी हो गई लेकिन मेरे प्रति उनका इतना प्यार रहता है कि वह ससुराल से ज्यादा मायके में ही रहती हैं और मेरी और मेरी मां-भाई की मदद करने के लिए हमेशा जान दिए रहती हैं। मेरे जीजा ओम प्रकाश जी भी हमारे लिए देवता की तरह हैं। बजरंगबली ने उन्हें जैसे हमारे लिए ही बनाया था। उन्हीं की छत्रछाया ने मुझे मेरा सपना पूरा करने में मदद की है।
मैंने इंटर किया, एलएलबी किया लेकिन खेलना मेरे लिए जुनून के समान ही था। मैंने आस-पास के जिलों में वॉलीबॉल-फुटबॉल खेला, कई पुरस्कार जीते, लेकिन मेरा जुनून बढ़ता ही गया। मैंने राष्ट्रीय स्तर पर भी खेलों में भाग लिया लेकिन मुझे मेरा हक नहीं मिला। मेरे पास हाथ-पैर थे, जुनून था लेकिन कोई सीढ़ी नहीं थी, कोई छत नहीं थी जो मुझे आगे बढ़ने देती, मुझे महफूज रखती।
मैंने सोचा कि कहीं पर नौकरी कर लूं ताकि उसी के साथ आगे बढ़ती जाऊं। कई जगह फार्म डाले। सीआईएसएफ में भी कोशिश की और एक दिन नोएडा में सीआईएसएफ के दफ्तर में जाने के लिए घर से निकल पड़ी, अकेली।
वह दिन था 11 अप्रैल 2011 का। मुझे नहीं मालूम था कि मेरी दुनिया बदलने जा रही है। पद्मावती एक्सप्रेस ट्रेन के चालू डिब्बे में खिड़की के किनारे एक सीट पर बैठी रात के अंधेरे में जुगनू जैसी किसी रोशनी की तलाश कर रही थी कि तभी कुछ 'लोफर टाइप' के लड़के आए और उन्होंने मेरे गले में पड़ी चेन पर झपट्टा मारा। मुझे हंसी आ गई। इन लड़कों की क्या औकात कि मुझसे मेरी चीज छीन लें? मैंने लड़के का हाथ पकड़कर मरोड़ दिया। लेकिन तभी दूसरे लड़के ने मेरे गले में हाथ डाला तो मेरे गरदन हटा लेने पर उसके हाथ में चेन की जगह मेरी शर्ट का कालर आ गया। उसने कालर पकड़कर घसीटा और दो-तीन लड़कों ने मुझे पकड़कर दरवाजे के पास खींच लिया।
मेरे लिए उनसे निबटना मुश्किल काम नहीं था लेकिन तभी लड़कों ने मेरे ऊपर ऐसी लात मारी कि मैं चलती ट्रेन से बाहर गिट्टियों के बीच लोटती सी नजर आई..। पता नहीं क्या हुआ, मुझे कुछ पता नहीं कि मेरे पैर के ऊपर से ट्रेन के कितने पहिए गुजरते चले गए। वे पहिए पद्मावत एक्सप्रेस के थे या दूसरी पटरी के ऊपर से गुजरने वाली ट्रेनों के? उस समय रात के डेढ़ बजे थे और ट्रेन बरेली के पास थी। लेकिन कुछ सोचने-समझने से पहले दर्द के आवेग ने मुझे बेसुध कर दिया।
बीच-बीच में मेरी तंद्रा टूटती तो देखती कि मैं ट्रेन की पटरियों के किनारे पड़ी हूं, मेरी एक टांग कट गई थी बस कुछ मांस भर ने उसे मेरे शरीर से जोड़े रखा था। बगल की पटरी से रह-रहकर ट्रेनें गुजर रही थीं। पटरी और मेरे बीच मात्र कुछ इंचों का ही फासला था। मैं अपने को पटरी से दूर करना चाहती थी लेकिन मेरे पास इतना दम कहां था, उस पर भीषण दर्द। मैं उस बीहड़ रात में उसी तरह पड़ी रही। जब मुझे होश आता तो बजरंगबली को याद करके यही कहती कि जय बजरंगबली..यह क्या हो रहा है मेरी जिंदगी के साथ..और अब क्या शेष रह गया है होने को? आंखों के सामने कभी मां की तस्वीर आती तो कभी भाई तो कभी लक्ष्मी दीदी की तो कभी जीजा की..।
पौ फटने पर जब लोग शौच के लिए रेलवे की पटरियों की तरफ आए तो मुझे पड़ा पाया। गांव वाले आए। मेरा नाम-पता पूछा। शायद आधी बेहोशी में मैंने घर का टेलीफोन नंबर बता दिया था। जीजा ने उनसे कहा कि इतनी मदद और कर दीजिए कि अरुणिमा को किसी अस्पताल तक पंहुचा दीजिए।
सुबह के सात बजे के करीब मुझे अस्पताल पंहुचाया गया। मेरी बाईं टांग काट दी गई। मीडिया द्वारा शोर मचाने पर मुझे लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। वहां से फिर मुझे एम्स ले जाया गया। डाक्टरों ने मुझे बचा लिया। सीआईएसफ ने नौकरी देने की घोषणा की। तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी ने भी नौकरी देने की घोषणा की। तत्कालीन खेल मंत्री अजय माकन ने काफी राहतें दीं।
समाज को ये बातें हजम नहीं हुईं। इलाज के साथ ही विवाद भी शुरू हो गया कि मैं राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी नहीं हूं। मैंने इंटर भी पास नहीं किया है। मैं किसी के साथ भाग रही थी। मेरी शादी हो चुकी है। मैंने किसी प्रतियोगिता में भाग नहीं लिया। मैं झूठी हूं, फरेबी हूं। यूपी के एडीजी रेल एके जैन ने तो बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस करके मुझे झूठा साबित किया और कहा कि मैंने ट्रेन से कूदकर आत्महत्या की कोशिश की थी या फिर मैं उस बीहड़ सुनसान इलाके में अकेले आधी रात को रेलवे लाइन पार कर रही थी, जब यह दुर्घटना घटी।
मैंने गुस्से में एके जैन को फोन लगाकर खूब सुनाया कि क्या आपका कोई सिपाही ट्रेन में मौजूद था जो बताता कि उस दिन ट्रेन में मुझे लूटने की कोशिश नहीं की गई थी? क्या रातभर पटरियों पर पड़े होने के बावजूद जीआरपी ने मेरी कोई मदद की? मन करता था कि मैं एके जैन के पास जाकर उनका मुंह नोच लूं।
एम्स में मेरी मां, मेरी बहन और जीजा ने मुझे समझाया कि और लड़कियों के साथ क्या-क्या नहीं होता, लोग तेजाब तक डाल देते हैं, तुम्हारा तो बस एक पैर ही गया है, अब आगे की योजना बनाओ। बहन की प्रेरणा ने मेरे मन में यह बात ला दी कि कुछ ऐसा करूं जिसे दुनिया देखे। क्यों न एवरेस्ट पर चढ़ जाऊं? बिना पैर के एवरेस्ट पर चढ़ना ही मुझे सबसे बेहतर विचार लगा। असली चुनौती यही है।
आसान काम तो हर कोई कर लेता है। मेरी मुश्किल को आसान कर दिया अमेरिका निवासी डॉ राकेश श्रीवास्तव और उनके भाई शैलेश श्रीवास्तव ने जो इनोवेटिव नाम से एक संस्था चलाते हैं। उन्होंने मेरे लिए एक कृत्रिम पैर बनवाया जिसको पहनकर मैं चलती हूं।
मुझे अजय माकन ने इतनी सहूलियतें दीं और वह भी तब, जब उत्तर प्रदेश की सरकार मुझे मुल्जिम बताने के लिए उतारू थी और मीडिया मेरे पीछे पड़ गया था। खिलाड़ियों का संगठन 'साई' भी मुझे खिलाड़ी नहीं मानता था। मैं चीख-चीख कर कहा करती थी कि "मैं जिंदा हूं, मुझसे आकर पूछो, मैं झूठी नहीं हूं।"
लेकिन मुसीबतों और परीक्षाओं का अंत अभी नहीं हुआ था। चार महीने एम्स में गुजारने के बाद जब मैं वापस लौटी तो मेरी बदनामी मेरा पीछा कर रही थी। मुझे विकलांगता का प्रमाण पत्र मिल गया था और रेल से पास भी। लेकिन मुझे ट्रेन के सेंकड क्लास की आरक्षित बोगी में चलने के लिए टिकट नहीं मिलता था। मुझे दौड़ाया जाता, शक किया जाता। मेरे लिए विकलांग बोगी में चलना भी अपमान के कड़वे घूंट पीने के समान ही था।
आरपीएफ के सिपाही मेरी टांग खुलवाकर देखते और फिर पास मांगकर उसकी जांच करते। एक बार तो हरिद्वार में जब मुझे टिकट नहीं मिला तो स्टेशन मास्टर ने बहुत मदद की। उन्होंने काउंटर क्लर्क से टिकट देने को कहा लेकिन उसने कहा कि उसे मेरे पास पर उसे शक है। उसमें हस्ताक्षर ठीक नहीं हैं। अंत में स्टेशन मास्टर ने अपने दम पर मुझे जबरदस्ती ट्रेन में बैठाया।
ममता बनर्जी ने नौकरी देने की घोषणा की थी। जब मैं कृत्रिम टांगों से चलकर रेल मंत्रालय पंहुची तो उनके पीए ने मिलाने से मना कर दिया। तीन बार निराश होकर मैं लौट आई। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विवेक सहाय से मिलने में मैं किसी तरह कामयाब हो गई तो उनका जवाब सुनकर हैरत हुई। उन्होंने सारे कागजात देखे और फिर कहा कि पहले जीआरपी से बढ़िया सी रिपोर्ट लगवाकर लाओ। ये थी रेलवे के मंत्री और अध्यक्ष की मानवीयता।
मैंने हिम्मत नहीं हारी। कहा कि इन सबको अपनी ताकत दिखाऊंगी, ये सब मुझे पहचानेंगे और खुद चलकर मेरे पास आएंगे। मुझे बछेंद्री पाल ने काफी प्रोत्साहित किया। उन्हीं के प्रशिक्षण की बदौलत मैं आज आसमान के इतने करीब हूं। मैं माउंट एवरेस्ट की चोटी पर हूं जहां पर हर कोई नहीं पंहुच पाता है। ऐसा लगता है कि बस हाथ उठाऊं और छू लूं।टिप्पणियां
मुझे बुखार आ गया। और नीचे भी लौटना था उस दुनिया में जो नहीं चाहती थी कि मैं यहां तक पहुंचूं। लेकिन कुछ लोग थे जिनका मेरे पर विश्वास था और उन्हीं के भरोसे मैं यहां तक पहुंची हूं। मेरी इच्छा अपने जैसे विकलांग लोगों की मदद करने की है, जिन्हें समाज ठुकराता है। मैं चाहती हूं कि उनके लिए कोई खेल अकादमी बनाऊं, उन्नाव में साढ़े सात बीघा जमीन मिल गई है। साढ़े तीन बीघा और खरीदनी है।
इस अकादमी से जब मेरी जैसी ऊंची चाहत रखने वाले निकलेंगे तब मुझे लगेगा कि मेरे साथ जो कुछ हुआ वह सब ठीक था क्योंकि अगर ये सब न होता तो आने वाली पीढ़ी को हौसला कौन दे पाता..! अगले महीने की 10 तारीख को मैं 27 वर्ष की हो जाऊंगी। मुझमें अभी बहुत सी ऊंचाइयों को छूने का हौसला बाकी है। बस, मुझे कोई चुनौती दे दीजिए..!"
वे अपनी बात पर अड़े रहे और मैं अपनी बात पर। इस बीच जब लक्ष्मी दीदी आ गईं और हम चलने लगे तो किसी लड़के ने झापड़ मारा जो मेरी दीदी के गाल पर लग गया। भीड़ का लाभ उठाकर लड़के भाग गए। दीदी के गाल पर चांटा देखकर मुझे बहुत क्रोध आया। मैंने दीदी से कहा कि चलो उस लड़के को ढूंढ़कर सबक सिखाते हैं। दीदी ने मना किया लेकिन मेरे ऊपर तो जैसे चंडी सवार थी। हम दोनों उन लड़कों को काफी देर तक तलाशते रहे और घूम-फिर कर उसी जगह आ गए। वहां पर पान की दुकान पर खड़े एक लड़के की शर्ट का कालर देखकर दीदी ने कहा कि यही वह लड़का है। बस फिर क्या था, मैंने दौड़कर उस लड़के को दबोच लिया और दीदी से कहा, "मार दीदी, छोड़ना नहीं।"
भीड़ लग गई, काफी बवाल हुआ लेकिन मैंने छोड़ा नहीं। अंत में उस लड़के के घर वाले आए और माफी मांगी तब जाकर मैंने उसे छोड़ा। उसके बाद फिर किसी ने मेरी तरफ या मेरी दीदी की तरफ नजर उठाकर भी नहीं देखा। लक्ष्मी दीदी की शादी हो गई लेकिन मेरे प्रति उनका इतना प्यार रहता है कि वह ससुराल से ज्यादा मायके में ही रहती हैं और मेरी और मेरी मां-भाई की मदद करने के लिए हमेशा जान दिए रहती हैं। मेरे जीजा ओम प्रकाश जी भी हमारे लिए देवता की तरह हैं। बजरंगबली ने उन्हें जैसे हमारे लिए ही बनाया था। उन्हीं की छत्रछाया ने मुझे मेरा सपना पूरा करने में मदद की है।
मैंने इंटर किया, एलएलबी किया लेकिन खेलना मेरे लिए जुनून के समान ही था। मैंने आस-पास के जिलों में वॉलीबॉल-फुटबॉल खेला, कई पुरस्कार जीते, लेकिन मेरा जुनून बढ़ता ही गया। मैंने राष्ट्रीय स्तर पर भी खेलों में भाग लिया लेकिन मुझे मेरा हक नहीं मिला। मेरे पास हाथ-पैर थे, जुनून था लेकिन कोई सीढ़ी नहीं थी, कोई छत नहीं थी जो मुझे आगे बढ़ने देती, मुझे महफूज रखती।
मैंने सोचा कि कहीं पर नौकरी कर लूं ताकि उसी के साथ आगे बढ़ती जाऊं। कई जगह फार्म डाले। सीआईएसएफ में भी कोशिश की और एक दिन नोएडा में सीआईएसएफ के दफ्तर में जाने के लिए घर से निकल पड़ी, अकेली।
वह दिन था 11 अप्रैल 2011 का। मुझे नहीं मालूम था कि मेरी दुनिया बदलने जा रही है। पद्मावती एक्सप्रेस ट्रेन के चालू डिब्बे में खिड़की के किनारे एक सीट पर बैठी रात के अंधेरे में जुगनू जैसी किसी रोशनी की तलाश कर रही थी कि तभी कुछ 'लोफर टाइप' के लड़के आए और उन्होंने मेरे गले में पड़ी चेन पर झपट्टा मारा। मुझे हंसी आ गई। इन लड़कों की क्या औकात कि मुझसे मेरी चीज छीन लें? मैंने लड़के का हाथ पकड़कर मरोड़ दिया। लेकिन तभी दूसरे लड़के ने मेरे गले में हाथ डाला तो मेरे गरदन हटा लेने पर उसके हाथ में चेन की जगह मेरी शर्ट का कालर आ गया। उसने कालर पकड़कर घसीटा और दो-तीन लड़कों ने मुझे पकड़कर दरवाजे के पास खींच लिया।
मेरे लिए उनसे निबटना मुश्किल काम नहीं था लेकिन तभी लड़कों ने मेरे ऊपर ऐसी लात मारी कि मैं चलती ट्रेन से बाहर गिट्टियों के बीच लोटती सी नजर आई..। पता नहीं क्या हुआ, मुझे कुछ पता नहीं कि मेरे पैर के ऊपर से ट्रेन के कितने पहिए गुजरते चले गए। वे पहिए पद्मावत एक्सप्रेस के थे या दूसरी पटरी के ऊपर से गुजरने वाली ट्रेनों के? उस समय रात के डेढ़ बजे थे और ट्रेन बरेली के पास थी। लेकिन कुछ सोचने-समझने से पहले दर्द के आवेग ने मुझे बेसुध कर दिया।
बीच-बीच में मेरी तंद्रा टूटती तो देखती कि मैं ट्रेन की पटरियों के किनारे पड़ी हूं, मेरी एक टांग कट गई थी बस कुछ मांस भर ने उसे मेरे शरीर से जोड़े रखा था। बगल की पटरी से रह-रहकर ट्रेनें गुजर रही थीं। पटरी और मेरे बीच मात्र कुछ इंचों का ही फासला था। मैं अपने को पटरी से दूर करना चाहती थी लेकिन मेरे पास इतना दम कहां था, उस पर भीषण दर्द। मैं उस बीहड़ रात में उसी तरह पड़ी रही। जब मुझे होश आता तो बजरंगबली को याद करके यही कहती कि जय बजरंगबली..यह क्या हो रहा है मेरी जिंदगी के साथ..और अब क्या शेष रह गया है होने को? आंखों के सामने कभी मां की तस्वीर आती तो कभी भाई तो कभी लक्ष्मी दीदी की तो कभी जीजा की..।
पौ फटने पर जब लोग शौच के लिए रेलवे की पटरियों की तरफ आए तो मुझे पड़ा पाया। गांव वाले आए। मेरा नाम-पता पूछा। शायद आधी बेहोशी में मैंने घर का टेलीफोन नंबर बता दिया था। जीजा ने उनसे कहा कि इतनी मदद और कर दीजिए कि अरुणिमा को किसी अस्पताल तक पंहुचा दीजिए।
सुबह के सात बजे के करीब मुझे अस्पताल पंहुचाया गया। मेरी बाईं टांग काट दी गई। मीडिया द्वारा शोर मचाने पर मुझे लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। वहां से फिर मुझे एम्स ले जाया गया। डाक्टरों ने मुझे बचा लिया। सीआईएसफ ने नौकरी देने की घोषणा की। तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी ने भी नौकरी देने की घोषणा की। तत्कालीन खेल मंत्री अजय माकन ने काफी राहतें दीं।
समाज को ये बातें हजम नहीं हुईं। इलाज के साथ ही विवाद भी शुरू हो गया कि मैं राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी नहीं हूं। मैंने इंटर भी पास नहीं किया है। मैं किसी के साथ भाग रही थी। मेरी शादी हो चुकी है। मैंने किसी प्रतियोगिता में भाग नहीं लिया। मैं झूठी हूं, फरेबी हूं। यूपी के एडीजी रेल एके जैन ने तो बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस करके मुझे झूठा साबित किया और कहा कि मैंने ट्रेन से कूदकर आत्महत्या की कोशिश की थी या फिर मैं उस बीहड़ सुनसान इलाके में अकेले आधी रात को रेलवे लाइन पार कर रही थी, जब यह दुर्घटना घटी।
मैंने गुस्से में एके जैन को फोन लगाकर खूब सुनाया कि क्या आपका कोई सिपाही ट्रेन में मौजूद था जो बताता कि उस दिन ट्रेन में मुझे लूटने की कोशिश नहीं की गई थी? क्या रातभर पटरियों पर पड़े होने के बावजूद जीआरपी ने मेरी कोई मदद की? मन करता था कि मैं एके जैन के पास जाकर उनका मुंह नोच लूं।
एम्स में मेरी मां, मेरी बहन और जीजा ने मुझे समझाया कि और लड़कियों के साथ क्या-क्या नहीं होता, लोग तेजाब तक डाल देते हैं, तुम्हारा तो बस एक पैर ही गया है, अब आगे की योजना बनाओ। बहन की प्रेरणा ने मेरे मन में यह बात ला दी कि कुछ ऐसा करूं जिसे दुनिया देखे। क्यों न एवरेस्ट पर चढ़ जाऊं? बिना पैर के एवरेस्ट पर चढ़ना ही मुझे सबसे बेहतर विचार लगा। असली चुनौती यही है।
आसान काम तो हर कोई कर लेता है। मेरी मुश्किल को आसान कर दिया अमेरिका निवासी डॉ राकेश श्रीवास्तव और उनके भाई शैलेश श्रीवास्तव ने जो इनोवेटिव नाम से एक संस्था चलाते हैं। उन्होंने मेरे लिए एक कृत्रिम पैर बनवाया जिसको पहनकर मैं चलती हूं।
मुझे अजय माकन ने इतनी सहूलियतें दीं और वह भी तब, जब उत्तर प्रदेश की सरकार मुझे मुल्जिम बताने के लिए उतारू थी और मीडिया मेरे पीछे पड़ गया था। खिलाड़ियों का संगठन 'साई' भी मुझे खिलाड़ी नहीं मानता था। मैं चीख-चीख कर कहा करती थी कि "मैं जिंदा हूं, मुझसे आकर पूछो, मैं झूठी नहीं हूं।"
लेकिन मुसीबतों और परीक्षाओं का अंत अभी नहीं हुआ था। चार महीने एम्स में गुजारने के बाद जब मैं वापस लौटी तो मेरी बदनामी मेरा पीछा कर रही थी। मुझे विकलांगता का प्रमाण पत्र मिल गया था और रेल से पास भी। लेकिन मुझे ट्रेन के सेंकड क्लास की आरक्षित बोगी में चलने के लिए टिकट नहीं मिलता था। मुझे दौड़ाया जाता, शक किया जाता। मेरे लिए विकलांग बोगी में चलना भी अपमान के कड़वे घूंट पीने के समान ही था।
आरपीएफ के सिपाही मेरी टांग खुलवाकर देखते और फिर पास मांगकर उसकी जांच करते। एक बार तो हरिद्वार में जब मुझे टिकट नहीं मिला तो स्टेशन मास्टर ने बहुत मदद की। उन्होंने काउंटर क्लर्क से टिकट देने को कहा लेकिन उसने कहा कि उसे मेरे पास पर उसे शक है। उसमें हस्ताक्षर ठीक नहीं हैं। अंत में स्टेशन मास्टर ने अपने दम पर मुझे जबरदस्ती ट्रेन में बैठाया।
ममता बनर्जी ने नौकरी देने की घोषणा की थी। जब मैं कृत्रिम टांगों से चलकर रेल मंत्रालय पंहुची तो उनके पीए ने मिलाने से मना कर दिया। तीन बार निराश होकर मैं लौट आई। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विवेक सहाय से मिलने में मैं किसी तरह कामयाब हो गई तो उनका जवाब सुनकर हैरत हुई। उन्होंने सारे कागजात देखे और फिर कहा कि पहले जीआरपी से बढ़िया सी रिपोर्ट लगवाकर लाओ। ये थी रेलवे के मंत्री और अध्यक्ष की मानवीयता।
मैंने हिम्मत नहीं हारी। कहा कि इन सबको अपनी ताकत दिखाऊंगी, ये सब मुझे पहचानेंगे और खुद चलकर मेरे पास आएंगे। मुझे बछेंद्री पाल ने काफी प्रोत्साहित किया। उन्हीं के प्रशिक्षण की बदौलत मैं आज आसमान के इतने करीब हूं। मैं माउंट एवरेस्ट की चोटी पर हूं जहां पर हर कोई नहीं पंहुच पाता है। ऐसा लगता है कि बस हाथ उठाऊं और छू लूं।टिप्पणियां
मुझे बुखार आ गया। और नीचे भी लौटना था उस दुनिया में जो नहीं चाहती थी कि मैं यहां तक पहुंचूं। लेकिन कुछ लोग थे जिनका मेरे पर विश्वास था और उन्हीं के भरोसे मैं यहां तक पहुंची हूं। मेरी इच्छा अपने जैसे विकलांग लोगों की मदद करने की है, जिन्हें समाज ठुकराता है। मैं चाहती हूं कि उनके लिए कोई खेल अकादमी बनाऊं, उन्नाव में साढ़े सात बीघा जमीन मिल गई है। साढ़े तीन बीघा और खरीदनी है।
इस अकादमी से जब मेरी जैसी ऊंची चाहत रखने वाले निकलेंगे तब मुझे लगेगा कि मेरे साथ जो कुछ हुआ वह सब ठीक था क्योंकि अगर ये सब न होता तो आने वाली पीढ़ी को हौसला कौन दे पाता..! अगले महीने की 10 तारीख को मैं 27 वर्ष की हो जाऊंगी। मुझमें अभी बहुत सी ऊंचाइयों को छूने का हौसला बाकी है। बस, मुझे कोई चुनौती दे दीजिए..!"
भीड़ लग गई, काफी बवाल हुआ लेकिन मैंने छोड़ा नहीं। अंत में उस लड़के के घर वाले आए और माफी मांगी तब जाकर मैंने उसे छोड़ा। उसके बाद फिर किसी ने मेरी तरफ या मेरी दीदी की तरफ नजर उठाकर भी नहीं देखा। लक्ष्मी दीदी की शादी हो गई लेकिन मेरे प्रति उनका इतना प्यार रहता है कि वह ससुराल से ज्यादा मायके में ही रहती हैं और मेरी और मेरी मां-भाई की मदद करने के लिए हमेशा जान दिए रहती हैं। मेरे जीजा ओम प्रकाश जी भी हमारे लिए देवता की तरह हैं। बजरंगबली ने उन्हें जैसे हमारे लिए ही बनाया था। उन्हीं की छत्रछाया ने मुझे मेरा सपना पूरा करने में मदद की है।
मैंने इंटर किया, एलएलबी किया लेकिन खेलना मेरे लिए जुनून के समान ही था। मैंने आस-पास के जिलों में वॉलीबॉल-फुटबॉल खेला, कई पुरस्कार जीते, लेकिन मेरा जुनून बढ़ता ही गया। मैंने राष्ट्रीय स्तर पर भी खेलों में भाग लिया लेकिन मुझे मेरा हक नहीं मिला। मेरे पास हाथ-पैर थे, जुनून था लेकिन कोई सीढ़ी नहीं थी, कोई छत नहीं थी जो मुझे आगे बढ़ने देती, मुझे महफूज रखती।
मैंने सोचा कि कहीं पर नौकरी कर लूं ताकि उसी के साथ आगे बढ़ती जाऊं। कई जगह फार्म डाले। सीआईएसएफ में भी कोशिश की और एक दिन नोएडा में सीआईएसएफ के दफ्तर में जाने के लिए घर से निकल पड़ी, अकेली।
वह दिन था 11 अप्रैल 2011 का। मुझे नहीं मालूम था कि मेरी दुनिया बदलने जा रही है। पद्मावती एक्सप्रेस ट्रेन के चालू डिब्बे में खिड़की के किनारे एक सीट पर बैठी रात के अंधेरे में जुगनू जैसी किसी रोशनी की तलाश कर रही थी कि तभी कुछ 'लोफर टाइप' के लड़के आए और उन्होंने मेरे गले में पड़ी चेन पर झपट्टा मारा। मुझे हंसी आ गई। इन लड़कों की क्या औकात कि मुझसे मेरी चीज छीन लें? मैंने लड़के का हाथ पकड़कर मरोड़ दिया। लेकिन तभी दूसरे लड़के ने मेरे गले में हाथ डाला तो मेरे गरदन हटा लेने पर उसके हाथ में चेन की जगह मेरी शर्ट का कालर आ गया। उसने कालर पकड़कर घसीटा और दो-तीन लड़कों ने मुझे पकड़कर दरवाजे के पास खींच लिया।
मेरे लिए उनसे निबटना मुश्किल काम नहीं था लेकिन तभी लड़कों ने मेरे ऊपर ऐसी लात मारी कि मैं चलती ट्रेन से बाहर गिट्टियों के बीच लोटती सी नजर आई..। पता नहीं क्या हुआ, मुझे कुछ पता नहीं कि मेरे पैर के ऊपर से ट्रेन के कितने पहिए गुजरते चले गए। वे पहिए पद्मावत एक्सप्रेस के थे या दूसरी पटरी के ऊपर से गुजरने वाली ट्रेनों के? उस समय रात के डेढ़ बजे थे और ट्रेन बरेली के पास थी। लेकिन कुछ सोचने-समझने से पहले दर्द के आवेग ने मुझे बेसुध कर दिया।
बीच-बीच में मेरी तंद्रा टूटती तो देखती कि मैं ट्रेन की पटरियों के किनारे पड़ी हूं, मेरी एक टांग कट गई थी बस कुछ मांस भर ने उसे मेरे शरीर से जोड़े रखा था। बगल की पटरी से रह-रहकर ट्रेनें गुजर रही थीं। पटरी और मेरे बीच मात्र कुछ इंचों का ही फासला था। मैं अपने को पटरी से दूर करना चाहती थी लेकिन मेरे पास इतना दम कहां था, उस पर भीषण दर्द। मैं उस बीहड़ रात में उसी तरह पड़ी रही। जब मुझे होश आता तो बजरंगबली को याद करके यही कहती कि जय बजरंगबली..यह क्या हो रहा है मेरी जिंदगी के साथ..और अब क्या शेष रह गया है होने को? आंखों के सामने कभी मां की तस्वीर आती तो कभी भाई तो कभी लक्ष्मी दीदी की तो कभी जीजा की..।
पौ फटने पर जब लोग शौच के लिए रेलवे की पटरियों की तरफ आए तो मुझे पड़ा पाया। गांव वाले आए। मेरा नाम-पता पूछा। शायद आधी बेहोशी में मैंने घर का टेलीफोन नंबर बता दिया था। जीजा ने उनसे कहा कि इतनी मदद और कर दीजिए कि अरुणिमा को किसी अस्पताल तक पंहुचा दीजिए।
सुबह के सात बजे के करीब मुझे अस्पताल पंहुचाया गया। मेरी बाईं टांग काट दी गई। मीडिया द्वारा शोर मचाने पर मुझे लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। वहां से फिर मुझे एम्स ले जाया गया। डाक्टरों ने मुझे बचा लिया। सीआईएसफ ने नौकरी देने की घोषणा की। तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी ने भी नौकरी देने की घोषणा की। तत्कालीन खेल मंत्री अजय माकन ने काफी राहतें दीं।
समाज को ये बातें हजम नहीं हुईं। इलाज के साथ ही विवाद भी शुरू हो गया कि मैं राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी नहीं हूं। मैंने इंटर भी पास नहीं किया है। मैं किसी के साथ भाग रही थी। मेरी शादी हो चुकी है। मैंने किसी प्रतियोगिता में भाग नहीं लिया। मैं झूठी हूं, फरेबी हूं। यूपी के एडीजी रेल एके जैन ने तो बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस करके मुझे झूठा साबित किया और कहा कि मैंने ट्रेन से कूदकर आत्महत्या की कोशिश की थी या फिर मैं उस बीहड़ सुनसान इलाके में अकेले आधी रात को रेलवे लाइन पार कर रही थी, जब यह दुर्घटना घटी।
मैंने गुस्से में एके जैन को फोन लगाकर खूब सुनाया कि क्या आपका कोई सिपाही ट्रेन में मौजूद था जो बताता कि उस दिन ट्रेन में मुझे लूटने की कोशिश नहीं की गई थी? क्या रातभर पटरियों पर पड़े होने के बावजूद जीआरपी ने मेरी कोई मदद की? मन करता था कि मैं एके जैन के पास जाकर उनका मुंह नोच लूं।
एम्स में मेरी मां, मेरी बहन और जीजा ने मुझे समझाया कि और लड़कियों के साथ क्या-क्या नहीं होता, लोग तेजाब तक डाल देते हैं, तुम्हारा तो बस एक पैर ही गया है, अब आगे की योजना बनाओ। बहन की प्रेरणा ने मेरे मन में यह बात ला दी कि कुछ ऐसा करूं जिसे दुनिया देखे। क्यों न एवरेस्ट पर चढ़ जाऊं? बिना पैर के एवरेस्ट पर चढ़ना ही मुझे सबसे बेहतर विचार लगा। असली चुनौती यही है।
आसान काम तो हर कोई कर लेता है। मेरी मुश्किल को आसान कर दिया अमेरिका निवासी डॉ राकेश श्रीवास्तव और उनके भाई शैलेश श्रीवास्तव ने जो इनोवेटिव नाम से एक संस्था चलाते हैं। उन्होंने मेरे लिए एक कृत्रिम पैर बनवाया जिसको पहनकर मैं चलती हूं।
मुझे अजय माकन ने इतनी सहूलियतें दीं और वह भी तब, जब उत्तर प्रदेश की सरकार मुझे मुल्जिम बताने के लिए उतारू थी और मीडिया मेरे पीछे पड़ गया था। खिलाड़ियों का संगठन 'साई' भी मुझे खिलाड़ी नहीं मानता था। मैं चीख-चीख कर कहा करती थी कि "मैं जिंदा हूं, मुझसे आकर पूछो, मैं झूठी नहीं हूं।"
लेकिन मुसीबतों और परीक्षाओं का अंत अभी नहीं हुआ था। चार महीने एम्स में गुजारने के बाद जब मैं वापस लौटी तो मेरी बदनामी मेरा पीछा कर रही थी। मुझे विकलांगता का प्रमाण पत्र मिल गया था और रेल से पास भी। लेकिन मुझे ट्रेन के सेंकड क्लास की आरक्षित बोगी में चलने के लिए टिकट नहीं मिलता था। मुझे दौड़ाया जाता, शक किया जाता। मेरे लिए विकलांग बोगी में चलना भी अपमान के कड़वे घूंट पीने के समान ही था।
आरपीएफ के सिपाही मेरी टांग खुलवाकर देखते और फिर पास मांगकर उसकी जांच करते। एक बार तो हरिद्वार में जब मुझे टिकट नहीं मिला तो स्टेशन मास्टर ने बहुत मदद की। उन्होंने काउंटर क्लर्क से टिकट देने को कहा लेकिन उसने कहा कि उसे मेरे पास पर उसे शक है। उसमें हस्ताक्षर ठीक नहीं हैं। अंत में स्टेशन मास्टर ने अपने दम पर मुझे जबरदस्ती ट्रेन में बैठाया।
ममता बनर्जी ने नौकरी देने की घोषणा की थी। जब मैं कृत्रिम टांगों से चलकर रेल मंत्रालय पंहुची तो उनके पीए ने मिलाने से मना कर दिया। तीन बार निराश होकर मैं लौट आई। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विवेक सहाय से मिलने में मैं किसी तरह कामयाब हो गई तो उनका जवाब सुनकर हैरत हुई। उन्होंने सारे कागजात देखे और फिर कहा कि पहले जीआरपी से बढ़िया सी रिपोर्ट लगवाकर लाओ। ये थी रेलवे के मंत्री और अध्यक्ष की मानवीयता।
मैंने हिम्मत नहीं हारी। कहा कि इन सबको अपनी ताकत दिखाऊंगी, ये सब मुझे पहचानेंगे और खुद चलकर मेरे पास आएंगे। मुझे बछेंद्री पाल ने काफी प्रोत्साहित किया। उन्हीं के प्रशिक्षण की बदौलत मैं आज आसमान के इतने करीब हूं। मैं माउंट एवरेस्ट की चोटी पर हूं जहां पर हर कोई नहीं पंहुच पाता है। ऐसा लगता है कि बस हाथ उठाऊं और छू लूं।टिप्पणियां
मुझे बुखार आ गया। और नीचे भी लौटना था उस दुनिया में जो नहीं चाहती थी कि मैं यहां तक पहुंचूं। लेकिन कुछ लोग थे जिनका मेरे पर विश्वास था और उन्हीं के भरोसे मैं यहां तक पहुंची हूं। मेरी इच्छा अपने जैसे विकलांग लोगों की मदद करने की है, जिन्हें समाज ठुकराता है। मैं चाहती हूं कि उनके लिए कोई खेल अकादमी बनाऊं, उन्नाव में साढ़े सात बीघा जमीन मिल गई है। साढ़े तीन बीघा और खरीदनी है।
इस अकादमी से जब मेरी जैसी ऊंची चाहत रखने वाले निकलेंगे तब मुझे लगेगा कि मेरे साथ जो कुछ हुआ वह सब ठीक था क्योंकि अगर ये सब न होता तो आने वाली पीढ़ी को हौसला कौन दे पाता..! अगले महीने की 10 तारीख को मैं 27 वर्ष की हो जाऊंगी। मुझमें अभी बहुत सी ऊंचाइयों को छूने का हौसला बाकी है। बस, मुझे कोई चुनौती दे दीजिए..!"
मैंने इंटर किया, एलएलबी किया लेकिन खेलना मेरे लिए जुनून के समान ही था। मैंने आस-पास के जिलों में वॉलीबॉल-फुटबॉल खेला, कई पुरस्कार जीते, लेकिन मेरा जुनून बढ़ता ही गया। मैंने राष्ट्रीय स्तर पर भी खेलों में भाग लिया लेकिन मुझे मेरा हक नहीं मिला। मेरे पास हाथ-पैर थे, जुनून था लेकिन कोई सीढ़ी नहीं थी, कोई छत नहीं थी जो मुझे आगे बढ़ने देती, मुझे महफूज रखती।
मैंने सोचा कि कहीं पर नौकरी कर लूं ताकि उसी के साथ आगे बढ़ती जाऊं। कई जगह फार्म डाले। सीआईएसएफ में भी कोशिश की और एक दिन नोएडा में सीआईएसएफ के दफ्तर में जाने के लिए घर से निकल पड़ी, अकेली।
वह दिन था 11 अप्रैल 2011 का। मुझे नहीं मालूम था कि मेरी दुनिया बदलने जा रही है। पद्मावती एक्सप्रेस ट्रेन के चालू डिब्बे में खिड़की के किनारे एक सीट पर बैठी रात के अंधेरे में जुगनू जैसी किसी रोशनी की तलाश कर रही थी कि तभी कुछ 'लोफर टाइप' के लड़के आए और उन्होंने मेरे गले में पड़ी चेन पर झपट्टा मारा। मुझे हंसी आ गई। इन लड़कों की क्या औकात कि मुझसे मेरी चीज छीन लें? मैंने लड़के का हाथ पकड़कर मरोड़ दिया। लेकिन तभी दूसरे लड़के ने मेरे गले में हाथ डाला तो मेरे गरदन हटा लेने पर उसके हाथ में चेन की जगह मेरी शर्ट का कालर आ गया। उसने कालर पकड़कर घसीटा और दो-तीन लड़कों ने मुझे पकड़कर दरवाजे के पास खींच लिया।
मेरे लिए उनसे निबटना मुश्किल काम नहीं था लेकिन तभी लड़कों ने मेरे ऊपर ऐसी लात मारी कि मैं चलती ट्रेन से बाहर गिट्टियों के बीच लोटती सी नजर आई..। पता नहीं क्या हुआ, मुझे कुछ पता नहीं कि मेरे पैर के ऊपर से ट्रेन के कितने पहिए गुजरते चले गए। वे पहिए पद्मावत एक्सप्रेस के थे या दूसरी पटरी के ऊपर से गुजरने वाली ट्रेनों के? उस समय रात के डेढ़ बजे थे और ट्रेन बरेली के पास थी। लेकिन कुछ सोचने-समझने से पहले दर्द के आवेग ने मुझे बेसुध कर दिया।
बीच-बीच में मेरी तंद्रा टूटती तो देखती कि मैं ट्रेन की पटरियों के किनारे पड़ी हूं, मेरी एक टांग कट गई थी बस कुछ मांस भर ने उसे मेरे शरीर से जोड़े रखा था। बगल की पटरी से रह-रहकर ट्रेनें गुजर रही थीं। पटरी और मेरे बीच मात्र कुछ इंचों का ही फासला था। मैं अपने को पटरी से दूर करना चाहती थी लेकिन मेरे पास इतना दम कहां था, उस पर भीषण दर्द। मैं उस बीहड़ रात में उसी तरह पड़ी रही। जब मुझे होश आता तो बजरंगबली को याद करके यही कहती कि जय बजरंगबली..यह क्या हो रहा है मेरी जिंदगी के साथ..और अब क्या शेष रह गया है होने को? आंखों के सामने कभी मां की तस्वीर आती तो कभी भाई तो कभी लक्ष्मी दीदी की तो कभी जीजा की..।
पौ फटने पर जब लोग शौच के लिए रेलवे की पटरियों की तरफ आए तो मुझे पड़ा पाया। गांव वाले आए। मेरा नाम-पता पूछा। शायद आधी बेहोशी में मैंने घर का टेलीफोन नंबर बता दिया था। जीजा ने उनसे कहा कि इतनी मदद और कर दीजिए कि अरुणिमा को किसी अस्पताल तक पंहुचा दीजिए।
सुबह के सात बजे के करीब मुझे अस्पताल पंहुचाया गया। मेरी बाईं टांग काट दी गई। मीडिया द्वारा शोर मचाने पर मुझे लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। वहां से फिर मुझे एम्स ले जाया गया। डाक्टरों ने मुझे बचा लिया। सीआईएसफ ने नौकरी देने की घोषणा की। तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी ने भी नौकरी देने की घोषणा की। तत्कालीन खेल मंत्री अजय माकन ने काफी राहतें दीं।
समाज को ये बातें हजम नहीं हुईं। इलाज के साथ ही विवाद भी शुरू हो गया कि मैं राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी नहीं हूं। मैंने इंटर भी पास नहीं किया है। मैं किसी के साथ भाग रही थी। मेरी शादी हो चुकी है। मैंने किसी प्रतियोगिता में भाग नहीं लिया। मैं झूठी हूं, फरेबी हूं। यूपी के एडीजी रेल एके जैन ने तो बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस करके मुझे झूठा साबित किया और कहा कि मैंने ट्रेन से कूदकर आत्महत्या की कोशिश की थी या फिर मैं उस बीहड़ सुनसान इलाके में अकेले आधी रात को रेलवे लाइन पार कर रही थी, जब यह दुर्घटना घटी।
मैंने गुस्से में एके जैन को फोन लगाकर खूब सुनाया कि क्या आपका कोई सिपाही ट्रेन में मौजूद था जो बताता कि उस दिन ट्रेन में मुझे लूटने की कोशिश नहीं की गई थी? क्या रातभर पटरियों पर पड़े होने के बावजूद जीआरपी ने मेरी कोई मदद की? मन करता था कि मैं एके जैन के पास जाकर उनका मुंह नोच लूं।
एम्स में मेरी मां, मेरी बहन और जीजा ने मुझे समझाया कि और लड़कियों के साथ क्या-क्या नहीं होता, लोग तेजाब तक डाल देते हैं, तुम्हारा तो बस एक पैर ही गया है, अब आगे की योजना बनाओ। बहन की प्रेरणा ने मेरे मन में यह बात ला दी कि कुछ ऐसा करूं जिसे दुनिया देखे। क्यों न एवरेस्ट पर चढ़ जाऊं? बिना पैर के एवरेस्ट पर चढ़ना ही मुझे सबसे बेहतर विचार लगा। असली चुनौती यही है।
आसान काम तो हर कोई कर लेता है। मेरी मुश्किल को आसान कर दिया अमेरिका निवासी डॉ राकेश श्रीवास्तव और उनके भाई शैलेश श्रीवास्तव ने जो इनोवेटिव नाम से एक संस्था चलाते हैं। उन्होंने मेरे लिए एक कृत्रिम पैर बनवाया जिसको पहनकर मैं चलती हूं।
मुझे अजय माकन ने इतनी सहूलियतें दीं और वह भी तब, जब उत्तर प्रदेश की सरकार मुझे मुल्जिम बताने के लिए उतारू थी और मीडिया मेरे पीछे पड़ गया था। खिलाड़ियों का संगठन 'साई' भी मुझे खिलाड़ी नहीं मानता था। मैं चीख-चीख कर कहा करती थी कि "मैं जिंदा हूं, मुझसे आकर पूछो, मैं झूठी नहीं हूं।"
लेकिन मुसीबतों और परीक्षाओं का अंत अभी नहीं हुआ था। चार महीने एम्स में गुजारने के बाद जब मैं वापस लौटी तो मेरी बदनामी मेरा पीछा कर रही थी। मुझे विकलांगता का प्रमाण पत्र मिल गया था और रेल से पास भी। लेकिन मुझे ट्रेन के सेंकड क्लास की आरक्षित बोगी में चलने के लिए टिकट नहीं मिलता था। मुझे दौड़ाया जाता, शक किया जाता। मेरे लिए विकलांग बोगी में चलना भी अपमान के कड़वे घूंट पीने के समान ही था।
आरपीएफ के सिपाही मेरी टांग खुलवाकर देखते और फिर पास मांगकर उसकी जांच करते। एक बार तो हरिद्वार में जब मुझे टिकट नहीं मिला तो स्टेशन मास्टर ने बहुत मदद की। उन्होंने काउंटर क्लर्क से टिकट देने को कहा लेकिन उसने कहा कि उसे मेरे पास पर उसे शक है। उसमें हस्ताक्षर ठीक नहीं हैं। अंत में स्टेशन मास्टर ने अपने दम पर मुझे जबरदस्ती ट्रेन में बैठाया।
ममता बनर्जी ने नौकरी देने की घोषणा की थी। जब मैं कृत्रिम टांगों से चलकर रेल मंत्रालय पंहुची तो उनके पीए ने मिलाने से मना कर दिया। तीन बार निराश होकर मैं लौट आई। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विवेक सहाय से मिलने में मैं किसी तरह कामयाब हो गई तो उनका जवाब सुनकर हैरत हुई। उन्होंने सारे कागजात देखे और फिर कहा कि पहले जीआरपी से बढ़िया सी रिपोर्ट लगवाकर लाओ। ये थी रेलवे के मंत्री और अध्यक्ष की मानवीयता।
मैंने हिम्मत नहीं हारी। कहा कि इन सबको अपनी ताकत दिखाऊंगी, ये सब मुझे पहचानेंगे और खुद चलकर मेरे पास आएंगे। मुझे बछेंद्री पाल ने काफी प्रोत्साहित किया। उन्हीं के प्रशिक्षण की बदौलत मैं आज आसमान के इतने करीब हूं। मैं माउंट एवरेस्ट की चोटी पर हूं जहां पर हर कोई नहीं पंहुच पाता है। ऐसा लगता है कि बस हाथ उठाऊं और छू लूं।टिप्पणियां
मुझे बुखार आ गया। और नीचे भी लौटना था उस दुनिया में जो नहीं चाहती थी कि मैं यहां तक पहुंचूं। लेकिन कुछ लोग थे जिनका मेरे पर विश्वास था और उन्हीं के भरोसे मैं यहां तक पहुंची हूं। मेरी इच्छा अपने जैसे विकलांग लोगों की मदद करने की है, जिन्हें समाज ठुकराता है। मैं चाहती हूं कि उनके लिए कोई खेल अकादमी बनाऊं, उन्नाव में साढ़े सात बीघा जमीन मिल गई है। साढ़े तीन बीघा और खरीदनी है।
इस अकादमी से जब मेरी जैसी ऊंची चाहत रखने वाले निकलेंगे तब मुझे लगेगा कि मेरे साथ जो कुछ हुआ वह सब ठीक था क्योंकि अगर ये सब न होता तो आने वाली पीढ़ी को हौसला कौन दे पाता..! अगले महीने की 10 तारीख को मैं 27 वर्ष की हो जाऊंगी। मुझमें अभी बहुत सी ऊंचाइयों को छूने का हौसला बाकी है। बस, मुझे कोई चुनौती दे दीजिए..!"
मैंने सोचा कि कहीं पर नौकरी कर लूं ताकि उसी के साथ आगे बढ़ती जाऊं। कई जगह फार्म डाले। सीआईएसएफ में भी कोशिश की और एक दिन नोएडा में सीआईएसएफ के दफ्तर में जाने के लिए घर से निकल पड़ी, अकेली।
वह दिन था 11 अप्रैल 2011 का। मुझे नहीं मालूम था कि मेरी दुनिया बदलने जा रही है। पद्मावती एक्सप्रेस ट्रेन के चालू डिब्बे में खिड़की के किनारे एक सीट पर बैठी रात के अंधेरे में जुगनू जैसी किसी रोशनी की तलाश कर रही थी कि तभी कुछ 'लोफर टाइप' के लड़के आए और उन्होंने मेरे गले में पड़ी चेन पर झपट्टा मारा। मुझे हंसी आ गई। इन लड़कों की क्या औकात कि मुझसे मेरी चीज छीन लें? मैंने लड़के का हाथ पकड़कर मरोड़ दिया। लेकिन तभी दूसरे लड़के ने मेरे गले में हाथ डाला तो मेरे गरदन हटा लेने पर उसके हाथ में चेन की जगह मेरी शर्ट का कालर आ गया। उसने कालर पकड़कर घसीटा और दो-तीन लड़कों ने मुझे पकड़कर दरवाजे के पास खींच लिया।
मेरे लिए उनसे निबटना मुश्किल काम नहीं था लेकिन तभी लड़कों ने मेरे ऊपर ऐसी लात मारी कि मैं चलती ट्रेन से बाहर गिट्टियों के बीच लोटती सी नजर आई..। पता नहीं क्या हुआ, मुझे कुछ पता नहीं कि मेरे पैर के ऊपर से ट्रेन के कितने पहिए गुजरते चले गए। वे पहिए पद्मावत एक्सप्रेस के थे या दूसरी पटरी के ऊपर से गुजरने वाली ट्रेनों के? उस समय रात के डेढ़ बजे थे और ट्रेन बरेली के पास थी। लेकिन कुछ सोचने-समझने से पहले दर्द के आवेग ने मुझे बेसुध कर दिया।
बीच-बीच में मेरी तंद्रा टूटती तो देखती कि मैं ट्रेन की पटरियों के किनारे पड़ी हूं, मेरी एक टांग कट गई थी बस कुछ मांस भर ने उसे मेरे शरीर से जोड़े रखा था। बगल की पटरी से रह-रहकर ट्रेनें गुजर रही थीं। पटरी और मेरे बीच मात्र कुछ इंचों का ही फासला था। मैं अपने को पटरी से दूर करना चाहती थी लेकिन मेरे पास इतना दम कहां था, उस पर भीषण दर्द। मैं उस बीहड़ रात में उसी तरह पड़ी रही। जब मुझे होश आता तो बजरंगबली को याद करके यही कहती कि जय बजरंगबली..यह क्या हो रहा है मेरी जिंदगी के साथ..और अब क्या शेष रह गया है होने को? आंखों के सामने कभी मां की तस्वीर आती तो कभी भाई तो कभी लक्ष्मी दीदी की तो कभी जीजा की..।
पौ फटने पर जब लोग शौच के लिए रेलवे की पटरियों की तरफ आए तो मुझे पड़ा पाया। गांव वाले आए। मेरा नाम-पता पूछा। शायद आधी बेहोशी में मैंने घर का टेलीफोन नंबर बता दिया था। जीजा ने उनसे कहा कि इतनी मदद और कर दीजिए कि अरुणिमा को किसी अस्पताल तक पंहुचा दीजिए।
सुबह के सात बजे के करीब मुझे अस्पताल पंहुचाया गया। मेरी बाईं टांग काट दी गई। मीडिया द्वारा शोर मचाने पर मुझे लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। वहां से फिर मुझे एम्स ले जाया गया। डाक्टरों ने मुझे बचा लिया। सीआईएसफ ने नौकरी देने की घोषणा की। तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी ने भी नौकरी देने की घोषणा की। तत्कालीन खेल मंत्री अजय माकन ने काफी राहतें दीं।
समाज को ये बातें हजम नहीं हुईं। इलाज के साथ ही विवाद भी शुरू हो गया कि मैं राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी नहीं हूं। मैंने इंटर भी पास नहीं किया है। मैं किसी के साथ भाग रही थी। मेरी शादी हो चुकी है। मैंने किसी प्रतियोगिता में भाग नहीं लिया। मैं झूठी हूं, फरेबी हूं। यूपी के एडीजी रेल एके जैन ने तो बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस करके मुझे झूठा साबित किया और कहा कि मैंने ट्रेन से कूदकर आत्महत्या की कोशिश की थी या फिर मैं उस बीहड़ सुनसान इलाके में अकेले आधी रात को रेलवे लाइन पार कर रही थी, जब यह दुर्घटना घटी।
मैंने गुस्से में एके जैन को फोन लगाकर खूब सुनाया कि क्या आपका कोई सिपाही ट्रेन में मौजूद था जो बताता कि उस दिन ट्रेन में मुझे लूटने की कोशिश नहीं की गई थी? क्या रातभर पटरियों पर पड़े होने के बावजूद जीआरपी ने मेरी कोई मदद की? मन करता था कि मैं एके जैन के पास जाकर उनका मुंह नोच लूं।
एम्स में मेरी मां, मेरी बहन और जीजा ने मुझे समझाया कि और लड़कियों के साथ क्या-क्या नहीं होता, लोग तेजाब तक डाल देते हैं, तुम्हारा तो बस एक पैर ही गया है, अब आगे की योजना बनाओ। बहन की प्रेरणा ने मेरे मन में यह बात ला दी कि कुछ ऐसा करूं जिसे दुनिया देखे। क्यों न एवरेस्ट पर चढ़ जाऊं? बिना पैर के एवरेस्ट पर चढ़ना ही मुझे सबसे बेहतर विचार लगा। असली चुनौती यही है।
आसान काम तो हर कोई कर लेता है। मेरी मुश्किल को आसान कर दिया अमेरिका निवासी डॉ राकेश श्रीवास्तव और उनके भाई शैलेश श्रीवास्तव ने जो इनोवेटिव नाम से एक संस्था चलाते हैं। उन्होंने मेरे लिए एक कृत्रिम पैर बनवाया जिसको पहनकर मैं चलती हूं।
मुझे अजय माकन ने इतनी सहूलियतें दीं और वह भी तब, जब उत्तर प्रदेश की सरकार मुझे मुल्जिम बताने के लिए उतारू थी और मीडिया मेरे पीछे पड़ गया था। खिलाड़ियों का संगठन 'साई' भी मुझे खिलाड़ी नहीं मानता था। मैं चीख-चीख कर कहा करती थी कि "मैं जिंदा हूं, मुझसे आकर पूछो, मैं झूठी नहीं हूं।"
लेकिन मुसीबतों और परीक्षाओं का अंत अभी नहीं हुआ था। चार महीने एम्स में गुजारने के बाद जब मैं वापस लौटी तो मेरी बदनामी मेरा पीछा कर रही थी। मुझे विकलांगता का प्रमाण पत्र मिल गया था और रेल से पास भी। लेकिन मुझे ट्रेन के सेंकड क्लास की आरक्षित बोगी में चलने के लिए टिकट नहीं मिलता था। मुझे दौड़ाया जाता, शक किया जाता। मेरे लिए विकलांग बोगी में चलना भी अपमान के कड़वे घूंट पीने के समान ही था।
आरपीएफ के सिपाही मेरी टांग खुलवाकर देखते और फिर पास मांगकर उसकी जांच करते। एक बार तो हरिद्वार में जब मुझे टिकट नहीं मिला तो स्टेशन मास्टर ने बहुत मदद की। उन्होंने काउंटर क्लर्क से टिकट देने को कहा लेकिन उसने कहा कि उसे मेरे पास पर उसे शक है। उसमें हस्ताक्षर ठीक नहीं हैं। अंत में स्टेशन मास्टर ने अपने दम पर मुझे जबरदस्ती ट्रेन में बैठाया।
ममता बनर्जी ने नौकरी देने की घोषणा की थी। जब मैं कृत्रिम टांगों से चलकर रेल मंत्रालय पंहुची तो उनके पीए ने मिलाने से मना कर दिया। तीन बार निराश होकर मैं लौट आई। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विवेक सहाय से मिलने में मैं किसी तरह कामयाब हो गई तो उनका जवाब सुनकर हैरत हुई। उन्होंने सारे कागजात देखे और फिर कहा कि पहले जीआरपी से बढ़िया सी रिपोर्ट लगवाकर लाओ। ये थी रेलवे के मंत्री और अध्यक्ष की मानवीयता।
मैंने हिम्मत नहीं हारी। कहा कि इन सबको अपनी ताकत दिखाऊंगी, ये सब मुझे पहचानेंगे और खुद चलकर मेरे पास आएंगे। मुझे बछेंद्री पाल ने काफी प्रोत्साहित किया। उन्हीं के प्रशिक्षण की बदौलत मैं आज आसमान के इतने करीब हूं। मैं माउंट एवरेस्ट की चोटी पर हूं जहां पर हर कोई नहीं पंहुच पाता है। ऐसा लगता है कि बस हाथ उठाऊं और छू लूं।टिप्पणियां
मुझे बुखार आ गया। और नीचे भी लौटना था उस दुनिया में जो नहीं चाहती थी कि मैं यहां तक पहुंचूं। लेकिन कुछ लोग थे जिनका मेरे पर विश्वास था और उन्हीं के भरोसे मैं यहां तक पहुंची हूं। मेरी इच्छा अपने जैसे विकलांग लोगों की मदद करने की है, जिन्हें समाज ठुकराता है। मैं चाहती हूं कि उनके लिए कोई खेल अकादमी बनाऊं, उन्नाव में साढ़े सात बीघा जमीन मिल गई है। साढ़े तीन बीघा और खरीदनी है।
इस अकादमी से जब मेरी जैसी ऊंची चाहत रखने वाले निकलेंगे तब मुझे लगेगा कि मेरे साथ जो कुछ हुआ वह सब ठीक था क्योंकि अगर ये सब न होता तो आने वाली पीढ़ी को हौसला कौन दे पाता..! अगले महीने की 10 तारीख को मैं 27 वर्ष की हो जाऊंगी। मुझमें अभी बहुत सी ऊंचाइयों को छूने का हौसला बाकी है। बस, मुझे कोई चुनौती दे दीजिए..!"
वह दिन था 11 अप्रैल 2011 का। मुझे नहीं मालूम था कि मेरी दुनिया बदलने जा रही है। पद्मावती एक्सप्रेस ट्रेन के चालू डिब्बे में खिड़की के किनारे एक सीट पर बैठी रात के अंधेरे में जुगनू जैसी किसी रोशनी की तलाश कर रही थी कि तभी कुछ 'लोफर टाइप' के लड़के आए और उन्होंने मेरे गले में पड़ी चेन पर झपट्टा मारा। मुझे हंसी आ गई। इन लड़कों की क्या औकात कि मुझसे मेरी चीज छीन लें? मैंने लड़के का हाथ पकड़कर मरोड़ दिया। लेकिन तभी दूसरे लड़के ने मेरे गले में हाथ डाला तो मेरे गरदन हटा लेने पर उसके हाथ में चेन की जगह मेरी शर्ट का कालर आ गया। उसने कालर पकड़कर घसीटा और दो-तीन लड़कों ने मुझे पकड़कर दरवाजे के पास खींच लिया।
मेरे लिए उनसे निबटना मुश्किल काम नहीं था लेकिन तभी लड़कों ने मेरे ऊपर ऐसी लात मारी कि मैं चलती ट्रेन से बाहर गिट्टियों के बीच लोटती सी नजर आई..। पता नहीं क्या हुआ, मुझे कुछ पता नहीं कि मेरे पैर के ऊपर से ट्रेन के कितने पहिए गुजरते चले गए। वे पहिए पद्मावत एक्सप्रेस के थे या दूसरी पटरी के ऊपर से गुजरने वाली ट्रेनों के? उस समय रात के डेढ़ बजे थे और ट्रेन बरेली के पास थी। लेकिन कुछ सोचने-समझने से पहले दर्द के आवेग ने मुझे बेसुध कर दिया।
बीच-बीच में मेरी तंद्रा टूटती तो देखती कि मैं ट्रेन की पटरियों के किनारे पड़ी हूं, मेरी एक टांग कट गई थी बस कुछ मांस भर ने उसे मेरे शरीर से जोड़े रखा था। बगल की पटरी से रह-रहकर ट्रेनें गुजर रही थीं। पटरी और मेरे बीच मात्र कुछ इंचों का ही फासला था। मैं अपने को पटरी से दूर करना चाहती थी लेकिन मेरे पास इतना दम कहां था, उस पर भीषण दर्द। मैं उस बीहड़ रात में उसी तरह पड़ी रही। जब मुझे होश आता तो बजरंगबली को याद करके यही कहती कि जय बजरंगबली..यह क्या हो रहा है मेरी जिंदगी के साथ..और अब क्या शेष रह गया है होने को? आंखों के सामने कभी मां की तस्वीर आती तो कभी भाई तो कभी लक्ष्मी दीदी की तो कभी जीजा की..।
पौ फटने पर जब लोग शौच के लिए रेलवे की पटरियों की तरफ आए तो मुझे पड़ा पाया। गांव वाले आए। मेरा नाम-पता पूछा। शायद आधी बेहोशी में मैंने घर का टेलीफोन नंबर बता दिया था। जीजा ने उनसे कहा कि इतनी मदद और कर दीजिए कि अरुणिमा को किसी अस्पताल तक पंहुचा दीजिए।
सुबह के सात बजे के करीब मुझे अस्पताल पंहुचाया गया। मेरी बाईं टांग काट दी गई। मीडिया द्वारा शोर मचाने पर मुझे लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। वहां से फिर मुझे एम्स ले जाया गया। डाक्टरों ने मुझे बचा लिया। सीआईएसफ ने नौकरी देने की घोषणा की। तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी ने भी नौकरी देने की घोषणा की। तत्कालीन खेल मंत्री अजय माकन ने काफी राहतें दीं।
समाज को ये बातें हजम नहीं हुईं। इलाज के साथ ही विवाद भी शुरू हो गया कि मैं राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी नहीं हूं। मैंने इंटर भी पास नहीं किया है। मैं किसी के साथ भाग रही थी। मेरी शादी हो चुकी है। मैंने किसी प्रतियोगिता में भाग नहीं लिया। मैं झूठी हूं, फरेबी हूं। यूपी के एडीजी रेल एके जैन ने तो बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस करके मुझे झूठा साबित किया और कहा कि मैंने ट्रेन से कूदकर आत्महत्या की कोशिश की थी या फिर मैं उस बीहड़ सुनसान इलाके में अकेले आधी रात को रेलवे लाइन पार कर रही थी, जब यह दुर्घटना घटी।
मैंने गुस्से में एके जैन को फोन लगाकर खूब सुनाया कि क्या आपका कोई सिपाही ट्रेन में मौजूद था जो बताता कि उस दिन ट्रेन में मुझे लूटने की कोशिश नहीं की गई थी? क्या रातभर पटरियों पर पड़े होने के बावजूद जीआरपी ने मेरी कोई मदद की? मन करता था कि मैं एके जैन के पास जाकर उनका मुंह नोच लूं।
एम्स में मेरी मां, मेरी बहन और जीजा ने मुझे समझाया कि और लड़कियों के साथ क्या-क्या नहीं होता, लोग तेजाब तक डाल देते हैं, तुम्हारा तो बस एक पैर ही गया है, अब आगे की योजना बनाओ। बहन की प्रेरणा ने मेरे मन में यह बात ला दी कि कुछ ऐसा करूं जिसे दुनिया देखे। क्यों न एवरेस्ट पर चढ़ जाऊं? बिना पैर के एवरेस्ट पर चढ़ना ही मुझे सबसे बेहतर विचार लगा। असली चुनौती यही है।
आसान काम तो हर कोई कर लेता है। मेरी मुश्किल को आसान कर दिया अमेरिका निवासी डॉ राकेश श्रीवास्तव और उनके भाई शैलेश श्रीवास्तव ने जो इनोवेटिव नाम से एक संस्था चलाते हैं। उन्होंने मेरे लिए एक कृत्रिम पैर बनवाया जिसको पहनकर मैं चलती हूं।
मुझे अजय माकन ने इतनी सहूलियतें दीं और वह भी तब, जब उत्तर प्रदेश की सरकार मुझे मुल्जिम बताने के लिए उतारू थी और मीडिया मेरे पीछे पड़ गया था। खिलाड़ियों का संगठन 'साई' भी मुझे खिलाड़ी नहीं मानता था। मैं चीख-चीख कर कहा करती थी कि "मैं जिंदा हूं, मुझसे आकर पूछो, मैं झूठी नहीं हूं।"
लेकिन मुसीबतों और परीक्षाओं का अंत अभी नहीं हुआ था। चार महीने एम्स में गुजारने के बाद जब मैं वापस लौटी तो मेरी बदनामी मेरा पीछा कर रही थी। मुझे विकलांगता का प्रमाण पत्र मिल गया था और रेल से पास भी। लेकिन मुझे ट्रेन के सेंकड क्लास की आरक्षित बोगी में चलने के लिए टिकट नहीं मिलता था। मुझे दौड़ाया जाता, शक किया जाता। मेरे लिए विकलांग बोगी में चलना भी अपमान के कड़वे घूंट पीने के समान ही था।
आरपीएफ के सिपाही मेरी टांग खुलवाकर देखते और फिर पास मांगकर उसकी जांच करते। एक बार तो हरिद्वार में जब मुझे टिकट नहीं मिला तो स्टेशन मास्टर ने बहुत मदद की। उन्होंने काउंटर क्लर्क से टिकट देने को कहा लेकिन उसने कहा कि उसे मेरे पास पर उसे शक है। उसमें हस्ताक्षर ठीक नहीं हैं। अंत में स्टेशन मास्टर ने अपने दम पर मुझे जबरदस्ती ट्रेन में बैठाया।
ममता बनर्जी ने नौकरी देने की घोषणा की थी। जब मैं कृत्रिम टांगों से चलकर रेल मंत्रालय पंहुची तो उनके पीए ने मिलाने से मना कर दिया। तीन बार निराश होकर मैं लौट आई। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विवेक सहाय से मिलने में मैं किसी तरह कामयाब हो गई तो उनका जवाब सुनकर हैरत हुई। उन्होंने सारे कागजात देखे और फिर कहा कि पहले जीआरपी से बढ़िया सी रिपोर्ट लगवाकर लाओ। ये थी रेलवे के मंत्री और अध्यक्ष की मानवीयता।
मैंने हिम्मत नहीं हारी। कहा कि इन सबको अपनी ताकत दिखाऊंगी, ये सब मुझे पहचानेंगे और खुद चलकर मेरे पास आएंगे। मुझे बछेंद्री पाल ने काफी प्रोत्साहित किया। उन्हीं के प्रशिक्षण की बदौलत मैं आज आसमान के इतने करीब हूं। मैं माउंट एवरेस्ट की चोटी पर हूं जहां पर हर कोई नहीं पंहुच पाता है। ऐसा लगता है कि बस हाथ उठाऊं और छू लूं।टिप्पणियां
मुझे बुखार आ गया। और नीचे भी लौटना था उस दुनिया में जो नहीं चाहती थी कि मैं यहां तक पहुंचूं। लेकिन कुछ लोग थे जिनका मेरे पर विश्वास था और उन्हीं के भरोसे मैं यहां तक पहुंची हूं। मेरी इच्छा अपने जैसे विकलांग लोगों की मदद करने की है, जिन्हें समाज ठुकराता है। मैं चाहती हूं कि उनके लिए कोई खेल अकादमी बनाऊं, उन्नाव में साढ़े सात बीघा जमीन मिल गई है। साढ़े तीन बीघा और खरीदनी है।
इस अकादमी से जब मेरी जैसी ऊंची चाहत रखने वाले निकलेंगे तब मुझे लगेगा कि मेरे साथ जो कुछ हुआ वह सब ठीक था क्योंकि अगर ये सब न होता तो आने वाली पीढ़ी को हौसला कौन दे पाता..! अगले महीने की 10 तारीख को मैं 27 वर्ष की हो जाऊंगी। मुझमें अभी बहुत सी ऊंचाइयों को छूने का हौसला बाकी है। बस, मुझे कोई चुनौती दे दीजिए..!"
मेरे लिए उनसे निबटना मुश्किल काम नहीं था लेकिन तभी लड़कों ने मेरे ऊपर ऐसी लात मारी कि मैं चलती ट्रेन से बाहर गिट्टियों के बीच लोटती सी नजर आई..। पता नहीं क्या हुआ, मुझे कुछ पता नहीं कि मेरे पैर के ऊपर से ट्रेन के कितने पहिए गुजरते चले गए। वे पहिए पद्मावत एक्सप्रेस के थे या दूसरी पटरी के ऊपर से गुजरने वाली ट्रेनों के? उस समय रात के डेढ़ बजे थे और ट्रेन बरेली के पास थी। लेकिन कुछ सोचने-समझने से पहले दर्द के आवेग ने मुझे बेसुध कर दिया।
बीच-बीच में मेरी तंद्रा टूटती तो देखती कि मैं ट्रेन की पटरियों के किनारे पड़ी हूं, मेरी एक टांग कट गई थी बस कुछ मांस भर ने उसे मेरे शरीर से जोड़े रखा था। बगल की पटरी से रह-रहकर ट्रेनें गुजर रही थीं। पटरी और मेरे बीच मात्र कुछ इंचों का ही फासला था। मैं अपने को पटरी से दूर करना चाहती थी लेकिन मेरे पास इतना दम कहां था, उस पर भीषण दर्द। मैं उस बीहड़ रात में उसी तरह पड़ी रही। जब मुझे होश आता तो बजरंगबली को याद करके यही कहती कि जय बजरंगबली..यह क्या हो रहा है मेरी जिंदगी के साथ..और अब क्या शेष रह गया है होने को? आंखों के सामने कभी मां की तस्वीर आती तो कभी भाई तो कभी लक्ष्मी दीदी की तो कभी जीजा की..।
पौ फटने पर जब लोग शौच के लिए रेलवे की पटरियों की तरफ आए तो मुझे पड़ा पाया। गांव वाले आए। मेरा नाम-पता पूछा। शायद आधी बेहोशी में मैंने घर का टेलीफोन नंबर बता दिया था। जीजा ने उनसे कहा कि इतनी मदद और कर दीजिए कि अरुणिमा को किसी अस्पताल तक पंहुचा दीजिए।
सुबह के सात बजे के करीब मुझे अस्पताल पंहुचाया गया। मेरी बाईं टांग काट दी गई। मीडिया द्वारा शोर मचाने पर मुझे लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। वहां से फिर मुझे एम्स ले जाया गया। डाक्टरों ने मुझे बचा लिया। सीआईएसफ ने नौकरी देने की घोषणा की। तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी ने भी नौकरी देने की घोषणा की। तत्कालीन खेल मंत्री अजय माकन ने काफी राहतें दीं।
समाज को ये बातें हजम नहीं हुईं। इलाज के साथ ही विवाद भी शुरू हो गया कि मैं राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी नहीं हूं। मैंने इंटर भी पास नहीं किया है। मैं किसी के साथ भाग रही थी। मेरी शादी हो चुकी है। मैंने किसी प्रतियोगिता में भाग नहीं लिया। मैं झूठी हूं, फरेबी हूं। यूपी के एडीजी रेल एके जैन ने तो बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस करके मुझे झूठा साबित किया और कहा कि मैंने ट्रेन से कूदकर आत्महत्या की कोशिश की थी या फिर मैं उस बीहड़ सुनसान इलाके में अकेले आधी रात को रेलवे लाइन पार कर रही थी, जब यह दुर्घटना घटी।
मैंने गुस्से में एके जैन को फोन लगाकर खूब सुनाया कि क्या आपका कोई सिपाही ट्रेन में मौजूद था जो बताता कि उस दिन ट्रेन में मुझे लूटने की कोशिश नहीं की गई थी? क्या रातभर पटरियों पर पड़े होने के बावजूद जीआरपी ने मेरी कोई मदद की? मन करता था कि मैं एके जैन के पास जाकर उनका मुंह नोच लूं।
एम्स में मेरी मां, मेरी बहन और जीजा ने मुझे समझाया कि और लड़कियों के साथ क्या-क्या नहीं होता, लोग तेजाब तक डाल देते हैं, तुम्हारा तो बस एक पैर ही गया है, अब आगे की योजना बनाओ। बहन की प्रेरणा ने मेरे मन में यह बात ला दी कि कुछ ऐसा करूं जिसे दुनिया देखे। क्यों न एवरेस्ट पर चढ़ जाऊं? बिना पैर के एवरेस्ट पर चढ़ना ही मुझे सबसे बेहतर विचार लगा। असली चुनौती यही है।
आसान काम तो हर कोई कर लेता है। मेरी मुश्किल को आसान कर दिया अमेरिका निवासी डॉ राकेश श्रीवास्तव और उनके भाई शैलेश श्रीवास्तव ने जो इनोवेटिव नाम से एक संस्था चलाते हैं। उन्होंने मेरे लिए एक कृत्रिम पैर बनवाया जिसको पहनकर मैं चलती हूं।
मुझे अजय माकन ने इतनी सहूलियतें दीं और वह भी तब, जब उत्तर प्रदेश की सरकार मुझे मुल्जिम बताने के लिए उतारू थी और मीडिया मेरे पीछे पड़ गया था। खिलाड़ियों का संगठन 'साई' भी मुझे खिलाड़ी नहीं मानता था। मैं चीख-चीख कर कहा करती थी कि "मैं जिंदा हूं, मुझसे आकर पूछो, मैं झूठी नहीं हूं।"
लेकिन मुसीबतों और परीक्षाओं का अंत अभी नहीं हुआ था। चार महीने एम्स में गुजारने के बाद जब मैं वापस लौटी तो मेरी बदनामी मेरा पीछा कर रही थी। मुझे विकलांगता का प्रमाण पत्र मिल गया था और रेल से पास भी। लेकिन मुझे ट्रेन के सेंकड क्लास की आरक्षित बोगी में चलने के लिए टिकट नहीं मिलता था। मुझे दौड़ाया जाता, शक किया जाता। मेरे लिए विकलांग बोगी में चलना भी अपमान के कड़वे घूंट पीने के समान ही था।
आरपीएफ के सिपाही मेरी टांग खुलवाकर देखते और फिर पास मांगकर उसकी जांच करते। एक बार तो हरिद्वार में जब मुझे टिकट नहीं मिला तो स्टेशन मास्टर ने बहुत मदद की। उन्होंने काउंटर क्लर्क से टिकट देने को कहा लेकिन उसने कहा कि उसे मेरे पास पर उसे शक है। उसमें हस्ताक्षर ठीक नहीं हैं। अंत में स्टेशन मास्टर ने अपने दम पर मुझे जबरदस्ती ट्रेन में बैठाया।
ममता बनर्जी ने नौकरी देने की घोषणा की थी। जब मैं कृत्रिम टांगों से चलकर रेल मंत्रालय पंहुची तो उनके पीए ने मिलाने से मना कर दिया। तीन बार निराश होकर मैं लौट आई। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विवेक सहाय से मिलने में मैं किसी तरह कामयाब हो गई तो उनका जवाब सुनकर हैरत हुई। उन्होंने सारे कागजात देखे और फिर कहा कि पहले जीआरपी से बढ़िया सी रिपोर्ट लगवाकर लाओ। ये थी रेलवे के मंत्री और अध्यक्ष की मानवीयता।
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मुझे बुखार आ गया। और नीचे भी लौटना था उस दुनिया में जो नहीं चाहती थी कि मैं यहां तक पहुंचूं। लेकिन कुछ लोग थे जिनका मेरे पर विश्वास था और उन्हीं के भरोसे मैं यहां तक पहुंची हूं। मेरी इच्छा अपने जैसे विकलांग लोगों की मदद करने की है, जिन्हें समाज ठुकराता है। मैं चाहती हूं कि उनके लिए कोई खेल अकादमी बनाऊं, उन्नाव में साढ़े सात बीघा जमीन मिल गई है। साढ़े तीन बीघा और खरीदनी है।
इस अकादमी से जब मेरी जैसी ऊंची चाहत रखने वाले निकलेंगे तब मुझे लगेगा कि मेरे साथ जो कुछ हुआ वह सब ठीक था क्योंकि अगर ये सब न होता तो आने वाली पीढ़ी को हौसला कौन दे पाता..! अगले महीने की 10 तारीख को मैं 27 वर्ष की हो जाऊंगी। मुझमें अभी बहुत सी ऊंचाइयों को छूने का हौसला बाकी है। बस, मुझे कोई चुनौती दे दीजिए..!"
बीच-बीच में मेरी तंद्रा टूटती तो देखती कि मैं ट्रेन की पटरियों के किनारे पड़ी हूं, मेरी एक टांग कट गई थी बस कुछ मांस भर ने उसे मेरे शरीर से जोड़े रखा था। बगल की पटरी से रह-रहकर ट्रेनें गुजर रही थीं। पटरी और मेरे बीच मात्र कुछ इंचों का ही फासला था। मैं अपने को पटरी से दूर करना चाहती थी लेकिन मेरे पास इतना दम कहां था, उस पर भीषण दर्द। मैं उस बीहड़ रात में उसी तरह पड़ी रही। जब मुझे होश आता तो बजरंगबली को याद करके यही कहती कि जय बजरंगबली..यह क्या हो रहा है मेरी जिंदगी के साथ..और अब क्या शेष रह गया है होने को? आंखों के सामने कभी मां की तस्वीर आती तो कभी भाई तो कभी लक्ष्मी दीदी की तो कभी जीजा की..।
पौ फटने पर जब लोग शौच के लिए रेलवे की पटरियों की तरफ आए तो मुझे पड़ा पाया। गांव वाले आए। मेरा नाम-पता पूछा। शायद आधी बेहोशी में मैंने घर का टेलीफोन नंबर बता दिया था। जीजा ने उनसे कहा कि इतनी मदद और कर दीजिए कि अरुणिमा को किसी अस्पताल तक पंहुचा दीजिए।
सुबह के सात बजे के करीब मुझे अस्पताल पंहुचाया गया। मेरी बाईं टांग काट दी गई। मीडिया द्वारा शोर मचाने पर मुझे लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। वहां से फिर मुझे एम्स ले जाया गया। डाक्टरों ने मुझे बचा लिया। सीआईएसफ ने नौकरी देने की घोषणा की। तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी ने भी नौकरी देने की घोषणा की। तत्कालीन खेल मंत्री अजय माकन ने काफी राहतें दीं।
समाज को ये बातें हजम नहीं हुईं। इलाज के साथ ही विवाद भी शुरू हो गया कि मैं राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी नहीं हूं। मैंने इंटर भी पास नहीं किया है। मैं किसी के साथ भाग रही थी। मेरी शादी हो चुकी है। मैंने किसी प्रतियोगिता में भाग नहीं लिया। मैं झूठी हूं, फरेबी हूं। यूपी के एडीजी रेल एके जैन ने तो बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस करके मुझे झूठा साबित किया और कहा कि मैंने ट्रेन से कूदकर आत्महत्या की कोशिश की थी या फिर मैं उस बीहड़ सुनसान इलाके में अकेले आधी रात को रेलवे लाइन पार कर रही थी, जब यह दुर्घटना घटी।
मैंने गुस्से में एके जैन को फोन लगाकर खूब सुनाया कि क्या आपका कोई सिपाही ट्रेन में मौजूद था जो बताता कि उस दिन ट्रेन में मुझे लूटने की कोशिश नहीं की गई थी? क्या रातभर पटरियों पर पड़े होने के बावजूद जीआरपी ने मेरी कोई मदद की? मन करता था कि मैं एके जैन के पास जाकर उनका मुंह नोच लूं।
एम्स में मेरी मां, मेरी बहन और जीजा ने मुझे समझाया कि और लड़कियों के साथ क्या-क्या नहीं होता, लोग तेजाब तक डाल देते हैं, तुम्हारा तो बस एक पैर ही गया है, अब आगे की योजना बनाओ। बहन की प्रेरणा ने मेरे मन में यह बात ला दी कि कुछ ऐसा करूं जिसे दुनिया देखे। क्यों न एवरेस्ट पर चढ़ जाऊं? बिना पैर के एवरेस्ट पर चढ़ना ही मुझे सबसे बेहतर विचार लगा। असली चुनौती यही है।
आसान काम तो हर कोई कर लेता है। मेरी मुश्किल को आसान कर दिया अमेरिका निवासी डॉ राकेश श्रीवास्तव और उनके भाई शैलेश श्रीवास्तव ने जो इनोवेटिव नाम से एक संस्था चलाते हैं। उन्होंने मेरे लिए एक कृत्रिम पैर बनवाया जिसको पहनकर मैं चलती हूं।
मुझे अजय माकन ने इतनी सहूलियतें दीं और वह भी तब, जब उत्तर प्रदेश की सरकार मुझे मुल्जिम बताने के लिए उतारू थी और मीडिया मेरे पीछे पड़ गया था। खिलाड़ियों का संगठन 'साई' भी मुझे खिलाड़ी नहीं मानता था। मैं चीख-चीख कर कहा करती थी कि "मैं जिंदा हूं, मुझसे आकर पूछो, मैं झूठी नहीं हूं।"
लेकिन मुसीबतों और परीक्षाओं का अंत अभी नहीं हुआ था। चार महीने एम्स में गुजारने के बाद जब मैं वापस लौटी तो मेरी बदनामी मेरा पीछा कर रही थी। मुझे विकलांगता का प्रमाण पत्र मिल गया था और रेल से पास भी। लेकिन मुझे ट्रेन के सेंकड क्लास की आरक्षित बोगी में चलने के लिए टिकट नहीं मिलता था। मुझे दौड़ाया जाता, शक किया जाता। मेरे लिए विकलांग बोगी में चलना भी अपमान के कड़वे घूंट पीने के समान ही था।
आरपीएफ के सिपाही मेरी टांग खुलवाकर देखते और फिर पास मांगकर उसकी जांच करते। एक बार तो हरिद्वार में जब मुझे टिकट नहीं मिला तो स्टेशन मास्टर ने बहुत मदद की। उन्होंने काउंटर क्लर्क से टिकट देने को कहा लेकिन उसने कहा कि उसे मेरे पास पर उसे शक है। उसमें हस्ताक्षर ठीक नहीं हैं। अंत में स्टेशन मास्टर ने अपने दम पर मुझे जबरदस्ती ट्रेन में बैठाया।
ममता बनर्जी ने नौकरी देने की घोषणा की थी। जब मैं कृत्रिम टांगों से चलकर रेल मंत्रालय पंहुची तो उनके पीए ने मिलाने से मना कर दिया। तीन बार निराश होकर मैं लौट आई। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विवेक सहाय से मिलने में मैं किसी तरह कामयाब हो गई तो उनका जवाब सुनकर हैरत हुई। उन्होंने सारे कागजात देखे और फिर कहा कि पहले जीआरपी से बढ़िया सी रिपोर्ट लगवाकर लाओ। ये थी रेलवे के मंत्री और अध्यक्ष की मानवीयता।
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मुझे बुखार आ गया। और नीचे भी लौटना था उस दुनिया में जो नहीं चाहती थी कि मैं यहां तक पहुंचूं। लेकिन कुछ लोग थे जिनका मेरे पर विश्वास था और उन्हीं के भरोसे मैं यहां तक पहुंची हूं। मेरी इच्छा अपने जैसे विकलांग लोगों की मदद करने की है, जिन्हें समाज ठुकराता है। मैं चाहती हूं कि उनके लिए कोई खेल अकादमी बनाऊं, उन्नाव में साढ़े सात बीघा जमीन मिल गई है। साढ़े तीन बीघा और खरीदनी है।
इस अकादमी से जब मेरी जैसी ऊंची चाहत रखने वाले निकलेंगे तब मुझे लगेगा कि मेरे साथ जो कुछ हुआ वह सब ठीक था क्योंकि अगर ये सब न होता तो आने वाली पीढ़ी को हौसला कौन दे पाता..! अगले महीने की 10 तारीख को मैं 27 वर्ष की हो जाऊंगी। मुझमें अभी बहुत सी ऊंचाइयों को छूने का हौसला बाकी है। बस, मुझे कोई चुनौती दे दीजिए..!"
पौ फटने पर जब लोग शौच के लिए रेलवे की पटरियों की तरफ आए तो मुझे पड़ा पाया। गांव वाले आए। मेरा नाम-पता पूछा। शायद आधी बेहोशी में मैंने घर का टेलीफोन नंबर बता दिया था। जीजा ने उनसे कहा कि इतनी मदद और कर दीजिए कि अरुणिमा को किसी अस्पताल तक पंहुचा दीजिए।
सुबह के सात बजे के करीब मुझे अस्पताल पंहुचाया गया। मेरी बाईं टांग काट दी गई। मीडिया द्वारा शोर मचाने पर मुझे लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। वहां से फिर मुझे एम्स ले जाया गया। डाक्टरों ने मुझे बचा लिया। सीआईएसफ ने नौकरी देने की घोषणा की। तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी ने भी नौकरी देने की घोषणा की। तत्कालीन खेल मंत्री अजय माकन ने काफी राहतें दीं।
समाज को ये बातें हजम नहीं हुईं। इलाज के साथ ही विवाद भी शुरू हो गया कि मैं राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी नहीं हूं। मैंने इंटर भी पास नहीं किया है। मैं किसी के साथ भाग रही थी। मेरी शादी हो चुकी है। मैंने किसी प्रतियोगिता में भाग नहीं लिया। मैं झूठी हूं, फरेबी हूं। यूपी के एडीजी रेल एके जैन ने तो बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस करके मुझे झूठा साबित किया और कहा कि मैंने ट्रेन से कूदकर आत्महत्या की कोशिश की थी या फिर मैं उस बीहड़ सुनसान इलाके में अकेले आधी रात को रेलवे लाइन पार कर रही थी, जब यह दुर्घटना घटी।
मैंने गुस्से में एके जैन को फोन लगाकर खूब सुनाया कि क्या आपका कोई सिपाही ट्रेन में मौजूद था जो बताता कि उस दिन ट्रेन में मुझे लूटने की कोशिश नहीं की गई थी? क्या रातभर पटरियों पर पड़े होने के बावजूद जीआरपी ने मेरी कोई मदद की? मन करता था कि मैं एके जैन के पास जाकर उनका मुंह नोच लूं।
एम्स में मेरी मां, मेरी बहन और जीजा ने मुझे समझाया कि और लड़कियों के साथ क्या-क्या नहीं होता, लोग तेजाब तक डाल देते हैं, तुम्हारा तो बस एक पैर ही गया है, अब आगे की योजना बनाओ। बहन की प्रेरणा ने मेरे मन में यह बात ला दी कि कुछ ऐसा करूं जिसे दुनिया देखे। क्यों न एवरेस्ट पर चढ़ जाऊं? बिना पैर के एवरेस्ट पर चढ़ना ही मुझे सबसे बेहतर विचार लगा। असली चुनौती यही है।
आसान काम तो हर कोई कर लेता है। मेरी मुश्किल को आसान कर दिया अमेरिका निवासी डॉ राकेश श्रीवास्तव और उनके भाई शैलेश श्रीवास्तव ने जो इनोवेटिव नाम से एक संस्था चलाते हैं। उन्होंने मेरे लिए एक कृत्रिम पैर बनवाया जिसको पहनकर मैं चलती हूं।
मुझे अजय माकन ने इतनी सहूलियतें दीं और वह भी तब, जब उत्तर प्रदेश की सरकार मुझे मुल्जिम बताने के लिए उतारू थी और मीडिया मेरे पीछे पड़ गया था। खिलाड़ियों का संगठन 'साई' भी मुझे खिलाड़ी नहीं मानता था। मैं चीख-चीख कर कहा करती थी कि "मैं जिंदा हूं, मुझसे आकर पूछो, मैं झूठी नहीं हूं।"
लेकिन मुसीबतों और परीक्षाओं का अंत अभी नहीं हुआ था। चार महीने एम्स में गुजारने के बाद जब मैं वापस लौटी तो मेरी बदनामी मेरा पीछा कर रही थी। मुझे विकलांगता का प्रमाण पत्र मिल गया था और रेल से पास भी। लेकिन मुझे ट्रेन के सेंकड क्लास की आरक्षित बोगी में चलने के लिए टिकट नहीं मिलता था। मुझे दौड़ाया जाता, शक किया जाता। मेरे लिए विकलांग बोगी में चलना भी अपमान के कड़वे घूंट पीने के समान ही था।
आरपीएफ के सिपाही मेरी टांग खुलवाकर देखते और फिर पास मांगकर उसकी जांच करते। एक बार तो हरिद्वार में जब मुझे टिकट नहीं मिला तो स्टेशन मास्टर ने बहुत मदद की। उन्होंने काउंटर क्लर्क से टिकट देने को कहा लेकिन उसने कहा कि उसे मेरे पास पर उसे शक है। उसमें हस्ताक्षर ठीक नहीं हैं। अंत में स्टेशन मास्टर ने अपने दम पर मुझे जबरदस्ती ट्रेन में बैठाया।
ममता बनर्जी ने नौकरी देने की घोषणा की थी। जब मैं कृत्रिम टांगों से चलकर रेल मंत्रालय पंहुची तो उनके पीए ने मिलाने से मना कर दिया। तीन बार निराश होकर मैं लौट आई। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विवेक सहाय से मिलने में मैं किसी तरह कामयाब हो गई तो उनका जवाब सुनकर हैरत हुई। उन्होंने सारे कागजात देखे और फिर कहा कि पहले जीआरपी से बढ़िया सी रिपोर्ट लगवाकर लाओ। ये थी रेलवे के मंत्री और अध्यक्ष की मानवीयता।
मैंने हिम्मत नहीं हारी। कहा कि इन सबको अपनी ताकत दिखाऊंगी, ये सब मुझे पहचानेंगे और खुद चलकर मेरे पास आएंगे। मुझे बछेंद्री पाल ने काफी प्रोत्साहित किया। उन्हीं के प्रशिक्षण की बदौलत मैं आज आसमान के इतने करीब हूं। मैं माउंट एवरेस्ट की चोटी पर हूं जहां पर हर कोई नहीं पंहुच पाता है। ऐसा लगता है कि बस हाथ उठाऊं और छू लूं।टिप्पणियां
मुझे बुखार आ गया। और नीचे भी लौटना था उस दुनिया में जो नहीं चाहती थी कि मैं यहां तक पहुंचूं। लेकिन कुछ लोग थे जिनका मेरे पर विश्वास था और उन्हीं के भरोसे मैं यहां तक पहुंची हूं। मेरी इच्छा अपने जैसे विकलांग लोगों की मदद करने की है, जिन्हें समाज ठुकराता है। मैं चाहती हूं कि उनके लिए कोई खेल अकादमी बनाऊं, उन्नाव में साढ़े सात बीघा जमीन मिल गई है। साढ़े तीन बीघा और खरीदनी है।
इस अकादमी से जब मेरी जैसी ऊंची चाहत रखने वाले निकलेंगे तब मुझे लगेगा कि मेरे साथ जो कुछ हुआ वह सब ठीक था क्योंकि अगर ये सब न होता तो आने वाली पीढ़ी को हौसला कौन दे पाता..! अगले महीने की 10 तारीख को मैं 27 वर्ष की हो जाऊंगी। मुझमें अभी बहुत सी ऊंचाइयों को छूने का हौसला बाकी है। बस, मुझे कोई चुनौती दे दीजिए..!"
सुबह के सात बजे के करीब मुझे अस्पताल पंहुचाया गया। मेरी बाईं टांग काट दी गई। मीडिया द्वारा शोर मचाने पर मुझे लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। वहां से फिर मुझे एम्स ले जाया गया। डाक्टरों ने मुझे बचा लिया। सीआईएसफ ने नौकरी देने की घोषणा की। तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी ने भी नौकरी देने की घोषणा की। तत्कालीन खेल मंत्री अजय माकन ने काफी राहतें दीं।
समाज को ये बातें हजम नहीं हुईं। इलाज के साथ ही विवाद भी शुरू हो गया कि मैं राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी नहीं हूं। मैंने इंटर भी पास नहीं किया है। मैं किसी के साथ भाग रही थी। मेरी शादी हो चुकी है। मैंने किसी प्रतियोगिता में भाग नहीं लिया। मैं झूठी हूं, फरेबी हूं। यूपी के एडीजी रेल एके जैन ने तो बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस करके मुझे झूठा साबित किया और कहा कि मैंने ट्रेन से कूदकर आत्महत्या की कोशिश की थी या फिर मैं उस बीहड़ सुनसान इलाके में अकेले आधी रात को रेलवे लाइन पार कर रही थी, जब यह दुर्घटना घटी।
मैंने गुस्से में एके जैन को फोन लगाकर खूब सुनाया कि क्या आपका कोई सिपाही ट्रेन में मौजूद था जो बताता कि उस दिन ट्रेन में मुझे लूटने की कोशिश नहीं की गई थी? क्या रातभर पटरियों पर पड़े होने के बावजूद जीआरपी ने मेरी कोई मदद की? मन करता था कि मैं एके जैन के पास जाकर उनका मुंह नोच लूं।
एम्स में मेरी मां, मेरी बहन और जीजा ने मुझे समझाया कि और लड़कियों के साथ क्या-क्या नहीं होता, लोग तेजाब तक डाल देते हैं, तुम्हारा तो बस एक पैर ही गया है, अब आगे की योजना बनाओ। बहन की प्रेरणा ने मेरे मन में यह बात ला दी कि कुछ ऐसा करूं जिसे दुनिया देखे। क्यों न एवरेस्ट पर चढ़ जाऊं? बिना पैर के एवरेस्ट पर चढ़ना ही मुझे सबसे बेहतर विचार लगा। असली चुनौती यही है।
आसान काम तो हर कोई कर लेता है। मेरी मुश्किल को आसान कर दिया अमेरिका निवासी डॉ राकेश श्रीवास्तव और उनके भाई शैलेश श्रीवास्तव ने जो इनोवेटिव नाम से एक संस्था चलाते हैं। उन्होंने मेरे लिए एक कृत्रिम पैर बनवाया जिसको पहनकर मैं चलती हूं।
मुझे अजय माकन ने इतनी सहूलियतें दीं और वह भी तब, जब उत्तर प्रदेश की सरकार मुझे मुल्जिम बताने के लिए उतारू थी और मीडिया मेरे पीछे पड़ गया था। खिलाड़ियों का संगठन 'साई' भी मुझे खिलाड़ी नहीं मानता था। मैं चीख-चीख कर कहा करती थी कि "मैं जिंदा हूं, मुझसे आकर पूछो, मैं झूठी नहीं हूं।"
लेकिन मुसीबतों और परीक्षाओं का अंत अभी नहीं हुआ था। चार महीने एम्स में गुजारने के बाद जब मैं वापस लौटी तो मेरी बदनामी मेरा पीछा कर रही थी। मुझे विकलांगता का प्रमाण पत्र मिल गया था और रेल से पास भी। लेकिन मुझे ट्रेन के सेंकड क्लास की आरक्षित बोगी में चलने के लिए टिकट नहीं मिलता था। मुझे दौड़ाया जाता, शक किया जाता। मेरे लिए विकलांग बोगी में चलना भी अपमान के कड़वे घूंट पीने के समान ही था।
आरपीएफ के सिपाही मेरी टांग खुलवाकर देखते और फिर पास मांगकर उसकी जांच करते। एक बार तो हरिद्वार में जब मुझे टिकट नहीं मिला तो स्टेशन मास्टर ने बहुत मदद की। उन्होंने काउंटर क्लर्क से टिकट देने को कहा लेकिन उसने कहा कि उसे मेरे पास पर उसे शक है। उसमें हस्ताक्षर ठीक नहीं हैं। अंत में स्टेशन मास्टर ने अपने दम पर मुझे जबरदस्ती ट्रेन में बैठाया।
ममता बनर्जी ने नौकरी देने की घोषणा की थी। जब मैं कृत्रिम टांगों से चलकर रेल मंत्रालय पंहुची तो उनके पीए ने मिलाने से मना कर दिया। तीन बार निराश होकर मैं लौट आई। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विवेक सहाय से मिलने में मैं किसी तरह कामयाब हो गई तो उनका जवाब सुनकर हैरत हुई। उन्होंने सारे कागजात देखे और फिर कहा कि पहले जीआरपी से बढ़िया सी रिपोर्ट लगवाकर लाओ। ये थी रेलवे के मंत्री और अध्यक्ष की मानवीयता।
मैंने हिम्मत नहीं हारी। कहा कि इन सबको अपनी ताकत दिखाऊंगी, ये सब मुझे पहचानेंगे और खुद चलकर मेरे पास आएंगे। मुझे बछेंद्री पाल ने काफी प्रोत्साहित किया। उन्हीं के प्रशिक्षण की बदौलत मैं आज आसमान के इतने करीब हूं। मैं माउंट एवरेस्ट की चोटी पर हूं जहां पर हर कोई नहीं पंहुच पाता है। ऐसा लगता है कि बस हाथ उठाऊं और छू लूं।टिप्पणियां
मुझे बुखार आ गया। और नीचे भी लौटना था उस दुनिया में जो नहीं चाहती थी कि मैं यहां तक पहुंचूं। लेकिन कुछ लोग थे जिनका मेरे पर विश्वास था और उन्हीं के भरोसे मैं यहां तक पहुंची हूं। मेरी इच्छा अपने जैसे विकलांग लोगों की मदद करने की है, जिन्हें समाज ठुकराता है। मैं चाहती हूं कि उनके लिए कोई खेल अकादमी बनाऊं, उन्नाव में साढ़े सात बीघा जमीन मिल गई है। साढ़े तीन बीघा और खरीदनी है।
इस अकादमी से जब मेरी जैसी ऊंची चाहत रखने वाले निकलेंगे तब मुझे लगेगा कि मेरे साथ जो कुछ हुआ वह सब ठीक था क्योंकि अगर ये सब न होता तो आने वाली पीढ़ी को हौसला कौन दे पाता..! अगले महीने की 10 तारीख को मैं 27 वर्ष की हो जाऊंगी। मुझमें अभी बहुत सी ऊंचाइयों को छूने का हौसला बाकी है। बस, मुझे कोई चुनौती दे दीजिए..!"
समाज को ये बातें हजम नहीं हुईं। इलाज के साथ ही विवाद भी शुरू हो गया कि मैं राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी नहीं हूं। मैंने इंटर भी पास नहीं किया है। मैं किसी के साथ भाग रही थी। मेरी शादी हो चुकी है। मैंने किसी प्रतियोगिता में भाग नहीं लिया। मैं झूठी हूं, फरेबी हूं। यूपी के एडीजी रेल एके जैन ने तो बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस करके मुझे झूठा साबित किया और कहा कि मैंने ट्रेन से कूदकर आत्महत्या की कोशिश की थी या फिर मैं उस बीहड़ सुनसान इलाके में अकेले आधी रात को रेलवे लाइन पार कर रही थी, जब यह दुर्घटना घटी।
मैंने गुस्से में एके जैन को फोन लगाकर खूब सुनाया कि क्या आपका कोई सिपाही ट्रेन में मौजूद था जो बताता कि उस दिन ट्रेन में मुझे लूटने की कोशिश नहीं की गई थी? क्या रातभर पटरियों पर पड़े होने के बावजूद जीआरपी ने मेरी कोई मदद की? मन करता था कि मैं एके जैन के पास जाकर उनका मुंह नोच लूं।
एम्स में मेरी मां, मेरी बहन और जीजा ने मुझे समझाया कि और लड़कियों के साथ क्या-क्या नहीं होता, लोग तेजाब तक डाल देते हैं, तुम्हारा तो बस एक पैर ही गया है, अब आगे की योजना बनाओ। बहन की प्रेरणा ने मेरे मन में यह बात ला दी कि कुछ ऐसा करूं जिसे दुनिया देखे। क्यों न एवरेस्ट पर चढ़ जाऊं? बिना पैर के एवरेस्ट पर चढ़ना ही मुझे सबसे बेहतर विचार लगा। असली चुनौती यही है।
आसान काम तो हर कोई कर लेता है। मेरी मुश्किल को आसान कर दिया अमेरिका निवासी डॉ राकेश श्रीवास्तव और उनके भाई शैलेश श्रीवास्तव ने जो इनोवेटिव नाम से एक संस्था चलाते हैं। उन्होंने मेरे लिए एक कृत्रिम पैर बनवाया जिसको पहनकर मैं चलती हूं।
मुझे अजय माकन ने इतनी सहूलियतें दीं और वह भी तब, जब उत्तर प्रदेश की सरकार मुझे मुल्जिम बताने के लिए उतारू थी और मीडिया मेरे पीछे पड़ गया था। खिलाड़ियों का संगठन 'साई' भी मुझे खिलाड़ी नहीं मानता था। मैं चीख-चीख कर कहा करती थी कि "मैं जिंदा हूं, मुझसे आकर पूछो, मैं झूठी नहीं हूं।"
लेकिन मुसीबतों और परीक्षाओं का अंत अभी नहीं हुआ था। चार महीने एम्स में गुजारने के बाद जब मैं वापस लौटी तो मेरी बदनामी मेरा पीछा कर रही थी। मुझे विकलांगता का प्रमाण पत्र मिल गया था और रेल से पास भी। लेकिन मुझे ट्रेन के सेंकड क्लास की आरक्षित बोगी में चलने के लिए टिकट नहीं मिलता था। मुझे दौड़ाया जाता, शक किया जाता। मेरे लिए विकलांग बोगी में चलना भी अपमान के कड़वे घूंट पीने के समान ही था।
आरपीएफ के सिपाही मेरी टांग खुलवाकर देखते और फिर पास मांगकर उसकी जांच करते। एक बार तो हरिद्वार में जब मुझे टिकट नहीं मिला तो स्टेशन मास्टर ने बहुत मदद की। उन्होंने काउंटर क्लर्क से टिकट देने को कहा लेकिन उसने कहा कि उसे मेरे पास पर उसे शक है। उसमें हस्ताक्षर ठीक नहीं हैं। अंत में स्टेशन मास्टर ने अपने दम पर मुझे जबरदस्ती ट्रेन में बैठाया।
ममता बनर्जी ने नौकरी देने की घोषणा की थी। जब मैं कृत्रिम टांगों से चलकर रेल मंत्रालय पंहुची तो उनके पीए ने मिलाने से मना कर दिया। तीन बार निराश होकर मैं लौट आई। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विवेक सहाय से मिलने में मैं किसी तरह कामयाब हो गई तो उनका जवाब सुनकर हैरत हुई। उन्होंने सारे कागजात देखे और फिर कहा कि पहले जीआरपी से बढ़िया सी रिपोर्ट लगवाकर लाओ। ये थी रेलवे के मंत्री और अध्यक्ष की मानवीयता।
मैंने हिम्मत नहीं हारी। कहा कि इन सबको अपनी ताकत दिखाऊंगी, ये सब मुझे पहचानेंगे और खुद चलकर मेरे पास आएंगे। मुझे बछेंद्री पाल ने काफी प्रोत्साहित किया। उन्हीं के प्रशिक्षण की बदौलत मैं आज आसमान के इतने करीब हूं। मैं माउंट एवरेस्ट की चोटी पर हूं जहां पर हर कोई नहीं पंहुच पाता है। ऐसा लगता है कि बस हाथ उठाऊं और छू लूं।टिप्पणियां
मुझे बुखार आ गया। और नीचे भी लौटना था उस दुनिया में जो नहीं चाहती थी कि मैं यहां तक पहुंचूं। लेकिन कुछ लोग थे जिनका मेरे पर विश्वास था और उन्हीं के भरोसे मैं यहां तक पहुंची हूं। मेरी इच्छा अपने जैसे विकलांग लोगों की मदद करने की है, जिन्हें समाज ठुकराता है। मैं चाहती हूं कि उनके लिए कोई खेल अकादमी बनाऊं, उन्नाव में साढ़े सात बीघा जमीन मिल गई है। साढ़े तीन बीघा और खरीदनी है।
इस अकादमी से जब मेरी जैसी ऊंची चाहत रखने वाले निकलेंगे तब मुझे लगेगा कि मेरे साथ जो कुछ हुआ वह सब ठीक था क्योंकि अगर ये सब न होता तो आने वाली पीढ़ी को हौसला कौन दे पाता..! अगले महीने की 10 तारीख को मैं 27 वर्ष की हो जाऊंगी। मुझमें अभी बहुत सी ऊंचाइयों को छूने का हौसला बाकी है। बस, मुझे कोई चुनौती दे दीजिए..!"
मैंने गुस्से में एके जैन को फोन लगाकर खूब सुनाया कि क्या आपका कोई सिपाही ट्रेन में मौजूद था जो बताता कि उस दिन ट्रेन में मुझे लूटने की कोशिश नहीं की गई थी? क्या रातभर पटरियों पर पड़े होने के बावजूद जीआरपी ने मेरी कोई मदद की? मन करता था कि मैं एके जैन के पास जाकर उनका मुंह नोच लूं।
एम्स में मेरी मां, मेरी बहन और जीजा ने मुझे समझाया कि और लड़कियों के साथ क्या-क्या नहीं होता, लोग तेजाब तक डाल देते हैं, तुम्हारा तो बस एक पैर ही गया है, अब आगे की योजना बनाओ। बहन की प्रेरणा ने मेरे मन में यह बात ला दी कि कुछ ऐसा करूं जिसे दुनिया देखे। क्यों न एवरेस्ट पर चढ़ जाऊं? बिना पैर के एवरेस्ट पर चढ़ना ही मुझे सबसे बेहतर विचार लगा। असली चुनौती यही है।
आसान काम तो हर कोई कर लेता है। मेरी मुश्किल को आसान कर दिया अमेरिका निवासी डॉ राकेश श्रीवास्तव और उनके भाई शैलेश श्रीवास्तव ने जो इनोवेटिव नाम से एक संस्था चलाते हैं। उन्होंने मेरे लिए एक कृत्रिम पैर बनवाया जिसको पहनकर मैं चलती हूं।
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लेकिन मुसीबतों और परीक्षाओं का अंत अभी नहीं हुआ था। चार महीने एम्स में गुजारने के बाद जब मैं वापस लौटी तो मेरी बदनामी मेरा पीछा कर रही थी। मुझे विकलांगता का प्रमाण पत्र मिल गया था और रेल से पास भी। लेकिन मुझे ट्रेन के सेंकड क्लास की आरक्षित बोगी में चलने के लिए टिकट नहीं मिलता था। मुझे दौड़ाया जाता, शक किया जाता। मेरे लिए विकलांग बोगी में चलना भी अपमान के कड़वे घूंट पीने के समान ही था।
आरपीएफ के सिपाही मेरी टांग खुलवाकर देखते और फिर पास मांगकर उसकी जांच करते। एक बार तो हरिद्वार में जब मुझे टिकट नहीं मिला तो स्टेशन मास्टर ने बहुत मदद की। उन्होंने काउंटर क्लर्क से टिकट देने को कहा लेकिन उसने कहा कि उसे मेरे पास पर उसे शक है। उसमें हस्ताक्षर ठीक नहीं हैं। अंत में स्टेशन मास्टर ने अपने दम पर मुझे जबरदस्ती ट्रेन में बैठाया।
ममता बनर्जी ने नौकरी देने की घोषणा की थी। जब मैं कृत्रिम टांगों से चलकर रेल मंत्रालय पंहुची तो उनके पीए ने मिलाने से मना कर दिया। तीन बार निराश होकर मैं लौट आई। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विवेक सहाय से मिलने में मैं किसी तरह कामयाब हो गई तो उनका जवाब सुनकर हैरत हुई। उन्होंने सारे कागजात देखे और फिर कहा कि पहले जीआरपी से बढ़िया सी रिपोर्ट लगवाकर लाओ। ये थी रेलवे के मंत्री और अध्यक्ष की मानवीयता।
मैंने हिम्मत नहीं हारी। कहा कि इन सबको अपनी ताकत दिखाऊंगी, ये सब मुझे पहचानेंगे और खुद चलकर मेरे पास आएंगे। मुझे बछेंद्री पाल ने काफी प्रोत्साहित किया। उन्हीं के प्रशिक्षण की बदौलत मैं आज आसमान के इतने करीब हूं। मैं माउंट एवरेस्ट की चोटी पर हूं जहां पर हर कोई नहीं पंहुच पाता है। ऐसा लगता है कि बस हाथ उठाऊं और छू लूं।टिप्पणियां
मुझे बुखार आ गया। और नीचे भी लौटना था उस दुनिया में जो नहीं चाहती थी कि मैं यहां तक पहुंचूं। लेकिन कुछ लोग थे जिनका मेरे पर विश्वास था और उन्हीं के भरोसे मैं यहां तक पहुंची हूं। मेरी इच्छा अपने जैसे विकलांग लोगों की मदद करने की है, जिन्हें समाज ठुकराता है। मैं चाहती हूं कि उनके लिए कोई खेल अकादमी बनाऊं, उन्नाव में साढ़े सात बीघा जमीन मिल गई है। साढ़े तीन बीघा और खरीदनी है।
इस अकादमी से जब मेरी जैसी ऊंची चाहत रखने वाले निकलेंगे तब मुझे लगेगा कि मेरे साथ जो कुछ हुआ वह सब ठीक था क्योंकि अगर ये सब न होता तो आने वाली पीढ़ी को हौसला कौन दे पाता..! अगले महीने की 10 तारीख को मैं 27 वर्ष की हो जाऊंगी। मुझमें अभी बहुत सी ऊंचाइयों को छूने का हौसला बाकी है। बस, मुझे कोई चुनौती दे दीजिए..!"
एम्स में मेरी मां, मेरी बहन और जीजा ने मुझे समझाया कि और लड़कियों के साथ क्या-क्या नहीं होता, लोग तेजाब तक डाल देते हैं, तुम्हारा तो बस एक पैर ही गया है, अब आगे की योजना बनाओ। बहन की प्रेरणा ने मेरे मन में यह बात ला दी कि कुछ ऐसा करूं जिसे दुनिया देखे। क्यों न एवरेस्ट पर चढ़ जाऊं? बिना पैर के एवरेस्ट पर चढ़ना ही मुझे सबसे बेहतर विचार लगा। असली चुनौती यही है।
आसान काम तो हर कोई कर लेता है। मेरी मुश्किल को आसान कर दिया अमेरिका निवासी डॉ राकेश श्रीवास्तव और उनके भाई शैलेश श्रीवास्तव ने जो इनोवेटिव नाम से एक संस्था चलाते हैं। उन्होंने मेरे लिए एक कृत्रिम पैर बनवाया जिसको पहनकर मैं चलती हूं।
मुझे अजय माकन ने इतनी सहूलियतें दीं और वह भी तब, जब उत्तर प्रदेश की सरकार मुझे मुल्जिम बताने के लिए उतारू थी और मीडिया मेरे पीछे पड़ गया था। खिलाड़ियों का संगठन 'साई' भी मुझे खिलाड़ी नहीं मानता था। मैं चीख-चीख कर कहा करती थी कि "मैं जिंदा हूं, मुझसे आकर पूछो, मैं झूठी नहीं हूं।"
लेकिन मुसीबतों और परीक्षाओं का अंत अभी नहीं हुआ था। चार महीने एम्स में गुजारने के बाद जब मैं वापस लौटी तो मेरी बदनामी मेरा पीछा कर रही थी। मुझे विकलांगता का प्रमाण पत्र मिल गया था और रेल से पास भी। लेकिन मुझे ट्रेन के सेंकड क्लास की आरक्षित बोगी में चलने के लिए टिकट नहीं मिलता था। मुझे दौड़ाया जाता, शक किया जाता। मेरे लिए विकलांग बोगी में चलना भी अपमान के कड़वे घूंट पीने के समान ही था।
आरपीएफ के सिपाही मेरी टांग खुलवाकर देखते और फिर पास मांगकर उसकी जांच करते। एक बार तो हरिद्वार में जब मुझे टिकट नहीं मिला तो स्टेशन मास्टर ने बहुत मदद की। उन्होंने काउंटर क्लर्क से टिकट देने को कहा लेकिन उसने कहा कि उसे मेरे पास पर उसे शक है। उसमें हस्ताक्षर ठीक नहीं हैं। अंत में स्टेशन मास्टर ने अपने दम पर मुझे जबरदस्ती ट्रेन में बैठाया।
ममता बनर्जी ने नौकरी देने की घोषणा की थी। जब मैं कृत्रिम टांगों से चलकर रेल मंत्रालय पंहुची तो उनके पीए ने मिलाने से मना कर दिया। तीन बार निराश होकर मैं लौट आई। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विवेक सहाय से मिलने में मैं किसी तरह कामयाब हो गई तो उनका जवाब सुनकर हैरत हुई। उन्होंने सारे कागजात देखे और फिर कहा कि पहले जीआरपी से बढ़िया सी रिपोर्ट लगवाकर लाओ। ये थी रेलवे के मंत्री और अध्यक्ष की मानवीयता।
मैंने हिम्मत नहीं हारी। कहा कि इन सबको अपनी ताकत दिखाऊंगी, ये सब मुझे पहचानेंगे और खुद चलकर मेरे पास आएंगे। मुझे बछेंद्री पाल ने काफी प्रोत्साहित किया। उन्हीं के प्रशिक्षण की बदौलत मैं आज आसमान के इतने करीब हूं। मैं माउंट एवरेस्ट की चोटी पर हूं जहां पर हर कोई नहीं पंहुच पाता है। ऐसा लगता है कि बस हाथ उठाऊं और छू लूं।टिप्पणियां
मुझे बुखार आ गया। और नीचे भी लौटना था उस दुनिया में जो नहीं चाहती थी कि मैं यहां तक पहुंचूं। लेकिन कुछ लोग थे जिनका मेरे पर विश्वास था और उन्हीं के भरोसे मैं यहां तक पहुंची हूं। मेरी इच्छा अपने जैसे विकलांग लोगों की मदद करने की है, जिन्हें समाज ठुकराता है। मैं चाहती हूं कि उनके लिए कोई खेल अकादमी बनाऊं, उन्नाव में साढ़े सात बीघा जमीन मिल गई है। साढ़े तीन बीघा और खरीदनी है।
इस अकादमी से जब मेरी जैसी ऊंची चाहत रखने वाले निकलेंगे तब मुझे लगेगा कि मेरे साथ जो कुछ हुआ वह सब ठीक था क्योंकि अगर ये सब न होता तो आने वाली पीढ़ी को हौसला कौन दे पाता..! अगले महीने की 10 तारीख को मैं 27 वर्ष की हो जाऊंगी। मुझमें अभी बहुत सी ऊंचाइयों को छूने का हौसला बाकी है। बस, मुझे कोई चुनौती दे दीजिए..!"
आसान काम तो हर कोई कर लेता है। मेरी मुश्किल को आसान कर दिया अमेरिका निवासी डॉ राकेश श्रीवास्तव और उनके भाई शैलेश श्रीवास्तव ने जो इनोवेटिव नाम से एक संस्था चलाते हैं। उन्होंने मेरे लिए एक कृत्रिम पैर बनवाया जिसको पहनकर मैं चलती हूं।
मुझे अजय माकन ने इतनी सहूलियतें दीं और वह भी तब, जब उत्तर प्रदेश की सरकार मुझे मुल्जिम बताने के लिए उतारू थी और मीडिया मेरे पीछे पड़ गया था। खिलाड़ियों का संगठन 'साई' भी मुझे खिलाड़ी नहीं मानता था। मैं चीख-चीख कर कहा करती थी कि "मैं जिंदा हूं, मुझसे आकर पूछो, मैं झूठी नहीं हूं।"
लेकिन मुसीबतों और परीक्षाओं का अंत अभी नहीं हुआ था। चार महीने एम्स में गुजारने के बाद जब मैं वापस लौटी तो मेरी बदनामी मेरा पीछा कर रही थी। मुझे विकलांगता का प्रमाण पत्र मिल गया था और रेल से पास भी। लेकिन मुझे ट्रेन के सेंकड क्लास की आरक्षित बोगी में चलने के लिए टिकट नहीं मिलता था। मुझे दौड़ाया जाता, शक किया जाता। मेरे लिए विकलांग बोगी में चलना भी अपमान के कड़वे घूंट पीने के समान ही था।
आरपीएफ के सिपाही मेरी टांग खुलवाकर देखते और फिर पास मांगकर उसकी जांच करते। एक बार तो हरिद्वार में जब मुझे टिकट नहीं मिला तो स्टेशन मास्टर ने बहुत मदद की। उन्होंने काउंटर क्लर्क से टिकट देने को कहा लेकिन उसने कहा कि उसे मेरे पास पर उसे शक है। उसमें हस्ताक्षर ठीक नहीं हैं। अंत में स्टेशन मास्टर ने अपने दम पर मुझे जबरदस्ती ट्रेन में बैठाया।
ममता बनर्जी ने नौकरी देने की घोषणा की थी। जब मैं कृत्रिम टांगों से चलकर रेल मंत्रालय पंहुची तो उनके पीए ने मिलाने से मना कर दिया। तीन बार निराश होकर मैं लौट आई। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विवेक सहाय से मिलने में मैं किसी तरह कामयाब हो गई तो उनका जवाब सुनकर हैरत हुई। उन्होंने सारे कागजात देखे और फिर कहा कि पहले जीआरपी से बढ़िया सी रिपोर्ट लगवाकर लाओ। ये थी रेलवे के मंत्री और अध्यक्ष की मानवीयता।
मैंने हिम्मत नहीं हारी। कहा कि इन सबको अपनी ताकत दिखाऊंगी, ये सब मुझे पहचानेंगे और खुद चलकर मेरे पास आएंगे। मुझे बछेंद्री पाल ने काफी प्रोत्साहित किया। उन्हीं के प्रशिक्षण की बदौलत मैं आज आसमान के इतने करीब हूं। मैं माउंट एवरेस्ट की चोटी पर हूं जहां पर हर कोई नहीं पंहुच पाता है। ऐसा लगता है कि बस हाथ उठाऊं और छू लूं।टिप्पणियां
मुझे बुखार आ गया। और नीचे भी लौटना था उस दुनिया में जो नहीं चाहती थी कि मैं यहां तक पहुंचूं। लेकिन कुछ लोग थे जिनका मेरे पर विश्वास था और उन्हीं के भरोसे मैं यहां तक पहुंची हूं। मेरी इच्छा अपने जैसे विकलांग लोगों की मदद करने की है, जिन्हें समाज ठुकराता है। मैं चाहती हूं कि उनके लिए कोई खेल अकादमी बनाऊं, उन्नाव में साढ़े सात बीघा जमीन मिल गई है। साढ़े तीन बीघा और खरीदनी है।
इस अकादमी से जब मेरी जैसी ऊंची चाहत रखने वाले निकलेंगे तब मुझे लगेगा कि मेरे साथ जो कुछ हुआ वह सब ठीक था क्योंकि अगर ये सब न होता तो आने वाली पीढ़ी को हौसला कौन दे पाता..! अगले महीने की 10 तारीख को मैं 27 वर्ष की हो जाऊंगी। मुझमें अभी बहुत सी ऊंचाइयों को छूने का हौसला बाकी है। बस, मुझे कोई चुनौती दे दीजिए..!"
मुझे अजय माकन ने इतनी सहूलियतें दीं और वह भी तब, जब उत्तर प्रदेश की सरकार मुझे मुल्जिम बताने के लिए उतारू थी और मीडिया मेरे पीछे पड़ गया था। खिलाड़ियों का संगठन 'साई' भी मुझे खिलाड़ी नहीं मानता था। मैं चीख-चीख कर कहा करती थी कि "मैं जिंदा हूं, मुझसे आकर पूछो, मैं झूठी नहीं हूं।"
लेकिन मुसीबतों और परीक्षाओं का अंत अभी नहीं हुआ था। चार महीने एम्स में गुजारने के बाद जब मैं वापस लौटी तो मेरी बदनामी मेरा पीछा कर रही थी। मुझे विकलांगता का प्रमाण पत्र मिल गया था और रेल से पास भी। लेकिन मुझे ट्रेन के सेंकड क्लास की आरक्षित बोगी में चलने के लिए टिकट नहीं मिलता था। मुझे दौड़ाया जाता, शक किया जाता। मेरे लिए विकलांग बोगी में चलना भी अपमान के कड़वे घूंट पीने के समान ही था।
आरपीएफ के सिपाही मेरी टांग खुलवाकर देखते और फिर पास मांगकर उसकी जांच करते। एक बार तो हरिद्वार में जब मुझे टिकट नहीं मिला तो स्टेशन मास्टर ने बहुत मदद की। उन्होंने काउंटर क्लर्क से टिकट देने को कहा लेकिन उसने कहा कि उसे मेरे पास पर उसे शक है। उसमें हस्ताक्षर ठीक नहीं हैं। अंत में स्टेशन मास्टर ने अपने दम पर मुझे जबरदस्ती ट्रेन में बैठाया।
ममता बनर्जी ने नौकरी देने की घोषणा की थी। जब मैं कृत्रिम टांगों से चलकर रेल मंत्रालय पंहुची तो उनके पीए ने मिलाने से मना कर दिया। तीन बार निराश होकर मैं लौट आई। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विवेक सहाय से मिलने में मैं किसी तरह कामयाब हो गई तो उनका जवाब सुनकर हैरत हुई। उन्होंने सारे कागजात देखे और फिर कहा कि पहले जीआरपी से बढ़िया सी रिपोर्ट लगवाकर लाओ। ये थी रेलवे के मंत्री और अध्यक्ष की मानवीयता।
मैंने हिम्मत नहीं हारी। कहा कि इन सबको अपनी ताकत दिखाऊंगी, ये सब मुझे पहचानेंगे और खुद चलकर मेरे पास आएंगे। मुझे बछेंद्री पाल ने काफी प्रोत्साहित किया। उन्हीं के प्रशिक्षण की बदौलत मैं आज आसमान के इतने करीब हूं। मैं माउंट एवरेस्ट की चोटी पर हूं जहां पर हर कोई नहीं पंहुच पाता है। ऐसा लगता है कि बस हाथ उठाऊं और छू लूं।टिप्पणियां
मुझे बुखार आ गया। और नीचे भी लौटना था उस दुनिया में जो नहीं चाहती थी कि मैं यहां तक पहुंचूं। लेकिन कुछ लोग थे जिनका मेरे पर विश्वास था और उन्हीं के भरोसे मैं यहां तक पहुंची हूं। मेरी इच्छा अपने जैसे विकलांग लोगों की मदद करने की है, जिन्हें समाज ठुकराता है। मैं चाहती हूं कि उनके लिए कोई खेल अकादमी बनाऊं, उन्नाव में साढ़े सात बीघा जमीन मिल गई है। साढ़े तीन बीघा और खरीदनी है।
इस अकादमी से जब मेरी जैसी ऊंची चाहत रखने वाले निकलेंगे तब मुझे लगेगा कि मेरे साथ जो कुछ हुआ वह सब ठीक था क्योंकि अगर ये सब न होता तो आने वाली पीढ़ी को हौसला कौन दे पाता..! अगले महीने की 10 तारीख को मैं 27 वर्ष की हो जाऊंगी। मुझमें अभी बहुत सी ऊंचाइयों को छूने का हौसला बाकी है। बस, मुझे कोई चुनौती दे दीजिए..!"
लेकिन मुसीबतों और परीक्षाओं का अंत अभी नहीं हुआ था। चार महीने एम्स में गुजारने के बाद जब मैं वापस लौटी तो मेरी बदनामी मेरा पीछा कर रही थी। मुझे विकलांगता का प्रमाण पत्र मिल गया था और रेल से पास भी। लेकिन मुझे ट्रेन के सेंकड क्लास की आरक्षित बोगी में चलने के लिए टिकट नहीं मिलता था। मुझे दौड़ाया जाता, शक किया जाता। मेरे लिए विकलांग बोगी में चलना भी अपमान के कड़वे घूंट पीने के समान ही था।
आरपीएफ के सिपाही मेरी टांग खुलवाकर देखते और फिर पास मांगकर उसकी जांच करते। एक बार तो हरिद्वार में जब मुझे टिकट नहीं मिला तो स्टेशन मास्टर ने बहुत मदद की। उन्होंने काउंटर क्लर्क से टिकट देने को कहा लेकिन उसने कहा कि उसे मेरे पास पर उसे शक है। उसमें हस्ताक्षर ठीक नहीं हैं। अंत में स्टेशन मास्टर ने अपने दम पर मुझे जबरदस्ती ट्रेन में बैठाया।
ममता बनर्जी ने नौकरी देने की घोषणा की थी। जब मैं कृत्रिम टांगों से चलकर रेल मंत्रालय पंहुची तो उनके पीए ने मिलाने से मना कर दिया। तीन बार निराश होकर मैं लौट आई। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विवेक सहाय से मिलने में मैं किसी तरह कामयाब हो गई तो उनका जवाब सुनकर हैरत हुई। उन्होंने सारे कागजात देखे और फिर कहा कि पहले जीआरपी से बढ़िया सी रिपोर्ट लगवाकर लाओ। ये थी रेलवे के मंत्री और अध्यक्ष की मानवीयता।
मैंने हिम्मत नहीं हारी। कहा कि इन सबको अपनी ताकत दिखाऊंगी, ये सब मुझे पहचानेंगे और खुद चलकर मेरे पास आएंगे। मुझे बछेंद्री पाल ने काफी प्रोत्साहित किया। उन्हीं के प्रशिक्षण की बदौलत मैं आज आसमान के इतने करीब हूं। मैं माउंट एवरेस्ट की चोटी पर हूं जहां पर हर कोई नहीं पंहुच पाता है। ऐसा लगता है कि बस हाथ उठाऊं और छू लूं।टिप्पणियां
मुझे बुखार आ गया। और नीचे भी लौटना था उस दुनिया में जो नहीं चाहती थी कि मैं यहां तक पहुंचूं। लेकिन कुछ लोग थे जिनका मेरे पर विश्वास था और उन्हीं के भरोसे मैं यहां तक पहुंची हूं। मेरी इच्छा अपने जैसे विकलांग लोगों की मदद करने की है, जिन्हें समाज ठुकराता है। मैं चाहती हूं कि उनके लिए कोई खेल अकादमी बनाऊं, उन्नाव में साढ़े सात बीघा जमीन मिल गई है। साढ़े तीन बीघा और खरीदनी है।
इस अकादमी से जब मेरी जैसी ऊंची चाहत रखने वाले निकलेंगे तब मुझे लगेगा कि मेरे साथ जो कुछ हुआ वह सब ठीक था क्योंकि अगर ये सब न होता तो आने वाली पीढ़ी को हौसला कौन दे पाता..! अगले महीने की 10 तारीख को मैं 27 वर्ष की हो जाऊंगी। मुझमें अभी बहुत सी ऊंचाइयों को छूने का हौसला बाकी है। बस, मुझे कोई चुनौती दे दीजिए..!"
आरपीएफ के सिपाही मेरी टांग खुलवाकर देखते और फिर पास मांगकर उसकी जांच करते। एक बार तो हरिद्वार में जब मुझे टिकट नहीं मिला तो स्टेशन मास्टर ने बहुत मदद की। उन्होंने काउंटर क्लर्क से टिकट देने को कहा लेकिन उसने कहा कि उसे मेरे पास पर उसे शक है। उसमें हस्ताक्षर ठीक नहीं हैं। अंत में स्टेशन मास्टर ने अपने दम पर मुझे जबरदस्ती ट्रेन में बैठाया।
ममता बनर्जी ने नौकरी देने की घोषणा की थी। जब मैं कृत्रिम टांगों से चलकर रेल मंत्रालय पंहुची तो उनके पीए ने मिलाने से मना कर दिया। तीन बार निराश होकर मैं लौट आई। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विवेक सहाय से मिलने में मैं किसी तरह कामयाब हो गई तो उनका जवाब सुनकर हैरत हुई। उन्होंने सारे कागजात देखे और फिर कहा कि पहले जीआरपी से बढ़िया सी रिपोर्ट लगवाकर लाओ। ये थी रेलवे के मंत्री और अध्यक्ष की मानवीयता।
मैंने हिम्मत नहीं हारी। कहा कि इन सबको अपनी ताकत दिखाऊंगी, ये सब मुझे पहचानेंगे और खुद चलकर मेरे पास आएंगे। मुझे बछेंद्री पाल ने काफी प्रोत्साहित किया। उन्हीं के प्रशिक्षण की बदौलत मैं आज आसमान के इतने करीब हूं। मैं माउंट एवरेस्ट की चोटी पर हूं जहां पर हर कोई नहीं पंहुच पाता है। ऐसा लगता है कि बस हाथ उठाऊं और छू लूं।टिप्पणियां
मुझे बुखार आ गया। और नीचे भी लौटना था उस दुनिया में जो नहीं चाहती थी कि मैं यहां तक पहुंचूं। लेकिन कुछ लोग थे जिनका मेरे पर विश्वास था और उन्हीं के भरोसे मैं यहां तक पहुंची हूं। मेरी इच्छा अपने जैसे विकलांग लोगों की मदद करने की है, जिन्हें समाज ठुकराता है। मैं चाहती हूं कि उनके लिए कोई खेल अकादमी बनाऊं, उन्नाव में साढ़े सात बीघा जमीन मिल गई है। साढ़े तीन बीघा और खरीदनी है।
इस अकादमी से जब मेरी जैसी ऊंची चाहत रखने वाले निकलेंगे तब मुझे लगेगा कि मेरे साथ जो कुछ हुआ वह सब ठीक था क्योंकि अगर ये सब न होता तो आने वाली पीढ़ी को हौसला कौन दे पाता..! अगले महीने की 10 तारीख को मैं 27 वर्ष की हो जाऊंगी। मुझमें अभी बहुत सी ऊंचाइयों को छूने का हौसला बाकी है। बस, मुझे कोई चुनौती दे दीजिए..!"
ममता बनर्जी ने नौकरी देने की घोषणा की थी। जब मैं कृत्रिम टांगों से चलकर रेल मंत्रालय पंहुची तो उनके पीए ने मिलाने से मना कर दिया। तीन बार निराश होकर मैं लौट आई। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विवेक सहाय से मिलने में मैं किसी तरह कामयाब हो गई तो उनका जवाब सुनकर हैरत हुई। उन्होंने सारे कागजात देखे और फिर कहा कि पहले जीआरपी से बढ़िया सी रिपोर्ट लगवाकर लाओ। ये थी रेलवे के मंत्री और अध्यक्ष की मानवीयता।
मैंने हिम्मत नहीं हारी। कहा कि इन सबको अपनी ताकत दिखाऊंगी, ये सब मुझे पहचानेंगे और खुद चलकर मेरे पास आएंगे। मुझे बछेंद्री पाल ने काफी प्रोत्साहित किया। उन्हीं के प्रशिक्षण की बदौलत मैं आज आसमान के इतने करीब हूं। मैं माउंट एवरेस्ट की चोटी पर हूं जहां पर हर कोई नहीं पंहुच पाता है। ऐसा लगता है कि बस हाथ उठाऊं और छू लूं।टिप्पणियां
मुझे बुखार आ गया। और नीचे भी लौटना था उस दुनिया में जो नहीं चाहती थी कि मैं यहां तक पहुंचूं। लेकिन कुछ लोग थे जिनका मेरे पर विश्वास था और उन्हीं के भरोसे मैं यहां तक पहुंची हूं। मेरी इच्छा अपने जैसे विकलांग लोगों की मदद करने की है, जिन्हें समाज ठुकराता है। मैं चाहती हूं कि उनके लिए कोई खेल अकादमी बनाऊं, उन्नाव में साढ़े सात बीघा जमीन मिल गई है। साढ़े तीन बीघा और खरीदनी है।
इस अकादमी से जब मेरी जैसी ऊंची चाहत रखने वाले निकलेंगे तब मुझे लगेगा कि मेरे साथ जो कुछ हुआ वह सब ठीक था क्योंकि अगर ये सब न होता तो आने वाली पीढ़ी को हौसला कौन दे पाता..! अगले महीने की 10 तारीख को मैं 27 वर्ष की हो जाऊंगी। मुझमें अभी बहुत सी ऊंचाइयों को छूने का हौसला बाकी है। बस, मुझे कोई चुनौती दे दीजिए..!"
मैंने हिम्मत नहीं हारी। कहा कि इन सबको अपनी ताकत दिखाऊंगी, ये सब मुझे पहचानेंगे और खुद चलकर मेरे पास आएंगे। मुझे बछेंद्री पाल ने काफी प्रोत्साहित किया। उन्हीं के प्रशिक्षण की बदौलत मैं आज आसमान के इतने करीब हूं। मैं माउंट एवरेस्ट की चोटी पर हूं जहां पर हर कोई नहीं पंहुच पाता है। ऐसा लगता है कि बस हाथ उठाऊं और छू लूं।टिप्पणियां
मुझे बुखार आ गया। और नीचे भी लौटना था उस दुनिया में जो नहीं चाहती थी कि मैं यहां तक पहुंचूं। लेकिन कुछ लोग थे जिनका मेरे पर विश्वास था और उन्हीं के भरोसे मैं यहां तक पहुंची हूं। मेरी इच्छा अपने जैसे विकलांग लोगों की मदद करने की है, जिन्हें समाज ठुकराता है। मैं चाहती हूं कि उनके लिए कोई खेल अकादमी बनाऊं, उन्नाव में साढ़े सात बीघा जमीन मिल गई है। साढ़े तीन बीघा और खरीदनी है।
इस अकादमी से जब मेरी जैसी ऊंची चाहत रखने वाले निकलेंगे तब मुझे लगेगा कि मेरे साथ जो कुछ हुआ वह सब ठीक था क्योंकि अगर ये सब न होता तो आने वाली पीढ़ी को हौसला कौन दे पाता..! अगले महीने की 10 तारीख को मैं 27 वर्ष की हो जाऊंगी। मुझमें अभी बहुत सी ऊंचाइयों को छूने का हौसला बाकी है। बस, मुझे कोई चुनौती दे दीजिए..!"
मुझे बुखार आ गया। और नीचे भी लौटना था उस दुनिया में जो नहीं चाहती थी कि मैं यहां तक पहुंचूं। लेकिन कुछ लोग थे जिनका मेरे पर विश्वास था और उन्हीं के भरोसे मैं यहां तक पहुंची हूं। मेरी इच्छा अपने जैसे विकलांग लोगों की मदद करने की है, जिन्हें समाज ठुकराता है। मैं चाहती हूं कि उनके लिए कोई खेल अकादमी बनाऊं, उन्नाव में साढ़े सात बीघा जमीन मिल गई है। साढ़े तीन बीघा और खरीदनी है।
इस अकादमी से जब मेरी जैसी ऊंची चाहत रखने वाले निकलेंगे तब मुझे लगेगा कि मेरे साथ जो कुछ हुआ वह सब ठीक था क्योंकि अगर ये सब न होता तो आने वाली पीढ़ी को हौसला कौन दे पाता..! अगले महीने की 10 तारीख को मैं 27 वर्ष की हो जाऊंगी। मुझमें अभी बहुत सी ऊंचाइयों को छूने का हौसला बाकी है। बस, मुझे कोई चुनौती दे दीजिए..!"
इस अकादमी से जब मेरी जैसी ऊंची चाहत रखने वाले निकलेंगे तब मुझे लगेगा कि मेरे साथ जो कुछ हुआ वह सब ठीक था क्योंकि अगर ये सब न होता तो आने वाली पीढ़ी को हौसला कौन दे पाता..! अगले महीने की 10 तारीख को मैं 27 वर्ष की हो जाऊंगी। मुझमें अभी बहुत सी ऊंचाइयों को छूने का हौसला बाकी है। बस, मुझे कोई चुनौती दे दीजिए..!" | हिमालय की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट पर विजय पताका फहराने वाली अरुणिमा सिन्हा जुनून को एवरेस्ट से भी बड़ा मनती हैं। उनका जुनून ही है, जिसने बायां पैर न रहते हुए भी उन्हें एवरेस्ट की ऊंचाई छूने में कामयाबी दिलाई। | 34 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: आप इस पर यकीन करें या ना करें, लेकिन एक नए शोध में कहा गया है कि कुत्ते सांस तथा मल के नमूनों को सूंघकर उच्च स्तर की सटीकता के साथ यह पता लगा सकते हैं कि क्या व्यक्ति को आंतों का कैंसर है। शोधकर्ताओं के अनुसार, मानव के सबसे बेहतर दोस्त कहे जाने वाले कुत्तों में सूंघने की क्षमता मनुष्य के मुकाबले एक हजार गुना अधिक होती है। इसके नतीजतन वह कुछ प्रकार के कैंसर में पाये जाने वाले विशिष्ट रासायनिक तत्वों की पहचान कर सकता है। गट पत्रिका में प्रकाशित इस शोध के अनुसार, लेब्रेडॉर नस्ल के कुत्ते नमूनों को सूंघकर 90 फीसदी से अधिक सटीकता के साथ कैंसर का पता लगा सकते हैं। जापानी शोधकर्ताओं ने लेब्रेडॉर नस्ल के एक कुत्ते पर 74 परीक्षण किए। हर परीक्षण में आंत के कैंसर के मरीज का एक नमूना, जबकि स्वस्थ व्यक्ति के चार नमूने शामिल किए। इन नमूनों को पांच अलग-अलग बक्सों में रख दिया गया। आंत के कैंसर के रसायनों को सूंघने के लिए खासतौर पर प्रशिक्षित किए गए इस लेब्रेडॉर ने सबसे पहले कैंसर के मरीज के नमूने को ही सूंघा। यह परीक्षण अलग-अलग बक्सों के साथ बार-बार किया गया। डेली मेल के अनुसार, शोधकर्ताओं ने कहा कि लेब्रेडॉर श्वास के नमूनों में 95 फीसदी और मल के नमूनों में 98 फीसदी सटीकता के साथ कैंसर का पता लगा सकते हैं। | यहाँ एक सारांश है:आंत के कैंसर के रसायनों को सूंघने के लिए खासतौर पर प्रशिक्षित किए गए इस लेब्रेडॉर ने सबसे पहले कैंसर के मरीज के नमूने को ही सूंघा। | 15 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने गुरुवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं से कहा कि केजरीवाल को पंजाब में हमने हराया और यहां आप हरा दो. दिल्ली कांग्रेस की तरफ से राजौरी गार्डन विधानसभा क्षेत्र में आयोजित स्वागत समारोह में अमरिंदर सिंह ने कहा 'केजरीवाल का सफाया हमने कर दिया. जो कसर बची है वह यहां निकाल दो.'टिप्पणियां
दरअसल दिल्ली में नगर निगम चुनाव तो हैं ही, साथ ही दिल्ली के जिस इलाके में पंजाब के सीएम अमरिंदर सिंह का स्वागत दिल्ली कांग्रेस ने किया उस राजौरी गार्डन विधानसभा क्षेत्र में 9 अप्रैल को उपचुनाव है. यह सीट आम आदमी पार्टी के विधायक जरनैल सिंह के इस्तीफे से खाली हुई थी. यहां सिख और पंजाबी बड़ी संख्या में हैं, इसलिए यह सीट आम आदमी पार्टी के लिए नाक की लड़ाई है.
कैप्टेन अमरिंदर ने केजरीवाल पर हमले करने के साथ राजौरी गार्डन से अकाली दल-बीजेपी के संयुक्त उम्मीदवार मनजिंदर सिंह सिरसा पर भी हमले किए. कैप्टेन ने कहा ''अकाली और बीजेपी ने पंजाब को बर्बाद किया. एक करोड़ 82 लाख करोड़ रुपये का कर्ज चढ़ा दिया पंजाब पर. सिरसा को यहां हराना है. कौन सी पार्टी के हैं सिरसा? पंजाब को वहां सिरसा ने लूटा.''
दरअसल दिल्ली में नगर निगम चुनाव तो हैं ही, साथ ही दिल्ली के जिस इलाके में पंजाब के सीएम अमरिंदर सिंह का स्वागत दिल्ली कांग्रेस ने किया उस राजौरी गार्डन विधानसभा क्षेत्र में 9 अप्रैल को उपचुनाव है. यह सीट आम आदमी पार्टी के विधायक जरनैल सिंह के इस्तीफे से खाली हुई थी. यहां सिख और पंजाबी बड़ी संख्या में हैं, इसलिए यह सीट आम आदमी पार्टी के लिए नाक की लड़ाई है.
कैप्टेन अमरिंदर ने केजरीवाल पर हमले करने के साथ राजौरी गार्डन से अकाली दल-बीजेपी के संयुक्त उम्मीदवार मनजिंदर सिंह सिरसा पर भी हमले किए. कैप्टेन ने कहा ''अकाली और बीजेपी ने पंजाब को बर्बाद किया. एक करोड़ 82 लाख करोड़ रुपये का कर्ज चढ़ा दिया पंजाब पर. सिरसा को यहां हराना है. कौन सी पार्टी के हैं सिरसा? पंजाब को वहां सिरसा ने लूटा.''
कैप्टेन अमरिंदर ने केजरीवाल पर हमले करने के साथ राजौरी गार्डन से अकाली दल-बीजेपी के संयुक्त उम्मीदवार मनजिंदर सिंह सिरसा पर भी हमले किए. कैप्टेन ने कहा ''अकाली और बीजेपी ने पंजाब को बर्बाद किया. एक करोड़ 82 लाख करोड़ रुपये का कर्ज चढ़ा दिया पंजाब पर. सिरसा को यहां हराना है. कौन सी पार्टी के हैं सिरसा? पंजाब को वहां सिरसा ने लूटा.'' | सारांश: अमरिंदर सिंह के स्वागत के लिए कांग्रेस का समारोह आयोजित
राजौरी गार्डन विधानसभा क्षेत्र में 9 अप्रैल को होंगे उपचुनाव
अकाली दल-बीजेपी के उम्मीदवार मनजिंदर सिंह पर भी निशाना साधा | 31 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: आधी रात के बाद जब उबर ड्राइवर अपनी कार लेकर जा रहा था तो एक दंपति ने उसको रुकने के लिए कहा. पत्नी जेनिफर (29) आगे की सीट पर बैठी और पति कैमरन (31) पिछली सीट पर बैठा. चंद मिनटों के भीतर ही उनमें झगड़ा शुरू हो गया. ऐसा लगता था कि वे पहले से ही लड़ रहे थे. ड्राइवर खामोशी से गाड़ी चलाता रहा. दंपति का झगड़ा बढ़ गया और गुस्से में वे एक-दूसरे को भला-बुरा कहने लगे.टिप्पणियां
इस बीच गाड़ी चलाते वक्त ड्राइवर को अचानक जोरदार धमाके की आवाज सुनाई पड़ी. उसको लगा कि उसका अगला टायर फट गया है लेकिन चंद पलों में ही उसको अहसास हुआ कि उसके बगल में बैठी जेनिफर की बॉडी से खून निकल रहा था. वह सिहर गया और उसको अहसास हुआ कि पति कैमरन ने जेनिफर को गोली मार दी है. ड्राइवर की घिग्गी बंध गई. उसको खुद की जिंदगी खतरे में दिखी. उसने होशियारी दिखाते हुए गाड़ी नहीं रोकी और संभलते हुए पूछा कि आपको कहां जाना है. कैमरन ने उसको गाड़ी चलाते रहने का आदेश दिया और थोड़ी देर बाद एक जगह रोकने का आदेश दिया.
वह जब कार से निकलकर चला गया तो थोड़ी दूर जाकर ड्राइवर ने पुलिस को फोन किया. पुलिस ने थोड़ी देर में ही कैमरन को सेमी ऑटोमेटिक पिस्तौल के साथ गिरफ्तार कर लिया. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस के साथ पूछताछ में ड्राइवर ने इस पूरी कहानी को सिलसिलेवार ढंग से बयान किया. कैमरन को जेल भेज दिया गया है और मामले की तफ्शीश चल रही है.
इस बीच गाड़ी चलाते वक्त ड्राइवर को अचानक जोरदार धमाके की आवाज सुनाई पड़ी. उसको लगा कि उसका अगला टायर फट गया है लेकिन चंद पलों में ही उसको अहसास हुआ कि उसके बगल में बैठी जेनिफर की बॉडी से खून निकल रहा था. वह सिहर गया और उसको अहसास हुआ कि पति कैमरन ने जेनिफर को गोली मार दी है. ड्राइवर की घिग्गी बंध गई. उसको खुद की जिंदगी खतरे में दिखी. उसने होशियारी दिखाते हुए गाड़ी नहीं रोकी और संभलते हुए पूछा कि आपको कहां जाना है. कैमरन ने उसको गाड़ी चलाते रहने का आदेश दिया और थोड़ी देर बाद एक जगह रोकने का आदेश दिया.
वह जब कार से निकलकर चला गया तो थोड़ी दूर जाकर ड्राइवर ने पुलिस को फोन किया. पुलिस ने थोड़ी देर में ही कैमरन को सेमी ऑटोमेटिक पिस्तौल के साथ गिरफ्तार कर लिया. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस के साथ पूछताछ में ड्राइवर ने इस पूरी कहानी को सिलसिलेवार ढंग से बयान किया. कैमरन को जेल भेज दिया गया है और मामले की तफ्शीश चल रही है.
वह जब कार से निकलकर चला गया तो थोड़ी दूर जाकर ड्राइवर ने पुलिस को फोन किया. पुलिस ने थोड़ी देर में ही कैमरन को सेमी ऑटोमेटिक पिस्तौल के साथ गिरफ्तार कर लिया. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस के साथ पूछताछ में ड्राइवर ने इस पूरी कहानी को सिलसिलेवार ढंग से बयान किया. कैमरन को जेल भेज दिया गया है और मामले की तफ्शीश चल रही है. | यहाँ एक सारांश है:कार के भीतर पति-पत्नी के बीच झगड़ा हुआ
कुछ देर बाद ड्राइवर को लगा कि धमाका हुआ
दरअसल गुस्से में पति ने पत्नी को गोली मारी | 15 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: भारत ने गुरुवार को दिल्ली में इटली के राजदूत को तलब किया और जलदस्यु होने के संदेह में कथित तौर पर इतालवी पोत पर तैनात सुरक्षाकर्मियों द्वारा समुद्र में अपने दो मछुआरों के मारे जाने पर कड़ा विरोध दर्ज कराया।
विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिमी) एम गणपति द्वारा तलब किए गए इतालवी राजदूत जियाकोमो सैनफेलिस ने हालांकि, कहा कि उनके देश की नौसेना ने अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकाल का पालन किया।
बुधवार को शाम अलपुझा तट पर इतालवी व्यापारिक पोत पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने जलदस्यु होने के संदेह में एक नौका में सवार दो भारतीय मछुआरों को गोलीबारी कर मार दिया। यहां मुलाकात के बाद राजदूत ने कहा कि मामले के तथ्य अभी स्पष्ट होने हैं।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘हम भारतीय अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। यह बहुत ही दुखद घटना है। मैं जिस बात पर बल देना चाहता हूं, वह यह है कि इतालवी पोत कोच्चि बंदरगाह पर अपने आप चला गया था।’ आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि घटना के समय नौका में 11 मछुआरे सवार थे जिनमें से नौ सो रहे थे और चालक तथा एक अन्य व्यक्ति जगा हुआ था जिनकी गोली लगने से मौत हो गई। टिप्पणियां
सूत्रों ने बताया, ‘चालक दल की रिपोर्ट के अनुसार कोई पूर्व चेतावनी नहीं दी गई।’ उन्होंने कहा कि मामले की नौ सेना, तटरक्षक और स्थानीय पुलिस जांच कर रही है।
गोलीबारी के बारे में पूछे जाने पर इतालवी राजदूत ने कहा, ‘इतालवी नौसेना ने अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकाल का पालन किया क्योंकि इसके पीछे एक पोत आ रहा था जो फ्लैश लाइट भेजे जाने पर भी नहीं रुका।’
विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिमी) एम गणपति द्वारा तलब किए गए इतालवी राजदूत जियाकोमो सैनफेलिस ने हालांकि, कहा कि उनके देश की नौसेना ने अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकाल का पालन किया।
बुधवार को शाम अलपुझा तट पर इतालवी व्यापारिक पोत पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने जलदस्यु होने के संदेह में एक नौका में सवार दो भारतीय मछुआरों को गोलीबारी कर मार दिया। यहां मुलाकात के बाद राजदूत ने कहा कि मामले के तथ्य अभी स्पष्ट होने हैं।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘हम भारतीय अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। यह बहुत ही दुखद घटना है। मैं जिस बात पर बल देना चाहता हूं, वह यह है कि इतालवी पोत कोच्चि बंदरगाह पर अपने आप चला गया था।’ आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि घटना के समय नौका में 11 मछुआरे सवार थे जिनमें से नौ सो रहे थे और चालक तथा एक अन्य व्यक्ति जगा हुआ था जिनकी गोली लगने से मौत हो गई। टिप्पणियां
सूत्रों ने बताया, ‘चालक दल की रिपोर्ट के अनुसार कोई पूर्व चेतावनी नहीं दी गई।’ उन्होंने कहा कि मामले की नौ सेना, तटरक्षक और स्थानीय पुलिस जांच कर रही है।
गोलीबारी के बारे में पूछे जाने पर इतालवी राजदूत ने कहा, ‘इतालवी नौसेना ने अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकाल का पालन किया क्योंकि इसके पीछे एक पोत आ रहा था जो फ्लैश लाइट भेजे जाने पर भी नहीं रुका।’
बुधवार को शाम अलपुझा तट पर इतालवी व्यापारिक पोत पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने जलदस्यु होने के संदेह में एक नौका में सवार दो भारतीय मछुआरों को गोलीबारी कर मार दिया। यहां मुलाकात के बाद राजदूत ने कहा कि मामले के तथ्य अभी स्पष्ट होने हैं।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘हम भारतीय अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। यह बहुत ही दुखद घटना है। मैं जिस बात पर बल देना चाहता हूं, वह यह है कि इतालवी पोत कोच्चि बंदरगाह पर अपने आप चला गया था।’ आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि घटना के समय नौका में 11 मछुआरे सवार थे जिनमें से नौ सो रहे थे और चालक तथा एक अन्य व्यक्ति जगा हुआ था जिनकी गोली लगने से मौत हो गई। टिप्पणियां
सूत्रों ने बताया, ‘चालक दल की रिपोर्ट के अनुसार कोई पूर्व चेतावनी नहीं दी गई।’ उन्होंने कहा कि मामले की नौ सेना, तटरक्षक और स्थानीय पुलिस जांच कर रही है।
गोलीबारी के बारे में पूछे जाने पर इतालवी राजदूत ने कहा, ‘इतालवी नौसेना ने अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकाल का पालन किया क्योंकि इसके पीछे एक पोत आ रहा था जो फ्लैश लाइट भेजे जाने पर भी नहीं रुका।’
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘हम भारतीय अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। यह बहुत ही दुखद घटना है। मैं जिस बात पर बल देना चाहता हूं, वह यह है कि इतालवी पोत कोच्चि बंदरगाह पर अपने आप चला गया था।’ आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि घटना के समय नौका में 11 मछुआरे सवार थे जिनमें से नौ सो रहे थे और चालक तथा एक अन्य व्यक्ति जगा हुआ था जिनकी गोली लगने से मौत हो गई। टिप्पणियां
सूत्रों ने बताया, ‘चालक दल की रिपोर्ट के अनुसार कोई पूर्व चेतावनी नहीं दी गई।’ उन्होंने कहा कि मामले की नौ सेना, तटरक्षक और स्थानीय पुलिस जांच कर रही है।
गोलीबारी के बारे में पूछे जाने पर इतालवी राजदूत ने कहा, ‘इतालवी नौसेना ने अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकाल का पालन किया क्योंकि इसके पीछे एक पोत आ रहा था जो फ्लैश लाइट भेजे जाने पर भी नहीं रुका।’
सूत्रों ने बताया, ‘चालक दल की रिपोर्ट के अनुसार कोई पूर्व चेतावनी नहीं दी गई।’ उन्होंने कहा कि मामले की नौ सेना, तटरक्षक और स्थानीय पुलिस जांच कर रही है।
गोलीबारी के बारे में पूछे जाने पर इतालवी राजदूत ने कहा, ‘इतालवी नौसेना ने अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकाल का पालन किया क्योंकि इसके पीछे एक पोत आ रहा था जो फ्लैश लाइट भेजे जाने पर भी नहीं रुका।’
गोलीबारी के बारे में पूछे जाने पर इतालवी राजदूत ने कहा, ‘इतालवी नौसेना ने अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकाल का पालन किया क्योंकि इसके पीछे एक पोत आ रहा था जो फ्लैश लाइट भेजे जाने पर भी नहीं रुका।’ | यह एक सारांश है: इटली के कार्गो जहाज एनरिका लेक्सी के सुरक्षाकर्मियों द्वारा दो भारतीय मछुआरों को लुटेरे समझकर मार डालने के मामले में भारत ने इटली के राजदूत को तलब किया। | 24 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के प्रयासस्वरुप शनिवार को उद्योगपतियों से कहा कि वह उद्योग लगाते समय किसी को भी रिश्वत नहीं दें। उन्होंने पुलिस से भी मामले में उचित कदम उठाने को कहा। उद्योगपतियों को दिये गये एक संदेश में मुख्यमंत्री ने राज्य में औद्योगिक इकाइयां लगाने के इच्छुक उद्योगपतियों से कहा यदि कोई रिश्वत मांगता है तो आप हमें बतायें, इस बात की जानकारी संबंधित मंत्री तक पहुंचायें, पुलिस को उचित कारवाई करने के लिये आदेश देते समय आपकी पहचान पूरी तरह छिपाकर रखी जाएगी। राज्य में औद्योगिक विकास की शीर्ष एजेंसी पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम (डब्ल्यूबीआईडीसी) की वेबसाइट जारी करते हुये मुख्यमंत्री ने कहा राज्य में औद्योगिक विकास के लिए अवसंरचना सुविधायें बढ़ाये जाने की जरुरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि रविवार से त्यौहारी मौसम शुरु हो रहा है, ऐसे में राज्य में शांति व्यवस्था हर कीमत पर बनाये रखनी होगी। हमारे राज्य में सांप्रदायिक सद्भाव की पुरानी परंपरा रही है, उसे बनाये रखना होगा। ममता बनर्जी ने सभी से शांतिपूर्वक त्योहार मानाने की अपील करते हुये कहा कि राज्य में सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने के किसी भी प्रयास को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा और कड़ी कारवाई की जाएगी। | ममता ने राज्य में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के प्रयासस्वरुप उद्योगपतियों से कहा कि वह उद्योग लगाते समय किसी को भी रिश्वत नहीं दें। | 26 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: रूस ने जोर देते हुए भारत को अश्वासन दिया कि वह उसके दुश्मनों को हथियार नहीं देगा। इसके अलावा भारत आए रूस के उप प्रधानमंत्री दमित्री रोगोजिन ने नए मालवाहक विमान और टैंकों के निर्माण के साथ रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने के मास्को की इच्छाओं का भी संकेत दिया।
यह पूछने पर कि क्या रूस पाकिस्तान को भी हथियार बेचेगा, रोगोजिन ने कहा, ‘आपको यह अवश्य समझना चाहिए कि हम आपके दुश्मनों के साथ सौदा नहीं करते... अगर आप इससे अलग कुछ देखते हैं तो मेरे चेहरे पर थूक सकते हैं।’ उन्होंने कहा कि रूस को भारत को हथियार देने में कोई प्रतिबंध नहीं है क्योंकि हमारे संबंधों में कोई विवाद या विरोधाभास नहीं है। उन्होंने कहा, ‘दूसरे देशों से इतर हमने भारत की सीमाओं पर कभी समस्याएं पैदा नहीं की हैं। यह भारत का मित्र होने का रूस को राजनीतिक लाभ है।’
रोगोजिन सोमवार को विदेश मंत्री एसएम कृष्णा के साथ व्यापार, अर्थव्यवस्था, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और सांस्कृतिक सहयोग पर अंतर-सरकारी आयोग की बैठक को संबोधित करेंगे। टिप्पणियां
रूसी नेता ने कहा कि रूस छह टन वजन उठाने वाले माल वाहक विमान और युद्धक टैंकों के निर्माण के क्षेत्र में भारत के साथ सहयोग के लिए तैयार है।
संयुक्त रूप से ब्रह्मोष सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के सफल निर्माण को रेखंकित करते हुए उन्होंने कहा कि रूस इस क्षेत्र में भारत के साथ सहयोग करने के लिए तैयार है और उसे शीर्ष रक्षा उत्पादक बनाना चाहता है।
यह पूछने पर कि क्या रूस पाकिस्तान को भी हथियार बेचेगा, रोगोजिन ने कहा, ‘आपको यह अवश्य समझना चाहिए कि हम आपके दुश्मनों के साथ सौदा नहीं करते... अगर आप इससे अलग कुछ देखते हैं तो मेरे चेहरे पर थूक सकते हैं।’ उन्होंने कहा कि रूस को भारत को हथियार देने में कोई प्रतिबंध नहीं है क्योंकि हमारे संबंधों में कोई विवाद या विरोधाभास नहीं है। उन्होंने कहा, ‘दूसरे देशों से इतर हमने भारत की सीमाओं पर कभी समस्याएं पैदा नहीं की हैं। यह भारत का मित्र होने का रूस को राजनीतिक लाभ है।’
रोगोजिन सोमवार को विदेश मंत्री एसएम कृष्णा के साथ व्यापार, अर्थव्यवस्था, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और सांस्कृतिक सहयोग पर अंतर-सरकारी आयोग की बैठक को संबोधित करेंगे। टिप्पणियां
रूसी नेता ने कहा कि रूस छह टन वजन उठाने वाले माल वाहक विमान और युद्धक टैंकों के निर्माण के क्षेत्र में भारत के साथ सहयोग के लिए तैयार है।
संयुक्त रूप से ब्रह्मोष सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के सफल निर्माण को रेखंकित करते हुए उन्होंने कहा कि रूस इस क्षेत्र में भारत के साथ सहयोग करने के लिए तैयार है और उसे शीर्ष रक्षा उत्पादक बनाना चाहता है।
रोगोजिन सोमवार को विदेश मंत्री एसएम कृष्णा के साथ व्यापार, अर्थव्यवस्था, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और सांस्कृतिक सहयोग पर अंतर-सरकारी आयोग की बैठक को संबोधित करेंगे। टिप्पणियां
रूसी नेता ने कहा कि रूस छह टन वजन उठाने वाले माल वाहक विमान और युद्धक टैंकों के निर्माण के क्षेत्र में भारत के साथ सहयोग के लिए तैयार है।
संयुक्त रूप से ब्रह्मोष सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के सफल निर्माण को रेखंकित करते हुए उन्होंने कहा कि रूस इस क्षेत्र में भारत के साथ सहयोग करने के लिए तैयार है और उसे शीर्ष रक्षा उत्पादक बनाना चाहता है।
रूसी नेता ने कहा कि रूस छह टन वजन उठाने वाले माल वाहक विमान और युद्धक टैंकों के निर्माण के क्षेत्र में भारत के साथ सहयोग के लिए तैयार है।
संयुक्त रूप से ब्रह्मोष सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के सफल निर्माण को रेखंकित करते हुए उन्होंने कहा कि रूस इस क्षेत्र में भारत के साथ सहयोग करने के लिए तैयार है और उसे शीर्ष रक्षा उत्पादक बनाना चाहता है।
संयुक्त रूप से ब्रह्मोष सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के सफल निर्माण को रेखंकित करते हुए उन्होंने कहा कि रूस इस क्षेत्र में भारत के साथ सहयोग करने के लिए तैयार है और उसे शीर्ष रक्षा उत्पादक बनाना चाहता है। | सारांश: रूस ने जोर देते हुए भारत को अश्वासन दिया कि वह उसके दुश्मनों को हथियार नहीं देगा। इसके अलावा भारत आए रूस के उप प्रधानमंत्री दमित्री रोगोजिन ने नए मालवाहक विमान और टैंकों के निर्माण के साथ रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने के मास्को की इच्छ | 20 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: अतीत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के चुनावी अभियानों की रणनीति बनाकर जीत हासिल कर चुके 37-वर्षीय चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के करीबी सूत्रों का दावा है कि पंजाब तथा उत्तर प्रदेश में होने जा रहे विधानसभा चुनाव के लिए प्रशांत ही कांग्रेस के मुख्य रणनीतिकार बने रहेंगे.टीवी चैनलों तथा समाचारपत्रों में प्रकाशित रिपोर्टों में दावा किया गया था कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से 'उधार' लिए गए प्रशांत किशोर को कांग्रेस निकालने जा रही है.
कहा जा रहा है कि प्रशांत किशोर ने उत्तर प्रदेश में सत्तासीन समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव से मुलाकात कर कांग्रेस को नाराज़ कर दिया है, जो अपने शीर्ष पदों पर बैठे नेताओं के ही पीछे चलने की परम्परा का पालन करती रही है.
पिछले सप्ताह प्रशांत किशोर ने दिल्ली में मुलायम सिंह यादव से मुलाकात की थी, और कांग्रेस के यूपी अध्यक्ष राज बब्बर के अनुसार, प्रशांत किशोर को इस कदम की इजाज़त नहीं दी गई थी. NDTV से बात करते हुए राज बब्बर ने कहा था, "यह आज़ाद मुल्क है, वह किसी से भी मुलाकात कर सकते हैं..." साथ ही राज बब्बर ने समाजवादी पार्टी से तब तक गठबंधन स्थापित करने के प्रति कांग्रेस की अनिच्छा पर भी ज़ोर दिया, जब तक मुलायम सिंह यादव अपने पुत्र तथा यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से जारी जंग को खत्म नहीं कर देते.
लेकिन इस आलोचना से कतई विचलित हुए बिना प्रशांत किशोर ने सोमवार को लगभग दो घंटे की बैठक अखिलेश यादव से भी की, जिसे कांग्रेस के भीतर कथित रूप से 'एक बार फिर अवज्ञा' के रूप में देखा जा रहा है. लेकिन प्रशांत किशोर के करीबी सूत्रों का कहना है, "कांग्रेस के भीतर मौजूद लोग ही इस तरह की कहानियां फैला रहे हैं... वह (प्रशांत किशोर) अब भी पार्टी के लिए ही काम कर रहे हैं..."
इस साल मार्च से ही, जब प्रशांत किशोर ने कांग्रेस की चुनावी रणनीति तैयार करने का बीड़ा उठाया था, पार्टी के भीतर ऐसे लोगों द्वारा उनका लगातार विरोध किया जा रहा है, जो संभवतः गांधी परिवार तक उनकी बेरोकटोक पहुंच से असहज महसूस कर रहे हैं, क्योंकि यही परिवार पार्टी का धुरा रहा है. प्रशांत किशोर के विरोधियों में गुलाम नबी आज़ाद और राज बब्बर शामिल रहे हैं, और हालिया दिनों में इनमें अहमद पटेल का नाम भी जुड़ गया है, जो कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी के शीर्ष सहायक हैं.
सूत्रों ने इस बात से इंकार किया है कि कांग्रेस कार्यसमिति की सोमवार को हुई बैठक में प्रशांत किशोर को लेकर विस्तार से चर्चा की गई. पार्टी की निर्णय लेने वाली शीर्ष संस्था के इस सत्र की अध्यक्षता पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने की थी, क्योंकि उनकी मां तथा पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी की तबीयत ठीक नहीं थी.
प्रशांत किशोर के सहयोगी स्वीकार करते हैं कि प्रत्याशियों के चयन और साझेदारियों को लेकर सलाह देने की आदत की वजह से ज़्यादा लोग उन्हें मित्र नहीं मानते हैं, लेकिन उनका कहना है कि प्रशांत किशोर अपने काम को सिर्फ आंकड़े इकट्ठा करना नहीं, बल्कि जीत का संभावित रास्ता बनाना मानते हैं.टिप्पणियां
इस बार यह बेहद मुश्किल काम है, क्योंकि उत्तर प्रदेश के पिछले चुनाव में कांग्रेस चौथे स्थान पर रही थी, और दो साल पहले हुए लोकसभा चुनाव में पूरे राज्य से पार्टी के दो ही सांसद - पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी व उपाध्यक्ष राहुल गांधी - जीत पाए थे.
प्रशांत किशोर की यादवों से मुलाकात को पिछले साल बिहार में बनाए गए गैर-बीजेपी 'महागठबंधन' से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें कांग्रेस भी शामिल थी, और जिसने नीतीश कुमार को लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री पद पर पहुंचाने में कामयाबी हासिल की थी. जीतने के बाद नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर के लिए एक सरकारी पद का सृजन किया, जिससे उनका दर्जा कैबिनेट मंत्री के बराबर हो गया. पंजाब और उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की मदद करने के बाद प्रशांत उसी पद पर लौट आने वाले हैं.
टीवी चैनलों तथा समाचारपत्रों में प्रकाशित रिपोर्टों में दावा किया गया था कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से 'उधार' लिए गए प्रशांत किशोर को कांग्रेस निकालने जा रही है.
कहा जा रहा है कि प्रशांत किशोर ने उत्तर प्रदेश में सत्तासीन समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव से मुलाकात कर कांग्रेस को नाराज़ कर दिया है, जो अपने शीर्ष पदों पर बैठे नेताओं के ही पीछे चलने की परम्परा का पालन करती रही है.
पिछले सप्ताह प्रशांत किशोर ने दिल्ली में मुलायम सिंह यादव से मुलाकात की थी, और कांग्रेस के यूपी अध्यक्ष राज बब्बर के अनुसार, प्रशांत किशोर को इस कदम की इजाज़त नहीं दी गई थी. NDTV से बात करते हुए राज बब्बर ने कहा था, "यह आज़ाद मुल्क है, वह किसी से भी मुलाकात कर सकते हैं..." साथ ही राज बब्बर ने समाजवादी पार्टी से तब तक गठबंधन स्थापित करने के प्रति कांग्रेस की अनिच्छा पर भी ज़ोर दिया, जब तक मुलायम सिंह यादव अपने पुत्र तथा यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से जारी जंग को खत्म नहीं कर देते.
लेकिन इस आलोचना से कतई विचलित हुए बिना प्रशांत किशोर ने सोमवार को लगभग दो घंटे की बैठक अखिलेश यादव से भी की, जिसे कांग्रेस के भीतर कथित रूप से 'एक बार फिर अवज्ञा' के रूप में देखा जा रहा है. लेकिन प्रशांत किशोर के करीबी सूत्रों का कहना है, "कांग्रेस के भीतर मौजूद लोग ही इस तरह की कहानियां फैला रहे हैं... वह (प्रशांत किशोर) अब भी पार्टी के लिए ही काम कर रहे हैं..."
इस साल मार्च से ही, जब प्रशांत किशोर ने कांग्रेस की चुनावी रणनीति तैयार करने का बीड़ा उठाया था, पार्टी के भीतर ऐसे लोगों द्वारा उनका लगातार विरोध किया जा रहा है, जो संभवतः गांधी परिवार तक उनकी बेरोकटोक पहुंच से असहज महसूस कर रहे हैं, क्योंकि यही परिवार पार्टी का धुरा रहा है. प्रशांत किशोर के विरोधियों में गुलाम नबी आज़ाद और राज बब्बर शामिल रहे हैं, और हालिया दिनों में इनमें अहमद पटेल का नाम भी जुड़ गया है, जो कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी के शीर्ष सहायक हैं.
सूत्रों ने इस बात से इंकार किया है कि कांग्रेस कार्यसमिति की सोमवार को हुई बैठक में प्रशांत किशोर को लेकर विस्तार से चर्चा की गई. पार्टी की निर्णय लेने वाली शीर्ष संस्था के इस सत्र की अध्यक्षता पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने की थी, क्योंकि उनकी मां तथा पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी की तबीयत ठीक नहीं थी.
प्रशांत किशोर के सहयोगी स्वीकार करते हैं कि प्रत्याशियों के चयन और साझेदारियों को लेकर सलाह देने की आदत की वजह से ज़्यादा लोग उन्हें मित्र नहीं मानते हैं, लेकिन उनका कहना है कि प्रशांत किशोर अपने काम को सिर्फ आंकड़े इकट्ठा करना नहीं, बल्कि जीत का संभावित रास्ता बनाना मानते हैं.टिप्पणियां
इस बार यह बेहद मुश्किल काम है, क्योंकि उत्तर प्रदेश के पिछले चुनाव में कांग्रेस चौथे स्थान पर रही थी, और दो साल पहले हुए लोकसभा चुनाव में पूरे राज्य से पार्टी के दो ही सांसद - पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी व उपाध्यक्ष राहुल गांधी - जीत पाए थे.
प्रशांत किशोर की यादवों से मुलाकात को पिछले साल बिहार में बनाए गए गैर-बीजेपी 'महागठबंधन' से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें कांग्रेस भी शामिल थी, और जिसने नीतीश कुमार को लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री पद पर पहुंचाने में कामयाबी हासिल की थी. जीतने के बाद नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर के लिए एक सरकारी पद का सृजन किया, जिससे उनका दर्जा कैबिनेट मंत्री के बराबर हो गया. पंजाब और उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की मदद करने के बाद प्रशांत उसी पद पर लौट आने वाले हैं.
कहा जा रहा है कि प्रशांत किशोर ने उत्तर प्रदेश में सत्तासीन समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव से मुलाकात कर कांग्रेस को नाराज़ कर दिया है, जो अपने शीर्ष पदों पर बैठे नेताओं के ही पीछे चलने की परम्परा का पालन करती रही है.
पिछले सप्ताह प्रशांत किशोर ने दिल्ली में मुलायम सिंह यादव से मुलाकात की थी, और कांग्रेस के यूपी अध्यक्ष राज बब्बर के अनुसार, प्रशांत किशोर को इस कदम की इजाज़त नहीं दी गई थी. NDTV से बात करते हुए राज बब्बर ने कहा था, "यह आज़ाद मुल्क है, वह किसी से भी मुलाकात कर सकते हैं..." साथ ही राज बब्बर ने समाजवादी पार्टी से तब तक गठबंधन स्थापित करने के प्रति कांग्रेस की अनिच्छा पर भी ज़ोर दिया, जब तक मुलायम सिंह यादव अपने पुत्र तथा यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से जारी जंग को खत्म नहीं कर देते.
लेकिन इस आलोचना से कतई विचलित हुए बिना प्रशांत किशोर ने सोमवार को लगभग दो घंटे की बैठक अखिलेश यादव से भी की, जिसे कांग्रेस के भीतर कथित रूप से 'एक बार फिर अवज्ञा' के रूप में देखा जा रहा है. लेकिन प्रशांत किशोर के करीबी सूत्रों का कहना है, "कांग्रेस के भीतर मौजूद लोग ही इस तरह की कहानियां फैला रहे हैं... वह (प्रशांत किशोर) अब भी पार्टी के लिए ही काम कर रहे हैं..."
इस साल मार्च से ही, जब प्रशांत किशोर ने कांग्रेस की चुनावी रणनीति तैयार करने का बीड़ा उठाया था, पार्टी के भीतर ऐसे लोगों द्वारा उनका लगातार विरोध किया जा रहा है, जो संभवतः गांधी परिवार तक उनकी बेरोकटोक पहुंच से असहज महसूस कर रहे हैं, क्योंकि यही परिवार पार्टी का धुरा रहा है. प्रशांत किशोर के विरोधियों में गुलाम नबी आज़ाद और राज बब्बर शामिल रहे हैं, और हालिया दिनों में इनमें अहमद पटेल का नाम भी जुड़ गया है, जो कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी के शीर्ष सहायक हैं.
सूत्रों ने इस बात से इंकार किया है कि कांग्रेस कार्यसमिति की सोमवार को हुई बैठक में प्रशांत किशोर को लेकर विस्तार से चर्चा की गई. पार्टी की निर्णय लेने वाली शीर्ष संस्था के इस सत्र की अध्यक्षता पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने की थी, क्योंकि उनकी मां तथा पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी की तबीयत ठीक नहीं थी.
प्रशांत किशोर के सहयोगी स्वीकार करते हैं कि प्रत्याशियों के चयन और साझेदारियों को लेकर सलाह देने की आदत की वजह से ज़्यादा लोग उन्हें मित्र नहीं मानते हैं, लेकिन उनका कहना है कि प्रशांत किशोर अपने काम को सिर्फ आंकड़े इकट्ठा करना नहीं, बल्कि जीत का संभावित रास्ता बनाना मानते हैं.टिप्पणियां
इस बार यह बेहद मुश्किल काम है, क्योंकि उत्तर प्रदेश के पिछले चुनाव में कांग्रेस चौथे स्थान पर रही थी, और दो साल पहले हुए लोकसभा चुनाव में पूरे राज्य से पार्टी के दो ही सांसद - पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी व उपाध्यक्ष राहुल गांधी - जीत पाए थे.
प्रशांत किशोर की यादवों से मुलाकात को पिछले साल बिहार में बनाए गए गैर-बीजेपी 'महागठबंधन' से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें कांग्रेस भी शामिल थी, और जिसने नीतीश कुमार को लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री पद पर पहुंचाने में कामयाबी हासिल की थी. जीतने के बाद नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर के लिए एक सरकारी पद का सृजन किया, जिससे उनका दर्जा कैबिनेट मंत्री के बराबर हो गया. पंजाब और उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की मदद करने के बाद प्रशांत उसी पद पर लौट आने वाले हैं.
पिछले सप्ताह प्रशांत किशोर ने दिल्ली में मुलायम सिंह यादव से मुलाकात की थी, और कांग्रेस के यूपी अध्यक्ष राज बब्बर के अनुसार, प्रशांत किशोर को इस कदम की इजाज़त नहीं दी गई थी. NDTV से बात करते हुए राज बब्बर ने कहा था, "यह आज़ाद मुल्क है, वह किसी से भी मुलाकात कर सकते हैं..." साथ ही राज बब्बर ने समाजवादी पार्टी से तब तक गठबंधन स्थापित करने के प्रति कांग्रेस की अनिच्छा पर भी ज़ोर दिया, जब तक मुलायम सिंह यादव अपने पुत्र तथा यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से जारी जंग को खत्म नहीं कर देते.
लेकिन इस आलोचना से कतई विचलित हुए बिना प्रशांत किशोर ने सोमवार को लगभग दो घंटे की बैठक अखिलेश यादव से भी की, जिसे कांग्रेस के भीतर कथित रूप से 'एक बार फिर अवज्ञा' के रूप में देखा जा रहा है. लेकिन प्रशांत किशोर के करीबी सूत्रों का कहना है, "कांग्रेस के भीतर मौजूद लोग ही इस तरह की कहानियां फैला रहे हैं... वह (प्रशांत किशोर) अब भी पार्टी के लिए ही काम कर रहे हैं..."
इस साल मार्च से ही, जब प्रशांत किशोर ने कांग्रेस की चुनावी रणनीति तैयार करने का बीड़ा उठाया था, पार्टी के भीतर ऐसे लोगों द्वारा उनका लगातार विरोध किया जा रहा है, जो संभवतः गांधी परिवार तक उनकी बेरोकटोक पहुंच से असहज महसूस कर रहे हैं, क्योंकि यही परिवार पार्टी का धुरा रहा है. प्रशांत किशोर के विरोधियों में गुलाम नबी आज़ाद और राज बब्बर शामिल रहे हैं, और हालिया दिनों में इनमें अहमद पटेल का नाम भी जुड़ गया है, जो कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी के शीर्ष सहायक हैं.
सूत्रों ने इस बात से इंकार किया है कि कांग्रेस कार्यसमिति की सोमवार को हुई बैठक में प्रशांत किशोर को लेकर विस्तार से चर्चा की गई. पार्टी की निर्णय लेने वाली शीर्ष संस्था के इस सत्र की अध्यक्षता पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने की थी, क्योंकि उनकी मां तथा पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी की तबीयत ठीक नहीं थी.
प्रशांत किशोर के सहयोगी स्वीकार करते हैं कि प्रत्याशियों के चयन और साझेदारियों को लेकर सलाह देने की आदत की वजह से ज़्यादा लोग उन्हें मित्र नहीं मानते हैं, लेकिन उनका कहना है कि प्रशांत किशोर अपने काम को सिर्फ आंकड़े इकट्ठा करना नहीं, बल्कि जीत का संभावित रास्ता बनाना मानते हैं.टिप्पणियां
इस बार यह बेहद मुश्किल काम है, क्योंकि उत्तर प्रदेश के पिछले चुनाव में कांग्रेस चौथे स्थान पर रही थी, और दो साल पहले हुए लोकसभा चुनाव में पूरे राज्य से पार्टी के दो ही सांसद - पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी व उपाध्यक्ष राहुल गांधी - जीत पाए थे.
प्रशांत किशोर की यादवों से मुलाकात को पिछले साल बिहार में बनाए गए गैर-बीजेपी 'महागठबंधन' से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें कांग्रेस भी शामिल थी, और जिसने नीतीश कुमार को लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री पद पर पहुंचाने में कामयाबी हासिल की थी. जीतने के बाद नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर के लिए एक सरकारी पद का सृजन किया, जिससे उनका दर्जा कैबिनेट मंत्री के बराबर हो गया. पंजाब और उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की मदद करने के बाद प्रशांत उसी पद पर लौट आने वाले हैं.
लेकिन इस आलोचना से कतई विचलित हुए बिना प्रशांत किशोर ने सोमवार को लगभग दो घंटे की बैठक अखिलेश यादव से भी की, जिसे कांग्रेस के भीतर कथित रूप से 'एक बार फिर अवज्ञा' के रूप में देखा जा रहा है. लेकिन प्रशांत किशोर के करीबी सूत्रों का कहना है, "कांग्रेस के भीतर मौजूद लोग ही इस तरह की कहानियां फैला रहे हैं... वह (प्रशांत किशोर) अब भी पार्टी के लिए ही काम कर रहे हैं..."
इस साल मार्च से ही, जब प्रशांत किशोर ने कांग्रेस की चुनावी रणनीति तैयार करने का बीड़ा उठाया था, पार्टी के भीतर ऐसे लोगों द्वारा उनका लगातार विरोध किया जा रहा है, जो संभवतः गांधी परिवार तक उनकी बेरोकटोक पहुंच से असहज महसूस कर रहे हैं, क्योंकि यही परिवार पार्टी का धुरा रहा है. प्रशांत किशोर के विरोधियों में गुलाम नबी आज़ाद और राज बब्बर शामिल रहे हैं, और हालिया दिनों में इनमें अहमद पटेल का नाम भी जुड़ गया है, जो कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी के शीर्ष सहायक हैं.
सूत्रों ने इस बात से इंकार किया है कि कांग्रेस कार्यसमिति की सोमवार को हुई बैठक में प्रशांत किशोर को लेकर विस्तार से चर्चा की गई. पार्टी की निर्णय लेने वाली शीर्ष संस्था के इस सत्र की अध्यक्षता पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने की थी, क्योंकि उनकी मां तथा पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी की तबीयत ठीक नहीं थी.
प्रशांत किशोर के सहयोगी स्वीकार करते हैं कि प्रत्याशियों के चयन और साझेदारियों को लेकर सलाह देने की आदत की वजह से ज़्यादा लोग उन्हें मित्र नहीं मानते हैं, लेकिन उनका कहना है कि प्रशांत किशोर अपने काम को सिर्फ आंकड़े इकट्ठा करना नहीं, बल्कि जीत का संभावित रास्ता बनाना मानते हैं.टिप्पणियां
इस बार यह बेहद मुश्किल काम है, क्योंकि उत्तर प्रदेश के पिछले चुनाव में कांग्रेस चौथे स्थान पर रही थी, और दो साल पहले हुए लोकसभा चुनाव में पूरे राज्य से पार्टी के दो ही सांसद - पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी व उपाध्यक्ष राहुल गांधी - जीत पाए थे.
प्रशांत किशोर की यादवों से मुलाकात को पिछले साल बिहार में बनाए गए गैर-बीजेपी 'महागठबंधन' से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें कांग्रेस भी शामिल थी, और जिसने नीतीश कुमार को लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री पद पर पहुंचाने में कामयाबी हासिल की थी. जीतने के बाद नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर के लिए एक सरकारी पद का सृजन किया, जिससे उनका दर्जा कैबिनेट मंत्री के बराबर हो गया. पंजाब और उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की मदद करने के बाद प्रशांत उसी पद पर लौट आने वाले हैं.
इस साल मार्च से ही, जब प्रशांत किशोर ने कांग्रेस की चुनावी रणनीति तैयार करने का बीड़ा उठाया था, पार्टी के भीतर ऐसे लोगों द्वारा उनका लगातार विरोध किया जा रहा है, जो संभवतः गांधी परिवार तक उनकी बेरोकटोक पहुंच से असहज महसूस कर रहे हैं, क्योंकि यही परिवार पार्टी का धुरा रहा है. प्रशांत किशोर के विरोधियों में गुलाम नबी आज़ाद और राज बब्बर शामिल रहे हैं, और हालिया दिनों में इनमें अहमद पटेल का नाम भी जुड़ गया है, जो कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी के शीर्ष सहायक हैं.
सूत्रों ने इस बात से इंकार किया है कि कांग्रेस कार्यसमिति की सोमवार को हुई बैठक में प्रशांत किशोर को लेकर विस्तार से चर्चा की गई. पार्टी की निर्णय लेने वाली शीर्ष संस्था के इस सत्र की अध्यक्षता पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने की थी, क्योंकि उनकी मां तथा पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी की तबीयत ठीक नहीं थी.
प्रशांत किशोर के सहयोगी स्वीकार करते हैं कि प्रत्याशियों के चयन और साझेदारियों को लेकर सलाह देने की आदत की वजह से ज़्यादा लोग उन्हें मित्र नहीं मानते हैं, लेकिन उनका कहना है कि प्रशांत किशोर अपने काम को सिर्फ आंकड़े इकट्ठा करना नहीं, बल्कि जीत का संभावित रास्ता बनाना मानते हैं.टिप्पणियां
इस बार यह बेहद मुश्किल काम है, क्योंकि उत्तर प्रदेश के पिछले चुनाव में कांग्रेस चौथे स्थान पर रही थी, और दो साल पहले हुए लोकसभा चुनाव में पूरे राज्य से पार्टी के दो ही सांसद - पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी व उपाध्यक्ष राहुल गांधी - जीत पाए थे.
प्रशांत किशोर की यादवों से मुलाकात को पिछले साल बिहार में बनाए गए गैर-बीजेपी 'महागठबंधन' से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें कांग्रेस भी शामिल थी, और जिसने नीतीश कुमार को लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री पद पर पहुंचाने में कामयाबी हासिल की थी. जीतने के बाद नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर के लिए एक सरकारी पद का सृजन किया, जिससे उनका दर्जा कैबिनेट मंत्री के बराबर हो गया. पंजाब और उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की मदद करने के बाद प्रशांत उसी पद पर लौट आने वाले हैं.
सूत्रों ने इस बात से इंकार किया है कि कांग्रेस कार्यसमिति की सोमवार को हुई बैठक में प्रशांत किशोर को लेकर विस्तार से चर्चा की गई. पार्टी की निर्णय लेने वाली शीर्ष संस्था के इस सत्र की अध्यक्षता पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने की थी, क्योंकि उनकी मां तथा पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी की तबीयत ठीक नहीं थी.
प्रशांत किशोर के सहयोगी स्वीकार करते हैं कि प्रत्याशियों के चयन और साझेदारियों को लेकर सलाह देने की आदत की वजह से ज़्यादा लोग उन्हें मित्र नहीं मानते हैं, लेकिन उनका कहना है कि प्रशांत किशोर अपने काम को सिर्फ आंकड़े इकट्ठा करना नहीं, बल्कि जीत का संभावित रास्ता बनाना मानते हैं.टिप्पणियां
इस बार यह बेहद मुश्किल काम है, क्योंकि उत्तर प्रदेश के पिछले चुनाव में कांग्रेस चौथे स्थान पर रही थी, और दो साल पहले हुए लोकसभा चुनाव में पूरे राज्य से पार्टी के दो ही सांसद - पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी व उपाध्यक्ष राहुल गांधी - जीत पाए थे.
प्रशांत किशोर की यादवों से मुलाकात को पिछले साल बिहार में बनाए गए गैर-बीजेपी 'महागठबंधन' से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें कांग्रेस भी शामिल थी, और जिसने नीतीश कुमार को लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री पद पर पहुंचाने में कामयाबी हासिल की थी. जीतने के बाद नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर के लिए एक सरकारी पद का सृजन किया, जिससे उनका दर्जा कैबिनेट मंत्री के बराबर हो गया. पंजाब और उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की मदद करने के बाद प्रशांत उसी पद पर लौट आने वाले हैं.
प्रशांत किशोर के सहयोगी स्वीकार करते हैं कि प्रत्याशियों के चयन और साझेदारियों को लेकर सलाह देने की आदत की वजह से ज़्यादा लोग उन्हें मित्र नहीं मानते हैं, लेकिन उनका कहना है कि प्रशांत किशोर अपने काम को सिर्फ आंकड़े इकट्ठा करना नहीं, बल्कि जीत का संभावित रास्ता बनाना मानते हैं.टिप्पणियां
इस बार यह बेहद मुश्किल काम है, क्योंकि उत्तर प्रदेश के पिछले चुनाव में कांग्रेस चौथे स्थान पर रही थी, और दो साल पहले हुए लोकसभा चुनाव में पूरे राज्य से पार्टी के दो ही सांसद - पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी व उपाध्यक्ष राहुल गांधी - जीत पाए थे.
प्रशांत किशोर की यादवों से मुलाकात को पिछले साल बिहार में बनाए गए गैर-बीजेपी 'महागठबंधन' से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें कांग्रेस भी शामिल थी, और जिसने नीतीश कुमार को लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री पद पर पहुंचाने में कामयाबी हासिल की थी. जीतने के बाद नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर के लिए एक सरकारी पद का सृजन किया, जिससे उनका दर्जा कैबिनेट मंत्री के बराबर हो गया. पंजाब और उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की मदद करने के बाद प्रशांत उसी पद पर लौट आने वाले हैं.
इस बार यह बेहद मुश्किल काम है, क्योंकि उत्तर प्रदेश के पिछले चुनाव में कांग्रेस चौथे स्थान पर रही थी, और दो साल पहले हुए लोकसभा चुनाव में पूरे राज्य से पार्टी के दो ही सांसद - पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी व उपाध्यक्ष राहुल गांधी - जीत पाए थे.
प्रशांत किशोर की यादवों से मुलाकात को पिछले साल बिहार में बनाए गए गैर-बीजेपी 'महागठबंधन' से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें कांग्रेस भी शामिल थी, और जिसने नीतीश कुमार को लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री पद पर पहुंचाने में कामयाबी हासिल की थी. जीतने के बाद नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर के लिए एक सरकारी पद का सृजन किया, जिससे उनका दर्जा कैबिनेट मंत्री के बराबर हो गया. पंजाब और उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की मदद करने के बाद प्रशांत उसी पद पर लौट आने वाले हैं.
प्रशांत किशोर की यादवों से मुलाकात को पिछले साल बिहार में बनाए गए गैर-बीजेपी 'महागठबंधन' से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें कांग्रेस भी शामिल थी, और जिसने नीतीश कुमार को लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री पद पर पहुंचाने में कामयाबी हासिल की थी. जीतने के बाद नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर के लिए एक सरकारी पद का सृजन किया, जिससे उनका दर्जा कैबिनेट मंत्री के बराबर हो गया. पंजाब और उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की मदद करने के बाद प्रशांत उसी पद पर लौट आने वाले हैं. | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: मीडिया में दावा किया गया था, प्रशांत को कांग्रेस निकालने जा रही है
कहा जा रहा है कि प्रशांत ने मुलायम से मुलाकात कर कांग्रेस को नाराज़ किया
सूत्रों ने इंकार किया कि CWC की बैठक में प्रशांत किशोर को लेकर चर्चा हुई | 32 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: एडेलगिव फाउंडेशन ने लंदन ओलिम्पिक में कांस्य पदक जीतने वाली मैरी कॉम का गुरुवार को दो करोड़ रुपये का जीवन बीमा किया है।टिप्पणियां
मैरी कॉम मुक्केबाजी में पदक जीतने वाली देश की पहली महिला हैं। उन्होंने मुक्केबाजी के 51 किलोग्राम वर्ग में पदक जीता था।
इससे पूर्व मणिपुर सरकार ने लंदन ओलिम्पिक में मुक्केबाजी में कांस्य पदक जीतने वाली एमसी मैरी कॉम को अन्य लाभों सहित 75 लाख रुपये बतौर पुरस्कार देने की घोषणा की थी।
मैरी कॉम मुक्केबाजी में पदक जीतने वाली देश की पहली महिला हैं। उन्होंने मुक्केबाजी के 51 किलोग्राम वर्ग में पदक जीता था।
इससे पूर्व मणिपुर सरकार ने लंदन ओलिम्पिक में मुक्केबाजी में कांस्य पदक जीतने वाली एमसी मैरी कॉम को अन्य लाभों सहित 75 लाख रुपये बतौर पुरस्कार देने की घोषणा की थी।
इससे पूर्व मणिपुर सरकार ने लंदन ओलिम्पिक में मुक्केबाजी में कांस्य पदक जीतने वाली एमसी मैरी कॉम को अन्य लाभों सहित 75 लाख रुपये बतौर पुरस्कार देने की घोषणा की थी। | संक्षिप्त सारांश: एडेलगिव फाउंडेशन ने लंदन ओलिम्पिक में कांस्य पदक जीतने वाली मैरी कॉम का गुरुवार को दो करोड़ रुपये का जीवन बीमा किया है। | 23 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: पत्नी ने जब तलाक नही दिया तो पति ने प्रेमिका के साथ मिलकर अपनी पत्नी को मौत के घाट उतार दिया। यहीं नही, दोनों ने पत्नी की लाश को चंडीगढ़ से 200 किलोमीटर दूर होशियारपुर के जंगलों में फैंक दिया।
मामला तब खुला जब चंडीगढ़ पुलिस ने कातिल पति से सख्ती से पूछताछ की और बाद में एक-एककर के सारी बातें साफ़ हो गई।
पुलिस इस संगीन मामले का पर्दाफाश करने में जुटी है।
मामला चंडीगढ़ के सेक्टर 17 का है जहां के रहने वाले बलबीर पाल ने बीती 13 तारीख को सेक्टर 17 में अपनी बहू पूजा की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज़ करवाई तो चंडीगढ़ पुलिस ने गुम हुई पूजा की तालाश शुरू कर दी। लेकिन पुलिस को कोई सफलता न मिली। जब पुलिस ने मृतका के पति विजेंदर से सख्ती से पूछताछ की तो पुलिस को सारा मामला समझते समय न लगा।
पुलिस के मुताबिक पूजा के पति विजेंदर का पिछले दो-ढाई साल से रेनू नाम की विवाहिता लड़की से अवैध संबध थे। इसका उसकी पत्नी को पता चल गया था। उस दिन से ही आरोपी विजेंदर ने अपनी पत्नी पर तलाक देने का दबाव बनाना शुरू कर दिया।
लेकिन पूजा नहीं मानी तो आरोपी विजेंदर ने अपनी प्रेमिका रेनु के साथ मिलकर पूजा को मारने की योजना बना डाली।टिप्पणियां
13 तारीख को विजेंदर ने अपनी पत्नी पूजा को कोल्ड-ड्रिंक में नींद की ढेर सारी गोलियां मिलाकर पिला दी। जिससे पूजा की मौत हो गई। उसके बाद उसने रेनु के साथ कार में अपनी पत्नी की लाश को डालकर चंडीगढ़ से करीब 200 किलोमीटर दूर होशियारपुर के जंगलों में आग लगाकर फेंक दी और वापस चंडीगढ़ आ गए।
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर पूजा की लाश बरामद कर दोनों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज़ कर लिया है।
मामला तब खुला जब चंडीगढ़ पुलिस ने कातिल पति से सख्ती से पूछताछ की और बाद में एक-एककर के सारी बातें साफ़ हो गई।
पुलिस इस संगीन मामले का पर्दाफाश करने में जुटी है।
मामला चंडीगढ़ के सेक्टर 17 का है जहां के रहने वाले बलबीर पाल ने बीती 13 तारीख को सेक्टर 17 में अपनी बहू पूजा की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज़ करवाई तो चंडीगढ़ पुलिस ने गुम हुई पूजा की तालाश शुरू कर दी। लेकिन पुलिस को कोई सफलता न मिली। जब पुलिस ने मृतका के पति विजेंदर से सख्ती से पूछताछ की तो पुलिस को सारा मामला समझते समय न लगा।
पुलिस के मुताबिक पूजा के पति विजेंदर का पिछले दो-ढाई साल से रेनू नाम की विवाहिता लड़की से अवैध संबध थे। इसका उसकी पत्नी को पता चल गया था। उस दिन से ही आरोपी विजेंदर ने अपनी पत्नी पर तलाक देने का दबाव बनाना शुरू कर दिया।
लेकिन पूजा नहीं मानी तो आरोपी विजेंदर ने अपनी प्रेमिका रेनु के साथ मिलकर पूजा को मारने की योजना बना डाली।टिप्पणियां
13 तारीख को विजेंदर ने अपनी पत्नी पूजा को कोल्ड-ड्रिंक में नींद की ढेर सारी गोलियां मिलाकर पिला दी। जिससे पूजा की मौत हो गई। उसके बाद उसने रेनु के साथ कार में अपनी पत्नी की लाश को डालकर चंडीगढ़ से करीब 200 किलोमीटर दूर होशियारपुर के जंगलों में आग लगाकर फेंक दी और वापस चंडीगढ़ आ गए।
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर पूजा की लाश बरामद कर दोनों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज़ कर लिया है।
पुलिस इस संगीन मामले का पर्दाफाश करने में जुटी है।
मामला चंडीगढ़ के सेक्टर 17 का है जहां के रहने वाले बलबीर पाल ने बीती 13 तारीख को सेक्टर 17 में अपनी बहू पूजा की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज़ करवाई तो चंडीगढ़ पुलिस ने गुम हुई पूजा की तालाश शुरू कर दी। लेकिन पुलिस को कोई सफलता न मिली। जब पुलिस ने मृतका के पति विजेंदर से सख्ती से पूछताछ की तो पुलिस को सारा मामला समझते समय न लगा।
पुलिस के मुताबिक पूजा के पति विजेंदर का पिछले दो-ढाई साल से रेनू नाम की विवाहिता लड़की से अवैध संबध थे। इसका उसकी पत्नी को पता चल गया था। उस दिन से ही आरोपी विजेंदर ने अपनी पत्नी पर तलाक देने का दबाव बनाना शुरू कर दिया।
लेकिन पूजा नहीं मानी तो आरोपी विजेंदर ने अपनी प्रेमिका रेनु के साथ मिलकर पूजा को मारने की योजना बना डाली।टिप्पणियां
13 तारीख को विजेंदर ने अपनी पत्नी पूजा को कोल्ड-ड्रिंक में नींद की ढेर सारी गोलियां मिलाकर पिला दी। जिससे पूजा की मौत हो गई। उसके बाद उसने रेनु के साथ कार में अपनी पत्नी की लाश को डालकर चंडीगढ़ से करीब 200 किलोमीटर दूर होशियारपुर के जंगलों में आग लगाकर फेंक दी और वापस चंडीगढ़ आ गए।
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर पूजा की लाश बरामद कर दोनों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज़ कर लिया है।
मामला चंडीगढ़ के सेक्टर 17 का है जहां के रहने वाले बलबीर पाल ने बीती 13 तारीख को सेक्टर 17 में अपनी बहू पूजा की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज़ करवाई तो चंडीगढ़ पुलिस ने गुम हुई पूजा की तालाश शुरू कर दी। लेकिन पुलिस को कोई सफलता न मिली। जब पुलिस ने मृतका के पति विजेंदर से सख्ती से पूछताछ की तो पुलिस को सारा मामला समझते समय न लगा।
पुलिस के मुताबिक पूजा के पति विजेंदर का पिछले दो-ढाई साल से रेनू नाम की विवाहिता लड़की से अवैध संबध थे। इसका उसकी पत्नी को पता चल गया था। उस दिन से ही आरोपी विजेंदर ने अपनी पत्नी पर तलाक देने का दबाव बनाना शुरू कर दिया।
लेकिन पूजा नहीं मानी तो आरोपी विजेंदर ने अपनी प्रेमिका रेनु के साथ मिलकर पूजा को मारने की योजना बना डाली।टिप्पणियां
13 तारीख को विजेंदर ने अपनी पत्नी पूजा को कोल्ड-ड्रिंक में नींद की ढेर सारी गोलियां मिलाकर पिला दी। जिससे पूजा की मौत हो गई। उसके बाद उसने रेनु के साथ कार में अपनी पत्नी की लाश को डालकर चंडीगढ़ से करीब 200 किलोमीटर दूर होशियारपुर के जंगलों में आग लगाकर फेंक दी और वापस चंडीगढ़ आ गए।
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर पूजा की लाश बरामद कर दोनों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज़ कर लिया है।
पुलिस के मुताबिक पूजा के पति विजेंदर का पिछले दो-ढाई साल से रेनू नाम की विवाहिता लड़की से अवैध संबध थे। इसका उसकी पत्नी को पता चल गया था। उस दिन से ही आरोपी विजेंदर ने अपनी पत्नी पर तलाक देने का दबाव बनाना शुरू कर दिया।
लेकिन पूजा नहीं मानी तो आरोपी विजेंदर ने अपनी प्रेमिका रेनु के साथ मिलकर पूजा को मारने की योजना बना डाली।टिप्पणियां
13 तारीख को विजेंदर ने अपनी पत्नी पूजा को कोल्ड-ड्रिंक में नींद की ढेर सारी गोलियां मिलाकर पिला दी। जिससे पूजा की मौत हो गई। उसके बाद उसने रेनु के साथ कार में अपनी पत्नी की लाश को डालकर चंडीगढ़ से करीब 200 किलोमीटर दूर होशियारपुर के जंगलों में आग लगाकर फेंक दी और वापस चंडीगढ़ आ गए।
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर पूजा की लाश बरामद कर दोनों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज़ कर लिया है।
लेकिन पूजा नहीं मानी तो आरोपी विजेंदर ने अपनी प्रेमिका रेनु के साथ मिलकर पूजा को मारने की योजना बना डाली।टिप्पणियां
13 तारीख को विजेंदर ने अपनी पत्नी पूजा को कोल्ड-ड्रिंक में नींद की ढेर सारी गोलियां मिलाकर पिला दी। जिससे पूजा की मौत हो गई। उसके बाद उसने रेनु के साथ कार में अपनी पत्नी की लाश को डालकर चंडीगढ़ से करीब 200 किलोमीटर दूर होशियारपुर के जंगलों में आग लगाकर फेंक दी और वापस चंडीगढ़ आ गए।
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर पूजा की लाश बरामद कर दोनों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज़ कर लिया है।
13 तारीख को विजेंदर ने अपनी पत्नी पूजा को कोल्ड-ड्रिंक में नींद की ढेर सारी गोलियां मिलाकर पिला दी। जिससे पूजा की मौत हो गई। उसके बाद उसने रेनु के साथ कार में अपनी पत्नी की लाश को डालकर चंडीगढ़ से करीब 200 किलोमीटर दूर होशियारपुर के जंगलों में आग लगाकर फेंक दी और वापस चंडीगढ़ आ गए।
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर पूजा की लाश बरामद कर दोनों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज़ कर लिया है।
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर पूजा की लाश बरामद कर दोनों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज़ कर लिया है। | संक्षिप्त पाठ: पत्नी ने जब तलाक नही दिया तो पति ने प्रेमिका के साथ मिलकर अपनी पत्नी को मौत के घाट उतार दिया। यहीं नही, दोनों ने पत्नी की लाश को चंडीगढ़ से 200 किलोमीटर दूर होशियारपुर के जंगलों में फैंक दिया। | 14 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: महाराष्ट्र के गृह मंत्री आरआर पाटिल ने विधानसभा में स्वीकार किया कि सुरक्षा बलों की भारी मौजूदगी के बावजूद राज्य में नक्सली हिंसा में कमी नहीं हो रही है।
पाटिल ने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर कहा, ‘पुलिस, सीआरपीएफ (नक्सल प्रभावित गढ़चिरौली और अन्य इलाकों में) की उपस्थिति के बावजूद आम आदमी एवं पुलिसकर्मी मारे जा रहे हैं। नक्सल हिंसा की संख्या में गिरावट नहीं आ रही है।’ उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में नक्सलवाद ‘सबसे चुनौतीपूर्ण समस्यायों में’ से एक है और जब तक पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में इसे खत्म नहीं किया जाता है तब तक इस पर काबू नहीं पाया जा सकता।टिप्पणियां
नक्सलियों से निपटने के लिए रणनीति बनाने की खातिर नेताओं, अधिकारियों और पुलिस की बैठक मॉनसून सत्र के अंत में होगी।
मंत्री ने कहा कि नक्सलियों के आर्थिक संसाधनों को निशाना बनाया जाना चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि जंगल के उत्पादों से उग्रवादियों को लाभ नहीं मिले।
पाटिल ने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर कहा, ‘पुलिस, सीआरपीएफ (नक्सल प्रभावित गढ़चिरौली और अन्य इलाकों में) की उपस्थिति के बावजूद आम आदमी एवं पुलिसकर्मी मारे जा रहे हैं। नक्सल हिंसा की संख्या में गिरावट नहीं आ रही है।’ उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में नक्सलवाद ‘सबसे चुनौतीपूर्ण समस्यायों में’ से एक है और जब तक पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में इसे खत्म नहीं किया जाता है तब तक इस पर काबू नहीं पाया जा सकता।टिप्पणियां
नक्सलियों से निपटने के लिए रणनीति बनाने की खातिर नेताओं, अधिकारियों और पुलिस की बैठक मॉनसून सत्र के अंत में होगी।
मंत्री ने कहा कि नक्सलियों के आर्थिक संसाधनों को निशाना बनाया जाना चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि जंगल के उत्पादों से उग्रवादियों को लाभ नहीं मिले।
नक्सलियों से निपटने के लिए रणनीति बनाने की खातिर नेताओं, अधिकारियों और पुलिस की बैठक मॉनसून सत्र के अंत में होगी।
मंत्री ने कहा कि नक्सलियों के आर्थिक संसाधनों को निशाना बनाया जाना चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि जंगल के उत्पादों से उग्रवादियों को लाभ नहीं मिले।
मंत्री ने कहा कि नक्सलियों के आर्थिक संसाधनों को निशाना बनाया जाना चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि जंगल के उत्पादों से उग्रवादियों को लाभ नहीं मिले। | महाराष्ट्र के गृह मंत्री आरआर पाटिल ने विधानसभा में स्वीकार किया कि सुरक्षा बलों की भारी मौजूदगी के बावजूद राज्य में नक्सली हिंसा में कमी नहीं हो रही है। | 34 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: कप्तान गौतम गम्भीर (50) के उम्दा अर्द्धशतक और लक्ष्मीपति बालाजी (19/3) के नेतृत्व में अपने गेंदबाजों के शानदार प्रदर्शन की बदौलत कोलकाता नाइट राइडर्स टीम ने गुरुवार को सुब्रत रॉय सहारा स्टेडियम में खेले गए इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के छठे संस्करण के 56वें मुकाबले में पुणे वॉरियर्स इंडिया को 46 रनों से हरा दिया। इस जीत के बावजूद नाइट राइडर्स सातवें क्रम पर ही बने हुए हैं।
नाइट राइडर्स द्वारा दिए गए 153 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए वॉरियर्स 19.3 ओवरों में सभी विकेट गंवाकर 106 रन ही बना सके। एंजेलो मैथ्यूज ने सबसे अधिक 40 रन बनाए जबकि रॉबिन उथप्पा ने 31 रनों का योगदान दिया। नाइट राइडर्स की ओर से लक्ष्मीपति बालाजी ने तीन विकेट लिए जबकि इकबाल अब्दुल्ला, सुनील नरेन और जैक्स कैलिस को दो-दो सफलता मिली। गम्भीर को मैन ऑफ द मैच चुना गया।
लगातार आठवीं हार टालने के लिए प्रयासरत वॉरियर्स की शुरुआत खराब रही। 20 रन के कुल योग पर कप्तान एरॉन फिंच (5) जैक्स कैलिस की गेंद पर बोल्ड हो गए। वॉरियर्स अभी पहले झटके से उबरा भी नहीं था कि युवराज सिंह (1) को लक्ष्मीपति बालाजी ने पैवेलियन की राह दिखा दी। युवराज का विकेट 23 के कुल योग पर गिरा।
इसके बाद 39 के कुल योग उदित बिरला (7) को इकबाल अब्दुल्ला ने चलता किया। एक छोर पर रॉबिन उथप्पा (31) काफी अच्छी बल्लेबाजी कर रहे थे लेकिन इकबाल ने 53 के कुल योग पर उन्हें आउट कर वॉरियर्स को चौथा झटका दिया।
मिशेल मार्श (5) और एंजेलो मैथ्यूज (40) ने पांचवें विकेट के लिए 25 रन जोड़े ही थे कि रजत भाटिया ने मार्श को आउट करके वॉरियर्स को पांचवां झटका दिया।
मैथ्यूज को आउट करना जरूरी था और यह काम नाइट राइडर्स के लिए सुनील नरेन ने किया। नरेन ने 95 के कुल योग पर मैथ्यूज को मनोज तिवारी के हाथों कैच कराके वॉरियर्स को छठा झटका दिया। मैथ्यूज ने 28 गेंदों पर चार छक्के लगाए।
इसके बाद 103 रनों के कुल योग पर महेश रावत (5) को कैलिस ने आउट किया। पारी के 19वें ओवर की पहली गेंद पर नरेन ने वायने पार्नेल (5) को चलता कर वॉरियर्स को आठवां झटका दिया। भुवनेश्वर कुमार (1) को बालाजी ने 105 के कुल योग पर आउट किया। बालाजी ने पारी के अंतिम ओवर की तीसरी गेंद पर परवेज रसूल (1) को आउट कर वॉरियर्स का पुलिंदा बांध दिया।
इससे पहले, टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने उतरी मौजूदा चैम्पियन टीम ने निर्धारित 20 ओवरों की समाप्ति तक छह विकेट पर 152 रन बनाए। इसमें कप्तान गम्भीर के सर्वाधिक 50 और रेयान टेन डोशे के 31 रन शामिल हैं।
मनोज तिवारी 15 और रजत भाटिया 13 रनों पर नाबाद लौटे। वॉरियर्स की ओर से भुवनेश्वर कुमार ने तीन विकेट लिए जबकि मिशेल मार्श ने दो विकेट लिए।
नाइट राइडर्स ने गम्भीर के नेतृत्व में अपेक्षाकृत अच्छी शुरुआत की। 44 गेंदों पर छह चौके लगाने वाले गम्भीर और मानविंदर बिसला (12) ने पहले विकेट के लिए 45 रन जोड़े। बिसला का विकेट इसी योग पर गिरा। वह भुवनेश्वर की गेंद पर महेश रावत के हाथों लपके गए।
बिसला ने 13 गेंदों पर दो चौके लगाए। उनका स्थान लेने आए जैक्स कैलिस (2) को परवेज रसूल ने सांस लेने की फुर्सत नहीं दी और 52 रन के कुल योग पर उन्हें एंजेलो मैथ्यूज के हाथों कैच करा दिया।
इसके बाद इयोन मोर्गन (15) और कप्तान ने तीसरे विकेट के लिए 23 रन जोड़े। मोर्गन लय में नहीं दिख रहे थे। वह 15 गेंदों पर एक चौका लगाकर मिशेल मार्श की गेंद पर रॉबिन उथप्पा के हाथों लपके गए। यह विकेट 75 रनों के कुल योग पर गिरा।टिप्पणियां
गम्भीर 90 के कुल योग पर पवेलियन लौटे। गम्भीर को मार्श ने मैथ्यूज के हाथों कैच कराया। यूसुफ पठान (3) के रूप में नाइट राइडर्स का पांचवां विकेट गिरा। आईपीएल-6 में अब तक सिर्फ एक अच्छी पारी खेलने वाले पठान को भुवनेश्वर ने रावत के हाथों कैच कराया।
डोशे का विकेट 135 रनों के कुल योग पर गिरा। पहली बार आईपीएल-6 में खेल रहे डोशे ने 23 गेंदों की तेज पारी में तीन चौके और एक छक्का लगाया। उनका विकेट भी भुवनेश्वर ने लिया। तिवारी ने अपनी 10 गेंदों की नाबाद पारी में दो चौके लगाए। भाटिया ने पांच गेंदों पर एक चौका और एक छक्का लगाया।
नाइट राइडर्स द्वारा दिए गए 153 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए वॉरियर्स 19.3 ओवरों में सभी विकेट गंवाकर 106 रन ही बना सके। एंजेलो मैथ्यूज ने सबसे अधिक 40 रन बनाए जबकि रॉबिन उथप्पा ने 31 रनों का योगदान दिया। नाइट राइडर्स की ओर से लक्ष्मीपति बालाजी ने तीन विकेट लिए जबकि इकबाल अब्दुल्ला, सुनील नरेन और जैक्स कैलिस को दो-दो सफलता मिली। गम्भीर को मैन ऑफ द मैच चुना गया।
लगातार आठवीं हार टालने के लिए प्रयासरत वॉरियर्स की शुरुआत खराब रही। 20 रन के कुल योग पर कप्तान एरॉन फिंच (5) जैक्स कैलिस की गेंद पर बोल्ड हो गए। वॉरियर्स अभी पहले झटके से उबरा भी नहीं था कि युवराज सिंह (1) को लक्ष्मीपति बालाजी ने पैवेलियन की राह दिखा दी। युवराज का विकेट 23 के कुल योग पर गिरा।
इसके बाद 39 के कुल योग उदित बिरला (7) को इकबाल अब्दुल्ला ने चलता किया। एक छोर पर रॉबिन उथप्पा (31) काफी अच्छी बल्लेबाजी कर रहे थे लेकिन इकबाल ने 53 के कुल योग पर उन्हें आउट कर वॉरियर्स को चौथा झटका दिया।
मिशेल मार्श (5) और एंजेलो मैथ्यूज (40) ने पांचवें विकेट के लिए 25 रन जोड़े ही थे कि रजत भाटिया ने मार्श को आउट करके वॉरियर्स को पांचवां झटका दिया।
मैथ्यूज को आउट करना जरूरी था और यह काम नाइट राइडर्स के लिए सुनील नरेन ने किया। नरेन ने 95 के कुल योग पर मैथ्यूज को मनोज तिवारी के हाथों कैच कराके वॉरियर्स को छठा झटका दिया। मैथ्यूज ने 28 गेंदों पर चार छक्के लगाए।
इसके बाद 103 रनों के कुल योग पर महेश रावत (5) को कैलिस ने आउट किया। पारी के 19वें ओवर की पहली गेंद पर नरेन ने वायने पार्नेल (5) को चलता कर वॉरियर्स को आठवां झटका दिया। भुवनेश्वर कुमार (1) को बालाजी ने 105 के कुल योग पर आउट किया। बालाजी ने पारी के अंतिम ओवर की तीसरी गेंद पर परवेज रसूल (1) को आउट कर वॉरियर्स का पुलिंदा बांध दिया।
इससे पहले, टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने उतरी मौजूदा चैम्पियन टीम ने निर्धारित 20 ओवरों की समाप्ति तक छह विकेट पर 152 रन बनाए। इसमें कप्तान गम्भीर के सर्वाधिक 50 और रेयान टेन डोशे के 31 रन शामिल हैं।
मनोज तिवारी 15 और रजत भाटिया 13 रनों पर नाबाद लौटे। वॉरियर्स की ओर से भुवनेश्वर कुमार ने तीन विकेट लिए जबकि मिशेल मार्श ने दो विकेट लिए।
नाइट राइडर्स ने गम्भीर के नेतृत्व में अपेक्षाकृत अच्छी शुरुआत की। 44 गेंदों पर छह चौके लगाने वाले गम्भीर और मानविंदर बिसला (12) ने पहले विकेट के लिए 45 रन जोड़े। बिसला का विकेट इसी योग पर गिरा। वह भुवनेश्वर की गेंद पर महेश रावत के हाथों लपके गए।
बिसला ने 13 गेंदों पर दो चौके लगाए। उनका स्थान लेने आए जैक्स कैलिस (2) को परवेज रसूल ने सांस लेने की फुर्सत नहीं दी और 52 रन के कुल योग पर उन्हें एंजेलो मैथ्यूज के हाथों कैच करा दिया।
इसके बाद इयोन मोर्गन (15) और कप्तान ने तीसरे विकेट के लिए 23 रन जोड़े। मोर्गन लय में नहीं दिख रहे थे। वह 15 गेंदों पर एक चौका लगाकर मिशेल मार्श की गेंद पर रॉबिन उथप्पा के हाथों लपके गए। यह विकेट 75 रनों के कुल योग पर गिरा।टिप्पणियां
गम्भीर 90 के कुल योग पर पवेलियन लौटे। गम्भीर को मार्श ने मैथ्यूज के हाथों कैच कराया। यूसुफ पठान (3) के रूप में नाइट राइडर्स का पांचवां विकेट गिरा। आईपीएल-6 में अब तक सिर्फ एक अच्छी पारी खेलने वाले पठान को भुवनेश्वर ने रावत के हाथों कैच कराया।
डोशे का विकेट 135 रनों के कुल योग पर गिरा। पहली बार आईपीएल-6 में खेल रहे डोशे ने 23 गेंदों की तेज पारी में तीन चौके और एक छक्का लगाया। उनका विकेट भी भुवनेश्वर ने लिया। तिवारी ने अपनी 10 गेंदों की नाबाद पारी में दो चौके लगाए। भाटिया ने पांच गेंदों पर एक चौका और एक छक्का लगाया।
लगातार आठवीं हार टालने के लिए प्रयासरत वॉरियर्स की शुरुआत खराब रही। 20 रन के कुल योग पर कप्तान एरॉन फिंच (5) जैक्स कैलिस की गेंद पर बोल्ड हो गए। वॉरियर्स अभी पहले झटके से उबरा भी नहीं था कि युवराज सिंह (1) को लक्ष्मीपति बालाजी ने पैवेलियन की राह दिखा दी। युवराज का विकेट 23 के कुल योग पर गिरा।
इसके बाद 39 के कुल योग उदित बिरला (7) को इकबाल अब्दुल्ला ने चलता किया। एक छोर पर रॉबिन उथप्पा (31) काफी अच्छी बल्लेबाजी कर रहे थे लेकिन इकबाल ने 53 के कुल योग पर उन्हें आउट कर वॉरियर्स को चौथा झटका दिया।
मिशेल मार्श (5) और एंजेलो मैथ्यूज (40) ने पांचवें विकेट के लिए 25 रन जोड़े ही थे कि रजत भाटिया ने मार्श को आउट करके वॉरियर्स को पांचवां झटका दिया।
मैथ्यूज को आउट करना जरूरी था और यह काम नाइट राइडर्स के लिए सुनील नरेन ने किया। नरेन ने 95 के कुल योग पर मैथ्यूज को मनोज तिवारी के हाथों कैच कराके वॉरियर्स को छठा झटका दिया। मैथ्यूज ने 28 गेंदों पर चार छक्के लगाए।
इसके बाद 103 रनों के कुल योग पर महेश रावत (5) को कैलिस ने आउट किया। पारी के 19वें ओवर की पहली गेंद पर नरेन ने वायने पार्नेल (5) को चलता कर वॉरियर्स को आठवां झटका दिया। भुवनेश्वर कुमार (1) को बालाजी ने 105 के कुल योग पर आउट किया। बालाजी ने पारी के अंतिम ओवर की तीसरी गेंद पर परवेज रसूल (1) को आउट कर वॉरियर्स का पुलिंदा बांध दिया।
इससे पहले, टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने उतरी मौजूदा चैम्पियन टीम ने निर्धारित 20 ओवरों की समाप्ति तक छह विकेट पर 152 रन बनाए। इसमें कप्तान गम्भीर के सर्वाधिक 50 और रेयान टेन डोशे के 31 रन शामिल हैं।
मनोज तिवारी 15 और रजत भाटिया 13 रनों पर नाबाद लौटे। वॉरियर्स की ओर से भुवनेश्वर कुमार ने तीन विकेट लिए जबकि मिशेल मार्श ने दो विकेट लिए।
नाइट राइडर्स ने गम्भीर के नेतृत्व में अपेक्षाकृत अच्छी शुरुआत की। 44 गेंदों पर छह चौके लगाने वाले गम्भीर और मानविंदर बिसला (12) ने पहले विकेट के लिए 45 रन जोड़े। बिसला का विकेट इसी योग पर गिरा। वह भुवनेश्वर की गेंद पर महेश रावत के हाथों लपके गए।
बिसला ने 13 गेंदों पर दो चौके लगाए। उनका स्थान लेने आए जैक्स कैलिस (2) को परवेज रसूल ने सांस लेने की फुर्सत नहीं दी और 52 रन के कुल योग पर उन्हें एंजेलो मैथ्यूज के हाथों कैच करा दिया।
इसके बाद इयोन मोर्गन (15) और कप्तान ने तीसरे विकेट के लिए 23 रन जोड़े। मोर्गन लय में नहीं दिख रहे थे। वह 15 गेंदों पर एक चौका लगाकर मिशेल मार्श की गेंद पर रॉबिन उथप्पा के हाथों लपके गए। यह विकेट 75 रनों के कुल योग पर गिरा।टिप्पणियां
गम्भीर 90 के कुल योग पर पवेलियन लौटे। गम्भीर को मार्श ने मैथ्यूज के हाथों कैच कराया। यूसुफ पठान (3) के रूप में नाइट राइडर्स का पांचवां विकेट गिरा। आईपीएल-6 में अब तक सिर्फ एक अच्छी पारी खेलने वाले पठान को भुवनेश्वर ने रावत के हाथों कैच कराया।
डोशे का विकेट 135 रनों के कुल योग पर गिरा। पहली बार आईपीएल-6 में खेल रहे डोशे ने 23 गेंदों की तेज पारी में तीन चौके और एक छक्का लगाया। उनका विकेट भी भुवनेश्वर ने लिया। तिवारी ने अपनी 10 गेंदों की नाबाद पारी में दो चौके लगाए। भाटिया ने पांच गेंदों पर एक चौका और एक छक्का लगाया।
इसके बाद 39 के कुल योग उदित बिरला (7) को इकबाल अब्दुल्ला ने चलता किया। एक छोर पर रॉबिन उथप्पा (31) काफी अच्छी बल्लेबाजी कर रहे थे लेकिन इकबाल ने 53 के कुल योग पर उन्हें आउट कर वॉरियर्स को चौथा झटका दिया।
मिशेल मार्श (5) और एंजेलो मैथ्यूज (40) ने पांचवें विकेट के लिए 25 रन जोड़े ही थे कि रजत भाटिया ने मार्श को आउट करके वॉरियर्स को पांचवां झटका दिया।
मैथ्यूज को आउट करना जरूरी था और यह काम नाइट राइडर्स के लिए सुनील नरेन ने किया। नरेन ने 95 के कुल योग पर मैथ्यूज को मनोज तिवारी के हाथों कैच कराके वॉरियर्स को छठा झटका दिया। मैथ्यूज ने 28 गेंदों पर चार छक्के लगाए।
इसके बाद 103 रनों के कुल योग पर महेश रावत (5) को कैलिस ने आउट किया। पारी के 19वें ओवर की पहली गेंद पर नरेन ने वायने पार्नेल (5) को चलता कर वॉरियर्स को आठवां झटका दिया। भुवनेश्वर कुमार (1) को बालाजी ने 105 के कुल योग पर आउट किया। बालाजी ने पारी के अंतिम ओवर की तीसरी गेंद पर परवेज रसूल (1) को आउट कर वॉरियर्स का पुलिंदा बांध दिया।
इससे पहले, टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने उतरी मौजूदा चैम्पियन टीम ने निर्धारित 20 ओवरों की समाप्ति तक छह विकेट पर 152 रन बनाए। इसमें कप्तान गम्भीर के सर्वाधिक 50 और रेयान टेन डोशे के 31 रन शामिल हैं।
मनोज तिवारी 15 और रजत भाटिया 13 रनों पर नाबाद लौटे। वॉरियर्स की ओर से भुवनेश्वर कुमार ने तीन विकेट लिए जबकि मिशेल मार्श ने दो विकेट लिए।
नाइट राइडर्स ने गम्भीर के नेतृत्व में अपेक्षाकृत अच्छी शुरुआत की। 44 गेंदों पर छह चौके लगाने वाले गम्भीर और मानविंदर बिसला (12) ने पहले विकेट के लिए 45 रन जोड़े। बिसला का विकेट इसी योग पर गिरा। वह भुवनेश्वर की गेंद पर महेश रावत के हाथों लपके गए।
बिसला ने 13 गेंदों पर दो चौके लगाए। उनका स्थान लेने आए जैक्स कैलिस (2) को परवेज रसूल ने सांस लेने की फुर्सत नहीं दी और 52 रन के कुल योग पर उन्हें एंजेलो मैथ्यूज के हाथों कैच करा दिया।
इसके बाद इयोन मोर्गन (15) और कप्तान ने तीसरे विकेट के लिए 23 रन जोड़े। मोर्गन लय में नहीं दिख रहे थे। वह 15 गेंदों पर एक चौका लगाकर मिशेल मार्श की गेंद पर रॉबिन उथप्पा के हाथों लपके गए। यह विकेट 75 रनों के कुल योग पर गिरा।टिप्पणियां
गम्भीर 90 के कुल योग पर पवेलियन लौटे। गम्भीर को मार्श ने मैथ्यूज के हाथों कैच कराया। यूसुफ पठान (3) के रूप में नाइट राइडर्स का पांचवां विकेट गिरा। आईपीएल-6 में अब तक सिर्फ एक अच्छी पारी खेलने वाले पठान को भुवनेश्वर ने रावत के हाथों कैच कराया।
डोशे का विकेट 135 रनों के कुल योग पर गिरा। पहली बार आईपीएल-6 में खेल रहे डोशे ने 23 गेंदों की तेज पारी में तीन चौके और एक छक्का लगाया। उनका विकेट भी भुवनेश्वर ने लिया। तिवारी ने अपनी 10 गेंदों की नाबाद पारी में दो चौके लगाए। भाटिया ने पांच गेंदों पर एक चौका और एक छक्का लगाया।
मिशेल मार्श (5) और एंजेलो मैथ्यूज (40) ने पांचवें विकेट के लिए 25 रन जोड़े ही थे कि रजत भाटिया ने मार्श को आउट करके वॉरियर्स को पांचवां झटका दिया।
मैथ्यूज को आउट करना जरूरी था और यह काम नाइट राइडर्स के लिए सुनील नरेन ने किया। नरेन ने 95 के कुल योग पर मैथ्यूज को मनोज तिवारी के हाथों कैच कराके वॉरियर्स को छठा झटका दिया। मैथ्यूज ने 28 गेंदों पर चार छक्के लगाए।
इसके बाद 103 रनों के कुल योग पर महेश रावत (5) को कैलिस ने आउट किया। पारी के 19वें ओवर की पहली गेंद पर नरेन ने वायने पार्नेल (5) को चलता कर वॉरियर्स को आठवां झटका दिया। भुवनेश्वर कुमार (1) को बालाजी ने 105 के कुल योग पर आउट किया। बालाजी ने पारी के अंतिम ओवर की तीसरी गेंद पर परवेज रसूल (1) को आउट कर वॉरियर्स का पुलिंदा बांध दिया।
इससे पहले, टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने उतरी मौजूदा चैम्पियन टीम ने निर्धारित 20 ओवरों की समाप्ति तक छह विकेट पर 152 रन बनाए। इसमें कप्तान गम्भीर के सर्वाधिक 50 और रेयान टेन डोशे के 31 रन शामिल हैं।
मनोज तिवारी 15 और रजत भाटिया 13 रनों पर नाबाद लौटे। वॉरियर्स की ओर से भुवनेश्वर कुमार ने तीन विकेट लिए जबकि मिशेल मार्श ने दो विकेट लिए।
नाइट राइडर्स ने गम्भीर के नेतृत्व में अपेक्षाकृत अच्छी शुरुआत की। 44 गेंदों पर छह चौके लगाने वाले गम्भीर और मानविंदर बिसला (12) ने पहले विकेट के लिए 45 रन जोड़े। बिसला का विकेट इसी योग पर गिरा। वह भुवनेश्वर की गेंद पर महेश रावत के हाथों लपके गए।
बिसला ने 13 गेंदों पर दो चौके लगाए। उनका स्थान लेने आए जैक्स कैलिस (2) को परवेज रसूल ने सांस लेने की फुर्सत नहीं दी और 52 रन के कुल योग पर उन्हें एंजेलो मैथ्यूज के हाथों कैच करा दिया।
इसके बाद इयोन मोर्गन (15) और कप्तान ने तीसरे विकेट के लिए 23 रन जोड़े। मोर्गन लय में नहीं दिख रहे थे। वह 15 गेंदों पर एक चौका लगाकर मिशेल मार्श की गेंद पर रॉबिन उथप्पा के हाथों लपके गए। यह विकेट 75 रनों के कुल योग पर गिरा।टिप्पणियां
गम्भीर 90 के कुल योग पर पवेलियन लौटे। गम्भीर को मार्श ने मैथ्यूज के हाथों कैच कराया। यूसुफ पठान (3) के रूप में नाइट राइडर्स का पांचवां विकेट गिरा। आईपीएल-6 में अब तक सिर्फ एक अच्छी पारी खेलने वाले पठान को भुवनेश्वर ने रावत के हाथों कैच कराया।
डोशे का विकेट 135 रनों के कुल योग पर गिरा। पहली बार आईपीएल-6 में खेल रहे डोशे ने 23 गेंदों की तेज पारी में तीन चौके और एक छक्का लगाया। उनका विकेट भी भुवनेश्वर ने लिया। तिवारी ने अपनी 10 गेंदों की नाबाद पारी में दो चौके लगाए। भाटिया ने पांच गेंदों पर एक चौका और एक छक्का लगाया।
मैथ्यूज को आउट करना जरूरी था और यह काम नाइट राइडर्स के लिए सुनील नरेन ने किया। नरेन ने 95 के कुल योग पर मैथ्यूज को मनोज तिवारी के हाथों कैच कराके वॉरियर्स को छठा झटका दिया। मैथ्यूज ने 28 गेंदों पर चार छक्के लगाए।
इसके बाद 103 रनों के कुल योग पर महेश रावत (5) को कैलिस ने आउट किया। पारी के 19वें ओवर की पहली गेंद पर नरेन ने वायने पार्नेल (5) को चलता कर वॉरियर्स को आठवां झटका दिया। भुवनेश्वर कुमार (1) को बालाजी ने 105 के कुल योग पर आउट किया। बालाजी ने पारी के अंतिम ओवर की तीसरी गेंद पर परवेज रसूल (1) को आउट कर वॉरियर्स का पुलिंदा बांध दिया।
इससे पहले, टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने उतरी मौजूदा चैम्पियन टीम ने निर्धारित 20 ओवरों की समाप्ति तक छह विकेट पर 152 रन बनाए। इसमें कप्तान गम्भीर के सर्वाधिक 50 और रेयान टेन डोशे के 31 रन शामिल हैं।
मनोज तिवारी 15 और रजत भाटिया 13 रनों पर नाबाद लौटे। वॉरियर्स की ओर से भुवनेश्वर कुमार ने तीन विकेट लिए जबकि मिशेल मार्श ने दो विकेट लिए।
नाइट राइडर्स ने गम्भीर के नेतृत्व में अपेक्षाकृत अच्छी शुरुआत की। 44 गेंदों पर छह चौके लगाने वाले गम्भीर और मानविंदर बिसला (12) ने पहले विकेट के लिए 45 रन जोड़े। बिसला का विकेट इसी योग पर गिरा। वह भुवनेश्वर की गेंद पर महेश रावत के हाथों लपके गए।
बिसला ने 13 गेंदों पर दो चौके लगाए। उनका स्थान लेने आए जैक्स कैलिस (2) को परवेज रसूल ने सांस लेने की फुर्सत नहीं दी और 52 रन के कुल योग पर उन्हें एंजेलो मैथ्यूज के हाथों कैच करा दिया।
इसके बाद इयोन मोर्गन (15) और कप्तान ने तीसरे विकेट के लिए 23 रन जोड़े। मोर्गन लय में नहीं दिख रहे थे। वह 15 गेंदों पर एक चौका लगाकर मिशेल मार्श की गेंद पर रॉबिन उथप्पा के हाथों लपके गए। यह विकेट 75 रनों के कुल योग पर गिरा।टिप्पणियां
गम्भीर 90 के कुल योग पर पवेलियन लौटे। गम्भीर को मार्श ने मैथ्यूज के हाथों कैच कराया। यूसुफ पठान (3) के रूप में नाइट राइडर्स का पांचवां विकेट गिरा। आईपीएल-6 में अब तक सिर्फ एक अच्छी पारी खेलने वाले पठान को भुवनेश्वर ने रावत के हाथों कैच कराया।
डोशे का विकेट 135 रनों के कुल योग पर गिरा। पहली बार आईपीएल-6 में खेल रहे डोशे ने 23 गेंदों की तेज पारी में तीन चौके और एक छक्का लगाया। उनका विकेट भी भुवनेश्वर ने लिया। तिवारी ने अपनी 10 गेंदों की नाबाद पारी में दो चौके लगाए। भाटिया ने पांच गेंदों पर एक चौका और एक छक्का लगाया।
इसके बाद 103 रनों के कुल योग पर महेश रावत (5) को कैलिस ने आउट किया। पारी के 19वें ओवर की पहली गेंद पर नरेन ने वायने पार्नेल (5) को चलता कर वॉरियर्स को आठवां झटका दिया। भुवनेश्वर कुमार (1) को बालाजी ने 105 के कुल योग पर आउट किया। बालाजी ने पारी के अंतिम ओवर की तीसरी गेंद पर परवेज रसूल (1) को आउट कर वॉरियर्स का पुलिंदा बांध दिया।
इससे पहले, टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने उतरी मौजूदा चैम्पियन टीम ने निर्धारित 20 ओवरों की समाप्ति तक छह विकेट पर 152 रन बनाए। इसमें कप्तान गम्भीर के सर्वाधिक 50 और रेयान टेन डोशे के 31 रन शामिल हैं।
मनोज तिवारी 15 और रजत भाटिया 13 रनों पर नाबाद लौटे। वॉरियर्स की ओर से भुवनेश्वर कुमार ने तीन विकेट लिए जबकि मिशेल मार्श ने दो विकेट लिए।
नाइट राइडर्स ने गम्भीर के नेतृत्व में अपेक्षाकृत अच्छी शुरुआत की। 44 गेंदों पर छह चौके लगाने वाले गम्भीर और मानविंदर बिसला (12) ने पहले विकेट के लिए 45 रन जोड़े। बिसला का विकेट इसी योग पर गिरा। वह भुवनेश्वर की गेंद पर महेश रावत के हाथों लपके गए।
बिसला ने 13 गेंदों पर दो चौके लगाए। उनका स्थान लेने आए जैक्स कैलिस (2) को परवेज रसूल ने सांस लेने की फुर्सत नहीं दी और 52 रन के कुल योग पर उन्हें एंजेलो मैथ्यूज के हाथों कैच करा दिया।
इसके बाद इयोन मोर्गन (15) और कप्तान ने तीसरे विकेट के लिए 23 रन जोड़े। मोर्गन लय में नहीं दिख रहे थे। वह 15 गेंदों पर एक चौका लगाकर मिशेल मार्श की गेंद पर रॉबिन उथप्पा के हाथों लपके गए। यह विकेट 75 रनों के कुल योग पर गिरा।टिप्पणियां
गम्भीर 90 के कुल योग पर पवेलियन लौटे। गम्भीर को मार्श ने मैथ्यूज के हाथों कैच कराया। यूसुफ पठान (3) के रूप में नाइट राइडर्स का पांचवां विकेट गिरा। आईपीएल-6 में अब तक सिर्फ एक अच्छी पारी खेलने वाले पठान को भुवनेश्वर ने रावत के हाथों कैच कराया।
डोशे का विकेट 135 रनों के कुल योग पर गिरा। पहली बार आईपीएल-6 में खेल रहे डोशे ने 23 गेंदों की तेज पारी में तीन चौके और एक छक्का लगाया। उनका विकेट भी भुवनेश्वर ने लिया। तिवारी ने अपनी 10 गेंदों की नाबाद पारी में दो चौके लगाए। भाटिया ने पांच गेंदों पर एक चौका और एक छक्का लगाया।
इससे पहले, टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने उतरी मौजूदा चैम्पियन टीम ने निर्धारित 20 ओवरों की समाप्ति तक छह विकेट पर 152 रन बनाए। इसमें कप्तान गम्भीर के सर्वाधिक 50 और रेयान टेन डोशे के 31 रन शामिल हैं।
मनोज तिवारी 15 और रजत भाटिया 13 रनों पर नाबाद लौटे। वॉरियर्स की ओर से भुवनेश्वर कुमार ने तीन विकेट लिए जबकि मिशेल मार्श ने दो विकेट लिए।
नाइट राइडर्स ने गम्भीर के नेतृत्व में अपेक्षाकृत अच्छी शुरुआत की। 44 गेंदों पर छह चौके लगाने वाले गम्भीर और मानविंदर बिसला (12) ने पहले विकेट के लिए 45 रन जोड़े। बिसला का विकेट इसी योग पर गिरा। वह भुवनेश्वर की गेंद पर महेश रावत के हाथों लपके गए।
बिसला ने 13 गेंदों पर दो चौके लगाए। उनका स्थान लेने आए जैक्स कैलिस (2) को परवेज रसूल ने सांस लेने की फुर्सत नहीं दी और 52 रन के कुल योग पर उन्हें एंजेलो मैथ्यूज के हाथों कैच करा दिया।
इसके बाद इयोन मोर्गन (15) और कप्तान ने तीसरे विकेट के लिए 23 रन जोड़े। मोर्गन लय में नहीं दिख रहे थे। वह 15 गेंदों पर एक चौका लगाकर मिशेल मार्श की गेंद पर रॉबिन उथप्पा के हाथों लपके गए। यह विकेट 75 रनों के कुल योग पर गिरा।टिप्पणियां
गम्भीर 90 के कुल योग पर पवेलियन लौटे। गम्भीर को मार्श ने मैथ्यूज के हाथों कैच कराया। यूसुफ पठान (3) के रूप में नाइट राइडर्स का पांचवां विकेट गिरा। आईपीएल-6 में अब तक सिर्फ एक अच्छी पारी खेलने वाले पठान को भुवनेश्वर ने रावत के हाथों कैच कराया।
डोशे का विकेट 135 रनों के कुल योग पर गिरा। पहली बार आईपीएल-6 में खेल रहे डोशे ने 23 गेंदों की तेज पारी में तीन चौके और एक छक्का लगाया। उनका विकेट भी भुवनेश्वर ने लिया। तिवारी ने अपनी 10 गेंदों की नाबाद पारी में दो चौके लगाए। भाटिया ने पांच गेंदों पर एक चौका और एक छक्का लगाया।
मनोज तिवारी 15 और रजत भाटिया 13 रनों पर नाबाद लौटे। वॉरियर्स की ओर से भुवनेश्वर कुमार ने तीन विकेट लिए जबकि मिशेल मार्श ने दो विकेट लिए।
नाइट राइडर्स ने गम्भीर के नेतृत्व में अपेक्षाकृत अच्छी शुरुआत की। 44 गेंदों पर छह चौके लगाने वाले गम्भीर और मानविंदर बिसला (12) ने पहले विकेट के लिए 45 रन जोड़े। बिसला का विकेट इसी योग पर गिरा। वह भुवनेश्वर की गेंद पर महेश रावत के हाथों लपके गए।
बिसला ने 13 गेंदों पर दो चौके लगाए। उनका स्थान लेने आए जैक्स कैलिस (2) को परवेज रसूल ने सांस लेने की फुर्सत नहीं दी और 52 रन के कुल योग पर उन्हें एंजेलो मैथ्यूज के हाथों कैच करा दिया।
इसके बाद इयोन मोर्गन (15) और कप्तान ने तीसरे विकेट के लिए 23 रन जोड़े। मोर्गन लय में नहीं दिख रहे थे। वह 15 गेंदों पर एक चौका लगाकर मिशेल मार्श की गेंद पर रॉबिन उथप्पा के हाथों लपके गए। यह विकेट 75 रनों के कुल योग पर गिरा।टिप्पणियां
गम्भीर 90 के कुल योग पर पवेलियन लौटे। गम्भीर को मार्श ने मैथ्यूज के हाथों कैच कराया। यूसुफ पठान (3) के रूप में नाइट राइडर्स का पांचवां विकेट गिरा। आईपीएल-6 में अब तक सिर्फ एक अच्छी पारी खेलने वाले पठान को भुवनेश्वर ने रावत के हाथों कैच कराया।
डोशे का विकेट 135 रनों के कुल योग पर गिरा। पहली बार आईपीएल-6 में खेल रहे डोशे ने 23 गेंदों की तेज पारी में तीन चौके और एक छक्का लगाया। उनका विकेट भी भुवनेश्वर ने लिया। तिवारी ने अपनी 10 गेंदों की नाबाद पारी में दो चौके लगाए। भाटिया ने पांच गेंदों पर एक चौका और एक छक्का लगाया।
नाइट राइडर्स ने गम्भीर के नेतृत्व में अपेक्षाकृत अच्छी शुरुआत की। 44 गेंदों पर छह चौके लगाने वाले गम्भीर और मानविंदर बिसला (12) ने पहले विकेट के लिए 45 रन जोड़े। बिसला का विकेट इसी योग पर गिरा। वह भुवनेश्वर की गेंद पर महेश रावत के हाथों लपके गए।
बिसला ने 13 गेंदों पर दो चौके लगाए। उनका स्थान लेने आए जैक्स कैलिस (2) को परवेज रसूल ने सांस लेने की फुर्सत नहीं दी और 52 रन के कुल योग पर उन्हें एंजेलो मैथ्यूज के हाथों कैच करा दिया।
इसके बाद इयोन मोर्गन (15) और कप्तान ने तीसरे विकेट के लिए 23 रन जोड़े। मोर्गन लय में नहीं दिख रहे थे। वह 15 गेंदों पर एक चौका लगाकर मिशेल मार्श की गेंद पर रॉबिन उथप्पा के हाथों लपके गए। यह विकेट 75 रनों के कुल योग पर गिरा।टिप्पणियां
गम्भीर 90 के कुल योग पर पवेलियन लौटे। गम्भीर को मार्श ने मैथ्यूज के हाथों कैच कराया। यूसुफ पठान (3) के रूप में नाइट राइडर्स का पांचवां विकेट गिरा। आईपीएल-6 में अब तक सिर्फ एक अच्छी पारी खेलने वाले पठान को भुवनेश्वर ने रावत के हाथों कैच कराया।
डोशे का विकेट 135 रनों के कुल योग पर गिरा। पहली बार आईपीएल-6 में खेल रहे डोशे ने 23 गेंदों की तेज पारी में तीन चौके और एक छक्का लगाया। उनका विकेट भी भुवनेश्वर ने लिया। तिवारी ने अपनी 10 गेंदों की नाबाद पारी में दो चौके लगाए। भाटिया ने पांच गेंदों पर एक चौका और एक छक्का लगाया।
बिसला ने 13 गेंदों पर दो चौके लगाए। उनका स्थान लेने आए जैक्स कैलिस (2) को परवेज रसूल ने सांस लेने की फुर्सत नहीं दी और 52 रन के कुल योग पर उन्हें एंजेलो मैथ्यूज के हाथों कैच करा दिया।
इसके बाद इयोन मोर्गन (15) और कप्तान ने तीसरे विकेट के लिए 23 रन जोड़े। मोर्गन लय में नहीं दिख रहे थे। वह 15 गेंदों पर एक चौका लगाकर मिशेल मार्श की गेंद पर रॉबिन उथप्पा के हाथों लपके गए। यह विकेट 75 रनों के कुल योग पर गिरा।टिप्पणियां
गम्भीर 90 के कुल योग पर पवेलियन लौटे। गम्भीर को मार्श ने मैथ्यूज के हाथों कैच कराया। यूसुफ पठान (3) के रूप में नाइट राइडर्स का पांचवां विकेट गिरा। आईपीएल-6 में अब तक सिर्फ एक अच्छी पारी खेलने वाले पठान को भुवनेश्वर ने रावत के हाथों कैच कराया।
डोशे का विकेट 135 रनों के कुल योग पर गिरा। पहली बार आईपीएल-6 में खेल रहे डोशे ने 23 गेंदों की तेज पारी में तीन चौके और एक छक्का लगाया। उनका विकेट भी भुवनेश्वर ने लिया। तिवारी ने अपनी 10 गेंदों की नाबाद पारी में दो चौके लगाए। भाटिया ने पांच गेंदों पर एक चौका और एक छक्का लगाया।
इसके बाद इयोन मोर्गन (15) और कप्तान ने तीसरे विकेट के लिए 23 रन जोड़े। मोर्गन लय में नहीं दिख रहे थे। वह 15 गेंदों पर एक चौका लगाकर मिशेल मार्श की गेंद पर रॉबिन उथप्पा के हाथों लपके गए। यह विकेट 75 रनों के कुल योग पर गिरा।टिप्पणियां
गम्भीर 90 के कुल योग पर पवेलियन लौटे। गम्भीर को मार्श ने मैथ्यूज के हाथों कैच कराया। यूसुफ पठान (3) के रूप में नाइट राइडर्स का पांचवां विकेट गिरा। आईपीएल-6 में अब तक सिर्फ एक अच्छी पारी खेलने वाले पठान को भुवनेश्वर ने रावत के हाथों कैच कराया।
डोशे का विकेट 135 रनों के कुल योग पर गिरा। पहली बार आईपीएल-6 में खेल रहे डोशे ने 23 गेंदों की तेज पारी में तीन चौके और एक छक्का लगाया। उनका विकेट भी भुवनेश्वर ने लिया। तिवारी ने अपनी 10 गेंदों की नाबाद पारी में दो चौके लगाए। भाटिया ने पांच गेंदों पर एक चौका और एक छक्का लगाया।
गम्भीर 90 के कुल योग पर पवेलियन लौटे। गम्भीर को मार्श ने मैथ्यूज के हाथों कैच कराया। यूसुफ पठान (3) के रूप में नाइट राइडर्स का पांचवां विकेट गिरा। आईपीएल-6 में अब तक सिर्फ एक अच्छी पारी खेलने वाले पठान को भुवनेश्वर ने रावत के हाथों कैच कराया।
डोशे का विकेट 135 रनों के कुल योग पर गिरा। पहली बार आईपीएल-6 में खेल रहे डोशे ने 23 गेंदों की तेज पारी में तीन चौके और एक छक्का लगाया। उनका विकेट भी भुवनेश्वर ने लिया। तिवारी ने अपनी 10 गेंदों की नाबाद पारी में दो चौके लगाए। भाटिया ने पांच गेंदों पर एक चौका और एक छक्का लगाया।
डोशे का विकेट 135 रनों के कुल योग पर गिरा। पहली बार आईपीएल-6 में खेल रहे डोशे ने 23 गेंदों की तेज पारी में तीन चौके और एक छक्का लगाया। उनका विकेट भी भुवनेश्वर ने लिया। तिवारी ने अपनी 10 गेंदों की नाबाद पारी में दो चौके लगाए। भाटिया ने पांच गेंदों पर एक चौका और एक छक्का लगाया। | यह एक सारांश है: नाइट राइडर्स द्वारा दिए गए 153 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए वॉरियर्स 19.3 ओवरों में सभी विकेट गंवाकर 106 रन ही बना सके। एंजेलो मैथ्यूज ने सबसे अधिक 40 रन बनाए जबकि रॉबिन उथप्पा ने 31 रनों का योगदान दिया। | 21 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: अमेरिका ने कहा है कि इस बात का कोई संकेत नहीं मिला है कि लीबिया के नेता मुअम्मर गद्दाफी ने देश छोड़ दिया है लेकिन हाल के घटनाक्रम से यह जाहिर होता है कि सत्ता उनके हाथ से फिसल रही है। व्हाइट हाउस के उप प्रेस सचिव जोश एर्नेस्ट ने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की गर्मी की छुट्टियों के दौरान उनके साथ यात्रा कर रहे संवाददाताओं को बताया, इस बात के अब तक कोई संकेत नहीं मिले हैं कि गद्दाफी लीबिया छोड़कर चले गए हैं । एर्नेस्ट ने कहा कि संकेतों के मुताबिक 42 साल से सत्ता पर कब्जा जमाए बैठे गद्दाफी के हाथ से सत्ता निकल रही है। उन्होंने कहा, पिछले छह महीने से संघर्ष कर रही लीबिया की जनता के कारण यह प्रगति संभव हो सकी है। इस प्रगति ने नि:संदेह नाटो और उस क्षेत्र में मौजूद हमारे सहयोगियों का सहयोग भी शामिल है जिसने हमें इस मोर्चे पर बहुत महत्वपूर्ण समर्थन दिया। एर्नेस्ट ने कहा कि अमेरिका लीबिया के हालात पर नजर रखे हुए है। | संक्षिप्त सारांश: अमेरिका ने कहा है कि इस बात का कोई संकेत नहीं मिला है कि लीबिया के नेता मुअम्मर गद्दाफी ने देश छोड़ दिया है। | 10 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: मध्य प्रदेश में हर रोज छह महिलाओं की अस्मत लूट ली जाती है,वहीं हर तीन दिन में दो महिलाएं सामूहिक बलात्कार का शिकार बनती हैं। इतना ही नहीं हर दस दिन में बलात्कार के बाद एक पीड़ित की हत्या कर दी जाती है। मंगलवार को सरकार की ओर से प्रस्तुत किए गए आंकड़ों से यह खुलासा हुआ है।प्रदेश के गृह मंत्री उमाशंकर गुप्ता द्वारा मंगलवार को विधानसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक 16 फरवरी 2010 से 31 जनवरी 2011 की अवधि में प्रदेश में 2,191 महिलाओं को बलात्कार का दंश झेलना पड़ा है। बलात्कार की सबसे ज्यादा 110 घटनाएं बैतूल जिले में हुईं वहीं राजधानी भोपाल इस मामले में दूसरे स्थान पर है जहां 99 महिलाओं की आबरू लूटी गई। आंकड़ों के मुताबिक पीड़ितों में 828 अनुसूचित जाति जनजाति और 901 पिछड़ा वर्ग से हैं। वहीं 462 पीड़िता सामान्य वर्ग की हैं। कुल पीड़ितों में 1,163 वयस्क और 1,028 अवयस्क हैं। कांग्रेस विधायक रामनिवास रावत व पांची लाल मेड़ा के सवालों के जवाब में बताया गया है कि 350 दिन की अवधि में 209 सामूहिक बलात्कार हुए हैं। वहीं 31 पीड़ितों की बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई। बलात्कार के बाद हत्या के सबसे ज्यादा 11 मामले इंदौर में दर्ज किए गए। गुप्ता ने बताया कि इन मामलों में अब तक 2,431 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और 132 आरेापी फरार हैं। कांग्रेस विधायक रामनिवास रावत ने कहा है कि प्रदेश की कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है और महिलाएं अपने आपको असुरक्षित महसूस कर रही हैं। | संक्षिप्त सारांश: मध्य प्रदेश में हर रोज छह महिलाओं की अस्मत लूट ली जाती है,वहीं हर तीन दिन में दो महिलाएं सामूहिक बलात्कार का शिकार बनती हैं। | 0 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान माइक क्लार्क न्यू साउथ वेल्स के लिए नहीं खेलेंगे। क्लार्क ने अब भी बिग बैश या घरेलू क्रिकेट में वापसी का फ़ैसला नहीं लिया है। न्यू साउथ वेल्स की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि क्लार्क ने फिलहाल घरेलू क्रिकेट में नहीं खेलने का फ़ैसला किया है। इस बयान के बाद ये साफ़ हो गया है कि 2016-17 में वो न्यू साउथ वेल्स के लिए नहीं खेलेंगे।
माना जा रहा है कि निजी कारणों से क्लार्क टीम के साथ 4 महीने का समय नहीं बिता सकते हैं, इस वजह से वो नहीं खेलेंगे। क्लार्क ने आख़िरी बार 2013 में न्यू साउथ वेल्स के लिए खेला था। गौर करने वाली बात है कि क्लार्क ने 18 साल की उम्र में फ़र्स्ट क्लास क्रिकेट में डेब्यू किया था। 1999 में क्लार्क ने भारतीय टीम के ख़िलाफ़ ये मैच खेला था जिसमें उनके बल्ले से 18 और 2 रन निकले। इस मैच में सौरव गांगुली भारत की कप्तानी कर रहे थे और टीम में अनिल कुंबले, वीवीएस लक्ष्मण और राहुल द्रविड़ शामिल थे।टिप्पणियां
क्लार्क ने 14 सालों में न्यू साउथ वेल्स के लिए 44 शेफ़िल्ड शिल्ड मैच खेले हैं जिसमें उन्होंने 11 शतकों की मदद से 3164 रन बनाए।
35 साल के क्लार्क ने क्रिकेट से संन्यास के बाद बिग बैश टीम मेलबर्न स्टार्स के साथ अपना क़रार रद्द कर दिया था। अगले सीज़न के लिए क्लार्क को साइन करने के लिए सिडनी थन्डर्स और मेलबर्न स्टार्स की टीम कोशिश कर रही हैं। हालांकि क्लार्क हॉन्ग-कॉन्ग में एक T20 लीग को बढ़ावा देने के लिए खेल रहे हैं।
माना जा रहा है कि निजी कारणों से क्लार्क टीम के साथ 4 महीने का समय नहीं बिता सकते हैं, इस वजह से वो नहीं खेलेंगे। क्लार्क ने आख़िरी बार 2013 में न्यू साउथ वेल्स के लिए खेला था। गौर करने वाली बात है कि क्लार्क ने 18 साल की उम्र में फ़र्स्ट क्लास क्रिकेट में डेब्यू किया था। 1999 में क्लार्क ने भारतीय टीम के ख़िलाफ़ ये मैच खेला था जिसमें उनके बल्ले से 18 और 2 रन निकले। इस मैच में सौरव गांगुली भारत की कप्तानी कर रहे थे और टीम में अनिल कुंबले, वीवीएस लक्ष्मण और राहुल द्रविड़ शामिल थे।टिप्पणियां
क्लार्क ने 14 सालों में न्यू साउथ वेल्स के लिए 44 शेफ़िल्ड शिल्ड मैच खेले हैं जिसमें उन्होंने 11 शतकों की मदद से 3164 रन बनाए।
35 साल के क्लार्क ने क्रिकेट से संन्यास के बाद बिग बैश टीम मेलबर्न स्टार्स के साथ अपना क़रार रद्द कर दिया था। अगले सीज़न के लिए क्लार्क को साइन करने के लिए सिडनी थन्डर्स और मेलबर्न स्टार्स की टीम कोशिश कर रही हैं। हालांकि क्लार्क हॉन्ग-कॉन्ग में एक T20 लीग को बढ़ावा देने के लिए खेल रहे हैं।
क्लार्क ने 14 सालों में न्यू साउथ वेल्स के लिए 44 शेफ़िल्ड शिल्ड मैच खेले हैं जिसमें उन्होंने 11 शतकों की मदद से 3164 रन बनाए।
35 साल के क्लार्क ने क्रिकेट से संन्यास के बाद बिग बैश टीम मेलबर्न स्टार्स के साथ अपना क़रार रद्द कर दिया था। अगले सीज़न के लिए क्लार्क को साइन करने के लिए सिडनी थन्डर्स और मेलबर्न स्टार्स की टीम कोशिश कर रही हैं। हालांकि क्लार्क हॉन्ग-कॉन्ग में एक T20 लीग को बढ़ावा देने के लिए खेल रहे हैं।
35 साल के क्लार्क ने क्रिकेट से संन्यास के बाद बिग बैश टीम मेलबर्न स्टार्स के साथ अपना क़रार रद्द कर दिया था। अगले सीज़न के लिए क्लार्क को साइन करने के लिए सिडनी थन्डर्स और मेलबर्न स्टार्स की टीम कोशिश कर रही हैं। हालांकि क्लार्क हॉन्ग-कॉन्ग में एक T20 लीग को बढ़ावा देने के लिए खेल रहे हैं। | यहाँ एक सारांश है:क्लार्क ने नहीं लिया है घरेलू क्रिकेट में वापसी का फ़ैसला
क्लार्क टीम के साथ 4 महीने का समय नहीं बिता सकते
हॉन्ग-कॉन्ग में T20 लीग को बढ़ावा देने के लिए खेल रहे हैं क्लार्क | 4 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: डिजिटल स्वास्थ्य क्षेत्र में अपने दखल को आगे बढ़ाते हुए दिग्गज प्रौद्योगिकी कंपनी ऐपल ने भारतीय मूल के दो उद्यमियों द्वारा बनाए गए स्वास्थ्य से संबंधित आंकड़ों का रिकॉर्ड रखने वाले स्टार्टअप 'ग्लिंप्स' का खामोशी से अधिग्रहण कर लिया है.
मीडिया की खबरों के अनुसार यह अधिग्रहण हाल में किया गया है लेकिन अभी तक सार्वजनिक तौर पर इसका ऐलान नहीं किया गया है.
ऐपल के प्रवक्ता ने अब अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है, "समय-समय पर ऐपल छोटी प्रौद्योगिकी कंपनियों को खरीदता रहा है. हम सामान्यतया अपने उद्देश्यों और योजनाओं के बारे में चर्चा नहीं करते हैं." अनिल सेठी और कार्तिक हरिहरन द्वारा साल 2013 में शुरू किए गया 'ग्लिंप्स' ग्राहकों को मेडिकल रिकॉर्ड रखने और उससे जुड़ी जानकारी साझा करने की सुविधा प्रदान करता है.टिप्पणियां
बीते कुछ महीनों में ऐपल ने मोबाइल के जरिए मरीजों, डॉक्टरों और रिसर्च करने वालों को स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़े उपल्बध कराने वाली छोटी कंपनियों हेल्थ किट, केयर किट और रिसर्च किट का अधिग्रहण किया है. ऐपल ने आईफोन-6 पर हेल्थ किट ऐप जारी किया है जो इसके उपभोक्ताओं को स्वास्थ्य और फिटनेस से जुड़े निजी आंकड़ों का निरीक्षण करने में मदद करता है. (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
मीडिया की खबरों के अनुसार यह अधिग्रहण हाल में किया गया है लेकिन अभी तक सार्वजनिक तौर पर इसका ऐलान नहीं किया गया है.
ऐपल के प्रवक्ता ने अब अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है, "समय-समय पर ऐपल छोटी प्रौद्योगिकी कंपनियों को खरीदता रहा है. हम सामान्यतया अपने उद्देश्यों और योजनाओं के बारे में चर्चा नहीं करते हैं." अनिल सेठी और कार्तिक हरिहरन द्वारा साल 2013 में शुरू किए गया 'ग्लिंप्स' ग्राहकों को मेडिकल रिकॉर्ड रखने और उससे जुड़ी जानकारी साझा करने की सुविधा प्रदान करता है.टिप्पणियां
बीते कुछ महीनों में ऐपल ने मोबाइल के जरिए मरीजों, डॉक्टरों और रिसर्च करने वालों को स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़े उपल्बध कराने वाली छोटी कंपनियों हेल्थ किट, केयर किट और रिसर्च किट का अधिग्रहण किया है. ऐपल ने आईफोन-6 पर हेल्थ किट ऐप जारी किया है जो इसके उपभोक्ताओं को स्वास्थ्य और फिटनेस से जुड़े निजी आंकड़ों का निरीक्षण करने में मदद करता है. (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
ऐपल के प्रवक्ता ने अब अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है, "समय-समय पर ऐपल छोटी प्रौद्योगिकी कंपनियों को खरीदता रहा है. हम सामान्यतया अपने उद्देश्यों और योजनाओं के बारे में चर्चा नहीं करते हैं." अनिल सेठी और कार्तिक हरिहरन द्वारा साल 2013 में शुरू किए गया 'ग्लिंप्स' ग्राहकों को मेडिकल रिकॉर्ड रखने और उससे जुड़ी जानकारी साझा करने की सुविधा प्रदान करता है.टिप्पणियां
बीते कुछ महीनों में ऐपल ने मोबाइल के जरिए मरीजों, डॉक्टरों और रिसर्च करने वालों को स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़े उपल्बध कराने वाली छोटी कंपनियों हेल्थ किट, केयर किट और रिसर्च किट का अधिग्रहण किया है. ऐपल ने आईफोन-6 पर हेल्थ किट ऐप जारी किया है जो इसके उपभोक्ताओं को स्वास्थ्य और फिटनेस से जुड़े निजी आंकड़ों का निरीक्षण करने में मदद करता है. (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
बीते कुछ महीनों में ऐपल ने मोबाइल के जरिए मरीजों, डॉक्टरों और रिसर्च करने वालों को स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़े उपल्बध कराने वाली छोटी कंपनियों हेल्थ किट, केयर किट और रिसर्च किट का अधिग्रहण किया है. ऐपल ने आईफोन-6 पर हेल्थ किट ऐप जारी किया है जो इसके उपभोक्ताओं को स्वास्थ्य और फिटनेस से जुड़े निजी आंकड़ों का निरीक्षण करने में मदद करता है. (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) | मीडिया की खबरों के अनुसार यह अधिग्रहण हाल में किया गया है
अभी तक सार्वजनिक तौर पर इसका ऐलान नहीं
स्वास्थ्य से संबंधित आंकड़ों का रिकॉर्ड रखने वाला स्टार्टअप है 'ग्लिंप्स | 28 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: भारत के मध्यक्रम के बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा अपनी महिला मित्र पूजा पाबरी के साथ परिणय सूत्र में बंध गए।
तीन दिन तक चलने वाला विवाह समारोह मंगलवार रात संगीत संध्या के साथ शुरू हुआ। शादी की रस्में शाम को पूरी हुई। बृहस्पतिवार को रिसेप्शन होगा।
पूजा गुजरात के जामनगर जिले की रहने वाली हैं और मैनेजमेंट में ग्रेजुएट है। चेतेश्वर के पिता अरविंद पुजारा ने कहा, ‘पूरी भारतीय टीम और बीसीसीआई अधिकारियों को न्यौता दिया गया है।’टिप्पणियां
पुजारा के साथियों का हालांकि रिसेप्शन में पहुंचना मुश्किल है क्योंकि वे ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शृंखला की तैयारियों में जुटे हैं।
पुजारा शादी के कारण ही मुंबई के खिलाफ ईरानी कप मैच में नहीं खेले थे। वह बोर्ड अध्यक्ष एकादश की तरफ से भी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ नहीं खेले थे। उन्हें अपनी पत्नी के साथ समय बिताने का अधिक समय नहीं मिलेगा क्योंकि वह 15 फरवरी को भारतीय टीम से जुड़ जाएंगे। पुजारा ने अब तक भारत की तरफ से नौ टेस्ट मैच में 58 की औसत से 761 रन बनाए हैं।
तीन दिन तक चलने वाला विवाह समारोह मंगलवार रात संगीत संध्या के साथ शुरू हुआ। शादी की रस्में शाम को पूरी हुई। बृहस्पतिवार को रिसेप्शन होगा।
पूजा गुजरात के जामनगर जिले की रहने वाली हैं और मैनेजमेंट में ग्रेजुएट है। चेतेश्वर के पिता अरविंद पुजारा ने कहा, ‘पूरी भारतीय टीम और बीसीसीआई अधिकारियों को न्यौता दिया गया है।’टिप्पणियां
पुजारा के साथियों का हालांकि रिसेप्शन में पहुंचना मुश्किल है क्योंकि वे ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शृंखला की तैयारियों में जुटे हैं।
पुजारा शादी के कारण ही मुंबई के खिलाफ ईरानी कप मैच में नहीं खेले थे। वह बोर्ड अध्यक्ष एकादश की तरफ से भी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ नहीं खेले थे। उन्हें अपनी पत्नी के साथ समय बिताने का अधिक समय नहीं मिलेगा क्योंकि वह 15 फरवरी को भारतीय टीम से जुड़ जाएंगे। पुजारा ने अब तक भारत की तरफ से नौ टेस्ट मैच में 58 की औसत से 761 रन बनाए हैं।
पूजा गुजरात के जामनगर जिले की रहने वाली हैं और मैनेजमेंट में ग्रेजुएट है। चेतेश्वर के पिता अरविंद पुजारा ने कहा, ‘पूरी भारतीय टीम और बीसीसीआई अधिकारियों को न्यौता दिया गया है।’टिप्पणियां
पुजारा के साथियों का हालांकि रिसेप्शन में पहुंचना मुश्किल है क्योंकि वे ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शृंखला की तैयारियों में जुटे हैं।
पुजारा शादी के कारण ही मुंबई के खिलाफ ईरानी कप मैच में नहीं खेले थे। वह बोर्ड अध्यक्ष एकादश की तरफ से भी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ नहीं खेले थे। उन्हें अपनी पत्नी के साथ समय बिताने का अधिक समय नहीं मिलेगा क्योंकि वह 15 फरवरी को भारतीय टीम से जुड़ जाएंगे। पुजारा ने अब तक भारत की तरफ से नौ टेस्ट मैच में 58 की औसत से 761 रन बनाए हैं।
पुजारा के साथियों का हालांकि रिसेप्शन में पहुंचना मुश्किल है क्योंकि वे ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शृंखला की तैयारियों में जुटे हैं।
पुजारा शादी के कारण ही मुंबई के खिलाफ ईरानी कप मैच में नहीं खेले थे। वह बोर्ड अध्यक्ष एकादश की तरफ से भी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ नहीं खेले थे। उन्हें अपनी पत्नी के साथ समय बिताने का अधिक समय नहीं मिलेगा क्योंकि वह 15 फरवरी को भारतीय टीम से जुड़ जाएंगे। पुजारा ने अब तक भारत की तरफ से नौ टेस्ट मैच में 58 की औसत से 761 रन बनाए हैं।
पुजारा शादी के कारण ही मुंबई के खिलाफ ईरानी कप मैच में नहीं खेले थे। वह बोर्ड अध्यक्ष एकादश की तरफ से भी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ नहीं खेले थे। उन्हें अपनी पत्नी के साथ समय बिताने का अधिक समय नहीं मिलेगा क्योंकि वह 15 फरवरी को भारतीय टीम से जुड़ जाएंगे। पुजारा ने अब तक भारत की तरफ से नौ टेस्ट मैच में 58 की औसत से 761 रन बनाए हैं। | संक्षिप्त सारांश: भारत के मध्यक्रम के बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा अपनी महिला मित्र पूजा पाबरी के साथ परिणय सूत्र में बंध गए। | 29 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: अन्ना हजारे द्वारा 12 दिन बाद अनशन तोड़े जाने के बाद उनके समर्थकों ने बड़ी तादाद में इकट्ठा होकर इंडिया गेट पर जश्न मनाया। हजारे ने जब अप्रैल में पांच दिन का अनशन किया था तब से अब तक अनशन में तिरंगा खास तौर पर छाया रहा है। यही तिरंगा शाम छह बजे से इंडिया गेट पर भी लहराने लगा जिसे हजारे के सैकड़ों समर्थक हाथ में थामे हुए थे। इंडिया गेट पर तय समय से काफी पहले ही लोगों के जुटने का सिलसिला शुरू हो गया। इसके चलते आस-पास के मार्गों पर यातायात की रफ्तार धीमी हो गई। इंडिया गेट पर लोगों ने अन्ना हजारे जिंदाबाद और भ्रष्टाचार मुर्दाबाद के नारे लगाए। आसमान में भी मैं अन्ना हूं लिखी तिरंगी पतंगे दिखाई दीं। लोग पूरे उत्सवी माहौल में नजर आए और अपने साथ ढोल नगाड़े लेकर आए। कुछ लोगों ने बाकायदा बैंड भी किराये पर लिया और उस पर देशभक्ति के गाने बजवाए।इससे पहले, अन्ना हजारे ने रविवार सुबह दिल्ली के रामलीला मैदान में जैसे ही अपना अनशन तोड़ा वैसे ही पूरे देश में लोग खुशी से झूम उठे। दिल्ली से लेकर मुम्बई और अन्ना हजारे के गांव रालेगांव सिद्धि तक में 'अन्ना हजारे जिंदाबाद' का नारा लगाते हुए लोगों ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचते हुए विजय जुलूस निकाला और मिठाइयां बांटीं। अन्ना के अनशन समाप्त करने के कुछ समय बाद ही मुम्बई के आजाद मैदान में अनशन पर बैठे 17 लोगों ने भी अपना अनशन समाप्त कर दिया। बारिश होने के बावजूद भी हजारों लोग आजाद मैदान में एकत्र हुए थे। अन्ना हजारे के गांव रालेगांव सिद्धि में जश्न का माहौल दिखा। 74 वर्षीय अन्ना हजारे ने जैसे ही नारियल पानी और शहद से अपना पिछले 12 दिन का अनशन तोड़ा, लोग खुशी से झूम उठे। जीत के जश्न में डूबे उत्साहित लोग कैलाश खेर के गीत 'अम्बर तक यही नाद गूंजेगा' की धुन पर थिरकने लगे। गांव के 2,000 से अधिक लोग संत यादवबाबा मंदिर परिसर में एकत्र हुए और अन्ना हजारे की लम्बी उम्र के लिए प्रार्थना की।कोलकाता में उनके समर्थकों ने जश्न मनाया। कॉलेज के छात्र देबारुण रॉय ने कहा, "अन्ना ने वह कर दिखाया जो राजनेता पिछले 65 साल में नहीं कर पाए। अन्ना की जीत देश के आम लोगों की जीत है।" पश्चिम बंगाल के अन्य हिस्सों में भी बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता और स्कूल-कॉलेज के छात्रों ने राष्ट्रीय ध्वज लेकर परेड की। उत्तर प्रदेश में राजधानी लखनऊ सहित समूचा प्रदेश जश्न में डूब गया। लखनऊ का झूलेलाल पार्क 'भारत माता की जय', 'वंदे मातरम्' और 'अन्ना हजारे जिंदाबाद' के नारों से गूंज उठा। यह पार्क पिछले 16 अगस्त से अन्ना समर्थकों के आंदोलन का केंद्र बना हुआ था। यहां अन्ना के समर्थन में पिछले 12 दिन से अनशन कर रहे राहुल वर्मा, उमेश शुक्ला, विनोद कुमार उपाध्याय, देवी दत्त पांडे और भुवन चंद्र पांडे को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अम्बर और मुस्लिम बुद्धिजीवी मारूफ मिर्जा ने जूस (फल का रस) पिलाकर उनका व्रत तोड़ा। इंडिया अगेन्स्ट करप्शन के बैनर तले बड़ी संख्या में मौजूद विभिन्न वर्गो के लोग हाथों में अन्ना हजारे की तस्वीर वाले पोस्टर और तिरंगा झंडे लेकर नाचते-गाते और नारे लगाते झूलेलाल पार्क से महात्मा गांधी की प्रतिमा तक करीब दो किलोमीटर लम्बा विजय जुलूस निकाला। इलाहाबाद, कानपुर, वाराणसी, मेरठ, गोरखपुर और रायबरेली सहित अन्य प्रमुख शहरों में भी अन्ना हजारे का अनशन टूटने के बाद जश्न का माहौल रहा। लोगों ने जुलूस निकालकर अपनी खुशी का इजहार किया। मध्य प्रदेश में भी कई शहरों में जगह-जगह मिठाई बांटी गई और लोग सड़क पर उतरकर खुशियां मनाने लगे। भोपाल के मैनिट चौराहे पर 12 दिन से अनशन पर बैठे चार लोगों ने भी अनशन खत्म कर दिया। यहां लोग तीन प्रमुख मांगे मानने को एक नई शुरुआत मान रहे हैं। इंदौर, जबलपुर तथा ग्वालियर के अलावा प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी लोग खुशियां मना रहे हैं। बिहार, छत्तीसगढ़ और उड़ीसा सहित अन्य राज्यों में भी सड़कों पर उतरकर लोगों ने जश्न मनाया। गौरतलब है कि अन्ना को 16 अगस्त को उस समय हिरासत में ले लिया गया था, जब वह अनशन के लिए जयप्रकाश नारायण पार्क जा रहे थे। बाद में उन्हें गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेज दिया गया था। जेल से छूटने के बाद वह 19 अगस्त को रामलीला मैदान पहुंचे थे। अन्ना का अनशन 13 दिन तक चला है। | संक्षिप्त सारांश: अन्ना हजारे द्वारा 12 दिन बाद अनशन तोड़े जाने के बाद उनके समर्थकों ने बड़ी तादाद में इकट्ठा होकर देशभर में जश्न मनाया। | 29 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह (Amit Shah) चुनाव के दौरान शहरों में रोड शो नियमित रूप से करते हैं. बिहार की राजधानी पटना के पटना साहिब (Patna Sahib) संसदीय क्षेत्र में उनका रोड शो शनिवार को आयोजित किया जा रहा है. लेकिन इस रोड शो के लिए जो रास्ता चुना गया है उससे साफ है कि यह आयोजन जानबूझकर बिहारी बाबू शत्रुघ्न सिन्हा को (Shatrughan Sinha) चुनौती देने के लिए हो रहा है. लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections 2019) में शत्रुघ्न सिन्हा पटना साहिब सीट से कांग्रेस और महागठबंधन के संयुक्त उम्मीदवार हैं.
रोड शो के बारे में जानकारी देते हुए बिहार बीजेपी (BJP) के वरिष्ठ नेता और मंत्री नंदकिशोर यादव ने बताया कि अमित शाह (Amit Shah) का यह रोड शो पटना साहिब क्षेत्र के कदम कुंज स्थित दुर्गा मंदिर से शुरू होगा. रोड शो साहित्य सम्मेलन ठाकुर बाड़ी रोड से गंज होते हुए गांधी मैदान के उद्योग भवन तक चलेगा. हालांकि यह दूरी मात्र दो किलोमीटर है लेकिन इस इलाके से बिहारी बाबू शत्रुघ्न सिन्हा (Shatrughan Sinha) का पुराना नाता है. कदम कुंज से सिन्हा का पैतृक घर कुछ ही मीटर की दूरी पर है, जहां से रोड शो शुरू होगा.
बीजेपी नेताओं का मानना है कि रोड शो का यह रूट जानबूझकर चुना गया है जिससे शत्रुघ्न सिन्हा (Shatrughan Sinha) को उनकी औकात बताई जाए. उन्हें इस बात का अहसास कराया जाए कि इससे पूर्व दो चुनाव में उन्हें जो वोट मिले थे वे भारतीय जनता पार्टी के परंपरागत वोट थे. अभी भी पार्टी के पास इतनी शक्ति है कि वह उनके घर के सामने से एक-एक वोट ले जा सकती है.
हालांकि रोड शो के रूट पर शत्रुघ्न सिन्हा (Shatrughan Sinha) ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन जब वे नामांकन करने गए थे तब उन्होंने भी इसी रूट का चयन किया था. | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: बीजेपी के मुताबिक रोडशो का रूट शत्रुघ्न को उनकी औकात बताने लिए चुना
शत्रुघ्न सिन्हा पटना साहिब सीट से कांग्रेस-महागठबंधन के संयुक्त उम्मीदवार
अमित शाह का रोड शो शनिवार को आयोजित किया जाएगा | 19 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: ईरान ने न्यूक्लियर कार्यक्रम को दुनिया के सामने रखने के बाद नया कूटनीतिक दांव चलकर बातचीत की पेशकश की है। बुधवार को अमेरिका समेत यूरोपियन यूनियन के देशों को तल्ख तेवर दिखाने के बाद ईरान ने इस मुद्दे पर बातचीत की इच्छा जाहिर की है। ईरान के बड़े परमाणु वार्ताकार ने यूरोपीय यूनियन की विदेश नीति की प्रमुख से कहा है कि तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर ताकतवर देशों के साथ फिर से बाचतीत शुरू करना चाहता है लेकिन ज्यादातर पश्चिमी देशों का मानना है कि बातचीत की बात करके ईरान कुछ समय चाहता है।टिप्पणियां
इससे पूर्व ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने अपने परमाणु रिएक्टर में न्यूक्लियर ईंधन रॉड डालने के बाद अमेरिका और पश्चिमी देशों पर परमाणु तकनीक पर एकाधिकार जमाने का आरोप लगाया था। अहमदीनेजाद ने अमेरिका और पश्चिमी देशों को घमंडी ताकतें बताते हुए उन्हें सबक सिखाने की भी बात कही थी।
उन्होंने कहा कि दुनिया अब बदल चुकी है। घमंडी ताकतों का एकाधिकार अब नहीं चलेगा। राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि परमाणु का मतलब सिर्फ बम नहीं होता। ईरान अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए परमाणु कार्यक्रम पर आगे बढ़ रहा है और उसे अब रोका नहीं जा सकता।
इससे पूर्व ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने अपने परमाणु रिएक्टर में न्यूक्लियर ईंधन रॉड डालने के बाद अमेरिका और पश्चिमी देशों पर परमाणु तकनीक पर एकाधिकार जमाने का आरोप लगाया था। अहमदीनेजाद ने अमेरिका और पश्चिमी देशों को घमंडी ताकतें बताते हुए उन्हें सबक सिखाने की भी बात कही थी।
उन्होंने कहा कि दुनिया अब बदल चुकी है। घमंडी ताकतों का एकाधिकार अब नहीं चलेगा। राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि परमाणु का मतलब सिर्फ बम नहीं होता। ईरान अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए परमाणु कार्यक्रम पर आगे बढ़ रहा है और उसे अब रोका नहीं जा सकता।
उन्होंने कहा कि दुनिया अब बदल चुकी है। घमंडी ताकतों का एकाधिकार अब नहीं चलेगा। राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि परमाणु का मतलब सिर्फ बम नहीं होता। ईरान अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए परमाणु कार्यक्रम पर आगे बढ़ रहा है और उसे अब रोका नहीं जा सकता। | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: अपने न्यूक्लियर कार्यक्रम को दुनिया के सामने रखने के बाद ईरान ने यूरोपीय यूनियन के देशों से इस मुद्दे पर बातचीत की इच्छा जाहिर की है। | 3 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: अपहरण के केस में आरोपी सरीफुल खातून कटिहार जेल में बंद थीं. करीब डेढ़ साल पहले इस जेल में मोहम्मद इनामुल हौदा की ड्यूटी इसी जेल में प्रहरी के रूप में लगी. इनामुल बताते हैं कि न जाने क्यों जेल में ड्यूटी के दौरान सरीफुल पर उनकी नजरें टिकीं रहती थीं. पहले तो दिल में घबराहट थी, लेकिन एक दिन हिम्मत करके बात की तो मामला आगे बढ़ा.
सरीफुल ने बताया कि उन्होंने इनामुल को अपने जीवन की सारी बातें बता दी थीं. साथ ही इनामुल ने भी सरीफुल को बता दिया था कि वह शादीशुदा है. बातचीत बढ़ने के बाद सरीफुल ने जमानत के लिए अर्जी दाखिल की. कोर्ट ने जमानत अर्जी स्वीकारते हुए उन्हें बाहर जाने का आदेश दे दिया. इसके बाद दोनों ने शादी कर ली.
मोहम्मद इनामुल हौदा पहले से शादी-शुदा हैं, लेकिन इस्लाम धर्म के आधार पर सरीफुल खातून से दूसरी शादी रचाई है. इनामुल अपने दूसरे शादी को भी हर हाल में जायज ठहराते हुए कहते हैं कि वो अपनी पहली पत्नी की इजाजत और दोनों परिवार की रजामंदी से सरीफुल से निकाह किया है.
वैलेंटाइन डे के मौके पर मोहम्मद इनामुल हौदा और सरीफुल मिले और एक दूसरे को लाल गुलाब भेंट कर तस्वीरें खिंचवाई. दोनों ने कहा कि वे इन तस्वीरों के जरिए दुनिया में प्यार का संदेश देना चाहते हैं. वे चाहते हैं कि दुनिया में जिस किसी को भी प्यार है वे खुलकर इसका इजहार करें. उन्होंने ये भी कहा कि प्यार का इजहार करने में इस बात का ख्याल जरूर रखें कि इससे सामने वाले को कोई कष्ट न पहुंचे. टिप्पणियां
कटिहार पुलिस का कहना है कि यह जोड़ी एक मिसाल है. समाज में आमतौर पर सजा पाने वाले लोगों को सम्मान नहीं मिल पाता है, लेकिन यह जोड़ी अपने फैसले से लोगों की सोच बदलने का काम करेगी.
सरीफुल ने बताया कि उन्होंने इनामुल को अपने जीवन की सारी बातें बता दी थीं. साथ ही इनामुल ने भी सरीफुल को बता दिया था कि वह शादीशुदा है. बातचीत बढ़ने के बाद सरीफुल ने जमानत के लिए अर्जी दाखिल की. कोर्ट ने जमानत अर्जी स्वीकारते हुए उन्हें बाहर जाने का आदेश दे दिया. इसके बाद दोनों ने शादी कर ली.
मोहम्मद इनामुल हौदा पहले से शादी-शुदा हैं, लेकिन इस्लाम धर्म के आधार पर सरीफुल खातून से दूसरी शादी रचाई है. इनामुल अपने दूसरे शादी को भी हर हाल में जायज ठहराते हुए कहते हैं कि वो अपनी पहली पत्नी की इजाजत और दोनों परिवार की रजामंदी से सरीफुल से निकाह किया है.
वैलेंटाइन डे के मौके पर मोहम्मद इनामुल हौदा और सरीफुल मिले और एक दूसरे को लाल गुलाब भेंट कर तस्वीरें खिंचवाई. दोनों ने कहा कि वे इन तस्वीरों के जरिए दुनिया में प्यार का संदेश देना चाहते हैं. वे चाहते हैं कि दुनिया में जिस किसी को भी प्यार है वे खुलकर इसका इजहार करें. उन्होंने ये भी कहा कि प्यार का इजहार करने में इस बात का ख्याल जरूर रखें कि इससे सामने वाले को कोई कष्ट न पहुंचे. टिप्पणियां
कटिहार पुलिस का कहना है कि यह जोड़ी एक मिसाल है. समाज में आमतौर पर सजा पाने वाले लोगों को सम्मान नहीं मिल पाता है, लेकिन यह जोड़ी अपने फैसले से लोगों की सोच बदलने का काम करेगी.
वैलेंटाइन डे के मौके पर मोहम्मद इनामुल हौदा और सरीफुल मिले और एक दूसरे को लाल गुलाब भेंट कर तस्वीरें खिंचवाई. दोनों ने कहा कि वे इन तस्वीरों के जरिए दुनिया में प्यार का संदेश देना चाहते हैं. वे चाहते हैं कि दुनिया में जिस किसी को भी प्यार है वे खुलकर इसका इजहार करें. उन्होंने ये भी कहा कि प्यार का इजहार करने में इस बात का ख्याल जरूर रखें कि इससे सामने वाले को कोई कष्ट न पहुंचे. टिप्पणियां
कटिहार पुलिस का कहना है कि यह जोड़ी एक मिसाल है. समाज में आमतौर पर सजा पाने वाले लोगों को सम्मान नहीं मिल पाता है, लेकिन यह जोड़ी अपने फैसले से लोगों की सोच बदलने का काम करेगी.
कटिहार पुलिस का कहना है कि यह जोड़ी एक मिसाल है. समाज में आमतौर पर सजा पाने वाले लोगों को सम्मान नहीं मिल पाता है, लेकिन यह जोड़ी अपने फैसले से लोगों की सोच बदलने का काम करेगी. | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: कटिहार जेल में अपहरण के मामले में आई थी महिला कैदी.
डेढ़ साल पहले तैनात हुए पुलिसकर्मी से हुआ प्यार.
जमानत मिलने पर महिला कैदी से पुलिसकर्मी ने की शादी. | 32 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: वाशिंगटन डीसी से कैलिफोर्निया जाते समय 'एयर फोर्स वन' विमान में बुधवार को संवाददाताओं ने जब डोनाल्ड ट्रंप से पूछा कि क्या वह ह्यूस्टन रैली में कोई घोषणा करेंगे? इसके जवाब में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, 'हो सकता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मेरे बहुत अच्छे संबंध हैं.' हालांकि उन्होंने इसके बारे में विस्तार से नहीं बताया. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दोनों देशों के अधिकारी ह्यूस्टन में मोदी और ट्रंप की मुलाकात से पहले एक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं.
डोनाल्ड ट्रंप ने शिकायत की थी कि भारत द्वारा अमेरिकी उत्पादों पर लगाए जाने वाले शुल्क 'अब स्वीकार्य' नहीं हैं, जिसके बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ गया है. अमेरिका ने जून में व्यापार में सामान्यीकृत तरजीह व्यवस्था के तहत भारत के लाभार्थी विकासशील देश के दर्जे को समाप्त कर दिया था. जवाब में भारत ने अमेरिका के 28 उत्पादों पर पांच जून से कर लगा दिया था जिसमें बादाम और सेब शामिल हैं. ह्यूस्टन कार्यक्रम के लिए भारतीय-अमेरिकियों के रिकॉर्ड संख्या में पंजीकरण कराने के बारे में ट्रंप ने कहा कि उनके रैली में शामिल होने की घोषणा के बाद इस कार्यक्रम के लिए भीड़ और बढ़ गई है. इस कार्यक्रम के लिए 50,000 से अधिक भारतीय-अमेरिकियों ने पंजीकरण कराया है.
ह्यूस्टन कार्यक्रम के बाद ट्रं ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री के साथ कार्यक्रम में शामिल होने के लिए ओहायो की यात्रा करेंगे.
ट्रंप ने कहा कि उनके भारत और पाकिस्तान दोनों के साथ अच्छे संबंध हैं. न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र के इतर ट्रंप अगले हफ्ते पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से भी मुलाकात कर सकते हैं. पीएम मोदी संयुक्त राष्ट्र महासभा के वार्षिक सत्र के लिए 21 से 27 सितंबर तक अमेरिका में होंगे. | यह एक सारांश है: हाउडी मोदी कार्यक्रम में बड़ी घोषणा कर सकते हैं ट्रंप
22 सितंबर को अमेरिका के ह्यूस्टन में होगा कार्यक्रम
यह पहली बार होगा, जब ट्रंप-मोदी मंच साझा करेंगे | 24 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: अंतरराष्ट्रीय ओलिम्पिक समिति (आईओसी) ने भारतीय ओलिम्पिक संघ के चुनावों को सरकारी नियमों के तहत करवाने के फैसले को पूरी तरह से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि ये चुनाव पूरी तरह से ओलिम्पिक चार्टर और आईओए के संविधान के तहत करवाए जाने चाहिए।
आईओए द्वारा नियुक्त निर्वाचन अधिकारी न्यायाधीश (सेवानिवृत) वीके बाली ने अधिसूचित किया था कि आईओए के 25 नवंबर को होने वाले आईओए के चुनाव सरकार की खेल संहिता के अंतर्गत कराए जाएंगे, लेकिन आईओसी ने साफ किया है कि ये चुनाव ‘‘अस्वीकृत’’ हैं और यह ओलिम्पिक चार्टर का सीधा-सीधा उल्लंघन है और राष्ट्रीय ओलिम्पिक संघ के नियमों के खिलाफ है।टिप्पणियां
अंतरराष्ट्रीय ओलिम्पिक समिति ने आईओए के कार्यवाहक अध्यक्ष विजय कुमार मल्होत्रा और चुनावा आयोग के अध्यक्ष एसवाई कुरैशी को लिखे अपने पत्र में कहा, ‘‘5 नवंबर 2012 को चुनाव आयोग के एक सदस्य द्वारा हस्ताक्षरित दस्तावेज से हमें पता चला है कि भारत सरकार की खेल संहिता के अनुसार चुनाव कराए जाने हैं। यह फैसला बहुत चिंता का विषय है और भारतीय ओलिम्पिक संघ के नियमों के खिलाफ है।’’
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय ओलिम्पिक समिति के नियमों में साफ-साफ कहा गया है कि किसी भी राष्ट्रीय ओलिम्पिक संघ के चुनाव ओलिम्पिक चार्टर के तहत कराए जा सकते हैं जिसमें किसी भी प्रकार का सरकारी हस्तक्षेप नहीं होगा।
आईओए द्वारा नियुक्त निर्वाचन अधिकारी न्यायाधीश (सेवानिवृत) वीके बाली ने अधिसूचित किया था कि आईओए के 25 नवंबर को होने वाले आईओए के चुनाव सरकार की खेल संहिता के अंतर्गत कराए जाएंगे, लेकिन आईओसी ने साफ किया है कि ये चुनाव ‘‘अस्वीकृत’’ हैं और यह ओलिम्पिक चार्टर का सीधा-सीधा उल्लंघन है और राष्ट्रीय ओलिम्पिक संघ के नियमों के खिलाफ है।टिप्पणियां
अंतरराष्ट्रीय ओलिम्पिक समिति ने आईओए के कार्यवाहक अध्यक्ष विजय कुमार मल्होत्रा और चुनावा आयोग के अध्यक्ष एसवाई कुरैशी को लिखे अपने पत्र में कहा, ‘‘5 नवंबर 2012 को चुनाव आयोग के एक सदस्य द्वारा हस्ताक्षरित दस्तावेज से हमें पता चला है कि भारत सरकार की खेल संहिता के अनुसार चुनाव कराए जाने हैं। यह फैसला बहुत चिंता का विषय है और भारतीय ओलिम्पिक संघ के नियमों के खिलाफ है।’’
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय ओलिम्पिक समिति के नियमों में साफ-साफ कहा गया है कि किसी भी राष्ट्रीय ओलिम्पिक संघ के चुनाव ओलिम्पिक चार्टर के तहत कराए जा सकते हैं जिसमें किसी भी प्रकार का सरकारी हस्तक्षेप नहीं होगा।
अंतरराष्ट्रीय ओलिम्पिक समिति ने आईओए के कार्यवाहक अध्यक्ष विजय कुमार मल्होत्रा और चुनावा आयोग के अध्यक्ष एसवाई कुरैशी को लिखे अपने पत्र में कहा, ‘‘5 नवंबर 2012 को चुनाव आयोग के एक सदस्य द्वारा हस्ताक्षरित दस्तावेज से हमें पता चला है कि भारत सरकार की खेल संहिता के अनुसार चुनाव कराए जाने हैं। यह फैसला बहुत चिंता का विषय है और भारतीय ओलिम्पिक संघ के नियमों के खिलाफ है।’’
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय ओलिम्पिक समिति के नियमों में साफ-साफ कहा गया है कि किसी भी राष्ट्रीय ओलिम्पिक संघ के चुनाव ओलिम्पिक चार्टर के तहत कराए जा सकते हैं जिसमें किसी भी प्रकार का सरकारी हस्तक्षेप नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय ओलिम्पिक समिति के नियमों में साफ-साफ कहा गया है कि किसी भी राष्ट्रीय ओलिम्पिक संघ के चुनाव ओलिम्पिक चार्टर के तहत कराए जा सकते हैं जिसमें किसी भी प्रकार का सरकारी हस्तक्षेप नहीं होगा। | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: आईओसी ने आईओए के चुनावों को सरकारी नियमों के तहत करवाने के फैसले को पूरी तरह से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि ये चुनाव पूरी तरह से ओलिम्पिक चार्टर और आईओए के संविधान के तहत करवाए जाने चाहिए। | 25 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: 1993 में मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में शेष सजा काट रहे अभिनेता संजय दत्त 14 दिनों की छुट्टी मिलने पर आज अपने घर लौटे।
दत्त पिछले चार महीनों से भी अधिक समय से यरवदा केंद्रीय कारागार में बंद थे। जेल अधीक्षक योगेश देसाई ने बताया कि जेल अधिकारियों ने दत्त का 14 दिनों की छुट्टी का आवेदन स्वीकार कर लिया है।
देसाई ने बताया कि छुट्टी मंजूर किए जाने का एक मानदंड अच्छा आचरण है। ये छुट्टियां कैदी की संचित छुट्टियों में से दी जाती हैं। इसके बाद दत्त ने बांद्रा में स्थित अपने घर के बाहर एकत्र संवाददाताओं से अपील की कि वे उनकी निजता का सम्मान करें।
उन्होंने कहा कि अपने परिवार के साथ समय बिताने के लिए उनके पास बहुत कम समय है।
दत्त से मीडिया से कहा, मैं प्रेस से हाथ जोड़कर निवेदन करता हूं कि मेरे पास जो भी थोड़ा बहुत समय है, आप मुझे उसे अपने परिवार के साथ व्यतीत करने की अनुमति दें। मैं कानून का सम्मान करता हूं और छुट्टियां समाप्त होने के बाद मैं जेल वापस चला जाउंगा। मैं आपके समर्थन के लिए आपका धन्यवाद करता हूं। 1993 मुंबई बम विस्फोट मामले में अवैध तरीके से हथियार रखने के दोषी 53 वर्षीय दत्त जेल में शेष 42 महीनों की सजा काट रहे हैं। टिप्पणियां
उच्चतम न्यायालय ने 21 मार्च को सुनाए अपने फैसले में दत्त की कारावास की सजा को छह वर्ष से कम करके पांच वर्ष कर दिया था। दत्त जेल में 18 महीने की सजा पहले ही काट चुके हैं।
न्यायालय ने दत्त को दोषी ठहराए जाने और उन्हें पांच वर्ष कारावास की सजा सुनाने के फैसले की समीक्षा करने संबंधी अभिनेता की याचिका 10 मई को अस्वीकार कर दी थी।
दत्त पिछले चार महीनों से भी अधिक समय से यरवदा केंद्रीय कारागार में बंद थे। जेल अधीक्षक योगेश देसाई ने बताया कि जेल अधिकारियों ने दत्त का 14 दिनों की छुट्टी का आवेदन स्वीकार कर लिया है।
देसाई ने बताया कि छुट्टी मंजूर किए जाने का एक मानदंड अच्छा आचरण है। ये छुट्टियां कैदी की संचित छुट्टियों में से दी जाती हैं। इसके बाद दत्त ने बांद्रा में स्थित अपने घर के बाहर एकत्र संवाददाताओं से अपील की कि वे उनकी निजता का सम्मान करें।
उन्होंने कहा कि अपने परिवार के साथ समय बिताने के लिए उनके पास बहुत कम समय है।
दत्त से मीडिया से कहा, मैं प्रेस से हाथ जोड़कर निवेदन करता हूं कि मेरे पास जो भी थोड़ा बहुत समय है, आप मुझे उसे अपने परिवार के साथ व्यतीत करने की अनुमति दें। मैं कानून का सम्मान करता हूं और छुट्टियां समाप्त होने के बाद मैं जेल वापस चला जाउंगा। मैं आपके समर्थन के लिए आपका धन्यवाद करता हूं। 1993 मुंबई बम विस्फोट मामले में अवैध तरीके से हथियार रखने के दोषी 53 वर्षीय दत्त जेल में शेष 42 महीनों की सजा काट रहे हैं। टिप्पणियां
उच्चतम न्यायालय ने 21 मार्च को सुनाए अपने फैसले में दत्त की कारावास की सजा को छह वर्ष से कम करके पांच वर्ष कर दिया था। दत्त जेल में 18 महीने की सजा पहले ही काट चुके हैं।
न्यायालय ने दत्त को दोषी ठहराए जाने और उन्हें पांच वर्ष कारावास की सजा सुनाने के फैसले की समीक्षा करने संबंधी अभिनेता की याचिका 10 मई को अस्वीकार कर दी थी।
देसाई ने बताया कि छुट्टी मंजूर किए जाने का एक मानदंड अच्छा आचरण है। ये छुट्टियां कैदी की संचित छुट्टियों में से दी जाती हैं। इसके बाद दत्त ने बांद्रा में स्थित अपने घर के बाहर एकत्र संवाददाताओं से अपील की कि वे उनकी निजता का सम्मान करें।
उन्होंने कहा कि अपने परिवार के साथ समय बिताने के लिए उनके पास बहुत कम समय है।
दत्त से मीडिया से कहा, मैं प्रेस से हाथ जोड़कर निवेदन करता हूं कि मेरे पास जो भी थोड़ा बहुत समय है, आप मुझे उसे अपने परिवार के साथ व्यतीत करने की अनुमति दें। मैं कानून का सम्मान करता हूं और छुट्टियां समाप्त होने के बाद मैं जेल वापस चला जाउंगा। मैं आपके समर्थन के लिए आपका धन्यवाद करता हूं। 1993 मुंबई बम विस्फोट मामले में अवैध तरीके से हथियार रखने के दोषी 53 वर्षीय दत्त जेल में शेष 42 महीनों की सजा काट रहे हैं। टिप्पणियां
उच्चतम न्यायालय ने 21 मार्च को सुनाए अपने फैसले में दत्त की कारावास की सजा को छह वर्ष से कम करके पांच वर्ष कर दिया था। दत्त जेल में 18 महीने की सजा पहले ही काट चुके हैं।
न्यायालय ने दत्त को दोषी ठहराए जाने और उन्हें पांच वर्ष कारावास की सजा सुनाने के फैसले की समीक्षा करने संबंधी अभिनेता की याचिका 10 मई को अस्वीकार कर दी थी।
उन्होंने कहा कि अपने परिवार के साथ समय बिताने के लिए उनके पास बहुत कम समय है।
दत्त से मीडिया से कहा, मैं प्रेस से हाथ जोड़कर निवेदन करता हूं कि मेरे पास जो भी थोड़ा बहुत समय है, आप मुझे उसे अपने परिवार के साथ व्यतीत करने की अनुमति दें। मैं कानून का सम्मान करता हूं और छुट्टियां समाप्त होने के बाद मैं जेल वापस चला जाउंगा। मैं आपके समर्थन के लिए आपका धन्यवाद करता हूं। 1993 मुंबई बम विस्फोट मामले में अवैध तरीके से हथियार रखने के दोषी 53 वर्षीय दत्त जेल में शेष 42 महीनों की सजा काट रहे हैं। टिप्पणियां
उच्चतम न्यायालय ने 21 मार्च को सुनाए अपने फैसले में दत्त की कारावास की सजा को छह वर्ष से कम करके पांच वर्ष कर दिया था। दत्त जेल में 18 महीने की सजा पहले ही काट चुके हैं।
न्यायालय ने दत्त को दोषी ठहराए जाने और उन्हें पांच वर्ष कारावास की सजा सुनाने के फैसले की समीक्षा करने संबंधी अभिनेता की याचिका 10 मई को अस्वीकार कर दी थी।
दत्त से मीडिया से कहा, मैं प्रेस से हाथ जोड़कर निवेदन करता हूं कि मेरे पास जो भी थोड़ा बहुत समय है, आप मुझे उसे अपने परिवार के साथ व्यतीत करने की अनुमति दें। मैं कानून का सम्मान करता हूं और छुट्टियां समाप्त होने के बाद मैं जेल वापस चला जाउंगा। मैं आपके समर्थन के लिए आपका धन्यवाद करता हूं। 1993 मुंबई बम विस्फोट मामले में अवैध तरीके से हथियार रखने के दोषी 53 वर्षीय दत्त जेल में शेष 42 महीनों की सजा काट रहे हैं। टिप्पणियां
उच्चतम न्यायालय ने 21 मार्च को सुनाए अपने फैसले में दत्त की कारावास की सजा को छह वर्ष से कम करके पांच वर्ष कर दिया था। दत्त जेल में 18 महीने की सजा पहले ही काट चुके हैं।
न्यायालय ने दत्त को दोषी ठहराए जाने और उन्हें पांच वर्ष कारावास की सजा सुनाने के फैसले की समीक्षा करने संबंधी अभिनेता की याचिका 10 मई को अस्वीकार कर दी थी।
उच्चतम न्यायालय ने 21 मार्च को सुनाए अपने फैसले में दत्त की कारावास की सजा को छह वर्ष से कम करके पांच वर्ष कर दिया था। दत्त जेल में 18 महीने की सजा पहले ही काट चुके हैं।
न्यायालय ने दत्त को दोषी ठहराए जाने और उन्हें पांच वर्ष कारावास की सजा सुनाने के फैसले की समीक्षा करने संबंधी अभिनेता की याचिका 10 मई को अस्वीकार कर दी थी।
न्यायालय ने दत्त को दोषी ठहराए जाने और उन्हें पांच वर्ष कारावास की सजा सुनाने के फैसले की समीक्षा करने संबंधी अभिनेता की याचिका 10 मई को अस्वीकार कर दी थी। | संक्षिप्त सारांश: अवैध हथियार रखने के मामले में जेल की सजा काट रहे संजय दत्त को जेल से दो हफ्ते की छुट्टी मिल गई है। संजय पुणे के यरवदा जेल से बाहर आ चुके हैं। | 0 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: अभिनेत्री चित्रांगदा सिंह की तुलना अक्सर गुजरे जमाने की संजीदा अदाकारा स्मिता पाटिल से की जाती है। चित्रांगदा इसे अपने लिए बड़ी बात मानती हैं, लेकिन उनका कहना है कि वह शायद ही कभी स्मिता पाटिल बन सकें। चित्रांगदा ने कहा, यह नहीं जानती कि मैं स्मिता पाटिल हो सकती हूं। वह एक अलग दौर था। जब लोग मेरी तुलना उनके साथ करते हैं, तो मुझे अच्छा लगता है। परंतु यह उस समय अनुचित लगता है, जब लोग कहते हैं कि मुझे स्मिता पाटिल की तरह काम करना चाहिए। सुधीर मिश्रा की फिल्म हजारों ख्वाहिशें ऐसी से अपने अभिनय का लोहा मनवाने वाली 34 साल की चित्रांगदा ने कहा, जब लोग मुझे स्मिता पाटिल कहते हैं, तो मैं खुश होती हूं। यह एक अलग तरह का अनुभव है। वह एक बेहतरीन अभिनेत्री और हमारे वक्त से बहुत आगे थीं। उनसे तुलना किया जाना मेरे लिए बड़ी बात है। चित्रांगदा की अगली फिल्म ये साली जिंदगी है। इसका निर्देशन सुधीर मिश्रा कर रहे हैं। फिल्म में इरफान खान भी हैं। यह 4 फरवरी को रिलीज हो रही है। | संक्षिप्त पाठ: चित्रांगदा की तुलना अक्सर गुजरे जमाने की अदाकारा स्मिता पाटिल से की जाती है। चित्रांगदा इसे अपने लिए बड़ी बात मानती हैं। | 30 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: खुद शिवपाल ने फिरोजाबाद सीट में सपा प्रत्याशी अक्षय यादव के खिलाफ ताल ठोकी है. अक्षय राज्यसभा सांसद और अखिलेश के चाचा रामगोपाल यादव के बेटे हैं. शिवपाल का मानना है कि रामगोपाल के कारण ही अखिलेश ने सपा में उन्हें ठिकाने लगाया और यह समय 'बदला' लेने का है. यादव समाज और अल्पसंख्यकों के वोट काटने का काम शिवपाल और उनका मोर्चा कर सकता है. माना जा रहा कि शिवपाल बीजेपी की 'बी' टीम के रूप में काम कर रहे हैं. वैसे भी, शिवपाल और अखिलेश के इस 'ईगो क्लेश' में मुलायम की भूमिका सपा कार्यकर्ताओं का भ्रम बढ़ा रही है. 'नेताजी' कभी शिवपाल की तारीफ करके उनके पक्ष में होने का संकेत देते हैं तो कभी बेटे अखिलेश के साथ दिखते हैं. अंदरखाने यह चर्चा है कि सपा-बसपा गठबंधन से मुलायम खुश नहीं हैं. वे कह चुके हैं कि गठबंधन करके अखिलेश ने सपा का नुकसान किया है. वैसे, मुलायम मैनपुरी से पार्टी उम्मीदवार हैं. महागठबंधन और एनडीए की इस लड़ाई में शिवपाल की एंट्री ने सबसकी दिलचस्पी बढ़ा दी है. स्वाभाविक रूप से शिवपाल सपा का नुकसान करेंगे लेकिन यह नुकसान कितना बड़ा या छोटा होगा, वोटिंग के बाद ही पता लगेगा.
बिहार की बात करें तो लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav)के सियासी परिदृश्य से बाहर होने के बाद यादव परिवार में तेजस्वी (Tejashwi Yadav)और उनके बड़े भाई तेजप्रताप (Tej Pratap Yadav) खुलकर सामने आ गए हैं. तेजप्रताप ने साफ कहा, तेजस्वी चाटुकारों से घिर गए हैं और इन चाटुकारों के कारण सही फैसले नहीं ले पा रहे हैं. अपनी अनदेखी से नाराज बड़े भैया ने लालू-राबड़ी के नाम से अलग मोर्चा बनाने का गठन कर दिया है. तेजप्रताप ने कहा कि टिकट तय करने में उनकी राय नहीं ली जा रही. उनकी सबसे अधिक नाराजगी सारण सीट से ससुर चंद्रिका राय को टिकट देने पर है. चंद्रिका की बेटी ऐश्वर्या की पिछले साल मई में तेजप्रताप के साथ शादी हुई थी. हालांकि, शादी के छह महीने से कम समय के भीतर तेजप्रताप की ओर से तलाक की याचिका दायर की गयी थी.
तेजप्रताप ने कहा है कि सारण से उनकी मां राबड़ी देवी को लालटेन (RJD का चुनाव चिह्न) से चुनाव लड़ना चाहिए. यदि मां नहीं लड़ीं तो वे अपने ससुर के खिलाफ निर्दलीय मैदान में उतरने को तैयार हैं. यही नहीं, तेजप्रताप जहानाबाद और शिवहर से अपने प्रत्याशी को टिकट देने पर अड़े हुए हैं. उन्होंने कहा, मैंने दो सीटों को लेकर तेजस्वी से बात की थी. जहानाबाद से सुरेंद्र यादव को टिकट दिया गया है जो तीन बार से लगातार हार रहे हैं और फिर भी उन्हें टिकट दिया गया है. तेजप्रताप जहानाबाद से चंद्र प्रकाश और शिवहर से अंगेश को राजद द्वारा उम्मीदवार बनाए जाने के लिए दबाव बना रहे है. उन्होंने दोटूक कहा है कि यदि इन दोनों को RJD से टिकट नहीं मिला तो ये दोनों लालू-राबड़ी मोर्चे से चुनावी मैदान में उतरेंगे. ऐसा लग रहा है कि एक समय तेजस्वी को अपना 'अर्जुन' बताने वाले तेजप्रताप के अपने छोटे भाई से रिश्ते सुलझने न वाली स्थिति में पहुंच चुके हैं. दोनों भाइयों की यह खटपट भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के लिए खुशखबरी है. उसे उम्मीद है कि राज्य में सत्ता विरोधी रुझान से पार पाते हुए वह 2014 लोकसभा चुनाव के बराबर ही सीटें जीतने में सफल रहेगी. | संक्षिप्त सारांश: यूपी में भतीजे अखिलेश के सामने खुलकर आए चाचा शिवपाल
फिरोजाबाद से सपा कैंडिडेट के खिलाफ लड़ रहे चुनाव
बिहार में तेजप्रताप अपनी उपेक्षा से खफा, दिखाए बागी तेवर | 23 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: बहरहाल नासिक पुलिस और मुंबई क्राइम ब्रांच की टीम के काम का तरीका एकदम अलग था. नासिक पुलिस जहां सीधे सज्जाद की तलाश में उसके गांव जा धमकी थी वहीं मुंबई क्राइम ब्रांच की टीम ने पहले सज्जाद के घर परिवार और दोस्तों की जानकारी जमा करना शुरू किया. क्योंकि वहां गई नासिक पुलिस की टीम को पथराव का सामना करना पड़ा था. स्थानीय पुलिस बड़ी मुश्किल से उन्हें अपनी सुरक्षा में बाहर निकाल कर लायी थी. ये अलग बात है कि दूसरी बार नासिक पुलिस सज्जाद की मां का बयान लेने में कामयाब रही थी. पर सज्जाद का कुछ पता नहीं चल पाया था.
पता चला कि सज्जाद के तीन और भाई हैं. उनके नाम हैं तौफीक़, अमजिद और इरफान. तकरीबन 6 महीने बाद पहली बार मुंबई क्राइम ब्रांच की टीम जम्मू गई. सूत्र बताते हैं कि पुलिस टीम को जम्मू से अपने अधिकारियों की तरफ से साफ निर्देश था कि वो सीधे कश्मीर में सज्जाद के गांव या उसके आसपास नहीं जायेगी जब तक कि कोई ठोस सुराग नहीं मिले. इसलिए इंस्पेक्टर निकम सबसे पहले जम्मू में ही रहकर बारामुला में सोर्स बनाने में जुट गये. साथ ही उस इलाके की भौगोलिक और सामाजिक स्थिति की जानकारी भी जुटानी शुरू की. वहां से पता चला कि श्रीनगर के आगे रामबन तक तो ठीक है लेकिन उसके आगे जाना खतरे से खाली नहीं है.
टीम जम्मू से ही वापस आ गई और मुंबई आकर जम्मू में बनाये गए सोर्स के जरिये तलाश जारी रखी. इस बीच एसीपी अभय शास्त्री अपने डिवीजन में वापस लौट गए, पुलिस इंस्पेक्टर महेश तावड़े को भी एक हत्याकांड के सिलसिले में मालाड पुलिस थाने में वापस आना पड़ा और सिपाही अजय बल्लाल भी किसी वजह से टीम का हिस्सा नहीं रहा. टीम में रह गये सिर्फ इंसपेक्टर संजय निकम और बाकी के 4 सिपाही.
मुंबई में रहकर भी इंस्पेक्टर संजय निकम शांत नहीं बैठे. सज्जाद के भाईयों के नाम से इंटरनेट पर सोशल साइट खंगालते रहे. कई दिनों की कोशिश के बाद उन्हें फेसबुक पर किलर नाम से एक पेज मिला. सज्जाद के छोटे भाई द्वारा बनाये गए उस पेज पर सभी 4 भाईयों का एक साथ एक फ़ोटो भी था. लेकिन फ़ोटो में भाइयों के पीछे जो जगह दिख रही थी वो सज्जाद के गांव से अलग थी. ध्यान से देखने पर पता चला कि वो कोई ऐसी जगह है जहां बांध या टनल जैसा कोई निर्माण कार्य चल रहा है. फ़ोटो में चारों भाइयों को साथ देखकर इतना तो साफ हो गया था कि सज्जाद पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में नहीं भागा है, वो इसी पार है और अपने परिवार के संपर्क में है. पुलिस के हाथ बहुत बड़ा सुराग लग गया था. लेकिन चुनौती उस जगह को पहचानने और वहां जाने की थी.
इस अहम सुराग के साथ इंस्पेक्टर निकम अपनी टीम के साथ अब श्रीनगर के लिए निकल गये. इसके लिए उन्होंने अपनी दाढ़ी बढ़ाई, और पहनावा भी बदल लिया. वहां रहकर उन्होंने कुछ ऐसे सोर्स बनाये जो बारामुला इलाके को समझते थे, वहां जान पहचान रखते थे. उनसे बातचीत में पता चला कि उस इलाके में हर कोई नहीं जा सकता. वहां कुछ ऐसे संवेदनशील इलाके हैं जहां जाने के लिये किसी भी बाहरी शख्स के पास टीआरपी यानी टेम्पररी रेसिडेंस पास होना चाहिए. उसके लिए इलाके में उस शख्स को जानने वाला भी होना चाहिए.
वो इलाका सेना की निगरानी में है और जरा भी शक होने पर वो गोली मार सकती है. पुलिस टीम के सामने दोहरी चुनौती थी. अगर वो अपनी असली पहचान जाहिर करते हैं तो राज खुलने का डर था और पहचान छुपाते हैं तो गोली खाने का. सूत्रों के मुताबिक इस दौरान सोर्स बनाने और जानकारी जुटाने के लिए उसे खूब पैसे भी खर्च करने पड़े. बताते हैं कि वहां के लोगों को मिठाई पसंद है लेकिन वहां इस तरह की मिठाई आसानी से नहीं मिलती इसलिए उन्हें मिठाई के डिब्बे भेंट कर काम निकालना पड़ा.
अब तक पुलिस टीम के पास काफी जानकारी जमा हो चुकी थी. ये भी पता चल चुका था कि फ़ोटो में पीछे दिख रही जगह झेलम नदी पर नेशनल हाइड्रो पावर की साइट हैं जहां निर्माण का काम चल रहा है. इससे ये अंदाजा लग गया कि सज्जाद हो ना हो उस जगह पर ही मजदूरी का काम कर रहा है. लेकिन सिर्फ अंदाजे पर ही वहां जाने का जोखिम नहीं लिया जा सकता था. बहरहाल पता चला है कि इंस्पेक्टर निकम किसी तरह जुगाड़ लगाकर एक बार सज्जाद के गांव तक भी पहुंच गये थे. लेकिन जब ये जानकारी मिली कि वहां 20 से 25 घर सज्जाद के मुगल परिवार के ही हैं और एक आवाज पर सभी जमा हो जाते हैं इसलिये वहां जरा भी जोखिम मोल लेना मुनासिब नहीं था. ये भी पता चला कि सज्जाद अपने घर मे ना रहकर गांव से 4 किलोमीटर दूर जबाड़ इलाके में अपने चाचा सरीफ के घर आता जाता रहता था. वहां कुछ करना उसके गांव से भी जोखिम भरा था. पुलिस टीम एक बार फिर वापस मुंबई आकर मौके का इंतजार करने लगी. मिठाई वाले सोर्स काम मे लगे रहे.
अक्टूबर के पहले सप्ताह में खबर मिली कि सोनमर्ग में एक बड़े प्रोजेक्ट के निर्माण का काम चल रहा है, वहां तकरीबन डेढ़ हजार मजदूर काम करते हैं. सलामाबाद से भी कई लड़के उस साइट पर मजदूरी करते हैं और वहीं रहते हैं. मतलब सज्जाद के वहां होने की प्रबल संभावना थी. सूचना मिलने के बाद इंस्पेक्टर संजय निकम अपने तीन सिपाहियों के साथ निकल गए. मुंबई से श्रीनगर और वहां से सोनमर्ग. श्रीनगर हवाई जहाज से गये थे इसलिये बंदूक और हथकड़ी ले जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता. ऐसे इलाके में जहां बात बात में पथराव, पुलिस और सेना पर भी हमला होने की आशंका बनी रहती हैं वहां 4 लोग वो भी निहत्थे, कुछ भी हो सकता था. लेकिन सज्जाद को पकड़ना था वो भी बिना स्थानीय पुलिस की सहायता लिए क्योंकि बात लीक होने का डर था.
स्थानीय लिबास में टीम सीधे उस साइट पर ना जाकर पहले आसपास के गांव में गई. खुद को टेलीफोन कंपनी का अफसर बताकर टेलीफोन टावर लगाने के लिए सर्वे करने आया है बताया. आतंक और गरीबी की दोहरी मार झेल रहे लोगों को आमदनी का जरिया दिखा और वो उसके लिए जमीन देने को तैयार हो गए. लेकिन पुलिस का लक्ष्य तो उन मजदूरों तक पहुंचना था. लिहाजा टावर बनाने के लिए जरूरी मजदूरों को लाने की शर्त जमीन वालों को ही दी गई. पैसा आता देख भला कौन मना करेगा. वो लोग सोनमर्ग में जहां निर्माण काम चल रहा था वहीं के कुछ ठेकेदारों को बुला लाये. उनसे कोटेशन मांगा गया और मजदूरों के काम देखने के लिए उस साइट पर ले जाने की शर्त रखी गई. ठेकेदार तैयार हो गया और थोड़ी ही देर में टीम उन मजदूरों के बीच में थी. इत्तेफाक से जिस ठेकेदार से मुलाकात हुई थी उसके मजदूरों की लिस्ट में साजिद नाम लिखा था. पुलिस को पहले से अंदेशा था कि अपनी पहचान छुपाने के लिये सज्जाद दूसरे नाम का सहारा ले सकता है और साजिद सज्जाद से मिलता जुलता है इसलिए पुलिस ने साजिद को देखना चाहा. ठेकेदार का उसकी तरफ इशारा करते ही पुलिस टीम को उसे पहचानने में देर नहीं लगी. लेकिन किसी ने कोई हड़बड़ी नहीं की ना ही अपने चेहरे पर सज्जाद को खोज निकालने की खुशी को आने दिया. टीम वापस चली गई.
अगले दो दिन उसे वहां से उठाने के मौके की तलाश होती रही. लेकिन वो कंस्ट्रक्शन साइट से बाहर नहीं आया. अब पुलिस के सामने मजदूरों के बीच मे जाकर सज्जाद को पकड़ने के अलावा कोई चारा नहीं था. तकरीबन 100 मीटर दूर गाड़ी खड़ी कर सिपाही दया कांबले और संदीप कांबले को ड्राइवर के साथ उसी में बैठे रहने को कहकर इंपेक्टर निकम सिर्फ एक सिपाही संदीप तलेकर के साथ सज्जाद के पास गए. सज्जाद जहां काम कर रहा था उसके ठीक पीछे बड़ा गड्ढा था और डर था कि अगर वो भागता है तो गड्ढे में गिर सकता है और अगर ऐसा हुआ तो बात बिगड़ते देर नहीं लगेगी और उसके बाद क्या होगा कुछ कहा नहीं जा सकता था. इसलिए इंपसेक्टर निकम पहले उस गड्ढे की तरफ सज्जाद के बिल्कुल करीब खड़े हुए फिर एक हाथ से उसके हाथ को दबाया और बोले, "सज्जाद तुझे मेरे साथ चलना है." और उसका हाथ छोड़ दिया. लेकिन तब तक साथ में गया दूसरा सिपाही तय योजना के मुताबिक दूसरी तरफ से सज्जाद से सटकर खड़ा हो गया.
इंस्पेक्टर निकम के मुताबिक उनकी आवाज सुनते ही सज्जाद जगह पर ही जड़ गया. उसे कुछ समझ ही नहीं आया कि हम कौन हैं और क्या चाहते हैं? हमने उसका हाथ बिना पकड़े ही शरीर से धक्का देकर आगे चलने का इशारा किया और उससे सामान्य बात करते करते गाड़ी के पास लाये. सबकुछ इतनी शांति से हो गया कि आसपास काम करने वाले मजदूर भी कुछ समझ नहीं पाये. गाड़ी का दरवाजा खोलकर जैसे ही उसे गाड़ी में बिठाया गया अंदर बैठे सिपाही दया कांबले को देख कर वो पहचान गया और उसके मुंह से आवाज निकली "अरे साहब आप?" दया कांबले वो सिपाही हैं जो मुकदमे के दौरान विशेष सरकारी वकील उज्वल निकम की मदद के लिए हमेशा अदालत में मौजूद रहते थे. सज्जाद उन्हें अच्छी तरह से पहचानता था और दया ने दाढ़ी भी नहीं रखी थी इसलिए दया कांबले को गाड़ी में ही बैठने को कहा गया था.
सज्जाद और कुछ बोलता या हरकत करता तब तक दूसरा सिपाही भी उसके बगल में बैठ चुका था और गाड़ी भी वहां से निकल चुकी थी. ड्राइवर के बगल की सीट पर बैठे इंस्पेक्टर संजय निकम ने पीछे मुड़कर सज्जाद को एक सेब दिया और बोले "खा". सज्जाद को पहचानते देर नहीं लगी और बोल उठा निकम साहब आप हैं?
सवाल है कि सज्जाद मुगल को पता था कि पुलिस उसकी तलाश में है. आज नहीं तो कल वो पकड़ा ही जायेगा. फिर वो सीमा पार क्यों नहीं भाग गया? इंस्पेक्टर संजय निकम के मुताबिक ये सवाल उन्होंने भी उससे पूछा था. तब सज्जाद का जवाब था, साहब उस पार जिंदगी नहीं है. गरीबी, बेकारी और जिल्लत के सिवा वहां कुछ नहीं है इसलिये मैं यहीं रहकर जीना चाह रहा था.
इसके बाद की कहानी तो जग जाहिर है. सज्जाद की गिरफ्तारी कितनी अहम थी इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद मुंबई पुलिस आयुक्त दत्तात्रेय पडसलगीकर ने पत्रकार परिषद लकेर उसकी गिरफ्तारी की घोषणा की. उन्होंने बताया कि जैसे ही मुझे सज्जाद की गिरफ्तारी की सूचना मिली मैंने सबसे पहले पल्लवी के पिता पुरकायस्थ को फोन कर बताया तो उनकी आंख में आसूं आ गए. वो बोले मुझे इसी पल का इंतजार था. पुलिस आयुक्त ने पूरी टीम का परिचय पत्रकारों से कराया.टिप्पणियां
कदकाठी से पहलवान लगने वाले इंस्पेक्टर संजय निकम 26/11 आतंकी हमले में भी मोर्चा संभालने वालों में रहे हैं. उस समय वो प्रॉपर्टी सेल में थे. प्रोपर्टी सेल ने ही साल 2008 में इंडियन मुजाहिदीन के पुणे मॉड्यूल को पकड़ कर आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन की कमर तोड़ी थी. तब अरुण चव्हाण प्रॉपर्टी सेल के इंचार्ज थे और श्रीपद काले, नंदकुमार गोपाले, संजय निकम और अजय सावंत उस टीम के अहम हिस्सा थे. उसके पहले तक पहेली रहे इंडियन मुजाहिदीन के लिए वो बड़ा झटका था. उसके बाद अहमदाबाद और कर्नाटक में भी बड़ी संख्या में उसके आतंकी पकड़े गए. उस समय दिवंगत आर आर पाटिल राज्य के गृहमंत्री थे उन्होंने 5 लाख रुपये इनाम देने का वादा किया था. लेकिन बाद में 26/11 आतंकी हमले के बाद उन्होंने इस्तीफा दिया और वो वादा सिर्फ घोषणा बनकर रह गया. हैरानी की बात है कि साल 2000 से 2008 तक देश में आतंकी वारदातों को अंजाम देने वाले संगठन को बेनकाब करने वाली टीम को इनाम तो दूर एक अदद पुरस्कार भी नहीं मिला. मिला है तो सिर्फ क्राइम ब्रांच में तब के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त देवेन भारती का एक अभिनंदन पत्र.
अब कश्मीर की दुरूह परिस्थितियों में से फरार क़ातिल को खोज निकालने और बिना किसी गड़बड़ी के उसे पकड़कर वापस सलाखों के पीछे भेजने वाली टीम की तारीफ तो खूब हो रही है. खुद मुख्यमंत्री देवेंन्द्र फडणवीस ने ट्वीट कर शाबाशी दी है. लेकिन सवाल है क्या इन्हें इनकी बहादुरी, समर्पण और सफलता पर इनाम और पुरस्कार मिलेगा या फिर साल 2008 की तरह सिर्फ जुबानी कवायद बन कर रह जायेगी?
पता चला कि सज्जाद के तीन और भाई हैं. उनके नाम हैं तौफीक़, अमजिद और इरफान. तकरीबन 6 महीने बाद पहली बार मुंबई क्राइम ब्रांच की टीम जम्मू गई. सूत्र बताते हैं कि पुलिस टीम को जम्मू से अपने अधिकारियों की तरफ से साफ निर्देश था कि वो सीधे कश्मीर में सज्जाद के गांव या उसके आसपास नहीं जायेगी जब तक कि कोई ठोस सुराग नहीं मिले. इसलिए इंस्पेक्टर निकम सबसे पहले जम्मू में ही रहकर बारामुला में सोर्स बनाने में जुट गये. साथ ही उस इलाके की भौगोलिक और सामाजिक स्थिति की जानकारी भी जुटानी शुरू की. वहां से पता चला कि श्रीनगर के आगे रामबन तक तो ठीक है लेकिन उसके आगे जाना खतरे से खाली नहीं है.
टीम जम्मू से ही वापस आ गई और मुंबई आकर जम्मू में बनाये गए सोर्स के जरिये तलाश जारी रखी. इस बीच एसीपी अभय शास्त्री अपने डिवीजन में वापस लौट गए, पुलिस इंस्पेक्टर महेश तावड़े को भी एक हत्याकांड के सिलसिले में मालाड पुलिस थाने में वापस आना पड़ा और सिपाही अजय बल्लाल भी किसी वजह से टीम का हिस्सा नहीं रहा. टीम में रह गये सिर्फ इंसपेक्टर संजय निकम और बाकी के 4 सिपाही.
मुंबई में रहकर भी इंस्पेक्टर संजय निकम शांत नहीं बैठे. सज्जाद के भाईयों के नाम से इंटरनेट पर सोशल साइट खंगालते रहे. कई दिनों की कोशिश के बाद उन्हें फेसबुक पर किलर नाम से एक पेज मिला. सज्जाद के छोटे भाई द्वारा बनाये गए उस पेज पर सभी 4 भाईयों का एक साथ एक फ़ोटो भी था. लेकिन फ़ोटो में भाइयों के पीछे जो जगह दिख रही थी वो सज्जाद के गांव से अलग थी. ध्यान से देखने पर पता चला कि वो कोई ऐसी जगह है जहां बांध या टनल जैसा कोई निर्माण कार्य चल रहा है. फ़ोटो में चारों भाइयों को साथ देखकर इतना तो साफ हो गया था कि सज्जाद पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में नहीं भागा है, वो इसी पार है और अपने परिवार के संपर्क में है. पुलिस के हाथ बहुत बड़ा सुराग लग गया था. लेकिन चुनौती उस जगह को पहचानने और वहां जाने की थी.
इस अहम सुराग के साथ इंस्पेक्टर निकम अपनी टीम के साथ अब श्रीनगर के लिए निकल गये. इसके लिए उन्होंने अपनी दाढ़ी बढ़ाई, और पहनावा भी बदल लिया. वहां रहकर उन्होंने कुछ ऐसे सोर्स बनाये जो बारामुला इलाके को समझते थे, वहां जान पहचान रखते थे. उनसे बातचीत में पता चला कि उस इलाके में हर कोई नहीं जा सकता. वहां कुछ ऐसे संवेदनशील इलाके हैं जहां जाने के लिये किसी भी बाहरी शख्स के पास टीआरपी यानी टेम्पररी रेसिडेंस पास होना चाहिए. उसके लिए इलाके में उस शख्स को जानने वाला भी होना चाहिए.
वो इलाका सेना की निगरानी में है और जरा भी शक होने पर वो गोली मार सकती है. पुलिस टीम के सामने दोहरी चुनौती थी. अगर वो अपनी असली पहचान जाहिर करते हैं तो राज खुलने का डर था और पहचान छुपाते हैं तो गोली खाने का. सूत्रों के मुताबिक इस दौरान सोर्स बनाने और जानकारी जुटाने के लिए उसे खूब पैसे भी खर्च करने पड़े. बताते हैं कि वहां के लोगों को मिठाई पसंद है लेकिन वहां इस तरह की मिठाई आसानी से नहीं मिलती इसलिए उन्हें मिठाई के डिब्बे भेंट कर काम निकालना पड़ा.
अब तक पुलिस टीम के पास काफी जानकारी जमा हो चुकी थी. ये भी पता चल चुका था कि फ़ोटो में पीछे दिख रही जगह झेलम नदी पर नेशनल हाइड्रो पावर की साइट हैं जहां निर्माण का काम चल रहा है. इससे ये अंदाजा लग गया कि सज्जाद हो ना हो उस जगह पर ही मजदूरी का काम कर रहा है. लेकिन सिर्फ अंदाजे पर ही वहां जाने का जोखिम नहीं लिया जा सकता था. बहरहाल पता चला है कि इंस्पेक्टर निकम किसी तरह जुगाड़ लगाकर एक बार सज्जाद के गांव तक भी पहुंच गये थे. लेकिन जब ये जानकारी मिली कि वहां 20 से 25 घर सज्जाद के मुगल परिवार के ही हैं और एक आवाज पर सभी जमा हो जाते हैं इसलिये वहां जरा भी जोखिम मोल लेना मुनासिब नहीं था. ये भी पता चला कि सज्जाद अपने घर मे ना रहकर गांव से 4 किलोमीटर दूर जबाड़ इलाके में अपने चाचा सरीफ के घर आता जाता रहता था. वहां कुछ करना उसके गांव से भी जोखिम भरा था. पुलिस टीम एक बार फिर वापस मुंबई आकर मौके का इंतजार करने लगी. मिठाई वाले सोर्स काम मे लगे रहे.
अक्टूबर के पहले सप्ताह में खबर मिली कि सोनमर्ग में एक बड़े प्रोजेक्ट के निर्माण का काम चल रहा है, वहां तकरीबन डेढ़ हजार मजदूर काम करते हैं. सलामाबाद से भी कई लड़के उस साइट पर मजदूरी करते हैं और वहीं रहते हैं. मतलब सज्जाद के वहां होने की प्रबल संभावना थी. सूचना मिलने के बाद इंस्पेक्टर संजय निकम अपने तीन सिपाहियों के साथ निकल गए. मुंबई से श्रीनगर और वहां से सोनमर्ग. श्रीनगर हवाई जहाज से गये थे इसलिये बंदूक और हथकड़ी ले जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता. ऐसे इलाके में जहां बात बात में पथराव, पुलिस और सेना पर भी हमला होने की आशंका बनी रहती हैं वहां 4 लोग वो भी निहत्थे, कुछ भी हो सकता था. लेकिन सज्जाद को पकड़ना था वो भी बिना स्थानीय पुलिस की सहायता लिए क्योंकि बात लीक होने का डर था.
स्थानीय लिबास में टीम सीधे उस साइट पर ना जाकर पहले आसपास के गांव में गई. खुद को टेलीफोन कंपनी का अफसर बताकर टेलीफोन टावर लगाने के लिए सर्वे करने आया है बताया. आतंक और गरीबी की दोहरी मार झेल रहे लोगों को आमदनी का जरिया दिखा और वो उसके लिए जमीन देने को तैयार हो गए. लेकिन पुलिस का लक्ष्य तो उन मजदूरों तक पहुंचना था. लिहाजा टावर बनाने के लिए जरूरी मजदूरों को लाने की शर्त जमीन वालों को ही दी गई. पैसा आता देख भला कौन मना करेगा. वो लोग सोनमर्ग में जहां निर्माण काम चल रहा था वहीं के कुछ ठेकेदारों को बुला लाये. उनसे कोटेशन मांगा गया और मजदूरों के काम देखने के लिए उस साइट पर ले जाने की शर्त रखी गई. ठेकेदार तैयार हो गया और थोड़ी ही देर में टीम उन मजदूरों के बीच में थी. इत्तेफाक से जिस ठेकेदार से मुलाकात हुई थी उसके मजदूरों की लिस्ट में साजिद नाम लिखा था. पुलिस को पहले से अंदेशा था कि अपनी पहचान छुपाने के लिये सज्जाद दूसरे नाम का सहारा ले सकता है और साजिद सज्जाद से मिलता जुलता है इसलिए पुलिस ने साजिद को देखना चाहा. ठेकेदार का उसकी तरफ इशारा करते ही पुलिस टीम को उसे पहचानने में देर नहीं लगी. लेकिन किसी ने कोई हड़बड़ी नहीं की ना ही अपने चेहरे पर सज्जाद को खोज निकालने की खुशी को आने दिया. टीम वापस चली गई.
अगले दो दिन उसे वहां से उठाने के मौके की तलाश होती रही. लेकिन वो कंस्ट्रक्शन साइट से बाहर नहीं आया. अब पुलिस के सामने मजदूरों के बीच मे जाकर सज्जाद को पकड़ने के अलावा कोई चारा नहीं था. तकरीबन 100 मीटर दूर गाड़ी खड़ी कर सिपाही दया कांबले और संदीप कांबले को ड्राइवर के साथ उसी में बैठे रहने को कहकर इंपेक्टर निकम सिर्फ एक सिपाही संदीप तलेकर के साथ सज्जाद के पास गए. सज्जाद जहां काम कर रहा था उसके ठीक पीछे बड़ा गड्ढा था और डर था कि अगर वो भागता है तो गड्ढे में गिर सकता है और अगर ऐसा हुआ तो बात बिगड़ते देर नहीं लगेगी और उसके बाद क्या होगा कुछ कहा नहीं जा सकता था. इसलिए इंपसेक्टर निकम पहले उस गड्ढे की तरफ सज्जाद के बिल्कुल करीब खड़े हुए फिर एक हाथ से उसके हाथ को दबाया और बोले, "सज्जाद तुझे मेरे साथ चलना है." और उसका हाथ छोड़ दिया. लेकिन तब तक साथ में गया दूसरा सिपाही तय योजना के मुताबिक दूसरी तरफ से सज्जाद से सटकर खड़ा हो गया.
इंस्पेक्टर निकम के मुताबिक उनकी आवाज सुनते ही सज्जाद जगह पर ही जड़ गया. उसे कुछ समझ ही नहीं आया कि हम कौन हैं और क्या चाहते हैं? हमने उसका हाथ बिना पकड़े ही शरीर से धक्का देकर आगे चलने का इशारा किया और उससे सामान्य बात करते करते गाड़ी के पास लाये. सबकुछ इतनी शांति से हो गया कि आसपास काम करने वाले मजदूर भी कुछ समझ नहीं पाये. गाड़ी का दरवाजा खोलकर जैसे ही उसे गाड़ी में बिठाया गया अंदर बैठे सिपाही दया कांबले को देख कर वो पहचान गया और उसके मुंह से आवाज निकली "अरे साहब आप?" दया कांबले वो सिपाही हैं जो मुकदमे के दौरान विशेष सरकारी वकील उज्वल निकम की मदद के लिए हमेशा अदालत में मौजूद रहते थे. सज्जाद उन्हें अच्छी तरह से पहचानता था और दया ने दाढ़ी भी नहीं रखी थी इसलिए दया कांबले को गाड़ी में ही बैठने को कहा गया था.
सज्जाद और कुछ बोलता या हरकत करता तब तक दूसरा सिपाही भी उसके बगल में बैठ चुका था और गाड़ी भी वहां से निकल चुकी थी. ड्राइवर के बगल की सीट पर बैठे इंस्पेक्टर संजय निकम ने पीछे मुड़कर सज्जाद को एक सेब दिया और बोले "खा". सज्जाद को पहचानते देर नहीं लगी और बोल उठा निकम साहब आप हैं?
सवाल है कि सज्जाद मुगल को पता था कि पुलिस उसकी तलाश में है. आज नहीं तो कल वो पकड़ा ही जायेगा. फिर वो सीमा पार क्यों नहीं भाग गया? इंस्पेक्टर संजय निकम के मुताबिक ये सवाल उन्होंने भी उससे पूछा था. तब सज्जाद का जवाब था, साहब उस पार जिंदगी नहीं है. गरीबी, बेकारी और जिल्लत के सिवा वहां कुछ नहीं है इसलिये मैं यहीं रहकर जीना चाह रहा था.
इसके बाद की कहानी तो जग जाहिर है. सज्जाद की गिरफ्तारी कितनी अहम थी इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद मुंबई पुलिस आयुक्त दत्तात्रेय पडसलगीकर ने पत्रकार परिषद लकेर उसकी गिरफ्तारी की घोषणा की. उन्होंने बताया कि जैसे ही मुझे सज्जाद की गिरफ्तारी की सूचना मिली मैंने सबसे पहले पल्लवी के पिता पुरकायस्थ को फोन कर बताया तो उनकी आंख में आसूं आ गए. वो बोले मुझे इसी पल का इंतजार था. पुलिस आयुक्त ने पूरी टीम का परिचय पत्रकारों से कराया.टिप्पणियां
कदकाठी से पहलवान लगने वाले इंस्पेक्टर संजय निकम 26/11 आतंकी हमले में भी मोर्चा संभालने वालों में रहे हैं. उस समय वो प्रॉपर्टी सेल में थे. प्रोपर्टी सेल ने ही साल 2008 में इंडियन मुजाहिदीन के पुणे मॉड्यूल को पकड़ कर आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन की कमर तोड़ी थी. तब अरुण चव्हाण प्रॉपर्टी सेल के इंचार्ज थे और श्रीपद काले, नंदकुमार गोपाले, संजय निकम और अजय सावंत उस टीम के अहम हिस्सा थे. उसके पहले तक पहेली रहे इंडियन मुजाहिदीन के लिए वो बड़ा झटका था. उसके बाद अहमदाबाद और कर्नाटक में भी बड़ी संख्या में उसके आतंकी पकड़े गए. उस समय दिवंगत आर आर पाटिल राज्य के गृहमंत्री थे उन्होंने 5 लाख रुपये इनाम देने का वादा किया था. लेकिन बाद में 26/11 आतंकी हमले के बाद उन्होंने इस्तीफा दिया और वो वादा सिर्फ घोषणा बनकर रह गया. हैरानी की बात है कि साल 2000 से 2008 तक देश में आतंकी वारदातों को अंजाम देने वाले संगठन को बेनकाब करने वाली टीम को इनाम तो दूर एक अदद पुरस्कार भी नहीं मिला. मिला है तो सिर्फ क्राइम ब्रांच में तब के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त देवेन भारती का एक अभिनंदन पत्र.
अब कश्मीर की दुरूह परिस्थितियों में से फरार क़ातिल को खोज निकालने और बिना किसी गड़बड़ी के उसे पकड़कर वापस सलाखों के पीछे भेजने वाली टीम की तारीफ तो खूब हो रही है. खुद मुख्यमंत्री देवेंन्द्र फडणवीस ने ट्वीट कर शाबाशी दी है. लेकिन सवाल है क्या इन्हें इनकी बहादुरी, समर्पण और सफलता पर इनाम और पुरस्कार मिलेगा या फिर साल 2008 की तरह सिर्फ जुबानी कवायद बन कर रह जायेगी?
टीम जम्मू से ही वापस आ गई और मुंबई आकर जम्मू में बनाये गए सोर्स के जरिये तलाश जारी रखी. इस बीच एसीपी अभय शास्त्री अपने डिवीजन में वापस लौट गए, पुलिस इंस्पेक्टर महेश तावड़े को भी एक हत्याकांड के सिलसिले में मालाड पुलिस थाने में वापस आना पड़ा और सिपाही अजय बल्लाल भी किसी वजह से टीम का हिस्सा नहीं रहा. टीम में रह गये सिर्फ इंसपेक्टर संजय निकम और बाकी के 4 सिपाही.
मुंबई में रहकर भी इंस्पेक्टर संजय निकम शांत नहीं बैठे. सज्जाद के भाईयों के नाम से इंटरनेट पर सोशल साइट खंगालते रहे. कई दिनों की कोशिश के बाद उन्हें फेसबुक पर किलर नाम से एक पेज मिला. सज्जाद के छोटे भाई द्वारा बनाये गए उस पेज पर सभी 4 भाईयों का एक साथ एक फ़ोटो भी था. लेकिन फ़ोटो में भाइयों के पीछे जो जगह दिख रही थी वो सज्जाद के गांव से अलग थी. ध्यान से देखने पर पता चला कि वो कोई ऐसी जगह है जहां बांध या टनल जैसा कोई निर्माण कार्य चल रहा है. फ़ोटो में चारों भाइयों को साथ देखकर इतना तो साफ हो गया था कि सज्जाद पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में नहीं भागा है, वो इसी पार है और अपने परिवार के संपर्क में है. पुलिस के हाथ बहुत बड़ा सुराग लग गया था. लेकिन चुनौती उस जगह को पहचानने और वहां जाने की थी.
इस अहम सुराग के साथ इंस्पेक्टर निकम अपनी टीम के साथ अब श्रीनगर के लिए निकल गये. इसके लिए उन्होंने अपनी दाढ़ी बढ़ाई, और पहनावा भी बदल लिया. वहां रहकर उन्होंने कुछ ऐसे सोर्स बनाये जो बारामुला इलाके को समझते थे, वहां जान पहचान रखते थे. उनसे बातचीत में पता चला कि उस इलाके में हर कोई नहीं जा सकता. वहां कुछ ऐसे संवेदनशील इलाके हैं जहां जाने के लिये किसी भी बाहरी शख्स के पास टीआरपी यानी टेम्पररी रेसिडेंस पास होना चाहिए. उसके लिए इलाके में उस शख्स को जानने वाला भी होना चाहिए.
वो इलाका सेना की निगरानी में है और जरा भी शक होने पर वो गोली मार सकती है. पुलिस टीम के सामने दोहरी चुनौती थी. अगर वो अपनी असली पहचान जाहिर करते हैं तो राज खुलने का डर था और पहचान छुपाते हैं तो गोली खाने का. सूत्रों के मुताबिक इस दौरान सोर्स बनाने और जानकारी जुटाने के लिए उसे खूब पैसे भी खर्च करने पड़े. बताते हैं कि वहां के लोगों को मिठाई पसंद है लेकिन वहां इस तरह की मिठाई आसानी से नहीं मिलती इसलिए उन्हें मिठाई के डिब्बे भेंट कर काम निकालना पड़ा.
अब तक पुलिस टीम के पास काफी जानकारी जमा हो चुकी थी. ये भी पता चल चुका था कि फ़ोटो में पीछे दिख रही जगह झेलम नदी पर नेशनल हाइड्रो पावर की साइट हैं जहां निर्माण का काम चल रहा है. इससे ये अंदाजा लग गया कि सज्जाद हो ना हो उस जगह पर ही मजदूरी का काम कर रहा है. लेकिन सिर्फ अंदाजे पर ही वहां जाने का जोखिम नहीं लिया जा सकता था. बहरहाल पता चला है कि इंस्पेक्टर निकम किसी तरह जुगाड़ लगाकर एक बार सज्जाद के गांव तक भी पहुंच गये थे. लेकिन जब ये जानकारी मिली कि वहां 20 से 25 घर सज्जाद के मुगल परिवार के ही हैं और एक आवाज पर सभी जमा हो जाते हैं इसलिये वहां जरा भी जोखिम मोल लेना मुनासिब नहीं था. ये भी पता चला कि सज्जाद अपने घर मे ना रहकर गांव से 4 किलोमीटर दूर जबाड़ इलाके में अपने चाचा सरीफ के घर आता जाता रहता था. वहां कुछ करना उसके गांव से भी जोखिम भरा था. पुलिस टीम एक बार फिर वापस मुंबई आकर मौके का इंतजार करने लगी. मिठाई वाले सोर्स काम मे लगे रहे.
अक्टूबर के पहले सप्ताह में खबर मिली कि सोनमर्ग में एक बड़े प्रोजेक्ट के निर्माण का काम चल रहा है, वहां तकरीबन डेढ़ हजार मजदूर काम करते हैं. सलामाबाद से भी कई लड़के उस साइट पर मजदूरी करते हैं और वहीं रहते हैं. मतलब सज्जाद के वहां होने की प्रबल संभावना थी. सूचना मिलने के बाद इंस्पेक्टर संजय निकम अपने तीन सिपाहियों के साथ निकल गए. मुंबई से श्रीनगर और वहां से सोनमर्ग. श्रीनगर हवाई जहाज से गये थे इसलिये बंदूक और हथकड़ी ले जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता. ऐसे इलाके में जहां बात बात में पथराव, पुलिस और सेना पर भी हमला होने की आशंका बनी रहती हैं वहां 4 लोग वो भी निहत्थे, कुछ भी हो सकता था. लेकिन सज्जाद को पकड़ना था वो भी बिना स्थानीय पुलिस की सहायता लिए क्योंकि बात लीक होने का डर था.
स्थानीय लिबास में टीम सीधे उस साइट पर ना जाकर पहले आसपास के गांव में गई. खुद को टेलीफोन कंपनी का अफसर बताकर टेलीफोन टावर लगाने के लिए सर्वे करने आया है बताया. आतंक और गरीबी की दोहरी मार झेल रहे लोगों को आमदनी का जरिया दिखा और वो उसके लिए जमीन देने को तैयार हो गए. लेकिन पुलिस का लक्ष्य तो उन मजदूरों तक पहुंचना था. लिहाजा टावर बनाने के लिए जरूरी मजदूरों को लाने की शर्त जमीन वालों को ही दी गई. पैसा आता देख भला कौन मना करेगा. वो लोग सोनमर्ग में जहां निर्माण काम चल रहा था वहीं के कुछ ठेकेदारों को बुला लाये. उनसे कोटेशन मांगा गया और मजदूरों के काम देखने के लिए उस साइट पर ले जाने की शर्त रखी गई. ठेकेदार तैयार हो गया और थोड़ी ही देर में टीम उन मजदूरों के बीच में थी. इत्तेफाक से जिस ठेकेदार से मुलाकात हुई थी उसके मजदूरों की लिस्ट में साजिद नाम लिखा था. पुलिस को पहले से अंदेशा था कि अपनी पहचान छुपाने के लिये सज्जाद दूसरे नाम का सहारा ले सकता है और साजिद सज्जाद से मिलता जुलता है इसलिए पुलिस ने साजिद को देखना चाहा. ठेकेदार का उसकी तरफ इशारा करते ही पुलिस टीम को उसे पहचानने में देर नहीं लगी. लेकिन किसी ने कोई हड़बड़ी नहीं की ना ही अपने चेहरे पर सज्जाद को खोज निकालने की खुशी को आने दिया. टीम वापस चली गई.
अगले दो दिन उसे वहां से उठाने के मौके की तलाश होती रही. लेकिन वो कंस्ट्रक्शन साइट से बाहर नहीं आया. अब पुलिस के सामने मजदूरों के बीच मे जाकर सज्जाद को पकड़ने के अलावा कोई चारा नहीं था. तकरीबन 100 मीटर दूर गाड़ी खड़ी कर सिपाही दया कांबले और संदीप कांबले को ड्राइवर के साथ उसी में बैठे रहने को कहकर इंपेक्टर निकम सिर्फ एक सिपाही संदीप तलेकर के साथ सज्जाद के पास गए. सज्जाद जहां काम कर रहा था उसके ठीक पीछे बड़ा गड्ढा था और डर था कि अगर वो भागता है तो गड्ढे में गिर सकता है और अगर ऐसा हुआ तो बात बिगड़ते देर नहीं लगेगी और उसके बाद क्या होगा कुछ कहा नहीं जा सकता था. इसलिए इंपसेक्टर निकम पहले उस गड्ढे की तरफ सज्जाद के बिल्कुल करीब खड़े हुए फिर एक हाथ से उसके हाथ को दबाया और बोले, "सज्जाद तुझे मेरे साथ चलना है." और उसका हाथ छोड़ दिया. लेकिन तब तक साथ में गया दूसरा सिपाही तय योजना के मुताबिक दूसरी तरफ से सज्जाद से सटकर खड़ा हो गया.
इंस्पेक्टर निकम के मुताबिक उनकी आवाज सुनते ही सज्जाद जगह पर ही जड़ गया. उसे कुछ समझ ही नहीं आया कि हम कौन हैं और क्या चाहते हैं? हमने उसका हाथ बिना पकड़े ही शरीर से धक्का देकर आगे चलने का इशारा किया और उससे सामान्य बात करते करते गाड़ी के पास लाये. सबकुछ इतनी शांति से हो गया कि आसपास काम करने वाले मजदूर भी कुछ समझ नहीं पाये. गाड़ी का दरवाजा खोलकर जैसे ही उसे गाड़ी में बिठाया गया अंदर बैठे सिपाही दया कांबले को देख कर वो पहचान गया और उसके मुंह से आवाज निकली "अरे साहब आप?" दया कांबले वो सिपाही हैं जो मुकदमे के दौरान विशेष सरकारी वकील उज्वल निकम की मदद के लिए हमेशा अदालत में मौजूद रहते थे. सज्जाद उन्हें अच्छी तरह से पहचानता था और दया ने दाढ़ी भी नहीं रखी थी इसलिए दया कांबले को गाड़ी में ही बैठने को कहा गया था.
सज्जाद और कुछ बोलता या हरकत करता तब तक दूसरा सिपाही भी उसके बगल में बैठ चुका था और गाड़ी भी वहां से निकल चुकी थी. ड्राइवर के बगल की सीट पर बैठे इंस्पेक्टर संजय निकम ने पीछे मुड़कर सज्जाद को एक सेब दिया और बोले "खा". सज्जाद को पहचानते देर नहीं लगी और बोल उठा निकम साहब आप हैं?
सवाल है कि सज्जाद मुगल को पता था कि पुलिस उसकी तलाश में है. आज नहीं तो कल वो पकड़ा ही जायेगा. फिर वो सीमा पार क्यों नहीं भाग गया? इंस्पेक्टर संजय निकम के मुताबिक ये सवाल उन्होंने भी उससे पूछा था. तब सज्जाद का जवाब था, साहब उस पार जिंदगी नहीं है. गरीबी, बेकारी और जिल्लत के सिवा वहां कुछ नहीं है इसलिये मैं यहीं रहकर जीना चाह रहा था.
इसके बाद की कहानी तो जग जाहिर है. सज्जाद की गिरफ्तारी कितनी अहम थी इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद मुंबई पुलिस आयुक्त दत्तात्रेय पडसलगीकर ने पत्रकार परिषद लकेर उसकी गिरफ्तारी की घोषणा की. उन्होंने बताया कि जैसे ही मुझे सज्जाद की गिरफ्तारी की सूचना मिली मैंने सबसे पहले पल्लवी के पिता पुरकायस्थ को फोन कर बताया तो उनकी आंख में आसूं आ गए. वो बोले मुझे इसी पल का इंतजार था. पुलिस आयुक्त ने पूरी टीम का परिचय पत्रकारों से कराया.टिप्पणियां
कदकाठी से पहलवान लगने वाले इंस्पेक्टर संजय निकम 26/11 आतंकी हमले में भी मोर्चा संभालने वालों में रहे हैं. उस समय वो प्रॉपर्टी सेल में थे. प्रोपर्टी सेल ने ही साल 2008 में इंडियन मुजाहिदीन के पुणे मॉड्यूल को पकड़ कर आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन की कमर तोड़ी थी. तब अरुण चव्हाण प्रॉपर्टी सेल के इंचार्ज थे और श्रीपद काले, नंदकुमार गोपाले, संजय निकम और अजय सावंत उस टीम के अहम हिस्सा थे. उसके पहले तक पहेली रहे इंडियन मुजाहिदीन के लिए वो बड़ा झटका था. उसके बाद अहमदाबाद और कर्नाटक में भी बड़ी संख्या में उसके आतंकी पकड़े गए. उस समय दिवंगत आर आर पाटिल राज्य के गृहमंत्री थे उन्होंने 5 लाख रुपये इनाम देने का वादा किया था. लेकिन बाद में 26/11 आतंकी हमले के बाद उन्होंने इस्तीफा दिया और वो वादा सिर्फ घोषणा बनकर रह गया. हैरानी की बात है कि साल 2000 से 2008 तक देश में आतंकी वारदातों को अंजाम देने वाले संगठन को बेनकाब करने वाली टीम को इनाम तो दूर एक अदद पुरस्कार भी नहीं मिला. मिला है तो सिर्फ क्राइम ब्रांच में तब के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त देवेन भारती का एक अभिनंदन पत्र.
अब कश्मीर की दुरूह परिस्थितियों में से फरार क़ातिल को खोज निकालने और बिना किसी गड़बड़ी के उसे पकड़कर वापस सलाखों के पीछे भेजने वाली टीम की तारीफ तो खूब हो रही है. खुद मुख्यमंत्री देवेंन्द्र फडणवीस ने ट्वीट कर शाबाशी दी है. लेकिन सवाल है क्या इन्हें इनकी बहादुरी, समर्पण और सफलता पर इनाम और पुरस्कार मिलेगा या फिर साल 2008 की तरह सिर्फ जुबानी कवायद बन कर रह जायेगी?
इस अहम सुराग के साथ इंस्पेक्टर निकम अपनी टीम के साथ अब श्रीनगर के लिए निकल गये. इसके लिए उन्होंने अपनी दाढ़ी बढ़ाई, और पहनावा भी बदल लिया. वहां रहकर उन्होंने कुछ ऐसे सोर्स बनाये जो बारामुला इलाके को समझते थे, वहां जान पहचान रखते थे. उनसे बातचीत में पता चला कि उस इलाके में हर कोई नहीं जा सकता. वहां कुछ ऐसे संवेदनशील इलाके हैं जहां जाने के लिये किसी भी बाहरी शख्स के पास टीआरपी यानी टेम्पररी रेसिडेंस पास होना चाहिए. उसके लिए इलाके में उस शख्स को जानने वाला भी होना चाहिए.
वो इलाका सेना की निगरानी में है और जरा भी शक होने पर वो गोली मार सकती है. पुलिस टीम के सामने दोहरी चुनौती थी. अगर वो अपनी असली पहचान जाहिर करते हैं तो राज खुलने का डर था और पहचान छुपाते हैं तो गोली खाने का. सूत्रों के मुताबिक इस दौरान सोर्स बनाने और जानकारी जुटाने के लिए उसे खूब पैसे भी खर्च करने पड़े. बताते हैं कि वहां के लोगों को मिठाई पसंद है लेकिन वहां इस तरह की मिठाई आसानी से नहीं मिलती इसलिए उन्हें मिठाई के डिब्बे भेंट कर काम निकालना पड़ा.
अब तक पुलिस टीम के पास काफी जानकारी जमा हो चुकी थी. ये भी पता चल चुका था कि फ़ोटो में पीछे दिख रही जगह झेलम नदी पर नेशनल हाइड्रो पावर की साइट हैं जहां निर्माण का काम चल रहा है. इससे ये अंदाजा लग गया कि सज्जाद हो ना हो उस जगह पर ही मजदूरी का काम कर रहा है. लेकिन सिर्फ अंदाजे पर ही वहां जाने का जोखिम नहीं लिया जा सकता था. बहरहाल पता चला है कि इंस्पेक्टर निकम किसी तरह जुगाड़ लगाकर एक बार सज्जाद के गांव तक भी पहुंच गये थे. लेकिन जब ये जानकारी मिली कि वहां 20 से 25 घर सज्जाद के मुगल परिवार के ही हैं और एक आवाज पर सभी जमा हो जाते हैं इसलिये वहां जरा भी जोखिम मोल लेना मुनासिब नहीं था. ये भी पता चला कि सज्जाद अपने घर मे ना रहकर गांव से 4 किलोमीटर दूर जबाड़ इलाके में अपने चाचा सरीफ के घर आता जाता रहता था. वहां कुछ करना उसके गांव से भी जोखिम भरा था. पुलिस टीम एक बार फिर वापस मुंबई आकर मौके का इंतजार करने लगी. मिठाई वाले सोर्स काम मे लगे रहे.
अक्टूबर के पहले सप्ताह में खबर मिली कि सोनमर्ग में एक बड़े प्रोजेक्ट के निर्माण का काम चल रहा है, वहां तकरीबन डेढ़ हजार मजदूर काम करते हैं. सलामाबाद से भी कई लड़के उस साइट पर मजदूरी करते हैं और वहीं रहते हैं. मतलब सज्जाद के वहां होने की प्रबल संभावना थी. सूचना मिलने के बाद इंस्पेक्टर संजय निकम अपने तीन सिपाहियों के साथ निकल गए. मुंबई से श्रीनगर और वहां से सोनमर्ग. श्रीनगर हवाई जहाज से गये थे इसलिये बंदूक और हथकड़ी ले जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता. ऐसे इलाके में जहां बात बात में पथराव, पुलिस और सेना पर भी हमला होने की आशंका बनी रहती हैं वहां 4 लोग वो भी निहत्थे, कुछ भी हो सकता था. लेकिन सज्जाद को पकड़ना था वो भी बिना स्थानीय पुलिस की सहायता लिए क्योंकि बात लीक होने का डर था.
स्थानीय लिबास में टीम सीधे उस साइट पर ना जाकर पहले आसपास के गांव में गई. खुद को टेलीफोन कंपनी का अफसर बताकर टेलीफोन टावर लगाने के लिए सर्वे करने आया है बताया. आतंक और गरीबी की दोहरी मार झेल रहे लोगों को आमदनी का जरिया दिखा और वो उसके लिए जमीन देने को तैयार हो गए. लेकिन पुलिस का लक्ष्य तो उन मजदूरों तक पहुंचना था. लिहाजा टावर बनाने के लिए जरूरी मजदूरों को लाने की शर्त जमीन वालों को ही दी गई. पैसा आता देख भला कौन मना करेगा. वो लोग सोनमर्ग में जहां निर्माण काम चल रहा था वहीं के कुछ ठेकेदारों को बुला लाये. उनसे कोटेशन मांगा गया और मजदूरों के काम देखने के लिए उस साइट पर ले जाने की शर्त रखी गई. ठेकेदार तैयार हो गया और थोड़ी ही देर में टीम उन मजदूरों के बीच में थी. इत्तेफाक से जिस ठेकेदार से मुलाकात हुई थी उसके मजदूरों की लिस्ट में साजिद नाम लिखा था. पुलिस को पहले से अंदेशा था कि अपनी पहचान छुपाने के लिये सज्जाद दूसरे नाम का सहारा ले सकता है और साजिद सज्जाद से मिलता जुलता है इसलिए पुलिस ने साजिद को देखना चाहा. ठेकेदार का उसकी तरफ इशारा करते ही पुलिस टीम को उसे पहचानने में देर नहीं लगी. लेकिन किसी ने कोई हड़बड़ी नहीं की ना ही अपने चेहरे पर सज्जाद को खोज निकालने की खुशी को आने दिया. टीम वापस चली गई.
अगले दो दिन उसे वहां से उठाने के मौके की तलाश होती रही. लेकिन वो कंस्ट्रक्शन साइट से बाहर नहीं आया. अब पुलिस के सामने मजदूरों के बीच मे जाकर सज्जाद को पकड़ने के अलावा कोई चारा नहीं था. तकरीबन 100 मीटर दूर गाड़ी खड़ी कर सिपाही दया कांबले और संदीप कांबले को ड्राइवर के साथ उसी में बैठे रहने को कहकर इंपेक्टर निकम सिर्फ एक सिपाही संदीप तलेकर के साथ सज्जाद के पास गए. सज्जाद जहां काम कर रहा था उसके ठीक पीछे बड़ा गड्ढा था और डर था कि अगर वो भागता है तो गड्ढे में गिर सकता है और अगर ऐसा हुआ तो बात बिगड़ते देर नहीं लगेगी और उसके बाद क्या होगा कुछ कहा नहीं जा सकता था. इसलिए इंपसेक्टर निकम पहले उस गड्ढे की तरफ सज्जाद के बिल्कुल करीब खड़े हुए फिर एक हाथ से उसके हाथ को दबाया और बोले, "सज्जाद तुझे मेरे साथ चलना है." और उसका हाथ छोड़ दिया. लेकिन तब तक साथ में गया दूसरा सिपाही तय योजना के मुताबिक दूसरी तरफ से सज्जाद से सटकर खड़ा हो गया.
इंस्पेक्टर निकम के मुताबिक उनकी आवाज सुनते ही सज्जाद जगह पर ही जड़ गया. उसे कुछ समझ ही नहीं आया कि हम कौन हैं और क्या चाहते हैं? हमने उसका हाथ बिना पकड़े ही शरीर से धक्का देकर आगे चलने का इशारा किया और उससे सामान्य बात करते करते गाड़ी के पास लाये. सबकुछ इतनी शांति से हो गया कि आसपास काम करने वाले मजदूर भी कुछ समझ नहीं पाये. गाड़ी का दरवाजा खोलकर जैसे ही उसे गाड़ी में बिठाया गया अंदर बैठे सिपाही दया कांबले को देख कर वो पहचान गया और उसके मुंह से आवाज निकली "अरे साहब आप?" दया कांबले वो सिपाही हैं जो मुकदमे के दौरान विशेष सरकारी वकील उज्वल निकम की मदद के लिए हमेशा अदालत में मौजूद रहते थे. सज्जाद उन्हें अच्छी तरह से पहचानता था और दया ने दाढ़ी भी नहीं रखी थी इसलिए दया कांबले को गाड़ी में ही बैठने को कहा गया था.
सज्जाद और कुछ बोलता या हरकत करता तब तक दूसरा सिपाही भी उसके बगल में बैठ चुका था और गाड़ी भी वहां से निकल चुकी थी. ड्राइवर के बगल की सीट पर बैठे इंस्पेक्टर संजय निकम ने पीछे मुड़कर सज्जाद को एक सेब दिया और बोले "खा". सज्जाद को पहचानते देर नहीं लगी और बोल उठा निकम साहब आप हैं?
सवाल है कि सज्जाद मुगल को पता था कि पुलिस उसकी तलाश में है. आज नहीं तो कल वो पकड़ा ही जायेगा. फिर वो सीमा पार क्यों नहीं भाग गया? इंस्पेक्टर संजय निकम के मुताबिक ये सवाल उन्होंने भी उससे पूछा था. तब सज्जाद का जवाब था, साहब उस पार जिंदगी नहीं है. गरीबी, बेकारी और जिल्लत के सिवा वहां कुछ नहीं है इसलिये मैं यहीं रहकर जीना चाह रहा था.
इसके बाद की कहानी तो जग जाहिर है. सज्जाद की गिरफ्तारी कितनी अहम थी इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद मुंबई पुलिस आयुक्त दत्तात्रेय पडसलगीकर ने पत्रकार परिषद लकेर उसकी गिरफ्तारी की घोषणा की. उन्होंने बताया कि जैसे ही मुझे सज्जाद की गिरफ्तारी की सूचना मिली मैंने सबसे पहले पल्लवी के पिता पुरकायस्थ को फोन कर बताया तो उनकी आंख में आसूं आ गए. वो बोले मुझे इसी पल का इंतजार था. पुलिस आयुक्त ने पूरी टीम का परिचय पत्रकारों से कराया.टिप्पणियां
कदकाठी से पहलवान लगने वाले इंस्पेक्टर संजय निकम 26/11 आतंकी हमले में भी मोर्चा संभालने वालों में रहे हैं. उस समय वो प्रॉपर्टी सेल में थे. प्रोपर्टी सेल ने ही साल 2008 में इंडियन मुजाहिदीन के पुणे मॉड्यूल को पकड़ कर आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन की कमर तोड़ी थी. तब अरुण चव्हाण प्रॉपर्टी सेल के इंचार्ज थे और श्रीपद काले, नंदकुमार गोपाले, संजय निकम और अजय सावंत उस टीम के अहम हिस्सा थे. उसके पहले तक पहेली रहे इंडियन मुजाहिदीन के लिए वो बड़ा झटका था. उसके बाद अहमदाबाद और कर्नाटक में भी बड़ी संख्या में उसके आतंकी पकड़े गए. उस समय दिवंगत आर आर पाटिल राज्य के गृहमंत्री थे उन्होंने 5 लाख रुपये इनाम देने का वादा किया था. लेकिन बाद में 26/11 आतंकी हमले के बाद उन्होंने इस्तीफा दिया और वो वादा सिर्फ घोषणा बनकर रह गया. हैरानी की बात है कि साल 2000 से 2008 तक देश में आतंकी वारदातों को अंजाम देने वाले संगठन को बेनकाब करने वाली टीम को इनाम तो दूर एक अदद पुरस्कार भी नहीं मिला. मिला है तो सिर्फ क्राइम ब्रांच में तब के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त देवेन भारती का एक अभिनंदन पत्र.
अब कश्मीर की दुरूह परिस्थितियों में से फरार क़ातिल को खोज निकालने और बिना किसी गड़बड़ी के उसे पकड़कर वापस सलाखों के पीछे भेजने वाली टीम की तारीफ तो खूब हो रही है. खुद मुख्यमंत्री देवेंन्द्र फडणवीस ने ट्वीट कर शाबाशी दी है. लेकिन सवाल है क्या इन्हें इनकी बहादुरी, समर्पण और सफलता पर इनाम और पुरस्कार मिलेगा या फिर साल 2008 की तरह सिर्फ जुबानी कवायद बन कर रह जायेगी?
वो इलाका सेना की निगरानी में है और जरा भी शक होने पर वो गोली मार सकती है. पुलिस टीम के सामने दोहरी चुनौती थी. अगर वो अपनी असली पहचान जाहिर करते हैं तो राज खुलने का डर था और पहचान छुपाते हैं तो गोली खाने का. सूत्रों के मुताबिक इस दौरान सोर्स बनाने और जानकारी जुटाने के लिए उसे खूब पैसे भी खर्च करने पड़े. बताते हैं कि वहां के लोगों को मिठाई पसंद है लेकिन वहां इस तरह की मिठाई आसानी से नहीं मिलती इसलिए उन्हें मिठाई के डिब्बे भेंट कर काम निकालना पड़ा.
अब तक पुलिस टीम के पास काफी जानकारी जमा हो चुकी थी. ये भी पता चल चुका था कि फ़ोटो में पीछे दिख रही जगह झेलम नदी पर नेशनल हाइड्रो पावर की साइट हैं जहां निर्माण का काम चल रहा है. इससे ये अंदाजा लग गया कि सज्जाद हो ना हो उस जगह पर ही मजदूरी का काम कर रहा है. लेकिन सिर्फ अंदाजे पर ही वहां जाने का जोखिम नहीं लिया जा सकता था. बहरहाल पता चला है कि इंस्पेक्टर निकम किसी तरह जुगाड़ लगाकर एक बार सज्जाद के गांव तक भी पहुंच गये थे. लेकिन जब ये जानकारी मिली कि वहां 20 से 25 घर सज्जाद के मुगल परिवार के ही हैं और एक आवाज पर सभी जमा हो जाते हैं इसलिये वहां जरा भी जोखिम मोल लेना मुनासिब नहीं था. ये भी पता चला कि सज्जाद अपने घर मे ना रहकर गांव से 4 किलोमीटर दूर जबाड़ इलाके में अपने चाचा सरीफ के घर आता जाता रहता था. वहां कुछ करना उसके गांव से भी जोखिम भरा था. पुलिस टीम एक बार फिर वापस मुंबई आकर मौके का इंतजार करने लगी. मिठाई वाले सोर्स काम मे लगे रहे.
अक्टूबर के पहले सप्ताह में खबर मिली कि सोनमर्ग में एक बड़े प्रोजेक्ट के निर्माण का काम चल रहा है, वहां तकरीबन डेढ़ हजार मजदूर काम करते हैं. सलामाबाद से भी कई लड़के उस साइट पर मजदूरी करते हैं और वहीं रहते हैं. मतलब सज्जाद के वहां होने की प्रबल संभावना थी. सूचना मिलने के बाद इंस्पेक्टर संजय निकम अपने तीन सिपाहियों के साथ निकल गए. मुंबई से श्रीनगर और वहां से सोनमर्ग. श्रीनगर हवाई जहाज से गये थे इसलिये बंदूक और हथकड़ी ले जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता. ऐसे इलाके में जहां बात बात में पथराव, पुलिस और सेना पर भी हमला होने की आशंका बनी रहती हैं वहां 4 लोग वो भी निहत्थे, कुछ भी हो सकता था. लेकिन सज्जाद को पकड़ना था वो भी बिना स्थानीय पुलिस की सहायता लिए क्योंकि बात लीक होने का डर था.
स्थानीय लिबास में टीम सीधे उस साइट पर ना जाकर पहले आसपास के गांव में गई. खुद को टेलीफोन कंपनी का अफसर बताकर टेलीफोन टावर लगाने के लिए सर्वे करने आया है बताया. आतंक और गरीबी की दोहरी मार झेल रहे लोगों को आमदनी का जरिया दिखा और वो उसके लिए जमीन देने को तैयार हो गए. लेकिन पुलिस का लक्ष्य तो उन मजदूरों तक पहुंचना था. लिहाजा टावर बनाने के लिए जरूरी मजदूरों को लाने की शर्त जमीन वालों को ही दी गई. पैसा आता देख भला कौन मना करेगा. वो लोग सोनमर्ग में जहां निर्माण काम चल रहा था वहीं के कुछ ठेकेदारों को बुला लाये. उनसे कोटेशन मांगा गया और मजदूरों के काम देखने के लिए उस साइट पर ले जाने की शर्त रखी गई. ठेकेदार तैयार हो गया और थोड़ी ही देर में टीम उन मजदूरों के बीच में थी. इत्तेफाक से जिस ठेकेदार से मुलाकात हुई थी उसके मजदूरों की लिस्ट में साजिद नाम लिखा था. पुलिस को पहले से अंदेशा था कि अपनी पहचान छुपाने के लिये सज्जाद दूसरे नाम का सहारा ले सकता है और साजिद सज्जाद से मिलता जुलता है इसलिए पुलिस ने साजिद को देखना चाहा. ठेकेदार का उसकी तरफ इशारा करते ही पुलिस टीम को उसे पहचानने में देर नहीं लगी. लेकिन किसी ने कोई हड़बड़ी नहीं की ना ही अपने चेहरे पर सज्जाद को खोज निकालने की खुशी को आने दिया. टीम वापस चली गई.
अगले दो दिन उसे वहां से उठाने के मौके की तलाश होती रही. लेकिन वो कंस्ट्रक्शन साइट से बाहर नहीं आया. अब पुलिस के सामने मजदूरों के बीच मे जाकर सज्जाद को पकड़ने के अलावा कोई चारा नहीं था. तकरीबन 100 मीटर दूर गाड़ी खड़ी कर सिपाही दया कांबले और संदीप कांबले को ड्राइवर के साथ उसी में बैठे रहने को कहकर इंपेक्टर निकम सिर्फ एक सिपाही संदीप तलेकर के साथ सज्जाद के पास गए. सज्जाद जहां काम कर रहा था उसके ठीक पीछे बड़ा गड्ढा था और डर था कि अगर वो भागता है तो गड्ढे में गिर सकता है और अगर ऐसा हुआ तो बात बिगड़ते देर नहीं लगेगी और उसके बाद क्या होगा कुछ कहा नहीं जा सकता था. इसलिए इंपसेक्टर निकम पहले उस गड्ढे की तरफ सज्जाद के बिल्कुल करीब खड़े हुए फिर एक हाथ से उसके हाथ को दबाया और बोले, "सज्जाद तुझे मेरे साथ चलना है." और उसका हाथ छोड़ दिया. लेकिन तब तक साथ में गया दूसरा सिपाही तय योजना के मुताबिक दूसरी तरफ से सज्जाद से सटकर खड़ा हो गया.
इंस्पेक्टर निकम के मुताबिक उनकी आवाज सुनते ही सज्जाद जगह पर ही जड़ गया. उसे कुछ समझ ही नहीं आया कि हम कौन हैं और क्या चाहते हैं? हमने उसका हाथ बिना पकड़े ही शरीर से धक्का देकर आगे चलने का इशारा किया और उससे सामान्य बात करते करते गाड़ी के पास लाये. सबकुछ इतनी शांति से हो गया कि आसपास काम करने वाले मजदूर भी कुछ समझ नहीं पाये. गाड़ी का दरवाजा खोलकर जैसे ही उसे गाड़ी में बिठाया गया अंदर बैठे सिपाही दया कांबले को देख कर वो पहचान गया और उसके मुंह से आवाज निकली "अरे साहब आप?" दया कांबले वो सिपाही हैं जो मुकदमे के दौरान विशेष सरकारी वकील उज्वल निकम की मदद के लिए हमेशा अदालत में मौजूद रहते थे. सज्जाद उन्हें अच्छी तरह से पहचानता था और दया ने दाढ़ी भी नहीं रखी थी इसलिए दया कांबले को गाड़ी में ही बैठने को कहा गया था.
सज्जाद और कुछ बोलता या हरकत करता तब तक दूसरा सिपाही भी उसके बगल में बैठ चुका था और गाड़ी भी वहां से निकल चुकी थी. ड्राइवर के बगल की सीट पर बैठे इंस्पेक्टर संजय निकम ने पीछे मुड़कर सज्जाद को एक सेब दिया और बोले "खा". सज्जाद को पहचानते देर नहीं लगी और बोल उठा निकम साहब आप हैं?
सवाल है कि सज्जाद मुगल को पता था कि पुलिस उसकी तलाश में है. आज नहीं तो कल वो पकड़ा ही जायेगा. फिर वो सीमा पार क्यों नहीं भाग गया? इंस्पेक्टर संजय निकम के मुताबिक ये सवाल उन्होंने भी उससे पूछा था. तब सज्जाद का जवाब था, साहब उस पार जिंदगी नहीं है. गरीबी, बेकारी और जिल्लत के सिवा वहां कुछ नहीं है इसलिये मैं यहीं रहकर जीना चाह रहा था.
इसके बाद की कहानी तो जग जाहिर है. सज्जाद की गिरफ्तारी कितनी अहम थी इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद मुंबई पुलिस आयुक्त दत्तात्रेय पडसलगीकर ने पत्रकार परिषद लकेर उसकी गिरफ्तारी की घोषणा की. उन्होंने बताया कि जैसे ही मुझे सज्जाद की गिरफ्तारी की सूचना मिली मैंने सबसे पहले पल्लवी के पिता पुरकायस्थ को फोन कर बताया तो उनकी आंख में आसूं आ गए. वो बोले मुझे इसी पल का इंतजार था. पुलिस आयुक्त ने पूरी टीम का परिचय पत्रकारों से कराया.टिप्पणियां
कदकाठी से पहलवान लगने वाले इंस्पेक्टर संजय निकम 26/11 आतंकी हमले में भी मोर्चा संभालने वालों में रहे हैं. उस समय वो प्रॉपर्टी सेल में थे. प्रोपर्टी सेल ने ही साल 2008 में इंडियन मुजाहिदीन के पुणे मॉड्यूल को पकड़ कर आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन की कमर तोड़ी थी. तब अरुण चव्हाण प्रॉपर्टी सेल के इंचार्ज थे और श्रीपद काले, नंदकुमार गोपाले, संजय निकम और अजय सावंत उस टीम के अहम हिस्सा थे. उसके पहले तक पहेली रहे इंडियन मुजाहिदीन के लिए वो बड़ा झटका था. उसके बाद अहमदाबाद और कर्नाटक में भी बड़ी संख्या में उसके आतंकी पकड़े गए. उस समय दिवंगत आर आर पाटिल राज्य के गृहमंत्री थे उन्होंने 5 लाख रुपये इनाम देने का वादा किया था. लेकिन बाद में 26/11 आतंकी हमले के बाद उन्होंने इस्तीफा दिया और वो वादा सिर्फ घोषणा बनकर रह गया. हैरानी की बात है कि साल 2000 से 2008 तक देश में आतंकी वारदातों को अंजाम देने वाले संगठन को बेनकाब करने वाली टीम को इनाम तो दूर एक अदद पुरस्कार भी नहीं मिला. मिला है तो सिर्फ क्राइम ब्रांच में तब के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त देवेन भारती का एक अभिनंदन पत्र.
अब कश्मीर की दुरूह परिस्थितियों में से फरार क़ातिल को खोज निकालने और बिना किसी गड़बड़ी के उसे पकड़कर वापस सलाखों के पीछे भेजने वाली टीम की तारीफ तो खूब हो रही है. खुद मुख्यमंत्री देवेंन्द्र फडणवीस ने ट्वीट कर शाबाशी दी है. लेकिन सवाल है क्या इन्हें इनकी बहादुरी, समर्पण और सफलता पर इनाम और पुरस्कार मिलेगा या फिर साल 2008 की तरह सिर्फ जुबानी कवायद बन कर रह जायेगी?
अब तक पुलिस टीम के पास काफी जानकारी जमा हो चुकी थी. ये भी पता चल चुका था कि फ़ोटो में पीछे दिख रही जगह झेलम नदी पर नेशनल हाइड्रो पावर की साइट हैं जहां निर्माण का काम चल रहा है. इससे ये अंदाजा लग गया कि सज्जाद हो ना हो उस जगह पर ही मजदूरी का काम कर रहा है. लेकिन सिर्फ अंदाजे पर ही वहां जाने का जोखिम नहीं लिया जा सकता था. बहरहाल पता चला है कि इंस्पेक्टर निकम किसी तरह जुगाड़ लगाकर एक बार सज्जाद के गांव तक भी पहुंच गये थे. लेकिन जब ये जानकारी मिली कि वहां 20 से 25 घर सज्जाद के मुगल परिवार के ही हैं और एक आवाज पर सभी जमा हो जाते हैं इसलिये वहां जरा भी जोखिम मोल लेना मुनासिब नहीं था. ये भी पता चला कि सज्जाद अपने घर मे ना रहकर गांव से 4 किलोमीटर दूर जबाड़ इलाके में अपने चाचा सरीफ के घर आता जाता रहता था. वहां कुछ करना उसके गांव से भी जोखिम भरा था. पुलिस टीम एक बार फिर वापस मुंबई आकर मौके का इंतजार करने लगी. मिठाई वाले सोर्स काम मे लगे रहे.
अक्टूबर के पहले सप्ताह में खबर मिली कि सोनमर्ग में एक बड़े प्रोजेक्ट के निर्माण का काम चल रहा है, वहां तकरीबन डेढ़ हजार मजदूर काम करते हैं. सलामाबाद से भी कई लड़के उस साइट पर मजदूरी करते हैं और वहीं रहते हैं. मतलब सज्जाद के वहां होने की प्रबल संभावना थी. सूचना मिलने के बाद इंस्पेक्टर संजय निकम अपने तीन सिपाहियों के साथ निकल गए. मुंबई से श्रीनगर और वहां से सोनमर्ग. श्रीनगर हवाई जहाज से गये थे इसलिये बंदूक और हथकड़ी ले जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता. ऐसे इलाके में जहां बात बात में पथराव, पुलिस और सेना पर भी हमला होने की आशंका बनी रहती हैं वहां 4 लोग वो भी निहत्थे, कुछ भी हो सकता था. लेकिन सज्जाद को पकड़ना था वो भी बिना स्थानीय पुलिस की सहायता लिए क्योंकि बात लीक होने का डर था.
स्थानीय लिबास में टीम सीधे उस साइट पर ना जाकर पहले आसपास के गांव में गई. खुद को टेलीफोन कंपनी का अफसर बताकर टेलीफोन टावर लगाने के लिए सर्वे करने आया है बताया. आतंक और गरीबी की दोहरी मार झेल रहे लोगों को आमदनी का जरिया दिखा और वो उसके लिए जमीन देने को तैयार हो गए. लेकिन पुलिस का लक्ष्य तो उन मजदूरों तक पहुंचना था. लिहाजा टावर बनाने के लिए जरूरी मजदूरों को लाने की शर्त जमीन वालों को ही दी गई. पैसा आता देख भला कौन मना करेगा. वो लोग सोनमर्ग में जहां निर्माण काम चल रहा था वहीं के कुछ ठेकेदारों को बुला लाये. उनसे कोटेशन मांगा गया और मजदूरों के काम देखने के लिए उस साइट पर ले जाने की शर्त रखी गई. ठेकेदार तैयार हो गया और थोड़ी ही देर में टीम उन मजदूरों के बीच में थी. इत्तेफाक से जिस ठेकेदार से मुलाकात हुई थी उसके मजदूरों की लिस्ट में साजिद नाम लिखा था. पुलिस को पहले से अंदेशा था कि अपनी पहचान छुपाने के लिये सज्जाद दूसरे नाम का सहारा ले सकता है और साजिद सज्जाद से मिलता जुलता है इसलिए पुलिस ने साजिद को देखना चाहा. ठेकेदार का उसकी तरफ इशारा करते ही पुलिस टीम को उसे पहचानने में देर नहीं लगी. लेकिन किसी ने कोई हड़बड़ी नहीं की ना ही अपने चेहरे पर सज्जाद को खोज निकालने की खुशी को आने दिया. टीम वापस चली गई.
अगले दो दिन उसे वहां से उठाने के मौके की तलाश होती रही. लेकिन वो कंस्ट्रक्शन साइट से बाहर नहीं आया. अब पुलिस के सामने मजदूरों के बीच मे जाकर सज्जाद को पकड़ने के अलावा कोई चारा नहीं था. तकरीबन 100 मीटर दूर गाड़ी खड़ी कर सिपाही दया कांबले और संदीप कांबले को ड्राइवर के साथ उसी में बैठे रहने को कहकर इंपेक्टर निकम सिर्फ एक सिपाही संदीप तलेकर के साथ सज्जाद के पास गए. सज्जाद जहां काम कर रहा था उसके ठीक पीछे बड़ा गड्ढा था और डर था कि अगर वो भागता है तो गड्ढे में गिर सकता है और अगर ऐसा हुआ तो बात बिगड़ते देर नहीं लगेगी और उसके बाद क्या होगा कुछ कहा नहीं जा सकता था. इसलिए इंपसेक्टर निकम पहले उस गड्ढे की तरफ सज्जाद के बिल्कुल करीब खड़े हुए फिर एक हाथ से उसके हाथ को दबाया और बोले, "सज्जाद तुझे मेरे साथ चलना है." और उसका हाथ छोड़ दिया. लेकिन तब तक साथ में गया दूसरा सिपाही तय योजना के मुताबिक दूसरी तरफ से सज्जाद से सटकर खड़ा हो गया.
इंस्पेक्टर निकम के मुताबिक उनकी आवाज सुनते ही सज्जाद जगह पर ही जड़ गया. उसे कुछ समझ ही नहीं आया कि हम कौन हैं और क्या चाहते हैं? हमने उसका हाथ बिना पकड़े ही शरीर से धक्का देकर आगे चलने का इशारा किया और उससे सामान्य बात करते करते गाड़ी के पास लाये. सबकुछ इतनी शांति से हो गया कि आसपास काम करने वाले मजदूर भी कुछ समझ नहीं पाये. गाड़ी का दरवाजा खोलकर जैसे ही उसे गाड़ी में बिठाया गया अंदर बैठे सिपाही दया कांबले को देख कर वो पहचान गया और उसके मुंह से आवाज निकली "अरे साहब आप?" दया कांबले वो सिपाही हैं जो मुकदमे के दौरान विशेष सरकारी वकील उज्वल निकम की मदद के लिए हमेशा अदालत में मौजूद रहते थे. सज्जाद उन्हें अच्छी तरह से पहचानता था और दया ने दाढ़ी भी नहीं रखी थी इसलिए दया कांबले को गाड़ी में ही बैठने को कहा गया था.
सज्जाद और कुछ बोलता या हरकत करता तब तक दूसरा सिपाही भी उसके बगल में बैठ चुका था और गाड़ी भी वहां से निकल चुकी थी. ड्राइवर के बगल की सीट पर बैठे इंस्पेक्टर संजय निकम ने पीछे मुड़कर सज्जाद को एक सेब दिया और बोले "खा". सज्जाद को पहचानते देर नहीं लगी और बोल उठा निकम साहब आप हैं?
सवाल है कि सज्जाद मुगल को पता था कि पुलिस उसकी तलाश में है. आज नहीं तो कल वो पकड़ा ही जायेगा. फिर वो सीमा पार क्यों नहीं भाग गया? इंस्पेक्टर संजय निकम के मुताबिक ये सवाल उन्होंने भी उससे पूछा था. तब सज्जाद का जवाब था, साहब उस पार जिंदगी नहीं है. गरीबी, बेकारी और जिल्लत के सिवा वहां कुछ नहीं है इसलिये मैं यहीं रहकर जीना चाह रहा था.
इसके बाद की कहानी तो जग जाहिर है. सज्जाद की गिरफ्तारी कितनी अहम थी इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद मुंबई पुलिस आयुक्त दत्तात्रेय पडसलगीकर ने पत्रकार परिषद लकेर उसकी गिरफ्तारी की घोषणा की. उन्होंने बताया कि जैसे ही मुझे सज्जाद की गिरफ्तारी की सूचना मिली मैंने सबसे पहले पल्लवी के पिता पुरकायस्थ को फोन कर बताया तो उनकी आंख में आसूं आ गए. वो बोले मुझे इसी पल का इंतजार था. पुलिस आयुक्त ने पूरी टीम का परिचय पत्रकारों से कराया.टिप्पणियां
कदकाठी से पहलवान लगने वाले इंस्पेक्टर संजय निकम 26/11 आतंकी हमले में भी मोर्चा संभालने वालों में रहे हैं. उस समय वो प्रॉपर्टी सेल में थे. प्रोपर्टी सेल ने ही साल 2008 में इंडियन मुजाहिदीन के पुणे मॉड्यूल को पकड़ कर आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन की कमर तोड़ी थी. तब अरुण चव्हाण प्रॉपर्टी सेल के इंचार्ज थे और श्रीपद काले, नंदकुमार गोपाले, संजय निकम और अजय सावंत उस टीम के अहम हिस्सा थे. उसके पहले तक पहेली रहे इंडियन मुजाहिदीन के लिए वो बड़ा झटका था. उसके बाद अहमदाबाद और कर्नाटक में भी बड़ी संख्या में उसके आतंकी पकड़े गए. उस समय दिवंगत आर आर पाटिल राज्य के गृहमंत्री थे उन्होंने 5 लाख रुपये इनाम देने का वादा किया था. लेकिन बाद में 26/11 आतंकी हमले के बाद उन्होंने इस्तीफा दिया और वो वादा सिर्फ घोषणा बनकर रह गया. हैरानी की बात है कि साल 2000 से 2008 तक देश में आतंकी वारदातों को अंजाम देने वाले संगठन को बेनकाब करने वाली टीम को इनाम तो दूर एक अदद पुरस्कार भी नहीं मिला. मिला है तो सिर्फ क्राइम ब्रांच में तब के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त देवेन भारती का एक अभिनंदन पत्र.
अब कश्मीर की दुरूह परिस्थितियों में से फरार क़ातिल को खोज निकालने और बिना किसी गड़बड़ी के उसे पकड़कर वापस सलाखों के पीछे भेजने वाली टीम की तारीफ तो खूब हो रही है. खुद मुख्यमंत्री देवेंन्द्र फडणवीस ने ट्वीट कर शाबाशी दी है. लेकिन सवाल है क्या इन्हें इनकी बहादुरी, समर्पण और सफलता पर इनाम और पुरस्कार मिलेगा या फिर साल 2008 की तरह सिर्फ जुबानी कवायद बन कर रह जायेगी?
अक्टूबर के पहले सप्ताह में खबर मिली कि सोनमर्ग में एक बड़े प्रोजेक्ट के निर्माण का काम चल रहा है, वहां तकरीबन डेढ़ हजार मजदूर काम करते हैं. सलामाबाद से भी कई लड़के उस साइट पर मजदूरी करते हैं और वहीं रहते हैं. मतलब सज्जाद के वहां होने की प्रबल संभावना थी. सूचना मिलने के बाद इंस्पेक्टर संजय निकम अपने तीन सिपाहियों के साथ निकल गए. मुंबई से श्रीनगर और वहां से सोनमर्ग. श्रीनगर हवाई जहाज से गये थे इसलिये बंदूक और हथकड़ी ले जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता. ऐसे इलाके में जहां बात बात में पथराव, पुलिस और सेना पर भी हमला होने की आशंका बनी रहती हैं वहां 4 लोग वो भी निहत्थे, कुछ भी हो सकता था. लेकिन सज्जाद को पकड़ना था वो भी बिना स्थानीय पुलिस की सहायता लिए क्योंकि बात लीक होने का डर था.
स्थानीय लिबास में टीम सीधे उस साइट पर ना जाकर पहले आसपास के गांव में गई. खुद को टेलीफोन कंपनी का अफसर बताकर टेलीफोन टावर लगाने के लिए सर्वे करने आया है बताया. आतंक और गरीबी की दोहरी मार झेल रहे लोगों को आमदनी का जरिया दिखा और वो उसके लिए जमीन देने को तैयार हो गए. लेकिन पुलिस का लक्ष्य तो उन मजदूरों तक पहुंचना था. लिहाजा टावर बनाने के लिए जरूरी मजदूरों को लाने की शर्त जमीन वालों को ही दी गई. पैसा आता देख भला कौन मना करेगा. वो लोग सोनमर्ग में जहां निर्माण काम चल रहा था वहीं के कुछ ठेकेदारों को बुला लाये. उनसे कोटेशन मांगा गया और मजदूरों के काम देखने के लिए उस साइट पर ले जाने की शर्त रखी गई. ठेकेदार तैयार हो गया और थोड़ी ही देर में टीम उन मजदूरों के बीच में थी. इत्तेफाक से जिस ठेकेदार से मुलाकात हुई थी उसके मजदूरों की लिस्ट में साजिद नाम लिखा था. पुलिस को पहले से अंदेशा था कि अपनी पहचान छुपाने के लिये सज्जाद दूसरे नाम का सहारा ले सकता है और साजिद सज्जाद से मिलता जुलता है इसलिए पुलिस ने साजिद को देखना चाहा. ठेकेदार का उसकी तरफ इशारा करते ही पुलिस टीम को उसे पहचानने में देर नहीं लगी. लेकिन किसी ने कोई हड़बड़ी नहीं की ना ही अपने चेहरे पर सज्जाद को खोज निकालने की खुशी को आने दिया. टीम वापस चली गई.
अगले दो दिन उसे वहां से उठाने के मौके की तलाश होती रही. लेकिन वो कंस्ट्रक्शन साइट से बाहर नहीं आया. अब पुलिस के सामने मजदूरों के बीच मे जाकर सज्जाद को पकड़ने के अलावा कोई चारा नहीं था. तकरीबन 100 मीटर दूर गाड़ी खड़ी कर सिपाही दया कांबले और संदीप कांबले को ड्राइवर के साथ उसी में बैठे रहने को कहकर इंपेक्टर निकम सिर्फ एक सिपाही संदीप तलेकर के साथ सज्जाद के पास गए. सज्जाद जहां काम कर रहा था उसके ठीक पीछे बड़ा गड्ढा था और डर था कि अगर वो भागता है तो गड्ढे में गिर सकता है और अगर ऐसा हुआ तो बात बिगड़ते देर नहीं लगेगी और उसके बाद क्या होगा कुछ कहा नहीं जा सकता था. इसलिए इंपसेक्टर निकम पहले उस गड्ढे की तरफ सज्जाद के बिल्कुल करीब खड़े हुए फिर एक हाथ से उसके हाथ को दबाया और बोले, "सज्जाद तुझे मेरे साथ चलना है." और उसका हाथ छोड़ दिया. लेकिन तब तक साथ में गया दूसरा सिपाही तय योजना के मुताबिक दूसरी तरफ से सज्जाद से सटकर खड़ा हो गया.
इंस्पेक्टर निकम के मुताबिक उनकी आवाज सुनते ही सज्जाद जगह पर ही जड़ गया. उसे कुछ समझ ही नहीं आया कि हम कौन हैं और क्या चाहते हैं? हमने उसका हाथ बिना पकड़े ही शरीर से धक्का देकर आगे चलने का इशारा किया और उससे सामान्य बात करते करते गाड़ी के पास लाये. सबकुछ इतनी शांति से हो गया कि आसपास काम करने वाले मजदूर भी कुछ समझ नहीं पाये. गाड़ी का दरवाजा खोलकर जैसे ही उसे गाड़ी में बिठाया गया अंदर बैठे सिपाही दया कांबले को देख कर वो पहचान गया और उसके मुंह से आवाज निकली "अरे साहब आप?" दया कांबले वो सिपाही हैं जो मुकदमे के दौरान विशेष सरकारी वकील उज्वल निकम की मदद के लिए हमेशा अदालत में मौजूद रहते थे. सज्जाद उन्हें अच्छी तरह से पहचानता था और दया ने दाढ़ी भी नहीं रखी थी इसलिए दया कांबले को गाड़ी में ही बैठने को कहा गया था.
सज्जाद और कुछ बोलता या हरकत करता तब तक दूसरा सिपाही भी उसके बगल में बैठ चुका था और गाड़ी भी वहां से निकल चुकी थी. ड्राइवर के बगल की सीट पर बैठे इंस्पेक्टर संजय निकम ने पीछे मुड़कर सज्जाद को एक सेब दिया और बोले "खा". सज्जाद को पहचानते देर नहीं लगी और बोल उठा निकम साहब आप हैं?
सवाल है कि सज्जाद मुगल को पता था कि पुलिस उसकी तलाश में है. आज नहीं तो कल वो पकड़ा ही जायेगा. फिर वो सीमा पार क्यों नहीं भाग गया? इंस्पेक्टर संजय निकम के मुताबिक ये सवाल उन्होंने भी उससे पूछा था. तब सज्जाद का जवाब था, साहब उस पार जिंदगी नहीं है. गरीबी, बेकारी और जिल्लत के सिवा वहां कुछ नहीं है इसलिये मैं यहीं रहकर जीना चाह रहा था.
इसके बाद की कहानी तो जग जाहिर है. सज्जाद की गिरफ्तारी कितनी अहम थी इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद मुंबई पुलिस आयुक्त दत्तात्रेय पडसलगीकर ने पत्रकार परिषद लकेर उसकी गिरफ्तारी की घोषणा की. उन्होंने बताया कि जैसे ही मुझे सज्जाद की गिरफ्तारी की सूचना मिली मैंने सबसे पहले पल्लवी के पिता पुरकायस्थ को फोन कर बताया तो उनकी आंख में आसूं आ गए. वो बोले मुझे इसी पल का इंतजार था. पुलिस आयुक्त ने पूरी टीम का परिचय पत्रकारों से कराया.टिप्पणियां
कदकाठी से पहलवान लगने वाले इंस्पेक्टर संजय निकम 26/11 आतंकी हमले में भी मोर्चा संभालने वालों में रहे हैं. उस समय वो प्रॉपर्टी सेल में थे. प्रोपर्टी सेल ने ही साल 2008 में इंडियन मुजाहिदीन के पुणे मॉड्यूल को पकड़ कर आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन की कमर तोड़ी थी. तब अरुण चव्हाण प्रॉपर्टी सेल के इंचार्ज थे और श्रीपद काले, नंदकुमार गोपाले, संजय निकम और अजय सावंत उस टीम के अहम हिस्सा थे. उसके पहले तक पहेली रहे इंडियन मुजाहिदीन के लिए वो बड़ा झटका था. उसके बाद अहमदाबाद और कर्नाटक में भी बड़ी संख्या में उसके आतंकी पकड़े गए. उस समय दिवंगत आर आर पाटिल राज्य के गृहमंत्री थे उन्होंने 5 लाख रुपये इनाम देने का वादा किया था. लेकिन बाद में 26/11 आतंकी हमले के बाद उन्होंने इस्तीफा दिया और वो वादा सिर्फ घोषणा बनकर रह गया. हैरानी की बात है कि साल 2000 से 2008 तक देश में आतंकी वारदातों को अंजाम देने वाले संगठन को बेनकाब करने वाली टीम को इनाम तो दूर एक अदद पुरस्कार भी नहीं मिला. मिला है तो सिर्फ क्राइम ब्रांच में तब के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त देवेन भारती का एक अभिनंदन पत्र.
अब कश्मीर की दुरूह परिस्थितियों में से फरार क़ातिल को खोज निकालने और बिना किसी गड़बड़ी के उसे पकड़कर वापस सलाखों के पीछे भेजने वाली टीम की तारीफ तो खूब हो रही है. खुद मुख्यमंत्री देवेंन्द्र फडणवीस ने ट्वीट कर शाबाशी दी है. लेकिन सवाल है क्या इन्हें इनकी बहादुरी, समर्पण और सफलता पर इनाम और पुरस्कार मिलेगा या फिर साल 2008 की तरह सिर्फ जुबानी कवायद बन कर रह जायेगी?
स्थानीय लिबास में टीम सीधे उस साइट पर ना जाकर पहले आसपास के गांव में गई. खुद को टेलीफोन कंपनी का अफसर बताकर टेलीफोन टावर लगाने के लिए सर्वे करने आया है बताया. आतंक और गरीबी की दोहरी मार झेल रहे लोगों को आमदनी का जरिया दिखा और वो उसके लिए जमीन देने को तैयार हो गए. लेकिन पुलिस का लक्ष्य तो उन मजदूरों तक पहुंचना था. लिहाजा टावर बनाने के लिए जरूरी मजदूरों को लाने की शर्त जमीन वालों को ही दी गई. पैसा आता देख भला कौन मना करेगा. वो लोग सोनमर्ग में जहां निर्माण काम चल रहा था वहीं के कुछ ठेकेदारों को बुला लाये. उनसे कोटेशन मांगा गया और मजदूरों के काम देखने के लिए उस साइट पर ले जाने की शर्त रखी गई. ठेकेदार तैयार हो गया और थोड़ी ही देर में टीम उन मजदूरों के बीच में थी. इत्तेफाक से जिस ठेकेदार से मुलाकात हुई थी उसके मजदूरों की लिस्ट में साजिद नाम लिखा था. पुलिस को पहले से अंदेशा था कि अपनी पहचान छुपाने के लिये सज्जाद दूसरे नाम का सहारा ले सकता है और साजिद सज्जाद से मिलता जुलता है इसलिए पुलिस ने साजिद को देखना चाहा. ठेकेदार का उसकी तरफ इशारा करते ही पुलिस टीम को उसे पहचानने में देर नहीं लगी. लेकिन किसी ने कोई हड़बड़ी नहीं की ना ही अपने चेहरे पर सज्जाद को खोज निकालने की खुशी को आने दिया. टीम वापस चली गई.
अगले दो दिन उसे वहां से उठाने के मौके की तलाश होती रही. लेकिन वो कंस्ट्रक्शन साइट से बाहर नहीं आया. अब पुलिस के सामने मजदूरों के बीच मे जाकर सज्जाद को पकड़ने के अलावा कोई चारा नहीं था. तकरीबन 100 मीटर दूर गाड़ी खड़ी कर सिपाही दया कांबले और संदीप कांबले को ड्राइवर के साथ उसी में बैठे रहने को कहकर इंपेक्टर निकम सिर्फ एक सिपाही संदीप तलेकर के साथ सज्जाद के पास गए. सज्जाद जहां काम कर रहा था उसके ठीक पीछे बड़ा गड्ढा था और डर था कि अगर वो भागता है तो गड्ढे में गिर सकता है और अगर ऐसा हुआ तो बात बिगड़ते देर नहीं लगेगी और उसके बाद क्या होगा कुछ कहा नहीं जा सकता था. इसलिए इंपसेक्टर निकम पहले उस गड्ढे की तरफ सज्जाद के बिल्कुल करीब खड़े हुए फिर एक हाथ से उसके हाथ को दबाया और बोले, "सज्जाद तुझे मेरे साथ चलना है." और उसका हाथ छोड़ दिया. लेकिन तब तक साथ में गया दूसरा सिपाही तय योजना के मुताबिक दूसरी तरफ से सज्जाद से सटकर खड़ा हो गया.
इंस्पेक्टर निकम के मुताबिक उनकी आवाज सुनते ही सज्जाद जगह पर ही जड़ गया. उसे कुछ समझ ही नहीं आया कि हम कौन हैं और क्या चाहते हैं? हमने उसका हाथ बिना पकड़े ही शरीर से धक्का देकर आगे चलने का इशारा किया और उससे सामान्य बात करते करते गाड़ी के पास लाये. सबकुछ इतनी शांति से हो गया कि आसपास काम करने वाले मजदूर भी कुछ समझ नहीं पाये. गाड़ी का दरवाजा खोलकर जैसे ही उसे गाड़ी में बिठाया गया अंदर बैठे सिपाही दया कांबले को देख कर वो पहचान गया और उसके मुंह से आवाज निकली "अरे साहब आप?" दया कांबले वो सिपाही हैं जो मुकदमे के दौरान विशेष सरकारी वकील उज्वल निकम की मदद के लिए हमेशा अदालत में मौजूद रहते थे. सज्जाद उन्हें अच्छी तरह से पहचानता था और दया ने दाढ़ी भी नहीं रखी थी इसलिए दया कांबले को गाड़ी में ही बैठने को कहा गया था.
सज्जाद और कुछ बोलता या हरकत करता तब तक दूसरा सिपाही भी उसके बगल में बैठ चुका था और गाड़ी भी वहां से निकल चुकी थी. ड्राइवर के बगल की सीट पर बैठे इंस्पेक्टर संजय निकम ने पीछे मुड़कर सज्जाद को एक सेब दिया और बोले "खा". सज्जाद को पहचानते देर नहीं लगी और बोल उठा निकम साहब आप हैं?
सवाल है कि सज्जाद मुगल को पता था कि पुलिस उसकी तलाश में है. आज नहीं तो कल वो पकड़ा ही जायेगा. फिर वो सीमा पार क्यों नहीं भाग गया? इंस्पेक्टर संजय निकम के मुताबिक ये सवाल उन्होंने भी उससे पूछा था. तब सज्जाद का जवाब था, साहब उस पार जिंदगी नहीं है. गरीबी, बेकारी और जिल्लत के सिवा वहां कुछ नहीं है इसलिये मैं यहीं रहकर जीना चाह रहा था.
इसके बाद की कहानी तो जग जाहिर है. सज्जाद की गिरफ्तारी कितनी अहम थी इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद मुंबई पुलिस आयुक्त दत्तात्रेय पडसलगीकर ने पत्रकार परिषद लकेर उसकी गिरफ्तारी की घोषणा की. उन्होंने बताया कि जैसे ही मुझे सज्जाद की गिरफ्तारी की सूचना मिली मैंने सबसे पहले पल्लवी के पिता पुरकायस्थ को फोन कर बताया तो उनकी आंख में आसूं आ गए. वो बोले मुझे इसी पल का इंतजार था. पुलिस आयुक्त ने पूरी टीम का परिचय पत्रकारों से कराया.टिप्पणियां
कदकाठी से पहलवान लगने वाले इंस्पेक्टर संजय निकम 26/11 आतंकी हमले में भी मोर्चा संभालने वालों में रहे हैं. उस समय वो प्रॉपर्टी सेल में थे. प्रोपर्टी सेल ने ही साल 2008 में इंडियन मुजाहिदीन के पुणे मॉड्यूल को पकड़ कर आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन की कमर तोड़ी थी. तब अरुण चव्हाण प्रॉपर्टी सेल के इंचार्ज थे और श्रीपद काले, नंदकुमार गोपाले, संजय निकम और अजय सावंत उस टीम के अहम हिस्सा थे. उसके पहले तक पहेली रहे इंडियन मुजाहिदीन के लिए वो बड़ा झटका था. उसके बाद अहमदाबाद और कर्नाटक में भी बड़ी संख्या में उसके आतंकी पकड़े गए. उस समय दिवंगत आर आर पाटिल राज्य के गृहमंत्री थे उन्होंने 5 लाख रुपये इनाम देने का वादा किया था. लेकिन बाद में 26/11 आतंकी हमले के बाद उन्होंने इस्तीफा दिया और वो वादा सिर्फ घोषणा बनकर रह गया. हैरानी की बात है कि साल 2000 से 2008 तक देश में आतंकी वारदातों को अंजाम देने वाले संगठन को बेनकाब करने वाली टीम को इनाम तो दूर एक अदद पुरस्कार भी नहीं मिला. मिला है तो सिर्फ क्राइम ब्रांच में तब के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त देवेन भारती का एक अभिनंदन पत्र.
अब कश्मीर की दुरूह परिस्थितियों में से फरार क़ातिल को खोज निकालने और बिना किसी गड़बड़ी के उसे पकड़कर वापस सलाखों के पीछे भेजने वाली टीम की तारीफ तो खूब हो रही है. खुद मुख्यमंत्री देवेंन्द्र फडणवीस ने ट्वीट कर शाबाशी दी है. लेकिन सवाल है क्या इन्हें इनकी बहादुरी, समर्पण और सफलता पर इनाम और पुरस्कार मिलेगा या फिर साल 2008 की तरह सिर्फ जुबानी कवायद बन कर रह जायेगी?
अगले दो दिन उसे वहां से उठाने के मौके की तलाश होती रही. लेकिन वो कंस्ट्रक्शन साइट से बाहर नहीं आया. अब पुलिस के सामने मजदूरों के बीच मे जाकर सज्जाद को पकड़ने के अलावा कोई चारा नहीं था. तकरीबन 100 मीटर दूर गाड़ी खड़ी कर सिपाही दया कांबले और संदीप कांबले को ड्राइवर के साथ उसी में बैठे रहने को कहकर इंपेक्टर निकम सिर्फ एक सिपाही संदीप तलेकर के साथ सज्जाद के पास गए. सज्जाद जहां काम कर रहा था उसके ठीक पीछे बड़ा गड्ढा था और डर था कि अगर वो भागता है तो गड्ढे में गिर सकता है और अगर ऐसा हुआ तो बात बिगड़ते देर नहीं लगेगी और उसके बाद क्या होगा कुछ कहा नहीं जा सकता था. इसलिए इंपसेक्टर निकम पहले उस गड्ढे की तरफ सज्जाद के बिल्कुल करीब खड़े हुए फिर एक हाथ से उसके हाथ को दबाया और बोले, "सज्जाद तुझे मेरे साथ चलना है." और उसका हाथ छोड़ दिया. लेकिन तब तक साथ में गया दूसरा सिपाही तय योजना के मुताबिक दूसरी तरफ से सज्जाद से सटकर खड़ा हो गया.
इंस्पेक्टर निकम के मुताबिक उनकी आवाज सुनते ही सज्जाद जगह पर ही जड़ गया. उसे कुछ समझ ही नहीं आया कि हम कौन हैं और क्या चाहते हैं? हमने उसका हाथ बिना पकड़े ही शरीर से धक्का देकर आगे चलने का इशारा किया और उससे सामान्य बात करते करते गाड़ी के पास लाये. सबकुछ इतनी शांति से हो गया कि आसपास काम करने वाले मजदूर भी कुछ समझ नहीं पाये. गाड़ी का दरवाजा खोलकर जैसे ही उसे गाड़ी में बिठाया गया अंदर बैठे सिपाही दया कांबले को देख कर वो पहचान गया और उसके मुंह से आवाज निकली "अरे साहब आप?" दया कांबले वो सिपाही हैं जो मुकदमे के दौरान विशेष सरकारी वकील उज्वल निकम की मदद के लिए हमेशा अदालत में मौजूद रहते थे. सज्जाद उन्हें अच्छी तरह से पहचानता था और दया ने दाढ़ी भी नहीं रखी थी इसलिए दया कांबले को गाड़ी में ही बैठने को कहा गया था.
सज्जाद और कुछ बोलता या हरकत करता तब तक दूसरा सिपाही भी उसके बगल में बैठ चुका था और गाड़ी भी वहां से निकल चुकी थी. ड्राइवर के बगल की सीट पर बैठे इंस्पेक्टर संजय निकम ने पीछे मुड़कर सज्जाद को एक सेब दिया और बोले "खा". सज्जाद को पहचानते देर नहीं लगी और बोल उठा निकम साहब आप हैं?
सवाल है कि सज्जाद मुगल को पता था कि पुलिस उसकी तलाश में है. आज नहीं तो कल वो पकड़ा ही जायेगा. फिर वो सीमा पार क्यों नहीं भाग गया? इंस्पेक्टर संजय निकम के मुताबिक ये सवाल उन्होंने भी उससे पूछा था. तब सज्जाद का जवाब था, साहब उस पार जिंदगी नहीं है. गरीबी, बेकारी और जिल्लत के सिवा वहां कुछ नहीं है इसलिये मैं यहीं रहकर जीना चाह रहा था.
इसके बाद की कहानी तो जग जाहिर है. सज्जाद की गिरफ्तारी कितनी अहम थी इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद मुंबई पुलिस आयुक्त दत्तात्रेय पडसलगीकर ने पत्रकार परिषद लकेर उसकी गिरफ्तारी की घोषणा की. उन्होंने बताया कि जैसे ही मुझे सज्जाद की गिरफ्तारी की सूचना मिली मैंने सबसे पहले पल्लवी के पिता पुरकायस्थ को फोन कर बताया तो उनकी आंख में आसूं आ गए. वो बोले मुझे इसी पल का इंतजार था. पुलिस आयुक्त ने पूरी टीम का परिचय पत्रकारों से कराया.टिप्पणियां
कदकाठी से पहलवान लगने वाले इंस्पेक्टर संजय निकम 26/11 आतंकी हमले में भी मोर्चा संभालने वालों में रहे हैं. उस समय वो प्रॉपर्टी सेल में थे. प्रोपर्टी सेल ने ही साल 2008 में इंडियन मुजाहिदीन के पुणे मॉड्यूल को पकड़ कर आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन की कमर तोड़ी थी. तब अरुण चव्हाण प्रॉपर्टी सेल के इंचार्ज थे और श्रीपद काले, नंदकुमार गोपाले, संजय निकम और अजय सावंत उस टीम के अहम हिस्सा थे. उसके पहले तक पहेली रहे इंडियन मुजाहिदीन के लिए वो बड़ा झटका था. उसके बाद अहमदाबाद और कर्नाटक में भी बड़ी संख्या में उसके आतंकी पकड़े गए. उस समय दिवंगत आर आर पाटिल राज्य के गृहमंत्री थे उन्होंने 5 लाख रुपये इनाम देने का वादा किया था. लेकिन बाद में 26/11 आतंकी हमले के बाद उन्होंने इस्तीफा दिया और वो वादा सिर्फ घोषणा बनकर रह गया. हैरानी की बात है कि साल 2000 से 2008 तक देश में आतंकी वारदातों को अंजाम देने वाले संगठन को बेनकाब करने वाली टीम को इनाम तो दूर एक अदद पुरस्कार भी नहीं मिला. मिला है तो सिर्फ क्राइम ब्रांच में तब के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त देवेन भारती का एक अभिनंदन पत्र.
अब कश्मीर की दुरूह परिस्थितियों में से फरार क़ातिल को खोज निकालने और बिना किसी गड़बड़ी के उसे पकड़कर वापस सलाखों के पीछे भेजने वाली टीम की तारीफ तो खूब हो रही है. खुद मुख्यमंत्री देवेंन्द्र फडणवीस ने ट्वीट कर शाबाशी दी है. लेकिन सवाल है क्या इन्हें इनकी बहादुरी, समर्पण और सफलता पर इनाम और पुरस्कार मिलेगा या फिर साल 2008 की तरह सिर्फ जुबानी कवायद बन कर रह जायेगी?
इंस्पेक्टर निकम के मुताबिक उनकी आवाज सुनते ही सज्जाद जगह पर ही जड़ गया. उसे कुछ समझ ही नहीं आया कि हम कौन हैं और क्या चाहते हैं? हमने उसका हाथ बिना पकड़े ही शरीर से धक्का देकर आगे चलने का इशारा किया और उससे सामान्य बात करते करते गाड़ी के पास लाये. सबकुछ इतनी शांति से हो गया कि आसपास काम करने वाले मजदूर भी कुछ समझ नहीं पाये. गाड़ी का दरवाजा खोलकर जैसे ही उसे गाड़ी में बिठाया गया अंदर बैठे सिपाही दया कांबले को देख कर वो पहचान गया और उसके मुंह से आवाज निकली "अरे साहब आप?" दया कांबले वो सिपाही हैं जो मुकदमे के दौरान विशेष सरकारी वकील उज्वल निकम की मदद के लिए हमेशा अदालत में मौजूद रहते थे. सज्जाद उन्हें अच्छी तरह से पहचानता था और दया ने दाढ़ी भी नहीं रखी थी इसलिए दया कांबले को गाड़ी में ही बैठने को कहा गया था.
सज्जाद और कुछ बोलता या हरकत करता तब तक दूसरा सिपाही भी उसके बगल में बैठ चुका था और गाड़ी भी वहां से निकल चुकी थी. ड्राइवर के बगल की सीट पर बैठे इंस्पेक्टर संजय निकम ने पीछे मुड़कर सज्जाद को एक सेब दिया और बोले "खा". सज्जाद को पहचानते देर नहीं लगी और बोल उठा निकम साहब आप हैं?
सवाल है कि सज्जाद मुगल को पता था कि पुलिस उसकी तलाश में है. आज नहीं तो कल वो पकड़ा ही जायेगा. फिर वो सीमा पार क्यों नहीं भाग गया? इंस्पेक्टर संजय निकम के मुताबिक ये सवाल उन्होंने भी उससे पूछा था. तब सज्जाद का जवाब था, साहब उस पार जिंदगी नहीं है. गरीबी, बेकारी और जिल्लत के सिवा वहां कुछ नहीं है इसलिये मैं यहीं रहकर जीना चाह रहा था.
इसके बाद की कहानी तो जग जाहिर है. सज्जाद की गिरफ्तारी कितनी अहम थी इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद मुंबई पुलिस आयुक्त दत्तात्रेय पडसलगीकर ने पत्रकार परिषद लकेर उसकी गिरफ्तारी की घोषणा की. उन्होंने बताया कि जैसे ही मुझे सज्जाद की गिरफ्तारी की सूचना मिली मैंने सबसे पहले पल्लवी के पिता पुरकायस्थ को फोन कर बताया तो उनकी आंख में आसूं आ गए. वो बोले मुझे इसी पल का इंतजार था. पुलिस आयुक्त ने पूरी टीम का परिचय पत्रकारों से कराया.टिप्पणियां
कदकाठी से पहलवान लगने वाले इंस्पेक्टर संजय निकम 26/11 आतंकी हमले में भी मोर्चा संभालने वालों में रहे हैं. उस समय वो प्रॉपर्टी सेल में थे. प्रोपर्टी सेल ने ही साल 2008 में इंडियन मुजाहिदीन के पुणे मॉड्यूल को पकड़ कर आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन की कमर तोड़ी थी. तब अरुण चव्हाण प्रॉपर्टी सेल के इंचार्ज थे और श्रीपद काले, नंदकुमार गोपाले, संजय निकम और अजय सावंत उस टीम के अहम हिस्सा थे. उसके पहले तक पहेली रहे इंडियन मुजाहिदीन के लिए वो बड़ा झटका था. उसके बाद अहमदाबाद और कर्नाटक में भी बड़ी संख्या में उसके आतंकी पकड़े गए. उस समय दिवंगत आर आर पाटिल राज्य के गृहमंत्री थे उन्होंने 5 लाख रुपये इनाम देने का वादा किया था. लेकिन बाद में 26/11 आतंकी हमले के बाद उन्होंने इस्तीफा दिया और वो वादा सिर्फ घोषणा बनकर रह गया. हैरानी की बात है कि साल 2000 से 2008 तक देश में आतंकी वारदातों को अंजाम देने वाले संगठन को बेनकाब करने वाली टीम को इनाम तो दूर एक अदद पुरस्कार भी नहीं मिला. मिला है तो सिर्फ क्राइम ब्रांच में तब के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त देवेन भारती का एक अभिनंदन पत्र.
अब कश्मीर की दुरूह परिस्थितियों में से फरार क़ातिल को खोज निकालने और बिना किसी गड़बड़ी के उसे पकड़कर वापस सलाखों के पीछे भेजने वाली टीम की तारीफ तो खूब हो रही है. खुद मुख्यमंत्री देवेंन्द्र फडणवीस ने ट्वीट कर शाबाशी दी है. लेकिन सवाल है क्या इन्हें इनकी बहादुरी, समर्पण और सफलता पर इनाम और पुरस्कार मिलेगा या फिर साल 2008 की तरह सिर्फ जुबानी कवायद बन कर रह जायेगी?
सज्जाद और कुछ बोलता या हरकत करता तब तक दूसरा सिपाही भी उसके बगल में बैठ चुका था और गाड़ी भी वहां से निकल चुकी थी. ड्राइवर के बगल की सीट पर बैठे इंस्पेक्टर संजय निकम ने पीछे मुड़कर सज्जाद को एक सेब दिया और बोले "खा". सज्जाद को पहचानते देर नहीं लगी और बोल उठा निकम साहब आप हैं?
सवाल है कि सज्जाद मुगल को पता था कि पुलिस उसकी तलाश में है. आज नहीं तो कल वो पकड़ा ही जायेगा. फिर वो सीमा पार क्यों नहीं भाग गया? इंस्पेक्टर संजय निकम के मुताबिक ये सवाल उन्होंने भी उससे पूछा था. तब सज्जाद का जवाब था, साहब उस पार जिंदगी नहीं है. गरीबी, बेकारी और जिल्लत के सिवा वहां कुछ नहीं है इसलिये मैं यहीं रहकर जीना चाह रहा था.
इसके बाद की कहानी तो जग जाहिर है. सज्जाद की गिरफ्तारी कितनी अहम थी इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद मुंबई पुलिस आयुक्त दत्तात्रेय पडसलगीकर ने पत्रकार परिषद लकेर उसकी गिरफ्तारी की घोषणा की. उन्होंने बताया कि जैसे ही मुझे सज्जाद की गिरफ्तारी की सूचना मिली मैंने सबसे पहले पल्लवी के पिता पुरकायस्थ को फोन कर बताया तो उनकी आंख में आसूं आ गए. वो बोले मुझे इसी पल का इंतजार था. पुलिस आयुक्त ने पूरी टीम का परिचय पत्रकारों से कराया.टिप्पणियां
कदकाठी से पहलवान लगने वाले इंस्पेक्टर संजय निकम 26/11 आतंकी हमले में भी मोर्चा संभालने वालों में रहे हैं. उस समय वो प्रॉपर्टी सेल में थे. प्रोपर्टी सेल ने ही साल 2008 में इंडियन मुजाहिदीन के पुणे मॉड्यूल को पकड़ कर आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन की कमर तोड़ी थी. तब अरुण चव्हाण प्रॉपर्टी सेल के इंचार्ज थे और श्रीपद काले, नंदकुमार गोपाले, संजय निकम और अजय सावंत उस टीम के अहम हिस्सा थे. उसके पहले तक पहेली रहे इंडियन मुजाहिदीन के लिए वो बड़ा झटका था. उसके बाद अहमदाबाद और कर्नाटक में भी बड़ी संख्या में उसके आतंकी पकड़े गए. उस समय दिवंगत आर आर पाटिल राज्य के गृहमंत्री थे उन्होंने 5 लाख रुपये इनाम देने का वादा किया था. लेकिन बाद में 26/11 आतंकी हमले के बाद उन्होंने इस्तीफा दिया और वो वादा सिर्फ घोषणा बनकर रह गया. हैरानी की बात है कि साल 2000 से 2008 तक देश में आतंकी वारदातों को अंजाम देने वाले संगठन को बेनकाब करने वाली टीम को इनाम तो दूर एक अदद पुरस्कार भी नहीं मिला. मिला है तो सिर्फ क्राइम ब्रांच में तब के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त देवेन भारती का एक अभिनंदन पत्र.
अब कश्मीर की दुरूह परिस्थितियों में से फरार क़ातिल को खोज निकालने और बिना किसी गड़बड़ी के उसे पकड़कर वापस सलाखों के पीछे भेजने वाली टीम की तारीफ तो खूब हो रही है. खुद मुख्यमंत्री देवेंन्द्र फडणवीस ने ट्वीट कर शाबाशी दी है. लेकिन सवाल है क्या इन्हें इनकी बहादुरी, समर्पण और सफलता पर इनाम और पुरस्कार मिलेगा या फिर साल 2008 की तरह सिर्फ जुबानी कवायद बन कर रह जायेगी?
सवाल है कि सज्जाद मुगल को पता था कि पुलिस उसकी तलाश में है. आज नहीं तो कल वो पकड़ा ही जायेगा. फिर वो सीमा पार क्यों नहीं भाग गया? इंस्पेक्टर संजय निकम के मुताबिक ये सवाल उन्होंने भी उससे पूछा था. तब सज्जाद का जवाब था, साहब उस पार जिंदगी नहीं है. गरीबी, बेकारी और जिल्लत के सिवा वहां कुछ नहीं है इसलिये मैं यहीं रहकर जीना चाह रहा था.
इसके बाद की कहानी तो जग जाहिर है. सज्जाद की गिरफ्तारी कितनी अहम थी इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद मुंबई पुलिस आयुक्त दत्तात्रेय पडसलगीकर ने पत्रकार परिषद लकेर उसकी गिरफ्तारी की घोषणा की. उन्होंने बताया कि जैसे ही मुझे सज्जाद की गिरफ्तारी की सूचना मिली मैंने सबसे पहले पल्लवी के पिता पुरकायस्थ को फोन कर बताया तो उनकी आंख में आसूं आ गए. वो बोले मुझे इसी पल का इंतजार था. पुलिस आयुक्त ने पूरी टीम का परिचय पत्रकारों से कराया.टिप्पणियां
कदकाठी से पहलवान लगने वाले इंस्पेक्टर संजय निकम 26/11 आतंकी हमले में भी मोर्चा संभालने वालों में रहे हैं. उस समय वो प्रॉपर्टी सेल में थे. प्रोपर्टी सेल ने ही साल 2008 में इंडियन मुजाहिदीन के पुणे मॉड्यूल को पकड़ कर आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन की कमर तोड़ी थी. तब अरुण चव्हाण प्रॉपर्टी सेल के इंचार्ज थे और श्रीपद काले, नंदकुमार गोपाले, संजय निकम और अजय सावंत उस टीम के अहम हिस्सा थे. उसके पहले तक पहेली रहे इंडियन मुजाहिदीन के लिए वो बड़ा झटका था. उसके बाद अहमदाबाद और कर्नाटक में भी बड़ी संख्या में उसके आतंकी पकड़े गए. उस समय दिवंगत आर आर पाटिल राज्य के गृहमंत्री थे उन्होंने 5 लाख रुपये इनाम देने का वादा किया था. लेकिन बाद में 26/11 आतंकी हमले के बाद उन्होंने इस्तीफा दिया और वो वादा सिर्फ घोषणा बनकर रह गया. हैरानी की बात है कि साल 2000 से 2008 तक देश में आतंकी वारदातों को अंजाम देने वाले संगठन को बेनकाब करने वाली टीम को इनाम तो दूर एक अदद पुरस्कार भी नहीं मिला. मिला है तो सिर्फ क्राइम ब्रांच में तब के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त देवेन भारती का एक अभिनंदन पत्र.
अब कश्मीर की दुरूह परिस्थितियों में से फरार क़ातिल को खोज निकालने और बिना किसी गड़बड़ी के उसे पकड़कर वापस सलाखों के पीछे भेजने वाली टीम की तारीफ तो खूब हो रही है. खुद मुख्यमंत्री देवेंन्द्र फडणवीस ने ट्वीट कर शाबाशी दी है. लेकिन सवाल है क्या इन्हें इनकी बहादुरी, समर्पण और सफलता पर इनाम और पुरस्कार मिलेगा या फिर साल 2008 की तरह सिर्फ जुबानी कवायद बन कर रह जायेगी?
इसके बाद की कहानी तो जग जाहिर है. सज्जाद की गिरफ्तारी कितनी अहम थी इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद मुंबई पुलिस आयुक्त दत्तात्रेय पडसलगीकर ने पत्रकार परिषद लकेर उसकी गिरफ्तारी की घोषणा की. उन्होंने बताया कि जैसे ही मुझे सज्जाद की गिरफ्तारी की सूचना मिली मैंने सबसे पहले पल्लवी के पिता पुरकायस्थ को फोन कर बताया तो उनकी आंख में आसूं आ गए. वो बोले मुझे इसी पल का इंतजार था. पुलिस आयुक्त ने पूरी टीम का परिचय पत्रकारों से कराया.टिप्पणियां
कदकाठी से पहलवान लगने वाले इंस्पेक्टर संजय निकम 26/11 आतंकी हमले में भी मोर्चा संभालने वालों में रहे हैं. उस समय वो प्रॉपर्टी सेल में थे. प्रोपर्टी सेल ने ही साल 2008 में इंडियन मुजाहिदीन के पुणे मॉड्यूल को पकड़ कर आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन की कमर तोड़ी थी. तब अरुण चव्हाण प्रॉपर्टी सेल के इंचार्ज थे और श्रीपद काले, नंदकुमार गोपाले, संजय निकम और अजय सावंत उस टीम के अहम हिस्सा थे. उसके पहले तक पहेली रहे इंडियन मुजाहिदीन के लिए वो बड़ा झटका था. उसके बाद अहमदाबाद और कर्नाटक में भी बड़ी संख्या में उसके आतंकी पकड़े गए. उस समय दिवंगत आर आर पाटिल राज्य के गृहमंत्री थे उन्होंने 5 लाख रुपये इनाम देने का वादा किया था. लेकिन बाद में 26/11 आतंकी हमले के बाद उन्होंने इस्तीफा दिया और वो वादा सिर्फ घोषणा बनकर रह गया. हैरानी की बात है कि साल 2000 से 2008 तक देश में आतंकी वारदातों को अंजाम देने वाले संगठन को बेनकाब करने वाली टीम को इनाम तो दूर एक अदद पुरस्कार भी नहीं मिला. मिला है तो सिर्फ क्राइम ब्रांच में तब के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त देवेन भारती का एक अभिनंदन पत्र.
अब कश्मीर की दुरूह परिस्थितियों में से फरार क़ातिल को खोज निकालने और बिना किसी गड़बड़ी के उसे पकड़कर वापस सलाखों के पीछे भेजने वाली टीम की तारीफ तो खूब हो रही है. खुद मुख्यमंत्री देवेंन्द्र फडणवीस ने ट्वीट कर शाबाशी दी है. लेकिन सवाल है क्या इन्हें इनकी बहादुरी, समर्पण और सफलता पर इनाम और पुरस्कार मिलेगा या फिर साल 2008 की तरह सिर्फ जुबानी कवायद बन कर रह जायेगी?
कदकाठी से पहलवान लगने वाले इंस्पेक्टर संजय निकम 26/11 आतंकी हमले में भी मोर्चा संभालने वालों में रहे हैं. उस समय वो प्रॉपर्टी सेल में थे. प्रोपर्टी सेल ने ही साल 2008 में इंडियन मुजाहिदीन के पुणे मॉड्यूल को पकड़ कर आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन की कमर तोड़ी थी. तब अरुण चव्हाण प्रॉपर्टी सेल के इंचार्ज थे और श्रीपद काले, नंदकुमार गोपाले, संजय निकम और अजय सावंत उस टीम के अहम हिस्सा थे. उसके पहले तक पहेली रहे इंडियन मुजाहिदीन के लिए वो बड़ा झटका था. उसके बाद अहमदाबाद और कर्नाटक में भी बड़ी संख्या में उसके आतंकी पकड़े गए. उस समय दिवंगत आर आर पाटिल राज्य के गृहमंत्री थे उन्होंने 5 लाख रुपये इनाम देने का वादा किया था. लेकिन बाद में 26/11 आतंकी हमले के बाद उन्होंने इस्तीफा दिया और वो वादा सिर्फ घोषणा बनकर रह गया. हैरानी की बात है कि साल 2000 से 2008 तक देश में आतंकी वारदातों को अंजाम देने वाले संगठन को बेनकाब करने वाली टीम को इनाम तो दूर एक अदद पुरस्कार भी नहीं मिला. मिला है तो सिर्फ क्राइम ब्रांच में तब के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त देवेन भारती का एक अभिनंदन पत्र.
अब कश्मीर की दुरूह परिस्थितियों में से फरार क़ातिल को खोज निकालने और बिना किसी गड़बड़ी के उसे पकड़कर वापस सलाखों के पीछे भेजने वाली टीम की तारीफ तो खूब हो रही है. खुद मुख्यमंत्री देवेंन्द्र फडणवीस ने ट्वीट कर शाबाशी दी है. लेकिन सवाल है क्या इन्हें इनकी बहादुरी, समर्पण और सफलता पर इनाम और पुरस्कार मिलेगा या फिर साल 2008 की तरह सिर्फ जुबानी कवायद बन कर रह जायेगी?
अब कश्मीर की दुरूह परिस्थितियों में से फरार क़ातिल को खोज निकालने और बिना किसी गड़बड़ी के उसे पकड़कर वापस सलाखों के पीछे भेजने वाली टीम की तारीफ तो खूब हो रही है. खुद मुख्यमंत्री देवेंन्द्र फडणवीस ने ट्वीट कर शाबाशी दी है. लेकिन सवाल है क्या इन्हें इनकी बहादुरी, समर्पण और सफलता पर इनाम और पुरस्कार मिलेगा या फिर साल 2008 की तरह सिर्फ जुबानी कवायद बन कर रह जायेगी? | यहाँ एक सारांश है:सज्जाद मुगल मुंबई की एक वकील पल्लवी पुरकायस्थ का क़ातिल है
नासिक पुलिस 2 बार सज्जाद के गांव से खाली हाथ लौट चुकी थी
2016 में 3 महीने के लिए पैरोल पर छूटने के बाद से फरार था सज्जाद | 12 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने सोमवार को भारतीय सेना को टाट्रा ट्रक की आपूर्ति में हुई कथित अनियमितता के मामले में ब्रिटेन के वेक्ट्रा समूह के मालिक रवि ऋषि से पूछताछ की।
सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह ने आरोप लगाया कि इस ट्रक की खरीद से सम्बंधित एक दस्तावेज को मंजूरी देने के लिए उन्हें 14 करोड़ रुपये रिश्वत की पेशकश की गई थी।टिप्पणियां
सीबीआई ने शुक्रवार को बेंगलुरू तथा नई दिल्ली में टाट्रा के कार्यालयों पर छापा मारा।
इससे पहले सीबीआई ने रवि ऋषि का पासपोर्ट जब्त कर लिया था।
सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह ने आरोप लगाया कि इस ट्रक की खरीद से सम्बंधित एक दस्तावेज को मंजूरी देने के लिए उन्हें 14 करोड़ रुपये रिश्वत की पेशकश की गई थी।टिप्पणियां
सीबीआई ने शुक्रवार को बेंगलुरू तथा नई दिल्ली में टाट्रा के कार्यालयों पर छापा मारा।
इससे पहले सीबीआई ने रवि ऋषि का पासपोर्ट जब्त कर लिया था।
सीबीआई ने शुक्रवार को बेंगलुरू तथा नई दिल्ली में टाट्रा के कार्यालयों पर छापा मारा।
इससे पहले सीबीआई ने रवि ऋषि का पासपोर्ट जब्त कर लिया था।
इससे पहले सीबीआई ने रवि ऋषि का पासपोर्ट जब्त कर लिया था। | संक्षिप्त पाठ: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने सोमवार को भारतीय सेना को टाट्रा ट्रक की आपूर्ति में हुई कथित अनियमितता के मामले में ब्रिटेन के वेक्ट्रा समूह के मालिक रवि ऋषि से पूछताछ की। | 13 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: हनीप्रीत ने कहा कि राम रहीम को वह पापा कहती है और दोनों के बीच ऐसा कोई संबंध नहीं है जैसा कि अब दिखाया जा रहा है. उसने कहा कि जैसा की चैनलों में दिखाया गया उससे वह खुद बहुत डर गई. उसने दावा किया कि जैसा हनीप्रीत को दिखाया गया है वह वैसी नहीं है. वैसे किसी शख्स से तो मैं खुद डर जाती. साथ ही हनीप्रीत यह भी दावा किया कि इस पूरी घटना के बाद से वह डिप्रेशन में चली गई थी. बता दें कि अगस्त महीने में डेरा प्रमुख राम रहीम को दो साध्वियों के रेप के मामले में दोषी ठहराने के बाद कोर्ट ने 20 साल कैद की सजा सुनाई थी. इसके बाद जब राम रहीम को जेल भेजा गया तब हनीप्रीत उनके साथ थी. लेकिन सजा सुनाए जाने के बाद जिस प्रकार से समर्थकों ने पंचकुला में उत्पात मचाया और पूरा शहर जला दिया. इसके अलावा हरियाणा के कई शहरों में जो उत्पात मचाया उससे प्रशासन काफी नाराज हो गया है. लोगों में दहशत पैदा करने की कोशिश की गई. पत्थरबाजी और आगजनी के लिए साजिश के आरोप हनीप्रीत पर भी लगे हैं. इस के बाद से वह गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार चल रही थी. | संक्षिप्त सारांश: गुरमीत राम रहीम के साथ पिता-बेटी का रिश्ता
विश्वास गुप्ता को लेकर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहती
हनीप्रीत बोली- मैं डिप्रेशन में हूं | 8 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: भारतीय विमानन क्षेत्र की नई कंपनी एयर एशिया का कहना है कि वह भारत में एक नए बाजार की संभावनाएं तलाश रही है और वह अपने बेड़े में हर साल 10 विमान जोड़ेगी।टिप्पणियां
एयर एशिया भारतीय बाजार में पकड़ बनाने के लिए नई रणनीतियों पर काम कर रही है। कंपनी का कहना है कि उनकी एयरलाइन लो कॉस्ट यानि कम कीमत वाली है। साथ ही वह कोशिश कर रहे हैं कि उनके ज्यादा से ज्यादा टिकट ऑनलाइन बिकें, एजेंट्स के जरिये नहीं।
इस एयरलाइन में टाटा ग्रुप की भी अहम हिस्सेदारी है और कहा जा रहा है कि इस साल के आखिर तक एयर एशिया अपनी उड़ानें शुरू कर देगी। इसी सिलसिले में मंगलवार को रतन टाटा और एयर एशिया के चीफ टोनी फर्नांडिस ने नागरिक उड्डयन मंत्री अजित सिंह से मुलाकात की है।
एयर एशिया भारतीय बाजार में पकड़ बनाने के लिए नई रणनीतियों पर काम कर रही है। कंपनी का कहना है कि उनकी एयरलाइन लो कॉस्ट यानि कम कीमत वाली है। साथ ही वह कोशिश कर रहे हैं कि उनके ज्यादा से ज्यादा टिकट ऑनलाइन बिकें, एजेंट्स के जरिये नहीं।
इस एयरलाइन में टाटा ग्रुप की भी अहम हिस्सेदारी है और कहा जा रहा है कि इस साल के आखिर तक एयर एशिया अपनी उड़ानें शुरू कर देगी। इसी सिलसिले में मंगलवार को रतन टाटा और एयर एशिया के चीफ टोनी फर्नांडिस ने नागरिक उड्डयन मंत्री अजित सिंह से मुलाकात की है।
इस एयरलाइन में टाटा ग्रुप की भी अहम हिस्सेदारी है और कहा जा रहा है कि इस साल के आखिर तक एयर एशिया अपनी उड़ानें शुरू कर देगी। इसी सिलसिले में मंगलवार को रतन टाटा और एयर एशिया के चीफ टोनी फर्नांडिस ने नागरिक उड्डयन मंत्री अजित सिंह से मुलाकात की है। | सारांश: भारतीय विमानन क्षेत्र की नई कंपनी एयर एशिया का कहना है कि वह भारत में एक नए बाजार की संभावनाएं तलाश रही है और वह अपने बेड़े में हर साल 10 विमान जोड़ेगी। एयर एशिया भारतीय बाजार में पकड़ बनाने के लिए नई रणनीतियों पर काम कर रही है। | 33 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने सोमवार को सभी मुख्यमंत्रियों से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि आतंकवाद से लड़ाई के नाम पर निर्दोष मुस्लिम युवकों की गिरफ्तारी न हो। यदि ऐसा कोई भी मामला प्रकाश में आए तो उस पर त्वरित कार्रवाई हो।
भाजपा ने इसे धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ करार देते हुए उनकी बर्खास्तगी की मांग की है। लेकिन, सत्तारूढ़ संप्रग का नेतृत्व कर रही कांग्रेस ने कहा कि शिंदे का पत्र अल्पसंख्यक समुदाय का तुष्टीकरण नहीं है।
मुख्यमंत्रियों को लिखे एक पत्र में शिंदे ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के किसी भी सदस्य को गलत ढंग से गिरफ्तार करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ शीघ्र और कड़े कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि गलत ढंग से गिरफ्तार एक व्यक्ति को न केवल तत्काल रिहा करना चाहिए वरन उसे पर्याप्त मुआवजा और मुख्य धारा में शामिल होने के लिए उसका पुनर्वास भी होना चाहिए।
शिंदे ने कहा कि केंद्र सरकार को निर्दोष मुस्लिम युवकों के उत्पीड़न की कई शिकायतें मिली हैं। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के युवकों के बीच यह भावना है कि उनको जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है।
शिंदे ने राज्य सरकारों से आतंकवाद से जुड़े मामलों के लिए विशेष अदालतें बनाने को और अन्य लंबित मामलों के ऊपर आतंकवाद से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देने को कहा।
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री के. रहमान खान उन कांग्रेसी नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने आतंकवादी मामलों में मुस्लिम युवाओं की गलत गिरफ्तारी के बारे में चिंता प्रकट की थी।टिप्पणियां
भाजपा के नेता एम. वैंकेया नायडू ने मांग की कि शिंदे को तत्काल इस पत्र को वापस लेना चाहिए और देश से क्षमा मांगनी चाहिए। यह लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ है।
भाजपा के नेता राजीव प्रताप रुडी ने कहा कि शिंदे को बर्खास्त कर देना चाहिए। कांग्रेस के प्रवक्ता राशिद अल्वी ने बहरहाल किसी प्रकार के तुष्टीकरण से इनकार किया।
भाजपा ने इसे धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ करार देते हुए उनकी बर्खास्तगी की मांग की है। लेकिन, सत्तारूढ़ संप्रग का नेतृत्व कर रही कांग्रेस ने कहा कि शिंदे का पत्र अल्पसंख्यक समुदाय का तुष्टीकरण नहीं है।
मुख्यमंत्रियों को लिखे एक पत्र में शिंदे ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के किसी भी सदस्य को गलत ढंग से गिरफ्तार करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ शीघ्र और कड़े कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि गलत ढंग से गिरफ्तार एक व्यक्ति को न केवल तत्काल रिहा करना चाहिए वरन उसे पर्याप्त मुआवजा और मुख्य धारा में शामिल होने के लिए उसका पुनर्वास भी होना चाहिए।
शिंदे ने कहा कि केंद्र सरकार को निर्दोष मुस्लिम युवकों के उत्पीड़न की कई शिकायतें मिली हैं। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के युवकों के बीच यह भावना है कि उनको जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है।
शिंदे ने राज्य सरकारों से आतंकवाद से जुड़े मामलों के लिए विशेष अदालतें बनाने को और अन्य लंबित मामलों के ऊपर आतंकवाद से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देने को कहा।
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री के. रहमान खान उन कांग्रेसी नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने आतंकवादी मामलों में मुस्लिम युवाओं की गलत गिरफ्तारी के बारे में चिंता प्रकट की थी।टिप्पणियां
भाजपा के नेता एम. वैंकेया नायडू ने मांग की कि शिंदे को तत्काल इस पत्र को वापस लेना चाहिए और देश से क्षमा मांगनी चाहिए। यह लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ है।
भाजपा के नेता राजीव प्रताप रुडी ने कहा कि शिंदे को बर्खास्त कर देना चाहिए। कांग्रेस के प्रवक्ता राशिद अल्वी ने बहरहाल किसी प्रकार के तुष्टीकरण से इनकार किया।
मुख्यमंत्रियों को लिखे एक पत्र में शिंदे ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के किसी भी सदस्य को गलत ढंग से गिरफ्तार करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ शीघ्र और कड़े कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि गलत ढंग से गिरफ्तार एक व्यक्ति को न केवल तत्काल रिहा करना चाहिए वरन उसे पर्याप्त मुआवजा और मुख्य धारा में शामिल होने के लिए उसका पुनर्वास भी होना चाहिए।
शिंदे ने कहा कि केंद्र सरकार को निर्दोष मुस्लिम युवकों के उत्पीड़न की कई शिकायतें मिली हैं। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के युवकों के बीच यह भावना है कि उनको जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है।
शिंदे ने राज्य सरकारों से आतंकवाद से जुड़े मामलों के लिए विशेष अदालतें बनाने को और अन्य लंबित मामलों के ऊपर आतंकवाद से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देने को कहा।
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री के. रहमान खान उन कांग्रेसी नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने आतंकवादी मामलों में मुस्लिम युवाओं की गलत गिरफ्तारी के बारे में चिंता प्रकट की थी।टिप्पणियां
भाजपा के नेता एम. वैंकेया नायडू ने मांग की कि शिंदे को तत्काल इस पत्र को वापस लेना चाहिए और देश से क्षमा मांगनी चाहिए। यह लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ है।
भाजपा के नेता राजीव प्रताप रुडी ने कहा कि शिंदे को बर्खास्त कर देना चाहिए। कांग्रेस के प्रवक्ता राशिद अल्वी ने बहरहाल किसी प्रकार के तुष्टीकरण से इनकार किया।
शिंदे ने कहा कि केंद्र सरकार को निर्दोष मुस्लिम युवकों के उत्पीड़न की कई शिकायतें मिली हैं। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के युवकों के बीच यह भावना है कि उनको जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है।
शिंदे ने राज्य सरकारों से आतंकवाद से जुड़े मामलों के लिए विशेष अदालतें बनाने को और अन्य लंबित मामलों के ऊपर आतंकवाद से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देने को कहा।
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री के. रहमान खान उन कांग्रेसी नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने आतंकवादी मामलों में मुस्लिम युवाओं की गलत गिरफ्तारी के बारे में चिंता प्रकट की थी।टिप्पणियां
भाजपा के नेता एम. वैंकेया नायडू ने मांग की कि शिंदे को तत्काल इस पत्र को वापस लेना चाहिए और देश से क्षमा मांगनी चाहिए। यह लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ है।
भाजपा के नेता राजीव प्रताप रुडी ने कहा कि शिंदे को बर्खास्त कर देना चाहिए। कांग्रेस के प्रवक्ता राशिद अल्वी ने बहरहाल किसी प्रकार के तुष्टीकरण से इनकार किया।
शिंदे ने राज्य सरकारों से आतंकवाद से जुड़े मामलों के लिए विशेष अदालतें बनाने को और अन्य लंबित मामलों के ऊपर आतंकवाद से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देने को कहा।
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री के. रहमान खान उन कांग्रेसी नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने आतंकवादी मामलों में मुस्लिम युवाओं की गलत गिरफ्तारी के बारे में चिंता प्रकट की थी।टिप्पणियां
भाजपा के नेता एम. वैंकेया नायडू ने मांग की कि शिंदे को तत्काल इस पत्र को वापस लेना चाहिए और देश से क्षमा मांगनी चाहिए। यह लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ है।
भाजपा के नेता राजीव प्रताप रुडी ने कहा कि शिंदे को बर्खास्त कर देना चाहिए। कांग्रेस के प्रवक्ता राशिद अल्वी ने बहरहाल किसी प्रकार के तुष्टीकरण से इनकार किया।
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री के. रहमान खान उन कांग्रेसी नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने आतंकवादी मामलों में मुस्लिम युवाओं की गलत गिरफ्तारी के बारे में चिंता प्रकट की थी।टिप्पणियां
भाजपा के नेता एम. वैंकेया नायडू ने मांग की कि शिंदे को तत्काल इस पत्र को वापस लेना चाहिए और देश से क्षमा मांगनी चाहिए। यह लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ है।
भाजपा के नेता राजीव प्रताप रुडी ने कहा कि शिंदे को बर्खास्त कर देना चाहिए। कांग्रेस के प्रवक्ता राशिद अल्वी ने बहरहाल किसी प्रकार के तुष्टीकरण से इनकार किया।
भाजपा के नेता एम. वैंकेया नायडू ने मांग की कि शिंदे को तत्काल इस पत्र को वापस लेना चाहिए और देश से क्षमा मांगनी चाहिए। यह लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ है।
भाजपा के नेता राजीव प्रताप रुडी ने कहा कि शिंदे को बर्खास्त कर देना चाहिए। कांग्रेस के प्रवक्ता राशिद अल्वी ने बहरहाल किसी प्रकार के तुष्टीकरण से इनकार किया।
भाजपा के नेता राजीव प्रताप रुडी ने कहा कि शिंदे को बर्खास्त कर देना चाहिए। कांग्रेस के प्रवक्ता राशिद अल्वी ने बहरहाल किसी प्रकार के तुष्टीकरण से इनकार किया। | सारांश: केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने सोमवार को सभी मुख्यमंत्रियों से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि आतंकवाद से लड़ाई के नाम पर निर्दोष मुस्लिम युवकों की गिरफ्तारी न हो। यदि ऐसा कोई भी मामला प्रकाश में आए तो उस पर त्वरित कार्रवाई हो। | 7 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: सरक्रीक पर आरोपों को प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) द्वारा ‘बेबुनियाद’ एवं ‘शरारतपूर्ण’ करार दिए जाने के बावजूद गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह आरोप लगाते हुए केंद्र पर अपना हमला तेज कर दिया कि प्रधानमंत्री पाकिस्तान के राष्ट्रपति के साथ चर्चा के दौरान इस मुद्दे के शीघ्र हल पर सहमत हुए थे।
कच्छ और उत्तरी गुजरात में रैलियों में मोदी ने प्रधानमंत्री पर निशाने साधते हुए कहा, ‘‘क्या यह सच नहीं है कि जब आसिफ अली जरदारी (अप्रैल 2012 में) अजमेर यात्रा पर थे तब आपने उनके साथ भोजन किया था। उस वक्त उन्होंने सरक्रीक का मुद्दा उठाया था।’’
उन्होंने कहा, ‘‘तेहरान में बात आगे बढ़ी और इस मुद्दे पर आपने दुनिया के सामने कहा कि करार संभव है।’’ मोदी ने बुधवार को एक नागरिक के तौर पर प्रधानमंत्री को पत्र भेज कर यह आरोप लगाया था और मांग की थी कि विवादित सरक्रीक पड़ोसी देश को नहीं सौंपा जाए।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने यह कहते हुए इस आरोप का खंडन किया कि यह ‘बेबुनियाद’ एवं ‘शरारतपूर्ण’ है।
पीएमओ ने मोदी के पत्र के जवाब में कहा था, ‘‘पत्र में लगाया गया यह आरोप कि सरक्रीक पाकिस्तान को दिया जाने वाला है, असत्य है। इस कथित तथ्य पर मोदी द्वारा निकाले गए अन्य निष्कर्ष भी सच नहीं हैं।’’ मोदी ने अपने पत्र में आरोप लगाया था कि सरक्रीक पर केंद्र शीघ्र ही निर्णय ले सकता है और उन्हें बतौर आम आदमी उसके गंभीर सुरक्षा परिणामों की चिंता है।
पीएमओ के इनकार करने पर पलटवार करते हुए मोदी ने इन घटनाओं का हवाला दिया है। मोदी ने प्रधानमंत्री से देश को गुमराह नहीं करने और देशवासियों को यह आश्वासन देने को कहा कि सरक्रीक पाकिस्तान को सौंपने का कोई फैसला नहीं हुआ है।
एक कदम आगे बढ़ते हुए मोदी ने कहा कि न केवल प्रधानमंत्री बल्कि केंद्रीय रक्षामंत्री ने भी विवादित सरक्रीक पर करार होने की आशा जताई।टिप्पणियां
मोदी ने पोरबंदर में रक्षामंत्री के भाषण का हवाला देते हुए आरोप लगाया, ‘‘अगस्त में, हमारे केंद्रीय रक्षामंत्री पोरबंदर आए थे। उन्होंने पोरबंदर में कहा था कि सरक्रीक पर पाकिस्तान के साथ बातचीत चल रही है और आगे रास्ता निकलेगा।’’
मोदी ने बाद में ट्विटर पर लिखा, ‘‘सरक्रीक का प्रश्न न केवल कच्छ या गुजरात के बारे में है बल्कि यह देश की सुरक्षा के बारे में है। यह हमारा गौरव के बारे में है।’’ उन्होंने लिखा, ‘‘संप्रग ने सीडब्ल्यूजी घोटाले के साथ हमारा खेल बेच दिया, टूजी घोटाले के साथ हमारी प्रौद्योगिकी बेच दी। उन्होंने कोयला बेच दी और अब सरक्रीक के साथ वे राष्ट्र को भी बेच देंगे।’’
कच्छ और उत्तरी गुजरात में रैलियों में मोदी ने प्रधानमंत्री पर निशाने साधते हुए कहा, ‘‘क्या यह सच नहीं है कि जब आसिफ अली जरदारी (अप्रैल 2012 में) अजमेर यात्रा पर थे तब आपने उनके साथ भोजन किया था। उस वक्त उन्होंने सरक्रीक का मुद्दा उठाया था।’’
उन्होंने कहा, ‘‘तेहरान में बात आगे बढ़ी और इस मुद्दे पर आपने दुनिया के सामने कहा कि करार संभव है।’’ मोदी ने बुधवार को एक नागरिक के तौर पर प्रधानमंत्री को पत्र भेज कर यह आरोप लगाया था और मांग की थी कि विवादित सरक्रीक पड़ोसी देश को नहीं सौंपा जाए।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने यह कहते हुए इस आरोप का खंडन किया कि यह ‘बेबुनियाद’ एवं ‘शरारतपूर्ण’ है।
पीएमओ ने मोदी के पत्र के जवाब में कहा था, ‘‘पत्र में लगाया गया यह आरोप कि सरक्रीक पाकिस्तान को दिया जाने वाला है, असत्य है। इस कथित तथ्य पर मोदी द्वारा निकाले गए अन्य निष्कर्ष भी सच नहीं हैं।’’ मोदी ने अपने पत्र में आरोप लगाया था कि सरक्रीक पर केंद्र शीघ्र ही निर्णय ले सकता है और उन्हें बतौर आम आदमी उसके गंभीर सुरक्षा परिणामों की चिंता है।
पीएमओ के इनकार करने पर पलटवार करते हुए मोदी ने इन घटनाओं का हवाला दिया है। मोदी ने प्रधानमंत्री से देश को गुमराह नहीं करने और देशवासियों को यह आश्वासन देने को कहा कि सरक्रीक पाकिस्तान को सौंपने का कोई फैसला नहीं हुआ है।
एक कदम आगे बढ़ते हुए मोदी ने कहा कि न केवल प्रधानमंत्री बल्कि केंद्रीय रक्षामंत्री ने भी विवादित सरक्रीक पर करार होने की आशा जताई।टिप्पणियां
मोदी ने पोरबंदर में रक्षामंत्री के भाषण का हवाला देते हुए आरोप लगाया, ‘‘अगस्त में, हमारे केंद्रीय रक्षामंत्री पोरबंदर आए थे। उन्होंने पोरबंदर में कहा था कि सरक्रीक पर पाकिस्तान के साथ बातचीत चल रही है और आगे रास्ता निकलेगा।’’
मोदी ने बाद में ट्विटर पर लिखा, ‘‘सरक्रीक का प्रश्न न केवल कच्छ या गुजरात के बारे में है बल्कि यह देश की सुरक्षा के बारे में है। यह हमारा गौरव के बारे में है।’’ उन्होंने लिखा, ‘‘संप्रग ने सीडब्ल्यूजी घोटाले के साथ हमारा खेल बेच दिया, टूजी घोटाले के साथ हमारी प्रौद्योगिकी बेच दी। उन्होंने कोयला बेच दी और अब सरक्रीक के साथ वे राष्ट्र को भी बेच देंगे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘तेहरान में बात आगे बढ़ी और इस मुद्दे पर आपने दुनिया के सामने कहा कि करार संभव है।’’ मोदी ने बुधवार को एक नागरिक के तौर पर प्रधानमंत्री को पत्र भेज कर यह आरोप लगाया था और मांग की थी कि विवादित सरक्रीक पड़ोसी देश को नहीं सौंपा जाए।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने यह कहते हुए इस आरोप का खंडन किया कि यह ‘बेबुनियाद’ एवं ‘शरारतपूर्ण’ है।
पीएमओ ने मोदी के पत्र के जवाब में कहा था, ‘‘पत्र में लगाया गया यह आरोप कि सरक्रीक पाकिस्तान को दिया जाने वाला है, असत्य है। इस कथित तथ्य पर मोदी द्वारा निकाले गए अन्य निष्कर्ष भी सच नहीं हैं।’’ मोदी ने अपने पत्र में आरोप लगाया था कि सरक्रीक पर केंद्र शीघ्र ही निर्णय ले सकता है और उन्हें बतौर आम आदमी उसके गंभीर सुरक्षा परिणामों की चिंता है।
पीएमओ के इनकार करने पर पलटवार करते हुए मोदी ने इन घटनाओं का हवाला दिया है। मोदी ने प्रधानमंत्री से देश को गुमराह नहीं करने और देशवासियों को यह आश्वासन देने को कहा कि सरक्रीक पाकिस्तान को सौंपने का कोई फैसला नहीं हुआ है।
एक कदम आगे बढ़ते हुए मोदी ने कहा कि न केवल प्रधानमंत्री बल्कि केंद्रीय रक्षामंत्री ने भी विवादित सरक्रीक पर करार होने की आशा जताई।टिप्पणियां
मोदी ने पोरबंदर में रक्षामंत्री के भाषण का हवाला देते हुए आरोप लगाया, ‘‘अगस्त में, हमारे केंद्रीय रक्षामंत्री पोरबंदर आए थे। उन्होंने पोरबंदर में कहा था कि सरक्रीक पर पाकिस्तान के साथ बातचीत चल रही है और आगे रास्ता निकलेगा।’’
मोदी ने बाद में ट्विटर पर लिखा, ‘‘सरक्रीक का प्रश्न न केवल कच्छ या गुजरात के बारे में है बल्कि यह देश की सुरक्षा के बारे में है। यह हमारा गौरव के बारे में है।’’ उन्होंने लिखा, ‘‘संप्रग ने सीडब्ल्यूजी घोटाले के साथ हमारा खेल बेच दिया, टूजी घोटाले के साथ हमारी प्रौद्योगिकी बेच दी। उन्होंने कोयला बेच दी और अब सरक्रीक के साथ वे राष्ट्र को भी बेच देंगे।’’
प्रधानमंत्री कार्यालय ने यह कहते हुए इस आरोप का खंडन किया कि यह ‘बेबुनियाद’ एवं ‘शरारतपूर्ण’ है।
पीएमओ ने मोदी के पत्र के जवाब में कहा था, ‘‘पत्र में लगाया गया यह आरोप कि सरक्रीक पाकिस्तान को दिया जाने वाला है, असत्य है। इस कथित तथ्य पर मोदी द्वारा निकाले गए अन्य निष्कर्ष भी सच नहीं हैं।’’ मोदी ने अपने पत्र में आरोप लगाया था कि सरक्रीक पर केंद्र शीघ्र ही निर्णय ले सकता है और उन्हें बतौर आम आदमी उसके गंभीर सुरक्षा परिणामों की चिंता है।
पीएमओ के इनकार करने पर पलटवार करते हुए मोदी ने इन घटनाओं का हवाला दिया है। मोदी ने प्रधानमंत्री से देश को गुमराह नहीं करने और देशवासियों को यह आश्वासन देने को कहा कि सरक्रीक पाकिस्तान को सौंपने का कोई फैसला नहीं हुआ है।
एक कदम आगे बढ़ते हुए मोदी ने कहा कि न केवल प्रधानमंत्री बल्कि केंद्रीय रक्षामंत्री ने भी विवादित सरक्रीक पर करार होने की आशा जताई।टिप्पणियां
मोदी ने पोरबंदर में रक्षामंत्री के भाषण का हवाला देते हुए आरोप लगाया, ‘‘अगस्त में, हमारे केंद्रीय रक्षामंत्री पोरबंदर आए थे। उन्होंने पोरबंदर में कहा था कि सरक्रीक पर पाकिस्तान के साथ बातचीत चल रही है और आगे रास्ता निकलेगा।’’
मोदी ने बाद में ट्विटर पर लिखा, ‘‘सरक्रीक का प्रश्न न केवल कच्छ या गुजरात के बारे में है बल्कि यह देश की सुरक्षा के बारे में है। यह हमारा गौरव के बारे में है।’’ उन्होंने लिखा, ‘‘संप्रग ने सीडब्ल्यूजी घोटाले के साथ हमारा खेल बेच दिया, टूजी घोटाले के साथ हमारी प्रौद्योगिकी बेच दी। उन्होंने कोयला बेच दी और अब सरक्रीक के साथ वे राष्ट्र को भी बेच देंगे।’’
पीएमओ ने मोदी के पत्र के जवाब में कहा था, ‘‘पत्र में लगाया गया यह आरोप कि सरक्रीक पाकिस्तान को दिया जाने वाला है, असत्य है। इस कथित तथ्य पर मोदी द्वारा निकाले गए अन्य निष्कर्ष भी सच नहीं हैं।’’ मोदी ने अपने पत्र में आरोप लगाया था कि सरक्रीक पर केंद्र शीघ्र ही निर्णय ले सकता है और उन्हें बतौर आम आदमी उसके गंभीर सुरक्षा परिणामों की चिंता है।
पीएमओ के इनकार करने पर पलटवार करते हुए मोदी ने इन घटनाओं का हवाला दिया है। मोदी ने प्रधानमंत्री से देश को गुमराह नहीं करने और देशवासियों को यह आश्वासन देने को कहा कि सरक्रीक पाकिस्तान को सौंपने का कोई फैसला नहीं हुआ है।
एक कदम आगे बढ़ते हुए मोदी ने कहा कि न केवल प्रधानमंत्री बल्कि केंद्रीय रक्षामंत्री ने भी विवादित सरक्रीक पर करार होने की आशा जताई।टिप्पणियां
मोदी ने पोरबंदर में रक्षामंत्री के भाषण का हवाला देते हुए आरोप लगाया, ‘‘अगस्त में, हमारे केंद्रीय रक्षामंत्री पोरबंदर आए थे। उन्होंने पोरबंदर में कहा था कि सरक्रीक पर पाकिस्तान के साथ बातचीत चल रही है और आगे रास्ता निकलेगा।’’
मोदी ने बाद में ट्विटर पर लिखा, ‘‘सरक्रीक का प्रश्न न केवल कच्छ या गुजरात के बारे में है बल्कि यह देश की सुरक्षा के बारे में है। यह हमारा गौरव के बारे में है।’’ उन्होंने लिखा, ‘‘संप्रग ने सीडब्ल्यूजी घोटाले के साथ हमारा खेल बेच दिया, टूजी घोटाले के साथ हमारी प्रौद्योगिकी बेच दी। उन्होंने कोयला बेच दी और अब सरक्रीक के साथ वे राष्ट्र को भी बेच देंगे।’’
पीएमओ के इनकार करने पर पलटवार करते हुए मोदी ने इन घटनाओं का हवाला दिया है। मोदी ने प्रधानमंत्री से देश को गुमराह नहीं करने और देशवासियों को यह आश्वासन देने को कहा कि सरक्रीक पाकिस्तान को सौंपने का कोई फैसला नहीं हुआ है।
एक कदम आगे बढ़ते हुए मोदी ने कहा कि न केवल प्रधानमंत्री बल्कि केंद्रीय रक्षामंत्री ने भी विवादित सरक्रीक पर करार होने की आशा जताई।टिप्पणियां
मोदी ने पोरबंदर में रक्षामंत्री के भाषण का हवाला देते हुए आरोप लगाया, ‘‘अगस्त में, हमारे केंद्रीय रक्षामंत्री पोरबंदर आए थे। उन्होंने पोरबंदर में कहा था कि सरक्रीक पर पाकिस्तान के साथ बातचीत चल रही है और आगे रास्ता निकलेगा।’’
मोदी ने बाद में ट्विटर पर लिखा, ‘‘सरक्रीक का प्रश्न न केवल कच्छ या गुजरात के बारे में है बल्कि यह देश की सुरक्षा के बारे में है। यह हमारा गौरव के बारे में है।’’ उन्होंने लिखा, ‘‘संप्रग ने सीडब्ल्यूजी घोटाले के साथ हमारा खेल बेच दिया, टूजी घोटाले के साथ हमारी प्रौद्योगिकी बेच दी। उन्होंने कोयला बेच दी और अब सरक्रीक के साथ वे राष्ट्र को भी बेच देंगे।’’
एक कदम आगे बढ़ते हुए मोदी ने कहा कि न केवल प्रधानमंत्री बल्कि केंद्रीय रक्षामंत्री ने भी विवादित सरक्रीक पर करार होने की आशा जताई।टिप्पणियां
मोदी ने पोरबंदर में रक्षामंत्री के भाषण का हवाला देते हुए आरोप लगाया, ‘‘अगस्त में, हमारे केंद्रीय रक्षामंत्री पोरबंदर आए थे। उन्होंने पोरबंदर में कहा था कि सरक्रीक पर पाकिस्तान के साथ बातचीत चल रही है और आगे रास्ता निकलेगा।’’
मोदी ने बाद में ट्विटर पर लिखा, ‘‘सरक्रीक का प्रश्न न केवल कच्छ या गुजरात के बारे में है बल्कि यह देश की सुरक्षा के बारे में है। यह हमारा गौरव के बारे में है।’’ उन्होंने लिखा, ‘‘संप्रग ने सीडब्ल्यूजी घोटाले के साथ हमारा खेल बेच दिया, टूजी घोटाले के साथ हमारी प्रौद्योगिकी बेच दी। उन्होंने कोयला बेच दी और अब सरक्रीक के साथ वे राष्ट्र को भी बेच देंगे।’’
मोदी ने पोरबंदर में रक्षामंत्री के भाषण का हवाला देते हुए आरोप लगाया, ‘‘अगस्त में, हमारे केंद्रीय रक्षामंत्री पोरबंदर आए थे। उन्होंने पोरबंदर में कहा था कि सरक्रीक पर पाकिस्तान के साथ बातचीत चल रही है और आगे रास्ता निकलेगा।’’
मोदी ने बाद में ट्विटर पर लिखा, ‘‘सरक्रीक का प्रश्न न केवल कच्छ या गुजरात के बारे में है बल्कि यह देश की सुरक्षा के बारे में है। यह हमारा गौरव के बारे में है।’’ उन्होंने लिखा, ‘‘संप्रग ने सीडब्ल्यूजी घोटाले के साथ हमारा खेल बेच दिया, टूजी घोटाले के साथ हमारी प्रौद्योगिकी बेच दी। उन्होंने कोयला बेच दी और अब सरक्रीक के साथ वे राष्ट्र को भी बेच देंगे।’’
मोदी ने बाद में ट्विटर पर लिखा, ‘‘सरक्रीक का प्रश्न न केवल कच्छ या गुजरात के बारे में है बल्कि यह देश की सुरक्षा के बारे में है। यह हमारा गौरव के बारे में है।’’ उन्होंने लिखा, ‘‘संप्रग ने सीडब्ल्यूजी घोटाले के साथ हमारा खेल बेच दिया, टूजी घोटाले के साथ हमारी प्रौद्योगिकी बेच दी। उन्होंने कोयला बेच दी और अब सरक्रीक के साथ वे राष्ट्र को भी बेच देंगे।’’ | यहाँ एक सारांश है:सरक्रीक पर आरोपों को प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) द्वारा ‘बेबुनियाद’ एवं ‘शरारतपूर्ण’ करार दिए जाने के बावजूद गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह आरोप लगाते हुए केंद्र पर अपना हमला तेज कर दिया कि प्रधानमंत्री पाकिस्तान के राष्ट्रपति के साथ चर्चा के | 4 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: कीनिया की राजधानी नैरोबी के निकट एक मॉल में हुए हमले में कम से कम 30 लोग मारे गए हैं। दर्जनों लोगों के घायल होने की खबर है।
कीनिया रेडक्रॉस के अधिकारी अब्बास गुलेत ने बताया कि मॉल में गोलीबारी करने वाले बंदूकधारियों ने गोलीबारी करने के साथ हथगोले भी फेंके तथा इसमें मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका है।टिप्पणियां
कीनिया के निकट वेस्टलैंड इलाके में दिन के समय हुए इस हमले के कुछ घंटों बाद सेना ने वेस्टगेट मॉल को घेर लिया।
नैरोबी के पुलिस प्रमुख बेनसन किबुए ने दावा किया कि यह हमला आतंकवादियों ने किया है, हालांकि उन्होंने किसी संगठन का नाम नहीं लिया।
कीनिया रेडक्रॉस के अधिकारी अब्बास गुलेत ने बताया कि मॉल में गोलीबारी करने वाले बंदूकधारियों ने गोलीबारी करने के साथ हथगोले भी फेंके तथा इसमें मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका है।टिप्पणियां
कीनिया के निकट वेस्टलैंड इलाके में दिन के समय हुए इस हमले के कुछ घंटों बाद सेना ने वेस्टगेट मॉल को घेर लिया।
नैरोबी के पुलिस प्रमुख बेनसन किबुए ने दावा किया कि यह हमला आतंकवादियों ने किया है, हालांकि उन्होंने किसी संगठन का नाम नहीं लिया।
कीनिया के निकट वेस्टलैंड इलाके में दिन के समय हुए इस हमले के कुछ घंटों बाद सेना ने वेस्टगेट मॉल को घेर लिया।
नैरोबी के पुलिस प्रमुख बेनसन किबुए ने दावा किया कि यह हमला आतंकवादियों ने किया है, हालांकि उन्होंने किसी संगठन का नाम नहीं लिया।
नैरोबी के पुलिस प्रमुख बेनसन किबुए ने दावा किया कि यह हमला आतंकवादियों ने किया है, हालांकि उन्होंने किसी संगठन का नाम नहीं लिया। | यह एक सारांश है: कीनिया की राजधानी नैरोबी के निकट एक मॉल में हुए हमले में कम से कम 30 लोग मारे गए हैं। दर्जनों लोग घायल हुए हैं। | 9 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) के लड़ाके बच्चों को निशाना बना रहे हैं, ताकि मोसुल में रहने वाले नागरिक वहां से भागकर न जा सकें. इराकी बल देश में आईएस को उसके आखिरी मजबूत गढ़ से खदेड़ने में जुटे हैं.
यूनिसेफ ने कहा कि उनके पास ऐसे कई मामलों का ब्योरा है, जिनमें आईएस के लड़ाकों ने उन परिवारों के बच्चों की हत्या की, जो आतंकवादियों के नियंत्रण वाले निकटवर्ती इलाकों से बाहर भागने की कोशिश कर रहे थे. इराक में यूनिसेफ के प्रतिनिधि पीटर हॉकिन्स ने कहा, "लोगों को वहां से भागने से रोकने के लिए वे बच्चों का इस्तेमाल युद्ध के हथियार के तौर पर कर रहे हैं... यह दिखाता है कि यह युद्ध कितना विवेकहीन और विनाशकारी है..."
इराकी बल धीरे-धीरे आईएस लड़ाकों को उनके आखिरी गढ़ मोसुल के पुराने शहर से खदेड़ने में जुटे हैं, लेकिन करीब 100,000 नागरिकों के घने इलाकों में मौजूद होने के कारण अभियान की गति धीमी पड़ गई है.
यूनिसेफ ने बताया कि वर्ष 2014 में आईएस आतंकवादियों के इराक के एक तिहाई हिस्से पर कब्जा करने के बाद से करीब 1,075 बच्चों की हत्या की गई और 1,130 बच्चे घायल हुए.
उन्होंने बताया कि इराक में पिछले छह माह में हुई हिंसा में 152 बच्चे मारे गए और 255 घायल हुए. सैन्य शासन या विस्थापन के कारण 10 लाख से अधिक बच्चों को अपनी शिक्षा बीच में ही छोड़नी पड़ी.टिप्पणियां
यूनिसेफ ने कहा कि बच्चों पर हिंसा में शामिल होने का भी दबाव बनाया जाता है. 18 वर्ष से कम आयु के कम से कम 231 बच्चे आईएस या अन्य सैन्य समूहों में भर्ती हुए.
हॉकिन्स ने कहा, "देश के भविष्य की सुरक्षा एवं आर्थिक दृढ़ता इस बात से तय होती है कि बच्चों के साथ आज क्या हो रहा है..."
यूनिसेफ ने कहा कि उनके पास ऐसे कई मामलों का ब्योरा है, जिनमें आईएस के लड़ाकों ने उन परिवारों के बच्चों की हत्या की, जो आतंकवादियों के नियंत्रण वाले निकटवर्ती इलाकों से बाहर भागने की कोशिश कर रहे थे. इराक में यूनिसेफ के प्रतिनिधि पीटर हॉकिन्स ने कहा, "लोगों को वहां से भागने से रोकने के लिए वे बच्चों का इस्तेमाल युद्ध के हथियार के तौर पर कर रहे हैं... यह दिखाता है कि यह युद्ध कितना विवेकहीन और विनाशकारी है..."
इराकी बल धीरे-धीरे आईएस लड़ाकों को उनके आखिरी गढ़ मोसुल के पुराने शहर से खदेड़ने में जुटे हैं, लेकिन करीब 100,000 नागरिकों के घने इलाकों में मौजूद होने के कारण अभियान की गति धीमी पड़ गई है.
यूनिसेफ ने बताया कि वर्ष 2014 में आईएस आतंकवादियों के इराक के एक तिहाई हिस्से पर कब्जा करने के बाद से करीब 1,075 बच्चों की हत्या की गई और 1,130 बच्चे घायल हुए.
उन्होंने बताया कि इराक में पिछले छह माह में हुई हिंसा में 152 बच्चे मारे गए और 255 घायल हुए. सैन्य शासन या विस्थापन के कारण 10 लाख से अधिक बच्चों को अपनी शिक्षा बीच में ही छोड़नी पड़ी.टिप्पणियां
यूनिसेफ ने कहा कि बच्चों पर हिंसा में शामिल होने का भी दबाव बनाया जाता है. 18 वर्ष से कम आयु के कम से कम 231 बच्चे आईएस या अन्य सैन्य समूहों में भर्ती हुए.
हॉकिन्स ने कहा, "देश के भविष्य की सुरक्षा एवं आर्थिक दृढ़ता इस बात से तय होती है कि बच्चों के साथ आज क्या हो रहा है..."
इराकी बल धीरे-धीरे आईएस लड़ाकों को उनके आखिरी गढ़ मोसुल के पुराने शहर से खदेड़ने में जुटे हैं, लेकिन करीब 100,000 नागरिकों के घने इलाकों में मौजूद होने के कारण अभियान की गति धीमी पड़ गई है.
यूनिसेफ ने बताया कि वर्ष 2014 में आईएस आतंकवादियों के इराक के एक तिहाई हिस्से पर कब्जा करने के बाद से करीब 1,075 बच्चों की हत्या की गई और 1,130 बच्चे घायल हुए.
उन्होंने बताया कि इराक में पिछले छह माह में हुई हिंसा में 152 बच्चे मारे गए और 255 घायल हुए. सैन्य शासन या विस्थापन के कारण 10 लाख से अधिक बच्चों को अपनी शिक्षा बीच में ही छोड़नी पड़ी.टिप्पणियां
यूनिसेफ ने कहा कि बच्चों पर हिंसा में शामिल होने का भी दबाव बनाया जाता है. 18 वर्ष से कम आयु के कम से कम 231 बच्चे आईएस या अन्य सैन्य समूहों में भर्ती हुए.
हॉकिन्स ने कहा, "देश के भविष्य की सुरक्षा एवं आर्थिक दृढ़ता इस बात से तय होती है कि बच्चों के साथ आज क्या हो रहा है..."
यूनिसेफ ने बताया कि वर्ष 2014 में आईएस आतंकवादियों के इराक के एक तिहाई हिस्से पर कब्जा करने के बाद से करीब 1,075 बच्चों की हत्या की गई और 1,130 बच्चे घायल हुए.
उन्होंने बताया कि इराक में पिछले छह माह में हुई हिंसा में 152 बच्चे मारे गए और 255 घायल हुए. सैन्य शासन या विस्थापन के कारण 10 लाख से अधिक बच्चों को अपनी शिक्षा बीच में ही छोड़नी पड़ी.टिप्पणियां
यूनिसेफ ने कहा कि बच्चों पर हिंसा में शामिल होने का भी दबाव बनाया जाता है. 18 वर्ष से कम आयु के कम से कम 231 बच्चे आईएस या अन्य सैन्य समूहों में भर्ती हुए.
हॉकिन्स ने कहा, "देश के भविष्य की सुरक्षा एवं आर्थिक दृढ़ता इस बात से तय होती है कि बच्चों के साथ आज क्या हो रहा है..."
उन्होंने बताया कि इराक में पिछले छह माह में हुई हिंसा में 152 बच्चे मारे गए और 255 घायल हुए. सैन्य शासन या विस्थापन के कारण 10 लाख से अधिक बच्चों को अपनी शिक्षा बीच में ही छोड़नी पड़ी.टिप्पणियां
यूनिसेफ ने कहा कि बच्चों पर हिंसा में शामिल होने का भी दबाव बनाया जाता है. 18 वर्ष से कम आयु के कम से कम 231 बच्चे आईएस या अन्य सैन्य समूहों में भर्ती हुए.
हॉकिन्स ने कहा, "देश के भविष्य की सुरक्षा एवं आर्थिक दृढ़ता इस बात से तय होती है कि बच्चों के साथ आज क्या हो रहा है..."
यूनिसेफ ने कहा कि बच्चों पर हिंसा में शामिल होने का भी दबाव बनाया जाता है. 18 वर्ष से कम आयु के कम से कम 231 बच्चे आईएस या अन्य सैन्य समूहों में भर्ती हुए.
हॉकिन्स ने कहा, "देश के भविष्य की सुरक्षा एवं आर्थिक दृढ़ता इस बात से तय होती है कि बच्चों के साथ आज क्या हो रहा है..."
हॉकिन्स ने कहा, "देश के भविष्य की सुरक्षा एवं आर्थिक दृढ़ता इस बात से तय होती है कि बच्चों के साथ आज क्या हो रहा है..." | संक्षिप्त सारांश: यूनिसेफ के मुताबिक, 2014 से ISIS 1,075 बच्चों की हत्या कर चुका है
आईएस उन बच्चों की हत्या करता है, जिनके परिवार भागने की कोशिश करें
ISIS बच्चों का इस्तेमाल युद्ध के हथियार के तौर पर कर रहा है : यूनिसेफ | 29 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: अल-कायदा ने अरब जगत और पश्चिम में अमेरिकी ठिकानों पर हमलों का फिर से आह्वान किया है, जबकि अमेरिका ने कहा कि वह सूडान और ट्यूनीशिया स्थित अपने दूतावासों से गैर आवश्यक कर्मियों को हटा रहा है।
साइट खुफिया समूह के अनुसार अरब प्रायद्वीप स्थित अल-कायदा ने पश्चिम एशिया तथा अफ्रीका स्थित अमेरिकी दूतावासों पर और अधिक हमलों का भी आह्वान किया और पश्चिमी देशों में रहने वाले मुसलमानों से कहा कि वे अमेरिकी हितों पर हमले करें।टिप्पणियां
उधर, अमेरिकी विदेश विभाग ने स्थिति को देखते हुए अपने सभी गैर आवश्यक कर्मियों को सूडान और ट्यूनीशिया छोड़ने के आदेश दिए हैं। इससे पहले सूडान ने खारतूम स्थित अमेरिकी दूतावास की रक्षा के लिए विशेष बल भेजे जाने के अमेरिकी आग्रह को खारिज कर दिया। शुक्रवार को अमेरिका के इस दूतावास पर हमला हुआ था।
उल्लेखनीय है कि एक विवादास्पद अमेरिकी फिल्म को लेकर अरब जगत में अमेरिका के खिलाफ जबर्दस्त विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। मंगलवार को लीबिया स्थित अमेरिकी दूतावास पर हुए हमले में अमेरिकी राजदूत सहित तीन अन्य अमेरिकी मारे गए थे।
साइट खुफिया समूह के अनुसार अरब प्रायद्वीप स्थित अल-कायदा ने पश्चिम एशिया तथा अफ्रीका स्थित अमेरिकी दूतावासों पर और अधिक हमलों का भी आह्वान किया और पश्चिमी देशों में रहने वाले मुसलमानों से कहा कि वे अमेरिकी हितों पर हमले करें।टिप्पणियां
उधर, अमेरिकी विदेश विभाग ने स्थिति को देखते हुए अपने सभी गैर आवश्यक कर्मियों को सूडान और ट्यूनीशिया छोड़ने के आदेश दिए हैं। इससे पहले सूडान ने खारतूम स्थित अमेरिकी दूतावास की रक्षा के लिए विशेष बल भेजे जाने के अमेरिकी आग्रह को खारिज कर दिया। शुक्रवार को अमेरिका के इस दूतावास पर हमला हुआ था।
उल्लेखनीय है कि एक विवादास्पद अमेरिकी फिल्म को लेकर अरब जगत में अमेरिका के खिलाफ जबर्दस्त विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। मंगलवार को लीबिया स्थित अमेरिकी दूतावास पर हुए हमले में अमेरिकी राजदूत सहित तीन अन्य अमेरिकी मारे गए थे।
उधर, अमेरिकी विदेश विभाग ने स्थिति को देखते हुए अपने सभी गैर आवश्यक कर्मियों को सूडान और ट्यूनीशिया छोड़ने के आदेश दिए हैं। इससे पहले सूडान ने खारतूम स्थित अमेरिकी दूतावास की रक्षा के लिए विशेष बल भेजे जाने के अमेरिकी आग्रह को खारिज कर दिया। शुक्रवार को अमेरिका के इस दूतावास पर हमला हुआ था।
उल्लेखनीय है कि एक विवादास्पद अमेरिकी फिल्म को लेकर अरब जगत में अमेरिका के खिलाफ जबर्दस्त विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। मंगलवार को लीबिया स्थित अमेरिकी दूतावास पर हुए हमले में अमेरिकी राजदूत सहित तीन अन्य अमेरिकी मारे गए थे।
उल्लेखनीय है कि एक विवादास्पद अमेरिकी फिल्म को लेकर अरब जगत में अमेरिका के खिलाफ जबर्दस्त विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। मंगलवार को लीबिया स्थित अमेरिकी दूतावास पर हुए हमले में अमेरिकी राजदूत सहित तीन अन्य अमेरिकी मारे गए थे। | यह एक सारांश है: एक विवादास्पद फिल्म को लेकर अरब जगत में अमेरिका के खिलाफ जबर्दस्त विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। लीबिया स्थित अमेरिकी दूतावास पर हुए हमले में अमेरिकी राजदूत सहित तीन अन्य अमेरिकी मारे गए थे। | 9 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: Asus ZenFone 6 स्मार्टफोन को लॉन्च कर दिया गया है। Asus ने गुरुवार को स्पेन में आयोजित इवेंट के दौरान असूस ज़ेनफोन 6 से पर्दा उठाया है। ZenFone 6 पिछले साल लॉन्च हुए कंपनी के फ्लैगशिप स्मार्टफोन ZenFone 5Z का अपग्रेड वर्जन है। Asus ZenFone 6 कंपनी का पहला ऐसा स्मार्टफोन है जो रोटेटिंग कैमरा सेटअप से लैस है। फोन के फ्रंट पैनल पर बेज़ल को कम करने और फुल-स्क्रीन देने के मकसद से कंपनी ने अपने असूस ज़ेनफोन 6 में फ्लिपिंग कैमरा को चुना है। फोन के बैक पैनल पर डुअल कैमरा सेटअप है लेकिन सेल्फी लेने के लिए यह रोटेट हो जाता है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि Asus अपनी प्रतिद्धंदी कंपनी Samsung के नक्शेकदम पर चल रही है, ऐसा इसलिए क्योंकि सैमसंग ने भी पिछले महीने रोटेटिंग कैमरा वाले गैलेक्सी ए80 को लॉन्च किया था।
असूस ज़ेनफोन 6 की शुरुआती कीमत 499 यूरो ( लगभग 39,100 रुपये) है। इस दाम में 6 जीबी + 64 जीबी वेरिएंट मिलेगा, इसके 6 जीबी + 128 जीबी स्टोरेज वेरिएंट की कीमत 559 यूरो ( लगभग 43,800 रुपये) और इसका टॉप वेरिएंट 8 जीबी + 256 जीबी स्टोरेज वेरिएंट से लैस है और इसकी कीमत 599 यूरो ( लगभग 47,000 रुपये) है।
Asus ZenFone 6 अब असूस ई-शॉप पर उपलब्ध है। अभी इस बात की जानकारी नहीं मिली है कि आखिर असूस ज़ेनफोन 6 को भारत कब लाया जाएगा। Asus ने बताया कि फोन के दो कलर वेरिएंट हैं - मिडनाइट ब्लैक और ट्विलाइट सिल्वर।
डुअल-सिम (नैनो) वाला असूस ज़ेनफोन 6 एंड्रॉयड पाई पर आधारित जे़न यूआई 6 पर चलता है। कंपनी का वादा किया है कि इस स्मार्टफोन को एंड्रॉयड क्यू और एंड्र्रॉयड आर में अपग्रेड किया जाएगा। कंपनी ने एंड्रॉयड बीटा प्रोग्राम को ज्वाइन कर लिया है।
Asus ZenFone 6 में 6.4 इंच का फुल-एचडी+ (1080x2340 पिक्सल) आईपीएस स्क्रीन है, जिसका आस्पेक्ट रेशियो 19.5:9 है। स्क्रीन-टू-बॉडी रेशियो 92 प्रतिशत है। असूस ज़ेनफोन 6 में ऑक्टा-कोर क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 855 प्रोसेसर, 8 जीबी तक रैम और ऐड्रेनो 640 जीपीयू का इस्तेमाल हुआ है।
अब बात कैमरा सेटअप की। फोन में डुअल कैमरा सेटअप है, 48 मेगापिक्सल का प्राइमरी सेंसर है जिसका अपर्चर एफ/1.79 है और यह लेसर फोकस के साथ आता है, साथ ही 13 मेगापिक्सल का सेकेंडरी अल्ट्रा-वाइड एंगल कैमरा भी है। Asus ब्रांड के इस फोन में जान फूंकने के लिए 5,000 एमएएच की बैटरी है जो क्विक चार्ज 4.0 सपोर्ट के साथ आती है।
फोन में डुअल स्पीकर्स के साथ डुअल स्मार्ट एंप्लीफायर और 3.5 मिलीमीटर ऑडियो जैक है। फोन में 256 जीबी तक इनबिल्ट स्टोरेज (UFS 2.1) है, माइक्रोएसडी कार्ड की मदद से स्टोरेज को 2टीबी तक बढ़ाना संभव है। कनेक्टिविटी की बात करें तो ZenFone 6 में यूएसबी टाइप-सी, एनएफसी, वाई-फाई 802.11एसी (वाई-फाई 5), ब्लूटूथ वर्जन 5.0 और जीपीएस शामिल है।
फोन की लंबाई-चौड़ाई 159.1x75.11x8.1-9.1 मिलीमीटर और वज़न 190 ग्राम है। फोन के ऊपरी और निचले हिस्से में स्टीरियो स्पीकर्स हैं, साथ ही नोटिफिकेशन एलईडी लाइट भी दी गई है। | सारांश: Asus ZenFone 6 में है डुअल कैमरा सेटअप के साथ रोटेटिंग मॉड्यूल
एंड्रॉयड पाई पर आधारित जे़न यूआई 6 पर चलता है Asus ZenFone 6
Asus ZenFone 6 के दो कलर वेरिएंट उतारे गए हैं | 5 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) ने कहा कि डच बैंक ने अपनी पूंजी बाजार कारोबार इकाई में उत्पादन प्रबंधन में बदलाव की पहल के लिए उसे रणनीतिक साझेदार के रूप में चुना है। कंपनी ने एक बयान जारी कर कहा, टीसीएस बैंक को उसके सात देशों-अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, हंगरी, फिलीपींस, सिंगापुर और भारत-के कार्यालयों में वैश्विक सेवा डेस्क, सेवा संचालन और सभी अन्य सूचना प्रौद्योगिकी आधारभूत संरचना लाइब्रेरी सेवा उपलब्ध कराएगी। कंपनी ने कहा कि यह ठेका कई लाख डॉलर का है और इसकी अवधि पांच सालों की है। कंपनी ने हालांकि स्पष्ट वित्तीय जानकारी नहीं दी। टीसीएस के बैंकिंग उद्योग समाधान इकाई के प्रमुख रमणमूर्ति मगापु ने कहा, बैंक जहां अपनी मजबूत बाजार स्थिति का फायदा उठाना चाहता है, वहीं सूचना प्रौद्योगिकी बदलाव की पहल के अपने व्यापक अनुभव, इस विशेष कारोबारी क्षेत्र में कार्य करने की बेहतर क्षमता और दीर्घकालिक साझेदारी की इच्छा के कारण हम डच बैंक को बेहतर सेवा देने में सक्षम हैं। | यहाँ एक सारांश है:टीसीएस को डच बैंक ने अपनी पूंजी बाजार कारोबार इकाई में उत्पादन प्रबंधन में बदलाव की पहल के लिए उसे रणनीतिक साझेदार के रूप में चुना है। | 12 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: केंद्रीय मंत्री फारूक अब्दुल्ला ने गुरुवार को राष्ट्रीय खेल विकास विधेयक पर कैबिनेट की आंतरिक चर्चा पर खेलमंत्री अजय माकन के बयान की निंदा करते हुए उन पर गोपनीयता की शपथ तोड़ने का आरोप लगाया है। जम्मू कश्मीर क्रिकेट संघप के अध्यक्ष अब्दुल्ला ने प्रेस ट्रस्ट से कहा, किसी मंत्री को कैबिनेट की आंतरिक बातचीत का खुलासा करने का अधिकार नहीं है जब तक कि कैबिनेट तय ना करे। यह गोपनीयता की शपथ का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि माकन को उन स्टेडियमों का ध्यान रखना चाहिए तो मंत्रालय के अधीन है और उन्हें दुरूस्त रखने की कोशिश करनी चाहिए ताकि खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में खेल सकें। उन्होंने कहा, माकन ने गोपनीयता की शपथ का उल्लंघन किया है। हम अगली कैबिनेट बैठक में इस पर बात करेंगे। मंत्री ने टीवी चैनल से कहा कि आरटीआई के खिलाफ कोई नहीं है। उन्होंने कहा, आरटीआई के खिलाफ कोई नहीं है। हममें से कोई नहीं। अजय माकन को समझना चाहिये कि कैबिनेट बैठक में जो कुछ हुआ, उस पर बाहर चर्चा नहीं करनी चाहिए। वह कैसे मंत्री हैं। हम आरटीआई के खिलाफ नहीं है। छिपाने को कुछ नहीं है। बीसीसीआई कोई सरकार से पैसा नहीं लेता। अब्दुल्ला ने कहा कि वह प्रधानमंत्री तक मसला नहीं ले जाएंगे। | यह एक सारांश है: फारूक ने खेल विधेयक पर कैबिनेट की आंतरिक चर्चा पर खेलमंत्री के बयान की निंदा करते हुए उन पर गोपनीयता की शपथ तोड़ने का आरोप लगाया है। | 9 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: यूपी में समाजवादी पार्टी को बहुमत मिलने के बाद से ही जिस तरह से एक के बाद एक हिंसा की खबरें आ रही हैं उससे आशंका जताई जाने लगी है कि यूपी में कहीं गुंडाराज की वापसी तो नहीं हो रही है। गुरुवार को आगरा में बीएसपी के एक पूर्व प्रधान की गोली मार कर हत्या कर दी गई तो भदोही और सीतापुर में दलितों के घर में आग लगा दी गई। अम्बेडकर नगर में माया सरकार में परिवहन मंत्री रहे राम अचल के बेटे संजय ने अपने गांव के ही लोगों पर गोलियां चला दीं।
यूपी में बलिया के भुज छपरा गांव में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं पर पांच दलित महिलाओं और बच्चों को बुरी तरह मारने−पीटने के आरोप लगे हैं। कहा जा रहा है कि जब यह पता चला कि इस गांव के ज्यादातर लोगों ने जेडीयू को वोट दिया था तो 40 से ज्यादा सपा कार्यकर्ता गांव में घुसे और मारपीट की।टिप्पणियां
आगरा में सपा कार्यकर्ताओं पर बहुजन समाज पार्टी के प्रधान के पति की हत्या का आरोप लगा है। बाह विधानसभा क्षेत्र में समाजवादी पार्टी के राजा अरिदमन सिंह ने बीएसपी के मधुसूदन शर्मा को हराया है। होली के दिन बाह के पार्वती पूरा गांव में बीएसपी की प्रधान गुड्डी देवी के पति मुन्ना लाल जाटव की हत्या कर दी गई। हत्या से पहले घर में तोड़फोड़ भी की गई है।
भदोही में समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं पर दलितों के घर में आग लगाने का आरोप लगा है। खबरों के मुताबिक इनमें से एक व्यक्ति के घर पर राहुल गांधी भी आए थे। पीड़ित के मुताबिक कुछ लोगों आए और उनके घर में आग लगा दी। पुलिस का कहना है कि शराब के नशे में कुछ लोगों ने दलितों के घर में आग लगाई है और घटना की जांच की जा रही है।
सीतापुर जिले के बबना गांव में समाजवादी पार्टी के समर्थकों ने एक निर्दलीय उम्मीदवार के समर्थकों की झोपड़ियां जला दीं। इस इलाके से समाजवादी पार्टी के महेंद्र कुमार सिंह जीते हैं। उनके और निर्दलीय उम्मीदवार शिव कुमार गुप्ता के समर्थकों में रात झड़प हो गई दोनों ने एक दूसरे पर पथराव किया। बाद में समाजवादी पार्टी के कुछ समर्थकों ने दो झोपड़ियों में आग लगा दी।
यूपी में बलिया के भुज छपरा गांव में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं पर पांच दलित महिलाओं और बच्चों को बुरी तरह मारने−पीटने के आरोप लगे हैं। कहा जा रहा है कि जब यह पता चला कि इस गांव के ज्यादातर लोगों ने जेडीयू को वोट दिया था तो 40 से ज्यादा सपा कार्यकर्ता गांव में घुसे और मारपीट की।टिप्पणियां
आगरा में सपा कार्यकर्ताओं पर बहुजन समाज पार्टी के प्रधान के पति की हत्या का आरोप लगा है। बाह विधानसभा क्षेत्र में समाजवादी पार्टी के राजा अरिदमन सिंह ने बीएसपी के मधुसूदन शर्मा को हराया है। होली के दिन बाह के पार्वती पूरा गांव में बीएसपी की प्रधान गुड्डी देवी के पति मुन्ना लाल जाटव की हत्या कर दी गई। हत्या से पहले घर में तोड़फोड़ भी की गई है।
भदोही में समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं पर दलितों के घर में आग लगाने का आरोप लगा है। खबरों के मुताबिक इनमें से एक व्यक्ति के घर पर राहुल गांधी भी आए थे। पीड़ित के मुताबिक कुछ लोगों आए और उनके घर में आग लगा दी। पुलिस का कहना है कि शराब के नशे में कुछ लोगों ने दलितों के घर में आग लगाई है और घटना की जांच की जा रही है।
सीतापुर जिले के बबना गांव में समाजवादी पार्टी के समर्थकों ने एक निर्दलीय उम्मीदवार के समर्थकों की झोपड़ियां जला दीं। इस इलाके से समाजवादी पार्टी के महेंद्र कुमार सिंह जीते हैं। उनके और निर्दलीय उम्मीदवार शिव कुमार गुप्ता के समर्थकों में रात झड़प हो गई दोनों ने एक दूसरे पर पथराव किया। बाद में समाजवादी पार्टी के कुछ समर्थकों ने दो झोपड़ियों में आग लगा दी।
आगरा में सपा कार्यकर्ताओं पर बहुजन समाज पार्टी के प्रधान के पति की हत्या का आरोप लगा है। बाह विधानसभा क्षेत्र में समाजवादी पार्टी के राजा अरिदमन सिंह ने बीएसपी के मधुसूदन शर्मा को हराया है। होली के दिन बाह के पार्वती पूरा गांव में बीएसपी की प्रधान गुड्डी देवी के पति मुन्ना लाल जाटव की हत्या कर दी गई। हत्या से पहले घर में तोड़फोड़ भी की गई है।
भदोही में समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं पर दलितों के घर में आग लगाने का आरोप लगा है। खबरों के मुताबिक इनमें से एक व्यक्ति के घर पर राहुल गांधी भी आए थे। पीड़ित के मुताबिक कुछ लोगों आए और उनके घर में आग लगा दी। पुलिस का कहना है कि शराब के नशे में कुछ लोगों ने दलितों के घर में आग लगाई है और घटना की जांच की जा रही है।
सीतापुर जिले के बबना गांव में समाजवादी पार्टी के समर्थकों ने एक निर्दलीय उम्मीदवार के समर्थकों की झोपड़ियां जला दीं। इस इलाके से समाजवादी पार्टी के महेंद्र कुमार सिंह जीते हैं। उनके और निर्दलीय उम्मीदवार शिव कुमार गुप्ता के समर्थकों में रात झड़प हो गई दोनों ने एक दूसरे पर पथराव किया। बाद में समाजवादी पार्टी के कुछ समर्थकों ने दो झोपड़ियों में आग लगा दी।
सीतापुर जिले के बबना गांव में समाजवादी पार्टी के समर्थकों ने एक निर्दलीय उम्मीदवार के समर्थकों की झोपड़ियां जला दीं। इस इलाके से समाजवादी पार्टी के महेंद्र कुमार सिंह जीते हैं। उनके और निर्दलीय उम्मीदवार शिव कुमार गुप्ता के समर्थकों में रात झड़प हो गई दोनों ने एक दूसरे पर पथराव किया। बाद में समाजवादी पार्टी के कुछ समर्थकों ने दो झोपड़ियों में आग लगा दी। | संक्षिप्त सारांश: यूपी में सपा की जीत के बाद जिस तरह से एक के बाद एक हिंसा की खबरें आ रही हैं उससे आशंका जताई जाने लगी है कि यूपी में कहीं गुंडाराज की वापसी तो नहीं हो रही है। | 29 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: अमेरिका की एक अदालत ने अपने पूर्व नियोक्ता एक आईएफएस अधिकारी और उसके पति पर उत्पीड़न और ‘गुलामी’ कराने का आरोप लगाने वाली एक भारतीय नौकरानी के पक्ष में फैसला दिया है और उसने नौकरानी द्वारा दंपति से 15 लाख डॉलर मुआवजा दिए जाने की मांग करने वाली याचिका को स्वीकार कर लिया है।टिप्पणियां
अमेरिकी जिला न्यायाधीश विक्टर मारेरो ने अमेरिकी मजिस्ट्रेट न्यायाधीश की रिपोर्ट को ‘पूरी तरह से स्वीकार कर लिया’ जिसमें मास ने नीना मल्होत्रा और उनके पति जोगेश मल्होत्रा को नौकरानी शांति गुरूंग को ‘बर्बर व्यवहार’ और ‘भावनात्मक परेशानी’ के मुआवजे के रूप में करीब 15 लाख डालर देने के लिये कहा था। शांति ने वर्ष 2006 से तीन साल तक के लिये काम किया था।
मारेरो ने मंगलवार को अपने आदेश में कहा, ‘वादी शांति गुरूंग का क्षति के लिये मुआवजा दिया जाने का आवेदन स्वीकार किया जाता है। इसके मुताबिक फैसला गुरूंग के पक्ष में है और प्रतिवादी जोगेश मल्होत्रा और नीना मल्होत्रा को गणना के मुताबिक 1,458,335 डॉलर देने होंगे।’ उन्होंने आदेश दिया कि यह मुद्दा अब यहीं बंद होता है। मारेरो ने कहा कि मल्होत्रा ने मास की रिपोर्ट पर कोई आपत्ति नहीं जताई जबकि उनके पास ऐसा करने के लिये 14 दिन का समय था।
अमेरिकी जिला न्यायाधीश विक्टर मारेरो ने अमेरिकी मजिस्ट्रेट न्यायाधीश की रिपोर्ट को ‘पूरी तरह से स्वीकार कर लिया’ जिसमें मास ने नीना मल्होत्रा और उनके पति जोगेश मल्होत्रा को नौकरानी शांति गुरूंग को ‘बर्बर व्यवहार’ और ‘भावनात्मक परेशानी’ के मुआवजे के रूप में करीब 15 लाख डालर देने के लिये कहा था। शांति ने वर्ष 2006 से तीन साल तक के लिये काम किया था।
मारेरो ने मंगलवार को अपने आदेश में कहा, ‘वादी शांति गुरूंग का क्षति के लिये मुआवजा दिया जाने का आवेदन स्वीकार किया जाता है। इसके मुताबिक फैसला गुरूंग के पक्ष में है और प्रतिवादी जोगेश मल्होत्रा और नीना मल्होत्रा को गणना के मुताबिक 1,458,335 डॉलर देने होंगे।’ उन्होंने आदेश दिया कि यह मुद्दा अब यहीं बंद होता है। मारेरो ने कहा कि मल्होत्रा ने मास की रिपोर्ट पर कोई आपत्ति नहीं जताई जबकि उनके पास ऐसा करने के लिये 14 दिन का समय था।
मारेरो ने मंगलवार को अपने आदेश में कहा, ‘वादी शांति गुरूंग का क्षति के लिये मुआवजा दिया जाने का आवेदन स्वीकार किया जाता है। इसके मुताबिक फैसला गुरूंग के पक्ष में है और प्रतिवादी जोगेश मल्होत्रा और नीना मल्होत्रा को गणना के मुताबिक 1,458,335 डॉलर देने होंगे।’ उन्होंने आदेश दिया कि यह मुद्दा अब यहीं बंद होता है। मारेरो ने कहा कि मल्होत्रा ने मास की रिपोर्ट पर कोई आपत्ति नहीं जताई जबकि उनके पास ऐसा करने के लिये 14 दिन का समय था। | यहाँ एक सारांश है:अमेरिका की एक अदालत ने अपने पूर्व नियोक्ता एक आईएफएस अधिकारी और उसके पति पर उत्पीड़न और ‘गुलामी’ कराने का आरोप लगाने वाली एक भारतीय नौकरानी के पक्ष में फैसला दिया है। | 17 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: लोकसभा सचिवालय ने सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल को फरवरी में विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान एक रैली में संसद सदस्यों के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी करने के कारण विशेषाधिकार हनन का नोटिस जारी किया है।
टीम अन्ना के एक सदस्य ने यह जानकारी शनिवार को दी।
कांग्रेस सांसद सज्जन सिंह वर्मा ने 12 मार्च को लोकसभा सचिवालय में एक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें कहा गया है कि केजरीवाल ने लोकसभा सदस्यों को 'बलात्कारी, हत्यारे और लुटेरे' कहा था।
वर्मा ने शिकायत में केजरीवाल की टिप्पणी की निंदा की है और उनके वक्तव्य को 'लोकतंत्र पर हमला' बताया है।टिप्पणियां
मध्य प्रदेश के देवास से सांसद वर्मा ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) कार्यकर्ता केजरीवाल को कड़ी सजा देने की मांग भी की है।
उल्लेखनीय है कि 25 फरवरी को केजरीवाल ने कहा था, "इस संसद में 163 ऐसे सदस्य हैं जिनके खिलाफ संगीन अपराधिक मुकदमे चल रहे हैं। इस संसद में बलात्कारी, हत्यारे और लुटेरे बैठते हैं। ऐसे में आप कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि संसद जन लोकपाल विधेयक पारित करेगी? आप कैसे गरीबी और भ्रष्टाचार से निजात पाने की उम्मीद कर सकते हैं?"
टीम अन्ना के एक सदस्य ने यह जानकारी शनिवार को दी।
कांग्रेस सांसद सज्जन सिंह वर्मा ने 12 मार्च को लोकसभा सचिवालय में एक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें कहा गया है कि केजरीवाल ने लोकसभा सदस्यों को 'बलात्कारी, हत्यारे और लुटेरे' कहा था।
वर्मा ने शिकायत में केजरीवाल की टिप्पणी की निंदा की है और उनके वक्तव्य को 'लोकतंत्र पर हमला' बताया है।टिप्पणियां
मध्य प्रदेश के देवास से सांसद वर्मा ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) कार्यकर्ता केजरीवाल को कड़ी सजा देने की मांग भी की है।
उल्लेखनीय है कि 25 फरवरी को केजरीवाल ने कहा था, "इस संसद में 163 ऐसे सदस्य हैं जिनके खिलाफ संगीन अपराधिक मुकदमे चल रहे हैं। इस संसद में बलात्कारी, हत्यारे और लुटेरे बैठते हैं। ऐसे में आप कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि संसद जन लोकपाल विधेयक पारित करेगी? आप कैसे गरीबी और भ्रष्टाचार से निजात पाने की उम्मीद कर सकते हैं?"
कांग्रेस सांसद सज्जन सिंह वर्मा ने 12 मार्च को लोकसभा सचिवालय में एक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें कहा गया है कि केजरीवाल ने लोकसभा सदस्यों को 'बलात्कारी, हत्यारे और लुटेरे' कहा था।
वर्मा ने शिकायत में केजरीवाल की टिप्पणी की निंदा की है और उनके वक्तव्य को 'लोकतंत्र पर हमला' बताया है।टिप्पणियां
मध्य प्रदेश के देवास से सांसद वर्मा ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) कार्यकर्ता केजरीवाल को कड़ी सजा देने की मांग भी की है।
उल्लेखनीय है कि 25 फरवरी को केजरीवाल ने कहा था, "इस संसद में 163 ऐसे सदस्य हैं जिनके खिलाफ संगीन अपराधिक मुकदमे चल रहे हैं। इस संसद में बलात्कारी, हत्यारे और लुटेरे बैठते हैं। ऐसे में आप कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि संसद जन लोकपाल विधेयक पारित करेगी? आप कैसे गरीबी और भ्रष्टाचार से निजात पाने की उम्मीद कर सकते हैं?"
वर्मा ने शिकायत में केजरीवाल की टिप्पणी की निंदा की है और उनके वक्तव्य को 'लोकतंत्र पर हमला' बताया है।टिप्पणियां
मध्य प्रदेश के देवास से सांसद वर्मा ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) कार्यकर्ता केजरीवाल को कड़ी सजा देने की मांग भी की है।
उल्लेखनीय है कि 25 फरवरी को केजरीवाल ने कहा था, "इस संसद में 163 ऐसे सदस्य हैं जिनके खिलाफ संगीन अपराधिक मुकदमे चल रहे हैं। इस संसद में बलात्कारी, हत्यारे और लुटेरे बैठते हैं। ऐसे में आप कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि संसद जन लोकपाल विधेयक पारित करेगी? आप कैसे गरीबी और भ्रष्टाचार से निजात पाने की उम्मीद कर सकते हैं?"
मध्य प्रदेश के देवास से सांसद वर्मा ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) कार्यकर्ता केजरीवाल को कड़ी सजा देने की मांग भी की है।
उल्लेखनीय है कि 25 फरवरी को केजरीवाल ने कहा था, "इस संसद में 163 ऐसे सदस्य हैं जिनके खिलाफ संगीन अपराधिक मुकदमे चल रहे हैं। इस संसद में बलात्कारी, हत्यारे और लुटेरे बैठते हैं। ऐसे में आप कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि संसद जन लोकपाल विधेयक पारित करेगी? आप कैसे गरीबी और भ्रष्टाचार से निजात पाने की उम्मीद कर सकते हैं?"
उल्लेखनीय है कि 25 फरवरी को केजरीवाल ने कहा था, "इस संसद में 163 ऐसे सदस्य हैं जिनके खिलाफ संगीन अपराधिक मुकदमे चल रहे हैं। इस संसद में बलात्कारी, हत्यारे और लुटेरे बैठते हैं। ऐसे में आप कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि संसद जन लोकपाल विधेयक पारित करेगी? आप कैसे गरीबी और भ्रष्टाचार से निजात पाने की उम्मीद कर सकते हैं?" | संक्षिप्त सारांश: लोकसभा सचिवालय ने सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल को फरवरी में विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान एक रैली में संसद सदस्यों के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी करने के कारण विशेषाधिकार हनन का नोटिस जारी किया है। | 0 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: भाजपा ने आरोप लगाया कि ‘शासन के संकट’ और ‘नेतृत्व की कमी’ से जूझ रही कांग्रेस इंडियन मुजाहिदीन और इशरत जहां जैसे मामलों को उठाकर आगामी लोकसभा चुनाव का साम्प्रदायीकरण करने का प्रयास कर रही है।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कहा, ‘2014 के चुनावों का साम्प्रदायीकरण करने के अंधाधुंध प्रयास में कांग्रेस राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का भी साम्प्रदायीकरण करने में जुटी है। इस प्रयास में कांग्रेस के प्रवक्ता शकील अहमद ने इंडियन मुजाहिदीन को 2002 के गुजरात के दंगों की उपज बताकर इतिहास के पुनर्लेखन की कोशिश कर डाली।’टिप्पणियां
पार्टी की ओर से जारी जेटली ने अपने लेख में कहा, सरकार और नेतृत्व दोनों को संकट से घिरा देखकर संप्रग की रणनीति चुनाव का एजेंडा बदलने की है। उन्होंने कहा, ‘लेकिन किसी भी कीमत पर ‘भारत की कहानी’ का नाश करने के संप्रग के प्रयास को चुनावी एजेंडा का केन्द्रीय मंच नहीं बनने दिया जाएगा।’ उन्होंने कहा कि इंडियन मुजाहिदीन को गुजरात दंगों की उपज बताकर अहमद ने इतिहास का पुनर्लेखन करने के प्रयास में यह स्थापित करने की कोशिश की है कि यह संगठन उन पीड़ितों का है जो 2002 दंगों का शिकार हुए।
भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि ऐसा करते हुए कांग्रेस के प्रवक्ता इंडियन मुजाहिदीन के अंतरराष्ट्रीय संदर्भ और इसके पीछे की पाकिस्तान की रणनीति को भूल गए।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कहा, ‘2014 के चुनावों का साम्प्रदायीकरण करने के अंधाधुंध प्रयास में कांग्रेस राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का भी साम्प्रदायीकरण करने में जुटी है। इस प्रयास में कांग्रेस के प्रवक्ता शकील अहमद ने इंडियन मुजाहिदीन को 2002 के गुजरात के दंगों की उपज बताकर इतिहास के पुनर्लेखन की कोशिश कर डाली।’टिप्पणियां
पार्टी की ओर से जारी जेटली ने अपने लेख में कहा, सरकार और नेतृत्व दोनों को संकट से घिरा देखकर संप्रग की रणनीति चुनाव का एजेंडा बदलने की है। उन्होंने कहा, ‘लेकिन किसी भी कीमत पर ‘भारत की कहानी’ का नाश करने के संप्रग के प्रयास को चुनावी एजेंडा का केन्द्रीय मंच नहीं बनने दिया जाएगा।’ उन्होंने कहा कि इंडियन मुजाहिदीन को गुजरात दंगों की उपज बताकर अहमद ने इतिहास का पुनर्लेखन करने के प्रयास में यह स्थापित करने की कोशिश की है कि यह संगठन उन पीड़ितों का है जो 2002 दंगों का शिकार हुए।
भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि ऐसा करते हुए कांग्रेस के प्रवक्ता इंडियन मुजाहिदीन के अंतरराष्ट्रीय संदर्भ और इसके पीछे की पाकिस्तान की रणनीति को भूल गए।
पार्टी की ओर से जारी जेटली ने अपने लेख में कहा, सरकार और नेतृत्व दोनों को संकट से घिरा देखकर संप्रग की रणनीति चुनाव का एजेंडा बदलने की है। उन्होंने कहा, ‘लेकिन किसी भी कीमत पर ‘भारत की कहानी’ का नाश करने के संप्रग के प्रयास को चुनावी एजेंडा का केन्द्रीय मंच नहीं बनने दिया जाएगा।’ उन्होंने कहा कि इंडियन मुजाहिदीन को गुजरात दंगों की उपज बताकर अहमद ने इतिहास का पुनर्लेखन करने के प्रयास में यह स्थापित करने की कोशिश की है कि यह संगठन उन पीड़ितों का है जो 2002 दंगों का शिकार हुए।
भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि ऐसा करते हुए कांग्रेस के प्रवक्ता इंडियन मुजाहिदीन के अंतरराष्ट्रीय संदर्भ और इसके पीछे की पाकिस्तान की रणनीति को भूल गए।
भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि ऐसा करते हुए कांग्रेस के प्रवक्ता इंडियन मुजाहिदीन के अंतरराष्ट्रीय संदर्भ और इसके पीछे की पाकिस्तान की रणनीति को भूल गए। | संक्षिप्त सारांश: भाजपा ने आरोप लगाया कि ‘शासन के संकट’ और ‘नेतृत्व की कमी’ से जूझ रही कांग्रेस इंडियन मुजाहिदीन और इशरत जहां जैसे मामलों को उठाकर आगामी लोकसभा चुनाव का साम्प्रदायीकरण करने का प्रयास कर रही है। | 10 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: 2-जी घोटाले की जांच के लिए बनी ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी के सामने मंगलवार को आहूत बैठक से एक बार भाजपा के सदस्य बाहर आ गए। उन्होंने एक बार यह मांग दोहराई कि इस मामले में गवाहों की सूची बनाई जाए। इस सूची में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वित्तमंत्री पी चिदंबरम को शामिल करने की बात भाजपा सदस्यों ने रखी।
आज की बैठक में उन्होंने समिति के अध्यक्ष पीसी चाको से पीएम और वित्तमंत्री को बुलाए जाने की मांग पर फैसला लेने को कहा। इस बात के जवाब में चाको ने कहा कि वह ऐसा नहीं करेंगे। उनका जवाब था कि जब भी कोई फैसला होगा तब भाजपा नेताओं को सूचित कर दिया जाएगा।
जेपीसी के सामने आज रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर सुब्बा राव पेश हुए और उन्होंने साफ किया कि 2-जी स्पेक्ट्रम को लेकर चिदंबरम से उनके कोई मतभेद नहीं थे।
इससे पहले 22 अगस्त को बीजेपी के सदस्य जसवंत सिंह, यशवंत सिन्हा, रविशंकर प्रसाद बैठक से बाहर आ गए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि कांग्रेस के सदस्यों ने असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया है। टिप्पणियां
दरअसल, बीजेपी और कांग्रेस के सदस्यों में उन लोगों की लिस्ट को लेकर मतभेद था जिन्हें पूछताछ के लिए जेपीसी के सामने बुलाया जाए। बीजेपी के सदस्य चाहते थे कि 2-जी मामले में पूछताछ के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वित्तमंत्री पी चिदंबरम को भी जेपीसी के सामने बुलाया जाए लेकिन, कांग्रेस सदस्य इसका विरोध कर रहे थे।
उसके बाद जेपीसी की कोई बैठक नहीं हुई। जेपीसी के चेयरमैन पीसी चाको ने तय किया कि चाहे बीजेपी के सदस्य आए ना आएं वह मुख्य गवाहों को पूछताछ के लिए बुलाएंगे। इसी सिलसिले में आज डी सुब्बाराव को बुलाया गया है जो अप्रैल 2007 से सितंबर 2008 तक फाइनेंस सेक्रेट्री थे।
आज की बैठक में उन्होंने समिति के अध्यक्ष पीसी चाको से पीएम और वित्तमंत्री को बुलाए जाने की मांग पर फैसला लेने को कहा। इस बात के जवाब में चाको ने कहा कि वह ऐसा नहीं करेंगे। उनका जवाब था कि जब भी कोई फैसला होगा तब भाजपा नेताओं को सूचित कर दिया जाएगा।
जेपीसी के सामने आज रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर सुब्बा राव पेश हुए और उन्होंने साफ किया कि 2-जी स्पेक्ट्रम को लेकर चिदंबरम से उनके कोई मतभेद नहीं थे।
इससे पहले 22 अगस्त को बीजेपी के सदस्य जसवंत सिंह, यशवंत सिन्हा, रविशंकर प्रसाद बैठक से बाहर आ गए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि कांग्रेस के सदस्यों ने असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया है। टिप्पणियां
दरअसल, बीजेपी और कांग्रेस के सदस्यों में उन लोगों की लिस्ट को लेकर मतभेद था जिन्हें पूछताछ के लिए जेपीसी के सामने बुलाया जाए। बीजेपी के सदस्य चाहते थे कि 2-जी मामले में पूछताछ के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वित्तमंत्री पी चिदंबरम को भी जेपीसी के सामने बुलाया जाए लेकिन, कांग्रेस सदस्य इसका विरोध कर रहे थे।
उसके बाद जेपीसी की कोई बैठक नहीं हुई। जेपीसी के चेयरमैन पीसी चाको ने तय किया कि चाहे बीजेपी के सदस्य आए ना आएं वह मुख्य गवाहों को पूछताछ के लिए बुलाएंगे। इसी सिलसिले में आज डी सुब्बाराव को बुलाया गया है जो अप्रैल 2007 से सितंबर 2008 तक फाइनेंस सेक्रेट्री थे।
इससे पहले 22 अगस्त को बीजेपी के सदस्य जसवंत सिंह, यशवंत सिन्हा, रविशंकर प्रसाद बैठक से बाहर आ गए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि कांग्रेस के सदस्यों ने असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया है। टिप्पणियां
दरअसल, बीजेपी और कांग्रेस के सदस्यों में उन लोगों की लिस्ट को लेकर मतभेद था जिन्हें पूछताछ के लिए जेपीसी के सामने बुलाया जाए। बीजेपी के सदस्य चाहते थे कि 2-जी मामले में पूछताछ के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वित्तमंत्री पी चिदंबरम को भी जेपीसी के सामने बुलाया जाए लेकिन, कांग्रेस सदस्य इसका विरोध कर रहे थे।
उसके बाद जेपीसी की कोई बैठक नहीं हुई। जेपीसी के चेयरमैन पीसी चाको ने तय किया कि चाहे बीजेपी के सदस्य आए ना आएं वह मुख्य गवाहों को पूछताछ के लिए बुलाएंगे। इसी सिलसिले में आज डी सुब्बाराव को बुलाया गया है जो अप्रैल 2007 से सितंबर 2008 तक फाइनेंस सेक्रेट्री थे।
दरअसल, बीजेपी और कांग्रेस के सदस्यों में उन लोगों की लिस्ट को लेकर मतभेद था जिन्हें पूछताछ के लिए जेपीसी के सामने बुलाया जाए। बीजेपी के सदस्य चाहते थे कि 2-जी मामले में पूछताछ के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वित्तमंत्री पी चिदंबरम को भी जेपीसी के सामने बुलाया जाए लेकिन, कांग्रेस सदस्य इसका विरोध कर रहे थे।
उसके बाद जेपीसी की कोई बैठक नहीं हुई। जेपीसी के चेयरमैन पीसी चाको ने तय किया कि चाहे बीजेपी के सदस्य आए ना आएं वह मुख्य गवाहों को पूछताछ के लिए बुलाएंगे। इसी सिलसिले में आज डी सुब्बाराव को बुलाया गया है जो अप्रैल 2007 से सितंबर 2008 तक फाइनेंस सेक्रेट्री थे।
उसके बाद जेपीसी की कोई बैठक नहीं हुई। जेपीसी के चेयरमैन पीसी चाको ने तय किया कि चाहे बीजेपी के सदस्य आए ना आएं वह मुख्य गवाहों को पूछताछ के लिए बुलाएंगे। इसी सिलसिले में आज डी सुब्बाराव को बुलाया गया है जो अप्रैल 2007 से सितंबर 2008 तक फाइनेंस सेक्रेट्री थे। | संक्षिप्त सारांश: 2-जी घोटाले की जांच के लिए बनी जेपीसी की मंगलवार को आहूत बैठक से एक बार भाजपा के सदस्य बाहर आ गए। उन्होंने एक बार यह मांग दोहराई कि इस मामले में गवाहों की सूची बनाई जाए। | 0 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: बिहार के नक्सल प्रभावित गया जिले के रोषनगंज थाना क्षेत्र में शुक्रवार को दोपहर में नक्सलियों ने बारूदी सुरंग विस्फोट कर दिया। इस विस्फोट की चपेट में एक पुलिस जीप के आ जाने से छह पुलिसकर्मी सहित आठ लोगों की मौत हो गई। घटना के जिम्मेदार नक्सलियों के खिलाफ लगातार छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है। टिप्पणियां
गया के पुलिस अधीक्षक (नगर) अख्तर हुसैन ने बताया कि स्थानीय बाल विकास परियोजना पदाधिकारी के अनुरोध पर बांके बाजार प्रखंड के बारासोत गांव में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के चयन कार्यक्रम में सुरक्षा उपलब्ध कराकर एक पुलिस जीप से छह पुलिसकर्मी और दो ग्रामीण लौट रहे थे। इसी दौरान उचला गांव के समीप नक्सलियों द्वारा किए गए बारूदी सुरंग विस्फोट की चपेट में पुलिस जीप आ गई। विस्फोट इतना भयानक था कि जीप के परखच्चे उड़ गए। उन्होंने बताया कि इस विस्फोट में जीप पर सवार सहायक अवर निरीक्षक (एएसआई) प्रदुम्न राय सहित छह पुलिसकर्मियों और बारासोत निवासी रमेश मिस्त्री एवं सिरसा गांव निवासी पवन कुमार की मौत हो गई। सूत्रों के मुताबिक घटनास्थल से नक्सली पुलिसकर्मियों के कुछ हथियार भी अपने साथ ले गए हैं जबकि दो हथियार क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिसे पुलिस ने बरामद किया है।
मगध प्रक्षेत्र के पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) एऩ एच़ खान ने बताया कि क्षेत्र में नक्सलियों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों को भी लगाया गया है। घटनास्थल बिहार और झारखंड की सीमा पर बताया जा रहा है।
गया के पुलिस अधीक्षक (नगर) अख्तर हुसैन ने बताया कि स्थानीय बाल विकास परियोजना पदाधिकारी के अनुरोध पर बांके बाजार प्रखंड के बारासोत गांव में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के चयन कार्यक्रम में सुरक्षा उपलब्ध कराकर एक पुलिस जीप से छह पुलिसकर्मी और दो ग्रामीण लौट रहे थे। इसी दौरान उचला गांव के समीप नक्सलियों द्वारा किए गए बारूदी सुरंग विस्फोट की चपेट में पुलिस जीप आ गई। विस्फोट इतना भयानक था कि जीप के परखच्चे उड़ गए। उन्होंने बताया कि इस विस्फोट में जीप पर सवार सहायक अवर निरीक्षक (एएसआई) प्रदुम्न राय सहित छह पुलिसकर्मियों और बारासोत निवासी रमेश मिस्त्री एवं सिरसा गांव निवासी पवन कुमार की मौत हो गई। सूत्रों के मुताबिक घटनास्थल से नक्सली पुलिसकर्मियों के कुछ हथियार भी अपने साथ ले गए हैं जबकि दो हथियार क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिसे पुलिस ने बरामद किया है।
मगध प्रक्षेत्र के पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) एऩ एच़ खान ने बताया कि क्षेत्र में नक्सलियों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों को भी लगाया गया है। घटनास्थल बिहार और झारखंड की सीमा पर बताया जा रहा है।
मगध प्रक्षेत्र के पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) एऩ एच़ खान ने बताया कि क्षेत्र में नक्सलियों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों को भी लगाया गया है। घटनास्थल बिहार और झारखंड की सीमा पर बताया जा रहा है। | बिहार के नक्सल प्रभावित गया जिले के रोषनगंज थाना क्षेत्र में शुक्रवार को दोपहर में नक्सलियों ने बारूदी सुरंग विस्फोट कर दिया। इस विस्फोट की चपेट में एक पुलिस जीप के आ जाने से छह पुलिसकर्मी सहित आठ लोगों की मौत हो गई। | 26 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के अधिकारियों ने इंडोनेशियाई अलकायदा के सदस्य उमर पाटेक को गिरफ्तार कर लिया है। वह वर्ष 2002 के बाली बम विस्फोटों का संदिग्ध है, जिनमें 202 लोगों की मौत हुई थी। खुफिया एजेंसी आईएसआई के एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर एक दैनिक समाचार पत्र को बताया कि जेम्माह इस्लामिया आतंकवादी नेटवर्क के सदस्य पाटेक को हाल ही में गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा, हमने उसे कुछ दिन पहले ही गिरफ्तार किया है और प्रोटोकॉल के अनुसार गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और इससे संबंधित अन्य विभाग सुनिश्चित करेंगे कि उसे इंडोनेशिया वापस ले जाया जाए। पाटेक पर अमेरिका ने 10 लाख डॉलर का इनाम घोषित किया था। रिपोर्ट के मुताबिक आईएसआई 35 वर्षीय पाटेक से पूछताछ कर रही है और यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे इंडोनेशिया को सौंप दिया जाएगा। एक सवाल के जवाब में पाटेक की गिरफ्तारी में कई खुफिया संगठनों के संयुक्त प्रयासों से इनकार करते हुए अधिकारी ने कहा, नहीं, यह पूरी तरह से आईएसआई का प्रयास है। | संक्षिप्त पाठ: पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ने इंडोनेशियाई अलकायदा के सदस्य उमर पाटेक को गिरफ्तार कर लिया है। वह 2002 के बाली बम विस्फोटों का संदिग्ध है। | 30 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए आम नागरिकों और मंत्रियों की 10 सदस्यीय समिति गठित करने की अधिसूचना जारी करने की मांग सरकार द्वारा मान लेने पर विख्यात सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने पांच दिन से जारी अपना आमरण अनशन शनिवार को तोड़ दिया। जंतर-मंतर पर हजारे ने अपने हजारों उत्साही समर्थकों के बीच सरकार की ओर से अधिसूचना जारी करने को जनता की जीत करार देते हुए चेतावनी दी कि अगर 15 अगस्त तक लोकपाल विधेयक पास नहीं किया जाता है, तो वह तिरंगा लेकर एक बार फिर आंदोलन शुरू करेंगे। भ्रष्टाचार के मुद्दे पर जारी आमरण अनशन के पांचवें दिन एक छोटी बच्ची के हाथों नींबू पानी पीकर अनशन तोड़ने के बाद हजारे ने अपने संबोधन में कहा, यह मेरे लिए सबसे बड़ा दिन है। यह लोगों की जीत है, लेकिन अभी सही आजादी प्राप्त करने के मार्ग में लम्बा रास्ता तय करना है। भ्रष्टाचार की बुराई का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, देश के लिए लोग कितने एकजुट हैं...यह दिखाई दिया है। भगत सिंह, राजगुरु के इंकालाब जिंदाबाद के नारे का असर एक बार फिर दिखाई दिया। उस समय उन्होंने गोरे अंग्रेजों की नींद उड़ाई थी, आज आपने काले अंग्रेजों की नींद उड़ाई है। उन्होंने कहा कि देश के समक्ष अभी कई प्रश्न है, लेकिन सभी विषयों को एक साथ नहीं लिया जा सकता है। इन प्रश्नों को एक-एक कर के लेना होगा। आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए एक संगठन की जरूरत बताते हुए हजारे ने कहा, मैं भ्रष्टाचार और देश की समस्याओं को लेकर पूरे देश में घूमता रहूंगा और पूरे देश को इसमें शामिल करूंगा। इससे पहले, अन्ना हजारे की मांग मानते हुए सरकार ने शनिवार को लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने वाली एक संयुक्त समिति के गठन के लिए अधिसूचना जारी की। कानून मंत्रालय के विधायी विभाग के सचिव वीके भसीन ने इस अधिसूचना पर हस्ताक्षर किया और बाद में धरना स्थल यानी जंतर-मंतर पर किरण बेदी ने इसे सबको दिखाया। इस अधिसूचना में एक तरफ जहां यह बताया गया है कि समिति का क्या काम होगा, वहीं दूसरी तरफ समिति के 10 सदस्यों के नाम भी इसमें हैं। इस समिति का नेतृत्व प्रणब मुखर्जी करेंगे और पूर्व कानून मंत्री शांतिभूषण इसके सह अध्यक्ष होंगे। सरकार की तरफ से इसमें बतौर सदस्य कानून मंत्री वीरप्पा मोइली, दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल, गृहमंत्री पी चिदंबरम और जल संसाधन मंत्री सलमान खुर्शीद को नियुक्त किया गया है। दूसरी तरफ नागरिक समाज की तरफ से अन्ना हजारे, वरिष्ठ वकील शांतिभूषण, वकील प्रशांत भूषण, उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश संतोष हेगड़े और आरटीआई कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल शामिल हैं। सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश ने कहा, हमने इस मामले में एक सरकारी आदेश की मांग की थी। सरकार ने एक कदम और आगे बढ़ाकर अधिसूचना जारी कर दी। | नारों की गूंज और तालियों की जोरदार गड़गड़ाहट के बीच अन्ना हजारे ने एक छोटी बच्ची के हाथ से पानी पीकर अपना अनशन समाप्त किया। | 1 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने लीबिया में मानवीय सहायता कार्यों के लिए सैन्य विमानों के उपयोग को अपनी स्वीकृति प्रदान करते हुए कहा है कि लीबियाई नेता मुअम्मर गद्दाफी अपनी वैधता खो चुके हैं इसलिए उनको गद्दी छोड़ देनी चाहिए। व्हाइट हाउस में एक समाचार सम्मेलन के दौरान ओबामा ने कहा, गद्दाफी नेतृत्व की वैधता खो चुके हैं इसलिए उनको गद्दी छोड़ देनी चाहिए। लीबिया में लोगों के खिलाफ हिंसा रुकनी चाहिए और जो भी हिंसा फैला रहे हैं उनको जिम्मेदार ठहराना जाना चाहिए। लीबियाई जनता की स्वतंत्रता, लोकतंत्र और गौरव की चाहत पूरी की जानी चाहिए। मैंने उन मिस्रवासियों की स्वदेश वापसी के लिए अमेरिकी सैन्य विमानों के इस्तेमाल की स्वीकृति दी है जो ट्यूनिशिया की सीमा पर पहुंच गए थे। दूसरी तरफ अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन ने स्वीकार किया है कि लीबियाई सेना ने विपक्षी दलों के साथ अपनी लड़ाई में बमबारी करने के लिए युद्धक विमानों का उपयोग किया है। टेलीविजन फुटेज का हवाला देते हुए पेंटागन के प्रवक्ता कर्नल डेव लापन ने संवाददाताओं से कहा, यह साफ है कि उन्होंने विमानों का इस्तेमाल किया है। हालांकि यह साफ नहीं है कि इस हमले का लक्ष्य विद्रोही थे या आम नागरिक। | संक्षिप्त सारांश: व्हाइट हाउस में एक समाचार सम्मेलन के दौरान ओबामा ने कहा, गद्दाफी नेतृत्व की वैधता खो चुके हैं इसलिए उनको गद्दी छोड़ देनी चाहिए। | 23 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: नेटवर्किंग मार्केटिंग कंपनी एमवे इंडिया के चेयरमैन एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) विलियम एस पिंकने और कंपनी के दो निदेशकों को वित्तीय अनियमितता के आरोप में केरल पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने गिरफ्तार कर लिया।
अपराध शाखा के सूत्रों ने बताया कि गिरफ्तार निदेशकों में संजय मल्होत्रा और अंशु बुद्धिराजा शामिल हैं।
यह गिरफ्तारी वायनाड की अपराध शाखा द्वारा 2011 में दर्ज तीन मामलों में वॉरंट जारी किए जाने के बाद हुई है। सूत्रों ने बताया कि इन अधिकारियों को प्राइस चिट्स एंड मनी सर्कुलेशन स्कीम्स (प्रतिबंध कानून) के उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस ने तीनों अधिकारियों ने इसी महीने पूछताछ की थी और उन्हें आगे की पूछताछ के लिए बुलाया गया था। पुलिस स्टेशन पहुंचने पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
पिछले साल अपराध शाखा (आर्थिक अपराध) इकाई ने एमवे के त्रिसूर, कोझिकोड तथा कन्नूर के दफ्तरों पर छापेमारी की थी। यह छापेमारी मनी चेन गतिविधियों का पता लगाने के लिए की गई थी। टिप्पणियां
इन केंद्रों पर कंपनी के गोदामों को बंद कर दिया गया और उत्पादित सामान जब्त किया गया था।
यह छापेमारी कोझिकोड की विसालाक्षी की शिकायत पर की गई थी। महिला ने दावा किया था कि उसे कंपनी की वजह से नुकसान हुआ है।
अपराध शाखा के सूत्रों ने बताया कि गिरफ्तार निदेशकों में संजय मल्होत्रा और अंशु बुद्धिराजा शामिल हैं।
यह गिरफ्तारी वायनाड की अपराध शाखा द्वारा 2011 में दर्ज तीन मामलों में वॉरंट जारी किए जाने के बाद हुई है। सूत्रों ने बताया कि इन अधिकारियों को प्राइस चिट्स एंड मनी सर्कुलेशन स्कीम्स (प्रतिबंध कानून) के उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस ने तीनों अधिकारियों ने इसी महीने पूछताछ की थी और उन्हें आगे की पूछताछ के लिए बुलाया गया था। पुलिस स्टेशन पहुंचने पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
पिछले साल अपराध शाखा (आर्थिक अपराध) इकाई ने एमवे के त्रिसूर, कोझिकोड तथा कन्नूर के दफ्तरों पर छापेमारी की थी। यह छापेमारी मनी चेन गतिविधियों का पता लगाने के लिए की गई थी। टिप्पणियां
इन केंद्रों पर कंपनी के गोदामों को बंद कर दिया गया और उत्पादित सामान जब्त किया गया था।
यह छापेमारी कोझिकोड की विसालाक्षी की शिकायत पर की गई थी। महिला ने दावा किया था कि उसे कंपनी की वजह से नुकसान हुआ है।
यह गिरफ्तारी वायनाड की अपराध शाखा द्वारा 2011 में दर्ज तीन मामलों में वॉरंट जारी किए जाने के बाद हुई है। सूत्रों ने बताया कि इन अधिकारियों को प्राइस चिट्स एंड मनी सर्कुलेशन स्कीम्स (प्रतिबंध कानून) के उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस ने तीनों अधिकारियों ने इसी महीने पूछताछ की थी और उन्हें आगे की पूछताछ के लिए बुलाया गया था। पुलिस स्टेशन पहुंचने पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
पिछले साल अपराध शाखा (आर्थिक अपराध) इकाई ने एमवे के त्रिसूर, कोझिकोड तथा कन्नूर के दफ्तरों पर छापेमारी की थी। यह छापेमारी मनी चेन गतिविधियों का पता लगाने के लिए की गई थी। टिप्पणियां
इन केंद्रों पर कंपनी के गोदामों को बंद कर दिया गया और उत्पादित सामान जब्त किया गया था।
यह छापेमारी कोझिकोड की विसालाक्षी की शिकायत पर की गई थी। महिला ने दावा किया था कि उसे कंपनी की वजह से नुकसान हुआ है।
पुलिस ने तीनों अधिकारियों ने इसी महीने पूछताछ की थी और उन्हें आगे की पूछताछ के लिए बुलाया गया था। पुलिस स्टेशन पहुंचने पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
पिछले साल अपराध शाखा (आर्थिक अपराध) इकाई ने एमवे के त्रिसूर, कोझिकोड तथा कन्नूर के दफ्तरों पर छापेमारी की थी। यह छापेमारी मनी चेन गतिविधियों का पता लगाने के लिए की गई थी। टिप्पणियां
इन केंद्रों पर कंपनी के गोदामों को बंद कर दिया गया और उत्पादित सामान जब्त किया गया था।
यह छापेमारी कोझिकोड की विसालाक्षी की शिकायत पर की गई थी। महिला ने दावा किया था कि उसे कंपनी की वजह से नुकसान हुआ है।
पिछले साल अपराध शाखा (आर्थिक अपराध) इकाई ने एमवे के त्रिसूर, कोझिकोड तथा कन्नूर के दफ्तरों पर छापेमारी की थी। यह छापेमारी मनी चेन गतिविधियों का पता लगाने के लिए की गई थी। टिप्पणियां
इन केंद्रों पर कंपनी के गोदामों को बंद कर दिया गया और उत्पादित सामान जब्त किया गया था।
यह छापेमारी कोझिकोड की विसालाक्षी की शिकायत पर की गई थी। महिला ने दावा किया था कि उसे कंपनी की वजह से नुकसान हुआ है।
इन केंद्रों पर कंपनी के गोदामों को बंद कर दिया गया और उत्पादित सामान जब्त किया गया था।
यह छापेमारी कोझिकोड की विसालाक्षी की शिकायत पर की गई थी। महिला ने दावा किया था कि उसे कंपनी की वजह से नुकसान हुआ है।
यह छापेमारी कोझिकोड की विसालाक्षी की शिकायत पर की गई थी। महिला ने दावा किया था कि उसे कंपनी की वजह से नुकसान हुआ है। | सारांश: नेटवर्किंग मार्केटिंग कंपनी एमवे इंडिया के चेयरमैन एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) विलियम एस पिंकने और कंपनी के दो निदेशकों को वित्तीय अनियमितता के आरोप में केरल पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने गिरफ्तार कर लिया। | 31 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: पाकिस्तान में सेना के शीर्ष पदों पर परिवर्तन की तैयारी हो चुकी है। नए सेना प्रमुख की नियुक्ति से पहले ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टॉफ कमिटी के प्रमुख की नियुक्ति को लेकर एक प्रस्ताव प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के पास भेजा गया है।
खबरों में कहा गया है कि औपचारिक प्रस्ताव में पाकिस्तानी नौसेना के प्रमुख एडमिरल आसिफ संदीला, लेफ्टिनेंट जनरल हारून असलम तथा एयर चीफ मार्शल ताहिर रफीक बट्ट के नाम संभावितों के तौर पर दिए गए हैं।
इस्लामाबाद में अटकलें लगाई जा रही हैं कि सेना प्रमुख जनरल अशफाक परवेज कयानी को ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टॉफ कमिटी का नया प्रमुख बनाया जा सकता है। यह पद प्रतीकात्मक होता है।
मौजूदा प्रमुख जनरल खालिद शमीम वायने आगामी छह अक्टूबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं तो सेना प्रमुख कयानी का कार्यकाल 28 नवंबर को खत्म हो रहा है। टिप्पणियां
समाचार चैनल जियो न्यूज ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि शरीफ आगामी 6 अक्टूबर को ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टॉफ कमिटी के प्रमुख का चयन करेंगे।
पाकिस्तान के सूचना मंत्री परवेज राशिद ने शरीफ के पास भेजे गए प्रस्ताव के बारे में टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
खबरों में कहा गया है कि औपचारिक प्रस्ताव में पाकिस्तानी नौसेना के प्रमुख एडमिरल आसिफ संदीला, लेफ्टिनेंट जनरल हारून असलम तथा एयर चीफ मार्शल ताहिर रफीक बट्ट के नाम संभावितों के तौर पर दिए गए हैं।
इस्लामाबाद में अटकलें लगाई जा रही हैं कि सेना प्रमुख जनरल अशफाक परवेज कयानी को ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टॉफ कमिटी का नया प्रमुख बनाया जा सकता है। यह पद प्रतीकात्मक होता है।
मौजूदा प्रमुख जनरल खालिद शमीम वायने आगामी छह अक्टूबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं तो सेना प्रमुख कयानी का कार्यकाल 28 नवंबर को खत्म हो रहा है। टिप्पणियां
समाचार चैनल जियो न्यूज ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि शरीफ आगामी 6 अक्टूबर को ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टॉफ कमिटी के प्रमुख का चयन करेंगे।
पाकिस्तान के सूचना मंत्री परवेज राशिद ने शरीफ के पास भेजे गए प्रस्ताव के बारे में टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
इस्लामाबाद में अटकलें लगाई जा रही हैं कि सेना प्रमुख जनरल अशफाक परवेज कयानी को ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टॉफ कमिटी का नया प्रमुख बनाया जा सकता है। यह पद प्रतीकात्मक होता है।
मौजूदा प्रमुख जनरल खालिद शमीम वायने आगामी छह अक्टूबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं तो सेना प्रमुख कयानी का कार्यकाल 28 नवंबर को खत्म हो रहा है। टिप्पणियां
समाचार चैनल जियो न्यूज ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि शरीफ आगामी 6 अक्टूबर को ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टॉफ कमिटी के प्रमुख का चयन करेंगे।
पाकिस्तान के सूचना मंत्री परवेज राशिद ने शरीफ के पास भेजे गए प्रस्ताव के बारे में टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
मौजूदा प्रमुख जनरल खालिद शमीम वायने आगामी छह अक्टूबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं तो सेना प्रमुख कयानी का कार्यकाल 28 नवंबर को खत्म हो रहा है। टिप्पणियां
समाचार चैनल जियो न्यूज ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि शरीफ आगामी 6 अक्टूबर को ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टॉफ कमिटी के प्रमुख का चयन करेंगे।
पाकिस्तान के सूचना मंत्री परवेज राशिद ने शरीफ के पास भेजे गए प्रस्ताव के बारे में टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
समाचार चैनल जियो न्यूज ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि शरीफ आगामी 6 अक्टूबर को ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टॉफ कमिटी के प्रमुख का चयन करेंगे।
पाकिस्तान के सूचना मंत्री परवेज राशिद ने शरीफ के पास भेजे गए प्रस्ताव के बारे में टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
पाकिस्तान के सूचना मंत्री परवेज राशिद ने शरीफ के पास भेजे गए प्रस्ताव के बारे में टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। | संक्षिप्त पाठ: पाकिस्तान में सेना के शीर्ष पदों पर परिवर्तन की तैयारी हो चुकी है। नए सेना प्रमुख की नियुक्ति से पहले ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टॉफ कमिटी के प्रमुख की नियुक्ति को लेकर एक प्रस्ताव प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के पास भेजा गया है। | 14 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: अमेरिका की विदेशमंत्री हिलेरी क्लिंटन को न्यूयॉर्क स्थित एक अस्पताल में उपचार के बाद आधिकारिक रूप से छुट्टी दे दी गई है।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, बुधवार को क्लिंटन के प्रवक्ता फिलिप रीन्स ने कहा, विदेशमंत्री हिलेरी को शाम को अस्पताल से छुट्टी मिल गई। उनके चिकित्सक दल ने यह सलाह दी है कि उनकी सेहत में हर स्तर पर सुधार हो रहा है, और उन्हें यह भरोसा है कि वह बिल्कुल स्वस्थ हो जाएंगी।
उन्होंने कहा, वह फिर से कार्यालय जाने को लेकर उत्सुक हैं।टिप्पणियां
हिलेरी के सिर में खून जम जाने की शिकायत पर उन्हें रविवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके चिकित्सकों के अनुसार यह खून दाएं कान के पीछे उनके मस्तिष्क और खोपड़ी के बीच की नस में जमा हुआ था।
हालांकि, चिकित्सकों का कहना है कि इस वजह से न तो उन्हें कोई मस्तिष्काघात हुआ है और न ही उनके तंत्रिका तंत्र को कोई नुकसान पहुंचा है और वह पूरी तरह स्वस्थ हो जाएंगी।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, बुधवार को क्लिंटन के प्रवक्ता फिलिप रीन्स ने कहा, विदेशमंत्री हिलेरी को शाम को अस्पताल से छुट्टी मिल गई। उनके चिकित्सक दल ने यह सलाह दी है कि उनकी सेहत में हर स्तर पर सुधार हो रहा है, और उन्हें यह भरोसा है कि वह बिल्कुल स्वस्थ हो जाएंगी।
उन्होंने कहा, वह फिर से कार्यालय जाने को लेकर उत्सुक हैं।टिप्पणियां
हिलेरी के सिर में खून जम जाने की शिकायत पर उन्हें रविवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके चिकित्सकों के अनुसार यह खून दाएं कान के पीछे उनके मस्तिष्क और खोपड़ी के बीच की नस में जमा हुआ था।
हालांकि, चिकित्सकों का कहना है कि इस वजह से न तो उन्हें कोई मस्तिष्काघात हुआ है और न ही उनके तंत्रिका तंत्र को कोई नुकसान पहुंचा है और वह पूरी तरह स्वस्थ हो जाएंगी।
उन्होंने कहा, वह फिर से कार्यालय जाने को लेकर उत्सुक हैं।टिप्पणियां
हिलेरी के सिर में खून जम जाने की शिकायत पर उन्हें रविवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके चिकित्सकों के अनुसार यह खून दाएं कान के पीछे उनके मस्तिष्क और खोपड़ी के बीच की नस में जमा हुआ था।
हालांकि, चिकित्सकों का कहना है कि इस वजह से न तो उन्हें कोई मस्तिष्काघात हुआ है और न ही उनके तंत्रिका तंत्र को कोई नुकसान पहुंचा है और वह पूरी तरह स्वस्थ हो जाएंगी।
हिलेरी के सिर में खून जम जाने की शिकायत पर उन्हें रविवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके चिकित्सकों के अनुसार यह खून दाएं कान के पीछे उनके मस्तिष्क और खोपड़ी के बीच की नस में जमा हुआ था।
हालांकि, चिकित्सकों का कहना है कि इस वजह से न तो उन्हें कोई मस्तिष्काघात हुआ है और न ही उनके तंत्रिका तंत्र को कोई नुकसान पहुंचा है और वह पूरी तरह स्वस्थ हो जाएंगी।
हालांकि, चिकित्सकों का कहना है कि इस वजह से न तो उन्हें कोई मस्तिष्काघात हुआ है और न ही उनके तंत्रिका तंत्र को कोई नुकसान पहुंचा है और वह पूरी तरह स्वस्थ हो जाएंगी। | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: अमेरिका की विदेशमंत्री हिलेरी क्लिंटन को न्यूयॉर्क स्थित एक अस्पताल में उपचार के बाद आधिकारिक रूप से छुट्टी दे दी गई है। | 19 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ (Kamal Nath) ने शुक्रवार को सोनिया गांधी से मुलाकात की. मध्य प्रदेश में नए अध्यक्ष के मुद्दे पर उन्होंने सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) से मुलाकात की. बातचीत के बाद कमलनाथ ने कहा, "सोनिया गांधी से कई मुद्दों पर बातचीत हुई. उनसे मध्य प्रदेश के संगठन पर भी बातचीत हुई. मैं 6 महीने से लगा हूं कि मध्यप्रदेश में नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए. लोकसभा चुनाव के बाद भी मैंने कहा था कि नया अध्यक्ष बनाया जाए." कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात करने के लिए दिल्ली आए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शुक्रवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ किसी भी दिक्कत से इंकार किया.
आजकल ऐसी ख़बरें आ रही हैं कि प्रदेश में कांग्रेस का नेतृत्व करने को लेकर गुटबाजी हो रही है. सोनिया गांधी के आवास पर उनसे मुलाकात के बाद कमलनाथ, जो मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री होने के साथ-साथ कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष भी हैं, ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "मुझे नहीं लगता, ज्योतिरादित्य सिंधिया नाखुश हैं..."
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा कि सोनिया गांधी से मुलाकात में प्रदेश संगठन पर चर्चा के साथ-साथ इस बात पर भी विचार-विमर्श हुआ कि लोकसभा चुनाव के बाद नया प्रदेशाध्यक्ष नियुक्त किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, "मैं यह बात कई बार कह चुका हूं, और एक बार फिर यही कहा..."
यह पूछे जाने पर कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शीर्ष पद नहीं दिए जाने की स्थिति में 'अन्य विकल्प तलाशने' की धमकी दी थी, कमलनाथ ने कहा, "मुझे नहीं लगता, यह सही है, और मुझे नहीं लगता, वह किसी से नाराज़ हैं..."
ज्योतिरादित्य सिंधिया की नाराज़गी की अटकलों को हाल ही में उस समय बल मिला, जब उन्होंने जम्मू एवं कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को खत्म कर देने के केंद्र सरकार के फैसले के समर्थन में टिप्पणियां कीं. आधिकारिक रूप से उन्होंने कहा कि पार्टी को छोड़कर जाने का 'सवाल ही पैदा नहीं होता...' | संक्षिप्त सारांश: सोनिया गांधी से मिले मध्य प्रदेश के सीएम कमलनाथ
सीएम कमलनाथ ने कहा- राज्य में हो नया अध्यक्ष
'सिंधिया के साथ किसी भी दिक्कत से इंकार किया' | 8 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: आखिरकार नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Modi government) को अयोध्या में जमीन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट क्यों जाना पड़ा? इसकी टाइमिंग को लेकर भी कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. सरकारी सूत्रों का कहना है कि राम मंदिर पर आगे बढ़ने के बारे में मोदी सरकार के शीर्ष स्तर पर संसद का शीतकालीन सत्र समाप्त होने के बाद ही मंथन शुरू हो गया था. इसी सत्र में मोदी सरकार ने सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए सरकारी नौकरियों और उच्च शैक्षणिक संस्थानों में 10 प्रतिशत आरक्षण देने का संविधान संशोधन बिल पारित कराया था. इससे उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में BJP को नाराज सवर्ण समर्थकों को मनाने में काफी हद तक मदद मिली, लेकिन BJP को मिले फीडबैक में यह कहा गया कि Ayodhya Case, यानी राम मंदिर पर भी सरकार को कुछ करना होगा, ताकि उत्तर प्रदेश में SP-BSP गठबंधन की काट खोजी जा सके.
शीर्ष नेतृत्व को राम मंदिर को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं की भावना का एक नमूना दिल्ली के रामलीला मैदान पर राष्ट्रीय परिषद की बैठक में अध्यक्ष अमित शाह के भाषण के दौरान देखने को मिला. उन्होंने जैसे ही अयोध्या का नाम लिया देश के कोने-कोने से आए पार्टी के हजारों कार्यकर्ताओं ने इस कदर जयश्री राम के नारे और तालियां बजाईं कि शाह को अपना भाषण काफी देर तक रोके रखना पड़ा. सबसे ज्यादा आवाज़ उस कोने से आई जहां उत्तर प्रदेश और बिहार से आए बीजेपी कार्यकर्ताओं को बैठाया गया था. हालांकि साल की शुरुआत में एएनआई को दिए इंटरव्यू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर निर्माण के लिए अध्यादेश लाने के सवाल पर कहा था कि सरकार न्यायिक प्रक्रिया पूरा होने का इंतजार करेगी. लेकिन यूपी बिहार से मिले फीडबैक के बाद तय किया गया कि इस मुद्दे पर अब कोई न कोई ठोस कदम उठाना जरूरी है ताकि कार्यकर्ताओं को और हिंदुत्व के वोट बैंक को ठोस संदेश दिया जा सके.
सरकार की कोशिश यह थी कि कदम उठाते वक्त संवैधानिक मर्यादा और दायरे का ध्यान रहे, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सरकार की किरकिरी न हो और न ही यह भाव जाए कि सरकार सुप्रीम कोर्ट की अनदेखी कर रही है. उपलब्ध न्यायिक विकल्पों में पाया गया कि गैरविवादित जमीन को राम जन्मभूमि न्यास को दिए जाने का विकल्प है जिस पर सरकार आगे बढ़ सकती है. सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या विवाद पर सुनवाई में लगातार हो रही देरी से भी सरकार के सब्र का बांध टूटा. यह कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद के पटना में दिए गए बयान से पता चला जिसमें उन्होंने कहा कि जब सबरीमला, कर्नाटक विधानसभा जैसे मामलों की सुनवाई तुरंत हो सकती है तो फिर जन्मभूमि विवाद पर सुनवाई बार-बार क्यों टाली जा रही है. बीजेपी को यह भी देखना है कि प्रयागराज में चल रहे अर्द्धकुंभ में विश्व हिंदू परिषद ने संतों की बैठक बुलाने की बात कह कर दबाव बढ़ा दिया. बीजेपी अर्द्ध कुंभ का इस्तेमाल 2019 के आम चुनाव के लिए हिंदुत्व का मुद्दा कें में लाने के लिए कर रही है. योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल की वहां बैठक और संतों की धर्म संसद इसी का हिस्सा है.
इसी दौरान तय किया गया कि राम जन्मभूमि न्यास से कहा जाए कि वे अपने हिस्से की जमीन सौंपने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखे. न्यास ने संसद सत्र खत्म होने के बाद इसी महीने यह पत्र कें सरकार को लिखा, जिसके आधार पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. हालांकि एक विकल्प सुप्रीम कोर्ट को नजरअंदाज कर सीधे शासकीय आदेश के जरिए न्यास को 42 एकड़ जमीन वापस करने का भी था, लेकिन शीर्ष स्तर पर कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के जरिए यह काम किया जाए. बीजेपी सूत्रों के अनुसार सरकार के इस फैसले ने कांग्रेस के सामने दिक्कत खड़ी कर दी है, क्योंकि अब उसे कहना होगा कि वह इस जमीन को न्यास को सौंपने पर क्या रुख रखती है. सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी न मिलने पर मोदी सरकार यह जमीन न्यास को सौंपने के लिए बजट सत्र में बिल लाने का विकल्प भी खुला रख रही है. कुल मिलाकर कोशिश यह है कि लोक सभा चुनाव तक राम मंदिर निर्माण के लिए कोई न कोई ठोस तस्वीर निकल कर सामने आए, ताकि हिंदी भाषी राज्यों में इसका फायदा उठाया जा सके. | संक्षिप्त पाठ: फीडबैक के बाद बीजेपी ने उठाया कदम
यूपी में गठबंधन की काट खोजने में मदद की उम्मीद
चुनाव में अहम हो सकता है यह मुद्दा | 13 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल ने बेसुरा राग अलापते हुए कहा, ‘‘मोदी को कश्मीर और भारत में कश्मीरियों, मुसलमानों और दलितों के खिलाफ लगातार हो रहे अत्याचार के लिए पहले अंतरराष्ट्रीय समुदाय के प्रति जवाबदेह होना चाहिए.’’ उन्होंने कहा, ‘‘बलूचिस्तान लोकतांत्रिक पाकिस्तान का अभिन्न हिस्सा है और किसी तानाशाह की गलतियां भारतीय प्रधानमंत्री को हमारे अंदरूनी मामलों में बोलने का अधिकार नहीं देतीं.’’
उन्होंने कहा कि पिछले दो महीने से कश्मीर कर्फ्यू में है और कई निर्दोष कश्मीरियों की मौत हुई है. बिलावल ने कहा, ‘‘पाकिस्तान में मोदी के कुछ यार हो सकते हैं लेकिन पाकिस्तान के लोग बलूचिस्तान या पाकिस्तान के अन्य किसी अभिन्न हिस्से के खिलाफ ऐसी भाषा नहीं बर्दाश्त करेंगे. हम एक संप्रभु राष्ट्र हैं और हमारे पास अपनी संप्रभुता को किसी भी कीमत पर बनाए रखने के लिए सभी उपाय हैं.’’टिप्पणियां
उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने पाकिस्तान की सभी लोकतांत्रिक शक्तियों के साथ मिलकर मोदी के इस अपमानजनक बयान की निंदा की है और उनसे कश्मीर मुद्दे पर हीलाहवाली करने एवं इसे लंबा खींचने के बजाय वहां के लोगों को आत्मनिर्णय का अधिकार देने की मांग की है. बिलावल ने शिकायती अंदाज में कहा कहा, ‘‘दुनिया के सबसे विस्फोटक मुद्दे कश्मीर से ध्यान बंटाने की कोशिश कामयाब नहीं होगी.’’(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
उन्होंने कहा कि पिछले दो महीने से कश्मीर कर्फ्यू में है और कई निर्दोष कश्मीरियों की मौत हुई है. बिलावल ने कहा, ‘‘पाकिस्तान में मोदी के कुछ यार हो सकते हैं लेकिन पाकिस्तान के लोग बलूचिस्तान या पाकिस्तान के अन्य किसी अभिन्न हिस्से के खिलाफ ऐसी भाषा नहीं बर्दाश्त करेंगे. हम एक संप्रभु राष्ट्र हैं और हमारे पास अपनी संप्रभुता को किसी भी कीमत पर बनाए रखने के लिए सभी उपाय हैं.’’टिप्पणियां
उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने पाकिस्तान की सभी लोकतांत्रिक शक्तियों के साथ मिलकर मोदी के इस अपमानजनक बयान की निंदा की है और उनसे कश्मीर मुद्दे पर हीलाहवाली करने एवं इसे लंबा खींचने के बजाय वहां के लोगों को आत्मनिर्णय का अधिकार देने की मांग की है. बिलावल ने शिकायती अंदाज में कहा कहा, ‘‘दुनिया के सबसे विस्फोटक मुद्दे कश्मीर से ध्यान बंटाने की कोशिश कामयाब नहीं होगी.’’(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने पाकिस्तान की सभी लोकतांत्रिक शक्तियों के साथ मिलकर मोदी के इस अपमानजनक बयान की निंदा की है और उनसे कश्मीर मुद्दे पर हीलाहवाली करने एवं इसे लंबा खींचने के बजाय वहां के लोगों को आत्मनिर्णय का अधिकार देने की मांग की है. बिलावल ने शिकायती अंदाज में कहा कहा, ‘‘दुनिया के सबसे विस्फोटक मुद्दे कश्मीर से ध्यान बंटाने की कोशिश कामयाब नहीं होगी.’’(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) | यह एक सारांश है: 'प्रधानमंत्री के शब्द बहुत ही भड़काऊ, गैर जिम्मेदाराना और उत्तेजक हैं'
'मोदी को पहले अंतरराष्ट्रीय समुदाय के प्रति जवाबदेह होना चाहिए'
बिलावल ने कहा, ‘‘पाकिस्तान में मोदी के कुछ यार हो सकते हैं लेकिन...'' | 24 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: बांग्लादेश के खिलाफ हैदराबाद टेस्ट के तीसरे दिन भारतीय स्पीडस्टर उमेश यादव ने शनिवार को कमाल की गेंदबाजी की. विदर्भ के इस तेज गेंदबाज ने बांग्लादेशी बल्लेबाजों को अपनी तेजी और रिवर्स स्विंग से कई बार परेशान किया. बांग्लादेशी टीम के हरफनमौला शाकिब अल हसन ने न केवल उमेश की गेंदबाजी की प्रशंसा की बल्कि वे यह कहने से भी नहीं चूके कि उमेश की गेंदबाजी के रूप में उन्होंने अपने टेस्ट करियर में बल्लेबाजी के दौरान सबसे मुश्किल समय का सामना किया. उमेश यादव 140 किमी प्रति घंटे से अधिक की गति से गेंदबाजी करते हैं. उमेश ने शनिवार को सुबह 9 ओवर का स्पैल फेंका था जिसमें उन्होंने अपनी तेजी और स्विंग से शाकिब को कई बार परेशान किया.
शाकिब ने तीसरे दिन कहा, ‘पिच में कुछ ज्यादा नहीं था. लेकिन हम केकेआर के लिये खेलते हैं, मैं उन्हें (उमेश को) अच्छी तरह जानता हूं. शायद मैंने अपने टेस्ट कैरियर में अपने सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी स्पैल का सामना किया. वह दोनों तरीकों से गेंद को मूव कर रहा था और उनकी कुछ गेंदों को खेलना बहुत मुश्किल था. इसके लिये सबसे अच्छा यही था कि मैं जितनी गेंदों का सर्वश्रेष्ठ तरीके से सामना कर सकता था, बस उन्हीं को खेलूं. मैंने उन्हें छूने की कोशिश नहीं की. मैं भाग्यशाली रहा कि मैं उस स्पैल में आउट नहीं हुआ.’ बांग्लादेश के इस अनुभवी क्रिकेटर ने विकेट को बल्लेबाजी के मुफीद करार किया. शाकिब के अनुसार, सिर्फ उमेश का स्पैल ही मुश्किल था, इसके अलावा कुछ नहीं हो रहा था. उन्होंने कहा, ‘नहीं, मुझे लगता है कि विकेट तीसरे दिन भी अच्छा है. हम जानते हैं कि गेंद टर्न लेती है और भारत में स्पिनरों को मदद मिलती है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा था. अभी तक विकेट अच्छा है लेकिन कल नया दिन होगा. देखते हैं क्या होता है.’
शाकिब ने तीसरे दिन कहा, ‘पिच में कुछ ज्यादा नहीं था. लेकिन हम केकेआर के लिये खेलते हैं, मैं उन्हें (उमेश को) अच्छी तरह जानता हूं. शायद मैंने अपने टेस्ट कैरियर में अपने सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी स्पैल का सामना किया. वह दोनों तरीकों से गेंद को मूव कर रहा था और उनकी कुछ गेंदों को खेलना बहुत मुश्किल था. इसके लिये सबसे अच्छा यही था कि मैं जितनी गेंदों का सर्वश्रेष्ठ तरीके से सामना कर सकता था, बस उन्हीं को खेलूं. मैंने उन्हें छूने की कोशिश नहीं की. मैं भाग्यशाली रहा कि मैं उस स्पैल में आउट नहीं हुआ.’ बांग्लादेश के इस अनुभवी क्रिकेटर ने विकेट को बल्लेबाजी के मुफीद करार किया. शाकिब के अनुसार, सिर्फ उमेश का स्पैल ही मुश्किल था, इसके अलावा कुछ नहीं हो रहा था. उन्होंने कहा, ‘नहीं, मुझे लगता है कि विकेट तीसरे दिन भी अच्छा है. हम जानते हैं कि गेंद टर्न लेती है और भारत में स्पिनरों को मदद मिलती है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा था. अभी तक विकेट अच्छा है लेकिन कल नया दिन होगा. देखते हैं क्या होता है.’ | सारांश: तेजी और स्विंग से उमेश ने हर किसी को प्रभावित किया
शाकिब बोले, टेस्ट करियर में सबसे कठिन स्पैल का सामना किया
उमेश की कुछ गेंदों को खेलना बेहद मुश्किल हो रहा था | 31 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: खुद को दिवंगत अभिनेता राजेश खन्ना की लिव-इन पार्टनर बताने वाली अनिता आडवाणी बिग बॉस के घर से बेदखल होने वाली तीसरी हस्ती बन गईं।टिप्पणियां
अनिता ने कहा कि बिग बॉस के घर में तीन हफ्ते तक रहने का उनका तजुर्बा अच्छा रहा पर उन्हें वक्त से पहले बाहर कर दिया गया।
बिग बॉस के घर से बेदखल होने के बाद अनिता ने कहा, ‘इतने कम समय में मेरा तजुर्बा अच्छा रहा पर मेरा मानना है कि मैं कुछ और दिन तक वहां रह सकती थी। मुझे लगता है कि मैं इसलिए बाहर हो गई क्योंकि मैं बिग बॉस के घर के अंदर की राजनीति और वहां के खेल में शामिल नहीं हो सकी।’
अनिता ने कहा कि बिग बॉस के घर में तीन हफ्ते तक रहने का उनका तजुर्बा अच्छा रहा पर उन्हें वक्त से पहले बाहर कर दिया गया।
बिग बॉस के घर से बेदखल होने के बाद अनिता ने कहा, ‘इतने कम समय में मेरा तजुर्बा अच्छा रहा पर मेरा मानना है कि मैं कुछ और दिन तक वहां रह सकती थी। मुझे लगता है कि मैं इसलिए बाहर हो गई क्योंकि मैं बिग बॉस के घर के अंदर की राजनीति और वहां के खेल में शामिल नहीं हो सकी।’
बिग बॉस के घर से बेदखल होने के बाद अनिता ने कहा, ‘इतने कम समय में मेरा तजुर्बा अच्छा रहा पर मेरा मानना है कि मैं कुछ और दिन तक वहां रह सकती थी। मुझे लगता है कि मैं इसलिए बाहर हो गई क्योंकि मैं बिग बॉस के घर के अंदर की राजनीति और वहां के खेल में शामिल नहीं हो सकी।’ | सारांश: खुद को दिवंगत अभिनेता राजेश खन्ना की लिव-इन पार्टनर बताने वाली अनिता आडवाणी बिग बॉस के घर से बेदखल होने वाली तीसरी हस्ती बन गईं। | 7 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: एक प्रतिष्ठित सुरक्षा एजेंसी के दो और खुफिया अधिकारियों ने एक सेक्स स्कैंडल के मामले में अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। अधिकारियों का इस्तीफा ऐसे समय में आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने सेक्स स्कैंडल में शामिल लोगों को उल्टी खोपड़ी का इंसान करार दिया।टिप्पणियां
खुफिया सेवा के सहायक निदेशक पॉल मॉरिसी ने मंगलवार को एक लिखित बयान में कहा कि एक अधिकारी की सुरक्षा मंजूरी वापस ले ली गई है, जिससे उसे बर्खास्त किए जाने की संभावना बढ़ गई है।
मॉरिसी ने कहा कि दो और अधिकारियों को गंभीर दुर्व्यवहार के आरोप से मुक्त कर दिया गया है, लेकिन वह प्रशासनिक कार्रवाई का सामना करेंगे। इससे पहले, एक और एजेंट को दुर्व्यवहार के आरोप से मुक्त किया गया था। ताजा कार्रवाई का मतलब यह है कि नौ खुफिया अधिकारियों की नौकरियां चली जाएंगी या स्कैंडल में नाम आने के कारण उन्हें सेवा से इस्तीफा देना होगा।
खुफिया सेवा के सहायक निदेशक पॉल मॉरिसी ने मंगलवार को एक लिखित बयान में कहा कि एक अधिकारी की सुरक्षा मंजूरी वापस ले ली गई है, जिससे उसे बर्खास्त किए जाने की संभावना बढ़ गई है।
मॉरिसी ने कहा कि दो और अधिकारियों को गंभीर दुर्व्यवहार के आरोप से मुक्त कर दिया गया है, लेकिन वह प्रशासनिक कार्रवाई का सामना करेंगे। इससे पहले, एक और एजेंट को दुर्व्यवहार के आरोप से मुक्त किया गया था। ताजा कार्रवाई का मतलब यह है कि नौ खुफिया अधिकारियों की नौकरियां चली जाएंगी या स्कैंडल में नाम आने के कारण उन्हें सेवा से इस्तीफा देना होगा।
मॉरिसी ने कहा कि दो और अधिकारियों को गंभीर दुर्व्यवहार के आरोप से मुक्त कर दिया गया है, लेकिन वह प्रशासनिक कार्रवाई का सामना करेंगे। इससे पहले, एक और एजेंट को दुर्व्यवहार के आरोप से मुक्त किया गया था। ताजा कार्रवाई का मतलब यह है कि नौ खुफिया अधिकारियों की नौकरियां चली जाएंगी या स्कैंडल में नाम आने के कारण उन्हें सेवा से इस्तीफा देना होगा। | सारांश: अधिकारियों का इस्तीफा ऐसे समय में आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने सेक्स स्कैंडल में शामिल लोगों को उल्टी खोपड़ी का इंसान करार दिया। | 7 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: मुस्लिम जगत में विरोध का कारण समझी जाने वाली एक कथित इस्लाम विरोधी फिल्म के निर्माता नाकौला बैसेले नाकौला को गिरफ्तार कर लिया गया है। फिल्म निर्माता की गिरफ्तारी की सूचना लॉस एंजिलिस के अटॉर्नी के कार्यालय ने दी।
अमेरिकी अटॉर्नी के कार्यालय के थोम म्रोजेक ने बताया, मैं उसके हिरासत में होने की पुष्टि कर सकता हूं। उसे लॉस एंजिलिस की संघीय अदालत में पेश किया जाना है। इसके आगे उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी। संघीय अदालत के दस्तावेज सीलबंद होने के कारण यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि फिल्म निर्माता को कौन सी अदालत में पेश किया जाएगा।टिप्पणियां
स्थानीय मीडिया की खबरों के मुताबिक, फिल्मकार की वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये अदालत में पेशी की संभावना थी। नाकौला को पूछताछ के लिए इस महीने की शुरुआत में हिरासत में भी लिया गया था, लेकिन बाद में उसे छोड़ दिया गया। ऐसा माना जा रहा है कि उसने अपनी पहचान छिपाई और एक छद्म नाम सैम बेसाइल से काम कर रहा था।
इस फिल्म निर्माता की बनाई फिल्म पर मुस्लिमों ने इस्लाम को गलत तरीके से पेश कर उसका अपमान करने का आरोप लगाया। फिल्म के विरोध में अरब जगत में अमेरिका विरोधी प्रदर्शन शुरू हो गए। इन प्रदर्शनों में कई लोगों की जान गई और अमेरिकी स्कूलों, दूतावासों और कारोबारी प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया।
अमेरिकी अटॉर्नी के कार्यालय के थोम म्रोजेक ने बताया, मैं उसके हिरासत में होने की पुष्टि कर सकता हूं। उसे लॉस एंजिलिस की संघीय अदालत में पेश किया जाना है। इसके आगे उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी। संघीय अदालत के दस्तावेज सीलबंद होने के कारण यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि फिल्म निर्माता को कौन सी अदालत में पेश किया जाएगा।टिप्पणियां
स्थानीय मीडिया की खबरों के मुताबिक, फिल्मकार की वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये अदालत में पेशी की संभावना थी। नाकौला को पूछताछ के लिए इस महीने की शुरुआत में हिरासत में भी लिया गया था, लेकिन बाद में उसे छोड़ दिया गया। ऐसा माना जा रहा है कि उसने अपनी पहचान छिपाई और एक छद्म नाम सैम बेसाइल से काम कर रहा था।
इस फिल्म निर्माता की बनाई फिल्म पर मुस्लिमों ने इस्लाम को गलत तरीके से पेश कर उसका अपमान करने का आरोप लगाया। फिल्म के विरोध में अरब जगत में अमेरिका विरोधी प्रदर्शन शुरू हो गए। इन प्रदर्शनों में कई लोगों की जान गई और अमेरिकी स्कूलों, दूतावासों और कारोबारी प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया।
स्थानीय मीडिया की खबरों के मुताबिक, फिल्मकार की वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये अदालत में पेशी की संभावना थी। नाकौला को पूछताछ के लिए इस महीने की शुरुआत में हिरासत में भी लिया गया था, लेकिन बाद में उसे छोड़ दिया गया। ऐसा माना जा रहा है कि उसने अपनी पहचान छिपाई और एक छद्म नाम सैम बेसाइल से काम कर रहा था।
इस फिल्म निर्माता की बनाई फिल्म पर मुस्लिमों ने इस्लाम को गलत तरीके से पेश कर उसका अपमान करने का आरोप लगाया। फिल्म के विरोध में अरब जगत में अमेरिका विरोधी प्रदर्शन शुरू हो गए। इन प्रदर्शनों में कई लोगों की जान गई और अमेरिकी स्कूलों, दूतावासों और कारोबारी प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया।
इस फिल्म निर्माता की बनाई फिल्म पर मुस्लिमों ने इस्लाम को गलत तरीके से पेश कर उसका अपमान करने का आरोप लगाया। फिल्म के विरोध में अरब जगत में अमेरिका विरोधी प्रदर्शन शुरू हो गए। इन प्रदर्शनों में कई लोगों की जान गई और अमेरिकी स्कूलों, दूतावासों और कारोबारी प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया। | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: मुस्लिम जगत में विरोध का कारण समझी जाने वाली एक कथित इस्लाम विरोधी फिल्म के निर्माता नाकौला बैसेले नाकौला को गिरफ्तार कर लिया गया है। | 3 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: ब्रेट ली ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाजी आक्रमण के सबसे उम्रदराज सदस्य हैं लेकिन 34 साल का होने के बावजूद वह अपनी रफ्तार और आक्रामकता से कोई समझौता नहीं करना चाहते हैं। पिछले सप्ताह ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग ने रफ्तार के इस सौदागर को टीम के तेज आक्रमण को इकाई में पिरोने वाला बताया था। उन्होंने अपने कप्तान की प्रशंसा को तहेदिल से स्वीकार करते हुए कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि अब उनमें काफी रफ्तार बची है और उन्हें विकेट हवा में लहराते हुए देखने में मजा आता है। ली ने कहा, मैं अब भी तेज गेंदबाजी करता हूं। लगभग छह महीने पहले मैंने कहा था कि यदि मैं 150 किमी की रफ्तार से गेंदबाजी नहीं कर पाता हूं तो मैं क्रिकेट नहीं खेलना चाहूंगा और यह सचाई है। उन्होंने कीनिया के खिलाफ होने वाले मैच के लिये अभ्यास सत्र के बाद कहा, मुझे रफ्तार में मजा आता है। मुझे विकेट हवा में लहराते हुए देखने में मजा आता है। मेरे लिये क्रिकेट का यह सबसे रोमांचक हिस्सा है लेकिन यहां उपमहाद्वीप में विकेट तेज गेंदबाजी के अधिक अनुकूल नहीं होते और इसलिए आपको कुछ नयी चीजें अपनानी पड़ती हैं। ऑस्ट्रेलिया की तरफ से अब विश्व कप में मिशेल जानसन ने आठ, शान टैट ने छह और ली ने तीन विकेट लिए हैं। | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: ब्रेट ली ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाजी आक्रमण के सबसे उम्रदराज सदस्य हैं लेकिन 34 साल का होने के बावजूद वह अपनी रफ्तार और आक्रामकता से कोई समझौता नहीं करना चाहते हैं। | 25 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने गुरुवार को संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार आर्थिक सुस्ती, रोजगार असुरक्षा तथा महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है।
राष्ट्रपति ने कहा, मैं इस बात को लेकर जागरूक हूं कि आकांक्षापूर्ण भारत उभर रहा है, एक ऐसा भारत जो अधिक अवसर, बेहतर विकल्प, बेहतर बुनियादी ढांचा तथा बेहतर सुरक्षा चाहता है। उन्होंने कहा, युवा हमारे राष्ट्र की सबसे बड़ी संपत्ति हैं। वे आत्मविश्वास व उत्साह से भरे हुए हैं। मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि उनका जुनून, ऊर्जा व उद्यमता देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
राष्ट्रपति ने कहा, इन आकांक्षाओं के बीच हम आर्थिक सुस्ती, रोजगार सुरक्षा एवं रोजगार की संभावनाओं को लेकर भी चिंतित हैं। लोग हमारी महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। उनमें सामाजिक एवं आर्थिक असमानता को लेकर भी चिंता है।
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने पाकिस्तान को नसीहत दी कि वह ऐसे कार्य न करे, जिससे विश्वास कम हो। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करे, हम भारतीय उपमहाद्वीप में शांति और स्थिरता चाहते हैं। बतौर राष्ट्रपति संसद के केंद्रीय कक्ष में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को पहली बार संबोधित करते हुए मुखर्जी ने कहा, हम इस महाद्वीप में शांति, स्थिरता, सहयोग और आर्थिक विकास बनाये रखना चाहते हैं। हम अपने निकट पड़ोसियों के साथ संबंधों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं।
उन्होंने कहा कि हमने पाकिस्तान के साथ संबंधों को सामान्य बनाने, द्विपक्षीय व्यापार तंत्र को मजबूत करने तथा दोनों देशों की जनता के बीच परस्पर संबंधों को बढ़ाने की दिशा में प्रगति की है। मुखर्जी ने कहा, यद्यपि हम इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, फिर भी जरूरी है कि पाकिस्तान अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करे और ऐसे कार्य न करे, जिससे विश्वास कम हो।
महिलाओं के खिलाफ अपराध रोकने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कैबिनेट द्वारा मंजूर अपने भाषण में कहा, मेरी सरकार महिलाओं के प्रति यौन अपराधों की घटनाओं के बारे में गंभीर रूप से चिंतित है। न्यायमूर्ति जेएस वर्मा समिति की सिफारिशों पर विचार के बाद सरकार ने महिलाओं के प्रति घृणित अपराधों के लिए कड़े दंड की व्यवस्था करने के उद्देश्य से आपराधिक कानून में संशोधन करते हुए एक अध्यादेश जारी किया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने देश में महिलाओं की सुरक्षा बढ़ाने के लिए अनेक प्रशासनिक उपायों का कार्यान्वयन भी शुरू कर दिया है।
राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार शासन में अधिक पारदर्शिता, ईमानदारी, सत्यनिष्ठा एवं जवाबदेही हेतु सुधारों के लिए प्रतिबद्ध है। इस दिशा में सरकार व्हिसल ब्लोअर प्रोटेक्शन विधेयक, विदेशी लोक पदधारी और अंतरराष्ट्रीय लोक संगठन पदधारी रिश्वत निवारण विधेयक, नागरिक शिकायत निवारण अधिकार विधेयक और लोकपाल एवं लोकायुक्त विधेयक अधिनियमित करने को प्राथमिकता देती है और ये विधेयक पहले ही संसद में प्रस्तुत किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा सरकार प्रभावी रूप से दोषियों को दंडित करने और ईमानदार सरकारी कर्मचारियों को संरक्षण प्रदान करने के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में संशोधन पर भी विचार कर रही है।
डायरेक्ट कैश सब्सिडी की चर्चा करते हुए मुखर्जी ने कहा कि लाभार्थी आधार संख्या के माध्यम से छात्रवृत्ति, पेंशन और मातृत्व लाभ जैसे विभिन्न लाभ हासिल कर सकेंगे। आने वाले समय में प्रणाली के तहत मजदूरी और खाद्य पदार्थों एवं एलपीजी पर दी जाने वाली सब्सिडी को भी शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस प्रणाली की मदद से निधि के लीकेज को कम करने, लाखों लोगों को वित्तीय प्रणाली के तहत लाने और लाभार्थियों को बेहतर रूप से चिह्नित करने में मदद मिलेगी।
राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क योजना के तहत ढाई लाख ग्राम पंचायतों को दिसंबर, 2014 तक ब्रॉडबैंड सुविधा से जोड़ा जाएगा। सरकार की नीतियों को दर्शाने वाले इस अभिभाषण में राष्ट्रपति ने स्वीकार किया कि अर्थव्यवस्था के मामले में यह वर्ष भारत के लिए कठिन रहा और वैश्विक एवं घरेलू दोनों ही कारणों से देश का विकास प्रभावित हुआ। उन्होंने कहा कि हाल में भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास की गति धीमी रही है। चालू वित्तवर्ष की प्रथम छमाही में सकल घरेलू उत्पाद की वास्तविक वृद्धि दर 5.4 प्रतिशत रही। यह पिछले दशक के लगभग आठ प्रतिशत वार्षिक विकास औसत दर से काफी कम है।टिप्पणियां
उन्होंने कहा कि सरकार मंदी के कारणों से निपटने के लिए कदम उठा रही है। मुद्रास्फीति धीरे-धीरे कम हो रही है, लेकिन यह अब भी समस्या बनी हुई है। मुखर्जी ने कहा कि हाल के महीनों में सकारात्मक परिणाम भी प्राप्त हुए हैं। मुद्रास्फीति में कुछ कमी आई है और विकास दर में पुन: वृद्धि होने की संभावना है। वर्ष के दौरान लिए गए नीतिगत निर्णयों से भी देश और विदेश में लोग पुन: आशावादी हुए हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार माल एवं सेवा कर के संबंध में आम सहमति कायम करने के लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर भी कार्य कर रही है। सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक को अधिनियमित करने के लिए प्रतिबद्ध है और इस संबंध में संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशें प्राप्त हो गई हैं। वामपंथी उग्रवाद से निपटने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए उन्होंने कहा कि वामपंथी उग्रवादी हिंसा की घटनाओं में कमी की प्रवृत्ति देखी गई है। जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर में सुरक्षा की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। 2011 की तुलना में 2012 में आतंकवादी हिंसा की घटनाओं में मृतकों की संख्या घटकर लगभग आधी रह गई है।
राष्ट्रपति ने कहा, मैं इस बात को लेकर जागरूक हूं कि आकांक्षापूर्ण भारत उभर रहा है, एक ऐसा भारत जो अधिक अवसर, बेहतर विकल्प, बेहतर बुनियादी ढांचा तथा बेहतर सुरक्षा चाहता है। उन्होंने कहा, युवा हमारे राष्ट्र की सबसे बड़ी संपत्ति हैं। वे आत्मविश्वास व उत्साह से भरे हुए हैं। मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि उनका जुनून, ऊर्जा व उद्यमता देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
राष्ट्रपति ने कहा, इन आकांक्षाओं के बीच हम आर्थिक सुस्ती, रोजगार सुरक्षा एवं रोजगार की संभावनाओं को लेकर भी चिंतित हैं। लोग हमारी महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। उनमें सामाजिक एवं आर्थिक असमानता को लेकर भी चिंता है।
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने पाकिस्तान को नसीहत दी कि वह ऐसे कार्य न करे, जिससे विश्वास कम हो। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करे, हम भारतीय उपमहाद्वीप में शांति और स्थिरता चाहते हैं। बतौर राष्ट्रपति संसद के केंद्रीय कक्ष में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को पहली बार संबोधित करते हुए मुखर्जी ने कहा, हम इस महाद्वीप में शांति, स्थिरता, सहयोग और आर्थिक विकास बनाये रखना चाहते हैं। हम अपने निकट पड़ोसियों के साथ संबंधों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं।
उन्होंने कहा कि हमने पाकिस्तान के साथ संबंधों को सामान्य बनाने, द्विपक्षीय व्यापार तंत्र को मजबूत करने तथा दोनों देशों की जनता के बीच परस्पर संबंधों को बढ़ाने की दिशा में प्रगति की है। मुखर्जी ने कहा, यद्यपि हम इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, फिर भी जरूरी है कि पाकिस्तान अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करे और ऐसे कार्य न करे, जिससे विश्वास कम हो।
महिलाओं के खिलाफ अपराध रोकने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कैबिनेट द्वारा मंजूर अपने भाषण में कहा, मेरी सरकार महिलाओं के प्रति यौन अपराधों की घटनाओं के बारे में गंभीर रूप से चिंतित है। न्यायमूर्ति जेएस वर्मा समिति की सिफारिशों पर विचार के बाद सरकार ने महिलाओं के प्रति घृणित अपराधों के लिए कड़े दंड की व्यवस्था करने के उद्देश्य से आपराधिक कानून में संशोधन करते हुए एक अध्यादेश जारी किया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने देश में महिलाओं की सुरक्षा बढ़ाने के लिए अनेक प्रशासनिक उपायों का कार्यान्वयन भी शुरू कर दिया है।
राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार शासन में अधिक पारदर्शिता, ईमानदारी, सत्यनिष्ठा एवं जवाबदेही हेतु सुधारों के लिए प्रतिबद्ध है। इस दिशा में सरकार व्हिसल ब्लोअर प्रोटेक्शन विधेयक, विदेशी लोक पदधारी और अंतरराष्ट्रीय लोक संगठन पदधारी रिश्वत निवारण विधेयक, नागरिक शिकायत निवारण अधिकार विधेयक और लोकपाल एवं लोकायुक्त विधेयक अधिनियमित करने को प्राथमिकता देती है और ये विधेयक पहले ही संसद में प्रस्तुत किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा सरकार प्रभावी रूप से दोषियों को दंडित करने और ईमानदार सरकारी कर्मचारियों को संरक्षण प्रदान करने के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में संशोधन पर भी विचार कर रही है।
डायरेक्ट कैश सब्सिडी की चर्चा करते हुए मुखर्जी ने कहा कि लाभार्थी आधार संख्या के माध्यम से छात्रवृत्ति, पेंशन और मातृत्व लाभ जैसे विभिन्न लाभ हासिल कर सकेंगे। आने वाले समय में प्रणाली के तहत मजदूरी और खाद्य पदार्थों एवं एलपीजी पर दी जाने वाली सब्सिडी को भी शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस प्रणाली की मदद से निधि के लीकेज को कम करने, लाखों लोगों को वित्तीय प्रणाली के तहत लाने और लाभार्थियों को बेहतर रूप से चिह्नित करने में मदद मिलेगी।
राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क योजना के तहत ढाई लाख ग्राम पंचायतों को दिसंबर, 2014 तक ब्रॉडबैंड सुविधा से जोड़ा जाएगा। सरकार की नीतियों को दर्शाने वाले इस अभिभाषण में राष्ट्रपति ने स्वीकार किया कि अर्थव्यवस्था के मामले में यह वर्ष भारत के लिए कठिन रहा और वैश्विक एवं घरेलू दोनों ही कारणों से देश का विकास प्रभावित हुआ। उन्होंने कहा कि हाल में भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास की गति धीमी रही है। चालू वित्तवर्ष की प्रथम छमाही में सकल घरेलू उत्पाद की वास्तविक वृद्धि दर 5.4 प्रतिशत रही। यह पिछले दशक के लगभग आठ प्रतिशत वार्षिक विकास औसत दर से काफी कम है।टिप्पणियां
उन्होंने कहा कि सरकार मंदी के कारणों से निपटने के लिए कदम उठा रही है। मुद्रास्फीति धीरे-धीरे कम हो रही है, लेकिन यह अब भी समस्या बनी हुई है। मुखर्जी ने कहा कि हाल के महीनों में सकारात्मक परिणाम भी प्राप्त हुए हैं। मुद्रास्फीति में कुछ कमी आई है और विकास दर में पुन: वृद्धि होने की संभावना है। वर्ष के दौरान लिए गए नीतिगत निर्णयों से भी देश और विदेश में लोग पुन: आशावादी हुए हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार माल एवं सेवा कर के संबंध में आम सहमति कायम करने के लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर भी कार्य कर रही है। सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक को अधिनियमित करने के लिए प्रतिबद्ध है और इस संबंध में संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशें प्राप्त हो गई हैं। वामपंथी उग्रवाद से निपटने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए उन्होंने कहा कि वामपंथी उग्रवादी हिंसा की घटनाओं में कमी की प्रवृत्ति देखी गई है। जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर में सुरक्षा की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। 2011 की तुलना में 2012 में आतंकवादी हिंसा की घटनाओं में मृतकों की संख्या घटकर लगभग आधी रह गई है।
राष्ट्रपति ने कहा, इन आकांक्षाओं के बीच हम आर्थिक सुस्ती, रोजगार सुरक्षा एवं रोजगार की संभावनाओं को लेकर भी चिंतित हैं। लोग हमारी महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। उनमें सामाजिक एवं आर्थिक असमानता को लेकर भी चिंता है।
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने पाकिस्तान को नसीहत दी कि वह ऐसे कार्य न करे, जिससे विश्वास कम हो। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करे, हम भारतीय उपमहाद्वीप में शांति और स्थिरता चाहते हैं। बतौर राष्ट्रपति संसद के केंद्रीय कक्ष में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को पहली बार संबोधित करते हुए मुखर्जी ने कहा, हम इस महाद्वीप में शांति, स्थिरता, सहयोग और आर्थिक विकास बनाये रखना चाहते हैं। हम अपने निकट पड़ोसियों के साथ संबंधों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं।
उन्होंने कहा कि हमने पाकिस्तान के साथ संबंधों को सामान्य बनाने, द्विपक्षीय व्यापार तंत्र को मजबूत करने तथा दोनों देशों की जनता के बीच परस्पर संबंधों को बढ़ाने की दिशा में प्रगति की है। मुखर्जी ने कहा, यद्यपि हम इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, फिर भी जरूरी है कि पाकिस्तान अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करे और ऐसे कार्य न करे, जिससे विश्वास कम हो।
महिलाओं के खिलाफ अपराध रोकने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कैबिनेट द्वारा मंजूर अपने भाषण में कहा, मेरी सरकार महिलाओं के प्रति यौन अपराधों की घटनाओं के बारे में गंभीर रूप से चिंतित है। न्यायमूर्ति जेएस वर्मा समिति की सिफारिशों पर विचार के बाद सरकार ने महिलाओं के प्रति घृणित अपराधों के लिए कड़े दंड की व्यवस्था करने के उद्देश्य से आपराधिक कानून में संशोधन करते हुए एक अध्यादेश जारी किया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने देश में महिलाओं की सुरक्षा बढ़ाने के लिए अनेक प्रशासनिक उपायों का कार्यान्वयन भी शुरू कर दिया है।
राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार शासन में अधिक पारदर्शिता, ईमानदारी, सत्यनिष्ठा एवं जवाबदेही हेतु सुधारों के लिए प्रतिबद्ध है। इस दिशा में सरकार व्हिसल ब्लोअर प्रोटेक्शन विधेयक, विदेशी लोक पदधारी और अंतरराष्ट्रीय लोक संगठन पदधारी रिश्वत निवारण विधेयक, नागरिक शिकायत निवारण अधिकार विधेयक और लोकपाल एवं लोकायुक्त विधेयक अधिनियमित करने को प्राथमिकता देती है और ये विधेयक पहले ही संसद में प्रस्तुत किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा सरकार प्रभावी रूप से दोषियों को दंडित करने और ईमानदार सरकारी कर्मचारियों को संरक्षण प्रदान करने के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में संशोधन पर भी विचार कर रही है।
डायरेक्ट कैश सब्सिडी की चर्चा करते हुए मुखर्जी ने कहा कि लाभार्थी आधार संख्या के माध्यम से छात्रवृत्ति, पेंशन और मातृत्व लाभ जैसे विभिन्न लाभ हासिल कर सकेंगे। आने वाले समय में प्रणाली के तहत मजदूरी और खाद्य पदार्थों एवं एलपीजी पर दी जाने वाली सब्सिडी को भी शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस प्रणाली की मदद से निधि के लीकेज को कम करने, लाखों लोगों को वित्तीय प्रणाली के तहत लाने और लाभार्थियों को बेहतर रूप से चिह्नित करने में मदद मिलेगी।
राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क योजना के तहत ढाई लाख ग्राम पंचायतों को दिसंबर, 2014 तक ब्रॉडबैंड सुविधा से जोड़ा जाएगा। सरकार की नीतियों को दर्शाने वाले इस अभिभाषण में राष्ट्रपति ने स्वीकार किया कि अर्थव्यवस्था के मामले में यह वर्ष भारत के लिए कठिन रहा और वैश्विक एवं घरेलू दोनों ही कारणों से देश का विकास प्रभावित हुआ। उन्होंने कहा कि हाल में भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास की गति धीमी रही है। चालू वित्तवर्ष की प्रथम छमाही में सकल घरेलू उत्पाद की वास्तविक वृद्धि दर 5.4 प्रतिशत रही। यह पिछले दशक के लगभग आठ प्रतिशत वार्षिक विकास औसत दर से काफी कम है।टिप्पणियां
उन्होंने कहा कि सरकार मंदी के कारणों से निपटने के लिए कदम उठा रही है। मुद्रास्फीति धीरे-धीरे कम हो रही है, लेकिन यह अब भी समस्या बनी हुई है। मुखर्जी ने कहा कि हाल के महीनों में सकारात्मक परिणाम भी प्राप्त हुए हैं। मुद्रास्फीति में कुछ कमी आई है और विकास दर में पुन: वृद्धि होने की संभावना है। वर्ष के दौरान लिए गए नीतिगत निर्णयों से भी देश और विदेश में लोग पुन: आशावादी हुए हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार माल एवं सेवा कर के संबंध में आम सहमति कायम करने के लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर भी कार्य कर रही है। सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक को अधिनियमित करने के लिए प्रतिबद्ध है और इस संबंध में संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशें प्राप्त हो गई हैं। वामपंथी उग्रवाद से निपटने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए उन्होंने कहा कि वामपंथी उग्रवादी हिंसा की घटनाओं में कमी की प्रवृत्ति देखी गई है। जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर में सुरक्षा की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। 2011 की तुलना में 2012 में आतंकवादी हिंसा की घटनाओं में मृतकों की संख्या घटकर लगभग आधी रह गई है।
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने पाकिस्तान को नसीहत दी कि वह ऐसे कार्य न करे, जिससे विश्वास कम हो। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करे, हम भारतीय उपमहाद्वीप में शांति और स्थिरता चाहते हैं। बतौर राष्ट्रपति संसद के केंद्रीय कक्ष में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को पहली बार संबोधित करते हुए मुखर्जी ने कहा, हम इस महाद्वीप में शांति, स्थिरता, सहयोग और आर्थिक विकास बनाये रखना चाहते हैं। हम अपने निकट पड़ोसियों के साथ संबंधों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं।
उन्होंने कहा कि हमने पाकिस्तान के साथ संबंधों को सामान्य बनाने, द्विपक्षीय व्यापार तंत्र को मजबूत करने तथा दोनों देशों की जनता के बीच परस्पर संबंधों को बढ़ाने की दिशा में प्रगति की है। मुखर्जी ने कहा, यद्यपि हम इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, फिर भी जरूरी है कि पाकिस्तान अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करे और ऐसे कार्य न करे, जिससे विश्वास कम हो।
महिलाओं के खिलाफ अपराध रोकने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कैबिनेट द्वारा मंजूर अपने भाषण में कहा, मेरी सरकार महिलाओं के प्रति यौन अपराधों की घटनाओं के बारे में गंभीर रूप से चिंतित है। न्यायमूर्ति जेएस वर्मा समिति की सिफारिशों पर विचार के बाद सरकार ने महिलाओं के प्रति घृणित अपराधों के लिए कड़े दंड की व्यवस्था करने के उद्देश्य से आपराधिक कानून में संशोधन करते हुए एक अध्यादेश जारी किया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने देश में महिलाओं की सुरक्षा बढ़ाने के लिए अनेक प्रशासनिक उपायों का कार्यान्वयन भी शुरू कर दिया है।
राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार शासन में अधिक पारदर्शिता, ईमानदारी, सत्यनिष्ठा एवं जवाबदेही हेतु सुधारों के लिए प्रतिबद्ध है। इस दिशा में सरकार व्हिसल ब्लोअर प्रोटेक्शन विधेयक, विदेशी लोक पदधारी और अंतरराष्ट्रीय लोक संगठन पदधारी रिश्वत निवारण विधेयक, नागरिक शिकायत निवारण अधिकार विधेयक और लोकपाल एवं लोकायुक्त विधेयक अधिनियमित करने को प्राथमिकता देती है और ये विधेयक पहले ही संसद में प्रस्तुत किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा सरकार प्रभावी रूप से दोषियों को दंडित करने और ईमानदार सरकारी कर्मचारियों को संरक्षण प्रदान करने के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में संशोधन पर भी विचार कर रही है।
डायरेक्ट कैश सब्सिडी की चर्चा करते हुए मुखर्जी ने कहा कि लाभार्थी आधार संख्या के माध्यम से छात्रवृत्ति, पेंशन और मातृत्व लाभ जैसे विभिन्न लाभ हासिल कर सकेंगे। आने वाले समय में प्रणाली के तहत मजदूरी और खाद्य पदार्थों एवं एलपीजी पर दी जाने वाली सब्सिडी को भी शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस प्रणाली की मदद से निधि के लीकेज को कम करने, लाखों लोगों को वित्तीय प्रणाली के तहत लाने और लाभार्थियों को बेहतर रूप से चिह्नित करने में मदद मिलेगी।
राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क योजना के तहत ढाई लाख ग्राम पंचायतों को दिसंबर, 2014 तक ब्रॉडबैंड सुविधा से जोड़ा जाएगा। सरकार की नीतियों को दर्शाने वाले इस अभिभाषण में राष्ट्रपति ने स्वीकार किया कि अर्थव्यवस्था के मामले में यह वर्ष भारत के लिए कठिन रहा और वैश्विक एवं घरेलू दोनों ही कारणों से देश का विकास प्रभावित हुआ। उन्होंने कहा कि हाल में भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास की गति धीमी रही है। चालू वित्तवर्ष की प्रथम छमाही में सकल घरेलू उत्पाद की वास्तविक वृद्धि दर 5.4 प्रतिशत रही। यह पिछले दशक के लगभग आठ प्रतिशत वार्षिक विकास औसत दर से काफी कम है।टिप्पणियां
उन्होंने कहा कि सरकार मंदी के कारणों से निपटने के लिए कदम उठा रही है। मुद्रास्फीति धीरे-धीरे कम हो रही है, लेकिन यह अब भी समस्या बनी हुई है। मुखर्जी ने कहा कि हाल के महीनों में सकारात्मक परिणाम भी प्राप्त हुए हैं। मुद्रास्फीति में कुछ कमी आई है और विकास दर में पुन: वृद्धि होने की संभावना है। वर्ष के दौरान लिए गए नीतिगत निर्णयों से भी देश और विदेश में लोग पुन: आशावादी हुए हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार माल एवं सेवा कर के संबंध में आम सहमति कायम करने के लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर भी कार्य कर रही है। सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक को अधिनियमित करने के लिए प्रतिबद्ध है और इस संबंध में संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशें प्राप्त हो गई हैं। वामपंथी उग्रवाद से निपटने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए उन्होंने कहा कि वामपंथी उग्रवादी हिंसा की घटनाओं में कमी की प्रवृत्ति देखी गई है। जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर में सुरक्षा की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। 2011 की तुलना में 2012 में आतंकवादी हिंसा की घटनाओं में मृतकों की संख्या घटकर लगभग आधी रह गई है।
उन्होंने कहा कि हमने पाकिस्तान के साथ संबंधों को सामान्य बनाने, द्विपक्षीय व्यापार तंत्र को मजबूत करने तथा दोनों देशों की जनता के बीच परस्पर संबंधों को बढ़ाने की दिशा में प्रगति की है। मुखर्जी ने कहा, यद्यपि हम इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, फिर भी जरूरी है कि पाकिस्तान अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करे और ऐसे कार्य न करे, जिससे विश्वास कम हो।
महिलाओं के खिलाफ अपराध रोकने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कैबिनेट द्वारा मंजूर अपने भाषण में कहा, मेरी सरकार महिलाओं के प्रति यौन अपराधों की घटनाओं के बारे में गंभीर रूप से चिंतित है। न्यायमूर्ति जेएस वर्मा समिति की सिफारिशों पर विचार के बाद सरकार ने महिलाओं के प्रति घृणित अपराधों के लिए कड़े दंड की व्यवस्था करने के उद्देश्य से आपराधिक कानून में संशोधन करते हुए एक अध्यादेश जारी किया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने देश में महिलाओं की सुरक्षा बढ़ाने के लिए अनेक प्रशासनिक उपायों का कार्यान्वयन भी शुरू कर दिया है।
राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार शासन में अधिक पारदर्शिता, ईमानदारी, सत्यनिष्ठा एवं जवाबदेही हेतु सुधारों के लिए प्रतिबद्ध है। इस दिशा में सरकार व्हिसल ब्लोअर प्रोटेक्शन विधेयक, विदेशी लोक पदधारी और अंतरराष्ट्रीय लोक संगठन पदधारी रिश्वत निवारण विधेयक, नागरिक शिकायत निवारण अधिकार विधेयक और लोकपाल एवं लोकायुक्त विधेयक अधिनियमित करने को प्राथमिकता देती है और ये विधेयक पहले ही संसद में प्रस्तुत किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा सरकार प्रभावी रूप से दोषियों को दंडित करने और ईमानदार सरकारी कर्मचारियों को संरक्षण प्रदान करने के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में संशोधन पर भी विचार कर रही है।
डायरेक्ट कैश सब्सिडी की चर्चा करते हुए मुखर्जी ने कहा कि लाभार्थी आधार संख्या के माध्यम से छात्रवृत्ति, पेंशन और मातृत्व लाभ जैसे विभिन्न लाभ हासिल कर सकेंगे। आने वाले समय में प्रणाली के तहत मजदूरी और खाद्य पदार्थों एवं एलपीजी पर दी जाने वाली सब्सिडी को भी शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस प्रणाली की मदद से निधि के लीकेज को कम करने, लाखों लोगों को वित्तीय प्रणाली के तहत लाने और लाभार्थियों को बेहतर रूप से चिह्नित करने में मदद मिलेगी।
राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क योजना के तहत ढाई लाख ग्राम पंचायतों को दिसंबर, 2014 तक ब्रॉडबैंड सुविधा से जोड़ा जाएगा। सरकार की नीतियों को दर्शाने वाले इस अभिभाषण में राष्ट्रपति ने स्वीकार किया कि अर्थव्यवस्था के मामले में यह वर्ष भारत के लिए कठिन रहा और वैश्विक एवं घरेलू दोनों ही कारणों से देश का विकास प्रभावित हुआ। उन्होंने कहा कि हाल में भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास की गति धीमी रही है। चालू वित्तवर्ष की प्रथम छमाही में सकल घरेलू उत्पाद की वास्तविक वृद्धि दर 5.4 प्रतिशत रही। यह पिछले दशक के लगभग आठ प्रतिशत वार्षिक विकास औसत दर से काफी कम है।टिप्पणियां
उन्होंने कहा कि सरकार मंदी के कारणों से निपटने के लिए कदम उठा रही है। मुद्रास्फीति धीरे-धीरे कम हो रही है, लेकिन यह अब भी समस्या बनी हुई है। मुखर्जी ने कहा कि हाल के महीनों में सकारात्मक परिणाम भी प्राप्त हुए हैं। मुद्रास्फीति में कुछ कमी आई है और विकास दर में पुन: वृद्धि होने की संभावना है। वर्ष के दौरान लिए गए नीतिगत निर्णयों से भी देश और विदेश में लोग पुन: आशावादी हुए हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार माल एवं सेवा कर के संबंध में आम सहमति कायम करने के लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर भी कार्य कर रही है। सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक को अधिनियमित करने के लिए प्रतिबद्ध है और इस संबंध में संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशें प्राप्त हो गई हैं। वामपंथी उग्रवाद से निपटने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए उन्होंने कहा कि वामपंथी उग्रवादी हिंसा की घटनाओं में कमी की प्रवृत्ति देखी गई है। जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर में सुरक्षा की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। 2011 की तुलना में 2012 में आतंकवादी हिंसा की घटनाओं में मृतकों की संख्या घटकर लगभग आधी रह गई है।
महिलाओं के खिलाफ अपराध रोकने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कैबिनेट द्वारा मंजूर अपने भाषण में कहा, मेरी सरकार महिलाओं के प्रति यौन अपराधों की घटनाओं के बारे में गंभीर रूप से चिंतित है। न्यायमूर्ति जेएस वर्मा समिति की सिफारिशों पर विचार के बाद सरकार ने महिलाओं के प्रति घृणित अपराधों के लिए कड़े दंड की व्यवस्था करने के उद्देश्य से आपराधिक कानून में संशोधन करते हुए एक अध्यादेश जारी किया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने देश में महिलाओं की सुरक्षा बढ़ाने के लिए अनेक प्रशासनिक उपायों का कार्यान्वयन भी शुरू कर दिया है।
राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार शासन में अधिक पारदर्शिता, ईमानदारी, सत्यनिष्ठा एवं जवाबदेही हेतु सुधारों के लिए प्रतिबद्ध है। इस दिशा में सरकार व्हिसल ब्लोअर प्रोटेक्शन विधेयक, विदेशी लोक पदधारी और अंतरराष्ट्रीय लोक संगठन पदधारी रिश्वत निवारण विधेयक, नागरिक शिकायत निवारण अधिकार विधेयक और लोकपाल एवं लोकायुक्त विधेयक अधिनियमित करने को प्राथमिकता देती है और ये विधेयक पहले ही संसद में प्रस्तुत किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा सरकार प्रभावी रूप से दोषियों को दंडित करने और ईमानदार सरकारी कर्मचारियों को संरक्षण प्रदान करने के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में संशोधन पर भी विचार कर रही है।
डायरेक्ट कैश सब्सिडी की चर्चा करते हुए मुखर्जी ने कहा कि लाभार्थी आधार संख्या के माध्यम से छात्रवृत्ति, पेंशन और मातृत्व लाभ जैसे विभिन्न लाभ हासिल कर सकेंगे। आने वाले समय में प्रणाली के तहत मजदूरी और खाद्य पदार्थों एवं एलपीजी पर दी जाने वाली सब्सिडी को भी शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस प्रणाली की मदद से निधि के लीकेज को कम करने, लाखों लोगों को वित्तीय प्रणाली के तहत लाने और लाभार्थियों को बेहतर रूप से चिह्नित करने में मदद मिलेगी।
राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क योजना के तहत ढाई लाख ग्राम पंचायतों को दिसंबर, 2014 तक ब्रॉडबैंड सुविधा से जोड़ा जाएगा। सरकार की नीतियों को दर्शाने वाले इस अभिभाषण में राष्ट्रपति ने स्वीकार किया कि अर्थव्यवस्था के मामले में यह वर्ष भारत के लिए कठिन रहा और वैश्विक एवं घरेलू दोनों ही कारणों से देश का विकास प्रभावित हुआ। उन्होंने कहा कि हाल में भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास की गति धीमी रही है। चालू वित्तवर्ष की प्रथम छमाही में सकल घरेलू उत्पाद की वास्तविक वृद्धि दर 5.4 प्रतिशत रही। यह पिछले दशक के लगभग आठ प्रतिशत वार्षिक विकास औसत दर से काफी कम है।टिप्पणियां
उन्होंने कहा कि सरकार मंदी के कारणों से निपटने के लिए कदम उठा रही है। मुद्रास्फीति धीरे-धीरे कम हो रही है, लेकिन यह अब भी समस्या बनी हुई है। मुखर्जी ने कहा कि हाल के महीनों में सकारात्मक परिणाम भी प्राप्त हुए हैं। मुद्रास्फीति में कुछ कमी आई है और विकास दर में पुन: वृद्धि होने की संभावना है। वर्ष के दौरान लिए गए नीतिगत निर्णयों से भी देश और विदेश में लोग पुन: आशावादी हुए हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार माल एवं सेवा कर के संबंध में आम सहमति कायम करने के लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर भी कार्य कर रही है। सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक को अधिनियमित करने के लिए प्रतिबद्ध है और इस संबंध में संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशें प्राप्त हो गई हैं। वामपंथी उग्रवाद से निपटने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए उन्होंने कहा कि वामपंथी उग्रवादी हिंसा की घटनाओं में कमी की प्रवृत्ति देखी गई है। जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर में सुरक्षा की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। 2011 की तुलना में 2012 में आतंकवादी हिंसा की घटनाओं में मृतकों की संख्या घटकर लगभग आधी रह गई है।
राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार शासन में अधिक पारदर्शिता, ईमानदारी, सत्यनिष्ठा एवं जवाबदेही हेतु सुधारों के लिए प्रतिबद्ध है। इस दिशा में सरकार व्हिसल ब्लोअर प्रोटेक्शन विधेयक, विदेशी लोक पदधारी और अंतरराष्ट्रीय लोक संगठन पदधारी रिश्वत निवारण विधेयक, नागरिक शिकायत निवारण अधिकार विधेयक और लोकपाल एवं लोकायुक्त विधेयक अधिनियमित करने को प्राथमिकता देती है और ये विधेयक पहले ही संसद में प्रस्तुत किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा सरकार प्रभावी रूप से दोषियों को दंडित करने और ईमानदार सरकारी कर्मचारियों को संरक्षण प्रदान करने के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में संशोधन पर भी विचार कर रही है।
डायरेक्ट कैश सब्सिडी की चर्चा करते हुए मुखर्जी ने कहा कि लाभार्थी आधार संख्या के माध्यम से छात्रवृत्ति, पेंशन और मातृत्व लाभ जैसे विभिन्न लाभ हासिल कर सकेंगे। आने वाले समय में प्रणाली के तहत मजदूरी और खाद्य पदार्थों एवं एलपीजी पर दी जाने वाली सब्सिडी को भी शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस प्रणाली की मदद से निधि के लीकेज को कम करने, लाखों लोगों को वित्तीय प्रणाली के तहत लाने और लाभार्थियों को बेहतर रूप से चिह्नित करने में मदद मिलेगी।
राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क योजना के तहत ढाई लाख ग्राम पंचायतों को दिसंबर, 2014 तक ब्रॉडबैंड सुविधा से जोड़ा जाएगा। सरकार की नीतियों को दर्शाने वाले इस अभिभाषण में राष्ट्रपति ने स्वीकार किया कि अर्थव्यवस्था के मामले में यह वर्ष भारत के लिए कठिन रहा और वैश्विक एवं घरेलू दोनों ही कारणों से देश का विकास प्रभावित हुआ। उन्होंने कहा कि हाल में भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास की गति धीमी रही है। चालू वित्तवर्ष की प्रथम छमाही में सकल घरेलू उत्पाद की वास्तविक वृद्धि दर 5.4 प्रतिशत रही। यह पिछले दशक के लगभग आठ प्रतिशत वार्षिक विकास औसत दर से काफी कम है।टिप्पणियां
उन्होंने कहा कि सरकार मंदी के कारणों से निपटने के लिए कदम उठा रही है। मुद्रास्फीति धीरे-धीरे कम हो रही है, लेकिन यह अब भी समस्या बनी हुई है। मुखर्जी ने कहा कि हाल के महीनों में सकारात्मक परिणाम भी प्राप्त हुए हैं। मुद्रास्फीति में कुछ कमी आई है और विकास दर में पुन: वृद्धि होने की संभावना है। वर्ष के दौरान लिए गए नीतिगत निर्णयों से भी देश और विदेश में लोग पुन: आशावादी हुए हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार माल एवं सेवा कर के संबंध में आम सहमति कायम करने के लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर भी कार्य कर रही है। सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक को अधिनियमित करने के लिए प्रतिबद्ध है और इस संबंध में संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशें प्राप्त हो गई हैं। वामपंथी उग्रवाद से निपटने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए उन्होंने कहा कि वामपंथी उग्रवादी हिंसा की घटनाओं में कमी की प्रवृत्ति देखी गई है। जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर में सुरक्षा की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। 2011 की तुलना में 2012 में आतंकवादी हिंसा की घटनाओं में मृतकों की संख्या घटकर लगभग आधी रह गई है।
डायरेक्ट कैश सब्सिडी की चर्चा करते हुए मुखर्जी ने कहा कि लाभार्थी आधार संख्या के माध्यम से छात्रवृत्ति, पेंशन और मातृत्व लाभ जैसे विभिन्न लाभ हासिल कर सकेंगे। आने वाले समय में प्रणाली के तहत मजदूरी और खाद्य पदार्थों एवं एलपीजी पर दी जाने वाली सब्सिडी को भी शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस प्रणाली की मदद से निधि के लीकेज को कम करने, लाखों लोगों को वित्तीय प्रणाली के तहत लाने और लाभार्थियों को बेहतर रूप से चिह्नित करने में मदद मिलेगी।
राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क योजना के तहत ढाई लाख ग्राम पंचायतों को दिसंबर, 2014 तक ब्रॉडबैंड सुविधा से जोड़ा जाएगा। सरकार की नीतियों को दर्शाने वाले इस अभिभाषण में राष्ट्रपति ने स्वीकार किया कि अर्थव्यवस्था के मामले में यह वर्ष भारत के लिए कठिन रहा और वैश्विक एवं घरेलू दोनों ही कारणों से देश का विकास प्रभावित हुआ। उन्होंने कहा कि हाल में भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास की गति धीमी रही है। चालू वित्तवर्ष की प्रथम छमाही में सकल घरेलू उत्पाद की वास्तविक वृद्धि दर 5.4 प्रतिशत रही। यह पिछले दशक के लगभग आठ प्रतिशत वार्षिक विकास औसत दर से काफी कम है।टिप्पणियां
उन्होंने कहा कि सरकार मंदी के कारणों से निपटने के लिए कदम उठा रही है। मुद्रास्फीति धीरे-धीरे कम हो रही है, लेकिन यह अब भी समस्या बनी हुई है। मुखर्जी ने कहा कि हाल के महीनों में सकारात्मक परिणाम भी प्राप्त हुए हैं। मुद्रास्फीति में कुछ कमी आई है और विकास दर में पुन: वृद्धि होने की संभावना है। वर्ष के दौरान लिए गए नीतिगत निर्णयों से भी देश और विदेश में लोग पुन: आशावादी हुए हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार माल एवं सेवा कर के संबंध में आम सहमति कायम करने के लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर भी कार्य कर रही है। सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक को अधिनियमित करने के लिए प्रतिबद्ध है और इस संबंध में संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशें प्राप्त हो गई हैं। वामपंथी उग्रवाद से निपटने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए उन्होंने कहा कि वामपंथी उग्रवादी हिंसा की घटनाओं में कमी की प्रवृत्ति देखी गई है। जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर में सुरक्षा की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। 2011 की तुलना में 2012 में आतंकवादी हिंसा की घटनाओं में मृतकों की संख्या घटकर लगभग आधी रह गई है।
राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क योजना के तहत ढाई लाख ग्राम पंचायतों को दिसंबर, 2014 तक ब्रॉडबैंड सुविधा से जोड़ा जाएगा। सरकार की नीतियों को दर्शाने वाले इस अभिभाषण में राष्ट्रपति ने स्वीकार किया कि अर्थव्यवस्था के मामले में यह वर्ष भारत के लिए कठिन रहा और वैश्विक एवं घरेलू दोनों ही कारणों से देश का विकास प्रभावित हुआ। उन्होंने कहा कि हाल में भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास की गति धीमी रही है। चालू वित्तवर्ष की प्रथम छमाही में सकल घरेलू उत्पाद की वास्तविक वृद्धि दर 5.4 प्रतिशत रही। यह पिछले दशक के लगभग आठ प्रतिशत वार्षिक विकास औसत दर से काफी कम है।टिप्पणियां
उन्होंने कहा कि सरकार मंदी के कारणों से निपटने के लिए कदम उठा रही है। मुद्रास्फीति धीरे-धीरे कम हो रही है, लेकिन यह अब भी समस्या बनी हुई है। मुखर्जी ने कहा कि हाल के महीनों में सकारात्मक परिणाम भी प्राप्त हुए हैं। मुद्रास्फीति में कुछ कमी आई है और विकास दर में पुन: वृद्धि होने की संभावना है। वर्ष के दौरान लिए गए नीतिगत निर्णयों से भी देश और विदेश में लोग पुन: आशावादी हुए हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार माल एवं सेवा कर के संबंध में आम सहमति कायम करने के लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर भी कार्य कर रही है। सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक को अधिनियमित करने के लिए प्रतिबद्ध है और इस संबंध में संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशें प्राप्त हो गई हैं। वामपंथी उग्रवाद से निपटने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए उन्होंने कहा कि वामपंथी उग्रवादी हिंसा की घटनाओं में कमी की प्रवृत्ति देखी गई है। जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर में सुरक्षा की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। 2011 की तुलना में 2012 में आतंकवादी हिंसा की घटनाओं में मृतकों की संख्या घटकर लगभग आधी रह गई है।
उन्होंने कहा कि सरकार मंदी के कारणों से निपटने के लिए कदम उठा रही है। मुद्रास्फीति धीरे-धीरे कम हो रही है, लेकिन यह अब भी समस्या बनी हुई है। मुखर्जी ने कहा कि हाल के महीनों में सकारात्मक परिणाम भी प्राप्त हुए हैं। मुद्रास्फीति में कुछ कमी आई है और विकास दर में पुन: वृद्धि होने की संभावना है। वर्ष के दौरान लिए गए नीतिगत निर्णयों से भी देश और विदेश में लोग पुन: आशावादी हुए हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार माल एवं सेवा कर के संबंध में आम सहमति कायम करने के लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर भी कार्य कर रही है। सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक को अधिनियमित करने के लिए प्रतिबद्ध है और इस संबंध में संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशें प्राप्त हो गई हैं। वामपंथी उग्रवाद से निपटने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए उन्होंने कहा कि वामपंथी उग्रवादी हिंसा की घटनाओं में कमी की प्रवृत्ति देखी गई है। जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर में सुरक्षा की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। 2011 की तुलना में 2012 में आतंकवादी हिंसा की घटनाओं में मृतकों की संख्या घटकर लगभग आधी रह गई है।
उन्होंने कहा कि सरकार माल एवं सेवा कर के संबंध में आम सहमति कायम करने के लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर भी कार्य कर रही है। सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक को अधिनियमित करने के लिए प्रतिबद्ध है और इस संबंध में संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशें प्राप्त हो गई हैं। वामपंथी उग्रवाद से निपटने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए उन्होंने कहा कि वामपंथी उग्रवादी हिंसा की घटनाओं में कमी की प्रवृत्ति देखी गई है। जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर में सुरक्षा की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। 2011 की तुलना में 2012 में आतंकवादी हिंसा की घटनाओं में मृतकों की संख्या घटकर लगभग आधी रह गई है। | यह एक सारांश है: संसद का बजट सत्र गुरुवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के अभिभाषण से शुरू हुआ। राष्ट्रपति ने कहा कि महंगाई और भ्रष्टाचार देश के सामने बड़ी समस्या है, लेकिन सरकार इस मोर्चे पर हरसंभव उपाय कर रही है। | 9 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: शिवसेना भले ही वेलेंटाइन डे की आलोचना करती रही हो लेकिन उनकी ही पार्टी के एक पार्षद प्यार के इजहार के इस दिन शादी के बंधन में बंध गए।
पार्टी के विधायक विनोद घोसलकार के बेटे और बोरीवली से पार्षद अभिषेक घोसलकार अपराह्न उपनगर बोरीवली में आईटी पेशेवर तेजस्वी दारेकर के साथ परिणय सूत्र में बंध गए।
अभिषेक ने कहा, ‘यह अभिवावकों द्वारा तय शादी है...शुभ मुहूर्त था इसलिए वेलेंटाइन डे के दिन हम शादी कर रहे हैं।’टिप्पणियां
विधायक के मुताबिक 14 फरवरी को बसंत पंचमी के कारण यह एक शुभ दिन है। बोरीवली से शिवसेना के एक पदाधिकारी ने कहा ‘इसका वेंलेंटाइन डे से कुछ लेना-देना नहीं है। पवित्र मुहूर्त के कारण यह शादी हुई।’
कुछ साल पहले तक वेलेंटाइन डे के खिलाफ शिवसेना कड़ा रुख अपनाती थी। प्रेमी युगलों को तो निशाना बनाया ही जाता था, कार्ड और उपहार आदि बेचने वाली दुकानों पर भी हमला करने से कार्यकर्ता बाज नहीं आते थे।
पार्टी के विधायक विनोद घोसलकार के बेटे और बोरीवली से पार्षद अभिषेक घोसलकार अपराह्न उपनगर बोरीवली में आईटी पेशेवर तेजस्वी दारेकर के साथ परिणय सूत्र में बंध गए।
अभिषेक ने कहा, ‘यह अभिवावकों द्वारा तय शादी है...शुभ मुहूर्त था इसलिए वेलेंटाइन डे के दिन हम शादी कर रहे हैं।’टिप्पणियां
विधायक के मुताबिक 14 फरवरी को बसंत पंचमी के कारण यह एक शुभ दिन है। बोरीवली से शिवसेना के एक पदाधिकारी ने कहा ‘इसका वेंलेंटाइन डे से कुछ लेना-देना नहीं है। पवित्र मुहूर्त के कारण यह शादी हुई।’
कुछ साल पहले तक वेलेंटाइन डे के खिलाफ शिवसेना कड़ा रुख अपनाती थी। प्रेमी युगलों को तो निशाना बनाया ही जाता था, कार्ड और उपहार आदि बेचने वाली दुकानों पर भी हमला करने से कार्यकर्ता बाज नहीं आते थे।
अभिषेक ने कहा, ‘यह अभिवावकों द्वारा तय शादी है...शुभ मुहूर्त था इसलिए वेलेंटाइन डे के दिन हम शादी कर रहे हैं।’टिप्पणियां
विधायक के मुताबिक 14 फरवरी को बसंत पंचमी के कारण यह एक शुभ दिन है। बोरीवली से शिवसेना के एक पदाधिकारी ने कहा ‘इसका वेंलेंटाइन डे से कुछ लेना-देना नहीं है। पवित्र मुहूर्त के कारण यह शादी हुई।’
कुछ साल पहले तक वेलेंटाइन डे के खिलाफ शिवसेना कड़ा रुख अपनाती थी। प्रेमी युगलों को तो निशाना बनाया ही जाता था, कार्ड और उपहार आदि बेचने वाली दुकानों पर भी हमला करने से कार्यकर्ता बाज नहीं आते थे।
विधायक के मुताबिक 14 फरवरी को बसंत पंचमी के कारण यह एक शुभ दिन है। बोरीवली से शिवसेना के एक पदाधिकारी ने कहा ‘इसका वेंलेंटाइन डे से कुछ लेना-देना नहीं है। पवित्र मुहूर्त के कारण यह शादी हुई।’
कुछ साल पहले तक वेलेंटाइन डे के खिलाफ शिवसेना कड़ा रुख अपनाती थी। प्रेमी युगलों को तो निशाना बनाया ही जाता था, कार्ड और उपहार आदि बेचने वाली दुकानों पर भी हमला करने से कार्यकर्ता बाज नहीं आते थे।
कुछ साल पहले तक वेलेंटाइन डे के खिलाफ शिवसेना कड़ा रुख अपनाती थी। प्रेमी युगलों को तो निशाना बनाया ही जाता था, कार्ड और उपहार आदि बेचने वाली दुकानों पर भी हमला करने से कार्यकर्ता बाज नहीं आते थे। | यहाँ एक सारांश है:शिवसेना भले ही वेलेंटाइन डे की आलोचना करती रही हो लेकिन उनकी ही पार्टी के एक पार्षद प्यार के इजहार के इस दिन शादी के बंधन में बंध गए। | 17 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: टी-20 मैच जीतकर वेस्टइंडीज दौरे की शानदार शुरुआत करने वाली दोयम दर्जे की भारतीय क्रिकेट टीम सोमवार से शुरू हो रही पांच मैचों की एक दिवसीय श्रृंखला में भी जीत की लय बरकरार रखने उतरेगी। सचिन तेंदुलकर, नियमित कप्तान महेंद्र सिंह धोनी , युवराज सिंह, वीरेंद्र सहवाग, गौतम गंभीर और तेज गेंदबाज जहीर खान के बिना खेल रही भारतीय टीम की कप्तानी सुरेश रैना कर रहे हैं। इस टीम ने एकमात्र टी-20 मैच में मेजबान को 16 रन से हराकर उम्दा आगाज किया। अनिल कुंबले, राहुल द्रविड़ और धोनी से कप्तानी के गुर सीखने वाले रैना ने युवा टीम की बागडोर बखूबी संभाली है। क्रिस गेल की गैर मौजूदगी में कमजोर कैरेबियाई चुनौती से पार पाने में टीम इंडिया को दिक्कत नहीं हुई। आईपीएल में अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से सफलता की बुलंदियों को छूने वाले गेल बोर्ड के खिलाफ भड़ास निकालने के कारण पहले दो वनडे में सिर्फ मूक दर्शक बने रहेंगे। रैना ने कहा, वेस्टइंडीज टीम को गेल जैसे खिलाड़ियों की कमी खलेगी। कमजोर प्रतिद्वंद्वी के सामने जीत का दबाव और बढ़ जाता है और रैना इससे भली भांति वाकिफ है। रैना ने कहा, दबाव तो हमेशा रहता है और हमने दबाव में अच्छा प्रदर्शन किया है। खिलाड़ियों की जिम्मेदारी है कि कोच की रणनीति पर बखूबी अमल करे। हमें अपना स्वाभाविक खेल दिखाना होगा। टी-20 मैच में भारत ने नौ ओवर में चार विकेट पर 56 रन बनाये थे लेकिन एस बद्रीनाथ और रोहिम शर्मा ने 71 रन जोड़कर अच्छे स्कोर की नींव रखी। आखिरी पांच ओवर में भारतीयों ने 71 रन बनाए। भारत के पास पार्थिव पटेल और शिखर धवन जैसे सलामी बल्लेबाज हैं जो टी-20 मैच में नहीं चले। भारतीय मध्यक्रम को रोकना हालांकि रवि रामपाल, ड्वेन ब्रावो या आंद्रे रसेल के बस की बात नहीं होगी। मुनाफ पटेल की अगुवाई में भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण भले ही उतना मजबूत नहीं लग रहा है लेकिन हरभजन सिंह की कमान में स्पिनरों को टर्न लेती पिचों पर फायदा मिलेगा। वेस्टइंडीज टीम में कीरोन पोलार्ड की वापसी हुई है जिससे बल्लेबाजी मजबूत होगी। कप्तान डेरेन सैमी के लिए गेंदबाजी चिंता का विषय बनी हुई है। कप्तान ने कल चार विकेट लिए लेकिन दूसरे छोर से उन्हें सहयोग नहीं मिला। टीमें इस प्रकार हैं : भारत : सुरेश रैना (कप्तान), आर अश्विन, एस बद्रीनाथ, हरभजन सिंह (उपकप्तान), विराट कोहली, प्रवीण कुमार, अमित मिश्रा, मुनाफ पटेल, पार्थिव पटेल (विकेटकीपर), यूसुफ पठान, ऋधिमान साहा (विकेटकीपर), ईशांत शर्मा, रोहित शर्मा, विनय कुमार, मनोज तिवारी और शिखर धवन। वेस्टइंडीज : डेरेन सैमी (कप्तान), कार्लटन बॉ (विकेटकीपर), लैंडल सिमंस, किर्क एडवर्डस, डेरेन ब्रावो, मार्लटन सैमुल्स, रामनरेश सरवन, ड्वेन ब्रावो, कीरोन पोलार्ड, आंद्रे रसेल, एंथनी मार्टिन, देवेंद्र बिशू, रवि रामपाल। | यह एक सारांश है: वेस्टइंडीज के खिलाफ भारतीय क्रिकेट टीम सोमवार से शुरू हो रही पांच मैचों की एक दिवसीय श्रृंखला में भी जीत की लय बरकरार रखने उतरेगी। | 2 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले की पल्लवपुरम पुलिस ने 29 लाख रुपये के पुराने नोटों के साथ एक महिला समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है. पल्लवपुरम थाना प्रभारी बृजेश कुमार सिंह ने गुरुवार को बताया कि बुधवार की रात को वाहन चेकिंग के दौरान मोदीपुरम फ्लाईओवर पर पुलिस ने कंकरखेड़ा की तरफ से आती कार को रोक कर उसकी तलाशी ली तो, उसमें एक बैग में 29.42 लाख रुपये के पुराने नोट मिले. इनमें एक हजार के पुराने नोटों की 17 गड्डियां और 500 के पुराने नोटों की 24 गड्डियां थीं.टिप्पणियां
पुराने नोट कहां से आए और उनको बदलने के लिए कहां ले जाया जा रहा था इसकी पुलिस जांच कर रही है. पुलिस ने कार में सवार शक्ति सिंह उर्फ जोनी पुत्र अमर सिंह (पूर्व प्रधान) निवासी रिठानी, रविन्दर पुत्र कृष्णपाल निवासी गांवड़ी कायस्थ, मनोज पुत्र दीपचंद निवासी मछरी, दीपक पुत्र मदनलाल निवासी मोदीनगर और ममता पत्नी भरत सिंह को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस के साथ ही आयकर विभाग के अधिकारी आरोपियों से पूछताछ कर रहे हैं. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
पुराने नोट कहां से आए और उनको बदलने के लिए कहां ले जाया जा रहा था इसकी पुलिस जांच कर रही है. पुलिस ने कार में सवार शक्ति सिंह उर्फ जोनी पुत्र अमर सिंह (पूर्व प्रधान) निवासी रिठानी, रविन्दर पुत्र कृष्णपाल निवासी गांवड़ी कायस्थ, मनोज पुत्र दीपचंद निवासी मछरी, दीपक पुत्र मदनलाल निवासी मोदीनगर और ममता पत्नी भरत सिंह को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस के साथ ही आयकर विभाग के अधिकारी आरोपियों से पूछताछ कर रहे हैं. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) | यह एक सारांश है: मोदीपुरम फ्लाईओवर के पास पुलिस ने की कार्रवाई
1000 के नोट की 17 गड्डियां, 500 के नोट की 24 गड्डियां बरामद
पुलिस और आयकर अधिकारी आरोपियों से कर रहे पूछताछ | 21 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: सीनेटर रॉबर्ट मेनेंदेज और कांग्रेस सदस्य इलियट एंजेल ने बुधवार को एक संयुक्त बयान में जम्मू कश्मीर में पाबंदियों पर चिंता भी जताई. मेनेंदेज सीनेट की विदेश संबंधों की समिति के शीर्ष सदस्य हैं जबकि एजेंल सदन की विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष हैं. उन्होंने बयान में कहा, "पाकिस्तान को नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ कराने में मदद समेत किसी भी तरह की बदले की कार्रवाई से बचना चाहिए और पाकिस्तान की सरजमीं पर आतंकवादी ढांचे के खिलाफ ठोस कार्रवाई करनी चाहिए."
जम्मू कश्मीर में नजरबंदी और प्रतिबंधों पर चिंता जताते हुए सांसदों ने कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने के नाते भारत के पास अपने सभी नागरिकों को विधानसभा की आजादी, सूचना तक पहुंच और कानून के तहत समान संरक्षण समेत समान अधिकारों की रक्षा करना तथा उनका प्रचार करने की महत्ता को दिखाने का अवसर है. उन्होंने कहा, "पारदर्शिता और राजनीतिक भागीदारी प्रतिनिधि लोकतंत्रों की आधारशिला हैं और हम उम्मीद करते हैं कि भारत सरकार जम्मू कश्मीर में इन सिद्धांतों का पालन करेगी." | संक्षिप्त पाठ: अमेरिकी सांसदों ने पाकिस्तान को दी नसीहत
कहा- भारत के खिलाफ बदले की कार्रवाई से बचें
यूएस ने पाक को आतंकी समूहों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने को भी कहा है | 27 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: ऐसा प्रतीत होता है कि एनसीपी नेता शरद पवार (Sharad Pawar) के परिवार में लंबे समय से चल रही कलह का फायदा भाजपा नेतृत्व ने उठाया और अंतिम समय में कांग्रेस, राकांपा और शिवसेना गठबंधन द्वारा सरकार बनाने का दावा करने से ठीक पहले रातोंरात पूरे घटनाक्रम को पलट दिया, मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री का आज हुआ शपथग्रहण भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और अजित पवार के बीच कई दिनों तक चली बातचीत का नतीजा है. अजित पवार के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों की जांच केंद्रीय एजेंसियों द्वारा की जा रही है. भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने पार्टी महासचिव और प्रदेश चुनावों में पार्टी प्रभारी रहे भूपेंद्र यादव को अपनी योजना को अमली जामा पहनाने और फड़णवीस के साथ जमीनी स्तर पर समन्वय की योजना को क्रियान्वित करने के लिये मुंबई भेजा. शिवसेना,कांग्रेस और राकांपा गठबंधन की सरकार गठन की कोशिशों को परवान नहीं चढ़ने देने के लिये यथाशीघ्र सरकार बनाने का फैसला किया गया. भाजपा नेताओं का मानना था कि सत्ता की चाहत कई निर्दलीय विधायकों और विरोधी धड़े के नेताओं को अपने पक्ष में करने में मददगार होगी. एनसीपी विधायक दल के नेता के तौर पर अजित पवार ने पार्टी विधायकों से समर्थन के पत्र लिये थे और इनका इस्तेमाल सरकार बनाने के भाजपा के दावे का समर्थन करने के लिये किया.
एनसीपी नेता नवाब मलिक ने कहा कि यह पत्र शिवसेना-राकांपा और कांग्रेस गठबंधन के सरकार गठन के दावे के समर्थन के लिये थे. भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने इस बात पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि क्या शरद पवार को इन सबकी जानकारी थी. उन्होंने शिवसेना के नेतृत्व वाले गठबंधन के समर्थन की पुष्टि करते हुए कहा कि उनके भतीजे ने अपने मन से यह कदम उठाया है. शिवसेना, राकंपा और कांग्रेस पिछले सप्ताह से एक असंभव से लगने वाले गठबंधन को बनाने के लिए प्रयासरत थे, जबकि इस दौरान भाजपा शांत थी. हालांकि, अब लगता है कि उसने पवार के भतीजे अजित पवार को शामिल करने का ‘‘प्लान बी'' तैयार रखा था. शिवसेना, कांग्रेस और राकांपा ने सरकार बनाने के लिए शुक्रवार रात गठबंधन को अंतिम रूप दिया, और वे शनिवार को राज्यपाल से मिलने वाले थे. कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि शुक्रवार शाम को यहां नेहरू केंद्र में हुई तीनों दलों की बैठक में अजित पवार भी मौजूद थे. प्रदेश में 12 नवंबर को लगे राष्ट्रपति शासन को हालांकि आज (शनिवार) सुबह पांच बजकर 47 मिनट पर हटा दिया गया. इसके बाद शनिवार सुबह ही साढ़े सात बजे देवेंद्र फड़णवीस ने मुख्यमंत्री और राकांपा विधायक दल के नेता अजित पवार ने उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.
अब देखने वाली बात ये है कि फड़णवीस और अजित पवार विधानसभा में बहुमत कैसे साबित करते हैं? कांग्रेस के एक नेता ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर पीटीआई-भाषा को बताया कि उनकी पार्टी को इस बात का संदेह था कि अगर कांग्रेस-राकांपा-शिवसेना के बीच गठबंधन नहीं हुआ, तो राकांपा का एक वर्ग भाजपा के साथ हाथ मिला सकता है. कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया, “भाजपा का शीर्ष नेतृत्व (राकांपा नेता) प्रफुल्ल पटेल के माध्यम से कोशिश कर रहा था कि शरद पवार भाजपा के साथ आ जाएं. उनका कहना था कि इससे पटेल और अजित पवार को प्रवर्तन निदेशालय की जांच में मदद मिलेगी.” सूत्रों ने बताया कि पवार परिवार में पिछले कुछ महीनों से चल रही तकरार में एक तरफ अजित पवार थे और दूसरी तरफ शरद पवार और उनकी बेटी सुप्रिया सुले. यह विवाद लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव के दौरान टिकट बंटवारे को लेकर बढ़ा, जब शरद पवार ने ईडी के कार्यालय जाने का निर्णय किया और पूरे राज्य के कार्यकर्ता मुंबई आने लगे, तो अजित पवार नदारद थे. उसी शाम उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया. इसे ध्यान भटकाने की कोशिश माना गया. अगले दिन अजित पवार ने आंखों में आंसू भरकर मीडिया से कहा कि उन्होंने इसलिए इस्तीफा दिया क्योंकि ईडी ने महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक घोटाले में न सिर्फ उनका बल्कि शरद पवार का नाम भी लिया.
परिवार में सबकुछ ठीक नहीं है, इसका आभास पिछले सप्ताह उस समय भी हुआ, जब शरद पवार के निवास ‘‘सिलवर ओक'' में राकांपा की एक बैठक से अजित पवार यह कहते हुए निकल आए कि कांग्रेस के साथ प्रस्तावित बैठक रद्द हो गई है और वह अपने विधानसभा क्षेत्र बारामती जा रहे हैं. हालांकि, बाद में उक्त बैठक हुई और बाद में राकांपा नेता ने कहा कि यह मीडिया को दूर रखने की एक कोशिश थी. सूत्रों के मुताबिक अजित पवार उस समय नाराज हुए जब उनके बेटे को पहले लोकसभा चुनाव में राकांपा का टिकट देने से इनकार किया गया और बाद में वह टिकट मिलने के बाद भी हार गए. सूत्रों ने बताया कि शरद पवार के एक अन्य भाई के पोते रोहित पवार के उदय और विधानसभा चुनाव में उनकी जीत से भी अजित पवार में असुरक्षा की भावना और बढ़ी. एक अन्य नेता ने कहा, “हम पूरे घटनाक्रम को पारिवारिक विवाद के रूप में देख रहे हैं, जो खुलकर सामने आ गया है.” अभी यह स्पष्ट नहीं है कि राकांपा के 54 विधायकों में कितने अजित पवार के समर्थन में हैं. शरद पवार का दावा है कि अजित पवार के शपथ लेने के दौरान सिर्फ एक दर्जन विधायक ही उनके साथ थे, जिसमें से तीन पार्टी के पास वापस आ चुके हैं और दो अन्य वापस आ सकते हैं. | संक्षिप्त पाठ: बीजेपी ने रातोंरात महाराष्ट्र में बाजी पलट दी
बीजेपी नेता फडणवीस दोबारा बन गए हैं सीएम
वहीं, अजित पवार को डिप्टी सीएम बनाया गया है | 13 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: केंद्र सरकार ने एयर इंडिया के विनिवेश का ऐलान तो कर दिया है, लेकिन बीजेपी और संघ परिवार से जुड़े संगठन ही इसके विरोध में खड़े हैं. सवाल बस यह है कि क्या वे अपने विरोध को ऐसी धार देंगे कि सरकार को फैसला वापस लेने पर मजबूर कर सकें?
आरएसएस से जुड़े भारतीय मजदूर संघ ने एयर इंडिया का हिस्सा बेचने के खिलाफ बैठक की. सोमवार को भारतीय मजदूर संघ ने कहा कि इससे यहां के हजारों कामगारों का शोषण बढ़ेगा. इसलिए भारत सरकार फौरन इस फैसले को वापस ले.
भारतीय मजदूर संघ के जोनल सेक्रेटरी पवन कुमार ने एनडीटीवी से कहा, "हम मांग करते हैं कि भारत सरकार एयर इंडिया के विनिवेश के फैसले को रोलबैक करे...नहीं तो नवंबर में पांच लाख वर्कर संसद का घेराव करेंगे."
उधर केंद्र सरकार ने कहा है कि एयर इंडिया के विनिवेश का फैसला काफी सोच-समझकर लिया गया है और विनिवेश के दौरान एयर इंडिया के कर्मचारियों के हितों का ध्यान रखा जाएगा. श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने एनडीटीवी से कहा, "कैबिनेट ने एयर इंडिया के विनिवेश का फैसला उसे सुधारने के लिए किया है. विनिवेश के बाद सभी वर्करों को एब्ज़ार्ब किया जाएगा. उनको सही जगह पर एडजस्ट किया जाएगा. सभी के हितों को ध्यान में रखा जाएगा." टिप्पणियां
हाल के दिनों में केंद्र सरकार के बहुत सारे फैसले ऐसे रहे हैं जिनका भारतीय मजदूर संघ ने विरोध किया है. लेकिन सवाल यह है कि यह विरोध दिखावे का है या इससे सरकार की नीतियों पर असर भी पड़ेगा?
आरएसएस से जुड़े मजदूर संघ भारतीय मजदूर संघ का विरोध कई सवाल खड़े कर रहा है. यह साफ दर्शाता है कि संघ परिवार के अंदर विनिवेश के मसले पर एक राय नहीं है. लेफ्ट समर्थित सीटू पहले ही एयर इंडिया के विनिवेश के खिलाफ अपना विरोध जता चुकी है. अब बड़े मजदूर संघों के इस विरोध से निपटना सरकार के लिए आसान नहीं होगा.
आरएसएस से जुड़े भारतीय मजदूर संघ ने एयर इंडिया का हिस्सा बेचने के खिलाफ बैठक की. सोमवार को भारतीय मजदूर संघ ने कहा कि इससे यहां के हजारों कामगारों का शोषण बढ़ेगा. इसलिए भारत सरकार फौरन इस फैसले को वापस ले.
भारतीय मजदूर संघ के जोनल सेक्रेटरी पवन कुमार ने एनडीटीवी से कहा, "हम मांग करते हैं कि भारत सरकार एयर इंडिया के विनिवेश के फैसले को रोलबैक करे...नहीं तो नवंबर में पांच लाख वर्कर संसद का घेराव करेंगे."
उधर केंद्र सरकार ने कहा है कि एयर इंडिया के विनिवेश का फैसला काफी सोच-समझकर लिया गया है और विनिवेश के दौरान एयर इंडिया के कर्मचारियों के हितों का ध्यान रखा जाएगा. श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने एनडीटीवी से कहा, "कैबिनेट ने एयर इंडिया के विनिवेश का फैसला उसे सुधारने के लिए किया है. विनिवेश के बाद सभी वर्करों को एब्ज़ार्ब किया जाएगा. उनको सही जगह पर एडजस्ट किया जाएगा. सभी के हितों को ध्यान में रखा जाएगा." टिप्पणियां
हाल के दिनों में केंद्र सरकार के बहुत सारे फैसले ऐसे रहे हैं जिनका भारतीय मजदूर संघ ने विरोध किया है. लेकिन सवाल यह है कि यह विरोध दिखावे का है या इससे सरकार की नीतियों पर असर भी पड़ेगा?
आरएसएस से जुड़े मजदूर संघ भारतीय मजदूर संघ का विरोध कई सवाल खड़े कर रहा है. यह साफ दर्शाता है कि संघ परिवार के अंदर विनिवेश के मसले पर एक राय नहीं है. लेफ्ट समर्थित सीटू पहले ही एयर इंडिया के विनिवेश के खिलाफ अपना विरोध जता चुकी है. अब बड़े मजदूर संघों के इस विरोध से निपटना सरकार के लिए आसान नहीं होगा.
भारतीय मजदूर संघ के जोनल सेक्रेटरी पवन कुमार ने एनडीटीवी से कहा, "हम मांग करते हैं कि भारत सरकार एयर इंडिया के विनिवेश के फैसले को रोलबैक करे...नहीं तो नवंबर में पांच लाख वर्कर संसद का घेराव करेंगे."
उधर केंद्र सरकार ने कहा है कि एयर इंडिया के विनिवेश का फैसला काफी सोच-समझकर लिया गया है और विनिवेश के दौरान एयर इंडिया के कर्मचारियों के हितों का ध्यान रखा जाएगा. श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने एनडीटीवी से कहा, "कैबिनेट ने एयर इंडिया के विनिवेश का फैसला उसे सुधारने के लिए किया है. विनिवेश के बाद सभी वर्करों को एब्ज़ार्ब किया जाएगा. उनको सही जगह पर एडजस्ट किया जाएगा. सभी के हितों को ध्यान में रखा जाएगा." टिप्पणियां
हाल के दिनों में केंद्र सरकार के बहुत सारे फैसले ऐसे रहे हैं जिनका भारतीय मजदूर संघ ने विरोध किया है. लेकिन सवाल यह है कि यह विरोध दिखावे का है या इससे सरकार की नीतियों पर असर भी पड़ेगा?
आरएसएस से जुड़े मजदूर संघ भारतीय मजदूर संघ का विरोध कई सवाल खड़े कर रहा है. यह साफ दर्शाता है कि संघ परिवार के अंदर विनिवेश के मसले पर एक राय नहीं है. लेफ्ट समर्थित सीटू पहले ही एयर इंडिया के विनिवेश के खिलाफ अपना विरोध जता चुकी है. अब बड़े मजदूर संघों के इस विरोध से निपटना सरकार के लिए आसान नहीं होगा.
उधर केंद्र सरकार ने कहा है कि एयर इंडिया के विनिवेश का फैसला काफी सोच-समझकर लिया गया है और विनिवेश के दौरान एयर इंडिया के कर्मचारियों के हितों का ध्यान रखा जाएगा. श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने एनडीटीवी से कहा, "कैबिनेट ने एयर इंडिया के विनिवेश का फैसला उसे सुधारने के लिए किया है. विनिवेश के बाद सभी वर्करों को एब्ज़ार्ब किया जाएगा. उनको सही जगह पर एडजस्ट किया जाएगा. सभी के हितों को ध्यान में रखा जाएगा." टिप्पणियां
हाल के दिनों में केंद्र सरकार के बहुत सारे फैसले ऐसे रहे हैं जिनका भारतीय मजदूर संघ ने विरोध किया है. लेकिन सवाल यह है कि यह विरोध दिखावे का है या इससे सरकार की नीतियों पर असर भी पड़ेगा?
आरएसएस से जुड़े मजदूर संघ भारतीय मजदूर संघ का विरोध कई सवाल खड़े कर रहा है. यह साफ दर्शाता है कि संघ परिवार के अंदर विनिवेश के मसले पर एक राय नहीं है. लेफ्ट समर्थित सीटू पहले ही एयर इंडिया के विनिवेश के खिलाफ अपना विरोध जता चुकी है. अब बड़े मजदूर संघों के इस विरोध से निपटना सरकार के लिए आसान नहीं होगा.
हाल के दिनों में केंद्र सरकार के बहुत सारे फैसले ऐसे रहे हैं जिनका भारतीय मजदूर संघ ने विरोध किया है. लेकिन सवाल यह है कि यह विरोध दिखावे का है या इससे सरकार की नीतियों पर असर भी पड़ेगा?
आरएसएस से जुड़े मजदूर संघ भारतीय मजदूर संघ का विरोध कई सवाल खड़े कर रहा है. यह साफ दर्शाता है कि संघ परिवार के अंदर विनिवेश के मसले पर एक राय नहीं है. लेफ्ट समर्थित सीटू पहले ही एयर इंडिया के विनिवेश के खिलाफ अपना विरोध जता चुकी है. अब बड़े मजदूर संघों के इस विरोध से निपटना सरकार के लिए आसान नहीं होगा.
आरएसएस से जुड़े मजदूर संघ भारतीय मजदूर संघ का विरोध कई सवाल खड़े कर रहा है. यह साफ दर्शाता है कि संघ परिवार के अंदर विनिवेश के मसले पर एक राय नहीं है. लेफ्ट समर्थित सीटू पहले ही एयर इंडिया के विनिवेश के खिलाफ अपना विरोध जता चुकी है. अब बड़े मजदूर संघों के इस विरोध से निपटना सरकार के लिए आसान नहीं होगा. | सारांश: एयर इंडिया के विनिवेश का फैसला उसे सुधारने के लिए : बंडारू दत्तात्रेय
भारतीय मजदूर संघ ने कहा- विनिवेश से हजारों कामगारों का शोषण बढ़ेगा
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ परिवार के अंदर विनिवेश के मसले पर एक राय नहीं | 20 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: बीकानेर में शनिवार देर रात दो अलग अलग हादसों में छह लोगों की मौत हो गई, जबकि चार अन्य घायल हो गये. नापासर थानाधिकारी उदयलाल ने बताया कि बीकानेर-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर नोरंगदेसर गांव के पास साइड लेने के फेर में एक ट्रक से एक स्कार्पियो कार टकराने के बाद पलट गई, जिससे उसमें सवार चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चार अन्य घायल हो गये. घायलों को पीबीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
उन्होंने बताया कि मृतकों की पहचान भागीरथ सोनी (38) दीपक सोनी (30), कार्तिक (8), मधुसूदन (12), के रूप में की गई है. पोस्टमार्टम के बाद शव को परिजनों को सौंप दिये गये है. स्कार्पियो में सवार सभी लोग किसी रिश्तेदार के घर गमी में भाग लेकर लौट रहे थे, जबकि ट्रक सीकर की ओर से बीकानेर की तरफ आ रहा था.
एक अन्य हादसे में कोलायत थाना क्षेत्र सांखला फांटा के पास एक ट्रक ने एक दुपहिया वाहन को टक्कर मार दी जिससे दुपहिया वाहन सवार राजू राम (35) सहित दो लोगों की मौत हो गई. दुपहिया वाहन पर सवार 15 वर्षीय युवक की पहचान के प्रयास किये जा रहे हैं. टिप्पणियां
पुलिस ने बताया कि मृतकों के परिजनों को सूचित कर दिया गया है. पुलिस ने ट्रक चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
उन्होंने बताया कि मृतकों की पहचान भागीरथ सोनी (38) दीपक सोनी (30), कार्तिक (8), मधुसूदन (12), के रूप में की गई है. पोस्टमार्टम के बाद शव को परिजनों को सौंप दिये गये है. स्कार्पियो में सवार सभी लोग किसी रिश्तेदार के घर गमी में भाग लेकर लौट रहे थे, जबकि ट्रक सीकर की ओर से बीकानेर की तरफ आ रहा था.
एक अन्य हादसे में कोलायत थाना क्षेत्र सांखला फांटा के पास एक ट्रक ने एक दुपहिया वाहन को टक्कर मार दी जिससे दुपहिया वाहन सवार राजू राम (35) सहित दो लोगों की मौत हो गई. दुपहिया वाहन पर सवार 15 वर्षीय युवक की पहचान के प्रयास किये जा रहे हैं. टिप्पणियां
पुलिस ने बताया कि मृतकों के परिजनों को सूचित कर दिया गया है. पुलिस ने ट्रक चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
एक अन्य हादसे में कोलायत थाना क्षेत्र सांखला फांटा के पास एक ट्रक ने एक दुपहिया वाहन को टक्कर मार दी जिससे दुपहिया वाहन सवार राजू राम (35) सहित दो लोगों की मौत हो गई. दुपहिया वाहन पर सवार 15 वर्षीय युवक की पहचान के प्रयास किये जा रहे हैं. टिप्पणियां
पुलिस ने बताया कि मृतकों के परिजनों को सूचित कर दिया गया है. पुलिस ने ट्रक चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
पुलिस ने बताया कि मृतकों के परिजनों को सूचित कर दिया गया है. पुलिस ने ट्रक चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) | संक्षिप्त पाठ: बीकानेर-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर नोरंगदेसर गांव के पास दुर्घटना
कोलायत थाना क्षेत्र सांखला फांटा के पास ट्रक बाइक को मारी ठोकर
दोनों सड़क दुर्घटनाओं में छह लोगों की मौत और चार लोग घायल | 14 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: जयपुर में आज समाप्त हुए तीन दिवसीय ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट 2016 में युवराज नाम का भैंसा आकर्षण का केन्द्र रहा.
हरियाणा के कुरुक्षेत्र से आया करीब आठ वर्ष का युवराज अपने गठीले, चमकीले बदन और लंबाई-चौड़ाई के कारण सबका ध्यान अपनी ओर खींचने में सफल रहा. युवराज के मालिक ने बताया कि उसने भैंसे की कीमत नौ करोड़ रुपये तय की है.
भैंसे की देखभाल कर रहे एक कर्मचारी ने बताया कि करीब डेढ़ टन वजन के युवराज की रोज की खुराक बीस लीटर दूध और करीब चौदह पंद्रह किलोग्राम फल है. उन्होंने बताया कि युवराज की उत्तम नस्ल, कद काठी और वंशवृद्वि के कारण इसकी बहुत मांग है.टिप्पणियां
उन्होंने बताया कि युवराज के मालिक ने इसकी वंशवृद्वि की वजह से हर महीने लाखों रुपये की कमाई की है. प्रदेश, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित पशु प्रतियोगिताओं में पुरस्कार जीतने वाले युवराज की देखभाल में चार पांच लोग रहते हैं. (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
हरियाणा के कुरुक्षेत्र से आया करीब आठ वर्ष का युवराज अपने गठीले, चमकीले बदन और लंबाई-चौड़ाई के कारण सबका ध्यान अपनी ओर खींचने में सफल रहा. युवराज के मालिक ने बताया कि उसने भैंसे की कीमत नौ करोड़ रुपये तय की है.
भैंसे की देखभाल कर रहे एक कर्मचारी ने बताया कि करीब डेढ़ टन वजन के युवराज की रोज की खुराक बीस लीटर दूध और करीब चौदह पंद्रह किलोग्राम फल है. उन्होंने बताया कि युवराज की उत्तम नस्ल, कद काठी और वंशवृद्वि के कारण इसकी बहुत मांग है.टिप्पणियां
उन्होंने बताया कि युवराज के मालिक ने इसकी वंशवृद्वि की वजह से हर महीने लाखों रुपये की कमाई की है. प्रदेश, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित पशु प्रतियोगिताओं में पुरस्कार जीतने वाले युवराज की देखभाल में चार पांच लोग रहते हैं. (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
भैंसे की देखभाल कर रहे एक कर्मचारी ने बताया कि करीब डेढ़ टन वजन के युवराज की रोज की खुराक बीस लीटर दूध और करीब चौदह पंद्रह किलोग्राम फल है. उन्होंने बताया कि युवराज की उत्तम नस्ल, कद काठी और वंशवृद्वि के कारण इसकी बहुत मांग है.टिप्पणियां
उन्होंने बताया कि युवराज के मालिक ने इसकी वंशवृद्वि की वजह से हर महीने लाखों रुपये की कमाई की है. प्रदेश, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित पशु प्रतियोगिताओं में पुरस्कार जीतने वाले युवराज की देखभाल में चार पांच लोग रहते हैं. (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
उन्होंने बताया कि युवराज के मालिक ने इसकी वंशवृद्वि की वजह से हर महीने लाखों रुपये की कमाई की है. प्रदेश, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित पशु प्रतियोगिताओं में पुरस्कार जीतने वाले युवराज की देखभाल में चार पांच लोग रहते हैं. (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) | संक्षिप्त पाठ: करीब डेढ़ टन वजन का है भैंसा युवराज
खुराक बीस लीटर दूध और पंद्रह किलोग्राम फल
वंशवृद्वि की वजह से हर महीने लाखों रुपये की कमाई | 30 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: प्रियंका चोपड़ा (Priyanka Chopra) की अमेरिकी सिंगर निक जोनास (Nick Jonas) के साथ शादी (Priyanka Chopra Nick Jonas Wedding) की रस्में जोधपुर के उमेद भवन पैलेस होटल में जोर-शोर से चल रही हैं. प्रियंका चोपड़ा और निक जोनास की ईसाई रीति रिवाज से शादी (Priyanka Chopra Nick Jonas Christian Wedding) हो गई है. बॉलीवुड़ से लेकर हॉलीवुड तक की हस्तियां इस शादी में शिरकत करने पहुंची हैं. फिल्मी सितारों के अलावा भारत के सबसे बड़े उद्योगपति मुकेश अंबानी भी परिवार के साथ शादी में हिस्सा लेने पहुंचे हैं. खास यह कि प्रियंका चोपड़ा (Priyanka Chopra) की मेहंदी की रस्म की तस्वीरें सामने आ गई हैं, और इन तस्वीरों में प्रियंका चोपड़ा (Priyanka Chopra) कमाल की लग रही हैं. प्रियंका चोपड़ा और निक जोनास तस्वीरों में काले चश्मे में नजर आए हैं.
प्रियंका चोपड़ा पीले और गुलाबी रंग के लहंगे चोली में नजर आ रही हैं और अपनी शादी की रस्मों को भरपूर इंजॉय कर रही हैं. प्रियंका चोपड़ा अबू जानी-संदीप खोसला की देसी ड्रेस में गजब ढाह रही हैं और देसी गर्ल ने दिखा दिया है कि वे वाकई कमाल है. प्रियंका चोपड़ा एक फोटो में निक जोनास के साथ भरपूर मस्ती के मूड में नजर आ रही हैं और निक जोनास ने काला चश्मा पहन रखा है, तथा वे भरपूर मस्ती कर रही हैं.
प्रियंका चोपड़ा एक फोटो में परिणीति चोपड़ा, निक जोनास की मम्मी और अपने बाकी रिश्तेदारों के साथ नजर आ रही हैं और भरपूर मस्ती के मूड में हैं.
प्रियंका चोपड़ा की मेहंदी की रस्म की एक फोटो में निक जोनास को रिश्तेदारों ने कंधे पर उठा रखा है और भरपूर इंजॉय कर रहे हैं. टिप्पणियां
प्रियंका चोपड़ा एक फोटो में लहंगा-चोली में डांस कर रही हैं, और अपनी मेहंदी की रस्म का भरपूर लुत्फ ले रही हैं. प्रियंका चोपड़ा इन फोटो में कमाल की लग रही हैं.
मजेदार यह कि मेहंदी की रस्म की फोटो सामने आई है जिसमें निक जोनास और प्रियंका चोपड़ा दोनों ने ही काले चश्मे पहन रखे हैं और मस्ती कर रहे हैं.
प्रियंका चोपड़ा एक फोटो में परिणीति चोपड़ा, निक जोनास की मम्मी और अपने बाकी रिश्तेदारों के साथ नजर आ रही हैं और भरपूर मस्ती के मूड में हैं.
प्रियंका चोपड़ा की मेहंदी की रस्म की एक फोटो में निक जोनास को रिश्तेदारों ने कंधे पर उठा रखा है और भरपूर इंजॉय कर रहे हैं. टिप्पणियां
प्रियंका चोपड़ा एक फोटो में लहंगा-चोली में डांस कर रही हैं, और अपनी मेहंदी की रस्म का भरपूर लुत्फ ले रही हैं. प्रियंका चोपड़ा इन फोटो में कमाल की लग रही हैं.
मजेदार यह कि मेहंदी की रस्म की फोटो सामने आई है जिसमें निक जोनास और प्रियंका चोपड़ा दोनों ने ही काले चश्मे पहन रखे हैं और मस्ती कर रहे हैं.
प्रियंका चोपड़ा एक फोटो में लहंगा-चोली में डांस कर रही हैं, और अपनी मेहंदी की रस्म का भरपूर लुत्फ ले रही हैं. प्रियंका चोपड़ा इन फोटो में कमाल की लग रही हैं.
मजेदार यह कि मेहंदी की रस्म की फोटो सामने आई है जिसमें निक जोनास और प्रियंका चोपड़ा दोनों ने ही काले चश्मे पहन रखे हैं और मस्ती कर रहे हैं.
मजेदार यह कि मेहंदी की रस्म की फोटो सामने आई है जिसमें निक जोनास और प्रियंका चोपड़ा दोनों ने ही काले चश्मे पहन रखे हैं और मस्ती कर रहे हैं. | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: प्रियंका की मेहंदी की रस्म की आईं तस्वीरें
काला चश्मा पहने आईं नजर
इस अंदाज में की रस्म पूरी | 25 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: भारतीय क्रिकेट टीम के 28 साल के अंतराल के बाद फिर विश्व विजेता बनने पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी शनिवार को दिल्ली की सड़कों पर निकलीं और सैकड़ों उत्साही प्रशंसकों के साथ जीत के जश्न में शामिल हुईं। व्यस्त आईटीओ चौराहे के पास बहादुरशाह जफर मार्ग पर रात करीब ग्यारह बजे जैसे ही सोनिया गांधी की गाड़ी पहुंची, वहां उपस्थित लोगों ने हाथ हिला कर उनका अभिवादन किया और तिरंगा लहराया। सोनिया ने प्रशंसकों से हाथ मिलाया। वहां उपस्थित लोगों ने जोरदार ढंग से सोनिया गांधी के साथ जीत का जश्न मनाया। सोनिया ने प्रशंसकों से कहा कि भारतीय टीम ने विश्व कप जीत कर वास्तव में हमें गौरवान्वित किया है। प्रशंसकों ने इंडिया इंडिया.. और वंदे मातरम का जयघोष किया। विशेष सुरक्षा बल की सुरक्षा में यहां आई सोनिया गांधी करीब 20 मिनट आईटीओ पर रूकी और उसके बाद दिल्ली गेट की ओर रवाना हो गई। दिल्ली के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक आईटीओ पर जबर्दस्त जाम लग गया। इस समाचार को सुनने के बाद कई क्षेत्रों से लोग आईटीओ की ओर आ गए जिसके कारण जाम की स्थिति और भी गंभीर हो गई। | यहाँ एक सारांश है:भारतीय टीम के विश्व विजेता बनने पर सोनिया गांधी दिल्ली की सड़कों पर निकलीं और सैकड़ों उत्साही प्रशंसकों के साथ जीत के जश्न में शामिल हुईं। | 17 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: नई दिल्ली से रांची जा रही राजधानी एक्सप्रेस में यात्रा कर रहे करीब 12 मुसाफिर फूड पॉयजनिंग का शिकार हो गए। खराब खाना खाकर बीमार पड़ने वालों में पलामू के सांसद कामेश्वर बैठा भी शामिल हैं। फूड पॉयजनिंग का शिकार हुए सभी यात्रियों का मुगलसराय पहुंचने पर डॉक्टरों ने इलाज किया।
मुगलसराय में यात्रियों ने कैटरिंग विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। यात्रियों के गुस्से को देखते हुए ट्रेन के कैटरिंग मैनेजर को हिरासत में लिया गया और खाने के सैम्पल को जांच के लिए भेजा गया है। यात्रियों को उपचार के बाद उसी ट्रेन से रांची के लिए रवाना किया गया।
मुगलसराय में यात्रियों ने कैटरिंग विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। यात्रियों के गुस्से को देखते हुए ट्रेन के कैटरिंग मैनेजर को हिरासत में लिया गया और खाने के सैम्पल को जांच के लिए भेजा गया है। यात्रियों को उपचार के बाद उसी ट्रेन से रांची के लिए रवाना किया गया। | यहाँ एक सारांश है:नई दिल्ली से रांची जा रही राजधानी एक्सप्रेस में यात्रा कर रहे करीब 12 मुसाफिर फूड पॉयजनिंग का शिकार हो गए। बीमार पड़ने वालों में पलामू के सांसद कामेश्वर बैठा भी शामिल हैं। | 15 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: दिग्गज राहुल द्रविड़ के अंदर ट्रेनिंग करने वाले संजू सैमसन ने आईपीएल 2017 में पहला शतक जमाया है. 22 वर्षीय सैमसन ने मात्र 63 गेंदों का सामना कर 102 रनों की शानदार पारी खेली, जिसकी बदौलत उनकी टीम दिल्ली डेयरडेविल्स ने राइजिंग पुणे सुपरजाएंट्स के खिलाफ 4 विकेट खोकर 205 रन बना डाले. टी-20 में सैमसन का यह पहला शतक है जिसे बनाने में उन्होंने 4 खूबसूरत चौके और पांच शानदार छक्के भी मारे. इससे पहले आईपीएल में वो 5 अर्द्धशतक भी बना चुके हैं.
सैमसन तब बल्लेबाजी करने उतरे जब डेयरडेविल्स ने अपनी पारी की सातवीं ही गेंद पर अपना पहला विकेट गंवा दिया. सलामी बल्लेबाज आदित्य तारे बिना खाता खोले ही आउट हो गए जिसके बाद संजू मैदान पर उतरे. उसके बाद संजू ने न केवल साझेदारियां कीं बल्कि तेज रन गति भी बनाए रखी.
सैमसन तब बल्लेबाजी करने उतरे जब डेयरडेविल्स ने अपनी पारी की सातवीं ही गेंद पर अपना पहला विकेट गंवा दिया. सलामी बल्लेबाज आदित्य तारे बिना खाता खोले ही आउट हो गए जिसके बाद संजू मैदान पर उतरे. उसके बाद संजू ने न केवल साझेदारियां कीं बल्कि तेज रन गति भी बनाए रखी. | संक्षिप्त सारांश: संजू सैमसन और कोरी एंडरसन ने चौथे विकेट 41 रन जोड़े
मौरिस और एंडरसन ने पांचवें विकेट के लिए 39 रनों की साझेदारी की
इन दोनों साझेदारियों को मिलाकर एंडरसन ने केवल 2 रन बनाए | 29 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: भारत ने भले ही दिसंबर 2008 में मुंबई आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान से क्रिकेटिया रिश्ते खत्म कर दिए थे लेकिन इस बीच दोनों देशों के बीच तटस्थ स्थानों पर चार मैच खेले गए जिनमें से भारतीय टीम तीन मैच जीतकर अव्वल रही।
भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने आज पाकिस्तान के साथ क्रिकेट संबंध बहाल करने का फैसला किया। दोनों टीमों के बीच इस साल दिसंबर में भारत में तीन वनडे और दो ट्वेंटी20 मैच खेले जाएंगे।
भारत और पाकिस्तान के बीच आखिरी द्विपक्षीय शृंखला नवंबर 2007 में खेली गई थी जिसमें भारत ने पाकिस्तान को 3-2 से पराजित किया था। दिसंबर 2008 में मुंबई में आतंकी हमले के बाद इन दोनों टीमों के बीच पहला मैच इस घटना के एक साल बाद 26 सितंबर 2009 में आईसीसी चैम्पियंस ट्राफी में सेंचुरियन में खेला गया था और इसमें पाकिस्तान ने 54 रन से जीत दर्ज की।टिप्पणियां
इसके बाद दोनों टीमें 19 जून 2010 में एशिया कप के मैच में डाम्बुला में आमने-सामने हुई। भारत ने यह मैच जीतन विकेट से जीता। विश्व कप 2011 में भारत और पाकिस्तान का मुकाबला सेमीफाइनल में हुआ। मोहाली में 30 मार्च को खेले गए इस मैच में भारत ने 29 रन से जीत दर्ज की थी। भारत बाद में श्रीलंका को हराकर दूसरी बार विश्व चैंपियन बना था।
इस साल 18 मार्च को एशिया कप के दौरान भी दोनों देशों के बीच भिड़ंत हुई जिसमें महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई वाली टीम ने पाकिस्तान को छह विकेट से पराजित किया। लेकिन फिर भी भारतीय टीम चार देशों के इस टूर्नामेंट के फाइनल में नहीं पहुंच सकी और पाकिस्तान ने बांग्लादेश पर दो रन की रोमांचक जीत दर्ज कर खिताब जीता।
भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने आज पाकिस्तान के साथ क्रिकेट संबंध बहाल करने का फैसला किया। दोनों टीमों के बीच इस साल दिसंबर में भारत में तीन वनडे और दो ट्वेंटी20 मैच खेले जाएंगे।
भारत और पाकिस्तान के बीच आखिरी द्विपक्षीय शृंखला नवंबर 2007 में खेली गई थी जिसमें भारत ने पाकिस्तान को 3-2 से पराजित किया था। दिसंबर 2008 में मुंबई में आतंकी हमले के बाद इन दोनों टीमों के बीच पहला मैच इस घटना के एक साल बाद 26 सितंबर 2009 में आईसीसी चैम्पियंस ट्राफी में सेंचुरियन में खेला गया था और इसमें पाकिस्तान ने 54 रन से जीत दर्ज की।टिप्पणियां
इसके बाद दोनों टीमें 19 जून 2010 में एशिया कप के मैच में डाम्बुला में आमने-सामने हुई। भारत ने यह मैच जीतन विकेट से जीता। विश्व कप 2011 में भारत और पाकिस्तान का मुकाबला सेमीफाइनल में हुआ। मोहाली में 30 मार्च को खेले गए इस मैच में भारत ने 29 रन से जीत दर्ज की थी। भारत बाद में श्रीलंका को हराकर दूसरी बार विश्व चैंपियन बना था।
इस साल 18 मार्च को एशिया कप के दौरान भी दोनों देशों के बीच भिड़ंत हुई जिसमें महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई वाली टीम ने पाकिस्तान को छह विकेट से पराजित किया। लेकिन फिर भी भारतीय टीम चार देशों के इस टूर्नामेंट के फाइनल में नहीं पहुंच सकी और पाकिस्तान ने बांग्लादेश पर दो रन की रोमांचक जीत दर्ज कर खिताब जीता।
भारत और पाकिस्तान के बीच आखिरी द्विपक्षीय शृंखला नवंबर 2007 में खेली गई थी जिसमें भारत ने पाकिस्तान को 3-2 से पराजित किया था। दिसंबर 2008 में मुंबई में आतंकी हमले के बाद इन दोनों टीमों के बीच पहला मैच इस घटना के एक साल बाद 26 सितंबर 2009 में आईसीसी चैम्पियंस ट्राफी में सेंचुरियन में खेला गया था और इसमें पाकिस्तान ने 54 रन से जीत दर्ज की।टिप्पणियां
इसके बाद दोनों टीमें 19 जून 2010 में एशिया कप के मैच में डाम्बुला में आमने-सामने हुई। भारत ने यह मैच जीतन विकेट से जीता। विश्व कप 2011 में भारत और पाकिस्तान का मुकाबला सेमीफाइनल में हुआ। मोहाली में 30 मार्च को खेले गए इस मैच में भारत ने 29 रन से जीत दर्ज की थी। भारत बाद में श्रीलंका को हराकर दूसरी बार विश्व चैंपियन बना था।
इस साल 18 मार्च को एशिया कप के दौरान भी दोनों देशों के बीच भिड़ंत हुई जिसमें महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई वाली टीम ने पाकिस्तान को छह विकेट से पराजित किया। लेकिन फिर भी भारतीय टीम चार देशों के इस टूर्नामेंट के फाइनल में नहीं पहुंच सकी और पाकिस्तान ने बांग्लादेश पर दो रन की रोमांचक जीत दर्ज कर खिताब जीता।
इसके बाद दोनों टीमें 19 जून 2010 में एशिया कप के मैच में डाम्बुला में आमने-सामने हुई। भारत ने यह मैच जीतन विकेट से जीता। विश्व कप 2011 में भारत और पाकिस्तान का मुकाबला सेमीफाइनल में हुआ। मोहाली में 30 मार्च को खेले गए इस मैच में भारत ने 29 रन से जीत दर्ज की थी। भारत बाद में श्रीलंका को हराकर दूसरी बार विश्व चैंपियन बना था।
इस साल 18 मार्च को एशिया कप के दौरान भी दोनों देशों के बीच भिड़ंत हुई जिसमें महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई वाली टीम ने पाकिस्तान को छह विकेट से पराजित किया। लेकिन फिर भी भारतीय टीम चार देशों के इस टूर्नामेंट के फाइनल में नहीं पहुंच सकी और पाकिस्तान ने बांग्लादेश पर दो रन की रोमांचक जीत दर्ज कर खिताब जीता।
इस साल 18 मार्च को एशिया कप के दौरान भी दोनों देशों के बीच भिड़ंत हुई जिसमें महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई वाली टीम ने पाकिस्तान को छह विकेट से पराजित किया। लेकिन फिर भी भारतीय टीम चार देशों के इस टूर्नामेंट के फाइनल में नहीं पहुंच सकी और पाकिस्तान ने बांग्लादेश पर दो रन की रोमांचक जीत दर्ज कर खिताब जीता। | सारांश: भारत ने भले ही दिसंबर 2008 में मुंबई आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान से क्रिकेटिया रिश्ते खत्म कर दिए थे लेकिन इस बीच दोनों देशों के बीच तटस्थ स्थानों पर चार मैच खेले गए जिनमें से भारतीय टीम तीन मैच जीतकर अव्वल रही। | 31 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक (PMC Bank) में वित्तीय गड़बड़ियों की वजह से लेनदेन पर प्रतिबंध लगाने के बाद अब रिजर्व बैंक (RBI) ने लक्ष्मी विलास बैंक (Lakshmi Vilas Bank) पर कई तरह की पाबंदियां लगा दी हैं. RBI ने लक्ष्मी विलास बैंक की कमजोर वित्तीय हालत को देखते हुए उसके खिलाफ त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (PCA) व्यवस्था के तहत कर्ज देने और नई शाखा खोलने पर रोक जैसे प्रतिबंध लगा दिये हैं. बताया जा रहा है कि लक्ष्मी विलास बैंक में जोखिम से बचाव के लिए पर्याप्त पूंजी के अभाव, दो लगातार साल से संपत्तियों पर नुकसान और बड़ी संख्या में फंसे लोन अमाउंट को देखते हुए RBI ने यह कदम उठाया है.
पीसीए के तहत लक्ष्मी निवास बैंक पर ऋण देने, नयी शाखाएं खोलने तथा लाभांश का भुगतान करने पर रोक लग गयी है. बैंक को चुनिंदा क्षेत्रों को दिये ऋण में कमी लाने पर भी काम करना होगा. लक्ष्मी विलास बैंक ने शनिवार को नियामक को इसकी जानकारी दी. रिजर्व बैंक ने यह कार्रवाई ऐसे समय की है जब दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने धोखाधड़ी तथा कोष के दुरुपयोग को लेकर लक्ष्मी विलास बैंक के निदेशक मंडल के खिलाफ मामला दर्ज किया है. रिजर्व बैंक के त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई से इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस का लक्ष्मी विलास बैंक में प्रस्तावित विलय अधर में अटक गया है. विलय को अभी रिजर्व बैंक से मंजूरी नहीं मिली है.
रिजर्व बैंक ने 31 मार्च 2019 को समाप्त वित्त वर्ष के लिये जोखिम की निगरानी के तहत हुई जांच के बाद यह कार्रवाई शुरू की है. वित्त वर्ष 2018-19 में लक्ष्मी निवास बैंक का शुद्ध एनपीए 7.49 प्रतिशत, पूंजी पर्याप्तता अनुपात 7.72 प्रतिशत रहा तथा संपत्तियों पर 2.32 प्रतिशत नुकसान हुआ। बैंक को 2018-19 में 894.10 करोड़ रुपये का घाटा हुआ. लक्ष्मी निवास बैंक ने कहा कि रिजर्व बैंक की कार्रवाई से उसका प्रदर्शन बेहतर होगा तथा सामान्य तौर पर जमा स्वीकार करने या पुनर्भुगतान समेत उसके दैनिक परिचालन पर प्रतिकूल असर नहीं होगा. लक्ष्मी निवास बैंक ने अलग से बीएसई को बताया कि उसे प्रतिभूति कर एक हजार करोड़ रुपये की पूंजी जुटाने के लिये शेयरधारकों की मंजूरी मिल गयी है.
आपको बता दें कि पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक (PMC Bank) में वित्तीय गड़बड़ियों के सामने आने के बाद आरबीआई ने इसी हफ्ते बैंकत पर कई प्रतिबंध लगा दिये थे. पहले ग्राहकों के लिए 6 महीने में निकासी की सीमा 1000 रुपये रखी गई थी, हालांकि इसे बढ़ाकर दस हजार रुपये कर दिया गया है. दूसरी तरफ, पीएमसी बैंक न तो लोन दे सकता है और न ही कोई निवेश कर सकता है. | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: लक्ष्मी विलास बैंक पर आरबीआई ने लगाए प्रतिबंध
नई शाखा और नया लोन नहीं दे सकेगा बैंक
इससे पहले पीएमसी बैंक पर लग चुका है प्रतिबंध | 32 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: कर्नाटक के विजयपुरा में एक इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रोफेसर को सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर केंद्र सरकार की आलोचना करना भारी पड़ गया. भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना करने पर उन्हें घुटनों के बल बैठकर हाथ जोड़ते हुए माफी मांगने के लिए मजबूर किया गया है. प्रोफेसर ने कथित तौर पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की तारीफ भी की थी.
दक्षिणपंथी ग्रुप के 100 से ज्यादा कार्यकर्ताओं ने प्रोफेसर को घेर लिया और उनसे घुटनों के बल बैठकर माफी मंगवाई गई. कार्यकर्ताओं ने प्रोफेसर के निलंबन की मांग भी की है. रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रिंसिपल ने उन्हें आश्वस्त किया है कि मंगलवार को कॉलेज खुलने के बाद प्रोफेसर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
वायरल हुए वीडियो में देखा जा सकता है कि प्रोफेसर घुटनों के बल बैठकर 'सॉरी' बोल रहे हैं और उनके चारों ओर खड़े प्रोफेसर नारे लगा रहे हैं. भीड़ में कुछ पुलिसकर्मी भी देखे जा सकते हैं, लेकिन वे वहां पर केवल मूकदर्शक बनकर खड़े हैं. विजयपुरा में एक सीनियर पुलिस अधिकारी प्रकाश एन अमृत ने एनडीटीवी को बताया 'हमें कोई शिकायत नहीं मिली और ना ही अभी तक कोई एफआईआर दर्ज हुई है.'
भाजपा नेता विवेक रेड्डी ने कहा, 'प्रोफेसर को संकट के समय हमारी सेना और भारत के लोगों की गहरी भावनाओं का ध्यान रखना होगा. आप पाकिस्तान की तारीफ करते हुए ऐसा कोई भी बयान नहीं दे सकते, जिससे भारत की नकारात्मक छवि बने.' कॉलेज कर्नाटक के गृहमंत्री एमबी पाटिल का है, लेकिन उनकी ओर से कोई टिप्पणी नहीं आई है.
बता दें, पिछले साल दिसंबर मणिपुर के एक पत्रकार को सोशल मीडिया पर कथिततौर पर सत्तारूढ़ भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करने को लेकर कस्टडी में लिए जाने के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत उसे एक साल तक हिरासत में रखने की सजा सुनाई गई. सरकार के मुताबिक, 39 वर्षीय किशोरचंद्र वांगखेम को शुरू में 27 नवंबर को हिरासत में लिया गया था. फेसबुक पर एक वीडियो के माध्यम से मुख्यमंत्री बीरेन सिंह और साथ ही पीएम मोदी की कथित तौर पर आलोचना करने के लिए उन्हें हिरासत में लिया गया था.
इस वीडियो में कथिततौर पर किशोरचंद्र वांगखेम ने झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का मणिपुर से कोई संबंध न होने के बावजूद उनकी जयंती को चिह्नित करने के लिए कार्यक्रम के आयोजन को लेकर बीरेने सिंह को प्रधानमंत्री मोदी और आरएसएस की कठपुतली कहा था. सूत्रों के मुताबिक, वीडियो क्लिप में उन्होंने सरकार को गिरफ्तार करने की भी चेतावनी दी थी. | यह एक सारांश है: घुटनों के बल बैठने को किया मजबूर
दक्षिणपंथी ग्रुप के कार्यकर्ताओं ने की नारेबाजी
फेसबुक पर की थी मोदी सरकार की आलोचना | 2 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: बंबई उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जेए पाटिल आदर्श हाउसिंग सोसाइटी घोटाले में कथित अनियमितता की जांच करने वाले आयोग के मुखिया होंगे। इस घोटाले की वजह से ही अशोक चव्हाण को मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था। मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि आयोग तीन महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य सचिव पी सुब्रह्मण्यन आयोग के अन्य सदस्य होंगे। दो सदस्यीय न्यायिक आयोग के गठन की घोषणा राज्य सरकार ने पिछले महीने विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान की थी। पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा, जांच आयोग को आदर्श सोसाइटी में अनियमितता की जांच करनी है। इसकी अध्यक्षता बंबई उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जेए पाटिल करेंगे और राज्य के पूर्व मुख्य सचिव पी सुब्रह्मण्यन आयोग के दूसरे सदस्य होंगे। उन्होंने कहा कि आयोग का गठन इन्क्वायरी कमीशन एक्ट, 1952 के तहत किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा, आयोग आदर्श सोसाइटी के भूमि के स्वामित्व मामले की, फ्लैटों का आरक्षण, नजदीकी प्रकाश पेठे मार्ग का विस्तार, बेस्ट (सिविक) भूखंड के आरक्षण में बदलाव, तटीय नियमन क्षेत्र मानक का उल्लंघन और नौकरशाहों की भूमिका की जांच करेगा। आयोग भविष्य में इस तरह के मामलों की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए भी सिफारिशें करेगा। चव्हाण ने कहा कि राज्य सरकार आदर्श सोसाइटी द्वारा किए गए उल्लंघनों की जांच को लेकर गंभीर है। पॉश कोलाबा इलाके में 31 मंजिला सोसाइटी का निर्माण कथित तौर पर कारगिल युद्ध के शहीदों के परिजनों को देने के लिए आरक्षित भूखंड पर किया गया। ये फ्लैट नौकरशाहों और नेताओं के परिजनों को आवंटित कर दिए गए। गत महीने घोटाले की बात सामने आने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण को पद से इस्तीफा देना पड़ा था। | यहाँ एक सारांश है:बंबई उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जेए पाटिल घोटाले में कथित अनियमितता की जांच करने वाले आयोग के मुखिया होंगे। | 12 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: स्पेन का एक व्यक्ति अपने 37वें जन्मदिन की पूर्व संध्या पर बैंकाक के एक व्यस्त इलाके में स्थित अपने अपार्टमेंट में मृत पाया गया। थाईलैंड पुलिस ने बताया कि उसने अपनी आत्महत्या की फेसबुक पर सीधे ब्लागिंग की।
पुलिस को बुधवार मध्यरात्रि के बाद उस समय सतर्क किया गया जब स्पेन में बैठे उसके मित्रों ने सोशल नेटवर्क पर भेजे गए उसके हताशापूर्ण पोस्ट और एक घातक दवा के चित्र को देखा।
मामले की जांच कर रहे लेफ्टीनेंट कर्नल अपिचन स्वासदिबुद ने बताया कि उसके द्वारा किसी दवा से भरे गिलास का चित्र पोस्ट किए जाने के बाद उसके मित्रों ने हमें सतर्क किया।
उसके मित्र की फर्मासिस्ट बहन ने उसे आगाह किया कि यह एक खतरनाक दवा है जिससे मौत हो सकती है।टिप्पणियां
अपिचन ने कहा कि मृतक के मित्रों और पड़ोसियों ने बताया कि वह आमतौर पर एक खुशदिल इंसान था। वह एक दूरसंचार कंपनी में काम करता था और पिछले करीब एक साल से थाईलैंड में रह रहा था।
आत्महत्या से करीब 30 मिनट पहले उसने अपने बॉस को ईमेल से अपना इस्तीफा भेजा और उनसे कहा कि वह स्पष्टीकरण के लिए उसके मित्र से बात कर सकते हैं।
पुलिस को बुधवार मध्यरात्रि के बाद उस समय सतर्क किया गया जब स्पेन में बैठे उसके मित्रों ने सोशल नेटवर्क पर भेजे गए उसके हताशापूर्ण पोस्ट और एक घातक दवा के चित्र को देखा।
मामले की जांच कर रहे लेफ्टीनेंट कर्नल अपिचन स्वासदिबुद ने बताया कि उसके द्वारा किसी दवा से भरे गिलास का चित्र पोस्ट किए जाने के बाद उसके मित्रों ने हमें सतर्क किया।
उसके मित्र की फर्मासिस्ट बहन ने उसे आगाह किया कि यह एक खतरनाक दवा है जिससे मौत हो सकती है।टिप्पणियां
अपिचन ने कहा कि मृतक के मित्रों और पड़ोसियों ने बताया कि वह आमतौर पर एक खुशदिल इंसान था। वह एक दूरसंचार कंपनी में काम करता था और पिछले करीब एक साल से थाईलैंड में रह रहा था।
आत्महत्या से करीब 30 मिनट पहले उसने अपने बॉस को ईमेल से अपना इस्तीफा भेजा और उनसे कहा कि वह स्पष्टीकरण के लिए उसके मित्र से बात कर सकते हैं।
मामले की जांच कर रहे लेफ्टीनेंट कर्नल अपिचन स्वासदिबुद ने बताया कि उसके द्वारा किसी दवा से भरे गिलास का चित्र पोस्ट किए जाने के बाद उसके मित्रों ने हमें सतर्क किया।
उसके मित्र की फर्मासिस्ट बहन ने उसे आगाह किया कि यह एक खतरनाक दवा है जिससे मौत हो सकती है।टिप्पणियां
अपिचन ने कहा कि मृतक के मित्रों और पड़ोसियों ने बताया कि वह आमतौर पर एक खुशदिल इंसान था। वह एक दूरसंचार कंपनी में काम करता था और पिछले करीब एक साल से थाईलैंड में रह रहा था।
आत्महत्या से करीब 30 मिनट पहले उसने अपने बॉस को ईमेल से अपना इस्तीफा भेजा और उनसे कहा कि वह स्पष्टीकरण के लिए उसके मित्र से बात कर सकते हैं।
उसके मित्र की फर्मासिस्ट बहन ने उसे आगाह किया कि यह एक खतरनाक दवा है जिससे मौत हो सकती है।टिप्पणियां
अपिचन ने कहा कि मृतक के मित्रों और पड़ोसियों ने बताया कि वह आमतौर पर एक खुशदिल इंसान था। वह एक दूरसंचार कंपनी में काम करता था और पिछले करीब एक साल से थाईलैंड में रह रहा था।
आत्महत्या से करीब 30 मिनट पहले उसने अपने बॉस को ईमेल से अपना इस्तीफा भेजा और उनसे कहा कि वह स्पष्टीकरण के लिए उसके मित्र से बात कर सकते हैं।
अपिचन ने कहा कि मृतक के मित्रों और पड़ोसियों ने बताया कि वह आमतौर पर एक खुशदिल इंसान था। वह एक दूरसंचार कंपनी में काम करता था और पिछले करीब एक साल से थाईलैंड में रह रहा था।
आत्महत्या से करीब 30 मिनट पहले उसने अपने बॉस को ईमेल से अपना इस्तीफा भेजा और उनसे कहा कि वह स्पष्टीकरण के लिए उसके मित्र से बात कर सकते हैं।
आत्महत्या से करीब 30 मिनट पहले उसने अपने बॉस को ईमेल से अपना इस्तीफा भेजा और उनसे कहा कि वह स्पष्टीकरण के लिए उसके मित्र से बात कर सकते हैं। | संक्षिप्त सारांश: स्पेन का एक व्यक्ति अपने 37वें जन्मदिन की पूर्व संध्या पर बैंकाक के एक व्यस्त इलाके में स्थित अपने अपार्टमेंट में मृत पाया गया। थाईलैंड पुलिस ने बताया कि उसने अपनी आत्महत्या की फेसबुक पर सीधे ब्लागिंग की। | 8 | ['hin'] |
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