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एक सारांश बनाओ: हालांकि शशिकला नटराजन को अभी तक आधिकारिक रूप से पार्टी में कोई स्थान नहीं मिला है लेकिन इस हफ्ते जिस तरह उनकी अहमियत जगज़ाहिर हुई है, उससे यह कानाफूसी और तेज़ हो गई है कि AIADMK की अगली महासचिव बनकर क्या वह पार्टी की कमान औपचारिक रूप से अपने हाथों में ले लेंगी. अगर इसमें कोई रोड़ा है भी तो पार्टी इस पर खुलकर कुछ नहीं बोल रही है. बल्कि फिलहाल नटराजन की पूर्व प्रमुख के प्रति वफादारी पर ही ज़ोर दिया जा रहा है. इन दोनों महिलाओं के बीच कुछ वक्त के लिए अलगाव रहा था लेकिन इस पर मैत्रेयन का कहना है कि 'ऐसा डर था कि डीएमके (मुख्य प्रतिद्वंद्वी पार्टी) शशिकला को अम्मा के खिलाफ कर देगी लेकिन ऐसा हो नहीं पाया. इसी से शशिकला की काबिलियत का अंदाज़ा लगाया जा सकता है.' इसी मौके पर मैत्रेयन ने विमुद्रीकरण के फैसले पर होने वाली परेशानी पर अफसोस जताते हुए कहा कि सरकार ने काफी असरदार फैसला लिया है और भारत इतिहास बदलने की कगार पर है. | सारांश: सत्ता हस्तांतरण में शशिकला के कथित रोल पर उठे सवाल
लेकिन पार्टी ने रुख़ साफ करते हुए शशिकला को क़ाबिल बताया
शशिकला फिलहाल पार्टी में किसी पद पर नहीं है | 5 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: इराक के पवित्र शहर में शिया श्रद्धालुओं को निशाना बना कर किए कार बम हमलों में कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई। पिछले सप्ताहभर से किए जा रहे हमलों में कर्बला में किए गए ये हमले सबसे ताजा हैं। सप्ताहभर से चल रही हिंसा में अब तक 159 लोगों की मौत हो चुकी है। अमेरिकी सेना की पूर्ण वापसी के बाद अपनी सुरक्षा खुद हाथ में लेने संबंधी इराकी बलों की योजना पर इसके चलते गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं। पुलिस और अस्पताल अधिकारियों ने बताया कि पहला हमला कर्बला के पूर्वी छोर पर उस स्थान पर सुबह सात बजे हुआ जहां श्रद्धालुओं की बसें खड़ी थी। इस हमले में छह श्रद्धालुओं की मौत हो गई जबकि 34 अन्य घायल हो गए। पुलिस ने कहा कि इसी स्थान पर समय रहते एक अन्य बम का पता लग जाने से एक और भीषण हादसा टल गया। पहले बम विस्फोट के चार घंटे बाद शहर के दक्षिणी छोर पर एक और कार बम हमला हुआ जिसमें कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई जिसमें 10 श्रद्धालु और दो सैनिक शामिल हैं। इस विस्फोट के कारण 21 लोग घायल हो गए। | सारांश: इराक के पवित्र शहर में शिया श्रद्धालुओं को निशाना बना कर किए कार बम हमलों में कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई। | 5 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: भारत के पारूपल्ली कश्यप एशियाई बैडमिंटन चैंपियनशिप के पुरुषों के एकल वर्ग के दूसरे दौर में पहुंच गए हैं। टूर्नामेंट के चौथे वरीय खिलाड़ी कश्यप ने बुधवार को खेले गए पहले दौर के मुकाबले में दक्षिण कोरिया के जी हून होंग को 18-21 21-15 22-20 से पराजित किया।
होंग और कश्यप के बीच यह दूसरी भिड़ंत थी। पहली भिड़ंत में भी कश्यप विजयी रहे थे। कश्यप ने 2009 में इसी टूर्नामेंट में होंग को हराया था। अगले दौर में कश्यप का सामना चीनी ताइपे के हान चोउ चू से होगा। इन दोनों के बीच यह पहली भिड़ंत होगी।टिप्पणियां
महिला युगल में प्रांद्या गडरे और अश्विनी पोनप्पा की जोड़ी भी दूसरे दौर में पहुंचने में सफल रही है। इस जोड़ी ने चीनी ताइपे की पी रोंग वोंग और सिंग यिन यूयेन को 21-19 21-17 से हराया। महिला युगल में भारत की दूसरी जोड़ीदारों-अपर्णा बालन और सिकी रेड्डी को हालांकि हार मिली है। अपर्णा और सिकी को चीनी ताइपे की हुआन चेन तथा वेन लाई ने 21-16 21-17 से हराया।
इसी तरह, मिश्रित युगल में भारत के तरुण कोना और पोनप्पा को भी हार मिली है। इस जोड़ी को सिंगापुर की लियू यी तथा लेई याओ ने 21-14 16-21 21-18 से मात दी। यह मैच 47 मिनट चला। पुरुष युगल में भारत के दूसरे जोड़ीदारों-प्रणव चोपड़ा और अक्षय देवाल्कर को भी हार मिली है। प्रणव और अक्षय को चानी ताइपे के हुंग लिन चेन और चिया पिन ने 31 मिनट में 21-17 21-17 से हराया।
होंग और कश्यप के बीच यह दूसरी भिड़ंत थी। पहली भिड़ंत में भी कश्यप विजयी रहे थे। कश्यप ने 2009 में इसी टूर्नामेंट में होंग को हराया था। अगले दौर में कश्यप का सामना चीनी ताइपे के हान चोउ चू से होगा। इन दोनों के बीच यह पहली भिड़ंत होगी।टिप्पणियां
महिला युगल में प्रांद्या गडरे और अश्विनी पोनप्पा की जोड़ी भी दूसरे दौर में पहुंचने में सफल रही है। इस जोड़ी ने चीनी ताइपे की पी रोंग वोंग और सिंग यिन यूयेन को 21-19 21-17 से हराया। महिला युगल में भारत की दूसरी जोड़ीदारों-अपर्णा बालन और सिकी रेड्डी को हालांकि हार मिली है। अपर्णा और सिकी को चीनी ताइपे की हुआन चेन तथा वेन लाई ने 21-16 21-17 से हराया।
इसी तरह, मिश्रित युगल में भारत के तरुण कोना और पोनप्पा को भी हार मिली है। इस जोड़ी को सिंगापुर की लियू यी तथा लेई याओ ने 21-14 16-21 21-18 से मात दी। यह मैच 47 मिनट चला। पुरुष युगल में भारत के दूसरे जोड़ीदारों-प्रणव चोपड़ा और अक्षय देवाल्कर को भी हार मिली है। प्रणव और अक्षय को चानी ताइपे के हुंग लिन चेन और चिया पिन ने 31 मिनट में 21-17 21-17 से हराया।
महिला युगल में प्रांद्या गडरे और अश्विनी पोनप्पा की जोड़ी भी दूसरे दौर में पहुंचने में सफल रही है। इस जोड़ी ने चीनी ताइपे की पी रोंग वोंग और सिंग यिन यूयेन को 21-19 21-17 से हराया। महिला युगल में भारत की दूसरी जोड़ीदारों-अपर्णा बालन और सिकी रेड्डी को हालांकि हार मिली है। अपर्णा और सिकी को चीनी ताइपे की हुआन चेन तथा वेन लाई ने 21-16 21-17 से हराया।
इसी तरह, मिश्रित युगल में भारत के तरुण कोना और पोनप्पा को भी हार मिली है। इस जोड़ी को सिंगापुर की लियू यी तथा लेई याओ ने 21-14 16-21 21-18 से मात दी। यह मैच 47 मिनट चला। पुरुष युगल में भारत के दूसरे जोड़ीदारों-प्रणव चोपड़ा और अक्षय देवाल्कर को भी हार मिली है। प्रणव और अक्षय को चानी ताइपे के हुंग लिन चेन और चिया पिन ने 31 मिनट में 21-17 21-17 से हराया।
इसी तरह, मिश्रित युगल में भारत के तरुण कोना और पोनप्पा को भी हार मिली है। इस जोड़ी को सिंगापुर की लियू यी तथा लेई याओ ने 21-14 16-21 21-18 से मात दी। यह मैच 47 मिनट चला। पुरुष युगल में भारत के दूसरे जोड़ीदारों-प्रणव चोपड़ा और अक्षय देवाल्कर को भी हार मिली है। प्रणव और अक्षय को चानी ताइपे के हुंग लिन चेन और चिया पिन ने 31 मिनट में 21-17 21-17 से हराया। | यह एक सारांश है: टूर्नामेंट के चौथे वरीय खिलाड़ी पारूपल्ली कश्यप ने पहले दौर के मुकाबले में दक्षिण कोरिया के जी हून होंग को 18-21 21-15 22-20 से पराजित किया। | 9 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों की टैक्स फ्री ग्रेच्युटी की सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये तक करने की कवायद को जल्द ही अमली जामा पहनाया जा सकता है. श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय के हवाले से न्यूज एजेंसी भाषा ने कहा है कि कर मुक्त ग्रैच्युटी सीमा बढ़ाकर 20 लाख रुपये किये जाने से संबंधित विधेयक संसद के मॉनसून सत्र में पेश किया जा सकता है.
यदि कैबिनेट ने इस बाबत मंजूरी दे दी तो केंद्रीय कर्मचारियों की तरह ही निजी क्षेत्र के कर्मियों को भी बड़ा लाभ मिलेगा. जाहिर है, इससे एंप्लॉयीज़ को रिटायरमेंट के वक्त ग्रेच्युटी का पैसा अधिक मिलेगा. संसद का मॉनसून सत्र 17 जुलाई से शुरू हो रहा है.
विधेयक में ग्रेच्युटी भुगतान कानून में संशोधन का प्रस्ताव है ताकि केंद्र सरकार कर्मचारियों के आय स्तर में वृद्धि के आधार पर संसद के जरिये कानून में संशोधन का रास्ता अपनाए बिना कर मुक्त ग्रैच्युटी की सीमा बढ़ा सके. हालांकि मसौदा विधेयक को अभी केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलना बाकी है. ग्रेच्युटी भुगतान संशोधन विधेयक की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर दत्तात्रेय के हवाले से एजेंसी ने बताया कि यह हमारे एजेंडे में है. कानून में संशोधन के बाद संगठित क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारी 20 लाख कर मुक्त ग्रैच्युटी के हकदार होंगे. इससे पहले फरवरी में केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने श्रम मंत्रालय के साथ द्विपक्षीय विचार-विमर्श में इस प्रस्ताव पर सहमति जतायी थी. टिप्पणियां
हालांकि यूनियनों ने ग्रेच्युटी भुगतान के लिये न्यूनतम पांच साल की सेवा और कम-से-कम 10 कर्मचारी होने की शर्त को हटाने की मांग की है. फिलहाल ग्रेच्युटी भुगतान कानून के तहत कर्मचारी को ग्रेच्युटी राशि के लिये न्यूनतम पांच साल की सेवा अनिवार्य है. साथ ही कानून उन प्रतिष्ठानों पर लागू होता है जहां कर्मचारियों की संख्या 10 से कम नहीं हो.भाषा के मुताबिक ट्रेड यूनियनों ने मांग की है कि अधिकतम राशि के संदर्भ में संशोधित प्रावधान एक जनवरी 2016 से प्रभावी हो जैसा कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों के मामले में किया गया है. यूनियनों ने यह भी मांग की कि ग्रैच्युटी के तहत प्रत्येक पूरे हुए सेवा वर्ष के लिये 15 दिन के वेतन के बजाय 30 दिन का वेतन दिया जाए. ग्रेच्युटी भुगतान कानून में प्रस्तावित संशोधन के तहत कानून की धारा 4 (तीन) के तहत अधिकतम राशि की सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये की गयी है.
यदि कैबिनेट ने इस बाबत मंजूरी दे दी तो केंद्रीय कर्मचारियों की तरह ही निजी क्षेत्र के कर्मियों को भी बड़ा लाभ मिलेगा. जाहिर है, इससे एंप्लॉयीज़ को रिटायरमेंट के वक्त ग्रेच्युटी का पैसा अधिक मिलेगा. संसद का मॉनसून सत्र 17 जुलाई से शुरू हो रहा है.
विधेयक में ग्रेच्युटी भुगतान कानून में संशोधन का प्रस्ताव है ताकि केंद्र सरकार कर्मचारियों के आय स्तर में वृद्धि के आधार पर संसद के जरिये कानून में संशोधन का रास्ता अपनाए बिना कर मुक्त ग्रैच्युटी की सीमा बढ़ा सके. हालांकि मसौदा विधेयक को अभी केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलना बाकी है. ग्रेच्युटी भुगतान संशोधन विधेयक की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर दत्तात्रेय के हवाले से एजेंसी ने बताया कि यह हमारे एजेंडे में है. कानून में संशोधन के बाद संगठित क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारी 20 लाख कर मुक्त ग्रैच्युटी के हकदार होंगे. इससे पहले फरवरी में केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने श्रम मंत्रालय के साथ द्विपक्षीय विचार-विमर्श में इस प्रस्ताव पर सहमति जतायी थी. टिप्पणियां
हालांकि यूनियनों ने ग्रेच्युटी भुगतान के लिये न्यूनतम पांच साल की सेवा और कम-से-कम 10 कर्मचारी होने की शर्त को हटाने की मांग की है. फिलहाल ग्रेच्युटी भुगतान कानून के तहत कर्मचारी को ग्रेच्युटी राशि के लिये न्यूनतम पांच साल की सेवा अनिवार्य है. साथ ही कानून उन प्रतिष्ठानों पर लागू होता है जहां कर्मचारियों की संख्या 10 से कम नहीं हो.भाषा के मुताबिक ट्रेड यूनियनों ने मांग की है कि अधिकतम राशि के संदर्भ में संशोधित प्रावधान एक जनवरी 2016 से प्रभावी हो जैसा कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों के मामले में किया गया है. यूनियनों ने यह भी मांग की कि ग्रैच्युटी के तहत प्रत्येक पूरे हुए सेवा वर्ष के लिये 15 दिन के वेतन के बजाय 30 दिन का वेतन दिया जाए. ग्रेच्युटी भुगतान कानून में प्रस्तावित संशोधन के तहत कानून की धारा 4 (तीन) के तहत अधिकतम राशि की सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये की गयी है.
विधेयक में ग्रेच्युटी भुगतान कानून में संशोधन का प्रस्ताव है ताकि केंद्र सरकार कर्मचारियों के आय स्तर में वृद्धि के आधार पर संसद के जरिये कानून में संशोधन का रास्ता अपनाए बिना कर मुक्त ग्रैच्युटी की सीमा बढ़ा सके. हालांकि मसौदा विधेयक को अभी केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलना बाकी है. ग्रेच्युटी भुगतान संशोधन विधेयक की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर दत्तात्रेय के हवाले से एजेंसी ने बताया कि यह हमारे एजेंडे में है. कानून में संशोधन के बाद संगठित क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारी 20 लाख कर मुक्त ग्रैच्युटी के हकदार होंगे. इससे पहले फरवरी में केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने श्रम मंत्रालय के साथ द्विपक्षीय विचार-विमर्श में इस प्रस्ताव पर सहमति जतायी थी. टिप्पणियां
हालांकि यूनियनों ने ग्रेच्युटी भुगतान के लिये न्यूनतम पांच साल की सेवा और कम-से-कम 10 कर्मचारी होने की शर्त को हटाने की मांग की है. फिलहाल ग्रेच्युटी भुगतान कानून के तहत कर्मचारी को ग्रेच्युटी राशि के लिये न्यूनतम पांच साल की सेवा अनिवार्य है. साथ ही कानून उन प्रतिष्ठानों पर लागू होता है जहां कर्मचारियों की संख्या 10 से कम नहीं हो.भाषा के मुताबिक ट्रेड यूनियनों ने मांग की है कि अधिकतम राशि के संदर्भ में संशोधित प्रावधान एक जनवरी 2016 से प्रभावी हो जैसा कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों के मामले में किया गया है. यूनियनों ने यह भी मांग की कि ग्रैच्युटी के तहत प्रत्येक पूरे हुए सेवा वर्ष के लिये 15 दिन के वेतन के बजाय 30 दिन का वेतन दिया जाए. ग्रेच्युटी भुगतान कानून में प्रस्तावित संशोधन के तहत कानून की धारा 4 (तीन) के तहत अधिकतम राशि की सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये की गयी है.
हालांकि यूनियनों ने ग्रेच्युटी भुगतान के लिये न्यूनतम पांच साल की सेवा और कम-से-कम 10 कर्मचारी होने की शर्त को हटाने की मांग की है. फिलहाल ग्रेच्युटी भुगतान कानून के तहत कर्मचारी को ग्रेच्युटी राशि के लिये न्यूनतम पांच साल की सेवा अनिवार्य है. साथ ही कानून उन प्रतिष्ठानों पर लागू होता है जहां कर्मचारियों की संख्या 10 से कम नहीं हो.भाषा के मुताबिक ट्रेड यूनियनों ने मांग की है कि अधिकतम राशि के संदर्भ में संशोधित प्रावधान एक जनवरी 2016 से प्रभावी हो जैसा कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों के मामले में किया गया है. यूनियनों ने यह भी मांग की कि ग्रैच्युटी के तहत प्रत्येक पूरे हुए सेवा वर्ष के लिये 15 दिन के वेतन के बजाय 30 दिन का वेतन दिया जाए. ग्रेच्युटी भुगतान कानून में प्रस्तावित संशोधन के तहत कानून की धारा 4 (तीन) के तहत अधिकतम राशि की सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये की गयी है.
भाषा के मुताबिक ट्रेड यूनियनों ने मांग की है कि अधिकतम राशि के संदर्भ में संशोधित प्रावधान एक जनवरी 2016 से प्रभावी हो जैसा कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों के मामले में किया गया है. यूनियनों ने यह भी मांग की कि ग्रैच्युटी के तहत प्रत्येक पूरे हुए सेवा वर्ष के लिये 15 दिन के वेतन के बजाय 30 दिन का वेतन दिया जाए. ग्रेच्युटी भुगतान कानून में प्रस्तावित संशोधन के तहत कानून की धारा 4 (तीन) के तहत अधिकतम राशि की सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये की गयी है. | संक्षिप्त पाठ: 17 जुलाई से मॉनसून सेशन शुरू होगा, जहां बिल पेश हो सकता है
कर मुक्त ग्रेच्युटी राशि 10 लाख से 20 लाख किए जाने का प्रस्ताव है
वैसे यूनियनों की इससे संबंधित कुछ और मांगे भी हैं | 27 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: क्या दया याचिका पर फ़ैसले में देरी की वजह से फांसी की सज़ा को उम्रक़ैद में बदला जा सकता है, सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को इस अहम मसले पर फ़ैसला आना है।टिप्पणियां
फांसी की सज़ा पाए देवेंदर पाल सिंह भुल्लर की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट को यह फ़ैसला सुनाना है। देवेंदर पाल सिंह की दया याचिका पर फ़ैसले में आठ साल की देरी हुई जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। इस मसले पर फ़ैसले का व्यापक असर होगा।
राजीव गांधी की हत्या के दोषियों तस्कर वीरप्पन के साथियों समेत कुल 17 लोगों की फांसी की सज़ा पर सुप्रीम कोर्ट ने स्टे दिया हुआ है और इस फ़ैसले से वे भी प्रभावित होंगे।
फांसी की सज़ा पाए देवेंदर पाल सिंह भुल्लर की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट को यह फ़ैसला सुनाना है। देवेंदर पाल सिंह की दया याचिका पर फ़ैसले में आठ साल की देरी हुई जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। इस मसले पर फ़ैसले का व्यापक असर होगा।
राजीव गांधी की हत्या के दोषियों तस्कर वीरप्पन के साथियों समेत कुल 17 लोगों की फांसी की सज़ा पर सुप्रीम कोर्ट ने स्टे दिया हुआ है और इस फ़ैसले से वे भी प्रभावित होंगे।
राजीव गांधी की हत्या के दोषियों तस्कर वीरप्पन के साथियों समेत कुल 17 लोगों की फांसी की सज़ा पर सुप्रीम कोर्ट ने स्टे दिया हुआ है और इस फ़ैसले से वे भी प्रभावित होंगे। | सारांश: क्या दया याचिका पर फ़ैसले में देरी की वजह से फांसी की सज़ा को उम्रक़ैद में बदला जा सकता है, सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को इस अहम मसले पर फ़ैसला आना है। | 5 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: लंदन ओलिंपिक-2012 में प्री क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय करने वाली भारतीय पुरुष तीरंदाजी टीम इस बार रियो ओलिंपिक-2016 के लिए क्वालिफाई तक नहीं कर पाई और अब देश को तीरंदाजी टीम स्पर्धा का पहला ओलिंपिक स्वर्ण दिलाने का जिम्मा दीपिका कुमारी, लैशराम बोम्बेला देवी और लक्ष्मी रानी माझी वाली महिला टीम पर आ गया है. ब्राजीलियाई महानगर रियो डि जेनेरियो में शुक्रवार से शुरू हो रहे खेलों के महाकुंभ 'ओलिंपिक' में भारतीय महिला तीरंदाज टीम सात अगस्त को अपना अभियान शुरू करेगी.
पुरुषों की व्यक्तिगत स्पर्धा में अतानू दास एकमात्र भारतीय प्रतिनिधि हैं. भारतीय तीरंदाजी दल रियो पहुंचने के बाद मारिका में ओलिंपिक खेलों की तैयारियां कर रहा था और शामबोड्रोमो के एक होटल में रुका हुआ था जो तीरंदाजी आयोजन स्थल के नजदीक ही है. हालांकि अब भारतीय दल खेलगांव चला गया है.
रियो ओलिंपिक के दौरान आठ दिनों तक तीरंदाजी स्पर्धाएं होंगी, जिसमें 56 देशों के 128 तीरंदाज हिस्सा लेंगे. सभी भारतीय तीरंदाजों की रैंकिंग अच्छी है और वे बेहतरीन फॉर्म में भी हैं. हालांकि इतिहास को खंगालें तो भारतीय टीम मजबूत टीमों के खिलाफ अहम मैचों में धैर्य खोती रही है और नजदीकी मुकाबलों में उसे हार झेलनी पड़ी है.
भारतीय तीरंदाजों के लिए अहम चुनौती होगा रियो ओलिंपिक में कृत्रिम रोशनी में खेलना. भारतीय तीरंदाजों को कृत्रिम रोशनी में खेलने का अभ्यास नहीं है और इस नई परिस्थिति में वे खुद को कितना ढाल पाते हैं, उनकी सफलता निर्भर करेगी.
महिला टीम रैंकिंग स्पर्धाएं शुक्रवार को होंगी, जबकि इलिमिनेशन राउंड रविवार को खेले जाएंगे. टीम स्पर्धाओं के खिताबी मुकाबले आठ अगस्त (सोमवार) को होंगे. सोमवार को ही भारतीय महिला तीरंदाज व्यक्तिगत स्पर्धाओं के इलिमिनेशन राउंड से अपने अभियान की शुरुआत करेंगी और पदक के लिए फाइनल मुकाबले 12 अगस्त को होंगे.
वहीं पुरुषों की व्यक्तिगत स्पर्धा का इलिमिनेशन राउंड शुक्रवार से शुरू होगा, हालांकि भारतीय दावेदार अतानू दास आठ अगस्त को इलिमिनेशन राउंड में हिस्सा लेंगे. फाइनल मुकाबले 13 अगस्त को खेले जाएंगे. भारत के नाम तीरंदाजी में अब तक कोई भी ओलिंपिक पदक नहीं है, जबकि भारतीय तीरंदाज 1988 के बाद से हर बार ओलिंपिक में हिस्सा लेते रहे हैं. ऐसे में भारत को इतिहास रचने के लिए निश्चित तौर पर इस बार अपना सर्वश्रेष्ठ करना होगा.
भारतीय तीरंदाजों का ओलिंपिक में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2004 और 2008 में रहा, जबकि महिला टीम क्वार्टर फाइनल तक पहुंचने में सफल रही थी. हालांकि व्यक्तिगत स्पर्धा में अब तक कोई भी भारतीय तीरंदाज क्वार्टर फाइनल तक नहीं पहुंच सका है. भारतीय तीरंदाजी संघ (एएआई) ने इस बार एक महीने पहले ही भारतीय दल को रियो भेज दिया, ताकि वे यहां के वातावरण के अनुकूल खुद को अच्छी तरह ढाल सकें.टिप्पणियां
दीपिका और बोम्बेला देवी लंदन ओलिंपिक का हिस्सा रह चुकी हैं, लेकिन माझी और अतानू पहली बार ओलिंपिक में हिस्सा ले रहे हैं. भारत को सर्वाधिक उम्मीदें भारतीय महिला टीम से है, जिसकी अगुवाई पूर्व सर्वोच्च विश्ववरीय रह चुकीं दीपिका के हाथों में है. दीपिका ने इस बार ओलिंपिक के लिए कठिन तैयारी की है और क्वालीफाइंग के दौरान उनका प्रदर्शन शानदार रहा, जहां उन्होंने दो बार विश्व रिकॉर्ड ध्वस्त किए.
हाल ही में दीपिका ने कहा, "हमने अहम क्षणों में तनाव के बीच धैर्य बनाए रखना सीख लिया है और सबसे अहम है कि हमने तीर छोड़ते वक्त अपनी सांस पर नियंत्रण पाना भी सीख लिया है."
पुरुषों की व्यक्तिगत स्पर्धा में अतानू दास एकमात्र भारतीय प्रतिनिधि हैं. भारतीय तीरंदाजी दल रियो पहुंचने के बाद मारिका में ओलिंपिक खेलों की तैयारियां कर रहा था और शामबोड्रोमो के एक होटल में रुका हुआ था जो तीरंदाजी आयोजन स्थल के नजदीक ही है. हालांकि अब भारतीय दल खेलगांव चला गया है.
रियो ओलिंपिक के दौरान आठ दिनों तक तीरंदाजी स्पर्धाएं होंगी, जिसमें 56 देशों के 128 तीरंदाज हिस्सा लेंगे. सभी भारतीय तीरंदाजों की रैंकिंग अच्छी है और वे बेहतरीन फॉर्म में भी हैं. हालांकि इतिहास को खंगालें तो भारतीय टीम मजबूत टीमों के खिलाफ अहम मैचों में धैर्य खोती रही है और नजदीकी मुकाबलों में उसे हार झेलनी पड़ी है.
भारतीय तीरंदाजों के लिए अहम चुनौती होगा रियो ओलिंपिक में कृत्रिम रोशनी में खेलना. भारतीय तीरंदाजों को कृत्रिम रोशनी में खेलने का अभ्यास नहीं है और इस नई परिस्थिति में वे खुद को कितना ढाल पाते हैं, उनकी सफलता निर्भर करेगी.
महिला टीम रैंकिंग स्पर्धाएं शुक्रवार को होंगी, जबकि इलिमिनेशन राउंड रविवार को खेले जाएंगे. टीम स्पर्धाओं के खिताबी मुकाबले आठ अगस्त (सोमवार) को होंगे. सोमवार को ही भारतीय महिला तीरंदाज व्यक्तिगत स्पर्धाओं के इलिमिनेशन राउंड से अपने अभियान की शुरुआत करेंगी और पदक के लिए फाइनल मुकाबले 12 अगस्त को होंगे.
वहीं पुरुषों की व्यक्तिगत स्पर्धा का इलिमिनेशन राउंड शुक्रवार से शुरू होगा, हालांकि भारतीय दावेदार अतानू दास आठ अगस्त को इलिमिनेशन राउंड में हिस्सा लेंगे. फाइनल मुकाबले 13 अगस्त को खेले जाएंगे. भारत के नाम तीरंदाजी में अब तक कोई भी ओलिंपिक पदक नहीं है, जबकि भारतीय तीरंदाज 1988 के बाद से हर बार ओलिंपिक में हिस्सा लेते रहे हैं. ऐसे में भारत को इतिहास रचने के लिए निश्चित तौर पर इस बार अपना सर्वश्रेष्ठ करना होगा.
भारतीय तीरंदाजों का ओलिंपिक में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2004 और 2008 में रहा, जबकि महिला टीम क्वार्टर फाइनल तक पहुंचने में सफल रही थी. हालांकि व्यक्तिगत स्पर्धा में अब तक कोई भी भारतीय तीरंदाज क्वार्टर फाइनल तक नहीं पहुंच सका है. भारतीय तीरंदाजी संघ (एएआई) ने इस बार एक महीने पहले ही भारतीय दल को रियो भेज दिया, ताकि वे यहां के वातावरण के अनुकूल खुद को अच्छी तरह ढाल सकें.टिप्पणियां
दीपिका और बोम्बेला देवी लंदन ओलिंपिक का हिस्सा रह चुकी हैं, लेकिन माझी और अतानू पहली बार ओलिंपिक में हिस्सा ले रहे हैं. भारत को सर्वाधिक उम्मीदें भारतीय महिला टीम से है, जिसकी अगुवाई पूर्व सर्वोच्च विश्ववरीय रह चुकीं दीपिका के हाथों में है. दीपिका ने इस बार ओलिंपिक के लिए कठिन तैयारी की है और क्वालीफाइंग के दौरान उनका प्रदर्शन शानदार रहा, जहां उन्होंने दो बार विश्व रिकॉर्ड ध्वस्त किए.
हाल ही में दीपिका ने कहा, "हमने अहम क्षणों में तनाव के बीच धैर्य बनाए रखना सीख लिया है और सबसे अहम है कि हमने तीर छोड़ते वक्त अपनी सांस पर नियंत्रण पाना भी सीख लिया है."
रियो ओलिंपिक के दौरान आठ दिनों तक तीरंदाजी स्पर्धाएं होंगी, जिसमें 56 देशों के 128 तीरंदाज हिस्सा लेंगे. सभी भारतीय तीरंदाजों की रैंकिंग अच्छी है और वे बेहतरीन फॉर्म में भी हैं. हालांकि इतिहास को खंगालें तो भारतीय टीम मजबूत टीमों के खिलाफ अहम मैचों में धैर्य खोती रही है और नजदीकी मुकाबलों में उसे हार झेलनी पड़ी है.
भारतीय तीरंदाजों के लिए अहम चुनौती होगा रियो ओलिंपिक में कृत्रिम रोशनी में खेलना. भारतीय तीरंदाजों को कृत्रिम रोशनी में खेलने का अभ्यास नहीं है और इस नई परिस्थिति में वे खुद को कितना ढाल पाते हैं, उनकी सफलता निर्भर करेगी.
महिला टीम रैंकिंग स्पर्धाएं शुक्रवार को होंगी, जबकि इलिमिनेशन राउंड रविवार को खेले जाएंगे. टीम स्पर्धाओं के खिताबी मुकाबले आठ अगस्त (सोमवार) को होंगे. सोमवार को ही भारतीय महिला तीरंदाज व्यक्तिगत स्पर्धाओं के इलिमिनेशन राउंड से अपने अभियान की शुरुआत करेंगी और पदक के लिए फाइनल मुकाबले 12 अगस्त को होंगे.
वहीं पुरुषों की व्यक्तिगत स्पर्धा का इलिमिनेशन राउंड शुक्रवार से शुरू होगा, हालांकि भारतीय दावेदार अतानू दास आठ अगस्त को इलिमिनेशन राउंड में हिस्सा लेंगे. फाइनल मुकाबले 13 अगस्त को खेले जाएंगे. भारत के नाम तीरंदाजी में अब तक कोई भी ओलिंपिक पदक नहीं है, जबकि भारतीय तीरंदाज 1988 के बाद से हर बार ओलिंपिक में हिस्सा लेते रहे हैं. ऐसे में भारत को इतिहास रचने के लिए निश्चित तौर पर इस बार अपना सर्वश्रेष्ठ करना होगा.
भारतीय तीरंदाजों का ओलिंपिक में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2004 और 2008 में रहा, जबकि महिला टीम क्वार्टर फाइनल तक पहुंचने में सफल रही थी. हालांकि व्यक्तिगत स्पर्धा में अब तक कोई भी भारतीय तीरंदाज क्वार्टर फाइनल तक नहीं पहुंच सका है. भारतीय तीरंदाजी संघ (एएआई) ने इस बार एक महीने पहले ही भारतीय दल को रियो भेज दिया, ताकि वे यहां के वातावरण के अनुकूल खुद को अच्छी तरह ढाल सकें.टिप्पणियां
दीपिका और बोम्बेला देवी लंदन ओलिंपिक का हिस्सा रह चुकी हैं, लेकिन माझी और अतानू पहली बार ओलिंपिक में हिस्सा ले रहे हैं. भारत को सर्वाधिक उम्मीदें भारतीय महिला टीम से है, जिसकी अगुवाई पूर्व सर्वोच्च विश्ववरीय रह चुकीं दीपिका के हाथों में है. दीपिका ने इस बार ओलिंपिक के लिए कठिन तैयारी की है और क्वालीफाइंग के दौरान उनका प्रदर्शन शानदार रहा, जहां उन्होंने दो बार विश्व रिकॉर्ड ध्वस्त किए.
हाल ही में दीपिका ने कहा, "हमने अहम क्षणों में तनाव के बीच धैर्य बनाए रखना सीख लिया है और सबसे अहम है कि हमने तीर छोड़ते वक्त अपनी सांस पर नियंत्रण पाना भी सीख लिया है."
भारतीय तीरंदाजों के लिए अहम चुनौती होगा रियो ओलिंपिक में कृत्रिम रोशनी में खेलना. भारतीय तीरंदाजों को कृत्रिम रोशनी में खेलने का अभ्यास नहीं है और इस नई परिस्थिति में वे खुद को कितना ढाल पाते हैं, उनकी सफलता निर्भर करेगी.
महिला टीम रैंकिंग स्पर्धाएं शुक्रवार को होंगी, जबकि इलिमिनेशन राउंड रविवार को खेले जाएंगे. टीम स्पर्धाओं के खिताबी मुकाबले आठ अगस्त (सोमवार) को होंगे. सोमवार को ही भारतीय महिला तीरंदाज व्यक्तिगत स्पर्धाओं के इलिमिनेशन राउंड से अपने अभियान की शुरुआत करेंगी और पदक के लिए फाइनल मुकाबले 12 अगस्त को होंगे.
वहीं पुरुषों की व्यक्तिगत स्पर्धा का इलिमिनेशन राउंड शुक्रवार से शुरू होगा, हालांकि भारतीय दावेदार अतानू दास आठ अगस्त को इलिमिनेशन राउंड में हिस्सा लेंगे. फाइनल मुकाबले 13 अगस्त को खेले जाएंगे. भारत के नाम तीरंदाजी में अब तक कोई भी ओलिंपिक पदक नहीं है, जबकि भारतीय तीरंदाज 1988 के बाद से हर बार ओलिंपिक में हिस्सा लेते रहे हैं. ऐसे में भारत को इतिहास रचने के लिए निश्चित तौर पर इस बार अपना सर्वश्रेष्ठ करना होगा.
भारतीय तीरंदाजों का ओलिंपिक में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2004 और 2008 में रहा, जबकि महिला टीम क्वार्टर फाइनल तक पहुंचने में सफल रही थी. हालांकि व्यक्तिगत स्पर्धा में अब तक कोई भी भारतीय तीरंदाज क्वार्टर फाइनल तक नहीं पहुंच सका है. भारतीय तीरंदाजी संघ (एएआई) ने इस बार एक महीने पहले ही भारतीय दल को रियो भेज दिया, ताकि वे यहां के वातावरण के अनुकूल खुद को अच्छी तरह ढाल सकें.टिप्पणियां
दीपिका और बोम्बेला देवी लंदन ओलिंपिक का हिस्सा रह चुकी हैं, लेकिन माझी और अतानू पहली बार ओलिंपिक में हिस्सा ले रहे हैं. भारत को सर्वाधिक उम्मीदें भारतीय महिला टीम से है, जिसकी अगुवाई पूर्व सर्वोच्च विश्ववरीय रह चुकीं दीपिका के हाथों में है. दीपिका ने इस बार ओलिंपिक के लिए कठिन तैयारी की है और क्वालीफाइंग के दौरान उनका प्रदर्शन शानदार रहा, जहां उन्होंने दो बार विश्व रिकॉर्ड ध्वस्त किए.
हाल ही में दीपिका ने कहा, "हमने अहम क्षणों में तनाव के बीच धैर्य बनाए रखना सीख लिया है और सबसे अहम है कि हमने तीर छोड़ते वक्त अपनी सांस पर नियंत्रण पाना भी सीख लिया है."
महिला टीम रैंकिंग स्पर्धाएं शुक्रवार को होंगी, जबकि इलिमिनेशन राउंड रविवार को खेले जाएंगे. टीम स्पर्धाओं के खिताबी मुकाबले आठ अगस्त (सोमवार) को होंगे. सोमवार को ही भारतीय महिला तीरंदाज व्यक्तिगत स्पर्धाओं के इलिमिनेशन राउंड से अपने अभियान की शुरुआत करेंगी और पदक के लिए फाइनल मुकाबले 12 अगस्त को होंगे.
वहीं पुरुषों की व्यक्तिगत स्पर्धा का इलिमिनेशन राउंड शुक्रवार से शुरू होगा, हालांकि भारतीय दावेदार अतानू दास आठ अगस्त को इलिमिनेशन राउंड में हिस्सा लेंगे. फाइनल मुकाबले 13 अगस्त को खेले जाएंगे. भारत के नाम तीरंदाजी में अब तक कोई भी ओलिंपिक पदक नहीं है, जबकि भारतीय तीरंदाज 1988 के बाद से हर बार ओलिंपिक में हिस्सा लेते रहे हैं. ऐसे में भारत को इतिहास रचने के लिए निश्चित तौर पर इस बार अपना सर्वश्रेष्ठ करना होगा.
भारतीय तीरंदाजों का ओलिंपिक में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2004 और 2008 में रहा, जबकि महिला टीम क्वार्टर फाइनल तक पहुंचने में सफल रही थी. हालांकि व्यक्तिगत स्पर्धा में अब तक कोई भी भारतीय तीरंदाज क्वार्टर फाइनल तक नहीं पहुंच सका है. भारतीय तीरंदाजी संघ (एएआई) ने इस बार एक महीने पहले ही भारतीय दल को रियो भेज दिया, ताकि वे यहां के वातावरण के अनुकूल खुद को अच्छी तरह ढाल सकें.टिप्पणियां
दीपिका और बोम्बेला देवी लंदन ओलिंपिक का हिस्सा रह चुकी हैं, लेकिन माझी और अतानू पहली बार ओलिंपिक में हिस्सा ले रहे हैं. भारत को सर्वाधिक उम्मीदें भारतीय महिला टीम से है, जिसकी अगुवाई पूर्व सर्वोच्च विश्ववरीय रह चुकीं दीपिका के हाथों में है. दीपिका ने इस बार ओलिंपिक के लिए कठिन तैयारी की है और क्वालीफाइंग के दौरान उनका प्रदर्शन शानदार रहा, जहां उन्होंने दो बार विश्व रिकॉर्ड ध्वस्त किए.
हाल ही में दीपिका ने कहा, "हमने अहम क्षणों में तनाव के बीच धैर्य बनाए रखना सीख लिया है और सबसे अहम है कि हमने तीर छोड़ते वक्त अपनी सांस पर नियंत्रण पाना भी सीख लिया है."
वहीं पुरुषों की व्यक्तिगत स्पर्धा का इलिमिनेशन राउंड शुक्रवार से शुरू होगा, हालांकि भारतीय दावेदार अतानू दास आठ अगस्त को इलिमिनेशन राउंड में हिस्सा लेंगे. फाइनल मुकाबले 13 अगस्त को खेले जाएंगे. भारत के नाम तीरंदाजी में अब तक कोई भी ओलिंपिक पदक नहीं है, जबकि भारतीय तीरंदाज 1988 के बाद से हर बार ओलिंपिक में हिस्सा लेते रहे हैं. ऐसे में भारत को इतिहास रचने के लिए निश्चित तौर पर इस बार अपना सर्वश्रेष्ठ करना होगा.
भारतीय तीरंदाजों का ओलिंपिक में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2004 और 2008 में रहा, जबकि महिला टीम क्वार्टर फाइनल तक पहुंचने में सफल रही थी. हालांकि व्यक्तिगत स्पर्धा में अब तक कोई भी भारतीय तीरंदाज क्वार्टर फाइनल तक नहीं पहुंच सका है. भारतीय तीरंदाजी संघ (एएआई) ने इस बार एक महीने पहले ही भारतीय दल को रियो भेज दिया, ताकि वे यहां के वातावरण के अनुकूल खुद को अच्छी तरह ढाल सकें.टिप्पणियां
दीपिका और बोम्बेला देवी लंदन ओलिंपिक का हिस्सा रह चुकी हैं, लेकिन माझी और अतानू पहली बार ओलिंपिक में हिस्सा ले रहे हैं. भारत को सर्वाधिक उम्मीदें भारतीय महिला टीम से है, जिसकी अगुवाई पूर्व सर्वोच्च विश्ववरीय रह चुकीं दीपिका के हाथों में है. दीपिका ने इस बार ओलिंपिक के लिए कठिन तैयारी की है और क्वालीफाइंग के दौरान उनका प्रदर्शन शानदार रहा, जहां उन्होंने दो बार विश्व रिकॉर्ड ध्वस्त किए.
हाल ही में दीपिका ने कहा, "हमने अहम क्षणों में तनाव के बीच धैर्य बनाए रखना सीख लिया है और सबसे अहम है कि हमने तीर छोड़ते वक्त अपनी सांस पर नियंत्रण पाना भी सीख लिया है."
भारतीय तीरंदाजों का ओलिंपिक में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2004 और 2008 में रहा, जबकि महिला टीम क्वार्टर फाइनल तक पहुंचने में सफल रही थी. हालांकि व्यक्तिगत स्पर्धा में अब तक कोई भी भारतीय तीरंदाज क्वार्टर फाइनल तक नहीं पहुंच सका है. भारतीय तीरंदाजी संघ (एएआई) ने इस बार एक महीने पहले ही भारतीय दल को रियो भेज दिया, ताकि वे यहां के वातावरण के अनुकूल खुद को अच्छी तरह ढाल सकें.टिप्पणियां
दीपिका और बोम्बेला देवी लंदन ओलिंपिक का हिस्सा रह चुकी हैं, लेकिन माझी और अतानू पहली बार ओलिंपिक में हिस्सा ले रहे हैं. भारत को सर्वाधिक उम्मीदें भारतीय महिला टीम से है, जिसकी अगुवाई पूर्व सर्वोच्च विश्ववरीय रह चुकीं दीपिका के हाथों में है. दीपिका ने इस बार ओलिंपिक के लिए कठिन तैयारी की है और क्वालीफाइंग के दौरान उनका प्रदर्शन शानदार रहा, जहां उन्होंने दो बार विश्व रिकॉर्ड ध्वस्त किए.
हाल ही में दीपिका ने कहा, "हमने अहम क्षणों में तनाव के बीच धैर्य बनाए रखना सीख लिया है और सबसे अहम है कि हमने तीर छोड़ते वक्त अपनी सांस पर नियंत्रण पाना भी सीख लिया है."
दीपिका और बोम्बेला देवी लंदन ओलिंपिक का हिस्सा रह चुकी हैं, लेकिन माझी और अतानू पहली बार ओलिंपिक में हिस्सा ले रहे हैं. भारत को सर्वाधिक उम्मीदें भारतीय महिला टीम से है, जिसकी अगुवाई पूर्व सर्वोच्च विश्ववरीय रह चुकीं दीपिका के हाथों में है. दीपिका ने इस बार ओलिंपिक के लिए कठिन तैयारी की है और क्वालीफाइंग के दौरान उनका प्रदर्शन शानदार रहा, जहां उन्होंने दो बार विश्व रिकॉर्ड ध्वस्त किए.
हाल ही में दीपिका ने कहा, "हमने अहम क्षणों में तनाव के बीच धैर्य बनाए रखना सीख लिया है और सबसे अहम है कि हमने तीर छोड़ते वक्त अपनी सांस पर नियंत्रण पाना भी सीख लिया है."
हाल ही में दीपिका ने कहा, "हमने अहम क्षणों में तनाव के बीच धैर्य बनाए रखना सीख लिया है और सबसे अहम है कि हमने तीर छोड़ते वक्त अपनी सांस पर नियंत्रण पाना भी सीख लिया है." | संक्षिप्त सारांश: लंदन ओलिंपिक-2012 में प्री क्वार्टर फाइनल तक पहुंचा था भारत
7 अगस्त को शुरु होगा महिला तीरंदाजों का अभियान
तीरंदाजी में 56 देशों के 128 तीरंदाज हिस्सा लेंगे | 23 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: भारत के टेबल टेनिस खिलाड़ी अभिषेक यादव ने दूसरे युवा एशियाई खेलों में कांस्य पदक हासिल किया। अभिषेक ने पुरुष एकल के सेमीफाइनल में जगह बनाकर बड़े पदक की उम्मीद जगाई थी, लेकिन वह अंतिम-4 दौर में हार गए।
अभिषेक ने सोमवार को क्वार्टर फाइनल में मलेशिया के डुनले फू को 41 मिनट में 4-1 (11-6, 11-5, 15-13, 5-11, 18-16) से हराया लेकिन उसी दिन वह शीर्ष वरीय चीनी खिलाड़ी झेनदोंग से 2-4 (4-11, 13-11, 13-11, 4-11, 8-11, 7-11) के अंतर से हार गए।
चूंकि युवा खेलों में प्लेऑफ का कोई प्रावधान नहीं है, लिहाजा सेमीफाइनल में हारने वाले दोनों खिलाड़ियों को कांस्य पदक मिला।टिप्पणियां
अभिषेक ने पदक के साथ-साथ अगले साल होने वाले युवा ओलम्पिक के लिए स्थान सुरक्षित कर लिया, क्योंकि एशियाई खेलों से आठ खिलाड़ियों को ओलिंपिक में सीधा प्रवेश मिलता है।
मैच के बाद अभिषेक ने कहा, मैं कुल मिलाकर अपने प्रदर्शन से संतुष्ट हूं। चीनी खिलाड़ी ने बेहतरीन खेल दिखाया।
अभिषेक ने सोमवार को क्वार्टर फाइनल में मलेशिया के डुनले फू को 41 मिनट में 4-1 (11-6, 11-5, 15-13, 5-11, 18-16) से हराया लेकिन उसी दिन वह शीर्ष वरीय चीनी खिलाड़ी झेनदोंग से 2-4 (4-11, 13-11, 13-11, 4-11, 8-11, 7-11) के अंतर से हार गए।
चूंकि युवा खेलों में प्लेऑफ का कोई प्रावधान नहीं है, लिहाजा सेमीफाइनल में हारने वाले दोनों खिलाड़ियों को कांस्य पदक मिला।टिप्पणियां
अभिषेक ने पदक के साथ-साथ अगले साल होने वाले युवा ओलम्पिक के लिए स्थान सुरक्षित कर लिया, क्योंकि एशियाई खेलों से आठ खिलाड़ियों को ओलिंपिक में सीधा प्रवेश मिलता है।
मैच के बाद अभिषेक ने कहा, मैं कुल मिलाकर अपने प्रदर्शन से संतुष्ट हूं। चीनी खिलाड़ी ने बेहतरीन खेल दिखाया।
चूंकि युवा खेलों में प्लेऑफ का कोई प्रावधान नहीं है, लिहाजा सेमीफाइनल में हारने वाले दोनों खिलाड़ियों को कांस्य पदक मिला।टिप्पणियां
अभिषेक ने पदक के साथ-साथ अगले साल होने वाले युवा ओलम्पिक के लिए स्थान सुरक्षित कर लिया, क्योंकि एशियाई खेलों से आठ खिलाड़ियों को ओलिंपिक में सीधा प्रवेश मिलता है।
मैच के बाद अभिषेक ने कहा, मैं कुल मिलाकर अपने प्रदर्शन से संतुष्ट हूं। चीनी खिलाड़ी ने बेहतरीन खेल दिखाया।
अभिषेक ने पदक के साथ-साथ अगले साल होने वाले युवा ओलम्पिक के लिए स्थान सुरक्षित कर लिया, क्योंकि एशियाई खेलों से आठ खिलाड़ियों को ओलिंपिक में सीधा प्रवेश मिलता है।
मैच के बाद अभिषेक ने कहा, मैं कुल मिलाकर अपने प्रदर्शन से संतुष्ट हूं। चीनी खिलाड़ी ने बेहतरीन खेल दिखाया।
मैच के बाद अभिषेक ने कहा, मैं कुल मिलाकर अपने प्रदर्शन से संतुष्ट हूं। चीनी खिलाड़ी ने बेहतरीन खेल दिखाया। | यहाँ एक सारांश है:अभिषेक ने पुरुष एकल के सेमीफाइनल में जगह बनाकर बड़े पदक की उम्मीद जगाई थी, लेकिन वह अंतिम-4 दौर में हार गए। | 17 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: बीजेपी में रहते हुए भी शत्रुघ्न सिन्हा लगातार प्रधानमंत्री मोदी पर हमलावर रहे थे. शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि राजीव गांधी पर दिए गए बयान से पीएम मोदी की हताशा साफ दिखने लगी है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की जमीन खिसक रही है. उन्होंने कहा कि पीएम की हताशा और बौखलाहट साफ दिखाई दे रही है. उन्होंने कहा कि भाषा का स्तर इतना नीचे गिरेगा कभी नहीं सोचा था. उन्होंने कहा कि राजीव गांधी के बारे में पीएम ने इतनी घटिया बात की है, जिसका जवाब जनता देगी. शत्रुघ्न ने कहा कि पीएम ने युवा शक्ति का दिल दुखाया है.
पीएम मोदी (PM Narendra Modi) ने राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के दिवंगत पिता पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) का नाम लिये बगैर कहा ''आपके पिताजी को आपके राज दरबारियों ने गाजे-बाजे के साथ मिस्टर क्लीन बना दिया था. लेकिन देखते ही देखते भ्रष्टाचारी नम्बर वन के रूप में उनका जीवनकाल समाप्त हो गया. नामदार यह अहंकार आपको खा जाएगा. ये देश गलतियां माफ करता है, मगर धोखेबाजी को कभी माफ नहीं करता.''
प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर हमले जारी रखते हुए कहा कि जो पार्टी पहले चरण के मतदान से पहले खुद को प्रधानमंत्री पद की दावेदार बता रही थी, वह अब मानने लगी है कि हम तो उत्तर प्रदेश में सिर्फ वोट काटने के लिये चुनाव लड़ रहे हैं. इस 'वोट कटवा' कांग्रेस का कितना पतन हो गया है, यह इसका जीता जागता सबूत है. | संक्षिप्त सारांश: शत्रुघ्न सिन्हा ने पीएम मोदी पर बोला हमला
कहा- PM की ज़मीन खिसक रही है
'पीएम की हताशा-बौखलाहट दिखाई दे रही' | 8 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: उड़ीसा के जगतसिंहपुर जिले में 12 अरब डॉलर की पॉस्को परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण का काम भारी बारिश के कारण रुक गया है। इस बीच गोविंदपुर गांव में अधिग्रहण का विरोध कर रहे हजारों लोगों ने प्रदर्शन जारी रखा है। सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश प्रदर्शनकारियों को अपना समर्थन देने के लिए गांव पहुंच चुके हैं। इससे पहले स्थानीय पर्व के कारण दक्षिण कोरियाई कम्पनी पॉस्को के लिए जमीन अधिग्रहण का काम चार दिनों तक रोकना पड़ा था। अतिरिक्त जिलाधिकारी एसके चौधरी ने बताया, हमने बारिश के कारण एक बार फिर जमीन अधिग्रहण का काम रोक दिया है। उन्होंने कहा कि अगर मौसम ठीक रहा, तो अधिग्रहण की प्रक्रिया सोमवार को शुरू हो सकती है। इस बीच बारिश के दौरान छाता लिए हजारों ग्रामीणों को गोविंदपुर गांव में प्रदर्शन करते देखा गया। स्वामी अग्निमेश के यहां पहुंचने के कारण ग्रामीणों के विरोध प्रदर्शन को बल मिला है। पॉस्को ने यहां 1.2 टन क्षमता की इस्पात परियोजना लगाने की योजना बनाई है, जो देश में अब तक का सबसे बड़ा विदेशी पूंजी निवेश है। | सारांश: उड़ीसा के जगतसिंहपुर जिले में 12 अरब डॉलर की पॉस्को परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण का काम भारी बारिश के कारण रुक गया है। | 33 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: राजस्थान रॉयल्स के ऑस्ट्रेलियाई ऑल राउंडर शेन वाटसन शनिवार को फिरोजशाह कोटला में अपनी टीम के दिल्ली डेयरडेविल्स के खिलाफ होने वाले शुरुआती आईपीएल मैच में नहीं खेलेंगे।
ऐसा पता चला है कि वाटसन मैच से पहले यहां नहीं पहुंच सकेंगे जिससे वह दूसरे मैच के बाद ही उपलब्ध होंगे।
राजस्थान रायल्स ने आज कोटला में ढाई घंटे तक ट्रेनिंग सत्र में हिस्सा लिया। बल्लेबाज राहुल द्रविड़ और अंजिक्य रहाणे ने अभ्यास किया।टिप्पणियां
वेस्टइंडीज के आल राउंडर केविन कूपर का भी पहले मैच में खेलना संदिग्ध लग रहा है क्योंकि उनके दायें घुटने में आइस पैक लगा हुआ था।
टीम सूत्रों के अनुसार केरल के युवा विकेटकीपर संजू सैमसन आईपीएल में आगाज करेंगे जबकि तेज गेंदबाजी आक्रमण में भारतीय तेज गेंदबाज एस श्रीसंत और वेस्टइंडीज के फिदेल एडवर्ड्स के शामिल होने की संभावना है।
ऐसा पता चला है कि वाटसन मैच से पहले यहां नहीं पहुंच सकेंगे जिससे वह दूसरे मैच के बाद ही उपलब्ध होंगे।
राजस्थान रायल्स ने आज कोटला में ढाई घंटे तक ट्रेनिंग सत्र में हिस्सा लिया। बल्लेबाज राहुल द्रविड़ और अंजिक्य रहाणे ने अभ्यास किया।टिप्पणियां
वेस्टइंडीज के आल राउंडर केविन कूपर का भी पहले मैच में खेलना संदिग्ध लग रहा है क्योंकि उनके दायें घुटने में आइस पैक लगा हुआ था।
टीम सूत्रों के अनुसार केरल के युवा विकेटकीपर संजू सैमसन आईपीएल में आगाज करेंगे जबकि तेज गेंदबाजी आक्रमण में भारतीय तेज गेंदबाज एस श्रीसंत और वेस्टइंडीज के फिदेल एडवर्ड्स के शामिल होने की संभावना है।
राजस्थान रायल्स ने आज कोटला में ढाई घंटे तक ट्रेनिंग सत्र में हिस्सा लिया। बल्लेबाज राहुल द्रविड़ और अंजिक्य रहाणे ने अभ्यास किया।टिप्पणियां
वेस्टइंडीज के आल राउंडर केविन कूपर का भी पहले मैच में खेलना संदिग्ध लग रहा है क्योंकि उनके दायें घुटने में आइस पैक लगा हुआ था।
टीम सूत्रों के अनुसार केरल के युवा विकेटकीपर संजू सैमसन आईपीएल में आगाज करेंगे जबकि तेज गेंदबाजी आक्रमण में भारतीय तेज गेंदबाज एस श्रीसंत और वेस्टइंडीज के फिदेल एडवर्ड्स के शामिल होने की संभावना है।
वेस्टइंडीज के आल राउंडर केविन कूपर का भी पहले मैच में खेलना संदिग्ध लग रहा है क्योंकि उनके दायें घुटने में आइस पैक लगा हुआ था।
टीम सूत्रों के अनुसार केरल के युवा विकेटकीपर संजू सैमसन आईपीएल में आगाज करेंगे जबकि तेज गेंदबाजी आक्रमण में भारतीय तेज गेंदबाज एस श्रीसंत और वेस्टइंडीज के फिदेल एडवर्ड्स के शामिल होने की संभावना है।
टीम सूत्रों के अनुसार केरल के युवा विकेटकीपर संजू सैमसन आईपीएल में आगाज करेंगे जबकि तेज गेंदबाजी आक्रमण में भारतीय तेज गेंदबाज एस श्रीसंत और वेस्टइंडीज के फिदेल एडवर्ड्स के शामिल होने की संभावना है। | राजस्थान रॉयल्स के ऑस्ट्रेलियाई ऑल राउंडर शेन वाटसन शनिवार को फिरोजशाह कोटला में अपनी टीम के दिल्ली डेयरडेविल्स के खिलाफ होने वाले शुरुआती आईपीएल मैच में नहीं खेलेंगे। | 28 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: अपने ही देश से बाहर रहने को मजबूर प्रख्यात भारतीय चित्रकार एमएफ हुसैन कभी अपनी सारी पेंटिंग्स नष्ट कर देना चाहते थे। मरहूम हुसैन के बेटे ओवैस हुसैन ने यह खुलासा किया है। अपने पिता पर एक वृत्तचित्र फिल्म बना रहे ओवैस ने एक साक्षात्कार में कहा, "मुझे जिंदगी में अचानक ही महसूस हो रहा है कि मेरे सामने एक बंजर भूमि है लेकिन यह बंजर भूमि समृद्ध है जो मेरे अंदर इसे अपना लेने की भूख प्रेरित करती है। मैं तैयार हूं, वास्तव में मैं ऐसा कर रहा हूं।" भारत से आत्म-निर्वासन के बाद अपने पिता के निराशा के दिनों को याद करते हुए ओवैस ने कहा, "एक ऐसा समय था जब मेरे पिता अपनी सारी पेंटिंग्स नष्ट कर देना चाहते थे। वह कहते थे कि इनकी क्या उपयोगिता है।" ओवैस एक कलाकार व फिल्मकार हैं। वह अपने भाइयों शफकत, शमशाद और मुस्तफा के साथ यहां सफदर हाशमी मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा हुसैन को श्रद्धांजलि स्वरूप आयोजित यादगार समारोह में शामिल होने के लिए पहुंचे थे। हुसैन का नौ जून को लंदन में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था। वह 95 साल के थे। उन्होंने हिंदू अतिवादियों द्वारा उनकी कुछ पेंटिंग्स पर ऐतराज किए जाने और उन्हें धमकाए जाने के बाद साल 2006 में भारत छोड़ दिया था। ओवैस की फिल्म 'लेटर्स टू माई सन एबाउट माई फादर' हुसैन परिवार की कला व प्रसिद्धि की यात्रा की कहानी है। यह फिल्म हुसैन की महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश के अंजान क्षेत्रों से लेकर मुम्बई और पूरे विश्व में प्रसिद्धि पाने की यात्रा पेश करती है। ओवैस कहते हैं, "यह उनके जीवन की एक दस्तावेज होगी, जिसमें एक कलाकार व एक व्यक्ति के नाते उनकी यात्रा दिखाई गई है। मैं अपने बेटे को यह कहानी सुनाना चाहता हूं। एक पिता द्वारा अपने बेटे को सुनाई गई कहानी की तरह दुनियाभर के सामने यह कहानी प्रस्तुत की जा रही है। इस वृत्तचित्र के पूरी तरह से तैयार होने से पहले मुझे इसके लिए कुछ साक्षात्कार और करने हैं। इसमें कुछ पारिवारिक दृश्य भी होंगे लेकिन मैं अभी कहानी का अंत तलाश रहा हूं।" | ओवैस ने कहा, "एक ऐसा समय था जब मेरे पिता अपनी सारी पेंटिंग्स नष्ट कर देना चाहते थे। वह कहते थे कि इनकी क्या उपयोगिता है।" | 28 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: बिग बॉस के घर में हर दिन कोई न कोई ड्रामा जरूर होता है. कभी दबे-छुपे होने वाला रोमांस तो कभी किसी भी बात को लेकर होती लड़ाइयां. यही कारण है कि 10 सीजन होने के बाद भी बिग बॉस के फैन्स की संख्या में कोई कमी नहीं आई है. कुछ ऐसा ही ड्रामा आज के एपिसोड में भी दर्शकों को देखने को मिल सकता है.
बिग बॉस शो के प्रोमो के अनुसार लोपामुद्रा राउत, नितिभा कौल और प्रियंका जग्गा तीनों घर के पूल में नहाती नजर आएंगी. इसी बीच हंसते-खेलते अचानक प्रियंका के चोट लग जाती है जिसका जिम्मेदार वह लोपामुद्रा और नितिभा को ठहराती हैं. इस घटना के बाद लोपामुद्रा और नितिभा एक दूसरे को कसूरवार मानते हुए काफी बुरा भी महसूस करती हैं.
लेकिन इस सारी घटना में तीनों लड़कियों में तो कोई झगड़ा बढ़ता नहीं दिख रहा है लेकिन इस बीच लोपा और स्वामी ओम आपस में भिड़ जाते हैं. बिग बॉस शो के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर यह बताया भी गया है कि स्वामी ओम और लोपामुद्रा के बीच में बड़ी लड़ाई होगी. दरअसल स्वामी ओम लोपामुद्रा और नितिभा को प्रियंका को चोट पहुंचाने के लिए कुछ कह रहे थे. इसी बात पर लोपा बहुत भड़क गई और उन्होंने पास में रखा टीशू पेपर को रोल स्वामी ओम की तरफ फेंका.
हालांकि वीकेंड के एपिसोड में सलमान कई बार लोपामुद्रा की उनकी साफगोई और किसी भी मुद्दे पर अपनी राय रखने के लिए तारीफ कर चुके हैं. लेकिन शुक्रवार की रात को प्रसारित होने वाले एपिसोड में देखना दिलचस्प होगा कि आखिर प्रियंका, लोपामुद्रा और नितिभा के बीच की इस घटना और स्वामी ओम के साथ होने वाली लोपा की झड़प पर बाकी घरवाले क्या प्रतिक्रिया देते हैं.
बिग बॉस शो के प्रोमो के अनुसार लोपामुद्रा राउत, नितिभा कौल और प्रियंका जग्गा तीनों घर के पूल में नहाती नजर आएंगी. इसी बीच हंसते-खेलते अचानक प्रियंका के चोट लग जाती है जिसका जिम्मेदार वह लोपामुद्रा और नितिभा को ठहराती हैं. इस घटना के बाद लोपामुद्रा और नितिभा एक दूसरे को कसूरवार मानते हुए काफी बुरा भी महसूस करती हैं.
लेकिन इस सारी घटना में तीनों लड़कियों में तो कोई झगड़ा बढ़ता नहीं दिख रहा है लेकिन इस बीच लोपा और स्वामी ओम आपस में भिड़ जाते हैं. बिग बॉस शो के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर यह बताया भी गया है कि स्वामी ओम और लोपामुद्रा के बीच में बड़ी लड़ाई होगी. दरअसल स्वामी ओम लोपामुद्रा और नितिभा को प्रियंका को चोट पहुंचाने के लिए कुछ कह रहे थे. इसी बात पर लोपा बहुत भड़क गई और उन्होंने पास में रखा टीशू पेपर को रोल स्वामी ओम की तरफ फेंका.
हालांकि वीकेंड के एपिसोड में सलमान कई बार लोपामुद्रा की उनकी साफगोई और किसी भी मुद्दे पर अपनी राय रखने के लिए तारीफ कर चुके हैं. लेकिन शुक्रवार की रात को प्रसारित होने वाले एपिसोड में देखना दिलचस्प होगा कि आखिर प्रियंका, लोपामुद्रा और नितिभा के बीच की इस घटना और स्वामी ओम के साथ होने वाली लोपा की झड़प पर बाकी घरवाले क्या प्रतिक्रिया देते हैं. | संक्षिप्त पाठ: स्वीमिंग पूल में नहाने के दौरान लगी प्रियंका जग्गा को चोट
स्वामी ओम ने मारा ताना तो लुपामुद्रा ने सुनाई खरी-खरी
शुक्रवार के एपिसोड में दर्शकों को देखने को मिलेगा ड्रामा | 30 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: इस्राइल की सरकार का कहना है कि उन्होंने जल संरक्षण योजना में भारत सरकार को मदद देने का प्रस्ताव दे दिया है. इस्राइल के वाणिज्यदूतावास की डिप्टी प्रमुख शाल्वी ने एनडीटीवी से कहा कि वह स्थापित श्रेष्ठ केंद्रों के ज़रिए इस क्षेत्र में अपने अनुभव साझा करने के लिए बिल्कुल तैयार हैं.टिप्पणियां
उन्होंने कहा अगर आप अपने खेत को लबालब कर देंगे तो इससे काफी पानी बर्बाद होगा. लेकिन अगर खेत में सिर्फ उतना ही पानी रिसाया जाए जितनी उस फसल को जरूरत है तो बात बन सकती है. यह प्रक्रिया काफी गुणकारी है और दुनिया भर में सफल भी है.
इस महीने सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक को आदेश दिया था कि वह तमिलनाडु के लिए कावेरी का पानी छोड़े. तमिलनाडु में बारिश की कमी की वजह से पानी की भारी मार है और कोर्ट के इस फैसले के बाद कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू में काफी हिंसक प्रदर्शन हुए. ऐसा अनुमान है कि कर्नाटक में सिंचाई के लिए कावेरी के पानी का 65 प्रतिशत हिस्सा इस्तेमाल किया जाता है. यही वजह है कि तमिलनाडु के लिए पानी छोड़े जाने के आदेश के बाद कर्नाटक में कई जगहों पर विरोध ने हिंसक रूप ले लिया जहां लोगों ने 'हम अपना खून देंगे, कावेरी का पानी नहीं' जैसे नारे लगाए.
उन्होंने कहा अगर आप अपने खेत को लबालब कर देंगे तो इससे काफी पानी बर्बाद होगा. लेकिन अगर खेत में सिर्फ उतना ही पानी रिसाया जाए जितनी उस फसल को जरूरत है तो बात बन सकती है. यह प्रक्रिया काफी गुणकारी है और दुनिया भर में सफल भी है.
इस महीने सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक को आदेश दिया था कि वह तमिलनाडु के लिए कावेरी का पानी छोड़े. तमिलनाडु में बारिश की कमी की वजह से पानी की भारी मार है और कोर्ट के इस फैसले के बाद कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू में काफी हिंसक प्रदर्शन हुए. ऐसा अनुमान है कि कर्नाटक में सिंचाई के लिए कावेरी के पानी का 65 प्रतिशत हिस्सा इस्तेमाल किया जाता है. यही वजह है कि तमिलनाडु के लिए पानी छोड़े जाने के आदेश के बाद कर्नाटक में कई जगहों पर विरोध ने हिंसक रूप ले लिया जहां लोगों ने 'हम अपना खून देंगे, कावेरी का पानी नहीं' जैसे नारे लगाए.
इस महीने सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक को आदेश दिया था कि वह तमिलनाडु के लिए कावेरी का पानी छोड़े. तमिलनाडु में बारिश की कमी की वजह से पानी की भारी मार है और कोर्ट के इस फैसले के बाद कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू में काफी हिंसक प्रदर्शन हुए. ऐसा अनुमान है कि कर्नाटक में सिंचाई के लिए कावेरी के पानी का 65 प्रतिशत हिस्सा इस्तेमाल किया जाता है. यही वजह है कि तमिलनाडु के लिए पानी छोड़े जाने के आदेश के बाद कर्नाटक में कई जगहों पर विरोध ने हिंसक रूप ले लिया जहां लोगों ने 'हम अपना खून देंगे, कावेरी का पानी नहीं' जैसे नारे लगाए. | कावेरी जल विवाद को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच तनातनी
इज़राइल ने जल संरक्षण से जुड़े उपाय साझा करने का प्रस्ताव दिया
इज़राइल ने अपने पास जरूरत से ज्यादा पानी होने का दावा किया है | 26 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: भारतीय टीम के तेज गेंदबाज मुनाफ पटेल का मानना है कि टीम के लिए आगामी आईसीसी विश्व कप जीतने का सुनहरा मौका है। उनका मानना है कि टीम जब विश्व कप जीतने के अपने अभियान की शुरुआत करेगी तो संतुलित टीम के अलावा अनुकूल परिस्थितियां और घरेलू दर्शकों का समर्थन महत्वपूर्ण कारक साबित होंगे। मुनाफ ने कहा कि भारतीय टीम ने वर्ष 1983 में कपिल देव के नेतृत्व में विश्व कप जीता था और 19 फरवरी को शुरू होने वाले विश्व कप क्रिकेट टूर्नामेंट में टीम के पास उस इतिहास को दोहराने का सुनहरा मौका है। उन्होंने कहा, विश्व कप के सभी 19 मैच भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका में खेले जाने हैं। इसलिए विकेट, मौसम और दर्शकों का समर्थन हमारे पक्ष में होगा। उन्होंने कहा, इसी कारण से मेरा मानना है कि हमारी टीम विश्व कप जीतने की प्रबल दावेदार है और इसे जीतने का उसके पास सुनहरा मौका भी है। घरेलू पिच और अनुकूल परिस्थितियों में क्रिकेट खेलने का मौका बार बार नहीं मिलता। मुनाफ ने कहा, भारतीय उपमहाद्वीप की पिचें विश्व कप में भारतीय टीम के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाएंगी। टीम के गेंदबाजों को यहां की पिचों की स्थितियों के बारे में पूरी जानकारी है और उन्हें यह भी पता है इनसे क्या उम्मीद करनी है। मुनाफ ने कहा, वर्तमान टीम काफी मजबूत स्थिति में है। टीम में कुछ सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज, फिट हरफनमौला खिलाड़ी और ऐसे गेंदबाज हैं जो अपने पूरे फार्म में हैं और पिछले कुछ समय से लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। चोटिल होने के कारण काफी समय टीम से बाहर रहने वाले मुनाफ फिलहाल अपनी फिटनेस पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं क्योंकि वह चोटिल होने के खतरे से तंग आ चुके हैं। चोट से उबरने के बाद मुनाफ की गेंदबाजी में काफी सुधार आया है तथा अब वह अच्छी लाइन और लेंथ बरकरार रखने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। पिछले विश्व कप टूर्नामेंट में चोट के कारण अपनी संभावना के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाने वाले मुनाफ ने कहा, मैं अपनी गेंद सही जगह पर डालने के साथ उसकी लाइन और लेंथ बरकरार रखने की कोशिश कर रहा हूं जिससे मुझे विकेट प्राप्त करने में काफी मदद मिली है। पिछले कुछ समय के भारतीय टीम के प्रदर्शन के मद्देनजर मुनाफ का यह मत काफी हद तक सही लगता है क्योंकि टीम ने न्यूजीलैंड को अपनी सरजमीं पर मात दी और दक्षिण अफ्रीका के साथ टेस्ट श्रंखला ड्रा समाप्त करने के बाद एकदिवसीय श्रृंखला में मजबूत चुनौती पेश की थी। | यह एक सारांश है: मुनाफ ने कहा कि भारतीय टीम ने वर्ष 1983 में विश्व कप जीता था और इस बार टीम के पास उस इतिहास को दोहराने का सुनहरा मौका है। | 21 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: बॉलीवुड के मशहूर हॉरर फिल्म निर्माता श्याम रामसे (Shyam Ramsay) का 67 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है. हॉरर फिल्म डायरेक्टर श्याम रामसे (Shyam Ramsay) काफी दिनों से अंधेरी के कोकिलाबेन हॉस्पिटल में भर्ती थे और वहीं उन्होंने अपनी आंखिरी सांसें लीं. इस बात की जानकारी खुद श्याम रामसे (Shyam Ramsay) के भतीजे ने दी है. उनके भतीजे अमित ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत के दौरान बताया कि उन्हें निमोनिया हुआ था और आज ही करीब 5 बजे उनका निधन हुआ है.
इस बारे में बताते हुए श्याम रामसे (Shyam Ramsay) के भतीजे अमित ने कहा, "बहुत ही दुख के साथ हमें आपको यह बताना पड़ राह है कि श्याम रामसे का निधन हो गया है. उन्हें कई दिन पहले निमोनिया हुआ था. आज ही सुबह करीब पांच बजे उनका निधन हो गया. बता दें कि श्याम रामसे (Shyam Ramsay) से पहले उनके भाई तुलसी रामसे का भी बीते साल दिसंबर में निधन हो गया था. दोनों ही भाई बॉलीवुड में हॉरर फिल्मों के लिए खूब जाने जाते थे.
श्याम रामसे (Shyam Ramsay) ने हिंदी सिनेमा में हॉरर फिल्मों के जरिए अपनी जबरदस्त पहचान बनाई है. उन्होंने अपने करियर के दौरान पुराना मंदिर (1984), अंधेरा (1975), सबूत (1980), पुरानी हवेली (1989), धुंध: द फॉग (2003) और कोई है जैसी कई फिल्में बनाई हैं. श्यामा रामसे के अलावा उनके भाई तुलसी ने वीराना फिल्म बनाई थी. | यहाँ एक सारांश है:'पुराना मंदिर' के डायरेक्टर का निधन
67 वर्ष की उम्र में कहा दुनिया को अलविदा
कई दिनों से थे अस्पताल में भर्ती | 18 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की-मून ने दुनिया के महासागरों की नाजुक हालत की ओर वैश्विक स्तर पर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने दुनियाभर में जीवन के अस्तित्व के लिए समुद्री विविधता के महत्व पर बल दिया।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक बान ने समुद्री जीवन की सुरक्षा मजबूत किए जाने पर बल दिया।टिप्पणियां
अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर बोलते हुए संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने मंगलवार को कहा, "पृथ्वी का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा समुद्र से ढका है। ये समुद्र पृथ्वी पर जीवित सबसे बड़े जानवर ब्ल्यू व्हेल का घर हैं।"
उन्होंने कहा, "रेतीले तटों से लेकर समुद्र की गहराइयों तक उसके जीवन में विविधता है, जिस पर मानवीय समुदाय भरोसा कर सकता है।" बान ने महासागरों में पाई जाने वाली मछलियों के व्यवसायिक इस्तेमाल के प्रभाव पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मत्स्य पालन से समुद्री जीवन प्रभावित हो रहा है। बान ने कहा, "जीवाश्म ईंधन को जलाने से वैश्विक जलवायु प्रभावित हो रही है। इससे समुद्र की सतह गर्म हो रही है, समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है और समुद्र में अम्लता बढ़ रही है। इन परिणामों के साथ हम केवल इसे समझने की शुरुआत कर रहे हैं।" संयुक्त राष्ट्र महासभा वैश्विक समुद्री जीवन को प्रभावित करने वाले मुद्दों के प्रति जागरूकता के लिए 22 मई को अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस मनाता है।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक बान ने समुद्री जीवन की सुरक्षा मजबूत किए जाने पर बल दिया।टिप्पणियां
अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर बोलते हुए संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने मंगलवार को कहा, "पृथ्वी का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा समुद्र से ढका है। ये समुद्र पृथ्वी पर जीवित सबसे बड़े जानवर ब्ल्यू व्हेल का घर हैं।"
उन्होंने कहा, "रेतीले तटों से लेकर समुद्र की गहराइयों तक उसके जीवन में विविधता है, जिस पर मानवीय समुदाय भरोसा कर सकता है।" बान ने महासागरों में पाई जाने वाली मछलियों के व्यवसायिक इस्तेमाल के प्रभाव पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मत्स्य पालन से समुद्री जीवन प्रभावित हो रहा है। बान ने कहा, "जीवाश्म ईंधन को जलाने से वैश्विक जलवायु प्रभावित हो रही है। इससे समुद्र की सतह गर्म हो रही है, समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है और समुद्र में अम्लता बढ़ रही है। इन परिणामों के साथ हम केवल इसे समझने की शुरुआत कर रहे हैं।" संयुक्त राष्ट्र महासभा वैश्विक समुद्री जीवन को प्रभावित करने वाले मुद्दों के प्रति जागरूकता के लिए 22 मई को अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस मनाता है।
अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर बोलते हुए संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने मंगलवार को कहा, "पृथ्वी का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा समुद्र से ढका है। ये समुद्र पृथ्वी पर जीवित सबसे बड़े जानवर ब्ल्यू व्हेल का घर हैं।"
उन्होंने कहा, "रेतीले तटों से लेकर समुद्र की गहराइयों तक उसके जीवन में विविधता है, जिस पर मानवीय समुदाय भरोसा कर सकता है।" बान ने महासागरों में पाई जाने वाली मछलियों के व्यवसायिक इस्तेमाल के प्रभाव पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मत्स्य पालन से समुद्री जीवन प्रभावित हो रहा है। बान ने कहा, "जीवाश्म ईंधन को जलाने से वैश्विक जलवायु प्रभावित हो रही है। इससे समुद्र की सतह गर्म हो रही है, समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है और समुद्र में अम्लता बढ़ रही है। इन परिणामों के साथ हम केवल इसे समझने की शुरुआत कर रहे हैं।" संयुक्त राष्ट्र महासभा वैश्विक समुद्री जीवन को प्रभावित करने वाले मुद्दों के प्रति जागरूकता के लिए 22 मई को अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस मनाता है।
उन्होंने कहा, "रेतीले तटों से लेकर समुद्र की गहराइयों तक उसके जीवन में विविधता है, जिस पर मानवीय समुदाय भरोसा कर सकता है।" बान ने महासागरों में पाई जाने वाली मछलियों के व्यवसायिक इस्तेमाल के प्रभाव पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मत्स्य पालन से समुद्री जीवन प्रभावित हो रहा है। बान ने कहा, "जीवाश्म ईंधन को जलाने से वैश्विक जलवायु प्रभावित हो रही है। इससे समुद्र की सतह गर्म हो रही है, समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है और समुद्र में अम्लता बढ़ रही है। इन परिणामों के साथ हम केवल इसे समझने की शुरुआत कर रहे हैं।" संयुक्त राष्ट्र महासभा वैश्विक समुद्री जीवन को प्रभावित करने वाले मुद्दों के प्रति जागरूकता के लिए 22 मई को अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस मनाता है। | संक्षिप्त पाठ: संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की-मून ने दुनिया के महासागरों की नाजुक हालत की ओर वैश्विक स्तर पर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। | 30 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: गांधीवादी अन्ना हजारे को 16 अगस्त से प्रस्तावित अपने अनशन से पहले गुड़गांव के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि, उनके साथी कार्यकर्ताओं ने इसका कारण नियमित स्वास्थ्य जांच बताया है। बताया जाता है कि हजारे को रक्तचाप संबंधी कुछ समस्या है, लेकिन उनके साथी कार्यकर्ता इसकी पुष्टि नहीं कर रहे हैं। इसी कारण उन्हें गुरुवार रात गुड़गांव के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। हजारे के करीबी मनीष सिसोदिया ने बताया, हजारे को अस्पताल लाया गया है, लेकिन उन्हें सेहत से जुड़ी कोई समस्या नहीं है। वह 16 अगस्त से अनिश्चितकालीन अनशन करने वाले हैं, लिहाजा इससे पहले उनके रक्तचाप आदि से संबंधित नियमित जांच की जा रही है। अन्ना बिल्कुल स्वस्थ हैं। इस बीच, हजारे पक्ष को जयप्रकाश नारायण नेशनल पार्क पर अनशन के लिए सीपीडब्ल्यूडी से अनापत्ति प्रमाणपत्र नहीं मिला है। सीपीडब्ल्यूडी के आला अधिकारियों ने हजारे पक्ष को आज दोपहर संपर्क करने को कहा है। गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस ने हजारे पक्ष को जंतर मंतर पर अनशन की अनुमति देने से इनकार कर दिया, लेकिन विकल्प के तौर पर जयप्रकाश नारायण पार्क का सुझाव दिया था। उधर, हजारे के आंदोलन इंडिया अगेस्ट करप्शन की ओर से गुरुवार शाम लखनऊ में जारी आंकड़ों के अनुसार कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के संसदीय निर्वाचन क्षेत्र अमेठी की 90 फीसदी जनता जनलोकपाल विधेयक के समर्थन में है। अमेठी में दो लाख लोगों के बीच सर्वेक्षण किया गया था। | संक्षिप्त पाठ: अन्ना को 16 अगस्त से प्रस्तावित अनशन से पहले अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनके साथी कार्यकर्ताओं ने इसका कारण नियमित स्वास्थ्य जांच बताया है। | 30 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: भारतीय जनता पार्टी के आलाकमान पर वादे से मुकरने का आरोप लगाते हुए कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने संकेत दिया कि इस साल के अंत तक वह अपनी नई पार्टी बना सकते हैं।टिप्पणियां
येदियुरप्पा ने एनडीटीवी से कहा, ‘मैं पिछले दो माह से राज्य में घूम रहा हूं। मैं अगले महीने तीसरा चरण शुरू कर रहा हूं। मैं लोगों और कार्यकर्ताओं की राय लेना चाहता हूं। दिसंबर के बाद मैं अपना निर्णय लूंगा।’ वह इस सवाल का जवाब दे रहे थे कि पार्टी नेतृत्व पर हमला और कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी की सराहना से संबंधित उनकी टिप्पणी के आलोक में क्या उन्होंने भाजपा से अलग होकर नई पार्टी बनाने का मन बना लिया है। उन्होंने कहा कि पिछले छह माह में पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी समेत पार्टी नेतृत्व ने उन्हें मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष समेत कई वादे कर उन्हें धोखा दिया।
येदियुरप्पा ने कहा, ‘लेकिन गडकरी ने कोई निर्णय नहीं लिया। उन्होंने मुझसे कहा कि यदि अदालत कोई राहत देती है तो मुझे मुख्यमंत्री बना दिया जाएगा। मुझे अदालत से राहत मिल गई लेकिन राष्ट्रीय नेताओं ने मुझे धोखा दिया।’
येदियुरप्पा ने एनडीटीवी से कहा, ‘मैं पिछले दो माह से राज्य में घूम रहा हूं। मैं अगले महीने तीसरा चरण शुरू कर रहा हूं। मैं लोगों और कार्यकर्ताओं की राय लेना चाहता हूं। दिसंबर के बाद मैं अपना निर्णय लूंगा।’ वह इस सवाल का जवाब दे रहे थे कि पार्टी नेतृत्व पर हमला और कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी की सराहना से संबंधित उनकी टिप्पणी के आलोक में क्या उन्होंने भाजपा से अलग होकर नई पार्टी बनाने का मन बना लिया है। उन्होंने कहा कि पिछले छह माह में पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी समेत पार्टी नेतृत्व ने उन्हें मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष समेत कई वादे कर उन्हें धोखा दिया।
येदियुरप्पा ने कहा, ‘लेकिन गडकरी ने कोई निर्णय नहीं लिया। उन्होंने मुझसे कहा कि यदि अदालत कोई राहत देती है तो मुझे मुख्यमंत्री बना दिया जाएगा। मुझे अदालत से राहत मिल गई लेकिन राष्ट्रीय नेताओं ने मुझे धोखा दिया।’
येदियुरप्पा ने कहा, ‘लेकिन गडकरी ने कोई निर्णय नहीं लिया। उन्होंने मुझसे कहा कि यदि अदालत कोई राहत देती है तो मुझे मुख्यमंत्री बना दिया जाएगा। मुझे अदालत से राहत मिल गई लेकिन राष्ट्रीय नेताओं ने मुझे धोखा दिया।’ | संक्षिप्त पाठ: भारतीय जनता पार्टी के आलाकमान पर वादे से मुकरने का आरोप लगाते हुए कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने संकेत दिया कि इस साल के अंत तक वह अपनी नई पार्टी बना सकते हैं। | 13 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: इंग्लैंड दौरे पर चोट से जूझ रही टीम इंडिया ने लॉर्ड्स में जहीर खान की चोट से सबक सिख लिया है। बीसीसीआई ने आशीष नेहरा को फिटनेस सर्टिफिकेट देने के बावजूद इंग्लैंड में हो रहे वन−डे सीरीज से बाहर रखा है। सूत्रों के मुताबिक बोर्ड जहीर की चोट को लेकर काफी आलोचना झेल चुका है और नेहरा की फिटनेस को लेकर कोई चांस लेना नहीं चाहता इस कारण उन्हें टीम से बाहर रखा गया है हालांकि बोर्ड को नेहरा की काबलियत पर कोई शक नहीं है लेकिन उन्हें घरेलू मैच खेलकर अपनी फिटनेस साबित करने को कहा गया है। इंग्लैंड दौरे पर टीम इंडिया के खिलाड़ियों की फिटनेस की हालत का जिम्मेदार दिग्गज एनसीए यानी कि नेशनल क्रिकेट एकेडमी को मान रहे हैं लेकिन एनसीए के डायरेक्टर संदीप पाटिल ने एकेडमी का बचाव करते हुए कहा है कि अगर खिलाड़ी एकेडमी में ठीक होने बाद बाहर जाकर चोटिल होते हैं तो उसके लिए एकेडमी को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। आपको बता दें कि जहीर खान और वीरेंद्र सहवाग जैसे खिलाड़ी इंग्लैंड दौरे के बीच में ही चोटिल होकर वापस आ गए थे। | यह एक सारांश है: खिलीड़ियों की चोटों पर आलोचना झेल रही बीसीसीआई ने आशीष नेहरा को फिटनेस सर्टिफिकेट देने के बावजूद वन−डे सीरीज से बाहर रखा है। | 24 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: संसद के मानसून सत्र का विस्तार छह सितंबर तक कर दिया गया है। सरकार के सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी। मानसून सत्र पांच अगस्त को शुरू हुआ था और 30 अगस्त को इसका समापन होना था।
सत्र के विस्तार का निर्णय लंबित विधेयकों की लंबी सूची को ध्यान में रखकर लिया गया है। सरकार को उम्मीद है कि सत्र की विस्तारित अवधि में कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित कराए जा सकेंगे।
संप्रग सरकार का सर्वोच्च प्राथमिकता वाला खाद्य सुरक्षा विधेयक सोमवार को लोकसभा में पारित हो जाने के बाद मंगलवार को इसके राज्यसभा में पारित हो जाने की संभावना है।
पांच अगस्त से शुरू हुए मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में पहली बार शनिवार को कामकाज हो पाया था। इस दिन राज्यपाल (उपलब्धियां, भत्ते एवं विशेषाधिकार) संशोधन विधेयक, 2012, संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश (संशोधन) विधेयक, 2012 और संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2012-ये तीन विधेयक पारित हुए।टिप्पणियां
विस्तारित सत्र के दौरान सरकार की योजना कुछ अन्य विधेयक लाने की भी है। ऐसे विधेयकों में सिर पर मैला ढोने के लिए नियुक्ति को प्रतिबंधित करने और इस कार्य से जुड़े लोगों के पुनर्वास संबंधी विधेयक, 2012, नशीली दवाओं और मन पर असर डालने वाले पदार्थो की बिक्री पर रोक संबंधी (संशोधन) विधेयक, 2011 भी शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि बुधवार 28 अगस्त को जन्माष्टमी पर्व के अवकाश के कारण संसद की कार्यवाही नहीं होगी।
सत्र के विस्तार का निर्णय लंबित विधेयकों की लंबी सूची को ध्यान में रखकर लिया गया है। सरकार को उम्मीद है कि सत्र की विस्तारित अवधि में कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित कराए जा सकेंगे।
संप्रग सरकार का सर्वोच्च प्राथमिकता वाला खाद्य सुरक्षा विधेयक सोमवार को लोकसभा में पारित हो जाने के बाद मंगलवार को इसके राज्यसभा में पारित हो जाने की संभावना है।
पांच अगस्त से शुरू हुए मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में पहली बार शनिवार को कामकाज हो पाया था। इस दिन राज्यपाल (उपलब्धियां, भत्ते एवं विशेषाधिकार) संशोधन विधेयक, 2012, संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश (संशोधन) विधेयक, 2012 और संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2012-ये तीन विधेयक पारित हुए।टिप्पणियां
विस्तारित सत्र के दौरान सरकार की योजना कुछ अन्य विधेयक लाने की भी है। ऐसे विधेयकों में सिर पर मैला ढोने के लिए नियुक्ति को प्रतिबंधित करने और इस कार्य से जुड़े लोगों के पुनर्वास संबंधी विधेयक, 2012, नशीली दवाओं और मन पर असर डालने वाले पदार्थो की बिक्री पर रोक संबंधी (संशोधन) विधेयक, 2011 भी शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि बुधवार 28 अगस्त को जन्माष्टमी पर्व के अवकाश के कारण संसद की कार्यवाही नहीं होगी।
संप्रग सरकार का सर्वोच्च प्राथमिकता वाला खाद्य सुरक्षा विधेयक सोमवार को लोकसभा में पारित हो जाने के बाद मंगलवार को इसके राज्यसभा में पारित हो जाने की संभावना है।
पांच अगस्त से शुरू हुए मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में पहली बार शनिवार को कामकाज हो पाया था। इस दिन राज्यपाल (उपलब्धियां, भत्ते एवं विशेषाधिकार) संशोधन विधेयक, 2012, संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश (संशोधन) विधेयक, 2012 और संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2012-ये तीन विधेयक पारित हुए।टिप्पणियां
विस्तारित सत्र के दौरान सरकार की योजना कुछ अन्य विधेयक लाने की भी है। ऐसे विधेयकों में सिर पर मैला ढोने के लिए नियुक्ति को प्रतिबंधित करने और इस कार्य से जुड़े लोगों के पुनर्वास संबंधी विधेयक, 2012, नशीली दवाओं और मन पर असर डालने वाले पदार्थो की बिक्री पर रोक संबंधी (संशोधन) विधेयक, 2011 भी शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि बुधवार 28 अगस्त को जन्माष्टमी पर्व के अवकाश के कारण संसद की कार्यवाही नहीं होगी।
पांच अगस्त से शुरू हुए मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में पहली बार शनिवार को कामकाज हो पाया था। इस दिन राज्यपाल (उपलब्धियां, भत्ते एवं विशेषाधिकार) संशोधन विधेयक, 2012, संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश (संशोधन) विधेयक, 2012 और संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2012-ये तीन विधेयक पारित हुए।टिप्पणियां
विस्तारित सत्र के दौरान सरकार की योजना कुछ अन्य विधेयक लाने की भी है। ऐसे विधेयकों में सिर पर मैला ढोने के लिए नियुक्ति को प्रतिबंधित करने और इस कार्य से जुड़े लोगों के पुनर्वास संबंधी विधेयक, 2012, नशीली दवाओं और मन पर असर डालने वाले पदार्थो की बिक्री पर रोक संबंधी (संशोधन) विधेयक, 2011 भी शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि बुधवार 28 अगस्त को जन्माष्टमी पर्व के अवकाश के कारण संसद की कार्यवाही नहीं होगी।
विस्तारित सत्र के दौरान सरकार की योजना कुछ अन्य विधेयक लाने की भी है। ऐसे विधेयकों में सिर पर मैला ढोने के लिए नियुक्ति को प्रतिबंधित करने और इस कार्य से जुड़े लोगों के पुनर्वास संबंधी विधेयक, 2012, नशीली दवाओं और मन पर असर डालने वाले पदार्थो की बिक्री पर रोक संबंधी (संशोधन) विधेयक, 2011 भी शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि बुधवार 28 अगस्त को जन्माष्टमी पर्व के अवकाश के कारण संसद की कार्यवाही नहीं होगी।
उल्लेखनीय है कि बुधवार 28 अगस्त को जन्माष्टमी पर्व के अवकाश के कारण संसद की कार्यवाही नहीं होगी। | यहाँ एक सारांश है:संसद के मानसून सत्र का विस्तार छह सितंबर तक कर दिया गया है। सरकार के सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी। मानसून सत्र पांच अगस्त को शुरू हुआ था और 30 अगस्त को इसका समापन होना था। | 15 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: अन्ना हजारे की टीम से दो महत्वपूर्ण सदस्यों द्वारा खुद को अलग किए जाने के बीच गांधीवादी नेता ने कहा है कि सामाजिक क्षेत्र में अहंकार को अलग रखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी अतार्किक बहस उनकी इच्छाशक्ति को समाप्त नहीं कर सकती। अपने ब्लॉग पर 74 वर्षीय अन्ना हजारे ने लिखा है, "मेरे आंदोलन से राजनीतिक हलके में असंगत बहस शुरू हुई है। मैं उनकी तरफ ध्यान नहीं देता। मैंने अतार्किक बहस और इसकी गलत व्याख्या सुनी है, जो मुख्यत: राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण है। यह पिछले 30 साल से मेरी जिंदगी का हिस्सा है। लेकिन ये सब मेरी इच्छाशक्ति को समाप्त करने में विफल हैं।" अन्ना हजारे ने लिखा, "यदि आप सामाजिक क्षेत्र में काम करते हैं तो आपको अपना अहम दूर रखना होगा और अपमान तथा प्रताड़ना सहनी होगी। इसके बाद ही सामाजिक कार्यकर्ता राष्ट्र के हित में रचनात्मक कार्य कर सकते हैं।" उन्होंने कहा कि सभी को सच्चाई के रास्ते पर चलना चाहिए, क्योंकि सत्य सर्वोच्च है। उल्लेखनीय है कि मैगसेसे अवार्ड विजेता राजेंद्र सिंह और गांधीवादी पीबी राजगोपाल ने अरविंद केजरीवाल के कथित स्वेच्छाचारी रवैये और समूह के 'राजनीतिक' होने को जिम्मेदार ठहराते हुए मंगलवार को खुद को अन्ना हजारे की टीम से अलग करने की घोषणा की थी। | यह एक सारांश है: टीम से दो महत्वपूर्ण सदस्यों द्वारा खुद को अलग किए जाने के बीच अन्ना ने कहा है कि सामाजिक क्षेत्र में अहंकार को अलग रखना चाहिए। | 9 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि भारत को आधुनिक और समृद्ध बनाने में साधु एवं संत एक अहम भूमिका निभा सकते हैं। पीएम मोदी ने गोरखनाथ मंदिर के पूर्व महंत दिवंगत अवैद्यनाथ की प्रतिमा का अनावरण करते हुए यह टिप्पणी की।
प्रधानमंत्री ने कहा, 'यह मेरा सौभाग्य है कि मुझको अवैद्यनाथ जी की प्रतिमा का अनावरण करने का अवसर मिला, जो सभी के लिए प्रेरणा के स्त्रोत हैं। साधु और संत भारत को आधुनिक और समृद्ध बनाने में एक अहम भूमिका निभा सकते हैं। कई यह कार्य कर रहे हैं।'
पीएम मोदी ने कहा, 'मुझे उन संतों के बारे में जानकारी मिली है, जिन्होंने शौचालय निर्माण के लिए अभियान में सहयोग किया है और अन्य लोगों को ऐसा करने के लिए प्रेरित किया है।'
उन्होंने कहा कि गौतमबुद्ध, महावीर और कबीर की भूमि होने के कारण यह धरती काफी विशेष है। इन सभी महापुरुषों का इस देश के साथ अटूट संबंध है। टिप्पणियां
प्रधानमंत्री ने कहा, 'जिन्हें भी देश की सेवा करने का अवसर मिला, अपना सर्वश्रेष्ठ दिया। इस मामले में महंत अवैद्यनाथ जी का बड़ा योगदान है।'(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
प्रधानमंत्री ने कहा, 'यह मेरा सौभाग्य है कि मुझको अवैद्यनाथ जी की प्रतिमा का अनावरण करने का अवसर मिला, जो सभी के लिए प्रेरणा के स्त्रोत हैं। साधु और संत भारत को आधुनिक और समृद्ध बनाने में एक अहम भूमिका निभा सकते हैं। कई यह कार्य कर रहे हैं।'
पीएम मोदी ने कहा, 'मुझे उन संतों के बारे में जानकारी मिली है, जिन्होंने शौचालय निर्माण के लिए अभियान में सहयोग किया है और अन्य लोगों को ऐसा करने के लिए प्रेरित किया है।'
उन्होंने कहा कि गौतमबुद्ध, महावीर और कबीर की भूमि होने के कारण यह धरती काफी विशेष है। इन सभी महापुरुषों का इस देश के साथ अटूट संबंध है। टिप्पणियां
प्रधानमंत्री ने कहा, 'जिन्हें भी देश की सेवा करने का अवसर मिला, अपना सर्वश्रेष्ठ दिया। इस मामले में महंत अवैद्यनाथ जी का बड़ा योगदान है।'(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
पीएम मोदी ने कहा, 'मुझे उन संतों के बारे में जानकारी मिली है, जिन्होंने शौचालय निर्माण के लिए अभियान में सहयोग किया है और अन्य लोगों को ऐसा करने के लिए प्रेरित किया है।'
उन्होंने कहा कि गौतमबुद्ध, महावीर और कबीर की भूमि होने के कारण यह धरती काफी विशेष है। इन सभी महापुरुषों का इस देश के साथ अटूट संबंध है। टिप्पणियां
प्रधानमंत्री ने कहा, 'जिन्हें भी देश की सेवा करने का अवसर मिला, अपना सर्वश्रेष्ठ दिया। इस मामले में महंत अवैद्यनाथ जी का बड़ा योगदान है।'(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
उन्होंने कहा कि गौतमबुद्ध, महावीर और कबीर की भूमि होने के कारण यह धरती काफी विशेष है। इन सभी महापुरुषों का इस देश के साथ अटूट संबंध है। टिप्पणियां
प्रधानमंत्री ने कहा, 'जिन्हें भी देश की सेवा करने का अवसर मिला, अपना सर्वश्रेष्ठ दिया। इस मामले में महंत अवैद्यनाथ जी का बड़ा योगदान है।'(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
प्रधानमंत्री ने कहा, 'जिन्हें भी देश की सेवा करने का अवसर मिला, अपना सर्वश्रेष्ठ दिया। इस मामले में महंत अवैद्यनाथ जी का बड़ा योगदान है।'(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: पीएम मोदी ने अवैद्यनाथ की प्रतिमा का अनावरण करते हुए यह टिप्पणी की
प्रधानमंत्री ने अवैद्यनाथ को सभी के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बताया
पीएम बोले, संतों ने शौचालय निर्माण के लिए अभियान में सहयोग दिया | 19 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: ओडिशा के लोगों को लुभाने के लिए भाजपा की राष्ट्रीय चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष नरेंद्र मोदी आज यहां भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए पहुंचे और उन्होंने गुजरात के आर्थिक विकास में उड़िया लोगों के योगदान की प्रशंसा की।
मोदी ने यहां गुंडिचा मंदिर और श्री मंदिर में पूजा करने के बाद उड़िया भाषा में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा, मैं उड़िया लोगों के योगदान की प्रशंसा करता हूं, जिन्होंने गुजरात के लिए अपना पसीना बहाया। ‘जय जगन्नाथ’ का मंत्रोच्चार करते हुए सफेद कुर्ता पजामा और कंधे पर लाल ओढ़ना डाले गुजरात के मुख्यमंत्री ने कहा कि वह सोमनाथ की धरती से भगवान जगन्नाथ की धरती पर पूरे देश के विकास के लिए उनका आशीर्वाद लेने आए हैं।
हालांकि आज उन्होंने कांग्रेस समेत किसी राजनीतिक दल का नाम नहीं लिया और कहा कि वह भाग्यशाली हैं कि भगवान जगन्नाथ का दर्शन करने आए हैं।
उन्होंने गुजरात और ओडिशा में अनेक समानताएं गिनाते हुए कहा, आप समुद्र तट के किनारे बसे हैं और गुजरात भी तटीय राज्य है। आपके यहां कोणार्क में सूर्य मंदिर है, जहां भारत में सूर्य की पहली किरण पहुंचती है, वहीं गुजरात में सूर्यास्त के दौरान सूर्य की अंतिम किरण पहुंचती है।
मोदी के उड़िया भाषण से प्रभावित होकर पार्टी कार्यकर्ताओं ने भी उनके बोले शब्दों को दोहराया। मोदी की पुरी यात्रा के दौरान हवा में ‘जय जगन्नाथ’ और ‘बंदे उत्कल जननी’ के मंत्र गुंजायमान हो रहे थे।
गुंडिचा मंदिर में और श्री मंदिर में मां बिमला तथा महालक्ष्मी के दर्शन के बाद मोदी पुरी के नरेश दिव्यसिंह देव के महल पहुंचे जहां दोनों ने करीब 10 मिनट तक बातचीत की। इस बारे में हालांकि मोदी और नरेश ने कोई बयान नहीं दिया। बाद में मोदी ने पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती से मुलाकात की और करीब 30 मिनट तक बातचीत की।
मोदी के मुताबिक, शंकराचार्य ने मोदी को सलाह दी कि देश के समग्र विकास के लिए गंभीरता से काम करें, क्योंकि देश के विकास के लिए कोई राजनीतिक दल गंभीरता से काम नहीं कर रहा है।
कड़ी सुरक्षा के बीच पुरी पहुंचे मोदी सबसे पहले गुंडिचा मंदिर गए जहां रथयात्रा महोत्सव के दौरान भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की पूजा की जा रही है। उन्होंने करीब 20 मिनट का समय मंदिर में बिताया और पूजा की। गुजरात के मुख्यमंत्री के साथ उनके पारिवारिक पुजारी रघुनाथ गोच्चिकर और अन्य पुजारी थे।
मोदी की यात्रा से प्रदेश में भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं में पार्टी के मजबूत होने की उम्मीद का संचार हुआ है। उनका मानना है कि गुजरात के मुख्यमंत्री का दौरा ओडिशा में संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा। अगर पुरी, भुवनेश्वर हवाईअड्डे और राज्य के अन्य हिस्सों में मोदी के भव्य स्वागत से किसी भी तरह के संकेत खोजे जाएं तो यहां मोदी का करिश्मा काम करता हुआ दिखाई देता है। भुवनेश्वर से पुरी तक 60 किलोमीटर के रास्ते में सड़कों के दोनों ओर खड़े लोगों ने उनका अभिनंदन किया।
पुरी के रास्ते में मोदी पांच मिनट के लिए सखीगोपाल में ठहरे और ‘पंच सखा’ की प्रतिमाओं पर श्रद्धांजलि अर्पित की जहां ओडिशा के पांच महान लोगों की मूर्तियां हैं।टिप्पणियां
भाजपा नेताओं ने मोदी की यात्रा को पूरी तरह अराजनीतिक बताया, लेकिन गजपति नरेश और शंकराचार्य, दोनों ही शख्सियतों से उनकी मुलाकात के बाद अटकलें शुरू हो गई हैं कि यह अगले चुनाव से पहले हिन्दू शक्तियों को एक करने और जनता की धार्मिक भावनाओं को प्रभावित करने की ही एक कवायद है।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि जगन्नाथ मंदिर के बाहर मीडिया को धाराप्रवाह उड़िया में मोदी के संबोधन से ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को स्पष्ट संदेश जाएगा।
मोदी ने यहां गुंडिचा मंदिर और श्री मंदिर में पूजा करने के बाद उड़िया भाषा में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा, मैं उड़िया लोगों के योगदान की प्रशंसा करता हूं, जिन्होंने गुजरात के लिए अपना पसीना बहाया। ‘जय जगन्नाथ’ का मंत्रोच्चार करते हुए सफेद कुर्ता पजामा और कंधे पर लाल ओढ़ना डाले गुजरात के मुख्यमंत्री ने कहा कि वह सोमनाथ की धरती से भगवान जगन्नाथ की धरती पर पूरे देश के विकास के लिए उनका आशीर्वाद लेने आए हैं।
हालांकि आज उन्होंने कांग्रेस समेत किसी राजनीतिक दल का नाम नहीं लिया और कहा कि वह भाग्यशाली हैं कि भगवान जगन्नाथ का दर्शन करने आए हैं।
उन्होंने गुजरात और ओडिशा में अनेक समानताएं गिनाते हुए कहा, आप समुद्र तट के किनारे बसे हैं और गुजरात भी तटीय राज्य है। आपके यहां कोणार्क में सूर्य मंदिर है, जहां भारत में सूर्य की पहली किरण पहुंचती है, वहीं गुजरात में सूर्यास्त के दौरान सूर्य की अंतिम किरण पहुंचती है।
मोदी के उड़िया भाषण से प्रभावित होकर पार्टी कार्यकर्ताओं ने भी उनके बोले शब्दों को दोहराया। मोदी की पुरी यात्रा के दौरान हवा में ‘जय जगन्नाथ’ और ‘बंदे उत्कल जननी’ के मंत्र गुंजायमान हो रहे थे।
गुंडिचा मंदिर में और श्री मंदिर में मां बिमला तथा महालक्ष्मी के दर्शन के बाद मोदी पुरी के नरेश दिव्यसिंह देव के महल पहुंचे जहां दोनों ने करीब 10 मिनट तक बातचीत की। इस बारे में हालांकि मोदी और नरेश ने कोई बयान नहीं दिया। बाद में मोदी ने पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती से मुलाकात की और करीब 30 मिनट तक बातचीत की।
मोदी के मुताबिक, शंकराचार्य ने मोदी को सलाह दी कि देश के समग्र विकास के लिए गंभीरता से काम करें, क्योंकि देश के विकास के लिए कोई राजनीतिक दल गंभीरता से काम नहीं कर रहा है।
कड़ी सुरक्षा के बीच पुरी पहुंचे मोदी सबसे पहले गुंडिचा मंदिर गए जहां रथयात्रा महोत्सव के दौरान भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की पूजा की जा रही है। उन्होंने करीब 20 मिनट का समय मंदिर में बिताया और पूजा की। गुजरात के मुख्यमंत्री के साथ उनके पारिवारिक पुजारी रघुनाथ गोच्चिकर और अन्य पुजारी थे।
मोदी की यात्रा से प्रदेश में भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं में पार्टी के मजबूत होने की उम्मीद का संचार हुआ है। उनका मानना है कि गुजरात के मुख्यमंत्री का दौरा ओडिशा में संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा। अगर पुरी, भुवनेश्वर हवाईअड्डे और राज्य के अन्य हिस्सों में मोदी के भव्य स्वागत से किसी भी तरह के संकेत खोजे जाएं तो यहां मोदी का करिश्मा काम करता हुआ दिखाई देता है। भुवनेश्वर से पुरी तक 60 किलोमीटर के रास्ते में सड़कों के दोनों ओर खड़े लोगों ने उनका अभिनंदन किया।
पुरी के रास्ते में मोदी पांच मिनट के लिए सखीगोपाल में ठहरे और ‘पंच सखा’ की प्रतिमाओं पर श्रद्धांजलि अर्पित की जहां ओडिशा के पांच महान लोगों की मूर्तियां हैं।टिप्पणियां
भाजपा नेताओं ने मोदी की यात्रा को पूरी तरह अराजनीतिक बताया, लेकिन गजपति नरेश और शंकराचार्य, दोनों ही शख्सियतों से उनकी मुलाकात के बाद अटकलें शुरू हो गई हैं कि यह अगले चुनाव से पहले हिन्दू शक्तियों को एक करने और जनता की धार्मिक भावनाओं को प्रभावित करने की ही एक कवायद है।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि जगन्नाथ मंदिर के बाहर मीडिया को धाराप्रवाह उड़िया में मोदी के संबोधन से ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को स्पष्ट संदेश जाएगा।
हालांकि आज उन्होंने कांग्रेस समेत किसी राजनीतिक दल का नाम नहीं लिया और कहा कि वह भाग्यशाली हैं कि भगवान जगन्नाथ का दर्शन करने आए हैं।
उन्होंने गुजरात और ओडिशा में अनेक समानताएं गिनाते हुए कहा, आप समुद्र तट के किनारे बसे हैं और गुजरात भी तटीय राज्य है। आपके यहां कोणार्क में सूर्य मंदिर है, जहां भारत में सूर्य की पहली किरण पहुंचती है, वहीं गुजरात में सूर्यास्त के दौरान सूर्य की अंतिम किरण पहुंचती है।
मोदी के उड़िया भाषण से प्रभावित होकर पार्टी कार्यकर्ताओं ने भी उनके बोले शब्दों को दोहराया। मोदी की पुरी यात्रा के दौरान हवा में ‘जय जगन्नाथ’ और ‘बंदे उत्कल जननी’ के मंत्र गुंजायमान हो रहे थे।
गुंडिचा मंदिर में और श्री मंदिर में मां बिमला तथा महालक्ष्मी के दर्शन के बाद मोदी पुरी के नरेश दिव्यसिंह देव के महल पहुंचे जहां दोनों ने करीब 10 मिनट तक बातचीत की। इस बारे में हालांकि मोदी और नरेश ने कोई बयान नहीं दिया। बाद में मोदी ने पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती से मुलाकात की और करीब 30 मिनट तक बातचीत की।
मोदी के मुताबिक, शंकराचार्य ने मोदी को सलाह दी कि देश के समग्र विकास के लिए गंभीरता से काम करें, क्योंकि देश के विकास के लिए कोई राजनीतिक दल गंभीरता से काम नहीं कर रहा है।
कड़ी सुरक्षा के बीच पुरी पहुंचे मोदी सबसे पहले गुंडिचा मंदिर गए जहां रथयात्रा महोत्सव के दौरान भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की पूजा की जा रही है। उन्होंने करीब 20 मिनट का समय मंदिर में बिताया और पूजा की। गुजरात के मुख्यमंत्री के साथ उनके पारिवारिक पुजारी रघुनाथ गोच्चिकर और अन्य पुजारी थे।
मोदी की यात्रा से प्रदेश में भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं में पार्टी के मजबूत होने की उम्मीद का संचार हुआ है। उनका मानना है कि गुजरात के मुख्यमंत्री का दौरा ओडिशा में संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा। अगर पुरी, भुवनेश्वर हवाईअड्डे और राज्य के अन्य हिस्सों में मोदी के भव्य स्वागत से किसी भी तरह के संकेत खोजे जाएं तो यहां मोदी का करिश्मा काम करता हुआ दिखाई देता है। भुवनेश्वर से पुरी तक 60 किलोमीटर के रास्ते में सड़कों के दोनों ओर खड़े लोगों ने उनका अभिनंदन किया।
पुरी के रास्ते में मोदी पांच मिनट के लिए सखीगोपाल में ठहरे और ‘पंच सखा’ की प्रतिमाओं पर श्रद्धांजलि अर्पित की जहां ओडिशा के पांच महान लोगों की मूर्तियां हैं।टिप्पणियां
भाजपा नेताओं ने मोदी की यात्रा को पूरी तरह अराजनीतिक बताया, लेकिन गजपति नरेश और शंकराचार्य, दोनों ही शख्सियतों से उनकी मुलाकात के बाद अटकलें शुरू हो गई हैं कि यह अगले चुनाव से पहले हिन्दू शक्तियों को एक करने और जनता की धार्मिक भावनाओं को प्रभावित करने की ही एक कवायद है।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि जगन्नाथ मंदिर के बाहर मीडिया को धाराप्रवाह उड़िया में मोदी के संबोधन से ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को स्पष्ट संदेश जाएगा।
उन्होंने गुजरात और ओडिशा में अनेक समानताएं गिनाते हुए कहा, आप समुद्र तट के किनारे बसे हैं और गुजरात भी तटीय राज्य है। आपके यहां कोणार्क में सूर्य मंदिर है, जहां भारत में सूर्य की पहली किरण पहुंचती है, वहीं गुजरात में सूर्यास्त के दौरान सूर्य की अंतिम किरण पहुंचती है।
मोदी के उड़िया भाषण से प्रभावित होकर पार्टी कार्यकर्ताओं ने भी उनके बोले शब्दों को दोहराया। मोदी की पुरी यात्रा के दौरान हवा में ‘जय जगन्नाथ’ और ‘बंदे उत्कल जननी’ के मंत्र गुंजायमान हो रहे थे।
गुंडिचा मंदिर में और श्री मंदिर में मां बिमला तथा महालक्ष्मी के दर्शन के बाद मोदी पुरी के नरेश दिव्यसिंह देव के महल पहुंचे जहां दोनों ने करीब 10 मिनट तक बातचीत की। इस बारे में हालांकि मोदी और नरेश ने कोई बयान नहीं दिया। बाद में मोदी ने पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती से मुलाकात की और करीब 30 मिनट तक बातचीत की।
मोदी के मुताबिक, शंकराचार्य ने मोदी को सलाह दी कि देश के समग्र विकास के लिए गंभीरता से काम करें, क्योंकि देश के विकास के लिए कोई राजनीतिक दल गंभीरता से काम नहीं कर रहा है।
कड़ी सुरक्षा के बीच पुरी पहुंचे मोदी सबसे पहले गुंडिचा मंदिर गए जहां रथयात्रा महोत्सव के दौरान भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की पूजा की जा रही है। उन्होंने करीब 20 मिनट का समय मंदिर में बिताया और पूजा की। गुजरात के मुख्यमंत्री के साथ उनके पारिवारिक पुजारी रघुनाथ गोच्चिकर और अन्य पुजारी थे।
मोदी की यात्रा से प्रदेश में भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं में पार्टी के मजबूत होने की उम्मीद का संचार हुआ है। उनका मानना है कि गुजरात के मुख्यमंत्री का दौरा ओडिशा में संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा। अगर पुरी, भुवनेश्वर हवाईअड्डे और राज्य के अन्य हिस्सों में मोदी के भव्य स्वागत से किसी भी तरह के संकेत खोजे जाएं तो यहां मोदी का करिश्मा काम करता हुआ दिखाई देता है। भुवनेश्वर से पुरी तक 60 किलोमीटर के रास्ते में सड़कों के दोनों ओर खड़े लोगों ने उनका अभिनंदन किया।
पुरी के रास्ते में मोदी पांच मिनट के लिए सखीगोपाल में ठहरे और ‘पंच सखा’ की प्रतिमाओं पर श्रद्धांजलि अर्पित की जहां ओडिशा के पांच महान लोगों की मूर्तियां हैं।टिप्पणियां
भाजपा नेताओं ने मोदी की यात्रा को पूरी तरह अराजनीतिक बताया, लेकिन गजपति नरेश और शंकराचार्य, दोनों ही शख्सियतों से उनकी मुलाकात के बाद अटकलें शुरू हो गई हैं कि यह अगले चुनाव से पहले हिन्दू शक्तियों को एक करने और जनता की धार्मिक भावनाओं को प्रभावित करने की ही एक कवायद है।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि जगन्नाथ मंदिर के बाहर मीडिया को धाराप्रवाह उड़िया में मोदी के संबोधन से ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को स्पष्ट संदेश जाएगा।
गुंडिचा मंदिर में और श्री मंदिर में मां बिमला तथा महालक्ष्मी के दर्शन के बाद मोदी पुरी के नरेश दिव्यसिंह देव के महल पहुंचे जहां दोनों ने करीब 10 मिनट तक बातचीत की। इस बारे में हालांकि मोदी और नरेश ने कोई बयान नहीं दिया। बाद में मोदी ने पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती से मुलाकात की और करीब 30 मिनट तक बातचीत की।
मोदी के मुताबिक, शंकराचार्य ने मोदी को सलाह दी कि देश के समग्र विकास के लिए गंभीरता से काम करें, क्योंकि देश के विकास के लिए कोई राजनीतिक दल गंभीरता से काम नहीं कर रहा है।
कड़ी सुरक्षा के बीच पुरी पहुंचे मोदी सबसे पहले गुंडिचा मंदिर गए जहां रथयात्रा महोत्सव के दौरान भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की पूजा की जा रही है। उन्होंने करीब 20 मिनट का समय मंदिर में बिताया और पूजा की। गुजरात के मुख्यमंत्री के साथ उनके पारिवारिक पुजारी रघुनाथ गोच्चिकर और अन्य पुजारी थे।
मोदी की यात्रा से प्रदेश में भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं में पार्टी के मजबूत होने की उम्मीद का संचार हुआ है। उनका मानना है कि गुजरात के मुख्यमंत्री का दौरा ओडिशा में संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा। अगर पुरी, भुवनेश्वर हवाईअड्डे और राज्य के अन्य हिस्सों में मोदी के भव्य स्वागत से किसी भी तरह के संकेत खोजे जाएं तो यहां मोदी का करिश्मा काम करता हुआ दिखाई देता है। भुवनेश्वर से पुरी तक 60 किलोमीटर के रास्ते में सड़कों के दोनों ओर खड़े लोगों ने उनका अभिनंदन किया।
पुरी के रास्ते में मोदी पांच मिनट के लिए सखीगोपाल में ठहरे और ‘पंच सखा’ की प्रतिमाओं पर श्रद्धांजलि अर्पित की जहां ओडिशा के पांच महान लोगों की मूर्तियां हैं।टिप्पणियां
भाजपा नेताओं ने मोदी की यात्रा को पूरी तरह अराजनीतिक बताया, लेकिन गजपति नरेश और शंकराचार्य, दोनों ही शख्सियतों से उनकी मुलाकात के बाद अटकलें शुरू हो गई हैं कि यह अगले चुनाव से पहले हिन्दू शक्तियों को एक करने और जनता की धार्मिक भावनाओं को प्रभावित करने की ही एक कवायद है।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि जगन्नाथ मंदिर के बाहर मीडिया को धाराप्रवाह उड़िया में मोदी के संबोधन से ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को स्पष्ट संदेश जाएगा।
मोदी के मुताबिक, शंकराचार्य ने मोदी को सलाह दी कि देश के समग्र विकास के लिए गंभीरता से काम करें, क्योंकि देश के विकास के लिए कोई राजनीतिक दल गंभीरता से काम नहीं कर रहा है।
कड़ी सुरक्षा के बीच पुरी पहुंचे मोदी सबसे पहले गुंडिचा मंदिर गए जहां रथयात्रा महोत्सव के दौरान भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की पूजा की जा रही है। उन्होंने करीब 20 मिनट का समय मंदिर में बिताया और पूजा की। गुजरात के मुख्यमंत्री के साथ उनके पारिवारिक पुजारी रघुनाथ गोच्चिकर और अन्य पुजारी थे।
मोदी की यात्रा से प्रदेश में भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं में पार्टी के मजबूत होने की उम्मीद का संचार हुआ है। उनका मानना है कि गुजरात के मुख्यमंत्री का दौरा ओडिशा में संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा। अगर पुरी, भुवनेश्वर हवाईअड्डे और राज्य के अन्य हिस्सों में मोदी के भव्य स्वागत से किसी भी तरह के संकेत खोजे जाएं तो यहां मोदी का करिश्मा काम करता हुआ दिखाई देता है। भुवनेश्वर से पुरी तक 60 किलोमीटर के रास्ते में सड़कों के दोनों ओर खड़े लोगों ने उनका अभिनंदन किया।
पुरी के रास्ते में मोदी पांच मिनट के लिए सखीगोपाल में ठहरे और ‘पंच सखा’ की प्रतिमाओं पर श्रद्धांजलि अर्पित की जहां ओडिशा के पांच महान लोगों की मूर्तियां हैं।टिप्पणियां
भाजपा नेताओं ने मोदी की यात्रा को पूरी तरह अराजनीतिक बताया, लेकिन गजपति नरेश और शंकराचार्य, दोनों ही शख्सियतों से उनकी मुलाकात के बाद अटकलें शुरू हो गई हैं कि यह अगले चुनाव से पहले हिन्दू शक्तियों को एक करने और जनता की धार्मिक भावनाओं को प्रभावित करने की ही एक कवायद है।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि जगन्नाथ मंदिर के बाहर मीडिया को धाराप्रवाह उड़िया में मोदी के संबोधन से ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को स्पष्ट संदेश जाएगा।
कड़ी सुरक्षा के बीच पुरी पहुंचे मोदी सबसे पहले गुंडिचा मंदिर गए जहां रथयात्रा महोत्सव के दौरान भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की पूजा की जा रही है। उन्होंने करीब 20 मिनट का समय मंदिर में बिताया और पूजा की। गुजरात के मुख्यमंत्री के साथ उनके पारिवारिक पुजारी रघुनाथ गोच्चिकर और अन्य पुजारी थे।
मोदी की यात्रा से प्रदेश में भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं में पार्टी के मजबूत होने की उम्मीद का संचार हुआ है। उनका मानना है कि गुजरात के मुख्यमंत्री का दौरा ओडिशा में संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा। अगर पुरी, भुवनेश्वर हवाईअड्डे और राज्य के अन्य हिस्सों में मोदी के भव्य स्वागत से किसी भी तरह के संकेत खोजे जाएं तो यहां मोदी का करिश्मा काम करता हुआ दिखाई देता है। भुवनेश्वर से पुरी तक 60 किलोमीटर के रास्ते में सड़कों के दोनों ओर खड़े लोगों ने उनका अभिनंदन किया।
पुरी के रास्ते में मोदी पांच मिनट के लिए सखीगोपाल में ठहरे और ‘पंच सखा’ की प्रतिमाओं पर श्रद्धांजलि अर्पित की जहां ओडिशा के पांच महान लोगों की मूर्तियां हैं।टिप्पणियां
भाजपा नेताओं ने मोदी की यात्रा को पूरी तरह अराजनीतिक बताया, लेकिन गजपति नरेश और शंकराचार्य, दोनों ही शख्सियतों से उनकी मुलाकात के बाद अटकलें शुरू हो गई हैं कि यह अगले चुनाव से पहले हिन्दू शक्तियों को एक करने और जनता की धार्मिक भावनाओं को प्रभावित करने की ही एक कवायद है।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि जगन्नाथ मंदिर के बाहर मीडिया को धाराप्रवाह उड़िया में मोदी के संबोधन से ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को स्पष्ट संदेश जाएगा।
पुरी के रास्ते में मोदी पांच मिनट के लिए सखीगोपाल में ठहरे और ‘पंच सखा’ की प्रतिमाओं पर श्रद्धांजलि अर्पित की जहां ओडिशा के पांच महान लोगों की मूर्तियां हैं।टिप्पणियां
भाजपा नेताओं ने मोदी की यात्रा को पूरी तरह अराजनीतिक बताया, लेकिन गजपति नरेश और शंकराचार्य, दोनों ही शख्सियतों से उनकी मुलाकात के बाद अटकलें शुरू हो गई हैं कि यह अगले चुनाव से पहले हिन्दू शक्तियों को एक करने और जनता की धार्मिक भावनाओं को प्रभावित करने की ही एक कवायद है।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि जगन्नाथ मंदिर के बाहर मीडिया को धाराप्रवाह उड़िया में मोदी के संबोधन से ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को स्पष्ट संदेश जाएगा।
भाजपा नेताओं ने मोदी की यात्रा को पूरी तरह अराजनीतिक बताया, लेकिन गजपति नरेश और शंकराचार्य, दोनों ही शख्सियतों से उनकी मुलाकात के बाद अटकलें शुरू हो गई हैं कि यह अगले चुनाव से पहले हिन्दू शक्तियों को एक करने और जनता की धार्मिक भावनाओं को प्रभावित करने की ही एक कवायद है।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि जगन्नाथ मंदिर के बाहर मीडिया को धाराप्रवाह उड़िया में मोदी के संबोधन से ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को स्पष्ट संदेश जाएगा।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि जगन्नाथ मंदिर के बाहर मीडिया को धाराप्रवाह उड़िया में मोदी के संबोधन से ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को स्पष्ट संदेश जाएगा। | संक्षिप्त सारांश: मोदी ने आज कांग्रेस समेत किसी राजनीतिक दल का नाम नहीं लिया और कहा कि वह भाग्यशाली हैं कि भगवान जगन्नाथ का दर्शन करने आए हैं। | 8 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: संसद में मंगलवार को पेश रेल बजट की सत्ताधारी कांग्रेस और केंद्रीय मंत्रियों ने 'सराहनीय' कहकर प्रशंसा की तो भाजपा ने इसे 'निराशाजनक' कहकर नकार दिया।
वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने कहा, "नई रेल लाइनों और विस्तारीकरण पर उल्लेखनीय काम किया गया है..यह अत्यंत सराहनीय बजट है।"
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता यशवंत सिन्हा ने रेल बजट की यह कहते हुए निंदा की, "मैं महसूस करता हूं कि इससे भयावह स्थिति पहले कभी नहीं दिखाई दी। सदन में एक नारा लग रहा था कि यह रेल बजट नहीं राय बरेली बजट है।"
दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा, "मैं बजट की सराहना करता हूं। यह अत्यंत व्यावहारिक और उपयोगी बजट है जो सालों बाद आया है..यात्रियों की सेवा करने के लिए अपने संसाधनों का ध्यान रखा गया है।"
भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे ने इसे 'राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंध (राजग) विरोधी बजट' करार दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष शासित राज्यों को तबज्जो नहीं दिया गया।
कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि रेलमंत्री ने अखिल भारतीय परिप्रेक्ष्य में बजट तैयार किया है।
भाजपा नेता बलवीर पुंज ने रेल बजट को अत्यंत निराशाजनक बताया और कहा कि यह 'बड़े वादे करने वाला बिना काम का बजट है' इसके बारे में कुछ कहने लायक भी नहीं है।टिप्पणियां
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मुखिया मायावती ने कहा कि रेल बजट ने गरीब और मध्यम वर्ग की उपेक्षा की है। यह वर्ग रेल से ज्यादा यात्रा करता है। इस वर्ग के लोगों को बजट से लाभ नहीं मिलने जा रहा है।
रेल किराये में वृद्धि नहीं करने के रेलमंत्री के दावे की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि यह काम तो वह पहले ही कर चुके हैं।
वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने कहा, "नई रेल लाइनों और विस्तारीकरण पर उल्लेखनीय काम किया गया है..यह अत्यंत सराहनीय बजट है।"
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता यशवंत सिन्हा ने रेल बजट की यह कहते हुए निंदा की, "मैं महसूस करता हूं कि इससे भयावह स्थिति पहले कभी नहीं दिखाई दी। सदन में एक नारा लग रहा था कि यह रेल बजट नहीं राय बरेली बजट है।"
दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा, "मैं बजट की सराहना करता हूं। यह अत्यंत व्यावहारिक और उपयोगी बजट है जो सालों बाद आया है..यात्रियों की सेवा करने के लिए अपने संसाधनों का ध्यान रखा गया है।"
भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे ने इसे 'राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंध (राजग) विरोधी बजट' करार दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष शासित राज्यों को तबज्जो नहीं दिया गया।
कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि रेलमंत्री ने अखिल भारतीय परिप्रेक्ष्य में बजट तैयार किया है।
भाजपा नेता बलवीर पुंज ने रेल बजट को अत्यंत निराशाजनक बताया और कहा कि यह 'बड़े वादे करने वाला बिना काम का बजट है' इसके बारे में कुछ कहने लायक भी नहीं है।टिप्पणियां
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मुखिया मायावती ने कहा कि रेल बजट ने गरीब और मध्यम वर्ग की उपेक्षा की है। यह वर्ग रेल से ज्यादा यात्रा करता है। इस वर्ग के लोगों को बजट से लाभ नहीं मिलने जा रहा है।
रेल किराये में वृद्धि नहीं करने के रेलमंत्री के दावे की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि यह काम तो वह पहले ही कर चुके हैं।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता यशवंत सिन्हा ने रेल बजट की यह कहते हुए निंदा की, "मैं महसूस करता हूं कि इससे भयावह स्थिति पहले कभी नहीं दिखाई दी। सदन में एक नारा लग रहा था कि यह रेल बजट नहीं राय बरेली बजट है।"
दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा, "मैं बजट की सराहना करता हूं। यह अत्यंत व्यावहारिक और उपयोगी बजट है जो सालों बाद आया है..यात्रियों की सेवा करने के लिए अपने संसाधनों का ध्यान रखा गया है।"
भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे ने इसे 'राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंध (राजग) विरोधी बजट' करार दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष शासित राज्यों को तबज्जो नहीं दिया गया।
कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि रेलमंत्री ने अखिल भारतीय परिप्रेक्ष्य में बजट तैयार किया है।
भाजपा नेता बलवीर पुंज ने रेल बजट को अत्यंत निराशाजनक बताया और कहा कि यह 'बड़े वादे करने वाला बिना काम का बजट है' इसके बारे में कुछ कहने लायक भी नहीं है।टिप्पणियां
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मुखिया मायावती ने कहा कि रेल बजट ने गरीब और मध्यम वर्ग की उपेक्षा की है। यह वर्ग रेल से ज्यादा यात्रा करता है। इस वर्ग के लोगों को बजट से लाभ नहीं मिलने जा रहा है।
रेल किराये में वृद्धि नहीं करने के रेलमंत्री के दावे की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि यह काम तो वह पहले ही कर चुके हैं।
दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा, "मैं बजट की सराहना करता हूं। यह अत्यंत व्यावहारिक और उपयोगी बजट है जो सालों बाद आया है..यात्रियों की सेवा करने के लिए अपने संसाधनों का ध्यान रखा गया है।"
भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे ने इसे 'राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंध (राजग) विरोधी बजट' करार दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष शासित राज्यों को तबज्जो नहीं दिया गया।
कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि रेलमंत्री ने अखिल भारतीय परिप्रेक्ष्य में बजट तैयार किया है।
भाजपा नेता बलवीर पुंज ने रेल बजट को अत्यंत निराशाजनक बताया और कहा कि यह 'बड़े वादे करने वाला बिना काम का बजट है' इसके बारे में कुछ कहने लायक भी नहीं है।टिप्पणियां
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मुखिया मायावती ने कहा कि रेल बजट ने गरीब और मध्यम वर्ग की उपेक्षा की है। यह वर्ग रेल से ज्यादा यात्रा करता है। इस वर्ग के लोगों को बजट से लाभ नहीं मिलने जा रहा है।
रेल किराये में वृद्धि नहीं करने के रेलमंत्री के दावे की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि यह काम तो वह पहले ही कर चुके हैं।
भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे ने इसे 'राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंध (राजग) विरोधी बजट' करार दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष शासित राज्यों को तबज्जो नहीं दिया गया।
कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि रेलमंत्री ने अखिल भारतीय परिप्रेक्ष्य में बजट तैयार किया है।
भाजपा नेता बलवीर पुंज ने रेल बजट को अत्यंत निराशाजनक बताया और कहा कि यह 'बड़े वादे करने वाला बिना काम का बजट है' इसके बारे में कुछ कहने लायक भी नहीं है।टिप्पणियां
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मुखिया मायावती ने कहा कि रेल बजट ने गरीब और मध्यम वर्ग की उपेक्षा की है। यह वर्ग रेल से ज्यादा यात्रा करता है। इस वर्ग के लोगों को बजट से लाभ नहीं मिलने जा रहा है।
रेल किराये में वृद्धि नहीं करने के रेलमंत्री के दावे की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि यह काम तो वह पहले ही कर चुके हैं।
कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि रेलमंत्री ने अखिल भारतीय परिप्रेक्ष्य में बजट तैयार किया है।
भाजपा नेता बलवीर पुंज ने रेल बजट को अत्यंत निराशाजनक बताया और कहा कि यह 'बड़े वादे करने वाला बिना काम का बजट है' इसके बारे में कुछ कहने लायक भी नहीं है।टिप्पणियां
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मुखिया मायावती ने कहा कि रेल बजट ने गरीब और मध्यम वर्ग की उपेक्षा की है। यह वर्ग रेल से ज्यादा यात्रा करता है। इस वर्ग के लोगों को बजट से लाभ नहीं मिलने जा रहा है।
रेल किराये में वृद्धि नहीं करने के रेलमंत्री के दावे की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि यह काम तो वह पहले ही कर चुके हैं।
भाजपा नेता बलवीर पुंज ने रेल बजट को अत्यंत निराशाजनक बताया और कहा कि यह 'बड़े वादे करने वाला बिना काम का बजट है' इसके बारे में कुछ कहने लायक भी नहीं है।टिप्पणियां
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मुखिया मायावती ने कहा कि रेल बजट ने गरीब और मध्यम वर्ग की उपेक्षा की है। यह वर्ग रेल से ज्यादा यात्रा करता है। इस वर्ग के लोगों को बजट से लाभ नहीं मिलने जा रहा है।
रेल किराये में वृद्धि नहीं करने के रेलमंत्री के दावे की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि यह काम तो वह पहले ही कर चुके हैं।
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मुखिया मायावती ने कहा कि रेल बजट ने गरीब और मध्यम वर्ग की उपेक्षा की है। यह वर्ग रेल से ज्यादा यात्रा करता है। इस वर्ग के लोगों को बजट से लाभ नहीं मिलने जा रहा है।
रेल किराये में वृद्धि नहीं करने के रेलमंत्री के दावे की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि यह काम तो वह पहले ही कर चुके हैं।
रेल किराये में वृद्धि नहीं करने के रेलमंत्री के दावे की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि यह काम तो वह पहले ही कर चुके हैं। | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: संसद में मंगलवार को पेश रेल बजट की सत्ताधारी कांग्रेस और केंद्रीय मंत्रियों ने 'सराहनीय' कहकर प्रशंसा की तो भाजपा ने इसे 'निराशाजनक' कहकर नकार दिया। | 19 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने नागरिकता संशोधन कानून पर बवाल खड़ा कर दिया है और देश के विभिन्न हिस्सों में अशांति और आगजनी के पीछे विपक्षी पार्टियों का ही हाथ है. पीएम मोदी ने झारखंड के दुमका में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए विपक्षी गठबंधन पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास झारखंड को विकसित करने का कोई रोडमैप या इच्छा नहीं है. उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस और उसके सहयोगी नागरिकता अधिनियम को लेकर आग भड़का रहे हैं लेकिन पूर्वोत्तर के लोगों ने नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन को अस्वीकार कर दिया है. कांग्रेस के कृत्य साबित करते हैं कि संसद में लिए गए सभी निर्णय सही हैं.'' मोदी ने दावा किया कि विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने केवल अपने लिए महलों का निर्माण किया और उन्हें लोगों की समस्याओं के बारे में कोई चिंता नहीं थी. केन्द्र और राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकारों की उपलब्धियां गिनाते हुए उन्होंने कहा, ‘‘मैं राज्य में हमारी पार्टी द्वारा किये गये विकास कार्यों का लेखा-जोखा रखने यहां आया हूं.''
पीएम मोदी ने कहा, 'JMM और कांग्रेस के पास झारखंड के विकास का कोई न रोडमैप है और न इरादा है और न कभी भूतकाल में कुछ किया है. अगर वो जानते है तो उनको एक ही बात का पता है, भाजपा का विरोध करो, मोदी को गाली दो. भाजपा का विरोध करते-करते इन लोगों को देश का विरोध करने की आदत हो गई है.' उन्होंने कहा, 'हमारे देश की संसद ने नागरिकता कानून से जुड़ा एक महत्वपूर्ण बदलाव किया. इस बदलाव के कारण पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से जो वहां कम संख्या में थे, जो अलग धर्म का पालन करते थे, इसलिए वहां उन पर जुल्म हुए.
उन्होंने कहा कि उनका वहां जीना मुश्किल हो गया. ये तीन देशों से हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन, बौद्ध उनको वहां से अपना गांव, घर, परिवार सबकुछ छोड़कर भारत में भाग कर यहां शरणार्थी की जिंदगी जीने के लिए मजबूर होना पड़ा. उनके जीवन को सुधारने के लिए, इन गरीबों को सम्मान मिले इसलिए भारत की दोनों सदनों में भारी बहुमत से इन गरीबों के लिए नागरिकता का निर्णय किया. कांग्रेस और उसके साथी तूफान खड़ा कर रहे हैं, उनकी बात चलती नहीं है तो आगजनी फैला रहे हैं. ये जो आग लगा रहे हैं, ये कौन है उनके कपड़ों से ही पता चल जाता है. देश का भला करने की, देश के लोगों का भला करने की इन लोगों से उम्मीद नहीं बची है. ये सिर्फ और सिर्फ अपने परिवार के बारे में सोचते हैं.'
प्रधानमंत्री ने कहा, 'मैं असम के भाइयों-बहनों का सिर झुकाकर अभिनंदन करता हूं कि इन्होंने हिंसा करने वालों को अपने से अलग कर दिया है. शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात बता रहे हैं. देश का मान-सम्मान बढ़े ऐसा व्यवहार असम, नार्थ ईस्ट कर रहा है. कल्पना कीजिए, अगर बाबा तिलका मांझी सिर्फ अपना हित ही सोचते तो क्या समाज के लिए इतना कुछ कर पाते? अगर सिद्धो-कान्हू, चांद-भैरव, फूलो-झानो, सिर्फ अपना लाभ ही देखते तो क्या अंग्रेजों का मुकाबला कर पाते. ये तमाम सेनानी, ये तमाम शहीद, परिवार हित से ऊपर उठकर, समाज के हित में, राष्ट्र के हित में खड़े हुए. भाजपा ऐसे ही संस्कारों को धारण करती है, उनको सम्मान देती है.'
'पहले सरकारी योजनाएं सिर्फ कागज़ों तक सिमट कर रह जाते थे क्योंकि सरकार और जनता के बीच बहुत बड़ी खाई थी. ये खाई राजनीति की थी, अफसरशाही की थी, भ्रष्टाचार की थी, असंवेदनशीलता की थी. आपका ये सेवक इस खाई को पाटने में निरंतर जुटा है और इसमें अभूतपूर्व सफलता भी मिली है. 2014 से पहले यहां जो मुख्यमंत्री थे, वो 30-35 हज़ार घरों के निर्माण का दावा करते थे और उसको ही बहुत बड़ी उपलब्धि बताते थे. अब हम इस संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं कि देश के हर गरीब के पास अपना पक्का घर हो.' | यह एक सारांश है: झारखंड के दुमका में पीएम मोदी की रैली
विपक्ष पर जमकर बरसे पीएम मोदी
नागरिकता कानून को लेकर विपक्ष पर किया हमला | 16 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम छेड़ने वाले समाजसेवी अन्ना हजारे ने टीम अन्ना भंग कर दी है। सोमवार को इसकी घोषणा करते हुए कहा कि टीम अन्ना के नाम पर जो काम शुरू हुआ था, वह अब समाप्त हो गया है, इसलिए इसे भंग किया जाता है।
अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के लिए जनता को 'राजनीतिक विकल्प' देने की शुक्रवार की घोषणा के तीन दिन बाद टीम अन्ना को भंग कर दिया। उन्होंने हालांकि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई जारी रखने की बात कही है। उनके इस फैसले से टीम के सदस्य भी हैरान हैं।
टीम अन्ना की सदस्य रह चुकीं किरण बेदी ने ट्विटर पर लिखा, "अन्ना का ब्लॉग पढ़ा। इन सबका अर्थ क्या है, नहीं जानती। अन्नाजी ने हमें जहां भी निर्देश दिया, हमारे लिए वह सहायक रहा।"
उधर, बेंगलुरू में टीम अन्ना के पूर्व सदस्य न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) एन. संतोष हेगड़े ने एक समाचार चैनल से कहा कि वह टीम अन्ना को भंग करने के निर्णय से हैरान हैं। उन्होंने कहा, "मैं राजनीतिक कदम के खिलाफ था.. मुझे बुरा लग रहा है क्योंकि अन्ना हजारे ने प्रभावी लोकपाल के लिए जो आंदोलन शुरू किया था वह समय की आवश्यकता थी।" उन्होंने कहा, "आंदोलन बहुत आगे बढ़ा था। टीम अन्ना को चुनाव लड़ना चाहिए या नहीं, इसे लेकर जो भी विवाद हुए, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। इसी वजह से अन्ना हजारे ने टीम भंग कर दी।"
मनीष सिसौदिया ने इस बारे में पूछे जाने पर कहा, "अन्नाजी ने अपने ब्लॉग में सबकुछ कह दिया है। इसमें कुछ भी अलग से कहने की जरूरत नहीं है। निर्णय के बारे में अधिक जानकारी केवल अन्ना दे सकते हैं।"
टीम अन्ना को भंग करने की घोषणा करने के बाद 75 वर्षीय अन्ना हजारे पुणे रवाना हो गए। उन्होंने मीडिया से बात करने से इनकार कर दिया। लेकिन वह काले धन के खिलाफ नौ अगस्त से शुरू हो रहे बाबा रामदेव के प्रदर्शन में शामिल होने के लिए यहां लौटेंगे।
अन्ना हजारे ने सोमवार को अपने ब्लॉग पर हिन्दी में लिखा, "आज हम टीम अन्ना के रूप में अपना काम समाप्त करते हैं। टीम अन्ना का गठन जन लोकपाल के लिए किया गया था। हमने सरकार के साथ कोई सम्बंध नहीं रखने का फैसला किया। टीम अन्ना के नाम पर जो काम शुरू हुआ था वह समाप्त हो गया है और टीम अन्ना कमेटी भी भंग हो गई है।"
अन्ना हजारे ने कहा कि 'लोगों को जागरूक करने के लिए' वह देशभर का दौरा करेंगे। उन्होंने लिखा, "कई बार प्रदर्शन के बावजूद सरकार जन लोकपाल विधेयक पारित करने के लिए तैयार नहीं है। हमें अच्छे उम्मीदवारों की तलाश करनी होगी और लोगों को विकल्प देना होगा। मैं ऐसा समझता हूं, लेकिन यह कैसे होगा, यह एक सवाल है।" उन्होंने माना कि जनता को 'राजनीतिक विकल्प' देने की उनकी तीन अगस्त की घोषणा की कई लोगों ने आलोचना की। अपने अगले कदम को लेकर लोगों का रुख जानने की आवश्यकता जताते हुए उन्होंने लिखा, "हमें लोगों के विचार जानने होंगे, क्योंकि जंतर-मंतर भारत नहीं है।" उन्होंने इसके लिए 6.5 लाख ग्राम सभाओं या ग्राम परिषदों में जनमत संग्रह का प्रस्ताव रखा और कहा कि कार्यकर्ता गांवों में जाकर लोगों का मत जानेंगे।
अन्ना हजारे ने एक बार फिर कहा कि वह व्यवस्था में शामिल नहीं होंगे, लेकिन इसे बाहर से समर्थन देंगे।
वहीं, कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने टीम अन्ना भंग करने की अन्ना हजारे की घोषणा पर समान प्रतिक्रिया व्यक्त की। कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी ने कहा, "अन्ना हजारे को स्वयं अपनी टीम में भरोसा नहीं है। यही वजह है कि उन्होंने यह निर्णय लिया। लेकिन यह उन पर है कि आगे क्या निर्णय लेते हैं।"टिप्पणियां
वहीं, भाजपा नेता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि यह होना ही था। हर किसी को चुनाव लड़ने का अधिकार है।
विवादों के बीच इंडिया अगेंस्ट करप्शन की मीडिया समन्वयक अस्वथी मुरलीधर ने स्पष्ट किया, "अन्नाजी ने रविवार को टीम के सदस्यों के साथ संक्षिप्त बैठक की थी। सभी लोगों को टीम अन्ना भंग करने के निर्णय के बारे में जानकारी दी गई थी।"
अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के लिए जनता को 'राजनीतिक विकल्प' देने की शुक्रवार की घोषणा के तीन दिन बाद टीम अन्ना को भंग कर दिया। उन्होंने हालांकि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई जारी रखने की बात कही है। उनके इस फैसले से टीम के सदस्य भी हैरान हैं।
टीम अन्ना की सदस्य रह चुकीं किरण बेदी ने ट्विटर पर लिखा, "अन्ना का ब्लॉग पढ़ा। इन सबका अर्थ क्या है, नहीं जानती। अन्नाजी ने हमें जहां भी निर्देश दिया, हमारे लिए वह सहायक रहा।"
उधर, बेंगलुरू में टीम अन्ना के पूर्व सदस्य न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) एन. संतोष हेगड़े ने एक समाचार चैनल से कहा कि वह टीम अन्ना को भंग करने के निर्णय से हैरान हैं। उन्होंने कहा, "मैं राजनीतिक कदम के खिलाफ था.. मुझे बुरा लग रहा है क्योंकि अन्ना हजारे ने प्रभावी लोकपाल के लिए जो आंदोलन शुरू किया था वह समय की आवश्यकता थी।" उन्होंने कहा, "आंदोलन बहुत आगे बढ़ा था। टीम अन्ना को चुनाव लड़ना चाहिए या नहीं, इसे लेकर जो भी विवाद हुए, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। इसी वजह से अन्ना हजारे ने टीम भंग कर दी।"
मनीष सिसौदिया ने इस बारे में पूछे जाने पर कहा, "अन्नाजी ने अपने ब्लॉग में सबकुछ कह दिया है। इसमें कुछ भी अलग से कहने की जरूरत नहीं है। निर्णय के बारे में अधिक जानकारी केवल अन्ना दे सकते हैं।"
टीम अन्ना को भंग करने की घोषणा करने के बाद 75 वर्षीय अन्ना हजारे पुणे रवाना हो गए। उन्होंने मीडिया से बात करने से इनकार कर दिया। लेकिन वह काले धन के खिलाफ नौ अगस्त से शुरू हो रहे बाबा रामदेव के प्रदर्शन में शामिल होने के लिए यहां लौटेंगे।
अन्ना हजारे ने सोमवार को अपने ब्लॉग पर हिन्दी में लिखा, "आज हम टीम अन्ना के रूप में अपना काम समाप्त करते हैं। टीम अन्ना का गठन जन लोकपाल के लिए किया गया था। हमने सरकार के साथ कोई सम्बंध नहीं रखने का फैसला किया। टीम अन्ना के नाम पर जो काम शुरू हुआ था वह समाप्त हो गया है और टीम अन्ना कमेटी भी भंग हो गई है।"
अन्ना हजारे ने कहा कि 'लोगों को जागरूक करने के लिए' वह देशभर का दौरा करेंगे। उन्होंने लिखा, "कई बार प्रदर्शन के बावजूद सरकार जन लोकपाल विधेयक पारित करने के लिए तैयार नहीं है। हमें अच्छे उम्मीदवारों की तलाश करनी होगी और लोगों को विकल्प देना होगा। मैं ऐसा समझता हूं, लेकिन यह कैसे होगा, यह एक सवाल है।" उन्होंने माना कि जनता को 'राजनीतिक विकल्प' देने की उनकी तीन अगस्त की घोषणा की कई लोगों ने आलोचना की। अपने अगले कदम को लेकर लोगों का रुख जानने की आवश्यकता जताते हुए उन्होंने लिखा, "हमें लोगों के विचार जानने होंगे, क्योंकि जंतर-मंतर भारत नहीं है।" उन्होंने इसके लिए 6.5 लाख ग्राम सभाओं या ग्राम परिषदों में जनमत संग्रह का प्रस्ताव रखा और कहा कि कार्यकर्ता गांवों में जाकर लोगों का मत जानेंगे।
अन्ना हजारे ने एक बार फिर कहा कि वह व्यवस्था में शामिल नहीं होंगे, लेकिन इसे बाहर से समर्थन देंगे।
वहीं, कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने टीम अन्ना भंग करने की अन्ना हजारे की घोषणा पर समान प्रतिक्रिया व्यक्त की। कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी ने कहा, "अन्ना हजारे को स्वयं अपनी टीम में भरोसा नहीं है। यही वजह है कि उन्होंने यह निर्णय लिया। लेकिन यह उन पर है कि आगे क्या निर्णय लेते हैं।"टिप्पणियां
वहीं, भाजपा नेता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि यह होना ही था। हर किसी को चुनाव लड़ने का अधिकार है।
विवादों के बीच इंडिया अगेंस्ट करप्शन की मीडिया समन्वयक अस्वथी मुरलीधर ने स्पष्ट किया, "अन्नाजी ने रविवार को टीम के सदस्यों के साथ संक्षिप्त बैठक की थी। सभी लोगों को टीम अन्ना भंग करने के निर्णय के बारे में जानकारी दी गई थी।"
टीम अन्ना की सदस्य रह चुकीं किरण बेदी ने ट्विटर पर लिखा, "अन्ना का ब्लॉग पढ़ा। इन सबका अर्थ क्या है, नहीं जानती। अन्नाजी ने हमें जहां भी निर्देश दिया, हमारे लिए वह सहायक रहा।"
उधर, बेंगलुरू में टीम अन्ना के पूर्व सदस्य न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) एन. संतोष हेगड़े ने एक समाचार चैनल से कहा कि वह टीम अन्ना को भंग करने के निर्णय से हैरान हैं। उन्होंने कहा, "मैं राजनीतिक कदम के खिलाफ था.. मुझे बुरा लग रहा है क्योंकि अन्ना हजारे ने प्रभावी लोकपाल के लिए जो आंदोलन शुरू किया था वह समय की आवश्यकता थी।" उन्होंने कहा, "आंदोलन बहुत आगे बढ़ा था। टीम अन्ना को चुनाव लड़ना चाहिए या नहीं, इसे लेकर जो भी विवाद हुए, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। इसी वजह से अन्ना हजारे ने टीम भंग कर दी।"
मनीष सिसौदिया ने इस बारे में पूछे जाने पर कहा, "अन्नाजी ने अपने ब्लॉग में सबकुछ कह दिया है। इसमें कुछ भी अलग से कहने की जरूरत नहीं है। निर्णय के बारे में अधिक जानकारी केवल अन्ना दे सकते हैं।"
टीम अन्ना को भंग करने की घोषणा करने के बाद 75 वर्षीय अन्ना हजारे पुणे रवाना हो गए। उन्होंने मीडिया से बात करने से इनकार कर दिया। लेकिन वह काले धन के खिलाफ नौ अगस्त से शुरू हो रहे बाबा रामदेव के प्रदर्शन में शामिल होने के लिए यहां लौटेंगे।
अन्ना हजारे ने सोमवार को अपने ब्लॉग पर हिन्दी में लिखा, "आज हम टीम अन्ना के रूप में अपना काम समाप्त करते हैं। टीम अन्ना का गठन जन लोकपाल के लिए किया गया था। हमने सरकार के साथ कोई सम्बंध नहीं रखने का फैसला किया। टीम अन्ना के नाम पर जो काम शुरू हुआ था वह समाप्त हो गया है और टीम अन्ना कमेटी भी भंग हो गई है।"
अन्ना हजारे ने कहा कि 'लोगों को जागरूक करने के लिए' वह देशभर का दौरा करेंगे। उन्होंने लिखा, "कई बार प्रदर्शन के बावजूद सरकार जन लोकपाल विधेयक पारित करने के लिए तैयार नहीं है। हमें अच्छे उम्मीदवारों की तलाश करनी होगी और लोगों को विकल्प देना होगा। मैं ऐसा समझता हूं, लेकिन यह कैसे होगा, यह एक सवाल है।" उन्होंने माना कि जनता को 'राजनीतिक विकल्प' देने की उनकी तीन अगस्त की घोषणा की कई लोगों ने आलोचना की। अपने अगले कदम को लेकर लोगों का रुख जानने की आवश्यकता जताते हुए उन्होंने लिखा, "हमें लोगों के विचार जानने होंगे, क्योंकि जंतर-मंतर भारत नहीं है।" उन्होंने इसके लिए 6.5 लाख ग्राम सभाओं या ग्राम परिषदों में जनमत संग्रह का प्रस्ताव रखा और कहा कि कार्यकर्ता गांवों में जाकर लोगों का मत जानेंगे।
अन्ना हजारे ने एक बार फिर कहा कि वह व्यवस्था में शामिल नहीं होंगे, लेकिन इसे बाहर से समर्थन देंगे।
वहीं, कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने टीम अन्ना भंग करने की अन्ना हजारे की घोषणा पर समान प्रतिक्रिया व्यक्त की। कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी ने कहा, "अन्ना हजारे को स्वयं अपनी टीम में भरोसा नहीं है। यही वजह है कि उन्होंने यह निर्णय लिया। लेकिन यह उन पर है कि आगे क्या निर्णय लेते हैं।"टिप्पणियां
वहीं, भाजपा नेता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि यह होना ही था। हर किसी को चुनाव लड़ने का अधिकार है।
विवादों के बीच इंडिया अगेंस्ट करप्शन की मीडिया समन्वयक अस्वथी मुरलीधर ने स्पष्ट किया, "अन्नाजी ने रविवार को टीम के सदस्यों के साथ संक्षिप्त बैठक की थी। सभी लोगों को टीम अन्ना भंग करने के निर्णय के बारे में जानकारी दी गई थी।"
उधर, बेंगलुरू में टीम अन्ना के पूर्व सदस्य न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) एन. संतोष हेगड़े ने एक समाचार चैनल से कहा कि वह टीम अन्ना को भंग करने के निर्णय से हैरान हैं। उन्होंने कहा, "मैं राजनीतिक कदम के खिलाफ था.. मुझे बुरा लग रहा है क्योंकि अन्ना हजारे ने प्रभावी लोकपाल के लिए जो आंदोलन शुरू किया था वह समय की आवश्यकता थी।" उन्होंने कहा, "आंदोलन बहुत आगे बढ़ा था। टीम अन्ना को चुनाव लड़ना चाहिए या नहीं, इसे लेकर जो भी विवाद हुए, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। इसी वजह से अन्ना हजारे ने टीम भंग कर दी।"
मनीष सिसौदिया ने इस बारे में पूछे जाने पर कहा, "अन्नाजी ने अपने ब्लॉग में सबकुछ कह दिया है। इसमें कुछ भी अलग से कहने की जरूरत नहीं है। निर्णय के बारे में अधिक जानकारी केवल अन्ना दे सकते हैं।"
टीम अन्ना को भंग करने की घोषणा करने के बाद 75 वर्षीय अन्ना हजारे पुणे रवाना हो गए। उन्होंने मीडिया से बात करने से इनकार कर दिया। लेकिन वह काले धन के खिलाफ नौ अगस्त से शुरू हो रहे बाबा रामदेव के प्रदर्शन में शामिल होने के लिए यहां लौटेंगे।
अन्ना हजारे ने सोमवार को अपने ब्लॉग पर हिन्दी में लिखा, "आज हम टीम अन्ना के रूप में अपना काम समाप्त करते हैं। टीम अन्ना का गठन जन लोकपाल के लिए किया गया था। हमने सरकार के साथ कोई सम्बंध नहीं रखने का फैसला किया। टीम अन्ना के नाम पर जो काम शुरू हुआ था वह समाप्त हो गया है और टीम अन्ना कमेटी भी भंग हो गई है।"
अन्ना हजारे ने कहा कि 'लोगों को जागरूक करने के लिए' वह देशभर का दौरा करेंगे। उन्होंने लिखा, "कई बार प्रदर्शन के बावजूद सरकार जन लोकपाल विधेयक पारित करने के लिए तैयार नहीं है। हमें अच्छे उम्मीदवारों की तलाश करनी होगी और लोगों को विकल्प देना होगा। मैं ऐसा समझता हूं, लेकिन यह कैसे होगा, यह एक सवाल है।" उन्होंने माना कि जनता को 'राजनीतिक विकल्प' देने की उनकी तीन अगस्त की घोषणा की कई लोगों ने आलोचना की। अपने अगले कदम को लेकर लोगों का रुख जानने की आवश्यकता जताते हुए उन्होंने लिखा, "हमें लोगों के विचार जानने होंगे, क्योंकि जंतर-मंतर भारत नहीं है।" उन्होंने इसके लिए 6.5 लाख ग्राम सभाओं या ग्राम परिषदों में जनमत संग्रह का प्रस्ताव रखा और कहा कि कार्यकर्ता गांवों में जाकर लोगों का मत जानेंगे।
अन्ना हजारे ने एक बार फिर कहा कि वह व्यवस्था में शामिल नहीं होंगे, लेकिन इसे बाहर से समर्थन देंगे।
वहीं, कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने टीम अन्ना भंग करने की अन्ना हजारे की घोषणा पर समान प्रतिक्रिया व्यक्त की। कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी ने कहा, "अन्ना हजारे को स्वयं अपनी टीम में भरोसा नहीं है। यही वजह है कि उन्होंने यह निर्णय लिया। लेकिन यह उन पर है कि आगे क्या निर्णय लेते हैं।"टिप्पणियां
वहीं, भाजपा नेता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि यह होना ही था। हर किसी को चुनाव लड़ने का अधिकार है।
विवादों के बीच इंडिया अगेंस्ट करप्शन की मीडिया समन्वयक अस्वथी मुरलीधर ने स्पष्ट किया, "अन्नाजी ने रविवार को टीम के सदस्यों के साथ संक्षिप्त बैठक की थी। सभी लोगों को टीम अन्ना भंग करने के निर्णय के बारे में जानकारी दी गई थी।"
मनीष सिसौदिया ने इस बारे में पूछे जाने पर कहा, "अन्नाजी ने अपने ब्लॉग में सबकुछ कह दिया है। इसमें कुछ भी अलग से कहने की जरूरत नहीं है। निर्णय के बारे में अधिक जानकारी केवल अन्ना दे सकते हैं।"
टीम अन्ना को भंग करने की घोषणा करने के बाद 75 वर्षीय अन्ना हजारे पुणे रवाना हो गए। उन्होंने मीडिया से बात करने से इनकार कर दिया। लेकिन वह काले धन के खिलाफ नौ अगस्त से शुरू हो रहे बाबा रामदेव के प्रदर्शन में शामिल होने के लिए यहां लौटेंगे।
अन्ना हजारे ने सोमवार को अपने ब्लॉग पर हिन्दी में लिखा, "आज हम टीम अन्ना के रूप में अपना काम समाप्त करते हैं। टीम अन्ना का गठन जन लोकपाल के लिए किया गया था। हमने सरकार के साथ कोई सम्बंध नहीं रखने का फैसला किया। टीम अन्ना के नाम पर जो काम शुरू हुआ था वह समाप्त हो गया है और टीम अन्ना कमेटी भी भंग हो गई है।"
अन्ना हजारे ने कहा कि 'लोगों को जागरूक करने के लिए' वह देशभर का दौरा करेंगे। उन्होंने लिखा, "कई बार प्रदर्शन के बावजूद सरकार जन लोकपाल विधेयक पारित करने के लिए तैयार नहीं है। हमें अच्छे उम्मीदवारों की तलाश करनी होगी और लोगों को विकल्प देना होगा। मैं ऐसा समझता हूं, लेकिन यह कैसे होगा, यह एक सवाल है।" उन्होंने माना कि जनता को 'राजनीतिक विकल्प' देने की उनकी तीन अगस्त की घोषणा की कई लोगों ने आलोचना की। अपने अगले कदम को लेकर लोगों का रुख जानने की आवश्यकता जताते हुए उन्होंने लिखा, "हमें लोगों के विचार जानने होंगे, क्योंकि जंतर-मंतर भारत नहीं है।" उन्होंने इसके लिए 6.5 लाख ग्राम सभाओं या ग्राम परिषदों में जनमत संग्रह का प्रस्ताव रखा और कहा कि कार्यकर्ता गांवों में जाकर लोगों का मत जानेंगे।
अन्ना हजारे ने एक बार फिर कहा कि वह व्यवस्था में शामिल नहीं होंगे, लेकिन इसे बाहर से समर्थन देंगे।
वहीं, कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने टीम अन्ना भंग करने की अन्ना हजारे की घोषणा पर समान प्रतिक्रिया व्यक्त की। कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी ने कहा, "अन्ना हजारे को स्वयं अपनी टीम में भरोसा नहीं है। यही वजह है कि उन्होंने यह निर्णय लिया। लेकिन यह उन पर है कि आगे क्या निर्णय लेते हैं।"टिप्पणियां
वहीं, भाजपा नेता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि यह होना ही था। हर किसी को चुनाव लड़ने का अधिकार है।
विवादों के बीच इंडिया अगेंस्ट करप्शन की मीडिया समन्वयक अस्वथी मुरलीधर ने स्पष्ट किया, "अन्नाजी ने रविवार को टीम के सदस्यों के साथ संक्षिप्त बैठक की थी। सभी लोगों को टीम अन्ना भंग करने के निर्णय के बारे में जानकारी दी गई थी।"
टीम अन्ना को भंग करने की घोषणा करने के बाद 75 वर्षीय अन्ना हजारे पुणे रवाना हो गए। उन्होंने मीडिया से बात करने से इनकार कर दिया। लेकिन वह काले धन के खिलाफ नौ अगस्त से शुरू हो रहे बाबा रामदेव के प्रदर्शन में शामिल होने के लिए यहां लौटेंगे।
अन्ना हजारे ने सोमवार को अपने ब्लॉग पर हिन्दी में लिखा, "आज हम टीम अन्ना के रूप में अपना काम समाप्त करते हैं। टीम अन्ना का गठन जन लोकपाल के लिए किया गया था। हमने सरकार के साथ कोई सम्बंध नहीं रखने का फैसला किया। टीम अन्ना के नाम पर जो काम शुरू हुआ था वह समाप्त हो गया है और टीम अन्ना कमेटी भी भंग हो गई है।"
अन्ना हजारे ने कहा कि 'लोगों को जागरूक करने के लिए' वह देशभर का दौरा करेंगे। उन्होंने लिखा, "कई बार प्रदर्शन के बावजूद सरकार जन लोकपाल विधेयक पारित करने के लिए तैयार नहीं है। हमें अच्छे उम्मीदवारों की तलाश करनी होगी और लोगों को विकल्प देना होगा। मैं ऐसा समझता हूं, लेकिन यह कैसे होगा, यह एक सवाल है।" उन्होंने माना कि जनता को 'राजनीतिक विकल्प' देने की उनकी तीन अगस्त की घोषणा की कई लोगों ने आलोचना की। अपने अगले कदम को लेकर लोगों का रुख जानने की आवश्यकता जताते हुए उन्होंने लिखा, "हमें लोगों के विचार जानने होंगे, क्योंकि जंतर-मंतर भारत नहीं है।" उन्होंने इसके लिए 6.5 लाख ग्राम सभाओं या ग्राम परिषदों में जनमत संग्रह का प्रस्ताव रखा और कहा कि कार्यकर्ता गांवों में जाकर लोगों का मत जानेंगे।
अन्ना हजारे ने एक बार फिर कहा कि वह व्यवस्था में शामिल नहीं होंगे, लेकिन इसे बाहर से समर्थन देंगे।
वहीं, कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने टीम अन्ना भंग करने की अन्ना हजारे की घोषणा पर समान प्रतिक्रिया व्यक्त की। कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी ने कहा, "अन्ना हजारे को स्वयं अपनी टीम में भरोसा नहीं है। यही वजह है कि उन्होंने यह निर्णय लिया। लेकिन यह उन पर है कि आगे क्या निर्णय लेते हैं।"टिप्पणियां
वहीं, भाजपा नेता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि यह होना ही था। हर किसी को चुनाव लड़ने का अधिकार है।
विवादों के बीच इंडिया अगेंस्ट करप्शन की मीडिया समन्वयक अस्वथी मुरलीधर ने स्पष्ट किया, "अन्नाजी ने रविवार को टीम के सदस्यों के साथ संक्षिप्त बैठक की थी। सभी लोगों को टीम अन्ना भंग करने के निर्णय के बारे में जानकारी दी गई थी।"
अन्ना हजारे ने सोमवार को अपने ब्लॉग पर हिन्दी में लिखा, "आज हम टीम अन्ना के रूप में अपना काम समाप्त करते हैं। टीम अन्ना का गठन जन लोकपाल के लिए किया गया था। हमने सरकार के साथ कोई सम्बंध नहीं रखने का फैसला किया। टीम अन्ना के नाम पर जो काम शुरू हुआ था वह समाप्त हो गया है और टीम अन्ना कमेटी भी भंग हो गई है।"
अन्ना हजारे ने कहा कि 'लोगों को जागरूक करने के लिए' वह देशभर का दौरा करेंगे। उन्होंने लिखा, "कई बार प्रदर्शन के बावजूद सरकार जन लोकपाल विधेयक पारित करने के लिए तैयार नहीं है। हमें अच्छे उम्मीदवारों की तलाश करनी होगी और लोगों को विकल्प देना होगा। मैं ऐसा समझता हूं, लेकिन यह कैसे होगा, यह एक सवाल है।" उन्होंने माना कि जनता को 'राजनीतिक विकल्प' देने की उनकी तीन अगस्त की घोषणा की कई लोगों ने आलोचना की। अपने अगले कदम को लेकर लोगों का रुख जानने की आवश्यकता जताते हुए उन्होंने लिखा, "हमें लोगों के विचार जानने होंगे, क्योंकि जंतर-मंतर भारत नहीं है।" उन्होंने इसके लिए 6.5 लाख ग्राम सभाओं या ग्राम परिषदों में जनमत संग्रह का प्रस्ताव रखा और कहा कि कार्यकर्ता गांवों में जाकर लोगों का मत जानेंगे।
अन्ना हजारे ने एक बार फिर कहा कि वह व्यवस्था में शामिल नहीं होंगे, लेकिन इसे बाहर से समर्थन देंगे।
वहीं, कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने टीम अन्ना भंग करने की अन्ना हजारे की घोषणा पर समान प्रतिक्रिया व्यक्त की। कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी ने कहा, "अन्ना हजारे को स्वयं अपनी टीम में भरोसा नहीं है। यही वजह है कि उन्होंने यह निर्णय लिया। लेकिन यह उन पर है कि आगे क्या निर्णय लेते हैं।"टिप्पणियां
वहीं, भाजपा नेता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि यह होना ही था। हर किसी को चुनाव लड़ने का अधिकार है।
विवादों के बीच इंडिया अगेंस्ट करप्शन की मीडिया समन्वयक अस्वथी मुरलीधर ने स्पष्ट किया, "अन्नाजी ने रविवार को टीम के सदस्यों के साथ संक्षिप्त बैठक की थी। सभी लोगों को टीम अन्ना भंग करने के निर्णय के बारे में जानकारी दी गई थी।"
अन्ना हजारे ने कहा कि 'लोगों को जागरूक करने के लिए' वह देशभर का दौरा करेंगे। उन्होंने लिखा, "कई बार प्रदर्शन के बावजूद सरकार जन लोकपाल विधेयक पारित करने के लिए तैयार नहीं है। हमें अच्छे उम्मीदवारों की तलाश करनी होगी और लोगों को विकल्प देना होगा। मैं ऐसा समझता हूं, लेकिन यह कैसे होगा, यह एक सवाल है।" उन्होंने माना कि जनता को 'राजनीतिक विकल्प' देने की उनकी तीन अगस्त की घोषणा की कई लोगों ने आलोचना की। अपने अगले कदम को लेकर लोगों का रुख जानने की आवश्यकता जताते हुए उन्होंने लिखा, "हमें लोगों के विचार जानने होंगे, क्योंकि जंतर-मंतर भारत नहीं है।" उन्होंने इसके लिए 6.5 लाख ग्राम सभाओं या ग्राम परिषदों में जनमत संग्रह का प्रस्ताव रखा और कहा कि कार्यकर्ता गांवों में जाकर लोगों का मत जानेंगे।
अन्ना हजारे ने एक बार फिर कहा कि वह व्यवस्था में शामिल नहीं होंगे, लेकिन इसे बाहर से समर्थन देंगे।
वहीं, कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने टीम अन्ना भंग करने की अन्ना हजारे की घोषणा पर समान प्रतिक्रिया व्यक्त की। कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी ने कहा, "अन्ना हजारे को स्वयं अपनी टीम में भरोसा नहीं है। यही वजह है कि उन्होंने यह निर्णय लिया। लेकिन यह उन पर है कि आगे क्या निर्णय लेते हैं।"टिप्पणियां
वहीं, भाजपा नेता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि यह होना ही था। हर किसी को चुनाव लड़ने का अधिकार है।
विवादों के बीच इंडिया अगेंस्ट करप्शन की मीडिया समन्वयक अस्वथी मुरलीधर ने स्पष्ट किया, "अन्नाजी ने रविवार को टीम के सदस्यों के साथ संक्षिप्त बैठक की थी। सभी लोगों को टीम अन्ना भंग करने के निर्णय के बारे में जानकारी दी गई थी।"
अन्ना हजारे ने एक बार फिर कहा कि वह व्यवस्था में शामिल नहीं होंगे, लेकिन इसे बाहर से समर्थन देंगे।
वहीं, कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने टीम अन्ना भंग करने की अन्ना हजारे की घोषणा पर समान प्रतिक्रिया व्यक्त की। कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी ने कहा, "अन्ना हजारे को स्वयं अपनी टीम में भरोसा नहीं है। यही वजह है कि उन्होंने यह निर्णय लिया। लेकिन यह उन पर है कि आगे क्या निर्णय लेते हैं।"टिप्पणियां
वहीं, भाजपा नेता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि यह होना ही था। हर किसी को चुनाव लड़ने का अधिकार है।
विवादों के बीच इंडिया अगेंस्ट करप्शन की मीडिया समन्वयक अस्वथी मुरलीधर ने स्पष्ट किया, "अन्नाजी ने रविवार को टीम के सदस्यों के साथ संक्षिप्त बैठक की थी। सभी लोगों को टीम अन्ना भंग करने के निर्णय के बारे में जानकारी दी गई थी।"
वहीं, कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने टीम अन्ना भंग करने की अन्ना हजारे की घोषणा पर समान प्रतिक्रिया व्यक्त की। कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी ने कहा, "अन्ना हजारे को स्वयं अपनी टीम में भरोसा नहीं है। यही वजह है कि उन्होंने यह निर्णय लिया। लेकिन यह उन पर है कि आगे क्या निर्णय लेते हैं।"टिप्पणियां
वहीं, भाजपा नेता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि यह होना ही था। हर किसी को चुनाव लड़ने का अधिकार है।
विवादों के बीच इंडिया अगेंस्ट करप्शन की मीडिया समन्वयक अस्वथी मुरलीधर ने स्पष्ट किया, "अन्नाजी ने रविवार को टीम के सदस्यों के साथ संक्षिप्त बैठक की थी। सभी लोगों को टीम अन्ना भंग करने के निर्णय के बारे में जानकारी दी गई थी।"
वहीं, भाजपा नेता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि यह होना ही था। हर किसी को चुनाव लड़ने का अधिकार है।
विवादों के बीच इंडिया अगेंस्ट करप्शन की मीडिया समन्वयक अस्वथी मुरलीधर ने स्पष्ट किया, "अन्नाजी ने रविवार को टीम के सदस्यों के साथ संक्षिप्त बैठक की थी। सभी लोगों को टीम अन्ना भंग करने के निर्णय के बारे में जानकारी दी गई थी।"
विवादों के बीच इंडिया अगेंस्ट करप्शन की मीडिया समन्वयक अस्वथी मुरलीधर ने स्पष्ट किया, "अन्नाजी ने रविवार को टीम के सदस्यों के साथ संक्षिप्त बैठक की थी। सभी लोगों को टीम अन्ना भंग करने के निर्णय के बारे में जानकारी दी गई थी।" | यहाँ एक सारांश है:भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम छेड़ने वाले समाजसेवी अन्ना हजारे ने टीम अन्ना भंग कर दी है। सोमवार को इसकी घोषणा करते हुए कहा कि टीम अन्ना के नाम पर जो काम शुरू हुआ था, वह अब समाप्त हो गया है, इसलिए इसे भंग किया जाता है। | 4 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: Housefull 4 Box Office Collection Day 19: अक्षय कुमार (Akshay Kumar), रितेश देशमुख, बॉबी देओल और कृति सेनन की फिल्म 'हाउसफुल 4 (Housefull 4)' ने बॉक्स ऑफिस पर अपना कब्जा जमाया हुआ है. लगातार शानदार कमाई करते हुए अक्षय कुमार की 'हाउसफुल 4' जल्द ही 200 करोड़ का आंकड़ा पार करने वाली है. फिल्म के शुरुआती आंकड़ों को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि 'हाउसफुल 4' (Housefull 4 Box Office Collection Day 19) ने बीते दिन करीब 1.25 करोड़ रुपये की कमाई की होगी. इस लिहाज से फिल्म 17 दिनों में कुल 195.5 करोड़ रुपये का कलेक्शन कर सकती है. हालांकि, इसकी अधिकारिक सूचना मिलनी अभी बाकी है.
अक्षय कुमार (Akshay Kumar) की 'हाउसफुल 4' (Housefull 4 Box Office Collection Day 19) ने रिलीज होने से पहले ही दर्शकों में इतनी ज्यादा एक्साइटमेंट भर दी थी कि फिल्म ने पहले दिन ही 20 करोड़ रुपये की शानदार ओपनिंग की. इतना ही नहीं, दिवाली और भैया दूज जैसे त्योहारों पर हाउसफुल 4 ने बॉक्स ऑफिस पर धुआं उड़ाकर रख दिया. केवल देश में ही नहीं, हाउसफुल 4 का जलवा विदेशों में भी खूब देखने को मिला. बॉक्स ऑफिस इंडिया के अनुसार 'हाउसफुल 4' को दिल्ली, उत्तर प्रदेश, गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों में खूब पसंद किया जा रहा है. हालांकि, फिल्म समीक्षकों का दिल जीतने में कामयाब नहीं हो पाई.
'हाउसफुल 4' (Housefull 4 Box Office Collection Day 19) की कहानी 1419 के सितमगढ़ की है, जहां अक्षय कुमार (Akshay Kumar), बॉबी (Bobby Deol), रितेश, कृति, पूजा और कृति (Kriti Sanon) एक दूसरे से प्यार करते हैं, लेकिन कुछ वजहों से ये जुदा हो जाते हैं. छह सौ साल बाद तीनों जोड़े पुनर्जन्म लेते हैं, और इसके बाद फिर शुरू होती है हाउसफुल (Housefull 4) टाइप कन्फ्यूजन. कपल्स का मिस मैच और एक के बाद एक ढ़ेर सारे कैमियो. कुल मिलाकर हाउसफुल 4 को पहले तीन पार्ट की तर्ज पर ही गढ़ने की कोशिश की गई है. कहानी बेहद कमजोर है. जबरदस्ती के जोक्स ठूंसे गए हैं, और कई जगह तो हंसी भी नहीं आती है. डायलॉग्स बहुत ही फीके हैं. | यह एक सारांश है: 'हाउसफुल 4' ने बॉक्स ऑफिस पर जमाया कब्जा
अक्षय कुमार की फिल्म ने की धुआंधार कमाई
कॉमेडी और ड्रामे से भरपूर है 'हाउसफुल 4' | 24 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: नमस्कार... आज रिलीज़ हुई 'डिपार्टमेंट' की कहानी पुलिस की ऐसी टीम पर आधारित है, जो अंडरवर्ल्ड के एक गैंग के सफाये के लिए दूसरे गैंग का इस्तेमाल करती है, लेकिन ऐसा करते-करते टीम खुद ही अंडरवर्ल्ड का मोहरा बनने लगती है... संजय दत्त और राणा दगुबत्ती इसी टीम के सदस्य हैं...
कॉन्सेप्ट अच्छा है, लेकिन फिल्म में 70 से 80 प्रतिशत सिर्फ खूनखराबा है... छोटे-छोटे बेसुरे गीतों पर फिल्माई गई भयंकर मारधाड़ के बीच कहानी तो हम ढूंढते ही रह गए... और फिर आया, अमिताभ बच्चन की वर्ष 1982 में रिलीज़ हुई फिल्म 'नमकहलाल' के हिट गीत 'थोड़ी सी जो पी ली है...' का रीमेक, जिसमें संजय दत्त एक नाइट क्लब में नाच रहे हैं... अमिताभ के इस बेहतरीन गाने की दुर्गति उन्हीं की एक और फिल्म में देखना बर्दाश्त नहीं हुआ... हां, नथालिया कौर ने देखने में ज़रूर अच्छा आइटम नंबर किया, लेकिन उसके बोल सुनकर लिखने वालों की कलम पर तरस आ गया...
लगता है, जब-जब डायरेक्टर रामगोपाल वर्मा ने एक्शन डायरेक्टर को पानी पीने का ब्रेक दिया होगा, फिल्म एक्शन से कॉमेडी बनती चली गई... बेशक, अनजाने में... कैमरा घूमने लगा - पिस्तौल, कॉफी मग, जूते, चश्मे, जीन्स, चाय की केतली और कैरम बोर्ड के स्ट्राइकर के साथ... टिप्पणियां
गैंगस्टर से नेता बने सरजी राव, यानी अमिताभ बच्चन हाथ पर घंटी बांधते हैं, क्योंकि जब-जब घंटी बजती है, उन्हें देश का दुश्मन याद आ जाता है। वह शीला मिक्स और शीला रीमिक्स जैसे ब्रांड नेम देकर दो गुटका किंग भाइयों के बीच का झगड़ा सुलझा देते हैं... विजय राज और उनकी गैंग में शामिल लेडी गैंगस्टर बनी मधुशालिनी ने तो कॉमेडी का बवाल कर दिया है, लेकिन यहां भी, अनजाने में...
भरे बाज़ार में एन्काउंटर समेत कुछ एक्शन सीन्स ज़रूर इम्पैक्टफुल है, लेकिन टोटैलिटी में 'डिपार्टमेंट' बेहद बोरिंग और कन्फ्यूज़्ड फिल्म है... 'रामगोपाल वर्मा की आग' देखते वक्त मन में एक जिज्ञासा तो थी कि वह 'शोले' का कितना बुरा हाल कर सकते हैं, लेकिन 'डिपार्टमेंट' देखते वक्त तो यह उम्मीद भी साथ नहीं थी... इस फिल्म के लिए हमारी रेटिंग है 1 स्टार...
कॉन्सेप्ट अच्छा है, लेकिन फिल्म में 70 से 80 प्रतिशत सिर्फ खूनखराबा है... छोटे-छोटे बेसुरे गीतों पर फिल्माई गई भयंकर मारधाड़ के बीच कहानी तो हम ढूंढते ही रह गए... और फिर आया, अमिताभ बच्चन की वर्ष 1982 में रिलीज़ हुई फिल्म 'नमकहलाल' के हिट गीत 'थोड़ी सी जो पी ली है...' का रीमेक, जिसमें संजय दत्त एक नाइट क्लब में नाच रहे हैं... अमिताभ के इस बेहतरीन गाने की दुर्गति उन्हीं की एक और फिल्म में देखना बर्दाश्त नहीं हुआ... हां, नथालिया कौर ने देखने में ज़रूर अच्छा आइटम नंबर किया, लेकिन उसके बोल सुनकर लिखने वालों की कलम पर तरस आ गया...
लगता है, जब-जब डायरेक्टर रामगोपाल वर्मा ने एक्शन डायरेक्टर को पानी पीने का ब्रेक दिया होगा, फिल्म एक्शन से कॉमेडी बनती चली गई... बेशक, अनजाने में... कैमरा घूमने लगा - पिस्तौल, कॉफी मग, जूते, चश्मे, जीन्स, चाय की केतली और कैरम बोर्ड के स्ट्राइकर के साथ... टिप्पणियां
गैंगस्टर से नेता बने सरजी राव, यानी अमिताभ बच्चन हाथ पर घंटी बांधते हैं, क्योंकि जब-जब घंटी बजती है, उन्हें देश का दुश्मन याद आ जाता है। वह शीला मिक्स और शीला रीमिक्स जैसे ब्रांड नेम देकर दो गुटका किंग भाइयों के बीच का झगड़ा सुलझा देते हैं... विजय राज और उनकी गैंग में शामिल लेडी गैंगस्टर बनी मधुशालिनी ने तो कॉमेडी का बवाल कर दिया है, लेकिन यहां भी, अनजाने में...
भरे बाज़ार में एन्काउंटर समेत कुछ एक्शन सीन्स ज़रूर इम्पैक्टफुल है, लेकिन टोटैलिटी में 'डिपार्टमेंट' बेहद बोरिंग और कन्फ्यूज़्ड फिल्म है... 'रामगोपाल वर्मा की आग' देखते वक्त मन में एक जिज्ञासा तो थी कि वह 'शोले' का कितना बुरा हाल कर सकते हैं, लेकिन 'डिपार्टमेंट' देखते वक्त तो यह उम्मीद भी साथ नहीं थी... इस फिल्म के लिए हमारी रेटिंग है 1 स्टार...
लगता है, जब-जब डायरेक्टर रामगोपाल वर्मा ने एक्शन डायरेक्टर को पानी पीने का ब्रेक दिया होगा, फिल्म एक्शन से कॉमेडी बनती चली गई... बेशक, अनजाने में... कैमरा घूमने लगा - पिस्तौल, कॉफी मग, जूते, चश्मे, जीन्स, चाय की केतली और कैरम बोर्ड के स्ट्राइकर के साथ... टिप्पणियां
गैंगस्टर से नेता बने सरजी राव, यानी अमिताभ बच्चन हाथ पर घंटी बांधते हैं, क्योंकि जब-जब घंटी बजती है, उन्हें देश का दुश्मन याद आ जाता है। वह शीला मिक्स और शीला रीमिक्स जैसे ब्रांड नेम देकर दो गुटका किंग भाइयों के बीच का झगड़ा सुलझा देते हैं... विजय राज और उनकी गैंग में शामिल लेडी गैंगस्टर बनी मधुशालिनी ने तो कॉमेडी का बवाल कर दिया है, लेकिन यहां भी, अनजाने में...
भरे बाज़ार में एन्काउंटर समेत कुछ एक्शन सीन्स ज़रूर इम्पैक्टफुल है, लेकिन टोटैलिटी में 'डिपार्टमेंट' बेहद बोरिंग और कन्फ्यूज़्ड फिल्म है... 'रामगोपाल वर्मा की आग' देखते वक्त मन में एक जिज्ञासा तो थी कि वह 'शोले' का कितना बुरा हाल कर सकते हैं, लेकिन 'डिपार्टमेंट' देखते वक्त तो यह उम्मीद भी साथ नहीं थी... इस फिल्म के लिए हमारी रेटिंग है 1 स्टार...
गैंगस्टर से नेता बने सरजी राव, यानी अमिताभ बच्चन हाथ पर घंटी बांधते हैं, क्योंकि जब-जब घंटी बजती है, उन्हें देश का दुश्मन याद आ जाता है। वह शीला मिक्स और शीला रीमिक्स जैसे ब्रांड नेम देकर दो गुटका किंग भाइयों के बीच का झगड़ा सुलझा देते हैं... विजय राज और उनकी गैंग में शामिल लेडी गैंगस्टर बनी मधुशालिनी ने तो कॉमेडी का बवाल कर दिया है, लेकिन यहां भी, अनजाने में...
भरे बाज़ार में एन्काउंटर समेत कुछ एक्शन सीन्स ज़रूर इम्पैक्टफुल है, लेकिन टोटैलिटी में 'डिपार्टमेंट' बेहद बोरिंग और कन्फ्यूज़्ड फिल्म है... 'रामगोपाल वर्मा की आग' देखते वक्त मन में एक जिज्ञासा तो थी कि वह 'शोले' का कितना बुरा हाल कर सकते हैं, लेकिन 'डिपार्टमेंट' देखते वक्त तो यह उम्मीद भी साथ नहीं थी... इस फिल्म के लिए हमारी रेटिंग है 1 स्टार...
भरे बाज़ार में एन्काउंटर समेत कुछ एक्शन सीन्स ज़रूर इम्पैक्टफुल है, लेकिन टोटैलिटी में 'डिपार्टमेंट' बेहद बोरिंग और कन्फ्यूज़्ड फिल्म है... 'रामगोपाल वर्मा की आग' देखते वक्त मन में एक जिज्ञासा तो थी कि वह 'शोले' का कितना बुरा हाल कर सकते हैं, लेकिन 'डिपार्टमेंट' देखते वक्त तो यह उम्मीद भी साथ नहीं थी... इस फिल्म के लिए हमारी रेटिंग है 1 स्टार... | संक्षिप्त सारांश: लगता है, जब-जब डायरेक्टर रामगोपाल वर्मा ने एक्शन डायरेक्टर को पानी पीने का ब्रेक दिया होगा, फिल्म एक्शन से कॉमेडी बनती चली गई... | 23 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: कभी चंबल के बीहड़ों पर राज करने वाली दस्यू सुंदरी फूलन देवी को प्रतिष्ठित टाइम मैगजीन ने इतिहास की 16 सबसे विद्रोही महिलाओं की सूची में चौथे नंबर पर रखा है। टाइम मैगजीन ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जारी इस सूची में दिवंगत दस्यू सुंदरी के बारे में लिखा, फूलन देवी को भारतीय गरीबों के संघर्ष को स्वर देने वाली और इस आधुनिक राष्ट्र के सबसे दुर्दांत अपराधियों के रूप में याद किया जाएगा। उसने कहा, अपने प्रारंभिक दिनों में बिना मर्जी की शादी और कई बार यौन उत्पीड़न का शिकार हुई फूलन देवी ने उत्तरी और मध्य भारत में उच्च जातियों को निशाना बनाते हुए हिंसा की और डकैतियां डालीं। टाइम ने कहा, वर्ष 1981 में फूलन ने अपने साथी डकैतों की मदद से उच्च जातियों के गांव में 20 से अधिक लोगों की हत्या कर दी। फूलन ने अंतत: भारत सरकार से समझौता किया और 11 साल जेल की सजा काटी। जेल से रिहा होने के दो साल बाद वह संसद के लिए चुनी गई। मैगजीन के अनुसार, कुछ लोगों ने फूलन पर आरोप लगाया कि सांसद रहने के दौरान उन्होंने गरीबों के लिए कुछ नहीं किया लेकिन जाति व्यवस्था के खिलाफ उनके विरोध ने उन्हें समाज के दबे कुचले लोगों के अधिकारों का प्रतीक बना दिया। | संक्षिप्त पाठ: दस्यू सुंदरी फूलन देवी को प्रतिष्ठित टाइम मैगजीन ने इतिहास की 16 सबसे विद्रोही महिलाओं की सूची में चौथे नंबर पर रखा है। | 27 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: सुपरहीरोज से भरी फिल्म 'एवेंजर्स एंडगेम' (Avengers Endgame) ने रिलीज के पहले हफ्ते करीब 258 करोड़, दूसरे हफ्ते फिल्म ने 76 करोड़ और तीसरे हफ्ते फिल्म ने 18 करोड़ की कमाई कर ली है. यह फिल्म भारतीय बॉक्स ऑफिस के अलावा विदेशों में भी जमकर कमाई कर रही है. 'एवेंजर्स एंडगेम' (Avengers Endgame) ने भारतीय बॉक्स ऑफिस (Avengers Endgame Box Office Collection) पर पहले दिन 53.10 करोड़ रुपये की बंपर ओपनिंग लेते हुए आमिर खान का रिकॉर्ड तोड़ दिया था. 'एवेंजर्स एंडगेम' (Avengers Endgame) की अब तक की कमाई ने कई बॉलीवुड फ़िल्मों की लाइफ़ टाइम कमाई को पीछे छोड़ दिया है. 16वें दिन एवेंजर्स एंडगेम (Avengers Endgame) ने आमिर ख़ान की 'पीके' (339.50 करोड़ रुपये) और सलमान खान की 'टाइगर ज़िंदा है' (339.16 करोड़) को पीछे छोड़ चुकी है.
ऐसा कहा जा रहा है कि एवेंजर्स एंडगेम (Avengers Endgame) जल्द ही रणबीर कपूर की 'संजू' के ₹342.53 करोड़ के लाइफ़ टाइम कलेक्शन को पीछे छोड़ देगी. इसके बाद फिल्म के सामने सिर्फ़ दंगल की चुनौती रह जाएगी, जिसका लाइफ टाइम कलेक्शन 387 करोड़ रुपये है. बता दें कि एवेंजर्स एंडगेम' (Avengers Endgame) को डायरेक्टर जोड़ी एंथनी रूसो और जो रूसो ने डायरेक्ट किया है. 'एवेंजर्स एंडगेम' (Avengers Endgame) में रॉबर्ट डाउनी जूनियर (Iron Man), क्रिस इवान्स (Captain Ameria), मार्क रूफैलो (Hulk), क्रिस हेम्सवर्थ (Thor), स्कारलेट योहानसन (Black Widow), जेरेमी रेनर (Hawk Eye), पॉल रूड (Ant Man), ब्री लार्सन (Captain America), और जोश ब्रोलिन (Thanos) लीड रोल में हैं. | संक्षिप्त पाठ: 'एवेंजर्स एंडगेम' की नहीं थम रही रफ्तार
बॉक्स ऑफस पर शानदार प्रदर्शन जारी
फिल्म कर रही है जोरदार कमाई | 27 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: आर्थिक संकट के दौर में सिल्वियो बलरुस्कोनी के सत्ता से जाने और ताजा राजनीतिक अस्थिरता के बीच इटली में रविवार को आम चुनाव हो रहा है।टिप्पणियां
इस चुनाव पर इटली समेत यूरोप की नजरें टिकी हुई है क्योंकि इसके नतीजों से आगामी रणनीति पर असर देखने को मिल सकता है। आर्थिक सुधारों और कटौती अभियान पर निवर्तमान प्रधानमंत्री मारियो मोंटी के रुख को लेकर भी लोगों की राय का पता चलेगा।
मध्य वामपंथी नेता पीयर लुइगी बेरसानी पर भी नजरें रहेंगी क्योंकि उन्होंने कहा है सख्त प्रावधानों को वह जारी रखेंगे लेकिन विकास और नौकरियों का भी सृजन करेंगे। पिछले 20 साल में इटली पहली बार आर्थिक संकट से इतना ज्यादा प्रभावित हुआ है।
इस चुनाव पर इटली समेत यूरोप की नजरें टिकी हुई है क्योंकि इसके नतीजों से आगामी रणनीति पर असर देखने को मिल सकता है। आर्थिक सुधारों और कटौती अभियान पर निवर्तमान प्रधानमंत्री मारियो मोंटी के रुख को लेकर भी लोगों की राय का पता चलेगा।
मध्य वामपंथी नेता पीयर लुइगी बेरसानी पर भी नजरें रहेंगी क्योंकि उन्होंने कहा है सख्त प्रावधानों को वह जारी रखेंगे लेकिन विकास और नौकरियों का भी सृजन करेंगे। पिछले 20 साल में इटली पहली बार आर्थिक संकट से इतना ज्यादा प्रभावित हुआ है।
मध्य वामपंथी नेता पीयर लुइगी बेरसानी पर भी नजरें रहेंगी क्योंकि उन्होंने कहा है सख्त प्रावधानों को वह जारी रखेंगे लेकिन विकास और नौकरियों का भी सृजन करेंगे। पिछले 20 साल में इटली पहली बार आर्थिक संकट से इतना ज्यादा प्रभावित हुआ है। | आर्थिक संकट के दौर में सिल्वियो बलरुस्कोनी के सत्ता से जाने और ताजा राजनीतिक अस्थिरता के बीच इटली में रविवार को आम चुनाव हो रहा है। | 34 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: राष्ट्रीय टीम से बाहर रहते हुए हरभजन सिंह को औसत घरेलू क्रिकेटरों की स्थिति के बारे में जानने का मौका मिला जिसके बाद उन्होंने मुख्य राष्ट्रीय कोच अनिल कुंबले से अनुरोध किया है कि वे कमेटी ऑफ एडमिनिस्ट्रेटर्स (सीओए) के सामने उनकी मैच फीस बढ़ाने का मसला रखें. कुंबले 21 मई को प्रशासकों की समिति के सामने प्रजेंटेशन देंगे जिसमें अनुबंधित भारतीय क्रिकेटरों के लिये संशोधित भुगतान ढांचे का खाका पेश करेंगे. ये ग्रेड दो करोड़, एक करोड़ और 50 लाख रुपये हैं.
भारत के शीर्ष क्रिकेटर और आईपीएल अनुबंध पाने वाले कुछ प्रथम श्रेणी क्रिकेटरों के अलावा औसत घरेलू क्रिकेटरों को एक प्रथम श्रेणी मैच (रणजी या दलीप ट्रॉफी) खेलने पर डेढ़ लाख रुपये मिलते हैं, वहीं अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों को एक टेस्ट मैच खेलने के 15 लाख रुपये दिये जाते हैं. भारत के सर्वश्रेष्ठ स्पिनरों में से एक हरभजन ने कुंबले को हाल ही में घरेलू क्रिकेटरों की वित्तीय असुरक्षा के बारे में लिखा.हरभजन ने पत्र में लिखा,‘पिछले दो तीन साल से मैं रणजी ट्रॉफी खेल रहा हूं. मैंने प्रथम श्रेणी साथी क्रिकेटरों को वित्तीय स्थिति को लेकर संघर्ष करते देखा. रणजी ट्रॉफी की मेजबानी दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड करता है. मैं एक खिलाड़ी के तौर पर आपसे अपील करता हूं चूंकि आप सभी रणजी खिलाड़ियों के लिये प्रेरणास्रोत और रोलमॉडल हैं. ’टिप्पणियां
हरभजन ने लिखा,‘मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि बोर्ड के आला अधिकारियों और सचिन, राहुल, लक्ष्मण और वीरू जैसे खिलाड़ियों से बात करके भुगतान की रकम में बदलाव सुनिश्चित करें.’उन्होंने यह भी कहा कि यह बात समझ से परे है कि लंबे समय से रणजी ट्रॉफी में भुगतान के ढांचे में बदलाव नहीं हुआ है. उन्होंने कहा,‘मैं बदलाव लाने में मदद करने के लिये तैयार हूं. यह हैरानी की बात है कि 2004 से भुगतान व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं हुआ है. उस समय 100 रुपये की कीमत क्या थी और अब क्या है.’ हरभजन ने कहा,‘आज के दौर में आप खुद को पेशेवर कैसे कह सकते हैं जब आपकी नौकरी आपको यह भी नहीं बताती कि सालाना आपको कितना पैसा मिलेगा. आपकी सालाना कमाई भी तय नहीं है और वह भी तब जब साल भर का काम पूरा होने पर आपको पैसा मिलता है.’ उन्होंने कहा,‘ये खिलाड़ी अपना भविष्य तय नहीं कर सकते क्योंकि उन्हें पता ही नहीं है कि उन्हें इस साल एक लाख रुपये मिलेंगे या दस लाख रुपये. इससे उनकी निजी जिंदगी में कई समस्यायें पैदा हो जाती है.’ पत्र के बारे में पूछने पर हरभजन ने कहा,‘यदि मैने पिछले चार पांच साल घरेलू क्रिकेट नहीं खेली होती तो मुझे औसत घरेलू क्रिकेटरों के हालात पता ही नहीं चलते. हर किसी के पास काम नहीं है. आईपीएल करार मिलने पर उनकी आजीविका बेहतर होती है लेकिन सभी को तो यह करार नहीं मिलता..’ (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
भारत के शीर्ष क्रिकेटर और आईपीएल अनुबंध पाने वाले कुछ प्रथम श्रेणी क्रिकेटरों के अलावा औसत घरेलू क्रिकेटरों को एक प्रथम श्रेणी मैच (रणजी या दलीप ट्रॉफी) खेलने पर डेढ़ लाख रुपये मिलते हैं, वहीं अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों को एक टेस्ट मैच खेलने के 15 लाख रुपये दिये जाते हैं. भारत के सर्वश्रेष्ठ स्पिनरों में से एक हरभजन ने कुंबले को हाल ही में घरेलू क्रिकेटरों की वित्तीय असुरक्षा के बारे में लिखा.हरभजन ने पत्र में लिखा,‘पिछले दो तीन साल से मैं रणजी ट्रॉफी खेल रहा हूं. मैंने प्रथम श्रेणी साथी क्रिकेटरों को वित्तीय स्थिति को लेकर संघर्ष करते देखा. रणजी ट्रॉफी की मेजबानी दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड करता है. मैं एक खिलाड़ी के तौर पर आपसे अपील करता हूं चूंकि आप सभी रणजी खिलाड़ियों के लिये प्रेरणास्रोत और रोलमॉडल हैं. ’टिप्पणियां
हरभजन ने लिखा,‘मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि बोर्ड के आला अधिकारियों और सचिन, राहुल, लक्ष्मण और वीरू जैसे खिलाड़ियों से बात करके भुगतान की रकम में बदलाव सुनिश्चित करें.’उन्होंने यह भी कहा कि यह बात समझ से परे है कि लंबे समय से रणजी ट्रॉफी में भुगतान के ढांचे में बदलाव नहीं हुआ है. उन्होंने कहा,‘मैं बदलाव लाने में मदद करने के लिये तैयार हूं. यह हैरानी की बात है कि 2004 से भुगतान व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं हुआ है. उस समय 100 रुपये की कीमत क्या थी और अब क्या है.’ हरभजन ने कहा,‘आज के दौर में आप खुद को पेशेवर कैसे कह सकते हैं जब आपकी नौकरी आपको यह भी नहीं बताती कि सालाना आपको कितना पैसा मिलेगा. आपकी सालाना कमाई भी तय नहीं है और वह भी तब जब साल भर का काम पूरा होने पर आपको पैसा मिलता है.’ उन्होंने कहा,‘ये खिलाड़ी अपना भविष्य तय नहीं कर सकते क्योंकि उन्हें पता ही नहीं है कि उन्हें इस साल एक लाख रुपये मिलेंगे या दस लाख रुपये. इससे उनकी निजी जिंदगी में कई समस्यायें पैदा हो जाती है.’ पत्र के बारे में पूछने पर हरभजन ने कहा,‘यदि मैने पिछले चार पांच साल घरेलू क्रिकेट नहीं खेली होती तो मुझे औसत घरेलू क्रिकेटरों के हालात पता ही नहीं चलते. हर किसी के पास काम नहीं है. आईपीएल करार मिलने पर उनकी आजीविका बेहतर होती है लेकिन सभी को तो यह करार नहीं मिलता..’ (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
हरभजन ने लिखा,‘मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि बोर्ड के आला अधिकारियों और सचिन, राहुल, लक्ष्मण और वीरू जैसे खिलाड़ियों से बात करके भुगतान की रकम में बदलाव सुनिश्चित करें.’उन्होंने यह भी कहा कि यह बात समझ से परे है कि लंबे समय से रणजी ट्रॉफी में भुगतान के ढांचे में बदलाव नहीं हुआ है. उन्होंने कहा,‘मैं बदलाव लाने में मदद करने के लिये तैयार हूं. यह हैरानी की बात है कि 2004 से भुगतान व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं हुआ है. उस समय 100 रुपये की कीमत क्या थी और अब क्या है.’ हरभजन ने कहा,‘आज के दौर में आप खुद को पेशेवर कैसे कह सकते हैं जब आपकी नौकरी आपको यह भी नहीं बताती कि सालाना आपको कितना पैसा मिलेगा. आपकी सालाना कमाई भी तय नहीं है और वह भी तब जब साल भर का काम पूरा होने पर आपको पैसा मिलता है.’ उन्होंने कहा,‘ये खिलाड़ी अपना भविष्य तय नहीं कर सकते क्योंकि उन्हें पता ही नहीं है कि उन्हें इस साल एक लाख रुपये मिलेंगे या दस लाख रुपये. इससे उनकी निजी जिंदगी में कई समस्यायें पैदा हो जाती है.’ पत्र के बारे में पूछने पर हरभजन ने कहा,‘यदि मैने पिछले चार पांच साल घरेलू क्रिकेट नहीं खेली होती तो मुझे औसत घरेलू क्रिकेटरों के हालात पता ही नहीं चलते. हर किसी के पास काम नहीं है. आईपीएल करार मिलने पर उनकी आजीविका बेहतर होती है लेकिन सभी को तो यह करार नहीं मिलता..’ (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) | कुंबले को 21 मई को सीओए के सामने देना हैं प्रजेंटेशन
इसमें वे क्रिकेटरों के लिए भुगतान का नया खाका पेश करेंगे
भज्जी ने लिखा, घरेलू क्रिकेटरों को मिलने वाले भुगतान में हो इजाफा | 28 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: इराक की राजधानी बगदाद में शिया तीर्थस्थल को निशाना बनाकर किए गए दो अलग-अलग कार बम विस्फोटों में कम से कम 32 तीर्थयात्री मारे गए, जबकि 68 अन्य घायल हुए।
आंतरिक मंत्रालय के सूत्र के अनुसार पहला हमला उत्तर पश्चिमी बगदाद के शूला जिले में दोपहर को एक चौराहे पर हुआ जहां शियाओं के धार्मिक जुलूस में फंसी एक कार में विस्फोट हो गया। इस हमले में कम से कम 14 तीर्थयात्री मारे गए एवं 32 अन्य घायल हो गए।
इस घटना के करीब दो घंटे बाद उत्तरी बगदाद के कधमियाह जिले में शिया तीर्थ स्थल के बाहर तीर्थयात्रियों को निशाना बनाकर विस्फोटकों से लदी कार को उड़ा दिया गया। इस हमले में कम से कम 18 लोग मारे गए जबकि 36 अन्य घायल हुए।
इससे पहले 20 लोगों के मरने एवं 44 अन्य के घायल होने की खबरें आई थीं।
हमले के वक्त शिया धार्मिक क्रियाकलाप सम्पन्न होने के बाद जुलूस की शक्ल में घर वापस जा रहे थे।टिप्पणियां
कधमियाह जिले में इमाम मूसा अल-कधीम के तीर्थस्थल पर देश के विभिन्न भागों से करीब साठ लाख शिया प्रत्येक वर्ष उनकी पुण्यतिथि पर जमा होते हैं।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक ये हमले शियाओं के तीर्थ स्थल को निशाना बनाकर किए गए थे।
आंतरिक मंत्रालय के सूत्र के अनुसार पहला हमला उत्तर पश्चिमी बगदाद के शूला जिले में दोपहर को एक चौराहे पर हुआ जहां शियाओं के धार्मिक जुलूस में फंसी एक कार में विस्फोट हो गया। इस हमले में कम से कम 14 तीर्थयात्री मारे गए एवं 32 अन्य घायल हो गए।
इस घटना के करीब दो घंटे बाद उत्तरी बगदाद के कधमियाह जिले में शिया तीर्थ स्थल के बाहर तीर्थयात्रियों को निशाना बनाकर विस्फोटकों से लदी कार को उड़ा दिया गया। इस हमले में कम से कम 18 लोग मारे गए जबकि 36 अन्य घायल हुए।
इससे पहले 20 लोगों के मरने एवं 44 अन्य के घायल होने की खबरें आई थीं।
हमले के वक्त शिया धार्मिक क्रियाकलाप सम्पन्न होने के बाद जुलूस की शक्ल में घर वापस जा रहे थे।टिप्पणियां
कधमियाह जिले में इमाम मूसा अल-कधीम के तीर्थस्थल पर देश के विभिन्न भागों से करीब साठ लाख शिया प्रत्येक वर्ष उनकी पुण्यतिथि पर जमा होते हैं।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक ये हमले शियाओं के तीर्थ स्थल को निशाना बनाकर किए गए थे।
इस घटना के करीब दो घंटे बाद उत्तरी बगदाद के कधमियाह जिले में शिया तीर्थ स्थल के बाहर तीर्थयात्रियों को निशाना बनाकर विस्फोटकों से लदी कार को उड़ा दिया गया। इस हमले में कम से कम 18 लोग मारे गए जबकि 36 अन्य घायल हुए।
इससे पहले 20 लोगों के मरने एवं 44 अन्य के घायल होने की खबरें आई थीं।
हमले के वक्त शिया धार्मिक क्रियाकलाप सम्पन्न होने के बाद जुलूस की शक्ल में घर वापस जा रहे थे।टिप्पणियां
कधमियाह जिले में इमाम मूसा अल-कधीम के तीर्थस्थल पर देश के विभिन्न भागों से करीब साठ लाख शिया प्रत्येक वर्ष उनकी पुण्यतिथि पर जमा होते हैं।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक ये हमले शियाओं के तीर्थ स्थल को निशाना बनाकर किए गए थे।
इससे पहले 20 लोगों के मरने एवं 44 अन्य के घायल होने की खबरें आई थीं।
हमले के वक्त शिया धार्मिक क्रियाकलाप सम्पन्न होने के बाद जुलूस की शक्ल में घर वापस जा रहे थे।टिप्पणियां
कधमियाह जिले में इमाम मूसा अल-कधीम के तीर्थस्थल पर देश के विभिन्न भागों से करीब साठ लाख शिया प्रत्येक वर्ष उनकी पुण्यतिथि पर जमा होते हैं।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक ये हमले शियाओं के तीर्थ स्थल को निशाना बनाकर किए गए थे।
हमले के वक्त शिया धार्मिक क्रियाकलाप सम्पन्न होने के बाद जुलूस की शक्ल में घर वापस जा रहे थे।टिप्पणियां
कधमियाह जिले में इमाम मूसा अल-कधीम के तीर्थस्थल पर देश के विभिन्न भागों से करीब साठ लाख शिया प्रत्येक वर्ष उनकी पुण्यतिथि पर जमा होते हैं।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक ये हमले शियाओं के तीर्थ स्थल को निशाना बनाकर किए गए थे।
कधमियाह जिले में इमाम मूसा अल-कधीम के तीर्थस्थल पर देश के विभिन्न भागों से करीब साठ लाख शिया प्रत्येक वर्ष उनकी पुण्यतिथि पर जमा होते हैं।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक ये हमले शियाओं के तीर्थ स्थल को निशाना बनाकर किए गए थे।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक ये हमले शियाओं के तीर्थ स्थल को निशाना बनाकर किए गए थे। | यह एक सारांश है: इराक की राजधानी बगदाद में शिया तीर्थस्थल को निशाना बनाकर किए गए दो अलग-अलग कार बम विस्फोटों में कम से कम 32 तीर्थयात्री मारे गए, जबकि 68 अन्य घायल हुए। | 21 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: पढ़ें: बवाना में AAP की जीत पर कपिल मिश्रा ने दी अरविंद केजरीवाल को बधाई
पढ़ें: आप की मान्यता रद्द की जाए : मुख्य निर्वाचन आयुक्त से भाजपा
दिल्ली में मतदाताओं की दृष्टि से सबसे बड़े इस विधानसभा क्षेत्र में 23 अगस्त को मतदान हुआ था. वैसे वोट प्रतिशत 45 फीसदी ही रहा था जबकि 2015 के पिछले विधानसभा चुनाव में इस सीट पर 61.83 फीसदी मतदान हुआ था. दिल्ली की 70 सदस्यीय विधानसभा में आप के पास 65 सीटें हैं, जबकि भाजपा के पास चार हैं. कांग्रेस बवाना सीट जीतकर सदन में अपना खाता खोलने की आस लगाई हुई है. इस साल पहले हुए राजौरी गार्डन उपचुनाव में भाजपा ने आप से यह सीट हथिया ली थी. तब कांग्रेस दूसरे स्थान पर रही थी.टिप्पणियां
पढ़ें: दिल्ली भाजपा प्रमुख मनोज तिवारी पर फेंका गया पत्थर बवाना उपचुनाव के लिए भाजपा ने वेद प्रकाश को चुनाव मैदान में उतारा, जो आप उम्मीदवार के तौर पर 2015 का विधानसभा चुनाव इस सीट से जीते थे, लेकिन उन्होंने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया और वह भाजपा में शामिल हो गए. आप के उम्मीदवार रामचंद्र हैं और कांग्रेस ने बवाना से तीन बार विधायक रहे सुरेंद्र कुमार पर दांव लगाया है.
दिल्ली में मतदाताओं की दृष्टि से सबसे बड़े इस विधानसभा क्षेत्र में 23 अगस्त को मतदान हुआ था. वैसे वोट प्रतिशत 45 फीसदी ही रहा था जबकि 2015 के पिछले विधानसभा चुनाव में इस सीट पर 61.83 फीसदी मतदान हुआ था. दिल्ली की 70 सदस्यीय विधानसभा में आप के पास 65 सीटें हैं, जबकि भाजपा के पास चार हैं. कांग्रेस बवाना सीट जीतकर सदन में अपना खाता खोलने की आस लगाई हुई है. इस साल पहले हुए राजौरी गार्डन उपचुनाव में भाजपा ने आप से यह सीट हथिया ली थी. तब कांग्रेस दूसरे स्थान पर रही थी.टिप्पणियां
पढ़ें: दिल्ली भाजपा प्रमुख मनोज तिवारी पर फेंका गया पत्थर बवाना उपचुनाव के लिए भाजपा ने वेद प्रकाश को चुनाव मैदान में उतारा, जो आप उम्मीदवार के तौर पर 2015 का विधानसभा चुनाव इस सीट से जीते थे, लेकिन उन्होंने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया और वह भाजपा में शामिल हो गए. आप के उम्मीदवार रामचंद्र हैं और कांग्रेस ने बवाना से तीन बार विधायक रहे सुरेंद्र कुमार पर दांव लगाया है.
पढ़ें: दिल्ली भाजपा प्रमुख मनोज तिवारी पर फेंका गया पत्थर बवाना उपचुनाव के लिए भाजपा ने वेद प्रकाश को चुनाव मैदान में उतारा, जो आप उम्मीदवार के तौर पर 2015 का विधानसभा चुनाव इस सीट से जीते थे, लेकिन उन्होंने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया और वह भाजपा में शामिल हो गए. आप के उम्मीदवार रामचंद्र हैं और कांग्रेस ने बवाना से तीन बार विधायक रहे सुरेंद्र कुमार पर दांव लगाया है.
बवाना उपचुनाव के लिए भाजपा ने वेद प्रकाश को चुनाव मैदान में उतारा, जो आप उम्मीदवार के तौर पर 2015 का विधानसभा चुनाव इस सीट से जीते थे, लेकिन उन्होंने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया और वह भाजपा में शामिल हो गए. आप के उम्मीदवार रामचंद्र हैं और कांग्रेस ने बवाना से तीन बार विधायक रहे सुरेंद्र कुमार पर दांव लगाया है. | यहाँ एक सारांश है:देश के तीन राज्यों की चार विधानसभा सीटों पर उपचुनाव
पणजी सीट पर मनोहर पर्रिकर का कब्जा
बवाना सीट पर आम आदमी पार्टी का कब्जा | 4 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: भारतीय मूल के 58 वर्षीय एक व्यक्ति पर 40 वर्षीय एक महिला की मौत और उसकी बेटी के गंभीर रूप से घायल होने के मामले में आरोप लगाया गया है। व्यक्ति ने अपनी कार से इन महिलाओं के वाहन को टक्कर मार दी थी। अधिकारियों ने बताया कि क्वींस निवासी जयराम बुढू निलंबित लाइसेंस के साथ कथित तौर पर वाहन चला रहा था और उसने जाकिया रसूल की कार को टक्कर मार दी जिससे वह और उसकी नौ वर्षीय बेटी कार से बाहर गिर गयीं।
रसूल को अस्पताल ले जाया गया जहां गंभीर चोट के कारण उसकी मौत हो गयी। उसकी बेटी को भी एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। उसकी हालत गंभीर थी और सिर में चोट लगी थी।टिप्पणियां
बुढू अपना लाइसेंस और बीमा पहचान कार्ड दिखाए बिना और अपना नाम, पता या बीमा वाहक के बारे में बताए बिना घटनास्थल से फरार हो गया। 19 जुलाई को पुलिस को सूचना मिली कि बुढू एक जगह कथित तौर पर शराब पी रहा है। पुलिस ने वहां पहुंचकर उसे गिरफ्तार कर लिया। (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
रसूल को अस्पताल ले जाया गया जहां गंभीर चोट के कारण उसकी मौत हो गयी। उसकी बेटी को भी एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। उसकी हालत गंभीर थी और सिर में चोट लगी थी।टिप्पणियां
बुढू अपना लाइसेंस और बीमा पहचान कार्ड दिखाए बिना और अपना नाम, पता या बीमा वाहक के बारे में बताए बिना घटनास्थल से फरार हो गया। 19 जुलाई को पुलिस को सूचना मिली कि बुढू एक जगह कथित तौर पर शराब पी रहा है। पुलिस ने वहां पहुंचकर उसे गिरफ्तार कर लिया। (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
बुढू अपना लाइसेंस और बीमा पहचान कार्ड दिखाए बिना और अपना नाम, पता या बीमा वाहक के बारे में बताए बिना घटनास्थल से फरार हो गया। 19 जुलाई को पुलिस को सूचना मिली कि बुढू एक जगह कथित तौर पर शराब पी रहा है। पुलिस ने वहां पहुंचकर उसे गिरफ्तार कर लिया। (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) | संक्षिप्त सारांश: निलंबित लाइसेंस के साथ वाहन चला रहा था जयराम बुढू
40 वर्षीय महिला की बाद में मौत हुई, बेटी की हालत गंभीर
फरार हो गया था जयराम, बाद में गिरफ्तार किया गया | 29 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु की दया याचिका 3 फरवरी को ही ठुकरा दी थी, जिसके बाद आज उसे फांसी पर लटका दिया गया। केंद्रीय गृह सचिव आरके सिंह ने यह जानकारी दी।टिप्पणियां
आरके सिंह ने संवाददाताओं से कहा, राष्ट्रपति ने 3 फरवरी को अफजल गुरु की दया याचिका को नामंजूर कर दिया था और उसके बाद हमने जेल के नियम कायदों की पड़ताल की और आज उसे फांसी दे दी गई।
अफजल को दफनाए जाने के बारे में पूछे जाने पर गृह सचिव ने कहा, हम जेल के नियमों का पालन करेंगे और कानून के अनुसार कार्रवाई होगी। आरके सिंह ने बताया कि अफजल गुरु को फांसी दिए जाने के साथ ही 2001 में संसद पर हमले के मामले की कार्यवाही एक तार्किक परिणाम तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा, कानून और न्याय ने अपना काम किया।
आरके सिंह ने संवाददाताओं से कहा, राष्ट्रपति ने 3 फरवरी को अफजल गुरु की दया याचिका को नामंजूर कर दिया था और उसके बाद हमने जेल के नियम कायदों की पड़ताल की और आज उसे फांसी दे दी गई।
अफजल को दफनाए जाने के बारे में पूछे जाने पर गृह सचिव ने कहा, हम जेल के नियमों का पालन करेंगे और कानून के अनुसार कार्रवाई होगी। आरके सिंह ने बताया कि अफजल गुरु को फांसी दिए जाने के साथ ही 2001 में संसद पर हमले के मामले की कार्यवाही एक तार्किक परिणाम तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा, कानून और न्याय ने अपना काम किया।
अफजल को दफनाए जाने के बारे में पूछे जाने पर गृह सचिव ने कहा, हम जेल के नियमों का पालन करेंगे और कानून के अनुसार कार्रवाई होगी। आरके सिंह ने बताया कि अफजल गुरु को फांसी दिए जाने के साथ ही 2001 में संसद पर हमले के मामले की कार्यवाही एक तार्किक परिणाम तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा, कानून और न्याय ने अपना काम किया। | सारांश: केंद्रीय गृहसचिव आरके सिंह ने कहा कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु की दया याचिका 3 फरवरी को ही ठुकरा दी थी, जिसके बाद आज उसे फांसी पर लटका दिया गया। | 7 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: इंग्लैंड क्रिकेट टीम के कप्तान एंड्रयू स्ट्रॉस ने सोमवार को कहा कि वर्ष 2007 में वेस्टइंडीज में हुए विश्व कप के दौरान निराशाजनक प्रदर्शन से हमने काफी कुछ सीखा है। वेस्टइंडीज में चार साल पूर्व हुए विश्व कप के दौरान इंग्लैंड टीम के कप्तान माइकल वॉन थे। इस दौरान टीम विश्व के शीर्ष आठ टीमों में से किसी को पराजित नहीं कर पाई थी। कप्तान स्ट्रॉस ने कहा कि इस बार उनकी टीम 50-50 प्रारूप का पहला विश्व कप जीतने के लिए तैयार है। इंग्लैंड की टीम ने पॉल कोलिंगवुड की कप्तानी में ट्वेंटी-20 विश्व कप जीता था। इंग्लैंड की टीम इस सप्ताह के अंत में विश्व कप अभियान से पहले कनाडा और पाकिस्तान के साथ अभ्यास मैच खेलेगी। स्ट्रॉस ने हालांकि यह भी कहा कि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हाल में हुई एकदिवसीय श्रृंखला 1-6 से गंवाने के बावजूद टीम के विश्व कप अभियान पर असर नहीं पड़ेगा। स्ट्रॉस ने कहा, "हाल में हमने एकदिवसीय श्रृंखला में काफी खराब प्रदर्शन किया था लेकिन हमारे पास एक सर्वश्रेष्ठ और अच्छी टीम है। हम विश्व कप में अच्छा प्रदर्शन करने को लेकर निश्चिंत हैं। हम टूर्नामेन्ट को लेकर उत्साहित हैं और ट्वेंटी-20 विश्व कप जीतने के बाद खिलाड़ी किसी बड़े टूर्नामेन्ट में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए आश्वस्त हैं।" विश्व कप अभियान के शुरू होने से पहले ही हालांकि इंग्लैंड की टीम मुख्य खिलाड़ियों की चोट की समस्या से जूझ रही है। चोट की वजह से इयोन मोर्गन, टिम ब्रेस्नन और अजमल शहजाद विश्व कप से बाहर हो गए हैं। | यहाँ एक सारांश है:इंग्लैंड क्रिकेट टीम के कप्तान एंड्रयू स्ट्रॉस ने कहा कि वेस्टइंडीज में हुए विश्व कप के दौरान निराशाजनक प्रदर्शन से हमने काफी कुछ सीखा है। | 12 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज जवागल श्रीनाथ को मंगलवार को वर्तमान आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी के पहले सेमीफाइनल मैच के लिए मैच रेफरी नियुक्त किया गया। श्रीनाथ बुधवार को इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका के बीच होने वाले मुकाबले में मैच रेफरी रहेंगे।टिप्पणियां
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने बताया कि बुधवार को होने वाले इस मैच में कुमार धर्मसेना और रॉड टकर मैदानी अम्पायर होंगे तथा ब्रूस ऑक्सेनफोर्ड और स्टीव डेविस तीसरे और चौथे अम्पायर होंगे।
चैम्पियंस ट्रॉफी के गुरुवार को भारत और श्रीलंका के बीच होने वाले दूसरे सेमीफाइनल मुकाबले में इंग्लैंड के पूर्व खिलाड़ी क्रिस ब्रॉड मैच रेफरी रहेंगे। इस मैच में रिचर्ड केटलबरो और अलीम डार मैदानी अम्पायर होंगे तथा निजेल लांग और इयान गोल्ड तीसरे और चौथे अम्पायर होंगे।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने बताया कि बुधवार को होने वाले इस मैच में कुमार धर्मसेना और रॉड टकर मैदानी अम्पायर होंगे तथा ब्रूस ऑक्सेनफोर्ड और स्टीव डेविस तीसरे और चौथे अम्पायर होंगे।
चैम्पियंस ट्रॉफी के गुरुवार को भारत और श्रीलंका के बीच होने वाले दूसरे सेमीफाइनल मुकाबले में इंग्लैंड के पूर्व खिलाड़ी क्रिस ब्रॉड मैच रेफरी रहेंगे। इस मैच में रिचर्ड केटलबरो और अलीम डार मैदानी अम्पायर होंगे तथा निजेल लांग और इयान गोल्ड तीसरे और चौथे अम्पायर होंगे।
चैम्पियंस ट्रॉफी के गुरुवार को भारत और श्रीलंका के बीच होने वाले दूसरे सेमीफाइनल मुकाबले में इंग्लैंड के पूर्व खिलाड़ी क्रिस ब्रॉड मैच रेफरी रहेंगे। इस मैच में रिचर्ड केटलबरो और अलीम डार मैदानी अम्पायर होंगे तथा निजेल लांग और इयान गोल्ड तीसरे और चौथे अम्पायर होंगे। | संक्षिप्त सारांश: पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज जवागल श्रीनाथ को मंगलवार को वर्तमान आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी के पहले सेमीफाइनल मैच के लिए मैच रेफरी नियुक्त किया गया। श्रीनाथ बुधवार को इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका के बीच होने वाले मुकाबले में मैच रेफरी रहेंगे। | 23 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: हमारे देश में कितने लोगों को एड्स है, इसकी गिनती सरकार ने वर्ष 2009 के बाद करने की ज़रूरत नहीं समझी है... ऐसे में जो आंकड़े मेरे पास हैं, वे शायद आज सही न हों, फिर भी इन्हें बताकर हमें तो अपना फर्ज़ पूरा करना ही है... तो लीजिए, सरकारी आंकड़ों के मुताबिक हमारे देश में 23.9 लाख लोगों को या तो एड्स है या फिर वे एचआईवी पॉज़िटिव हैं...
ऐसे में जब मैंने अखबार में पढ़ा कि अमेरिका में फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन ने अब 'ओवर द काउंटर होम एचआईवी टेस्ट' को मंज़ूरी दे दी है तो मैं दुविधा में थी... क्या यह भारत के लिए भी एक अच्छा विकल्प होगा...?
आखिर जिस देश के नागरिक गर्भनिरोधक तक खरीदने में शर्माते हैं, वहां क्या लोग अपनी इस बीमारी की जांच कराने जाते भी हैं... क्या ऐसे हालात में घर पर ही बैठकर अगर आपको कोई दिशा मिल जाए तो इसमें हर्ज़ ही क्या है... लेकिन फिर मुझे याद आई एक और खबर, जो मैंने कुछ दिन पहले पढ़ी थी... एक एड्स पीड़ित, जो कभी मुंबई में ऑटोचालक था, ने दो दिन पहले ही खुदकुशी की और जाते-जाते अपने ख़त में अपनी पत्नी की बीमारी का खुलासा भी कर गया...
तब मैंने सोचा कि इस इंसान की कोई मजबूरियां रही होंगी - आर्थिक तंगी, सामाजिक बहिष्कार, डिप्रेशन या आत्म−ग्लानि - लेकिन सवाल उठता था, यह शख्स अपनी पत्नी का बाकी जीवन क्यों बर्बाद कर गया... उसे बेसहारा तो छोड़ ही गया, जो बीमारी शायद उसने खुद ही अपनी पत्नी को दी हो, वह सारे समाज को बता भी गया... अब उस महिला के पास क्या चारा रह जाता है... ऐसे में इस तरह के पीड़ित कोई गलत कदम न उठा लें, उसके लिए नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गेनाइज़ेशन (NACO) का सुझाव है - काउंसिलिंग... मेरा सवाल है कि यदि किसी इंसान को अपने घर में बिना किसी काउंसिलिंग सपोर्ट के अपने एड्स से ग्रसित होने का पता चलता है, तो क्या उसकी मानसिक हालत ऐसी होगी कि वह अपनी इस स्थिति को समझ सके और अपने भविष्य के लिए कुछ सोच सके...
मैं किसी भी टेस्ट के खिलाफ या पक्ष में राय नहीं देना चाहती, लेकिन दोनों तरह के सवाल खड़े करना चाहती हूं... शायद घर की प्राइवेसी में किए गए टेस्ट से अब से ज़्यादा लोगों में इस बीमारी के लिए अपनी जांच कराने की रज़ामंदी पैदा हो जाए, और उससे वक्त रहते लोगों को इलाज मिल सके... लेकिन वहीं दूसरी मुश्किल यह है कि क्या रोग के बारे में जानने के बाद वे लोग सही मदद की तरफ हाथ बढ़ाएंगे, या समाज के डर से चुपचाप कोई गलत राह चुन लेंगे...टिप्पणियां
एक दलील यह भी दी जा सकती है कि हर चीज़ की च्वाइस होनी चाहिए... अगर हमारे देश में दुनिया के कई विकसित देशों के मुकाबले, जीवन के हर पहलू में चुनने का हक है, तो फिर यहां क्यों नहीं... हर इंसान को चुनने का हक हो कि वह घर पर टेस्ट चाहता है या नहीं... जिसे नहीं करना, वह किट न खरीदे...
खैर, दलीलें बहुत हैं... फिलहाल यह टेस्ट अमेरिका में ही विकसित हुआ है, और NACO ने पहले ही इसे भारत लाने से मना कर दिया है... लेकिन मैं बिना किसी पक्षपात के सवाल उठाती हूं - क्या यह फैसला सही है...?
ऐसे में जब मैंने अखबार में पढ़ा कि अमेरिका में फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन ने अब 'ओवर द काउंटर होम एचआईवी टेस्ट' को मंज़ूरी दे दी है तो मैं दुविधा में थी... क्या यह भारत के लिए भी एक अच्छा विकल्प होगा...?
आखिर जिस देश के नागरिक गर्भनिरोधक तक खरीदने में शर्माते हैं, वहां क्या लोग अपनी इस बीमारी की जांच कराने जाते भी हैं... क्या ऐसे हालात में घर पर ही बैठकर अगर आपको कोई दिशा मिल जाए तो इसमें हर्ज़ ही क्या है... लेकिन फिर मुझे याद आई एक और खबर, जो मैंने कुछ दिन पहले पढ़ी थी... एक एड्स पीड़ित, जो कभी मुंबई में ऑटोचालक था, ने दो दिन पहले ही खुदकुशी की और जाते-जाते अपने ख़त में अपनी पत्नी की बीमारी का खुलासा भी कर गया...
तब मैंने सोचा कि इस इंसान की कोई मजबूरियां रही होंगी - आर्थिक तंगी, सामाजिक बहिष्कार, डिप्रेशन या आत्म−ग्लानि - लेकिन सवाल उठता था, यह शख्स अपनी पत्नी का बाकी जीवन क्यों बर्बाद कर गया... उसे बेसहारा तो छोड़ ही गया, जो बीमारी शायद उसने खुद ही अपनी पत्नी को दी हो, वह सारे समाज को बता भी गया... अब उस महिला के पास क्या चारा रह जाता है... ऐसे में इस तरह के पीड़ित कोई गलत कदम न उठा लें, उसके लिए नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गेनाइज़ेशन (NACO) का सुझाव है - काउंसिलिंग... मेरा सवाल है कि यदि किसी इंसान को अपने घर में बिना किसी काउंसिलिंग सपोर्ट के अपने एड्स से ग्रसित होने का पता चलता है, तो क्या उसकी मानसिक हालत ऐसी होगी कि वह अपनी इस स्थिति को समझ सके और अपने भविष्य के लिए कुछ सोच सके...
मैं किसी भी टेस्ट के खिलाफ या पक्ष में राय नहीं देना चाहती, लेकिन दोनों तरह के सवाल खड़े करना चाहती हूं... शायद घर की प्राइवेसी में किए गए टेस्ट से अब से ज़्यादा लोगों में इस बीमारी के लिए अपनी जांच कराने की रज़ामंदी पैदा हो जाए, और उससे वक्त रहते लोगों को इलाज मिल सके... लेकिन वहीं दूसरी मुश्किल यह है कि क्या रोग के बारे में जानने के बाद वे लोग सही मदद की तरफ हाथ बढ़ाएंगे, या समाज के डर से चुपचाप कोई गलत राह चुन लेंगे...टिप्पणियां
एक दलील यह भी दी जा सकती है कि हर चीज़ की च्वाइस होनी चाहिए... अगर हमारे देश में दुनिया के कई विकसित देशों के मुकाबले, जीवन के हर पहलू में चुनने का हक है, तो फिर यहां क्यों नहीं... हर इंसान को चुनने का हक हो कि वह घर पर टेस्ट चाहता है या नहीं... जिसे नहीं करना, वह किट न खरीदे...
खैर, दलीलें बहुत हैं... फिलहाल यह टेस्ट अमेरिका में ही विकसित हुआ है, और NACO ने पहले ही इसे भारत लाने से मना कर दिया है... लेकिन मैं बिना किसी पक्षपात के सवाल उठाती हूं - क्या यह फैसला सही है...?
आखिर जिस देश के नागरिक गर्भनिरोधक तक खरीदने में शर्माते हैं, वहां क्या लोग अपनी इस बीमारी की जांच कराने जाते भी हैं... क्या ऐसे हालात में घर पर ही बैठकर अगर आपको कोई दिशा मिल जाए तो इसमें हर्ज़ ही क्या है... लेकिन फिर मुझे याद आई एक और खबर, जो मैंने कुछ दिन पहले पढ़ी थी... एक एड्स पीड़ित, जो कभी मुंबई में ऑटोचालक था, ने दो दिन पहले ही खुदकुशी की और जाते-जाते अपने ख़त में अपनी पत्नी की बीमारी का खुलासा भी कर गया...
तब मैंने सोचा कि इस इंसान की कोई मजबूरियां रही होंगी - आर्थिक तंगी, सामाजिक बहिष्कार, डिप्रेशन या आत्म−ग्लानि - लेकिन सवाल उठता था, यह शख्स अपनी पत्नी का बाकी जीवन क्यों बर्बाद कर गया... उसे बेसहारा तो छोड़ ही गया, जो बीमारी शायद उसने खुद ही अपनी पत्नी को दी हो, वह सारे समाज को बता भी गया... अब उस महिला के पास क्या चारा रह जाता है... ऐसे में इस तरह के पीड़ित कोई गलत कदम न उठा लें, उसके लिए नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गेनाइज़ेशन (NACO) का सुझाव है - काउंसिलिंग... मेरा सवाल है कि यदि किसी इंसान को अपने घर में बिना किसी काउंसिलिंग सपोर्ट के अपने एड्स से ग्रसित होने का पता चलता है, तो क्या उसकी मानसिक हालत ऐसी होगी कि वह अपनी इस स्थिति को समझ सके और अपने भविष्य के लिए कुछ सोच सके...
मैं किसी भी टेस्ट के खिलाफ या पक्ष में राय नहीं देना चाहती, लेकिन दोनों तरह के सवाल खड़े करना चाहती हूं... शायद घर की प्राइवेसी में किए गए टेस्ट से अब से ज़्यादा लोगों में इस बीमारी के लिए अपनी जांच कराने की रज़ामंदी पैदा हो जाए, और उससे वक्त रहते लोगों को इलाज मिल सके... लेकिन वहीं दूसरी मुश्किल यह है कि क्या रोग के बारे में जानने के बाद वे लोग सही मदद की तरफ हाथ बढ़ाएंगे, या समाज के डर से चुपचाप कोई गलत राह चुन लेंगे...टिप्पणियां
एक दलील यह भी दी जा सकती है कि हर चीज़ की च्वाइस होनी चाहिए... अगर हमारे देश में दुनिया के कई विकसित देशों के मुकाबले, जीवन के हर पहलू में चुनने का हक है, तो फिर यहां क्यों नहीं... हर इंसान को चुनने का हक हो कि वह घर पर टेस्ट चाहता है या नहीं... जिसे नहीं करना, वह किट न खरीदे...
खैर, दलीलें बहुत हैं... फिलहाल यह टेस्ट अमेरिका में ही विकसित हुआ है, और NACO ने पहले ही इसे भारत लाने से मना कर दिया है... लेकिन मैं बिना किसी पक्षपात के सवाल उठाती हूं - क्या यह फैसला सही है...?
तब मैंने सोचा कि इस इंसान की कोई मजबूरियां रही होंगी - आर्थिक तंगी, सामाजिक बहिष्कार, डिप्रेशन या आत्म−ग्लानि - लेकिन सवाल उठता था, यह शख्स अपनी पत्नी का बाकी जीवन क्यों बर्बाद कर गया... उसे बेसहारा तो छोड़ ही गया, जो बीमारी शायद उसने खुद ही अपनी पत्नी को दी हो, वह सारे समाज को बता भी गया... अब उस महिला के पास क्या चारा रह जाता है... ऐसे में इस तरह के पीड़ित कोई गलत कदम न उठा लें, उसके लिए नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गेनाइज़ेशन (NACO) का सुझाव है - काउंसिलिंग... मेरा सवाल है कि यदि किसी इंसान को अपने घर में बिना किसी काउंसिलिंग सपोर्ट के अपने एड्स से ग्रसित होने का पता चलता है, तो क्या उसकी मानसिक हालत ऐसी होगी कि वह अपनी इस स्थिति को समझ सके और अपने भविष्य के लिए कुछ सोच सके...
मैं किसी भी टेस्ट के खिलाफ या पक्ष में राय नहीं देना चाहती, लेकिन दोनों तरह के सवाल खड़े करना चाहती हूं... शायद घर की प्राइवेसी में किए गए टेस्ट से अब से ज़्यादा लोगों में इस बीमारी के लिए अपनी जांच कराने की रज़ामंदी पैदा हो जाए, और उससे वक्त रहते लोगों को इलाज मिल सके... लेकिन वहीं दूसरी मुश्किल यह है कि क्या रोग के बारे में जानने के बाद वे लोग सही मदद की तरफ हाथ बढ़ाएंगे, या समाज के डर से चुपचाप कोई गलत राह चुन लेंगे...टिप्पणियां
एक दलील यह भी दी जा सकती है कि हर चीज़ की च्वाइस होनी चाहिए... अगर हमारे देश में दुनिया के कई विकसित देशों के मुकाबले, जीवन के हर पहलू में चुनने का हक है, तो फिर यहां क्यों नहीं... हर इंसान को चुनने का हक हो कि वह घर पर टेस्ट चाहता है या नहीं... जिसे नहीं करना, वह किट न खरीदे...
खैर, दलीलें बहुत हैं... फिलहाल यह टेस्ट अमेरिका में ही विकसित हुआ है, और NACO ने पहले ही इसे भारत लाने से मना कर दिया है... लेकिन मैं बिना किसी पक्षपात के सवाल उठाती हूं - क्या यह फैसला सही है...?
मैं किसी भी टेस्ट के खिलाफ या पक्ष में राय नहीं देना चाहती, लेकिन दोनों तरह के सवाल खड़े करना चाहती हूं... शायद घर की प्राइवेसी में किए गए टेस्ट से अब से ज़्यादा लोगों में इस बीमारी के लिए अपनी जांच कराने की रज़ामंदी पैदा हो जाए, और उससे वक्त रहते लोगों को इलाज मिल सके... लेकिन वहीं दूसरी मुश्किल यह है कि क्या रोग के बारे में जानने के बाद वे लोग सही मदद की तरफ हाथ बढ़ाएंगे, या समाज के डर से चुपचाप कोई गलत राह चुन लेंगे...टिप्पणियां
एक दलील यह भी दी जा सकती है कि हर चीज़ की च्वाइस होनी चाहिए... अगर हमारे देश में दुनिया के कई विकसित देशों के मुकाबले, जीवन के हर पहलू में चुनने का हक है, तो फिर यहां क्यों नहीं... हर इंसान को चुनने का हक हो कि वह घर पर टेस्ट चाहता है या नहीं... जिसे नहीं करना, वह किट न खरीदे...
खैर, दलीलें बहुत हैं... फिलहाल यह टेस्ट अमेरिका में ही विकसित हुआ है, और NACO ने पहले ही इसे भारत लाने से मना कर दिया है... लेकिन मैं बिना किसी पक्षपात के सवाल उठाती हूं - क्या यह फैसला सही है...?
एक दलील यह भी दी जा सकती है कि हर चीज़ की च्वाइस होनी चाहिए... अगर हमारे देश में दुनिया के कई विकसित देशों के मुकाबले, जीवन के हर पहलू में चुनने का हक है, तो फिर यहां क्यों नहीं... हर इंसान को चुनने का हक हो कि वह घर पर टेस्ट चाहता है या नहीं... जिसे नहीं करना, वह किट न खरीदे...
खैर, दलीलें बहुत हैं... फिलहाल यह टेस्ट अमेरिका में ही विकसित हुआ है, और NACO ने पहले ही इसे भारत लाने से मना कर दिया है... लेकिन मैं बिना किसी पक्षपात के सवाल उठाती हूं - क्या यह फैसला सही है...?
खैर, दलीलें बहुत हैं... फिलहाल यह टेस्ट अमेरिका में ही विकसित हुआ है, और NACO ने पहले ही इसे भारत लाने से मना कर दिया है... लेकिन मैं बिना किसी पक्षपात के सवाल उठाती हूं - क्या यह फैसला सही है...? | यहाँ एक सारांश है:समस्याएं सभी बातों के साथ जुड़ी होती हैं, इसलिए किसी भी टेस्ट के खिलाफ या पक्ष में राय देना ज़रूरी नहीं, लेकिन दोनों पक्षों के लिए सवाल खड़े करना ज़रूरी है... | 15 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: तिहाड़ जेल में इस वर्ष पहली बार चलाए गए रोजगार नियोजन अभियान में शुक्रवार को कुल 142 कैदियों को नौकरी मिली। सजा पूरी कर चुके कैदी अब बेहतर जीवन यापन कर सकेंगे।
पांच कम्पनियों ने 175 कैदियों से साक्षात्कार लिए थे, जिनमें से 142 अभ्यर्थियों को चयनित किया गया। इनमें 13 महिलाएं हैं। साक्षात्कार का आयोजन शुक्रवार को जेल परिसर में ही किया गया।टिप्पणियां
चयनित अभ्यर्थियों का वेतन पैकेज 7,000 रुपये से लेकर 30,000 रुपये तक तय किया गया। फ्रंटलाइन सेक्युरिटीज ने 28 वर्षीय सुनील गुप्ता को सबसे अधिक पैकेज देने की पेशकश की है।
नियोजन अभियान चलाने वाली अन्य कम्पनियों में इक्या ग्लोबल, कॅरियर क्राफ्ट, फ्यूचर मैसन और वेदांता फाउंडेशन शामिल हैं। जेल में चलाया गया यह चौथा अभियान है।
पांच कम्पनियों ने 175 कैदियों से साक्षात्कार लिए थे, जिनमें से 142 अभ्यर्थियों को चयनित किया गया। इनमें 13 महिलाएं हैं। साक्षात्कार का आयोजन शुक्रवार को जेल परिसर में ही किया गया।टिप्पणियां
चयनित अभ्यर्थियों का वेतन पैकेज 7,000 रुपये से लेकर 30,000 रुपये तक तय किया गया। फ्रंटलाइन सेक्युरिटीज ने 28 वर्षीय सुनील गुप्ता को सबसे अधिक पैकेज देने की पेशकश की है।
नियोजन अभियान चलाने वाली अन्य कम्पनियों में इक्या ग्लोबल, कॅरियर क्राफ्ट, फ्यूचर मैसन और वेदांता फाउंडेशन शामिल हैं। जेल में चलाया गया यह चौथा अभियान है।
चयनित अभ्यर्थियों का वेतन पैकेज 7,000 रुपये से लेकर 30,000 रुपये तक तय किया गया। फ्रंटलाइन सेक्युरिटीज ने 28 वर्षीय सुनील गुप्ता को सबसे अधिक पैकेज देने की पेशकश की है।
नियोजन अभियान चलाने वाली अन्य कम्पनियों में इक्या ग्लोबल, कॅरियर क्राफ्ट, फ्यूचर मैसन और वेदांता फाउंडेशन शामिल हैं। जेल में चलाया गया यह चौथा अभियान है।
नियोजन अभियान चलाने वाली अन्य कम्पनियों में इक्या ग्लोबल, कॅरियर क्राफ्ट, फ्यूचर मैसन और वेदांता फाउंडेशन शामिल हैं। जेल में चलाया गया यह चौथा अभियान है। | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: तिहाड़ जेल में इस वर्ष पहली बार चलाए गए रोजगार नियोजन अभियान में शुक्रवार को कुल 142 कैदियों को नौकरी मिली। | 19 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: टीम इंडिया को वर्ष 1983 में पहली बार क्रिकेट वर्ल्डकप जिताने वाले कप्तान कपिल देव की भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड से सुलह हो जाने के बाद अब बंगाल क्रिकेट संघ ने अपने गेंदबाजों को ट्रेनिंग दिलवाने के लिए उनकी सेवाएं लेने का मन बना लिया है।टिप्पणियां
बंगाल क्रिकेट संघ के हाल ही में हुए चुनावों में भारी मतों से जीतकर अध्यक्ष पद पर पहुंचे जगमोहन डालमिया ने कहा है कि वह चाहते हैं कि कपिल देव बंगाल के तेज गेंदबाजों को ट्रेनिंग दें।
डालमिया ने बताया कि उन्होंने विश्व के सर्वकालिक बेहतरीन ऑल-राउंडरों में गिने जाने वाले कपिल देव से इस सिलसिले में बात भी की है, और इस बारे में जल्द ही कोई फैसला ले लिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि विद्रोही लीग आईसीएल से जुड़े रहने तक किसी को भी कपिल की याद नहीं आई थी, लेकिन टीम इंडिया के पूर्व कप्तान की बीसीसीआई से सुलह हो जाने के बाद राज्य का क्रिकेट संघ उनकी सेवाएं लेने के लिए आगे आ रहा है।
बंगाल क्रिकेट संघ के हाल ही में हुए चुनावों में भारी मतों से जीतकर अध्यक्ष पद पर पहुंचे जगमोहन डालमिया ने कहा है कि वह चाहते हैं कि कपिल देव बंगाल के तेज गेंदबाजों को ट्रेनिंग दें।
डालमिया ने बताया कि उन्होंने विश्व के सर्वकालिक बेहतरीन ऑल-राउंडरों में गिने जाने वाले कपिल देव से इस सिलसिले में बात भी की है, और इस बारे में जल्द ही कोई फैसला ले लिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि विद्रोही लीग आईसीएल से जुड़े रहने तक किसी को भी कपिल की याद नहीं आई थी, लेकिन टीम इंडिया के पूर्व कप्तान की बीसीसीआई से सुलह हो जाने के बाद राज्य का क्रिकेट संघ उनकी सेवाएं लेने के लिए आगे आ रहा है।
डालमिया ने बताया कि उन्होंने विश्व के सर्वकालिक बेहतरीन ऑल-राउंडरों में गिने जाने वाले कपिल देव से इस सिलसिले में बात भी की है, और इस बारे में जल्द ही कोई फैसला ले लिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि विद्रोही लीग आईसीएल से जुड़े रहने तक किसी को भी कपिल की याद नहीं आई थी, लेकिन टीम इंडिया के पूर्व कप्तान की बीसीसीआई से सुलह हो जाने के बाद राज्य का क्रिकेट संघ उनकी सेवाएं लेने के लिए आगे आ रहा है। | संक्षिप्त सारांश: बंगाल क्रिकेट संघ के हाल ही में हुए चुनावों में भारी मतों से जीतकर अध्यक्ष पद पर पहुंचे जगमोहन डालमिया ने कहा है कि वह चाहते हैं कि कपिल देव बंगाल के तेज गेंदबाजों को ट्रेनिंग दें। | 8 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: अलकायदा के नेता अनवर अल अवलाकी की यमन में एक ड्रोन हमले में हुई मौत का बदला लेने के लिए आतंकवादी दुनिया भर में अमेरिका विरोधी हमले तेज कर सकते हैं। विदेश विभाग ने विदेशों की यात्रा पर जाने वाले अपने नागरिकों के लिए कल अलर्ट जारी करते हुए एक बयान में कहा 30 सितंबर को अरब प्राय:द्वीप में अलकायदा के प्रमुख नेताओं के मारे जाने के बाद अमेरिकी नागरिकों के खिलाफ बदले की कार्रवाई किए जाने की आशंका के चलते विदेश मंत्रालय अपने नागरिकों के लिए अलर्ट जारी करता है। अमेरिकी मूल का यमनी नागरिक अवलाकी और अलकायदा के प्रचार में सक्रिय समीर खान 30 सितंबर को यमन में मारे गए। अवलाकी अरब प्राय:द्वीप में अलकायदा :एक्यूएपी: के विदेशी अभियानों का प्रभारी था। विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि धाराप्रवाह अंग्रेजी में हिंसा की वकालत करने वाले अवलाकी की मौत से निकट भविष्य में अमेरिकियों और अमेरिकी प्रतिष्ठानों के खिलाफ हमले तेज हो सकते हैं क्योंकि आतंकवादी उसकी मौत का बदला लेने की कोशिश करेंगे। बयान के अनुसार, पूर्व में अवलाकी और एक्यूएपी के अन्य सदस्यों ने अमेरिका, अमेरिकी नागरिकों और अमेरिकी प्रतिष्ठानों के खिलाफ हमलों का आह्वान किया था। | संक्षिप्त सारांश: अवलाकी की यमन में एक ड्रोन हमले में हुई मौत का बदला लेने के लिए आतंकवादी दुनियाभर में अमेरिका विरोधी हमले तेज कर सकते हैं। | 10 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: मिस्र के राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक को पद से हटाने के लिए जारी विरोध प्रदर्शन व्यापक होता जा रहा है। रविवार को विरोध प्रदर्शन के छठे दिन मिस्र की जेलों में बंद हजारों कैदी जेल से भाग निकले और कई सैनिक भी अपनी वर्दी उतारकर सरकार विरोधी प्रदर्शनों में शामिल हो गए हैं। दूसरी तरफ प्रदर्शनकारियों ने काहिरा के मॉल तथा बड़े बाजारों में लूटपाट की है। इन विरोध प्रदर्शनों में मरने वाले लोगों की कुल संख्या 102 पहुंच चुकी है। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक देश के अलेक्जेंद्रिया, अस्वान और अन्य कई स्थानों पर रातभर में जेल तोड़ने की कई घटनाएं हुई हैं। एक अनुमान के मुताबिक दक्षिणी काहिरा के अल फायोम में जेल तोड़कर पांच हजार कैदी भाग निकले हैं। इस घटना में एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई है। लुटेरों ने कर्फ्यू का उल्लंघन करते हुए तथा बड़ी तादाद में सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी को धता बताते हुए मॉल में टीवी सेट, फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तथा कपड़े लूट लिए। चारों तरफ से आलोचनाओं से घिरे 82 वर्षीय मुबारक ने शनिवार को पहली बार पद छोड़ने का संकेत दिया था। उन्होंने 30 साल के निरंकुश शासन के बाद पहली बार अपने खुफिया प्रमुख उमर सुलेमान को उप राष्ट्रपति के तौर पर नियुक्त किया। इस बीच, हजारों प्रदर्शनकारियों ने कर्फ्यू का उल्लंघन किया और काहिरा के मध्य में तहरीर स्क्वेयर में बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। पूरे शहर में प्रमुख इमारतों तथा पर्यटन स्थलों की सुरक्षा के लिए सैनिकों और हथियारबंद वाहनों को तैनात किया गया है। सूत्रों के अनुसार सरकार विरोधी प्रदर्शनों में कम से कम 102 लोग मारे जा चुके हैं। नगर की स्थिति को देखते हुए काहिरा रटॉक एक्सचेंज को रविवार को बंद रखने का फैसला किया गया। मिस्र के पहले ट्यूनीशिया में आंदोलन शुरू हुआ था, जिसमें राष्ट्रपति जाइन अल अबीदीन बेन अली को 23 साल की सत्ता के बाद पद छोड़ना पड़ा था। | यहाँ एक सारांश है:प्रदर्शन के छठे दिन मिस्र की जेलों में बंद हजारों कैदी भाग निकले और कई सैनिक भी अपनी वर्दी उतारकर सरकार विरोधी प्रदर्शनों में शामिल हो गए हैं। | 18 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: पुलवामा में हुए आतंकी हमले को लेकर सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट लिखने के मामले में उत्तर प्रदेश शिक्षा विभाग के अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है. घटना मुजफ्फरनगर जिले की है. अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट अमित कुमार के मुताबिक बेसिक शिक्षा अधिकारी डी के यादव के खिलाफ जिला अधिकारियों की सिफारिश के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने ये फैसला लिया है. यादव ने पुलवामा में हुए आतंकी हमले के संबंध में सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी. जिसके बाद यादव के खिलाफ शिकायतें आईं और कुछ लोग शिक्षा विभाग के अधिकारी के घर के बाहर प्रदर्शन भी करने लगे.के लिए जुट गए.
प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि यादव की टिप्पणी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए. जिला प्रशासन के अधिकारियों ने इस बारे में राज्य सरकार के पास जानकारी भेजी. जिसके बाद डी के यादव को सस्पेंड किया गया. बता दें कि 14 फरवरी को पुलवामा नें सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकियों ने हमला कर दिया था. जिसकी वजह से 40 जवान शहीद हो गए थे.
पुलवामा हमले के बाद दोनों देशों के बीच का तनाव बढ़ा हुआ है. सरकार ने इसके खिलाफ एक्शन लेना शुरू कर दिया है. 18 अलगाववादियों और 155 नेताओं का सुरक्षा कवर हटा दिया. इनमें पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के करीबी वाहिद मुफ्ती और पूर्व आईएएस अधिकारी शाह फैसल भी शामिल हैं. इसके अलावा अमेरिका, सऊदी अरब समेत कई देशों ने आतंक के खिलाफ भारत की लड़ाई में सहयोग की बात कही थी. फिलहाल भारत सरकार ने फैसला किया है कि भारत की ओर से जाने वाली नदियों का पानी पाकिस्तान जाने से रोका जाएगा. | संक्षिप्त पाठ: यूपी शिक्षा विभाग के अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई
पुलवामा हमले को लेकर सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट का मामला
अधिकारी के घर के बाहर लोगों ने किया प्रदर्शन | 30 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: रेलमंत्री दिनेश त्रिवेदी को पद से हटाने की मांग करने वाली तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने कहा है कि पार्टी के अनुशासन से ऊपर कोई नहीं है।
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार पार्टी के विधायक दल की बैठक के दौरान ममता ने कहा, ‘पार्टी अनुशासन से उपर कोई नहीं है। दिनेश त्रिवेदी ने ना मुझसे और न ही मुकल रॉय से विमर्श किया था।’ उनका मनना है कि रेल किराये में इजाफे से आम आदमी पर बोझ पड़ेगा। पार्टी के विधायकों और अन्य नेताओं ने भी पार्टी प्रमुख का समर्थन किया और त्रिवेदी की आलोचना की।
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार पार्टी के विधायक दल की बैठक के दौरान ममता ने कहा, ‘पार्टी अनुशासन से उपर कोई नहीं है। दिनेश त्रिवेदी ने ना मुझसे और न ही मुकल रॉय से विमर्श किया था।’ उनका मनना है कि रेल किराये में इजाफे से आम आदमी पर बोझ पड़ेगा। पार्टी के विधायकों और अन्य नेताओं ने भी पार्टी प्रमुख का समर्थन किया और त्रिवेदी की आलोचना की। | संक्षिप्त सारांश: रेलमंत्री दिनेश त्रिवेदी को पद से हटाने की मांग करने वाली तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने कहा है कि पार्टी के अनुशासन से ऊपर कोई नहीं है। | 0 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: मुंबई में अन्ना हजारे के अनशन के दौरान कम भीड़ उमड़ने की बात को गंभीर नहीं मानते हुए टीम अन्ना की प्रमुख सदस्य किरण बेदी ने कहा कि मौके पर आए लोगों की संख्या से ही कोई अंदाज नहीं लगाया जाना चाहिए बल्कि इंटरनेट और अन्य तरीकों से मिल रहे समर्थन को भी देखना चाहिए। किरण ने कहा कि इंटरनेट पर लाखों युवा भ्रष्टाचारविरोधी आंदोलन के प्रति अपना समर्थन जता रहे हैं और लाखों लोग टीवी पर हजारे के आंदोलन का लाइव प्रसारण देख रहे हैं। यह भी समर्थन का तरीका है। उन्होंने यहां रामलीला मैदान में कहा, किसी को मौके पर पहुंचे लोगों की संख्या पर नहीं जाना चाहिए। यदि किसी ने जुहू बीच से एमएमआरडीए मैदान तक मार्च में शामिल लोगों को देखा हो तो वह नहीं कहेगा कि भीड़ कम थी। हम जनता के बीच जागरुकता फैलाने में सफल रहे। किरण ने कहा कि टीम अन्ना लोकपाल के मुद्दे पर जनता के बीच जागरूकता फैलाती रहेगी और अंत तक संघर्ष करेगी। उन्होंने कहा, समय आ गया है कि सही कानून बनें। हमने कोशिश की कि संसद कम से कम जनता की आवाज सुने। लेकिन पारित विधेयक में जनता के विचार नहीं झलकते। उन्होंने कहा कि पूरे आंदोलन का मकसद सीबीआई को राजनीतिक हेरफेर से मुक्त करना है। किरण ने इस बात पर खेद जताया कि अभी यह लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सका है। | बेदी ने कहा कि मौजूद लोगों की संख्या से कोई अंदाज नहीं लगाया जाना चाहिए बल्कि इंटरनेट और अन्य तरीकों से मिल रहे समर्थन को भी देखना चाहिए। | 26 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: टिकट दलालों पर लगाम लगाने के मकसद से रेल मंत्रालय जल्द ही गैर-एसी शयनयान श्रेणी में सफर करने वाले यात्रियों के लिए भी फोटो पहचान पत्र साथ रखना अनिवार्य करेगा।
रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि गैर-एसी शयनयानों में यात्रा करने वाले ट्रेन यात्रियों के लिए भी फोटो पहचान पत्र साथ रखने को अनिवार्य बनाने के प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जा रहा है और इस संबंध में जल्द ही घोषणा हो सकती है।
अधिकारियों ने कहा, हस्तांतरित टिकटों पर यात्रा करने वाले लोगों पर लगाम लगाने के वास्ते इस तरह के उपायों को अपनाया जा रहा है। गौरतलब है कि रेलवे ने इस साल फरवरी से एसी श्रेणी में सफर करने वाले यात्रियों के लिए पहचान पत्र साथ रखना अनिवार्य कर दिया है। इसके अलावा रेलवे ने तत्काल टिकट अथवा ई-टिकट के साथ सफर करने वाले यात्रियों के लिए भी पहचान पत्र रखना अनिवार्य कर दिया है।टिप्पणियां
अधिकारी ने कहा, फिलहाल गैर-एसी यात्रियों के लिए फोटो पहचान पत्र रखना जरूरी नहीं है। अब इसके दायरे को बढ़ाया जा रहा है। अब आरक्षित श्रेणी में यात्रा करने वाले सभी ट्रेन यात्रियों के लिए वैध पहचान पत्र रखना जरूरी हो जाएगा।
इसकी घोषणा हो जाने के बाद शयनयान श्रेणी में यात्रा कर रहे यात्रियों को साथ में पहचान पत्र रखना अनिवार्य हो जाएगा और मांगे जाने पर इसे दिखाना होगा। ऐसा नहीं करने पर उन्हें बिना टिकट के माना जाएगा और जरूरी शुल्क देना होगा। यह नियम काउंटर से लिए गए टिकट समेत सभी प्रकार के टिकटों पर लागू होगा। अधिकारी ने बताया कि फोटो पहचान पत्र रखने को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि गैर-एसी शयनयानों में यात्रा करने वाले ट्रेन यात्रियों के लिए भी फोटो पहचान पत्र साथ रखने को अनिवार्य बनाने के प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जा रहा है और इस संबंध में जल्द ही घोषणा हो सकती है।
अधिकारियों ने कहा, हस्तांतरित टिकटों पर यात्रा करने वाले लोगों पर लगाम लगाने के वास्ते इस तरह के उपायों को अपनाया जा रहा है। गौरतलब है कि रेलवे ने इस साल फरवरी से एसी श्रेणी में सफर करने वाले यात्रियों के लिए पहचान पत्र साथ रखना अनिवार्य कर दिया है। इसके अलावा रेलवे ने तत्काल टिकट अथवा ई-टिकट के साथ सफर करने वाले यात्रियों के लिए भी पहचान पत्र रखना अनिवार्य कर दिया है।टिप्पणियां
अधिकारी ने कहा, फिलहाल गैर-एसी यात्रियों के लिए फोटो पहचान पत्र रखना जरूरी नहीं है। अब इसके दायरे को बढ़ाया जा रहा है। अब आरक्षित श्रेणी में यात्रा करने वाले सभी ट्रेन यात्रियों के लिए वैध पहचान पत्र रखना जरूरी हो जाएगा।
इसकी घोषणा हो जाने के बाद शयनयान श्रेणी में यात्रा कर रहे यात्रियों को साथ में पहचान पत्र रखना अनिवार्य हो जाएगा और मांगे जाने पर इसे दिखाना होगा। ऐसा नहीं करने पर उन्हें बिना टिकट के माना जाएगा और जरूरी शुल्क देना होगा। यह नियम काउंटर से लिए गए टिकट समेत सभी प्रकार के टिकटों पर लागू होगा। अधिकारी ने बताया कि फोटो पहचान पत्र रखने को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
अधिकारियों ने कहा, हस्तांतरित टिकटों पर यात्रा करने वाले लोगों पर लगाम लगाने के वास्ते इस तरह के उपायों को अपनाया जा रहा है। गौरतलब है कि रेलवे ने इस साल फरवरी से एसी श्रेणी में सफर करने वाले यात्रियों के लिए पहचान पत्र साथ रखना अनिवार्य कर दिया है। इसके अलावा रेलवे ने तत्काल टिकट अथवा ई-टिकट के साथ सफर करने वाले यात्रियों के लिए भी पहचान पत्र रखना अनिवार्य कर दिया है।टिप्पणियां
अधिकारी ने कहा, फिलहाल गैर-एसी यात्रियों के लिए फोटो पहचान पत्र रखना जरूरी नहीं है। अब इसके दायरे को बढ़ाया जा रहा है। अब आरक्षित श्रेणी में यात्रा करने वाले सभी ट्रेन यात्रियों के लिए वैध पहचान पत्र रखना जरूरी हो जाएगा।
इसकी घोषणा हो जाने के बाद शयनयान श्रेणी में यात्रा कर रहे यात्रियों को साथ में पहचान पत्र रखना अनिवार्य हो जाएगा और मांगे जाने पर इसे दिखाना होगा। ऐसा नहीं करने पर उन्हें बिना टिकट के माना जाएगा और जरूरी शुल्क देना होगा। यह नियम काउंटर से लिए गए टिकट समेत सभी प्रकार के टिकटों पर लागू होगा। अधिकारी ने बताया कि फोटो पहचान पत्र रखने को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
अधिकारी ने कहा, फिलहाल गैर-एसी यात्रियों के लिए फोटो पहचान पत्र रखना जरूरी नहीं है। अब इसके दायरे को बढ़ाया जा रहा है। अब आरक्षित श्रेणी में यात्रा करने वाले सभी ट्रेन यात्रियों के लिए वैध पहचान पत्र रखना जरूरी हो जाएगा।
इसकी घोषणा हो जाने के बाद शयनयान श्रेणी में यात्रा कर रहे यात्रियों को साथ में पहचान पत्र रखना अनिवार्य हो जाएगा और मांगे जाने पर इसे दिखाना होगा। ऐसा नहीं करने पर उन्हें बिना टिकट के माना जाएगा और जरूरी शुल्क देना होगा। यह नियम काउंटर से लिए गए टिकट समेत सभी प्रकार के टिकटों पर लागू होगा। अधिकारी ने बताया कि फोटो पहचान पत्र रखने को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
इसकी घोषणा हो जाने के बाद शयनयान श्रेणी में यात्रा कर रहे यात्रियों को साथ में पहचान पत्र रखना अनिवार्य हो जाएगा और मांगे जाने पर इसे दिखाना होगा। ऐसा नहीं करने पर उन्हें बिना टिकट के माना जाएगा और जरूरी शुल्क देना होगा। यह नियम काउंटर से लिए गए टिकट समेत सभी प्रकार के टिकटों पर लागू होगा। अधिकारी ने बताया कि फोटो पहचान पत्र रखने को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। | सारांश: टिकट दलालों पर लगाम लगाने के मकसद से रेल मंत्रालय जल्द ही गैर-एसी शयनयान श्रेणी में सफर करने वाले यात्रियों के लिए भी फोटो पहचान पत्र साथ रखना अनिवार्य करेगा। | 20 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: देश के शेयर बाजारों में मंगलवार को आई गिरावट के बाद आज शुरुआत तेजी में हुई. लिवाली समर्थन मिलने से बैंकिंग, पेट्रोलियम और रोजमर्रा के उपभोग के सामान बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में तेजी का रुख रहा. बंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 193 अंक चढ़ गया तो नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 9,800 अंक से ऊपर निकल गया.
बाजार सूत्रों के अनुसार अगस्त के वायदा एवं विकल्प सौदों के निपटान का दिन नजदीक आने से सटोरिये कारोबारी अपने बकाया सौदों को समेटने लगे हैं. अगस्त डेरिवेटिव सौदों का कल निपटान होना है. बंबई शेयर बाजार (बीएसई) का 30-शेयरों पर आधारित सेंसेक्स आज शुरुआती दौर में 193.39 अंक यानी 0.61 प्रतिशत बढ़कर 31,581.78 अंक पर पहुंच गया. मंगलवार को सेंसेक्स में भारी गिरावट आई थी. उत्तरी कोरिया के जापान के ऊपर से मिसाइल दागने से बढ़े भू-राजनीतिक तनाव के चलते कल वैश्विक बाजारों में गिरावट का रुख था.
पढ़ें: सेंसेक्स की टॉप-10 कंपनियों में से आठ का मार्केट कैप 54,968 करोड़ रुपये बढ़ाटिप्पणियां
बहरहाल, आज कारोबार के शुरुआती दौर में रीयल्टी, धातु, अवसंरचना और बैंकिंग क्षेत्र के शेयरों में 1.23 प्रतिशत तक तेजी रही. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी शुरुआती दौर में 75.20 अंक यानी 0.76 प्रतिशत चढ़कर 9,871.25 अंक पर पहुंच गया. एशियाई बाजारों में भी मंगलवार की गिरावट के बाद आज सुधार का रुख रहा. जापान का निक्केई सूचकांक 0.55 प्रतिशत ऊंचा रहा. हांग कांग का हेंग सेंग सूचकांक 0.79 प्रतिशत बढ़ गया जबकि शंघाई का कंपोजिट सूचकांक भी 0.05 प्रतिशत बढ़ गया. अमेरिका का डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज भी कल कारोबार की समाप्ति पर 0.26 प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ था.(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
बाजार सूत्रों के अनुसार अगस्त के वायदा एवं विकल्प सौदों के निपटान का दिन नजदीक आने से सटोरिये कारोबारी अपने बकाया सौदों को समेटने लगे हैं. अगस्त डेरिवेटिव सौदों का कल निपटान होना है. बंबई शेयर बाजार (बीएसई) का 30-शेयरों पर आधारित सेंसेक्स आज शुरुआती दौर में 193.39 अंक यानी 0.61 प्रतिशत बढ़कर 31,581.78 अंक पर पहुंच गया. मंगलवार को सेंसेक्स में भारी गिरावट आई थी. उत्तरी कोरिया के जापान के ऊपर से मिसाइल दागने से बढ़े भू-राजनीतिक तनाव के चलते कल वैश्विक बाजारों में गिरावट का रुख था.
पढ़ें: सेंसेक्स की टॉप-10 कंपनियों में से आठ का मार्केट कैप 54,968 करोड़ रुपये बढ़ाटिप्पणियां
बहरहाल, आज कारोबार के शुरुआती दौर में रीयल्टी, धातु, अवसंरचना और बैंकिंग क्षेत्र के शेयरों में 1.23 प्रतिशत तक तेजी रही. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी शुरुआती दौर में 75.20 अंक यानी 0.76 प्रतिशत चढ़कर 9,871.25 अंक पर पहुंच गया. एशियाई बाजारों में भी मंगलवार की गिरावट के बाद आज सुधार का रुख रहा. जापान का निक्केई सूचकांक 0.55 प्रतिशत ऊंचा रहा. हांग कांग का हेंग सेंग सूचकांक 0.79 प्रतिशत बढ़ गया जबकि शंघाई का कंपोजिट सूचकांक भी 0.05 प्रतिशत बढ़ गया. अमेरिका का डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज भी कल कारोबार की समाप्ति पर 0.26 प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ था.(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
पढ़ें: सेंसेक्स की टॉप-10 कंपनियों में से आठ का मार्केट कैप 54,968 करोड़ रुपये बढ़ाटिप्पणियां
बहरहाल, आज कारोबार के शुरुआती दौर में रीयल्टी, धातु, अवसंरचना और बैंकिंग क्षेत्र के शेयरों में 1.23 प्रतिशत तक तेजी रही. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी शुरुआती दौर में 75.20 अंक यानी 0.76 प्रतिशत चढ़कर 9,871.25 अंक पर पहुंच गया. एशियाई बाजारों में भी मंगलवार की गिरावट के बाद आज सुधार का रुख रहा. जापान का निक्केई सूचकांक 0.55 प्रतिशत ऊंचा रहा. हांग कांग का हेंग सेंग सूचकांक 0.79 प्रतिशत बढ़ गया जबकि शंघाई का कंपोजिट सूचकांक भी 0.05 प्रतिशत बढ़ गया. अमेरिका का डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज भी कल कारोबार की समाप्ति पर 0.26 प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ था.(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
बहरहाल, आज कारोबार के शुरुआती दौर में रीयल्टी, धातु, अवसंरचना और बैंकिंग क्षेत्र के शेयरों में 1.23 प्रतिशत तक तेजी रही. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी शुरुआती दौर में 75.20 अंक यानी 0.76 प्रतिशत चढ़कर 9,871.25 अंक पर पहुंच गया. एशियाई बाजारों में भी मंगलवार की गिरावट के बाद आज सुधार का रुख रहा. जापान का निक्केई सूचकांक 0.55 प्रतिशत ऊंचा रहा. हांग कांग का हेंग सेंग सूचकांक 0.79 प्रतिशत बढ़ गया जबकि शंघाई का कंपोजिट सूचकांक भी 0.05 प्रतिशत बढ़ गया. अमेरिका का डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज भी कल कारोबार की समाप्ति पर 0.26 प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ था.(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) | संक्षिप्त पाठ: बैंकिंग और पेट्रोलियम के शेयर चढ़े
निफ्टी भी 9800 से ऊपर निकल गया
मंगलवार को सेंसेक्स में भारी गिरावट आई थी | 30 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: पश्चिम बंगाल को अब अंग्रेज़ी और हिन्दी में 'बैन्गॉल' और 'बंगाल' कहा जाएगा और इसे बंगाली भाषा में 'बांग्ला' कहा जाएगा, अगर केंद्र ने राज्य के इस संदर्भ में भेजे जाने वाले प्रस्ताव को मंजूरी दे दी. राज्य विधानसभा में नाम परिवर्तन के इस प्रस्ताव को सोमवार को मंजूरी दे दी गई, हालांकि विपक्षी वामदलों, कांग्रेस तथा बीजेपी ने वॉकआउट किया.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पत्रकारों से कहा, "जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं, उन्हें इतिहास कभी क्षमा नहीं करेगा... आज ऐतिहासिक दिन है, और इसे सुनहरे अक्षरों में लिखकर रखा जाएगा..."
विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री के सदन में दिए गए भाषण के दौरान ही बहस छिड़ जाने के बाद वॉकआउट कर दिया था. ममता बनर्जी ने कहा, "वामदलों ने भी नाम परिवर्तन की कोशिश की थी, लेकिन नाकाम रहे थे... अब वही इसका विरोध कर रहे हैं..."
अब नए नाम की वजह से राज्यों की सूची में बंगाल काफी ऊपर पहुंच जाएगा, जो अंग्रेज़ी की वर्णमाला के क्रम के अनुसार बनाई जाती है. मुख्यमंत्री कई बार इस बात की शिकायत कर चुकी हैं कि अंतरराज्यीय बैठकों में उन्हें कभी-कभार ही बोलने का मौका मिल पाता है, क्योंकि 29 नामों वाली सूची में उनके राज्य का नाम अंत में होता है.
बांग्ला भाषा में राज्य के नाम पर सरकार में 'बंग' (जिसे संगीत उपकरण Bongo की तरह उच्चारित किया जाए) तथा 'बांग्ला' (जो स्थानीय खराब के लिए प्रयोग होने वाला शब्द है) के बीच मतभेद था, लेकिन ममता बनर्जी ने बताया, "'बांग्ला' आराम से जीत गया..."
वैसे, इस समय राज्य को बांग्ला में 'पश्चिम बंग' कहकर पुकारा जाता है. वर्ष 2001 में बुद्धदेब भट्टाचार्य के नेतृत्व वाली वाम सरकार ने भी राज्य का नाम 'पश्चिमबंग' किए जाने का प्रस्ताव पारित कर दिया था. केंद्र में तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने उस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया था, हालांकि उस वक्त राजधानी नगर का नाम कलकत्ता से बदलकर कोलकाता कर दिया गया था.टिप्पणियां
दरअसल, वर्ष 1947 में आज़ादी के समय बंगाल का बंटवारा हो गया था, जिससे पश्चिम बंगाल यहां भारत का हिस्सा बना रह गया, और पूर्वी बंगाल उस नए देश का हिस्सा बना, जिसे आज बांग्लादेश कहा जाता है.
इस नाम परिवर्तन से जुड़ी एक दिलचस्प बात दिवंगत लेखक सुनील गंगोपाध्याय ने कही थी, "जब कोई पूर्वी बंगाल ही नहीं बचा है, तो पश्चिम बंगाल कैसे हो सकता है...?"
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पत्रकारों से कहा, "जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं, उन्हें इतिहास कभी क्षमा नहीं करेगा... आज ऐतिहासिक दिन है, और इसे सुनहरे अक्षरों में लिखकर रखा जाएगा..."
विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री के सदन में दिए गए भाषण के दौरान ही बहस छिड़ जाने के बाद वॉकआउट कर दिया था. ममता बनर्जी ने कहा, "वामदलों ने भी नाम परिवर्तन की कोशिश की थी, लेकिन नाकाम रहे थे... अब वही इसका विरोध कर रहे हैं..."
अब नए नाम की वजह से राज्यों की सूची में बंगाल काफी ऊपर पहुंच जाएगा, जो अंग्रेज़ी की वर्णमाला के क्रम के अनुसार बनाई जाती है. मुख्यमंत्री कई बार इस बात की शिकायत कर चुकी हैं कि अंतरराज्यीय बैठकों में उन्हें कभी-कभार ही बोलने का मौका मिल पाता है, क्योंकि 29 नामों वाली सूची में उनके राज्य का नाम अंत में होता है.
बांग्ला भाषा में राज्य के नाम पर सरकार में 'बंग' (जिसे संगीत उपकरण Bongo की तरह उच्चारित किया जाए) तथा 'बांग्ला' (जो स्थानीय खराब के लिए प्रयोग होने वाला शब्द है) के बीच मतभेद था, लेकिन ममता बनर्जी ने बताया, "'बांग्ला' आराम से जीत गया..."
वैसे, इस समय राज्य को बांग्ला में 'पश्चिम बंग' कहकर पुकारा जाता है. वर्ष 2001 में बुद्धदेब भट्टाचार्य के नेतृत्व वाली वाम सरकार ने भी राज्य का नाम 'पश्चिमबंग' किए जाने का प्रस्ताव पारित कर दिया था. केंद्र में तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने उस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया था, हालांकि उस वक्त राजधानी नगर का नाम कलकत्ता से बदलकर कोलकाता कर दिया गया था.टिप्पणियां
दरअसल, वर्ष 1947 में आज़ादी के समय बंगाल का बंटवारा हो गया था, जिससे पश्चिम बंगाल यहां भारत का हिस्सा बना रह गया, और पूर्वी बंगाल उस नए देश का हिस्सा बना, जिसे आज बांग्लादेश कहा जाता है.
इस नाम परिवर्तन से जुड़ी एक दिलचस्प बात दिवंगत लेखक सुनील गंगोपाध्याय ने कही थी, "जब कोई पूर्वी बंगाल ही नहीं बचा है, तो पश्चिम बंगाल कैसे हो सकता है...?"
विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री के सदन में दिए गए भाषण के दौरान ही बहस छिड़ जाने के बाद वॉकआउट कर दिया था. ममता बनर्जी ने कहा, "वामदलों ने भी नाम परिवर्तन की कोशिश की थी, लेकिन नाकाम रहे थे... अब वही इसका विरोध कर रहे हैं..."
अब नए नाम की वजह से राज्यों की सूची में बंगाल काफी ऊपर पहुंच जाएगा, जो अंग्रेज़ी की वर्णमाला के क्रम के अनुसार बनाई जाती है. मुख्यमंत्री कई बार इस बात की शिकायत कर चुकी हैं कि अंतरराज्यीय बैठकों में उन्हें कभी-कभार ही बोलने का मौका मिल पाता है, क्योंकि 29 नामों वाली सूची में उनके राज्य का नाम अंत में होता है.
बांग्ला भाषा में राज्य के नाम पर सरकार में 'बंग' (जिसे संगीत उपकरण Bongo की तरह उच्चारित किया जाए) तथा 'बांग्ला' (जो स्थानीय खराब के लिए प्रयोग होने वाला शब्द है) के बीच मतभेद था, लेकिन ममता बनर्जी ने बताया, "'बांग्ला' आराम से जीत गया..."
वैसे, इस समय राज्य को बांग्ला में 'पश्चिम बंग' कहकर पुकारा जाता है. वर्ष 2001 में बुद्धदेब भट्टाचार्य के नेतृत्व वाली वाम सरकार ने भी राज्य का नाम 'पश्चिमबंग' किए जाने का प्रस्ताव पारित कर दिया था. केंद्र में तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने उस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया था, हालांकि उस वक्त राजधानी नगर का नाम कलकत्ता से बदलकर कोलकाता कर दिया गया था.टिप्पणियां
दरअसल, वर्ष 1947 में आज़ादी के समय बंगाल का बंटवारा हो गया था, जिससे पश्चिम बंगाल यहां भारत का हिस्सा बना रह गया, और पूर्वी बंगाल उस नए देश का हिस्सा बना, जिसे आज बांग्लादेश कहा जाता है.
इस नाम परिवर्तन से जुड़ी एक दिलचस्प बात दिवंगत लेखक सुनील गंगोपाध्याय ने कही थी, "जब कोई पूर्वी बंगाल ही नहीं बचा है, तो पश्चिम बंगाल कैसे हो सकता है...?"
अब नए नाम की वजह से राज्यों की सूची में बंगाल काफी ऊपर पहुंच जाएगा, जो अंग्रेज़ी की वर्णमाला के क्रम के अनुसार बनाई जाती है. मुख्यमंत्री कई बार इस बात की शिकायत कर चुकी हैं कि अंतरराज्यीय बैठकों में उन्हें कभी-कभार ही बोलने का मौका मिल पाता है, क्योंकि 29 नामों वाली सूची में उनके राज्य का नाम अंत में होता है.
बांग्ला भाषा में राज्य के नाम पर सरकार में 'बंग' (जिसे संगीत उपकरण Bongo की तरह उच्चारित किया जाए) तथा 'बांग्ला' (जो स्थानीय खराब के लिए प्रयोग होने वाला शब्द है) के बीच मतभेद था, लेकिन ममता बनर्जी ने बताया, "'बांग्ला' आराम से जीत गया..."
वैसे, इस समय राज्य को बांग्ला में 'पश्चिम बंग' कहकर पुकारा जाता है. वर्ष 2001 में बुद्धदेब भट्टाचार्य के नेतृत्व वाली वाम सरकार ने भी राज्य का नाम 'पश्चिमबंग' किए जाने का प्रस्ताव पारित कर दिया था. केंद्र में तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने उस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया था, हालांकि उस वक्त राजधानी नगर का नाम कलकत्ता से बदलकर कोलकाता कर दिया गया था.टिप्पणियां
दरअसल, वर्ष 1947 में आज़ादी के समय बंगाल का बंटवारा हो गया था, जिससे पश्चिम बंगाल यहां भारत का हिस्सा बना रह गया, और पूर्वी बंगाल उस नए देश का हिस्सा बना, जिसे आज बांग्लादेश कहा जाता है.
इस नाम परिवर्तन से जुड़ी एक दिलचस्प बात दिवंगत लेखक सुनील गंगोपाध्याय ने कही थी, "जब कोई पूर्वी बंगाल ही नहीं बचा है, तो पश्चिम बंगाल कैसे हो सकता है...?"
बांग्ला भाषा में राज्य के नाम पर सरकार में 'बंग' (जिसे संगीत उपकरण Bongo की तरह उच्चारित किया जाए) तथा 'बांग्ला' (जो स्थानीय खराब के लिए प्रयोग होने वाला शब्द है) के बीच मतभेद था, लेकिन ममता बनर्जी ने बताया, "'बांग्ला' आराम से जीत गया..."
वैसे, इस समय राज्य को बांग्ला में 'पश्चिम बंग' कहकर पुकारा जाता है. वर्ष 2001 में बुद्धदेब भट्टाचार्य के नेतृत्व वाली वाम सरकार ने भी राज्य का नाम 'पश्चिमबंग' किए जाने का प्रस्ताव पारित कर दिया था. केंद्र में तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने उस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया था, हालांकि उस वक्त राजधानी नगर का नाम कलकत्ता से बदलकर कोलकाता कर दिया गया था.टिप्पणियां
दरअसल, वर्ष 1947 में आज़ादी के समय बंगाल का बंटवारा हो गया था, जिससे पश्चिम बंगाल यहां भारत का हिस्सा बना रह गया, और पूर्वी बंगाल उस नए देश का हिस्सा बना, जिसे आज बांग्लादेश कहा जाता है.
इस नाम परिवर्तन से जुड़ी एक दिलचस्प बात दिवंगत लेखक सुनील गंगोपाध्याय ने कही थी, "जब कोई पूर्वी बंगाल ही नहीं बचा है, तो पश्चिम बंगाल कैसे हो सकता है...?"
वैसे, इस समय राज्य को बांग्ला में 'पश्चिम बंग' कहकर पुकारा जाता है. वर्ष 2001 में बुद्धदेब भट्टाचार्य के नेतृत्व वाली वाम सरकार ने भी राज्य का नाम 'पश्चिमबंग' किए जाने का प्रस्ताव पारित कर दिया था. केंद्र में तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने उस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया था, हालांकि उस वक्त राजधानी नगर का नाम कलकत्ता से बदलकर कोलकाता कर दिया गया था.टिप्पणियां
दरअसल, वर्ष 1947 में आज़ादी के समय बंगाल का बंटवारा हो गया था, जिससे पश्चिम बंगाल यहां भारत का हिस्सा बना रह गया, और पूर्वी बंगाल उस नए देश का हिस्सा बना, जिसे आज बांग्लादेश कहा जाता है.
इस नाम परिवर्तन से जुड़ी एक दिलचस्प बात दिवंगत लेखक सुनील गंगोपाध्याय ने कही थी, "जब कोई पूर्वी बंगाल ही नहीं बचा है, तो पश्चिम बंगाल कैसे हो सकता है...?"
दरअसल, वर्ष 1947 में आज़ादी के समय बंगाल का बंटवारा हो गया था, जिससे पश्चिम बंगाल यहां भारत का हिस्सा बना रह गया, और पूर्वी बंगाल उस नए देश का हिस्सा बना, जिसे आज बांग्लादेश कहा जाता है.
इस नाम परिवर्तन से जुड़ी एक दिलचस्प बात दिवंगत लेखक सुनील गंगोपाध्याय ने कही थी, "जब कोई पूर्वी बंगाल ही नहीं बचा है, तो पश्चिम बंगाल कैसे हो सकता है...?"
इस नाम परिवर्तन से जुड़ी एक दिलचस्प बात दिवंगत लेखक सुनील गंगोपाध्याय ने कही थी, "जब कोई पूर्वी बंगाल ही नहीं बचा है, तो पश्चिम बंगाल कैसे हो सकता है...?" | पश्चिम बंगाल विधानसभा ने पारित किया राज्य का नाम बदलने का प्रस्ताव
अंग्रेज़ी में बैन्गॉल, हिन्दी में बंगाल, बंगाली भाषा में बांग्ला कहेंगे
अंग्रेज़ी वर्णमाला के आधार पर बनी सूची में नाम को ऊपर लाना भी वजह | 26 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: अगर आप मोटरसाइकिल की सवारी करना चाहते हैं और इसमें आर्थिक संकट आड़े आ रहा है तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है, बस इसके लिए आपको 25 से ज्यादा लोगों की नसबंदी करानी होगी। ऐसा करने में सफल रहे तो आपके लिए मोटरसाइकिल की सवारी भी आसान हो जाएगी। मध्य प्रदेश सरकार वर्ष 2010-11 को परिवार कल्याण वर्ष के रूप मे मना रही है। इसी के चलते हर जिले को कुछ लक्ष्य दिए गए हैं। सरकार द्वारा तय लक्ष्य हासिल करना जिला प्रशासन के लिए मुसीबत बन गया है, इसीलिए हर जिले में इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कई लुभावनी योजनाएं बनाई गई हैं। कहीं बंदूक के लाइसेंस दिए जा रहे हैं तो कहीं मोटरसाइकिल और कपड़े बांटे जा रहे हैं। पन्ना जिले में भी एक मार्च से छह मार्च तक नसबंदी का महा अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के दौरान ज्यादा से ज्यादा ऑपरेशन कराने को प्रोत्साहित करने के लिए जिला प्रशासन ने लुभावनी योजना बनाई है। इसके मुताबिक 25 से ज्यादा लोगों के ऑपरेशन कराने वाले को मुफ्त में हीरो होंडा मोटरसाइकिल दी जाएगी। इसी तरह 20 से ज्यादा लोगों के लिए एलसीडी टीवी, 10 से ज्यादा पर टीवी, पांच से ज्यादा पर प्रशस्ति पत्र व शाल, श्रीफल दिया जाएगा। इस योजना में हितग्राहियों का भी ध्यान रखा गया है, उनको भी इनाम दिए जाएगें। इसके लिए छह मार्च के बाद प्रत्येक विकास खंड में लाटरी के जरिए पांच-पांच विजेताओं को प्रेशर कुकर दिए जाएंगे। पन्ना के कलेक्टर के. सी. जैन ने आईएएनएस से चर्चा के दौरान कहा है कि यह योजना नसबंदी के प्रति लोगो में प्रोत्साहन लाने के लिए बनाई गई है। वह इन कोशिशों की वजह सरकार द्वारा तय किए गए लक्ष्य को हासिल करने में आ रही कठिनाईयों को मानने को तैयार नही हैं। यहां हम आपको बता दें कि पन्ना जिले में 10750 लोगों की नसबंदी का लक्ष्य दिया गया है, मगर अभी तक 8500 ऑपरेशन ही हुए हैं। जिला लक्ष्य हासिल करने से अभी लगभग 20 प्रतिशत दूर है। प्रदेश में नसबंदी को प्रोत्साहित करने की यह पहली पुरस्कार योजना नहीं है, भोपाल में भी प्रोत्साहन पुरस्कार का एलान किए जाने के साथ हितग्राहियों को कपड़े भी दिए जा रहे हैं। इसी तरह सागर के कलेक्टर मनीष श्रीवास्तव ने पांच नसबंदी ऑपरेशन कराने वाले को बंदूक का लाइसेंस देने में प्राथमिकता देने की योजना शुरू की है। | सारांश: मध्य प्रदेश सरकार वर्ष 2010-11 को परिवार कल्याण वर्ष के रूप मे मना रही है। इसी के चलते हर जिले को कुछ लक्ष्य दिए गए हैं। | 31 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी अगले हफ्ते मुजफ्फरनगर के हिंसाग्रस्त क्षेत्रों का दौरा करके वहां पीड़ित लोगों से मुलाकात करेंगे।
कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी मधुसूदन मिस्त्री ने सोनभद्र में संवाददाताओं को बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी अगले हफ्ते मुजफ्फरनगर के हिंसाग्रस्त क्षेत्रों का दौरा कर वहां हो रहे राहतकार्यों की जानकारी लेंगे।टिप्पणियां
मिस्त्री ने मुजफ्फरनगर दंगों को अफसोसजनक बताते हुए कहा कि इसके लिए जो भी दोषी हो वह चाहे किसी भी दल का हो, उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि दंगा भड़काने वाले लोगों को जनसेवक अथवा राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता के रूप में किसी भी प्रकार की छूट नहीं दी जा सकती।
कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी मधुसूदन मिस्त्री ने सोनभद्र में संवाददाताओं को बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी अगले हफ्ते मुजफ्फरनगर के हिंसाग्रस्त क्षेत्रों का दौरा कर वहां हो रहे राहतकार्यों की जानकारी लेंगे।टिप्पणियां
मिस्त्री ने मुजफ्फरनगर दंगों को अफसोसजनक बताते हुए कहा कि इसके लिए जो भी दोषी हो वह चाहे किसी भी दल का हो, उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि दंगा भड़काने वाले लोगों को जनसेवक अथवा राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता के रूप में किसी भी प्रकार की छूट नहीं दी जा सकती।
मिस्त्री ने मुजफ्फरनगर दंगों को अफसोसजनक बताते हुए कहा कि इसके लिए जो भी दोषी हो वह चाहे किसी भी दल का हो, उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि दंगा भड़काने वाले लोगों को जनसेवक अथवा राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता के रूप में किसी भी प्रकार की छूट नहीं दी जा सकती।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि दंगा भड़काने वाले लोगों को जनसेवक अथवा राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता के रूप में किसी भी प्रकार की छूट नहीं दी जा सकती। | यह एक सारांश है: कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी अगले हफ्ते मुजफ्फरनगर के हिंसाग्रस्त क्षेत्रों का दौरा करके वहां पीड़ित लोगों से मुलाकात करेंगे। | 9 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने सीरिया में अत्याचार का सामना कर रहे जातीय तथा धार्मिक अल्पसंख्यकों की रक्षा के लिए और मानवीय सहायता को आगे बढ़ाने जैसे कार्यों के लिए पांच करोड़ डॉलर की राशि जारी की है. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव स्टेफनी ग्रिशम ने बताया कि यह धनराशि सीरिया में मानवाधिकार रक्षकों, नागरिक संगठनों तथा ऐसे पुनर्वास कार्यक्रमों को आर्थिक सहायता मुहैया कराएगी जो हिंसा से पीड़ित जातीय तथा धार्मिक अल्पसंख्यकों की सीधे तौर पर मदद कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि इस राशि का प्रयोग जिम्मेदारी बढ़ाना, युद्ध से बचे विस्फोटक हटाना, समुदाय की सुरक्षा, मानवाधिकार हनन के मामलों को दर्ज करना, लिंग आधारित हिंसा और प्रताड़ना के शिकार लोगों की मदद करने जैसे कामों में भी किया जाएगा.
ग्रिशम ने कहा, ‘‘हम उम्मीद करते हैं कि क्षेत्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोगी भी अपना योगदान जारी रखेंगे. जातीय तथा धार्मिक सुरक्षा और आजादी इस प्रशासन की प्राथमिकता है.'' | यह एक सारांश है: अमेरिका के राष्ट्रपति ने सीरिया को दिए 5 करोड़ डॉलर
हिंसा से पीड़ितों की मदद के लिए उठाया कदम
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव ने दी जानकारी | 2 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य के पूर्वी शहर गोमा में एक यात्री विमान के लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से हुए हादसे में कम से कम 36 लोग मारे गए।
समाचार एजेंसी आरआईए नावोस्ती के अनुसार, स्थानीय कम्पनी सीएए के यात्री विमान ने कांगो के मुख्य शहर लोड्जा से उड़ान भरी थी और गोमा में उतरने के पहले उसे बारिश का सामना करना पड़ा था।टिप्पणियां
अल जजीरा के मुताबिक, हादसे में घायल तीन लोगों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस बात का खुलासा नहीं हुआ है कि विमान में कितने यात्री सवार थे।
कांगो की कमजोर हवाई सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए यूरोपीय संघ और यूरोपीय एयरस्पेस ने लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो की तकरीबन 50 एयरलाइंस को काली सूची में शामिल किया है।
समाचार एजेंसी आरआईए नावोस्ती के अनुसार, स्थानीय कम्पनी सीएए के यात्री विमान ने कांगो के मुख्य शहर लोड्जा से उड़ान भरी थी और गोमा में उतरने के पहले उसे बारिश का सामना करना पड़ा था।टिप्पणियां
अल जजीरा के मुताबिक, हादसे में घायल तीन लोगों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस बात का खुलासा नहीं हुआ है कि विमान में कितने यात्री सवार थे।
कांगो की कमजोर हवाई सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए यूरोपीय संघ और यूरोपीय एयरस्पेस ने लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो की तकरीबन 50 एयरलाइंस को काली सूची में शामिल किया है।
अल जजीरा के मुताबिक, हादसे में घायल तीन लोगों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस बात का खुलासा नहीं हुआ है कि विमान में कितने यात्री सवार थे।
कांगो की कमजोर हवाई सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए यूरोपीय संघ और यूरोपीय एयरस्पेस ने लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो की तकरीबन 50 एयरलाइंस को काली सूची में शामिल किया है।
कांगो की कमजोर हवाई सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए यूरोपीय संघ और यूरोपीय एयरस्पेस ने लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो की तकरीबन 50 एयरलाइंस को काली सूची में शामिल किया है। | संक्षिप्त पाठ: कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य के पूर्वी शहर गोमा में एक यात्री विमान के लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से हुए हादसे में कम से कम 36 लोग मारे गए। | 22 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: दुबई से कोझिकोड जाने वाली इंडिगो की फ्लाइट की मुंबई एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग करवाई गई। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, एक यात्री ने विमान में चालक दल और साथी यात्रियों के साथ अभद्र व्यवहार किया और वह इस दौरान हिंसक हो गया, जिसकी वजह से विमान की इमरजेंसी लैंडिंग करवानी पड़ी।
एयरलाइन ने स्टेटमेंट जारी कर कहा कि यात्री ने अचानक क्रू के साथ अभद्र व्यवहार शुरू कर दिया और खाना लाने के लिए इस्तेमाल होने वाली टेबल पर चढ़ गया। धीरे-धीरे उसका हंगामा बढ़ता गया।टिप्पणियां
चालक दल ने विनम्रता से हंगामा मचा रहे यात्री को खाना लाने की गाड़ी से उतरने का अनुरोध किया। वह उतरा और अचानक हिंसक हो गया। अब उसने साथी पैसेंजरों को परेशान करना शुरू कर दिया।
इसके बाद विमान के कैप्टन ने तुरंत एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क किया और ग्राउंड सिक्योरिटी स्टाफ को इससे संबंधित जानकारी दी। मुंबई में विमान की 9.15 मिनट पर लैंडिंग करवाई गई। इस शख्स को पुलिस को सौंप दिया गया।
एयरलाइन ने स्टेटमेंट जारी कर कहा कि यात्री ने अचानक क्रू के साथ अभद्र व्यवहार शुरू कर दिया और खाना लाने के लिए इस्तेमाल होने वाली टेबल पर चढ़ गया। धीरे-धीरे उसका हंगामा बढ़ता गया।टिप्पणियां
चालक दल ने विनम्रता से हंगामा मचा रहे यात्री को खाना लाने की गाड़ी से उतरने का अनुरोध किया। वह उतरा और अचानक हिंसक हो गया। अब उसने साथी पैसेंजरों को परेशान करना शुरू कर दिया।
इसके बाद विमान के कैप्टन ने तुरंत एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क किया और ग्राउंड सिक्योरिटी स्टाफ को इससे संबंधित जानकारी दी। मुंबई में विमान की 9.15 मिनट पर लैंडिंग करवाई गई। इस शख्स को पुलिस को सौंप दिया गया।
चालक दल ने विनम्रता से हंगामा मचा रहे यात्री को खाना लाने की गाड़ी से उतरने का अनुरोध किया। वह उतरा और अचानक हिंसक हो गया। अब उसने साथी पैसेंजरों को परेशान करना शुरू कर दिया।
इसके बाद विमान के कैप्टन ने तुरंत एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क किया और ग्राउंड सिक्योरिटी स्टाफ को इससे संबंधित जानकारी दी। मुंबई में विमान की 9.15 मिनट पर लैंडिंग करवाई गई। इस शख्स को पुलिस को सौंप दिया गया।
इसके बाद विमान के कैप्टन ने तुरंत एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क किया और ग्राउंड सिक्योरिटी स्टाफ को इससे संबंधित जानकारी दी। मुंबई में विमान की 9.15 मिनट पर लैंडिंग करवाई गई। इस शख्स को पुलिस को सौंप दिया गया। | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: खाना लाने वाली गाड़ी पर चढ़ गया यात्री
क्रू मेंबर्स और यात्रियों के साथ किया अभद्र व्यवहार
हंगामे कारण विमान को मुंबई में लैंड करवाना पड़ा | 25 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: क्रिकेट के मैदान पर अपना जलवा दिखाने के एक दिन बाद भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने अपना फुटबॉल कौशल भी दिखाया और मैत्री मैच के दौरान एक गोल भी दागा।
सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ चैम्पियन्स लीग टी-20 मैच में चेन्नई सुपरकिंग्स की जीत के दौरान 19 गेंद में 63 रन की पारी खेलने वाले धोनी ने यहां से लगभग 55 किमी दूर पूर्व उप मुख्यमंत्री सुदेश महतो के विधानसभा क्षेत्र सिली में 35 मिनट के मैत्री मैच में शिरकत की।टिप्पणियां
जेएससीए स्टेडियम में तिसारा परेरा के ओवर में पांच छक्के जड़ने वाले धोनी महतो के साथ मिलकर सिली स्टेडियम में स्थानीय फुटबॉल अकादमी की टीम के खिलाफ खेले। महतो ने कहा कि धोनी के प्रशंसक चाहते हैं कि वह अब एक ओवर में छह छक्के मारे।
उन्होंने कहा, प्रशंसकों ने उनसे मांग की है कि वह एक ओवर में छह छक्के मारे और धोनी ने कहा कि इंतजार करना पड़ेगा। धोनी और महतो ने एक-एक गोल दागा, जिससे उनकी टीम ने खचाखच भरे स्टेडियम में मैत्री मैच में विरोधी युवा टीम को 4-1 से शिकस्त दी।
सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ चैम्पियन्स लीग टी-20 मैच में चेन्नई सुपरकिंग्स की जीत के दौरान 19 गेंद में 63 रन की पारी खेलने वाले धोनी ने यहां से लगभग 55 किमी दूर पूर्व उप मुख्यमंत्री सुदेश महतो के विधानसभा क्षेत्र सिली में 35 मिनट के मैत्री मैच में शिरकत की।टिप्पणियां
जेएससीए स्टेडियम में तिसारा परेरा के ओवर में पांच छक्के जड़ने वाले धोनी महतो के साथ मिलकर सिली स्टेडियम में स्थानीय फुटबॉल अकादमी की टीम के खिलाफ खेले। महतो ने कहा कि धोनी के प्रशंसक चाहते हैं कि वह अब एक ओवर में छह छक्के मारे।
उन्होंने कहा, प्रशंसकों ने उनसे मांग की है कि वह एक ओवर में छह छक्के मारे और धोनी ने कहा कि इंतजार करना पड़ेगा। धोनी और महतो ने एक-एक गोल दागा, जिससे उनकी टीम ने खचाखच भरे स्टेडियम में मैत्री मैच में विरोधी युवा टीम को 4-1 से शिकस्त दी।
जेएससीए स्टेडियम में तिसारा परेरा के ओवर में पांच छक्के जड़ने वाले धोनी महतो के साथ मिलकर सिली स्टेडियम में स्थानीय फुटबॉल अकादमी की टीम के खिलाफ खेले। महतो ने कहा कि धोनी के प्रशंसक चाहते हैं कि वह अब एक ओवर में छह छक्के मारे।
उन्होंने कहा, प्रशंसकों ने उनसे मांग की है कि वह एक ओवर में छह छक्के मारे और धोनी ने कहा कि इंतजार करना पड़ेगा। धोनी और महतो ने एक-एक गोल दागा, जिससे उनकी टीम ने खचाखच भरे स्टेडियम में मैत्री मैच में विरोधी युवा टीम को 4-1 से शिकस्त दी।
उन्होंने कहा, प्रशंसकों ने उनसे मांग की है कि वह एक ओवर में छह छक्के मारे और धोनी ने कहा कि इंतजार करना पड़ेगा। धोनी और महतो ने एक-एक गोल दागा, जिससे उनकी टीम ने खचाखच भरे स्टेडियम में मैत्री मैच में विरोधी युवा टीम को 4-1 से शिकस्त दी। | यहाँ एक सारांश है:क्रिकेट के मैदान पर अपना जलवा दिखाने के एक दिन बाद भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने अपना फुटबॉल कौशल भी दिखाया और मैत्री मैच के दौरान एक गोल भी दागा। | 15 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के इशारे पर बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी के ख़िलाफ़ पार्टी के भीतर से प्रचार चल रहा है। यह आरोप आरएसएस के वरिष्ठ नेता एमजी वैद्य ने अपने ब्लॉग में लगाया है।
वैद्य के मुताबिक मोदी प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं और उन्हें लगता है कि गडकरी उन्हें यह हसरत पूरी नहीं करने देंगे। वैद्य ने लिखा है कि आडवाणी और गडकरी प्रधानमंत्री होने के लिए मना कर चुके हैं जबकि मोदी ने यह बात नहीं कही है।
वैद्य का यह भी कहना है कि अगर राम जेठमलानी को कोई शिकायत है तो वह उन्हें पार्टी के भीतर रखनी चाहिए न कि सार्वजनिक करनी चाहिए। वैद्य यहीं नहीं रुकते उनका कहना है कि बीजेपी अभी अपने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का ऐलान न करे।
वहीं संघ ने वैद्य के इस बयान पर कहा है कि यह उनकी निजी राय है संघ की नहीं।
एमजी वैद्य ने जसवंत सिंह यशवंत सिन्हा और शत्रुघ्न सिन्हा को सलाह दी है कि अगर उन्हें इतनी नाराज़गी है तो वह महेश जेठमलानी की तरह पार्टी से इस्तीफा दे दें।
आरएसएस के वरिष्ठ नेता एमजी वैद्य नितिन गडकरी के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं और नरेंद्र मोदी को आड़े हाथों लिया है। वैद्य ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि नितिन गडकरी के खिलाफ मोदी कैंपेन चला रहे हैं। उनका तर्क है कि जब राम जेठमलानी ने बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी का इस्तीफा मांगा था तब उन्होंने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार बनाने की भी बात कही थी।
वैद्य का कहना है कि नरेंद्र मोदी को लगता है कि गडकरी उनके और प्रधानमंत्री पद के बीच रोड़ा बन सकते हैं। यही वजह है कि मोदी गडकरी को पार्टी के अध्यक्ष पद से हटाना चाहते हैं और इसके लिए राम जेठमलानी का सहारा ले रहे हैं।
ब्लॉग में वैद्य ने बीजेपी के सांसद राम जेठमलानी के सार्वजनिक रूप से गडकरी के खिलाफ बयानबाजी करने पर भी नाराजगी जताई है। उनके मुताबिक, अगर जेठमलानी को गडकरी से कोई शिकायत है तो वह पार्टी के मंच पर अपनी बात रख सकते थे। इसके लिए बाहर जाकर बयानबाज़ी करने की क्या ज़रूरत है।टिप्पणियां
बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने इस मसले पर एक बयान जारी किया है। इसमें कहा गया है कि मेरा ध्यान वरिष्ठ पत्रकार एमजी वैद्य के मराठी ब्लॉग की ओर दिलाया गया है। इस ब्लॉग का सार मीडिया के एक वर्ग में भी प्रकाशित किया गया है। लेखक ने हाल में पार्टी के एक सांसद की टिप्पणियों को नरेंद्र मोदी से जोड़ने की कोशिश की है।
बीजेपी ऐसी किसी भी कोशिश को पूरी तरह खारिज करती है, क्योंकि इसका कोई आधार नहीं है। पार्टी के सभी केंद्रीय नेता और मुख्यमंत्री पार्टी के लिए पूरी तरह मिलकर काम कर रहे हैं। हम गुजरात विधानसभा चुनाव पूरे आपसी विश्वास और एकता के साथ लड़ रहे हैं। बीजेपी पूरी तरह एक होकर मजबूती से नरेंद्र मोदी के साथ खड़ी है और हमें विश्वास है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में बीजेपी को शानदार जीत हासिल होगी।
वैद्य के मुताबिक मोदी प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं और उन्हें लगता है कि गडकरी उन्हें यह हसरत पूरी नहीं करने देंगे। वैद्य ने लिखा है कि आडवाणी और गडकरी प्रधानमंत्री होने के लिए मना कर चुके हैं जबकि मोदी ने यह बात नहीं कही है।
वैद्य का यह भी कहना है कि अगर राम जेठमलानी को कोई शिकायत है तो वह उन्हें पार्टी के भीतर रखनी चाहिए न कि सार्वजनिक करनी चाहिए। वैद्य यहीं नहीं रुकते उनका कहना है कि बीजेपी अभी अपने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का ऐलान न करे।
वहीं संघ ने वैद्य के इस बयान पर कहा है कि यह उनकी निजी राय है संघ की नहीं।
एमजी वैद्य ने जसवंत सिंह यशवंत सिन्हा और शत्रुघ्न सिन्हा को सलाह दी है कि अगर उन्हें इतनी नाराज़गी है तो वह महेश जेठमलानी की तरह पार्टी से इस्तीफा दे दें।
आरएसएस के वरिष्ठ नेता एमजी वैद्य नितिन गडकरी के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं और नरेंद्र मोदी को आड़े हाथों लिया है। वैद्य ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि नितिन गडकरी के खिलाफ मोदी कैंपेन चला रहे हैं। उनका तर्क है कि जब राम जेठमलानी ने बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी का इस्तीफा मांगा था तब उन्होंने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार बनाने की भी बात कही थी।
वैद्य का कहना है कि नरेंद्र मोदी को लगता है कि गडकरी उनके और प्रधानमंत्री पद के बीच रोड़ा बन सकते हैं। यही वजह है कि मोदी गडकरी को पार्टी के अध्यक्ष पद से हटाना चाहते हैं और इसके लिए राम जेठमलानी का सहारा ले रहे हैं।
ब्लॉग में वैद्य ने बीजेपी के सांसद राम जेठमलानी के सार्वजनिक रूप से गडकरी के खिलाफ बयानबाजी करने पर भी नाराजगी जताई है। उनके मुताबिक, अगर जेठमलानी को गडकरी से कोई शिकायत है तो वह पार्टी के मंच पर अपनी बात रख सकते थे। इसके लिए बाहर जाकर बयानबाज़ी करने की क्या ज़रूरत है।टिप्पणियां
बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने इस मसले पर एक बयान जारी किया है। इसमें कहा गया है कि मेरा ध्यान वरिष्ठ पत्रकार एमजी वैद्य के मराठी ब्लॉग की ओर दिलाया गया है। इस ब्लॉग का सार मीडिया के एक वर्ग में भी प्रकाशित किया गया है। लेखक ने हाल में पार्टी के एक सांसद की टिप्पणियों को नरेंद्र मोदी से जोड़ने की कोशिश की है।
बीजेपी ऐसी किसी भी कोशिश को पूरी तरह खारिज करती है, क्योंकि इसका कोई आधार नहीं है। पार्टी के सभी केंद्रीय नेता और मुख्यमंत्री पार्टी के लिए पूरी तरह मिलकर काम कर रहे हैं। हम गुजरात विधानसभा चुनाव पूरे आपसी विश्वास और एकता के साथ लड़ रहे हैं। बीजेपी पूरी तरह एक होकर मजबूती से नरेंद्र मोदी के साथ खड़ी है और हमें विश्वास है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में बीजेपी को शानदार जीत हासिल होगी।
वैद्य का यह भी कहना है कि अगर राम जेठमलानी को कोई शिकायत है तो वह उन्हें पार्टी के भीतर रखनी चाहिए न कि सार्वजनिक करनी चाहिए। वैद्य यहीं नहीं रुकते उनका कहना है कि बीजेपी अभी अपने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का ऐलान न करे।
वहीं संघ ने वैद्य के इस बयान पर कहा है कि यह उनकी निजी राय है संघ की नहीं।
एमजी वैद्य ने जसवंत सिंह यशवंत सिन्हा और शत्रुघ्न सिन्हा को सलाह दी है कि अगर उन्हें इतनी नाराज़गी है तो वह महेश जेठमलानी की तरह पार्टी से इस्तीफा दे दें।
आरएसएस के वरिष्ठ नेता एमजी वैद्य नितिन गडकरी के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं और नरेंद्र मोदी को आड़े हाथों लिया है। वैद्य ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि नितिन गडकरी के खिलाफ मोदी कैंपेन चला रहे हैं। उनका तर्क है कि जब राम जेठमलानी ने बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी का इस्तीफा मांगा था तब उन्होंने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार बनाने की भी बात कही थी।
वैद्य का कहना है कि नरेंद्र मोदी को लगता है कि गडकरी उनके और प्रधानमंत्री पद के बीच रोड़ा बन सकते हैं। यही वजह है कि मोदी गडकरी को पार्टी के अध्यक्ष पद से हटाना चाहते हैं और इसके लिए राम जेठमलानी का सहारा ले रहे हैं।
ब्लॉग में वैद्य ने बीजेपी के सांसद राम जेठमलानी के सार्वजनिक रूप से गडकरी के खिलाफ बयानबाजी करने पर भी नाराजगी जताई है। उनके मुताबिक, अगर जेठमलानी को गडकरी से कोई शिकायत है तो वह पार्टी के मंच पर अपनी बात रख सकते थे। इसके लिए बाहर जाकर बयानबाज़ी करने की क्या ज़रूरत है।टिप्पणियां
बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने इस मसले पर एक बयान जारी किया है। इसमें कहा गया है कि मेरा ध्यान वरिष्ठ पत्रकार एमजी वैद्य के मराठी ब्लॉग की ओर दिलाया गया है। इस ब्लॉग का सार मीडिया के एक वर्ग में भी प्रकाशित किया गया है। लेखक ने हाल में पार्टी के एक सांसद की टिप्पणियों को नरेंद्र मोदी से जोड़ने की कोशिश की है।
बीजेपी ऐसी किसी भी कोशिश को पूरी तरह खारिज करती है, क्योंकि इसका कोई आधार नहीं है। पार्टी के सभी केंद्रीय नेता और मुख्यमंत्री पार्टी के लिए पूरी तरह मिलकर काम कर रहे हैं। हम गुजरात विधानसभा चुनाव पूरे आपसी विश्वास और एकता के साथ लड़ रहे हैं। बीजेपी पूरी तरह एक होकर मजबूती से नरेंद्र मोदी के साथ खड़ी है और हमें विश्वास है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में बीजेपी को शानदार जीत हासिल होगी।
वहीं संघ ने वैद्य के इस बयान पर कहा है कि यह उनकी निजी राय है संघ की नहीं।
एमजी वैद्य ने जसवंत सिंह यशवंत सिन्हा और शत्रुघ्न सिन्हा को सलाह दी है कि अगर उन्हें इतनी नाराज़गी है तो वह महेश जेठमलानी की तरह पार्टी से इस्तीफा दे दें।
आरएसएस के वरिष्ठ नेता एमजी वैद्य नितिन गडकरी के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं और नरेंद्र मोदी को आड़े हाथों लिया है। वैद्य ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि नितिन गडकरी के खिलाफ मोदी कैंपेन चला रहे हैं। उनका तर्क है कि जब राम जेठमलानी ने बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी का इस्तीफा मांगा था तब उन्होंने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार बनाने की भी बात कही थी।
वैद्य का कहना है कि नरेंद्र मोदी को लगता है कि गडकरी उनके और प्रधानमंत्री पद के बीच रोड़ा बन सकते हैं। यही वजह है कि मोदी गडकरी को पार्टी के अध्यक्ष पद से हटाना चाहते हैं और इसके लिए राम जेठमलानी का सहारा ले रहे हैं।
ब्लॉग में वैद्य ने बीजेपी के सांसद राम जेठमलानी के सार्वजनिक रूप से गडकरी के खिलाफ बयानबाजी करने पर भी नाराजगी जताई है। उनके मुताबिक, अगर जेठमलानी को गडकरी से कोई शिकायत है तो वह पार्टी के मंच पर अपनी बात रख सकते थे। इसके लिए बाहर जाकर बयानबाज़ी करने की क्या ज़रूरत है।टिप्पणियां
बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने इस मसले पर एक बयान जारी किया है। इसमें कहा गया है कि मेरा ध्यान वरिष्ठ पत्रकार एमजी वैद्य के मराठी ब्लॉग की ओर दिलाया गया है। इस ब्लॉग का सार मीडिया के एक वर्ग में भी प्रकाशित किया गया है। लेखक ने हाल में पार्टी के एक सांसद की टिप्पणियों को नरेंद्र मोदी से जोड़ने की कोशिश की है।
बीजेपी ऐसी किसी भी कोशिश को पूरी तरह खारिज करती है, क्योंकि इसका कोई आधार नहीं है। पार्टी के सभी केंद्रीय नेता और मुख्यमंत्री पार्टी के लिए पूरी तरह मिलकर काम कर रहे हैं। हम गुजरात विधानसभा चुनाव पूरे आपसी विश्वास और एकता के साथ लड़ रहे हैं। बीजेपी पूरी तरह एक होकर मजबूती से नरेंद्र मोदी के साथ खड़ी है और हमें विश्वास है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में बीजेपी को शानदार जीत हासिल होगी।
एमजी वैद्य ने जसवंत सिंह यशवंत सिन्हा और शत्रुघ्न सिन्हा को सलाह दी है कि अगर उन्हें इतनी नाराज़गी है तो वह महेश जेठमलानी की तरह पार्टी से इस्तीफा दे दें।
आरएसएस के वरिष्ठ नेता एमजी वैद्य नितिन गडकरी के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं और नरेंद्र मोदी को आड़े हाथों लिया है। वैद्य ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि नितिन गडकरी के खिलाफ मोदी कैंपेन चला रहे हैं। उनका तर्क है कि जब राम जेठमलानी ने बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी का इस्तीफा मांगा था तब उन्होंने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार बनाने की भी बात कही थी।
वैद्य का कहना है कि नरेंद्र मोदी को लगता है कि गडकरी उनके और प्रधानमंत्री पद के बीच रोड़ा बन सकते हैं। यही वजह है कि मोदी गडकरी को पार्टी के अध्यक्ष पद से हटाना चाहते हैं और इसके लिए राम जेठमलानी का सहारा ले रहे हैं।
ब्लॉग में वैद्य ने बीजेपी के सांसद राम जेठमलानी के सार्वजनिक रूप से गडकरी के खिलाफ बयानबाजी करने पर भी नाराजगी जताई है। उनके मुताबिक, अगर जेठमलानी को गडकरी से कोई शिकायत है तो वह पार्टी के मंच पर अपनी बात रख सकते थे। इसके लिए बाहर जाकर बयानबाज़ी करने की क्या ज़रूरत है।टिप्पणियां
बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने इस मसले पर एक बयान जारी किया है। इसमें कहा गया है कि मेरा ध्यान वरिष्ठ पत्रकार एमजी वैद्य के मराठी ब्लॉग की ओर दिलाया गया है। इस ब्लॉग का सार मीडिया के एक वर्ग में भी प्रकाशित किया गया है। लेखक ने हाल में पार्टी के एक सांसद की टिप्पणियों को नरेंद्र मोदी से जोड़ने की कोशिश की है।
बीजेपी ऐसी किसी भी कोशिश को पूरी तरह खारिज करती है, क्योंकि इसका कोई आधार नहीं है। पार्टी के सभी केंद्रीय नेता और मुख्यमंत्री पार्टी के लिए पूरी तरह मिलकर काम कर रहे हैं। हम गुजरात विधानसभा चुनाव पूरे आपसी विश्वास और एकता के साथ लड़ रहे हैं। बीजेपी पूरी तरह एक होकर मजबूती से नरेंद्र मोदी के साथ खड़ी है और हमें विश्वास है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में बीजेपी को शानदार जीत हासिल होगी।
आरएसएस के वरिष्ठ नेता एमजी वैद्य नितिन गडकरी के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं और नरेंद्र मोदी को आड़े हाथों लिया है। वैद्य ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि नितिन गडकरी के खिलाफ मोदी कैंपेन चला रहे हैं। उनका तर्क है कि जब राम जेठमलानी ने बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी का इस्तीफा मांगा था तब उन्होंने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार बनाने की भी बात कही थी।
वैद्य का कहना है कि नरेंद्र मोदी को लगता है कि गडकरी उनके और प्रधानमंत्री पद के बीच रोड़ा बन सकते हैं। यही वजह है कि मोदी गडकरी को पार्टी के अध्यक्ष पद से हटाना चाहते हैं और इसके लिए राम जेठमलानी का सहारा ले रहे हैं।
ब्लॉग में वैद्य ने बीजेपी के सांसद राम जेठमलानी के सार्वजनिक रूप से गडकरी के खिलाफ बयानबाजी करने पर भी नाराजगी जताई है। उनके मुताबिक, अगर जेठमलानी को गडकरी से कोई शिकायत है तो वह पार्टी के मंच पर अपनी बात रख सकते थे। इसके लिए बाहर जाकर बयानबाज़ी करने की क्या ज़रूरत है।टिप्पणियां
बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने इस मसले पर एक बयान जारी किया है। इसमें कहा गया है कि मेरा ध्यान वरिष्ठ पत्रकार एमजी वैद्य के मराठी ब्लॉग की ओर दिलाया गया है। इस ब्लॉग का सार मीडिया के एक वर्ग में भी प्रकाशित किया गया है। लेखक ने हाल में पार्टी के एक सांसद की टिप्पणियों को नरेंद्र मोदी से जोड़ने की कोशिश की है।
बीजेपी ऐसी किसी भी कोशिश को पूरी तरह खारिज करती है, क्योंकि इसका कोई आधार नहीं है। पार्टी के सभी केंद्रीय नेता और मुख्यमंत्री पार्टी के लिए पूरी तरह मिलकर काम कर रहे हैं। हम गुजरात विधानसभा चुनाव पूरे आपसी विश्वास और एकता के साथ लड़ रहे हैं। बीजेपी पूरी तरह एक होकर मजबूती से नरेंद्र मोदी के साथ खड़ी है और हमें विश्वास है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में बीजेपी को शानदार जीत हासिल होगी।
वैद्य का कहना है कि नरेंद्र मोदी को लगता है कि गडकरी उनके और प्रधानमंत्री पद के बीच रोड़ा बन सकते हैं। यही वजह है कि मोदी गडकरी को पार्टी के अध्यक्ष पद से हटाना चाहते हैं और इसके लिए राम जेठमलानी का सहारा ले रहे हैं।
ब्लॉग में वैद्य ने बीजेपी के सांसद राम जेठमलानी के सार्वजनिक रूप से गडकरी के खिलाफ बयानबाजी करने पर भी नाराजगी जताई है। उनके मुताबिक, अगर जेठमलानी को गडकरी से कोई शिकायत है तो वह पार्टी के मंच पर अपनी बात रख सकते थे। इसके लिए बाहर जाकर बयानबाज़ी करने की क्या ज़रूरत है।टिप्पणियां
बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने इस मसले पर एक बयान जारी किया है। इसमें कहा गया है कि मेरा ध्यान वरिष्ठ पत्रकार एमजी वैद्य के मराठी ब्लॉग की ओर दिलाया गया है। इस ब्लॉग का सार मीडिया के एक वर्ग में भी प्रकाशित किया गया है। लेखक ने हाल में पार्टी के एक सांसद की टिप्पणियों को नरेंद्र मोदी से जोड़ने की कोशिश की है।
बीजेपी ऐसी किसी भी कोशिश को पूरी तरह खारिज करती है, क्योंकि इसका कोई आधार नहीं है। पार्टी के सभी केंद्रीय नेता और मुख्यमंत्री पार्टी के लिए पूरी तरह मिलकर काम कर रहे हैं। हम गुजरात विधानसभा चुनाव पूरे आपसी विश्वास और एकता के साथ लड़ रहे हैं। बीजेपी पूरी तरह एक होकर मजबूती से नरेंद्र मोदी के साथ खड़ी है और हमें विश्वास है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में बीजेपी को शानदार जीत हासिल होगी।
ब्लॉग में वैद्य ने बीजेपी के सांसद राम जेठमलानी के सार्वजनिक रूप से गडकरी के खिलाफ बयानबाजी करने पर भी नाराजगी जताई है। उनके मुताबिक, अगर जेठमलानी को गडकरी से कोई शिकायत है तो वह पार्टी के मंच पर अपनी बात रख सकते थे। इसके लिए बाहर जाकर बयानबाज़ी करने की क्या ज़रूरत है।टिप्पणियां
बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने इस मसले पर एक बयान जारी किया है। इसमें कहा गया है कि मेरा ध्यान वरिष्ठ पत्रकार एमजी वैद्य के मराठी ब्लॉग की ओर दिलाया गया है। इस ब्लॉग का सार मीडिया के एक वर्ग में भी प्रकाशित किया गया है। लेखक ने हाल में पार्टी के एक सांसद की टिप्पणियों को नरेंद्र मोदी से जोड़ने की कोशिश की है।
बीजेपी ऐसी किसी भी कोशिश को पूरी तरह खारिज करती है, क्योंकि इसका कोई आधार नहीं है। पार्टी के सभी केंद्रीय नेता और मुख्यमंत्री पार्टी के लिए पूरी तरह मिलकर काम कर रहे हैं। हम गुजरात विधानसभा चुनाव पूरे आपसी विश्वास और एकता के साथ लड़ रहे हैं। बीजेपी पूरी तरह एक होकर मजबूती से नरेंद्र मोदी के साथ खड़ी है और हमें विश्वास है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में बीजेपी को शानदार जीत हासिल होगी।
बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने इस मसले पर एक बयान जारी किया है। इसमें कहा गया है कि मेरा ध्यान वरिष्ठ पत्रकार एमजी वैद्य के मराठी ब्लॉग की ओर दिलाया गया है। इस ब्लॉग का सार मीडिया के एक वर्ग में भी प्रकाशित किया गया है। लेखक ने हाल में पार्टी के एक सांसद की टिप्पणियों को नरेंद्र मोदी से जोड़ने की कोशिश की है।
बीजेपी ऐसी किसी भी कोशिश को पूरी तरह खारिज करती है, क्योंकि इसका कोई आधार नहीं है। पार्टी के सभी केंद्रीय नेता और मुख्यमंत्री पार्टी के लिए पूरी तरह मिलकर काम कर रहे हैं। हम गुजरात विधानसभा चुनाव पूरे आपसी विश्वास और एकता के साथ लड़ रहे हैं। बीजेपी पूरी तरह एक होकर मजबूती से नरेंद्र मोदी के साथ खड़ी है और हमें विश्वास है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में बीजेपी को शानदार जीत हासिल होगी।
बीजेपी ऐसी किसी भी कोशिश को पूरी तरह खारिज करती है, क्योंकि इसका कोई आधार नहीं है। पार्टी के सभी केंद्रीय नेता और मुख्यमंत्री पार्टी के लिए पूरी तरह मिलकर काम कर रहे हैं। हम गुजरात विधानसभा चुनाव पूरे आपसी विश्वास और एकता के साथ लड़ रहे हैं। बीजेपी पूरी तरह एक होकर मजबूती से नरेंद्र मोदी के साथ खड़ी है और हमें विश्वास है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में बीजेपी को शानदार जीत हासिल होगी। | यह एक सारांश है: वैद्य का कहना है कि नरेंद्र मोदी को लगता है कि गडकरी उनके और प्रधानमंत्री पद के बीच रोड़ा बन सकते हैं। यही वजह है कि मोदी गडकरी को पार्टी के अध्यक्ष पद से हटाना चाहते हैं और इसके लिए राम जेठमलानी का सहारा ले रहे हैं। | 21 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: इंडियन प्रीमियर लीग में शुरू से ही दबदबा बनाए रखने वाली चेन्नई सुपरकिंग्स की टीम इस सत्र में मुंबई इंडियन्स से दोनों मैच गंवाने के बावजूद मंगलवार को फिरोजशाह कोटला में होने वाले पहले क्वालीफायर में बड़े मैचों के अपने अपार अनुभव के दम पर बदला चुकता करने की कोशिश करेगी।
स्पॉट फिक्सिंग के भंवर में फंसे आईपीएल का यह मैच यदि उम्मीद के मुताबिक रोमांचक होता है, तो इससे क्रिकेट प्रेमियों का ध्यान विवादों से इतर खेल पर भी केंद्रित होगा। दोनों टीमों का यह घरेलू मैदान नहीं है। उनके पास कई स्टार खिलाड़ी हैं और ऐसे में फाइनल में पहुंचने की इस पहली जंग में रणनीति के अनुसार खेलने वाली टीम की संभावना बढ़ जाएंगी।
चेन्नई और मुंबई दोनों ने ही लीग चरण में समान 22 अंक लेकर पहला क्वालीफायर खेलने का हक पाया। चेन्नई नेट रन रेट के आधार पर शीर्ष पर रहा, लेकिन इससे अब कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। पहले दो स्थान पर रहने के कारण चेन्नई और मुंबई दोनों को ही फाइनल में पहुंचने के दो मौके मिलेंगे। इन दोनों के बीच मुकाबले में मंगलवार को जो भी टीम जीतेगी, वह सीधे 26 मई को कोलकाता में होने वाले फाइनल में चली जाएगी, जबकि हारने वाली टीम एलिमिनेटर के विजेता के साथ 24 मई को दूसरा क्वालीफायर खेलेगी।
एलिमिनेटर राजस्थान रॉयल्स और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच 22 मई को खेला जाएगा। चेन्नई की टीम दो बार आईपीएल चैंपियन और दो बार उप विजेता रह चुकी है। मुंबई केवल एक बार 2010 में फाइनल में पहुंचा था, जहां उसे चेन्नई ने 22 रन से हरा दिया था। इस तरह से चेन्नई को बड़े मैचों में खेलने का अच्छा अनुभव है, लेकिन महेंद्र सिंह धोनी की टीम वर्तमान में केवल मुंबई के सामने फिसड्डी साबित हुई है।
आईपीएल में मुंबई एकमात्र ऐसी टीम है, जिसके खिलाफ चेन्नई का रिकॉर्ड नकारात्मक (13 मैच में आठ में मुंबई जीता है) रहा है। रोहित शर्मा की अगुवाई वाली मुंबई अपने इस प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ यह दबदबा बरकरार रखने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। वह अपनी पिछली जीत से भी प्रेरणा लेने की कोशिश करेगी, लेकिन उसके खिलाड़ी इस तथ्य से भी अच्छी तरह वाकिफ होंगे कि चेन्नई पलटवार करने में भी माहिर है।
मुंबई को स्टार बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर से फिर बड़ी पारी की उम्मीद होगी, जिन्होंने चेन्नई के खिलाफ हमेशा अच्छा प्रदर्शन किया है। तेंदुलकर ने चेन्नई के खिलाफ 12 मैचों में 368 रन बनाए हैं। उनके अलावा कप्तान रोहित शर्मा, विकेटकीपर बल्लेबाज दिनेश कार्तिक और कीरोन पोलार्ड पर मुंबई का काफी दारोमदार रहेगा।
चेन्नई की बल्लेबाजी इस सत्र में पूरी तरह से माइकल हसी, सुरेश रैना और धोनी के इर्द-गिर्द घूमती रही है। इन तीनों में से किन्हीं दो बल्लेबाजों को लसिथ मलिंगा, मिशेल जॉनसन, हरभजन सिंह और प्रज्ञान ओझा जैसे गेंदबाजों के सामने टिककर खेलना होगा। ओझा पिछले दोनों मैचों में चेन्नई के बल्लेबाजों के लिए अबूझ पहेली बने रहे और कोटला की स्पिनरों की मददगार पिच पर बाएं हाथ के इस स्पिनर से निबटना आसान नहीं होगा। ओझा ने इन दो मैचों में मिलाकर 27 रन देकर पांच विकेट लिए।टिप्पणियां
चेन्नई के लिए गेंदबाजी में इस बार ड्वेन ब्रावो ने अच्छा प्रदर्शन किया है। उनके नाम पर 16 मैचों में 25 विकेट दर्ज हैं। उनके अलावा मध्यम गति के गेंदबाज मोहित शर्मा और अनुभवी स्पिनर रविचंद्रन अश्विन पर भी दारोमदार रहेगा। चेन्नई ने इस बार कोटला में दिल्ली डेयरडेविल्स के खिलाफ जो मैच खेला था, उसमें मोहित और अश्विन ने जानदार प्रदर्शन करके अपनी टीम को 86 रन से जीत दिलाई थी।
दूसरी तरफ मुंबई को तेंदुलकर की अर्धशतकीय पारी के बावजूद कोटला में खेले गए मैच में हार का सामना करना पड़ा था। मुंबई को यहां की पिच पर रिकॉर्ड भी अच्छा नहीं है। उसने कोटला में जो पांच मैच खेले हैं, उनमें से तीन में उसे हार मिली। इसके विपरीत चेन्नई ने यहां चार मैचों में से तीन में जीत दर्ज की है। ये दोनों टीमें आईपीएल के नॉकआउट में अब तक दो बार आमने सामने रही हैं और दोनों अवसरों पर चेन्नई को जीत मिली। चेन्नई जहां इस सत्र की हार को दिल से लगाए बैठा है, वहीं मुंबई नॉकआउट की हार का हिसाब कोटला में पूरा करना चाहेगा। दोनों ही टीमें लीग चरण में अपना आखिरी मैच गंवाने के बाद यहां नए जोश और जज्बे के साथ उतरेंगी और संभावना है कि दर्शकों को रोमांचक मैच देखने को मिलेगा।
स्पॉट फिक्सिंग के भंवर में फंसे आईपीएल का यह मैच यदि उम्मीद के मुताबिक रोमांचक होता है, तो इससे क्रिकेट प्रेमियों का ध्यान विवादों से इतर खेल पर भी केंद्रित होगा। दोनों टीमों का यह घरेलू मैदान नहीं है। उनके पास कई स्टार खिलाड़ी हैं और ऐसे में फाइनल में पहुंचने की इस पहली जंग में रणनीति के अनुसार खेलने वाली टीम की संभावना बढ़ जाएंगी।
चेन्नई और मुंबई दोनों ने ही लीग चरण में समान 22 अंक लेकर पहला क्वालीफायर खेलने का हक पाया। चेन्नई नेट रन रेट के आधार पर शीर्ष पर रहा, लेकिन इससे अब कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। पहले दो स्थान पर रहने के कारण चेन्नई और मुंबई दोनों को ही फाइनल में पहुंचने के दो मौके मिलेंगे। इन दोनों के बीच मुकाबले में मंगलवार को जो भी टीम जीतेगी, वह सीधे 26 मई को कोलकाता में होने वाले फाइनल में चली जाएगी, जबकि हारने वाली टीम एलिमिनेटर के विजेता के साथ 24 मई को दूसरा क्वालीफायर खेलेगी।
एलिमिनेटर राजस्थान रॉयल्स और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच 22 मई को खेला जाएगा। चेन्नई की टीम दो बार आईपीएल चैंपियन और दो बार उप विजेता रह चुकी है। मुंबई केवल एक बार 2010 में फाइनल में पहुंचा था, जहां उसे चेन्नई ने 22 रन से हरा दिया था। इस तरह से चेन्नई को बड़े मैचों में खेलने का अच्छा अनुभव है, लेकिन महेंद्र सिंह धोनी की टीम वर्तमान में केवल मुंबई के सामने फिसड्डी साबित हुई है।
आईपीएल में मुंबई एकमात्र ऐसी टीम है, जिसके खिलाफ चेन्नई का रिकॉर्ड नकारात्मक (13 मैच में आठ में मुंबई जीता है) रहा है। रोहित शर्मा की अगुवाई वाली मुंबई अपने इस प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ यह दबदबा बरकरार रखने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। वह अपनी पिछली जीत से भी प्रेरणा लेने की कोशिश करेगी, लेकिन उसके खिलाड़ी इस तथ्य से भी अच्छी तरह वाकिफ होंगे कि चेन्नई पलटवार करने में भी माहिर है।
मुंबई को स्टार बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर से फिर बड़ी पारी की उम्मीद होगी, जिन्होंने चेन्नई के खिलाफ हमेशा अच्छा प्रदर्शन किया है। तेंदुलकर ने चेन्नई के खिलाफ 12 मैचों में 368 रन बनाए हैं। उनके अलावा कप्तान रोहित शर्मा, विकेटकीपर बल्लेबाज दिनेश कार्तिक और कीरोन पोलार्ड पर मुंबई का काफी दारोमदार रहेगा।
चेन्नई की बल्लेबाजी इस सत्र में पूरी तरह से माइकल हसी, सुरेश रैना और धोनी के इर्द-गिर्द घूमती रही है। इन तीनों में से किन्हीं दो बल्लेबाजों को लसिथ मलिंगा, मिशेल जॉनसन, हरभजन सिंह और प्रज्ञान ओझा जैसे गेंदबाजों के सामने टिककर खेलना होगा। ओझा पिछले दोनों मैचों में चेन्नई के बल्लेबाजों के लिए अबूझ पहेली बने रहे और कोटला की स्पिनरों की मददगार पिच पर बाएं हाथ के इस स्पिनर से निबटना आसान नहीं होगा। ओझा ने इन दो मैचों में मिलाकर 27 रन देकर पांच विकेट लिए।टिप्पणियां
चेन्नई के लिए गेंदबाजी में इस बार ड्वेन ब्रावो ने अच्छा प्रदर्शन किया है। उनके नाम पर 16 मैचों में 25 विकेट दर्ज हैं। उनके अलावा मध्यम गति के गेंदबाज मोहित शर्मा और अनुभवी स्पिनर रविचंद्रन अश्विन पर भी दारोमदार रहेगा। चेन्नई ने इस बार कोटला में दिल्ली डेयरडेविल्स के खिलाफ जो मैच खेला था, उसमें मोहित और अश्विन ने जानदार प्रदर्शन करके अपनी टीम को 86 रन से जीत दिलाई थी।
दूसरी तरफ मुंबई को तेंदुलकर की अर्धशतकीय पारी के बावजूद कोटला में खेले गए मैच में हार का सामना करना पड़ा था। मुंबई को यहां की पिच पर रिकॉर्ड भी अच्छा नहीं है। उसने कोटला में जो पांच मैच खेले हैं, उनमें से तीन में उसे हार मिली। इसके विपरीत चेन्नई ने यहां चार मैचों में से तीन में जीत दर्ज की है। ये दोनों टीमें आईपीएल के नॉकआउट में अब तक दो बार आमने सामने रही हैं और दोनों अवसरों पर चेन्नई को जीत मिली। चेन्नई जहां इस सत्र की हार को दिल से लगाए बैठा है, वहीं मुंबई नॉकआउट की हार का हिसाब कोटला में पूरा करना चाहेगा। दोनों ही टीमें लीग चरण में अपना आखिरी मैच गंवाने के बाद यहां नए जोश और जज्बे के साथ उतरेंगी और संभावना है कि दर्शकों को रोमांचक मैच देखने को मिलेगा।
चेन्नई और मुंबई दोनों ने ही लीग चरण में समान 22 अंक लेकर पहला क्वालीफायर खेलने का हक पाया। चेन्नई नेट रन रेट के आधार पर शीर्ष पर रहा, लेकिन इससे अब कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। पहले दो स्थान पर रहने के कारण चेन्नई और मुंबई दोनों को ही फाइनल में पहुंचने के दो मौके मिलेंगे। इन दोनों के बीच मुकाबले में मंगलवार को जो भी टीम जीतेगी, वह सीधे 26 मई को कोलकाता में होने वाले फाइनल में चली जाएगी, जबकि हारने वाली टीम एलिमिनेटर के विजेता के साथ 24 मई को दूसरा क्वालीफायर खेलेगी।
एलिमिनेटर राजस्थान रॉयल्स और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच 22 मई को खेला जाएगा। चेन्नई की टीम दो बार आईपीएल चैंपियन और दो बार उप विजेता रह चुकी है। मुंबई केवल एक बार 2010 में फाइनल में पहुंचा था, जहां उसे चेन्नई ने 22 रन से हरा दिया था। इस तरह से चेन्नई को बड़े मैचों में खेलने का अच्छा अनुभव है, लेकिन महेंद्र सिंह धोनी की टीम वर्तमान में केवल मुंबई के सामने फिसड्डी साबित हुई है।
आईपीएल में मुंबई एकमात्र ऐसी टीम है, जिसके खिलाफ चेन्नई का रिकॉर्ड नकारात्मक (13 मैच में आठ में मुंबई जीता है) रहा है। रोहित शर्मा की अगुवाई वाली मुंबई अपने इस प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ यह दबदबा बरकरार रखने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। वह अपनी पिछली जीत से भी प्रेरणा लेने की कोशिश करेगी, लेकिन उसके खिलाड़ी इस तथ्य से भी अच्छी तरह वाकिफ होंगे कि चेन्नई पलटवार करने में भी माहिर है।
मुंबई को स्टार बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर से फिर बड़ी पारी की उम्मीद होगी, जिन्होंने चेन्नई के खिलाफ हमेशा अच्छा प्रदर्शन किया है। तेंदुलकर ने चेन्नई के खिलाफ 12 मैचों में 368 रन बनाए हैं। उनके अलावा कप्तान रोहित शर्मा, विकेटकीपर बल्लेबाज दिनेश कार्तिक और कीरोन पोलार्ड पर मुंबई का काफी दारोमदार रहेगा।
चेन्नई की बल्लेबाजी इस सत्र में पूरी तरह से माइकल हसी, सुरेश रैना और धोनी के इर्द-गिर्द घूमती रही है। इन तीनों में से किन्हीं दो बल्लेबाजों को लसिथ मलिंगा, मिशेल जॉनसन, हरभजन सिंह और प्रज्ञान ओझा जैसे गेंदबाजों के सामने टिककर खेलना होगा। ओझा पिछले दोनों मैचों में चेन्नई के बल्लेबाजों के लिए अबूझ पहेली बने रहे और कोटला की स्पिनरों की मददगार पिच पर बाएं हाथ के इस स्पिनर से निबटना आसान नहीं होगा। ओझा ने इन दो मैचों में मिलाकर 27 रन देकर पांच विकेट लिए।टिप्पणियां
चेन्नई के लिए गेंदबाजी में इस बार ड्वेन ब्रावो ने अच्छा प्रदर्शन किया है। उनके नाम पर 16 मैचों में 25 विकेट दर्ज हैं। उनके अलावा मध्यम गति के गेंदबाज मोहित शर्मा और अनुभवी स्पिनर रविचंद्रन अश्विन पर भी दारोमदार रहेगा। चेन्नई ने इस बार कोटला में दिल्ली डेयरडेविल्स के खिलाफ जो मैच खेला था, उसमें मोहित और अश्विन ने जानदार प्रदर्शन करके अपनी टीम को 86 रन से जीत दिलाई थी।
दूसरी तरफ मुंबई को तेंदुलकर की अर्धशतकीय पारी के बावजूद कोटला में खेले गए मैच में हार का सामना करना पड़ा था। मुंबई को यहां की पिच पर रिकॉर्ड भी अच्छा नहीं है। उसने कोटला में जो पांच मैच खेले हैं, उनमें से तीन में उसे हार मिली। इसके विपरीत चेन्नई ने यहां चार मैचों में से तीन में जीत दर्ज की है। ये दोनों टीमें आईपीएल के नॉकआउट में अब तक दो बार आमने सामने रही हैं और दोनों अवसरों पर चेन्नई को जीत मिली। चेन्नई जहां इस सत्र की हार को दिल से लगाए बैठा है, वहीं मुंबई नॉकआउट की हार का हिसाब कोटला में पूरा करना चाहेगा। दोनों ही टीमें लीग चरण में अपना आखिरी मैच गंवाने के बाद यहां नए जोश और जज्बे के साथ उतरेंगी और संभावना है कि दर्शकों को रोमांचक मैच देखने को मिलेगा।
एलिमिनेटर राजस्थान रॉयल्स और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच 22 मई को खेला जाएगा। चेन्नई की टीम दो बार आईपीएल चैंपियन और दो बार उप विजेता रह चुकी है। मुंबई केवल एक बार 2010 में फाइनल में पहुंचा था, जहां उसे चेन्नई ने 22 रन से हरा दिया था। इस तरह से चेन्नई को बड़े मैचों में खेलने का अच्छा अनुभव है, लेकिन महेंद्र सिंह धोनी की टीम वर्तमान में केवल मुंबई के सामने फिसड्डी साबित हुई है।
आईपीएल में मुंबई एकमात्र ऐसी टीम है, जिसके खिलाफ चेन्नई का रिकॉर्ड नकारात्मक (13 मैच में आठ में मुंबई जीता है) रहा है। रोहित शर्मा की अगुवाई वाली मुंबई अपने इस प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ यह दबदबा बरकरार रखने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। वह अपनी पिछली जीत से भी प्रेरणा लेने की कोशिश करेगी, लेकिन उसके खिलाड़ी इस तथ्य से भी अच्छी तरह वाकिफ होंगे कि चेन्नई पलटवार करने में भी माहिर है।
मुंबई को स्टार बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर से फिर बड़ी पारी की उम्मीद होगी, जिन्होंने चेन्नई के खिलाफ हमेशा अच्छा प्रदर्शन किया है। तेंदुलकर ने चेन्नई के खिलाफ 12 मैचों में 368 रन बनाए हैं। उनके अलावा कप्तान रोहित शर्मा, विकेटकीपर बल्लेबाज दिनेश कार्तिक और कीरोन पोलार्ड पर मुंबई का काफी दारोमदार रहेगा।
चेन्नई की बल्लेबाजी इस सत्र में पूरी तरह से माइकल हसी, सुरेश रैना और धोनी के इर्द-गिर्द घूमती रही है। इन तीनों में से किन्हीं दो बल्लेबाजों को लसिथ मलिंगा, मिशेल जॉनसन, हरभजन सिंह और प्रज्ञान ओझा जैसे गेंदबाजों के सामने टिककर खेलना होगा। ओझा पिछले दोनों मैचों में चेन्नई के बल्लेबाजों के लिए अबूझ पहेली बने रहे और कोटला की स्पिनरों की मददगार पिच पर बाएं हाथ के इस स्पिनर से निबटना आसान नहीं होगा। ओझा ने इन दो मैचों में मिलाकर 27 रन देकर पांच विकेट लिए।टिप्पणियां
चेन्नई के लिए गेंदबाजी में इस बार ड्वेन ब्रावो ने अच्छा प्रदर्शन किया है। उनके नाम पर 16 मैचों में 25 विकेट दर्ज हैं। उनके अलावा मध्यम गति के गेंदबाज मोहित शर्मा और अनुभवी स्पिनर रविचंद्रन अश्विन पर भी दारोमदार रहेगा। चेन्नई ने इस बार कोटला में दिल्ली डेयरडेविल्स के खिलाफ जो मैच खेला था, उसमें मोहित और अश्विन ने जानदार प्रदर्शन करके अपनी टीम को 86 रन से जीत दिलाई थी।
दूसरी तरफ मुंबई को तेंदुलकर की अर्धशतकीय पारी के बावजूद कोटला में खेले गए मैच में हार का सामना करना पड़ा था। मुंबई को यहां की पिच पर रिकॉर्ड भी अच्छा नहीं है। उसने कोटला में जो पांच मैच खेले हैं, उनमें से तीन में उसे हार मिली। इसके विपरीत चेन्नई ने यहां चार मैचों में से तीन में जीत दर्ज की है। ये दोनों टीमें आईपीएल के नॉकआउट में अब तक दो बार आमने सामने रही हैं और दोनों अवसरों पर चेन्नई को जीत मिली। चेन्नई जहां इस सत्र की हार को दिल से लगाए बैठा है, वहीं मुंबई नॉकआउट की हार का हिसाब कोटला में पूरा करना चाहेगा। दोनों ही टीमें लीग चरण में अपना आखिरी मैच गंवाने के बाद यहां नए जोश और जज्बे के साथ उतरेंगी और संभावना है कि दर्शकों को रोमांचक मैच देखने को मिलेगा।
आईपीएल में मुंबई एकमात्र ऐसी टीम है, जिसके खिलाफ चेन्नई का रिकॉर्ड नकारात्मक (13 मैच में आठ में मुंबई जीता है) रहा है। रोहित शर्मा की अगुवाई वाली मुंबई अपने इस प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ यह दबदबा बरकरार रखने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। वह अपनी पिछली जीत से भी प्रेरणा लेने की कोशिश करेगी, लेकिन उसके खिलाड़ी इस तथ्य से भी अच्छी तरह वाकिफ होंगे कि चेन्नई पलटवार करने में भी माहिर है।
मुंबई को स्टार बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर से फिर बड़ी पारी की उम्मीद होगी, जिन्होंने चेन्नई के खिलाफ हमेशा अच्छा प्रदर्शन किया है। तेंदुलकर ने चेन्नई के खिलाफ 12 मैचों में 368 रन बनाए हैं। उनके अलावा कप्तान रोहित शर्मा, विकेटकीपर बल्लेबाज दिनेश कार्तिक और कीरोन पोलार्ड पर मुंबई का काफी दारोमदार रहेगा।
चेन्नई की बल्लेबाजी इस सत्र में पूरी तरह से माइकल हसी, सुरेश रैना और धोनी के इर्द-गिर्द घूमती रही है। इन तीनों में से किन्हीं दो बल्लेबाजों को लसिथ मलिंगा, मिशेल जॉनसन, हरभजन सिंह और प्रज्ञान ओझा जैसे गेंदबाजों के सामने टिककर खेलना होगा। ओझा पिछले दोनों मैचों में चेन्नई के बल्लेबाजों के लिए अबूझ पहेली बने रहे और कोटला की स्पिनरों की मददगार पिच पर बाएं हाथ के इस स्पिनर से निबटना आसान नहीं होगा। ओझा ने इन दो मैचों में मिलाकर 27 रन देकर पांच विकेट लिए।टिप्पणियां
चेन्नई के लिए गेंदबाजी में इस बार ड्वेन ब्रावो ने अच्छा प्रदर्शन किया है। उनके नाम पर 16 मैचों में 25 विकेट दर्ज हैं। उनके अलावा मध्यम गति के गेंदबाज मोहित शर्मा और अनुभवी स्पिनर रविचंद्रन अश्विन पर भी दारोमदार रहेगा। चेन्नई ने इस बार कोटला में दिल्ली डेयरडेविल्स के खिलाफ जो मैच खेला था, उसमें मोहित और अश्विन ने जानदार प्रदर्शन करके अपनी टीम को 86 रन से जीत दिलाई थी।
दूसरी तरफ मुंबई को तेंदुलकर की अर्धशतकीय पारी के बावजूद कोटला में खेले गए मैच में हार का सामना करना पड़ा था। मुंबई को यहां की पिच पर रिकॉर्ड भी अच्छा नहीं है। उसने कोटला में जो पांच मैच खेले हैं, उनमें से तीन में उसे हार मिली। इसके विपरीत चेन्नई ने यहां चार मैचों में से तीन में जीत दर्ज की है। ये दोनों टीमें आईपीएल के नॉकआउट में अब तक दो बार आमने सामने रही हैं और दोनों अवसरों पर चेन्नई को जीत मिली। चेन्नई जहां इस सत्र की हार को दिल से लगाए बैठा है, वहीं मुंबई नॉकआउट की हार का हिसाब कोटला में पूरा करना चाहेगा। दोनों ही टीमें लीग चरण में अपना आखिरी मैच गंवाने के बाद यहां नए जोश और जज्बे के साथ उतरेंगी और संभावना है कि दर्शकों को रोमांचक मैच देखने को मिलेगा।
मुंबई को स्टार बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर से फिर बड़ी पारी की उम्मीद होगी, जिन्होंने चेन्नई के खिलाफ हमेशा अच्छा प्रदर्शन किया है। तेंदुलकर ने चेन्नई के खिलाफ 12 मैचों में 368 रन बनाए हैं। उनके अलावा कप्तान रोहित शर्मा, विकेटकीपर बल्लेबाज दिनेश कार्तिक और कीरोन पोलार्ड पर मुंबई का काफी दारोमदार रहेगा।
चेन्नई की बल्लेबाजी इस सत्र में पूरी तरह से माइकल हसी, सुरेश रैना और धोनी के इर्द-गिर्द घूमती रही है। इन तीनों में से किन्हीं दो बल्लेबाजों को लसिथ मलिंगा, मिशेल जॉनसन, हरभजन सिंह और प्रज्ञान ओझा जैसे गेंदबाजों के सामने टिककर खेलना होगा। ओझा पिछले दोनों मैचों में चेन्नई के बल्लेबाजों के लिए अबूझ पहेली बने रहे और कोटला की स्पिनरों की मददगार पिच पर बाएं हाथ के इस स्पिनर से निबटना आसान नहीं होगा। ओझा ने इन दो मैचों में मिलाकर 27 रन देकर पांच विकेट लिए।टिप्पणियां
चेन्नई के लिए गेंदबाजी में इस बार ड्वेन ब्रावो ने अच्छा प्रदर्शन किया है। उनके नाम पर 16 मैचों में 25 विकेट दर्ज हैं। उनके अलावा मध्यम गति के गेंदबाज मोहित शर्मा और अनुभवी स्पिनर रविचंद्रन अश्विन पर भी दारोमदार रहेगा। चेन्नई ने इस बार कोटला में दिल्ली डेयरडेविल्स के खिलाफ जो मैच खेला था, उसमें मोहित और अश्विन ने जानदार प्रदर्शन करके अपनी टीम को 86 रन से जीत दिलाई थी।
दूसरी तरफ मुंबई को तेंदुलकर की अर्धशतकीय पारी के बावजूद कोटला में खेले गए मैच में हार का सामना करना पड़ा था। मुंबई को यहां की पिच पर रिकॉर्ड भी अच्छा नहीं है। उसने कोटला में जो पांच मैच खेले हैं, उनमें से तीन में उसे हार मिली। इसके विपरीत चेन्नई ने यहां चार मैचों में से तीन में जीत दर्ज की है। ये दोनों टीमें आईपीएल के नॉकआउट में अब तक दो बार आमने सामने रही हैं और दोनों अवसरों पर चेन्नई को जीत मिली। चेन्नई जहां इस सत्र की हार को दिल से लगाए बैठा है, वहीं मुंबई नॉकआउट की हार का हिसाब कोटला में पूरा करना चाहेगा। दोनों ही टीमें लीग चरण में अपना आखिरी मैच गंवाने के बाद यहां नए जोश और जज्बे के साथ उतरेंगी और संभावना है कि दर्शकों को रोमांचक मैच देखने को मिलेगा।
चेन्नई की बल्लेबाजी इस सत्र में पूरी तरह से माइकल हसी, सुरेश रैना और धोनी के इर्द-गिर्द घूमती रही है। इन तीनों में से किन्हीं दो बल्लेबाजों को लसिथ मलिंगा, मिशेल जॉनसन, हरभजन सिंह और प्रज्ञान ओझा जैसे गेंदबाजों के सामने टिककर खेलना होगा। ओझा पिछले दोनों मैचों में चेन्नई के बल्लेबाजों के लिए अबूझ पहेली बने रहे और कोटला की स्पिनरों की मददगार पिच पर बाएं हाथ के इस स्पिनर से निबटना आसान नहीं होगा। ओझा ने इन दो मैचों में मिलाकर 27 रन देकर पांच विकेट लिए।टिप्पणियां
चेन्नई के लिए गेंदबाजी में इस बार ड्वेन ब्रावो ने अच्छा प्रदर्शन किया है। उनके नाम पर 16 मैचों में 25 विकेट दर्ज हैं। उनके अलावा मध्यम गति के गेंदबाज मोहित शर्मा और अनुभवी स्पिनर रविचंद्रन अश्विन पर भी दारोमदार रहेगा। चेन्नई ने इस बार कोटला में दिल्ली डेयरडेविल्स के खिलाफ जो मैच खेला था, उसमें मोहित और अश्विन ने जानदार प्रदर्शन करके अपनी टीम को 86 रन से जीत दिलाई थी।
दूसरी तरफ मुंबई को तेंदुलकर की अर्धशतकीय पारी के बावजूद कोटला में खेले गए मैच में हार का सामना करना पड़ा था। मुंबई को यहां की पिच पर रिकॉर्ड भी अच्छा नहीं है। उसने कोटला में जो पांच मैच खेले हैं, उनमें से तीन में उसे हार मिली। इसके विपरीत चेन्नई ने यहां चार मैचों में से तीन में जीत दर्ज की है। ये दोनों टीमें आईपीएल के नॉकआउट में अब तक दो बार आमने सामने रही हैं और दोनों अवसरों पर चेन्नई को जीत मिली। चेन्नई जहां इस सत्र की हार को दिल से लगाए बैठा है, वहीं मुंबई नॉकआउट की हार का हिसाब कोटला में पूरा करना चाहेगा। दोनों ही टीमें लीग चरण में अपना आखिरी मैच गंवाने के बाद यहां नए जोश और जज्बे के साथ उतरेंगी और संभावना है कि दर्शकों को रोमांचक मैच देखने को मिलेगा।
चेन्नई के लिए गेंदबाजी में इस बार ड्वेन ब्रावो ने अच्छा प्रदर्शन किया है। उनके नाम पर 16 मैचों में 25 विकेट दर्ज हैं। उनके अलावा मध्यम गति के गेंदबाज मोहित शर्मा और अनुभवी स्पिनर रविचंद्रन अश्विन पर भी दारोमदार रहेगा। चेन्नई ने इस बार कोटला में दिल्ली डेयरडेविल्स के खिलाफ जो मैच खेला था, उसमें मोहित और अश्विन ने जानदार प्रदर्शन करके अपनी टीम को 86 रन से जीत दिलाई थी।
दूसरी तरफ मुंबई को तेंदुलकर की अर्धशतकीय पारी के बावजूद कोटला में खेले गए मैच में हार का सामना करना पड़ा था। मुंबई को यहां की पिच पर रिकॉर्ड भी अच्छा नहीं है। उसने कोटला में जो पांच मैच खेले हैं, उनमें से तीन में उसे हार मिली। इसके विपरीत चेन्नई ने यहां चार मैचों में से तीन में जीत दर्ज की है। ये दोनों टीमें आईपीएल के नॉकआउट में अब तक दो बार आमने सामने रही हैं और दोनों अवसरों पर चेन्नई को जीत मिली। चेन्नई जहां इस सत्र की हार को दिल से लगाए बैठा है, वहीं मुंबई नॉकआउट की हार का हिसाब कोटला में पूरा करना चाहेगा। दोनों ही टीमें लीग चरण में अपना आखिरी मैच गंवाने के बाद यहां नए जोश और जज्बे के साथ उतरेंगी और संभावना है कि दर्शकों को रोमांचक मैच देखने को मिलेगा।
दूसरी तरफ मुंबई को तेंदुलकर की अर्धशतकीय पारी के बावजूद कोटला में खेले गए मैच में हार का सामना करना पड़ा था। मुंबई को यहां की पिच पर रिकॉर्ड भी अच्छा नहीं है। उसने कोटला में जो पांच मैच खेले हैं, उनमें से तीन में उसे हार मिली। इसके विपरीत चेन्नई ने यहां चार मैचों में से तीन में जीत दर्ज की है। ये दोनों टीमें आईपीएल के नॉकआउट में अब तक दो बार आमने सामने रही हैं और दोनों अवसरों पर चेन्नई को जीत मिली। चेन्नई जहां इस सत्र की हार को दिल से लगाए बैठा है, वहीं मुंबई नॉकआउट की हार का हिसाब कोटला में पूरा करना चाहेगा। दोनों ही टीमें लीग चरण में अपना आखिरी मैच गंवाने के बाद यहां नए जोश और जज्बे के साथ उतरेंगी और संभावना है कि दर्शकों को रोमांचक मैच देखने को मिलेगा। | संक्षिप्त पाठ: आईपीएल में शुरू से ही दबदबा बनाए रखने वाली चेन्नई सुपरकिंग्स की टीम इस सत्र में मुंबई इंडियन्स से दोनों मैच गंवाने के बावजूद फिरोजशाह कोटला में पहले क्वालीफायर में बड़े मैचों के अपने अपार अनुभव के दम पर बदला चुकता करने की कोशिश करेगी। | 22 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: अमेरिका के कनेक्टिकट स्थित एक स्कूल में गोलीबारी की ताजा घटना के बाद ओबामा प्रशासन पर इस बात का दबाव बढ़ गया है कि देश के शस्त्र कानूनों को लेकर उचित कदम उठाए जाएं।
कनेक्टिकट के न्यूटाउन स्थित सैंडी हूक एलीमेंटरी स्कूल में 20-वर्षीय युवक एडम लांजा ने गोलीबारी की, जिसमें 20 बच्चे और छह वयस्क मारे गए। मारे गए बच्चे पांच से 10 साल उम्र के बीच थे। यह घटना कोलोराडो के थियेटर और विस्कोन्सिन के गुरुद्वारे में हुई गोलीबारी से मिलती-जुलती है।
इस घटना के बाद पूरे अमेरिका में सदमे की स्थिति है और भावुक ओबामा ने इस तरह की घटनाओं पर लगाम के लिए सार्थक कार्रवाई का आह्वान किया है। उन्होंने कहा, अमेरिका इस तरह की त्रासदियों से गई बार गुजर चुका है और देश को साथ आकर इसके खिलाफ सार्थक कदम उठाना होगा ताकि ऐसी त्रासदियों को रोका जा सके।टिप्पणियां
उधर, व्हाइट हाउस को संबोधित करते हुए की गई एक ऑनलाइन अपील में कहा गया है कि अमेरिकी कांग्रेस में विधेयक के जरिये शस्त्र नियंत्रण के मुद्दे को तत्काल सुलझाया जाए। स्कूल में गोलीबारी के बाद की गई इस अपील के पक्ष में 43,000 से अधिक लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं। न्यूयॉर्क के मेयर माइकल ब्लूमबर्ग ने गोलीबारी की घटना की कड़ी निंदा की है।
उन्होंने कहा कि ओबामा के सांत्वना भरे शब्द पर्याप्त नहीं हैं और राष्ट्रपति को देश में शस्त्र नियंत्रण कानूनों को कड़ा बनाने के लिए तत्काल कार्रवाई करनी होगी। ब्लूमबर्ग 'मेयर्स अगेन्स्ट इल्लीगल गन्स' के सह अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने कहा कि वर्जीनिया टेक, औरोरा और विस्कोन्सिन में ऐसी घटना हो चुकी हैं। अब समय आ गया है कि ओबामा शस्त्र नियंत्रण कानूनों पर एक विधेयक कांग्रेस में भेजें ताकि समस्या का हल निकल सके। कनेक्टिकट के गवर्नर डेनेल मेलोय ने गोलीबारी स्थल पर पहुंच कर मृतक बच्चों के अभिभावकों को सांत्वना दी और घटना की निंदा की।
कनेक्टिकट के न्यूटाउन स्थित सैंडी हूक एलीमेंटरी स्कूल में 20-वर्षीय युवक एडम लांजा ने गोलीबारी की, जिसमें 20 बच्चे और छह वयस्क मारे गए। मारे गए बच्चे पांच से 10 साल उम्र के बीच थे। यह घटना कोलोराडो के थियेटर और विस्कोन्सिन के गुरुद्वारे में हुई गोलीबारी से मिलती-जुलती है।
इस घटना के बाद पूरे अमेरिका में सदमे की स्थिति है और भावुक ओबामा ने इस तरह की घटनाओं पर लगाम के लिए सार्थक कार्रवाई का आह्वान किया है। उन्होंने कहा, अमेरिका इस तरह की त्रासदियों से गई बार गुजर चुका है और देश को साथ आकर इसके खिलाफ सार्थक कदम उठाना होगा ताकि ऐसी त्रासदियों को रोका जा सके।टिप्पणियां
उधर, व्हाइट हाउस को संबोधित करते हुए की गई एक ऑनलाइन अपील में कहा गया है कि अमेरिकी कांग्रेस में विधेयक के जरिये शस्त्र नियंत्रण के मुद्दे को तत्काल सुलझाया जाए। स्कूल में गोलीबारी के बाद की गई इस अपील के पक्ष में 43,000 से अधिक लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं। न्यूयॉर्क के मेयर माइकल ब्लूमबर्ग ने गोलीबारी की घटना की कड़ी निंदा की है।
उन्होंने कहा कि ओबामा के सांत्वना भरे शब्द पर्याप्त नहीं हैं और राष्ट्रपति को देश में शस्त्र नियंत्रण कानूनों को कड़ा बनाने के लिए तत्काल कार्रवाई करनी होगी। ब्लूमबर्ग 'मेयर्स अगेन्स्ट इल्लीगल गन्स' के सह अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने कहा कि वर्जीनिया टेक, औरोरा और विस्कोन्सिन में ऐसी घटना हो चुकी हैं। अब समय आ गया है कि ओबामा शस्त्र नियंत्रण कानूनों पर एक विधेयक कांग्रेस में भेजें ताकि समस्या का हल निकल सके। कनेक्टिकट के गवर्नर डेनेल मेलोय ने गोलीबारी स्थल पर पहुंच कर मृतक बच्चों के अभिभावकों को सांत्वना दी और घटना की निंदा की।
इस घटना के बाद पूरे अमेरिका में सदमे की स्थिति है और भावुक ओबामा ने इस तरह की घटनाओं पर लगाम के लिए सार्थक कार्रवाई का आह्वान किया है। उन्होंने कहा, अमेरिका इस तरह की त्रासदियों से गई बार गुजर चुका है और देश को साथ आकर इसके खिलाफ सार्थक कदम उठाना होगा ताकि ऐसी त्रासदियों को रोका जा सके।टिप्पणियां
उधर, व्हाइट हाउस को संबोधित करते हुए की गई एक ऑनलाइन अपील में कहा गया है कि अमेरिकी कांग्रेस में विधेयक के जरिये शस्त्र नियंत्रण के मुद्दे को तत्काल सुलझाया जाए। स्कूल में गोलीबारी के बाद की गई इस अपील के पक्ष में 43,000 से अधिक लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं। न्यूयॉर्क के मेयर माइकल ब्लूमबर्ग ने गोलीबारी की घटना की कड़ी निंदा की है।
उन्होंने कहा कि ओबामा के सांत्वना भरे शब्द पर्याप्त नहीं हैं और राष्ट्रपति को देश में शस्त्र नियंत्रण कानूनों को कड़ा बनाने के लिए तत्काल कार्रवाई करनी होगी। ब्लूमबर्ग 'मेयर्स अगेन्स्ट इल्लीगल गन्स' के सह अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने कहा कि वर्जीनिया टेक, औरोरा और विस्कोन्सिन में ऐसी घटना हो चुकी हैं। अब समय आ गया है कि ओबामा शस्त्र नियंत्रण कानूनों पर एक विधेयक कांग्रेस में भेजें ताकि समस्या का हल निकल सके। कनेक्टिकट के गवर्नर डेनेल मेलोय ने गोलीबारी स्थल पर पहुंच कर मृतक बच्चों के अभिभावकों को सांत्वना दी और घटना की निंदा की।
उधर, व्हाइट हाउस को संबोधित करते हुए की गई एक ऑनलाइन अपील में कहा गया है कि अमेरिकी कांग्रेस में विधेयक के जरिये शस्त्र नियंत्रण के मुद्दे को तत्काल सुलझाया जाए। स्कूल में गोलीबारी के बाद की गई इस अपील के पक्ष में 43,000 से अधिक लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं। न्यूयॉर्क के मेयर माइकल ब्लूमबर्ग ने गोलीबारी की घटना की कड़ी निंदा की है।
उन्होंने कहा कि ओबामा के सांत्वना भरे शब्द पर्याप्त नहीं हैं और राष्ट्रपति को देश में शस्त्र नियंत्रण कानूनों को कड़ा बनाने के लिए तत्काल कार्रवाई करनी होगी। ब्लूमबर्ग 'मेयर्स अगेन्स्ट इल्लीगल गन्स' के सह अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने कहा कि वर्जीनिया टेक, औरोरा और विस्कोन्सिन में ऐसी घटना हो चुकी हैं। अब समय आ गया है कि ओबामा शस्त्र नियंत्रण कानूनों पर एक विधेयक कांग्रेस में भेजें ताकि समस्या का हल निकल सके। कनेक्टिकट के गवर्नर डेनेल मेलोय ने गोलीबारी स्थल पर पहुंच कर मृतक बच्चों के अभिभावकों को सांत्वना दी और घटना की निंदा की।
उन्होंने कहा कि ओबामा के सांत्वना भरे शब्द पर्याप्त नहीं हैं और राष्ट्रपति को देश में शस्त्र नियंत्रण कानूनों को कड़ा बनाने के लिए तत्काल कार्रवाई करनी होगी। ब्लूमबर्ग 'मेयर्स अगेन्स्ट इल्लीगल गन्स' के सह अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने कहा कि वर्जीनिया टेक, औरोरा और विस्कोन्सिन में ऐसी घटना हो चुकी हैं। अब समय आ गया है कि ओबामा शस्त्र नियंत्रण कानूनों पर एक विधेयक कांग्रेस में भेजें ताकि समस्या का हल निकल सके। कनेक्टिकट के गवर्नर डेनेल मेलोय ने गोलीबारी स्थल पर पहुंच कर मृतक बच्चों के अभिभावकों को सांत्वना दी और घटना की निंदा की। | संक्षिप्त पाठ: अमेरिका के कनेक्टिकट स्थित एक स्कूल में गोलीबारी की ताजा घटना के बाद ओबामा प्रशासन पर इस बात का दबाव बढ़ गया है कि देश के शस्त्र कानूनों को लेकर उचित कदम उठाए जाएं। | 14 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: कर्नाटक में जानवरों के खेल 'कंबला' पर प्रतिबंध समाप्त करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है. बुधवार को राजभवन की तरफ जाने की कोशिश कर रहे कन्नड़ संगठनों के नेता वाटल नागराज सहित तकरीबन एक दर्जन कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया. कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई ने भी इसके पक्ष में रैली निकाली.
कर्नाटक के तटीय ग्रामीण इलाकों में खासकर मंगलौर उडिपी में भैंसों की दौड़ सदियों से लोकप्रिय रही है. इसे 'कंबला' कहते हैं. जल्लीकट्टू पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद 2014 में कर्नाटक हाई कोर्ट ने कंबला पर भी पाबंदी लगा दी थी. पशु संरक्षण करने वाले संगठनों की याचिका पर सुनवाई के बाद यह प्रतिबंध लगाया गया था.
कंबला में ताकतवर भैंसों को सजा-संवारकर दौड़ाया जाता है. यह खेल दिसंबर से मार्च-अप्रैल तक चलता है. इसका विरोध कर रहे संगठनों का कहना है कि बैलों को तेज भगाने के लिए चाबुक मारी जाती है जो कि जानवरों पर अत्याचार है.
इस मामले में 30 जनवरी को कर्नाटक हाई कोर्ट में सुनवाई है. ऐसा माना जा रहा है कि इस पर फैसला भी आ सकता है. इस सुनवाई को देखते हुए राज्य के कानून मंत्री टीबी जयचंद्रा ने अपने मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक की. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का कहना है कि वे कंबला का समर्थन करते हैं और यह होगा.
केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद के मुताबिक अगर राज्य सरकार तमिलनाडु की ही तरह अध्यदेश लाए या बिल तैयार करे तो केंद्र सरकार इसका समर्थन करेगी क्योंकि सरकार परंपराओं की हिफाजत की हमेशा पक्षधर रही है.
कर्नाटक के तटीय ग्रामीण इलाकों में खासकर मंगलौर उडिपी में भैंसों की दौड़ सदियों से लोकप्रिय रही है. इसे 'कंबला' कहते हैं. जल्लीकट्टू पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद 2014 में कर्नाटक हाई कोर्ट ने कंबला पर भी पाबंदी लगा दी थी. पशु संरक्षण करने वाले संगठनों की याचिका पर सुनवाई के बाद यह प्रतिबंध लगाया गया था.
कंबला में ताकतवर भैंसों को सजा-संवारकर दौड़ाया जाता है. यह खेल दिसंबर से मार्च-अप्रैल तक चलता है. इसका विरोध कर रहे संगठनों का कहना है कि बैलों को तेज भगाने के लिए चाबुक मारी जाती है जो कि जानवरों पर अत्याचार है.
इस मामले में 30 जनवरी को कर्नाटक हाई कोर्ट में सुनवाई है. ऐसा माना जा रहा है कि इस पर फैसला भी आ सकता है. इस सुनवाई को देखते हुए राज्य के कानून मंत्री टीबी जयचंद्रा ने अपने मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक की. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का कहना है कि वे कंबला का समर्थन करते हैं और यह होगा.
केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद के मुताबिक अगर राज्य सरकार तमिलनाडु की ही तरह अध्यदेश लाए या बिल तैयार करे तो केंद्र सरकार इसका समर्थन करेगी क्योंकि सरकार परंपराओं की हिफाजत की हमेशा पक्षधर रही है. | सारांश: राजभवन की तरफ जाने की कोशिश कर रहे आंदोलनकारी गिरफ्तार
तटीय ग्रामीण इलाकों में भैंसों की दौड़ सदियों से लोकप्रिय
मामले में 30 जनवरी को कर्नाटक हाई कोर्ट में होगी सुनवाई | 5 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: लगता है इस बार 'बिग बॉस' के घर से लोग जनता के वोट से नहीं बल्कि बिग बॉस के आदेश से ही ज्यादा निकलने वाले हैं. जानकारी के अनुसार अपनी मुंहबोली बेटी प्रियंका जग्गा की तरह स्वामी ओम को भी बिग बॉस के शो से उनकी हरकतों के चलते निकाल दिया गया है. स्वामी ओम घर में कई बार यह कहते हुए सुने गए हैं कि वह बिग बॉस के विजेता हैं लेकिन लगता है खुद 'बिग बॉस' ने उनकी यह भविष्यवाणी गलत साबित कर दी है. घर से निकाले जाने की वजह की बात करें तो जानकारी के अनुसार स्वामी ओम ने अपना पेशाब बानी पर फेंकने जैसी हरकत की है.टिप्पणियां
जानकारी के मुताबिक घर में कप्तानी का एक टास्क चल रहा है. स्वामी ओम ने अपनी हरकतों के माध्यम से टास्क को सभी घरवालों के लिए काफी मुश्किल बना दिया. इस टास्क के दौरान स्वामी ओम और बानी आखिर में कप्तानी के दावेदार बनते हैं. इस बीच वह मनु पंजाबी और मनवीर से यह कहते हुए भी पाए गए कि वह कप्तान बनने में उनकी मदद करें. लेकिन स्वामी ओम की हरकतों की वजह से उन्हें कोई भी कप्तान बनते हुए देखना नहीं चाहता.
आज के एपिसोड में बानी और स्वामी ओम के बीच में मुकाबला होने वाला है. पिछले एपिसोड में हम देख चुके हैं कि पूरा घर स्वामी ओम से नाराज है. ऐसे में स्वामी ओम खुद ही सब अपने हाथ में ले लेते हैं. ऐसे में पूरा घर एक होकर उन्हें जेल में बंद करने की तैयारी करने लगा और ऐसे में चीजें और बिगड़ गई और स्वामी ओम ने सारी हदें पार कर दी.
ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि स्वामी ओम ने घरवालों को इतना परेशान किया है. इससे पहले भी वह कई बार ऐसी हरकतें कर चुके हैं और बिग बॉस उन्हें उनकी हरकतों के लिए कई बार चेतावनी भी दे चुके हैं. सिर्फ बिग बॉस ही नहीं, स्वामी ओम सलमान खान से भी कई बार खरी खोटी सनु चुके हैं.
जानकारी के मुताबिक घर में कप्तानी का एक टास्क चल रहा है. स्वामी ओम ने अपनी हरकतों के माध्यम से टास्क को सभी घरवालों के लिए काफी मुश्किल बना दिया. इस टास्क के दौरान स्वामी ओम और बानी आखिर में कप्तानी के दावेदार बनते हैं. इस बीच वह मनु पंजाबी और मनवीर से यह कहते हुए भी पाए गए कि वह कप्तान बनने में उनकी मदद करें. लेकिन स्वामी ओम की हरकतों की वजह से उन्हें कोई भी कप्तान बनते हुए देखना नहीं चाहता.
आज के एपिसोड में बानी और स्वामी ओम के बीच में मुकाबला होने वाला है. पिछले एपिसोड में हम देख चुके हैं कि पूरा घर स्वामी ओम से नाराज है. ऐसे में स्वामी ओम खुद ही सब अपने हाथ में ले लेते हैं. ऐसे में पूरा घर एक होकर उन्हें जेल में बंद करने की तैयारी करने लगा और ऐसे में चीजें और बिगड़ गई और स्वामी ओम ने सारी हदें पार कर दी.
ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि स्वामी ओम ने घरवालों को इतना परेशान किया है. इससे पहले भी वह कई बार ऐसी हरकतें कर चुके हैं और बिग बॉस उन्हें उनकी हरकतों के लिए कई बार चेतावनी भी दे चुके हैं. सिर्फ बिग बॉस ही नहीं, स्वामी ओम सलमान खान से भी कई बार खरी खोटी सनु चुके हैं.
ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि स्वामी ओम ने घरवालों को इतना परेशान किया है. इससे पहले भी वह कई बार ऐसी हरकतें कर चुके हैं और बिग बॉस उन्हें उनकी हरकतों के लिए कई बार चेतावनी भी दे चुके हैं. सिर्फ बिग बॉस ही नहीं, स्वामी ओम सलमान खान से भी कई बार खरी खोटी सनु चुके हैं. | संक्षिप्त सारांश: कप्तानी के टास्क में फिर की स्वामी ओम ने शर्मनाक हरकत
बानी पर फेंका अपना पेशाब
स्वामी ओम को घर से निकाला बिग बॉस ने | 10 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: दो साल पहले भारतीय टेस्ट टीम की कमान संभालने वाले विराट कोहली का कप्तानी का अब तक का रिकॉर्ड शानदार रहा है और उनका मानना है कि अच्छी कप्तानी की कुंजी साहसिक फैसले लेने और नतीजे की परवाह किए बिना उनका डटकर समर्थन करने में है. इतना ही नहीं कप्तान कोहली पूर्व टेस्ट कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के भी कायल हैं और उन्हें प्रेरक बताया है.
कोहली की कप्तानी में भारत ने 16 में से नौ टेस्ट जीते और सिर्फ दो गंवाए, जबकि पांच ड्रॉ रहे. कप्तान के तौर पर अपनी सरजमीं पर वह एक भी टेस्ट नहीं हारे हैं.
वहीं कोहली खुद महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी के कायल हैं. उन्होंने बीसीसीआई टीवी से कहा, ‘कई बार फैसले लेना काफी कठिन होता है और इसके लिए काफी हिम्मत चाहिए होती है. मैंने धोनी से बहुत कुछ सीखा है. आपके फैसले सही या गलत हो सकते हैं, लेकिन उन पर डटे रहने के लिए साहस चाहिए और यही कप्तान की निशानी है.’
उनका मानना है कि कप्तानी की जिम्मेदारी ने उन्हें बेहतर क्रिकेटर बनाया है. उन्होंने कहा, ‘देश की टेस्ट टीम का कप्तान होना फख्र की बात है. मुझे इस पर गर्व है. मेरे लिए इससे बढ़कर कुछ नहीं. इस अतिरिक्त जिम्मेदारी से मुझे बेहतर क्रिकेटर बनने में मदद मिली.’
उन्होंने कहा, ‘‘मेरे लिए सफेद जर्सी पहनकर मैदान पर उतरना फख्र की बात है. टेस्ट क्रिकेट जैसी परीक्षा किसी और प्रारूप में नहीं होती.’ कोहली की कप्तानी में भारतीय टीम टेस्ट क्रिकेट में नंबर एक तक पहुंची और उनका लक्ष्य इस लय को कायम रखना है. उन्होंने कहा, ‘हम विश्व स्तरीय टीम बनना चाहते हैं और हमारी टीम के हर खिलाड़ी के जेहन में यही है. आप किसी भी प्रारूप में खेलें, आपका लक्ष्य यही होता है.’टिप्पणियां
कोहली ने कहा, ‘टेस्ट टीम को अच्छे प्रदर्शन के लिए प्रेरित करने में मुझे गर्व महसूस होता है और मजा आता है. खुद को आजमाने की यह चुनौती है और पूरी टीम के साथ एक लक्ष्य की ओर हम बढ़ रहे हैं. इसमें कोई दबाव महसूस नहीं होता. महान खिलाड़ी बनने के लिए आपको एक टीम के रूप में अच्छा खेलना होता है जिसके बाद ही निजी प्रदर्शन मायने रखता है.’
उन्होंने कहा, ‘उतार-चढ़ाव तो आएंगे जब आपको आलोचना और नकारात्मक चीजों का सामना भी करना पड़ेगा, लेकिन इसी में असल परीक्षा होती है.’
कोहली की कप्तानी में भारत ने 16 में से नौ टेस्ट जीते और सिर्फ दो गंवाए, जबकि पांच ड्रॉ रहे. कप्तान के तौर पर अपनी सरजमीं पर वह एक भी टेस्ट नहीं हारे हैं.
वहीं कोहली खुद महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी के कायल हैं. उन्होंने बीसीसीआई टीवी से कहा, ‘कई बार फैसले लेना काफी कठिन होता है और इसके लिए काफी हिम्मत चाहिए होती है. मैंने धोनी से बहुत कुछ सीखा है. आपके फैसले सही या गलत हो सकते हैं, लेकिन उन पर डटे रहने के लिए साहस चाहिए और यही कप्तान की निशानी है.’
उनका मानना है कि कप्तानी की जिम्मेदारी ने उन्हें बेहतर क्रिकेटर बनाया है. उन्होंने कहा, ‘देश की टेस्ट टीम का कप्तान होना फख्र की बात है. मुझे इस पर गर्व है. मेरे लिए इससे बढ़कर कुछ नहीं. इस अतिरिक्त जिम्मेदारी से मुझे बेहतर क्रिकेटर बनने में मदद मिली.’
उन्होंने कहा, ‘‘मेरे लिए सफेद जर्सी पहनकर मैदान पर उतरना फख्र की बात है. टेस्ट क्रिकेट जैसी परीक्षा किसी और प्रारूप में नहीं होती.’ कोहली की कप्तानी में भारतीय टीम टेस्ट क्रिकेट में नंबर एक तक पहुंची और उनका लक्ष्य इस लय को कायम रखना है. उन्होंने कहा, ‘हम विश्व स्तरीय टीम बनना चाहते हैं और हमारी टीम के हर खिलाड़ी के जेहन में यही है. आप किसी भी प्रारूप में खेलें, आपका लक्ष्य यही होता है.’टिप्पणियां
कोहली ने कहा, ‘टेस्ट टीम को अच्छे प्रदर्शन के लिए प्रेरित करने में मुझे गर्व महसूस होता है और मजा आता है. खुद को आजमाने की यह चुनौती है और पूरी टीम के साथ एक लक्ष्य की ओर हम बढ़ रहे हैं. इसमें कोई दबाव महसूस नहीं होता. महान खिलाड़ी बनने के लिए आपको एक टीम के रूप में अच्छा खेलना होता है जिसके बाद ही निजी प्रदर्शन मायने रखता है.’
उन्होंने कहा, ‘उतार-चढ़ाव तो आएंगे जब आपको आलोचना और नकारात्मक चीजों का सामना भी करना पड़ेगा, लेकिन इसी में असल परीक्षा होती है.’
वहीं कोहली खुद महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी के कायल हैं. उन्होंने बीसीसीआई टीवी से कहा, ‘कई बार फैसले लेना काफी कठिन होता है और इसके लिए काफी हिम्मत चाहिए होती है. मैंने धोनी से बहुत कुछ सीखा है. आपके फैसले सही या गलत हो सकते हैं, लेकिन उन पर डटे रहने के लिए साहस चाहिए और यही कप्तान की निशानी है.’
उनका मानना है कि कप्तानी की जिम्मेदारी ने उन्हें बेहतर क्रिकेटर बनाया है. उन्होंने कहा, ‘देश की टेस्ट टीम का कप्तान होना फख्र की बात है. मुझे इस पर गर्व है. मेरे लिए इससे बढ़कर कुछ नहीं. इस अतिरिक्त जिम्मेदारी से मुझे बेहतर क्रिकेटर बनने में मदद मिली.’
उन्होंने कहा, ‘‘मेरे लिए सफेद जर्सी पहनकर मैदान पर उतरना फख्र की बात है. टेस्ट क्रिकेट जैसी परीक्षा किसी और प्रारूप में नहीं होती.’ कोहली की कप्तानी में भारतीय टीम टेस्ट क्रिकेट में नंबर एक तक पहुंची और उनका लक्ष्य इस लय को कायम रखना है. उन्होंने कहा, ‘हम विश्व स्तरीय टीम बनना चाहते हैं और हमारी टीम के हर खिलाड़ी के जेहन में यही है. आप किसी भी प्रारूप में खेलें, आपका लक्ष्य यही होता है.’टिप्पणियां
कोहली ने कहा, ‘टेस्ट टीम को अच्छे प्रदर्शन के लिए प्रेरित करने में मुझे गर्व महसूस होता है और मजा आता है. खुद को आजमाने की यह चुनौती है और पूरी टीम के साथ एक लक्ष्य की ओर हम बढ़ रहे हैं. इसमें कोई दबाव महसूस नहीं होता. महान खिलाड़ी बनने के लिए आपको एक टीम के रूप में अच्छा खेलना होता है जिसके बाद ही निजी प्रदर्शन मायने रखता है.’
उन्होंने कहा, ‘उतार-चढ़ाव तो आएंगे जब आपको आलोचना और नकारात्मक चीजों का सामना भी करना पड़ेगा, लेकिन इसी में असल परीक्षा होती है.’
उनका मानना है कि कप्तानी की जिम्मेदारी ने उन्हें बेहतर क्रिकेटर बनाया है. उन्होंने कहा, ‘देश की टेस्ट टीम का कप्तान होना फख्र की बात है. मुझे इस पर गर्व है. मेरे लिए इससे बढ़कर कुछ नहीं. इस अतिरिक्त जिम्मेदारी से मुझे बेहतर क्रिकेटर बनने में मदद मिली.’
उन्होंने कहा, ‘‘मेरे लिए सफेद जर्सी पहनकर मैदान पर उतरना फख्र की बात है. टेस्ट क्रिकेट जैसी परीक्षा किसी और प्रारूप में नहीं होती.’ कोहली की कप्तानी में भारतीय टीम टेस्ट क्रिकेट में नंबर एक तक पहुंची और उनका लक्ष्य इस लय को कायम रखना है. उन्होंने कहा, ‘हम विश्व स्तरीय टीम बनना चाहते हैं और हमारी टीम के हर खिलाड़ी के जेहन में यही है. आप किसी भी प्रारूप में खेलें, आपका लक्ष्य यही होता है.’टिप्पणियां
कोहली ने कहा, ‘टेस्ट टीम को अच्छे प्रदर्शन के लिए प्रेरित करने में मुझे गर्व महसूस होता है और मजा आता है. खुद को आजमाने की यह चुनौती है और पूरी टीम के साथ एक लक्ष्य की ओर हम बढ़ रहे हैं. इसमें कोई दबाव महसूस नहीं होता. महान खिलाड़ी बनने के लिए आपको एक टीम के रूप में अच्छा खेलना होता है जिसके बाद ही निजी प्रदर्शन मायने रखता है.’
उन्होंने कहा, ‘उतार-चढ़ाव तो आएंगे जब आपको आलोचना और नकारात्मक चीजों का सामना भी करना पड़ेगा, लेकिन इसी में असल परीक्षा होती है.’
उन्होंने कहा, ‘‘मेरे लिए सफेद जर्सी पहनकर मैदान पर उतरना फख्र की बात है. टेस्ट क्रिकेट जैसी परीक्षा किसी और प्रारूप में नहीं होती.’ कोहली की कप्तानी में भारतीय टीम टेस्ट क्रिकेट में नंबर एक तक पहुंची और उनका लक्ष्य इस लय को कायम रखना है. उन्होंने कहा, ‘हम विश्व स्तरीय टीम बनना चाहते हैं और हमारी टीम के हर खिलाड़ी के जेहन में यही है. आप किसी भी प्रारूप में खेलें, आपका लक्ष्य यही होता है.’टिप्पणियां
कोहली ने कहा, ‘टेस्ट टीम को अच्छे प्रदर्शन के लिए प्रेरित करने में मुझे गर्व महसूस होता है और मजा आता है. खुद को आजमाने की यह चुनौती है और पूरी टीम के साथ एक लक्ष्य की ओर हम बढ़ रहे हैं. इसमें कोई दबाव महसूस नहीं होता. महान खिलाड़ी बनने के लिए आपको एक टीम के रूप में अच्छा खेलना होता है जिसके बाद ही निजी प्रदर्शन मायने रखता है.’
उन्होंने कहा, ‘उतार-चढ़ाव तो आएंगे जब आपको आलोचना और नकारात्मक चीजों का सामना भी करना पड़ेगा, लेकिन इसी में असल परीक्षा होती है.’
कोहली ने कहा, ‘टेस्ट टीम को अच्छे प्रदर्शन के लिए प्रेरित करने में मुझे गर्व महसूस होता है और मजा आता है. खुद को आजमाने की यह चुनौती है और पूरी टीम के साथ एक लक्ष्य की ओर हम बढ़ रहे हैं. इसमें कोई दबाव महसूस नहीं होता. महान खिलाड़ी बनने के लिए आपको एक टीम के रूप में अच्छा खेलना होता है जिसके बाद ही निजी प्रदर्शन मायने रखता है.’
उन्होंने कहा, ‘उतार-चढ़ाव तो आएंगे जब आपको आलोचना और नकारात्मक चीजों का सामना भी करना पड़ेगा, लेकिन इसी में असल परीक्षा होती है.’
उन्होंने कहा, ‘उतार-चढ़ाव तो आएंगे जब आपको आलोचना और नकारात्मक चीजों का सामना भी करना पड़ेगा, लेकिन इसी में असल परीक्षा होती है.’ | सारांश: एमएस धोनी टीम इंडिया के अब तक के सबसे सफल कप्तान हैं
विराट कोहली की अगुवाई में टेस्ट में नंबर वन बनी है टीम इंडिया
न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज का अंतिम मैच इंदौर में होगा | 7 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: गुलबर्ग दंगा मामले में एसआईटी की रिपोर्ट में मोदी को क्लीन चिट दिए जाने पर मोदी और बीजेपी खेमा जहां खुशी मना रहा है, वहीं इस रिपोर्ट पर कुछ सवाल भी उठ रहे हैं।
नरेन्द्र मोदी को क्लीन चिट देने वाली एसआईटी प्रमुख रहे आरके राघवन का कहना है कि रिपोर्ट सबूतों के आधार पर तैयार की गई है और उनकी ईमानदारी पर सवाल नहीं उठाए जा सकते। राघवन ने कहा कि उन्होंने अपना फर्ज निभाया है, लेकिन वह गलत भी हो सकते हैं। वहीं इस मामले में एमिकस क्यूरी राजू रामचंद्रन का कहना है कि सबूतों के आधार पर उन्होंने अलग से जांच की है और जब रिपोर्ट सार्वजनिक होगी तो सबको पता चल जाएगा। रामचंद्रन ने कहा कि अब कोर्ट के हाथ में यह है कि केस बंद होगा या नहीं। दूसरी ओर सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ ने एसआईटी की रिपोर्ट पर हैरानी जताई है। उनका कहना है कि यह रिपोर्ट शक पैदा करती है।टिप्पणियां
उधर, एसआईटी की रिपोर्ट ने गुजरात दंगों के दस साल बाद नरेन्द्र मोदी को फिर से अपने दाग धोने का एक मौका दे दिया। गुलबर्ग सोसायटी मामले में एसआईटी की क्लोजर रिपोर्ट से कानूनी लड़ाई के रास्ते भले ही बंद न हुए हों, लेकिन मोदी को राजनीतिक लड़ाई के लिए नए रास्ते जरूर मिल गए हैं। दंगों के बाद मोदी ने लगातार दो विधानसभा चुनाव जीते, हालांकि उनकी लोकप्रियता कुछ गिरी।
2002 के दिसम्बर में जब दंगों की तपन तेज थी, तब मोदी ने 126 सीटें जीतीं, लेकिन पांच साल बाद जब गुजरात थोड़ा सामान्य होने लगा तो 2007 में बीजेपी को 117 सीटें ही मिल पाईं। इस साल दिसंबर में फिर विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में यह रिपोर्ट मोदी को राजनीतिक ताकत देने के काम आ सकती है। अपने खिलाफ लगे हर आरोप को नरेंद्र मोदी गुजरात के सम्मान और अपमान का सवाल बनाते रहे हैं। जाहिर है इस कानूनी फैसले का भी वह पूरा सियासी इस्तेमाल करेंगे और बताएंगे कि उन पर लगाए गए आरोप गुजरात को बदनाम करने की साजिश थे।
नरेन्द्र मोदी को क्लीन चिट देने वाली एसआईटी प्रमुख रहे आरके राघवन का कहना है कि रिपोर्ट सबूतों के आधार पर तैयार की गई है और उनकी ईमानदारी पर सवाल नहीं उठाए जा सकते। राघवन ने कहा कि उन्होंने अपना फर्ज निभाया है, लेकिन वह गलत भी हो सकते हैं। वहीं इस मामले में एमिकस क्यूरी राजू रामचंद्रन का कहना है कि सबूतों के आधार पर उन्होंने अलग से जांच की है और जब रिपोर्ट सार्वजनिक होगी तो सबको पता चल जाएगा। रामचंद्रन ने कहा कि अब कोर्ट के हाथ में यह है कि केस बंद होगा या नहीं। दूसरी ओर सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ ने एसआईटी की रिपोर्ट पर हैरानी जताई है। उनका कहना है कि यह रिपोर्ट शक पैदा करती है।टिप्पणियां
उधर, एसआईटी की रिपोर्ट ने गुजरात दंगों के दस साल बाद नरेन्द्र मोदी को फिर से अपने दाग धोने का एक मौका दे दिया। गुलबर्ग सोसायटी मामले में एसआईटी की क्लोजर रिपोर्ट से कानूनी लड़ाई के रास्ते भले ही बंद न हुए हों, लेकिन मोदी को राजनीतिक लड़ाई के लिए नए रास्ते जरूर मिल गए हैं। दंगों के बाद मोदी ने लगातार दो विधानसभा चुनाव जीते, हालांकि उनकी लोकप्रियता कुछ गिरी।
2002 के दिसम्बर में जब दंगों की तपन तेज थी, तब मोदी ने 126 सीटें जीतीं, लेकिन पांच साल बाद जब गुजरात थोड़ा सामान्य होने लगा तो 2007 में बीजेपी को 117 सीटें ही मिल पाईं। इस साल दिसंबर में फिर विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में यह रिपोर्ट मोदी को राजनीतिक ताकत देने के काम आ सकती है। अपने खिलाफ लगे हर आरोप को नरेंद्र मोदी गुजरात के सम्मान और अपमान का सवाल बनाते रहे हैं। जाहिर है इस कानूनी फैसले का भी वह पूरा सियासी इस्तेमाल करेंगे और बताएंगे कि उन पर लगाए गए आरोप गुजरात को बदनाम करने की साजिश थे।
उधर, एसआईटी की रिपोर्ट ने गुजरात दंगों के दस साल बाद नरेन्द्र मोदी को फिर से अपने दाग धोने का एक मौका दे दिया। गुलबर्ग सोसायटी मामले में एसआईटी की क्लोजर रिपोर्ट से कानूनी लड़ाई के रास्ते भले ही बंद न हुए हों, लेकिन मोदी को राजनीतिक लड़ाई के लिए नए रास्ते जरूर मिल गए हैं। दंगों के बाद मोदी ने लगातार दो विधानसभा चुनाव जीते, हालांकि उनकी लोकप्रियता कुछ गिरी।
2002 के दिसम्बर में जब दंगों की तपन तेज थी, तब मोदी ने 126 सीटें जीतीं, लेकिन पांच साल बाद जब गुजरात थोड़ा सामान्य होने लगा तो 2007 में बीजेपी को 117 सीटें ही मिल पाईं। इस साल दिसंबर में फिर विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में यह रिपोर्ट मोदी को राजनीतिक ताकत देने के काम आ सकती है। अपने खिलाफ लगे हर आरोप को नरेंद्र मोदी गुजरात के सम्मान और अपमान का सवाल बनाते रहे हैं। जाहिर है इस कानूनी फैसले का भी वह पूरा सियासी इस्तेमाल करेंगे और बताएंगे कि उन पर लगाए गए आरोप गुजरात को बदनाम करने की साजिश थे।
2002 के दिसम्बर में जब दंगों की तपन तेज थी, तब मोदी ने 126 सीटें जीतीं, लेकिन पांच साल बाद जब गुजरात थोड़ा सामान्य होने लगा तो 2007 में बीजेपी को 117 सीटें ही मिल पाईं। इस साल दिसंबर में फिर विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में यह रिपोर्ट मोदी को राजनीतिक ताकत देने के काम आ सकती है। अपने खिलाफ लगे हर आरोप को नरेंद्र मोदी गुजरात के सम्मान और अपमान का सवाल बनाते रहे हैं। जाहिर है इस कानूनी फैसले का भी वह पूरा सियासी इस्तेमाल करेंगे और बताएंगे कि उन पर लगाए गए आरोप गुजरात को बदनाम करने की साजिश थे। | गुलबर्ग सोसायटी नरसंहार मामले में SIT रिपोर्ट में मोदी को क्लीन चिट दिए जाने पर जहां बीजेपी खेमा खुशी मना रहा है, वहीं इस रिपोर्ट पर कुछ सवाल भी उठ रहे हैं। | 34 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: भारतीय उद्योग जगत ने मंगलवार को भारतीय रिजर्व बैंक के कुछ प्रमुख नीतिगत दरों में कटौती के फैसले का स्वागत किया और कहा कि इससे निवेश बढ़ेगा और कारोबारी संवेदना बेहतर होगी।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने और अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने की एक कोशिश के तहत मंगलवार को प्रमुख दरों में 50 आधार अंकों की कटौती की घोषणा की। इससे आवासीय, वाहन और वाणिज्यिक ऋण पर ब्याज दर घटने का अनुमान है।
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने आरबीआई की वार्षिक मौद्रिक नीति के बारे में कहा, "रेपो दर में 50 आधार अंकों की कटौती स्वागत योग्य कदम है। आर्थिक विकास दर और औद्योगिक उत्पादन विकास (आईआईपी) दर में गिरावट को देखते हुए इसकी काफी जरूरत थी।" उन्होंने कहा, "रेपो दर में कटौती से निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा साथ ही एक स्पष्ट संदेश जाएगा कि विकास को काफी महत्व दिया जा रहा है।"
आरबीआई के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने चालू वित्त वर्ष के लिए मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए कहा कि रेपो दर को 8.50 फीसदी से घटाकर आठ फीसदी किया जा रहा है। इस तरह रिवर्स रेपो दर स्वत: सात हो जाएगी, जो अभी 7.50 फीसदी है।
रेपो दर रिजर्व बैंक द्वारा व्यावसायिक बैंकों को दिए गए ऋण पर लगाया जाने वाला ब्याज होती है जबकि रिवर्स रेपो दर रिजर्व बैंक के पास व्यावसायिक बैंकों द्वारा जमा राशि पर मिलने वाला ब्याज होती है।
इन दरों में कटौती से व्यावसायिक बैंक सरकारी प्रतिभूतियों के रूप में आरबीआई में अपना धन जमा न करने के प्रति आकर्षित होंगे और इसके बदले वे धन को व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए ऋण में लगाएंगे।
उद्योग जगत की एक अन्य प्रतिनिधि संस्था एसोसिएटेड चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) ने भी कटौती का स्वागत किया।टिप्पणियां
एसोचैम के महासचिव डीएस रावत ने कहा, "इससे सस्ते कर्ज की जमीन तैयार हो चुकी है और निवेश का माहौल बना है। हालांकि इससे महंगाई के दबाव की भी वापसी हो सकती है।"
रावत ने कहा, "ऊंची ब्याज दरों के कारण लगभग दो सालों से नए निवेश और औद्योगिक उत्पादन में कमी देखी जा रही थी। आरबीआई ने सुस्ती दूर करने के लिए बड़ा कदम उठाया है।"
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने और अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने की एक कोशिश के तहत मंगलवार को प्रमुख दरों में 50 आधार अंकों की कटौती की घोषणा की। इससे आवासीय, वाहन और वाणिज्यिक ऋण पर ब्याज दर घटने का अनुमान है।
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने आरबीआई की वार्षिक मौद्रिक नीति के बारे में कहा, "रेपो दर में 50 आधार अंकों की कटौती स्वागत योग्य कदम है। आर्थिक विकास दर और औद्योगिक उत्पादन विकास (आईआईपी) दर में गिरावट को देखते हुए इसकी काफी जरूरत थी।" उन्होंने कहा, "रेपो दर में कटौती से निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा साथ ही एक स्पष्ट संदेश जाएगा कि विकास को काफी महत्व दिया जा रहा है।"
आरबीआई के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने चालू वित्त वर्ष के लिए मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए कहा कि रेपो दर को 8.50 फीसदी से घटाकर आठ फीसदी किया जा रहा है। इस तरह रिवर्स रेपो दर स्वत: सात हो जाएगी, जो अभी 7.50 फीसदी है।
रेपो दर रिजर्व बैंक द्वारा व्यावसायिक बैंकों को दिए गए ऋण पर लगाया जाने वाला ब्याज होती है जबकि रिवर्स रेपो दर रिजर्व बैंक के पास व्यावसायिक बैंकों द्वारा जमा राशि पर मिलने वाला ब्याज होती है।
इन दरों में कटौती से व्यावसायिक बैंक सरकारी प्रतिभूतियों के रूप में आरबीआई में अपना धन जमा न करने के प्रति आकर्षित होंगे और इसके बदले वे धन को व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए ऋण में लगाएंगे।
उद्योग जगत की एक अन्य प्रतिनिधि संस्था एसोसिएटेड चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) ने भी कटौती का स्वागत किया।टिप्पणियां
एसोचैम के महासचिव डीएस रावत ने कहा, "इससे सस्ते कर्ज की जमीन तैयार हो चुकी है और निवेश का माहौल बना है। हालांकि इससे महंगाई के दबाव की भी वापसी हो सकती है।"
रावत ने कहा, "ऊंची ब्याज दरों के कारण लगभग दो सालों से नए निवेश और औद्योगिक उत्पादन में कमी देखी जा रही थी। आरबीआई ने सुस्ती दूर करने के लिए बड़ा कदम उठाया है।"
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने आरबीआई की वार्षिक मौद्रिक नीति के बारे में कहा, "रेपो दर में 50 आधार अंकों की कटौती स्वागत योग्य कदम है। आर्थिक विकास दर और औद्योगिक उत्पादन विकास (आईआईपी) दर में गिरावट को देखते हुए इसकी काफी जरूरत थी।" उन्होंने कहा, "रेपो दर में कटौती से निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा साथ ही एक स्पष्ट संदेश जाएगा कि विकास को काफी महत्व दिया जा रहा है।"
आरबीआई के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने चालू वित्त वर्ष के लिए मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए कहा कि रेपो दर को 8.50 फीसदी से घटाकर आठ फीसदी किया जा रहा है। इस तरह रिवर्स रेपो दर स्वत: सात हो जाएगी, जो अभी 7.50 फीसदी है।
रेपो दर रिजर्व बैंक द्वारा व्यावसायिक बैंकों को दिए गए ऋण पर लगाया जाने वाला ब्याज होती है जबकि रिवर्स रेपो दर रिजर्व बैंक के पास व्यावसायिक बैंकों द्वारा जमा राशि पर मिलने वाला ब्याज होती है।
इन दरों में कटौती से व्यावसायिक बैंक सरकारी प्रतिभूतियों के रूप में आरबीआई में अपना धन जमा न करने के प्रति आकर्षित होंगे और इसके बदले वे धन को व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए ऋण में लगाएंगे।
उद्योग जगत की एक अन्य प्रतिनिधि संस्था एसोसिएटेड चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) ने भी कटौती का स्वागत किया।टिप्पणियां
एसोचैम के महासचिव डीएस रावत ने कहा, "इससे सस्ते कर्ज की जमीन तैयार हो चुकी है और निवेश का माहौल बना है। हालांकि इससे महंगाई के दबाव की भी वापसी हो सकती है।"
रावत ने कहा, "ऊंची ब्याज दरों के कारण लगभग दो सालों से नए निवेश और औद्योगिक उत्पादन में कमी देखी जा रही थी। आरबीआई ने सुस्ती दूर करने के लिए बड़ा कदम उठाया है।"
आरबीआई के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने चालू वित्त वर्ष के लिए मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए कहा कि रेपो दर को 8.50 फीसदी से घटाकर आठ फीसदी किया जा रहा है। इस तरह रिवर्स रेपो दर स्वत: सात हो जाएगी, जो अभी 7.50 फीसदी है।
रेपो दर रिजर्व बैंक द्वारा व्यावसायिक बैंकों को दिए गए ऋण पर लगाया जाने वाला ब्याज होती है जबकि रिवर्स रेपो दर रिजर्व बैंक के पास व्यावसायिक बैंकों द्वारा जमा राशि पर मिलने वाला ब्याज होती है।
इन दरों में कटौती से व्यावसायिक बैंक सरकारी प्रतिभूतियों के रूप में आरबीआई में अपना धन जमा न करने के प्रति आकर्षित होंगे और इसके बदले वे धन को व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए ऋण में लगाएंगे।
उद्योग जगत की एक अन्य प्रतिनिधि संस्था एसोसिएटेड चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) ने भी कटौती का स्वागत किया।टिप्पणियां
एसोचैम के महासचिव डीएस रावत ने कहा, "इससे सस्ते कर्ज की जमीन तैयार हो चुकी है और निवेश का माहौल बना है। हालांकि इससे महंगाई के दबाव की भी वापसी हो सकती है।"
रावत ने कहा, "ऊंची ब्याज दरों के कारण लगभग दो सालों से नए निवेश और औद्योगिक उत्पादन में कमी देखी जा रही थी। आरबीआई ने सुस्ती दूर करने के लिए बड़ा कदम उठाया है।"
रेपो दर रिजर्व बैंक द्वारा व्यावसायिक बैंकों को दिए गए ऋण पर लगाया जाने वाला ब्याज होती है जबकि रिवर्स रेपो दर रिजर्व बैंक के पास व्यावसायिक बैंकों द्वारा जमा राशि पर मिलने वाला ब्याज होती है।
इन दरों में कटौती से व्यावसायिक बैंक सरकारी प्रतिभूतियों के रूप में आरबीआई में अपना धन जमा न करने के प्रति आकर्षित होंगे और इसके बदले वे धन को व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए ऋण में लगाएंगे।
उद्योग जगत की एक अन्य प्रतिनिधि संस्था एसोसिएटेड चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) ने भी कटौती का स्वागत किया।टिप्पणियां
एसोचैम के महासचिव डीएस रावत ने कहा, "इससे सस्ते कर्ज की जमीन तैयार हो चुकी है और निवेश का माहौल बना है। हालांकि इससे महंगाई के दबाव की भी वापसी हो सकती है।"
रावत ने कहा, "ऊंची ब्याज दरों के कारण लगभग दो सालों से नए निवेश और औद्योगिक उत्पादन में कमी देखी जा रही थी। आरबीआई ने सुस्ती दूर करने के लिए बड़ा कदम उठाया है।"
इन दरों में कटौती से व्यावसायिक बैंक सरकारी प्रतिभूतियों के रूप में आरबीआई में अपना धन जमा न करने के प्रति आकर्षित होंगे और इसके बदले वे धन को व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए ऋण में लगाएंगे।
उद्योग जगत की एक अन्य प्रतिनिधि संस्था एसोसिएटेड चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) ने भी कटौती का स्वागत किया।टिप्पणियां
एसोचैम के महासचिव डीएस रावत ने कहा, "इससे सस्ते कर्ज की जमीन तैयार हो चुकी है और निवेश का माहौल बना है। हालांकि इससे महंगाई के दबाव की भी वापसी हो सकती है।"
रावत ने कहा, "ऊंची ब्याज दरों के कारण लगभग दो सालों से नए निवेश और औद्योगिक उत्पादन में कमी देखी जा रही थी। आरबीआई ने सुस्ती दूर करने के लिए बड़ा कदम उठाया है।"
उद्योग जगत की एक अन्य प्रतिनिधि संस्था एसोसिएटेड चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) ने भी कटौती का स्वागत किया।टिप्पणियां
एसोचैम के महासचिव डीएस रावत ने कहा, "इससे सस्ते कर्ज की जमीन तैयार हो चुकी है और निवेश का माहौल बना है। हालांकि इससे महंगाई के दबाव की भी वापसी हो सकती है।"
रावत ने कहा, "ऊंची ब्याज दरों के कारण लगभग दो सालों से नए निवेश और औद्योगिक उत्पादन में कमी देखी जा रही थी। आरबीआई ने सुस्ती दूर करने के लिए बड़ा कदम उठाया है।"
एसोचैम के महासचिव डीएस रावत ने कहा, "इससे सस्ते कर्ज की जमीन तैयार हो चुकी है और निवेश का माहौल बना है। हालांकि इससे महंगाई के दबाव की भी वापसी हो सकती है।"
रावत ने कहा, "ऊंची ब्याज दरों के कारण लगभग दो सालों से नए निवेश और औद्योगिक उत्पादन में कमी देखी जा रही थी। आरबीआई ने सुस्ती दूर करने के लिए बड़ा कदम उठाया है।"
रावत ने कहा, "ऊंची ब्याज दरों के कारण लगभग दो सालों से नए निवेश और औद्योगिक उत्पादन में कमी देखी जा रही थी। आरबीआई ने सुस्ती दूर करने के लिए बड़ा कदम उठाया है।" | यह एक सारांश है: भारतीय उद्योग जगत ने मंगलवार को भारतीय रिजर्व बैंक के कुछ प्रमुख नीतिगत दरों में कटौती के फैसले का स्वागत किया और कहा कि इससे निवेश बढ़ेगा और कारोबारी संवेदना बेहतर होगी। | 21 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: चुनाव आयोग ने अनंतनाग में लोकसभा उपचुनाव रद्द करते हुए कहा कि फिलहाल की स्थिति चुनाव कराने योग्य नहीं है. यहां 25 मई को चुनाव होना था. कश्मीर घाटी में बिगड़े हालात की वजह से यह फैसला लिया गया है. चुनाव आयोग अनंतनाग के लिए सेना की 600 से ज्यादा कंपनी चाहता है, लेकिन गृहमंत्रालय 300 कंपनी से ज्यादा देने को तैयार नहीं है. गृह मंत्रालय ने चुनाव आयोग को बता दिया था कि वह अनंतनाग के उपचुनाव के लिए सिर्फ़ 30,000 अर्धसैनिक बल भेज सकता है. चुनाव आयोग ने मंत्रालय से 74000 सुरक्षाकर्मी मई 12 तक इलाक़े में तैनात करने को कहा था. एक वरिष्ठ अफसर ने एनडीटीवी से कहा कि हमने आयोग को बता दिया है कि सिर्फ़ 300 कंपनियां भेज सकते हैं, इससे ज़्यादा नहीं.टिप्पणियां
चुनाव आयोग ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से कहा है कि उसे 747 कंपनियां चाहिए जो 12 मई तक उसे मिल जानी चाहिए ताकि तैनाती हो सके. एक कंपनी में 100 सुरक्षाकर्मी होते हैं. चुनाव आयोग की ये मांग इसलिए अद्भुत थी, क्योंकि हाल में पांच राज्यों में चुनाव ख़त्म हुए हैं और सभी राज्यों में कुल मिलाकर 70000 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे. सिर्फ़ उत्तर प्रदेश में 403 विधानसभा की सीटें हैं और 80 लोकसभा की.
श्रीनगर इलाक़े में 9 अप्रैल को उपचुनाव के लिए मतदान हुआ था लेकिन हिंसा की वारदातों को देखते हुए अनंतनाग में उपचुनाव टाल दिया गया था. गृह मंत्रालय के मुताबिक़ औसतन संसदीय चुनाव के लिए 10 कंपनियां कम्पनिया तैनात की जाती हैं यानी 1000 सुरक्षा कर्मी. केन्द्रीय गृह मंत्रालय चुनाव आयोग से कहने वाला है कि इतनी जल्दी ये संभव नहीं है. आयोग को उसे कुछ समय देना होगा. आज की तारीख़ में 150 कम्पनियां घाटी में तैनात हैं यानी 15000 अर्ध सैनिक बल. कुल मिलाकर अर्ध सैनिक बलों की संख्या दस लाख के क़रीब है लेकिन वो अलग अलग राज्यों में तैनात हैं. हालांकि PDP चुनाव को टालने के लिए आयोग को पहले ही चिट्ठी लिख चुकी है.
चुनाव आयोग ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से कहा है कि उसे 747 कंपनियां चाहिए जो 12 मई तक उसे मिल जानी चाहिए ताकि तैनाती हो सके. एक कंपनी में 100 सुरक्षाकर्मी होते हैं. चुनाव आयोग की ये मांग इसलिए अद्भुत थी, क्योंकि हाल में पांच राज्यों में चुनाव ख़त्म हुए हैं और सभी राज्यों में कुल मिलाकर 70000 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे. सिर्फ़ उत्तर प्रदेश में 403 विधानसभा की सीटें हैं और 80 लोकसभा की.
श्रीनगर इलाक़े में 9 अप्रैल को उपचुनाव के लिए मतदान हुआ था लेकिन हिंसा की वारदातों को देखते हुए अनंतनाग में उपचुनाव टाल दिया गया था. गृह मंत्रालय के मुताबिक़ औसतन संसदीय चुनाव के लिए 10 कंपनियां कम्पनिया तैनात की जाती हैं यानी 1000 सुरक्षा कर्मी. केन्द्रीय गृह मंत्रालय चुनाव आयोग से कहने वाला है कि इतनी जल्दी ये संभव नहीं है. आयोग को उसे कुछ समय देना होगा. आज की तारीख़ में 150 कम्पनियां घाटी में तैनात हैं यानी 15000 अर्ध सैनिक बल. कुल मिलाकर अर्ध सैनिक बलों की संख्या दस लाख के क़रीब है लेकिन वो अलग अलग राज्यों में तैनात हैं. हालांकि PDP चुनाव को टालने के लिए आयोग को पहले ही चिट्ठी लिख चुकी है.
श्रीनगर इलाक़े में 9 अप्रैल को उपचुनाव के लिए मतदान हुआ था लेकिन हिंसा की वारदातों को देखते हुए अनंतनाग में उपचुनाव टाल दिया गया था. गृह मंत्रालय के मुताबिक़ औसतन संसदीय चुनाव के लिए 10 कंपनियां कम्पनिया तैनात की जाती हैं यानी 1000 सुरक्षा कर्मी. केन्द्रीय गृह मंत्रालय चुनाव आयोग से कहने वाला है कि इतनी जल्दी ये संभव नहीं है. आयोग को उसे कुछ समय देना होगा. आज की तारीख़ में 150 कम्पनियां घाटी में तैनात हैं यानी 15000 अर्ध सैनिक बल. कुल मिलाकर अर्ध सैनिक बलों की संख्या दस लाख के क़रीब है लेकिन वो अलग अलग राज्यों में तैनात हैं. हालांकि PDP चुनाव को टालने के लिए आयोग को पहले ही चिट्ठी लिख चुकी है. | संक्षिप्त सारांश: गृहमंत्रालय 300 कंपनी से ज्यादा देने को तैयार नहीं है
चुनाव आयोग ने 747 कंपनियां मांगी
हिंसक वारदातों के चलते अनंतनाग का चुनाव टाला गया | 0 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25-26 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के न्यौते पर वाशिंगटन डीसी का दौरा करेंगे. दोनों नेता 26 जून को अपनी पहली द्विपक्षीय वार्ता करेंगे.पिछले हफ्ते अमेरिकी विदेश विभाग ने पुष्टि की थी कि पीएम मोदी इस महीने के आखिर तक वाशिंगटन का दौरा करेंगे. व्हाइट हाउस ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्टपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच होने वाली पहली बैठक भारत और अमेरिका के बीच की साझेदारी को एक महत्वाकांक्षी ढंग से विस्तार देने के लिए एक दृष्टिकोण पेश करेगी. दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के नेता आतंकवाद से जुड़े मुद्दों और एच1बी वीजा नियमों में संभावित बदलावों से जुड़ी भारत की चिंताओं जैसे द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा के लिए 26 जून को बैठक करेंगे.
व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव सीन स्पाइसर ने दैनिक संवाददाता सम्मेलन में कहा, आप उम्मीद कर सकते हैं कि वे दोनों एक ऐसा दृष्टिकोण पेश करेंगे, जो भारत और अमेरिका की साझेदारी को एक महत्वाकांक्षी और योग्य तरीके से विस्तार देगा. स्पाइसर ने कहा कि दोनों नेता भारत और अमेरिका की साझेदारी के विस्तार पर एक साझा दृष्टिकोण पेश कर सकते हैं. उन्होंने आतंकवाद से लड़ाई, आर्थिक वृद्धि को दिए जाने वाले बल, सुधारों और सुरक्षा सहयोग को दिए जाने वाले विस्तार को हिंद-प्रशांत क्षेत्र की साझा प्राथमिकताएं बताया.
स्पाइसर ने कहा, राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका और भारत की ऐसी साझेदारी के लिए एक साझा नजरिया तैयार करने पर काम करेंगे, जो 1.6 अरब नागरिकों के लिए अच्छा हो. पीएम मोदी ने जब जनवरी में ट्रंप को राष्टपति बनने पर बधाई देने के लिए फोन किया था, तब ट्रंप ने पीएम मोदी को वाशिंगटन आने का निमंत्रण दिया था.
ट्रंप प्रशासन के सत्ता में आने के बाद पीएम मोदी का यह पहला अमेरिका दौरा होगा. हालांकि दोनों नेताओं के बीच कम से कम तीन बार फोन पर बात हो चुकी है.टिप्पणियां
विदेश मंत्रालय ने प्रधानमंत्री की 25 जून से शुरू होने वाली अमेरिका यात्रा की घोषणा करते हुए सोमवार को कहा कि मोदी-ट्रंप के बीच बातचीत गहरे द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा प्रदान करेगी. मंत्रालय ने कहा, 'प्रधानमंत्री 26 जून को राष्ट्रपति ट्रंप के साथ आधिकारिक वार्ता करेंगे. उनकी चर्चा पारस्परिक हित के मुद्दों पर गहरे द्विपक्षीय संबंधों और भारत और अमेरिका के बीच बहुआयामी रणनीतिक भागीदारी को मजबूत बनाने के लिए नई दिशा प्रदान करेगी.'
पूर्ववर्ती ओबामा प्रशासन के दौरान पीएम मोदी की बराक ओबामा से रिकार्ड आठ बार मुलाकात हुई थी. पीएम मोदी ने वाशिंगटन का तीन बार दौरा किया था, जबकि साल 2015 में ओबामा की ऐतिहासिक भारत यात्रा हुई थी, जिसमें वह गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि थे. (इनपुट्स भाषा से )
व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव सीन स्पाइसर ने दैनिक संवाददाता सम्मेलन में कहा, आप उम्मीद कर सकते हैं कि वे दोनों एक ऐसा दृष्टिकोण पेश करेंगे, जो भारत और अमेरिका की साझेदारी को एक महत्वाकांक्षी और योग्य तरीके से विस्तार देगा. स्पाइसर ने कहा कि दोनों नेता भारत और अमेरिका की साझेदारी के विस्तार पर एक साझा दृष्टिकोण पेश कर सकते हैं. उन्होंने आतंकवाद से लड़ाई, आर्थिक वृद्धि को दिए जाने वाले बल, सुधारों और सुरक्षा सहयोग को दिए जाने वाले विस्तार को हिंद-प्रशांत क्षेत्र की साझा प्राथमिकताएं बताया.
स्पाइसर ने कहा, राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका और भारत की ऐसी साझेदारी के लिए एक साझा नजरिया तैयार करने पर काम करेंगे, जो 1.6 अरब नागरिकों के लिए अच्छा हो. पीएम मोदी ने जब जनवरी में ट्रंप को राष्टपति बनने पर बधाई देने के लिए फोन किया था, तब ट्रंप ने पीएम मोदी को वाशिंगटन आने का निमंत्रण दिया था.
ट्रंप प्रशासन के सत्ता में आने के बाद पीएम मोदी का यह पहला अमेरिका दौरा होगा. हालांकि दोनों नेताओं के बीच कम से कम तीन बार फोन पर बात हो चुकी है.टिप्पणियां
विदेश मंत्रालय ने प्रधानमंत्री की 25 जून से शुरू होने वाली अमेरिका यात्रा की घोषणा करते हुए सोमवार को कहा कि मोदी-ट्रंप के बीच बातचीत गहरे द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा प्रदान करेगी. मंत्रालय ने कहा, 'प्रधानमंत्री 26 जून को राष्ट्रपति ट्रंप के साथ आधिकारिक वार्ता करेंगे. उनकी चर्चा पारस्परिक हित के मुद्दों पर गहरे द्विपक्षीय संबंधों और भारत और अमेरिका के बीच बहुआयामी रणनीतिक भागीदारी को मजबूत बनाने के लिए नई दिशा प्रदान करेगी.'
पूर्ववर्ती ओबामा प्रशासन के दौरान पीएम मोदी की बराक ओबामा से रिकार्ड आठ बार मुलाकात हुई थी. पीएम मोदी ने वाशिंगटन का तीन बार दौरा किया था, जबकि साल 2015 में ओबामा की ऐतिहासिक भारत यात्रा हुई थी, जिसमें वह गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि थे. (इनपुट्स भाषा से )
स्पाइसर ने कहा, राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका और भारत की ऐसी साझेदारी के लिए एक साझा नजरिया तैयार करने पर काम करेंगे, जो 1.6 अरब नागरिकों के लिए अच्छा हो. पीएम मोदी ने जब जनवरी में ट्रंप को राष्टपति बनने पर बधाई देने के लिए फोन किया था, तब ट्रंप ने पीएम मोदी को वाशिंगटन आने का निमंत्रण दिया था.
ट्रंप प्रशासन के सत्ता में आने के बाद पीएम मोदी का यह पहला अमेरिका दौरा होगा. हालांकि दोनों नेताओं के बीच कम से कम तीन बार फोन पर बात हो चुकी है.टिप्पणियां
विदेश मंत्रालय ने प्रधानमंत्री की 25 जून से शुरू होने वाली अमेरिका यात्रा की घोषणा करते हुए सोमवार को कहा कि मोदी-ट्रंप के बीच बातचीत गहरे द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा प्रदान करेगी. मंत्रालय ने कहा, 'प्रधानमंत्री 26 जून को राष्ट्रपति ट्रंप के साथ आधिकारिक वार्ता करेंगे. उनकी चर्चा पारस्परिक हित के मुद्दों पर गहरे द्विपक्षीय संबंधों और भारत और अमेरिका के बीच बहुआयामी रणनीतिक भागीदारी को मजबूत बनाने के लिए नई दिशा प्रदान करेगी.'
पूर्ववर्ती ओबामा प्रशासन के दौरान पीएम मोदी की बराक ओबामा से रिकार्ड आठ बार मुलाकात हुई थी. पीएम मोदी ने वाशिंगटन का तीन बार दौरा किया था, जबकि साल 2015 में ओबामा की ऐतिहासिक भारत यात्रा हुई थी, जिसमें वह गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि थे. (इनपुट्स भाषा से )
ट्रंप प्रशासन के सत्ता में आने के बाद पीएम मोदी का यह पहला अमेरिका दौरा होगा. हालांकि दोनों नेताओं के बीच कम से कम तीन बार फोन पर बात हो चुकी है.टिप्पणियां
विदेश मंत्रालय ने प्रधानमंत्री की 25 जून से शुरू होने वाली अमेरिका यात्रा की घोषणा करते हुए सोमवार को कहा कि मोदी-ट्रंप के बीच बातचीत गहरे द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा प्रदान करेगी. मंत्रालय ने कहा, 'प्रधानमंत्री 26 जून को राष्ट्रपति ट्रंप के साथ आधिकारिक वार्ता करेंगे. उनकी चर्चा पारस्परिक हित के मुद्दों पर गहरे द्विपक्षीय संबंधों और भारत और अमेरिका के बीच बहुआयामी रणनीतिक भागीदारी को मजबूत बनाने के लिए नई दिशा प्रदान करेगी.'
पूर्ववर्ती ओबामा प्रशासन के दौरान पीएम मोदी की बराक ओबामा से रिकार्ड आठ बार मुलाकात हुई थी. पीएम मोदी ने वाशिंगटन का तीन बार दौरा किया था, जबकि साल 2015 में ओबामा की ऐतिहासिक भारत यात्रा हुई थी, जिसमें वह गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि थे. (इनपुट्स भाषा से )
विदेश मंत्रालय ने प्रधानमंत्री की 25 जून से शुरू होने वाली अमेरिका यात्रा की घोषणा करते हुए सोमवार को कहा कि मोदी-ट्रंप के बीच बातचीत गहरे द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा प्रदान करेगी. मंत्रालय ने कहा, 'प्रधानमंत्री 26 जून को राष्ट्रपति ट्रंप के साथ आधिकारिक वार्ता करेंगे. उनकी चर्चा पारस्परिक हित के मुद्दों पर गहरे द्विपक्षीय संबंधों और भारत और अमेरिका के बीच बहुआयामी रणनीतिक भागीदारी को मजबूत बनाने के लिए नई दिशा प्रदान करेगी.'
पूर्ववर्ती ओबामा प्रशासन के दौरान पीएम मोदी की बराक ओबामा से रिकार्ड आठ बार मुलाकात हुई थी. पीएम मोदी ने वाशिंगटन का तीन बार दौरा किया था, जबकि साल 2015 में ओबामा की ऐतिहासिक भारत यात्रा हुई थी, जिसमें वह गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि थे. (इनपुट्स भाषा से )
पूर्ववर्ती ओबामा प्रशासन के दौरान पीएम मोदी की बराक ओबामा से रिकार्ड आठ बार मुलाकात हुई थी. पीएम मोदी ने वाशिंगटन का तीन बार दौरा किया था, जबकि साल 2015 में ओबामा की ऐतिहासिक भारत यात्रा हुई थी, जिसमें वह गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि थे. (इनपुट्स भाषा से ) | संक्षिप्त पाठ: ट्रंप से तीन बार फोन पर बात कर चुके हैं पीएम मोदी
आतंकवाद और H1B वीजा पर होगी बात
ओबामा से आठ बार मिले थे पीएम मोदी | 14 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: केंद्रीय कानून मंत्री वीरप्पा मोइली ने शनिवार को कहा कि वेबसाइट विकिलीक्स द्वारा भारत-अमेरिका परमाणु करार पर अमेरिकी राजनयिकों के साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की गुप्त बातचीत का खुलासा भाजपा की 'दोहरी नीति' को दर्शाता है। मोइली ने पत्रकारों से कहा, "यह पूरी तरह से एक दोहरी नीति है। भाजपा को इसका जवाब देना होगा कि वह क्यों ऐसा बर्ताव करती है।" ज्ञात हो कि विकिलीक्स ने वर्ष 2008 में भारत और अमेरिका के बीच हुए परमाणु करार को लेकर अमेरिकी राजनयिक संदेशों का खुलासा किया है। विकिलीक्स के नए खुलासे के मुताबिक भाजपा के नेतृत्व ने कथित रूप से अमेरिकी राजनयिकों को बताया कि वह कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के खिलाफ 'राजनीतिक फायदे के लिए' सार्वजनिक रूप से उनकी आलोचना करती है। संदेश के मुताबिक भाजपा नेतृत्व ने अमेरिकी राजनयिकों को आश्वस्त किया कि जब वे सत्ता में आएंगे तो वे इस करार को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे। विकिलीक्स इसके पहले खुलासा कर चुका है कि परमाणु करार को लेकर जुलाई 2008 में पेश विश्वास प्रस्ताव में जीत दर्ज हासिल करने के लिए कांग्रेस ने कथित रूप से विपक्ष के सदस्यों को रिश्वत दी। भाजपा ने हालांकि यह कहा है कि उसने वास्तव में परमाणु दायित्व विधेयक का विरोध किया था और उसके तीव्र विरोध के चलते ही सरकार को विधेयक में 16 संशोधन करने पड़े। | संक्षिप्त सारांश: मोइली ने कहा कि विकिलीक्स द्वारा परमाणु करार पर अमेरिकी राजनयिकों के साथ भाजपा की गुप्त बातचीत का खुलासा भाजपा की 'दोहरी नीति' को दर्शाता है। | 29 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: एक के बाद एक कई युवा नेताओं को पार्टी से निकालने के बाद शिवपाल यादव आज संगठन में फेरबदल करने जा रहे हैं. यूपी समाजवादी पार्टी की कमान संभालने के बाद शिवपाल यादव जिस तरह से एक के बाद युवा नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा रहे हैं उससे परिवार के भीतर घमासान थमता नहीं दिख रहा है. रामगोपाल यादव के भांजे अरविंद यादव के बाद शिवपाल ने सात और युवा नेताओं को पार्टी से निकाल दिया है.
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव ने रामगोपाल यादव के भांजे और मैनपुरी से विधानपरिषद के सदस्य अरविंद प्रताप यादव को पार्टी से निकाले जाने को सही बताया है. अरविंद यादव को मुलायम सिंह के खिलाफ अभद्र भाषा के इस्तेमाल और उनके खिलाफ नारेबाज़ी करने का आरोप है, जिसके बाद उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया. शिवपाल ने आज कहा कि जो भी अनुशासनहीनता करेगा उसे बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा.
मुलायम सड़कों पर नारेबाजी करने वाले युवा नेताओं से सख्त नाराज बताए जाते हैं. उनके निर्देश पर अखिलेश के करीबी जिन सात नेताओं को पार्टी से बर्खास्त किया गया उनमें तीन एमएलसी सुनील सिंह साजन, आनंद भदौरिया और संजय लाथार के अलावा मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद ऐबाद, समाजवादी युवजन सभा के प्रदेश अध्यक्ष ब्रिजेश यादव, मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौरव दुबे और समाजवादी छात्र सभा के प्रदेश अध्यक्ष दिग्विजय सिंह शामिल हैं. मुलायम सिंह ने शिवपाल यादव को प्रदेश अध्यक्ष बनाया तो पार्टी के युवा संगठन उसके खिलाफ सड़कों पर उतर आए. वे शिवपाल यादव को हटाकर अखिलेश यादव को अध्यक्ष बनाने की मांग कर रहे थे. टिप्पणियां
समाजवादी लोहिया वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप तिवारी ने मुलायम के नाम अपने खत में लिखा है कि ''जिस दिन से शिवपाल यादव प्रदेश अध्यक्ष बने हैं, पूरे प्रदेश के नौजवान घुटन महसूस कर रहे हैं. और आज नौजवानों के ऊपर हुई कार्रवाई अखिलेश यादव के भविष्य पर बड़ा हमला है.''
प्रदीप तिवारी अखिलेश यादव के अलावा किसी को नेता मानने को तैयार भी नहीं हैं. वे कहते हैं ''हम नौजवानों के साथ यह बहुत बड़ी साजिश है. हम नौजवान अपना नेता सिर्फ और सिर्फ अखिलेश यादव जी को मानते हैं. उनके नेतृत्व में काम करेंगे.''
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव ने रामगोपाल यादव के भांजे और मैनपुरी से विधानपरिषद के सदस्य अरविंद प्रताप यादव को पार्टी से निकाले जाने को सही बताया है. अरविंद यादव को मुलायम सिंह के खिलाफ अभद्र भाषा के इस्तेमाल और उनके खिलाफ नारेबाज़ी करने का आरोप है, जिसके बाद उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया. शिवपाल ने आज कहा कि जो भी अनुशासनहीनता करेगा उसे बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा.
मुलायम सड़कों पर नारेबाजी करने वाले युवा नेताओं से सख्त नाराज बताए जाते हैं. उनके निर्देश पर अखिलेश के करीबी जिन सात नेताओं को पार्टी से बर्खास्त किया गया उनमें तीन एमएलसी सुनील सिंह साजन, आनंद भदौरिया और संजय लाथार के अलावा मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद ऐबाद, समाजवादी युवजन सभा के प्रदेश अध्यक्ष ब्रिजेश यादव, मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौरव दुबे और समाजवादी छात्र सभा के प्रदेश अध्यक्ष दिग्विजय सिंह शामिल हैं. मुलायम सिंह ने शिवपाल यादव को प्रदेश अध्यक्ष बनाया तो पार्टी के युवा संगठन उसके खिलाफ सड़कों पर उतर आए. वे शिवपाल यादव को हटाकर अखिलेश यादव को अध्यक्ष बनाने की मांग कर रहे थे. टिप्पणियां
समाजवादी लोहिया वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप तिवारी ने मुलायम के नाम अपने खत में लिखा है कि ''जिस दिन से शिवपाल यादव प्रदेश अध्यक्ष बने हैं, पूरे प्रदेश के नौजवान घुटन महसूस कर रहे हैं. और आज नौजवानों के ऊपर हुई कार्रवाई अखिलेश यादव के भविष्य पर बड़ा हमला है.''
प्रदीप तिवारी अखिलेश यादव के अलावा किसी को नेता मानने को तैयार भी नहीं हैं. वे कहते हैं ''हम नौजवानों के साथ यह बहुत बड़ी साजिश है. हम नौजवान अपना नेता सिर्फ और सिर्फ अखिलेश यादव जी को मानते हैं. उनके नेतृत्व में काम करेंगे.''
मुलायम सड़कों पर नारेबाजी करने वाले युवा नेताओं से सख्त नाराज बताए जाते हैं. उनके निर्देश पर अखिलेश के करीबी जिन सात नेताओं को पार्टी से बर्खास्त किया गया उनमें तीन एमएलसी सुनील सिंह साजन, आनंद भदौरिया और संजय लाथार के अलावा मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद ऐबाद, समाजवादी युवजन सभा के प्रदेश अध्यक्ष ब्रिजेश यादव, मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौरव दुबे और समाजवादी छात्र सभा के प्रदेश अध्यक्ष दिग्विजय सिंह शामिल हैं. मुलायम सिंह ने शिवपाल यादव को प्रदेश अध्यक्ष बनाया तो पार्टी के युवा संगठन उसके खिलाफ सड़कों पर उतर आए. वे शिवपाल यादव को हटाकर अखिलेश यादव को अध्यक्ष बनाने की मांग कर रहे थे. टिप्पणियां
समाजवादी लोहिया वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप तिवारी ने मुलायम के नाम अपने खत में लिखा है कि ''जिस दिन से शिवपाल यादव प्रदेश अध्यक्ष बने हैं, पूरे प्रदेश के नौजवान घुटन महसूस कर रहे हैं. और आज नौजवानों के ऊपर हुई कार्रवाई अखिलेश यादव के भविष्य पर बड़ा हमला है.''
प्रदीप तिवारी अखिलेश यादव के अलावा किसी को नेता मानने को तैयार भी नहीं हैं. वे कहते हैं ''हम नौजवानों के साथ यह बहुत बड़ी साजिश है. हम नौजवान अपना नेता सिर्फ और सिर्फ अखिलेश यादव जी को मानते हैं. उनके नेतृत्व में काम करेंगे.''
समाजवादी लोहिया वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप तिवारी ने मुलायम के नाम अपने खत में लिखा है कि ''जिस दिन से शिवपाल यादव प्रदेश अध्यक्ष बने हैं, पूरे प्रदेश के नौजवान घुटन महसूस कर रहे हैं. और आज नौजवानों के ऊपर हुई कार्रवाई अखिलेश यादव के भविष्य पर बड़ा हमला है.''
प्रदीप तिवारी अखिलेश यादव के अलावा किसी को नेता मानने को तैयार भी नहीं हैं. वे कहते हैं ''हम नौजवानों के साथ यह बहुत बड़ी साजिश है. हम नौजवान अपना नेता सिर्फ और सिर्फ अखिलेश यादव जी को मानते हैं. उनके नेतृत्व में काम करेंगे.''
प्रदीप तिवारी अखिलेश यादव के अलावा किसी को नेता मानने को तैयार भी नहीं हैं. वे कहते हैं ''हम नौजवानों के साथ यह बहुत बड़ी साजिश है. हम नौजवान अपना नेता सिर्फ और सिर्फ अखिलेश यादव जी को मानते हैं. उनके नेतृत्व में काम करेंगे.'' | सारांश: शिवपाल यादव आज करेंगे संगठन में फेरबदल
सोमवार को सात युवा नेताओं को बाहर निकाला
शिवपाल बोले, अनुशासनहीनता मंजूर नहीं | 7 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन की आगे की रणनीति पर चर्चा करने के लिए अन्ना हजारे मंगलवार को दिल्ली पहुंच रहे हैं, लेकिन उनके पहुंचने से एक दिन पहले सोमवार को अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाले इंडिया अंगेस्ट करप्शन ने दावा किया है कि उनके सर्वेक्षण में 76 फीसदी लोगों ने राजनैतिक दल बनाने का समर्थन किया है।टिप्पणियां
आईएसी के मुताबिक सर्वेक्षण के दौरान सात लाख 37 हज़ार 41 लोगों में से पांच लाख 61 हजार 791 लोगों यानि 76 फीसदी लोग पार्टी बनाने के पक्ष में थे जबकि 24 फीसदी इसके विरोध में। ये सर्वेक्षण मोबाइल एसएमएस, ईमेल और सीधे सर्वेक्षण के जरिये कराया गया।
अन्ना कहते आए हैं कि वह ना तो पार्टी बनाएंगे ना ही कभी चुनाव लड़ेंगे लेकिन केजरीवाल उनके उलट पार्टी बनाने और चुनाव लड़ने के हिमायती है। अब देखना दिलचस्प होगा कि आंदोलन राजनैतिक रंग लेगा या नहीं।
आईएसी के मुताबिक सर्वेक्षण के दौरान सात लाख 37 हज़ार 41 लोगों में से पांच लाख 61 हजार 791 लोगों यानि 76 फीसदी लोग पार्टी बनाने के पक्ष में थे जबकि 24 फीसदी इसके विरोध में। ये सर्वेक्षण मोबाइल एसएमएस, ईमेल और सीधे सर्वेक्षण के जरिये कराया गया।
अन्ना कहते आए हैं कि वह ना तो पार्टी बनाएंगे ना ही कभी चुनाव लड़ेंगे लेकिन केजरीवाल उनके उलट पार्टी बनाने और चुनाव लड़ने के हिमायती है। अब देखना दिलचस्प होगा कि आंदोलन राजनैतिक रंग लेगा या नहीं।
अन्ना कहते आए हैं कि वह ना तो पार्टी बनाएंगे ना ही कभी चुनाव लड़ेंगे लेकिन केजरीवाल उनके उलट पार्टी बनाने और चुनाव लड़ने के हिमायती है। अब देखना दिलचस्प होगा कि आंदोलन राजनैतिक रंग लेगा या नहीं। | यहाँ एक सारांश है:भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन की आगे की रणनीति पर चर्चा करने के लिए अन्ना हजारे मंगलवार को दिल्ली पहुंच रहे हैं। | 18 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 में बदलाव के बाद ऐहतियातन बंद किए श्रीनगर के 190 प्राइमरी स्कूल आज से खोले गए हैं.स्कूल खुलने के साथ ही पिछले कई दिनों से घरों में क़ैद बच्चे अब स्कूलों की रौनक बढ़ाते नज़र आएंगे.हांलाकि सीनियर क्लासेज के स्कूलों को खोलने का फ़ैसला हालात की समीक्षा के बाद ही होगा. इन सब के बीच हर हालात से निपटने के लिए सेना समेत अन्य सुरक्षा बलों को अलर्ट रहने को कहा गया है. श्रीनगर के जिन क्षेत्रों में स्कूलों को खोला जा रहा है उसमें लासजान, सागरी, पथचौक, नौकाम, राजबाग, जवाहर नगर, गगरीबल, धारा, थीड, बाटमालू और शल्टिंग शामिल हैं. प्रशासन के मुताबिक स्थिति सामान्य होते ही धीरे-धीरे अन्य क्षेत्रों के स्कूलों में बी पढ़ाई शुरू हो जाएगी. स्कूलों के खुलने के साथ ही घाटी में दूसरी पाबंदियों में भी लगातार ढील दी जा रही है.
कश्मीर घाटी के 50 पुलिस थाना क्षेत्रों में रविवार को प्रतिबंधों में ढील दी गयी. हालांकि, श्रीनगर के कुछ हिस्सों में हिंसा की छिटपुट घटनाओं के बाद प्रतिबंधों को और कड़ा कर दिया गया है. इस बीच, जम्मू क्षेत्र के पांच जिलों में इंटरनेट सेवाओं की बहाली के एक दिन बाद इसे फिर से बंद कर दिया गया. अधिकारियों ने बताया कि 300 हज जायरीनों का पहला जत्था रविवार को सउदी अरब से कश्मीर वापस लौटा. उन्होंने बताया कि जायरीनों की सुरक्षित घर वापसी के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किये गए थे. सरकारी प्रवक्ता रोहित कंसल ने यहां रविवार की शाम संवाददाताओं को बताया कि निषेधाज्ञा में ढील देने की प्रक्रिया जारी है . प्रदेश के 50 पुलिस थाना क्षेत्रों में आज प्रतिबंधों में ढील दी गयी जबकि कल 35 थाना क्षेत्रों में ऐसा किया गया था. कंसल ने बताया कि सोमवार से नया हफ्ता शुरू हो रहा है और हम इसे नई आशा के साथ देख रहे हैं. उन्होंने बताया कि अकेले श्रीनगर में 190 से अधिक प्राथमिक स्कूल सोमवार से दोबारा खुल रहे हैं और इसके बाद हम दूसरे क्षेत्रों की ओर देख रहे हैं, जहां हम विकास से संबंधित गतिविधि शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं.
कंसल ने कहा कि रविवार को छूट की अवधि भी छह घंटे से बढ़ाकर आठ घंटे कर दी गई. छूट की घोषणा करने से लोगों और दुकानदारों को पहले से योजना बनाने में मदद मिली. कल की प्रतिक्रिया के मद्देनजर और व्यापारियों द्वारा अनुरोध को ध्यान में रखते हुए छूट के घंटों में वृद्धि की गई है. यह प्रक्रिया आने वाले दिनों में भी जारी रहेगी . सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि कुछ इलाकों में कुछ शरारती तत्वों द्वारा दुकानदारों के साथ गुंडागर्दी करने और उनकी दुकानों को बंद करने की खबरें थीं. उन्होंने बताया कि कानून लागू करने वाली एजेंसियों ने इसका संज्ञान लिया है. जिन इलाकों में प्रतिबंधों में छूट दी गयी है उन क्षेत्रों में किसी भी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है.
हालांकि, गड़बड़ी की दो-तीन घटनाओं की खबरें है जिसमें दो व्यक्ति घायल हुए हैं और जिनकी हालत स्थिर बतायी गई है. घाटी में मोबाइल फोन सेवाओं की बहाली के मुद्दे पर, कंसल ने कहा कि संचार पर प्रतिबंधों में ढील जारी है और प्रयास है कि लैंडलाइन टेलीफोन सेवाओं को जल्द से जल्द पूरी तरह से बहाल किया जाए. इससे पहले, अधिकारियों ने कहा कि एक दिन पहले हिंसक घटनाओं की खबरों के बाद रविवार को श्रीनगर शहर के कुछ हिस्सों में प्रतिबंध कड़े कर दिए गए . उन्होंने बताया कि घाटी के विभिन्न हिस्सों में प्रतिबंध आज रविवार को 14 वें दिन भी जारी रहा . शहर के कुछ स्थानों समेत घाटी में विभिन्न स्थानों में शनिवार को प्रतिबंधों में ढील दी गयी थी, जहां कुछ गड़बड़ी की घटनायें हुईं. इसके बाद कुछ इलाकों में पुन: प्रतिबंध लगा दिया गया . लगभग एक दर्जन स्थानों पर प्रदर्शन किया गया जिसमें कुछ प्रदर्शनकारी घायल हो गए . उन्होंने बताया कि घायलों की वास्तविक संख्या की जानकारी उपलब्ध नहीं है .
शनिवार की शाम घाटी में छह स्थानों पर प्रदर्शन किया गया जिसमें आठ लोग घायल हो गए थे . शहर के कई इलाकों में लैंडलाइन टेलीफोन सेवाएं बहाल कर दी गई हैं और यह प्रक्रिया जारी है . रविवार को कुछ निजी वाहनों को शहर के सिविल लाइंस इलाकों में और घाटी के दूसरे जिला मुख्यालयों में सड़कों पर देखा गया . उन इलाकों में कुछ दुकानें भी खुली हुई हैं. जम्मू क्षेत्र में, कम गति वाले 2 जी मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को एक बार फिर से पांच जिलों में रविवार को बंद कर दिया गया, ताकि इन सेवाओं को बहाल करने के एक दिन बाद अफवाह फैलाने वालों की जांच की जा सके. इन सब के बीच, एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि अधिकारियों ने संबंधित सेवा प्रदाताओं को दोपहर से पहले इंटरनेट सेवाओं को बंद करने के लिए कहा . शांति एवं धैर्य बनाये रखने तथा अफवाह फैलाने वालों की जांच करने के लिए यह निर्णय किया गया है. लगभग एक पखवाड़े तक निलंबित रहने के बाद शुक्रवार और शनिवार की मध्यरात्रि को जम्मू क्षेत्र के पांच जिलों - जम्मू, सांबा, कठुआ, उधमपुर और रियासी - में कम गति वाली मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बहाल कर दी गईं थीं.
जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को समाप्त करने तथा राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेश में बांटने से पहले चार अगस्त को मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह बंद कर दिया गया था . सरकार की ओर से यह कदम उठाये जाने से कुछ घंटे पहले पूरे प्रदेश में कर्फ्यू जैसे प्रतिबंध लागू कर दिये गए थे. हालांकि, प्रतिबंधों में बाद में ढील दी गयी थी . पांच जिलों में 2 जी मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को फिर से शुरू करने के तुरंत बाद, जम्मू के पुलिस महानिरीक्षक मुकेश सिंह ने सोशल मीडिया पर फर्जी संदेश या वीडियो प्रसारित करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी थी.
बता दें कि जम्मू में रविवार को पांच जिलों में कम गति की 2जी मोबाइल इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कर दी गई है. एक दिन पहले ही इन सेवाओं को बहाल किया गया था. अधिकारियों ने लोगों को अफवाहों के प्रति आगाह करते हुए कहा कि क्षेत्र में हालात शांतिपूर्ण हैं. जम्मू के पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) मुकेश सिंह ने कहा कि तकनीकी कारणों से 2जी सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कर दी गईं और तकनीकी खामियों का पता लगाया जा रहा है व जल्द से जल्द सेवाओं की बहाली सुनिश्चित करने के प्रयास किये जा रहे हैं. इससे पहले एक पुलिस अधिकारी ने कहा था कि अफवाहों को फैलने से रोकने और शांति बनाए रखने के लिए यह फैसला लिया गया. जल्दबाजी में बुलाए गए संवाददाता सम्मेलन में जम्मू की जिला विकास आयुक्त सुषमा चौहान और जम्मू के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक तेजिंदर सिंह ने कहा कि जिले के किसी भी हिस्से में किसी अप्रिय घटना की कोई खबर नहीं है.
उन्होंने अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी. चौहान ने कहा कि धारा 144 दोबारा लागू करने और स्कूल बंद किये जाने की अफवाहें पूरी तरह से निराधार हैं. उन्होंने कहा कि सभी स्कूल सोमवार को सामान्य रूप से संचालित रहेंगे. चीजें बिल्कुल सामान्य हैं और सभी नागरिकों से अपेक्षा की जाती है कि वे किसी भी आधारहीन और असत्यापित डेटा या सूचना को न फैलाकर जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने में योगदान दें, क्योंकि ऐसा करना भी दंडनीय अपराध होगा. एसएसपी ने लोगों से अनुरोध किया कि वे गलत सूचना फैलाने वाले लोगों को तुरंत उनके ध्यान में लाएं. | संक्षिप्त सारांश: जम्मू-कश्मीर में प्रशासन दे रहा है ढील
कई जगहों पर खोले गए स्कूल
जम्मू में भी हालात पहले से सामान्य | 8 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: दिल्ली की उत्तर-पश्चिम सीट पर बीजेपी (BJP), कांग्रेस (Congress) और आम आदमी पार्टी (AAP) तीनों ने नए उम्मीदवार खड़े किए हैं. तीनों पहली बार लोकसभा चुनाव (Loksabha Elections) लड़ रहे हैं. मुकाबला इसलिए कुछ अधिक दिलचस्प हो गया है कि उदित राज की जगह बीजेपी ने एक सूफी गायक हंसराज हंस (Hansraj Hans) को टिकट दिया. ये अलग बात है कि अब उनके सूफी गायन में मोदी (PM Modi) और कमल शामिल हो गए हैं.
"दिल मोदी-मोदी हो गया, बीजेपी-बीजेपी...दिल मोदी-मोदी बोलता, कमल का फूल खिल जाए"... सूफी गायक हंसराज हंस ने अपने चुनावी अभियान के लिए यह कैंपेन गीत तैयार किया है. उनके चुनावी जंग में उतरने से आरक्षित उत्तर-पश्चिम दिल्ली सीट पर मुकाबला कुछ सुरीला हो गया है. हंसराज हंस खुश हैं कि उन्हें बीजेपी ने उम्मीदवार बनाया है. एनडीटीवी से बातचीत में कहते हैं, संगीत से लोगों के दिल जीतने की कोशिश करेंगे.
हालांकि हंसराज हंस के लिए चुनौती कम नहीं है. उत्तर-पश्चिम दिल्ली सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार राजेश लिलोठिया हंसराज हंस की चुनौती को गंभीर नहीं मानते हैं. राजेश लिलोठिया एनडीटीवी से कहते हैं, "बीजेपी को उम्मीदवार नहीं मिला इसीलिए आखिरी मौके पर हंसराज हंस को उम्मीदवार बनाया."
आम आदमी पार्टी ने इस बार 2017 में पार्टी में शामिल हुए गुग्गन सिंह को उम्मीदवार बनाया है. गुग्गन सिंह एनडीटीवी से कहते हैं, युवाओं को रोजगार, शिक्षा के लिए अच्छे कालेज और विकास के लिए दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्ज़ा दिलाना उनकी प्राथमिकता होगी.
कांग्रेस-आप ने दिल्ली में तालमेल की बहुत कोशिश की, जो आखिरकार नाकाम रही. इसलिए अब सारे मुकाबले त्रिकोणीय होते नज़र आ रहे हैं. इसके बावजूद हंसराज हंस के लिए राह आसान नहीं है. | सारांश: बीजेपी ने सूफी गायक हंसराज हंस पर लगाया दांव
त्रिकोणीय मुकाबले में कड़ा चुनावी संघर्ष
हंसराज ने चुनावी अभियान के लिए कैंपेन गीत तैयार किया | 31 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा तथा अन्य पर 2-जी मामले में संलिप्त होने का आरोप लगाने वाले एक महत्वपूर्ण गवाह ने दिल्ली की एक अदालत को बताया कि उसे जान से मारने की धमकी दी जा रही है। राजा के पूर्व सहयोगी असेरवर्थम आचारी ने विशेष सीबीआई न्यायाधीश ओपी सैनी को बताया कि जो व्यक्ति उन्हें धमकी दे रहा है वह अदालत कक्ष में मौजूद था लेकिन अपने पकड़े जाने की आशंका से भाग गया। आचारी ने जैसे ही खुद को मिल रही धमकी के बारे में अदालत को बताया अदालत कक्ष के बाहर बैठे पुलिसकर्मी हरकत में आ गए और भागने की कोशिश कर रहे व्यक्ति को पकड़ लिया। पुलिस ने तब इस व्यक्ति को अदालत के समक्ष पेश किया जिसने उससे अदालत कक्ष में मौजूदगी के बारे में सवाल किए। उसे देखकर आचारी ने न्यायाधीश को बताया कि वह इस व्यक्ति से पहले कभी नहीं मिले लेकिन उनके पीएसओ ने सुबह उन्हें बताया कि यह वही व्यक्ति है जो पूर्व में उनसे मिलने उनके घर आया था। पकड़े गए व्यक्ति की पहचान जयप्रकाश के रूप में हुई। उसने कहा कि वह मामले में कुछ आरोपियों के लिए भोजन और पानी लेकर आता है लेकिन अदालत इससे संतुष्ट नहीं हुई और उसे पूछताछ के लिए पुलिस को सौंप दिया ताकि सच सामने आ सके। | संक्षिप्त पाठ: राजा तथा अन्य पर 2-जी में संलिप्त होने का आरोप लगाने वाले एक महत्वपूर्ण गवाह ने बताया है कि उसे जान से मारने की धमकी दी जा रही है। | 22 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: नोटबंदी को लेकर संसद में जारी गतिरोध के बीच विपक्षी समाजवादी पार्टी के सांसद अक्षय यादव ने लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन पर कागज के टुकड़े फाड़कर फेंक दिए.
सदन में इस मुद्दे पर भारी शोर-शराबे और नारेबाजी के कारण कार्यवाही बाधित हुई. लोकसभा की कार्यवाही जैसे ही शुरू हुई, विपक्षी दलों के सदस्य सदन की अध्यक्ष के आसन के पास इकट्ठा हो गए और नोटबंदी के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी. इसी दौरान अक्षय यादव ने कागज के टुकड़े फेंके. इससे गुस्साई लोकसभा स्पीकर ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी और माना जा रहा है कि यादव के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है.टिप्पणियां
अक्षय यादव सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के भतीजे और पार्टी के पूर्व महासचिव रामगोपाल यादव के बेटे हैं. वह यूपी की फिरोजाबाद सीट से सपा के सांसद हैं. यह सीट मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के इस्तीफे से खाली हुई थी और इसके बाद हुए उपचुनाव में अक्षय ने जीत दर्ज की.
पिछले हफ्ते शुरू हुए संसद के शीतकालीन सत्र में नोटबंदी के खिलाफ एकजुट विपक्ष के विरोध के चलते सदन में काफी गतिरोध है.
सदन में इस मुद्दे पर भारी शोर-शराबे और नारेबाजी के कारण कार्यवाही बाधित हुई. लोकसभा की कार्यवाही जैसे ही शुरू हुई, विपक्षी दलों के सदस्य सदन की अध्यक्ष के आसन के पास इकट्ठा हो गए और नोटबंदी के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी. इसी दौरान अक्षय यादव ने कागज के टुकड़े फेंके. इससे गुस्साई लोकसभा स्पीकर ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी और माना जा रहा है कि यादव के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है.टिप्पणियां
अक्षय यादव सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के भतीजे और पार्टी के पूर्व महासचिव रामगोपाल यादव के बेटे हैं. वह यूपी की फिरोजाबाद सीट से सपा के सांसद हैं. यह सीट मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के इस्तीफे से खाली हुई थी और इसके बाद हुए उपचुनाव में अक्षय ने जीत दर्ज की.
पिछले हफ्ते शुरू हुए संसद के शीतकालीन सत्र में नोटबंदी के खिलाफ एकजुट विपक्ष के विरोध के चलते सदन में काफी गतिरोध है.
अक्षय यादव सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के भतीजे और पार्टी के पूर्व महासचिव रामगोपाल यादव के बेटे हैं. वह यूपी की फिरोजाबाद सीट से सपा के सांसद हैं. यह सीट मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के इस्तीफे से खाली हुई थी और इसके बाद हुए उपचुनाव में अक्षय ने जीत दर्ज की.
पिछले हफ्ते शुरू हुए संसद के शीतकालीन सत्र में नोटबंदी के खिलाफ एकजुट विपक्ष के विरोध के चलते सदन में काफी गतिरोध है.
पिछले हफ्ते शुरू हुए संसद के शीतकालीन सत्र में नोटबंदी के खिलाफ एकजुट विपक्ष के विरोध के चलते सदन में काफी गतिरोध है. | यह एक सारांश है: मुलायम सिंह के भतीजे और रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय फिरोजबाद से सांसद हैं
माना जा रहा है कि अक्षय यादव के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है
संसद के शीतकालीन सत्र में विपक्ष के विरोध के चलते सदन में काफी गतिरोध है | 16 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर शनिवार रात को राज्य सड़क परिवहन निगम की एक बस के गहरी खाई में गिर जाने से 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि 18 अन्य घायल हो गए। मृतक संभवत: अमरनाथ यात्री थे।
पुलिस अधीक्षक (रामवन) अनिल मगोत्रा ने बताया कि बस कश्मीर घाटी से जम्मू जा रही थी। रात करीब 11 बजकर 20 मिनट पर यह दिग्दोल नाले के पास सड़क किनारे गहरी खाई में गिर गई। उन्होंने बताया कि इस हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि 18 अन्य घायल हो गए। घायलों में कई की हालत गंभीर है।
राहत कार्य का नेतृत्व करने वाले मगोत्रा ने बताया कि यह अभियान रविवार सुबह पूरा हुआ और इस दौरान 14 शव बरामद किए गए। एक यात्री की जम्मू के जीएमसी अस्पताल में मौत हो गई। घायलों को रामवन के जिला अस्पताल में दाखिल कराया गया है। गंभीर रूप से घायल यात्रियों को जीएमसी अस्पताल भेज दिया गया है।
मगोत्रा ने बताया कि ऐसा प्रतीत होता है कि पीड़ित अमरनाथ यात्री थे। लेकिन उनके बारे में विस्तृत जानकारी देने के पहले रजिस्ट्रेशन दस्तावेजों की जांच किए जाने की जरूरत है। टिप्पणियां
एक अधिकारी ने बताया, संभवत: वे अमरनाथ यात्री थे। अगर पीड़ित अमरनाथ यात्री थे, तो हमें मुआवजा सुनिश्चित करने की प्रक्रिया का पालन करना होगा। उन्होंने बताया कि सरकार ने उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को यात्रियों की पहचान करने को कहा है।
इस बीच, एक अन्य दुर्घटना में उस समय छह वैष्णोदेवी यात्री घायल हो गए, जब शनिवार देर रात रिसाई जिले में एक कार और टाटा सूमो के बीच टक्कर हो गई। घायलों को अस्पताल में दाखिल करा दिया गया है।
पुलिस अधीक्षक (रामवन) अनिल मगोत्रा ने बताया कि बस कश्मीर घाटी से जम्मू जा रही थी। रात करीब 11 बजकर 20 मिनट पर यह दिग्दोल नाले के पास सड़क किनारे गहरी खाई में गिर गई। उन्होंने बताया कि इस हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि 18 अन्य घायल हो गए। घायलों में कई की हालत गंभीर है।
राहत कार्य का नेतृत्व करने वाले मगोत्रा ने बताया कि यह अभियान रविवार सुबह पूरा हुआ और इस दौरान 14 शव बरामद किए गए। एक यात्री की जम्मू के जीएमसी अस्पताल में मौत हो गई। घायलों को रामवन के जिला अस्पताल में दाखिल कराया गया है। गंभीर रूप से घायल यात्रियों को जीएमसी अस्पताल भेज दिया गया है।
मगोत्रा ने बताया कि ऐसा प्रतीत होता है कि पीड़ित अमरनाथ यात्री थे। लेकिन उनके बारे में विस्तृत जानकारी देने के पहले रजिस्ट्रेशन दस्तावेजों की जांच किए जाने की जरूरत है। टिप्पणियां
एक अधिकारी ने बताया, संभवत: वे अमरनाथ यात्री थे। अगर पीड़ित अमरनाथ यात्री थे, तो हमें मुआवजा सुनिश्चित करने की प्रक्रिया का पालन करना होगा। उन्होंने बताया कि सरकार ने उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को यात्रियों की पहचान करने को कहा है।
इस बीच, एक अन्य दुर्घटना में उस समय छह वैष्णोदेवी यात्री घायल हो गए, जब शनिवार देर रात रिसाई जिले में एक कार और टाटा सूमो के बीच टक्कर हो गई। घायलों को अस्पताल में दाखिल करा दिया गया है।
राहत कार्य का नेतृत्व करने वाले मगोत्रा ने बताया कि यह अभियान रविवार सुबह पूरा हुआ और इस दौरान 14 शव बरामद किए गए। एक यात्री की जम्मू के जीएमसी अस्पताल में मौत हो गई। घायलों को रामवन के जिला अस्पताल में दाखिल कराया गया है। गंभीर रूप से घायल यात्रियों को जीएमसी अस्पताल भेज दिया गया है।
मगोत्रा ने बताया कि ऐसा प्रतीत होता है कि पीड़ित अमरनाथ यात्री थे। लेकिन उनके बारे में विस्तृत जानकारी देने के पहले रजिस्ट्रेशन दस्तावेजों की जांच किए जाने की जरूरत है। टिप्पणियां
एक अधिकारी ने बताया, संभवत: वे अमरनाथ यात्री थे। अगर पीड़ित अमरनाथ यात्री थे, तो हमें मुआवजा सुनिश्चित करने की प्रक्रिया का पालन करना होगा। उन्होंने बताया कि सरकार ने उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को यात्रियों की पहचान करने को कहा है।
इस बीच, एक अन्य दुर्घटना में उस समय छह वैष्णोदेवी यात्री घायल हो गए, जब शनिवार देर रात रिसाई जिले में एक कार और टाटा सूमो के बीच टक्कर हो गई। घायलों को अस्पताल में दाखिल करा दिया गया है।
मगोत्रा ने बताया कि ऐसा प्रतीत होता है कि पीड़ित अमरनाथ यात्री थे। लेकिन उनके बारे में विस्तृत जानकारी देने के पहले रजिस्ट्रेशन दस्तावेजों की जांच किए जाने की जरूरत है। टिप्पणियां
एक अधिकारी ने बताया, संभवत: वे अमरनाथ यात्री थे। अगर पीड़ित अमरनाथ यात्री थे, तो हमें मुआवजा सुनिश्चित करने की प्रक्रिया का पालन करना होगा। उन्होंने बताया कि सरकार ने उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को यात्रियों की पहचान करने को कहा है।
इस बीच, एक अन्य दुर्घटना में उस समय छह वैष्णोदेवी यात्री घायल हो गए, जब शनिवार देर रात रिसाई जिले में एक कार और टाटा सूमो के बीच टक्कर हो गई। घायलों को अस्पताल में दाखिल करा दिया गया है।
एक अधिकारी ने बताया, संभवत: वे अमरनाथ यात्री थे। अगर पीड़ित अमरनाथ यात्री थे, तो हमें मुआवजा सुनिश्चित करने की प्रक्रिया का पालन करना होगा। उन्होंने बताया कि सरकार ने उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को यात्रियों की पहचान करने को कहा है।
इस बीच, एक अन्य दुर्घटना में उस समय छह वैष्णोदेवी यात्री घायल हो गए, जब शनिवार देर रात रिसाई जिले में एक कार और टाटा सूमो के बीच टक्कर हो गई। घायलों को अस्पताल में दाखिल करा दिया गया है।
इस बीच, एक अन्य दुर्घटना में उस समय छह वैष्णोदेवी यात्री घायल हो गए, जब शनिवार देर रात रिसाई जिले में एक कार और टाटा सूमो के बीच टक्कर हो गई। घायलों को अस्पताल में दाखिल करा दिया गया है। | यहाँ एक सारांश है:जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर शनिवार रात को राज्य सड़क परिवहन निगम की एक बस के गहरी खाई में गिर जाने से 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि 18 अन्य घायल हो गए। | 4 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: फ्रांस में हो रहे राष्ट्रपति चुनाव के बीच मुख्य मुकाबला दक्षिणपंथी नेता ली पेन और एमेनुअल मैकरॉन(39) के बीच माना जा रहा है. मैकरान की चर्चा इसलिए खास है क्योंकि वह सबसे कम उम्र के प्रत्याशी हैं और दूसरी बात यह है कि वह हाल ही में राजनीति में आए हैं. लेकिन इन सबसे इतर पूरे फ्रांस में उनकी प्रेम कहानी को काफी चटखारे के साथ कहा-सुना जाता है. यह बात उस दौर की है जब वह स्कूल में पढ़ते थे और उस दौरान अपने से उम्र में 24 साल बड़ी टीचर के साथ रोमांस में गिरफ्तार हो गए थे.टिप्पणियां
दरअसल मैकरान जब किशोरावस्था में थे तो स्कूल में टीचर ब्रिगिट ट्रोगनेक्स से उनको प्रेम हो गया. उस वक्त ब्रिगिट की शादी हो चुकी थी और वह तीन बच्चों की मां थीं. जब मैकरान के पिता को यह बात पता चली तो उन्होंने ब्रिगिट से कहा कि जब तक उनका बेटा 18 साल का बालिग नहीं हो जाता तब तक वह उससे दूर रहें. लेकिन ब्रिगिट ने ऐसा वादा करने से इनकार कर दिया. उस वक्त मैकरान 16 साल के थे और ब्रिगिट उनकी ड्रामा टीचर थीं. उनके संबंध बने रहे. नतीजतन 2007 में ब्रिगिट के अपने पति को तलाक देने बाद इन दोनों ने शादी कर ली.
शादी के बाद तमाम मैगजीनों समेत पूरे फ्रांस में उनकी अनोखी लव स्टोरी के किस्से बहुत मशहूर हुए. एक किताब 'एमेनुअल मैकरान: ए परफेक्ट यंग मैन' में इस किस्से को बखूबी पेश किया गया है. इस सूरतेहाल में यदि मैकरान चुनाव जीतते हैं तो ब्रिगिट फर्स्ट लेडी बनेंगी. इस वक्त फ्रांस में राष्ट्रपति चुनाव हो रहे हैं. पहले चरण का मतदान पिछले रविवार को हुआ था और दूसरे चरण का मतदान सात मई को होने जा रहा है.
दरअसल मैकरान जब किशोरावस्था में थे तो स्कूल में टीचर ब्रिगिट ट्रोगनेक्स से उनको प्रेम हो गया. उस वक्त ब्रिगिट की शादी हो चुकी थी और वह तीन बच्चों की मां थीं. जब मैकरान के पिता को यह बात पता चली तो उन्होंने ब्रिगिट से कहा कि जब तक उनका बेटा 18 साल का बालिग नहीं हो जाता तब तक वह उससे दूर रहें. लेकिन ब्रिगिट ने ऐसा वादा करने से इनकार कर दिया. उस वक्त मैकरान 16 साल के थे और ब्रिगिट उनकी ड्रामा टीचर थीं. उनके संबंध बने रहे. नतीजतन 2007 में ब्रिगिट के अपने पति को तलाक देने बाद इन दोनों ने शादी कर ली.
शादी के बाद तमाम मैगजीनों समेत पूरे फ्रांस में उनकी अनोखी लव स्टोरी के किस्से बहुत मशहूर हुए. एक किताब 'एमेनुअल मैकरान: ए परफेक्ट यंग मैन' में इस किस्से को बखूबी पेश किया गया है. इस सूरतेहाल में यदि मैकरान चुनाव जीतते हैं तो ब्रिगिट फर्स्ट लेडी बनेंगी. इस वक्त फ्रांस में राष्ट्रपति चुनाव हो रहे हैं. पहले चरण का मतदान पिछले रविवार को हुआ था और दूसरे चरण का मतदान सात मई को होने जा रहा है.
शादी के बाद तमाम मैगजीनों समेत पूरे फ्रांस में उनकी अनोखी लव स्टोरी के किस्से बहुत मशहूर हुए. एक किताब 'एमेनुअल मैकरान: ए परफेक्ट यंग मैन' में इस किस्से को बखूबी पेश किया गया है. इस सूरतेहाल में यदि मैकरान चुनाव जीतते हैं तो ब्रिगिट फर्स्ट लेडी बनेंगी. इस वक्त फ्रांस में राष्ट्रपति चुनाव हो रहे हैं. पहले चरण का मतदान पिछले रविवार को हुआ था और दूसरे चरण का मतदान सात मई को होने जा रहा है. | यह एक सारांश है: फ्रांस में हो रहे राष्ट्रपति चुनाव
मैकरान सबसे युवा प्रत्याशी
मैकरान की लव स्टोरी चर्चाओं में | 24 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: बांग्लादेश की राजधानी ढाका में शुक्रवार को एक ब्लॉगर और सामाजिक कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई। अहमद रजीब हैदर बांग्लादेश में युद्ध अपराधियों को फांसी दिए जाने की मांग कर रहे प्रदर्शन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे और अपने ब्लॉग और सोशल मीडिया के माध्यम से भी मुहिम चला रहे थे।
5 फरवरी से प्रदर्शन कर रहे लोग, जिनमें ज्यादातर युवा है, मांग कर रहे हैं कि जमात−ए−इस्लामी पार्टी के नेता अब्दुल कादिर मुल्ला को फांसी दी जाए। कादिर को युद्ध अपराध का दोषी पाए जाने पर उमकैद की सजा दी गई है, लेकिन प्रदर्शनकारी उमकैद को फांसी की सजा में बदलने की मांग कर रहे हैं। कादिर ने 1971 में बांग्लादेश की आजादी के युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना का साथ दिया था। अधिकतर बांग्लादेशियों का मानना है कि 1971 के बाद से इस तरह का आंदोलन नहीं हुआ है।
5 फरवरी से प्रदर्शन कर रहे लोग, जिनमें ज्यादातर युवा है, मांग कर रहे हैं कि जमात−ए−इस्लामी पार्टी के नेता अब्दुल कादिर मुल्ला को फांसी दी जाए। कादिर को युद्ध अपराध का दोषी पाए जाने पर उमकैद की सजा दी गई है, लेकिन प्रदर्शनकारी उमकैद को फांसी की सजा में बदलने की मांग कर रहे हैं। कादिर ने 1971 में बांग्लादेश की आजादी के युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना का साथ दिया था। अधिकतर बांग्लादेशियों का मानना है कि 1971 के बाद से इस तरह का आंदोलन नहीं हुआ है। | संक्षिप्त पाठ: ढाका में एक ब्लॉगर और सामाजिक कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई। अहमद रजीब हैदर बांग्लादेश में युद्ध अपराधियों को फांसी दिए जाने की मांग कर रहे प्रदर्शन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे और अपने ब्लॉग और सोशल मीडिया के माध्यम से भी मुहिम चला रहे थे। | 30 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: Cervical Cancer : सर्वाइकल कैंसर क्या है, शुरुआती लक्षण और बचाव के उपाय
जब भी बालों से जुड़ी किसी समस्या पर चर्चा होती है, तो एक चीज का जिक्र हमेशा होता है. वह है तेल. बालों में तेल लगाकर उन्हें पोषण दिया जाता है. बालों के सही विकास के लिए ऑइलिंग बेहद आवश्यक है. जब आप अपने स्कैल्प पर बालों के तेल की मालिश करते हैं, तो रक्त परिसंचरण में सुधार होता है जो बालों के विकास को बढ़ावा देता है.
तो अगर आप भी बालों की समस्याओं का सामना कर रहे हैं तो हम आपको बताते हैं कि कैसे आप अपने तेल को बना सकते हैं और भी बेहतर-
अविश्वसनीय लेकिन सच! महिला के गले की नली से निकाली 53 पथरी
करी पत्ते में विटामिन सी, फॉस्फोरस, आयरन, कैल्शियम और निकोटिनिक एसिड होते हैं. ये पत्ते आपके बालों के लिए अद्भुत काम कर सकते हैं और बालों को जल्दी लंबा करने में मदद भी कर सकते हैं. अगर आप अपने नारियल के तेल में करी पत्ते को शामिल कर लेते हैं तो यकीनन बालों को तेजी से बढ़ने में मदद मिलेगी. इसके लिए आपको करना बस यह है कि नारियल तेल लेकर इसे गर्म कर लें. कुछ मिनटों के बाद इसमें मुट्ठी भर करी पत्ते डालें. अब इसे तब तक गर्म करें जबतक की करी पत्ते पूरी तरह काले न हो जाएं. इसके बाद इसे ठंडा होने दें. इस तेल को ठीक से स्टोर करें और एक नॉर्मल तेल की तरह इस्तेमाल करें.
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Hair Fall: बालों को झड़ने से रोकने के लिए नारियल के तेल से जुड़े नुस्खे अपनाए जा सकते हैं.
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बालों के लिए प्याज के फायदों के बारे में तो बहुत से लोगों को पता ही है. बालों पर प्याज का रस लगाना एक बहुत ही प्रचलित घरेलू नुस्खा है. इसे बालों को मजबूत बनाने वाले घरेलू उपाय के तौर पर खूब इस्तेमाल किया जाता है. बालों को झड़ने से रोकने के लिए प्याज के जूस को खूब इस्तेमाल किया जाता है. आप चाहें तो बालों की सेहत के लिए जादू अपने तेल में भी प्याज के गुणों को शामिल कर सकते हैं. इसके लिए आप अपने नारियल तेल में प्याज के गुणों को शामिल कर सकते हैं. प्याज को काट लें और इसे गर्म नारियल तेल में डाल दें. इसके साथ ही साथ आप इसमें करी पत्ते भी डाल सकते हैं. पहले वाले तरीके की ही तरह आप इसे भी अच्छी तरह गर्म कर लें. इसके बाद इसे छान कर स्टोर कर लें और सामान्य तेल की तरह लगाएं.
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हिबिस्कस एक रंगीन फूल है, जो बालों के विकास के लिए अच्छा माना जाता है. यह स्कैल्प के लिए अच्छा माना जाता है. हिबिस्कस हेयर ऑयल तैयार करने के लिए आपको कुछ हिबिस्कस फूल लेने होंगे और उन्हें तब तक पीसने की जरूरत है जब तक कि आपको एक चिकनी पेस्ट न मिल जाए. थोड़े से नारियल के तेल को गर्म करें और उसमें पेस्ट मिलाएं. इसे कुछ समय के लिए गर्मी आंच पर रखें. बाद में तेल को ठंडा होने दें और तेल को फूलों के पेस्ट से अलग करें. अपने बालों को धोने से कुछ घंटे पहले इस तेल का उपयोग करें.
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Hair growth: बालों की ग्रोथ के लिए Hibiscus Oil अच्छा माना जाता है.
यह प्राकृतिक चीजें आपके बालों को मजबूत और चमकदार बनाने में मददगार साबित हो सकती हैं.
(अस्वीकरण: यहां दी गई सामग्री या सलाह केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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Cervical Cancer : सर्वाइकल कैंसर क्या है, शुरुआती लक्षण और बचाव के उपाय | यह एक सारांश है: ये नुस्खा बालों को लंबा करने या झड़ने से रोकने में मददगार हो सकता है
बालों का झड़ना पुरुषों और महिलाओं दोनों को समान रूप से प्रभावित कर रहा है
बालों के झड़ने से रोकने के लिए कई तरीके और घरेलू उपचार मौजूद हैं | 2 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह को एक बार फिर राज्यसभा में पहुंचाने के लिए कांग्रेस के पास अब राजस्थान का सहारा है, क्योंकि असम और गुजरात के रास्ते बंद हो जाने के बाद तमिलनाडु में भी सहयोगी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) ने मंगलवार को राज्य की तीनों राज्यसभा सीटों के लिए प्रत्याशी घोषित कर दिए, और दो सीटें अपने पास रखकर तीसरी सीट के लिए उन्होंने कांग्रेस के स्थान पर अन्य सहयोगी MDMK के वी. गोपालसामी अथवा वाइको का नाम घोषित किया.
तमिलनाडु में सत्तासीन ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) तथा विपक्षी दल DMK, दोनों के पास इतने विधायक हैं कि वे तीन-तीन सीटें जीत सकते हैं. पिछले दिनों इस तरह की ख़बरें काफी गर्म रहीं कि एक वक्त में प्रधानमंत्री पद के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के नाम की पैरवी करने वाले DMK प्रमुख एम.के. स्टालिन इस बात के लिए राज़ी थे कि अपने कोटे की एक सीट वह डॉ मनमोहन सिंह को दे देंगे.
सूत्रों का कहना है कि DMK का इरादा बदलने के पीछे एक कारण यह रहा कि कांग्रेस के शीर्ष दोनों नेताओं - राहुल गांधी या उनकी मां सोनिया गांधी - ने सीधे एम.के. स्टालिन से बात नहीं की, बल्कि उनके स्थान पर कांग्रेस नेताओं अहमद पटेल तथा गुलाम नबी आज़ाद ने DMK में अपने समकक्षों से बात की, जिसकी वजह से DMK नेतृत्व नाराज़ हो गया.
वर्ष 2014 में कांग्रेस-नीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) की सरकार की हार से पहले 10 साल तक प्रधानमंत्री रहे डॉ मनमोहन सिंह पूर्वोत्तर के असम राज्य से राज्यसभा सांसद थे, लेकिन अब इस राज्य में कांग्रेस के पास पर्याप्त संख्या में विधायक मौजूद नहीं हैं, ताकि डॉ सिंह को संसद के उच्च सदन में फिर भेजा जा सके.
बताया गया कि कांग्रेस ने पूर्व प्रधानमंत्री को गुजरात से राज्यसभा भेजने का फैसला किया था, जहां केंद्रीय मंत्रियों अमित शाह तथा स्मृति ईरानी के लोकसभा सदस्य बन जाने की वजह से दो सीटें रिक्त हो गई हैं. लेकिन सूत्रों के मुताबिक, राज्य की दोनों राज्यसभा सीटों के लिए एक साथ चुनाव करवाए जाने की मांग खारिज हो जाने के बाद पार्टी ने फैसला पलट दिया.
कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी का तर्क था कि यदि दोनों सीटों के लिए अलग-अलग चुनाव करवाया जाता है, तो 'फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट' सिस्टम के चलते दोनों सीटों पर BJP की जीत होगी, क्योंकि उनके पास कांग्रेस के मुकाबले 20 विधायक ज़्यादा हैं. उनका कहना था कि अगर दोनों सीटों पर एक ही दिन में एक साथ चुनाव करवाया जाता, तो कांग्रेस एक सीट जीत सकती थी. लेकिन चुनाव आयोग के अनुसार, इस तरह के चुनावों को कभी एक साथ नहीं करवाया जाता. उधर, सुप्रीम कोर्ट ने भी चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती देने वाली गुजरात कांग्रेस की याचिका को खारिज कर दिया.
अब बताया जा रहा है कि कांग्रेस की योजना डॉ मनमोहन सिंह को राजस्थान से राज्यसभा में भेजने की है, जहां पिछले ही महीने राज्य BJP प्रमुख मदनलाल सैनी के निधन के बाद एक राज्यसभा सीट खाली हुई है. उनका कार्यकाल अप्रैल, 2024 तक का था. पिछले साल दिसंबर में राजस्थान विधानसभा चुनाव जीतकर राज्य में सत्तासीन हुई कांग्रेस को यहां अपनी जीत का भरोसा है. | सारांश: मनमोहन सिंह का खत्म हो रहा है कार्यकाल
राजस्थान से भेजने पर हो रहा है विचार
असम में कांग्रेस के पास नहीं बचा बहुमत | 5 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: उत्तर प्रदेश की राजनीति खासकर समाजवादी पार्टी के अंदर जो उठापठक चल रही है, भले ही उसका प्रभाव बिहार की राजनीति पर तत्काल कुछ न पड़े, लेकिन इसे लेकर राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव तनाव में हैं. दरअसल, लालू यादव की चिंता इस बात को लेकर नहीं है कि उनके बीच-बचाव के प्रयास और दावे धरे के धरे रह गए, लेकिन अखिलेश ने जिस तरह सत्ता और पार्टी पर कब्ज़ा जमाया हैं और राजनीति में लंबी रेखा खींचते जा रहे हैं... यह लालू के लिए चिंता की वजह है.
ये बात किसी से छिपी नहीं कि लालू और मुलायम सिंह यादव राजनीति में एक ही जाति के होने के बावजूद अपने राजनीतिक शिखर पर एक-दूसरे के कट्टर विरोधी रहे. दोनों के बीच राजनीतिक कटुता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता हैं कि लालू ने मुलायम सिंह के प्रधानमंत्री बनने की उम्मीद पर अपने प्रयास से पानी फेर दिया था. हालांकि लालू ने इसे बाद के दिनों में अपनी गलती मानते हुए माफ़ी भी मांगी थी, लेकिन ये खटास वर्षों बाद लालू की सबसे छोटी बेटी लक्ष्मी की शादी से कम हुई, जिसकी शादी मुलायम सिंह यादव के बड़े भाई के पोते तेज प्रताप सिंह के साथ हुई. तेज प्रताप समाजवादी पार्टी के मैनपुरी से सांसद भी हैं. ये बात अलग है कि इस संबंध के बावजूद जब लालू और नीतीश ने मुलायम सिंह यादव के समाजवादी पार्टी में विलय की घोषणा की और रामगोपाल यादव ने अकेले इस विलय को रोकने में कामयाबी पाई थी तब ये माना गया कि लालू की भी मौन सहमति थी.
लेकिन लालू की परेशानी है कि फ़िलहाल उन्हें अगले कुछ दिनों में ये निर्णय लेना होगा की दो धड़ों में बंटी समाजवादी पार्टी के किस धड़े के साथ वो रहते हैं. चाहे वो अखिलेश की समाजवादी पार्टी हो या शिवपाल की... लालू के लिए किसी के समर्थन में खड़े होना उतना आसान नहीं होगा. हालांकि उनकी कोशिश होगी, जहां उनके दामाद के कदम हों, उसके साथ रहना ही उनके लिए बेहतर होगा. फ़िलहाल लखनऊ से खबरों के अनुसार तेज प्रताप, अखिलेश यादव के साथ हैं, इसलिए मुलायम सिंह के पीछे न खड़े रहना अब उनकी मजबूरी है. यहीं से लालू यादव की असल मुश्किल शुरू होती है.
दरअसल, लालू यादव को मालूम है कि भले अखिलेश यादव ने अपने पिता को मार्गदर्शक मंडल का रास्ता दिखा दिया हो, लेकिन अब तक के अखिलेश के मन और मिजाज से एक चीज साफ़ है कि वो सरकार और पार्टी चलाने के लिए किसी अपराधी, बाहुबली से किसी तरह का संबंध नहीं रखना चाहते.. भले ही वो किसी जाति या धर्म से आता हो. इस आधार पर लालू को मालूम हैं कि उनके पार्टी में एक नहीं दर्जन भर लोग ऐसे हैं, जिस पर अखिलेश जैसे नेता संबंधी होने के आधार पर नजरअंदाज नहीं करने वाले. लालू जानते हैं कि नीतीश कुमार के लिए मोदी विरोध के नाम पर उनके साथ राजनीतिक संबंध रखने की मजबूरी हो, लेकिन अखिलेश के लिए ऐसी कोई बाध्यता नहीं है और तब लालू को देर-सवेर ये निर्णय लेना होगा कि वो अखिलेश के साथ भविष्य की राजनीति करते हैं या अपनी पार्टी के बाहुबलियों के सामने नतमस्तक रहते हैं. हालांकि जब भी उनकी पार्टी के किसी नेता भले ही वो शहाबुद्दीन हो या राजभल्लव यादव.. उनके खिलाफ नीतीश सरकार ने कार्रवाई की, तब लालू ने मौन रहकर सरकार बचाना ज्यादा बेहतर समझा.टिप्पणियां
लेकिन लालू यादव की असल दिक्कत इस बात को लेकर है कि अब हर दिन बिहार के उनके समर्थकों में अखिलेश चर्चा का केंद्र रहेंगे और यहां उनके दोनों बेटे तेजप्रताप और तेजस्वी यादव के 'परफॉरमेंस' पर चर्चा केंद्रित होगी. अखिलेश आज पूरे देश में चर्चा के केंद्र में हैं, तब उनका काम मुख्य आधार रहा हैं और लालू यादव खुद भी जानते हैं कि सब जानते हैं कि अपने बेटों के विभाग का रिमोट उनके पास रहने के बावजूद अखिलेश को छोडि़ए, लेकिन नीतीश कुमार के पूर्व के बीजेपी के मंत्रियों से भी तुलना करने के लायक उनका कार्यकाल नहीं रहा है. फ़िलहाल लालू यादव ने अपने दोनों बेटो के हिस्से में आठ विभाग रखे हैं और कई विभाग के दफ्तर में भी उनके बेटे तेजप्रताप यादव महीनों नहीं जाते. अपने विभाग के कार्यक्रम में भी तेजप्रताप का नदारद रहना चर्चा का विषय होता हैं. उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव अपने एक विभाग पथ निर्माण में रूचि तो लेते हैं, लेकिन अन्य विभागों के कामकाज में जितना सोशल मीडिया में उनकी सक्रियता रहती हैं, उतनी कभी नहीं देखी गई.
लालू यादव खुद अधिकांश विभाग के कामकाज में खुलकर दखलंदाजी भी करते हैं. जो आज की तारीख में अखिलेश ब्रांड की राजनीति और कामकाज की शैली से कहीं भी मेल नहीं खाता. हालांकि लालू से ज्यादा उनके बेटों को अब राजनीति के ब्रांड लालू और अखिलेश में से एक को चुनना होगा. ब्रांड लालू का अनुसरण कर वो सत्ता में एक हद तक जा सकते हैं, लेकिन ब्रांड अखिलेश को अपनाकर वो खासकर तेजस्वी यादव अपने जीवन की राजनीतिक महत्वाकांक्षा को पूरा कर सकते हैं.. अन्यथा बिहार में ब्रांड नीतीश तब तक चलता रहेगा जब तक वो सत्ता में बने रहना चाहते हैं.
ये बात किसी से छिपी नहीं कि लालू और मुलायम सिंह यादव राजनीति में एक ही जाति के होने के बावजूद अपने राजनीतिक शिखर पर एक-दूसरे के कट्टर विरोधी रहे. दोनों के बीच राजनीतिक कटुता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता हैं कि लालू ने मुलायम सिंह के प्रधानमंत्री बनने की उम्मीद पर अपने प्रयास से पानी फेर दिया था. हालांकि लालू ने इसे बाद के दिनों में अपनी गलती मानते हुए माफ़ी भी मांगी थी, लेकिन ये खटास वर्षों बाद लालू की सबसे छोटी बेटी लक्ष्मी की शादी से कम हुई, जिसकी शादी मुलायम सिंह यादव के बड़े भाई के पोते तेज प्रताप सिंह के साथ हुई. तेज प्रताप समाजवादी पार्टी के मैनपुरी से सांसद भी हैं. ये बात अलग है कि इस संबंध के बावजूद जब लालू और नीतीश ने मुलायम सिंह यादव के समाजवादी पार्टी में विलय की घोषणा की और रामगोपाल यादव ने अकेले इस विलय को रोकने में कामयाबी पाई थी तब ये माना गया कि लालू की भी मौन सहमति थी.
लेकिन लालू की परेशानी है कि फ़िलहाल उन्हें अगले कुछ दिनों में ये निर्णय लेना होगा की दो धड़ों में बंटी समाजवादी पार्टी के किस धड़े के साथ वो रहते हैं. चाहे वो अखिलेश की समाजवादी पार्टी हो या शिवपाल की... लालू के लिए किसी के समर्थन में खड़े होना उतना आसान नहीं होगा. हालांकि उनकी कोशिश होगी, जहां उनके दामाद के कदम हों, उसके साथ रहना ही उनके लिए बेहतर होगा. फ़िलहाल लखनऊ से खबरों के अनुसार तेज प्रताप, अखिलेश यादव के साथ हैं, इसलिए मुलायम सिंह के पीछे न खड़े रहना अब उनकी मजबूरी है. यहीं से लालू यादव की असल मुश्किल शुरू होती है.
दरअसल, लालू यादव को मालूम है कि भले अखिलेश यादव ने अपने पिता को मार्गदर्शक मंडल का रास्ता दिखा दिया हो, लेकिन अब तक के अखिलेश के मन और मिजाज से एक चीज साफ़ है कि वो सरकार और पार्टी चलाने के लिए किसी अपराधी, बाहुबली से किसी तरह का संबंध नहीं रखना चाहते.. भले ही वो किसी जाति या धर्म से आता हो. इस आधार पर लालू को मालूम हैं कि उनके पार्टी में एक नहीं दर्जन भर लोग ऐसे हैं, जिस पर अखिलेश जैसे नेता संबंधी होने के आधार पर नजरअंदाज नहीं करने वाले. लालू जानते हैं कि नीतीश कुमार के लिए मोदी विरोध के नाम पर उनके साथ राजनीतिक संबंध रखने की मजबूरी हो, लेकिन अखिलेश के लिए ऐसी कोई बाध्यता नहीं है और तब लालू को देर-सवेर ये निर्णय लेना होगा कि वो अखिलेश के साथ भविष्य की राजनीति करते हैं या अपनी पार्टी के बाहुबलियों के सामने नतमस्तक रहते हैं. हालांकि जब भी उनकी पार्टी के किसी नेता भले ही वो शहाबुद्दीन हो या राजभल्लव यादव.. उनके खिलाफ नीतीश सरकार ने कार्रवाई की, तब लालू ने मौन रहकर सरकार बचाना ज्यादा बेहतर समझा.टिप्पणियां
लेकिन लालू यादव की असल दिक्कत इस बात को लेकर है कि अब हर दिन बिहार के उनके समर्थकों में अखिलेश चर्चा का केंद्र रहेंगे और यहां उनके दोनों बेटे तेजप्रताप और तेजस्वी यादव के 'परफॉरमेंस' पर चर्चा केंद्रित होगी. अखिलेश आज पूरे देश में चर्चा के केंद्र में हैं, तब उनका काम मुख्य आधार रहा हैं और लालू यादव खुद भी जानते हैं कि सब जानते हैं कि अपने बेटों के विभाग का रिमोट उनके पास रहने के बावजूद अखिलेश को छोडि़ए, लेकिन नीतीश कुमार के पूर्व के बीजेपी के मंत्रियों से भी तुलना करने के लायक उनका कार्यकाल नहीं रहा है. फ़िलहाल लालू यादव ने अपने दोनों बेटो के हिस्से में आठ विभाग रखे हैं और कई विभाग के दफ्तर में भी उनके बेटे तेजप्रताप यादव महीनों नहीं जाते. अपने विभाग के कार्यक्रम में भी तेजप्रताप का नदारद रहना चर्चा का विषय होता हैं. उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव अपने एक विभाग पथ निर्माण में रूचि तो लेते हैं, लेकिन अन्य विभागों के कामकाज में जितना सोशल मीडिया में उनकी सक्रियता रहती हैं, उतनी कभी नहीं देखी गई.
लालू यादव खुद अधिकांश विभाग के कामकाज में खुलकर दखलंदाजी भी करते हैं. जो आज की तारीख में अखिलेश ब्रांड की राजनीति और कामकाज की शैली से कहीं भी मेल नहीं खाता. हालांकि लालू से ज्यादा उनके बेटों को अब राजनीति के ब्रांड लालू और अखिलेश में से एक को चुनना होगा. ब्रांड लालू का अनुसरण कर वो सत्ता में एक हद तक जा सकते हैं, लेकिन ब्रांड अखिलेश को अपनाकर वो खासकर तेजस्वी यादव अपने जीवन की राजनीतिक महत्वाकांक्षा को पूरा कर सकते हैं.. अन्यथा बिहार में ब्रांड नीतीश तब तक चलता रहेगा जब तक वो सत्ता में बने रहना चाहते हैं.
लेकिन लालू की परेशानी है कि फ़िलहाल उन्हें अगले कुछ दिनों में ये निर्णय लेना होगा की दो धड़ों में बंटी समाजवादी पार्टी के किस धड़े के साथ वो रहते हैं. चाहे वो अखिलेश की समाजवादी पार्टी हो या शिवपाल की... लालू के लिए किसी के समर्थन में खड़े होना उतना आसान नहीं होगा. हालांकि उनकी कोशिश होगी, जहां उनके दामाद के कदम हों, उसके साथ रहना ही उनके लिए बेहतर होगा. फ़िलहाल लखनऊ से खबरों के अनुसार तेज प्रताप, अखिलेश यादव के साथ हैं, इसलिए मुलायम सिंह के पीछे न खड़े रहना अब उनकी मजबूरी है. यहीं से लालू यादव की असल मुश्किल शुरू होती है.
दरअसल, लालू यादव को मालूम है कि भले अखिलेश यादव ने अपने पिता को मार्गदर्शक मंडल का रास्ता दिखा दिया हो, लेकिन अब तक के अखिलेश के मन और मिजाज से एक चीज साफ़ है कि वो सरकार और पार्टी चलाने के लिए किसी अपराधी, बाहुबली से किसी तरह का संबंध नहीं रखना चाहते.. भले ही वो किसी जाति या धर्म से आता हो. इस आधार पर लालू को मालूम हैं कि उनके पार्टी में एक नहीं दर्जन भर लोग ऐसे हैं, जिस पर अखिलेश जैसे नेता संबंधी होने के आधार पर नजरअंदाज नहीं करने वाले. लालू जानते हैं कि नीतीश कुमार के लिए मोदी विरोध के नाम पर उनके साथ राजनीतिक संबंध रखने की मजबूरी हो, लेकिन अखिलेश के लिए ऐसी कोई बाध्यता नहीं है और तब लालू को देर-सवेर ये निर्णय लेना होगा कि वो अखिलेश के साथ भविष्य की राजनीति करते हैं या अपनी पार्टी के बाहुबलियों के सामने नतमस्तक रहते हैं. हालांकि जब भी उनकी पार्टी के किसी नेता भले ही वो शहाबुद्दीन हो या राजभल्लव यादव.. उनके खिलाफ नीतीश सरकार ने कार्रवाई की, तब लालू ने मौन रहकर सरकार बचाना ज्यादा बेहतर समझा.टिप्पणियां
लेकिन लालू यादव की असल दिक्कत इस बात को लेकर है कि अब हर दिन बिहार के उनके समर्थकों में अखिलेश चर्चा का केंद्र रहेंगे और यहां उनके दोनों बेटे तेजप्रताप और तेजस्वी यादव के 'परफॉरमेंस' पर चर्चा केंद्रित होगी. अखिलेश आज पूरे देश में चर्चा के केंद्र में हैं, तब उनका काम मुख्य आधार रहा हैं और लालू यादव खुद भी जानते हैं कि सब जानते हैं कि अपने बेटों के विभाग का रिमोट उनके पास रहने के बावजूद अखिलेश को छोडि़ए, लेकिन नीतीश कुमार के पूर्व के बीजेपी के मंत्रियों से भी तुलना करने के लायक उनका कार्यकाल नहीं रहा है. फ़िलहाल लालू यादव ने अपने दोनों बेटो के हिस्से में आठ विभाग रखे हैं और कई विभाग के दफ्तर में भी उनके बेटे तेजप्रताप यादव महीनों नहीं जाते. अपने विभाग के कार्यक्रम में भी तेजप्रताप का नदारद रहना चर्चा का विषय होता हैं. उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव अपने एक विभाग पथ निर्माण में रूचि तो लेते हैं, लेकिन अन्य विभागों के कामकाज में जितना सोशल मीडिया में उनकी सक्रियता रहती हैं, उतनी कभी नहीं देखी गई.
लालू यादव खुद अधिकांश विभाग के कामकाज में खुलकर दखलंदाजी भी करते हैं. जो आज की तारीख में अखिलेश ब्रांड की राजनीति और कामकाज की शैली से कहीं भी मेल नहीं खाता. हालांकि लालू से ज्यादा उनके बेटों को अब राजनीति के ब्रांड लालू और अखिलेश में से एक को चुनना होगा. ब्रांड लालू का अनुसरण कर वो सत्ता में एक हद तक जा सकते हैं, लेकिन ब्रांड अखिलेश को अपनाकर वो खासकर तेजस्वी यादव अपने जीवन की राजनीतिक महत्वाकांक्षा को पूरा कर सकते हैं.. अन्यथा बिहार में ब्रांड नीतीश तब तक चलता रहेगा जब तक वो सत्ता में बने रहना चाहते हैं.
दरअसल, लालू यादव को मालूम है कि भले अखिलेश यादव ने अपने पिता को मार्गदर्शक मंडल का रास्ता दिखा दिया हो, लेकिन अब तक के अखिलेश के मन और मिजाज से एक चीज साफ़ है कि वो सरकार और पार्टी चलाने के लिए किसी अपराधी, बाहुबली से किसी तरह का संबंध नहीं रखना चाहते.. भले ही वो किसी जाति या धर्म से आता हो. इस आधार पर लालू को मालूम हैं कि उनके पार्टी में एक नहीं दर्जन भर लोग ऐसे हैं, जिस पर अखिलेश जैसे नेता संबंधी होने के आधार पर नजरअंदाज नहीं करने वाले. लालू जानते हैं कि नीतीश कुमार के लिए मोदी विरोध के नाम पर उनके साथ राजनीतिक संबंध रखने की मजबूरी हो, लेकिन अखिलेश के लिए ऐसी कोई बाध्यता नहीं है और तब लालू को देर-सवेर ये निर्णय लेना होगा कि वो अखिलेश के साथ भविष्य की राजनीति करते हैं या अपनी पार्टी के बाहुबलियों के सामने नतमस्तक रहते हैं. हालांकि जब भी उनकी पार्टी के किसी नेता भले ही वो शहाबुद्दीन हो या राजभल्लव यादव.. उनके खिलाफ नीतीश सरकार ने कार्रवाई की, तब लालू ने मौन रहकर सरकार बचाना ज्यादा बेहतर समझा.टिप्पणियां
लेकिन लालू यादव की असल दिक्कत इस बात को लेकर है कि अब हर दिन बिहार के उनके समर्थकों में अखिलेश चर्चा का केंद्र रहेंगे और यहां उनके दोनों बेटे तेजप्रताप और तेजस्वी यादव के 'परफॉरमेंस' पर चर्चा केंद्रित होगी. अखिलेश आज पूरे देश में चर्चा के केंद्र में हैं, तब उनका काम मुख्य आधार रहा हैं और लालू यादव खुद भी जानते हैं कि सब जानते हैं कि अपने बेटों के विभाग का रिमोट उनके पास रहने के बावजूद अखिलेश को छोडि़ए, लेकिन नीतीश कुमार के पूर्व के बीजेपी के मंत्रियों से भी तुलना करने के लायक उनका कार्यकाल नहीं रहा है. फ़िलहाल लालू यादव ने अपने दोनों बेटो के हिस्से में आठ विभाग रखे हैं और कई विभाग के दफ्तर में भी उनके बेटे तेजप्रताप यादव महीनों नहीं जाते. अपने विभाग के कार्यक्रम में भी तेजप्रताप का नदारद रहना चर्चा का विषय होता हैं. उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव अपने एक विभाग पथ निर्माण में रूचि तो लेते हैं, लेकिन अन्य विभागों के कामकाज में जितना सोशल मीडिया में उनकी सक्रियता रहती हैं, उतनी कभी नहीं देखी गई.
लालू यादव खुद अधिकांश विभाग के कामकाज में खुलकर दखलंदाजी भी करते हैं. जो आज की तारीख में अखिलेश ब्रांड की राजनीति और कामकाज की शैली से कहीं भी मेल नहीं खाता. हालांकि लालू से ज्यादा उनके बेटों को अब राजनीति के ब्रांड लालू और अखिलेश में से एक को चुनना होगा. ब्रांड लालू का अनुसरण कर वो सत्ता में एक हद तक जा सकते हैं, लेकिन ब्रांड अखिलेश को अपनाकर वो खासकर तेजस्वी यादव अपने जीवन की राजनीतिक महत्वाकांक्षा को पूरा कर सकते हैं.. अन्यथा बिहार में ब्रांड नीतीश तब तक चलता रहेगा जब तक वो सत्ता में बने रहना चाहते हैं.
लेकिन लालू यादव की असल दिक्कत इस बात को लेकर है कि अब हर दिन बिहार के उनके समर्थकों में अखिलेश चर्चा का केंद्र रहेंगे और यहां उनके दोनों बेटे तेजप्रताप और तेजस्वी यादव के 'परफॉरमेंस' पर चर्चा केंद्रित होगी. अखिलेश आज पूरे देश में चर्चा के केंद्र में हैं, तब उनका काम मुख्य आधार रहा हैं और लालू यादव खुद भी जानते हैं कि सब जानते हैं कि अपने बेटों के विभाग का रिमोट उनके पास रहने के बावजूद अखिलेश को छोडि़ए, लेकिन नीतीश कुमार के पूर्व के बीजेपी के मंत्रियों से भी तुलना करने के लायक उनका कार्यकाल नहीं रहा है. फ़िलहाल लालू यादव ने अपने दोनों बेटो के हिस्से में आठ विभाग रखे हैं और कई विभाग के दफ्तर में भी उनके बेटे तेजप्रताप यादव महीनों नहीं जाते. अपने विभाग के कार्यक्रम में भी तेजप्रताप का नदारद रहना चर्चा का विषय होता हैं. उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव अपने एक विभाग पथ निर्माण में रूचि तो लेते हैं, लेकिन अन्य विभागों के कामकाज में जितना सोशल मीडिया में उनकी सक्रियता रहती हैं, उतनी कभी नहीं देखी गई.
लालू यादव खुद अधिकांश विभाग के कामकाज में खुलकर दखलंदाजी भी करते हैं. जो आज की तारीख में अखिलेश ब्रांड की राजनीति और कामकाज की शैली से कहीं भी मेल नहीं खाता. हालांकि लालू से ज्यादा उनके बेटों को अब राजनीति के ब्रांड लालू और अखिलेश में से एक को चुनना होगा. ब्रांड लालू का अनुसरण कर वो सत्ता में एक हद तक जा सकते हैं, लेकिन ब्रांड अखिलेश को अपनाकर वो खासकर तेजस्वी यादव अपने जीवन की राजनीतिक महत्वाकांक्षा को पूरा कर सकते हैं.. अन्यथा बिहार में ब्रांड नीतीश तब तक चलता रहेगा जब तक वो सत्ता में बने रहना चाहते हैं.
लालू यादव खुद अधिकांश विभाग के कामकाज में खुलकर दखलंदाजी भी करते हैं. जो आज की तारीख में अखिलेश ब्रांड की राजनीति और कामकाज की शैली से कहीं भी मेल नहीं खाता. हालांकि लालू से ज्यादा उनके बेटों को अब राजनीति के ब्रांड लालू और अखिलेश में से एक को चुनना होगा. ब्रांड लालू का अनुसरण कर वो सत्ता में एक हद तक जा सकते हैं, लेकिन ब्रांड अखिलेश को अपनाकर वो खासकर तेजस्वी यादव अपने जीवन की राजनीतिक महत्वाकांक्षा को पूरा कर सकते हैं.. अन्यथा बिहार में ब्रांड नीतीश तब तक चलता रहेगा जब तक वो सत्ता में बने रहना चाहते हैं. | लालू की चिंता, दो धड़ों में बंटी सपा के किस धड़े के साथ वो रहेंगे.
लालू के लिए किसी के समर्थन में खड़े होना उतना आसान नहीं होगा.
अखिलेश आज पूरे देश में चर्चा के केंद्र में हैं... | 6 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: तमिलनाडु के खाद्य मंत्री आर कामराज के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एक रियल एस्टेट कारोबारी से 30 लाख रपये की कथित तौर पर धोखाधड़ी करने को लेकर मामला दर्ज किया गया है.टिप्पणियां
यह घटनाक्रम शीर्ष अदालत के 28 अप्रैल के आदेश के मद्देनजर हुआ है, जिसमें राज्य पुलिस को कामराज के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया गया था.
एसवीएस कुमार ने शीर्ष अदालत को अन्नाद्रमुक (अम्मा) के उप-महासचिव टी टी वी दिनाकरण का करीबी समझे जाने वाले मंत्री के खिलाफ मामला दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की थी.
यह घटनाक्रम शीर्ष अदालत के 28 अप्रैल के आदेश के मद्देनजर हुआ है, जिसमें राज्य पुलिस को कामराज के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया गया था.
एसवीएस कुमार ने शीर्ष अदालत को अन्नाद्रमुक (अम्मा) के उप-महासचिव टी टी वी दिनाकरण का करीबी समझे जाने वाले मंत्री के खिलाफ मामला दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की थी.
एसवीएस कुमार ने शीर्ष अदालत को अन्नाद्रमुक (अम्मा) के उप-महासचिव टी टी वी दिनाकरण का करीबी समझे जाने वाले मंत्री के खिलाफ मामला दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की थी. | एक रियल एस्टेट कारोबारी से 30 लाख रुपये की कथित तौर पर धोखाधड़ी
शीर्ष अदालत के 28 अप्रैल के आदेश के मद्देनजर हुई एफआईआर
राज्य पुलिस ने कामराज के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की. | 28 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: वाट्सएप (WhatsApp) ने कई भारतीय पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को बताया है कि एक इजरायली सॉफ्टवेयर के जरिये उनकी जासूसी की गई. ये जासूसी लोकसभा चुनाव के दौरान हुई है. जिन लोगों की जासूसी की गई है, उनके नाम पर गौर करने पर संदेह पैदा होता है कि क्या इसमें सरकार की कोई भूमिका रही है? हालांकि केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद का कहना है कि भारत के नागरिकों की निजता में व्हाट्सएप पर उल्लंघन होने को लेकर सरकार चिंतित है. इस बारे में व्हाट्सएप से बात की है और उनसे पूछा है कि वह लाखों भारतीयों की निजता की सुरक्षा को लेकर क्या कर रहे हैं. दरअसल, एक दिन पहले ही 'इंडियन एक्सप्रेस' ने रिपोर्ट दी थी कि वाट्सएप के ज़रिए कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों की जासूसी की गई है.
कुछ ही घंटों के भीतर उन लोगों के नाम भी सामने आने लगे, जिनकी जासूसी हुई है. इनमें कई लोग वो हैं जो नक्सलवाद या मानवाधिकारवादी आंदोलनों से सहानुभूति रखने के आरोप में सरकार के निशाने पर रहे हैं. मिसाल के तौर पर भीमा कोरेगांव मामले से जुड़े आरोपियों के वकीलों निहाल सिंह राठौड़ और शालिनी गेरे ने बताया कि उन्हें ये संदेश मिला कि उनकी जासूसी हो रही है. इस मामले में गिरफ़्तार लेखक और प्रोफ़ेसर आनंद तेलतुंबड़े ने भी कहा कि उनकी जासूसी हो रही थी. कुछ वो लोग हैं जो छत्तीसगढ़ में आदिवासियों के बीच काम कर रहे हैं- जैसे वकील डिग्री चौहान और सामाजिक कार्यकर्ता बेला भाटिया. वामपंथी संगठनों पर लिखने वाले दिल्ली विश्वविद्यालय के एक प्रोफ़ेसर ने भी कहा कि उन्हें निशाना बनाया गया. | वाट्सएप के जरिये पत्रकारों की हुई जासूसी
सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी बनाया गया निशाना
सरकार ने वाट्सएप से मांगा है जवाब | 28 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: मकबूल फिदा हुसैन के जबर्दस्त आलोचक शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने कहा कि पेंटर के निधन से आधुनिक कला को नुकसान पहुंचा होगा और अल्लाह उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें। बाल ठाकरे के भतीजे एवं महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे हुसैन की कलाकृतियों से संबंधित सभी विवादों को दफना देना चाहते हैं। खुद एक प्रतिष्ठित कार्टूनिस्ट 83 वर्षीय बाल ठाकरे ने कहा, हुसैन के निधन से आधुनिक कला को नुकसान पहुंचा होगा। बस। अल्लाह उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें। हुसैन द्वारा हिन्दू देवी देवताओं की निर्वस्त्र तस्वीरें बनाए जाने पर शिवसेना मनसे जैसे दक्षिणपंथी संगठनों और अन्य हिन्दू संगठनों ने भृकुटियां तान ली थीं और उन्होंने कई बार प्रदर्शनियों में उनकी पेंटिंगों को निशाना बनाया। बाल ठाकरे ने कहा, कलाकार के रूप में प्रत्येक व्यक्ति का एक कार्यक्षेत्र होता है और हुसैन ने आधुनिक कला क्षेत्र में जोश के साथ काम किया। हालांकि हिन्दू देवी-देवताओं के चित्र बनाते समय वह भटक गए। उन्होंने कहा, वह अपने क्षेत्र में खुश थे। मैं आधुनिक कला को पसंद नहीं करता। मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने अपनी टिप्पणी में कहा, हुसैन राष्ट्रीय धरोहर थे और भारतीय कला में उनके योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जो भी विवाद हुए उन्हें उनके निधन के साथ ही दफना दिया जाना चाहिए। यदि उनका परिवार उनकी पार्थिव देह वापस लाना चाहता है तो इसकी अनुमति मिलनी चाहिए। राज ठाकरे भी एक कार्टूनिस्ट हैं। उन्होंने कहा कि पंढरपुर में जन्मे हुसैन महाराष्ट्र से गहराई से जुड़े थे जहां उनकी कला फली-फूली और उन्हें अंतरराष्ट्रीय ख्याति मिली। | यहाँ एक सारांश है:शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने कहा कि पेंटर के निधन से आधुनिक कला को नुकसान पहुंचा होगा और अल्लाह उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें। | 15 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: Vivo आज चीन में अपने नए स्मार्टफोन Vivo Z5x को लॉन्च करेगी। वीवो ब्रांड का यह आगामी स्मार्टफोन कंपनी की जे़ड सीरीज़ का हिस्सा होगा और यह कंपनी के मौजूदा Vivo Z3, Vivo Z3x, Vivo Z1 Youth Edition, Vivo Z3i Standard Edition, Vivo Z3i और Vivo Z1i स्मार्टफोन को ज्वाइन करेगा। भारतीय समयानुसार Vivo Z5x का लॉन्च इवेंट शाम 5 बजे शुरू होगा। लॉन्च की लाइव स्ट्रीमिंग चीन की माइक्रोब्लॉगिंग साइट वीबो और कंपनी की आधिकारिक साइट पर होगी। Vivo Z5x एक मिड-रेंज़ स्मार्टफोन हो सकता है और इसे पंच-होल डिस्प्ले और 5,000 एमएएच बैटरी के साथ उतारा जा सकता है।
अगर आप वीवो ज़ेड5एक्स के इवेंट की लाइव स्ट्रीमिंग देखना चाहते हैं तो Vivo के आधिकारिक वीबो अकाउंट या फिर कंपनी की वेबसाइट पर जाकर देख सकते हैं। ऐसा संभव है लाइव स्ट्रीमिंग मंदारिन मतलब चीनी भाषा में हो सकती है इसलिए हो सकता है कि आपको कुछ भी समझ ना आए। जैसा कि हमने आपको पहले बताया कि Vivo Z5x का लॉन्च इवेंट भारतीय समयानुसार शाम 5 बजे शुरू होगा।
वीवो ज़ेड5एक्स के स्पेसिफिकेशन की बात करें तो इसमें स्नैपड्रैगन 710 प्रोसेसर, 8 जीबी तक रैम और 6.53 इंच का पंच-होल डिस्प्ले है। Vivo पहले ही इस बात को कंफर्म कर चुकी है कि वीवो जे़ड5एक्स में जान फूंकने के लिए 5,000 एमएएच की बैटरी दी जाएगी। Vivo Z5x फुल-एचडी+ (1080x2340 पिक्सल) रिजॉल्यूशन से लैस हो सकता है।
फोटो, वीडियो और अन्य चीजों को सेव करने के लिए 128 जीबी तक के स्टोरेज वेरिएंट को उतारा जा सकता है। वीवो ज़ेड5एक्स एंड्रॉयड पाई पर आधारित फनटच ओएस9 से लैस हो सकता है। कैमरा सेटअप की बात करें तो Vivo ब्रांड का यह फोन तीन रियर कैमरों से लैस हो सकता है। लीक से ऐसा पता चला था कि Vivo Z5x के तीन कलर वेरिएंट हो सकते हैं- एक्सट्रीम नाइट ब्लैक, फैंटम ब्लैक और तीसरे कलर के बारे में फिलहाल कोई भी जानकारी नहीं मिल पाई है। इसके अलावा Vivo Z5x के रिटेल बॉक्स में 18 वाट का चार्जर दिया जा सकता है। | वीवो जे़ड5एक्स में हो सकते हैं तीन रियर कैमरे
Vivo Z5x के दो कलर वेरिएंट हो सकते हैं
पंच-होल डिस्प्ले से लैस हो सकता है Vivo Z5x | 34 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या में फांसी की सजा पाए आतंकी बलवंत सिंह पर सियासत तेज हो गई है।
इस मामले में शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने तय किया है कि वह राष्ट्रपति के पास फांसी माफी की अपील दाखिल करेगी।टिप्पणियां
इस अपील में गुजारिश की जाएगी कि राष्ट्रपति बलंवत की फांसी की सजा को कम कर दें। इसके अलावा मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल भी इस मामले में विधानसभा में बयान देंगे।
बलवंत को 31 मार्च को फांसी दी जानी है और कई सिख संगत इस पक्ष में है कि फिलहाल उसकी सज़ा को टाल दिया जाए। बलवंत पटियाला जेल में बंद है और उसके समर्थन में लोगों ने एक मार्च निकाला और जेल के बाहर धरना भी दिया।
इस मामले में शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने तय किया है कि वह राष्ट्रपति के पास फांसी माफी की अपील दाखिल करेगी।टिप्पणियां
इस अपील में गुजारिश की जाएगी कि राष्ट्रपति बलंवत की फांसी की सजा को कम कर दें। इसके अलावा मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल भी इस मामले में विधानसभा में बयान देंगे।
बलवंत को 31 मार्च को फांसी दी जानी है और कई सिख संगत इस पक्ष में है कि फिलहाल उसकी सज़ा को टाल दिया जाए। बलवंत पटियाला जेल में बंद है और उसके समर्थन में लोगों ने एक मार्च निकाला और जेल के बाहर धरना भी दिया।
इस अपील में गुजारिश की जाएगी कि राष्ट्रपति बलंवत की फांसी की सजा को कम कर दें। इसके अलावा मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल भी इस मामले में विधानसभा में बयान देंगे।
बलवंत को 31 मार्च को फांसी दी जानी है और कई सिख संगत इस पक्ष में है कि फिलहाल उसकी सज़ा को टाल दिया जाए। बलवंत पटियाला जेल में बंद है और उसके समर्थन में लोगों ने एक मार्च निकाला और जेल के बाहर धरना भी दिया।
बलवंत को 31 मार्च को फांसी दी जानी है और कई सिख संगत इस पक्ष में है कि फिलहाल उसकी सज़ा को टाल दिया जाए। बलवंत पटियाला जेल में बंद है और उसके समर्थन में लोगों ने एक मार्च निकाला और जेल के बाहर धरना भी दिया। | पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या में फांसी की सजा पाए आतंकी बलवंत सिंह पर सियासत तेज हो गई है। | 26 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: उत्तर प्रदेश विधानसभा के ताजा चुनाव में बीजेपी के पिछली बार से भी ज्यादा खराब प्रदर्शन पर निराशा जताते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने चेतावनी दी है कि पार्टी नेतृत्व ने अगर समय रहते समाधान नहीं खोजा, तो 2014 में केंद्र की सत्ता तक पहुंचना उसके लिए मुश्किल होगा।
संघ के अंग्रेजी और हिन्दी में प्रकाशित होने वाले मुखपत्रों ‘ऑर्गेनाइजर’ तथा ‘पांचजन्य’ दोनों के नवीनतम अंकों के संपादकीय में खराब प्रदर्शन के लिए पार्टी को आड़े हाथ लेते हुए उसे इस बारे में सोचने की कटाक्ष भरी नसीहत दी गई कि ‘‘उत्तर प्रदेश बीजेपी में कार्यकर्ताओं से अधिक नेताओं की फौज क्यों है।’’
ऑर्गेनाइजर के संपादकीय में कहा गया है, ‘‘उत्तर प्रदेश में बीजेपी को भी मतदाताओं से अलग थलग हो जाने की कांग्रेस की बीमारी लग गई। इसके चलते यह पिछले एक दशक में अपने आधे मतदाता गंवा बैठी है।’’ इसमें पार्टी नेतृत्व पर एक तरह से सवाल उठाते हुए कहा गया है, ‘‘मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए मूल विचारधारात्मक मुद्दों और सिद्धांतों के साथ नेतृत्व की विश्वसनीयता की जरूरत होती है। इन दिनों पार्टी से अधिक नेतृत्व और नेताओं से अधिक उनके कामकाज का चिट्ठा चुनावी नतीजों को प्रभावित करता है।’’
पांचजन्य के संपादकीय में भी बीजेपी और उसके नेतृत्व के प्रति कड़ा रुख अपनाते हुए आगाह किया गया है कि पार्टी ने अगर अपने को ठीक नहीं किया, तो आगामी लोकसभा चुनाव में भी उसका प्रदर्शन ठीक नहीं होगा। इसमें कहा गया है, ‘‘उत्तर प्रदेश के चुनाव परिणामों ने पार्टी के सामने कई प्रश्न खड़े कर दिए हैं, जिनका समाधान पार्टी नेतृत्व को समय रहते खोजना होगा, अन्यथा 2014 का लोकसभा चुनाव उसके लिए अग्निपथ बन सकता है, जिसे पार कर केंद्रीय सत्ता तक पंहुचना बीजेपी के लिए मुश्किल भरा होगा।’’
संघ ने अपने मुखपत्र के संपादकीयों के जरिए बीजेपी से सीधा सवाल किया है, ‘‘भारतीय जनता पार्टी एक सुदृढ़ सांगठनिक ढांचा और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की एक मजबूत शृंखला होने के बावजूद मतदाताओं की नजरों में क्यों नहीं चढ़ सकी? उत्तर प्रदेश में बीजेपी को कार्यकर्ताओं से अधिक नेताओं की फौज के बारे में भी सोचना होगा।’’ इसमें यह चिंता जताई गई है कि इस महत्वपूर्ण राज्य में बीजेपी का कमजोर होना कट्टरवादी ताकतों को मजबूत बनाएगा, जैसा कि इन चुनावों में सामने आया है।
उसने पार्टी से यह सवाल भी किया है कि ऐसा कैसे हो गया कि मायावती के ‘भ्रष्ट कुशासन’ से त्रस्त जनता जब विकल्प की तलाश में निकली, तो उसे वही मुलायम सिंह नजर आए, जिनके ‘गुंडाराज’ से आजिज आकर मायावती को 2007 में उसने सत्ता सौंपी थी। ऑर्गेनाइजर में प्रकाशित चुनाव परिणामों के विश्लेषण में बीजेपी को अपना ऐसा सर्वोत्तम नेता चुनने की जरूरत बताई गई है, जो जनता पर प्रभाव डाल सके।टिप्पणियां
इस विश्लेषण में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी या छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह का नाम लिए बिना कहा गया है, ‘‘जनता पर प्रभाव डालने वाला ऐसा नेता चुनने की जरूरत है, जिसका सुशासन और विकास का बढ़िया रिकॉर्ड हो। ऐसा नेता चुनकर सर्वोत्तम नतीजों को हासिल करने के लिए उसे पूर्ण समर्थन दिया जाए।’’
इसमें चेतावनी दी गई है कि अगर पार्टी जल्द ही ऐसा करने में विफल रही, तो अगले लोकसभा चुनाव अवश्यंभावी रूप से क्षेत्रीय गठजोड़ की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं और उसे रोका नहीं जा सकेगा। विश्लेषण में इस दलील को भी ठुकरा दिया गया है कि मुसलमानों के सपा को वोट देने से ऐसी स्थिति बनी है। इसमें कहा गया, ‘‘सचाई यह है कि मुसलमानों ने बीजेपी को कभी वोट नहीं दिया और 1996, 1998 और 1999 के संसदीय चुनावों में देश भर में मुसलमानों के भारी विरोध के बावजजूद बीजेपी उनमें विजयी हुई।’’
संघ के अंग्रेजी और हिन्दी में प्रकाशित होने वाले मुखपत्रों ‘ऑर्गेनाइजर’ तथा ‘पांचजन्य’ दोनों के नवीनतम अंकों के संपादकीय में खराब प्रदर्शन के लिए पार्टी को आड़े हाथ लेते हुए उसे इस बारे में सोचने की कटाक्ष भरी नसीहत दी गई कि ‘‘उत्तर प्रदेश बीजेपी में कार्यकर्ताओं से अधिक नेताओं की फौज क्यों है।’’
ऑर्गेनाइजर के संपादकीय में कहा गया है, ‘‘उत्तर प्रदेश में बीजेपी को भी मतदाताओं से अलग थलग हो जाने की कांग्रेस की बीमारी लग गई। इसके चलते यह पिछले एक दशक में अपने आधे मतदाता गंवा बैठी है।’’ इसमें पार्टी नेतृत्व पर एक तरह से सवाल उठाते हुए कहा गया है, ‘‘मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए मूल विचारधारात्मक मुद्दों और सिद्धांतों के साथ नेतृत्व की विश्वसनीयता की जरूरत होती है। इन दिनों पार्टी से अधिक नेतृत्व और नेताओं से अधिक उनके कामकाज का चिट्ठा चुनावी नतीजों को प्रभावित करता है।’’
पांचजन्य के संपादकीय में भी बीजेपी और उसके नेतृत्व के प्रति कड़ा रुख अपनाते हुए आगाह किया गया है कि पार्टी ने अगर अपने को ठीक नहीं किया, तो आगामी लोकसभा चुनाव में भी उसका प्रदर्शन ठीक नहीं होगा। इसमें कहा गया है, ‘‘उत्तर प्रदेश के चुनाव परिणामों ने पार्टी के सामने कई प्रश्न खड़े कर दिए हैं, जिनका समाधान पार्टी नेतृत्व को समय रहते खोजना होगा, अन्यथा 2014 का लोकसभा चुनाव उसके लिए अग्निपथ बन सकता है, जिसे पार कर केंद्रीय सत्ता तक पंहुचना बीजेपी के लिए मुश्किल भरा होगा।’’
संघ ने अपने मुखपत्र के संपादकीयों के जरिए बीजेपी से सीधा सवाल किया है, ‘‘भारतीय जनता पार्टी एक सुदृढ़ सांगठनिक ढांचा और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की एक मजबूत शृंखला होने के बावजूद मतदाताओं की नजरों में क्यों नहीं चढ़ सकी? उत्तर प्रदेश में बीजेपी को कार्यकर्ताओं से अधिक नेताओं की फौज के बारे में भी सोचना होगा।’’ इसमें यह चिंता जताई गई है कि इस महत्वपूर्ण राज्य में बीजेपी का कमजोर होना कट्टरवादी ताकतों को मजबूत बनाएगा, जैसा कि इन चुनावों में सामने आया है।
उसने पार्टी से यह सवाल भी किया है कि ऐसा कैसे हो गया कि मायावती के ‘भ्रष्ट कुशासन’ से त्रस्त जनता जब विकल्प की तलाश में निकली, तो उसे वही मुलायम सिंह नजर आए, जिनके ‘गुंडाराज’ से आजिज आकर मायावती को 2007 में उसने सत्ता सौंपी थी। ऑर्गेनाइजर में प्रकाशित चुनाव परिणामों के विश्लेषण में बीजेपी को अपना ऐसा सर्वोत्तम नेता चुनने की जरूरत बताई गई है, जो जनता पर प्रभाव डाल सके।टिप्पणियां
इस विश्लेषण में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी या छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह का नाम लिए बिना कहा गया है, ‘‘जनता पर प्रभाव डालने वाला ऐसा नेता चुनने की जरूरत है, जिसका सुशासन और विकास का बढ़िया रिकॉर्ड हो। ऐसा नेता चुनकर सर्वोत्तम नतीजों को हासिल करने के लिए उसे पूर्ण समर्थन दिया जाए।’’
इसमें चेतावनी दी गई है कि अगर पार्टी जल्द ही ऐसा करने में विफल रही, तो अगले लोकसभा चुनाव अवश्यंभावी रूप से क्षेत्रीय गठजोड़ की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं और उसे रोका नहीं जा सकेगा। विश्लेषण में इस दलील को भी ठुकरा दिया गया है कि मुसलमानों के सपा को वोट देने से ऐसी स्थिति बनी है। इसमें कहा गया, ‘‘सचाई यह है कि मुसलमानों ने बीजेपी को कभी वोट नहीं दिया और 1996, 1998 और 1999 के संसदीय चुनावों में देश भर में मुसलमानों के भारी विरोध के बावजजूद बीजेपी उनमें विजयी हुई।’’
ऑर्गेनाइजर के संपादकीय में कहा गया है, ‘‘उत्तर प्रदेश में बीजेपी को भी मतदाताओं से अलग थलग हो जाने की कांग्रेस की बीमारी लग गई। इसके चलते यह पिछले एक दशक में अपने आधे मतदाता गंवा बैठी है।’’ इसमें पार्टी नेतृत्व पर एक तरह से सवाल उठाते हुए कहा गया है, ‘‘मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए मूल विचारधारात्मक मुद्दों और सिद्धांतों के साथ नेतृत्व की विश्वसनीयता की जरूरत होती है। इन दिनों पार्टी से अधिक नेतृत्व और नेताओं से अधिक उनके कामकाज का चिट्ठा चुनावी नतीजों को प्रभावित करता है।’’
पांचजन्य के संपादकीय में भी बीजेपी और उसके नेतृत्व के प्रति कड़ा रुख अपनाते हुए आगाह किया गया है कि पार्टी ने अगर अपने को ठीक नहीं किया, तो आगामी लोकसभा चुनाव में भी उसका प्रदर्शन ठीक नहीं होगा। इसमें कहा गया है, ‘‘उत्तर प्रदेश के चुनाव परिणामों ने पार्टी के सामने कई प्रश्न खड़े कर दिए हैं, जिनका समाधान पार्टी नेतृत्व को समय रहते खोजना होगा, अन्यथा 2014 का लोकसभा चुनाव उसके लिए अग्निपथ बन सकता है, जिसे पार कर केंद्रीय सत्ता तक पंहुचना बीजेपी के लिए मुश्किल भरा होगा।’’
संघ ने अपने मुखपत्र के संपादकीयों के जरिए बीजेपी से सीधा सवाल किया है, ‘‘भारतीय जनता पार्टी एक सुदृढ़ सांगठनिक ढांचा और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की एक मजबूत शृंखला होने के बावजूद मतदाताओं की नजरों में क्यों नहीं चढ़ सकी? उत्तर प्रदेश में बीजेपी को कार्यकर्ताओं से अधिक नेताओं की फौज के बारे में भी सोचना होगा।’’ इसमें यह चिंता जताई गई है कि इस महत्वपूर्ण राज्य में बीजेपी का कमजोर होना कट्टरवादी ताकतों को मजबूत बनाएगा, जैसा कि इन चुनावों में सामने आया है।
उसने पार्टी से यह सवाल भी किया है कि ऐसा कैसे हो गया कि मायावती के ‘भ्रष्ट कुशासन’ से त्रस्त जनता जब विकल्प की तलाश में निकली, तो उसे वही मुलायम सिंह नजर आए, जिनके ‘गुंडाराज’ से आजिज आकर मायावती को 2007 में उसने सत्ता सौंपी थी। ऑर्गेनाइजर में प्रकाशित चुनाव परिणामों के विश्लेषण में बीजेपी को अपना ऐसा सर्वोत्तम नेता चुनने की जरूरत बताई गई है, जो जनता पर प्रभाव डाल सके।टिप्पणियां
इस विश्लेषण में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी या छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह का नाम लिए बिना कहा गया है, ‘‘जनता पर प्रभाव डालने वाला ऐसा नेता चुनने की जरूरत है, जिसका सुशासन और विकास का बढ़िया रिकॉर्ड हो। ऐसा नेता चुनकर सर्वोत्तम नतीजों को हासिल करने के लिए उसे पूर्ण समर्थन दिया जाए।’’
इसमें चेतावनी दी गई है कि अगर पार्टी जल्द ही ऐसा करने में विफल रही, तो अगले लोकसभा चुनाव अवश्यंभावी रूप से क्षेत्रीय गठजोड़ की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं और उसे रोका नहीं जा सकेगा। विश्लेषण में इस दलील को भी ठुकरा दिया गया है कि मुसलमानों के सपा को वोट देने से ऐसी स्थिति बनी है। इसमें कहा गया, ‘‘सचाई यह है कि मुसलमानों ने बीजेपी को कभी वोट नहीं दिया और 1996, 1998 और 1999 के संसदीय चुनावों में देश भर में मुसलमानों के भारी विरोध के बावजजूद बीजेपी उनमें विजयी हुई।’’
पांचजन्य के संपादकीय में भी बीजेपी और उसके नेतृत्व के प्रति कड़ा रुख अपनाते हुए आगाह किया गया है कि पार्टी ने अगर अपने को ठीक नहीं किया, तो आगामी लोकसभा चुनाव में भी उसका प्रदर्शन ठीक नहीं होगा। इसमें कहा गया है, ‘‘उत्तर प्रदेश के चुनाव परिणामों ने पार्टी के सामने कई प्रश्न खड़े कर दिए हैं, जिनका समाधान पार्टी नेतृत्व को समय रहते खोजना होगा, अन्यथा 2014 का लोकसभा चुनाव उसके लिए अग्निपथ बन सकता है, जिसे पार कर केंद्रीय सत्ता तक पंहुचना बीजेपी के लिए मुश्किल भरा होगा।’’
संघ ने अपने मुखपत्र के संपादकीयों के जरिए बीजेपी से सीधा सवाल किया है, ‘‘भारतीय जनता पार्टी एक सुदृढ़ सांगठनिक ढांचा और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की एक मजबूत शृंखला होने के बावजूद मतदाताओं की नजरों में क्यों नहीं चढ़ सकी? उत्तर प्रदेश में बीजेपी को कार्यकर्ताओं से अधिक नेताओं की फौज के बारे में भी सोचना होगा।’’ इसमें यह चिंता जताई गई है कि इस महत्वपूर्ण राज्य में बीजेपी का कमजोर होना कट्टरवादी ताकतों को मजबूत बनाएगा, जैसा कि इन चुनावों में सामने आया है।
उसने पार्टी से यह सवाल भी किया है कि ऐसा कैसे हो गया कि मायावती के ‘भ्रष्ट कुशासन’ से त्रस्त जनता जब विकल्प की तलाश में निकली, तो उसे वही मुलायम सिंह नजर आए, जिनके ‘गुंडाराज’ से आजिज आकर मायावती को 2007 में उसने सत्ता सौंपी थी। ऑर्गेनाइजर में प्रकाशित चुनाव परिणामों के विश्लेषण में बीजेपी को अपना ऐसा सर्वोत्तम नेता चुनने की जरूरत बताई गई है, जो जनता पर प्रभाव डाल सके।टिप्पणियां
इस विश्लेषण में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी या छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह का नाम लिए बिना कहा गया है, ‘‘जनता पर प्रभाव डालने वाला ऐसा नेता चुनने की जरूरत है, जिसका सुशासन और विकास का बढ़िया रिकॉर्ड हो। ऐसा नेता चुनकर सर्वोत्तम नतीजों को हासिल करने के लिए उसे पूर्ण समर्थन दिया जाए।’’
इसमें चेतावनी दी गई है कि अगर पार्टी जल्द ही ऐसा करने में विफल रही, तो अगले लोकसभा चुनाव अवश्यंभावी रूप से क्षेत्रीय गठजोड़ की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं और उसे रोका नहीं जा सकेगा। विश्लेषण में इस दलील को भी ठुकरा दिया गया है कि मुसलमानों के सपा को वोट देने से ऐसी स्थिति बनी है। इसमें कहा गया, ‘‘सचाई यह है कि मुसलमानों ने बीजेपी को कभी वोट नहीं दिया और 1996, 1998 और 1999 के संसदीय चुनावों में देश भर में मुसलमानों के भारी विरोध के बावजजूद बीजेपी उनमें विजयी हुई।’’
संघ ने अपने मुखपत्र के संपादकीयों के जरिए बीजेपी से सीधा सवाल किया है, ‘‘भारतीय जनता पार्टी एक सुदृढ़ सांगठनिक ढांचा और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की एक मजबूत शृंखला होने के बावजूद मतदाताओं की नजरों में क्यों नहीं चढ़ सकी? उत्तर प्रदेश में बीजेपी को कार्यकर्ताओं से अधिक नेताओं की फौज के बारे में भी सोचना होगा।’’ इसमें यह चिंता जताई गई है कि इस महत्वपूर्ण राज्य में बीजेपी का कमजोर होना कट्टरवादी ताकतों को मजबूत बनाएगा, जैसा कि इन चुनावों में सामने आया है।
उसने पार्टी से यह सवाल भी किया है कि ऐसा कैसे हो गया कि मायावती के ‘भ्रष्ट कुशासन’ से त्रस्त जनता जब विकल्प की तलाश में निकली, तो उसे वही मुलायम सिंह नजर आए, जिनके ‘गुंडाराज’ से आजिज आकर मायावती को 2007 में उसने सत्ता सौंपी थी। ऑर्गेनाइजर में प्रकाशित चुनाव परिणामों के विश्लेषण में बीजेपी को अपना ऐसा सर्वोत्तम नेता चुनने की जरूरत बताई गई है, जो जनता पर प्रभाव डाल सके।टिप्पणियां
इस विश्लेषण में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी या छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह का नाम लिए बिना कहा गया है, ‘‘जनता पर प्रभाव डालने वाला ऐसा नेता चुनने की जरूरत है, जिसका सुशासन और विकास का बढ़िया रिकॉर्ड हो। ऐसा नेता चुनकर सर्वोत्तम नतीजों को हासिल करने के लिए उसे पूर्ण समर्थन दिया जाए।’’
इसमें चेतावनी दी गई है कि अगर पार्टी जल्द ही ऐसा करने में विफल रही, तो अगले लोकसभा चुनाव अवश्यंभावी रूप से क्षेत्रीय गठजोड़ की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं और उसे रोका नहीं जा सकेगा। विश्लेषण में इस दलील को भी ठुकरा दिया गया है कि मुसलमानों के सपा को वोट देने से ऐसी स्थिति बनी है। इसमें कहा गया, ‘‘सचाई यह है कि मुसलमानों ने बीजेपी को कभी वोट नहीं दिया और 1996, 1998 और 1999 के संसदीय चुनावों में देश भर में मुसलमानों के भारी विरोध के बावजजूद बीजेपी उनमें विजयी हुई।’’
उसने पार्टी से यह सवाल भी किया है कि ऐसा कैसे हो गया कि मायावती के ‘भ्रष्ट कुशासन’ से त्रस्त जनता जब विकल्प की तलाश में निकली, तो उसे वही मुलायम सिंह नजर आए, जिनके ‘गुंडाराज’ से आजिज आकर मायावती को 2007 में उसने सत्ता सौंपी थी। ऑर्गेनाइजर में प्रकाशित चुनाव परिणामों के विश्लेषण में बीजेपी को अपना ऐसा सर्वोत्तम नेता चुनने की जरूरत बताई गई है, जो जनता पर प्रभाव डाल सके।टिप्पणियां
इस विश्लेषण में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी या छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह का नाम लिए बिना कहा गया है, ‘‘जनता पर प्रभाव डालने वाला ऐसा नेता चुनने की जरूरत है, जिसका सुशासन और विकास का बढ़िया रिकॉर्ड हो। ऐसा नेता चुनकर सर्वोत्तम नतीजों को हासिल करने के लिए उसे पूर्ण समर्थन दिया जाए।’’
इसमें चेतावनी दी गई है कि अगर पार्टी जल्द ही ऐसा करने में विफल रही, तो अगले लोकसभा चुनाव अवश्यंभावी रूप से क्षेत्रीय गठजोड़ की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं और उसे रोका नहीं जा सकेगा। विश्लेषण में इस दलील को भी ठुकरा दिया गया है कि मुसलमानों के सपा को वोट देने से ऐसी स्थिति बनी है। इसमें कहा गया, ‘‘सचाई यह है कि मुसलमानों ने बीजेपी को कभी वोट नहीं दिया और 1996, 1998 और 1999 के संसदीय चुनावों में देश भर में मुसलमानों के भारी विरोध के बावजजूद बीजेपी उनमें विजयी हुई।’’
इस विश्लेषण में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी या छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह का नाम लिए बिना कहा गया है, ‘‘जनता पर प्रभाव डालने वाला ऐसा नेता चुनने की जरूरत है, जिसका सुशासन और विकास का बढ़िया रिकॉर्ड हो। ऐसा नेता चुनकर सर्वोत्तम नतीजों को हासिल करने के लिए उसे पूर्ण समर्थन दिया जाए।’’
इसमें चेतावनी दी गई है कि अगर पार्टी जल्द ही ऐसा करने में विफल रही, तो अगले लोकसभा चुनाव अवश्यंभावी रूप से क्षेत्रीय गठजोड़ की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं और उसे रोका नहीं जा सकेगा। विश्लेषण में इस दलील को भी ठुकरा दिया गया है कि मुसलमानों के सपा को वोट देने से ऐसी स्थिति बनी है। इसमें कहा गया, ‘‘सचाई यह है कि मुसलमानों ने बीजेपी को कभी वोट नहीं दिया और 1996, 1998 और 1999 के संसदीय चुनावों में देश भर में मुसलमानों के भारी विरोध के बावजजूद बीजेपी उनमें विजयी हुई।’’
इसमें चेतावनी दी गई है कि अगर पार्टी जल्द ही ऐसा करने में विफल रही, तो अगले लोकसभा चुनाव अवश्यंभावी रूप से क्षेत्रीय गठजोड़ की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं और उसे रोका नहीं जा सकेगा। विश्लेषण में इस दलील को भी ठुकरा दिया गया है कि मुसलमानों के सपा को वोट देने से ऐसी स्थिति बनी है। इसमें कहा गया, ‘‘सचाई यह है कि मुसलमानों ने बीजेपी को कभी वोट नहीं दिया और 1996, 1998 और 1999 के संसदीय चुनावों में देश भर में मुसलमानों के भारी विरोध के बावजजूद बीजेपी उनमें विजयी हुई।’’ | सारांश: यूपी चुनाव में बीजेपी के खराब प्रदर्शन पर आरएसएस ने चेतावनी दी है कि पार्टी ने अगर समय रहते समाधान नहीं खोजा, तो 2014 में केंद्र की सत्ता तक पहुंचना उसके लिए मुश्किल होगा। | 31 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: दक्षिण एशियन जूनियर टेबल टेनिस चैम्पियनशिप के दूसरे दिन यहां आईजी इनडोर स्टेडियम में हुए मुकाबले में सभी चार टीम स्वर्ण पदकों पर भारतीय खिलाड़ियों ने कब्जा कर लिया।
भारत के बाद दूसरे स्थान पर श्रीलंका रहा, जिसने चार रजत पदक हासिल किए। इसके अलावा बांग्लादेश, नेपाल एवं पाकिस्तान को कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। टूर्नामेंट में सिर्फ भूटान ही ऐसा देश रहा जो कोई भी पदक हासिल नहीं कर सका।टिप्पणियां
भारत की तरफ से सुधांशु ग्रोवर ने श्रीलंका के विमुक्ति विजेसीरी को 11-5, 11-6, 11-6 से, अभिषेक यादव ने निरोशना कहावथाता को 11-9, 11-8, 8-11, 11-6 से तथा रोहित राजशेखर ने दिलशान एकानायके को 11-6, 11-4, 11-6 से हराकर जूनियर बॉयज का स्वर्ण पदक हासिल किया।
इसके अलावा जूनियर गर्ल्स, कैडेट बॉयज तथा कैडेट गर्ल्स स्पर्धाओं में भी भारत ने श्रीलंका को 3-0 से मात दी।
भारत के बाद दूसरे स्थान पर श्रीलंका रहा, जिसने चार रजत पदक हासिल किए। इसके अलावा बांग्लादेश, नेपाल एवं पाकिस्तान को कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। टूर्नामेंट में सिर्फ भूटान ही ऐसा देश रहा जो कोई भी पदक हासिल नहीं कर सका।टिप्पणियां
भारत की तरफ से सुधांशु ग्रोवर ने श्रीलंका के विमुक्ति विजेसीरी को 11-5, 11-6, 11-6 से, अभिषेक यादव ने निरोशना कहावथाता को 11-9, 11-8, 8-11, 11-6 से तथा रोहित राजशेखर ने दिलशान एकानायके को 11-6, 11-4, 11-6 से हराकर जूनियर बॉयज का स्वर्ण पदक हासिल किया।
इसके अलावा जूनियर गर्ल्स, कैडेट बॉयज तथा कैडेट गर्ल्स स्पर्धाओं में भी भारत ने श्रीलंका को 3-0 से मात दी।
भारत की तरफ से सुधांशु ग्रोवर ने श्रीलंका के विमुक्ति विजेसीरी को 11-5, 11-6, 11-6 से, अभिषेक यादव ने निरोशना कहावथाता को 11-9, 11-8, 8-11, 11-6 से तथा रोहित राजशेखर ने दिलशान एकानायके को 11-6, 11-4, 11-6 से हराकर जूनियर बॉयज का स्वर्ण पदक हासिल किया।
इसके अलावा जूनियर गर्ल्स, कैडेट बॉयज तथा कैडेट गर्ल्स स्पर्धाओं में भी भारत ने श्रीलंका को 3-0 से मात दी।
इसके अलावा जूनियर गर्ल्स, कैडेट बॉयज तथा कैडेट गर्ल्स स्पर्धाओं में भी भारत ने श्रीलंका को 3-0 से मात दी। | यहाँ एक सारांश है:दक्षिण एशियन जूनियर टेबल टेनिस चैम्पियनशिप के दूसरे दिन यहां आईजी इनडोर स्टेडियम में हुए मुकाबले में सभी चार टीम स्वर्ण पदकों पर भारतीय खिलाड़ियों ने कब्जा कर लिया। | 18 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: मुंबई में भारत और श्रीलंका के बीच होने वाले विश्व कप फाइनल मुकाबले को देखते हुए रांची में भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के घर और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है, जबकि उनके प्रशंसक मंदिरों में टीम इंडिया की सफलता के लिए पूजा-पाठ कर रहे हैं। रांची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रवीण कुमार ने बताया कि फाइनल में हो रहे भारत-श्रीलंका मैच के तनाव को देखते हुए भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान धोनी के हरमू स्थित घर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कुमार ने बताया कि धोनी के घर पर हमेशा ही सुरक्ष की विशेष व्यवस्था रहती है, लेकिन शनिवार को फाइनल मैच होने के कारण वहां सुरक्षा बढ़ा दी गई है। उन्होंने कहा कि भारत के मैच जीतने या हारने दोनों स्थितियों में धोनी के घर के सामने क्रिकेट प्रेमियों के उमड़ने की आशंका को देखते हुए ऐसा किया गया है। उन्होंने बताया कि धोनी के घर पर सुरक्षा बलों के विशेष दस्ते की तैनाती की गई है। इसके अलावा स्थानीय थाने को भी विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। कुमार ने बताया कि सेमीफाइनल मुकाबले में भारत की पाकिस्तान पर जीत के बाद अल्बर्ट एक्का चौक पर एकत्रित भीड़ में से कुछ असामाजिक तत्वों ने अल्बर्ट एक्का की मूर्ति में लगी बंदूक की प्रतिकृति को नुकसान पहुंचाया था। उन्होंने इस घटना के मद्देनजर इस बार सुरक्षा और कड़ी करने की बात कही। उन्होंने कहा कि घटना में शामिल लोगों की तस्वीर मिल गई है और उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर तलाश की जा रही है। इस बीच, धोनी के प्रशंसकों ने रांची के पहाड़ी मंदिर और धोनी के प्रिय देवड़ी मंदिर समेत तमाम मंदिरों में भारतीय टीम की जीत के लिए विशेष पूजा की। अनेक क्रिकेट प्रेमियों ने पहाड़ी मंदिर में यज्ञ का भी आयोजन किया है। | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: फाइनल में भारत-श्रीलंका मैच के तनाव को देखते हुए भारतीय टीम के कप्तान धोनी के रांची के हरमू स्थित घर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। | 19 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: नोएडा के चर्चित आरुषि-हेमराज हत्याकांड में इलाहाबाद हाईकोर्ट में सीबीआई की उस याचिका पर सुनवाई है जिसमें उसने राजेश तलवार की बेल को खारिज करने की मांग की है। सीबीआई चाहती है कि राजेश तलवार को जब तक फिर से बेल नहीं मिलती तब तक उसे जेल में ही रखा जाए।टिप्पणियां
उधर, राजेश तलवार ने डासना जेल में बंद अपनी पत्नी नूपुर तलवार से मुलाकात की।
सीबीआई के मुताबिक राजेश तलवार को 11 जुलाई 2008 को सशर्त जमानत मिली थी। तब सीबीआई के पास भी उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं थे लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। 9 फरवरी 2011 के फैसले के बाद राजेश तलवार पर अपनी बेटी की हत्या और हत्या के सबूत मिटाने के आरोप तय हो गए हैं। अब सीबीआई चाहती है कि तलवार भी हत्या के बाकी आरोपियों की तरह सेशन्स कोर्ट से नियमित जमानत लें।
उधर, राजेश तलवार ने डासना जेल में बंद अपनी पत्नी नूपुर तलवार से मुलाकात की।
सीबीआई के मुताबिक राजेश तलवार को 11 जुलाई 2008 को सशर्त जमानत मिली थी। तब सीबीआई के पास भी उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं थे लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। 9 फरवरी 2011 के फैसले के बाद राजेश तलवार पर अपनी बेटी की हत्या और हत्या के सबूत मिटाने के आरोप तय हो गए हैं। अब सीबीआई चाहती है कि तलवार भी हत्या के बाकी आरोपियों की तरह सेशन्स कोर्ट से नियमित जमानत लें।
सीबीआई के मुताबिक राजेश तलवार को 11 जुलाई 2008 को सशर्त जमानत मिली थी। तब सीबीआई के पास भी उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं थे लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। 9 फरवरी 2011 के फैसले के बाद राजेश तलवार पर अपनी बेटी की हत्या और हत्या के सबूत मिटाने के आरोप तय हो गए हैं। अब सीबीआई चाहती है कि तलवार भी हत्या के बाकी आरोपियों की तरह सेशन्स कोर्ट से नियमित जमानत लें। | यहाँ एक सारांश है:नोएडा के चर्चित आरुषि-हेमराज हत्याकांड में इलाहाबाद हाईकोर्ट में सीबीआई की उस याचिका पर सुनवाई है जिसमें उसने राजेश तलवार की बेल को खारिज करने की मांग की है। | 4 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: नेशनल स्टाक एक्सचेंज में सूचीबद्ध कंपनियों के बाजार पूंजीकरण का 66 प्रतिशत नियंत्रण कई बोर्डों में शामिल निदेशकों के एक छोटे समूह के पास है। ये निदेशक ऐसे हैं जो पांच या अधिक कंपनियों के निदेशक मंडल में शामिल हैं। भारतीय प्रबंधन संस्थानों (आईआईएम) द्वारा किए गए अध्ययन में यह तथ्य सामने आया है। यह अध्ययन रिपोर्ट कॉपिंग विद कारपोरेट कालेस्ट्राल बोर्ड इंटरलाक्स एंड देयर इम्पैक्ट आन कारपोरेट गवर्नेंस-द इंडियन एक्सपिरियंस आईआईएम, अहमदाबाद के निदेशक डॉ समीर बरुआ ने एक विजिटंग प्रोफेसर तथा आईआईएम बेंगलूर के दो सहायक प्राफेसरों के साथ मिलकर तैयार की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे हाल में पेश किए कारपोरेट गवर्नेंस नियमों की क्षमता पर सवाल खड़ा होता है, जिनका मकसद निदेशकों की विभिन्नता को बढ़ाना है। शोधकर्ताओं ने कहा है कि इस तरह सिर्फ कुछ लोगों के हाथों में आर्थिक शक्तियां केंद्रित होना समाज के वृहद हित में नहीं है। आईआईएम-बेंगलूर के सहायक प्रोफेसर सुरेश भगावातालु ने कहा, निदेशकों के एक छोटे से समूह के पास 2010 तक एनएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का 66 प्रतिशत बाजार पूंजीकरण है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 2001 से 2003 तक तीन वर्षों में ऐसी कंपनियां जिनके निदेशक कई बोर्डों में शामिल हैं, का बाजार पूंजीकरण 33 से 43 प्रतिशत के बीच था। यह 2007 में बढ़कर 70 प्रतिशत हो गया और 2010 में 66 प्रतिशत पर था। सरकार ने सूचीबद्ध कंपनियों को अपने निदेशक मंडल में ज्यादा स्वतंत्र निदेशक रखने का निर्देश दिया है। पर शोधकर्ताओं ने पाया है कि इससे एक ही निदेशक कई-कई कंपनियों में बन गया है। इसकी प्रमुख वजह यह है कि कई मामलों में अतिरिक्त स्वतंत्र निदेशकों के पदों को दूसरी कंपनियों के निदेशकों से भरा गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि ऐसे निदेशक जो कई कंपनियों के बोर्ड में हैं उनकी संख्या 2001 में 40 थी और 2010 में यह बढ़कर 71 हो गई। एनएसई-100 की कंपनियों में कुल निदेशकों की संख्या 1,104 है, जबकि 284 कंपनियां ऐसी हैं जिनके निदेशक कई-कई कंपनियों में हैं। ऐसे निदेशक जो कई कंपनियों में हैं, उनकी एनएसई-100 की कंपनियों में संख्या छह प्रतिशत की है। | सारांश: एनएसई में सूचीबद्ध कंपनियों के बाजार पूंजीकरण का 66 प्रतिशत नियंत्रण कई बोर्डों में शामिल निदेशकों के एक छोटे समूह के पास है। | 7 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: विवादों में घिरे तेज गेंदबाज मोहम्मद आसिफ ने कहा कि पीसीबी के लिए भारत के साथ द्विपक्षीय क्रिकेट संबंध बनाना काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे मिलने वाले राजस्व से पाकिस्तान क्रिकेट में सुधार करने में मदद मिलेगी।टिप्पणियां
आसिफ ने कहा, भारत आईसीसी द्वारा हासिल किए जाने राजस्व का 70 प्रतिशत देता है और एक बार हम भारत के साथ द्विपक्षीय संबंध शुरू कर लेंगे, पाकिस्तान क्रिकेट में सब कुछ सुधर जाएगा। पैसा भी आएगा और यही अहम है।
उन्होंने हालांकि इस बात का खुलासा करने से इनकार कर दिया कि वह 2010 में स्पॉट फिक्सिंग रैकेट में कैसे शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि जब वह आगामी हफ्ते में आईसीसी..पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के भ्रष्टाचारा रोधी अधिकारियों से मिलेंगे तो उन्हें इसके बारे में बताएंगे।
आसिफ ने कहा, भारत आईसीसी द्वारा हासिल किए जाने राजस्व का 70 प्रतिशत देता है और एक बार हम भारत के साथ द्विपक्षीय संबंध शुरू कर लेंगे, पाकिस्तान क्रिकेट में सब कुछ सुधर जाएगा। पैसा भी आएगा और यही अहम है।
उन्होंने हालांकि इस बात का खुलासा करने से इनकार कर दिया कि वह 2010 में स्पॉट फिक्सिंग रैकेट में कैसे शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि जब वह आगामी हफ्ते में आईसीसी..पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के भ्रष्टाचारा रोधी अधिकारियों से मिलेंगे तो उन्हें इसके बारे में बताएंगे।
उन्होंने हालांकि इस बात का खुलासा करने से इनकार कर दिया कि वह 2010 में स्पॉट फिक्सिंग रैकेट में कैसे शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि जब वह आगामी हफ्ते में आईसीसी..पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के भ्रष्टाचारा रोधी अधिकारियों से मिलेंगे तो उन्हें इसके बारे में बताएंगे। | संक्षिप्त पाठ: विवादों में घिरे तेज गेंदबाज मोहम्मद आसिफ ने कहा कि पीसीबी के लिए भारत के साथ द्विपक्षीय क्रिकेट संबंध बनाना काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे मिलने वाले राजस्व से पाकिस्तान क्रिकेट में सुधार करने में मदद मिलेगी। | 27 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: कोयला आवंटन के मुद्दे पर आज भी संसद में गतिरोध बरकरार रहा और विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के हंगामे के बीच पीठासीन अधिकारियों ने सदन की कार्यवाही चलाने की कोशिश की। इस बीच सरकार ने लोकसभा में तीन अहम बिल पास करा लिए, लेकिन हंगामे की वजह से लोकसभा की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। वहीं, राज्यसभा भी दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित की गई थी, लेकिन बाद में यहां भी कार्यवाही नहीं चल पाई और कल तक के लिए स्थगित करना पड़ा।
इससे पहले भी राज्यसभा जैसे ही बैठी वैसे ही विपक्ष ने हंगामा किया और कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी वहीं लोकसभा में पूर्व मंत्री काशीराम राणा को श्रद्धांजलि देने के बाद हंगामे के कारण स्थगित करनी पड़ी थी। बीजेपी ने संसद चलने देने के लिए दो शर्तें रखी हैं, लेकिन कांग्रेस इन शर्तों को मानने के लिए तैयार नहीं दिख रही है।टिप्पणियां
इस गतिरोध को खत्म करने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने लोकसभा में विपक्ष की अध्यक्ष सुषमा स्वराज से बात भी की। बातचीत के बाद बीजेपी पीएम के इस्तीफे की मांग पर तो थोड़ी नरम होती दिखाई दी, लेकिन आवंटन रद्द करने और निष्पक्ष जांच के ऐलान के पहले संसद चलने देने के लिए तैयार नहीं है। कोयला खदानों के लाइसेंस दिए जाने में गड़बड़ी के आरोप के बाद बीजेपी नाराज है।
इस बीच कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने साफ कर दिया है कि जब तक कोयला आवंटनों को लेकर सीबीआई जांच पूरी नहीं होती और मंत्रालयों के पैनल की रिपोर्ट नहीं आ जाती तब तक इस मामले की न्यायिक जांच का सवाल नहीं उठता।
इससे पहले भी राज्यसभा जैसे ही बैठी वैसे ही विपक्ष ने हंगामा किया और कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी वहीं लोकसभा में पूर्व मंत्री काशीराम राणा को श्रद्धांजलि देने के बाद हंगामे के कारण स्थगित करनी पड़ी थी। बीजेपी ने संसद चलने देने के लिए दो शर्तें रखी हैं, लेकिन कांग्रेस इन शर्तों को मानने के लिए तैयार नहीं दिख रही है।टिप्पणियां
इस गतिरोध को खत्म करने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने लोकसभा में विपक्ष की अध्यक्ष सुषमा स्वराज से बात भी की। बातचीत के बाद बीजेपी पीएम के इस्तीफे की मांग पर तो थोड़ी नरम होती दिखाई दी, लेकिन आवंटन रद्द करने और निष्पक्ष जांच के ऐलान के पहले संसद चलने देने के लिए तैयार नहीं है। कोयला खदानों के लाइसेंस दिए जाने में गड़बड़ी के आरोप के बाद बीजेपी नाराज है।
इस बीच कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने साफ कर दिया है कि जब तक कोयला आवंटनों को लेकर सीबीआई जांच पूरी नहीं होती और मंत्रालयों के पैनल की रिपोर्ट नहीं आ जाती तब तक इस मामले की न्यायिक जांच का सवाल नहीं उठता।
इस गतिरोध को खत्म करने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने लोकसभा में विपक्ष की अध्यक्ष सुषमा स्वराज से बात भी की। बातचीत के बाद बीजेपी पीएम के इस्तीफे की मांग पर तो थोड़ी नरम होती दिखाई दी, लेकिन आवंटन रद्द करने और निष्पक्ष जांच के ऐलान के पहले संसद चलने देने के लिए तैयार नहीं है। कोयला खदानों के लाइसेंस दिए जाने में गड़बड़ी के आरोप के बाद बीजेपी नाराज है।
इस बीच कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने साफ कर दिया है कि जब तक कोयला आवंटनों को लेकर सीबीआई जांच पूरी नहीं होती और मंत्रालयों के पैनल की रिपोर्ट नहीं आ जाती तब तक इस मामले की न्यायिक जांच का सवाल नहीं उठता।
इस बीच कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने साफ कर दिया है कि जब तक कोयला आवंटनों को लेकर सीबीआई जांच पूरी नहीं होती और मंत्रालयों के पैनल की रिपोर्ट नहीं आ जाती तब तक इस मामले की न्यायिक जांच का सवाल नहीं उठता। | कोयला आवंटन के मुद्दे पर आज भी संसद में गतिरोध बरकरार रहा और विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के हंगामे के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी है। | 34 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि केन्द्रीय गुप्तचर एजेंसी ने राज्य सरकार को सलमान रूशदी को मिली धमकी के बारे में सूचना दी थी।
गहलोत ने रविवार को बातचीत करते हुए कहा कि गुप्तचर एजेंसी के माध्यम से सलमान रूशदी को धमकी के बारे में छह बार सरकार को परामर्श मिला था। अन्तिम परामर्श 18 जनवरी को मिला था।टिप्पणियां
उन्होंने कहा कि गुप्तचर एजेंसी से मिली सूचनाओं की जानकारी आधिकारिक स्तर से सलमान रूशदी को भी पहुंचाई गयी थी। साथ ही जयपुर साहित्य उत्सव के मुख्य प्रायोजक को भी इस बारे में अवगत करवा दिया गया था।
गहलोत ने कहा कि इसके बावजूद हमने सुरक्षा के पूरे कड़े प्रबंध कर लिये थे। उन्होंने कहा कि हम नहीं चाहते थे जयपुर साहित्य महोत्सर का शानदार आयोजन किसी तरह से बांधित हो क्योंकि सुरक्षा प्रबंध के तहत मेटल डिटेक्टर जांच की प्रक्रिया पूरी करनी होती।
गहलोत ने रविवार को बातचीत करते हुए कहा कि गुप्तचर एजेंसी के माध्यम से सलमान रूशदी को धमकी के बारे में छह बार सरकार को परामर्श मिला था। अन्तिम परामर्श 18 जनवरी को मिला था।टिप्पणियां
उन्होंने कहा कि गुप्तचर एजेंसी से मिली सूचनाओं की जानकारी आधिकारिक स्तर से सलमान रूशदी को भी पहुंचाई गयी थी। साथ ही जयपुर साहित्य उत्सव के मुख्य प्रायोजक को भी इस बारे में अवगत करवा दिया गया था।
गहलोत ने कहा कि इसके बावजूद हमने सुरक्षा के पूरे कड़े प्रबंध कर लिये थे। उन्होंने कहा कि हम नहीं चाहते थे जयपुर साहित्य महोत्सर का शानदार आयोजन किसी तरह से बांधित हो क्योंकि सुरक्षा प्रबंध के तहत मेटल डिटेक्टर जांच की प्रक्रिया पूरी करनी होती।
उन्होंने कहा कि गुप्तचर एजेंसी से मिली सूचनाओं की जानकारी आधिकारिक स्तर से सलमान रूशदी को भी पहुंचाई गयी थी। साथ ही जयपुर साहित्य उत्सव के मुख्य प्रायोजक को भी इस बारे में अवगत करवा दिया गया था।
गहलोत ने कहा कि इसके बावजूद हमने सुरक्षा के पूरे कड़े प्रबंध कर लिये थे। उन्होंने कहा कि हम नहीं चाहते थे जयपुर साहित्य महोत्सर का शानदार आयोजन किसी तरह से बांधित हो क्योंकि सुरक्षा प्रबंध के तहत मेटल डिटेक्टर जांच की प्रक्रिया पूरी करनी होती।
गहलोत ने कहा कि इसके बावजूद हमने सुरक्षा के पूरे कड़े प्रबंध कर लिये थे। उन्होंने कहा कि हम नहीं चाहते थे जयपुर साहित्य महोत्सर का शानदार आयोजन किसी तरह से बांधित हो क्योंकि सुरक्षा प्रबंध के तहत मेटल डिटेक्टर जांच की प्रक्रिया पूरी करनी होती। | संक्षिप्त पाठ: राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि केन्द्रीय गुप्तचर एजेंसी ने राज्य सरकार को सलमान रूशदी को मिली धमकी के बारे में सूचना दी थी। | 22 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: भारत के अनुभवी खिलाड़ी महेश भूपति और रोहन बोपन्ना की जोड़ी शंघाई मास्टर्स टेनिस टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में प्रवेश कर गई है। उधर, चेक गणराज्य के टॉमस बर्डिच भी एकल स्पर्धा के अंतिम-4 में पहुंचने में सफल रहे हैं।
पेशेवर टेनिस संघ (एटीपी) के मुताबिक, शुक्रवार को खेले गए पुरुषों की युगल स्पर्धा के क्वार्टर फाइनल मुकाबले में सातवीं वरीयता प्राप्त भूपति और बोपन्ना ने बेलारूस के मैक्स मिनी और कनाडा के डेनियल नेस्टर की जोड़ी को 7-6(7), 6-4 से पराजित किया।
मिर्नी और नेस्टर की जोड़ी को यहां दूसरी वरीयता मिली हुई थी। उल्लेखनीय है कि भूपति और बोपन्ना ने प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबले में फिलीपींस के ट्रीट कोनराड हुए और ब्रिटेन के जोनाथन मैरे की जोड़ी को 7-6(9), 6-4 से शिकस्त देकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई थी।टिप्पणियां
उधर, टूर्नामेंट के चौथी वरीयता प्राप्त बर्डिच ने एकल स्पर्धा के क्वार्टर फाइनल मुकाबले में फ्रांस के जो-विल्फ्रेड सोंगा को 6-3, 7-6(4) से पराजित किया। बर्डिच की मौजूदा सत्र में यह 53वीं जीत है। उन्होंने एक घंटे और 35 मिनट में यह मुकाबला अपने नाम किया।
हार के बाद पांचवीं वरीयत प्राप्त सोंगा ने कहा, "आज मैं सर्वश्रेष्ठ टेनिस नहीं खेल सका। दुर्भाग्यवश, टॉमस आज मुझसे बेहतर खेला। मुझे लगता है कि मुझमें और उसमें तकनीक का अंतर है। मुझे सुधार करना होगा। वह शारीरिक रूप से मुझसे बेहतर है।"
पेशेवर टेनिस संघ (एटीपी) के मुताबिक, शुक्रवार को खेले गए पुरुषों की युगल स्पर्धा के क्वार्टर फाइनल मुकाबले में सातवीं वरीयता प्राप्त भूपति और बोपन्ना ने बेलारूस के मैक्स मिनी और कनाडा के डेनियल नेस्टर की जोड़ी को 7-6(7), 6-4 से पराजित किया।
मिर्नी और नेस्टर की जोड़ी को यहां दूसरी वरीयता मिली हुई थी। उल्लेखनीय है कि भूपति और बोपन्ना ने प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबले में फिलीपींस के ट्रीट कोनराड हुए और ब्रिटेन के जोनाथन मैरे की जोड़ी को 7-6(9), 6-4 से शिकस्त देकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई थी।टिप्पणियां
उधर, टूर्नामेंट के चौथी वरीयता प्राप्त बर्डिच ने एकल स्पर्धा के क्वार्टर फाइनल मुकाबले में फ्रांस के जो-विल्फ्रेड सोंगा को 6-3, 7-6(4) से पराजित किया। बर्डिच की मौजूदा सत्र में यह 53वीं जीत है। उन्होंने एक घंटे और 35 मिनट में यह मुकाबला अपने नाम किया।
हार के बाद पांचवीं वरीयत प्राप्त सोंगा ने कहा, "आज मैं सर्वश्रेष्ठ टेनिस नहीं खेल सका। दुर्भाग्यवश, टॉमस आज मुझसे बेहतर खेला। मुझे लगता है कि मुझमें और उसमें तकनीक का अंतर है। मुझे सुधार करना होगा। वह शारीरिक रूप से मुझसे बेहतर है।"
मिर्नी और नेस्टर की जोड़ी को यहां दूसरी वरीयता मिली हुई थी। उल्लेखनीय है कि भूपति और बोपन्ना ने प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबले में फिलीपींस के ट्रीट कोनराड हुए और ब्रिटेन के जोनाथन मैरे की जोड़ी को 7-6(9), 6-4 से शिकस्त देकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई थी।टिप्पणियां
उधर, टूर्नामेंट के चौथी वरीयता प्राप्त बर्डिच ने एकल स्पर्धा के क्वार्टर फाइनल मुकाबले में फ्रांस के जो-विल्फ्रेड सोंगा को 6-3, 7-6(4) से पराजित किया। बर्डिच की मौजूदा सत्र में यह 53वीं जीत है। उन्होंने एक घंटे और 35 मिनट में यह मुकाबला अपने नाम किया।
हार के बाद पांचवीं वरीयत प्राप्त सोंगा ने कहा, "आज मैं सर्वश्रेष्ठ टेनिस नहीं खेल सका। दुर्भाग्यवश, टॉमस आज मुझसे बेहतर खेला। मुझे लगता है कि मुझमें और उसमें तकनीक का अंतर है। मुझे सुधार करना होगा। वह शारीरिक रूप से मुझसे बेहतर है।"
उधर, टूर्नामेंट के चौथी वरीयता प्राप्त बर्डिच ने एकल स्पर्धा के क्वार्टर फाइनल मुकाबले में फ्रांस के जो-विल्फ्रेड सोंगा को 6-3, 7-6(4) से पराजित किया। बर्डिच की मौजूदा सत्र में यह 53वीं जीत है। उन्होंने एक घंटे और 35 मिनट में यह मुकाबला अपने नाम किया।
हार के बाद पांचवीं वरीयत प्राप्त सोंगा ने कहा, "आज मैं सर्वश्रेष्ठ टेनिस नहीं खेल सका। दुर्भाग्यवश, टॉमस आज मुझसे बेहतर खेला। मुझे लगता है कि मुझमें और उसमें तकनीक का अंतर है। मुझे सुधार करना होगा। वह शारीरिक रूप से मुझसे बेहतर है।"
हार के बाद पांचवीं वरीयत प्राप्त सोंगा ने कहा, "आज मैं सर्वश्रेष्ठ टेनिस नहीं खेल सका। दुर्भाग्यवश, टॉमस आज मुझसे बेहतर खेला। मुझे लगता है कि मुझमें और उसमें तकनीक का अंतर है। मुझे सुधार करना होगा। वह शारीरिक रूप से मुझसे बेहतर है।" | यहाँ एक सारांश है:भारत के अनुभवी खिलाड़ी महेश भूपति और रोहन बोपन्ना की जोड़ी शंघाई मास्टर्स टेनिस टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में प्रवेश कर गई है। उधर, चेक गणराज्य के टॉमस बर्डिच भी एकल स्पर्धा के अंतिम-4 में पहुंचने में सफल रहे हैं। | 15 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार को कहा मौद्रिक नीति विभाग अगले आदेश तक सीधे गवर्नर डी. सुब्बाराव को रिपोर्ट करेगा। बैंक के डिप्टी गवर्नर सुबीर गोकर्ण पद से सोमवार को सेवानिवृत्त हो गए।
रिजर्व बैंक ने एक बयान जारी कर कहा कि गोकर्ण का कार्यकाल 31 दिसम्बर 2012 को समाप्त हो गया और उनकी जिम्मेदारियों का फिर से बंटवारा कर दिया गया है।
बैंक ने कहा, "आर्थिक नीति और शोध विभाग, सांख्यिकी और सूचना प्रबंधन विभाग तथा मौद्रिक नीति विभाग अगले आदेश तक सीधे गवर्नर को रिपोर्ट करेंगे।"टिप्पणियां
गोकर्ण का तीन साल का कार्यकाल 24 नवम्बर को समाप्त होना था, लेकिन 31 दिसम्बर तक के लिए बढ़ा दिया गया था।
अटकलें लगाई जा रही है कि डिप्टी गवर्नर पद के लिए विश्व बैंक में दक्षिण एशिया मामलों के लिए मुख्य अर्थशास्त्री कल्पना कोचर के नाम पर विचार किया जा रहा है। कोचर पहले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में डिवीजन प्रमुख और वरिष्ठ सलाहकार थी।
रिजर्व बैंक ने एक बयान जारी कर कहा कि गोकर्ण का कार्यकाल 31 दिसम्बर 2012 को समाप्त हो गया और उनकी जिम्मेदारियों का फिर से बंटवारा कर दिया गया है।
बैंक ने कहा, "आर्थिक नीति और शोध विभाग, सांख्यिकी और सूचना प्रबंधन विभाग तथा मौद्रिक नीति विभाग अगले आदेश तक सीधे गवर्नर को रिपोर्ट करेंगे।"टिप्पणियां
गोकर्ण का तीन साल का कार्यकाल 24 नवम्बर को समाप्त होना था, लेकिन 31 दिसम्बर तक के लिए बढ़ा दिया गया था।
अटकलें लगाई जा रही है कि डिप्टी गवर्नर पद के लिए विश्व बैंक में दक्षिण एशिया मामलों के लिए मुख्य अर्थशास्त्री कल्पना कोचर के नाम पर विचार किया जा रहा है। कोचर पहले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में डिवीजन प्रमुख और वरिष्ठ सलाहकार थी।
बैंक ने कहा, "आर्थिक नीति और शोध विभाग, सांख्यिकी और सूचना प्रबंधन विभाग तथा मौद्रिक नीति विभाग अगले आदेश तक सीधे गवर्नर को रिपोर्ट करेंगे।"टिप्पणियां
गोकर्ण का तीन साल का कार्यकाल 24 नवम्बर को समाप्त होना था, लेकिन 31 दिसम्बर तक के लिए बढ़ा दिया गया था।
अटकलें लगाई जा रही है कि डिप्टी गवर्नर पद के लिए विश्व बैंक में दक्षिण एशिया मामलों के लिए मुख्य अर्थशास्त्री कल्पना कोचर के नाम पर विचार किया जा रहा है। कोचर पहले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में डिवीजन प्रमुख और वरिष्ठ सलाहकार थी।
गोकर्ण का तीन साल का कार्यकाल 24 नवम्बर को समाप्त होना था, लेकिन 31 दिसम्बर तक के लिए बढ़ा दिया गया था।
अटकलें लगाई जा रही है कि डिप्टी गवर्नर पद के लिए विश्व बैंक में दक्षिण एशिया मामलों के लिए मुख्य अर्थशास्त्री कल्पना कोचर के नाम पर विचार किया जा रहा है। कोचर पहले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में डिवीजन प्रमुख और वरिष्ठ सलाहकार थी।
अटकलें लगाई जा रही है कि डिप्टी गवर्नर पद के लिए विश्व बैंक में दक्षिण एशिया मामलों के लिए मुख्य अर्थशास्त्री कल्पना कोचर के नाम पर विचार किया जा रहा है। कोचर पहले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में डिवीजन प्रमुख और वरिष्ठ सलाहकार थी। | यहाँ एक सारांश है:भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार को कहा मौद्रिक नीति विभाग अगले आदेश तक सीधे गवर्नर डी. सुब्बाराव को रिपोर्ट करेगा। बैंक के डिप्टी गवर्नर सुबीर गोकर्ण पद से सोमवार को सेवानिवृत्त हो गए। | 15 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: कितावो ने बताया कि भ्रूण के लिंग की जांच हो जाएगी लेकिन इसके लिए 35000 रुपये देने होंगे. टीम ने सौदा तय कर लिया और फिर नकली कस्टमर को कितावो जनकपुरी के साईं नर्सिंग होम लेकर गई. छापेमारी करने वाली टीम नर्सिंग होम के बाहर ही खड़ी हो गई. नर्सिंग होम में डॉक्टर अंशु अरोड़ा ने महिला का अल्ट्रासाउंड किया और बताया कि उसके गर्भ में बेटी है. इसके बाद बाहर खड़ी टीम ने छापा मारकर डॉक्टर अंशु और एजेंट कितावो को पकड़ लिया. नर्सिंग होम में मौजूद दस्तावेज और अल्ट्रासाउंड मशीन को जब्त कर लिया गया.
नर्सिंग होम का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया गया है. पुलिस ने पीएनडीटी एक्ट और पीसी एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया है. पूछताछ में कितावो ने बताया कि अभी तक वह इस नर्सिंग होम में 250 महिला ग्राहकों को ला चुकी है जिनके भ्रूण के लिंग की जांच हुई है. एक ग्राहक से डॉक्टर अंशु 35 हज़ार रुपये लेता था जिसमें से कितावो को 2000 रुपये मिलते थे.
अब पता लगाया जा रहा है कि इस नर्सिंग होम में ऐसी कुल कितनी जांचें हुई हैं और इस गोरखधंधे में कितने और लोग शामिल हैं. इस पूरे ऑपरेशन का मोबाइल से स्टिंग भी किया गया है. जांच टीम के मुताबिक नर्सिंग होम अंशु अरोड़ा का है. | सारांश: एक महिला को कस्टमर बनाकर नर्सिंग होम में भेजा गया
35 हजार रुपये लिए और जांच करके बता दिया कि लड़की है
नर्सिंग होम की एजेंट ने बताया 250 भ्रूण की जांच करा चुकी है | 5 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: टीम अन्ना ने शुक्रवार को कहा कि सरकार ने राज्यसभा में हुए नाटक को रचा क्योंकि उसकी मंशा एक मजबूत भ्रष्टाचार विरोधी संस्था बनाने की नहीं थी।
टीम अन्ना के सदस्य अरविंद केजरीवाल ने कहा, ‘राज्यसभा में जिस तरह मतदान से बचा गया उससे साबित होता है कि सरकार एक के बाद एक धोखा कर रही है। उनका कहना है कि वह एक मजबूत लोकपाल विधेयक पेश करना चाहते हैं, लेकिन उनकी ऐसी मंशा नहीं है।’ अन्ना हजारे के समर्थकों का कहना था कि सरकार अगर तीन संशोधनों को मान लेती तो वह विधेयक पारित करा सकती थी। ये तीन संशोधन हैं- सीबीआई की स्वतंत्रता, चुनने व हटाने की प्रक्रिया और लोकायुक्त को अलग करना।
केजरीवाल ने कहा कि सदन में पेश किया गया विधेयक न सिर्फ कमजोर था बल्कि ‘खतरनाक’ भी था, क्योंकि इसमें लोकपाल पूरी तरह सरकार के नियंत्रण में था।
केजरीवाल ने कहा, ‘यह एक मतबूत लोकपाल की शुरुआत हो सकती थी।’ वहीं टीम के एक अन्य सदस्य प्रशांत भूषण ने कहा, ‘अब लड़ाई लोकतंत्र को बचाने के लिए होगी।’ उधर, केजरीवाल ने कहा, ‘टेलीविजन चैनलों ने दिन की खबरों में बताया था कि राजद सदस्य अड़चन पैदा करेंगे और कार्यवाही को देर रात तक खीचेंगे, ताकि विधेयक पर चर्चा नहीं हो सके। राज्यसभा में जो हुआ उसकी पटकथा सदन के बाहर ही लिख ली गई थी। कुछ लोगों ने बिलकुल इसके अनुसार काम किया..यह संसद में मैच फिक्सिंग का स्पष्ट मामला था।’
प्रशांत ने कहा, ‘कार्यवाही बाधित करने, विधेयक को हटाने और विधेयक पारित किए बगैर सभी लोगों का घर जाना सुनिश्चित करने के लिए लोगों को नियुक्त किया गया था।’ टीम के अन्य सदस्य शांति भूषण ने कहा कि तीन संशोंधनों पर विपक्ष एकमत हो चुका था। उन्होंने कहा कि सदन के अंदर लोकतंत्र की ‘हत्या’ के वक्त प्रधानमंत्री भी वहां मौजूद थे। | यहाँ एक सारांश है:टीम अन्ना ने शुक्रवार को कहा कि सरकार ने राज्यसभा में हुए नाटक को रचा क्योंकि उसकी मंशा एक मजबूत भ्रष्टाचार विरोधी संस्था बनाने की नहीं थी। | 17 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रविवार को सियासी घटनाक्रम पल-पल बदल रहा है. मंत्रिमंडल से कई मंत्रियों को बर्खास्त करने के बाद सख्त तेवर में दिख रहे मुख्यमंत्री अखिलेश की कुर्सी अब खतरे में है. यह दावा सरकार के एक पुराने नौकरशाह का है.
उनका कहना है कि 24 अक्टूबर को मुलायम ने समाजवादी पार्टी (सपा) के पुराने वफादारों की बैठक बुलाई है. इस बैठक में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को हटाने पर फैसला लिया जा सकता है. पूर्व आईएएस सूर्य प्रताप सिंह ने दावा किया है कि अखिलेश यादव को 24 अक्टूबर को पार्टी से बाहर निकाला जा सकता है.टिप्पणियां
उन्होंने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा, "मुख्यमंत्री अखिलेश की 24 अक्टूबर को पार्टी से बर्खास्तगी हो सकती है. मुलायम ने 24 तारीख को सभी विधायकों और एमएलसी की बैठक बुलाई है. इस बैठक में विधायकों और एमएलसी के दबाव में यादव परिवार को एक होने के लिए बाध्य होना पड़ेगा या फिर सपा के विघटन का रास्ता तय हो जाएगा."
उन्होंने लिखा कि बैठक में समझौता नहीं हो पाया तो विधानमंडल दल की बैठक में अखिलेश की बर्खास्तगी भी संभव है. उन्होंने कहा कि 23 तारीख सपा के भविष्य के लिए 'कत्ल की रात' और 24 तारीख 'विघटन का दिन' हो सकता है. सोशल मीडिया पर एक मैसेज भी वायरल हो रहा है, जिसमें उप्र में राष्ट्रपति शासन लगाने की बात चल रही है.
उनका कहना है कि 24 अक्टूबर को मुलायम ने समाजवादी पार्टी (सपा) के पुराने वफादारों की बैठक बुलाई है. इस बैठक में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को हटाने पर फैसला लिया जा सकता है. पूर्व आईएएस सूर्य प्रताप सिंह ने दावा किया है कि अखिलेश यादव को 24 अक्टूबर को पार्टी से बाहर निकाला जा सकता है.टिप्पणियां
उन्होंने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा, "मुख्यमंत्री अखिलेश की 24 अक्टूबर को पार्टी से बर्खास्तगी हो सकती है. मुलायम ने 24 तारीख को सभी विधायकों और एमएलसी की बैठक बुलाई है. इस बैठक में विधायकों और एमएलसी के दबाव में यादव परिवार को एक होने के लिए बाध्य होना पड़ेगा या फिर सपा के विघटन का रास्ता तय हो जाएगा."
उन्होंने लिखा कि बैठक में समझौता नहीं हो पाया तो विधानमंडल दल की बैठक में अखिलेश की बर्खास्तगी भी संभव है. उन्होंने कहा कि 23 तारीख सपा के भविष्य के लिए 'कत्ल की रात' और 24 तारीख 'विघटन का दिन' हो सकता है. सोशल मीडिया पर एक मैसेज भी वायरल हो रहा है, जिसमें उप्र में राष्ट्रपति शासन लगाने की बात चल रही है.
उन्होंने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा, "मुख्यमंत्री अखिलेश की 24 अक्टूबर को पार्टी से बर्खास्तगी हो सकती है. मुलायम ने 24 तारीख को सभी विधायकों और एमएलसी की बैठक बुलाई है. इस बैठक में विधायकों और एमएलसी के दबाव में यादव परिवार को एक होने के लिए बाध्य होना पड़ेगा या फिर सपा के विघटन का रास्ता तय हो जाएगा."
उन्होंने लिखा कि बैठक में समझौता नहीं हो पाया तो विधानमंडल दल की बैठक में अखिलेश की बर्खास्तगी भी संभव है. उन्होंने कहा कि 23 तारीख सपा के भविष्य के लिए 'कत्ल की रात' और 24 तारीख 'विघटन का दिन' हो सकता है. सोशल मीडिया पर एक मैसेज भी वायरल हो रहा है, जिसमें उप्र में राष्ट्रपति शासन लगाने की बात चल रही है.
उन्होंने लिखा कि बैठक में समझौता नहीं हो पाया तो विधानमंडल दल की बैठक में अखिलेश की बर्खास्तगी भी संभव है. उन्होंने कहा कि 23 तारीख सपा के भविष्य के लिए 'कत्ल की रात' और 24 तारीख 'विघटन का दिन' हो सकता है. सोशल मीडिया पर एक मैसेज भी वायरल हो रहा है, जिसमें उप्र में राष्ट्रपति शासन लगाने की बात चल रही है. | दावा है कि अखिलेश को 24 अक्टूबर को पार्टी से बाहर निकाला जा सकता है
समाजवादी पार्टी का घमासान के बीच एक पूर्व आईएस ने यह बात कही
24 तारीख को सभी विधायकों और एमएलसी की बैठक मुलायम ने बुलाई है | 26 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: इसकी तुलना दुनिया के उन बेहतरीन ड्रोन से की जा सकती है जिनकी क्षमता बहुत अधिक है. जानकार बताते हैं कि इसे अमरीकी ड्रोन प्रिडेटर की तर्ज पर विकसित किया गया है. दो टन वजनी इस ड्रोन की कई खासियत हैं. इसके डैने लगभग 21 मीटर लंबे हैं. यह 24 घंटे उड़ान भरने में सक्षम है.
ये दुश्मनों के इलाके में घुसकर टोह लेने, निगरानी रखने और लक्ष्य की पहचान करने उस पर हमला करने में भी सक्षम है. ये 500 किलोमीटर घंटे प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान तो भरेगा ही, साथ ही दुश्मन की नजर से भी बचा रहेगा. वजह है इसमें ऐसे सिस्टम लगे है जो दुश्मन की पकड़ में नही आएंगे. ये दिन के साथ-साथ रात में अपना काम कर सकता है. इसमें करीब वे सारी खूबियां हैं जो एक छोटे टोही विमान में होती हैं.
ये दुश्मनों के इलाके में घुसकर टोह लेने, निगरानी रखने और लक्ष्य की पहचान करने उस पर हमला करने में भी सक्षम है. ये 500 किलोमीटर घंटे प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान तो भरेगा ही, साथ ही दुश्मन की नजर से भी बचा रहेगा. वजह है इसमें ऐसे सिस्टम लगे है जो दुश्मन की पकड़ में नही आएंगे. ये दिन के साथ-साथ रात में अपना काम कर सकता है. इसमें करीब वे सारी खूबियां हैं जो एक छोटे टोही विमान में होती हैं. | यहाँ एक सारांश है:बादलों के पार देखने में भी सक्षम है रुस्तम-2
दिन के साथ रात के समय भी कर सकता है काम
इसे अमेरिकी ड्रोन प्रिडेटर की तर्ज पर विकसित किया गया | 18 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: अमेरिका (United States of America) यूं तो पुलवामा (Pulwama) में हुए आतंकी हमले और फिर पाकिस्तान में आतंकी अड्डों पर एयर स्ट्राइक के मसले पर भले ही भारत (India) के साथ खड़ा नजर आया, मगर अब उसने आर्थिक मोर्चे पर बड़ा झटका देने की तैयारी की है. इसके संकेत खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने दिए हैं. उन्होंने व्यापार में भारत को जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंस (GSP) से बाहर करने से जुड़ा बयान देकर वैश्विक आर्थिक गलियारे में नई हलचल पैदा कर दी है. ट्रंप ने इस बाबत अमेरिका की संसद यानी 'कांग्रेस' को बी बकायदा पत्र लिखकर सूचित कर दिया है.अगर ऐसा सचमुच में हुआ तो फिर अमेरिकी बाजार में 5.6 बिलियन डॉलर मूल्य के भारतीय उत्पादों के लिए ड्यूटी फ्री यानी शुल्क-मुक्त एंट्री का दरवाजा बंद हो जाएगा. यह एक बड़ा आर्थिक झटका होगा. ट्रंप ने सोमवार को कहा कि वह भारत के लिए शुल्क मुक्त ट्रीटमेंट को खत्म करने का इरादा रखते हैं. बताया जा रहा है कि जीएसपी के तहत अगर भागीदारी समाप्त होती है तो 2017 में डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति का पद संभालने के बाद से यह भारत के खिलाफ सबसे बड़ी कार्रवाई होगी.
दरअसल, अमेरिकी व्यापार घाटे को कम करने की कसम खाने वाले डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) का मानना है कि भारत व्यापार के मामले में अमेरिका को अपेक्षित सहयोग नहीं कर रहा. वजह कि अमेरिकी उत्पादों पर भारत मोटा टैक्स वसूल रहा है. ट्रंप कई बार और कई मंच से यह बात कह चुके हैं. उनका मानना है कि भारत ऐसा देश है, जो अमेरिकी उत्पादों पर ज्यादा टैरिफ थोपता है. इसके जवाब में उन्होंने भी भारत के उत्पादों के अमेरिकी बाजार में ड्यूटी फ्री प्रवेश रोकने की सोची है. ट्रंप ने कहा," मैं यह कदम इसलिए उठा रहा हूं क्योंकि अमेरिका से गहन जुड़ाव के बाद भी भारत ने अमेरिका को यह आश्वासन नहीं दिया है कि वह भारत के बाजार में समान और उचित पहुंच प्रदान करेगा. | संक्षिप्त पाठ: भारत को बड़ा आर्थिक झटका देने की तैयारी में अमेरिका
भारत उत्पादों पर शुल्क लगाने की तैयारी, कर मुक्त दर्जा होगा समाप्त
भारत में अमेरिकी उत्पादों पर मोटा कर लगने से नाराज हुए ट्रंप | 13 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: भारत सुल्तान अजलन शाह कप हाकी टूर्नामेंट में कल यहां जब पाकिस्तान का सामना करेगा तो उसका इरादा एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता पर अपना दबदबा बरकरार रखते हुए जीत के क्रम को जारी रखना होगा। गत चैम्पियन भारत को अगर खिताब की हैट्रिक पूरी करनी है तो उसे अपने अगले दोनों मैच जीतने होंगे। टीम ने दक्षिण कोरिया के खिलाफ शुरूआती मैच में दो गोल की बढ़त बनाने के बावजूद मैच 2-3 से गंवा दिया था। वर्ष 2009 में यहां खिताब जीतने के बाद 2010 में दक्षिण कोरिया के साथ संयुक्त विजेता रहे भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ अपने पिछले चार मैचों में जीत दर्ज की है। शुरूआती मैच में शिकस्त के बाद भारत ने शीर्ष पर चल रहे ब्रिटेन और मेजबान मलेशिया को हराया जबकि विश्व चैम्पियन ऑस्ट्रेलिया को 1-1 की बराबरी पर रोका। पाकिस्तान ने दो जीत दर्ज की लेकिन उसे ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के हाथों हार भी झेलनी पड़ी। भारत के मुख्य कोच हरेंद्र सिंह ने कहा, हमें अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। प्रत्येक मैच के साथ हमारी टीम में सुधार हो रहा है क्योंकि युवाओं का मनोबल बढ़ रहा है। युवा खिलाड़ियों ने यहां बेहतरीन काम किया है और यहां के अनुभव से उन्हें काफी फायदा मिलेगा। हरेंद्र ने कहा कि भारतीय टीम की नजरें अपनी रणनीति पर हैं और वे यह सोचकर चिंतित नहीं हैं कि विरोधी टीम क्या कर रही है। उन्होंने कहा, हम पाकिस्तान के खिलाफ मैच को अपने पिछले मैचों से अलग मानकर नहीं चल रहे। भारत फिलहाल राउंड रोबिन लीग अंक तालिका में ब्रिटेन (चार मैचों में नौ अंक) और ऑस्ट्रेलिया (तीन मैचों में सात अंक) के बाद तीसरे स्थान पर चल रहा है और अगर उसे फाइनल में जगह बनानी है तो पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के खिलाफ अपने अगले दोनों मैच जीतने होंगे। पिछले साल भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ अपने चारों मैच जीते जिसमें नयी दिल्ली में विश्व कप और ग्वांग्झू एशियाई खेलों में मिली जीत भी शामिल है। भारत को एशियाई खेलों के सेमीफाइनल में मलेशिया के हाथों उलटफेर का शिकार होना पड़ा था जिसके बाद पाकिस्तान ने खिताब जीता था। दूसरी तरफ पाकिस्तान की नजरें भारत के खिलाफ हार के क्रम को तोड़ने पर टिकी हैं। पाकिस्तान के टीम मैनेजर ख्वाजा जुनैद ने कहा, भारत के खिलाफ हम अपनी रणनीति को पिछले मैचों के मुकाबले बेहतर तरीके से अंजाम तक पहुंचाना चाहते हैं। पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी जुनैद ने कहा, हम इस मैच में मजबूत वापसी को बेताब हैं। कल ऑस्ट्रेलिया के हाथों 1-5 की शिकस्त के दौरान काफी कुछ सीखने को मिला। हमें अपनी कमजोरियों को दूर करना होगा। पाकिस्तान की टीम में अधिकतर वे खिलाड़ी शामिल हैं जो एशियाई खेलों की स्वर्ण पदक विजेता टीम का हिस्सा थे लेकिन आस्ट्रेलिया के खिलाफ कल टीम का डिफेंस चरमरा गया था। पाकिस्तान के चार मैचों में छह अंक हैं जबकि उसे भारत और मलेशिया के खिलाफ खेलना है। भारत को अपने डिफेंस को मजबूत करना होगा तो मलेशिया के खिलाफ कल दूसरे हाफ के शुरूआती 15 मिनट में बिखरा हुआ लग रहा था जिसके कारण मेजबान टीम को कुछ अच्छे मौके मिले थे। | सारांश: गत चैम्पियन भारत को अगर खिताब की हैट्रिक पूरी करनी है तो उसे अपने अगले दोनों मैच जीतने होंगे। | 7 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि रुके हुए आर्थिक फैसलों को आगे बढ़ाने की ज़रूरत है। यह काम राजनीतिक वजहों से मुश्किल हो रहा है लेकिन, ज़मीनी हालात बताते हैं कि यह संकट बहुत गहरा है और वजहें और भी हैं।
15 अगस्त को देशवासियों के सामने प्रधानमंत्री ने जो फिक्र जताई उसका असली मतलब क्या है? सांख्यिकी मंत्रालय की ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि अभी भारत सरकार के 150 करोड़ से ऊपर के कुल 564 प्रोजेक्ट हैं। इनमें कुल 251 प्रोजेक्ट काफी देरी से चल रहे हैं। इनमें से 105 योजनाएं ऐसी हैं जो दो से पांच साल तक पीछे चल रही हैं जबकि 34 बड़ी योजनाएं ऐसी हैं जिनमें पांच साल से ज्यादा की देरी हो चुकी है।
एनडीटीवी ने जब योजना राज्यमंत्री अश्विनी कुमार से इस स्लो-डाउन के बारे में पूछा तब उनका जवाब था कि हालात सुधारने के लिए प्रधानमंत्री खुद कदम उठा रहे हैं। बरसों से अटके पड़े सरकारी प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने में नाकामी पूरी सरकारी मशीनरी की खस्ता हालत की तरफ इशारा करती है। टिप्पणियां
इस देरी का असर यह हुआ है कि इन प्रोजेक्ट्स पर खर्च का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। इन योजनाओं का मूल बजट 7.32 लाख करोड़ था जो देरी की वजह से बढ़ कर 8.75 लाख करोड़ से ऊपर जा चुका है। यानी 1.43 लाख करोड़ रुपये का सीधा−सीधा नुकसान।
पूर्व नौकरशाह और जेडी−यू सांसद एनके सिंह मानते हैं कि सरकार में अफसरों की जवाबदेही तय नहीं की गई है जिस वजह से काम पर बुरा असर पड़ रहा है। इस धीमी रफ़्तार का सीधा असर अर्थव्यवस्था में गिरावट और रोज़गार में कमी है। यानी हालात जल्द नहीं सुधारे गए तो यह अंदरुनी आर्थिक मंदी कहीं ज़्यादा भारी पड़ेगी।
15 अगस्त को देशवासियों के सामने प्रधानमंत्री ने जो फिक्र जताई उसका असली मतलब क्या है? सांख्यिकी मंत्रालय की ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि अभी भारत सरकार के 150 करोड़ से ऊपर के कुल 564 प्रोजेक्ट हैं। इनमें कुल 251 प्रोजेक्ट काफी देरी से चल रहे हैं। इनमें से 105 योजनाएं ऐसी हैं जो दो से पांच साल तक पीछे चल रही हैं जबकि 34 बड़ी योजनाएं ऐसी हैं जिनमें पांच साल से ज्यादा की देरी हो चुकी है।
एनडीटीवी ने जब योजना राज्यमंत्री अश्विनी कुमार से इस स्लो-डाउन के बारे में पूछा तब उनका जवाब था कि हालात सुधारने के लिए प्रधानमंत्री खुद कदम उठा रहे हैं। बरसों से अटके पड़े सरकारी प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने में नाकामी पूरी सरकारी मशीनरी की खस्ता हालत की तरफ इशारा करती है। टिप्पणियां
इस देरी का असर यह हुआ है कि इन प्रोजेक्ट्स पर खर्च का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। इन योजनाओं का मूल बजट 7.32 लाख करोड़ था जो देरी की वजह से बढ़ कर 8.75 लाख करोड़ से ऊपर जा चुका है। यानी 1.43 लाख करोड़ रुपये का सीधा−सीधा नुकसान।
पूर्व नौकरशाह और जेडी−यू सांसद एनके सिंह मानते हैं कि सरकार में अफसरों की जवाबदेही तय नहीं की गई है जिस वजह से काम पर बुरा असर पड़ रहा है। इस धीमी रफ़्तार का सीधा असर अर्थव्यवस्था में गिरावट और रोज़गार में कमी है। यानी हालात जल्द नहीं सुधारे गए तो यह अंदरुनी आर्थिक मंदी कहीं ज़्यादा भारी पड़ेगी।
एनडीटीवी ने जब योजना राज्यमंत्री अश्विनी कुमार से इस स्लो-डाउन के बारे में पूछा तब उनका जवाब था कि हालात सुधारने के लिए प्रधानमंत्री खुद कदम उठा रहे हैं। बरसों से अटके पड़े सरकारी प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने में नाकामी पूरी सरकारी मशीनरी की खस्ता हालत की तरफ इशारा करती है। टिप्पणियां
इस देरी का असर यह हुआ है कि इन प्रोजेक्ट्स पर खर्च का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। इन योजनाओं का मूल बजट 7.32 लाख करोड़ था जो देरी की वजह से बढ़ कर 8.75 लाख करोड़ से ऊपर जा चुका है। यानी 1.43 लाख करोड़ रुपये का सीधा−सीधा नुकसान।
पूर्व नौकरशाह और जेडी−यू सांसद एनके सिंह मानते हैं कि सरकार में अफसरों की जवाबदेही तय नहीं की गई है जिस वजह से काम पर बुरा असर पड़ रहा है। इस धीमी रफ़्तार का सीधा असर अर्थव्यवस्था में गिरावट और रोज़गार में कमी है। यानी हालात जल्द नहीं सुधारे गए तो यह अंदरुनी आर्थिक मंदी कहीं ज़्यादा भारी पड़ेगी।
इस देरी का असर यह हुआ है कि इन प्रोजेक्ट्स पर खर्च का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। इन योजनाओं का मूल बजट 7.32 लाख करोड़ था जो देरी की वजह से बढ़ कर 8.75 लाख करोड़ से ऊपर जा चुका है। यानी 1.43 लाख करोड़ रुपये का सीधा−सीधा नुकसान।
पूर्व नौकरशाह और जेडी−यू सांसद एनके सिंह मानते हैं कि सरकार में अफसरों की जवाबदेही तय नहीं की गई है जिस वजह से काम पर बुरा असर पड़ रहा है। इस धीमी रफ़्तार का सीधा असर अर्थव्यवस्था में गिरावट और रोज़गार में कमी है। यानी हालात जल्द नहीं सुधारे गए तो यह अंदरुनी आर्थिक मंदी कहीं ज़्यादा भारी पड़ेगी।
पूर्व नौकरशाह और जेडी−यू सांसद एनके सिंह मानते हैं कि सरकार में अफसरों की जवाबदेही तय नहीं की गई है जिस वजह से काम पर बुरा असर पड़ रहा है। इस धीमी रफ़्तार का सीधा असर अर्थव्यवस्था में गिरावट और रोज़गार में कमी है। यानी हालात जल्द नहीं सुधारे गए तो यह अंदरुनी आर्थिक मंदी कहीं ज़्यादा भारी पड़ेगी। | यहाँ एक सारांश है:अभी भारत सरकार के 150 करोड़ से ऊपर के कुल 564 प्रोजेक्ट हैं। इनमें कुल 251 प्रोजेक्ट काफी देरी से चल रहे हैं। | 17 | ['hin'] |
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