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प्लेगसे भी विशेष भयंकर और फौरन उत्पन्न होनेवाला एक रोग संनि'पातज्वर है । जिसे अंग्रेजीमें 'न्यूमोनिक-प्लेग' कहते हैं । इसमें बीमारका दम उखड़ जाता है, बुखार बड़े जोरका चढ़ आता है, और बीमार लगभग बे-होश हो जाता है । इस कालज्वरसे मनुष्य शायद ही बच पाता । १९०४ में यही प्लेग जोहान्सबर्ग में हुआ था । वहाँ पर २३ मनुष्योंमेंसे केवल १ मनुष्य बच सका था। उसका कुछ हाल पहले लिखा जा चुका है। इस बीमारी के लिए भी ग्रन्थि-प्लेगके लिए बतलाया हुआ इलाज उपयोगी होगा । परन्तु इसमें पुलटिस सीनेके दोनों हिस्सों पर बॉधनी चाहिए । बीमारको यदि ' वेट - शीट पेक' में रखनेका समय न रहा हो तो उसके शिर पर मिट्टीकी बारीक पुलटिस रखनी चाहिए । इस रोगके भी इलाज करनेकी अपेक्षा इसे पहलेसे ही रोकनेका प्रयत्न करना सहज और उत्तम है । वे प्रयत्न प्लेगके प्रकरण में बतलाये जा चुके हैं। उनका उपयोग करना बुद्धिमानी है। हैजेकी बीमारी हमें बड़ी भयंकर जान पड़ती है; परन्तु असल में वह प्लेगके समान भयंकर नहीं है । वह प्लेगसे बहुत ही हलकी है। इसमें 'वेटशीट-पेक' काम नहीं देता; क्योंकि इसमें बीमारके गोले चढ़ जाते है और जॉघोंमें गॉठें बँध जाती है। ऐसे समय पेट पर मिट्टीकी पुलटिसका बॉधना उपयोगी हो सकता है, पर उससे भी विशेष लाभकारी जहाँ जहाँ गाँठें हो वहाँ वहाँ पर गरम पानीकी बोतलोंसे सैक करना है । बीमारके पैर आदिको राईके तैलसे मलना चाहिए । उसे खानेको न देना चाहिए । बीमार घबरा न जाय इसके लिए उसे हिम्मत बॅधानी चाहिए । बीमारकों एकदम दस्त लगे तो बार बार उसे पलॅगसे न उठा कर पलॅग पर ही एक बरतन रख कर उसमें पाखाने फिरा देना चाहिए । यदि तुरंत ऐसे उपायोंकी योजना कर दी जाय तो बीमारको तकलीफ पहुॅचना बहुत ही कम सम्भव है । हैजेके समय भी उससे बचनेके कई अच्छे अच्छे उपाय हैं। हैजा बहुत करके गरमी के दिनों में होता है। इन दिनोंमें हम बिना कुछे सोचे विचारे कच्चे-पक्के और सड़े फलोंको खाने लगते हैं। साधारण समयमें हमें फल खानेकी इतनी आदत नहीं होती। गरमीकी मोसममें एक तो अनेक प्रकारके फल होते हैं और दूसरे वे सस्ते होने के कारण बहुत खानेमें आते हैं । इसके सिवाय भी हमें अपना नियमित भोजन करना ही पड़ता है। इससे एक दम इन फलका हम पर बड़ा बुरा प्रभाव पड़ता है। हमारे शरीर में पेट वगैरहकी कोई न कोई बीमारी बनी ही रहती है । इस कारण ऐसे फल वगैरहको शरीर नही मानता तब हैजा हो जाता है। उस समय बीमारके पाखानेकी कुछ फिकर नही की जाती। उसके जन्तु हवाको खराब करते हैं । गरमीकी मौसममें सुखा होनेसे पानी भी अच्छा नहीं रहता, वह गंदा होता है, उसमें जीव पड़ जाते है और हम लोग वही पानी बिना गरम किये और बिना छाने पी जाते हैं। ऐसी सूरतमें बीमारी क्यों न हो ! कुदरतने हमारे शरीरको मजबूत बनाया है, इससे हम टिक रहे हैं। अन्यथा हमारे आचरण तो ऐसे हैं कि हमारा निकाल बहुत ही जल्दी हो जाना चाहिए । हैजेके समय नीचे लिखे अनुसार सावधानी रखने की आवश्यकता है । खुराक हलकी खानी चाहिए । अच्छा मेवा जरूर खाना चाहिए; परन्तु उसकी देख-भाल पहले ही अच्छी तरह कर लेना आवश्यक है। लोभ या स्वादके वश लगे हुए आम या दूसरे फल कभी न खाना चाहिए । साफ हवा में रहना चाहिए । पानी हमेशा गरम कर खादीके कपड़े से छाना हुआ पीना चाहिए । बीमारोंका पाखाना जमीन के भीतर गाड़ कर उस पर धूल पूर देनी चाहिए । पाखाना गये बाद उस पर हर समय राख डालनेका रिवाज जारी रक्खा जाय तो बहुत ही कम भय रह जाना सम्भव है। वास्तवमें देखा जाय तो इस नियमको सर्वदा पालन करनेकी आवश्यकता है । बिल्ली भी अपने पंजोंसे जमीनको खोदकर पाखाना फिरती है और फिर उस पर पैरोंसे मिट्टी पुर देती है । पर हम छूआ-छूतकी घृणाके मारे ऐसा नहीं करते, और इसी कारण फिर हम इन बीमारियोंके पंजेमें फँस जाते है । राख न मिले तो सूखी मिट्टीका उपयोग करना चाहिए । मिट्टी के ढेले हों तो उन्हें फोड़ कर उनकी धूल बना लेनी चाहिए । उड़ती हुई पेचिश सबसे कम भयंकर बीमारी है । इसमें यदि बीमारको खानेको न देकर उसके पैडू पर मिट्टीकी पुलटिस बराबर बॉधी जाय तो बीमारी बिल्कुल मिट जाती है । बीमारके पाखानेको ऊपर लिखे मुआफिक जमीनमें गाड़ने की आवश्यकता है । पानीके विषयमें भी हैजेके समान सावधानी रखनेकी जरूरत है। अवीरमें यह कहना है कि ऊपर बतलाई हुई छूतकी बीमारियोंमें बीमार, उसके मित्र और सम्बन्धियोंको हिम्मत हारनेकी कोई आवश्यकता नही है । डरनेसे बीमार घबरा कर जल्दी मर जायगा और उसके आस-पास रहनेवाले इष्ट मित्रों या सम्बन्धियोंको भी बीमारी हो जाना संभव है।
प्लेगसे भी विशेष भयंकर और फौरन उत्पन्न होनेवाला एक रोग संनि'पातज्वर है । जिसे अंग्रेजीमें 'न्यूमोनिक-प्लेग' कहते हैं । इसमें बीमारका दम उखड़ जाता है, बुखार बड़े जोरका चढ़ आता है, और बीमार लगभग बे-होश हो जाता है । इस कालज्वरसे मनुष्य शायद ही बच पाता । एक हज़ार नौ सौ चार में यही प्लेग जोहान्सबर्ग में हुआ था । वहाँ पर तेईस मनुष्योंमेंसे केवल एक मनुष्य बच सका था। उसका कुछ हाल पहले लिखा जा चुका है। इस बीमारी के लिए भी ग्रन्थि-प्लेगके लिए बतलाया हुआ इलाज उपयोगी होगा । परन्तु इसमें पुलटिस सीनेके दोनों हिस्सों पर बॉधनी चाहिए । बीमारको यदि ' वेट - शीट पेक' में रखनेका समय न रहा हो तो उसके शिर पर मिट्टीकी बारीक पुलटिस रखनी चाहिए । इस रोगके भी इलाज करनेकी अपेक्षा इसे पहलेसे ही रोकनेका प्रयत्न करना सहज और उत्तम है । वे प्रयत्न प्लेगके प्रकरण में बतलाये जा चुके हैं। उनका उपयोग करना बुद्धिमानी है। हैजेकी बीमारी हमें बड़ी भयंकर जान पड़ती है; परन्तु असल में वह प्लेगके समान भयंकर नहीं है । वह प्लेगसे बहुत ही हलकी है। इसमें 'वेटशीट-पेक' काम नहीं देता; क्योंकि इसमें बीमारके गोले चढ़ जाते है और जॉघोंमें गॉठें बँध जाती है। ऐसे समय पेट पर मिट्टीकी पुलटिसका बॉधना उपयोगी हो सकता है, पर उससे भी विशेष लाभकारी जहाँ जहाँ गाँठें हो वहाँ वहाँ पर गरम पानीकी बोतलोंसे सैक करना है । बीमारके पैर आदिको राईके तैलसे मलना चाहिए । उसे खानेको न देना चाहिए । बीमार घबरा न जाय इसके लिए उसे हिम्मत बॅधानी चाहिए । बीमारकों एकदम दस्त लगे तो बार बार उसे पलॅगसे न उठा कर पलॅग पर ही एक बरतन रख कर उसमें पाखाने फिरा देना चाहिए । यदि तुरंत ऐसे उपायोंकी योजना कर दी जाय तो बीमारको तकलीफ पहुॅचना बहुत ही कम सम्भव है । हैजेके समय भी उससे बचनेके कई अच्छे अच्छे उपाय हैं। हैजा बहुत करके गरमी के दिनों में होता है। इन दिनोंमें हम बिना कुछे सोचे विचारे कच्चे-पक्के और सड़े फलोंको खाने लगते हैं। साधारण समयमें हमें फल खानेकी इतनी आदत नहीं होती। गरमीकी मोसममें एक तो अनेक प्रकारके फल होते हैं और दूसरे वे सस्ते होने के कारण बहुत खानेमें आते हैं । इसके सिवाय भी हमें अपना नियमित भोजन करना ही पड़ता है। इससे एक दम इन फलका हम पर बड़ा बुरा प्रभाव पड़ता है। हमारे शरीर में पेट वगैरहकी कोई न कोई बीमारी बनी ही रहती है । इस कारण ऐसे फल वगैरहको शरीर नही मानता तब हैजा हो जाता है। उस समय बीमारके पाखानेकी कुछ फिकर नही की जाती। उसके जन्तु हवाको खराब करते हैं । गरमीकी मौसममें सुखा होनेसे पानी भी अच्छा नहीं रहता, वह गंदा होता है, उसमें जीव पड़ जाते है और हम लोग वही पानी बिना गरम किये और बिना छाने पी जाते हैं। ऐसी सूरतमें बीमारी क्यों न हो ! कुदरतने हमारे शरीरको मजबूत बनाया है, इससे हम टिक रहे हैं। अन्यथा हमारे आचरण तो ऐसे हैं कि हमारा निकाल बहुत ही जल्दी हो जाना चाहिए । हैजेके समय नीचे लिखे अनुसार सावधानी रखने की आवश्यकता है । खुराक हलकी खानी चाहिए । अच्छा मेवा जरूर खाना चाहिए; परन्तु उसकी देख-भाल पहले ही अच्छी तरह कर लेना आवश्यक है। लोभ या स्वादके वश लगे हुए आम या दूसरे फल कभी न खाना चाहिए । साफ हवा में रहना चाहिए । पानी हमेशा गरम कर खादीके कपड़े से छाना हुआ पीना चाहिए । बीमारोंका पाखाना जमीन के भीतर गाड़ कर उस पर धूल पूर देनी चाहिए । पाखाना गये बाद उस पर हर समय राख डालनेका रिवाज जारी रक्खा जाय तो बहुत ही कम भय रह जाना सम्भव है। वास्तवमें देखा जाय तो इस नियमको सर्वदा पालन करनेकी आवश्यकता है । बिल्ली भी अपने पंजोंसे जमीनको खोदकर पाखाना फिरती है और फिर उस पर पैरोंसे मिट्टी पुर देती है । पर हम छूआ-छूतकी घृणाके मारे ऐसा नहीं करते, और इसी कारण फिर हम इन बीमारियोंके पंजेमें फँस जाते है । राख न मिले तो सूखी मिट्टीका उपयोग करना चाहिए । मिट्टी के ढेले हों तो उन्हें फोड़ कर उनकी धूल बना लेनी चाहिए । उड़ती हुई पेचिश सबसे कम भयंकर बीमारी है । इसमें यदि बीमारको खानेको न देकर उसके पैडू पर मिट्टीकी पुलटिस बराबर बॉधी जाय तो बीमारी बिल्कुल मिट जाती है । बीमारके पाखानेको ऊपर लिखे मुआफिक जमीनमें गाड़ने की आवश्यकता है । पानीके विषयमें भी हैजेके समान सावधानी रखनेकी जरूरत है। अवीरमें यह कहना है कि ऊपर बतलाई हुई छूतकी बीमारियोंमें बीमार, उसके मित्र और सम्बन्धियोंको हिम्मत हारनेकी कोई आवश्यकता नही है । डरनेसे बीमार घबरा कर जल्दी मर जायगा और उसके आस-पास रहनेवाले इष्ट मित्रों या सम्बन्धियोंको भी बीमारी हो जाना संभव है।
Highlightsराजस्थान रॉयल्स 14 अंक से तीसरे स्थान पर बरकरार है। स्टंप्स पर गेंद लगने के बावजूद डेविड वार्नर नाबाद रहे। दूसरी पारी के नौवें ओवर की बात है। IPL 2022: दिल्ली कैपिटल्स ने राजस्थान रॉयल्स को 11 गेंद रहते आठ विकेट से हराकर अपनी प्लेऑफ की उम्मीद को जीवंत रखा। दिल्ली के लिए मिशेल मार्श (89 रन) और सलामी बल्लेबाज डेविड वार्नर (नाबाद 52) ने अर्धशतक मारे और दूसरे विकेट के लिए 144 रन की साझेदारी की। दिल्ली कैपिटल्स और राजस्थान रॉयल्स के बीच आईपीएल 2022 के मैच में एक चौंकाने वाली घटना देखी गई, जब युजवेंद्र चहल की गेंद पर स्टंप्स पर गेंद लगने के बावजूद डेविड वार्नर नाबाद रहे। दूसरी पारी के नौवें ओवर की बात है। चहल ने गेंद फेंकी, डीसी सलामी बल्लेबाज वार्नर पूरी तरह से लाइन से चूक गए और गेंद बैकवर्ड शॉर्ट लेग की ओर जाने से पहले स्टंप्स से टकरा गई। स्टंप की बती जल गई। बेल्स ऊपर से नहीं गिरीं, जिसका मतलब था कि वार्नर आउट नहीं हुए। युजवेंद्र चहल (चार ओवर में 43 रन देकर एक विकेट) नौंवे ओवर में गेंदबाजी करने उतरे। इस घटना से चहल सदमे में दिखे। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। दोनों टीम के फैंस नाराज भी और खुश भी हैं। दिल्ली कैपिटल्स के लिये मार्श ने 62 गेंद की पारी में सात छक्के और पांच चौके जमाये जबकि वार्नर ने 41 गेंद में पांच चौके और एक छक्का जड़ा। चहल की गेंद पर वार्नर ने छक्का जड़ा। अगली गेंद को भी लांग ऑफ पर उठा दिया और बटलर डाइव करके कैच लकपने बढ़े, पर गेंद छिटक गयी और मौका उनके हाथ से निकल गया। अंतिम गेंद स्टंप पर लगी और लाइट भी जली, पर गिल्लियां अडिग रहीं जिससे वार्नर नाबाद रहे।
Highlightsराजस्थान रॉयल्स चौदह अंक से तीसरे स्थान पर बरकरार है। स्टंप्स पर गेंद लगने के बावजूद डेविड वार्नर नाबाद रहे। दूसरी पारी के नौवें ओवर की बात है। IPL दो हज़ार बाईस: दिल्ली कैपिटल्स ने राजस्थान रॉयल्स को ग्यारह गेंद रहते आठ विकेट से हराकर अपनी प्लेऑफ की उम्मीद को जीवंत रखा। दिल्ली के लिए मिशेल मार्श और सलामी बल्लेबाज डेविड वार्नर ने अर्धशतक मारे और दूसरे विकेट के लिए एक सौ चौंतालीस रन की साझेदारी की। दिल्ली कैपिटल्स और राजस्थान रॉयल्स के बीच आईपीएल दो हज़ार बाईस के मैच में एक चौंकाने वाली घटना देखी गई, जब युजवेंद्र चहल की गेंद पर स्टंप्स पर गेंद लगने के बावजूद डेविड वार्नर नाबाद रहे। दूसरी पारी के नौवें ओवर की बात है। चहल ने गेंद फेंकी, डीसी सलामी बल्लेबाज वार्नर पूरी तरह से लाइन से चूक गए और गेंद बैकवर्ड शॉर्ट लेग की ओर जाने से पहले स्टंप्स से टकरा गई। स्टंप की बती जल गई। बेल्स ऊपर से नहीं गिरीं, जिसका मतलब था कि वार्नर आउट नहीं हुए। युजवेंद्र चहल नौंवे ओवर में गेंदबाजी करने उतरे। इस घटना से चहल सदमे में दिखे। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। दोनों टीम के फैंस नाराज भी और खुश भी हैं। दिल्ली कैपिटल्स के लिये मार्श ने बासठ गेंद की पारी में सात छक्के और पांच चौके जमाये जबकि वार्नर ने इकतालीस गेंद में पांच चौके और एक छक्का जड़ा। चहल की गेंद पर वार्नर ने छक्का जड़ा। अगली गेंद को भी लांग ऑफ पर उठा दिया और बटलर डाइव करके कैच लकपने बढ़े, पर गेंद छिटक गयी और मौका उनके हाथ से निकल गया। अंतिम गेंद स्टंप पर लगी और लाइट भी जली, पर गिल्लियां अडिग रहीं जिससे वार्नर नाबाद रहे।
आज हम आपको ऐसी एडल्ट फिल्म एक्ट्रेस के बारे में बताने जा रहे हैं, जो साड़ी पहनकर इन फिल्मों में काम करती हैं। साड़ी पहनकर एडल्ट फिल्मों में काम करने के कारण इस अभिनेत्री के प्रशंसकों की संख्या भारी नंबरों में है। भारत में इस अभिनेत्री के काफी ज्यादा प्रशंसक हैं। एडल्ट फिल्मों में काम करने वाली इस खूबसूरत अभिनेत्री का नाम त्रिया दास है । यह अभिनेत्री अपने बोल्ड अंदाज़ की वजह से पूरी दुनिया भर में प्रसिद्ध है। अपने इस हॉट अंदाज़ के लिए त्रिया के फैंस की संख्या करोड़ों में है । त्रिया की एडल्ट फिल्में देखना लोगों को काफी पसंद है। इंडस्ट्री में त्रिया दास बहुत ही कम समय में अच्छी पहचान बना चुकी है।
आज हम आपको ऐसी एडल्ट फिल्म एक्ट्रेस के बारे में बताने जा रहे हैं, जो साड़ी पहनकर इन फिल्मों में काम करती हैं। साड़ी पहनकर एडल्ट फिल्मों में काम करने के कारण इस अभिनेत्री के प्रशंसकों की संख्या भारी नंबरों में है। भारत में इस अभिनेत्री के काफी ज्यादा प्रशंसक हैं। एडल्ट फिल्मों में काम करने वाली इस खूबसूरत अभिनेत्री का नाम त्रिया दास है । यह अभिनेत्री अपने बोल्ड अंदाज़ की वजह से पूरी दुनिया भर में प्रसिद्ध है। अपने इस हॉट अंदाज़ के लिए त्रिया के फैंस की संख्या करोड़ों में है । त्रिया की एडल्ट फिल्में देखना लोगों को काफी पसंद है। इंडस्ट्री में त्रिया दास बहुत ही कम समय में अच्छी पहचान बना चुकी है।
BEST Bus: मुंबई के दैनिक यात्रियों की सहूलियत के लिए बेस्ट (बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट) सोमवार से दो नए रूट्स पर बस सेवा शुरू करने जा रहा है। बेस्ट के द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार इनमें से एक रूट टी2 इंटरनेशनल एयरपोर्ट से खारघर है, जिसपर कई बसें दौड़ेंगी। वहीं दूसरा रूट सीएसएमटी से बॉम्बे अस्पताल-चर्चगेट स्टेशन फाइनल किया गया है, इनके बीच भी कई बसें चलेंगी। इन दोनों रूट्स पर अभी तक डायरेक्ट बस सेवा नहीं थी। मुंबई में परिवहन सेवाओं का परिचालन करने वाली बेस्ट के प्रवक्ता मनोज वरदे ने इस बस सुविधा की जानकारी देते हुए बताया कि इन बसों के शुरू होने के बाद दोनों मार्गों पर ऑफिस जाने वाले डेली यात्री, रेलवे स्टेशन व एयरपोर्ट जाने वालों के साथ अन्य यात्रियों को फायदा होगा। मनोज वरदे ने बताया कि टी2 एयरपोर्ट से चलने वाली एसी मिनी बसें सप्ताह के सभी दिन चलेंगी। इस रूट पर यात्रियों को हर 90 मिनट के अंतराल पर एक बस मिलेगी। इस बस से वाशी तक सफर करने का टिकट 150 रुपये, सीवुड तक का 175 रुपये, सीबीडी बेलापुर तक का 225 रुपये और खारघर तक सफर करने का टिकट 250 रुपये का होगा। रिंग रूट पर चलने वाली बस सीएसएमटी से बॉम्बे अस्पताल-चर्चगेट स्टेशन के बीच रिंग पैटर्न में चलेगी। यह सीएसएमटी से शुरू होकर महापालिका मार्ग, जिमखाना, मेट्रो सिनेमा, आयकर भवन, चर्चगेट स्टेशन, हुतात्मा चौक होते हुए वापस सीएसएमटी स्टेशन पहुंचेगी। इस नए रूट पर बस का संचालन सुबह से लेकर शाम तक के अलग-अलग व्यस्त समय में होगा। सीएसएमटी से पहली बस सुबह 8. 30 बजे चलेगी। इसके बाद दूसरी बस दोपहर 12. 30 बजे, तीसरी बस शाम 4. 30 बजे और आखिरी बस रात 8. 30 बजे से चलेगी। बेस्ट प्रवक्ता के अनुसार इसके अलावा यात्रियों की मांग को देखते हुए बेस्ट ने मंत्रालय/वाईबी चव्हाण केंद्र से सीएसएमटी के रूट ए-115 पर रोजाना दो अतिरिक्त बसें चलाने का निर्णय लिया है। ये बसें भी सोमवार से शुरू हो जाएंगी।
BEST Bus: मुंबई के दैनिक यात्रियों की सहूलियत के लिए बेस्ट सोमवार से दो नए रूट्स पर बस सेवा शुरू करने जा रहा है। बेस्ट के द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार इनमें से एक रूट टीदो इंटरनेशनल एयरपोर्ट से खारघर है, जिसपर कई बसें दौड़ेंगी। वहीं दूसरा रूट सीएसएमटी से बॉम्बे अस्पताल-चर्चगेट स्टेशन फाइनल किया गया है, इनके बीच भी कई बसें चलेंगी। इन दोनों रूट्स पर अभी तक डायरेक्ट बस सेवा नहीं थी। मुंबई में परिवहन सेवाओं का परिचालन करने वाली बेस्ट के प्रवक्ता मनोज वरदे ने इस बस सुविधा की जानकारी देते हुए बताया कि इन बसों के शुरू होने के बाद दोनों मार्गों पर ऑफिस जाने वाले डेली यात्री, रेलवे स्टेशन व एयरपोर्ट जाने वालों के साथ अन्य यात्रियों को फायदा होगा। मनोज वरदे ने बताया कि टीदो एयरपोर्ट से चलने वाली एसी मिनी बसें सप्ताह के सभी दिन चलेंगी। इस रूट पर यात्रियों को हर नब्बे मिनट के अंतराल पर एक बस मिलेगी। इस बस से वाशी तक सफर करने का टिकट एक सौ पचास रुपयापये, सीवुड तक का एक सौ पचहत्तर रुपयापये, सीबीडी बेलापुर तक का दो सौ पच्चीस रुपयापये और खारघर तक सफर करने का टिकट दो सौ पचास रुपयापये का होगा। रिंग रूट पर चलने वाली बस सीएसएमटी से बॉम्बे अस्पताल-चर्चगेट स्टेशन के बीच रिंग पैटर्न में चलेगी। यह सीएसएमटी से शुरू होकर महापालिका मार्ग, जिमखाना, मेट्रो सिनेमा, आयकर भवन, चर्चगेट स्टेशन, हुतात्मा चौक होते हुए वापस सीएसएमटी स्टेशन पहुंचेगी। इस नए रूट पर बस का संचालन सुबह से लेकर शाम तक के अलग-अलग व्यस्त समय में होगा। सीएसएमटी से पहली बस सुबह आठ. तीस बजे चलेगी। इसके बाद दूसरी बस दोपहर बारह. तीस बजे, तीसरी बस शाम चार. तीस बजे और आखिरी बस रात आठ. तीस बजे से चलेगी। बेस्ट प्रवक्ता के अनुसार इसके अलावा यात्रियों की मांग को देखते हुए बेस्ट ने मंत्रालय/वाईबी चव्हाण केंद्र से सीएसएमटी के रूट ए-एक सौ पंद्रह पर रोजाना दो अतिरिक्त बसें चलाने का निर्णय लिया है। ये बसें भी सोमवार से शुरू हो जाएंगी।
अपने फेस पर मेकअप कर सही लुक लाने के लिए आपको सबसे पहले अपनी स्किन को साफ करना बेहद जरूरी है। यानी कि, मेकअप करने से पहले आप अपने चेहरे को अच्छी तरह साफ कर लें। सफाई हो जाने के बाद चेहरे पर हाइड्रेटिंग क्रीम का इस्तेमाल करें। अगर आप ऐसा करेंगे तो आपको लॉन्ग लास्टिंग मेकअप लुक मिलेगा। क्रीम लगाने के बाद आप 10 मिनट इंतजार करें। उसके बाद फाउंडेशन लगाएं। आप फाउंडेशन का चुनाव अपनी स्किन के हिसाब से लिक्विड या मेट कोई भी फाउंडेशन इस्तेमाल करें बस आपको ध्यान नहीं रखना है कि उसे ज्यादा मात्रा में ना लगे ज्यादा लगाने से आपकी फेस पर लायंस दिखने लगती हैं। आपकी आंखें आपके मेकअप को और शानदार बनाती हैं। इसके लिए आपको आइब्रो हाईलाइट करना होगा। आइब्रो पेंसिल और पाउडर का उपयोग करके आइब्रो को बोल्ड भी करें। आइब्रो हाइलाइट से आपके लुक में चार चांद लग जाएंगे। ग्लिटर आईलाइनर का इस्तेमाल ज्यादा उम्र की महिलाओं को नहीं करना चाहिए। यदि आप 35 से 40 की उम्र के हैं तो ग्लिटर आईलाइनर का यूज बिल्कुल ना करें। अपने सभी प्रोडक्ट को चेक कर लें कि, वह कहीं एक्सपायर तो नहीं हैं। इस तरह के प्रोडक्ट 3 से छह महीने और कुछ 1 से 2 साल में एक्सपायर हो जाते हैं। इनकी पहचान करने के लिए आप स्मैल कर सकते हैं। एक्सपायरी प्रोडक्ट के इस्तेमाल से आपकी स्किन खराब हो सकती है।
अपने फेस पर मेकअप कर सही लुक लाने के लिए आपको सबसे पहले अपनी स्किन को साफ करना बेहद जरूरी है। यानी कि, मेकअप करने से पहले आप अपने चेहरे को अच्छी तरह साफ कर लें। सफाई हो जाने के बाद चेहरे पर हाइड्रेटिंग क्रीम का इस्तेमाल करें। अगर आप ऐसा करेंगे तो आपको लॉन्ग लास्टिंग मेकअप लुक मिलेगा। क्रीम लगाने के बाद आप दस मिनट इंतजार करें। उसके बाद फाउंडेशन लगाएं। आप फाउंडेशन का चुनाव अपनी स्किन के हिसाब से लिक्विड या मेट कोई भी फाउंडेशन इस्तेमाल करें बस आपको ध्यान नहीं रखना है कि उसे ज्यादा मात्रा में ना लगे ज्यादा लगाने से आपकी फेस पर लायंस दिखने लगती हैं। आपकी आंखें आपके मेकअप को और शानदार बनाती हैं। इसके लिए आपको आइब्रो हाईलाइट करना होगा। आइब्रो पेंसिल और पाउडर का उपयोग करके आइब्रो को बोल्ड भी करें। आइब्रो हाइलाइट से आपके लुक में चार चांद लग जाएंगे। ग्लिटर आईलाइनर का इस्तेमाल ज्यादा उम्र की महिलाओं को नहीं करना चाहिए। यदि आप पैंतीस से चालीस की उम्र के हैं तो ग्लिटर आईलाइनर का यूज बिल्कुल ना करें। अपने सभी प्रोडक्ट को चेक कर लें कि, वह कहीं एक्सपायर तो नहीं हैं। इस तरह के प्रोडक्ट तीन से छह महीने और कुछ एक से दो साल में एक्सपायर हो जाते हैं। इनकी पहचान करने के लिए आप स्मैल कर सकते हैं। एक्सपायरी प्रोडक्ट के इस्तेमाल से आपकी स्किन खराब हो सकती है।
पश्चिम बंगाल में मतदाता सुरक्षित नहीं हैं। हमने चुनाव के बाद की हिंसा, आगजनी, लूट, हत्याएं और बलात्कार देखे हैं। पश्चिम बंगाल (West Bengal) के राज्यपाल जगदीप धनखड़ (Governor Jagdeep Dhankhar) ने राज्य में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार निशाना साधा है। राज्य विधानसभा में आज राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने डॉ बीआर अंबेडकर (Dr BR Ambedkar) की प्रतिमा पर पहुंचर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके बाद राज्यपाल ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि पश्चिम बंगाल (West Bengal) की स्थिति इतनी भयावह है कि यहां कानून का शासन नहीं है, यहां केवल शासक का कानून है। पश्चिम बंगाल में मतदाता सुरक्षित नहीं हैं। हमने चुनाव के बाद की हिंसा, आगजनी, लूट, हत्याएं और बलात्कार देखे हैं। धनखड़ ने राज्य सरकार पर राज्यपाल कार्यालय को कमजोर करने का भी आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि मैंने बहुत कोशिश की है कि हर कोई कानून के मुताबिक काम करे। सरकारी अधिकारी कानून के तहत काम करना भूल गए हैं। लेकिन वे नहीं जानते कि गवर्नर हाउस क्या कर सकता है? राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने दावा किया कि राज्य के मुख्य सचिव ने उनका फोन नहीं उठाया। पश्चिम बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष खुद को कानून से ऊपर मान रहे हैं। मैं पूरी तरह हैरान हूं। राज्य के लोगों में डर हैं और संवैधानिक पदों पर आसीन लोग भी राज्यपाल के कार्यक्रम में भाग लेने से हिचकिचा रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने कहा कि राज्यपाल की मंजूरी के बिना 25 से अधिक कुलपति नियुक्त किए गए थे। धनखड़ ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि कैसे पश्चिम बंगाल के जिलाधिकारियों ने पिछले सप्ताह शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक में भाग नहीं लिया। उन्होंने पूछा कि क्या वे किसी व्यक्ति के हुक्म का पालन करने के लिए हैं? राज्यपाल ने यह भी आरोप लगाया कि सीएम ममता बनर्जी के पास संवैधानिक ज्ञान का अभाव है और वह उनके प्रति जवाबदेह हैं।
पश्चिम बंगाल में मतदाता सुरक्षित नहीं हैं। हमने चुनाव के बाद की हिंसा, आगजनी, लूट, हत्याएं और बलात्कार देखे हैं। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने राज्य में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार निशाना साधा है। राज्य विधानसभा में आज राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने डॉ बीआर अंबेडकर की प्रतिमा पर पहुंचर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके बाद राज्यपाल ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि पश्चिम बंगाल की स्थिति इतनी भयावह है कि यहां कानून का शासन नहीं है, यहां केवल शासक का कानून है। पश्चिम बंगाल में मतदाता सुरक्षित नहीं हैं। हमने चुनाव के बाद की हिंसा, आगजनी, लूट, हत्याएं और बलात्कार देखे हैं। धनखड़ ने राज्य सरकार पर राज्यपाल कार्यालय को कमजोर करने का भी आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि मैंने बहुत कोशिश की है कि हर कोई कानून के मुताबिक काम करे। सरकारी अधिकारी कानून के तहत काम करना भूल गए हैं। लेकिन वे नहीं जानते कि गवर्नर हाउस क्या कर सकता है? राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने दावा किया कि राज्य के मुख्य सचिव ने उनका फोन नहीं उठाया। पश्चिम बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष खुद को कानून से ऊपर मान रहे हैं। मैं पूरी तरह हैरान हूं। राज्य के लोगों में डर हैं और संवैधानिक पदों पर आसीन लोग भी राज्यपाल के कार्यक्रम में भाग लेने से हिचकिचा रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने कहा कि राज्यपाल की मंजूरी के बिना पच्चीस से अधिक कुलपति नियुक्त किए गए थे। धनखड़ ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि कैसे पश्चिम बंगाल के जिलाधिकारियों ने पिछले सप्ताह शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक में भाग नहीं लिया। उन्होंने पूछा कि क्या वे किसी व्यक्ति के हुक्म का पालन करने के लिए हैं? राज्यपाल ने यह भी आरोप लगाया कि सीएम ममता बनर्जी के पास संवैधानिक ज्ञान का अभाव है और वह उनके प्रति जवाबदेह हैं।
बॉलीवुड अभिनेत्री क्रिसन परेरा को संयुक्त अरब अमीरात की जेल से रिहा कर दिया गया है. उन्हें कथित तौर पर ड्रग्स मामले में फंसाए जाने के बाद इस महीने की शुरुआत में गिरफ्तार किया गया था. अभिनेत्री ने जेल से बाहर आने के बाद एक नोट साझा किया है. उन्होंने लिखा है कि उसे जेल के अंदर अपने बालों को टाइड डिटर्जेंट से धोना पड़ता था. शौचालय के पानी से कॉफी बनानी पड़ती थी. परेरा ने नोट में अपने समर्थकों को धन्यवाद दिया है. साथ ही उन्होंने लिखा कि मैं इस गंदे खेल का बस मोहरा हूं. अभिनेत्री क्रिसन परेरा ने लिखा है कि मुझे जेल में पेन और पेपर खोजने में 3 सप्ताह का समय लग गया. मैं अपने बालों को टाइड से धोने के लिए मजबूर थी. शौचालय के पानी से मुझे अपने लिए कॉफी बनानी पड़ती थी. मैं बॉलीवुड फिल्में देखती थी, कभी-कभी मेरी आंखों में आंसू आ जाते थे, यह जानकर कि मेरी महत्वाकांक्षा मुझे यहां लेकर आई थी और कभी-कभी मैं हमारी संस्कृति, संगीत और टीवी पर जाने-पहचाने चेहरों को देखकर खुश हो जाती थी. क्रिसन परेरा के भाई ने उनके जेल से बाहर आने को लेकर एक वीडियो किया है जिसमें उसकी मां प्रमिला परेरा कहती हैं, "तुम आजाद हो. यह सुखद आश्चर्य है. " मुंबई के संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) लखमी गौतम ने पूरे मामले पर कहा है कि अभिनेत्री के 48 घंटे के भीतर भारत लौटने की उम्मीद है. परेरा को 1 अप्रैल को शारजाह हवाई अड्डे पर गिरफ्तार किया गया था. मुंबई अपराध शाखा को बाद में पता चला कि एक कुत्ते को लेकर हुए झगड़े के बाद अभिनेत्री को एक बेकरी मालिक ने बदले की भावना से फंसाया था. पुलिस ने बेकरी के मालिक एंथोनी पॉल और एक बैंक में सहायक महाप्रबंधक राजेश बोभाटे को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने क्रिसन परेरा को फंसाने में एंथनी की मदद की थी. शुरुआती जांच में सामने आया था कि कुत्ते को लेकर एंथनी की बहन का अभिनेत्री की मां से झगड़ा हुआ था. दोनों एक ही बिल्डिंग में रहते हैं. पुलिस को संदेह है कि इसी मुद्दे को लेकर अभिनेत्री को कथित तौर पर ड्रग म्यूल बनाया गया था. एंथोनी ने कथित तौर पर राजेश के माध्यम से अभिनेत्री से संपर्क किया, जिसने खुद को प्रतिभा सलाहकार के रूप में पेश किया और उसे शारजाह में एक वेब सीरीज के ऑडिशन के बारे में बताया. पुलिस ने कहा कि उसने उसे एक ट्रॉफी ले जाने के लिए भी कहा, जिसमें उसने ड्रग्स छिपाई थी. उसे बताया गया कि स्मृति चिन्ह एक ऑडिशन प्रॉप था. पुलिस ने कहा, "उसने गांजा और पोस्ता दाना छिपाकर ट्रॉफी दी, ताकि उसे वहां पकड़ा जा सके. उसके उतरने के बाद उसने शारजाह हवाईअड्डे पर फोन किया और अधिकारियों को बताया कि वह ड्रग्स ले रही थी. " इन लोगों ने परेरा के ड्रग्स के साथ पकड़े जाने के बाद उनकी रिहाई के लिए उनके परिवार से 80 लाख रुपये की मांग की. पुलिस ने जांच रिपोर्ट विदेश मंत्रालय को भेजी थी. मंत्रालय ने इसके बाद यूएई सरकार और ड्रग्स इंफॉर्मेशन एजेंसी के साथ सूचना साझा की. पुलिस ने कहा कि एंथनी और राजेश ने इसी तरह कम से कम पांच लोगों को फंसाने की साजिश रची थी.
बॉलीवुड अभिनेत्री क्रिसन परेरा को संयुक्त अरब अमीरात की जेल से रिहा कर दिया गया है. उन्हें कथित तौर पर ड्रग्स मामले में फंसाए जाने के बाद इस महीने की शुरुआत में गिरफ्तार किया गया था. अभिनेत्री ने जेल से बाहर आने के बाद एक नोट साझा किया है. उन्होंने लिखा है कि उसे जेल के अंदर अपने बालों को टाइड डिटर्जेंट से धोना पड़ता था. शौचालय के पानी से कॉफी बनानी पड़ती थी. परेरा ने नोट में अपने समर्थकों को धन्यवाद दिया है. साथ ही उन्होंने लिखा कि मैं इस गंदे खेल का बस मोहरा हूं. अभिनेत्री क्रिसन परेरा ने लिखा है कि मुझे जेल में पेन और पेपर खोजने में तीन सप्ताह का समय लग गया. मैं अपने बालों को टाइड से धोने के लिए मजबूर थी. शौचालय के पानी से मुझे अपने लिए कॉफी बनानी पड़ती थी. मैं बॉलीवुड फिल्में देखती थी, कभी-कभी मेरी आंखों में आंसू आ जाते थे, यह जानकर कि मेरी महत्वाकांक्षा मुझे यहां लेकर आई थी और कभी-कभी मैं हमारी संस्कृति, संगीत और टीवी पर जाने-पहचाने चेहरों को देखकर खुश हो जाती थी. क्रिसन परेरा के भाई ने उनके जेल से बाहर आने को लेकर एक वीडियो किया है जिसमें उसकी मां प्रमिला परेरा कहती हैं, "तुम आजाद हो. यह सुखद आश्चर्य है. " मुंबई के संयुक्त पुलिस आयुक्त लखमी गौतम ने पूरे मामले पर कहा है कि अभिनेत्री के अड़तालीस घंटाटे के भीतर भारत लौटने की उम्मीद है. परेरा को एक अप्रैल को शारजाह हवाई अड्डे पर गिरफ्तार किया गया था. मुंबई अपराध शाखा को बाद में पता चला कि एक कुत्ते को लेकर हुए झगड़े के बाद अभिनेत्री को एक बेकरी मालिक ने बदले की भावना से फंसाया था. पुलिस ने बेकरी के मालिक एंथोनी पॉल और एक बैंक में सहायक महाप्रबंधक राजेश बोभाटे को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने क्रिसन परेरा को फंसाने में एंथनी की मदद की थी. शुरुआती जांच में सामने आया था कि कुत्ते को लेकर एंथनी की बहन का अभिनेत्री की मां से झगड़ा हुआ था. दोनों एक ही बिल्डिंग में रहते हैं. पुलिस को संदेह है कि इसी मुद्दे को लेकर अभिनेत्री को कथित तौर पर ड्रग म्यूल बनाया गया था. एंथोनी ने कथित तौर पर राजेश के माध्यम से अभिनेत्री से संपर्क किया, जिसने खुद को प्रतिभा सलाहकार के रूप में पेश किया और उसे शारजाह में एक वेब सीरीज के ऑडिशन के बारे में बताया. पुलिस ने कहा कि उसने उसे एक ट्रॉफी ले जाने के लिए भी कहा, जिसमें उसने ड्रग्स छिपाई थी. उसे बताया गया कि स्मृति चिन्ह एक ऑडिशन प्रॉप था. पुलिस ने कहा, "उसने गांजा और पोस्ता दाना छिपाकर ट्रॉफी दी, ताकि उसे वहां पकड़ा जा सके. उसके उतरने के बाद उसने शारजाह हवाईअड्डे पर फोन किया और अधिकारियों को बताया कि वह ड्रग्स ले रही थी. " इन लोगों ने परेरा के ड्रग्स के साथ पकड़े जाने के बाद उनकी रिहाई के लिए उनके परिवार से अस्सी लाख रुपये की मांग की. पुलिस ने जांच रिपोर्ट विदेश मंत्रालय को भेजी थी. मंत्रालय ने इसके बाद यूएई सरकार और ड्रग्स इंफॉर्मेशन एजेंसी के साथ सूचना साझा की. पुलिस ने कहा कि एंथनी और राजेश ने इसी तरह कम से कम पांच लोगों को फंसाने की साजिश रची थी.
दिल्ली की रोहिणी कोर्ट ने सोमवार को कंझावला मौत मामले में सभी छह आरोपियों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में दे दिया। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में आरोपियों की पुलिस रिमांड नहीं मांगी थी। कंझावला मामले के छह आरोपियों की रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें सोमवार को रोहिणी अदालत में पेश किया गया। जहां से सभी आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। रोहिणी स्थित मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट सान्या दलाल की अदालत ने कहा कि पुलिस की तरफ से आग्रह किया गया था कि आरोयपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया जाए। अभियोजन पक्ष ने अदालत में कहा कि पूछताछ के दौरान आरोपियों ने माना कि उन्हें पता था कि पीड़िता का शव पहियों में फंसा है। हालांकि, अतिरिक्त सरकारी वकील ने उन दो आरोपियों की पहचान का खुलासा नहीं किया, जो यह देखने के लिए कार से नीचे उतरे थे कि पहियों के नीचे क्या है। जांच अधिकारी ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज प्राप्त किए जा रहे हैं और उस रास्ते का पता लगाया जा रहा है, जिससे कार गुजरी थी। करीब 20 गवाहों ने अपने बयान दर्ज कराए हैं। एक नया गवाह भी जांच में शामिल हुआ है, जो दुर्घटनास्थल से करीब 100 मीटर की दूरी पर था। पुलिस ने इस मामले में पिछले सोमवार को 26 वर्षीय दीपक खन्ना, 25 वर्षीय अमित खन्ना, 27 वर्षीय कृष्ण, 26 वर्षीय मिथुन और मनोज मित्तल को पहले गिरफ्तार किया था। बाद में, उन्होंने शुक्रवार को आशुतोष को गिरफ्तार किया। एक अन्य आरोपी अंकुश खन्ना ने शुक्रवार को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया और उसे शनिवार को जमानत मिल गई थी। वहीं दूसरी ओर अमन विहार इलाके में स्थित अंजलि के घर को चोरों ने निशाना बना लिया। ताला तोड़कर घर से एलईडी टीवी और बर्तन आदि पर हाथ साफ कर दिया। पुलिस ने सूचना मिलने पर एफआईआर दर्ज कर ली है। अभी तक चोरों की पहचान नहीं हो सकी है। सुल्तानपुरी हादसे की शिकार अंजलि का परिवार वाई ब्लॉक मंगोलपुरी इलाके में रहता है। अंजलि की मां रेखा ने अमन विहार के करण विहार इलाके में मकान खरीदा है, लेकिन किडनी की बीमारी से परेशान रेखा देवी अपने मायके में ही रहती हैं। 31 दिसंबर को घटना वाली रात अंजलि भी यहीं से रोहिणी सेक्टर 23 स्थित होटल में गई थी। इसकी वजह से करन विहार स्थित अंजलि के घर पर ताला लगा हुआ था। सोमवार सुबह जब पड़ोसियों ने देखा तो घर की कुंडी टूटी हुई थी। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची। जांच में मालूम हुआ कि एलईडी टीवी और बर्तन आदि गायब हैं। पुलिस अधिकारी ने बताया कि मौके से चार-पांच तरह के फिंगर प्रिंट उठाए गए हैं। सीसीटीवी कैमरे की फुटेज भी खंगाली जा रही है। वहीं, घटना के बाद अंजलि के परिजन मकान से बचा हुआ सामान निकालकर दूसरी सुरक्षित जगह रखने में जुट गए हैं। परिजनों ने अंजलि की मौत के मामले में आरोपियों पर ही चोरी का आरोप लगाया है। सोमवार को अंजलि के परिजनों और रिश्तेदारों ने थाने के सामने प्रदर्शन किया। उन्होंने पूरे मामले की जांच हत्या की धारा में करने की मांग की। उनका कहना था कि जब आरोपी यह कह रहे हैं कि अंजलि के टायर में फंसने की जानकारी उन्हें थी, तब हत्या का मामला क्यों नहीं दर्ज किया जा रहा। उन्होंने एफआईआर में हत्या की धारा जोड़े जाने तक प्रदर्शन करते रहने की बात कही है।
दिल्ली की रोहिणी कोर्ट ने सोमवार को कंझावला मौत मामले में सभी छह आरोपियों को चौदह दिनों की न्यायिक हिरासत में दे दिया। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में आरोपियों की पुलिस रिमांड नहीं मांगी थी। कंझावला मामले के छह आरोपियों की रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें सोमवार को रोहिणी अदालत में पेश किया गया। जहां से सभी आरोपियों को चौदह दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। रोहिणी स्थित मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट सान्या दलाल की अदालत ने कहा कि पुलिस की तरफ से आग्रह किया गया था कि आरोयपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया जाए। अभियोजन पक्ष ने अदालत में कहा कि पूछताछ के दौरान आरोपियों ने माना कि उन्हें पता था कि पीड़िता का शव पहियों में फंसा है। हालांकि, अतिरिक्त सरकारी वकील ने उन दो आरोपियों की पहचान का खुलासा नहीं किया, जो यह देखने के लिए कार से नीचे उतरे थे कि पहियों के नीचे क्या है। जांच अधिकारी ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज प्राप्त किए जा रहे हैं और उस रास्ते का पता लगाया जा रहा है, जिससे कार गुजरी थी। करीब बीस गवाहों ने अपने बयान दर्ज कराए हैं। एक नया गवाह भी जांच में शामिल हुआ है, जो दुर्घटनास्थल से करीब एक सौ मीटर की दूरी पर था। पुलिस ने इस मामले में पिछले सोमवार को छब्बीस वर्षीय दीपक खन्ना, पच्चीस वर्षीय अमित खन्ना, सत्ताईस वर्षीय कृष्ण, छब्बीस वर्षीय मिथुन और मनोज मित्तल को पहले गिरफ्तार किया था। बाद में, उन्होंने शुक्रवार को आशुतोष को गिरफ्तार किया। एक अन्य आरोपी अंकुश खन्ना ने शुक्रवार को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया और उसे शनिवार को जमानत मिल गई थी। वहीं दूसरी ओर अमन विहार इलाके में स्थित अंजलि के घर को चोरों ने निशाना बना लिया। ताला तोड़कर घर से एलईडी टीवी और बर्तन आदि पर हाथ साफ कर दिया। पुलिस ने सूचना मिलने पर एफआईआर दर्ज कर ली है। अभी तक चोरों की पहचान नहीं हो सकी है। सुल्तानपुरी हादसे की शिकार अंजलि का परिवार वाई ब्लॉक मंगोलपुरी इलाके में रहता है। अंजलि की मां रेखा ने अमन विहार के करण विहार इलाके में मकान खरीदा है, लेकिन किडनी की बीमारी से परेशान रेखा देवी अपने मायके में ही रहती हैं। इकतीस दिसंबर को घटना वाली रात अंजलि भी यहीं से रोहिणी सेक्टर तेईस स्थित होटल में गई थी। इसकी वजह से करन विहार स्थित अंजलि के घर पर ताला लगा हुआ था। सोमवार सुबह जब पड़ोसियों ने देखा तो घर की कुंडी टूटी हुई थी। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची। जांच में मालूम हुआ कि एलईडी टीवी और बर्तन आदि गायब हैं। पुलिस अधिकारी ने बताया कि मौके से चार-पांच तरह के फिंगर प्रिंट उठाए गए हैं। सीसीटीवी कैमरे की फुटेज भी खंगाली जा रही है। वहीं, घटना के बाद अंजलि के परिजन मकान से बचा हुआ सामान निकालकर दूसरी सुरक्षित जगह रखने में जुट गए हैं। परिजनों ने अंजलि की मौत के मामले में आरोपियों पर ही चोरी का आरोप लगाया है। सोमवार को अंजलि के परिजनों और रिश्तेदारों ने थाने के सामने प्रदर्शन किया। उन्होंने पूरे मामले की जांच हत्या की धारा में करने की मांग की। उनका कहना था कि जब आरोपी यह कह रहे हैं कि अंजलि के टायर में फंसने की जानकारी उन्हें थी, तब हत्या का मामला क्यों नहीं दर्ज किया जा रहा। उन्होंने एफआईआर में हत्या की धारा जोड़े जाने तक प्रदर्शन करते रहने की बात कही है।
0x लैब्स, एक विकेन्द्रीकृत एक्सचेंज इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रदाता, ने ग्रेलॉक पार्टनर्स, फोर्ब्स के नेतृत्व में सीरीज बी फंडिंग राउंड में $70 मिलियन का पर्याप्त फंडिंग हासिल किया है। की सूचना दी मंगलवार, समाचार के स्रोत के रूप में। रिपोर्ट के अनुसार, राउंड में प्रतिभागियों में NFT मार्केटप्लेस OpenSea, Pantera Capital, Jump Crypto और Jared Leto शामिल थे। कंपनी के मौजूदा मूल्यांकन का खुलासा नहीं किया गया है। कंपनी ने हाल ही में अपने जल्द-से-लॉन्च होने वाले एनएफटी प्लेटफॉर्म 'कॉइनबेस एनएफटी' के लिए बुनियादी ढांचा प्रदान करने के लिए क्रिप्टो एक्सचेंज कॉइनबेस के साथ भागीदारी की है। उस समय, घोषणा ने अपने ZRX टोकन मूल्य को 67% तक बढ़ाकर $ 1.18 के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंचा दिया। प्रेस समय में, टोकन था व्यापार $0.782 पर, पिछले दिन से 2.55% अधिक। अपनी भविष्य की विकास योजनाओं के बारे में बताते हुए, 0x लैब्स के सह-संस्थापक और सह-सीईओ विल वॉरेन ने फोर्ब्स को बतायाः
शून्यx लैब्स, एक विकेन्द्रीकृत एक्सचेंज इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रदाता, ने ग्रेलॉक पार्टनर्स, फोर्ब्स के नेतृत्व में सीरीज बी फंडिंग राउंड में सत्तर डॉलर मिलियन का पर्याप्त फंडिंग हासिल किया है। की सूचना दी मंगलवार, समाचार के स्रोत के रूप में। रिपोर्ट के अनुसार, राउंड में प्रतिभागियों में NFT मार्केटप्लेस OpenSea, Pantera Capital, Jump Crypto और Jared Leto शामिल थे। कंपनी के मौजूदा मूल्यांकन का खुलासा नहीं किया गया है। कंपनी ने हाल ही में अपने जल्द-से-लॉन्च होने वाले एनएफटी प्लेटफॉर्म 'कॉइनबेस एनएफटी' के लिए बुनियादी ढांचा प्रदान करने के लिए क्रिप्टो एक्सचेंज कॉइनबेस के साथ भागीदारी की है। उस समय, घोषणा ने अपने ZRX टोकन मूल्य को सरसठ% तक बढ़ाकर एक दशमलव अट्ठारह डॉलर के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंचा दिया। प्रेस समय में, टोकन था व्यापार शून्य दशमलव सात सौ बयासी डॉलर पर, पिछले दिन से दो.पचपन% अधिक। अपनी भविष्य की विकास योजनाओं के बारे में बताते हुए, शून्यx लैब्स के सह-संस्थापक और सह-सीईओ विल वॉरेन ने फोर्ब्स को बतायाः
रूस की बड़ी तेल उत्पादक कंपनी के चेयरमैन रवील मगनोव की गुरुवार को मॉस्को के एक हॉस्पिटल की खिड़की से गिरने के बाद मौत हो गई है. कंपनी ने उनकी मौत की पुष्टि की है. रूस की बड़ी तेल उत्पादक कंपनी के चेयरमैन रवील मगनोव की गुरुवार को मॉस्को के एक हॉस्पिटल की खिड़की से गिरने के बाद मौत हो गई है. कंपनी ने उनकी मौत की पुष्टि की है. कंपनी ने उनकी मौत पर कहा कि, 'मगनोव की गंभीर बीमारी के बाद मौत हो गई है.' वहीं रूसी मीडिया की माने तो मगनोव का इलाज मॉस्को की सेंट्रल क्लिनिकल हॉस्पिटल में किया जा रहा था, जहां गंभीर चोटों की वजह से उनकी जान गई है. मगनोव से पहले भी कई हाई प्रोफाइल बिजनेसमैनों की रूस में संदिग्ध मौत हो चुकी है. जांच अधिकारियों का कहना है कि वह घटनास्थल का मुआयना कर रहे हैं कि आखिर मगनोव की मौत कैसे हुई. टास न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के मुताबिक जानकारी दी है कि मगनोव गुरुवार सुबह हॉस्पिटल की 6ठीं मंजिल पर बनी खिड़की से गिर गए थे. बाद में मिली जानकारी के अनुसार सूत्रों ने बताया कि उन्होंने खुदकुशी की है. जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया था तब लुकोइल की कंपनी ने दोनों देशों के बीच में संघर्ष खत्म करने का अह्वान किया था, और इस 'त्रासदी' से पीड़ित लोगों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की थी. इसके करोड़पति प्रेसिडेंट वैगिट अलेकपेरो ने अप्रैल में पद से इस्तीफा दे दिया था जब ब्रिटेन ने उनपर प्रतिबंध लगाए थे. बीते दिनों रूस के कई बड़े लोगों की संदिग्ध हालातों में मौत हुई है. अप्रैल में सेरगेई प्रोटोसेन्या के मैनेजर और करोड़पति नोवाटेक की लाश उनकी पत्नी और बेटी के साथ स्पेनिश विला में पड़ी मिली थी. अप्रैल में ही गैजप्रोमबैंक के पूर्व वाइस प्रेसिडेंट व्लादिस्लाव अवायेव की लाश भी इनकी पत्नी और बेटी के साथ इनके मॉस्को के फ्लैट में मिली थी. वहीं मई में लुकोइल के पूर्व टायकून एलेक्सजेंडर सुबोटिन की हार्ट फेल होने की वजह से मौत हुई थी. बताया गया था कि उन्होंने अल्टरनेटिव के तौर पर एक जादूगर से ट्रीटमेंट लिया था. लुकोईल रूस की टॉप कंपनियों में शुमार है. उन्होंने अपने स्टेटमेंट में कहा कि यह मगनोव की वजह से ही संभव हो पाया कि लुकोइल दुनिा की सबसे बड़ी ऊर्जा कंपनियों में शुमार हुई है. उन्होंने एक प्राइवेट ऑइल कंपनी के लिए 1993 में काम शुरु किया था और 2 साल पहले उन्हें चेयरमैन बनाया गया था. उन्हें लाइफटाइम अचीवमेंट का अवार्ड भी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन से मिला था.
रूस की बड़ी तेल उत्पादक कंपनी के चेयरमैन रवील मगनोव की गुरुवार को मॉस्को के एक हॉस्पिटल की खिड़की से गिरने के बाद मौत हो गई है. कंपनी ने उनकी मौत की पुष्टि की है. रूस की बड़ी तेल उत्पादक कंपनी के चेयरमैन रवील मगनोव की गुरुवार को मॉस्को के एक हॉस्पिटल की खिड़की से गिरने के बाद मौत हो गई है. कंपनी ने उनकी मौत की पुष्टि की है. कंपनी ने उनकी मौत पर कहा कि, 'मगनोव की गंभीर बीमारी के बाद मौत हो गई है.' वहीं रूसी मीडिया की माने तो मगनोव का इलाज मॉस्को की सेंट्रल क्लिनिकल हॉस्पिटल में किया जा रहा था, जहां गंभीर चोटों की वजह से उनकी जान गई है. मगनोव से पहले भी कई हाई प्रोफाइल बिजनेसमैनों की रूस में संदिग्ध मौत हो चुकी है. जांच अधिकारियों का कहना है कि वह घटनास्थल का मुआयना कर रहे हैं कि आखिर मगनोव की मौत कैसे हुई. टास न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के मुताबिक जानकारी दी है कि मगनोव गुरुवार सुबह हॉस्पिटल की छःठीं मंजिल पर बनी खिड़की से गिर गए थे. बाद में मिली जानकारी के अनुसार सूत्रों ने बताया कि उन्होंने खुदकुशी की है. जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया था तब लुकोइल की कंपनी ने दोनों देशों के बीच में संघर्ष खत्म करने का अह्वान किया था, और इस 'त्रासदी' से पीड़ित लोगों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की थी. इसके करोड़पति प्रेसिडेंट वैगिट अलेकपेरो ने अप्रैल में पद से इस्तीफा दे दिया था जब ब्रिटेन ने उनपर प्रतिबंध लगाए थे. बीते दिनों रूस के कई बड़े लोगों की संदिग्ध हालातों में मौत हुई है. अप्रैल में सेरगेई प्रोटोसेन्या के मैनेजर और करोड़पति नोवाटेक की लाश उनकी पत्नी और बेटी के साथ स्पेनिश विला में पड़ी मिली थी. अप्रैल में ही गैजप्रोमबैंक के पूर्व वाइस प्रेसिडेंट व्लादिस्लाव अवायेव की लाश भी इनकी पत्नी और बेटी के साथ इनके मॉस्को के फ्लैट में मिली थी. वहीं मई में लुकोइल के पूर्व टायकून एलेक्सजेंडर सुबोटिन की हार्ट फेल होने की वजह से मौत हुई थी. बताया गया था कि उन्होंने अल्टरनेटिव के तौर पर एक जादूगर से ट्रीटमेंट लिया था. लुकोईल रूस की टॉप कंपनियों में शुमार है. उन्होंने अपने स्टेटमेंट में कहा कि यह मगनोव की वजह से ही संभव हो पाया कि लुकोइल दुनिा की सबसे बड़ी ऊर्जा कंपनियों में शुमार हुई है. उन्होंने एक प्राइवेट ऑइल कंपनी के लिए एक हज़ार नौ सौ तिरानवे में काम शुरु किया था और दो साल पहले उन्हें चेयरमैन बनाया गया था. उन्हें लाइफटाइम अचीवमेंट का अवार्ड भी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन से मिला था.
टीचर्स डे के अवसर पर क्रांतिधरा मेरठ के शिक्षण संस्थानों में सांस्कृतिक आयोजन हुए। स्कूलों, कॉलेजों में शिक्षक सम्मान समारोहों का आयोजन हुआ। छात्रों ने अपने टीचर्स के सम्मान में आयोजन किए। तस्वीरों में देखिए मेरठ में कहां-कहां हुआ शिक्षकों का सम्मान। जिला प्रशासन की ओर से भी इस अवसर पर शिक्षक सम्मान समारोह मनाया गया। राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद उत्तर प्रदेश लखनऊ द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय सूचना और संचार प्रौद्योगिकी आधारित कक्षा शिक्षण प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन हेतु श्रीमती राजरानी शर्मा सहायक अध्यापक लूपुर बक्सर एस आर जी नीलम पंकज सहायक अध्यापक स्मिता, निज बुल निशा, वसीम को डायट प्राचार्य द्वारा सम्मानित किया गया तथा डायट प्रवक्ता मनजीत को पाठ योजना के लिए समानित किया गया। चौधरी चरण सिंह विवि में आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह में इन शिक्षकों को किया गया सम्मानित प्रोफेसर राकेश गुप्ता, प्रोफेसर वाई विमला, प्रोफेसर मृदुल गुप्ता, प्रोफेसर हरे कृष्णा, प्रोफेसर नवीनचंद्र लोहानी, प्रोफेसर वीरपाल सिंह, प्रोफेसर योगेंद्र सिंह ,विजय जायसवाल, प्रोफेसर एस एस गौरव, प्रोफेसर भूपेंद्र सिंह, प्रोफेसर एसके दत्ता, प्रोफेसर आर के सोनी, ऑफिसर संजय कुमार भारद्वाज, प्रोफेसर रूपनारायण, प्रोफेसर असलम जमशेद पुरी, प्रोफेसर जितेंद्र ढाका, प्रोफेसर आराधना गुप्ता, प्रोफेसर प्रतिभा त्यागी, प्रोफेसर संजीव शर्मा, प्रोफेसर संजय कुमार, प्रोफेसर जगबीर भारद्वाज, प्रोफेसर बिंदु शर्मा, प्रोफेसर अतवीर सिंह, डॉक्टर अंजली मित्तल, डॉ एमके जैन को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की संयोजक प्रो॰बिंदु शर्मा रहीं। कार्यक्रम का संचालन डॉ वंदना ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर नीलू जैन गुप्ता ने किया। इस अवसर पर कुलसचिव धीरेंद्र कुमार, प्रो॰ योगेंद्र सिंह, प्रो॰ संजय भारद्वाज सहित विश्वविद्यालय के सभी शिक्षक उपस्थित रहे। चौधरी केहर सिंह एजुकेशनल ट्रस्ट,बडौत द्वारा शिक्षक सम्मान समारोह मेडिसिटी हॉस्पिटल परिसर में स्थित सभागार में हुआ। जिसमें जनपद बागपत,मेरठ,गाजियाबाद,हापुड़,बुलंदशहर,गौतमबुद्ध नगर,सहारनपुर शामली व मुजफ्फरनगर की विभिन्न शिक्षण संस्थाओं में कार्यरत रचनात्मक, सृजनशील व कर्तव्यनिष्ट शिक्षकों को सम्मानित होने का अवसर प्राप्त हुआ। मेरठ से 6 शिक्षकों को मतीन अंसारी, कौशल जहां, राजरानी शर्मा, प्रतिभा शिवाली जयसवाल, कविंदर सिंह को डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन अवार्ड से तथा मेजर ध्यानचंद सम्मान से सम्मानित किया गया। हिंदी विभाग, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में सम्मान समारोह हुआ। विभागाध्यक्ष प्रो॰ नवीन चन्द्र लोहनी ने कहा कि विद्यार्थियों को समय का महत्व समझना चाहिए। डॉ. प्रवीण कटारिया ने कहा कि शिक्षक और विद्यार्थी के एक दूसरे के पूरक है। डॉ. अंजू ने कहा कि अध्यापक वह व्यक्तित्व होता है जो अपने छात्र की सफलता से प्रसन्न होता हैं। डॉ. आरती राणा ने कहा कि शिक्षक छात्र के संस्कारों को मजबूत बनाता है और जीवन पथ में आने वाली रूकावटों के प्रति छात्रों के मजबूत व्यक्तित्व का विकास करता हैं। छात्र निकुंज कुमार, पूजा यादव, प्रियांश, शिवम, शिवानी पांचाल, शिवानी, राधा, प्रियंका कुशवाह, प्रिंसी, शौर्य उपस्थित रहें। This website follows the DNPA Code of Ethics.
टीचर्स डे के अवसर पर क्रांतिधरा मेरठ के शिक्षण संस्थानों में सांस्कृतिक आयोजन हुए। स्कूलों, कॉलेजों में शिक्षक सम्मान समारोहों का आयोजन हुआ। छात्रों ने अपने टीचर्स के सम्मान में आयोजन किए। तस्वीरों में देखिए मेरठ में कहां-कहां हुआ शिक्षकों का सम्मान। जिला प्रशासन की ओर से भी इस अवसर पर शिक्षक सम्मान समारोह मनाया गया। राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद उत्तर प्रदेश लखनऊ द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय सूचना और संचार प्रौद्योगिकी आधारित कक्षा शिक्षण प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन हेतु श्रीमती राजरानी शर्मा सहायक अध्यापक लूपुर बक्सर एस आर जी नीलम पंकज सहायक अध्यापक स्मिता, निज बुल निशा, वसीम को डायट प्राचार्य द्वारा सम्मानित किया गया तथा डायट प्रवक्ता मनजीत को पाठ योजना के लिए समानित किया गया। चौधरी चरण सिंह विवि में आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह में इन शिक्षकों को किया गया सम्मानित प्रोफेसर राकेश गुप्ता, प्रोफेसर वाई विमला, प्रोफेसर मृदुल गुप्ता, प्रोफेसर हरे कृष्णा, प्रोफेसर नवीनचंद्र लोहानी, प्रोफेसर वीरपाल सिंह, प्रोफेसर योगेंद्र सिंह ,विजय जायसवाल, प्रोफेसर एस एस गौरव, प्रोफेसर भूपेंद्र सिंह, प्रोफेसर एसके दत्ता, प्रोफेसर आर के सोनी, ऑफिसर संजय कुमार भारद्वाज, प्रोफेसर रूपनारायण, प्रोफेसर असलम जमशेद पुरी, प्रोफेसर जितेंद्र ढाका, प्रोफेसर आराधना गुप्ता, प्रोफेसर प्रतिभा त्यागी, प्रोफेसर संजीव शर्मा, प्रोफेसर संजय कुमार, प्रोफेसर जगबीर भारद्वाज, प्रोफेसर बिंदु शर्मा, प्रोफेसर अतवीर सिंह, डॉक्टर अंजली मित्तल, डॉ एमके जैन को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की संयोजक प्रो॰बिंदु शर्मा रहीं। कार्यक्रम का संचालन डॉ वंदना ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर नीलू जैन गुप्ता ने किया। इस अवसर पर कुलसचिव धीरेंद्र कुमार, प्रो॰ योगेंद्र सिंह, प्रो॰ संजय भारद्वाज सहित विश्वविद्यालय के सभी शिक्षक उपस्थित रहे। चौधरी केहर सिंह एजुकेशनल ट्रस्ट,बडौत द्वारा शिक्षक सम्मान समारोह मेडिसिटी हॉस्पिटल परिसर में स्थित सभागार में हुआ। जिसमें जनपद बागपत,मेरठ,गाजियाबाद,हापुड़,बुलंदशहर,गौतमबुद्ध नगर,सहारनपुर शामली व मुजफ्फरनगर की विभिन्न शिक्षण संस्थाओं में कार्यरत रचनात्मक, सृजनशील व कर्तव्यनिष्ट शिक्षकों को सम्मानित होने का अवसर प्राप्त हुआ। मेरठ से छः शिक्षकों को मतीन अंसारी, कौशल जहां, राजरानी शर्मा, प्रतिभा शिवाली जयसवाल, कविंदर सिंह को डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन अवार्ड से तथा मेजर ध्यानचंद सम्मान से सम्मानित किया गया। हिंदी विभाग, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में सम्मान समारोह हुआ। विभागाध्यक्ष प्रो॰ नवीन चन्द्र लोहनी ने कहा कि विद्यार्थियों को समय का महत्व समझना चाहिए। डॉ. प्रवीण कटारिया ने कहा कि शिक्षक और विद्यार्थी के एक दूसरे के पूरक है। डॉ. अंजू ने कहा कि अध्यापक वह व्यक्तित्व होता है जो अपने छात्र की सफलता से प्रसन्न होता हैं। डॉ. आरती राणा ने कहा कि शिक्षक छात्र के संस्कारों को मजबूत बनाता है और जीवन पथ में आने वाली रूकावटों के प्रति छात्रों के मजबूत व्यक्तित्व का विकास करता हैं। छात्र निकुंज कुमार, पूजा यादव, प्रियांश, शिवम, शिवानी पांचाल, शिवानी, राधा, प्रियंका कुशवाह, प्रिंसी, शौर्य उपस्थित रहें। This website follows the DNPA Code of Ethics.
वेदों में भगवान् विश्वकर्मा : विनोदकुमार विश्वकर्मा 'विमल', सन्दर्भः विश्वकर्मा पूजा, विनोदकुमार विश्वकर्मा 'विमल', काठमांडू , 17 सेप्टेम्बर । सृष्टि के आरंभ से ही भगवान् विश्वकर्मा सर्वपूज्य रहे हैंस जैसा कि उपलब्ध सभी वेदों, धर्म-ग्रन्थों, पुराणों, उपनिषदों आदि अनेक पुस्तकों में देखने को मिलता है । इसका विस्तार न होने का कारण मात्र सामाजिक अशिक्षा है । भगवान् विश्वकर्मा के सृष्टि निर्माता होने के पर्याप्त प्रमाण वेदों में मिलते हैं । ब्रह्मा उपनिषद् के तैत्तेरीय श्रुति के अनुसार - भगवान् विश्वकर्मा सम्पूर्ण जगत् के उत्पन्न करने वाले जगत्पिता हैं । उन्हीं से सर्वसृष्टि उत्पन्न हुई है । सम्पूर्ण लोक के जीव सिद्ध, किन्नर इन सबके पालन करने वाले पुराण पुरुष भगवान् विश्वकर्मा हैं । विराट रूप भगवान् विश्वकर्मा सर्वत्र व्यापक हैं जिनसे ब्रह्मा, रूद्र, विष्णु, शतमुख और देवता मुनि इत्यादि उत्पन्न हुए हैं । विश्व देवता, आठो वसु, पितर, गन्धर्व सम्पूर्ण लोक भगवान् विश्वकर्मा से उत्पन्न हुए हैं । यजुर्वेद अध्याय ३१, मंत्र १७ के अनुसार भगवान् विश्वकर्मा ने पृथ्वी, अग्नि, जल, आकाश और वायु की रचना की है । आविष्कार एवं निर्माण कार्यों के सन्दर्भ में इन्द्रपुरी, यमपुरी, वरुणपुरी, कुबेरपुरी, पाण्डवपुरी, सुदामापुरी, शिवमण्डलपुरी आदि का निर्माण भगवान विश्वकर्मा के द्वारा किया गया है । पुष्पक विमान का निर्माण तथा सभी देवों के भवन और उनके दैनिक उपयोगी होने वाले वस्तुएं भी इनके द्वारा ही बनाया गया है । कर्ण का कुण्डल, विष्णु भगवान् का सुदर्शन चक्र, शंकर भगवान् का त्रिशूल और यमराज का कालदण्ड इत्यादि वस्तुओं का निर्माण भगवान् विश्वकर्मा ने ही किया है । देवगुरु बृहस्पति की भगिनी भुवना (महर्षि अंगीरा की बेटी) के पुत्र विश्वकर्मा की वंश परंपरा अत्यंत वृद्ध है । स्कन्दपुराण के नागर खण्ड में भगवान् विश्वकर्मा के वंशजों की चर्चा की गई है । ब्रह्मस्वरूप विराट विश्वकर्मा पंचमुख हैं । विश्वकर्मा के पांच मुखों से पांच ब्र्राह्मण उत्पन्न हुए हैं । उनके नाम हैं- मनु, मय, त्वष्टा, शिल्पी और दैवज्ञ । सानग ऋषि से 'मनु' उत्पन्न हुए । मनु सबसे ज्येष्ठ हैं । ये लौह कर्म करते थे । लोहे के शस्त्र बनाते थे, और पांचों जातियों को आयुध देते थे । इनकी सन्तान लौहशिल्प कर्म करते हैं । अर्थात् इनके वंशज लोहकार के रूप में जाने जाते हैं । लोहार जाति के लोग मनु की सन्तान हंै । अतः वे उस्ताद कहलाते हैं । सनातन ऋषि से 'मय' उत्पन्न हुए । ये काष्ठ शिल्प कर्म करते थे । ये काष्ठशिल्प के अधिपति हैं । इनकी संतानें, पुत्र, पौत्रादि (बरही या बढ़ई) काष्ठ शिल्प कर्म करते चले आ रहे हैं । अहभून ऋषि से 'त्वष्टा' उत्पन्न हुए । इनका ताम्रशिल्प कर्म है और यह ताम्रशिल्प के अधिपति हैं । इनकी संतति (ठठेरा, ठठेरिया, टमाटा) भी ताम्रशिल्प-रूपी कर्म करते चले आ रहे हैं । प्रत्न ऋषि से शिल्पी पैदा हुए । ये पाषाण-शिल्प कर्म के अधिपति के रूप में जाने जाते हैं । अभी भी इनकी संतति शिलाशिल्प के कर्म करते आ रहे हैं । पत्थरकट्टा या कुशबाडिया जाति के लोग इसी के अंतर्गत आते हैं । सुपर्ण ऋषि से 'दैवज्ञ' (तक्षा) उत्पन्न हुए । यह सुवर्णशिल्प कर्म के अधिपति कहलाते हैं । इनकी संतति (विश्वकर्मा, सुनार÷सोनार÷सोनी÷स्वर्णकार) भी सुवर्ण कर्म करते आ रहे हैं । इस प्रकार हम देखते हैं कि लोहार, बरही (बढ़ई), पत्थरकट्टा, ठठेरा÷ठठेरिया÷टमाटा, विश्वकर्मा, सुनार÷सोनार÷सोनी÷स्वर्णकार सभी भगवान् विश्वकर्मा की ही संतति हैं । मनु, मय, शिल्पी, त्वष्टा और दैवज्ञ- ये सभी ऋषि वेदों में पारंगत थे । इनकी रचनाएं लोकहितकारणी हैं । इन्हें 'पांचाल ब्राह्मण' भी कहते हैं । ये पांचों वन्दनीय ब्राह्मण हैं और यज्ञ कर्म करने वाले हैं । इनके बिना कोई भी यज्ञ सफल नहीं हो सकता । विष्णुपुराण के पहले अंश में विश्वकर्मा को देवताओं का 'देव- बढ़ई' कहा गया है तथा शिल्पावतार के रूप में सम्मान योग्य बताया गया है । स्कन्दपुराण में उन्हें देवायतनों का स्रष्टा कहा गया है । कहा जाता है कि वह शिल्प के इतने ज्ञाता थे कि जल पर चल सकने योग्य खड़ाउ तैयार करने में समर्थ थे । विश्व के सबसे पहले तकनीकी ग्रन्थ 'विश्वकर्मीय' ग्रन्थ माने गये हैं, जिसमें न केवल वास्तु विद्या, बल्कि रथादि वाहन और रत्नों पर विमर्श है । विश्वकर्मा प्रकाश, जिसे वास्तुतंत्र भी कहा गया है, विश्वकर्मा के मतों का जीवंत ग्रन्थ है । विश्वकर्मा पुराण एवं विश्वकर्मा प्रकाश के अनुसार भगवान् विश्वकर्मा का जन्म १७ सितंबर (नेपाली तिथि असोज १ गते) को हुआ था । इसीलिए हर वर्ष १७ सितंबर को विश्वभर भगवान् विश्वकर्मा की पूजा धूमधाम से की जाती है । नेपाल में भी असोज १ गते भगवान् विश्वकर्मा जी की पूजा की जाती है । इस अवसर पर विविध प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है । इस बार राजधानी में 'मिस विश्वकर्मा २०७३' नामक एक भव्य प्रतियोगिता रखी गई है । इस प्रतियोगिता में विश्वकर्मा जाति की ५ दर्जन से अधिक प्रतियोगियों ने भाग ली । समग्रतः प्रत्येक विश्वकर्मा सन्तान को अपने पूर्वजों पर गर्व करते हुए विश्वकर्मा समाज के सर्वांगिण विकास हेतु सतत् प्रयास करते रहना चाहिए ।
वेदों में भगवान् विश्वकर्मा : विनोदकुमार विश्वकर्मा 'विमल', सन्दर्भः विश्वकर्मा पूजा, विनोदकुमार विश्वकर्मा 'विमल', काठमांडू , सत्रह सेप्टेम्बर । सृष्टि के आरंभ से ही भगवान् विश्वकर्मा सर्वपूज्य रहे हैंस जैसा कि उपलब्ध सभी वेदों, धर्म-ग्रन्थों, पुराणों, उपनिषदों आदि अनेक पुस्तकों में देखने को मिलता है । इसका विस्तार न होने का कारण मात्र सामाजिक अशिक्षा है । भगवान् विश्वकर्मा के सृष्टि निर्माता होने के पर्याप्त प्रमाण वेदों में मिलते हैं । ब्रह्मा उपनिषद् के तैत्तेरीय श्रुति के अनुसार - भगवान् विश्वकर्मा सम्पूर्ण जगत् के उत्पन्न करने वाले जगत्पिता हैं । उन्हीं से सर्वसृष्टि उत्पन्न हुई है । सम्पूर्ण लोक के जीव सिद्ध, किन्नर इन सबके पालन करने वाले पुराण पुरुष भगवान् विश्वकर्मा हैं । विराट रूप भगवान् विश्वकर्मा सर्वत्र व्यापक हैं जिनसे ब्रह्मा, रूद्र, विष्णु, शतमुख और देवता मुनि इत्यादि उत्पन्न हुए हैं । विश्व देवता, आठो वसु, पितर, गन्धर्व सम्पूर्ण लोक भगवान् विश्वकर्मा से उत्पन्न हुए हैं । यजुर्वेद अध्याय इकतीस, मंत्र सत्रह के अनुसार भगवान् विश्वकर्मा ने पृथ्वी, अग्नि, जल, आकाश और वायु की रचना की है । आविष्कार एवं निर्माण कार्यों के सन्दर्भ में इन्द्रपुरी, यमपुरी, वरुणपुरी, कुबेरपुरी, पाण्डवपुरी, सुदामापुरी, शिवमण्डलपुरी आदि का निर्माण भगवान विश्वकर्मा के द्वारा किया गया है । पुष्पक विमान का निर्माण तथा सभी देवों के भवन और उनके दैनिक उपयोगी होने वाले वस्तुएं भी इनके द्वारा ही बनाया गया है । कर्ण का कुण्डल, विष्णु भगवान् का सुदर्शन चक्र, शंकर भगवान् का त्रिशूल और यमराज का कालदण्ड इत्यादि वस्तुओं का निर्माण भगवान् विश्वकर्मा ने ही किया है । देवगुरु बृहस्पति की भगिनी भुवना के पुत्र विश्वकर्मा की वंश परंपरा अत्यंत वृद्ध है । स्कन्दपुराण के नागर खण्ड में भगवान् विश्वकर्मा के वंशजों की चर्चा की गई है । ब्रह्मस्वरूप विराट विश्वकर्मा पंचमुख हैं । विश्वकर्मा के पांच मुखों से पांच ब्र्राह्मण उत्पन्न हुए हैं । उनके नाम हैं- मनु, मय, त्वष्टा, शिल्पी और दैवज्ञ । सानग ऋषि से 'मनु' उत्पन्न हुए । मनु सबसे ज्येष्ठ हैं । ये लौह कर्म करते थे । लोहे के शस्त्र बनाते थे, और पांचों जातियों को आयुध देते थे । इनकी सन्तान लौहशिल्प कर्म करते हैं । अर्थात् इनके वंशज लोहकार के रूप में जाने जाते हैं । लोहार जाति के लोग मनु की सन्तान हंै । अतः वे उस्ताद कहलाते हैं । सनातन ऋषि से 'मय' उत्पन्न हुए । ये काष्ठ शिल्प कर्म करते थे । ये काष्ठशिल्प के अधिपति हैं । इनकी संतानें, पुत्र, पौत्रादि काष्ठ शिल्प कर्म करते चले आ रहे हैं । अहभून ऋषि से 'त्वष्टा' उत्पन्न हुए । इनका ताम्रशिल्प कर्म है और यह ताम्रशिल्प के अधिपति हैं । इनकी संतति भी ताम्रशिल्प-रूपी कर्म करते चले आ रहे हैं । प्रत्न ऋषि से शिल्पी पैदा हुए । ये पाषाण-शिल्प कर्म के अधिपति के रूप में जाने जाते हैं । अभी भी इनकी संतति शिलाशिल्प के कर्म करते आ रहे हैं । पत्थरकट्टा या कुशबाडिया जाति के लोग इसी के अंतर्गत आते हैं । सुपर्ण ऋषि से 'दैवज्ञ' उत्पन्न हुए । यह सुवर्णशिल्प कर्म के अधिपति कहलाते हैं । इनकी संतति भी सुवर्ण कर्म करते आ रहे हैं । इस प्रकार हम देखते हैं कि लोहार, बरही , पत्थरकट्टा, ठठेरा÷ठठेरिया÷टमाटा, विश्वकर्मा, सुनार÷सोनार÷सोनी÷स्वर्णकार सभी भगवान् विश्वकर्मा की ही संतति हैं । मनु, मय, शिल्पी, त्वष्टा और दैवज्ञ- ये सभी ऋषि वेदों में पारंगत थे । इनकी रचनाएं लोकहितकारणी हैं । इन्हें 'पांचाल ब्राह्मण' भी कहते हैं । ये पांचों वन्दनीय ब्राह्मण हैं और यज्ञ कर्म करने वाले हैं । इनके बिना कोई भी यज्ञ सफल नहीं हो सकता । विष्णुपुराण के पहले अंश में विश्वकर्मा को देवताओं का 'देव- बढ़ई' कहा गया है तथा शिल्पावतार के रूप में सम्मान योग्य बताया गया है । स्कन्दपुराण में उन्हें देवायतनों का स्रष्टा कहा गया है । कहा जाता है कि वह शिल्प के इतने ज्ञाता थे कि जल पर चल सकने योग्य खड़ाउ तैयार करने में समर्थ थे । विश्व के सबसे पहले तकनीकी ग्रन्थ 'विश्वकर्मीय' ग्रन्थ माने गये हैं, जिसमें न केवल वास्तु विद्या, बल्कि रथादि वाहन और रत्नों पर विमर्श है । विश्वकर्मा प्रकाश, जिसे वास्तुतंत्र भी कहा गया है, विश्वकर्मा के मतों का जीवंत ग्रन्थ है । विश्वकर्मा पुराण एवं विश्वकर्मा प्रकाश के अनुसार भगवान् विश्वकर्मा का जन्म सत्रह सितंबर को हुआ था । इसीलिए हर वर्ष सत्रह सितंबर को विश्वभर भगवान् विश्वकर्मा की पूजा धूमधाम से की जाती है । नेपाल में भी असोज एक गते भगवान् विश्वकर्मा जी की पूजा की जाती है । इस अवसर पर विविध प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है । इस बार राजधानी में 'मिस विश्वकर्मा दो हज़ार तिहत्तर' नामक एक भव्य प्रतियोगिता रखी गई है । इस प्रतियोगिता में विश्वकर्मा जाति की पाँच दर्जन से अधिक प्रतियोगियों ने भाग ली । समग्रतः प्रत्येक विश्वकर्मा सन्तान को अपने पूर्वजों पर गर्व करते हुए विश्वकर्मा समाज के सर्वांगिण विकास हेतु सतत् प्रयास करते रहना चाहिए ।
ट्रंप देंगे इजरायल को 'तोहफा', खत्म होगा दशकों पुराना विवाद! ग्रीन हाउस गैसों की उत्पादन की मात्रा को तय करने के लिए विश्व के लक्ष्यों से जुड़े रहने के लिए इस दो दिवसीय फोरम में महापौरों ने प्रतिबद्धताओं की एक श्रृंखला पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने ट्रंप के जलवायु समझौते से हटने के फैसले का विरोध किया। इस फैसले पर 195 देशों ने हस्ताक्षर किए हैं।
ट्रंप देंगे इजरायल को 'तोहफा', खत्म होगा दशकों पुराना विवाद! ग्रीन हाउस गैसों की उत्पादन की मात्रा को तय करने के लिए विश्व के लक्ष्यों से जुड़े रहने के लिए इस दो दिवसीय फोरम में महापौरों ने प्रतिबद्धताओं की एक श्रृंखला पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने ट्रंप के जलवायु समझौते से हटने के फैसले का विरोध किया। इस फैसले पर एक सौ पचानवे देशों ने हस्ताक्षर किए हैं।
रायपुर, डेस्क रिपोर्ट। छत्तीसगढ़-ओडिशा बॉर्डर पर नुआपाड़ा में नक्सली हमले (naxalites attack) में CRPF के 3 जवान शहीद हो गए हैं। बताया जा रहा है कि ये रोड ओपनिंग पार्टी (ROP) थी जो गश्त पर निकली थी। हमले में कई जवानों के घायल होने की खबर है। हमले का पता लगते ही सीआरपीएफ ने बैकअप टीम मौके पर रवाना कर दी। आपको बता दें कि शहीदों में एक जवान और दो सब-इंस्पेक्टर रैंक के अफसर शामिल हैं। शहीद जवान ASI शिशुपाल सिंह (उत्तर प्रदेश), ASI शिवलाल और कांस्टेबल धर्मेंद्र सिंह (दोनों हरियाणा) हैं। तीनों 9वीं बटालियन के जवान थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जवानों की जंगल में माओवादियों के साथ फायरिंग भी हुई थी। गौरतलब है कि जवानों की टीम सड़क खुलवाने के लिए निकली थी। इसी दौरान ग्रेनेड से जवानों को निशाना बनाया गया। सब कुछ इतनी तेजी में हुआ कि जवान कुछ समझ ही नहीं सके। हमला करने के बाद नक्सली अपने ठिकानों की तरफ भाग निकले। उधर, सीआरपीएफ के एक अफसर का कहना है कि हमला का माकूल जवाब देने की तैयारी चल रही है। फोर्स को तैयार रहने को कहा गया है। नक्सली ठिकानों का पता लगाकर उन पर जवाबी हमला किया जाएगा।
रायपुर, डेस्क रिपोर्ट। छत्तीसगढ़-ओडिशा बॉर्डर पर नुआपाड़ा में नक्सली हमले में CRPF के तीन जवान शहीद हो गए हैं। बताया जा रहा है कि ये रोड ओपनिंग पार्टी थी जो गश्त पर निकली थी। हमले में कई जवानों के घायल होने की खबर है। हमले का पता लगते ही सीआरपीएफ ने बैकअप टीम मौके पर रवाना कर दी। आपको बता दें कि शहीदों में एक जवान और दो सब-इंस्पेक्टर रैंक के अफसर शामिल हैं। शहीद जवान ASI शिशुपाल सिंह , ASI शिवलाल और कांस्टेबल धर्मेंद्र सिंह हैं। तीनों नौवीं बटालियन के जवान थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जवानों की जंगल में माओवादियों के साथ फायरिंग भी हुई थी। गौरतलब है कि जवानों की टीम सड़क खुलवाने के लिए निकली थी। इसी दौरान ग्रेनेड से जवानों को निशाना बनाया गया। सब कुछ इतनी तेजी में हुआ कि जवान कुछ समझ ही नहीं सके। हमला करने के बाद नक्सली अपने ठिकानों की तरफ भाग निकले। उधर, सीआरपीएफ के एक अफसर का कहना है कि हमला का माकूल जवाब देने की तैयारी चल रही है। फोर्स को तैयार रहने को कहा गया है। नक्सली ठिकानों का पता लगाकर उन पर जवाबी हमला किया जाएगा।
Ankita Lokhande's husband Vicky Jain Staying His Wife Home: विक्की जैन लगभग दो सालों से पत्नी अंकिता लोखंडे के घर पर 'घर जमाई' बनकर रह रहे हैं। विक्की ने अब जाकर असली वजह बताई है। Ankita Lokhande's husband Vicky Jain Staying His Wife Home: अंकिता लोखंडे और विक्की जैन टीवी इंडस्ट्री के सबसे क्यूट कपल्स में से एक हैं। दोनों काफी समय तक एक दूसरे को डेट करने के बाद 14 दिसम्बर 2021 के दिन शादी की। अंकिता लोखंडे और विक्की जैन ने शादी से पहले कई प्री-वेडिंग फंक्शन होस्ट किए थे, जिसमें टीवी इंडस्ट्री के कई सेलेब्स भी एन्जॉय करते नजर आए थे। यही नहीं लगभग 2 सालों से विक्की जैन अंकिता के घर पर ही रह रहे हैं। ऐसे में अब ईटाइम्स को दिए इंटरव्यू में इस कपल ने अपनी शादीशुदा जिंदगी और नए घर शिफ्ट ना हो पाने के बारे में बात की। विक्की जैन (Vicky Jain) ने अपने अपने फ्लैट के बारे में बात करते हुए कहा, 'हम दोनों ने मिलकर एक नया फ्लैट लिया था लेकिन उसका रिपेयरिंग वर्क, रेनोवेशन और बाकी कई ऐसी चीजें थी, जो समय पर पूरी नहीं हो सकीं। फ्लैट के काम पूरा होने में कोरोना वायरस महामारी की वजह से काफी देरी हुई। हालांकि अभी भी काफी काम पेंडिंग है, जिस वजह से हम नए घर में शिफ्ट नहीं हो पाए। इसलिए मैं अभी भी 'घर जमाई' बनकर अंकिता लोखंडे के घर पर ही रह रहा हूं। मैं जब भी मुंबई आता हूं, तो अंकिता के घर में रहता हूं। ऐसे में ये सवाल अंकिता से करना चाहिए क्योंकि वो दो सालों से मेरे साथ अपना घर शेयर कर रही है। हालांकि अंकिता लोखंडे (Ankita Lokhande) ने कहा, 'मेरे लिए यह एक कपल के तौर पर मेरी रियल लाइफ है। हम दोनों शादी से पहले एक ही छत के नीचे पति-पत्नी की रह रहे हैं। जब हम अपना नया घर बनाएंगे, तो एक कपल के रूप में ये हमारी नई शुरुआत होगी। मैं जानती हूं कि मैं एक अच्छी हाउसवाइफ बनूंगी और मैं सभी चीजें सही तरीके से हैंडल कर पाउंगी। मुझे विक्की के साथ अपनी लाइफ और बाकी चीजें सभी चीजें शेयर करने में कोई प्रॉब्लम नहीं है। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
Ankita Lokhande's husband Vicky Jain Staying His Wife Home: विक्की जैन लगभग दो सालों से पत्नी अंकिता लोखंडे के घर पर 'घर जमाई' बनकर रह रहे हैं। विक्की ने अब जाकर असली वजह बताई है। Ankita Lokhande's husband Vicky Jain Staying His Wife Home: अंकिता लोखंडे और विक्की जैन टीवी इंडस्ट्री के सबसे क्यूट कपल्स में से एक हैं। दोनों काफी समय तक एक दूसरे को डेट करने के बाद चौदह दिसम्बर दो हज़ार इक्कीस के दिन शादी की। अंकिता लोखंडे और विक्की जैन ने शादी से पहले कई प्री-वेडिंग फंक्शन होस्ट किए थे, जिसमें टीवी इंडस्ट्री के कई सेलेब्स भी एन्जॉय करते नजर आए थे। यही नहीं लगभग दो सालों से विक्की जैन अंकिता के घर पर ही रह रहे हैं। ऐसे में अब ईटाइम्स को दिए इंटरव्यू में इस कपल ने अपनी शादीशुदा जिंदगी और नए घर शिफ्ट ना हो पाने के बारे में बात की। विक्की जैन ने अपने अपने फ्लैट के बारे में बात करते हुए कहा, 'हम दोनों ने मिलकर एक नया फ्लैट लिया था लेकिन उसका रिपेयरिंग वर्क, रेनोवेशन और बाकी कई ऐसी चीजें थी, जो समय पर पूरी नहीं हो सकीं। फ्लैट के काम पूरा होने में कोरोना वायरस महामारी की वजह से काफी देरी हुई। हालांकि अभी भी काफी काम पेंडिंग है, जिस वजह से हम नए घर में शिफ्ट नहीं हो पाए। इसलिए मैं अभी भी 'घर जमाई' बनकर अंकिता लोखंडे के घर पर ही रह रहा हूं। मैं जब भी मुंबई आता हूं, तो अंकिता के घर में रहता हूं। ऐसे में ये सवाल अंकिता से करना चाहिए क्योंकि वो दो सालों से मेरे साथ अपना घर शेयर कर रही है। हालांकि अंकिता लोखंडे ने कहा, 'मेरे लिए यह एक कपल के तौर पर मेरी रियल लाइफ है। हम दोनों शादी से पहले एक ही छत के नीचे पति-पत्नी की रह रहे हैं। जब हम अपना नया घर बनाएंगे, तो एक कपल के रूप में ये हमारी नई शुरुआत होगी। मैं जानती हूं कि मैं एक अच्छी हाउसवाइफ बनूंगी और मैं सभी चीजें सही तरीके से हैंडल कर पाउंगी। मुझे विक्की के साथ अपनी लाइफ और बाकी चीजें सभी चीजें शेयर करने में कोई प्रॉब्लम नहीं है। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
सफाईगीरी अवार्ड 2018 के तीसरे सत्र में गायक नीति मोहन ने शिरकत की. नीति मोहन ने बताया कि वह अपनी सफाई की आदत की वजह से दोस्तों के बीच फेमस हैं. उन्होंने बताया कि वह किसी के भी घर जाती हैं तो सफाई करने लग जाती हैं. सत्र का संचालन कर रहे साहिल जोशी ने सिंगर नीति से पूछा कि क्या उनकी एनसीसी ट्रेनिंग से सफाई के प्रति जागरूक होने में मदद मिली? नीति ने बताया, "सफाई के पीछे इसकी मेरा एनसीसी में जाना रहा है. एनसीसी में सिर्फ मार्चिंग या यूनिफार्म पहनना ही नहीं सिखाया जाता. उसमें तमाम चीजों को सिखाया जाता है. जैसे चीजों को साफ़ सुथरा रखना, ब्रश करना, अपना बेड बनाना, अपने आस पास की चीजों सही रख रखाव सिखाया जाता है. यहां सफाई के बारे में कई बेसिक चीजें बताई जाती हैं. " नीति मोहन ने कहा, "पानी हमारे जीवन में अहम मुद्दा है. इसका रख रखाव हमें अपनी जिंदगी में इसे निभाना चाहिए. इसे आगे की पीढ़ी के लिए बढ़ाना चाहिए. " नीति ने कहा, "लोगों का घर अंदर से कितना बढ़िया रहता है. लेकिन बाहर देखें तो कचरा इकट्ठा रहता है. हम थोड़ा सा ध्यान रखें तो ये चीजें बेहतर हो सकती हैं. "
सफाईगीरी अवार्ड दो हज़ार अट्ठारह के तीसरे सत्र में गायक नीति मोहन ने शिरकत की. नीति मोहन ने बताया कि वह अपनी सफाई की आदत की वजह से दोस्तों के बीच फेमस हैं. उन्होंने बताया कि वह किसी के भी घर जाती हैं तो सफाई करने लग जाती हैं. सत्र का संचालन कर रहे साहिल जोशी ने सिंगर नीति से पूछा कि क्या उनकी एनसीसी ट्रेनिंग से सफाई के प्रति जागरूक होने में मदद मिली? नीति ने बताया, "सफाई के पीछे इसकी मेरा एनसीसी में जाना रहा है. एनसीसी में सिर्फ मार्चिंग या यूनिफार्म पहनना ही नहीं सिखाया जाता. उसमें तमाम चीजों को सिखाया जाता है. जैसे चीजों को साफ़ सुथरा रखना, ब्रश करना, अपना बेड बनाना, अपने आस पास की चीजों सही रख रखाव सिखाया जाता है. यहां सफाई के बारे में कई बेसिक चीजें बताई जाती हैं. " नीति मोहन ने कहा, "पानी हमारे जीवन में अहम मुद्दा है. इसका रख रखाव हमें अपनी जिंदगी में इसे निभाना चाहिए. इसे आगे की पीढ़ी के लिए बढ़ाना चाहिए. " नीति ने कहा, "लोगों का घर अंदर से कितना बढ़िया रहता है. लेकिन बाहर देखें तो कचरा इकट्ठा रहता है. हम थोड़ा सा ध्यान रखें तो ये चीजें बेहतर हो सकती हैं. "
Motihari: जिले में अपराधी बेलगाम हो गए है. आये दिन लूट, हत्या और छिनतई की घटना सामने आ रही है. अपराधियों के बढ़ते हौसले को देखते हुए पुलिस भी एक्शन में आ गयी है और अपराधियों पर नकेल कसने लगी है. ताजा मामला जिले के बंजरिया के अम्बिकानगर की है. जहाँ छापेमारी के दौरान 2 अपराधी के साथ भारी मात्रा में हथियार बरामद हुआ है. मिली जानकारी के अनुसार पुलिस को अपराधियों की गुप्त सूचना प्राप्त हुई थी. उसके आधार पर पुलिस ने छापेमारी शुरू कर दी और 2 अपराधी सहित हथियार बरामद किया है. पुलिस ने बतया कि अपराधी किसी बड़ी योजना को अंजाम देने वाले थे. पुलिस ने छापेमारी में एक देशी कट्टा ओर दो जिंदा कारतूस बरामद किया है साथ ही एक बोलेरो भी जब्त किया है. पुलिस अपराधियों से पूछताछ कर रही है और मामले की तह तक जाने का प्रयास कर रही है.
Motihari: जिले में अपराधी बेलगाम हो गए है. आये दिन लूट, हत्या और छिनतई की घटना सामने आ रही है. अपराधियों के बढ़ते हौसले को देखते हुए पुलिस भी एक्शन में आ गयी है और अपराधियों पर नकेल कसने लगी है. ताजा मामला जिले के बंजरिया के अम्बिकानगर की है. जहाँ छापेमारी के दौरान दो अपराधी के साथ भारी मात्रा में हथियार बरामद हुआ है. मिली जानकारी के अनुसार पुलिस को अपराधियों की गुप्त सूचना प्राप्त हुई थी. उसके आधार पर पुलिस ने छापेमारी शुरू कर दी और दो अपराधी सहित हथियार बरामद किया है. पुलिस ने बतया कि अपराधी किसी बड़ी योजना को अंजाम देने वाले थे. पुलिस ने छापेमारी में एक देशी कट्टा ओर दो जिंदा कारतूस बरामद किया है साथ ही एक बोलेरो भी जब्त किया है. पुलिस अपराधियों से पूछताछ कर रही है और मामले की तह तक जाने का प्रयास कर रही है.
छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल के बेटे पलाश चंदेल पर एक आदिवासी युवती ने रेप का केस दर्ज कराया है। युवती ने रायपुर के महिला थाने में शिकायत की है कि उसके साथ जांजगीर चांपा निवासी पलाश चंदेल पिता नारायण चंदेल नाम के युवक ने रेप किया है और जब वह गर्भवती हो गई तो गर्भपात भी कराया है। युवती की शिकायत पर पुलिस ने पलाश के खिलाफ दुष्कर्म सहित अन्य धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर लिया है। शिकायत करने वाली महिला सरकारी नौकरी करती है। उसने बताया कि 2018 में फेसबुक के माध्यम से पलाश चंदेल उसके संपर्क में आया था। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि पलाश ने उसे शादी का प्रस्ताव दिया था और शादी करने के नाम पर लंबे समय से उसका शारीरिक शोषण कर रहा था। आरोपी को ये भी मालूम था कि, पीड़िता आदिवासी वर्ग से है। पीड़ित युवती के मुताबिक आरोपी द्वारा लगातार किये जा रहे शारीरिक शोषण से 2021 में वह गर्भवती हो गई थी। लेकिन पलाश ने धोखे से उसे गर्भपात की गोली खिला दी। जिससे उसका गर्भपात हो गया था। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि आरोपी उसके साथ मारपीट भी करता था। पलाश युवती को अपने पिता नारायण चंदेल के रूतबे का डर दिखाकर धमकाया करता था कि, वह उसे नौकरी से निकलवा देगा। आरोपी के ऐसे डराने धमकाने और अपने यौन शोषण से त्रस्त होकर पीड़िता ने रायपुर आकर अनुसूचित जनजाति आयोग, राज्य महिला आयोग, महिला थाना रायपुर में शिकायत की। जिसके बाद आरोपी के खिलाफ 376, 376(2) (छ), 313 व 3(2) एसटी/एससी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। पीड़िता ने आरोपी पलाश चंदेल से अपनी एवं अपने परिवार की सुरक्षा की भी मांग की है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल के बेटे पलाश चंदेल पर एक आदिवासी युवती ने रेप का केस दर्ज कराया है। युवती ने रायपुर के महिला थाने में शिकायत की है कि उसके साथ जांजगीर चांपा निवासी पलाश चंदेल पिता नारायण चंदेल नाम के युवक ने रेप किया है और जब वह गर्भवती हो गई तो गर्भपात भी कराया है। युवती की शिकायत पर पुलिस ने पलाश के खिलाफ दुष्कर्म सहित अन्य धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर लिया है। शिकायत करने वाली महिला सरकारी नौकरी करती है। उसने बताया कि दो हज़ार अट्ठारह में फेसबुक के माध्यम से पलाश चंदेल उसके संपर्क में आया था। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि पलाश ने उसे शादी का प्रस्ताव दिया था और शादी करने के नाम पर लंबे समय से उसका शारीरिक शोषण कर रहा था। आरोपी को ये भी मालूम था कि, पीड़िता आदिवासी वर्ग से है। पीड़ित युवती के मुताबिक आरोपी द्वारा लगातार किये जा रहे शारीरिक शोषण से दो हज़ार इक्कीस में वह गर्भवती हो गई थी। लेकिन पलाश ने धोखे से उसे गर्भपात की गोली खिला दी। जिससे उसका गर्भपात हो गया था। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि आरोपी उसके साथ मारपीट भी करता था। पलाश युवती को अपने पिता नारायण चंदेल के रूतबे का डर दिखाकर धमकाया करता था कि, वह उसे नौकरी से निकलवा देगा। आरोपी के ऐसे डराने धमकाने और अपने यौन शोषण से त्रस्त होकर पीड़िता ने रायपुर आकर अनुसूचित जनजाति आयोग, राज्य महिला आयोग, महिला थाना रायपुर में शिकायत की। जिसके बाद आरोपी के खिलाफ तीन सौ छिहत्तर, तीन सौ छिहत्तर , तीन सौ तेरह व तीन एसटी/एससी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। पीड़िता ने आरोपी पलाश चंदेल से अपनी एवं अपने परिवार की सुरक्षा की भी मांग की है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
You Searched For "#bjpindia" किसान आंदोलन के बीच भाजपा के किसान संवाद अभियान में आये ठहराव के बाद रविवार को केन्द्रीय राज्य मंत्री डा. संजीव बालियान, विधायक उमेश मलिक ने भाजपा पश्चिम प्रदेश अध्यक्ष मोहित बेनीवाल के साथ मिनी छपरौली माने जाने वाले मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना क्षेत्र में अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। मुजफ्फरनगर जनपद के सौरम प्रकरण को लेकर मचे सियासी बवाल के बीच रालोद मुखिया चौ. अजित सिंह को शाहपुर में बड़ी सभा करने के साथ ही चुनाव मैदान में मुकाबला करने की चुनौती देने वाले केन्द्रीय मंत्री संजीव बालियान से पार्टी अध्यक्ष ने आगामी रणनीति पर चर्चा की। सौरम प्रकरण को लेकर केन्द्रीय मंत्री संजीव बालियान ने मीडिया के सामने अपनी बात रखी, आप भी देखें वीडियो. . . . संजीव बालियान ने किस अंदाज में विपक्ष को दी चुनौती।
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आपने सर्च किया थाः बॉब सरोया ने जनवरी, 1990 में इस्लामी आतंकवादियों द्वारा कश्मीर की हिन्दू आबादी के नरसंहार की निंदा की और PM मोदी द्वारा उनके पुनर्वास के लिए किए जा रहे प्रयासों का समर्थन किया है। भारतीय किसान यूनियन (हरियाणा) के अध्यक्ष गुरनाम चढूनी पर आंदोलन के नाम पर एक कॉन्ग्रेस नेता से 10 करोड़ रुपए लेने के आरोप लगे हैं। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने स्वीकार किया है कि मुंबई पुलिस ने ही अर्नब गोस्वामी के निजी चैट को लीक किया है। यूपी पुलिस ने मुनव्वर फारूकी के खिलाफ पिछले साल अप्रैल में दर्ज एक मामले को लेकर प्रोडक्शन वारंट जारी किया है। हार्वर्ड वाले स्टीव जार्डिंग के NDTV से लेकर राहुल-अखिलेश तक से लिंक, लेकिन निधि राजदान को नहीं किया खबरदार! साइबर क्राइम के एक से एक मामले आपने देखे-सुने होंगे। लेकिन निधि राजदान के साथ जो हुआ वो अलग और अनोखा है। और ऐसा स्टीव जार्डिंग के रहते हो गया। जौहर यूनिवर्सिटी की 70. 05 हेक्टेयर जमीन उत्तर प्रदेश सरकार के नाम दर्ज करने का आदेश दिया गया है। आजम खान यूनिवर्सिटी के चांसलर हैं। नॉर्वे में कोरोना वैक्सीन लगाने के बाद अब तक 29 लोगों की मौत हो चुकी है। ये सभी 75 वर्ष के थे, जिनके शरीर में पहले से कई बीमारियाँ थीं। अगर भारत ने तिब्बत को लेकर अपनी यथास्थिति में बदलाव किया, तो चीन सिक्किम को भारत का हिस्सा मानने से इंकार कर देगा। इसके अलावा चीन कश्मीर के मुद्दे पर भी अपना कथित तटस्थ रवैया बरकरार नहीं रखेगा। AltNews ने फैक्टचेक नहीं किया। फेसबुक ने रीच नहीं घटाई। रवीश कुमार अपनी 'गलती स्वीकार' कर 'महान' बन गए। पत्र में लिखा गया कि ऐसे संवेदनशील समय में जब किसान दिल्ली के पास विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, उस समय रवीश कुमार ने महत्वपूर्ण तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया है, जो किसानों को भ्रमित करता है और समाज में नकारात्मक भावनाओं को उकसाता है।
आपने सर्च किया थाः बॉब सरोया ने जनवरी, एक हज़ार नौ सौ नब्बे में इस्लामी आतंकवादियों द्वारा कश्मीर की हिन्दू आबादी के नरसंहार की निंदा की और PM मोदी द्वारा उनके पुनर्वास के लिए किए जा रहे प्रयासों का समर्थन किया है। भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष गुरनाम चढूनी पर आंदोलन के नाम पर एक कॉन्ग्रेस नेता से दस करोड़ रुपए लेने के आरोप लगे हैं। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने स्वीकार किया है कि मुंबई पुलिस ने ही अर्नब गोस्वामी के निजी चैट को लीक किया है। यूपी पुलिस ने मुनव्वर फारूकी के खिलाफ पिछले साल अप्रैल में दर्ज एक मामले को लेकर प्रोडक्शन वारंट जारी किया है। हार्वर्ड वाले स्टीव जार्डिंग के NDTV से लेकर राहुल-अखिलेश तक से लिंक, लेकिन निधि राजदान को नहीं किया खबरदार! साइबर क्राइम के एक से एक मामले आपने देखे-सुने होंगे। लेकिन निधि राजदान के साथ जो हुआ वो अलग और अनोखा है। और ऐसा स्टीव जार्डिंग के रहते हो गया। जौहर यूनिवर्सिटी की सत्तर. पाँच हेक्टेयर जमीन उत्तर प्रदेश सरकार के नाम दर्ज करने का आदेश दिया गया है। आजम खान यूनिवर्सिटी के चांसलर हैं। नॉर्वे में कोरोना वैक्सीन लगाने के बाद अब तक उनतीस लोगों की मौत हो चुकी है। ये सभी पचहत्तर वर्ष के थे, जिनके शरीर में पहले से कई बीमारियाँ थीं। अगर भारत ने तिब्बत को लेकर अपनी यथास्थिति में बदलाव किया, तो चीन सिक्किम को भारत का हिस्सा मानने से इंकार कर देगा। इसके अलावा चीन कश्मीर के मुद्दे पर भी अपना कथित तटस्थ रवैया बरकरार नहीं रखेगा। AltNews ने फैक्टचेक नहीं किया। फेसबुक ने रीच नहीं घटाई। रवीश कुमार अपनी 'गलती स्वीकार' कर 'महान' बन गए। पत्र में लिखा गया कि ऐसे संवेदनशील समय में जब किसान दिल्ली के पास विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, उस समय रवीश कुमार ने महत्वपूर्ण तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया है, जो किसानों को भ्रमित करता है और समाज में नकारात्मक भावनाओं को उकसाता है।
अजमेर : बिजली सम्बन्धी समस्याओं को लेकर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी की ओर से आज अजमेर के पंचशील में डिस्कॉम मुख्यालय का घेराव किया गया है। इसमें पार्टी सुप्रीमो और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल, पार्टी के तीनों विधायक व पदाधिकारी भी शामिल हुए। प्रदेश की सभी जिलों से आरएलपी जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता अजमेर में एकत्र हुए और जिला कलेक्ट्रेट से विरोध प्रदर्शन करते हुए पैदल मार्च के माध्यम से अजमेर डिस्कॉम पहुंचें। पार्टी सुप्रीमो व नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल बताया कि प्रदेश सरकार किसानों के साथ ही युवाओं व आम जनता के साथ छलावा कर रही है। सचिन पायलट को लेकर बेनीवाल ने कहा की उनको बाहर आ जाना चाहिए, कांग्रेस में रहकर अगर वो काम नहीं करवा पा रहे है उनकी कोई नहीं सुन रहा तो वो वहां बैठे किसलिए है ,उन्हें बाहर आ जाना चाहिए।
अजमेर : बिजली सम्बन्धी समस्याओं को लेकर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी की ओर से आज अजमेर के पंचशील में डिस्कॉम मुख्यालय का घेराव किया गया है। इसमें पार्टी सुप्रीमो और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल, पार्टी के तीनों विधायक व पदाधिकारी भी शामिल हुए। प्रदेश की सभी जिलों से आरएलपी जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता अजमेर में एकत्र हुए और जिला कलेक्ट्रेट से विरोध प्रदर्शन करते हुए पैदल मार्च के माध्यम से अजमेर डिस्कॉम पहुंचें। पार्टी सुप्रीमो व नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल बताया कि प्रदेश सरकार किसानों के साथ ही युवाओं व आम जनता के साथ छलावा कर रही है। सचिन पायलट को लेकर बेनीवाल ने कहा की उनको बाहर आ जाना चाहिए, कांग्रेस में रहकर अगर वो काम नहीं करवा पा रहे है उनकी कोई नहीं सुन रहा तो वो वहां बैठे किसलिए है ,उन्हें बाहर आ जाना चाहिए।
चर्चा में क्यों? भारतीय खाद्य निगम (FCI) के नवीनतम आदेशों के बाद फार्म यूनियनों ने चेतावनी दी है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के प्रत्यक्ष भुगतान पर केंद्र का आग्रह फसल खरीद प्रक्रिया में बाधक बन सकता है। प्रमुख बिंदुः FCI का आदेशः - न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का प्रत्यक्ष भुगतानः - मध्यस्थों को प्रक्रिया से हटाने के लिये केंद्र सरकार ऑनलाइन प्रक्रिया के ज़रिये सीधे किसानों के बैंक खातों में MSP का भुगतान करना चाहती है। - यह फसल की वह कीमत होती है, जिसका भुगतान सरकारी एजेंसी द्वारा फसल विशेष की खरीद करते समय किया जाता है। - वर्तमान में आढ़तियों (कमीशन एजेंटों) को उनके खातों में भुगतान किया जाता है और इसके बाद वे चेक के माध्यम से किसानों को भुगतान करते हैं। - केंद्र को 2.5 प्रतिशत कमीशन आढ़तियों को देना पड़ता है जो किसानों से लेकर सरकारी एजेंसियों तक फसल की खरीद की सुविधा प्रदान करते हैं और इसके लिये सरकार से कमीशन लेते हैं। - मध्यस्थों को प्रक्रिया से हटाने के लिये केंद्र सरकार ऑनलाइन प्रक्रिया के ज़रिये सीधे किसानों के बैंक खातों में MSP का भुगतान करना चाहती है। - जमाबंदी प्रणालीः - FCI के आदेश में कहा गया है कि पट्टेदार किसानों और अंशधारकों को एक जमाबंदी समझौता प्रस्तुत करना होगा। - जमाबंदी एक कानूनी समझौता है जो साबित करता है कि उन्हें पट्टे की समयावधि तक उस ज़मीन पर अधिकार है, ताकि खरीद की गई फसलों का भुगतान किया जा सके। - FCI ने गेहूँ और धान की खरीद के लिये उनकी गुणवत्ता को प्रभावी बनाए जाने का प्रस्ताव किया है। - पारदर्शिता और जवाबदेहीः FCI ने इस बात पर अधिक बल दिया है कि किसानों के बैंक खातों में सीधे भुगतान करने से शक्तिशाली आढ़तियों (कमीशन एजेंटों) को हटाने से और अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही लाई जा सकती है। - गैर-भेदभाव की प्रकृतिः जाति और भूमि आकार जैसी मापन विधि के आधार पर लाभार्थियों की चयन प्रक्रिया में कोई पूर्वाग्रह शामिल नहीं है। FCI आदेश को चुनौतीः - चूँकि आढ़ति समुदाय पंजाब और हरियाणा के कृषि पारिस्थितिकी तंत्र में कृषि ऋण प्रदान करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसलिये इस आदेश का विरोध पंजाब सरकार के साथ-साथ किसानों के एक बड़े वर्ग ने किया है। - फार्म यूनियनों के अनुसार, सरकार को बैंक खाते में सीधे भुगतान के प्रावधान को वापस लेना चाहिये क्योंकि इसे ज़ल्दबाज़ी में लागू करने से कई जटिल समस्याएँ पैदा हो सकती हैं जो कई किसानों को उनकी फसल की कीमत पाने से बाहर कर देंगी। - हज़ारों शेयरधारकों के पास इस तरह की जमाबंदी या कानूनी समझौता नहीं है और वे इस आदेश से बहुत प्रभावित होंगे। - गेहूँ और धान की खरीद के लिये गुणवत्ता की आवश्यकताओं को प्रभावी बनाने के FCI के प्रस्ताव का विरोध किया जा रहा है। - व्यापक स्तर पर किसानों ने FCI के साथ कृषि कानूनों को निरस्त करने और सभी फसलों की खरीद के लिये कानूनी गारंटी देने और MSP लागू करने के लिये अपने मुद्दों को जोड़ा है। भारतीय खाद्य निगम (FCI) - भारतीय खाद्य निगम एक सांविधिक निकाय है जिसे भारतीय खाद्य निगम अधिनियम, 1964 के तहत वर्ष 1965 में स्थापित किया गया। - FCI उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय' के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के अंतर्गत शामिल सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है। - देश में भीषण अन्न संकट, विशेष रूप से गेहूँ के अभाव के चलते इस निकाय की स्थापना की गई थी। - इसके साथ ही कृषकों के लिये लाभकारी मूल्य की सिफारिश (MSP) करने हेतु वर्ष 1965 में कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) का भी गठन किया गया। कृषि लागत और मूल्य आयोग भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय से संलग्न कार्यालय है। - इसका मुख्य कार्य खाद्यान्न एवं अन्य खाद्य पदार्थों की खरीद, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री करना है। - FCI के उद्देश्यः - किसानों को उनकी फसल लाभकारी मूल्य प्रदान करना। - खाद्यान्नों के कार्यात्मक बफर स्टॉक का संतोषजनक स्तर बनाकर राष्ट्र की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना। - सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के माध्यम से संपूर्ण देश में खाद्यान्न का वितरण। - किसानों के हितों की सुरक्षा के लिये प्रभावी मूल्य सहायता ऑपरेशन (Effective Price Support Operations) लागू करना।
चर्चा में क्यों? भारतीय खाद्य निगम के नवीनतम आदेशों के बाद फार्म यूनियनों ने चेतावनी दी है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य के प्रत्यक्ष भुगतान पर केंद्र का आग्रह फसल खरीद प्रक्रिया में बाधक बन सकता है। प्रमुख बिंदुः FCI का आदेशः - न्यूनतम समर्थन मूल्य का प्रत्यक्ष भुगतानः - मध्यस्थों को प्रक्रिया से हटाने के लिये केंद्र सरकार ऑनलाइन प्रक्रिया के ज़रिये सीधे किसानों के बैंक खातों में MSP का भुगतान करना चाहती है। - यह फसल की वह कीमत होती है, जिसका भुगतान सरकारी एजेंसी द्वारा फसल विशेष की खरीद करते समय किया जाता है। - वर्तमान में आढ़तियों को उनके खातों में भुगतान किया जाता है और इसके बाद वे चेक के माध्यम से किसानों को भुगतान करते हैं। - केंद्र को दो.पाँच प्रतिशत कमीशन आढ़तियों को देना पड़ता है जो किसानों से लेकर सरकारी एजेंसियों तक फसल की खरीद की सुविधा प्रदान करते हैं और इसके लिये सरकार से कमीशन लेते हैं। - मध्यस्थों को प्रक्रिया से हटाने के लिये केंद्र सरकार ऑनलाइन प्रक्रिया के ज़रिये सीधे किसानों के बैंक खातों में MSP का भुगतान करना चाहती है। - जमाबंदी प्रणालीः - FCI के आदेश में कहा गया है कि पट्टेदार किसानों और अंशधारकों को एक जमाबंदी समझौता प्रस्तुत करना होगा। - जमाबंदी एक कानूनी समझौता है जो साबित करता है कि उन्हें पट्टे की समयावधि तक उस ज़मीन पर अधिकार है, ताकि खरीद की गई फसलों का भुगतान किया जा सके। - FCI ने गेहूँ और धान की खरीद के लिये उनकी गुणवत्ता को प्रभावी बनाए जाने का प्रस्ताव किया है। - पारदर्शिता और जवाबदेहीः FCI ने इस बात पर अधिक बल दिया है कि किसानों के बैंक खातों में सीधे भुगतान करने से शक्तिशाली आढ़तियों को हटाने से और अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही लाई जा सकती है। - गैर-भेदभाव की प्रकृतिः जाति और भूमि आकार जैसी मापन विधि के आधार पर लाभार्थियों की चयन प्रक्रिया में कोई पूर्वाग्रह शामिल नहीं है। FCI आदेश को चुनौतीः - चूँकि आढ़ति समुदाय पंजाब और हरियाणा के कृषि पारिस्थितिकी तंत्र में कृषि ऋण प्रदान करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसलिये इस आदेश का विरोध पंजाब सरकार के साथ-साथ किसानों के एक बड़े वर्ग ने किया है। - फार्म यूनियनों के अनुसार, सरकार को बैंक खाते में सीधे भुगतान के प्रावधान को वापस लेना चाहिये क्योंकि इसे ज़ल्दबाज़ी में लागू करने से कई जटिल समस्याएँ पैदा हो सकती हैं जो कई किसानों को उनकी फसल की कीमत पाने से बाहर कर देंगी। - हज़ारों शेयरधारकों के पास इस तरह की जमाबंदी या कानूनी समझौता नहीं है और वे इस आदेश से बहुत प्रभावित होंगे। - गेहूँ और धान की खरीद के लिये गुणवत्ता की आवश्यकताओं को प्रभावी बनाने के FCI के प्रस्ताव का विरोध किया जा रहा है। - व्यापक स्तर पर किसानों ने FCI के साथ कृषि कानूनों को निरस्त करने और सभी फसलों की खरीद के लिये कानूनी गारंटी देने और MSP लागू करने के लिये अपने मुद्दों को जोड़ा है। भारतीय खाद्य निगम - भारतीय खाद्य निगम एक सांविधिक निकाय है जिसे भारतीय खाद्य निगम अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ चौंसठ के तहत वर्ष एक हज़ार नौ सौ पैंसठ में स्थापित किया गया। - FCI उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय' के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के अंतर्गत शामिल सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है। - देश में भीषण अन्न संकट, विशेष रूप से गेहूँ के अभाव के चलते इस निकाय की स्थापना की गई थी। - इसके साथ ही कृषकों के लिये लाभकारी मूल्य की सिफारिश करने हेतु वर्ष एक हज़ार नौ सौ पैंसठ में कृषि लागत और मूल्य आयोग का भी गठन किया गया। कृषि लागत और मूल्य आयोग भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय से संलग्न कार्यालय है। - इसका मुख्य कार्य खाद्यान्न एवं अन्य खाद्य पदार्थों की खरीद, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री करना है। - FCI के उद्देश्यः - किसानों को उनकी फसल लाभकारी मूल्य प्रदान करना। - खाद्यान्नों के कार्यात्मक बफर स्टॉक का संतोषजनक स्तर बनाकर राष्ट्र की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना। - सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से संपूर्ण देश में खाद्यान्न का वितरण। - किसानों के हितों की सुरक्षा के लिये प्रभावी मूल्य सहायता ऑपरेशन लागू करना।
Meerut। शनिवार को बंगला 210बी के आरआर मॉल ध्वस्तीकरण में मारे गए दीपक शर्मा व उनके पुत्र आकाश को सोमवार को नम आंखों से श्रद्धांजलि दी गई। शिव चौक सदर पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। वहीं कई सामाजिक संगठन व छात्रों ने कैंडल मार्च निकाला। श्रद्धांजलि सभा में लोगों में कैंट बोर्ड के प्रति खासा आक्रोश था। लोग ने सभी आरोपियों की गिरफ्तारी व मुआवजे की मांग की। श्रद्धांजलि सभा में दीपक शर्मा की पत्नी, बेटी व अन्य परिजनों के आंखों रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। सभी रो-रोकर बुरा हाल था। अन्य लोग परिजनों को ढांढस बांध रहे थे। श्रद्धांजलि सभा में कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल व महापौर हरिकांत अहलूवालिया भी श्रद्धांजलि देने के लिए पहुंचे। इसके अलावा संयुक्त व्यापार संघ के अध्यक्ष नवीन गुप्ता, भाजपा महानगर अध्यक्ष करूणेश नंदन गर्ग, पूर्व पार्षद जगमोहन शाकाल, भाजपा महानगर महामंत्री महिला मोर्चा सरला शर्मा सहित सैंकड़ों लोग श्रद्धांजलि सभा में पहुंचे। कैंट बोर्ड के सभी अधिकारियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर लोग धरने पर बैठ गए। लोगों ने हाथ में तख्ती ले रखी थी। जिस पर हत्यारों को फांसी दो लिख रखा था। डीएन डिग्री कॉलेज के छात्र नेता भानू चौधरी व अजय तालियान के नेतृत्व में छात्रों ने कैंडल मार्च निकाला। कैंडल मार्च हनुमान चौक आबूलेन से वेस्ट एंड रोड होते हुए बंगला नंबर 210 बी पर समाप्त हुआ। उधर अखिल भारतीय संयुक्त व्यापार मंडल के बैनर तले व्यापारियों ने भी कैंडल मार्च निकाला। कैंडल मार्च भैंसाल मैदान से शुरू होकर सदर बाजार, दाल मंडी और सर्राफा होते हुए घटना स्थल पर समाप्त हुआ।
Meerut। शनिवार को बंगला दो सौ दसबी के आरआर मॉल ध्वस्तीकरण में मारे गए दीपक शर्मा व उनके पुत्र आकाश को सोमवार को नम आंखों से श्रद्धांजलि दी गई। शिव चौक सदर पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। वहीं कई सामाजिक संगठन व छात्रों ने कैंडल मार्च निकाला। श्रद्धांजलि सभा में लोगों में कैंट बोर्ड के प्रति खासा आक्रोश था। लोग ने सभी आरोपियों की गिरफ्तारी व मुआवजे की मांग की। श्रद्धांजलि सभा में दीपक शर्मा की पत्नी, बेटी व अन्य परिजनों के आंखों रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। सभी रो-रोकर बुरा हाल था। अन्य लोग परिजनों को ढांढस बांध रहे थे। श्रद्धांजलि सभा में कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल व महापौर हरिकांत अहलूवालिया भी श्रद्धांजलि देने के लिए पहुंचे। इसके अलावा संयुक्त व्यापार संघ के अध्यक्ष नवीन गुप्ता, भाजपा महानगर अध्यक्ष करूणेश नंदन गर्ग, पूर्व पार्षद जगमोहन शाकाल, भाजपा महानगर महामंत्री महिला मोर्चा सरला शर्मा सहित सैंकड़ों लोग श्रद्धांजलि सभा में पहुंचे। कैंट बोर्ड के सभी अधिकारियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर लोग धरने पर बैठ गए। लोगों ने हाथ में तख्ती ले रखी थी। जिस पर हत्यारों को फांसी दो लिख रखा था। डीएन डिग्री कॉलेज के छात्र नेता भानू चौधरी व अजय तालियान के नेतृत्व में छात्रों ने कैंडल मार्च निकाला। कैंडल मार्च हनुमान चौक आबूलेन से वेस्ट एंड रोड होते हुए बंगला नंबर दो सौ दस बी पर समाप्त हुआ। उधर अखिल भारतीय संयुक्त व्यापार मंडल के बैनर तले व्यापारियों ने भी कैंडल मार्च निकाला। कैंडल मार्च भैंसाल मैदान से शुरू होकर सदर बाजार, दाल मंडी और सर्राफा होते हुए घटना स्थल पर समाप्त हुआ।
कथानक दस संधियों में विभक्त है । संधि के अन्त में कथा के उपशीर्षक दिए गए हैं, पज्झटिका मुख्य छंद है । प्रत्येक संधि में छंद बदलते हैं । तीसरी संधि में मदनावली का चित्रपट देखने से करकुडु के मन में जहां प्रेम का जागरण होता है वह रूपाकर्षरण है । इसकी परिणिति विवाह में होती है । सातवीं संधि में रतिवेगा का पारिणग्रहण करते समय रतिभाव दर्शनीय है । वीर रस के प्रकाशक मुख्यस्थल दो हैं; तीसरी संधि में चम्पा नरेश की सेना के साथ युद्ध तथा आठवीं संधि में द्रविड़ राजाओं के साथ करकंडु का युद्ध, भयानक वीभत्स रसों की दृष्टि से श्मशानभूमि का चित्ररण दर्शनीय है जहां चोर व्यापारी शूलों से भिदे हुए थे । मांस लोभी राक्षस फें-फें करते थे और अग्निज्वाला में जलते हुए जीवों से रणभूमि व्याप्त थी । अन्य भावों की अभिव्यक्ति भी हुई है । पद्मावती और मालिन की ईर्ष्या, पदमावती का पुत्र करकंडु की आशीर्वाद इसके अच्छे उदाहरण है । जैसे वनमाली की पत्नी कुसुमदत्ता पदमावती को देख कर अपने मन में विचार करती है : एह णारि विसिट्ठी तें तर्हि दिट्ठी कि गारि कि विज्जाहरीय । गम णाय पियारी महि लह सारी चम्पय गोरी गुण भरिम ॥ तसु रूप रिद्धि एह अइ ।। विहाइ, गह रूवई रवि ससि गाइ । सारउ सरिस इच्छतियाएं, इह सारिउ जथंउ कमलियाए । यण सुन्दरी कोई किन्नरी है या विद्याधरी, जो नेत्र दर्शना है, और गुरगवान कदली इसकी जंघाओं का अनुकरण करती हैं, ऐरावत हाथी जिसके समक्ष नत मस्तक होकर मेरुशिखर को को चला गया है । फिर वह सोचती है यदि इसके सौन्दर्य ने मेरे पति को विचलित कर दिया तो वह मुझे निकाल देगा । इसलिए वह दोप लगा कर रानी को ही घर से बाहर निकाल देती है । अलंकारों में रूपक, उत्प्रेक्षा अतिशयोक्ति श्रादि के जो उदाहरण है, वे शास्त्रीयता के सांचे में ढले हैं । भाषा परिनिष्ठन भ्रंश की विशे पताओं से मुक्त है। करकंडु को देखने के लिए नगर नारियों का जो समूह उमड़ता है, उस समय भाषा का प्रवाह दर्शनीय है- कोई रमणी उत्कंठित होकर चली, तो कोई विह्वल द्वार पर ही खड़ी रह गई । कोई दौड़ पड़ी, किसी को अपने वस्त्रा भूषणों की सुवि ही नहीं रही। कोई अवरों में काजल देने लगी, कोई करतल में नूपुर धारण करने लगी । कोई बिल्ली को ही सन्तान समझ कर गोद में उठाने लगी (संधि - ३ ) । ऐसे वर्णनों द्वारा वस्तुस्थिति का विव ग्रहण कराया जाता है । सांस्कृतिक दृष्टि से न केवल 'करकंड चरिउ" महत्वपूर्ण है वल्कि सभी अपभ्रंश आख्यानों का इस दृष्टि से विशेष स्थान है। यदि सभी आख्यानों का सांस्कृतिक विवेचन किया जाए तो दसवीं शताब्दी से लेकर मोलहवीं शताब्दी तक उत्तर भारत का एक जीता जागता चित्र सामने ग्रा जाएगा। चम्पानगरी की समृद्धि उसके उच्च प्रसाद शिखरों से जानी जा सकती है जो मानों अपनी सैकडों भुजाओं से स्वर्ग छूते थे । वह पंचरंग मणियों की किरणों से दैदीप्य मान थी। राजा धाडी वाहन दीन दुखियों का परम आश्रय था । उसके मुख कमल में सरस्वती शोभायमान थी और में लक्ष्मी । जैन धर्म का प्रसार दक्षिण भारत तक हो चुका था । चोल, चेर, पाण्डय राजाओं ने ने करकंडु ने उनके मुकुटों पर पैर रखा तो उन पर जिन प्रतिमा बनी थी, उसे पश्चाताप हुआ । लोक प्रथाओं, पूजा-अनुष्ठानों, व्रत कथाओं, खानपान मनोरंजन के विविध उपायों का उल्लेख पर्याप्त हुआ है। मंगल हाथी के द्वारा करकंडु को राजा चुना जाना, अपशकुन होने के कारण जन्मते ही पदमावती को नदी में प्रवाहित कर देना, रतिवेगा से अप्रभ्रंश के जैन प्रमाख्यानं काव्य विवाह करते समय मोतियों से तोररग सजाया जाना स्वर्ण निर्मित चौरियां लटकाना, मनोहारी निर्मल वेदियां बनाना, ये सभी प्रसंग आचारों व अनुष्ठानों के निर्देशक हैं । रतिवेगा देवी की उपासना लाल वस्त्रों से करती है। आज भी लोकपरम्परा में देवी पूजा के लिए लालवस्त्रों का ही विधान मिलता कहीं रणनीति का परिचय होता है । रथ रथों से, हाथी हाथियों से घोडे घोडों से पुरुष पुरुषों से लडते थे जैसे करकंडु के द्रविड़ राजाओं के साथ युद्ध में वर्णित है । पद स्मरण करते हुए सात पग आगे बढ़ता है, फिर आनन्द भेरी वजवा कर दक्षिण कांक्षी लोगों को एकत्र करता है। मुनिवर के उपदेश जैन धर्म के विशिष्ट सिद्धान्तों की व्याख्या करते हैं । आदर सत्कार की यह प्ररणाली अन्य काव्यों में भी मिलेगी । इस आख्यान की वस्तु उत्पाहतं नहीं है । 'उत्तराध्ययन सूत्र' के अनुसार जैन पुराणों में और वौद्धों के 'कुम्भकार जातक' में यह वृतात मिलता है । जैन परम्परां में करकण्डु को कलिग देश का राजा कहा गया है । इसकी अवांतर कथायें भी भिन्न स्रोतों से ली गई है । कुछ तत्त्व, जैसे अशुभ शिशु का जल प्रवाह कराना, महाभारत मे मिलते है । यदुवंशी पृष्या कन्यावस्था में सूर्य का आवाहन करने से गर्भवती हो गई और प्रसव के उपरान्त उसने पुत्र को जल में छोड़ दिया जो महा प्रतापी करणं हुआ । कुछ कथाएं प्राचीन साहित्य में परिचित है जैसे रानी पदमावती के दोहद का वर्णन अपने पूर्व रूप में 'गायाधम्मका में दिखाई देता है । महाराजा श्रेणिक की देवी वारिणी की वैसा ही दोहद होता है। रानी, राजा को साथ ले कर मन्द मन्द जल वृष्टि के वीच नगर का भ्रमण करती है । नरं वाहनदत्त की कथा ' कथा सरित्सागर' से ली गई है । शुक की कथा, जो अरिदमन के कंथानक में आई है, 'कथासरित्सागर' में सुमना राजा की कथा से तुलनीय है । ' कादम्बरी' में जिस प्रकार पण्डित तोता राजा को उपदेश देता है, यहां भी वह पैर उठा कर राजा का अभिनन्दन करता है । ये सभी कथासूत्र लोक जीवन से ग्रहरण किए गए हैं जिन्हें कवि आकर्षक बना देता है । करकण्डु का कथानक वन की श्रेणी में आएगा । लोकतत्त्व की दृष्टि से दूसरी संधि में मातंग विद्याधर द्वारा करकण्डु की शिक्षा के लिए कही गई कथा पठनीय है जिसमें मन्त्रशक्ति का प्रभाव बताया गया है । मदनावली के हरण से दुखी हो जाने वाले करकण्डु को तेरापुर में एक विद्याधर जो कथा सुनाता है, उसमें अलौकिक शक्ति के द्वारा न केवल मदन मञ्जूपा के हरण का उल्लेख है बल्कि ऋषिकन्या के श्राप से प्रेमी विद्याधर का शुक बन जाना भी वरिंगत है । शाप द्वारा रूप परिवर्तन लोक कथाओं की प्रसिद्ध रूढ़ि है जो यहा प्रयुक्त हुई है । छठी संघि में मदनामर एक ऋषि कन्या का स्पर्श कर लेता है जिसके श्राप से वह शुक हो जाता है। प्रार्थना करने पर ऋपि कन्या श्राप की अवधि घटा कर कहती हैनरवाहन दत्त का रति विभ्रमा से परिणय हो जाने पर वह पुनः मनुष्य हो जाएगा । शुभ शकुन की एक कथा सातवीं संधि में है जहां कोई क्षत्रिय कुमार ब्राह्मरण से कह सुन कर उसके शकुन का फल स्वयं ले लेता है । वह लड़ते हुए साप और मेंढक को अपने शरीर का मांस देता है और वे दोनों मनुष्य रूप धारण कर उसके साथ हो लेते हैं । दसवीं संधि में ऐसी ही एक अलौकिक कथा मुनिराज शील गुप्त पदमावती को सुनाते हैं जिसमें उज्जैन नरेश की पुत्री किसी ब्राह्मण पुत्र का जन्म लेती है जो राक्षसी को वश में कर लेने के उपरान्त कभी शेरनी का दूध लाता है तो कभी बोलता हुआ पानी । मुनिवर ने जहां पूर्व भवों का वर्णन करके करकण्डु के प्रश्नों का समाधान किया हैं उसमें भी अनेक अभिप्राय है। प्रेम मार्ग प्रेम मार्ग को कठिनाइयां, कठिन परीक्षाएं, नायक की सफलता आदि तत्त्व इसमें यथा स्थान मिलेंगे । जहां तक प्रेम व्यंजना का प्रश्न है, हम देखते हैं रूपाकर्षरण ही करकण्डु को मदनावली तथा रतिवेगा की आकर्षित करता है। फिर भी कवि का उद्देश्य उसके चारित्रिक गौरव का चित्रण करना रहा है। नायक स्वयं तो अद्वितीय सुन्दर है ही उसे देखने के लिए दन्तीपुर की नगर वधुएं व्याकुल हो उठती है । मदनावली सुन्दरी है। सिंहल की राजकन्या रतिवेगा भी अलौकिक सुन्दरी है । मन्त्री सर्वत्र राजा की उद्देश्य पूर्ति में सहायक होते हैं । पूजा पाठ का विशेष माहात्म्य रतिवेगा के प्रसंग में ज्ञात होता है। ध्यान लगाने पर देवी प्रकट होकर उसे पति-प्राप्ति का वरदान देती है और स्वयं करकण्डु के पराक्रम का उल्लेख करती है । यह सूचना देती है कि उसने अन्य सात सौ कन्याए विवाही हैं । इस प्रकार 'करकण्ड चरिउ' की उपर्युक्त विशेषताएं न्यूनाधिक रूप से सभी जैन प्रेमाख्यानों में दिखाई देगी । ये प्रेमाख्यान भाव चित्ररण, वातावरण निर्मारण, पात्र एवं रूढ़ि संयोजन आदि की दृष्टि से संस्कृत प्राकृत प्राख्यानों की ही परम्परा में हैं और उसी प्रकार कान्ता सम्मत उपदेश देने के लिए लिखे गये हैं । विशुद्ध मनोरंजन इनका लक्ष्य कभी नहीं रहा। एक तथ्य और प्रकाशित होता है कि इन कथाओं के रचना विधान में शास्त्रीय परम्परा तथा लोक परम्परा दोनों का पालन किया गया है । हिन्दी साहित्य को ध्यान में रखते हुए अपभ्रंश के इन जैन- प्रेमाख्यानों का महत्त्व दो दृष्टियों से सर्वाधिक है। एक ओर इन्होंने कथा शैली, उपमान योजना, छन्द विधान वातावरण आदि दृष्टियों से हिन्दी के सूफी प्रेमाख्यानों का मार्ग प्रशस्त किया है तो दूसरी ओर एकाविक जैन कवियों को मिलतेजुलते जैन कथानकों के आधार पर हिन्दी में रचना करने की प्रेरणा दी है । सूफी काव्यों की जो मसनवी पद्धति कही जाती है अर्थात् कथारम्भ में अल्लाह की वन्दना, पैगम्बर व खलीफा का स्मरण, गुरु परम्परा, शाहे वक्त की चर्चा आदि, ये सब प्रवृत्तियां अपभ्रंश के उपर्युक्त आख्यानों में पूरी मिल जाती हैं। नायिकाओं के नाम पर ग्रन्थ का जैसा नामकरण सूफियों ने किया 'पदमावत', 'मिरगावती', 'मधुमालती' आदि वह अपभ्रंश रचना 'विलासवती', 'शशिलेखा', 'मदन लेखा' की ही परम्परा में स्वीकृत होनी चाहिए । राजाओं का सिंहल कुमारी से विवाह, समुद्र यात्रा और जहाज टूटना भारतीय आख्यान साहित्य की चिर परिचित काव्य रूढ़ियां हैं जो इन्हीं आख्यानों से होकर कुतबन, जायसी, मंझन जैसे कवियों द्वारा अपनाई गई हैं । शुक का विलक्षण और पण्डित होना भी भारतीय तत्त्व है । वह सर्वत्र मार्गदर्शक है और प्रेम संदेशों का प्रिय वाहक है । चित्रदर्शन से प्रेम की उत्पत्ति इन सभी प्रेमाख्यानों में एक सी है । नायक नायिकाओं के जीवन में अलीकिक शक्तियां सहायक होती है वे चाहे व्यन्तर या विद्याधर हों अथवा कोई देवी देवता हों । देवी शक्तियां का रूपान्तरण लोक कथाओं में साधारण सी बात है । शिवजी प्रसन्न होकर सर्वत्र वरदान देते हैं और गौरापार्वती उनसे भी अधिक दयालु हैं । इन वस्तुगत विशेषताओं के अतिरिक्त वारह महिनों का वर्णन, वृक्षों-फल फूलों का नाम परिगणन जो अपभ्रंश आख्यानों में हैं, उसे सूफी कवियों ने भी अपनाया है, सरोवर में स्नान करना, मन्दिर में शिव पार्वती का पूजन करना ऐसे काव्यों को अनिवार्य रूढ़ियां थी जिन्हें सूफी कवियों ने प्रचुरता से
कथानक दस संधियों में विभक्त है । संधि के अन्त में कथा के उपशीर्षक दिए गए हैं, पज्झटिका मुख्य छंद है । प्रत्येक संधि में छंद बदलते हैं । तीसरी संधि में मदनावली का चित्रपट देखने से करकुडु के मन में जहां प्रेम का जागरण होता है वह रूपाकर्षरण है । इसकी परिणिति विवाह में होती है । सातवीं संधि में रतिवेगा का पारिणग्रहण करते समय रतिभाव दर्शनीय है । वीर रस के प्रकाशक मुख्यस्थल दो हैं; तीसरी संधि में चम्पा नरेश की सेना के साथ युद्ध तथा आठवीं संधि में द्रविड़ राजाओं के साथ करकंडु का युद्ध, भयानक वीभत्स रसों की दृष्टि से श्मशानभूमि का चित्ररण दर्शनीय है जहां चोर व्यापारी शूलों से भिदे हुए थे । मांस लोभी राक्षस फें-फें करते थे और अग्निज्वाला में जलते हुए जीवों से रणभूमि व्याप्त थी । अन्य भावों की अभिव्यक्ति भी हुई है । पद्मावती और मालिन की ईर्ष्या, पदमावती का पुत्र करकंडु की आशीर्वाद इसके अच्छे उदाहरण है । जैसे वनमाली की पत्नी कुसुमदत्ता पदमावती को देख कर अपने मन में विचार करती है : एह णारि विसिट्ठी तें तर्हि दिट्ठी कि गारि कि विज्जाहरीय । गम णाय पियारी महि लह सारी चम्पय गोरी गुण भरिम ॥ तसु रूप रिद्धि एह अइ ।। विहाइ, गह रूवई रवि ससि गाइ । सारउ सरिस इच्छतियाएं, इह सारिउ जथंउ कमलियाए । यण सुन्दरी कोई किन्नरी है या विद्याधरी, जो नेत्र दर्शना है, और गुरगवान कदली इसकी जंघाओं का अनुकरण करती हैं, ऐरावत हाथी जिसके समक्ष नत मस्तक होकर मेरुशिखर को को चला गया है । फिर वह सोचती है यदि इसके सौन्दर्य ने मेरे पति को विचलित कर दिया तो वह मुझे निकाल देगा । इसलिए वह दोप लगा कर रानी को ही घर से बाहर निकाल देती है । अलंकारों में रूपक, उत्प्रेक्षा अतिशयोक्ति श्रादि के जो उदाहरण है, वे शास्त्रीयता के सांचे में ढले हैं । भाषा परिनिष्ठन भ्रंश की विशे पताओं से मुक्त है। करकंडु को देखने के लिए नगर नारियों का जो समूह उमड़ता है, उस समय भाषा का प्रवाह दर्शनीय है- कोई रमणी उत्कंठित होकर चली, तो कोई विह्वल द्वार पर ही खड़ी रह गई । कोई दौड़ पड़ी, किसी को अपने वस्त्रा भूषणों की सुवि ही नहीं रही। कोई अवरों में काजल देने लगी, कोई करतल में नूपुर धारण करने लगी । कोई बिल्ली को ही सन्तान समझ कर गोद में उठाने लगी । ऐसे वर्णनों द्वारा वस्तुस्थिति का विव ग्रहण कराया जाता है । सांस्कृतिक दृष्टि से न केवल 'करकंड चरिउ" महत्वपूर्ण है वल्कि सभी अपभ्रंश आख्यानों का इस दृष्टि से विशेष स्थान है। यदि सभी आख्यानों का सांस्कृतिक विवेचन किया जाए तो दसवीं शताब्दी से लेकर मोलहवीं शताब्दी तक उत्तर भारत का एक जीता जागता चित्र सामने ग्रा जाएगा। चम्पानगरी की समृद्धि उसके उच्च प्रसाद शिखरों से जानी जा सकती है जो मानों अपनी सैकडों भुजाओं से स्वर्ग छूते थे । वह पंचरंग मणियों की किरणों से दैदीप्य मान थी। राजा धाडी वाहन दीन दुखियों का परम आश्रय था । उसके मुख कमल में सरस्वती शोभायमान थी और में लक्ष्मी । जैन धर्म का प्रसार दक्षिण भारत तक हो चुका था । चोल, चेर, पाण्डय राजाओं ने ने करकंडु ने उनके मुकुटों पर पैर रखा तो उन पर जिन प्रतिमा बनी थी, उसे पश्चाताप हुआ । लोक प्रथाओं, पूजा-अनुष्ठानों, व्रत कथाओं, खानपान मनोरंजन के विविध उपायों का उल्लेख पर्याप्त हुआ है। मंगल हाथी के द्वारा करकंडु को राजा चुना जाना, अपशकुन होने के कारण जन्मते ही पदमावती को नदी में प्रवाहित कर देना, रतिवेगा से अप्रभ्रंश के जैन प्रमाख्यानं काव्य विवाह करते समय मोतियों से तोररग सजाया जाना स्वर्ण निर्मित चौरियां लटकाना, मनोहारी निर्मल वेदियां बनाना, ये सभी प्रसंग आचारों व अनुष्ठानों के निर्देशक हैं । रतिवेगा देवी की उपासना लाल वस्त्रों से करती है। आज भी लोकपरम्परा में देवी पूजा के लिए लालवस्त्रों का ही विधान मिलता कहीं रणनीति का परिचय होता है । रथ रथों से, हाथी हाथियों से घोडे घोडों से पुरुष पुरुषों से लडते थे जैसे करकंडु के द्रविड़ राजाओं के साथ युद्ध में वर्णित है । पद स्मरण करते हुए सात पग आगे बढ़ता है, फिर आनन्द भेरी वजवा कर दक्षिण कांक्षी लोगों को एकत्र करता है। मुनिवर के उपदेश जैन धर्म के विशिष्ट सिद्धान्तों की व्याख्या करते हैं । आदर सत्कार की यह प्ररणाली अन्य काव्यों में भी मिलेगी । इस आख्यान की वस्तु उत्पाहतं नहीं है । 'उत्तराध्ययन सूत्र' के अनुसार जैन पुराणों में और वौद्धों के 'कुम्भकार जातक' में यह वृतात मिलता है । जैन परम्परां में करकण्डु को कलिग देश का राजा कहा गया है । इसकी अवांतर कथायें भी भिन्न स्रोतों से ली गई है । कुछ तत्त्व, जैसे अशुभ शिशु का जल प्रवाह कराना, महाभारत मे मिलते है । यदुवंशी पृष्या कन्यावस्था में सूर्य का आवाहन करने से गर्भवती हो गई और प्रसव के उपरान्त उसने पुत्र को जल में छोड़ दिया जो महा प्रतापी करणं हुआ । कुछ कथाएं प्राचीन साहित्य में परिचित है जैसे रानी पदमावती के दोहद का वर्णन अपने पूर्व रूप में 'गायाधम्मका में दिखाई देता है । महाराजा श्रेणिक की देवी वारिणी की वैसा ही दोहद होता है। रानी, राजा को साथ ले कर मन्द मन्द जल वृष्टि के वीच नगर का भ्रमण करती है । नरं वाहनदत्त की कथा ' कथा सरित्सागर' से ली गई है । शुक की कथा, जो अरिदमन के कंथानक में आई है, 'कथासरित्सागर' में सुमना राजा की कथा से तुलनीय है । ' कादम्बरी' में जिस प्रकार पण्डित तोता राजा को उपदेश देता है, यहां भी वह पैर उठा कर राजा का अभिनन्दन करता है । ये सभी कथासूत्र लोक जीवन से ग्रहरण किए गए हैं जिन्हें कवि आकर्षक बना देता है । करकण्डु का कथानक वन की श्रेणी में आएगा । लोकतत्त्व की दृष्टि से दूसरी संधि में मातंग विद्याधर द्वारा करकण्डु की शिक्षा के लिए कही गई कथा पठनीय है जिसमें मन्त्रशक्ति का प्रभाव बताया गया है । मदनावली के हरण से दुखी हो जाने वाले करकण्डु को तेरापुर में एक विद्याधर जो कथा सुनाता है, उसमें अलौकिक शक्ति के द्वारा न केवल मदन मञ्जूपा के हरण का उल्लेख है बल्कि ऋषिकन्या के श्राप से प्रेमी विद्याधर का शुक बन जाना भी वरिंगत है । शाप द्वारा रूप परिवर्तन लोक कथाओं की प्रसिद्ध रूढ़ि है जो यहा प्रयुक्त हुई है । छठी संघि में मदनामर एक ऋषि कन्या का स्पर्श कर लेता है जिसके श्राप से वह शुक हो जाता है। प्रार्थना करने पर ऋपि कन्या श्राप की अवधि घटा कर कहती हैनरवाहन दत्त का रति विभ्रमा से परिणय हो जाने पर वह पुनः मनुष्य हो जाएगा । शुभ शकुन की एक कथा सातवीं संधि में है जहां कोई क्षत्रिय कुमार ब्राह्मरण से कह सुन कर उसके शकुन का फल स्वयं ले लेता है । वह लड़ते हुए साप और मेंढक को अपने शरीर का मांस देता है और वे दोनों मनुष्य रूप धारण कर उसके साथ हो लेते हैं । दसवीं संधि में ऐसी ही एक अलौकिक कथा मुनिराज शील गुप्त पदमावती को सुनाते हैं जिसमें उज्जैन नरेश की पुत्री किसी ब्राह्मण पुत्र का जन्म लेती है जो राक्षसी को वश में कर लेने के उपरान्त कभी शेरनी का दूध लाता है तो कभी बोलता हुआ पानी । मुनिवर ने जहां पूर्व भवों का वर्णन करके करकण्डु के प्रश्नों का समाधान किया हैं उसमें भी अनेक अभिप्राय है। प्रेम मार्ग प्रेम मार्ग को कठिनाइयां, कठिन परीक्षाएं, नायक की सफलता आदि तत्त्व इसमें यथा स्थान मिलेंगे । जहां तक प्रेम व्यंजना का प्रश्न है, हम देखते हैं रूपाकर्षरण ही करकण्डु को मदनावली तथा रतिवेगा की आकर्षित करता है। फिर भी कवि का उद्देश्य उसके चारित्रिक गौरव का चित्रण करना रहा है। नायक स्वयं तो अद्वितीय सुन्दर है ही उसे देखने के लिए दन्तीपुर की नगर वधुएं व्याकुल हो उठती है । मदनावली सुन्दरी है। सिंहल की राजकन्या रतिवेगा भी अलौकिक सुन्दरी है । मन्त्री सर्वत्र राजा की उद्देश्य पूर्ति में सहायक होते हैं । पूजा पाठ का विशेष माहात्म्य रतिवेगा के प्रसंग में ज्ञात होता है। ध्यान लगाने पर देवी प्रकट होकर उसे पति-प्राप्ति का वरदान देती है और स्वयं करकण्डु के पराक्रम का उल्लेख करती है । यह सूचना देती है कि उसने अन्य सात सौ कन्याए विवाही हैं । इस प्रकार 'करकण्ड चरिउ' की उपर्युक्त विशेषताएं न्यूनाधिक रूप से सभी जैन प्रेमाख्यानों में दिखाई देगी । ये प्रेमाख्यान भाव चित्ररण, वातावरण निर्मारण, पात्र एवं रूढ़ि संयोजन आदि की दृष्टि से संस्कृत प्राकृत प्राख्यानों की ही परम्परा में हैं और उसी प्रकार कान्ता सम्मत उपदेश देने के लिए लिखे गये हैं । विशुद्ध मनोरंजन इनका लक्ष्य कभी नहीं रहा। एक तथ्य और प्रकाशित होता है कि इन कथाओं के रचना विधान में शास्त्रीय परम्परा तथा लोक परम्परा दोनों का पालन किया गया है । हिन्दी साहित्य को ध्यान में रखते हुए अपभ्रंश के इन जैन- प्रेमाख्यानों का महत्त्व दो दृष्टियों से सर्वाधिक है। एक ओर इन्होंने कथा शैली, उपमान योजना, छन्द विधान वातावरण आदि दृष्टियों से हिन्दी के सूफी प्रेमाख्यानों का मार्ग प्रशस्त किया है तो दूसरी ओर एकाविक जैन कवियों को मिलतेजुलते जैन कथानकों के आधार पर हिन्दी में रचना करने की प्रेरणा दी है । सूफी काव्यों की जो मसनवी पद्धति कही जाती है अर्थात् कथारम्भ में अल्लाह की वन्दना, पैगम्बर व खलीफा का स्मरण, गुरु परम्परा, शाहे वक्त की चर्चा आदि, ये सब प्रवृत्तियां अपभ्रंश के उपर्युक्त आख्यानों में पूरी मिल जाती हैं। नायिकाओं के नाम पर ग्रन्थ का जैसा नामकरण सूफियों ने किया 'पदमावत', 'मिरगावती', 'मधुमालती' आदि वह अपभ्रंश रचना 'विलासवती', 'शशिलेखा', 'मदन लेखा' की ही परम्परा में स्वीकृत होनी चाहिए । राजाओं का सिंहल कुमारी से विवाह, समुद्र यात्रा और जहाज टूटना भारतीय आख्यान साहित्य की चिर परिचित काव्य रूढ़ियां हैं जो इन्हीं आख्यानों से होकर कुतबन, जायसी, मंझन जैसे कवियों द्वारा अपनाई गई हैं । शुक का विलक्षण और पण्डित होना भी भारतीय तत्त्व है । वह सर्वत्र मार्गदर्शक है और प्रेम संदेशों का प्रिय वाहक है । चित्रदर्शन से प्रेम की उत्पत्ति इन सभी प्रेमाख्यानों में एक सी है । नायक नायिकाओं के जीवन में अलीकिक शक्तियां सहायक होती है वे चाहे व्यन्तर या विद्याधर हों अथवा कोई देवी देवता हों । देवी शक्तियां का रूपान्तरण लोक कथाओं में साधारण सी बात है । शिवजी प्रसन्न होकर सर्वत्र वरदान देते हैं और गौरापार्वती उनसे भी अधिक दयालु हैं । इन वस्तुगत विशेषताओं के अतिरिक्त वारह महिनों का वर्णन, वृक्षों-फल फूलों का नाम परिगणन जो अपभ्रंश आख्यानों में हैं, उसे सूफी कवियों ने भी अपनाया है, सरोवर में स्नान करना, मन्दिर में शिव पार्वती का पूजन करना ऐसे काव्यों को अनिवार्य रूढ़ियां थी जिन्हें सूफी कवियों ने प्रचुरता से
हॉलीवुड एक्ट्रेस एलेसेंड्रा एम्ब्रोसियो को आज के समय में कौन नहीं जानता है, वह हमेशा ही किसी न किसी बात के चलते चर्चाओं में बनी रहती है, उनका सोशल मीडिया पर एक से बढ़कर एक फोटोज साझा की है. बता दें कि अपने हॉट लुक को लेकर अक्सर चर्चा में आ ही जाती है। वह हमेशा ही अपनी बोल्ड तस्वीरें शेयर कर इंटरनेट का तापमान और भी ज्यादा बढ़ा रही है। एक्ट्रेस ने अपने न्यू ईयर 2023 की शुरुआत भी बोल्ड अंदाज से ही की। एलेसेंड्रा ने नए साल का स्वागत मेक्सिको में किया, इसकी फोटोज अब उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा की हैं। एक्ट्रेस की ये तस्वीरें अब इंटरनेट पर खूब देखी जा रही हैं। मीडिया फोटोज में देखा जा सकता है कि एलेसेंड्रा एम्ब्रोसियो व्हाइट बिकिनी में कहर ढाती हुई नजर आ रही है। खबरों का कहना है कि समंदर किनारे और समंदर के बीचों-बीच अभिनेत्री खूब मस्ती करती दिख रही हैं। फैंस उनकी इन फोटोज को देख खूब मदहोश हो रहे हैं। वर्क फ्रंट के बारें में बात की जाए तो एलेसेंड्रा एम्ब्रोसियो को आखिरी बार मूवी Daddy's Home 2 में देखा गया था, जिसमें वह Karen के रोल में नजर आईं थी। मूवी में एक्ट्रेस के किरदार को खूब पसंदभी किया जा चुका है।
हॉलीवुड एक्ट्रेस एलेसेंड्रा एम्ब्रोसियो को आज के समय में कौन नहीं जानता है, वह हमेशा ही किसी न किसी बात के चलते चर्चाओं में बनी रहती है, उनका सोशल मीडिया पर एक से बढ़कर एक फोटोज साझा की है. बता दें कि अपने हॉट लुक को लेकर अक्सर चर्चा में आ ही जाती है। वह हमेशा ही अपनी बोल्ड तस्वीरें शेयर कर इंटरनेट का तापमान और भी ज्यादा बढ़ा रही है। एक्ट्रेस ने अपने न्यू ईयर दो हज़ार तेईस की शुरुआत भी बोल्ड अंदाज से ही की। एलेसेंड्रा ने नए साल का स्वागत मेक्सिको में किया, इसकी फोटोज अब उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा की हैं। एक्ट्रेस की ये तस्वीरें अब इंटरनेट पर खूब देखी जा रही हैं। मीडिया फोटोज में देखा जा सकता है कि एलेसेंड्रा एम्ब्रोसियो व्हाइट बिकिनी में कहर ढाती हुई नजर आ रही है। खबरों का कहना है कि समंदर किनारे और समंदर के बीचों-बीच अभिनेत्री खूब मस्ती करती दिख रही हैं। फैंस उनकी इन फोटोज को देख खूब मदहोश हो रहे हैं। वर्क फ्रंट के बारें में बात की जाए तो एलेसेंड्रा एम्ब्रोसियो को आखिरी बार मूवी Daddy's Home दो में देखा गया था, जिसमें वह Karen के रोल में नजर आईं थी। मूवी में एक्ट्रेस के किरदार को खूब पसंदभी किया जा चुका है।
गोभी और अंडे के साथ पेटी - घर बेकिंग के लिए सबसे लोकप्रिय और सफल विकल्पों में से एक, कई अनुभवी पाक विशेषज्ञों ने बचपन से इस नुस्खा को जाना है। गोभी और अंडे को विभिन्न सब्ज़ियों, चावल, मशरूम, विभिन्न प्रकार के गोभी में जोड़ना संभव है, जो पकवान को विविधता देते हैं। खमीर से पफ तक आटा भी अलग हो सकता है। कैसे गोभी और अंडे के साथ पाई पकाने के लिए? गोभी और अंडे के साथ पाई भरना गोभी है, जो ताजा, सायरक्राट, स्ट्यूड और चिकन अंडे हो सकता है। आटा पफ, क्लासिक यीस्ट, bezdrozhzhevym बनाया जा सकता है। पाई बनाने के लिए अन्य सुझावः - दूध के साथ खमीर आटा मिश्रण करने के लिए, फैटी दूध लेना सबसे अच्छा है। - केफिर या खट्टा क्रीम पर आटा आदर्श है यदि बहुत सारे बेकिंग किए जाते हैं। यह आटा लंबे समय तक खराब नहीं होता है, पाई चार दिनों तक ताजा बेक्ड के रूप में रहते हैं। - ओवन में रखे जाने पर अंडा जर्दी के साथ गोभी और अंडे के साथ ओवन पाई को धुंधला करने की सिफारिश की जाती है। - पफ पेस्ट्री को केवल एक दिशा में घुमाया जाना चाहिए, ताकि फाड़ न जाए। स्वाद, बचपन से जाना जाता है और प्यार करता है, गोभी और अंडे के साथ पाई पकाया है। वे क्लासिक यीस्ट टेस्ट पर बने होते हैं, जिन्हें आप स्वयं कर सकते हैं, और आप स्टोर में भी खरीद सकते हैं। बेकिंग के लिए बिलेट्स को सॉकर काटा जा सकता है, इसलिए आपको चिकनी क्रुग्लैशकी मिलती है। गोभी में एक छोटा बल्ब जोड़ा जा सकता है। गोभी और अंडे के साथ और भी भूख लगाना, अगर बेकिंग के बाद, ऊपर से प्रोटीन के साथ ग्रीस करें। सामग्रीः - गोभी - 230-260 ग्राम; - अंडा - 5 पीसी। - दूध - 1 गिलास; - शुष्क खमीर ½ पैक; - मक्खन - 120-140 ग्राम; - चीनी - 60-80 ग्राम; - आटा - 650-670 जी। - चीनी, दूध और नमक के साथ पिघला हुआ मक्खन पिघलाओ। इसे शांत करो। - 2 अंडे, 2 कप आटा और खमीर विभाजित, एक मिक्सर के साथ हराया। - धीरे-धीरे आटे के बाकी हिस्सों को पेश करें। उठने के लिए छोड़ दो। - गोभी काट लें और उबालें। हल्के से तलना। - गोभी में उबला हुआ और बारीक कटा हुआ अंडे जोड़ें। - आटा लुढ़का और सर्कल में विभाजित। प्रत्येक मग के केंद्र में भराई रखो और किनारों को तेज करें। - सीम के साथ बेकिंग ट्रे पर पाई के लिए परिणामस्वरूप बिलेट्स रखें। - 175-180 डिग्री पर भूरे रंग तक सेंकना। एक फ्राइंग पैन में गोभी और अंडे के साथ पिरोज्की बनाना आसान है, और ओवन को गरम करने की आवश्यकता नहीं होती है। बेकिंग नरम हो जाती है, अगर आप इसे बल्लेबाज खट्टा क्रीम परीक्षण पर करते हैं। खट्टा क्रीम के बजाय, आप उसी अनुपात में केफिर का उपयोग कर सकते हैं। स्वाद के लिए आप सब्जी घटक grated पनीर, अजमोद, डिल में जोड़ सकते हैं। सामग्रीः - गोभी - 1/3 कांटा; - अंडे - 3 टुकड़े; - प्याज - 1 टुकड़ा; - आटा - 600-700 ग्राम; - खट्टा क्रीम - 5-6 बड़ा चम्मच। एल। - मक्खन - 65-85 ग्राम; - चीनी, नमक - 1 चम्मच; - सोडा - ½ छोटा चम्मच। - तेल और पानी के 25-30 ग्राम के अतिरिक्त के साथ एक फ्राइंग पैन में मुलायम तक गोभी और प्याज बुझाने के लिए। सब्जियों में कटा हुआ उबले हुए अंडे और नमक में जोड़ें। - एक प्लेट में, खट्टा क्रीम, पिघला हुआ तेल, चीनी, सोडा और नमक गठबंधन करें। - धीरे-धीरे आटा जोड़ें। आटा गूंधें। - प्रत्येक पक्ष पर 5-6 मिनट के लिए गोभी और अंडे के साथ पैटी फ्राइये। Sauerkraut और अंडे तला हुआ के साथ पाई एक उत्कृष्ट नाश्ता, और मुख्य पाठ्यक्रम दोनों बन जाएगा। खट्टा क्रीम या केफिर पर आटा सबसे अच्छा किया जाता है। एक कटोरे में डालने से पहले गोभी आपको निचोड़ने की जरूरत है, ताकि वह रस और अतिरिक्त तरल न दे। यदि यह बहुत ताजा नहीं है, तो इसे पहले पानी से धोया जाना चाहिए। सामग्रीः - गोभी - 1/4 कांटा; - अंडा - 2 टुकड़े; - प्याज - 1 टुकड़ा; - गाजर - 2 टुकड़े; - आटा 750-800 ग्राम है। - केफिर पर खमीर के बिना घुटने आटा। - गाजर और प्याज तलना। - Kvasshenuyu गोभी निचोड़, सब्जियों में डाल, 12-15 मिनट passem। - आटा रोल, केक फैशन। बहुत सारे मक्खन के साथ फ्राइये। एक स्तरित पेस्ट्री के साथ गोभी और अंडे के साथ पाई के लिए नुस्खा सबसे सरल है। दुकान में आटा खरीदा जा सकता है, और इसमें सेंकने के लिए आधे घंटे से भी कम समय लग जाएगा। सब्जी घटक में टमाटर का पेस्ट जोड़ना, आप दिलचस्प रूप से पकवान को विविधता दे सकते हैं। तैयार किए गए भोजन के शीर्ष पर तिल के बीज के साथ छिड़काया जा सकता है, और गोभी के साथ धनिया के बीज अच्छी तरह से संयुक्त हो जाएंगे। सामग्रीः - गोभी - ½ गोभी; - अंडे - 3 टुकड़े; - आटा flaky - 1 परत; - तेल और हिरन - स्वाद के लिए; - Cilantro बीज - 15 ग्राम। - गोभी काट लें और मुलायम तक उबाल लें और धनिया और हिरन जोड़ें। - इसे शांत करो। कटा हुआ कठोर उबले हुए अंडे जोड़ें। - इन स्वादिष्ट पैटी को गोभी और अंडे के साथ 180 डिग्री पर केवल 20 मिनट के लिए सेंकना। गोभी, प्याज और अंडे के साथ पाई न केवल पारंपरिक सफेद गोभी के साथ पकाया जा सकता है, एक बहुत ही रोचक विकल्प गोभी पेकिंग होगा। भरने के लिए चावल और अंडों से सब्जियों को अलग से पकाने की सिफारिश की जाती हैः पहले जैतून के तेल में प्याज फ्राइये, फिर गाजर, और फिर गोभी जोड़ें। मध्यम गर्मी पर नरम होने तक भरना चाहिए। सामग्रीः - गोभी पेकिंग - 1 सिर; - अंडे - 3 टुकड़े; - प्याज - 2 टुकड़े; - गाजर - 1-2 टुकड़े; - जैतून का तेल - 2 बड़ा चम्मच। एल। - खमीर के लिए आटा - 1 परत। - खमीर आटा गूंधना। - एक सब्जी भरने तैयार करें। - अंडे उबाल लें, सब्जियों में जोड़ें। - लुढ़का हुआ आटा भरने के लिए डालो। किनारों की रक्षा करें। - प्रत्येक पक्ष पर 5-6 मिनट के लिए पेकिंग गोभी और अंडा तलना के साथ पिरोज़्की। गोभी और गोभी के साथ रसदार पाई हल्के केफिर आटा के कारण बहुत नाजुक हैं, और कम वसा वाले आहार गोभी की वजह से। फूलगोभी को जमे हुए ले जाया जा सकता है, तो आपको इसे धोने और इसे फूलों में विभाजित करने की आवश्यकता नहीं है। केफिर पर पहले से मिश्रित आटा में, आप वनस्पति तेल के कुछ चम्मच जोड़ सकते हैं - यह नरम और अधिक लोचदार हो जाएगा। सामग्रीः - गोभी रंग - 350 ग्राम; - अंडा - 4 टुकड़े; - बिना खमीर के बल्लेबाज - 580 ग्राम; - मसाले - स्वाद के लिए। - 5-8 मिनट के लिए नमकीन पानी में गोभी उबाल लें। - वनस्पति तेल में फूलगोभी के फ्राइड टुकड़े। - अंडे जोड़ें। - केफिर पर खमीर के बिना आटा को प्रतिस्थापित करने के लिए। - 35-40 मिनट के लिए फूलगोभी और अंडा के साथ केक सेंकना। मशरूम के अतिरिक्त ताजा गोभी और अंडा के साथ पाई पाई के लिए लगभग एक क्लासिक नुस्खा बन गए हैं। उन्हें जल्दी से और स्टोर में जमे हुए पफ पेस्ट्री खरीदने और गोभी और मसालेदार मशरूम को भरने के रूप में किया जा सकता है। वन बोलेटस पानी में पहले से भिगोया जाना चाहिए और 10 मिनट के लिए फोड़ा जाना चाहिए। सामग्रीः - गोभी - 250 ग्राम; - अंडा - 5 पीसी। - मशरूम - 160 ग्राम; - खमीर आटा - 650 ग्राम। - एक क्लासिक नुस्खा के साथ खमीर आटा गूंधना। - मशरूम और प्याज बारीक कटा हुआ और तला हुआ। - कटा हुआ गोभी जोड़ें। फ्राइंग, हलचल, 10 मिनट। - ठंडा करने के बाद, कटा हुआ अंडे जोड़ें। भरना तैयार है। - गोभी और अंडे के साथ बने पाई, और मशरूम बेकिंग ट्रे पर डालते हैं, जर्दी के साथ तेल, 35 मिनट के लिए सेंकना। गोभी और अंडे के साथ पिरोज़्की बनाने के लिए नुस्खा अक्सर चावल के साथ पूरक होता है। इस तरह के बेकिंग अधिक संतोषजनक हो जाता है, और घटक लगभग पूरी तरह से संयुक्त होते हैं। चावल गोल अनाज लेने के लिए बेहतर है, यह उबला हुआ है और अन्य घटकों के साथ थोड़ा मिश्रित है, और उदाहरण के लिए, बासमती के रूप में भी सूखा नहीं है। रूप में वे वर्ग हो सकते हैं। सामग्रीः - गोभी - ½ कांटा; - अंडा - 2 टुकड़े; - प्याज - 1 टुकड़ा; - चावल - 140-160 ग्राम; - आटा flaky - 1 परत। - प्याज और गोभी कटा हुआ और तेल में तला हुआ। इसे शांत करो। - ठंडा गोभी में पूर्व उबले हुए अंडे (कटा हुआ) और चावल जोड़ें। - आटा रोल आउट, पाई बनाओ। - 20 मिनट के लिए सेंकना। गोभी और अंडे के साथ पाई के लिए एक साधारण नुस्खा नाश्ता के लिए एक पकवान के रूप में आदर्श है। उनके लिए, आपको कुछ भी मोल्ड करने और इसे रोल करने की आवश्यकता नहीं है - भरने तुरंत आटा के साथ मिलकर मिश्रण करता है। शीतल गोभी को नरमता के लिए, नमक के पानी में 2-3 मिनट के लिए उबाला जाना चाहिए। आटा के लिए शानदार के लिए, आप एक बेकिंग पाउडर जोड़ सकते हैं। सामग्रीः - गोभी - 300 ग्राम; - अंडा - 4 टुकड़े; - आटा - 2 कप; - केफिर - 230-250 मिलीलीटर; - स्वाद के लिए ग्रीन्स, तेल, मसालों। - गोभी काट, नमक जोड़ें, उबले अंडे (3 टुकड़े) के साथ मिश्रण। - एक कटोरे में, अंडे, केफिर, चाबुक मिलाएं, धीरे-धीरे आटा और मिश्रण जोड़ें। - फिर सीधे आटा में भरना जोड़ें। धीरे हलचल। - परिणामी द्रव्यमान को एक फ्राइंग पैन और तलना में फैलाएं।
गोभी और अंडे के साथ पेटी - घर बेकिंग के लिए सबसे लोकप्रिय और सफल विकल्पों में से एक, कई अनुभवी पाक विशेषज्ञों ने बचपन से इस नुस्खा को जाना है। गोभी और अंडे को विभिन्न सब्ज़ियों, चावल, मशरूम, विभिन्न प्रकार के गोभी में जोड़ना संभव है, जो पकवान को विविधता देते हैं। खमीर से पफ तक आटा भी अलग हो सकता है। कैसे गोभी और अंडे के साथ पाई पकाने के लिए? गोभी और अंडे के साथ पाई भरना गोभी है, जो ताजा, सायरक्राट, स्ट्यूड और चिकन अंडे हो सकता है। आटा पफ, क्लासिक यीस्ट, bezdrozhzhevym बनाया जा सकता है। पाई बनाने के लिए अन्य सुझावः - दूध के साथ खमीर आटा मिश्रण करने के लिए, फैटी दूध लेना सबसे अच्छा है। - केफिर या खट्टा क्रीम पर आटा आदर्श है यदि बहुत सारे बेकिंग किए जाते हैं। यह आटा लंबे समय तक खराब नहीं होता है, पाई चार दिनों तक ताजा बेक्ड के रूप में रहते हैं। - ओवन में रखे जाने पर अंडा जर्दी के साथ गोभी और अंडे के साथ ओवन पाई को धुंधला करने की सिफारिश की जाती है। - पफ पेस्ट्री को केवल एक दिशा में घुमाया जाना चाहिए, ताकि फाड़ न जाए। स्वाद, बचपन से जाना जाता है और प्यार करता है, गोभी और अंडे के साथ पाई पकाया है। वे क्लासिक यीस्ट टेस्ट पर बने होते हैं, जिन्हें आप स्वयं कर सकते हैं, और आप स्टोर में भी खरीद सकते हैं। बेकिंग के लिए बिलेट्स को सॉकर काटा जा सकता है, इसलिए आपको चिकनी क्रुग्लैशकी मिलती है। गोभी में एक छोटा बल्ब जोड़ा जा सकता है। गोभी और अंडे के साथ और भी भूख लगाना, अगर बेकिंग के बाद, ऊपर से प्रोटीन के साथ ग्रीस करें। सामग्रीः - गोभी - दो सौ तीस-दो सौ साठ ग्राम; - अंडा - पाँच पीसी। - दूध - एक गिलास; - शुष्क खमीर ½ पैक; - मक्खन - एक सौ बीस-एक सौ चालीस ग्राम; - चीनी - साठ-अस्सी ग्राम; - आटा - छः सौ पचास-छः सौ सत्तर जी। - चीनी, दूध और नमक के साथ पिघला हुआ मक्खन पिघलाओ। इसे शांत करो। - दो अंडे, दो कप आटा और खमीर विभाजित, एक मिक्सर के साथ हराया। - धीरे-धीरे आटे के बाकी हिस्सों को पेश करें। उठने के लिए छोड़ दो। - गोभी काट लें और उबालें। हल्के से तलना। - गोभी में उबला हुआ और बारीक कटा हुआ अंडे जोड़ें। - आटा लुढ़का और सर्कल में विभाजित। प्रत्येक मग के केंद्र में भराई रखो और किनारों को तेज करें। - सीम के साथ बेकिंग ट्रे पर पाई के लिए परिणामस्वरूप बिलेट्स रखें। - एक सौ पचहत्तर-एक सौ अस्सी डिग्री पर भूरे रंग तक सेंकना। एक फ्राइंग पैन में गोभी और अंडे के साथ पिरोज्की बनाना आसान है, और ओवन को गरम करने की आवश्यकता नहीं होती है। बेकिंग नरम हो जाती है, अगर आप इसे बल्लेबाज खट्टा क्रीम परीक्षण पर करते हैं। खट्टा क्रीम के बजाय, आप उसी अनुपात में केफिर का उपयोग कर सकते हैं। स्वाद के लिए आप सब्जी घटक grated पनीर, अजमोद, डिल में जोड़ सकते हैं। सामग्रीः - गोभी - एक/तीन कांटा; - अंडे - तीन टुकड़े; - प्याज - एक टुकड़ा; - आटा - छः सौ-सात सौ ग्राम; - खट्टा क्रीम - पाँच-छः बड़ा चम्मच। एल। - मक्खन - पैंसठ-पचासी ग्राम; - चीनी, नमक - एक चम्मच; - सोडा - ½ छोटा चम्मच। - तेल और पानी के पच्चीस-तीस ग्राम के अतिरिक्त के साथ एक फ्राइंग पैन में मुलायम तक गोभी और प्याज बुझाने के लिए। सब्जियों में कटा हुआ उबले हुए अंडे और नमक में जोड़ें। - एक प्लेट में, खट्टा क्रीम, पिघला हुआ तेल, चीनी, सोडा और नमक गठबंधन करें। - धीरे-धीरे आटा जोड़ें। आटा गूंधें। - प्रत्येक पक्ष पर पाँच-छः मिनट के लिए गोभी और अंडे के साथ पैटी फ्राइये। Sauerkraut और अंडे तला हुआ के साथ पाई एक उत्कृष्ट नाश्ता, और मुख्य पाठ्यक्रम दोनों बन जाएगा। खट्टा क्रीम या केफिर पर आटा सबसे अच्छा किया जाता है। एक कटोरे में डालने से पहले गोभी आपको निचोड़ने की जरूरत है, ताकि वह रस और अतिरिक्त तरल न दे। यदि यह बहुत ताजा नहीं है, तो इसे पहले पानी से धोया जाना चाहिए। सामग्रीः - गोभी - एक/चार कांटा; - अंडा - दो टुकड़े; - प्याज - एक टुकड़ा; - गाजर - दो टुकड़े; - आटा सात सौ पचास-आठ सौ ग्राम है। - केफिर पर खमीर के बिना घुटने आटा। - गाजर और प्याज तलना। - Kvasshenuyu गोभी निचोड़, सब्जियों में डाल, बारह-पंद्रह मिनट passem। - आटा रोल, केक फैशन। बहुत सारे मक्खन के साथ फ्राइये। एक स्तरित पेस्ट्री के साथ गोभी और अंडे के साथ पाई के लिए नुस्खा सबसे सरल है। दुकान में आटा खरीदा जा सकता है, और इसमें सेंकने के लिए आधे घंटे से भी कम समय लग जाएगा। सब्जी घटक में टमाटर का पेस्ट जोड़ना, आप दिलचस्प रूप से पकवान को विविधता दे सकते हैं। तैयार किए गए भोजन के शीर्ष पर तिल के बीज के साथ छिड़काया जा सकता है, और गोभी के साथ धनिया के बीज अच्छी तरह से संयुक्त हो जाएंगे। सामग्रीः - गोभी - ½ गोभी; - अंडे - तीन टुकड़े; - आटा flaky - एक परत; - तेल और हिरन - स्वाद के लिए; - Cilantro बीज - पंद्रह ग्राम। - गोभी काट लें और मुलायम तक उबाल लें और धनिया और हिरन जोड़ें। - इसे शांत करो। कटा हुआ कठोर उबले हुए अंडे जोड़ें। - इन स्वादिष्ट पैटी को गोभी और अंडे के साथ एक सौ अस्सी डिग्री पर केवल बीस मिनट के लिए सेंकना। गोभी, प्याज और अंडे के साथ पाई न केवल पारंपरिक सफेद गोभी के साथ पकाया जा सकता है, एक बहुत ही रोचक विकल्प गोभी पेकिंग होगा। भरने के लिए चावल और अंडों से सब्जियों को अलग से पकाने की सिफारिश की जाती हैः पहले जैतून के तेल में प्याज फ्राइये, फिर गाजर, और फिर गोभी जोड़ें। मध्यम गर्मी पर नरम होने तक भरना चाहिए। सामग्रीः - गोभी पेकिंग - एक सिर; - अंडे - तीन टुकड़े; - प्याज - दो टुकड़े; - गाजर - एक-दो टुकड़े; - जैतून का तेल - दो बड़ा चम्मच। एल। - खमीर के लिए आटा - एक परत। - खमीर आटा गूंधना। - एक सब्जी भरने तैयार करें। - अंडे उबाल लें, सब्जियों में जोड़ें। - लुढ़का हुआ आटा भरने के लिए डालो। किनारों की रक्षा करें। - प्रत्येक पक्ष पर पाँच-छः मिनट के लिए पेकिंग गोभी और अंडा तलना के साथ पिरोज़्की। गोभी और गोभी के साथ रसदार पाई हल्के केफिर आटा के कारण बहुत नाजुक हैं, और कम वसा वाले आहार गोभी की वजह से। फूलगोभी को जमे हुए ले जाया जा सकता है, तो आपको इसे धोने और इसे फूलों में विभाजित करने की आवश्यकता नहीं है। केफिर पर पहले से मिश्रित आटा में, आप वनस्पति तेल के कुछ चम्मच जोड़ सकते हैं - यह नरम और अधिक लोचदार हो जाएगा। सामग्रीः - गोभी रंग - तीन सौ पचास ग्राम; - अंडा - चार टुकड़े; - बिना खमीर के बल्लेबाज - पाँच सौ अस्सी ग्राम; - मसाले - स्वाद के लिए। - पाँच-आठ मिनट के लिए नमकीन पानी में गोभी उबाल लें। - वनस्पति तेल में फूलगोभी के फ्राइड टुकड़े। - अंडे जोड़ें। - केफिर पर खमीर के बिना आटा को प्रतिस्थापित करने के लिए। - पैंतीस-चालीस मिनट के लिए फूलगोभी और अंडा के साथ केक सेंकना। मशरूम के अतिरिक्त ताजा गोभी और अंडा के साथ पाई पाई के लिए लगभग एक क्लासिक नुस्खा बन गए हैं। उन्हें जल्दी से और स्टोर में जमे हुए पफ पेस्ट्री खरीदने और गोभी और मसालेदार मशरूम को भरने के रूप में किया जा सकता है। वन बोलेटस पानी में पहले से भिगोया जाना चाहिए और दस मिनट के लिए फोड़ा जाना चाहिए। सामग्रीः - गोभी - दो सौ पचास ग्राम; - अंडा - पाँच पीसी। - मशरूम - एक सौ साठ ग्राम; - खमीर आटा - छः सौ पचास ग्राम। - एक क्लासिक नुस्खा के साथ खमीर आटा गूंधना। - मशरूम और प्याज बारीक कटा हुआ और तला हुआ। - कटा हुआ गोभी जोड़ें। फ्राइंग, हलचल, दस मिनट। - ठंडा करने के बाद, कटा हुआ अंडे जोड़ें। भरना तैयार है। - गोभी और अंडे के साथ बने पाई, और मशरूम बेकिंग ट्रे पर डालते हैं, जर्दी के साथ तेल, पैंतीस मिनट के लिए सेंकना। गोभी और अंडे के साथ पिरोज़्की बनाने के लिए नुस्खा अक्सर चावल के साथ पूरक होता है। इस तरह के बेकिंग अधिक संतोषजनक हो जाता है, और घटक लगभग पूरी तरह से संयुक्त होते हैं। चावल गोल अनाज लेने के लिए बेहतर है, यह उबला हुआ है और अन्य घटकों के साथ थोड़ा मिश्रित है, और उदाहरण के लिए, बासमती के रूप में भी सूखा नहीं है। रूप में वे वर्ग हो सकते हैं। सामग्रीः - गोभी - ½ कांटा; - अंडा - दो टुकड़े; - प्याज - एक टुकड़ा; - चावल - एक सौ चालीस-एक सौ साठ ग्राम; - आटा flaky - एक परत। - प्याज और गोभी कटा हुआ और तेल में तला हुआ। इसे शांत करो। - ठंडा गोभी में पूर्व उबले हुए अंडे और चावल जोड़ें। - आटा रोल आउट, पाई बनाओ। - बीस मिनट के लिए सेंकना। गोभी और अंडे के साथ पाई के लिए एक साधारण नुस्खा नाश्ता के लिए एक पकवान के रूप में आदर्श है। उनके लिए, आपको कुछ भी मोल्ड करने और इसे रोल करने की आवश्यकता नहीं है - भरने तुरंत आटा के साथ मिलकर मिश्रण करता है। शीतल गोभी को नरमता के लिए, नमक के पानी में दो-तीन मिनट के लिए उबाला जाना चाहिए। आटा के लिए शानदार के लिए, आप एक बेकिंग पाउडर जोड़ सकते हैं। सामग्रीः - गोभी - तीन सौ ग्राम; - अंडा - चार टुकड़े; - आटा - दो कप; - केफिर - दो सौ तीस-दो सौ पचास मिलीलीटर; - स्वाद के लिए ग्रीन्स, तेल, मसालों। - गोभी काट, नमक जोड़ें, उबले अंडे के साथ मिश्रण। - एक कटोरे में, अंडे, केफिर, चाबुक मिलाएं, धीरे-धीरे आटा और मिश्रण जोड़ें। - फिर सीधे आटा में भरना जोड़ें। धीरे हलचल। - परिणामी द्रव्यमान को एक फ्राइंग पैन और तलना में फैलाएं।
मोतिहारी/ राजन द्विवेदी। बिहार का सबसे बड़ा लीची उत्पादक क्षेत्र मेहसी में 8 से 10 अप्रैल तक आयोजित होने वाले लीचीपुरम उत्सव की तिथि अब एक सप्ताह आगे बढ़ा दिया गया है। चुनावी आदर्श आचार संहिता के कारण समिति ने तिथि में बदलाव करने का निर्णय लिया। लीची पुरम उत्सव समिति के सदस्यों की बैठक तिरहुत उच्चतर विद्यालय के पास स्थित सत्याश्रम में आज संपन्न हुई। इसमें चुनावी आचार संहिता को देखते हुए सदस्यों ने तिथि में बदलाव का निर्णय लिया। समिति बदले हुए कार्यक्रम की जानकारी कृषि विभाग, प्रशासन के अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लेने वाले सभी कलाकारों को पत्र के माध्यम से देना सुनिश्चित किया है। बैठक की अध्यक्षता संस्थापक संरक्षक सत्यदेव राय आर्य ने की। बता दें कि इस कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिकों के अलावा चिकित्सकों की भी सहभागिता होगी। इस अवसर पर एक संपूर्ण रंगीन आकर्षक स्मारिका का प्रकाशन किया जा रहा है, इसमें कई ऐसे तथ्य मिलेंगे जो अब तक लोगों की नजरों से ओझल थे। इस कार्यक्रम में बॉलीवुड के गायक कलाकार नवीन कुमार के अलावा देश के विभिन्न भागों से आए कलाकार भी अपनी रंगारंग प्रस्तुति देंगे। इस बार कई भोजपुरी फिल्मों का कार्यक्रम के मंच से हो सकता है। बैठक में समिति के अध्यक्ष सुधीर कुमार सिन्हा, महासचिव सुदिष्ट नारायण ठाकुर, उपाध्यक्ष सह मुखिया राकेश पाठक मनोज मेहसवी, कोषाध्यक्ष मनोज कुमार, सचिव शंकर प्रसाद कुशवाहा, चंद्रभूषण प्रसाद कुशवाहा, शंकर प्रसाद कुशवाहा, हामिद रजा, कृत नारायण कुशवाहा, धर्मेंद्र कुमार, राजीव कुमार, मोहम्मद हुसैन सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे।
मोतिहारी/ राजन द्विवेदी। बिहार का सबसे बड़ा लीची उत्पादक क्षेत्र मेहसी में आठ से दस अप्रैल तक आयोजित होने वाले लीचीपुरम उत्सव की तिथि अब एक सप्ताह आगे बढ़ा दिया गया है। चुनावी आदर्श आचार संहिता के कारण समिति ने तिथि में बदलाव करने का निर्णय लिया। लीची पुरम उत्सव समिति के सदस्यों की बैठक तिरहुत उच्चतर विद्यालय के पास स्थित सत्याश्रम में आज संपन्न हुई। इसमें चुनावी आचार संहिता को देखते हुए सदस्यों ने तिथि में बदलाव का निर्णय लिया। समिति बदले हुए कार्यक्रम की जानकारी कृषि विभाग, प्रशासन के अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लेने वाले सभी कलाकारों को पत्र के माध्यम से देना सुनिश्चित किया है। बैठक की अध्यक्षता संस्थापक संरक्षक सत्यदेव राय आर्य ने की। बता दें कि इस कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिकों के अलावा चिकित्सकों की भी सहभागिता होगी। इस अवसर पर एक संपूर्ण रंगीन आकर्षक स्मारिका का प्रकाशन किया जा रहा है, इसमें कई ऐसे तथ्य मिलेंगे जो अब तक लोगों की नजरों से ओझल थे। इस कार्यक्रम में बॉलीवुड के गायक कलाकार नवीन कुमार के अलावा देश के विभिन्न भागों से आए कलाकार भी अपनी रंगारंग प्रस्तुति देंगे। इस बार कई भोजपुरी फिल्मों का कार्यक्रम के मंच से हो सकता है। बैठक में समिति के अध्यक्ष सुधीर कुमार सिन्हा, महासचिव सुदिष्ट नारायण ठाकुर, उपाध्यक्ष सह मुखिया राकेश पाठक मनोज मेहसवी, कोषाध्यक्ष मनोज कुमार, सचिव शंकर प्रसाद कुशवाहा, चंद्रभूषण प्रसाद कुशवाहा, शंकर प्रसाद कुशवाहा, हामिद रजा, कृत नारायण कुशवाहा, धर्मेंद्र कुमार, राजीव कुमार, मोहम्मद हुसैन सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे।
जूलिया नाम की एक लड़की - एक ईमानदार और खुलीलोग। उसके जीवन पर सकारात्मक दृष्टिकोण है। और इसके आशावाद के साथ, यह दूसरों को संक्रमित करता है। अक्सर, जूलिया आकर्षक लग रहा है। हालांकि, वह लोगों में अच्छी तरह से परिचित नहीं है, और वह पीड़ित है क्योंकि वह हर किसी के लिए अपना दिल खोलती है। अगर कोई व्यक्ति अपेक्षाओं को पूरा नहीं करता है तो बहुत हैरान है। स्वतंत्रता-प्रेमपूर्ण, आंदोलन उसका जीवन है। यदि जूलिया चार दीवारों में बंद है, तो उसे परवाह नहीं हैसंवाद करने और नए परिचितों को बनाने का एक तरीका खोजें। इस नाम वाली एक लड़की अपने रिश्तेदारों के लिए बेहद चौकस है। इसकी नकारात्मक गुणवत्ता गर्व है। इसी कारण से, उसके साथ बहस करना मुश्किल है। जूलिया की अभी भी अपनी राय होगी। आप केवल अपने तर्कों के साथ धीरे-धीरे बहस कर सकते हैं ताकि वह निर्णय ले सके कि वह स्वयं कुछ निष्कर्षों तक पहुंच चुकी है। वह बहुत नारी और आकर्षक है। इसके साथ कई रिश्तेदार और दोस्त हैंसुंदर नाम अगर आपकी प्रेमिका के पास छुट्टी है, तो कृपया जूलिया को कविता या गद्य में जन्मदिन की बधाई भेजें ताकि वह अद्वितीय दिख सके। वह इसकी सराहना करेगी। "आज यूल के जन्मदिन पर बधाई है- हमारी बेटी। हाल ही में, आप काफी बच्चे थे, और मेरे पिताजी और मैंने सोचा कि आपको कैसे कॉल करना है। यह पता चला कि हमने कई विकल्पों में से एकमात्र सही चुना है। आप हमारे विचित्र हैं, आप वास्तविक जूलिया-युला हैं। और आप अभी भी एक मिनट के लिए नहीं बैठते हैं। सक्रिय, हंसमुख, हंसमुख। अपनी हंसी के साथ, आप दूसरों को संक्रमित करते हैं। हम एक ऐसे व्यक्ति को नहीं जानते जो आपको प्यार नहीं करता है। और हम में से अधिकांश हम आपको पूजा करते हैं। आप हमारी सब कुछ हैं। " "जन्मदिन मुबारक जूलिया! इस भूरे रंग की जिंदगी में हमारी खुशी की गर्म गेंद, एक शराबी बनी, एक उज्ज्वल इंद्रधनुष और असली जादू। दुनिया में सबसे सभ्य और सुंदर। हम चाहते हैं कि आप आज रात पार्टी की रानी बनें, जब आप इसका सपना देखते हैं! एक इच्छा करो, और यह सच हो जाएगा, और हम, हमारे हिस्से पर, ऐसा करने के लिए सबकुछ करेंगे। हमें हमारी बेटी पर बहुत गर्व है और हमें विश्वास है कि हमें आपके लिए कभी भी ब्लश नहीं करना पड़ेगा। हैप्पी अवकाश, हमारी थंबेलिना! "। "मैं दिन में अपनी पहली बधाई भेजने के लिए जल्दी करोजूलिया का जन्म आप के लिए, मेरे प्यारे दोस्त, मैं आपको बहुत प्यार करना चाहता हूं। आपके द्वारा सम्मानित सभी मानव गुण, आपके साथी थे। उसे सचमुच आपको अपनी बाहों में ले जाने दें। अध्ययन करने के लिए उत्कृष्ट था, और आपके पूरे जीवन के लिए आपके पास प्रयास करने के लिए कुछ था। मैं ताकत और आत्मविश्वास की कामना करता हूं। ताकि जीवन में सबकुछ आसान हो। आनंद लें, नाचें, आनंद करें, चमकें, क्योंकि आज आपका दिन है। मुझे रखने के लिए धन्यवाद। " "युलिया के जन्मदिन पर बधाई आज सुनाएक बार नहीं मुझे, सबसे अच्छे दोस्त के रूप में, कुछ शब्द कहें। इससे पहले कि मैं आपसे मिला, मुझे नहीं पता था कि दोस्ती क्या थी। आपके बारे में, शब्द की सबसे अच्छी भावना में, मैंने सपना देखा। उम्मीद व्यर्थ नहीं थी। इस तरह के करीबी व्यक्ति होने के लिए यह एक बड़ी खुशी है। तुम मेरे परिवार हो, केवल आप ही किसी भी स्थिति में भरोसा कर सकते हैं। सबसे अच्छा दोस्त ही एकमात्र व्यक्ति है जिसके साथ मैं चुप रहना सहज महसूस करता हूं। आपके साथ, मैं सुरक्षित महसूस करता हूँ। मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ। हैप्पी अवकाश! »। "प्रिय दोस्त, दिन पर बधाईजन्म। जूलिया, हम आपको चाहते हैं कि आपके जीवन में उदासी के लिए कोई जगह नहीं थी। इसे स्थिरता दें, और भाग्य की सभी आश्चर्य केवल सुखद होगी। आप ऐसे व्यक्ति हैं जो हमेशा बचाव के लिए आते हैं और समर्थन करेंगे। हम चाहते हैं कि आपको अपनी मदद की जरूरत न हो। जीवन के मार्ग पर सभी समस्याओं को एक दिलचस्प स्थिति के साथ रहने दें और आपके पक्ष में हल हो जाएं। " "Yulchik! हमारा सूर्य, आपकी मुस्कान जीवन को आसान बनाती है। अपनी आंखें खुशी से चमकते हैं। वैसे ही केवल योग्य पुरुष हैं। हम आपको बहुत प्यार करते हैं। आप नहीं, लेकिन उसने आपकी देखभाल की और आपकी बुढ़ापे तक आपकी रक्षा की। " "यूल के जन्मदिन पर आज बधाईअसामान्य। मैं उसे प्यार में स्वीकार करना चाहता हूं। मैं कितना भाग्यशाली था कि मैं इस आदमी से मिला था। अच्छा और आशावाद की यह किरण। मेरे जीवन में कभी भी जागने में इतना आसान नहीं रहा है, काम से घर आने के लिए बहुत अच्छा लगा। हमारे पास जाने के लिए बहुत कुछ था। लेकिन मेरी पत्नी के लिए धन्यवाद, हम किसी भी मुश्किल परिस्थिति के योग्य बाहर आ गए। मुझे यकीन है कि यह मेरे लिए ऊपर से है। और अब हमें "मैं" और "वह" में विभाजित करना मुश्किल है, क्योंकि हम एक हैं। मुझे आशा है कि हमारे बच्चे न केवल बाहरी रूप से, बल्कि आंतरिक रूप से भी उनके जैसे होंगे। जन्मदिन मुबारक जूलिया! "। "हम चाहते हैं, कि आप सभी सुपर थे! पति सुपरमैन है, बेटा सुपरस्पोर्ट्समैन है, बेटी सुपर-ब्यूटी है। कक्षा को वही होना चाहिए। कूल मूड, कूल हेयर स्टाइल, कूल वर्क। क्योंकि हमारी जूलिया और सुपर, और कक्षा, और, सामान्य रूप से, एक चकित लड़की! "। "जन्मदिन मुबारक हो, जूलिया! बधाई हो आप मजाकिया चाहते हैं? अपने चुने हुए व्यक्ति को जॉनी डेप या ब्रैड पिट की तरह बनने दें। ताकि किसी भी एंजेलीना जोली ने आपकी सुंदरता को ईर्ष्या दी। कैमरून डायज या जूलिया रॉबर्ट्स से मुस्कुराओ। " कविताओं-बधाईः जन्मदिन मुबारक हो, जूलिया! Yulyashka के नाम से, मजेदार हास्यास्पद! और हम जो प्यार चाहते हैं, आप हमारे आकर्षण हैं, कूल प्यारी! »। "हम सभी सौंदर्य जानते हैं, उसका नाम, ज़ाहिर है, जूलिया, हम अब उसकी इच्छा करना चाहते हैं। जन्म के दिन खुशी के लिए था, अब, हर समय और फिर, अपना आरामदायक घर भरें! "। "हैलो, मेरे प्यारे यूलचोनोक, मेरा शराबी खरगोश! और मेरे दिल के नीचे से मैं चाहता हूंः बूढ़े मत हो और बीमार न हो, हर साल युवा हो जाते हैं! आत्मा को उदास नहीं होने दें, पर्स में खाली नहीं होगा, हमें प्रकाश के साथ रोशनी। " आप नहीं भूलेंगे, और फिर, हम तुम्हारे लिए हैं, प्रिये, हम पीते हैं! आपने सुंदरता पर विजय प्राप्त की, अक्सर एक बिकनी पहनते हैं, और हम एक स्टार की तरह जाएंगे। चलो Yulkoi उसके साथ ध्यान दें,
जूलिया नाम की एक लड़की - एक ईमानदार और खुलीलोग। उसके जीवन पर सकारात्मक दृष्टिकोण है। और इसके आशावाद के साथ, यह दूसरों को संक्रमित करता है। अक्सर, जूलिया आकर्षक लग रहा है। हालांकि, वह लोगों में अच्छी तरह से परिचित नहीं है, और वह पीड़ित है क्योंकि वह हर किसी के लिए अपना दिल खोलती है। अगर कोई व्यक्ति अपेक्षाओं को पूरा नहीं करता है तो बहुत हैरान है। स्वतंत्रता-प्रेमपूर्ण, आंदोलन उसका जीवन है। यदि जूलिया चार दीवारों में बंद है, तो उसे परवाह नहीं हैसंवाद करने और नए परिचितों को बनाने का एक तरीका खोजें। इस नाम वाली एक लड़की अपने रिश्तेदारों के लिए बेहद चौकस है। इसकी नकारात्मक गुणवत्ता गर्व है। इसी कारण से, उसके साथ बहस करना मुश्किल है। जूलिया की अभी भी अपनी राय होगी। आप केवल अपने तर्कों के साथ धीरे-धीरे बहस कर सकते हैं ताकि वह निर्णय ले सके कि वह स्वयं कुछ निष्कर्षों तक पहुंच चुकी है। वह बहुत नारी और आकर्षक है। इसके साथ कई रिश्तेदार और दोस्त हैंसुंदर नाम अगर आपकी प्रेमिका के पास छुट्टी है, तो कृपया जूलिया को कविता या गद्य में जन्मदिन की बधाई भेजें ताकि वह अद्वितीय दिख सके। वह इसकी सराहना करेगी। "आज यूल के जन्मदिन पर बधाई है- हमारी बेटी। हाल ही में, आप काफी बच्चे थे, और मेरे पिताजी और मैंने सोचा कि आपको कैसे कॉल करना है। यह पता चला कि हमने कई विकल्पों में से एकमात्र सही चुना है। आप हमारे विचित्र हैं, आप वास्तविक जूलिया-युला हैं। और आप अभी भी एक मिनट के लिए नहीं बैठते हैं। सक्रिय, हंसमुख, हंसमुख। अपनी हंसी के साथ, आप दूसरों को संक्रमित करते हैं। हम एक ऐसे व्यक्ति को नहीं जानते जो आपको प्यार नहीं करता है। और हम में से अधिकांश हम आपको पूजा करते हैं। आप हमारी सब कुछ हैं। " "जन्मदिन मुबारक जूलिया! इस भूरे रंग की जिंदगी में हमारी खुशी की गर्म गेंद, एक शराबी बनी, एक उज्ज्वल इंद्रधनुष और असली जादू। दुनिया में सबसे सभ्य और सुंदर। हम चाहते हैं कि आप आज रात पार्टी की रानी बनें, जब आप इसका सपना देखते हैं! एक इच्छा करो, और यह सच हो जाएगा, और हम, हमारे हिस्से पर, ऐसा करने के लिए सबकुछ करेंगे। हमें हमारी बेटी पर बहुत गर्व है और हमें विश्वास है कि हमें आपके लिए कभी भी ब्लश नहीं करना पड़ेगा। हैप्पी अवकाश, हमारी थंबेलिना! "। "मैं दिन में अपनी पहली बधाई भेजने के लिए जल्दी करोजूलिया का जन्म आप के लिए, मेरे प्यारे दोस्त, मैं आपको बहुत प्यार करना चाहता हूं। आपके द्वारा सम्मानित सभी मानव गुण, आपके साथी थे। उसे सचमुच आपको अपनी बाहों में ले जाने दें। अध्ययन करने के लिए उत्कृष्ट था, और आपके पूरे जीवन के लिए आपके पास प्रयास करने के लिए कुछ था। मैं ताकत और आत्मविश्वास की कामना करता हूं। ताकि जीवन में सबकुछ आसान हो। आनंद लें, नाचें, आनंद करें, चमकें, क्योंकि आज आपका दिन है। मुझे रखने के लिए धन्यवाद। " "युलिया के जन्मदिन पर बधाई आज सुनाएक बार नहीं मुझे, सबसे अच्छे दोस्त के रूप में, कुछ शब्द कहें। इससे पहले कि मैं आपसे मिला, मुझे नहीं पता था कि दोस्ती क्या थी। आपके बारे में, शब्द की सबसे अच्छी भावना में, मैंने सपना देखा। उम्मीद व्यर्थ नहीं थी। इस तरह के करीबी व्यक्ति होने के लिए यह एक बड़ी खुशी है। तुम मेरे परिवार हो, केवल आप ही किसी भी स्थिति में भरोसा कर सकते हैं। सबसे अच्छा दोस्त ही एकमात्र व्यक्ति है जिसके साथ मैं चुप रहना सहज महसूस करता हूं। आपके साथ, मैं सुरक्षित महसूस करता हूँ। मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ। हैप्पी अवकाश! »। "प्रिय दोस्त, दिन पर बधाईजन्म। जूलिया, हम आपको चाहते हैं कि आपके जीवन में उदासी के लिए कोई जगह नहीं थी। इसे स्थिरता दें, और भाग्य की सभी आश्चर्य केवल सुखद होगी। आप ऐसे व्यक्ति हैं जो हमेशा बचाव के लिए आते हैं और समर्थन करेंगे। हम चाहते हैं कि आपको अपनी मदद की जरूरत न हो। जीवन के मार्ग पर सभी समस्याओं को एक दिलचस्प स्थिति के साथ रहने दें और आपके पक्ष में हल हो जाएं। " "Yulchik! हमारा सूर्य, आपकी मुस्कान जीवन को आसान बनाती है। अपनी आंखें खुशी से चमकते हैं। वैसे ही केवल योग्य पुरुष हैं। हम आपको बहुत प्यार करते हैं। आप नहीं, लेकिन उसने आपकी देखभाल की और आपकी बुढ़ापे तक आपकी रक्षा की। " "यूल के जन्मदिन पर आज बधाईअसामान्य। मैं उसे प्यार में स्वीकार करना चाहता हूं। मैं कितना भाग्यशाली था कि मैं इस आदमी से मिला था। अच्छा और आशावाद की यह किरण। मेरे जीवन में कभी भी जागने में इतना आसान नहीं रहा है, काम से घर आने के लिए बहुत अच्छा लगा। हमारे पास जाने के लिए बहुत कुछ था। लेकिन मेरी पत्नी के लिए धन्यवाद, हम किसी भी मुश्किल परिस्थिति के योग्य बाहर आ गए। मुझे यकीन है कि यह मेरे लिए ऊपर से है। और अब हमें "मैं" और "वह" में विभाजित करना मुश्किल है, क्योंकि हम एक हैं। मुझे आशा है कि हमारे बच्चे न केवल बाहरी रूप से, बल्कि आंतरिक रूप से भी उनके जैसे होंगे। जन्मदिन मुबारक जूलिया! "। "हम चाहते हैं, कि आप सभी सुपर थे! पति सुपरमैन है, बेटा सुपरस्पोर्ट्समैन है, बेटी सुपर-ब्यूटी है। कक्षा को वही होना चाहिए। कूल मूड, कूल हेयर स्टाइल, कूल वर्क। क्योंकि हमारी जूलिया और सुपर, और कक्षा, और, सामान्य रूप से, एक चकित लड़की! "। "जन्मदिन मुबारक हो, जूलिया! बधाई हो आप मजाकिया चाहते हैं? अपने चुने हुए व्यक्ति को जॉनी डेप या ब्रैड पिट की तरह बनने दें। ताकि किसी भी एंजेलीना जोली ने आपकी सुंदरता को ईर्ष्या दी। कैमरून डायज या जूलिया रॉबर्ट्स से मुस्कुराओ। " कविताओं-बधाईः जन्मदिन मुबारक हो, जूलिया! Yulyashka के नाम से, मजेदार हास्यास्पद! और हम जो प्यार चाहते हैं, आप हमारे आकर्षण हैं, कूल प्यारी! »। "हम सभी सौंदर्य जानते हैं, उसका नाम, ज़ाहिर है, जूलिया, हम अब उसकी इच्छा करना चाहते हैं। जन्म के दिन खुशी के लिए था, अब, हर समय और फिर, अपना आरामदायक घर भरें! "। "हैलो, मेरे प्यारे यूलचोनोक, मेरा शराबी खरगोश! और मेरे दिल के नीचे से मैं चाहता हूंः बूढ़े मत हो और बीमार न हो, हर साल युवा हो जाते हैं! आत्मा को उदास नहीं होने दें, पर्स में खाली नहीं होगा, हमें प्रकाश के साथ रोशनी। " आप नहीं भूलेंगे, और फिर, हम तुम्हारे लिए हैं, प्रिये, हम पीते हैं! आपने सुंदरता पर विजय प्राप्त की, अक्सर एक बिकनी पहनते हैं, और हम एक स्टार की तरह जाएंगे। चलो Yulkoi उसके साथ ध्यान दें,
पत्नी, नाबालिग बच्चों या बूढ़े मां-बाप, जिनका कोई अपना भरण-पोषण का सहारा नहीं है और जिन्हें उनके पति/पिता ने छोड़ दिया है या बच्चे अपने मां बाप के बुढापें में उनका सहारा नहीं बनते हैं और उनको भरण-पोषण का खर्च नहीं देते हैं तो धारा 125 दण्ड प्राक्रिया संहिता के अन्तर्गत ऐसे व्यक्ति खर्चा गुजारा प्राप्त करने का अधिकार रखते हैं। इस धारा 125 दण्ड प्राक्रिया संहिता, 1973 के तहत पति या पिता का यह कानूनी कर्तव्य है कि वह पत्नी, जायज या नाजायज नाबलिग बच्चों का पालन पोषण करें। अगर ऐसा पति या पिता पत्नी या बच्चों को खर्चा देने से इन्कार करें तो उनके द्वारा प्रार्थना पत्र या दरखास्त देने पर न्यायिक दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी को कानूनी अधिकार है कि वह आवदेक को 500 रूपये खर्च प्रति व्यक्ति की दर से प्रदान करें और यह रकम उस पति से या पिता से अदालत के निर्देश द्वारा जबरन वसूल की जा सकती है। दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 125 से 128 तक इस सामाजिक समस्या निवारण के लिए बनाए गये कानून हैं। इन धाराओं के अधीन, निश्रित पत्नी, बच्चे व माता-पिता याचिका प्रथम श्रेणी के ज्युडिशियल मैजिस्ट्रेट की अदालत में दायर कर सकते हैं। खर्चा प्राप्त करने के लिए याचिका ऐसे अधिकार क्षेत्र वाले ज्युडिशियल मैजिस्ट्रेट, प्रथम श्रेणी की अदालत में दी जा सकती है। जहां पति उस समय रह रहा हो।जहां प्रतिवादी हाल तक आवेदक के साथ रहता रहा हो, जहां आवेदक रहता हो/जहां प्रतिवादी का स्थाई निवास हो, जहां पति-पत्नी याचिका से पहले (चाहे अस्थाई रूप से) रह रहे हों। खर्चे के लिए दी गई याचिका-आरोप पत्र न होकर एक याचिका होती है इसलिए प्रतिपक्षी को अभियुक्त नहीं बल्कि प्रत्यार्थी माना जाता है। यह कार्यवाही पूर्णतया फौजदारी नहीं होती बल्कि अर्ध-फौजदारी होती है। याचिका अदालत में प्रत्यार्थी को सम्मन जारी किये जाते हैं। अगर प्रत्यार्थी सम्मन लेने से जान बूझकर इन्कार करे या सम्मन मिलने के बावजूद अदालत में उपस्थित न हों तो उनके खिलाफ एक तरफा कार्यवाही के आदेश दिये जा सकते हैं। एक तरफा फैसले का आदेश उचित कारण साबित किये जाने पर तीन महीने के अन्दर रद्द करवाया जा सकता है। प्रार्थी या प्रत्यार्थी दोनों पक्षों को अपने आरापों को साबित करने के लिए गवाही देने का अधिकार है। दोनों पक्ष स्वयं अपने गवाह के तौर पर अदालत के समक्ष पेश होने का अधिकार रखते हैं। केस व अनुमान सावित्री बनाम गोबिन्द सिंह रावत,1986(1) सी.एल.आर.पेज नं0 331 में उच्च न्यायालय द्वारा निर्देश दिया गया है कि जब तक 125 सी0आर0पी0सी0 के तहत कारवाई पूरी होने तक गुजारा भता बारे कोई अन्तिम फैसला नहीं होता तब तक अन्तरिम आदेश के तहत 125 सी0आर0पी0सी0 की दरखास्त दायर होते ही गुजारा भता दिया जा सकता है। यहां यह भी बताना उचित होगा कि केस व अनुमान श्रीमती कमला वगैरा बनाम महिमा सिंह, 1989(1) सी.एल.आर.पेज न0 501 में दर्ज, उच्च न्यायालय द्वारा दिये गये फैसले के मुताबिक ऐसी हर दरखास्त जेर धारा 125 सी0आर0पी0सी0 दुबारा चालू हो सकती है जो प्रार्थीय के न आने के कारण खारिज कर दी गई हो। यहां यह भी बताना उचित होगा कि केस व अनुमान पवित्र सिंह बनाम भुपिन्द्र कौर, 1988 एस.एल.जे. पेज न0 164 में दर्ज उच्च न्यायालय के फैसले के मुताबिक ऐसी दरखास्त जेर धारा 125 सी0आर0पी0सी0 जो राजीनामा की वहज से वापिस ले ली गई हो दुबारा चलाई जा सकती है अगर उस केस का राजीनामा टूट जाये। अपनी पत्नी जो अपना, खर्चा स्वयं वहन न कर सकती हों, अपने नाबालिग बच्चों (वैध व अवैध) जो स्वयं अपना खर्चा चलाने में असमर्थ हो, अपने बालिग बच्चों (वैध व अवैध) सिवाय विवाहित पुत्री के) जो शारीरिक या मानसिक रूप से अक्षम होने पर अपना खर्चा स्वयं वहन न कर सकते हों, अपने वृद्ध व लाचार माता पिता जो स्वयं अपना खर्चा उठाने में असमर्थ हो, कि वह उनका खर्चा व पालन पोषण का व्यय उठाएं। ध्यान रहे कि केवल कानूनन व्याहिता पत्नी ही खर्चा लेने की अधिकारिणी है। दूसरी (पत्नी जो विवाह कानून द्वारा मान्य नहीं है, या रखैल, खर्चा प्राप्त करने की हकदार नहीं है लेकिन वैध या अवैध सन्तानें इस धारा के अन्तर्गत खर्चा लेने की हकदार है।) कि प्रार्थी के पास खर्चा देने के पर्याप्त साधन हैं। वह जानबूझकर भरण-पोषण देने में आनाकानी या इन्कार कर रहा है। आवेदक प्रत्यार्थी के साथ न रहने के लिए मजबूर है, अगर पति के खिलाफ व्यभिचार (परस्त्रीगमन) निर्दयता (शारीरिक व मानसिक) दूसरी शादी या अन्य ऐसे कोई आरोप साबित हो तो पत्नी द्वारा अलग रह कर खर्चा प्राप्त करने का अधिकार मान्य होगा। आवदेक के पास स्वयं अपना खर्चा चलाने के लिए कोई साधन उपलब्ध न है। पति-पत्नी स्वयं रजाबन्दी से अलग रह रहे हों, तो खर्चा प्राप्त करने की याचिका रद्द की जा सकती है। अदालत द्वारा प्रति माह व्यक्ति (आवेदक) 500 रूपये से अधिक खर्चे का आदेश नहीं दिया जा सकता। यह आदेश अदालत द्वारा दोनों पक्षों की आर्थिक व सामाजिक परिस्थितियों, उनकी जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए निर्धारित किया जाता है। किसी भी पक्ष की परिस्थितियों में फेर बदल होने पर खर्च के आदेश को रद्द या कम या ज्यादा किया जा सकता है। अगर खर्चा प्राप्त करने वाले व्यक्ति का समय व्यतीत हो जाने के उपरान्त अदालत द्वारा प्रदान किये हुए खर्चे से गुजारा नहीं होता या जिस व्यक्ति के विरूद्ध खर्चा लगवाया गया है उसकी आर्थिक स्थिति में खर्चे के निर्देश उपरान्त तबदीली आती है तो खर्चा प्राप्त करने वाले व्यक्ति को अधिकार है कि वहा न्यायिक दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी की अदालत में खर्चा बढ़ाने के लिए आवेदन धारा 127 दण्ड प्राक्रिया संहिता के तहत दे सकता है। 2001 के अधिनियम 50 ने तबदीली लाई है कि खर्चे की रकम अदालत हालत के मुताबिक तय करेगी और इसकी कोई सीमा न होगी। अगर इस प्रकार के आवेदन पर पत्नी, बच्चों या माता पिता के खर्चा तबदीली करने की सुनवाई करता है तो अदालत किसी दिवानी दावे में हुए फैसले को भी मद्देनजर रखेगी। इस प्रकार अगर किसी पत्नी ने तलाक लिया है या पति ने उसे तलाक दिया है और ऐसी पत्नी तलाक लेने के उपरान्त दूसरी शादी कर लेती है तो अदालत को अधिकार है कि वह पति के आवेदन पर ऐसी पत्नी के खर्चा गुजारे के आदेश को उसके द्वारा शादी करने की तारीख से रद्द कर सकती है। मेरी पत्नी सरकारी नौकरी में हैं और पूरा पैसा अपने जीवन में ही उपयोग करती है अपने मायके पक्ष में ही दे देती हैं,एक बेटी है मेरी उस की देखभाल के लिए भी मेरे को पैसे देने पड़ते हैं और मकान की बैंक किस्त भी मुझे ही जा मां करना पड़ता है मेरा परिवार में आना जाना भी नहीं है ,,,,, kya muslim ko bhi dhara 125 ke tahet rakh rakhaw dena pad sakta he??? or agar kitne samay tak rakh rakhaw na diya to jail ho sakti he??
पत्नी, नाबालिग बच्चों या बूढ़े मां-बाप, जिनका कोई अपना भरण-पोषण का सहारा नहीं है और जिन्हें उनके पति/पिता ने छोड़ दिया है या बच्चे अपने मां बाप के बुढापें में उनका सहारा नहीं बनते हैं और उनको भरण-पोषण का खर्च नहीं देते हैं तो धारा एक सौ पच्चीस दण्ड प्राक्रिया संहिता के अन्तर्गत ऐसे व्यक्ति खर्चा गुजारा प्राप्त करने का अधिकार रखते हैं। इस धारा एक सौ पच्चीस दण्ड प्राक्रिया संहिता, एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर के तहत पति या पिता का यह कानूनी कर्तव्य है कि वह पत्नी, जायज या नाजायज नाबलिग बच्चों का पालन पोषण करें। अगर ऐसा पति या पिता पत्नी या बच्चों को खर्चा देने से इन्कार करें तो उनके द्वारा प्रार्थना पत्र या दरखास्त देने पर न्यायिक दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी को कानूनी अधिकार है कि वह आवदेक को पाँच सौ रूपये खर्च प्रति व्यक्ति की दर से प्रदान करें और यह रकम उस पति से या पिता से अदालत के निर्देश द्वारा जबरन वसूल की जा सकती है। दण्ड प्रक्रिया संहिता एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर की धारा एक सौ पच्चीस से एक सौ अट्ठाईस तक इस सामाजिक समस्या निवारण के लिए बनाए गये कानून हैं। इन धाराओं के अधीन, निश्रित पत्नी, बच्चे व माता-पिता याचिका प्रथम श्रेणी के ज्युडिशियल मैजिस्ट्रेट की अदालत में दायर कर सकते हैं। खर्चा प्राप्त करने के लिए याचिका ऐसे अधिकार क्षेत्र वाले ज्युडिशियल मैजिस्ट्रेट, प्रथम श्रेणी की अदालत में दी जा सकती है। जहां पति उस समय रह रहा हो।जहां प्रतिवादी हाल तक आवेदक के साथ रहता रहा हो, जहां आवेदक रहता हो/जहां प्रतिवादी का स्थाई निवास हो, जहां पति-पत्नी याचिका से पहले रह रहे हों। खर्चे के लिए दी गई याचिका-आरोप पत्र न होकर एक याचिका होती है इसलिए प्रतिपक्षी को अभियुक्त नहीं बल्कि प्रत्यार्थी माना जाता है। यह कार्यवाही पूर्णतया फौजदारी नहीं होती बल्कि अर्ध-फौजदारी होती है। याचिका अदालत में प्रत्यार्थी को सम्मन जारी किये जाते हैं। अगर प्रत्यार्थी सम्मन लेने से जान बूझकर इन्कार करे या सम्मन मिलने के बावजूद अदालत में उपस्थित न हों तो उनके खिलाफ एक तरफा कार्यवाही के आदेश दिये जा सकते हैं। एक तरफा फैसले का आदेश उचित कारण साबित किये जाने पर तीन महीने के अन्दर रद्द करवाया जा सकता है। प्रार्थी या प्रत्यार्थी दोनों पक्षों को अपने आरापों को साबित करने के लिए गवाही देने का अधिकार है। दोनों पक्ष स्वयं अपने गवाह के तौर पर अदालत के समक्ष पेश होने का अधिकार रखते हैं। केस व अनुमान सावित्री बनाम गोबिन्द सिंह रावत,एक हज़ार नौ सौ छियासी सी.एल.आर.पेज नंशून्य तीन सौ इकतीस में उच्च न्यायालय द्वारा निर्देश दिया गया है कि जब तक एक सौ पच्चीस सीशून्यआरशून्यपीशून्यसीशून्य के तहत कारवाई पूरी होने तक गुजारा भता बारे कोई अन्तिम फैसला नहीं होता तब तक अन्तरिम आदेश के तहत एक सौ पच्चीस सीशून्यआरशून्यपीशून्यसीशून्य की दरखास्त दायर होते ही गुजारा भता दिया जा सकता है। यहां यह भी बताना उचित होगा कि केस व अनुमान श्रीमती कमला वगैरा बनाम महिमा सिंह, एक हज़ार नौ सौ नवासी सी.एल.आर.पेज नशून्य पाँच सौ एक में दर्ज, उच्च न्यायालय द्वारा दिये गये फैसले के मुताबिक ऐसी हर दरखास्त जेर धारा एक सौ पच्चीस सीशून्यआरशून्यपीशून्यसीशून्य दुबारा चालू हो सकती है जो प्रार्थीय के न आने के कारण खारिज कर दी गई हो। यहां यह भी बताना उचित होगा कि केस व अनुमान पवित्र सिंह बनाम भुपिन्द्र कौर, एक हज़ार नौ सौ अठासी एस.एल.जे. पेज नशून्य एक सौ चौंसठ में दर्ज उच्च न्यायालय के फैसले के मुताबिक ऐसी दरखास्त जेर धारा एक सौ पच्चीस सीशून्यआरशून्यपीशून्यसीशून्य जो राजीनामा की वहज से वापिस ले ली गई हो दुबारा चलाई जा सकती है अगर उस केस का राजीनामा टूट जाये। अपनी पत्नी जो अपना, खर्चा स्वयं वहन न कर सकती हों, अपने नाबालिग बच्चों जो स्वयं अपना खर्चा चलाने में असमर्थ हो, अपने बालिग बच्चों सिवाय विवाहित पुत्री के) जो शारीरिक या मानसिक रूप से अक्षम होने पर अपना खर्चा स्वयं वहन न कर सकते हों, अपने वृद्ध व लाचार माता पिता जो स्वयं अपना खर्चा उठाने में असमर्थ हो, कि वह उनका खर्चा व पालन पोषण का व्यय उठाएं। ध्यान रहे कि केवल कानूनन व्याहिता पत्नी ही खर्चा लेने की अधिकारिणी है। दूसरी कि प्रार्थी के पास खर्चा देने के पर्याप्त साधन हैं। वह जानबूझकर भरण-पोषण देने में आनाकानी या इन्कार कर रहा है। आवेदक प्रत्यार्थी के साथ न रहने के लिए मजबूर है, अगर पति के खिलाफ व्यभिचार निर्दयता दूसरी शादी या अन्य ऐसे कोई आरोप साबित हो तो पत्नी द्वारा अलग रह कर खर्चा प्राप्त करने का अधिकार मान्य होगा। आवदेक के पास स्वयं अपना खर्चा चलाने के लिए कोई साधन उपलब्ध न है। पति-पत्नी स्वयं रजाबन्दी से अलग रह रहे हों, तो खर्चा प्राप्त करने की याचिका रद्द की जा सकती है। अदालत द्वारा प्रति माह व्यक्ति पाँच सौ रूपये से अधिक खर्चे का आदेश नहीं दिया जा सकता। यह आदेश अदालत द्वारा दोनों पक्षों की आर्थिक व सामाजिक परिस्थितियों, उनकी जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए निर्धारित किया जाता है। किसी भी पक्ष की परिस्थितियों में फेर बदल होने पर खर्च के आदेश को रद्द या कम या ज्यादा किया जा सकता है। अगर खर्चा प्राप्त करने वाले व्यक्ति का समय व्यतीत हो जाने के उपरान्त अदालत द्वारा प्रदान किये हुए खर्चे से गुजारा नहीं होता या जिस व्यक्ति के विरूद्ध खर्चा लगवाया गया है उसकी आर्थिक स्थिति में खर्चे के निर्देश उपरान्त तबदीली आती है तो खर्चा प्राप्त करने वाले व्यक्ति को अधिकार है कि वहा न्यायिक दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी की अदालत में खर्चा बढ़ाने के लिए आवेदन धारा एक सौ सत्ताईस दण्ड प्राक्रिया संहिता के तहत दे सकता है। दो हज़ार एक के अधिनियम पचास ने तबदीली लाई है कि खर्चे की रकम अदालत हालत के मुताबिक तय करेगी और इसकी कोई सीमा न होगी। अगर इस प्रकार के आवेदन पर पत्नी, बच्चों या माता पिता के खर्चा तबदीली करने की सुनवाई करता है तो अदालत किसी दिवानी दावे में हुए फैसले को भी मद्देनजर रखेगी। इस प्रकार अगर किसी पत्नी ने तलाक लिया है या पति ने उसे तलाक दिया है और ऐसी पत्नी तलाक लेने के उपरान्त दूसरी शादी कर लेती है तो अदालत को अधिकार है कि वह पति के आवेदन पर ऐसी पत्नी के खर्चा गुजारे के आदेश को उसके द्वारा शादी करने की तारीख से रद्द कर सकती है। मेरी पत्नी सरकारी नौकरी में हैं और पूरा पैसा अपने जीवन में ही उपयोग करती है अपने मायके पक्ष में ही दे देती हैं,एक बेटी है मेरी उस की देखभाल के लिए भी मेरे को पैसे देने पड़ते हैं और मकान की बैंक किस्त भी मुझे ही जा मां करना पड़ता है मेरा परिवार में आना जाना भी नहीं है ,,,,, kya muslim ko bhi dhara एक सौ पच्चीस ke tahet rakh rakhaw dena pad sakta he??? or agar kitne samay tak rakh rakhaw na diya to jail ho sakti he??
नसोहत की और कई साधु सन्तों द्वारा उपदेश दिलाया, लेकिन उसने अपनी वह आदत नहीं छोड़ी। दुष्ट आदमी अपनी कुटेव इस तरह थोड़े हो छोड़ता है । लुब्धक जवान का मीठा था, इसलिए उसका दर्जा धीरे धीरे बढ़ता गया । एक दिन सारे राज्य में उसकी तूती बोलने लगी । उसकी वक्र दृष्टि से बचने के लिए और उसकी मदरबानी प्राप्त करने के लिए गरजमन्द लोग उसे सलाम भरने लगे और नजराने देने लगे। लुब्धक के गाँव के नजदीक तुगभद्र-नामक एक कुनबी रहता था । वह पैसे-टके से सुखी था । जाति-बिरादरी में भी उसकी अच्छी इज्जत थी । वह एक सक्षम व्यक्ति माना जाता था। वह बड़ा दान पुण्य करता, साधु-सर्वो को जिमाता और गरीब, निराधार या या अपग लोगों को भी यथाशक्ति सहायता देकर सन्तुष्ट करता । उसकी इस उदारता और सेवा परायण वृत्ति के कारण उसे लोग 'भगत' कहने लगे । सन लोग उसका चड़ा सम्मान करते थे । यह देखकर लुब्धक का ईष्यालु हृदय जल्ने लगा। उसे विचार हुआ - "बैल का दुम पकड़नेवाला यह पटेल पाँच भिखमर्गो को रोटी का टुकड़ा फेंक कर बड़ा धर्मात्मा बन बैठा है और मुझे कभी सलाम करने भी नहीं आता । अत उसे अवश्य देख लेना चाहिए ।" तुगभद्र सलाम करने नहीं आता था, यह उसका भयकर गुनाई था और इसलिए उसे दण्ड देने की तैयारी ! इस जगत में दुष्ट व्यक्ति की दुष्टता भी किस हद तक जाती है ? लुब्धक ने तुगभद्र को फँसाने के लिए जाल फैलाया, पर वह व्यर्थ गया ' तुगभद्र उसमें नहीं फँसा ! दूसरी चार भी
नसोहत की और कई साधु सन्तों द्वारा उपदेश दिलाया, लेकिन उसने अपनी वह आदत नहीं छोड़ी। दुष्ट आदमी अपनी कुटेव इस तरह थोड़े हो छोड़ता है । लुब्धक जवान का मीठा था, इसलिए उसका दर्जा धीरे धीरे बढ़ता गया । एक दिन सारे राज्य में उसकी तूती बोलने लगी । उसकी वक्र दृष्टि से बचने के लिए और उसकी मदरबानी प्राप्त करने के लिए गरजमन्द लोग उसे सलाम भरने लगे और नजराने देने लगे। लुब्धक के गाँव के नजदीक तुगभद्र-नामक एक कुनबी रहता था । वह पैसे-टके से सुखी था । जाति-बिरादरी में भी उसकी अच्छी इज्जत थी । वह एक सक्षम व्यक्ति माना जाता था। वह बड़ा दान पुण्य करता, साधु-सर्वो को जिमाता और गरीब, निराधार या या अपग लोगों को भी यथाशक्ति सहायता देकर सन्तुष्ट करता । उसकी इस उदारता और सेवा परायण वृत्ति के कारण उसे लोग 'भगत' कहने लगे । सन लोग उसका चड़ा सम्मान करते थे । यह देखकर लुब्धक का ईष्यालु हृदय जल्ने लगा। उसे विचार हुआ - "बैल का दुम पकड़नेवाला यह पटेल पाँच भिखमर्गो को रोटी का टुकड़ा फेंक कर बड़ा धर्मात्मा बन बैठा है और मुझे कभी सलाम करने भी नहीं आता । अत उसे अवश्य देख लेना चाहिए ।" तुगभद्र सलाम करने नहीं आता था, यह उसका भयकर गुनाई था और इसलिए उसे दण्ड देने की तैयारी ! इस जगत में दुष्ट व्यक्ति की दुष्टता भी किस हद तक जाती है ? लुब्धक ने तुगभद्र को फँसाने के लिए जाल फैलाया, पर वह व्यर्थ गया ' तुगभद्र उसमें नहीं फँसा ! दूसरी चार भी
नई दिल्लीः हाल ही विराट कोहली मैदान पर ग्लेन मैक्सवेल के साथ रॉक पेपर सिजर्स खेलते नजर आए थे. उन्हें ऐसा करते देख फैंस खुश हो गए थे. अब उन्होंने एक ऐसा खेल खेला कि साथी खिलाड़ी भी दंग रह गए. दरअसल, 23 अप्रैल को राजस्थान रॉयल्स के विरूद्ध रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (आरसीबी) के मैच पहले कोहली को मोहम्मद सिराज, फाफ डु प्लेसिस और दिनेश कार्तिक के साथ दिलचस्प खेल खेलते देखा गया. विराट कोहली को आंखों पर पट्टी बांधकर खिलाड़ियों को पहचाने की चुनौती दी गई. हालांकि उन्होंने आरसीबी टीम के साथियों को वॉच और बीयर्ड के साथ सरलता से पहचान लिया, लेकिन इस दौरान उन्हें एक ऐसा सरप्राइज मिला कि वे स्वयं भी दंग रह गए. दरअसल, डु प्लेसिस के बाद कोहली के सामने अचानक स्टार फुटबॉलर सुनील छेत्री आ गए. कोहली ने फुटबॉलर के बालों और हाथ को छुआ और उनकी हाइट चैक करने लगे.
नई दिल्लीः हाल ही विराट कोहली मैदान पर ग्लेन मैक्सवेल के साथ रॉक पेपर सिजर्स खेलते नजर आए थे. उन्हें ऐसा करते देख फैंस खुश हो गए थे. अब उन्होंने एक ऐसा खेल खेला कि साथी खिलाड़ी भी दंग रह गए. दरअसल, तेईस अप्रैल को राजस्थान रॉयल्स के विरूद्ध रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के मैच पहले कोहली को मोहम्मद सिराज, फाफ डु प्लेसिस और दिनेश कार्तिक के साथ दिलचस्प खेल खेलते देखा गया. विराट कोहली को आंखों पर पट्टी बांधकर खिलाड़ियों को पहचाने की चुनौती दी गई. हालांकि उन्होंने आरसीबी टीम के साथियों को वॉच और बीयर्ड के साथ सरलता से पहचान लिया, लेकिन इस दौरान उन्हें एक ऐसा सरप्राइज मिला कि वे स्वयं भी दंग रह गए. दरअसल, डु प्लेसिस के बाद कोहली के सामने अचानक स्टार फुटबॉलर सुनील छेत्री आ गए. कोहली ने फुटबॉलर के बालों और हाथ को छुआ और उनकी हाइट चैक करने लगे.
मुंबई के पात्रा चॉल भूमि घोटाला मामले में आज केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारी शिवसेना प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद संजय राउत के आवास पर पहुंचे हैं. महाराष्ट्र से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है. पात्रा चॉल भूमि घोटाला मामले में आज केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारी शिवसेना प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद संजय राउत के आवास पर पहुंचे हैं. इस मामले में ईडी संजय राउत के घर की तलाशी और पूछताछ कर रही है. इस दौरान शिवसेना नेता संजय राउत ने ट्वीट किया कि 'महाराष्ट्र और शिवसेना लड़ते रहेंगे'. इससे पहले ईडी ने संजय राउत को 1034 करोड़ रुपये के इस घोटाले में पूछताछ के लिए बुधवार को तलब किया था, लेकिन वह पेश नहीं हुए थे. उधर, इस मामले में गवाह सपना पाटकर को धमकी दी गई है कि वह बयान वापस ले ले. इस मामले में राउत पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है. दरअसल पात्रा चॉल भूमि घोटाला मामले में गवाह सपना पाटकर को जान से मारने की धमकी के बाद मुंबई पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है. इस मामले में शिवसेना सांसद संजय राउत का नाम भी शामिल है. आरोप है कि सपना को धमकी भरा ऑडियो संजय राउत ने भिजवाया है. वहीं धमकी भरी चिट्ठी में ये भी लिखा था कि वह बयान में कहें कि पहले कही गई बातें उन्होंने बीजेपी नेता किरिट सोमैया के दबाव में आकर कही थीं. वहीं शिवसेना सांसद संजय राउत पर सपना पाटकर के साथ गाली गलौज करने का भी आरोप लगा है. इसका एक ऑडियो भी वायरल हुआ था. उनकी शिकायत पर मुंबई पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया था. पात्रा चॉल घोटाला मुंबई के गोरेगांव इलाके से जुड़ा हुआ है. यह महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवेलपमेंट अथॉरिटी का जमीन है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इसमें करीब 1034 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ था. वहीं इस मामले में शिवसेना सांसद संजय राउत की 9 करोड़ रुपये और उनकी पत्नी वर्षा की 2 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त कर ली गई थी. इस मामले में ईडी पहले ही रीयल एस्टेट कारोबारी प्रवीण राउत को गिरफ्तार कर चुकी है. आरोप है कि प्रवीण ने पात्रा चॉल में रह रहे लोगों को धोखा दिया. इसमें एक कंस्ट्रक्शन कंपनी को यहां तीन हजार फ्लैट बनाने का काम मिला था, जिसमें से 672 फ्लैट पहले से यहां रह रहे लोगों को देने थे. बाकी एमएचएडीए और उक्त कंपनी को दिए जाने थे. लेकिन साल 2011 में इस जमीन के कुछ हिस्सों को दूसरे बिल्डरों को बेच दिया गया था.
मुंबई के पात्रा चॉल भूमि घोटाला मामले में आज केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी शिवसेना प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद संजय राउत के आवास पर पहुंचे हैं. महाराष्ट्र से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है. पात्रा चॉल भूमि घोटाला मामले में आज केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी शिवसेना प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद संजय राउत के आवास पर पहुंचे हैं. इस मामले में ईडी संजय राउत के घर की तलाशी और पूछताछ कर रही है. इस दौरान शिवसेना नेता संजय राउत ने ट्वीट किया कि 'महाराष्ट्र और शिवसेना लड़ते रहेंगे'. इससे पहले ईडी ने संजय राउत को एक हज़ार चौंतीस करोड़ रुपये के इस घोटाले में पूछताछ के लिए बुधवार को तलब किया था, लेकिन वह पेश नहीं हुए थे. उधर, इस मामले में गवाह सपना पाटकर को धमकी दी गई है कि वह बयान वापस ले ले. इस मामले में राउत पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है. दरअसल पात्रा चॉल भूमि घोटाला मामले में गवाह सपना पाटकर को जान से मारने की धमकी के बाद मुंबई पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है. इस मामले में शिवसेना सांसद संजय राउत का नाम भी शामिल है. आरोप है कि सपना को धमकी भरा ऑडियो संजय राउत ने भिजवाया है. वहीं धमकी भरी चिट्ठी में ये भी लिखा था कि वह बयान में कहें कि पहले कही गई बातें उन्होंने बीजेपी नेता किरिट सोमैया के दबाव में आकर कही थीं. वहीं शिवसेना सांसद संजय राउत पर सपना पाटकर के साथ गाली गलौज करने का भी आरोप लगा है. इसका एक ऑडियो भी वायरल हुआ था. उनकी शिकायत पर मुंबई पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया था. पात्रा चॉल घोटाला मुंबई के गोरेगांव इलाके से जुड़ा हुआ है. यह महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवेलपमेंट अथॉरिटी का जमीन है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इसमें करीब एक हज़ार चौंतीस करोड़ रुपए का घोटाला हुआ था. वहीं इस मामले में शिवसेना सांसद संजय राउत की नौ करोड़ रुपये और उनकी पत्नी वर्षा की दो करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त कर ली गई थी. इस मामले में ईडी पहले ही रीयल एस्टेट कारोबारी प्रवीण राउत को गिरफ्तार कर चुकी है. आरोप है कि प्रवीण ने पात्रा चॉल में रह रहे लोगों को धोखा दिया. इसमें एक कंस्ट्रक्शन कंपनी को यहां तीन हजार फ्लैट बनाने का काम मिला था, जिसमें से छः सौ बहत्तर फ्लैट पहले से यहां रह रहे लोगों को देने थे. बाकी एमएचएडीए और उक्त कंपनी को दिए जाने थे. लेकिन साल दो हज़ार ग्यारह में इस जमीन के कुछ हिस्सों को दूसरे बिल्डरों को बेच दिया गया था.
लॉस एंजेलिस । रियलिटी टीवी स्टार किम कार्दशियन ने हाल ही में स्वीकार किया है कि वह 'डोंट वरी डालिर्ंग' की अभिनेत्री फ्लोरेंस पुघ को हैरी स्टाइल्स के साथ मनोवैज्ञानिक नाटक में देखने के बाद से 'जुनूनी' हैं। फीमेलफस्र्ट डॉट को डॉट यूके की रिपोर्ट, अब, यह दावा किया जा रहा है कि रियलिटी स्टार 26 वर्षीय पुघ के साथ घूमने के मिशन पर है। एक अंदरूनी सूत्र ने हीट मैगजीन को बताया, "किम हर किसी के लिए फ्लोरेंस के बारे में बता रही है जो सुनेगा और अब उन्हें कार्दशियन के सोशल सर्कल में लाने के मिशन पर है। "वह पहले से ही फ्लो के बारे में बहुत अच्छी बातें सुन चुकी थी, और अब उन्होंने 'डोंट वरी डालिर्ंग' देखी है। किम इस बारे में आगे बताना बंद नहीं कर सकती कि उन्हें यह सब कैसे मिला है - प्रतिभा, करिश्मा, एक सुंदर फिगर, और शरीर की संरचना जिसके लिए आप कुछ भी करना पसंद करेंगे। " "उनके पास दोस्तों का एक समूह है और अतीत में कुछ ऐसे ही कार्यक्रमों में शामिल हुई हैं, लेकिन हमें पूरी तरह से एक दूसरे के साथ बात करने का मौका कभी नहीं मिला। " "किम इसे बदलना चाहती है। " उन्होंने ओलिविया वाइल्ड के फ्लिक के बारे में ट्वीट किया था, "हैरी बहुत अच्छा था, पर अब मैं फ्लोरेंस पुघ से जुनूनी हूं। " "वह एक अद्भुत अभिनेत्री से परे है और वह बहुत सुंदर भी है। " किम के 28 वर्षीय कॉमेडियन पीट डेविडसन से अलग होने के बाद दोनों सितारे हाल ही में सिंगल हो गए हैं, और फ्लोरेंस 47 वर्षीय अभिनेता-और-फिल्म निर्माता जैच ब्रैफ के साथ एक दीर्घकालिक संबंध से बाहर आ गई हैं।
लॉस एंजेलिस । रियलिटी टीवी स्टार किम कार्दशियन ने हाल ही में स्वीकार किया है कि वह 'डोंट वरी डालिर्ंग' की अभिनेत्री फ्लोरेंस पुघ को हैरी स्टाइल्स के साथ मनोवैज्ञानिक नाटक में देखने के बाद से 'जुनूनी' हैं। फीमेलफस्र्ट डॉट को डॉट यूके की रिपोर्ट, अब, यह दावा किया जा रहा है कि रियलिटी स्टार छब्बीस वर्षीय पुघ के साथ घूमने के मिशन पर है। एक अंदरूनी सूत्र ने हीट मैगजीन को बताया, "किम हर किसी के लिए फ्लोरेंस के बारे में बता रही है जो सुनेगा और अब उन्हें कार्दशियन के सोशल सर्कल में लाने के मिशन पर है। "वह पहले से ही फ्लो के बारे में बहुत अच्छी बातें सुन चुकी थी, और अब उन्होंने 'डोंट वरी डालिर्ंग' देखी है। किम इस बारे में आगे बताना बंद नहीं कर सकती कि उन्हें यह सब कैसे मिला है - प्रतिभा, करिश्मा, एक सुंदर फिगर, और शरीर की संरचना जिसके लिए आप कुछ भी करना पसंद करेंगे। " "उनके पास दोस्तों का एक समूह है और अतीत में कुछ ऐसे ही कार्यक्रमों में शामिल हुई हैं, लेकिन हमें पूरी तरह से एक दूसरे के साथ बात करने का मौका कभी नहीं मिला। " "किम इसे बदलना चाहती है। " उन्होंने ओलिविया वाइल्ड के फ्लिक के बारे में ट्वीट किया था, "हैरी बहुत अच्छा था, पर अब मैं फ्लोरेंस पुघ से जुनूनी हूं। " "वह एक अद्भुत अभिनेत्री से परे है और वह बहुत सुंदर भी है। " किम के अट्ठाईस वर्षीय कॉमेडियन पीट डेविडसन से अलग होने के बाद दोनों सितारे हाल ही में सिंगल हो गए हैं, और फ्लोरेंस सैंतालीस वर्षीय अभिनेता-और-फिल्म निर्माता जैच ब्रैफ के साथ एक दीर्घकालिक संबंध से बाहर आ गई हैं।
१०/२९/३] श्रीकृष्ण और गोपियोंका रासक्रीड़ाके लिए मिलन २७ वल्लभा सेयं वंशुलीति च विश्रुता । क्रमान्मणिमयी हैमी वैणवीति त्रिधा च सा॥' इति। अतो द्वादशाङ्गुलान्तरे तारमुखरन्ध्रा हैमीयं ज्ञेया । एवं गान - वैशिष्ट्यमपि ज्ञेयम्, वामदृशामिति श्लेषेण स्वस्मिन् कुटिलमेव पश्यन्तीनां तासां मनोरूपमूलाकृष्ट्या दृष्ट्यादि-सर्वेन्द्रियवृन्दमेवाकृष्टमिवेत्यर्थः। अत्र श्लेषेण कामबीजं जगाविति रहस्यम्, यतो वामदृक्सम्बन्धि यत्तत् सहितं कलमिति प्रथमाक्षरत्रयं व्यञ्जितम् । कीदृशम् ? मनोहरं, मनःशब्देन तदधिष्ठाता चन्द्र उच्यते, स च तदाकारत्वेन लवकः, तं हरतीति आकर्षतीति तत्सम्वलितमित्यर्थः । नादयुक्तत्वन्तु वेणुनादस्वाभाव्यादेवेति भावः; तदुक्तम्- 'कला तु माया लवका तु मूर्त्तिः, कलक्वणद्वेणुनिनादरम्यः' इति ॥३॥ भावानुवाद - तत्पश्चात् उस पूर्णचन्द्रको देखकर हृदयमें किसी भाव-विशेषका आविर्भाव होनेपर भगवान् श्रीकृष्ण ने अपने घरसे वृन्दावनमें आगमन किया और चन्द्रकी लाल-लाल किरणोंसे उस भूमिको सुरञ्जित देखकर यमुना पुलिनमें स्थित 'रासौली' नामक चबूतरे पर पहुँचे। यह ग्राम श्रीवज्रनाभके द्वारा स्थापित है। आज भी यमुनाका यह पुलिन 'रासौली' नामसे प्रसिद्ध है। इस पुलिनमें पधारकर प्रेमवती गोपियोंको आकर्षण करनेके लिए श्रीकृष्णने मोहन वेणुके द्वारा न जाने कैसा एक अनिर्वचनीय गीतका गान किया। इस वचनके द्वारा पूर्व-पूर्व रात्रियों में प्रकटित उनकी वेणु-शिक्षाकी विशेषताको 'दृष्ट्वा' इत्यादि पदोंसे बतला रहे हैं । 'रमाननाभम्' - जो भगवान्के साथमें रमण करती हैं, वे रमा अथवा जो भगवान्को रमण कराती हैं, वे रमा । इस 'रमा' शब्दकी मुख्यवृत्तिसे परम-रमारूप श्रीकृष्ण प्रेयसियोंको समझना चाहिये और उन प्रेयसियोंमें भी परम प्रेयसी श्रीमती राधिका ही इस 'रमा' शब्दकी वाच्या हैं। इस परम प्रेयसीको पानेके लिए ही श्रीभगवान् द्वारा वेणु - शिक्षाकी विशेषताके प्रकटनमें तथा इतने समय तक इन प्रेयसियोंके साथ सङ्गममें शिथिलताका प्रदर्शन सूचित हुआ है। 'रमाननाभम्'- अब उन्हीं 'रमा' श्रीराधिकाजीके मुखमण्डलकी 'तदाभ' - शोभाके समान समझकर अर्थात् चन्द्रको देखकर श्रीराधाजीके मुखमण्डलका स्मरण होनेके कारण अपनेको प्रकाश करनेके लिए श्रीभगवान्ने कलस्वर (मधुर अस्फुट स्वर) से वेणुवादन किया । अर्थात् वेणुगानकी विशेषता यही है कि यह केवल अनुरागवती ही कर्णगोचर हुआ करता है, अन्य कोई भी इसे नहीं सुन सकता । 'कुमुत्कुमुदम' -वितर्क (सम्भावना) और श्रीराधाजीके स्मरण आदिके उत्पन्न होनेके लिए समान रूपमें विशेषण है। इस प्रकार चन्द्रके साथ श्रीमती राधिकाजीके मुख सादृश्य आदिको देखकर श्रीकृष्ण जो वितर्क करने लगे, उसका कारण निर्देश कर रहे हैं। 'कुमुद्वान्'-चन्द्रके उदित होते ही कुमुद पुष्प विकसित होता है, इसीलिए चन्द्रका एक नाम कुमुद्वान भी है। इसके द्वारा यह अर्थ ध्वनित हो रहा है कि उस समय कुमुदके पुष्प विकसित हो रहे थे। यहाँ विशेषणोंके द्वारा विशेष्य चन्द्रको पाया गया है। "पद्मिनी (कमल) की मुद्रित अवस्थाके भञ्जनकारी ये उदित हो रहे हैं" ( अयमुदयति मुद्राभञ्जनः पद्मिनीनाम्) - साहित्यदर्पणके इस वाक्यके प्रयोगसे जिस प्रकार विशेषणके द्वारा विशेष्य सूर्यको पाया जाता है, उसी प्रकार 'कुमुद्वन्त' इत्यादि विशेषणोंके द्वारा विशेष्य चन्द्रको पाया जा रहा है। रमा (श्रीराधा) के मुखमण्डलके पक्षमें 'कुमुद्वन्त' विशेषण पदकी व्याख्या है - 'कु' - पृथ्वी, मुत्' - आनन्द, अर्थात् पृथ्वीके आनन्दको वर्द्धन करना ही जिस मुखमण्डलका कर्त्तव्य है, वही 'कुमुदवत्'। यहाँ विशेष्य क्लीवलिङ्ग पद मुखमण्डलके अधीन होनेके कारण विशेषण 'कुमुद्वन्तं' लिङ्ग परिवर्तनसे 'कुमुदवत्' हुआ है। श्रीराधाजी स्वयं रमारूपा होनेके कारण उनके मुखका कर्त्तव्य पृथ्वीका आनन्दवर्द्धन करना है। 'अखण्डमण्डलं'-चन्द्रके पक्षमें - सोलह कलाओंसे युक्त पूर्णचन्द्र और श्रीराधाजी मुखके पक्षमें - यथावत् परिमाणसे युक्त मण्डल (नासिका - कर्ण - नयन आदि प्रति अङ्ग विशिष्ट) अर्थात् शृङ्गाररस - उचित हाव-भाव आदिके आविर्भावसे जिस मुखके सौन्दर्य आदिमें किसी भी अंशमें न्यूनता नहीं हुई, वह अखण्ड मुखमण्डल। 'नवकुंकुमारुणं'-चन्द्रके पक्ष में - नवकुङ्कुम पिण्डके समान अरुण वर्ण और श्रीराधाजीके मुखके पक्षमें- नवकुङ्कुम रागसे अरुण वर्ण मुखमण्डल । इस इस प्रकार कालकी रति योग्यता दिखलाकर उस स्थानकी भी रति योग्यता 'वनञ्च' इत्यादि पदोंसे दिखला रहे हैं। चन्द्रकी कोमल किरणोंसे वन भूमि उद्भासित देखकर अर्थात् चन्द्रके १०/२९/३] श्रीकृष्ण और गोपियोंका रासक्रीड़ाके लिए मिलन २९ प्रथम उदयसे अल्प परिमाणमें प्रकाशके द्वारा रञ्जित वनको देखकर । इस प्रकार भावोद्दीपनका प्रदर्शन हुआ है। 'कोमलगोभिरञ्जितं' - यहाँ 'गोभिः' पदके विसर्ग स्थानमें 'र' होनेसे उसका लोप और 'भि' की 'इ' दीर्घ होनेसे छन्दका पतन घटता है, इसीलिए उसे दीर्घ नहीं किया 'कलं'-मधुर-अस्फुट ध्वनि । किन्तु, इसे गान करनेवाले श्रीकृष्णकी वेणुध्वनिके रूपमें ही समझना चाहिये, क्योंकि उस ध्वनिको 'जगौ'- वेणु द्वारा गान किया था। आगे, कथित होनेवाले रासके प्रसङ्गमें कहा जायेगा (श्रीमद्भा॰ १०/२९/४०)-"हे कृष्ण ! त्रिलोकीमें ऐसी कौन-सी रमणी है जो तुम्हारे मधुर अस्फुट वेणुगीतके श्रवणसे आर्यपथसे विचलित न हो जाये?" मधुर अस्फुट ध्वनिका अभिप्राय व्यक्त कर रहे हैं - यह वेणुगान सभीके मनको हरण करनेके कारण मधुर है और उन सभी अनुरागवती गोपियोंके अपने-अपने नामोंके उच्चारणमें भ्रमके लिए अस्फुट है। अर्थात् जिनके नाम आदिका निर्देशकर श्रीकृष्ण ध्वनि कर रहे हैं, वह सुस्पष्ट नहीं है, इसलिए प्रत्येक गोपी ही ऐसा समझी कि श्रीकृष्ण मुझे ही बुला रहे हैं । 'वामदृशां मनोहरं' - कुटिल नयनोंवाली भाववती गोपियोंको जिस प्रकार मनोहर लगे, उसी भावसे वेणुगान किया । अर्थात् वे वेणुगान केवल अनुरागवती व्रजाङ्गनाओंके ही मनको मुग्ध करनेवाला था, क्योंकि उस वेणुगीतको केवल उन्होंने ही श्रवण किया था और उसे श्रवणकर केवल वे ही श्रीकृष्णके निकट आयीं थीं, अन्य कोई भी नहीं । श्रीभगवान्ने भी केवलमात्र आदिरस अर्थात् शृङ्गाररसके उद्दीपक राग विशेषका ही गान किया था। अगले श्लोकमें भी कहेंगे'अनङ्गवर्द्धनं' इत्यादि । श्रीकृष्णने जिस राग विशेषका गान किया था, वह निश्चय ही मध्यम आदि राग होगा, क्योंकि इसी रागसे व्रजसुन्दरियोंमें काम उद्दीपन हुआ था । सङ्गीतशास्त्र में मायूर राग भेदमें ऐसा कहा गया है, "जो मध्यम ग्रामके रागसे उत्पन्न होकर अन्तमें मध्यम स्वर होता है, वही मध्यमादि राग है। केवल सायंकालमें ही इसका गान होता है। शृङ्गाररसमें ऋषभ् और धैवत् स्वर वर्जित होता है।" इस उद्धृत श्लोकमें 'म' - मध्यम, 'ऋ' - ऋषभ, 'ध' - धैवत स्वर, गीतके आदिमें जो स्वर समर्पित होता है, उसे 'ग्रह' कहते हैं। पहले ( श्रीमद्भा० १० / २१/६) में "हे राजन् ! वेणुध्वनि समस्त प्राणियों के लिए ही मनोहर है" - इस प्रकार साधारण रूपमें वेणुध्वनिका परिचय प्रदान हुआ है, अर्थात् वेणुध्वनिके स्वभावके अनुसार सभी व्रजसुन्दरियोंको मोह उत्पन्न हुआ था। किन्तु, इस समय उज्ज्वलरस विशेषके उद्दीपनवशतः उन्हें आकर्षण हुआ था । अतएव उन-उन अवस्थाओंमें बंसीका भी वैशिष्ट्य है। यहाँ उसीको बतला रहे हैं (श्रीभ० र० सि० २/१/३६८-३७२)-"अर्द्धाङ्गुली व्यवधानसे उर्द्धमानमें तारा आदि स्वरके लिए आठ छिद्रयुक्त और उन सभी छिद्रोंमें पहले छिद्रसे डेढ़ अङ्गुली दूर एक अङ्गुली परिमित मुखका छिद्र होता है। आगेका भाग चार अङ्गुली और पीछेका भाग तीन अङ्गुली-कुल नौ छिद्रयुक्त सतरह अङ्गुली परिमित बाँस ही बंसीके नामसे जाना जाता है। बंसीका मुख-छिद्र तार नामक अन्तिम छिद्रसे दस अङ्गुली परिमित दूर होनेपर उस बंसीका नाम 'महानन्दा' होता है। कोई-कोई इस बंसीको 'सम्मोहिनी' बंसी कहते हैं। यदि बंसीके तार छिद्र और मुखरन्ध्र बारह अङ्गुली दूर रहते हैं, तो उसे 'आकर्षिणी' और चौदह अङ्गुली दूर होनेपर उसे 'आनन्दिनी' कहते हैं। आनन्दिनीका दूसरा नाम 'वंशुली' भी है। यह श्रीकृष्णके सखाओंको अति प्रिय है। यथाक्रमसे श्रीकृष्णकी ये तीन प्रकारकी बंसियाँ हैं - मणिमयी, हेममयी और वैणवी अर्थात् सरल बाँससे निर्मित। इनमेंसे मणिमयी बंसीका नाम सम्मोहिनी, स्वर्णमयी (हेममयी) बंसीका नाम आकर्षिणी तथा बाँस - निर्मित वैणवी बंसीका नाम आनन्दिनी है।" इस प्रकार बंसीकी भाँति गानका भी वैशिष्ट्य जानना होगा । मूल श्लोकमें 'वामदृशां' पदके श्लेषार्थमें यह भी जाना जाता है कि जो श्रीकृष्णके प्रति कुटिल दृष्टि करती हैं, उन्हीं गोपियों के मनरूप मूल इन्द्रिय अधिपति सहित कुटिल नेत्रादि समस्त इन्द्रियोंको आकर्षण करनेके लिए ही श्रीकृष्णने इस प्रकार गान किया। श्लेषमें यह रहस्य भी प्रकटित होता है कि श्रीभगवान्ने व्रजसुन्दरियोंके मन और इन्द्रिय-वृत्तिका आकर्षण करनेके लिए कामबीजका गान किया था, क्योंकि तन्त्रमें 'वामदृशां' पदका अर्थ (ई) दीर्घ ईकार, उसके सहित 'कलं' पदके 'क' और 'ल' के संयोग द्वारा प्रथम अक्षर 'क्ली' प्राप्त हुआ है। वेणुगान किस प्रकार है ? इसके लिए कह रहे हैं - मनोहर। यहाँपर 'मन' शब्दके द्वारा उसके अधिष्ठाता चन्द्र कहे गये हैं। वही चन्द्र मनका आकारत्व होनेके कारण लवक, अर्थात् वही (वेणुध्वनि) चन्द्र (मन) का 'हर' - हरण वा आकर्षण करती है । इसीलिए उसके साथ बिन्दु ( ) युक्त होता है। अतएव चन्द्रबिन्दुके साथ 'क्ली' पदके योगसे कामबीज (क्लीं) प्रकट हुआ। पुनः बीजमात्रका नादयुक्त होना आवश्यक है। यहाँ स्वभावतः वेणुनाद ही वह नाद है। ऐसा होनेपर नादयुक्त (क्लीं) कामबीज प्राप्त हुआ है । इसीलिए कहा गया है - "कला तु माया लवका तु मूर्तिः कलक्वणद् वेणुनिनादरम्यः - कला - माया या राधा, लवक- मूर्ति या नाद ( क्लीं) ।" अर्थात् अस्फुट मधुर वेणुनिनादके द्वारा रम्य (मनोहर) श्रीराधाजीके साथ वंशीवादनमें रत श्रीकृष्ण । इस श्लोकका तात्पर्य है कि 'क' कार और 'ल' कारके साथ सम्बन्ध माया या राधा और लवकयुक्त 'ई' (1) कार और अनुस्वार ( ) ही कामबीज है। श्रीकृष्णने इसी प्रकार कामबीजरूप मूर्ति धारण की है ॥ ३ ॥ सारार्थदर्शिनी - ततश्च तद्दर्शनेनोद्भूत कन्दर्पविकारो यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जन' इति स्मृत्वा स्वकुलादिपुरुषस्य तस्य धर्मं स्वस्मिन्नपि पश्यन् निःशङ्कमेव परस्त्रीरानेतुं कमप्यमोघं यत्नमकरोदित्याह- दृष्ट्वेति । कुमुत् कुमदं । 'कुमुदेऽपि कुमुत्प्रोक्तम्' इति विश्वः । तद्विकासनीयत्वेन वर्त्तते यस्य तम्। कोः पृथिव्या अपि मुत्कर्त्तव्यत्वेन वर्त्तते यस्य तमात्मानञ्च दृष्ट्वेत्यपि व्याख्येयं, विशेष्यविशेषणानुक्तेः न खण्डं मण्डलं बिम्बं स्वरूपं यस्य तं पूर्णमित्यर्थः । रमा लक्ष्मीस्तद्भ्रातृत्वात् - तदाननाभम्। यद्वा, सर्वलक्ष्मीमयी सर्वकान्तिः सन्मोहिनी परा' इति स्मृते रमा श्रीराधा। रमन्ते रमयन्तीति वा रमा गोप्यश्च तासामाननस्येवाभा यस्य तमिति तद्दर्शनेन ताः स्मृतिपथमारूढ़ा इति भावः । पक्षे रमाणां तासां आनने आभा अन्तःकन्दर्पविकारद्योतनी सम्यक् कान्तिर्यतस्तमात्मानं उदयरागव्याप्तत्वात् नवकुङ्कुमपिण्डवदरुणं, पक्षे नवकुङ्कुमचर्चया अरुणम्, तथा वनञ्च तस्य कोमलैर्गोभिः किरणै रञ्जितं म्रक्षितं अभिरञ्जितमिति समासो वा । पक्षे तैः प्रसिद्धैर्गोभिः स्वाङ्गकान्तिभिः स्वपाल्यमानगवीभिर्वा अभिरञ्जितं अभिरञ्जितचरमित्यर्थः। टजभावार्षः। इत्युद्दीपनालम्बनविभावौ दृष्ट्वा कलं मधुरमगायत वेणुनेति शेषः। 'कास्त्र्यङ्ग ते कलपदामृतवेणुगीत' इत्यग्रिमोक्तेः । कथं वामा मनोहरा दृशो यासां तासां युवतीनामेव मनोहरं यथा स्यात्तथा गायन्तं स्त्रियः कामयन्त' इति श्रुतेः । श्लेषेण कलं ककार लकार वामदृशामिति लुप्तविभक्तिकं पदं वामदृक् चतुर्थः स्वरः । तया सह पञ्चदशस्वरं कामबीजं जगाविति रहस्यं मनोहरं मनस आकर्षकत्वात् स्वस्वरूपभूतमहामन्मथमन्त्रमित्यर्थः॥३॥ भावानुवाद - तत्पश्चात् भगवान् श्रीकृष्णने पूर्णचन्द्रकी ओर देखा और उसे देखकर उनके हृदयमें एक अद्भुत कन्दर्प-विकार प्रकट हुआ। पुनः ( श्रीगी० ४/११) "यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः अर्थात् श्रेष्ठजन जैसा आचरण करते हैं, दुसरे लोग उसी आचरणका अनुसरण करते हैं"- वचनका स्मरणकर और अपने कुलके आदिपुरुष चन्द्रका धर्म देखकर शोकरहित भावसे परस्त्रीको बुलानेके लिए श्रीकृष्ण किसी अमोघ उपायका प्रयत्न करने लगे। इसे बतलानेके लिए 'दृष्ट्वा' इत्यादि पद कहा गया है। 'कुमुदवन्तम्' - कुमुद पुष्प विकसित करना जिसका कर्त्तव्य है, उस चन्द्रके उदय होनेपर समस्त जगद्वासियोंको ही परम आनन्द हुआ था । अथवा 'कुमुद्वत्' कु - पृथिवी, मुत् - हर्ष, अर्थात् पृथ्वीका आनन्दवर्धन करना ही जिस मुखमण्डलका कर्त्तव्य है। यहाँ 'अखण्डमण्डल' इस विशेषणके द्वारा विशेष्य पद जो चन्द्र है, उसकी उपलब्धि होती है। 'अखण्डमण्डल' कहनेसे सोलह कलाओंसे युक्त पूर्णचन्द्रका बोध होता है, अथवा जिस मुखमण्डलका स्वरूप खण्डित नहीं है, वही अखण्ड हैं। 'रमाननाभं' अर्थात् सगी बहन लक्ष्मी । सगे भाई और सगी बहन देखनेमें प्रायः समान मुखमण्डलवाले होते हैं, इसलिए चन्द्रको लक्ष्मीके मुखमण्डलकी कान्तिके समान आभायुक्त कहना ही सङ्गत हुआ है। अथवा तन्त्रोक्त 'सर्वलक्ष्मीमयी सर्वकान्तिः सम्मोहिनी परा' - इस वचनके अनुसार परदेवता श्रीराधिका ही साक्षात् कृष्णमयी, सर्वलक्ष्मीमयी, सर्वकान्तिमयी, कृष्ण सम्मोहिनी और पराशक्ति होनेके कारण 'रमा' शब्दसे राधाका ही बोध होता है । अथवा 'रमा - श्रीराधा' जो रमण करती हैं और रमण कराती हैं, अथवा 'रमा' अर्थात् गोपियाँ । अतएव 'रमाननाभं' पदसे गोपियोंके मुखमण्डलकी भाँति कान्तियुक्त पूर्णचन्द्रको देखकर श्रीकृष्णको गोपियोंका स्मरण हो आया और इसीलिए उन्हें
दस/उनतीस/तीन] श्रीकृष्ण और गोपियोंका रासक्रीड़ाके लिए मिलन सत्ताईस वल्लभा सेयं वंशुलीति च विश्रुता । क्रमान्मणिमयी हैमी वैणवीति त्रिधा च सा॥' इति। अतो द्वादशाङ्गुलान्तरे तारमुखरन्ध्रा हैमीयं ज्ञेया । एवं गान - वैशिष्ट्यमपि ज्ञेयम्, वामदृशामिति श्लेषेण स्वस्मिन् कुटिलमेव पश्यन्तीनां तासां मनोरूपमूलाकृष्ट्या दृष्ट्यादि-सर्वेन्द्रियवृन्दमेवाकृष्टमिवेत्यर्थः। अत्र श्लेषेण कामबीजं जगाविति रहस्यम्, यतो वामदृक्सम्बन्धि यत्तत् सहितं कलमिति प्रथमाक्षरत्रयं व्यञ्जितम् । कीदृशम् ? मनोहरं, मनःशब्देन तदधिष्ठाता चन्द्र उच्यते, स च तदाकारत्वेन लवकः, तं हरतीति आकर्षतीति तत्सम्वलितमित्यर्थः । नादयुक्तत्वन्तु वेणुनादस्वाभाव्यादेवेति भावः; तदुक्तम्- 'कला तु माया लवका तु मूर्त्तिः, कलक्वणद्वेणुनिनादरम्यः' इति ॥तीन॥ भावानुवाद - तत्पश्चात् उस पूर्णचन्द्रको देखकर हृदयमें किसी भाव-विशेषका आविर्भाव होनेपर भगवान् श्रीकृष्ण ने अपने घरसे वृन्दावनमें आगमन किया और चन्द्रकी लाल-लाल किरणोंसे उस भूमिको सुरञ्जित देखकर यमुना पुलिनमें स्थित 'रासौली' नामक चबूतरे पर पहुँचे। यह ग्राम श्रीवज्रनाभके द्वारा स्थापित है। आज भी यमुनाका यह पुलिन 'रासौली' नामसे प्रसिद्ध है। इस पुलिनमें पधारकर प्रेमवती गोपियोंको आकर्षण करनेके लिए श्रीकृष्णने मोहन वेणुके द्वारा न जाने कैसा एक अनिर्वचनीय गीतका गान किया। इस वचनके द्वारा पूर्व-पूर्व रात्रियों में प्रकटित उनकी वेणु-शिक्षाकी विशेषताको 'दृष्ट्वा' इत्यादि पदोंसे बतला रहे हैं । 'रमाननाभम्' - जो भगवान्के साथमें रमण करती हैं, वे रमा अथवा जो भगवान्को रमण कराती हैं, वे रमा । इस 'रमा' शब्दकी मुख्यवृत्तिसे परम-रमारूप श्रीकृष्ण प्रेयसियोंको समझना चाहिये और उन प्रेयसियोंमें भी परम प्रेयसी श्रीमती राधिका ही इस 'रमा' शब्दकी वाच्या हैं। इस परम प्रेयसीको पानेके लिए ही श्रीभगवान् द्वारा वेणु - शिक्षाकी विशेषताके प्रकटनमें तथा इतने समय तक इन प्रेयसियोंके साथ सङ्गममें शिथिलताका प्रदर्शन सूचित हुआ है। 'रमाननाभम्'- अब उन्हीं 'रमा' श्रीराधिकाजीके मुखमण्डलकी 'तदाभ' - शोभाके समान समझकर अर्थात् चन्द्रको देखकर श्रीराधाजीके मुखमण्डलका स्मरण होनेके कारण अपनेको प्रकाश करनेके लिए श्रीभगवान्ने कलस्वर से वेणुवादन किया । अर्थात् वेणुगानकी विशेषता यही है कि यह केवल अनुरागवती ही कर्णगोचर हुआ करता है, अन्य कोई भी इसे नहीं सुन सकता । 'कुमुत्कुमुदम' -वितर्क और श्रीराधाजीके स्मरण आदिके उत्पन्न होनेके लिए समान रूपमें विशेषण है। इस प्रकार चन्द्रके साथ श्रीमती राधिकाजीके मुख सादृश्य आदिको देखकर श्रीकृष्ण जो वितर्क करने लगे, उसका कारण निर्देश कर रहे हैं। 'कुमुद्वान्'-चन्द्रके उदित होते ही कुमुद पुष्प विकसित होता है, इसीलिए चन्द्रका एक नाम कुमुद्वान भी है। इसके द्वारा यह अर्थ ध्वनित हो रहा है कि उस समय कुमुदके पुष्प विकसित हो रहे थे। यहाँ विशेषणोंके द्वारा विशेष्य चन्द्रको पाया गया है। "पद्मिनी की मुद्रित अवस्थाके भञ्जनकारी ये उदित हो रहे हैं" - साहित्यदर्पणके इस वाक्यके प्रयोगसे जिस प्रकार विशेषणके द्वारा विशेष्य सूर्यको पाया जाता है, उसी प्रकार 'कुमुद्वन्त' इत्यादि विशेषणोंके द्वारा विशेष्य चन्द्रको पाया जा रहा है। रमा के मुखमण्डलके पक्षमें 'कुमुद्वन्त' विशेषण पदकी व्याख्या है - 'कु' - पृथ्वी, मुत्' - आनन्द, अर्थात् पृथ्वीके आनन्दको वर्द्धन करना ही जिस मुखमण्डलका कर्त्तव्य है, वही 'कुमुदवत्'। यहाँ विशेष्य क्लीवलिङ्ग पद मुखमण्डलके अधीन होनेके कारण विशेषण 'कुमुद्वन्तं' लिङ्ग परिवर्तनसे 'कुमुदवत्' हुआ है। श्रीराधाजी स्वयं रमारूपा होनेके कारण उनके मुखका कर्त्तव्य पृथ्वीका आनन्दवर्द्धन करना है। 'अखण्डमण्डलं'-चन्द्रके पक्षमें - सोलह कलाओंसे युक्त पूर्णचन्द्र और श्रीराधाजी मुखके पक्षमें - यथावत् परिमाणसे युक्त मण्डल अर्थात् शृङ्गाररस - उचित हाव-भाव आदिके आविर्भावसे जिस मुखके सौन्दर्य आदिमें किसी भी अंशमें न्यूनता नहीं हुई, वह अखण्ड मुखमण्डल। 'नवकुंकुमारुणं'-चन्द्रके पक्ष में - नवकुङ्कुम पिण्डके समान अरुण वर्ण और श्रीराधाजीके मुखके पक्षमें- नवकुङ्कुम रागसे अरुण वर्ण मुखमण्डल । इस इस प्रकार कालकी रति योग्यता दिखलाकर उस स्थानकी भी रति योग्यता 'वनञ्च' इत्यादि पदोंसे दिखला रहे हैं। चन्द्रकी कोमल किरणोंसे वन भूमि उद्भासित देखकर अर्थात् चन्द्रके दस/उनतीस/तीन] श्रीकृष्ण और गोपियोंका रासक्रीड़ाके लिए मिलन उनतीस प्रथम उदयसे अल्प परिमाणमें प्रकाशके द्वारा रञ्जित वनको देखकर । इस प्रकार भावोद्दीपनका प्रदर्शन हुआ है। 'कोमलगोभिरञ्जितं' - यहाँ 'गोभिः' पदके विसर्ग स्थानमें 'र' होनेसे उसका लोप और 'भि' की 'इ' दीर्घ होनेसे छन्दका पतन घटता है, इसीलिए उसे दीर्घ नहीं किया 'कलं'-मधुर-अस्फुट ध्वनि । किन्तु, इसे गान करनेवाले श्रीकृष्णकी वेणुध्वनिके रूपमें ही समझना चाहिये, क्योंकि उस ध्वनिको 'जगौ'- वेणु द्वारा गान किया था। आगे, कथित होनेवाले रासके प्रसङ्गमें कहा जायेगा -"हे कृष्ण ! त्रिलोकीमें ऐसी कौन-सी रमणी है जो तुम्हारे मधुर अस्फुट वेणुगीतके श्रवणसे आर्यपथसे विचलित न हो जाये?" मधुर अस्फुट ध्वनिका अभिप्राय व्यक्त कर रहे हैं - यह वेणुगान सभीके मनको हरण करनेके कारण मधुर है और उन सभी अनुरागवती गोपियोंके अपने-अपने नामोंके उच्चारणमें भ्रमके लिए अस्फुट है। अर्थात् जिनके नाम आदिका निर्देशकर श्रीकृष्ण ध्वनि कर रहे हैं, वह सुस्पष्ट नहीं है, इसलिए प्रत्येक गोपी ही ऐसा समझी कि श्रीकृष्ण मुझे ही बुला रहे हैं । 'वामदृशां मनोहरं' - कुटिल नयनोंवाली भाववती गोपियोंको जिस प्रकार मनोहर लगे, उसी भावसे वेणुगान किया । अर्थात् वे वेणुगान केवल अनुरागवती व्रजाङ्गनाओंके ही मनको मुग्ध करनेवाला था, क्योंकि उस वेणुगीतको केवल उन्होंने ही श्रवण किया था और उसे श्रवणकर केवल वे ही श्रीकृष्णके निकट आयीं थीं, अन्य कोई भी नहीं । श्रीभगवान्ने भी केवलमात्र आदिरस अर्थात् शृङ्गाररसके उद्दीपक राग विशेषका ही गान किया था। अगले श्लोकमें भी कहेंगे'अनङ्गवर्द्धनं' इत्यादि । श्रीकृष्णने जिस राग विशेषका गान किया था, वह निश्चय ही मध्यम आदि राग होगा, क्योंकि इसी रागसे व्रजसुन्दरियोंमें काम उद्दीपन हुआ था । सङ्गीतशास्त्र में मायूर राग भेदमें ऐसा कहा गया है, "जो मध्यम ग्रामके रागसे उत्पन्न होकर अन्तमें मध्यम स्वर होता है, वही मध्यमादि राग है। केवल सायंकालमें ही इसका गान होता है। शृङ्गाररसमें ऋषभ् और धैवत् स्वर वर्जित होता है।" इस उद्धृत श्लोकमें 'म' - मध्यम, 'ऋ' - ऋषभ, 'ध' - धैवत स्वर, गीतके आदिमें जो स्वर समर्पित होता है, उसे 'ग्रह' कहते हैं। पहले में "हे राजन् ! वेणुध्वनि समस्त प्राणियों के लिए ही मनोहर है" - इस प्रकार साधारण रूपमें वेणुध्वनिका परिचय प्रदान हुआ है, अर्थात् वेणुध्वनिके स्वभावके अनुसार सभी व्रजसुन्दरियोंको मोह उत्पन्न हुआ था। किन्तु, इस समय उज्ज्वलरस विशेषके उद्दीपनवशतः उन्हें आकर्षण हुआ था । अतएव उन-उन अवस्थाओंमें बंसीका भी वैशिष्ट्य है। यहाँ उसीको बतला रहे हैं -"अर्द्धाङ्गुली व्यवधानसे उर्द्धमानमें तारा आदि स्वरके लिए आठ छिद्रयुक्त और उन सभी छिद्रोंमें पहले छिद्रसे डेढ़ अङ्गुली दूर एक अङ्गुली परिमित मुखका छिद्र होता है। आगेका भाग चार अङ्गुली और पीछेका भाग तीन अङ्गुली-कुल नौ छिद्रयुक्त सतरह अङ्गुली परिमित बाँस ही बंसीके नामसे जाना जाता है। बंसीका मुख-छिद्र तार नामक अन्तिम छिद्रसे दस अङ्गुली परिमित दूर होनेपर उस बंसीका नाम 'महानन्दा' होता है। कोई-कोई इस बंसीको 'सम्मोहिनी' बंसी कहते हैं। यदि बंसीके तार छिद्र और मुखरन्ध्र बारह अङ्गुली दूर रहते हैं, तो उसे 'आकर्षिणी' और चौदह अङ्गुली दूर होनेपर उसे 'आनन्दिनी' कहते हैं। आनन्दिनीका दूसरा नाम 'वंशुली' भी है। यह श्रीकृष्णके सखाओंको अति प्रिय है। यथाक्रमसे श्रीकृष्णकी ये तीन प्रकारकी बंसियाँ हैं - मणिमयी, हेममयी और वैणवी अर्थात् सरल बाँससे निर्मित। इनमेंसे मणिमयी बंसीका नाम सम्मोहिनी, स्वर्णमयी बंसीका नाम आकर्षिणी तथा बाँस - निर्मित वैणवी बंसीका नाम आनन्दिनी है।" इस प्रकार बंसीकी भाँति गानका भी वैशिष्ट्य जानना होगा । मूल श्लोकमें 'वामदृशां' पदके श्लेषार्थमें यह भी जाना जाता है कि जो श्रीकृष्णके प्रति कुटिल दृष्टि करती हैं, उन्हीं गोपियों के मनरूप मूल इन्द्रिय अधिपति सहित कुटिल नेत्रादि समस्त इन्द्रियोंको आकर्षण करनेके लिए ही श्रीकृष्णने इस प्रकार गान किया। श्लेषमें यह रहस्य भी प्रकटित होता है कि श्रीभगवान्ने व्रजसुन्दरियोंके मन और इन्द्रिय-वृत्तिका आकर्षण करनेके लिए कामबीजका गान किया था, क्योंकि तन्त्रमें 'वामदृशां' पदका अर्थ दीर्घ ईकार, उसके सहित 'कलं' पदके 'क' और 'ल' के संयोग द्वारा प्रथम अक्षर 'क्ली' प्राप्त हुआ है। वेणुगान किस प्रकार है ? इसके लिए कह रहे हैं - मनोहर। यहाँपर 'मन' शब्दके द्वारा उसके अधिष्ठाता चन्द्र कहे गये हैं। वही चन्द्र मनका आकारत्व होनेके कारण लवक, अर्थात् वही चन्द्र का 'हर' - हरण वा आकर्षण करती है । इसीलिए उसके साथ बिन्दु युक्त होता है। अतएव चन्द्रबिन्दुके साथ 'क्ली' पदके योगसे कामबीज प्रकट हुआ। पुनः बीजमात्रका नादयुक्त होना आवश्यक है। यहाँ स्वभावतः वेणुनाद ही वह नाद है। ऐसा होनेपर नादयुक्त कामबीज प्राप्त हुआ है । इसीलिए कहा गया है - "कला तु माया लवका तु मूर्तिः कलक्वणद् वेणुनिनादरम्यः - कला - माया या राधा, लवक- मूर्ति या नाद ।" अर्थात् अस्फुट मधुर वेणुनिनादके द्वारा रम्य श्रीराधाजीके साथ वंशीवादनमें रत श्रीकृष्ण । इस श्लोकका तात्पर्य है कि 'क' कार और 'ल' कारके साथ सम्बन्ध माया या राधा और लवकयुक्त 'ई' कार और अनुस्वार ही कामबीज है। श्रीकृष्णने इसी प्रकार कामबीजरूप मूर्ति धारण की है ॥ तीन ॥ सारार्थदर्शिनी - ततश्च तद्दर्शनेनोद्भूत कन्दर्पविकारो यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जन' इति स्मृत्वा स्वकुलादिपुरुषस्य तस्य धर्मं स्वस्मिन्नपि पश्यन् निःशङ्कमेव परस्त्रीरानेतुं कमप्यमोघं यत्नमकरोदित्याह- दृष्ट्वेति । कुमुत् कुमदं । 'कुमुदेऽपि कुमुत्प्रोक्तम्' इति विश्वः । तद्विकासनीयत्वेन वर्त्तते यस्य तम्। कोः पृथिव्या अपि मुत्कर्त्तव्यत्वेन वर्त्तते यस्य तमात्मानञ्च दृष्ट्वेत्यपि व्याख्येयं, विशेष्यविशेषणानुक्तेः न खण्डं मण्डलं बिम्बं स्वरूपं यस्य तं पूर्णमित्यर्थः । रमा लक्ष्मीस्तद्भ्रातृत्वात् - तदाननाभम्। यद्वा, सर्वलक्ष्मीमयी सर्वकान्तिः सन्मोहिनी परा' इति स्मृते रमा श्रीराधा। रमन्ते रमयन्तीति वा रमा गोप्यश्च तासामाननस्येवाभा यस्य तमिति तद्दर्शनेन ताः स्मृतिपथमारूढ़ा इति भावः । पक्षे रमाणां तासां आनने आभा अन्तःकन्दर्पविकारद्योतनी सम्यक् कान्तिर्यतस्तमात्मानं उदयरागव्याप्तत्वात् नवकुङ्कुमपिण्डवदरुणं, पक्षे नवकुङ्कुमचर्चया अरुणम्, तथा वनञ्च तस्य कोमलैर्गोभिः किरणै रञ्जितं म्रक्षितं अभिरञ्जितमिति समासो वा । पक्षे तैः प्रसिद्धैर्गोभिः स्वाङ्गकान्तिभिः स्वपाल्यमानगवीभिर्वा अभिरञ्जितं अभिरञ्जितचरमित्यर्थः। टजभावार्षः। इत्युद्दीपनालम्बनविभावौ दृष्ट्वा कलं मधुरमगायत वेणुनेति शेषः। 'कास्त्र्यङ्ग ते कलपदामृतवेणुगीत' इत्यग्रिमोक्तेः । कथं वामा मनोहरा दृशो यासां तासां युवतीनामेव मनोहरं यथा स्यात्तथा गायन्तं स्त्रियः कामयन्त' इति श्रुतेः । श्लेषेण कलं ककार लकार वामदृशामिति लुप्तविभक्तिकं पदं वामदृक् चतुर्थः स्वरः । तया सह पञ्चदशस्वरं कामबीजं जगाविति रहस्यं मनोहरं मनस आकर्षकत्वात् स्वस्वरूपभूतमहामन्मथमन्त्रमित्यर्थः॥तीन॥ भावानुवाद - तत्पश्चात् भगवान् श्रीकृष्णने पूर्णचन्द्रकी ओर देखा और उसे देखकर उनके हृदयमें एक अद्भुत कन्दर्प-विकार प्रकट हुआ। पुनः "यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः अर्थात् श्रेष्ठजन जैसा आचरण करते हैं, दुसरे लोग उसी आचरणका अनुसरण करते हैं"- वचनका स्मरणकर और अपने कुलके आदिपुरुष चन्द्रका धर्म देखकर शोकरहित भावसे परस्त्रीको बुलानेके लिए श्रीकृष्ण किसी अमोघ उपायका प्रयत्न करने लगे। इसे बतलानेके लिए 'दृष्ट्वा' इत्यादि पद कहा गया है। 'कुमुदवन्तम्' - कुमुद पुष्प विकसित करना जिसका कर्त्तव्य है, उस चन्द्रके उदय होनेपर समस्त जगद्वासियोंको ही परम आनन्द हुआ था । अथवा 'कुमुद्वत्' कु - पृथिवी, मुत् - हर्ष, अर्थात् पृथ्वीका आनन्दवर्धन करना ही जिस मुखमण्डलका कर्त्तव्य है। यहाँ 'अखण्डमण्डल' इस विशेषणके द्वारा विशेष्य पद जो चन्द्र है, उसकी उपलब्धि होती है। 'अखण्डमण्डल' कहनेसे सोलह कलाओंसे युक्त पूर्णचन्द्रका बोध होता है, अथवा जिस मुखमण्डलका स्वरूप खण्डित नहीं है, वही अखण्ड हैं। 'रमाननाभं' अर्थात् सगी बहन लक्ष्मी । सगे भाई और सगी बहन देखनेमें प्रायः समान मुखमण्डलवाले होते हैं, इसलिए चन्द्रको लक्ष्मीके मुखमण्डलकी कान्तिके समान आभायुक्त कहना ही सङ्गत हुआ है। अथवा तन्त्रोक्त 'सर्वलक्ष्मीमयी सर्वकान्तिः सम्मोहिनी परा' - इस वचनके अनुसार परदेवता श्रीराधिका ही साक्षात् कृष्णमयी, सर्वलक्ष्मीमयी, सर्वकान्तिमयी, कृष्ण सम्मोहिनी और पराशक्ति होनेके कारण 'रमा' शब्दसे राधाका ही बोध होता है । अथवा 'रमा - श्रीराधा' जो रमण करती हैं और रमण कराती हैं, अथवा 'रमा' अर्थात् गोपियाँ । अतएव 'रमाननाभं' पदसे गोपियोंके मुखमण्डलकी भाँति कान्तियुक्त पूर्णचन्द्रको देखकर श्रीकृष्णको गोपियोंका स्मरण हो आया और इसीलिए उन्हें
Don't Miss! - Lifestyle New Year 2024: भारत में एक बार नहीं बल्कि 5 बार मनाया जाता है नया साल! जानिए कैसे? आखिरकार सारा अली खान, सुशांत सिंह राजपूत के अपोज़िट, अभिषेक कपूर की फिल्म केदारनाथ के साथ आज डेब्यू कर रही हैं। फिल्म का टीज़र, ट्रेलर और पोस्टर सब कुछ लोगों को काफी पसंद आया था। उम्मीद की जा रही थी कि फिल्म 8 - 9 करोड़ की ओपनिंग कर सकती है। कुछ ट्रेड पंडितों का मानना था कि सारा - सुशांत की केमिस्ट्री फिल्म को 2 अंकों की ओपनिंग भी दे सकती है। यानि कि 10 - 11 करोड़। लेकिन 2.0 की रिलीज़ के बाद, हिंदी दर्शकों में 2.0 का क्रेज़ देख, केदरनाथ के लिए संकट अभी से मंडराता नज़र आ रहा है। फिल्म की ओपनिंग को लेकर लोग शंका में हैं और माना जा रहा है कि फिल्म 4 - 5 करोड़ की ही ओपनिंग कर पाएगी। फिल्म की आगे की कमाई पूरी तरह से फिल्म के वर्ड ऑफ माउथ पर निर्भर करेगी। गौरतलब है कि सारा अली खान के डेब्यू की तैयारी, 2 साल से चल रही है। दर्शक उन्हें परदे पर देखना चाहते हैं और इसके लिए हर दूसरी फिल्म के साथ उनका नाम जुड़ चुका है। अब एक ही महीने में सारा दो दो फिल्मों में नज़र आएंगी - केदारनाथ और सिंबा। देखना है कि बॉलीवुड में उनका बॉक्स ऑफिस पर डेब्यू कैसा रहता है।
Don't Miss! - Lifestyle New Year दो हज़ार चौबीस: भारत में एक बार नहीं बल्कि पाँच बार मनाया जाता है नया साल! जानिए कैसे? आखिरकार सारा अली खान, सुशांत सिंह राजपूत के अपोज़िट, अभिषेक कपूर की फिल्म केदारनाथ के साथ आज डेब्यू कर रही हैं। फिल्म का टीज़र, ट्रेलर और पोस्टर सब कुछ लोगों को काफी पसंद आया था। उम्मीद की जा रही थी कि फिल्म आठ - नौ करोड़ की ओपनिंग कर सकती है। कुछ ट्रेड पंडितों का मानना था कि सारा - सुशांत की केमिस्ट्री फिल्म को दो अंकों की ओपनिंग भी दे सकती है। यानि कि दस - ग्यारह करोड़। लेकिन दो.शून्य की रिलीज़ के बाद, हिंदी दर्शकों में दो.शून्य का क्रेज़ देख, केदरनाथ के लिए संकट अभी से मंडराता नज़र आ रहा है। फिल्म की ओपनिंग को लेकर लोग शंका में हैं और माना जा रहा है कि फिल्म चार - पाँच करोड़ की ही ओपनिंग कर पाएगी। फिल्म की आगे की कमाई पूरी तरह से फिल्म के वर्ड ऑफ माउथ पर निर्भर करेगी। गौरतलब है कि सारा अली खान के डेब्यू की तैयारी, दो साल से चल रही है। दर्शक उन्हें परदे पर देखना चाहते हैं और इसके लिए हर दूसरी फिल्म के साथ उनका नाम जुड़ चुका है। अब एक ही महीने में सारा दो दो फिल्मों में नज़र आएंगी - केदारनाथ और सिंबा। देखना है कि बॉलीवुड में उनका बॉक्स ऑफिस पर डेब्यू कैसा रहता है।
Shreyas Iyer Injured: भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच अहमदाबाद में बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी का चौथा मैच खेला जा रहा है. वहीं, मैच के चौथे दिन की शुरुआत में ही भारतीय टीम के लिए एक बुरी खबर सामने आई है. दरअसल, टीम इंडिया के धाकड़ बल्लेबाज श्रेयस अय्यर अहमदाबाद टेस्ट के बीच चोटिल हो गए हैं. श्रेयस ने तीसरे दिन के खेल के बाद अपनी पीठ के निचले हिस्से में दर्द की शिकायत की थी. जिसके बाद उन्हें स्कैन के लिए ले जाया गया. बीसीसीआई की मेडिल टीम उन पर नजर बनाए हुई है. जिस वजह से वह पहली पारी में अभी तक बल्लेबाजी करने नहीं उतरे हैं. रविवार को बीसीसीआई ने अपने अधिकारिक बयान में कहा कि 'तीसरे दिन के खेल के बाद श्रेयस अय्यर ने पीठ के निचले हिस्से में दर्द की शिकायत की. वह स्कैन के लिए गए हैं और बीसीसीआई की मेडिकल टीम उनकी निगरानी कर रही है. ' फिलहाल अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि श्रेयस की यह चोट कितनी गंभीर है और वह पहली पारी में बल्लेबाजी करने मैदान पर उतर पाएंगे या नहीं. बता दें, पीठ की इसी चोट के चलते वह सीरीज का पहला मुकाबला नहीं खेल पाए थे. वहीं, मैच की बात करें तो ऑस्ट्रेलिया के पहली पारी में 480 रनों का विशाल स्कोर खड़ा करने के बाद भारत ने पहली पारी में खबर लिखे जाने तक चार विकेट के नुकसान पर 338 रन बना लिए हैं. इस समय विराट कोहली (76) के साथ केएस भरत (18) क्रीज पर मौजूद हैं. भारत अभी भी ऑस्ट्रेलिया से 142 रन पीछे है. इससे पहले ऑस्ट्रेलियाई टीम ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला लिया था. सलामी बल्लेबाज उस्मान ख्वाजा (180) और हरफनमौला कैमरून ग्रीन (114) के शतक के दम पर कंगारू टीम इतने बड़े स्कोर तक पहुंचने में सफल रही. इस दौरान अश्विन ने सर्वाधिक 6 विकेट झटके. बता दें कि भारत चार मैचों की इस टेस्ट सीरीज में 2-1 से आगे है.
Shreyas Iyer Injured: भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच अहमदाबाद में बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी का चौथा मैच खेला जा रहा है. वहीं, मैच के चौथे दिन की शुरुआत में ही भारतीय टीम के लिए एक बुरी खबर सामने आई है. दरअसल, टीम इंडिया के धाकड़ बल्लेबाज श्रेयस अय्यर अहमदाबाद टेस्ट के बीच चोटिल हो गए हैं. श्रेयस ने तीसरे दिन के खेल के बाद अपनी पीठ के निचले हिस्से में दर्द की शिकायत की थी. जिसके बाद उन्हें स्कैन के लिए ले जाया गया. बीसीसीआई की मेडिल टीम उन पर नजर बनाए हुई है. जिस वजह से वह पहली पारी में अभी तक बल्लेबाजी करने नहीं उतरे हैं. रविवार को बीसीसीआई ने अपने अधिकारिक बयान में कहा कि 'तीसरे दिन के खेल के बाद श्रेयस अय्यर ने पीठ के निचले हिस्से में दर्द की शिकायत की. वह स्कैन के लिए गए हैं और बीसीसीआई की मेडिकल टीम उनकी निगरानी कर रही है. ' फिलहाल अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि श्रेयस की यह चोट कितनी गंभीर है और वह पहली पारी में बल्लेबाजी करने मैदान पर उतर पाएंगे या नहीं. बता दें, पीठ की इसी चोट के चलते वह सीरीज का पहला मुकाबला नहीं खेल पाए थे. वहीं, मैच की बात करें तो ऑस्ट्रेलिया के पहली पारी में चार सौ अस्सी रनों का विशाल स्कोर खड़ा करने के बाद भारत ने पहली पारी में खबर लिखे जाने तक चार विकेट के नुकसान पर तीन सौ अड़तीस रन बना लिए हैं. इस समय विराट कोहली के साथ केएस भरत क्रीज पर मौजूद हैं. भारत अभी भी ऑस्ट्रेलिया से एक सौ बयालीस रन पीछे है. इससे पहले ऑस्ट्रेलियाई टीम ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला लिया था. सलामी बल्लेबाज उस्मान ख्वाजा और हरफनमौला कैमरून ग्रीन के शतक के दम पर कंगारू टीम इतने बड़े स्कोर तक पहुंचने में सफल रही. इस दौरान अश्विन ने सर्वाधिक छः विकेट झटके. बता दें कि भारत चार मैचों की इस टेस्ट सीरीज में दो-एक से आगे है.
विशाखापत्तनमः प्रत्येक मंडल में जूनियर कॉलेज स्थापित करने के एजेंडे के साथ हाई स्कूल प्लस (HSP) में हाई स्कूलों का उन्नयन विफल रहा। स्कूलों को जूनियर कॉलेजों में अपग्रेड करने में दिखाई गई प्रारंभिक रुचि आवश्यक बुनियादी ढांचे की सुविधा, शिक्षण संकाय की नियुक्ति और उपयुक्त प्लेटफार्मों को प्रदर्शित करने में विफल रही। नतीजतन, विशाखापत्तनम में एचएसपी ने पांच से कम पास प्रतिशत दर्ज किया। विशाखापत्तनम में पांच उच्च विद्यालयों को पिछले शैक्षणिक वर्ष में एचएसपी में अपग्रेड किया गया है, । परिणामों ने पूरे राज्य में उत्साह का कोई संकेत नहीं दिखाया। विचारशील उन्नयन और उचित योजना के अभाव ने छात्रों के सबसे महत्वपूर्ण शैक्षणिक चरण को प्रभावित किया। जाहिर है, एचएसपी में योग्य शिक्षकों की कमी विनाशकारी परिणाम के मुख्य कारणों में से एक है। जहां कुछ स्कूलों में विज्ञान के शिक्षकों की कमी थी, वहीं कुछ अन्य स्कूलों में गणित के शिक्षकों की नियुक्ति में पिछड़ गए। अधिकांश एचएसपी में स्थिति कमोबेश एक जैसी प्रतीत होती है। बिना किसी पूर्व प्रशिक्षण के हाई स्कूलों में कार्यरत स्कूल सहायकों को विषय पढ़ाने के लिए कह दिया गया। किसी भी एचएसपी ने इस शैक्षणिक वर्ष में दो अंकों का पास प्रतिशत दर्ज नहीं किया, जहां 174 छात्र परीक्षाओं में शामिल हुए थे। मलकापुरम के पास मुलागड़ा एचएसपी में 19 छात्रों में से दो छात्र पास हुए हैं। इसी तरह, ZPHS, गोपालपट्टनम में कुल 32 उम्मीदवारों में से दो छात्र उत्तीर्ण हुए। गजुवाका में 72 छात्रों में से दो छात्र पास हुए हैं। सीथम्माधारा में एनएमसी हाई स्कूल में, 26 में से एक छात्र उत्तीर्ण हुआ। हालांकि, गंगावरम जिला परिषद हाई स्कूल में शून्य उत्तीर्ण प्रतिशत दर्ज किया गया। अधिकांश छात्र गणित, भौतिकी, वनस्पति विज्ञान, रसायन विज्ञान और जूलॉजी विषयों में असफल रहे। "योग्य शिक्षकों की कमी इस मुद्दे का एक हिस्सा है, जबकि शैक्षणिक वर्ष में कुछ हफ्तों की देरी हुई है। साथ ही छात्रों को पाठ्यपुस्तकों की कमी से भी जूझना पड़ता है। इन झटकों के कारण खराब परिणाम सामने आए," माता-पिता ए वेंकट राव दुखी हैं। सितंबर तक पाठ्यपुस्तकों की आपूर्ति का इंतजार करने के बाद, प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों ने मिलकर अधिकांश संस्थानों में छात्रों के लिए पाठ्यपुस्तकों में निवेश किया। पहले से ही, कुछ माता-पिता ने अपने वार्डों को अन्य संस्थानों में स्थानांतरित करने पर विचार किया है। "असफल उम्मीदवारों के लिए एक अलग समर क्लास की सुविधा दी गई है। अगली निर्धारित पूरक परीक्षा के दौरान अनुत्तीर्ण विषयों को पास करने के लिए छात्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, "एचएसपी के एक एचएम ने साझा किया।
विशाखापत्तनमः प्रत्येक मंडल में जूनियर कॉलेज स्थापित करने के एजेंडे के साथ हाई स्कूल प्लस में हाई स्कूलों का उन्नयन विफल रहा। स्कूलों को जूनियर कॉलेजों में अपग्रेड करने में दिखाई गई प्रारंभिक रुचि आवश्यक बुनियादी ढांचे की सुविधा, शिक्षण संकाय की नियुक्ति और उपयुक्त प्लेटफार्मों को प्रदर्शित करने में विफल रही। नतीजतन, विशाखापत्तनम में एचएसपी ने पांच से कम पास प्रतिशत दर्ज किया। विशाखापत्तनम में पांच उच्च विद्यालयों को पिछले शैक्षणिक वर्ष में एचएसपी में अपग्रेड किया गया है, । परिणामों ने पूरे राज्य में उत्साह का कोई संकेत नहीं दिखाया। विचारशील उन्नयन और उचित योजना के अभाव ने छात्रों के सबसे महत्वपूर्ण शैक्षणिक चरण को प्रभावित किया। जाहिर है, एचएसपी में योग्य शिक्षकों की कमी विनाशकारी परिणाम के मुख्य कारणों में से एक है। जहां कुछ स्कूलों में विज्ञान के शिक्षकों की कमी थी, वहीं कुछ अन्य स्कूलों में गणित के शिक्षकों की नियुक्ति में पिछड़ गए। अधिकांश एचएसपी में स्थिति कमोबेश एक जैसी प्रतीत होती है। बिना किसी पूर्व प्रशिक्षण के हाई स्कूलों में कार्यरत स्कूल सहायकों को विषय पढ़ाने के लिए कह दिया गया। किसी भी एचएसपी ने इस शैक्षणिक वर्ष में दो अंकों का पास प्रतिशत दर्ज नहीं किया, जहां एक सौ चौहत्तर छात्र परीक्षाओं में शामिल हुए थे। मलकापुरम के पास मुलागड़ा एचएसपी में उन्नीस छात्रों में से दो छात्र पास हुए हैं। इसी तरह, ZPHS, गोपालपट्टनम में कुल बत्तीस उम्मीदवारों में से दो छात्र उत्तीर्ण हुए। गजुवाका में बहत्तर छात्रों में से दो छात्र पास हुए हैं। सीथम्माधारा में एनएमसी हाई स्कूल में, छब्बीस में से एक छात्र उत्तीर्ण हुआ। हालांकि, गंगावरम जिला परिषद हाई स्कूल में शून्य उत्तीर्ण प्रतिशत दर्ज किया गया। अधिकांश छात्र गणित, भौतिकी, वनस्पति विज्ञान, रसायन विज्ञान और जूलॉजी विषयों में असफल रहे। "योग्य शिक्षकों की कमी इस मुद्दे का एक हिस्सा है, जबकि शैक्षणिक वर्ष में कुछ हफ्तों की देरी हुई है। साथ ही छात्रों को पाठ्यपुस्तकों की कमी से भी जूझना पड़ता है। इन झटकों के कारण खराब परिणाम सामने आए," माता-पिता ए वेंकट राव दुखी हैं। सितंबर तक पाठ्यपुस्तकों की आपूर्ति का इंतजार करने के बाद, प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों ने मिलकर अधिकांश संस्थानों में छात्रों के लिए पाठ्यपुस्तकों में निवेश किया। पहले से ही, कुछ माता-पिता ने अपने वार्डों को अन्य संस्थानों में स्थानांतरित करने पर विचार किया है। "असफल उम्मीदवारों के लिए एक अलग समर क्लास की सुविधा दी गई है। अगली निर्धारित पूरक परीक्षा के दौरान अनुत्तीर्ण विषयों को पास करने के लिए छात्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, "एचएसपी के एक एचएम ने साझा किया।
भारत में वूमेन इंडियन प्रीमियर लीग (WPL) की शुरूआत होने जा रही है. जिसके लिए बीसीसीआई ने 5 टीमों का ऐलान कर दिया है. बुधवार को हुई टीम ऑक्शन में बीसीसीआई ने पांच टीमों को 4670 करोड़ में बेचा. ऐसे में इस लीग की जो सबसे सस्ती टीम है. उसके आगे पाकिस्तान की PSL कहीं नहीं ठहरती है. चलिए इस लेख के जरिए जानते हैं कि WPL और PSL की टीमें पैसों के मामले में कहां टिकती है? वीमेंस प्रीमियर लीग (WPL) की सबसे महंगी टीम 1289 करोड़ की है जबकि सबसे सस्ती टीम की कीमत 757 करोड़ रुपये है. जय शाह के ट्वीट के आधार पर इस नीलामी में साल 2008 के रिकॉर्ड को धराशायी कर दिया है. पुरूष आईपीएल के बाद फ्रेंचाइजियों नें महिला प्रीमियर लीग में टीम खरीदने के लिए पैसा पानी की तरह बहाया है. चलए जानते है WPL की कीमत कितनी है. पाकिस्तान के लोग PSL की तुलना आईपीएल से करने पर लगे हैं. लेकिन वह उनका एक ख्वाब और कुछ नहीं. दुनिया जानती है IPL दुनिया की सबसे महंगी लीग है. बता दें हाल ही नें शुरू होने जा रही WPL के सामने PSL कहीं नहीं ठहरती है. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने साल 2015 में अपनी पांच टीमों को 93 मिलियन डॉलर में बेचा था. इसके बाद 2019 में इस लीग की छठी टीम 6. 35 मिलियन डॉलर में बिकी थी. अगर इन सभी टीमों की कीमत की तुलना वूमेन इंडियन प्रीमियर लीग (WPL) से करें तो वह किसी पूरी PSL की कीमत किसी एक टीम के बराबर भी नहीं है. चलिए जानते हैं. PSL की कौन सी टीम कितने में बिकी थी?
भारत में वूमेन इंडियन प्रीमियर लीग की शुरूआत होने जा रही है. जिसके लिए बीसीसीआई ने पाँच टीमों का ऐलान कर दिया है. बुधवार को हुई टीम ऑक्शन में बीसीसीआई ने पांच टीमों को चार हज़ार छः सौ सत्तर करोड़ में बेचा. ऐसे में इस लीग की जो सबसे सस्ती टीम है. उसके आगे पाकिस्तान की PSL कहीं नहीं ठहरती है. चलिए इस लेख के जरिए जानते हैं कि WPL और PSL की टीमें पैसों के मामले में कहां टिकती है? वीमेंस प्रीमियर लीग की सबसे महंगी टीम एक हज़ार दो सौ नवासी करोड़ की है जबकि सबसे सस्ती टीम की कीमत सात सौ सत्तावन करोड़ रुपये है. जय शाह के ट्वीट के आधार पर इस नीलामी में साल दो हज़ार आठ के रिकॉर्ड को धराशायी कर दिया है. पुरूष आईपीएल के बाद फ्रेंचाइजियों नें महिला प्रीमियर लीग में टीम खरीदने के लिए पैसा पानी की तरह बहाया है. चलए जानते है WPL की कीमत कितनी है. पाकिस्तान के लोग PSL की तुलना आईपीएल से करने पर लगे हैं. लेकिन वह उनका एक ख्वाब और कुछ नहीं. दुनिया जानती है IPL दुनिया की सबसे महंगी लीग है. बता दें हाल ही नें शुरू होने जा रही WPL के सामने PSL कहीं नहीं ठहरती है. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने साल दो हज़ार पंद्रह में अपनी पांच टीमों को तिरानवे मिलियन डॉलर में बेचा था. इसके बाद दो हज़ार उन्नीस में इस लीग की छठी टीम छः. पैंतीस मिलियन डॉलर में बिकी थी. अगर इन सभी टीमों की कीमत की तुलना वूमेन इंडियन प्रीमियर लीग से करें तो वह किसी पूरी PSL की कीमत किसी एक टीम के बराबर भी नहीं है. चलिए जानते हैं. PSL की कौन सी टीम कितने में बिकी थी?
नए-नए फीचर्स को लगातार बदलते हुए ऑटोमोबाइल कंपनियों ने कारों को इस कदर बदल दिया है कि मानों ये कारें नहीं कोई आरामगह हों। परफॉर्मेंस, माइलेज और सिक्योरिटी जैसे बदलाव के चलते नई कार में पुराने और अप्रासंगिक हो चुके कई फीचर्स गायब हो चुके हैं। हो सकता है आपको इन पुराने फीचर्स से प्यार हो या फिर घृणा, लेकिन उनमें से कुछ निश्चित रूप से आपको याद होंगे। हम यहां नई कारों से लगभग गायब हो चुके या जल्द गायब होने वाले ऐसे फीचर्स की चर्चा कर रहे हैं। गोल हैडलैंप्स काफी पुरानी हो चुकी हैं। युवा पीढ़ी को कारों की यह हैडलैंप याद ना हो। क्रोम फ्रेम में ये राउंड हैडलैंप्स हिंदुस्तान एंबेस्डर और फिएट पद्मनी जैसी कारों की शानदार थी। पुरानी कारों के सामने और पीछे की ओर फ्लैट बेंच सीटें भी यादों से जुड़ी हैं। फ्रंट सीट पर भी तीन लोगो के बैठने की व्यवस्था हो जाती थी। सुविधा और सुरक्षा के चलते बेंच सीट को खत्म कर दिया गया। कॉलम शिफ्टर बेंच सीट से भी पुरानी बात है। कॉलम शिफ्टर एक गियर लीवर होता है जो आमतौर पर हैडलाइट या वाइपर कंट्रोल्स की दिशा में इस्तेमाल किया जाता था। मर्सिडीज बेंज की ऑटोमैटिक कारों में यह आज भी देखने को मिलता है। फिलहाल आज सभी कारों में टायर ब्लैक ही नजर आते हैं, लेकिन एक दौर ऐसा भी रहा है जब ब्लैक टायर एक व्हाइट व्हील के साथ नजर आते थे।
नए-नए फीचर्स को लगातार बदलते हुए ऑटोमोबाइल कंपनियों ने कारों को इस कदर बदल दिया है कि मानों ये कारें नहीं कोई आरामगह हों। परफॉर्मेंस, माइलेज और सिक्योरिटी जैसे बदलाव के चलते नई कार में पुराने और अप्रासंगिक हो चुके कई फीचर्स गायब हो चुके हैं। हो सकता है आपको इन पुराने फीचर्स से प्यार हो या फिर घृणा, लेकिन उनमें से कुछ निश्चित रूप से आपको याद होंगे। हम यहां नई कारों से लगभग गायब हो चुके या जल्द गायब होने वाले ऐसे फीचर्स की चर्चा कर रहे हैं। गोल हैडलैंप्स काफी पुरानी हो चुकी हैं। युवा पीढ़ी को कारों की यह हैडलैंप याद ना हो। क्रोम फ्रेम में ये राउंड हैडलैंप्स हिंदुस्तान एंबेस्डर और फिएट पद्मनी जैसी कारों की शानदार थी। पुरानी कारों के सामने और पीछे की ओर फ्लैट बेंच सीटें भी यादों से जुड़ी हैं। फ्रंट सीट पर भी तीन लोगो के बैठने की व्यवस्था हो जाती थी। सुविधा और सुरक्षा के चलते बेंच सीट को खत्म कर दिया गया। कॉलम शिफ्टर बेंच सीट से भी पुरानी बात है। कॉलम शिफ्टर एक गियर लीवर होता है जो आमतौर पर हैडलाइट या वाइपर कंट्रोल्स की दिशा में इस्तेमाल किया जाता था। मर्सिडीज बेंज की ऑटोमैटिक कारों में यह आज भी देखने को मिलता है। फिलहाल आज सभी कारों में टायर ब्लैक ही नजर आते हैं, लेकिन एक दौर ऐसा भी रहा है जब ब्लैक टायर एक व्हाइट व्हील के साथ नजर आते थे।
दुर्ग। सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक से प्राप्त जानकारी के अनुसार जालबांधा निवासी श्रीमती सुभिया निषाद उम्र 28 साल पिछले 4-5 महीनों से अपने पेट दर्द की समस्या को लेकर जिला चिकित्सालय दुर्ग में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. उज्जवला देवांगन के पास ईलाज करने पहुंची। सोनोग्राफी के बाद पता चला कि उनके ओवरी में गांठ बना हुआ है। स्त्री रोग विशेषज्ञ ने मरीज को ऑपरेशन कराने की सलाह दी। महिला का ऑपरेशन कर 8 किलो का सिस्ट निकाला गया। इस कार्य में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर उज्जवला देवांगन एवं टीम में शामिल डॉ. पूजा वर्मा, डॉ. रिमपल एवं स्टॉफ नर्स सीमा द्वारा मरीज के ओवरी सिस्ट का सफलतापूर्वक सर्जरी किया गया।
दुर्ग। सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक से प्राप्त जानकारी के अनुसार जालबांधा निवासी श्रीमती सुभिया निषाद उम्र अट्ठाईस साल पिछले चार-पाँच महीनों से अपने पेट दर्द की समस्या को लेकर जिला चिकित्सालय दुर्ग में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. उज्जवला देवांगन के पास ईलाज करने पहुंची। सोनोग्राफी के बाद पता चला कि उनके ओवरी में गांठ बना हुआ है। स्त्री रोग विशेषज्ञ ने मरीज को ऑपरेशन कराने की सलाह दी। महिला का ऑपरेशन कर आठ किलो का सिस्ट निकाला गया। इस कार्य में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर उज्जवला देवांगन एवं टीम में शामिल डॉ. पूजा वर्मा, डॉ. रिमपल एवं स्टॉफ नर्स सीमा द्वारा मरीज के ओवरी सिस्ट का सफलतापूर्वक सर्जरी किया गया।
Udaipur. डिजिटल इंडिया की मुहीम के तहत गांवों को डिजिटल सुविधाओं से जोडऩे क्रम में Udaipur से 50 किलोमीटर दूर स्थित गांव पलाना खुर्द भी शुगरबॉक्स के सहयोग से डिजिटल बन गया है. भले ही पहले यह गांव तकनीकी सेवाएं हासिल करने में बेहद पीछे था, लेकिन आज वह इस चुनौती को पार कर सफलता की पहली सीढ़ी चढ़ चुका है. शुगरबॉक्स के कॉमन सर्विस सेंटर की मदद से इस चुनौती को पार कर शहरी-ग्रामीण डिजिटल विभाजन के मौजूदा अवसरों को गांव के लोगों तक उन्हीं की भाषा में मुहैया करवाया है. जो डिजिटल इंडिया युग के समय की अहम मांग है. इसका श्रेय कॉमन सर्विस सेंटर, भारत सरकार की ई-गवर्नेंस को श्रेय जाता है. शुगरबॉक्स के सीईओ और सह संस्थापक, रोहित परांजपे ने कहा कि 4000 लोगों की आबादी वाले गांव पलाना खुर्द में डिजिटल युग की उक्त सेवा वर्ष 2022 में अक्टूबर माह से आरंभ हुई है. कुछ ही सप्ताह के भीतर गांव वाले इस तकनीकी युग के आदी हो गए हैं. अपने मनोरंजन के लिए वह फिल्म, वैबसीरीज देख रहे हैं और देश व दुनिया भर का ज्ञान अपने गांव में बैठे हासिल कर रहे हैं. इसके माध्यम से student भी विभिन्न प्लैटफार्म जैसे मैगनेट ब्रेन, मिशन ज्ञान आदि का प्रयोग कर भावी संभावनाओं के लिए खुद को तैयार कर रहे है. रोहित परांजपे ने बताया कि शुगरबॉक्स डिजिटलकरण की शक्ति के लोकतंत्रीकरण के मकसद से आगे बढ़ रहा है. जहां हम हाइपरलोकल और प्रासंगिक अनुभवों को बिलकुल शून्य डिजिटल क्नैक्टिविटी क्षेत्र तक लाने का प्रयास कर रहे है. पलाना खुर्द की बात करें तो वहां मोबाइल डाटापैक के प्रयोग के बिना पोडकास्ट, खबरें, शैक्षणिक कान्टैंट मुहैया करवाया जा रहा शुगरबॉक्स के जरिए केवल Rajasthan ही नहीं बल्कि देश के अन्य राज्य उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, Haryana , Maharashtra आदि में 300 से अधिक ग्राम पंचायतों तक पहुंच की जा रही है. गांव की सरपंच, तुलसी बाई भील ने कॉमन सर्विस सेंटर (सी. एस. एस. ) पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भौगोलिक स्तर पर पिछड़े हुए गांवों तक तकनीक को पहुंचाना सराहनीय प्रयास है. इससे हमारे बच्चे बेहतर शिक्षा के विकल्प खोज कर सुनहरे भविष्य की तैयारी कर सकेंगे. इसके अलावा फिल्मों व वैब सीरीज की मदद से लोगों का मनोरंजन होने के साथ तथा उनके ज्ञान का विस्तार भी होगा.
Udaipur. डिजिटल इंडिया की मुहीम के तहत गांवों को डिजिटल सुविधाओं से जोडऩे क्रम में Udaipur से पचास किलोग्राममीटर दूर स्थित गांव पलाना खुर्द भी शुगरबॉक्स के सहयोग से डिजिटल बन गया है. भले ही पहले यह गांव तकनीकी सेवाएं हासिल करने में बेहद पीछे था, लेकिन आज वह इस चुनौती को पार कर सफलता की पहली सीढ़ी चढ़ चुका है. शुगरबॉक्स के कॉमन सर्विस सेंटर की मदद से इस चुनौती को पार कर शहरी-ग्रामीण डिजिटल विभाजन के मौजूदा अवसरों को गांव के लोगों तक उन्हीं की भाषा में मुहैया करवाया है. जो डिजिटल इंडिया युग के समय की अहम मांग है. इसका श्रेय कॉमन सर्विस सेंटर, भारत सरकार की ई-गवर्नेंस को श्रेय जाता है. शुगरबॉक्स के सीईओ और सह संस्थापक, रोहित परांजपे ने कहा कि चार हज़ार लोगों की आबादी वाले गांव पलाना खुर्द में डिजिटल युग की उक्त सेवा वर्ष दो हज़ार बाईस में अक्टूबर माह से आरंभ हुई है. कुछ ही सप्ताह के भीतर गांव वाले इस तकनीकी युग के आदी हो गए हैं. अपने मनोरंजन के लिए वह फिल्म, वैबसीरीज देख रहे हैं और देश व दुनिया भर का ज्ञान अपने गांव में बैठे हासिल कर रहे हैं. इसके माध्यम से student भी विभिन्न प्लैटफार्म जैसे मैगनेट ब्रेन, मिशन ज्ञान आदि का प्रयोग कर भावी संभावनाओं के लिए खुद को तैयार कर रहे है. रोहित परांजपे ने बताया कि शुगरबॉक्स डिजिटलकरण की शक्ति के लोकतंत्रीकरण के मकसद से आगे बढ़ रहा है. जहां हम हाइपरलोकल और प्रासंगिक अनुभवों को बिलकुल शून्य डिजिटल क्नैक्टिविटी क्षेत्र तक लाने का प्रयास कर रहे है. पलाना खुर्द की बात करें तो वहां मोबाइल डाटापैक के प्रयोग के बिना पोडकास्ट, खबरें, शैक्षणिक कान्टैंट मुहैया करवाया जा रहा शुगरबॉक्स के जरिए केवल Rajasthan ही नहीं बल्कि देश के अन्य राज्य उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, Haryana , Maharashtra आदि में तीन सौ से अधिक ग्राम पंचायतों तक पहुंच की जा रही है. गांव की सरपंच, तुलसी बाई भील ने कॉमन सर्विस सेंटर पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भौगोलिक स्तर पर पिछड़े हुए गांवों तक तकनीक को पहुंचाना सराहनीय प्रयास है. इससे हमारे बच्चे बेहतर शिक्षा के विकल्प खोज कर सुनहरे भविष्य की तैयारी कर सकेंगे. इसके अलावा फिल्मों व वैब सीरीज की मदद से लोगों का मनोरंजन होने के साथ तथा उनके ज्ञान का विस्तार भी होगा.
यह बात आमतौर पर हम सभजी जानते है कि शौचालय का उपयोग हर एक व्यक्ति करता है वही दुनिया में शौचालयों की कमी के प्रति जागरूक करने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ की घोषणा के अनुसार हर साल हर साल 19 नवंबर को विश्व शौचालय दिवस की शुरुआत की गई. पूरी दुनिया में तकरीबन एक अरब वैश्विक आबादी आज भी खुले में शौच करती है. इस बात का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि अफगानिस्तान में 90 फीसदी अबादी के पास टेलीविजन है जबकि मात्र सात फीसदी लोगों के पास ही शौचालय है. विश्व शौचालय दिवस के अवसर पर हम आपको कुछ ऐसे रोचक और मजेदार बताएंगे, जिसे जानकर आप हैरान हो जाएंगे. मिली जानकारी के मुताबिक कम्प्यूटर की-बोर्ड पर बैक्टीरिया की मात्रा एक टॉयलेट सीट से दो सौ गुना ज्यादा होती है. वही सिंगापुर में टॉयलेट में फ्लश नहीं करना कानूनी जुर्म है. इसके लिए बाकायदा जुर्माना भी है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एक बार टॉयलेट में फ्लश करने पर करीब 26 लीटर पानी बहता है. चीन में कुत्तों के लिए अलग से सार्वजनिक शौचालय होता है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक जी हाँ आपको यह जानकर हैरानी होगी कि लगभग 20 फीसदी लोग टॉयलेट जाने के बाद हाथ नहीं धोते हैं. और मात्र 30 फीसदी लोग हाथ धोने के लिए साबुन का उपयोग करते हैं. वही 'द स्कॉट पेपर कंपनी' दुनिया की पहली ऐसी कंपनी है जिसने सन 1890 में टॉयलेट पेपर एक रोल पर बनाया. जंहा अगर आप दुनिया का सबसे महंगा शौचालय देखना चाहते हैं तो आपको अन्तर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन जाना होगा. इस स्टेशन में बने टॉयलेट की लागत करीब 19 मिलियन डॉलर है. एक छोटा बच्चा बाथरूम का प्रयोग सीखने से पहले करीब 10,000 बार नैपी बदलता है. 1992 में हुए एक सर्वे में ब्रिटिश टॉयलेट को दुनिया में सबसे ज्यादा खराब बताया जाता है.
यह बात आमतौर पर हम सभजी जानते है कि शौचालय का उपयोग हर एक व्यक्ति करता है वही दुनिया में शौचालयों की कमी के प्रति जागरूक करने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ की घोषणा के अनुसार हर साल हर साल उन्नीस नवंबर को विश्व शौचालय दिवस की शुरुआत की गई. पूरी दुनिया में तकरीबन एक अरब वैश्विक आबादी आज भी खुले में शौच करती है. इस बात का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि अफगानिस्तान में नब्बे फीसदी अबादी के पास टेलीविजन है जबकि मात्र सात फीसदी लोगों के पास ही शौचालय है. विश्व शौचालय दिवस के अवसर पर हम आपको कुछ ऐसे रोचक और मजेदार बताएंगे, जिसे जानकर आप हैरान हो जाएंगे. मिली जानकारी के मुताबिक कम्प्यूटर की-बोर्ड पर बैक्टीरिया की मात्रा एक टॉयलेट सीट से दो सौ गुना ज्यादा होती है. वही सिंगापुर में टॉयलेट में फ्लश नहीं करना कानूनी जुर्म है. इसके लिए बाकायदा जुर्माना भी है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एक बार टॉयलेट में फ्लश करने पर करीब छब्बीस लीटरटर पानी बहता है. चीन में कुत्तों के लिए अलग से सार्वजनिक शौचालय होता है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक जी हाँ आपको यह जानकर हैरानी होगी कि लगभग बीस फीसदी लोग टॉयलेट जाने के बाद हाथ नहीं धोते हैं. और मात्र तीस फीसदी लोग हाथ धोने के लिए साबुन का उपयोग करते हैं. वही 'द स्कॉट पेपर कंपनी' दुनिया की पहली ऐसी कंपनी है जिसने सन एक हज़ार आठ सौ नब्बे में टॉयलेट पेपर एक रोल पर बनाया. जंहा अगर आप दुनिया का सबसे महंगा शौचालय देखना चाहते हैं तो आपको अन्तर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन जाना होगा. इस स्टेशन में बने टॉयलेट की लागत करीब उन्नीस मिलियन डॉलर है. एक छोटा बच्चा बाथरूम का प्रयोग सीखने से पहले करीब दस,शून्य बार नैपी बदलता है. एक हज़ार नौ सौ बानवे में हुए एक सर्वे में ब्रिटिश टॉयलेट को दुनिया में सबसे ज्यादा खराब बताया जाता है.
शादी में मिला तोहफा एक परिवार के लिए बहुत खतरनाक साबित हुआ. विवाह समारोह में मिले गिफ्ट पैकेट को खोलते समय ब्लास्ट हो गया, जिसमें नवविवाहित युवक समेत उसका भतीजा जख्मी हो गया. दोनों को प्राइवेट अस्पताल में भर्ती करवाया गया है. घायल दूल्हे की हालत गंभीर बनी हुई है. यह पूरा मामला गुजरात के नवसारी जिले के वंसदा तालुका स्थित मीठांबरी का है. इस गांव में 12 मई को एक शादी हुई थी, जहां तमाम मेहमानों ने दूल्हा-दुल्हन को उपहार भेंट किए. बीते मंगलवार को ही नवविवाहित लतेश गावित ने फुर्सत के पलों में घर पर इन्हीं तोहफों को बारी-बारी देखना शुरू किया. इसी बीच, उपहार स्वरूप मिले एक टेडी बियर में जोरदार धमाका हो गया. इस हादसे में दूल्हा समेत उसका 3 साल का भतीजा बुरी तरह झुलस गए. दूल्हे के ससुर ने बताया कि उनकी बेटी सलमा की शादी 12 मई को लतेश गावित के हुई थी. इस दौरान सलमा की बड़ी बहन के पूर्व प्रेमी राजू धसनुख पटेल ने एक आशा वर्कर के हाथ एक टेडी बियर जैसा इलेक्ट्रॉनिक्स गिफ्ट भेजा था. मंगलवार के दिन सुबह जब शादी में मिले सभी गिफ्ट को लतेश देख रहा था, तभी टेडी वियर में एक बड़ा धमाका हुआ. इस पूरे घटनाक्रम में तोहफा भेजने वाला राजू धनसुख पटेल संदेह के घेरे में है. पुलिस को अंदेशा है कि राजू धनसुख पटेल का सलमा के साथ भी पहले से प्रेम संबंध था, लेकिन लड़की ने दूसरे युवक से शादी कर ली. इसी खुन्नस में बदले की भावना से आरोपी ने वारदात को अंजाम दिया है. फिलहाल वंसदा पुलिस ने शिकायत दर्ज कर ली है और पीड़ित परिवार के बयान के आधार पर जांच शुरू कर दी है.
शादी में मिला तोहफा एक परिवार के लिए बहुत खतरनाक साबित हुआ. विवाह समारोह में मिले गिफ्ट पैकेट को खोलते समय ब्लास्ट हो गया, जिसमें नवविवाहित युवक समेत उसका भतीजा जख्मी हो गया. दोनों को प्राइवेट अस्पताल में भर्ती करवाया गया है. घायल दूल्हे की हालत गंभीर बनी हुई है. यह पूरा मामला गुजरात के नवसारी जिले के वंसदा तालुका स्थित मीठांबरी का है. इस गांव में बारह मई को एक शादी हुई थी, जहां तमाम मेहमानों ने दूल्हा-दुल्हन को उपहार भेंट किए. बीते मंगलवार को ही नवविवाहित लतेश गावित ने फुर्सत के पलों में घर पर इन्हीं तोहफों को बारी-बारी देखना शुरू किया. इसी बीच, उपहार स्वरूप मिले एक टेडी बियर में जोरदार धमाका हो गया. इस हादसे में दूल्हा समेत उसका तीन साल का भतीजा बुरी तरह झुलस गए. दूल्हे के ससुर ने बताया कि उनकी बेटी सलमा की शादी बारह मई को लतेश गावित के हुई थी. इस दौरान सलमा की बड़ी बहन के पूर्व प्रेमी राजू धसनुख पटेल ने एक आशा वर्कर के हाथ एक टेडी बियर जैसा इलेक्ट्रॉनिक्स गिफ्ट भेजा था. मंगलवार के दिन सुबह जब शादी में मिले सभी गिफ्ट को लतेश देख रहा था, तभी टेडी वियर में एक बड़ा धमाका हुआ. इस पूरे घटनाक्रम में तोहफा भेजने वाला राजू धनसुख पटेल संदेह के घेरे में है. पुलिस को अंदेशा है कि राजू धनसुख पटेल का सलमा के साथ भी पहले से प्रेम संबंध था, लेकिन लड़की ने दूसरे युवक से शादी कर ली. इसी खुन्नस में बदले की भावना से आरोपी ने वारदात को अंजाम दिया है. फिलहाल वंसदा पुलिस ने शिकायत दर्ज कर ली है और पीड़ित परिवार के बयान के आधार पर जांच शुरू कर दी है.
RANCHI: लौहनगरी में धोखा देकर करोड़ों की हेराफेरी का एक और मामला सामने आया है। इसमें बैंक ऑफ इंडिया (बीओआई) की टेल्को शाखा से 15. 84 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई है। इस मामले में भी सीबीआई की आर्थिक अपराध शाखा ने प्राथमिकी दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है। ठगी का यह मामला फाइनांशियल 2013-2015 के बीच का है। इस मामले में सीबीआई ने पांच नामजद व अन्य अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की जमशेदपुर स्थित बिष्टुपुर व मानगो शाखा को करोड़ों का चूना लगाने का मामला उजागर होने के बाद जमशेदपुर का यह तीसरा मामला है। दर्ज प्राथमिकी में सीबीआई ने बताया है कि सभी आरोपितों ने अपराधिक षड्यंत्र के तहत बेइमानी कर बैंक को 15 करोड़, 84 लाख 95 हजार रुपये ऋण के रूप में लेकर चूना लगाया। ऋण जिस मद में स्वीकृत कराया था, उससे संबंधित कार्य ही नहीं किया। स्वीकृत राशि के छह करोड़, 90 लाख, 58 हजार 624 रुपये का गलत इस्तेमाल किया गया। सीबीआइ की छानबीन में यह बात सामने आई कि एम/एस फेमिका प्रेस इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है। इस कंपनी में जयराम सिंह व राकेश सिंह दोनों निदेशक हैं। यह कंपनी जमशेदपुर, पूर्वी सिंहभूम आधारित है जो टाटा मोटर्स लिमिटेड के लिए मेटल शीट का निर्माण करती है। छानबीन में यह भी खुलासा हुआ कि ऋण की राशि से किसी मशीनरी की सप्लाई नहीं हुई और न ही रुपये बैंक को वापस ही किए गए। ऋण लेने वालों ने जिस एम/एस प्रथम डील मार्क प्राइवेट लिमिटेड कोलकाता से मशीनरी सप्लाई की सूचना बैंक को दी थी, वह कंपनी मशीनरी सप्लाई करती ही नहीं थी। उक्त कंपनी रियल एस्टेट के व्यवसाय से जुड़ी हुई थी। बैंक को धोखे में रखकर ऋण लिया गया था और उसे चुकाया भी नहीं गया। इस मामले में अनुसंधान अभी जारी है। - जयराम सिंह, निदेशक, एम/एस फेमिका प्रेस इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, सिंह कॉलोनी, रहगोड़ा। - राकेश सिंह, निदेशक, एम/एस फेमिका प्रेस इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, सिंह कॉलोनी, राहरगोड़ा। - एम/एस फेमिका प्रेस इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, सिंह कॉलोनी, राहरगोड़ा, जमशेदपुर। - एम/एस प्रथम डील मार्क प्राइवेट लिमिटेड, कोलकाता, 4/3, बी, भुवन मोहन राय रोड, पोस्ट बारीशा, शेखर बाजार, कोलकाता। -- एम/एस सनमास मशीन टूल्स प्राइवेट लिमिटेड, बंगलोर, सी-73, थर्ड स्टेज, पिन्या इंडस्ट्रीयल इस्टेट, बंगलुरु।
RANCHI: लौहनगरी में धोखा देकर करोड़ों की हेराफेरी का एक और मामला सामने आया है। इसमें बैंक ऑफ इंडिया की टेल्को शाखा से पंद्रह. चौरासी करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई है। इस मामले में भी सीबीआई की आर्थिक अपराध शाखा ने प्राथमिकी दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है। ठगी का यह मामला फाइनांशियल दो हज़ार तेरह-दो हज़ार पंद्रह के बीच का है। इस मामले में सीबीआई ने पांच नामजद व अन्य अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। पंजाब नेशनल बैंक की जमशेदपुर स्थित बिष्टुपुर व मानगो शाखा को करोड़ों का चूना लगाने का मामला उजागर होने के बाद जमशेदपुर का यह तीसरा मामला है। दर्ज प्राथमिकी में सीबीआई ने बताया है कि सभी आरोपितों ने अपराधिक षड्यंत्र के तहत बेइमानी कर बैंक को पंद्रह करोड़, चौरासी लाख पचानवे हजार रुपये ऋण के रूप में लेकर चूना लगाया। ऋण जिस मद में स्वीकृत कराया था, उससे संबंधित कार्य ही नहीं किया। स्वीकृत राशि के छह करोड़, नब्बे लाख, अट्ठावन हजार छः सौ चौबीस रुपयापये का गलत इस्तेमाल किया गया। सीबीआइ की छानबीन में यह बात सामने आई कि एम/एस फेमिका प्रेस इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है। इस कंपनी में जयराम सिंह व राकेश सिंह दोनों निदेशक हैं। यह कंपनी जमशेदपुर, पूर्वी सिंहभूम आधारित है जो टाटा मोटर्स लिमिटेड के लिए मेटल शीट का निर्माण करती है। छानबीन में यह भी खुलासा हुआ कि ऋण की राशि से किसी मशीनरी की सप्लाई नहीं हुई और न ही रुपये बैंक को वापस ही किए गए। ऋण लेने वालों ने जिस एम/एस प्रथम डील मार्क प्राइवेट लिमिटेड कोलकाता से मशीनरी सप्लाई की सूचना बैंक को दी थी, वह कंपनी मशीनरी सप्लाई करती ही नहीं थी। उक्त कंपनी रियल एस्टेट के व्यवसाय से जुड़ी हुई थी। बैंक को धोखे में रखकर ऋण लिया गया था और उसे चुकाया भी नहीं गया। इस मामले में अनुसंधान अभी जारी है। - जयराम सिंह, निदेशक, एम/एस फेमिका प्रेस इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, सिंह कॉलोनी, रहगोड़ा। - राकेश सिंह, निदेशक, एम/एस फेमिका प्रेस इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, सिंह कॉलोनी, राहरगोड़ा। - एम/एस फेमिका प्रेस इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, सिंह कॉलोनी, राहरगोड़ा, जमशेदपुर। - एम/एस प्रथम डील मार्क प्राइवेट लिमिटेड, कोलकाता, चार/तीन, बी, भुवन मोहन राय रोड, पोस्ट बारीशा, शेखर बाजार, कोलकाता। -- एम/एस सनमास मशीन टूल्स प्राइवेट लिमिटेड, बंगलोर, सी-तिहत्तर, थर्ड स्टेज, पिन्या इंडस्ट्रीयल इस्टेट, बंगलुरु।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
शास्त्रोंके वचनोंसे ज्ञात होता है कि पाप और पुण्य मनुष्यकी भावनापर निर्भर है। हम गुस्से में आकर किसीके शरीरपर साधारण-सी चोटं लगा देते हैं तो पाप हो जाता है; किन्तु डाक्टर लोग बड़े-बड़े ऑपरेशन कर डालते हैं और कइयोंके अङ्ग भी काट डालते हैं, फिर भी वे पुण्यात्मा समझे जाते हैं; इसका कारण यही है कि हमारा कृत्य हिंसा, द्वेष एवं परपीडनकी भावनासे भरा होता है और डाक्टरका काम देखने में अत्यन्त दोषपूर्ण होते हुए भी प्रेम, उपकार एवं हितकी पवित्र भावनासे प्रेरित है । वस्तुतः क्रियाका महत्त्व पशुओंको भी रोग उतना ही कष्ट देते हैं, जितना कि मनुष्योंको । अन्तर इतना ही है कि हम मनुष्य विवेक साधन तथा उपायोंद्वारा किसी सीमातक रोग दूर करके कष्टका निवारण कर लेते हैं; किन्तु बेचारे मूक, असहाय, विवश तथा केवल पूँछ हिलानेतकका उपाय कर सकनेवाले पशु रोगग्रसित होकर कष्टोंको सहते रहते हैं । पर मनुष्य जातिकी शोभा इसमें नहीं है। जिसने अपनी बुद्धि तथा सामर्थ्यका उपयोग अपने ही लिये किया, उसने क्या किया ? मनुष्यका यह कर्तव्य है कि परिवारके प्राणीके समान एक ही घर में रहनेवाले अपने पशुओंके भी दुःखको दूर करनेके लिये कुछ उठा न रक्खे । सोचा जाय तो ऐसा करनेमें वह पशुओंके ऊपर कोई एहसान नहीं करेगा, यह उसका धर्म है; क्योंकि मनुष्यने ही तो उन्हें प्रकृतिकी गोदीसे छीनकर अपने कामके लिये अपने घरमें बाँध रक्खा है । जंगली पशुओंकी दवा करने कौन जाता है ? प्रकृति माता स्वयं उनकी देख-भाल करती है। अतः यदि मनुष्य प्रकृति मातासे माँगकर लाये हुए पशुओंके दुःख सुखकी परवा नहीं करता तो यह उसकी कृतघ्नता है । और वह प्रकृतिदेवीका कोप-भाजन बनकर दण्डका भागी होगा । पशुओंके रोग, उनके लक्षण और चिकित्सा "हमारे शास्त्रों में कहा हुआ है कि जबतक रोगी, भयभीत, चकित, बाघ अथवा चोर आदि संतायी हुई, ऊँचे स्थान से गिरी हुई, दलदलमें फँसी हुई, सर्दी गर्मी से पीड़ित तथा अन्य किसी प्रकारसे दुःखित गौका उद्धार न कर ले, तबतक आर्यसन्तान कोई दूसरा कार्य न करे । यथा - भावनाके सामने बिल्कुल गौण है। बस, गो-चिकित्साके विषयमें हमें इस सिद्धान्तको सामने रखकर बिना किसी प्रकारके संकोचके कार्य करना चाहिये। जिस प्रकार मनुष्यकी डाक्टरी चिकित्सामें काटना, चीरना आदि आवश्यक होनेके कारण किसीको उसमें घृणा नहीं है और सभी तरह के लोग निःसंकोच भावसे यह कार्य करते हैं, उसी प्रकार गो-चिकित्साके विषयमें सभी तरहके सुयोग्य पुरुषोंको पूरे उत्साहके साथ भाग लेना चाहिये। ऐसा करनेसे ही हम अपने कर्तव्यका पालन कर सकेंगे । आतुरां मार्गशस्तां वा चौरव्याघ्रादिभिर्भयैः । पतितां पङ्कलमां वा सर्वोपायैर्विमोचयेत् ॥ ऊष्मे वर्षति शीते वा मारुते वाति वा भृशम् । न कुर्वीतात्मनस्त्राणं गोरकृत्वा तु शक्तितः ॥ तात्पर्य यह कि जिस प्रकार अपने किसी घरवालेको खाँसी-बुखार हो जानेपर हम वैद्यके पास दौड़ने लगते हैं, उसी प्रकार अपने पालित पशुओंके रोगोंको दूर करनेके लिये भी हमें सचेष्ट होना चाहिये । पशुओंकी रोगावस्था में पशुशालाका प्रबन्ध किसी पशुके रोग ग्रस्त हो जानेपर उसे पशुशालासे इटाकर किसी अलग स्थानमें रखना चाहिये । इस प्रकार दूसरे नीरोग पशुओंकी रक्षा होगी। यदि छूतकी बीमारी न हो, तो भी रोगी पशुको अलग हटा देना ही ठीक है; क्योंकि प्रेम, द्वेष तथा सहानुभूतिका भाव पशुओंमें भी होता है। जब अन्य पशु अपने किसी साथीको दुखी या उदास देखेंगे तो वे भी उदास होकर खाना-पीना छोड़ सकते हैं। रोगी पशुका दाना-पानी दूसरे पशुओंके दाना-पानी में न मिलने पाये। रोगी पशुकी देख-भाल रोगी पशुकी देख-भाल बड़ी सावधानीसे करनी चाहिये । उसको ऐसे स्थानपर रखना चाहिये, जहाँ हवा और प्रकाश अच्छी तरह आये-जाये; किन्तु पशुके ऊपरं न हवाका झोंका सीधा लगे, नं तो धूप लगे। मक्खी-मच्छड़ोंसे बचाने के लिये गूगल, गन्धक की धूप या साधारण धुआँ कर देना चाहिये । पशुको दवा आदि पिलाते समय उसके साथ बहुत जबर्दस्ती करके उसे अधिक कष्ट न दिया जाय । यदि पशु एक दिनसे अधिक एक करवट पड़ा रहे तो उसे करवट बदलानेकी चेष्टा करनी चाहिये । रोगकी पहचान या निदान जल्दबाजी में
शास्त्रोंके वचनोंसे ज्ञात होता है कि पाप और पुण्य मनुष्यकी भावनापर निर्भर है। हम गुस्से में आकर किसीके शरीरपर साधारण-सी चोटं लगा देते हैं तो पाप हो जाता है; किन्तु डाक्टर लोग बड़े-बड़े ऑपरेशन कर डालते हैं और कइयोंके अङ्ग भी काट डालते हैं, फिर भी वे पुण्यात्मा समझे जाते हैं; इसका कारण यही है कि हमारा कृत्य हिंसा, द्वेष एवं परपीडनकी भावनासे भरा होता है और डाक्टरका काम देखने में अत्यन्त दोषपूर्ण होते हुए भी प्रेम, उपकार एवं हितकी पवित्र भावनासे प्रेरित है । वस्तुतः क्रियाका महत्त्व पशुओंको भी रोग उतना ही कष्ट देते हैं, जितना कि मनुष्योंको । अन्तर इतना ही है कि हम मनुष्य विवेक साधन तथा उपायोंद्वारा किसी सीमातक रोग दूर करके कष्टका निवारण कर लेते हैं; किन्तु बेचारे मूक, असहाय, विवश तथा केवल पूँछ हिलानेतकका उपाय कर सकनेवाले पशु रोगग्रसित होकर कष्टोंको सहते रहते हैं । पर मनुष्य जातिकी शोभा इसमें नहीं है। जिसने अपनी बुद्धि तथा सामर्थ्यका उपयोग अपने ही लिये किया, उसने क्या किया ? मनुष्यका यह कर्तव्य है कि परिवारके प्राणीके समान एक ही घर में रहनेवाले अपने पशुओंके भी दुःखको दूर करनेके लिये कुछ उठा न रक्खे । सोचा जाय तो ऐसा करनेमें वह पशुओंके ऊपर कोई एहसान नहीं करेगा, यह उसका धर्म है; क्योंकि मनुष्यने ही तो उन्हें प्रकृतिकी गोदीसे छीनकर अपने कामके लिये अपने घरमें बाँध रक्खा है । जंगली पशुओंकी दवा करने कौन जाता है ? प्रकृति माता स्वयं उनकी देख-भाल करती है। अतः यदि मनुष्य प्रकृति मातासे माँगकर लाये हुए पशुओंके दुःख सुखकी परवा नहीं करता तो यह उसकी कृतघ्नता है । और वह प्रकृतिदेवीका कोप-भाजन बनकर दण्डका भागी होगा । पशुओंके रोग, उनके लक्षण और चिकित्सा "हमारे शास्त्रों में कहा हुआ है कि जबतक रोगी, भयभीत, चकित, बाघ अथवा चोर आदि संतायी हुई, ऊँचे स्थान से गिरी हुई, दलदलमें फँसी हुई, सर्दी गर्मी से पीड़ित तथा अन्य किसी प्रकारसे दुःखित गौका उद्धार न कर ले, तबतक आर्यसन्तान कोई दूसरा कार्य न करे । यथा - भावनाके सामने बिल्कुल गौण है। बस, गो-चिकित्साके विषयमें हमें इस सिद्धान्तको सामने रखकर बिना किसी प्रकारके संकोचके कार्य करना चाहिये। जिस प्रकार मनुष्यकी डाक्टरी चिकित्सामें काटना, चीरना आदि आवश्यक होनेके कारण किसीको उसमें घृणा नहीं है और सभी तरह के लोग निःसंकोच भावसे यह कार्य करते हैं, उसी प्रकार गो-चिकित्साके विषयमें सभी तरहके सुयोग्य पुरुषोंको पूरे उत्साहके साथ भाग लेना चाहिये। ऐसा करनेसे ही हम अपने कर्तव्यका पालन कर सकेंगे । आतुरां मार्गशस्तां वा चौरव्याघ्रादिभिर्भयैः । पतितां पङ्कलमां वा सर्वोपायैर्विमोचयेत् ॥ ऊष्मे वर्षति शीते वा मारुते वाति वा भृशम् । न कुर्वीतात्मनस्त्राणं गोरकृत्वा तु शक्तितः ॥ तात्पर्य यह कि जिस प्रकार अपने किसी घरवालेको खाँसी-बुखार हो जानेपर हम वैद्यके पास दौड़ने लगते हैं, उसी प्रकार अपने पालित पशुओंके रोगोंको दूर करनेके लिये भी हमें सचेष्ट होना चाहिये । पशुओंकी रोगावस्था में पशुशालाका प्रबन्ध किसी पशुके रोग ग्रस्त हो जानेपर उसे पशुशालासे इटाकर किसी अलग स्थानमें रखना चाहिये । इस प्रकार दूसरे नीरोग पशुओंकी रक्षा होगी। यदि छूतकी बीमारी न हो, तो भी रोगी पशुको अलग हटा देना ही ठीक है; क्योंकि प्रेम, द्वेष तथा सहानुभूतिका भाव पशुओंमें भी होता है। जब अन्य पशु अपने किसी साथीको दुखी या उदास देखेंगे तो वे भी उदास होकर खाना-पीना छोड़ सकते हैं। रोगी पशुका दाना-पानी दूसरे पशुओंके दाना-पानी में न मिलने पाये। रोगी पशुकी देख-भाल रोगी पशुकी देख-भाल बड़ी सावधानीसे करनी चाहिये । उसको ऐसे स्थानपर रखना चाहिये, जहाँ हवा और प्रकाश अच्छी तरह आये-जाये; किन्तु पशुके ऊपरं न हवाका झोंका सीधा लगे, नं तो धूप लगे। मक्खी-मच्छड़ोंसे बचाने के लिये गूगल, गन्धक की धूप या साधारण धुआँ कर देना चाहिये । पशुको दवा आदि पिलाते समय उसके साथ बहुत जबर्दस्ती करके उसे अधिक कष्ट न दिया जाय । यदि पशु एक दिनसे अधिक एक करवट पड़ा रहे तो उसे करवट बदलानेकी चेष्टा करनी चाहिये । रोगकी पहचान या निदान जल्दबाजी में
मुंबई, 24 सितंबर (आईएएनएस)। आस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेटर और कॉमेंटेटर डीन जोंस का गुरुवार को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। जोंस इस समय संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में खेले जा रहे आईपीएल के लिए मुंबई में स्टार स्पोटर्स की कॉमेंट्री टीम का हिस्सा थे। गुरुवार को अचानक उन्हें दिल का दौरा पड़ा। स्टार इंडिया ने कहा है कि जोंस खेल के एक सच्चे राजदूत थे। प्रोफेसर डीन के नाम से मशहूर जोंस को एक जिंदादिल इंसान के तौर पर जाना जाता था। वह हमेशा हंसते मुस्कुराते रहते थे। मेलबर्न में जन्म लेने वाले जोंस ने 16 मार्च को 1984 में पोर्ट ऑफ स्पेन में वेस्टइंडीज के खिलाफ अपना पहला टेस्ट मैच खेला था। दो साल बाद 1984 में 30 जनवरी को उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ एडिलेड में वनडे पदार्पण किया था। जोंस ने आस्ट्रेलिया के लिए 52 टेस्ट मैच खेले और 46. 55 की औसत से 3631 रन बनाए। जोंस ने अपने टेस्ट करियर में 11 शतक और 14 अर्धशतक लगाए। उनका सर्वोच्च स्कोर 216 रहा जो उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ 1989 में एडिलेड में ही बनाया था। अपने करियर में उन्होंने दो दोहरे शतक जमाए। आस्ट्रेलिया के लिए जोंस ने 164 वनडे मैच भी खेले और 44. 61 की औसत से 6068 रन बनाए। वनडे में उन्होंने सात शतक और 46 अर्धशतक लगाए। वनडे में उनका सर्वोच्च स्कोर 145 है। यह स्कोर उन्होंने 16 दिसंबर 1990 में इंग्लैंड के खिलाफ ब्रिस्बेन में बनाया था। क्रिकेट के मैदान के बाद जोंस ने एक पेशेवर कॉमेंटेटर के रूप में अपनी एक अलग पहचान बनाई थी। वह कई बड़े टूर्नामेंट्स में अपनी आवाज से लोगों के खेल के बारे में बताते रहे थे। खेल के विश्लेष्णात्मक पहलू पर भी उनकी का पैनी नजर थी। उन्होंने अपना आखिरी टेस्ट 8 सितंबर 1992 में श्रीलंका के खिलाफ खेला था। छह अप्रैल 1994 में केप टाउन में उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपना आखिरी वनडे मैच खेला था। जोंस उस आस्ट्रेलियाई टीम का हिस्सा थे जिसने 1987 में पहली बार विश्व कप जीता था। 1989 में एशेज सीरीज जीतने वाली आस्ट्रेलियाई टीम में भी वह शामिल थे। जोंस उस आस्ट्रेलियाई टीम का हिस्सा रहे हैं जिसने आस्ट्रेलिया की एक अलग पहचान जमाने की शुरुआत की थी और बाद में वह तकरीबन डेढ़ दशक तक विश्व क्रिकेट पर राज कर सकी। वह पाकिस्तान सुपर लीग में इस्लामाबाद फ्रेंचाइजी के कोच भी रह चुके हैं।
मुंबई, चौबीस सितंबर । आस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेटर और कॉमेंटेटर डीन जोंस का गुरुवार को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। जोंस इस समय संयुक्त अरब अमीरात में खेले जा रहे आईपीएल के लिए मुंबई में स्टार स्पोटर्स की कॉमेंट्री टीम का हिस्सा थे। गुरुवार को अचानक उन्हें दिल का दौरा पड़ा। स्टार इंडिया ने कहा है कि जोंस खेल के एक सच्चे राजदूत थे। प्रोफेसर डीन के नाम से मशहूर जोंस को एक जिंदादिल इंसान के तौर पर जाना जाता था। वह हमेशा हंसते मुस्कुराते रहते थे। मेलबर्न में जन्म लेने वाले जोंस ने सोलह मार्च को एक हज़ार नौ सौ चौरासी में पोर्ट ऑफ स्पेन में वेस्टइंडीज के खिलाफ अपना पहला टेस्ट मैच खेला था। दो साल बाद एक हज़ार नौ सौ चौरासी में तीस जनवरी को उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ एडिलेड में वनडे पदार्पण किया था। जोंस ने आस्ट्रेलिया के लिए बावन टेस्ट मैच खेले और छियालीस. पचपन की औसत से तीन हज़ार छः सौ इकतीस रन बनाए। जोंस ने अपने टेस्ट करियर में ग्यारह शतक और चौदह अर्धशतक लगाए। उनका सर्वोच्च स्कोर दो सौ सोलह रहा जो उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ एक हज़ार नौ सौ नवासी में एडिलेड में ही बनाया था। अपने करियर में उन्होंने दो दोहरे शतक जमाए। आस्ट्रेलिया के लिए जोंस ने एक सौ चौंसठ वनडे मैच भी खेले और चौंतालीस. इकसठ की औसत से छः हज़ार अड़सठ रन बनाए। वनडे में उन्होंने सात शतक और छियालीस अर्धशतक लगाए। वनडे में उनका सर्वोच्च स्कोर एक सौ पैंतालीस है। यह स्कोर उन्होंने सोलह दिसंबर एक हज़ार नौ सौ नब्बे में इंग्लैंड के खिलाफ ब्रिस्बेन में बनाया था। क्रिकेट के मैदान के बाद जोंस ने एक पेशेवर कॉमेंटेटर के रूप में अपनी एक अलग पहचान बनाई थी। वह कई बड़े टूर्नामेंट्स में अपनी आवाज से लोगों के खेल के बारे में बताते रहे थे। खेल के विश्लेष्णात्मक पहलू पर भी उनकी का पैनी नजर थी। उन्होंने अपना आखिरी टेस्ट आठ सितंबर एक हज़ार नौ सौ बानवे में श्रीलंका के खिलाफ खेला था। छह अप्रैल एक हज़ार नौ सौ चौरानवे में केप टाउन में उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपना आखिरी वनडे मैच खेला था। जोंस उस आस्ट्रेलियाई टीम का हिस्सा थे जिसने एक हज़ार नौ सौ सत्तासी में पहली बार विश्व कप जीता था। एक हज़ार नौ सौ नवासी में एशेज सीरीज जीतने वाली आस्ट्रेलियाई टीम में भी वह शामिल थे। जोंस उस आस्ट्रेलियाई टीम का हिस्सा रहे हैं जिसने आस्ट्रेलिया की एक अलग पहचान जमाने की शुरुआत की थी और बाद में वह तकरीबन डेढ़ दशक तक विश्व क्रिकेट पर राज कर सकी। वह पाकिस्तान सुपर लीग में इस्लामाबाद फ्रेंचाइजी के कोच भी रह चुके हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'रोजगार मेला' का आगाज कर दिया है. इस मौके पर उन्होंने कहा कि आज केंद्र सरकार 75 हजार युवाओं को नियुक्ति पत्र दे रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'रोजगार मेला' के तहत भर्ती अभियान की शुरुआत कर दी है. इसके तहत 75000 युवाओं को Sarkari Naukri के लिए अप्वाइंटमेंट लेटर दिया गया है. इसके अलावा, देशभर में 50 केंद्रीय मंत्रियों ने भी अलग-अलग जगहों पर 20 हजार लोगों को अप्वाइंटमेंट लेटर दिया है. अलग-अलग सरकारी नौकरियों के लिए चुने गए कुछ उम्मीदवारों को रोजगार मेला के तहत निर्धारित स्थानों पर व्यक्तिगत रूप से अप्वाइंटमेंट लेटर दिया गया है. सरकारी नौकरी के लिए चुने गए उम्मीदवारों में से चुनिंदा को पीएम मोदी और अन्य मंत्रियों द्वारा अप्वाइंटमेंट लेटर दिया गया. वहीं, बाकी के उम्मीदवारों को ईमेल या डाक के जरिए इसे भेजा गया है. प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं को अप्वाइंटमेंट लेटर देते हुए उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं. कहां हुई है युवाओं की भर्ती? - भारत सरकार के 38 मंत्रालयों या विभागों में इन युवाओं को नौकरी दी गई है. - ग्रुप-ए और बी (गजट), ग्रुप-बी (नॉन-गजट) और ग्रुप-सी कैटेगरी के तहत अलग-अलग मंत्रालयों में इन युवाओं को नौकरी मिली है. - केंद्रीय सशस्त्र बल कार्मिक, सब इंस्पेक्टर, कांस्टेबल, एलडीसी, स्टेनो, पीए, इनकम टैक्स इंस्पेक्टर, एमटीएस समेत अलग-अलग पोस्ट पर नियुक्ति हुई है. किसने भर्ती की है? भारत सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों ने खुद ही इन युवाओं की भर्ती की है. इसके अलावा, संघ लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन आयोग और रेलवे भर्ती बोर्ड जैसी नियुक्ति एजेंसियों ने भी भर्ती के लिए नोटिफिकेशन निकालकर युवाओं को नौकरी दी है. गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने विभिन्न सरकारी विभागों और मंत्रालयों को अगले डेढ़ साल में 'मिशन मोड' पर 10 लाख लोगों की भर्ती करने के लिए कहा था. (भाषा इनपुट के साथ)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'रोजगार मेला' का आगाज कर दिया है. इस मौके पर उन्होंने कहा कि आज केंद्र सरकार पचहत्तर हजार युवाओं को नियुक्ति पत्र दे रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'रोजगार मेला' के तहत भर्ती अभियान की शुरुआत कर दी है. इसके तहत पचहत्तर हज़ार युवाओं को Sarkari Naukri के लिए अप्वाइंटमेंट लेटर दिया गया है. इसके अलावा, देशभर में पचास केंद्रीय मंत्रियों ने भी अलग-अलग जगहों पर बीस हजार लोगों को अप्वाइंटमेंट लेटर दिया है. अलग-अलग सरकारी नौकरियों के लिए चुने गए कुछ उम्मीदवारों को रोजगार मेला के तहत निर्धारित स्थानों पर व्यक्तिगत रूप से अप्वाइंटमेंट लेटर दिया गया है. सरकारी नौकरी के लिए चुने गए उम्मीदवारों में से चुनिंदा को पीएम मोदी और अन्य मंत्रियों द्वारा अप्वाइंटमेंट लेटर दिया गया. वहीं, बाकी के उम्मीदवारों को ईमेल या डाक के जरिए इसे भेजा गया है. प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं को अप्वाइंटमेंट लेटर देते हुए उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं. कहां हुई है युवाओं की भर्ती? - भारत सरकार के अड़तीस मंत्रालयों या विभागों में इन युवाओं को नौकरी दी गई है. - ग्रुप-ए और बी , ग्रुप-बी और ग्रुप-सी कैटेगरी के तहत अलग-अलग मंत्रालयों में इन युवाओं को नौकरी मिली है. - केंद्रीय सशस्त्र बल कार्मिक, सब इंस्पेक्टर, कांस्टेबल, एलडीसी, स्टेनो, पीए, इनकम टैक्स इंस्पेक्टर, एमटीएस समेत अलग-अलग पोस्ट पर नियुक्ति हुई है. किसने भर्ती की है? भारत सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों ने खुद ही इन युवाओं की भर्ती की है. इसके अलावा, संघ लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन आयोग और रेलवे भर्ती बोर्ड जैसी नियुक्ति एजेंसियों ने भी भर्ती के लिए नोटिफिकेशन निकालकर युवाओं को नौकरी दी है. गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने विभिन्न सरकारी विभागों और मंत्रालयों को अगले डेढ़ साल में 'मिशन मोड' पर दस लाख लोगों की भर्ती करने के लिए कहा था.
You Searched For "tona totka" स्वास्तिक के चिन्ह के बारे में जानकर हिल जाएगा आपका दिमाग, जानिए! अक्सर हर शुभ कार्य में आपने देखा होगा कि स्वास्तिक का चिन्ह बनाया जाता है। Tona-Totka : सड़क पर चलते समय रास्ते पर अगर आपको ये वस्तुएं दिखाई देती हैं, तो फ़ौरन उनसे दूरी बना लें। सोते समय अपने सिर के पास न रखे ये चीज़ नहीं तो होगा कुछ ऐसा कि कांप उठेगी आपकी रूह, जानिए! मिट्टी के तबे पर बनी रोटी मचाएगी धमाल, कर देगी कुछ ऐसा, जानिए! घर के इन स्थानों पर पहनते है जूते तो हो जाए सावधान नहीं तो हो जाएगा अनर्थ, जानिए!
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राजधानी में को हल्की बारिश होने और आम तौर पर बादल छाए रहने की संभावना है। दिल्ली। (आईएएनएस) भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में बुधवार को हल्की बारिश होने और आम तौर पर बादल छाए रहने की संभावना है। आईएमडी ने कहा कि शहर का न्यूनतम तापमान 27. 1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो मौसम के औसत से तीन डिग्री कम है और दिन के दौरान अधिकतम तापमान 36 डिग्री के आसपास रहने की संभावना है। सुबह 8. 30 बजे सापेक्ष आर्द्रता 81 प्रतिशत दर्ज की गई। इस बीच, आईएमडी ने कहा कि अगले पांच दिनों के दौरान उत्तर-पश्चिम, मध्य और पश्चिम भारत में सक्रिय मानसून की स्थिति जारी रहने की संभावना है और अगले दो दिनों में राजस्थान और पंजाब और हरियाणा के कुछ और हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने की उम्मीद है। विभाग ने यह भी भविष्यवाणी की है कि उत्तर पश्चिम भारत में अगले पांच दिनों में हल्की से मध्यम और काफी व्यापक वर्षा होने की उम्मीद है, जिससे सूखी भूमि को राहत मिलेगी।
राजधानी में को हल्की बारिश होने और आम तौर पर बादल छाए रहने की संभावना है। दिल्ली। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में बुधवार को हल्की बारिश होने और आम तौर पर बादल छाए रहने की संभावना है। आईएमडी ने कहा कि शहर का न्यूनतम तापमान सत्ताईस. एक डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो मौसम के औसत से तीन डिग्री कम है और दिन के दौरान अधिकतम तापमान छत्तीस डिग्री के आसपास रहने की संभावना है। सुबह आठ. तीस बजे सापेक्ष आर्द्रता इक्यासी प्रतिशत दर्ज की गई। इस बीच, आईएमडी ने कहा कि अगले पांच दिनों के दौरान उत्तर-पश्चिम, मध्य और पश्चिम भारत में सक्रिय मानसून की स्थिति जारी रहने की संभावना है और अगले दो दिनों में राजस्थान और पंजाब और हरियाणा के कुछ और हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने की उम्मीद है। विभाग ने यह भी भविष्यवाणी की है कि उत्तर पश्चिम भारत में अगले पांच दिनों में हल्की से मध्यम और काफी व्यापक वर्षा होने की उम्मीद है, जिससे सूखी भूमि को राहत मिलेगी।
Aaj Ka Rashifal 07 August 2022: आज किन राशियों के लिए खास है दिन, किसके लिए है भारी, पढ़ें आज का राशिफल और जानें क्या कहते हैं आपके सितारे? मेषः आज आपको घर की नई जिम्मेदारी संभालनी पड़ सकती है। कार्यक्षेत्र में बदलाव आ सकता है। समाज में आपका मान-सम्मान बढ़ेगा। पारिवारिक जीवन में भी सचेत रहना होगा। किसी पर बेवजह से कमेंट पास न करें अन्यथा इससे रिश्ते भी बिगड़ सकते हैं। वृषभः आज आप अपनी योग्यता साबित करने के लिए बेहतर अवसरों का लाभ उठाएंगे। समाज में आपका मान-सम्मान बढ़ेगा। मानसिक शान्ति रहेगी। शोध से जुड़े विद्यार्थियों को अच्छे परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। मिथुनः आज आपको आर्थिक क्षेत्र में सफलता मिलेगी। मान-सम्मान से वृद्धि होगी। व्यापार में लाभ प्राप्त हो सकता है। सोशल मीडिया में आपका काफी समय बीत सकता है। आप कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं। कर्कः आज आप अन्य दिनों की अपेक्षा कुछ अधिक व्यस्त नजर आएंगे। लंबे समय से अधूरा पड़ा कार्य पूर्ण कर सकते हैं। राजनीति के टॉपिक को लेकर किसी से बहसबाजी संभव है। परिजनों का सहयोग प्राप्त होगा। सिंहः आज अपने क्षेत्र में बढ़िया प्रदर्शन करते हुए नजर आएंगे। दोस्तों के साथ कुछ रोमांच के कार्य कर सकते हैं। संतान सुख प्राप्त होने की संभावना है। विभिन्न स्रोतों से धन प्राप्त कर सकते हैं। कन्याः आज आपको संतान की ओर से शुभ समाचार की प्राप्ति हो सकती है। परिवार में धार्मिक कार्यक्रम हो सकता है। महत्वाकांक्षाएं चरम पर रहेंगी आपको नौकरी में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता हैं। तुलाः आज आप अपने खाली समय को मनोरंजन में लगाएंगे। आगामी त्योहार की शॉपिंग कर सकते हैं। आपके अंदर जोश और उत्साह की कोई कमी नहीं रहेगी। कामकाज में कोई गलती हो सकती है। वृश्चिकः आज आपके सामाजिक दायरे में वृद्धि होगी। नए लोगों से मुलाकात कर सकते हैं। परिजनों के साथ अच्छा समय बीतेगा। धन संचय करने की सोच रहे हैं उसमें आपको सफलता मिल सकती है। आज आपकी वाणी में मधुरता रहेगी। धनुः आज जीवनसाथी के साथ आज आप सैर का आनंद ले सकते हैं। आपको गलत संगत से दूरी बनाए रखनी है। विद्यार्थियों के लिए आज का दिन अच्छा है। नई नौकरी मिलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। मकरः आज किसी बर्थडे पार्टी में शामिल हो सकते हैं। मनोरंजन में समय बिताएंगे। बिजनेस में आर्थिक लाभ होगी। आपका जिद्दी बर्ताव रिश्ते के लिए ठीक नहीं है। महत्वपूर्ण आर्थिक फैसले लेते समय दूसरों की सलाह अवश्य लें। कुंभः आज आपको आर्थिक मोर्चे में सफलता मिलेगी। सामाजिक जीवन में लोग आपकी सादगी से प्रभावित होंगे। आज समय को यूं ही नष्ट न करें, बल्कि इसे सही दिशा में लगाएं। कटु शब्दों के इस्तेमाल से बचें। मीनः आज आपको सेहत के प्रति सचेत रहने की जरूरत है। अपच की शिकायत हो सकती है। परिवार में सुख-शान्ति रहेगी, परन्तु स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें। आर्थिक जीवन में जोखिम लेने से बचें।
Aaj Ka Rashifal सात अगस्तust दो हज़ार बाईस: आज किन राशियों के लिए खास है दिन, किसके लिए है भारी, पढ़ें आज का राशिफल और जानें क्या कहते हैं आपके सितारे? मेषः आज आपको घर की नई जिम्मेदारी संभालनी पड़ सकती है। कार्यक्षेत्र में बदलाव आ सकता है। समाज में आपका मान-सम्मान बढ़ेगा। पारिवारिक जीवन में भी सचेत रहना होगा। किसी पर बेवजह से कमेंट पास न करें अन्यथा इससे रिश्ते भी बिगड़ सकते हैं। वृषभः आज आप अपनी योग्यता साबित करने के लिए बेहतर अवसरों का लाभ उठाएंगे। समाज में आपका मान-सम्मान बढ़ेगा। मानसिक शान्ति रहेगी। शोध से जुड़े विद्यार्थियों को अच्छे परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। मिथुनः आज आपको आर्थिक क्षेत्र में सफलता मिलेगी। मान-सम्मान से वृद्धि होगी। व्यापार में लाभ प्राप्त हो सकता है। सोशल मीडिया में आपका काफी समय बीत सकता है। आप कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं। कर्कः आज आप अन्य दिनों की अपेक्षा कुछ अधिक व्यस्त नजर आएंगे। लंबे समय से अधूरा पड़ा कार्य पूर्ण कर सकते हैं। राजनीति के टॉपिक को लेकर किसी से बहसबाजी संभव है। परिजनों का सहयोग प्राप्त होगा। सिंहः आज अपने क्षेत्र में बढ़िया प्रदर्शन करते हुए नजर आएंगे। दोस्तों के साथ कुछ रोमांच के कार्य कर सकते हैं। संतान सुख प्राप्त होने की संभावना है। विभिन्न स्रोतों से धन प्राप्त कर सकते हैं। कन्याः आज आपको संतान की ओर से शुभ समाचार की प्राप्ति हो सकती है। परिवार में धार्मिक कार्यक्रम हो सकता है। महत्वाकांक्षाएं चरम पर रहेंगी आपको नौकरी में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता हैं। तुलाः आज आप अपने खाली समय को मनोरंजन में लगाएंगे। आगामी त्योहार की शॉपिंग कर सकते हैं। आपके अंदर जोश और उत्साह की कोई कमी नहीं रहेगी। कामकाज में कोई गलती हो सकती है। वृश्चिकः आज आपके सामाजिक दायरे में वृद्धि होगी। नए लोगों से मुलाकात कर सकते हैं। परिजनों के साथ अच्छा समय बीतेगा। धन संचय करने की सोच रहे हैं उसमें आपको सफलता मिल सकती है। आज आपकी वाणी में मधुरता रहेगी। धनुः आज जीवनसाथी के साथ आज आप सैर का आनंद ले सकते हैं। आपको गलत संगत से दूरी बनाए रखनी है। विद्यार्थियों के लिए आज का दिन अच्छा है। नई नौकरी मिलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। मकरः आज किसी बर्थडे पार्टी में शामिल हो सकते हैं। मनोरंजन में समय बिताएंगे। बिजनेस में आर्थिक लाभ होगी। आपका जिद्दी बर्ताव रिश्ते के लिए ठीक नहीं है। महत्वपूर्ण आर्थिक फैसले लेते समय दूसरों की सलाह अवश्य लें। कुंभः आज आपको आर्थिक मोर्चे में सफलता मिलेगी। सामाजिक जीवन में लोग आपकी सादगी से प्रभावित होंगे। आज समय को यूं ही नष्ट न करें, बल्कि इसे सही दिशा में लगाएं। कटु शब्दों के इस्तेमाल से बचें। मीनः आज आपको सेहत के प्रति सचेत रहने की जरूरत है। अपच की शिकायत हो सकती है। परिवार में सुख-शान्ति रहेगी, परन्तु स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें। आर्थिक जीवन में जोखिम लेने से बचें।
BAREILLY: वैलेंटाइन डे सन्नी और रेनू की जिंदगी में खुशियां लेकर आया। चार साल से अलग रह रहा यह कपल फिर से साथ हो गया। मामूली वजहों से दोनों के बीच पैदा हुई कड़वाहट ने कोर्ट केस का रूप ले लिया था, लेकिन दोनों के बीच प्यार बरकरार था, इसलिए दोनों ने कोर्ट में समझौता कर लिया। इसके लिए उन्होंने प्यार के दिन वैलेंटाइन डे को चुना। सन्नी कुमार राजापुरी नई दिल्ली में रहते हैं। सन्नी की शादी ख्0 नवंबर ख्0क्0 को सुभाषनगर की रहने वाली रेनू से हुई थी। दोनों के दो बेटे भी हैं, लेकिन रेनू अपने मां-बाप के प्यार को पूरी तरह से नहीं भुला सकी। बार-बार मायके जाने की जिद पर सनी को गुस्सा आ गया तो उसने रेनू पर हाथ उठा दिया। रेनू गुस्से में सन्नी का घर छोड़कर अपने मायके चली गई। सन्नी उसे लेने उसके मायके गए, लेकिन रेनू नहीं मानी। सनी ने रेनू को अपने घर वापस ले जाने के लिए बरेली की परिवारिक कोर्ट में सेक्शन-9 का केस डाल दिया। जब रेनू को इस बारे में पता चला तो उसने भी कोर्ट में सनी के खिलाफ भरण-पोषण का केस डाल दिया। बार-बार दोनों कोर्ट में पेश होने आए। मन में दरार थी, लेकिन दिलों में दोनों के प्यार पनप रहा था। इसलिए दोनों ने अपने जीवन को अच्छे से चलाने और बच्चों के भविष्य को देखते हुए क्ब् फरवरी की डेट एक साथ रहने के लिए डिसाइड की। दोनों कोर्ट पहुंचे और फिर समझौता कर लिया। दोनों अब काफी खुश हैं और उसके परिवार वाले भी खुश हैं।
BAREILLY: वैलेंटाइन डे सन्नी और रेनू की जिंदगी में खुशियां लेकर आया। चार साल से अलग रह रहा यह कपल फिर से साथ हो गया। मामूली वजहों से दोनों के बीच पैदा हुई कड़वाहट ने कोर्ट केस का रूप ले लिया था, लेकिन दोनों के बीच प्यार बरकरार था, इसलिए दोनों ने कोर्ट में समझौता कर लिया। इसके लिए उन्होंने प्यार के दिन वैलेंटाइन डे को चुना। सन्नी कुमार राजापुरी नई दिल्ली में रहते हैं। सन्नी की शादी ख्शून्य नवंबर ख्शून्यक्शून्य को सुभाषनगर की रहने वाली रेनू से हुई थी। दोनों के दो बेटे भी हैं, लेकिन रेनू अपने मां-बाप के प्यार को पूरी तरह से नहीं भुला सकी। बार-बार मायके जाने की जिद पर सनी को गुस्सा आ गया तो उसने रेनू पर हाथ उठा दिया। रेनू गुस्से में सन्नी का घर छोड़कर अपने मायके चली गई। सन्नी उसे लेने उसके मायके गए, लेकिन रेनू नहीं मानी। सनी ने रेनू को अपने घर वापस ले जाने के लिए बरेली की परिवारिक कोर्ट में सेक्शन-नौ का केस डाल दिया। जब रेनू को इस बारे में पता चला तो उसने भी कोर्ट में सनी के खिलाफ भरण-पोषण का केस डाल दिया। बार-बार दोनों कोर्ट में पेश होने आए। मन में दरार थी, लेकिन दिलों में दोनों के प्यार पनप रहा था। इसलिए दोनों ने अपने जीवन को अच्छे से चलाने और बच्चों के भविष्य को देखते हुए क्ब् फरवरी की डेट एक साथ रहने के लिए डिसाइड की। दोनों कोर्ट पहुंचे और फिर समझौता कर लिया। दोनों अब काफी खुश हैं और उसके परिवार वाले भी खुश हैं।
दमोह में भारतीय जनता पार्टी के बेताज बादशाह माने जाने वाले पूर्व मंत्री जयंत मलैया के समर्थकों का मानना था कि उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी की ओर से सिद्धार्थ मलैया को टिकट मिलेगा। जब सीएम शिवराज सिंह चौहान ने राहुल सिंह लोधी के नाम की घोषणा की तो मलैया समर्थकों में नाराजगी स्पष्ट रूप से दिखाई दी। इसके बाद सिद्धार्थ मलैया ने लोगों से मेल मुलाकात का दौर शुरू किया। एक बार पत्रकारों को भी बुलाया। शायद सिद्धार्थ मलैया यह जानने की कोशिश कर रहे थे कि यदि वह निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतरते हैं तो उनकी स्थिति क्या होगी। कुछ दिनों पहले स्पष्ट हो गया था कि उनके साथ इतना जनाधार नहीं है कि वह भारतीय जनता पार्टी से बगावत करके चुनाव लड़ पाए। सिद्धार्थ मलैया ने आज कहा कि चुनाव तो लड़ना था, लेकिन भाजपा ने उम्मीदवार घोषित कर दिया है, इसलिए अब वह पार्टी प्रत्याशी के साथ काम करेंगें। किसी दबाब से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि कोई दबाब नहीं है, केवल पिता का आदेश है, जिसका पालन कर रहा हूं। पार्टी प्रत्याशी के साथ काम करने के समन्वय पर उन्होंने कहा कि यदि पार्टी के साथ काम करूंगा तो पूरी ईमानदारी और ताकत के साथ करूंगा। अपने समर्थकों को प्रेरित करूंगा कि वह भी निष्ठा से काम करें। यदि उन्हें पार्टी जबादारी देती है तो वह उसे निभाएंगे वरना वह अपने वार्ड में काम करेंगे। वह अपने वार्ड से आठ पंचवर्षीय से करीब एक हजार वोटों से जीतते हैं, वही रिकार्ड वह इस बार भी कायम रखेंगे। कैबिनेट का दर्जा और निगम अध्यक्ष के पद मिलने से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि वह काल्पनिक प्रश्नों का जबाब नहीं देते हैं, लेकिन इस प्रश्न का जबाब देना जरूरी है, इसलिए वह बताना चाहते हैं कि वह या उनका परिवार विश्वासहीन नहीं है। कैबिनेट का दर्जा या निगम अध्यक्ष का पद लेकर पार्टी के प्रति विश्वासहीन नहीं हो सकते। वह पार्टी के साधाराण कार्यकर्ता हैं और केवल यही चाहते हैं कि पार्टी का उनपर विश्वास बना रहे, यही उनके लिए काफी। चुनाव लड़ने का फैसला करने में इतना समय लगने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वह चुनाव लड़ना चाहते थे, एक यात्रा शुरू की थी, उसपर एक अल्प विराम लगाया है। यात्रा चालू रहेगी, मंजिल अभी बाकी है।
दमोह में भारतीय जनता पार्टी के बेताज बादशाह माने जाने वाले पूर्व मंत्री जयंत मलैया के समर्थकों का मानना था कि उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी की ओर से सिद्धार्थ मलैया को टिकट मिलेगा। जब सीएम शिवराज सिंह चौहान ने राहुल सिंह लोधी के नाम की घोषणा की तो मलैया समर्थकों में नाराजगी स्पष्ट रूप से दिखाई दी। इसके बाद सिद्धार्थ मलैया ने लोगों से मेल मुलाकात का दौर शुरू किया। एक बार पत्रकारों को भी बुलाया। शायद सिद्धार्थ मलैया यह जानने की कोशिश कर रहे थे कि यदि वह निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतरते हैं तो उनकी स्थिति क्या होगी। कुछ दिनों पहले स्पष्ट हो गया था कि उनके साथ इतना जनाधार नहीं है कि वह भारतीय जनता पार्टी से बगावत करके चुनाव लड़ पाए। सिद्धार्थ मलैया ने आज कहा कि चुनाव तो लड़ना था, लेकिन भाजपा ने उम्मीदवार घोषित कर दिया है, इसलिए अब वह पार्टी प्रत्याशी के साथ काम करेंगें। किसी दबाब से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि कोई दबाब नहीं है, केवल पिता का आदेश है, जिसका पालन कर रहा हूं। पार्टी प्रत्याशी के साथ काम करने के समन्वय पर उन्होंने कहा कि यदि पार्टी के साथ काम करूंगा तो पूरी ईमानदारी और ताकत के साथ करूंगा। अपने समर्थकों को प्रेरित करूंगा कि वह भी निष्ठा से काम करें। यदि उन्हें पार्टी जबादारी देती है तो वह उसे निभाएंगे वरना वह अपने वार्ड में काम करेंगे। वह अपने वार्ड से आठ पंचवर्षीय से करीब एक हजार वोटों से जीतते हैं, वही रिकार्ड वह इस बार भी कायम रखेंगे। कैबिनेट का दर्जा और निगम अध्यक्ष के पद मिलने से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि वह काल्पनिक प्रश्नों का जबाब नहीं देते हैं, लेकिन इस प्रश्न का जबाब देना जरूरी है, इसलिए वह बताना चाहते हैं कि वह या उनका परिवार विश्वासहीन नहीं है। कैबिनेट का दर्जा या निगम अध्यक्ष का पद लेकर पार्टी के प्रति विश्वासहीन नहीं हो सकते। वह पार्टी के साधाराण कार्यकर्ता हैं और केवल यही चाहते हैं कि पार्टी का उनपर विश्वास बना रहे, यही उनके लिए काफी। चुनाव लड़ने का फैसला करने में इतना समय लगने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वह चुनाव लड़ना चाहते थे, एक यात्रा शुरू की थी, उसपर एक अल्प विराम लगाया है। यात्रा चालू रहेगी, मंजिल अभी बाकी है।
शिवपुरी। गुना-शिवपुरी संसदीय क्षेत्र के सांसद केपी यादव ने आज शिवपुरी जिले के भावखेड़ी गांव पहुंच दो दलित बच्चों की हत्या के बाद पीडित परिवार से मुलाकात की। इस दौरान केपी यादव ने दलित पीडि़त परिवार को हर संभव मदद का आश्वासन दिया। इस मौके पर सांसद केपी यादव ने पत्रकारों से कहा कि इस पीडि़त परिवार को अभी तक पीएम आवास नहीं मिल पाया है। उन्होंने कलेक्टर को कहा है कि जल्द से जल्द इस पीडि़त परिवार को पीएम आवास सहित अन्य योजनाओं का लाभ दिलाया जाए। केपी यादव ने मप्र की कानून व्यवस्था की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि प्रदेश में जब से कांग्रेस की कमलनाथ सरकार आई है तब से कानून व्यवस्था का बुरा हाल है। अपराधों में वृद्धि हुई है और प्रदेश सरकार कोई उपाय नहीं कर रही है।
शिवपुरी। गुना-शिवपुरी संसदीय क्षेत्र के सांसद केपी यादव ने आज शिवपुरी जिले के भावखेड़ी गांव पहुंच दो दलित बच्चों की हत्या के बाद पीडित परिवार से मुलाकात की। इस दौरान केपी यादव ने दलित पीडि़त परिवार को हर संभव मदद का आश्वासन दिया। इस मौके पर सांसद केपी यादव ने पत्रकारों से कहा कि इस पीडि़त परिवार को अभी तक पीएम आवास नहीं मिल पाया है। उन्होंने कलेक्टर को कहा है कि जल्द से जल्द इस पीडि़त परिवार को पीएम आवास सहित अन्य योजनाओं का लाभ दिलाया जाए। केपी यादव ने मप्र की कानून व्यवस्था की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि प्रदेश में जब से कांग्रेस की कमलनाथ सरकार आई है तब से कानून व्यवस्था का बुरा हाल है। अपराधों में वृद्धि हुई है और प्रदेश सरकार कोई उपाय नहीं कर रही है।
काहिरा : खाड़ी के चार देशों ने कतर को अपनी मांगों को पूरा करने के लिए दो और दिन का समय दिया है। इन देशों ने कथित तौर पर आतंकवाद के समर्थन पर कतर से राजनयिक संबंध तोड़ लिए हैं और अपनी मांगें पूरी करने का उसे अल्टीमेटम दिया हुआ है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), बहरीन व मिस्र ने रविवार देर जारी किए गए एक संयुक्त बयान में कहा कि उन्होंने अपने अल्टिमेटम में 48 घंटे का और विस्तार किया है। पहले इस अंतिम चेतावनी की समय सीमा 4 जुलाई तय थी। यह विस्तार कुवैत के अमीर सबाह अल-अहमद अल जबर अल-सबाह के अनुरोध पर किया गया। सऊदी एपीए ने कहा कि चार देशों द्वारा कतर को दिया गया समय कतर सरकार की इस बात पर मिला है कि वह सोमवार को संबंधित मांगों की सूची पर अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया भेजेगा। चारों देशों ने इस अवधि को 'अनुग्रह अवधि' कहा है। इन चारों देशों ने जून में कतर से अपने वाणिज्यिक व कूटनीतिक संबंध तोड़ दिए थे। इन देशों ने कतर पर ईरान व आतंकवाद को समर्थन देने का आरोप लगाया है।
काहिरा : खाड़ी के चार देशों ने कतर को अपनी मांगों को पूरा करने के लिए दो और दिन का समय दिया है। इन देशों ने कथित तौर पर आतंकवाद के समर्थन पर कतर से राजनयिक संबंध तोड़ लिए हैं और अपनी मांगें पूरी करने का उसे अल्टीमेटम दिया हुआ है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात , बहरीन व मिस्र ने रविवार देर जारी किए गए एक संयुक्त बयान में कहा कि उन्होंने अपने अल्टिमेटम में अड़तालीस घंटाटे का और विस्तार किया है। पहले इस अंतिम चेतावनी की समय सीमा चार जुलाई तय थी। यह विस्तार कुवैत के अमीर सबाह अल-अहमद अल जबर अल-सबाह के अनुरोध पर किया गया। सऊदी एपीए ने कहा कि चार देशों द्वारा कतर को दिया गया समय कतर सरकार की इस बात पर मिला है कि वह सोमवार को संबंधित मांगों की सूची पर अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया भेजेगा। चारों देशों ने इस अवधि को 'अनुग्रह अवधि' कहा है। इन चारों देशों ने जून में कतर से अपने वाणिज्यिक व कूटनीतिक संबंध तोड़ दिए थे। इन देशों ने कतर पर ईरान व आतंकवाद को समर्थन देने का आरोप लगाया है।
डिंडौरी के नवोदय विद्यालय में 6 वीं की एक छात्रा की लाश मिली है. लाश के पास एक पत्र मिला है, जिसमें लिखा है कि उसे स्कूल में अच्छा नहीं लगता और वो टीसी निकालना चाहती है. पहली नज़र में ये मामला आत्महत्या का लग रहा है, लेकिन पुलिस अभी कई ऐंगल से जांच कर रही है. छात्रा दो दिन पहले ही स्कूल आयी थी. डिंडोरी के धमनगांव में जवाहर नवोदय विद्यालय में आज सुबह सनसनी फैल गयी. यहां स्कूल के कैंपस में एक नाबालिग छात्रा की लाश फांसी पर लटकी दिखी. छात्रा का शव सीढ़ी की रेलिंग में रस्सी के सहारे लटका हुआ था. उसकी उम्र महज़ 11 साल थी. शव के पास से एक नोट मिला है जिस पर लिखा है- वो अपने पापा-मम्मी और परिवार से प्यार करती है. शिक्षक बनना चाहती है. लेकिन स्कूल में अच्छा नहीं लगता इशलिए टीसी निकालना चाहती है. छात्रा भूमकुंडी गांव की रहने वाली थी और यहां 6वीं में पढ़ रही थी. बताया जा रहा है कि दो दिन पहले ही उसके परिवार के लोग यहां उसे छोड़कर गए थे. खबर पाते ही छात्रा का परिवार फौरन मौके पर पहुंच गया. घटना से परिवार भी स्तब्ध है. बच्ची के पिता ने स्कूल प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है वो राजी-खुशी अपनी बच्ची को यहां छोड़कर गए थे, फिर ऐसा क्या हुआ. सूचना मिलने पर पुलिस भी फौरन मौके पर पहुंची और लाश को अपने कब्ज़े में लेकर पोस्ट मॉर्टम के लिए भेजा. मामला आत्महत्या का ही है या कुछ और इस मामले की जांच की जा रही है. मौके पर पहुंचे पुलिस अधीक्षक का कहना है कि पीएम रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा. ये भी पढ़ें-ये लोग इंद्रदेव को यातना दे रहे हैं ताकि उनका दम घुटने लगे. . .
डिंडौरी के नवोदय विद्यालय में छः वीं की एक छात्रा की लाश मिली है. लाश के पास एक पत्र मिला है, जिसमें लिखा है कि उसे स्कूल में अच्छा नहीं लगता और वो टीसी निकालना चाहती है. पहली नज़र में ये मामला आत्महत्या का लग रहा है, लेकिन पुलिस अभी कई ऐंगल से जांच कर रही है. छात्रा दो दिन पहले ही स्कूल आयी थी. डिंडोरी के धमनगांव में जवाहर नवोदय विद्यालय में आज सुबह सनसनी फैल गयी. यहां स्कूल के कैंपस में एक नाबालिग छात्रा की लाश फांसी पर लटकी दिखी. छात्रा का शव सीढ़ी की रेलिंग में रस्सी के सहारे लटका हुआ था. उसकी उम्र महज़ ग्यारह साल थी. शव के पास से एक नोट मिला है जिस पर लिखा है- वो अपने पापा-मम्मी और परिवार से प्यार करती है. शिक्षक बनना चाहती है. लेकिन स्कूल में अच्छा नहीं लगता इशलिए टीसी निकालना चाहती है. छात्रा भूमकुंडी गांव की रहने वाली थी और यहां छःवीं में पढ़ रही थी. बताया जा रहा है कि दो दिन पहले ही उसके परिवार के लोग यहां उसे छोड़कर गए थे. खबर पाते ही छात्रा का परिवार फौरन मौके पर पहुंच गया. घटना से परिवार भी स्तब्ध है. बच्ची के पिता ने स्कूल प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है वो राजी-खुशी अपनी बच्ची को यहां छोड़कर गए थे, फिर ऐसा क्या हुआ. सूचना मिलने पर पुलिस भी फौरन मौके पर पहुंची और लाश को अपने कब्ज़े में लेकर पोस्ट मॉर्टम के लिए भेजा. मामला आत्महत्या का ही है या कुछ और इस मामले की जांच की जा रही है. मौके पर पहुंचे पुलिस अधीक्षक का कहना है कि पीएम रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा. ये भी पढ़ें-ये लोग इंद्रदेव को यातना दे रहे हैं ताकि उनका दम घुटने लगे. . .
शाहपुरा थाना इलाके के साइवाड़ गांव में ट्रेलर ने बाइक सवार तीन युवकों के रविवार को टक्कर मार दी। हादसे के बाइक सवार एक युवक की दर्दनाक मौत हो गई और 2 युवक घायल हो गए। हादसे के बाद गुस्साए लोगों ने पुलिस पर देरी से आने का आरोप लगाते हुए घटनास्थल व अस्पताल की मोर्चरी के बाहर जमकर हंगामा किया। सूचना पर शाहपुरा सहित 3 पुलिस थानों के जाब्ता मौके पर पहुंचा और समझाइश कर मामला शांत कराया। जानकारी के अनुसार नाथावाला गांव की भाटियों की ढाणी निवासी युवक अमरसिंह अपने साथी रविन्द्र व अरशद अली के साथ बाइक लेकर साईवाड़ गांव में क्रिकेट खेलने जा रहा था। यहां स्कूल के पास पहुंचने पर सामने से आ रहे एक ट्रेलर ने बाइक के टक्कर मार दी। दुर्घटना में अमरसिंह पुत्र जय नारायण यादव ट्रेलर के टायरों के नीचे आ गया, जिससे उसकी दर्दनाक मौत हो गई। वहीं खोरी शाहपुरा निवासी रविन्द्र यादव और काजी कॉलोनी शाहपुरा निवासी अरशद अली गंभीर रूप से घायल हो गए। इस दौरान मौके पर ग्रामीणों की भीड़ एकत्रित हो गई। घायलों को शाहपुरा के राजकीय अस्पताल में भर्ती कराया। जहां से उन्हें जयपुर रैफर किया। पुलिस ने शव को मोर्चरी में रखवाया। लोगों ने पुलिस पर देरी से आने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। सूचना पर शाहपुरा थाना प्रभारी विजेन्द्र सिंह मौके पर पहुंचे। इसके बाद अस्पताल की मोर्चरी के बाहर बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हो गए और शव का पोस्टमार्टम करवाने से इंकार करते हुए हंगामा किया। मामला बढ़ता देख 3 पुलिस थानों के जाब्ता पहुंचा। पुलिस ने समझाईश कर 1 घंटे बाद मामला शांत कराया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
शाहपुरा थाना इलाके के साइवाड़ गांव में ट्रेलर ने बाइक सवार तीन युवकों के रविवार को टक्कर मार दी। हादसे के बाइक सवार एक युवक की दर्दनाक मौत हो गई और दो युवक घायल हो गए। हादसे के बाद गुस्साए लोगों ने पुलिस पर देरी से आने का आरोप लगाते हुए घटनास्थल व अस्पताल की मोर्चरी के बाहर जमकर हंगामा किया। सूचना पर शाहपुरा सहित तीन पुलिस थानों के जाब्ता मौके पर पहुंचा और समझाइश कर मामला शांत कराया। जानकारी के अनुसार नाथावाला गांव की भाटियों की ढाणी निवासी युवक अमरसिंह अपने साथी रविन्द्र व अरशद अली के साथ बाइक लेकर साईवाड़ गांव में क्रिकेट खेलने जा रहा था। यहां स्कूल के पास पहुंचने पर सामने से आ रहे एक ट्रेलर ने बाइक के टक्कर मार दी। दुर्घटना में अमरसिंह पुत्र जय नारायण यादव ट्रेलर के टायरों के नीचे आ गया, जिससे उसकी दर्दनाक मौत हो गई। वहीं खोरी शाहपुरा निवासी रविन्द्र यादव और काजी कॉलोनी शाहपुरा निवासी अरशद अली गंभीर रूप से घायल हो गए। इस दौरान मौके पर ग्रामीणों की भीड़ एकत्रित हो गई। घायलों को शाहपुरा के राजकीय अस्पताल में भर्ती कराया। जहां से उन्हें जयपुर रैफर किया। पुलिस ने शव को मोर्चरी में रखवाया। लोगों ने पुलिस पर देरी से आने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। सूचना पर शाहपुरा थाना प्रभारी विजेन्द्र सिंह मौके पर पहुंचे। इसके बाद अस्पताल की मोर्चरी के बाहर बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हो गए और शव का पोस्टमार्टम करवाने से इंकार करते हुए हंगामा किया। मामला बढ़ता देख तीन पुलिस थानों के जाब्ता पहुंचा। पुलिस ने समझाईश कर एक घंटाटे बाद मामला शांत कराया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
अमरावती/प्रतिनिधि दि. २० - किसी भी आपातकालीन प्रसंग में अगर पुलिस से तुरंत संपर्क करना है, तो सबसे पहले दिमाग में 'एक शून्य शून्य' यानी १०० यह आपातकालीन नंबर आता है. इसी तरह अग्निशमन विभाग से संपर्क करने हेतु १०१ व महिला हेल्पलाईन के लिए १०९० नंबर पर संपर्क किया जा सकता था. विगत अनेक वर्षों से यही नंबर चलन में हैं और देश के २० राज्यों में इन्हीं नंबरों के जरिये संबंधित शहरों व क्षेत्रोें के पुलिस नियंत्रण कक्ष सहित संबंधित महकमों से संपर्क किया जाता है. जिनमें महाराष्ट्र राज्य का भी समावेश है. लेकिन अब यह 'एक शून्य शून्य' वाले नंबर सहित अन्य दोनोें नंबर हमेशा के लिए इतिहास में जमा हो जायेंगे. जिसके बाद इस वर्ष के अंत तक महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में '११२' यह नया हेल्पलाईन नंबर उपलब्ध होगा. जिसे डायल करने के बाद किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत हर तरह की सहायता प्राप्त होगी. बता दें कि, गत वर्ष देश में सर्वप्रथम उत्तर प्रदेश सरकार ने १०० क्रमांक की बजाय ११२ क्रमांक का हेल्पलाईन के तौर पर उपयोग करना शुरू किया. साथ ही देश के २० राज्यों सहित कुछ केंद्र शासित प्रदेशों ने भी ११२ हेल्पलाईन क्रमांक को स्वीकार किया है. ऐसी जानकारी है और अब महाराष्ट्र में भी इस हेल्पलाईन नंबर को अमल में लाने के लिए प्रयास शुरू है. जानकारी के मुताबिक यदि कोई भी व्यक्ति ११२ हेल्पलाईन क्रमांक पर संपर्क करता है, तो उसे एक ही समय पुलिस नियंत्रण कक्ष, अग्निशमन दल, महिला हेल्प लाईन व चाईल्ड हेल्प लाईन से संपर्क करने की सुविधा उपलब्ध होगी. इस हेतु जल्द ही संबंधित महकमों को विस्तृत प्रशिक्षण दिया जायेगा. बता दें कि, दिल्ली में घटित निर्भया मामले के बाद समूचे देश में एक ही हेल्पलाईन नंबर हो, इस मांग ने जोर पकडा था. पश्चात सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे लेकर आवश्यक निर्देश दिये थे. जिसके आधार पर आपातकालीन स्थिति में सहायता उपलब्ध कराने हेतु हेल्पलाईन नंबर की यह व्यवस्था अमल में लायी गयी.
अमरावती/प्रतिनिधि दि. बीस - किसी भी आपातकालीन प्रसंग में अगर पुलिस से तुरंत संपर्क करना है, तो सबसे पहले दिमाग में 'एक शून्य शून्य' यानी एक सौ यह आपातकालीन नंबर आता है. इसी तरह अग्निशमन विभाग से संपर्क करने हेतु एक सौ एक व महिला हेल्पलाईन के लिए एक हज़ार नब्बे नंबर पर संपर्क किया जा सकता था. विगत अनेक वर्षों से यही नंबर चलन में हैं और देश के बीस राज्यों में इन्हीं नंबरों के जरिये संबंधित शहरों व क्षेत्रोें के पुलिस नियंत्रण कक्ष सहित संबंधित महकमों से संपर्क किया जाता है. जिनमें महाराष्ट्र राज्य का भी समावेश है. लेकिन अब यह 'एक शून्य शून्य' वाले नंबर सहित अन्य दोनोें नंबर हमेशा के लिए इतिहास में जमा हो जायेंगे. जिसके बाद इस वर्ष के अंत तक महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में 'एक सौ बारह' यह नया हेल्पलाईन नंबर उपलब्ध होगा. जिसे डायल करने के बाद किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत हर तरह की सहायता प्राप्त होगी. बता दें कि, गत वर्ष देश में सर्वप्रथम उत्तर प्रदेश सरकार ने एक सौ क्रमांक की बजाय एक सौ बारह क्रमांक का हेल्पलाईन के तौर पर उपयोग करना शुरू किया. साथ ही देश के बीस राज्यों सहित कुछ केंद्र शासित प्रदेशों ने भी एक सौ बारह हेल्पलाईन क्रमांक को स्वीकार किया है. ऐसी जानकारी है और अब महाराष्ट्र में भी इस हेल्पलाईन नंबर को अमल में लाने के लिए प्रयास शुरू है. जानकारी के मुताबिक यदि कोई भी व्यक्ति एक सौ बारह हेल्पलाईन क्रमांक पर संपर्क करता है, तो उसे एक ही समय पुलिस नियंत्रण कक्ष, अग्निशमन दल, महिला हेल्प लाईन व चाईल्ड हेल्प लाईन से संपर्क करने की सुविधा उपलब्ध होगी. इस हेतु जल्द ही संबंधित महकमों को विस्तृत प्रशिक्षण दिया जायेगा. बता दें कि, दिल्ली में घटित निर्भया मामले के बाद समूचे देश में एक ही हेल्पलाईन नंबर हो, इस मांग ने जोर पकडा था. पश्चात सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे लेकर आवश्यक निर्देश दिये थे. जिसके आधार पर आपातकालीन स्थिति में सहायता उपलब्ध कराने हेतु हेल्पलाईन नंबर की यह व्यवस्था अमल में लायी गयी.
१॰ यदि पर्याप्त उपचार करने पर भी रोग-पीड़ा शांत नहीं हो रही हो अथवा बार-बार एक ही रोग प्रकट होकर पीड़ित कर रहा हो तथा उपचार करने पर शांत हो जाता हो, ऐसे व्यक्ति को अपने वजन के बराबर गेहूँ का दान रविवार के दिन करना चाहिए। गेहूँ का दान जरुरतमंद एवं अभावग्रस्त व्यक्तियों को ही करना चाहिए। २॰ यदि जन्म कुण्डली में अष्टम भाव से सम्बन्धित ग्रह की दशा-अन्तर्दशा चल रही हो, तो ऐसी दशा में पूर्वजन्मकृत अशुभ कार्यों के कारण इस जन्म में रोग पीड़ा का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में उस ग्रह से सम्बन्धित अनाज को उस ग्रह के वार के दिन बहते हुए जल में प्रवाहित करना चाहिए। ३॰ निर्बल षष्ठेश की दशा-अन्तर्दशा में उससे सम्बन्धित प्रतिनिधि वस्तु को भूमि में दबाना चाहिए। ४॰ एलर्जी एवं चर्म रोगों की पीड़ा शान्ति के लिए बुधवार के दिन मिट्टी का घड़ा खरीदकर एक सप्ताह तक घर पर रखकर अगले बुधवार को किसी जरुरतमंद व्यक्ति को दान करना चाहिए। ५॰ बार-बार ज्वर से पीड़ा मिलती हो, तो उसे सफेद कनेर की जड़ का ताबीज लाल डोरे में पिरोकर गले में पहनना चाहिए। ६॰ नजर दोष के कारण यदि स्वास्थ्य खराब हो तो, ऐसे व्यक्ति के सिर पर से काली राई सात बार उसार कर चूल्हे की अग्नि में डाल देनी चाहिए। ७॰ यदि घर में किसी न किसी सदस्य का स्वास्थ्य खराब रहता हो, जिसके कारण धन का अपव्यय लगा रहता हो, तो ऐसे घर के गृहस्वामी को प्रतिदिन अपने भोजन में से प्रथम रोटी निकालकर गाय को खिलानी चाहिए। ८॰ जिस घर में स्त्रीवर्ग को निरन्तर स्वास्थ्य की पीड़ाएँ रहती हो, उस घर में तुलसी का पौधा लगाकर उसकी श्रद्धापूर्वक देखभाल करने से रोग पीड़ाएँ समाप्त होती है।
एक॰ यदि पर्याप्त उपचार करने पर भी रोग-पीड़ा शांत नहीं हो रही हो अथवा बार-बार एक ही रोग प्रकट होकर पीड़ित कर रहा हो तथा उपचार करने पर शांत हो जाता हो, ऐसे व्यक्ति को अपने वजन के बराबर गेहूँ का दान रविवार के दिन करना चाहिए। गेहूँ का दान जरुरतमंद एवं अभावग्रस्त व्यक्तियों को ही करना चाहिए। दो॰ यदि जन्म कुण्डली में अष्टम भाव से सम्बन्धित ग्रह की दशा-अन्तर्दशा चल रही हो, तो ऐसी दशा में पूर्वजन्मकृत अशुभ कार्यों के कारण इस जन्म में रोग पीड़ा का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में उस ग्रह से सम्बन्धित अनाज को उस ग्रह के वार के दिन बहते हुए जल में प्रवाहित करना चाहिए। तीन॰ निर्बल षष्ठेश की दशा-अन्तर्दशा में उससे सम्बन्धित प्रतिनिधि वस्तु को भूमि में दबाना चाहिए। चार॰ एलर्जी एवं चर्म रोगों की पीड़ा शान्ति के लिए बुधवार के दिन मिट्टी का घड़ा खरीदकर एक सप्ताह तक घर पर रखकर अगले बुधवार को किसी जरुरतमंद व्यक्ति को दान करना चाहिए। पाँच॰ बार-बार ज्वर से पीड़ा मिलती हो, तो उसे सफेद कनेर की जड़ का ताबीज लाल डोरे में पिरोकर गले में पहनना चाहिए। छः॰ नजर दोष के कारण यदि स्वास्थ्य खराब हो तो, ऐसे व्यक्ति के सिर पर से काली राई सात बार उसार कर चूल्हे की अग्नि में डाल देनी चाहिए। सात॰ यदि घर में किसी न किसी सदस्य का स्वास्थ्य खराब रहता हो, जिसके कारण धन का अपव्यय लगा रहता हो, तो ऐसे घर के गृहस्वामी को प्रतिदिन अपने भोजन में से प्रथम रोटी निकालकर गाय को खिलानी चाहिए। आठ॰ जिस घर में स्त्रीवर्ग को निरन्तर स्वास्थ्य की पीड़ाएँ रहती हो, उस घर में तुलसी का पौधा लगाकर उसकी श्रद्धापूर्वक देखभाल करने से रोग पीड़ाएँ समाप्त होती है।
कोर-मैंटल के बीच बहुत बड़ा इलाका पाया गया है जो गर्म और अधिक धनत्व वाला है. (फोटोःDoyeon Kim/University of Maryland) नई दिल्लीः बहुत सालों में वैज्ञानिक भूकंपों का अध्ययन कर रहे हैं. भूंकप (Earthquake) के दौरान पृथ्वी (Earth) के भीतर से आने वाली भूगर्भीय तरंगों (Seismic waves) का अध्ययन कर उन्होंने बहुत सी जानकारी भी हासिल की है. लेकिन एक ताजा शोध ने वैज्ञानिकों को इसलिए हैरान कर दिया है क्योंकि उन्हें वह जानकारी मिली जो इतने सालों के भूकंप का अध्ययन कर रहे वैज्ञानिक पकड़ नहीं सके. अब तक माना जाता था कि हम पृथ्वी के इस सबसे अंदर की परत क्रोड़ (Core) के बारे में काफी कुछ जानते थे, लेकिन अब यह साबित होता दिख रहा है कि हम काफी कुछ नहीं जानते हैं. वैज्ञानिकों ने खोज निकाला है कि पृथ्वी के 2900 किलोमीटर के अंदर बड़ी संरचनाएं मौजूद हैं. ये संरचनाएं पृथ्वी की पिघली हुई क्रोड़ यानि पृथ्वी की भीतर से दूसरी परत और उसके ऊपर की परत जिसे ठोस मैंटल कहा जाता है, के बीच स्थित हैं. यह अनुमान लगाया जा रहा है कि इन संरचनाओं का व्यास एक हजार किलोमीटर है और इनकी गहराई 25 किलोमीटर तक है. अमेरिका की मैरीलैंड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने यह खोज की है. इस शोध में शोधकर्ताओं ने प्रशांत महासागर क्षेत्र में साल 1990 से 2018 में आए 7000 भूकंपों के आंकड़ों का अध्ययन किया, जिसमें कुछ बड़े भूकंप भी शामिल थे. शोधकर्ताओं ने पाया कि जिसे वे अल्ट्रा लो वेलॉसिटी (ULV) जोन कह रहे हैं उसमें से भूगर्भीय तरंगें धीमी गति से गुजरती हैं. इसके बाद भी वैज्ञानिक इस तरह की संरचना और उसके बारे में अन्य जानकारी से अनभिज्ञ थे. इसके लिए शोधकर्ताओं ने सीक्वेंसर नाम के एक मशीन लर्निंग एलगॉरिदम का उपयोग किया. इस एलगॉरिदम को जॉन्स हॉपकिंस यूनवर्सिटी और तेल अवीव यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने विकसित किया जो इस अध्ययन के सह लेखक भी हैं. यह अध्ययन साइंस जर्नल में प्रकाशित हुआ है. .
कोर-मैंटल के बीच बहुत बड़ा इलाका पाया गया है जो गर्म और अधिक धनत्व वाला है. नई दिल्लीः बहुत सालों में वैज्ञानिक भूकंपों का अध्ययन कर रहे हैं. भूंकप के दौरान पृथ्वी के भीतर से आने वाली भूगर्भीय तरंगों का अध्ययन कर उन्होंने बहुत सी जानकारी भी हासिल की है. लेकिन एक ताजा शोध ने वैज्ञानिकों को इसलिए हैरान कर दिया है क्योंकि उन्हें वह जानकारी मिली जो इतने सालों के भूकंप का अध्ययन कर रहे वैज्ञानिक पकड़ नहीं सके. अब तक माना जाता था कि हम पृथ्वी के इस सबसे अंदर की परत क्रोड़ के बारे में काफी कुछ जानते थे, लेकिन अब यह साबित होता दिख रहा है कि हम काफी कुछ नहीं जानते हैं. वैज्ञानिकों ने खोज निकाला है कि पृथ्वी के दो हज़ार नौ सौ किलोग्राममीटर के अंदर बड़ी संरचनाएं मौजूद हैं. ये संरचनाएं पृथ्वी की पिघली हुई क्रोड़ यानि पृथ्वी की भीतर से दूसरी परत और उसके ऊपर की परत जिसे ठोस मैंटल कहा जाता है, के बीच स्थित हैं. यह अनुमान लगाया जा रहा है कि इन संरचनाओं का व्यास एक हजार किलोमीटर है और इनकी गहराई पच्चीस किलोग्राममीटर तक है. अमेरिका की मैरीलैंड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने यह खोज की है. इस शोध में शोधकर्ताओं ने प्रशांत महासागर क्षेत्र में साल एक हज़ार नौ सौ नब्बे से दो हज़ार अट्ठारह में आए सात हज़ार भूकंपों के आंकड़ों का अध्ययन किया, जिसमें कुछ बड़े भूकंप भी शामिल थे. शोधकर्ताओं ने पाया कि जिसे वे अल्ट्रा लो वेलॉसिटी जोन कह रहे हैं उसमें से भूगर्भीय तरंगें धीमी गति से गुजरती हैं. इसके बाद भी वैज्ञानिक इस तरह की संरचना और उसके बारे में अन्य जानकारी से अनभिज्ञ थे. इसके लिए शोधकर्ताओं ने सीक्वेंसर नाम के एक मशीन लर्निंग एलगॉरिदम का उपयोग किया. इस एलगॉरिदम को जॉन्स हॉपकिंस यूनवर्सिटी और तेल अवीव यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने विकसित किया जो इस अध्ययन के सह लेखक भी हैं. यह अध्ययन साइंस जर्नल में प्रकाशित हुआ है. .
आज वर्ल्ड लाफ्टर डे है। आज हम आपको मध्यप्रदेश के दो बेहतरीन कॉमेडियंस के बारे में बताएंगे। एक राजधानी भोपाल से उठा और देशभर में छा गया। दूसरा धार जैसे छोटे जिले से कॉमेडी शुरू कर लोगों के दिलों में समा गया। आज सोशल मीडिया पर इनके लाखों फॉलोअर्स हैं। कॉमेडी से इनकी कमाई भी शुरू हो चुकी है और वे अच्छा जीवन बिता रहे हैं। अगर आप स्टैंडअप कॉमेडी देखने के शौकीन नहीं भी हैं तो आदित्य कुलश्रेष्ठ का कोई न कोई वीडियो आपकी आंखों के सामने से जरूर गुजरा होगा। भोपाल में ही पले-बढ़े आदित्य आज देश के चर्चित स्टैंडअप कॉमेडियंस में से एक हैं। देश के कई बड़े शहरों में अपने शो कर चुके आदित्य के लिए यह मुकाम हासिल करना आसान नहीं था। कारण कि जब आदित्य ने अपने करियर की शुरुआत की थी तब भोपाल में स्टैंडअप कॉमेडी का स्कोप नहीं था। आज भी जब स्टैंडअप कॉमेडी का नाम आता है तो दिल्ली-मुंबई जैसे मेट्रो सिटी का अक्स दिमाग में उभरता है। ऐसे में आदित्य के लिए करियर के तौर पर स्टैंडअप कॉमेडी को आगे बढ़ाना आसान नहीं था। आदित्य कहते हैं कि मुझे अपने शौक से इतना लगाव था कि इसे डवलप करने के लिए दिन-रात लगा रहता था। पहले शो के बाद आदित्य को मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के कई शहरों से बुलावा आने लगा। शुरुआत में कॉलेजों और छोटे आयोजनों में बुलाया जाता था। इसका फायदा ये रहा कि उन्हें अपनी कला पर ज्यादा काम करने का समय मिला। कुछ सालों में ही उन्होंने स्टैंडअप कॉमेडियन के तौर पर अपनी पहचान बना ली। इसके बाद उन्होंने दिल्ली-मुंबई जैसे बड़े शहरों की ओर रुख किया। आज उनके पास इतना काम है कि वो परमानेंट मुंबई में ही शिफ्ट हो गए हैं। आदित्य सिंगल पैरेंट्स चाइल्ड हैं। उनकी मां ही उनका बैक सपोर्ट रही हैं। आदित्य ने 12वीं के बाद इंजीनियरिंग चुनी, लेकिन उनकी दिलचस्पी कहीं और थी। बैचलर डिग्री की पढ़ाई कंप्लीट होते-होते उन्हें ये समझ आ गया था कि इंजीनियरिंग की फील्ड उनके लिए नहीं बनी। आदित्य ने बताया- इंजीनियरिंग पूरी होने के बाद समझ नहीं आ रहा था कि आगे क्या किया जाए? तब मां ने समझाया कि शौक को ही करियर बना लो। वो हमेशा इस बात पर जोर दिया करती थीं कि सर्वाइवल के लिए जेब में पैसा होना जरूरी है। मां को भी कला में बहुत रुचि थी, लेकिन उनके मन में एक धारणा थी कि कलाकारों के पास पैसा नहीं होता और उनकी पर्सनल लाइफ अच्छी नहीं होती। हालांकि, मां के सुझाव के बाद ही पहली बार स्टैंडअप कॉमेडी को करियर बनाने का सोचा और आज इस मुकाम तक पहुंच पाया हूं। बतौर सिंगल पैरेंट मां के लिए भी मुश्किलें थीं, लेकिन वो हमेशा मेरे पैशन के साथ खड़ी रहीं। आदित्य ने अपने एक शो में कहा था कि उनकी जिंदगी में दो ही चीजें बाकी रह गई हैं, पहला थैरेपी और दूसरा FIR। इस पर उन्होंने कहा- जब मैंने ये बात कही थी, उस वक्त बहुत सारे कॉमेडियन्स पर FIR हो रही थी। वहीं, हर स्टैंडअप कॉमेडियन अपने शो के दौरान मेंटल हेल्थ और थैरेपी की बात कर रहा था। इन बातों को मैंने बस मजाक में कह दिया था, रियल लाइफ में मुझे कोई FIR नहीं चाहिए। मैं इन सब से दूर ही रहना चाहता हूं। हमने उनसे ये सवाल किया कि क्या आप उन मुद्दों पर भी बाेलने से बचेंगे, जिन पर बोलना जरूरी है? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा- किसी भी मुद्दे पर राय रखने से पहले मैं ये जरूर सोचता हूं कि क्या मैं उस विषय पर बोलने के लिए क्वालिफाइड व्यक्ति हूं? मैं चाहता हूं कि जब भी मैं मंच से कुछ बोलूं तो विपरीत विचार रखने वाला व्यक्ति भी अगर सामने बैठा हो, तो भले वो मुझसे सहमत न हो लेकिन उसे मजा आए। मैं बतौर कलाकार एक ऐसी डेमोक्रेसी की उम्मीद भी करता हूं। मैं बोलने से तो खुद को कभी रोकूंगा नहीं और मैं ऐसी आजादी का हिमायती भी हूं। अब बात एक और स्टैंडअप कॉमेडियन राजू सेठ की। सोशल ब्लेड के अनुसार यूट्यूब से राजू सेठ की न्यूनतम मासिक कमाई 1300 डॉलर और अधिकतम 20,000 डॉलर के बीच होने का अनुमान है। ये अपने वीडियोज फेसबुक पर भी डालते हैं। एक अनुमान के मुताबिक इनकी कुल न्यूनतम कमाई 2 लाख रुपए प्रति माह से ज्यादा है। आइए, अब आपको बताते हैं गांव के एक बेहद आम इंसान के 30 करोड़ लोगों तक पहुंचने की कहानी। राजू सेठ पेशे से दुकानदार हैं। उन्होंने कोविडकाल में टाइमपास के लिए वीडियो बनाना शुरू किया था। लोगों को उनके वीडियो पसंद आने लगे। इससे उत्साहित होकर वे आगे बढ़े। शुरुआत में वे टिक-टॉक पर वीडियो बनाते थे। वहां उनको पसंद किया जाने लगा और तेजी से सब्सक्राइबर्स बढ़ते गए। जुलाई 2020 में टिकटॉक के भारत में बैन होने से राजू को झटका लगा। टिकटॉक की तरफ से उन्हें वेरिफाइड बैज मिलने वाला था। दो-चार ब्रांड्स से प्रमोशन के लिए ऑफर भी आए थे। टिकटॉक पर बैन लगने के बाद उन्होंने लंबे टाइम तक कोई वीडियो नहीं बनाया। उन्होंने टाइम पास के लिए यह काम शुरू किया था, इसलिए ज्यादा तनाव नहीं लिया। वे वापस अपनी दुकानदारी में ही लग गए। राजू बताते हैं कि करीब दस महीने तक उन्होंने कोई वीडियो नहीं बनाया। अगली शुरुआत वे प्रोफेशनल तरीके से करना चाहते थे। पहले वे ट्राइपॉड पर कैमरा स्टिल रखकर एक ही एंगल से वीडियो शूट करते थे। धीरे-धीरे जब पैसे आने शुरू हुए तो उन्होंने इन चीजों में भी सुधार किया। वे वीडियो शूट करने के लिए अच्छे गैजेट खरीदने लगे। राजू कहते हैं कि जिस तरह लोगों की दिनचर्या बदली है, उन पर कई तरह के दबाव रहते हैं। मेरे लिए इससे बड़ी और कोई संतुष्टि नहीं कि लोगों के चेहरे पर हमारे वीडियो की वजह से मुस्कान आ जाती है। टीम के सबसे सीनियर सदस्य गोपाल जामलिया की उम्र 50 साल से भी ज्यादा है। उन्होंने ये काम बस इस मकसद से शुरू किया था कि लॉकडाउन में जो लोग बैठे-बैठे बोर रहे हैं या तनाव में हैं, उनके चेहरे पर हंसी आए। कोविड के पहले वे एक फार्मा कंपनी में 20 साल से काम कर रहे थे। जैसे ही कॉमेडी वीडियो का कारोबार चल निकला, उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी। आज वे काम से संतुष्ट भी हैं और खुश भी। खासकर मध्यप्रदेश और राजस्थान में लोग इन्हें काफी पसंद करते हैं। राजू और गोपाल बताते हैं कि भले ही उन्हें लाखों लोग देखते हों, लेकिन आज भी वे आम इंसानों की तरह ही रहते हैं। जहां भी लोग उनसे मिलना चाहते हैं, वे एक-एक कर हर किसी से मिलते हैं। अगर कोई घर आकर भी मिलना चाहे तो कोई मनाही नहीं है। राजू के पास अब पहले से बेहतर व्यवस्था है। नॉर्मल फोन से शूट और एडिट के साथ इस काम की शुरुआत हुई थी। अब सबसे महंगे फोन से शूट और प्रीमियर प्रो पर एडिटिंग का काम चल रहा है। वीडियो शूट होने के बाद एडिटिंग के लिए एक छोटे से कमरे में जाता है। जहां लैपटॉप और डेस्कटॉप पर एडिटिंग की जिम्मेदारी कैमरामैन संदीप और और वीडियो एडिटर संजय संभालते हैं। संदीप और संजय बताते हैं कि शुरुआत में उन्हें बेसिक से भी कम चीजें आती थीं। धीरे-धीरे उन्होंने यूट्यूब से ही सबकुछ सीखा और आज प्रोफेशनल तरीके से क्रिएशन कर रहे हैं। राजू और उनकी टीम का फोकस अब नए ट्रेंड्स को सीखने का है। इसके लिए वे ज्यादातर साउथ की मूवीज देखते हैं। फिलहाल यूट्यूब और फेसबुक की कमाई से पांच लोगों की टीम का खर्च अच्छे से चल रहा है। कुछ ब्रांड्स के साथ अनुबंध करके भी वे अच्छी कमाई कर रहे हैं। विक्रम बागड़ी मध्यप्रदेश के सागर के रहने वाले हैं। ये अपनी पत्नी के साथ नोंक-झोंक के फनी वीडियो बनाते हैं। यूट्यूब पर इनके सवा लाख से भी ज्यादा फॉलोअर हैं। वहीं, फेसबुक पर फॉलोअर की संख्या करीब डेढ़ लाख है। अब तक यूट्यूब पर अपलोड इनके 214 वीडियोज को करीब 1 करोड़ लोग देख चुके हैं। सोशल ब्लेड के अनुसार सिर्फ यूट्यूब वीडियो से ही ये 37 हजार रुपए प्रति माह तक कमा लेते हैं। फेसबुक वीडियो के जरिए भी मोटी रकम इनकी जेब में आ जाती है। एक अनुमान के मुताबिक, डिफरेंट सोशल मीडिया प्लेटफाॅर्म्स के जरिए ये 1 लाख रुपए हर महीने आसानी से कमा लेते हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
आज वर्ल्ड लाफ्टर डे है। आज हम आपको मध्यप्रदेश के दो बेहतरीन कॉमेडियंस के बारे में बताएंगे। एक राजधानी भोपाल से उठा और देशभर में छा गया। दूसरा धार जैसे छोटे जिले से कॉमेडी शुरू कर लोगों के दिलों में समा गया। आज सोशल मीडिया पर इनके लाखों फॉलोअर्स हैं। कॉमेडी से इनकी कमाई भी शुरू हो चुकी है और वे अच्छा जीवन बिता रहे हैं। अगर आप स्टैंडअप कॉमेडी देखने के शौकीन नहीं भी हैं तो आदित्य कुलश्रेष्ठ का कोई न कोई वीडियो आपकी आंखों के सामने से जरूर गुजरा होगा। भोपाल में ही पले-बढ़े आदित्य आज देश के चर्चित स्टैंडअप कॉमेडियंस में से एक हैं। देश के कई बड़े शहरों में अपने शो कर चुके आदित्य के लिए यह मुकाम हासिल करना आसान नहीं था। कारण कि जब आदित्य ने अपने करियर की शुरुआत की थी तब भोपाल में स्टैंडअप कॉमेडी का स्कोप नहीं था। आज भी जब स्टैंडअप कॉमेडी का नाम आता है तो दिल्ली-मुंबई जैसे मेट्रो सिटी का अक्स दिमाग में उभरता है। ऐसे में आदित्य के लिए करियर के तौर पर स्टैंडअप कॉमेडी को आगे बढ़ाना आसान नहीं था। आदित्य कहते हैं कि मुझे अपने शौक से इतना लगाव था कि इसे डवलप करने के लिए दिन-रात लगा रहता था। पहले शो के बाद आदित्य को मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के कई शहरों से बुलावा आने लगा। शुरुआत में कॉलेजों और छोटे आयोजनों में बुलाया जाता था। इसका फायदा ये रहा कि उन्हें अपनी कला पर ज्यादा काम करने का समय मिला। कुछ सालों में ही उन्होंने स्टैंडअप कॉमेडियन के तौर पर अपनी पहचान बना ली। इसके बाद उन्होंने दिल्ली-मुंबई जैसे बड़े शहरों की ओर रुख किया। आज उनके पास इतना काम है कि वो परमानेंट मुंबई में ही शिफ्ट हो गए हैं। आदित्य सिंगल पैरेंट्स चाइल्ड हैं। उनकी मां ही उनका बैक सपोर्ट रही हैं। आदित्य ने बारहवीं के बाद इंजीनियरिंग चुनी, लेकिन उनकी दिलचस्पी कहीं और थी। बैचलर डिग्री की पढ़ाई कंप्लीट होते-होते उन्हें ये समझ आ गया था कि इंजीनियरिंग की फील्ड उनके लिए नहीं बनी। आदित्य ने बताया- इंजीनियरिंग पूरी होने के बाद समझ नहीं आ रहा था कि आगे क्या किया जाए? तब मां ने समझाया कि शौक को ही करियर बना लो। वो हमेशा इस बात पर जोर दिया करती थीं कि सर्वाइवल के लिए जेब में पैसा होना जरूरी है। मां को भी कला में बहुत रुचि थी, लेकिन उनके मन में एक धारणा थी कि कलाकारों के पास पैसा नहीं होता और उनकी पर्सनल लाइफ अच्छी नहीं होती। हालांकि, मां के सुझाव के बाद ही पहली बार स्टैंडअप कॉमेडी को करियर बनाने का सोचा और आज इस मुकाम तक पहुंच पाया हूं। बतौर सिंगल पैरेंट मां के लिए भी मुश्किलें थीं, लेकिन वो हमेशा मेरे पैशन के साथ खड़ी रहीं। आदित्य ने अपने एक शो में कहा था कि उनकी जिंदगी में दो ही चीजें बाकी रह गई हैं, पहला थैरेपी और दूसरा FIR। इस पर उन्होंने कहा- जब मैंने ये बात कही थी, उस वक्त बहुत सारे कॉमेडियन्स पर FIR हो रही थी। वहीं, हर स्टैंडअप कॉमेडियन अपने शो के दौरान मेंटल हेल्थ और थैरेपी की बात कर रहा था। इन बातों को मैंने बस मजाक में कह दिया था, रियल लाइफ में मुझे कोई FIR नहीं चाहिए। मैं इन सब से दूर ही रहना चाहता हूं। हमने उनसे ये सवाल किया कि क्या आप उन मुद्दों पर भी बाेलने से बचेंगे, जिन पर बोलना जरूरी है? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा- किसी भी मुद्दे पर राय रखने से पहले मैं ये जरूर सोचता हूं कि क्या मैं उस विषय पर बोलने के लिए क्वालिफाइड व्यक्ति हूं? मैं चाहता हूं कि जब भी मैं मंच से कुछ बोलूं तो विपरीत विचार रखने वाला व्यक्ति भी अगर सामने बैठा हो, तो भले वो मुझसे सहमत न हो लेकिन उसे मजा आए। मैं बतौर कलाकार एक ऐसी डेमोक्रेसी की उम्मीद भी करता हूं। मैं बोलने से तो खुद को कभी रोकूंगा नहीं और मैं ऐसी आजादी का हिमायती भी हूं। अब बात एक और स्टैंडअप कॉमेडियन राजू सेठ की। सोशल ब्लेड के अनुसार यूट्यूब से राजू सेठ की न्यूनतम मासिक कमाई एक हज़ार तीन सौ डॉलर और अधिकतम बीस,शून्य डॉलर के बीच होने का अनुमान है। ये अपने वीडियोज फेसबुक पर भी डालते हैं। एक अनुमान के मुताबिक इनकी कुल न्यूनतम कमाई दो लाख रुपए प्रति माह से ज्यादा है। आइए, अब आपको बताते हैं गांव के एक बेहद आम इंसान के तीस करोड़ लोगों तक पहुंचने की कहानी। राजू सेठ पेशे से दुकानदार हैं। उन्होंने कोविडकाल में टाइमपास के लिए वीडियो बनाना शुरू किया था। लोगों को उनके वीडियो पसंद आने लगे। इससे उत्साहित होकर वे आगे बढ़े। शुरुआत में वे टिक-टॉक पर वीडियो बनाते थे। वहां उनको पसंद किया जाने लगा और तेजी से सब्सक्राइबर्स बढ़ते गए। जुलाई दो हज़ार बीस में टिकटॉक के भारत में बैन होने से राजू को झटका लगा। टिकटॉक की तरफ से उन्हें वेरिफाइड बैज मिलने वाला था। दो-चार ब्रांड्स से प्रमोशन के लिए ऑफर भी आए थे। टिकटॉक पर बैन लगने के बाद उन्होंने लंबे टाइम तक कोई वीडियो नहीं बनाया। उन्होंने टाइम पास के लिए यह काम शुरू किया था, इसलिए ज्यादा तनाव नहीं लिया। वे वापस अपनी दुकानदारी में ही लग गए। राजू बताते हैं कि करीब दस महीने तक उन्होंने कोई वीडियो नहीं बनाया। अगली शुरुआत वे प्रोफेशनल तरीके से करना चाहते थे। पहले वे ट्राइपॉड पर कैमरा स्टिल रखकर एक ही एंगल से वीडियो शूट करते थे। धीरे-धीरे जब पैसे आने शुरू हुए तो उन्होंने इन चीजों में भी सुधार किया। वे वीडियो शूट करने के लिए अच्छे गैजेट खरीदने लगे। राजू कहते हैं कि जिस तरह लोगों की दिनचर्या बदली है, उन पर कई तरह के दबाव रहते हैं। मेरे लिए इससे बड़ी और कोई संतुष्टि नहीं कि लोगों के चेहरे पर हमारे वीडियो की वजह से मुस्कान आ जाती है। टीम के सबसे सीनियर सदस्य गोपाल जामलिया की उम्र पचास साल से भी ज्यादा है। उन्होंने ये काम बस इस मकसद से शुरू किया था कि लॉकडाउन में जो लोग बैठे-बैठे बोर रहे हैं या तनाव में हैं, उनके चेहरे पर हंसी आए। कोविड के पहले वे एक फार्मा कंपनी में बीस साल से काम कर रहे थे। जैसे ही कॉमेडी वीडियो का कारोबार चल निकला, उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी। आज वे काम से संतुष्ट भी हैं और खुश भी। खासकर मध्यप्रदेश और राजस्थान में लोग इन्हें काफी पसंद करते हैं। राजू और गोपाल बताते हैं कि भले ही उन्हें लाखों लोग देखते हों, लेकिन आज भी वे आम इंसानों की तरह ही रहते हैं। जहां भी लोग उनसे मिलना चाहते हैं, वे एक-एक कर हर किसी से मिलते हैं। अगर कोई घर आकर भी मिलना चाहे तो कोई मनाही नहीं है। राजू के पास अब पहले से बेहतर व्यवस्था है। नॉर्मल फोन से शूट और एडिट के साथ इस काम की शुरुआत हुई थी। अब सबसे महंगे फोन से शूट और प्रीमियर प्रो पर एडिटिंग का काम चल रहा है। वीडियो शूट होने के बाद एडिटिंग के लिए एक छोटे से कमरे में जाता है। जहां लैपटॉप और डेस्कटॉप पर एडिटिंग की जिम्मेदारी कैमरामैन संदीप और और वीडियो एडिटर संजय संभालते हैं। संदीप और संजय बताते हैं कि शुरुआत में उन्हें बेसिक से भी कम चीजें आती थीं। धीरे-धीरे उन्होंने यूट्यूब से ही सबकुछ सीखा और आज प्रोफेशनल तरीके से क्रिएशन कर रहे हैं। राजू और उनकी टीम का फोकस अब नए ट्रेंड्स को सीखने का है। इसके लिए वे ज्यादातर साउथ की मूवीज देखते हैं। फिलहाल यूट्यूब और फेसबुक की कमाई से पांच लोगों की टीम का खर्च अच्छे से चल रहा है। कुछ ब्रांड्स के साथ अनुबंध करके भी वे अच्छी कमाई कर रहे हैं। विक्रम बागड़ी मध्यप्रदेश के सागर के रहने वाले हैं। ये अपनी पत्नी के साथ नोंक-झोंक के फनी वीडियो बनाते हैं। यूट्यूब पर इनके सवा लाख से भी ज्यादा फॉलोअर हैं। वहीं, फेसबुक पर फॉलोअर की संख्या करीब डेढ़ लाख है। अब तक यूट्यूब पर अपलोड इनके दो सौ चौदह वीडियोज को करीब एक करोड़ लोग देख चुके हैं। सोशल ब्लेड के अनुसार सिर्फ यूट्यूब वीडियो से ही ये सैंतीस हजार रुपए प्रति माह तक कमा लेते हैं। फेसबुक वीडियो के जरिए भी मोटी रकम इनकी जेब में आ जाती है। एक अनुमान के मुताबिक, डिफरेंट सोशल मीडिया प्लेटफाॅर्म्स के जरिए ये एक लाख रुपए हर महीने आसानी से कमा लेते हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
GORAKHPUR: इस साल दिवाली पर घी का दिया जलाएंगे। घर में मिठाई के साथ पकवान बनेगा और बच्चे जी भर कर आतिशबाजी छुड़ाएंगे। बेटे को पढ़ने के लिए शहर भेजना है और बिटिया की शादी करनी है। सब हो जाएगा। यह सोच लालवचन बहुत खुश था। मगर उसे नहीं मालूम था कि एक पल में ही उसकी सारी खुशियां अंधकार में डूब जाएंगी। गोरखपुर में आए हुदहुद के इफेक्ट ने लालवचन की सारी खुशियां पल में छीन ली और सारी उम्मीदें तोड़ दी। हुदहुद के इफेक्ट से आई तेज हवा के साथ भारी बारिश ने धान की फसल को लगभग पूरी तरह बर्बाद कर दिया। लालवचन की सारी उम्मीदें भी इसी धान की फसल पर टिकी थी। मगर अब वह पूरी तरह बर्बाद हो चुका है। फायदा तो दूर उसकी लागत भी इस हुदहुद में डूब गई। यह हाल अकेले लालवचन का नहीं बल्कि उन लाखों किसानों का है, जिन्होंने कम बारिश के बावजूद धान की फसल को तैयार किया था। हुदहुद से करीब 80 परसेंट फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। हर साल लाखों घरों की सारी समस्याएं दूर करने वाली धान की फसल ने इस बार उन लोगों को बर्बादी के रास्ते पर लाकर खड़ा कर दिया। फायदा तो दूर किसानों की लागत निकलना भी मुश्किल है। जून-जुलाई में हुई कम बारिश के कारण धान की फसल पहले ही कमजोर थी। किसी तरह किसानों ने नहर, ट्यूबवेल के जरिए पैसा लगाकर सिंचाई की। खाद का भरपूर छिड़काव कर किसी तरह फसल को सूखा होने के बावजूद तैयार किया। मगर क्फ् और क्ब् अक्टूबर को आए हुदहुद के इफेक्ट ने किसानों की इस मेहनत पर पानी फेर दिया। तेज हवा के साथ भारी बारिश ने खेतों में खड़ी धान की फसल को गिरा दिया। इससे पूरी फसल बर्बाद हो गई। गोरखपुर तराई का एरिया है। यहां धान की फसल सबसे अधिक होती है। गोरखपुर में भी सबसे अधिक धान पिपराइच एरिया में होता है। हुदहुद के इफेक्ट से आई तेज हवा के साथ भारी बारिश ने लगभग 80 परसेंट धान की फसल बर्बाद कर दी। सरयू भ्ख्, सोड़ा मंसूरी पूरी तरह बर्बाद हो गया। सांभा काफी हद तक बचा हुआ है। क्योंकि सांभा धान की फसल की हाइट कम होती है। इससे इस फसल पर तूफान का इफेक्ट अधिक नहीं पड़ा। वहीं वे फसल बच गई हैं, जिन्हें किसानों ने बर्बाद समझ पहले ही छोड़ दिया था। कम बारिश और खाद न देने की वजह से इन फसलों की हाइट कम रह गई थी। जिससे ये फसल तूफान से बच गई। धान की फसल ने किसानों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। फायदा की उम्मीद लगाए बैठे किसानों की लागत तक डूब गई है। कई किसानों ने पांच से क्0 एकड़ तक धान की फसल लगाई थी, जिसमें कुछ भी नहीं बचा। कई किसान भयंकर कर्ज में डूब गए हैं, जिन्होंने दूसरों से कर्जा लेकर फसल में लगाया था। हुदहुद का आतंक तो खत्म हो गया, मगर अब इन किसानों के घरों और दिलों में जो आतंक चल रहा है, उसका अंत नहीं है। क्योंकि वे पूरे साल कहां से खर्च करेंगे और कैसे कर्जा चुकाएंगे, इसका कोई सॉल्यूशन नहीं है, उनके पास। किसानों ने बताया कि धान की फसल ने पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। तेज हवा और भारी बारिश के कारण फसल टूट कर खेत में गिर गई है। साथ ही पानी भरा है। इससे पूरी फसल से कुछ भी नहीं मिलेगा। खेत में पानी होने से इस फसल को मशीन से नहीं काटा जा सकता। इसे काटने के लिए मजदूर लगाने पड़ेंगे। इसके लिए भी काफी पैसा खर्च करना पड़ेगा। फिर मजदूर मिलना भी बड़ी समस्या है। अगर समय पर फसल नहीं हटी तो गेहूं की बुआई में देरी होगी। मतलब हुदहुद किसानों के लिए सिर्फ समस्या ही समस्या दे गया है। हुदहुद के इफेक्ट ने पूरी फसल बर्बाद कर दी। अब दिवाली पर दिया जलाना तो दूर घर का खर्चा चलाना भी मुश्किल पड़ जाएगा। पूरे साल कैसे काम होगा, कुछ समझ नहीं आ रहा है। पहले सूखा, फिर हुदहुद ने पूरी धान की फसल बर्बाद कर दी। पांच एकड़ खेत में धान की फसल लगाई थी। मगर हुदहुद के बाद आए तूफान ने पूरी फसल तबाह कर दी। कुछ भी नहीं बचा है। फायदा तो दूर लागत तक डूब गई। सूखा के बावजूद खाद और पानी डाल कर फसल को तैयार किया था। सूखा पड़ने से फसल को तैयार करने में पहले ही पानी तक के लिए पैसा खर्च करना पड़ा था। कम पानी से खाद में भी अधिक पैसा लगा। इसके बावजूद आए तूफान ने सब कुछ बर्बाद कर दिया। पूरी लागत डूब गई। अब फसल को खेत से हटाने में भी पैसा खर्च करना पड़ेगा। दिवाली के दिए तो हुदहुद ने पहले ही बुझा दिया। पूरी फसल चौपट हो गई। इसी फसल के भरोसे पूरे साल घर के साथ अन्य खर्च चलता है। अब क्या होगा? कुछ समझ में नहीं आ रहा। इस बार पूरी फसल ने फायदा देना तो दूर घर का पैसा भी खत्म कर दिया। हुदहुद से आए तूफान ने धान की फसल को पूरी तरह बर्बाद कर दिया। अब फसल से कुछ नहीं मिलेगा। बल्कि गेहूं की फसल के लिए भी अब प्रॉब्लम हो गई है। क्योंकि इस बर्बाद धान की फसल को खेत से हटाने के लिए भी पैसा खर्च करना पड़ेगा। पहले सूखा, फिर हुदहुद ने धान की फसल को पूरा तबाह कर दिया। अब खेत में सिर्फ फसल बची है, धान नहीं। मतलब धान ने जहां किसानों को बर्बाद कर दिया। वहीं अब चावल के रेट आम पब्लिक को परेशान करेंगे। मेरी पूरी फसल बर्बाद हो गई है। खेत में कुछ भी नहीं बचा है। किसी तरह फसल को खड़ा करने की कोशिश कर रही हूं, मगर कुछ भी नहीं बचेगा। जो बचेगा, वह खेत से फसल काटने वाले ले जाएंगे। मतलब सारी लागत इस हुदहुद में डूब गई। हुदहुद के इफेक्ट से आई हवा और बारिश ने धान की फसल को पूरा तबाह कर दिया। मेरे सभी खेत में धान की फसल लगी थी, मगर अब कुछ भी नहीं बचा है। सारी लागत डूब गई। अब दिवाली क्या बाकी त्योहार भी कैसे मनेंगे, सोच कर परेशान हूं।
GORAKHPUR: इस साल दिवाली पर घी का दिया जलाएंगे। घर में मिठाई के साथ पकवान बनेगा और बच्चे जी भर कर आतिशबाजी छुड़ाएंगे। बेटे को पढ़ने के लिए शहर भेजना है और बिटिया की शादी करनी है। सब हो जाएगा। यह सोच लालवचन बहुत खुश था। मगर उसे नहीं मालूम था कि एक पल में ही उसकी सारी खुशियां अंधकार में डूब जाएंगी। गोरखपुर में आए हुदहुद के इफेक्ट ने लालवचन की सारी खुशियां पल में छीन ली और सारी उम्मीदें तोड़ दी। हुदहुद के इफेक्ट से आई तेज हवा के साथ भारी बारिश ने धान की फसल को लगभग पूरी तरह बर्बाद कर दिया। लालवचन की सारी उम्मीदें भी इसी धान की फसल पर टिकी थी। मगर अब वह पूरी तरह बर्बाद हो चुका है। फायदा तो दूर उसकी लागत भी इस हुदहुद में डूब गई। यह हाल अकेले लालवचन का नहीं बल्कि उन लाखों किसानों का है, जिन्होंने कम बारिश के बावजूद धान की फसल को तैयार किया था। हुदहुद से करीब अस्सी परसेंट फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। हर साल लाखों घरों की सारी समस्याएं दूर करने वाली धान की फसल ने इस बार उन लोगों को बर्बादी के रास्ते पर लाकर खड़ा कर दिया। फायदा तो दूर किसानों की लागत निकलना भी मुश्किल है। जून-जुलाई में हुई कम बारिश के कारण धान की फसल पहले ही कमजोर थी। किसी तरह किसानों ने नहर, ट्यूबवेल के जरिए पैसा लगाकर सिंचाई की। खाद का भरपूर छिड़काव कर किसी तरह फसल को सूखा होने के बावजूद तैयार किया। मगर क्फ् और क्ब् अक्टूबर को आए हुदहुद के इफेक्ट ने किसानों की इस मेहनत पर पानी फेर दिया। तेज हवा के साथ भारी बारिश ने खेतों में खड़ी धान की फसल को गिरा दिया। इससे पूरी फसल बर्बाद हो गई। गोरखपुर तराई का एरिया है। यहां धान की फसल सबसे अधिक होती है। गोरखपुर में भी सबसे अधिक धान पिपराइच एरिया में होता है। हुदहुद के इफेक्ट से आई तेज हवा के साथ भारी बारिश ने लगभग अस्सी परसेंट धान की फसल बर्बाद कर दी। सरयू भ्ख्, सोड़ा मंसूरी पूरी तरह बर्बाद हो गया। सांभा काफी हद तक बचा हुआ है। क्योंकि सांभा धान की फसल की हाइट कम होती है। इससे इस फसल पर तूफान का इफेक्ट अधिक नहीं पड़ा। वहीं वे फसल बच गई हैं, जिन्हें किसानों ने बर्बाद समझ पहले ही छोड़ दिया था। कम बारिश और खाद न देने की वजह से इन फसलों की हाइट कम रह गई थी। जिससे ये फसल तूफान से बच गई। धान की फसल ने किसानों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। फायदा की उम्मीद लगाए बैठे किसानों की लागत तक डूब गई है। कई किसानों ने पांच से क्शून्य एकड़ तक धान की फसल लगाई थी, जिसमें कुछ भी नहीं बचा। कई किसान भयंकर कर्ज में डूब गए हैं, जिन्होंने दूसरों से कर्जा लेकर फसल में लगाया था। हुदहुद का आतंक तो खत्म हो गया, मगर अब इन किसानों के घरों और दिलों में जो आतंक चल रहा है, उसका अंत नहीं है। क्योंकि वे पूरे साल कहां से खर्च करेंगे और कैसे कर्जा चुकाएंगे, इसका कोई सॉल्यूशन नहीं है, उनके पास। किसानों ने बताया कि धान की फसल ने पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। तेज हवा और भारी बारिश के कारण फसल टूट कर खेत में गिर गई है। साथ ही पानी भरा है। इससे पूरी फसल से कुछ भी नहीं मिलेगा। खेत में पानी होने से इस फसल को मशीन से नहीं काटा जा सकता। इसे काटने के लिए मजदूर लगाने पड़ेंगे। इसके लिए भी काफी पैसा खर्च करना पड़ेगा। फिर मजदूर मिलना भी बड़ी समस्या है। अगर समय पर फसल नहीं हटी तो गेहूं की बुआई में देरी होगी। मतलब हुदहुद किसानों के लिए सिर्फ समस्या ही समस्या दे गया है। हुदहुद के इफेक्ट ने पूरी फसल बर्बाद कर दी। अब दिवाली पर दिया जलाना तो दूर घर का खर्चा चलाना भी मुश्किल पड़ जाएगा। पूरे साल कैसे काम होगा, कुछ समझ नहीं आ रहा है। पहले सूखा, फिर हुदहुद ने पूरी धान की फसल बर्बाद कर दी। पांच एकड़ खेत में धान की फसल लगाई थी। मगर हुदहुद के बाद आए तूफान ने पूरी फसल तबाह कर दी। कुछ भी नहीं बचा है। फायदा तो दूर लागत तक डूब गई। सूखा के बावजूद खाद और पानी डाल कर फसल को तैयार किया था। सूखा पड़ने से फसल को तैयार करने में पहले ही पानी तक के लिए पैसा खर्च करना पड़ा था। कम पानी से खाद में भी अधिक पैसा लगा। इसके बावजूद आए तूफान ने सब कुछ बर्बाद कर दिया। पूरी लागत डूब गई। अब फसल को खेत से हटाने में भी पैसा खर्च करना पड़ेगा। दिवाली के दिए तो हुदहुद ने पहले ही बुझा दिया। पूरी फसल चौपट हो गई। इसी फसल के भरोसे पूरे साल घर के साथ अन्य खर्च चलता है। अब क्या होगा? कुछ समझ में नहीं आ रहा। इस बार पूरी फसल ने फायदा देना तो दूर घर का पैसा भी खत्म कर दिया। हुदहुद से आए तूफान ने धान की फसल को पूरी तरह बर्बाद कर दिया। अब फसल से कुछ नहीं मिलेगा। बल्कि गेहूं की फसल के लिए भी अब प्रॉब्लम हो गई है। क्योंकि इस बर्बाद धान की फसल को खेत से हटाने के लिए भी पैसा खर्च करना पड़ेगा। पहले सूखा, फिर हुदहुद ने धान की फसल को पूरा तबाह कर दिया। अब खेत में सिर्फ फसल बची है, धान नहीं। मतलब धान ने जहां किसानों को बर्बाद कर दिया। वहीं अब चावल के रेट आम पब्लिक को परेशान करेंगे। मेरी पूरी फसल बर्बाद हो गई है। खेत में कुछ भी नहीं बचा है। किसी तरह फसल को खड़ा करने की कोशिश कर रही हूं, मगर कुछ भी नहीं बचेगा। जो बचेगा, वह खेत से फसल काटने वाले ले जाएंगे। मतलब सारी लागत इस हुदहुद में डूब गई। हुदहुद के इफेक्ट से आई हवा और बारिश ने धान की फसल को पूरा तबाह कर दिया। मेरे सभी खेत में धान की फसल लगी थी, मगर अब कुछ भी नहीं बचा है। सारी लागत डूब गई। अब दिवाली क्या बाकी त्योहार भी कैसे मनेंगे, सोच कर परेशान हूं।
नूरपुर (कांगड़ा). विश्व हिंदू परिषद तथा बजरंग दल की नुरपुर इकाई ने प्रदेश में बढ़ते धर्मान्तरण के मामलों में सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए महामहिम राज्यपाल को अपना ज्ञापन एसडीएम नूरपुर के माध्यम से भेजने के लिए प्रस्तुत किया है. इस संदर्भ में हिन्दू सगठंन नूरपुर के प्रभारी केप्टन रजिंद्र शर्मा ने बताया कि विश्वहिन्दू परिषद के साथ अन्य हिन्दू वादी संगठन सरकार के प्रदेश ने बढ़ते धर्मान्तरण के मामलों को रोकने के लिए समय पर कड़े कदम उठाने का आग्रह कर रहे हैं. परंतु उसके बावजूद भी सरकार का ढुलमुल रविया सामने आ रहा है. जिसका ताजा उदहारण पालमपुर तहसील के भरमात गांव के 50 लोगों द्वारा धर्मान्तरण ताजा उदहारण है. ईसाई मिशनरीयो द्वारा परदेस में जबरन पैसे के बल पर लोगों का धर्म परिवर्तन करवाया जा रहा है. उन्होंने इस ओर प्रदेश सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए मांग की है कि प्रदेश में बढ़ते धर्म परिवर्तन के मामलों में सलिप्त लोगों पर कड़ी कारवाई की जाए ताकि इस मामले में रोक लग सके.
नूरपुर . विश्व हिंदू परिषद तथा बजरंग दल की नुरपुर इकाई ने प्रदेश में बढ़ते धर्मान्तरण के मामलों में सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए महामहिम राज्यपाल को अपना ज्ञापन एसडीएम नूरपुर के माध्यम से भेजने के लिए प्रस्तुत किया है. इस संदर्भ में हिन्दू सगठंन नूरपुर के प्रभारी केप्टन रजिंद्र शर्मा ने बताया कि विश्वहिन्दू परिषद के साथ अन्य हिन्दू वादी संगठन सरकार के प्रदेश ने बढ़ते धर्मान्तरण के मामलों को रोकने के लिए समय पर कड़े कदम उठाने का आग्रह कर रहे हैं. परंतु उसके बावजूद भी सरकार का ढुलमुल रविया सामने आ रहा है. जिसका ताजा उदहारण पालमपुर तहसील के भरमात गांव के पचास लोगों द्वारा धर्मान्तरण ताजा उदहारण है. ईसाई मिशनरीयो द्वारा परदेस में जबरन पैसे के बल पर लोगों का धर्म परिवर्तन करवाया जा रहा है. उन्होंने इस ओर प्रदेश सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए मांग की है कि प्रदेश में बढ़ते धर्म परिवर्तन के मामलों में सलिप्त लोगों पर कड़ी कारवाई की जाए ताकि इस मामले में रोक लग सके.
हिन्दी सिनेमा की धमाकेदार शुरुआत करने वाली फिल्म 'पठान' को रिलीज हुए 2 महीने हो चुके हैं। लेकिन इस फिल्म की दिवानगी लोगों के दिमाग से जा ही नहीं रही है। इस फिल्म के सुपरहिट होने के साथ ही किंग खान का दौर मानो लौट आया हो। आपको बता दें की फिल्म ने दुनियाभर में 1000 करोड़ से ऊपर कमा लिए हैं। फिल्म की इतनी शानदार कमाई के बाद ऐसा लगता है कि शाहरुख खान(Shah Rukh Khan) ने खुद को एक महंगा तोहफा दिया है। उन्होंने अपनी लग्जरी गाड़ियों में एक और चमकता सितारा जोड़ते हुए एक रोल्स-रॉयस SUV कार खरीदी है। जिसकी कीमत तकरीबन 10 करोड़ है। शाहरुख खान गाड़ियों से कितना प्यार करते हैं इस बात का अंदाजा आप ऐसे लगा सकते हैं कि, उनके पास ऑडी, बीएमडब्ल्यू, मर्सिडीज-बेंज बड़ी गाड़ियों का कलेक्शन है। इस लग्जरी कलेक्शन में अब रोल्स-रॉयस कलिनन ब्लैक बैज एसयूवी शामिल हो चुकी है। आपको बता दें कि, शाहरुख खान की इस नई गाड़ी का वीडियो सोशल मीडिया पर जदमकर वायरल हो रहा है। किंग खान ने अपनी गाड़ी पर सिग्नेचर '0555' की नंबर प्लेट लगवाई है। कल रात को किंग खान की गाड़ी सड़क पर भागती हुई दिखई। ऐसा लगता है कि 'पठान' की भारी सफलता ने सुपरस्टार को लक्जरी एसयूवी पर धूम मचा दी है। समान्य तौर पर कलिनन की कीमत करीब 8. 2 करोड़ है। जो ऑन रोड़ 9 करोड़ की पड़ती है। अगर आप कस्टमाइजेशन करवाते हैं तो इसकी कीमत 10 करोड़ तक हो जाती है। हालांकि अभी तक ये नहीं पता है कि, किंग खान ने अपनी कार में कोई कस्टमाइजेशन करवाया है या नहीं। शाहरुख खान(Shah Rukh Khan) की खरीदी रोल्स रॉयस कलिनन इंडिया में बहुत कम मौजूद हैं। इससे पहले कलिनन का ओल्ड मॉडल बिजनसमैन विजय माल्या के हुआ करती थी।
हिन्दी सिनेमा की धमाकेदार शुरुआत करने वाली फिल्म 'पठान' को रिलीज हुए दो महीने हो चुके हैं। लेकिन इस फिल्म की दिवानगी लोगों के दिमाग से जा ही नहीं रही है। इस फिल्म के सुपरहिट होने के साथ ही किंग खान का दौर मानो लौट आया हो। आपको बता दें की फिल्म ने दुनियाभर में एक हज़ार करोड़ से ऊपर कमा लिए हैं। फिल्म की इतनी शानदार कमाई के बाद ऐसा लगता है कि शाहरुख खान ने खुद को एक महंगा तोहफा दिया है। उन्होंने अपनी लग्जरी गाड़ियों में एक और चमकता सितारा जोड़ते हुए एक रोल्स-रॉयस SUV कार खरीदी है। जिसकी कीमत तकरीबन दस करोड़ है। शाहरुख खान गाड़ियों से कितना प्यार करते हैं इस बात का अंदाजा आप ऐसे लगा सकते हैं कि, उनके पास ऑडी, बीएमडब्ल्यू, मर्सिडीज-बेंज बड़ी गाड़ियों का कलेक्शन है। इस लग्जरी कलेक्शन में अब रोल्स-रॉयस कलिनन ब्लैक बैज एसयूवी शामिल हो चुकी है। आपको बता दें कि, शाहरुख खान की इस नई गाड़ी का वीडियो सोशल मीडिया पर जदमकर वायरल हो रहा है। किंग खान ने अपनी गाड़ी पर सिग्नेचर 'पाँच सौ पचपन' की नंबर प्लेट लगवाई है। कल रात को किंग खान की गाड़ी सड़क पर भागती हुई दिखई। ऐसा लगता है कि 'पठान' की भारी सफलता ने सुपरस्टार को लक्जरी एसयूवी पर धूम मचा दी है। समान्य तौर पर कलिनन की कीमत करीब आठ. दो करोड़ है। जो ऑन रोड़ नौ करोड़ की पड़ती है। अगर आप कस्टमाइजेशन करवाते हैं तो इसकी कीमत दस करोड़ तक हो जाती है। हालांकि अभी तक ये नहीं पता है कि, किंग खान ने अपनी कार में कोई कस्टमाइजेशन करवाया है या नहीं। शाहरुख खान की खरीदी रोल्स रॉयस कलिनन इंडिया में बहुत कम मौजूद हैं। इससे पहले कलिनन का ओल्ड मॉडल बिजनसमैन विजय माल्या के हुआ करती थी।
नई दिल्लीः बीजेपी के वरिष्ठ नेता और बिहार के मधुबनी से लोकसभा के पूर्व सांसद हुकुमदेव नारायण यादव ने गुरुवार को प्रशांत किशोर को राजनीतिक बिजनेसमैन कहा. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि प्रशांत किशोर ने प्रसिद्धि पाने के लिए नया बिजनेस शुरू किया है. आज दिन में प्रशांत किशोर ने किसी राजनीतिक पार्टी की शुरुआत करने से इनकार करते हुए कहा कि वे 2 अक्टूबर से बिहार के चंपारण में 3 हजार किलोमीटर की पदयात्रा की शुरुआत करने जा रहे हैं. हुकुमदेव नारायण ने कहा कि उन्हें रणनीतिकार मत कहिए वह राजनीतिक बिजनेसमैन हैं और किसी बिजनेसमैन के बारे में इतना महत्त्वपूर्ण तरीके से बात करना ठीक नहीं है. वह घूम-घूमकर बिजनेस करते हैं और आजकल उनके पास काम नहीं है तो प्रसिद्धि पाने के लिए उन्होंने एक नया काम शुरू कर दिया है. कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि यह उनका भ्रम है कि महात्मा गांधी के आश्रम से 2 अक्टूबर को पदयात्रा शुरू करने से उनके पास गांधी जी का विज़न भी आ जाएगा. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. उन्होंने आगे कहा कि गांधी बनने में सालों लगते हैं. एक दिन में कोई गांधी नहीं बनता. मैंने गांधी जी, राम मनोहर लोहिया, दीनदयाल उपाध्याय, जय प्रकाश नारायण का समय देखा है और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समय देख रहा हूं. बता दें कि गुरुवार को प्रशांत किशोर ने कहा था कि अगले तीन-चार महीनों में वह जन सुराज कैंपेन की शुरुआत करेंगे और करीब 17 हजार लोगों से उनके घर जाकर व्यक्तिगत स्तर पर मुलाकात करेंगे.
नई दिल्लीः बीजेपी के वरिष्ठ नेता और बिहार के मधुबनी से लोकसभा के पूर्व सांसद हुकुमदेव नारायण यादव ने गुरुवार को प्रशांत किशोर को राजनीतिक बिजनेसमैन कहा. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि प्रशांत किशोर ने प्रसिद्धि पाने के लिए नया बिजनेस शुरू किया है. आज दिन में प्रशांत किशोर ने किसी राजनीतिक पार्टी की शुरुआत करने से इनकार करते हुए कहा कि वे दो अक्टूबर से बिहार के चंपारण में तीन हजार किलोमीटर की पदयात्रा की शुरुआत करने जा रहे हैं. हुकुमदेव नारायण ने कहा कि उन्हें रणनीतिकार मत कहिए वह राजनीतिक बिजनेसमैन हैं और किसी बिजनेसमैन के बारे में इतना महत्त्वपूर्ण तरीके से बात करना ठीक नहीं है. वह घूम-घूमकर बिजनेस करते हैं और आजकल उनके पास काम नहीं है तो प्रसिद्धि पाने के लिए उन्होंने एक नया काम शुरू कर दिया है. कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि यह उनका भ्रम है कि महात्मा गांधी के आश्रम से दो अक्टूबर को पदयात्रा शुरू करने से उनके पास गांधी जी का विज़न भी आ जाएगा. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. उन्होंने आगे कहा कि गांधी बनने में सालों लगते हैं. एक दिन में कोई गांधी नहीं बनता. मैंने गांधी जी, राम मनोहर लोहिया, दीनदयाल उपाध्याय, जय प्रकाश नारायण का समय देखा है और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समय देख रहा हूं. बता दें कि गुरुवार को प्रशांत किशोर ने कहा था कि अगले तीन-चार महीनों में वह जन सुराज कैंपेन की शुरुआत करेंगे और करीब सत्रह हजार लोगों से उनके घर जाकर व्यक्तिगत स्तर पर मुलाकात करेंगे.
वोटिंग के बाद अचानक गायब हुई EVM मशीन , अधिकारियों में हडकंप ! महोबा : हमीरपुर महोबा तिंदवारी लोकसभा सीट 47 में चौथे चरण के मतदान के दौरान बड़ी लापरवाही सामने आई है । मतदान स्थल से पीठासीन अधिकारी की लापरवाही के चलते कल शाम वोटिंग प्रकिया सम्पन्न होने के बाद ईवीएम मशीन अचानक गायब हो गयी । स्ट्रांग रूम में ईवीएम मशीन मिलान के दौरान मशीन गायब होने से अधिकारियों में हड़कंप मच गया । आनन-फानन में जिला निर्वाचन अधिकारी ,पुलिस अधीक्षक सहित तमाम आलाधिकारियों के देर रात तक मौके का मुआयना करने के बाद भी कोई सफलता हाथ नही लगी । फिलहाल पुलिस और प्रशासनिक आलाधिकारी ईवीएम मशीन की तलाश में जुटे हुए हैं । तो वहीं लापरवाह पीठासीन अधिकारी सहित मतदेय में लगे अन्य कर्मियों को हिरासत में लेकर पूछताछ जारी है । तभी अचानक मशीन गायब नजर आयी तो जिला पीठासीन अधिकारी सहित सभी आलाधिकारियों में हड़कंप मच गया । मामले को गंभीरता से लेते हुये जिला निर्वाचन अधिकारी सहदेव, पुलिस अधीक्षक स्वामीनाथ सहित तमाम प्रशासनिक अधिकारियों ने गांव में पहुंच मशीन को तलाश करने का प्रयास किया मगर सफलता हाथ नही मिल सकी है । ऑक्सीजन सिलेंडर उतारते समय सिलेंडर फटा, युवक के उड़े चिथड़े ! पुलिस और प्रशासनिक आलाधिकारियों द्वारा गांव में डेरा डाल ग्रामीणों की मदद के सहारे ईवीएम मशीन की तलाश की जा रही है ।
वोटिंग के बाद अचानक गायब हुई EVM मशीन , अधिकारियों में हडकंप ! महोबा : हमीरपुर महोबा तिंदवारी लोकसभा सीट सैंतालीस में चौथे चरण के मतदान के दौरान बड़ी लापरवाही सामने आई है । मतदान स्थल से पीठासीन अधिकारी की लापरवाही के चलते कल शाम वोटिंग प्रकिया सम्पन्न होने के बाद ईवीएम मशीन अचानक गायब हो गयी । स्ट्रांग रूम में ईवीएम मशीन मिलान के दौरान मशीन गायब होने से अधिकारियों में हड़कंप मच गया । आनन-फानन में जिला निर्वाचन अधिकारी ,पुलिस अधीक्षक सहित तमाम आलाधिकारियों के देर रात तक मौके का मुआयना करने के बाद भी कोई सफलता हाथ नही लगी । फिलहाल पुलिस और प्रशासनिक आलाधिकारी ईवीएम मशीन की तलाश में जुटे हुए हैं । तो वहीं लापरवाह पीठासीन अधिकारी सहित मतदेय में लगे अन्य कर्मियों को हिरासत में लेकर पूछताछ जारी है । तभी अचानक मशीन गायब नजर आयी तो जिला पीठासीन अधिकारी सहित सभी आलाधिकारियों में हड़कंप मच गया । मामले को गंभीरता से लेते हुये जिला निर्वाचन अधिकारी सहदेव, पुलिस अधीक्षक स्वामीनाथ सहित तमाम प्रशासनिक अधिकारियों ने गांव में पहुंच मशीन को तलाश करने का प्रयास किया मगर सफलता हाथ नही मिल सकी है । ऑक्सीजन सिलेंडर उतारते समय सिलेंडर फटा, युवक के उड़े चिथड़े ! पुलिस और प्रशासनिक आलाधिकारियों द्वारा गांव में डेरा डाल ग्रामीणों की मदद के सहारे ईवीएम मशीन की तलाश की जा रही है ।
एकोनपवाशः सर्गः यथाक्रमं तैः स करिपृष्टः कार्यार्थमर्थस्य च मूलमादौ । निवेदयामास हरीश्वरस्य दुतः सकाशादहमागतोऽस्मि ॥ ६१ ॥ इति प्रष्टचत्वारिंशः सर्गः ॥ जब उन मन्त्रियों ने हनुमान जी से पूछा कि, तुम यहाँ क्यों और किस लिए आए हो, ? तथ उत्तर में हनुमान जी ने कहा कि, मैं कपिराज सुप्रोत्र के पास से आया हूँ और मैं उनका दूत हूँ ।। ६५ ।। सुन्दरकाण्ड का अड़तालीसवॉ सर्ग पूरा हुआ। एकोनपञ्चाशः सर्गः ततः स कर्मणा तस्य विस्मितो भीमविक्रमः । हनुमान्रोपताम्राची रक्षोधिपमवैचत ॥ १ ॥ भयकर विक्रम सम्पन्न हनुमान जी, नेघनाद के उस बन्धन रूप कर्म से विस्मित हो, क्रोध से लाल नेत्र कर. रावण को देखने लगे ॥ १ ॥ भ्राजमानं महाहे ण काञ्चनेन विराजता । मुक्ताजालवृतेनाथ मुकुटेन महाद्य तिम् ।। २ ।। उस समय महातेजस्वी रावण वड़ा मूल्यवान् और मोतियों से जड़ा हुआ चमचमाता मुकुट धारण किए हुए था ॥ २ ॥ वज्रसंयोगसंयुक्तैर्महार्हम गिविग्रहैः । हैमैराभर गौश्चित्रैर्मनसेव प्रकल्पितैः ॥ ३ ॥ उस समय रावण शरीर को जिन अद्भुत भूषणों से भूषित किए हुए था; वे सब सुवर्ण के थे और उनमें हीरे तथा बड़ी मूल्यवान् मणियाँ जड़ी हुई थीं। वे ऐसे सुन्दर थे, मानों मन लगा कर बनाए गये थे ॥ ३ ॥ महार्हतौम संवीतं रक्तचन्दनरूपितम् । स्वनुलिप्त विचित्राभिर्विविधाभिश्च १भक्तिमिः ॥ ४ ॥ रावण मूल्यवान् रेशमी वस्त्र पहिने हुए था तथा उसके शरीर में लाल चन्दन लगा हुआ था। वह विविध प्रकार के सुगन्धि युक्त कस्तूरी केसरादि शरीर में लगाए हुए था ॥ ४ ॥ विपुलैदर्शनीयैश्च रक्ताचैर्भीमदर्शनैः । दीप्ततीचणमहादंष्ट्रैः प्रलम्बदशनच्छदैः ।। ५ ।। उस समय वह अत्यन्त दर्शनीय हो रहा था। उसके भय उपजाने वाले लाल लाल नेत्र थे । उसके पैने और बड़े बड़े दाँत साफ होने के कारण चमचमा रहे थे। उसके ओंठ लम्बे थे ।।५।। शिरोभिर्दशभिर्वीरं आजमान' महौजसम् । नानाव्यालसमा कीर्णैः शिखरैरिव मन्दरम् ॥ ६ ॥ १ भक्तिभिः- सेवनीयकस्तूर्यादिमिः । ( शि० )
एकोनपवाशः सर्गः यथाक्रमं तैः स करिपृष्टः कार्यार्थमर्थस्य च मूलमादौ । निवेदयामास हरीश्वरस्य दुतः सकाशादहमागतोऽस्मि ॥ इकसठ ॥ इति प्रष्टचत्वारिंशः सर्गः ॥ जब उन मन्त्रियों ने हनुमान जी से पूछा कि, तुम यहाँ क्यों और किस लिए आए हो, ? तथ उत्तर में हनुमान जी ने कहा कि, मैं कपिराज सुप्रोत्र के पास से आया हूँ और मैं उनका दूत हूँ ।। पैंसठ ।। सुन्दरकाण्ड का अड़तालीसवॉ सर्ग पूरा हुआ। एकोनपञ्चाशः सर्गः ततः स कर्मणा तस्य विस्मितो भीमविक्रमः । हनुमान्रोपताम्राची रक्षोधिपमवैचत ॥ एक ॥ भयकर विक्रम सम्पन्न हनुमान जी, नेघनाद के उस बन्धन रूप कर्म से विस्मित हो, क्रोध से लाल नेत्र कर. रावण को देखने लगे ॥ एक ॥ भ्राजमानं महाहे ण काञ्चनेन विराजता । मुक्ताजालवृतेनाथ मुकुटेन महाद्य तिम् ।। दो ।। उस समय महातेजस्वी रावण वड़ा मूल्यवान् और मोतियों से जड़ा हुआ चमचमाता मुकुट धारण किए हुए था ॥ दो ॥ वज्रसंयोगसंयुक्तैर्महार्हम गिविग्रहैः । हैमैराभर गौश्चित्रैर्मनसेव प्रकल्पितैः ॥ तीन ॥ उस समय रावण शरीर को जिन अद्भुत भूषणों से भूषित किए हुए था; वे सब सुवर्ण के थे और उनमें हीरे तथा बड़ी मूल्यवान् मणियाँ जड़ी हुई थीं। वे ऐसे सुन्दर थे, मानों मन लगा कर बनाए गये थे ॥ तीन ॥ महार्हतौम संवीतं रक्तचन्दनरूपितम् । स्वनुलिप्त विचित्राभिर्विविधाभिश्च एकभक्तिमिः ॥ चार ॥ रावण मूल्यवान् रेशमी वस्त्र पहिने हुए था तथा उसके शरीर में लाल चन्दन लगा हुआ था। वह विविध प्रकार के सुगन्धि युक्त कस्तूरी केसरादि शरीर में लगाए हुए था ॥ चार ॥ विपुलैदर्शनीयैश्च रक्ताचैर्भीमदर्शनैः । दीप्ततीचणमहादंष्ट्रैः प्रलम्बदशनच्छदैः ।। पाँच ।। उस समय वह अत्यन्त दर्शनीय हो रहा था। उसके भय उपजाने वाले लाल लाल नेत्र थे । उसके पैने और बड़े बड़े दाँत साफ होने के कारण चमचमा रहे थे। उसके ओंठ लम्बे थे ।।पाँच।। शिरोभिर्दशभिर्वीरं आजमान' महौजसम् । नानाव्यालसमा कीर्णैः शिखरैरिव मन्दरम् ॥ छः ॥ एक भक्तिभिः- सेवनीयकस्तूर्यादिमिः ।
डीयू विवाद के बाद एबीवीपी के खिलाफ कैंपेन चलाने वाली गुरमेहर कौर एक बार फिर चर्चाओं में हैं, अपने शहीद पिता की मौत की वजह जंग को बताने वाली गुरमेहर ने नया बयान दिया है। जिसमें उनका दर्द साफ छलका है। एपीजे कॉलेज में एपीजे सत्या यूनाइटेड कॉन्फ्रेंस के समापन समारोह में पहुंचीं गुरमेहर कौर को एग्जीक्यूटिव कमेटी में शामिल होने के लिए सम्मानित किया गया। जहां उन्होंने अपने पूराने विवाद का ज़िक्र किया। सम्मानित होने से पहले गुरमेहर ने देशभर से आए युवाओं से कहा, मेरे साथ जो भी कुछ हुआ, जो भी नफरत मुझे मिली। इस सबके बीच मैं यही कहूंगी कि कोई नहीं समझा कि मैंने क्या कहने की कोशिश की थी। इस कॉन्फ्रेंस में देशभर से आए युवाओं से मिलकर एक उम्मीद जगी है कि मेरे अलावा और भी लोग हैं जो उस आइडियोलॉजी में विश्वास करते हैं। गुरमेहर दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज में पढ़ती हैं। 22 फरवरी, 2017 को उन्होंने फेसबुक पर अपनी प्रोफ़ाइल पिक्चर बदली थी।
डीयू विवाद के बाद एबीवीपी के खिलाफ कैंपेन चलाने वाली गुरमेहर कौर एक बार फिर चर्चाओं में हैं, अपने शहीद पिता की मौत की वजह जंग को बताने वाली गुरमेहर ने नया बयान दिया है। जिसमें उनका दर्द साफ छलका है। एपीजे कॉलेज में एपीजे सत्या यूनाइटेड कॉन्फ्रेंस के समापन समारोह में पहुंचीं गुरमेहर कौर को एग्जीक्यूटिव कमेटी में शामिल होने के लिए सम्मानित किया गया। जहां उन्होंने अपने पूराने विवाद का ज़िक्र किया। सम्मानित होने से पहले गुरमेहर ने देशभर से आए युवाओं से कहा, मेरे साथ जो भी कुछ हुआ, जो भी नफरत मुझे मिली। इस सबके बीच मैं यही कहूंगी कि कोई नहीं समझा कि मैंने क्या कहने की कोशिश की थी। इस कॉन्फ्रेंस में देशभर से आए युवाओं से मिलकर एक उम्मीद जगी है कि मेरे अलावा और भी लोग हैं जो उस आइडियोलॉजी में विश्वास करते हैं। गुरमेहर दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज में पढ़ती हैं। बाईस फरवरी, दो हज़ार सत्रह को उन्होंने फेसबुक पर अपनी प्रोफ़ाइल पिक्चर बदली थी।
एंटी करप्शन डिपार्टमेंट ने सोमवार को शिवपुर थाना क्षेत्र के कादीपुर में 20 हजार रुपये घूस लेते यूपी पुलिस के दरोगा ललित कुमार सिंह को रंगे हाथों पकड़ा। दरोगा जौनपुर जनपद के केराकत थाने में तैनात है। दरोगा एक महिला की बेटी को गिरफ्तार करने की धमकी देकर 50 हजार रुपये घूस मांग रहा था। कादीपुर निवासिनी महिला की दो बेटियों के खिलाफ केराकत थाने में पैतृक गांव भौरा में परिवार के ही कुछ लोगों ने मुकदमा दर्ज कराया है। मुकदमे की जांच कर रहा दरोगा चार दिन पूर्व बनारस आया और बेटी को गिरफ्तार करने की धमकी देने लगा। महिला काफी गिड़गिड़ाई और बेटी की शादी तय होने का हवाला दिया। इसके बाद भी दरोगा अड़ा रहा। बाद में 50 हजार रुपये की मांग की। तय हुआ कि वह इंतजाम कर पहले 20 हजार रुपये देगी। इस बीच महिला ने भ्रष्टाचार निवारण संगठन को सूचित कर दिया। लड़की की 26 अप्रैल को शादी थी और दरोगा सोमवार को 20 हजार रुपये लेने पहुंच गया। पहले से तय सारी प्लैनिंग के हिसाब से जैसे ही उसने रुपये पकड़े तो पहले से तैनात संगठन के लोगों ने उसे रंगे हाथों धर दबोचा। जब उसके हाथ को धुलाया गया तो केमिकल लगे नोट के कारण उसके हाथ लाल हो गए। दरोगा को जेल भेज दिया गया है।
एंटी करप्शन डिपार्टमेंट ने सोमवार को शिवपुर थाना क्षेत्र के कादीपुर में बीस हजार रुपये घूस लेते यूपी पुलिस के दरोगा ललित कुमार सिंह को रंगे हाथों पकड़ा। दरोगा जौनपुर जनपद के केराकत थाने में तैनात है। दरोगा एक महिला की बेटी को गिरफ्तार करने की धमकी देकर पचास हजार रुपये घूस मांग रहा था। कादीपुर निवासिनी महिला की दो बेटियों के खिलाफ केराकत थाने में पैतृक गांव भौरा में परिवार के ही कुछ लोगों ने मुकदमा दर्ज कराया है। मुकदमे की जांच कर रहा दरोगा चार दिन पूर्व बनारस आया और बेटी को गिरफ्तार करने की धमकी देने लगा। महिला काफी गिड़गिड़ाई और बेटी की शादी तय होने का हवाला दिया। इसके बाद भी दरोगा अड़ा रहा। बाद में पचास हजार रुपये की मांग की। तय हुआ कि वह इंतजाम कर पहले बीस हजार रुपये देगी। इस बीच महिला ने भ्रष्टाचार निवारण संगठन को सूचित कर दिया। लड़की की छब्बीस अप्रैल को शादी थी और दरोगा सोमवार को बीस हजार रुपये लेने पहुंच गया। पहले से तय सारी प्लैनिंग के हिसाब से जैसे ही उसने रुपये पकड़े तो पहले से तैनात संगठन के लोगों ने उसे रंगे हाथों धर दबोचा। जब उसके हाथ को धुलाया गया तो केमिकल लगे नोट के कारण उसके हाथ लाल हो गए। दरोगा को जेल भेज दिया गया है।
सुशांत सिंह राजपूत केस की जांच में ड्रग्स एंगल सामने आने से अब इस केस से नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की टीम भी जुड़ गई है । रिया चक्रवर्ती के फ़ोन से डिलीट की गई चैट में ड्रग्स एंगल सामने आने के बाद एनसीबी ने रिया और उनके भाई शोविक चक्रवर्ती के खिलाफ़ क्रिमिनल केस दर्ज कर लिया था । इसी सिलसिले में रिया चक्रवर्ती और ड्रग्स एंगल से जुड़े लोगों से पूछताछ जारी है । वहीं एनसीबी की टीम इस केस में ड्रग्स माफियाओं से कनेक्शन को भी खंगालने में जुटी हुई है । रिया और रिया के भाई शोविक को ड्रग्स को कौन देता था ? इन सबकी जांच की जा रही है । खबरों की मानें तो एनसीबी उन ड्रग्स माफियाओं पर भी शिकंजा कसने जा रही है, जो खासतौर पर बॉलीवुड सेलिब्रिटीज के बीच ड्रग्स सप्लाई करते हैं । इस मामले में एनसीबी के रडार पर फारुख बटाटा, जो मुंबई में ड्रग्स के सिंडिकेट का बड़ा नाम है, और सुवेद लोहिया नाम का शख्स है । फारुख और सुवेद लोहिया से पूछताछ के दौरान बॉलीवुड और ड्रग्स कनेक्शन का बड़ा पर्दाफाश होने की उम्मीद जताई जा रही है । सुशांत केस में सुवेद लोहिया तब सुर्खियों में आए, जब रिया इसकी कार से ईडी दफ्तर पर पहुंची थी । सुवेद लोहिया ने कबूल किया है वह सुशांत और रिया को 10 साल से जानता है । बहरहाल अब केस में कुछ और नया खुलासा होने की उम्मीद है । गौरतलब है कि, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने रिया चक्रवर्ती और सुशांत के घर के मैनेजर सैमुअल मिरांडा, टैलेंट मैनेजर जया साहा और एक शख्स गौरव आर्या के खिलाफ केस दर्ज किया है । इन चारों लोगों पर 67 NDPS एक्ट के तरह पूछताछ की जाएगी, जिसके बाद उनसे व्हाट्सएप चैट को लेकर सवाल जवाब किए जाएंगे ।
सुशांत सिंह राजपूत केस की जांच में ड्रग्स एंगल सामने आने से अब इस केस से नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की टीम भी जुड़ गई है । रिया चक्रवर्ती के फ़ोन से डिलीट की गई चैट में ड्रग्स एंगल सामने आने के बाद एनसीबी ने रिया और उनके भाई शोविक चक्रवर्ती के खिलाफ़ क्रिमिनल केस दर्ज कर लिया था । इसी सिलसिले में रिया चक्रवर्ती और ड्रग्स एंगल से जुड़े लोगों से पूछताछ जारी है । वहीं एनसीबी की टीम इस केस में ड्रग्स माफियाओं से कनेक्शन को भी खंगालने में जुटी हुई है । रिया और रिया के भाई शोविक को ड्रग्स को कौन देता था ? इन सबकी जांच की जा रही है । खबरों की मानें तो एनसीबी उन ड्रग्स माफियाओं पर भी शिकंजा कसने जा रही है, जो खासतौर पर बॉलीवुड सेलिब्रिटीज के बीच ड्रग्स सप्लाई करते हैं । इस मामले में एनसीबी के रडार पर फारुख बटाटा, जो मुंबई में ड्रग्स के सिंडिकेट का बड़ा नाम है, और सुवेद लोहिया नाम का शख्स है । फारुख और सुवेद लोहिया से पूछताछ के दौरान बॉलीवुड और ड्रग्स कनेक्शन का बड़ा पर्दाफाश होने की उम्मीद जताई जा रही है । सुशांत केस में सुवेद लोहिया तब सुर्खियों में आए, जब रिया इसकी कार से ईडी दफ्तर पर पहुंची थी । सुवेद लोहिया ने कबूल किया है वह सुशांत और रिया को दस साल से जानता है । बहरहाल अब केस में कुछ और नया खुलासा होने की उम्मीद है । गौरतलब है कि, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने रिया चक्रवर्ती और सुशांत के घर के मैनेजर सैमुअल मिरांडा, टैलेंट मैनेजर जया साहा और एक शख्स गौरव आर्या के खिलाफ केस दर्ज किया है । इन चारों लोगों पर सरसठ NDPS एक्ट के तरह पूछताछ की जाएगी, जिसके बाद उनसे व्हाट्सएप चैट को लेकर सवाल जवाब किए जाएंगे ।
दर्शको की डिमांड को पूरा करने वाले और अपनी हर फिल्म से बॉक्स ऑफिस को हिला देने वाले सुपर स्टार "अक्षय कुमार" जो एक तरफ बॉलीवुड के फिट एन फाइन एक्टर कहे जाते है। तो वही एक तरफ उन की गिनती बॉलीवुड के चुनिंदा सितारों में की जाती है। जो साल में एक या दो नही बल्कि चार से पांच फिल्मो के साथ बड़े पर्दे पर दस्तक देते है। अपनी सभी फिल्मों से दर्शको का प्यार बटोरते है इस लिए तो दर्शक के बीच इनकी अपकमिंग फिल्मो की एक्सिटेमेंट ज़बरदस्त देखने को मिलती है। अब खिलाड़ी कुमार यानी अक्षय कुमार एक बड़े बजट की फ़िल्म "बच्चन पांडे" के साथ नज़र आने वाले है। ये फ़िल्म हमे बहोत जल्द देखने को मिलने वाली है। तो आपको बताते है इस फ़िल्म की स्टार कास्ट के बारे में और कब आएगी ये फ़िल्म, पिछले साल अक्षय अपनी ढेर सारी फिल्मो के साथ नज़र आऐ थे। जहाँ इनकी फ़िल्म "मिशन मंगल" ने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त कमाई की थी। तो वही "हॉउसफुल 4" ने दर्शकों को गुदगुदाने का काम किया था। जिस के बाद अब अक्षय जल्द ही अपनी एक और बड़े बजट की फ़िल्म दर्शको का प्यार बटोरने आ रहे है वो भी फ़िल्म "बच्चन पांडे" के साथ जी हां हमे फ़िल्म जल्द ही देखने को मिलने वाली है। फ़िल्म की कहानी पर काम शुरू हो चुका है। और ये फ़िल्म जल्द ही फ्लोर पर आने वाली है जो कि एक एक्शन,कॉमेडी,ड्रामा फ़िल्म होगी जिसे फरहाद समजी के डायरेक्शन में बनाया जा रहा है। इस फ़िल्म में जबरदस्त कालमेक्स देखने को मन वाला है। साथ ही इस फ़िल्म में सस्पेंस सीन भी शामिल है। यही नही इस फ़िल्म में हमे रोमांटिक और पार्टी गाने भी देखने को मिलने वाले है।
दर्शको की डिमांड को पूरा करने वाले और अपनी हर फिल्म से बॉक्स ऑफिस को हिला देने वाले सुपर स्टार "अक्षय कुमार" जो एक तरफ बॉलीवुड के फिट एन फाइन एक्टर कहे जाते है। तो वही एक तरफ उन की गिनती बॉलीवुड के चुनिंदा सितारों में की जाती है। जो साल में एक या दो नही बल्कि चार से पांच फिल्मो के साथ बड़े पर्दे पर दस्तक देते है। अपनी सभी फिल्मों से दर्शको का प्यार बटोरते है इस लिए तो दर्शक के बीच इनकी अपकमिंग फिल्मो की एक्सिटेमेंट ज़बरदस्त देखने को मिलती है। अब खिलाड़ी कुमार यानी अक्षय कुमार एक बड़े बजट की फ़िल्म "बच्चन पांडे" के साथ नज़र आने वाले है। ये फ़िल्म हमे बहोत जल्द देखने को मिलने वाली है। तो आपको बताते है इस फ़िल्म की स्टार कास्ट के बारे में और कब आएगी ये फ़िल्म, पिछले साल अक्षय अपनी ढेर सारी फिल्मो के साथ नज़र आऐ थे। जहाँ इनकी फ़िल्म "मिशन मंगल" ने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त कमाई की थी। तो वही "हॉउसफुल चार" ने दर्शकों को गुदगुदाने का काम किया था। जिस के बाद अब अक्षय जल्द ही अपनी एक और बड़े बजट की फ़िल्म दर्शको का प्यार बटोरने आ रहे है वो भी फ़िल्म "बच्चन पांडे" के साथ जी हां हमे फ़िल्म जल्द ही देखने को मिलने वाली है। फ़िल्म की कहानी पर काम शुरू हो चुका है। और ये फ़िल्म जल्द ही फ्लोर पर आने वाली है जो कि एक एक्शन,कॉमेडी,ड्रामा फ़िल्म होगी जिसे फरहाद समजी के डायरेक्शन में बनाया जा रहा है। इस फ़िल्म में जबरदस्त कालमेक्स देखने को मन वाला है। साथ ही इस फ़िल्म में सस्पेंस सीन भी शामिल है। यही नही इस फ़िल्म में हमे रोमांटिक और पार्टी गाने भी देखने को मिलने वाले है।
बेगूसराय में बढ़ते अपराधिक की घटनाओं के बीच चोरों की लगातार उत्पात जारी है। चोरों ने एक बार फिर एक सुनसान मकान को अपना शिकार बनाया। घटना सहायक थाना सिंघौल क्षेत्र के पचम्बा गांव स्थित वास्तु बिहार की है। गृह स्वामिनी सेवानिवृत्त शिक्षिका चंद्र प्रकाश नारायण सिंह की पत्नी मीरा कुमारी ने बताया कि वह लगभग एक सप्ताह से अपने पैतृक निवास मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के बासुदेव पुर गांव में रह रही थी। उन्होंने बताया कि मंगलवार की रात उनके मकान से अज्ञात चोरों ने घर का ताला तोड़कर लगभग ढाई लाख रुपए मूल्य के ज्वेलरी, कपड़े, बर्तन, इनवर्टर एवं बैट्री को चोरों ने लेकर मौके से फरार हो गया। उन्होंने हैरानी जताया है कि यह घटना सेक्युरिटी गार्ड के रहते सोसायटी में चोरी की लगातार घटना ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। आपको बता दें कि इसके पूर्व लगभग चार माह पहले सेवानिवृत दरोगा रामविनोद सिंह, रिफायनरी कर्मी बैजनाथ साव, शिक्षक अरुण कुमार के मकान को निशाना बनाया था। जहां के चोरी की घटना ने पुलिस के होश उड़ा दी थी। जबकि मानों एक दिन पहले मंदिर के दानपत्र से चोरी की घटना को अंजाम देकर लोगों को आगामी चोरी का निमंत्रण दे दिया हो और अगले दिन सेवानिवृत्त शिक्षिका के घर लाखों की चोरी कर चोरों ने पुलिस को खुली चुनौती दी है। वहीं दूसरी तरफ घटना की सूचना मिलते ही सिंघौल थाने की पुलिस घटना स्थल पहुंच मामले की जांच में जुट गई है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
बेगूसराय में बढ़ते अपराधिक की घटनाओं के बीच चोरों की लगातार उत्पात जारी है। चोरों ने एक बार फिर एक सुनसान मकान को अपना शिकार बनाया। घटना सहायक थाना सिंघौल क्षेत्र के पचम्बा गांव स्थित वास्तु बिहार की है। गृह स्वामिनी सेवानिवृत्त शिक्षिका चंद्र प्रकाश नारायण सिंह की पत्नी मीरा कुमारी ने बताया कि वह लगभग एक सप्ताह से अपने पैतृक निवास मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के बासुदेव पुर गांव में रह रही थी। उन्होंने बताया कि मंगलवार की रात उनके मकान से अज्ञात चोरों ने घर का ताला तोड़कर लगभग ढाई लाख रुपए मूल्य के ज्वेलरी, कपड़े, बर्तन, इनवर्टर एवं बैट्री को चोरों ने लेकर मौके से फरार हो गया। उन्होंने हैरानी जताया है कि यह घटना सेक्युरिटी गार्ड के रहते सोसायटी में चोरी की लगातार घटना ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। आपको बता दें कि इसके पूर्व लगभग चार माह पहले सेवानिवृत दरोगा रामविनोद सिंह, रिफायनरी कर्मी बैजनाथ साव, शिक्षक अरुण कुमार के मकान को निशाना बनाया था। जहां के चोरी की घटना ने पुलिस के होश उड़ा दी थी। जबकि मानों एक दिन पहले मंदिर के दानपत्र से चोरी की घटना को अंजाम देकर लोगों को आगामी चोरी का निमंत्रण दे दिया हो और अगले दिन सेवानिवृत्त शिक्षिका के घर लाखों की चोरी कर चोरों ने पुलिस को खुली चुनौती दी है। वहीं दूसरी तरफ घटना की सूचना मिलते ही सिंघौल थाने की पुलिस घटना स्थल पहुंच मामले की जांच में जुट गई है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
कोविड-19 महामारी के मद्देनजर सामाजिक दूरी और सख्त एहतियाती कदमों के बीच 1 सितंबर से इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा (JEE-Main) की शुरुआत हो चुकी है. कोरोना वायरस से संक्रमित होने की चिंता और आशंका के बीच छात्र दूसरे दिन भी जेईई-मुख्य परीक्षा देने परीक्षा केंद्रों तक पहुंचे. इस दौरान छात्रों को एग्जाम सेंटर तक पहुंचने में किसी प्रकार की कोई दिक्कत न हो इसके लिए इंडियन रेलवे ने पहल की है. रेलवे ने कई राज्यों में छात्रों के लिए स्पेशल ट्रेनों को चलाने का ऐलान किया है. ये ट्रेनें 15 सितंबर तक छात्रों को परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में मददगार साबित होंगी. रेल मंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट करके उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान समेत कई राज्यों में परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों के लिए स्पेशल ट्रेनों को चलाने की जानकारी दी है. पीयूष गोयल ने बिहार के लिए 56 स्पेशल ट्रेनों को चलाने का ऐलान किया है. उन्होंने बिहार में छात्रों के लिए पहले 20 जोड़ी स्पेशल ट्रेनों को दौड़ाने का फैसला किया था और इसके बाद स्पेशल ट्रेनों की संख्या में और 16 ट्रेनें जोड़ दी गईं. रेल मंत्री ने ट्वीट कर लिखा, 'बिहार में JEE Mains, NEET व NDA में शामिल होने वाले परीक्षार्थियों को परीक्षा सेंटर तक आने-जाने की सुविधा हेतु भारतीय रेलवे ने 2 से 15 सितंबर तक 20 जोड़ी MEMU/DEMU स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है. ' इस ट्वीट के बाद रेल मंत्री पीयूष गोयल का एक और ट्वीट आया जिसमें उन्होंने बिहार के लिए और 8 जोड़ी ट्रेनों को चलाने की मांग की. गोयल ने ट्वीट कर बताया कि रेलवे ने बिहार में 4 से 15 सितंबर तक और 8 जोड़ी इंटरसिटी स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है. बिहार के अलावा उत्तर प्रदेश में भी छात्रों के लिए 5 जोड़ी स्पेशल ट्रेन चलानी की घोषणा की गई. पीयूष गोयल ने ट्वीट कर बताया कि छात्रों के लिए चलाए जा रहे स्पेशल ट्रेनों में यात्रियों को कोरोना वायरस के सभी प्रोटोकॉल का पालन करना अनिवार्य होगा. इसमें मास्क पहने रहना, सोशल डिस्टैंसिंग और सैनिटाइजेशन के नियमों का पालन करना होगा. मंत्री की घोषणा के मुताबिक यूपी में छात्रों के लिए स्पेशल ट्रेन 3 सितंबर से लेकर 30 सितंबर तक चलेंगी. पीयूष गोयल ने बिहार और उत्तर प्रदेश के अलावा राजस्थान में भी छात्र हित के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए, JEE Mains, NEET, NDA व अन्य परीक्षाओं में भाग लेने वाले छात्रों की सुविधा के लिए 4 से 15 सितंबर के बीच 4 जोड़ी परीक्षा स्पेशल ट्रेनों को चलाने का निर्णय लिया. उन्होंने ट्रेनों की पूरी जानकारी ट्वीट के माध्यम से साझा की. इसके अलावा रेलवे ने महाराष्ट्र में भी छात्रों को ट्रेन में यात्रा करने की अनुमति दी है. बता दें कि महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस ने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर छात्रों के लिए ट्रेनों की सुविधा मुहैया कराने की अपील की थी. जिसके बाद सरकार ने महाराष्ट्र में भी ट्रेनों की सर्विस बढ़ाने की बात कही और छात्रों को ट्रेनों में सफर की अनुमति दी. गौरतलब है कि कोविड-19 महामारी में जेईई-मेन की परक्षा बडे़ पैमाने पर हो रही परीक्षा है. यह परीक्षा 1 सितंबर से शुरू हो चुकी है और 6 सितंबर तक चलेगी. परीक्षा के लिए 9 लाख उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन करवाया है.
कोविड-उन्नीस महामारी के मद्देनजर सामाजिक दूरी और सख्त एहतियाती कदमों के बीच एक सितंबर से इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा की शुरुआत हो चुकी है. कोरोना वायरस से संक्रमित होने की चिंता और आशंका के बीच छात्र दूसरे दिन भी जेईई-मुख्य परीक्षा देने परीक्षा केंद्रों तक पहुंचे. इस दौरान छात्रों को एग्जाम सेंटर तक पहुंचने में किसी प्रकार की कोई दिक्कत न हो इसके लिए इंडियन रेलवे ने पहल की है. रेलवे ने कई राज्यों में छात्रों के लिए स्पेशल ट्रेनों को चलाने का ऐलान किया है. ये ट्रेनें पंद्रह सितंबर तक छात्रों को परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में मददगार साबित होंगी. रेल मंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट करके उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान समेत कई राज्यों में परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों के लिए स्पेशल ट्रेनों को चलाने की जानकारी दी है. पीयूष गोयल ने बिहार के लिए छप्पन स्पेशल ट्रेनों को चलाने का ऐलान किया है. उन्होंने बिहार में छात्रों के लिए पहले बीस जोड़ी स्पेशल ट्रेनों को दौड़ाने का फैसला किया था और इसके बाद स्पेशल ट्रेनों की संख्या में और सोलह ट्रेनें जोड़ दी गईं. रेल मंत्री ने ट्वीट कर लिखा, 'बिहार में JEE Mains, NEET व NDA में शामिल होने वाले परीक्षार्थियों को परीक्षा सेंटर तक आने-जाने की सुविधा हेतु भारतीय रेलवे ने दो से पंद्रह सितंबर तक बीस जोड़ी MEMU/DEMU स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है. ' इस ट्वीट के बाद रेल मंत्री पीयूष गोयल का एक और ट्वीट आया जिसमें उन्होंने बिहार के लिए और आठ जोड़ी ट्रेनों को चलाने की मांग की. गोयल ने ट्वीट कर बताया कि रेलवे ने बिहार में चार से पंद्रह सितंबर तक और आठ जोड़ी इंटरसिटी स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है. बिहार के अलावा उत्तर प्रदेश में भी छात्रों के लिए पाँच जोड़ी स्पेशल ट्रेन चलानी की घोषणा की गई. पीयूष गोयल ने ट्वीट कर बताया कि छात्रों के लिए चलाए जा रहे स्पेशल ट्रेनों में यात्रियों को कोरोना वायरस के सभी प्रोटोकॉल का पालन करना अनिवार्य होगा. इसमें मास्क पहने रहना, सोशल डिस्टैंसिंग और सैनिटाइजेशन के नियमों का पालन करना होगा. मंत्री की घोषणा के मुताबिक यूपी में छात्रों के लिए स्पेशल ट्रेन तीन सितंबर से लेकर तीस सितंबर तक चलेंगी. पीयूष गोयल ने बिहार और उत्तर प्रदेश के अलावा राजस्थान में भी छात्र हित के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए, JEE Mains, NEET, NDA व अन्य परीक्षाओं में भाग लेने वाले छात्रों की सुविधा के लिए चार से पंद्रह सितंबर के बीच चार जोड़ी परीक्षा स्पेशल ट्रेनों को चलाने का निर्णय लिया. उन्होंने ट्रेनों की पूरी जानकारी ट्वीट के माध्यम से साझा की. इसके अलावा रेलवे ने महाराष्ट्र में भी छात्रों को ट्रेन में यात्रा करने की अनुमति दी है. बता दें कि महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस ने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर छात्रों के लिए ट्रेनों की सुविधा मुहैया कराने की अपील की थी. जिसके बाद सरकार ने महाराष्ट्र में भी ट्रेनों की सर्विस बढ़ाने की बात कही और छात्रों को ट्रेनों में सफर की अनुमति दी. गौरतलब है कि कोविड-उन्नीस महामारी में जेईई-मेन की परक्षा बडे़ पैमाने पर हो रही परीक्षा है. यह परीक्षा एक सितंबर से शुरू हो चुकी है और छः सितंबर तक चलेगी. परीक्षा के लिए नौ लाख उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन करवाया है.
एक बड़ा हिस्सा वित्तीय संस्था से प्राप्त हुआ है । यदि भारतीय विनिर्माताओं को संवर्धित आयातों से पर्याप्त संरक्षण प्रदान नहीं किया जाता है तो रोजगार और सार्वजनिक हित जोखिम में पड़ जाएंगे । 287. इसके अलावा, आवेदक घरेलू उद्योग के अतिरिक्त अन्य सभी भारतीय उत्पादक जाँचाधीन उत्पाद के उत्पादन हेतु अंतिम मध्यवर्ती 4एडीपीए के विदेशी उत्पादकों पर आश्रित हैं । आवेदक उद्योग बंद हो जाने की स्थिति में अन्य भारतीय उत्पादकों को प्रतिस्पर्धी कीमत पर 4एडीपीए समय पर मिलने की कोई गारंटी नहीं है । अतः आवेदक घरेलू उत्पादकों का बचा रहना उपभोक्ताओं के हित में है। इसके अलावा, इस समय आवेदक के पास कार्यरत से अधिक व्यक्तियों का रोजगार भी जोखिम में पड़ता है । 288. रक्षोपाय शुल्क, जिससे घरेलू उद्योग संवर्धित आयातों द्वारा प्रस्तुत प्रतिस्पर्धा का सामना करने में समर्थ होगा, जांचाधीन उत्पाद के क्रेताओं के अंततः सार्वजनिक हित में और उससे विनिर्मित उत्पादों के क्रेताओं के भी हित में होगा । अतः यह माना जाता है कि जांचाधीन उत्पाद पर रक्षोपाय शुल्क लगाना सार्वजनिक हित में है । विकासशील देश 289. विकासशील देशों से हुए आयातों के प्रतिशत की भी जाँच की गई है । चीन को छोड़कर जिसका हिस्सा वित्त वर्ष 2009-10 और 2010-11 में भारत में हुए कुल आयातों का क्रमशः 18.14% तथा 15.09% रहा है, अन्य विकासशील देशों का अलग-अलग हिस्सा भारत में हुए कुल आयातों के 3% से कम है । अतः चीन को छोड़कर विकासशील देशों के मूल के विचाराधीन उत्पाद के आयात पर सीमाशुल्क टैरिफ अधिनियम, 1975 की धारा 8 (ख) के परंतुक के अनुसार रक्षोपाय शुल्क नहीं लगाया जा सकता । 290. उपर्युक्त जाँच परिणाम के मद्देनजर अंतिम निर्धारण यह है कि भारत में एन 1,3डाइमिथाइलब्यूटाइल-एन फिनाइलिनडाइएमीन (पीएक्स - 13 अथवा 6पीपीडी) के संवर्धित आयातों के कारण एन 1,3 - डाइमिथाइलब्यूटाइल-एन फिनाइलिनडाइएमीन (पीएक्स - 13 अथवा 6 पीपीडी) के घरेलू उत्पादकों को गंभीर क्षति हुई है और गंभीर क्षति होने का खतरा भी उत्पन्न हुआ है । रक्षोपाय शुल्क की वह राशि निकालने के लिए जो घरेलू उद्योग को हुई गंभीर क्षति तथा गंभीर क्षति के खतरे को रोकने के लिए पर्याप्त होगी तथा सकारात्मक समायोजन को सुकर बनाने के लिए लगाई गई पूंजी पर उचित आय पर भारित औसत बिक्री लागत तथा आयातों की औसत पहुँच लागत (मूल सीमाशुल्क, उपकर को हिसाब में लेते हुए ) पर विचार किया गया है । रक्षोपाय शुल्क की राशि निकालते समय जांचाधीन
एक बड़ा हिस्सा वित्तीय संस्था से प्राप्त हुआ है । यदि भारतीय विनिर्माताओं को संवर्धित आयातों से पर्याप्त संरक्षण प्रदान नहीं किया जाता है तो रोजगार और सार्वजनिक हित जोखिम में पड़ जाएंगे । दो सौ सत्तासी. इसके अलावा, आवेदक घरेलू उद्योग के अतिरिक्त अन्य सभी भारतीय उत्पादक जाँचाधीन उत्पाद के उत्पादन हेतु अंतिम मध्यवर्ती चारएडीपीए के विदेशी उत्पादकों पर आश्रित हैं । आवेदक उद्योग बंद हो जाने की स्थिति में अन्य भारतीय उत्पादकों को प्रतिस्पर्धी कीमत पर चारएडीपीए समय पर मिलने की कोई गारंटी नहीं है । अतः आवेदक घरेलू उत्पादकों का बचा रहना उपभोक्ताओं के हित में है। इसके अलावा, इस समय आवेदक के पास कार्यरत से अधिक व्यक्तियों का रोजगार भी जोखिम में पड़ता है । दो सौ अठासी. रक्षोपाय शुल्क, जिससे घरेलू उद्योग संवर्धित आयातों द्वारा प्रस्तुत प्रतिस्पर्धा का सामना करने में समर्थ होगा, जांचाधीन उत्पाद के क्रेताओं के अंततः सार्वजनिक हित में और उससे विनिर्मित उत्पादों के क्रेताओं के भी हित में होगा । अतः यह माना जाता है कि जांचाधीन उत्पाद पर रक्षोपाय शुल्क लगाना सार्वजनिक हित में है । विकासशील देश दो सौ नवासी. विकासशील देशों से हुए आयातों के प्रतिशत की भी जाँच की गई है । चीन को छोड़कर जिसका हिस्सा वित्त वर्ष दो हज़ार नौ-दस और दो हज़ार दस-ग्यारह में भारत में हुए कुल आयातों का क्रमशः अट्ठारह.चौदह% तथा पंद्रह.नौ% रहा है, अन्य विकासशील देशों का अलग-अलग हिस्सा भारत में हुए कुल आयातों के तीन% से कम है । अतः चीन को छोड़कर विकासशील देशों के मूल के विचाराधीन उत्पाद के आयात पर सीमाशुल्क टैरिफ अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर की धारा आठ के परंतुक के अनुसार रक्षोपाय शुल्क नहीं लगाया जा सकता । दो सौ नब्बे. उपर्युक्त जाँच परिणाम के मद्देनजर अंतिम निर्धारण यह है कि भारत में एन एक,तीनडाइमिथाइलब्यूटाइल-एन फिनाइलिनडाइएमीन के संवर्धित आयातों के कारण एन एक,तीन - डाइमिथाइलब्यूटाइल-एन फिनाइलिनडाइएमीन के घरेलू उत्पादकों को गंभीर क्षति हुई है और गंभीर क्षति होने का खतरा भी उत्पन्न हुआ है । रक्षोपाय शुल्क की वह राशि निकालने के लिए जो घरेलू उद्योग को हुई गंभीर क्षति तथा गंभीर क्षति के खतरे को रोकने के लिए पर्याप्त होगी तथा सकारात्मक समायोजन को सुकर बनाने के लिए लगाई गई पूंजी पर उचित आय पर भारित औसत बिक्री लागत तथा आयातों की औसत पहुँच लागत पर विचार किया गया है । रक्षोपाय शुल्क की राशि निकालते समय जांचाधीन
'धाकड़ एक्सक्लूसिव' में बात हुई अफगानिस्तान से लौटे नागरिकों की। अफगानिस्तान में लगातार हालात बिगड़ रहे है। हर कोई जल्द से जल्द अफगानिस्तान छोड़ देना चाहता है। अफगानिस्तान से स्वदेश वापसी के लिए भारत सरकार ने ऑपरेशन देवी शक्ति शुरू किया और आज 25 भारतीय नागरिकों के साथ कुल 78 यात्रियों को लेकर एयर इंडिया की एक फ्लाइट दिल्ली पहुंची। इस वापसी में सबसे खास है गुरूग्रंथ साहिब की तीन प्रतियों को भारत लाया जाना। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी सिर पर गुरु ग्रंथ साहिब की प्रति को उठाते हैं। एयरक्राफ्ट से एयरपोर्ट के बाहर की तरफ पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब को लेकर हरदीप सिंह पुरी निकल पड़े। हरदीप सिंह पुरी और उनके साथ सभी लोग सत् नाम वाहे गुरु का जयकारा लगाया। अफगानिस्तान के काबुल से गुरु ग्रंथ साहिब को लाने वाले ग्रंथी हैं सरदार धर्मेन्द्र सिंह। धर्मेन्द्र सिंह ने बताया कि अफगानिस्तान में हालात बेहद खराब हैं। उन्होंने स्वदेश वापसी पर भारत सरकार का शुक्रिया अदा किया। गुरु ग्रंथ साहिब को काबुल से भारत लाने की जरूरत क्यों पड़ी। इसका जवाब ये है कि तालिबान का कोई भरोसा नहीं है कि वो कब क्या करेगा। गुरु ग्रंथ साहिब को सुरक्षित रखने के लिए भारत वापस लाना पड़ा क्योंकि अफगानिस्तान से सभी सिख धीरे धीरे स्वदेश वापस आ रहे हैं और काबुल में गुरु ग्रंथ साहिब को सुरक्षित रख पाना मुश्किल हो जाता। भारत ने 16 अगस्त से ही अफगानिस्तान से लोगों का रेस्क्यू शुरू कर दिया था। अब तक 800 से अधिक लोगों को भारत लाया जा चुका है। इस रेस्क्यू मिशन को 'ऑपरेशन देवी शक्ति' नाम दिया गया है। यही असल भारत है, जो वसुधैव कुटंबकम के सिद्धान्त को सिर्फ मानता ही नहीं बल्कि समूची दुनिया को अपना मानता है। इसलिए मनजिंदर सिंह सिरसा ने सरकार से अपील की कि CAA को लागू 2014 से नहीं बल्कि 2021 से करे ताकि अफगानिस्तान से आने वाले शरणार्थियों को शरण मिल सके। Times Now Navbharat पर पढ़ें India News in Hindi, साथ ही ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें ।
'धाकड़ एक्सक्लूसिव' में बात हुई अफगानिस्तान से लौटे नागरिकों की। अफगानिस्तान में लगातार हालात बिगड़ रहे है। हर कोई जल्द से जल्द अफगानिस्तान छोड़ देना चाहता है। अफगानिस्तान से स्वदेश वापसी के लिए भारत सरकार ने ऑपरेशन देवी शक्ति शुरू किया और आज पच्चीस भारतीय नागरिकों के साथ कुल अठहत्तर यात्रियों को लेकर एयर इंडिया की एक फ्लाइट दिल्ली पहुंची। इस वापसी में सबसे खास है गुरूग्रंथ साहिब की तीन प्रतियों को भारत लाया जाना। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी सिर पर गुरु ग्रंथ साहिब की प्रति को उठाते हैं। एयरक्राफ्ट से एयरपोर्ट के बाहर की तरफ पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब को लेकर हरदीप सिंह पुरी निकल पड़े। हरदीप सिंह पुरी और उनके साथ सभी लोग सत् नाम वाहे गुरु का जयकारा लगाया। अफगानिस्तान के काबुल से गुरु ग्रंथ साहिब को लाने वाले ग्रंथी हैं सरदार धर्मेन्द्र सिंह। धर्मेन्द्र सिंह ने बताया कि अफगानिस्तान में हालात बेहद खराब हैं। उन्होंने स्वदेश वापसी पर भारत सरकार का शुक्रिया अदा किया। गुरु ग्रंथ साहिब को काबुल से भारत लाने की जरूरत क्यों पड़ी। इसका जवाब ये है कि तालिबान का कोई भरोसा नहीं है कि वो कब क्या करेगा। गुरु ग्रंथ साहिब को सुरक्षित रखने के लिए भारत वापस लाना पड़ा क्योंकि अफगानिस्तान से सभी सिख धीरे धीरे स्वदेश वापस आ रहे हैं और काबुल में गुरु ग्रंथ साहिब को सुरक्षित रख पाना मुश्किल हो जाता। भारत ने सोलह अगस्त से ही अफगानिस्तान से लोगों का रेस्क्यू शुरू कर दिया था। अब तक आठ सौ से अधिक लोगों को भारत लाया जा चुका है। इस रेस्क्यू मिशन को 'ऑपरेशन देवी शक्ति' नाम दिया गया है। यही असल भारत है, जो वसुधैव कुटंबकम के सिद्धान्त को सिर्फ मानता ही नहीं बल्कि समूची दुनिया को अपना मानता है। इसलिए मनजिंदर सिंह सिरसा ने सरकार से अपील की कि CAA को लागू दो हज़ार चौदह से नहीं बल्कि दो हज़ार इक्कीस से करे ताकि अफगानिस्तान से आने वाले शरणार्थियों को शरण मिल सके। Times Now Navbharat पर पढ़ें India News in Hindi, साथ ही ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें ।
Khelo India Youth Games: बता दें कि पंजकूला में होने जा रहे खेलो इंडिया यूथ गेम्स-2021 का आगाज केंद्रीय ग्रह मंत्री अमित शाह के द्वारा होगा। खेलों इंडिया यूथ गेम्स की मेजबानी हरियाणा करेगा और इसकी पूर्ण रूप से तैयारी भी कर ली गई है। इसका आयोजन 4 जून से 13 जून, 2022 तक हरियाणा सरकार और भारतीय खेल प्राधिकरण के द्वारा संयुक्त रुप से किया जा रहा है। Mulewala Massacre: बता दें कि सिदधू मूसेवाला के परिजनों की ग्रहमंत्री अमित शाह से करीब दस मिनट तक इस मसले पर बात चली। Punjab: ध्यान रहे कि पिछले कुछ दिनों से इस बात के कयास लगाए जा रहे थे कि कई कांग्रेसी बीजेपी का दामन थाम सकते हैं। इससे पहले पंजाब कांग्रेस इकाई के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने भी बीजेपी का दामन थामा था। जिसके बाद इसे पार्टी में सबसे बड़े भितरघात के रूप में देखा गया था। वहीं, इस संदर्भ में अभी तक किसी भी कांग्रेसी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। Samrat Prithviraj: स्क्रीनिंग में बॉलीवुड स्टार्स और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शिरकत की। अमित शाह को अक्षय की फिल्म बहुत पसंद आई और उन्होंने फिल्म की जमकर तारीफ की। फिल्म की तारीफ सुनकर अक्षय कुमार भावुक नजर आए। पिछले दिनों हार्दिक पटेल ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तमाम आरोप लगाते हुए कांग्रेस छोड़ दी थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी की वजह से वो कांग्रेस में गए, लेकिन राहुल ने उनकी मदद नहीं की। हार्दिक ने आरोप लगाया था कि गुजरात कांग्रेस के नेता उनकी राह में रोड़ा अटकाने और राहुल के गुजरात दौरों के वक्त उनके लिए चिकन सैंडविच की ही जुगाड़ करने में लगे रहते थे। इस बीच, हिंदू सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए केंद्र के निर्देश पर लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा की अध्यक्षता में बुधवार को हुई बैठक में तय किया गया कि पीएम रोजगार पैकेज के तहत नियुक्त कश्मीरी पंडितों को 6 जून तक सुरक्षित जगहों पर पोस्टिंग दी जाएगी। मैच में राजस्थान की टीम पहले बैटिंग करते हुए 9 विकेट गंवाकर सिर्फ 130 रन का आंकड़ा ही स्कोर बोर्ड पर टांग सकी। जोस बटलर ने 39 रन बनाए। जबकि, संजू सैमसन जैसे धाकड़ बैट्समैन भी 14 रन ही बना सके। हेटमायर 11 रन बनाकर चलता हुए। इसके बाद गुजरात टाइटंस ने मैच जीत लिया। सीएए के विरोध में एक साल तक दिल्ली और देश के अलग-अलग राज्यों में धरना प्रदर्शन और हिंसा की घटनाएं हुई थीं। यहां तक कि सीएए विरोधी प्रदर्शन के दौरान जब अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप दिल्ली आए थे, तब भी हिंसा की घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा था। दिल्ली में तीन नगर निगमों का विलय कर एक किए जाने के बिल पर बीजेपी और दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी AAP के बीच काफी विवाद रहा है। आम आदमी पार्टी का कहना है कि बीजेपी ने चुनाव में पराजय के डर से तीनों निगमों का विलय किया है। सूत्रों के मुताबिक 20 मई को बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी जयपुर में अलग से बैठक करेंगे। इस बैठक को पीएम नरेंद्र मोदी वर्चुअली संबोधित करने वाले हैं। मोदी इस बैठक में नेताओं को चुनावों में जीत का मंत्र देंगे।
Khelo India Youth Games: बता दें कि पंजकूला में होने जा रहे खेलो इंडिया यूथ गेम्स-दो हज़ार इक्कीस का आगाज केंद्रीय ग्रह मंत्री अमित शाह के द्वारा होगा। खेलों इंडिया यूथ गेम्स की मेजबानी हरियाणा करेगा और इसकी पूर्ण रूप से तैयारी भी कर ली गई है। इसका आयोजन चार जून से तेरह जून, दो हज़ार बाईस तक हरियाणा सरकार और भारतीय खेल प्राधिकरण के द्वारा संयुक्त रुप से किया जा रहा है। Mulewala Massacre: बता दें कि सिदधू मूसेवाला के परिजनों की ग्रहमंत्री अमित शाह से करीब दस मिनट तक इस मसले पर बात चली। Punjab: ध्यान रहे कि पिछले कुछ दिनों से इस बात के कयास लगाए जा रहे थे कि कई कांग्रेसी बीजेपी का दामन थाम सकते हैं। इससे पहले पंजाब कांग्रेस इकाई के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने भी बीजेपी का दामन थामा था। जिसके बाद इसे पार्टी में सबसे बड़े भितरघात के रूप में देखा गया था। वहीं, इस संदर्भ में अभी तक किसी भी कांग्रेसी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। Samrat Prithviraj: स्क्रीनिंग में बॉलीवुड स्टार्स और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शिरकत की। अमित शाह को अक्षय की फिल्म बहुत पसंद आई और उन्होंने फिल्म की जमकर तारीफ की। फिल्म की तारीफ सुनकर अक्षय कुमार भावुक नजर आए। पिछले दिनों हार्दिक पटेल ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तमाम आरोप लगाते हुए कांग्रेस छोड़ दी थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी की वजह से वो कांग्रेस में गए, लेकिन राहुल ने उनकी मदद नहीं की। हार्दिक ने आरोप लगाया था कि गुजरात कांग्रेस के नेता उनकी राह में रोड़ा अटकाने और राहुल के गुजरात दौरों के वक्त उनके लिए चिकन सैंडविच की ही जुगाड़ करने में लगे रहते थे। इस बीच, हिंदू सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए केंद्र के निर्देश पर लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा की अध्यक्षता में बुधवार को हुई बैठक में तय किया गया कि पीएम रोजगार पैकेज के तहत नियुक्त कश्मीरी पंडितों को छः जून तक सुरक्षित जगहों पर पोस्टिंग दी जाएगी। मैच में राजस्थान की टीम पहले बैटिंग करते हुए नौ विकेट गंवाकर सिर्फ एक सौ तीस रन का आंकड़ा ही स्कोर बोर्ड पर टांग सकी। जोस बटलर ने उनतालीस रन बनाए। जबकि, संजू सैमसन जैसे धाकड़ बैट्समैन भी चौदह रन ही बना सके। हेटमायर ग्यारह रन बनाकर चलता हुए। इसके बाद गुजरात टाइटंस ने मैच जीत लिया। सीएए के विरोध में एक साल तक दिल्ली और देश के अलग-अलग राज्यों में धरना प्रदर्शन और हिंसा की घटनाएं हुई थीं। यहां तक कि सीएए विरोधी प्रदर्शन के दौरान जब अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप दिल्ली आए थे, तब भी हिंसा की घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा था। दिल्ली में तीन नगर निगमों का विलय कर एक किए जाने के बिल पर बीजेपी और दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी AAP के बीच काफी विवाद रहा है। आम आदमी पार्टी का कहना है कि बीजेपी ने चुनाव में पराजय के डर से तीनों निगमों का विलय किया है। सूत्रों के मुताबिक बीस मई को बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी जयपुर में अलग से बैठक करेंगे। इस बैठक को पीएम नरेंद्र मोदी वर्चुअली संबोधित करने वाले हैं। मोदी इस बैठक में नेताओं को चुनावों में जीत का मंत्र देंगे।
केंद्र सरकार ने केरल के दो न्यूज़ चैनलों पर बैन लगा दी है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने इन चैनलों के प्रसारण पर 48 घंटों के लिए रोक लगाई है। मंत्रालय ने ये फैसला दिल्ली में हुए हिंसा के दौरान की गई गलत रिपोर्टिंग के चलते ली है। मंत्रालय का कहना है कि हिंसा के दौरान गैर-जिम्मेदार रिपोर्टिंग चैनलों पर की गई जिसे सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील पाया गया। जिन दो चैनलों को बैन किया गया है वे हैं मलयालम चैनल 'एशियानेट न्यूज' और 'मीडिया वन'। इन दोनों चैनल का प्रसारण 6 मार्च की शाम 7.30 बजे से लेकर 8 मार्च को शाम 7.30 बजे तक बंद रहेगा। 8 मार्च को 7.30 बजे के बाद से फिर से शुरू हो जाएगा। बैन को लेकर अपने आदेश में मंत्रालय ने कहा कि दोनों चैनलों का कवरेज दिल्ली हिंसा को लेकर एक तरफा था। इसी आधार पर मंत्रालय ने शुक्रवार को केरल से प्रसारित होने वाले 'एशियानेट न्यूज' और 'मीडिया वन' चैनल को गाइडलाइन्स का उल्लंघन करने का दोषी पाया। इसलिए मंत्रालय की तरफ से 48 घंटे के लिए चैनल बंद करने का आदेश जारी किया गया। बता दें कि पिछले महीने जब दिल्ली में हिंसा हुई थी उस वक्त भी सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सभी निजी सेटेलाइट टीवी चैनलों के लिए परामर्श जारी की थी कि उनसे हिंसा फैलाने या राष्ट्रविरोधी दृष्टिकोण को बढ़ावा देने वाली सामग्री के प्रति सावधानी बरतें। मंत्रालय ने केबल टीवी नेटवर्क (विनियम) अधिनियम, 1995 के कार्यक्रम संहिता के कथित उल्लंघन का हवाला देते हुए चैनल को दो अलग-अलग आदेश शुक्रवार को जारी किए हैं। 'वन न्यूज' चैनल के प्रधान संपादक सी एल थॉमस ने केंद्र सरकार के इस फैसले को मीडिया की स्वतंत्रता पर सरकार का सबसे बड़ा अतिक्रमण बताया है। उन्होंने कहा, "भारत के इतिहास में, ऐसा प्रतिबंध कभी नहीं लगा है। आपातकाल के समय, मीडिया पर प्रतिबंध थे। लेकिन अभी देश इमरजेंसी से नहीं गुजर रहा है। टीवी चैनलों पर रोक लगाने का निर्णय देश के सभी मीडिया घरानों के लिए एक चेतावनी है कि उन्हें सरकार की आलोचना नहीं करनी चाहिए।" मीडिया वन न्यूज का स्वामित्व माध्यमम ब्रॉडकास्टिंग लिमिटेड के पास है, जो जमात-ए-इस्लामी द्वारा समर्थित है। वहीं एशियानेट न्यूज के संपादक एमजी राधाकृष्णन ने कहा, "हम इस समय इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देना चाहते हैं। हम इस मुद्दे पर सामूहिक रूप से विचार करेंगे और बाद में अपने विचार रखेंगे।" ऐसा नहीं है कि मंत्रालय की तरफ से ये पहली बार किसी चैनल को बैन की गई है। 2016 में एनडीटीवी इंडिया को एक दिन के लिए प्रतिबंध बाकी गई थी। एनडीटीवी इंडिया ने पठानकोट एयर बेस पर आतंकी हमले की रिपोर्टिंग की थी। संवेदनशील विवरण साझा करने का आरोप लगाते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने चैनल को एक दिन के लिए प्रसारण पर बैन लगा दी थी। हालांकि, इसके खिलाफ एनडीटीवी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने केंद्र सरकार के फैसले पर रोक लगा दिया था। इस बात की जानकारी मिलते ही सोशल मीडिया का माहौल फिर से गरमाया हुआ है। कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इस कदम की जमकर आलोचना की है। उन्होंने कहा, "बीजेपी की सरकार दिल्ली के दंगों पर कोई भी चर्चा नहीं करेगी। लेकिन उन्होंने 'एशियानेट न्यूज' टीवी और 'मीडिया वन' टीवी लाइव पर सख्ती दिखाई। गुलाम बनाना, दमन करना और गला घोंटना ही बीजेपी का 'मंत्र' है। क्या यही 'न्यू इंडिया' है? ट्विटर पर एशियानेट न्यूज़ और मीडिया वन ट्रेंड करने लगा। लोग सरकार के इस कदम की आलोचना कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि सरकार का फैसला ऐसे समय आया हैं जब अधिकतर मीडिया 'गोदी मीडिया' के भांति काम कर रही हैं। कुछ कहना है कि अधिकतर मीडिया बीजेपी सरकार के सामने समर्पण कर चुकी हैं। अब भारत में चुनिंदा चैनल बचे हैं जो सरकार के नाकामियों के खिलाफ बोलने का माद्दा रखते हैं। गौरतलब है कि दिल्ली में हुई हिंसा में अब तक 51 लोगों की मौत हो चुकी है। घायलों का इलाज चल रहा है। कई लापता हैं। अभी भी लाशें मिल रही हैं। ढाई सौ से अधिक एफआईआर दर्ज की जा चुकी है।
केंद्र सरकार ने केरल के दो न्यूज़ चैनलों पर बैन लगा दी है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने इन चैनलों के प्रसारण पर अड़तालीस घंटाटों के लिए रोक लगाई है। मंत्रालय ने ये फैसला दिल्ली में हुए हिंसा के दौरान की गई गलत रिपोर्टिंग के चलते ली है। मंत्रालय का कहना है कि हिंसा के दौरान गैर-जिम्मेदार रिपोर्टिंग चैनलों पर की गई जिसे सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील पाया गया। जिन दो चैनलों को बैन किया गया है वे हैं मलयालम चैनल 'एशियानेट न्यूज' और 'मीडिया वन'। इन दोनों चैनल का प्रसारण छः मार्च की शाम सात.तीस बजे से लेकर आठ मार्च को शाम सात.तीस बजे तक बंद रहेगा। आठ मार्च को सात.तीस बजे के बाद से फिर से शुरू हो जाएगा। बैन को लेकर अपने आदेश में मंत्रालय ने कहा कि दोनों चैनलों का कवरेज दिल्ली हिंसा को लेकर एक तरफा था। इसी आधार पर मंत्रालय ने शुक्रवार को केरल से प्रसारित होने वाले 'एशियानेट न्यूज' और 'मीडिया वन' चैनल को गाइडलाइन्स का उल्लंघन करने का दोषी पाया। इसलिए मंत्रालय की तरफ से अड़तालीस घंटाटे के लिए चैनल बंद करने का आदेश जारी किया गया। बता दें कि पिछले महीने जब दिल्ली में हिंसा हुई थी उस वक्त भी सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सभी निजी सेटेलाइट टीवी चैनलों के लिए परामर्श जारी की थी कि उनसे हिंसा फैलाने या राष्ट्रविरोधी दृष्टिकोण को बढ़ावा देने वाली सामग्री के प्रति सावधानी बरतें। मंत्रालय ने केबल टीवी नेटवर्क अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ पचानवे के कार्यक्रम संहिता के कथित उल्लंघन का हवाला देते हुए चैनल को दो अलग-अलग आदेश शुक्रवार को जारी किए हैं। 'वन न्यूज' चैनल के प्रधान संपादक सी एल थॉमस ने केंद्र सरकार के इस फैसले को मीडिया की स्वतंत्रता पर सरकार का सबसे बड़ा अतिक्रमण बताया है। उन्होंने कहा, "भारत के इतिहास में, ऐसा प्रतिबंध कभी नहीं लगा है। आपातकाल के समय, मीडिया पर प्रतिबंध थे। लेकिन अभी देश इमरजेंसी से नहीं गुजर रहा है। टीवी चैनलों पर रोक लगाने का निर्णय देश के सभी मीडिया घरानों के लिए एक चेतावनी है कि उन्हें सरकार की आलोचना नहीं करनी चाहिए।" मीडिया वन न्यूज का स्वामित्व माध्यमम ब्रॉडकास्टिंग लिमिटेड के पास है, जो जमात-ए-इस्लामी द्वारा समर्थित है। वहीं एशियानेट न्यूज के संपादक एमजी राधाकृष्णन ने कहा, "हम इस समय इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देना चाहते हैं। हम इस मुद्दे पर सामूहिक रूप से विचार करेंगे और बाद में अपने विचार रखेंगे।" ऐसा नहीं है कि मंत्रालय की तरफ से ये पहली बार किसी चैनल को बैन की गई है। दो हज़ार सोलह में एनडीटीवी इंडिया को एक दिन के लिए प्रतिबंध बाकी गई थी। एनडीटीवी इंडिया ने पठानकोट एयर बेस पर आतंकी हमले की रिपोर्टिंग की थी। संवेदनशील विवरण साझा करने का आरोप लगाते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने चैनल को एक दिन के लिए प्रसारण पर बैन लगा दी थी। हालांकि, इसके खिलाफ एनडीटीवी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने केंद्र सरकार के फैसले पर रोक लगा दिया था। इस बात की जानकारी मिलते ही सोशल मीडिया का माहौल फिर से गरमाया हुआ है। कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इस कदम की जमकर आलोचना की है। उन्होंने कहा, "बीजेपी की सरकार दिल्ली के दंगों पर कोई भी चर्चा नहीं करेगी। लेकिन उन्होंने 'एशियानेट न्यूज' टीवी और 'मीडिया वन' टीवी लाइव पर सख्ती दिखाई। गुलाम बनाना, दमन करना और गला घोंटना ही बीजेपी का 'मंत्र' है। क्या यही 'न्यू इंडिया' है? ट्विटर पर एशियानेट न्यूज़ और मीडिया वन ट्रेंड करने लगा। लोग सरकार के इस कदम की आलोचना कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि सरकार का फैसला ऐसे समय आया हैं जब अधिकतर मीडिया 'गोदी मीडिया' के भांति काम कर रही हैं। कुछ कहना है कि अधिकतर मीडिया बीजेपी सरकार के सामने समर्पण कर चुकी हैं। अब भारत में चुनिंदा चैनल बचे हैं जो सरकार के नाकामियों के खिलाफ बोलने का माद्दा रखते हैं। गौरतलब है कि दिल्ली में हुई हिंसा में अब तक इक्यावन लोगों की मौत हो चुकी है। घायलों का इलाज चल रहा है। कई लापता हैं। अभी भी लाशें मिल रही हैं। ढाई सौ से अधिक एफआईआर दर्ज की जा चुकी है।
दिल्लीः अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् (ABVP ) को अगर आरएसएस का बौद्धिक अंग कहा जाए तो गलत नहीं है, यही वो संगठन है जहाँ से राजनीतिज्ञ के साथ साथ बौद्धिक लोग निकलकर आते हैं लेकिन पिछले दो वर्षों से आरएसएस के इस अंग पर बड़ा वार किया गया है, ABVP के दुश्मन चाहते हैं कि इसकी छवि को खराब करके युवाओं को इससे विमुख कर दिया जाए ताकि कॉलेज और यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले छात्र इस संगठन से जुड़ने से परहेज करें और यह संगठन कमजोर हो जाए। पिछले दो साल से ABVP की ताकत बढ़ी है, दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र संघ के चुनाव में ABVP ने कांग्रेस समर्थित NSUI और वामपंथी संगठन AISF का पत्ता साफ़ कर दिया था, इसके अलावा सभी विश्वविद्यालयों में ABVP की ताकत बढ़ती जा रही है, छात्र इस संगठन से जुड़ते जा रहे हैं और दूसरी तरफ NSUI और AISF कमजोर होते जा रहे हैं। इसके अलावा JNU में देशद्रोही गतिविधियों का भंडाफोड़ भी ABVP ने किया था। पिछले वर्ष JNU और इस वर्ष दिल्ली यूनिवर्सिटी के रामजस कॉलेज में देशद्रोही गतिविधियों को देखकर लोगों के जेहन में एक तस्वीर उभर रही है कि NSUI और AISF के लोग देश में आजादी आजादी का नारा लगाकर देश के टुकड़े टुकड़े करना चाहते हैं, वहीं ABVP आजादी आजादी के नारे के खिलाफ आवाज उठाकर देश को एक करना चाहता है। NSUI और AISF अलगाववाद का समर्थन करते हैं, ये चाहते हैं कि अगर कश्मीर के कुछ लोग आजादी आजादी का नारा लगाएं तो कश्मीर को अलग कर देना चाहिए भले ही पाकिस्तान उसपर कब्ज़ा कर ले, ये लोग चाहते हैं कि अगर कोई पंजाब की आजादी मांगे तो भारत उसे अलग कर दे, अगर कोई बिहार की आजादी मांगे तो भारत उसे अलग कर दे। ये लोग यह नहीं जानते कि अलग होने के बाद भारत का अस्तित्व मिट जाएगा और धीरे धीरे पाकिस्तान सभी राज्यों में जिहाद और आतंकवाद फैलाकर उनपर कब्ज़ा करता जाएगा, इस काम में 100-200 साल लगेंगे लेकिन होगा जरूर। पाकिस्तान समझता है कि लॉन्ग टर्म में NSUI, कांग्रेस, AISF, AAP और केजरीवाल उसके साथ हैं और उसके अलगाववाद की राजनीति को ये लोग हवा देकर पाकिस्तान का ही काम कर रहे हैं। पाकिस्तान जब आजादी आजादी के नारे सुनता होगा तो बहुत खुश होता होगा और सोचता होगा कि यार ये तो हमारा ही काम कर रहे हैं। दूसरी तरफ ABVP है जो आजादी आजादी का नारा लगाने वालों को एक्सपोज करता है, इसके अलग ABVP की ताकत भी दिनों दिन बढती जा रही है, युवा इस संगठन से जुड़कर अपना राजनीतिक कैरियर बनाना चाहते हैं। अगर ये क्रम जारी रहा तो आने वाले समय में ABVP राष्ट्रवादी राजनीतिज्ञों की फैक्ट्री बन जाएगा और NSUI और AISF का सफाया हो जाएगा। यही सब सोचकर देश के दुश्मन और वामपंथी लोग डर गए हैं, इसलिए एक सोची समझी साजिश के तहत ABVP को गुंडों और बलात्कारियों का संगठन बताया जा रहा है, यहाँ तक कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल जैसे लोग भी ABVP को गुंडा और बलात्कारी बता रहे हैं, केजरीवाल ये सब इसलिए कर रहे हैं ताकि देश के पढ़े लिखे युवा ABVP को गुंडे और बलात्कारी समझें और इससे जुड़ने से परहेज करें। अगर आप ध्यान दें तो JNU और रामजस कॉलेज में अलावा आज तक किसी भी यूनिवर्सिटी में ऐसा नहीं हुआ है कि ABVP की गुंडागर्दी की खबर आयी हो। JNU में ABVP वालों ने देशद्रोहियों को एक्सपोज किया तो रामजस कॉलेज में एक कदम आगे बढ़ते हुए आजादी आजादी का नारा लगाने वालों की पिटाई कर दी। क्या करना चाहिए ABVP को? ABVP ने अब तक कुछ भी किया हो लेकिन अब उन्हें इस बात का ध्यान रखना होगा कि उन्हें कमजोर करने के लिए बहुत बड़ी बड़ी ताकतें लगी हुई हैं इसलिए अब उन्हें लोहे का जवाब लोहे से देना होगा, बौद्धिक हमले का जवाब बौद्धिक हमले से देना होगा, मारपीट के बजाय उन्हें जागरूकता का अभियान चलाना होगा। घर घर और गाँव गाँव जाकर देशवासियों को जागरूक करना होगा। - अगर वामपंथी कश्मीर की आजादी पर डिबेट करें और सेमिनार आयोजित करें तो ABVP वाले बलूचिस्तान, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की आजादी के लिए सेमीनार आयोजित करें। - अगर वामपंथी अल्पसंख्यकों और मुस्लिमों का दर्द दिखाएँ तो ABVP वाले कश्मीर में कश्मीरी पंडितों और बंगाल एक हिन्दुओं का दर्द दिखाओ, घर घर जाकर लोगों को बताओ कि बंगाल में अल्पसंख्यक हिन्दुओं की क्या हालत है और यह हालत क्यों हुई, क्या गलती हुई और कौन है इसके लिए जिम्मेदार। - केरल में आरएसएस के कार्यकर्ताओं को चुन चुन कर मारा जा रहा है, आप इसके लिए प्रदर्शन करें। अगर आप ध्यान दें तो JNU और रामजस कॉलेज में अलावा आज तक किसी भी यूनिवर्सिटी में ऐसा नहीं हुआ है कि ABVP की गुंडागर्दी की खबर आयी हो। JNU में ABVP वालों ने देशद्रोहियों को एक्सपोज किया तो रामजस कॉलेज में एक कदम आगे बढ़ते हुए आजादी आजादी का नारा लगाने वालों की पिटाई कर दी। क्या करना चाहिए ABVP को? ABVP ने अब तक कुछ भी किया हो लेकिन अब उन्हें इस बात का ध्यान रखना होगा कि उन्हें कमजोर करने के लिए बहुत बड़ी बड़ी ताकतें लगी हुई हैं इसलिए अब उन्हें लोहे का जवाब लोहे से देना होगा, बौद्धिक हमले का जवाब बौद्धिक हमले से देना होगा, मारपीट के बजाय उन्हें जागरूकता का अभियान चलाना होगा। घर घर और गाँव गाँव जाकर देशवासियों को जागरूक करना होगा। - अगर वामपंथी कश्मीर की आजादी पर डिबेट करें और सेमिनार आयोजित करें तो ABVP वाले बलूचिस्तान, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की आजादी के लिए सेमीनार आयोजित करें। - अगर वामपंथी अल्पसंख्यकों और मुस्लिमों का दर्द दिखाएँ तो ABVP वाले कश्मीर में कश्मीरी पंडितों और बंगाल एक हिन्दुओं का दर्द दिखाओ, घर घर जाकर लोगों को बताओ कि बंगाल में अल्पसंख्यक हिन्दुओं की क्या हालत है और यह हालत क्यों हुई, क्या गलती हुई और कौन है इसके लिए जिम्मेदार। - केरल में आरएसएस के कार्यकर्ताओं को चुन चुन कर मारा जा रहा है, आप इसके लिए प्रदर्शन करें। - वामपंथी नेहरू को महान बताएं तो ABVP वाले वीर सावरकर की प्रतिमा हर हॉस्टल, हर नुक्कड़ पर स्थापित करिए. बच्चे बचे को सावरकर की याद दिलाएं, सुभासचन्द्र बोस के आजादी में योगदान के बारे में बताएं। 7. वामपंथी नक्सलवाद की बात करें तो ABVP वाले भी नक्सल प्रभावित क्षेत्र में समाज की दुर्दशा का वर्णन करें। 8. अगर वामपंथी अख़बारों में लेख लिखें तो ABVP वाले भी अख़बारों में, सोशल मीडिया को लेख से भर दें, अपनी बात को तर्क देकर लिखें। ऐसे बहुत से टॉपिक हैं जिसे ABVP वाले उठा सकते हैं, अब इन्हें जवाब नहीं बल्कि प्रश्न पूछने की आदत डालनी होगी, जब तक इन्हें प्रश्न पूछना नहीं आएगा तब तक सफलता नहीं मिलेगी, कोई और प्रश्न पूछे उससे बढ़िया है कि पहले आप ही उससे प्रश्न पूछ लें, आप उनसे पूछिए, कांग्रेस ने 60 साल राज किया, देश से गरीबी क्यों दूर नहीं हुई और इससे पहले हमें चाहिए गरीबी से आजादी के नारे क्यों नहीं लगे, इससे पहले आजादी आजादी के नारे क्यों नहीं लगे।
दिल्लीः अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् को अगर आरएसएस का बौद्धिक अंग कहा जाए तो गलत नहीं है, यही वो संगठन है जहाँ से राजनीतिज्ञ के साथ साथ बौद्धिक लोग निकलकर आते हैं लेकिन पिछले दो वर्षों से आरएसएस के इस अंग पर बड़ा वार किया गया है, ABVP के दुश्मन चाहते हैं कि इसकी छवि को खराब करके युवाओं को इससे विमुख कर दिया जाए ताकि कॉलेज और यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले छात्र इस संगठन से जुड़ने से परहेज करें और यह संगठन कमजोर हो जाए। पिछले दो साल से ABVP की ताकत बढ़ी है, दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र संघ के चुनाव में ABVP ने कांग्रेस समर्थित NSUI और वामपंथी संगठन AISF का पत्ता साफ़ कर दिया था, इसके अलावा सभी विश्वविद्यालयों में ABVP की ताकत बढ़ती जा रही है, छात्र इस संगठन से जुड़ते जा रहे हैं और दूसरी तरफ NSUI और AISF कमजोर होते जा रहे हैं। इसके अलावा JNU में देशद्रोही गतिविधियों का भंडाफोड़ भी ABVP ने किया था। पिछले वर्ष JNU और इस वर्ष दिल्ली यूनिवर्सिटी के रामजस कॉलेज में देशद्रोही गतिविधियों को देखकर लोगों के जेहन में एक तस्वीर उभर रही है कि NSUI और AISF के लोग देश में आजादी आजादी का नारा लगाकर देश के टुकड़े टुकड़े करना चाहते हैं, वहीं ABVP आजादी आजादी के नारे के खिलाफ आवाज उठाकर देश को एक करना चाहता है। NSUI और AISF अलगाववाद का समर्थन करते हैं, ये चाहते हैं कि अगर कश्मीर के कुछ लोग आजादी आजादी का नारा लगाएं तो कश्मीर को अलग कर देना चाहिए भले ही पाकिस्तान उसपर कब्ज़ा कर ले, ये लोग चाहते हैं कि अगर कोई पंजाब की आजादी मांगे तो भारत उसे अलग कर दे, अगर कोई बिहार की आजादी मांगे तो भारत उसे अलग कर दे। ये लोग यह नहीं जानते कि अलग होने के बाद भारत का अस्तित्व मिट जाएगा और धीरे धीरे पाकिस्तान सभी राज्यों में जिहाद और आतंकवाद फैलाकर उनपर कब्ज़ा करता जाएगा, इस काम में एक सौ-दो सौ साल लगेंगे लेकिन होगा जरूर। पाकिस्तान समझता है कि लॉन्ग टर्म में NSUI, कांग्रेस, AISF, AAP और केजरीवाल उसके साथ हैं और उसके अलगाववाद की राजनीति को ये लोग हवा देकर पाकिस्तान का ही काम कर रहे हैं। पाकिस्तान जब आजादी आजादी के नारे सुनता होगा तो बहुत खुश होता होगा और सोचता होगा कि यार ये तो हमारा ही काम कर रहे हैं। दूसरी तरफ ABVP है जो आजादी आजादी का नारा लगाने वालों को एक्सपोज करता है, इसके अलग ABVP की ताकत भी दिनों दिन बढती जा रही है, युवा इस संगठन से जुड़कर अपना राजनीतिक कैरियर बनाना चाहते हैं। अगर ये क्रम जारी रहा तो आने वाले समय में ABVP राष्ट्रवादी राजनीतिज्ञों की फैक्ट्री बन जाएगा और NSUI और AISF का सफाया हो जाएगा। यही सब सोचकर देश के दुश्मन और वामपंथी लोग डर गए हैं, इसलिए एक सोची समझी साजिश के तहत ABVP को गुंडों और बलात्कारियों का संगठन बताया जा रहा है, यहाँ तक कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल जैसे लोग भी ABVP को गुंडा और बलात्कारी बता रहे हैं, केजरीवाल ये सब इसलिए कर रहे हैं ताकि देश के पढ़े लिखे युवा ABVP को गुंडे और बलात्कारी समझें और इससे जुड़ने से परहेज करें। अगर आप ध्यान दें तो JNU और रामजस कॉलेज में अलावा आज तक किसी भी यूनिवर्सिटी में ऐसा नहीं हुआ है कि ABVP की गुंडागर्दी की खबर आयी हो। JNU में ABVP वालों ने देशद्रोहियों को एक्सपोज किया तो रामजस कॉलेज में एक कदम आगे बढ़ते हुए आजादी आजादी का नारा लगाने वालों की पिटाई कर दी। क्या करना चाहिए ABVP को? ABVP ने अब तक कुछ भी किया हो लेकिन अब उन्हें इस बात का ध्यान रखना होगा कि उन्हें कमजोर करने के लिए बहुत बड़ी बड़ी ताकतें लगी हुई हैं इसलिए अब उन्हें लोहे का जवाब लोहे से देना होगा, बौद्धिक हमले का जवाब बौद्धिक हमले से देना होगा, मारपीट के बजाय उन्हें जागरूकता का अभियान चलाना होगा। घर घर और गाँव गाँव जाकर देशवासियों को जागरूक करना होगा। - अगर वामपंथी कश्मीर की आजादी पर डिबेट करें और सेमिनार आयोजित करें तो ABVP वाले बलूचिस्तान, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की आजादी के लिए सेमीनार आयोजित करें। - अगर वामपंथी अल्पसंख्यकों और मुस्लिमों का दर्द दिखाएँ तो ABVP वाले कश्मीर में कश्मीरी पंडितों और बंगाल एक हिन्दुओं का दर्द दिखाओ, घर घर जाकर लोगों को बताओ कि बंगाल में अल्पसंख्यक हिन्दुओं की क्या हालत है और यह हालत क्यों हुई, क्या गलती हुई और कौन है इसके लिए जिम्मेदार। - केरल में आरएसएस के कार्यकर्ताओं को चुन चुन कर मारा जा रहा है, आप इसके लिए प्रदर्शन करें। अगर आप ध्यान दें तो JNU और रामजस कॉलेज में अलावा आज तक किसी भी यूनिवर्सिटी में ऐसा नहीं हुआ है कि ABVP की गुंडागर्दी की खबर आयी हो। JNU में ABVP वालों ने देशद्रोहियों को एक्सपोज किया तो रामजस कॉलेज में एक कदम आगे बढ़ते हुए आजादी आजादी का नारा लगाने वालों की पिटाई कर दी। क्या करना चाहिए ABVP को? ABVP ने अब तक कुछ भी किया हो लेकिन अब उन्हें इस बात का ध्यान रखना होगा कि उन्हें कमजोर करने के लिए बहुत बड़ी बड़ी ताकतें लगी हुई हैं इसलिए अब उन्हें लोहे का जवाब लोहे से देना होगा, बौद्धिक हमले का जवाब बौद्धिक हमले से देना होगा, मारपीट के बजाय उन्हें जागरूकता का अभियान चलाना होगा। घर घर और गाँव गाँव जाकर देशवासियों को जागरूक करना होगा। - अगर वामपंथी कश्मीर की आजादी पर डिबेट करें और सेमिनार आयोजित करें तो ABVP वाले बलूचिस्तान, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की आजादी के लिए सेमीनार आयोजित करें। - अगर वामपंथी अल्पसंख्यकों और मुस्लिमों का दर्द दिखाएँ तो ABVP वाले कश्मीर में कश्मीरी पंडितों और बंगाल एक हिन्दुओं का दर्द दिखाओ, घर घर जाकर लोगों को बताओ कि बंगाल में अल्पसंख्यक हिन्दुओं की क्या हालत है और यह हालत क्यों हुई, क्या गलती हुई और कौन है इसके लिए जिम्मेदार। - केरल में आरएसएस के कार्यकर्ताओं को चुन चुन कर मारा जा रहा है, आप इसके लिए प्रदर्शन करें। - वामपंथी नेहरू को महान बताएं तो ABVP वाले वीर सावरकर की प्रतिमा हर हॉस्टल, हर नुक्कड़ पर स्थापित करिए. बच्चे बचे को सावरकर की याद दिलाएं, सुभासचन्द्र बोस के आजादी में योगदान के बारे में बताएं। सात. वामपंथी नक्सलवाद की बात करें तो ABVP वाले भी नक्सल प्रभावित क्षेत्र में समाज की दुर्दशा का वर्णन करें। आठ. अगर वामपंथी अख़बारों में लेख लिखें तो ABVP वाले भी अख़बारों में, सोशल मीडिया को लेख से भर दें, अपनी बात को तर्क देकर लिखें। ऐसे बहुत से टॉपिक हैं जिसे ABVP वाले उठा सकते हैं, अब इन्हें जवाब नहीं बल्कि प्रश्न पूछने की आदत डालनी होगी, जब तक इन्हें प्रश्न पूछना नहीं आएगा तब तक सफलता नहीं मिलेगी, कोई और प्रश्न पूछे उससे बढ़िया है कि पहले आप ही उससे प्रश्न पूछ लें, आप उनसे पूछिए, कांग्रेस ने साठ साल राज किया, देश से गरीबी क्यों दूर नहीं हुई और इससे पहले हमें चाहिए गरीबी से आजादी के नारे क्यों नहीं लगे, इससे पहले आजादी आजादी के नारे क्यों नहीं लगे।
कांगड़ा जिले में पंजाब और हिमाचल की सीमा पर चक्की नदी पर बना 800 मीटर लंबा रेलवे पुल शनिवार सुबह ढह गया। सूत्रों ने कहा कि जानकरी के अनुसार चक्की में अचानक आई बाढ़ ने पुल का कमजोर खंभा बहा दिया। पुल टूटने से कांगड़ा घाटी रेल का संपर्क भी पूरी तरह से कट गया है। इसके साथ ही पुल का नया पिलर बनने तक पठानकोट और जोगिंद्रनगर के बीच नैरो गेज ट्रेन सेवा निलंबित रहेगी।
कांगड़ा जिले में पंजाब और हिमाचल की सीमा पर चक्की नदी पर बना आठ सौ मीटर लंबा रेलवे पुल शनिवार सुबह ढह गया। सूत्रों ने कहा कि जानकरी के अनुसार चक्की में अचानक आई बाढ़ ने पुल का कमजोर खंभा बहा दिया। पुल टूटने से कांगड़ा घाटी रेल का संपर्क भी पूरी तरह से कट गया है। इसके साथ ही पुल का नया पिलर बनने तक पठानकोट और जोगिंद्रनगर के बीच नैरो गेज ट्रेन सेवा निलंबित रहेगी।
फर्रुखाबाद-पुलिस लाइन सभागार में पुलिस अधीक्षक डॉक्टर अनिल कुमार मिश्रा खुलासा करते हुए बताया कि जिले में अपराधियों के खिलाफ चलाये जा रहे अभियान के अंतर्गत स्वाट प्रभारी दिनेश गौतम,सर्विलांस प्रभारी,थाना नबाबगंज प्रभारी की मदद से कई राज्यो में ट्रक चोरी करने वाले उनको कबाड़े में काटने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह के चार अपराधियो को पकड़ा है। उनकी निशान देही पर तीन ट्रकों को भी पुलिस ने बरामद किया। गिरफ्तार किए गए अपराधियो ने अपने नाम सईद अहमद पुत्र अब्दुल हमीद निवासी कस्बा रिक्षा थाना देवरनिया,नदीम खान उर्फ टार्जन पुत्र शकील खान निवासी मोहल्ला शेखपुर , मोहम्मद बसीम पुत्र शकूर अहमद निवासी मोहल्ला टाडा,समीर रजा पुत्र कौसर हुसैन निवासी शेरनगर थाना बहेड़ी जनपद बरेली के रहने वाले है। इन अपराधियो के साथ काम करने वाला कुलदीप उर्फ गब्बर पुत्र सरमन सिंह निवासी बासमई थाना नबाबगंज जिला फर्रुखाबाद और अनिल कुमार उर्फ भैयालाल निवासी बरथिया कुसमरा थाना किसनी जनपद मैनपुरी यह अपराधी फरार हो गए है। इनको पकड़कर जल्द ही जेल भेजा जायेगा उसके साथ और भी कुछ जानकारी मिल सकती है। अपराधियो ने पूछताछ में बताया कि शहर के बाहर ढाबा या होटल पर जब ट्रक चालक सो जाता या खाना खाने ट्रक से दूर होता वैसे ही सईद ट्रक लेकर फरार हो जाता था। बरेली में ले जाकर कबाड़ी के यहां कटबा देता था। तीनो ट्रकों की कीमत लगभग 60 लाख रुपये है। इन अपराधियो का एक संगठित गिरोह है जो राज्य में ही नही आसपास के राज्यो में ट्रक चोरी करने का काम करता था।
फर्रुखाबाद-पुलिस लाइन सभागार में पुलिस अधीक्षक डॉक्टर अनिल कुमार मिश्रा खुलासा करते हुए बताया कि जिले में अपराधियों के खिलाफ चलाये जा रहे अभियान के अंतर्गत स्वाट प्रभारी दिनेश गौतम,सर्विलांस प्रभारी,थाना नबाबगंज प्रभारी की मदद से कई राज्यो में ट्रक चोरी करने वाले उनको कबाड़े में काटने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह के चार अपराधियो को पकड़ा है। उनकी निशान देही पर तीन ट्रकों को भी पुलिस ने बरामद किया। गिरफ्तार किए गए अपराधियो ने अपने नाम सईद अहमद पुत्र अब्दुल हमीद निवासी कस्बा रिक्षा थाना देवरनिया,नदीम खान उर्फ टार्जन पुत्र शकील खान निवासी मोहल्ला शेखपुर , मोहम्मद बसीम पुत्र शकूर अहमद निवासी मोहल्ला टाडा,समीर रजा पुत्र कौसर हुसैन निवासी शेरनगर थाना बहेड़ी जनपद बरेली के रहने वाले है। इन अपराधियो के साथ काम करने वाला कुलदीप उर्फ गब्बर पुत्र सरमन सिंह निवासी बासमई थाना नबाबगंज जिला फर्रुखाबाद और अनिल कुमार उर्फ भैयालाल निवासी बरथिया कुसमरा थाना किसनी जनपद मैनपुरी यह अपराधी फरार हो गए है। इनको पकड़कर जल्द ही जेल भेजा जायेगा उसके साथ और भी कुछ जानकारी मिल सकती है। अपराधियो ने पूछताछ में बताया कि शहर के बाहर ढाबा या होटल पर जब ट्रक चालक सो जाता या खाना खाने ट्रक से दूर होता वैसे ही सईद ट्रक लेकर फरार हो जाता था। बरेली में ले जाकर कबाड़ी के यहां कटबा देता था। तीनो ट्रकों की कीमत लगभग साठ लाख रुपये है। इन अपराधियो का एक संगठित गिरोह है जो राज्य में ही नही आसपास के राज्यो में ट्रक चोरी करने का काम करता था।
रूपा कहे सुणो धारवा बैलिया लावो बैल सू जोड । आगे रावळ मालजो सीदा अपणे सरग भवन में कौघी ठौड ॥ ११ ॥ महिमा घणी. णट दियो म्हा में खून पडियौ था पहिली म्हारै बध्या मौड । क्रिया बिना धूं किसी कामणी कठै हाली थू बैलिया जोड ॥ १२ ॥ महिमा घो जाऊला सदर धणी रे पाव म्हारे बात नहीं कोई और थाळी माहे किया सो वाना कळी केवडो दाख बिजोर ॥ १३ ॥ महिमा घणी - घम घम पइया बैल रा बाजे बाज ताल करे रिमझोल । सत से बैल गेब सू हाली जणी सरगा चढ़ी लूमती नाल ॥ १४ ॥ महिमा घणी_ दोनों ही साथ बराबर ऊबा पोळिया निवण करे कर जोड़। सिव धरम रा थे सहीसे करो बड़ा धरमरा मसकत मोड ॥१५ ॥ महिमा घणी_ परसण हे मिलिया परमैसर राजा विया रजाबद जोड़ कहो (नो) थे किसी धणी घ्यावी इसबै मते आयो नहीं कोई और ॥ १६ ॥ महिमा घणी.. अलख निरजण सिवरिया साधौ राम भज्यो राजा रिणछोड । साहिब एक भेख सगळा में ओ सेहस नावा में एक होज मोड ॥१७ ॥ महिमा घणो. सतरो कथा साभळौ साधा कीधा धरम पावा निज ठौड । नाव लिया हेला निसतारो ज्याने जम किंकर लागे नहीं जोर ।। सबळ कहता जकै साच कमाया सरगा चढ लूमती लोळ । माणक बगस माल सलखा रौ पीरा निवण करै कर जोड ॥ १८ ॥ महिमा घणी - चौधरी शिवसिंह मल्लाजी चोयल शोध पत्रिका भाग २ अक २ (श्री चोयल ने इसे हरजी भाटी की रचना माना है परन्तु यह बगसा खातो की रचना प्रतीत होती है।) मालैजो री जन्मपत्रिका (रूपादे-मल्लीनाथ के पूर्वजन्म की अनुश्रुति) बुधजी चालो पाटण सहर में धूणी धुकावो पाटण पोळिया । करो अपणा गुरु नै याद अंक जुग रौ आसण साजसा 11 बुधजी लेवो मालक से नाव दिल रा धोखा आलम गजा पूरसी ॥ टेर ।। बुधजी लीधी चींपी हाथ नगर चेतावण अबे हालिया । पायी है घाटण से लोग चिमटी नहीं घाले कोरे चून री ॥२ ॥ बुधजी दियो धुणो रो कोटवाळ जाय लवार नै हेलो मारियो । लवारिया सुण ले म्हारी बात सस्तर भाग नै करदे कवाडियो ॥ ३ ॥ सावामीजी कैसी सामियों से प्रीत मरै न मसाण जोगी तापिया । ओ मेल दो धूगी रा कोटवाल जातोडा ले जायजो कवाडियो ॥४ ॥ बुधजो बुवा वन री बनवास बन में नहीं लाधी सूवी लाकड़ी। घालियो है कदम नै घाव दूधा रा धारोळा परा छूटिया ॥५ ॥ बुधजी सूता किसडी नींद आघी नै अधराती हेलौ पाडियो । थाने तूठा है संभुनाथ जावो धूणी सेवा सोपडौ ॥६॥ बुधजी उठायो सिर पर बोझ सिरे बाजारों हालियो । गया गाधा री हाट चनण बेचे मुहगा माल ये ॥ ७ ॥ बुधजी काई न्टा कासी केदार काई अडसठ तीरथ न्हाविया । काई मिळी नागों से जमात माथा रा मुकुट कुण पाडिया ॥८ ॥ गुरु नही न्हायो टू कासी केदार नहीं म्हू अडसठ तीरथ साजियो । नहीं मिळी नागों से जमात माथा रो मुकुट हाथों ही पाडियो ॥ ९ ॥ बुधजी गया कुम्हार रे बार जायने कुम्हार है हेलो पाडियो । कुम्हारिया सुणले म्हारी बात म्हारा बचन गुरा मत लोपजे ॥१० ॥ क्यू करियो मोड़ा रो बिसवास रहता रा छुडावै सोमो झूपड़ा। नित उठ करती दान ऊना
रूपा कहे सुणो धारवा बैलिया लावो बैल सू जोड । आगे रावळ मालजो सीदा अपणे सरग भवन में कौघी ठौड ॥ ग्यारह ॥ महिमा घणी. णट दियो म्हा में खून पडियौ था पहिली म्हारै बध्या मौड । क्रिया बिना धूं किसी कामणी कठै हाली थू बैलिया जोड ॥ बारह ॥ महिमा घो जाऊला सदर धणी रे पाव म्हारे बात नहीं कोई और थाळी माहे किया सो वाना कळी केवडो दाख बिजोर ॥ तेरह ॥ महिमा घणी - घम घम पइया बैल रा बाजे बाज ताल करे रिमझोल । सत से बैल गेब सू हाली जणी सरगा चढ़ी लूमती नाल ॥ चौदह ॥ महिमा घणी_ दोनों ही साथ बराबर ऊबा पोळिया निवण करे कर जोड़। सिव धरम रा थे सहीसे करो बड़ा धरमरा मसकत मोड ॥पंद्रह ॥ महिमा घणी_ परसण हे मिलिया परमैसर राजा विया रजाबद जोड़ कहो थे किसी धणी घ्यावी इसबै मते आयो नहीं कोई और ॥ सोलह ॥ महिमा घणी.. अलख निरजण सिवरिया साधौ राम भज्यो राजा रिणछोड । साहिब एक भेख सगळा में ओ सेहस नावा में एक होज मोड ॥सत्रह ॥ महिमा घणो. सतरो कथा साभळौ साधा कीधा धरम पावा निज ठौड । नाव लिया हेला निसतारो ज्याने जम किंकर लागे नहीं जोर ।। सबळ कहता जकै साच कमाया सरगा चढ लूमती लोळ । माणक बगस माल सलखा रौ पीरा निवण करै कर जोड ॥ अट्ठारह ॥ महिमा घणी - चौधरी शिवसिंह मल्लाजी चोयल शोध पत्रिका भाग दो अक दो मालैजो री जन्मपत्रिका बुधजी चालो पाटण सहर में धूणी धुकावो पाटण पोळिया । करो अपणा गुरु नै याद अंक जुग रौ आसण साजसा ग्यारह बुधजी लेवो मालक से नाव दिल रा धोखा आलम गजा पूरसी ॥ टेर ।। बुधजी लीधी चींपी हाथ नगर चेतावण अबे हालिया । पायी है घाटण से लोग चिमटी नहीं घाले कोरे चून री ॥दो ॥ बुधजी दियो धुणो रो कोटवाळ जाय लवार नै हेलो मारियो । लवारिया सुण ले म्हारी बात सस्तर भाग नै करदे कवाडियो ॥ तीन ॥ सावामीजी कैसी सामियों से प्रीत मरै न मसाण जोगी तापिया । ओ मेल दो धूगी रा कोटवाल जातोडा ले जायजो कवाडियो ॥चार ॥ बुधजो बुवा वन री बनवास बन में नहीं लाधी सूवी लाकड़ी। घालियो है कदम नै घाव दूधा रा धारोळा परा छूटिया ॥पाँच ॥ बुधजी सूता किसडी नींद आघी नै अधराती हेलौ पाडियो । थाने तूठा है संभुनाथ जावो धूणी सेवा सोपडौ ॥छः॥ बुधजी उठायो सिर पर बोझ सिरे बाजारों हालियो । गया गाधा री हाट चनण बेचे मुहगा माल ये ॥ सात ॥ बुधजी काई न्टा कासी केदार काई अडसठ तीरथ न्हाविया । काई मिळी नागों से जमात माथा रा मुकुट कुण पाडिया ॥आठ ॥ गुरु नही न्हायो टू कासी केदार नहीं म्हू अडसठ तीरथ साजियो । नहीं मिळी नागों से जमात माथा रो मुकुट हाथों ही पाडियो ॥ नौ ॥ बुधजी गया कुम्हार रे बार जायने कुम्हार है हेलो पाडियो । कुम्हारिया सुणले म्हारी बात म्हारा बचन गुरा मत लोपजे ॥दस ॥ क्यू करियो मोड़ा रो बिसवास रहता रा छुडावै सोमो झूपड़ा। नित उठ करती दान ऊना
कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है। उनके लिए DA में वृद्धि की जा सकती है। इसके अलावा उनके एरियर के भुगतान के किश्तों पर भी सहमति बन सकती है। 17 मार्च को पेश होने वाले बजट से कर्मचारियों को बेहद उम्मीद है। Employees Honorarium-Salary Hike : राज्य के कर्मचारियों को बकाया महंगाई भत्ता सहित एरियर के भुगतान को लेकर संभावनाएं तेज हो गई है। दरअसल 17 मार्च को राज्य सरकार बजट पेश करने जा रही है। ऐसे में कर्मचारियों को उम्मीद है कि उनके एरियर के भुगतान पर सरकार जल्द ही राशि आवंटित कर सकती है। इसके अलावा हजारों अस्थाई कर्मचारी के मानदेय में भी बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है। वही आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए भी कोई पॉलिसी बनने की संभावना तेज है। हिमाचल के सुखविंदर सिंह सरकार के द्वारा 17 मार्च को बजट पेश किया जाना है। ऐसे में कर्मचारी संशोधित वेतनमान एरियर और डीए सहित महंगाई भत्ते की लंबित किस्तों का इंतजार कर रहे हैं। वही माना जा रहा है कि बजट में इसके लिए सरकार बड़ी घोषणा कर सकती है। साथ ही कर्मचारियों को 31 फीसद महंगाई भत्ते उपलब्ध कराये जा रहे हैं जबकि केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते 31 फीसद है। DA वृद्धि पर भी हिमाचल सरकार द्वारा फैसला लिए जाने की उम्मीद जताई जा रही है। इन एरियर किस्तों में जनवरी 2022 की तीन फीसद की किस्त के अलावा जुलाई 2022 की 4 फीसद किस्त शामिल है। हिमाचल में कर्मचारियों को संशोधित वेतनमान 2022 का लाभ दिया जाएगा। इसे 2016 से लागू किया जाना है। कर्मचारियों को 2016 से 2022 तक के एरियर का भुगतान किया जाना है। पूर्व की जयराम सरकार द्वारा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को ₹60000 की एकमुश्त भुगतान करने और बाकी कर्मचारियों को ₹50000 देने का ऐलान किया गया था। हालांकि कर्मचारियों को एरियर का लाभ नहीं मिल पाया। वहीं मुख्यमंत्री का पदभार ग्रहण करते हुए सीएम सुखविंदर भी कह चुके हैं कि संशोधित वेतनमान के एरियर देने की स्थिति में सरकार नहीं है लेकिन कर्मचारियों को उम्मीद है कि बजट में इसकी घोषणा की जा सकती है। इसके अलावा आउट सोर्स और अस्थाई कर्मचारियों के लिए भी बजट में बड़ी घोषणा की जा सकती है। चुनाव से पहले पारदर्शी नीति बनाने की घोषणा की गई थी। ऐसे में आउटसोर्स कर्मचारी बजट में कोई ना कोई पॉलिसी बनाए जाने की आस लगाए बैठे हैं। वहीं सैकड़ों कर्मचारी की नजर भी बजट पर है। मिड डे मील वर्कर के अलावा आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी अस्थाई तौर पर मानदेय वृद्धि का इंतजार है। इससे पहले पंजाब में पुरानी पेंशन योजना को मंजूरी दी जा चुकी है। पुरानी पेंशन योजना का लाभ 136000 कर्मचारियों को मिल रहा है। वहीं अब कर्मचारी संशोधित वेतनमान के एरियर सहित बचे हुए महंगाई भत्ते में वृद्धि की राह देख रहे हैं।
कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है। उनके लिए DA में वृद्धि की जा सकती है। इसके अलावा उनके एरियर के भुगतान के किश्तों पर भी सहमति बन सकती है। सत्रह मार्च को पेश होने वाले बजट से कर्मचारियों को बेहद उम्मीद है। Employees Honorarium-Salary Hike : राज्य के कर्मचारियों को बकाया महंगाई भत्ता सहित एरियर के भुगतान को लेकर संभावनाएं तेज हो गई है। दरअसल सत्रह मार्च को राज्य सरकार बजट पेश करने जा रही है। ऐसे में कर्मचारियों को उम्मीद है कि उनके एरियर के भुगतान पर सरकार जल्द ही राशि आवंटित कर सकती है। इसके अलावा हजारों अस्थाई कर्मचारी के मानदेय में भी बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है। वही आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए भी कोई पॉलिसी बनने की संभावना तेज है। हिमाचल के सुखविंदर सिंह सरकार के द्वारा सत्रह मार्च को बजट पेश किया जाना है। ऐसे में कर्मचारी संशोधित वेतनमान एरियर और डीए सहित महंगाई भत्ते की लंबित किस्तों का इंतजार कर रहे हैं। वही माना जा रहा है कि बजट में इसके लिए सरकार बड़ी घोषणा कर सकती है। साथ ही कर्मचारियों को इकतीस फीसद महंगाई भत्ते उपलब्ध कराये जा रहे हैं जबकि केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते इकतीस फीसद है। DA वृद्धि पर भी हिमाचल सरकार द्वारा फैसला लिए जाने की उम्मीद जताई जा रही है। इन एरियर किस्तों में जनवरी दो हज़ार बाईस की तीन फीसद की किस्त के अलावा जुलाई दो हज़ार बाईस की चार फीसद किस्त शामिल है। हिमाचल में कर्मचारियों को संशोधित वेतनमान दो हज़ार बाईस का लाभ दिया जाएगा। इसे दो हज़ार सोलह से लागू किया जाना है। कर्मचारियों को दो हज़ार सोलह से दो हज़ार बाईस तक के एरियर का भुगतान किया जाना है। पूर्व की जयराम सरकार द्वारा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को साठ हज़ार रुपया की एकमुश्त भुगतान करने और बाकी कर्मचारियों को पचास हज़ार रुपया देने का ऐलान किया गया था। हालांकि कर्मचारियों को एरियर का लाभ नहीं मिल पाया। वहीं मुख्यमंत्री का पदभार ग्रहण करते हुए सीएम सुखविंदर भी कह चुके हैं कि संशोधित वेतनमान के एरियर देने की स्थिति में सरकार नहीं है लेकिन कर्मचारियों को उम्मीद है कि बजट में इसकी घोषणा की जा सकती है। इसके अलावा आउट सोर्स और अस्थाई कर्मचारियों के लिए भी बजट में बड़ी घोषणा की जा सकती है। चुनाव से पहले पारदर्शी नीति बनाने की घोषणा की गई थी। ऐसे में आउटसोर्स कर्मचारी बजट में कोई ना कोई पॉलिसी बनाए जाने की आस लगाए बैठे हैं। वहीं सैकड़ों कर्मचारी की नजर भी बजट पर है। मिड डे मील वर्कर के अलावा आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी अस्थाई तौर पर मानदेय वृद्धि का इंतजार है। इससे पहले पंजाब में पुरानी पेंशन योजना को मंजूरी दी जा चुकी है। पुरानी पेंशन योजना का लाभ एक लाख छत्तीस हज़ार कर्मचारियों को मिल रहा है। वहीं अब कर्मचारी संशोधित वेतनमान के एरियर सहित बचे हुए महंगाई भत्ते में वृद्धि की राह देख रहे हैं।
तारक मेहता का उल्टा चश्मा में दयाबेन का किरदार निभाकर सबके दिलों पर छाने वालीं दिशा वकानी को लेकर एक नई खबर सामने आ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक दिशा को बिग बॉस 14 के लिए संपर्क किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शो के निर्माता चाहते हैं कि दिशा वकानी शो के इस सीजन का हिस्सा बनें। हालांकि, इस बारे में अभी तक एक्ट्रेस या शो की तरह से कोई स्टेटमेंट नहीं आया है। इससे पहले खबर आई थी कि 'बिग बॉस 14' की शूटिंग पूरी नहीं हो पा रही है, जिसके कारण इसके प्रसारण में देरी भी हो सकती है। मुंबई में भारी बारिश के चलते सलमान खान शूटिंग नहीं कर पा रहे हैं। कहा जा रहा है कि शो सितंबर में नहीं बल्कि अक्टूबर में प्रसारित हो सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस साल कंटेस्टेंट्स को हमेशा की तरह हफ्तों के हिसाब से फीस नहीं मिलेगी। वहीं एलिमिनेशन प्रक्रिया भी अलग है। खबरों के मुताबिक इस बार कंटेस्टेंट्स को कोराना के मद्देनजर उनके टेम्प्रेचर लेवल और हाईजीन के आधार पर एलिमिनेट किया जा सकता है। अगर कोई कंटेस्टेंट बीमार पाया जाता है तो वह शो से आउट माना जाएगा इसलिए जिन कंटेस्टेंट्स की इम्यूनिटी स्ट्रॉन्ग होगी उन्हें ही शो में लिया जाएगा। इसके अलावा यह भी कहा जा रहा है कि अगर किसी वजह से शो बीच में बंद होता है तो प्रॉडक्शन हाउस उन एपिसोड्स के पैसे नहीं देगा जो हुए ही नहीं। इस बार शो में सेलेब्रिटी गेस्ट में जैस्मीन भसीन, नेहा शर्मा, विवियन डीसेना, हर्ष बेनीवाल, निया शर्मा का नाम सुनने में आया है। हालांकि इस बारे में किसी ने भी कोई कमेंट नहीं किया है।
तारक मेहता का उल्टा चश्मा में दयाबेन का किरदार निभाकर सबके दिलों पर छाने वालीं दिशा वकानी को लेकर एक नई खबर सामने आ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक दिशा को बिग बॉस चौदह के लिए संपर्क किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शो के निर्माता चाहते हैं कि दिशा वकानी शो के इस सीजन का हिस्सा बनें। हालांकि, इस बारे में अभी तक एक्ट्रेस या शो की तरह से कोई स्टेटमेंट नहीं आया है। इससे पहले खबर आई थी कि 'बिग बॉस चौदह' की शूटिंग पूरी नहीं हो पा रही है, जिसके कारण इसके प्रसारण में देरी भी हो सकती है। मुंबई में भारी बारिश के चलते सलमान खान शूटिंग नहीं कर पा रहे हैं। कहा जा रहा है कि शो सितंबर में नहीं बल्कि अक्टूबर में प्रसारित हो सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस साल कंटेस्टेंट्स को हमेशा की तरह हफ्तों के हिसाब से फीस नहीं मिलेगी। वहीं एलिमिनेशन प्रक्रिया भी अलग है। खबरों के मुताबिक इस बार कंटेस्टेंट्स को कोराना के मद्देनजर उनके टेम्प्रेचर लेवल और हाईजीन के आधार पर एलिमिनेट किया जा सकता है। अगर कोई कंटेस्टेंट बीमार पाया जाता है तो वह शो से आउट माना जाएगा इसलिए जिन कंटेस्टेंट्स की इम्यूनिटी स्ट्रॉन्ग होगी उन्हें ही शो में लिया जाएगा। इसके अलावा यह भी कहा जा रहा है कि अगर किसी वजह से शो बीच में बंद होता है तो प्रॉडक्शन हाउस उन एपिसोड्स के पैसे नहीं देगा जो हुए ही नहीं। इस बार शो में सेलेब्रिटी गेस्ट में जैस्मीन भसीन, नेहा शर्मा, विवियन डीसेना, हर्ष बेनीवाल, निया शर्मा का नाम सुनने में आया है। हालांकि इस बारे में किसी ने भी कोई कमेंट नहीं किया है।
अंबाला (अमन कपूर) : 1971 की लड़ाई में भारत ने पाकिस्तान को दो दिन में नाको चने चबवा दिए थे। मात्र दो दिन में पाकिस्तान गुटनों पर आ गया था और उसके 93 हजार सैनिकों ने आत्मसमर्पण कर दिया था। इसी दिन भारत ने पाक को धूल चटाई थी। 16 दिसम्बर 1971 को पाकिस्तान से युद्ध में मिली जीत को विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारत पाकिस्तान की लड़ाई में भाग लेने वाले वाले वीर सैनिकों ने आज अपनी पुरानी यादों को ताजा करते हुए बताया कि उन्होंने किस प्रकार बहादुरी से इस लड़ाई में भाग लिया। आज भी वह उस दिन को याद करते हुए जब उन्होंने पाकिस्तान के गिराए सात बमों को अपने हाथों से डिफ्यूज किया था। इस वीरता के लिए भारत सरकार द्वारा उन्हें सम्मानित करते हुए शौर्यचक्र प्रदान किया था। सूबेदार सेवा सिंह के पुत्र बलविंद्र सिंह ने बताया कि उसे अपने पिता की बहादुरी पर नाज है। उन्होंने बताया कि उनका पूरा परिवार सेना से जुड़ा हुआ है। उनके परदादा, ब्रिटिश आर्मी में थे जबकि मेरे दादा व मेरे पिता, चाचा व भाई भारतीय सेना से जुड़े रहे। उन्होंने बताया कि देश सेवा का जज्बा लिए वह उस समय फौज में भर्ती हुए तथा 1971 की लड़ाई में उन्होंने जिस प्रकार से वीरता दिखाई, वह हमारे लिए गर्व की बात है। उन्होनें केन्द्र सरकार व रक्षा मंत्रालय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र सरकार भूतपूर्व सैनिकों के लिए बेहद सरहानीय काम कर रही है व अस्पतालों में बेहतरीन इलाज करवाया जा रहा है। वहीं इस युद्ध के एक और साक्षी हैं वो है ऑनरेरी कैप्टन मेहर सिंह जिन्होंने युद्ध का आंखों देखा वर्णन किया और बताया कैसे उनकी टीम ने एक पाकिस्तानी स्टार फाईटर को मार गिराया और एक फाईटर को वापिस जाने पर मजबूर कर दिया। जबकि पाकिस्तान की सेना को मुंह तोड़ जवाब एयरफोर्स ने भी पूरी ताकत से दिया था। एयरफोर्स में रहे गुलशन राय चानना बताते हैं भारतीय सेना को एक जरूरत पड़ी थी तो वे चेरापूंजी के रास्ते बंग्लादेश गए थे। उनकी जिम्मेदारी उनके ग्रुप कैप्टन ने लगाई थी। जिसे उन्होंने बखूबी निभाया था। (हरियाणा की खबरें टेलीग्राम पर भी, बस यहां क्लिक करें या फिर टेलीग्राम पर Punjab Kesari Haryana सर्च करें। )
अंबाला : एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर की लड़ाई में भारत ने पाकिस्तान को दो दिन में नाको चने चबवा दिए थे। मात्र दो दिन में पाकिस्तान गुटनों पर आ गया था और उसके तिरानवे हजार सैनिकों ने आत्मसमर्पण कर दिया था। इसी दिन भारत ने पाक को धूल चटाई थी। सोलह दिसम्बर एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर को पाकिस्तान से युद्ध में मिली जीत को विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारत पाकिस्तान की लड़ाई में भाग लेने वाले वाले वीर सैनिकों ने आज अपनी पुरानी यादों को ताजा करते हुए बताया कि उन्होंने किस प्रकार बहादुरी से इस लड़ाई में भाग लिया। आज भी वह उस दिन को याद करते हुए जब उन्होंने पाकिस्तान के गिराए सात बमों को अपने हाथों से डिफ्यूज किया था। इस वीरता के लिए भारत सरकार द्वारा उन्हें सम्मानित करते हुए शौर्यचक्र प्रदान किया था। सूबेदार सेवा सिंह के पुत्र बलविंद्र सिंह ने बताया कि उसे अपने पिता की बहादुरी पर नाज है। उन्होंने बताया कि उनका पूरा परिवार सेना से जुड़ा हुआ है। उनके परदादा, ब्रिटिश आर्मी में थे जबकि मेरे दादा व मेरे पिता, चाचा व भाई भारतीय सेना से जुड़े रहे। उन्होंने बताया कि देश सेवा का जज्बा लिए वह उस समय फौज में भर्ती हुए तथा एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर की लड़ाई में उन्होंने जिस प्रकार से वीरता दिखाई, वह हमारे लिए गर्व की बात है। उन्होनें केन्द्र सरकार व रक्षा मंत्रालय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र सरकार भूतपूर्व सैनिकों के लिए बेहद सरहानीय काम कर रही है व अस्पतालों में बेहतरीन इलाज करवाया जा रहा है। वहीं इस युद्ध के एक और साक्षी हैं वो है ऑनरेरी कैप्टन मेहर सिंह जिन्होंने युद्ध का आंखों देखा वर्णन किया और बताया कैसे उनकी टीम ने एक पाकिस्तानी स्टार फाईटर को मार गिराया और एक फाईटर को वापिस जाने पर मजबूर कर दिया। जबकि पाकिस्तान की सेना को मुंह तोड़ जवाब एयरफोर्स ने भी पूरी ताकत से दिया था। एयरफोर्स में रहे गुलशन राय चानना बताते हैं भारतीय सेना को एक जरूरत पड़ी थी तो वे चेरापूंजी के रास्ते बंग्लादेश गए थे। उनकी जिम्मेदारी उनके ग्रुप कैप्टन ने लगाई थी। जिसे उन्होंने बखूबी निभाया था।
'मिस्टर इंडिया (Mr. India)', 'नो एंट्री (No Entry)' और 'जुदाई (Judaai)' जैसी एक से बढ़कर एक शानदार फिल्में देने वाले फिल्मकार बोनी कपूर (Boney Kapoor) का आज जन्मदिन है। आज वह 67 साल के हो गए हैं। जी हाँ, हालाँकि बोनी कपूर ने जितनी शोहरत अपनी फिल्मों से अपने नाम की उससे कहीं ज्यादा सुर्खियां उन्होंने श्रीदेवी से शादी करने के बाद अपने नाम की। कहा जाता है बोनी कपूर ने मशहूर एक्ट्रेस श्रीदेवी को पहली बार फिल्म 'सोलहवां सावन' में देखा था। जी हाँ और बोनी कपूर ने पहली ही नजर में श्रीदेवी को अपना दिल दे दिया था। कहा जाता है इसके बाद से वो उनसे मिलने के तरीके सोचा करते थे। जी हाँ और उसी वक्त वो फिल्म 'मिस्टर इंडिया' का निर्माण करने जा रहे थे। ऐसे में उन्होंने 'मिस्टर इंडिया' में लीड एक्ट्रेस के तौर पर श्रीदेवी को लेने के बारे में सोचा और इसी के चलते वो श्रीदेवी की मां से मिले। कहा जाता है उनकी मां ने बोनी के सामने फीस के रूप 10 लाख की मांग रख दी। जी हाँ और श्रीदेवी के इश्क में पड़े बोनी कपूर ने फौरन उनकी मां की बात मान ली और 'मिस्टर इंडिया' के लिए श्रीदेवी को साइन कर लिया। कहा जाता है शुरुआत में श्रीदेवी (Sridevi), बोनी कपूर पर कोई ध्यान नहीं देती थी लेकिन इसी बीच जब उनकी मां की तबियत खराब हुई तो उस कठिन वक्त में बोनी कपूर (Boney Kapoor) ने उनका बहुत साथ दिया और इसके बाद उनकी मां के निधन के वो काफी करीब आ गए और दोनों ने एक दूसरे को अपना हमसफर बनाने का फैसला कर लिया। जी हैं और इसके बाद दोनो ने साल 1996 में शादी कर ली। अब श्रीदेवी इस दुनिया में नहीं हैं और बोनी कपूर अपनी दोनों बेटियों जाह्नवी कपूर और ख़ुशी कपूर के साथ रह रहे हैं।
'मिस्टर इंडिया ', 'नो एंट्री ' और 'जुदाई ' जैसी एक से बढ़कर एक शानदार फिल्में देने वाले फिल्मकार बोनी कपूर का आज जन्मदिन है। आज वह सरसठ साल के हो गए हैं। जी हाँ, हालाँकि बोनी कपूर ने जितनी शोहरत अपनी फिल्मों से अपने नाम की उससे कहीं ज्यादा सुर्खियां उन्होंने श्रीदेवी से शादी करने के बाद अपने नाम की। कहा जाता है बोनी कपूर ने मशहूर एक्ट्रेस श्रीदेवी को पहली बार फिल्म 'सोलहवां सावन' में देखा था। जी हाँ और बोनी कपूर ने पहली ही नजर में श्रीदेवी को अपना दिल दे दिया था। कहा जाता है इसके बाद से वो उनसे मिलने के तरीके सोचा करते थे। जी हाँ और उसी वक्त वो फिल्म 'मिस्टर इंडिया' का निर्माण करने जा रहे थे। ऐसे में उन्होंने 'मिस्टर इंडिया' में लीड एक्ट्रेस के तौर पर श्रीदेवी को लेने के बारे में सोचा और इसी के चलते वो श्रीदेवी की मां से मिले। कहा जाता है उनकी मां ने बोनी के सामने फीस के रूप दस लाख की मांग रख दी। जी हाँ और श्रीदेवी के इश्क में पड़े बोनी कपूर ने फौरन उनकी मां की बात मान ली और 'मिस्टर इंडिया' के लिए श्रीदेवी को साइन कर लिया। कहा जाता है शुरुआत में श्रीदेवी , बोनी कपूर पर कोई ध्यान नहीं देती थी लेकिन इसी बीच जब उनकी मां की तबियत खराब हुई तो उस कठिन वक्त में बोनी कपूर ने उनका बहुत साथ दिया और इसके बाद उनकी मां के निधन के वो काफी करीब आ गए और दोनों ने एक दूसरे को अपना हमसफर बनाने का फैसला कर लिया। जी हैं और इसके बाद दोनो ने साल एक हज़ार नौ सौ छियानवे में शादी कर ली। अब श्रीदेवी इस दुनिया में नहीं हैं और बोनी कपूर अपनी दोनों बेटियों जाह्नवी कपूर और ख़ुशी कपूर के साथ रह रहे हैं।
- (निमिष गंगराड़े) 10 मई 2022, नई दिल्ली । ग्रीष्मकालीन फसलों की बुवाई 71 लाख हेक्टेयर से अधिक - कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय , भारत सरकार द्वारा गत सप्ताह जारी ताजा आंकड़ों में बताया गया है कि 71. 88 लाख हेक्टेयर में ग्रीष्म फसलें बोई गई हैं। पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में बुवाई में कुल मिलाकर 4. 4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। ग्रीष्म दलहनी फसलों में पिछले वर्ष के इसी सप्ताह की तुलना में 18 प्रतिशत की सर्वाधिक वृद्धि दर्ज की गई है। कृषक जगत द्वारा विश्लेषण की गई साप्ताहिक रिपोर्ट से पता चलता है कि पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान 17. 21 लाख हेक्टेयर की तुलना में लगभग 20. 38 लाख हेक्टेयर क्षेत्र कवरेज हो गया है। यह कवरेज मुख्य रूप से मध्य प्रदेश राज्य (8. 85 लाख हेक्टेयर), ओडिशा (2. 61 लाख हेक्टेयर) और बिहार (2. 06 लाख हेक्टेयर) में है। वहीं ग्रीष्मकालीन धान में 3. 6 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है। धान का रकबा 29. 71 लाख हेक्टेयर है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान 30. 83 लाख हेक्टेयर था। उच्चतम रकबे वाले शीर्ष तीन राज्य पश्चिम बंगाल (9. 27 लाख हेक्टेयर), तेलंगाना (6. 75 लाख हेक्टेयर) और कर्नाटक (3. 00 लाख हेक्टेयर) हैं। भारत में गर्मियों की फसल बुवाई में विभिन्न बाधाएं होती हैं जैसे बुवाई के लिए कम समय अवधि, सिंचाई की कमी, आदि। गर्मियों में खेती के लिए इन बाधाओं के बावजूद, बढ़ा हुआ क्षेत्रफल उत्साहजनक है। केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) साप्ताहिक आधार पर देश के 140 जलाशयों के जल संग्रहण की निगरानी कर रहा है। पिछले सप्ताह कृषक जगत को प्राप्त जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार भारत पिछले साल की तुलना में बेहतर समग्र भंडारण स्थिति में है। पिछले 10 वर्षों के इसी अवधि के दौरान औसत भंडारण की तुलना में स्थिति भी बेहतर है। 28 अप्रैल 2022 तक, लाइव स्टोरेज 63. 31 बिलियन क्यूबिक मीटर है जो पिछले साल के स्टोरेज का 108 फीसदी और पिछले 10 सालों के औसत का 128 फीसदी है।
- दस मई दो हज़ार बाईस, नई दिल्ली । ग्रीष्मकालीन फसलों की बुवाई इकहत्तर लाख हेक्टेयर से अधिक - कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय , भारत सरकार द्वारा गत सप्ताह जारी ताजा आंकड़ों में बताया गया है कि इकहत्तर. अठासी लाख हेक्टेयर में ग्रीष्म फसलें बोई गई हैं। पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में बुवाई में कुल मिलाकर चार. चार प्रतिशत की वृद्धि हुई है। ग्रीष्म दलहनी फसलों में पिछले वर्ष के इसी सप्ताह की तुलना में अट्ठारह प्रतिशत की सर्वाधिक वृद्धि दर्ज की गई है। कृषक जगत द्वारा विश्लेषण की गई साप्ताहिक रिपोर्ट से पता चलता है कि पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान सत्रह. इक्कीस लाख हेक्टेयर की तुलना में लगभग बीस. अड़तीस लाख हेक्टेयर क्षेत्र कवरेज हो गया है। यह कवरेज मुख्य रूप से मध्य प्रदेश राज्य , ओडिशा और बिहार में है। वहीं ग्रीष्मकालीन धान में तीन. छः प्रतिशत की गिरावट देखी गई है। धान का रकबा उनतीस. इकहत्तर लाख हेक्टेयर है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान तीस. तिरासी लाख हेक्टेयर था। उच्चतम रकबे वाले शीर्ष तीन राज्य पश्चिम बंगाल , तेलंगाना और कर्नाटक हैं। भारत में गर्मियों की फसल बुवाई में विभिन्न बाधाएं होती हैं जैसे बुवाई के लिए कम समय अवधि, सिंचाई की कमी, आदि। गर्मियों में खेती के लिए इन बाधाओं के बावजूद, बढ़ा हुआ क्षेत्रफल उत्साहजनक है। केंद्रीय जल आयोग साप्ताहिक आधार पर देश के एक सौ चालीस जलाशयों के जल संग्रहण की निगरानी कर रहा है। पिछले सप्ताह कृषक जगत को प्राप्त जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार भारत पिछले साल की तुलना में बेहतर समग्र भंडारण स्थिति में है। पिछले दस वर्षों के इसी अवधि के दौरान औसत भंडारण की तुलना में स्थिति भी बेहतर है। अट्ठाईस अप्रैल दो हज़ार बाईस तक, लाइव स्टोरेज तिरेसठ. इकतीस बिलियन क्यूबिक मीटर है जो पिछले साल के स्टोरेज का एक सौ आठ फीसदी और पिछले दस सालों के औसत का एक सौ अट्ठाईस फीसदी है।
UP News: ज्योतिबा फूले की आज जयंती है। ऐसे में लोग उन्हें श्रद्धांजली दे रहे हैं। इसी कड़ी में बीएसपी सुप्रीमों मायावती ने ज्योतिबा फूले को श्रद्धांजलि अर्पित की है। उन्होंने कहा कि वो महान क्रांतिकारी थे साथ ही उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में काफी बदलाव किया था। बीजेपी पर निशाना साधते हुए मायावती ने कहा कि जाति की राजनीति करने वालों को बस चुनाव के समय ऐसे क्रांतिकारी याद आते हैं। बीएसपी के शासन में ज्योतिबा फूले के लिए काम किया गया। 1. देश में सामाजिक क्रान्ति के पितामह तथा नारी शिक्षा व नारी मुक्ति की ज्वाला की अपने घर से ही शुरूआत करने का मानवतावादी इतिहास रचकर उसके लिए आजीवन कड़ा संघर्ष करके अमर हो जाने वाले देश के महान सपूत महात्मा ज्योतिबा फुले को आज उनकी जयंती पर शत्-शत् नमन व अपार श्रद्धा सुमन अर्पित। ज्योतिबा फूले का जीवन काफी संघर्षों में बीता। महज एक साल की ही उम्र में उनकी मां का निधन हो गया था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा मराठी में हुई। हालांकि कुछ विशेष कारणों से उनके पढ़ाई में गैप आ गया। 21 साल की उम्र में उन्होंने इंग्लिश मीडियम से सातवीं की पढ़ाई पूरी की थी। वहीं 1840 में उनकी शादी सावित्री बाई से हुई थी। बताया जाता है कि 1984 में वो किसी ब्राहमण दोस्त के यहां गए थे। जहां इनका काफी अपमान हुआ। इसके बाद उन्होंने ठाना कि समाज से वो असमानता को उखाड़ फेंकेंगे। इसके बाद वो छुआछूत को लेकर वो समाज में काफी सुधार के लिए जाने गए।
UP News: ज्योतिबा फूले की आज जयंती है। ऐसे में लोग उन्हें श्रद्धांजली दे रहे हैं। इसी कड़ी में बीएसपी सुप्रीमों मायावती ने ज्योतिबा फूले को श्रद्धांजलि अर्पित की है। उन्होंने कहा कि वो महान क्रांतिकारी थे साथ ही उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में काफी बदलाव किया था। बीजेपी पर निशाना साधते हुए मायावती ने कहा कि जाति की राजनीति करने वालों को बस चुनाव के समय ऐसे क्रांतिकारी याद आते हैं। बीएसपी के शासन में ज्योतिबा फूले के लिए काम किया गया। एक. देश में सामाजिक क्रान्ति के पितामह तथा नारी शिक्षा व नारी मुक्ति की ज्वाला की अपने घर से ही शुरूआत करने का मानवतावादी इतिहास रचकर उसके लिए आजीवन कड़ा संघर्ष करके अमर हो जाने वाले देश के महान सपूत महात्मा ज्योतिबा फुले को आज उनकी जयंती पर शत्-शत् नमन व अपार श्रद्धा सुमन अर्पित। ज्योतिबा फूले का जीवन काफी संघर्षों में बीता। महज एक साल की ही उम्र में उनकी मां का निधन हो गया था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा मराठी में हुई। हालांकि कुछ विशेष कारणों से उनके पढ़ाई में गैप आ गया। इक्कीस साल की उम्र में उन्होंने इंग्लिश मीडियम से सातवीं की पढ़ाई पूरी की थी। वहीं एक हज़ार आठ सौ चालीस में उनकी शादी सावित्री बाई से हुई थी। बताया जाता है कि एक हज़ार नौ सौ चौरासी में वो किसी ब्राहमण दोस्त के यहां गए थे। जहां इनका काफी अपमान हुआ। इसके बाद उन्होंने ठाना कि समाज से वो असमानता को उखाड़ फेंकेंगे। इसके बाद वो छुआछूत को लेकर वो समाज में काफी सुधार के लिए जाने गए।
२१. द्वितीय सर्पदश ( बिसहर) खण्ड 'कड् केहूं' किच्छु 'देइ मोकरावा' दोसु भुवंगहि लाग । 'कर्त्रानि नोंदि' तुम्ह 'सूति' बांदा 'सपनहि भएउ सुहागु ।। सन्दर्भ - मै० पत्र २६६, म० पत्र १६८, भो० पत्र ३६ ( नवीन ), बी० १०८६-१०६१। म० में इस कडवक के बाद तर्क नाग मेस' है, जो अगले कडवक का है । भो० में पूर्ववर्ती कडवक के नीचे तर्क 'के' रे कुदिन' है, जो इसी कडवक का है । पाठान्तर - (१) १. बी० कैर । २. भो० मई । ३. बी० कै सरापु, म० कइ कराप । ४. ० मैना ५०का । (२) १. बी० के कुटंब २. बो० कै । ( ३ ) १. वी०परी । (घरी - फ़ा० ) । २. भै० गा, बी० कै । २. भो० कै मई, बी० कै हम । ३. मै० कुसगुन कुसगुन, बी० कुसुगनि । (४) १. बी० बर भयो उचाटु दुपायों । २. बी० कौन । ३. म० हउं, बी० मैं । ४. चो०] पार्यो । ( ५ ) १. बी० रु । । २. म० भो० चांद । ३. भो निदोषी । ४. बी० कै रु । (६) १.३० कई के बी० के काहू । २. म० देइ मोगलावा, भो० देइ मोगराए, बी० दौ सुकरावा । (७) १. बी० कौन नींद । २. मै० सूती, बी० सोवोहु । २. मै० सपनेई भयेउ, बी० सुपर्ने भयो । अर्थ - - (१) "या तो किसी बुरे दिन को पायंत रक्खा ( प्रस्थान किया ), अथवा हम पर मांजरी ( मैना) का कलाप ( दुःखित होने का प्रभाव ) पड़ा है ? (२) अथवा, मेरे कुटुंबियों ने जी भारी किया है ? अथवा, मेरी माता ने मुझे शाप दिया है ? ( ३ ) अथवा, [ यात्रा की ] घड़ी निर्धारित करते हुए पंडित ने भूल की है ? अथवा, हमने कुशकुनों में प्रयाण किया है ? ४ ) इतना बड़ा ( इतनी बड़ी अवस्था ) का हो गया हूं, [किन्तु] मैंने चींटे को भी दुःखित नहीं किया है; [तब ] यह कौन-सा पाप ( किस पाप का भोग ) हे दैव, मैंने पाया है ? ( ५ ) महर की यह दुहिता निर्दोष नारी है, [फिर] किस निपूती के द्वारा चांदा कोसी गई है ? ( ६ ) अथवा, किसी ने कुछ दे खिला) कर इसे मुक्त किया ( आने दिया ), और दोष भुजंग को लगा है ? ( ७ ) ऐ चांदा, तुम कौन-सी निद्रा में सो गई हो कि स्वप्न ही मेरा सौभाग्य हुआ है ? नाग भेस होइ 'के' धनि 'हरी' । 'लोरहि' राम अवस्था परी । रामहि हनिरंतु 'भएड संघाता' । मोहि न 'कोइ' विनु दई विधाता ।
इक्कीस. द्वितीय सर्पदश खण्ड 'कड् केहूं' किच्छु 'देइ मोकरावा' दोसु भुवंगहि लाग । 'कर्त्रानि नोंदि' तुम्ह 'सूति' बांदा 'सपनहि भएउ सुहागु ।। सन्दर्भ - मैशून्य पत्र दो सौ छयासठ, मशून्य पत्र एक सौ अड़सठ, भोशून्य पत्र छत्तीस , बीशून्य एक हज़ार छियासी-एक हज़ार इकसठ। मशून्य में इस कडवक के बाद तर्क नाग मेस' है, जो अगले कडवक का है । भोशून्य में पूर्ववर्ती कडवक के नीचे तर्क 'के' रे कुदिन' है, जो इसी कडवक का है । पाठान्तर - एक. बीशून्य कैर । दो. भोशून्य मई । तीन. बीशून्य कै सरापु, मशून्य कइ कराप । चार. शून्य मैना पचासका । एक. बीशून्य के कुटंब दो. बोशून्य कै । एक. वीशून्यपरी । । दो. भैशून्य गा, बीशून्य कै । दो. भोशून्य कै मई, बीशून्य कै हम । तीन. मैशून्य कुसगुन कुसगुन, बीशून्य कुसुगनि । एक. बीशून्य बर भयो उचाटु दुपायों । दो. बीशून्य कौन । तीन. मशून्य हउं, बीशून्य मैं । चार. चोशून्य] पार्यो । एक. बीशून्य रुपया । । दो. मशून्य भोशून्य चांद । तीन. भो निदोषी । चार. बीशून्य कै रु । एक.तीस कई के बीशून्य के काहू । दो. मशून्य देइ मोगलावा, भोशून्य देइ मोगराए, बीशून्य दौ सुकरावा । एक. बीशून्य कौन नींद । दो. मैशून्य सूती, बीशून्य सोवोहु । दो. मैशून्य सपनेई भयेउ, बीशून्य सुपर्ने भयो । अर्थ - - "या तो किसी बुरे दिन को पायंत रक्खा , अथवा हम पर मांजरी का कलाप पड़ा है ? अथवा, मेरे कुटुंबियों ने जी भारी किया है ? अथवा, मेरी माता ने मुझे शाप दिया है ? अथवा, [ यात्रा की ] घड़ी निर्धारित करते हुए पंडित ने भूल की है ? अथवा, हमने कुशकुनों में प्रयाण किया है ? चार ) इतना बड़ा का हो गया हूं, [किन्तु] मैंने चींटे को भी दुःखित नहीं किया है; [तब ] यह कौन-सा पाप हे दैव, मैंने पाया है ? महर की यह दुहिता निर्दोष नारी है, [फिर] किस निपूती के द्वारा चांदा कोसी गई है ? अथवा, किसी ने कुछ दे खिला) कर इसे मुक्त किया , और दोष भुजंग को लगा है ? ऐ चांदा, तुम कौन-सी निद्रा में सो गई हो कि स्वप्न ही मेरा सौभाग्य हुआ है ? नाग भेस होइ 'के' धनि 'हरी' । 'लोरहि' राम अवस्था परी । रामहि हनिरंतु 'भएड संघाता' । मोहि न 'कोइ' विनु दई विधाता ।
Firecrackers smoke impact: अगर आप के घर में कोई बच्चा अस्थमा से पीड़ित है तो आप भलीभांति ट्रिगर्स को समझते होंगे. वे चीजें जो अस्थमा के लक्षणों को और बदतर बना देती हैं, जैसे-ठंड का मौसम, वायु प्रदूषण, पालतू जानवरों की रूसी, या किसी प्रकार का धुंआ. दिवाली के समय वायु प्रदूषण काफी ज्यादा बढ़ जाता है इससे अस्थमा मरीजों को दिक्कत हो सकती है. पटाखे के धुएं से होने वाले वायु प्रदूषण से हमारे स्वास्थ्य को भी भारी नुकसान होता है. Firecrackers smoke impact: दिवाली का त्योहार आने वाला है. अगर दिवाली में पटाखे न छुटाए जाए तो कुछ अधूरा सा लगता है. हालांकि पटाखों के धुए की वजह से प्रदूषण को भारी नुकसान पहुचंता है और वायु प्रदूषण भी जमकर बढ़ जाता है. पटाखे के धुएं से होने वाले वायु प्रदूषण से हमारे स्वास्थ्य को भी भारी नुकसान होता है. वायु प्रदूषण अस्थमा के मरीजों और बच्चों के स्वास्थ्य को बहुत अधिक नुकसान पहुंचता है. पटाखों का धुंआ वैसे तो सभी के लिए हानिकारक होता है लेकिन यह अस्थमा रोगी, पांच साल से कम उम्र के बच्चों और 60 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए कई तरह की गंभीर बीमारियां उत्पन्न कर सकता है. इसके साथ ही अगर घर में गर्भवती महिलाएं हैं तो उन्हें पटाखों के धुएं से बचने की सख्त जरूरत है.
Firecrackers smoke impact: अगर आप के घर में कोई बच्चा अस्थमा से पीड़ित है तो आप भलीभांति ट्रिगर्स को समझते होंगे. वे चीजें जो अस्थमा के लक्षणों को और बदतर बना देती हैं, जैसे-ठंड का मौसम, वायु प्रदूषण, पालतू जानवरों की रूसी, या किसी प्रकार का धुंआ. दिवाली के समय वायु प्रदूषण काफी ज्यादा बढ़ जाता है इससे अस्थमा मरीजों को दिक्कत हो सकती है. पटाखे के धुएं से होने वाले वायु प्रदूषण से हमारे स्वास्थ्य को भी भारी नुकसान होता है. Firecrackers smoke impact: दिवाली का त्योहार आने वाला है. अगर दिवाली में पटाखे न छुटाए जाए तो कुछ अधूरा सा लगता है. हालांकि पटाखों के धुए की वजह से प्रदूषण को भारी नुकसान पहुचंता है और वायु प्रदूषण भी जमकर बढ़ जाता है. पटाखे के धुएं से होने वाले वायु प्रदूषण से हमारे स्वास्थ्य को भी भारी नुकसान होता है. वायु प्रदूषण अस्थमा के मरीजों और बच्चों के स्वास्थ्य को बहुत अधिक नुकसान पहुंचता है. पटाखों का धुंआ वैसे तो सभी के लिए हानिकारक होता है लेकिन यह अस्थमा रोगी, पांच साल से कम उम्र के बच्चों और साठ साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए कई तरह की गंभीर बीमारियां उत्पन्न कर सकता है. इसके साथ ही अगर घर में गर्भवती महिलाएं हैं तो उन्हें पटाखों के धुएं से बचने की सख्त जरूरत है.
भोपालः मध्य प्रदेश की अभिनव योजना सीखो कमाओ योजना के तहत पंजीयन का सिलसिला आज शुरु हो गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश के युवाओं में क्षमता, ऊर्जा, प्रतिभा और टेलेंट है। उद्योगपति और व्यापारिक संस्थान इन्हें काम सिखाएंगे, तो वे उनके प्रतिष्ठान को मालामाल कर देंगे। मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और युवाओं के हितों को समान रूप से ध्यान में रखते हुए बनाई गई है। इससे युवाओं को काम सीखने का मौका मिलेगा और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को स्किल्ड मेनपावर की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। चौहान ने इस योजना की चर्चा करते हुए कहा, सीखो-कमाओ योजना का संक्षिप्त रूप एसकेवाय अर्थात् स्काय मतलब आसमान है। युवा आगे आएं, योजना से जुड़ें, आसमान में ऊँची उड़ान भरें और अपने जीवन को सफल और सार्थक बनाए। मैं युवाओं के सपनों को किसी भी कीमत पर मरने नहीं दूंगा। चिड़िया अपने बच्चों को घोसला नहीं पंख देती है, मैं आज पंख देने आया हूं और इसीलिए मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना लागू की गई है। उन्होंने आईटीआई उत्तीर्ण श्री राज कुशवाह का स्वयं योजना के पोर्टल पर पंजीयन कराकर योजना का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि युवाओं को रोजगार के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास जारी हैं। स्वतंत्रता दिवस पर एक साल में एक लाख सरकारी नौकरियां देने की बात कही गई थी। अब तक 55 हजार भर्तियां हो चुकी हैं और आगामी 15 अगस्त से पहले एक लाख से अधिक शासकीय भर्तियां हो जाएंगी। रोजगार के लिए मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना, मुद्रा योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम आदि में स्व-रोजगार के लिए ऋण की व्यवस्था की गई है। युवा स्वयं का स्टार्टअप आरंभ कर सकते हैं। प्रदेश में अब तक 2800 स्टार्टअप कार्यरत हैं। मुख्यमंत्री चौहान ने मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि योजना में 18 से 29 वर्ष के युवा पात्र होंगे। मध्यप्रदेश के स्थायी निवासी योजना का लाभ ले सकेंगे। कक्षा 12वीं उत्तीर्ण को आठ हजार रूपए, आईटीआई उत्तीर्ण को 8500, डिप्लोमा उत्तीर्ण को नौ हजार रुपये, स्नातक या उच्च शिक्षित को 10 हजार रूपए की सम्मान राशि प्रदान की जाएगी। युवाओं को रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध कराने के लिए 700 कोर्सेस चयनित किए गए हैं। इसमें सभी प्रकार के उद्योग, व्यापारिक प्रतिष्ठान, सर्विस सेक्टर आदि को शामिल किया गया है। पोर्टल पर युवा अपनी योग्यता और रूचि के अनुसार गतिविधि चुन सकेंगे। मुख्यमंत्री चौहान ने पंजीकरण की प्रक्रिया को भी युवाओं को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि समग्र पोर्टल पर आधार ई-केवायसी आवश्यक है। पंजीयन के लिए मोबाइल नंबर एवं ई-मेल आईडी जरूरी है और बैंक खाता आधार से लिंक हो एवं डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर में सक्षम होना चाहिए। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने युवाओं के प्रश्नों और जिज्ञासाओं का समाधान भी किया। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि योजना में अब तक 10 हजार 432 प्रतिष्ठानों ने पंजीयन करा लिया है और 34 हजार 785 वेकेंसी चिन्हित हैं। प्रदेश के साथ ही प्रदेश के बाहर के प्रतिष्ठानों को भी योजना से जोड़ा जा रहा है। यह देश और दुनिया की अद्भुत और अनूठी योजना है। योजना के क्रियान्वयन से जो फीडबेक सामने आएगा, उसके आधार पर भविष्य में आवश्यक सुधार भी किया जाएगा। हम युवाओं के साथ आगे बढ़ेंगे और मध्यप्रदेश को ऊँचाइयों पर पहुंचाएंगे। सांसद वी. डी. शर्मा ने कहा कि आज का दिन मध्यप्रदेश के लिए सौभाग्यशाली है। यह योजना उद्योगपतियों और युवाओं के लिए लाभप्रद है। इससे युवाओं को उचित प्लेटफार्म मिलेगा। उद्योगों तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को उपयुक्त इंटर्न मिल सकेंगे। कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना पर लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया।
भोपालः मध्य प्रदेश की अभिनव योजना सीखो कमाओ योजना के तहत पंजीयन का सिलसिला आज शुरु हो गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश के युवाओं में क्षमता, ऊर्जा, प्रतिभा और टेलेंट है। उद्योगपति और व्यापारिक संस्थान इन्हें काम सिखाएंगे, तो वे उनके प्रतिष्ठान को मालामाल कर देंगे। मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और युवाओं के हितों को समान रूप से ध्यान में रखते हुए बनाई गई है। इससे युवाओं को काम सीखने का मौका मिलेगा और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को स्किल्ड मेनपावर की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। चौहान ने इस योजना की चर्चा करते हुए कहा, सीखो-कमाओ योजना का संक्षिप्त रूप एसकेवाय अर्थात् स्काय मतलब आसमान है। युवा आगे आएं, योजना से जुड़ें, आसमान में ऊँची उड़ान भरें और अपने जीवन को सफल और सार्थक बनाए। मैं युवाओं के सपनों को किसी भी कीमत पर मरने नहीं दूंगा। चिड़िया अपने बच्चों को घोसला नहीं पंख देती है, मैं आज पंख देने आया हूं और इसीलिए मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना लागू की गई है। उन्होंने आईटीआई उत्तीर्ण श्री राज कुशवाह का स्वयं योजना के पोर्टल पर पंजीयन कराकर योजना का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि युवाओं को रोजगार के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास जारी हैं। स्वतंत्रता दिवस पर एक साल में एक लाख सरकारी नौकरियां देने की बात कही गई थी। अब तक पचपन हजार भर्तियां हो चुकी हैं और आगामी पंद्रह अगस्त से पहले एक लाख से अधिक शासकीय भर्तियां हो जाएंगी। रोजगार के लिए मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना, मुद्रा योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम आदि में स्व-रोजगार के लिए ऋण की व्यवस्था की गई है। युवा स्वयं का स्टार्टअप आरंभ कर सकते हैं। प्रदेश में अब तक दो हज़ार आठ सौ स्टार्टअप कार्यरत हैं। मुख्यमंत्री चौहान ने मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि योजना में अट्ठारह से उनतीस वर्ष के युवा पात्र होंगे। मध्यप्रदेश के स्थायी निवासी योजना का लाभ ले सकेंगे। कक्षा बारहवीं उत्तीर्ण को आठ हजार रूपए, आईटीआई उत्तीर्ण को आठ हज़ार पाँच सौ, डिप्लोमा उत्तीर्ण को नौ हजार रुपये, स्नातक या उच्च शिक्षित को दस हजार रूपए की सम्मान राशि प्रदान की जाएगी। युवाओं को रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध कराने के लिए सात सौ कोर्सेस चयनित किए गए हैं। इसमें सभी प्रकार के उद्योग, व्यापारिक प्रतिष्ठान, सर्विस सेक्टर आदि को शामिल किया गया है। पोर्टल पर युवा अपनी योग्यता और रूचि के अनुसार गतिविधि चुन सकेंगे। मुख्यमंत्री चौहान ने पंजीकरण की प्रक्रिया को भी युवाओं को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि समग्र पोर्टल पर आधार ई-केवायसी आवश्यक है। पंजीयन के लिए मोबाइल नंबर एवं ई-मेल आईडी जरूरी है और बैंक खाता आधार से लिंक हो एवं डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर में सक्षम होना चाहिए। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने युवाओं के प्रश्नों और जिज्ञासाओं का समाधान भी किया। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि योजना में अब तक दस हजार चार सौ बत्तीस प्रतिष्ठानों ने पंजीयन करा लिया है और चौंतीस हजार सात सौ पचासी वेकेंसी चिन्हित हैं। प्रदेश के साथ ही प्रदेश के बाहर के प्रतिष्ठानों को भी योजना से जोड़ा जा रहा है। यह देश और दुनिया की अद्भुत और अनूठी योजना है। योजना के क्रियान्वयन से जो फीडबेक सामने आएगा, उसके आधार पर भविष्य में आवश्यक सुधार भी किया जाएगा। हम युवाओं के साथ आगे बढ़ेंगे और मध्यप्रदेश को ऊँचाइयों पर पहुंचाएंगे। सांसद वी. डी. शर्मा ने कहा कि आज का दिन मध्यप्रदेश के लिए सौभाग्यशाली है। यह योजना उद्योगपतियों और युवाओं के लिए लाभप्रद है। इससे युवाओं को उचित प्लेटफार्म मिलेगा। उद्योगों तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को उपयुक्त इंटर्न मिल सकेंगे। कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना पर लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया।
राजस्थान में अशोक गहलोत की सरकार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। राजस्थान के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट बागी तेवर अख्तियार किए हुए हैं। इस बीच कांग्रेस उन्हें मनाने की भी कोशिश नहीं कर रही है। इसके बाद अटकलें लगाई जाने लगी हैं कि पायलट बीजेपी का दामन थाम सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो मध्य प्रदेश के बाद कांग्रेस के हाथ से एक और राज्य जा सकता है। पायलट ने सोमवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर से बुलाई गई कांग्रेस विधायकों की अहम बैठक में जाने से इनकार कर दिया, जिसके बाद यह लगने लगा है कि पायलट राजस्थान में सत्ता का पासा पलट सकते हैं। बीजेपी इस मसले को लेकर अब तक खामोश है। हालांकि, पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से अपने नेताओं से हालात पर लगातार नजर रखने के लिए कहा गया है।
राजस्थान में अशोक गहलोत की सरकार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। राजस्थान के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट बागी तेवर अख्तियार किए हुए हैं। इस बीच कांग्रेस उन्हें मनाने की भी कोशिश नहीं कर रही है। इसके बाद अटकलें लगाई जाने लगी हैं कि पायलट बीजेपी का दामन थाम सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो मध्य प्रदेश के बाद कांग्रेस के हाथ से एक और राज्य जा सकता है। पायलट ने सोमवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर से बुलाई गई कांग्रेस विधायकों की अहम बैठक में जाने से इनकार कर दिया, जिसके बाद यह लगने लगा है कि पायलट राजस्थान में सत्ता का पासा पलट सकते हैं। बीजेपी इस मसले को लेकर अब तक खामोश है। हालांकि, पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से अपने नेताओं से हालात पर लगातार नजर रखने के लिए कहा गया है।
मुंबई :मुंबई पुलिस 26 पाकिस्तानियों के लापता हो जाने के बाद हाई अलर्ट पर है। ये पाकिस्तानी पिछले दो-तीन हफ्ते से लापता हैं। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार गायब पाकिस्तानियों के साथ पिछले 10 साल से जुहू में चाय की दुकान चलाने वाला एक शख्स भी शामिल है। एचटी की रिपोर्ट के अनुसार भारत में आने वाले पाकिस्तानियों के लिए जरूरी सी-फॉर्म में इन सभी ने उन लोगों के बारे में जानकारी नहीं दी थी जिनसे वो मिलने आए थे और जहां वो ठहरे थे। खुफिया एजेंसियों ने जब इन पाकिस्तानियों को तलाश शुरू की तो ये जानकारी सामने आयी। महाराष्ट्र की एंटी-टेररिज्म स्क्वैड (एटीएस) इन पाकिस्तानियों की तलाश कर रहा है। एटीएस को इन पाकिस्तानियों के लापता होने के बारे में खुफिया एजेंसियों से सुराग मिला। रिपोर्ट के अनुसार भारतीय एजेंसियों को ये सुराग पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलीजेंस (आईएसआई) में मौजूद अपने जासूसों से मिला। सी-फॉर्म में पाकिस्तान से भारत आने वालों को अपने रुकने की जगह, वह कितने दिन रुकेगा, पासपोर्ट और वीजा की कॉपी और आवासीय परमिट की प्रति के साथ बतानी होती है। इन 26 पाकिस्तानियों के सी-फॉर्म अधूरे पाने के बाद महाराष्ट्र एटीएस ने उनकी तलाश और सघन कर दी। महाराष्ट्र एटीएस मुंबई के सभी होटलों और लॉजों में इन लोगों की तलाश कर रही है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इंडियन मुजाहिद्दीन (आईएम) के कैडरों ने पिछले कुछ महीनों में मुंबई में रेकी की थी। रिपोर्टे के अनुसार इन कैडरों के कर्नाटक के भटकल का निवासी होने का संदेह है। माना जाता है कि आईएम के संस्थापक रिजाय शाहबंदरी उर्फ रियाज भटकल और उसका बड़ा भाई इकबाल अब पाकिस्तान में रहते हैं। भटकल के ही रहने वाले सुल्तान और शफी अरमर को भारत में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट का मुख्य रिक्रूटर माना जाता था। माना जाता है कि ये दोनों ही कुछ महीने पहले सीरिया में मारे गये थे।
मुंबई :मुंबई पुलिस छब्बीस पाकिस्तानियों के लापता हो जाने के बाद हाई अलर्ट पर है। ये पाकिस्तानी पिछले दो-तीन हफ्ते से लापता हैं। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार गायब पाकिस्तानियों के साथ पिछले दस साल से जुहू में चाय की दुकान चलाने वाला एक शख्स भी शामिल है। एचटी की रिपोर्ट के अनुसार भारत में आने वाले पाकिस्तानियों के लिए जरूरी सी-फॉर्म में इन सभी ने उन लोगों के बारे में जानकारी नहीं दी थी जिनसे वो मिलने आए थे और जहां वो ठहरे थे। खुफिया एजेंसियों ने जब इन पाकिस्तानियों को तलाश शुरू की तो ये जानकारी सामने आयी। महाराष्ट्र की एंटी-टेररिज्म स्क्वैड इन पाकिस्तानियों की तलाश कर रहा है। एटीएस को इन पाकिस्तानियों के लापता होने के बारे में खुफिया एजेंसियों से सुराग मिला। रिपोर्ट के अनुसार भारतीय एजेंसियों को ये सुराग पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलीजेंस में मौजूद अपने जासूसों से मिला। सी-फॉर्म में पाकिस्तान से भारत आने वालों को अपने रुकने की जगह, वह कितने दिन रुकेगा, पासपोर्ट और वीजा की कॉपी और आवासीय परमिट की प्रति के साथ बतानी होती है। इन छब्बीस पाकिस्तानियों के सी-फॉर्म अधूरे पाने के बाद महाराष्ट्र एटीएस ने उनकी तलाश और सघन कर दी। महाराष्ट्र एटीएस मुंबई के सभी होटलों और लॉजों में इन लोगों की तलाश कर रही है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इंडियन मुजाहिद्दीन के कैडरों ने पिछले कुछ महीनों में मुंबई में रेकी की थी। रिपोर्टे के अनुसार इन कैडरों के कर्नाटक के भटकल का निवासी होने का संदेह है। माना जाता है कि आईएम के संस्थापक रिजाय शाहबंदरी उर्फ रियाज भटकल और उसका बड़ा भाई इकबाल अब पाकिस्तान में रहते हैं। भटकल के ही रहने वाले सुल्तान और शफी अरमर को भारत में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट का मुख्य रिक्रूटर माना जाता था। माना जाता है कि ये दोनों ही कुछ महीने पहले सीरिया में मारे गये थे।
माई अजितप्रसादजी २२ जनवरी सन् १९९० को जयपुर में पहले पहल मेरी जान-पहचान बाबू अजितप्रसादज़ी से हुई । वहा उनके साथ उनकी बड़ी बेटी सरला भी आई हुई थी । २२ जनवरी सन् १० क़ो समाज में मेरी क्या जगह थी यह सवाल अगर कोई मुझसे पूछने लगे तो मै यही जवाब दूंगा कि कहीं कुछ भी नही । ऐसे न कुछ आदमी को अजितप्रसादजी जैसा समाज में प्रतिष्ठित आदमी दस मिनिट मे इतना अपनाले कि दूसरे ही महीने में इस बात की तैय्यारी हो जाय कि मेरा और अजितप्रसादजी का कुटुंब साथ-साथ यात्रा के लिए निकल पड़े, तब सिवा इसके क्या कहा जा सकता है कि अजितप्रसादजी का मन शीशे की तरह साफ था। स्वच्छ और निर्मल मन से इतना ही नफा नहीं होता कि दूसरे उसकी स्वच्छता को जानकर उसकी ओर खिचे, पर यह भी होता है कि वह स्वच्छ मन दूसरे के मन मे प्रवेश करके उस को समझ लेता है और हो सके तो उसे कुछ स्वच्छता भी देता है और फिर दो दिल एक होने में देर नहीं लगती। अजितप्रसादजी की बेटी सरला उन दिनो बीस वरस की रही होगी। वह नाम की सरला नही, स्वभाव की सरला थी और आज के दिन तक वैसे ही सरल स्वभाव की बनी हुई है। जिस यात्रा की बात मैने ऊपर कही है उस में वह साथ थी । उस यात्रा का जिक्र इस लेख में शायद ही कुछ रहे, वह अलग लेख का विषय है जिसका जिक्र फिर कभी किया जायगा । हा तो बाबू अजितप्रसादजी ने अपने स्वच्छ मनका मेरे मन पर जो असर डाला वह उनके स्वर्गवास होने तक कायम रहा और उनसे मेरी मित्रता और निकटता दिन दिन बढ़ती ही रही । ऋषियों ने सज्जन अर्जुनलाल सेठी को हम आदमी कहे, या देश की आजादी का दीवाना कहे, हम अर्जुनलाल सेठी को हिन्दुस्तानी कहें, या आजादी के दीपक का परवाना कहें जो अपने २५ वर्ष के इकलौते बेटे को मौतके बिस्तर पर छोड़कर पं० सुन्दरलालके एक मामूली तार पर दौड़ा हुआ बम्बई पहुँचता है, पर बेटे के मर जाने के बाद भी उसे देश का काम छोड़ कर घर लौटने की जल्दी नहीं होती। कोई यह न समझे कि उसे घर से मोह नहीं था, उसे बेटे से प्यार नही था, वह इतना प्यारा था, और इतना महन्वती था कि उस जैसे पति के लिए पत्नियाँ. तरस सकती है, उस जैसे वाप के लिए बेटे जानपर खेल सकते है, उस जैसे दोस्त के लिए दोस्त खून पसीना एक कर सकते हैं, उस जैसे नेता के लिए अनुयायी सरके बल चल सकते है । अर्जुनलाल सेठी ने त्याग का व्रत नही लिया, त्याग किसी से सोखा नही, क़िसी नेता का व्याख्यान सुन कर जोश में आकर उस ने त्याग को नही अपनाया । त्याग तो वह मां के पेट से लाया था, त्याग तो उस के जन्म-घुट्टी में मिला था, त्याग को तो उसने मां के स्तन से पिया था, इसलिए त्याग करते हुए उसे त्याग का गीत नही गाना पड़ता था और त्यागी होते हुए दूसरो पर त्याग के घमण्ड का रोब नही जमाना पड़ता था । त्यागी का बाना पहनने की उसे जरूरत हो कहाँ थी ? इन पक्तियों के पढ़नेवालो मे हो सकता है अनेकों ऐसे निकल आवे जो खुले नही तो मन ही मन यह i कहने लगे कि रुपये तो हम से भी मगाए थे, पर यह वही बता सकते है जो उसके साथ रहे हो कि उसने उन रुपयो का क्या किया था । अर्जुनलाल सेठी के त्याग की बाते ऐसी है जिन को आज भी हम साफ-साफ कहने के लिए तैयार नहीं । चूकि यह अच्छा ही है कि अभी वे कुछ दिनी और अजानकारीके गड्ढे में पड़े रहे, पर हम अपने पढनेवालोको किसी दूसरी तरहसे समझाए देते है । कलकत्ता के मशहूर देशभक्त श्री श्यामसुन्दर चक्रवर्ती जो कि चितरंजनदासजीकी टक्करके आदमी थे उनसे मिलने के लिए हम १० सुन्दरलालजीके साथ कलकत्ता पहुँचे । श्मामसुन्दर चक्रवर्ती 'सवेंट' नामका एक. अंग्रेजी दैनिक निकालते थे । हम वही उनसे उनके दफ्तर में मिले । वे बड़ी मुहब्बतसे मिले और ऐसी खातिरदारी की मानो हम उनके माँ-जाये भाई हों। थोड़ी देर बाद वे हमे अपने घर ले गये और १६ वर्ष की लडकीको दिखांया जो वीमारीसे काटा हो गई थी और एकदम पीली पडी हुई थी । चक्रवती और लडकीकी मांसे वातों-बातोमे यह भी पता चला कि उम लडकीके लिए दवा और दूधका ठिकाना नही । तब हमने सोचा कि कुछ रुपये चक्रवर्तीको दे देने चाहिए । हम घरसे 'सर्वेट' के दफ्तर लौट ही रहे थे कि रास्ते में एक आदमीने चक्रवर्तीके नामका ५०० रु० का चेक दिया, चक्रवर्तीजी हमारे साथ उस चेकको लेकर पासके बॅकमे पहुँचे और ५०० रु० लिये । दफ्तरमे आये । पाँच मिनिटमे पूरे पाँच मौ खतम हो गये । 'सवेंट में काम करनेवालोकी २-३ महीनीको तनख्वाह चढी हुई थी । चक्रवर्तीकी नजरमें पहले वह आदमी थे जो देशकी आजादीके काममे जुटे हुए है न कि वह बीमार लडकी जो पलंगपर पड़ी थी। हमने जब यह देखा तो यही मुनासिव समझा कि चक्रवर्तीके हाथमे दिये हुए रुपये तो न कभी दवाका रूप ले सकेंगे और न कभी दूध वन सकेगे । इमसे यही ठीक होगा कि दवा खरीद कर दी जाय और दूधका कोई इन्तजाम कर दिया जाय । अगर कुछ देना हो तो लडकीकी माँके हाथ में दिया जाय । हमने यह भी सोचा कि लड़कीकी मा हिन्दू नारी है और हिन्दू पत्नी है, वह पति देवतासे कैसे छिपाव रख सकेगी और फिर उसके पास भी वह रुपया कैसे बच सकेगा । आखिर ऐसा ही इतजाम करना पड़ा कि जिससे सब झंझटोसे वचकर रुपये दूध और दवामे तवदील हो सके । वस, इस ऊपरकी कथासे समझ लीजिए कि सेठीजीके हाथ में पहुँचा हुआ रुपया जाने कहाँ-कहाँ और किस तरह बिखर जाता था और किस तरह कम-ज्यादा देशकी आजादीके दीपकका तेल बनकर जल जाता था । सारी संस्थाएँ एक-एक आदमीके बलपर चलती है और वह आदमी इधरउधरसे मांगकर ही रुपया लाता है पर जिनपर वह रुपया खर्च करता है उनपर सौ एहसान ज़माता है। इतना ही नहीं, वह तो प्लेटफार्मसे चिल्लाचिल्लाकर यह भी कहता है कि यह मैं ही हूँ जो इन भूखोका पेट भर रहा
माई अजितप्रसादजी बाईस जनवरी सन् एक हज़ार नौ सौ नब्बे को जयपुर में पहले पहल मेरी जान-पहचान बाबू अजितप्रसादज़ी से हुई । वहा उनके साथ उनकी बड़ी बेटी सरला भी आई हुई थी । बाईस जनवरी सन् दस क़ो समाज में मेरी क्या जगह थी यह सवाल अगर कोई मुझसे पूछने लगे तो मै यही जवाब दूंगा कि कहीं कुछ भी नही । ऐसे न कुछ आदमी को अजितप्रसादजी जैसा समाज में प्रतिष्ठित आदमी दस मिनिट मे इतना अपनाले कि दूसरे ही महीने में इस बात की तैय्यारी हो जाय कि मेरा और अजितप्रसादजी का कुटुंब साथ-साथ यात्रा के लिए निकल पड़े, तब सिवा इसके क्या कहा जा सकता है कि अजितप्रसादजी का मन शीशे की तरह साफ था। स्वच्छ और निर्मल मन से इतना ही नफा नहीं होता कि दूसरे उसकी स्वच्छता को जानकर उसकी ओर खिचे, पर यह भी होता है कि वह स्वच्छ मन दूसरे के मन मे प्रवेश करके उस को समझ लेता है और हो सके तो उसे कुछ स्वच्छता भी देता है और फिर दो दिल एक होने में देर नहीं लगती। अजितप्रसादजी की बेटी सरला उन दिनो बीस वरस की रही होगी। वह नाम की सरला नही, स्वभाव की सरला थी और आज के दिन तक वैसे ही सरल स्वभाव की बनी हुई है। जिस यात्रा की बात मैने ऊपर कही है उस में वह साथ थी । उस यात्रा का जिक्र इस लेख में शायद ही कुछ रहे, वह अलग लेख का विषय है जिसका जिक्र फिर कभी किया जायगा । हा तो बाबू अजितप्रसादजी ने अपने स्वच्छ मनका मेरे मन पर जो असर डाला वह उनके स्वर्गवास होने तक कायम रहा और उनसे मेरी मित्रता और निकटता दिन दिन बढ़ती ही रही । ऋषियों ने सज्जन अर्जुनलाल सेठी को हम आदमी कहे, या देश की आजादी का दीवाना कहे, हम अर्जुनलाल सेठी को हिन्दुस्तानी कहें, या आजादी के दीपक का परवाना कहें जो अपने पच्चीस वर्ष के इकलौते बेटे को मौतके बिस्तर पर छोड़कर पंशून्य सुन्दरलालके एक मामूली तार पर दौड़ा हुआ बम्बई पहुँचता है, पर बेटे के मर जाने के बाद भी उसे देश का काम छोड़ कर घर लौटने की जल्दी नहीं होती। कोई यह न समझे कि उसे घर से मोह नहीं था, उसे बेटे से प्यार नही था, वह इतना प्यारा था, और इतना महन्वती था कि उस जैसे पति के लिए पत्नियाँ. तरस सकती है, उस जैसे वाप के लिए बेटे जानपर खेल सकते है, उस जैसे दोस्त के लिए दोस्त खून पसीना एक कर सकते हैं, उस जैसे नेता के लिए अनुयायी सरके बल चल सकते है । अर्जुनलाल सेठी ने त्याग का व्रत नही लिया, त्याग किसी से सोखा नही, क़िसी नेता का व्याख्यान सुन कर जोश में आकर उस ने त्याग को नही अपनाया । त्याग तो वह मां के पेट से लाया था, त्याग तो उस के जन्म-घुट्टी में मिला था, त्याग को तो उसने मां के स्तन से पिया था, इसलिए त्याग करते हुए उसे त्याग का गीत नही गाना पड़ता था और त्यागी होते हुए दूसरो पर त्याग के घमण्ड का रोब नही जमाना पड़ता था । त्यागी का बाना पहनने की उसे जरूरत हो कहाँ थी ? इन पक्तियों के पढ़नेवालो मे हो सकता है अनेकों ऐसे निकल आवे जो खुले नही तो मन ही मन यह i कहने लगे कि रुपये तो हम से भी मगाए थे, पर यह वही बता सकते है जो उसके साथ रहे हो कि उसने उन रुपयो का क्या किया था । अर्जुनलाल सेठी के त्याग की बाते ऐसी है जिन को आज भी हम साफ-साफ कहने के लिए तैयार नहीं । चूकि यह अच्छा ही है कि अभी वे कुछ दिनी और अजानकारीके गड्ढे में पड़े रहे, पर हम अपने पढनेवालोको किसी दूसरी तरहसे समझाए देते है । कलकत्ता के मशहूर देशभक्त श्री श्यामसुन्दर चक्रवर्ती जो कि चितरंजनदासजीकी टक्करके आदमी थे उनसे मिलने के लिए हम दस सुन्दरलालजीके साथ कलकत्ता पहुँचे । श्मामसुन्दर चक्रवर्ती 'सवेंट' नामका एक. अंग्रेजी दैनिक निकालते थे । हम वही उनसे उनके दफ्तर में मिले । वे बड़ी मुहब्बतसे मिले और ऐसी खातिरदारी की मानो हम उनके माँ-जाये भाई हों। थोड़ी देर बाद वे हमे अपने घर ले गये और सोलह वर्ष की लडकीको दिखांया जो वीमारीसे काटा हो गई थी और एकदम पीली पडी हुई थी । चक्रवती और लडकीकी मांसे वातों-बातोमे यह भी पता चला कि उम लडकीके लिए दवा और दूधका ठिकाना नही । तब हमने सोचा कि कुछ रुपये चक्रवर्तीको दे देने चाहिए । हम घरसे 'सर्वेट' के दफ्तर लौट ही रहे थे कि रास्ते में एक आदमीने चक्रवर्तीके नामका पाँच सौ रुपयाशून्य का चेक दिया, चक्रवर्तीजी हमारे साथ उस चेकको लेकर पासके बॅकमे पहुँचे और पाँच सौ रुपयाशून्य लिये । दफ्तरमे आये । पाँच मिनिटमे पूरे पाँच मौ खतम हो गये । 'सवेंट में काम करनेवालोकी दो-तीन महीनीको तनख्वाह चढी हुई थी । चक्रवर्तीकी नजरमें पहले वह आदमी थे जो देशकी आजादीके काममे जुटे हुए है न कि वह बीमार लडकी जो पलंगपर पड़ी थी। हमने जब यह देखा तो यही मुनासिव समझा कि चक्रवर्तीके हाथमे दिये हुए रुपये तो न कभी दवाका रूप ले सकेंगे और न कभी दूध वन सकेगे । इमसे यही ठीक होगा कि दवा खरीद कर दी जाय और दूधका कोई इन्तजाम कर दिया जाय । अगर कुछ देना हो तो लडकीकी माँके हाथ में दिया जाय । हमने यह भी सोचा कि लड़कीकी मा हिन्दू नारी है और हिन्दू पत्नी है, वह पति देवतासे कैसे छिपाव रख सकेगी और फिर उसके पास भी वह रुपया कैसे बच सकेगा । आखिर ऐसा ही इतजाम करना पड़ा कि जिससे सब झंझटोसे वचकर रुपये दूध और दवामे तवदील हो सके । वस, इस ऊपरकी कथासे समझ लीजिए कि सेठीजीके हाथ में पहुँचा हुआ रुपया जाने कहाँ-कहाँ और किस तरह बिखर जाता था और किस तरह कम-ज्यादा देशकी आजादीके दीपकका तेल बनकर जल जाता था । सारी संस्थाएँ एक-एक आदमीके बलपर चलती है और वह आदमी इधरउधरसे मांगकर ही रुपया लाता है पर जिनपर वह रुपया खर्च करता है उनपर सौ एहसान ज़माता है। इतना ही नहीं, वह तो प्लेटफार्मसे चिल्लाचिल्लाकर यह भी कहता है कि यह मैं ही हूँ जो इन भूखोका पेट भर रहा
श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेनों में सवार होकर जा रहे मजदूर व कामगारों से टिकट के पैसे लेने से आए भूचाल के बाद रेलवे ने अब उनको निशुल्क बेज बिरयानी बांटना शुरू कर दिया है। आईआरसीसीटी बिरयानी के साथ यात्रियों को एक आचार, चम्मच व एक लीटर पानी की बोतल उपलब्ध करा रहा है। प्रतिदिन झांसी से चार ट्रेनें गुजर रही हैं। इनमें जो ट्रेनें दिन के वक्त गुजरतीं हैं, उनमें उक्त भोजन की व्यवस्था उपलब्ध कराई जा रही है। लॉकडाउन के लगातार बढ़ने के कारण लाखों लोग अभी अपने घर से दूसरे शहरों में फंसे हैं। इन लोगों की बढ़ती परेशानी को देखते हुए राज्य सरकारों की आपसी सहमति के बाद श्रमिक ट्रेनों का संचालन रविवार से शुरू कर दिया है। ये ट्रेनें एक राज्य के निर्धारित स्टेशन से संबंधित राज्य के तय स्टेशन तक सीधा भेजी जा रही हैं। दक्षिण भारत, महाराष्ट्र व गुजरात से प्रतिदिन तीन से चार ट्रेनें झांसी से गुजरकर लखनऊ व गोरखपुर की तरफ जा रही हैं। जो ट्रेनें दिन के वक्त झांसी से गुजरतीं हैं, उन ट्रेनों के यात्रियों को आईआरसीटीसी द्वारा बेज बिरयानी, एक अचार, एक चम्मच व एक लीटर पानी की बोतल दी जा रही है। अभी तक दो ट्रेनों में झांसी से दोपहर के भोजन में उक्त खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई गई। शाम को गुजरने वाली ट्रेनों में चाय, बिस्किट दी जाती है। मंगलवार की रात 12 बजे के बाद से बुधवार की सुबह दस बजे के बीच 09323 आनंदपुर लखनऊ एक्सप्रेस, 09321 सूरत गोरखपुर एक्सप्रेस, 19329 नाडियाल गोरखपुर एक्सप्रेस व 09321 बड़ोदरा लखनऊ एक्सप्रेस गुजरीं। यह बरती जाती है सतर्कता झांसी स्टेशन से सभी श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेनों को प्लेटफार्म दो से गुजारा जा रहा है। ट्रेन के आने पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहते हैं। ट्रेन के आने से पूर्व ही प्लेटफार्म एक व दो को आरपीएफ व जीआरपी घेर लेती है। इस दौरान आरपीएफ, वाणिज्य, स्टेशन व जीआरपी के अधिकारी मौजूद रहते हैं, ताकि कोई यात्री उतरकर कहीं न जा सके। ट्रेन के रुकते ही उनके कोचों के सामने खाने के बाक्स रख दिए जाते हैं। इस बीच कोच में बैठा एक यात्री प्लेटफार्म पर उतरकर आता है, जो प्लेटफार्म से बाक्स उठाकर कोच में ले जाता है। इसके बाद वही यात्री दूसरे मुसाफिरों को खाने के बाक्स बांटता है। ट्रेन को सैनिटाइज किया जाएगा। चालक, सहचालक व गार्ड के बदलने के बाद गाड़ी गंतव्य के लिए रवाना हो जाती है। ट्रेन के जाने के बाद प्लेटफार्मों को सैनिटाइज किया जाता है।
श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेनों में सवार होकर जा रहे मजदूर व कामगारों से टिकट के पैसे लेने से आए भूचाल के बाद रेलवे ने अब उनको निशुल्क बेज बिरयानी बांटना शुरू कर दिया है। आईआरसीसीटी बिरयानी के साथ यात्रियों को एक आचार, चम्मच व एक लीटर पानी की बोतल उपलब्ध करा रहा है। प्रतिदिन झांसी से चार ट्रेनें गुजर रही हैं। इनमें जो ट्रेनें दिन के वक्त गुजरतीं हैं, उनमें उक्त भोजन की व्यवस्था उपलब्ध कराई जा रही है। लॉकडाउन के लगातार बढ़ने के कारण लाखों लोग अभी अपने घर से दूसरे शहरों में फंसे हैं। इन लोगों की बढ़ती परेशानी को देखते हुए राज्य सरकारों की आपसी सहमति के बाद श्रमिक ट्रेनों का संचालन रविवार से शुरू कर दिया है। ये ट्रेनें एक राज्य के निर्धारित स्टेशन से संबंधित राज्य के तय स्टेशन तक सीधा भेजी जा रही हैं। दक्षिण भारत, महाराष्ट्र व गुजरात से प्रतिदिन तीन से चार ट्रेनें झांसी से गुजरकर लखनऊ व गोरखपुर की तरफ जा रही हैं। जो ट्रेनें दिन के वक्त झांसी से गुजरतीं हैं, उन ट्रेनों के यात्रियों को आईआरसीटीसी द्वारा बेज बिरयानी, एक अचार, एक चम्मच व एक लीटर पानी की बोतल दी जा रही है। अभी तक दो ट्रेनों में झांसी से दोपहर के भोजन में उक्त खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई गई। शाम को गुजरने वाली ट्रेनों में चाय, बिस्किट दी जाती है। मंगलवार की रात बारह बजे के बाद से बुधवार की सुबह दस बजे के बीच नौ हज़ार तीन सौ तेईस आनंदपुर लखनऊ एक्सप्रेस, नौ हज़ार तीन सौ इक्कीस सूरत गोरखपुर एक्सप्रेस, उन्नीस हज़ार तीन सौ उनतीस नाडियाल गोरखपुर एक्सप्रेस व नौ हज़ार तीन सौ इक्कीस बड़ोदरा लखनऊ एक्सप्रेस गुजरीं। यह बरती जाती है सतर्कता झांसी स्टेशन से सभी श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेनों को प्लेटफार्म दो से गुजारा जा रहा है। ट्रेन के आने पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहते हैं। ट्रेन के आने से पूर्व ही प्लेटफार्म एक व दो को आरपीएफ व जीआरपी घेर लेती है। इस दौरान आरपीएफ, वाणिज्य, स्टेशन व जीआरपी के अधिकारी मौजूद रहते हैं, ताकि कोई यात्री उतरकर कहीं न जा सके। ट्रेन के रुकते ही उनके कोचों के सामने खाने के बाक्स रख दिए जाते हैं। इस बीच कोच में बैठा एक यात्री प्लेटफार्म पर उतरकर आता है, जो प्लेटफार्म से बाक्स उठाकर कोच में ले जाता है। इसके बाद वही यात्री दूसरे मुसाफिरों को खाने के बाक्स बांटता है। ट्रेन को सैनिटाइज किया जाएगा। चालक, सहचालक व गार्ड के बदलने के बाद गाड़ी गंतव्य के लिए रवाना हो जाती है। ट्रेन के जाने के बाद प्लेटफार्मों को सैनिटाइज किया जाता है।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
पन्ना जिले के शाहनगर थाना क्षेत्र के पुरैना गांव के जंगल में जुआ चल रहा था। जिस पर पुलिस ने कार्रवाई की है। पुलिस ने 16 जुआरियों को गिरफ्तार किया गया है। जिनके पास से लाखों रुपए बरामद किए गए हैं। इसी के साथ ही चार कार, 4 बाइक भी जब्त की है। पन्ना जिले के शाहनगर थाना क्षेत्र में पुरैना गांव के पास घने जंगल में गुरुवार की रात टेंट में जुआ खेला जा रहे था। जिसकी सूचना स्थानीय व्यक्ति ने शाहनगर थाना पुलिस को न देकर सीधे पन्ना एसपी धर्मराज मीणा को फोन से दी। सूचना मिलते ही पन्ना एसपी ने तुरंत जिला मुख्यालय से पुलिस टीम को साइबर सेल की टीम के साथ रात में ही रवाना किया। जिसने जंगल के बीच चल रहे जुआ के फड़ पर छापेमार कार्रवाई की। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 16 जुआरियों को मौके से गिरफ्तार कर लिया। उनसे 4 कार और 4 बाइक भी जब्त की गई है। पुलिस की इस कार्रवाई में जुआ के फड़ से लाखों रुपए मिलने की सूचना मिल रही है। हालांकि अभी कितने रुपए मिले यह स्पष्ट नही हुआ है। जिला मुख्यालय की पुलिस टीम ने सभी जुआरियों को शाहनगर थाना पुलिस के हवाले कर दिया। जहां पर शाहनगर पुलिस आगे की कार्यवाही कर रही है।
पन्ना जिले के शाहनगर थाना क्षेत्र के पुरैना गांव के जंगल में जुआ चल रहा था। जिस पर पुलिस ने कार्रवाई की है। पुलिस ने सोलह जुआरियों को गिरफ्तार किया गया है। जिनके पास से लाखों रुपए बरामद किए गए हैं। इसी के साथ ही चार कार, चार बाइक भी जब्त की है। पन्ना जिले के शाहनगर थाना क्षेत्र में पुरैना गांव के पास घने जंगल में गुरुवार की रात टेंट में जुआ खेला जा रहे था। जिसकी सूचना स्थानीय व्यक्ति ने शाहनगर थाना पुलिस को न देकर सीधे पन्ना एसपी धर्मराज मीणा को फोन से दी। सूचना मिलते ही पन्ना एसपी ने तुरंत जिला मुख्यालय से पुलिस टीम को साइबर सेल की टीम के साथ रात में ही रवाना किया। जिसने जंगल के बीच चल रहे जुआ के फड़ पर छापेमार कार्रवाई की। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सोलह जुआरियों को मौके से गिरफ्तार कर लिया। उनसे चार कार और चार बाइक भी जब्त की गई है। पुलिस की इस कार्रवाई में जुआ के फड़ से लाखों रुपए मिलने की सूचना मिल रही है। हालांकि अभी कितने रुपए मिले यह स्पष्ट नही हुआ है। जिला मुख्यालय की पुलिस टीम ने सभी जुआरियों को शाहनगर थाना पुलिस के हवाले कर दिया। जहां पर शाहनगर पुलिस आगे की कार्यवाही कर रही है।
कृषि उत्पादन २५६ और लम्बी होती है ( रेशा हैइच से इच तक होता है। इसके उत्पादक क्षेत्र गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आन्ध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और कर्नाटक हूँ । तोसरे जाति को पान (Gossy paum hirsutam) भारत में ईस्ट इण्डिया कम्पनी के शासन काल में बोयो जाने लगी। इसका धागा मध्यम से लम्बा (2 इच से अधिक) और उत्तम श्रेणी का होता है। इस प्रकार की कपास का उत्पादन पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान के बीकानेर सभाग, मध्य प्रदेश के कुछ भागो मे, आन्ध्र वर्नाटक, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में होता है। भारत में कपास के कुम उत्पादन क्षेत्र का १७ प्रतिशत छोट रेशे वाली, ४४ प्रतिदात मध्यम रे बासी और ३६ प्रतिशत लम्बे रेशे वाली कपास के अन्तर्गत पाया जाता हूँ। कुल कपास के उत्पादन का लगभग १६ प्रतिशत छोटे रेशे वालो, ४३ प्रतिशत मध्यम रेसे वाली और ४१ प्रनिदात लम्बे रेशे वाली का होता है। व्यापारिक दृष्टिकोण से भारत में मुख्यतः १४ किस्मोवी कपास पैदा की जाती है। इनकी अच्छाई या बुगई, उनको मजबूती पागे, सूक्ष्मता, रग, धमक और मोटाई की प्रतिशतता पर निर्भर करती है। ये किस्में इस प्रकार है : बाल अमरीकन धोनेरा, उमरा, भडौंब, गुरती, कम्पटा, कम्बोडिया, जयवत, कोमिला, दक्षिणी भसेम, महास, यूगडा और निरुनलवेली । पिछने कई वर्षों में भारत में दो किस्मो को मिलाकर नयी और अच्छी किस्म तैयार करने की और प्रयास किये गये हैं। इनमें काफी सीमा तक सफलता मिली है। भारतीय केन्द्रीय कपास समिति इस ओर काफी प्रयत्नशील रही है और इसने जिन नयी किस्मो को निकाला है उनमे मुख्य ये हैं कल्याण, विजय, विजनपा, विरतार, जरीना, जयघर, लक्ष्मी प्रताप, गारोनी, सूरती सुयोग, हैदराबाद-गारोनी, इन्दोरी और मानवी । उत्पादक क्षेत्र - भारत में कपास की खेती का क्षेत्र अध्यन्त बिखरा हुआ है। इन क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार की जलवायु, मिट्टी और उत्पादन की दशाएं पायी जाती हैं। अतएव प्रत्यक्षेत्र की कपास अन्य क्षेत्रो से भिन्न होती है और उस क्षेत्र की अवस्थाओं के अनुरूप होती है । कपास के उत्पादन की दृष्टि से दक्षिण की काली मिट्टी का प्रदेश बड़ा महत्त्वपूर्ण है। गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश मिलकर देश के उत्पादन का तगभग ५० प्रतिशत कपास उत्पन्न करते हैं। अन्य मुख्य उत्पादक तमिलनाडु, आन्ध्र प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, आदि है। महाराष्ट्र कपास उत्पादन क्षेत्रों में प्रमुख है। यहां कपास अगस्त तक वोसो जाती है और दिसम्बर-जनवरी तक बुन तो आती है। यहां कपास का उत्पादन कई क्षेत्रों में किया जाता हैः (१) अकोला और अमरावती जिलों में कमरा और कम्बोडियाकपासबी जाती है । (२) यवतमाल जिले में पूसद, दरवाहा ताल्लुक में ऊमरा कपाठ होती है । (३) बुलढाना जिले के मलकपुर, महकार खामगाँव और भरत कt ar जलगाँव ताल्लुकों में कमरा और कम्बोडिया या पैदा की जाती है। (४) नागपुर, वर्षा, चन्द्रपुर और जिलों में कम्बोडिया कपास होती है । इन सब जिलों में रूपास वर्षा के सहारे ही पैदा की जाती है । (५) कर्नाटक सागली, करात और जूट की उपय • कास बीजापुर, नासिक, अहमदनगर, गोलापुर, पूना तथा प्रमान जन्य उत्पादक जिले हैं। यहाँ ऊमरा और खानदेशी कपास होती है। गुमरात में समुद्र तटीय क्षेत्रों को छोडकर मुख्यत तीन क्षेत्रों में कपास पैदा की जाती है। अधिकतर उत्पादन वर्षों के सहारे हो होता है। छोटे वाली कपास अधिक पैदा की जाती है । (१) उत्तरी गुजरात से ब्रहमदाबाद, माना और बनासकांठा जिलों में साबरमती नदी के पार और उतरी मौराष्ट्र तथा कच्छ मे भौलेरा और बागड़ किस्म की कपास पैदा की जाती है और अमरेली, अहमदाबाद तथा दक्षिणी सौराष्ट्र में घटिया किम्म की कपास । (२) मध्य गुजरात के नडीच बड़ौदा मेडा, गोहिलवाड, पंचमहल, साबरकाटा जिलों में भय कपास पैदा को जाती है। (३) दक्षिण गुजरात के सूरत और परिचमी मानदेश जिलो में तो और नवसारी किस्मे पैदा की जाती है । गुजरात में उत्तम कालो मिट्टी पायी जाती है और वर्षा १० सेण्टीमोटर तक होती है । कपास जून तक बोयी जाती है और अटूबर-नवम्बर से मार्च-अप्रैल तक चुन ली जाती है । मध्य प्रवेश में जून में बुआई की जाती है और नवम्बर से मार्च तक चुनाई की जाती है। यहाँ मालवा के पठार एवं नर्मदा-तापी की घाटियों में काली और कछारी मिट्टियों में इसका उत्पादन किया जाता है। नीमाड, इन्दौर, रायपुर, धार, देवास, उज्जैन, रतलाम मन्दसौर जिलों में ऊमरा, जरोसा, बिहार, मालवी और इन्दौरी कपाम बोयी जाती है । राजस्थान में गंगा नहर क्षेत्र में गया नहर में पजाब देशो और पंजाबअमरीफन तथा जालावाड, कोटा, टोक, बूंदी जिलों में मानवशे कपास तथा भीलवाड़ा, उदयपुर, चित्तौड़, अजमेर और उदयपुर जिलो में राजस्थान देशी और अमरीकन कपासबो जाती है । पजाब और हरियाणा में कपास की बुआई मार्च से अगस्त तक और चुनाई जनवरी तक की जाती है। अधिकतर उत्पादन सिचाई के सहारे किया जाता है । प्रमुख उत्पादक जिले पंजाब मे अमृतगर, जालन्धर, लुधियाना, पटियाला, मगरूर, मटिडा तथा हरियाणा में गुड़गाँव, करनाल और रोहतक हैं। इनमें अधिकतर पजाब अमरीकन कपास पैदा की जाती है । उत्तर प्रदेश में गंगा और यमुना के दोआव तथा रद्देलखण्ड और बुन्देलखण्ड संभागों में सिंचाई के सहारे छोटे रेशे वाली कपास पैदा की जाती है। सम्बे रेशे वाली कपास का उत्पादन भी किया जाने लगा है। मेरठ, बिजनौर, मुज्जफरनगर, एंटा सहारनपुर, बुलन्दशहर, अलीगढ़, आगरा, इटावा, कानपुर, रामपुर, बरेली, नंनोनाल (तराई), मथुरा, मैनपुरी और फर्रुखाबाद प्रमुख उत्पादक जिले हैं। तमिलनाडु मे कपाग दोना ही मानसून कालों में बोयी जाती है और सान भर ही यह कपास किसी न किसी क्षेत्र मे दो है। यहां अधिकतर कम्बोडिया, यूगेडा, माम-यूगंडा, सलेम, तिरुचिरापल्लो किस्म की कपास पैदा की जाती है । यह सारा उत्पादन काली मिट्टी के क्षेत्रों में किया जाता है। कपास उत्पादक प्रमुख जिले कोयम्बटूर, सलेम, रामनाथपुरम, मदुराई, तिरुचिरापल्ली निवती और पंजबूर हैं। ૩૯૧ भारत का भूगोल आन्ध्र प्रदेश में कपास का उत्पादन गतूर, कड्डप्पा करनूल परिचमी गोदावरी, कृष्णा, महबूबनगर, आदिलाबाद और अनन्तपुर जिलों में किया जाता है । यहाँ मुख्यतः मुगारी किस्म बांयी जाती है । कर्नाटक में दो प्रमुख उत्पादक क्षेत्र है। प्रथम क्षेत्र काली मिट्टी का है जिसे सलाहक्षेत्र कहते हैं। इसके अन्तर्गत बलारी, हमन, दिमोगा, चिकमगलूर और चित्तलहुग जिलों में वर्षा के महारे अधिकतर बेशी कपास पैदा की जाती है। दूसरा क्षेत्र लाल मिट्टी का है जिसे बाद कहते हैं। इसमें वर्षा और सिचाई दोनों के सहारे पंजाब-अमरोहन कपास बोयी जाती है। असम और मेघालय में कपाग का उत्पादन पहाडी क्षेत्रों में किया जाता है। वासी, जयन्तिया, मिकिर, सुधाई, नागा और गारो पहाड़ियों में सीढ़ीदार खेतों में वनोवो जलाकर साफ की गयी भूमि में कपास पैदा की जाती है । अन्य उत्पादकों में बिहार, उड़ीसा और पश्चिमी बंगाल में भी यत्रतत्र कपास पैदा की जाती है । बिहार में सारन, चपारन, संथाल परगना, मुजफ्फरपुर, हजारीबाग बोर राची जिलां मै; उड़ीसा मे धैनकनाल, कटक, सुन्दरगढ़ और कोरापुर जिलों में तथा frent बंगाल में चौeी परमना, मुर्शिदाबाद जिलो में कपास पैदा की जाती है। उत्पादन एवं व्यापार - सन् १९५०-५१ में कपास के अन्तर्गत ८८ लाख हेक्टेअर, १९६०-६१ मे ७६१ लाख हेक्टेअर और १९७२-७३ मे ७७० लाख हैक्टेअर भूमि थी। इन वर्षों में कपास का उत्पादन क्रमशः २८७ लाख ५२३ लाख और ५४६ लाख गांठो का हुआ था। प्रत्येक गाँठ मे १५० किलोग्राम कपास बाती है । १९७३-७४ मे कपास का उत्पादन ८० लाख गाँठ (अर्थात् ३३ प्रतिशत अधिक) हो जाने का अनुमान है । भारत के विभाजन के पूर्व कपास पैदा करने में भारत का स्थान दूसरा था और यहाँ से काफी मात्रा में कपास का निर्यात किया जाता था किन्तु विभाजन के पश्चात् से भारत कपास का मुख्य आयातक बन गया है क्योंकि प्रमुख कपास उत्पादक क्षेत्र पाकिस्तान को चले गये। फिर मो भारत की छोटे रेशे वाली पुरदरी काम करे मांग सुयुक्त राज्य अमरीका और जापान में होती है जहाँ ऊन के साथ मिलाकर मोर्ट कम्बत और मोटे वस्त्र बनाये जाते हैं। थोडी मात्रा में पई का निर्यात इंग्लैण्ड, जापान, जर्मनी, फास, बेल्जियम, हार्लण्ड, न्यूजीलैण्ड और आस्ट्रेलिया को भी किया जाता है। लम्बे रेशे वाली रुई का यान पाकिस्तान, मिश्र, मयुक्त राज्य अमरीका, सूडान, केनिया, पीरू आदि देशों में किया जाता है । १९५०-५१ म १३७ करोड लाख रुपये और १९७२-७३ मे २१५ करोड रुसये के मूल्य की कपास का निर्मात भारत से किया गया । इन वर्षों में आयात का मूल्य मश २६४ लाम चोर १० लीग रुपया था ।
कृषि उत्पादन दो सौ छप्पन और लम्बी होती है भारत में ईस्ट इण्डिया कम्पनी के शासन काल में बोयो जाने लगी। इसका धागा मध्यम से लम्बा और उत्तम श्रेणी का होता है। इस प्रकार की कपास का उत्पादन पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान के बीकानेर सभाग, मध्य प्रदेश के कुछ भागो मे, आन्ध्र वर्नाटक, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में होता है। भारत में कपास के कुम उत्पादन क्षेत्र का सत्रह प्रतिशत छोट रेशे वाली, चौंतालीस प्रतिदात मध्यम रे बासी और छत्तीस प्रतिशत लम्बे रेशे वाली कपास के अन्तर्गत पाया जाता हूँ। कुल कपास के उत्पादन का लगभग सोलह प्रतिशत छोटे रेशे वालो, तैंतालीस प्रतिशत मध्यम रेसे वाली और इकतालीस प्रनिदात लम्बे रेशे वाली का होता है। व्यापारिक दृष्टिकोण से भारत में मुख्यतः चौदह किस्मोवी कपास पैदा की जाती है। इनकी अच्छाई या बुगई, उनको मजबूती पागे, सूक्ष्मता, रग, धमक और मोटाई की प्रतिशतता पर निर्भर करती है। ये किस्में इस प्रकार है : बाल अमरीकन धोनेरा, उमरा, भडौंब, गुरती, कम्पटा, कम्बोडिया, जयवत, कोमिला, दक्षिणी भसेम, महास, यूगडा और निरुनलवेली । पिछने कई वर्षों में भारत में दो किस्मो को मिलाकर नयी और अच्छी किस्म तैयार करने की और प्रयास किये गये हैं। इनमें काफी सीमा तक सफलता मिली है। भारतीय केन्द्रीय कपास समिति इस ओर काफी प्रयत्नशील रही है और इसने जिन नयी किस्मो को निकाला है उनमे मुख्य ये हैं कल्याण, विजय, विजनपा, विरतार, जरीना, जयघर, लक्ष्मी प्रताप, गारोनी, सूरती सुयोग, हैदराबाद-गारोनी, इन्दोरी और मानवी । उत्पादक क्षेत्र - भारत में कपास की खेती का क्षेत्र अध्यन्त बिखरा हुआ है। इन क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार की जलवायु, मिट्टी और उत्पादन की दशाएं पायी जाती हैं। अतएव प्रत्यक्षेत्र की कपास अन्य क्षेत्रो से भिन्न होती है और उस क्षेत्र की अवस्थाओं के अनुरूप होती है । कपास के उत्पादन की दृष्टि से दक्षिण की काली मिट्टी का प्रदेश बड़ा महत्त्वपूर्ण है। गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश मिलकर देश के उत्पादन का तगभग पचास प्रतिशत कपास उत्पन्न करते हैं। अन्य मुख्य उत्पादक तमिलनाडु, आन्ध्र प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, आदि है। महाराष्ट्र कपास उत्पादन क्षेत्रों में प्रमुख है। यहां कपास अगस्त तक वोसो जाती है और दिसम्बर-जनवरी तक बुन तो आती है। यहां कपास का उत्पादन कई क्षेत्रों में किया जाता हैः अकोला और अमरावती जिलों में कमरा और कम्बोडियाकपासबी जाती है । यवतमाल जिले में पूसद, दरवाहा ताल्लुक में ऊमरा कपाठ होती है । बुलढाना जिले के मलकपुर, महकार खामगाँव और भरत कt ar जलगाँव ताल्लुकों में कमरा और कम्बोडिया या पैदा की जाती है। नागपुर, वर्षा, चन्द्रपुर और जिलों में कम्बोडिया कपास होती है । इन सब जिलों में रूपास वर्षा के सहारे ही पैदा की जाती है । कर्नाटक सागली, करात और जूट की उपय • कास बीजापुर, नासिक, अहमदनगर, गोलापुर, पूना तथा प्रमान जन्य उत्पादक जिले हैं। यहाँ ऊमरा और खानदेशी कपास होती है। गुमरात में समुद्र तटीय क्षेत्रों को छोडकर मुख्यत तीन क्षेत्रों में कपास पैदा की जाती है। अधिकतर उत्पादन वर्षों के सहारे हो होता है। छोटे वाली कपास अधिक पैदा की जाती है । उत्तरी गुजरात से ब्रहमदाबाद, माना और बनासकांठा जिलों में साबरमती नदी के पार और उतरी मौराष्ट्र तथा कच्छ मे भौलेरा और बागड़ किस्म की कपास पैदा की जाती है और अमरेली, अहमदाबाद तथा दक्षिणी सौराष्ट्र में घटिया किम्म की कपास । मध्य गुजरात के नडीच बड़ौदा मेडा, गोहिलवाड, पंचमहल, साबरकाटा जिलों में भय कपास पैदा को जाती है। दक्षिण गुजरात के सूरत और परिचमी मानदेश जिलो में तो और नवसारी किस्मे पैदा की जाती है । गुजरात में उत्तम कालो मिट्टी पायी जाती है और वर्षा दस सेण्टीमोटर तक होती है । कपास जून तक बोयी जाती है और अटूबर-नवम्बर से मार्च-अप्रैल तक चुन ली जाती है । मध्य प्रवेश में जून में बुआई की जाती है और नवम्बर से मार्च तक चुनाई की जाती है। यहाँ मालवा के पठार एवं नर्मदा-तापी की घाटियों में काली और कछारी मिट्टियों में इसका उत्पादन किया जाता है। नीमाड, इन्दौर, रायपुर, धार, देवास, उज्जैन, रतलाम मन्दसौर जिलों में ऊमरा, जरोसा, बिहार, मालवी और इन्दौरी कपाम बोयी जाती है । राजस्थान में गंगा नहर क्षेत्र में गया नहर में पजाब देशो और पंजाबअमरीफन तथा जालावाड, कोटा, टोक, बूंदी जिलों में मानवशे कपास तथा भीलवाड़ा, उदयपुर, चित्तौड़, अजमेर और उदयपुर जिलो में राजस्थान देशी और अमरीकन कपासबो जाती है । पजाब और हरियाणा में कपास की बुआई मार्च से अगस्त तक और चुनाई जनवरी तक की जाती है। अधिकतर उत्पादन सिचाई के सहारे किया जाता है । प्रमुख उत्पादक जिले पंजाब मे अमृतगर, जालन्धर, लुधियाना, पटियाला, मगरूर, मटिडा तथा हरियाणा में गुड़गाँव, करनाल और रोहतक हैं। इनमें अधिकतर पजाब अमरीकन कपास पैदा की जाती है । उत्तर प्रदेश में गंगा और यमुना के दोआव तथा रद्देलखण्ड और बुन्देलखण्ड संभागों में सिंचाई के सहारे छोटे रेशे वाली कपास पैदा की जाती है। सम्बे रेशे वाली कपास का उत्पादन भी किया जाने लगा है। मेरठ, बिजनौर, मुज्जफरनगर, एंटा सहारनपुर, बुलन्दशहर, अलीगढ़, आगरा, इटावा, कानपुर, रामपुर, बरेली, नंनोनाल , मथुरा, मैनपुरी और फर्रुखाबाद प्रमुख उत्पादक जिले हैं। तमिलनाडु मे कपाग दोना ही मानसून कालों में बोयी जाती है और सान भर ही यह कपास किसी न किसी क्षेत्र मे दो है। यहां अधिकतर कम्बोडिया, यूगेडा, माम-यूगंडा, सलेम, तिरुचिरापल्लो किस्म की कपास पैदा की जाती है । यह सारा उत्पादन काली मिट्टी के क्षेत्रों में किया जाता है। कपास उत्पादक प्रमुख जिले कोयम्बटूर, सलेम, रामनाथपुरम, मदुराई, तिरुचिरापल्ली निवती और पंजबूर हैं। तीन सौ इक्यानवे भारत का भूगोल आन्ध्र प्रदेश में कपास का उत्पादन गतूर, कड्डप्पा करनूल परिचमी गोदावरी, कृष्णा, महबूबनगर, आदिलाबाद और अनन्तपुर जिलों में किया जाता है । यहाँ मुख्यतः मुगारी किस्म बांयी जाती है । कर्नाटक में दो प्रमुख उत्पादक क्षेत्र है। प्रथम क्षेत्र काली मिट्टी का है जिसे सलाहक्षेत्र कहते हैं। इसके अन्तर्गत बलारी, हमन, दिमोगा, चिकमगलूर और चित्तलहुग जिलों में वर्षा के महारे अधिकतर बेशी कपास पैदा की जाती है। दूसरा क्षेत्र लाल मिट्टी का है जिसे बाद कहते हैं। इसमें वर्षा और सिचाई दोनों के सहारे पंजाब-अमरोहन कपास बोयी जाती है। असम और मेघालय में कपाग का उत्पादन पहाडी क्षेत्रों में किया जाता है। वासी, जयन्तिया, मिकिर, सुधाई, नागा और गारो पहाड़ियों में सीढ़ीदार खेतों में वनोवो जलाकर साफ की गयी भूमि में कपास पैदा की जाती है । अन्य उत्पादकों में बिहार, उड़ीसा और पश्चिमी बंगाल में भी यत्रतत्र कपास पैदा की जाती है । बिहार में सारन, चपारन, संथाल परगना, मुजफ्फरपुर, हजारीबाग बोर राची जिलां मै; उड़ीसा मे धैनकनाल, कटक, सुन्दरगढ़ और कोरापुर जिलों में तथा frent बंगाल में चौeी परमना, मुर्शिदाबाद जिलो में कपास पैदा की जाती है। उत्पादन एवं व्यापार - सन् एक हज़ार नौ सौ पचास-इक्यावन में कपास के अन्तर्गत अठासी लाख हेक्टेअर, एक हज़ार नौ सौ साठ-इकसठ मे सात सौ इकसठ लाख हेक्टेअर और एक हज़ार नौ सौ बहत्तर-तिहत्तर मे सात सौ सत्तर लाख हैक्टेअर भूमि थी। इन वर्षों में कपास का उत्पादन क्रमशः दो सौ सत्तासी लाख पाँच सौ तेईस लाख और पाँच सौ छियालीस लाख गांठो का हुआ था। प्रत्येक गाँठ मे एक सौ पचास किलोग्रामग्राम कपास बाती है । एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर-चौहत्तर मे कपास का उत्पादन अस्सी लाख गाँठ हो जाने का अनुमान है । भारत के विभाजन के पूर्व कपास पैदा करने में भारत का स्थान दूसरा था और यहाँ से काफी मात्रा में कपास का निर्यात किया जाता था किन्तु विभाजन के पश्चात् से भारत कपास का मुख्य आयातक बन गया है क्योंकि प्रमुख कपास उत्पादक क्षेत्र पाकिस्तान को चले गये। फिर मो भारत की छोटे रेशे वाली पुरदरी काम करे मांग सुयुक्त राज्य अमरीका और जापान में होती है जहाँ ऊन के साथ मिलाकर मोर्ट कम्बत और मोटे वस्त्र बनाये जाते हैं। थोडी मात्रा में पई का निर्यात इंग्लैण्ड, जापान, जर्मनी, फास, बेल्जियम, हार्लण्ड, न्यूजीलैण्ड और आस्ट्रेलिया को भी किया जाता है। लम्बे रेशे वाली रुई का यान पाकिस्तान, मिश्र, मयुक्त राज्य अमरीका, सूडान, केनिया, पीरू आदि देशों में किया जाता है । एक हज़ार नौ सौ पचास-इक्यावन म एक सौ सैंतीस करोड लाख रुपये और एक हज़ार नौ सौ बहत्तर-तिहत्तर मे दो सौ पंद्रह करोड रुसये के मूल्य की कपास का निर्मात भारत से किया गया । इन वर्षों में आयात का मूल्य मश दो सौ चौंसठ लाम चोर दस लीटरग रुपया था ।
बक्सर जिले का पहला प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट मुंगाव पंचायत में लगा है। इस प्रोसेसिंग यूनिट लगाने पर कुल 16 लाख खर्च हुए हैं। बता दें कि इस प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट को लगाने के लिए विगत जुलाई माह में डुमराँव प्रखंड के मुगांव पंचायत का चयन कर सेटअप की कवायद प्रारम्भ की गई थी। बताया जा रहा है कि यह प्रोसेसिंग यूनिट पर्यावरण में बढ़ते प्रदूषण को रोकने में काफी कारगर साबित होगा। वहीं जिले का पहला प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट अब काम करना भी शुरु कर दिया है। प्लास्टिक से न केवल वातावरण दूषित हो रहा है बल्कि जमीन की उर्वरा शक्ति भी क्षीण हो रही है। वातावरण को दूषित होने से बचाने के लिए प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट किया स्थापना की गई है। यूनिट प्रारम्भ हो जाने के बादपंचायतों से प्लास्टिक मुगांव पहुंच रहा है। जहां प्रोसेसिंग यूनिट में मजदूर विभिन्न प्रकार के प्लास्टिक को अलग करने के काम में लगे हैं। पंचायत को स्वच्छ बनाने के इस अभियान में 250 से अधिक लोगों को गांव में ही रोजगार का अवसर मिल रहा है। इस यूनिट की स्थापना मुगांव के पुराने पैक्स भवन में की गई है।
बक्सर जिले का पहला प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट मुंगाव पंचायत में लगा है। इस प्रोसेसिंग यूनिट लगाने पर कुल सोलह लाख खर्च हुए हैं। बता दें कि इस प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट को लगाने के लिए विगत जुलाई माह में डुमराँव प्रखंड के मुगांव पंचायत का चयन कर सेटअप की कवायद प्रारम्भ की गई थी। बताया जा रहा है कि यह प्रोसेसिंग यूनिट पर्यावरण में बढ़ते प्रदूषण को रोकने में काफी कारगर साबित होगा। वहीं जिले का पहला प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट अब काम करना भी शुरु कर दिया है। प्लास्टिक से न केवल वातावरण दूषित हो रहा है बल्कि जमीन की उर्वरा शक्ति भी क्षीण हो रही है। वातावरण को दूषित होने से बचाने के लिए प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट किया स्थापना की गई है। यूनिट प्रारम्भ हो जाने के बादपंचायतों से प्लास्टिक मुगांव पहुंच रहा है। जहां प्रोसेसिंग यूनिट में मजदूर विभिन्न प्रकार के प्लास्टिक को अलग करने के काम में लगे हैं। पंचायत को स्वच्छ बनाने के इस अभियान में दो सौ पचास से अधिक लोगों को गांव में ही रोजगार का अवसर मिल रहा है। इस यूनिट की स्थापना मुगांव के पुराने पैक्स भवन में की गई है।
उत्तर प्रदेश के मथुरा में रविवार को आंखों में मिर्च पाउडर झोंककर बाइक सवार दो लुटेरे दिनदहाड़े स्कूटी सवार से 20 किलो चांदी डकैती ले गए. घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस के आलाधिकारी मौके पर पहुंचे. पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी कैमरे खंगाले. इस पर पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद मिली. फुटेज के आधार पर पुलिस लुटेरों की तलाश में जुटी है. घटना गोविंदनगर थाना क्षेत्र की द्वारिकेशपुरी कॉलोनी के निकट की है. चांदी व्यवसायी एडवोकेट प्रभुदयाल गुप्ता का नौकर मोतीलाल दोपहर करीब एक बजे बैरागपुरा गोविंदनगर के कारखाने से चांदी की पायलों की सफाई कराकर द्वारिकेशपुरी स्थित दुकान पर लौट रहा था. रास्ते में बाइक सवार दो लुटेरे चलती स्कूटी से चांदी की पायलों से भरा बैग छीनकर फरार हो गए. मोतीलाल लुटेरों को पकड़ने के लिए दौड़ा. इसने एक लुटेरे को पकड़ भी लिया. इसी बीच दूसरे लुटेरे ने मोतीलाल की आंखों में मिर्च पाउडर छिड़क दिया और दोनों फरार हो गए. शोर मचाने पर आसपास के लोग जुटे. सूचना पर ताना पुलिस के साथ ही आईजी दीपक कुमार, एसएसपी शैलेश पांडेय, एसपी सिटी मार्तंड प्रताप सिंह मौके पर पहुंचे. एसएसपी ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर लुटेरों की तलाश की जा रही है.
उत्तर प्रदेश के मथुरा में रविवार को आंखों में मिर्च पाउडर झोंककर बाइक सवार दो लुटेरे दिनदहाड़े स्कूटी सवार से बीस किलो चांदी डकैती ले गए. घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस के आलाधिकारी मौके पर पहुंचे. पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी कैमरे खंगाले. इस पर पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद मिली. फुटेज के आधार पर पुलिस लुटेरों की तलाश में जुटी है. घटना गोविंदनगर थाना क्षेत्र की द्वारिकेशपुरी कॉलोनी के निकट की है. चांदी व्यवसायी एडवोकेट प्रभुदयाल गुप्ता का नौकर मोतीलाल दोपहर करीब एक बजे बैरागपुरा गोविंदनगर के कारखाने से चांदी की पायलों की सफाई कराकर द्वारिकेशपुरी स्थित दुकान पर लौट रहा था. रास्ते में बाइक सवार दो लुटेरे चलती स्कूटी से चांदी की पायलों से भरा बैग छीनकर फरार हो गए. मोतीलाल लुटेरों को पकड़ने के लिए दौड़ा. इसने एक लुटेरे को पकड़ भी लिया. इसी बीच दूसरे लुटेरे ने मोतीलाल की आंखों में मिर्च पाउडर छिड़क दिया और दोनों फरार हो गए. शोर मचाने पर आसपास के लोग जुटे. सूचना पर ताना पुलिस के साथ ही आईजी दीपक कुमार, एसएसपी शैलेश पांडेय, एसपी सिटी मार्तंड प्रताप सिंह मौके पर पहुंचे. एसएसपी ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर लुटेरों की तलाश की जा रही है.