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West BEngal News शिक्षक भर्ती घोटाले मामले में सीबीआई ने पूर्व तृणमूल कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष बिवास अधिकारी को तलब किया है। बीते शनिवार को इनके घर और आश्रम में छापेमारी और तलाशी अभियान चलाया गया था जिसमें कई दस्तावेज हाथ लगे हैं। कोलकाता, एजेंसी। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के अधिकारियों ने राज्य में शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती में करोड़ों रुपये के घोटाले में पूछताछ के लिए पूर्व तृणमूल कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष, बिवास अधिकारी को तलब किया है। बिवास अधिकारी बीरभूम जिले के नलहाटी के पूर्व तृणमूल कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष है। इन्हें कोलकाता स्थित एजेंसी के कार्यालय में तलब किया गया है। सूत्रों ने कहा कि बिवास को रविवार दोपहर तक ही कोलकाता में एजेंसी के निजाम पैलेस कार्यालय पहुंचने को कहा गया है। शनिवार को सीबीआई के अधिकारियों ने बिवास के आवास, कार्यालय और आश्रम में छापेमारी और तलाशी अभियान चलाया। सूत्रों ने कहा कि शनिवार को इन जगहों पर छापेमारी और तलाशी अभियान के दौरान सीबीआई के अधिकारियों ने कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए, जिसमें बिवास की संलिप्तता का स्पष्ट संकेत मिलता है। सीबीआई के एक सहयोगी ने कहा, "उन्हें हमारे जांच अधिकारियों द्वारा प्राप्त सबूतों और दस्तावेजों पर पूछताछ के उद्देश्य से तलब किया गया है। " यह पता चला है कि 2012 और 2018 के बीच बंगाल शिक्षक प्रशिक्षण संघ के तत्कालीन प्रमुख के रूप में अधिकारी की भूमिका केंद्रीय एजेंसी के जांच के दायरे में है। संदेह है कि अवैध भर्तियों की व्यवस्था करने के अलावा, वह निजी शिक्षक प्रशिक्षण कॉलेजों के लिए अनुमोदन और मान्यता प्राप्त करने की प्रक्रिया में भी शामिल था और उस प्रक्रिया के माध्यम से मोटी रकम कमा रहा था। बिवास को तृणमूल कांग्रेस के विधायक और पश्चिम बंगाल प्राथमिक शिक्षा बोर्ड (डब्ल्यूबीबीपीई) के पूर्व अध्यक्ष माणिक भट्टाचार्य का बेहद करीबी माना जाता है। माणिक भट्टाचार्य वर्तमान में भर्ती घोटाले के सिलसिले में न्यायिक हिरासत में हैं।
West BEngal News शिक्षक भर्ती घोटाले मामले में सीबीआई ने पूर्व तृणमूल कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष बिवास अधिकारी को तलब किया है। बीते शनिवार को इनके घर और आश्रम में छापेमारी और तलाशी अभियान चलाया गया था जिसमें कई दस्तावेज हाथ लगे हैं। कोलकाता, एजेंसी। केंद्रीय जांच ब्यूरो के अधिकारियों ने राज्य में शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती में करोड़ों रुपये के घोटाले में पूछताछ के लिए पूर्व तृणमूल कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष, बिवास अधिकारी को तलब किया है। बिवास अधिकारी बीरभूम जिले के नलहाटी के पूर्व तृणमूल कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष है। इन्हें कोलकाता स्थित एजेंसी के कार्यालय में तलब किया गया है। सूत्रों ने कहा कि बिवास को रविवार दोपहर तक ही कोलकाता में एजेंसी के निजाम पैलेस कार्यालय पहुंचने को कहा गया है। शनिवार को सीबीआई के अधिकारियों ने बिवास के आवास, कार्यालय और आश्रम में छापेमारी और तलाशी अभियान चलाया। सूत्रों ने कहा कि शनिवार को इन जगहों पर छापेमारी और तलाशी अभियान के दौरान सीबीआई के अधिकारियों ने कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए, जिसमें बिवास की संलिप्तता का स्पष्ट संकेत मिलता है। सीबीआई के एक सहयोगी ने कहा, "उन्हें हमारे जांच अधिकारियों द्वारा प्राप्त सबूतों और दस्तावेजों पर पूछताछ के उद्देश्य से तलब किया गया है। " यह पता चला है कि दो हज़ार बारह और दो हज़ार अट्ठारह के बीच बंगाल शिक्षक प्रशिक्षण संघ के तत्कालीन प्रमुख के रूप में अधिकारी की भूमिका केंद्रीय एजेंसी के जांच के दायरे में है। संदेह है कि अवैध भर्तियों की व्यवस्था करने के अलावा, वह निजी शिक्षक प्रशिक्षण कॉलेजों के लिए अनुमोदन और मान्यता प्राप्त करने की प्रक्रिया में भी शामिल था और उस प्रक्रिया के माध्यम से मोटी रकम कमा रहा था। बिवास को तृणमूल कांग्रेस के विधायक और पश्चिम बंगाल प्राथमिक शिक्षा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष माणिक भट्टाचार्य का बेहद करीबी माना जाता है। माणिक भट्टाचार्य वर्तमान में भर्ती घोटाले के सिलसिले में न्यायिक हिरासत में हैं।
15- सूरत-हिज्र इस मक्की सूरत में '6' रूकू और '99' आयतें हैं الر تلک ايت الكتب و قران مبین و ربما يود الذين يتمتعوا ويلههم الأمل فسوف يعلمون 0 وما أهلكنا من قرية إلا ولها كتاب معلوم و ما تسبق من أمة اجلها و ما يستأخرون و قالوا يايها الذي نزل عليه الذكر إنك لمجنون لو ما تأتينا بالمليكة إن كنت من الصديقين و ما ننزل الملكة إلا بالحق وما كانوا إذا منظرين إلا نحن تزلنا الذكر و إقالة تحفظونه अलिफ़ लाम रा (इस का मतलब तो अल्लाह को पता है) ये आयते हैं (अल्लाह की) किताब की और रौशन कुरआन की ( 01 ) ( जब आख़रत में काफ़िरों पर तरह-तरह का अज़ाब होगा तो ) काफ़र लोग बार-बार तमन्ना करेंगे (और पछताएंगे ) कि क्या अच्छा होता अगर वो ( यानी हम दुनिया में ) मुसलमान होते ( 02 ) आप ( दुनिया में उनके कुफ पर ग़म न कीजिए और ) उन को उनके हाल पर रहने दीजिए कि वो अच्छी तरह खालें और मज़े उड़ा लें और सोची उम्मीदें उन को भूल में डाल रक्खें उन को अभी ( मरने के साथ ही ) असलीयत पता चल जाएगी (03) और ( दुनिया में जो उन को उन के कुफ़ और बुरे कामों की फौरन सज़ा नहीं मिलती उसकी वजह यह है कि अल्लाह तआला ने सज़ा का वक़्त तय कर रक्खा है अभी वो वक़्त नहीं आया और ) हमने जितनी बस्तियां (कुफ़ की वजह से ) हलाक की हैं उन सब के लिए एक तय वक़्त लिखा हुआ होता रहा है(04) (और हमारा कानून है कि कोई उम्मत अपने तय वक़्त से न पहले हलाक हुई है और न (उससे) आगे जा सकती है (बल्कि तय वक़्त पर हलाक हुई है इसी तरह जब उन का वक़्त आजाएगा उन को भी सज़ा दी जाएगी ) (05) और इन (मक्के के ) काफिरों ने ( रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से) यह कहा कि ऐ वो इन्सान जिस पर ( उसके दावे के हिसाब से ) कुरआन उतारा गया है तुम (नऊज़ुबिल्लाह पैग़म्बरी का ग़लत दावा करते हो और ) दीवाने हो (06) ( वर्ना ) अगर तुम ( इस दावे में) सच्चे हो तो ( अपनी सच्चाई की गवाही के लिए ) हमारे पास फुरिशता क्यों नहीं लाते(07) (अल्लाह तआला जवाब देते हैं कि ) हम फ़रिशतों को (जिस तरह वो चाहते हैं) सिर्फ फैसले ही के लिए उतारा करते हैं और ( अगर ऐसा होता तो ) उस वक़्त उन को मुहलत भी न दी जाती (बल्कि जब फरिशतों के आने पर भी ईमान न लाते जैसा कि उन की हालत से पता चलता है तो फ़ौरन हलाक कर दिये जाते ) (08) हमने कुरआन को उतारा है और (यह दावा बिना दलील नहीं बल्कि इस का मोजिज़ा होना इस पर दलील है और कुरआन का एक मोजिज़ा तो यह है कि कोई इन्सान इस जैसी एक सूरत भी नहीं बना सकता और दूसरा मोजिज़ा यह है कि ) हम इस (कुरआन ) की हिफाज़त ( और देखभाल करने वाले हैं (इसे कोई घटा बढ़ा नहीं सकता जैसा और किताबों में होता है यह एक ऐसा खुला मोजिज़ा है जिस को हर ख़ास व आम समझ सकता है)(09)। नोटः- कुरआन की हिफाज़त का मतलब यह है कि कुरआन के अलफाज़ उसके माइने दोनो की हिफाज़त अल्लाह ने अपनी ज़िम्मेदारी में लेली है न कोई इसके लफ़ज़ों को घटा बढ़ा सकता है और न माइने मतलब बदल सकता है । और हदीसे रसूल असल में कुरआन की तफ़सीर और कुरआन के माइने हैं और वो अल्लाह की हिफाज़त में हैं फिर यह कैसे हो सकता है कि हदीसें बर्बाद हो जाएं। जो लोग हदीसों को नाकाबिले ऐतबार कहते हैं वो ग़लती पर हैं । و لقد ارسلنا من قبلك في شيع الأولين و ما يأتيهم من رسول إلا كانوا به يستهزءون كذلك تسلكه في قلوب المجرمين و لا يؤمنون به وقد خلت سنة الأولين و لو فتحنا عليهم بابا من و السماء فظلوافيه يعرجون لقالوا إتماسكرت أبصارنا بل نحن قوم مسحورون आयत न० 10 से 15 और (ऐ मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आप इनके झुटलाने से ग़म न कीजिए क्योंकि यह बरताव पैग़म्बरों के साथ सदा से होता चला आया है जैसा कि ) हमने आप से पहले भी पैग़म्बरों को लोगों के बहुते से गिरोहों में भेजा था ( 10 ) और ( उन की हालत यह थी कि) कोई पैग़म्बर उनके पास ऐसा नहीं आया जिस का उन्होंने मज़ाक़ न उड़ाया हो (जो कि झुटलाने की सबसे घटिया क़िस्म है)(11) इसी तरह हम इन मुजरिमों (यानी मक्के के काफिरों) के दिलों में यह बात (यानी मज़ाक उड़ाना) डाल देते हैं ( 12 ) ( जिस की वजह से ) ये लोग कुरआन पर ईमान नहीं लाते और यह दस्तूर पहलों से ही होता आया है ( कि पैग़म्बरों को झुटलाते रहे बस आप ग़म न करें) (13) और (उन की ज़िद की यह हालत है कि रिशतों का आसमान से आना तो क्या इससे बढ़ कर) अगर (ख़ुद उन को आसमान पर भेज दिया जाए इस तरह से कि) हम उन के लिए आसमान में कोई दरवाज़ा खोल दें फिर ये दिन के वक़्त (जिसमें नींद और ऊंघ का भी शक न हो) उस ( दरवाज़े) में ( से आसमान को ) चढ़ जाएं ( 14 ) तब भी यह कहदें कि हमारी नज़रबन्दी कर दी गई थी (जिससे हम अपने को आसमान पर चढ़ता हुआ देख रहे हैं और असलीयत में नहीं चढ़ रहे और नज़रबन्दी इसी बात में नहीं) बल्कि हम लोगों पर तो बिल्कुल जादू कर रक्खा है (अगर हम को इससे बढ़ कर भी कोई मोजिज़ा दिखाया जाएगा वो भी असल में मोजिज़ा न होगा ) ( 15 ) । नोटः- यहां यह भी मालूम हुआ कि हर गिरोह का पैग़म्बर उसी गिरोह के लोगो में से भेजा गया ताकि लोगों को उस पर भरोसा करना आसान हो । और ये पैग़म्बर भी उनके मिज़ाज को जानकर उनके सुधार के लिए सही प्रोग्राम बना सकें । ولقد جعلنا في السماء بروجاؤ زينها النظرين ل وحفظنها من كل شيطن رجيم في الأمن استرق الشمع فاتبعه شهاب مبين و الأرض مددنها و القينا فيها رواستی و انبتنا فيها من كل شيء موزون و جعلنا لكم فيها معايش ومن لستم له برزقين و إن من شيء إلا عندنا خزانه و ما ننزلة إلا بقدر معلوم 0 و ارسلنا الريح لواقح فانزلنا من السماء ماء فاسقينكمون وما انتم له بخزنين و إنا لنحن نخی و نميت و نحن الورثون و لقد علمنا المستقدمين منكم و لقد علمنا المستأخرين و إن ربك هو يحشرهم - إنه حكيم عليم आयत न० 16 से 25 और बेशक (हमारी कुदरत की निशानियों में से है कि) हमने आसमान में बड़े-बड़े सितारे पैदा किये और देखने वालों के लिए आसमान को (सितारों से ) सजाया ( 16 ) और उस (आसमान ) की (सितारों के वास्ते से ) हर शैतान मरदूद से हिफाज़त की ( कि वहां तक वो पहुंच नहीं पाते) (17) हां मगर कोई बात (फ़रिशतों की) चोरी छुपे सुन भागे तो उस के पीछे एक चमकता अंगारा होता ( है और उसके असर से वो शैतान हलाक या बदहवास हो जाता ) है ( 18 ) और हमने ज़मीन को फैला दिया और उस ( ज़मीन ) में भारी-भारी पहाड़ रख दिये और उसमें हर किस्म की (ज़रूरत की पैदावार) एक ख़ास अन्दाज़ से उगाई ( 19 ) और हमने तुम्हारे वास्ते उस (ज़मीन) में रोज़गार के सामान बनाए (जिसमें ज़िन्दगी की ज़रूरतों की सभी चीज़ें आगईं जो खाने पीने पहनने और रहने सहने की हैं) और ( यह सामान) उन को भी दिया जिन को तुम रोज़ी नहीं देते (यानी वो जानदार जिनके खाने पीने का तुम इन्तिज़ाम नहीं करते ) (20) और जितनी चीजें (ज़िन्दगी की ज़रूरत की) हैं हमारे पास सब के ख़ज़ाने के ख़ज़ाने (भरे पड़े) हैं, और हम ( अपनी ख़ास हिकमत से ) उस (चीज़ ) को एक ख़ास हिसाब से उतारते रहते हैं ( 21 ) और हम ही हवाओं को भेजते रहते हैं जो बादल को पानी से भर देती हैं फिर हम ही आसमान से पानी बरसाते हैं फिर वो पानी तुम को पीने को देते हैं और तुम उस को जमा करके रखने वाले न थे (कि अगली बारिश तक उस जमा पानी को बरतते रहते ) ( 22 ) और हम है कि ज़िन्दगी देते हैं और मौत देते हैं और (सब के मरने के बाद ) हम ही बाकी रह जाएंगे (28) और हम ही जानते हैं तुम में से आगे बढ़ जाने वालों को और हम जानते हैं पीछे रह जाने वालों को ( 24 ) और बेशक आप का रब ही इन सब को (कियामत में) जमा करेगा, बेशक वो हिकमत वाला है ( हर आदमी को उस के हिसाब से बदला देगा और ) इल्म वाला ( है सब के कामों को जानता) है (25)। नोटः- आगे बढ़ जाने वालों से मुराद नेक कामों में आगे बढ़ जाने वाले लोग हैं । हदीस में है कि अगर लोगों को मालूम हो जाता कि अज़ान कहने और नमाज़ की पहली सफ़ में खड़े होने की कितनी बड़ी फ़ज़ीलत ( और सवाब ) है तो सभी आदमी इसकी कोशिशश में लग जाते कि पहली ही सफ़ में खड़े हों और सबके लिए जगह न होती तो कुरा अन्दाज़ी करनी पड़ती यानी लाटरी डालनी पड़ती । ولقد خلقنا الإنسان من صلصال من حيا مسنون والجان خلقته من قبل من نار الشهوم و و إذ قال ربك للمليكة إني خالق بشرا من صلصال من حيا مسنون فإذا سويته و نفخت فيه من روی فقعوا له سجدين و فسجد المليكة كلهم أجمعون إلا إبليس أبى أن يكون مع الشجيين © قال يابليس ما لك الا تكون مع الشجيين قال لم أكن لأسجد لبشر خلقته من صلصال من حما مسنون قال فاخرج منها فائك رجيم لي و إن عليك اللعنة إلى يوم الدين © قال رب فانظري إلى يوم يبعثون قال فائك من المنظرين 3 إلى يوم الوقت المعلوم © قال رب بما أغويتني لأزينت لهم في الأرض و لأغوينهم أجمعين و إلا عبادك منهم المخلصين و قال هذا صراط على مستقيم 0 ان عبادي ليس لك عليهم سلطن الامن اتبعك من الغوين و إن جهنم لموعدهم اجمعين لها و و و و و و و و आयत न० 26 से 44 और हमने इन्सान को (यानी उन के बाप आदम अलैहिस्सलाम को) गारे के ख़मीर की खनखनाती मिट्टी से पैदा किया (यानी पहले गारे का ख़मीर बनाया कि उसमें बू आने लगी फिर वो सूख कर खनखन बोलने लगा जैसे मिट्टी के बर्तन चुटकी मारने से बजा करते हैं फिर उस सूखे गारे से आदम का पुतला बनाया जो बड़ी कुदरत की निशानी है ) ( 26 ) और जिन्नात को (यानी उनके बाप को) उस के पहले (यानी आदम अलैहिस्सलाम से पहले ) आग से कि वो एक गर्म हवा थी पैदा कर चुके थे(27) और वो वक़्त याद कीजिए जब आप के रब ने फ़रिशतों से कहा कि मैं एक इन्सान को (यानी उसके पुतले को) गारे के ख़मीर की बजती हुई मिट्टी से पैदा करने वाला हूं (28) तो मैं जब उस को पूरा बना चुकूं और उसमें अपनी (तरफ से) जान डाल दूं तो सब उसके सामने सजदे में गिर जाना ( 29 ) सो ( जब अल्लाह तआल ने उस को बना लिया तो ) सारे के सारे रिशतों ने ( आदम अलैहिस्सलाम को ) सजदा किया ( 30 ) सिवाए इबलीस के, कि उसने इस बात को न माना कि सजदा करने वालों के साथ शामिल हो (यानी सजदा न किया) (81) अल्लाह तआला ने कहा ऐ इबलीस तू किस लिए सजदा करने वालों में शामिल न हुआ (32) कहने लगा कि मैं ऐसा (गिरा हुआ ) नहीं कि ( उस) इन्सान को सजदा करूं जिस को आपने गारे के ख़मीर की बजती हुई मिट्टी से पैदा किया है (और मैं नूरानी चीज़ आग से पैदा हुआ हूं तो उस को सजदा कैसे करूं ) ( 33 ) कहा ( अल्लाह तआला ने) तो ( अच्छा फिर ) आसमान से निकल क्यूंकि बेशक तू ( इस हरकत से) मरदूद हो गया ( 34 ) और बेशक तुझ पर ( मेरी ) लानत क़ियामत तक रहेगी (यानी तौबा की तौफीक न होगी ) (35) कहने लगा या रब (अगर मुझ को आदम अलैहिस्सलाम की वजह से मरदूद किया है) तो फिर मुझ को (ज़िन्दा रहने की ) मुहलत दीजिए क़ियामत के दिन तक (ताकि उनसे और उनकी औलाद से अच्छी तरह बदला लूं ) ( 36 ) कहा ( अल्लाह तआला ने जब तू मुहलत मांगता है) तो (जा) तुझ को मुहलत (तो) देदी गई ( 37 ) (मगर) ऐसे दिन तक जो हमें पता है ( 38 ) कहने लगा या रब मेरे क्योंकि आप ने मुझ को गुमराह किया है (इसलिए अब) मैं क़सम खाता हूं कि मैं दुनिया में उनकी (यानी आदम और आदम की औलाद की) नज़र में गुनाह को अच्छा करके दिखाऊंगा और उन सब को गुमराह करूंगा (39) सिवाए आप के उन बन्दों के जो उन में चुन लिये गये हैं (यानी आपने उन को मेरे असर से बचा रक्खा है)(40) कहा (अल्लाह तआला ने ) कि (हां ) यह ( चुना जाना जिस का तरीका नेक काम करना और पूरी ताबेदारी करना है) एक सीधा रास्ता है जो मुझ तक पहुंचता ( है यानी उस पर चल कर हमारा बन जाता) है(41) बेशक मेरे उन बन्दों पर तेरा ज़रा भी बस न चलेगा सिवाए उन गुमराह लोगों के जो तेरी राह पर चलने लगें ( 42 ) और ( जो लोग तेरी राह पर चलेंगे) उन सब का ठिकाना जहन्नम है ( 43 ) जिस के सात दरवाज़े हैं, हर दरवाज़े ( में से जाने) के लिए उन लोगों के अलग-अलग हिस्से हैं (कि कोई किसी दरवाज़े से जाएगा कोई किसी दरवाज़े से) (44)। नोटः- अल्लाह के नेक बन्दों पर शैतान का ऐसा असर नहीं होता कि वो अपनी ग़लती पर किसी वक़्त भी तौबा न करें । إن المتقين في جنت و عيون و أدخلوها بسلم امنين و نزعنا ما في صدورهم من غل إخوانا على © سرر متقبلين ولا يمسهم فيها نصب و ماهم منها بمخرجين و نبی عبادي اني انا الغفور الرحيم * و ان عذابى هو العذاب الأليم © आयत न० 45 से 50 बेशक अल्लाह तआला से डरने वाले ( यानी ईमान वाले) बाग़ों और झरनों में (रहते होंगे चाहे शुरू ही से अगर गुनाह न हो या मुआफ़ हो गया हो और चाहे गुनाह की सज़ा भुगतने के बाद दाख़िल) होंगे(45) (और उन से कहा जाएगा कि ) तुम इन (जन्नतों) में सलामती और अमन के साथ दाख़िल हो जाओ (यानी इस वक़्त भी हर नापसन्द चीज़ से सलामती है और आगे भी किसी बुराई के पहुंचने का ख़तरा नहीं ) (46) और ( दुनिया में कुछ बातों में) उन के दिलों में जो नाराज़गी थी हम वो सब ( उन के दिलों से जन्नत में दाख़िल होने से पहले ही ) दूर कर देंगे कि भाई-भाई की तरह ( प्यार मुहब्बत से ) रहेंगे (और) तख़्तों पर आमने सामने बैठा करेंगे (47) वहां उन को TIT: 14 HT ज़रा भी तकलीफ़ न पहुंचेगी और न वहां से निकाले जाएंगे ( 48 ) (ऐ पैग़म्बर) आप मेरे बन्दों को ख़बर दे दीजिए कि मैं बड़ा मुआफ़ करने वाला और रहमत वाला (भी) हूं (49) और यह (भी बता दीजिए) कि मेरी सज़ा (भी) दर्दनाक सज़ा है ( ताकि यह ख़बर सुन कर ईमान और नेकी * la afr ph a Jil Se aar )(50) । नोटः- दुनिया की सैर तफरीह से इन्सान कभी न कभी थक जाता है चाहे कितनी ही मज़ेदार हो लेकिन जन्नत में कभी थकान न होगी । और न वहां की नेमतें कभी ख़त्म होगीं और न वहां से कभी उस को निकाला जाएगा। ونهم عن ضيف إبرهيم ن إذ دخلوا عليه فقالوا سلما قال انا منكم وجنون و قالوا لا تؤجل إنا نبشرك بغلم عليه و قال ابشرتهوني على أن تمشيني الكبر فيم تبشرون قالوا بشرنك بالحق فلا تكن من الفنيين و قال ومن يقنط من رحمة ربة إلا القانون و قال فما خطبكم ايها المرسلون قالوا إنا أرسلنا إلى قوم مجرمين إلا آل لوط إنا لمنجوهم أجمعين * إلا امراته قدرنا إنّها لين الغيرين في فلما جاء ال لوط المرسلون لي قال إنكم قوم منكرون قالوا بل جئنك بما كانوا فيه يمترون و اتيناك بالحق و انا لصيقون فأسر بأهلك بقطع من اليل و التبغ أدبارهم ولا يلتفت منكم احد و امضوا حيث تؤمرون وقضينا إليه ذلك الأمر أن دابر هؤلاء مقطوع مصبحين 0 وجاء أهل المدينة يستبشرون و قال إن هؤلاء ضيفي فلا تفضحون واتقوا الله ولا تخزون قالوا أو لم تنهك عن العلمين و قال هؤلاء بنتي إن كنتم فعلين لعمرك إنهم لفي سكرتهم يعمهون فاخذتهم الصيحة مشرقين و فجعلنا عاليها سافلها و أمطرنا عليهم حجارة من سجيل إن في ذلك لايت للمتوسمين و إنها ليسبيل مقيمه إن في ذلك لاية और ( ऐ मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) आप इन ( लोगों ) को इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के महमानों (के किस्से) की भी ख़बर दीजिए ( 51 ) ( वो किस्सा उस वक़्त हुआ था ) जब कि वो ( महमान जो कि असल में फ़रिशते थे और इन्सानी रूप में होने की वजह से हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने उन को महमान समझा) उनके ( यानी इब्राहीम अलैहिस्सलाम के) पास आए फिर ( आकर ) उन्होंने सलाम किया, (इब्राहीम अलैहिस्सलाम उन को महमान समझ कर फ़ौरन उन के लिए खाना लाए मगर चूंकि फ़रिशते थे उन्होंने खाया नहीं तब) इब्राहीम (अलैहिस्सलाम दिल में डरे ये लोग कहीं दुशमन न हों और) कहने लगे कि हमें तो तुम से डर लग रहा है (52) उन्होंने कहा कि आप डरें नहीं क्योंकि हम (फ़रिशते हैं अल्लाह की तरफ से खुशख़बरी लेकर आए हैं और ) आप को एक बेटे की खुशख़बरी देते हैं जो बड़ा आलिम होगा ( मतलब यह कि पैग़म्बर होगा क्योंकि आदमियों में सब से ज़्यादा इल्म पैग़म्बरों को होता है, मुराद इस बेटे से इसहाक अलैहिस्सलाम हैं ) ( 53 ) इब्राहीम (अलैहिस्सलाम ) कहने लगे कि क्या तुम मुझ को इस हालत में (बेटे की ) खुशख़बरी देते हो कि मुझ पर बुढ़ापा आ गया तो (ऐसी हालत में मुझ को) किस ( अजीब ) चीज़ की खुशख़बरी देते हो (54) वो (फ़रिशते) बोले कि हम आप को सच्ची बात की खुशख़बरी देते हैं सो आप नाउम्मीद न हों (यानी अपने बुढ़ापे पर नज़र न कीजिए ) (55) इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने कहा कि भला अपने रब की रहमत से कौन ना उम्मीद होता है सिवाए गुमराह लोगों के ( 56 ) ( फिर पैग़म्बरी के इल्म से जान गये कि फ़रिशते कुछ और ख़ास काम भी आए हैं इसलिए ) कहने लगे तो (यह बताओ कि) अब तुम को क्या ख़ास काम है ऐ फ़रिशतो ! (57) फरिशतों ने कहा कि हम एक मुजरिम क़ौम (यानी क़ौमे लूत) की तरफ ( उन को सज़ा देने के लिए) भेजे गये हैं (58) मगर लूत (अलैहिस्सलाम) का ख़ानदान कि हम उन सब को ( अज़ाब से) बचा लेंगे (यानी उन को बचने का तरीका बता देंगे कि मुजरिमों से अलग हो जाएं ) (59) सिवाए उन की (यानी लूत अलैहिस्सलाम की) बीवी के कि उस के बारे में हम ने तय कर रक्खा है कि वो ज़रूर उसी मुजरिम क़ौम में रह जाएगी ( और उन के साथ अज़ाब में पकड़ी जाएगी ) (60) फिर जब वो फ़रिशते लूत (अलैहिस्सलाम) के ख़ानदान वालों के पास आए(61) ( तो चूंकि इन्सानी रूप में थे इसलिए लूत अलैहिस्सलाम) कहने लगे तुम तो अजनबी आदमी ( लगते ) हो ( देखिये शहर वाले तुम्हारे साथ क्या सलूक करते हैं क्योंकि ये अजनबी लोगों को परीशान किया करते हैं ) (62) उन्होंने कहा नहीं ( हम आदमी नहीं) बल्कि हम ( फ़रिशते हैं) आप के पास वो चीज़ (यानी वो अज़ाब ) लेकर आए हैं जिसमें ये लोग शक किया करते थे (63) और हम आपके पास अटल फैसला ( यानी अज़ाब ) लेकर आए हैं और हम (इस ख़बर देने में) बिल्कुल सच्चे हैं ( 64 ) सो आप रात के किसी हिस्से में अपने घर वालों को लेकर (यहां से) चले जाइये और आप सब के पीछे हो लीजिए ( ताकि कोई रह न जाए या लौट न जाए ) और तुम में से कोई पीछे मुड़ कर भी न देखे (यानी सब जल्दी चले जाएं ) और जिस जगह (जाने का ) तुम को हुक्म हुआ है उस तरफ़ सब के सब चले जाओ (65) और हमने ( उन फ़रिशतों के वास्ते से) लूत (अलैहिस्सलाम) के पास यह हुक्म भेजा कि सुबह होते ही उन की जड़ कट जाएगी (यानी बिल्कुल बर्बाद व हलाक हो जाएंगे ) ( 66 ) और (उधर ) शहर के लोग (यह ख़बर सुनकर कि लूत अलैहिस्सलाम के यहां हसीन लड़के आए हैं) बहुत खुशियां मनाते हुए (अपनी बुरी नीयत व इरादे के साथ लूत अलैहिस्सलाम के घर ) आपहुंचे (67) लूत (अलैहिस्सलाम) ने (जो अब तक उन को इन्सान और अपना महमान समझ रहे थे कि फ़रिशता होना बाद में पता चला था ) कहा कि ये लोग मेरे महमान हैं (इन को परीशान करके) मुझ को ( आम लोगों में) रूसवा न करो (क्योंकि महमान की तौहीन में मेज़बान की तौहीन होती है ) ( 68 ) तुम अल्लाह से डरो और मुझ को (इन महमानों की नज़र में) ज़लील मत करो (कि महमान यह समझेंगे कि अपनी बस्ती के लोगों की नज़र में इन की कोई इज़्ज़त नहीं ) (69) वो कहने लगे ( यह रूसवाई खुद आपकी ख़रीदी हुई है कि उन को महमान बनाया और) क्या हम आप को दुनिया भर के लोगों को अपना महमान बनाने ) से ( बहुत बार) मना नहीं कर चुके ( न आप उन को महमान बनाते न इस रूसवाई की नौबत आती) (70) लूत (अलैहिस्सलाम) ने कहा कि तुम्हारी ज़रूरत पूरी करने के लिए) ये मेरी (बहू) बेटियां (हैं जो तुम्हारे घरों में) मौजूद हैं अगर तुम मेरा कहना मानो ( तो शराफत के साथ अपनी औरतों से अपना मतलब पूरा करो मगर वो किस की सुनते थे ) ( 71 ) आप की जान की क़सम (ऐ पैग़म्बर) सच यह है कि वो अपनी मस्ती में अन्धे बने हुए ( थे किसी की कब सुनने वाले) थे(72) बस सूरज निकलते-निकलते उन को सख़्त आवाज़ ने आदबाया (73) फिर ( उस के बाद ) हम ने उन बस्तियों (की ज़मीन को उलट कर उन ) का ऊपर का तख़्ता (तो) नीचे कर दिया (और नीचे का तख़्ता ऊपर कर दिया) और उन लोगों पर कंकर के पत्थर बरसाए (74) इस क़िस्से में बहुत सी निशानियां है सबक लेने वालों के लिए (जैसे एक तो यह कि बुरे काम का नतीजा आख़िरकार बुरा होता है अगर कुछ दिन की ढील मिल जाए तो इससे धोका न खाना चाहिए दूसरे यह कि सदा रहने वाली इज़्ज़त व चैन आराम सिर्फ अल्लाह तआला पर ईमान लाने और उसका कहना मानने में है तीसरे यह कि अल्लाह तआला की कुदरत के क़ब्ज़े में सब कुछ है वो जो चाहे कर सकता है ) (75) और ये बस्तियां (ऐसे) सीधे रास्ते पर ( हैं जिस पर लोग आते जाते रहते ) हैं (76) बेशक इस (क़िस्से) में ईमान वालों के लिए बड़ी निशानी है ( 77 ) । नोटः- किसी इन्सान को जाइज़ नहीं कि वो अल्लाह के सिवा किसी और की क़सम खाए क्योंकि कुसम उसकी खाई जाती हैं जिसको सब से ज़्यादा बड़ा समझा जाए और ज़ाहिर है सबसे ज़्यादा बड़ा सिर्फ अल्लाह तआला ही हो सकता है। लेकिन अल्लाह तआला अपनी मखलूक में से किसी की कुसम खा सकते हैं जिससे उस चीज़ की बड़ाई ज़ाहिर होती है तो यहां मालूम हुआ कि अल्लाह के नज़दीक आपका बड़ा रूतबा है। जो आपकी जान की क़सम खाई है। و إن كان أصحب الأيكة لطيبين لي فانتقمنا منهم وإنهما ليامام مبين ، و لقد كذب أصحب الحجر المرسلين و اتينهم ايتنا فكانوا عنها معرضين ل و كانوا ينحثون من الجبال بيوتا و منين فأخذتهم الضيحة مصبحين * فما أغنى عنهم ما كانوا يكسبون * و ما خلقنا السموت و الأرض وما بينهما إلا بالحق و ان الشاعة لاتية فاصفح الصفح الجميل و إن ربك هو الخلق العليم © आयत न० 78 से 86 और ऐका (के रहने) वाले ( यानी शुऐब अलैहिस्सलाम की उम्मत के लोग भी ) बड़े ज़ालिम थे (78) सो हमने उन से (भी) बदला लिया ( और उन को अज़ाब से हलाक किया), और दोनो (क़ौम की) बस्तियां साफ सड़क पर ( मौजूद हैं और मुल्क शाम को जाते हुए रास्ते में दिखाई देती) हैं (79) और हिज्र वालों ने (भी) पैग़म्बरों को झूटा बताया ( क्योंकि जब अपने पैग़म्बर सालिह अलैहिस्सलाम को झूटा कहा तो सब पैग़म्बरों को झूटा कहा क्योंकि सब पैग़म्बरों का असल दीन एक है ) (80) और हमने उनको अपनी तरफ से ) निशानियां दीं (जिससे अल्लाह तआला की तौहीद और सालिह अलैहिस्सलाम की पैग़म्बरी साबित होती थी) तो वो लोग उन (निशानियों) से मुंह मोड़े (ही) रहे (81) और वो लोग पहाड़ों को तराश - तराश कर उनमें घर बनाते थे कि (उनमें सब मुसीबतों से) अमन में रहें (82) सो उन को सुबह के वक़्त सख़्त आवाज़ (के अज़ाब ) ने आ पकड़ा ( 88 ) सो उनके ( दुनिया के) हुनर उन के कुछ भी काम न आए ( उन ही मज़बूत घरों में अज़ाब से काम तमाम हो गया)(84) और (ऐ मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आप इन लोगों की ज़िद और मुख़ालफत पर ग़म न कीजिए क्योंकि इस का एक दिन फैसला होने वाला है) हम ने आसमानों को और ज़मीन को और उनके बीच की चीज़ों को बेवजह पैदा नहीं किया (बल्कि इस लिए पैदा किया कि इन को देख कर पैदा करने वाले अल्लाह की कुदरत को सोचे और ताबेदारी करें), और (जो न मानें तो उनकी सज़ा के लिए ) क़ियामत ज़रूर आने वाली है ( वहां सब का अन्जाम सामने आजाएगा) सो आप (कुछ ग़म न कीजिए बल्कि ) भलाई के साथ ( इनकी शरारतों को) टाल दीजिए (85) बेशक आप का रब ( ही ) सब को पैदा करने वाला ( और सब कुछ ) जानने वाला है ( सब का हाल उस को पता है आप के सब्र का भी उनकी शरारत का भी इसलिए उन से पूरा-पूरा बदला ले लेगा ) ( 86 ) । ولقد اتيناك سبعا من المثاني والقرآن العظيم ولا تمدن عينيك إلى ما متعنا به أزواجا منهم و لا تحزن عليهم و اخفض جناحك للمؤمنين و قل إني أنا القدير المبين * كما انزلنا على المقتسمين الذين جعلوا القران عضين فوربك لنستلتهم أجمعين عنا كانوا يعملون فاصدع بما تؤمر و أعرض عن المشركين و إنا كفيناك المستهزءين و الذين يجعلون مع الله إلها أخر فسوف يعلمون ولقد تعلم انك يضيق صدرك بما يقولون و فسبح بحمد ربك و كن من الشجيين في واعبد ربك حتى يأتيك اليقين * आयत न० 87 से 99 और (आप उन के बरताव को न देखिए बल्कि हमारी महरबानी को देखिए कि) हमने आप को ( एक बहुत बड़ी नेमत यानी ) सात आयतें दीं जो ( नमाज़ में बार-बार पढ़ी जाती हैं और (ऐसा कहिए कि) बड़े दर्जे का कुरआन दिया ( है मुराद इससे सूरत फ़ातिहा ) है (87) (और) आप अपनी आंख उठा कर भी उस चीज़ को न देखिये जो कि हमने उन ( काफ़िरों) में से बहुत से लोगों को बरतने के लिए दे रक्खी है (और बहुत जल्दी उन से अलग हो जाएगी) और उन (की कुफ़ की हालत ) पर ( कुछ ) ग़म न कीजिए और मुसलमानों पर महरबानी रखिए ( 88 ) और (काफिरों से इतना) कह दीजिए कि मैं तो ऐलानिया ( तुम को अल्लाह के अज़ाब से ) डराने वाला हूं (89) (और अल्लाह की तरफ़ से तुम को यह बात पहुंचाता हूं कि वो अज़ाब जिससे हमारा पैग़म्बर डराता है हम तुम पर किसी वक़्त ज़रूर भेजेंगे ) जैसा हम ने ( वो अज़ाब ) उन लोगों पर ( पहले बहुत बार) भेजा जिन्होंने ( अल्लाह के हुक्मों के हिस्से कर रक्खे थे (90) यानी आसमानी किताब के बहुत से हिस्से ठहरा दिये थे ( उन में जो मर्ज़ी के मुताबिक हुआ मान लिया जो मर्जी के ख़िलाफ़ हुआ इनकार कर दिया) (91) सो (ऐ मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) हम को आप के रब की (यानी अपनी ) कुसम हम इन सब ( अगलों और पिछलों) से ( कियामत के दिन ) ज़रूर पूछताछ करेंगे (92) कि (दुनिया में) क्या काम किये (फिर हर एक को उस के हिसाब से सज़ा देंगे ) (93) बस आप को जिस बात ( के पहुंचाने का ) का हुक्म किया गया है उस को (तो) साफ़-साफ़ सुना दीजिए और अगर ये न मानें तो) उन मुशरिकों ( के न मानने) की ( ज़रा ) परवा न ( कीजिए यानी ग़म न ) कीजिए (94) यकीन रक्खो हम ( उन लोगों से बदला लेने के लिए ) आप की तरफ से काफी हैं जो (आप के और अल्लाह के मुख़ालिफ़ हैं जैसा कि आप पर तो) हंसते हैं (95) (और) अल्लाह तआला के साथ दूसरा माबूद बनाते हैं, सो उन को अभी पता चल जाएगा (कि मज़ाक उड़ाने और शिर्क करने का क्या अन्जाम होता है) (96) और बेशक हम को पता है कि ये लोग जो (कुफ़ व मज़ाक उड़ाने की) बातें करते हैं उससे आप का जी घुटता है (97) सो ( इसका इलाज यह है कि) आप अपने रब की हम्द के साथ उस की तस्बीह करते रहिए और नमाज़े पढ़ने वालों में रहिए (98) और अपने रब की इबादत करते रहिए यहां तक कि ( इसी हालत में) आप को मौत आजाए (यानी मरते दम तक ज़िक्र व इबादत में लगे रहिए क्योंकि अल्लाह के ज़िक्र और इबादत में आख़रत के अज्र व सवाब के अलावा यह असर भी है कि दुनिया में जब इन्सान इस तरफ़ लग जाता है तो दुनिया का दुख और तकलीफ व मुसीबत कम हो जाती है ) (99) । नोटः- इन आयतों में सूरत फ़ातिहा को कुरआने अज़ीम कहने में इस तरफ इशारा है कि सूरत फ़ातिहा एक हैसियत से पूरा कुरआन है क्योंकि इस्लाम के सब उसूल इसमें समाए हुए हैं। हदीसः- हज़रत ज़ैद बिन अरक़म से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि जो आदमी इख़लास ( मन की सच्चाई ) साथ लाइलाह इल्लल्लाह कहेगा वो ज़रूर जन्नत में जाएगा। लोगों ने पूछा या रसूलुल्लाह इस कलिमे में इख़लास का क्या मतलब है। आप ने फ़रमाया कि जब यह कलिमा इन्सान को अल्लाह की हराम की हुई बातों और नाजाइज़ कामों से रोक दे तो वो इख़लास के साथ है। 16- सूरत-नहल में '16' रूकू इस मक्की सूरत और '128' आयतें हैं آتی آمر الله فلا تستعجلون سبحنة و تعلى عما يشركون ينزل المليكة بالروح من أمره على من يشاء من عبادة أن أنذروا أنه لا إله إلا أنا فاتقون خلق السموات والأرض بالحق تعلى عبا يشركون خلق الإنسان من نطفة فإذا هو خصيم مبين والأنعام خلقها لكم فيها دف و منافع و منها تأكلون ولكم فيها جمال حين تريحون وحين تسرحونة وتحيل أثقالكم إلى بكي لم تكونوا بلغيه إلا بشق الأنفس إن ربكم لرءوف رحيم ل والخيل والبغال والحمير لتركبوها و ويخلق ما لا تعلمون وعلى الله قصد السبيل ومنها جار ولو شاء لهلكم اجمعين زينة अल्लाह का हुक्म (यानी कुफ़ की सज़ा का वक़्त नज़दीक ) आ पहुंचा सो तुम इस में ( इनकार करके) जल्दी मत मचाओ, (बल्कि तौहीद अपनाओ और उसकी असलीयत सुनो कि) वो लोगों के शिर्क से पाक और बहुत ऊंचा है ( 01 ) वो अल्लाह तआला फ़रिशतों ( की जिन्स यानी जिब्राईल) को वही यानी अपना हुक्म देकर अपने बन्दों में जिस पर चाहे (यानी पैग़म्बरों पर ) भेजते हैं (और वो हुक्म ) यह ( है) कि लोगों को ख़बरदार करदो कि मेरे सिवा कोई इबादत का हक़दार नहीं सो मुझसे ही डरते रहो (यानी मेरे साथ किसी को साझी न ठहराओ वर्ना सज़ा होगी ) (02) आसमानों को और ज़मीन को ( अल्लाह तआला ने बेवजह नहीं बल्कि) हिकमत से बनाया, वो इनके शिर्क से पाक है (03) (और) इन्सान को मनी से बनाया फिर वो अचानक खुल्लम खुल्ला (अल्लाह ही की जात व ख़ूबियों में) झगड़ने लगा (यानी कुछ ऐसे भी हुए मतलब यह है कि हमारी ये नेमतें और इन्सान की तरफ से नाशुक्री ) (04) और उसी ने जानवरों को बनाया जिन में तुम्हारे (लिए ) सर्दी ( से बचाव ) का भी सामान है ( कि जानवरों के बाल यानी ऊन और खाल से इन्सान के कपड़े व जरकीन बनते हैं) और ( इसके सिवा और ) भी बहुत से फाइदे हैं (जैसे दूध, सवारी, सामान ले जाना और दूसरे ) और उन में (जो खाने के काबिल हैं, उन को) खाते भी हो (05) और उनमें तुम्हारी शान ( का सामान ) भी है जब कि शाम के वक़्त (जंगल से घर) लाते हो और जब कि सुबह के वक़्त ( घर से जंगल को चराने) ले जाते हो (06) और वो तुम्हारे सामान भी (लाद कर) ऐसे शहरों को ले जाते हैं जहां तुम बिना जान को मेहनत में डाले हुए नहीं पहुंच सकते थे, बेशक तुम्हारा रब बड़ी महरबानी वाला व रहमत वाला है (कि तुम्हारे आराम के लिए क्या-क्या सामान पैदा किये ) (07) और घोड़े और ख़च्चर और गधे भी पैदा किये ताकि उन पर सवारी करो और शान के लिए भी, और वो ऐसी ऐसी चीज़ें ( तुम्हारी सवारी और दूसरी ज़रूरतों के लिए ) बनाता है जिन की तुम को ख़बर भी नहीं ( इसमें वो सभी चीज़ें आ गईं जो पहले नहीं थी बाद में हुई या आगे ज़माने में होंगी ) (08) और ( ऊपर बताई सच्ची दलीलों से जो) सीधा रास्ता (दीन का साबित होता है वो ख़ास ) अल्लाह तक पहुंचता है और कुछ रास्ते (जो कि दीन के ख़िलाफ़ हैं) टेढ़े भी हैं (कि उन से अल्लाह तक नहीं पहुंच सकते, बस कुछ तो सीधे रास्ते पर चलते हैं और कुछ टेढ़े रास्ते पर), और अगर अल्लाह चाहता तो तुम सब को सीधे रास्ते तक पहुंचा देता ( मगर वो उसी को पहुंचाता है जो सीधे रास्ते का चाहने वाला हो) (09) नोटः- मुशरिकों ने कहा था जिस अज़ाब और क़ियामत से हमें डराया जाता है हमें तो कुछ नज़र नहीं आता इस पर ये आयतें उतरीं कि अज़ाब का हुक्म नज़दीक आ पहुंचा है। هو الذي أنزل من السماء ماء لكم منه شراب و منه شجر فيه شيمون يثبت لكم به الزرع و الزيتون و النخيل والأعناب و من كل الثمرت إن في ذلك لآية لقوم يتفكرون وسخر لكم اليل و النّهار والشمس والقمر والنجوم مسخرت بأمره إن في ذلك لايت لقوم يعقلون وما ذرا لكم في الأرض مختلفا ألوانه إن في ذلك لاية يقوم يذكرون وهو الذي سخر البحر لتأكلوا منه لحما طريا و تستخرجوا منه حلية تلبسونها وترى الفلك مواخر فيه ولتبتغوا من فضله و لعلكم تشكرون و القى في الأرض رواسي أن تميد بكم و انهرا و سبلا لعلكم تهتدون و علمت وبالتجم هم يهتدون
पंद्रह- सूरत-हिज्र इस मक्की सूरत में 'छः' रूकू और 'निन्यानवे' आयतें हैं الر تلک ايت الكتب و قران مبین و ربما يود الذين يتمتعوا ويلههم الأمل فسوف يعلمون शून्य وما أهلكنا من قرية إلا ولها كتاب معلوم و ما تسبق من أمة اجلها و ما يستأخرون و قالوا يايها الذي نزل عليه الذكر إنك لمجنون لو ما تأتينا بالمليكة إن كنت من الصديقين و ما ننزل الملكة إلا بالحق وما كانوا إذا منظرين إلا نحن تزلنا الذكر و إقالة تحفظونه अलिफ़ लाम रा ये आयते हैं किताब की और रौशन कुरआन की काफ़र लोग बार-बार तमन्ना करेंगे कि क्या अच्छा होता अगर वो मुसलमान होते आप उन को उनके हाल पर रहने दीजिए कि वो अच्छी तरह खालें और मज़े उड़ा लें और सोची उम्मीदें उन को भूल में डाल रक्खें उन को अभी असलीयत पता चल जाएगी और हमने जितनी बस्तियां हलाक की हैं उन सब के लिए एक तय वक़्त लिखा हुआ होता रहा है आगे जा सकती है और इन काफिरों ने यह कहा कि ऐ वो इन्सान जिस पर कुरआन उतारा गया है तुम दीवाने हो अगर तुम सच्चे हो तो हमारे पास फुरिशता क्यों नहीं लाते हम फ़रिशतों को सिर्फ फैसले ही के लिए उतारा करते हैं और उस वक़्त उन को मुहलत भी न दी जाती हमने कुरआन को उतारा है और हम इस की हिफाज़त । नोटः- कुरआन की हिफाज़त का मतलब यह है कि कुरआन के अलफाज़ उसके माइने दोनो की हिफाज़त अल्लाह ने अपनी ज़िम्मेदारी में लेली है न कोई इसके लफ़ज़ों को घटा बढ़ा सकता है और न माइने मतलब बदल सकता है । और हदीसे रसूल असल में कुरआन की तफ़सीर और कुरआन के माइने हैं और वो अल्लाह की हिफाज़त में हैं फिर यह कैसे हो सकता है कि हदीसें बर्बाद हो जाएं। जो लोग हदीसों को नाकाबिले ऐतबार कहते हैं वो ग़लती पर हैं । و لقد ارسلنا من قبلك في شيع الأولين و ما يأتيهم من رسول إلا كانوا به يستهزءون كذلك تسلكه في قلوب المجرمين و لا يؤمنون به وقد خلت سنة الأولين و لو فتحنا عليهم بابا من و السماء فظلوافيه يعرجون لقالوا إتماسكرت أبصارنا بل نحن قوم مسحورون आयत नशून्य दस से पंद्रह और हमने आप से पहले भी पैग़म्बरों को लोगों के बहुते से गिरोहों में भेजा था और कोई पैग़म्बर उनके पास ऐसा नहीं आया जिस का उन्होंने मज़ाक़ न उड़ाया हो इसी तरह हम इन मुजरिमों के दिलों में यह बात डाल देते हैं ये लोग कुरआन पर ईमान नहीं लाते और यह दस्तूर पहलों से ही होता आया है और अगर हम उन के लिए आसमान में कोई दरवाज़ा खोल दें फिर ये दिन के वक़्त उस में चढ़ जाएं तब भी यह कहदें कि हमारी नज़रबन्दी कर दी गई थी बल्कि हम लोगों पर तो बिल्कुल जादू कर रक्खा है । नोटः- यहां यह भी मालूम हुआ कि हर गिरोह का पैग़म्बर उसी गिरोह के लोगो में से भेजा गया ताकि लोगों को उस पर भरोसा करना आसान हो । और ये पैग़म्बर भी उनके मिज़ाज को जानकर उनके सुधार के लिए सही प्रोग्राम बना सकें । ولقد جعلنا في السماء بروجاؤ زينها النظرين ل وحفظنها من كل شيطن رجيم في الأمن استرق الشمع فاتبعه شهاب مبين و الأرض مددنها و القينا فيها رواستی و انبتنا فيها من كل شيء موزون و جعلنا لكم فيها معايش ومن لستم له برزقين و إن من شيء إلا عندنا خزانه و ما ننزلة إلا بقدر معلوم शून्य و ارسلنا الريح لواقح فانزلنا من السماء ماء فاسقينكمون وما انتم له بخزنين و إنا لنحن نخی و نميت و نحن الورثون و لقد علمنا المستقدمين منكم و لقد علمنا المستأخرين و إن ربك هو يحشرهم - إنه حكيم عليم आयत नशून्य सोलह से पच्चीस और बेशक हमने आसमान में बड़े-बड़े सितारे पैदा किये और देखने वालों के लिए आसमान को सजाया और उस की हर शैतान मरदूद से हिफाज़त की हां मगर कोई बात चोरी छुपे सुन भागे तो उस के पीछे एक चमकता अंगारा होता है और हमने ज़मीन को फैला दिया और उस में भारी-भारी पहाड़ रख दिये और उसमें हर किस्म की एक ख़ास अन्दाज़ से उगाई और हमने तुम्हारे वास्ते उस में रोज़गार के सामान बनाए और उन को भी दिया जिन को तुम रोज़ी नहीं देते और जितनी चीजें हैं हमारे पास सब के ख़ज़ाने के ख़ज़ाने हैं, और हम उस को एक ख़ास हिसाब से उतारते रहते हैं और हम ही हवाओं को भेजते रहते हैं जो बादल को पानी से भर देती हैं फिर हम ही आसमान से पानी बरसाते हैं फिर वो पानी तुम को पीने को देते हैं और तुम उस को जमा करके रखने वाले न थे और हम है कि ज़िन्दगी देते हैं और मौत देते हैं और हम ही बाकी रह जाएंगे और हम ही जानते हैं तुम में से आगे बढ़ जाने वालों को और हम जानते हैं पीछे रह जाने वालों को और बेशक आप का रब ही इन सब को जमा करेगा, बेशक वो हिकमत वाला है इल्म वाला है । नोटः- आगे बढ़ जाने वालों से मुराद नेक कामों में आगे बढ़ जाने वाले लोग हैं । हदीस में है कि अगर लोगों को मालूम हो जाता कि अज़ान कहने और नमाज़ की पहली सफ़ में खड़े होने की कितनी बड़ी फ़ज़ीलत है तो सभी आदमी इसकी कोशिशश में लग जाते कि पहली ही सफ़ में खड़े हों और सबके लिए जगह न होती तो कुरा अन्दाज़ी करनी पड़ती यानी लाटरी डालनी पड़ती । ولقد خلقنا الإنسان من صلصال من حيا مسنون والجان خلقته من قبل من نار الشهوم و و إذ قال ربك للمليكة إني خالق بشرا من صلصال من حيا مسنون فإذا سويته و نفخت فيه من روی فقعوا له سجدين و فسجد المليكة كلهم أجمعون إلا إبليس أبى أن يكون مع الشجيين © قال يابليس ما لك الا تكون مع الشجيين قال لم أكن لأسجد لبشر خلقته من صلصال من حما مسنون قال فاخرج منها فائك رجيم لي و إن عليك اللعنة إلى يوم الدين © قال رب فانظري إلى يوم يبعثون قال فائك من المنظرين तीन إلى يوم الوقت المعلوم © قال رب بما أغويتني لأزينت لهم في الأرض و لأغوينهم أجمعين و إلا عبادك منهم المخلصين و قال هذا صراط على مستقيم शून्य ان عبادي ليس لك عليهم سلطن الامن اتبعك من الغوين و إن جهنم لموعدهم اجمعين لها و و و و و و و و आयत नशून्य छब्बीस से चौंतालीस और हमने इन्सान को गारे के ख़मीर की खनखनाती मिट्टी से पैदा किया और जिन्नात को उस के पहले आग से कि वो एक गर्म हवा थी पैदा कर चुके थे और वो वक़्त याद कीजिए जब आप के रब ने फ़रिशतों से कहा कि मैं एक इन्सान को गारे के ख़मीर की बजती हुई मिट्टी से पैदा करने वाला हूं तो मैं जब उस को पूरा बना चुकूं और उसमें अपनी जान डाल दूं तो सब उसके सामने सजदे में गिर जाना सो सारे के सारे रिशतों ने सजदा किया सिवाए इबलीस के, कि उसने इस बात को न माना कि सजदा करने वालों के साथ शामिल हो अल्लाह तआला ने कहा ऐ इबलीस तू किस लिए सजदा करने वालों में शामिल न हुआ कहने लगा कि मैं ऐसा नहीं कि इन्सान को सजदा करूं जिस को आपने गारे के ख़मीर की बजती हुई मिट्टी से पैदा किया है कहा तो आसमान से निकल क्यूंकि बेशक तू मरदूद हो गया और बेशक तुझ पर लानत क़ियामत तक रहेगी कहने लगा या रब तो फिर मुझ को मुहलत दीजिए क़ियामत के दिन तक कहा तो तुझ को मुहलत देदी गई ऐसे दिन तक जो हमें पता है कहने लगा या रब मेरे क्योंकि आप ने मुझ को गुमराह किया है मैं क़सम खाता हूं कि मैं दुनिया में उनकी नज़र में गुनाह को अच्छा करके दिखाऊंगा और उन सब को गुमराह करूंगा सिवाए आप के उन बन्दों के जो उन में चुन लिये गये हैं कहा कि यह एक सीधा रास्ता है जो मुझ तक पहुंचता है बेशक मेरे उन बन्दों पर तेरा ज़रा भी बस न चलेगा सिवाए उन गुमराह लोगों के जो तेरी राह पर चलने लगें और उन सब का ठिकाना जहन्नम है जिस के सात दरवाज़े हैं, हर दरवाज़े के लिए उन लोगों के अलग-अलग हिस्से हैं । नोटः- अल्लाह के नेक बन्दों पर शैतान का ऐसा असर नहीं होता कि वो अपनी ग़लती पर किसी वक़्त भी तौबा न करें । إن المتقين في جنت و عيون و أدخلوها بسلم امنين و نزعنا ما في صدورهم من غل إخوانا على © سرر متقبلين ولا يمسهم فيها نصب و ماهم منها بمخرجين و نبی عبادي اني انا الغفور الرحيم * و ان عذابى هو العذاب الأليم © आयत नशून्य पैंतालीस से पचास बेशक अल्लाह तआला से डरने वाले बाग़ों और झरनों में होंगे तुम इन में सलामती और अमन के साथ दाख़िल हो जाओ और उन के दिलों में जो नाराज़गी थी हम वो सब दूर कर देंगे कि भाई-भाई की तरह रहेंगे तख़्तों पर आमने सामने बैठा करेंगे वहां उन को TIT: चौदह HT ज़रा भी तकलीफ़ न पहुंचेगी और न वहां से निकाले जाएंगे आप मेरे बन्दों को ख़बर दे दीजिए कि मैं बड़ा मुआफ़ करने वाला और रहमत वाला हूं और यह कि मेरी सज़ा दर्दनाक सज़ा है । नोटः- दुनिया की सैर तफरीह से इन्सान कभी न कभी थक जाता है चाहे कितनी ही मज़ेदार हो लेकिन जन्नत में कभी थकान न होगी । और न वहां की नेमतें कभी ख़त्म होगीं और न वहां से कभी उस को निकाला जाएगा। ونهم عن ضيف إبرهيم ن إذ دخلوا عليه فقالوا سلما قال انا منكم وجنون و قالوا لا تؤجل إنا نبشرك بغلم عليه و قال ابشرتهوني على أن تمشيني الكبر فيم تبشرون قالوا بشرنك بالحق فلا تكن من الفنيين و قال ومن يقنط من رحمة ربة إلا القانون و قال فما خطبكم ايها المرسلون قالوا إنا أرسلنا إلى قوم مجرمين إلا آل لوط إنا لمنجوهم أجمعين * إلا امراته قدرنا إنّها لين الغيرين في فلما جاء ال لوط المرسلون لي قال إنكم قوم منكرون قالوا بل جئنك بما كانوا فيه يمترون و اتيناك بالحق و انا لصيقون فأسر بأهلك بقطع من اليل و التبغ أدبارهم ولا يلتفت منكم احد و امضوا حيث تؤمرون وقضينا إليه ذلك الأمر أن دابر هؤلاء مقطوع مصبحين शून्य وجاء أهل المدينة يستبشرون و قال إن هؤلاء ضيفي فلا تفضحون واتقوا الله ولا تخزون قالوا أو لم تنهك عن العلمين و قال هؤلاء بنتي إن كنتم فعلين لعمرك إنهم لفي سكرتهم يعمهون فاخذتهم الصيحة مشرقين و فجعلنا عاليها سافلها و أمطرنا عليهم حجارة من سجيل إن في ذلك لايت للمتوسمين و إنها ليسبيل مقيمه إن في ذلك لاية और आप इन को इब्राहीम के महमानों की भी ख़बर दीजिए जब कि वो उनके पास आए फिर उन्होंने सलाम किया, इब्राहीम कहने लगे कि हमें तो तुम से डर लग रहा है उन्होंने कहा कि आप डरें नहीं क्योंकि हम आप को एक बेटे की खुशख़बरी देते हैं जो बड़ा आलिम होगा इब्राहीम कहने लगे कि क्या तुम मुझ को इस हालत में खुशख़बरी देते हो कि मुझ पर बुढ़ापा आ गया तो किस चीज़ की खुशख़बरी देते हो वो बोले कि हम आप को सच्ची बात की खुशख़बरी देते हैं सो आप नाउम्मीद न हों इब्राहीम ने कहा कि भला अपने रब की रहमत से कौन ना उम्मीद होता है सिवाए गुमराह लोगों के कहने लगे तो अब तुम को क्या ख़ास काम है ऐ फ़रिशतो ! फरिशतों ने कहा कि हम एक मुजरिम क़ौम की तरफ भेजे गये हैं मगर लूत का ख़ानदान कि हम उन सब को बचा लेंगे सिवाए उन की बीवी के कि उस के बारे में हम ने तय कर रक्खा है कि वो ज़रूर उसी मुजरिम क़ौम में रह जाएगी फिर जब वो फ़रिशते लूत के ख़ानदान वालों के पास आए कहने लगे तुम तो अजनबी आदमी हो उन्होंने कहा नहीं बल्कि हम आप के पास वो चीज़ लेकर आए हैं जिसमें ये लोग शक किया करते थे और हम आपके पास अटल फैसला लेकर आए हैं और हम बिल्कुल सच्चे हैं सो आप रात के किसी हिस्से में अपने घर वालों को लेकर चले जाइये और आप सब के पीछे हो लीजिए और तुम में से कोई पीछे मुड़ कर भी न देखे और जिस जगह तुम को हुक्म हुआ है उस तरफ़ सब के सब चले जाओ और हमने लूत के पास यह हुक्म भेजा कि सुबह होते ही उन की जड़ कट जाएगी और शहर के लोग बहुत खुशियां मनाते हुए आपहुंचे लूत ने कहा कि ये लोग मेरे महमान हैं मुझ को रूसवा न करो तुम अल्लाह से डरो और मुझ को ज़लील मत करो वो कहने लगे क्या हम आप को दुनिया भर के लोगों को अपना महमान बनाने ) से मना नहीं कर चुके लूत ने कहा कि तुम्हारी ज़रूरत पूरी करने के लिए) ये मेरी बेटियां मौजूद हैं अगर तुम मेरा कहना मानो आप की जान की क़सम सच यह है कि वो अपनी मस्ती में अन्धे बने हुए थे बस सूरज निकलते-निकलते उन को सख़्त आवाज़ ने आदबाया फिर हम ने उन बस्तियों का ऊपर का तख़्ता नीचे कर दिया और उन लोगों पर कंकर के पत्थर बरसाए इस क़िस्से में बहुत सी निशानियां है सबक लेने वालों के लिए और ये बस्तियां सीधे रास्ते पर हैं बेशक इस में ईमान वालों के लिए बड़ी निशानी है । नोटः- किसी इन्सान को जाइज़ नहीं कि वो अल्लाह के सिवा किसी और की क़सम खाए क्योंकि कुसम उसकी खाई जाती हैं जिसको सब से ज़्यादा बड़ा समझा जाए और ज़ाहिर है सबसे ज़्यादा बड़ा सिर्फ अल्लाह तआला ही हो सकता है। लेकिन अल्लाह तआला अपनी मखलूक में से किसी की कुसम खा सकते हैं जिससे उस चीज़ की बड़ाई ज़ाहिर होती है तो यहां मालूम हुआ कि अल्लाह के नज़दीक आपका बड़ा रूतबा है। जो आपकी जान की क़सम खाई है। و إن كان أصحب الأيكة لطيبين لي فانتقمنا منهم وإنهما ليامام مبين ، و لقد كذب أصحب الحجر المرسلين و اتينهم ايتنا فكانوا عنها معرضين ل و كانوا ينحثون من الجبال بيوتا و منين فأخذتهم الضيحة مصبحين * فما أغنى عنهم ما كانوا يكسبون * و ما خلقنا السموت و الأرض وما بينهما إلا بالحق و ان الشاعة لاتية فاصفح الصفح الجميل و إن ربك هو الخلق العليم © आयत नशून्य अठहत्तर से छियासी और ऐका वाले बड़े ज़ालिम थे सो हमने उन से बदला लिया , और दोनो बस्तियां साफ सड़क पर हैं और हिज्र वालों ने पैग़म्बरों को झूटा बताया और हमने उनको अपनी तरफ से ) निशानियां दीं तो वो लोग उन से मुंह मोड़े रहे और वो लोग पहाड़ों को तराश - तराश कर उनमें घर बनाते थे कि अमन में रहें सो उन को सुबह के वक़्त सख़्त आवाज़ ने आ पकड़ा सो उनके हुनर उन के कुछ भी काम न आए और हम ने आसमानों को और ज़मीन को और उनके बीच की चीज़ों को बेवजह पैदा नहीं किया , और क़ियामत ज़रूर आने वाली है सो आप भलाई के साथ टाल दीजिए बेशक आप का रब सब को पैदा करने वाला जानने वाला है । ولقد اتيناك سبعا من المثاني والقرآن العظيم ولا تمدن عينيك إلى ما متعنا به أزواجا منهم و لا تحزن عليهم و اخفض جناحك للمؤمنين و قل إني أنا القدير المبين * كما انزلنا على المقتسمين الذين جعلوا القران عضين فوربك لنستلتهم أجمعين عنا كانوا يعملون فاصدع بما تؤمر و أعرض عن المشركين و إنا كفيناك المستهزءين و الذين يجعلون مع الله إلها أخر فسوف يعلمون ولقد تعلم انك يضيق صدرك بما يقولون و فسبح بحمد ربك و كن من الشجيين في واعبد ربك حتى يأتيك اليقين * आयत नशून्य सत्तासी से निन्यानवे और हमने आप को सात आयतें दीं जो बड़े दर्जे का कुरआन दिया है आप अपनी आंख उठा कर भी उस चीज़ को न देखिये जो कि हमने उन में से बहुत से लोगों को बरतने के लिए दे रक्खी है और उन पर ग़म न कीजिए और मुसलमानों पर महरबानी रखिए और कह दीजिए कि मैं तो ऐलानिया डराने वाला हूं जैसा हम ने उन लोगों पर भेजा जिन्होंने यानी आसमानी किताब के बहुत से हिस्से ठहरा दिये थे सो हम को आप के रब की कुसम हम इन सब से ज़रूर पूछताछ करेंगे कि क्या काम किये बस आप को जिस बात का हुक्म किया गया है उस को साफ़-साफ़ सुना दीजिए और अगर ये न मानें तो) उन मुशरिकों की परवा न कीजिए यकीन रक्खो हम आप की तरफ से काफी हैं जो हंसते हैं अल्लाह तआला के साथ दूसरा माबूद बनाते हैं, सो उन को अभी पता चल जाएगा और बेशक हम को पता है कि ये लोग जो बातें करते हैं उससे आप का जी घुटता है सो आप अपने रब की हम्द के साथ उस की तस्बीह करते रहिए और नमाज़े पढ़ने वालों में रहिए और अपने रब की इबादत करते रहिए यहां तक कि आप को मौत आजाए । नोटः- इन आयतों में सूरत फ़ातिहा को कुरआने अज़ीम कहने में इस तरफ इशारा है कि सूरत फ़ातिहा एक हैसियत से पूरा कुरआन है क्योंकि इस्लाम के सब उसूल इसमें समाए हुए हैं। हदीसः- हज़रत ज़ैद बिन अरक़म से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि जो आदमी इख़लास साथ लाइलाह इल्लल्लाह कहेगा वो ज़रूर जन्नत में जाएगा। लोगों ने पूछा या रसूलुल्लाह इस कलिमे में इख़लास का क्या मतलब है। आप ने फ़रमाया कि जब यह कलिमा इन्सान को अल्लाह की हराम की हुई बातों और नाजाइज़ कामों से रोक दे तो वो इख़लास के साथ है। सोलह- सूरत-नहल में 'सोलह' रूकू इस मक्की सूरत और 'एक सौ अट्ठाईस' आयतें हैं آتی آمر الله فلا تستعجلون سبحنة و تعلى عما يشركون ينزل المليكة بالروح من أمره على من يشاء من عبادة أن أنذروا أنه لا إله إلا أنا فاتقون خلق السموات والأرض بالحق تعلى عبا يشركون خلق الإنسان من نطفة فإذا هو خصيم مبين والأنعام خلقها لكم فيها دف و منافع و منها تأكلون ولكم فيها جمال حين تريحون وحين تسرحونة وتحيل أثقالكم إلى بكي لم تكونوا بلغيه إلا بشق الأنفس إن ربكم لرءوف رحيم ل والخيل والبغال والحمير لتركبوها و ويخلق ما لا تعلمون وعلى الله قصد السبيل ومنها جار ولو شاء لهلكم اجمعين زينة अल्लाह का हुक्म आ पहुंचा सो तुम इस में जल्दी मत मचाओ, वो लोगों के शिर्क से पाक और बहुत ऊंचा है वो अल्लाह तआला फ़रिशतों को वही यानी अपना हुक्म देकर अपने बन्दों में जिस पर चाहे भेजते हैं यह कि लोगों को ख़बरदार करदो कि मेरे सिवा कोई इबादत का हक़दार नहीं सो मुझसे ही डरते रहो आसमानों को और ज़मीन को हिकमत से बनाया, वो इनके शिर्क से पाक है इन्सान को मनी से बनाया फिर वो अचानक खुल्लम खुल्ला झगड़ने लगा और उसी ने जानवरों को बनाया जिन में तुम्हारे सर्दी का भी सामान है और भी बहुत से फाइदे हैं और उन में खाते भी हो और उनमें तुम्हारी शान भी है जब कि शाम के वक़्त लाते हो और जब कि सुबह के वक़्त ले जाते हो और वो तुम्हारे सामान भी ऐसे शहरों को ले जाते हैं जहां तुम बिना जान को मेहनत में डाले हुए नहीं पहुंच सकते थे, बेशक तुम्हारा रब बड़ी महरबानी वाला व रहमत वाला है और घोड़े और ख़च्चर और गधे भी पैदा किये ताकि उन पर सवारी करो और शान के लिए भी, और वो ऐसी ऐसी चीज़ें बनाता है जिन की तुम को ख़बर भी नहीं और सीधा रास्ता अल्लाह तक पहुंचता है और कुछ रास्ते टेढ़े भी हैं , और अगर अल्लाह चाहता तो तुम सब को सीधे रास्ते तक पहुंचा देता नोटः- मुशरिकों ने कहा था जिस अज़ाब और क़ियामत से हमें डराया जाता है हमें तो कुछ नज़र नहीं आता इस पर ये आयतें उतरीं कि अज़ाब का हुक्म नज़दीक आ पहुंचा है। هو الذي أنزل من السماء ماء لكم منه شراب و منه شجر فيه شيمون يثبت لكم به الزرع و الزيتون و النخيل والأعناب و من كل الثمرت إن في ذلك لآية لقوم يتفكرون وسخر لكم اليل و النّهار والشمس والقمر والنجوم مسخرت بأمره إن في ذلك لايت لقوم يعقلون وما ذرا لكم في الأرض مختلفا ألوانه إن في ذلك لاية يقوم يذكرون وهو الذي سخر البحر لتأكلوا منه لحما طريا و تستخرجوا منه حلية تلبسونها وترى الفلك مواخر فيه ولتبتغوا من فضله و لعلكم تشكرون و القى في الأرض رواسي أن تميد بكم و انهرا و سبلا لعلكم تهتدون و علمت وبالتجم هم يهتدون
ALLAHABAD: कच्ची उम्र में भुलई का पूरा मोहल्ला निवासी एक छात्र को न जाने कौन सी बात खटक गई, कि ट्रेन के सामने कूद कर उसने खुदकुशी कर ली। खोजते हुए पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे उसके भाई ने शव की शिनाख्त की। बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद परिजन उसके शव को घर ले गए। मामले में घरवाले चुप हैं, वहीं पुलिस सुसाइड की वजह आशनाई मान रही है। घटना शिवकुटी थाना क्षेत्र के आइईआरटी रेलवे क्रासिंग के पास की है। शिवकुटी थाना क्षेत्र के भुलई का पूरा मोहल्ला निवासी अशोक कुमार कानपुर विकास प्राधिकरण में चतुर्थ श्रेणी के पद पर तैनात हैं। उनके तीन बेटों में विशाल सबसे छोटा था, और अभी पढ़ाई कर रहा था। पुलिस की पूछताछ में परिजनों ने बताया है कि मंगलवार की शाम करीब पांच बजे विशाल यह बताकर निकला था कि वह टहलने जा रहा है, कुछ देर बाद घर लौट आएगा। घंटों बाद भी जब वे वापस नहीं लौटा तो परिजन तलाश में जुट गए। तलाश में उकसा कहीं पर कुछ पता नहीं चला। इसके बाद थकहार कर परिजनों ने मंगलवार की देर शाम शिवकुटी थाने बेटे के गुम होने की तहरीर दी। देर रात उसे खोजते हुए परिजन कर्नलगंज थाने पहुंच गए। पुलिस ने उन्हें बताया कि रेलवे लाइन पर एक युवक का शव मिला है। बुधवार को पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे उसके बड़े भाई अखिलेश ने शव की शिनाख्त की। परिजनों को यह बात समझ नहीं आ रही कि आखिर विशाल कौन सी वजह थी जिसके चलते सुसाइड कर लिया। मृतक के जेब से महिलाओं से संबंधित कुछ वस्तु मिली है। घटना की जांच की जा रही है। फिलहाल प्रथम दृष्टया उसकी मौत को आशनाई से जोड़कर देखा जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
ALLAHABAD: कच्ची उम्र में भुलई का पूरा मोहल्ला निवासी एक छात्र को न जाने कौन सी बात खटक गई, कि ट्रेन के सामने कूद कर उसने खुदकुशी कर ली। खोजते हुए पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे उसके भाई ने शव की शिनाख्त की। बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद परिजन उसके शव को घर ले गए। मामले में घरवाले चुप हैं, वहीं पुलिस सुसाइड की वजह आशनाई मान रही है। घटना शिवकुटी थाना क्षेत्र के आइईआरटी रेलवे क्रासिंग के पास की है। शिवकुटी थाना क्षेत्र के भुलई का पूरा मोहल्ला निवासी अशोक कुमार कानपुर विकास प्राधिकरण में चतुर्थ श्रेणी के पद पर तैनात हैं। उनके तीन बेटों में विशाल सबसे छोटा था, और अभी पढ़ाई कर रहा था। पुलिस की पूछताछ में परिजनों ने बताया है कि मंगलवार की शाम करीब पांच बजे विशाल यह बताकर निकला था कि वह टहलने जा रहा है, कुछ देर बाद घर लौट आएगा। घंटों बाद भी जब वे वापस नहीं लौटा तो परिजन तलाश में जुट गए। तलाश में उकसा कहीं पर कुछ पता नहीं चला। इसके बाद थकहार कर परिजनों ने मंगलवार की देर शाम शिवकुटी थाने बेटे के गुम होने की तहरीर दी। देर रात उसे खोजते हुए परिजन कर्नलगंज थाने पहुंच गए। पुलिस ने उन्हें बताया कि रेलवे लाइन पर एक युवक का शव मिला है। बुधवार को पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे उसके बड़े भाई अखिलेश ने शव की शिनाख्त की। परिजनों को यह बात समझ नहीं आ रही कि आखिर विशाल कौन सी वजह थी जिसके चलते सुसाइड कर लिया। मृतक के जेब से महिलाओं से संबंधित कुछ वस्तु मिली है। घटना की जांच की जा रही है। फिलहाल प्रथम दृष्टया उसकी मौत को आशनाई से जोड़कर देखा जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
Ranchi : बरही विधानसभा सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी उमाशंकर अकेला ने मंगलवार को अपने समर्थकों के साथ बाइक रैली निकाली. इस दौरान उनके हजारों समर्थक बाइक के साथ रैली में उपस्थित थे. रैली कई इलाकों से गुजरी जिसमें हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए. जनसभा को संबोधित करते हुए उमाशंकर अकेला लोगों से पिछले 5 साल बनाम 20 साल की विधायिकी की तुलना करने की बात कह रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस दौरान कितना विकास हुआ और कितना विनाश हुआ, जनता खुद निर्णय कर ले. उन्होंने कहा कि आप पायेंगे कि हमारा शासन काल उनसे बेहतर रहा है. श्री अकेला ने कहा कि वर्तमान समय में लूट खसोट की राजनीति हो रही है. हमने पानी की टंकी बनवायी. लेकिन अब तक पानी नहीं पहुंच रहा है. गरीबों की जमीन रियाडा ने कौड़ी के भाव से ले लिया. वहां उद्योग धंधे की जगह पर पेट्रोल पंप खोल दिया. यह कैसा उद्योग है. लेकिन इस पर आपके प्रतिनिधि ने ध्यान नहीं दिया. कांग्रेस प्रत्याशी ने लोगों से कहा कि क्षेत्र में कई समस्याएं अब तक बनी हुई हैं. जिनका निदान कर क्षेत्र की समस्याओं को दूर करने का पूरा प्रयास करूंगा. वे लोगों से अपील की कि एक बार बरही की जनता उन्हें मौका दे. बरही का विकास दिखेगा. गलत एवं शोषण करनेवालों को छोड़ा नहीं जायेगा. कई अधूरे काम बचे हैं. उन्हें पूरा किया जायेगा. उन्होंने वर्तमान विधायक पर ओऱ कई गंभीर आरोप भी लगाये.
Ranchi : बरही विधानसभा सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी उमाशंकर अकेला ने मंगलवार को अपने समर्थकों के साथ बाइक रैली निकाली. इस दौरान उनके हजारों समर्थक बाइक के साथ रैली में उपस्थित थे. रैली कई इलाकों से गुजरी जिसमें हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए. जनसभा को संबोधित करते हुए उमाशंकर अकेला लोगों से पिछले पाँच साल बनाम बीस साल की विधायिकी की तुलना करने की बात कह रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस दौरान कितना विकास हुआ और कितना विनाश हुआ, जनता खुद निर्णय कर ले. उन्होंने कहा कि आप पायेंगे कि हमारा शासन काल उनसे बेहतर रहा है. श्री अकेला ने कहा कि वर्तमान समय में लूट खसोट की राजनीति हो रही है. हमने पानी की टंकी बनवायी. लेकिन अब तक पानी नहीं पहुंच रहा है. गरीबों की जमीन रियाडा ने कौड़ी के भाव से ले लिया. वहां उद्योग धंधे की जगह पर पेट्रोल पंप खोल दिया. यह कैसा उद्योग है. लेकिन इस पर आपके प्रतिनिधि ने ध्यान नहीं दिया. कांग्रेस प्रत्याशी ने लोगों से कहा कि क्षेत्र में कई समस्याएं अब तक बनी हुई हैं. जिनका निदान कर क्षेत्र की समस्याओं को दूर करने का पूरा प्रयास करूंगा. वे लोगों से अपील की कि एक बार बरही की जनता उन्हें मौका दे. बरही का विकास दिखेगा. गलत एवं शोषण करनेवालों को छोड़ा नहीं जायेगा. कई अधूरे काम बचे हैं. उन्हें पूरा किया जायेगा. उन्होंने वर्तमान विधायक पर ओऱ कई गंभीर आरोप भी लगाये.
वाराणसी में दोपहर 12 बजे के बाद चार घंटे तक मौसम सामान्य रहा, मगर उसके बाद थोड़ी हवा चली और बादल घिरे। मगर उसके बाद फिर से मौसम सामान्य हो गया। हालांकि धूप बिल्कुल भी नहीं ळे। आज दोपहर 12 बजे तक वाराणसी में रिकॉर्ड 66 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। बीते 10 साल में दूसरा मौका है जब वाराणसी में एक दिन में इतनी ज्यादा बारिश हुई है। इससे पहले साल 2015 में 103 मिलीमीटर दर्ज की गई थी। मौसम विज्ञान विभाग का अनुमान है कि आज भी पूरे दिन बारिश हो सकती है। इससे पहले मंगलवार को रात तक 53 मिलीमीटर तक दर्ज की गई। मंगलवार को बिजली कड़कने और बादल की गर्जना के साथ बारिश हुई। मौसम विज्ञान विभाग का कहना है कि अब यह बारिश रुकने वाली नहीं है। 30 जून तक बारिश ऐसे होगी। उसके बाद थोड़ी कम हो सकती है। अब 3 जुलाई तक धूप दिखने की उम्मीद कम ही है। यह मानसून सोनभद्र के रास्ते उत्तर प्रदेश में किया है। अब यह पश्चिमी की ओर बढ़ने लगा है। मंगलवार को वाराणसी का मैक्सिमम टेंपरेचर 39 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। यह सामान्य से 3 डिग्री सेल्सियस ज्यादा है। इसके साथ ही वाराणसी का मिनिमम टेंपरेचर 29. 1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह सामान्य से 2 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा। वाराणसी में इस समय हवा शांत है। मंगलवार को यह 15 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी। आज हवा में 98% तक नमी रिकॉर्ड की गई। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक प्रो. मनोज कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि यह बारिश थाेड़ी लंबी है। धीरे-धीरे ही सही, लेकिन काफी बारिश हो जाएगी। तीन जुलाई के बाद धूप निकल सकती है और मौसम कुछ दिन गर्मी वाला होगा। बारिश के बाद वाराणसी का एयर पॉल्यूशन कम हो गया है। आज शहर में AQI यानी कि एयर क्वालिटी इंडेक्स 47 प्वाइंट है। वाराणसी की हवा आज गुड कैटेगिरी में आ गई है। आज वाराणसी का सबसे कम प्रदूषित इलाका भेलूपुर है। यहां का AQI 36 अंक है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
वाराणसी में दोपहर बारह बजे के बाद चार घंटे तक मौसम सामान्य रहा, मगर उसके बाद थोड़ी हवा चली और बादल घिरे। मगर उसके बाद फिर से मौसम सामान्य हो गया। हालांकि धूप बिल्कुल भी नहीं ळे। आज दोपहर बारह बजे तक वाराणसी में रिकॉर्ड छयासठ मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। बीते दस साल में दूसरा मौका है जब वाराणसी में एक दिन में इतनी ज्यादा बारिश हुई है। इससे पहले साल दो हज़ार पंद्रह में एक सौ तीन मिलीमीटर दर्ज की गई थी। मौसम विज्ञान विभाग का अनुमान है कि आज भी पूरे दिन बारिश हो सकती है। इससे पहले मंगलवार को रात तक तिरेपन मिलीमीटर तक दर्ज की गई। मंगलवार को बिजली कड़कने और बादल की गर्जना के साथ बारिश हुई। मौसम विज्ञान विभाग का कहना है कि अब यह बारिश रुकने वाली नहीं है। तीस जून तक बारिश ऐसे होगी। उसके बाद थोड़ी कम हो सकती है। अब तीन जुलाई तक धूप दिखने की उम्मीद कम ही है। यह मानसून सोनभद्र के रास्ते उत्तर प्रदेश में किया है। अब यह पश्चिमी की ओर बढ़ने लगा है। मंगलवार को वाराणसी का मैक्सिमम टेंपरेचर उनतालीस डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। यह सामान्य से तीन डिग्री सेल्सियस ज्यादा है। इसके साथ ही वाराणसी का मिनिमम टेंपरेचर उनतीस. एक डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह सामान्य से दो डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा। वाराणसी में इस समय हवा शांत है। मंगलवार को यह पंद्रह किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी। आज हवा में अट्ठानवे% तक नमी रिकॉर्ड की गई। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक प्रो. मनोज कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि यह बारिश थाेड़ी लंबी है। धीरे-धीरे ही सही, लेकिन काफी बारिश हो जाएगी। तीन जुलाई के बाद धूप निकल सकती है और मौसम कुछ दिन गर्मी वाला होगा। बारिश के बाद वाराणसी का एयर पॉल्यूशन कम हो गया है। आज शहर में AQI यानी कि एयर क्वालिटी इंडेक्स सैंतालीस प्वाइंट है। वाराणसी की हवा आज गुड कैटेगिरी में आ गई है। आज वाराणसी का सबसे कम प्रदूषित इलाका भेलूपुर है। यहां का AQI छत्तीस अंक है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
इस मुद्दे पर बात बिगड़ती गई और दोनों भाइयों के बीच विवाद बढ़ गया। इस बीच वहां पहुंचे श्यामसुंदर का बेटा आशीष और छोटे भाई गंगाराम का बेटा अंशू ने श्यामसुंदर के साथ मिलकर हरिराम को पीट-पीट कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। पति की पिटाई की खबर मिलने पर पहुंची हरिराम की पत्नी नन्ही देवी ने उसे किसी तरह आरोपियों से बचाया गया और इलाज के लिए असोहा सीएचसी में भर्ती कराया, जहां उपचार के दौरान बुधवार सुबह हरिराम की मौत हो गई। मामले की सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा और आरोपी भाई और भतीजों की तलाश में जुट गई है।
इस मुद्दे पर बात बिगड़ती गई और दोनों भाइयों के बीच विवाद बढ़ गया। इस बीच वहां पहुंचे श्यामसुंदर का बेटा आशीष और छोटे भाई गंगाराम का बेटा अंशू ने श्यामसुंदर के साथ मिलकर हरिराम को पीट-पीट कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। पति की पिटाई की खबर मिलने पर पहुंची हरिराम की पत्नी नन्ही देवी ने उसे किसी तरह आरोपियों से बचाया गया और इलाज के लिए असोहा सीएचसी में भर्ती कराया, जहां उपचार के दौरान बुधवार सुबह हरिराम की मौत हो गई। मामले की सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा और आरोपी भाई और भतीजों की तलाश में जुट गई है।
जनजातीय मामले मंत्री श्री अर्जुन मुंडा ने आज नई दिल्ली में 'जनजातीय आजीविकाओं एवं सुरक्षा' पर राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस आयोजित की। बैठक में 20 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों, उप मुख्यमंत्रियों, जनजातीय मामले राज्य मंत्रियों तथा वन राज्य मंत्रियों के अतिरिक्त राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया। जनजातीय मामले राज्य मंत्री श्रीमती रेणुका सिंह सरुता, जनजातीय मामले मंत्रालय में सचिव श्री दीपक खांडेकर, ट्राइफेड के एमडी श्री प्रवीर कृष्णा एवं जनजातीय मामले मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए श्री अर्जुन मुंडा ने राज्यों को संशोधित समर्थन मूल्यों पर गौण वन ऊपज (एमएफपी) की खरीद में तेजी लाने के द्वारा जनजातीय आजीविका को समर्थन देने के लिए राज्यों को बधाई दी। 1 मई, 2020 से, जब से 50 मदों के लिए एमएफपी हेतु एमएसपी को संशोधित किया गया था, 17 राज्यों द्वारा 40 करोड़ रुपये तक की खरीद कर ली गई है। पांच और राज्य जल्द ही खरीद की प्रक्रिया आरंभ कर देंगे। श्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि एमएफपी जनजातीय आबादी के लिए आजीविका के एक प्रमुख माध्यम के रूप में उभरा है और सरकार यह सुनिश्चित करने का सभी संभव प्रयास कर रही है कि जनजातीय लोगों को उनके उत्पादों के लिए सही मूल्य प्राप्त हो। उन्होंने शेष राज्यों से भी जल्द ही सच्ची तत्परता से एमएफपी की खरीद आरंभ करने का आग्रह किया। जनजातीय मामले मंत्री श्री अर्जुन मुंडा ने राज्यों में प्रधानमंत्री की वन धन योजना के कामकाज की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि जनजातीय ऊपज को वैश्विक बाजार से जोड़ने के लिए मूल्य वर्धन की आवश्यकता है जोकि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का दीर्घकालिक विजन है। उन्होंने कहा कि वनधन केंद्र एवं जनजातीय ऊपज के मूल्य वर्धन तथा विपणन के लिए आवश्यक अवसंरचना सुविधाओं की राज्यों में जनजातीय मामले मंत्रालय द्वारा सहायता की जा रही है और इस संबंध में राज्यों की अन्य आवश्यकताओं की भी पूर्ति की जाएगी। उन्होंने जैविक प्रकृति के ग्रामीण उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक ले जाने के लिए एक बाजार श्रृंखला विकसित करने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया। श्री अर्जुन मुंडा ने कोविड-19 द्वारा उत्पन्न स्थिति के बाद घर लौटने वाले जनजातीय प्रवासियों/छात्रों के लिए राज्यों द्वारा की जाने वाली कार्रवाई की भी समी़क्षा की। मंत्री ने कहा कि वीडीवीके तथा उचित समर्थन मूल्य के माध्यम से मूल्य वर्धन तथा विपणन के साथ गौण वन ऊपज को दिया गया बढ़ावा प्रवासियों के लिए अतिरिक्त आजीविका अर्जित करने में वरदान साबित होगा जो इस नाजुक समय में घर लौट रहे है। जनजातीय मामले राज्य मंत्री श्रीमती रेणुका सिंह सरुता ने विभिन्न राज्यों से लौटने वाले जनजातीय लोगों को रोजगार देने के लिए ग्राम स्तर पर लघु स्तर की इकाइयों की स्थापना करने और जनजातीयों के बीच अंतनिर्हित पारंपरिक ज्ञान का लाभ उठाने की आवश्यकता की अनुशंसा की। विभिन्न राज्यों ने वन धन केंद्रों, स्वयं सहायता समूहों एवं जनजातीय ऊपज के विपणन के जरिये आजीविका एवं रोजगार सृजन में सहायता के लिए केंद्र सरकार के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। वन धन केंद्रो से बहुत अच्छे आरंभिक परिणाम प्राप्त करने के बाद लगभग सभी राज्यों ने अपने राज्यों में वन धन केंद्रां को दोगुना किए जाने का आग्रह किया है। उन्होंने अपने राज्यों में उपलब्ध गौण वन ऊपज की किस्मों एवं लाभों तथा किस प्रकार एमएसपी में बढोतरी ने एमएफपी की खरीद को सुगम बनाने में सहायता की है, को भी रेखांकित किया। कुछ राज्यों ने कोविड 19 के बाद जनजातीयों द्वारा बनाये गए हैंड सैनिटाइजर एवं फेस मास्क जैसे उत्पादों को भी प्रदर्शित किया जिनकी आपूर्ति स्थानीय समुदायों एवं रेलवे जैसी राज्य एजेन्सियों को की जा रही है। ट्राइफेड के एमडी श्री प्रवीर कृष्णा ने वन धन केंद्रों की स्थापना के संबंध में अलग अलग राज्यों के प्रदर्शन पर प्रस्तुति दी। श्री प्रवीर कृष्णा ने खुलासा किया कि राज्य एजेन्सियों द्वारा एमएफपी के 40 करोड़ रुपये के बराबर की खरीद का परिणाम वन ऊपज के बाजार मूल्य में बढोतरी के रूप में आया है जिससे जनजातीयों को संशोधित लागत पर निजी व्यापारियों द्वारा खरीद के परिणामस्वरूप 300 करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ प्राप्त होगा। राज्यों में 1205 वन धन केंद्रों की स्थापना की गई है और इसने 18075 स्वयं सहायता समूहों के जरिये 3.75 लाख लाभार्थियों को फायदा हुआ है। अभी तक वीडीवीके की स्थापना के लिए लगभग 166 करोड़ रुपये की मंजूरी दी जा चुकी है। फोटो कैप्शन (जनजातीय मामले मंत्री श्री अर्जुन मुंडा ने 'जनजातीय आजीविकाओं एवं सुरक्षा ' पर राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों के साथ वीडियो कांफ्रेंस आयोजित की )
जनजातीय मामले मंत्री श्री अर्जुन मुंडा ने आज नई दिल्ली में 'जनजातीय आजीविकाओं एवं सुरक्षा' पर राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस आयोजित की। बैठक में बीस राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों, उप मुख्यमंत्रियों, जनजातीय मामले राज्य मंत्रियों तथा वन राज्य मंत्रियों के अतिरिक्त राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया। जनजातीय मामले राज्य मंत्री श्रीमती रेणुका सिंह सरुता, जनजातीय मामले मंत्रालय में सचिव श्री दीपक खांडेकर, ट्राइफेड के एमडी श्री प्रवीर कृष्णा एवं जनजातीय मामले मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए श्री अर्जुन मुंडा ने राज्यों को संशोधित समर्थन मूल्यों पर गौण वन ऊपज की खरीद में तेजी लाने के द्वारा जनजातीय आजीविका को समर्थन देने के लिए राज्यों को बधाई दी। एक मई, दो हज़ार बीस से, जब से पचास मदों के लिए एमएफपी हेतु एमएसपी को संशोधित किया गया था, सत्रह राज्यों द्वारा चालीस करोड़ रुपये तक की खरीद कर ली गई है। पांच और राज्य जल्द ही खरीद की प्रक्रिया आरंभ कर देंगे। श्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि एमएफपी जनजातीय आबादी के लिए आजीविका के एक प्रमुख माध्यम के रूप में उभरा है और सरकार यह सुनिश्चित करने का सभी संभव प्रयास कर रही है कि जनजातीय लोगों को उनके उत्पादों के लिए सही मूल्य प्राप्त हो। उन्होंने शेष राज्यों से भी जल्द ही सच्ची तत्परता से एमएफपी की खरीद आरंभ करने का आग्रह किया। जनजातीय मामले मंत्री श्री अर्जुन मुंडा ने राज्यों में प्रधानमंत्री की वन धन योजना के कामकाज की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि जनजातीय ऊपज को वैश्विक बाजार से जोड़ने के लिए मूल्य वर्धन की आवश्यकता है जोकि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का दीर्घकालिक विजन है। उन्होंने कहा कि वनधन केंद्र एवं जनजातीय ऊपज के मूल्य वर्धन तथा विपणन के लिए आवश्यक अवसंरचना सुविधाओं की राज्यों में जनजातीय मामले मंत्रालय द्वारा सहायता की जा रही है और इस संबंध में राज्यों की अन्य आवश्यकताओं की भी पूर्ति की जाएगी। उन्होंने जैविक प्रकृति के ग्रामीण उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक ले जाने के लिए एक बाजार श्रृंखला विकसित करने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया। श्री अर्जुन मुंडा ने कोविड-उन्नीस द्वारा उत्पन्न स्थिति के बाद घर लौटने वाले जनजातीय प्रवासियों/छात्रों के लिए राज्यों द्वारा की जाने वाली कार्रवाई की भी समी़क्षा की। मंत्री ने कहा कि वीडीवीके तथा उचित समर्थन मूल्य के माध्यम से मूल्य वर्धन तथा विपणन के साथ गौण वन ऊपज को दिया गया बढ़ावा प्रवासियों के लिए अतिरिक्त आजीविका अर्जित करने में वरदान साबित होगा जो इस नाजुक समय में घर लौट रहे है। जनजातीय मामले राज्य मंत्री श्रीमती रेणुका सिंह सरुता ने विभिन्न राज्यों से लौटने वाले जनजातीय लोगों को रोजगार देने के लिए ग्राम स्तर पर लघु स्तर की इकाइयों की स्थापना करने और जनजातीयों के बीच अंतनिर्हित पारंपरिक ज्ञान का लाभ उठाने की आवश्यकता की अनुशंसा की। विभिन्न राज्यों ने वन धन केंद्रों, स्वयं सहायता समूहों एवं जनजातीय ऊपज के विपणन के जरिये आजीविका एवं रोजगार सृजन में सहायता के लिए केंद्र सरकार के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। वन धन केंद्रो से बहुत अच्छे आरंभिक परिणाम प्राप्त करने के बाद लगभग सभी राज्यों ने अपने राज्यों में वन धन केंद्रां को दोगुना किए जाने का आग्रह किया है। उन्होंने अपने राज्यों में उपलब्ध गौण वन ऊपज की किस्मों एवं लाभों तथा किस प्रकार एमएसपी में बढोतरी ने एमएफपी की खरीद को सुगम बनाने में सहायता की है, को भी रेखांकित किया। कुछ राज्यों ने कोविड उन्नीस के बाद जनजातीयों द्वारा बनाये गए हैंड सैनिटाइजर एवं फेस मास्क जैसे उत्पादों को भी प्रदर्शित किया जिनकी आपूर्ति स्थानीय समुदायों एवं रेलवे जैसी राज्य एजेन्सियों को की जा रही है। ट्राइफेड के एमडी श्री प्रवीर कृष्णा ने वन धन केंद्रों की स्थापना के संबंध में अलग अलग राज्यों के प्रदर्शन पर प्रस्तुति दी। श्री प्रवीर कृष्णा ने खुलासा किया कि राज्य एजेन्सियों द्वारा एमएफपी के चालीस करोड़ रुपये के बराबर की खरीद का परिणाम वन ऊपज के बाजार मूल्य में बढोतरी के रूप में आया है जिससे जनजातीयों को संशोधित लागत पर निजी व्यापारियों द्वारा खरीद के परिणामस्वरूप तीन सौ करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ प्राप्त होगा। राज्यों में एक हज़ार दो सौ पाँच वन धन केंद्रों की स्थापना की गई है और इसने अट्ठारह हज़ार पचहत्तर स्वयं सहायता समूहों के जरिये तीन.पचहत्तर लाख लाभार्थियों को फायदा हुआ है। अभी तक वीडीवीके की स्थापना के लिए लगभग एक सौ छयासठ करोड़ रुपये की मंजूरी दी जा चुकी है। फोटो कैप्शन
कारण वस्तुओंका मूल्य और भी चढ़ रहा था । अनाजकी कमी होनेसे कम उर्वर भूमिखण्ड जोते जाने लगे थे । मिल-मालिक सस्ते दामोंपर कच्चा माल चाहते थे और भू-स्वामी इसके लिए सचेष्ट थे कि उन्हें उनकी उपजका अच्छा पैसा मिले । यह सत्र क्यों हो रहा है ? ऐसो भयंकर स्थिति क्यों उत्पन्न हो गयो है ? - यह था वह मूलभूत प्रश्न, जो रिकार्डाके सामने मुँह बाये खड़ा था । जीवन परिचय डेबिड रिकार्डोका ज़न्म सन् १७७२ में लन्दननें हुआ । उसके माता-पिता हालैण्ड-निवासो यहूदी थे, पर इंग्लैण्डमें आकर बस गये थे । २० २१ वर्षको आयु में ही विवाह और धर्म परिवर्तन के प्रश्नको लेकर रिकार्डोका माता-पितासे मतभेद हो गया और वह स्वतंत्र रूपसे सका व्यापार करने लगा । पाँच वर्षके भीतर ही उसने २० लाख पौण्डकी सम्पत्ति अर्जित कर ली । उस युग में इतनी सम्पत्ति बहुत भारी मानी जाती थी । उसके बाद वह व्यापार छोड़कर अर्थशास्त्र के अध्ययन में प्रवृत्त हो गया । रिकार्डोका सबसे पहला निबन्ध सन् १८९० में प्रकाशित हुआ । उसका शीर्षक था - 'दि हाई प्राइस ऑफ बुलियन ए फ ऑफ दि डिप्रीसिएशन ऑफ बैंक नोट्स' । सन् १८१७ में उसकी प्रमुख पुस्तक 'ऑफ पोलिटिकल इकॉनॉमी एण्ड टेक्सेशन' प्रकाशित हुई । स्वयं व्यापारी एवं पूँजीपति होते हुए भी रिकार्डाको क्या पता था कि उसको यह पुस्तक पूँजोवादी भवनकी नींव ही हिला डालेगी । सन् १८१९ में रिकार्डो इंग्लैण्डको लोकसभा ( ससद् ) का सदस्य चुना गया । संसद्की कार्यवाहियोंमें वह सम्मिलित तो होता था, पर बोलता बहुत कम था; पर जब बोलता था, तो सारा सदन बड़े आदर और ध्यानसे उसकी बातें सुनता था । सन् १८२१ में उसने 'अर्थशास्त्र -गोष्ठी' को जन्म दिया । सन् १८२२ में 'प्रोटेक्शन ऑफ एग्रीकल्चर' नामक उसकी रचना प्रकाशित हुई । सन् १८२३ मं उसका देहान्त हो गया । १ जीद और रिस्ट : ए हिस्ट्री ऑफ इकॉनॉमिक डाक्ट्रिन्स, पृष्ठ १५५ । ( १ ) भाटक-सिद्धान्त ( २ ) मजुरी सिद्धान्त ( ३ ) लाभ-सिद्धान्त यद्यपि रिकार्डोके आर्थिक विचारों का क्षेत्र बहुत व्यापक रहा है, तथापि सुविधाको दृष्टिसे उसके विचारोंका इस प्रकार विभाजन किया जा सकता हैः १. वितरणके सिद्धान्त २. मूल्य सिद्धान्त ३. विदेशी व्यापार ४. बैंक तथा कागदी मुद्रा इसी क्रमसे रिकार्डोका अध्ययन करना अच्छा होगा । १. वितरण के सिद्धान्त रिकार्डो और मैल्थस समकालीन रहे हैं। दोनोंमें परस्पर मैत्री भी थी और पत्र व्यवहार भी होता रहता था । २० अक्तूवर १८२० को अपने एक पत्रने रिकार्डोने मैल्सको लिखा था : 'तुम शायद ऐसा सोचते हो कि सम्पत्तिके कारणों और उसकी प्रकृतिको शोध ही 'अर्थशास्त्र' है, पर मेरी दृष्टिमं 'अर्थशास्त्र उन नियमोंकी शोध कही जानी चाहिए, जो यह निर्णय करते हैं कि उद्योगनें जो उत्पत्ति होती है, उसका विभिन्न उत्पादक-वर्गीमें किस प्रकार वितरण किया जाय।' रिकार्डोके पहले अर्थशास्त्री उत्पादनकी समस्यापर सबसे अधिक बल दिया करते थे, पर रिकाडोंने वितरणको अध्ययनका प्रमुख विषय बनाया । तत्कालीन परिस्थितिका भी यही तकाजा था। रिकार्डोंने वितरणके महत्त्वको स्वीकारकर अर्थशास्त्रके एक बड़े अंगकी पूर्ति की । रिकाडीके पहले प्रकृतिवादियों तथा अदम स्मिथने उत्पादनकी समन्यापर विचार करके उसे इस स्थिति में पहुँचा दिया था कि उत्पादनके लिए तीन वस्तुओंकी आवश्यकता है - भूमि, श्रम और पूँजी । इन तीनों साधनोंको उत्पादित वस्तुका अंश मिलता है । भूमिको भाटक, श्रमको मजूरी और पूँजीको लाभके रूपमें यह अंश प्रात होता है । उत्पादक-वर्गको मिलनेवाला यह अंश किस सिद्धान्तके अनुसार प्राप्त होता है, इस प्रश्नका रिकार्डोसे पूर्व किसीने विधिवत् विवेचन नहीं किया था । इस कामको रिकार्डोंने अपने हाथमें लिया और वितरण के तीनों साधनों के लिए भाटकसिद्धान्त, मजुरी सिद्धान्त और लाभ-सिद्धान्तका प्रतिपादन किया । स्मिथ मानता था कि भूमिसे भाटक इसलिए मिलता है कि प्रकृति दयालु है और मनुष्य प्रकृतिके सहयोगसे काम करता है। मैल्थस मानता था कि जनसंख्या वृद्धि के साथ भूमिमें उत्पत्ति-हास नियम लागू होता है। रिकार्डोंने मध्यम मार्ग निकालकर इस सिद्धान्तका प्रतिपादन किया कि 'भाटक' उत्पत्तिका वह अंश है, जो भूमिकी स्थायी एवं अनश्वर शक्तियों के प्रतिफलस्वरूप भू-स्वामीको दिया जाता है । रिकार्डोका कहना था कि भूमिमें मौलिक, प्राकृतिक एवं अनश्वर शक्तियाँ हैं, फिर भी प्रकृतिकी दयालुता नहीं, अपितु कंजूसी ही भाटकका कारण है। जबतक प्रथम कोटिके भूमिखण्डों पर, जो अधिक उर्वर होते हैं, खेती की जाती हैं, तबतक भू-स्वामियोंको भाटक प्राप्त नहीं होता । जनसंख्या वृद्धि के कारण खाद्यान्नको माँग बढ़नेसे जब द्वितीय कोटिके अपेक्षाकृत कम उर्वर भूमिखण्डोंपर खेती की जाती है, तब प्रथम कोटिके भूमिखण्डोंके स्वामियोंको भाटक मिलने लगता है। रिकार्डोका मत है कि जहाँ जनसंख्या कम रहती हैं, वहाँ सबसे पहले वह भूमि जोती जाती है, जो सबसे उर्वरा होती है और उसकी जो उपज होती है, उसका सभी लोग उपभोग कर लेते हैं। ऐसी भूमिका बाहुल्य रहता है और इस कारण उससे निम्नकोटिकी भूमि जोती ही नहीं जाती । परन्तु जब जनसंख्यामें वृद्धि होती है, तो उपजका मूल्य बढ़ने लगता है और भू-स्वामीको लागतपर अतिरिक्त मिलने लगता है। लागतपर आयका अतिरेक हो 'भाटक' है । मूल्य वृद्धि के कारण अपेक्षाकृत कम उर्वरा भूमि जोतना भी लाभदायक सिद्ध होता है। कारण, उस स्थिति अपेक्षाकृत निम्न कोटिके भू-स्वामी भी अपनी उत्पत्तिको अधिक मूल्यपर बेचकर उत्पादनकी लागत प्राप्त कर सकते हैं । जनसंख्या में ज्यों-ज्यों वृद्धि होती चलती है, त्यों-त्यों निम्न और निम्नतर कोटिके भूमिखण्ड जोते जाने लगते हैं। उनमें अन्तिम कोटिवाले भूमिखण्डकोसीमान्त भूमिखण्डको छोड़कर शेष सभी भूमिखण्डोंपर अतिरेक या 'भाटक' मिलने लगता है । रिकार्डो कहता है कि जनसंख्या वृद्धि के कारण गल्लेकी माँगमें जो वृद्धि होती हैं, उसकी पूर्ति दो प्रकारकी खेती से की जा सकती है : ( १ ) विस्तृत खेती और ( २ ) गहरी खेती । विस्तृत खेती में कम उर्वरा भूमिकी उत्पत्ति तथा अधिक उर्वरा भूमिको उत्पत्तिका अन्तर 'भाटक' है । गहरी खेतीनें पुराने ही भूमिखण्डों पर अधिक श्रम और अधिक पूँजी लगायी जाती है। उसमें आगे चलकर उत्पत्ति
कारण वस्तुओंका मूल्य और भी चढ़ रहा था । अनाजकी कमी होनेसे कम उर्वर भूमिखण्ड जोते जाने लगे थे । मिल-मालिक सस्ते दामोंपर कच्चा माल चाहते थे और भू-स्वामी इसके लिए सचेष्ट थे कि उन्हें उनकी उपजका अच्छा पैसा मिले । यह सत्र क्यों हो रहा है ? ऐसो भयंकर स्थिति क्यों उत्पन्न हो गयो है ? - यह था वह मूलभूत प्रश्न, जो रिकार्डाके सामने मुँह बाये खड़ा था । जीवन परिचय डेबिड रिकार्डोका ज़न्म सन् एक हज़ार सात सौ बहत्तर में लन्दननें हुआ । उसके माता-पिता हालैण्ड-निवासो यहूदी थे, पर इंग्लैण्डमें आकर बस गये थे । बीस इक्कीस वर्षको आयु में ही विवाह और धर्म परिवर्तन के प्रश्नको लेकर रिकार्डोका माता-पितासे मतभेद हो गया और वह स्वतंत्र रूपसे सका व्यापार करने लगा । पाँच वर्षके भीतर ही उसने बीस लाख पौण्डकी सम्पत्ति अर्जित कर ली । उस युग में इतनी सम्पत्ति बहुत भारी मानी जाती थी । उसके बाद वह व्यापार छोड़कर अर्थशास्त्र के अध्ययन में प्रवृत्त हो गया । रिकार्डोका सबसे पहला निबन्ध सन् एक हज़ार आठ सौ नब्बे में प्रकाशित हुआ । उसका शीर्षक था - 'दि हाई प्राइस ऑफ बुलियन ए फ ऑफ दि डिप्रीसिएशन ऑफ बैंक नोट्स' । सन् एक हज़ार आठ सौ सत्रह में उसकी प्रमुख पुस्तक 'ऑफ पोलिटिकल इकॉनॉमी एण्ड टेक्सेशन' प्रकाशित हुई । स्वयं व्यापारी एवं पूँजीपति होते हुए भी रिकार्डाको क्या पता था कि उसको यह पुस्तक पूँजोवादी भवनकी नींव ही हिला डालेगी । सन् एक हज़ार आठ सौ उन्नीस में रिकार्डो इंग्लैण्डको लोकसभा का सदस्य चुना गया । संसद्की कार्यवाहियोंमें वह सम्मिलित तो होता था, पर बोलता बहुत कम था; पर जब बोलता था, तो सारा सदन बड़े आदर और ध्यानसे उसकी बातें सुनता था । सन् एक हज़ार आठ सौ इक्कीस में उसने 'अर्थशास्त्र -गोष्ठी' को जन्म दिया । सन् एक हज़ार आठ सौ बाईस में 'प्रोटेक्शन ऑफ एग्रीकल्चर' नामक उसकी रचना प्रकाशित हुई । सन् एक हज़ार आठ सौ तेईस मं उसका देहान्त हो गया । एक जीद और रिस्ट : ए हिस्ट्री ऑफ इकॉनॉमिक डाक्ट्रिन्स, पृष्ठ एक सौ पचपन । भाटक-सिद्धान्त मजुरी सिद्धान्त लाभ-सिद्धान्त यद्यपि रिकार्डोके आर्थिक विचारों का क्षेत्र बहुत व्यापक रहा है, तथापि सुविधाको दृष्टिसे उसके विचारोंका इस प्रकार विभाजन किया जा सकता हैः एक. वितरणके सिद्धान्त दो. मूल्य सिद्धान्त तीन. विदेशी व्यापार चार. बैंक तथा कागदी मुद्रा इसी क्रमसे रिकार्डोका अध्ययन करना अच्छा होगा । एक. वितरण के सिद्धान्त रिकार्डो और मैल्थस समकालीन रहे हैं। दोनोंमें परस्पर मैत्री भी थी और पत्र व्यवहार भी होता रहता था । बीस अक्तूवर एक हज़ार आठ सौ बीस को अपने एक पत्रने रिकार्डोने मैल्सको लिखा था : 'तुम शायद ऐसा सोचते हो कि सम्पत्तिके कारणों और उसकी प्रकृतिको शोध ही 'अर्थशास्त्र' है, पर मेरी दृष्टिमं 'अर्थशास्त्र उन नियमोंकी शोध कही जानी चाहिए, जो यह निर्णय करते हैं कि उद्योगनें जो उत्पत्ति होती है, उसका विभिन्न उत्पादक-वर्गीमें किस प्रकार वितरण किया जाय।' रिकार्डोके पहले अर्थशास्त्री उत्पादनकी समस्यापर सबसे अधिक बल दिया करते थे, पर रिकाडोंने वितरणको अध्ययनका प्रमुख विषय बनाया । तत्कालीन परिस्थितिका भी यही तकाजा था। रिकार्डोंने वितरणके महत्त्वको स्वीकारकर अर्थशास्त्रके एक बड़े अंगकी पूर्ति की । रिकाडीके पहले प्रकृतिवादियों तथा अदम स्मिथने उत्पादनकी समन्यापर विचार करके उसे इस स्थिति में पहुँचा दिया था कि उत्पादनके लिए तीन वस्तुओंकी आवश्यकता है - भूमि, श्रम और पूँजी । इन तीनों साधनोंको उत्पादित वस्तुका अंश मिलता है । भूमिको भाटक, श्रमको मजूरी और पूँजीको लाभके रूपमें यह अंश प्रात होता है । उत्पादक-वर्गको मिलनेवाला यह अंश किस सिद्धान्तके अनुसार प्राप्त होता है, इस प्रश्नका रिकार्डोसे पूर्व किसीने विधिवत् विवेचन नहीं किया था । इस कामको रिकार्डोंने अपने हाथमें लिया और वितरण के तीनों साधनों के लिए भाटकसिद्धान्त, मजुरी सिद्धान्त और लाभ-सिद्धान्तका प्रतिपादन किया । स्मिथ मानता था कि भूमिसे भाटक इसलिए मिलता है कि प्रकृति दयालु है और मनुष्य प्रकृतिके सहयोगसे काम करता है। मैल्थस मानता था कि जनसंख्या वृद्धि के साथ भूमिमें उत्पत्ति-हास नियम लागू होता है। रिकार्डोंने मध्यम मार्ग निकालकर इस सिद्धान्तका प्रतिपादन किया कि 'भाटक' उत्पत्तिका वह अंश है, जो भूमिकी स्थायी एवं अनश्वर शक्तियों के प्रतिफलस्वरूप भू-स्वामीको दिया जाता है । रिकार्डोका कहना था कि भूमिमें मौलिक, प्राकृतिक एवं अनश्वर शक्तियाँ हैं, फिर भी प्रकृतिकी दयालुता नहीं, अपितु कंजूसी ही भाटकका कारण है। जबतक प्रथम कोटिके भूमिखण्डों पर, जो अधिक उर्वर होते हैं, खेती की जाती हैं, तबतक भू-स्वामियोंको भाटक प्राप्त नहीं होता । जनसंख्या वृद्धि के कारण खाद्यान्नको माँग बढ़नेसे जब द्वितीय कोटिके अपेक्षाकृत कम उर्वर भूमिखण्डोंपर खेती की जाती है, तब प्रथम कोटिके भूमिखण्डोंके स्वामियोंको भाटक मिलने लगता है। रिकार्डोका मत है कि जहाँ जनसंख्या कम रहती हैं, वहाँ सबसे पहले वह भूमि जोती जाती है, जो सबसे उर्वरा होती है और उसकी जो उपज होती है, उसका सभी लोग उपभोग कर लेते हैं। ऐसी भूमिका बाहुल्य रहता है और इस कारण उससे निम्नकोटिकी भूमि जोती ही नहीं जाती । परन्तु जब जनसंख्यामें वृद्धि होती है, तो उपजका मूल्य बढ़ने लगता है और भू-स्वामीको लागतपर अतिरिक्त मिलने लगता है। लागतपर आयका अतिरेक हो 'भाटक' है । मूल्य वृद्धि के कारण अपेक्षाकृत कम उर्वरा भूमि जोतना भी लाभदायक सिद्ध होता है। कारण, उस स्थिति अपेक्षाकृत निम्न कोटिके भू-स्वामी भी अपनी उत्पत्तिको अधिक मूल्यपर बेचकर उत्पादनकी लागत प्राप्त कर सकते हैं । जनसंख्या में ज्यों-ज्यों वृद्धि होती चलती है, त्यों-त्यों निम्न और निम्नतर कोटिके भूमिखण्ड जोते जाने लगते हैं। उनमें अन्तिम कोटिवाले भूमिखण्डकोसीमान्त भूमिखण्डको छोड़कर शेष सभी भूमिखण्डोंपर अतिरेक या 'भाटक' मिलने लगता है । रिकार्डो कहता है कि जनसंख्या वृद्धि के कारण गल्लेकी माँगमें जो वृद्धि होती हैं, उसकी पूर्ति दो प्रकारकी खेती से की जा सकती है : विस्तृत खेती और गहरी खेती । विस्तृत खेती में कम उर्वरा भूमिकी उत्पत्ति तथा अधिक उर्वरा भूमिको उत्पत्तिका अन्तर 'भाटक' है । गहरी खेतीनें पुराने ही भूमिखण्डों पर अधिक श्रम और अधिक पूँजी लगायी जाती है। उसमें आगे चलकर उत्पत्ति
Shilpi Raj Latest Bhojpuri Song Video viral: युवा दिलों की धड़कन भोजपुरी सिंगर और एक्टर अरविंद अकेला कल्लू (Arvind Akela Kallu) आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। उनके गाने और फिल्मों का लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं। इसी कड़ी में अब एक्टर का नया वीडियो सॉन्ग रिलीज कर दिया गया है, जो कि रिलीज के साथ ही छा गया है। अपने लेटेस्ट वीडियो सॉन्ग में वो एक्ट्रेस माही श्रीवास्तव (Mahi Shrivastava) के साथ जमकर रोमांस किया है। इस गाने के बोल 'हरदिया ले अइती दहेज में' हैं। इसमें दोनों एक्टर्स के बीच कमाल की केमिस्ट्री देखने के लिए मिल रही है। अरविंद अकेला कल्लू और एक्ट्रेस माही श्रीवास्तव के लेटेस्ट वीडियो 'हरदिया ले अइति दहेज में' को देखने के लिए मिल रहा है कि इसमें माही, शादीशुदा कल्लू की वाइफ का रोल प्ले कर रही हैं। जहां पिंक कलर की धारी दार शर्ट और व्हाइट पैंट में कल्लू को देखा जा सकता है वहीं, भोजपुरी एक्ट्रेस को एक्टर के शर्ट के मैचिंग लहंगे में देखा जा सकता। दोनों के बीच कमाल की केमिस्ट्री देखने के लिए मिल रही है। वीडियो को फैंस बार-बार देखना पसंद कर रहे हैं और इनके वीडियो पर लोग बार-बार देखना पसंद कर रहे हैं। माही श्रीवास्तव और कल्लू के बीच कमाल की केमिस्ट्री है। साथ ही वीडियो में दोनों के डांस मूव्स और एक्ट्रेस माही की अदाएं आपको दिल जीत लेंगी। उनके इस वीडियो सॉन्ग को देखकर एक बार में आपका मन नहीं भरेगा। इससे नजरें भी हटा पाना काफी मुश्किल है। ये एक रोमांटिक भोजपुरी सॉन्ग है। इस गाने को शिल्पी राज ने अपनी बेहतरीन आवाज से सजाया है। इस पर लोग जमकर कमेंट्स कर रहे हैं। एक ने लिखा, 'जियो शेर...। ' दूसरे ने लिखा, 'बवाल है। ' तीसरे ने लिखा, 'पवन भैया के बाद दूसरे नंबर पर कल्लू का नाम है। ' इसी तरह से लोग इस वीडियो पर कमेंट्स कर रहे हैं। भोजपुरी गाना 'हरदिया ले अइती दहेज में' को शिल्पी राज के साथ अरविंद अकेला कल्लू ने गाया है। दोनों की आवाज में ये गाना काफी जंच रहा है। इसके गीतकार प्रिंस प्रियदर्शी हैं। संगीतकार रौशन सिंह हैं। वीडियो डायरेक्टर रवि पंडित, कोरियोग्राफर विशाल गुप्ता, एडिटर दीपक पंडित हैं। डीआई रोहित किया है।
Shilpi Raj Latest Bhojpuri Song Video viral: युवा दिलों की धड़कन भोजपुरी सिंगर और एक्टर अरविंद अकेला कल्लू आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। उनके गाने और फिल्मों का लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं। इसी कड़ी में अब एक्टर का नया वीडियो सॉन्ग रिलीज कर दिया गया है, जो कि रिलीज के साथ ही छा गया है। अपने लेटेस्ट वीडियो सॉन्ग में वो एक्ट्रेस माही श्रीवास्तव के साथ जमकर रोमांस किया है। इस गाने के बोल 'हरदिया ले अइती दहेज में' हैं। इसमें दोनों एक्टर्स के बीच कमाल की केमिस्ट्री देखने के लिए मिल रही है। अरविंद अकेला कल्लू और एक्ट्रेस माही श्रीवास्तव के लेटेस्ट वीडियो 'हरदिया ले अइति दहेज में' को देखने के लिए मिल रहा है कि इसमें माही, शादीशुदा कल्लू की वाइफ का रोल प्ले कर रही हैं। जहां पिंक कलर की धारी दार शर्ट और व्हाइट पैंट में कल्लू को देखा जा सकता है वहीं, भोजपुरी एक्ट्रेस को एक्टर के शर्ट के मैचिंग लहंगे में देखा जा सकता। दोनों के बीच कमाल की केमिस्ट्री देखने के लिए मिल रही है। वीडियो को फैंस बार-बार देखना पसंद कर रहे हैं और इनके वीडियो पर लोग बार-बार देखना पसंद कर रहे हैं। माही श्रीवास्तव और कल्लू के बीच कमाल की केमिस्ट्री है। साथ ही वीडियो में दोनों के डांस मूव्स और एक्ट्रेस माही की अदाएं आपको दिल जीत लेंगी। उनके इस वीडियो सॉन्ग को देखकर एक बार में आपका मन नहीं भरेगा। इससे नजरें भी हटा पाना काफी मुश्किल है। ये एक रोमांटिक भोजपुरी सॉन्ग है। इस गाने को शिल्पी राज ने अपनी बेहतरीन आवाज से सजाया है। इस पर लोग जमकर कमेंट्स कर रहे हैं। एक ने लिखा, 'जियो शेर...। ' दूसरे ने लिखा, 'बवाल है। ' तीसरे ने लिखा, 'पवन भैया के बाद दूसरे नंबर पर कल्लू का नाम है। ' इसी तरह से लोग इस वीडियो पर कमेंट्स कर रहे हैं। भोजपुरी गाना 'हरदिया ले अइती दहेज में' को शिल्पी राज के साथ अरविंद अकेला कल्लू ने गाया है। दोनों की आवाज में ये गाना काफी जंच रहा है। इसके गीतकार प्रिंस प्रियदर्शी हैं। संगीतकार रौशन सिंह हैं। वीडियो डायरेक्टर रवि पंडित, कोरियोग्राफर विशाल गुप्ता, एडिटर दीपक पंडित हैं। डीआई रोहित किया है।
कौशाम्बी के चरवा थाना क्षेत्र की रहने वाली विधवा महिला ने स्थानीय भाजपा विधायक के करीबी युवकों पर अश्लील हरकतें और छेड़खानी करने का आरोप लगाया है। कई दिनों से परेशान महिला को स्थानीय पुलिस ने इन्साफ नहीं दिया तो वह बुधवार को पेट्रोल की बोतल लेकर एसपी के सामने पहुंच गई। एसपी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल थानेदार से आरोपी को गिरफ्तार करने के निर्देश दिए हैं। महिला 4 अक्टूबर को शिकायत लेकर चरवा पुलिस से लेकर एसपी दफ्तर तक इन्साफ की गुहार लगा चुकी है, लेकिन इसके बाद भी पीड़िता को इंसाफ नहीं मिला है। महिला के पति की मौत हादसे में तीन साल पहले हो चुकी है। महिला की दो बेटियां है। पीड़िता ने बताया कि कस्बे के ही रहने वाले तीन युवक उस पर बुरी नज़र रखते हैं। आते-जाते वो लोग रास्ते में उसका मोबाइल से वीडियो बनाते है। फब्तियां कसते हैं, छेड़ते हैं। पीड़िता ने आरोप लगाया कि भाजपा विधायक संजय कुमार गुप्ता के करीबी होने के चलते आरोपी शेखर पांडेय डब्बू मिश्रा और कम्बू उसको परेशान करते हैं। भाजपा विधायक का नाम सामने आने के बाद से ही पुलिस उसके मामले में कार्रवाई नहीं कर रही है। मामले में भाजपा विधायक संजय कुमार गुप्ता ने बताया कि महिला के आरोपों से उनका कोई लेने देना नहीं है। एक दिन शिकायत लेकर महिला उनके पास आई थी। मैंने उसे कार्रवाई का भरोसा दिया था। महिला और आरोपियों से उनका कोई लेना देना नहीं है। पुलिस कार्रवाई के लिए स्वतंत्र है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
कौशाम्बी के चरवा थाना क्षेत्र की रहने वाली विधवा महिला ने स्थानीय भाजपा विधायक के करीबी युवकों पर अश्लील हरकतें और छेड़खानी करने का आरोप लगाया है। कई दिनों से परेशान महिला को स्थानीय पुलिस ने इन्साफ नहीं दिया तो वह बुधवार को पेट्रोल की बोतल लेकर एसपी के सामने पहुंच गई। एसपी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल थानेदार से आरोपी को गिरफ्तार करने के निर्देश दिए हैं। महिला चार अक्टूबर को शिकायत लेकर चरवा पुलिस से लेकर एसपी दफ्तर तक इन्साफ की गुहार लगा चुकी है, लेकिन इसके बाद भी पीड़िता को इंसाफ नहीं मिला है। महिला के पति की मौत हादसे में तीन साल पहले हो चुकी है। महिला की दो बेटियां है। पीड़िता ने बताया कि कस्बे के ही रहने वाले तीन युवक उस पर बुरी नज़र रखते हैं। आते-जाते वो लोग रास्ते में उसका मोबाइल से वीडियो बनाते है। फब्तियां कसते हैं, छेड़ते हैं। पीड़िता ने आरोप लगाया कि भाजपा विधायक संजय कुमार गुप्ता के करीबी होने के चलते आरोपी शेखर पांडेय डब्बू मिश्रा और कम्बू उसको परेशान करते हैं। भाजपा विधायक का नाम सामने आने के बाद से ही पुलिस उसके मामले में कार्रवाई नहीं कर रही है। मामले में भाजपा विधायक संजय कुमार गुप्ता ने बताया कि महिला के आरोपों से उनका कोई लेने देना नहीं है। एक दिन शिकायत लेकर महिला उनके पास आई थी। मैंने उसे कार्रवाई का भरोसा दिया था। महिला और आरोपियों से उनका कोई लेना देना नहीं है। पुलिस कार्रवाई के लिए स्वतंत्र है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
रचते हैं। उनके अनुसार, 'इस दूसरे सेमे मे हो हमारे देश के सबसे बड़े कवि और विद्वान रहे हैं। यह कहना असगत न होगा कि 'साहित्य जनता के लिये - 'यह हमारा जातीय सिद्धात बन चुका है। " साहित्य की 'सामाजिक सोद्देश्यता पर बल देना, उसे सामाजिक जीवन के विकास तथा नव-निर्माण का आवश्यक उपकरण सिद्ध करना प्रगतिवादी समीक्षको का तीसरा महत्वपूर्ण प्रदेय वहा जा सकता है । यद्यपि हिन्दी समीक्षा के अन्तर्गत आचार्य शुक्ल ने तथा साहित्य के सामाजिक और सास्कृतिक पक्षों पर बल देने वाले स्वच्छन्दतावादी विचारकों ने इस तथ्य को ओर, उनके पहले भी सकेत किया था। पर प्रगतिवादियों को यह विशेषता है कि उन्होंने इसे मूल्याकनका आवश्यक तथा सबसे महत्वपूर्ण आधार सिद्ध किया है। किसी भी कला कृति को होनना तथा श्रेष्ठता का निर्णय, उनके मत से, सामाजिक जीवन पर उसके द्वारा पडने वाले प्रभावों से हो किया जा सकता है। इस सबंध में उनका स्पष्ट अभिमत है- 'जो कला वृति मनुष्य को सृजनात्मक शक्तियों को थपकियाँ देकर गुलाती है और उसे अफीम या नशा-सा पिलाकर जीवन के गधपं से विरत करती है, यह निश्चय होन कोटि का है। इसके विपरीत, 'श्रेष्ठ साहित्य मर्दव जीवन को उन्नंतर बनाने वाले कर्म की प्रेरणा देना है, चाहे उमरीशैत्रीपष्ट अउहान को न हो, हो तसतको हो । यद्यपि यह प्रेरणा काय अपना क्सा के उन्हीं माध्यमों से होकर आती हैं, जो आनन्दानुभूति के कारण है। इसलिये साहित्य की सामाजिक पर न देने का यह अर्थ नहीं कि प्रगतिवादी समीशकों ने उसके गुलरिया हो उन्हें भारतीय बा शाम्बारात माग्य है वे उगमता आध्यात्मिक ब स्वीकार नहीं करते । मेरो समीक्षकों ने गायारणोहरण तथा गामूहिक बीदिया है और पारगीर को मनाविज्ञान के बार राहो है। अभी तक नही t. gesu, nader ute m हकअविवेन में पूर्ववर्ती इटिसेको तथा अपार प्रस्तुत किये हैं। इसके पति मुग्यत वैयक्ति तथा नहीकी अमूर्त आन्तरिक शक्तियों को ही प्रसुख देती रही है। मीटिइसके विपरित, श्च पिता को प्रभावित करने वाले अपना वृद्धि के माध्यम से प्रभा दिन होने बारेमामाजिउन तथ्यों से सम्बद्ध होती है जिनका विवेचन वास्ता र आधार पर वैज्ञानिक विधि से संभव है। इसी प्रकार जैसा कि डॉ धर्मशान है- 'अतीत के प्रति भी पुनहत्थानवादियों को भावीमा तथा पूर्ण आग्रह के बदल एक वैज्ञानिक तथा ऐतिहासिक दृष्टिको नेतना हमे सबसे पहले मार्क्सवादी विचारकों ने ही दी ।'३ व्यावहारिक विवेचन के धरातल पर उनकी वस्तुमूलक तथा सामाजिक दृष्टि की प्रमुख उपादेयता है, रचित साहित्य के पुनर्मूल्याकत को सभावना । हिन्दी के प्रगतिवादी समीक्षकों ने इस दृष्टि से कुछ महत्वपूर्ण प्रयत्न किये भी है । उदाहरण के लिए डॉ० रामविलास शर्मा द्वारा भारतेन्दु तथा प्रेमचन्द के वृतित्व की व्यावहाहिक समीक्षा को ले सकते है । हिन्दी साहित्य का प्रवृत्तिगत विवेचन करते हुए डॉ० नामवरसिंह ने भी कतिपय नये तथ्यों पर प्रकाश डाला है। लेकिन इसी क्रम मे वे कही कही एकागिता तथा व्यवमरवादिता के उदाहरण भी प्रस्तुत किये हैं जिनका उनके अभाव के विवेचन कम मे मैंने उल्लेख किया है। प्रेमचन्द के समस्त आदर्शवादी परिवेश की उपेक्षा कर उन्हें मात्र यथार्थवादी द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद के आदर्शों के निकट खीच लाना अधिक तथ्यपूर्ण नहीं कहा जा सकता । वस्तुस्थिति को मनमाने ढंग से विवेचन करने को हम पुनर्मूल्याकन की सज्ञा नहीं दे सकते । महादेवी को प्रगतिशीलताको प्रमाणित करने का प्रयत्न भी इसीलिए हास्यास्पद हो १. पृष्ठ ५८, मानव मूल्य और साहित्य ।
रचते हैं। उनके अनुसार, 'इस दूसरे सेमे मे हो हमारे देश के सबसे बड़े कवि और विद्वान रहे हैं। यह कहना असगत न होगा कि 'साहित्य जनता के लिये - 'यह हमारा जातीय सिद्धात बन चुका है। " साहित्य की 'सामाजिक सोद्देश्यता पर बल देना, उसे सामाजिक जीवन के विकास तथा नव-निर्माण का आवश्यक उपकरण सिद्ध करना प्रगतिवादी समीक्षको का तीसरा महत्वपूर्ण प्रदेय वहा जा सकता है । यद्यपि हिन्दी समीक्षा के अन्तर्गत आचार्य शुक्ल ने तथा साहित्य के सामाजिक और सास्कृतिक पक्षों पर बल देने वाले स्वच्छन्दतावादी विचारकों ने इस तथ्य को ओर, उनके पहले भी सकेत किया था। पर प्रगतिवादियों को यह विशेषता है कि उन्होंने इसे मूल्याकनका आवश्यक तथा सबसे महत्वपूर्ण आधार सिद्ध किया है। किसी भी कला कृति को होनना तथा श्रेष्ठता का निर्णय, उनके मत से, सामाजिक जीवन पर उसके द्वारा पडने वाले प्रभावों से हो किया जा सकता है। इस सबंध में उनका स्पष्ट अभिमत है- 'जो कला वृति मनुष्य को सृजनात्मक शक्तियों को थपकियाँ देकर गुलाती है और उसे अफीम या नशा-सा पिलाकर जीवन के गधपं से विरत करती है, यह निश्चय होन कोटि का है। इसके विपरीत, 'श्रेष्ठ साहित्य मर्दव जीवन को उन्नंतर बनाने वाले कर्म की प्रेरणा देना है, चाहे उमरीशैत्रीपष्ट अउहान को न हो, हो तसतको हो । यद्यपि यह प्रेरणा काय अपना क्सा के उन्हीं माध्यमों से होकर आती हैं, जो आनन्दानुभूति के कारण है। इसलिये साहित्य की सामाजिक पर न देने का यह अर्थ नहीं कि प्रगतिवादी समीशकों ने उसके गुलरिया हो उन्हें भारतीय बा शाम्बारात माग्य है वे उगमता आध्यात्मिक ब स्वीकार नहीं करते । मेरो समीक्षकों ने गायारणोहरण तथा गामूहिक बीदिया है और पारगीर को मनाविज्ञान के बार राहो है। अभी तक नही t. gesu, nader ute m हकअविवेन में पूर्ववर्ती इटिसेको तथा अपार प्रस्तुत किये हैं। इसके पति मुग्यत वैयक्ति तथा नहीकी अमूर्त आन्तरिक शक्तियों को ही प्रसुख देती रही है। मीटिइसके विपरित, श्च पिता को प्रभावित करने वाले अपना वृद्धि के माध्यम से प्रभा दिन होने बारेमामाजिउन तथ्यों से सम्बद्ध होती है जिनका विवेचन वास्ता र आधार पर वैज्ञानिक विधि से संभव है। इसी प्रकार जैसा कि डॉ धर्मशान है- 'अतीत के प्रति भी पुनहत्थानवादियों को भावीमा तथा पूर्ण आग्रह के बदल एक वैज्ञानिक तथा ऐतिहासिक दृष्टिको नेतना हमे सबसे पहले मार्क्सवादी विचारकों ने ही दी ।'तीन व्यावहारिक विवेचन के धरातल पर उनकी वस्तुमूलक तथा सामाजिक दृष्टि की प्रमुख उपादेयता है, रचित साहित्य के पुनर्मूल्याकत को सभावना । हिन्दी के प्रगतिवादी समीक्षकों ने इस दृष्टि से कुछ महत्वपूर्ण प्रयत्न किये भी है । उदाहरण के लिए डॉशून्य रामविलास शर्मा द्वारा भारतेन्दु तथा प्रेमचन्द के वृतित्व की व्यावहाहिक समीक्षा को ले सकते है । हिन्दी साहित्य का प्रवृत्तिगत विवेचन करते हुए डॉशून्य नामवरसिंह ने भी कतिपय नये तथ्यों पर प्रकाश डाला है। लेकिन इसी क्रम मे वे कही कही एकागिता तथा व्यवमरवादिता के उदाहरण भी प्रस्तुत किये हैं जिनका उनके अभाव के विवेचन कम मे मैंने उल्लेख किया है। प्रेमचन्द के समस्त आदर्शवादी परिवेश की उपेक्षा कर उन्हें मात्र यथार्थवादी द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद के आदर्शों के निकट खीच लाना अधिक तथ्यपूर्ण नहीं कहा जा सकता । वस्तुस्थिति को मनमाने ढंग से विवेचन करने को हम पुनर्मूल्याकन की सज्ञा नहीं दे सकते । महादेवी को प्रगतिशीलताको प्रमाणित करने का प्रयत्न भी इसीलिए हास्यास्पद हो एक. पृष्ठ अट्ठावन, मानव मूल्य और साहित्य ।
और पदवियों को तिलांजलि दे, कहीं-कहीं मिलते हैं। परन्तु ऋषिश्रेणी में कोई सम्मिलित नहीं हो सकता जबतक कि वह लोकैषणा, वित्तैषणा और पुत्रैषणा को पहले छोड़ न दे । स्वामी दयानन्द कभी ऋषिश्रेणी में प्रविष्ट होने का अधिकारी न हो सकता यदि वह इन एषणाओं से रहित न होता । ऋषियों के प्रभाव में मुझे भले ही ऋषि बना लो - एक वार उत्तर पश्चिमी प्रदेश के एक प्रसिद्ध नगर में किसी सज्जन ने उन से कहा कि स्वामी जी ! आप तो ऋषि है । उत्तर में स्वामी जी कहने लगे कि ऋषियों के प्रभाव में मुझे ऋषि कह रहे हो परन्तु सत्य जानो कि यदि मैं कणाद ऋषि के समय में उत्पन्न होता तो उस समय के विद्वानों में भी कठिनता से गिना जाता । अट्ठारह घंटे' की समाधि लगाने वाला पूर्ण योगी दयानन्द जिसको 'धर्मदिवाकर के कथनानुसार लोग परमयोगी और 'जड़भरत का अवतार कहते हैं, कहीं भी अपने आप को लोगों में योगी प्रसिद्ध करने का यत्न नहीं करता। भला सच्चे गुलाब को बनावट की क्या आवश्यकता है। उसकी सुगन्ध ही उस का अस्तित्व को प्रकट कर देता है परन्तु कागज के बने हुए कृत्रिम गुलाब को गुलाबी रंगत और इत्र लगाने की आवश्यकता है ताकि वह धोखे से अपने आप को गुलाब सिद्ध कर सके। योग और योगसिद्धि के नाम पर भोगी पुरुषों ने ससार को लूट लिया । योग और योगसिद्धि का नाम लेते हुए ठगों ने लोगो को मनघड़ंत लीला दिखा कर निश्चय दिलाने का यत्न किया है कि ये चमत्कार हैं और हम प्रकृति के नियम को तोड़ सकते है । योगसिद्धि की झलक दिखाने पर ही लोग गुरु बनकर मूर्खो से चरण पुजवाते है परन्तु चमत्कार, आश्चर्य, तमाशे, भूतप्रेत, भ्रान्तियों को काटने वाला, विद्या की ठेकेदारी और ठगीको अन्धकार के समुद्र में धक्का देने वाला सच्चा योगी दयानन्द हठयोग और दम्भ और तमाशे के छलों से लोगों को सावधान करता हुआ राजयोग के सच्चे सिद्धान्तो और श्रेष्ठ नियमों का प्रकाश करता है जिससे कि आत्मा की पूर्ण शक्तियाँ प्रकृति के नियम के अनुकूल न कि विरुद्ध प्रकट हो सकती है। महर्षि उस योगविद्या का प्रतिपादन करता है जो योग की अन्य विद्याओं के समान प्रत्येक धार्मिक समुन्नत पुरुष का अधिकार है और जिस योगबल से मनुष्य वेदसू की ज्योति का अनुभव करने पर मन्त्रद्रष्टा ऋषि कहला सकता और उसी साधन से ईश्वरदर्शन करता हुआ मृत्यु पर विजय पा सकता है । एक अमरीकन का कथन है कि सच्चाई मन से निकली हुई कहानी से भी बढ़कर विचित्र है। बिजली के गुण जिन से पाँच मिनट के भीतर सैकड़ो मील का समाचार मिल सकता है, वास्तव में किसी उपन्यासक के मन से निकले हुए वर्णन . से बढकर विचित्र हैं परन्तु यदि इसी बिजली का गुरण किसी पन्थाई और नाम के भूखे पुरुष को विदित - हो जाता तो वह बिजली का मन्दिर बनवा कर स्वयं पुजारी बनने से लोगों को रोम के पोप की भाँति लूट कर खा जाता और इस विद्या का वह प्रचार जो इस समय नियमित रूप से हो रहा है, कभी न होता । योगविद्या जिस में बिजली से बढ़कर प्रात्मा की शक्तियाँ दिखाई देती है यद्यपि आश्चर्यजनक है परन्तु विद्युत्विद्या की भांति नियत सिद्धान्तों पर आधारित है। यही योग यदि किसी थियोसोफिस्ट या पन्थाई को लेश मात्र भी आ जाये तो वह लोगों को तमाशे दिखाने का प्रयत्न करेगा औौर विद्या का ठेकेदार बनकर लोगो से किसी प्रकार का धन छीनना चाहेगा । यही योग यदि किसी विद्याप्रेमी के पास हो तो वह ठेकेदार बनने के स्थान पर लोगों को उस विद्या के प्राप्त करने के नियम और व्यवहार सिखायेगा । इसके स्थान पर सिद्धियाँ तमाशे के रूप में उन को आश्चर्य में डालने के लिए करके दिखाये गूं १. देखो 'दय) नन्द दिग्विजयार्क' । २. / समाचार पत्र 'धर्मदिवाकर' कलकत्ता, खड १, संख्या ८, पृष्ठ १२४-१२७, मार्गशीर्ष मास, संवत् १९४० । 'जड़भरत' एक पूर्ण योगी और महर्षि का नाम है। ४ एण्ड्रॉ जेक्सन डेविस । और केवल नाम के लिए एक सच्चे विज्ञान के प्रचार को रोक दे। तमाशे और अनुभव में वह भेद है जो कि खेल और साधन में है। अध्यापक विद्यार्थी को बिजली के प्रयोग करके दिखाते है परन्तु बाजार में पैसे या नाम के लिए निरर्थक या खेल के रूप में बिजली के प्रयोग करने वाला एक तमाशा दिखाने वाला ही होता है। अध्यापक को यदि अपने ज्ञान पर अधिकार होता है तो तमाशा दिखाने वाला आवश्यकतावश वह काम करता है। अध्यापक विद्यावृद्धि के लिए योग्य पात्र में दान करता है परन्तु तमाशा दिखाने वाला स्वांग भर कर समय व्यर्थ खो देता है। प्रयोग का दूसरा नाम साधन और तमाशे का दूसरा नाम खेल है । प्रयोग के अधिकारी विद्यार्थियों को विद्या सिखाते हैं परन्तु तमाशे मन बहलाव और अकर्मण्यता का पेट भरते हैं। प्रयोग पात्र के सामने किया जाता है परन्तु तमाशे में यह बन्धन नहीं। क, ख, पढ़ने वाले विद्यार्थी को प्रारण और रथि (सत् और सत्), विद्युत् के भेद प्रयोग से सिद्ध करके दिखाने निरर्थक हैं परन्तु बुद्धिमान् योग्य विद्यार्थी इस प्रयोग को समझ सकता है । तमाशे की दशा में योग्य, अयोग्य, पात्रकुपात्र का विचार नहीं है। प्रयोग से विद्या की प्राप्ति अभीष्ट है परन्तु तमाशे से केवल वाह-वाह और प्रशंसा ही मिलती है। हिमालय या आबू के सच्चे योगी तमाशा दिखाते नहीं फिरते परन्तु विद्यार्थी उनके पास जाकर साधनों द्वारा योगविद्या सीख सकते हैं। स्वामी दयानन्द योगविद्या के आचार्य थे न कि तमाशा दिखाने वाले । योग के सम्बन्ध में स्वामी जी का मन्तव्य योग सिखाने के सम्बन्ध में योगी दयानन्द का मन्तव्य - वह योगविद्या की वृद्धि चाहते थे और इसलिए अधिकारी विद्यार्थी मांगते थे । रुड़की में जब किसी आर्यसज्जन ने योगविद्या की महिमा सुनकर इस विद्या को सीखना चाहा तो उन्होंने उत्तर दिया। उस के अर्थ यह थे कि पहले इस विद्या का अधिकारी बन लो, पीछे सीख लेना । रुड़की में तो उस आर्य सज्जन ने सीखने की रुवि प्रकट की थी परन्तु अन्य स्थानों पर सीखने की रुचि रखने वाले भी थोड़े और योगसिद्धि का तमाशा देखने वाले उन्हें अधिकता से मिलते थे। स्वामी जी कभी तमाशे के रूप में लोगों को केवल दिखाने के लिए इस विद्या का खेल करने वाले न थे । दो-चार पुरुषों को जिन्होंने साधनों द्वारा इस विद्या को सीखना चाहा था और जो अधिकारी थे, उन को उन की योग्यतानुसार स्वामी जी ने योग क्रिया सिखाई थी परन्तु किसी की प्रार्थना पर योगविद्या का तमाशा नहीं किया । परिणामतः एक बार सेण्ट साहब ने स्वामी जी से कहा कि हमें कुछ योग का चमत्कार दिखाओ तो उन्होंने योग के दिखाने से इन्कार किया जैसा कि उन के निम्नलिखित पत्र से विदित हो रहा है। स्वामी जी का पत्र - "जो मैंने सेण्ट साहब से कहा था वह ठीक है क्योंकि मैं इन तमाशे की बातों को देखना- दिखलाना उचित नहीं समझता, चाहे वे हाथ की चालाकी से हों चाहे योग की रीति से हों क्योंकि योग के किये कराये बिना किसी को भी योग का महत्त्व वा इस में सत्य प्रेम कभी नहीं हो सकता । अपितु सन्देह और आश्चर्य में पड़कर उसी तमाशे दिखलाने वाले की परीक्षा और सब सुधार की बातों को छोड़ तमाशे देखने को सब मन' चाहते हैं और उस के साधन करना स्वीकार नहीं करते । जैसे सेण्ट साहब को मैने न दिखलाया और न दिखलाना चाहता है, चाहे वे प्रसन्न रहें चाहे प्रप्रसन्न हों क्यों कि जो मैं इसमें प्रवृत्त हो जाऊँ तो सब मूर्ख और पंडित मुझ से यही कहेंगे कि हम को भी कुछ योग के आश्चर्य का काम दिखलाइये जैसा उस को प्रापने दिखलाया। ऐसी संसार के तमाशे की लीला मेरे साथ भी लग जाती जैसी मैडम एच० पी० ब्लैवेत्स्की के पीछे लगी है। अब जो इन की विद्या, धर्मात्मता की बाते १. १४ जुलाई, सन् १८८० को यह पत्र उन्होंने कर्नल अल्काट को लिखा था । है कि जिन से मनुष्यों के आत्मा पवित्र हो आनन्द को प्राप्त हो सकते है, उनके पूछने और ग्रहण करने से दूर रहते है किन्तु जो कोई आता है (यही कहता आता है) 'मैडम साहबा, आप हम को भी कोई तमाशा दिखलायें ।' - इत्यादि कारणो से इन बातों में प्रवृत्ति नहीं करता न कराता है किन्तु कोई चाहे तो उस को योगरीति मिखला सकता है कि जिस के अनुष्ठान करने से वह स्वय सिद्धि को प्राप्त हो जाये । " योग एक आत्मिक शक्ति है - जिस प्रकार विद्या शक्ति है उसी प्रकार योग भी आत्मिक शक्ति है। यदि कोई बिजली की विद्या लोगों के ताले तोड़ने के लिए लगाये तो विद्या का कुछ दोष नही, दोष उस के अनुचित व्यवहार करने वाले का है, परन्तु पूरा वैज्ञानिक कभी बिजली की विद्या किसी की हानि अथवा तुच्छ कार्य की सिद्धि के लिए नही लगाता । इसी प्रकार योगविद्या को योगी लोग ईश्वरदर्शन के महान कार्य मे लगाते है, लोगो की तुच्छ बातों के सुनने पर महान विद्या का अनुचित व्यवहार नहीं करते परन्तु जो विद्या का अनुचित व्यवहार करते है, समझना चाहिये कि वे पूरे विद्वान् नहीं । यूरोप और अमरीका मे योगविद्या का एक तुच्छ अंश रखने वाले स्त्रिच्यूलिस्ट Spiritualist लोगों ने पाखंड का तूफान खडा कर रखा है। मूर्खों को बतलाते है कि मरे हुए जीव हमारी इच्छानुसार हमारे मन में प्रेरणा करने आते हैं और इस प्रकार के अनेक दम्भ रचकर लोगों को ठग कर खा गये हैं। इन स्प्रिच्यूलिस्ट लोगों की ठग-लीला का उचित खंडन' अमरीका के एंड्रोजैक्सन डेविस ने भली प्रकार किया है । प्रत्येक बुद्धिमान् मैस्मरेजम और स्प्रिच्यूलिज्म के ठगों से साविधान हो सकता है, यदि वह अपनी बुद्धि को काम मे लाये । योगविद्या के जितने तमाशा दिखाने वाले है, वे योगी नही किन्तु दुकानदार है । इन दुकानदारों से बचकर हमे सच्ची योगविद्या के सिखाने वाले योगियों को अधिकारी बनने पर खोज करनी चाहिये । योगो भी सृष्टिनियम नहीं तोड़ सकता- संसार में यह बहुत प्रसिद्ध हो रहा है कि योगी जो चाहे सो कर सकते है, सृष्टि-नियमों को तोड़ना योगियों के लिए कोई बड़ी बात नहीं परन्तु महर्षि स्पष्ट शब्दों में योग को महानता दर्शाते हुए इस बात का इस प्रकार खडन करते है - "जो अनादि ईश्वर जगत् का स्रष्टा न हो तो साधनों से सिद्ध होने वाले जीवों का आधार जीवनरूप जगत् शरीर और इन्द्रियों के गोलक कैसे बनते ? इन के बिना जीव साधन नही कर सकता । जब साधन न होते तो सिद्ध कहाँ से होता ? जीव चाहे जैसा साधन कर सिद्ध होय तो भी ईश्वर की जो स्वयं सनातन अनादि सिद्धि है जिस में अनन्त सिद्धि है उस के तुल्य कोई भी जीव नहीं हो सकता क्योंकि जीव का परम अवधि तक ज्ञान बढ़े तो भी परिमित ज्ञान और सामर्थ्य वाला होता है। अनन्त ज्ञान और सामर्थ्य वाला कभी नहीं हो सकता । देखो कोई भी आजतक ईश्वरकृत मष्टि-क्रम को बदलने हारा नही हुआ है और न होगा । जैसा अनादि सिद्ध परमेश्वर ने नेत्र से देखने और कानो से सुनने का प्रवन्ध किया है इसको कोई भी योगी बदल नहीं सकता। जीव ईश्वर कभी नहीं हो सकता ।" योग-विद्या का उल्लेख - जहाँ स्वामी जी ने अपने लेख में अनेक विद्या का वर्णन किया है वहाँ उन्होंने योगविद्या का भी वर्णन किया है । योग से प्रात्मबल किस प्रकार बढ़ जाता है इस को निम्नलिखित वचन दर्शा रहे है-" हे जगदीश्वर ' जिस से सब योगी लोग इन सब भूत, भविष्यत्, वर्तमान व्यवहारो को जानते, जो नाशरहित जीवात्मा को परमात्मा के साथ मिल के सब प्रकार त्रिकालज्ञ करता है, जिस में ज्ञान १. देखो पुस्तक 'दी फाउण्टन पृष्ठ २०६ से २२० तक । २. सत्यार्थप्रकाश आठवां समुल्लास, पृष्ठ २१६ ।
और पदवियों को तिलांजलि दे, कहीं-कहीं मिलते हैं। परन्तु ऋषिश्रेणी में कोई सम्मिलित नहीं हो सकता जबतक कि वह लोकैषणा, वित्तैषणा और पुत्रैषणा को पहले छोड़ न दे । स्वामी दयानन्द कभी ऋषिश्रेणी में प्रविष्ट होने का अधिकारी न हो सकता यदि वह इन एषणाओं से रहित न होता । ऋषियों के प्रभाव में मुझे भले ही ऋषि बना लो - एक वार उत्तर पश्चिमी प्रदेश के एक प्रसिद्ध नगर में किसी सज्जन ने उन से कहा कि स्वामी जी ! आप तो ऋषि है । उत्तर में स्वामी जी कहने लगे कि ऋषियों के प्रभाव में मुझे ऋषि कह रहे हो परन्तु सत्य जानो कि यदि मैं कणाद ऋषि के समय में उत्पन्न होता तो उस समय के विद्वानों में भी कठिनता से गिना जाता । अट्ठारह घंटे' की समाधि लगाने वाला पूर्ण योगी दयानन्द जिसको 'धर्मदिवाकर के कथनानुसार लोग परमयोगी और 'जड़भरत का अवतार कहते हैं, कहीं भी अपने आप को लोगों में योगी प्रसिद्ध करने का यत्न नहीं करता। भला सच्चे गुलाब को बनावट की क्या आवश्यकता है। उसकी सुगन्ध ही उस का अस्तित्व को प्रकट कर देता है परन्तु कागज के बने हुए कृत्रिम गुलाब को गुलाबी रंगत और इत्र लगाने की आवश्यकता है ताकि वह धोखे से अपने आप को गुलाब सिद्ध कर सके। योग और योगसिद्धि के नाम पर भोगी पुरुषों ने ससार को लूट लिया । योग और योगसिद्धि का नाम लेते हुए ठगों ने लोगो को मनघड़ंत लीला दिखा कर निश्चय दिलाने का यत्न किया है कि ये चमत्कार हैं और हम प्रकृति के नियम को तोड़ सकते है । योगसिद्धि की झलक दिखाने पर ही लोग गुरु बनकर मूर्खो से चरण पुजवाते है परन्तु चमत्कार, आश्चर्य, तमाशे, भूतप्रेत, भ्रान्तियों को काटने वाला, विद्या की ठेकेदारी और ठगीको अन्धकार के समुद्र में धक्का देने वाला सच्चा योगी दयानन्द हठयोग और दम्भ और तमाशे के छलों से लोगों को सावधान करता हुआ राजयोग के सच्चे सिद्धान्तो और श्रेष्ठ नियमों का प्रकाश करता है जिससे कि आत्मा की पूर्ण शक्तियाँ प्रकृति के नियम के अनुकूल न कि विरुद्ध प्रकट हो सकती है। महर्षि उस योगविद्या का प्रतिपादन करता है जो योग की अन्य विद्याओं के समान प्रत्येक धार्मिक समुन्नत पुरुष का अधिकार है और जिस योगबल से मनुष्य वेदसू की ज्योति का अनुभव करने पर मन्त्रद्रष्टा ऋषि कहला सकता और उसी साधन से ईश्वरदर्शन करता हुआ मृत्यु पर विजय पा सकता है । एक अमरीकन का कथन है कि सच्चाई मन से निकली हुई कहानी से भी बढ़कर विचित्र है। बिजली के गुण जिन से पाँच मिनट के भीतर सैकड़ो मील का समाचार मिल सकता है, वास्तव में किसी उपन्यासक के मन से निकले हुए वर्णन . से बढकर विचित्र हैं परन्तु यदि इसी बिजली का गुरण किसी पन्थाई और नाम के भूखे पुरुष को विदित - हो जाता तो वह बिजली का मन्दिर बनवा कर स्वयं पुजारी बनने से लोगों को रोम के पोप की भाँति लूट कर खा जाता और इस विद्या का वह प्रचार जो इस समय नियमित रूप से हो रहा है, कभी न होता । योगविद्या जिस में बिजली से बढ़कर प्रात्मा की शक्तियाँ दिखाई देती है यद्यपि आश्चर्यजनक है परन्तु विद्युत्विद्या की भांति नियत सिद्धान्तों पर आधारित है। यही योग यदि किसी थियोसोफिस्ट या पन्थाई को लेश मात्र भी आ जाये तो वह लोगों को तमाशे दिखाने का प्रयत्न करेगा औौर विद्या का ठेकेदार बनकर लोगो से किसी प्रकार का धन छीनना चाहेगा । यही योग यदि किसी विद्याप्रेमी के पास हो तो वह ठेकेदार बनने के स्थान पर लोगों को उस विद्या के प्राप्त करने के नियम और व्यवहार सिखायेगा । इसके स्थान पर सिद्धियाँ तमाशे के रूप में उन को आश्चर्य में डालने के लिए करके दिखाये गूं एक. देखो 'दय) नन्द दिग्विजयार्क' । दो. / समाचार पत्र 'धर्मदिवाकर' कलकत्ता, खड एक, संख्या आठ, पृष्ठ एक सौ चौबीस-एक सौ सत्ताईस, मार्गशीर्ष मास, संवत् एक हज़ार नौ सौ चालीस । 'जड़भरत' एक पूर्ण योगी और महर्षि का नाम है। चार एण्ड्रॉ जेक्सन डेविस । और केवल नाम के लिए एक सच्चे विज्ञान के प्रचार को रोक दे। तमाशे और अनुभव में वह भेद है जो कि खेल और साधन में है। अध्यापक विद्यार्थी को बिजली के प्रयोग करके दिखाते है परन्तु बाजार में पैसे या नाम के लिए निरर्थक या खेल के रूप में बिजली के प्रयोग करने वाला एक तमाशा दिखाने वाला ही होता है। अध्यापक को यदि अपने ज्ञान पर अधिकार होता है तो तमाशा दिखाने वाला आवश्यकतावश वह काम करता है। अध्यापक विद्यावृद्धि के लिए योग्य पात्र में दान करता है परन्तु तमाशा दिखाने वाला स्वांग भर कर समय व्यर्थ खो देता है। प्रयोग का दूसरा नाम साधन और तमाशे का दूसरा नाम खेल है । प्रयोग के अधिकारी विद्यार्थियों को विद्या सिखाते हैं परन्तु तमाशे मन बहलाव और अकर्मण्यता का पेट भरते हैं। प्रयोग पात्र के सामने किया जाता है परन्तु तमाशे में यह बन्धन नहीं। क, ख, पढ़ने वाले विद्यार्थी को प्रारण और रथि , विद्युत् के भेद प्रयोग से सिद्ध करके दिखाने निरर्थक हैं परन्तु बुद्धिमान् योग्य विद्यार्थी इस प्रयोग को समझ सकता है । तमाशे की दशा में योग्य, अयोग्य, पात्रकुपात्र का विचार नहीं है। प्रयोग से विद्या की प्राप्ति अभीष्ट है परन्तु तमाशे से केवल वाह-वाह और प्रशंसा ही मिलती है। हिमालय या आबू के सच्चे योगी तमाशा दिखाते नहीं फिरते परन्तु विद्यार्थी उनके पास जाकर साधनों द्वारा योगविद्या सीख सकते हैं। स्वामी दयानन्द योगविद्या के आचार्य थे न कि तमाशा दिखाने वाले । योग के सम्बन्ध में स्वामी जी का मन्तव्य योग सिखाने के सम्बन्ध में योगी दयानन्द का मन्तव्य - वह योगविद्या की वृद्धि चाहते थे और इसलिए अधिकारी विद्यार्थी मांगते थे । रुड़की में जब किसी आर्यसज्जन ने योगविद्या की महिमा सुनकर इस विद्या को सीखना चाहा तो उन्होंने उत्तर दिया। उस के अर्थ यह थे कि पहले इस विद्या का अधिकारी बन लो, पीछे सीख लेना । रुड़की में तो उस आर्य सज्जन ने सीखने की रुवि प्रकट की थी परन्तु अन्य स्थानों पर सीखने की रुचि रखने वाले भी थोड़े और योगसिद्धि का तमाशा देखने वाले उन्हें अधिकता से मिलते थे। स्वामी जी कभी तमाशे के रूप में लोगों को केवल दिखाने के लिए इस विद्या का खेल करने वाले न थे । दो-चार पुरुषों को जिन्होंने साधनों द्वारा इस विद्या को सीखना चाहा था और जो अधिकारी थे, उन को उन की योग्यतानुसार स्वामी जी ने योग क्रिया सिखाई थी परन्तु किसी की प्रार्थना पर योगविद्या का तमाशा नहीं किया । परिणामतः एक बार सेण्ट साहब ने स्वामी जी से कहा कि हमें कुछ योग का चमत्कार दिखाओ तो उन्होंने योग के दिखाने से इन्कार किया जैसा कि उन के निम्नलिखित पत्र से विदित हो रहा है। स्वामी जी का पत्र - "जो मैंने सेण्ट साहब से कहा था वह ठीक है क्योंकि मैं इन तमाशे की बातों को देखना- दिखलाना उचित नहीं समझता, चाहे वे हाथ की चालाकी से हों चाहे योग की रीति से हों क्योंकि योग के किये कराये बिना किसी को भी योग का महत्त्व वा इस में सत्य प्रेम कभी नहीं हो सकता । अपितु सन्देह और आश्चर्य में पड़कर उसी तमाशे दिखलाने वाले की परीक्षा और सब सुधार की बातों को छोड़ तमाशे देखने को सब मन' चाहते हैं और उस के साधन करना स्वीकार नहीं करते । जैसे सेण्ट साहब को मैने न दिखलाया और न दिखलाना चाहता है, चाहे वे प्रसन्न रहें चाहे प्रप्रसन्न हों क्यों कि जो मैं इसमें प्रवृत्त हो जाऊँ तो सब मूर्ख और पंडित मुझ से यही कहेंगे कि हम को भी कुछ योग के आश्चर्य का काम दिखलाइये जैसा उस को प्रापने दिखलाया। ऐसी संसार के तमाशे की लीला मेरे साथ भी लग जाती जैसी मैडम एचशून्य पीशून्य ब्लैवेत्स्की के पीछे लगी है। अब जो इन की विद्या, धर्मात्मता की बाते एक. चौदह जुलाई, सन् एक हज़ार आठ सौ अस्सी को यह पत्र उन्होंने कर्नल अल्काट को लिखा था । है कि जिन से मनुष्यों के आत्मा पवित्र हो आनन्द को प्राप्त हो सकते है, उनके पूछने और ग्रहण करने से दूर रहते है किन्तु जो कोई आता है 'मैडम साहबा, आप हम को भी कोई तमाशा दिखलायें ।' - इत्यादि कारणो से इन बातों में प्रवृत्ति नहीं करता न कराता है किन्तु कोई चाहे तो उस को योगरीति मिखला सकता है कि जिस के अनुष्ठान करने से वह स्वय सिद्धि को प्राप्त हो जाये । " योग एक आत्मिक शक्ति है - जिस प्रकार विद्या शक्ति है उसी प्रकार योग भी आत्मिक शक्ति है। यदि कोई बिजली की विद्या लोगों के ताले तोड़ने के लिए लगाये तो विद्या का कुछ दोष नही, दोष उस के अनुचित व्यवहार करने वाले का है, परन्तु पूरा वैज्ञानिक कभी बिजली की विद्या किसी की हानि अथवा तुच्छ कार्य की सिद्धि के लिए नही लगाता । इसी प्रकार योगविद्या को योगी लोग ईश्वरदर्शन के महान कार्य मे लगाते है, लोगो की तुच्छ बातों के सुनने पर महान विद्या का अनुचित व्यवहार नहीं करते परन्तु जो विद्या का अनुचित व्यवहार करते है, समझना चाहिये कि वे पूरे विद्वान् नहीं । यूरोप और अमरीका मे योगविद्या का एक तुच्छ अंश रखने वाले स्त्रिच्यूलिस्ट Spiritualist लोगों ने पाखंड का तूफान खडा कर रखा है। मूर्खों को बतलाते है कि मरे हुए जीव हमारी इच्छानुसार हमारे मन में प्रेरणा करने आते हैं और इस प्रकार के अनेक दम्भ रचकर लोगों को ठग कर खा गये हैं। इन स्प्रिच्यूलिस्ट लोगों की ठग-लीला का उचित खंडन' अमरीका के एंड्रोजैक्सन डेविस ने भली प्रकार किया है । प्रत्येक बुद्धिमान् मैस्मरेजम और स्प्रिच्यूलिज्म के ठगों से साविधान हो सकता है, यदि वह अपनी बुद्धि को काम मे लाये । योगविद्या के जितने तमाशा दिखाने वाले है, वे योगी नही किन्तु दुकानदार है । इन दुकानदारों से बचकर हमे सच्ची योगविद्या के सिखाने वाले योगियों को अधिकारी बनने पर खोज करनी चाहिये । योगो भी सृष्टिनियम नहीं तोड़ सकता- संसार में यह बहुत प्रसिद्ध हो रहा है कि योगी जो चाहे सो कर सकते है, सृष्टि-नियमों को तोड़ना योगियों के लिए कोई बड़ी बात नहीं परन्तु महर्षि स्पष्ट शब्दों में योग को महानता दर्शाते हुए इस बात का इस प्रकार खडन करते है - "जो अनादि ईश्वर जगत् का स्रष्टा न हो तो साधनों से सिद्ध होने वाले जीवों का आधार जीवनरूप जगत् शरीर और इन्द्रियों के गोलक कैसे बनते ? इन के बिना जीव साधन नही कर सकता । जब साधन न होते तो सिद्ध कहाँ से होता ? जीव चाहे जैसा साधन कर सिद्ध होय तो भी ईश्वर की जो स्वयं सनातन अनादि सिद्धि है जिस में अनन्त सिद्धि है उस के तुल्य कोई भी जीव नहीं हो सकता क्योंकि जीव का परम अवधि तक ज्ञान बढ़े तो भी परिमित ज्ञान और सामर्थ्य वाला होता है। अनन्त ज्ञान और सामर्थ्य वाला कभी नहीं हो सकता । देखो कोई भी आजतक ईश्वरकृत मष्टि-क्रम को बदलने हारा नही हुआ है और न होगा । जैसा अनादि सिद्ध परमेश्वर ने नेत्र से देखने और कानो से सुनने का प्रवन्ध किया है इसको कोई भी योगी बदल नहीं सकता। जीव ईश्वर कभी नहीं हो सकता ।" योग-विद्या का उल्लेख - जहाँ स्वामी जी ने अपने लेख में अनेक विद्या का वर्णन किया है वहाँ उन्होंने योगविद्या का भी वर्णन किया है । योग से प्रात्मबल किस प्रकार बढ़ जाता है इस को निम्नलिखित वचन दर्शा रहे है-" हे जगदीश्वर ' जिस से सब योगी लोग इन सब भूत, भविष्यत्, वर्तमान व्यवहारो को जानते, जो नाशरहित जीवात्मा को परमात्मा के साथ मिल के सब प्रकार त्रिकालज्ञ करता है, जिस में ज्ञान एक. देखो पुस्तक 'दी फाउण्टन पृष्ठ दो सौ छः से दो सौ बीस तक । दो. सत्यार्थप्रकाश आठवां समुल्लास, पृष्ठ दो सौ सोलह ।
वाराणसी से बहुजन समाज पार्टी के पूर्व विधायक त्रिभुवन राम से 1 करोड़ रुपए की रंगदारी मांगे जाने का मामला सामने आया है. बताया जा रहा है कि कॉल करने वालों ने रक़म न देने पर 7 दिन में गोली से उड़ाने की धमकी भी दी है. मामले में लखनऊ की गोमतीनगर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. बताया जा रहा है कि त्रिभुवन राम को सोमवार देर रात ये रंंगदारी की कॉल आई. खुद को मिंटू सिंह बताने वाले शख्स ने फोन पर रंगदारी मांगी है. बता दें बसपा सरकार में पीडब्ल्यूडी में प्रमुख अभियंता रह चुके हैं. पुलिस के अनुसार गोमती नगर विवेक खंड-3 में त्रिभुवन राम का घर है. सोमवार रात करीब 10. 45 बजे उनके मोबाइल पर 6 कॉल आईं. इस दौरान कॉल करने वाले खुद को मिंटू सिंह बताया और 7 दिन के अंदर एक करोड़ रुपए पहुंचाने की धमकी दी. पुलिस के अनुसार मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच की जा रही है. बता दें इसी साल मई में बीजेपी के कई विधायकों को धमकी भरी कॉल आई थी, जिसमें उनसे रंगदारी मांगी गई थी. प्रदेश के 11 विधायकों को इसी तरह की धमकी मिली थी. इसके बाद प्रदेश भर में हड़कंप मच गया. डीजीपी स्तर से मामले का संज्ञान लिया गया. मुख्यमंत्री ने भी इस मामले में कड़ी कार्रवाई करने को कहा. ये भी पढ़ेंः विवेक तिवारी हत्याकांडः आरोपी सिपाही के समर्थन में यूपी पुलिस, 5 अक्टूबर को काला दिवस! .
वाराणसी से बहुजन समाज पार्टी के पूर्व विधायक त्रिभुवन राम से एक करोड़ रुपए की रंगदारी मांगे जाने का मामला सामने आया है. बताया जा रहा है कि कॉल करने वालों ने रक़म न देने पर सात दिन में गोली से उड़ाने की धमकी भी दी है. मामले में लखनऊ की गोमतीनगर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. बताया जा रहा है कि त्रिभुवन राम को सोमवार देर रात ये रंंगदारी की कॉल आई. खुद को मिंटू सिंह बताने वाले शख्स ने फोन पर रंगदारी मांगी है. बता दें बसपा सरकार में पीडब्ल्यूडी में प्रमुख अभियंता रह चुके हैं. पुलिस के अनुसार गोमती नगर विवेक खंड-तीन में त्रिभुवन राम का घर है. सोमवार रात करीब दस. पैंतालीस बजे उनके मोबाइल पर छः कॉल आईं. इस दौरान कॉल करने वाले खुद को मिंटू सिंह बताया और सात दिन के अंदर एक करोड़ रुपए पहुंचाने की धमकी दी. पुलिस के अनुसार मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच की जा रही है. बता दें इसी साल मई में बीजेपी के कई विधायकों को धमकी भरी कॉल आई थी, जिसमें उनसे रंगदारी मांगी गई थी. प्रदेश के ग्यारह विधायकों को इसी तरह की धमकी मिली थी. इसके बाद प्रदेश भर में हड़कंप मच गया. डीजीपी स्तर से मामले का संज्ञान लिया गया. मुख्यमंत्री ने भी इस मामले में कड़ी कार्रवाई करने को कहा. ये भी पढ़ेंः विवेक तिवारी हत्याकांडः आरोपी सिपाही के समर्थन में यूपी पुलिस, पाँच अक्टूबर को काला दिवस! .
Posted On: प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने स्टार्टप्स के लिए निधि स्थापित करने के लिए निम्नलिखित प्रस्तावों को अनुमति प्रदान कर दी है। इसे पिछले साल जून में 1,000 करोड़ रुपये के साथ स्थापित किया गया था। · गजट अधिसूचना जी एस आर 180 17-02-2016 के मुताबिक स्टार्टप्स निधि द्वारा सहायता प्राप्त वैकल्पिक निवेश निधि(एआईएफ) को कम से कम दो बार निवेश किया जा सकेगा। अगर स्टार्ट-अप समाप्त होने से पहले पूरी तरह से स्टार्ट-अप के लिए प्रतिबद्ध राशि को जारी नहीं किया गया है तो शेष राशि उसके बाद जारी रह सकती है। · यह भी निर्णय लिया गया कि एआईएफ और बकाया के लिए किए गए प्रतिबद्धताओं के 0.50% की सीमा तक एफईएस से ली जाएगी जिससे वेंचर कैपिटल इनवेस्टमेंट कमेटी की बैठक का आयोजन, कानूनी और तकनीकी मूल्यांकन के लिए परिचालन व्यय आदि की पूर्ति होगी। प्रत्येक आधे वर्ष की शुरुआत में (एक अप्रैल और एक अक्टूबर को) इसे फंड में निकासी की जाएगी। केंद्रीय कैबिननेट की 22-06-2016 को हुई बैठक में स्टार्टअप्स के लिए निधि स्थापित करने का फैसला लिया था जिसके लिए 10000 करोड़ रुपये की धनराशि निर्धारित की गई थी। यह योगदान 14वें और 15वें वित्त आयोग के धनराशि की चक्रीय उपलब्धता और कार्यान्वयन की प्रगति के लिहाज से किया गया था। बैठक में एफएफएस वैकल्पिक निवेश निधि(एआईएफ) के लिए धन प्रदान करने का फैसला लिया गया। एफएफएस का प्रबंधन भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक(सिडबी) की देखरेख में होता है। सेबी में पंजीकृत वैकल्पिक निवेश निधि(एआईएफ) में एफएफएस योगदान करता है। यह योगदान अधिकतम 35 प्रतिशत से अधिक तक हो सकता है। उसी बैठक में कैबिनेट ने फैसला किया कि एआईएफ द्वारा जुटाया गया फंड पूरे स्टार्टप्स में निवेश किया जाएगा। विभिन्न हितधारकों के साथ अपनी बातचीत के दौरान यह विभाग को सूचित किया गया है कि एआईएफ में निवेशकों को प्राथमिकता दी जाएगी जिससे एआईएफ का पोर्टफोलियो निवेश के जोखिम को उचित रूप से प्रबंधित करने के लिए पर्याप्त रूप से विविध है और अगर एआईएफ के संपूर्ण धन को स्टार्ट-अप में निवेश किया जाता है तो यह ऐसे एआईएफ के निवेशकों के लिए अस्वीकार्य जोखिम बना हुआ है। जिन अन्य मुद्दों को लेकर हितधारकों ने चिंता जाहिर की उनमें एआईएफ द्वारा स्टार्ट-अप के वित्तपोषण की प्रक्रिया लंबे समय से तैयार की गई है जो एआईएफ द्वारा शुरूआती प्रतिबद्धता से शुरू होती है और फिर फंड्स में फंड जारी करता है, शामिल है। इस प्रकार यह संभव है कि अंतिम किस्त के जारी किए जाने से पहले स्टार्ट-अप का कारोबार 25 करोड़ रुपये हो लेकिन इसकी अभी भी अपनी विकास आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए धन की आवश्यकता है। इसके अलावा, स्टार्ट अप को अपने जीवन चक्र के विभिन्न चरणों के माध्यम से धन जुटाने की आवश्यकता होती है, अर्थात प्रारंभिक चरण, बीज स्तर और विकास मंच पर। सिडबी द्वारा विभाग को भी बताया गया कि वर्तमान प्रावधान एआईएफ को स्वीकृति के बाद की गई गतिविधियों के लिए सिडबी को मुआवजा देने के लिए अधिकार प्रदान नहीं करते हैं। इन निर्णयों को ऊपर की चिंताओं की पृष्ठभूमि में लिया गया है।
Posted On: प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने स्टार्टप्स के लिए निधि स्थापित करने के लिए निम्नलिखित प्रस्तावों को अनुमति प्रदान कर दी है। इसे पिछले साल जून में एक,शून्य करोड़ रुपये के साथ स्थापित किया गया था। · गजट अधिसूचना जी एस आर एक सौ अस्सी सत्रह फ़रवरी दो हज़ार सोलह के मुताबिक स्टार्टप्स निधि द्वारा सहायता प्राप्त वैकल्पिक निवेश निधि को कम से कम दो बार निवेश किया जा सकेगा। अगर स्टार्ट-अप समाप्त होने से पहले पूरी तरह से स्टार्ट-अप के लिए प्रतिबद्ध राशि को जारी नहीं किया गया है तो शेष राशि उसके बाद जारी रह सकती है। · यह भी निर्णय लिया गया कि एआईएफ और बकाया के लिए किए गए प्रतिबद्धताओं के शून्य.पचास% की सीमा तक एफईएस से ली जाएगी जिससे वेंचर कैपिटल इनवेस्टमेंट कमेटी की बैठक का आयोजन, कानूनी और तकनीकी मूल्यांकन के लिए परिचालन व्यय आदि की पूर्ति होगी। प्रत्येक आधे वर्ष की शुरुआत में इसे फंड में निकासी की जाएगी। केंद्रीय कैबिननेट की बाईस जून दो हज़ार सोलह को हुई बैठक में स्टार्टअप्स के लिए निधि स्थापित करने का फैसला लिया था जिसके लिए दस हज़ार करोड़ रुपये की धनराशि निर्धारित की गई थी। यह योगदान चौदहवें और पंद्रहवें वित्त आयोग के धनराशि की चक्रीय उपलब्धता और कार्यान्वयन की प्रगति के लिहाज से किया गया था। बैठक में एफएफएस वैकल्पिक निवेश निधि के लिए धन प्रदान करने का फैसला लिया गया। एफएफएस का प्रबंधन भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक की देखरेख में होता है। सेबी में पंजीकृत वैकल्पिक निवेश निधि में एफएफएस योगदान करता है। यह योगदान अधिकतम पैंतीस प्रतिशत से अधिक तक हो सकता है। उसी बैठक में कैबिनेट ने फैसला किया कि एआईएफ द्वारा जुटाया गया फंड पूरे स्टार्टप्स में निवेश किया जाएगा। विभिन्न हितधारकों के साथ अपनी बातचीत के दौरान यह विभाग को सूचित किया गया है कि एआईएफ में निवेशकों को प्राथमिकता दी जाएगी जिससे एआईएफ का पोर्टफोलियो निवेश के जोखिम को उचित रूप से प्रबंधित करने के लिए पर्याप्त रूप से विविध है और अगर एआईएफ के संपूर्ण धन को स्टार्ट-अप में निवेश किया जाता है तो यह ऐसे एआईएफ के निवेशकों के लिए अस्वीकार्य जोखिम बना हुआ है। जिन अन्य मुद्दों को लेकर हितधारकों ने चिंता जाहिर की उनमें एआईएफ द्वारा स्टार्ट-अप के वित्तपोषण की प्रक्रिया लंबे समय से तैयार की गई है जो एआईएफ द्वारा शुरूआती प्रतिबद्धता से शुरू होती है और फिर फंड्स में फंड जारी करता है, शामिल है। इस प्रकार यह संभव है कि अंतिम किस्त के जारी किए जाने से पहले स्टार्ट-अप का कारोबार पच्चीस करोड़ रुपये हो लेकिन इसकी अभी भी अपनी विकास आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए धन की आवश्यकता है। इसके अलावा, स्टार्ट अप को अपने जीवन चक्र के विभिन्न चरणों के माध्यम से धन जुटाने की आवश्यकता होती है, अर्थात प्रारंभिक चरण, बीज स्तर और विकास मंच पर। सिडबी द्वारा विभाग को भी बताया गया कि वर्तमान प्रावधान एआईएफ को स्वीकृति के बाद की गई गतिविधियों के लिए सिडबी को मुआवजा देने के लिए अधिकार प्रदान नहीं करते हैं। इन निर्णयों को ऊपर की चिंताओं की पृष्ठभूमि में लिया गया है।
आपसी रंजिश में बदमाशों ने एक युवक के साथ मारपीट की। युवक जब अपने पिता के साथ हमलावर के घर गया तो बदमाश और उसके परिवारवालों ने फिर युवक पर तलवार से हमला कर दिया। मामले में युवक ने सीकर के उद्योग नगर थाना में रिपोर्ट दर्ज करवाई है। माधव सागर तालाब के पास रहने वाले रमन ने रिपोर्ट देकर बताया कि सोमवार दोपहर 3 बजे के करीब वह पपलेश नायक,मनोज नायक और कैलाश भामू के साथ रानी सती रोड पर माधव सागर तालाब पर बैठा हुआ था। इस दौरान चंद्रपुरा निवासी विनोद, हेमंत और उनके कुछ साथी लोहे के सरिए लेकर वहां आए। उन्होंने पहले तो गाली-गलौज की। इसके बाद वहां खड़ी बाइक को सरियों से तोड़ा और रमन व उसके साथियों के साथ मारपीट की। ऐसे में रमन वहां से अपनी जान बचाकर घर भागा। घर पहुंचकर परिवार वालों को पूरी बात बताई। रमन और उसके पिता जुगल किशोर प्रदीप के घर गए। वहां प्रदीप और परिवार के दो अन्य लोगों ने रमन के साथ मारपीट करना शुरू कर दी। एक तलवार से रमन के गले पर हमला कर दिया। साथ ही जान से मारने की धमकी भी दी। रमन ने रिपोर्ट में बताया है कि प्रदीप पिछले 10 दिनों से उनके घर के पास देर रात बदमाशों को बुलाकर गाली-गलौच करता है। साथ ही घर की औरतों को उठाने और पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी भी देता है। फिलहाल रमन की रिपोर्ट पर उद्योग नगर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
आपसी रंजिश में बदमाशों ने एक युवक के साथ मारपीट की। युवक जब अपने पिता के साथ हमलावर के घर गया तो बदमाश और उसके परिवारवालों ने फिर युवक पर तलवार से हमला कर दिया। मामले में युवक ने सीकर के उद्योग नगर थाना में रिपोर्ट दर्ज करवाई है। माधव सागर तालाब के पास रहने वाले रमन ने रिपोर्ट देकर बताया कि सोमवार दोपहर तीन बजे के करीब वह पपलेश नायक,मनोज नायक और कैलाश भामू के साथ रानी सती रोड पर माधव सागर तालाब पर बैठा हुआ था। इस दौरान चंद्रपुरा निवासी विनोद, हेमंत और उनके कुछ साथी लोहे के सरिए लेकर वहां आए। उन्होंने पहले तो गाली-गलौज की। इसके बाद वहां खड़ी बाइक को सरियों से तोड़ा और रमन व उसके साथियों के साथ मारपीट की। ऐसे में रमन वहां से अपनी जान बचाकर घर भागा। घर पहुंचकर परिवार वालों को पूरी बात बताई। रमन और उसके पिता जुगल किशोर प्रदीप के घर गए। वहां प्रदीप और परिवार के दो अन्य लोगों ने रमन के साथ मारपीट करना शुरू कर दी। एक तलवार से रमन के गले पर हमला कर दिया। साथ ही जान से मारने की धमकी भी दी। रमन ने रिपोर्ट में बताया है कि प्रदीप पिछले दस दिनों से उनके घर के पास देर रात बदमाशों को बुलाकर गाली-गलौच करता है। साथ ही घर की औरतों को उठाने और पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी भी देता है। फिलहाल रमन की रिपोर्ट पर उद्योग नगर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
जेलके अनुभव - ४१ 'राजनीतिक' कैदी हम राजनीतिक तथा अन्य कैदियों में कोई भेद नहीं करते। आपके लिए ऐसा कोई भेद किया जाये, यह तो निस्सन्देह आप भी नहीं चाहेंगे ? " जब गत वर्ष के अन्तमें सर जॉर्ज लॉयड यरवदा जेल आये थे; ये वाक्य उन्होंने तभी कहे थे । मेरे मुंहसे असावधानीसे यह "राजनीतिक " विशेषण निकल गया, उसीके ' उत्तरमें वे इस प्रकार बोले थे । मुझे अधिक सावधानीसे काम लेना चाहिए था, क्योंकि मैं जानता था कि गवर्नर महोदयको इस शब्दसे चिढ़ है। फिर भी, अजीब बात है कि हममें से अधिकांश कैदियोंके दैनिक व्यवहारके टिकटोंपर "राजनीतिक " ' शब्द अंकित था। जब मैंने इस असंगतिकी चर्चा की तो उस समयके जेल सुपरिंटेंडेंटने बताया कि यह तो एक खानगी चीज है और केवल अधिकारियोंकी सुविधाके लिए है। आप कैदियोंको इस भेदपर विचार करनेकी जरूरत नहीं; क्योंकि इसके आधारपर कोई हक नहीं माँगा जा सकता । सर जॉर्ज लॉयडकी कही हुई बातको मैंने अपनी स्मृतिके अनुसार तो शब्दशः हीं दिया है। सर जॉर्ज लॉयडने जो कुछ कहा था उसमें एक दंश था, और वह भी कितना अहेतुक । वे जानते थे कि मैं किसी मेहरबानी या विशिष्ट व्यवहारकी । याचना नहीं कर रहा था । प्रसंगवश इस विषयमें साधारण सी चर्चा निकल आई थी । लेकिन वे मुझे यह जताना चाहते थे कि कानून और प्रशासनकी दृष्टि में तुम्हारी स्थिति औरोंकी स्थिति से किसी भी तरह बढ़कर नहीं है । और अकारण ही, सिद्धान्तके नामपर इस भेदका प्रतिवाद किया जाना और दूसरी ओर व्यवहारमें इस भेदको अमली जामा पहनाना एक शोचनीय असंगति तो थी ही और तिसपर अधिकांश अवसरोंपर इस भेदका प्रयोग राजनीतिक कैदियों के विरुद्ध ही किया जाता था । सच तो यह है कि भेदसे बचना असम्भव है। यदि इस तथ्यकी उपेक्षा न की जाये कि कैदी भी मनुष्य ही है, तो उसके रहन-सहनको समझना और तदनुसार जेलोंमें उसकी व्यवस्था करना जरूरी होगा । यहाँ सवाल गरीब और अमीर अथवा शिक्षित और अशिक्षित में भेद करनेका नहीं है । कुल सवाल उनके रहन-सहनके उन तौर-तरीकोंमें भेद करनेका है, जिनके कि वे अपनी पूर्व परिस्थितियोंके कारण आदी हो गये हैं । इस वस्तुस्थितिको अनिवार्य रूपसे मान लेनेकी बजाय ऐसा कहा जाता है कि अपराध करनेवाले लोगोंको यह समझ लेना चाहिए कि कानून किसीका लिहाज नहीं करता और चाहे कोई अमीर आदमी चोरी करे अथवा कोई ग्रेजुएट या मजदूर, कानूनकी दृष्टिमें सब समान हैं । यह तो एक निर्दोष और अच्छे कानूनका १. इस लेखमालाके पहले तीन लेखोंके लिए देखिए खण्ड २३ । २. बम्बईके गवर्नर; कैदियों में भेदके सम्बन्ध में गांधीजी के पत्रके लिए देखिए खण्ड २३, पृष्ठ १८६-८७ । २४-१ गलत अर्थ लगाना है। यदि कानूनकी दृष्टिमें सभी समान हैं, जैसा कि होना भी चाहिए, तो हर आदमी के साथ उसकी सहनशक्तिको देखकर बरताव किया जाना चाहिए । जिस चोरका शरीर नाजुक हो उसे भी ३० कोड़े लगाना और जो शरीर - से हट्टा-कट्टा हो उसे भी ३० कोड़े लगाना, निष्पक्ष व्यवहार नहीं माना जायेगा । वह तो नाजुक शरीरवाले के साथ अनुचित सख्ती और शायद हट्टे-कट्टे शरीरवाले के प्रति अनुग्रह ही कहा जायेगा । उसी तरह, उदाहरण के तौरपर, मोतीलालजी को सख्त जमीनपर बिछी नारियलकी खुरदरी चटाईपर सुलाना, समान व्यवहारका नहीं अतिरिक्त सजा देनेका उदाहरण होगा। जेलकी व्यवस्थामें यदि यह स्वीकार कर लिया जाये कि कैदी भी मनुष्य ही है, तो कैदीको जेलमें प्रवेश कराने के समयकी प्रक्रिया आजसे भिन्न हो । अँगुलियोंके निशान जरूर लिये जायेंगे; रजिस्टरमें उसके पहले के अपराध भी दर्ज किये ही जायेंग; लेकिन साथ ही कैदीकी आदतों और रहन-सहनका ब्योरा भी दर्ज किया जायेगा । यदि अधिकारी कैदियोंको मनुष्य समझने लगें तो उन्हें जो पद्धति स्वीकार करनी होगी उसे "भेद करना " न कहकर "वर्गीकरण " ही कहा जायेगा । एक प्रकारका वर्गीकरण तो आज भी मौजूद है। उदाहरण के लिए, कुछ अहातों में कदियोंको लम्बी कोठरियों में इकट्ठा रखा जाता है। खतरनाक अपराधियोंके लिए अलग-अलग कोठरियाँ होती हैं और तनहाईकी सजावालोंको ताला लगाकर अलग-अलग रखा जाता है। फिर, फाँसीवालोंकी कोठरियाँ भी होती हैं, जिनमें फाँसीकी सजा सुनाये गये कैदियोंको रखा जाता है और अन्तमें हवालाती कैदियोंके लिए अलग कोठरियाँ होती हैं । पाठकोंको यह जानकर आश्चर्य होगा कि ज्यादातर राजनीतिक कैदियोंको अलग या तनहाई में रखा जाता था। कुछको तो फाँसीकी सजा पाये हुए अपराधियोंकी कोठरियोंमें भी रखा जाता था। लेकिन यहाँ में एक बात साफ कर देना चाहूँगा, अन्यथा अधिकारियोंके साथ कहीं अन्याय न हो जाये । वह बात यह है कि जिन्हें इन विभागों और कोठरियोंकी जानकारी नहीं है, वे ऐसा सोच सकते हैं कि फाँसीकी सजा सुनाये गये कैदियोंकी कोठरियाँ खास तौरपर कुछ खराब होती होंगी, लेकिन वस्तुस्थिति एसी नहीं है । जहाँतक यरवदा जेलका सम्बन्ध है, इन कोठरियोंकी बनावट बहुत अच्छी है और ये हवादार हैं। लेकिन जो चीज बहुत आपत्तिजनक है वह है इनके इर्द-गिर्दका वातावरण । जैसा मैंने ऊपर बताया, वर्गीकरण अनिवार्य है और वह किया भी जाता है । फिर कोई कारण नहीं कि वह वैज्ञानिक और मानवतापूर्ण भी क्यों न हो। मैं जानता हूँ कि मेरे सुझाये हुए ढंगसे वर्गीकरण करनेका मतलब है सारी पद्धतिमें आमूलचूल परिवर्तन । बेशक, इसमें खर्च ज्यादा होगा और नई पद्धतिको चलाने के लिए दूसरे ढंगके लोगोंकी भी जरूरत होगी। लेकिन आज अतिरिक्त खर्च होगा तो अन्तमें बचत भी होगी। मैं जो क्रान्तिकारी परिवर्तन सुझा रहा हूँ उसका सबसे बड़ा लाभ तो यह होगा कि अपराधों की संख्या में निश्चित रूपसे कमी आ जायेगी और कैदियोंका जेलके अनुभव - ४ सुधार होगा । फिर तो जेल सुधार गृह हो जायेंगे और समाजमें पाप करनेवाले लोग उन स्थानों में जाकर सुधर जायेंगे और लौटकर आनेपर समाजके प्रतिष्ठित सदस्य बन जायेंगे। हो सकता है, वह दिन बहुत दूर हो; लेकिन अगर हम पुरानी रूढ़ियोंके मोहमें न पड़ गये हों तो जेलोंको सुधार गृह बनाने में हमें कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए । यहाँ मुझे एक जेलरके सारगर्भित वचन याद आते हैं । उसने कहा था : "जब कभी मैं कैदियोंको भरती करता हूँ या उनकी तलाशी लेता हूँ अथवा उनके बारेमें रिपोर्ट करता हूँ, मेरे मन में अक्सर एक सवाल उठता है; क्या में इनमें से ज्यादातर लोगोंसे अच्छा हूँ ? ईश्वर जानता है कि इनमें से कुछ जिन अपराधोंके कारण यहाँ आये हैं, उनसे बुरे अपराध तो मैंने किये हैं। फर्क इतना ही है कि इन बेचारोंके अपराधका पता लग गया और मेरे अपराधका पता नहीं लग पाया । जो बात इस नेक जेलरने स्वीकार की, क्या वही हममें से बहुतोंके साथ लागू नहीं होती ? समाज उनपर तो अँगुली नहीं उठाता । लेकिन हमें तो, जिन लोगोंमें बच निकलनेकी चतुराई नहीं है, उनके प्रति सदा शंकित बने रहनेकी आदत पड़ गई है। कारावासके परिणामस्वरूप अकसर वे पक्के अपराधी बन जाते हैं । कोई भी व्यक्ति पकड़ा गया कि उसके साथ पशुओंका-सा व्यवहार शुरू हो जाता है। अभियुक्त जबतक अपराधी न सिद्ध कर दिया जाये तबतक सिद्धान्ततः उसे निर्दोष माना जाता है। लेकिन व्यवहारमें उसकी देख-रेखके लिए जिम्मेदार लोगोंका रवैया दम्भपूर्ण और तिरस्कार-भरा होता है। मनुष्य अपराधी करार दिया गया कि वह समाजका अंग रह ही नहीं जाता । जेलका वातावरण उसमें अपने आपको हीन माननेकी आदत पैदा कर देता है । राजनीतिक कैदियोंपर इस निर्वीर्य बनानेवाले वातावरणका असर आमतौरपर नहीं होता । मनको खिन्न बना देनेवाले इस वातावरणके असरमें आने की बजाय वे उसके खिलाफ संघर्ष करते हैं और कुछ अंशोंमें उसे सुधार भी पाते हैं । समाज भी उन्हें अपराधी नहीं मानता । इसके विपरीत, वे वीर पुरुष और शहींद माने जाते हैं । जेलमें उन्हें जो कष्ट भोगना पड़ता है, उसका बखान लोग बहुत बढ़ा-चढ़ाकर करते हैं और कभी-कभी यह अति प्रशंसा राजनीतिक कैदियोंके नैतिक पतनका भी कारण बन जाती है। लेकिन दुर्भाग्यकी बात यह है कि राजनीतिक कैदियोंके प्रति आम लोग जितनी उदारता दिखाते हैं, अधिकारीगण उतनी ही सख्ती बरतते हैं; अधिकांश मामलोंमें यह सख्ती बिलकुल बेजा हुआ करती है। सरकार राजनीतिक कैदियोंको साधारण कैदियोंसे अधिक खतरनाक मानती है। एक अधिकारीने बड़ी गम्भीरतासे कहा था कि राजनीतिक कैदीके अपराध से पूरे समाजको खतरा रहता है, जब कि साधारण अपराधसे केवल अपराधीका ही नुकसान होता है । एक दूसरे अधिकारीने मुझे बताया कि राजनीतिक कैदियोंको अलग रखने और पत्र-पत्रिकाएँ न देनेका कारण यह है कि उन्हें अपने अपराधका एहसास कराया जाये । उसने कहा, राजनीतिक कैदी "कैद" में गौरवका अनुभव करते हैं । स्वतन्त्रता खो जाने से जहाँ साधारण अपराधियोंको दुःख होता है, राजनीतिक अपराधियोंपर उसका कोई असर ही नहीं होता । उसने आगे कहा कि इसलिए यह स्वाभाविक है कि सरकार उन्हें सजा देनेका कोई और उपाय करे; इसीलिए उन्हें साधारणतया जो सुविधाएँ बेशक मिलनी चाहिएं, वे नहीं दी जातीं । मैंने 'टाइम्स ऑफ इंडिया के साप्ताहिक अंक, या 'इंडियन सोशल रिफॉर्मर' या 'सर्वेट ऑफ इंडिया' अथवा 'मॉडर्न रिव्यू' या 'इंडियन रिव्यू' की माँग की थी। अधिकारीने उसीके जवाबमें यह बात कही थी । जो लोग अखबारोंको नाश्तेकी ही तरह जरूरी मानते हैं, उनके लिए यह बहुत कड़ी सजा थी । पाठक इसे मामूली सजा न समझें । मैं तो कहूँगा कि अगर श्री मजलीको समाचारपत्र दिये गये होते तो उनके मस्तिष्कमें खराबी पैदा न होतीं। इसी तरह उस आदमी के लिए जो अपनेको हर अवसरपर सुधारक नहीं मानता यह बहुत उद्वेगजनक सिद्ध होगा कि उसे खतरनाक अपराधियोंके साथ रख दिया जाये, जैसा कि यरवदा जेलमें लगभग सभी राजनीतिक कैदियोंके साथ किया जा रहा था । जो लोग सिवा गालीके बात नहीं करते या जिनकी बातचीत आमतौर पर अशिष्टतापूर्ण होती है, उनके साथ रह सकना आसान काम नहीं है । यदि सरकार अक्लसे काम लेकर साधारण कैदियोंपर अच्छा असर डालने के लिए राजनीतिक कैदियों के साथ सलाह-मशविरा करके उन्हें ऐसे वातावरण में रखती तो यह बात समझमें आ सकती थी। लेकिन मैं मानता हूँ कि यह बात व्यावहारिक नहीं है। मैं यह कहना चाहता हूँ कि राजनीतिक कैदियोंको अरुचिकर वातावरण में रखना उन्हें अतिरिक्त सजा देना है, जिसके वे कदापि पात्र नहीं हैं। उन्हें अलग रखा जाना चाहिए और वे किस तरह रहते आये हैं, यह समझकर उनके साथ तदनुसार बरताव करना चाहिए । आशा है, सत्याग्रही लोग इसका और अगले अन्य किसी प्रकरणमें मैंने जेलके सुधारकी जो हिमायत की है, उसका गलत अर्थ नहीं लगायेंगे । सत्याग्रहियोंको चाहे जैसी असुविधाएँ सहनी पड़ें, उनका इस कारण रोष करना शोभा नहीं देगा। वह तो क्रूरसे - क्रूर व्यवहारके लिए तैयार होकर ही आया है। इसलिए यदि व्यवहार भलमनसीका किया जाये तो ठीक है; यदि न किया जाये तो भी ठीक ही है । १. देखिए खण्ड २३, पृष्ठ ३६८-६९ । २. टिप्पणियाँ स्वर्गीया श्रीमती रमाबाई रानडे रमाबाई रानडेका' निधन राष्ट्रकी एक बहुत बड़ी हानि है। हम जिन गुणोंकी एक हिन्दू विधवामें कल्पना करते हैं वे उन सब गुणोंकी साकार मूर्ति थीं । अपने तेजस्वी पतिके जीवन-कालमें वे उनकी सच्ची मित्र और सहधर्मिणी रहीं। उन्होंने अपने पतिके दिवंगत होने के बाद उनके एक प्रिय कामको आगे बढ़ाना ही अपना जीवन-कार्य बना लिया था । श्री रानडे समाज सुधारक थे और भारतीय नारियोंके उत्थान में उनकी गहरी रुचि थी। इसलिए रमाबाई प्राणपणसे सेवासदनके काममें जुट गई । इसी काम में उन्होंने अपनी समूची शक्ति लगा दी । इसीका परिणाम है कि आज भारत-भरमें सेवासदन - जैसी कोई दूसरी संस्था नहीं है। वहाँ लगभग एक हजार बालिकाओं और महिलाओंको शिक्षा दी जा रही है। कर्नल मैडॉकने मुझे बतलाया है कि सैसून अस्पतालमें ही सबसे अच्छी और सबसे अधिक संख्या में भारतीय नसे तैयार की जाती हैं और वे सब नर्से सेवासदनसे आई हुई होती हैं। इसमें शक नहीं कि रमाबाईको देवधर जैसा अथक परिश्रमी और छोटीसे-छोटी चीजोंका भी पूरा पूरा ध्यान रखनेवाला एक कार्यकर्ता भी मिल गया था। लेकिन उनके पास सुयोग्य और निष्ठावान सहयोगी थे, यह तथ्य भी रमाबाईको ही अधिक प्रशंसनीय बनाता है । सेवासदन सदा उनकी पवित्र स्मृतिका जीवन्त स्मारक बना रहेगा। मैं अपनी इस दिवंगत बहनके परिवार और सेवासदनके अनेक बालक-बालिकाओंके प्रति विनम्रतापूर्वक अपनी सहानुभूति प्रकट करता हूँ । प्रिंसिपल गिडवानी मेरे पूछने पर श्रीमती गिडवानी अपने एक पत्र में लिखती हैंः कुछ समय पहले जब में अपने पतिसे मिलने गई, तब देखा कि अधि कारी लोग उनके साथ अशिष्टतासे पेश आ रहे थे। वे कोठरीमें बन्द थे और उनके कपड़े मैले थे । सात दिनके अनशनके कारण वे बहुत दुबले दिख रहे थे । इससे पहले चौरीचौराके समय भी उन्होंने अनशन किया था, लेकिन तब वे इतने कमजोर नहीं हुए थे । उनको अन्य बन्दियों जैसा ही खाना दिया जाता है। मुलाकातियोंको उनसे मिलनेमें तरह-तरहकी कठिनाइयाँ पैदा की १. (१८६२-१९२४); महादेव गोविन्द रानडेकी पत्नी २. पूनाके सैसून अस्पतालके सर्जन-जनरल, जिन्होंने जनवरी, १९२४ में गांधीजी का एपेण्डिसाइटिसका ऑपरेशन किया था । ३. गो० कृ० देवधर ( १८७९-१९३५); सवेंट्स ऑफ इंडिया सोसाइटीके सदस्य; बादमें उसके अध्यक्ष । ४. आसूदोमल देकचन्द गिडवानी, गुजरात विद्यापीठ, अहमदाबादके प्रधानाचार्थं । जाती हैं। उनके भाईने मुलाकात के लिए दो बार लिखा, पर कोई सन्तोषप्रद उत्तर नहीं दिया गया। लेकिन मैं इस सबकी चिन्ता नहीं करती । इन्सान कठिनाइयों में से गुजरकर ही ऊपर चढ़ता है । यह करुणाजनक पत्र एक पतिपरायणा महिलाका लिखा हुआ है, श्रीमती गिडवानीका पत्र प्रकाशनके लिए नहीं लिखा गया था । वह एक मित्रको लिखा गया घरेलू पत्र है। मैंने उन मित्रको लिखा था कि वे श्रीमती गिडवानीसे उनके पतिकी हालत के बारेमें पूछें। यदि श्रीमती गिडवानी द्वारा बतलाई गई बातें सही हैं तो उनसे नाभाके वर्तमान प्रशासनकी इज्जत नहीं बढ़ती । प्रिंसिपल गिडवानीपर कोई मुकदमा नहीं चलाया गया है, फिर भी स्पष्ट है कि उनके साथ पक्के अपराधियों जैसा ही बरताव किया जा रहा है। श्री जिमंडने बतलाया है कि प्रिंसिपल गिडवानीने मानवताकी भावनासे प्रेरित होकर ही राज्यकी सीमामें प्रवेश किया था । नाभाके प्रशासकोंसे मेरा कहना है कि वे या तो इस कथनका खण्डन करें या अपनी सफाई दें। इस बातका मैं वादा करता हूँ कि उनकी सफाईमें दिये गये उनके बयानको भी मैं उसी तरह प्रकाशित करूँगा जिस तरह मैंने श्रीमती गिडवानीके कथनको किया है। पत्रकारिताकी भाषा एक मित्र पूछते ह : क्या आपने "महात्माको मानपत्र " शीर्षकसे लिखा गया 'क्रॉनिकल का अग्रलेख पढ़ा है ? उसमें लेखकने लिखा है कि "यदि दो-तीन विरोधकर्ताओंके भाषणोंकी रिपोर्ट विरोध सूचित करती हो तो कहना पड़गा कि विरोध केवल विरोधके लिए किया गया था और उसके पीछे कुछ ऐसे पेशेवर झगड़ालू लोग ही थे, जिनके मनमें महात्माके आन्दोलनकी सफलतासे ईर्ष्याके कारण बड़ी ही कटुभावना व्याप्त हो गई है । 'टाइम्स' जब श्री मुहम्मद अलीके बारेमें लिखता है तो आप उसे उपदेश सुनाने लगते हैं। लेकिन क्या उस 'क्रॉनिकल' के बारेमें आप चुप रहना चाहेंगे जो अपने आपको आपका अनुयायी बतलाता है और राजनीतिक विरोधियोंके लिए ऐसी असंयत और अयथार्थ भाषाका प्रयोग करता है ? 'टाइम्स' को कभी उपदेश देनेकी बात मुझे तो याद नहीं पड़ती। वैसे अगर कभी मैं यह चाहता भी तो साहस न होता । साफ है कि लेखकने मेरे उन शब्दोंका हवाला दिया है जो मैंने देशी भाषाओंकी उन कुछ- एक पत्रिकाओं के बारेमें लिखे थे जो आजकल झूठी बदनामी फैलानेका अभियान-सा चला रही हैं । हुआ यह था कि मैंने 'टाइम्स ऑफ इंडिया' में अनुवाद किये हुए कुछ अंश देखे और मुझे उनके बारेमें लिखना ही पड़ा । पर मैंने उसमें 'टाइम्स ऑफ इंडिया' को नहीं, सम्बन्धित पत्रिकाओंको ही सलाह दी थी । पत्र लेखक खुद उसे देखकर अपनी तसल्ली कर सकता है । मैं यह आरोप तो स्वीकार नहीं कर सकता कि मैंने 'टाइम्स ' को कभी 'उपदेश' दिया, पर हाँ, मैं इतना जरूर कह सकता हूँ कि 'क्रॉनिकल' के लेखकको अहिंसात्मक असहयोगके अपने दावे के अनुरूप भाषाका प्रयोग करना चाहिए था और मानपत्रका विरोध करनेवालोंकी मंशापर शक नहीं करना चाहिए था। अवश्य ही पत्र लेखकने जिसका हवाला दिया है वह लेख मैंने नहीं पढ़ा है। आमतौरपर मैं अपने बारेमें भारतीय समाचारपत्रों में निकलनेवाले लेख इत्यादि पढ़ता ही नहीं, चाहे उनमें मेरी प्रशंसा की गई हो । प्रशंसाकी मुझे दरकार नहीं है क्योंकि बिना किसी भी बाहरी सहायताके मेरो मनमें पहलेसे ही काफी अहम् भरा पड़ा है और अपनी निन्दा इस ख्यालसे नहीं पढ़ता कि कहीं मेरे भीतरका असुर सौम्य भावनाओंपर हावी होकर मेरी अहिंसाको न धर दबोचे । पूरा लेख पढ़ने के बाद मेरे इस कथनमें तदनुसार संशोधन किया जा सकता है। फिर भी, मेरा अपना अनुमान यह है कि उक्त बातें श्री जे० बी० पेटिट और कानजी द्वारकादासको नजरमें रखकर कही गई हैं। मैं इन दोनोंसे भलीभाँति परिचित हूँ । हम लोगोंके आपसी सम्बन्ध आज भी उतने ही मैत्रीपूर्ण हैं, जितने कि असहयोगके प्रारम्भसे पहले थे । मैं कल्पना भी नहीं कर सकता कि इन दोनों में से किसीके भी दिलमें मेरे प्रति किसी प्रकारकी कटुता हो सकती है। वे साफसाफ कहते हैं कि मेरे तरीके उन्हें पसन्द नहीं हैं। कमसे-कम वे तो विरोध करनेके लिए विरोध नहीं करेंगे। जिनकी राय मानपत्र देने के पक्ष में थी उनसे मैंने यह सुना है कि उस अवसरपर श्री पेटिटने इतने संयमित ढंगसे अपनी बात कहीं कि उनके स्वभावको देखते हुए वह एक आश्चर्यजनक चीज ही थी। मुझे मालूम है कि श्री पेटिट चाहे जब आवेश में आकर बोल सकते हैं लेकिन प्रस्तुत मामले में उन्हें यह अहसास रहा कि उन्हें एक मित्रके खिलाफ बोलनेका दुखद कर्त्तव्य निभाना है। निगमके एक काफी पुराने सदस्यकी हैसियतसे उन्हें लगा कि निगम एक ऐसे व्यक्तिको मानपत्र देकर अपनी परम्पराओंके विरुद्ध आचरण करेगा जिसके सौजन्यको उसकी (पेटिटके तई) घृणित राजनीति से अलग रखकर नहीं देखा जा सकता । सर्वश्री पेटिट और कानजी हृदयसे ऐसा मानते थे कि बम्बई नगर निगम एक गलत काम कर रहा है। इसलिए मेरी विनम्र सम्मतिमें उनका विरोध प्रकट करना उचित ही था । बेशक, आजकल हमारे देशके सार्वजनिक जीवनमें एक दूसरेके इरादोंपर जरूरतसे ज्यादा शंका की जाती है । ( सहयोगियोंकी तो बात छोड़िए) स्वराज्यवादियोंमें भी कोई ऐसा नहीं है जिसके इरादोंपर अपरिवर्तनवादी लोग कोई शक जाहिर न करें और स्वराज्यवादी लोग भी अपरिवर्तनवादियों के साथ ऐसा ही सलूक करते हैं । और उदार दलके लोगोंपर तो दोनों ही ऐसा शक करते हैं। समझमें नहीं आता कि जिन्हें पहले ईमानदार माना जाता था वे ही अब एकाएक राजनीतिक विचारोंके परिवर्तनके कारण बेईमान कैसे हो गये । चूँकि असहयोगियोंके विरोधियोंने नहीं, बल्कि असहयोगियोंने अपनी विचार-धारा बदली है, इसलिए उनको खास सावधानी रखनेकी जरूरत है, अपने विपक्षियोंसे कहीं ज्यादा । यदि दोनोंमें मतभेद है तो इसमें विपक्षियोंका १. बम्बईके दानशील पारसी समाज-सेवी । २. होमरूल लीगके प्रमुख सदस्य और गांधीजी के मित्र । कोई दोष नहीं हो सकता । इसलिए मैं तो अपना पूरा रोष विचारकर्ताओं की बजाय विचारोंके प्रति प्रकट करता । मुझे लगता है कि वाइकोम सत्याग्रह अपनी मर्यादाएँ भंग करने लगा है। मैं तो यह चाहता हूँ कि सिख अपना लंगर बन्द कर दें और यह आन्दोलन सिर्फ हिन्दुओं तक सीमित रहे । कांग्रेस के कार्यक्रम में शामिल कर लिये जानेसे ही यह हिन्दुओं और गैर-हिन्दुओंका आन्दोलन नहीं बन जाता, ठीक उसी प्रकार जैसे खिलाफत आन्दोलन कांग्रेस के कार्यक्रममें शामिल कर लिये जानेपर भी मुसलमानों और गैर मुसलमानोंका आन्दोलन नहीं बन गया। इसके सिवा खिलाफत आन्दोलनके विरुद्ध ब्रिटिश सर कारके रूप में गैर-मुसलमान लोग थे । अगर हिन्दू या दूसरे गैर-मुसलमान लोग मुसलमानोंके अपने अन्दरूनी धार्मिक झगड़ोंमें दखल देने लगें तो वह बेजा मदाखलत होगी और अगर मुसलमान उसे धृष्टतापूर्ण समझें तो वह ठीक ही होगा। इसी तरह जो मामला सिर्फ हिन्दू समाजके सुधारसे सम्बन्धित है यदि उसमें गैर-हिन्दू टाँग अड़ाना चाहें तो कट्टरपंथी हिन्दू नाराजी जाहिर करेंगे ही । यदि मलाबारके हिन्दूसुधारक गैर हिन्दुओंकी सहानुभूतिको छोड़कर और किसी प्रकारकी सहायता अथवा हस्तक्षेप स्वीकार करेंगे या उसे प्रोत्साहन देंगे तो वे सारे हिन्दू समाजकी हमदर्दी खो बैठेंगे। मुझे पूरा विश्वास है कि वाइकोममें इस आन्दोलनका नेतृत्व करनेवाले हिन्दू सुधारक अपने कट्टरपंथी भाइयोंके विचारोंमें जोर-जबरदस्तीके बलपर परिवर्तन नहीं चाहते। जो भी हो, नेताओंको वह सीमा रेखा जान लेनी चाहिए जिसका अतिक्रमण किसी भी सत्याग्रहीको नहीं करना है। मैं सुधारकोंका पूरा सम्मान करते हुए, अनुरोध करना चाहता हूँ कि वे सनातनी लोगोंको आतंकित करनेकी कोशिश न करें । मैं इस विचारसे सहमत नहीं हूँ कि वाइकोममें जिस रास्तेको लेकर संघर्ष चल रहा है, यदि वह खुल जाता है तो मलाबार-भरमें छुआछूतकी समस्या हल हो जायेगी 1 वाइकोममें यदि अहिंसापूर्ण तरीकोंसे विजय हासिल की गई तो इसमें शक नहीं कि पण्डे - पुजारियों द्वारा फैलाये गये अन्ध-विश्वासोंके गढ़की नीवें आमतौरपर हिल जायेंगी, पर हर स्थानपर जब भी समस्या सिर उठाये तब उसे वहीं स्थानीय रूपसे ही हल करना पड़ेगा । गुजरातमें कहीं एक जगह कोई कुआँ हरिजनोंके इस्तेमालके लिए खोल दिये जानेका यह मतलब नहीं होगा कि गुजरातके सारे कुएँ उनके लिए खुल जायेंगे और अगर ईसाई, मुसलमान, अकाली और इन हिन्दू सुधारकोंके सभी गैरहिन्दू मित्र भी कट्टरपंथी हिन्दुओंके विरुद्ध प्रदर्शन करने लगें, इन सुधारकोंकी पैसेरुपये से मदद करने लगें और अन्तमें आतंकित करके उनपर हावी हो जायें तो हिन्दूधर्मका क्या होगा ? क्या हम इसे सत्याग्रह कह सकेंगे ? क्या सनातनी लोगोंका घुटने टेक देना स्वेच्छाप्रेरित कहा जायेगा ? क्या उसे हिन्दू धर्म में सुधार कहेंगे ? ३. पत्र लेखकोंसे मेरे नाम पत्र भेजनेवालोंकी संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। इनमें सम्पादकके नाम पत्र लिखनेवाले और वे लोग भी शामिल हैं जो सार्वजनिक महत्त्वके विषयोंके बारेमें मेरी सलाह माँगते हैं। मैं इन्हें आश्वस्त करना चाहता हूँ कि मुझसे जहाँतक बन पाता है, मैं सभी पत्रोंको पढ़ता हूँ और यथासामर्थ्य इन स्तम्भोंमें उनके उत्तर भी देता हूँ । साथ ही मैं यह मानता हूँ कि मैं अपने पत्र लेखकों द्वारा चर्चित सभी महत्त्वपूर्ण विषयों के बारेमें पूरे विस्तारसे लिखने में असमर्थ हूँ । मेरे लिए यह भी सम्भव नहीं है कि मैं सभी पत्रोंका अलग-अलग उत्तर दूँ । पत्र - लेखक 'यंग इंडिया' को ही उनके नाम भेजा गया मेरा व्यक्तिगत पत्र समझनेकी कृपा करें। यदि लोग चाहते हैं कि उनके पत्रोंपर ध्यान दिया जाये तो उनके पत्र संक्षिप्त, साफ लिखे और निर्वैयक्तिक होने चाहिए । [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, ८-५-१९२४ ४. आत्म-निरीक्षणका आमन्त्रण एक सम्माननीय पत्र लेखकका पत्र नीचे देते हुए मुझे प्रसन्नता के साथ पीड़ाका भी अनुभव हो रहा हैः 'यंग इंडिया' के हालके लेखने मेरी अधिकांश शंकाओंको दूर कर दिया है, किन्तु अभी कुछ ऐसे प्रश्न हैं जिन्हें, मैं चाहता हूँ, थोड़ा और साफ कर दिया जाये तथा फिर इन्हें शीघ्र ही 'यंग इंडिया' में प्रकाशित कर दिया जाये । कौंसिलोंमें प्रवेश सम्बन्धी आपके विचार अब मेरे सम्मुख बिलकुल स्पष्ट हो गये हैं और अब वे मुझे परेशान नहीं करते। किन्तु मैं चाहता हूँ कि आप नगरपालिकाओं और जिला बोर्डोंमें बहुमत प्राप्त करने के सम्बन्ध में अपने विचार व्यक्त करें । मैंने १९२१ में इन मुद्दोंपर आपका मत जानने की इच्छासे आपको एक तार' भेजा था । तब मुझे आपने उत्तर दिया थाः "नगरपालिकाओंपर अधिकार कर सकते हो, जिला बोडोंके बारेमें सन्देह है। " १९२३ के अन्त में सभी नगरपालिकाओंमें नये चुनाव हुए हैं और असहयोगियोंने उनमें से अधिकांशपर अधिकार कर लिया है। हमने जिला १. यह सूचना यंग इंडियाके बादके अंकोंमें बार-बार दी जाती रही थी। २. यह तार उपलब्ध नहीं है । बोर्डके चुनाव भी लड़े हैं। हमारे इन चुनावोंके अनुभव बहुत ही दुःखजनक हैं । उनसे कांग्रेस कार्यको बल नहीं मिला है, प्रत्युत हममें बहुत बड़ी कमजोरी आई है। उनके फलस्वरूप हमारे असहयोगी कार्यकर्ताओंमें परस्पर तीखे मतभेद, द्वेष तथा घृणाके भाव पैदा हो गये हैं। दूसरी ओर हमने अपने नरमदलीय समर्थकों, जमींदारों तथा इनमें दिलचस्पी रखनेवाले अन्य लोगोंकी सहानुभूति भी लगभग गँवा दी है। उन्होंने अब डराने-धमकानेका रुख अख्तियार कर लिया है और वे हमारे मार्ग में रोड़े अटकाने तथा हमें बदनाम करनेका भरसक प्रयत्न कर रहे हैं। इससे भी अधिक गम्भीर बात यह है कि हमें सरकारसे सम्बन्ध रखना पड़ता है। हम सरकारसे अनुदान प्राप्त करते हैं, इसलिए हमारे लिए सरकारी अधिकारियोंको सभी कुछ लिख भेजना जरूरी हो जाता है। यहाँ हमें जनताकी सेवा करनेका अवसर तो अवश्य मिलता है, किन्तु हम जो श्रम, समय और शक्ति इसमें लगाते हैं, उसका उतना परिणाम नहीं निकलता और उससे हमारा जल्दी स्वराज्य लेनेको कार्य भी सचमुच आगे नहीं बढ़ता । जिला बोर्डके अन्तर्गत देशी भाषाओंके प्राथमिक, माध्यमिक तथा मिडिल स्कूल हमारे नियन्त्रणमें रहते हैं, परन्तु हमको उन्हें विहित सरकारी नीतिके अनुसार ही चलाना पड़ता है। अतः मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ कि आप मुझे अपनी राय बतायें। हमारे जिलेमें बोर्डके अध्यक्ष और उपाध्यक्षका शीघ्र ही चुनाव होनेवाला है; हमें आपका स्पष्ट उत्तर चाहिए कि हम इन स्थानोंके लिए चुनाव लड़ें या न लड़ें । एक बात साफ समझ में आती है और वह यह है कि यदि हम अपने आदमियोंको अध्यक्ष और उपाध्यक्ष नहीं बनवा सकते तो हमारा इन संस्थाओं में जाना व्यर्थ है । मेरा अन्तिम प्रश्न है, हमें अपने कांग्रेस संगठनोंका क्या करना चाहिए ? वर्तमान नियमोंके अनुसार हमें गाँवोंसे मण्डलोंके लिए, मण्डलोंसे थानोंके लिए, थानोंसे तहसीलों अथवा जिलेके लिए जिलेसे प्रान्तके लिए तथा प्रान्तसे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटीके लिए सदस्य चुनने होते हैं। यह एक बहुत ही बड़ा काम है जिसे सँभालना मुश्किल है। हमारे पास न तो कार्यकर्ता हैं और न पैसा है, इसलिए हम इस विराट् संगठनको चलाने में असमर्थ हैं । हममें से कुछ कहते हैं कि हमें अपनी सारी गतिविधि जिला बोर्डों और नगरपालिकाओंपर केन्द्रित करनी चाहिए, तथा कांग्रेस संगठनको भगवान्पर छोड़ देना चाहिए । कांग्रेस संगठनों को चलाते रहना बड़े खर्चका काम है और वह साराका-सारा काम लगभग बन्द ही पड़ा है । जहाँतक रचनात्मक कार्यका प्रश्न है, उसमें न तो हमारे कार्यकर्त्ताओंकी रुचि है, न गाँववालोंकी, और न जनताकी हो । उसमें बहुत अधिक समय लगता है और उससे स्वराज्य शीघ्र कैसे प्राप्त हो सकता है, यह बात मेरी
जेलके अनुभव - इकतालीस 'राजनीतिक' कैदी हम राजनीतिक तथा अन्य कैदियों में कोई भेद नहीं करते। आपके लिए ऐसा कोई भेद किया जाये, यह तो निस्सन्देह आप भी नहीं चाहेंगे ? " जब गत वर्ष के अन्तमें सर जॉर्ज लॉयड यरवदा जेल आये थे; ये वाक्य उन्होंने तभी कहे थे । मेरे मुंहसे असावधानीसे यह "राजनीतिक " विशेषण निकल गया, उसीके ' उत्तरमें वे इस प्रकार बोले थे । मुझे अधिक सावधानीसे काम लेना चाहिए था, क्योंकि मैं जानता था कि गवर्नर महोदयको इस शब्दसे चिढ़ है। फिर भी, अजीब बात है कि हममें से अधिकांश कैदियोंके दैनिक व्यवहारके टिकटोंपर "राजनीतिक " ' शब्द अंकित था। जब मैंने इस असंगतिकी चर्चा की तो उस समयके जेल सुपरिंटेंडेंटने बताया कि यह तो एक खानगी चीज है और केवल अधिकारियोंकी सुविधाके लिए है। आप कैदियोंको इस भेदपर विचार करनेकी जरूरत नहीं; क्योंकि इसके आधारपर कोई हक नहीं माँगा जा सकता । सर जॉर्ज लॉयडकी कही हुई बातको मैंने अपनी स्मृतिके अनुसार तो शब्दशः हीं दिया है। सर जॉर्ज लॉयडने जो कुछ कहा था उसमें एक दंश था, और वह भी कितना अहेतुक । वे जानते थे कि मैं किसी मेहरबानी या विशिष्ट व्यवहारकी । याचना नहीं कर रहा था । प्रसंगवश इस विषयमें साधारण सी चर्चा निकल आई थी । लेकिन वे मुझे यह जताना चाहते थे कि कानून और प्रशासनकी दृष्टि में तुम्हारी स्थिति औरोंकी स्थिति से किसी भी तरह बढ़कर नहीं है । और अकारण ही, सिद्धान्तके नामपर इस भेदका प्रतिवाद किया जाना और दूसरी ओर व्यवहारमें इस भेदको अमली जामा पहनाना एक शोचनीय असंगति तो थी ही और तिसपर अधिकांश अवसरोंपर इस भेदका प्रयोग राजनीतिक कैदियों के विरुद्ध ही किया जाता था । सच तो यह है कि भेदसे बचना असम्भव है। यदि इस तथ्यकी उपेक्षा न की जाये कि कैदी भी मनुष्य ही है, तो उसके रहन-सहनको समझना और तदनुसार जेलोंमें उसकी व्यवस्था करना जरूरी होगा । यहाँ सवाल गरीब और अमीर अथवा शिक्षित और अशिक्षित में भेद करनेका नहीं है । कुल सवाल उनके रहन-सहनके उन तौर-तरीकोंमें भेद करनेका है, जिनके कि वे अपनी पूर्व परिस्थितियोंके कारण आदी हो गये हैं । इस वस्तुस्थितिको अनिवार्य रूपसे मान लेनेकी बजाय ऐसा कहा जाता है कि अपराध करनेवाले लोगोंको यह समझ लेना चाहिए कि कानून किसीका लिहाज नहीं करता और चाहे कोई अमीर आदमी चोरी करे अथवा कोई ग्रेजुएट या मजदूर, कानूनकी दृष्टिमें सब समान हैं । यह तो एक निर्दोष और अच्छे कानूनका एक. इस लेखमालाके पहले तीन लेखोंके लिए देखिए खण्ड तेईस । दो. बम्बईके गवर्नर; कैदियों में भेदके सम्बन्ध में गांधीजी के पत्रके लिए देखिए खण्ड तेईस, पृष्ठ एक सौ छियासी-सत्तासी । चौबीस-एक गलत अर्थ लगाना है। यदि कानूनकी दृष्टिमें सभी समान हैं, जैसा कि होना भी चाहिए, तो हर आदमी के साथ उसकी सहनशक्तिको देखकर बरताव किया जाना चाहिए । जिस चोरका शरीर नाजुक हो उसे भी तीस कोड़े लगाना और जो शरीर - से हट्टा-कट्टा हो उसे भी तीस कोड़े लगाना, निष्पक्ष व्यवहार नहीं माना जायेगा । वह तो नाजुक शरीरवाले के साथ अनुचित सख्ती और शायद हट्टे-कट्टे शरीरवाले के प्रति अनुग्रह ही कहा जायेगा । उसी तरह, उदाहरण के तौरपर, मोतीलालजी को सख्त जमीनपर बिछी नारियलकी खुरदरी चटाईपर सुलाना, समान व्यवहारका नहीं अतिरिक्त सजा देनेका उदाहरण होगा। जेलकी व्यवस्थामें यदि यह स्वीकार कर लिया जाये कि कैदी भी मनुष्य ही है, तो कैदीको जेलमें प्रवेश कराने के समयकी प्रक्रिया आजसे भिन्न हो । अँगुलियोंके निशान जरूर लिये जायेंगे; रजिस्टरमें उसके पहले के अपराध भी दर्ज किये ही जायेंग; लेकिन साथ ही कैदीकी आदतों और रहन-सहनका ब्योरा भी दर्ज किया जायेगा । यदि अधिकारी कैदियोंको मनुष्य समझने लगें तो उन्हें जो पद्धति स्वीकार करनी होगी उसे "भेद करना " न कहकर "वर्गीकरण " ही कहा जायेगा । एक प्रकारका वर्गीकरण तो आज भी मौजूद है। उदाहरण के लिए, कुछ अहातों में कदियोंको लम्बी कोठरियों में इकट्ठा रखा जाता है। खतरनाक अपराधियोंके लिए अलग-अलग कोठरियाँ होती हैं और तनहाईकी सजावालोंको ताला लगाकर अलग-अलग रखा जाता है। फिर, फाँसीवालोंकी कोठरियाँ भी होती हैं, जिनमें फाँसीकी सजा सुनाये गये कैदियोंको रखा जाता है और अन्तमें हवालाती कैदियोंके लिए अलग कोठरियाँ होती हैं । पाठकोंको यह जानकर आश्चर्य होगा कि ज्यादातर राजनीतिक कैदियोंको अलग या तनहाई में रखा जाता था। कुछको तो फाँसीकी सजा पाये हुए अपराधियोंकी कोठरियोंमें भी रखा जाता था। लेकिन यहाँ में एक बात साफ कर देना चाहूँगा, अन्यथा अधिकारियोंके साथ कहीं अन्याय न हो जाये । वह बात यह है कि जिन्हें इन विभागों और कोठरियोंकी जानकारी नहीं है, वे ऐसा सोच सकते हैं कि फाँसीकी सजा सुनाये गये कैदियोंकी कोठरियाँ खास तौरपर कुछ खराब होती होंगी, लेकिन वस्तुस्थिति एसी नहीं है । जहाँतक यरवदा जेलका सम्बन्ध है, इन कोठरियोंकी बनावट बहुत अच्छी है और ये हवादार हैं। लेकिन जो चीज बहुत आपत्तिजनक है वह है इनके इर्द-गिर्दका वातावरण । जैसा मैंने ऊपर बताया, वर्गीकरण अनिवार्य है और वह किया भी जाता है । फिर कोई कारण नहीं कि वह वैज्ञानिक और मानवतापूर्ण भी क्यों न हो। मैं जानता हूँ कि मेरे सुझाये हुए ढंगसे वर्गीकरण करनेका मतलब है सारी पद्धतिमें आमूलचूल परिवर्तन । बेशक, इसमें खर्च ज्यादा होगा और नई पद्धतिको चलाने के लिए दूसरे ढंगके लोगोंकी भी जरूरत होगी। लेकिन आज अतिरिक्त खर्च होगा तो अन्तमें बचत भी होगी। मैं जो क्रान्तिकारी परिवर्तन सुझा रहा हूँ उसका सबसे बड़ा लाभ तो यह होगा कि अपराधों की संख्या में निश्चित रूपसे कमी आ जायेगी और कैदियोंका जेलके अनुभव - चार सुधार होगा । फिर तो जेल सुधार गृह हो जायेंगे और समाजमें पाप करनेवाले लोग उन स्थानों में जाकर सुधर जायेंगे और लौटकर आनेपर समाजके प्रतिष्ठित सदस्य बन जायेंगे। हो सकता है, वह दिन बहुत दूर हो; लेकिन अगर हम पुरानी रूढ़ियोंके मोहमें न पड़ गये हों तो जेलोंको सुधार गृह बनाने में हमें कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए । यहाँ मुझे एक जेलरके सारगर्भित वचन याद आते हैं । उसने कहा था : "जब कभी मैं कैदियोंको भरती करता हूँ या उनकी तलाशी लेता हूँ अथवा उनके बारेमें रिपोर्ट करता हूँ, मेरे मन में अक्सर एक सवाल उठता है; क्या में इनमें से ज्यादातर लोगोंसे अच्छा हूँ ? ईश्वर जानता है कि इनमें से कुछ जिन अपराधोंके कारण यहाँ आये हैं, उनसे बुरे अपराध तो मैंने किये हैं। फर्क इतना ही है कि इन बेचारोंके अपराधका पता लग गया और मेरे अपराधका पता नहीं लग पाया । जो बात इस नेक जेलरने स्वीकार की, क्या वही हममें से बहुतोंके साथ लागू नहीं होती ? समाज उनपर तो अँगुली नहीं उठाता । लेकिन हमें तो, जिन लोगोंमें बच निकलनेकी चतुराई नहीं है, उनके प्रति सदा शंकित बने रहनेकी आदत पड़ गई है। कारावासके परिणामस्वरूप अकसर वे पक्के अपराधी बन जाते हैं । कोई भी व्यक्ति पकड़ा गया कि उसके साथ पशुओंका-सा व्यवहार शुरू हो जाता है। अभियुक्त जबतक अपराधी न सिद्ध कर दिया जाये तबतक सिद्धान्ततः उसे निर्दोष माना जाता है। लेकिन व्यवहारमें उसकी देख-रेखके लिए जिम्मेदार लोगोंका रवैया दम्भपूर्ण और तिरस्कार-भरा होता है। मनुष्य अपराधी करार दिया गया कि वह समाजका अंग रह ही नहीं जाता । जेलका वातावरण उसमें अपने आपको हीन माननेकी आदत पैदा कर देता है । राजनीतिक कैदियोंपर इस निर्वीर्य बनानेवाले वातावरणका असर आमतौरपर नहीं होता । मनको खिन्न बना देनेवाले इस वातावरणके असरमें आने की बजाय वे उसके खिलाफ संघर्ष करते हैं और कुछ अंशोंमें उसे सुधार भी पाते हैं । समाज भी उन्हें अपराधी नहीं मानता । इसके विपरीत, वे वीर पुरुष और शहींद माने जाते हैं । जेलमें उन्हें जो कष्ट भोगना पड़ता है, उसका बखान लोग बहुत बढ़ा-चढ़ाकर करते हैं और कभी-कभी यह अति प्रशंसा राजनीतिक कैदियोंके नैतिक पतनका भी कारण बन जाती है। लेकिन दुर्भाग्यकी बात यह है कि राजनीतिक कैदियोंके प्रति आम लोग जितनी उदारता दिखाते हैं, अधिकारीगण उतनी ही सख्ती बरतते हैं; अधिकांश मामलोंमें यह सख्ती बिलकुल बेजा हुआ करती है। सरकार राजनीतिक कैदियोंको साधारण कैदियोंसे अधिक खतरनाक मानती है। एक अधिकारीने बड़ी गम्भीरतासे कहा था कि राजनीतिक कैदीके अपराध से पूरे समाजको खतरा रहता है, जब कि साधारण अपराधसे केवल अपराधीका ही नुकसान होता है । एक दूसरे अधिकारीने मुझे बताया कि राजनीतिक कैदियोंको अलग रखने और पत्र-पत्रिकाएँ न देनेका कारण यह है कि उन्हें अपने अपराधका एहसास कराया जाये । उसने कहा, राजनीतिक कैदी "कैद" में गौरवका अनुभव करते हैं । स्वतन्त्रता खो जाने से जहाँ साधारण अपराधियोंको दुःख होता है, राजनीतिक अपराधियोंपर उसका कोई असर ही नहीं होता । उसने आगे कहा कि इसलिए यह स्वाभाविक है कि सरकार उन्हें सजा देनेका कोई और उपाय करे; इसीलिए उन्हें साधारणतया जो सुविधाएँ बेशक मिलनी चाहिएं, वे नहीं दी जातीं । मैंने 'टाइम्स ऑफ इंडिया के साप्ताहिक अंक, या 'इंडियन सोशल रिफॉर्मर' या 'सर्वेट ऑफ इंडिया' अथवा 'मॉडर्न रिव्यू' या 'इंडियन रिव्यू' की माँग की थी। अधिकारीने उसीके जवाबमें यह बात कही थी । जो लोग अखबारोंको नाश्तेकी ही तरह जरूरी मानते हैं, उनके लिए यह बहुत कड़ी सजा थी । पाठक इसे मामूली सजा न समझें । मैं तो कहूँगा कि अगर श्री मजलीको समाचारपत्र दिये गये होते तो उनके मस्तिष्कमें खराबी पैदा न होतीं। इसी तरह उस आदमी के लिए जो अपनेको हर अवसरपर सुधारक नहीं मानता यह बहुत उद्वेगजनक सिद्ध होगा कि उसे खतरनाक अपराधियोंके साथ रख दिया जाये, जैसा कि यरवदा जेलमें लगभग सभी राजनीतिक कैदियोंके साथ किया जा रहा था । जो लोग सिवा गालीके बात नहीं करते या जिनकी बातचीत आमतौर पर अशिष्टतापूर्ण होती है, उनके साथ रह सकना आसान काम नहीं है । यदि सरकार अक्लसे काम लेकर साधारण कैदियोंपर अच्छा असर डालने के लिए राजनीतिक कैदियों के साथ सलाह-मशविरा करके उन्हें ऐसे वातावरण में रखती तो यह बात समझमें आ सकती थी। लेकिन मैं मानता हूँ कि यह बात व्यावहारिक नहीं है। मैं यह कहना चाहता हूँ कि राजनीतिक कैदियोंको अरुचिकर वातावरण में रखना उन्हें अतिरिक्त सजा देना है, जिसके वे कदापि पात्र नहीं हैं। उन्हें अलग रखा जाना चाहिए और वे किस तरह रहते आये हैं, यह समझकर उनके साथ तदनुसार बरताव करना चाहिए । आशा है, सत्याग्रही लोग इसका और अगले अन्य किसी प्रकरणमें मैंने जेलके सुधारकी जो हिमायत की है, उसका गलत अर्थ नहीं लगायेंगे । सत्याग्रहियोंको चाहे जैसी असुविधाएँ सहनी पड़ें, उनका इस कारण रोष करना शोभा नहीं देगा। वह तो क्रूरसे - क्रूर व्यवहारके लिए तैयार होकर ही आया है। इसलिए यदि व्यवहार भलमनसीका किया जाये तो ठीक है; यदि न किया जाये तो भी ठीक ही है । एक. देखिए खण्ड तेईस, पृष्ठ तीन सौ अड़सठ-उनहत्तर । दो. टिप्पणियाँ स्वर्गीया श्रीमती रमाबाई रानडे रमाबाई रानडेका' निधन राष्ट्रकी एक बहुत बड़ी हानि है। हम जिन गुणोंकी एक हिन्दू विधवामें कल्पना करते हैं वे उन सब गुणोंकी साकार मूर्ति थीं । अपने तेजस्वी पतिके जीवन-कालमें वे उनकी सच्ची मित्र और सहधर्मिणी रहीं। उन्होंने अपने पतिके दिवंगत होने के बाद उनके एक प्रिय कामको आगे बढ़ाना ही अपना जीवन-कार्य बना लिया था । श्री रानडे समाज सुधारक थे और भारतीय नारियोंके उत्थान में उनकी गहरी रुचि थी। इसलिए रमाबाई प्राणपणसे सेवासदनके काममें जुट गई । इसी काम में उन्होंने अपनी समूची शक्ति लगा दी । इसीका परिणाम है कि आज भारत-भरमें सेवासदन - जैसी कोई दूसरी संस्था नहीं है। वहाँ लगभग एक हजार बालिकाओं और महिलाओंको शिक्षा दी जा रही है। कर्नल मैडॉकने मुझे बतलाया है कि सैसून अस्पतालमें ही सबसे अच्छी और सबसे अधिक संख्या में भारतीय नसे तैयार की जाती हैं और वे सब नर्से सेवासदनसे आई हुई होती हैं। इसमें शक नहीं कि रमाबाईको देवधर जैसा अथक परिश्रमी और छोटीसे-छोटी चीजोंका भी पूरा पूरा ध्यान रखनेवाला एक कार्यकर्ता भी मिल गया था। लेकिन उनके पास सुयोग्य और निष्ठावान सहयोगी थे, यह तथ्य भी रमाबाईको ही अधिक प्रशंसनीय बनाता है । सेवासदन सदा उनकी पवित्र स्मृतिका जीवन्त स्मारक बना रहेगा। मैं अपनी इस दिवंगत बहनके परिवार और सेवासदनके अनेक बालक-बालिकाओंके प्रति विनम्रतापूर्वक अपनी सहानुभूति प्रकट करता हूँ । प्रिंसिपल गिडवानी मेरे पूछने पर श्रीमती गिडवानी अपने एक पत्र में लिखती हैंः कुछ समय पहले जब में अपने पतिसे मिलने गई, तब देखा कि अधि कारी लोग उनके साथ अशिष्टतासे पेश आ रहे थे। वे कोठरीमें बन्द थे और उनके कपड़े मैले थे । सात दिनके अनशनके कारण वे बहुत दुबले दिख रहे थे । इससे पहले चौरीचौराके समय भी उन्होंने अनशन किया था, लेकिन तब वे इतने कमजोर नहीं हुए थे । उनको अन्य बन्दियों जैसा ही खाना दिया जाता है। मुलाकातियोंको उनसे मिलनेमें तरह-तरहकी कठिनाइयाँ पैदा की एक. ; महादेव गोविन्द रानडेकी पत्नी दो. पूनाके सैसून अस्पतालके सर्जन-जनरल, जिन्होंने जनवरी, एक हज़ार नौ सौ चौबीस में गांधीजी का एपेण्डिसाइटिसका ऑपरेशन किया था । तीन. गोशून्य कृशून्य देवधर ; सवेंट्स ऑफ इंडिया सोसाइटीके सदस्य; बादमें उसके अध्यक्ष । चार. आसूदोमल देकचन्द गिडवानी, गुजरात विद्यापीठ, अहमदाबादके प्रधानाचार्थं । जाती हैं। उनके भाईने मुलाकात के लिए दो बार लिखा, पर कोई सन्तोषप्रद उत्तर नहीं दिया गया। लेकिन मैं इस सबकी चिन्ता नहीं करती । इन्सान कठिनाइयों में से गुजरकर ही ऊपर चढ़ता है । यह करुणाजनक पत्र एक पतिपरायणा महिलाका लिखा हुआ है, श्रीमती गिडवानीका पत्र प्रकाशनके लिए नहीं लिखा गया था । वह एक मित्रको लिखा गया घरेलू पत्र है। मैंने उन मित्रको लिखा था कि वे श्रीमती गिडवानीसे उनके पतिकी हालत के बारेमें पूछें। यदि श्रीमती गिडवानी द्वारा बतलाई गई बातें सही हैं तो उनसे नाभाके वर्तमान प्रशासनकी इज्जत नहीं बढ़ती । प्रिंसिपल गिडवानीपर कोई मुकदमा नहीं चलाया गया है, फिर भी स्पष्ट है कि उनके साथ पक्के अपराधियों जैसा ही बरताव किया जा रहा है। श्री जिमंडने बतलाया है कि प्रिंसिपल गिडवानीने मानवताकी भावनासे प्रेरित होकर ही राज्यकी सीमामें प्रवेश किया था । नाभाके प्रशासकोंसे मेरा कहना है कि वे या तो इस कथनका खण्डन करें या अपनी सफाई दें। इस बातका मैं वादा करता हूँ कि उनकी सफाईमें दिये गये उनके बयानको भी मैं उसी तरह प्रकाशित करूँगा जिस तरह मैंने श्रीमती गिडवानीके कथनको किया है। पत्रकारिताकी भाषा एक मित्र पूछते ह : क्या आपने "महात्माको मानपत्र " शीर्षकसे लिखा गया 'क्रॉनिकल का अग्रलेख पढ़ा है ? उसमें लेखकने लिखा है कि "यदि दो-तीन विरोधकर्ताओंके भाषणोंकी रिपोर्ट विरोध सूचित करती हो तो कहना पड़गा कि विरोध केवल विरोधके लिए किया गया था और उसके पीछे कुछ ऐसे पेशेवर झगड़ालू लोग ही थे, जिनके मनमें महात्माके आन्दोलनकी सफलतासे ईर्ष्याके कारण बड़ी ही कटुभावना व्याप्त हो गई है । 'टाइम्स' जब श्री मुहम्मद अलीके बारेमें लिखता है तो आप उसे उपदेश सुनाने लगते हैं। लेकिन क्या उस 'क्रॉनिकल' के बारेमें आप चुप रहना चाहेंगे जो अपने आपको आपका अनुयायी बतलाता है और राजनीतिक विरोधियोंके लिए ऐसी असंयत और अयथार्थ भाषाका प्रयोग करता है ? 'टाइम्स' को कभी उपदेश देनेकी बात मुझे तो याद नहीं पड़ती। वैसे अगर कभी मैं यह चाहता भी तो साहस न होता । साफ है कि लेखकने मेरे उन शब्दोंका हवाला दिया है जो मैंने देशी भाषाओंकी उन कुछ- एक पत्रिकाओं के बारेमें लिखे थे जो आजकल झूठी बदनामी फैलानेका अभियान-सा चला रही हैं । हुआ यह था कि मैंने 'टाइम्स ऑफ इंडिया' में अनुवाद किये हुए कुछ अंश देखे और मुझे उनके बारेमें लिखना ही पड़ा । पर मैंने उसमें 'टाइम्स ऑफ इंडिया' को नहीं, सम्बन्धित पत्रिकाओंको ही सलाह दी थी । पत्र लेखक खुद उसे देखकर अपनी तसल्ली कर सकता है । मैं यह आरोप तो स्वीकार नहीं कर सकता कि मैंने 'टाइम्स ' को कभी 'उपदेश' दिया, पर हाँ, मैं इतना जरूर कह सकता हूँ कि 'क्रॉनिकल' के लेखकको अहिंसात्मक असहयोगके अपने दावे के अनुरूप भाषाका प्रयोग करना चाहिए था और मानपत्रका विरोध करनेवालोंकी मंशापर शक नहीं करना चाहिए था। अवश्य ही पत्र लेखकने जिसका हवाला दिया है वह लेख मैंने नहीं पढ़ा है। आमतौरपर मैं अपने बारेमें भारतीय समाचारपत्रों में निकलनेवाले लेख इत्यादि पढ़ता ही नहीं, चाहे उनमें मेरी प्रशंसा की गई हो । प्रशंसाकी मुझे दरकार नहीं है क्योंकि बिना किसी भी बाहरी सहायताके मेरो मनमें पहलेसे ही काफी अहम् भरा पड़ा है और अपनी निन्दा इस ख्यालसे नहीं पढ़ता कि कहीं मेरे भीतरका असुर सौम्य भावनाओंपर हावी होकर मेरी अहिंसाको न धर दबोचे । पूरा लेख पढ़ने के बाद मेरे इस कथनमें तदनुसार संशोधन किया जा सकता है। फिर भी, मेरा अपना अनुमान यह है कि उक्त बातें श्री जेशून्य बीशून्य पेटिट और कानजी द्वारकादासको नजरमें रखकर कही गई हैं। मैं इन दोनोंसे भलीभाँति परिचित हूँ । हम लोगोंके आपसी सम्बन्ध आज भी उतने ही मैत्रीपूर्ण हैं, जितने कि असहयोगके प्रारम्भसे पहले थे । मैं कल्पना भी नहीं कर सकता कि इन दोनों में से किसीके भी दिलमें मेरे प्रति किसी प्रकारकी कटुता हो सकती है। वे साफसाफ कहते हैं कि मेरे तरीके उन्हें पसन्द नहीं हैं। कमसे-कम वे तो विरोध करनेके लिए विरोध नहीं करेंगे। जिनकी राय मानपत्र देने के पक्ष में थी उनसे मैंने यह सुना है कि उस अवसरपर श्री पेटिटने इतने संयमित ढंगसे अपनी बात कहीं कि उनके स्वभावको देखते हुए वह एक आश्चर्यजनक चीज ही थी। मुझे मालूम है कि श्री पेटिट चाहे जब आवेश में आकर बोल सकते हैं लेकिन प्रस्तुत मामले में उन्हें यह अहसास रहा कि उन्हें एक मित्रके खिलाफ बोलनेका दुखद कर्त्तव्य निभाना है। निगमके एक काफी पुराने सदस्यकी हैसियतसे उन्हें लगा कि निगम एक ऐसे व्यक्तिको मानपत्र देकर अपनी परम्पराओंके विरुद्ध आचरण करेगा जिसके सौजन्यको उसकी घृणित राजनीति से अलग रखकर नहीं देखा जा सकता । सर्वश्री पेटिट और कानजी हृदयसे ऐसा मानते थे कि बम्बई नगर निगम एक गलत काम कर रहा है। इसलिए मेरी विनम्र सम्मतिमें उनका विरोध प्रकट करना उचित ही था । बेशक, आजकल हमारे देशके सार्वजनिक जीवनमें एक दूसरेके इरादोंपर जरूरतसे ज्यादा शंका की जाती है । स्वराज्यवादियोंमें भी कोई ऐसा नहीं है जिसके इरादोंपर अपरिवर्तनवादी लोग कोई शक जाहिर न करें और स्वराज्यवादी लोग भी अपरिवर्तनवादियों के साथ ऐसा ही सलूक करते हैं । और उदार दलके लोगोंपर तो दोनों ही ऐसा शक करते हैं। समझमें नहीं आता कि जिन्हें पहले ईमानदार माना जाता था वे ही अब एकाएक राजनीतिक विचारोंके परिवर्तनके कारण बेईमान कैसे हो गये । चूँकि असहयोगियोंके विरोधियोंने नहीं, बल्कि असहयोगियोंने अपनी विचार-धारा बदली है, इसलिए उनको खास सावधानी रखनेकी जरूरत है, अपने विपक्षियोंसे कहीं ज्यादा । यदि दोनोंमें मतभेद है तो इसमें विपक्षियोंका एक. बम्बईके दानशील पारसी समाज-सेवी । दो. होमरूल लीगके प्रमुख सदस्य और गांधीजी के मित्र । कोई दोष नहीं हो सकता । इसलिए मैं तो अपना पूरा रोष विचारकर्ताओं की बजाय विचारोंके प्रति प्रकट करता । मुझे लगता है कि वाइकोम सत्याग्रह अपनी मर्यादाएँ भंग करने लगा है। मैं तो यह चाहता हूँ कि सिख अपना लंगर बन्द कर दें और यह आन्दोलन सिर्फ हिन्दुओं तक सीमित रहे । कांग्रेस के कार्यक्रम में शामिल कर लिये जानेसे ही यह हिन्दुओं और गैर-हिन्दुओंका आन्दोलन नहीं बन जाता, ठीक उसी प्रकार जैसे खिलाफत आन्दोलन कांग्रेस के कार्यक्रममें शामिल कर लिये जानेपर भी मुसलमानों और गैर मुसलमानोंका आन्दोलन नहीं बन गया। इसके सिवा खिलाफत आन्दोलनके विरुद्ध ब्रिटिश सर कारके रूप में गैर-मुसलमान लोग थे । अगर हिन्दू या दूसरे गैर-मुसलमान लोग मुसलमानोंके अपने अन्दरूनी धार्मिक झगड़ोंमें दखल देने लगें तो वह बेजा मदाखलत होगी और अगर मुसलमान उसे धृष्टतापूर्ण समझें तो वह ठीक ही होगा। इसी तरह जो मामला सिर्फ हिन्दू समाजके सुधारसे सम्बन्धित है यदि उसमें गैर-हिन्दू टाँग अड़ाना चाहें तो कट्टरपंथी हिन्दू नाराजी जाहिर करेंगे ही । यदि मलाबारके हिन्दूसुधारक गैर हिन्दुओंकी सहानुभूतिको छोड़कर और किसी प्रकारकी सहायता अथवा हस्तक्षेप स्वीकार करेंगे या उसे प्रोत्साहन देंगे तो वे सारे हिन्दू समाजकी हमदर्दी खो बैठेंगे। मुझे पूरा विश्वास है कि वाइकोममें इस आन्दोलनका नेतृत्व करनेवाले हिन्दू सुधारक अपने कट्टरपंथी भाइयोंके विचारोंमें जोर-जबरदस्तीके बलपर परिवर्तन नहीं चाहते। जो भी हो, नेताओंको वह सीमा रेखा जान लेनी चाहिए जिसका अतिक्रमण किसी भी सत्याग्रहीको नहीं करना है। मैं सुधारकोंका पूरा सम्मान करते हुए, अनुरोध करना चाहता हूँ कि वे सनातनी लोगोंको आतंकित करनेकी कोशिश न करें । मैं इस विचारसे सहमत नहीं हूँ कि वाइकोममें जिस रास्तेको लेकर संघर्ष चल रहा है, यदि वह खुल जाता है तो मलाबार-भरमें छुआछूतकी समस्या हल हो जायेगी एक वाइकोममें यदि अहिंसापूर्ण तरीकोंसे विजय हासिल की गई तो इसमें शक नहीं कि पण्डे - पुजारियों द्वारा फैलाये गये अन्ध-विश्वासोंके गढ़की नीवें आमतौरपर हिल जायेंगी, पर हर स्थानपर जब भी समस्या सिर उठाये तब उसे वहीं स्थानीय रूपसे ही हल करना पड़ेगा । गुजरातमें कहीं एक जगह कोई कुआँ हरिजनोंके इस्तेमालके लिए खोल दिये जानेका यह मतलब नहीं होगा कि गुजरातके सारे कुएँ उनके लिए खुल जायेंगे और अगर ईसाई, मुसलमान, अकाली और इन हिन्दू सुधारकोंके सभी गैरहिन्दू मित्र भी कट्टरपंथी हिन्दुओंके विरुद्ध प्रदर्शन करने लगें, इन सुधारकोंकी पैसेरुपये से मदद करने लगें और अन्तमें आतंकित करके उनपर हावी हो जायें तो हिन्दूधर्मका क्या होगा ? क्या हम इसे सत्याग्रह कह सकेंगे ? क्या सनातनी लोगोंका घुटने टेक देना स्वेच्छाप्रेरित कहा जायेगा ? क्या उसे हिन्दू धर्म में सुधार कहेंगे ? तीन. पत्र लेखकोंसे मेरे नाम पत्र भेजनेवालोंकी संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। इनमें सम्पादकके नाम पत्र लिखनेवाले और वे लोग भी शामिल हैं जो सार्वजनिक महत्त्वके विषयोंके बारेमें मेरी सलाह माँगते हैं। मैं इन्हें आश्वस्त करना चाहता हूँ कि मुझसे जहाँतक बन पाता है, मैं सभी पत्रोंको पढ़ता हूँ और यथासामर्थ्य इन स्तम्भोंमें उनके उत्तर भी देता हूँ । साथ ही मैं यह मानता हूँ कि मैं अपने पत्र लेखकों द्वारा चर्चित सभी महत्त्वपूर्ण विषयों के बारेमें पूरे विस्तारसे लिखने में असमर्थ हूँ । मेरे लिए यह भी सम्भव नहीं है कि मैं सभी पत्रोंका अलग-अलग उत्तर दूँ । पत्र - लेखक 'यंग इंडिया' को ही उनके नाम भेजा गया मेरा व्यक्तिगत पत्र समझनेकी कृपा करें। यदि लोग चाहते हैं कि उनके पत्रोंपर ध्यान दिया जाये तो उनके पत्र संक्षिप्त, साफ लिखे और निर्वैयक्तिक होने चाहिए । [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, आठ मई एक हज़ार नौ सौ चौबीस चार. आत्म-निरीक्षणका आमन्त्रण एक सम्माननीय पत्र लेखकका पत्र नीचे देते हुए मुझे प्रसन्नता के साथ पीड़ाका भी अनुभव हो रहा हैः 'यंग इंडिया' के हालके लेखने मेरी अधिकांश शंकाओंको दूर कर दिया है, किन्तु अभी कुछ ऐसे प्रश्न हैं जिन्हें, मैं चाहता हूँ, थोड़ा और साफ कर दिया जाये तथा फिर इन्हें शीघ्र ही 'यंग इंडिया' में प्रकाशित कर दिया जाये । कौंसिलोंमें प्रवेश सम्बन्धी आपके विचार अब मेरे सम्मुख बिलकुल स्पष्ट हो गये हैं और अब वे मुझे परेशान नहीं करते। किन्तु मैं चाहता हूँ कि आप नगरपालिकाओं और जिला बोर्डोंमें बहुमत प्राप्त करने के सम्बन्ध में अपने विचार व्यक्त करें । मैंने एक हज़ार नौ सौ इक्कीस में इन मुद्दोंपर आपका मत जानने की इच्छासे आपको एक तार' भेजा था । तब मुझे आपने उत्तर दिया थाः "नगरपालिकाओंपर अधिकार कर सकते हो, जिला बोडोंके बारेमें सन्देह है। " एक हज़ार नौ सौ तेईस के अन्त में सभी नगरपालिकाओंमें नये चुनाव हुए हैं और असहयोगियोंने उनमें से अधिकांशपर अधिकार कर लिया है। हमने जिला एक. यह सूचना यंग इंडियाके बादके अंकोंमें बार-बार दी जाती रही थी। दो. यह तार उपलब्ध नहीं है । बोर्डके चुनाव भी लड़े हैं। हमारे इन चुनावोंके अनुभव बहुत ही दुःखजनक हैं । उनसे कांग्रेस कार्यको बल नहीं मिला है, प्रत्युत हममें बहुत बड़ी कमजोरी आई है। उनके फलस्वरूप हमारे असहयोगी कार्यकर्ताओंमें परस्पर तीखे मतभेद, द्वेष तथा घृणाके भाव पैदा हो गये हैं। दूसरी ओर हमने अपने नरमदलीय समर्थकों, जमींदारों तथा इनमें दिलचस्पी रखनेवाले अन्य लोगोंकी सहानुभूति भी लगभग गँवा दी है। उन्होंने अब डराने-धमकानेका रुख अख्तियार कर लिया है और वे हमारे मार्ग में रोड़े अटकाने तथा हमें बदनाम करनेका भरसक प्रयत्न कर रहे हैं। इससे भी अधिक गम्भीर बात यह है कि हमें सरकारसे सम्बन्ध रखना पड़ता है। हम सरकारसे अनुदान प्राप्त करते हैं, इसलिए हमारे लिए सरकारी अधिकारियोंको सभी कुछ लिख भेजना जरूरी हो जाता है। यहाँ हमें जनताकी सेवा करनेका अवसर तो अवश्य मिलता है, किन्तु हम जो श्रम, समय और शक्ति इसमें लगाते हैं, उसका उतना परिणाम नहीं निकलता और उससे हमारा जल्दी स्वराज्य लेनेको कार्य भी सचमुच आगे नहीं बढ़ता । जिला बोर्डके अन्तर्गत देशी भाषाओंके प्राथमिक, माध्यमिक तथा मिडिल स्कूल हमारे नियन्त्रणमें रहते हैं, परन्तु हमको उन्हें विहित सरकारी नीतिके अनुसार ही चलाना पड़ता है। अतः मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ कि आप मुझे अपनी राय बतायें। हमारे जिलेमें बोर्डके अध्यक्ष और उपाध्यक्षका शीघ्र ही चुनाव होनेवाला है; हमें आपका स्पष्ट उत्तर चाहिए कि हम इन स्थानोंके लिए चुनाव लड़ें या न लड़ें । एक बात साफ समझ में आती है और वह यह है कि यदि हम अपने आदमियोंको अध्यक्ष और उपाध्यक्ष नहीं बनवा सकते तो हमारा इन संस्थाओं में जाना व्यर्थ है । मेरा अन्तिम प्रश्न है, हमें अपने कांग्रेस संगठनोंका क्या करना चाहिए ? वर्तमान नियमोंके अनुसार हमें गाँवोंसे मण्डलोंके लिए, मण्डलोंसे थानोंके लिए, थानोंसे तहसीलों अथवा जिलेके लिए जिलेसे प्रान्तके लिए तथा प्रान्तसे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटीके लिए सदस्य चुनने होते हैं। यह एक बहुत ही बड़ा काम है जिसे सँभालना मुश्किल है। हमारे पास न तो कार्यकर्ता हैं और न पैसा है, इसलिए हम इस विराट् संगठनको चलाने में असमर्थ हैं । हममें से कुछ कहते हैं कि हमें अपनी सारी गतिविधि जिला बोर्डों और नगरपालिकाओंपर केन्द्रित करनी चाहिए, तथा कांग्रेस संगठनको भगवान्पर छोड़ देना चाहिए । कांग्रेस संगठनों को चलाते रहना बड़े खर्चका काम है और वह साराका-सारा काम लगभग बन्द ही पड़ा है । जहाँतक रचनात्मक कार्यका प्रश्न है, उसमें न तो हमारे कार्यकर्त्ताओंकी रुचि है, न गाँववालोंकी, और न जनताकी हो । उसमें बहुत अधिक समय लगता है और उससे स्वराज्य शीघ्र कैसे प्राप्त हो सकता है, यह बात मेरी
वीडियो में हम शहनवाज हुसैन को दोनों हाथ से तिरंगा फहराते देख सकते हैं। वहीं दूसरी वीडियो में हम सैंकड़ों की भीड़ को भाजपा के लिए नारे लगाते और हाथ में तिरंगा फहराते भी देख सकते हैं। संदीप चौधरी जम्मू कश्मीर में अनंतनाग के SSP हैं। पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के खिलाफ मुखर इस IPS अधिकारी के खिलाफ 'The Wire' ने लेख लिखा है। डल झील में पत्रकारों और भाजपा कार्यकर्ताओं को ले जा रही एक नाव पलट गई, जिस पर तरह-तरह के चुटकुले बनाए गए। इतिहास में पहली बार पश्चिमी पाकिस्तान के शरणार्थी, गोरखा और वाल्मीकि समुदाय के लोग भी मतदान कर सकेंगे। अभी तक ये अभागे और उपेक्षित समुदाय राज्य के चुनावों में मतदान के अपने लोकतान्त्रिक अधिकार से वंचित रहे हैं। जम्मू-कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट के पूर्व अध्यक्ष फिरोज पीरजादा ने शेहला रशीद के पिता अब्दुल राशिद शोरा को दस करोड़ रुपये के मानहानि दावे का नोटिस भेजा है। जम्मू-कश्मीर में पुलवामा के टिकेन इलाके में सुरक्षा बलों ने बुधवार (9 दिसंबर, 2020) को तीन इस्लामिक आतंकवादियों को मुठभेड़ के दौरान ढेर कर दिया है। कॉन्ग्रेस ने 'भारत किसानों के साथ है, मोदी अंबानी के साथ हैं' टैगलाइन के साथ देश का गलत नक्शा शेयर किया और लद्दाख को पाकिस्तान में दिखा दिया। एक सोशल मीडिया यूजर ने JioTV प्लस ऐप के फ्रंट पेज पर नजर आ रहे समाचार चैनल Aaj Tak की तस्वीरें शेयर की हैं जिनमें भारत का गलत नक्शा देखा जा सकता है। नाबालिग बहनें लाएबा जुबैर और सना जुबैर सीमा पार कर भारत आ गईं थी। पूछताछ के बाद सेना ने उन्हें घर वापस भेज दिया।
वीडियो में हम शहनवाज हुसैन को दोनों हाथ से तिरंगा फहराते देख सकते हैं। वहीं दूसरी वीडियो में हम सैंकड़ों की भीड़ को भाजपा के लिए नारे लगाते और हाथ में तिरंगा फहराते भी देख सकते हैं। संदीप चौधरी जम्मू कश्मीर में अनंतनाग के SSP हैं। पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के खिलाफ मुखर इस IPS अधिकारी के खिलाफ 'The Wire' ने लेख लिखा है। डल झील में पत्रकारों और भाजपा कार्यकर्ताओं को ले जा रही एक नाव पलट गई, जिस पर तरह-तरह के चुटकुले बनाए गए। इतिहास में पहली बार पश्चिमी पाकिस्तान के शरणार्थी, गोरखा और वाल्मीकि समुदाय के लोग भी मतदान कर सकेंगे। अभी तक ये अभागे और उपेक्षित समुदाय राज्य के चुनावों में मतदान के अपने लोकतान्त्रिक अधिकार से वंचित रहे हैं। जम्मू-कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट के पूर्व अध्यक्ष फिरोज पीरजादा ने शेहला रशीद के पिता अब्दुल राशिद शोरा को दस करोड़ रुपये के मानहानि दावे का नोटिस भेजा है। जम्मू-कश्मीर में पुलवामा के टिकेन इलाके में सुरक्षा बलों ने बुधवार को तीन इस्लामिक आतंकवादियों को मुठभेड़ के दौरान ढेर कर दिया है। कॉन्ग्रेस ने 'भारत किसानों के साथ है, मोदी अंबानी के साथ हैं' टैगलाइन के साथ देश का गलत नक्शा शेयर किया और लद्दाख को पाकिस्तान में दिखा दिया। एक सोशल मीडिया यूजर ने JioTV प्लस ऐप के फ्रंट पेज पर नजर आ रहे समाचार चैनल Aaj Tak की तस्वीरें शेयर की हैं जिनमें भारत का गलत नक्शा देखा जा सकता है। नाबालिग बहनें लाएबा जुबैर और सना जुबैर सीमा पार कर भारत आ गईं थी। पूछताछ के बाद सेना ने उन्हें घर वापस भेज दिया।
Cryptocurrency: क्रिप्टो कॉइन्स के फंक्शन में इसकी भूमिका का भी काफी खास महत्व होता है। क्रिप्टो मार्केट में लगातार नए लोग जुड़ रहे हैं और उनके बीच सिस्टम को समझने की जिज्ञासा भी देखी जाती है। लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है कि बिटकॉइन में निवेश करने के लिए आपको सारे टेक्निकल टर्म के बारे में पता हो। लेकिन इन सभी टर्म्स की बेसिक जानकारी होना अच्छी बात है। Punjab Congress Row: कांग्रेस आलाकमान के आशीर्वाद से नवजोत सिंह सिद्धू पंजाब में पार्टी अध्यक्ष बन गए। इसके बाद से ही वह लगातार कैप्टन के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं। Blow To Pak: कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान ने तालिबान से तहरीक के खिलाफ कार्रवाई के लिए कहा था। अब तालिबान ने इससे साफ इनकार किया है और इससे पाकिस्तानी सेना और वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए कुछ कहने को नहीं रह गया है। Armaan Kohli Arrest: बॉलीवुड एक्टर अरमान कोहली (Armaan Kohli) को एनसीबी (NCB) ने रविवार सुबह गिरफ्तार कर लिया। ये गिरफ्तारी ड्रग्स केस (Drugs Case) में हुई है। दरअसल, शनिवार शाम को एनसीबी ने एक्टर के घर पर छापेमारी की थी, जिसमें उनके घर से ड्रग्स बरामद हुए थे। Black Money: जुलाई में रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर टी. रविशंकर ने भी इशारा किया था कि जल्दी ही केंद्रीय बैंक अपनी डिजिटल करेंसी लॉन्च कर सकता है। उन्होंने वैसे यह साफ किया था कि बैंक इस मामले में कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहता। Terror: अफगानिस्तान खासकर काबुल में जमीन पर हालात बेहद खतरनाक बने हुए हैं। काबुल एयरपोर्ट पर एक और आतंकी हमले की आशंका अमेरिकी सेना के कमांडरों ने जताई है। बाइडेन इससे पहले भी इसी तरह के आतंकी हमलों की चेतावनी दे चुके हैं। Indira And Ayodhya: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद आज अयोध्या में रामलला के दर्शन-पूजन करने आ रहे हैं। राम जन्मभूमि परिसर आने वाले वह देश के पहले राष्ट्रपति होंगे। उनसे पहले एक और राष्ट्रपति भी अयोध्या आए थे, लेकिन उन्होंने रामलला के दर्शन नहीं किए थे। उनका नाम था ज्ञानी जैल सिंह। ज्ञानी जैल सिंह ने राष्ट्रपति के तौर पर 1983 में अयोध्या का दौरा किया था। Baghel Vs TS: छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने राहुल गांधी को अपनी ताकत दिखाकर बता दिया है कि अगर उन्हें छेड़ा गया, तो दिक्कत बढ़ सकती है। कांग्रेस के सूत्रों के मुताबिक 70 में से 60 विधायक बघेल के खेमे के हैं। ये सभी दिल्ली आए थे। जिसकी जानकारी मिलने के बाद राहुल गांधी और सोनिया ने चुप्पी साध लेना ही बेहतर समझा। Ayodhya: राष्ट्रपति के दौरे के लिए सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। पूरे अयोध्या में हाई सिक्योरिटी प्रोटोकॉल लागू किया गया है। लखनऊ से लेकर अयोध्या तक ट्रेन की पटरी के किनारे सुरक्षाबल के जवानों की भी तैनाती की गई है। Haryana Farmers: एडीजीपी लॉ एंड ऑर्डर नवदीप विर्क ने जानकारी दी कि, उग्र किसानों पर पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए उनपर हल्का बल प्रयोग किया। इस मामले में मिली जानकारी के मुताबिक 4 किसानों को चोट आई है और 10 पुलिसकर्मियों को भी चोट आई है।
Cryptocurrency: क्रिप्टो कॉइन्स के फंक्शन में इसकी भूमिका का भी काफी खास महत्व होता है। क्रिप्टो मार्केट में लगातार नए लोग जुड़ रहे हैं और उनके बीच सिस्टम को समझने की जिज्ञासा भी देखी जाती है। लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है कि बिटकॉइन में निवेश करने के लिए आपको सारे टेक्निकल टर्म के बारे में पता हो। लेकिन इन सभी टर्म्स की बेसिक जानकारी होना अच्छी बात है। Punjab Congress Row: कांग्रेस आलाकमान के आशीर्वाद से नवजोत सिंह सिद्धू पंजाब में पार्टी अध्यक्ष बन गए। इसके बाद से ही वह लगातार कैप्टन के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं। Blow To Pak: कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान ने तालिबान से तहरीक के खिलाफ कार्रवाई के लिए कहा था। अब तालिबान ने इससे साफ इनकार किया है और इससे पाकिस्तानी सेना और वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए कुछ कहने को नहीं रह गया है। Armaan Kohli Arrest: बॉलीवुड एक्टर अरमान कोहली को एनसीबी ने रविवार सुबह गिरफ्तार कर लिया। ये गिरफ्तारी ड्रग्स केस में हुई है। दरअसल, शनिवार शाम को एनसीबी ने एक्टर के घर पर छापेमारी की थी, जिसमें उनके घर से ड्रग्स बरामद हुए थे। Black Money: जुलाई में रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर टी. रविशंकर ने भी इशारा किया था कि जल्दी ही केंद्रीय बैंक अपनी डिजिटल करेंसी लॉन्च कर सकता है। उन्होंने वैसे यह साफ किया था कि बैंक इस मामले में कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहता। Terror: अफगानिस्तान खासकर काबुल में जमीन पर हालात बेहद खतरनाक बने हुए हैं। काबुल एयरपोर्ट पर एक और आतंकी हमले की आशंका अमेरिकी सेना के कमांडरों ने जताई है। बाइडेन इससे पहले भी इसी तरह के आतंकी हमलों की चेतावनी दे चुके हैं। Indira And Ayodhya: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद आज अयोध्या में रामलला के दर्शन-पूजन करने आ रहे हैं। राम जन्मभूमि परिसर आने वाले वह देश के पहले राष्ट्रपति होंगे। उनसे पहले एक और राष्ट्रपति भी अयोध्या आए थे, लेकिन उन्होंने रामलला के दर्शन नहीं किए थे। उनका नाम था ज्ञानी जैल सिंह। ज्ञानी जैल सिंह ने राष्ट्रपति के तौर पर एक हज़ार नौ सौ तिरासी में अयोध्या का दौरा किया था। Baghel Vs TS: छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने राहुल गांधी को अपनी ताकत दिखाकर बता दिया है कि अगर उन्हें छेड़ा गया, तो दिक्कत बढ़ सकती है। कांग्रेस के सूत्रों के मुताबिक सत्तर में से साठ विधायक बघेल के खेमे के हैं। ये सभी दिल्ली आए थे। जिसकी जानकारी मिलने के बाद राहुल गांधी और सोनिया ने चुप्पी साध लेना ही बेहतर समझा। Ayodhya: राष्ट्रपति के दौरे के लिए सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। पूरे अयोध्या में हाई सिक्योरिटी प्रोटोकॉल लागू किया गया है। लखनऊ से लेकर अयोध्या तक ट्रेन की पटरी के किनारे सुरक्षाबल के जवानों की भी तैनाती की गई है। Haryana Farmers: एडीजीपी लॉ एंड ऑर्डर नवदीप विर्क ने जानकारी दी कि, उग्र किसानों पर पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए उनपर हल्का बल प्रयोग किया। इस मामले में मिली जानकारी के मुताबिक चार किसानों को चोट आई है और दस पुलिसकर्मियों को भी चोट आई है।
इंसान हमेशा से अमरत्व (Immortality) की खोज में भटकता रहा है. आज भी वैज्ञानिक (Scientist) इस कोशिश में लगे हैं कि किसी तरह मौत को चकमा दिया जा सके. इंसान ने मौत को मात देने की कोशिश में धर्म (Religion), ग्रह (Planets), प्रकृति (Nature), क्रायोजेनिक्स और फ्लोरिडा में बूढ़े को जवान कर देने वाले मिथक फव्वारे सेंट ऑगस्टिन फाउंटेन तक का अध्ययन कर डाला. इंसान अमरता की खोज में आकाश, विज्ञान की किताबों, प्रकृति के हर पहलू और धरती के कोनों की खाक छान रहा था. इस दौरान एक जीव समुद्र के अंदर बार-बार मरकर जिंदा हो रहा था. समुद्री जीव मेडुसा जेलीफिश टुरीटोप्सिस डोहर्नी (Turritopsis Dohrnii) खतरे की आहट पाकर या बूढ़ी-बीमार होने पर खुद को मार देती है और मृत शरीर से फिर जन्म ले लेती है. दूसरे शब्दों में कहें तो जेलीफिश मरकर अपना क्लोन (Clone) बना देती है. जेलीफिश (Jellyfish) जीवन के दूसरे चरण मेडुसा में अपने पुछल्ले टेंटिकल्स के साथ बहने वाले अपारदर्शी गुब्बारे की तरह होते हैं. एक जेलीफिश में नर और मादा दोनों के गुण होते हैं. इनमें शुक्राणु और अंडाणु भी होते हैं. हालांकि, इनके बच्चे दूसरे जीवों की तरह पैदा नहीं होते. जेलीफिश अपना जीवन लार्वा के रूप में शुरू करती है. लार्वा पानी में बहते रहते हैं. ये लार्वा किसी चट्टान पर आसानी से चिपक जाते हैं. अनुकूल जगह मिलने पर लार्वा पॉलिप में बदल जाते हैं. ये पॉलिप अपना क्लोन खुद बनाते हैं और लगातार बनाते रहते हैं. इस तरह पॉलिप की कॉलोनियां बन जाती हैं. कुछ खास तरह के पॉलिप झाड़ियों के आकार में इकट्ठा हो जाते हैं. हालात अनुकूल होने पर पॉलिप खिल जाते हैं. खिलने पर पॉलिप के अंदर से छोटी जेलीफिश बाहर आ जाती है. जेलीफिश के पॉलिप अपना क्लोन खुद बनाते हैं और लगातार बनाते रहते हैं. इस तरह पॉलिप की कॉलोनियां बन जाती हैं. के मुताबिक, तस्मानिया की जेलीफिश रिसर्चर और मरीन स्टिंगर एडवाइजरी सर्विस की डायरेक्टर डॉक्टर लिसाएन्न गेर्श्विन कहती हैं, 'यह हमारे समय की अद्भुत खोज है. ' गेर्श्विन कहती हैं कि 96 साल पहले एफ. स्कॉट फिट्जगेराल्ड की लिखी बेंजामिन बटन (Benjamin Button) की कहानी और जेलीफिश की कहानी में थोड़ा अंतर है. बेंजामिन बटन एक ही रहते हुए पहले बूढ़ा और उम्र बढ़ने के साथ पहले जवान फिर आखिर में बच्चा बन जाता है. इसके उलट जेलीफिश की कहानी ऐसी है, जैसे बूढ़े बेंजामिन बटन की एक उंगली कट जाए और वह उंगली एक जवान बेंजामिन बटन में तब्दील हो जाए. अपने मृत शरीर (Dead Body) से दोबारा जिंदा होने वाले जीवों में टुरीटोप्सिस डोहर्नी अकेली नहीं है. 2011 में चीन की शियामेन यूनिवर्सिटी में मरीन बायलॉजी के छात्र जिनरू ही ने मून जेलीफिश ऑरेलिया ऑरिटा (Aurelia Aurita) को एक टैंक में रखकर अध्ययन किया. दोबारा जिंदा होने वाले जीवों में टुरीटोप्सिस डोहर्नी अकेली नहीं है. मून जेलीफिश ऑरेलिया ऑरिटा भी मृत शरीर से दोबारा जन्म ले लेती है. जिनरू ने मून जेलीफिश (Moon Jellyfish) के मरने के बाद उसके मृत शरीर को दूसरे टैंक में रख दिया. तीन महीने बाद मृत शरीर के ऊपर एक छोटा पॉलिप बाहर आने लगा. मृत शरीर से दोबारा जन्म लेने की प्रक्रिया अब तक जेलीफिश की पांच प्रजातियों (Species) में देखी जा चुकी है. टुरीटोप्सिस डोहर्नी हाइड्रोजोआ (Hydrozoa) वर्ग के जीव हैं, जबकि मून जेलीफिश स्काइफोजोआ (Skaiphozoa) वर्ग के हैं. इन दोनों में उतना ही अंतर है, जितना अंतर स्तनधारियों और उभयचरों में होता है. सवाल है कि जेलीफिश ऐसा क्यों करती है? दरअसल, जेलीफिश उम्र बढ़ जाने या किसी बीमारी के कारण कमजोर होने या खतरा महसूस होने पर अपने अस्तित्व को बचाने के लिए इस तरीके का सहारा लेती हैं और दोबारा जन्म लेती हैं. फिर से जन्म लेने की प्रक्रिया शुरू होने पर जेलीफिश का पैराशूट की छतरी जैसा हिस्सा और इसके टेंटिकल्स गलने लगते हैं. फिर यह पॉलिप में बदल जाती है. इस प्रक्रिया में नए शरीर की कोशिकाएं पहले से अलग होती हैं. ये कोशिकाएं नई शारीरिक संरचना का निर्माण करती हैं. जेलीफिश यह प्रक्रिया बार-बार दोहरा सकती है. डॉक्टर गेर्श्विन का कहना है कि जेलीफिश की अमरता और इंसान के अमरत्व की खोज में कोई संबंध नहीं है. हालांकि, इसका यह मतलब नहीं कि भविष्य में ऐसे जेनेटिक स्प्लिसिंग (Genetic Splicing) संभव नहीं हो सकते. .
इंसान हमेशा से अमरत्व की खोज में भटकता रहा है. आज भी वैज्ञानिक इस कोशिश में लगे हैं कि किसी तरह मौत को चकमा दिया जा सके. इंसान ने मौत को मात देने की कोशिश में धर्म , ग्रह , प्रकृति , क्रायोजेनिक्स और फ्लोरिडा में बूढ़े को जवान कर देने वाले मिथक फव्वारे सेंट ऑगस्टिन फाउंटेन तक का अध्ययन कर डाला. इंसान अमरता की खोज में आकाश, विज्ञान की किताबों, प्रकृति के हर पहलू और धरती के कोनों की खाक छान रहा था. इस दौरान एक जीव समुद्र के अंदर बार-बार मरकर जिंदा हो रहा था. समुद्री जीव मेडुसा जेलीफिश टुरीटोप्सिस डोहर्नी खतरे की आहट पाकर या बूढ़ी-बीमार होने पर खुद को मार देती है और मृत शरीर से फिर जन्म ले लेती है. दूसरे शब्दों में कहें तो जेलीफिश मरकर अपना क्लोन बना देती है. जेलीफिश जीवन के दूसरे चरण मेडुसा में अपने पुछल्ले टेंटिकल्स के साथ बहने वाले अपारदर्शी गुब्बारे की तरह होते हैं. एक जेलीफिश में नर और मादा दोनों के गुण होते हैं. इनमें शुक्राणु और अंडाणु भी होते हैं. हालांकि, इनके बच्चे दूसरे जीवों की तरह पैदा नहीं होते. जेलीफिश अपना जीवन लार्वा के रूप में शुरू करती है. लार्वा पानी में बहते रहते हैं. ये लार्वा किसी चट्टान पर आसानी से चिपक जाते हैं. अनुकूल जगह मिलने पर लार्वा पॉलिप में बदल जाते हैं. ये पॉलिप अपना क्लोन खुद बनाते हैं और लगातार बनाते रहते हैं. इस तरह पॉलिप की कॉलोनियां बन जाती हैं. कुछ खास तरह के पॉलिप झाड़ियों के आकार में इकट्ठा हो जाते हैं. हालात अनुकूल होने पर पॉलिप खिल जाते हैं. खिलने पर पॉलिप के अंदर से छोटी जेलीफिश बाहर आ जाती है. जेलीफिश के पॉलिप अपना क्लोन खुद बनाते हैं और लगातार बनाते रहते हैं. इस तरह पॉलिप की कॉलोनियां बन जाती हैं. के मुताबिक, तस्मानिया की जेलीफिश रिसर्चर और मरीन स्टिंगर एडवाइजरी सर्विस की डायरेक्टर डॉक्टर लिसाएन्न गेर्श्विन कहती हैं, 'यह हमारे समय की अद्भुत खोज है. ' गेर्श्विन कहती हैं कि छियानवे साल पहले एफ. स्कॉट फिट्जगेराल्ड की लिखी बेंजामिन बटन की कहानी और जेलीफिश की कहानी में थोड़ा अंतर है. बेंजामिन बटन एक ही रहते हुए पहले बूढ़ा और उम्र बढ़ने के साथ पहले जवान फिर आखिर में बच्चा बन जाता है. इसके उलट जेलीफिश की कहानी ऐसी है, जैसे बूढ़े बेंजामिन बटन की एक उंगली कट जाए और वह उंगली एक जवान बेंजामिन बटन में तब्दील हो जाए. अपने मृत शरीर से दोबारा जिंदा होने वाले जीवों में टुरीटोप्सिस डोहर्नी अकेली नहीं है. दो हज़ार ग्यारह में चीन की शियामेन यूनिवर्सिटी में मरीन बायलॉजी के छात्र जिनरू ही ने मून जेलीफिश ऑरेलिया ऑरिटा को एक टैंक में रखकर अध्ययन किया. दोबारा जिंदा होने वाले जीवों में टुरीटोप्सिस डोहर्नी अकेली नहीं है. मून जेलीफिश ऑरेलिया ऑरिटा भी मृत शरीर से दोबारा जन्म ले लेती है. जिनरू ने मून जेलीफिश के मरने के बाद उसके मृत शरीर को दूसरे टैंक में रख दिया. तीन महीने बाद मृत शरीर के ऊपर एक छोटा पॉलिप बाहर आने लगा. मृत शरीर से दोबारा जन्म लेने की प्रक्रिया अब तक जेलीफिश की पांच प्रजातियों में देखी जा चुकी है. टुरीटोप्सिस डोहर्नी हाइड्रोजोआ वर्ग के जीव हैं, जबकि मून जेलीफिश स्काइफोजोआ वर्ग के हैं. इन दोनों में उतना ही अंतर है, जितना अंतर स्तनधारियों और उभयचरों में होता है. सवाल है कि जेलीफिश ऐसा क्यों करती है? दरअसल, जेलीफिश उम्र बढ़ जाने या किसी बीमारी के कारण कमजोर होने या खतरा महसूस होने पर अपने अस्तित्व को बचाने के लिए इस तरीके का सहारा लेती हैं और दोबारा जन्म लेती हैं. फिर से जन्म लेने की प्रक्रिया शुरू होने पर जेलीफिश का पैराशूट की छतरी जैसा हिस्सा और इसके टेंटिकल्स गलने लगते हैं. फिर यह पॉलिप में बदल जाती है. इस प्रक्रिया में नए शरीर की कोशिकाएं पहले से अलग होती हैं. ये कोशिकाएं नई शारीरिक संरचना का निर्माण करती हैं. जेलीफिश यह प्रक्रिया बार-बार दोहरा सकती है. डॉक्टर गेर्श्विन का कहना है कि जेलीफिश की अमरता और इंसान के अमरत्व की खोज में कोई संबंध नहीं है. हालांकि, इसका यह मतलब नहीं कि भविष्य में ऐसे जेनेटिक स्प्लिसिंग संभव नहीं हो सकते. .
कलरी - मुख्य संसदीय सचिव राजेश धर्माणी ने घुमारवीं में शिवा अस्पताल एवं डायग्नोस्टिक अस्पताल का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि इस अस्पताल द्वारा लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके लिए उन्होंने संस्थान निदेशक पुरुषोत्तम शर्मा के प्रयासों की भी जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि वह इन सेवाओं को लोगों के घरों व गांव तक जाकर भी उपलब्ध कराने का प्रयास करें। संस्थान निदेशक पुरुषोत्तम शर्मा ने कहा कि अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा सभी प्रकार की बीमारियां जैसे माइग्रेन, गर्दन से संबंधित व कंधों का दर्द तथा पेट दर्द व लीवर संबंधी समस्याएं, स्त्री रोग, , अस्थमा, एलर्जी व बच्चों संबंधी रोग, पथरी, कील मुहासे, स्त्री रोग आदि का उपचार विशेषज्ञ डाक्टरों द्वारा किया जाएगा। इस अवसर पर अस्पताल के शुभारंभ पर नगर पार्षद रीता सहगल, व्यापार मंडल प्रधान हेमराज संख्यान, नगर पार्षद विनोद सहित शहर के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कलरी - मुख्य संसदीय सचिव राजेश धर्माणी ने घुमारवीं में शिवा अस्पताल एवं डायग्नोस्टिक अस्पताल का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि इस अस्पताल द्वारा लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके लिए उन्होंने संस्थान निदेशक पुरुषोत्तम शर्मा के प्रयासों की भी जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि वह इन सेवाओं को लोगों के घरों व गांव तक जाकर भी उपलब्ध कराने का प्रयास करें। संस्थान निदेशक पुरुषोत्तम शर्मा ने कहा कि अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा सभी प्रकार की बीमारियां जैसे माइग्रेन, गर्दन से संबंधित व कंधों का दर्द तथा पेट दर्द व लीवर संबंधी समस्याएं, स्त्री रोग, , अस्थमा, एलर्जी व बच्चों संबंधी रोग, पथरी, कील मुहासे, स्त्री रोग आदि का उपचार विशेषज्ञ डाक्टरों द्वारा किया जाएगा। इस अवसर पर अस्पताल के शुभारंभ पर नगर पार्षद रीता सहगल, व्यापार मंडल प्रधान हेमराज संख्यान, नगर पार्षद विनोद सहित शहर के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
JAC Jharkhand Board 10th, 12th Result 2022: झारखंड एकेडमिक काउंसिल, JAC द्वारा आज 10वीं, 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं का रिजल्ट जारी कर दिया गया। शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने रिजल्ट (JAC Result 2022) की घोषणा की। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अपना बोर्ड रिजल्ट ऑफिशियल वेबसाइट jacresults. com पर जाकर चेक कर सकते हैं। लेकिन अगर ऑफिशियल वेबसाइट क्रैश हो गई तो? ये सवाल कई छात्रों के मन में होगा। इसका जवाब है- वेबसाइट के क्रैश होने पर भी रिजल्ट देखा जा सकता है। आइये जानते हैं इसका तरीका. . वेबसाइट के क्रैश होने पर रिजल्ट चेक करने के 2 तरीके हैं। ये दोनों ही तरीके नीचे दिए गए हैं। पहला तरीका है कि आप थर्ड पार्टी वेबसाइट जैसे indiaresults. com और examresults. net पर जाएं और यहां डिटेल सबमिट कर अपना रिजल्ट चेक कर लें। दूसरा तरीका है SMS से रिजल्ट चेक करने का। छात्र आसानी से एसएमएस कर अपने हाथ में रिजल्ट पा सकते हैं। कक्षा 10वीं के छात्रों को अपना रिजल्ट देखने के लिए मैजेस बॉक्स में Result <space> JAC10 <space> Roll Code <space> Roll Number टाइप करके 56263 पर भेजना होगा। इसी प्रकार कक्षा 12वीं के छात्रों को अपना रिजल्ट चेक करने के लिए Result <space> JAC12<space> Roll Code <space> Roll Number टाइप करके उसी नंबर 56263 पर मैसेज करना होगा। JAC के बारे में झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) भारत के झारखंड राज्य में अकादमिक प्रशासन के लिए जिम्मेदार एक राज्य सरकार की एजेंसी है। प्राथमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों सहित सरकारी मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों की निगरानी के लिए एजेंसी में संशोधन किया गया है। यह झारखंड सरकार द्वारा झारखंड अकादमिक परिषद अधिनियम, 2003 के अधिनियमन के बाद राज्य विधानमंडल और राज्यपाल द्वारा स्थापित किया गया था। JAC का मुख्य कार्य 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं आयोजित करना है। डॉ अनिल कुमार महतो को 10 दिसंबर 2021 को जेएसी के नए अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था।
JAC Jharkhand Board दसth, बारहth Result दो हज़ार बाईस: झारखंड एकेडमिक काउंसिल, JAC द्वारा आज दसवीं, बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं का रिजल्ट जारी कर दिया गया। शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने रिजल्ट की घोषणा की। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अपना बोर्ड रिजल्ट ऑफिशियल वेबसाइट jacresults. com पर जाकर चेक कर सकते हैं। लेकिन अगर ऑफिशियल वेबसाइट क्रैश हो गई तो? ये सवाल कई छात्रों के मन में होगा। इसका जवाब है- वेबसाइट के क्रैश होने पर भी रिजल्ट देखा जा सकता है। आइये जानते हैं इसका तरीका. . वेबसाइट के क्रैश होने पर रिजल्ट चेक करने के दो तरीके हैं। ये दोनों ही तरीके नीचे दिए गए हैं। पहला तरीका है कि आप थर्ड पार्टी वेबसाइट जैसे indiaresults. com और examresults. net पर जाएं और यहां डिटेल सबमिट कर अपना रिजल्ट चेक कर लें। दूसरा तरीका है SMS से रिजल्ट चेक करने का। छात्र आसानी से एसएमएस कर अपने हाथ में रिजल्ट पा सकते हैं। कक्षा दसवीं के छात्रों को अपना रिजल्ट देखने के लिए मैजेस बॉक्स में Result <space> JACदस <space> Roll Code <space> Roll Number टाइप करके छप्पन हज़ार दो सौ तिरेसठ पर भेजना होगा। इसी प्रकार कक्षा बारहवीं के छात्रों को अपना रिजल्ट चेक करने के लिए Result <space> JACबारह<space> Roll Code <space> Roll Number टाइप करके उसी नंबर छप्पन हज़ार दो सौ तिरेसठ पर मैसेज करना होगा। JAC के बारे में झारखंड एकेडमिक काउंसिल भारत के झारखंड राज्य में अकादमिक प्रशासन के लिए जिम्मेदार एक राज्य सरकार की एजेंसी है। प्राथमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों सहित सरकारी मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों की निगरानी के लिए एजेंसी में संशोधन किया गया है। यह झारखंड सरकार द्वारा झारखंड अकादमिक परिषद अधिनियम, दो हज़ार तीन के अधिनियमन के बाद राज्य विधानमंडल और राज्यपाल द्वारा स्थापित किया गया था। JAC का मुख्य कार्य दसवीं और बारहवीं की परीक्षाएं आयोजित करना है। डॉ अनिल कुमार महतो को दस दिसंबर दो हज़ार इक्कीस को जेएसी के नए अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था।
उदयपुर के कन्हैयालाल हत्याकांड के संबंध में पुलिस ने एक और युवक को गिरफ्तार किया है। यह वही युवक है जिसने कन्हैया हत्याकांड के आरोपियों की हत्या करने वालों को एक लाख रुपए का इनाम दिये जाने की घोषणा की थी। सीकर. राजस्थान के उदयपुर जिले में कन्हैयालाल के नृशंस हत्याकांड के संबंध में एक ओर गिरफ्तारी हुई है। सीकर जिले की अजीतगढ़ थाना पुलिस ने ढाणी मेहता निवासी रामधन यादव पुत्र माठूराम यादव को गिरफ्तार किया है। जिसने कन्हैया हत्याकांड के आरोपियों की हत्या करने वालों को एक लाख रुपए का इनाम दिये जाने की घोषणा की थी। जो सोशल मीडिया पर भी पोस्ट की गई थी। पोस्ट को सांप्रदायिक सौहार्द बिगाडऩे वाली मानते हुए पुलिस ने आरोपी को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया। जिसका मोबाइल जब्त कर उसके फेसबुक अकाउंट व अन्य पोस्ट की जांच की जा रही है। थानाधिकारी सुनिल जांगिड़ ने बताया कि आरोपी रामधन ने उदयपुर हत्याकांड के बाद सोशल मीडिया पर पोस्ट वायरल की थी। जिसमें उसने कन्हैया के हत्यारों को जान से मारने वाले को एक लाख रुपए का इनाम देने की घोषणा की थी। साथ में हत्या करने वाले को पारिवारिक सुरक्षा देने की गारंटी भी दी। पोस्ट प्रदेश में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाडऩे वाली होने की वजह से आरोपी के खिलाफ तुरंत एक्शन लिया गया। रविवार को कार्रवाई करते हुए पुलिस ने उसे घर से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के खिलाफ धारा 153 क व 505 में मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है। गौरतलब है कि उदयपुर में टेलर का काम करने वाले कन्हैयालाल की मंगलवार को जिहादी मानसिकता वाले मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद ने धारदार हथियार से हमला कर हत्या कर दी थी। दुकान में घुसकर हत्या के बाद दोनों फरार हो गए थे। जिन्हें बाद में राजसमन्द से गिरफ्तार किया गया। दो अन्य सहयोगियों के साथ दोनों को दो दिन पहले जयपुर में एनआईए कोर्ट में पेश किया गया। जहां से चारों को दस दिन की रिमांड पर सौंपा गया है। हत्या को राजस्थान सहित देशभर में विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं।
उदयपुर के कन्हैयालाल हत्याकांड के संबंध में पुलिस ने एक और युवक को गिरफ्तार किया है। यह वही युवक है जिसने कन्हैया हत्याकांड के आरोपियों की हत्या करने वालों को एक लाख रुपए का इनाम दिये जाने की घोषणा की थी। सीकर. राजस्थान के उदयपुर जिले में कन्हैयालाल के नृशंस हत्याकांड के संबंध में एक ओर गिरफ्तारी हुई है। सीकर जिले की अजीतगढ़ थाना पुलिस ने ढाणी मेहता निवासी रामधन यादव पुत्र माठूराम यादव को गिरफ्तार किया है। जिसने कन्हैया हत्याकांड के आरोपियों की हत्या करने वालों को एक लाख रुपए का इनाम दिये जाने की घोषणा की थी। जो सोशल मीडिया पर भी पोस्ट की गई थी। पोस्ट को सांप्रदायिक सौहार्द बिगाडऩे वाली मानते हुए पुलिस ने आरोपी को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया। जिसका मोबाइल जब्त कर उसके फेसबुक अकाउंट व अन्य पोस्ट की जांच की जा रही है। थानाधिकारी सुनिल जांगिड़ ने बताया कि आरोपी रामधन ने उदयपुर हत्याकांड के बाद सोशल मीडिया पर पोस्ट वायरल की थी। जिसमें उसने कन्हैया के हत्यारों को जान से मारने वाले को एक लाख रुपए का इनाम देने की घोषणा की थी। साथ में हत्या करने वाले को पारिवारिक सुरक्षा देने की गारंटी भी दी। पोस्ट प्रदेश में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाडऩे वाली होने की वजह से आरोपी के खिलाफ तुरंत एक्शन लिया गया। रविवार को कार्रवाई करते हुए पुलिस ने उसे घर से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के खिलाफ धारा एक सौ तिरेपन क व पाँच सौ पाँच में मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है। गौरतलब है कि उदयपुर में टेलर का काम करने वाले कन्हैयालाल की मंगलवार को जिहादी मानसिकता वाले मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद ने धारदार हथियार से हमला कर हत्या कर दी थी। दुकान में घुसकर हत्या के बाद दोनों फरार हो गए थे। जिन्हें बाद में राजसमन्द से गिरफ्तार किया गया। दो अन्य सहयोगियों के साथ दोनों को दो दिन पहले जयपुर में एनआईए कोर्ट में पेश किया गया। जहां से चारों को दस दिन की रिमांड पर सौंपा गया है। हत्या को राजस्थान सहित देशभर में विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर दद्दाजी को श्रद्धांजलि दी है। उन्होंने लिखा 'मध्यप्रदेश के महान संत, आध्यात्मिक गुरु,लाखों लोगों के जीवन को दिशा देने वाले, ऐसे महात्मा जिनका सम्पूर्ण जीवन पीड़ित मानवता की सेवा में समर्पित था, जिन्होंने अपनी आध्यात्मिक शक्ति व आशीर्वाद से लोगों की ज़िंदगी बदल दी, ऐसे पूजनीय दद्दाजी के चरणों में श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ'। श्रद्धेय दद्दाजी ने पार्थिव शिवलिंग के निर्माण का एक ऐसा अभियान चलाया जिससे अध्यात्म, धर्म और सद्विचार की एक नई लहर पैदा हुई और भारतीय संस्कृति को एक ही धागे में पिरोने का पवित्र कार्य हुआ। दद्दाजी का देवलोकगमन आज हुआ है, उनका आशीर्वाद मुझे सदैव मिला और वे आज भी मुझे आशीर्वाद और प्रेरणा देते दिखाई दे रहे हैं। वे भले ही आज भौतिक रूप से हमारे बीच न हों, लेकिन वे सदैव हमें प्रेरणा देते रहेंगे, आशीर्वाद देते रहेंगे और हमें सन्मार्ग दिखाते रहेंगे। उनके चरणों में प्रणाम। रविवार को संत देवप्रभाकर शास्त्री के दर्शन करने कई दिग्गज नेता पहुंचे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पत्नी साधना सिंह, भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय, गोपाल भार्गव, भूपेन्द्र सिंह, रमेश मेंदोलो, सहित कई दिग्गज नेता और अभिनेता निवास पर पहुंच के गुरु के स्वास्थ्य की जानकारी ली । दद्दा जी द्वारा पूरे भारत के कई स्थानो पर शिवलिंग निर्माण एवं भागवत यज्ञ करवा चुके है।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर दद्दाजी को श्रद्धांजलि दी है। उन्होंने लिखा 'मध्यप्रदेश के महान संत, आध्यात्मिक गुरु,लाखों लोगों के जीवन को दिशा देने वाले, ऐसे महात्मा जिनका सम्पूर्ण जीवन पीड़ित मानवता की सेवा में समर्पित था, जिन्होंने अपनी आध्यात्मिक शक्ति व आशीर्वाद से लोगों की ज़िंदगी बदल दी, ऐसे पूजनीय दद्दाजी के चरणों में श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ'। श्रद्धेय दद्दाजी ने पार्थिव शिवलिंग के निर्माण का एक ऐसा अभियान चलाया जिससे अध्यात्म, धर्म और सद्विचार की एक नई लहर पैदा हुई और भारतीय संस्कृति को एक ही धागे में पिरोने का पवित्र कार्य हुआ। दद्दाजी का देवलोकगमन आज हुआ है, उनका आशीर्वाद मुझे सदैव मिला और वे आज भी मुझे आशीर्वाद और प्रेरणा देते दिखाई दे रहे हैं। वे भले ही आज भौतिक रूप से हमारे बीच न हों, लेकिन वे सदैव हमें प्रेरणा देते रहेंगे, आशीर्वाद देते रहेंगे और हमें सन्मार्ग दिखाते रहेंगे। उनके चरणों में प्रणाम। रविवार को संत देवप्रभाकर शास्त्री के दर्शन करने कई दिग्गज नेता पहुंचे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पत्नी साधना सिंह, भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय, गोपाल भार्गव, भूपेन्द्र सिंह, रमेश मेंदोलो, सहित कई दिग्गज नेता और अभिनेता निवास पर पहुंच के गुरु के स्वास्थ्य की जानकारी ली । दद्दा जी द्वारा पूरे भारत के कई स्थानो पर शिवलिंग निर्माण एवं भागवत यज्ञ करवा चुके है।
लखनऊः समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने सदन की कार्रवाई में शामिल होने से पहले एक बार फिर BJP पर निशाना साधते हुए कहा कि आने वाले चुनाव के चलते सरकार ED और CBI का दुरुपयोग कर रही है। Adani को लेकर केंद्र सरकार (Central Government) पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दो-दो गनर रखते हुए भी यदि किसी की जान चली जाए तो कानून-व्यवस्था की स्थिति समझी जा सकती है। अखिलेश ने दिल्ली के Deputy CM मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) की गिरफ्तारी पर भी बयान दिया। मीडिया (Media) से बातचीत में अखिलेश ने कहा, 'आपको समझना चाहिए कि कौन-कौन मिला हुआ है। यहां एक बड़ी साजिश हो रही है। यूपी का चुनाव छोटा नहीं होता है। यहां देश का चुनाव होता है। यहां से देश के लिए प्रधानमंत्री निकलते हैं। योगी सरकार (Yogi Government) ने कहा है कि वह माफियाओं को मिट्टी में मिला देगी। मैंने योगी सरकार से टॉप 10 और टॉप 100 माफियाओं की सूची जारी करने की मांग की है। गन रखते हुए यदि किसी की जान चली जाती है तो कानून-व्यवस्था की स्थिति समझी जा सकती है। इससे पहले शराब घोटाले में दिल्ली के Deputy CM मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी पर SP सुप्रीमो ने कहा कि यह कार्रवाई एक बड़ी साजिश का हिस्सा है। अखिलेश ने कहा 'यहां यह बात समझनी होगी कि इसमें कौन - कौन मिला हुआ है। यह एक बड़ी साजिश है। अखिलेश यादव का यह भी कहना है कि उत्तर प्रदेश बड़ा प्रदेश है इसलिए यहां साजिश बड़े स्तर पर की जा रही है।
लखनऊः समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सदन की कार्रवाई में शामिल होने से पहले एक बार फिर BJP पर निशाना साधते हुए कहा कि आने वाले चुनाव के चलते सरकार ED और CBI का दुरुपयोग कर रही है। Adani को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दो-दो गनर रखते हुए भी यदि किसी की जान चली जाए तो कानून-व्यवस्था की स्थिति समझी जा सकती है। अखिलेश ने दिल्ली के Deputy CM मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी पर भी बयान दिया। मीडिया से बातचीत में अखिलेश ने कहा, 'आपको समझना चाहिए कि कौन-कौन मिला हुआ है। यहां एक बड़ी साजिश हो रही है। यूपी का चुनाव छोटा नहीं होता है। यहां देश का चुनाव होता है। यहां से देश के लिए प्रधानमंत्री निकलते हैं। योगी सरकार ने कहा है कि वह माफियाओं को मिट्टी में मिला देगी। मैंने योगी सरकार से टॉप दस और टॉप एक सौ माफियाओं की सूची जारी करने की मांग की है। गन रखते हुए यदि किसी की जान चली जाती है तो कानून-व्यवस्था की स्थिति समझी जा सकती है। इससे पहले शराब घोटाले में दिल्ली के Deputy CM मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी पर SP सुप्रीमो ने कहा कि यह कार्रवाई एक बड़ी साजिश का हिस्सा है। अखिलेश ने कहा 'यहां यह बात समझनी होगी कि इसमें कौन - कौन मिला हुआ है। यह एक बड़ी साजिश है। अखिलेश यादव का यह भी कहना है कि उत्तर प्रदेश बड़ा प्रदेश है इसलिए यहां साजिश बड़े स्तर पर की जा रही है।
इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइक गैटिंग भी इन दागनुमा खिलाड़ियों की लिस्ट में शामिल हैं। माइक गेटिंग 1989-90 में एक सीरीज के दौरान वेस्ट इंडीज टूर पर गई टीम के इंग्लिश कप्तान थे। सीरीज के दौरान वे एक बार गए हुए थे, जहां उनकी मुलाकात एक बार टेंडर से हुई। गेटिंग इसी बार टेंडर महिला के साथ अपने होटल रूम में पकड़े गए।
इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइक गैटिंग भी इन दागनुमा खिलाड़ियों की लिस्ट में शामिल हैं। माइक गेटिंग एक हज़ार नौ सौ नवासी-नब्बे में एक सीरीज के दौरान वेस्ट इंडीज टूर पर गई टीम के इंग्लिश कप्तान थे। सीरीज के दौरान वे एक बार गए हुए थे, जहां उनकी मुलाकात एक बार टेंडर से हुई। गेटिंग इसी बार टेंडर महिला के साथ अपने होटल रूम में पकड़े गए।
षष्ठम- अध्याय HANN VANNI (3) - श्री मद्भागवत में :१ श्रीभगत संस्कृतवांगमय के अन्तर्गत वैष्णव सम्प्रदाय काग्रंथ है । ली उपादेयता धार्मिक स्वम् कन्याम सरण में ख्याति जन्य हमहर्षि वेद व्यास ने सरिताओं में देवों में भगवान विष्णु और वैष्णवों में शिवपुराणों में से उतलाकर इसका लोकप्रियता का प्रमाण दिदिया है । जिस प्रकार जत्रों में काशी अग्रगण्य है उसी प्रकार पुराण में यह स्वंयमा ग्रंथ आवरणीय है। इसमें वेद वेदान्त का सारभाग निचोड़कर भर दिया गया है। शुकदेव के मुख का निर्मल रह है। वैराणियों इसमें श्री परमहंसीका विशुद्ध ज्ञान है स्वम् महापुरुषों के प्रबंधन का श्रुतिसम्मत तार है। श्रीमद्भागवत में भावान विष्णु के २० बनतारों की लोगों का परिवांकन है, जिनमें सभी भक्त पात्रों के उदगारों को उद्धृत करनाओं का अतिक्रमण करता है । जाः कतिपय त पात्रों के भक्ति सम्मत उगारों का यहां करना जभीष्ट भागवतकारभावाना, भावान शिव, यम, देवर्षि ना काण बालक, महामुनि कपिल, महाराज मनु भक्त प्रहलाद, विदेश ३- श्रीमद्भागवत४- श्रीमद्भागवतसुनारा दि णष्ठम- कयाय (3) - श्रीमद्भागवत में :श्रीमद्भागवत संस्कृत वांगमय के अन्तर्गत वैष्णव सम्प्रदाय है। की उपादेयता धार्मिक स्वम् आध्यात्मिक सरणि में ख्याति जन्य महर्षि वेद व्यास ने सरिताओं में गंगा देवों में भगवान विष्णु और वैष्णवों में शिव के समान पुराणों में इसे सर्वश्रेष्ठ तलाकर इसकी लोकप्रियता का प्रमाण किया है। जिस प्रकार जब पत्रों में काशी अग्रगण्य है उसी प्रकार पुराणों में यह सर्व पूज्यमान ग्रंथ आदरणीय है। इसमें वेद वेदान्त का सारभाग निचोड़कर भर दिया गया है। इसमें श्रीशुकदेव के मुख का निर्मित र है। वैरागियों एवम् परमहंसी का विशुद्ध ज्ञान है स्वम् महापुरुषों के यात्मक प्रवचनका श्रुतिसम्मत सार है। श्रीमद्भागवत में भगवान विष्णु के २४ अवतारों की लीलाओं का परितांकन है, जिनमें सभी भक्त पात्रों के उदगारों को उद्धृत करना शोध की सीमाओं का अतिक्रमण करना है । जत कतिपय त पात्रों के भक्ति सम्मत उदगारों का यहां विवेन करना जमीष्ट समरेंगे. भागवतकार ने भावान वृक्षा, भावान शिव, यम, देवर्षि नारद कणि बालक, महामुनि कपिल, महाराज मनु भक्त प्रहलाद, विदेह जनक, ३- श्रीमद्भागवत४- श्रीमद्भागवतW
षष्ठम- अध्याय HANN VANNI - श्री मद्भागवत में :एक श्रीभगत संस्कृतवांगमय के अन्तर्गत वैष्णव सम्प्रदाय काग्रंथ है । ली उपादेयता धार्मिक स्वम् कन्याम सरण में ख्याति जन्य हमहर्षि वेद व्यास ने सरिताओं में देवों में भगवान विष्णु और वैष्णवों में शिवपुराणों में से उतलाकर इसका लोकप्रियता का प्रमाण दिदिया है । जिस प्रकार जत्रों में काशी अग्रगण्य है उसी प्रकार पुराण में यह स्वंयमा ग्रंथ आवरणीय है। इसमें वेद वेदान्त का सारभाग निचोड़कर भर दिया गया है। शुकदेव के मुख का निर्मल रह है। वैराणियों इसमें श्री परमहंसीका विशुद्ध ज्ञान है स्वम् महापुरुषों के प्रबंधन का श्रुतिसम्मत तार है। श्रीमद्भागवत में भावान विष्णु के बीस बनतारों की लोगों का परिवांकन है, जिनमें सभी भक्त पात्रों के उदगारों को उद्धृत करनाओं का अतिक्रमण करता है । जाः कतिपय त पात्रों के भक्ति सम्मत उगारों का यहां करना जभीष्ट भागवतकारभावाना, भावान शिव, यम, देवर्षि ना काण बालक, महामुनि कपिल, महाराज मनु भक्त प्रहलाद, विदेश तीन- श्रीमद्भागवतचार- श्रीमद्भागवतसुनारा दि णष्ठम- कयाय - श्रीमद्भागवत में :श्रीमद्भागवत संस्कृत वांगमय के अन्तर्गत वैष्णव सम्प्रदाय है। की उपादेयता धार्मिक स्वम् आध्यात्मिक सरणि में ख्याति जन्य महर्षि वेद व्यास ने सरिताओं में गंगा देवों में भगवान विष्णु और वैष्णवों में शिव के समान पुराणों में इसे सर्वश्रेष्ठ तलाकर इसकी लोकप्रियता का प्रमाण किया है। जिस प्रकार जब पत्रों में काशी अग्रगण्य है उसी प्रकार पुराणों में यह सर्व पूज्यमान ग्रंथ आदरणीय है। इसमें वेद वेदान्त का सारभाग निचोड़कर भर दिया गया है। इसमें श्रीशुकदेव के मुख का निर्मित र है। वैरागियों एवम् परमहंसी का विशुद्ध ज्ञान है स्वम् महापुरुषों के यात्मक प्रवचनका श्रुतिसम्मत सार है। श्रीमद्भागवत में भगवान विष्णु के चौबीस अवतारों की लीलाओं का परितांकन है, जिनमें सभी भक्त पात्रों के उदगारों को उद्धृत करना शोध की सीमाओं का अतिक्रमण करना है । जत कतिपय त पात्रों के भक्ति सम्मत उदगारों का यहां विवेन करना जमीष्ट समरेंगे. भागवतकार ने भावान वृक्षा, भावान शिव, यम, देवर्षि नारद कणि बालक, महामुनि कपिल, महाराज मनु भक्त प्रहलाद, विदेह जनक, तीन- श्रीमद्भागवतचार- श्रीमद्भागवतW
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य नवाचार आयोग के चेयरमैन विवेक ढांड ने सोमवार को नीति आयोग के सीईओ वीबीआर सुब्रमण्यम से मुलाकात की। दोनों के बीच राज्य की नीति में क्या नवाचार हो सकता है, इस पर विस्तार से चर्चा हुई। छत्तीसगढ़ कैडर के 87 बैच के आईएएस सुब्रमण्यम राज्य में गृह विभाग के एसीएस के तौर पर काम कर चुके हैं। उस वक्त ढांड सीएस थे। सुब्रमण्यम केंद्र सरकार में सचिव के पद से रिटायर होने के बाद कुछ दिन पहले ही नीति आयोग के सीईओ बने हैं। इसी बीच नवाचार आयोग के चेयरमैन का दायित्व संभालने के बाद ढांड दिल्ली प्रवास पर हैं, और उनकी नीति आयोग दफ्तर में सीईओ सुब्रमण्यम से करीब एक घंटे तक चर्चा हुई। सुब्रमण्यम छत्तीसगढ़ की भौगोलिक स्थितियों, समस्याओं, और संभावनाओं से भली भांति परिचित हैं। ढांड के साथ उनकी छत्तीसगढ़ सरकार की आदिवासी विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और औद्योगिकरण आदि नीतियों में नवाचार की संभावनाओं पर गहन मंत्रणा हुई है। नवाचार आयोग के चेयरमैन ढांड ने उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं भी दी।
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य नवाचार आयोग के चेयरमैन विवेक ढांड ने सोमवार को नीति आयोग के सीईओ वीबीआर सुब्रमण्यम से मुलाकात की। दोनों के बीच राज्य की नीति में क्या नवाचार हो सकता है, इस पर विस्तार से चर्चा हुई। छत्तीसगढ़ कैडर के सत्तासी बैच के आईएएस सुब्रमण्यम राज्य में गृह विभाग के एसीएस के तौर पर काम कर चुके हैं। उस वक्त ढांड सीएस थे। सुब्रमण्यम केंद्र सरकार में सचिव के पद से रिटायर होने के बाद कुछ दिन पहले ही नीति आयोग के सीईओ बने हैं। इसी बीच नवाचार आयोग के चेयरमैन का दायित्व संभालने के बाद ढांड दिल्ली प्रवास पर हैं, और उनकी नीति आयोग दफ्तर में सीईओ सुब्रमण्यम से करीब एक घंटे तक चर्चा हुई। सुब्रमण्यम छत्तीसगढ़ की भौगोलिक स्थितियों, समस्याओं, और संभावनाओं से भली भांति परिचित हैं। ढांड के साथ उनकी छत्तीसगढ़ सरकार की आदिवासी विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और औद्योगिकरण आदि नीतियों में नवाचार की संभावनाओं पर गहन मंत्रणा हुई है। नवाचार आयोग के चेयरमैन ढांड ने उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं भी दी।
उत्तर प्रदेश में पुलिस विभाग में वैसे तो एक से एक जाबांज पुलिस अफसर भरे हुए हैं लेकिन उनमें से कुछ नाम ऐसे हैं जिन्हें सिर्फ सुनने से ही माफिया खौफजदा हो जाते हैं. उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में कांवड़ियों पर लाठीचार्च के बाद IPS प्रभाकर चौधरी का ट्रांसफर किया गया है. IPS प्रभाकर चौधरी का महज 13 साल की सर्विस में 21 बार ट्रांसफर किया जा चुका है. हाल में हुए इस ट्रांसफर से पूरे प्रदेश में IPS अधिकारियों और उनके ट्रांसफर की चर्चा हो रही है. प्रभाकर चौधरी को उन IPS अधिकारियों में से एक माना जाता है जो हर हाल में लॉ एंड ऑर्डर को कायम रखने की कूबत रखते हैं. ऐसे में हम उन IPS की चर्चा भी कर लेते हैं जिनके नाम लेने भर से प्रदेश के माफिया खौफजदा हो जाते हैं. जब यूपी के खतरनाक आईपीएस अधिकारियों की बात की जाती है तो सबसे पहले IPS अमिताभ यश का नाम सामने आता है. अमिताभ यश अपनी सूझ-बूझ और साहस के दम पर 150 से ज्यादा बदमाशों को खत्म कर चुके हैं. अमिताभ ने कई माफियाओं को पूरी तरह से खात्मा किया है. वह 1996 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं जिन्हें यूपी कैडर दिया गया है. अमिताभ ने दिल्ली से ग्रेजुएशन किया है और बाद में IIT कानपुर से अपनी पोस्ट ग्रेजुएशन की है. वह फिलहाल यूपी एसटीएफ के एडीजी हैं. अमिताभ यश के अलावा और भी ऐसे जाबांज हैं जिनके नाम लेने भर से एक से बड़े एक माफिया खौफजदा हो जाते हैं. इस लिस्ट में दूसरा नाम है IPS दीपक कुमार का. दीपक कुमार के नेतृत्व में पुलिस विभाग अभी तक 56 से ज्यादा खतरनाक बदमाशों को ढेर कर चुका है. अपनी सख्त छवि के लिए प्रसिद्ध दीपक अलीगढ़ रेंज के डीआईजी हैं. दीपक अलीगढ़ से पहले अयोध्या, बांदा और लखनऊ में रह चुके हैं. दीपक बिहार के रहने वाले हैं और 2005 बैच से हैं. इस लिस्ट में वैसे तो कई नाम हैं लेकिन IPS अनंत देव तिवारी का नाम कुछ और ही मायने रखता है. 2006 बैच के आईपीएस अनंत देव कई टीमों का हिस्सा रह चुके हैं जो कि 150 से ज्यादा माफियाओं को ढेर कर चुकी हैं. ददुआ और ठोकिया के खात्में में भी अनंत देव की अहम भूमिका रही थी. वह पीसीएस से सिलेक्ट हुए थे जिसके बाद 2006 में उनका प्रमोशन करके IPS बनाया गया. वहीं यूपी के एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार का नाम भी इस लिस्ट में शुमार है. यूपी में उन्हें आज के दौर में सबसे खतरनाक माना जाता है, उनके नेतृत्व में यूपी पुलिस कई माफियाओं को उनके गैंग के साथ खत्म कर चुके है. बिहार के रहने वाले प्रशांत अभी तक 300 से ज्यादा माफियाओं का सामना कर चुके हैं. उन्हें डिपार्टमेंट के कई अवॉर्ड्स दिए जा चुके हैं. इस लिस्ट में अगला नाम IPS नवनीत सिकेरा का है. यह अपने अच्छे व्यवहार के लिए जाने जाते हैं लेकिन अगर बदमाशों की बात की जाए तो उनकी हालत इनका नाम सुनते ही पस्त हो जाती है. वह अभी तक 60 से ज्यादा बदमाशों को खत्म करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं. उनके बारे में यह बात बहुत रोचक है कि वह UPSC में टॉप रैंकर्स में से एक थे. टॉप रैंकर होने के बावजूद उन्होंने पुलिस डिपार्टमेंट चुना और IPS बने. (रिपोर्ट- अनुराग अग्रवाल)
उत्तर प्रदेश में पुलिस विभाग में वैसे तो एक से एक जाबांज पुलिस अफसर भरे हुए हैं लेकिन उनमें से कुछ नाम ऐसे हैं जिन्हें सिर्फ सुनने से ही माफिया खौफजदा हो जाते हैं. उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में कांवड़ियों पर लाठीचार्च के बाद IPS प्रभाकर चौधरी का ट्रांसफर किया गया है. IPS प्रभाकर चौधरी का महज तेरह साल की सर्विस में इक्कीस बार ट्रांसफर किया जा चुका है. हाल में हुए इस ट्रांसफर से पूरे प्रदेश में IPS अधिकारियों और उनके ट्रांसफर की चर्चा हो रही है. प्रभाकर चौधरी को उन IPS अधिकारियों में से एक माना जाता है जो हर हाल में लॉ एंड ऑर्डर को कायम रखने की कूबत रखते हैं. ऐसे में हम उन IPS की चर्चा भी कर लेते हैं जिनके नाम लेने भर से प्रदेश के माफिया खौफजदा हो जाते हैं. जब यूपी के खतरनाक आईपीएस अधिकारियों की बात की जाती है तो सबसे पहले IPS अमिताभ यश का नाम सामने आता है. अमिताभ यश अपनी सूझ-बूझ और साहस के दम पर एक सौ पचास से ज्यादा बदमाशों को खत्म कर चुके हैं. अमिताभ ने कई माफियाओं को पूरी तरह से खात्मा किया है. वह एक हज़ार नौ सौ छियानवे बैच के आईपीएस अधिकारी हैं जिन्हें यूपी कैडर दिया गया है. अमिताभ ने दिल्ली से ग्रेजुएशन किया है और बाद में IIT कानपुर से अपनी पोस्ट ग्रेजुएशन की है. वह फिलहाल यूपी एसटीएफ के एडीजी हैं. अमिताभ यश के अलावा और भी ऐसे जाबांज हैं जिनके नाम लेने भर से एक से बड़े एक माफिया खौफजदा हो जाते हैं. इस लिस्ट में दूसरा नाम है IPS दीपक कुमार का. दीपक कुमार के नेतृत्व में पुलिस विभाग अभी तक छप्पन से ज्यादा खतरनाक बदमाशों को ढेर कर चुका है. अपनी सख्त छवि के लिए प्रसिद्ध दीपक अलीगढ़ रेंज के डीआईजी हैं. दीपक अलीगढ़ से पहले अयोध्या, बांदा और लखनऊ में रह चुके हैं. दीपक बिहार के रहने वाले हैं और दो हज़ार पाँच बैच से हैं. इस लिस्ट में वैसे तो कई नाम हैं लेकिन IPS अनंत देव तिवारी का नाम कुछ और ही मायने रखता है. दो हज़ार छः बैच के आईपीएस अनंत देव कई टीमों का हिस्सा रह चुके हैं जो कि एक सौ पचास से ज्यादा माफियाओं को ढेर कर चुकी हैं. ददुआ और ठोकिया के खात्में में भी अनंत देव की अहम भूमिका रही थी. वह पीसीएस से सिलेक्ट हुए थे जिसके बाद दो हज़ार छः में उनका प्रमोशन करके IPS बनाया गया. वहीं यूपी के एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार का नाम भी इस लिस्ट में शुमार है. यूपी में उन्हें आज के दौर में सबसे खतरनाक माना जाता है, उनके नेतृत्व में यूपी पुलिस कई माफियाओं को उनके गैंग के साथ खत्म कर चुके है. बिहार के रहने वाले प्रशांत अभी तक तीन सौ से ज्यादा माफियाओं का सामना कर चुके हैं. उन्हें डिपार्टमेंट के कई अवॉर्ड्स दिए जा चुके हैं. इस लिस्ट में अगला नाम IPS नवनीत सिकेरा का है. यह अपने अच्छे व्यवहार के लिए जाने जाते हैं लेकिन अगर बदमाशों की बात की जाए तो उनकी हालत इनका नाम सुनते ही पस्त हो जाती है. वह अभी तक साठ से ज्यादा बदमाशों को खत्म करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं. उनके बारे में यह बात बहुत रोचक है कि वह UPSC में टॉप रैंकर्स में से एक थे. टॉप रैंकर होने के बावजूद उन्होंने पुलिस डिपार्टमेंट चुना और IPS बने.
पाद तलौः पृष्ठ देशे अंगुठे द्वे च संस्पृशेत् । जानु युग्मं पुरस्कृत्य साधयेन्मंडुकासनम् ॥ घे० सं० २-३१ विधिः- प्रथम पैर लंबे फैला कर बैठ जाओ। अब बाएं पैर को मोड़कर एड़ीको जांघ के पास लगाते हुए खड़ा रखो जिससे घोंटू छाती के पास आजाय । अव दाहिना हाथ सहारे के लिये जमीन पर टेक कर बाएं हाथ से पैर को चूतड़ के नीचे इस तरह से जमाओ कि जिसमें एड़ी चूतड़ के पीछे निकल आवे, और तलुआ चूतड़ के नीचे आजाय और घोंटू ठीक वाईं ओर तना रहे । फिर इसी प्रकार दाहिने पैर को लाकर उसके पंजे को प्रथम वाएं पंजे के ऊपर रख कर वाद एड़ी को और घोंटू को जमा । अव पंजे एक पर एक थोड़े चढ़े हुए रहेंगे, एड़ियां दोनों चूतड़ के पीछे रहेंगी जांवें आगे रहेंगे और दोनों घोंटू दोनों ओर तने रहेंगे। दोनों हाथ घोंटू पर रखदो ( देखो चित्र नं० २६ ) और पीठ, गर्दन तथा सिर एक सीध में रख कर बैठो। दृष्टि सामने रखो। मंडूकासन से लाभ इस आसन से जांघ के भीतरी स्नायु मजबूत और मुलायम होते हैं और इसके गुण वज्रासन के समान हैं।
पाद तलौः पृष्ठ देशे अंगुठे द्वे च संस्पृशेत् । जानु युग्मं पुरस्कृत्य साधयेन्मंडुकासनम् ॥ घेशून्य संशून्य दो-इकतीस विधिः- प्रथम पैर लंबे फैला कर बैठ जाओ। अब बाएं पैर को मोड़कर एड़ीको जांघ के पास लगाते हुए खड़ा रखो जिससे घोंटू छाती के पास आजाय । अव दाहिना हाथ सहारे के लिये जमीन पर टेक कर बाएं हाथ से पैर को चूतड़ के नीचे इस तरह से जमाओ कि जिसमें एड़ी चूतड़ के पीछे निकल आवे, और तलुआ चूतड़ के नीचे आजाय और घोंटू ठीक वाईं ओर तना रहे । फिर इसी प्रकार दाहिने पैर को लाकर उसके पंजे को प्रथम वाएं पंजे के ऊपर रख कर वाद एड़ी को और घोंटू को जमा । अव पंजे एक पर एक थोड़े चढ़े हुए रहेंगे, एड़ियां दोनों चूतड़ के पीछे रहेंगी जांवें आगे रहेंगे और दोनों घोंटू दोनों ओर तने रहेंगे। दोनों हाथ घोंटू पर रखदो और पीठ, गर्दन तथा सिर एक सीध में रख कर बैठो। दृष्टि सामने रखो। मंडूकासन से लाभ इस आसन से जांघ के भीतरी स्नायु मजबूत और मुलायम होते हैं और इसके गुण वज्रासन के समान हैं।
हमीरपुर संसदीय क्षेत्र किसान मोर्चा की बैठक घुमारवीं मिलन पैलेस में आयोजित हुई। जिसमें पूर्णकालिक विस्तारक हमीरपुर संसदीय क्षेत्र अक्षय भरमौरी विशेष रूप से उपस्थित हुए। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य किसानों को किस तरह सरकार की योजनाओं के बारे में बताया जाए व किसान हितों की रक्षा कैसे की जाए इस बारे विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। अक्षय भरमौरी ने बताया कि किस तरह कुछ संगठन किसानों को आंदोलन के रूप में गुमराह कर अपना स्वार्थ सिद्ध कर रहे व असली किसानों को बदनाम कर रहे उससे भी बचाना है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसान कल्याण को लेकर, आय बढ़ाने को लेकर लगातार प्रयासरत है, परतुं कुछ लोगों द्वारा गलत राजनीति कर किसानों को उकसाया व अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकी उस विषय को भी अन्नदाता किसानों के समक्ष प्रस्तुत करना हमारा दायित्व है। उन्होंने साथ में यह भी बताया कि पीएम किसान सम्मान निधि के तहत भी पहली बार किसानों को सहायता दी गई फिर प्रश्न यह उठता है कि सरकार किसान विरोधी कैसे हो सकती है। अतः इन सब बातों को लेकर हम सभी किसानों को हर गांव, पंचायत में जाकर किसान हितों की पैरवी करनी है व किसानों को जागरूक करना है जिसके लिए किसान मोर्चा हर बूथ पर 15 किसान प्रहरी तैयार करेगा जो किसानों की पैरवी व उन्हें मिलने वाले लाभों के बारे जागरूक करेगा। इस बैठक में प्रदेश उपाध्यक्ष किसान मोर्चा देवेंद्र कानपुरी, प्रदेश सचिव संजीव उर्फ कुकी, अतुल, सुरेंद्र भारती, जसवीर सिंह, प्रदेश मीडिया प्रभारी मदन राणा, प्रकाश, अनीश, राजीव, पृथ्वी चंद, सुदर्शन व संजीव उपस्थित रहे।
हमीरपुर संसदीय क्षेत्र किसान मोर्चा की बैठक घुमारवीं मिलन पैलेस में आयोजित हुई। जिसमें पूर्णकालिक विस्तारक हमीरपुर संसदीय क्षेत्र अक्षय भरमौरी विशेष रूप से उपस्थित हुए। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य किसानों को किस तरह सरकार की योजनाओं के बारे में बताया जाए व किसान हितों की रक्षा कैसे की जाए इस बारे विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। अक्षय भरमौरी ने बताया कि किस तरह कुछ संगठन किसानों को आंदोलन के रूप में गुमराह कर अपना स्वार्थ सिद्ध कर रहे व असली किसानों को बदनाम कर रहे उससे भी बचाना है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसान कल्याण को लेकर, आय बढ़ाने को लेकर लगातार प्रयासरत है, परतुं कुछ लोगों द्वारा गलत राजनीति कर किसानों को उकसाया व अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकी उस विषय को भी अन्नदाता किसानों के समक्ष प्रस्तुत करना हमारा दायित्व है। उन्होंने साथ में यह भी बताया कि पीएम किसान सम्मान निधि के तहत भी पहली बार किसानों को सहायता दी गई फिर प्रश्न यह उठता है कि सरकार किसान विरोधी कैसे हो सकती है। अतः इन सब बातों को लेकर हम सभी किसानों को हर गांव, पंचायत में जाकर किसान हितों की पैरवी करनी है व किसानों को जागरूक करना है जिसके लिए किसान मोर्चा हर बूथ पर पंद्रह किसान प्रहरी तैयार करेगा जो किसानों की पैरवी व उन्हें मिलने वाले लाभों के बारे जागरूक करेगा। इस बैठक में प्रदेश उपाध्यक्ष किसान मोर्चा देवेंद्र कानपुरी, प्रदेश सचिव संजीव उर्फ कुकी, अतुल, सुरेंद्र भारती, जसवीर सिंह, प्रदेश मीडिया प्रभारी मदन राणा, प्रकाश, अनीश, राजीव, पृथ्वी चंद, सुदर्शन व संजीव उपस्थित रहे।
Who Betrayed Anne Frank: दूसरे विश्व युद्ध के समय बाकी यहूदी लोगों की तरह एनी फ्रैंक भी अपने परिवार के साथ एक सीक्रेट एनेक्स में छिपी थी. इस दौरान उसने एक डायरी लिखी, जो 70 से अधिक भाषाओं में पब्लिश हुई. एनी फ्रैंक (Anne Frank) और उसके परिवार को किसने धोखा दिया था, इस बात का पता चल गया है. दुनिया का बच्चा-बच्चा एनी फ्रैंक के बारे में जानता है, वही एनी जिसके बारे में स्कूल की किताबों में एक चैप्टर जरूर होता है. इतिहासकारों के लगातार किए जा रहे प्रयासों के कारण 77 साल बाद पता चल गया है कि किसकी वजह से एनी और उसका परिवार गिरफ्तार हुआ था (Anne Frank Betrayal). जिसके बाद उन सबकी मौत हो गई. एनी ने एक डायरी लिखी थी, जो 'द डायरी ऑफ यंग गर्ल' के नाम से दुनियाभर में मशहूर है. वो एक यहूदी (Jewish) लड़की थी, जो बड़ी होकर पत्रकार बनना चाहती थी. ये कहानी दूसरे विश्व युद्ध के समय की है, जब नाजियों से अपनी जान बचाने के लिए यहूदी धर्म के लोग यूरोप के अलग-अलग हिस्सों में छिपे हुए थे. इनमें जो भी पकड़ा जाता, उसे नाजी सैनिक यातना शिविरों में भेजकर मौत के घाट उतार देते. एनी फ्रैंक का परिवार भी बाकी यहूदियों की तरह नीदरलैंड के एम्सटर्डम में स्थित एक घर में छिपा हुआ था. जिसे सीक्रेट एनेक्स के नाम से जाना जाता है (Anne Frank Father and Mother Name). यहां एनी फ्रैंक, उसकी मां एडिथ फ्रैंक, पिता ऑटो फ्रैंक, बड़ी बहन मार्गो फ्रैंक के अलावा एक दूसरा परिवार भी था. जिन्हें एनी वान डान्स कहती थी. इनमें हर्मन वान पेल्स (मिस्टर वान डान), उनकी पत्नी ऑगस्टे वान पेल्स और बेटा पीटर वान पेल्स था. साथ ही एक आठवां शख्स फ्रिट्स फेफर भी इनके साथ छिपा हुआ था. जो दंत चिकित्सक था. ये सभी लोग 1942 से लेकर 1944 तक यहां छिपे रहे. लेकिन किसी ने नाजियों को इनके यहां छिपे होने के बारे में बता दिया, जिसके बाद सभी को यातना शिविरों में भेज दिया गया. अब उस शख्स का पता चल गया है, जिसने इन्हें इतना बड़ा धोखा दिया था. अमेरिकी खुफिया एजेंसी (फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन) यानी एफबीआई के पूर्व एजेंट के नेतृत्व में शोधकर्ताओं के एक ग्रुप ने इस रहस्य को आखिरकार सुलझा लिया है. इन्होंने पता लगाया है कि धोखा देने वाला शख्स 'अर्नोल्ड वान डेन बर्घ' (Arnold van den Bergh) नाम का यहूदी नोटरी था. जांच टीम को सीधे तौर पर इससे जुडे़ सबूत तो नहीं मिले हैं, लेकिन उनका मानना है कि वान डेन बर्घ को यहूदी काउंसिल में काम करते हुए उन पतों (एड्रेस) की सूची के बारे में पता चल गया होगा, जहां यहूदी लोग छिपे हुए थे. और हो सकता है कि उसने अपने परिवार को बचाने के लिए इस जानकारी का खुलासा किया हो. शोधकर्ताओं को एनी के पिता ऑटो फ्रैंक को भेजे गए एक गुमनाम नोट की टाइप की हुई कॉपी भी मिली है. जिसपर फ्रैंक परिवार को धोखा देने वाले वान डेन बर्घ का नाम लिखा है. फ्रैंक परिवार जहां छिपा हुआ था, उस बिल्डिंग में एक बुक केस था. जिसे हटाने पर अंदर जाने का गुप्त रास्ता था. 4 अगस्त, 1944 को पुलिस ने छापेमारी में सबको गिरफ्तार कर लिया था. एनी को पहले ऑश्वित्ज भेजा गया और फिर बाद में बर्गन-बेल्सन कैंप, जहां एनी और उसकी बड़ी बहन मार्गो की 1945 में मौत हो गई. यानी दूसरा विश्व युद्ध खत्म होने से कुछ महीने पहले. परिवार में अकेले ऑटो फ्रैंक ही जीवित बचे थे. जिन्हें सेवियत सेना ने ऑश्वित्ज से रिहा कराया था (Anne Frank Explanation). एनी ने सीक्रेट एनेक्स में छिपे होने के दौरान एक डायरी लिखी थी, जिसे वो युद्ध खत्म होने के बाद पब्लिश कराना चाहती थी. उसका सपना एक लेखिका बनने का था. जब ऑटो फ्रैंक यातना शिविर से बाहर आए, तो उन्हें अपनी बेटी की डायरी मिली, जिसे उन्होंने पब्लिश कराया. ये डायरी 70 से अधिक भाषाओं में ट्रांसलेट हुई है. अमेरिका और यूरोप के लाखों लोगों की तरह ही भारत में स्कूली बच्चों ने भी एनी के बारे में पढ़ा है. अब बात करते हैं, उनकी जिन्होंने इस रहस्य से परदा उठाया है. विन्सेंट पैनकोक (Vincent Pankoke) एफबीआई में इन्वेस्टिगेटर के तौर पर काम कर चुके हैं. जिन्होंने कोलंबियाई ड्रग कार्टेल का भंडाफोड़ करने और 9/11 अपहर्ताओं की गतिविधियों का पता लगाने जैसे बडे़ काम किए हैं. वह सेवानिवृत होने के बाद फिलहाल अमेरिका के फ्लोरिडा में रह रहे हैं. उनकी वजह से ही फ्रैंक परिवार से जुड़ा ये केस सुलझ पाया है. दुनियाभर के बच्चों की तरह पैनकोक ने भी एनी की कहानी स्कूल में पढ़ी थी. वह साल 2016 से ही नीदरलैंड में इस केस से जुडे़ सबूतों की तलाश कर रहे थे. इसके लिए उन्होंने लाखों दस्तावेजों की सटीकता से जानकारी लेने के लिए आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया. उन्होंने पुलिस रिपोर्ट, नाजी जासूसों की सूची, खुफिया फाइलें, उनसे जुड़े कनेक्शन और नई लीड खोजने के लिए दिन रात एक कर दिए. अमेरिका के सीबीएस चैनल को दिए इंटरव्यू में पैनकोक ने कहा कि वह एनी और यहूदी नरसंहार के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने की कोशिश में थे. उन्होंने कहा, 'मेरी टीम ने बैठकर उन तरीकों की एक सूची तैयार की जिनसे पता चल सके कि आखिर फ्रैंक परिवार को किसने धोखा दिया था. वान डेन बर्घ को सबसे संभावित अपराधी माना जा रहा है. हमने पहले 20 अलग-अलग सिनेरियो में 30 से अधिक संदिग्धों की पहचान की.' पैनकोक ने कहा कि यह परिस्थिति से जुड़ा मामला है लेकिन उन्हें लगता है कि जांच में जो पता चला है, वही सच है. उन्होंने ये भी कहा कि इस बात की संभावना कम है कि वान डेन बर्घ एनी के परिवार को व्यक्तिगत रूप से जानता था लेकिन उसने उनकी जानकारी नाजियों तक पहुंचाई थी. लेकिन बर्घ को ये नहीं पता था कि सीक्रेट एनेक्स में कौन सा परिवार छिपा हुआ है. उसे केवल एक यहूदी परिवार के छिपे होने की ही जानकारी थी (Anne Frank Family Members Name). पैनकोक ने वान डेन बर्घ को 'चेस प्लेयर' बताते हुए कहा कि उसने ऐसा अपने परिवार की रक्षा के लिए किया होगा. बर्घ की 1950 में मौत हो गई थी. एनी के पिता ऑटो फ्रैंक की 1980 में मौत हुई. उन्होंने भी मरने से पहले लगातार उस शख्स के बारे में पता लगाने की कोशिश की थी. जिसने उनके परिवार को धोखा दिया. ऐसी संभावना है कि उन्हें इस बारे में पता चल गया था, लेकिन उन्होंने सार्वजनिक तौर पर सामने आकर इसका खुलासा नहीं किया और चुप रहे. उनमें यहूदी विरोधी विचारों को लेकर डर उत्पन्न हो गया था. क्योंकि धोखा देने वाला भी खुद यहूदी ही था. इसलिए उन्होंने चुप रहना बेहतर समझा. जांच में सामने आई जानकारी को कनाडाई लेखक रोजमैरी सुलिवान की किताब में प्रकाशित किया गया है. सुलिवान ने भी वान डेन बर्घ को युद्ध का पीड़ित बताया और कहा कि वह खुद एक मुश्किल स्थिति में था. इसलिए इतिहास को उसे कठोरता के साथ जज नहीं करना चाहिए. हालांकि कुछ इतिहासकार इस खुलासे से खुश नहीं हैं. उनका कहना है कि पर्याप्त सबूतों के अभाव में ये मान लेना कि वान डेन बर्घ ही दोषी है, ये सही नहीं है.
Who Betrayed Anne Frank: दूसरे विश्व युद्ध के समय बाकी यहूदी लोगों की तरह एनी फ्रैंक भी अपने परिवार के साथ एक सीक्रेट एनेक्स में छिपी थी. इस दौरान उसने एक डायरी लिखी, जो सत्तर से अधिक भाषाओं में पब्लिश हुई. एनी फ्रैंक और उसके परिवार को किसने धोखा दिया था, इस बात का पता चल गया है. दुनिया का बच्चा-बच्चा एनी फ्रैंक के बारे में जानता है, वही एनी जिसके बारे में स्कूल की किताबों में एक चैप्टर जरूर होता है. इतिहासकारों के लगातार किए जा रहे प्रयासों के कारण सतहत्तर साल बाद पता चल गया है कि किसकी वजह से एनी और उसका परिवार गिरफ्तार हुआ था . जिसके बाद उन सबकी मौत हो गई. एनी ने एक डायरी लिखी थी, जो 'द डायरी ऑफ यंग गर्ल' के नाम से दुनियाभर में मशहूर है. वो एक यहूदी लड़की थी, जो बड़ी होकर पत्रकार बनना चाहती थी. ये कहानी दूसरे विश्व युद्ध के समय की है, जब नाजियों से अपनी जान बचाने के लिए यहूदी धर्म के लोग यूरोप के अलग-अलग हिस्सों में छिपे हुए थे. इनमें जो भी पकड़ा जाता, उसे नाजी सैनिक यातना शिविरों में भेजकर मौत के घाट उतार देते. एनी फ्रैंक का परिवार भी बाकी यहूदियों की तरह नीदरलैंड के एम्सटर्डम में स्थित एक घर में छिपा हुआ था. जिसे सीक्रेट एनेक्स के नाम से जाना जाता है . यहां एनी फ्रैंक, उसकी मां एडिथ फ्रैंक, पिता ऑटो फ्रैंक, बड़ी बहन मार्गो फ्रैंक के अलावा एक दूसरा परिवार भी था. जिन्हें एनी वान डान्स कहती थी. इनमें हर्मन वान पेल्स , उनकी पत्नी ऑगस्टे वान पेल्स और बेटा पीटर वान पेल्स था. साथ ही एक आठवां शख्स फ्रिट्स फेफर भी इनके साथ छिपा हुआ था. जो दंत चिकित्सक था. ये सभी लोग एक हज़ार नौ सौ बयालीस से लेकर एक हज़ार नौ सौ चौंतालीस तक यहां छिपे रहे. लेकिन किसी ने नाजियों को इनके यहां छिपे होने के बारे में बता दिया, जिसके बाद सभी को यातना शिविरों में भेज दिया गया. अब उस शख्स का पता चल गया है, जिसने इन्हें इतना बड़ा धोखा दिया था. अमेरिकी खुफिया एजेंसी यानी एफबीआई के पूर्व एजेंट के नेतृत्व में शोधकर्ताओं के एक ग्रुप ने इस रहस्य को आखिरकार सुलझा लिया है. इन्होंने पता लगाया है कि धोखा देने वाला शख्स 'अर्नोल्ड वान डेन बर्घ' नाम का यहूदी नोटरी था. जांच टीम को सीधे तौर पर इससे जुडे़ सबूत तो नहीं मिले हैं, लेकिन उनका मानना है कि वान डेन बर्घ को यहूदी काउंसिल में काम करते हुए उन पतों की सूची के बारे में पता चल गया होगा, जहां यहूदी लोग छिपे हुए थे. और हो सकता है कि उसने अपने परिवार को बचाने के लिए इस जानकारी का खुलासा किया हो. शोधकर्ताओं को एनी के पिता ऑटो फ्रैंक को भेजे गए एक गुमनाम नोट की टाइप की हुई कॉपी भी मिली है. जिसपर फ्रैंक परिवार को धोखा देने वाले वान डेन बर्घ का नाम लिखा है. फ्रैंक परिवार जहां छिपा हुआ था, उस बिल्डिंग में एक बुक केस था. जिसे हटाने पर अंदर जाने का गुप्त रास्ता था. चार अगस्त, एक हज़ार नौ सौ चौंतालीस को पुलिस ने छापेमारी में सबको गिरफ्तार कर लिया था. एनी को पहले ऑश्वित्ज भेजा गया और फिर बाद में बर्गन-बेल्सन कैंप, जहां एनी और उसकी बड़ी बहन मार्गो की एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस में मौत हो गई. यानी दूसरा विश्व युद्ध खत्म होने से कुछ महीने पहले. परिवार में अकेले ऑटो फ्रैंक ही जीवित बचे थे. जिन्हें सेवियत सेना ने ऑश्वित्ज से रिहा कराया था . एनी ने सीक्रेट एनेक्स में छिपे होने के दौरान एक डायरी लिखी थी, जिसे वो युद्ध खत्म होने के बाद पब्लिश कराना चाहती थी. उसका सपना एक लेखिका बनने का था. जब ऑटो फ्रैंक यातना शिविर से बाहर आए, तो उन्हें अपनी बेटी की डायरी मिली, जिसे उन्होंने पब्लिश कराया. ये डायरी सत्तर से अधिक भाषाओं में ट्रांसलेट हुई है. अमेरिका और यूरोप के लाखों लोगों की तरह ही भारत में स्कूली बच्चों ने भी एनी के बारे में पढ़ा है. अब बात करते हैं, उनकी जिन्होंने इस रहस्य से परदा उठाया है. विन्सेंट पैनकोक एफबीआई में इन्वेस्टिगेटर के तौर पर काम कर चुके हैं. जिन्होंने कोलंबियाई ड्रग कार्टेल का भंडाफोड़ करने और नौ/ग्यारह अपहर्ताओं की गतिविधियों का पता लगाने जैसे बडे़ काम किए हैं. वह सेवानिवृत होने के बाद फिलहाल अमेरिका के फ्लोरिडा में रह रहे हैं. उनकी वजह से ही फ्रैंक परिवार से जुड़ा ये केस सुलझ पाया है. दुनियाभर के बच्चों की तरह पैनकोक ने भी एनी की कहानी स्कूल में पढ़ी थी. वह साल दो हज़ार सोलह से ही नीदरलैंड में इस केस से जुडे़ सबूतों की तलाश कर रहे थे. इसके लिए उन्होंने लाखों दस्तावेजों की सटीकता से जानकारी लेने के लिए आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया. उन्होंने पुलिस रिपोर्ट, नाजी जासूसों की सूची, खुफिया फाइलें, उनसे जुड़े कनेक्शन और नई लीड खोजने के लिए दिन रात एक कर दिए. अमेरिका के सीबीएस चैनल को दिए इंटरव्यू में पैनकोक ने कहा कि वह एनी और यहूदी नरसंहार के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने की कोशिश में थे. उन्होंने कहा, 'मेरी टीम ने बैठकर उन तरीकों की एक सूची तैयार की जिनसे पता चल सके कि आखिर फ्रैंक परिवार को किसने धोखा दिया था. वान डेन बर्घ को सबसे संभावित अपराधी माना जा रहा है. हमने पहले बीस अलग-अलग सिनेरियो में तीस से अधिक संदिग्धों की पहचान की.' पैनकोक ने कहा कि यह परिस्थिति से जुड़ा मामला है लेकिन उन्हें लगता है कि जांच में जो पता चला है, वही सच है. उन्होंने ये भी कहा कि इस बात की संभावना कम है कि वान डेन बर्घ एनी के परिवार को व्यक्तिगत रूप से जानता था लेकिन उसने उनकी जानकारी नाजियों तक पहुंचाई थी. लेकिन बर्घ को ये नहीं पता था कि सीक्रेट एनेक्स में कौन सा परिवार छिपा हुआ है. उसे केवल एक यहूदी परिवार के छिपे होने की ही जानकारी थी . पैनकोक ने वान डेन बर्घ को 'चेस प्लेयर' बताते हुए कहा कि उसने ऐसा अपने परिवार की रक्षा के लिए किया होगा. बर्घ की एक हज़ार नौ सौ पचास में मौत हो गई थी. एनी के पिता ऑटो फ्रैंक की एक हज़ार नौ सौ अस्सी में मौत हुई. उन्होंने भी मरने से पहले लगातार उस शख्स के बारे में पता लगाने की कोशिश की थी. जिसने उनके परिवार को धोखा दिया. ऐसी संभावना है कि उन्हें इस बारे में पता चल गया था, लेकिन उन्होंने सार्वजनिक तौर पर सामने आकर इसका खुलासा नहीं किया और चुप रहे. उनमें यहूदी विरोधी विचारों को लेकर डर उत्पन्न हो गया था. क्योंकि धोखा देने वाला भी खुद यहूदी ही था. इसलिए उन्होंने चुप रहना बेहतर समझा. जांच में सामने आई जानकारी को कनाडाई लेखक रोजमैरी सुलिवान की किताब में प्रकाशित किया गया है. सुलिवान ने भी वान डेन बर्घ को युद्ध का पीड़ित बताया और कहा कि वह खुद एक मुश्किल स्थिति में था. इसलिए इतिहास को उसे कठोरता के साथ जज नहीं करना चाहिए. हालांकि कुछ इतिहासकार इस खुलासे से खुश नहीं हैं. उनका कहना है कि पर्याप्त सबूतों के अभाव में ये मान लेना कि वान डेन बर्घ ही दोषी है, ये सही नहीं है.
Agra News शहर में हैं 15 बड़े ब्रीडर और 100 से ज्यादा हैं पेट्स शॉप। बड़े ब्रीडर कैनल क्लब आफ इंडिया से कराते हैं पंजीकरण। कोरोना काल में कुत्तों की कीमतों में इजाफा होने के बाद एक दिन में ही करीब साढ़े सात लाख रुपये का व्यापार होता है। आगरा, प्रभजोत कौर। नगर निगम ने देसी कुत्तों को बढ़ावा देने के लिए विदेशी नस्ल के कुत्तों के अवैध कारोबार पर प्रतिबंध लगाने की बात कही है। अब विदेशी नस्ल के कुत्तों की बिक्री के लिए नगर निगम से लाइसेंस लेना होगा। इस प्रस्ताव के पारित होने के बाद आगरा में विदेशी कुत्तों की बिक्री का लगभग 25-30 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हो सकता है। आगरा में ब्रीडर से ज्यादा पेट्स शॉप्स हैं, जो विदेशी कुत्तों की बिक्री का काम करते हैं। आगरा में 100 से ज्यादा छोटी-बड़ी पेट्स शॉप्स हैं और 15 बड़े ब्रीडर हैं। एक दिन में शहर में लगभग 50 कुत्तों की बिक्री होती है। कोरोना काल में कुत्तों की कीमतों में इजाफा होने के बाद एक दिन में ही करीब साढ़े सात लाख रुपये का व्यापार होता है। इस तरह एक महीने में करीब सवा से डेढ़ करोड़ रुपये का कारोबार है। जानकारों की मानें तो एक साल में शहर में कुत्तों की बिक्री का 25-30 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। खंदारी में रहने वाले ब्रीडर पिंटू तोमर ने बताया कि बड़े ब्रीडर कैनल क्लब आफ इंडिया से पंजीकृत होते हैं। अपने कुत्तों का पंजीकरण भी वहीं से कराते हैं। अगर नगर निगम यह नियम बना रहा है तो इसकी शर्ते समझेंगे। अनिवार्यता होगी तो जरूर लाइसेंस लेंगे। सदर के एक ब्रीडर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि आगरा के ब्रीडर पूरी तरह से पेट शाप संचालकों पर निर्भर हैं। पेट शाप संचालक ही ब्रीडरों और ग्राहकों के बीच की कड़ी हैं। हमारे पास वे तब आते हैं, जब पंजाब और मेरठ से आने वाले पिल्ले किसी कारण से उनके पास नहीं आते हैं। अगर हम सीधा ग्राहकों से संपर्क करें तो वे हमारे पिल्लों की नेगेटिव मार्केटिंग करते हैं। घटिया आजम खां स्थित कृषि पेट शाप के संचालक विनय कुमार का कहना है कि हम सिर्फ पालतू जानवरों से संबंधित उत्पाद बेचते हैं। कुत्तों को बेचने का काम पशु चिकित्सक कर रहे हैं। दूसरी तरफ पशु चिकित्सक डा. संजीव नेहरू का कहना है कि जिसके पास विदेशी नस्ल की मादा श्वान है, वे ब्रीडर बन गया है। यह कहीं भी पंजीकृत नहीं होते हैं। बड़े ब्रीडर तो कैनल क्लब आफ इंडिया से पंजीकरण करा लेते हैं। नगर निगम ने पिछले दिनों नियम बनाया था कि हर पालतू कुत्ते के मालिक को उसका पंजीकरण निगम में कराना होगा। इसके लिए पड़ोसी की अनुमति भी लेनी होगी। पालने वाले को दस्तावेज जमा कराने होंगे और सत्यापन भी कराना होगा। कुत्ते का फोटो और उसकी ब्रीड के बारे में भी जानकारी देनी होगी।
Agra News शहर में हैं पंद्रह बड़े ब्रीडर और एक सौ से ज्यादा हैं पेट्स शॉप। बड़े ब्रीडर कैनल क्लब आफ इंडिया से कराते हैं पंजीकरण। कोरोना काल में कुत्तों की कीमतों में इजाफा होने के बाद एक दिन में ही करीब साढ़े सात लाख रुपये का व्यापार होता है। आगरा, प्रभजोत कौर। नगर निगम ने देसी कुत्तों को बढ़ावा देने के लिए विदेशी नस्ल के कुत्तों के अवैध कारोबार पर प्रतिबंध लगाने की बात कही है। अब विदेशी नस्ल के कुत्तों की बिक्री के लिए नगर निगम से लाइसेंस लेना होगा। इस प्रस्ताव के पारित होने के बाद आगरा में विदेशी कुत्तों की बिक्री का लगभग पच्चीस-तीस करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हो सकता है। आगरा में ब्रीडर से ज्यादा पेट्स शॉप्स हैं, जो विदेशी कुत्तों की बिक्री का काम करते हैं। आगरा में एक सौ से ज्यादा छोटी-बड़ी पेट्स शॉप्स हैं और पंद्रह बड़े ब्रीडर हैं। एक दिन में शहर में लगभग पचास कुत्तों की बिक्री होती है। कोरोना काल में कुत्तों की कीमतों में इजाफा होने के बाद एक दिन में ही करीब साढ़े सात लाख रुपये का व्यापार होता है। इस तरह एक महीने में करीब सवा से डेढ़ करोड़ रुपये का कारोबार है। जानकारों की मानें तो एक साल में शहर में कुत्तों की बिक्री का पच्चीस-तीस करोड़ रुपये का कारोबार होता है। खंदारी में रहने वाले ब्रीडर पिंटू तोमर ने बताया कि बड़े ब्रीडर कैनल क्लब आफ इंडिया से पंजीकृत होते हैं। अपने कुत्तों का पंजीकरण भी वहीं से कराते हैं। अगर नगर निगम यह नियम बना रहा है तो इसकी शर्ते समझेंगे। अनिवार्यता होगी तो जरूर लाइसेंस लेंगे। सदर के एक ब्रीडर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि आगरा के ब्रीडर पूरी तरह से पेट शाप संचालकों पर निर्भर हैं। पेट शाप संचालक ही ब्रीडरों और ग्राहकों के बीच की कड़ी हैं। हमारे पास वे तब आते हैं, जब पंजाब और मेरठ से आने वाले पिल्ले किसी कारण से उनके पास नहीं आते हैं। अगर हम सीधा ग्राहकों से संपर्क करें तो वे हमारे पिल्लों की नेगेटिव मार्केटिंग करते हैं। घटिया आजम खां स्थित कृषि पेट शाप के संचालक विनय कुमार का कहना है कि हम सिर्फ पालतू जानवरों से संबंधित उत्पाद बेचते हैं। कुत्तों को बेचने का काम पशु चिकित्सक कर रहे हैं। दूसरी तरफ पशु चिकित्सक डा. संजीव नेहरू का कहना है कि जिसके पास विदेशी नस्ल की मादा श्वान है, वे ब्रीडर बन गया है। यह कहीं भी पंजीकृत नहीं होते हैं। बड़े ब्रीडर तो कैनल क्लब आफ इंडिया से पंजीकरण करा लेते हैं। नगर निगम ने पिछले दिनों नियम बनाया था कि हर पालतू कुत्ते के मालिक को उसका पंजीकरण निगम में कराना होगा। इसके लिए पड़ोसी की अनुमति भी लेनी होगी। पालने वाले को दस्तावेज जमा कराने होंगे और सत्यापन भी कराना होगा। कुत्ते का फोटो और उसकी ब्रीड के बारे में भी जानकारी देनी होगी।
डूंगरपुर के धम्बोला थाना क्षेत्र के गड़ा पट्टापीठ रोड पर दिवाली के दूसरे दिन युवक का शव मिलने के मामले में परिजनों और ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर धरना-प्रदर्शन किया। लोगों ने युवक की हत्या के आरोपियों की गिरफ्तार की मांग की। भोई समाज के सुरेश कुमार भोई ने बताया कि दीपावली के दूसरे दिन 26 अक्टूबर को गड़ा पट्टापीठ निवासी निकुंज भोई (22) का शव गड़ा पट्टापीठ मार्ग पर पड़ा हुआ मिला। वहीं उसकी स्कूटी पास में गिरी हुई थी। मामले में परिजनों ने हत्या की आशंका जताई थी। पुलिस की जांच से असंतुष्ट मृतक के परिजन और ग्रामीण गडापट्टा पीठ गांव से गुरुवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे। परिजनों और ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट के बाहर धरना देते हुए नारेबाजी के साथ प्रदर्शन किया। लोगों ने निकुंज भोई की मौत के मामले में न्याय की मांग की। परिजनों ने बताया कि दीपावली के दिन निकुंज ने कुछ लोगों के साथ शराब पार्टी की थी। उसके बाद से वह घर नहीं लौटा और अगले दिन उसका शव गड़ा पट्टापीठ मार्ग पर पड़ा हुआ मिला। धरना-प्रदर्शन के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने डूंगरपुर एसडीएम को कलेक्टर के नाम का ज्ञापन सौंपा। और मामले का जल्द खुलासा करने की मांग की। This website follows the DNPA Code of Ethics.
डूंगरपुर के धम्बोला थाना क्षेत्र के गड़ा पट्टापीठ रोड पर दिवाली के दूसरे दिन युवक का शव मिलने के मामले में परिजनों और ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर धरना-प्रदर्शन किया। लोगों ने युवक की हत्या के आरोपियों की गिरफ्तार की मांग की। भोई समाज के सुरेश कुमार भोई ने बताया कि दीपावली के दूसरे दिन छब्बीस अक्टूबर को गड़ा पट्टापीठ निवासी निकुंज भोई का शव गड़ा पट्टापीठ मार्ग पर पड़ा हुआ मिला। वहीं उसकी स्कूटी पास में गिरी हुई थी। मामले में परिजनों ने हत्या की आशंका जताई थी। पुलिस की जांच से असंतुष्ट मृतक के परिजन और ग्रामीण गडापट्टा पीठ गांव से गुरुवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे। परिजनों और ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट के बाहर धरना देते हुए नारेबाजी के साथ प्रदर्शन किया। लोगों ने निकुंज भोई की मौत के मामले में न्याय की मांग की। परिजनों ने बताया कि दीपावली के दिन निकुंज ने कुछ लोगों के साथ शराब पार्टी की थी। उसके बाद से वह घर नहीं लौटा और अगले दिन उसका शव गड़ा पट्टापीठ मार्ग पर पड़ा हुआ मिला। धरना-प्रदर्शन के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने डूंगरपुर एसडीएम को कलेक्टर के नाम का ज्ञापन सौंपा। और मामले का जल्द खुलासा करने की मांग की। This website follows the DNPA Code of Ethics.
सीनियर भाजपा नेता सुखविंदर सिंह बिंद्रा पूर्व चेयरमैन युवा सेवाएं व खेल विभाग (पंजाब सरकार) ने माननीय श्री मनसुख लक्ष्मणभाई मंडाविया, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री और रसायन और उर्वरक मंत्री, भारत सरकार के साथ दिल्ली में एक महत्वपूर्ण मुलाकात की। माननीय मनसुख लक्ष्मणभाई मंडाविया भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं। वह भारत के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण और रसायन और उर्वरक मंत्री हैं। वह गुजरात से भारत के राज्यसभा सदस्य हैं। बिंद्रा ने कहा कि माननीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय मंत्री श्री मनसुख मंडाविया, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की देखरेख में देश भर में चकिस्ता सेवाओं के सफलतापूर्वक संचालन पर विस्तार चर्चा की। उन्होंने युवाओं की अच्छी सेहत व कल्याण के लिए कई महत्वपूर्ण बातें उनसे साझा कीं। उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से मांग की कि लुधियाना शहर के लाखों लोगों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने के लिए नया एम्स अस्पताल बनाया जाए। बिंद्रा ने कहा कि 2024 में भाजपा को पंजाब में लाने और लुधियाना शहर के निवासियों को अच्छी सेहत सेवाएं उपलब्ध करवाई जाएगी। नोजवानों की सभी समस्याओं को दूर करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने ने देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्री ग्रह मंत्री अमित शाह और केन्द्री मंत्री गजेन्द्र शिखावत का धन्यवाद किया।
सीनियर भाजपा नेता सुखविंदर सिंह बिंद्रा पूर्व चेयरमैन युवा सेवाएं व खेल विभाग ने माननीय श्री मनसुख लक्ष्मणभाई मंडाविया, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री और रसायन और उर्वरक मंत्री, भारत सरकार के साथ दिल्ली में एक महत्वपूर्ण मुलाकात की। माननीय मनसुख लक्ष्मणभाई मंडाविया भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं। वह भारत के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण और रसायन और उर्वरक मंत्री हैं। वह गुजरात से भारत के राज्यसभा सदस्य हैं। बिंद्रा ने कहा कि माननीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय मंत्री श्री मनसुख मंडाविया, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की देखरेख में देश भर में चकिस्ता सेवाओं के सफलतापूर्वक संचालन पर विस्तार चर्चा की। उन्होंने युवाओं की अच्छी सेहत व कल्याण के लिए कई महत्वपूर्ण बातें उनसे साझा कीं। उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से मांग की कि लुधियाना शहर के लाखों लोगों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने के लिए नया एम्स अस्पताल बनाया जाए। बिंद्रा ने कहा कि दो हज़ार चौबीस में भाजपा को पंजाब में लाने और लुधियाना शहर के निवासियों को अच्छी सेहत सेवाएं उपलब्ध करवाई जाएगी। नोजवानों की सभी समस्याओं को दूर करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने ने देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्री ग्रह मंत्री अमित शाह और केन्द्री मंत्री गजेन्द्र शिखावत का धन्यवाद किया।
Sunday April 12, 2020, कहते हैं कि उद्यमी बनने के लिए अपने अंदर की आवाज को खोजने का कोई निर्धारित समय नहीं है और स्माइल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के डायरेक्टर मुकेश गुप्ता इस फेमस कहावत के बिल्कुल सही उदाहरण हैं। प्राइवेट फानेंसियल मार्केट में 25 साल के अनुभव के साथ एलएलबी स्नातक 63 वर्षीय मुकेश ने इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री में एक व्यावसायिक अवसर पाया। इस सबके अलावा वे कैटेगरी 1 मर्चेंट बैंकिंग एंटरप्राइज भी चला रहे हैं। YourStory के साथ बातचीत में, दूसरी पीढ़ी की उद्यमी व मुकेश गुप्ता की बेटी सीओओ अशिता गुप्ता जिन्होंने 2012 में कंपनी को ज्वाइन किया था, वे कहती हैं, "मेरे पिता जब फाइनेंसर थे तब उनके पास क्लाइंट के रूप में बड़े कॉर्पोरेट थे। उन्हें इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री की काफी अच्छी समझ थी। अपनी कम समझ के साथ, उन्होंने अपने जान पहचान वालों से मार्गदर्शन लेते हुए उद्योग में कदम रखने का फैसला किया।" मुकेश गुप्ता ने 2000 में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (ईएमएस) कंपनी के रूप में डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, फुलफिलमेंट, कंपलीट फॉरवर्ड और रिवर्स लॉजिस्टिक्स सर्विसेस व दुनिया के प्रौद्योगिकी दिग्गजों के लिए समग्र प्रोडक्ट लाइफ साइकिल मैनेजमेंट सर्विसेस देने के लिए स्माइल इलेक्ट्रॉनिक्स की शुरुआत की। स्माइल इलेक्ट्रॉनिक्स ने ग्रो किया और इसने एयरफोर्स और नेवी के लिए हाई-टेक, अत्यधिक जटिल प्रिंटेड सर्किट बोर्ड को शामिल किया। टेलीकम्युनिकेशन और मेडिकल डिवाइसेस के सेक्टर में एक गैप देखने के बाद मुकेश ने इस सेगमेंट में भी कदम रखने का सोचा। हालांकि, 2012 में, भारत में 2जी टेलीकॉम घोटाले के बाद से टेलीकॉम इन्फ्रास्ट्रक्चर उद्योग नाटकीय रूप से धीमा हो गया, इसलिए स्माइल इलेक्ट्रॉनिक्स ने खुद में विविधता लाने का फैसला किया और अन्य वर्टिकल्स में बड़े वैश्विक व्यवसायों को टारगेट किया। इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर में अपग्रेड, बिजनेस पर ध्यान केंद्रित करने और संस्कृति में बदलाव की आवश्यकता थी, जो 2015 से इसकी ग्रोथ का कारण रहा। स्माइल इलेक्ट्रॉनिक्स की मैसूरु में मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी है और सिंगापुर और फ्रेमोंट (यूएसए) में इसके प्रोक्योरमेंट ऑफिस हैं। कंपनी सालाना 200 करोड़ रुपये का कारोबार करती है। 20 वर्षों की अवधि में, स्माइल इलेक्ट्रॉनिक्स ने टर्नकी बेसिस पर इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के विनिर्माण में विविधता ला दी है, जिसमें कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, टेलीकम्युनिकेश, ऑटोमोटिव (मोटर वाहन), डिफेंस और एयरोस्पेस प्रोडक्ट्स के एप्लीकेशन्स शामिल हैं। कंपनी के प्रोडक्ट पोर्टफोलियो और कस्टमर बेस में वॉशिंग मशीन (प्रिटेंड बोर्ड असेंबली) पीबीए, रेफ्रिजरेशन पीबीए, एयरबोर्न टेलीमेट्री पीबीए, बायोमेट्रिक डिवाइस पीबीए, रेडियो फ्रीक्वेंसी पीबीए, पॉवर सप्लाई बिल्ड्स, एनर्जी मीटर पीबीए, वियरेबल इलेक्ट्रॉनिक्स, फ्लाइट कंट्रोल पैनल, टैबलेट, और फोन मॉड्यूल शामिल हैं। ये प्रोडक्ट्स मुख्य रूप से कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिसिटी, इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी और टेलीकम्युनिकेशन सेगमेंट में आवेदन प्राप्त करते हैं, जो वित्त वर्ष 2019 में कंपनी के राजस्व में 89 प्रतिशत के करीब योगदान करते हैं। स्माइल इलेक्ट्रॉनिक्स प्रमुख रूप से घरेलू बाजार को पूरा करती है, जो 2019 में कुल राजस्व का लगभग 90.80 प्रतिशत है। कंपनी के निर्यात बाजार में अमेरिका, चीन, दक्षिण कोरिया और जापान शामिल हैं। स्माइल इलेक्ट्रॉनिक्स के मजबूत ग्राहक आधार में लार्सन एंड टुब्रो, सैमसंग, बॉश, हनीवेल, टीवीएस, एचपी, अल्ट्रान, वोल्वो, वेस्टर्न डिजिटल, और कई शामिल हैं। स्माइल इलेक्ट्रॉनिक्स उन कुछ कंपनियों में से एक है, जिन्होंने इसरो के मंगलयान प्रोजेक्ट में भी योगदान दिया है। कंपनी एसडी एसोसिएशन के बोर्ड में भी है। एसडी एसोसिएशन एक अमेरिकी गैर-लाभकारी संगठन है जो उपयोग को आसान बनाने और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स के परफॉर्मेंस को ऑप्टिमाइज करने के लिए मेमोरी कार्ड स्टैंडर्ड्स को सेट करता है जिसे दुनिया भर में लोग उपयोग करते हैं। बिजनेस में बिताए इन लंबे वर्षों में, कंपनी को ISO 14001: 2015, AS9100D और ISO 9001: 2015, ISO 14001: 2004, IATF 16949: 2016 और ISO 9001: 2005 NQA से एक्रीडेशन मिले हैं। NQA क्वालिटी मैनेजमेंट सिस्टम, मैन्युफैक्चरिंग, असेंबली और एयरोस्पेस व ऑटोमोटिव एप्लीकेशन्स के लिए प्रिंटेड सर्किट बोर्ड असेंबलीज के टेस्ट और इंटीग्रेशन के लिए एक ब्रिटिश एक्रीडेशन कंपनी है। आशिता कहती हैं कि कंपनी अभी भी निवेश के साथ समस्याओं का सामना करती है। अन्य चुनौतियों में सही और कुशल कार्यबल और बढ़ती लागतों का पता लगाना है। कोरोनावायरस के प्रकोप के साथ, भारतीय विनिर्माण क्षेत्र ने एक नई गिरावट देखी है। कई उद्यमियों के अनुसार, चीन से आयात की निर्भरता कम करने के लिए मेक-इन-इंडिया पहल को आगे आने का ये सबसे सही समय है। इस चिंता पर प्रकाश डालते हुए, अशिता का कहना है कि नीति स्तर पर, सरकार कंपोनेंट सप्लाई चैन को बढ़ाने और एक फुल सर्विस ईकोसिस्टम का संश्लेषण करने की दिशा में कार्यक्रम शुरू कर रही है। भारतीय हार्डवेयर उद्योग को और अधिक सेल्फ सफिशिएंट (आत्म निर्भर), सेल्फ रेलियंट (खुद पर भरोसा करने वाला), स्केल्ड और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने वाले हस्तक्षेपों और कार्यों को लगातार प्रोत्साहित करने की सख्त जरूरत है। स्माइल इलेक्ट्रॉनिक्स अपनी विनिर्माण क्षमताओं का विस्तार करने और एक नई अत्याधुनिक सुविधा का निर्माण करके अपने डिजिटल फुटप्रिंट को बढ़ाने की योजना बना रही है, जिसमें 25 विनिर्माण लाइनें होंगी। ये सभी प्रोजेक्ट्स ऑटोमेशन और कस्टमर स्पेसिफिकेशन द्वारा संचालित होंगी और अपने ग्राहकों को सर्वोत्तम संभव समाधान प्रदान करने में मदद करने के लिए होंगी। कंपनी का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में 500 करोड़ रुपये के राजस्व को हासिल करना है, जिससे घरेलू कर्मचारियों के लिए 1,000 से अधिक नौकरियां पैदा होंगी। आशिता का कहना है कि कंपनी रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आरएंडडी) सुविधाओं में एक मजबूत वृद्धि देख रही है जो जल्द ही कई वैश्विक ब्रांडों के लिए पूर्ण ऑरिजिनल डिजाइन मैन्युफैक्चरर (ODM) सपोर्ट शुरू करेगी।
Sunday April बारह, दो हज़ार बीस, कहते हैं कि उद्यमी बनने के लिए अपने अंदर की आवाज को खोजने का कोई निर्धारित समय नहीं है और स्माइल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के डायरेक्टर मुकेश गुप्ता इस फेमस कहावत के बिल्कुल सही उदाहरण हैं। प्राइवेट फानेंसियल मार्केट में पच्चीस साल के अनुभव के साथ एलएलबी स्नातक तिरेसठ वर्षीय मुकेश ने इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री में एक व्यावसायिक अवसर पाया। इस सबके अलावा वे कैटेगरी एक मर्चेंट बैंकिंग एंटरप्राइज भी चला रहे हैं। YourStory के साथ बातचीत में, दूसरी पीढ़ी की उद्यमी व मुकेश गुप्ता की बेटी सीओओ अशिता गुप्ता जिन्होंने दो हज़ार बारह में कंपनी को ज्वाइन किया था, वे कहती हैं, "मेरे पिता जब फाइनेंसर थे तब उनके पास क्लाइंट के रूप में बड़े कॉर्पोरेट थे। उन्हें इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री की काफी अच्छी समझ थी। अपनी कम समझ के साथ, उन्होंने अपने जान पहचान वालों से मार्गदर्शन लेते हुए उद्योग में कदम रखने का फैसला किया।" मुकेश गुप्ता ने दो हज़ार में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज कंपनी के रूप में डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, फुलफिलमेंट, कंपलीट फॉरवर्ड और रिवर्स लॉजिस्टिक्स सर्विसेस व दुनिया के प्रौद्योगिकी दिग्गजों के लिए समग्र प्रोडक्ट लाइफ साइकिल मैनेजमेंट सर्विसेस देने के लिए स्माइल इलेक्ट्रॉनिक्स की शुरुआत की। स्माइल इलेक्ट्रॉनिक्स ने ग्रो किया और इसने एयरफोर्स और नेवी के लिए हाई-टेक, अत्यधिक जटिल प्रिंटेड सर्किट बोर्ड को शामिल किया। टेलीकम्युनिकेशन और मेडिकल डिवाइसेस के सेक्टर में एक गैप देखने के बाद मुकेश ने इस सेगमेंट में भी कदम रखने का सोचा। हालांकि, दो हज़ार बारह में, भारत में दोजी टेलीकॉम घोटाले के बाद से टेलीकॉम इन्फ्रास्ट्रक्चर उद्योग नाटकीय रूप से धीमा हो गया, इसलिए स्माइल इलेक्ट्रॉनिक्स ने खुद में विविधता लाने का फैसला किया और अन्य वर्टिकल्स में बड़े वैश्विक व्यवसायों को टारगेट किया। इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर में अपग्रेड, बिजनेस पर ध्यान केंद्रित करने और संस्कृति में बदलाव की आवश्यकता थी, जो दो हज़ार पंद्रह से इसकी ग्रोथ का कारण रहा। स्माइल इलेक्ट्रॉनिक्स की मैसूरु में मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी है और सिंगापुर और फ्रेमोंट में इसके प्रोक्योरमेंट ऑफिस हैं। कंपनी सालाना दो सौ करोड़ रुपये का कारोबार करती है। बीस वर्षों की अवधि में, स्माइल इलेक्ट्रॉनिक्स ने टर्नकी बेसिस पर इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के विनिर्माण में विविधता ला दी है, जिसमें कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, टेलीकम्युनिकेश, ऑटोमोटिव , डिफेंस और एयरोस्पेस प्रोडक्ट्स के एप्लीकेशन्स शामिल हैं। कंपनी के प्रोडक्ट पोर्टफोलियो और कस्टमर बेस में वॉशिंग मशीन पीबीए, रेफ्रिजरेशन पीबीए, एयरबोर्न टेलीमेट्री पीबीए, बायोमेट्रिक डिवाइस पीबीए, रेडियो फ्रीक्वेंसी पीबीए, पॉवर सप्लाई बिल्ड्स, एनर्जी मीटर पीबीए, वियरेबल इलेक्ट्रॉनिक्स, फ्लाइट कंट्रोल पैनल, टैबलेट, और फोन मॉड्यूल शामिल हैं। ये प्रोडक्ट्स मुख्य रूप से कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिसिटी, इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी और टेलीकम्युनिकेशन सेगमेंट में आवेदन प्राप्त करते हैं, जो वित्त वर्ष दो हज़ार उन्नीस में कंपनी के राजस्व में नवासी प्रतिशत के करीब योगदान करते हैं। स्माइल इलेक्ट्रॉनिक्स प्रमुख रूप से घरेलू बाजार को पूरा करती है, जो दो हज़ार उन्नीस में कुल राजस्व का लगभग नब्बे.अस्सी प्रतिशत है। कंपनी के निर्यात बाजार में अमेरिका, चीन, दक्षिण कोरिया और जापान शामिल हैं। स्माइल इलेक्ट्रॉनिक्स के मजबूत ग्राहक आधार में लार्सन एंड टुब्रो, सैमसंग, बॉश, हनीवेल, टीवीएस, एचपी, अल्ट्रान, वोल्वो, वेस्टर्न डिजिटल, और कई शामिल हैं। स्माइल इलेक्ट्रॉनिक्स उन कुछ कंपनियों में से एक है, जिन्होंने इसरो के मंगलयान प्रोजेक्ट में भी योगदान दिया है। कंपनी एसडी एसोसिएशन के बोर्ड में भी है। एसडी एसोसिएशन एक अमेरिकी गैर-लाभकारी संगठन है जो उपयोग को आसान बनाने और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स के परफॉर्मेंस को ऑप्टिमाइज करने के लिए मेमोरी कार्ड स्टैंडर्ड्स को सेट करता है जिसे दुनिया भर में लोग उपयोग करते हैं। बिजनेस में बिताए इन लंबे वर्षों में, कंपनी को ISO चौदह हज़ार एक: दो हज़ार पंद्रह, ASनौ हज़ार एक सौD और ISO नौ हज़ार एक: दो हज़ार पंद्रह, ISO चौदह हज़ार एक: दो हज़ार चार, IATF सोलह हज़ार नौ सौ उनचास: दो हज़ार सोलह और ISO नौ हज़ार एक: दो हज़ार पाँच NQA से एक्रीडेशन मिले हैं। NQA क्वालिटी मैनेजमेंट सिस्टम, मैन्युफैक्चरिंग, असेंबली और एयरोस्पेस व ऑटोमोटिव एप्लीकेशन्स के लिए प्रिंटेड सर्किट बोर्ड असेंबलीज के टेस्ट और इंटीग्रेशन के लिए एक ब्रिटिश एक्रीडेशन कंपनी है। आशिता कहती हैं कि कंपनी अभी भी निवेश के साथ समस्याओं का सामना करती है। अन्य चुनौतियों में सही और कुशल कार्यबल और बढ़ती लागतों का पता लगाना है। कोरोनावायरस के प्रकोप के साथ, भारतीय विनिर्माण क्षेत्र ने एक नई गिरावट देखी है। कई उद्यमियों के अनुसार, चीन से आयात की निर्भरता कम करने के लिए मेक-इन-इंडिया पहल को आगे आने का ये सबसे सही समय है। इस चिंता पर प्रकाश डालते हुए, अशिता का कहना है कि नीति स्तर पर, सरकार कंपोनेंट सप्लाई चैन को बढ़ाने और एक फुल सर्विस ईकोसिस्टम का संश्लेषण करने की दिशा में कार्यक्रम शुरू कर रही है। भारतीय हार्डवेयर उद्योग को और अधिक सेल्फ सफिशिएंट , सेल्फ रेलियंट , स्केल्ड और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने वाले हस्तक्षेपों और कार्यों को लगातार प्रोत्साहित करने की सख्त जरूरत है। स्माइल इलेक्ट्रॉनिक्स अपनी विनिर्माण क्षमताओं का विस्तार करने और एक नई अत्याधुनिक सुविधा का निर्माण करके अपने डिजिटल फुटप्रिंट को बढ़ाने की योजना बना रही है, जिसमें पच्चीस विनिर्माण लाइनें होंगी। ये सभी प्रोजेक्ट्स ऑटोमेशन और कस्टमर स्पेसिफिकेशन द्वारा संचालित होंगी और अपने ग्राहकों को सर्वोत्तम संभव समाधान प्रदान करने में मदद करने के लिए होंगी। कंपनी का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में पाँच सौ करोड़ रुपये के राजस्व को हासिल करना है, जिससे घरेलू कर्मचारियों के लिए एक,शून्य से अधिक नौकरियां पैदा होंगी। आशिता का कहना है कि कंपनी रिसर्च एंड डेवलपमेंट सुविधाओं में एक मजबूत वृद्धि देख रही है जो जल्द ही कई वैश्विक ब्रांडों के लिए पूर्ण ऑरिजिनल डिजाइन मैन्युफैक्चरर सपोर्ट शुरू करेगी।
शुक्रवार को होने वाला एक दिवसीय विधानसभा सत्र हंगामेदार होने की संभावना जताई जा रही है। नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने साफ कहा कि भले ही कुछ भी हो वे जनहित की बात को पुरजोर तरीके से विधानसभा में उठाएंगे। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार लोगों से जुड़े मुद्दे पर चर्चा से भाग रही है। जबकि प्रदूषण, भाजपा ने जल बोर्ड का 14 करोड़ रुपये जमा न होने का आरोप लगाया है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता और नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने इस मामले में प्रेस वार्ता कर कहा कि जुलाई 2012 में दिल्ली जल बोर्ड और तत्कालीन कारपोरेशन बैंक (अब यूनियन बैंक) के बीच बिल को जमा करने के लिए एक करार किया गया।
शुक्रवार को होने वाला एक दिवसीय विधानसभा सत्र हंगामेदार होने की संभावना जताई जा रही है। नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने साफ कहा कि भले ही कुछ भी हो वे जनहित की बात को पुरजोर तरीके से विधानसभा में उठाएंगे। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार लोगों से जुड़े मुद्दे पर चर्चा से भाग रही है। जबकि प्रदूषण, भाजपा ने जल बोर्ड का चौदह करोड़ रुपये जमा न होने का आरोप लगाया है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता और नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने इस मामले में प्रेस वार्ता कर कहा कि जुलाई दो हज़ार बारह में दिल्ली जल बोर्ड और तत्कालीन कारपोरेशन बैंक के बीच बिल को जमा करने के लिए एक करार किया गया।
इस राशि से शुक्र सुख भाव में गोचर कर रहा है जहां इसका मिलन बृहस्पति से भी हो रहा है। इस गोचर का सबसे ज्यादा आपकी राशि पर प्रभाव पड़ेगा। लाभ प्राप्ति के योग बन रहे हैं। यदि कर्क राशि का कोई जातक फैशन या फैबरिक से जुड़ा कोई व्यवसाय शुरु करना चाहता है तो ये समय अनुकूल रहेगा। नया घर या गाड़ी लेने का सपना भी सच कर सकते हैं। ये समय आपको एक शाही जीवन का आनंद देगा।
इस राशि से शुक्र सुख भाव में गोचर कर रहा है जहां इसका मिलन बृहस्पति से भी हो रहा है। इस गोचर का सबसे ज्यादा आपकी राशि पर प्रभाव पड़ेगा। लाभ प्राप्ति के योग बन रहे हैं। यदि कर्क राशि का कोई जातक फैशन या फैबरिक से जुड़ा कोई व्यवसाय शुरु करना चाहता है तो ये समय अनुकूल रहेगा। नया घर या गाड़ी लेने का सपना भी सच कर सकते हैं। ये समय आपको एक शाही जीवन का आनंद देगा।
सपा सदस्यों के सदन से बहिर्गमन के बीच विधान परिषद में कार्यसूची के अनुसार सारे विधायी कार्य निपटाए गए। बाद में सभापति ने सदन की कार्यवाही मंगलवार कि सुबह 11:00 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। सपा सदस्यों के सदन से बहिर्गमन के बीच विधान परिषद में कार्यसूची के अनुसार सारे विधायी कार्य निपटाए गए। बाद में सभापति ने सदन की कार्यवाही मंगलवार कि सुबह 11:00 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। दोनों सदनों के संयुक्त बैठक में राज्यपाल के अभिभाषण के बाद दोपहर 12:30 बजे विधान परिषद की कार्यवाही शुरू हुई। कार्यवाही शुरू होते ही सपा के नरेश उत्तम ने 22 फरवरी को बजट भाषण से पूर्व प्रश्न प्रहर चलाए जाने की मांग की जिसके जवाब में सभापति कुंवर मानवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि कार्यमंत्रणा समिति में इस मुद्दे पर सहमति बन चुकी है। लिहाजा अब इस पर कोई बात नहीं होगी। इसके बाद सभापति ने आगामी 10 मार्च तक के लिए जारी एजेंडा पढ़ना शुरू किया। इस दौरान सपा सदस्य की ओर से लगातार टोका टाकी की गई और कहा गया कि बजट के दिन 22 फरवरी को प्रश्न प्रहर स्थगित ना किया जाए। इस पर सभापति ने फिर कहा की कार्य मंत्रणा समिति में सारी बातें तय हो चुकी है संबंधित तिथि के सभी प्रश्नों के उत्तरित मान लिया जाएगा। इसके तत्काल बाद सभापति ने राज्यपाल का अभिभाषण पढ़ना शुरू कर दिया। इसी दौरान सपा के सदस्यों ने नारेबाजी करते हुए सदन से बहिर्गमन कर दिया। सभापति ने राज्यपाल की अभिभाषण पुस्तिका के पहले और अंतिम पृष्ठ पढ़कर कहा कि इसे पूरा पढ़ा माना जाए। इसके बाद नेता सदन केशव प्रसाद मौर्य और उनके पश्चात प्रमुख सचिव विधान परिषद डॉ राजेश सिंह की ओर से अलग-अलग बृजेश पटल पर रखा गया। करीब 23 मिनट की कार्यवाही के बाद सदन की कार्यवाही मंगलवार सुबह 11:00 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
सपा सदस्यों के सदन से बहिर्गमन के बीच विधान परिषद में कार्यसूची के अनुसार सारे विधायी कार्य निपटाए गए। बाद में सभापति ने सदन की कार्यवाही मंगलवार कि सुबह ग्यारह:शून्य बजे तक के लिए स्थगित कर दी। सपा सदस्यों के सदन से बहिर्गमन के बीच विधान परिषद में कार्यसूची के अनुसार सारे विधायी कार्य निपटाए गए। बाद में सभापति ने सदन की कार्यवाही मंगलवार कि सुबह ग्यारह:शून्य बजे तक के लिए स्थगित कर दी। दोनों सदनों के संयुक्त बैठक में राज्यपाल के अभिभाषण के बाद दोपहर बारह:तीस बजे विधान परिषद की कार्यवाही शुरू हुई। कार्यवाही शुरू होते ही सपा के नरेश उत्तम ने बाईस फरवरी को बजट भाषण से पूर्व प्रश्न प्रहर चलाए जाने की मांग की जिसके जवाब में सभापति कुंवर मानवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि कार्यमंत्रणा समिति में इस मुद्दे पर सहमति बन चुकी है। लिहाजा अब इस पर कोई बात नहीं होगी। इसके बाद सभापति ने आगामी दस मार्च तक के लिए जारी एजेंडा पढ़ना शुरू किया। इस दौरान सपा सदस्य की ओर से लगातार टोका टाकी की गई और कहा गया कि बजट के दिन बाईस फरवरी को प्रश्न प्रहर स्थगित ना किया जाए। इस पर सभापति ने फिर कहा की कार्य मंत्रणा समिति में सारी बातें तय हो चुकी है संबंधित तिथि के सभी प्रश्नों के उत्तरित मान लिया जाएगा। इसके तत्काल बाद सभापति ने राज्यपाल का अभिभाषण पढ़ना शुरू कर दिया। इसी दौरान सपा के सदस्यों ने नारेबाजी करते हुए सदन से बहिर्गमन कर दिया। सभापति ने राज्यपाल की अभिभाषण पुस्तिका के पहले और अंतिम पृष्ठ पढ़कर कहा कि इसे पूरा पढ़ा माना जाए। इसके बाद नेता सदन केशव प्रसाद मौर्य और उनके पश्चात प्रमुख सचिव विधान परिषद डॉ राजेश सिंह की ओर से अलग-अलग बृजेश पटल पर रखा गया। करीब तेईस मिनट की कार्यवाही के बाद सदन की कार्यवाही मंगलवार सुबह ग्यारह:शून्य बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
चर्चा में क्यों? हाल ही में भारत सरकार ने कॉर्पोरेट इंडिया को सार्वजनिक रूप से वित्तपोषित इनक्यूबेटरों में निवेश के लिये अपने अनिवार्य कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी (Corporate Social Responsibility-CSR) फंड्स के उपयोग हेतु अनुमति देने का फैसला किया है। प्रमुख बिंदु : - भारत में अनुसंधान और विकास (Research and development- R&D) गतिविधियों पर सार्वजनिक व्यय जीडीपी के 1% के हिस्से से भी कम रहा है। उल्लेखनीय है कि इसमें निजी क्षेत्र का योगदान आधे से कम रहा है। - वित्त मंत्रालय के अनुसार, CSR के मानदंडों को नियंत्रित करने वाले नियमों में संशोधन किया गया है जिससे अनुसंधान और विकास गतिविधियों में अधिक निवेश का मार्ग प्रशस्त किया जा सके। ध्यातव्य है कि अभी तक भारत का प्रदर्शन इस संदर्भ में वैश्विक स्तर पर काफी ख़राब रहा है । - अब यह CSR फंड केंद्र या राज्य सरकारों द्वारा वित्तपोषित अथवा केंद्र या राज्य के किसी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम की किसी भी एजेंसी द्वारा वित्तपोषित इनक्यूबेटरों पर खर्च किया जा सकेगा। - इसके अलावा अब CSR फंड को सार्वजनिक वित्तपोषित विश्वविद्यालयों, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (Defence Research and Development Organisation- DRDO), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना तकनीकी मंत्रालय के अंतर्गत विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग व चिकित्सा के क्षेत्र में अनुसंधान हेतु खर्च किया जाएगा। - कंपनियांँ निर्दिष्ट संस्थानों में R&D गतिविधियों हेतु निवेश करके इसकी गणना अपने CSR के तहत कर सकती हैं। उल्लेखनीय है कि कंपनी अधिनियम के वर्तमान प्रावधानों के अनुसार, शैक्षणिक संस्थानों में सरकार द्वारा अनुमोदित प्रौद्योगिकी इन्क्यूबेटरों में योगदान ही CSR के रूप में मान्य है। इस कदम के निहितार्थ : - CSR के माध्यम से अनुसंधान के क्षेत्र में निवेश का यह विस्तार स्टार्टअप एवं स्किल इंडिया जैसी भारत सरकार की विभिन्न फ्लैगशिप योजनाओं के लिये दीर्घकालिक रूप से लाभप्रद साबित हो सकेगा। - सरकार की नई पहल से CSR गतिविधियों के दायरे का विस्तार होगा और अब कंपनियांँ विज्ञान, प्रौद्योगिकी और चिकित्सा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान के लिये भी अधिकाधिक योगदान कर सकती हैं। - सरकार का यह कदम वैश्विक प्रतिस्पर्द्धा में भारतीय उद्योगों की स्थिति में सुधार करेगा, साथ ही इनक्यूबेटरों पर खर्च करने की अनुमति से भारत का तकनीक पारितंत्र को सुदृढ़ होगा। - यह देश भर में कई सक्षम अन्वेषकों एवं इंजीनियरों के उत्थान और उनके कौशल संवर्द्धन में मदद करेगा। - स्टार्टअप इंडिया कार्यक्रम के बाद भारत सरकार की मौजूदा नीति द्वारा इन्क्यूबेटरों को और अधिक प्रोत्साहित किया जा सकेगा। - इसके अतिरिक्त सरकार के इस कदम से CSR में होने वाली धोखाधड़ी को भी रोका जा सकेगा। सरकार का उपरोक्त कदम न केवल CSR फंड्स का बेहतर प्रयोग एवं उद्योगों की नैतिक ज़िम्मेदारियों को विस्तृत करने, बल्कि घरेलू एवं वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति को भी मज़बूती प्रदान करने की दृष्टि से सार्थक प्रतीत हो रहा है। इस प्रकार के कदम व्यापक निहितार्थों को पूरा करने के लिये ज़रूरी है कि क्रियान्वयन में पारदर्शिता के साथ-साथ इसके व्यावहारिक उपयोगिता को सुनिश्चित करने पर बल दिया जाए।
चर्चा में क्यों? हाल ही में भारत सरकार ने कॉर्पोरेट इंडिया को सार्वजनिक रूप से वित्तपोषित इनक्यूबेटरों में निवेश के लिये अपने अनिवार्य कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी फंड्स के उपयोग हेतु अनुमति देने का फैसला किया है। प्रमुख बिंदु : - भारत में अनुसंधान और विकास गतिविधियों पर सार्वजनिक व्यय जीडीपी के एक% के हिस्से से भी कम रहा है। उल्लेखनीय है कि इसमें निजी क्षेत्र का योगदान आधे से कम रहा है। - वित्त मंत्रालय के अनुसार, CSR के मानदंडों को नियंत्रित करने वाले नियमों में संशोधन किया गया है जिससे अनुसंधान और विकास गतिविधियों में अधिक निवेश का मार्ग प्रशस्त किया जा सके। ध्यातव्य है कि अभी तक भारत का प्रदर्शन इस संदर्भ में वैश्विक स्तर पर काफी ख़राब रहा है । - अब यह CSR फंड केंद्र या राज्य सरकारों द्वारा वित्तपोषित अथवा केंद्र या राज्य के किसी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम की किसी भी एजेंसी द्वारा वित्तपोषित इनक्यूबेटरों पर खर्च किया जा सकेगा। - इसके अलावा अब CSR फंड को सार्वजनिक वित्तपोषित विश्वविद्यालयों, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन , विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना तकनीकी मंत्रालय के अंतर्गत विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग व चिकित्सा के क्षेत्र में अनुसंधान हेतु खर्च किया जाएगा। - कंपनियांँ निर्दिष्ट संस्थानों में R&D गतिविधियों हेतु निवेश करके इसकी गणना अपने CSR के तहत कर सकती हैं। उल्लेखनीय है कि कंपनी अधिनियम के वर्तमान प्रावधानों के अनुसार, शैक्षणिक संस्थानों में सरकार द्वारा अनुमोदित प्रौद्योगिकी इन्क्यूबेटरों में योगदान ही CSR के रूप में मान्य है। इस कदम के निहितार्थ : - CSR के माध्यम से अनुसंधान के क्षेत्र में निवेश का यह विस्तार स्टार्टअप एवं स्किल इंडिया जैसी भारत सरकार की विभिन्न फ्लैगशिप योजनाओं के लिये दीर्घकालिक रूप से लाभप्रद साबित हो सकेगा। - सरकार की नई पहल से CSR गतिविधियों के दायरे का विस्तार होगा और अब कंपनियांँ विज्ञान, प्रौद्योगिकी और चिकित्सा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान के लिये भी अधिकाधिक योगदान कर सकती हैं। - सरकार का यह कदम वैश्विक प्रतिस्पर्द्धा में भारतीय उद्योगों की स्थिति में सुधार करेगा, साथ ही इनक्यूबेटरों पर खर्च करने की अनुमति से भारत का तकनीक पारितंत्र को सुदृढ़ होगा। - यह देश भर में कई सक्षम अन्वेषकों एवं इंजीनियरों के उत्थान और उनके कौशल संवर्द्धन में मदद करेगा। - स्टार्टअप इंडिया कार्यक्रम के बाद भारत सरकार की मौजूदा नीति द्वारा इन्क्यूबेटरों को और अधिक प्रोत्साहित किया जा सकेगा। - इसके अतिरिक्त सरकार के इस कदम से CSR में होने वाली धोखाधड़ी को भी रोका जा सकेगा। सरकार का उपरोक्त कदम न केवल CSR फंड्स का बेहतर प्रयोग एवं उद्योगों की नैतिक ज़िम्मेदारियों को विस्तृत करने, बल्कि घरेलू एवं वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति को भी मज़बूती प्रदान करने की दृष्टि से सार्थक प्रतीत हो रहा है। इस प्रकार के कदम व्यापक निहितार्थों को पूरा करने के लिये ज़रूरी है कि क्रियान्वयन में पारदर्शिता के साथ-साथ इसके व्यावहारिक उपयोगिता को सुनिश्चित करने पर बल दिया जाए।
हम बेहद थे अधूरे तेरे आने से अब हो गए पूरे।। मेरे आने से पहले ही वो गरमा गरम चाय तैयार रखती ।। हम बेहद थे अधूरे तेरे आने से अब हो गए हैं पूरे। उसे अचानक रसोई मैं ना जाने कौन सा ज़रूरी काम याद आया।। हम बेहद थे अधूरे तेरे आने से अब हो गए है पूरे।। ना जाने क्यों मुझे देखते ही उसका दिल क्यों था घबराया।। हम बेहद थे अधूरे तेरे आने से अब हो गए है पूरे।। उसके होने से मुझे ज़िन्दगी ज़िन्दगी थी लगती।।
हम बेहद थे अधूरे तेरे आने से अब हो गए पूरे।। मेरे आने से पहले ही वो गरमा गरम चाय तैयार रखती ।। हम बेहद थे अधूरे तेरे आने से अब हो गए हैं पूरे। उसे अचानक रसोई मैं ना जाने कौन सा ज़रूरी काम याद आया।। हम बेहद थे अधूरे तेरे आने से अब हो गए है पूरे।। ना जाने क्यों मुझे देखते ही उसका दिल क्यों था घबराया।। हम बेहद थे अधूरे तेरे आने से अब हो गए है पूरे।। उसके होने से मुझे ज़िन्दगी ज़िन्दगी थी लगती।।
नई दिल्ली : राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले बढ़ते जा रहे हैं, जिसे देखते हुए विभिन्न इलाकों को सील किया जा रहा है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में जहां मंगलवार को 55 कंटेनमेंट जोन की पहचान की गई थी, वहीं बुधवार को यह संख्या 1 और बढ़ गई है, जिसके बाद ऐसे इलाके अब 56 हो गए हैं। कोरोना वायरस के हॉटस्पॉट के तौर पर चिहिन्त यह नया इलाका मॉडल टाउन की पुलिस कॉलोनी का है। दिल्ली में जो नया इलाका एक अन्य कंटेनमेंट जोन के तौर पर सामने आया है, वे मॉडल टाउन स्थित पुलिस कॉलोनी में जी, एच और आई ब्लॉक्स हैं। राष्ट्रीय राजधानी में अब तक कोरोना वायरस संक्रमण के 1578 मामले सामने आ चुके हैं, जबकि 32 लोगों की जान जा चुकी है। बीते 24 घंटों के दौरान यहां कोरोना वायरस संक्रमण के 17 नए मामले सामने आए हैं, जबकि 2 अन्य लोगों की जान चली गई है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हालांकि कंटेनमेंट जोन बढ़कर 56 हो गए हैं, पर यहां रोजाना सामने आ रहे कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में बीते दो दिना में कमी देखी गई है, जिसका जिक्र मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी मंगलवार को किया था। उन्होंने कहा था कि कल दिल्ली में 356 करोना के मामले आए थे, आज 51 ही आए। उनकी इस बात को बुधवार के मामलों से जोड़कर देखा जाए तो यहां आज 17 नए मामले सामने आए हैं, जो लगातार गिरावट को दर्शाता है। इस बीच दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने राष्ट्रीय राजधानी में मरीजों के इलाज के लिए प्लाज्मा टेक्नीक का ट्रायल शुरू किए जाने की बात कही है, जो इलाज की 120 साल पुरानी पद्धति है। करीब 120 साल पुरानी इलाज की इस पद्धति को कोरोना वायरस के उपचार में प्रभावी माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका इस्तेमाल रेबीज, इबोला, MERS और SARS के इलाज में भी होता रहा है, जिसमें यह काफी कारगर पाया गया है।
नई दिल्ली : राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले बढ़ते जा रहे हैं, जिसे देखते हुए विभिन्न इलाकों को सील किया जा रहा है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में जहां मंगलवार को पचपन कंटेनमेंट जोन की पहचान की गई थी, वहीं बुधवार को यह संख्या एक और बढ़ गई है, जिसके बाद ऐसे इलाके अब छप्पन हो गए हैं। कोरोना वायरस के हॉटस्पॉट के तौर पर चिहिन्त यह नया इलाका मॉडल टाउन की पुलिस कॉलोनी का है। दिल्ली में जो नया इलाका एक अन्य कंटेनमेंट जोन के तौर पर सामने आया है, वे मॉडल टाउन स्थित पुलिस कॉलोनी में जी, एच और आई ब्लॉक्स हैं। राष्ट्रीय राजधानी में अब तक कोरोना वायरस संक्रमण के एक हज़ार पाँच सौ अठहत्तर मामले सामने आ चुके हैं, जबकि बत्तीस लोगों की जान जा चुकी है। बीते चौबीस घंटाटों के दौरान यहां कोरोना वायरस संक्रमण के सत्रह नए मामले सामने आए हैं, जबकि दो अन्य लोगों की जान चली गई है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हालांकि कंटेनमेंट जोन बढ़कर छप्पन हो गए हैं, पर यहां रोजाना सामने आ रहे कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में बीते दो दिना में कमी देखी गई है, जिसका जिक्र मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी मंगलवार को किया था। उन्होंने कहा था कि कल दिल्ली में तीन सौ छप्पन करोना के मामले आए थे, आज इक्यावन ही आए। उनकी इस बात को बुधवार के मामलों से जोड़कर देखा जाए तो यहां आज सत्रह नए मामले सामने आए हैं, जो लगातार गिरावट को दर्शाता है। इस बीच दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने राष्ट्रीय राजधानी में मरीजों के इलाज के लिए प्लाज्मा टेक्नीक का ट्रायल शुरू किए जाने की बात कही है, जो इलाज की एक सौ बीस साल पुरानी पद्धति है। करीब एक सौ बीस साल पुरानी इलाज की इस पद्धति को कोरोना वायरस के उपचार में प्रभावी माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका इस्तेमाल रेबीज, इबोला, MERS और SARS के इलाज में भी होता रहा है, जिसमें यह काफी कारगर पाया गया है।
भोपाल। राजधानी में एक युवती ने एक आयुर्वेदिक डॉक्टर एवं टीआई पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। युवती का आरोप है कि डॉक्टर ने इलाज के नाम पर उसके साथ गंदी हरकत की और पुलिस ने बजाए डॉक्टर को पकड़ने के, उसे व उसके भाईयों गिरफ्तार कर लिया। युवती न्याय की प्रत्याशा में यहां वहां भटक रही है। पीड़िता के भाई सुरेन्द्र अहिरवार ने पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि पिछली 25 जून को आयुर्वेद अस्पताल के डॉक्टर सरमनप्रसाद वर्मा ने इलाज के बहाने उनकी बहन के साथ अशलील हरकत की थी। इस घटना के बाद उन्होंने अपने भाई महेन्द्र अहिरवार के साथ मिलकर अस्पताल परिसर में डॉक्टर की पिटाई कर दी। हमले से बचने के लिए डॉक्टर ने डायल 100 को फोन कर दिया। पुलिस दोनों पक्षों को हबीबगंज थाने ले गई। हबीबगंज थाने के टीआई रविन्द्र यादव ने डॉक्टर वर्मा का पक्ष लेते हुए उन्हें एवं भाई-बहन को हवालात में बंद कर दिया और एफआईआर भी दर्ज कर दी, जबकि डॉक्टर को छोड़ दिया। सुरेन्द्र अहिरवार का कहना है कि इस दौरान टीआई रविन्द्र यादव ने उन्हें धमकी देते हुए कहा कि वह डॉक्टर वर्मा को अच्छे से जानते हैं, डॉक्टर वर्मा ऐसी कोई हरकत नहीं कर सकते। इस घटना के बाद जब वह अपनी बहन को लेकर महिला थाने जहांगीराबाद पहुंचे तो महिला पुलिस स्टॉफ ने उन्हें वापस करते हुए कहा कि हबीबगंज पुलिस ने कहा है कि आपके खिलाफ हबीबगंज थाने में एफआईआर दर्ज है, आपकी रिपोर्ट नहीं लिखी जा सकती। सुरेन्द्र अहिरवार का कहना है कि थानों के चक्कर काटने के बाद उन्होंने जनसुनवाई में इस मामले की शिकायत की। शिकायत दर्ज कराने के उपरांत उन्हें वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अरुणा मोहन राव से आश्वासन मिला कि इस मामले की जांच की जाएगी, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। सुरेन्द्र अहिरवार का कहना है कि इस घटना के मुख्य आरोपी डॉ. सरमनप्रसाद वर्मा ने उन्हें एक लीगल नोटिस भेजा है जिसमें कहा गया है कि प्रकरण वापस ले लो और किसी से कोई शिकायत मत करो, अन्यथा बीस लाख रुपए की मानहानि का दावा ठोक दूंगा। सुरेन्द्र अहिरवार ने अपनी बहन पर हुए अत्याचार का हवाला देते हुए कहा कि राजधानी में एक महिला के साथ हुई शर्मनाक घटना के बाद भी पुलिस प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। उनकी बहन न्याय पाने के लिए दर-दर भटक रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से अपनी बहन को उचित न्याय दिलाने की मांग की है।
भोपाल। राजधानी में एक युवती ने एक आयुर्वेदिक डॉक्टर एवं टीआई पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। युवती का आरोप है कि डॉक्टर ने इलाज के नाम पर उसके साथ गंदी हरकत की और पुलिस ने बजाए डॉक्टर को पकड़ने के, उसे व उसके भाईयों गिरफ्तार कर लिया। युवती न्याय की प्रत्याशा में यहां वहां भटक रही है। पीड़िता के भाई सुरेन्द्र अहिरवार ने पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि पिछली पच्चीस जून को आयुर्वेद अस्पताल के डॉक्टर सरमनप्रसाद वर्मा ने इलाज के बहाने उनकी बहन के साथ अशलील हरकत की थी। इस घटना के बाद उन्होंने अपने भाई महेन्द्र अहिरवार के साथ मिलकर अस्पताल परिसर में डॉक्टर की पिटाई कर दी। हमले से बचने के लिए डॉक्टर ने डायल एक सौ को फोन कर दिया। पुलिस दोनों पक्षों को हबीबगंज थाने ले गई। हबीबगंज थाने के टीआई रविन्द्र यादव ने डॉक्टर वर्मा का पक्ष लेते हुए उन्हें एवं भाई-बहन को हवालात में बंद कर दिया और एफआईआर भी दर्ज कर दी, जबकि डॉक्टर को छोड़ दिया। सुरेन्द्र अहिरवार का कहना है कि इस दौरान टीआई रविन्द्र यादव ने उन्हें धमकी देते हुए कहा कि वह डॉक्टर वर्मा को अच्छे से जानते हैं, डॉक्टर वर्मा ऐसी कोई हरकत नहीं कर सकते। इस घटना के बाद जब वह अपनी बहन को लेकर महिला थाने जहांगीराबाद पहुंचे तो महिला पुलिस स्टॉफ ने उन्हें वापस करते हुए कहा कि हबीबगंज पुलिस ने कहा है कि आपके खिलाफ हबीबगंज थाने में एफआईआर दर्ज है, आपकी रिपोर्ट नहीं लिखी जा सकती। सुरेन्द्र अहिरवार का कहना है कि थानों के चक्कर काटने के बाद उन्होंने जनसुनवाई में इस मामले की शिकायत की। शिकायत दर्ज कराने के उपरांत उन्हें वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अरुणा मोहन राव से आश्वासन मिला कि इस मामले की जांच की जाएगी, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। सुरेन्द्र अहिरवार का कहना है कि इस घटना के मुख्य आरोपी डॉ. सरमनप्रसाद वर्मा ने उन्हें एक लीगल नोटिस भेजा है जिसमें कहा गया है कि प्रकरण वापस ले लो और किसी से कोई शिकायत मत करो, अन्यथा बीस लाख रुपए की मानहानि का दावा ठोक दूंगा। सुरेन्द्र अहिरवार ने अपनी बहन पर हुए अत्याचार का हवाला देते हुए कहा कि राजधानी में एक महिला के साथ हुई शर्मनाक घटना के बाद भी पुलिस प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। उनकी बहन न्याय पाने के लिए दर-दर भटक रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से अपनी बहन को उचित न्याय दिलाने की मांग की है।
Quick links: बिहार के मुजफ्फरपुर में जदयू नेता की गुंडागर्दी का एक मामला सामने आया है, जदयू नेता गजनफर हुसैन पर 3 युवकों ने बुरी तरह से मारपीट करने का आरोप लगाया है। सत्ता के नशे में चूर जदयू नेता ने अपने बिजनेस पार्टनर को बेरहमी से पीटा, पीड़ितों का आरोप है कि जदयू नेता के अपने गुर्गों के साथ मिलकर इस घटना को अंजाम दिया। गजनफर हुसैन को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है.जानकारी के मुताबिक जदयू नेता गजनफर हुसैन ने अपने गुर्गों के साथ मिलकर तीन लोगों को रॉड से हमला कर बुरी तरह से घायल कर दिया। इतना ही नहीं दो लोगों के नाखून तक उखाड़ दिए गए। घायल विकास तिवारी ने बताया कि अस्पताल पहुंचते ही उसे, उसके भाई और उसके कर्मचारी पर जेडीयू नेता ने अपने गुर्गों के साथ हमला कर दिया... बंद कमरे में तीनों की बुरी तरह से पीटा गया। औराई के एक हॉस्पिटल को जदयू नेता और विकास तिवारी पार्टनरशिप में चला रहे थे, लेकिन हिसाब को लेकर विकास और गजनफर हुसैन में विवाद हो गया था। पुलिस के मुताबिक, विवाद को सुलझाने को लेकर विकास शिफा हॉस्पिटल पहुंचा, उस दौरान पहले से ही जेडीयू नेता ने हमले की पूरी तैयारी कर रखी थी।
Quick links: बिहार के मुजफ्फरपुर में जदयू नेता की गुंडागर्दी का एक मामला सामने आया है, जदयू नेता गजनफर हुसैन पर तीन युवकों ने बुरी तरह से मारपीट करने का आरोप लगाया है। सत्ता के नशे में चूर जदयू नेता ने अपने बिजनेस पार्टनर को बेरहमी से पीटा, पीड़ितों का आरोप है कि जदयू नेता के अपने गुर्गों के साथ मिलकर इस घटना को अंजाम दिया। गजनफर हुसैन को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है.जानकारी के मुताबिक जदयू नेता गजनफर हुसैन ने अपने गुर्गों के साथ मिलकर तीन लोगों को रॉड से हमला कर बुरी तरह से घायल कर दिया। इतना ही नहीं दो लोगों के नाखून तक उखाड़ दिए गए। घायल विकास तिवारी ने बताया कि अस्पताल पहुंचते ही उसे, उसके भाई और उसके कर्मचारी पर जेडीयू नेता ने अपने गुर्गों के साथ हमला कर दिया... बंद कमरे में तीनों की बुरी तरह से पीटा गया। औराई के एक हॉस्पिटल को जदयू नेता और विकास तिवारी पार्टनरशिप में चला रहे थे, लेकिन हिसाब को लेकर विकास और गजनफर हुसैन में विवाद हो गया था। पुलिस के मुताबिक, विवाद को सुलझाने को लेकर विकास शिफा हॉस्पिटल पहुंचा, उस दौरान पहले से ही जेडीयू नेता ने हमले की पूरी तैयारी कर रखी थी।
Sindri : सिंदरी (Sindri) सिंदरी में नौ दिवसीय श्रीराम कथा मंदाकिनी के पहले दिन सोमवार 3 अप्रैल को शिव मंदिर प्रांगण से भव्य कलश शोभायात्रा निकाली गई. शोभायात्रा में लगभग 251 महिलाएं शामिल थीं. यात्रा में शामिल महिलाओं ने नगर भ्रमण करते हुए शिव मंदिर प्रांगण स्थित तालाब में जल भरा व अनुष्ठान स्थल पर स्थापित किया. कलश शोभायात्रा श्रीराम कथा आयोजन कमेटी की संयोजक भाजपा नेत्री रंजना शर्मा व कथा वाचिका डॉ अमृता करुणेश्वरी के नेतृत्व में निकली, जिसमें बतौर मुख्य अतिथि पूर्व मेयर इंदु सिंह भी शामिल थी. कलश शोभायात्रा में पूर्व मेयर की पूत्रवधू आसनी सिंह भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति लेकर चल रही थीं. अहले सुबह लगभग नौ बजे महिलाएं सिर पर कलश लेकर नगर भ्रमण करती हुई वापस कथा स्थल पहुंची. मुख्य यजमान अंजनी तिवारी व उनकी धर्मपत्नी भी मौजूद थी. कलश शोभायात्रा में श्री राम कथा आयोजन कमेटी के अध्यक्ष प्रशांत कुमार दुबे, कमेटी महासचिव भाजपा नेता दिनेश सिंह, संयोजक भाजपा नेत्री रंजना शर्मा, संजय सिंह, कौशल सिंह, मोहित मिश्रा, पवन ओझा, संजय प्रसाद, राजेश प्रसाद, ब्रजेश सिंह, रांगा दुबे, इंदु बाला, उमा शर्मा, अनीता श्रीवास्तव, शारदा सिंह सहित सैकड़ों महिला पुरुष शामिल थे.
Sindri : सिंदरी सिंदरी में नौ दिवसीय श्रीराम कथा मंदाकिनी के पहले दिन सोमवार तीन अप्रैल को शिव मंदिर प्रांगण से भव्य कलश शोभायात्रा निकाली गई. शोभायात्रा में लगभग दो सौ इक्यावन महिलाएं शामिल थीं. यात्रा में शामिल महिलाओं ने नगर भ्रमण करते हुए शिव मंदिर प्रांगण स्थित तालाब में जल भरा व अनुष्ठान स्थल पर स्थापित किया. कलश शोभायात्रा श्रीराम कथा आयोजन कमेटी की संयोजक भाजपा नेत्री रंजना शर्मा व कथा वाचिका डॉ अमृता करुणेश्वरी के नेतृत्व में निकली, जिसमें बतौर मुख्य अतिथि पूर्व मेयर इंदु सिंह भी शामिल थी. कलश शोभायात्रा में पूर्व मेयर की पूत्रवधू आसनी सिंह भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति लेकर चल रही थीं. अहले सुबह लगभग नौ बजे महिलाएं सिर पर कलश लेकर नगर भ्रमण करती हुई वापस कथा स्थल पहुंची. मुख्य यजमान अंजनी तिवारी व उनकी धर्मपत्नी भी मौजूद थी. कलश शोभायात्रा में श्री राम कथा आयोजन कमेटी के अध्यक्ष प्रशांत कुमार दुबे, कमेटी महासचिव भाजपा नेता दिनेश सिंह, संयोजक भाजपा नेत्री रंजना शर्मा, संजय सिंह, कौशल सिंह, मोहित मिश्रा, पवन ओझा, संजय प्रसाद, राजेश प्रसाद, ब्रजेश सिंह, रांगा दुबे, इंदु बाला, उमा शर्मा, अनीता श्रीवास्तव, शारदा सिंह सहित सैकड़ों महिला पुरुष शामिल थे.
भारतीय खगोलविदों ने अतिरिक्त सौर ग्रहों के वातावरण को समझने की एक नई विधि खोजी है। उन्होंने दिखाया है कि सूर्य के अलावा अन्य सितारों के चारों ओर घूमने वाले ग्रहों का अध्ययन प्रकाश के ध्रुवीकरण को देखकर और ध्रुवीकरण के संकेतों का अध्ययन करके किया जा सकता है। ध्रुवीकरण के इन संकेतों अथवा हस्ताक्षर या प्रकाश की प्रकीर्णन तीव्रता में बदलाव को मौजूदा उपकरणों के साथ देखा जा सकता है और मौजूदा उपकरणों का उपयोग करके सौर मंडल से परे ग्रहों के अध्ययन का विस्तार किया जा सकता है। हाल के दिनों में, खगोलविदों ने पता लगाया है कि हमारे सौर मंडल की तरह भी कई अन्य तारों के चारों ओर भी ग्रह घूम रहे हैं। अब तक लगभग 5000 ऐसे एक्सोप्लैनेट का पता लगाया जा चुका है। लगभग कुछ दशक पहले, भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के एक स्वायत्त संस्थान, भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (आईआईए), बैंगलोर के वैज्ञानिक सुजान सेनगुप्ता ने सुझाव दिया था कि गर्म युवा ग्रहों के तापीय (थर्मल) विकिरण और अन्य सितारों की परिक्रमा करने वाले ग्रहों के परावर्तित प्रकाश, जिन्हें अतिरिक्त-सौर ग्रह या एक्सोप्लैनेट के रूप में जाना जाता है, को भी ध्रुवीकृत किया जाएगा और ध्रुवीकरण का माप एक्सोप्लैनेटरी वातावरण की रासायनिक संरचना और अन्य गुणों का खुलासा कर सकता है। कई ब्राउन ड्वार्रफ्स के ध्रुवीकरण का पता लगाने के बाद भविष्यवाणी की पुष्टि, एक प्रकार के असफल तारों, जिनका वातावरण बृहस्पति के समान ही है, ने दुनिया भर के शोधकर्ताओं को अत्यधिक संवेदनशील पोलीमीटर बनाने और एक्सोप्लैनेटरी पर्यावरण की जांच के लिए पोलारिमेट्रिक विधियों का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। हाल ही में, सुजान सेनगुप्ता के साथ भारतीय खगोल भौतकीय संस्थान-आईआईए काम कर रही पोस्टडॉक्टरल शोधकर्ता अरित्रा चक्रवर्ती ने एक विस्तृत त्रि-आयामी संख्यात्मक विधि विकसित की और एक्सोप्लैनेट के ध्रुवीकरण का अनुकरण किया है। सौर-ग्रहों की तरह ही एक्सोप्लैनेट अपने तेजी से घूमने के कारण थोड़े तिरछे होते हैं। इसके अलावा, तारे के चारों ओर अपनी स्थिति के आधार पर, ग्रहीय डिस्क का केवल एक हिस्सा ही तारे की रोशनी (स्टारलाइट) से प्रकाशित होता है। प्रकाश उत्सर्जक क्षेत्र की यह विषमता गैर-शून्य ध्रुवीकरण (नॉन जीरो पोलोराइजेशन)को जन्म देती है। 'द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल' में प्रकाशित शोध में, वैज्ञानिकों ने एक पायथन-आधारित संख्यात्मक कोड विकसित किया है जिसमें एक अत्याधुनिक ग्रहीय वातावरण मॉडल शामिल है और विभिन्न झुकाव कोणों पर मूल तारे की परिक्रमा करने वाले एक्सोप्लैनेट की ऐसी सभी विषमताओं को नियोजित किया गया है। उन्होंने डिस्क केंद्र के संबंध में परिभाषित ग्रहों की सतह के विभिन्न अक्षांशों और देशांतरों पर ध्रुवीकरण की मात्रा की गणना की और उन्हें प्रबुद्ध और घूर्णन-प्रेरित तिरछी ग्रहीय सतह पर औसत किया। विभिन्न तरंगदैर्घयों पर ध्रुवीकरण पर्याप्त रूप से अधिक होता है और इसलिए एक साधारण पोलारिमीटर द्वारा भी इसका पता लगाया जा सकता है यदि स्टारलाइट अवरुद्ध हो। यह एक्सोप्लैनेट के वातावरण के साथ-साथ इसकी रासायनिक संरचना का अध्ययन करने में मदद करता है। "यहां तक कि अगर हम सीधे ग्रह की छवि नहीं बना सकते हैं और अध्रुवीकृत स्टारलाइट को ग्रह के ध्रुवीकृत परावर्तित प्रकाश के साथ मिलाने की अनुमति है, तो यह राशि किसी एक दस लाख के कुछ दस भाग होनी चाहिए, लेकिन फिर भी कुछ मौजूदा उच्च उपकरणों जैसे एचआईपीपीआई, पीओएलआईएसएच, प्लैनेट पोल, आदि द्वारा पता लगाया जा सकता है। अरित्रा चक्रवर्ती ने कहा कि यह अनुसंधान उपयुक्त संवेदनशीलता के साथ उपकरणों को डिजाइन करने और पर्यवेक्षकों का मार्गदर्शन करने में मदद करेगा। ट्रांजिट फोटोमेट्री और रेडियल वेलोसिटी विधियों जैसे पारंपरिक और लोकप्रिय तरीकों के विपरीत, जो केवल किनारे पर देखे जाने वाले ग्रहों का पता लगा सकते हैं, यह पोलरिमेट्रिक विधि कक्षीय झुकाव कोणों की एक विस्तृत श्रृंखला के साथ परिक्रमा करने वाले एक्सोप्लैनेट का पता लगा कर उनकी आगे जांच कर सकती है। इस प्रकार, निकट भविष्य में पोलारिमेट्रिक तकनीक एक्सोप्लैनेट के अध्ययन के लिए एक नई खिड़की खोलेगी और हमें पारंपरिक तकनीकों की कई सीमाओं को दूर करने में सक्षम बनाएगी। चित्र 1: एक झुकाव कोण के साथ परिक्रमा करते हुए कक्षीय चरण में एक ग्रह का योजनाबद्ध आरेख i. चित्र 2: परावर्तित प्रकाश की तीव्रता और ध्रुवीकृत प्रकाश (क्यू/आई और यू/आई) दृश्य तरंग दैर्ध्य में आंशिक रूप से प्रकाशित सतह (कक्षीय चरण 45o) के विभिन्न बिंदुओं पर चेहरे पर और किनारे पर परिक्रमा करते हुए- विचारों पर, कक्षीय झुकाव के दो चरम मामले। अलग-अलग देशांतरों पर उत्पन्न होने वाले सकारात्मक (हरा) और नकारात्मक (नीला) ध्रुवीकरण एक दूसरे को रद्द कर देते हैं। शुद्ध गैर-शून्य पता लगाने योग्य डिस्क-औसत ध्रुवीकरण ज्यामितीय विषमता के कारण अपूर्ण रद्दीकरण के कारण उत्पन्न होता है। चित्र 3: दृश्यमान तरंगदैर्घ्य क्षेत्र में पता लगाने योग्य डिस्क-औसत ध्रुवीकरण का अनुमानित प्रतिशत और विभिन्न झुकाव कोणों पर परिक्रमा करने वाले बादल एक्सोप्लैनेट के विभिन्न कक्षीय चरण कोणों पर। ध्रुवीकरण समय के साथ स्थिर होता है यदि ग्रह को (i=0o) के साथ आमने-सामने देखा जाता है। अन्य सभी झुकाव कोणों के लिए, ध्रुवीकरण ग्रह के दो आधे चरणों के दौरान अधिकतम और पूर्ण चरणों के दौरान न्यूनतम होता है, अर्थात, जब दिन (áorb=0o) और रात (áorb=180o)दोनों पक्ष पर्यवेक्षक के सामने आते हैं। अधिक जानकारी के लिए कृपया संपर्क करें डॉ. एस.के. सेनगुप्ता (sujan@iiap.res.in), अरित्रा चक्रवर्ती (aritra@iiap.res.in)।
भारतीय खगोलविदों ने अतिरिक्त सौर ग्रहों के वातावरण को समझने की एक नई विधि खोजी है। उन्होंने दिखाया है कि सूर्य के अलावा अन्य सितारों के चारों ओर घूमने वाले ग्रहों का अध्ययन प्रकाश के ध्रुवीकरण को देखकर और ध्रुवीकरण के संकेतों का अध्ययन करके किया जा सकता है। ध्रुवीकरण के इन संकेतों अथवा हस्ताक्षर या प्रकाश की प्रकीर्णन तीव्रता में बदलाव को मौजूदा उपकरणों के साथ देखा जा सकता है और मौजूदा उपकरणों का उपयोग करके सौर मंडल से परे ग्रहों के अध्ययन का विस्तार किया जा सकता है। हाल के दिनों में, खगोलविदों ने पता लगाया है कि हमारे सौर मंडल की तरह भी कई अन्य तारों के चारों ओर भी ग्रह घूम रहे हैं। अब तक लगभग पाँच हज़ार ऐसे एक्सोप्लैनेट का पता लगाया जा चुका है। लगभग कुछ दशक पहले, भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के एक स्वायत्त संस्थान, भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान , बैंगलोर के वैज्ञानिक सुजान सेनगुप्ता ने सुझाव दिया था कि गर्म युवा ग्रहों के तापीय विकिरण और अन्य सितारों की परिक्रमा करने वाले ग्रहों के परावर्तित प्रकाश, जिन्हें अतिरिक्त-सौर ग्रह या एक्सोप्लैनेट के रूप में जाना जाता है, को भी ध्रुवीकृत किया जाएगा और ध्रुवीकरण का माप एक्सोप्लैनेटरी वातावरण की रासायनिक संरचना और अन्य गुणों का खुलासा कर सकता है। कई ब्राउन ड्वार्रफ्स के ध्रुवीकरण का पता लगाने के बाद भविष्यवाणी की पुष्टि, एक प्रकार के असफल तारों, जिनका वातावरण बृहस्पति के समान ही है, ने दुनिया भर के शोधकर्ताओं को अत्यधिक संवेदनशील पोलीमीटर बनाने और एक्सोप्लैनेटरी पर्यावरण की जांच के लिए पोलारिमेट्रिक विधियों का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। हाल ही में, सुजान सेनगुप्ता के साथ भारतीय खगोल भौतकीय संस्थान-आईआईए काम कर रही पोस्टडॉक्टरल शोधकर्ता अरित्रा चक्रवर्ती ने एक विस्तृत त्रि-आयामी संख्यात्मक विधि विकसित की और एक्सोप्लैनेट के ध्रुवीकरण का अनुकरण किया है। सौर-ग्रहों की तरह ही एक्सोप्लैनेट अपने तेजी से घूमने के कारण थोड़े तिरछे होते हैं। इसके अलावा, तारे के चारों ओर अपनी स्थिति के आधार पर, ग्रहीय डिस्क का केवल एक हिस्सा ही तारे की रोशनी से प्रकाशित होता है। प्रकाश उत्सर्जक क्षेत्र की यह विषमता गैर-शून्य ध्रुवीकरण को जन्म देती है। 'द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल' में प्रकाशित शोध में, वैज्ञानिकों ने एक पायथन-आधारित संख्यात्मक कोड विकसित किया है जिसमें एक अत्याधुनिक ग्रहीय वातावरण मॉडल शामिल है और विभिन्न झुकाव कोणों पर मूल तारे की परिक्रमा करने वाले एक्सोप्लैनेट की ऐसी सभी विषमताओं को नियोजित किया गया है। उन्होंने डिस्क केंद्र के संबंध में परिभाषित ग्रहों की सतह के विभिन्न अक्षांशों और देशांतरों पर ध्रुवीकरण की मात्रा की गणना की और उन्हें प्रबुद्ध और घूर्णन-प्रेरित तिरछी ग्रहीय सतह पर औसत किया। विभिन्न तरंगदैर्घयों पर ध्रुवीकरण पर्याप्त रूप से अधिक होता है और इसलिए एक साधारण पोलारिमीटर द्वारा भी इसका पता लगाया जा सकता है यदि स्टारलाइट अवरुद्ध हो। यह एक्सोप्लैनेट के वातावरण के साथ-साथ इसकी रासायनिक संरचना का अध्ययन करने में मदद करता है। "यहां तक कि अगर हम सीधे ग्रह की छवि नहीं बना सकते हैं और अध्रुवीकृत स्टारलाइट को ग्रह के ध्रुवीकृत परावर्तित प्रकाश के साथ मिलाने की अनुमति है, तो यह राशि किसी एक दस लाख के कुछ दस भाग होनी चाहिए, लेकिन फिर भी कुछ मौजूदा उच्च उपकरणों जैसे एचआईपीपीआई, पीओएलआईएसएच, प्लैनेट पोल, आदि द्वारा पता लगाया जा सकता है। अरित्रा चक्रवर्ती ने कहा कि यह अनुसंधान उपयुक्त संवेदनशीलता के साथ उपकरणों को डिजाइन करने और पर्यवेक्षकों का मार्गदर्शन करने में मदद करेगा। ट्रांजिट फोटोमेट्री और रेडियल वेलोसिटी विधियों जैसे पारंपरिक और लोकप्रिय तरीकों के विपरीत, जो केवल किनारे पर देखे जाने वाले ग्रहों का पता लगा सकते हैं, यह पोलरिमेट्रिक विधि कक्षीय झुकाव कोणों की एक विस्तृत श्रृंखला के साथ परिक्रमा करने वाले एक्सोप्लैनेट का पता लगा कर उनकी आगे जांच कर सकती है। इस प्रकार, निकट भविष्य में पोलारिमेट्रिक तकनीक एक्सोप्लैनेट के अध्ययन के लिए एक नई खिड़की खोलेगी और हमें पारंपरिक तकनीकों की कई सीमाओं को दूर करने में सक्षम बनाएगी। चित्र एक: एक झुकाव कोण के साथ परिक्रमा करते हुए कक्षीय चरण में एक ग्रह का योजनाबद्ध आरेख i. चित्र दो: परावर्तित प्रकाश की तीव्रता और ध्रुवीकृत प्रकाश दृश्य तरंग दैर्ध्य में आंशिक रूप से प्रकाशित सतह के विभिन्न बिंदुओं पर चेहरे पर और किनारे पर परिक्रमा करते हुए- विचारों पर, कक्षीय झुकाव के दो चरम मामले। अलग-अलग देशांतरों पर उत्पन्न होने वाले सकारात्मक और नकारात्मक ध्रुवीकरण एक दूसरे को रद्द कर देते हैं। शुद्ध गैर-शून्य पता लगाने योग्य डिस्क-औसत ध्रुवीकरण ज्यामितीय विषमता के कारण अपूर्ण रद्दीकरण के कारण उत्पन्न होता है। चित्र तीन: दृश्यमान तरंगदैर्घ्य क्षेत्र में पता लगाने योग्य डिस्क-औसत ध्रुवीकरण का अनुमानित प्रतिशत और विभिन्न झुकाव कोणों पर परिक्रमा करने वाले बादल एक्सोप्लैनेट के विभिन्न कक्षीय चरण कोणों पर। ध्रुवीकरण समय के साथ स्थिर होता है यदि ग्रह को के साथ आमने-सामने देखा जाता है। अन्य सभी झुकाव कोणों के लिए, ध्रुवीकरण ग्रह के दो आधे चरणों के दौरान अधिकतम और पूर्ण चरणों के दौरान न्यूनतम होता है, अर्थात, जब दिन और रात दोनों पक्ष पर्यवेक्षक के सामने आते हैं। अधिक जानकारी के लिए कृपया संपर्क करें डॉ. एस.के. सेनगुप्ता , अरित्रा चक्रवर्ती ।
लखनऊ. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एप्पल के एरिया मैनेजर विवेक तिवारी एनकाउंटर घटना ने यूपी पुलिस को कटघरे में खड़ा किया है. योगी आदित्यनाथ सरकार में सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह के बिगड़े बोल सामने आए हैं. जिन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि गोली सिर्फ उन्हें ही लग रही है जो अपराधी हैं जिन्होंने अपराध किया है उन्हें दंड मिलेगा ही, किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा. मंत्री के इन बिगड़े बोल ने इस मुद्दे को और गरम कर दिया है. जहां एक तरफ पुलिस विवेक एनकाउंटर मामले पर घिरती जा रही है वहीं उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार में सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह का यह बयान बवाल को और बढ़ा देता है. धर्मपाल सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि एनकाउंटर में कोई गलती नहीं हुई है, गोली उन्हीं को लग रही है जो अपराधी है और जो क्रीमिनल्स हैं उन्हें बख्शा नहीं जाएगा, न्याय सबको मिलेगा. बता दें शुक्रवार घटित इस घटना के बाद मामला गरम होते देख यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि यह एनकाउंटर साधारण घटना नहीं है, इस मामले की जांच होगी यदि जरूरत पड़ी तो विवेक एनकाउंटर केस को सीबीआई को सौपा जाएगा. यह घटना शुक्रवार देर रात की है. विवेक तिवारी और उनकी दोस्त रात करीब 1. 30 बजे एक कार्यक्रम से लौट रहे थे जब पुलिस कांस्टेबल चेकिंग के दौरान हुई. इस दौरान सिपाई उन्हें रोकने में असफल रहे तो उन्होंने उनका पीछा कर गोली मार दी. मृतक की सहयोगी सना खान जो उस घटना के समय मृतक की गाड़ी में ही थीं, उन्होंने बताया कि वह दोनों आईफोन एक्स प्लस के लॉन्च प्रोग्राम के बाद घर लौट रहे थें. वहीं पुलिस का कहना है कि गोमती नगर एक्सटेंशन पर विवेक तिवारी को रुकने का संकेत दिया लेकिन वह रुके नहीं बल्कि भागने लगे और पुलिस की बाइक को टक्कर मार दी जिस पर पुलिस के दो कांस्टेबल सवार थें. पुलिस का कहना है कि हमने अपने बचाव में गोली चलाई क्योंकि वह गाड़ी चढ़ा रहे थें.
लखनऊ. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एप्पल के एरिया मैनेजर विवेक तिवारी एनकाउंटर घटना ने यूपी पुलिस को कटघरे में खड़ा किया है. योगी आदित्यनाथ सरकार में सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह के बिगड़े बोल सामने आए हैं. जिन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि गोली सिर्फ उन्हें ही लग रही है जो अपराधी हैं जिन्होंने अपराध किया है उन्हें दंड मिलेगा ही, किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा. मंत्री के इन बिगड़े बोल ने इस मुद्दे को और गरम कर दिया है. जहां एक तरफ पुलिस विवेक एनकाउंटर मामले पर घिरती जा रही है वहीं उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार में सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह का यह बयान बवाल को और बढ़ा देता है. धर्मपाल सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि एनकाउंटर में कोई गलती नहीं हुई है, गोली उन्हीं को लग रही है जो अपराधी है और जो क्रीमिनल्स हैं उन्हें बख्शा नहीं जाएगा, न्याय सबको मिलेगा. बता दें शुक्रवार घटित इस घटना के बाद मामला गरम होते देख यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि यह एनकाउंटर साधारण घटना नहीं है, इस मामले की जांच होगी यदि जरूरत पड़ी तो विवेक एनकाउंटर केस को सीबीआई को सौपा जाएगा. यह घटना शुक्रवार देर रात की है. विवेक तिवारी और उनकी दोस्त रात करीब एक. तीस बजे एक कार्यक्रम से लौट रहे थे जब पुलिस कांस्टेबल चेकिंग के दौरान हुई. इस दौरान सिपाई उन्हें रोकने में असफल रहे तो उन्होंने उनका पीछा कर गोली मार दी. मृतक की सहयोगी सना खान जो उस घटना के समय मृतक की गाड़ी में ही थीं, उन्होंने बताया कि वह दोनों आईफोन एक्स प्लस के लॉन्च प्रोग्राम के बाद घर लौट रहे थें. वहीं पुलिस का कहना है कि गोमती नगर एक्सटेंशन पर विवेक तिवारी को रुकने का संकेत दिया लेकिन वह रुके नहीं बल्कि भागने लगे और पुलिस की बाइक को टक्कर मार दी जिस पर पुलिस के दो कांस्टेबल सवार थें. पुलिस का कहना है कि हमने अपने बचाव में गोली चलाई क्योंकि वह गाड़ी चढ़ा रहे थें.
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Please note that all translations are automatically generated. इमेजिंग फ्लो cytometry व्यक्तिगत और जनसंख्या स्तर पर कोशिकाओं के रूपात्मक और कार्यात्मक परिवर्तन का पता लगाने के लिए एक आदर्श दृष्टिकोण प्रदान करता है । प्रदूषक-उजागर मानव वृक्ष कोशिकाओं में लिपिड प्रतिजन प्रस्तुति के लिए बाधित endocytic समारोह जीन अभिव्यक्ति और प्रोटीन की तस्करी के रूपात्मक प्रदर्शन की एक संयुक्त transcriptomic रूपरेखा के साथ प्रदर्शन किया गया । ये विधियां अगली पीढ़ी के अनुक्रमण और प्रवाह साइटोमेट्री इमेजिंग विश्लेषण को एकीकृत करते हैं। यह दिलचस्प सवालों के जवाब में मदद कर सकता है, जैसे कि क्या कुछ फेनोटाइपिक परिवर्तन को फंसाया जाता है, बजाय ट्रांसक्रिप्टोम के, विशेष रूप से प्रदूषक जोखिम वातावरण में। हमारे लिए इस सरल विधि का मुख्य लाभ यह है कि हम इसका उपयोग जैविक रूप से महत्वपूर्ण प्रोटीन के कोलोकैलाइजेशन को मापने के लिए कर सकते हैं, एक कार्यात्मक स्तर पर प्रमुख अंतर जीन अभिव्यक्ति के परिणामों की व्याख्या करने के लिए । इस तकनीक के निहितार्थ पैथोलॉजिकल और विष विज्ञान के परिणामों के निदान की ओर विस्तार करते हैं। एक सामान्य इमेजर दृष्टिकोण के रूप में, फोर्सी में जीन अभिव्यक्ति को प्रोटीन फ़ंक्शन से जोड़ने की क्षमता है। आम तौर पर, इमेजिंग और ट्रांसक्रिप्टोमिक विश्लेषण की उच्च तकनीकी मांगों के कारण इस विधि में नए व्यक्ति संघर्ष करेंगे। मानव मोनोसाइट व्युत्पन्न डेंड्रिटिक सेल लाइब्रेरी को अनुक्रमित करने के लिए, पहले अनुक्रमण बायोसिंथेसिस और इंडेक्सिंग रिएजेंट रैक पर अनुक्रमण और अनुक्रमण अभिकर् थरों को लोड करें, और रैक को एक घंटे के लिए प्रयोगशाला ग्रेड पानी स्नान में रखें, जब तक कि सभी बर्फ पिघल न जाए, और रीजेंट्स को अच्छी तरह से मिलाया जाए। जबकि रिएजेंट्स विगलन कर रहे हैं, सीक्वेंसर पर बिजली, कंप्यूटर को नेटवर्क ड्राइव से कनेक्ट करते हैं जब डू नॉट इजेक्शन ड्राइव दिखाई देता है, और सीक्वेंसर कंट्रोल सॉफ्टवेयर लॉन्च करते हैं। इसके बाद, अनुक्रमण बायोसिंथेसिस रिएजेंट रैक में प्रत्येक बोतल में रखरखाव धोने के समाधान के बारे में 100 मिलीलीटर जोड़ें, और प्रत्येक बोतल पर एक कीप कैप स्क्रू करें। अनुक्रमण अभिकर्मक रैक में प्रत्येक 15 मिलीलीटर शंकु नली में रखरखाव धोने के समाधान के लगभग 12 मिलीलीटर जोड़ें, और टोपियां त्यागें। फिर दोनों रैक को सीक्वेंसर पर लोड करें। सीक्वेंसर नियंत्रण सॉफ्टवेयर के भीतर रखरखाव धोने का चयन करें, और अनुक्रमक द्रव प्रणाली की सफाई के लिए निर्देशों का पालन करें। गलियों से गुजरने वाले बुलबुले के लिए प्रवाह कोशिका का निरीक्षण करने के लिए एक टॉर्च का उपयोग करें, यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई रिसाव नहीं है। जब वॉश सीक्वेंस समाप्त हो जाता है, तो अनुक्रम टैब खोलें, और एक नया रन शुरू करें, आउटपुट डेटा को नेटवर्क ड्राइव पर निर्देशित करें। डिमुलिप्लेक्सिंग के लिए एक नमूना शीट अपलोड करें, और उचित अभिकर्मित जानकारी दर्ज करें। अनुक्रमण अभिकर् स के साथ, सिस्टम को प्राइम करने के लिए उपयोग किए गए प्रवाह सेल का उपयोग करें। क्लस्टर जनरेशन पूरा होने के बाद फ्लो सेल को हटा दें। और सेल को पानी से हल्का स्प्रे करें। लेंस पेपर के साथ प्रवाह सेल सूखी पोंछें, इसके बाद 95% इथेनॉल के साथ एक हल्का स्प्रे करें। प्रवाह कोशिका को फिर से सूखी पोंछने के बाद, प्रकाश के खिलाफ प्रवाह कोशिका की सतह की जांच करें ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह मलबे या नमक अवशेषों के बिना साफ है। जब प्रधान चरण समाप्त हो जाता है, तो संकुल प्रवाह सेल लोड करें, और अनुक्रमण शुरू करें। सीक्वेंस एनालिसिस व्यूअर सॉफ्टवेयर अपने आप शुरू हो जाएगा। लगभग 26 घंटे बाद, उच्च अनुक्रम नियंत्रण सॉफ्टवेयर के माध्यम से अनुक्रमण डेटा गुणवत्ता की निगरानी करें, और डेटा की गुणवत्ता का आकलन करने के लिए और किसी भी समस्या निवारण के लिए विश्लेषण दृश्य सॉफ्टवेयर अनुक्रमण करें। फिर, जब अनुक्रम समाप्त हो जाता है, तो प्रवाह सेल गैसकेट बदलें, और अगले रन की शुरुआत करने से पहले रखरखाव धोने का प्रदर्शन करें। प्रदूषक-उजागर डेंड्रिटिक कोशिकाओं के प्रवाह साइटोमेट्रिक इमेजिंग के बाद, इमेजजे फिजी खोलें, और उपचार समूह के अनुसार गैर-उजागर और प्रदूषक-उजागर मानव डेंड्रिटिक सेल नमूना समूहों के लिए 100 सहेजे गए सेल छवियों को अलग-अलग फ़ाइलों में मर्ज करें। CD1d का विश्लेषण करने के लिए, और दो आबादी के भीतर Lamp1 colocalization, प्रदूषक उजागर १०० विलय सेल छवि खोलने के लिए, और छवि, रंग का चयन करें, और विभाजन चैनलों प्रति चैनल एक फ्लोरोफोर के साथ दो व्यक्तिगत छवियों में छवि विभाजित करने के लिए । कोलोकैलाइज्ड पिक्सल का एक स्कैटर प्लॉट बनाने के लिए, एनालिसिस, कोलोकैलाइजेशन और कोलोकैलाइजेशन थ्रेसहोल्ड का चयन करें, और स्कैटर प्लॉट को बचाने के लिए प्रिंट स्क्रीन दबाएं। प्रत्येक एकल-सेलुलर छवि के लिए मंडेर के कोलोकैलाइजेशन गुणांक की गणना करने के लिए, स्प्लिट चैनलों के साथ छवि फ़ाइल पर एकल-सेल छवि का चयन करने के लिए अंडाकार चयन उपकरण का उपयोग करें, और विश्लेषण, कोलोकैलाइजेशन और कोलोकैलाइजेशन थ्रेसहोल्ड का फिर से चयन करें। फिर रुचि के क्षेत्र के लिए संवाद बॉक्स से चैनल 1 का चयन करें, और ठीक क्लिक करें । जब गुणांक की गणना सभी 100 सेल छवियों के लिए की गई है, तो परिणामों को एक उपयुक्त स्प्रेडशीट में आयात करें, और नियंत्रण गैर-उजागर सेल नमूने के लिए विश्लेषण दोहराएं। आरएनए अनुक्रमण और ट्रांसक्रिप्टोमिक डेटा विश्लेषण का उपयोग करके, प्रदूषक-उजागर डीसी में लिपिड मेटाबोलिज्म और एंडोसाइटिक कार्यों सहित कई प्रमुख परिवर्तित जीन समूहों की पहचान की गई थी । व्यक्तिगत सेल छवि स्तर पर, HLADR सकारात्मक CD11c सकारात्मक dendritic कोशिकाओं gated जा सकता है, उनके CD1d और Lamp1 coexpression के अनुसार । नियंत्रण गैर-उजागर डेंड्रिटिक कोशिकाएं न्यूनतम सीडी 1डी और लैम्प1 प्रोटीन कोलोकैलाइजेशन प्रदर्शित करती हैं, जो सीडी 1डी एंडोसाइटिक तस्करी के बेसल स्तर और शारीरिक परिस्थितियों में सतह अभिव्यक्ति का एक उच्च स्तर दर्शाती है। जबकि CD1d प्रदूषक उजागर डेंड्रिटिक कोशिकाओं के देर से एंडोसाइटिक डिब्बों में बनाए रखा है, इस प्रयोगात्मक सेल आबादी में बदल अंतःस्यात जीन प्रोफाइल की पुष्टि । व्यक्तिगत सेलुलर छवियों को एक छवि फ़ाइल में विलय करने के बाद, व्यक्तिगत छवियों को उनकी फ्लोरोफोर अभिव्यक्ति के अनुसार विभाजित किया जा सकता है, और दो चैनलों के बीच पिक्सेल तीव्रता के कोलोकैलाइजेशन को एक स्कैटर प्लॉट में कल्पना की जा सकती है। दो उपचार समूहों में CD1d और Lamp1 प्रोटीन के बीच कोलोकैलाइजेशन की डिग्री को मंडेर के गुणांकों का उपयोग करके निर्धारित किया जा सकता है। यदि प्रोटीन की तीव्रता कोलोकैलाइज्ड और गैर-कोलोकैलिज्ड क्षेत्रों के बीच विषम है, तो कोलोकैलाइज्ड तीव्रता कोलोकैलाइज्ड क्षेत्रों के समानांतर नहीं होगी, इसलिए पिक्सेल तीव्रता के आधार पर दो प्रोटीन के कोलोकलाइजेशन का और आकलन करना भी महत्वपूर्ण है । एक बार महारत हासिल होने के बाद, छवि विश्लेषण को दो घंटे में पूरा किया जा सकता है, और आरएनए अनुक्रमण सेटअप को तीन घंटे में पूरा किया जा सकता है, यदि प्रत्येक तकनीक ठीक से की जाती है। इस प्रक्रिया का प्रयास करते समय, यह सुनिश्चित करना याद रखना महत्वपूर्ण है कि सभी अभिकर् य सही स्थितियों में ठीक से लोड किए गए हैं, और अनुक्रमक में कोई रिसाव नहीं है। इस प्रक्रिया के बाद, माइक्रो आरएनए, एक्सोम, या मस्त सेल अनुक्रमण जैसे अन्य तरीकों को क्रमशः वैश्विक माइक्रो आरएनए अभिव्यक्ति, जीन उत्परिवर्तन या डीएनए मिथाइलेशन के बारे में अतिरिक्त सवालों के जवाब देने के लिए किया जा सकता है। तो इसके विकास के बाद, इस तकनीक सेलुलर इमेजिंग विश्लेषण के क्षेत्र में शोधकर्ताओं की मदद मिलेगी, और अगली पीढ़ी अनुक्रमण जीन अभिव्यक्ति और प्रोटीन समारोह पर पर्यावरण प्रदूषक के प्रभाव का पता लगाने के लिए । इस वीडियो को देखने के बाद, आपको इस बात की अच्छी समझ होनी चाहिए कि अगली पीढ़ी के अनुक्रमण को कैसे स्थापित किया जाए, और प्रोटीन कोलोकैलाइजेशन का इमेजर विश्लेषण किया जाए। यह न भूलें कि मानव रक्त के नमूनों में जहरीले प्रदूषक रसायनों के साथ काम करना बेहद खतरनाक हो सकता है। इन प्रक्रियाओं को निष्पादित करते समय रासायनिक धुएं हुड और व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करने जैसी सावधानियां हमेशा ली जानी चाहिए।
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Please note that all translations are automatically generated. इमेजिंग फ्लो cytometry व्यक्तिगत और जनसंख्या स्तर पर कोशिकाओं के रूपात्मक और कार्यात्मक परिवर्तन का पता लगाने के लिए एक आदर्श दृष्टिकोण प्रदान करता है । प्रदूषक-उजागर मानव वृक्ष कोशिकाओं में लिपिड प्रतिजन प्रस्तुति के लिए बाधित endocytic समारोह जीन अभिव्यक्ति और प्रोटीन की तस्करी के रूपात्मक प्रदर्शन की एक संयुक्त transcriptomic रूपरेखा के साथ प्रदर्शन किया गया । ये विधियां अगली पीढ़ी के अनुक्रमण और प्रवाह साइटोमेट्री इमेजिंग विश्लेषण को एकीकृत करते हैं। यह दिलचस्प सवालों के जवाब में मदद कर सकता है, जैसे कि क्या कुछ फेनोटाइपिक परिवर्तन को फंसाया जाता है, बजाय ट्रांसक्रिप्टोम के, विशेष रूप से प्रदूषक जोखिम वातावरण में। हमारे लिए इस सरल विधि का मुख्य लाभ यह है कि हम इसका उपयोग जैविक रूप से महत्वपूर्ण प्रोटीन के कोलोकैलाइजेशन को मापने के लिए कर सकते हैं, एक कार्यात्मक स्तर पर प्रमुख अंतर जीन अभिव्यक्ति के परिणामों की व्याख्या करने के लिए । इस तकनीक के निहितार्थ पैथोलॉजिकल और विष विज्ञान के परिणामों के निदान की ओर विस्तार करते हैं। एक सामान्य इमेजर दृष्टिकोण के रूप में, फोर्सी में जीन अभिव्यक्ति को प्रोटीन फ़ंक्शन से जोड़ने की क्षमता है। आम तौर पर, इमेजिंग और ट्रांसक्रिप्टोमिक विश्लेषण की उच्च तकनीकी मांगों के कारण इस विधि में नए व्यक्ति संघर्ष करेंगे। मानव मोनोसाइट व्युत्पन्न डेंड्रिटिक सेल लाइब्रेरी को अनुक्रमित करने के लिए, पहले अनुक्रमण बायोसिंथेसिस और इंडेक्सिंग रिएजेंट रैक पर अनुक्रमण और अनुक्रमण अभिकर् थरों को लोड करें, और रैक को एक घंटे के लिए प्रयोगशाला ग्रेड पानी स्नान में रखें, जब तक कि सभी बर्फ पिघल न जाए, और रीजेंट्स को अच्छी तरह से मिलाया जाए। जबकि रिएजेंट्स विगलन कर रहे हैं, सीक्वेंसर पर बिजली, कंप्यूटर को नेटवर्क ड्राइव से कनेक्ट करते हैं जब डू नॉट इजेक्शन ड्राइव दिखाई देता है, और सीक्वेंसर कंट्रोल सॉफ्टवेयर लॉन्च करते हैं। इसके बाद, अनुक्रमण बायोसिंथेसिस रिएजेंट रैक में प्रत्येक बोतल में रखरखाव धोने के समाधान के बारे में एक सौ मिलीलीटर जोड़ें, और प्रत्येक बोतल पर एक कीप कैप स्क्रू करें। अनुक्रमण अभिकर्मक रैक में प्रत्येक पंद्रह मिलीलीटर शंकु नली में रखरखाव धोने के समाधान के लगभग बारह मिलीलीटर जोड़ें, और टोपियां त्यागें। फिर दोनों रैक को सीक्वेंसर पर लोड करें। सीक्वेंसर नियंत्रण सॉफ्टवेयर के भीतर रखरखाव धोने का चयन करें, और अनुक्रमक द्रव प्रणाली की सफाई के लिए निर्देशों का पालन करें। गलियों से गुजरने वाले बुलबुले के लिए प्रवाह कोशिका का निरीक्षण करने के लिए एक टॉर्च का उपयोग करें, यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई रिसाव नहीं है। जब वॉश सीक्वेंस समाप्त हो जाता है, तो अनुक्रम टैब खोलें, और एक नया रन शुरू करें, आउटपुट डेटा को नेटवर्क ड्राइव पर निर्देशित करें। डिमुलिप्लेक्सिंग के लिए एक नमूना शीट अपलोड करें, और उचित अभिकर्मित जानकारी दर्ज करें। अनुक्रमण अभिकर् स के साथ, सिस्टम को प्राइम करने के लिए उपयोग किए गए प्रवाह सेल का उपयोग करें। क्लस्टर जनरेशन पूरा होने के बाद फ्लो सेल को हटा दें। और सेल को पानी से हल्का स्प्रे करें। लेंस पेपर के साथ प्रवाह सेल सूखी पोंछें, इसके बाद पचानवे% इथेनॉल के साथ एक हल्का स्प्रे करें। प्रवाह कोशिका को फिर से सूखी पोंछने के बाद, प्रकाश के खिलाफ प्रवाह कोशिका की सतह की जांच करें ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह मलबे या नमक अवशेषों के बिना साफ है। जब प्रधान चरण समाप्त हो जाता है, तो संकुल प्रवाह सेल लोड करें, और अनुक्रमण शुरू करें। सीक्वेंस एनालिसिस व्यूअर सॉफ्टवेयर अपने आप शुरू हो जाएगा। लगभग छब्बीस घंटाटे बाद, उच्च अनुक्रम नियंत्रण सॉफ्टवेयर के माध्यम से अनुक्रमण डेटा गुणवत्ता की निगरानी करें, और डेटा की गुणवत्ता का आकलन करने के लिए और किसी भी समस्या निवारण के लिए विश्लेषण दृश्य सॉफ्टवेयर अनुक्रमण करें। फिर, जब अनुक्रम समाप्त हो जाता है, तो प्रवाह सेल गैसकेट बदलें, और अगले रन की शुरुआत करने से पहले रखरखाव धोने का प्रदर्शन करें। प्रदूषक-उजागर डेंड्रिटिक कोशिकाओं के प्रवाह साइटोमेट्रिक इमेजिंग के बाद, इमेजजे फिजी खोलें, और उपचार समूह के अनुसार गैर-उजागर और प्रदूषक-उजागर मानव डेंड्रिटिक सेल नमूना समूहों के लिए एक सौ सहेजे गए सेल छवियों को अलग-अलग फ़ाइलों में मर्ज करें। CDएकd का विश्लेषण करने के लिए, और दो आबादी के भीतर Lampएक colocalization, प्रदूषक उजागर एक सौ विलय सेल छवि खोलने के लिए, और छवि, रंग का चयन करें, और विभाजन चैनलों प्रति चैनल एक फ्लोरोफोर के साथ दो व्यक्तिगत छवियों में छवि विभाजित करने के लिए । कोलोकैलाइज्ड पिक्सल का एक स्कैटर प्लॉट बनाने के लिए, एनालिसिस, कोलोकैलाइजेशन और कोलोकैलाइजेशन थ्रेसहोल्ड का चयन करें, और स्कैटर प्लॉट को बचाने के लिए प्रिंट स्क्रीन दबाएं। प्रत्येक एकल-सेलुलर छवि के लिए मंडेर के कोलोकैलाइजेशन गुणांक की गणना करने के लिए, स्प्लिट चैनलों के साथ छवि फ़ाइल पर एकल-सेल छवि का चयन करने के लिए अंडाकार चयन उपकरण का उपयोग करें, और विश्लेषण, कोलोकैलाइजेशन और कोलोकैलाइजेशन थ्रेसहोल्ड का फिर से चयन करें। फिर रुचि के क्षेत्र के लिए संवाद बॉक्स से चैनल एक का चयन करें, और ठीक क्लिक करें । जब गुणांक की गणना सभी एक सौ सेल छवियों के लिए की गई है, तो परिणामों को एक उपयुक्त स्प्रेडशीट में आयात करें, और नियंत्रण गैर-उजागर सेल नमूने के लिए विश्लेषण दोहराएं। आरएनए अनुक्रमण और ट्रांसक्रिप्टोमिक डेटा विश्लेषण का उपयोग करके, प्रदूषक-उजागर डीसी में लिपिड मेटाबोलिज्म और एंडोसाइटिक कार्यों सहित कई प्रमुख परिवर्तित जीन समूहों की पहचान की गई थी । व्यक्तिगत सेल छवि स्तर पर, HLADR सकारात्मक CDग्यारहc सकारात्मक dendritic कोशिकाओं gated जा सकता है, उनके CDएकd और Lampएक coexpression के अनुसार । नियंत्रण गैर-उजागर डेंड्रिटिक कोशिकाएं न्यूनतम सीडी एकडी और लैम्पएक प्रोटीन कोलोकैलाइजेशन प्रदर्शित करती हैं, जो सीडी एकडी एंडोसाइटिक तस्करी के बेसल स्तर और शारीरिक परिस्थितियों में सतह अभिव्यक्ति का एक उच्च स्तर दर्शाती है। जबकि CDएकd प्रदूषक उजागर डेंड्रिटिक कोशिकाओं के देर से एंडोसाइटिक डिब्बों में बनाए रखा है, इस प्रयोगात्मक सेल आबादी में बदल अंतःस्यात जीन प्रोफाइल की पुष्टि । व्यक्तिगत सेलुलर छवियों को एक छवि फ़ाइल में विलय करने के बाद, व्यक्तिगत छवियों को उनकी फ्लोरोफोर अभिव्यक्ति के अनुसार विभाजित किया जा सकता है, और दो चैनलों के बीच पिक्सेल तीव्रता के कोलोकैलाइजेशन को एक स्कैटर प्लॉट में कल्पना की जा सकती है। दो उपचार समूहों में CDएकd और Lampएक प्रोटीन के बीच कोलोकैलाइजेशन की डिग्री को मंडेर के गुणांकों का उपयोग करके निर्धारित किया जा सकता है। यदि प्रोटीन की तीव्रता कोलोकैलाइज्ड और गैर-कोलोकैलिज्ड क्षेत्रों के बीच विषम है, तो कोलोकैलाइज्ड तीव्रता कोलोकैलाइज्ड क्षेत्रों के समानांतर नहीं होगी, इसलिए पिक्सेल तीव्रता के आधार पर दो प्रोटीन के कोलोकलाइजेशन का और आकलन करना भी महत्वपूर्ण है । एक बार महारत हासिल होने के बाद, छवि विश्लेषण को दो घंटे में पूरा किया जा सकता है, और आरएनए अनुक्रमण सेटअप को तीन घंटे में पूरा किया जा सकता है, यदि प्रत्येक तकनीक ठीक से की जाती है। इस प्रक्रिया का प्रयास करते समय, यह सुनिश्चित करना याद रखना महत्वपूर्ण है कि सभी अभिकर् य सही स्थितियों में ठीक से लोड किए गए हैं, और अनुक्रमक में कोई रिसाव नहीं है। इस प्रक्रिया के बाद, माइक्रो आरएनए, एक्सोम, या मस्त सेल अनुक्रमण जैसे अन्य तरीकों को क्रमशः वैश्विक माइक्रो आरएनए अभिव्यक्ति, जीन उत्परिवर्तन या डीएनए मिथाइलेशन के बारे में अतिरिक्त सवालों के जवाब देने के लिए किया जा सकता है। तो इसके विकास के बाद, इस तकनीक सेलुलर इमेजिंग विश्लेषण के क्षेत्र में शोधकर्ताओं की मदद मिलेगी, और अगली पीढ़ी अनुक्रमण जीन अभिव्यक्ति और प्रोटीन समारोह पर पर्यावरण प्रदूषक के प्रभाव का पता लगाने के लिए । इस वीडियो को देखने के बाद, आपको इस बात की अच्छी समझ होनी चाहिए कि अगली पीढ़ी के अनुक्रमण को कैसे स्थापित किया जाए, और प्रोटीन कोलोकैलाइजेशन का इमेजर विश्लेषण किया जाए। यह न भूलें कि मानव रक्त के नमूनों में जहरीले प्रदूषक रसायनों के साथ काम करना बेहद खतरनाक हो सकता है। इन प्रक्रियाओं को निष्पादित करते समय रासायनिक धुएं हुड और व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करने जैसी सावधानियां हमेशा ली जानी चाहिए।
Japanese whiskey : इतनी महंगी क्यों होती है जापानी व्हिस्की, कहां है इसकी सबसे ज्यादा डिमांड? जापान की व्हिस्की दुनिया में सबसे ज्यादा महंगी और पॉपुलर है. जापान में युवाओं के बीच इसका जितना क्रेज है उतनी ही दुनिया के तमाम मुल्कों में इसकी मांग है. जापान में व्हिस्की शराब प्रेमियों के दिलों में खास जगह रखती है. लेकिन पिछले कुछ सालों में जापानी व्हिस्की (Japanese whiskey) की लोकप्रियता जापान के बाहर भी लगातार बढ़ी है. जैसे-जैसे जापानी व्हिस्की दुनिया के अलग-अलग मुल्कों में सप्लाई होने लगी है. इसकी कीमत आसमान छूने लगी है. सप्लाई कम होने से जापानी व्हिस्की की नीलामी की प्रवृति भी बढ़ी, जिसके चलते इसकी कीमत में इजाफा देखने को मिला. 1930 के दशक में जब जापान में व्हिस्की का उद्योग शुरू हुआ था तब इसकी कोई खास मांग नहीं थी. लेकिन बाद से सालों में इसकी गुणवत्ता से इसकी मांग बढ़ी. हाल में जापानी व्हिस्की अपने खुदरा मूल्य से दस गुना अधिक पर बिक रही है. मांग बढ़ने से जापानी व्हिस्की में सबसे लोकप्रिय यामाजाकी, हकुशू और हिबिकी ने अपनी कीमतों में वृद्धि की घोषणा की है. क्यों महंगी है जापानी शराब? स्कॉटलैंड या अमेरिका जैसे अन्य व्हिस्की उत्पादक देशों के मुकाबले जापान में व्हिस्की का उत्पादन कम होता है. जापानी व्हिस्की के बारे में माना जाता है इसकी क्वालिटी काफी बेहतर होती है. क्वालिटी को मेंटेन रखने के लिए उत्पादन में लागत अधिक आती है. और इसका दाम बढ़ जाता है. जापानी व्हिस्की को अंतरराष्ट्रीय मान्यता हासिल है. जापानी व्हिस्की को ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर कई पुरस्कार मिले हैं. नतीजतन दुनिया में जापानी व्हिस्की को प्रतिष्ठा बढ़ी है. इसके अलावा आयात कर और शुल्क के चलते भी जापानी शराब महंगी होती है. अगर कोई जापान के बाहर जापानी व्हिस्की खरीदता है तो आयात कर और लोकल टैक्स के चलते भी उसकी कीमत बढ़ जाती है. कोरोना के बाद जापान की अर्थव्यवस्था खराब हो चुकी है. ऐसे में जापानी व्हिस्की को देश की इकोनोमी के लिए वरदान माना जा रहा है. जापान में सरकार ने सेक वाइवा (Sake Viva) अभियान के जरिए लोगों को शराब पीने के लिए प्रेरित किया है. साल 2020 में जापान में शराब का रेवेन्यू 1.7 फीसदी रह गया था. इसके बाद से ही जापान सरकार रेवेन्यू बढ़ाने का प्रयास में जुटी है. सेक वाइवा सर्विस बकायदा जापान की नेशनल टैक्स एजेंसी (NTA) की तरफ से शुरू की गई है. इस सर्विस के तहत 20 से 39 साल की आयु के लोगों से शराब की खपत को बढ़ावा देने की अपील की गई है. जानकारी के मुताबिक कोरोनो वायरस संक्रमण के प्रभाव के कारण जापान की इकोनोमी पर बुरा असर पड़ा है. एनटीए की एक रिपोर्ट के मुताबिक 1999 में जापान में शराब से होने वाली आय चरम पर थी. लेकिन उसके बाद लगातार गिरावट देखी गई. एनटीए के मुताबिक साल 2020 में जापान में शराब की बिक्री से करीब 1.1 ट्रिलियन येन की कमाई हुई थी, यह 2016 से 13 फीसदी कम थी. ऐसे में जापानी व्हिस्की को देश की अर्थव्यवस्था के लिए अहम माना जाता है. यह भी पढ़ें : जापानी युवा कितनी पी लेते हैं शराब? क्या है वजह?
Japanese whiskey : इतनी महंगी क्यों होती है जापानी व्हिस्की, कहां है इसकी सबसे ज्यादा डिमांड? जापान की व्हिस्की दुनिया में सबसे ज्यादा महंगी और पॉपुलर है. जापान में युवाओं के बीच इसका जितना क्रेज है उतनी ही दुनिया के तमाम मुल्कों में इसकी मांग है. जापान में व्हिस्की शराब प्रेमियों के दिलों में खास जगह रखती है. लेकिन पिछले कुछ सालों में जापानी व्हिस्की की लोकप्रियता जापान के बाहर भी लगातार बढ़ी है. जैसे-जैसे जापानी व्हिस्की दुनिया के अलग-अलग मुल्कों में सप्लाई होने लगी है. इसकी कीमत आसमान छूने लगी है. सप्लाई कम होने से जापानी व्हिस्की की नीलामी की प्रवृति भी बढ़ी, जिसके चलते इसकी कीमत में इजाफा देखने को मिला. एक हज़ार नौ सौ तीस के दशक में जब जापान में व्हिस्की का उद्योग शुरू हुआ था तब इसकी कोई खास मांग नहीं थी. लेकिन बाद से सालों में इसकी गुणवत्ता से इसकी मांग बढ़ी. हाल में जापानी व्हिस्की अपने खुदरा मूल्य से दस गुना अधिक पर बिक रही है. मांग बढ़ने से जापानी व्हिस्की में सबसे लोकप्रिय यामाजाकी, हकुशू और हिबिकी ने अपनी कीमतों में वृद्धि की घोषणा की है. क्यों महंगी है जापानी शराब? स्कॉटलैंड या अमेरिका जैसे अन्य व्हिस्की उत्पादक देशों के मुकाबले जापान में व्हिस्की का उत्पादन कम होता है. जापानी व्हिस्की के बारे में माना जाता है इसकी क्वालिटी काफी बेहतर होती है. क्वालिटी को मेंटेन रखने के लिए उत्पादन में लागत अधिक आती है. और इसका दाम बढ़ जाता है. जापानी व्हिस्की को अंतरराष्ट्रीय मान्यता हासिल है. जापानी व्हिस्की को ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर कई पुरस्कार मिले हैं. नतीजतन दुनिया में जापानी व्हिस्की को प्रतिष्ठा बढ़ी है. इसके अलावा आयात कर और शुल्क के चलते भी जापानी शराब महंगी होती है. अगर कोई जापान के बाहर जापानी व्हिस्की खरीदता है तो आयात कर और लोकल टैक्स के चलते भी उसकी कीमत बढ़ जाती है. कोरोना के बाद जापान की अर्थव्यवस्था खराब हो चुकी है. ऐसे में जापानी व्हिस्की को देश की इकोनोमी के लिए वरदान माना जा रहा है. जापान में सरकार ने सेक वाइवा अभियान के जरिए लोगों को शराब पीने के लिए प्रेरित किया है. साल दो हज़ार बीस में जापान में शराब का रेवेन्यू एक.सात फीसदी रह गया था. इसके बाद से ही जापान सरकार रेवेन्यू बढ़ाने का प्रयास में जुटी है. सेक वाइवा सर्विस बकायदा जापान की नेशनल टैक्स एजेंसी की तरफ से शुरू की गई है. इस सर्विस के तहत बीस से उनतालीस साल की आयु के लोगों से शराब की खपत को बढ़ावा देने की अपील की गई है. जानकारी के मुताबिक कोरोनो वायरस संक्रमण के प्रभाव के कारण जापान की इकोनोमी पर बुरा असर पड़ा है. एनटीए की एक रिपोर्ट के मुताबिक एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में जापान में शराब से होने वाली आय चरम पर थी. लेकिन उसके बाद लगातार गिरावट देखी गई. एनटीए के मुताबिक साल दो हज़ार बीस में जापान में शराब की बिक्री से करीब एक.एक ट्रिलियन येन की कमाई हुई थी, यह दो हज़ार सोलह से तेरह फीसदी कम थी. ऐसे में जापानी व्हिस्की को देश की अर्थव्यवस्था के लिए अहम माना जाता है. यह भी पढ़ें : जापानी युवा कितनी पी लेते हैं शराब? क्या है वजह?
भारत में कोरोनावायरस के बीच चक्रवाती तूफान अम्फान का खतरा भी मंडराने लगा है। जिसे लेकर मौसम विभाग ने कई राज्यों में अलर्ट भी जारी कर दिया है। मौसम विभाग ने इस चक्रवाती तूफान की आशंका जताते हुए पूर्वी तटों के राज्य तमिलनाडु, पुडुचेरी से लेकर आंध्र प्रदेश, उड़ीसा पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, मणिपुर और आसपास के तटीय इलाकों में ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया है। अम्फान तूफान का असर झारखंड में भी देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग के अनुसार झारखंड में 20 और 21 मई को कई जिलों में बारिश होने की संभावना है। ओडिशा से सटे प्रदेश के पूर्वी एवं पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां एवं सिमडेगा जिले में तेज हवा के साथ मध्यम दर्जे की बारिश होने की संभावना है। मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट के मुताबिक अगले 24 घंटों में केरल, तटीय कर्नाटक और दक्षिणी तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश जारी रहने की उम्मीद है। वहीं, आंतरिक तमिलनाडु, आंतरिक कर्नाटक, मध्य महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों, गंगीय पश्चिम बंगाल, ओडिशा और उत्तर पूर्वी राज्यों में कुछ स्थानों पर बारिश के आसार हैं। मौसम विभाग के अनुसार इस तूफान का असर बिहार में भी कुछ जिलों में देखा जा सकता है। बता दें की पिछली बार फॉनी तूफान का असर भी बिहार में देखने को मिला था। फिलहाल आइएमडी, पटना के मौसम विज्ञानियों के मुताबिक उत्तर-पूर्व बिहार में असर ज्यादा पड़ेगा।
भारत में कोरोनावायरस के बीच चक्रवाती तूफान अम्फान का खतरा भी मंडराने लगा है। जिसे लेकर मौसम विभाग ने कई राज्यों में अलर्ट भी जारी कर दिया है। मौसम विभाग ने इस चक्रवाती तूफान की आशंका जताते हुए पूर्वी तटों के राज्य तमिलनाडु, पुडुचेरी से लेकर आंध्र प्रदेश, उड़ीसा पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, मणिपुर और आसपास के तटीय इलाकों में ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया है। अम्फान तूफान का असर झारखंड में भी देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग के अनुसार झारखंड में बीस और इक्कीस मई को कई जिलों में बारिश होने की संभावना है। ओडिशा से सटे प्रदेश के पूर्वी एवं पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां एवं सिमडेगा जिले में तेज हवा के साथ मध्यम दर्जे की बारिश होने की संभावना है। मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट के मुताबिक अगले चौबीस घंटाटों में केरल, तटीय कर्नाटक और दक्षिणी तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश जारी रहने की उम्मीद है। वहीं, आंतरिक तमिलनाडु, आंतरिक कर्नाटक, मध्य महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों, गंगीय पश्चिम बंगाल, ओडिशा और उत्तर पूर्वी राज्यों में कुछ स्थानों पर बारिश के आसार हैं। मौसम विभाग के अनुसार इस तूफान का असर बिहार में भी कुछ जिलों में देखा जा सकता है। बता दें की पिछली बार फॉनी तूफान का असर भी बिहार में देखने को मिला था। फिलहाल आइएमडी, पटना के मौसम विज्ञानियों के मुताबिक उत्तर-पूर्व बिहार में असर ज्यादा पड़ेगा।
पटनाः बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बीते सोमवार को वरिष्ठ पत्रकार मर्डर केस को लेकर कहा कि पत्रकार की हत्या मेरे ऊपर हमला है। यदि पीड़ित के परिजन चाहेंगे, तो हम इस मामले को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने की सिफारिश करेंगे। नीतीश ने कहा कि राजदेव रंजन की हत्या से वह दुखी हैं। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "पत्रकार की हत्या मेरे ऊपर हमला है। " उन्होंने कहा कि उनका बिहार पुलिस व उसकी जांच पर पूरा भरोसा है। मुख्यमंत्री ने कहा, "हमने कोई भी कोर-कसर नहीं छोड़ी है। जांच पूरी तत्परता से की जा रही है। इस अपराध को अंजाम देने वालों को कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी। " नीतीश ने कहा कि उन्होंने रविवार रात राज्य के पुलिस प्रमुख को पीड़ित के परिजनों से मिलने और यह पूछने के लिए कहा कि वे कार्रवाई से संतुष्ट हैं या नहीं। उन्होंने कहा, "अगर वे हमारी कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं, तो हम केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच के लिए कहेंगे। " नीतीश कुमार ने कहा, "मैंने पहले भी यह बात कही है। अपराध कोई भी कर सकता है। लेकिन कानून अपना काम करेगा। " गौरतलब है कि सिवान के वरिष्ठ पत्रकार और दैनिक अखबार 'हिन्दुस्तान' के ब्यूरो प्रमुख राजदेव रंजन को शुक्रवार जब अखबार का कार्यालय बंद कर वापस घर जा रहे थे, तभी सिवान रेलवे स्टेशन के नजदीक अपराधियों ने उन्हें गोली मारकर हत्या कर दी थी। सिवान के पुलिस अधीक्षक सौरभ कुमार शाह ने कहा कि मुंशी मियां सहित लगभग दर्जन भर संदिग्धों को इस मामले में हिरासत में लिया गया है। पुलिस के अनुसार, मुंशी मियां को प्रतापुर से हिरासत में लिया गया। प्रतापपुर, जेल में बंद पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन का गांव है।
पटनाः बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बीते सोमवार को वरिष्ठ पत्रकार मर्डर केस को लेकर कहा कि पत्रकार की हत्या मेरे ऊपर हमला है। यदि पीड़ित के परिजन चाहेंगे, तो हम इस मामले को केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंपने की सिफारिश करेंगे। नीतीश ने कहा कि राजदेव रंजन की हत्या से वह दुखी हैं। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "पत्रकार की हत्या मेरे ऊपर हमला है। " उन्होंने कहा कि उनका बिहार पुलिस व उसकी जांच पर पूरा भरोसा है। मुख्यमंत्री ने कहा, "हमने कोई भी कोर-कसर नहीं छोड़ी है। जांच पूरी तत्परता से की जा रही है। इस अपराध को अंजाम देने वालों को कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी। " नीतीश ने कहा कि उन्होंने रविवार रात राज्य के पुलिस प्रमुख को पीड़ित के परिजनों से मिलने और यह पूछने के लिए कहा कि वे कार्रवाई से संतुष्ट हैं या नहीं। उन्होंने कहा, "अगर वे हमारी कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं, तो हम केंद्रीय जांच ब्यूरो से जांच के लिए कहेंगे। " नीतीश कुमार ने कहा, "मैंने पहले भी यह बात कही है। अपराध कोई भी कर सकता है। लेकिन कानून अपना काम करेगा। " गौरतलब है कि सिवान के वरिष्ठ पत्रकार और दैनिक अखबार 'हिन्दुस्तान' के ब्यूरो प्रमुख राजदेव रंजन को शुक्रवार जब अखबार का कार्यालय बंद कर वापस घर जा रहे थे, तभी सिवान रेलवे स्टेशन के नजदीक अपराधियों ने उन्हें गोली मारकर हत्या कर दी थी। सिवान के पुलिस अधीक्षक सौरभ कुमार शाह ने कहा कि मुंशी मियां सहित लगभग दर्जन भर संदिग्धों को इस मामले में हिरासत में लिया गया है। पुलिस के अनुसार, मुंशी मियां को प्रतापुर से हिरासत में लिया गया। प्रतापपुर, जेल में बंद पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन का गांव है।
ठीक है, किसी भी अन्य साधन की तरह, हैप्रभाव के विशेष लक्षण, जो तरीकों, तकनीकों और औजार हैं। उनकी संपूर्णता और एक विशेष संस्था का गठन - "कानूनी विनियमन के तरीके" मानव में संबंधों के भागीदार के रूप में राज्यसमाज व्यवहार के लिए संभव उपकरणों के एक सेट के मामले में अलग है। इस तरह की स्थिति कानूनी विनियमन के तरीकों में व्यक्त की गई है जो इसका उपयोग करती है। समझने के लिए कि उनका सार क्या है,इस घटना की मुख्य विशेषताओं को प्राप्त करना आवश्यक है। इसलिए, कानूनी विनियमन एक ऐसे संबंधों को प्रभावित करने का एक मौका है जो कड़ाई से परिभाषित क्षेत्र में एक निश्चित समुदाय के भीतर बनते हैं। ऐसा प्रभाव या तो संकेतक या अनुशंसित हो सकता है पहली तरह से आत्मनिर्भरता का नाम और दूसरा - डिस्पोजेबिलिटी प्राप्त हुआ है। कानूनी विनियमन की इम्प्रैरेटिव विधियह है कि राज्य किसी विशेष स्थिति में व्यवहार के एक स्पष्ट परिभाषित मॉडल को स्थापित करता है। एक डिस्पोजेट्यूट विधि प्रतिभागियों को व्यवहार के दो या अधिक मॉडल के बीच एक विकल्प प्रदान करता है। और अगर पहले मामले में इस नियम का अनुपालन करने में विफलता का सख्ती से मुकदमा चल रहा है, तो दूसरे मामले में, प्रतिभागियों को ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं, जैसा कि कानून के ढांचे द्वारा स्थापित किया गया है। प्रस्तुत दो मुख्य विधियां नहीं हैंएक विशेष देश के क्षेत्र में सार्वजनिक संबंधों को विनियमित करने की एकमात्र संभावना है। कुछ वकीलों सात अतिरिक्त तरीकों को गाते हैं लेकिन, एक नियम के रूप में, वे पहले या दो हद तक अधिक से अधिक प्रतिबिंबित करते हैं। उदाहरण के लिए, अनुमतियों, प्रतिबंधों और obyazyvaniya की विधि इस तरह के सबसे जरूरी और डिस्पोजेबल के संयोजन को दर्शाता है। इसलिए, अनुमतियां अधिक उपेक्षणीय हैं, जबकि मजबूरी और निषेध कानूनी विनियमन का एक क्लासिक अनिवार्य तरीका है। इसके अलावा, प्रस्तुत उदाहरण विधि को प्रतिबिंबित नहीं करता है, लेकिन केवल इसका हिस्सा - जिस तरह से। अपने अभ्यास में, राज्य पूरे का उपयोग करता हैअपने क्षेत्र में रहने वाले समाज के मामलों के प्रभावी प्रबंधन को पूरा करने के लिए तरीकों, साधनों और तकनीकों का एक सेट जो इसे अपने मूल कार्य को पूरा करने में सक्षम बनाता है। लेकिन सभी एक ही, प्रस्तुत सेट में मुख्य कानूनी विनियमन के तरीके हैं। उनमें से बोलते हुए, हमेशा तीन मुख्य होते हैंपहले से ही नोट किए गए कार्यों - अनुमति, बाध्यकारी और निषेध और कानूनी विनियमन के तरीकों का इस्तेमाल उनमें से एक के रूप में किया जा सकता है, और गठबंधन कर सकते हैं। अनुमति विनियमन की एक विधि है, के साथजिसमें कहा गया है कि किसी व्यक्ति या समूह को कोई कार्रवाई करने का अधिकार है अधिक हद तक अनुमति देने के तरीके की अनुमति विशेषता है। हालांकि, एक राय है कि एक छोटे से हिस्से में यह अनिवार्य की विशेषता है। इसलिए, यह स्वीकृति में सबसे अच्छा परिलक्षित होता है, जब न्यायिक अधिकार को एक विकल्प दिया जाता है, जो दंड को दंडित करने के लिए दंड पर निर्भर करता है। लेकिन यह केवल एक विशिष्ट उदाहरण है। Obliging जिस तरह से राज्य हैडिवाइस व्यक्ति को एक निश्चित तरीके से आने के लिए मजबूर करता है। किसी व्यक्ति के निर्देशों से सिद्ध प्रस्थान के मामले में, अपराध मान्यता प्राप्त है और, परिणामस्वरूप, सजा उत्पन्न होती है। निषेध लागू एक चरम उपाय हैराज्य। एक नियम के रूप में, यह समाज और राज्य के लिए महत्वपूर्ण महत्व की स्थितियों के संबंध में स्थापित है। निषेध का एक ज्वलंत उदाहरण अपने भौतिक भाग में आपराधिक कानून के मानदंड हैं।
ठीक है, किसी भी अन्य साधन की तरह, हैप्रभाव के विशेष लक्षण, जो तरीकों, तकनीकों और औजार हैं। उनकी संपूर्णता और एक विशेष संस्था का गठन - "कानूनी विनियमन के तरीके" मानव में संबंधों के भागीदार के रूप में राज्यसमाज व्यवहार के लिए संभव उपकरणों के एक सेट के मामले में अलग है। इस तरह की स्थिति कानूनी विनियमन के तरीकों में व्यक्त की गई है जो इसका उपयोग करती है। समझने के लिए कि उनका सार क्या है,इस घटना की मुख्य विशेषताओं को प्राप्त करना आवश्यक है। इसलिए, कानूनी विनियमन एक ऐसे संबंधों को प्रभावित करने का एक मौका है जो कड़ाई से परिभाषित क्षेत्र में एक निश्चित समुदाय के भीतर बनते हैं। ऐसा प्रभाव या तो संकेतक या अनुशंसित हो सकता है पहली तरह से आत्मनिर्भरता का नाम और दूसरा - डिस्पोजेबिलिटी प्राप्त हुआ है। कानूनी विनियमन की इम्प्रैरेटिव विधियह है कि राज्य किसी विशेष स्थिति में व्यवहार के एक स्पष्ट परिभाषित मॉडल को स्थापित करता है। एक डिस्पोजेट्यूट विधि प्रतिभागियों को व्यवहार के दो या अधिक मॉडल के बीच एक विकल्प प्रदान करता है। और अगर पहले मामले में इस नियम का अनुपालन करने में विफलता का सख्ती से मुकदमा चल रहा है, तो दूसरे मामले में, प्रतिभागियों को ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं, जैसा कि कानून के ढांचे द्वारा स्थापित किया गया है। प्रस्तुत दो मुख्य विधियां नहीं हैंएक विशेष देश के क्षेत्र में सार्वजनिक संबंधों को विनियमित करने की एकमात्र संभावना है। कुछ वकीलों सात अतिरिक्त तरीकों को गाते हैं लेकिन, एक नियम के रूप में, वे पहले या दो हद तक अधिक से अधिक प्रतिबिंबित करते हैं। उदाहरण के लिए, अनुमतियों, प्रतिबंधों और obyazyvaniya की विधि इस तरह के सबसे जरूरी और डिस्पोजेबल के संयोजन को दर्शाता है। इसलिए, अनुमतियां अधिक उपेक्षणीय हैं, जबकि मजबूरी और निषेध कानूनी विनियमन का एक क्लासिक अनिवार्य तरीका है। इसके अलावा, प्रस्तुत उदाहरण विधि को प्रतिबिंबित नहीं करता है, लेकिन केवल इसका हिस्सा - जिस तरह से। अपने अभ्यास में, राज्य पूरे का उपयोग करता हैअपने क्षेत्र में रहने वाले समाज के मामलों के प्रभावी प्रबंधन को पूरा करने के लिए तरीकों, साधनों और तकनीकों का एक सेट जो इसे अपने मूल कार्य को पूरा करने में सक्षम बनाता है। लेकिन सभी एक ही, प्रस्तुत सेट में मुख्य कानूनी विनियमन के तरीके हैं। उनमें से बोलते हुए, हमेशा तीन मुख्य होते हैंपहले से ही नोट किए गए कार्यों - अनुमति, बाध्यकारी और निषेध और कानूनी विनियमन के तरीकों का इस्तेमाल उनमें से एक के रूप में किया जा सकता है, और गठबंधन कर सकते हैं। अनुमति विनियमन की एक विधि है, के साथजिसमें कहा गया है कि किसी व्यक्ति या समूह को कोई कार्रवाई करने का अधिकार है अधिक हद तक अनुमति देने के तरीके की अनुमति विशेषता है। हालांकि, एक राय है कि एक छोटे से हिस्से में यह अनिवार्य की विशेषता है। इसलिए, यह स्वीकृति में सबसे अच्छा परिलक्षित होता है, जब न्यायिक अधिकार को एक विकल्प दिया जाता है, जो दंड को दंडित करने के लिए दंड पर निर्भर करता है। लेकिन यह केवल एक विशिष्ट उदाहरण है। Obliging जिस तरह से राज्य हैडिवाइस व्यक्ति को एक निश्चित तरीके से आने के लिए मजबूर करता है। किसी व्यक्ति के निर्देशों से सिद्ध प्रस्थान के मामले में, अपराध मान्यता प्राप्त है और, परिणामस्वरूप, सजा उत्पन्न होती है। निषेध लागू एक चरम उपाय हैराज्य। एक नियम के रूप में, यह समाज और राज्य के लिए महत्वपूर्ण महत्व की स्थितियों के संबंध में स्थापित है। निषेध का एक ज्वलंत उदाहरण अपने भौतिक भाग में आपराधिक कानून के मानदंड हैं।
बातें करते थे। कक्षाओं में पढ़ाने के दौरान राष्ट्र विरोधी मानसिकता रखते है और एक ही धर्म से जुड़ी बातें करते है। नवीन शासकीय विधि महाविद्यालय के छह शिक्षकों पर धार्मिक कट्टरता फैलाने का आरोप लगाया गया है। वे छात्रों से कश्मीर में धारा 370 हटाने का विरोध करते थे। भारतीय सेना पर टिप्पणी करते थे। इसे लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता कॅालेज पहुंचे और हंगामा किया। इसके बाद कॅालेज के छह अतिथि शिक्षकों पांच दिन के लिए निलंबित कर दिया है। इन शिक्षकों के नाम प्रो अमिक खोकर, डॅा मिर्जा बेग, डॅा फिरोज अहमद मीर, प्रो सुहैल वाणी, मिलिन्द गौतम और पूर्णिमा बीसे है। इन प्रोफेसरों की शिकायत मिलने के बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता कालेज पहुंचे ते। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रोफेसर छात्रों को अकेले में बुलाते थे और धारा 370 पर बातें करते थे। कक्षाओं में पढ़ाने के दौरान राष्ट्र विरोधी मानसिकता रखते है और एक ही धर्म से जुड़ी बातें करते है। जिसका पाठ्यक्रम से कोई लेना-देना नहीं होता है। छात्राओं को रेस्त्रां में चलने और बाहर मिलने के लिए भी प्रोफेसर दबाव बनाते थे। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कालेज प्रबंधन ने शिक्षकों पर कार्रवाई की है। पांच दिनों के लिए उन्हें निलंबित कर दिया। प्रदर्शन करने वालों को जांच का आश्वासन भी दिया है। प्रदशर्न करने कॅालेज गए प्रदर्शनकारियों ने प्राचार्य इनामुर्रहमान का घेराव किया और कहा कि वे कॅालेज में चल रही गतिविधियों पर ध्यान नहीं रखते है। उन्होंने उन प्रोफेसरों को भी बुलाने का दबाव बनाया, जिन पर धार्मिक कट्टरता फैलाने के आरोप लगे,लेकिन वे नहीं आए। प्रदर्शनकारियों में अभाविप के प्रांत मंत्री घनश्याम सोलंकी, दीपेंद्र ठाकुर, लक्की आदिवाल भी शामिल थे। प्राचार्य ने इस मामले में आदेश जारी करते हुए कहा कि इस मामले में एक कमेटी जांच करेगी। जो छात्रों से पूछताछ करेगी। जांच प्रभावित न हो, इसलिए पांच दिनों के लिए छह अतिथि शिक्षकों को निलंबित किया जा रहा है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
बातें करते थे। कक्षाओं में पढ़ाने के दौरान राष्ट्र विरोधी मानसिकता रखते है और एक ही धर्म से जुड़ी बातें करते है। नवीन शासकीय विधि महाविद्यालय के छह शिक्षकों पर धार्मिक कट्टरता फैलाने का आरोप लगाया गया है। वे छात्रों से कश्मीर में धारा तीन सौ सत्तर हटाने का विरोध करते थे। भारतीय सेना पर टिप्पणी करते थे। इसे लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता कॅालेज पहुंचे और हंगामा किया। इसके बाद कॅालेज के छह अतिथि शिक्षकों पांच दिन के लिए निलंबित कर दिया है। इन शिक्षकों के नाम प्रो अमिक खोकर, डॅा मिर्जा बेग, डॅा फिरोज अहमद मीर, प्रो सुहैल वाणी, मिलिन्द गौतम और पूर्णिमा बीसे है। इन प्रोफेसरों की शिकायत मिलने के बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता कालेज पहुंचे ते। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रोफेसर छात्रों को अकेले में बुलाते थे और धारा तीन सौ सत्तर पर बातें करते थे। कक्षाओं में पढ़ाने के दौरान राष्ट्र विरोधी मानसिकता रखते है और एक ही धर्म से जुड़ी बातें करते है। जिसका पाठ्यक्रम से कोई लेना-देना नहीं होता है। छात्राओं को रेस्त्रां में चलने और बाहर मिलने के लिए भी प्रोफेसर दबाव बनाते थे। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कालेज प्रबंधन ने शिक्षकों पर कार्रवाई की है। पांच दिनों के लिए उन्हें निलंबित कर दिया। प्रदर्शन करने वालों को जांच का आश्वासन भी दिया है। प्रदशर्न करने कॅालेज गए प्रदर्शनकारियों ने प्राचार्य इनामुर्रहमान का घेराव किया और कहा कि वे कॅालेज में चल रही गतिविधियों पर ध्यान नहीं रखते है। उन्होंने उन प्रोफेसरों को भी बुलाने का दबाव बनाया, जिन पर धार्मिक कट्टरता फैलाने के आरोप लगे,लेकिन वे नहीं आए। प्रदर्शनकारियों में अभाविप के प्रांत मंत्री घनश्याम सोलंकी, दीपेंद्र ठाकुर, लक्की आदिवाल भी शामिल थे। प्राचार्य ने इस मामले में आदेश जारी करते हुए कहा कि इस मामले में एक कमेटी जांच करेगी। जो छात्रों से पूछताछ करेगी। जांच प्रभावित न हो, इसलिए पांच दिनों के लिए छह अतिथि शिक्षकों को निलंबित किया जा रहा है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
1952 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक आधिकारिक तौर पर XV ओलंपियाड के खेलों के नाम से जाना जाता था, 1952 में हेलसिंकी, फ़िनलैंड में आयोजित अंतरराष्ट्रीय बहु-खेल आयोजन थे। हेलसिंकी को पहले 1940 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक की मेजबानी के लिए चुना गया था, जो द्वितीय विश्व युद्ध के कारण रद्द कर दिया गया था। यह उत्तरी शहर है जिसमें ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों का आयोजन किया गया है। ये गैर-इंडो-यूरोपीय भाषा बोलने वाले देश में आयोजित होने वाले पहले खेलों थे। यह ओलंपिक खेलों भी था जिसमें बीजिंग में 2008 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों के मुकाबले सबसे ज्यादा विश्व रिकार्ड तोड़ा गया था। सोवियत संघ, पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना, इंडोनेशिया, इजरायल, थाईलैंड, और सारलैंड ने अपनी ओलंपिक की शुरुआत 1952 में हेलसिंकी में की। . 7 संबंधोंः फिनलैंड ओलंपिक विवरण, ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेल, 1948 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक, 1952 शीतकालीन ओलंपिक, 1952 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक पदक तालिका, 1956 शीतकालीन ओलंपिक, 1956 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक। फिनलैंड ने पहली बार ओलंपिक खेलों में 1908 में भाग लिया और तब से हर ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों और प्रत्येक शीतकालीन ओलंपिक खेलों में प्रतिस्पर्धा करने के लिए एथलीटों को भेजा है। हेलसिंकी में 1952 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक के लिए फिनलैंड भी मेजबान देश था फिनिश एथलीट ने ग्रीष्मकालीन खेलों में कुल 302 पदक जीते हैं, ज्यादातर एथलेटिक्स और कुश्ती में। फिनलैंड ने शीतकालीन खेलों में 161 पदक भी जीते हैं, ज्यादातर नोर्ड स्कीइंग आयोजनों में हैं। फ़िनलैंड के लिए राष्ट्रीय ओलंपिक समिति फिनिश ओलंपिक समिति है, और 1907 में फिनलैंड एक स्वायत्त हिस्सा था, रूसी साम्राज्य (1917 तक) के फिनलैंड के ग्रांड डची। . ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों या ओलंपियाड के खेलों (Jeux olympiques d'été), जो पहली बार 1896 में आयोजित किया गया था, एक अंतर्राष्ट्रीय मल्टी-स्पोर्ट इवेंट आयोजन है जो चार साल से एक अलग शहर द्वारा आयोजित किया जाता है। सबसे हालिया ओलंपिक रियो डी जनेरियो, ब्राजील में आयोजित किए गए थे। अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति खेल का आयोजन करती है और मेजबान शहर की तैयारियों की देखरेख करता है। प्रत्येक ओलंपिक आयोजन में, स्वर्ण पदक प्रथम स्थान पर दिए जाते हैं, दूसरे स्थान पर रजत पदक से सम्मानित किया जाता है, और तीसरे के लिए कांस्य पदक प्रदान किए जाते हैं; यह परंपरा 1904 में शुरू हुई। ग्रीष्मकालीन ओलंपिक की सफलता के कारण शीतकालीन ओलंपिक खेलों का निर्माण किया गया था। ओलंपिक में 42 स्पर्धाओं की प्रतियोगिता में वृद्धि हुई है, जो कि 1896 में 14 देशों के 250 से कम पुरुष प्रतिद्वंद्वियों के साथ 2012 में 204 देशों से 10,768 प्रतिद्वंद्वियों (5,992 पुरुष, 4,776 महिलाओं) के साथ 302 घटनाओं के साथ बढ़ी है। अठारह देशों ने ग्रीष्मकालीन ओलंपिक की मेजबानी की है। संयुक्त राज्य अमेरिका में किसी भी अन्य देश से अधिक चार ग्रीष्मकालीन ओलंपिक (1904, 1932, 1984, 1996), की मेजबानी की है, और ग्रेट ब्रिटेन लंदन में तीन ग्रीष्मकालीन ओलंपिक (1908, 1948, 2012), सभी की मेजबानी की है। एथेंस (1896, 2004), पेरिस (1900, 1924), लॉस एंजिल्स (1932, 1984) और टोक्यो (1964, 2020): चार शहरों में दो ग्रीष्मकालीन ओलंपिक आयोजित किए गए हैं। ग्रीष्मकालीन ओलंपिक कई बार होस्ट करने के लिए पश्चिमी दुनिया के बाहर टोक्यो पहला शहर है। एशिया ने ग्रीष्मकालीन ओलंपिक की मेजबानी की है, जापान, दक्षिण कोरिया और चीन में चार बार (1964, 1988, 2008, 2020)। दक्षिणी गोलार्ध में आयोजित केवल ग्रीष्मकालीन ओलंपिक ऑस्ट्रेलिया (1956, 2000) और ब्राजील (2016) में रहे हैं। 2016 के खेल दक्षिण अमेरिका में होने वाले पहले ग्रीष्मकालीन ओलंपिक हैं और स्थानीय शीतकालीन सत्र के दौरान आयोजित होने वाले पहले थे। अफ्रीका अभी तक एक ग्रीष्मकालीन ओलंपिक की मेजबानी नहीं है। केवल पांच देशों-ग्रीस, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, ग्रेट ब्रिटेन, और हर ग्रीष्मकालीन ओलिंपिक खेलों में स्विट्जरलैंड की है प्रतिनिधित्व करता रहा। प्रत्येक ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों में कम से कम एक स्वर्ण पदक जीतने वाला एकमात्र देश ग्रेट ब्रिटेन है संयुक्त राज्य अमेरिका ने सभी समय के पदक तालिका का नेतृत्व किया। . 1948 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक, जिसे आधिकारिक तौर पर XIV ओलंपियाड के खेलों के नाम से जाना जाता है, एक अंतरराष्ट्रीय मल्टी-स्पोर्ट कार्यक्रम था, जो लंदन, यूनाइटेड किंगडम में आयोजित किया गया था। द्वितीय विश्व युद्ध के कारण 12 साल के अंतराल के बाद, ये बर्लिन में 1936 के खेलों के बाद से पहली बार ग्रीष्मकालीन ओलंपिक थे। 1940 के खेलों को टोक्यो के लिए और फिर हेलसिंकी के लिए निर्धारित किया गया था; 1944 के खेलों को लंदन के लिए अनौपचारिक रूप से तैयार किया गया था। यह दूसरा मौका था कि लंदन ने ओलंपिक खेलों की मेजबानी की थी, जो पहले 1908 में स्थल रहा था, चालीस साल पहले। (ओलंपिक 2012 में फिर से लंदन लौट आया, जिससे यह खेल तीन गुना तक होस्ट करने वाला एकमात्र शहर बना।) 1948 का खेल सिगफ्रिड एड्स्ट्रॉम के आईओसी अध्यक्ष के तहत दो ओलंपिक खेलों में से पहला था। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद आर्थिक जलवायु और राशन के चलते घटना को आधिकारिक खेलों के रूप में जाना जाने लगा। खेलों के लिए कोई नया स्थान नहीं बनाया गया (मुख्य रूप से वेम्बली स्टेडियम और वेम्बेल्ले पार्क में एम्पायर पूल में होने वाली घटनाओं के साथ), और 19 36 के खेलों और एथलीटों को ओलंपिक ग्राम के बजाय वम्बले क्षेत्र में मौजूदा आवास में रखा गया था बाद में 1952 खेल। 19 खेल विषयों में 4,104 एथलीट, 3,714 पुरुष और 390 महिलाओं द्वारा 59 देशों का एक रिकॉर्ड था। जर्मनी और जापान को खेलों में आमंत्रित नहीं किया गया; सोवियत संघ को आमंत्रित किया गया था लेकिन किसी भी एथलीटों को भेजने के लिए नहीं चुना। संयुक्त राज्य की टीम ने सबसे अधिक पदक, 84, और सबसे स्वर्ण पदक, 38 जीता। मेजबान राष्ट्र ने 23 पदक जीते, उनमें से तीन स्वर्ण पदक। खेल में स्टार कलाकारों में से एक डच स्पीकर फेनी ब्लैंकर-कोएन था। डबर्ड "फ्लाइंग गृहिणी", दो की 30 वर्षीय मां ने एथलेटिक्स में चार स्वर्ण पदक जीत लिए। डिकैथलॉन में, अमेरिकी बॉब मेथियास 17 वर्ष की आयु में ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतने वाले सबसे कम उम्र के पुरुष बन गए। सबसे व्यक्तिगत पदक फिनलैंड के वेको हुटानेन जो तीन स्वर्ण, एक रजत और पुरुषों की जिमनास्टिक में एक कांस्य ले लिया द्वारा जीते गए। . 1952 शीतकालीन ओलंपिक (नार्वेजियनः Vinter-OL 1952), औपचारिक रूप से VI ओलंपिक शीतकालीन खेलों (फ्रेंचः Les VIes Jeux olympiques d'hiver), के रूप में जाना जाता है, 14 से 25 फरवरी तक ओस्लो, नॉर्वे में हुई थी। शीतकालीन ओलंपिक खेलों की मेजबानी ओस्लो के बारे में चर्चाएं 1935 के आरंभ से शुरू हुई; शहर 1948 के खेलों की मेजबानी करना चाहता था, लेकिन द्वितीय विश्व युद्ध ने यह असंभव बना दिया। इसके बजाय, ओस्लो ने एक प्रतियोगिता में 1952 के खेलों की मेजबानी करने का अधिकार जीता जो इटली में कॉर्टिना डी अम्पेज़ो और संयुक्त राज्य अमेरिका में झील प्लेसिड शामिल था। सभी स्थानों ओस्लो के महानगरीय क्षेत्र में थे, लेकिन अल्पाइन स्कीइंग घटनाओं को छोड़कर, जो नोरफेजेल में आयोजित किया गया था, 113 किमी (70 मील) राजधानी से। एक नया होटल प्रेस और गणमान्य व्यक्तियों के लिए बनाया गया था, साथ में तीन अस्पताल और एथलीटों और कोचों के लिए, पहला आधुनिक एथलीट गांव बनाने के लिए। ओस्लो शहर ने उन राजस्व की बदौलत खेल की मेजबानी के वित्तीय बोझ को जन्म दिया जो उन्होंने उत्पन्न किया था। खेलों ने 30 देशों के 694 एथलीटों को आकर्षित किया, जिन्होंने चार खेल और 22 आयोजनों में भाग लिया। द्वितीय विश्व युद्ध के परिणाम में 1948 के खेलों को याद करने के लिए मजबूर होने के बाद, जापान और जर्मनी ने शीतकालीन ओलंपिक प्रतियोगिता में अपनी रिटर्न बनाया। जर्मनी का प्रतिनिधित्व केवल पश्चिमी जर्मन एथलीटों द्वारा किया गया था क्योंकि पूर्वी जर्मनी ने एक एकीकृत टीम के रूप में प्रतिस्पर्धा करने से इनकार कर दिया। पुर्तगाल और न्यूजीलैंड ने अपने शीतकालीन ओलंपिक की शुरुआत की, और पहली बार महिलाओं को पार से देश स्कीइंग में प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति दी गई। नार्वे के ट्रक चालक हाल्मर एंडर्सन ने चार स्पीड स्केटिंग स्केटिंग स्कीटों में से तीन जीतकर खेलों में सबसे अधिक सजाया गया एथलीट बनने का मौका दिया। बोस्लेउ में जर्मनी ने अपने पूर्व प्रमुखता को फिर से शुरू किया, जिसमें चार- और दो-पुरुष आयोजनों में जीत दर्ज की गई। संयुक्त राज्य अमेरिका के डिक बटन ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में पहला ट्रिपल जंपिंग हासिल किया, जिसमें उन्होंने लगातार दूसरे पुरुषों के स्केटिंग ओलंपिक खिताब का दावा किया। 1952 के खेलों में एक प्रदर्शन खेल, बेंडी शामिल था, लेकिन केवल तीन नॉर्डिक देशों ने टूर्नामेंट में भाग लिया। नॉर्वे ने कुल 16 पदकों के साथ कुल पदक गिनती का वर्चस्व किया, उनमें से सात स्वर्ण खेल एक झंडे की प्रस्तुति के साथ बंद हुआ जो कि एक शीतकालीन ओलंपिक मेजबान शहर से अगले तक पारित हो जाएगा। ध्वज, जिसे "ओस्लो ध्वज" के रूप में जाना जाता है, प्रत्येक बाद के शीतकालीन खेलों के दौरान मेजबान शहर में प्रदर्शित किया गया है। . यह हेलसिंकी, फिनलैंड में आयोजित 1952 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक के पदक तालिका की पूरी मेज है यह रैंकिंग एक देश द्वारा अर्जित स्वर्ण पदकों की संख्या से क्रमबद्ध है। यदि, उपर्युक्त के बाद, देश अभी भी बांध रहे हैं, समान रैंकिंग दी गई है और उन्हें वर्णानुक्रम में सूचीबद्ध किया गया है। यह आईओसी, आईएएएफ और बीबीसी द्वारा उपयोग की जाने वाली प्रणाली का पालन करता है। श्रेणीःओलम्पिक खेल. 1956 शीतकालीन ओलंपिक, आधिकारिक तौर पर VII ओलिंपिक शीतकालीन खेलों (फ्रेंचः Les VIIes Jeux olympiques d'hiver) (इटालियनः VII Giochi olimpici invernali), के रूप में जाना जाता है, इटली के कॉर्टिना डी अम्पेज़ो में मनाया जाने वाला शीतकालीन बहु-खेल आयोजन था। खेलों का यह आयोजन 26 जनवरी से 5 फरवरी 1956 तक आयोजित किया गया था। कॉर्टिना, जिसे मूल रूप से 1944 के शीतकालीन ओलंपिक से सम्मानित किया गया था, ने 1956 के खेलों की मेजबानी के अधिकार के लिए मॉन्ट्रियल, कोलोराडो स्प्रिंग्स और झील प्लेसिड को हरा दिया। कॉर्टिना गेम्स अद्वितीय थे क्योंकि कई जगहें एक-दूसरे के पैदल दूरी के भीतर थीं। आयोजन समिति को बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए इतालवी सरकार से वित्तीय समर्थन प्राप्त हुआ, लेकिन खेल के लिए बाकी सभी को निजी तौर पर वित्तपोषण करना पड़ा। नतीजतन, वित्तपोषण के लिए कॉर्पोरेट प्रायोजन पर भारी निर्भर करने के लिए सबसे पहले आयोजन समिति थी। 32 राष्ट्रों ने शीतकालीन ओलंपिक देशों में भाग लेने वाले सबसे बड़ी संख्या में चार खेल और चौबीस घटनाओं में भाग लिया। सोवियत संघ ने अपनी शीतकालीन ओलंपिक की शुरुआत की और किसी भी देश से ज्यादा पदक जीते। ऑस्ट्रियाई टोनी सैलर एक एकल ओलंपिक में सभी तीन अल्पाइन स्कीइंग घटनाओं को छोडने वाले पहले व्यक्ति बन गए। इन खेलों में अंतिम बार स्केटिंग प्रतियोगिता आयोजित की गई थी। तर्कसंगत रूप से, अल्पाइन स्कीइंग घटनाओं में केवल एकमात्र समस्या बर्फ की कमी थी। इसका समाधान करने के लिए, इतालवी सेना ने पर्याप्त मात्रा में हिमपात करने के लिए पाठ्यक्रमों को पर्याप्त रूप से कवर किया गया था। राजनीति ने मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया में ग्रीष्मकालीन खेलों के रूप में 1956 के शीतकालीन खेलों को प्रभावित नहीं किया था, जहां हंगेरियन विद्रोह और सुवे युद्ध के सोवियत प्रतिक्रिया ने खेलों को बहिष्कार करने के लिए कई देशों का नेतृत्व किया था। कॉर्टिना ओलंपिक पहले शीतकालीन ओलंपिक थे जो एक बहु-राष्ट्रीय श्रोताओं के लिए टेलीविजन थे। चूंकि कम्युनिस्ट देशों की श्रेष्ठ तकनीक थी, फ़िनलैंड जैसे पूर्वी यूरोपीय देशों और पश्चिम जर्मनी और ऑस्ट्रिया के कुछ पृथक भौगोलिक क्षेत्रों को केवल खेलों के साम्यवादी प्रसारण प्राप्त करने में सक्षम थे। यह शीतयुद्ध के प्रचार के सामने सोवियत संघ के लिए एक महत्वपूर्ण जीत माना जाता था,Schwoch (2009), pp. 1956 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक, जिसे आधिकारिक तौर पर XVI ओलंपियाड के खेलों के नाम से जाना जाता है, 1956 में मेलबर्न, विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया में आयोजित एक अंतर्राष्ट्रीय मल्टी-स्पोर्ट कार्यक्रम थे, इसके अलावा घुड़सवार घटनाओं के अलावा, जो पांच महीने पहले स्टॉकहोम में आयोजित किए गए थे, स्वीडन। 1956 के खेल दक्षिणी गोलार्ध और ओशिनिया में पहली बार आयोजित किए गए थे, साथ ही साथ यूरोप और उत्तरी अमेरिका के बाहर आयोजित होने वाले पहले। मेलबोर्न खेल को होस्ट करने के लिए सबसे दक्षिणी शहर है। संगरोध नियमों के कारण ऑस्ट्रेलिया में घुसपैठ की घटनाएं आयोजित नहीं की जा सकतीं। यह एक दूसरा ओलंपिक था, जिसे पूरी तरह से एक देश में आयोजित नहीं किया गया था, पहला पहला 1920 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक था, जो एंटवर्प, बेल्जियम, एम्स्टर्डम और ओस्टेंड के साथ सह-मेजबान था। .
एक हज़ार नौ सौ बावन ग्रीष्मकालीन ओलंपिक आधिकारिक तौर पर XV ओलंपियाड के खेलों के नाम से जाना जाता था, एक हज़ार नौ सौ बावन में हेलसिंकी, फ़िनलैंड में आयोजित अंतरराष्ट्रीय बहु-खेल आयोजन थे। हेलसिंकी को पहले एक हज़ार नौ सौ चालीस के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक की मेजबानी के लिए चुना गया था, जो द्वितीय विश्व युद्ध के कारण रद्द कर दिया गया था। यह उत्तरी शहर है जिसमें ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों का आयोजन किया गया है। ये गैर-इंडो-यूरोपीय भाषा बोलने वाले देश में आयोजित होने वाले पहले खेलों थे। यह ओलंपिक खेलों भी था जिसमें बीजिंग में दो हज़ार आठ ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों के मुकाबले सबसे ज्यादा विश्व रिकार्ड तोड़ा गया था। सोवियत संघ, पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना, इंडोनेशिया, इजरायल, थाईलैंड, और सारलैंड ने अपनी ओलंपिक की शुरुआत एक हज़ार नौ सौ बावन में हेलसिंकी में की। . सात संबंधोंः फिनलैंड ओलंपिक विवरण, ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेल, एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस ग्रीष्मकालीन ओलंपिक, एक हज़ार नौ सौ बावन शीतकालीन ओलंपिक, एक हज़ार नौ सौ बावन ग्रीष्मकालीन ओलंपिक पदक तालिका, एक हज़ार नौ सौ छप्पन शीतकालीन ओलंपिक, एक हज़ार नौ सौ छप्पन ग्रीष्मकालीन ओलंपिक। फिनलैंड ने पहली बार ओलंपिक खेलों में एक हज़ार नौ सौ आठ में भाग लिया और तब से हर ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों और प्रत्येक शीतकालीन ओलंपिक खेलों में प्रतिस्पर्धा करने के लिए एथलीटों को भेजा है। हेलसिंकी में एक हज़ार नौ सौ बावन ग्रीष्मकालीन ओलंपिक के लिए फिनलैंड भी मेजबान देश था फिनिश एथलीट ने ग्रीष्मकालीन खेलों में कुल तीन सौ दो पदक जीते हैं, ज्यादातर एथलेटिक्स और कुश्ती में। फिनलैंड ने शीतकालीन खेलों में एक सौ इकसठ पदक भी जीते हैं, ज्यादातर नोर्ड स्कीइंग आयोजनों में हैं। फ़िनलैंड के लिए राष्ट्रीय ओलंपिक समिति फिनिश ओलंपिक समिति है, और एक हज़ार नौ सौ सात में फिनलैंड एक स्वायत्त हिस्सा था, रूसी साम्राज्य के फिनलैंड के ग्रांड डची। . ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों या ओलंपियाड के खेलों , जो पहली बार एक हज़ार आठ सौ छियानवे में आयोजित किया गया था, एक अंतर्राष्ट्रीय मल्टी-स्पोर्ट इवेंट आयोजन है जो चार साल से एक अलग शहर द्वारा आयोजित किया जाता है। सबसे हालिया ओलंपिक रियो डी जनेरियो, ब्राजील में आयोजित किए गए थे। अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति खेल का आयोजन करती है और मेजबान शहर की तैयारियों की देखरेख करता है। प्रत्येक ओलंपिक आयोजन में, स्वर्ण पदक प्रथम स्थान पर दिए जाते हैं, दूसरे स्थान पर रजत पदक से सम्मानित किया जाता है, और तीसरे के लिए कांस्य पदक प्रदान किए जाते हैं; यह परंपरा एक हज़ार नौ सौ चार में शुरू हुई। ग्रीष्मकालीन ओलंपिक की सफलता के कारण शीतकालीन ओलंपिक खेलों का निर्माण किया गया था। ओलंपिक में बयालीस स्पर्धाओं की प्रतियोगिता में वृद्धि हुई है, जो कि एक हज़ार आठ सौ छियानवे में चौदह देशों के दो सौ पचास से कम पुरुष प्रतिद्वंद्वियों के साथ दो हज़ार बारह में दो सौ चार देशों से दस,सात सौ अड़सठ प्रतिद्वंद्वियों के साथ तीन सौ दो घटनाओं के साथ बढ़ी है। अठारह देशों ने ग्रीष्मकालीन ओलंपिक की मेजबानी की है। संयुक्त राज्य अमेरिका में किसी भी अन्य देश से अधिक चार ग्रीष्मकालीन ओलंपिक , की मेजबानी की है, और ग्रेट ब्रिटेन लंदन में तीन ग्रीष्मकालीन ओलंपिक , सभी की मेजबानी की है। एथेंस , पेरिस , लॉस एंजिल्स और टोक्यो : चार शहरों में दो ग्रीष्मकालीन ओलंपिक आयोजित किए गए हैं। ग्रीष्मकालीन ओलंपिक कई बार होस्ट करने के लिए पश्चिमी दुनिया के बाहर टोक्यो पहला शहर है। एशिया ने ग्रीष्मकालीन ओलंपिक की मेजबानी की है, जापान, दक्षिण कोरिया और चीन में चार बार । दक्षिणी गोलार्ध में आयोजित केवल ग्रीष्मकालीन ओलंपिक ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील में रहे हैं। दो हज़ार सोलह के खेल दक्षिण अमेरिका में होने वाले पहले ग्रीष्मकालीन ओलंपिक हैं और स्थानीय शीतकालीन सत्र के दौरान आयोजित होने वाले पहले थे। अफ्रीका अभी तक एक ग्रीष्मकालीन ओलंपिक की मेजबानी नहीं है। केवल पांच देशों-ग्रीस, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, ग्रेट ब्रिटेन, और हर ग्रीष्मकालीन ओलिंपिक खेलों में स्विट्जरलैंड की है प्रतिनिधित्व करता रहा। प्रत्येक ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों में कम से कम एक स्वर्ण पदक जीतने वाला एकमात्र देश ग्रेट ब्रिटेन है संयुक्त राज्य अमेरिका ने सभी समय के पदक तालिका का नेतृत्व किया। . एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस ग्रीष्मकालीन ओलंपिक, जिसे आधिकारिक तौर पर XIV ओलंपियाड के खेलों के नाम से जाना जाता है, एक अंतरराष्ट्रीय मल्टी-स्पोर्ट कार्यक्रम था, जो लंदन, यूनाइटेड किंगडम में आयोजित किया गया था। द्वितीय विश्व युद्ध के कारण बारह साल के अंतराल के बाद, ये बर्लिन में एक हज़ार नौ सौ छत्तीस के खेलों के बाद से पहली बार ग्रीष्मकालीन ओलंपिक थे। एक हज़ार नौ सौ चालीस के खेलों को टोक्यो के लिए और फिर हेलसिंकी के लिए निर्धारित किया गया था; एक हज़ार नौ सौ चौंतालीस के खेलों को लंदन के लिए अनौपचारिक रूप से तैयार किया गया था। यह दूसरा मौका था कि लंदन ने ओलंपिक खेलों की मेजबानी की थी, जो पहले एक हज़ार नौ सौ आठ में स्थल रहा था, चालीस साल पहले। एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस का खेल सिगफ्रिड एड्स्ट्रॉम के आईओसी अध्यक्ष के तहत दो ओलंपिक खेलों में से पहला था। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद आर्थिक जलवायु और राशन के चलते घटना को आधिकारिक खेलों के रूप में जाना जाने लगा। खेलों के लिए कोई नया स्थान नहीं बनाया गया , और उन्नीस छत्तीस के खेलों और एथलीटों को ओलंपिक ग्राम के बजाय वम्बले क्षेत्र में मौजूदा आवास में रखा गया था बाद में एक हज़ार नौ सौ बावन खेल। उन्नीस खेल विषयों में चार,एक सौ चार एथलीट, तीन,सात सौ चौदह पुरुष और तीन सौ नब्बे महिलाओं द्वारा उनसठ देशों का एक रिकॉर्ड था। जर्मनी और जापान को खेलों में आमंत्रित नहीं किया गया; सोवियत संघ को आमंत्रित किया गया था लेकिन किसी भी एथलीटों को भेजने के लिए नहीं चुना। संयुक्त राज्य की टीम ने सबसे अधिक पदक, चौरासी, और सबसे स्वर्ण पदक, अड़तीस जीता। मेजबान राष्ट्र ने तेईस पदक जीते, उनमें से तीन स्वर्ण पदक। खेल में स्टार कलाकारों में से एक डच स्पीकर फेनी ब्लैंकर-कोएन था। डबर्ड "फ्लाइंग गृहिणी", दो की तीस वर्षीय मां ने एथलेटिक्स में चार स्वर्ण पदक जीत लिए। डिकैथलॉन में, अमेरिकी बॉब मेथियास सत्रह वर्ष की आयु में ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतने वाले सबसे कम उम्र के पुरुष बन गए। सबसे व्यक्तिगत पदक फिनलैंड के वेको हुटानेन जो तीन स्वर्ण, एक रजत और पुरुषों की जिमनास्टिक में एक कांस्य ले लिया द्वारा जीते गए। . एक हज़ार नौ सौ बावन शीतकालीन ओलंपिक , औपचारिक रूप से VI ओलंपिक शीतकालीन खेलों , के रूप में जाना जाता है, चौदह से पच्चीस फरवरी तक ओस्लो, नॉर्वे में हुई थी। शीतकालीन ओलंपिक खेलों की मेजबानी ओस्लो के बारे में चर्चाएं एक हज़ार नौ सौ पैंतीस के आरंभ से शुरू हुई; शहर एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस के खेलों की मेजबानी करना चाहता था, लेकिन द्वितीय विश्व युद्ध ने यह असंभव बना दिया। इसके बजाय, ओस्लो ने एक प्रतियोगिता में एक हज़ार नौ सौ बावन के खेलों की मेजबानी करने का अधिकार जीता जो इटली में कॉर्टिना डी अम्पेज़ो और संयुक्त राज्य अमेरिका में झील प्लेसिड शामिल था। सभी स्थानों ओस्लो के महानगरीय क्षेत्र में थे, लेकिन अल्पाइन स्कीइंग घटनाओं को छोड़कर, जो नोरफेजेल में आयोजित किया गया था, एक सौ तेरह किमी राजधानी से। एक नया होटल प्रेस और गणमान्य व्यक्तियों के लिए बनाया गया था, साथ में तीन अस्पताल और एथलीटों और कोचों के लिए, पहला आधुनिक एथलीट गांव बनाने के लिए। ओस्लो शहर ने उन राजस्व की बदौलत खेल की मेजबानी के वित्तीय बोझ को जन्म दिया जो उन्होंने उत्पन्न किया था। खेलों ने तीस देशों के छः सौ चौरानवे एथलीटों को आकर्षित किया, जिन्होंने चार खेल और बाईस आयोजनों में भाग लिया। द्वितीय विश्व युद्ध के परिणाम में एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस के खेलों को याद करने के लिए मजबूर होने के बाद, जापान और जर्मनी ने शीतकालीन ओलंपिक प्रतियोगिता में अपनी रिटर्न बनाया। जर्मनी का प्रतिनिधित्व केवल पश्चिमी जर्मन एथलीटों द्वारा किया गया था क्योंकि पूर्वी जर्मनी ने एक एकीकृत टीम के रूप में प्रतिस्पर्धा करने से इनकार कर दिया। पुर्तगाल और न्यूजीलैंड ने अपने शीतकालीन ओलंपिक की शुरुआत की, और पहली बार महिलाओं को पार से देश स्कीइंग में प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति दी गई। नार्वे के ट्रक चालक हाल्मर एंडर्सन ने चार स्पीड स्केटिंग स्केटिंग स्कीटों में से तीन जीतकर खेलों में सबसे अधिक सजाया गया एथलीट बनने का मौका दिया। बोस्लेउ में जर्मनी ने अपने पूर्व प्रमुखता को फिर से शुरू किया, जिसमें चार- और दो-पुरुष आयोजनों में जीत दर्ज की गई। संयुक्त राज्य अमेरिका के डिक बटन ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में पहला ट्रिपल जंपिंग हासिल किया, जिसमें उन्होंने लगातार दूसरे पुरुषों के स्केटिंग ओलंपिक खिताब का दावा किया। एक हज़ार नौ सौ बावन के खेलों में एक प्रदर्शन खेल, बेंडी शामिल था, लेकिन केवल तीन नॉर्डिक देशों ने टूर्नामेंट में भाग लिया। नॉर्वे ने कुल सोलह पदकों के साथ कुल पदक गिनती का वर्चस्व किया, उनमें से सात स्वर्ण खेल एक झंडे की प्रस्तुति के साथ बंद हुआ जो कि एक शीतकालीन ओलंपिक मेजबान शहर से अगले तक पारित हो जाएगा। ध्वज, जिसे "ओस्लो ध्वज" के रूप में जाना जाता है, प्रत्येक बाद के शीतकालीन खेलों के दौरान मेजबान शहर में प्रदर्शित किया गया है। . यह हेलसिंकी, फिनलैंड में आयोजित एक हज़ार नौ सौ बावन ग्रीष्मकालीन ओलंपिक के पदक तालिका की पूरी मेज है यह रैंकिंग एक देश द्वारा अर्जित स्वर्ण पदकों की संख्या से क्रमबद्ध है। यदि, उपर्युक्त के बाद, देश अभी भी बांध रहे हैं, समान रैंकिंग दी गई है और उन्हें वर्णानुक्रम में सूचीबद्ध किया गया है। यह आईओसी, आईएएएफ और बीबीसी द्वारा उपयोग की जाने वाली प्रणाली का पालन करता है। श्रेणीःओलम्पिक खेल. एक हज़ार नौ सौ छप्पन शीतकालीन ओलंपिक, आधिकारिक तौर पर VII ओलिंपिक शीतकालीन खेलों , के रूप में जाना जाता है, इटली के कॉर्टिना डी अम्पेज़ो में मनाया जाने वाला शीतकालीन बहु-खेल आयोजन था। खेलों का यह आयोजन छब्बीस जनवरी से पाँच फरवरी एक हज़ार नौ सौ छप्पन तक आयोजित किया गया था। कॉर्टिना, जिसे मूल रूप से एक हज़ार नौ सौ चौंतालीस के शीतकालीन ओलंपिक से सम्मानित किया गया था, ने एक हज़ार नौ सौ छप्पन के खेलों की मेजबानी के अधिकार के लिए मॉन्ट्रियल, कोलोराडो स्प्रिंग्स और झील प्लेसिड को हरा दिया। कॉर्टिना गेम्स अद्वितीय थे क्योंकि कई जगहें एक-दूसरे के पैदल दूरी के भीतर थीं। आयोजन समिति को बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए इतालवी सरकार से वित्तीय समर्थन प्राप्त हुआ, लेकिन खेल के लिए बाकी सभी को निजी तौर पर वित्तपोषण करना पड़ा। नतीजतन, वित्तपोषण के लिए कॉर्पोरेट प्रायोजन पर भारी निर्भर करने के लिए सबसे पहले आयोजन समिति थी। बत्तीस राष्ट्रों ने शीतकालीन ओलंपिक देशों में भाग लेने वाले सबसे बड़ी संख्या में चार खेल और चौबीस घटनाओं में भाग लिया। सोवियत संघ ने अपनी शीतकालीन ओलंपिक की शुरुआत की और किसी भी देश से ज्यादा पदक जीते। ऑस्ट्रियाई टोनी सैलर एक एकल ओलंपिक में सभी तीन अल्पाइन स्कीइंग घटनाओं को छोडने वाले पहले व्यक्ति बन गए। इन खेलों में अंतिम बार स्केटिंग प्रतियोगिता आयोजित की गई थी। तर्कसंगत रूप से, अल्पाइन स्कीइंग घटनाओं में केवल एकमात्र समस्या बर्फ की कमी थी। इसका समाधान करने के लिए, इतालवी सेना ने पर्याप्त मात्रा में हिमपात करने के लिए पाठ्यक्रमों को पर्याप्त रूप से कवर किया गया था। राजनीति ने मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया में ग्रीष्मकालीन खेलों के रूप में एक हज़ार नौ सौ छप्पन के शीतकालीन खेलों को प्रभावित नहीं किया था, जहां हंगेरियन विद्रोह और सुवे युद्ध के सोवियत प्रतिक्रिया ने खेलों को बहिष्कार करने के लिए कई देशों का नेतृत्व किया था। कॉर्टिना ओलंपिक पहले शीतकालीन ओलंपिक थे जो एक बहु-राष्ट्रीय श्रोताओं के लिए टेलीविजन थे। चूंकि कम्युनिस्ट देशों की श्रेष्ठ तकनीक थी, फ़िनलैंड जैसे पूर्वी यूरोपीय देशों और पश्चिम जर्मनी और ऑस्ट्रिया के कुछ पृथक भौगोलिक क्षेत्रों को केवल खेलों के साम्यवादी प्रसारण प्राप्त करने में सक्षम थे। यह शीतयुद्ध के प्रचार के सामने सोवियत संघ के लिए एक महत्वपूर्ण जीत माना जाता था,Schwoch , pp. एक हज़ार नौ सौ छप्पन ग्रीष्मकालीन ओलंपिक, जिसे आधिकारिक तौर पर XVI ओलंपियाड के खेलों के नाम से जाना जाता है, एक हज़ार नौ सौ छप्पन में मेलबर्न, विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया में आयोजित एक अंतर्राष्ट्रीय मल्टी-स्पोर्ट कार्यक्रम थे, इसके अलावा घुड़सवार घटनाओं के अलावा, जो पांच महीने पहले स्टॉकहोम में आयोजित किए गए थे, स्वीडन। एक हज़ार नौ सौ छप्पन के खेल दक्षिणी गोलार्ध और ओशिनिया में पहली बार आयोजित किए गए थे, साथ ही साथ यूरोप और उत्तरी अमेरिका के बाहर आयोजित होने वाले पहले। मेलबोर्न खेल को होस्ट करने के लिए सबसे दक्षिणी शहर है। संगरोध नियमों के कारण ऑस्ट्रेलिया में घुसपैठ की घटनाएं आयोजित नहीं की जा सकतीं। यह एक दूसरा ओलंपिक था, जिसे पूरी तरह से एक देश में आयोजित नहीं किया गया था, पहला पहला एक हज़ार नौ सौ बीस ग्रीष्मकालीन ओलंपिक था, जो एंटवर्प, बेल्जियम, एम्स्टर्डम और ओस्टेंड के साथ सह-मेजबान था। .
सेमीफाइनल राउंड में पहुंचकर मेरी कॉम ने भारत के लिए पदक को पक्का कर लिया है। राउंड के बारे में बात करें तो इस भारतीय मुक्केबाज ने क्वार्टर फाइनल में वेनेजुएला की कार्ला मैगलियोको को 3-0 से शिकस्त दी है। राउंड के दौरान बड़ी संख्या में मेरी कॉम के प्रशंसकों ने उनका उत्साहवर्धन किया। बताया गया है कि प्रतियोगिता के लिए विश्व संस्था और रियो ओलंपिक आयोजन समिति ने मुक्केबाजों को व्यक्ितगत तौर पर आमंत्रित किया है। अब बात करें मेरी कॉम के अगले मुकाबले की, तो इनका अगला मुकाबला शनिवार को वर्जीनिया फुच से होगा। प्रतियोगिता में अन्य प्रतिभागियों की बात करें तो पुरुष वर्ग में रोहित टोकस (60 किग्रा) पहले दौर में हारकर राउंड से बाहर हो गए। बता दें कि इस राउंड में वह वेनेजुएला के लुईस काबरेरा से 0-3 से हारकर राउंड से बाहर हुए हैं।
सेमीफाइनल राउंड में पहुंचकर मेरी कॉम ने भारत के लिए पदक को पक्का कर लिया है। राउंड के बारे में बात करें तो इस भारतीय मुक्केबाज ने क्वार्टर फाइनल में वेनेजुएला की कार्ला मैगलियोको को तीन-शून्य से शिकस्त दी है। राउंड के दौरान बड़ी संख्या में मेरी कॉम के प्रशंसकों ने उनका उत्साहवर्धन किया। बताया गया है कि प्रतियोगिता के लिए विश्व संस्था और रियो ओलंपिक आयोजन समिति ने मुक्केबाजों को व्यक्ितगत तौर पर आमंत्रित किया है। अब बात करें मेरी कॉम के अगले मुकाबले की, तो इनका अगला मुकाबला शनिवार को वर्जीनिया फुच से होगा। प्रतियोगिता में अन्य प्रतिभागियों की बात करें तो पुरुष वर्ग में रोहित टोकस पहले दौर में हारकर राउंड से बाहर हो गए। बता दें कि इस राउंड में वह वेनेजुएला के लुईस काबरेरा से शून्य-तीन से हारकर राउंड से बाहर हुए हैं।
लोग किडनी की समस्या से जूझ रहे हैं, उन्हें बहुत टमाटर नहीं खाना चाहिए। एक रिसर्च के अनुसार टमाटर में पोटेशियम की मात्रा अत्यधिक होती है और डॉक्टरों के मुताबिक किडनी की बीमारी से पीड़ित मरीजों में पोटेशियम की मात्रा संतुलित होनी चाहिए। क्योंकि पोटेशियम बढ़ने से किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है और किडनी डैमेज का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा टमाटर में एक ऑक्सालेट तत्व भी पाया जाता है, जो किडनी के मरीजों के लिए हानिकारक हो सकता है। जो लोग अत्यधिक टमाटर का सेवन करते हैं, उन्हें गैस, एसिडिटी या कब्ज की समस्या हो सकती है। सलाद में टमाटर खाना अत्यधिक पसंद किया जाता है, लेकिन जिन्हें पाचन संबंधी समस्या है, उन्हें टमाटर का सेवन कम करना चाहिए। अत्यधिक मात्रा में जब टमाटर खाया जाता है तो यह अपच की समस्या भी पैदा कर देता है, इस कारण पेट में गैस बनने लगती है। जिन लोगों को जोड़ों के दर्द और सूजन की समस्या बनी रहती है, उन्हें टमाटर का सेवन बिल्कुल ही कम करना चाहिए, क्योंकि टमाटर में क्षारीय पदार्थ अधिक मात्रा में मौजूद होते हैं, जो जोड़ों के दर्द को बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा टमाटर में सोलनिन तत्व भी पाया जाता है, जो शरीर के ऊतकों में कैल्शियम की मात्रा को बढ़ाता है, जिससे जोड़ों में अधिक दर्द और सूजन की समस्या होने लगती है। टमाटर अधिक खाने पर स्किन एलर्जी की समस्या भी हो सकती है। टमाटर में लाइकोपिन तत्व अधिक होता है, जिससे लाइकोपेनोडर्मिया नामक स्किन एलर्जी हो सकती है। किसी भी व्यक्ति को 1 दिन में 75 मिलीग्राम से अधिक मात्रा में लाइकोपीन का सेवन नहीं करना चाहिए। ज्यादा टमाटर खाने से उसमें पाए जाने वाले हिस्टामाइन तत्व के कारण शरीर पर चकत्ते भी हो सकते हैं। अक्सर आपने गौर किया होगा कि किसी-किसी व्यक्ति के शरीर से एक अजीब तरह की दुर्गंध आती है, दरअसल इसके लिए टरपीन्स नामक तत्व जिम्मेदार होता है। शरीर में जब इसकी अधिकता हो जाती है, तो उसके कारण एक अजीब सी दुर्गंध आने लगती है। टमाटर में भी कुछ मात्रा में टरपीन्स पाया जाता है, इसलिए ज्यादा टमाटर खाने से शारीरिक दुर्गंध बढ़ने की आशंका बनी रहती है। इसके अलावा ज्यादा टमाटर खाने से पथरी की भी समस्या हो सकती है। पथरी की समस्या से पीड़ित लोगों को टमाटर का सेवन बिल्कुल कम कर देना चाहिए।
लोग किडनी की समस्या से जूझ रहे हैं, उन्हें बहुत टमाटर नहीं खाना चाहिए। एक रिसर्च के अनुसार टमाटर में पोटेशियम की मात्रा अत्यधिक होती है और डॉक्टरों के मुताबिक किडनी की बीमारी से पीड़ित मरीजों में पोटेशियम की मात्रा संतुलित होनी चाहिए। क्योंकि पोटेशियम बढ़ने से किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है और किडनी डैमेज का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा टमाटर में एक ऑक्सालेट तत्व भी पाया जाता है, जो किडनी के मरीजों के लिए हानिकारक हो सकता है। जो लोग अत्यधिक टमाटर का सेवन करते हैं, उन्हें गैस, एसिडिटी या कब्ज की समस्या हो सकती है। सलाद में टमाटर खाना अत्यधिक पसंद किया जाता है, लेकिन जिन्हें पाचन संबंधी समस्या है, उन्हें टमाटर का सेवन कम करना चाहिए। अत्यधिक मात्रा में जब टमाटर खाया जाता है तो यह अपच की समस्या भी पैदा कर देता है, इस कारण पेट में गैस बनने लगती है। जिन लोगों को जोड़ों के दर्द और सूजन की समस्या बनी रहती है, उन्हें टमाटर का सेवन बिल्कुल ही कम करना चाहिए, क्योंकि टमाटर में क्षारीय पदार्थ अधिक मात्रा में मौजूद होते हैं, जो जोड़ों के दर्द को बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा टमाटर में सोलनिन तत्व भी पाया जाता है, जो शरीर के ऊतकों में कैल्शियम की मात्रा को बढ़ाता है, जिससे जोड़ों में अधिक दर्द और सूजन की समस्या होने लगती है। टमाटर अधिक खाने पर स्किन एलर्जी की समस्या भी हो सकती है। टमाटर में लाइकोपिन तत्व अधिक होता है, जिससे लाइकोपेनोडर्मिया नामक स्किन एलर्जी हो सकती है। किसी भी व्यक्ति को एक दिन में पचहत्तर मिलीग्राम से अधिक मात्रा में लाइकोपीन का सेवन नहीं करना चाहिए। ज्यादा टमाटर खाने से उसमें पाए जाने वाले हिस्टामाइन तत्व के कारण शरीर पर चकत्ते भी हो सकते हैं। अक्सर आपने गौर किया होगा कि किसी-किसी व्यक्ति के शरीर से एक अजीब तरह की दुर्गंध आती है, दरअसल इसके लिए टरपीन्स नामक तत्व जिम्मेदार होता है। शरीर में जब इसकी अधिकता हो जाती है, तो उसके कारण एक अजीब सी दुर्गंध आने लगती है। टमाटर में भी कुछ मात्रा में टरपीन्स पाया जाता है, इसलिए ज्यादा टमाटर खाने से शारीरिक दुर्गंध बढ़ने की आशंका बनी रहती है। इसके अलावा ज्यादा टमाटर खाने से पथरी की भी समस्या हो सकती है। पथरी की समस्या से पीड़ित लोगों को टमाटर का सेवन बिल्कुल कम कर देना चाहिए।
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। गायिका- अभिनेत्री शर्ली सेतिया, जो निकम्मा के साथ बॉलीवुड में अपना डेब्यू करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं, एक अन्य प्रोजेक्ट्स में नागा शौर्य के अपोजिट लीड फीमेल का किरदार निभाने वाली हैं। फिल्म के टाइटल को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है और इस वर्ष इसके फ्लोर पर जाने की उम्मीद है। यह फिल्म अब तक शर्ली की एक और डेब्यू फिल्म है, यह फिल्म टॉलीवुड इंडस्ट्री से है। फिल्म अनीश कृष्णा द्वारा अभिनीत और उषा मूलपुरी द्वारा प्रोड्यूस्ड होगी। फिल्म के लिए म्यूजिक महाति स्वरा सागर द्वारा तैयार किया जाएगा। ओटीटी मंच पर 'मसका' के साथ अभिनय की शुरुआत करने वाली शर्ली निकम्मा में अभिमन्यु दासानी के साथ बॉलीवुड में भी अपना डेब्यू करने जा रही है.
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। गायिका- अभिनेत्री शर्ली सेतिया, जो निकम्मा के साथ बॉलीवुड में अपना डेब्यू करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं, एक अन्य प्रोजेक्ट्स में नागा शौर्य के अपोजिट लीड फीमेल का किरदार निभाने वाली हैं। फिल्म के टाइटल को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है और इस वर्ष इसके फ्लोर पर जाने की उम्मीद है। यह फिल्म अब तक शर्ली की एक और डेब्यू फिल्म है, यह फिल्म टॉलीवुड इंडस्ट्री से है। फिल्म अनीश कृष्णा द्वारा अभिनीत और उषा मूलपुरी द्वारा प्रोड्यूस्ड होगी। फिल्म के लिए म्यूजिक महाति स्वरा सागर द्वारा तैयार किया जाएगा। ओटीटी मंच पर 'मसका' के साथ अभिनय की शुरुआत करने वाली शर्ली निकम्मा में अभिमन्यु दासानी के साथ बॉलीवुड में भी अपना डेब्यू करने जा रही है.
से क्षमा चाहेंगे । बढ़ाओ, बढ़ाओ ! अबे मूर्ख गाड़ीवान, बढ़ाता क्यों नहीं ?" मेरी आँखों में अपनी दुर्दशा की कल्पना से आँसू आ गए थे । को पोंछते हुए मैं मन-ही-मन कहता चला गया - "हाँ, ठीक है ! कल सुबह जीर्काव के साथ मेरा द्वन्द्वयुद्ध होगा, यह निश्चित है । साथ ही यह भी निश्चित है कि उस द्वन्द्वयुद्ध के कारण मैं फ़स से निकाल दिया जाऊँगा । पर कुछ भी हो, मैं द्वन्द्वयुद्ध के लिए पिस्तौलें कहाँ से लाऊँगा ? अपने वेतन में से कुछ रुपये मुझे "एडवान्स' के बतौर लेने होंगे और उनमें दो-एक पिस्तौलें खरीदनी 'पड़ेंगी। और बारूद और गोली ? जो लोग द्वन्द्वयुद्ध में मेरे 'द्वितीय ' होंगे, यह उनका काम है, मेरा नहीं । पर तड़के ही मैं आदमियों को -कहाँ से ढूँढूँगा ? कौन मेरा 'द्वितीय' बनना स्वीकार करेगा ? रुपये का प्रबन्ध कैसे हो सकेगा ? - दुत ! " सहसा अपनी ऊटपटांग कल्पना की मूर्खता के सम्बन्ध में मुझे चैतन्य हुआ । फिर भी मैंने वास्तविकता की ओर से मुँह मोड़ लेने की चेष्टा की और गाड़ीवाले को लक्ष्य करके बोला - "बढ़ाओ ! मूर्ख कहीं का ! तेज़ क्यों नहीं हाँकता ! " "यह लीजिये, सरकार ! " कहकर उस गरीब ने घोड़े को फिर एक बार चाबुक से मारा । कुछ दूर चलने पर अकस्मात् एक दूसरा ही विचार मेरे मन में उत्पन्न हुआ । मैंने सोचा - "यदि यहाँ से सीधे घर चला जाऊँ और आराम से सो रहूँ, तो कैसा रहेगा ? पर क्या वहाँ भी मुझे नींद आवेगी ! उफ़ ! कैसी भयंकर भूल आज के दिन मुझसे हुई ! क्यों मैंने उस नीच जीकांव की विदायी के भोज में शरीक होने की मूर्खता की ! बढ़ाश्रो, बढ़ाश्रो ! गधा कहीं का ! सुनता नहीं ?" 'अच्छा, यदि वे लोग सब मिलकर मुझे हवालात में दे दें? पर नहीं, ऐसा करने का साहस वे नहीं कर सकते। और यदि जीव ने मुझे अपने से हीन श्रेणी का समझ कर मेरे साथ द्वन्द्वयुद्ध करने से वी कार कर दिया, तो उस हालत में मैं क्या करूँगा ? उस हालत में में - हाँ, मैं यह करूँगा कि उसके दरवाज़े के पास जाकर खड़ा हो जाऊँगा,. मैं ज्योंही वह गाड़ी में सवार होने के लिए बाहर निकलेगा, त्योही में उसका गला पकड़ कर, उसका ओवरकोट खींचकर फाड़ डालूँगा. और उसके हाथ में पूरी ताकत से अपने दाँत गड़ा कर खून निक लने के पहले नहीं छोडूं गा । इसके बाद रास्ते में चलने वाले सव लोगों को पुकार कर कहूँगा - तुम सब लोग देखो ! एक आत्मदग्ध रहताश व्यक्ति किस हद तक बौखला सकता है ! इसका ज्वलन्त दृष्टान्त देख लो ! मेरी बौखलाहट से उत्तेजित होकर जीर्काव निश्चय ही मुझे पीटना शुरू कर देगा । पर मैं राहगीरों को लक्ष्य करके चिल्लाचिल्ला कर कहता जाऊँ गा - 'यह देखो ! यह महाशय काकेशिया पर विजय प्राप्त करने जा रहे हैं ! पर इनके मुँह पर मेरे थूक के जो दाग़ हैं, उन्हें देख लो ! इसके बाद निश्चय ही मैं गिरफ़्तार हो जाऊँगा, मेरे लिए मेरे का अस्तित्व ही धरातल से लुप्त हो जायगा । मैं जेल चला जाऊँगा, और यह भी सम्भव है कि अन्त में मुझे साइबेरिया में जाकर पाँच वर्ष के लिए निर्वासन का दंड भुगतना
से क्षमा चाहेंगे । बढ़ाओ, बढ़ाओ ! अबे मूर्ख गाड़ीवान, बढ़ाता क्यों नहीं ?" मेरी आँखों में अपनी दुर्दशा की कल्पना से आँसू आ गए थे । को पोंछते हुए मैं मन-ही-मन कहता चला गया - "हाँ, ठीक है ! कल सुबह जीर्काव के साथ मेरा द्वन्द्वयुद्ध होगा, यह निश्चित है । साथ ही यह भी निश्चित है कि उस द्वन्द्वयुद्ध के कारण मैं फ़स से निकाल दिया जाऊँगा । पर कुछ भी हो, मैं द्वन्द्वयुद्ध के लिए पिस्तौलें कहाँ से लाऊँगा ? अपने वेतन में से कुछ रुपये मुझे "एडवान्स' के बतौर लेने होंगे और उनमें दो-एक पिस्तौलें खरीदनी 'पड़ेंगी। और बारूद और गोली ? जो लोग द्वन्द्वयुद्ध में मेरे 'द्वितीय ' होंगे, यह उनका काम है, मेरा नहीं । पर तड़के ही मैं आदमियों को -कहाँ से ढूँढूँगा ? कौन मेरा 'द्वितीय' बनना स्वीकार करेगा ? रुपये का प्रबन्ध कैसे हो सकेगा ? - दुत ! " सहसा अपनी ऊटपटांग कल्पना की मूर्खता के सम्बन्ध में मुझे चैतन्य हुआ । फिर भी मैंने वास्तविकता की ओर से मुँह मोड़ लेने की चेष्टा की और गाड़ीवाले को लक्ष्य करके बोला - "बढ़ाओ ! मूर्ख कहीं का ! तेज़ क्यों नहीं हाँकता ! " "यह लीजिये, सरकार ! " कहकर उस गरीब ने घोड़े को फिर एक बार चाबुक से मारा । कुछ दूर चलने पर अकस्मात् एक दूसरा ही विचार मेरे मन में उत्पन्न हुआ । मैंने सोचा - "यदि यहाँ से सीधे घर चला जाऊँ और आराम से सो रहूँ, तो कैसा रहेगा ? पर क्या वहाँ भी मुझे नींद आवेगी ! उफ़ ! कैसी भयंकर भूल आज के दिन मुझसे हुई ! क्यों मैंने उस नीच जीकांव की विदायी के भोज में शरीक होने की मूर्खता की ! बढ़ाश्रो, बढ़ाश्रो ! गधा कहीं का ! सुनता नहीं ?" 'अच्छा, यदि वे लोग सब मिलकर मुझे हवालात में दे दें? पर नहीं, ऐसा करने का साहस वे नहीं कर सकते। और यदि जीव ने मुझे अपने से हीन श्रेणी का समझ कर मेरे साथ द्वन्द्वयुद्ध करने से वी कार कर दिया, तो उस हालत में मैं क्या करूँगा ? उस हालत में में - हाँ, मैं यह करूँगा कि उसके दरवाज़े के पास जाकर खड़ा हो जाऊँगा,. मैं ज्योंही वह गाड़ी में सवार होने के लिए बाहर निकलेगा, त्योही में उसका गला पकड़ कर, उसका ओवरकोट खींचकर फाड़ डालूँगा. और उसके हाथ में पूरी ताकत से अपने दाँत गड़ा कर खून निक लने के पहले नहीं छोडूं गा । इसके बाद रास्ते में चलने वाले सव लोगों को पुकार कर कहूँगा - तुम सब लोग देखो ! एक आत्मदग्ध रहताश व्यक्ति किस हद तक बौखला सकता है ! इसका ज्वलन्त दृष्टान्त देख लो ! मेरी बौखलाहट से उत्तेजित होकर जीर्काव निश्चय ही मुझे पीटना शुरू कर देगा । पर मैं राहगीरों को लक्ष्य करके चिल्लाचिल्ला कर कहता जाऊँ गा - 'यह देखो ! यह महाशय काकेशिया पर विजय प्राप्त करने जा रहे हैं ! पर इनके मुँह पर मेरे थूक के जो दाग़ हैं, उन्हें देख लो ! इसके बाद निश्चय ही मैं गिरफ़्तार हो जाऊँगा, मेरे लिए मेरे का अस्तित्व ही धरातल से लुप्त हो जायगा । मैं जेल चला जाऊँगा, और यह भी सम्भव है कि अन्त में मुझे साइबेरिया में जाकर पाँच वर्ष के लिए निर्वासन का दंड भुगतना
सारण जिला के माँझी में नॉन बैंकिंग संस्था गोल्ड माइन के आफिस के ताला कोर्ट का आदेश पर बियफे का दिने प्रशासन तूड़वा दिहलसि आ बीडीओ सूरज कुमार सिंह आ दारोगा एसएन सिन्हा अउर भिखारी राम के मौजूदगी में कार्यालय के फर्नीचर, आलमारी, कम्प्यूटर वगैरह जब्त क लिहल गइल. आफिस के आलमारी का दराज से 2,21,120 रुपिया नगदो बरामद भइल. करीब डेढ़ बरीस पहिले तब के बीडीओ शंभू शरण सिंह एह संस्था पर छापा मरलन त कर्मचारी आफिस छोड़ के भाग खड़ा भइलें आ एकरा के सील क दीहल रहे. जवन काल्हु अदालत से आदेश ले के खोलल गइल.
सारण जिला के माँझी में नॉन बैंकिंग संस्था गोल्ड माइन के आफिस के ताला कोर्ट का आदेश पर बियफे का दिने प्रशासन तूड़वा दिहलसि आ बीडीओ सूरज कुमार सिंह आ दारोगा एसएन सिन्हा अउर भिखारी राम के मौजूदगी में कार्यालय के फर्नीचर, आलमारी, कम्प्यूटर वगैरह जब्त क लिहल गइल. आफिस के आलमारी का दराज से दो,इक्कीस,एक सौ बीस रुपयापिया नगदो बरामद भइल. करीब डेढ़ बरीस पहिले तब के बीडीओ शंभू शरण सिंह एह संस्था पर छापा मरलन त कर्मचारी आफिस छोड़ के भाग खड़ा भइलें आ एकरा के सील क दीहल रहे. जवन काल्हु अदालत से आदेश ले के खोलल गइल.
SIWAN:सीवान से बड़ा खबर सामने आ रही है। सीवान के महाराजगंज में तेज रफ्तार कार ने बीडीओ की गाड़ी में टक्कर मारी है। तेज रफ्तार स्कॉर्पियो कार ने बीडीओ की गाड़ी में टक्कर मारी है। हादसे के बाद मौके पर अफऱा-तफरी मच गयी। इसी बीच स्कॉर्पियो का ड्राइवर मौके देखकर फरार हो गया। हादसा महाराजगंज शहर के रामलखन चौके पास हुआ जहां तेज रफ्तार कार ने बीडीओ की गाड़ी में तेज टक्कर मार दी। टक्कर में बीडीओ की गाड़ी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गयी। हालांकि कार में बैठे लोग बाल-बाल बच गए। हादसे के बाद स्कार्पियो ड्राइवर कार छोड़ मौके से फरार हो गया। फिलहाल पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। वहीं स्कॉर्पियो के ड्राइवर की तलाश में छापेमारी की जा रही है।
SIWAN:सीवान से बड़ा खबर सामने आ रही है। सीवान के महाराजगंज में तेज रफ्तार कार ने बीडीओ की गाड़ी में टक्कर मारी है। तेज रफ्तार स्कॉर्पियो कार ने बीडीओ की गाड़ी में टक्कर मारी है। हादसे के बाद मौके पर अफऱा-तफरी मच गयी। इसी बीच स्कॉर्पियो का ड्राइवर मौके देखकर फरार हो गया। हादसा महाराजगंज शहर के रामलखन चौके पास हुआ जहां तेज रफ्तार कार ने बीडीओ की गाड़ी में तेज टक्कर मार दी। टक्कर में बीडीओ की गाड़ी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गयी। हालांकि कार में बैठे लोग बाल-बाल बच गए। हादसे के बाद स्कार्पियो ड्राइवर कार छोड़ मौके से फरार हो गया। फिलहाल पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। वहीं स्कॉर्पियो के ड्राइवर की तलाश में छापेमारी की जा रही है।
थैंक्यू डीसी साहब अब मैं रेहड़ी लगाकर अपना व अपने बच्चों का पालन पोषण कर पाऊंगी। जी हां यह सोलह आने सत्य है कि आज जब उपायुक्त डा. जयकृष्ण आभीर लघु सचिवालय में आ रहे थे तो उनकी नजर कोने में बैठी एक दिव्यांग महिला पर पड़ी। उन्होंने उनसे वहां बैठे रहने का कारण पूछा तो महिला अपनी आंखों में आंसू ले आई और कहा कि वह एक विधवा है और 100 प्रतिशत दिव्यांग है। उसके दोनों कान नहीं है। यह सुनकर उपायुक्त ने उससे पूरी आपबीती सुनी और उसके परिवार के बारे में हालचाल जाना । जागरण संवाददाता,नारनौलः थैंक्यू डीसी साहब अब मैं रेहड़ी लगाकर अपना व अपने बच्चों का पालन पोषण कर पाऊंगी। जी हां यह सोलह आने सत्य है कि आज जब उपायुक्त डा. जयकृष्ण आभीर लघु सचिवालय में आ रहे थे तो उनकी नजर कोने में बैठी एक दिव्यांग महिला पर पड़ी। उन्होंने उनसे वहां बैठे रहने का कारण पूछा तो महिला अपनी आंखों में आंसू ले आई और कहा कि वह एक विधवा है और 100 प्रतिशत दिव्यांग है। उसके दोनों कान नहीं है। यह सुनकर उपायुक्त ने उससे पूरी आपबीती सुनी और उसके परिवार के बारे में हालचाल जाना। महिला ने बताया कि उसका नाम ममता है और वह नारनौल की ही रहने वाली है। पति की मृत्यु हो चुकी है तथा स्वयं दिव्यांग होने के कारण कोई काम नहीं कर पाती है। आप मुझे केवल चाय की दुकान के लिए रेहड़ी उपलब्ध करवा दें और थोड़ा सा पैसा दे दे तो मैं इस पैसे से अपना रोजगार शुरू करके आपको धीरे-धीरे पैसे वापस लौटा दूंगी। उपायुक्त ने उनकी इस बात पर काफी गहनता से विचार किया और कहा कि इस दिव्यांग महिला के जज्बे को सलाम है जो कुछ भी अपने बच्चों के पालन पोषण के लिए कर सकती है। महिला की यह फरियाद सुनकर डीसी ने उसी समय रेडक्रास सचिव श्याम सुंदर को अपनी जेब से 15 हजार रुपये देकर कहा कि आप तुरंत लघु सचिवालय जाकर ममता नाम की इस दिव्यांग महिला को यह 15 हजार रुपये जाकर दें और उसका हालचाल जानें। रेडक्रास सचिव श्याम सुंदर ने उपायुक्त के आदेशों की पालना में उपायुक्त द्वारा दिए गए 15 हजार रुपये दिव्यांग महिला ममता को दे दिए। उससे बात कर जानना चाहा कि वह क्या काम करेंगे तो बेहिचक महिला ने तुरंत कहा कि रेहड़ी लगाकर चाय की दुकान करेंगे और धीरे-धीरे करके एक पैसा वापस लौटा देंगे।
थैंक्यू डीसी साहब अब मैं रेहड़ी लगाकर अपना व अपने बच्चों का पालन पोषण कर पाऊंगी। जी हां यह सोलह आने सत्य है कि आज जब उपायुक्त डा. जयकृष्ण आभीर लघु सचिवालय में आ रहे थे तो उनकी नजर कोने में बैठी एक दिव्यांग महिला पर पड़ी। उन्होंने उनसे वहां बैठे रहने का कारण पूछा तो महिला अपनी आंखों में आंसू ले आई और कहा कि वह एक विधवा है और एक सौ प्रतिशत दिव्यांग है। उसके दोनों कान नहीं है। यह सुनकर उपायुक्त ने उससे पूरी आपबीती सुनी और उसके परिवार के बारे में हालचाल जाना । जागरण संवाददाता,नारनौलः थैंक्यू डीसी साहब अब मैं रेहड़ी लगाकर अपना व अपने बच्चों का पालन पोषण कर पाऊंगी। जी हां यह सोलह आने सत्य है कि आज जब उपायुक्त डा. जयकृष्ण आभीर लघु सचिवालय में आ रहे थे तो उनकी नजर कोने में बैठी एक दिव्यांग महिला पर पड़ी। उन्होंने उनसे वहां बैठे रहने का कारण पूछा तो महिला अपनी आंखों में आंसू ले आई और कहा कि वह एक विधवा है और एक सौ प्रतिशत दिव्यांग है। उसके दोनों कान नहीं है। यह सुनकर उपायुक्त ने उससे पूरी आपबीती सुनी और उसके परिवार के बारे में हालचाल जाना। महिला ने बताया कि उसका नाम ममता है और वह नारनौल की ही रहने वाली है। पति की मृत्यु हो चुकी है तथा स्वयं दिव्यांग होने के कारण कोई काम नहीं कर पाती है। आप मुझे केवल चाय की दुकान के लिए रेहड़ी उपलब्ध करवा दें और थोड़ा सा पैसा दे दे तो मैं इस पैसे से अपना रोजगार शुरू करके आपको धीरे-धीरे पैसे वापस लौटा दूंगी। उपायुक्त ने उनकी इस बात पर काफी गहनता से विचार किया और कहा कि इस दिव्यांग महिला के जज्बे को सलाम है जो कुछ भी अपने बच्चों के पालन पोषण के लिए कर सकती है। महिला की यह फरियाद सुनकर डीसी ने उसी समय रेडक्रास सचिव श्याम सुंदर को अपनी जेब से पंद्रह हजार रुपये देकर कहा कि आप तुरंत लघु सचिवालय जाकर ममता नाम की इस दिव्यांग महिला को यह पंद्रह हजार रुपये जाकर दें और उसका हालचाल जानें। रेडक्रास सचिव श्याम सुंदर ने उपायुक्त के आदेशों की पालना में उपायुक्त द्वारा दिए गए पंद्रह हजार रुपये दिव्यांग महिला ममता को दे दिए। उससे बात कर जानना चाहा कि वह क्या काम करेंगे तो बेहिचक महिला ने तुरंत कहा कि रेहड़ी लगाकर चाय की दुकान करेंगे और धीरे-धीरे करके एक पैसा वापस लौटा देंगे।
कोर्ट ने युवक और उसकी पत्नी को माता-पिता का घर खाली करने का आदेश दिया है। युवक की मां ने आरोप लगाए है कि उनका बेटा कुत्ते का इस्तेमाल अफनी मां को डराने के लिए कर रहा था। जिससे वो अपने ही घर में असहज महसूस करने लगी थीं। नई दिल्ली, एजेंसियांः दिल्ली से एक अजीब वाक्या सामने आया है। यहां माता-पिता की अनुमति के बिना घर में कुत्ता लाना एक युवक को महंगा पड़ा है। कोर्ट ने युवक और उसकी पत्नी को माता-पिता का घर खाली करने का आदेश दिया है। युवक की मां ने आरोप लगाए है कि उनका बेटा कुत्ते का इस्तेमाल अफनी मां को डराने के लिए कर रहा था। जिससे वो अपने ही घर में असहज महसूस करने लगी थीं। पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया है कि कुत्ते की घर में मौजूदगी के कारण उन्हें सांस से जुड़ी दिक्कतें होना शुरू हो गईं थीं। मामले में सबसे चौकाने वाली बात यह है कि युवक अपनी ही मां पर हमला करने के लिए कुत्ते को उकसाता रहता था, यह आरोप पीड़िता ने अपनी शिकायत में लगाया है। जिसके चलते पीड़िता ने PWDV Act (घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005) के तहत एक याचिका दायर की। जिसमें उन्होंने अपने बेटे को घर से बाहर करने की गुहार लगाई थी। मामले में सुनवाई करते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अरुल वर्मा ने पीड़िता के बेटे और उसकी पत्नी को एक सप्ताह के भीतर माता-पिता का घर खाली करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने अपने आदेश में बताया है कि, पीड़िता और उनका पति कई तरह की बीमारियों से पीड़ित है। बेटे के कारण उनके तनाव में लगातार बढ़ोतरी हो रही थी। मामले में विडंबना यह है कि पूरा विवाद कुत्ते से लगाव को लेकर है। पीड़िता, जो की युवक की मां है उन्होंने बताया है कि वो सांस की बीमारियों से पीड़ित हैं। जिसके चलते कुत्ते की मौजूदगी उनके लिए परेशानी का कारण बन रही थी। कोर्ट ने मामले में टिप्पणी करते हुए कहा है कि कुछ लोग पशु प्रेमी होते हैं, जबकि कुछ लोगों को घृणा हो सकती है। यहां तक कि उन्हें उनकी मौजूदगी से भी घृणा भी हो सकती है। ऐसे में पूजा घर या रसोई में कुत्ते का प्रवेश मां के लिए बड़ी परेशानी का कारण हो सकता है। कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया है कि पीड़िता का बेटा और उसकी पत्नी को घर में रहने से पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जाता है। कोर्ट ने घर में दाखिल होने के लिए माता-पिता की अनुमति को अनिवार्य कर दिया है।
कोर्ट ने युवक और उसकी पत्नी को माता-पिता का घर खाली करने का आदेश दिया है। युवक की मां ने आरोप लगाए है कि उनका बेटा कुत्ते का इस्तेमाल अफनी मां को डराने के लिए कर रहा था। जिससे वो अपने ही घर में असहज महसूस करने लगी थीं। नई दिल्ली, एजेंसियांः दिल्ली से एक अजीब वाक्या सामने आया है। यहां माता-पिता की अनुमति के बिना घर में कुत्ता लाना एक युवक को महंगा पड़ा है। कोर्ट ने युवक और उसकी पत्नी को माता-पिता का घर खाली करने का आदेश दिया है। युवक की मां ने आरोप लगाए है कि उनका बेटा कुत्ते का इस्तेमाल अफनी मां को डराने के लिए कर रहा था। जिससे वो अपने ही घर में असहज महसूस करने लगी थीं। पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया है कि कुत्ते की घर में मौजूदगी के कारण उन्हें सांस से जुड़ी दिक्कतें होना शुरू हो गईं थीं। मामले में सबसे चौकाने वाली बात यह है कि युवक अपनी ही मां पर हमला करने के लिए कुत्ते को उकसाता रहता था, यह आरोप पीड़िता ने अपनी शिकायत में लगाया है। जिसके चलते पीड़िता ने PWDV Act के तहत एक याचिका दायर की। जिसमें उन्होंने अपने बेटे को घर से बाहर करने की गुहार लगाई थी। मामले में सुनवाई करते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अरुल वर्मा ने पीड़िता के बेटे और उसकी पत्नी को एक सप्ताह के भीतर माता-पिता का घर खाली करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने अपने आदेश में बताया है कि, पीड़िता और उनका पति कई तरह की बीमारियों से पीड़ित है। बेटे के कारण उनके तनाव में लगातार बढ़ोतरी हो रही थी। मामले में विडंबना यह है कि पूरा विवाद कुत्ते से लगाव को लेकर है। पीड़िता, जो की युवक की मां है उन्होंने बताया है कि वो सांस की बीमारियों से पीड़ित हैं। जिसके चलते कुत्ते की मौजूदगी उनके लिए परेशानी का कारण बन रही थी। कोर्ट ने मामले में टिप्पणी करते हुए कहा है कि कुछ लोग पशु प्रेमी होते हैं, जबकि कुछ लोगों को घृणा हो सकती है। यहां तक कि उन्हें उनकी मौजूदगी से भी घृणा भी हो सकती है। ऐसे में पूजा घर या रसोई में कुत्ते का प्रवेश मां के लिए बड़ी परेशानी का कारण हो सकता है। कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया है कि पीड़िता का बेटा और उसकी पत्नी को घर में रहने से पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जाता है। कोर्ट ने घर में दाखिल होने के लिए माता-पिता की अनुमति को अनिवार्य कर दिया है।
इचाकः पुलिस ने गस्ती के दौरान एनएच 33 बोगा पेट्रोल पंप के पास प्रतिबंधित पशु लोड एक पिकअप वैन के साथ दो तस्कर को धर दबोचा है। पशु तस्कर वाहन संख्या जेएच 01डीएच 6881 पर छह गौवंशीय पशुओं को लोड कर तस्करी के नियत से हजारीबाग की ओर ले जा रहे थे। जिसकी भनक पुलिस को लग चुकी थी। तस्करों को मवेशी लेकर गुजरने की सूचना पर इचाक थाना प्रभारी देवेंद्र कुमार ने गश्ती दल को एलर्ट करते हुए, निगरानी रखने का निर्देश दिया। जिसके बाद गश्ती दल में लगे पदाधिकारी और पुलिसकर्मियों ने आने जाने वाले हर वाहन पर निगरानी रखना शुरू किया। चालक ने जैसे ही पुलिस गश्ती दल को देखा वाहन को तेज रफ्तार से निकालने की कोशिश की। लेकिन घात लगाए पुलिसकर्मियों ने रोककर जायजा लेने शुरू किया। जिसमें यह खुलासा हुआ। वाहन में 6 मवेशी लोड था। जिनमें एक की मौत वाहन के अंदर हो गया था। जबकि पांच पशु जीवित थे। पुलिस ने मौके से तस्करी में शामिल नवाजिश खान और नन्हे खान उर्फ आशिक अनवर रोमी पेलावल को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। साथ ही गोवंशीय प्रतिषेध अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है। थाना प्रभारी देवेंद्र कुमार ने बताया कि पुलिस को यह सफलता शुक्रवार को यह ले सुबह हाथ लगी है। उन्होंने कहा कि गिरफ्तार तस्करों ने कई राज खोले हैं जिनके नामों का खुलासा उन्होंने किया है उसे गिरफ्तार करने में पुलिस लगी हुई है। इचाक पी 5 मवेशी लोड पिकअप वैन पुलिस गिरफ्त में।
इचाकः पुलिस ने गस्ती के दौरान एनएच तैंतीस बोगा पेट्रोल पंप के पास प्रतिबंधित पशु लोड एक पिकअप वैन के साथ दो तस्कर को धर दबोचा है। पशु तस्कर वाहन संख्या जेएच एकडीएच छः हज़ार आठ सौ इक्यासी पर छह गौवंशीय पशुओं को लोड कर तस्करी के नियत से हजारीबाग की ओर ले जा रहे थे। जिसकी भनक पुलिस को लग चुकी थी। तस्करों को मवेशी लेकर गुजरने की सूचना पर इचाक थाना प्रभारी देवेंद्र कुमार ने गश्ती दल को एलर्ट करते हुए, निगरानी रखने का निर्देश दिया। जिसके बाद गश्ती दल में लगे पदाधिकारी और पुलिसकर्मियों ने आने जाने वाले हर वाहन पर निगरानी रखना शुरू किया। चालक ने जैसे ही पुलिस गश्ती दल को देखा वाहन को तेज रफ्तार से निकालने की कोशिश की। लेकिन घात लगाए पुलिसकर्मियों ने रोककर जायजा लेने शुरू किया। जिसमें यह खुलासा हुआ। वाहन में छः मवेशी लोड था। जिनमें एक की मौत वाहन के अंदर हो गया था। जबकि पांच पशु जीवित थे। पुलिस ने मौके से तस्करी में शामिल नवाजिश खान और नन्हे खान उर्फ आशिक अनवर रोमी पेलावल को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। साथ ही गोवंशीय प्रतिषेध अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है। थाना प्रभारी देवेंद्र कुमार ने बताया कि पुलिस को यह सफलता शुक्रवार को यह ले सुबह हाथ लगी है। उन्होंने कहा कि गिरफ्तार तस्करों ने कई राज खोले हैं जिनके नामों का खुलासा उन्होंने किया है उसे गिरफ्तार करने में पुलिस लगी हुई है। इचाक पी पाँच मवेशी लोड पिकअप वैन पुलिस गिरफ्त में।
हैदराबादः निर्वाण म्यूजिक एंड डांस एकेडमी ने हैदराबाद के पहले एक्सक्लूसिव क्वीर डांस फेस्टिवल- 'द हैदराबाद क्वीर डांस फेस्टिवल 2023' के साथ विश्व नृत्य दिवस मनाया। ड्रैगवंती और क्वीर निलयम द्वारा प्रस्तुत, यह कार्यक्रम 29 अप्रैल, शनिवार को शाम 5 बजे होगा। कोंडापुर में निर्वाण संगीत और नृत्य अकादमी में आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम क्वीर कनेक्ट और निर्वाण स्टूडियो द्वारा समर्थित है। प्रवेश शुल्क 200 रुपये से 500 रुपये है, और सभी भुगतान कलाकार के पास जाते हैं।
हैदराबादः निर्वाण म्यूजिक एंड डांस एकेडमी ने हैदराबाद के पहले एक्सक्लूसिव क्वीर डांस फेस्टिवल- 'द हैदराबाद क्वीर डांस फेस्टिवल दो हज़ार तेईस' के साथ विश्व नृत्य दिवस मनाया। ड्रैगवंती और क्वीर निलयम द्वारा प्रस्तुत, यह कार्यक्रम उनतीस अप्रैल, शनिवार को शाम पाँच बजे होगा। कोंडापुर में निर्वाण संगीत और नृत्य अकादमी में आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम क्वीर कनेक्ट और निर्वाण स्टूडियो द्वारा समर्थित है। प्रवेश शुल्क दो सौ रुपयापये से पाँच सौ रुपयापये है, और सभी भुगतान कलाकार के पास जाते हैं।
अनूप पासवान/कोरबा. छत्तीसगढ़ का कोरबा जिला वन्य जीवों की विविधता है. वनांचल क्षेत्र होने के कारण यहां सांपों की कई प्रजातियां पाई जाती हैं. इनमें से कई बहुत जहरीले और विलुप्त प्रजाति के सांप शामिल हैं. बरसात के मौसम में सांप निकलने की घटनाएं बढ़ जाती हैं. साथ ही, सर्पदंश से मौत के मामले सामने आने लगते हैं. सर्पदंश के ज्यादातर मामले ग्रामीण अंचल में घटित होते है. यहां शिक्षा और जानकारी के अभाव में ग्रामीण सर्पदंश के शिकार व्यक्ति को अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक करवाते हैं. ज्यादातर ऐसे मामलों में व्यक्ति की मौत हो जाती है. बरसात का मौसम शुरू होते ही स्वास्थ्य विभाग ने सांप काटे लोगों की जान बचाने के लिए कमर कस ली है. मेडिकल कॉलेज अस्पताल सहित अन्य सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी स्नेक वेनम की उपलब्धता सुनिश्चित करवाई गई है. इसके अलावा, लोगों को जागरूक कर उन्हें सर्पदंश के शिकार व्यक्ति को झाड़-फूंक के बजाय अस्पताल ले जाने की अपील की जा रही है. कोरबा मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर चंद्रकांत भास्कर ने बताया कि भारत में जहरीले सांपों की 13 प्रजातियां हैं. इनमें से चार बेहद जहरीले हैं- कोबरा, रसेल वाइपर, सॉ-स्केल्ड वाइपर और करैत. सबसे ज्यादा मौत नाग या गेहूंवन और करैत के काटने से होती है. सांपों में तीन प्रकार के जहर होते हैं इनमें हीमोटॉक्सिक, न्यूरोटॉक्सिक और मायोटॉक्सिक शामिल है. हिमोटॉक्सिक वेनम रक्त कोशिकाओं पर अटैक करता है. इसके कारण सांप काटे व्यक्ति को शरीर में कई जगहों से ब्लीडिंग के लक्षण, खून की उल्टी होती है. जबकि, न्यूरोटॉक्सिक जहर शरीर के नर्वस सिस्टम पर अटैक करता है. उन्होंने कहा कि कोरबा जिले में न्यूरोटॉक्सिक और हीमोटोएक्सिक दोनों ही प्रकार के जहर वाले सांप पाए जाते हैं. कोरबा के जंगलों में दुनिया का सबसे बड़ा विषधर किंग कोबरा भी रहता है. इंडियन कोबरा (भारतीय नाग) के डंसने के कुछ ही समय बाद शरीर का न्यूरो सिस्टम काम करना बंद कर देता है और लकवा मार जाता है. इसमें न्यूरोटॉक्सिन व कार्डियोटॉक्सिन यानी नर्वस सिस्टम और दिल पर असर करने वाला जहर होता है. इसके जहर से आंखों की रोशनी भी जा सकती है. रसेल वाइपर (दबौया सांप) यह अजगर की तरह दिखता है. एक बार डंसने पर 120 से 250 ग्राम तक जहर छोड़ता है. इस सांप में होमोटॉक्सिन जहर पाया जाता है यानी दिल के साथ खून के थक्के जमने लगते हैं. इसके काटने पर इंसान के शरीर में खून के थक्के बनने से मल्टीपल ऑर्गेन फेल्योर से उसकी मौत हो जाती है. यह सांप राजस्थान के पहाड़ी और ग्रामीण इलाके में ज्यादा देखने को मिलता है. यह लंबाई में अन्य विषैले सांपों से काफी छोटा होता है. भूरे रंग और उस पर काले और सफेद धब्बों के कारण यह काफी डेंजरस दिखता है. सॉ-स्केल्ड वाइपर बहुत नर्वस सांप है. यह बाकी सांपों की अपेक्षा जल्दी अटैक करता है. करैत भारत में पाया जाने वाला सबसे जहरीला सांप है. यह मुख्यतया नॉकटर्नल (रात को बाहर निकलने वाला) है. यह रात को सोते समय हमला करता है. इसके काटने के बाद व्यक्ति को दर्द महसूस नहीं होता और अक्सर नींद में उसकी मौत हो जाती है. यह सांप पतला और लंबा होता है. इसके काले शरीर पर एक साथ दो गोल-गोल सफेद लाइनें होती हैं. जिस जगह पर करैत काटता है, वो जगह मच्छर के काटने जैसी लगती है. इन सभी वजहों से करैत को भारत का सबसे ज्यादा जहरीला सांप माना जाता है. सबसे पहले जिसको सांप ने काटा है उसे लिटा दें ताकि चलने-फिरने से जहर न फैले. उसका हौसला बढ़ाएं जिससे वो घबराए नहीं. घबराहट से सर्पदंश के शिकार व्यक्ति के शरीर में खून का बहाव तेजी से होगा जिससे जहर जल्दी फैलेगा. शरीर में जहां पर सांप ने काटा है, उसके ऊपर और नीचे ब्लड फ्लो रोकने के लिए पट्टी बांध दें. सांप ने जहां काटा है उस जगह को साबुन और पानी से अच्छी तरह धो दें. डसने वाली जगह पर बीटाडीन लगाएं और जितना जल्दी हो सके, उसको सरकारी अस्पताल ले कर जाएं. मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर ने बताया कि सांप के कहर से बचाने के लिए सांपों के ही जहर से एंटीडोट एंटीवेनम बनाया जाता है. सांप काटने के तुरंत बाद अस्पताल पहुंच कर इंजेक्शन लगवाना चाहिए. एंटीवेनम लगवाने के लिए आपको काटने वाले सांप के प्रजाति को पहचानने की जरूरत नहीं होती. अस्पताल पहुंचने के बाद लक्षण के आधार पर एंटीवेनम दिया जाता है. इससे समय रहते सर्पदंश से शिकार व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है. ग्रामीण अंचलों में झाड़-फूंक के चक्कर में पड़ने के बाद अस्पताल लाने में देरी होने सर्पदंश के शिकार व्यक्ति की मौत होती है. .
अनूप पासवान/कोरबा. छत्तीसगढ़ का कोरबा जिला वन्य जीवों की विविधता है. वनांचल क्षेत्र होने के कारण यहां सांपों की कई प्रजातियां पाई जाती हैं. इनमें से कई बहुत जहरीले और विलुप्त प्रजाति के सांप शामिल हैं. बरसात के मौसम में सांप निकलने की घटनाएं बढ़ जाती हैं. साथ ही, सर्पदंश से मौत के मामले सामने आने लगते हैं. सर्पदंश के ज्यादातर मामले ग्रामीण अंचल में घटित होते है. यहां शिक्षा और जानकारी के अभाव में ग्रामीण सर्पदंश के शिकार व्यक्ति को अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक करवाते हैं. ज्यादातर ऐसे मामलों में व्यक्ति की मौत हो जाती है. बरसात का मौसम शुरू होते ही स्वास्थ्य विभाग ने सांप काटे लोगों की जान बचाने के लिए कमर कस ली है. मेडिकल कॉलेज अस्पताल सहित अन्य सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी स्नेक वेनम की उपलब्धता सुनिश्चित करवाई गई है. इसके अलावा, लोगों को जागरूक कर उन्हें सर्पदंश के शिकार व्यक्ति को झाड़-फूंक के बजाय अस्पताल ले जाने की अपील की जा रही है. कोरबा मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर चंद्रकांत भास्कर ने बताया कि भारत में जहरीले सांपों की तेरह प्रजातियां हैं. इनमें से चार बेहद जहरीले हैं- कोबरा, रसेल वाइपर, सॉ-स्केल्ड वाइपर और करैत. सबसे ज्यादा मौत नाग या गेहूंवन और करैत के काटने से होती है. सांपों में तीन प्रकार के जहर होते हैं इनमें हीमोटॉक्सिक, न्यूरोटॉक्सिक और मायोटॉक्सिक शामिल है. हिमोटॉक्सिक वेनम रक्त कोशिकाओं पर अटैक करता है. इसके कारण सांप काटे व्यक्ति को शरीर में कई जगहों से ब्लीडिंग के लक्षण, खून की उल्टी होती है. जबकि, न्यूरोटॉक्सिक जहर शरीर के नर्वस सिस्टम पर अटैक करता है. उन्होंने कहा कि कोरबा जिले में न्यूरोटॉक्सिक और हीमोटोएक्सिक दोनों ही प्रकार के जहर वाले सांप पाए जाते हैं. कोरबा के जंगलों में दुनिया का सबसे बड़ा विषधर किंग कोबरा भी रहता है. इंडियन कोबरा के डंसने के कुछ ही समय बाद शरीर का न्यूरो सिस्टम काम करना बंद कर देता है और लकवा मार जाता है. इसमें न्यूरोटॉक्सिन व कार्डियोटॉक्सिन यानी नर्वस सिस्टम और दिल पर असर करने वाला जहर होता है. इसके जहर से आंखों की रोशनी भी जा सकती है. रसेल वाइपर यह अजगर की तरह दिखता है. एक बार डंसने पर एक सौ बीस से दो सौ पचास ग्राम तक जहर छोड़ता है. इस सांप में होमोटॉक्सिन जहर पाया जाता है यानी दिल के साथ खून के थक्के जमने लगते हैं. इसके काटने पर इंसान के शरीर में खून के थक्के बनने से मल्टीपल ऑर्गेन फेल्योर से उसकी मौत हो जाती है. यह सांप राजस्थान के पहाड़ी और ग्रामीण इलाके में ज्यादा देखने को मिलता है. यह लंबाई में अन्य विषैले सांपों से काफी छोटा होता है. भूरे रंग और उस पर काले और सफेद धब्बों के कारण यह काफी डेंजरस दिखता है. सॉ-स्केल्ड वाइपर बहुत नर्वस सांप है. यह बाकी सांपों की अपेक्षा जल्दी अटैक करता है. करैत भारत में पाया जाने वाला सबसे जहरीला सांप है. यह मुख्यतया नॉकटर्नल है. यह रात को सोते समय हमला करता है. इसके काटने के बाद व्यक्ति को दर्द महसूस नहीं होता और अक्सर नींद में उसकी मौत हो जाती है. यह सांप पतला और लंबा होता है. इसके काले शरीर पर एक साथ दो गोल-गोल सफेद लाइनें होती हैं. जिस जगह पर करैत काटता है, वो जगह मच्छर के काटने जैसी लगती है. इन सभी वजहों से करैत को भारत का सबसे ज्यादा जहरीला सांप माना जाता है. सबसे पहले जिसको सांप ने काटा है उसे लिटा दें ताकि चलने-फिरने से जहर न फैले. उसका हौसला बढ़ाएं जिससे वो घबराए नहीं. घबराहट से सर्पदंश के शिकार व्यक्ति के शरीर में खून का बहाव तेजी से होगा जिससे जहर जल्दी फैलेगा. शरीर में जहां पर सांप ने काटा है, उसके ऊपर और नीचे ब्लड फ्लो रोकने के लिए पट्टी बांध दें. सांप ने जहां काटा है उस जगह को साबुन और पानी से अच्छी तरह धो दें. डसने वाली जगह पर बीटाडीन लगाएं और जितना जल्दी हो सके, उसको सरकारी अस्पताल ले कर जाएं. मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर ने बताया कि सांप के कहर से बचाने के लिए सांपों के ही जहर से एंटीडोट एंटीवेनम बनाया जाता है. सांप काटने के तुरंत बाद अस्पताल पहुंच कर इंजेक्शन लगवाना चाहिए. एंटीवेनम लगवाने के लिए आपको काटने वाले सांप के प्रजाति को पहचानने की जरूरत नहीं होती. अस्पताल पहुंचने के बाद लक्षण के आधार पर एंटीवेनम दिया जाता है. इससे समय रहते सर्पदंश से शिकार व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है. ग्रामीण अंचलों में झाड़-फूंक के चक्कर में पड़ने के बाद अस्पताल लाने में देरी होने सर्पदंश के शिकार व्यक्ति की मौत होती है. .
पिछली सदी में 20 के दशक में भारत में शुरू हुए कम्युनिस्ट आंदोलन ने कई पड़ाव तय किए हैं. 1951-52 में हुए पहले लोकसभा चुनाव में अविभाजित कम्युनिस्ट पार्टी ने जहाँ 16 सीटें जीती थीं वहीं पिछले लोकसभा चुनाव में वामपंथी दलों की कुल सीटों की संख्या बढ़कर 61 पहुँच गई थी. इसमें अकेले मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के 43 सदस्य थे. 1957 में कम्युनिस्टों ने पहली बार केरल में विधानसभा चुनाव जीता था. ये पहला मौक़ा था जब दुनिया में कोई भी कम्युनिस्ट सरकार मतदान द्वारा चुनकर सत्ता में आई थीं. ईएमएस नंबूदरीपाद वहाँ के मुख्यमंत्री बने. ये अलग बात है कि दो साल बाद 1959 में इस सरकार को केंद्र ने बर्ख़ास्त कर दिया. वामपंथी दलों के सामने सबसे बड़ा धर्मसंकट 1962 में आया जब चीन ने भारत पर आक्रमण किया. जहाँ सोवियत संघ का समर्थन करने वाले वामपंथी नेताओं ने भारत सरकार का समर्थन किया, लेकिन कुछ कम्युनिस्ट नेताओं जैसे ईएमएस नम्बूदरीपाद और बीटी रणदिवे ने इसे समाजवादी और पूँजीवादी राष्ट्र के बीच संघर्ष करार दिया. 1964 के आते-आते कम्युनिस्ट पार्टी में औपचारिक विभाजन हो गया. 1970 से 1977 के बीच भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने काँग्रेस का समर्थन किया. केरल में उसने काँग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाई और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता अच्युत मेनन वहाँ के मुख्यमंत्री बने. 1977 में ज्योति बसु के नेतृत्व में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी पश्चिम बंगाल में सत्ता में आई और तभी से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का भी काँग्रेस से मोह भंग शुरू हो गया. 1989 के लोकसभा चुनाव के बाद वामपंथी दलों ने विश्वनाथ प्रताप सिंह की जनता दल सरकार को बाहर से समर्थन दिया. दिलचस्प बात यह कि इस सरकार को भारतीय जनता पार्टी भी बाहर से समर्थन दे रही थी. 1996 में जब काँग्रेस की हार हुई तो तीसरे मोर्चे की सरकार बनवाने में वामपंथी दलों की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रही. 'ऐतिहासिक भूल' एक समय तो ज्योति बसु को प्रधानमंत्री बनाए जाने पर लगभग सहमति बन गई थी. लेकिन उनकी पार्टी ने उन्हें ये पेशकश स्वीकार करने की अनुमति नहीं दी. बाद में स्वयं ज्योति बसु ने इसे एक 'ऐतिहासिक भूल' बताया और कहा कि इसका कारण था पोलित ब्यूरो और केंद्रीय कमेटी के सदस्यों में उपयुक्त राजनीतिक समझ का अभाव. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने ज़रूर तीसरे मोर्चे की सरकार में शिरकत की और इंद्रजीत गुप्त भारत के गृह मंत्री बने. आठ साल बाद जब वामपंथियों के पास एक बार फिर सरकार में शामिल होने का मौक़ा आया, तो इतिहास ने एक बार फिर अपने आप को दोहराया. उन्हें केंद्र सरकार में भागीदारी कर किसानों, मज़दूरों, निम्न मध्यमवर्ग के लिए कुछ कर पाने और दक्षिणपंथियों द्वारा सत्ता व्यवस्था में कथित रूप से की गई घुसपैठ की सफ़ाई से ज़्यादा चिंता पश्चिम बंगाल और केरल के अपने किले को बचाए रखने की हुई. मज़ेदार बात ये है कि 1967 और 1969 में कम्युनिस्टों ने ही अजय मुखर्जी के नेतृत्ववाली काँग्रेस की सरकार में शामिल होकर पश्चिम बंगाल में अपना असर बढ़ाया था. सत्ता में शामिल हुए बग़ैर बंगाल में उनके द्वारा लाए गए भूमि सुधार के कार्यक्रम सफ़ल हो पाते इसमें काफ़ी संदेह है. वामपंथियों के ख़िलाफ़ ये टिप्पणी भी की जाती रही हैं कि वे सरकार की सफलताओँ का श्रेय तो लेना चाहते हैं लेकिन कमज़ोरियों, विफलताओं, गड़बड़ियों की पूरी ज़िम्मेदारी सरकार पर ही डालना चाहते हैं. वे इसका जवाब ये कहकर देते हैं कि जिस गठबंधन का नेतृत्व वामपंथियों के हाथ में न हो, उसकी नीतियों को भी एक सीमा से अधिक नहीं प्रभावित किया जा सकता. वैश्वीकरण और उदारीकरण की काँग्रेस की नीतियों को अगर वे गरीबों के पक्ष में नहीं मोड़ पाते हैं तो जनअसंतोष के दंड का भागीदार भी वामपंथियों को बनना पड़ेगा. केरल और पश्चिम बंगाल के बारे में उनकी दलील है कि दोनों राज्यों में काँग्रेस की नीतियों का विरोध कर ही वाम मोर्चे ने भारी विजय पाई है और उन्हीं नीतियों से भागीदारी दिखाना अलगे वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव में उनके लिए भारी पड़ जाएगा. लेकिन सरकार से बाहर रहते हुए भी कई मुद्दों पर उन्होंने सरकार का हाथ मरोड़ा है. हाल में संसद में पास हुआ पेटेंट बिल और पेंशन बिल का स्थाई समिति को भेजा जाना इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं. कहा जाता है कि दुनिया भर में कम्युनिस्ट नेता कभी रिटायर नहीं होते-चाहे वो माओ हों, लियोनिद ब्रेझनेव हों या फिर फ़ीडेल कास्ट्रो हों. लेकिन मार्क्सवादी पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेता हरकिशन सिंह सुरजीत अगली पीढ़ी को पार्टी का नेतृत्व सौंपने के बारे में सोच रहे हैं. सुरजीत 1992 से पार्टी के महासचिव हैं और छह अप्रैल से शुरू होने वाली पार्टी काँग्रेस में नई केंद्रीय समिति का चयन होगा और नई केंद्रीय समिति नए महासचिव का चुनाव करेगी. सबकी आँखें पोलित ब्यूरो के अपेक्षाकृत युवा चेहरे प्रकाश करात पर हैं जिन्हें वामपंथी हलकों में कट्टरपंथी माना जाता है. इस पद के दूसरे दावेदार सीताराम येचुरी हैं जोकि गठबंधन राजनीति में पार्टी के रूख़ को सामने रखने के लिए जाने जाते हैं. पार्टी की पिछली काँग्रेस में भी नेतृत्व परिवर्तन की बात आई थी और कहा गया था कि सुरजीत किसी युवा चेहरे को नेतृत्व की बागडोर सौंपना चाहते हैं. लेकिन उन्होंने अंततः पद न छोड़ने का फ़ैसला किया था.
पिछली सदी में बीस के दशक में भारत में शुरू हुए कम्युनिस्ट आंदोलन ने कई पड़ाव तय किए हैं. एक हज़ार नौ सौ इक्यावन-बावन में हुए पहले लोकसभा चुनाव में अविभाजित कम्युनिस्ट पार्टी ने जहाँ सोलह सीटें जीती थीं वहीं पिछले लोकसभा चुनाव में वामपंथी दलों की कुल सीटों की संख्या बढ़कर इकसठ पहुँच गई थी. इसमें अकेले मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के तैंतालीस सदस्य थे. एक हज़ार नौ सौ सत्तावन में कम्युनिस्टों ने पहली बार केरल में विधानसभा चुनाव जीता था. ये पहला मौक़ा था जब दुनिया में कोई भी कम्युनिस्ट सरकार मतदान द्वारा चुनकर सत्ता में आई थीं. ईएमएस नंबूदरीपाद वहाँ के मुख्यमंत्री बने. ये अलग बात है कि दो साल बाद एक हज़ार नौ सौ उनसठ में इस सरकार को केंद्र ने बर्ख़ास्त कर दिया. वामपंथी दलों के सामने सबसे बड़ा धर्मसंकट एक हज़ार नौ सौ बासठ में आया जब चीन ने भारत पर आक्रमण किया. जहाँ सोवियत संघ का समर्थन करने वाले वामपंथी नेताओं ने भारत सरकार का समर्थन किया, लेकिन कुछ कम्युनिस्ट नेताओं जैसे ईएमएस नम्बूदरीपाद और बीटी रणदिवे ने इसे समाजवादी और पूँजीवादी राष्ट्र के बीच संघर्ष करार दिया. एक हज़ार नौ सौ चौंसठ के आते-आते कम्युनिस्ट पार्टी में औपचारिक विभाजन हो गया. एक हज़ार नौ सौ सत्तर से एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर के बीच भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने काँग्रेस का समर्थन किया. केरल में उसने काँग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाई और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता अच्युत मेनन वहाँ के मुख्यमंत्री बने. एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर में ज्योति बसु के नेतृत्व में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी पश्चिम बंगाल में सत्ता में आई और तभी से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का भी काँग्रेस से मोह भंग शुरू हो गया. एक हज़ार नौ सौ नवासी के लोकसभा चुनाव के बाद वामपंथी दलों ने विश्वनाथ प्रताप सिंह की जनता दल सरकार को बाहर से समर्थन दिया. दिलचस्प बात यह कि इस सरकार को भारतीय जनता पार्टी भी बाहर से समर्थन दे रही थी. एक हज़ार नौ सौ छियानवे में जब काँग्रेस की हार हुई तो तीसरे मोर्चे की सरकार बनवाने में वामपंथी दलों की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रही. 'ऐतिहासिक भूल' एक समय तो ज्योति बसु को प्रधानमंत्री बनाए जाने पर लगभग सहमति बन गई थी. लेकिन उनकी पार्टी ने उन्हें ये पेशकश स्वीकार करने की अनुमति नहीं दी. बाद में स्वयं ज्योति बसु ने इसे एक 'ऐतिहासिक भूल' बताया और कहा कि इसका कारण था पोलित ब्यूरो और केंद्रीय कमेटी के सदस्यों में उपयुक्त राजनीतिक समझ का अभाव. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने ज़रूर तीसरे मोर्चे की सरकार में शिरकत की और इंद्रजीत गुप्त भारत के गृह मंत्री बने. आठ साल बाद जब वामपंथियों के पास एक बार फिर सरकार में शामिल होने का मौक़ा आया, तो इतिहास ने एक बार फिर अपने आप को दोहराया. उन्हें केंद्र सरकार में भागीदारी कर किसानों, मज़दूरों, निम्न मध्यमवर्ग के लिए कुछ कर पाने और दक्षिणपंथियों द्वारा सत्ता व्यवस्था में कथित रूप से की गई घुसपैठ की सफ़ाई से ज़्यादा चिंता पश्चिम बंगाल और केरल के अपने किले को बचाए रखने की हुई. मज़ेदार बात ये है कि एक हज़ार नौ सौ सरसठ और एक हज़ार नौ सौ उनहत्तर में कम्युनिस्टों ने ही अजय मुखर्जी के नेतृत्ववाली काँग्रेस की सरकार में शामिल होकर पश्चिम बंगाल में अपना असर बढ़ाया था. सत्ता में शामिल हुए बग़ैर बंगाल में उनके द्वारा लाए गए भूमि सुधार के कार्यक्रम सफ़ल हो पाते इसमें काफ़ी संदेह है. वामपंथियों के ख़िलाफ़ ये टिप्पणी भी की जाती रही हैं कि वे सरकार की सफलताओँ का श्रेय तो लेना चाहते हैं लेकिन कमज़ोरियों, विफलताओं, गड़बड़ियों की पूरी ज़िम्मेदारी सरकार पर ही डालना चाहते हैं. वे इसका जवाब ये कहकर देते हैं कि जिस गठबंधन का नेतृत्व वामपंथियों के हाथ में न हो, उसकी नीतियों को भी एक सीमा से अधिक नहीं प्रभावित किया जा सकता. वैश्वीकरण और उदारीकरण की काँग्रेस की नीतियों को अगर वे गरीबों के पक्ष में नहीं मोड़ पाते हैं तो जनअसंतोष के दंड का भागीदार भी वामपंथियों को बनना पड़ेगा. केरल और पश्चिम बंगाल के बारे में उनकी दलील है कि दोनों राज्यों में काँग्रेस की नीतियों का विरोध कर ही वाम मोर्चे ने भारी विजय पाई है और उन्हीं नीतियों से भागीदारी दिखाना अलगे वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव में उनके लिए भारी पड़ जाएगा. लेकिन सरकार से बाहर रहते हुए भी कई मुद्दों पर उन्होंने सरकार का हाथ मरोड़ा है. हाल में संसद में पास हुआ पेटेंट बिल और पेंशन बिल का स्थाई समिति को भेजा जाना इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं. कहा जाता है कि दुनिया भर में कम्युनिस्ट नेता कभी रिटायर नहीं होते-चाहे वो माओ हों, लियोनिद ब्रेझनेव हों या फिर फ़ीडेल कास्ट्रो हों. लेकिन मार्क्सवादी पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेता हरकिशन सिंह सुरजीत अगली पीढ़ी को पार्टी का नेतृत्व सौंपने के बारे में सोच रहे हैं. सुरजीत एक हज़ार नौ सौ बानवे से पार्टी के महासचिव हैं और छह अप्रैल से शुरू होने वाली पार्टी काँग्रेस में नई केंद्रीय समिति का चयन होगा और नई केंद्रीय समिति नए महासचिव का चुनाव करेगी. सबकी आँखें पोलित ब्यूरो के अपेक्षाकृत युवा चेहरे प्रकाश करात पर हैं जिन्हें वामपंथी हलकों में कट्टरपंथी माना जाता है. इस पद के दूसरे दावेदार सीताराम येचुरी हैं जोकि गठबंधन राजनीति में पार्टी के रूख़ को सामने रखने के लिए जाने जाते हैं. पार्टी की पिछली काँग्रेस में भी नेतृत्व परिवर्तन की बात आई थी और कहा गया था कि सुरजीत किसी युवा चेहरे को नेतृत्व की बागडोर सौंपना चाहते हैं. लेकिन उन्होंने अंततः पद न छोड़ने का फ़ैसला किया था.
मधुर भंडारकर की 'इंदु सरकार' इतनी सुर्ख़ियों में आने के बाद, आज आखिरकार सिनेमाघरों में रिलीज़ हो गयी है। इस फिल्म में सन 1975 से 1977 लागु की गयी इमरजेंसी के हालात को दर्शाया है। इस फिल्म की कहानी सन 1975 की 27 जून से शुरू होती है। यह वही तारीख है जब, भारत में इंदिरा गाँधी के कार्यकाल के समय इमरजेंसी लागु की गयी थी। इस फिल्म में संजय गाँधी की भूमिका नील नितिन मुकेश ने निभाई है। वही, इस फिल्म में तोता रॉय चौधरी एक अहम सरकारी अफसार के किरदार में नज़र आएंगे, जो की नील नितिन मुकेश के अधीन आने वाली मिनिस्ट्री के सलाहकार है। नवीन इंदु उर्फ़ क्रीति कुल्हारी से शादी कर लेते है। इसके बाद उनके जीवन में ऐसा मोड़ आता है, जिनकी उनको कल्पना भी नहीं होती। देश में आपातकाल लगने से उनके और उनके पति के बीच मन-मुटाव हो जाता है। इसको लेकर इन्दु घर छोड़कर सरकार के खिलाफ आंदोलन करने निकल जाती है।
मधुर भंडारकर की 'इंदु सरकार' इतनी सुर्ख़ियों में आने के बाद, आज आखिरकार सिनेमाघरों में रिलीज़ हो गयी है। इस फिल्म में सन एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर से एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर लागु की गयी इमरजेंसी के हालात को दर्शाया है। इस फिल्म की कहानी सन एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर की सत्ताईस जून से शुरू होती है। यह वही तारीख है जब, भारत में इंदिरा गाँधी के कार्यकाल के समय इमरजेंसी लागु की गयी थी। इस फिल्म में संजय गाँधी की भूमिका नील नितिन मुकेश ने निभाई है। वही, इस फिल्म में तोता रॉय चौधरी एक अहम सरकारी अफसार के किरदार में नज़र आएंगे, जो की नील नितिन मुकेश के अधीन आने वाली मिनिस्ट्री के सलाहकार है। नवीन इंदु उर्फ़ क्रीति कुल्हारी से शादी कर लेते है। इसके बाद उनके जीवन में ऐसा मोड़ आता है, जिनकी उनको कल्पना भी नहीं होती। देश में आपातकाल लगने से उनके और उनके पति के बीच मन-मुटाव हो जाता है। इसको लेकर इन्दु घर छोड़कर सरकार के खिलाफ आंदोलन करने निकल जाती है।
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। दुबई "'دبيّ"'. संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की सात अमीरातों में से एक है। यह फारस की खाड़ी के दक्षिण में अरब प्रायद्वीप पर स्थित है। दुबई नगर पालिका को अमीरात से अलग बताने के लिए कभी कभी दुबई राज्य बुलाया जाता है। दुबई, मध्य पूर्व के एक वैश्विक नगर तथा व्यापार केन्द्र के रूप में उभर कर सामने आया है। लिखित दस्तावेजों में इस शहर का अस्तित्व संयुक्त अरब अमीरात के गठन से 150 साल पहले होने का जिक्र है। दुबई अन्य अमीरातों के साथ कानून, राजनीति, सैनिक और आर्थिक कार्य एक संघीय ढांचे के भीतर साझा करता है। हालांकि प्रत्येक अमीरात में नागरिक कानून लागू करने और व्यवस्था और स्थानीय सुविधाओं के रखरखाव जैसे कुछ कार्यों पर क्षेत्राधिकार है। दुबई की आबादी सबसे ज्यादा है और यह क्षेत्रफल में अबू धाबी के बाद दूसरी सबसे बड़ी अमीरात है। दुबई और अबू धाबी ही सिर्फ दो अमीरात है जिनके पास देश की विधायिका अनुसार राष्ट्रीय महत्व के महत्वपूर्ण मामलों पर प्रत्यादेश शक्ति का अधिकार है। ^ मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका की सरकर और राजनीति डी लांग, बी रेक. शंघाई (चीनीः 上海; पिनयिन) चीनी जनवादी गणराज्य का सबसे बड़ा नगर है। यह देश के पूर्वी भाग में यांग्त्ज़े नदी के डेल्टा पर स्थित है। यह अर्थव्यवस्था और जनसंख्या दोनों ही दृष्टि से चीन का सबसे बड़ा नगर है। यह देश की चार नगरपालिकाओं में से एक है और उसी स्तर पर है जिसपर कि चीन का कोई अन्य प्रान्त। नगर सीमा के भीतर की जनसंख्या ९३ लाख है और पूरी नगरपालिका में १ करोड़ ८१ लाख लोग रहते हैं। १ जनवरी, २००६ की स्थिति तक यहां १ करोड़ ३७ लाख स्थाई निवासी और ४४ लाख अस्थाई निवासी थे जिनके पास रहने का वैध परमिट था। इसके अतिरिक्त यहां ३० लाख लोग अवैध रूप से भी रहते है। . दुबई और शंघाई आम में एक बात है (यूनियनपीडिया में): चीनी जनवादी गणराज्य। चीनी जनवादी गणराज्य (चीनीः 中华人民共和国) जिसे प्रायः चीन नाम से भी सम्बोधित किया जाता है, पूर्वी एशिया में स्थित एक देश है। १.३ अरब निवासियों के साथ यह विश्व का सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश है और ९६,४१,१४४ वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के साथ यह रूस और कनाडा के बाद विश्व का तीसरा सबसे बड़ा क्षेत्रफल वाला देश है। इतना विशाल क्षेत्रफल होने के कारण इसकी सीमा से लगते देशों की संख्या भी विश्व में सर्वाधिक (रूस के बराबर) है जो इस प्रकार है (उत्तर से दक्षिणावर्त्त): रूस, मंगोलिया, उत्तर कोरिया, वियतनाम, लाओस, म्यान्मार, भारत, भूटान, नेपाल, तिबत देश,पाकिस्तान, अफ़्गानिस्तान, ताजिकिस्तान, किर्गिस्तान और कज़ाख़िस्तान। उत्तर पूर्व में जापान और दक्षिण कोरिया मुख्य भूमि से दूरी पर स्थित हैं। चीनी जनवादी गणराज्य की स्थापना १ अक्टूबर, १९४९ को हुई थी, जब साम्यवादियों ने गृहयुद्ध में कुओमिन्तांग पर जीत प्राप्त की। कुओमिन्तांग की हार के बाद वे लोग ताइवान या चीनी गणराज्य को चले गए और मुख्यभूमि चीन पर साम्यवादी दल ने साम्यवादी गणराज्य की स्थापना की। लेकिन चीन, ताईवान को अपना स्वायत्त क्षेत्र कहता है जबकि ताइवान का प्रशासन स्वयं को स्वतन्त्र राष्ट्र कहता है। चीनी जनवादी गणराज्य और ताइवान दोनों अपने-अपने को चीन का वैध प्रतिनिधि कहते हैं। चीन विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक है जो अभी भी अस्तित्व में है। इसकी सभ्यता ५,००० वर्षों से अधिक भी पुरानी है। वर्तमान में यह एक "समाजवादी गणराज्य" है, जिसका नेतृत्व एक दल के हाथों में है, जिसका देश के २२ प्रान्तों, ५ स्वायत्तशासी क्षेत्रों, ४ नगरपालिकाओं और २ विशेष प्रशासनिक क्षेत्रों पर नियन्त्रण है। चीन विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थाई सदस्य भी है। यह विश्व का सबसे बड़ा निर्यातक और दूसरा सबसे बड़ा आयातक है और एक मान्यता प्राप्त नाभिकीय महाशक्ति है। चीनी साम्यवादी दल के अधीन रहकर चीन में "समाजवादी बाज़ार अर्थव्यवस्था" को अपनाया जिसके अधीन पूंजीवाद और अधिकारवादी राजनैतिक नियन्त्रण सम्मित्लित है। विश्व के राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक ढाँचे में चीन को २१वीं सदी की अपरिहार्य महाशक्ति के रूप में माना और स्वीकृत किया जाता है। यहाँ की मुख्य भाषा चीनी है जिसका पाम्परिक तथा आधुनिक रूप दोनों रूपों में उपयोग किया जाता है। प्रमुख नगरों में बीजिंग (राजधानी), शंघाई (प्रमुख वित्तीय केन्द्र), हांगकांग, शेन्ज़ेन, ग्वांगझोउ इत्यादी हैं। . दुबई 72 संबंध है और शंघाई 12 है। वे आम 1 में है, समानता सूचकांक 1.19% है = 1 / (72 + 12)। यह लेख दुबई और शंघाई के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। दुबई "'دبيّ"'. संयुक्त अरब अमीरात की सात अमीरातों में से एक है। यह फारस की खाड़ी के दक्षिण में अरब प्रायद्वीप पर स्थित है। दुबई नगर पालिका को अमीरात से अलग बताने के लिए कभी कभी दुबई राज्य बुलाया जाता है। दुबई, मध्य पूर्व के एक वैश्विक नगर तथा व्यापार केन्द्र के रूप में उभर कर सामने आया है। लिखित दस्तावेजों में इस शहर का अस्तित्व संयुक्त अरब अमीरात के गठन से एक सौ पचास साल पहले होने का जिक्र है। दुबई अन्य अमीरातों के साथ कानून, राजनीति, सैनिक और आर्थिक कार्य एक संघीय ढांचे के भीतर साझा करता है। हालांकि प्रत्येक अमीरात में नागरिक कानून लागू करने और व्यवस्था और स्थानीय सुविधाओं के रखरखाव जैसे कुछ कार्यों पर क्षेत्राधिकार है। दुबई की आबादी सबसे ज्यादा है और यह क्षेत्रफल में अबू धाबी के बाद दूसरी सबसे बड़ी अमीरात है। दुबई और अबू धाबी ही सिर्फ दो अमीरात है जिनके पास देश की विधायिका अनुसार राष्ट्रीय महत्व के महत्वपूर्ण मामलों पर प्रत्यादेश शक्ति का अधिकार है। ^ मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका की सरकर और राजनीति डी लांग, बी रेक. शंघाई चीनी जनवादी गणराज्य का सबसे बड़ा नगर है। यह देश के पूर्वी भाग में यांग्त्ज़े नदी के डेल्टा पर स्थित है। यह अर्थव्यवस्था और जनसंख्या दोनों ही दृष्टि से चीन का सबसे बड़ा नगर है। यह देश की चार नगरपालिकाओं में से एक है और उसी स्तर पर है जिसपर कि चीन का कोई अन्य प्रान्त। नगर सीमा के भीतर की जनसंख्या तिरानवे लाख है और पूरी नगरपालिका में एक करोड़ इक्यासी लाख लोग रहते हैं। एक जनवरी, दो हज़ार छः की स्थिति तक यहां एक करोड़ सैंतीस लाख स्थाई निवासी और चौंतालीस लाख अस्थाई निवासी थे जिनके पास रहने का वैध परमिट था। इसके अतिरिक्त यहां तीस लाख लोग अवैध रूप से भी रहते है। . दुबई और शंघाई आम में एक बात है : चीनी जनवादी गणराज्य। चीनी जनवादी गणराज्य जिसे प्रायः चीन नाम से भी सम्बोधित किया जाता है, पूर्वी एशिया में स्थित एक देश है। एक.तीन अरब निवासियों के साथ यह विश्व का सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश है और छियानवे,इकतालीस,एक सौ चौंतालीस वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के साथ यह रूस और कनाडा के बाद विश्व का तीसरा सबसे बड़ा क्षेत्रफल वाला देश है। इतना विशाल क्षेत्रफल होने के कारण इसकी सीमा से लगते देशों की संख्या भी विश्व में सर्वाधिक है जो इस प्रकार है : रूस, मंगोलिया, उत्तर कोरिया, वियतनाम, लाओस, म्यान्मार, भारत, भूटान, नेपाल, तिबत देश,पाकिस्तान, अफ़्गानिस्तान, ताजिकिस्तान, किर्गिस्तान और कज़ाख़िस्तान। उत्तर पूर्व में जापान और दक्षिण कोरिया मुख्य भूमि से दूरी पर स्थित हैं। चीनी जनवादी गणराज्य की स्थापना एक अक्टूबर, एक हज़ार नौ सौ उनचास को हुई थी, जब साम्यवादियों ने गृहयुद्ध में कुओमिन्तांग पर जीत प्राप्त की। कुओमिन्तांग की हार के बाद वे लोग ताइवान या चीनी गणराज्य को चले गए और मुख्यभूमि चीन पर साम्यवादी दल ने साम्यवादी गणराज्य की स्थापना की। लेकिन चीन, ताईवान को अपना स्वायत्त क्षेत्र कहता है जबकि ताइवान का प्रशासन स्वयं को स्वतन्त्र राष्ट्र कहता है। चीनी जनवादी गणराज्य और ताइवान दोनों अपने-अपने को चीन का वैध प्रतिनिधि कहते हैं। चीन विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक है जो अभी भी अस्तित्व में है। इसकी सभ्यता पाँच,शून्य वर्षों से अधिक भी पुरानी है। वर्तमान में यह एक "समाजवादी गणराज्य" है, जिसका नेतृत्व एक दल के हाथों में है, जिसका देश के बाईस प्रान्तों, पाँच स्वायत्तशासी क्षेत्रों, चार नगरपालिकाओं और दो विशेष प्रशासनिक क्षेत्रों पर नियन्त्रण है। चीन विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थाई सदस्य भी है। यह विश्व का सबसे बड़ा निर्यातक और दूसरा सबसे बड़ा आयातक है और एक मान्यता प्राप्त नाभिकीय महाशक्ति है। चीनी साम्यवादी दल के अधीन रहकर चीन में "समाजवादी बाज़ार अर्थव्यवस्था" को अपनाया जिसके अधीन पूंजीवाद और अधिकारवादी राजनैतिक नियन्त्रण सम्मित्लित है। विश्व के राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक ढाँचे में चीन को इक्कीसवीं सदी की अपरिहार्य महाशक्ति के रूप में माना और स्वीकृत किया जाता है। यहाँ की मुख्य भाषा चीनी है जिसका पाम्परिक तथा आधुनिक रूप दोनों रूपों में उपयोग किया जाता है। प्रमुख नगरों में बीजिंग , शंघाई , हांगकांग, शेन्ज़ेन, ग्वांगझोउ इत्यादी हैं। . दुबई बहत्तर संबंध है और शंघाई बारह है। वे आम एक में है, समानता सूचकांक एक.उन्नीस% है = एक / । यह लेख दुबई और शंघाई के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
नई दिल्लीः मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के सामने मिली कार और आतंकी संगठन जैश-उल-हिंद संगठन की तरफ से मिली धमकी के मामले में तिहाड़ जेल में कैद जिस आतंकी का नाम सामने आया है, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल उससे पूछताछ करने पहुंची है. तिहाड़ जेल में बंद इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी तहसीन अख्तर की बैरक से जांच में एक मोबाइल फोन बरामद किया गया था. इसी मोबाइल से एक टेलीग्राम चैनल बनाया था, जिसके जरिए अंबानी परिवार को धमकी दी गई थी. इसी सिलसिले में दिल्ली पुलिस को कोर्ट से तिहाड़ जेल में कैद इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी तहसीन अख़्तर से पूछताछ की अनुमति मिली है. सूत्रों ने बताया है कि जैश उल हिंद धमकी मामले में इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी को इस केस में अरेस्ट भी कर सकती है. बता दें कि बीते गुरुवार को तिहाड़ जेल में दिल्ली स्पेशल सेल ने जेल नंबर 8 में छापेमारी की थी, जिसके बाद आतंकी तहसीन अख्तर के बैरक से मोबाइल बरामद किया गया है. इसी मोबाइल से टेलीग्राम चैनल एक्टिवेट किया गया था. तहसीन अख्तर पटना के गांधी मैदान में पीएम मोदी की रैली में बम ब्लास्ट, हैदराबाद में ब्लास्ट, बोधगया बम ब्लास्ट्स में भी शामिल रहा है. जानकारी मिली थी कि जो मोबाइल बरामद किया गया है, उस मोबाइल में टोर ब्राउज़र के माध्यम से वर्चुअल नम्बर क्रिएट किया गया था और फिर टेलीग्राम अकाउंट बनाया गया था. एक और भी नंबर है जो सेल के रडार पर है.
नई दिल्लीः मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के सामने मिली कार और आतंकी संगठन जैश-उल-हिंद संगठन की तरफ से मिली धमकी के मामले में तिहाड़ जेल में कैद जिस आतंकी का नाम सामने आया है, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल उससे पूछताछ करने पहुंची है. तिहाड़ जेल में बंद इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी तहसीन अख्तर की बैरक से जांच में एक मोबाइल फोन बरामद किया गया था. इसी मोबाइल से एक टेलीग्राम चैनल बनाया था, जिसके जरिए अंबानी परिवार को धमकी दी गई थी. इसी सिलसिले में दिल्ली पुलिस को कोर्ट से तिहाड़ जेल में कैद इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी तहसीन अख़्तर से पूछताछ की अनुमति मिली है. सूत्रों ने बताया है कि जैश उल हिंद धमकी मामले में इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी को इस केस में अरेस्ट भी कर सकती है. बता दें कि बीते गुरुवार को तिहाड़ जेल में दिल्ली स्पेशल सेल ने जेल नंबर आठ में छापेमारी की थी, जिसके बाद आतंकी तहसीन अख्तर के बैरक से मोबाइल बरामद किया गया है. इसी मोबाइल से टेलीग्राम चैनल एक्टिवेट किया गया था. तहसीन अख्तर पटना के गांधी मैदान में पीएम मोदी की रैली में बम ब्लास्ट, हैदराबाद में ब्लास्ट, बोधगया बम ब्लास्ट्स में भी शामिल रहा है. जानकारी मिली थी कि जो मोबाइल बरामद किया गया है, उस मोबाइल में टोर ब्राउज़र के माध्यम से वर्चुअल नम्बर क्रिएट किया गया था और फिर टेलीग्राम अकाउंट बनाया गया था. एक और भी नंबर है जो सेल के रडार पर है.
छत्तीसगढ़। गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी के कारण हुई मौत का विवाद अभी थमा नहीं था कि छत्तीसगढ़ के रायपुर से ऐसा ही एक मामला सामने आया है। यहां अंबेडकनगर के अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी के कारण तीन बच्चों की मौत हो गई है। लेकिन इस बार कर्मचारी की लापरवाही के कारण यह घटना हुई है। जानकारी के अनुसार ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी सो गया था जिस कारण यह हादसा हुआ है। मामले पर संज्ञान लेते हुए सीएम रमन सिंह ने इस मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं। आरोप लगाया गया है कि ऑक्सीजन सप्लाई करने वाले ऑपरेटर रवि चंद्रा ड्यूटी के दौरान शराब पीकर सो गया था, कारणवश इमरजेंसी वार्ड में ऑक्सीजन की सप्लाई बंद हो गई थी। ऑक्सीजन की सप्लाई बंद होने के कारण वेंटीलेटर पर रखे गए तीन बच्चों की मौत हो गई। हादसा सामने आने के बाद ऑक्सीजन सप्लाई में तैनात डॉक्टर पर एफआईआर दर्ज करा ली गई है। वही इस मामले में स्वास्थ्य आयुक्त आर प्रसन्ना ने इस बात की माना है कि बच्चों की मौत ऑक्सीजन की कमी के कारण हुई है। आपको बता दें कि ऐसा ही एक मामला हाल ही में गोरखपुर से सामने आया था। यहां ऑक्सीजन की कमी के कारण कई सारे बच्चों की मौत हो गई थी। गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में हुई बच्चों की मौत के बाद सियासत ने एक अलग ही रंग ले लिया है, गोरखपुर हादसे के बाद बीजेपी को चारों तरफ से घेरा जाने लग गया था। हालांकि यूपी के मुखिया सीएम योगी ने ऑक्सीजन की कमी के कारण बच्चों की मौत से इनकार किया है।
छत्तीसगढ़। गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी के कारण हुई मौत का विवाद अभी थमा नहीं था कि छत्तीसगढ़ के रायपुर से ऐसा ही एक मामला सामने आया है। यहां अंबेडकनगर के अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी के कारण तीन बच्चों की मौत हो गई है। लेकिन इस बार कर्मचारी की लापरवाही के कारण यह घटना हुई है। जानकारी के अनुसार ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी सो गया था जिस कारण यह हादसा हुआ है। मामले पर संज्ञान लेते हुए सीएम रमन सिंह ने इस मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं। आरोप लगाया गया है कि ऑक्सीजन सप्लाई करने वाले ऑपरेटर रवि चंद्रा ड्यूटी के दौरान शराब पीकर सो गया था, कारणवश इमरजेंसी वार्ड में ऑक्सीजन की सप्लाई बंद हो गई थी। ऑक्सीजन की सप्लाई बंद होने के कारण वेंटीलेटर पर रखे गए तीन बच्चों की मौत हो गई। हादसा सामने आने के बाद ऑक्सीजन सप्लाई में तैनात डॉक्टर पर एफआईआर दर्ज करा ली गई है। वही इस मामले में स्वास्थ्य आयुक्त आर प्रसन्ना ने इस बात की माना है कि बच्चों की मौत ऑक्सीजन की कमी के कारण हुई है। आपको बता दें कि ऐसा ही एक मामला हाल ही में गोरखपुर से सामने आया था। यहां ऑक्सीजन की कमी के कारण कई सारे बच्चों की मौत हो गई थी। गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में हुई बच्चों की मौत के बाद सियासत ने एक अलग ही रंग ले लिया है, गोरखपुर हादसे के बाद बीजेपी को चारों तरफ से घेरा जाने लग गया था। हालांकि यूपी के मुखिया सीएम योगी ने ऑक्सीजन की कमी के कारण बच्चों की मौत से इनकार किया है।
चांदीकी मूरतें बनानेसे कारीगरों को बहुत काम दिलाता था। उसने उन्हांको और ऐसी ऐसी बस्तुओंके कारीगरों- २५ को एकट्ठे करके कहा हे मनुष्यो तुम जानते हो कि इस कामसे हमोंको सम्पत्ति प्राप्त होती है । और तुम देखते २६ और सुनते हो कि इस पावलने यह कहके कि जो हाथोंसे बनाये जाते सो ईश्वर नहीं हैं केवल इफिसके नहीं परन्तु प्राय समस्त आशियाके बहुत लोगोंको समझाके भरमाया है । और हमोंको केवल यह डर नहीं है कि २० यह उदाम निन्दित हो जाय परन्तु यह भी कि बड़ी देवी अर्त्तिमीका मन्दिर तुच्छ समझा जाय और उसकी महिमा जिसे समस्त आशिया और जगत पूजता है नष्ट हो जाय । वे यह सुनके और क्रोधसे पूर्ण होके पुकारने २८ लगे इफिसियोंकी अर्त्तिमीकी जय । और सारे नगर में २० बड़ी गड़बड़ाहट हुई और लोग गायस और अरिस्ताख दो माकिदोनियोंको जो पावलके संगी पथिक थे पकड़के एक चित्त होके रंगशालामें दौड़ गये । जब पावलने ३० लोगोंके पास भीतर जाने चाहा तव शिष्यांने उसको जाने न दिया । आशियाके प्रधानों से भी कितनोंने जो ३१ उसके मित्र थे उस पास भेजके उससे बिन्ती किई कि रंगशाला में जानेकी जोखिम मत अपनेपर उठाइये । सो ३२ कोई कुछ और कोई कुछ पुकारते थे क्योंकि सभा घवराई हुई थी और अधिक लोग नहीं जानते थे हम किस कारण एकट्ठे हुए हैं । तब भीड़ में से कितनोंने सिकन्दर- ३३ को जिसे यिहूदियोंने खड़ा किया था आगे बढ़ाया और सिकन्दर हाथसे सैन करके लोगों के आगे उत्तर दिया ३४ चाहता था । परन्तु जब उन्होंने जाना कि वह यिहूदी है सबके सब एक शब्दसे दो घड़ीके अटकल इफिसियोंकी ३५ अर्तिमीकी जय पुकारते रहे। तब नगरके लेखकने लोगोंको शांत करके कहा हे इफिसी लोगो कौन मनुष्य है जो नहीं जानता कि इफिसियोंका नगर बड़ी देवी अर्त्तिमीका और जूपितर की ओर से गिरी हुई मूर्त्तिका टहलुआ ३६ है । सो जबकि इन बातोंका खंडन नहीं हो सकता है उचित है कि तुम शांत होओ और कोई काम उतावली३७ से न करो । क्योंकि तुम इन मनुष्योंको लाये हो जो न ३८ पवित्र बस्तुओंके चार न तुम्हारी देवीके निन्दक हैं। सो जो दीमीजियको और उसके संगके कारीगरोंको किसीसे बिवाद है तो बिचारके दिन होते हैं और प्रधान ३९ लोग हैं वे एक दूसरेपर नालिश करें । परन्तु जो तुम दूसरी बातोंके विषय में कुछ पूछते हो तो व्यवहारिक 80 सभामें निर्णय किया जायगा । क्योंकि जो आज हुई है उसके हेतुसे हमपर बलवेका दोष लगाये जानेका डर है इसलिये कि कोई कारण नहीं है जिस करके हम ४१ इस भीड़का उत्तर दे सकेंगे । और यह कहके उसने सभाको बिदा किया । २० बीसवां पर्व्व । १ पावलका कई एक देशांसे होके बोया नगरको जाना : 9 उतुखका मरना और फिरके जिलाया जाना । १३ पावलका मिलीत नगरमें पहुंचना । १७ इफिसकी मंडलोके प्राचीनका उपदेश देना । ३६ वहांसे विदा होना । जब हुल्लड़ थम गया तब पावल शिष्यों को अपने पास बुलाके और गले लगाके माकिदोनिया जानेको २ चल निकला। उस सारे देश में फिरके और बहुत बातोंसे उन्हें उपदेश देके वह यूनान देशमें आया । और तीन ३ मास रहके जब वह जहाजपर सुरियाको जानेपर था यिहूदी लोग उसकी घातमें लगे इसलिये उसने माकिदोनिया होके लौट जानेको ठहराया । बिरेया नगरका 8 सोपातर और थिसलोनियों में से अरिस्तार्ख और सिकुन्द और दर्बी नगरका गायस और तिमोथिय और आशिया देशके तुखिक और चोफिम आशियालों उसके संग हो लिये । इन्होंने आगे जाके बोआमें हमोंकी बार देखी । और हम लोग अखमीरी रोटीके पर्व्वके दिनोंके पीछे ६ जहाजपर फिलिपीसे चले और पांच दिनमें चोआ में उनके पास पहुंचे जहां हम सात दिन रहे । अठवारेके पहिले दिन जब शिष्य लोग रोटी तोड़ने- ७ को एकट्ठे हुए तब पावलने जो अगले दिन चले जानेपर था उनसे बातें किई और आधी रातलों बात करता रहा । जिस उपरौठी कोठरीमें वे एकट्ठे हुए थे उसमें द बहुत दीपक बरते थे । और उतुख नाम एक जवान 6 खिड़कीपर बैठा हुआ भारी नींदसे झुक रहा था और पावलके बड़ी वेरलों बातें करते करते वह नींदसे झुकके तीसरी अटारीपरसे नीचे गिर पड़ा और मूआ उठाया गया । परन्तु पावल उतरके उसपर औंधे पड़ गया १० और उसे गोदीमें लेके बोला मत धूम मचाओ क्योंकि उसका प्राण उसमें है । तब ऊपर जाके और रोटी ११ तोड़के और खाके और बड़ी बेरलों भरतक बातचीत करके वह चला गया । और वे उस जवानको जीते ले १२ आये और बहुत शांति पाई ।
चांदीकी मूरतें बनानेसे कारीगरों को बहुत काम दिलाता था। उसने उन्हांको और ऐसी ऐसी बस्तुओंके कारीगरों- पच्चीस को एकट्ठे करके कहा हे मनुष्यो तुम जानते हो कि इस कामसे हमोंको सम्पत्ति प्राप्त होती है । और तुम देखते छब्बीस और सुनते हो कि इस पावलने यह कहके कि जो हाथोंसे बनाये जाते सो ईश्वर नहीं हैं केवल इफिसके नहीं परन्तु प्राय समस्त आशियाके बहुत लोगोंको समझाके भरमाया है । और हमोंको केवल यह डर नहीं है कि बीस यह उदाम निन्दित हो जाय परन्तु यह भी कि बड़ी देवी अर्त्तिमीका मन्दिर तुच्छ समझा जाय और उसकी महिमा जिसे समस्त आशिया और जगत पूजता है नष्ट हो जाय । वे यह सुनके और क्रोधसे पूर्ण होके पुकारने अट्ठाईस लगे इफिसियोंकी अर्त्तिमीकी जय । और सारे नगर में बीस बड़ी गड़बड़ाहट हुई और लोग गायस और अरिस्ताख दो माकिदोनियोंको जो पावलके संगी पथिक थे पकड़के एक चित्त होके रंगशालामें दौड़ गये । जब पावलने तीस लोगोंके पास भीतर जाने चाहा तव शिष्यांने उसको जाने न दिया । आशियाके प्रधानों से भी कितनोंने जो इकतीस उसके मित्र थे उस पास भेजके उससे बिन्ती किई कि रंगशाला में जानेकी जोखिम मत अपनेपर उठाइये । सो बत्तीस कोई कुछ और कोई कुछ पुकारते थे क्योंकि सभा घवराई हुई थी और अधिक लोग नहीं जानते थे हम किस कारण एकट्ठे हुए हैं । तब भीड़ में से कितनोंने सिकन्दर- तैंतीस को जिसे यिहूदियोंने खड़ा किया था आगे बढ़ाया और सिकन्दर हाथसे सैन करके लोगों के आगे उत्तर दिया चौंतीस चाहता था । परन्तु जब उन्होंने जाना कि वह यिहूदी है सबके सब एक शब्दसे दो घड़ीके अटकल इफिसियोंकी पैंतीस अर्तिमीकी जय पुकारते रहे। तब नगरके लेखकने लोगोंको शांत करके कहा हे इफिसी लोगो कौन मनुष्य है जो नहीं जानता कि इफिसियोंका नगर बड़ी देवी अर्त्तिमीका और जूपितर की ओर से गिरी हुई मूर्त्तिका टहलुआ छत्तीस है । सो जबकि इन बातोंका खंडन नहीं हो सकता है उचित है कि तुम शांत होओ और कोई काम उतावलीसैंतीस से न करो । क्योंकि तुम इन मनुष्योंको लाये हो जो न अड़तीस पवित्र बस्तुओंके चार न तुम्हारी देवीके निन्दक हैं। सो जो दीमीजियको और उसके संगके कारीगरोंको किसीसे बिवाद है तो बिचारके दिन होते हैं और प्रधान उनतालीस लोग हैं वे एक दूसरेपर नालिश करें । परन्तु जो तुम दूसरी बातोंके विषय में कुछ पूछते हो तो व्यवहारिक अस्सी सभामें निर्णय किया जायगा । क्योंकि जो आज हुई है उसके हेतुसे हमपर बलवेका दोष लगाये जानेका डर है इसलिये कि कोई कारण नहीं है जिस करके हम इकतालीस इस भीड़का उत्तर दे सकेंगे । और यह कहके उसने सभाको बिदा किया । बीस बीसवां पर्व्व । एक पावलका कई एक देशांसे होके बोया नगरको जाना : नौ उतुखका मरना और फिरके जिलाया जाना । तेरह पावलका मिलीत नगरमें पहुंचना । सत्रह इफिसकी मंडलोके प्राचीनका उपदेश देना । छत्तीस वहांसे विदा होना । जब हुल्लड़ थम गया तब पावल शिष्यों को अपने पास बुलाके और गले लगाके माकिदोनिया जानेको दो चल निकला। उस सारे देश में फिरके और बहुत बातोंसे उन्हें उपदेश देके वह यूनान देशमें आया । और तीन तीन मास रहके जब वह जहाजपर सुरियाको जानेपर था यिहूदी लोग उसकी घातमें लगे इसलिये उसने माकिदोनिया होके लौट जानेको ठहराया । बिरेया नगरका आठ सोपातर और थिसलोनियों में से अरिस्तार्ख और सिकुन्द और दर्बी नगरका गायस और तिमोथिय और आशिया देशके तुखिक और चोफिम आशियालों उसके संग हो लिये । इन्होंने आगे जाके बोआमें हमोंकी बार देखी । और हम लोग अखमीरी रोटीके पर्व्वके दिनोंके पीछे छः जहाजपर फिलिपीसे चले और पांच दिनमें चोआ में उनके पास पहुंचे जहां हम सात दिन रहे । अठवारेके पहिले दिन जब शिष्य लोग रोटी तोड़ने- सात को एकट्ठे हुए तब पावलने जो अगले दिन चले जानेपर था उनसे बातें किई और आधी रातलों बात करता रहा । जिस उपरौठी कोठरीमें वे एकट्ठे हुए थे उसमें द बहुत दीपक बरते थे । और उतुख नाम एक जवान छः खिड़कीपर बैठा हुआ भारी नींदसे झुक रहा था और पावलके बड़ी वेरलों बातें करते करते वह नींदसे झुकके तीसरी अटारीपरसे नीचे गिर पड़ा और मूआ उठाया गया । परन्तु पावल उतरके उसपर औंधे पड़ गया दस और उसे गोदीमें लेके बोला मत धूम मचाओ क्योंकि उसका प्राण उसमें है । तब ऊपर जाके और रोटी ग्यारह तोड़के और खाके और बड़ी बेरलों भरतक बातचीत करके वह चला गया । और वे उस जवानको जीते ले बारह आये और बहुत शांति पाई ।
हमारा व्यक्तित्व हमारी राशियों से अत्यधिक प्रभावित होता है। हम कितने अच्छे या असभ्य हैं या दूसरों के साथ घुलमिल सकते हैं, आदि। यह काफी हद तक हमारे राशि व्यक्तित्व लक्षणों पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, यदि आप एक अच्छे या मतलबी व्यक्ति हैं, तो ज्योतिष शास्त्र के अनुसार आपकी राशियों के आधार पर इस बात का चयन किया जा सकता है। ज्योतिष शास्त्र में 12 राशियों का वर्णन है और हर राशि के जातक का व्यवहार एक दूसरे से भिन्न होता है। ज्योतिष शास्त्र में ऐसी तीन राशियों के बारे में जानकारी दी गई है जिसके जातक किसी से भी कोई द्वेष भाव नहीं रखते हैं। उनके मन में किसी के लिए गिला-शिकवा नहीं होता है। वे अपनी पुरानी बातों को जल्द ही भूल जाते हैं और जीवन में आगे बढ़ने का प्रयास करते हैं। इन राशियों के जातक लोगों को उनकी गलतियों के लिए बहुत जल्दी माफ कर देते हैं। Get all Astrology News in Hindi related to daily horoscope, tarot readings, birth chart report in Hindi etc. Stay updated with us for all breaking news from Astro and more news in Hindi.
हमारा व्यक्तित्व हमारी राशियों से अत्यधिक प्रभावित होता है। हम कितने अच्छे या असभ्य हैं या दूसरों के साथ घुलमिल सकते हैं, आदि। यह काफी हद तक हमारे राशि व्यक्तित्व लक्षणों पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, यदि आप एक अच्छे या मतलबी व्यक्ति हैं, तो ज्योतिष शास्त्र के अनुसार आपकी राशियों के आधार पर इस बात का चयन किया जा सकता है। ज्योतिष शास्त्र में बारह राशियों का वर्णन है और हर राशि के जातक का व्यवहार एक दूसरे से भिन्न होता है। ज्योतिष शास्त्र में ऐसी तीन राशियों के बारे में जानकारी दी गई है जिसके जातक किसी से भी कोई द्वेष भाव नहीं रखते हैं। उनके मन में किसी के लिए गिला-शिकवा नहीं होता है। वे अपनी पुरानी बातों को जल्द ही भूल जाते हैं और जीवन में आगे बढ़ने का प्रयास करते हैं। इन राशियों के जातक लोगों को उनकी गलतियों के लिए बहुत जल्दी माफ कर देते हैं। Get all Astrology News in Hindi related to daily horoscope, tarot readings, birth chart report in Hindi etc. Stay updated with us for all breaking news from Astro and more news in Hindi.
1 संबंधः नीदरलैण्ड। नीदरलैण्ड नीदरलैंड युरोप महाद्वीप का एक प्रमुख देश है। यह उत्तरी-पूर्वी यूरोप में स्थित है। इसकी उत्तरी तथा पश्चिमी सीमा पर उत्तरी समुद्र स्थित है, दक्षिण में बेल्जियम एवं पूर्व में जर्मनी है। नीदरलैंड की राजधानी एम्सटर्डम है। "द हेग" को प्रशासनिक राजधानी का दर्जा दिया जाता है। नीदरलैंड को अक्सर हॉलैंड के नाम संबोधित किया जाता है एवं सामान्यतः नीदरलैंड के निवासियों तथा इसकी भाषा दोनों के लिए डच शब्द का उपयोग किया जाता है। .
एक संबंधः नीदरलैण्ड। नीदरलैण्ड नीदरलैंड युरोप महाद्वीप का एक प्रमुख देश है। यह उत्तरी-पूर्वी यूरोप में स्थित है। इसकी उत्तरी तथा पश्चिमी सीमा पर उत्तरी समुद्र स्थित है, दक्षिण में बेल्जियम एवं पूर्व में जर्मनी है। नीदरलैंड की राजधानी एम्सटर्डम है। "द हेग" को प्रशासनिक राजधानी का दर्जा दिया जाता है। नीदरलैंड को अक्सर हॉलैंड के नाम संबोधित किया जाता है एवं सामान्यतः नीदरलैंड के निवासियों तथा इसकी भाषा दोनों के लिए डच शब्द का उपयोग किया जाता है। .
IND VS SL: भारत ने श्रीलंका से टेस्ट सीरीज जीत ली. जानिए इस बार किसे रोहित शर्मा ने थमाई ट्रॉफी. (AP) नई दिल्ली. भारत ने बेंगलुरू में खेले गए पिंक-बॉल टेस्ट (Pink ball test) में श्रीलंका को 238 रन से शिकस्त देकर टेस्ट सीरीज 2-0 से अपने नाम की. भारत ने यह टेस्ट मैच तीसरे दिन ही जीत लिया. इससे पहले, टीम इंडिया ने मोहाली टेस्ट भी तीन दिन के भीतर ही जीत लिया था. उस मुकाबले में भारत ने मेहमान श्रीलंका को पारी और 222 रन के अंतर से हराया था. बेंगलुरू में सीरीज जीतने के बाद भारतीय कप्तान रोहित शर्मा (Rohit Sharma) ने महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) द्वारा शुरू की गई परंपरा को आगे बढ़ाते हुए टीम एक युवा खिलाड़ियों को ट्रॉफी थमा दी. इसके बाद वो खुद किनारे खड़े हो गए. ट्रॉफी के साथ जो तस्वीरें सामने आईं हैं, उसमें भी रोहित नजर नहीं आ रहे हैं. रोहित शर्मा (Rohit Sharma) ने इस बार जीत के बाद टीम के युवा खिलाड़ी प्रियंक पांचाल (Priyank Panchal) को ट्रॉफी थमाई. फोटो सेशन में भी प्रियंक ही ट्रॉफी पकड़े नजर आ रहे हैं और टीम के बाकी खिलाड़ी उनके आस-पास खड़े हैं. बता दें कि प्रियंक श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में बैकअप ओपनर के रूप में टीम के साथ थे. इससे पहले, भारत के दक्षिण अफ्रीका दौरे पर भी प्रियंक टीम के साथ गए थे. तब उन्हें चोटिल रोहित शर्मा की जगह बतौर सलामी बल्लेबाज स्क्वॉड से जोड़ा गया था. हालांकि, उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला. वो अब तक भारत के लिए डेब्यू नहीं कर पाए हैं. प्रियंक ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 101 मैच में 7 हजार से अधिक रन बनाए हैं. वो घरेलू क्रिकेट में 24 शतक लगा चुके हैं. बता दें कि महेंद्र सिंह धोनी जब टीम इंडिया के कप्तान थे, तो उन्होंने युवा खिलाड़ियों की हौसला अफजाई करने के लिए उन्हें ट्रॉफी थमाने का सिलसिला शुरू किया था. इसके बाद विराट कोहली ने इस परंपरा को लंबे वक्त तक निभाया. रोहित शर्मा भी जब से कप्तान बने हैं. वो भी धोनी-विराट के नक्शेकदम पर ही चल रहे हैं. वो भी युवा खिलाड़ियों को ही ट्रॉफी थमाते हैं. हालांकि, उन्होंने एक नई पहल शुरू की. जो श्रीलंका के खिलाफ टी20 सीरीज के दौरान देखने को मिली थी. श्रीलंका के खिलाफ 3 टी20 की सीरीज क्लीन स्वीप करने के बाद रोहित ने अवॉर्ड सेरेमनी में ट्रॉफी लेने के बाद इसे जयदेव शाह को दे दिया था. वो श्रीलंका के खिलाफ टी20 सीरीज में बीसीसीआई के प्रतिनिधि के तौर पर शामिल थे. जयदेव सौराष्ट्र के पूर्व कप्तान और बीसीसीआई के पूर्व सचिव निरंजन शाह के बेटे हैं. .
IND VS SL: भारत ने श्रीलंका से टेस्ट सीरीज जीत ली. जानिए इस बार किसे रोहित शर्मा ने थमाई ट्रॉफी. नई दिल्ली. भारत ने बेंगलुरू में खेले गए पिंक-बॉल टेस्ट में श्रीलंका को दो सौ अड़तीस रन से शिकस्त देकर टेस्ट सीरीज दो-शून्य से अपने नाम की. भारत ने यह टेस्ट मैच तीसरे दिन ही जीत लिया. इससे पहले, टीम इंडिया ने मोहाली टेस्ट भी तीन दिन के भीतर ही जीत लिया था. उस मुकाबले में भारत ने मेहमान श्रीलंका को पारी और दो सौ बाईस रन के अंतर से हराया था. बेंगलुरू में सीरीज जीतने के बाद भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने महेंद्र सिंह धोनी द्वारा शुरू की गई परंपरा को आगे बढ़ाते हुए टीम एक युवा खिलाड़ियों को ट्रॉफी थमा दी. इसके बाद वो खुद किनारे खड़े हो गए. ट्रॉफी के साथ जो तस्वीरें सामने आईं हैं, उसमें भी रोहित नजर नहीं आ रहे हैं. रोहित शर्मा ने इस बार जीत के बाद टीम के युवा खिलाड़ी प्रियंक पांचाल को ट्रॉफी थमाई. फोटो सेशन में भी प्रियंक ही ट्रॉफी पकड़े नजर आ रहे हैं और टीम के बाकी खिलाड़ी उनके आस-पास खड़े हैं. बता दें कि प्रियंक श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में बैकअप ओपनर के रूप में टीम के साथ थे. इससे पहले, भारत के दक्षिण अफ्रीका दौरे पर भी प्रियंक टीम के साथ गए थे. तब उन्हें चोटिल रोहित शर्मा की जगह बतौर सलामी बल्लेबाज स्क्वॉड से जोड़ा गया था. हालांकि, उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला. वो अब तक भारत के लिए डेब्यू नहीं कर पाए हैं. प्रियंक ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में एक सौ एक मैच में सात हजार से अधिक रन बनाए हैं. वो घरेलू क्रिकेट में चौबीस शतक लगा चुके हैं. बता दें कि महेंद्र सिंह धोनी जब टीम इंडिया के कप्तान थे, तो उन्होंने युवा खिलाड़ियों की हौसला अफजाई करने के लिए उन्हें ट्रॉफी थमाने का सिलसिला शुरू किया था. इसके बाद विराट कोहली ने इस परंपरा को लंबे वक्त तक निभाया. रोहित शर्मा भी जब से कप्तान बने हैं. वो भी धोनी-विराट के नक्शेकदम पर ही चल रहे हैं. वो भी युवा खिलाड़ियों को ही ट्रॉफी थमाते हैं. हालांकि, उन्होंने एक नई पहल शुरू की. जो श्रीलंका के खिलाफ टीबीस सीरीज के दौरान देखने को मिली थी. श्रीलंका के खिलाफ तीन टीबीस की सीरीज क्लीन स्वीप करने के बाद रोहित ने अवॉर्ड सेरेमनी में ट्रॉफी लेने के बाद इसे जयदेव शाह को दे दिया था. वो श्रीलंका के खिलाफ टीबीस सीरीज में बीसीसीआई के प्रतिनिधि के तौर पर शामिल थे. जयदेव सौराष्ट्र के पूर्व कप्तान और बीसीसीआई के पूर्व सचिव निरंजन शाह के बेटे हैं. .
कोपेनहेगेन : सर्वोच्च विश्व वरीयता प्राप्त भारत की बैडमिंटन स्टार सायना नेहवाल के अलावा भारत की दूसरे नंबर की महिला एकल खिलाड़ी पी. वी. सिंधु और शीर्ष पुरुष एकल खिलाड़ी किदांबी श्रीकांत ने बुधवार को डेनमार्क ओपन सुपरसीरीज प्रीमियर में जीत के साथ अपने अभियान का आगाज किया। भारत की शीर्ष महिला युगल जोड़ी ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा को हालांकि पहले ही दौर में हार झेलनी पड़ी। इसके अलावा पहले ही दौर में पूर्व सर्वोच्च विश्व वरीयता प्राप्त ली चोंग वेई का सामना करने उतरे पारुपल्ली कश्यप भी पहले दौर से आगे नहीं बढ़ सके। सायना ने पहले दौर के मुकाबले में 17वीं विश्व वरीयता प्राप्त थाईलैंड की बुसानान ओंगबुमरुं गफान को हराकर दूसरे दौर में प्रवेश कर लिया, जहां उनका मुकाबला 18वीं विश्व वरीयता प्राप्त जापान की मिनात्सु मितानी से होगा। शीर्ष वरीय सायना के लिए हालांकि पहले दौर का मुकाबला आसान नहीं था। उन्हें तीन गेम तक खिंचे मैच में 69 मिनट संघर्ष करना पड़ा। सायना ने बुसानान को 23-21, 14-21, 21-18 से हराया। पहले गेम से ही दोनों के बीच मुकाबला संघर्षपूर्ण रहने का आभास हो गया था। दोनों खिलाड़ियों के बीच एक-एक अंक के लिए कड़ा संघर्ष हुआ। सायना जहां पहले गेम में सर्वाधिक लगातार चार अंक जुटा पाईं वहीं, बुसानान एक बार लगातार पांच अंक अर्जित करने में सफल रहीं। 21-21 तक गेम बराबर रहने के बाद सायना ने अंततः धैर्य कायम रखते हुए आखिरी दो अंक ले लिए और पहला गेम जीतकर बढ़त ले ली। दूसरे गेम में लेकिन बुसानान कहीं आक्रामक नजर आईं। 4-7 से पिछड़ने के बाद सायना 9-9 के स्कोर तक ही बुसानान का सामना कर सकीं। इसके बाद बुसानान ने तेजी दिखाते हुए 18-11 की बड़ी बढ़त हासिल कर ली और अंततः दूसरा गेम जीतकर मैच में बराबरी कर ली। तीसरे गेम में लेकिन ओलम्पिक और विश्व चैम्पियनशिप कांस्य पदक विजेता सायना ने बुसानान की चुनौती स्वीकार करते हुए पहले 11-11 से स्कोर बराबर किया और लगातार पांच अंक हासिल करते हुए 18-12 की बढ़त ले ली और अंततः गेम जीतकर मैच अपने नाम कर लिया। दो बार विश्व चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीत चुकीं सिंधु ने पहले दौर के मुकाबले में इंडोनेशिया को मारिया फेबे कुसुमास्तुती को एकतरफा मुकाबले में 21-13, 21-11 से हराया। सिंधु को पहले दौर का अपना मैच जीतने में सिर्फ 33 मिनट लगे। सिंधु के लिए हालांकि दूसरे दौर का मुकाबला कठिन हो सकता है, जहां उनका सामना तीसरी वरीय चीनी ताइपे की ताई त्जू यिंग से हो सकता है। यिंग को हालांकि अभी फिनलैंड की क्वालीफायर खिलाड़ी ऐरी मिक्केला से पहले दौर का मैच खेलना है। पुरुष एकल वर्ग में पांचवें विश्व वरीयता प्राप्त किदांबी श्रीकांत ने हमवतन अजय जयराम को 32 मिनट में आसान मुकाबले में 21-10, 21-14 से मात देकर दूसरे दौर में प्रवेश कर लिया। दूसरे दौर में श्रीकांत को जापान के शो सासाकी और इंडोनेशिया के टॉमी सुगियार्तो के बीच विजेता से भिड़ना पड़ सकता है। वहीं आठवें विश्व वरीयता प्राप्त कश्यप मलेशिया के दिग्गज चोंग वेई के खिलाफ सिर्फ 47 मिनट संघर्ष पेश कर सके। चोंग वेई ने कश्यप को 21-14, 21-15 से हराया। चोंग वेई के खिलाफ कश्यप का यह सातवां मैच था और कश्यप को सातवीं बार भी हार झेलनी पड़ी। महिला युगल वर्ग में भी भारत के लिए दिन अच्छा नहीं रहा। ज्वाला अश्विनी की भारतीय जोड़ी को रीका काकिवा और मीयूकी माएदा की सातवीं वरीय जापानी जोड़ी ने सीधे गेमों में 21-19, 21-18 से हरा दिया। कोरिया ओपन से बाहर रहने के बाद कोर्ट पर वापसी करते हुए ज्वाला-अश्विनी सिर्फ 45 मिनट अपना संघर्ष कायम रख सकीं। हालांकि शीर्ष भारतीय जोड़ी ने पूरे मैच के दौरान जापानी जोड़ीदारों को कड़ी टक्कर दी और एक-एक अंक के लिए पसीना बहाने पर मजबूर किया। दोनों ही गेम के आखिर में भारतीय जोड़ी धैर्य नहीं रख पाईं और उन्हें पहले ही दौर से बाहर होना पड़ा।
कोपेनहेगेन : सर्वोच्च विश्व वरीयता प्राप्त भारत की बैडमिंटन स्टार सायना नेहवाल के अलावा भारत की दूसरे नंबर की महिला एकल खिलाड़ी पी. वी. सिंधु और शीर्ष पुरुष एकल खिलाड़ी किदांबी श्रीकांत ने बुधवार को डेनमार्क ओपन सुपरसीरीज प्रीमियर में जीत के साथ अपने अभियान का आगाज किया। भारत की शीर्ष महिला युगल जोड़ी ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा को हालांकि पहले ही दौर में हार झेलनी पड़ी। इसके अलावा पहले ही दौर में पूर्व सर्वोच्च विश्व वरीयता प्राप्त ली चोंग वेई का सामना करने उतरे पारुपल्ली कश्यप भी पहले दौर से आगे नहीं बढ़ सके। सायना ने पहले दौर के मुकाबले में सत्रहवीं विश्व वरीयता प्राप्त थाईलैंड की बुसानान ओंगबुमरुं गफान को हराकर दूसरे दौर में प्रवेश कर लिया, जहां उनका मुकाबला अट्ठारहवीं विश्व वरीयता प्राप्त जापान की मिनात्सु मितानी से होगा। शीर्ष वरीय सायना के लिए हालांकि पहले दौर का मुकाबला आसान नहीं था। उन्हें तीन गेम तक खिंचे मैच में उनहत्तर मिनट संघर्ष करना पड़ा। सायना ने बुसानान को तेईस-इक्कीस, चौदह-इक्कीस, इक्कीस-अट्ठारह से हराया। पहले गेम से ही दोनों के बीच मुकाबला संघर्षपूर्ण रहने का आभास हो गया था। दोनों खिलाड़ियों के बीच एक-एक अंक के लिए कड़ा संघर्ष हुआ। सायना जहां पहले गेम में सर्वाधिक लगातार चार अंक जुटा पाईं वहीं, बुसानान एक बार लगातार पांच अंक अर्जित करने में सफल रहीं। इक्कीस-इक्कीस तक गेम बराबर रहने के बाद सायना ने अंततः धैर्य कायम रखते हुए आखिरी दो अंक ले लिए और पहला गेम जीतकर बढ़त ले ली। दूसरे गेम में लेकिन बुसानान कहीं आक्रामक नजर आईं। चार-सात से पिछड़ने के बाद सायना नौ-नौ के स्कोर तक ही बुसानान का सामना कर सकीं। इसके बाद बुसानान ने तेजी दिखाते हुए अट्ठारह-ग्यारह की बड़ी बढ़त हासिल कर ली और अंततः दूसरा गेम जीतकर मैच में बराबरी कर ली। तीसरे गेम में लेकिन ओलम्पिक और विश्व चैम्पियनशिप कांस्य पदक विजेता सायना ने बुसानान की चुनौती स्वीकार करते हुए पहले ग्यारह-ग्यारह से स्कोर बराबर किया और लगातार पांच अंक हासिल करते हुए अट्ठारह-बारह की बढ़त ले ली और अंततः गेम जीतकर मैच अपने नाम कर लिया। दो बार विश्व चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीत चुकीं सिंधु ने पहले दौर के मुकाबले में इंडोनेशिया को मारिया फेबे कुसुमास्तुती को एकतरफा मुकाबले में इक्कीस-तेरह, इक्कीस-ग्यारह से हराया। सिंधु को पहले दौर का अपना मैच जीतने में सिर्फ तैंतीस मिनट लगे। सिंधु के लिए हालांकि दूसरे दौर का मुकाबला कठिन हो सकता है, जहां उनका सामना तीसरी वरीय चीनी ताइपे की ताई त्जू यिंग से हो सकता है। यिंग को हालांकि अभी फिनलैंड की क्वालीफायर खिलाड़ी ऐरी मिक्केला से पहले दौर का मैच खेलना है। पुरुष एकल वर्ग में पांचवें विश्व वरीयता प्राप्त किदांबी श्रीकांत ने हमवतन अजय जयराम को बत्तीस मिनट में आसान मुकाबले में इक्कीस-दस, इक्कीस-चौदह से मात देकर दूसरे दौर में प्रवेश कर लिया। दूसरे दौर में श्रीकांत को जापान के शो सासाकी और इंडोनेशिया के टॉमी सुगियार्तो के बीच विजेता से भिड़ना पड़ सकता है। वहीं आठवें विश्व वरीयता प्राप्त कश्यप मलेशिया के दिग्गज चोंग वेई के खिलाफ सिर्फ सैंतालीस मिनट संघर्ष पेश कर सके। चोंग वेई ने कश्यप को इक्कीस-चौदह, इक्कीस-पंद्रह से हराया। चोंग वेई के खिलाफ कश्यप का यह सातवां मैच था और कश्यप को सातवीं बार भी हार झेलनी पड़ी। महिला युगल वर्ग में भी भारत के लिए दिन अच्छा नहीं रहा। ज्वाला अश्विनी की भारतीय जोड़ी को रीका काकिवा और मीयूकी माएदा की सातवीं वरीय जापानी जोड़ी ने सीधे गेमों में इक्कीस-उन्नीस, इक्कीस-अट्ठारह से हरा दिया। कोरिया ओपन से बाहर रहने के बाद कोर्ट पर वापसी करते हुए ज्वाला-अश्विनी सिर्फ पैंतालीस मिनट अपना संघर्ष कायम रख सकीं। हालांकि शीर्ष भारतीय जोड़ी ने पूरे मैच के दौरान जापानी जोड़ीदारों को कड़ी टक्कर दी और एक-एक अंक के लिए पसीना बहाने पर मजबूर किया। दोनों ही गेम के आखिर में भारतीय जोड़ी धैर्य नहीं रख पाईं और उन्हें पहले ही दौर से बाहर होना पड़ा।
कार्प तालाबों और नदियों में रहता है। यह मछली कार्प के प्रकार से संबंधित है। एक तालाब में रहने वाले एक कार्प में नदी में रहने वाली प्रजातियों से थोड़ा अलग आकार होता है। तो पहली कक्षा गोलाकार और बड़े पैमाने पर humpbacked है, और दूसरा एक पहले प्रकार से बड़ा है और इसका रंग हल्का है। दोनों प्रजातियों में सिर के किनारों पर स्थित मूंछ होता है। इस तरह की मछली को स्पॉन्गिंग के आधार पर बहुत ज्यादा पकड़ा जा सकता है। कार्प मछली के प्रकार को संदर्भित करता है जो बहुत हैप्रतिरोधी। कैवियार को बंद करने के लिए, वे लंबे और कठिन जगह पर जाते हैं। डैम्स, जो कभी-कभी अपने रास्ते को अवरुद्ध करते हैं, उनके लिए बाधा नहीं होती है। वे पानी से ऊंचाई से दो मीटर तक कूद सकते हैं। कार्प स्पॉन्गिंग जगह चुनती है जहां स्नैग या रीड होते हैं। ऐसा किया जाता है ताकि कोई भी अपना कैवियार नहीं खा सके। कार्प के व्यक्ति स्वतंत्र रूप से पुरुष व्यक्ति के पक्ष में एक विकल्प बनाते हैं। पसंद आसान नहीं है, क्योंकि पुरुषों के झुंड इसके पीछे चल सकते हैं। मादा कार्प मोटा और बड़ा है। स्पॉन्ग कार्पः यह घटना कब शुरू होती है? पहली छोर अप्रैल के अंत में शुरू होती हैरूसी संघ का केंद्रीय क्षेत्र। यह सब लगभग 14 दिन तक रहता है। 15 मई के आसपास स्पॉन्गिंग शुरू होती है। तालाब में स्पॉन्ग कार्प नदी की तुलना में पहले होता है। इस मछली की बड़ी संख्या में टैडपोलजून के शुरू में दिखाई देता है। इस घटना को इस तथ्य से समझाया गया है कि इस समय यह गर्म है, हवा और पानी का तापमान स्थिर है। यह भी होता है कि गर्मी के अंत में स्पॉन्गिंग की घटना देखी जा सकती है। लेकिन यह काफी सामान्य नहीं है और व्यक्तिगत क्षणों को संदर्भित करता है। कार्प उम्रः जब स्पॉन्गिंग होती है? स्पॉन्गिंग की अवधि मछली और जगह पर निर्भर करती है। अंडे की शुरुआत में सबसे छोटी तलना, और फिर अधिक मछली जमा की जाती है। वृद्ध व्यक्तियों के बाद, स्पॉन्ग कार्प की शुरुआत एक युवा पीढ़ी लेती है। कार्प स्पॉन होने पर पानी का तापमान क्या होना चाहिए? स्पिल के दौरान मछली खेल के लिए जाती है। एक संकेत है जो कहता है कि उस समय कार्प स्पॉन्गिंग की अवधि होती है जब गेहूं खिलता है। फिर यह बहुत गर्म हो जाता है। पानी का तापमान लगभग 1 9 डिग्री हो सकता है। आपको यह जानने की जरूरत है कि ठंडे पानी की कार्प में स्पॉन नहीं होता है। इस समय, मछली शांतता से तैरती है और खेलती नहीं है। स्पिल एक जगह नहीं हैकार्प स्पॉन्गिंग होता है क्योंकि अंडे अलग हो जाते हैं और घास पर और चट्टानों पर रहते हैं। जब पानी कुछ समय बाद छोड़ देता है, तो कैवियार पानी से सूख जाएगा और सूखे, या पक्षी इसे खाएंगे। लेकिन यहां तक कि छोटे व्यक्तियों को भी उसी मछली द्वारा नष्ट कर दिया जाता है, उदाहरण के लिए, पाइक। अंडे की सबसे बड़ी संख्या गड्ढे या बे में बनी हुई है। इस तथ्य को इस तथ्य से समझाया गया है कि इस तरह के स्थानों को पहुंचने में कठोर माना जाता है और शिकारियों वहां नहीं जा सकते हैं। मैं और मछली कैसे पकड़ सकता हूँ? कार्प प्राप्त करने के लिए कुछ सुझाव हैंः - फेरोमोन की मदद से। यह मछली को आकर्षित करता है और भूख बढ़ता है। लेकिन निकट भविष्य में रोस्पोट्रेबनाडोजर इस उपकरण के आगे उपयोग को प्रतिबंधित करने वाला कानून तैयार कर रहा है। - टैक्स जिन्हें अधिक संवेदनशील माना जाता है। स्पॉन्गिंग की विशेषताएं क्या हैं? कार्प के स्पॉन्गिंग समय आमतौर पर के लिए जिम्मेदार हैसुबह। दोपहर के भोजन के बाद, खेल बंद हो जाता है। लंबे समय तक महिला व्यक्ति स्पॉनिंग के लिए क्षेत्र चुनते हैं। असल में, उनकी पसंद पौधे क्षेत्र है। यह तब भी होता है जब मादा उस जगह पर अपने अंडे डालती है जहां पानी कम होता है। यह इस तथ्य से भरा हुआ है कि भविष्य में, पानी की कमी के कारण, कार्प तैरने में सक्षम नहीं होगा और गहरे पानी में लौटने में सक्षम होने के बिना मर जाएगी। कार्प स्पॉन्गिंग समय कैसा दिखता है? स्पॉन्गिंग के दौरान, पुरुष नमूने महिलाओं के पास तैरते हैं, विस्फोट करते हैं। इस तरह की एक दिलचस्प घटना एक किलोमीटर की दूरी पर शांत मौसम में मानव कान के अधीन है। अंडे जो बाहर निकल गए थे, मादापूंछ को इस तरह से बताता है कि वे धीरे-धीरे पौधों पर पड़ते हैं। एक पुरुष मादा के पीछे तैरता है और उन्हें दूध से ढकता है। इस पदार्थ की एक छोटी राशि भी हर अनाज को उर्वरित करने के लिए पर्याप्त है। कार्प कैवियार अन्य मछली की रोई से अलग हैपरिवार। इस पर कोई धारा नहीं है, श्लेष्म पदार्थ के बिंदु छोटे जर्दी पर लागू होते हैं। इस कारण से, स्पॉन को उर्वरित करने के लिए कई पुरुषों की आवश्यकता होती है। अंडा से युवा मछली में औसत रूपांतरण क्या है? प्रक्रिया जब थोड़ा कैवियार बदल जाता हैमछली पानी के तापमान पर निर्भर करता है। यदि यह लगभग 20 इकाइयां है, तो पानी का तापमान भी कम होने पर परिवर्तन स्वयं एक सप्ताह से थोड़ा अधिक होगा, परिवर्तन में तीन सप्ताह का समय लग सकता है। बशर्ते कि पानी ठंडा हो, यह संभव हैकार्प की संतान की निरंतरता नहीं होगी। चार सौ हजार अंडे, एक नियम के रूप में, केवल तीन हजार रहते हैं, और केवल चार सौ मछली में बदल जाते हैं। सबसे पहले, छोटी मछली जो अभी निकलीzooplankton खाओ। पहले वर्ष में, कार्प को सर्दी के तथ्य के बावजूद कार्प तेजी से बढ़ता है। इस घटना को इस तथ्य से समझाया गया है कि वे सबकुछ खाते हैं। उनके पास वार्मिंग के लिए पर्याप्त भोजन है। लोग उन्हें "राष्ट्रीय सुअर" कहते हैं क्योंकि वे पशु और पौधे की उत्पत्ति के तत्वों पर भोजन करते हैं। जब कार्प काटने? गर्मियों में कार्प मछली पकड़ने के बाद शुरू होता हैसितंबर तक। दिन के दौरान, मछली को गर्मी पसंद नहीं है, इसलिए वे गड्ढे में और तीन मीटर की गहराई में छिपाते हैं। यह झाड़ी में भी पाया जा सकता है। जब कार्प spawning के बाद pecks? आमतौर पर बादल मौसम में, गर्मी के रूप में यह मछली गहरी जगहों में कुछ भी नहीं खाती है और छुपाती है। - वायुमंडलीय दबाव कम होना चाहिए। यह अवधि उस समय से मेल खाती है जब दिन का गर्म समय बीत चुका है या बारिश हो रही है। - सक्रिय कार्प आमतौर पर रात में, चोटी के लिए शुरू होता हैया तो सुबह या देर शाम को। इसका मतलब यह नहीं है कि आप दोपहर में मछली पकड़ नहीं सकते हैं। यदि आप सही चारा और मछली पकड़ने की तकनीक चुनते हैं, तो आप कर सकते हैं। - पालतू कार्प प्रजातियों को पानी का गर्म तापमान पसंद होता है, अर्थात् गर्म, गर्म नहीं और ठंडा नहीं, जो लगभग 20 डिग्री के अनुरूप होता है। - आम तौर पर कार्प थैक्स या स्नैग में पाया जाता है। खैर, यदि ऐसी जगह है, जहां तक संभव हो, ताकि मछली को डराने का कोई मौका न हो। भारी सिंकर्स पकड़ते समय उपयोग करने की सिफारिश की जाती है। आप खाड़ी के पास, बांध के पास कार्प भी पकड़ सकते हैं। क्या carps विशेष कहा जाता है? पर्यावरण में ऐसी कार्प प्रजातियां हैं जो प्रजनन करने में सक्षम नहीं हैं। इन मछलियों में एक तरफ दूध होता है और पीठ पर एक छोटा सा बैग होता है, जहां अंडे होते हैं। कार्प विभिन्न तरीकों से पकड़ा जा सकता है। पकड़े जाने का सबसे आम प्रकार कताई है, फिर फीडर और सामान्य मछली पकड़ने के ध्रुव पर पकड़ रहा है। एंग्लरों के बीच इस प्रकार का कार्प बहुत स्वादिष्ट माना जाता है। स्पॉन्गिंग से परिपक्व रूपों की अवधि को खतरनाक और दीर्घकालिक माना जाता है, क्योंकि वे पक्षियों और अन्य प्रकार की मछलियों द्वारा खाए जाते हैं।
कार्प तालाबों और नदियों में रहता है। यह मछली कार्प के प्रकार से संबंधित है। एक तालाब में रहने वाले एक कार्प में नदी में रहने वाली प्रजातियों से थोड़ा अलग आकार होता है। तो पहली कक्षा गोलाकार और बड़े पैमाने पर humpbacked है, और दूसरा एक पहले प्रकार से बड़ा है और इसका रंग हल्का है। दोनों प्रजातियों में सिर के किनारों पर स्थित मूंछ होता है। इस तरह की मछली को स्पॉन्गिंग के आधार पर बहुत ज्यादा पकड़ा जा सकता है। कार्प मछली के प्रकार को संदर्भित करता है जो बहुत हैप्रतिरोधी। कैवियार को बंद करने के लिए, वे लंबे और कठिन जगह पर जाते हैं। डैम्स, जो कभी-कभी अपने रास्ते को अवरुद्ध करते हैं, उनके लिए बाधा नहीं होती है। वे पानी से ऊंचाई से दो मीटर तक कूद सकते हैं। कार्प स्पॉन्गिंग जगह चुनती है जहां स्नैग या रीड होते हैं। ऐसा किया जाता है ताकि कोई भी अपना कैवियार नहीं खा सके। कार्प के व्यक्ति स्वतंत्र रूप से पुरुष व्यक्ति के पक्ष में एक विकल्प बनाते हैं। पसंद आसान नहीं है, क्योंकि पुरुषों के झुंड इसके पीछे चल सकते हैं। मादा कार्प मोटा और बड़ा है। स्पॉन्ग कार्पः यह घटना कब शुरू होती है? पहली छोर अप्रैल के अंत में शुरू होती हैरूसी संघ का केंद्रीय क्षेत्र। यह सब लगभग चौदह दिन तक रहता है। पंद्रह मई के आसपास स्पॉन्गिंग शुरू होती है। तालाब में स्पॉन्ग कार्प नदी की तुलना में पहले होता है। इस मछली की बड़ी संख्या में टैडपोलजून के शुरू में दिखाई देता है। इस घटना को इस तथ्य से समझाया गया है कि इस समय यह गर्म है, हवा और पानी का तापमान स्थिर है। यह भी होता है कि गर्मी के अंत में स्पॉन्गिंग की घटना देखी जा सकती है। लेकिन यह काफी सामान्य नहीं है और व्यक्तिगत क्षणों को संदर्भित करता है। कार्प उम्रः जब स्पॉन्गिंग होती है? स्पॉन्गिंग की अवधि मछली और जगह पर निर्भर करती है। अंडे की शुरुआत में सबसे छोटी तलना, और फिर अधिक मछली जमा की जाती है। वृद्ध व्यक्तियों के बाद, स्पॉन्ग कार्प की शुरुआत एक युवा पीढ़ी लेती है। कार्प स्पॉन होने पर पानी का तापमान क्या होना चाहिए? स्पिल के दौरान मछली खेल के लिए जाती है। एक संकेत है जो कहता है कि उस समय कार्प स्पॉन्गिंग की अवधि होती है जब गेहूं खिलता है। फिर यह बहुत गर्म हो जाता है। पानी का तापमान लगभग एक नौ डिग्री हो सकता है। आपको यह जानने की जरूरत है कि ठंडे पानी की कार्प में स्पॉन नहीं होता है। इस समय, मछली शांतता से तैरती है और खेलती नहीं है। स्पिल एक जगह नहीं हैकार्प स्पॉन्गिंग होता है क्योंकि अंडे अलग हो जाते हैं और घास पर और चट्टानों पर रहते हैं। जब पानी कुछ समय बाद छोड़ देता है, तो कैवियार पानी से सूख जाएगा और सूखे, या पक्षी इसे खाएंगे। लेकिन यहां तक कि छोटे व्यक्तियों को भी उसी मछली द्वारा नष्ट कर दिया जाता है, उदाहरण के लिए, पाइक। अंडे की सबसे बड़ी संख्या गड्ढे या बे में बनी हुई है। इस तथ्य को इस तथ्य से समझाया गया है कि इस तरह के स्थानों को पहुंचने में कठोर माना जाता है और शिकारियों वहां नहीं जा सकते हैं। मैं और मछली कैसे पकड़ सकता हूँ? कार्प प्राप्त करने के लिए कुछ सुझाव हैंः - फेरोमोन की मदद से। यह मछली को आकर्षित करता है और भूख बढ़ता है। लेकिन निकट भविष्य में रोस्पोट्रेबनाडोजर इस उपकरण के आगे उपयोग को प्रतिबंधित करने वाला कानून तैयार कर रहा है। - टैक्स जिन्हें अधिक संवेदनशील माना जाता है। स्पॉन्गिंग की विशेषताएं क्या हैं? कार्प के स्पॉन्गिंग समय आमतौर पर के लिए जिम्मेदार हैसुबह। दोपहर के भोजन के बाद, खेल बंद हो जाता है। लंबे समय तक महिला व्यक्ति स्पॉनिंग के लिए क्षेत्र चुनते हैं। असल में, उनकी पसंद पौधे क्षेत्र है। यह तब भी होता है जब मादा उस जगह पर अपने अंडे डालती है जहां पानी कम होता है। यह इस तथ्य से भरा हुआ है कि भविष्य में, पानी की कमी के कारण, कार्प तैरने में सक्षम नहीं होगा और गहरे पानी में लौटने में सक्षम होने के बिना मर जाएगी। कार्प स्पॉन्गिंग समय कैसा दिखता है? स्पॉन्गिंग के दौरान, पुरुष नमूने महिलाओं के पास तैरते हैं, विस्फोट करते हैं। इस तरह की एक दिलचस्प घटना एक किलोमीटर की दूरी पर शांत मौसम में मानव कान के अधीन है। अंडे जो बाहर निकल गए थे, मादापूंछ को इस तरह से बताता है कि वे धीरे-धीरे पौधों पर पड़ते हैं। एक पुरुष मादा के पीछे तैरता है और उन्हें दूध से ढकता है। इस पदार्थ की एक छोटी राशि भी हर अनाज को उर्वरित करने के लिए पर्याप्त है। कार्प कैवियार अन्य मछली की रोई से अलग हैपरिवार। इस पर कोई धारा नहीं है, श्लेष्म पदार्थ के बिंदु छोटे जर्दी पर लागू होते हैं। इस कारण से, स्पॉन को उर्वरित करने के लिए कई पुरुषों की आवश्यकता होती है। अंडा से युवा मछली में औसत रूपांतरण क्या है? प्रक्रिया जब थोड़ा कैवियार बदल जाता हैमछली पानी के तापमान पर निर्भर करता है। यदि यह लगभग बीस इकाइयां है, तो पानी का तापमान भी कम होने पर परिवर्तन स्वयं एक सप्ताह से थोड़ा अधिक होगा, परिवर्तन में तीन सप्ताह का समय लग सकता है। बशर्ते कि पानी ठंडा हो, यह संभव हैकार्प की संतान की निरंतरता नहीं होगी। चार सौ हजार अंडे, एक नियम के रूप में, केवल तीन हजार रहते हैं, और केवल चार सौ मछली में बदल जाते हैं। सबसे पहले, छोटी मछली जो अभी निकलीzooplankton खाओ। पहले वर्ष में, कार्प को सर्दी के तथ्य के बावजूद कार्प तेजी से बढ़ता है। इस घटना को इस तथ्य से समझाया गया है कि वे सबकुछ खाते हैं। उनके पास वार्मिंग के लिए पर्याप्त भोजन है। लोग उन्हें "राष्ट्रीय सुअर" कहते हैं क्योंकि वे पशु और पौधे की उत्पत्ति के तत्वों पर भोजन करते हैं। जब कार्प काटने? गर्मियों में कार्प मछली पकड़ने के बाद शुरू होता हैसितंबर तक। दिन के दौरान, मछली को गर्मी पसंद नहीं है, इसलिए वे गड्ढे में और तीन मीटर की गहराई में छिपाते हैं। यह झाड़ी में भी पाया जा सकता है। जब कार्प spawning के बाद pecks? आमतौर पर बादल मौसम में, गर्मी के रूप में यह मछली गहरी जगहों में कुछ भी नहीं खाती है और छुपाती है। - वायुमंडलीय दबाव कम होना चाहिए। यह अवधि उस समय से मेल खाती है जब दिन का गर्म समय बीत चुका है या बारिश हो रही है। - सक्रिय कार्प आमतौर पर रात में, चोटी के लिए शुरू होता हैया तो सुबह या देर शाम को। इसका मतलब यह नहीं है कि आप दोपहर में मछली पकड़ नहीं सकते हैं। यदि आप सही चारा और मछली पकड़ने की तकनीक चुनते हैं, तो आप कर सकते हैं। - पालतू कार्प प्रजातियों को पानी का गर्म तापमान पसंद होता है, अर्थात् गर्म, गर्म नहीं और ठंडा नहीं, जो लगभग बीस डिग्री के अनुरूप होता है। - आम तौर पर कार्प थैक्स या स्नैग में पाया जाता है। खैर, यदि ऐसी जगह है, जहां तक संभव हो, ताकि मछली को डराने का कोई मौका न हो। भारी सिंकर्स पकड़ते समय उपयोग करने की सिफारिश की जाती है। आप खाड़ी के पास, बांध के पास कार्प भी पकड़ सकते हैं। क्या carps विशेष कहा जाता है? पर्यावरण में ऐसी कार्प प्रजातियां हैं जो प्रजनन करने में सक्षम नहीं हैं। इन मछलियों में एक तरफ दूध होता है और पीठ पर एक छोटा सा बैग होता है, जहां अंडे होते हैं। कार्प विभिन्न तरीकों से पकड़ा जा सकता है। पकड़े जाने का सबसे आम प्रकार कताई है, फिर फीडर और सामान्य मछली पकड़ने के ध्रुव पर पकड़ रहा है। एंग्लरों के बीच इस प्रकार का कार्प बहुत स्वादिष्ट माना जाता है। स्पॉन्गिंग से परिपक्व रूपों की अवधि को खतरनाक और दीर्घकालिक माना जाता है, क्योंकि वे पक्षियों और अन्य प्रकार की मछलियों द्वारा खाए जाते हैं।
खंडवा। प्राचीन विट्ठल मंदिर में गुरुवार को भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव साथ मनाया गया। भगवान का अभिषेक और विशेष श्रृंगार किया गया। भगवान श्रीकृष्ण का आकर्षण झूला मंदिर के पुजारी राम व श्याम आष्टेकर परिवार द्वारा सजाया गया। सुबह से मंदिर में श्रद्धालुओं ने विठ्ठल मंदिर में पहुंचकर भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन कर झूला झुलाया। रात 12 बजे भगवान के जन्मोत्सव पर महाआरती की गई। प्रसादी का वितरण किया गया। आरती के पूर्व भगवान श्रीकृष्ण की जन्म कथा भी हुई। दिन भर मंदिर में कृष्ण भजन हरेराम संकीर्तन किया गया। ओंकारेश्वर। धार्मिक नगरी ओंकारेश्वर में लड्डू गोपाल का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। अति प्राचीन महानिर्वाणी अखाड़े में स्थित विष्णु मंदिर में महंत कैलाश भारती के मार्गदर्शन में जन्मोत्सव मनाया जाएगा। पंडित सतीश गीते ने बताया ओंकारेश्वर में दो दिनों तक जन्मोत्सव मनाने की तैयारी है। कुछ मंदिरों में गुरुवार को जन्मोत्सव मनाया गया। बाकि मंदिरों में 19 अगस्त को जन्मोत्सव मनाएंगे।
खंडवा। प्राचीन विट्ठल मंदिर में गुरुवार को भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव साथ मनाया गया। भगवान का अभिषेक और विशेष श्रृंगार किया गया। भगवान श्रीकृष्ण का आकर्षण झूला मंदिर के पुजारी राम व श्याम आष्टेकर परिवार द्वारा सजाया गया। सुबह से मंदिर में श्रद्धालुओं ने विठ्ठल मंदिर में पहुंचकर भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन कर झूला झुलाया। रात बारह बजे भगवान के जन्मोत्सव पर महाआरती की गई। प्रसादी का वितरण किया गया। आरती के पूर्व भगवान श्रीकृष्ण की जन्म कथा भी हुई। दिन भर मंदिर में कृष्ण भजन हरेराम संकीर्तन किया गया। ओंकारेश्वर। धार्मिक नगरी ओंकारेश्वर में लड्डू गोपाल का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। अति प्राचीन महानिर्वाणी अखाड़े में स्थित विष्णु मंदिर में महंत कैलाश भारती के मार्गदर्शन में जन्मोत्सव मनाया जाएगा। पंडित सतीश गीते ने बताया ओंकारेश्वर में दो दिनों तक जन्मोत्सव मनाने की तैयारी है। कुछ मंदिरों में गुरुवार को जन्मोत्सव मनाया गया। बाकि मंदिरों में उन्नीस अगस्त को जन्मोत्सव मनाएंगे।
बल्कि सार्वजनिक तथा राजनीतिक जीवन की आम तौर पर सभी अभिव्यक्तियों के आधार पर सरकार के सामने पेश की जाये । सारांश यह कि क्रान्तिकारी सामाजिक-जनवाद सुधारों के लिए संघर्ष को स्वतंत्रता और समाजवाद के क्रान्तिकारी संघर्ष के अधीन उसी तरह रखता है जैसे कोई एक भाग अपने पूर्ण होता है । लेकिन मार्तिनोव अलग-अलग मंज़िलों वाले सिद्धान्त को एक नये रूप में फिर से जीवित करके राजनीतिक संघर्ष के विकास के लिए मानो एक शुद्ध आर्थिक पथ निर्धारित करने की कोशिश कर रहे हैं। इस समय, जब क्रान्तिकारी आन्दोलन उभार पर है, सुधारों के लिए लड़ने के एक तथाकथित विशेष "काम " को सामने लाकर वह पार्टी को पीछे घसीट रहे हैं " अर्थवादी तथा उदारपंथी, दोनों प्रकार के अवसरवाद के हाथों में खेल रहे हैं । अस्तु, "आर्थिक संघर्ष को ही राजनीतिक रूप देने" की ऊपर से बड़ी गूढ़ लगनेवाली स्थापना के पीछे बेशर्मी के साथ सुधारों की लड़ाई को छिपाते हुए मार्तिनोव ने शुद्धतः आर्थिक (वास्तव में केवल कारखानों की हालत के) सुधारों को इस तरह पेश किया है, मानो यह कोई खास बात हो । उन्होंने ऐसा क्यों किया यह हम नहीं जानते। हो सकता है, वह लापरवाही में ऐसा कर गये हों ? पर यदि "कारखानों की हालत " में सुधारों के अलावा भी उनके दिमाग़ में कुछ था, तो उनकी यह पूरी स्थापना जिसे हम ऊपर उद्धृत कर चुके हैं, अर्थहीन हो जाती है। शायद उन्होंने यह सोचकर ऐसा किया हो कि सरकार केवल आर्थिक क्षेत्र में ही कुछ " रिायतें " दे सकती है ?* यदि ऐसी बात है, तो यह एक विचित्र आत्म-प्रवंचना है। कोडेबाज़ी, पासपोर्ट, ज़मीन के मुआवजे की अदायगी धार्मिक सम्प्रदायों, सेंसरशिप आदि से सम्बंधित क़ानूनों के बारे में भी रिआयतें मिल सकती हैं और मिलती रहती हैं । "आर्थिक" ( या झूठी रिआयतें ) ज़ाहिर है कि सरकार के दृष्टिकोण से सबसे सस्ती और सबसे अधिक लाभदायक होती हैं, क्योंकि उनके ज़रिए उसे ग्राम मज़दूरों का विश्वास प्राप्त करने की आशा * पृष्ठ ४३ः "ज़ाहिर है कि जब हम मज़दूरों को सरकार के सामने कुछ आर्थिक मांगें पेश करने की राय देते हैं तो इसका कारण यह है कि आर्थिक क्षेत्र में निरंकुश सरकार आवश्यकतावश कुछ रिआयतें देने को तैयार है । " होती है। इसी कारण हम सामाजिक-जनवादियों को किसी भी हालत में या किसी तरह भी कोई ऐसी बात नहीं करनी चाहिए जिससे इस विश्वास ( या ग़ल तफ़हमी ) के लिए आधार तैयार होता हो कि हम आर्थिक सुधारों को अधिक महत्व देते हैं, या उन्हें विशेष रूप से महत्वपूर्ण समझते हैं, आदि । क़ानून बनवाने तथा प्रशासनात्मक उपायों की जिन ठोस मांगों का ऊपर ज़िक्र किया गया है, उनके बारे में मार्तिनोव लिखते हैं : "इस प्रकार की मांगें कोरी नारेबाज़ी नहीं होंगी, क्योंकि उनसे ठोस नतीजों के निकलने की आशा होगी और इसलिए हो सकता है कि आम मज़दूर सक्रिय रूप से उनका समर्थन करें " भला हम " अर्थवादी हैं, क़तई नहीं ! हम तो सिर्फ़ नतीजों के "ठोसपन" के सामने उसी आजिज़ी से गिड़गिड़ाते हैं, जैसे बर्न्सटीन, प्रोकोपोविच, स्त्रूवे, र० म० जैसे लोग और उनका गिरोह गिड़गिड़ाता है । हम तो केवल ( नरसिस तुपोरिलोव की तरह ) लोगों को यह समझाना चाहते हैं कि वे तमाम चीजें जिनसे "किसी ठोस नतीजे की उम्मीद नहीं है", सब " कोरी नारेबाज़ी " हैं ! हम तो केवल इस तरह तर्क करने की कोशिश कर रहे हैं मानो आम मज़दूरों में निरंकुश शासन के खिलाफ़ विरोध प्रदर्शन करनेवाली प्रत्येक कार्रवाई का - भले ही उससे रत्ती भर भी किसी ठोस नतीजे के निकलने की उम्मीद न हो - समर्थन करने की क्षमता न हो ( और मानो मज़दूरों ने उन तमाम लोगों के बावजूद, जो खुद अपना कूपमंडूकपन और स्वार्थीपन मज़दूरों पर लाद देते हैं, अपनी यह क्षमता कभी की साबित न कर दी हो) ! उदाहरण के लिए, उन्हीं "उपायों को ले लीजिये जो खुद मार्तिनोव बेकारी और काल से पीड़ित लोगों की सहायता के लिए करवाना चाहते हैं । 'राबोचेये देलो' ने जो वादे किये हैं, उनसे यदि हम अन्दाज़ा लगायें, तो वह क़ानून बनवाने तथा प्रशासनात्मक उपायों के लिए ऐसी ठोस " ( क्या विधेयकों के रूप में ? ) "मांगों का कार्यक्रम तैयार करने में व्यस्त है जिससे कुछ " ठोस नतीजे निकलने की उम्मीद हो " । लेकिन 'ईस्का' ने जो "जीवन में क्रान्ति पैदा करने की अपेक्षा सूत्र में क्रान्ति पैदा करने को निरंतर अधिक महत्व देता है बेकारी और पूरी पूंजीवादी व्यवस्था के अटूट सम्बंध को बताने की कोशिश की ; उसने चेतावनी दी कि "अकाल आ रहा है ", पुलिस का भंडाफोड़ किया 'अकाल पीड़ितों से कैसे लड़ती है, " और "दंड के अस्थायी नियमों के घोर अन्यायी रूप का पर्दाफ़ाश किया; और 'ज़ार्या' ने "घरेलू मामलों की समीक्षा " शीर्षक अकाल सम्बंधी लेख के एक हिस्से को एक आन्दोलन पुस्तिका के रूप में खास तौर पर फिर से छापा । पर हे भगवन् ! ये कट्टर मतवादी भी कितने " एकांगी " हैं ; उनके कान इतने बहरे हैं कि वे "स्वयं जीवन " की पुकार को भी नहीं सुन पाते। ज़रा सोचिये ज़रा कल्पना कीजिये कि उनके लेखों में एक भी - क्या आप विश्वास कर सकते हैं ? - एक भी "ठोस मांग " ऐसी नहीं थी जिससे "कोई ठोस नतीजा निकलने की उम्मीद हो ! " बेचारे मतवादी ! इन लोगों को तो क्रिचेव्स्की और मार्तिनोव के पास भेजना चाहिए ताकि वे यह सीख सकें कि कार्यनीति विकास की एक प्रक्रिया है, उसकी जो कि विकसित होता है, इत्यादि, और यह कि हमें संघर्ष को ही राजनीतिक रूप देना है ! अपने तात्कालिक क्रान्तिकारी महत्व के अलावा, मालिकों तथा सरकार मजदूरों के आर्थिक संघर्ष का" (" सरकार के खिलाफ़ आर्थिक "यह महत्व भी है कि उससे लगातार मजदूरों के सामने यह बात साफ़ होती रहती है कि उनके कोई राजनीतिक अधिकार नहीं हैं । " (मार्तिनोव, पृष्ठ ४४।) हम इस अंश को उद्धृत कर रहे हैं तो इसलिए नहीं कि जो कुछ पहले ही कहा जा चुका है, उसे सौवीं या हज़ारवीं बार फिर दुहरायें, बल्कि "मालिकों तथा सरकार के खिलाफ़ मज़दूरों के आर्थिक संघर्ष" के इस विलक्षण एवं नवीन सूत्र के लिए मार्तिनोव को हम धन्यवाद दें । क्या हीरा जैसा सूत्र है ! "अर्थवादियों" में पाये जानेवाले तमाम छोटे-मोटे, आंशिक मतभेदों और अलगअलग रंगों को कैसे अनुपम कौशल एवं चातुर्य से दूर करके यह स्पष्ट तथा संक्षिप्त सूत्र " अर्थवाद" के सार-तत्व को व्यक्त करता हैः मज़दूरों को यह सलाह देने से शुरू करके कि उन्हें उस 'राजनीतिक संघर्ष में" शामिल होना चाहिए, 'जिसे वे सबके सामान्य हित में इस उद्देश्य से चलाते हैं कि सभी मज़दूरों की हालत में सुधार हो अलग-अलग मंज़िलों वाले सिद्धान्त से होते हुए अन्त में जाकर कांग्रेस से " जिसका सबसे अधिक व्यापक रूप में उपयोग किया जा सकता है, प्रस्ताव का रूप धारण कर लेना, आदि । सरकार के ख़िलाफ़ आर्थिक संघर्ष " सरासर ट्रेड यूनियनवादी राजनीति है, जिसमें और सामाजिक-जनवादी राजनीति में ज़मीन-आसमान का फ़र्क़ है । राबोचाया मीस्ल', विशेष क्रोड़पत्र, पृष्ठ १४ । ( ख ) एक कहानी - मार्तिनोव ने प्लेखानोव को और गूढ़ कैसे बनाया कुछ दिनों से हमारे बीच कितनी बड़ी संख्या में सामाजिक जनवादी लोमोनोसोव पैदा हो गये हैं ! " - एक साथी ने एक रोज़ यह कहा; वह अर्थवाद" की ओर झुकाव रखनेवाले बहुत से लोगों की इस आश्चर्यजनक प्रवृत्ति की ओर संकेत कर रहा था कि वे "अकेले ही " महान सत्यों का आविष्कार कर डालते हैं (जैसे यह कि आर्थिक संघर्ष मज़दूरों को अपने अधिकारों के अभाव के बारे में सोचने की प्रेरणा देता है), और ऐसा करते समय वे क्रान्तिकारी विचारधारा और क्रान्तिकारी आन्दोलन के पहले के तमाम विकास के दौरान में जो कुछ भी पैदा किया गया है उसे जन्मजात मेधावी पुरुषों की भांति असीम तिरस्कार के साथ भुला देते हैं। लोमोनोसोव-मार्तिनोव बिलकुल ऐसे ही जन्मजात मेधावी पुरुष हैं। उनके 'तात्कालिक प्रश्न' शीर्षक लेख पर एक नज़र डालिये और देखिये कि वह कैसे "अकेले ही " उस बात तक लगभग पहुंच जाते हैं जिसे अक्सेद बहुत दिन पहले कह चुके हैं ( जाहिर है कि इनके बारे में हमारा लोमोनोसोव एक शब्द भी नहीं कहता ) ; मिसाल के लिए, वह किस तरह यह समझना शुरू कर रहे हैं कि हम पूंजीपति वर्ग के विभिन्न स्तरों के विरोध की अवहेलना नहीं कर सकते ('राबोचेये देलो', अंक ६, पृष्ठ ६१, ६२, ७१ ; इसकी तुलना अक्सेलरोद के नाम ""राबोचेये देलो' के उत्तर " से कीजिये, पृष्ठ २२, २३-२४), इत्यादि । लेकिन अफ़सोस यह है कि वह केवल "लगभग पहुंच पाते हैं", और अभी " शुरू " ही कर रहे हैं, इससे ज्यादा नहीं, क्योंकि अक्सेलरोद के विचारों को उन्होंने इतना कम समझा है कि वह "मालिकों तथा सरकार के खिलाफ़ आर्थिक संघर्ष " की बात करते हैं। 'राबोचेये देलो' ने तीन साल से (१८९८१९०१) अक्सेल्रोद को समझने की जी-तोड़ कोशिश की है, पर पर अभी तक नहीं समझ पाया है ! इसका शायद एक कारण यह है कि मानवजाति की भांति " सामाजिक जनवाद भी सदा अपने सामने ऐसे ही काम रखता है, जिन्हें वह पूरा कर सकता है ? परन्तु हमारे इन लोमोनोसोवों की यही एक विशेषता नहीं है कि बहुत सी बातों के विषय में वे घोर अज्ञान रखते हैं (यह तो आधे दुर्भाग्य की बात होती ! ) उनकी एक विशेषता यह भी है कि अपने का उन्हें तनिक भी आभास नहीं है। और यह सचमुच बड़े दुर्भाग्य की बात है; और इसी दुर्भाग्य का प्रताप है कि वे झटपट प्लेखानोव को " और गूढ़ " बनाने की कोशिश करने लगते हैं । लोमोनोसोव-मार्तिनोव कहते हैंः "जिस समय प्लेखानोव ने यह ( " रूस में अकाल के विरुद्ध संघर्ष में समाजवादियों के काम ) लिखी थी, तब से दरिया में बहुत पानी बह चुका है। सामाजिकजनवादी, जो दस वर्षों से मज़दूर वर्ग के आर्थिक संघर्ष का नेतृत्व कर रहे हैं अभी तक पार्टी की कार्यनीति के लिए कोई व्यापक सैद्धान्तिक आधार निर्धारित नहीं कर पाये हैं। अब यह सवाल बहुत ज़रूरी बन गया है, और यदि हम ऐसा सैद्धान्तिक आधार निर्धारित करना चाहते हैं, तो एक समय प्लेखानोव ने कार्यनीति के जिन सिद्धान्तों को विकसित किया था, हमें निश्चय ही उनको और गहरा बनाना होगा प्रचार और आन्दोलन के अन्तर की हमारी वर्तमान परिभाषा को प्लेखानोव की परिभाषा से भिन्न होना होगा ।" (मार्तिनोव इसके कुछ पहले ही प्लेखानोव के इन शब्दों को उद्धृत कर चुके थे : कोई प्रचारक एक या चन्द आदमियों के सामने अनेक विचार पेश करता है, आन्दोलनकर्ता केवल एक या चन्द विचार पेश करता है, परन्तु वह उन्हें आम जनता के सामने रखता है । " ) हम प्रचार उसे कहेंगे जब आजकल की पूरी व्यवस्था का या उसके आंशिक रूपों का क्रान्तिकारी ढंग से स्पष्टीकरण किया जाये, चाहे वह चन्द व्यक्तियों को समझाने की भाषा में किया जाये या आम जनता को समझाने की भाषा में । आन्दोलन, यदि उसके बिलकुल सही अर्थ को लिया जाये तो, " ( जी हां ! ) " हम उसे कहेंगे जब जनता का कुछ ऐसे ठोस काम करने के लिए आवाहन किया जाये जिनसे सामाजिक जीवन में सर्वहारा वर्ग के सीधे क्रान्तिकारी हस्तक्षेप में सहायता मिलती हो । " इस नयी मार्तिनोव शब्दावली के लिए, जो अधिक चुस्त और अधिक गूढ़ है, हम रूसी - और अन्तर्राष्ट्रीय - सामाजिक-जनवाद को बधाई देते हैं । अभी तक ( प्लेखानोव की भांति और अन्तर्राष्ट्रीय मज़दूर वर्ग के आन्दोलन के सभी
बल्कि सार्वजनिक तथा राजनीतिक जीवन की आम तौर पर सभी अभिव्यक्तियों के आधार पर सरकार के सामने पेश की जाये । सारांश यह कि क्रान्तिकारी सामाजिक-जनवाद सुधारों के लिए संघर्ष को स्वतंत्रता और समाजवाद के क्रान्तिकारी संघर्ष के अधीन उसी तरह रखता है जैसे कोई एक भाग अपने पूर्ण होता है । लेकिन मार्तिनोव अलग-अलग मंज़िलों वाले सिद्धान्त को एक नये रूप में फिर से जीवित करके राजनीतिक संघर्ष के विकास के लिए मानो एक शुद्ध आर्थिक पथ निर्धारित करने की कोशिश कर रहे हैं। इस समय, जब क्रान्तिकारी आन्दोलन उभार पर है, सुधारों के लिए लड़ने के एक तथाकथित विशेष "काम " को सामने लाकर वह पार्टी को पीछे घसीट रहे हैं " अर्थवादी तथा उदारपंथी, दोनों प्रकार के अवसरवाद के हाथों में खेल रहे हैं । अस्तु, "आर्थिक संघर्ष को ही राजनीतिक रूप देने" की ऊपर से बड़ी गूढ़ लगनेवाली स्थापना के पीछे बेशर्मी के साथ सुधारों की लड़ाई को छिपाते हुए मार्तिनोव ने शुद्धतः आर्थिक सुधारों को इस तरह पेश किया है, मानो यह कोई खास बात हो । उन्होंने ऐसा क्यों किया यह हम नहीं जानते। हो सकता है, वह लापरवाही में ऐसा कर गये हों ? पर यदि "कारखानों की हालत " में सुधारों के अलावा भी उनके दिमाग़ में कुछ था, तो उनकी यह पूरी स्थापना जिसे हम ऊपर उद्धृत कर चुके हैं, अर्थहीन हो जाती है। शायद उन्होंने यह सोचकर ऐसा किया हो कि सरकार केवल आर्थिक क्षेत्र में ही कुछ " रिायतें " दे सकती है ?* यदि ऐसी बात है, तो यह एक विचित्र आत्म-प्रवंचना है। कोडेबाज़ी, पासपोर्ट, ज़मीन के मुआवजे की अदायगी धार्मिक सम्प्रदायों, सेंसरशिप आदि से सम्बंधित क़ानूनों के बारे में भी रिआयतें मिल सकती हैं और मिलती रहती हैं । "आर्थिक" ज़ाहिर है कि सरकार के दृष्टिकोण से सबसे सस्ती और सबसे अधिक लाभदायक होती हैं, क्योंकि उनके ज़रिए उसे ग्राम मज़दूरों का विश्वास प्राप्त करने की आशा * पृष्ठ तैंतालीसः "ज़ाहिर है कि जब हम मज़दूरों को सरकार के सामने कुछ आर्थिक मांगें पेश करने की राय देते हैं तो इसका कारण यह है कि आर्थिक क्षेत्र में निरंकुश सरकार आवश्यकतावश कुछ रिआयतें देने को तैयार है । " होती है। इसी कारण हम सामाजिक-जनवादियों को किसी भी हालत में या किसी तरह भी कोई ऐसी बात नहीं करनी चाहिए जिससे इस विश्वास के लिए आधार तैयार होता हो कि हम आर्थिक सुधारों को अधिक महत्व देते हैं, या उन्हें विशेष रूप से महत्वपूर्ण समझते हैं, आदि । क़ानून बनवाने तथा प्रशासनात्मक उपायों की जिन ठोस मांगों का ऊपर ज़िक्र किया गया है, उनके बारे में मार्तिनोव लिखते हैं : "इस प्रकार की मांगें कोरी नारेबाज़ी नहीं होंगी, क्योंकि उनसे ठोस नतीजों के निकलने की आशा होगी और इसलिए हो सकता है कि आम मज़दूर सक्रिय रूप से उनका समर्थन करें " भला हम " अर्थवादी हैं, क़तई नहीं ! हम तो सिर्फ़ नतीजों के "ठोसपन" के सामने उसी आजिज़ी से गिड़गिड़ाते हैं, जैसे बर्न्सटीन, प्रोकोपोविच, स्त्रूवे, रशून्य मशून्य जैसे लोग और उनका गिरोह गिड़गिड़ाता है । हम तो केवल लोगों को यह समझाना चाहते हैं कि वे तमाम चीजें जिनसे "किसी ठोस नतीजे की उम्मीद नहीं है", सब " कोरी नारेबाज़ी " हैं ! हम तो केवल इस तरह तर्क करने की कोशिश कर रहे हैं मानो आम मज़दूरों में निरंकुश शासन के खिलाफ़ विरोध प्रदर्शन करनेवाली प्रत्येक कार्रवाई का - भले ही उससे रत्ती भर भी किसी ठोस नतीजे के निकलने की उम्मीद न हो - समर्थन करने की क्षमता न हो ! उदाहरण के लिए, उन्हीं "उपायों को ले लीजिये जो खुद मार्तिनोव बेकारी और काल से पीड़ित लोगों की सहायता के लिए करवाना चाहते हैं । 'राबोचेये देलो' ने जो वादे किये हैं, उनसे यदि हम अन्दाज़ा लगायें, तो वह क़ानून बनवाने तथा प्रशासनात्मक उपायों के लिए ऐसी ठोस " "मांगों का कार्यक्रम तैयार करने में व्यस्त है जिससे कुछ " ठोस नतीजे निकलने की उम्मीद हो " । लेकिन 'ईस्का' ने जो "जीवन में क्रान्ति पैदा करने की अपेक्षा सूत्र में क्रान्ति पैदा करने को निरंतर अधिक महत्व देता है बेकारी और पूरी पूंजीवादी व्यवस्था के अटूट सम्बंध को बताने की कोशिश की ; उसने चेतावनी दी कि "अकाल आ रहा है ", पुलिस का भंडाफोड़ किया 'अकाल पीड़ितों से कैसे लड़ती है, " और "दंड के अस्थायी नियमों के घोर अन्यायी रूप का पर्दाफ़ाश किया; और 'ज़ार्या' ने "घरेलू मामलों की समीक्षा " शीर्षक अकाल सम्बंधी लेख के एक हिस्से को एक आन्दोलन पुस्तिका के रूप में खास तौर पर फिर से छापा । पर हे भगवन् ! ये कट्टर मतवादी भी कितने " एकांगी " हैं ; उनके कान इतने बहरे हैं कि वे "स्वयं जीवन " की पुकार को भी नहीं सुन पाते। ज़रा सोचिये ज़रा कल्पना कीजिये कि उनके लेखों में एक भी - क्या आप विश्वास कर सकते हैं ? - एक भी "ठोस मांग " ऐसी नहीं थी जिससे "कोई ठोस नतीजा निकलने की उम्मीद हो ! " बेचारे मतवादी ! इन लोगों को तो क्रिचेव्स्की और मार्तिनोव के पास भेजना चाहिए ताकि वे यह सीख सकें कि कार्यनीति विकास की एक प्रक्रिया है, उसकी जो कि विकसित होता है, इत्यादि, और यह कि हमें संघर्ष को ही राजनीतिक रूप देना है ! अपने तात्कालिक क्रान्तिकारी महत्व के अलावा, मालिकों तथा सरकार मजदूरों के आर्थिक संघर्ष का" हम इस अंश को उद्धृत कर रहे हैं तो इसलिए नहीं कि जो कुछ पहले ही कहा जा चुका है, उसे सौवीं या हज़ारवीं बार फिर दुहरायें, बल्कि "मालिकों तथा सरकार के खिलाफ़ मज़दूरों के आर्थिक संघर्ष" के इस विलक्षण एवं नवीन सूत्र के लिए मार्तिनोव को हम धन्यवाद दें । क्या हीरा जैसा सूत्र है ! "अर्थवादियों" में पाये जानेवाले तमाम छोटे-मोटे, आंशिक मतभेदों और अलगअलग रंगों को कैसे अनुपम कौशल एवं चातुर्य से दूर करके यह स्पष्ट तथा संक्षिप्त सूत्र " अर्थवाद" के सार-तत्व को व्यक्त करता हैः मज़दूरों को यह सलाह देने से शुरू करके कि उन्हें उस 'राजनीतिक संघर्ष में" शामिल होना चाहिए, 'जिसे वे सबके सामान्य हित में इस उद्देश्य से चलाते हैं कि सभी मज़दूरों की हालत में सुधार हो अलग-अलग मंज़िलों वाले सिद्धान्त से होते हुए अन्त में जाकर कांग्रेस से " जिसका सबसे अधिक व्यापक रूप में उपयोग किया जा सकता है, प्रस्ताव का रूप धारण कर लेना, आदि । सरकार के ख़िलाफ़ आर्थिक संघर्ष " सरासर ट्रेड यूनियनवादी राजनीति है, जिसमें और सामाजिक-जनवादी राजनीति में ज़मीन-आसमान का फ़र्क़ है । राबोचाया मीस्ल', विशेष क्रोड़पत्र, पृष्ठ चौदह । एक कहानी - मार्तिनोव ने प्लेखानोव को और गूढ़ कैसे बनाया कुछ दिनों से हमारे बीच कितनी बड़ी संख्या में सामाजिक जनवादी लोमोनोसोव पैदा हो गये हैं ! " - एक साथी ने एक रोज़ यह कहा; वह अर्थवाद" की ओर झुकाव रखनेवाले बहुत से लोगों की इस आश्चर्यजनक प्रवृत्ति की ओर संकेत कर रहा था कि वे "अकेले ही " महान सत्यों का आविष्कार कर डालते हैं , और ऐसा करते समय वे क्रान्तिकारी विचारधारा और क्रान्तिकारी आन्दोलन के पहले के तमाम विकास के दौरान में जो कुछ भी पैदा किया गया है उसे जन्मजात मेधावी पुरुषों की भांति असीम तिरस्कार के साथ भुला देते हैं। लोमोनोसोव-मार्तिनोव बिलकुल ऐसे ही जन्मजात मेधावी पुरुष हैं। उनके 'तात्कालिक प्रश्न' शीर्षक लेख पर एक नज़र डालिये और देखिये कि वह कैसे "अकेले ही " उस बात तक लगभग पहुंच जाते हैं जिसे अक्सेद बहुत दिन पहले कह चुके हैं ; मिसाल के लिए, वह किस तरह यह समझना शुरू कर रहे हैं कि हम पूंजीपति वर्ग के विभिन्न स्तरों के विरोध की अवहेलना नहीं कर सकते , इत्यादि । लेकिन अफ़सोस यह है कि वह केवल "लगभग पहुंच पाते हैं", और अभी " शुरू " ही कर रहे हैं, इससे ज्यादा नहीं, क्योंकि अक्सेलरोद के विचारों को उन्होंने इतना कम समझा है कि वह "मालिकों तथा सरकार के खिलाफ़ आर्थिक संघर्ष " की बात करते हैं। 'राबोचेये देलो' ने तीन साल से अक्सेल्रोद को समझने की जी-तोड़ कोशिश की है, पर पर अभी तक नहीं समझ पाया है ! इसका शायद एक कारण यह है कि मानवजाति की भांति " सामाजिक जनवाद भी सदा अपने सामने ऐसे ही काम रखता है, जिन्हें वह पूरा कर सकता है ? परन्तु हमारे इन लोमोनोसोवों की यही एक विशेषता नहीं है कि बहुत सी बातों के विषय में वे घोर अज्ञान रखते हैं उनकी एक विशेषता यह भी है कि अपने का उन्हें तनिक भी आभास नहीं है। और यह सचमुच बड़े दुर्भाग्य की बात है; और इसी दुर्भाग्य का प्रताप है कि वे झटपट प्लेखानोव को " और गूढ़ " बनाने की कोशिश करने लगते हैं । लोमोनोसोव-मार्तिनोव कहते हैंः "जिस समय प्लेखानोव ने यह लिखी थी, तब से दरिया में बहुत पानी बह चुका है। सामाजिकजनवादी, जो दस वर्षों से मज़दूर वर्ग के आर्थिक संघर्ष का नेतृत्व कर रहे हैं अभी तक पार्टी की कार्यनीति के लिए कोई व्यापक सैद्धान्तिक आधार निर्धारित नहीं कर पाये हैं। अब यह सवाल बहुत ज़रूरी बन गया है, और यदि हम ऐसा सैद्धान्तिक आधार निर्धारित करना चाहते हैं, तो एक समय प्लेखानोव ने कार्यनीति के जिन सिद्धान्तों को विकसित किया था, हमें निश्चय ही उनको और गहरा बनाना होगा प्रचार और आन्दोलन के अन्तर की हमारी वर्तमान परिभाषा को प्लेखानोव की परिभाषा से भिन्न होना होगा ।" हम प्रचार उसे कहेंगे जब आजकल की पूरी व्यवस्था का या उसके आंशिक रूपों का क्रान्तिकारी ढंग से स्पष्टीकरण किया जाये, चाहे वह चन्द व्यक्तियों को समझाने की भाषा में किया जाये या आम जनता को समझाने की भाषा में । आन्दोलन, यदि उसके बिलकुल सही अर्थ को लिया जाये तो, " " हम उसे कहेंगे जब जनता का कुछ ऐसे ठोस काम करने के लिए आवाहन किया जाये जिनसे सामाजिक जीवन में सर्वहारा वर्ग के सीधे क्रान्तिकारी हस्तक्षेप में सहायता मिलती हो । " इस नयी मार्तिनोव शब्दावली के लिए, जो अधिक चुस्त और अधिक गूढ़ है, हम रूसी - और अन्तर्राष्ट्रीय - सामाजिक-जनवाद को बधाई देते हैं । अभी तक ( प्लेखानोव की भांति और अन्तर्राष्ट्रीय मज़दूर वर्ग के आन्दोलन के सभी
अंधाधुंध इस्तेमाल इसी तरह जारी रहा तो देश के अन्य भागों की जमीनें भी अपनी उर्वराशक्ति खो देंगी। अमरीकी कीटनाशी विशेषज्ञ डेविड पाइमेण्टल ने 'बायोसांइस' नामक एक रिसर्च जर्नल में प्रकाशित एक शोधपत्र में अपना निष्कर्ष प्रस्तुत करते हुए कहा है कि जब कीटनाशी रसायनों का प्रयोग पेड़-पौधों फलों व साग-सब्जियों पर किया जाता है तो उनका मात्र एक प्रतिशत भाग ही अपने सही लक्ष्य पर प्रभावी होता है जबकि शेष 99 प्रतिशत पर्यावरण को प्रदूषित करता है। कीटनाशकों के मामले में एक बहुत बुरा पक्ष यह है कि धीरे-धीरे कीटनाशकों का असर कीट-पतंगों पर घटता जाता है। दरअसल जब किसी रसायनन का प्रयोग किसी कीट विशेष को खत्म करने के लिए लगातार काफी दिनों तक होता है तो उस कीट के अन्दर भी उस रसायन विशेष से लड़ने का धीरे-धीरे विकास होने लगता है। यही कारण है कि डी.डी.टी. जैसे विषैले कीटनाशक का असर अब मच्छरों पर उतना प्रभावी नहीं रहा । परिणामस्वरूप कीटनाशकों का प्रयोग बढ़ा दिया जाता है। कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग के चलते उन प्राकृतिक तरीकों पर भी गाज गिरी है जो परम्परागत रूप से सदियों से कीड़े-मकोड़ों से फसलों को बचाने के लिए इस्तेमाल किए जाते रहे हैं। मिट्टी, पानी, हवा और फसलों के मध्य जो निरापद अन्योन्याश्रित संबंध था, रासायनिक खेती ने उस पर वज्रपात किया है । इस पूरे कुचक्र से मित्र कीड़े नष्ट हो रहे हैं और पौधों की रोग प्रतिरोधी क्षमता घट रही है। एक अनुमान के अनुसार लगभग एक हजार कीटों में से एक कीट हानिकारक होता है और उसके चक्कर में अनेक लाभदायक कीट भी कीटनाशकों का शिकार हो जाते हैं। केचुओं, तितलियों और मधुमक्खियों को भी कीटनाशकों का शिकार होना पड़ता है। उधर कीटनाशकों के लगातार प्रयोग के कारण कई हानिकारक कीटों पर कीटनाशक अपना प्रभाव नहीं डाल पाते हैं । सन् 1938 में कीटनाशक दवाओं के प्रति प्रतिरोध क्षमता पैदा करने वाले कीट-पतंगों की संख्या मात्र 7 थी जो अब बढ़कर 500 तक पहुँच गयी है । अतः कीटनाशकों के बढ़ते प्रयोग पर यदि रोक नहीं लगाई गई तो पर्यावरण में घुलता जहर मनुष्य तक के अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर सकता है। अब यह बहुत जरूरी हो गया कि कीटनाशकों का कोई निरापद विकल्प तलाशा जाए। इस दिशा में प्राचीन परम्परागत तरीकों को वर्तमान परिस्थितियों के अनुकूल बनाना भी काफी फायदेमंद हो सकता है। कीटनाशकों से होने वाले नुकसान के मद्देनजर यह भ्रम अब त्याग देने की जरूरत है कि इनके इस्तेमाल से उपज बढ़ेगी और किसान खुशहाल होंगे। भुज में भयानक भूकम्प 26 जनवरी 2001 को प्रातः 8 बजकर 46 मिनट पर गुजरात राज्य में भूकम्प के भीषण झटके लगे। इस भूकम्प का केन्द्र भुज नगर के पास था । इसका प्रभाव राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली व पंजाब तथा पाकिस्तान के सिंध, पंजाब व उत्तर पश्चिमी सीमा प्रान्त तक महसूस किया गया। इस भूकम्प की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 6.9 मापी गई है। इस कारण गुजरात के अनेक नगरों में जनधन की भारी क्षति हुई है। मृतात्माओं के प्रति विज्ञान परिषद् परिवार शोक व्यक्त करता है। हरियाणा पर्यावरण संरक्षण एवं शोध समिति पर्यावरण भवन, चरखी दादरी (हरियाणा)
अंधाधुंध इस्तेमाल इसी तरह जारी रहा तो देश के अन्य भागों की जमीनें भी अपनी उर्वराशक्ति खो देंगी। अमरीकी कीटनाशी विशेषज्ञ डेविड पाइमेण्टल ने 'बायोसांइस' नामक एक रिसर्च जर्नल में प्रकाशित एक शोधपत्र में अपना निष्कर्ष प्रस्तुत करते हुए कहा है कि जब कीटनाशी रसायनों का प्रयोग पेड़-पौधों फलों व साग-सब्जियों पर किया जाता है तो उनका मात्र एक प्रतिशत भाग ही अपने सही लक्ष्य पर प्रभावी होता है जबकि शेष निन्यानवे प्रतिशत पर्यावरण को प्रदूषित करता है। कीटनाशकों के मामले में एक बहुत बुरा पक्ष यह है कि धीरे-धीरे कीटनाशकों का असर कीट-पतंगों पर घटता जाता है। दरअसल जब किसी रसायनन का प्रयोग किसी कीट विशेष को खत्म करने के लिए लगातार काफी दिनों तक होता है तो उस कीट के अन्दर भी उस रसायन विशेष से लड़ने का धीरे-धीरे विकास होने लगता है। यही कारण है कि डी.डी.टी. जैसे विषैले कीटनाशक का असर अब मच्छरों पर उतना प्रभावी नहीं रहा । परिणामस्वरूप कीटनाशकों का प्रयोग बढ़ा दिया जाता है। कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग के चलते उन प्राकृतिक तरीकों पर भी गाज गिरी है जो परम्परागत रूप से सदियों से कीड़े-मकोड़ों से फसलों को बचाने के लिए इस्तेमाल किए जाते रहे हैं। मिट्टी, पानी, हवा और फसलों के मध्य जो निरापद अन्योन्याश्रित संबंध था, रासायनिक खेती ने उस पर वज्रपात किया है । इस पूरे कुचक्र से मित्र कीड़े नष्ट हो रहे हैं और पौधों की रोग प्रतिरोधी क्षमता घट रही है। एक अनुमान के अनुसार लगभग एक हजार कीटों में से एक कीट हानिकारक होता है और उसके चक्कर में अनेक लाभदायक कीट भी कीटनाशकों का शिकार हो जाते हैं। केचुओं, तितलियों और मधुमक्खियों को भी कीटनाशकों का शिकार होना पड़ता है। उधर कीटनाशकों के लगातार प्रयोग के कारण कई हानिकारक कीटों पर कीटनाशक अपना प्रभाव नहीं डाल पाते हैं । सन् एक हज़ार नौ सौ अड़तीस में कीटनाशक दवाओं के प्रति प्रतिरोध क्षमता पैदा करने वाले कीट-पतंगों की संख्या मात्र सात थी जो अब बढ़कर पाँच सौ तक पहुँच गयी है । अतः कीटनाशकों के बढ़ते प्रयोग पर यदि रोक नहीं लगाई गई तो पर्यावरण में घुलता जहर मनुष्य तक के अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर सकता है। अब यह बहुत जरूरी हो गया कि कीटनाशकों का कोई निरापद विकल्प तलाशा जाए। इस दिशा में प्राचीन परम्परागत तरीकों को वर्तमान परिस्थितियों के अनुकूल बनाना भी काफी फायदेमंद हो सकता है। कीटनाशकों से होने वाले नुकसान के मद्देनजर यह भ्रम अब त्याग देने की जरूरत है कि इनके इस्तेमाल से उपज बढ़ेगी और किसान खुशहाल होंगे। भुज में भयानक भूकम्प छब्बीस जनवरी दो हज़ार एक को प्रातः आठ बजकर छियालीस मिनट पर गुजरात राज्य में भूकम्प के भीषण झटके लगे। इस भूकम्प का केन्द्र भुज नगर के पास था । इसका प्रभाव राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली व पंजाब तथा पाकिस्तान के सिंध, पंजाब व उत्तर पश्चिमी सीमा प्रान्त तक महसूस किया गया। इस भूकम्प की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर छः.नौ मापी गई है। इस कारण गुजरात के अनेक नगरों में जनधन की भारी क्षति हुई है। मृतात्माओं के प्रति विज्ञान परिषद् परिवार शोक व्यक्त करता है। हरियाणा पर्यावरण संरक्षण एवं शोध समिति पर्यावरण भवन, चरखी दादरी
मध्य प्रदेश में मारपीट के दस साल पुराने मामले में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सहित कांग्रेस के छह नेताओं को इंदौर के विशेष न्यायालय ने शनिवार को एक-एक साल कारावास की सजा सुनाई। न्यायालय ने आरोपितों पर पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना भी लगाया। दिग्विजय व अन्य पर 17 जुलाई, 2011 को उज्जैन के जूना सोमवारिया में भाजयुमो कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट का आरोप था। एफआइआर में पहले दिग्विजय का नाम ही नहीं था, लेकिन बाद में अभियोजन ने धारा 319 के तहत एक आवेदन देकर उनका नाम जुड़वाया था। प्रकरण का विचारण भोपाल के विशेष न्यायालय में चल रहा था, लेकिन पिछले दिनों जनप्रतिनिधियों के खिलाफ दर्ज प्रकरणों की सुनवाई के लिए इंदौर में विशेष न्यायालय गठित होने के बाद प्रकरण भोपाल से इंदौर विशेष न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया था। शनिवार को विशेष न्यायाधीश मुकेश नाथ ने मामले में निर्णय सुनाया। सजा सुनाने के कुछ ही देर बाद दिग्विजय सिंह और अन्य को 25-25 हजार रुपये के मुचलके पर जमानत भी दे दी गई। सजा के बाद दिग्विजय ने ट्वीट में लिखा कि 11 वर्ष पुराने प्रकरण में जिसमें मेरा नाम एफआइआर में भी नहीं था, राजनीतिक दबाव में बाद में जोड़ा गया, मुझे सजा दी गई। मैं अहिंसा वादी व्यक्ति हूं। हिंसक गतिविधियों का सदैव विरोध करता रहा हूं। एडीजे कोर्ट का आदेश है। उच्च न्यायालय में अपील करेंगे। मैं ना भाजपा संघ से डरा हूं, ना कभी डरूंगा चाहे कितने ही झूठे प्रकरण बना दें और कितनी ही सजा दे दी जाए। घटना 17 जुलाई, 2011 की है। पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए उज्जैन आए थे। भाजयुमो के कार्यकर्ताओं ने उन्हें काले झंडे़ दिखाए तो नाराज होकर कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने भाजयुमो कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की। घटना में भाजयुमो के अमय आप्टे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस मामले में जीवाजीगंज पुलिस थाने में कांग्रेस नेताओं पर जानलेवा हमले की कोशिश का प्रकरण दर्ज हुआ था। अभिभाषक कमल गुप्ता के अनुसार प्रकरण की सुनवाई के दौरान अभियोजन ने एक आवेदन दिया था कि मामले में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय की भी संलिप्तता है। उनका नाम भी एफआइआर में जोड़ा जाए। न्यायालय ने इस आवेदन को स्वीकारते हुए सिंह का नाम एफआइआर में जोड़ लिया। मामले में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू, तराना से विधायक महेश परमार, दिलीप चौधरी, जयसिंह दरबार, असलम लाला, अनंत नारायण मीणा, मुकेश भाटी और हेमंत चौहान को आरोपित बनाया गया था। छह को सजा, तीन बरी विशेष न्यायालय ने मामले में मुकेश भाटी, हेमंत चौहान और तराना के विधायक महेश परमार को बरी कर दिया है। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू, दिलीप चौधरी, जयसिंह दरबार, असलम लाला, अनंत नारायण मीणा को एक-एक साल की सजा और पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा से दंडित किया।
मध्य प्रदेश में मारपीट के दस साल पुराने मामले में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सहित कांग्रेस के छह नेताओं को इंदौर के विशेष न्यायालय ने शनिवार को एक-एक साल कारावास की सजा सुनाई। न्यायालय ने आरोपितों पर पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना भी लगाया। दिग्विजय व अन्य पर सत्रह जुलाई, दो हज़ार ग्यारह को उज्जैन के जूना सोमवारिया में भाजयुमो कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट का आरोप था। एफआइआर में पहले दिग्विजय का नाम ही नहीं था, लेकिन बाद में अभियोजन ने धारा तीन सौ उन्नीस के तहत एक आवेदन देकर उनका नाम जुड़वाया था। प्रकरण का विचारण भोपाल के विशेष न्यायालय में चल रहा था, लेकिन पिछले दिनों जनप्रतिनिधियों के खिलाफ दर्ज प्रकरणों की सुनवाई के लिए इंदौर में विशेष न्यायालय गठित होने के बाद प्रकरण भोपाल से इंदौर विशेष न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया था। शनिवार को विशेष न्यायाधीश मुकेश नाथ ने मामले में निर्णय सुनाया। सजा सुनाने के कुछ ही देर बाद दिग्विजय सिंह और अन्य को पच्चीस-पच्चीस हजार रुपये के मुचलके पर जमानत भी दे दी गई। सजा के बाद दिग्विजय ने ट्वीट में लिखा कि ग्यारह वर्ष पुराने प्रकरण में जिसमें मेरा नाम एफआइआर में भी नहीं था, राजनीतिक दबाव में बाद में जोड़ा गया, मुझे सजा दी गई। मैं अहिंसा वादी व्यक्ति हूं। हिंसक गतिविधियों का सदैव विरोध करता रहा हूं। एडीजे कोर्ट का आदेश है। उच्च न्यायालय में अपील करेंगे। मैं ना भाजपा संघ से डरा हूं, ना कभी डरूंगा चाहे कितने ही झूठे प्रकरण बना दें और कितनी ही सजा दे दी जाए। घटना सत्रह जुलाई, दो हज़ार ग्यारह की है। पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए उज्जैन आए थे। भाजयुमो के कार्यकर्ताओं ने उन्हें काले झंडे़ दिखाए तो नाराज होकर कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने भाजयुमो कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की। घटना में भाजयुमो के अमय आप्टे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस मामले में जीवाजीगंज पुलिस थाने में कांग्रेस नेताओं पर जानलेवा हमले की कोशिश का प्रकरण दर्ज हुआ था। अभिभाषक कमल गुप्ता के अनुसार प्रकरण की सुनवाई के दौरान अभियोजन ने एक आवेदन दिया था कि मामले में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय की भी संलिप्तता है। उनका नाम भी एफआइआर में जोड़ा जाए। न्यायालय ने इस आवेदन को स्वीकारते हुए सिंह का नाम एफआइआर में जोड़ लिया। मामले में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू, तराना से विधायक महेश परमार, दिलीप चौधरी, जयसिंह दरबार, असलम लाला, अनंत नारायण मीणा, मुकेश भाटी और हेमंत चौहान को आरोपित बनाया गया था। छह को सजा, तीन बरी विशेष न्यायालय ने मामले में मुकेश भाटी, हेमंत चौहान और तराना के विधायक महेश परमार को बरी कर दिया है। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू, दिलीप चौधरी, जयसिंह दरबार, असलम लाला, अनंत नारायण मीणा को एक-एक साल की सजा और पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा से दंडित किया।
जमीन पर गिर पड़ा । यह देखकर एक घुड़सवार सिपाही ने पास आकर सेनापति पर हमला करनेवाले सिपाही को लड़कर भगा दिया, और अपने सेनापति को घोड़े पर बिठाकर पीछे के एक निर्भय स्थान में ले गया। और सिपाही के इस काम से मिढ्नी बहुत प्रसन्न हुआ, कृतज्ञता प्रकट करते हुए उसने मिपाही से पूछा- "तुम्हारा नाम क्या है ?" साहसी सिपाही ने नम्रता पूर्वक जवाब दिया- "मारु कीजिए साहत्र, मैंने इनाम के लिये यह काम नहीं किया है।" यह कहकर सिपाडो विना नाम बताए पीछे लौट भाया । सिड्नी ने बहुत तलाश की, परंतु फिर अपने उपकारी और प्राणदाता सिपाही का उसे पता नहीं लगा । क्रिमिया के युद्ध में जब रूम अकेला ही तुकिंग्नान, इँगलैंड, फ्रांस और साडिँनिया के साथ युद्ध कर रहा था, तब एक दिन सेवाटिनोपल के घिरे हुए किले मे रूम के बादशाह निकोलम के पास एक जरूरी समाचार भेजने की जरूरत पड़ी। रूस के सेनापति ने एक कुलीन रशियन तान के हाथ में मुहर लगा हुआ एक पत्र दिया, भौर कद्दा१२२ "यह पत्र बादशाह के हाथ में देना । रात-दिन चलना, जरा भी कहीं मत ठहरना, और जल्दी वहाँ पहुँचना ।" आज्ञा पाकर कप्तान रवाना हुआ। रास्ते में प्रत्येक दस माइल पर घोड़ा बदलने की व्यवस्था की गई। जितने जोर से घोड़े दौड़ाए जा सकते थे, उतने जोर से दौड़ाते हुए गाड़ी चलने लगी । जहाँ घोड़े बदलने का स्थान आता था, वहाँ घोड़े बदलने में दो-एक मिनट ठहरना पड़ता था। ये दो-एक मिनट भी कप्तान के लिये बहुत भारी हो जाते थे । परंतु जब गाड़ीवान कहता कि गाड़ी तैयार है, तब वह फ़ौरन ही हुक्म देता कि जल्दी दौड़ाओो । इस तरह कितने ही रात-दिन मुसाफ़िरी करके यह कप्तान सेंटपिटर्सबर्ग के महल में पहुँचा और बादशाह हाथ में पत्र दिया । थकावट के कारण इसका दिमाग ठिकाने नहीं रहा । बादशाह के देखते ही यह एक कुरसी पर बैठ गया, और बैठते ही इसे मूर्च्छा या निद्रा भा गई । पत्र पढ़ लेने के बाद बादशाह ने देखा, कप्तान आँखें मींचकर कुरसी पर पड़ा है। बादशाह ने उसे बहुत आदीं, बहुत फोरा, पर वह जगा नहीं । सबने सोचा, यह मर गया है । परंतु बादशाह ने नाड़ी और छाती पर हाथ रखकर देखा, तो मालूम हुआ कि यह मरा नहीं है, पर घोर निद्रा में सो रहा है । इसके बाद उसने कमान के कान के पास मुँह ले जाकर कहा-"महाशय ! गाड़ो तैयार है।" ये शब्द कान में पड़ते ही कप्तान ने अपनी आगे की जेव, जिसमें पहले चादशाह का पत्र रखा था, खूब सँभाली, और उसे दवाकर उठ बैठा, और कहने लगा- "खूब जोर से गाड़ी हाँको ।" परंतु थोड़ी ही देर में उसने देखा कि सामने न गाड़ी है, और न गाड़ीवान, बल्कि वह राजमहल में प्रसन्नमुख खड़े हुए बादशाह के सामने कुरसी पर बैठा है ! यह दृश्य देखकर वह एकदम लज्जित होकर बड़ा हो गया । बादशाह ने इसका हाथ पकड़कर सम्मान के साथ कहा"कप्तान ! अपनी जन्म-भूमि और चादशाह के काम के लिये जब तक रशियन अफसरों के शरीर में इतनी फर्मव्य-दृढ़ना रहेगी, तब तक रूस का गौरव कभी नष्ट नहीं होगा। मे चाहता हूँ, तुम जैसे ही कर्तव्यपरायण हृद्को असर इस देश का गौरव बढ़ावें ।" एक दिन इतिहास लेखक नर विलियन नेपियर ने घर से बहुत दूर घूमने गए। वहाँ इन्होंने देखा कि लड़की रास्ते के एक तरफ बैठी हुई रो रही है। राजे का कारण पूछने पर लड़की ने जवाब दिया- "मेरे हाथ से मिट्टी का घड़ा गिरकर फूट गया है। हम बहुत गरीब हैं । मेरी माता क्रोध में आकर मुझे मारेगी। क्या आपको घड़ा जोड़ना आता है ?" सर विलियम ने कहा - "घड़ा जोड़ना तो मुझे नहीं आता, परंतु नया घड़ा खरीदने के लिये तू जितने पैसे चाहे, मैं दे सकता हूँ।" यह कहकर सर विलियम ने जेब में हाथ डाला, पर उसमें कुछ भी न मिला । तब वह बोले - "आज मैं पैसे लाना भूल गया हूँ । कल तू इसी समय यहाँ आना, मैं तुझे पैसे दूँगा । अपनी माता से यह बात कह देना, वह तुझे मारेगी नहीं।" दूसरे दिन सर विलियम के पास एक खास मित्र का पत्र आया। उसमें लिखा था- "मैं लंबे सफर को जाता हूँ, आप पास के स्टेशन पर मुझसे ज़रूर मिलिएगा ।" सर विलियम ने जो समय लड़की को पैसे देने के लिये बताया था, वही समय स्टेशन जाकर मित्र से मिलने का था। अब विलियम बड़ी दुविधा में पड़े । अब क्या करना चाहिए ? बहुत विचारने के बाद उन्होंने निश्चय किया कि वचन पूरा करना ही लाजिम है। अतएव वह ठीक वक, पर बालिका को पैसे देने गए, और मित्र के पास नौकर को पत्र देकर भेजा।। भक्त गड़ाधर भट्ट और कपटी महंत का उद्धार १२५ हमारे यहाँ के बड़े-बड़े अफसरों, आइदेदारों, जागीरदारों, साहूकारों और ग्रंथकारों को इस उदाहरण से शिक्षा लेनी चाहिए । भक्त गदाधर भट्ट और कपटी महंत का उद्धार परमभक गद्दाधर भट्ट बंगाल के एक प्रसिद्ध पौराणिक थे । इनके पास बहुत-से लोग भागवत को कथा सुनने आते थे । इनकी वाणी में इतना असर था कि कथा सुनतेसुनते अनेक श्रोताओं की आँखों से आँसू निकलने लगने थे । एक दिन एक भक्ति-हीन महंत भी इनको कथा में गया । भट्टजी ने इसे प्रेम-पूर्वक अपने पास विठाया। परंतु इसका मन ऐसा कठोर था कि कथा सुनकर सारे श्रोताओं की आँखों से आँसू टपकने लगे, पर इसके नेत्रों में आँसू को एक बूँद भी नहीं आई। यह अपने दुपट्टे के सूंट में पिसी हुई मिरचें बाँध लाया था, उन्हीं को आँख में लगाकर इसने आँसू निकाले । यह बात जब भट्टजी के कानों में पहुँच उन्होंने महंत की प्रशंसा करते हुए कहा-"एक दिन के लिये इनके मठ जाऊँगा ।" कुछ दिनों बाद भट्टजी नवजी के पास गए, और ने लगे- "महंतजी महाराज । आपको धन्य है ! आपकी भगवान् में प्रीति है । तभी तो आप कथा सुनने पधारे थे । प्रेमाश्रु बरसाना चाहिए, यह भी आप जानते हैं। पूर्व - जन्म के किसी कर्म के फल से प्रेमाश्रु बरसाने में देर लगी, इसलिये आपने क्रोध करके आँखों को दंड देने का प्रयत्न किया ।" सरल-हृदय, भक्त गदाधर भट्ट को किसी पर भी क्रोध नहीं आता था, और न वह किसी का तिरस्कार करते थे । महंत की कपटता में भी एक अच्छी वस्तु की तरफ सूक्ष्म रूप से आकर्षण रहा था, उसी पर ध्यान देकर तथा दोषों की तरफ़ न देखकर भट्टजी ने महंत की भलाई करने का प्रयत्न किया । सच है, भगवान् की तरह भक्त भी थोड़े ही में संतोष कर लेते हैं । भक्त गदाधर भट्ट के स्वभाव से महंत मुग्ध हो गया । मेरे अपराध का भट्टजी ने इतना अच्छा अर्थ किया, यह सोचकर महंत लज्जित हुआ, और उसका हृदय पिघल गया । वह जोर-जोर से रोने लगा, और महात्मा गदाधरजी के चरणों में गिर पड़ा । उसी दिन से उसका स्वभाव बदल गया, और वह ईश्वर का सच्चा भक्त बन गया । दीन से दीवान और कृतज्ञता का आदर्श १२७ ( १०० ) दीन से दीवान और कृतज्ञता का आदर्श जयप्रकाशलाल एक बहुत गरीब मनुष्य का पुत्र था। गया की कचहरी के एक दयालु कारकुन की संरक्षकता में यह विद्याभ्यास करता था। पढ़ने में इसका अधिक ध्यान और लगन देखकर कारकुन इसे दो बार के भोजन के अतिरिक्त एक पैसा भी चवेनी के लिये देता था। इस समय गया को पाठशाला में गाड नाम के एक शिक्षक थे। वह भी जयप्रकाश का विद्या व्यसन देखकर उसे बहुत चाहते और उस पर खास तौर से ध्यान रखते थे । निर्वाह के लिये थोड़े ही दिनों में जयप्रकाश को पाठशाला छोड़कर नौकरी तलाश करनी पड़ी । डुमरावन-राज्य में वहाँ के महाराज कुमार को हिंदी पढ़ाने के लिये यह २५) मासिक पर मुक़र्रर हुआ । कुछ मास बीतने के बाद जय प्रकाश ने महाराज से कहा-"महाराज ! आपके कुमार कुछ भी नहीं पढ़ते, और आपको मेरे मासिक वेतन के लिये व्यर्थ हो खर्च करना पड़ता है। ऐसा वेतन लेना मुझे उचित नहीं। परंतु मेरे पाम निर्वाह का दूसरा पोर्ट साधन नहीं, इसलिये भाप कृपा करके मुझे कोई दूसरा काम सौंपिए । " महाराज जयप्रकाश को इस बात से बहुत प्रम हुए। उन्होंने मन में सोचा, यह मनुष्य विश्वासपात्र और है । यह सोचकर महाराज ने उसे ५०) मासिक पर बिल क्लर्क बना दिया। यह एक सभा का काम था । इस सभा में ऐसी व्यवस्था थी कि जितने रुपए इस सभा के खर्च के लिये मंजूर होते थे, वे सब मंजूर होने के बाद जयप्रकाश के पास जाँच के लिये आते थे, और उसकी सही होने के बाद तनख्वाह बँटती थी । एक बार सात हजार रुपयों का एक बिल भूल से दो बार पास हो गया । सही करते समय जयप्रकाश ने यह भूल पकड़ी, और बिल को रोका । राज्य के जिस कर्मचारी की यह भूल थी, उसने जयप्रकाश से कहा - "ये सात हजार रुपए मैं आपको दे दूँ ; पर यह बात महाराज के कानों में नहीं पहुँचनी चाहिए ।" जयप्रकाश यदि चाहता, तो सात हजार रुपए लेकर अपना मतलब बनाता । पर उसने ऐसा नहीं किया । वह ईमानदार था, सच्चा था, स्वामिभक्त और कर्तव्यशील था । अतएव लोभ से वह जरा भी विचलित नहीं हुआ। उसने साफ कह दिया - "मैं अपने मालिक से यह बात कभी नहीं छिपाऊँगा ।" में उसने महाराज से यह बात कह दी, और साथ ही यह भी अर्ज कर दी कि भूल से दो बार बिल पास हो जाना संभव है। महाराज इस बर्ताव से बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने धीरेधीरे जयप्रकाश को दीवान के पद पर पहुँचा दिया, और
जमीन पर गिर पड़ा । यह देखकर एक घुड़सवार सिपाही ने पास आकर सेनापति पर हमला करनेवाले सिपाही को लड़कर भगा दिया, और अपने सेनापति को घोड़े पर बिठाकर पीछे के एक निर्भय स्थान में ले गया। और सिपाही के इस काम से मिढ्नी बहुत प्रसन्न हुआ, कृतज्ञता प्रकट करते हुए उसने मिपाही से पूछा- "तुम्हारा नाम क्या है ?" साहसी सिपाही ने नम्रता पूर्वक जवाब दिया- "मारु कीजिए साहत्र, मैंने इनाम के लिये यह काम नहीं किया है।" यह कहकर सिपाडो विना नाम बताए पीछे लौट भाया । सिड्नी ने बहुत तलाश की, परंतु फिर अपने उपकारी और प्राणदाता सिपाही का उसे पता नहीं लगा । क्रिमिया के युद्ध में जब रूम अकेला ही तुकिंग्नान, इँगलैंड, फ्रांस और साडिँनिया के साथ युद्ध कर रहा था, तब एक दिन सेवाटिनोपल के घिरे हुए किले मे रूम के बादशाह निकोलम के पास एक जरूरी समाचार भेजने की जरूरत पड़ी। रूस के सेनापति ने एक कुलीन रशियन तान के हाथ में मुहर लगा हुआ एक पत्र दिया, भौर कद्दाएक सौ बाईस "यह पत्र बादशाह के हाथ में देना । रात-दिन चलना, जरा भी कहीं मत ठहरना, और जल्दी वहाँ पहुँचना ।" आज्ञा पाकर कप्तान रवाना हुआ। रास्ते में प्रत्येक दस माइल पर घोड़ा बदलने की व्यवस्था की गई। जितने जोर से घोड़े दौड़ाए जा सकते थे, उतने जोर से दौड़ाते हुए गाड़ी चलने लगी । जहाँ घोड़े बदलने का स्थान आता था, वहाँ घोड़े बदलने में दो-एक मिनट ठहरना पड़ता था। ये दो-एक मिनट भी कप्तान के लिये बहुत भारी हो जाते थे । परंतु जब गाड़ीवान कहता कि गाड़ी तैयार है, तब वह फ़ौरन ही हुक्म देता कि जल्दी दौड़ाओो । इस तरह कितने ही रात-दिन मुसाफ़िरी करके यह कप्तान सेंटपिटर्सबर्ग के महल में पहुँचा और बादशाह हाथ में पत्र दिया । थकावट के कारण इसका दिमाग ठिकाने नहीं रहा । बादशाह के देखते ही यह एक कुरसी पर बैठ गया, और बैठते ही इसे मूर्च्छा या निद्रा भा गई । पत्र पढ़ लेने के बाद बादशाह ने देखा, कप्तान आँखें मींचकर कुरसी पर पड़ा है। बादशाह ने उसे बहुत आदीं, बहुत फोरा, पर वह जगा नहीं । सबने सोचा, यह मर गया है । परंतु बादशाह ने नाड़ी और छाती पर हाथ रखकर देखा, तो मालूम हुआ कि यह मरा नहीं है, पर घोर निद्रा में सो रहा है । इसके बाद उसने कमान के कान के पास मुँह ले जाकर कहा-"महाशय ! गाड़ो तैयार है।" ये शब्द कान में पड़ते ही कप्तान ने अपनी आगे की जेव, जिसमें पहले चादशाह का पत्र रखा था, खूब सँभाली, और उसे दवाकर उठ बैठा, और कहने लगा- "खूब जोर से गाड़ी हाँको ।" परंतु थोड़ी ही देर में उसने देखा कि सामने न गाड़ी है, और न गाड़ीवान, बल्कि वह राजमहल में प्रसन्नमुख खड़े हुए बादशाह के सामने कुरसी पर बैठा है ! यह दृश्य देखकर वह एकदम लज्जित होकर बड़ा हो गया । बादशाह ने इसका हाथ पकड़कर सम्मान के साथ कहा"कप्तान ! अपनी जन्म-भूमि और चादशाह के काम के लिये जब तक रशियन अफसरों के शरीर में इतनी फर्मव्य-दृढ़ना रहेगी, तब तक रूस का गौरव कभी नष्ट नहीं होगा। मे चाहता हूँ, तुम जैसे ही कर्तव्यपरायण हृद्को असर इस देश का गौरव बढ़ावें ।" एक दिन इतिहास लेखक नर विलियन नेपियर ने घर से बहुत दूर घूमने गए। वहाँ इन्होंने देखा कि लड़की रास्ते के एक तरफ बैठी हुई रो रही है। राजे का कारण पूछने पर लड़की ने जवाब दिया- "मेरे हाथ से मिट्टी का घड़ा गिरकर फूट गया है। हम बहुत गरीब हैं । मेरी माता क्रोध में आकर मुझे मारेगी। क्या आपको घड़ा जोड़ना आता है ?" सर विलियम ने कहा - "घड़ा जोड़ना तो मुझे नहीं आता, परंतु नया घड़ा खरीदने के लिये तू जितने पैसे चाहे, मैं दे सकता हूँ।" यह कहकर सर विलियम ने जेब में हाथ डाला, पर उसमें कुछ भी न मिला । तब वह बोले - "आज मैं पैसे लाना भूल गया हूँ । कल तू इसी समय यहाँ आना, मैं तुझे पैसे दूँगा । अपनी माता से यह बात कह देना, वह तुझे मारेगी नहीं।" दूसरे दिन सर विलियम के पास एक खास मित्र का पत्र आया। उसमें लिखा था- "मैं लंबे सफर को जाता हूँ, आप पास के स्टेशन पर मुझसे ज़रूर मिलिएगा ।" सर विलियम ने जो समय लड़की को पैसे देने के लिये बताया था, वही समय स्टेशन जाकर मित्र से मिलने का था। अब विलियम बड़ी दुविधा में पड़े । अब क्या करना चाहिए ? बहुत विचारने के बाद उन्होंने निश्चय किया कि वचन पूरा करना ही लाजिम है। अतएव वह ठीक वक, पर बालिका को पैसे देने गए, और मित्र के पास नौकर को पत्र देकर भेजा।। भक्त गड़ाधर भट्ट और कपटी महंत का उद्धार एक सौ पच्चीस हमारे यहाँ के बड़े-बड़े अफसरों, आइदेदारों, जागीरदारों, साहूकारों और ग्रंथकारों को इस उदाहरण से शिक्षा लेनी चाहिए । भक्त गदाधर भट्ट और कपटी महंत का उद्धार परमभक गद्दाधर भट्ट बंगाल के एक प्रसिद्ध पौराणिक थे । इनके पास बहुत-से लोग भागवत को कथा सुनने आते थे । इनकी वाणी में इतना असर था कि कथा सुनतेसुनते अनेक श्रोताओं की आँखों से आँसू निकलने लगने थे । एक दिन एक भक्ति-हीन महंत भी इनको कथा में गया । भट्टजी ने इसे प्रेम-पूर्वक अपने पास विठाया। परंतु इसका मन ऐसा कठोर था कि कथा सुनकर सारे श्रोताओं की आँखों से आँसू टपकने लगे, पर इसके नेत्रों में आँसू को एक बूँद भी नहीं आई। यह अपने दुपट्टे के सूंट में पिसी हुई मिरचें बाँध लाया था, उन्हीं को आँख में लगाकर इसने आँसू निकाले । यह बात जब भट्टजी के कानों में पहुँच उन्होंने महंत की प्रशंसा करते हुए कहा-"एक दिन के लिये इनके मठ जाऊँगा ।" कुछ दिनों बाद भट्टजी नवजी के पास गए, और ने लगे- "महंतजी महाराज । आपको धन्य है ! आपकी भगवान् में प्रीति है । तभी तो आप कथा सुनने पधारे थे । प्रेमाश्रु बरसाना चाहिए, यह भी आप जानते हैं। पूर्व - जन्म के किसी कर्म के फल से प्रेमाश्रु बरसाने में देर लगी, इसलिये आपने क्रोध करके आँखों को दंड देने का प्रयत्न किया ।" सरल-हृदय, भक्त गदाधर भट्ट को किसी पर भी क्रोध नहीं आता था, और न वह किसी का तिरस्कार करते थे । महंत की कपटता में भी एक अच्छी वस्तु की तरफ सूक्ष्म रूप से आकर्षण रहा था, उसी पर ध्यान देकर तथा दोषों की तरफ़ न देखकर भट्टजी ने महंत की भलाई करने का प्रयत्न किया । सच है, भगवान् की तरह भक्त भी थोड़े ही में संतोष कर लेते हैं । भक्त गदाधर भट्ट के स्वभाव से महंत मुग्ध हो गया । मेरे अपराध का भट्टजी ने इतना अच्छा अर्थ किया, यह सोचकर महंत लज्जित हुआ, और उसका हृदय पिघल गया । वह जोर-जोर से रोने लगा, और महात्मा गदाधरजी के चरणों में गिर पड़ा । उसी दिन से उसका स्वभाव बदल गया, और वह ईश्वर का सच्चा भक्त बन गया । दीन से दीवान और कृतज्ञता का आदर्श एक सौ सत्ताईस दीन से दीवान और कृतज्ञता का आदर्श जयप्रकाशलाल एक बहुत गरीब मनुष्य का पुत्र था। गया की कचहरी के एक दयालु कारकुन की संरक्षकता में यह विद्याभ्यास करता था। पढ़ने में इसका अधिक ध्यान और लगन देखकर कारकुन इसे दो बार के भोजन के अतिरिक्त एक पैसा भी चवेनी के लिये देता था। इस समय गया को पाठशाला में गाड नाम के एक शिक्षक थे। वह भी जयप्रकाश का विद्या व्यसन देखकर उसे बहुत चाहते और उस पर खास तौर से ध्यान रखते थे । निर्वाह के लिये थोड़े ही दिनों में जयप्रकाश को पाठशाला छोड़कर नौकरी तलाश करनी पड़ी । डुमरावन-राज्य में वहाँ के महाराज कुमार को हिंदी पढ़ाने के लिये यह पच्चीस) मासिक पर मुक़र्रर हुआ । कुछ मास बीतने के बाद जय प्रकाश ने महाराज से कहा-"महाराज ! आपके कुमार कुछ भी नहीं पढ़ते, और आपको मेरे मासिक वेतन के लिये व्यर्थ हो खर्च करना पड़ता है। ऐसा वेतन लेना मुझे उचित नहीं। परंतु मेरे पाम निर्वाह का दूसरा पोर्ट साधन नहीं, इसलिये भाप कृपा करके मुझे कोई दूसरा काम सौंपिए । " महाराज जयप्रकाश को इस बात से बहुत प्रम हुए। उन्होंने मन में सोचा, यह मनुष्य विश्वासपात्र और है । यह सोचकर महाराज ने उसे पचास) मासिक पर बिल क्लर्क बना दिया। यह एक सभा का काम था । इस सभा में ऐसी व्यवस्था थी कि जितने रुपए इस सभा के खर्च के लिये मंजूर होते थे, वे सब मंजूर होने के बाद जयप्रकाश के पास जाँच के लिये आते थे, और उसकी सही होने के बाद तनख्वाह बँटती थी । एक बार सात हजार रुपयों का एक बिल भूल से दो बार पास हो गया । सही करते समय जयप्रकाश ने यह भूल पकड़ी, और बिल को रोका । राज्य के जिस कर्मचारी की यह भूल थी, उसने जयप्रकाश से कहा - "ये सात हजार रुपए मैं आपको दे दूँ ; पर यह बात महाराज के कानों में नहीं पहुँचनी चाहिए ।" जयप्रकाश यदि चाहता, तो सात हजार रुपए लेकर अपना मतलब बनाता । पर उसने ऐसा नहीं किया । वह ईमानदार था, सच्चा था, स्वामिभक्त और कर्तव्यशील था । अतएव लोभ से वह जरा भी विचलित नहीं हुआ। उसने साफ कह दिया - "मैं अपने मालिक से यह बात कभी नहीं छिपाऊँगा ।" में उसने महाराज से यह बात कह दी, और साथ ही यह भी अर्ज कर दी कि भूल से दो बार बिल पास हो जाना संभव है। महाराज इस बर्ताव से बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने धीरेधीरे जयप्रकाश को दीवान के पद पर पहुँचा दिया, और
रविवार दोपहर पुसौर थाना क्षेत्र के तेतला गांव के पास सड़क दुर्घटना में एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। टक्कर के बाद घर्षण से ट्रक में आग लग गई। सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम ने मौके पर पहुंच कर आग पर काबू पाया। घायल युवक की मेकाहारा में इलाज के दाैरान मौत हो गई । लिंजिर गांव का अजय खड़िया रविवार सुबह क्रिकेट मैच देखने तेतला गया था। दोपहर 1 बजे वह घर लौट रहा था। इसी दौरान सारंगढ़ की ओर से रायगढ़ आ रहे ट्रक क्रमांक एनएल-1 एडी 0593 के चालक ने बाइक में टक्कर मार दी। ट्रक की टक्कर से बाइक सवार युवक दूर जा गिरा। बाइक ट्रक में फंसी रह गई। लगभग 70 मीटर घिसटाने के बाद ट्रक में आग लग गई। ड्राइवर मौके से जान बचा भाग निकला। पुसौर पुलिस आई और घायल को अस्पताल भिजवाया। प्याज से भरा ट्रक सारंगढ़ की ओर से रायगढ़ आ रहा था। अचानक आग लगने से केबिन के साथ डाले में रखा प्याज भी जलने लगा। फायर बिग्रेड की टीम ने 3 घंटों तक कड़ी मशक्कत की और आग पर काबू पाया। आसपास के लोगों ने भी पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम की मदद की। पुलिस ने आरोपी ट्रक चालक के विरूद्ध मामला दर्ज कर लिया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
रविवार दोपहर पुसौर थाना क्षेत्र के तेतला गांव के पास सड़क दुर्घटना में एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। टक्कर के बाद घर्षण से ट्रक में आग लग गई। सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम ने मौके पर पहुंच कर आग पर काबू पाया। घायल युवक की मेकाहारा में इलाज के दाैरान मौत हो गई । लिंजिर गांव का अजय खड़िया रविवार सुबह क्रिकेट मैच देखने तेतला गया था। दोपहर एक बजे वह घर लौट रहा था। इसी दौरान सारंगढ़ की ओर से रायगढ़ आ रहे ट्रक क्रमांक एनएल-एक एडी पाँच सौ तिरानवे के चालक ने बाइक में टक्कर मार दी। ट्रक की टक्कर से बाइक सवार युवक दूर जा गिरा। बाइक ट्रक में फंसी रह गई। लगभग सत्तर मीटर घिसटाने के बाद ट्रक में आग लग गई। ड्राइवर मौके से जान बचा भाग निकला। पुसौर पुलिस आई और घायल को अस्पताल भिजवाया। प्याज से भरा ट्रक सारंगढ़ की ओर से रायगढ़ आ रहा था। अचानक आग लगने से केबिन के साथ डाले में रखा प्याज भी जलने लगा। फायर बिग्रेड की टीम ने तीन घंटाटों तक कड़ी मशक्कत की और आग पर काबू पाया। आसपास के लोगों ने भी पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम की मदद की। पुलिस ने आरोपी ट्रक चालक के विरूद्ध मामला दर्ज कर लिया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
चार्जशीट भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विशेष न्यायाधीश एडीजे रमाकांत प्रसाद की कोर्ट में दाखिल हो गई है. एसटीएफ धर्म सिंह सैनी से पूछताछ करेगी. लखनऊः योगी सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान आयुष कॉलेज की मान्यता देने में भ्रष्टाचार हुआ था. बिना नीट परीक्षा पास हुए छात्रों का भी एडमिशन के आयुष कॉलेजों में हुआ था और आयुष कॉलेज को मान्यता देने के लिए पूर्व आयुष मंत्री धर्म सिंह सैनी ने घूस ली थी. यह खुलासा एसटीएफ द्वारा आयुष कॉलेजों में बिना नीट परीक्षा के हुए एडमिशन के मामले में दाखिल की गई चार्जशीट में किया गया है. यह चार्जशीट भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विशेष न्यायाधीश एडीजे रमाकांत प्रसाद की कोर्ट में दाखिल हो गई है. अब जल्दी ही एसटीएफ धर्म सिंह सैनी से पूछताछ करेगी. इस दौरान उन्हे गिरफ्तार भी किया जा सकता है. एसटीएफ के इस खुलासे के बाद धर्म सिंह सैनी का भारतीय जनता पार्टी में वापस लौटने का रास्ता भी अब बंद हो गया है. एसटीएफ के अधिकारियों के प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीते वर्ष केंद्र सरकार ने यूपी के आयुष कॉलेजों में बिना नीट परीक्षा पास हुए छात्रों को एडमिशन दिए जाने को लेकर पूछताछ की थी. तब प्रदेश सरकार को आयुष कॉलेजों में हुए भ्रष्टाचार की भनक लगी और एसटीएफ को इस मामले की जांच का दायित्व सौंपा गया. एसटीएफ की पड़ताल के दौरान प्रोफेसर एस एन सिंह (पूर्व निदेशक आयुष) और डॉ. उमाकांत यादव ने बताया कि साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी एक आदेश की कड़ी में डॉ. अनवर सईद और डॉ. अकरम निदेशालय में डॉ. उमाकांत से मिले थे. अकरम और सईद ने उमाकांत से कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का जल्द से जल्द अनुपालन करवा दें तो यूजी की मान्यता के लिए एक करोड़ 10 लाख रुपये और पीजी के लिए 50 लाख रुपये दे देंगे. इस पर एसएन सिंह और उमाकांत ने उन दोनों को आश्वस्त किया कि काम हो जाएगा मंत्री जी से मुलाकात करवा देते हैं. दोनों ने तत्कालीन मंत्री धर्म सिंह सैनी के पर्सनल सेक्रेटरी राजकुमार दिवाकर से बात कर मुलाकात का समय ले लिया. दिवाकर ने सईद और अकरम की तत्कालीन मंत्री से मुलाकात करवाई. वहां से काम होने का आश्वासन मिलने के बाद सईद और अकरम ने अलग-अलग तारीखों में यूजी के लिए एक करोड़ 10 लाख रुपये एसएन सिंह व उमाकांत को दिए. फिर पीजी वाली फाइल के लिए भी 50 लाख रुपये दिए. एसटीएफ के अनुसार तत्कालीन मंत्री धर्म सिंह सैनी, प्रोफेसर एसएन सिंह, उमाकांत यादव आदि ने फाइल पास कराने की प्रक्रिया में घूस ली जिसे आपस में बांटा गया. एसटीएफ ने राजकुमार दिवाकर का मजिस्ट्रेट के सामने सीआरपीसी की धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराया है. राजकुमार दिवाकर ने 161 के तहत दिए गए बयान को ही 164 में भी दोहराया है. उसने अपने बयानों में पूर्व मंत्री द्वारा रिश्वत लिए जाने की पुष्टि की है. राजकुमार का बयान धर्म सिंह सैनी की मुश्किलें बढ़ाएगा. एसटीएफ अब उन्हे जल्दी ही पूछताछ के लिए बुलाएगी. एसटीएफ ने उन्हे पहले भी इस मामले में पूछताछ के लिए 91 सीआरपीसी की नोटिस भेजकर बुलाया था. परंतु गिरफ्तारी की आशंका के चलते धर्म सिंह सैनी ने कोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी लगाई थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था. अब उन्हे पूछताछ के लिए आना ही होगा. धर्म सिंह सैनी बीते विधानसभा चुनाव के पहले भाजपा से नाता तोड़कर सपा में शामिल हो गए थे. सपा के टिकट पर चुनाव भी लड़े थे लेकिन जीत नहीं सके. चुनाव हारने के बाद से वह भाजपा में वापस लौटने के प्रयास कर रहे थे. अब उनके लिए भाजपा में लौटना भी संभव नहीं होगा क्योंकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भ्रष्टाचार में फंसे धर्म सिंह सैनी को पार्टी में वापस लेने के लिए तैयार नहीं होंगे.
चार्जशीट भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विशेष न्यायाधीश एडीजे रमाकांत प्रसाद की कोर्ट में दाखिल हो गई है. एसटीएफ धर्म सिंह सैनी से पूछताछ करेगी. लखनऊः योगी सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान आयुष कॉलेज की मान्यता देने में भ्रष्टाचार हुआ था. बिना नीट परीक्षा पास हुए छात्रों का भी एडमिशन के आयुष कॉलेजों में हुआ था और आयुष कॉलेज को मान्यता देने के लिए पूर्व आयुष मंत्री धर्म सिंह सैनी ने घूस ली थी. यह खुलासा एसटीएफ द्वारा आयुष कॉलेजों में बिना नीट परीक्षा के हुए एडमिशन के मामले में दाखिल की गई चार्जशीट में किया गया है. यह चार्जशीट भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विशेष न्यायाधीश एडीजे रमाकांत प्रसाद की कोर्ट में दाखिल हो गई है. अब जल्दी ही एसटीएफ धर्म सिंह सैनी से पूछताछ करेगी. इस दौरान उन्हे गिरफ्तार भी किया जा सकता है. एसटीएफ के इस खुलासे के बाद धर्म सिंह सैनी का भारतीय जनता पार्टी में वापस लौटने का रास्ता भी अब बंद हो गया है. एसटीएफ के अधिकारियों के प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीते वर्ष केंद्र सरकार ने यूपी के आयुष कॉलेजों में बिना नीट परीक्षा पास हुए छात्रों को एडमिशन दिए जाने को लेकर पूछताछ की थी. तब प्रदेश सरकार को आयुष कॉलेजों में हुए भ्रष्टाचार की भनक लगी और एसटीएफ को इस मामले की जांच का दायित्व सौंपा गया. एसटीएफ की पड़ताल के दौरान प्रोफेसर एस एन सिंह और डॉ. उमाकांत यादव ने बताया कि साल दो हज़ार उन्नीस में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी एक आदेश की कड़ी में डॉ. अनवर सईद और डॉ. अकरम निदेशालय में डॉ. उमाकांत से मिले थे. अकरम और सईद ने उमाकांत से कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का जल्द से जल्द अनुपालन करवा दें तो यूजी की मान्यता के लिए एक करोड़ दस लाख रुपये और पीजी के लिए पचास लाख रुपये दे देंगे. इस पर एसएन सिंह और उमाकांत ने उन दोनों को आश्वस्त किया कि काम हो जाएगा मंत्री जी से मुलाकात करवा देते हैं. दोनों ने तत्कालीन मंत्री धर्म सिंह सैनी के पर्सनल सेक्रेटरी राजकुमार दिवाकर से बात कर मुलाकात का समय ले लिया. दिवाकर ने सईद और अकरम की तत्कालीन मंत्री से मुलाकात करवाई. वहां से काम होने का आश्वासन मिलने के बाद सईद और अकरम ने अलग-अलग तारीखों में यूजी के लिए एक करोड़ दस लाख रुपये एसएन सिंह व उमाकांत को दिए. फिर पीजी वाली फाइल के लिए भी पचास लाख रुपये दिए. एसटीएफ के अनुसार तत्कालीन मंत्री धर्म सिंह सैनी, प्रोफेसर एसएन सिंह, उमाकांत यादव आदि ने फाइल पास कराने की प्रक्रिया में घूस ली जिसे आपस में बांटा गया. एसटीएफ ने राजकुमार दिवाकर का मजिस्ट्रेट के सामने सीआरपीसी की धारा एक सौ चौंसठ के तहत बयान दर्ज कराया है. राजकुमार दिवाकर ने एक सौ इकसठ के तहत दिए गए बयान को ही एक सौ चौंसठ में भी दोहराया है. उसने अपने बयानों में पूर्व मंत्री द्वारा रिश्वत लिए जाने की पुष्टि की है. राजकुमार का बयान धर्म सिंह सैनी की मुश्किलें बढ़ाएगा. एसटीएफ अब उन्हे जल्दी ही पूछताछ के लिए बुलाएगी. एसटीएफ ने उन्हे पहले भी इस मामले में पूछताछ के लिए इक्यानवे सीआरपीसी की नोटिस भेजकर बुलाया था. परंतु गिरफ्तारी की आशंका के चलते धर्म सिंह सैनी ने कोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी लगाई थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था. अब उन्हे पूछताछ के लिए आना ही होगा. धर्म सिंह सैनी बीते विधानसभा चुनाव के पहले भाजपा से नाता तोड़कर सपा में शामिल हो गए थे. सपा के टिकट पर चुनाव भी लड़े थे लेकिन जीत नहीं सके. चुनाव हारने के बाद से वह भाजपा में वापस लौटने के प्रयास कर रहे थे. अब उनके लिए भाजपा में लौटना भी संभव नहीं होगा क्योंकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भ्रष्टाचार में फंसे धर्म सिंह सैनी को पार्टी में वापस लेने के लिए तैयार नहीं होंगे.
पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार नुसरत मिर्जा ने हाल में ही दावा किया था कि वे कांग्रेस के शासनकाल के समय कई बार भारत आए थे। इस दौरान उन्होंने कई खुफिया जानकारी यहां पर आकर जुटाई थी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि तत्कालीन उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के कार्यकाल में उन्हें कई बार भारत आने का न्यौता मिला था। इसी विषय पर हो रही टीवी डिबेट के दौरान राजनीतिक विश्लेषक शुभ्रस्था और कांग्रेस प्रवक्ता अलका लांबा के बीच बहस हो गई। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। दरअसल, यह टीवी डिबेट 'एबीपी' न्यूज़ चैनल पर हो रही थी। इस दौरान अलका लांबा शुभ्रस्था पर कटाक्ष करते हुए उन्हें बार-बार फ्रिंज एलिमेंट कहने लगीं। इस बात पर भड़क कर शुभ्रस्था शो छोड़कर चली गईं। उन्होंने डिबेट छोड़कर जाते हुए कहा कि वह इस महिला के साथ डिबेट नहीं कर सकती, जो इस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रही हो। बता दें कि शुभ्रस्था ने लाइव डिबेट के दौरान यह भी कहा कि वह किसी रैली में नहीं आई हैं, अगर मुझे पता होता कि यह इस डिबेट में हैं तो मैं बिल्कुल भी नहीं आती। एंकर ने कही बात : शुभ्रस्था के शो छोड़कर चले जाने के एंकर रुबिका लियाकत ने कहा कि अलका लांबा की ओर से कोई भी व्यक्तिगत टिप्पणी आप पर नहीं की गई है। इसके साथ उन्होंने कहा कि अलका लांबा शुभ्रस्था द्वारा उठाए गए मुद्दों पर काउंटर किया है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उन्होंने आप पर व्यक्तिगत टिप्पणी की है। अलका लांबा ने शेयर किया वीडियो : कांग्रेस प्रवक्ता ने अपनी सोशल मीडिया हैंडल से शुभ्रस्था के डिबेट छोड़कर जाने का वीडियो शेयर करते हुए कमेंट किया, ' भाजपा की फ्रिंज एलिमेंट। मेरे सवालों से बौखला कर बिना जवाब दिए चर्चा बीच में छोड़कर भागी। ' सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो पर कुछ लोग अलका लांबा का समर्थन करते हैं नजर आ रहे हैं तो वहीं कुछ लोगों ने उन पर तंज भी कसा है। शुभ्रस्था ने यूं किया पलटवार : शुभ्रस्था ने अपने टि्वटर हैंडल से पलटवार कर लिखा कि अलका लांबा जैसी हल्की और बदतमीज प्रवक्ताओं के साथ बहस करना संभव नहीं है। उन्होंने अलका लांबा के साथ हुई पिछली डिबेट का जिक्र करते हुए कहा कि आज इस उम्मीद में आई थी कि इसे रैली और डिबेट का अंतर पता चला होगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी लिखा कि ऐसा नहीं है कि कांग्रेस में अच्छे नेता नहीं है लेकिन जिन छटें हुए लोगों को वह भेजती है। उसका विरोध, उनकी बदतमीजी को बर्दाश्त नहीं करके ही संभव है।
पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार नुसरत मिर्जा ने हाल में ही दावा किया था कि वे कांग्रेस के शासनकाल के समय कई बार भारत आए थे। इस दौरान उन्होंने कई खुफिया जानकारी यहां पर आकर जुटाई थी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि तत्कालीन उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के कार्यकाल में उन्हें कई बार भारत आने का न्यौता मिला था। इसी विषय पर हो रही टीवी डिबेट के दौरान राजनीतिक विश्लेषक शुभ्रस्था और कांग्रेस प्रवक्ता अलका लांबा के बीच बहस हो गई। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। दरअसल, यह टीवी डिबेट 'एबीपी' न्यूज़ चैनल पर हो रही थी। इस दौरान अलका लांबा शुभ्रस्था पर कटाक्ष करते हुए उन्हें बार-बार फ्रिंज एलिमेंट कहने लगीं। इस बात पर भड़क कर शुभ्रस्था शो छोड़कर चली गईं। उन्होंने डिबेट छोड़कर जाते हुए कहा कि वह इस महिला के साथ डिबेट नहीं कर सकती, जो इस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रही हो। बता दें कि शुभ्रस्था ने लाइव डिबेट के दौरान यह भी कहा कि वह किसी रैली में नहीं आई हैं, अगर मुझे पता होता कि यह इस डिबेट में हैं तो मैं बिल्कुल भी नहीं आती। एंकर ने कही बात : शुभ्रस्था के शो छोड़कर चले जाने के एंकर रुबिका लियाकत ने कहा कि अलका लांबा की ओर से कोई भी व्यक्तिगत टिप्पणी आप पर नहीं की गई है। इसके साथ उन्होंने कहा कि अलका लांबा शुभ्रस्था द्वारा उठाए गए मुद्दों पर काउंटर किया है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उन्होंने आप पर व्यक्तिगत टिप्पणी की है। अलका लांबा ने शेयर किया वीडियो : कांग्रेस प्रवक्ता ने अपनी सोशल मीडिया हैंडल से शुभ्रस्था के डिबेट छोड़कर जाने का वीडियो शेयर करते हुए कमेंट किया, ' भाजपा की फ्रिंज एलिमेंट। मेरे सवालों से बौखला कर बिना जवाब दिए चर्चा बीच में छोड़कर भागी। ' सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो पर कुछ लोग अलका लांबा का समर्थन करते हैं नजर आ रहे हैं तो वहीं कुछ लोगों ने उन पर तंज भी कसा है। शुभ्रस्था ने यूं किया पलटवार : शुभ्रस्था ने अपने टि्वटर हैंडल से पलटवार कर लिखा कि अलका लांबा जैसी हल्की और बदतमीज प्रवक्ताओं के साथ बहस करना संभव नहीं है। उन्होंने अलका लांबा के साथ हुई पिछली डिबेट का जिक्र करते हुए कहा कि आज इस उम्मीद में आई थी कि इसे रैली और डिबेट का अंतर पता चला होगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी लिखा कि ऐसा नहीं है कि कांग्रेस में अच्छे नेता नहीं है लेकिन जिन छटें हुए लोगों को वह भेजती है। उसका विरोध, उनकी बदतमीजी को बर्दाश्त नहीं करके ही संभव है।
नेपाल के PM ओली ने चीन के इशारे पर नाचते हुए भारत-विरोधी बयान तो दे दिया लेकिन अब उनके साथी नेताओं के कारण उनकी अपनी कुर्सी जाने ही वाली है। नेपाल के PM ओली ने चीन के इशारे पर नाचते हुए भारत-विरोधी बयान तो दे दिया लेकिन अब उनके साथी नेताओं के कारण उनकी अपनी कुर्सी जाने ही वाली है। पाकिस्तान के स्थानीय लोगो ने इस्लामाबाद में बन रहे श्रीकृष्ण मंदिर में तोड़फोड़ मचाने वाले मलिक को एक 'नायक' के रूप में पेश किया है। इजरायल ने जोरदार साइबर हमला करके ईरान के परमाणु ठिकानों में दो विस्फोट करा दिए। इनमें से एक यूरेनियम संवर्धन केंद्र है और दूसरा मिसाइल निर्माण केंद्र। नेपाल की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी की स्थायी समिति की बैठक सोमवार तक के लिए टाल दी गई है। बैठक में प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के भविष्य पर फैसला होना था। मौलाना मुजीब मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद का राइट हैंड माना जाता था। उसे कराची में गोली मारी गई। शुरुआत में निधान सिंह को अगवा करने के पीछे तालिबान का हाथ होने की बात कही जा रही थी। लेकिन परिवार ने इससे इनकार किया है।
नेपाल के PM ओली ने चीन के इशारे पर नाचते हुए भारत-विरोधी बयान तो दे दिया लेकिन अब उनके साथी नेताओं के कारण उनकी अपनी कुर्सी जाने ही वाली है। नेपाल के PM ओली ने चीन के इशारे पर नाचते हुए भारत-विरोधी बयान तो दे दिया लेकिन अब उनके साथी नेताओं के कारण उनकी अपनी कुर्सी जाने ही वाली है। पाकिस्तान के स्थानीय लोगो ने इस्लामाबाद में बन रहे श्रीकृष्ण मंदिर में तोड़फोड़ मचाने वाले मलिक को एक 'नायक' के रूप में पेश किया है। इजरायल ने जोरदार साइबर हमला करके ईरान के परमाणु ठिकानों में दो विस्फोट करा दिए। इनमें से एक यूरेनियम संवर्धन केंद्र है और दूसरा मिसाइल निर्माण केंद्र। नेपाल की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी की स्थायी समिति की बैठक सोमवार तक के लिए टाल दी गई है। बैठक में प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के भविष्य पर फैसला होना था। मौलाना मुजीब मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद का राइट हैंड माना जाता था। उसे कराची में गोली मारी गई। शुरुआत में निधान सिंह को अगवा करने के पीछे तालिबान का हाथ होने की बात कही जा रही थी। लेकिन परिवार ने इससे इनकार किया है।
मण्डपके मध्यमें परम दिव्य कनकमय चौकमें दिव्यरत्नसिंहासन पर बिराजे हुए युगलसरकार परात्परतर प्रभु श्रीसीतारामजी महाराजके सन्मुख उपस्थित करते हैं । वहां पर श्री भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न और हनुमदादिक नित्य दिव्य सेवकोंसे सेव्यमान प्रभुका दर्शनकर तुक्तात्मा कृत्य कृत्य होजाता है और प्रभुके चरणोंमे प्रेमसहित जैसे जडसे कटा हुआ झाड गिर पडता है उस प्रकार गिरकर साष्टाङ्ग दण्डवत् करता है । दीनबन्धु, भक्तवत्सल, परमोदार, परमदिव्य, परमप्रतापी, दयानिधि, पतितपावन, देवाधिदेव, विधिहरिहरवन्दित, अनन्त कोटि ब्रह्माण्डाघिनायक, श्रीरामजी दया स्वरूपिणी श्रीजानकीजी की कृपादृष्टिसे आलोचित प्रेमी भक्तको दौडकर हृदयमें लगाते हैं। और परम मधुर स्वरसें उसे सान्त्वना देते हैं। अपना अभयकरकमल उसके मस्तकपर रखकर उसके समस्त पाप, ताप, क्लेश और चिन्ताओंका हरणकर शाश्वत शान्तिप्रदान करते हैं । तबसे वह जीव जीवन्मुक्त होजाता है। प्रभुके नित्य धामके निवासी नित्य जीवोंके सदृश होजाता है और परम अविचल, चिन्मय आनन्दमय, प्रेममय प्रभु धामका नित्य निवासी बन जाता है। प्रभु अपने धामका वर्णन करते हुए कहते हैं । यद्गत्वा न निवर्तन्ते तद्धाम परमं मम । " जहां जाकर जीव वापिस नही लौटता है वह मेरा परमधाम है " श्रुति कहती है । मुक्त स्वरूप "पादोस्य विश्वाभूतानि त्रिपादस्यामृतं दिवि " मुमुक्षुजीव वात्सल्यादि दिव्यगुणसागर, उपनिषद् वेद प्रतिपाद्य, सर्व शरणागतोंके रक्षक य तो वा इमानि भूतानि जायन्ते येन जातानि जीवन्ति यत्प्रयन्त्यभि संविशन्ति " इत्यादि श्रुतियों और "जन्माद्यस्ययतः इत्यादि सूत्रोंसे प्रतिपाद्य उत्पत्ति पालन, प्रलय कर्ता, सर्वसमर्थ, इन्द्रादि समस्त देवताओंके स्वामी, अनादि और अनन्त, "यौ वै ब्रह्माणं विदधाति पूर्व यो वै वेदांश्च प्रहिणोति तस्मै । तं ह देवात्मबुद्धिप्रकाशं मुमुक्षुर्वै शरण महम् प्रपद्ये " इत्यादि श्रुतिकरके प्रतिपादित ब्रह्मादि देवपूजित, समस्त शत्रुओंका नाश करनेवाले सुन्दर वेदोंका उपदेश देनेवाले, सर्वज्ञ, सर्वसमर्थ, परमपावन, योगियोंको भी अत्यन्त दुर्लभ, समस्त चेतनों को चेतनता प्रदायक ध्यान, पूजन, उपासना करनेलायक प्रभु श्री सीतारामजीकी आराधना करता है और समस्त संशयरूपी गर्विष्ठ हाथियोंका नाश करनेवाले सिंहवत् श्रीगुरुशरण होकर प्रभु भजन करता है। वह मुमुक्षु सत्सङ्ग और गुरुकृपा कटाक्षके प्रभावसें सांसारिक स्पृहाओंका नाश करदेता है, और प्रभुकी साङ्गोपाङ्ग प्रपत्ति स्वीकारकर, समस्त प्रारब्ध कर्मोंका उपभोगकर पञ्चत्वको प्राप्त होता है और प्रभुके दिव्य धाममें जाकर बसता है वह मुक्तात्मा सुषुम्ना नाडीसे बहिर्गत होकर जिसरास्तेसें प्रभुधाममें जाता है उस अर्चिरादि मार्गका श्रुति वर्णन करती है । " तेऽचिष मेवाभि संभवन्ति, अर्चिषोऽहः, अहः आपुर्यमाण पक्षमापूर्यमाणपक्षायान् पडदङङेति मासास्तॉन् मासेभ्यः संवत्सरं संवत्सरादादित्यमादित्याच्चन्द्रमसं चन्द्रमसो विद्युतं तत्पुरूषोऽमानवः । स एनान् ब्रह्म गमयत्वेष देव यथो ब्रह्म पथ एतेन प्रतिपद्यमाना इमं मानव मानत नावर्तन्ते । वह मुक्तात्मा अर्चिरादिमार्गसें होता हुआ प्रभुको प्राप्त करता है. प्रथम अग्निलोक, फिर दिनके अभिमानी देवलोकमें, फिर पक्षाभिमानी देवलोकमें, फिर उत्तरायणको प्राप्त होता है, फिर संवत्सर, फिर सूर्यलोक, चन्द्रलोक, विद्युल्लोक, इत्यादिकोंको अतिक्रमण करके प्रभुके दिव्य धामको प्राप्त करता है । यही देवपथ है यही ब्रह्मपथ है । जो इस रास्तेसें प्रभुसानिध्यको प्राप्त करता है वह इस आवागमनरूपी मर्त्यलोकमे फिर नही आता है। यह आत्मा उस प्रभुधाममें प्रभुसें पृथक् होकर रहता है । ज्ञान पुरस्पर अपनेको प्रभुका विशेषण, प्रकार, पोष्य, शेष आदिकमानकर प्रभुसेवापरायण रहता है, यदि उसकी इच्छा होती है तो प्रभुकी चरण पादुकाका रूप उसे प्राप्त होता है, यदि उसकी इच्छा होती है तो प्रभुके दिव्य शरीरका कुण्डल, कङ्कण नूपुर आदिक बनकर प्रभुका परम संश्लेष-परम संयोग प्राप्त करता है। तात्पर्य वह है कि वहांपर मुक्तजीव जिस प्रकारकी भक्ति करना चाहता है उसके लिये प्रभु कृपार्से सब सुलभ होजाता है। यही वात शास्त्रों कही गई है - यथायदा कामयते मुक्तो जगदीशस्य पादयोः । आत्मनः पादुकारूपं तस्मै तत्माप्यते तदा ।। यदा कङ्कणभावं वा कुण्डलं वा परात्मनः । वाञ्छति च तदा स्वामी तदप्यस्मै प्रयच्छति ॥
मण्डपके मध्यमें परम दिव्य कनकमय चौकमें दिव्यरत्नसिंहासन पर बिराजे हुए युगलसरकार परात्परतर प्रभु श्रीसीतारामजी महाराजके सन्मुख उपस्थित करते हैं । वहां पर श्री भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न और हनुमदादिक नित्य दिव्य सेवकोंसे सेव्यमान प्रभुका दर्शनकर तुक्तात्मा कृत्य कृत्य होजाता है और प्रभुके चरणोंमे प्रेमसहित जैसे जडसे कटा हुआ झाड गिर पडता है उस प्रकार गिरकर साष्टाङ्ग दण्डवत् करता है । दीनबन्धु, भक्तवत्सल, परमोदार, परमदिव्य, परमप्रतापी, दयानिधि, पतितपावन, देवाधिदेव, विधिहरिहरवन्दित, अनन्त कोटि ब्रह्माण्डाघिनायक, श्रीरामजी दया स्वरूपिणी श्रीजानकीजी की कृपादृष्टिसे आलोचित प्रेमी भक्तको दौडकर हृदयमें लगाते हैं। और परम मधुर स्वरसें उसे सान्त्वना देते हैं। अपना अभयकरकमल उसके मस्तकपर रखकर उसके समस्त पाप, ताप, क्लेश और चिन्ताओंका हरणकर शाश्वत शान्तिप्रदान करते हैं । तबसे वह जीव जीवन्मुक्त होजाता है। प्रभुके नित्य धामके निवासी नित्य जीवोंके सदृश होजाता है और परम अविचल, चिन्मय आनन्दमय, प्रेममय प्रभु धामका नित्य निवासी बन जाता है। प्रभु अपने धामका वर्णन करते हुए कहते हैं । यद्गत्वा न निवर्तन्ते तद्धाम परमं मम । " जहां जाकर जीव वापिस नही लौटता है वह मेरा परमधाम है " श्रुति कहती है । मुक्त स्वरूप "पादोस्य विश्वाभूतानि त्रिपादस्यामृतं दिवि " मुमुक्षुजीव वात्सल्यादि दिव्यगुणसागर, उपनिषद् वेद प्रतिपाद्य, सर्व शरणागतोंके रक्षक य तो वा इमानि भूतानि जायन्ते येन जातानि जीवन्ति यत्प्रयन्त्यभि संविशन्ति " इत्यादि श्रुतियों और "जन्माद्यस्ययतः इत्यादि सूत्रोंसे प्रतिपाद्य उत्पत्ति पालन, प्रलय कर्ता, सर्वसमर्थ, इन्द्रादि समस्त देवताओंके स्वामी, अनादि और अनन्त, "यौ वै ब्रह्माणं विदधाति पूर्व यो वै वेदांश्च प्रहिणोति तस्मै । तं ह देवात्मबुद्धिप्रकाशं मुमुक्षुर्वै शरण महम् प्रपद्ये " इत्यादि श्रुतिकरके प्रतिपादित ब्रह्मादि देवपूजित, समस्त शत्रुओंका नाश करनेवाले सुन्दर वेदोंका उपदेश देनेवाले, सर्वज्ञ, सर्वसमर्थ, परमपावन, योगियोंको भी अत्यन्त दुर्लभ, समस्त चेतनों को चेतनता प्रदायक ध्यान, पूजन, उपासना करनेलायक प्रभु श्री सीतारामजीकी आराधना करता है और समस्त संशयरूपी गर्विष्ठ हाथियोंका नाश करनेवाले सिंहवत् श्रीगुरुशरण होकर प्रभु भजन करता है। वह मुमुक्षु सत्सङ्ग और गुरुकृपा कटाक्षके प्रभावसें सांसारिक स्पृहाओंका नाश करदेता है, और प्रभुकी साङ्गोपाङ्ग प्रपत्ति स्वीकारकर, समस्त प्रारब्ध कर्मोंका उपभोगकर पञ्चत्वको प्राप्त होता है और प्रभुके दिव्य धाममें जाकर बसता है वह मुक्तात्मा सुषुम्ना नाडीसे बहिर्गत होकर जिसरास्तेसें प्रभुधाममें जाता है उस अर्चिरादि मार्गका श्रुति वर्णन करती है । " तेऽचिष मेवाभि संभवन्ति, अर्चिषोऽहः, अहः आपुर्यमाण पक्षमापूर्यमाणपक्षायान् पडदङङेति मासास्तॉन् मासेभ्यः संवत्सरं संवत्सरादादित्यमादित्याच्चन्द्रमसं चन्द्रमसो विद्युतं तत्पुरूषोऽमानवः । स एनान् ब्रह्म गमयत्वेष देव यथो ब्रह्म पथ एतेन प्रतिपद्यमाना इमं मानव मानत नावर्तन्ते । वह मुक्तात्मा अर्चिरादिमार्गसें होता हुआ प्रभुको प्राप्त करता है. प्रथम अग्निलोक, फिर दिनके अभिमानी देवलोकमें, फिर पक्षाभिमानी देवलोकमें, फिर उत्तरायणको प्राप्त होता है, फिर संवत्सर, फिर सूर्यलोक, चन्द्रलोक, विद्युल्लोक, इत्यादिकोंको अतिक्रमण करके प्रभुके दिव्य धामको प्राप्त करता है । यही देवपथ है यही ब्रह्मपथ है । जो इस रास्तेसें प्रभुसानिध्यको प्राप्त करता है वह इस आवागमनरूपी मर्त्यलोकमे फिर नही आता है। यह आत्मा उस प्रभुधाममें प्रभुसें पृथक् होकर रहता है । ज्ञान पुरस्पर अपनेको प्रभुका विशेषण, प्रकार, पोष्य, शेष आदिकमानकर प्रभुसेवापरायण रहता है, यदि उसकी इच्छा होती है तो प्रभुकी चरण पादुकाका रूप उसे प्राप्त होता है, यदि उसकी इच्छा होती है तो प्रभुके दिव्य शरीरका कुण्डल, कङ्कण नूपुर आदिक बनकर प्रभुका परम संश्लेष-परम संयोग प्राप्त करता है। तात्पर्य वह है कि वहांपर मुक्तजीव जिस प्रकारकी भक्ति करना चाहता है उसके लिये प्रभु कृपार्से सब सुलभ होजाता है। यही वात शास्त्रों कही गई है - यथायदा कामयते मुक्तो जगदीशस्य पादयोः । आत्मनः पादुकारूपं तस्मै तत्माप्यते तदा ।। यदा कङ्कणभावं वा कुण्डलं वा परात्मनः । वाञ्छति च तदा स्वामी तदप्यस्मै प्रयच्छति ॥
कुश अग्रवाल बलौदाबाजार - छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले से गाय मांस बेचने हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। मामला लवन थाना क्षेत्र का है। मिली जानकारी के अनुसार जिले में गाय मांस बेचने हुए एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ है। वीडियो वायरल होने पर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल संगठन के लोगों ने वीडियो में गाय मांस बेचने वाले व्यक्ति की गिरफ्तारी की मांग करते हुए लवन पुलिस चौकी प्रभारी को आवेदन सौंपा। हिंदू परिषद और बजरंग दल के शिकायत पर पुलिस ने वायरल वीडियो में दिख रहे एक व्यक्ति को हिरासत लिया। फिलहाल पुलिस आरोपी को गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई में जुट गई है।
कुश अग्रवाल बलौदाबाजार - छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले से गाय मांस बेचने हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। मामला लवन थाना क्षेत्र का है। मिली जानकारी के अनुसार जिले में गाय मांस बेचने हुए एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ है। वीडियो वायरल होने पर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल संगठन के लोगों ने वीडियो में गाय मांस बेचने वाले व्यक्ति की गिरफ्तारी की मांग करते हुए लवन पुलिस चौकी प्रभारी को आवेदन सौंपा। हिंदू परिषद और बजरंग दल के शिकायत पर पुलिस ने वायरल वीडियो में दिख रहे एक व्यक्ति को हिरासत लिया। फिलहाल पुलिस आरोपी को गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई में जुट गई है।
11092020प्रादेशिक समाचार1800बजे प्रधानमंत्री शिक्षा नीति प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति2020 21वीं सदी के भारत को नई दिशा देगी 21वीं सदी में स्कूली शिक्षा पर राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए आज प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति नये भारत की आकांक्षाओं अपेक्षाओं और आवश्यकताओं को पूरा करने का माध्यम बनेगी उन्होंने कहा कि नई नीति अनेक लोगों के पिछले चारपांच वर्षों के अथक परिश्रम का परिणाम है प्रधानमंत्री ने कहा कि इस नीति को लागू करने के बारे में माईगॉव पोर्टल पर एक सप्ताह के भीतर पंद्रह लाख से अधिक सुझाव मिले हैं नरेन्द्र मोदी ने कहा कि बच्चों के लिए सीखने के आसान और अभिनव तरीके खोजे जाने चाहिए इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मुख्य उदेश्य वैज्ञानिक सोच के साथ विद्यार्थियों का समग्र विकास करना है प्रश्नकाल प्रदेश सरकार राज्य के दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे एसएमसी शिक्षकों की मदद करेगी मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने आज विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक प्रतिपूरक प्रश्न के उत्तर में कहा कि राज्य में इस समय दो हजार पाँच सौ पचपन एसएमसी शिक्षक हैं उन्होंने कहा कि मानवीय दृष्टकोण के तहत सरकार इनके लिए मदद का रास्ता बना रही है मुख्यमंत्री ने कहा कि इन शिक्षकों की हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं हुई है ऐसे में सरकार इन्हें सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने में मदद कर रही है जयराम ठाकुर ने कहा कि एसएमसी शिक्षकों के मामले में कुछ कानूनी पेचीदगियां हैं जिन्हें ठीक करने में समय लगेगा इस सम्बंध में विपक्ष के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने प्रतिपूरक सवाल के माध्यम से मामला उठाया इससे पहले नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर कांग्रेस सदस्य आशा कुमारी के मूल सवाल के जवाब में शिक्षा मंत्री गोबिंद ठाकुर ने कहा कि नई नीति को प्रदेश में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा इसके लिए टॉस्क फोर्स का गठन कर दिया गया है जिसकी बैठक तेरह सितंबर को प्रस्तावित है प्रश्नकालदो वेंटिलेटर खरीद और इन्हें अस्पतालों में स्थापित करने को लेकर कांग्रेस के जगत सिंह नेगी के एक सवाल के जवाब में स्वास्थ्य मंत्री राजीव सैजल ने कहा कि प्रदेश में वेंटिलेटर की कमी के कारण एक भी कोरोना मरीज की अभी तक मौत नहीं हुई है विधायक रमेश ध्वाला अरुण कुमार और जियालाल के एक संयुक्त प्रश्न के उत्तर में शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि बीते तीन सालों में राज्य में वर्षा बर्फबारी और अग्निकांड से सात हजार इकसठ मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं विधायक राजेंद्र राणा और विक्रमादित्य सिंह के एक सवाल के लिखित उत्तर में मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि प्रदेश सरकार पुलिस कर्मियों की डाइट मनी में बढ़ोतरी पर विचार कर रही है ध्यानाकर्षण प्रस्ताव मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि ऊना जिले में हरोली के भदसाली गांव में हुए गोलीकांड के सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर दिया गया है ऐसे में इस मामले की न्यायिक जांच की जरूरत महसूस नहीं हो रही है वे आज विधानसभा में विपक्ष के नेता मुकेश अग्निहोत्री द्वारा इस संबंध में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से उठाए गए मामले के जवाब में बोल रहे थे मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि देवभूमि हिमाचल में गोली चलना चिंता का विषय है और उनके हलके में यह गोली कांड राजनीतिक संरक्षण के चलते हुआ है उन्होंने आरोप लगाया कि सिस्टम की निष्क्रियता के कारण चौकीदार की हत्या हो गई अग्निहोत्री ने इस मामले की न्यायिक जांच की मांग भी मुख्यमंत्री ने कहा कि जमीन से संबंधित विवाद के बाद यह हत्या हुई है मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले की जांच के लिए एसआईटी बनाई गई थी उन्होंने कहा कि इस मामले से जुड़े सभी आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं और हथियार भी बरामद कर दिया गया है मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले में फारेंसिक विशेषज्ञों द्वारा एकत्र साक्ष्य परीक्षण के लिए भेजे जा रहे हैं और प्राथमिकता के साथ जांच जारी है पोस्ट डेवेल्यूशन रैवेन्यू केन्द्र सरकार ने 15वें वित्त आयोग की सिफारिश के तहत तेरह राज्यों को पोस्ट डेवेल्यूशन रैवेन्यू डिफिसिट ग्रांट की छः हजार एक सौ सत्तावन करोड़ की राशि जारी कर दी है केन्द्रीय वित्त व कॉरपोरेट मामले राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने यह जानकारी देते हुए बताया कि इसमें हिमाचल प्रदेश को सितंबर माह के नौ सौ बावन करोड़ अट्ठावन लाख तैंतीस हजार की राशि जारी की है उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार सभी राज्यों के साथ बेहतरीन तालमेल के साथ चुनौतियों से निपटते हुए जन कल्याण के प्रति समर्पित है अनुराग ठाकुर ने कहा कि हिमाचल में विकास कार्यों को जारी रखने व कोरोना आपदा से निपटने में ये राशि मद्दगार साबित होगी उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन का आभार जताया है
एक करोड़ दस लाख बानवे हज़ार बीसप्रादेशिक समाचारएक हज़ार आठ सौबजे प्रधानमंत्री शिक्षा नीति प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीतिदो हज़ार बीस इक्कीसवीं सदी के भारत को नई दिशा देगी इक्कीसवीं सदी में स्कूली शिक्षा पर राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए आज प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति नये भारत की आकांक्षाओं अपेक्षाओं और आवश्यकताओं को पूरा करने का माध्यम बनेगी उन्होंने कहा कि नई नीति अनेक लोगों के पिछले चारपांच वर्षों के अथक परिश्रम का परिणाम है प्रधानमंत्री ने कहा कि इस नीति को लागू करने के बारे में माईगॉव पोर्टल पर एक सप्ताह के भीतर पंद्रह लाख से अधिक सुझाव मिले हैं नरेन्द्र मोदी ने कहा कि बच्चों के लिए सीखने के आसान और अभिनव तरीके खोजे जाने चाहिए इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मुख्य उदेश्य वैज्ञानिक सोच के साथ विद्यार्थियों का समग्र विकास करना है प्रश्नकाल प्रदेश सरकार राज्य के दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे एसएमसी शिक्षकों की मदद करेगी मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने आज विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक प्रतिपूरक प्रश्न के उत्तर में कहा कि राज्य में इस समय दो हजार पाँच सौ पचपन एसएमसी शिक्षक हैं उन्होंने कहा कि मानवीय दृष्टकोण के तहत सरकार इनके लिए मदद का रास्ता बना रही है मुख्यमंत्री ने कहा कि इन शिक्षकों की हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं हुई है ऐसे में सरकार इन्हें सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने में मदद कर रही है जयराम ठाकुर ने कहा कि एसएमसी शिक्षकों के मामले में कुछ कानूनी पेचीदगियां हैं जिन्हें ठीक करने में समय लगेगा इस सम्बंध में विपक्ष के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने प्रतिपूरक सवाल के माध्यम से मामला उठाया इससे पहले नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर कांग्रेस सदस्य आशा कुमारी के मूल सवाल के जवाब में शिक्षा मंत्री गोबिंद ठाकुर ने कहा कि नई नीति को प्रदेश में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा इसके लिए टॉस्क फोर्स का गठन कर दिया गया है जिसकी बैठक तेरह सितंबर को प्रस्तावित है प्रश्नकालदो वेंटिलेटर खरीद और इन्हें अस्पतालों में स्थापित करने को लेकर कांग्रेस के जगत सिंह नेगी के एक सवाल के जवाब में स्वास्थ्य मंत्री राजीव सैजल ने कहा कि प्रदेश में वेंटिलेटर की कमी के कारण एक भी कोरोना मरीज की अभी तक मौत नहीं हुई है विधायक रमेश ध्वाला अरुण कुमार और जियालाल के एक संयुक्त प्रश्न के उत्तर में शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि बीते तीन सालों में राज्य में वर्षा बर्फबारी और अग्निकांड से सात हजार इकसठ मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं विधायक राजेंद्र राणा और विक्रमादित्य सिंह के एक सवाल के लिखित उत्तर में मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि प्रदेश सरकार पुलिस कर्मियों की डाइट मनी में बढ़ोतरी पर विचार कर रही है ध्यानाकर्षण प्रस्ताव मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि ऊना जिले में हरोली के भदसाली गांव में हुए गोलीकांड के सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर दिया गया है ऐसे में इस मामले की न्यायिक जांच की जरूरत महसूस नहीं हो रही है वे आज विधानसभा में विपक्ष के नेता मुकेश अग्निहोत्री द्वारा इस संबंध में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से उठाए गए मामले के जवाब में बोल रहे थे मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि देवभूमि हिमाचल में गोली चलना चिंता का विषय है और उनके हलके में यह गोली कांड राजनीतिक संरक्षण के चलते हुआ है उन्होंने आरोप लगाया कि सिस्टम की निष्क्रियता के कारण चौकीदार की हत्या हो गई अग्निहोत्री ने इस मामले की न्यायिक जांच की मांग भी मुख्यमंत्री ने कहा कि जमीन से संबंधित विवाद के बाद यह हत्या हुई है मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले की जांच के लिए एसआईटी बनाई गई थी उन्होंने कहा कि इस मामले से जुड़े सभी आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं और हथियार भी बरामद कर दिया गया है मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले में फारेंसिक विशेषज्ञों द्वारा एकत्र साक्ष्य परीक्षण के लिए भेजे जा रहे हैं और प्राथमिकता के साथ जांच जारी है पोस्ट डेवेल्यूशन रैवेन्यू केन्द्र सरकार ने पंद्रहवें वित्त आयोग की सिफारिश के तहत तेरह राज्यों को पोस्ट डेवेल्यूशन रैवेन्यू डिफिसिट ग्रांट की छः हजार एक सौ सत्तावन करोड़ की राशि जारी कर दी है केन्द्रीय वित्त व कॉरपोरेट मामले राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने यह जानकारी देते हुए बताया कि इसमें हिमाचल प्रदेश को सितंबर माह के नौ सौ बावन करोड़ अट्ठावन लाख तैंतीस हजार की राशि जारी की है उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार सभी राज्यों के साथ बेहतरीन तालमेल के साथ चुनौतियों से निपटते हुए जन कल्याण के प्रति समर्पित है अनुराग ठाकुर ने कहा कि हिमाचल में विकास कार्यों को जारी रखने व कोरोना आपदा से निपटने में ये राशि मद्दगार साबित होगी उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन का आभार जताया है
Jamshedpur : कोल्हान यूनिवर्सिटी के कुलपति छात्र नेताओं से इतने नाराज हैं कि एक छात्र नेता के फोन करने पर उन्होंने खुद को मरा हुआ बता दिया. इसके बाद छात्र नेता ने भी कुलपति को मृत मानते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिये सिर मुंडवाने और ब्राह्मण भोज करवाने का फैसला लिया है. मामला आज गुरुवार का है. अखिल झारखंड छात्र संघ के कोल्हान अध्यक्ष हेमंत पाठक ने बताया कि उन्होंने कुलपति डॉक्टर गंगाधर पांडा को एक छात्रा की समस्या से अवगत करवाने के उद्देश्य से फोन किया था. फोन पर कुलपति ने कहा 'आपने तो मेरा पुतला जलाया है. मैं तो आपके लिये मर गया हूं. आप मुझे कॉल न करें. ' दरअसल आजसू कोल्हान कमिटी द्वारा विगत दिनों कुलपति का पुतला दहन किया गया था इस पर कुलपति नाराज थे. इसे भी पढ़ेंः शाम की न्यूज डायरी। । 19 मई। । जर्जर रिम्स का हॉस्टल। बाबूलाल गयो पर भी कार्रवाई नहीं- प्रतुल। आजम खान को मिली बेल। सिद्धू को एक साल जेल। CIP में देश का पहला न्यूरोप्लास्टिसिटी लैब। सुनील जाखड़ हुए भाजपा के। बिहार की खबरें व कई वीडियो। । हेमंत पाठक ने कहा कि एक जिम्मेदार पद पर सुशोभित व्यक्ति द्वारा इस तरह का कथन काफी शर्मनाक है. एक कुलपति इतनी तथ्यहीन बात कर सकता है यह हम लोग सोच भी नहीं सकते. लगता है कुलपति अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं. छात्र हित से इनको कोई सरोकार नहीं है. उन्होंने कहा कि अब कुलपति की ही बात को सच मानते हुए आगे का कार्यक्रम किया जाएगा. आजसू कोल्हान कमिटी से जुड़े सभी छात्र कुलपति को श्रद्धांजलि देते हुए मुंडन कराएंगे और उनकी आत्मा की शांति के लिये ब्राह्मण भोज का भी आयोजन किया जाएगा.
Jamshedpur : कोल्हान यूनिवर्सिटी के कुलपति छात्र नेताओं से इतने नाराज हैं कि एक छात्र नेता के फोन करने पर उन्होंने खुद को मरा हुआ बता दिया. इसके बाद छात्र नेता ने भी कुलपति को मृत मानते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिये सिर मुंडवाने और ब्राह्मण भोज करवाने का फैसला लिया है. मामला आज गुरुवार का है. अखिल झारखंड छात्र संघ के कोल्हान अध्यक्ष हेमंत पाठक ने बताया कि उन्होंने कुलपति डॉक्टर गंगाधर पांडा को एक छात्रा की समस्या से अवगत करवाने के उद्देश्य से फोन किया था. फोन पर कुलपति ने कहा 'आपने तो मेरा पुतला जलाया है. मैं तो आपके लिये मर गया हूं. आप मुझे कॉल न करें. ' दरअसल आजसू कोल्हान कमिटी द्वारा विगत दिनों कुलपति का पुतला दहन किया गया था इस पर कुलपति नाराज थे. इसे भी पढ़ेंः शाम की न्यूज डायरी। । उन्नीस मई। । जर्जर रिम्स का हॉस्टल। बाबूलाल गयो पर भी कार्रवाई नहीं- प्रतुल। आजम खान को मिली बेल। सिद्धू को एक साल जेल। CIP में देश का पहला न्यूरोप्लास्टिसिटी लैब। सुनील जाखड़ हुए भाजपा के। बिहार की खबरें व कई वीडियो। । हेमंत पाठक ने कहा कि एक जिम्मेदार पद पर सुशोभित व्यक्ति द्वारा इस तरह का कथन काफी शर्मनाक है. एक कुलपति इतनी तथ्यहीन बात कर सकता है यह हम लोग सोच भी नहीं सकते. लगता है कुलपति अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं. छात्र हित से इनको कोई सरोकार नहीं है. उन्होंने कहा कि अब कुलपति की ही बात को सच मानते हुए आगे का कार्यक्रम किया जाएगा. आजसू कोल्हान कमिटी से जुड़े सभी छात्र कुलपति को श्रद्धांजलि देते हुए मुंडन कराएंगे और उनकी आत्मा की शांति के लिये ब्राह्मण भोज का भी आयोजन किया जाएगा.
ये सब क्यों हो रहा है ? पिंकी - क्यों ? सोनिया - क्या हुआ मेरे बेटे को ? से मिलती है क्या ? सोनिया - नहीं तो क्यों ?
ये सब क्यों हो रहा है ? पिंकी - क्यों ? सोनिया - क्या हुआ मेरे बेटे को ? से मिलती है क्या ? सोनिया - नहीं तो क्यों ?
कोरोना वायरस की वजह से सब्जियों के दाम भी बढ़ गए हैं. (File Photo) शिमला. हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) अब पांरपरिक मार्केटिंग सिस्टम (Marketing System) से हटकर विदेशों की तर्ज पर मार्केटिंग सिस्टम विकसित करने जा रहा है. हाल ही में स्पेन, तुर्की और इटली के दौरे पर कृषि मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा (Dr. Ram Lal Markanda) के नेतृत्व में गई टीम स्वदेश लौट आई है. दस लोगों का शिष्टमंडल इसी महीने तीन यूरोपीय देशों के दौरे पर गया था. इन देशों के मार्केटिंग मॉडल को समझने के लिए टीम गई थी, जिसमें पाया गया कि इन देशों का मॉर्केटिंग मॉडल बेहतर है. हिमाचल भी इस मॉडल को हिमाचल में लागू करेगा. कृषि मंत्री डा रामलाल मारकंडा ने इसकी पुष्टि की है. उन्होंने कहा कि इन देशों में मार्केटिंग का जिम्मा प्राइवेट हाथों में है. सरकार का कोई योगदान नहीं है. वे पहले कंपनी बनाते हैं फिर उन्हें सोयाइटी में बदलकर मार्केटिंग करवाते हैं, जिसमें सरकार का कोई लेना-देना नहीं होता है. प्राइवेट मार्केटिंग यार्ड में हर तरह का उत्पाद बेचा जाता है, जिसमें फल,फूल, सब्जी और मीट सब शामिल हैं. हिमाचल का एग्रीकल्चर मॉडल एक्ट भी इसी बजट सत्र में सदन में पेश होने वाला है. भारत सरकार के इस एक्ट को 18 राज्य अपना चुके हैं. अब हिमाचल भी इसी एक्ट को कुछ नई चीजें जोड़कर अपनाएगा. सरकार विदेशों की तर्ज पर मॉडल एक्ट में फल, फूल, सब्जी, मीट, मछली सहित हर उत्पाद को एक ही यार्ड में बेचने का प्रावधान करने जा रही है. नए एक्ट के तहत 244 उत्पाद बेचे जा सकेंगे. इसके अलावा सरकारी के अधीन सब्जी मंडियों की जगह प्राइवेट मॉर्केटिंग यार्ड को भी अनुमति दी जाएगी. कृषि मंत्री मारकंडा ने कहा कि हिमाचल सरकार ओपन मार्केटिंग व्यवस्था करने वाली है. ऊना जिला के स्वां में चल रहे स्वयं सहायता समूह के प्रयास की तारीफ करते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि अब पूरे हिमाचल में महिला, किसान और दूसरे स्वयं सहायता समूहों को स्पेशल वित्तीय मदद देकर मार्केटिंग के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि लोग समूहों में मार्केटिंग कर सकें. इससे उन्हें लाभ भी ज्यादा होगा और धोखाधड़ी भी रुकेगी. जायका परियोजना जल्द शुरू होने वाली है. जो 1104 करोड़ रुपये की है. इसके जरिए भी स्वयं सहायता समूहों को शुरूआती फंडिंग की जाएगी, ताकि वो काम शुरू कर सकें. इसके अलावा नाबार्ड, ग्रामीण विकास विभाग के जरिए भी वित्तीय मदद के लिए सीएम जयराम ठाकुर से बात की जाएगी. प्राइवेट मार्केटिंग यार्ड और स्वयं सहायता समूहों की ओर से मार्केटिंग किए जाने का असर सब्जी मंडियों पर पड़ सकता है. क्योंकि यहां पर सरकार से लाइसेंस प्राप्त आढ़ती फल-सब्जियों को बिकवाते हैं. हालांकि कृषि मंत्री मारकंडा का मानना है कि नये मॉडल एक्ट के प्रावधानों से ऐसा कोई फर्क नहीं पड़ेगा. सब्जी मंडियां मार्केटिंग बोर्ड के कंट्रोल में रहेंगी. यहां पर ई-ट्रेडिंग के जरिए उत्पाद बेचने के प्रयास होंगे. नए कृषि मॉडल एक्ट के लागू होने के बाद अब एक ही लाइसेंस से पूरे देश में काम किया जा सकेगा. इसका दायरा केवल हिमाचल नहीं बल्कि पूरे देश में होगा. दूसरे राज्य का लदानी या व्यापारी कृषि उत्पाद खरीदने के बाद भी पैसा नहीं देता है और भाग जाता है, तो उसे पकड़ना आसान होगा. क्योंकि जिस राज्य का वह व्यापारी होगा, उस पर कार्रवाई की जिम्मेदारी उसी राज्य की होगी. क्योंकि यह एक्ट केंद्रीय एक्ट के अनुरूप है और अब तक 18 राज्य कृषि मॉडल को लागू कर चुके हैं. अब हिमाचल भी उसी प्रांत में खड़ा है. दोषी को 6 माह कैद के साथ-साथ 20 हजार जुर्माना भी देना होगा. व्यापारियों के लिए रजिस्ट्रेशन से पहले सिक्योरिटी मनी भी जमा करनी होगी. उतना ही उत्पाद वे खरीद सकेंगे. कृषि मंत्री मारकंडा ने कहा कि किसानों की आय दो गुणा करने में नया कृषि मॉडल एक्ट मील का पत्थर साबित होने वाला है. हिमाचल प्रदेश मार्केटिंग के क्षेत्र में न केवल भारत के दूसरे राज्यों से आगे निकलेगा, बल्कि विदेशों का भी मुकाबला करेगा. .
कोरोना वायरस की वजह से सब्जियों के दाम भी बढ़ गए हैं. शिमला. हिमाचल प्रदेश अब पांरपरिक मार्केटिंग सिस्टम से हटकर विदेशों की तर्ज पर मार्केटिंग सिस्टम विकसित करने जा रहा है. हाल ही में स्पेन, तुर्की और इटली के दौरे पर कृषि मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा के नेतृत्व में गई टीम स्वदेश लौट आई है. दस लोगों का शिष्टमंडल इसी महीने तीन यूरोपीय देशों के दौरे पर गया था. इन देशों के मार्केटिंग मॉडल को समझने के लिए टीम गई थी, जिसमें पाया गया कि इन देशों का मॉर्केटिंग मॉडल बेहतर है. हिमाचल भी इस मॉडल को हिमाचल में लागू करेगा. कृषि मंत्री डा रामलाल मारकंडा ने इसकी पुष्टि की है. उन्होंने कहा कि इन देशों में मार्केटिंग का जिम्मा प्राइवेट हाथों में है. सरकार का कोई योगदान नहीं है. वे पहले कंपनी बनाते हैं फिर उन्हें सोयाइटी में बदलकर मार्केटिंग करवाते हैं, जिसमें सरकार का कोई लेना-देना नहीं होता है. प्राइवेट मार्केटिंग यार्ड में हर तरह का उत्पाद बेचा जाता है, जिसमें फल,फूल, सब्जी और मीट सब शामिल हैं. हिमाचल का एग्रीकल्चर मॉडल एक्ट भी इसी बजट सत्र में सदन में पेश होने वाला है. भारत सरकार के इस एक्ट को अट्ठारह राज्य अपना चुके हैं. अब हिमाचल भी इसी एक्ट को कुछ नई चीजें जोड़कर अपनाएगा. सरकार विदेशों की तर्ज पर मॉडल एक्ट में फल, फूल, सब्जी, मीट, मछली सहित हर उत्पाद को एक ही यार्ड में बेचने का प्रावधान करने जा रही है. नए एक्ट के तहत दो सौ चौंतालीस उत्पाद बेचे जा सकेंगे. इसके अलावा सरकारी के अधीन सब्जी मंडियों की जगह प्राइवेट मॉर्केटिंग यार्ड को भी अनुमति दी जाएगी. कृषि मंत्री मारकंडा ने कहा कि हिमाचल सरकार ओपन मार्केटिंग व्यवस्था करने वाली है. ऊना जिला के स्वां में चल रहे स्वयं सहायता समूह के प्रयास की तारीफ करते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि अब पूरे हिमाचल में महिला, किसान और दूसरे स्वयं सहायता समूहों को स्पेशल वित्तीय मदद देकर मार्केटिंग के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि लोग समूहों में मार्केटिंग कर सकें. इससे उन्हें लाभ भी ज्यादा होगा और धोखाधड़ी भी रुकेगी. जायका परियोजना जल्द शुरू होने वाली है. जो एक हज़ार एक सौ चार करोड़ रुपये की है. इसके जरिए भी स्वयं सहायता समूहों को शुरूआती फंडिंग की जाएगी, ताकि वो काम शुरू कर सकें. इसके अलावा नाबार्ड, ग्रामीण विकास विभाग के जरिए भी वित्तीय मदद के लिए सीएम जयराम ठाकुर से बात की जाएगी. प्राइवेट मार्केटिंग यार्ड और स्वयं सहायता समूहों की ओर से मार्केटिंग किए जाने का असर सब्जी मंडियों पर पड़ सकता है. क्योंकि यहां पर सरकार से लाइसेंस प्राप्त आढ़ती फल-सब्जियों को बिकवाते हैं. हालांकि कृषि मंत्री मारकंडा का मानना है कि नये मॉडल एक्ट के प्रावधानों से ऐसा कोई फर्क नहीं पड़ेगा. सब्जी मंडियां मार्केटिंग बोर्ड के कंट्रोल में रहेंगी. यहां पर ई-ट्रेडिंग के जरिए उत्पाद बेचने के प्रयास होंगे. नए कृषि मॉडल एक्ट के लागू होने के बाद अब एक ही लाइसेंस से पूरे देश में काम किया जा सकेगा. इसका दायरा केवल हिमाचल नहीं बल्कि पूरे देश में होगा. दूसरे राज्य का लदानी या व्यापारी कृषि उत्पाद खरीदने के बाद भी पैसा नहीं देता है और भाग जाता है, तो उसे पकड़ना आसान होगा. क्योंकि जिस राज्य का वह व्यापारी होगा, उस पर कार्रवाई की जिम्मेदारी उसी राज्य की होगी. क्योंकि यह एक्ट केंद्रीय एक्ट के अनुरूप है और अब तक अट्ठारह राज्य कृषि मॉडल को लागू कर चुके हैं. अब हिमाचल भी उसी प्रांत में खड़ा है. दोषी को छः माह कैद के साथ-साथ बीस हजार जुर्माना भी देना होगा. व्यापारियों के लिए रजिस्ट्रेशन से पहले सिक्योरिटी मनी भी जमा करनी होगी. उतना ही उत्पाद वे खरीद सकेंगे. कृषि मंत्री मारकंडा ने कहा कि किसानों की आय दो गुणा करने में नया कृषि मॉडल एक्ट मील का पत्थर साबित होने वाला है. हिमाचल प्रदेश मार्केटिंग के क्षेत्र में न केवल भारत के दूसरे राज्यों से आगे निकलेगा, बल्कि विदेशों का भी मुकाबला करेगा. .
नई दिल्लीः गणपति को विघ्नहर्ता और ऋद्धि-सिद्धी का स्वामी कहा जाता है। इनका स्मरण, ध्यान, जप, आराधना से कामनाओं की पूर्ति होती है व विघ्नों का विनाश होता है। वे शीघ्र प्रसन्न होने वाले बुद्धि के अधिष्ठाता और साक्षात् प्रणवरूप है। गणेश का मतलब है गणों का स्वामी। हिंदू पंचाग के अनुसार हर माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी पर प्रथम पूज्य देवता श्री गणेश की आराधना को समर्पित विनायक चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। इस बार ये व्रत व्रत 6 अगस्त, शनिवार को है। इस व्रत के नाम से ही इस व्रत का फल भी स्पष्ट हो जाता है। इसका अर्थ है वर देने वाला यानि कि हर मनोकामना पूर्ण करने वाला। इस दिन व्रत रखने से सभी कामनाएं पूरी होती है और विघ्न-बाधाएं दूर होती है। भगवान श्री गणेश बुद्धि प्रदान करने वाले देवता भी हैं। अतः यह व्रत बुद्धि की शुद्धि को देकते हुए अधिक महत्व रखता है। ऐसें करें पूजा। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान करें। इसके बाद बगवान की थोड़ी अराधना कर लें। इसके बाद दोपहर के समय अपने मंदिर या फिर जहां आपको उचित लगे। वहां पर अपनी इच्छानुसार सोने, चांदी, तांबे, पीतल या मिट्टी से बनी श्रीगणेश की प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद संकल्प मंत्र के बाद श्रीगणेश की षोड़शोपचार से पूजन और आरती करें। असके बाद श्रीगणेशजी की मूर्ति पर सिंदूर चढ़ाएं। फिर ऊं गं गणपतयै नमः मंत्र को बोलते हुए 21 दूर्वा दल चढ़ाएं। और भोग के रुप में गुड़ या बूंदी के 21 लड्डुओं का भोग लगाएं। साथ ही श्रीगणेश स्त्रोत, अथर्वशीर्ष, संकटनाशक स्त्रोत आदि का पाठ करें।
नई दिल्लीः गणपति को विघ्नहर्ता और ऋद्धि-सिद्धी का स्वामी कहा जाता है। इनका स्मरण, ध्यान, जप, आराधना से कामनाओं की पूर्ति होती है व विघ्नों का विनाश होता है। वे शीघ्र प्रसन्न होने वाले बुद्धि के अधिष्ठाता और साक्षात् प्रणवरूप है। गणेश का मतलब है गणों का स्वामी। हिंदू पंचाग के अनुसार हर माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी पर प्रथम पूज्य देवता श्री गणेश की आराधना को समर्पित विनायक चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। इस बार ये व्रत व्रत छः अगस्त, शनिवार को है। इस व्रत के नाम से ही इस व्रत का फल भी स्पष्ट हो जाता है। इसका अर्थ है वर देने वाला यानि कि हर मनोकामना पूर्ण करने वाला। इस दिन व्रत रखने से सभी कामनाएं पूरी होती है और विघ्न-बाधाएं दूर होती है। भगवान श्री गणेश बुद्धि प्रदान करने वाले देवता भी हैं। अतः यह व्रत बुद्धि की शुद्धि को देकते हुए अधिक महत्व रखता है। ऐसें करें पूजा। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान करें। इसके बाद बगवान की थोड़ी अराधना कर लें। इसके बाद दोपहर के समय अपने मंदिर या फिर जहां आपको उचित लगे। वहां पर अपनी इच्छानुसार सोने, चांदी, तांबे, पीतल या मिट्टी से बनी श्रीगणेश की प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद संकल्प मंत्र के बाद श्रीगणेश की षोड़शोपचार से पूजन और आरती करें। असके बाद श्रीगणेशजी की मूर्ति पर सिंदूर चढ़ाएं। फिर ऊं गं गणपतयै नमः मंत्र को बोलते हुए इक्कीस दूर्वा दल चढ़ाएं। और भोग के रुप में गुड़ या बूंदी के इक्कीस लड्डुओं का भोग लगाएं। साथ ही श्रीगणेश स्त्रोत, अथर्वशीर्ष, संकटनाशक स्त्रोत आदि का पाठ करें।
फ़िल्म रिव्यूः 'जय हो' इरॉस इंटरनेशनल और सोहैल ख़ान प्रोडक्शंस की 'जय हो' कहानी है एक ऐसे शख़्स की जो इस दुनिया को बेहतर बनाना चाहता है. इस काम में उसे कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है और उनसे वो कैसे निपटता है यही फ़िल्म की कहानी है. जय अग्निहोत्री (सलमान ख़ान) एक बहुत दिलेर और सिद्धांतवादी आर्मी अफ़सर है. वो अपने वरिष्ठ अधिकारियों की अवमानना के आरोप में सेना से निलंबित कर दिया जाता है. जय, आसपास के लोगों की पीड़ा और उन पर हो रहे अत्याचार से बेहद परेशान रहता है और लोगों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहता है. एक दफ़ा एक विकलांग लड़की (जेनेलिया डिसूज़ा), उसके सामने ख़ुदकुशी कर लेती है जिससे जय बेहद दुखी हो जाता है. उस लड़की की वो पहले मदद कर चुका होता है. जब उस लड़की के भाई को अपनी बहन की मौत के पीछे राज्य के गृहमंत्री की बेटी पर शक़ होता है और वो उसके ख़िलाफ़ शिक़ायत दर्ज कराता है. इससे नाराज़ होकर गृहमंत्री दशरथ सिंह (डैनी) उसके भाई को मरवा डालता है. जय, कमज़ोर, लाचार लोगों की मदद करने के मिशन में निकल पड़ता है और इसी वजह से गृहमंत्री समेत कई शक्तिशाली लोगों से दुश्मनी मोल ले लेता है. जहां एक ओर आम आदमी उसके साथ होता है वहीं भ्रष्ट राजनेता और दूसरे शक्तिशाली लोग उसके पीछे पड़ जाते हैं. क्या अंत में जय, इन लोगों के चंगुल से लोगों को बचा पाता है, यही फ़िल्म की कहानी है. 'जय हो', तेलुगू फ़िल्म 'स्तालिन' का रीमेक है. 'स्तालिन', ख़ुद हॉलीवुड फ़िल्म 'पे इट फ़ॉरवर्ड' से प्रेरित है. एआर मुरुगदॉस की लिखी कहानी दिलचस्प है और देश में चल रहे वर्तमान घटनाक्रम से काफ़ी मेल खाती हुई है. लेकिन दिलीप शुक्ला का लिखा स्क्रीनप्ले ढीला है. इंटरवल से पहले के हिस्से में तो ऐसा लगता है कि कहानी में कोई तारतम्य ही नहीं है. बस सीन्स को एक दूसरे से जोड़ दिया गया है. फ़िल्म में ढेर सारे किरदार हैं और कई किरदारों को तो ठीक से परिभाषित भी नहीं किया गया. फ़िल्म देखकर लगता है कि निर्देशक किसी जल्दबाज़ी में हैं और बिखरी फ़िल्म को समेटने की कोशिश कर रहे हैं. जेलेनिया डिसूज़ा की ख़ुदकुशी के पीछे की वजह ठीक से बताई ही नहीं गई है. और इसी वजह से दर्शकों को उनसे सहानुभूति नहीं हो पाती. सलमान ख़ान का अच्छे नागरिक होने वाला प्लॉट भी ठीक से नहीं उभारा गया. इस वजह से लोगों को फ़िल्म प्रभावी नहीं लगेगी. हालांकि फ़िल्म में कुछ कॉमिक और ड्रामेटिक सीन बहुत अच्छे बन पड़े हैं. सलमान ख़ान और डेज़ी शाह के कुछ सीन और कुछ एक्शन दृश्य सचमुच बहुत जानदार हैं. साथ ही फ़िल्म के आख़िर के 20-25 मिनट बहुत प्रभावशाली हैं और दर्शकों को बांधे रखते हैं. क्लाईमेक्स अच्छा है. लेकिन दिलीप शुक्ला के लिखे संवादों में दम नहीं है. हां, हास्य दृश्यों में संवाद अच्छे हैं. सलमान ख़ान बहुत अच्छे लगे हैं. उन्होंने अपना रोल बखूबी निभाया है. अपना किरदार उन्होंने बड़ी सहजता से निभाया है और कई एक्शन दृश्यों में उनके प्रशंसक ताली बजाने पर मजबूर हो जाएंगे. उनकी लोकप्रियता देखते हुए इस फ़िल्म में भी एक सीन है जिसमें उन्होंने शर्ट उतारी है और हमेशा की तरह लोगों को ये सीन भी बहुत पसंद आएगा. नवोदित अभिनेत्री डेज़ी शाह कैमरे के सामने सहज लगी हैं. हालांकि वो ग्लैमरस नहीं हैं लेकिन उन्होंने ठीक-ठाक काम किया है. सलमान ख़ान की बहन के रोल में तब्बू भी अच्छी रही हैं लेकिन वो फ़िल्म में फ़्रेश नहीं लगी हैं. खलनायक के रोल में डैनी बेहतरीन रहे हैं. नादिरा बब्बर ने कई जगह लोगों को हंसाया है. भ्रष्ट पुलिस अधिकारियों के रोल में आदित्य पंचोली और शरद कपूर को बहुत सीमित मौक़े मिले हैं. क्लाईमेक्स में सुनील शेट्टी की मौजूदगी इसे और प्रभावी बना देती है. संतोष शुक्ला ने गुंडे के रोल में अपने बॉलीवुड करियर की बड़ी ज़बरदस्त शुरुआत की है. बाकी कलाकार भी ठीक हैं. सोहैल ख़ान का निर्देशन कहीं कहीं पर अच्छा है. एक्शन दृश्यों में जहां वो सटीक रहे हैं वहीं नाटकीय और भावुक दृश्यों को फ़िल्माने में वो विफल रहे. साजिद-वाजिद, देवी श्री प्रसाद और अमल मलिक का संगीत बहुत निराशाजनक है. सलमान ख़ान की फ़िल्म में एक भी सुपरहिट गाने का ना होना उनके प्रशंसकों को बहुत निराश करेगा. फ़िल्म के एक्शन और स्टंट ज़रूर कमाल के हैं. कुल मिलाकर 'जय हो' एक कमज़ोर स्क्रीनप्ले वाली फ़िल्म है. लेकिन सलमान ख़ान पूरी फ़िल्म में छाए हैं. सिंगल स्क्रीन थिएटर्स में सलमान के प्रशंसकों को फ़िल्म पसंद आएगी. लेकिन मल्टीप्लेक्सेस में फ़िल्म को मिश्रित प्रतिक्रिया मिलेगी. (बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं. )
फ़िल्म रिव्यूः 'जय हो' इरॉस इंटरनेशनल और सोहैल ख़ान प्रोडक्शंस की 'जय हो' कहानी है एक ऐसे शख़्स की जो इस दुनिया को बेहतर बनाना चाहता है. इस काम में उसे कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है और उनसे वो कैसे निपटता है यही फ़िल्म की कहानी है. जय अग्निहोत्री एक बहुत दिलेर और सिद्धांतवादी आर्मी अफ़सर है. वो अपने वरिष्ठ अधिकारियों की अवमानना के आरोप में सेना से निलंबित कर दिया जाता है. जय, आसपास के लोगों की पीड़ा और उन पर हो रहे अत्याचार से बेहद परेशान रहता है और लोगों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहता है. एक दफ़ा एक विकलांग लड़की , उसके सामने ख़ुदकुशी कर लेती है जिससे जय बेहद दुखी हो जाता है. उस लड़की की वो पहले मदद कर चुका होता है. जब उस लड़की के भाई को अपनी बहन की मौत के पीछे राज्य के गृहमंत्री की बेटी पर शक़ होता है और वो उसके ख़िलाफ़ शिक़ायत दर्ज कराता है. इससे नाराज़ होकर गृहमंत्री दशरथ सिंह उसके भाई को मरवा डालता है. जय, कमज़ोर, लाचार लोगों की मदद करने के मिशन में निकल पड़ता है और इसी वजह से गृहमंत्री समेत कई शक्तिशाली लोगों से दुश्मनी मोल ले लेता है. जहां एक ओर आम आदमी उसके साथ होता है वहीं भ्रष्ट राजनेता और दूसरे शक्तिशाली लोग उसके पीछे पड़ जाते हैं. क्या अंत में जय, इन लोगों के चंगुल से लोगों को बचा पाता है, यही फ़िल्म की कहानी है. 'जय हो', तेलुगू फ़िल्म 'स्तालिन' का रीमेक है. 'स्तालिन', ख़ुद हॉलीवुड फ़िल्म 'पे इट फ़ॉरवर्ड' से प्रेरित है. एआर मुरुगदॉस की लिखी कहानी दिलचस्प है और देश में चल रहे वर्तमान घटनाक्रम से काफ़ी मेल खाती हुई है. लेकिन दिलीप शुक्ला का लिखा स्क्रीनप्ले ढीला है. इंटरवल से पहले के हिस्से में तो ऐसा लगता है कि कहानी में कोई तारतम्य ही नहीं है. बस सीन्स को एक दूसरे से जोड़ दिया गया है. फ़िल्म में ढेर सारे किरदार हैं और कई किरदारों को तो ठीक से परिभाषित भी नहीं किया गया. फ़िल्म देखकर लगता है कि निर्देशक किसी जल्दबाज़ी में हैं और बिखरी फ़िल्म को समेटने की कोशिश कर रहे हैं. जेलेनिया डिसूज़ा की ख़ुदकुशी के पीछे की वजह ठीक से बताई ही नहीं गई है. और इसी वजह से दर्शकों को उनसे सहानुभूति नहीं हो पाती. सलमान ख़ान का अच्छे नागरिक होने वाला प्लॉट भी ठीक से नहीं उभारा गया. इस वजह से लोगों को फ़िल्म प्रभावी नहीं लगेगी. हालांकि फ़िल्म में कुछ कॉमिक और ड्रामेटिक सीन बहुत अच्छे बन पड़े हैं. सलमान ख़ान और डेज़ी शाह के कुछ सीन और कुछ एक्शन दृश्य सचमुच बहुत जानदार हैं. साथ ही फ़िल्म के आख़िर के बीस-पच्चीस मिनट बहुत प्रभावशाली हैं और दर्शकों को बांधे रखते हैं. क्लाईमेक्स अच्छा है. लेकिन दिलीप शुक्ला के लिखे संवादों में दम नहीं है. हां, हास्य दृश्यों में संवाद अच्छे हैं. सलमान ख़ान बहुत अच्छे लगे हैं. उन्होंने अपना रोल बखूबी निभाया है. अपना किरदार उन्होंने बड़ी सहजता से निभाया है और कई एक्शन दृश्यों में उनके प्रशंसक ताली बजाने पर मजबूर हो जाएंगे. उनकी लोकप्रियता देखते हुए इस फ़िल्म में भी एक सीन है जिसमें उन्होंने शर्ट उतारी है और हमेशा की तरह लोगों को ये सीन भी बहुत पसंद आएगा. नवोदित अभिनेत्री डेज़ी शाह कैमरे के सामने सहज लगी हैं. हालांकि वो ग्लैमरस नहीं हैं लेकिन उन्होंने ठीक-ठाक काम किया है. सलमान ख़ान की बहन के रोल में तब्बू भी अच्छी रही हैं लेकिन वो फ़िल्म में फ़्रेश नहीं लगी हैं. खलनायक के रोल में डैनी बेहतरीन रहे हैं. नादिरा बब्बर ने कई जगह लोगों को हंसाया है. भ्रष्ट पुलिस अधिकारियों के रोल में आदित्य पंचोली और शरद कपूर को बहुत सीमित मौक़े मिले हैं. क्लाईमेक्स में सुनील शेट्टी की मौजूदगी इसे और प्रभावी बना देती है. संतोष शुक्ला ने गुंडे के रोल में अपने बॉलीवुड करियर की बड़ी ज़बरदस्त शुरुआत की है. बाकी कलाकार भी ठीक हैं. सोहैल ख़ान का निर्देशन कहीं कहीं पर अच्छा है. एक्शन दृश्यों में जहां वो सटीक रहे हैं वहीं नाटकीय और भावुक दृश्यों को फ़िल्माने में वो विफल रहे. साजिद-वाजिद, देवी श्री प्रसाद और अमल मलिक का संगीत बहुत निराशाजनक है. सलमान ख़ान की फ़िल्म में एक भी सुपरहिट गाने का ना होना उनके प्रशंसकों को बहुत निराश करेगा. फ़िल्म के एक्शन और स्टंट ज़रूर कमाल के हैं. कुल मिलाकर 'जय हो' एक कमज़ोर स्क्रीनप्ले वाली फ़िल्म है. लेकिन सलमान ख़ान पूरी फ़िल्म में छाए हैं. सिंगल स्क्रीन थिएटर्स में सलमान के प्रशंसकों को फ़िल्म पसंद आएगी. लेकिन मल्टीप्लेक्सेस में फ़िल्म को मिश्रित प्रतिक्रिया मिलेगी.
T20 World Cup 2021 में लगातार दो हार के बाद India का सेमीफाइनल में पहुंचना अब मुश्किल हो गया है। पाकिस्तान के बाद न्यूजीलैंड की टीम ने भी भारत को बुरी तरह हराया। दोनों मैचों में हार के बाद निराश क्रिकेट फैंस ट्विटर पर IPL को बैन करने की मांग कर रहे है। फैंस यह कह रहे है कि विश्व की सबसे बड़ी क्रिकेट लीग कराने से क्या फायदा जब भारतीय टीम प्रर्दशन ही नहीं कर पा रही है। न्यूज़ीलैंड ने शानदार गेंदबाजी करते हुए भारत को मात्र 110 रन पर रोक दिया। जवाब में छोटे लक्ष्य के पीछा करते हुए न्यूज़ीलैंड ने 2 विकेट खोकर मुकाबले को जीत लिया। भारत ने ऐसी बल्लेबाजी की जिसको देखकर 2007 का दौर याद आ गया। 2007 के वनडे वर्ल्ड कप में भारत क्वालीफाई नहीं कर पाई थी ठीक उसी प्रकार इस बार टी20 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम का क्वालीफाई करना अब मुश्किल ही नहीं नामुमकिन लग रहा है। इस हार के बाद कई फैंस कहा कि हम केवल IPL खेल रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर का दबाव हम झेलने के काबिल नहीं हैं। ऐसे में IPL को बैन करो और केवल इंटरनेशनल क्रिकेट पर फोकस करो। आपको बताते हैं, लोगों ने क्या-क्या कहा है। न्यूज़ीलैंड ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला लिया। भारतीय बल्लेबाजों ने पूरे 20 ओवर में शर्मनाक प्रदर्शन करते हुए किसी तरह 110 रन बनाए। भारतीय टीम की शुरुआत बेहद खराब रही। ईशान किशन 4 रन बनाकर आउट हो गए। उसके बाद विकेट गिरने का सिलसिला जारी रहा। 35 के स्कोर पर केएल राहुल 18 रन बनाकर आउट हुए। इसके बाद कोई बल्लेबाज क्रीज पर टिक नहीं पाए। 40 के स्कोर पर रोहित शर्मा 14 रन बनाकर चलते बने। उसके बाद विराट कोहली 9 रन बनाकर 48 के स्कोर पर चलते बने। 70 के स्कोर पर ऋषभ पंत 12 रन बनाकर चलते बने। हार्दिक पांड्या 23 बनाकर 94 के स्कोर पर आउट हो गए। उसी स्कोर पर शार्दूल ठाकुर भी चलते बने। रविंद्र जडेजा ने 19 गेंदों में 26 रनों की तेज पारी खेलकर टीम को 110 तक पहुंचाया।
Tबीस World Cup दो हज़ार इक्कीस में लगातार दो हार के बाद India का सेमीफाइनल में पहुंचना अब मुश्किल हो गया है। पाकिस्तान के बाद न्यूजीलैंड की टीम ने भी भारत को बुरी तरह हराया। दोनों मैचों में हार के बाद निराश क्रिकेट फैंस ट्विटर पर IPL को बैन करने की मांग कर रहे है। फैंस यह कह रहे है कि विश्व की सबसे बड़ी क्रिकेट लीग कराने से क्या फायदा जब भारतीय टीम प्रर्दशन ही नहीं कर पा रही है। न्यूज़ीलैंड ने शानदार गेंदबाजी करते हुए भारत को मात्र एक सौ दस रन पर रोक दिया। जवाब में छोटे लक्ष्य के पीछा करते हुए न्यूज़ीलैंड ने दो विकेट खोकर मुकाबले को जीत लिया। भारत ने ऐसी बल्लेबाजी की जिसको देखकर दो हज़ार सात का दौर याद आ गया। दो हज़ार सात के वनडे वर्ल्ड कप में भारत क्वालीफाई नहीं कर पाई थी ठीक उसी प्रकार इस बार टीबीस वर्ल्ड कप में भारतीय टीम का क्वालीफाई करना अब मुश्किल ही नहीं नामुमकिन लग रहा है। इस हार के बाद कई फैंस कहा कि हम केवल IPL खेल रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर का दबाव हम झेलने के काबिल नहीं हैं। ऐसे में IPL को बैन करो और केवल इंटरनेशनल क्रिकेट पर फोकस करो। आपको बताते हैं, लोगों ने क्या-क्या कहा है। न्यूज़ीलैंड ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला लिया। भारतीय बल्लेबाजों ने पूरे बीस ओवर में शर्मनाक प्रदर्शन करते हुए किसी तरह एक सौ दस रन बनाए। भारतीय टीम की शुरुआत बेहद खराब रही। ईशान किशन चार रन बनाकर आउट हो गए। उसके बाद विकेट गिरने का सिलसिला जारी रहा। पैंतीस के स्कोर पर केएल राहुल अट्ठारह रन बनाकर आउट हुए। इसके बाद कोई बल्लेबाज क्रीज पर टिक नहीं पाए। चालीस के स्कोर पर रोहित शर्मा चौदह रन बनाकर चलते बने। उसके बाद विराट कोहली नौ रन बनाकर अड़तालीस के स्कोर पर चलते बने। सत्तर के स्कोर पर ऋषभ पंत बारह रन बनाकर चलते बने। हार्दिक पांड्या तेईस बनाकर चौरानवे के स्कोर पर आउट हो गए। उसी स्कोर पर शार्दूल ठाकुर भी चलते बने। रविंद्र जडेजा ने उन्नीस गेंदों में छब्बीस रनों की तेज पारी खेलकर टीम को एक सौ दस तक पहुंचाया।
अधिकतर देखा गया है की चाहे शहर हो, क़स्बा हो या फिर ग्राम पंचायत ,हर जगह पर कूड़े के डस्टबिन पहले से ही भरे हुए होते हैं पर इसके बावजूद लोग उन भरे हुए डस्टबिन में भी अपने घर का कूड़ा डालते रहते है। देखते ही देखते डस्टबिन में कूड़े का पहाड़ बन जाता है और ओवरलोड होने के बाद ये पूरा कचड़ा सड़क पे गिरकर फैल जाता है। जिस से सड़क पे गन्दगी तो फैलती ही है साथ में तमाम बिमारियों का डर भी बना रहता है। जीएलए के छात्रों ने एक स्मार्ट डस्टबिन मैनेजमेंट सिस्टम तैयार किया है। इसके तहत एक सेंसर का प्रयोग किया गया है, जिससे डस्टबिन भरने से पहले ही सफाइकर्मियों सहित नगर निगम, नगरपंचायत सहित ग्राम पंचायत स्तर के अधिकारियों को उनके मोबाइल में जानकारी मिल जाएगी की वो कूड़ेदान को आकर साफ करवाएँ। जीएलए न्यूजैन आइईडीसी के चीफ कोर्डिनेटर डॉ. मनोज चौबे ने बताया कि, इस प्रोजेक्ट को भारत सरकार की संस्था आइईडीसी के माध्यम से 80 हजार रूपये का अनुदान प्राप्त हुआ है और यह प्रोजेक्ट बाजार में आने के लिए तैयार है। डॉ. चौबे ने ये भी कहा की छात्रों को रोजगार से ज्यादा आत्म निर्भरता और उद्यमिता के पथ पर बढ़ना चाहिए क्योंकि उससे बेहतर और कुछ नहीं है। यही वजह है की जीएलए छात्रों को उद्यमी बनाने के लिए, भारत सरकार द्वारा मिलने वाले प्रोजेक्टों पर कार्य करने को छात्रों को तैयार करता है और छात्र भी इसमें बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं और प्रोटोटाइप तैयार करते हैं।
अधिकतर देखा गया है की चाहे शहर हो, क़स्बा हो या फिर ग्राम पंचायत ,हर जगह पर कूड़े के डस्टबिन पहले से ही भरे हुए होते हैं पर इसके बावजूद लोग उन भरे हुए डस्टबिन में भी अपने घर का कूड़ा डालते रहते है। देखते ही देखते डस्टबिन में कूड़े का पहाड़ बन जाता है और ओवरलोड होने के बाद ये पूरा कचड़ा सड़क पे गिरकर फैल जाता है। जिस से सड़क पे गन्दगी तो फैलती ही है साथ में तमाम बिमारियों का डर भी बना रहता है। जीएलए के छात्रों ने एक स्मार्ट डस्टबिन मैनेजमेंट सिस्टम तैयार किया है। इसके तहत एक सेंसर का प्रयोग किया गया है, जिससे डस्टबिन भरने से पहले ही सफाइकर्मियों सहित नगर निगम, नगरपंचायत सहित ग्राम पंचायत स्तर के अधिकारियों को उनके मोबाइल में जानकारी मिल जाएगी की वो कूड़ेदान को आकर साफ करवाएँ। जीएलए न्यूजैन आइईडीसी के चीफ कोर्डिनेटर डॉ. मनोज चौबे ने बताया कि, इस प्रोजेक्ट को भारत सरकार की संस्था आइईडीसी के माध्यम से अस्सी हजार रूपये का अनुदान प्राप्त हुआ है और यह प्रोजेक्ट बाजार में आने के लिए तैयार है। डॉ. चौबे ने ये भी कहा की छात्रों को रोजगार से ज्यादा आत्म निर्भरता और उद्यमिता के पथ पर बढ़ना चाहिए क्योंकि उससे बेहतर और कुछ नहीं है। यही वजह है की जीएलए छात्रों को उद्यमी बनाने के लिए, भारत सरकार द्वारा मिलने वाले प्रोजेक्टों पर कार्य करने को छात्रों को तैयार करता है और छात्र भी इसमें बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं और प्रोटोटाइप तैयार करते हैं।
महिलाओं के खिलाफ रेप और छेड़छाड़ की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। इसी बीच एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें 6 लड़के एक नाबालिग लड़की के साथ सरेआम अभद्र व्यवहार कर रहे हैं। वीडियो में नाबालिग लड़की चीख रही है जबकि लड़के उसके कपड़े फाड़कर उसके साथ दुष्कर्म करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके अलावा 7वां लड़का वहीं पर खड़ा होकर वीडियो बना रहा है। मामले पर कार्रवाई करते हुए पटना जोनल आईजी नैयर हसनैन खान ने एसआईटी गठित कर जांच के आदेश दे दिए हैं। युवकों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। वहीं वीडियो में दिखने वाली बाइक को बरामद कर लिया गया है। एसपी मनीष के मुताबिक उन्हें आशंका है कि यह घटना जहानाबाद जिले के चौर क्षेत्र की है क्योंकि वीडियो में कैद मोटरसाइकिल का रजिस्ट्रेशन जहानाबाद जिले से ही कराया गया है। उन्होंने कहा कि जैसे ही उन्हें वीडियो वायरल होने की जानकारी मिली उन्होंने नगर थाने में मोटर साइकिल मालिक सहित अन्य 7 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए।
महिलाओं के खिलाफ रेप और छेड़छाड़ की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। इसी बीच एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें छः लड़के एक नाबालिग लड़की के साथ सरेआम अभद्र व्यवहार कर रहे हैं। वीडियो में नाबालिग लड़की चीख रही है जबकि लड़के उसके कपड़े फाड़कर उसके साथ दुष्कर्म करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके अलावा सातवां लड़का वहीं पर खड़ा होकर वीडियो बना रहा है। मामले पर कार्रवाई करते हुए पटना जोनल आईजी नैयर हसनैन खान ने एसआईटी गठित कर जांच के आदेश दे दिए हैं। युवकों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। वहीं वीडियो में दिखने वाली बाइक को बरामद कर लिया गया है। एसपी मनीष के मुताबिक उन्हें आशंका है कि यह घटना जहानाबाद जिले के चौर क्षेत्र की है क्योंकि वीडियो में कैद मोटरसाइकिल का रजिस्ट्रेशन जहानाबाद जिले से ही कराया गया है। उन्होंने कहा कि जैसे ही उन्हें वीडियो वायरल होने की जानकारी मिली उन्होंने नगर थाने में मोटर साइकिल मालिक सहित अन्य सात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए।
अद्वितीय redfin भूमध्य में रहता है विभिन्न देशों में यह मछली पूरी तरह से अलग नाम है, लेकिन सबसे अधिक बार ये है - डोराडो। यह लगभग 40 किलो वजन का रिकॉर्ड वजन तक पहुंच सकता है। यहां और वहां, प्राचीन काल से, यह क्रूसियन विशेष रूप से बड़े आकारों से तंग आ गया था, और तब भोजन के लिए इस्तेमाल किया गया था। यह एक डोराडो मछली क्या है? डोरडो की महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक हैशुद्ध मांस सब के बाद, यह विशेष कृत्रिम स्थितियों में रहता है। इसकी सुगंध बहुत आकर्षक है, और मांस मोटी और स्वादिष्ट है। इसलिए, यह मछली एक सस्ते पकवान नहीं है। अक्सर डोराडो का वजन 300 से 600 ग्राम होता है। आहार व्यंजन खाना बनाने के लिए इस मछली का निविदा मांस बहुत अच्छा है। आखिरकार, इसके 100 ग्राम में केवल 4-8 ग्राम वसा होता है। मछली को पकाने के बारे में भी मत सोचोडोराडो। कई अलग-अलग व्यंजन हैं जो जीवन के किसी भी अवसर के लिए उपयोगी होंगे। पाक कला की ऐसी कृतियों को न केवल एक उत्सव को सजाया जाएगा, बल्कि एक दैनिक खाने की मेज भी होगी। खाना पकाने के लिए मछली लेने के लिए आवश्यक है (300 ग्राम),मसाला का एक मुख्य सेट (काली मिर्च और नमक), अजमोद (लगभग 20 - 40 ग्राम), लीक की हरी हिस्सा है, 1 नींबू और नींबू का एक ही राशि, मेंहदी, थोड़ा तेल (क्रीम) और सूखी सफेद शराब (काफ़ी - 3 सेंट .l।)। सबसे पहले डोराडो तैयार करना चाहिए। मछली, पूरी, पहले से ही ब्रश किया जाना चाहिए एक भी पंख और गिल्स के बिना। वह मसालों के साथ मला, और केवल एक हाथ से कटौती कर सकते हैं। डोरडो के अंदर कटा हुआ अजमोद से भरा हुआ है औरमेंहदी। शव पर प्रत्येक चीरा में, छोटे नींबू और चूने के क्षेत्रों को डाला जाता है। अब बेकिंग के लिए तैयार मछली पन्नी की शीट पर फैली हुई है। डोराडो के ऊपर शराब से पानी पिलाया और एक छोटा सा टुकड़ा (30 ग्राम) तेल डाल दिया। यह सब पन्नी की एक और चादर के साथ कवर किया जाना चाहिए और ओवन में डाल दिया। इसे 180 डिग्री तक गरम किया जाना चाहिए डिश लगभग 20 मिनट के लिए पकाया जाता है। यदि वांछित है, तो आप पन्नी के शीर्ष परत को निकाल सकते हैं और इसे ओवन में वापस कर सकते हैं जब तक कि एक सुंदर क्रस्ट का गठन न हो। वास्तव में आश्चर्यजनक डोराडो मछली इसकी तैयारी के लिए व्यंजन बहुत अलग हैं स्वादिष्ट व्यंजनों में से एक बारबाडोस में बेक्ड मछली है निम्नलिखित सामग्रियों की आवश्यकता होगीः भरा हुआ डोराडो एक विशेष रूप में रखा गया हैपाक के लिए ऊपर से यह टमाटर और प्याज के छल्ले से ढका हुआ है, और ब्रेडक्रंब के साथ छिड़क भी। डालना और थोड़ा पानी के रूप में, ताकि पकवान नहीं जलाया जाता है 200 डिग्री के तापमान पर पर्याप्त 20 मिनट, ताकि मछली तैयार हो सकें। आम तौर पर यह तला हुआ आलू के साथ परोसा जाता है! यदि एक विशेष तरीके से स्वादिष्ट प्राप्त होता हैतलना डोराडो। मछली तो यह निविदा पता चला है और अपने मुँह में पिघला। भोजन Redfin (आधा किलो), वनस्पति तेल, आटा, मक्का और गेहूं (200 ग्राम), मलाई (एक गिलास के बारे में), जड़ी बूटियों और मसालों (लाल शिमला मिर्च, मेंहदी, लहसुन, डिल, नमक, काली मिर्च और अजमोद) की जरूरत के लिए। डोराडो अच्छी तरह से धोया और सूखे होना चाहिए। इस बीच, विभिन्न प्रकार के आटा मिश्रित और नमक और पपरीका शामिल हैं। लहसुन और दौनी मछली के पेट में रखा जाता है। इसके बाद, यह आटे के मिश्रण में लुढ़क जाता है और गर्म पैन पर डालता है, जहां चटके हुए वनस्पति तेल। दोनों पक्षों पर, एक सुनहरा मिठाई परत प्रकट होने तक डोराडो को तली हुई है। इस डिश के लिए एक विशेष सॉस की आवश्यकता है यह उसके लिए ज्यादा प्रयास नहीं करता है यह अजमोद के साथ सूखा काटना और खट्टा क्रीम वहाँ जोड़ने के लिए पर्याप्त है। अच्छी तरह से मसाले के साथ सब कुछ और मौसम मिश्रण और अब, मछली के लिए सॉस तैयार है!
अद्वितीय redfin भूमध्य में रहता है विभिन्न देशों में यह मछली पूरी तरह से अलग नाम है, लेकिन सबसे अधिक बार ये है - डोराडो। यह लगभग चालीस किलो वजन का रिकॉर्ड वजन तक पहुंच सकता है। यहां और वहां, प्राचीन काल से, यह क्रूसियन विशेष रूप से बड़े आकारों से तंग आ गया था, और तब भोजन के लिए इस्तेमाल किया गया था। यह एक डोराडो मछली क्या है? डोरडो की महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक हैशुद्ध मांस सब के बाद, यह विशेष कृत्रिम स्थितियों में रहता है। इसकी सुगंध बहुत आकर्षक है, और मांस मोटी और स्वादिष्ट है। इसलिए, यह मछली एक सस्ते पकवान नहीं है। अक्सर डोराडो का वजन तीन सौ से छः सौ ग्राम होता है। आहार व्यंजन खाना बनाने के लिए इस मछली का निविदा मांस बहुत अच्छा है। आखिरकार, इसके एक सौ ग्राम में केवल चार-आठ ग्राम वसा होता है। मछली को पकाने के बारे में भी मत सोचोडोराडो। कई अलग-अलग व्यंजन हैं जो जीवन के किसी भी अवसर के लिए उपयोगी होंगे। पाक कला की ऐसी कृतियों को न केवल एक उत्सव को सजाया जाएगा, बल्कि एक दैनिक खाने की मेज भी होगी। खाना पकाने के लिए मछली लेने के लिए आवश्यक है ,मसाला का एक मुख्य सेट , अजमोद , लीक की हरी हिस्सा है, एक नींबू और नींबू का एक ही राशि, मेंहदी, थोड़ा तेल और सूखी सफेद शराब । सबसे पहले डोराडो तैयार करना चाहिए। मछली, पूरी, पहले से ही ब्रश किया जाना चाहिए एक भी पंख और गिल्स के बिना। वह मसालों के साथ मला, और केवल एक हाथ से कटौती कर सकते हैं। डोरडो के अंदर कटा हुआ अजमोद से भरा हुआ है औरमेंहदी। शव पर प्रत्येक चीरा में, छोटे नींबू और चूने के क्षेत्रों को डाला जाता है। अब बेकिंग के लिए तैयार मछली पन्नी की शीट पर फैली हुई है। डोराडो के ऊपर शराब से पानी पिलाया और एक छोटा सा टुकड़ा तेल डाल दिया। यह सब पन्नी की एक और चादर के साथ कवर किया जाना चाहिए और ओवन में डाल दिया। इसे एक सौ अस्सी डिग्री तक गरम किया जाना चाहिए डिश लगभग बीस मिनट के लिए पकाया जाता है। यदि वांछित है, तो आप पन्नी के शीर्ष परत को निकाल सकते हैं और इसे ओवन में वापस कर सकते हैं जब तक कि एक सुंदर क्रस्ट का गठन न हो। वास्तव में आश्चर्यजनक डोराडो मछली इसकी तैयारी के लिए व्यंजन बहुत अलग हैं स्वादिष्ट व्यंजनों में से एक बारबाडोस में बेक्ड मछली है निम्नलिखित सामग्रियों की आवश्यकता होगीः भरा हुआ डोराडो एक विशेष रूप में रखा गया हैपाक के लिए ऊपर से यह टमाटर और प्याज के छल्ले से ढका हुआ है, और ब्रेडक्रंब के साथ छिड़क भी। डालना और थोड़ा पानी के रूप में, ताकि पकवान नहीं जलाया जाता है दो सौ डिग्री के तापमान पर पर्याप्त बीस मिनट, ताकि मछली तैयार हो सकें। आम तौर पर यह तला हुआ आलू के साथ परोसा जाता है! यदि एक विशेष तरीके से स्वादिष्ट प्राप्त होता हैतलना डोराडो। मछली तो यह निविदा पता चला है और अपने मुँह में पिघला। भोजन Redfin , वनस्पति तेल, आटा, मक्का और गेहूं , मलाई , जड़ी बूटियों और मसालों की जरूरत के लिए। डोराडो अच्छी तरह से धोया और सूखे होना चाहिए। इस बीच, विभिन्न प्रकार के आटा मिश्रित और नमक और पपरीका शामिल हैं। लहसुन और दौनी मछली के पेट में रखा जाता है। इसके बाद, यह आटे के मिश्रण में लुढ़क जाता है और गर्म पैन पर डालता है, जहां चटके हुए वनस्पति तेल। दोनों पक्षों पर, एक सुनहरा मिठाई परत प्रकट होने तक डोराडो को तली हुई है। इस डिश के लिए एक विशेष सॉस की आवश्यकता है यह उसके लिए ज्यादा प्रयास नहीं करता है यह अजमोद के साथ सूखा काटना और खट्टा क्रीम वहाँ जोड़ने के लिए पर्याप्त है। अच्छी तरह से मसाले के साथ सब कुछ और मौसम मिश्रण और अब, मछली के लिए सॉस तैयार है!
येरुशलम को इजरायल की राजधानी बनाने की अमेरिकी कोशिशों को तगड़ा झटका लगा है। अमेरिका को झटका देने वाले देशों में भारत भी शामिल है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने गुरुवार को एक प्रस्ताव पारित कर अमेरिका से यरुशलम को इजरायल की राजधानी के तौर पर मान्यता देने के फैसले को वापस लेने को कहा है। तुर्की और यमन की ओर से पेश इस प्रस्ताव का भारत समेत 128 देशों ने समर्थन किया। जबकि अमेरिका और इजरायल समेत सिर्फ नौ देशों ने ही प्रस्ताव के विरोध में वोट दिया। 35 देशों ने प्रस्ताव पर मतदान में हिस्सा नहीं लिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी थी कि जो भी देश प्रस्ताव के पक्ष में वोट देंगे, उन्हें अमेरिका से मिलने वाली आर्थिक मदद में कटौती की जाएगी। लेकिन, उनकी धमकी का कोई खास असर नहीं पड़ा और सिर्फ नौ देशों ने ही प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया। इन देशों में अमेरिका के अलावा ग्वाटेमाला, होंडुरास, इजरायल, मार्शल आइलैंड्स, माइक्रोनेशिया, पलाउ, टोगो और नोरू शामिल हैं। जिन प्रमुख देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया उनमें आस्ट्रेलिया, भूटान, कनाडा, कोलंबिया, हंगरी, मैक्सिको, पनामा, फिलीपींस, पोलैंड और यूगांडा शामिल हैं। न्यूयॉर्क में महासभा की बैठक में भारत ने हालांकि इस मसले पर कुछ नहीं कहा था, लेकिन ट्रंप द्वारा यरुशलम को इजरायल की राजधानी के तौर पर मान्यता देने के बाद भारत ने कहा था कि फिलिस्तीन पर उसकी स्थिति पहले की तरह और स्वतंत्र है। संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के अलावा गुट निरपेक्ष देशों की मंत्रिस्तरीय बैठक में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा था कि इजरायल-येरुशलम शांति का मार्ग आपसी मान्यता और सुरक्षा प्रबंधों पर आधारित इजरायल और फिलिस्तीन के बीच जल्द से जल्द बातचीत से ही निकल सकता है। प्रस्ताव में सभी देशों से यरुशलम पर सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का पालन करने की मांग की गई है। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत निकी हेली ने महासभा के प्रस्ताव की आलोचना की। हेली ने कहा कि अमेरिका इस दिन को याद रखेगा जब एक संप्रभु देश के तौर पर अपने अधिकारों का इस्तेमाल करने की वजह से संयुक्त राष्ट्र महासभा में उस पर हमला हुआ। उन्होंने कहा कि अमेरिका येरुशलम में अपना दूतावास खोलेगा। बता दें कि सोमवार को अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ऐसे ही एक प्रस्ताव को वीटो किया था। अमेरिका को छोड़कर सुरक्षा परिषद के बाकी सभी 14 सदस्य प्रस्ताव के पक्ष में थे। अमेरिका द्वारा प्रस्ताव को वीटो किए जाने के बाद ही उसे महासभा में भेजा गया था।
येरुशलम को इजरायल की राजधानी बनाने की अमेरिकी कोशिशों को तगड़ा झटका लगा है। अमेरिका को झटका देने वाले देशों में भारत भी शामिल है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने गुरुवार को एक प्रस्ताव पारित कर अमेरिका से यरुशलम को इजरायल की राजधानी के तौर पर मान्यता देने के फैसले को वापस लेने को कहा है। तुर्की और यमन की ओर से पेश इस प्रस्ताव का भारत समेत एक सौ अट्ठाईस देशों ने समर्थन किया। जबकि अमेरिका और इजरायल समेत सिर्फ नौ देशों ने ही प्रस्ताव के विरोध में वोट दिया। पैंतीस देशों ने प्रस्ताव पर मतदान में हिस्सा नहीं लिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी थी कि जो भी देश प्रस्ताव के पक्ष में वोट देंगे, उन्हें अमेरिका से मिलने वाली आर्थिक मदद में कटौती की जाएगी। लेकिन, उनकी धमकी का कोई खास असर नहीं पड़ा और सिर्फ नौ देशों ने ही प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया। इन देशों में अमेरिका के अलावा ग्वाटेमाला, होंडुरास, इजरायल, मार्शल आइलैंड्स, माइक्रोनेशिया, पलाउ, टोगो और नोरू शामिल हैं। जिन प्रमुख देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया उनमें आस्ट्रेलिया, भूटान, कनाडा, कोलंबिया, हंगरी, मैक्सिको, पनामा, फिलीपींस, पोलैंड और यूगांडा शामिल हैं। न्यूयॉर्क में महासभा की बैठक में भारत ने हालांकि इस मसले पर कुछ नहीं कहा था, लेकिन ट्रंप द्वारा यरुशलम को इजरायल की राजधानी के तौर पर मान्यता देने के बाद भारत ने कहा था कि फिलिस्तीन पर उसकी स्थिति पहले की तरह और स्वतंत्र है। संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के अलावा गुट निरपेक्ष देशों की मंत्रिस्तरीय बैठक में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा था कि इजरायल-येरुशलम शांति का मार्ग आपसी मान्यता और सुरक्षा प्रबंधों पर आधारित इजरायल और फिलिस्तीन के बीच जल्द से जल्द बातचीत से ही निकल सकता है। प्रस्ताव में सभी देशों से यरुशलम पर सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का पालन करने की मांग की गई है। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत निकी हेली ने महासभा के प्रस्ताव की आलोचना की। हेली ने कहा कि अमेरिका इस दिन को याद रखेगा जब एक संप्रभु देश के तौर पर अपने अधिकारों का इस्तेमाल करने की वजह से संयुक्त राष्ट्र महासभा में उस पर हमला हुआ। उन्होंने कहा कि अमेरिका येरुशलम में अपना दूतावास खोलेगा। बता दें कि सोमवार को अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ऐसे ही एक प्रस्ताव को वीटो किया था। अमेरिका को छोड़कर सुरक्षा परिषद के बाकी सभी चौदह सदस्य प्रस्ताव के पक्ष में थे। अमेरिका द्वारा प्रस्ताव को वीटो किए जाने के बाद ही उसे महासभा में भेजा गया था।
यूपी बोर्ड द्वारा हर साल कक्षा 12वीं के मॉडल पेपर छात्रों की सहायता के लिए जारी किए जाते है। कक्षा 12वीं के मॉडल पेपर 2022-23 उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की आधिकारिक वेबसाइट upmsp. edu. in पर पीडीएफ फॉर्मेट में उपलब्ध है। जिसे छात्र नीचे दिए गए डायरेक्ट लिकं और आसान चरणों के माध्यम से डाउनलोड कर सकते हैं। कक्षा 12वीं के छात्रों को बात दें की बोर्ड परीक्षा की तिथि दिसंबर 2022 में जारी करने की संभावना है। पिछले साल के ट्रेंड को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि परीक्षा का आयोजन मार्च 2023 में किया जा सकता है। लेकिन इसे जानकारी पर यूपी बोर्ड द्वारा आधिकारिक तौर पर कोई सूचना जारी नहीं की गई है। जो छात्र इस साल तर्कशास्त्र यानी लॉजिक की परीक्षा में शामिल होने वाले हैं वह अपने विषय का मॉडल पेपर करियर इंडिया के इस लेख के माध्यम से सीधा डाउनलोड कर सकते हैं। मॉडल पेपर छात्रों के लिए लेख के अंत में दिया गया है। छात्रों को मॉडल पेपर डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए गए डाउनलोड के बटन पर क्लिक करना है और मॉडल पेपर डाउनलोड हो जाएगा। तर्कशास्त्र यानी लॉजिक विषय में औपचारिक और अनौपचारिक दोनों तर्क शामिल है। औपचारिक तर्क अनुमानों या तार्किक सत्यों का विज्ञान है। ये विषय जितना आसान लगता है उतना है नहीं यदि छात्र सोच रहे हैं कि विषय केवल तर्क पर आधारित है तो आपको बता दें कि तर्कशास्त्र तर्क पर तो आधारित है लेकिन अवधारणाओं के साथ इस लिए इस विषय की तैयारी करने के लिए छात्रों को बोर्ड द्वारा मॉडल पेपर जरूर डाउनलोड करें। - अन्य कक्षा 12वीं की परीक्षाओं की तरह इस विषय की परीक्षा का आयोजन कुल 100 अंकों के लिए किया जाएगा। - परीक्षा पास करने के लिए छात्रों को कम से कम 33 प्रतिशत अंक प्राप्त करने की आवश्यकता है। - तर्कशास्त्र की परीक्षा में कुल 10 प्रश्न दिए गए हैं। - प्रत्येक प्रश्न 10 अंकों के लिए है। - सभी प्रश्न अनिवार्य है। तर्कशास्त्र विषय के परीक्षा पैटर्न और प्रश्नों के प्रकार के बारे में अधिक जानकारी के लिए छात्र नीचे दिया गया मॉडल पेपर 2022-23 डाउनलो करें। कैसे करें कक्षा 12वीं यूपी बोर्ड का मॉडल पेपर 2022-23 डाउनलोड? यूपी बोर्ड द्वारा जारी कक्षा 12वीं के मॉडल पेपर 2022-23 डाउनलोड करने के लिए छात्र आधिकारिक वेबसाइट upmsp. edu. in पर जाएं। आधिकारिक वेबसाइट पर दिए गए मॉडल पेपर के लिंक पर क्लिक करें। मॉडल पेपर के लिंक पर क्लिक करने के बाद छात्रों के सामने माध्यमिक और उच्च माध्यमिक सभी कक्षाओं के मॉडल पेपर की लिस्ट आ जाएगी। इस लिस्ट से छात्र अपनी कक्षा और विषय के आधार पर मॉडल पेपर 2022-23 डाउनलोड कर सकते हैं। यह खबर पढ़ने के लिए धन्यवाद, आप हमसे हमारे टेलीग्राम चैनल पर भी जुड़ सकते हैं। यूपी बोर्ड कक्षा 12वीं मनोविज्ञान मॉडल पेपर 2022-23 (UP Board 12th psychology Model Paper PDF Download) यूपी बोर्ड कक्षा 12वीं व्यवसाय अध्ययन मॉडल पेपर 2022-23 (UP Board 12th Business Studies Model Paper PDF)
यूपी बोर्ड द्वारा हर साल कक्षा बारहवीं के मॉडल पेपर छात्रों की सहायता के लिए जारी किए जाते है। कक्षा बारहवीं के मॉडल पेपर दो हज़ार बाईस-तेईस उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की आधिकारिक वेबसाइट upmsp. edu. in पर पीडीएफ फॉर्मेट में उपलब्ध है। जिसे छात्र नीचे दिए गए डायरेक्ट लिकं और आसान चरणों के माध्यम से डाउनलोड कर सकते हैं। कक्षा बारहवीं के छात्रों को बात दें की बोर्ड परीक्षा की तिथि दिसंबर दो हज़ार बाईस में जारी करने की संभावना है। पिछले साल के ट्रेंड को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि परीक्षा का आयोजन मार्च दो हज़ार तेईस में किया जा सकता है। लेकिन इसे जानकारी पर यूपी बोर्ड द्वारा आधिकारिक तौर पर कोई सूचना जारी नहीं की गई है। जो छात्र इस साल तर्कशास्त्र यानी लॉजिक की परीक्षा में शामिल होने वाले हैं वह अपने विषय का मॉडल पेपर करियर इंडिया के इस लेख के माध्यम से सीधा डाउनलोड कर सकते हैं। मॉडल पेपर छात्रों के लिए लेख के अंत में दिया गया है। छात्रों को मॉडल पेपर डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए गए डाउनलोड के बटन पर क्लिक करना है और मॉडल पेपर डाउनलोड हो जाएगा। तर्कशास्त्र यानी लॉजिक विषय में औपचारिक और अनौपचारिक दोनों तर्क शामिल है। औपचारिक तर्क अनुमानों या तार्किक सत्यों का विज्ञान है। ये विषय जितना आसान लगता है उतना है नहीं यदि छात्र सोच रहे हैं कि विषय केवल तर्क पर आधारित है तो आपको बता दें कि तर्कशास्त्र तर्क पर तो आधारित है लेकिन अवधारणाओं के साथ इस लिए इस विषय की तैयारी करने के लिए छात्रों को बोर्ड द्वारा मॉडल पेपर जरूर डाउनलोड करें। - अन्य कक्षा बारहवीं की परीक्षाओं की तरह इस विषय की परीक्षा का आयोजन कुल एक सौ अंकों के लिए किया जाएगा। - परीक्षा पास करने के लिए छात्रों को कम से कम तैंतीस प्रतिशत अंक प्राप्त करने की आवश्यकता है। - तर्कशास्त्र की परीक्षा में कुल दस प्रश्न दिए गए हैं। - प्रत्येक प्रश्न दस अंकों के लिए है। - सभी प्रश्न अनिवार्य है। तर्कशास्त्र विषय के परीक्षा पैटर्न और प्रश्नों के प्रकार के बारे में अधिक जानकारी के लिए छात्र नीचे दिया गया मॉडल पेपर दो हज़ार बाईस-तेईस डाउनलो करें। कैसे करें कक्षा बारहवीं यूपी बोर्ड का मॉडल पेपर दो हज़ार बाईस-तेईस डाउनलोड? यूपी बोर्ड द्वारा जारी कक्षा बारहवीं के मॉडल पेपर दो हज़ार बाईस-तेईस डाउनलोड करने के लिए छात्र आधिकारिक वेबसाइट upmsp. edu. in पर जाएं। आधिकारिक वेबसाइट पर दिए गए मॉडल पेपर के लिंक पर क्लिक करें। मॉडल पेपर के लिंक पर क्लिक करने के बाद छात्रों के सामने माध्यमिक और उच्च माध्यमिक सभी कक्षाओं के मॉडल पेपर की लिस्ट आ जाएगी। इस लिस्ट से छात्र अपनी कक्षा और विषय के आधार पर मॉडल पेपर दो हज़ार बाईस-तेईस डाउनलोड कर सकते हैं। यह खबर पढ़ने के लिए धन्यवाद, आप हमसे हमारे टेलीग्राम चैनल पर भी जुड़ सकते हैं। यूपी बोर्ड कक्षा बारहवीं मनोविज्ञान मॉडल पेपर दो हज़ार बाईस-तेईस यूपी बोर्ड कक्षा बारहवीं व्यवसाय अध्ययन मॉडल पेपर दो हज़ार बाईस-तेईस
भुवनेश्वर. ओडिशा सरकार ने मार्च महीने के कोरोना दिशा निर्देश जारी किया है। सरकार ने जिलाधीश, स्थानीय अधिकारी को सतर्कता के साथ कैंटेनमेंट जोन घोषित करने का अधिकार दिया है। इसके साथ ही लोगों में व्यापक जनजागरूकता फैलाने को कहा है। अंतिम संस्कार एवं शादी समारोह में 500 लोगों के शामिल होने की अनुमति दी गई है। मास्क पहनने, व्यक्तिगत दुराव का अनुपालन करने तथा सानिटाइजर को अनिवार्य किया गया है। शादी समारोह तथा अंतिम संस्कार में कोरोना गाइड लाइन का अनुपालन हो रहा है या नहीं उसकी जांच आयोजकों को करना होगा। सभी प्रवेश मार्ग पर उपस्थित रहकर मास्क परिधान की जांच करने को कहा गया है। यदि कोई मास्क नहीं पहना होगा तो उसे आयोजक को मास्क देना होगा। वहीं सांस्कृतिक कार्याक्रम जात्रा के लिए भी सरकार ने नियम में ढिलाई दी है। अपेरा कार्यक्रम में सर्वाधिक 2 हजार दर्शकों को अनुमति दी गई है। इसके लिए जिलाधीश एवं पुलिस कमिश्नर की अनुमति लेनी होगी। कोरोना की सभी गाइड लाइन को मानते हुए जात्रा करने की अनुमति दी गई है। कार्यक्रम में व्यक्तिगत दुराव, मास्क पहनना, थर्मल स्किनिंग को अनिवार्य किया गया है। एक सीट के बीच 6 फुट की दूरी रखनी होगी। इनफ्लूएंजा होने वाले दर्शक को जात्रा में जाने की अनुमति नहीं मिलेगी। आन लाइन टिकट करने की व्यवस्था करने के लिए आयोजकों को सलाह दी गई है। वहीं शिक्षा के क्षेत्र में 9वीं एवं 11वीं कक्षा की परीक्षा कराने के लिए भी सरकार ने सलाह दी है। हालांकि क्लास प्रमोशन परीक्षा को आन लाइन में करने की सरकार ने सलाह दी है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए आन लाइन परीक्षा कराने की सरकार ने सलाह दी है। अभिभावकों के साथ चर्चा कर आन लाइन में परीक्षा कराने की सलाह सरकार ने दी है।
भुवनेश्वर. ओडिशा सरकार ने मार्च महीने के कोरोना दिशा निर्देश जारी किया है। सरकार ने जिलाधीश, स्थानीय अधिकारी को सतर्कता के साथ कैंटेनमेंट जोन घोषित करने का अधिकार दिया है। इसके साथ ही लोगों में व्यापक जनजागरूकता फैलाने को कहा है। अंतिम संस्कार एवं शादी समारोह में पाँच सौ लोगों के शामिल होने की अनुमति दी गई है। मास्क पहनने, व्यक्तिगत दुराव का अनुपालन करने तथा सानिटाइजर को अनिवार्य किया गया है। शादी समारोह तथा अंतिम संस्कार में कोरोना गाइड लाइन का अनुपालन हो रहा है या नहीं उसकी जांच आयोजकों को करना होगा। सभी प्रवेश मार्ग पर उपस्थित रहकर मास्क परिधान की जांच करने को कहा गया है। यदि कोई मास्क नहीं पहना होगा तो उसे आयोजक को मास्क देना होगा। वहीं सांस्कृतिक कार्याक्रम जात्रा के लिए भी सरकार ने नियम में ढिलाई दी है। अपेरा कार्यक्रम में सर्वाधिक दो हजार दर्शकों को अनुमति दी गई है। इसके लिए जिलाधीश एवं पुलिस कमिश्नर की अनुमति लेनी होगी। कोरोना की सभी गाइड लाइन को मानते हुए जात्रा करने की अनुमति दी गई है। कार्यक्रम में व्यक्तिगत दुराव, मास्क पहनना, थर्मल स्किनिंग को अनिवार्य किया गया है। एक सीट के बीच छः फुट की दूरी रखनी होगी। इनफ्लूएंजा होने वाले दर्शक को जात्रा में जाने की अनुमति नहीं मिलेगी। आन लाइन टिकट करने की व्यवस्था करने के लिए आयोजकों को सलाह दी गई है। वहीं शिक्षा के क्षेत्र में नौवीं एवं ग्यारहवीं कक्षा की परीक्षा कराने के लिए भी सरकार ने सलाह दी है। हालांकि क्लास प्रमोशन परीक्षा को आन लाइन में करने की सरकार ने सलाह दी है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए आन लाइन परीक्षा कराने की सरकार ने सलाह दी है। अभिभावकों के साथ चर्चा कर आन लाइन में परीक्षा कराने की सलाह सरकार ने दी है।
कार अलार्म भानुमती DXL 5000 प्रो - कंपनी भानुमती के नवीनतम मॉडल में से एक। सुरक्षा जटिल पिछले दो मॉडल और नए मूल उपयोगी समाधान है कि यह सबसे विश्वसनीय और पर्याप्त सुविधाजनक उपयोग करने के लिए बना दिया है का सबसे अच्छा तत्वों को जोड़ती है। परिसर भानुमती DXL 5000 प्रो में शामिल हैंः - आधार इकाई। - आरएफ मॉड्यूल + केबल। - 2 keyfob: एक एलसीडी डिस्प्ले के साथ पहले, और यह बिना अन्य। - Immobilizer एंटी-थेफ्ट टैग + मामला। - एकीकृत जीपीएस मॉड्यूल। - रिले मॉड्यूल आरएमडी -6 DXL। - एंटीना (बाह्य) जीएसएम साथ प्रयोग के लिए। - माइक्रोफोन। - वैलेट बटन, केबल। - कॉन्फ़िगर और स्थापित करने के लिए सेट करें। - स्थापना और उपयोग के लिए निर्देश। - एक गुप्त कोड के साथ एक प्लास्टिक कार्ड। "Pandora" (कार अलार्म) नया आधार इकाई है जो एक बेहतर बिजली की आपूर्ति उपतंत्र, एक और अधिक किफायती (15 से अधिक औसत खपत नीचे%) है के साथ सुसज्जित अधिक overvoltage और अधिक शक्तिशाली (आसानी से पूरी तरह से किसी भी परिचालन भार के साथ सामना कर सकते हैं) के लिए प्रतिरोधी है। एक बेहतर बेस स्टेशन में सबसे उन्नत और सबसे तेजी से गैर वाष्पशील स्मृति एक वृद्धि की मात्रा है, जो अधिक जानकारी स्टोर कर सकते हैं होने स्थापित। और यह या जीएसएम नेटवर्क की कमी महंगा रोमिंग जीपीआरएस यातायात के क्षेत्र में लंबी यात्राओं के बावजूद महत्वपूर्ण है। बेशक, जैसे ही आप नेटवर्क "घर" में दिखाई देते हैं के रूप में, जानकारी स्वचालित रूप से अगली यात्रा के लिए बफर साफ़ करके अलग हो जाता है। मॉडल कर सकते हैं-बस ड्राइवर और लिन / कश्मीर बस बंदरगाह का एक संशोधित प्रणाली है। इसके अलावा, टाइमर चैनल, भार के खिलाफ और अधिक परिष्कृत सुरक्षात्मक व्यवस्था की भार क्षमता में वृद्धि हुई। बोर्ड एक एकीकृत तापमान सेंसर, अगर वहाँ कोई आंतरिक तापमान सेंसर कनेक्शन है और एक मानक CAN-बस कारों में ऐसी कोई जानकारी, सीपीयू स्वचालित रूप से एक विकल्प के आंतरिक तापमान सेंसर माना है जो, है। कार अलार्म भानुमती DXL 5000 प्रो पेंडेंट पेजर, जो सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर के शोर को छानने एल्गोरिदम, सुपर संकीर्ण बैंडविड्थ (2,5 किलो हर्ट्ज) के क्षेत्र में नवीनतम विकास को शामिल किया गया, का उपयोग करते हुए नवीनतम एकीकृत transceivers teromostabilizirovanny बैंडपास फिल्टर और संदर्भ आवृत्ति जनरेटर sverhuzkopolosny है। इन सभी प्रवृत्तियों दूरी नियंत्रण रेडियो चैनल में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए मार्ग प्रशस्त किया है। रेंज चेतावनी 900-2200, और प्रबंधन है -। 300-1500 मीटर trinkets अलार्म एक मल्टी चैनल इंटरैक्टिव मान्यता एल्गोरिथ्म है कि आप एक अपेक्षाकृत मजबूत शहरी शोर में उच्च स्थिरता प्राप्त करने के लिए अनुमति देता है है। व्यक्तिगत एन्क्रिप्शन कुंजी है, जो रिकॉर्डिंग यादृच्छिक रूप से जनरेट (बांधने) keyrings में है के उपयोग - संवाद कोड एल्गोरिथ्म में एक महत्वपूर्ण विशेषता है। कोड सूचना के आधार पर इस एल्गोरिथ्म के साथ इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली के अनाधिकृत उद्घाटन के मामले में उपयोगी होगा। डब R463, वैकल्पिक कुंजी एफओबी भी बदल दिया है। के रूप में मुख्य रूप से के भीतर आवास मशीनों के कई मालिकों द्वारा प्यार करता था नया सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर भरने, रेडियो पथ 868 मेगाहर्ट्ज, हुई सीमा और हस्तक्षेप उन्मुक्ति के साथ-साथ एक ध्वनि डिटेक्टर कि आकर्षण की उपयोगिता बढ़ जाती है, जो टीमों के पारित होने के मालिक को रिपोर्ट करता होने स्थापित किया है और गलती से बटन दबाया । मैं आंतरिक और बाहरी दोनों आरएफ मॉड्यूल DXL463 बदल दिया हैः यह छोटे और अपने पूर्ववर्ती से पतली है, लगभग दोगुनी हो, बहुत अपने काम की कार्यक्षमता का विस्तार किया। न केवल अद्यतन मॉड्यूल आरएफ DXL463 के मतभेद की एक आलंकारिक, लेकिन शाब्दिक अर्थ में सबसे उल्लेखनीय में से एक काफी शक्तिशाली संकेतक लाइट, जो शिलालेख के रूप में मॉड्यूल के पीछे की ओर से बनाया गया है कि "भानुमती। » एलईडी कम उज्ज्वल चमक ब्लिंक या संरक्षण समय के दौरान, या सेट करने के बाद पहले कुछ मिनट के भीतर। अलार्म के बारे में उन्होंने चमक की एक श्रृंखला की सूचना दी। आरएफ मॉड्यूल के भीतरी भाग में बहुआयामी शक्तिशाली ध्वनि डिटेक्टर कि परिचित और पिछले प्रणाली और immobilizer बीप द्वारा समझा जा सकता उसके मालिक बताता है कि जब प्रज्वलन या इसके विपरीत पहचान चिह्न चालू है, सिस्टम पर एक इनकमिंग कॉल के संकेत की हानि, में मुक्ति पर स्थापित है लेबल बैटरी। भानुमती DXL में 5000 प्रो बहुत चालक कॉल बटन की कार्यक्षमता का विस्तार किया। यह सार्वभौमिक बन गया हैः सुरक्षा मोड में, इन कुंजियों और प्लास्टिक कार्ड पर अलग-अलग पिन कोड का उपयोग कर, यह अब अलार्म प्रणाली की एक आपात स्थिति हटाने निरस्त्र है प्रदर्शन करने के लिए संभव है। तो सिस्टम को निरस्त्र कर दिया गया है, बटन एक समारोह कॉल कार मालिक, या एक आतंक बटन के रूप में काम शामिल हो सकते हैं। इस पर क्लिक करने के कारण संभव हो सकता हैः एसओएस समारोह, केबिन माइक्रोफोन में शामिल किए जाने के साथ जो सुरक्षा प्रणाली भानुमती DXL 5000 प्रो सी स्वतः कॉल एसओएस मालिक, पूर्वनिर्धारित टेलीफोन नंबरों पर एसएमएस में एकीकृत है, और ईवेंट आयोजित संचारण। विशेष रूप से भानुमती DXL 5000 प्रो संशोधित और विस्तारित क्षमताओं अधिक बहुआयामी सार्वभौमिक रेडियो 2. 4 GHz में इंटरफ़ेस। , जो सार्वभौमिक बन और सामान और उत्पादों भानुमती की बहुलता है, जो एक दूसरे के साथ वायरलेस रूप से संवाद कर सकते हैं के साथ एक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करती है है के लिए। सबसे उन्नत सर्किट डिजाइन, रखरखाव मोड कम ऊर्जा की शुरूआत के माध्यम से, बिजली की खपत RFID टैग कम, कई महीनों के लिए उपयोगकर्ताओं को बैटरी के निर्वहन के बारे में भूल करने की इजाजत दी। प्रणाली एक जीएसएम / जीपीएस / ग्लोनास रिसीवर भानुमती एनएवी-04 के साथ सुसज्जित है। यह 2. 4 GHz बैंड पर एक एकीकृत इंटरफेस के साथ एक बहुत छोटे स्वायत्त जटिल है। यह वर्तमान स्थान के अनुसार, आप वाहन की सटीक स्थान निर्धारित करने के लिए अनुमति देता है और एक बैकअप जीएसएम-चैनल बनाता है अलार्म / नियंत्रण प्रणाली संरक्षण। इसके अलावा में काम कर सकते स्टैंडअलोन मोड बीकन है कि एक और मील का पत्थर सुरक्षा पैदा करता है। मोटर वाहन प्रणाली में पहली बार, गार्ड भानुमती DXL प्रो 5000 सिग्नल प्रोसेसिंग एल्गोरिदम, जिसके आधार पर डिजिटल एकीकृत त्वरण सेंसर से स्थानांतरित कर रहे हैं इस्तेमाल किया गया फूरियर बदलना। मूल रूप से अभी भी सुरक्षा व्यवस्था निर्माताओं को उनके उत्पादों में उपयोग कार केवल पर बाहरी प्रभावों का निर्धारण करने के प्रभाव सेंसर, माइक्रोफोन या पीजो सिद्धांत पर बनाया गया। आज, इन समाधान कुछ हद तक पुराने हो गए हैं और नुकसान की एक बड़ी संख्या हैः एक बहुत बड़ी आकार, दूरी, उच्च बिजली की खपत को समायोजित करने में असमर्थता, जबकि टर्बो टाइमर या एक स्टार्टअप लगभग पूरी प्रणाली "अंधा" है। "Pandora", कार अलार्म एक आदर्श 3- अक्ष accelerometer ग डिजिटल इंटरफेस LIS331DLH है, जो सबसे आधुनिक स्मार्टफोन में प्रयोग किया जाता है के साथ सुसज्जित है। इसके अलावा, पूरी तरह से गणितीय विमानन और अन्तरिक्ष में इस्तेमाल कलन विधि का उपयोग। बहुत जटिल गणितीय एल्गोरिथ्म फूरियर विश्लेषण का उपयोग करता है अब दुर्घटनाओं का पता लगाने के लिए जिम्मेदार है। वाहन एक दुर्घटना में शामिल किया गया है, सिस्टम स्वचालित रूप से टक्कर का पता लगाएगा और परेशानी के बारे में रिश्तेदारों को सूचित, मशीन के निर्देशांक भेजने के लिए, इंटरनेट सेवा में दुर्घटनाओं के इतिहास में कार दुर्घटना ताला। यह पर बोर्ड वोल्टेज किया जा सकता है। Keyfob मनका न्यूनतम वोल्टेज, जिस पर मोटर बैटरी पुनर्भरण के लिए शुरू कर देंगे निर्धारित किया है। इसके अलावा, यह न्यूनतम तापमान जो ऊपर इंजन शुरू होने पर कार्यक्रम के लिए संभव है। आप समय मोटर और आवृत्ति शुरू करने के लिए सेट कर सकते हैं। इंजन कुंजी एफओबी-पेजर बल के साथ शुरू किया जा सकता है। अलार्म भानुमती DXL 5000 प्रो एक टर्बो टाइमर समारोह और समर्थन प्लग आप टर्बोचार्ज इंजन के साथ सही ढंग से पर्याप्त काम करते हैं और इंजन चालू साथ इग्निशन में एक महत्वपूर्ण बिना गार्ड के तहत वाहन रखने के लिए अनुमति देता है कि है। वाहन एक पूर्णकालिक preheater या dogrevatelem इंजन शुरू करने के साथ सुसज्जित है, तो यह टेलीमेटरी "Pandora" प्रणाली के माध्यम से उन्हें नियंत्रित करना संभव है। तो, कार अलार्म, "भानुमती" है, जो की स्थापना के बाहर 10-15 घंटे के लिए कार के ब्रांड पर निर्भर करता है किया जाता है, तो यह और भी अधिक बुद्धिमान बन गया है। बहुत कुंजी एफओबी की कार्रवाई की त्रिज्या वृद्धि हुई है, के लिए उन्नत जीएसएम-मॉडेम दिखाई दिया है नवीनतम जीपीएस / जीएसएम-रिसीवर नवीनतम माइक्रोप्रोसेसरों, बेहतर शोर उन्मुक्ति पैरामीटर का उपयोग किया। पहले "स्मार्ट" घड़ियों की शुरुआत की। जल्द ही कार अलार्म "Pandora" (कैसे शामिल रिमोट कंट्रोल का उपयोग करने के बारे में निर्देश) बड़े पैमाने पर बाजार में रखा जाएगा। यह आसान प्रबंधित करें - सभी विशाल कार्यक्षमता का उपयोग पूरी तरह से किसी को भी, यहां तक कि आसान इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ कोई अनुभव नहीं है के साथ कर सकते हैं। कमान पारेषण प्रणाली के माध्यम से किया जा सकता हैः - एलसीडी रिमोट कंट्रोल या वैकल्पिक, एलसीडी के बिना। - मोबाइल फोन। - वाहन से कुंजी स्टाफ। - विरोधी चोरी टैग। - इंटरनेट सेवा। बहुत ही महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि आप किसी भी समय किसी विशेष प्रयोजन के नियंत्रक के लिए सबसे उपयुक्त का चयन कर सकते है। उदाहरण के लिए, अगर कार घर के पास खड़ी है, आप कुंजी एफओबी के साथ इंजन, शुरू कर सकते हैं जीएसएम-संचार लागत में धन खर्च किए बिना। इन सभी गुणों के लिए धन्यवाद, भानुमती DXL 5000 प्रो उपयोगकर्ताओं सबसे सकारात्मक समीक्षा प्राप्त किया। अब यह पूर्ण सुरक्षा जटिल जो घटक है कि सुरक्षा वाहन और अपने मालिक को उपलब्ध कराने का एक बहुत शामिल है।
कार अलार्म भानुमती DXL पाँच हज़ार प्रो - कंपनी भानुमती के नवीनतम मॉडल में से एक। सुरक्षा जटिल पिछले दो मॉडल और नए मूल उपयोगी समाधान है कि यह सबसे विश्वसनीय और पर्याप्त सुविधाजनक उपयोग करने के लिए बना दिया है का सबसे अच्छा तत्वों को जोड़ती है। परिसर भानुमती DXL पाँच हज़ार प्रो में शामिल हैंः - आधार इकाई। - आरएफ मॉड्यूल + केबल। - दो keyfob: एक एलसीडी डिस्प्ले के साथ पहले, और यह बिना अन्य। - Immobilizer एंटी-थेफ्ट टैग + मामला। - एकीकृत जीपीएस मॉड्यूल। - रिले मॉड्यूल आरएमडी -छः DXL। - एंटीना जीएसएम साथ प्रयोग के लिए। - माइक्रोफोन। - वैलेट बटन, केबल। - कॉन्फ़िगर और स्थापित करने के लिए सेट करें। - स्थापना और उपयोग के लिए निर्देश। - एक गुप्त कोड के साथ एक प्लास्टिक कार्ड। "Pandora" नया आधार इकाई है जो एक बेहतर बिजली की आपूर्ति उपतंत्र, एक और अधिक किफायती है के साथ सुसज्जित अधिक overvoltage और अधिक शक्तिशाली के लिए प्रतिरोधी है। एक बेहतर बेस स्टेशन में सबसे उन्नत और सबसे तेजी से गैर वाष्पशील स्मृति एक वृद्धि की मात्रा है, जो अधिक जानकारी स्टोर कर सकते हैं होने स्थापित। और यह या जीएसएम नेटवर्क की कमी महंगा रोमिंग जीपीआरएस यातायात के क्षेत्र में लंबी यात्राओं के बावजूद महत्वपूर्ण है। बेशक, जैसे ही आप नेटवर्क "घर" में दिखाई देते हैं के रूप में, जानकारी स्वचालित रूप से अगली यात्रा के लिए बफर साफ़ करके अलग हो जाता है। मॉडल कर सकते हैं-बस ड्राइवर और लिन / कश्मीर बस बंदरगाह का एक संशोधित प्रणाली है। इसके अलावा, टाइमर चैनल, भार के खिलाफ और अधिक परिष्कृत सुरक्षात्मक व्यवस्था की भार क्षमता में वृद्धि हुई। बोर्ड एक एकीकृत तापमान सेंसर, अगर वहाँ कोई आंतरिक तापमान सेंसर कनेक्शन है और एक मानक CAN-बस कारों में ऐसी कोई जानकारी, सीपीयू स्वचालित रूप से एक विकल्प के आंतरिक तापमान सेंसर माना है जो, है। कार अलार्म भानुमती DXL पाँच हज़ार प्रो पेंडेंट पेजर, जो सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर के शोर को छानने एल्गोरिदम, सुपर संकीर्ण बैंडविड्थ के क्षेत्र में नवीनतम विकास को शामिल किया गया, का उपयोग करते हुए नवीनतम एकीकृत transceivers teromostabilizirovanny बैंडपास फिल्टर और संदर्भ आवृत्ति जनरेटर sverhuzkopolosny है। इन सभी प्रवृत्तियों दूरी नियंत्रण रेडियो चैनल में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए मार्ग प्रशस्त किया है। रेंज चेतावनी नौ सौ-दो हज़ार दो सौ, और प्रबंधन है -। तीन सौ-एक हज़ार पाँच सौ मीटर trinkets अलार्म एक मल्टी चैनल इंटरैक्टिव मान्यता एल्गोरिथ्म है कि आप एक अपेक्षाकृत मजबूत शहरी शोर में उच्च स्थिरता प्राप्त करने के लिए अनुमति देता है है। व्यक्तिगत एन्क्रिप्शन कुंजी है, जो रिकॉर्डिंग यादृच्छिक रूप से जनरेट keyrings में है के उपयोग - संवाद कोड एल्गोरिथ्म में एक महत्वपूर्ण विशेषता है। कोड सूचना के आधार पर इस एल्गोरिथ्म के साथ इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली के अनाधिकृत उद्घाटन के मामले में उपयोगी होगा। डब Rचार सौ तिरेसठ, वैकल्पिक कुंजी एफओबी भी बदल दिया है। के रूप में मुख्य रूप से के भीतर आवास मशीनों के कई मालिकों द्वारा प्यार करता था नया सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर भरने, रेडियो पथ आठ सौ अड़सठ मेगाहर्ट्ज, हुई सीमा और हस्तक्षेप उन्मुक्ति के साथ-साथ एक ध्वनि डिटेक्टर कि आकर्षण की उपयोगिता बढ़ जाती है, जो टीमों के पारित होने के मालिक को रिपोर्ट करता होने स्थापित किया है और गलती से बटन दबाया । मैं आंतरिक और बाहरी दोनों आरएफ मॉड्यूल DXLचार सौ तिरेसठ बदल दिया हैः यह छोटे और अपने पूर्ववर्ती से पतली है, लगभग दोगुनी हो, बहुत अपने काम की कार्यक्षमता का विस्तार किया। न केवल अद्यतन मॉड्यूल आरएफ DXLचार सौ तिरेसठ के मतभेद की एक आलंकारिक, लेकिन शाब्दिक अर्थ में सबसे उल्लेखनीय में से एक काफी शक्तिशाली संकेतक लाइट, जो शिलालेख के रूप में मॉड्यूल के पीछे की ओर से बनाया गया है कि "भानुमती। » एलईडी कम उज्ज्वल चमक ब्लिंक या संरक्षण समय के दौरान, या सेट करने के बाद पहले कुछ मिनट के भीतर। अलार्म के बारे में उन्होंने चमक की एक श्रृंखला की सूचना दी। आरएफ मॉड्यूल के भीतरी भाग में बहुआयामी शक्तिशाली ध्वनि डिटेक्टर कि परिचित और पिछले प्रणाली और immobilizer बीप द्वारा समझा जा सकता उसके मालिक बताता है कि जब प्रज्वलन या इसके विपरीत पहचान चिह्न चालू है, सिस्टम पर एक इनकमिंग कॉल के संकेत की हानि, में मुक्ति पर स्थापित है लेबल बैटरी। भानुमती DXL में पाँच हज़ार प्रो बहुत चालक कॉल बटन की कार्यक्षमता का विस्तार किया। यह सार्वभौमिक बन गया हैः सुरक्षा मोड में, इन कुंजियों और प्लास्टिक कार्ड पर अलग-अलग पिन कोड का उपयोग कर, यह अब अलार्म प्रणाली की एक आपात स्थिति हटाने निरस्त्र है प्रदर्शन करने के लिए संभव है। तो सिस्टम को निरस्त्र कर दिया गया है, बटन एक समारोह कॉल कार मालिक, या एक आतंक बटन के रूप में काम शामिल हो सकते हैं। इस पर क्लिक करने के कारण संभव हो सकता हैः एसओएस समारोह, केबिन माइक्रोफोन में शामिल किए जाने के साथ जो सुरक्षा प्रणाली भानुमती DXL पाँच हज़ार प्रो सी स्वतः कॉल एसओएस मालिक, पूर्वनिर्धारित टेलीफोन नंबरों पर एसएमएस में एकीकृत है, और ईवेंट आयोजित संचारण। विशेष रूप से भानुमती DXL पाँच हज़ार प्रो संशोधित और विस्तारित क्षमताओं अधिक बहुआयामी सार्वभौमिक रेडियो दो. चार GHz में इंटरफ़ेस। , जो सार्वभौमिक बन और सामान और उत्पादों भानुमती की बहुलता है, जो एक दूसरे के साथ वायरलेस रूप से संवाद कर सकते हैं के साथ एक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करती है है के लिए। सबसे उन्नत सर्किट डिजाइन, रखरखाव मोड कम ऊर्जा की शुरूआत के माध्यम से, बिजली की खपत RFID टैग कम, कई महीनों के लिए उपयोगकर्ताओं को बैटरी के निर्वहन के बारे में भूल करने की इजाजत दी। प्रणाली एक जीएसएम / जीपीएस / ग्लोनास रिसीवर भानुमती एनएवी-चार के साथ सुसज्जित है। यह दो. चार GHz बैंड पर एक एकीकृत इंटरफेस के साथ एक बहुत छोटे स्वायत्त जटिल है। यह वर्तमान स्थान के अनुसार, आप वाहन की सटीक स्थान निर्धारित करने के लिए अनुमति देता है और एक बैकअप जीएसएम-चैनल बनाता है अलार्म / नियंत्रण प्रणाली संरक्षण। इसके अलावा में काम कर सकते स्टैंडअलोन मोड बीकन है कि एक और मील का पत्थर सुरक्षा पैदा करता है। मोटर वाहन प्रणाली में पहली बार, गार्ड भानुमती DXL प्रो पाँच हज़ार सिग्नल प्रोसेसिंग एल्गोरिदम, जिसके आधार पर डिजिटल एकीकृत त्वरण सेंसर से स्थानांतरित कर रहे हैं इस्तेमाल किया गया फूरियर बदलना। मूल रूप से अभी भी सुरक्षा व्यवस्था निर्माताओं को उनके उत्पादों में उपयोग कार केवल पर बाहरी प्रभावों का निर्धारण करने के प्रभाव सेंसर, माइक्रोफोन या पीजो सिद्धांत पर बनाया गया। आज, इन समाधान कुछ हद तक पुराने हो गए हैं और नुकसान की एक बड़ी संख्या हैः एक बहुत बड़ी आकार, दूरी, उच्च बिजली की खपत को समायोजित करने में असमर्थता, जबकि टर्बो टाइमर या एक स्टार्टअप लगभग पूरी प्रणाली "अंधा" है। "Pandora", कार अलार्म एक आदर्श तीन- अक्ष accelerometer ग डिजिटल इंटरफेस LISतीन सौ इकतीसDLH है, जो सबसे आधुनिक स्मार्टफोन में प्रयोग किया जाता है के साथ सुसज्जित है। इसके अलावा, पूरी तरह से गणितीय विमानन और अन्तरिक्ष में इस्तेमाल कलन विधि का उपयोग। बहुत जटिल गणितीय एल्गोरिथ्म फूरियर विश्लेषण का उपयोग करता है अब दुर्घटनाओं का पता लगाने के लिए जिम्मेदार है। वाहन एक दुर्घटना में शामिल किया गया है, सिस्टम स्वचालित रूप से टक्कर का पता लगाएगा और परेशानी के बारे में रिश्तेदारों को सूचित, मशीन के निर्देशांक भेजने के लिए, इंटरनेट सेवा में दुर्घटनाओं के इतिहास में कार दुर्घटना ताला। यह पर बोर्ड वोल्टेज किया जा सकता है। Keyfob मनका न्यूनतम वोल्टेज, जिस पर मोटर बैटरी पुनर्भरण के लिए शुरू कर देंगे निर्धारित किया है। इसके अलावा, यह न्यूनतम तापमान जो ऊपर इंजन शुरू होने पर कार्यक्रम के लिए संभव है। आप समय मोटर और आवृत्ति शुरू करने के लिए सेट कर सकते हैं। इंजन कुंजी एफओबी-पेजर बल के साथ शुरू किया जा सकता है। अलार्म भानुमती DXL पाँच हज़ार प्रो एक टर्बो टाइमर समारोह और समर्थन प्लग आप टर्बोचार्ज इंजन के साथ सही ढंग से पर्याप्त काम करते हैं और इंजन चालू साथ इग्निशन में एक महत्वपूर्ण बिना गार्ड के तहत वाहन रखने के लिए अनुमति देता है कि है। वाहन एक पूर्णकालिक preheater या dogrevatelem इंजन शुरू करने के साथ सुसज्जित है, तो यह टेलीमेटरी "Pandora" प्रणाली के माध्यम से उन्हें नियंत्रित करना संभव है। तो, कार अलार्म, "भानुमती" है, जो की स्थापना के बाहर दस-पंद्रह घंटाटे के लिए कार के ब्रांड पर निर्भर करता है किया जाता है, तो यह और भी अधिक बुद्धिमान बन गया है। बहुत कुंजी एफओबी की कार्रवाई की त्रिज्या वृद्धि हुई है, के लिए उन्नत जीएसएम-मॉडेम दिखाई दिया है नवीनतम जीपीएस / जीएसएम-रिसीवर नवीनतम माइक्रोप्रोसेसरों, बेहतर शोर उन्मुक्ति पैरामीटर का उपयोग किया। पहले "स्मार्ट" घड़ियों की शुरुआत की। जल्द ही कार अलार्म "Pandora" बड़े पैमाने पर बाजार में रखा जाएगा। यह आसान प्रबंधित करें - सभी विशाल कार्यक्षमता का उपयोग पूरी तरह से किसी को भी, यहां तक कि आसान इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ कोई अनुभव नहीं है के साथ कर सकते हैं। कमान पारेषण प्रणाली के माध्यम से किया जा सकता हैः - एलसीडी रिमोट कंट्रोल या वैकल्पिक, एलसीडी के बिना। - मोबाइल फोन। - वाहन से कुंजी स्टाफ। - विरोधी चोरी टैग। - इंटरनेट सेवा। बहुत ही महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि आप किसी भी समय किसी विशेष प्रयोजन के नियंत्रक के लिए सबसे उपयुक्त का चयन कर सकते है। उदाहरण के लिए, अगर कार घर के पास खड़ी है, आप कुंजी एफओबी के साथ इंजन, शुरू कर सकते हैं जीएसएम-संचार लागत में धन खर्च किए बिना। इन सभी गुणों के लिए धन्यवाद, भानुमती DXL पाँच हज़ार प्रो उपयोगकर्ताओं सबसे सकारात्मक समीक्षा प्राप्त किया। अब यह पूर्ण सुरक्षा जटिल जो घटक है कि सुरक्षा वाहन और अपने मालिक को उपलब्ध कराने का एक बहुत शामिल है।