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धारः राधेश्याम जुलानिया के कार्यकाल में शुरू हुआ था डैम का निर्माण, घोटाला करने वालों के खिलाफ क्या कदम उठाएंगे मामाजी? धारः धार के पास स्थित तक कारम डैम का इस वक्त जो हाल है वह सभी के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है. डैम की पाल लगातार धसक रही है जो कभी भी बड़े हादसे का रूप ले सकती है. इस बारे में मुख्यमंत्री से लेकर जिला प्रशासन और पूरे मध्यप्रदेश में उथल-पुथल देखी जा रही है. बता दें कि कारम डैम का निर्माण बहुचर्चित सेवानिवृत्त नौकरशाह और कई घोटालों में फंसे राधेश्याम जुलानिया के कार्यकाल में शुरू हुआ था. जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट इस बात की जानकारी दे चुके हैं कि कारम डैम के निर्माण की ईओडब्ल्यू जांच कर रही है. बताया जा रहा है कि जुलानिया के साथ ई टेंडर सहित कई अन्य बड़े ठेकों में एक प्रभावी मंत्र की पार्टनरशिप भी रही है और वह इस घटिया निर्माण के दोषी हैं. 1 वर्ष पहले ही इस डैम का निर्माण हुआ है और पहली बारिश ने इसकी पोल खोल कर रख दी. पोल खोलना तो ठीक लेकिन हजारों लाखों लोगों की जान पर बन आई है. आज तिरंगा रैली के लिए इंदौर पहुंचे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी कारम डैम के घटनाक्रम के चलते चिंतित नजर आए. 304 करोड़ की लागत से इस डैम का निर्माण किया गया था. लेकिन निर्माण में जो घोटाला हुआ है उसी के चलते आज ये स्थिति बनी है. अब यह देखने वाली बात होगी कि मामा जी इससे डैम निर्माण घोटाले में शामिल लोगों के खिलाफ क्या कदम उठाते हैं. इंदौर के पास धार जिले का डैम फूटने की कगार पर पहुंच चुका है. 304 करोड़ की लागत से इस डैम को तैयार किया गया था लेकिन पहली बारिश में ही इसकी असलियत सामने आ गई है. बारिश शुरू होते ही सीपेज शुरू हो गया है और लगातार पानी बह रहा है और दीवार यानी डैम की पाल धसकती नजर आ रही है और पानी के फव्वारे निकल रहे हैं. हालात को देखते हुए प्रशासनिक अमला और अधिकारी मौके पर मौजूद हैं. इंदौर और भोपाल के विशेषज्ञों की टीम मौके पर पहुंच गई है. पुलिस ने धार के 12 खरगोन के 9 गांवों को खाली कराना शुरू कर दिया है. इसी के साथ NH 13 पूरी तरीके से बंद है. वहीं लोगों से उनके घरों को छोड़कर सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर जाने की अपील की जा रही है.
धारः राधेश्याम जुलानिया के कार्यकाल में शुरू हुआ था डैम का निर्माण, घोटाला करने वालों के खिलाफ क्या कदम उठाएंगे मामाजी? धारः धार के पास स्थित तक कारम डैम का इस वक्त जो हाल है वह सभी के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है. डैम की पाल लगातार धसक रही है जो कभी भी बड़े हादसे का रूप ले सकती है. इस बारे में मुख्यमंत्री से लेकर जिला प्रशासन और पूरे मध्यप्रदेश में उथल-पुथल देखी जा रही है. बता दें कि कारम डैम का निर्माण बहुचर्चित सेवानिवृत्त नौकरशाह और कई घोटालों में फंसे राधेश्याम जुलानिया के कार्यकाल में शुरू हुआ था. जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट इस बात की जानकारी दे चुके हैं कि कारम डैम के निर्माण की ईओडब्ल्यू जांच कर रही है. बताया जा रहा है कि जुलानिया के साथ ई टेंडर सहित कई अन्य बड़े ठेकों में एक प्रभावी मंत्र की पार्टनरशिप भी रही है और वह इस घटिया निर्माण के दोषी हैं. एक वर्ष पहले ही इस डैम का निर्माण हुआ है और पहली बारिश ने इसकी पोल खोल कर रख दी. पोल खोलना तो ठीक लेकिन हजारों लाखों लोगों की जान पर बन आई है. आज तिरंगा रैली के लिए इंदौर पहुंचे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी कारम डैम के घटनाक्रम के चलते चिंतित नजर आए. तीन सौ चार करोड़ की लागत से इस डैम का निर्माण किया गया था. लेकिन निर्माण में जो घोटाला हुआ है उसी के चलते आज ये स्थिति बनी है. अब यह देखने वाली बात होगी कि मामा जी इससे डैम निर्माण घोटाले में शामिल लोगों के खिलाफ क्या कदम उठाते हैं. इंदौर के पास धार जिले का डैम फूटने की कगार पर पहुंच चुका है. तीन सौ चार करोड़ की लागत से इस डैम को तैयार किया गया था लेकिन पहली बारिश में ही इसकी असलियत सामने आ गई है. बारिश शुरू होते ही सीपेज शुरू हो गया है और लगातार पानी बह रहा है और दीवार यानी डैम की पाल धसकती नजर आ रही है और पानी के फव्वारे निकल रहे हैं. हालात को देखते हुए प्रशासनिक अमला और अधिकारी मौके पर मौजूद हैं. इंदौर और भोपाल के विशेषज्ञों की टीम मौके पर पहुंच गई है. पुलिस ने धार के बारह खरगोन के नौ गांवों को खाली कराना शुरू कर दिया है. इसी के साथ NH तेरह पूरी तरीके से बंद है. वहीं लोगों से उनके घरों को छोड़कर सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर जाने की अपील की जा रही है.
पंजाब की टीम ने क्रिस गेल को उनके जन्मदिन पर मैच खेलने का मौका नहीं दिया। गावस्कर ने कहा आप टी20 टीम के सबसे बड़े खिलाड़ी को उनके इस खास दिन पर कैसे बाहर बिठा सकते हैं। पूर्व इंग्लिश कप्तान पीटरसन ने भी इस फैसले पर नाराजगी जाहिर की। नई दिल्ली, आनलाइन डेस्क। इंडियन प्रीमियर लीग के 14वें सीजन के दूसरे चरण के मुकाबले में पहली बार पंजाब किंग्स की टीम मैदान पर उतरी और विवाद हो गया। टी20 क्रिकेट के महान बल्लेबाज यूनिवर्स बास के नाम से जाने जाने वाले क्रिस गेल को उनके जन्मदिन पर टीम के प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिली। पूर्व दिग्गज सुनील गावस्कर और केविन पीटरसन ने इस फैसले को लेकर टीम के कोच अनिल कुंबले और कप्तान केएल राहुल को जमकर फटकारा। केविड पीटरसन ने कहा, "कुछ सवाल तो जरूर ही पूछे जाएंगे। मुझे तो यह बात समझ नहीं आती जन्मदिन पर क्रिस गेल जैसे खिलाड़ी को आप बाहर कैसे बिठा सकते हैं। अगर जो आप किसी एक मैच में उनके साथ उतरना चाहते थे तो यही वो मुकाबला होना था। अगर जो वह नाकाम होते तो आप कह सकते थे ठीट है अब थोड़ा आराम कीजिए। इसी वजह से मुझे तो यह सोच ही समझ नहीं आई। " गावस्कर ने कहा, "मैं केपी को पसंद करता हूं, मैं इस बात से बहुत ही ज्यादा प्रभावित हूं कि आज का मैच क्रिस गेल नहीं खेल रहे हैं। जिन चार विदेशी खिलाड़ियों को उन्होंने आज के मैच के लिए चुना है बहुत ही शानदार खेल दिखा सकते हैं और पंजाब के लिए मैच भी जीत सकते हैं। लेकिन बात यहीं पर आकर रुक जाती है कि आपने एक टी20 क्रिकेट से सबसे बेहतरीन खिलाड़ी को उनके जन्मदिन पर बाहर बिठाया। सिर्फ आइपीएल ही नहीं बल्कि सीबीएल और बिग बैश में भी आप किसी भी टी20 लीग का नाम ले लीजिए वो हर जगह हावी होकर खेले हैं। आपने उनको जन्मदिन के दिन पर बाहर बिठा दिया इससे ज्यादा बेकार बात कुछ नहीं हो सकती है। " गेल के प्लेइंग इलेवन से बाहर रखने पर फैंस के भी अजब गजब रिएक्शन आ रहे हैं। एक फैन ने हल्क की तस्वीर पोस्ट करते हुए अपने दिल की बात कोच अनिल कुंबले तक पहुंचाने की कोशिश की।
पंजाब की टीम ने क्रिस गेल को उनके जन्मदिन पर मैच खेलने का मौका नहीं दिया। गावस्कर ने कहा आप टीबीस टीम के सबसे बड़े खिलाड़ी को उनके इस खास दिन पर कैसे बाहर बिठा सकते हैं। पूर्व इंग्लिश कप्तान पीटरसन ने भी इस फैसले पर नाराजगी जाहिर की। नई दिल्ली, आनलाइन डेस्क। इंडियन प्रीमियर लीग के चौदहवें सीजन के दूसरे चरण के मुकाबले में पहली बार पंजाब किंग्स की टीम मैदान पर उतरी और विवाद हो गया। टीबीस क्रिकेट के महान बल्लेबाज यूनिवर्स बास के नाम से जाने जाने वाले क्रिस गेल को उनके जन्मदिन पर टीम के प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिली। पूर्व दिग्गज सुनील गावस्कर और केविन पीटरसन ने इस फैसले को लेकर टीम के कोच अनिल कुंबले और कप्तान केएल राहुल को जमकर फटकारा। केविड पीटरसन ने कहा, "कुछ सवाल तो जरूर ही पूछे जाएंगे। मुझे तो यह बात समझ नहीं आती जन्मदिन पर क्रिस गेल जैसे खिलाड़ी को आप बाहर कैसे बिठा सकते हैं। अगर जो आप किसी एक मैच में उनके साथ उतरना चाहते थे तो यही वो मुकाबला होना था। अगर जो वह नाकाम होते तो आप कह सकते थे ठीट है अब थोड़ा आराम कीजिए। इसी वजह से मुझे तो यह सोच ही समझ नहीं आई। " गावस्कर ने कहा, "मैं केपी को पसंद करता हूं, मैं इस बात से बहुत ही ज्यादा प्रभावित हूं कि आज का मैच क्रिस गेल नहीं खेल रहे हैं। जिन चार विदेशी खिलाड़ियों को उन्होंने आज के मैच के लिए चुना है बहुत ही शानदार खेल दिखा सकते हैं और पंजाब के लिए मैच भी जीत सकते हैं। लेकिन बात यहीं पर आकर रुक जाती है कि आपने एक टीबीस क्रिकेट से सबसे बेहतरीन खिलाड़ी को उनके जन्मदिन पर बाहर बिठाया। सिर्फ आइपीएल ही नहीं बल्कि सीबीएल और बिग बैश में भी आप किसी भी टीबीस लीटरग का नाम ले लीजिए वो हर जगह हावी होकर खेले हैं। आपने उनको जन्मदिन के दिन पर बाहर बिठा दिया इससे ज्यादा बेकार बात कुछ नहीं हो सकती है। " गेल के प्लेइंग इलेवन से बाहर रखने पर फैंस के भी अजब गजब रिएक्शन आ रहे हैं। एक फैन ने हल्क की तस्वीर पोस्ट करते हुए अपने दिल की बात कोच अनिल कुंबले तक पहुंचाने की कोशिश की।
बैंक को शोध्य राशियों की वसूलीःबैंक पेंशन के संराशीकरण मूल्य या मासिक पेंशन या कुटुम्ब पेंशन से बैंक को देय आवास ऋण, अग्रिम, अनुज्ञाप्ति फीस, अन्य वसूलियों और कर्मचारी राहकारी प्रत्यय सोसाइटी का देय शोध्य राशियों की वसूली करने का हकदार होगा। 48. सेवानिवृत्ति के पश्चात वाणिज्यिक नियोजनः यदि कोई पेंशनभागी अपनी सेवानिवृत्ति से ठीक पहले अधिकारी का पद धारण कर रहा था अपनी सेवानिवृत्ति की तारीख से एक वर्ष की समाप्ति से पूर्व कोई वाणिज्यिक नियोजन स्वीकार करना चाहता है तो वह ऐसी स्वीकृति के लिए बैंक की पूर्व मंजूरी प्राप्त करेगा और उप-विनियम (2) के उपबंध के अध्यधीन बैंक लिखित आदेश के द्वारा ऐसी शर्तों के अध्यधीन, जिन्हें आवश्यक माना जाए, अनुमति प्रदान करेगा या लिखित रूप में अभिलेखबद्ध कारणों से अनुमति देने से मना कर सकता है। किसी पेंशनभोगी को कोई वाणिज्यिक नियोजन ग्रहण करने के लिए विनियम (1) के अधीन अनुज्ञा देने या देने से इनकार करने में, बैंक निम्नलिखित बातों का ध्यान रखेगा, अर्थातः ग्रहण किए जाने के लिए प्रस्तावित नियोजन की प्रकृति और कर्मचारी का पूर्ववृत्त; क्या उस नियोजन में जो वह ग्रहण करने का प्रस्ताव करता है, उसके कर्तव्य ऐसे हो सकते हैं जिनसे उसका बैंक के साथ विरोध हो, क्या पेंशनभोगी की जब वह सेवा में था तब उस नियोजक के साथ, जिसके अधीन वह नियोजन चाहता है ऐसा व्यवहार था कि जिससे यह संदेह करने के लिए यह युक्तियुक्त आधार बनता है कि ऐसे पेंशनभोगी ने ऐसे नियोजक के प्रति पक्षपात किया था, क्या प्रस्तावित वाणिज्यिक नियोजन के कर्तव्यों में बैंक के साथ सम्पर्क या संबंध अंतर्वलित है, क्या उसके वाणिज्यिक कर्तव्य ऐसे होंगे कि बैंक के अधीन उसकी पूर्ववर्ती पदीय स्थिति या ज्ञान या अनुभव का प्रस्तावित नियोजन को अनुचित फायदा देने के लिए प्रयोग किया जा सकता है, प्रस्तावित नियोजक द्वारा प्रस्थापित परिलब्धियां, और कोई अन्य सुसंगत बात (3) जहां उप-विनियम (4) के अधीन किसी आवेदन की प्राप्ति की तारीख से 60 दिन की कालावधि के भीतर बैंक आवेदित अनुज्ञा देने से इनकार नहीं करता है या आवेदक को इनकार किए जाने की संसूचना नहीं देता है वहां यह समझा जाएगा कि बैंक ने आवेदक को अनुज्ञा दे दी है। परन्तु किसी ऐसी दशा में जहां आवेदक द्वारा त्रुटिपूर्ण या अपर्याप्त सूचना दी जाती है और बैंक के लिए उससे और स्पष्टीकरण या जानकारी मांगना आवश्यक हो जाता है, वहां 60 दिन की अवधि की गणना उस तारीख से की जाएगी जिस तारीख को आवेदक द्वारा त्रुटियां दूर की गई हैं या पूर्ण जानकारी दी गई है। (4) जहां बैंक आवेदित अनुज्ञा किन्हीं शर्तों के अधीन रहते हुए देता है या ऐसी अनुज्ञा देने से इनकार करता है वहां आवेदक उस आशय के बैंक के आदेश की प्राप्ति के 30 दिन के भीतर किसी ऐसी शर्त या इनकार किए जाने के विरुद्ध अभ्यावेदन कर सकेगा और बैंक उस पर ऐसे आदेश कर सकेगा जो वह ठीक समझे। परन्तु इस उप-विनियम के अधीन ऐसी किसी शर्त को रद्द करने वाले या बिना किसी शर्त के ऐसी अनुज्ञा वाले किसी आदेश के भिन्न कोई आदेश, अभ्यावेदन करने वाले पेंशनभोगी को प्रस्तावित आदेश के विरुद्ध कारण दर्शित करने का अवसर दिए बिना नहीं किया जाएगा। (5) यदि कोई पेंशनभोगी बैंक की पूर्व अनुज्ञा के बिना अपनी सेवानिवृत्ति तारीख से दो वर्ष समाप्ति के पूर्व किसी समय कोई वाणिज्यिक नियोजन ग्रहण करता है या किसी ऐसी शर्त को भंग करता है जिसके अधीन कोई वाणिज्यिक नियोजन ग्रहण करने की अनुज्ञा उसे इस विनियम के अधीन दी गई है तो बैंक लिखित आदेश द्वारा और उसमें लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों
बैंक को शोध्य राशियों की वसूलीःबैंक पेंशन के संराशीकरण मूल्य या मासिक पेंशन या कुटुम्ब पेंशन से बैंक को देय आवास ऋण, अग्रिम, अनुज्ञाप्ति फीस, अन्य वसूलियों और कर्मचारी राहकारी प्रत्यय सोसाइटी का देय शोध्य राशियों की वसूली करने का हकदार होगा। अड़तालीस. सेवानिवृत्ति के पश्चात वाणिज्यिक नियोजनः यदि कोई पेंशनभागी अपनी सेवानिवृत्ति से ठीक पहले अधिकारी का पद धारण कर रहा था अपनी सेवानिवृत्ति की तारीख से एक वर्ष की समाप्ति से पूर्व कोई वाणिज्यिक नियोजन स्वीकार करना चाहता है तो वह ऐसी स्वीकृति के लिए बैंक की पूर्व मंजूरी प्राप्त करेगा और उप-विनियम के उपबंध के अध्यधीन बैंक लिखित आदेश के द्वारा ऐसी शर्तों के अध्यधीन, जिन्हें आवश्यक माना जाए, अनुमति प्रदान करेगा या लिखित रूप में अभिलेखबद्ध कारणों से अनुमति देने से मना कर सकता है। किसी पेंशनभोगी को कोई वाणिज्यिक नियोजन ग्रहण करने के लिए विनियम के अधीन अनुज्ञा देने या देने से इनकार करने में, बैंक निम्नलिखित बातों का ध्यान रखेगा, अर्थातः ग्रहण किए जाने के लिए प्रस्तावित नियोजन की प्रकृति और कर्मचारी का पूर्ववृत्त; क्या उस नियोजन में जो वह ग्रहण करने का प्रस्ताव करता है, उसके कर्तव्य ऐसे हो सकते हैं जिनसे उसका बैंक के साथ विरोध हो, क्या पेंशनभोगी की जब वह सेवा में था तब उस नियोजक के साथ, जिसके अधीन वह नियोजन चाहता है ऐसा व्यवहार था कि जिससे यह संदेह करने के लिए यह युक्तियुक्त आधार बनता है कि ऐसे पेंशनभोगी ने ऐसे नियोजक के प्रति पक्षपात किया था, क्या प्रस्तावित वाणिज्यिक नियोजन के कर्तव्यों में बैंक के साथ सम्पर्क या संबंध अंतर्वलित है, क्या उसके वाणिज्यिक कर्तव्य ऐसे होंगे कि बैंक के अधीन उसकी पूर्ववर्ती पदीय स्थिति या ज्ञान या अनुभव का प्रस्तावित नियोजन को अनुचित फायदा देने के लिए प्रयोग किया जा सकता है, प्रस्तावित नियोजक द्वारा प्रस्थापित परिलब्धियां, और कोई अन्य सुसंगत बात जहां उप-विनियम के अधीन किसी आवेदन की प्राप्ति की तारीख से साठ दिन की कालावधि के भीतर बैंक आवेदित अनुज्ञा देने से इनकार नहीं करता है या आवेदक को इनकार किए जाने की संसूचना नहीं देता है वहां यह समझा जाएगा कि बैंक ने आवेदक को अनुज्ञा दे दी है। परन्तु किसी ऐसी दशा में जहां आवेदक द्वारा त्रुटिपूर्ण या अपर्याप्त सूचना दी जाती है और बैंक के लिए उससे और स्पष्टीकरण या जानकारी मांगना आवश्यक हो जाता है, वहां साठ दिन की अवधि की गणना उस तारीख से की जाएगी जिस तारीख को आवेदक द्वारा त्रुटियां दूर की गई हैं या पूर्ण जानकारी दी गई है। जहां बैंक आवेदित अनुज्ञा किन्हीं शर्तों के अधीन रहते हुए देता है या ऐसी अनुज्ञा देने से इनकार करता है वहां आवेदक उस आशय के बैंक के आदेश की प्राप्ति के तीस दिन के भीतर किसी ऐसी शर्त या इनकार किए जाने के विरुद्ध अभ्यावेदन कर सकेगा और बैंक उस पर ऐसे आदेश कर सकेगा जो वह ठीक समझे। परन्तु इस उप-विनियम के अधीन ऐसी किसी शर्त को रद्द करने वाले या बिना किसी शर्त के ऐसी अनुज्ञा वाले किसी आदेश के भिन्न कोई आदेश, अभ्यावेदन करने वाले पेंशनभोगी को प्रस्तावित आदेश के विरुद्ध कारण दर्शित करने का अवसर दिए बिना नहीं किया जाएगा। यदि कोई पेंशनभोगी बैंक की पूर्व अनुज्ञा के बिना अपनी सेवानिवृत्ति तारीख से दो वर्ष समाप्ति के पूर्व किसी समय कोई वाणिज्यिक नियोजन ग्रहण करता है या किसी ऐसी शर्त को भंग करता है जिसके अधीन कोई वाणिज्यिक नियोजन ग्रहण करने की अनुज्ञा उसे इस विनियम के अधीन दी गई है तो बैंक लिखित आदेश द्वारा और उसमें लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों
रायपुर। छत्तीसगढ़ में बुधवार रात को हुए एक भीषण सड़क हादसे में एक ही परिवार के 11 लोगों की मौत हो गई। ये सभी लोग शादी में शामिल होने जा रहे थे। मृतकों में केशव साहू (34), डोमेश ध्रुव (19), टोमिन साहू (33), संध्या साहू (24), रमा साहू (20), शैलेंद्र साहू (22), लक्ष्मी साहू (45), धरमराज साहू (55), उषा साहू (52), योग्यांश साहू (3), ईशान साहू डेढ़ साल. शामिल हैं। हादसा कांकेर नेशनल हाइवे पर जगतरा के पास हुआ। बताया जा रहा है कि परिवार धमतरी के सोरम गांव से बोलेरो में सवार होकर शादी में शामिल होने के लिए मरकाटोला जा रहा था, लेकिन बीच में ही एक्सीडेंट हो गया। पुलिस अधीक्षक जितेंद्र कुमार यादव ने बताया कि बुधवार रात ये हादसा हुआ. इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई है। ये सभी लोग शादी में शामिल होने के लिए मरकाटोला जा रहे थे। टक्कर इतनी तेज थी कि 10 लोगों की मौत पर ही मौत हो गई। जबकि एक की अस्पताल के जाते वक्त जान चली गई। उन्होंने बताया कि सभी के शवों को अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। उधर, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने घटना पर दुख जताया है। उन्होंने ट्वीट किया, अभी अभी सूचना मिली है कि बालोद के पुरूर और चारमा के बीच बालोदगहन के पास शादी कार्यक्रम में जा रही बोलेरो और ट्रक के बीच भिड़ंत में 10 लोगों की मौत हो गई है और बच्ची की स्थिति गंभीर है। ईश्वर दुर्घटना में दिवंगत आत्माओं को शांति एवं उनके परिवारजनों को हिम्मत दे. घायल बच्ची के स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में बुधवार रात को हुए एक भीषण सड़क हादसे में एक ही परिवार के ग्यारह लोगों की मौत हो गई। ये सभी लोग शादी में शामिल होने जा रहे थे। मृतकों में केशव साहू , डोमेश ध्रुव , टोमिन साहू , संध्या साहू , रमा साहू , शैलेंद्र साहू , लक्ष्मी साहू , धरमराज साहू , उषा साहू , योग्यांश साहू , ईशान साहू डेढ़ साल. शामिल हैं। हादसा कांकेर नेशनल हाइवे पर जगतरा के पास हुआ। बताया जा रहा है कि परिवार धमतरी के सोरम गांव से बोलेरो में सवार होकर शादी में शामिल होने के लिए मरकाटोला जा रहा था, लेकिन बीच में ही एक्सीडेंट हो गया। पुलिस अधीक्षक जितेंद्र कुमार यादव ने बताया कि बुधवार रात ये हादसा हुआ. इस हादसे में ग्यारह लोगों की मौत हुई है। ये सभी लोग शादी में शामिल होने के लिए मरकाटोला जा रहे थे। टक्कर इतनी तेज थी कि दस लोगों की मौत पर ही मौत हो गई। जबकि एक की अस्पताल के जाते वक्त जान चली गई। उन्होंने बताया कि सभी के शवों को अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। उधर, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने घटना पर दुख जताया है। उन्होंने ट्वीट किया, अभी अभी सूचना मिली है कि बालोद के पुरूर और चारमा के बीच बालोदगहन के पास शादी कार्यक्रम में जा रही बोलेरो और ट्रक के बीच भिड़ंत में दस लोगों की मौत हो गई है और बच्ची की स्थिति गंभीर है। ईश्वर दुर्घटना में दिवंगत आत्माओं को शांति एवं उनके परिवारजनों को हिम्मत दे. घायल बच्ची के स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं।
भारतीय क्रिकेटर ऋषभ पंत और बॉलीवुड अभिनेत्री उर्वशी रौतेला के बीच विवाद सामने आया है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें उर्वशी एक इंटरव्यू में दिख रही हैं। इतना ही नहीं इंटरव्यू में उर्वशी ने किसी 'मिस्टर RP (आरपी)' के नाम का जिक्र किया है और रिश्ते टूटने को लेकर पूरी कहानी बताई है। इसके बाद सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि पंत ने सोशल मीडिया पर स्टोरी लगाकर रौतेला को जवाब भी दिया है। दरअसल, साल 2018 में ऐसे कयास लगाए गए थे कि पंत और उर्वशी रौतेला रिलेशनशिप में हैं। दोनों कई बार लंच-डेट पर दिख जाते थे। इनकी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थीं। हालांकि, कुछ समय बाद सोशल मीडिया पर यह खबर उड़ी कि पंत ने उर्वशी को व्हाट्सएप पर ब्लॉक कर दिया है। हालांकि, बाद में यह बताया गया कि दोनों ने आपसी सहमति से एक-दूसरे को ब्लॉक किया है। अब एक मीडिया हाउस को दिए इंटरव्यू में उर्वशी ने कुछ ऐसा कहा है, जिसे लोग पंत से जोड़कर देख रहे हैं। इसके बाद पंत ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर किए गए पोस्ट ने फैन्स को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या जिस 'मिस्टर आरपी' का जिक्र कर रही हैं, वह उर्वशी ही हैं। उर्वशी ने इंटरव्यू में एक कहानी बताई। उन्होंने कहा- मैं एक बार वाराणसी से दिल्ली शूटिंग के लिए आई थी, तब 'मिस्टर RP' मिलने के लिए आए थे। वह लॉबी में इंतजार कर रहे थे, लेकिन मैं सो गई थी। वाराणसी में दिन भर शूट करने के बाद दिल्ली में रात में मुझे शूट करना था। मैं मेकअप वगैरह में लगी हुई थी। इसके बाद शूट के बाद मैं सो गई। इसमें 10 घंटे बीत गए। मिस्टर RP मुझे कॉल करते रहे। इसका पता मुझे बाद में चला। मेरे फोन में 17 मिस्ड कॉल थीं। मैंने उनसे कहा भी कि जब आप मुंबई आओगे, तो मिल लेंगे। फिर हम मुंबई में मिले भी, लेकिन तब तक मीडिया में चीजें आ चुकी थीं। हालांकि, इसके बाद सबकुछ बिगड़ चुका था। इस दौरान एंकर उर्वशी से यह भी पूछता है कि मिस्टर RP कौन हैं? इस पर उर्वशी ने नाम बताने से इंकार कर दिया। इंटरव्यू के वायरल होने के बाद पंत और उर्वशी को लेकर विवाद एकबार फिर बढ़ गया है। इसके बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया गया है। इसमें पंत की इंस्टाग्राम स्टोरी दिखाई गई है। सोशल मीडिया यूजर्स का दावा है कि पंत ने इस स्टोरी के जरिये उर्वशी को जवाब दिया है। इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा है- कैसे कुछ लोग इंटरव्यू में सिर्फ नाम, फेम, पॉपुलैरिटी और हेडलाइन में आने के लिए झूठ बोल देते हैं। यह देखकर दुख होता है कि लोग कैसे नाम और फेम के इतने भूखे हैं। भगवान उनका भला करे। पंत ने साथ ही में स्टोरी में यह भी लिखा है कि मेरा पीछा छोड़ो बहन, झूठ की भी कोई सीमा होती है। हालांकि, सोशल मीडिया यूजर्स का दावा है कि पंत ने कुछ देर बाद यह स्टोरी डिलीट कर ली। अब यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है।
भारतीय क्रिकेटर ऋषभ पंत और बॉलीवुड अभिनेत्री उर्वशी रौतेला के बीच विवाद सामने आया है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें उर्वशी एक इंटरव्यू में दिख रही हैं। इतना ही नहीं इंटरव्यू में उर्वशी ने किसी 'मिस्टर RP ' के नाम का जिक्र किया है और रिश्ते टूटने को लेकर पूरी कहानी बताई है। इसके बाद सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि पंत ने सोशल मीडिया पर स्टोरी लगाकर रौतेला को जवाब भी दिया है। दरअसल, साल दो हज़ार अट्ठारह में ऐसे कयास लगाए गए थे कि पंत और उर्वशी रौतेला रिलेशनशिप में हैं। दोनों कई बार लंच-डेट पर दिख जाते थे। इनकी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थीं। हालांकि, कुछ समय बाद सोशल मीडिया पर यह खबर उड़ी कि पंत ने उर्वशी को व्हाट्सएप पर ब्लॉक कर दिया है। हालांकि, बाद में यह बताया गया कि दोनों ने आपसी सहमति से एक-दूसरे को ब्लॉक किया है। अब एक मीडिया हाउस को दिए इंटरव्यू में उर्वशी ने कुछ ऐसा कहा है, जिसे लोग पंत से जोड़कर देख रहे हैं। इसके बाद पंत ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर किए गए पोस्ट ने फैन्स को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या जिस 'मिस्टर आरपी' का जिक्र कर रही हैं, वह उर्वशी ही हैं। उर्वशी ने इंटरव्यू में एक कहानी बताई। उन्होंने कहा- मैं एक बार वाराणसी से दिल्ली शूटिंग के लिए आई थी, तब 'मिस्टर RP' मिलने के लिए आए थे। वह लॉबी में इंतजार कर रहे थे, लेकिन मैं सो गई थी। वाराणसी में दिन भर शूट करने के बाद दिल्ली में रात में मुझे शूट करना था। मैं मेकअप वगैरह में लगी हुई थी। इसके बाद शूट के बाद मैं सो गई। इसमें दस घंटाटे बीत गए। मिस्टर RP मुझे कॉल करते रहे। इसका पता मुझे बाद में चला। मेरे फोन में सत्रह मिस्ड कॉल थीं। मैंने उनसे कहा भी कि जब आप मुंबई आओगे, तो मिल लेंगे। फिर हम मुंबई में मिले भी, लेकिन तब तक मीडिया में चीजें आ चुकी थीं। हालांकि, इसके बाद सबकुछ बिगड़ चुका था। इस दौरान एंकर उर्वशी से यह भी पूछता है कि मिस्टर RP कौन हैं? इस पर उर्वशी ने नाम बताने से इंकार कर दिया। इंटरव्यू के वायरल होने के बाद पंत और उर्वशी को लेकर विवाद एकबार फिर बढ़ गया है। इसके बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया गया है। इसमें पंत की इंस्टाग्राम स्टोरी दिखाई गई है। सोशल मीडिया यूजर्स का दावा है कि पंत ने इस स्टोरी के जरिये उर्वशी को जवाब दिया है। इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा है- कैसे कुछ लोग इंटरव्यू में सिर्फ नाम, फेम, पॉपुलैरिटी और हेडलाइन में आने के लिए झूठ बोल देते हैं। यह देखकर दुख होता है कि लोग कैसे नाम और फेम के इतने भूखे हैं। भगवान उनका भला करे। पंत ने साथ ही में स्टोरी में यह भी लिखा है कि मेरा पीछा छोड़ो बहन, झूठ की भी कोई सीमा होती है। हालांकि, सोशल मीडिया यूजर्स का दावा है कि पंत ने कुछ देर बाद यह स्टोरी डिलीट कर ली। अब यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है।
लीच थेरेपी प्राकृतिक चिकित्सा की प्रक्रिया है और लगभग 2,000 वर्षों के लिए जाना जाता है। रक्त चूसने के दौरान, लीच रक्त और ऊतक में अलग-अलग पदार्थ अलग करते हैं। इसका प्रयोग विभिन्न बीमारियों के उपचार में किया जाता है, उदाहरण के लिए सूजन और दर्द में। - चूसने के दौरान, लीच घाव में लार जारी करता है - और इसमें पदार्थों का एक पूरा कॉकटेल होता है जिसमें उपचार प्रभाव होता है। लीक - शब्द "लीच" ग्रीक शब्द ईचिस से निकला है, जिसका अर्थ है थोड़ा सा सांप - एक रिंगवार्म है और इसे गांडुड़ियों का एक अधिक उन्नत रिश्तेदार माना जाता है। 14 विभिन्न प्रकार के ईल, मुख्य रूप से औषधीय लीच (हिरुडो औषधीय) और हंगेरियन लीच (हिरुडो क्रिया) इस उद्देश्य के लिए चिकित्सीय और विशेष रूप से पैदा हुए थे। जर्मनी में, लीच सख्त गुणवत्ता मानकों और स्वच्छता आवश्यकताओं के अधीन हैं क्योंकि उपयोग के लिए तैयार औषधीय उत्पाद लाइसेंसिंग के अधीन हैं. लीच त्वचा में एक छोटे घाव को ड्रिल करके और खुद को जोड़कर खून चूसती है। उनके लार के साथ, वे रक्त और ऊतकों में कम से कम 30 विभिन्न पदार्थों को छोड़ देते हैं। दर्द और सूजन के खिलाफ, अन्य चीजों के साथ ये कार्य - वे भी बाधित करते हैं रक्त के थक्के, इन anticoagulant पदार्थों में से एक है Hirudin, एक और Calin, उत्तरार्द्ध फिर से खून बहने से घाव की सफाई के 24 घंटे तक का कारण बनता है, जो एक कोमल रक्तचाप के बराबर है। लीच थेरेपी के साथ स्वयं को सभी सक्रिय पदार्थों से ऊपर बना देता है लार परजीवी का लाभ। लेकिन लीक के पतन के बाद काटने की जलन और पुनरुत्थान भी चिकित्सकीय प्रभाव को जिम्मेदार ठहराया जाता है। इस लीच उपचार का प्रभाव मुख्य रूप से दो कारकों पर आधारित है। - थक्कारोधी, - lymphstrombeschleunigend, - संवहनी antispasmodic। - आम तौर पर राहत और शांत, - रक्त सफाई और detoxifying, - एंटीस्पाज्मोडिक हो। एक लीच उपचार शुरू करने से पहले, चिकित्सक पहले रोगी की त्वचा को साफ करता है और फिर लीच की एक अलग संख्या लागू करता है। आवेदन करने के लिए लीच की संख्या रोगी की उम्र, उसकी पोषण की स्थिति और नैदानिक तस्वीर पर निर्भर करती है। इच्छित उपयोग की आवृत्ति और लीच के आकार में भी एक भूमिका निभाती है। बच्चों में, जीवन के प्रति वर्ष एक लीच में इस्तेमाल किया जा सकता है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि जानवर वांछित स्थान पर व्यवस्थित हों, उन्हें त्वचा पर एक उल्टा ग्लास में रखा जाता है। जानवर का काटने सीधे दर्दनाक नहीं है, क्योंकि फ्री-स्टाइल लीच को इसके शिकार द्वारा ध्यान में कोई रूचि नहीं है। कड़ाई से बोलते हुए, यह एक आवरण हैः तीन सितारा आकार के आवरण सलाखों, जिनमें से लगभग 80 चूने के दांत होते हैं, धीरे-धीरे रक्त तक पहुंचने के लिए त्वचा के माध्यम से घूमते हैं। Kalkzähchen के बीच खुली हैं जिसके माध्यम से लार (लीच लार) वितरित किया जाता है। लिखे गए भोजन के स्रोत तक पहुंचने पर वर्णित एक बढ़िया डंक या खींचना है; यह और बाद के लयबद्ध चूसने आंदोलनों से संकेत मिलता है कि काटने का स्थान लिया गया है और वास्तविक चूसने वाला कार्य शुरू होता है। लीच थेरेपी के लिए एक शांत, आधे अंधेरे कमरे की आवश्यकता होती है। न केवल रोगी को आराम करने के लिए, बल्कि तनाव के प्रति संवेदनशील होने वाले लीच भी। तनावग्रस्त जानवरों में, दुष्प्रभावों का खतरा बढ़ जाता है। यह आमतौर पर 20 से 9 0 मिनट के बीच होता है, कभी-कभी तीन घंटे तक, जब तक लीच अपने भोजन को खत्म नहीं करते हैं और खुद से गिर जाते हैं। उन्हें जबरन हटाया जाना चाहिए क्योंकि जबड़े घाव में रह सकते हैं और सूजन का कारण बन सकते हैं। Saugakt लेकिन सिरका, नमक या शराब के साथ dabbing द्वारा बाधित किया जा सकता है। सक्रिय घटक कैलिन के कारण, घाव आठ से 24 घंटे तक खुला रहता है और आसानी से खून बहता है। इसलिए, एक बाँझ पट्टी आवश्यक है। लीच थेरेपी के आवेदन का एक क्षेत्र प्लास्टिक सर्जरी है, मुख्य रूप से कान, उंगली, पैर की अंगुली या त्वचा के झुकाव के साथ-साथ त्वचा और अंग की चोटों के बाद परिसंचरण को बहाल करने के लिए दुर्घटना शल्य चिकित्सा उपचार। अंगों या त्वचा के लोबों के प्रतिस्थापन के बाद, हालांकि धमनियों की आपूर्ति सूक्ष्म रूप से बहाल की जाती है, शिरापरक नाली मुश्किल होती है। यह एक अच्छा सप्ताह लेता है, जब तक कि सबसे छोटे रक्त वाहिकाओं तक केशिकाओं, खुद से फिर से अंकुरित करें। इस समय के दौरान, केशिका के लिए अपर्याप्त रक्त आपूर्ति भीड़ के कारण हो सकती है। एक ऊतक परिगलन, यानी ऊतक की मृत्यु, परिणाम हो सकता है। चिकित्सा लीच का उपयोग करके, शिरापरक स्टेसिस को चूसा जा सकता है और आस-पास के ऊतक को बचाया जा सकता है। लीच उपचार तथाकथित अग्रणी चिकित्सकीय तरीकों में से एक है और कई क्षेत्रों में वैकल्पिक चिकित्सा में उपयोग किया जाता है, खासकर जब दर्द से राहत और कम खून की थक्की हासिल की जानी चाहिए। अक्सर प्रक्रिया का उपयोग तब किया जाता है जब परंपरागत दवा पहले से ही सभी संभावनाओं को समाप्त कर देती है। दो अध्ययनों ने घुटने ऑस्टियोआर्थराइटिस के लिए लीच उपचार की प्रभावकारिता की जांच की है। लीच थेरेपी दवाओं के साथ पारंपरिक उपचार से बेहतर थी, दर्द अधिकांश प्रतिभागियों में वापस चला गया, प्रभाव छह महीने तक चला। हालांकि, स्वास्थ्य बीमा कंपनियों की चिकित्सा सेवा के आईजीईएल मॉनिटर पद्धतियों को कमजोरियों के कारण सार्थक के रूप में रेट नहीं करते हैं। एक प्लेसबो प्रभाव से इंकार नहीं किया जा सकता है। इसके अलावा, दीर्घकालिक प्रभाव के बारे में कोई बयान नहीं दिया जा सकता है। रोगियों के लिए, इसका मतलब है कि इलाज के लिए ही भुगतान किया जाना चाहिए। - संवहनी विकार (पीएडीः लक्षण, चरणों और अंतःविषय क्लाउडिकेशन, मधुमेह संबंधी जटिलताओं और sequelae के उपचार) लीच उपचार के अधिक आम साइड इफेक्ट्स में हल्के सूजन, चोट लगने, और काटने की साइट पर अस्थायी खुजली, साथ ही परिसंचरण कमजोरी भी होती है। इसका कारण सक्रिय घटक कॉकटेल होने की संभावना है, जो काटने के घाव में लीक देता है। इसलिए सावधानी बरतने और उपचार के दिन बहुत कुछ पीना अनुशंसा की जाती है। दुर्लभ दुष्प्रभाव के रूप में, काटने की साइट पर घाव संक्रमण कहा जाता है, जो आमतौर पर एंटीबायोटिक के साथ इलाज करने के लिए अच्छा होता है। संक्रमण के जोखिम को कम करने और बीमारी के प्रसारण को बाहर करने के लिए, लीच का उपयोग केवल एक बार किया जा सकता है। स्थानीयकृत एलर्जी प्रतिक्रियाएं या बढ़ी हुई या लगातार खून बह रहा था। उत्तरार्द्ध विशेष रूप से अपेक्षा की जाती है जब लीच सीधे नसों पर लागू होते हैं, उदाहरण के लिए वैरिकाज़ नसों के उपचार के लिए। इसके लिए दबाव पट्टी के आवेदन की आवश्यकता होती है। यद्यपि लीच के लार में कई चिकित्सकीय प्रभावी पदार्थों का पता लगाया गया है, प्रक्रिया नकदी भुगतान नहीं है और रोगी द्वारा खुद को लिया जाना चाहिए। डॉक्टर या चिकित्सक के आधार पर, लागत काफी भिन्न हो सकती है। प्रति सत्र आपको 45 से 100 यूरो तक गिनना होगा। इसमें जोड़ा गया लीच के लिए खर्च हैं, जो प्रत्येक पांच और आठ यूरो के बीच खर्च करते हैं।
लीच थेरेपी प्राकृतिक चिकित्सा की प्रक्रिया है और लगभग दो,शून्य वर्षों के लिए जाना जाता है। रक्त चूसने के दौरान, लीच रक्त और ऊतक में अलग-अलग पदार्थ अलग करते हैं। इसका प्रयोग विभिन्न बीमारियों के उपचार में किया जाता है, उदाहरण के लिए सूजन और दर्द में। - चूसने के दौरान, लीच घाव में लार जारी करता है - और इसमें पदार्थों का एक पूरा कॉकटेल होता है जिसमें उपचार प्रभाव होता है। लीक - शब्द "लीच" ग्रीक शब्द ईचिस से निकला है, जिसका अर्थ है थोड़ा सा सांप - एक रिंगवार्म है और इसे गांडुड़ियों का एक अधिक उन्नत रिश्तेदार माना जाता है। चौदह विभिन्न प्रकार के ईल, मुख्य रूप से औषधीय लीच और हंगेरियन लीच इस उद्देश्य के लिए चिकित्सीय और विशेष रूप से पैदा हुए थे। जर्मनी में, लीच सख्त गुणवत्ता मानकों और स्वच्छता आवश्यकताओं के अधीन हैं क्योंकि उपयोग के लिए तैयार औषधीय उत्पाद लाइसेंसिंग के अधीन हैं. लीच त्वचा में एक छोटे घाव को ड्रिल करके और खुद को जोड़कर खून चूसती है। उनके लार के साथ, वे रक्त और ऊतकों में कम से कम तीस विभिन्न पदार्थों को छोड़ देते हैं। दर्द और सूजन के खिलाफ, अन्य चीजों के साथ ये कार्य - वे भी बाधित करते हैं रक्त के थक्के, इन anticoagulant पदार्थों में से एक है Hirudin, एक और Calin, उत्तरार्द्ध फिर से खून बहने से घाव की सफाई के चौबीस घंटाटे तक का कारण बनता है, जो एक कोमल रक्तचाप के बराबर है। लीच थेरेपी के साथ स्वयं को सभी सक्रिय पदार्थों से ऊपर बना देता है लार परजीवी का लाभ। लेकिन लीक के पतन के बाद काटने की जलन और पुनरुत्थान भी चिकित्सकीय प्रभाव को जिम्मेदार ठहराया जाता है। इस लीच उपचार का प्रभाव मुख्य रूप से दो कारकों पर आधारित है। - थक्कारोधी, - lymphstrombeschleunigend, - संवहनी antispasmodic। - आम तौर पर राहत और शांत, - रक्त सफाई और detoxifying, - एंटीस्पाज्मोडिक हो। एक लीच उपचार शुरू करने से पहले, चिकित्सक पहले रोगी की त्वचा को साफ करता है और फिर लीच की एक अलग संख्या लागू करता है। आवेदन करने के लिए लीच की संख्या रोगी की उम्र, उसकी पोषण की स्थिति और नैदानिक तस्वीर पर निर्भर करती है। इच्छित उपयोग की आवृत्ति और लीच के आकार में भी एक भूमिका निभाती है। बच्चों में, जीवन के प्रति वर्ष एक लीच में इस्तेमाल किया जा सकता है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि जानवर वांछित स्थान पर व्यवस्थित हों, उन्हें त्वचा पर एक उल्टा ग्लास में रखा जाता है। जानवर का काटने सीधे दर्दनाक नहीं है, क्योंकि फ्री-स्टाइल लीच को इसके शिकार द्वारा ध्यान में कोई रूचि नहीं है। कड़ाई से बोलते हुए, यह एक आवरण हैः तीन सितारा आकार के आवरण सलाखों, जिनमें से लगभग अस्सी चूने के दांत होते हैं, धीरे-धीरे रक्त तक पहुंचने के लिए त्वचा के माध्यम से घूमते हैं। Kalkzähchen के बीच खुली हैं जिसके माध्यम से लार वितरित किया जाता है। लिखे गए भोजन के स्रोत तक पहुंचने पर वर्णित एक बढ़िया डंक या खींचना है; यह और बाद के लयबद्ध चूसने आंदोलनों से संकेत मिलता है कि काटने का स्थान लिया गया है और वास्तविक चूसने वाला कार्य शुरू होता है। लीच थेरेपी के लिए एक शांत, आधे अंधेरे कमरे की आवश्यकता होती है। न केवल रोगी को आराम करने के लिए, बल्कि तनाव के प्रति संवेदनशील होने वाले लीच भी। तनावग्रस्त जानवरों में, दुष्प्रभावों का खतरा बढ़ जाता है। यह आमतौर पर बीस से नौ शून्य मिनट के बीच होता है, कभी-कभी तीन घंटे तक, जब तक लीच अपने भोजन को खत्म नहीं करते हैं और खुद से गिर जाते हैं। उन्हें जबरन हटाया जाना चाहिए क्योंकि जबड़े घाव में रह सकते हैं और सूजन का कारण बन सकते हैं। Saugakt लेकिन सिरका, नमक या शराब के साथ dabbing द्वारा बाधित किया जा सकता है। सक्रिय घटक कैलिन के कारण, घाव आठ से चौबीस घंटाटे तक खुला रहता है और आसानी से खून बहता है। इसलिए, एक बाँझ पट्टी आवश्यक है। लीच थेरेपी के आवेदन का एक क्षेत्र प्लास्टिक सर्जरी है, मुख्य रूप से कान, उंगली, पैर की अंगुली या त्वचा के झुकाव के साथ-साथ त्वचा और अंग की चोटों के बाद परिसंचरण को बहाल करने के लिए दुर्घटना शल्य चिकित्सा उपचार। अंगों या त्वचा के लोबों के प्रतिस्थापन के बाद, हालांकि धमनियों की आपूर्ति सूक्ष्म रूप से बहाल की जाती है, शिरापरक नाली मुश्किल होती है। यह एक अच्छा सप्ताह लेता है, जब तक कि सबसे छोटे रक्त वाहिकाओं तक केशिकाओं, खुद से फिर से अंकुरित करें। इस समय के दौरान, केशिका के लिए अपर्याप्त रक्त आपूर्ति भीड़ के कारण हो सकती है। एक ऊतक परिगलन, यानी ऊतक की मृत्यु, परिणाम हो सकता है। चिकित्सा लीच का उपयोग करके, शिरापरक स्टेसिस को चूसा जा सकता है और आस-पास के ऊतक को बचाया जा सकता है। लीच उपचार तथाकथित अग्रणी चिकित्सकीय तरीकों में से एक है और कई क्षेत्रों में वैकल्पिक चिकित्सा में उपयोग किया जाता है, खासकर जब दर्द से राहत और कम खून की थक्की हासिल की जानी चाहिए। अक्सर प्रक्रिया का उपयोग तब किया जाता है जब परंपरागत दवा पहले से ही सभी संभावनाओं को समाप्त कर देती है। दो अध्ययनों ने घुटने ऑस्टियोआर्थराइटिस के लिए लीच उपचार की प्रभावकारिता की जांच की है। लीच थेरेपी दवाओं के साथ पारंपरिक उपचार से बेहतर थी, दर्द अधिकांश प्रतिभागियों में वापस चला गया, प्रभाव छह महीने तक चला। हालांकि, स्वास्थ्य बीमा कंपनियों की चिकित्सा सेवा के आईजीईएल मॉनिटर पद्धतियों को कमजोरियों के कारण सार्थक के रूप में रेट नहीं करते हैं। एक प्लेसबो प्रभाव से इंकार नहीं किया जा सकता है। इसके अलावा, दीर्घकालिक प्रभाव के बारे में कोई बयान नहीं दिया जा सकता है। रोगियों के लिए, इसका मतलब है कि इलाज के लिए ही भुगतान किया जाना चाहिए। - संवहनी विकार लीच उपचार के अधिक आम साइड इफेक्ट्स में हल्के सूजन, चोट लगने, और काटने की साइट पर अस्थायी खुजली, साथ ही परिसंचरण कमजोरी भी होती है। इसका कारण सक्रिय घटक कॉकटेल होने की संभावना है, जो काटने के घाव में लीक देता है। इसलिए सावधानी बरतने और उपचार के दिन बहुत कुछ पीना अनुशंसा की जाती है। दुर्लभ दुष्प्रभाव के रूप में, काटने की साइट पर घाव संक्रमण कहा जाता है, जो आमतौर पर एंटीबायोटिक के साथ इलाज करने के लिए अच्छा होता है। संक्रमण के जोखिम को कम करने और बीमारी के प्रसारण को बाहर करने के लिए, लीच का उपयोग केवल एक बार किया जा सकता है। स्थानीयकृत एलर्जी प्रतिक्रियाएं या बढ़ी हुई या लगातार खून बह रहा था। उत्तरार्द्ध विशेष रूप से अपेक्षा की जाती है जब लीच सीधे नसों पर लागू होते हैं, उदाहरण के लिए वैरिकाज़ नसों के उपचार के लिए। इसके लिए दबाव पट्टी के आवेदन की आवश्यकता होती है। यद्यपि लीच के लार में कई चिकित्सकीय प्रभावी पदार्थों का पता लगाया गया है, प्रक्रिया नकदी भुगतान नहीं है और रोगी द्वारा खुद को लिया जाना चाहिए। डॉक्टर या चिकित्सक के आधार पर, लागत काफी भिन्न हो सकती है। प्रति सत्र आपको पैंतालीस से एक सौ यूरो तक गिनना होगा। इसमें जोड़ा गया लीच के लिए खर्च हैं, जो प्रत्येक पांच और आठ यूरो के बीच खर्च करते हैं।
मौसम विभाग के अनुसार आज बिहार के पटना, पूर्णिया, भागलपुर, बक्सर, शेखपुरा, नवादा, जमुई, बांका, खगड़िया, अररिया जिले में तापमान 41 से 43 डिग्री के आस-पास रहेगा। इसलिए इन जिलों में रहने वाले लोग आज लू से सावधान रहें। हालांकि 13 मई के बाद राज्य के कई जिलों में लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी और आसमान में बादलों का आना-जाना शुरू होगा। 14 मई से बिहार के सभी जिलों में चलने वाली हवा में नमी होगी। जिसके कारण तापमान में गिरावट आएगी। आपको बता दें की बंगाल की खाड़ी में उठा साइक्लोन मोचा का असर बंगाल, झारखंड के साथ-साथ बिहार के कुछ हिस्सों में भी हो सकता है। इससे बिहार के कई जिलों में हल्की बूंदाबांदी हो सकती हैं और लोगों को गर्मी से राहत मिल सकती हैं।
मौसम विभाग के अनुसार आज बिहार के पटना, पूर्णिया, भागलपुर, बक्सर, शेखपुरा, नवादा, जमुई, बांका, खगड़िया, अररिया जिले में तापमान इकतालीस से तैंतालीस डिग्री के आस-पास रहेगा। इसलिए इन जिलों में रहने वाले लोग आज लू से सावधान रहें। हालांकि तेरह मई के बाद राज्य के कई जिलों में लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी और आसमान में बादलों का आना-जाना शुरू होगा। चौदह मई से बिहार के सभी जिलों में चलने वाली हवा में नमी होगी। जिसके कारण तापमान में गिरावट आएगी। आपको बता दें की बंगाल की खाड़ी में उठा साइक्लोन मोचा का असर बंगाल, झारखंड के साथ-साथ बिहार के कुछ हिस्सों में भी हो सकता है। इससे बिहार के कई जिलों में हल्की बूंदाबांदी हो सकती हैं और लोगों को गर्मी से राहत मिल सकती हैं।
Afganistan : पिछले 20 सालों में भारत ने अफगानिस्तान में 23 हज़ार करोड़ का बड़ा निवेश किया है। लेकिन अफगानिस्तान अब पूर्ण रूप से तालिबान के कब्जे में आ चुका है। Afganistan : अफगानिस्तान अब पूर्ण रूप से तालिबान के कब्जे में आ चुका है। कल तालिबान प्रमुख अपने लड़ाकों साथ राष्ट्रपति भवन में पहुंचे। जिसके बाद वह की राजनीतिक पार्टियां अब तालिबान के आक़ाओं से वार्ता स्थपित करने को तैयार हो गयी हैं। अफगानिस्तान तेज़ी से हालात बिगड़ रहे हैं। कुछ दिन पहले अफगानिस्तान के वित्त मंत्री ने देश छोड़ दिया था। कल की खबरों से ज्ञात है कि अब अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने भी देश छोड़ दिया है । जिस्क्स बाद अमेरिकी और यूएन ने चिंता व्यक्त की है। इस बीच तालिबान ने पूरे देश में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। तालिबान ने पिछले कुछ सप्ताह में कई रणनीतिक जिलों में नियंत्रण हासिल किया है, जिनमें विशेष रूप से ईरान, उज्बेकिस्तान और ताजिकिस्तान की सीमाओं से लगे इलाके हैं। इस बीच वहां राजनयिक स्तर पर भारत के लिए भी हालात ठीक नहीं है। मौजूदा हालात में भारत को यहां अपनी कोई भूमिका नहीं दिख रही है। हम जानते हैं कि तालिबान हमेशा से भारत विरोधी रहा है। अब अफगानिस्तान में भारत का प्रवेश मुश्किल ही है। पर हमने तालिबान के खात्मे के बाद पिछले करीब 20 सालों से अफगानिस्तान से रिश्ते बेहद मजबूत किये थे। । पिछले 20 सालों में भारत ने अफगानिस्तान में 23 हज़ार करोड़ का बड़ा निवेश किया है। भारत ने यहां महत्वपूर्ण सड़कों, बांधों, बिजली लाइनों और सब-स्टेशनों, स्कूलों और अस्पतालों का निर्माण किया है। लेकिन भारत के इस निवेश का भविष्य क्या होगा इस पर गौर किया जाना जरूरी है। साल 2011 के भारत-अफगानिस्तान रणनीतिक साझेदारी समझौते के तहत बुनियादी ढांचे और संस्थानों के पुनर्निर्माण में मदद करने के लिए सिफारिश की गई थी। लिहाज़ा कई क्षेत्रों में अफगानिस्तान में निवेश को बढ़ावा दिया गया। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार अब एक अरब डॉलर का है। नवंबर 2020 में जिनेवा में अफगानिस्तान सम्मेलन में बोलते हुए, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि अफगानिस्तान का कोई भी हिस्सा आज भारत के प्रोजेक्ट से अछूता नहीं है। उन्होंने कहा था कि यहां के 34 प्रांतों में 400 से अधिक प्रोजेक्ट्स हैं। सलमान डैम अफगानिस्तान के हेरात प्रांत में है। यहां भारत ने 42 मेगावाट का पावर प्रोजेक्ट लगाया गया है। कई मुश्किलों के बाद इस प्रोजेक्ट को पूरा किया गया। साल 2016 में इसका उद्घाटन किया गया। इसे अफगान-भारत मैत्री डैम के रूप में जाना जाता है। ये दूसरा हाई-प्रोफाइल प्रोजेक्ट है, जिसे सीमा सड़क संगठन ने तैयार किया था। 218 किलोमीटर लंबे इस राजमार्ग का ज़रांज इलाका ईरान के साथ अफगानिस्तान की सीमा के करीब स्थित है। 150 मिलियन डॉलर का राजमार्ग खश रुड नदी के साथ जरंज के उत्तर-पूर्व में डेलाराम तक जाता है, जहां यह एक रिंग रोड से जुड़ता है, जो दक्षिण में कंधार, पूर्व में गजनी और काबुल, उत्तर में मजार-ए-शरीफ को जोड़ता है। पाकिस्तान के रास्ते भारत का अफगानिस्तान के साथ व्यापार नहीं होता है, इसलिए इस हाइवे का नई दिल्ली के लिए काफी रणनीतिक महत्व का है। ये ईरान के चाबहार बंदरगाह के माध्यम से अफगानिस्तान में एक वैकल्पिक रास्ता देता है। काबुल में अफगान संसद का निर्माण भारत ने 90 मिलियन डॉलर में किया था। इसे 2015 में खोला गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भवन का उद्घाटन किया। इमारत के एक ब्लॉक का नाम पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर रखा गया है। साल 2016 में अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी और प्रधानमंत्री मोदी ने काबुल में स्टोर पैलेस का फिर से उद्घाटन किया। ये मूल रूप से 19वीं शताब्दी के आखिर में बनाया गया था। इस इमारत में 1965 तक अफगान विदेश मंत्री और मंत्रालय के कार्यालय थे। 2009 में, भारत, अफगानिस्तान और आगा खान डेवलपमेंट नेटवर्क ने इसकी बहाली के लिए एक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए। आगा खान ट्रस्ट फॉर कल्चर ने 2013 और 2016 के बीच परियोजना को पूरा किया। भारत ने एक बच्चों के अस्पताल का पुनर्निर्माण किया है, जिसे उसने 1972 में काबुल में बनाने में मदद की थी। इसका नाम 1985 में इंदिरा गांधी बाल स्वास्थ्य संस्थान रखा गया था। बाद में ये युद्ध के दौरान जर्जर हो गया था। भारत ने सीमावर्ती प्रांतों बदख्शां, बल्ख, कंधार, खोस्त, कुनार, नंगरहार, निमरूज, नूरिस्तान, पक्तिया और पक्तिका में भी क्लीनिक बनाए हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत ने शहरी परिवहन के लिए 400 बसें और 200 मिनी बसें, नगर पालिकाओं के लिए 105 उपयोगिता वाहन, अफगान राष्ट्रीय सेना के लिए 285 सैन्य वाहन और पांच शहरों में सार्वजनिक अस्पतालों के लिए 10 एम्बुलेंस उपहार में दीं। अफगानिस्तान में अन्य भारतीय परियोजनाओं में राजधानी काबुल को बिजली की आपूर्ति बढ़ाने के पावर इन्फ्रा प्रोजेक्ट पर काम किया। बघलान प्रांत की राजधानी पुल-ए-खुमरी से काबुल के उत्तर में 220kV डीसी ट्रांसमिशन लाइन का निर्माण भारत की तरफ से किया गया। नवंबर में जिनेवा सम्मेलन में जयशंकर ने घोषणा की थी कि भारत ने अफगानिस्तान के साथ काबुल जिले में शतूत बांध के निर्माण के लिए एक समझौता किया है। इससे 20 लाख लोगों को सुरक्षित पेयजल का लाभ मिलेगा। उन्होंने 80 मिलियन डॉलर की लगभग 100 सामुदायिक विकास परियोजनाओं की शुरुआत की भी घोषणा की थी। पिछले साल नवंबर में जिनेवा सम्मेलन में, जयशंकर ने घोषणा की कि भारत ने अफगानिस्तान के साथ काबुल जिले में शतूत बांध के निर्माण के लिए एक समझौता किया है। इस प्रोजेक्ट से 20 लाख लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सकेगा। जयशंकर ने 80 मिलियन डॉलर की लगभग 100 कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट की शुरुआत की भी घोषणा की। तालिबान से भारत को क्या खतरा है? अफगानिस्तान में ऊर्जा संयंत्र, बांध का निर्माण, राजमार्ग के निर्माण, स्कूल, भवन, संसद भवन के निर्माण में भारत ने अहम भूमिका निभाई है। अफगानिस्तान के सैनिकों को ट्रेनिंग समेत अन्य तमाम सुविधाएं प्रदान की हैं। भारत की योजना अफगानिस्तान में सड़क और रेल लाइन बिछाने तथा मध्य एशिया तक फर्राटा भरने की थी। ऐसा माना जा रहा है कि अफगानिस्तान में तालिबान के आने के बाद इन सभी कोशिशों को करारा झटका लग सकता है। सबसे बड़ा खतरा भारत के सामने तालिबान में अस्थिरता फैलने के बाद आतंकवाद, उग्रवाद, अलगाववाद फैलने का है। इससे वहां अस्थिरकारी ताकतें हावी हो सकती हैं और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई, पाकिस्तान से संचालित आतंकी संगठन इसके सहारे भारत में अस्थिरता की गतिविधियां बढ़ा सकते हैं। भारत के माथे पर क्यों हैं चिंता की लकीरें? भारत सरकार ने पिछले 20 साल में तालिबान और इसके नेताओं से कभी कोई संपर्क नहीं साधा। यहां तक कि 2008-09 में पाकिस्तान की तालिबान के नेताओं से अमेरिकी प्रतिनिधियों की बातचीत जैसे प्रयास का विरोध किया था। भारत ने अच्छे और बुरे तालिबान के तर्क को भी खारिज कर दिया था। भारत सरकार ने अफगानिस्तान में अपने हित और अफगानिस्तान के निर्माण का रास्ता वहां की सरकार के माध्यम से तय किया। भारत की इस कोशिश के सामानांतर पाकिस्तान तालिबान की सरकार को सबसे पहले मान्यता देने वाले देशों में शामिल था। पाकिस्तान ने ही सबसे अंत में तालिबान सरकार के साथ अपने राजनयिक रिश्ते समाप्त किए। विदेश, रक्षा, खुफिया जानकारों की मानें तो तालिबान के तमाम सैन्य कमांडरों और कई शीर्ष नेताओं को पाकिस्तान से सहायता मिलती है। चीन ने भी अफगानिस्तान में अपनी योजना को साकार करने के लिए पाकिस्तान का सहारा लिया है। बताते हैं कि चीन के ही प्रयास से रूस ने पाकिस्तान के साथ संबंध ठीक किए हैं और चीन, रूस, ईरान, पाकिस्तान अपना हित साधने का रोडमैप बना रहे हैं। तुर्की ने अफगानिस्तान में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के प्रयासों को तेज कर दिया है। उसने एक तरफ अमेरिका तो दूसरी तरफ पाकिस्तान को साधने की भी कोशिशें तेज की हैं। इस रोडमैप में भारत के पास सबसे विश्वस्त सामरिक साझीदार सहयोगी देश केवल रूस है। बताते हैं कि यह चिंता केवल भारत की नहीं है। उज्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान की भी है। हालांकि ये अफगानिस्तान के पड़ोसी देश हैं। भारत के हाथ में क्या है? इसका उत्तर किसी के पास नहीं है। विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की टीम इसी का जवाब तलाशने में लगी है। अफगानिस्तान भारत की सुरक्षा की दृष्टि से हमेशा बहुत महत्वपूर्ण रहा है। अफगानिस्तान में अस्थिरता बढ़ने पर जिहादी और कट्टरपंथी ग्रुप कश्मीर में सक्रिय हो जाते हैं। ऐसे में भारत की रणनीति रही है कि अफगानिस्तान की उस राजनीतिक सत्ता से नजदीकी रखी जाए, जो वहां के कट्टरपंथी समूहों को काबू में रख सके। इसके अलावा ईरान जैसे देशों के साथ व्यापारिक लिहाज से भी अफगानिस्तान भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण रहा है। इस टीम को पता है कि अफगानिस्तान में तालिबान सत्ता पर काबिज हुआ तो हालात 90 के दशक से कई गुना अधिक खराब हो सकते हैं। अफगानिस्तान और तालिबान से संबंधों तथा हितों के मामले में भारत को ऐसी स्थिति में दूसरे देशों पर अधिक निर्भर रहना पड़ सकता है। सऊदी अरब, यूएई, रूस, ईरान अधिक महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
Afganistan : पिछले बीस सालों में भारत ने अफगानिस्तान में तेईस हज़ार करोड़ का बड़ा निवेश किया है। लेकिन अफगानिस्तान अब पूर्ण रूप से तालिबान के कब्जे में आ चुका है। Afganistan : अफगानिस्तान अब पूर्ण रूप से तालिबान के कब्जे में आ चुका है। कल तालिबान प्रमुख अपने लड़ाकों साथ राष्ट्रपति भवन में पहुंचे। जिसके बाद वह की राजनीतिक पार्टियां अब तालिबान के आक़ाओं से वार्ता स्थपित करने को तैयार हो गयी हैं। अफगानिस्तान तेज़ी से हालात बिगड़ रहे हैं। कुछ दिन पहले अफगानिस्तान के वित्त मंत्री ने देश छोड़ दिया था। कल की खबरों से ज्ञात है कि अब अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने भी देश छोड़ दिया है । जिस्क्स बाद अमेरिकी और यूएन ने चिंता व्यक्त की है। इस बीच तालिबान ने पूरे देश में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। तालिबान ने पिछले कुछ सप्ताह में कई रणनीतिक जिलों में नियंत्रण हासिल किया है, जिनमें विशेष रूप से ईरान, उज्बेकिस्तान और ताजिकिस्तान की सीमाओं से लगे इलाके हैं। इस बीच वहां राजनयिक स्तर पर भारत के लिए भी हालात ठीक नहीं है। मौजूदा हालात में भारत को यहां अपनी कोई भूमिका नहीं दिख रही है। हम जानते हैं कि तालिबान हमेशा से भारत विरोधी रहा है। अब अफगानिस्तान में भारत का प्रवेश मुश्किल ही है। पर हमने तालिबान के खात्मे के बाद पिछले करीब बीस सालों से अफगानिस्तान से रिश्ते बेहद मजबूत किये थे। । पिछले बीस सालों में भारत ने अफगानिस्तान में तेईस हज़ार करोड़ का बड़ा निवेश किया है। भारत ने यहां महत्वपूर्ण सड़कों, बांधों, बिजली लाइनों और सब-स्टेशनों, स्कूलों और अस्पतालों का निर्माण किया है। लेकिन भारत के इस निवेश का भविष्य क्या होगा इस पर गौर किया जाना जरूरी है। साल दो हज़ार ग्यारह के भारत-अफगानिस्तान रणनीतिक साझेदारी समझौते के तहत बुनियादी ढांचे और संस्थानों के पुनर्निर्माण में मदद करने के लिए सिफारिश की गई थी। लिहाज़ा कई क्षेत्रों में अफगानिस्तान में निवेश को बढ़ावा दिया गया। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार अब एक अरब डॉलर का है। नवंबर दो हज़ार बीस में जिनेवा में अफगानिस्तान सम्मेलन में बोलते हुए, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि अफगानिस्तान का कोई भी हिस्सा आज भारत के प्रोजेक्ट से अछूता नहीं है। उन्होंने कहा था कि यहां के चौंतीस प्रांतों में चार सौ से अधिक प्रोजेक्ट्स हैं। सलमान डैम अफगानिस्तान के हेरात प्रांत में है। यहां भारत ने बयालीस मेगावाट का पावर प्रोजेक्ट लगाया गया है। कई मुश्किलों के बाद इस प्रोजेक्ट को पूरा किया गया। साल दो हज़ार सोलह में इसका उद्घाटन किया गया। इसे अफगान-भारत मैत्री डैम के रूप में जाना जाता है। ये दूसरा हाई-प्रोफाइल प्रोजेक्ट है, जिसे सीमा सड़क संगठन ने तैयार किया था। दो सौ अट्ठारह किलोग्राममीटर लंबे इस राजमार्ग का ज़रांज इलाका ईरान के साथ अफगानिस्तान की सीमा के करीब स्थित है। एक सौ पचास मिलियन डॉलर का राजमार्ग खश रुड नदी के साथ जरंज के उत्तर-पूर्व में डेलाराम तक जाता है, जहां यह एक रिंग रोड से जुड़ता है, जो दक्षिण में कंधार, पूर्व में गजनी और काबुल, उत्तर में मजार-ए-शरीफ को जोड़ता है। पाकिस्तान के रास्ते भारत का अफगानिस्तान के साथ व्यापार नहीं होता है, इसलिए इस हाइवे का नई दिल्ली के लिए काफी रणनीतिक महत्व का है। ये ईरान के चाबहार बंदरगाह के माध्यम से अफगानिस्तान में एक वैकल्पिक रास्ता देता है। काबुल में अफगान संसद का निर्माण भारत ने नब्बे मिलियन डॉलर में किया था। इसे दो हज़ार पंद्रह में खोला गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भवन का उद्घाटन किया। इमारत के एक ब्लॉक का नाम पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर रखा गया है। साल दो हज़ार सोलह में अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी और प्रधानमंत्री मोदी ने काबुल में स्टोर पैलेस का फिर से उद्घाटन किया। ये मूल रूप से उन्नीसवीं शताब्दी के आखिर में बनाया गया था। इस इमारत में एक हज़ार नौ सौ पैंसठ तक अफगान विदेश मंत्री और मंत्रालय के कार्यालय थे। दो हज़ार नौ में, भारत, अफगानिस्तान और आगा खान डेवलपमेंट नेटवर्क ने इसकी बहाली के लिए एक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए। आगा खान ट्रस्ट फॉर कल्चर ने दो हज़ार तेरह और दो हज़ार सोलह के बीच परियोजना को पूरा किया। भारत ने एक बच्चों के अस्पताल का पुनर्निर्माण किया है, जिसे उसने एक हज़ार नौ सौ बहत्तर में काबुल में बनाने में मदद की थी। इसका नाम एक हज़ार नौ सौ पचासी में इंदिरा गांधी बाल स्वास्थ्य संस्थान रखा गया था। बाद में ये युद्ध के दौरान जर्जर हो गया था। भारत ने सीमावर्ती प्रांतों बदख्शां, बल्ख, कंधार, खोस्त, कुनार, नंगरहार, निमरूज, नूरिस्तान, पक्तिया और पक्तिका में भी क्लीनिक बनाए हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत ने शहरी परिवहन के लिए चार सौ बसें और दो सौ मिनी बसें, नगर पालिकाओं के लिए एक सौ पाँच उपयोगिता वाहन, अफगान राष्ट्रीय सेना के लिए दो सौ पचासी सैन्य वाहन और पांच शहरों में सार्वजनिक अस्पतालों के लिए दस एम्बुलेंस उपहार में दीं। अफगानिस्तान में अन्य भारतीय परियोजनाओं में राजधानी काबुल को बिजली की आपूर्ति बढ़ाने के पावर इन्फ्रा प्रोजेक्ट पर काम किया। बघलान प्रांत की राजधानी पुल-ए-खुमरी से काबुल के उत्तर में दो सौ बीस किलोवोल्ट डीसी ट्रांसमिशन लाइन का निर्माण भारत की तरफ से किया गया। नवंबर में जिनेवा सम्मेलन में जयशंकर ने घोषणा की थी कि भारत ने अफगानिस्तान के साथ काबुल जिले में शतूत बांध के निर्माण के लिए एक समझौता किया है। इससे बीस लाख लोगों को सुरक्षित पेयजल का लाभ मिलेगा। उन्होंने अस्सी मिलियन डॉलर की लगभग एक सौ सामुदायिक विकास परियोजनाओं की शुरुआत की भी घोषणा की थी। पिछले साल नवंबर में जिनेवा सम्मेलन में, जयशंकर ने घोषणा की कि भारत ने अफगानिस्तान के साथ काबुल जिले में शतूत बांध के निर्माण के लिए एक समझौता किया है। इस प्रोजेक्ट से बीस लाख लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सकेगा। जयशंकर ने अस्सी मिलियन डॉलर की लगभग एक सौ कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट की शुरुआत की भी घोषणा की। तालिबान से भारत को क्या खतरा है? अफगानिस्तान में ऊर्जा संयंत्र, बांध का निर्माण, राजमार्ग के निर्माण, स्कूल, भवन, संसद भवन के निर्माण में भारत ने अहम भूमिका निभाई है। अफगानिस्तान के सैनिकों को ट्रेनिंग समेत अन्य तमाम सुविधाएं प्रदान की हैं। भारत की योजना अफगानिस्तान में सड़क और रेल लाइन बिछाने तथा मध्य एशिया तक फर्राटा भरने की थी। ऐसा माना जा रहा है कि अफगानिस्तान में तालिबान के आने के बाद इन सभी कोशिशों को करारा झटका लग सकता है। सबसे बड़ा खतरा भारत के सामने तालिबान में अस्थिरता फैलने के बाद आतंकवाद, उग्रवाद, अलगाववाद फैलने का है। इससे वहां अस्थिरकारी ताकतें हावी हो सकती हैं और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई, पाकिस्तान से संचालित आतंकी संगठन इसके सहारे भारत में अस्थिरता की गतिविधियां बढ़ा सकते हैं। भारत के माथे पर क्यों हैं चिंता की लकीरें? भारत सरकार ने पिछले बीस साल में तालिबान और इसके नेताओं से कभी कोई संपर्क नहीं साधा। यहां तक कि दो हज़ार आठ-नौ में पाकिस्तान की तालिबान के नेताओं से अमेरिकी प्रतिनिधियों की बातचीत जैसे प्रयास का विरोध किया था। भारत ने अच्छे और बुरे तालिबान के तर्क को भी खारिज कर दिया था। भारत सरकार ने अफगानिस्तान में अपने हित और अफगानिस्तान के निर्माण का रास्ता वहां की सरकार के माध्यम से तय किया। भारत की इस कोशिश के सामानांतर पाकिस्तान तालिबान की सरकार को सबसे पहले मान्यता देने वाले देशों में शामिल था। पाकिस्तान ने ही सबसे अंत में तालिबान सरकार के साथ अपने राजनयिक रिश्ते समाप्त किए। विदेश, रक्षा, खुफिया जानकारों की मानें तो तालिबान के तमाम सैन्य कमांडरों और कई शीर्ष नेताओं को पाकिस्तान से सहायता मिलती है। चीन ने भी अफगानिस्तान में अपनी योजना को साकार करने के लिए पाकिस्तान का सहारा लिया है। बताते हैं कि चीन के ही प्रयास से रूस ने पाकिस्तान के साथ संबंध ठीक किए हैं और चीन, रूस, ईरान, पाकिस्तान अपना हित साधने का रोडमैप बना रहे हैं। तुर्की ने अफगानिस्तान में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के प्रयासों को तेज कर दिया है। उसने एक तरफ अमेरिका तो दूसरी तरफ पाकिस्तान को साधने की भी कोशिशें तेज की हैं। इस रोडमैप में भारत के पास सबसे विश्वस्त सामरिक साझीदार सहयोगी देश केवल रूस है। बताते हैं कि यह चिंता केवल भारत की नहीं है। उज्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान की भी है। हालांकि ये अफगानिस्तान के पड़ोसी देश हैं। भारत के हाथ में क्या है? इसका उत्तर किसी के पास नहीं है। विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की टीम इसी का जवाब तलाशने में लगी है। अफगानिस्तान भारत की सुरक्षा की दृष्टि से हमेशा बहुत महत्वपूर्ण रहा है। अफगानिस्तान में अस्थिरता बढ़ने पर जिहादी और कट्टरपंथी ग्रुप कश्मीर में सक्रिय हो जाते हैं। ऐसे में भारत की रणनीति रही है कि अफगानिस्तान की उस राजनीतिक सत्ता से नजदीकी रखी जाए, जो वहां के कट्टरपंथी समूहों को काबू में रख सके। इसके अलावा ईरान जैसे देशों के साथ व्यापारिक लिहाज से भी अफगानिस्तान भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण रहा है। इस टीम को पता है कि अफगानिस्तान में तालिबान सत्ता पर काबिज हुआ तो हालात नब्बे के दशक से कई गुना अधिक खराब हो सकते हैं। अफगानिस्तान और तालिबान से संबंधों तथा हितों के मामले में भारत को ऐसी स्थिति में दूसरे देशों पर अधिक निर्भर रहना पड़ सकता है। सऊदी अरब, यूएई, रूस, ईरान अधिक महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
इस मांग के संबंध में सचिव शैलेश बगौली की तरफ से शासनादेश जारी कर दिए गए हैं। हालांकि इस शासनादेश में तिथि पहले दो अक्टूबर लिखी थी, फिर इसे पैन से काटकर अक्टूबर का नवंबर लिखा गया, वहीं, राज्यकर्मियों की मुख्यमंत्री से वार्ता पांच नवंबर को हुई थी। वहीं, पता चलता है कि इसी तरह का शासनादेश 13 दिसंबर 2018 को भी जारी किया गया था। इसके बाद 20 जनवरी 2021 को भी ऐसा ही शासनादेश जारी किया गया था। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए) उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी समन्वय समिति के प्रवक्ताअरुण पांडे ने कहा कि समन्वय समिति के साथ 20 सूत्रीय मांगपत्र पर पांच नवंबर 2022 को मुख्यमंत्री पुष्कर सिहं धामी जी की अध्यक्षता में हुई बैठक में मांग संख्या 19 में शासन से मांग की गई थी कि समन्वय समिति से सम्बद्ध समस्त परिसंघों के साथ पूर्व में शासन स्तर पर हुई बैठकों में किये गये समझौते को निर्णयों के अनुरूप शीघ्र शासनादेश जारी कराया जाए। उन्होंने बताया कि इस संबंध में शासनादेश बैठक से पहले ही जारी हो चुका था। इसके तहत कार्मिक विभाग के सचिवों, जिलाधिकारियों, विभागाध्यक्षों को विभागान्तर्गत गठित शिकायत निवारण समिति की बैठक बुलाने को कहा गया था। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए) उन्होंने कहा कि उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी समन्वय समिति इस शासनादेश के अनुरूप मांगों को लेकर आगे बढ़ने का सरकार के आग्रह कर रहा है। उक्त शासनादेश में सचिव कार्मिक की ओर से विभागाध्यक्षों एवं जिलाधिकारियों को शिकायत निवारण समिति को प्रत्येक माह एवं सचिव स्तर पर प्रत्येक तीन माह में बैठक का आयोजन किए जाने के लिए निर्देशित किया गया है। पाण्डे ने आशा जताई कि समस्त जिलाधिकारियों, विभागाध्यक्षों एवं सचिवों की ओर से उक्त निर्देशों का पालन कर संघों परिसंघों के साथ दिए गए समयान्तर्गत बैठक का आयोजन किया जाएगा। ताकि मांगों पर पूर्व में सहमति हो चुकी है, उन समझौतों, निर्णयों का शासनादेश भी यथाशीघ्र जारी किया जाएगा। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
इस मांग के संबंध में सचिव शैलेश बगौली की तरफ से शासनादेश जारी कर दिए गए हैं। हालांकि इस शासनादेश में तिथि पहले दो अक्टूबर लिखी थी, फिर इसे पैन से काटकर अक्टूबर का नवंबर लिखा गया, वहीं, राज्यकर्मियों की मुख्यमंत्री से वार्ता पांच नवंबर को हुई थी। वहीं, पता चलता है कि इसी तरह का शासनादेश तेरह दिसंबर दो हज़ार अट्ठारह को भी जारी किया गया था। इसके बाद बीस जनवरी दो हज़ार इक्कीस को भी ऐसा ही शासनादेश जारी किया गया था। उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी समन्वय समिति के प्रवक्ताअरुण पांडे ने कहा कि समन्वय समिति के साथ बीस सूत्रीय मांगपत्र पर पांच नवंबर दो हज़ार बाईस को मुख्यमंत्री पुष्कर सिहं धामी जी की अध्यक्षता में हुई बैठक में मांग संख्या उन्नीस में शासन से मांग की गई थी कि समन्वय समिति से सम्बद्ध समस्त परिसंघों के साथ पूर्व में शासन स्तर पर हुई बैठकों में किये गये समझौते को निर्णयों के अनुरूप शीघ्र शासनादेश जारी कराया जाए। उन्होंने बताया कि इस संबंध में शासनादेश बैठक से पहले ही जारी हो चुका था। इसके तहत कार्मिक विभाग के सचिवों, जिलाधिकारियों, विभागाध्यक्षों को विभागान्तर्गत गठित शिकायत निवारण समिति की बैठक बुलाने को कहा गया था। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी समन्वय समिति इस शासनादेश के अनुरूप मांगों को लेकर आगे बढ़ने का सरकार के आग्रह कर रहा है। उक्त शासनादेश में सचिव कार्मिक की ओर से विभागाध्यक्षों एवं जिलाधिकारियों को शिकायत निवारण समिति को प्रत्येक माह एवं सचिव स्तर पर प्रत्येक तीन माह में बैठक का आयोजन किए जाने के लिए निर्देशित किया गया है। पाण्डे ने आशा जताई कि समस्त जिलाधिकारियों, विभागाध्यक्षों एवं सचिवों की ओर से उक्त निर्देशों का पालन कर संघों परिसंघों के साथ दिए गए समयान्तर्गत बैठक का आयोजन किया जाएगा। ताकि मांगों पर पूर्व में सहमति हो चुकी है, उन समझौतों, निर्णयों का शासनादेश भी यथाशीघ्र जारी किया जाएगा। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
गाजियाबाद. दिल्ली से सटे गाजियाबाद में मंगलवार को कोरोना वायरस के 25 नए मरीज सामने आए, जिसके बाद जिले में कोरोना वायरस के मामले बढ़कर 527 हो गए। इन मामलों में से 316 लोग कोरोना वायरस की बीमारी को मात देकर घर जा चुके हैं, जबकि 14 लोगों की अबतक मौत हो चुकी है। जिले में वर्तमान में 197 एक्टिव केस हैं। गाजियाबाद में मंगलवार को 9 मरीजों को ठीक होने के बाद डिस्चार्ज किया गया और 242 लोगों के सैंपल लिए गए। जिले में अबदक 12,160 लोगों कें सैंपल लिए जा चुके हैं। बात अगर गाजियाबाद से सटे गौतमबुद्धनगर की करें तो यहां भी कोरोना वायरस के मरीज लगातार बढ़ते जा रहे हैं। मंगलवार को गौतमबुद्धनगर में जिले में कोरोना वायरस के 38 नए मरीज मिले, जिसके बाद अबतक मिले कुल कोरोना संक्रमित मामले बढ़कर 691 हो गए। इन मामलों में से 10 लोगों की मौत हो चुकी है। 423 मरीजों को ठीक होने के बाद डिस्चार्ज किया जा चुका है। फिलहाल जिले में 258 एक्टिव केस है।
गाजियाबाद. दिल्ली से सटे गाजियाबाद में मंगलवार को कोरोना वायरस के पच्चीस नए मरीज सामने आए, जिसके बाद जिले में कोरोना वायरस के मामले बढ़कर पाँच सौ सत्ताईस हो गए। इन मामलों में से तीन सौ सोलह लोग कोरोना वायरस की बीमारी को मात देकर घर जा चुके हैं, जबकि चौदह लोगों की अबतक मौत हो चुकी है। जिले में वर्तमान में एक सौ सत्तानवे एक्टिव केस हैं। गाजियाबाद में मंगलवार को नौ मरीजों को ठीक होने के बाद डिस्चार्ज किया गया और दो सौ बयालीस लोगों के सैंपल लिए गए। जिले में अबदक बारह,एक सौ साठ लोगों कें सैंपल लिए जा चुके हैं। बात अगर गाजियाबाद से सटे गौतमबुद्धनगर की करें तो यहां भी कोरोना वायरस के मरीज लगातार बढ़ते जा रहे हैं। मंगलवार को गौतमबुद्धनगर में जिले में कोरोना वायरस के अड़तीस नए मरीज मिले, जिसके बाद अबतक मिले कुल कोरोना संक्रमित मामले बढ़कर छः सौ इक्यानवे हो गए। इन मामलों में से दस लोगों की मौत हो चुकी है। चार सौ तेईस मरीजों को ठीक होने के बाद डिस्चार्ज किया जा चुका है। फिलहाल जिले में दो सौ अट्ठावन एक्टिव केस है।
शेयर बाजार की खबरें हैं कि पिछले दो दिन से रेलवे से जुड़ी कम्पनियों के शेयरों में उछाला देखने को मिल रहा है. ऐसी क्या खुश खबरी हो सकती है जिसे लेकर शेयर बाजार खुश है? क्या निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ने वाली है? क्या रेलमंत्री सामान्य यात्री की सुविधाएं बढ़ा सकते हैं? तमाम खामियों के बावजूद हमारी रेलगाड़ी गरीब आदमी की सवारी है. सिर्फ इसके सहारे वह अपनी गठरी उठाए महानगरों की सड़कों पर ठोकरें खाने के लिए अपना घर छोड़कर निकलता है. किराया बढ़ने का मतलब है उसकी गठरी पर लात लगाना. रेलगाड़ी औद्योगिक गतिविधि भी है. वह बगैर पूँजी के नहीं चलती. मध्य वर्ग की दिलचस्पी अपनी सुविधा में है. सरकार को तमाम लोगों के बारे में सोचना होता है. रेल किराए या इसी किस्म की लोकलुभावन बातों पर गौर न करें तो भारत के आधुनिकीकरण में रेलवे की भावी भूमिका और अंदेशों का संकेत तो इस बार के रेल बजट में मिलता है, पर जवाब कहीं नहीं मिलता। रेल बजट को लोकलुभावन बनाने का ममता बनर्जी का फ़र्मूला किराया न बढ़ाना था तो पवन बंसल का फ़ॉर्मूला विकास के कार्यों को रोक देने का है। लगता है सरकार ने सारे काम भविष्य पर छोड़ दिए हैं। रेलवे की सबसे बड़ी ज़रूरत है माल ढोने के लिए आधार ढाँचे को तैयार करना, यात्रियों की सुरक्षा और सहूलियतों में इज़ाफा, विद्युतीकरण, आमान परिवर्तन और नई लाइनों का निर्माण। हमें अपने बजट को इसी लिहाज से देखना चाहिए। और यह देखना चाहिए कि सरकार कितना निवेश इन कामों पर करने जा रही है। इसके लिए पाँचवीं पंचवर्षीय योजना में रेलवे के लिए 5. 19 लाख करोड़ रुपए के निवेश की ज़रूरत है। इसमें से आंतरिक साधनों से 1. 05 लाख करोड़ की व्यवस्था करने का निश्चय किया गया है। इसमें से केवल 10,000 करोड़ रुपए की व्यवस्था पिछले साल के बजट में की गई थी। यानी 95,000 करोड़ रुपए का इंतज़ाम अगले चार साल पर छोड़ दिया गया। पिछले साल रेलवे का योजनागत व्यय 60,100 करोड़ रुपए था, जो संशोधित कर 52,265 करोड़ रु कर दिया गया। यानी वह व्यवस्था भी नहीं हो पाई। इस साल 63, 363 करोड़ रु की व्यवस्था बजट में की गई है। यानी दो साल में योजनागत व्यय एक लाख 15, 628 करोड़ रु हुआ। यानी अगले तीन साल में 4. 04 लाख करोड़ रु की व्यवस्था करनी होगी। यानी अगले तीन साल तक रेलवे को योजनागत व्यय में इस साल के व्यय का तकरीबन ढाई गुना खर्च करना होगा। यह काम लगभग असम्भव है। Subscribe to: Posts (Atom)
शेयर बाजार की खबरें हैं कि पिछले दो दिन से रेलवे से जुड़ी कम्पनियों के शेयरों में उछाला देखने को मिल रहा है. ऐसी क्या खुश खबरी हो सकती है जिसे लेकर शेयर बाजार खुश है? क्या निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ने वाली है? क्या रेलमंत्री सामान्य यात्री की सुविधाएं बढ़ा सकते हैं? तमाम खामियों के बावजूद हमारी रेलगाड़ी गरीब आदमी की सवारी है. सिर्फ इसके सहारे वह अपनी गठरी उठाए महानगरों की सड़कों पर ठोकरें खाने के लिए अपना घर छोड़कर निकलता है. किराया बढ़ने का मतलब है उसकी गठरी पर लात लगाना. रेलगाड़ी औद्योगिक गतिविधि भी है. वह बगैर पूँजी के नहीं चलती. मध्य वर्ग की दिलचस्पी अपनी सुविधा में है. सरकार को तमाम लोगों के बारे में सोचना होता है. रेल किराए या इसी किस्म की लोकलुभावन बातों पर गौर न करें तो भारत के आधुनिकीकरण में रेलवे की भावी भूमिका और अंदेशों का संकेत तो इस बार के रेल बजट में मिलता है, पर जवाब कहीं नहीं मिलता। रेल बजट को लोकलुभावन बनाने का ममता बनर्जी का फ़र्मूला किराया न बढ़ाना था तो पवन बंसल का फ़ॉर्मूला विकास के कार्यों को रोक देने का है। लगता है सरकार ने सारे काम भविष्य पर छोड़ दिए हैं। रेलवे की सबसे बड़ी ज़रूरत है माल ढोने के लिए आधार ढाँचे को तैयार करना, यात्रियों की सुरक्षा और सहूलियतों में इज़ाफा, विद्युतीकरण, आमान परिवर्तन और नई लाइनों का निर्माण। हमें अपने बजट को इसी लिहाज से देखना चाहिए। और यह देखना चाहिए कि सरकार कितना निवेश इन कामों पर करने जा रही है। इसके लिए पाँचवीं पंचवर्षीय योजना में रेलवे के लिए पाँच. उन्नीस लाख करोड़ रुपए के निवेश की ज़रूरत है। इसमें से आंतरिक साधनों से एक. पाँच लाख करोड़ की व्यवस्था करने का निश्चय किया गया है। इसमें से केवल दस,शून्य करोड़ रुपए की व्यवस्था पिछले साल के बजट में की गई थी। यानी पचानवे,शून्य करोड़ रुपए का इंतज़ाम अगले चार साल पर छोड़ दिया गया। पिछले साल रेलवे का योजनागत व्यय साठ,एक सौ करोड़ रुपए था, जो संशोधित कर बावन,दो सौ पैंसठ करोड़ रु कर दिया गया। यानी वह व्यवस्था भी नहीं हो पाई। इस साल तिरेसठ, तीन सौ तिरेसठ करोड़ रु की व्यवस्था बजट में की गई है। यानी दो साल में योजनागत व्यय एक लाख पंद्रह, छः सौ अट्ठाईस करोड़ रु हुआ। यानी अगले तीन साल में चार. चार लाख करोड़ रु की व्यवस्था करनी होगी। यानी अगले तीन साल तक रेलवे को योजनागत व्यय में इस साल के व्यय का तकरीबन ढाई गुना खर्च करना होगा। यह काम लगभग असम्भव है। Subscribe to: Posts
PATNA: लोकसभा इलेक्शन नजदीक आते ही इंडियन मुजाहिद्दीन व सिमी की गतिविधियां बढ़ गई हैं। हाल ही में राजस्थान एटीएस ने संयुक्त कार्रवाई में इंडियन मुजाहिद्दीन-आईएम के आतंकी वकास सहित पांच टेररिस्ट को अरेस्ट किया। दिल्ली पुलिस का दावा है कि अरेस्टेड क्रिमिनल्स वकास, साकिब अंसारी मेहराज उद्ददीन उर्फ मेहराज, मो। मारूफ उर्फ इब्राहिम और वकार अजहर लोकसभा चुनाव में किसी बड़े हमले की साजिश रच रहा था। इनके और भी साथी ऐसी वारदात को अंजाम देने की फिराक में हैं। इसको देखते हुए पटना जंक्शन पर भी सिक्योरिटी बढ़ा दी गई है। दानापुर रेवले डिवीजन की ओर से ट्रेन में क्रिमिनल एक्टिविटीज को बढ़ावा देने वाले मोस्ट वांटेड लोगों की सूची निकाली गई है। लोकसभा इलेक्शन और ट्रेनों में बढ़ते अपराध ने रेलवे एडमिनिस्ट्रेशन की नींद उड़ा दी है। यही वजह है कि आरपीएफ और जीआरपी पुलिस इन खूंखारों के पीछे साये की तरह लगी हुई है। रेलवे ऑफिसर्स की मानें तो ये अपराधी चुनावी सभा को निशाना बनाने के साथ ही पटना जेल में बंद अपने साथियों को छुड़ाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। गौरतलब है कि पटना, मुजफ्फरपुर, हाजीपुर, नालंदा के जेलों में भी इनके कई साथी बंद हैं। सूत्रों की मानें, तो रेलवे की ओर से जारी इन एक्टिव क्रिमिनल्स की फोटों में से बहुत से नक्सली से संबंध रखते हैं, जिसकी पुष्टि कुछ दिन पहले ही गया हमले में हो चुकी है। इसी कारण रेलवे डिपार्टमेंट ने इनकी फोटो पटना जंक्शन सहित आसपास के स्टेशनों पर चस्पा दिए हैं। पटना सहित पूरे स्टेट में इंडियन मुजाहिद्दीन व सिमी के आतंकियों की तालाश जोर-शोर से हो रही है तथा उधर रेलवे की ओर से जारी इन अपराधियों की तलाश भी चल रही है। रेलवे एडमिनिस्ट्रेशन के आला ऑफिसर्स के अनुसार पटना से लगे कुछ जिलों के अलावा पूरे ईसीआर डिवीजन में सिक्योरिटी बढ़ाई गई है। - 27 मार्च को मुजफ्फरपुर स्टेशन जाने वाली रेलवे लाइन को नक्सलियों ने क्षतिग्रस्त कर दिया। - 2 मार्च 2014 को तिलैया-दानापुर सवारी गाड़ी में पैसेंजर के साथ बंका घाट स्टेशन पर लूटपाट। - 15 मार्च 2014 को मगध एक्सप्रेस में थूड़ींगज और बक्सर रूट में तीन लाख रुपए की लूट। - राजधानी एक्सप्रेस में फरवरी 2014 में महिला से छेड़छाड़, जिसका मामला पटना जंक्शन पर दर्ज हुआ था। - किशनगंज और जलपाईगुड़ी के बीच गरीब नवाज एक्सप्रेस में एक लड़की से रेप। - झारखंड बंद के क्रम में अपने नेता को छुड़वाने के लिए रांची रेलवे ट्रेक को उड़ाया। रेलवे के मोस्ट वांडेट की लिस्ट में अब्दुल रहमान, अबू सरवार, रमेश प्रजापति, गुलाम नवी खान, मोहम्मद साजाद, संतोष कुमार, मंजूर अहमद डार, पप्पु प्रसाद, बेलाल अहमद, राजेन्द्र यादव, मनोज कुमार सहित कई अपराधी हैं, जिनकी तलाश में रेलवे के खुफिया एजेंसियां दिन-रात एक की हुई हैं। इन सब पर इनाम भी घोषित किया गया है। इलेक्शन को लेकर रेलवे की ओर से खास तैयारी की गई है। एक्टिव क्रिमिनल्स की तलाश जारी है। अगर किसी भी व्यकित को इसकी सूचना मिलती है, तो हमें 9ब्फ्क्8ख्ख्म्9ब् पर इंफॉर्म कर सकते हैं। संजय कुमार पांडे, प्रभारी, आरपीएफ।
PATNA: लोकसभा इलेक्शन नजदीक आते ही इंडियन मुजाहिद्दीन व सिमी की गतिविधियां बढ़ गई हैं। हाल ही में राजस्थान एटीएस ने संयुक्त कार्रवाई में इंडियन मुजाहिद्दीन-आईएम के आतंकी वकास सहित पांच टेररिस्ट को अरेस्ट किया। दिल्ली पुलिस का दावा है कि अरेस्टेड क्रिमिनल्स वकास, साकिब अंसारी मेहराज उद्ददीन उर्फ मेहराज, मो। मारूफ उर्फ इब्राहिम और वकार अजहर लोकसभा चुनाव में किसी बड़े हमले की साजिश रच रहा था। इनके और भी साथी ऐसी वारदात को अंजाम देने की फिराक में हैं। इसको देखते हुए पटना जंक्शन पर भी सिक्योरिटी बढ़ा दी गई है। दानापुर रेवले डिवीजन की ओर से ट्रेन में क्रिमिनल एक्टिविटीज को बढ़ावा देने वाले मोस्ट वांटेड लोगों की सूची निकाली गई है। लोकसभा इलेक्शन और ट्रेनों में बढ़ते अपराध ने रेलवे एडमिनिस्ट्रेशन की नींद उड़ा दी है। यही वजह है कि आरपीएफ और जीआरपी पुलिस इन खूंखारों के पीछे साये की तरह लगी हुई है। रेलवे ऑफिसर्स की मानें तो ये अपराधी चुनावी सभा को निशाना बनाने के साथ ही पटना जेल में बंद अपने साथियों को छुड़ाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। गौरतलब है कि पटना, मुजफ्फरपुर, हाजीपुर, नालंदा के जेलों में भी इनके कई साथी बंद हैं। सूत्रों की मानें, तो रेलवे की ओर से जारी इन एक्टिव क्रिमिनल्स की फोटों में से बहुत से नक्सली से संबंध रखते हैं, जिसकी पुष्टि कुछ दिन पहले ही गया हमले में हो चुकी है। इसी कारण रेलवे डिपार्टमेंट ने इनकी फोटो पटना जंक्शन सहित आसपास के स्टेशनों पर चस्पा दिए हैं। पटना सहित पूरे स्टेट में इंडियन मुजाहिद्दीन व सिमी के आतंकियों की तालाश जोर-शोर से हो रही है तथा उधर रेलवे की ओर से जारी इन अपराधियों की तलाश भी चल रही है। रेलवे एडमिनिस्ट्रेशन के आला ऑफिसर्स के अनुसार पटना से लगे कुछ जिलों के अलावा पूरे ईसीआर डिवीजन में सिक्योरिटी बढ़ाई गई है। - सत्ताईस मार्च को मुजफ्फरपुर स्टेशन जाने वाली रेलवे लाइन को नक्सलियों ने क्षतिग्रस्त कर दिया। - दो मार्च दो हज़ार चौदह को तिलैया-दानापुर सवारी गाड़ी में पैसेंजर के साथ बंका घाट स्टेशन पर लूटपाट। - पंद्रह मार्च दो हज़ार चौदह को मगध एक्सप्रेस में थूड़ींगज और बक्सर रूट में तीन लाख रुपए की लूट। - राजधानी एक्सप्रेस में फरवरी दो हज़ार चौदह में महिला से छेड़छाड़, जिसका मामला पटना जंक्शन पर दर्ज हुआ था। - किशनगंज और जलपाईगुड़ी के बीच गरीब नवाज एक्सप्रेस में एक लड़की से रेप। - झारखंड बंद के क्रम में अपने नेता को छुड़वाने के लिए रांची रेलवे ट्रेक को उड़ाया। रेलवे के मोस्ट वांडेट की लिस्ट में अब्दुल रहमान, अबू सरवार, रमेश प्रजापति, गुलाम नवी खान, मोहम्मद साजाद, संतोष कुमार, मंजूर अहमद डार, पप्पु प्रसाद, बेलाल अहमद, राजेन्द्र यादव, मनोज कुमार सहित कई अपराधी हैं, जिनकी तलाश में रेलवे के खुफिया एजेंसियां दिन-रात एक की हुई हैं। इन सब पर इनाम भी घोषित किया गया है। इलेक्शन को लेकर रेलवे की ओर से खास तैयारी की गई है। एक्टिव क्रिमिनल्स की तलाश जारी है। अगर किसी भी व्यकित को इसकी सूचना मिलती है, तो हमें नौब्फ्क्आठख्ख्म्नौब् पर इंफॉर्म कर सकते हैं। संजय कुमार पांडे, प्रभारी, आरपीएफ।
Dhanbad : गर्मी की छुट्टी में परिवार के साथ हिल स्टेशन जाने की सोच रहे हैं, तो सोच-समझकर निर्णय लें. क्योंकि धनबाद होकर हिल स्टेशन जाने वाली ट्रेनों में नो बर्थ की स्थिति है. टिकटों की लंबी वेटिंग लिस्ट चल रही है. ट्रेनों की स्थिति देखकर ऐसे परिवारों के लिए सैर सपाटा सपना बन सकता है. नियिमित ट्रेनों में भी लंबी वेटिंग चल रही है. अधिक भीड़ की वहज से तत्काल टिकट मिलना भी मुश्किल है. स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां 14 मई से शुरू हो गई हैं. लोग टिकट आरक्षित कराने के लिए भाग-दौड़ कर रहे हैं. धनबाद होकर सिर्फ एक समर स्पेशल ट्रेन बरौनी-कोयंबटूर साप्तहिक चल रही है. वहीं, कोलकाता-जम्मूतवी, नेताजी एक्सप्रेस, धनबाद-एलेप्पी सहित अन्य लंबी दूरी की ट्रेनों में टिकटों की लंबी वेटिंग लिस्ट चल रही है. इन सभी ट्रेनों में 10 जुलाई तक नो बर्थ की स्थिति है. ट्रेनों में तत्काल टिकट भी बड़ी मुश्किल से मिल रहे हैं. तत्काल टिकट का निर्धारित समय सुबह 10 बजे से है, लेकिन धनबाद स्टेशन के आरक्षण टिकट कांउटर सुबह 8 बजे से ही यात्रियों की कतार शुरू हो जा रही है. इसके बावजूद टिकट मशीन मुश्किल से 4-5 यात्रियों को ही राहत दे पाती है और समय समाप्त हो जाता है. शिमला, नैनीताल, मनाली, बीर-बिलिंग, श्रीनगर, गुलमर्ग, ऊटी, औली, मसूरी, दार्जिलिंग, शिलांग, माथेरान आदि प्रमुख हिल स्टेशन हैं, जहां लोग गर्मियों में छुट्टियां मनाने जाते हैं. धनबाद रेल मंडल के प्रभारी जनसंपर्क अधिकारी जयदीप घोष ने बताया कि फिलहाल धनबाद से होकर बरौनी-कोयंबटूर समर स्पेशल ट्रेन चल रही है. भीड़ ज्याद बढ़ने पर कुछ ट्रेनों में कोच की संख्या बढ़ाई जा सकती है. इससे लोगों को राहत मिलेगी.
Dhanbad : गर्मी की छुट्टी में परिवार के साथ हिल स्टेशन जाने की सोच रहे हैं, तो सोच-समझकर निर्णय लें. क्योंकि धनबाद होकर हिल स्टेशन जाने वाली ट्रेनों में नो बर्थ की स्थिति है. टिकटों की लंबी वेटिंग लिस्ट चल रही है. ट्रेनों की स्थिति देखकर ऐसे परिवारों के लिए सैर सपाटा सपना बन सकता है. नियिमित ट्रेनों में भी लंबी वेटिंग चल रही है. अधिक भीड़ की वहज से तत्काल टिकट मिलना भी मुश्किल है. स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां चौदह मई से शुरू हो गई हैं. लोग टिकट आरक्षित कराने के लिए भाग-दौड़ कर रहे हैं. धनबाद होकर सिर्फ एक समर स्पेशल ट्रेन बरौनी-कोयंबटूर साप्तहिक चल रही है. वहीं, कोलकाता-जम्मूतवी, नेताजी एक्सप्रेस, धनबाद-एलेप्पी सहित अन्य लंबी दूरी की ट्रेनों में टिकटों की लंबी वेटिंग लिस्ट चल रही है. इन सभी ट्रेनों में दस जुलाई तक नो बर्थ की स्थिति है. ट्रेनों में तत्काल टिकट भी बड़ी मुश्किल से मिल रहे हैं. तत्काल टिकट का निर्धारित समय सुबह दस बजे से है, लेकिन धनबाद स्टेशन के आरक्षण टिकट कांउटर सुबह आठ बजे से ही यात्रियों की कतार शुरू हो जा रही है. इसके बावजूद टिकट मशीन मुश्किल से चार-पाँच यात्रियों को ही राहत दे पाती है और समय समाप्त हो जाता है. शिमला, नैनीताल, मनाली, बीर-बिलिंग, श्रीनगर, गुलमर्ग, ऊटी, औली, मसूरी, दार्जिलिंग, शिलांग, माथेरान आदि प्रमुख हिल स्टेशन हैं, जहां लोग गर्मियों में छुट्टियां मनाने जाते हैं. धनबाद रेल मंडल के प्रभारी जनसंपर्क अधिकारी जयदीप घोष ने बताया कि फिलहाल धनबाद से होकर बरौनी-कोयंबटूर समर स्पेशल ट्रेन चल रही है. भीड़ ज्याद बढ़ने पर कुछ ट्रेनों में कोच की संख्या बढ़ाई जा सकती है. इससे लोगों को राहत मिलेगी.
रोहतक, 2 मार्च (निस) बैंक मित्र संचालक के घर रुपये जमा करने आए युवक व संचालक के पिता की गोली मारकर हत्या कर दी। बताया जा रहा है कि हमलावर रुपये जमा करवाने आए युवक की हत्या करने आए थे, इसी दौरान हमलावरों को पकड़ने दौडे अधेड़ की भी गोली दी, जिससे मौके पर ही उसकी भी मौत हो गई। दोहरे हत्याकांड के गांव में दहशत का माहौल बना हुआ है। सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची और इस बारे में जांच पड़ताल की। डीएसपी और एफएसएल की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और परिजनों से भी पूछताछ की। जांच-पड़ताल में सामने आया कि पुरानी रंजिश के चलते वारदात को अंजाम दिया गया है। पुलिस के अनुसार बुधवार शाम को गांव रिटौली निवासी रोहित गांव के ही बैंक मित्र केंद्र संचालक दलबीर के घर रुपये जमा करवाने गया हुआ था। इसी दौरान बाइक सवार 3 युवक आए और दलबीर के घर के अंदर जाकर रोहित पर फायरिंग कर दी। गोली लगते ही रोहित वहीं गिर गया और इसी दौरान दलबीर के पिता राजेंद्र ने हमलावराें को पकड़ने के लिए उनका पीछा किया तो हमलावरों ने उसे भी गोली मार दी, जिससे मौके पर ही राजेंद्र की मौत हो गई। घटना के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए।
रोहतक, दो मार्च बैंक मित्र संचालक के घर रुपये जमा करने आए युवक व संचालक के पिता की गोली मारकर हत्या कर दी। बताया जा रहा है कि हमलावर रुपये जमा करवाने आए युवक की हत्या करने आए थे, इसी दौरान हमलावरों को पकड़ने दौडे अधेड़ की भी गोली दी, जिससे मौके पर ही उसकी भी मौत हो गई। दोहरे हत्याकांड के गांव में दहशत का माहौल बना हुआ है। सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची और इस बारे में जांच पड़ताल की। डीएसपी और एफएसएल की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और परिजनों से भी पूछताछ की। जांच-पड़ताल में सामने आया कि पुरानी रंजिश के चलते वारदात को अंजाम दिया गया है। पुलिस के अनुसार बुधवार शाम को गांव रिटौली निवासी रोहित गांव के ही बैंक मित्र केंद्र संचालक दलबीर के घर रुपये जमा करवाने गया हुआ था। इसी दौरान बाइक सवार तीन युवक आए और दलबीर के घर के अंदर जाकर रोहित पर फायरिंग कर दी। गोली लगते ही रोहित वहीं गिर गया और इसी दौरान दलबीर के पिता राजेंद्र ने हमलावराें को पकड़ने के लिए उनका पीछा किया तो हमलावरों ने उसे भी गोली मार दी, जिससे मौके पर ही राजेंद्र की मौत हो गई। घटना के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए।
न्यूयार्क - यूएस ओपन में विश्व के नंबर एक खिलाड़ी स्पेन के राफेल नडाल और तीसरी रैंकिग प्राप्त रोजर फेडरर के बीच यूएस ओपन में बहुप्रतीक्षित संभावित सेमीफाइनल का इंतज़ार दोनों दिग्गजों के क्वार्टर फाइनल में पहुंचने के साथ अब खत्म होता नज़र आ रहा है। पुरुष एकल के चौथे दौर के मुकाबलों में शीर्ष वरीय नडाल ने यूक्रेन के एलेक्सांद्र डोल्गोपोलोव को लगातार सेटों में 6-2, 6-4, 6-1 से मात दी, जबकि तीसरी वरीय स्विटजरलैंड के फेडरर ने 33वीं सीड जर्मनी के फिलीप कोलश्रेबर को लगातार सेटों में 6-4, 6-2, 7-5 से हराया। वर्ष 2009 के चैंपियन और बुखार से ग्रसित 24वीं वरीय जुआन मार्टिन डेल पोत्रो ने छठी वरीय आस्ट्रिया के डॉमिनिक थिएम को पांच सेटों के संघर्ष में 1-6, 2-6, 6-1, 7-6, 6-4 से पीटते हुए क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर लिया। पोत्रो के लिए हालांकि अगली चुनौती मुश्किल होने वाली है, जहां उनके सामने क्वार्टर फाइनल में पांच बार के यूएस ओपन चैंपियन फेडरर होंगे। हालांकि न्यूयार्क में अपने करियर के एकमात्र ग्रैंड स्लैम के लिए वह फाइनल में फेडरर को हरा चुके हैं। नंबर वन नडाल ने भी अपने मैच में आराम से जीत दर्ज की और फ्रेंच ओपन चैंपियन अब अंतिम आठ के मैच में रूस के आंद्रे रूबलेव का सामना करेंगे, लेकिन स्पेनिश खिलाड़ी को 19 साल के रूबलेव से सतर्क रहना होगा जिन्होंने नौवीं सीड बेल्जियम के डेविड गोफिन को 7-5, 7-6, 6-3 से उलटफेर का शिकार बना लिया। उधर, महिला एकल के मुकाबलों में नंबर वन खिलाड़ी चेक गणराज्य की कैरोलीना प्लिस्कोवा ने अमरीका की जैनिफर ब्राडी को लगातार सेटों में 6-1, 6-0 से हराया। उनके सामने अब 20वीं सीड अमरीका की कोको वेंडेवेगे की चुनौती रहेगी, जिन्होंने लूसी सफारोवा को 6-4 7-6 से मात दी। अमेरिका की मैडिसन की ने अपने चौथे दौर के मुकाबले में 52 बेजा भूलें और 46 विनर्स लगाने के बाद चौथी वरीय यूक्रेन की एलीना स्वीतोलीना पर 7-6, 1-6, 6-4 से जीत दर्ज करते हुए घरेलू चुनौती को मज़बूत बनाए रखा। 15वीं सीड मैडिसन अब विश्व की 418वें नंबर की खिलाड़ी एस्तोनिया की काइया कानेपी का सामना करेंगी जिन्होंने रूस की डारिया कसात्किना को लगातार सेटों में 6-4, 6-4 से चौंकाया।
न्यूयार्क - यूएस ओपन में विश्व के नंबर एक खिलाड़ी स्पेन के राफेल नडाल और तीसरी रैंकिग प्राप्त रोजर फेडरर के बीच यूएस ओपन में बहुप्रतीक्षित संभावित सेमीफाइनल का इंतज़ार दोनों दिग्गजों के क्वार्टर फाइनल में पहुंचने के साथ अब खत्म होता नज़र आ रहा है। पुरुष एकल के चौथे दौर के मुकाबलों में शीर्ष वरीय नडाल ने यूक्रेन के एलेक्सांद्र डोल्गोपोलोव को लगातार सेटों में छः-दो, छः-चार, छः-एक से मात दी, जबकि तीसरी वरीय स्विटजरलैंड के फेडरर ने तैंतीसवीं सीड जर्मनी के फिलीप कोलश्रेबर को लगातार सेटों में छः-चार, छः-दो, सात-पाँच से हराया। वर्ष दो हज़ार नौ के चैंपियन और बुखार से ग्रसित चौबीसवीं वरीय जुआन मार्टिन डेल पोत्रो ने छठी वरीय आस्ट्रिया के डॉमिनिक थिएम को पांच सेटों के संघर्ष में एक-छः, दो-छः, छः-एक, सात-छः, छः-चार से पीटते हुए क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर लिया। पोत्रो के लिए हालांकि अगली चुनौती मुश्किल होने वाली है, जहां उनके सामने क्वार्टर फाइनल में पांच बार के यूएस ओपन चैंपियन फेडरर होंगे। हालांकि न्यूयार्क में अपने करियर के एकमात्र ग्रैंड स्लैम के लिए वह फाइनल में फेडरर को हरा चुके हैं। नंबर वन नडाल ने भी अपने मैच में आराम से जीत दर्ज की और फ्रेंच ओपन चैंपियन अब अंतिम आठ के मैच में रूस के आंद्रे रूबलेव का सामना करेंगे, लेकिन स्पेनिश खिलाड़ी को उन्नीस साल के रूबलेव से सतर्क रहना होगा जिन्होंने नौवीं सीड बेल्जियम के डेविड गोफिन को सात-पाँच, सात-छः, छः-तीन से उलटफेर का शिकार बना लिया। उधर, महिला एकल के मुकाबलों में नंबर वन खिलाड़ी चेक गणराज्य की कैरोलीना प्लिस्कोवा ने अमरीका की जैनिफर ब्राडी को लगातार सेटों में छः-एक, छः-शून्य से हराया। उनके सामने अब बीसवीं सीड अमरीका की कोको वेंडेवेगे की चुनौती रहेगी, जिन्होंने लूसी सफारोवा को छः-चार सात-छः से मात दी। अमेरिका की मैडिसन की ने अपने चौथे दौर के मुकाबले में बावन बेजा भूलें और छियालीस विनर्स लगाने के बाद चौथी वरीय यूक्रेन की एलीना स्वीतोलीना पर सात-छः, एक-छः, छः-चार से जीत दर्ज करते हुए घरेलू चुनौती को मज़बूत बनाए रखा। पंद्रहवीं सीड मैडिसन अब विश्व की चार सौ अट्ठारहवें नंबर की खिलाड़ी एस्तोनिया की काइया कानेपी का सामना करेंगी जिन्होंने रूस की डारिया कसात्किना को लगातार सेटों में छः-चार, छः-चार से चौंकाया।
Maharashtra Politics: 'हमने बीजेपी से गठबंधन किया है, लेकिन. . . ', विचारधारा बदलने के सवाल पर क्या बोले छगन भुजबल? Maharashtra Politics: देर रात सीएम शिंदे से मिले अजित पवार और देवेंद्र फड़णवीस, क्या सुलझ गई विभाग बंटवारे की गुत्थी? Maharashtra: शरद पवार गुट को बड़ा झटका, अब ये विधायक अजित पवार गुट में शामिल, कहा- 'फैसला लेना बहुत. . . ' Maharashtra: शरद पवार के पोते रोहित पवार का आरोप- 'BJP ने पहले शिवसेना को तोड़ा, फिर NCP को ताकि. . . ' Maharashtra: उद्धव ठाकरे का बड़ा बयान, कहा- 'शिवसेना नाम मेरे दादा ने दिया था, चुनाव आयोग के पास. . . '
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मेरठ के सदर इलाके में माँ काली की विशाल मूर्ति स्थापित है. यहां भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है. सिद्धपीठ मां काली का मंदिर करीब 450 साल पुराना है. चैत्र नवरात्रि की शुरुआत शनिवार से हो गई है. इसको हिंदू कैलेंडर के हिसाब से नया साल भी (Hindu New Year) माना जाता है. मेरठ (Meerut) में सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की कतार लगना शुरू हो गई. नवरात्र के पहले दिन भक्त पूजा अर्चना करने के लिए मंदिर पहुंचे. मेरठ के काफी मंदिरों में सुबह 4:00 बजे से ही भक्तों की लंबी कतार लगना शुरू हो गई थी. विधिवत तरीके से मां को प्रसन्न करने के लिए भक्तों ने पूजा-अर्चना की. मेरठ के सदर इलाके में माँ काली की विशाल मूर्ति स्थापित है. यहां भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है. सिद्धपीठ मां काली का मंदिर करीब 450 साल पुराना है. कहा जाता है कि मंदिर के स्थान पर पहले श्मशान हुआ करता था. यही कारण है कि मंदिर को श्मशान महाकाली के नाम से भी जाना जाता है. ये मंदिर मेरठ कैंट इलाके में स्थित है. पास में ही भगवान भोलेनाथ का औघड़नाथ मंदिर भी है. सुबह 4:00 बजे ही मंदिर के कपाट खोल दिए गए थे. मां काली की पूजा अर्चना हुई और नवरात्रि के मौके पर विशेष शृंगार किया गया. श्रृंगार के बाद मां की आरती हुई और भक्तों ने आरती में शामिल होकर पुण्य कमाया. पूजा अर्चना करने आए भक्तों ने मां को पुष्प, चुन्नी, नारियल, साड़ी आदि चढ़ाकर आशीर्वाद मांगा. बताया जाता है कि सालों पहले यहां श्मशान घाट हुआ करता था. जिसमें मां काली की छोटी सी मूर्ति स्थापित थी. लोग यहां आकर पूजा-अर्चना करते थे. जैसे-जैसे लोगों की मनोकामनएं यहां पूरी होने लगीं, तभी से मंदिर ख्याति प्राप्त करने लगा. एक बंगाली परिवार श्मशान में लगी मूर्ति की पूजा करने लगा और तभी से उनकी सेवा करता आ रहा है. मान्यता के अनुसार मां काली की पूजा करने से बुरी शक्तियां और टोने टोटके नष्ट हो जाते हैं. करीब 150 साल पहले यहां विशाल मंदिर बनाया गया और सिद्धपीठ के रुप में मंदिर को जाना जाने लगा. अन्य शहरों और राज्यों से भी यहां लोग दर्शन करने के लिए आते हैं. शास्त्रीनगर स्थित गोल मंदिर, बाबा औघड़नाथ मंदिर, सदर काली मंदिर, सदर वैष्णो धाम मंदिर, जागृति विहार मां मंशा देवी मंदिर, स्मार्ट पैलेस स्थित राजराजेश्वरी मंदिर आदि में पहले माता रानी का शृंगार किया गया. इसके बाद आरती की गई.
मेरठ के सदर इलाके में माँ काली की विशाल मूर्ति स्थापित है. यहां भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है. सिद्धपीठ मां काली का मंदिर करीब चार सौ पचास साल पुराना है. चैत्र नवरात्रि की शुरुआत शनिवार से हो गई है. इसको हिंदू कैलेंडर के हिसाब से नया साल भी माना जाता है. मेरठ में सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की कतार लगना शुरू हो गई. नवरात्र के पहले दिन भक्त पूजा अर्चना करने के लिए मंदिर पहुंचे. मेरठ के काफी मंदिरों में सुबह चार:शून्य बजे से ही भक्तों की लंबी कतार लगना शुरू हो गई थी. विधिवत तरीके से मां को प्रसन्न करने के लिए भक्तों ने पूजा-अर्चना की. मेरठ के सदर इलाके में माँ काली की विशाल मूर्ति स्थापित है. यहां भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है. सिद्धपीठ मां काली का मंदिर करीब चार सौ पचास साल पुराना है. कहा जाता है कि मंदिर के स्थान पर पहले श्मशान हुआ करता था. यही कारण है कि मंदिर को श्मशान महाकाली के नाम से भी जाना जाता है. ये मंदिर मेरठ कैंट इलाके में स्थित है. पास में ही भगवान भोलेनाथ का औघड़नाथ मंदिर भी है. सुबह चार:शून्य बजे ही मंदिर के कपाट खोल दिए गए थे. मां काली की पूजा अर्चना हुई और नवरात्रि के मौके पर विशेष शृंगार किया गया. श्रृंगार के बाद मां की आरती हुई और भक्तों ने आरती में शामिल होकर पुण्य कमाया. पूजा अर्चना करने आए भक्तों ने मां को पुष्प, चुन्नी, नारियल, साड़ी आदि चढ़ाकर आशीर्वाद मांगा. बताया जाता है कि सालों पहले यहां श्मशान घाट हुआ करता था. जिसमें मां काली की छोटी सी मूर्ति स्थापित थी. लोग यहां आकर पूजा-अर्चना करते थे. जैसे-जैसे लोगों की मनोकामनएं यहां पूरी होने लगीं, तभी से मंदिर ख्याति प्राप्त करने लगा. एक बंगाली परिवार श्मशान में लगी मूर्ति की पूजा करने लगा और तभी से उनकी सेवा करता आ रहा है. मान्यता के अनुसार मां काली की पूजा करने से बुरी शक्तियां और टोने टोटके नष्ट हो जाते हैं. करीब एक सौ पचास साल पहले यहां विशाल मंदिर बनाया गया और सिद्धपीठ के रुप में मंदिर को जाना जाने लगा. अन्य शहरों और राज्यों से भी यहां लोग दर्शन करने के लिए आते हैं. शास्त्रीनगर स्थित गोल मंदिर, बाबा औघड़नाथ मंदिर, सदर काली मंदिर, सदर वैष्णो धाम मंदिर, जागृति विहार मां मंशा देवी मंदिर, स्मार्ट पैलेस स्थित राजराजेश्वरी मंदिर आदि में पहले माता रानी का शृंगार किया गया. इसके बाद आरती की गई.
Bigg Boss 13 Episode 82 Updates । 22 Jan 2020: सिद्धार्थ शुक्ला (Sidharth Shukla) नॉमिनेशन में आरती सिंह (Arti Singh) को बचाते हैं, इससे शहनाज़ गिल (Shehnaaz Gill) को गुस्सा आता है. इसके बाद आरती और शहनाज़ में जोरदार बहस होती है. इस हफ्ते एलिमिनेशन से सिर्फ सिद्धार्थ और शहनाज़ सुरक्षित हैं. बाकी सभी सदस्य एलिमिनेट होने के लिए नॉमिनेट हुए हैं. खाने को लेकर रश्मि देसाई (Rashami Desai) और माहिरा शर्मा (Mahira Sharma) लड़ने लगते हैं. रश्मि, माहिरा को Immature कहती हैं. पारस छाबड़ भी रश्मि को सुनाने लगते हैं. माहिरा-पारस से बदला लेने के लिए रश्मि चाय छुपा देती हैं. ये एपिसोड्स आप रोज़ाना Colors TV पर और कभी भी VOOT पर देख सकते हैं.
Bigg Boss तेरह Episode बयासी Updates । बाईस जनवरी दो हज़ार बीस: सिद्धार्थ शुक्ला नॉमिनेशन में आरती सिंह को बचाते हैं, इससे शहनाज़ गिल को गुस्सा आता है. इसके बाद आरती और शहनाज़ में जोरदार बहस होती है. इस हफ्ते एलिमिनेशन से सिर्फ सिद्धार्थ और शहनाज़ सुरक्षित हैं. बाकी सभी सदस्य एलिमिनेट होने के लिए नॉमिनेट हुए हैं. खाने को लेकर रश्मि देसाई और माहिरा शर्मा लड़ने लगते हैं. रश्मि, माहिरा को Immature कहती हैं. पारस छाबड़ भी रश्मि को सुनाने लगते हैं. माहिरा-पारस से बदला लेने के लिए रश्मि चाय छुपा देती हैं. ये एपिसोड्स आप रोज़ाना Colors TV पर और कभी भी VOOT पर देख सकते हैं.
ग्वालियर में मकान बनाकर लोगों के सपने बुनने वाला एक कारीगर स्मैक की चमक में फंसकर स्मैक तस्कर बन गया। ऐसे ही एक स्मैक तस्कर को पुलिस ने गुरुवार रात को कालू बाबा की बगिया से गिरफ्तार किया है। स्मैक तस्कर के पास से 12. 50 लाख रुपए की स्मैक बरामद हुई है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
ग्वालियर में मकान बनाकर लोगों के सपने बुनने वाला एक कारीगर स्मैक की चमक में फंसकर स्मैक तस्कर बन गया। ऐसे ही एक स्मैक तस्कर को पुलिस ने गुरुवार रात को कालू बाबा की बगिया से गिरफ्तार किया है। स्मैक तस्कर के पास से बारह. पचास लाख रुपए की स्मैक बरामद हुई है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
- भौगौलिक विस्तारः - सीमावर्ती देशः यूक्रेन, रूस, जॉर्जिया, तुर्किये, बुल्गारिया और रोमानिया। - इसे यूक्सिन सागर के नाम से भी जाना जाता है। - यह दक्षिण, पूर्व और उत्तर में क्रमशः पोंटिक, काकेशस और क्रीमियन पहाड़ों से घिरा हुआ है। - तुर्की जलडमरूमध्य प्रणाली- डार्डानेल्स, बोस्पोरस और मरमरा सागर- भूमध्यसागर तथा काला सागर के बीच एक ट्रांज़ीशन ज़ोन के रूप में कार्य करती है। - आज़ोव सागर काला सागर का एक उत्तरी विस्तार बनाता है जो कर्च जलडमरूमध्य से जुड़ा हुआ है। - एनोक्सिक जल; काला सागर के जल में ऑक्सीजन की भारी कमी है। - रूस - यूक्रेन संघर्षः - यूक्रेन में रूसी सैन्य नियंत्रण का क्षेत्रः - वर्ष 2022 में डोनबास पर नियंत्रण स्थापित किया गया जिसमें डोनेट्स्क और लुहांस्क क्षेत्र भी शामिल हैं। - क्रीमियाः रूस ने वर्ष 2014 में क्रीमिया पर कब्ज़ा किया था। - मारियुपोल और ओडेसा : रूस का फोकस इन क्षेत्रों पर हैः - मारियुपोल, डोनेट्स्क में अज़ोव बंदरगाह का सागर है। - क्रीमिया के पश्चिम में ओडेसा है। - 'बोस्पोरस' और 'डार्डानेल्स' जलडमरूमध्यः मोंट्रेक्स कन्वेंशन द्वारा तुर्किये को एजियन, मरमरा और काला सागर को जोड़ने वाले डार्डानेल्स एवं बोस्पोरस जलडमरूमध्य से युद्धपोतों के गुज़रने पर कुछ नियंत्रण प्राप्त होता है। - नौसैनिक अभ्यास 'सी ब्रीज : इसमें नाटो राज्य तथा इसके सहयोगी देश शामिल होते हैं। - यूक्रेन में रूसी सैन्य नियंत्रण का क्षेत्रः - पर्यावरण संदर्भः - तुर्किये का मरमरा सागर (Sea of Marmara): इसमें 'सी स्नॉट' (Sea Snot) का सबसे बड़ा प्रकोप देखा गया। प्रिलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय में केंद्र सरकार ने कहा कि वह अनिवासी भारतीयों (NRI), विशेष रूप से प्रवासी मज़दूरों के लिये दूरस्थ मतदान सुविधा पर विचार कर रही है, ताकि चुनावी प्रक्रिया की अखंडता सुनिश्चित करते हुए दूरस्थ मतदान सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। - वर्ष 2020 में चुनाव आयोग के अधिकारियों ने दूरस्थ मतदान को सक्षम करने के लिये ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग करने का विचार भी प्रस्तावित किया। इसका उद्देश्य मतदान में भौगोलिक बाधाओं को दूर करना है। - आयोग दूरस्थ मतदान की संभावना पर विचार कर रहा है जिससे लोग अपने कार्यस्थल से मतदान कर सकेंगे। - जनप्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक 2017 में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 20A के तहत लगाए गए 'अनुचित प्रतिबंध' को हटाने का प्रस्ताव किया गया था, जिसके तहत विदेश में रह रहे भारतीय मतदाताओं को अपने निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान करने के लिये भौतिक रूप से उपस्थित रहने की आवश्यकता होती है. - यह वर्ष 2018 में विधेयक में पारित हो गया था, लेकिन 16वीं लोकसभा के भंग होने के साथ समाप्त हो गया। - वर्तमान में केवल निम्नलिखित मतदाताओं को डाक मतपत्र के माध्यम से अपना वोट डालने की अनुमति हैः - सेवारत मतदाता (सशस्त्र बल, किसी राज्य का सशस्त्र पुलिस बल और विदेश में तैनात सरकारी कर्मचारी), - मतदाता, चुनाव ड्यूटी में संलग्न, - 80 वर्ष से अधिक आयु के मतदाता या विकलांग व्यक्ति (PwD), - निवारक नजरबंदी के तहत मतदाता। रिमोट वोटिंग/दूरस्थ मतदानः - दूरस्थ मतदान किसी नियत मतदान केंद्र के अलावा कहीं और व्यक्तिगत रूप से हो सकता है या किसी अन्य समय पर हो सकता है या वोट डाक द्वारा भेजे जा सकते हैं या नियुक्त प्रॉक्सी द्वारा डाले जा सकते हैं। - विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा मांग की गई है कि चुनाव आयोग को यह सुनिश्चित करना चाहिये कि प्रवासी श्रमिक, एनआरआई (अनिवासी भारतीय) जो मतदान से चूक जाते हैं, क्योंकि वे अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिये चुनाव के दौरान घर जाने का जोखिम नहीं उठा सकते हैं, उन्हें जिस शहर में वे काम कर रहे हैं, वहाँ के निर्वाचन क्षेत्र में वोट देने की अनुमति दी जानी चाहिये। दूरस्थ मतदान की आवश्यकताः - प्रतिकूल परिस्थितियों के कारणः - मतदाता अपने पंजीकरण के स्थान से शहरों और अन्य स्थानों पर शिक्षा, रोज़गार और अन्य उद्देश्यों के लिये प्रवासन करते हैं। उनके लिये वोट डालने के लिये अपने पंजीकृत मतदान केंद्रों पर लौटना मुश्किल हो जाता है। - यह भी देखा गया है कि उत्तराखंड के दुमक और कलगोठ जैसे गाँवों में लगभग 20-25% पंजीकृत मतदाता अपने निर्वाचन क्षेत्रों में वोट डालने में असमर्थ हैं क्योंकि उन्हें नौकरी या शैक्षिक कारण से अपने गाँव/राज्य से बाहर जाना पड़ता है। - मतदान प्रतिशत में कमीः - वर्ष 2019 के आम चुनावों के दौरान कुल 910 मिलियन मतदाताओं में से लगभग 300 मिलियन नागरिकों ने अपना वोट नहीं डाला। - महानगरीय क्षेत्रों से संबंधित चिंताएँः - चुनाव आयोग द्वारा शहरी क्षेत्रों में मतदाता के लिये 2 किमी. के भीतर मतदान केंद्र स्थापित किये जाने के बावजूद कुछ महानगरों/शहर क्षेत्रों में कम मतदान के बारे में चिंता व्यक्त की गई। शहरी क्षेत्रों में मतदान को लेकर उदासीनता को दूर करने की आवश्यकता महसूस की गई। - असंगठित श्रमिकों का बढ़ता पंजीकरणः - प्रवासी श्रमिकों की संख्या लगभग 10 मिलियन हैं, जो असंगठित क्षेत्र से हैं और सरकार के ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत हैं। यदि रिमोट वोटिंग परियोजना को लागू किया जाता है, तो इसके दूरगामी प्रभाव होंगे। - स्वास्थ्य संबंधी चिंताएँः - मुख्य रूप से वरिष्ठ नागरिकों की स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं पर भी चर्चा करने की आवश्यकता है क्योंकि वे भी मुख्य विचार-विमर्श बन रहे हैं। दूरस्थ मतदान सुविधा के परिणामस्वरूप शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी मतदान प्रतिशत में वृद्धि होगी। रिमोट वोटिंग से संबंधित समस्याएँ : - सुरक्षाः - कोई भी नई प्रौद्योगिकी प्रणाली जिसमें ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी और अन्य पर आधारित प्रणाली शामिल है, साइबर हमलों एवं अन्य सुरक्षा कमज़ोरियों के प्रति संवेदनशील हैं। - सत्यता और पुष्टिकरणः - इसके अलावा एक मतदाता सत्यापन प्रणाली जो बायोमेट्रिक सॉफ्टवेयर का उपयोग करती है, जैसे कि चेहरे की पहचान, मतदाता पहचान में सकारात्मक या नकारात्मक झूठी जानकारी दे सकती है, इस प्रकार से धोखाधड़ी को बल मिलता है। - इंटरनेट कनेक्शन और मालवेयर सुरक्षाः - मतदान हेतु मतदाताओं की निर्भरता विश्वसनीय इंटरनेट कनेक्शन पर रहती है कुछ देशों में इंटरनेट की पहुँच और उपलब्धता एवं ई-सरकारी सेवाओं का उपयोग सीमित है। - मतदाताओं के उपकरणों पर सॉफ्टवेयर त्रुटियाँ या मालवेयर भी वोट कास्टिंग (मतदान) को प्रभावित कर सकते हैं। - गोपनीयताः - मतदाता गोपनीयता और अंतिम परिणामों की अखंडता की रक्षा के लिये चुनावों में हमेशा उच्च स्तर की सुरक्षा की आवश्यकता होती है। चुनावों की सुरक्षा ज़रूरतों को पूरा करने का मतलब है कि ऑनलाइन वोटिंग तकनीक से उन बाधाओं को दूर करना होगा जो मतदाता की गोपनीयता के लिये खतरा उत्पन्न कर सकती हैं। - पसंदीदा वातावरणः यह भी संभव है कि मतदान अनियंत्रित वातावरण में हो। अतः यह सुनिश्चित करना मुश्किल है कि व्यक्ति स्वतंत्र रूप से और बिना ज़बरदस्ती के मतदान करे। - इसमें जोखिम यह है कि कोई अन्य व्यक्ति मतदाता की ओर से मतदान करता है, इसलिये मतदाता की पहचान करना मुश्किल है। भारतीय चुनावों में प्रवासी मतदाताओं के लिये वर्तमान मतदान प्रक्रियाः - जन प्रतिनिधित्व (संशोधन) अधिनियम, 2010 के माध्यम से पात्र एनआरआई जो छह महीने से अधिक समय तक विदेश में रहे थे, को मतदान करने की अनुमति दी गई थी, लेकिन केवल मतदान केंद्र पर व्यक्तिगत रूप से जहाँ उन्हें एक विदेशी मतदाता के रूप में नामांकित किया गया था। - वर्ष 2010 से पहले एक भारतीय नागरिक जो एक पात्र मतदाता है तथा छह महीने से अधिक समय से विदेश में रह रहा हो, चुनाव में मतदान नहीं कर सकता था। ऐसा इसलिये था क्योंकि वह देश से बाहर छह महीने से अधिक समय तक रहा है और NRI का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया था। - NRI, निर्वाचन क्षेत्र में अपने निवास स्थान पर मतदान कर सकता है, जैसा कि पासपोर्ट में उल्लिखित है। - वह केवल व्यक्तिगत रूप से मतदान कर सकता है और पहचान के लिये उसे मतदान केंद्र पर अपना पासपोर्ट मूल रूप में प्रस्तुत करना होगा। - ऑनलाइन मतदान प्रणाली को यह सत्यापन करने में भी सक्षम होना चाहिये कि इसमें चुनाव की अखंडता बनी रहने के साथ मतदान प्रक्रिया के दौरान कोई हेरफेर नहीं हुई हो। - यह महत्त्वपूर्ण है कि रिमोट वोटिंग की किसी भी प्रणाली में चुनावी प्रणाली के सभी हितधारकों- मतदाताओं, राजनीतिक दलों और चुनाव मशीनरी के विश्वास एवं स्वीकार्यता को ध्यान में रखने के साथ राजनीतिक सहमति भी रिमोट वोटिंग शुरू करने का एक रास्ता है। - यदि सरकार या आम जनता इसकी सुरक्षा, अखंडता और सटीकता को लेकर आश्वस्त नहीं है तो उचित कानूनी ढाँचे के बावजूद ऑनलाइन वोटिंग प्रणाली का उपयोग करना व्यर्थ होगा। - प्रभावी डाक प्रणाली तथा डाक मतपत्र तंत्र, जो नामित कांसुलर/दूतावास कार्यालयों में मतपत्र के उचित प्रमाणीकरण की अनुमति देता है, को अनिवासी भारतीयों के लिये आसान बनाया जाना चाहिये, लेकिन देश से दूर बिताए गए समय के आधार पर पात्रता हेतु नियमों को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जाना चाहिये। भारत में मतदान करने और निर्वाचित होने का अधिकार हैः (2017) उत्तरः (c) अतः विकल्प (c) सही उत्तर है। Q. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत भ्रष्ट आचरण के दोषी पाए गए व्यक्तियों की अयोग्यता निर्धारण प्रक्रिया के सरलीकरण की आवश्यकता है"। टिप्पणी कीजिये। (2020) प्रिलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्च में क्यों? "पहाड़ी जातीय समूह" को अब राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) द्वारा केंद्रशासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर की अनुसूचित जनजाति (ST) सूची में शामिल करने के लिये मंज़ूरी दे दी गई है। - आयोग ने "पद्दारी जनजाति", "कोली" और "गड्डा ब्राह्मण" समुदायों को जम्मू-कश्मीर की एसटी सूची में शामिल करने का भी आह्वान किया। - वर्तमान में जम्मू और कश्मीर में 12 ऐसे समुदाय हैं जिन्हें अनुसूचित जनजाति के रूप में अधिसूचित किया गया है। किसी समुदाय को अनुसूचित जनजातियों की सूची में शामिल करने की प्रक्रियाः - जनजातियों को ST की सूची में शामिल करने की प्रक्रिया संबंधित राज्य सरकारों की सिफारिश से शुरू होती है, जिसे बाद में जनजातीय मामलों के मंत्रालय को भेजा जाता है, जो समीक्षा करता है और अनुमोदन के लिये भारत के महापंजीयक को इसे प्रेषित करता है। - इसके बाद अंतिम निर्णय के लिये कैबिनेट को सूची भेजे जाने से पहले राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का अनुमोदन आवश्यक है। - इसका अंतिम निर्णय अनुच्छेद 342 में निहित शक्तियों के तहत राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है। - किसी भी समुदाय को अनुसूचित जनजाति में शामिल करना तभी प्रभावी होता है जब राष्ट्रपति संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश, 1950 में संशोधन करने वाले विधेयक को लोकसभा और राज्यसभा दोनों द्वारा पारित किये जाने के बाद, अपनी सहमति देता है। ST सूची में शामिल होने के फायदेः - यह कदम अनुसूचित जनजातियों की संशोधित सूची में नए सूचीबद्ध समुदायों के सदस्यों को सरकार की मौजूदा योजनाओं के तहत लाभ प्राप्त करने में सक्षम बनाएगा। - कुछ प्रमुख लाभों में पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति, विदेशी छात्रवृत्ति और राष्ट्रीय फेलोशिप, शिक्षा के अलावा राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त और विकास निगम से रियायती ऋण तथा छात्रों के लिये छात्रावास शामिल हैं। - इसके अलावा वे सरकारी नीति के अनुसार सेवाओं में आरक्षण और शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश पाने के भी हकदार होंगे। भारत में जनजातियों से संबंधित संवैधानिक प्रावधान और पहलः - संवैधानिक प्रावधानः - वर्ष 1931 की जनगणना के अनुसार, अनुसूचित जनजातियों को "बहिष्कृत" और "आंशिक रूप से बहिष्कृत" क्षेत्रों में रहने वाली "पिछड़ी जनजाति" कहा जाता है। वर्ष 1935 के भारत सरकार अधिनियम ने पहली बार प्रांतीय विधानसभाओं में "पिछड़ी जनजातियों" के प्रतिनिधियों को शामिल करने हेतु प्रावधान किया। - संविधान अनुसूचित जनजातियों की मान्यता के मानदंडों को परिभाषित नहीं करता है, इसलिये वर्ष 1931 की जनगणना में निहित परिभाषा का उपयोग स्वतंत्रता के बाद के प्रारंभिक वर्षों में किया गया था। - हालाँकि संविधान का अनुच्छेद 366 (25) केवल अनुसूचित जनजातियों को परिभाषित करने के लिये प्रक्रिया प्रदान करता हैः "अनुसूचित जनजातियों का अर्थ ऐसी जनजातियों या जनजातीय समुदायों या जनजातियों या जनजातीय समुदायों के कुछ हिस्सों या समूहों से है जिन्हें संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत अनुसूचित जनजाति माना जाता है। - 342 (1): राष्ट्रपति किसी भी राज्य या केंद्रशासित प्रदेश के संबंध में, जबकि राज्य के संदर्भ में राज्यपाल के परामर्श के बाद सार्वजनिक अधिसूचना द्वारा उस राज्य या संघ राज्य क्षेत्र के संबंध में जनजातियों या जनजातीय समुदायों के हिस्से या जनजातियों या जनजातीय समुदायों के भीतर के समूहों को अनुसूचित जनजाति के रूप में निर्दिष्ट कर सकता है। - संविधान की पाँचवीं अनुसूची में असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिज़ोरम को छोड़कर अन्य राज्यों में अनुसूचित क्षेत्रों तथा अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन एवं नियंत्रण से संबंधित प्रावधान है। - छठी अनुसूची असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिज़ोरम में जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन से संबंधित है। - कानूनी प्रावधानः अनुसूचित जनजातियों के लिये सरकार की पहलः - संबंधित समितियाँः - शाशा समिति (2013) - लोकुर समिति (1965) प्रश्न. यदि किसी विशेष क्षेत्र को भारत के संविधान की पाँचवीं अनुसूची के अधीन लाया जाता है, तो निम्नलिखित कथनों में से कौन सा इसके परिणाम को सर्वोत्तम तरीके से प्रतिबिंबित करता है? (2022)) (a) इससे जनजातियों की भूमि गैर-जनजातीय लोगों को हस्तांतरित होने से रोका जा सकेगा। उत्तरः (a) प्रश्न. भारत के संविधान की किस अनुसूची के अधीन जनजातीय भूमि के खनन के लिये निजी पक्षकारों के अंतरण को शून्य घोषित किया जा सकता है? उत्तरः (b) प्रश्न. स्वतंत्रता के बाद से अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के प्रति भेदभाव को दूर करने के लिये राज्य द्वारा की गई दो मुख्य विधिक पहलें क्या हैं? (मेन्स-2017) प्रिलिम्स के लियेः जैविक हथियार सम्मेलन, जिनेवा प्रोटोकॉल 1925, संयुक्त राष्ट्र संकल्प, रूस-यूक्रेन संघर्ष, सामूहिक विनाश के हथियार (WMD)। मेन्स के लियेः रूस-यूक्रेन संकट पर भारत का रुख, जैविक हथियार सम्मेलन- विशेषताएँ और इसका महत्त्व। चर्चा में क्यों? भारत, रूस द्वारा प्रस्तावित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के उस प्रस्ताव से अनुपस्थित रहा जिसमें अमेरिका और यूक्रेन पर जैविक हथियार सम्मेलन (BWC) का उल्लंघन करने के लिये "सैन्य जैविक गतिविधियों" को अंजाम देने का आरोप लगाया गया है। - इस प्रस्ताव से पहले भारत हाल ही में UNSC के एक अन्य प्रस्ताव से अनुपस्थित रहा, जिसमें रूस के चार यूक्रेनी क्षेत्रों के कब्ज़े को अमान्य घोषित करने की मांग की गई थी। जैविक हथियार सम्मेलनः - परिचयः - जैविक हथियार सूक्ष्मजीवविज्ञानी एजेंटों (जैसे बैक्टीरिया, वायरस या कवक) या विषाक्त पदार्थों का उपयोग जान-बूझकर मनुष्यों, जानवरों या पौधों की मौत या उन्हें नुकसान पहुँचाने के लिये किया जाता है। - जैविक हथियार अभिसमयः - परिचयः - औपचारिक रूप से "बैक्टीरियोलॉजिकल (जैविक) और विषाक्त हथियारों के विकास, उत्पादन तथा भंडारण एवं उनके विनाश के निषेध पर अभिसमय" के रूप में जाना जाता है, अभिसमय पर जिनेवा, स्विट्रज़लैंड में निरस्त्रीकरण समिति के सम्मेलन में वार्ता की गई थी। - यह 26 मार्च, 1975 को लागू हुआ। - दायराः - यह जैविक और विषाक्त हथियारों के विकास, उत्पादन, अधिग्रहण, हस्तांतरण, भंडारण एवं उपयोग को प्रभावी ढंग से प्रतिबंधित करता है। - महत्त्वः - यह सामूहिक विनाश के हथियारों (WMD) के प्रसार को सीमित करने के लिये अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के प्रयासों में एक प्रमुख तत्त्व है और इसने जैविक हथियारों के खिलाफ एक मज़बूत मानदंड स्थापित किया है। - WMD की सभी श्रेणियों पर प्रतिबंध लगाने वाली यह पहली बहुपक्षीय निरस्त्रीकरण संधि थी। - यह वर्ष 1925 के जिनेवा प्रोटोकॉल का पूरक है, जिसके द्वारा युद्ध में जैविक (और रासायनिक) हथियारों के उपयोग को प्रतिबंधित किया गया था। - लीग ऑफ नेशन के तत्त्वाधान में जिनेवा में आयोजित एक सम्मेलन में जिनेवा प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किये गए थे। - यह वर्ष 1928 में प्रभावी हुआ। - भारत ने इस प्रोटोकॉल की पुष्टि की है। - सदस्यः - 184 भागीदार देशों और चार हस्ताक्षरकर्त्ताओं के साथ इसकी लगभग सार्वभौमिक सदस्यता है। - भारत इस कन्वेंशन का हस्ताक्षरकर्त्ता देश है। - परिचयः UNGA का प्रस्तावः - परिचयः संयुक्त राष्ट्र के संकल्प और निर्णय संयुक्त राष्ट्र के अंगों की राय या इच्छा की औपचारिक अभिव्यक्ति हैं। - संकल्प की प्रकृति निर्धारित करती है कि क्या इसे राज्यों के लिये बाध्यकारी माना जाता है। - UNGA प्रस्तावः संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 10 और 14 में महासभा के प्रस्तावों को "सिफारिशें" कहा गया है। - अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) द्वारा महासभा के प्रस्तावों की 'सिफारिशी प्रकृति' पर बार-बार ज़ोर दिया गया है। - हालाँकि संयुक्त राष्ट्र के आंतरिक मामलों से संबंधित महासभा के कुछ प्रस्ताव- जैसे कि बजटीय निर्णय या निम्न-श्रेणी के निकायों को निर्देश देना, स्पष्ट रूप से बाध्यकारी हैं। - UNSC प्रस्तावः सामान्य तौर पर चार्टर के अध्याय VII के तहत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा अपनाए गए प्रस्तावों को चार्टर के अनुच्छेद 25 के अनुसार बाध्यकारी माना जाता है। - हालाँकि वे UNSC के स्थायी सदस्यों द्वारा प्रयोग किये जाने वाले वीटो के अधीन हैं। रूस और यूक्रेन से जुड़े संयुक्त राष्ट्र के पिछले प्रस्तावों पर भारत का रुखः - भारत ने संयुक्त राष्ट्र के निम्नलिखित प्रस्तावों का बहिष्कार कियाः - यूएस-प्रायोजित UNSC प्रस्ताव जिसने यूक्रेन के खिलाफ रूस की आक्रामकता की कड़े शब्दों में निंदा की। - रूस ने यूक्रेन में मानवीय स्थिति पर UNSC के प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया, जिसमें नागरिकों की सुरक्षित, तीव्र, स्वैच्छिक और निर्बाध निकासी सुनिश्चित करने के लिये बातचीत के ज़रिये संघर्ष विराम का आह्वान किया गया। - यूक्रेन में रूस के कार्यों की जाँच के लिये एक अंतर्राष्ट्रीय आयोग की स्थापना हेतु संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में प्रस्ताव पारित किया गया। - UNGA का प्रस्ताव, जिसने यूक्रेन में रूस की सैन्य कार्रवाइयों के लिये उसकी निंदा की। - इस प्रस्ताव से अनुपस्थित रहने वाले 34 अन्य देश भी थे जिनमें चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका के अलावा मध्य एशियाई और कुछ अफ्रीकी देश शामिल थे। - अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) का प्रस्ताव चार परमाणु ऊर्जा स्टेशनों और चेरनोबिल सहित कई परमाणु अपशिष्ट स्थलों पर सुरक्षा से संबंधित है, क्योंकि रूसियों ने उन पर नियंत्रण कर लिया था। प्रश्न. हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका ने 'ऑस्ट्रेलिया समूह' तथा 'वासेनार व्यवस्था' के नाम से ज्ञात बहुपक्षीय निर्यात नियंत्रण व्यवस्थाओं में भारत को सदस्य बनाए जाने का समर्थन करने का निर्णय लिया है। इन दोनों व्यवस्थाओं के बीच क्या अंतर है? (2011) उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? उत्तरः (d) प्रश्न. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट प्राप्त करने में भारत के सामने आने वाली बाधाओं पर चर्चा कीजिये। (2015) प्रिलिम्स के लियेः जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, राजनीति का अपराधीकरण। मेन्स के लियेः राजनीति के अपराधीकरण के कारण, प्रभाव और समाधान। चर्चा में क्यों? हाल ही में उत्तर प्रदेश के दो विधायकों को आपराधिक आरोपों में दोषी ठहराया गया था, लेकिन उनमें से केवल एक को अयोग्य घोषित किया गया है और उसकी सीट को राज्य के विधानसभा सचिवालय द्वारा रिक्त घोषित किया गया है। राजनीति का अपराधीकरणः - परिचयः - इसका अर्थ राजनीति में अपराधियों की भागीदारी से है, जिसमें अपराधी चुनाव लड़ सकते हैं और संसद तथा राज्य विधायिका के सदस्य के रूप में चुने जा सकते हैं। - यह मुख्य रूप से राजनेताओं और अपराधियों के बीच साँठगाँठ के कारण होता है। आपराधिक छवि के उम्मीदवारों की अयोग्यता के कानूनी पहलूः - भारतीय संविधान में संसद या विधानमंडल का चुनाव लड़ने वाले किसी आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्ति की अयोग्यता के विषय में उपबंध नहीं किया गया है। - लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में विधानमंडल का चुनाव लड़ने के लिये किसी व्यक्ति को अयोग्य घोषित करने के मानदंडों का उल्लेख है। - इस अधिनियम की धारा 8 (अर्थात कुछ अपराधों के लिये दोषसिद्धि के संबंध में अयोग्यता) के तहत दो साल से अधिक की जेल की सज़ा पाने वाला व्यक्ति जेल की अवधि समाप्त होने के बाद छह साल तक चुनाव नहीं लड़ सकता है। - अयोग्यता के खिलाफ संरक्षणः - RPA की धारा 8(4) के तहत वर्ष 2013 तक विधानमंडल सदस्य तत्काल अयोग्यता से बच सकते थे। - इस प्रावधान के अनुसार, संसद या राज्य विधानमंडल के सदस्य तीन महीने के लिये अयोग्य नहीं होंगे। - यदि इस अवधि के दौरान दोषी विधानमंडल सदस्य अपील या पुनरीक्षण आवेदन करता है, तो अपील के निपटारे तक यह प्रभावी नहीं होगा। - वर्ष 2013 में 'लिली थॉमस बनाम यूनियन ऑफ इंडिया' के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने धारा 8(4) को असंवैधानिक ठहरा कर इसे निरस्त कर दिया था। - आरपीए की धारा 8(4) के तहत विधायक वर्ष 2013 तक तत्काल अयोग्यता से बच सकते हैं। - प्रावधान के अनुसार संसद सदस्य या राज्य के विधायक तीन महीने के लिये अयोग्य नहीं होंगे। - यदि उस अवधि के भीतर दोषी विधायक अपील या पुनरीक्षण आवेदन दायर करता है, तो यह अपील या आवेदन के निपटारे तक प्रभावी नहीं होगा। - लिली थॉमस बनाम भारत संघ, 2013 में सर्वोच्च न्यायालय ने खंड (4) को असंवैधानिक करार दिया, इस प्रकार सांसदों द्वारा प्राप्त सुरक्षा को हटा दिया गया। - RPA की धारा 8(4) के तहत वर्ष 2013 तक विधानमंडल सदस्य तत्काल अयोग्यता से बच सकते थे। - सर्वोच्च न्यायालय की संबंधित शक्तिः - सुप्रीम कोर्ट के पास न केवल सज़ा देने बल्कि किसी व्यक्ति की दोषसिद्धि पर भी रोक लगाने की शक्ति है। कुछ दुर्लभ मामलों में अपीलकर्त्ता को चुनाव लड़ने में सक्षम बनाने के लिये दोषसिद्धि पर रोक लगाई गई है। - हालाँकि सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस तरह की रोक बहुत दुर्लभ और विशेष कारणों से होनी चाहिये। आरपीए स्वयं चुनाव आयोग (EC) के माध्यम से एक उपाय प्रदान करता है। अधिनियम की धारा 11 के तहत चुनाव आयोग कारणों को रिकॉर्ड कर सकता है और किसी व्यक्ति की अयोग्यता की अवधि को हटा सकता है या कम कर सकता है। - राजनीति के अपराधीकरण का कारणः - प्रवर्तन की कमीः कानूनों और निर्णयों के प्रवर्तन की कमी के कारण कई कानूनों और न्यायालयी निर्णयों ने ज़्यादा मदद नहीं की है। - निहित स्वार्थः राजनीतिक दलों द्वारा चुने गए उम्मीदवारों के संपूर्ण आपराधिक इतिहास का प्रकाशन बहुत प्रभावी नहीं हो सकता है, क्योंकि मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा जाति या धर्म जैसे सामुदायिक हितों से प्रभावित होकर मतदान करता है। - बाहुबल और धन का उपयोगः - गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों के पास अक्सर धन और संपदा काफी अधिक मात्रा में होती है, इसलिये वे दल के चुनावी अभियान में अधिक-से-अधिक पैसा खर्च करते हैं और उनकी राजनीति में प्रवेश करने तथा जीतने की संभावना बढ़ जाती है। - इसके अलावा कभी-कभी मतदाताओं के पास कोई विकल्प नहीं बचता है, क्योंकि सभी प्रतिस्पर्द्धी उम्मीदवारों की आपराधिक पृष्ठभूमि होती है। राजनीति के अपराधीकरण के प्रभावः - स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के सिद्धांत के विरुद्धः यह एक उपयुक्त उम्मीदवार का चुनाव करने के संबंध में मतदाताओं की पसंद को सीमित करता है। - यह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लोकाचार के खिलाफ है जिससे लोकतंत्र का आधार माना जाता है। - सुशासन पर प्रभावः प्रमुख समस्या यह है कि कानून तोड़ने वाले कानून बनाने वाले बन जाते हैं, इससे सुशासन सुनिश्चित करने में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की प्रभावकारिता प्रभावित होती है। - लोकतांत्रिक व्यवस्था में ये अस्वस्थ प्रवृत्तियाँ भारत के राज्य संस्थानों की प्रकृति और इसके निर्वाचित प्रतिनिधियों की गुणवत्ता की खराब छवि को दर्शाती हैं। - लोक सेवकों की सत्यनिष्ठा पर प्रभावः इससे चुनाव के दौरान और बाद में काले धन का प्रचलन भी बढ़ता है, जो बदले में समाज में भ्रष्टाचार को बढ़ाता है और लोक सेवकों के कामकाज को प्रभावित करता है। - सामाजिक विषमता का कारण बननाः इससे समाज में हिंसा की संस्कृति का प्रसार होता है और युवाओं के भविष्य के खिलवाड़ के साथ शासन प्रणाली के रूप में लोकतंत्र में लोगों के विश्वास को कम करता है। - चुनावों का राज्य वित्तपोषणः चुनाव सुधार पर बनी विभिन्न समितियों (दिनेश गोस्वामी, इंद्रजीत समिति) ने राज्य द्वारा चुनावी खर्च वहन किये जाने की सिफारिश की, जिससे काफी हद तक चुनावों में काले धन के उपयोग पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी और परिणामस्वरूप राजनीति के अपराधीकरण को सीमित किया जा सकेगा। - चुनाव आयोग को सुदृढ़ बनानाः एक स्वच्छ चुनावी प्रक्रिया हेतु राजनीतिक पार्टियों के मामलों को विनियमित करना आवश्यक है, जिसके लिये निर्वाचन आयोग (Election Commission) को मज़बूत करना ज़रूरी है। - जागरूक मतदाताः मतदाताओं को चुनाव के दौरान धन, उपहार जैसे अन्य प्रलोभनों के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता है। - न्यायपालिका की सक्रिय भूमिकाः भारत के राजनीतिक दलों की राजनीति के अपराधीकरण और भारतीय लोकतंत्र पर इसके बढ़ते हानिकारक प्रभावों को रोकने के प्रति अनिच्छा को देखते हुए यहाँ के न्यायालयों को अब गंभीर आपराधिक प्रवृत्ति वाले उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाने जैसे फैसले पर विचार करना चाहिये। UPSC सिविल सेवा परीक्षा विगत वर्ष के प्रश्न (PYQs) प्रश्नः अक्सर कहा जाता है कि 'राजनीति' और 'नैतिकता' एक साथ नहीं चलते हैं। इस संबंध में आपकी क्या राय है? दृष्टांतों के साथ अपने उत्तर की पुष्टि कीजिये। (मुख्य परीक्षा, 2013) प्रश्न. जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत संसद या राज्य विधानमंडल के सदस्य के चुनाव से उत्पन्न विवादों को तय करने के लिये प्रक्रियाओं पर चर्चा कीजिये। ऐसे कौन से आधार हैं जिन पर किसी भी उम्मीदवार का चुनाव शून्य घोषित किया जा सकता है? निर्णय के विरुद्ध पीड़ित पक्ष के पास क्या उपाय उपलब्ध है? केस कानूनों का संदर्भ लीजिये। (मुख्य परीक्षा, 2022) प्रिलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? हाल ही में एक शोध में पाया गया है कि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में वृद्धि के कारण क्लाउड कवर और वर्षा में परिवर्तन से औसत वैश्विक वार्षिक इंद्रधनुष दिनों में वृद्धि होने का अनुमान है। - वर्ष 2100 तक विश्व स्तर पर इंद्रधनुष के औसत दिनों में 4.0-4.9% की वृद्धि होने की उम्मीद है। अध्ययन से इंद्रधनुष के बारे में निष्कर्षः - कम इंद्रधनुष वाले क्षेत्रः - लगभग 21-34% भूमि क्षेत्र इंद्रधनुष के दिनों को खो देंगे। - मध्य अफ्रीका, मेडागास्कर और मध्य दक्षिण अमेरिका को छोड़कर जिन क्षेत्रों में इंद्रधनुष के दिनों में कमी आएगी, उनमें वर्ष 2100 तक कुल वर्षा में कमी का अनुमान है। - सभी में अधिक वार्षिक शुष्क दिन और कम कुल वार्षिक क्लाउड कवर होने का अनुमान है। - उच्च इंद्रधनुष वाले क्षेत्रः - उच्च उत्सर्जन वाले क्षेत्र (लगभग 66-79%) इंद्रधनुष के दिनों को प्राप्त करेंगे। - भारत उन देशों में से एक है जहाँ इंद्रधनुष के दिनों की संख्या बढ़ेगी। - माली, नाइजर, चाड, सूडान और इथियोपिया जैसे अफ्रीकी देशों में भी अधिक इंद्रधनुष बनने की संभावना है। - रेनबो गेन हॉटस्पॉट ज़्यादातर उच्च अक्षांशों पर या बहुत अधिक ऊँचाई पर स्थित होते हैं, जैसे तिब्बती पठार, जहाँ कम बर्फ और अधिक बारिश होने की संभावना होती है। - पूर्वी बोर्नियो और उत्तरी जापान जैसे दो इंद्रधनुष हॉटस्पॉट में कुल वर्षा में वृद्धि होगी लेकिन प्रति वर्ष अधिक शुष्क दिन होंगे। इंद्रधनुष और जलवायु परिवर्तन में परस्पर संबंधः - विषयः - इंद्रधनुष एक सामान्य वायुमंडलीय प्रकाशीय घटना है। बरसात के मौसम में जब पानी की बूँदे सूर्य के प्रकाश पर पड़ती है तब सूर्य की किरणों का विक्षेपण ही इंद्रधनुष के सुंदर रंगों का कारण बनता है। - जब सूरज की रोशनी बारिश की बूँदों से टकराती है, तो कुछ प्रकाश परावर्तित हो जाता है। इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम कई अलग-अलग वेवलेंथ के साथ प्रकाश से बना होता है और प्रत्येक वेवलेंथ एक अलग कोण पर परावर्तित होता है। इस प्रकार स्पेक्ट्रम अलग हो जाता है, जिससे इंद्रधनुष बनता है। - इंद्रधनुष को कोहरे, समुद्री फुहारें या झरनों के आसपास भी देखा जा सकता है। - यह एक दृष्टि संबंधी/ऑप्टिकल भ्रम है, यह वास्तव में आकाश में किसी विशिष्ट स्थान पर मौजूद नहीं होता है। - इंद्रधनुष प्रकाश के अपवर्तन और परावर्तन का परिणाम है। - अपवर्तन और परावर्तन दोनों ही ऐसी घटनाएँ हैं जिनमें तरंग की दिशा में परिवर्तन शामिल होता है। - अपवर्तित तरंग "झुकी हुई" दिखाई दे सकती है, जबकि परावर्तित तरंग किसी सतह या अन्य तरंगाग्र से "वापस आती हुई" प्रतीत हो सकती है। - प्राथमिक इंद्रधनुष पर रंग हमेशा उनकी तरंग दैर्ध्य के क्रम में होते हैं, दीर्घ से सबसे लघु तकः लाल, नारंगी, पीला, हरा, नीला, इंडिगो और बैंगनी। - इंद्रधनुष एक सामान्य वायुमंडलीय प्रकाशीय घटना है। बरसात के मौसम में जब पानी की बूँदे सूर्य के प्रकाश पर पड़ती है तब सूर्य की किरणों का विक्षेपण ही इंद्रधनुष के सुंदर रंगों का कारण बनता है। - जलवायु परिवर्तन के साथ संबंधः - जीवाश्म ईंधन जलाने जैसी मानवीय गतिविधियाँ वातावरण को गर्म कर रही हैं, जिससे स्वरूप और वर्षा एवं बादलों की मात्रा में परिवर्तन होता है। - जलवायु परिवर्तन वाष्पीकरण और नमी के अभिसरण को प्रभावित करके इंद्रधनुषी घटना के वितरण को बदल देगा। - यह वर्षा और बादल अच्छादन के स्वरूप को बदल देता है। वर्षा की बूँदों पर सूर्य की रोशनी पड़ने पर इंद्रधनुष बनता है। निम्नलिखित में से कौन-सी भौतिक घटनाएँ इसके लिये उत्तरदायी हैं? (2013) नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनियेः उत्तरः (d) अतः विकल्प (d) सही उत्तर है। प्रिलिम्स के लियेः बायोस्फीयर रिज़र्व, संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को), भारत में बायोस्फीयर रिज़र्व, मैन एंड बायोस्फीयर प्रोग्राम। मेन्स के लियेः बायोस्फीयर रिज़र्वः निर्धारण के लिये मानदंड, मुख्य क्षेत्र, कार्य, अंतर्राष्ट्रीय स्थिति। चर्चा में क्यों? वर्ष 2022 से प्रत्येक वर्ष 3 नवंबर को 'अंतर्राष्ट्रीय बायोस्फीयर रिज़र्व दिवस' के रूप में मनाया जाएगा। बायोस्फीयर रिज़र्वः - परिचयः - बायोस्फीयर रिज़र्व (BR), यूनेस्को द्वारा प्राकृतिक और सांस्कृतिक परिदृश्यों के सांकेतिक भागों के लिये दिया गया एक अंतर्राष्ट्रीय पदनाम है, जो स्थलीय या तटीय/समुद्री पारिस्थितिक तंत्रों के बड़े क्षेत्रों या दोनों के संयोजन को शामिल करता है। - बायोस्फीयर रिज़र्व प्रकृति के संरक्षण के साथ आर्थिक एवं सामाजिक विकास तथा संबद्ध सांस्कृतिक मूल्यों के रखरखाव को भी संतुलित करने का प्रयास करता है। - बायोस्फीयर रिज़र्व को राष्ट्रीय स्तर पर सरकारों द्वारा नामित किया जाता है और वे उन राज्यों के संप्रभु अधिकार क्षेत्र में आते हैं जहाँ वे स्थित हैं। - इन्हें 'MAB अंतर्राष्ट्रीय समन्वय परिषद' (MAB ICC) के निर्णयों के बाद यूनेस्को के महानिदेशक द्वारा अंतर-सरकारी MAB कार्यक्रम के तहत नामित किया जाता है। - मैन एंड बायोस्फीयर रिज़र्व प्रोग्राम (MAB) एक अंतर-सरकारी वैज्ञानिक कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य लोगों और उनके वातावरण के बीच संबंधों में सुधार के लिये वैज्ञानिक आधार स्थापित करना है। - इनकी स्थिति अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है। - तीन मुख्य क्षेत्र : - कोर क्षेत्र (Core Areas): इसमें एक जटिल या सुभेद्य संरक्षित क्षेत्र शामिल है जो परिदृश्य, पारिस्थितिकी तंत्र, प्रजातियों और आनुवंशिक भिन्नता के संरक्षण में योगदान देता है। - बफर क्षेत्र (Buffer Zone): यह मुख्य क्षेत्र को चारों तरफ से संरक्षित करता है या जोड़ता है तथा इसका उपयोग ध्वनि पारिस्थितिक गतिविधियों को संतुलित करने हेतु किया जाता है जो वैज्ञानिक अनुसंधान, निगरानी, प्रशिक्षण एवं शिक्षा को सुदृढ़ कर सकते हैं। - संक्रमण क्षेत्र (Transition Area): संक्रमण क्षेत्र वह स्थान है जहाँ समुदाय सामाजिक- सांस्कृतिक और पारिस्थितिक रूप से टिकाऊ आर्थिक एवं मानवीय गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं। भारत/विश्व में बायोस्फीयर रिज़र्व की स्थितिः - भारत मेंः - भारत में वर्तमान में 60,000 वर्ग किमी में फैले 18 अधिसूचित बायोस्फीयर रिज़र्व हैं। - भारत में पहला बायोस्फीयर रिज़र्व तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल में फैले नीलगिीरि के नीले पहाड़ थे। - सबसे बड़ा बायोस्फीयर रिज़र्व कच्छ (गुजरात) की खाड़ी है और सबसे छोटा डिब्रू-सैखोवा (असम) है। - अन्य बड़े बायोस्फीयर रिज़र्व मन्नार की खाड़ी (तमिलनाडु), सुंदरबन (पश्चिम बंगाल) और शीत रेगिस्तान (हिमाचल प्रदेश) हैं। - वैश्विक स्तर परः - परिचयः - यूनेस्को के अनुसार, 22 ट्रांसबाउंड्री साइटों सहित 134 देशों में 738 बायोस्फीयर रिज़र्व हैं। - क्षेत्र के आधार परः - सबसे अधिक बायोस्फीयर रिज़र्व यूरोप और उत्तरी अमेरिका में हैं, इसके बाद एशिया और प्रशांत, लैटिन अमेरिका तथा कैरिबियन, अफ्रीका एवं अरब देशों का नाम आता है। - दक्षिण एशिया मे, 30 से अधिक बायोस्फीयर रिज़र्व स्थापित किये गए हैं। पहला श्रीलंका में हुरुलु बायोस्फीयर रिज़र्व था, जिसमें 25,500 हेक्टेयर उष्णकटिबंधीय शुष्क सदाबहार वन शामिल था। - बांग्लादेश, भूटान और नेपाल में अब तक कोई बायोस्फीयर रिज़र्व नहीं है। - देशों के आधार पर : - ऐसी साइटों की सबसे अधिक संख्या स्पेन, रूस और मैक्सिको में है। - विश्व का प्रथम 'पाँच देशों का बायोस्फीयर रिज़र्व': - यह बायोस्फीयर रिज़र्व मुरा, द्रवा और डेन्यूब नदियों के 700 किलोमीटर के क्षेत्र और ऑस्ट्रिया, स्लोवेनिया, क्रोएशिया, हंगरी तथा सर्बिया में फैला हुआ है, जिसे यूनेस्को द्वारा सितंबर 2021 में घोषित किया गया । - इस रिज़र्व का कुल क्षेत्रफल एक मिलियन हेक्टेयर है जिसे 'यूरोप का अमेज़न' (Amazon of Europe) कहा जाता है तथा यह अब यूरोप में सबसे बड़ा नदी संरक्षित क्षेत्र है। - परिचयः - संक्रमण क्षेत्रों में वन संसाधनों पर निर्भर आदिवासियों के भूमि अधिकारों को सुरक्षित किया जाना चाहिये। - मुन्नार घोषणा पत्र जो बताता है कि बायोस्फीयर रिज़र्व को रेगिस्तान और गंगा के मैदानी जैव-भौगोलिक क्षेत्रों से बाहर रखा जा सकता है, को भी लागू किया जाना चाहिये।। - चूँकि बायोस्फीयर रिज़र्व अवधारणा का उद्देश्य सतत् विकास था, इसलिये शब्द आरक्षित को एक उपयुक्त शब्द के साथ प्रतिस्थापित किया जाना चाहिये। - सरकार को विभिन्न बायोस्फीयर रिज़र्व जैसे नीलगिरि बायोस्फीयर रिज़र्व पर आक्रमण करने वाली विदेशी प्रजातियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने चाहिये। प्रश्न. निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजियेः (2013) उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं? उत्तरः (a) प्रश्न. जैवविविधता के साथ-साथ मनुष्य के परंपरागत जीवन के संरक्षण के लिये सबसे महत्त्वपूर्ण रणनीति निम्नलिखित में से किस एक की स्थापना करने में निहित है? (2014) (a) जीवमंडल निचय (रिज़र्व) उत्तरः (a) प्रश्न. भारत के सभी बायोस्फीयर रिज़र्व में से चार को यूनेस्को द्वारा वर्ल्ड नेटवर्क के रूप में मान्यता दी गई है। निम्नलिखित में से कौन-सा उनमें से एक नहीं है? (2008) उत्तरः (b)
- भौगौलिक विस्तारः - सीमावर्ती देशः यूक्रेन, रूस, जॉर्जिया, तुर्किये, बुल्गारिया और रोमानिया। - इसे यूक्सिन सागर के नाम से भी जाना जाता है। - यह दक्षिण, पूर्व और उत्तर में क्रमशः पोंटिक, काकेशस और क्रीमियन पहाड़ों से घिरा हुआ है। - तुर्की जलडमरूमध्य प्रणाली- डार्डानेल्स, बोस्पोरस और मरमरा सागर- भूमध्यसागर तथा काला सागर के बीच एक ट्रांज़ीशन ज़ोन के रूप में कार्य करती है। - आज़ोव सागर काला सागर का एक उत्तरी विस्तार बनाता है जो कर्च जलडमरूमध्य से जुड़ा हुआ है। - एनोक्सिक जल; काला सागर के जल में ऑक्सीजन की भारी कमी है। - रूस - यूक्रेन संघर्षः - यूक्रेन में रूसी सैन्य नियंत्रण का क्षेत्रः - वर्ष दो हज़ार बाईस में डोनबास पर नियंत्रण स्थापित किया गया जिसमें डोनेट्स्क और लुहांस्क क्षेत्र भी शामिल हैं। - क्रीमियाः रूस ने वर्ष दो हज़ार चौदह में क्रीमिया पर कब्ज़ा किया था। - मारियुपोल और ओडेसा : रूस का फोकस इन क्षेत्रों पर हैः - मारियुपोल, डोनेट्स्क में अज़ोव बंदरगाह का सागर है। - क्रीमिया के पश्चिम में ओडेसा है। - 'बोस्पोरस' और 'डार्डानेल्स' जलडमरूमध्यः मोंट्रेक्स कन्वेंशन द्वारा तुर्किये को एजियन, मरमरा और काला सागर को जोड़ने वाले डार्डानेल्स एवं बोस्पोरस जलडमरूमध्य से युद्धपोतों के गुज़रने पर कुछ नियंत्रण प्राप्त होता है। - नौसैनिक अभ्यास 'सी ब्रीज : इसमें नाटो राज्य तथा इसके सहयोगी देश शामिल होते हैं। - यूक्रेन में रूसी सैन्य नियंत्रण का क्षेत्रः - पर्यावरण संदर्भः - तुर्किये का मरमरा सागर : इसमें 'सी स्नॉट' का सबसे बड़ा प्रकोप देखा गया। प्रिलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय में केंद्र सरकार ने कहा कि वह अनिवासी भारतीयों , विशेष रूप से प्रवासी मज़दूरों के लिये दूरस्थ मतदान सुविधा पर विचार कर रही है, ताकि चुनावी प्रक्रिया की अखंडता सुनिश्चित करते हुए दूरस्थ मतदान सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। - वर्ष दो हज़ार बीस में चुनाव आयोग के अधिकारियों ने दूरस्थ मतदान को सक्षम करने के लिये ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग करने का विचार भी प्रस्तावित किया। इसका उद्देश्य मतदान में भौगोलिक बाधाओं को दूर करना है। - आयोग दूरस्थ मतदान की संभावना पर विचार कर रहा है जिससे लोग अपने कार्यस्थल से मतदान कर सकेंगे। - जनप्रतिनिधित्व विधेयक दो हज़ार सत्रह में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ इक्यावन की धारा बीस एम्पीयर के तहत लगाए गए 'अनुचित प्रतिबंध' को हटाने का प्रस्ताव किया गया था, जिसके तहत विदेश में रह रहे भारतीय मतदाताओं को अपने निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान करने के लिये भौतिक रूप से उपस्थित रहने की आवश्यकता होती है. - यह वर्ष दो हज़ार अट्ठारह में विधेयक में पारित हो गया था, लेकिन सोलहवीं लोकसभा के भंग होने के साथ समाप्त हो गया। - वर्तमान में केवल निम्नलिखित मतदाताओं को डाक मतपत्र के माध्यम से अपना वोट डालने की अनुमति हैः - सेवारत मतदाता , - मतदाता, चुनाव ड्यूटी में संलग्न, - अस्सी वर्ष से अधिक आयु के मतदाता या विकलांग व्यक्ति , - निवारक नजरबंदी के तहत मतदाता। रिमोट वोटिंग/दूरस्थ मतदानः - दूरस्थ मतदान किसी नियत मतदान केंद्र के अलावा कहीं और व्यक्तिगत रूप से हो सकता है या किसी अन्य समय पर हो सकता है या वोट डाक द्वारा भेजे जा सकते हैं या नियुक्त प्रॉक्सी द्वारा डाले जा सकते हैं। - विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा मांग की गई है कि चुनाव आयोग को यह सुनिश्चित करना चाहिये कि प्रवासी श्रमिक, एनआरआई जो मतदान से चूक जाते हैं, क्योंकि वे अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिये चुनाव के दौरान घर जाने का जोखिम नहीं उठा सकते हैं, उन्हें जिस शहर में वे काम कर रहे हैं, वहाँ के निर्वाचन क्षेत्र में वोट देने की अनुमति दी जानी चाहिये। दूरस्थ मतदान की आवश्यकताः - प्रतिकूल परिस्थितियों के कारणः - मतदाता अपने पंजीकरण के स्थान से शहरों और अन्य स्थानों पर शिक्षा, रोज़गार और अन्य उद्देश्यों के लिये प्रवासन करते हैं। उनके लिये वोट डालने के लिये अपने पंजीकृत मतदान केंद्रों पर लौटना मुश्किल हो जाता है। - यह भी देखा गया है कि उत्तराखंड के दुमक और कलगोठ जैसे गाँवों में लगभग बीस-पच्चीस% पंजीकृत मतदाता अपने निर्वाचन क्षेत्रों में वोट डालने में असमर्थ हैं क्योंकि उन्हें नौकरी या शैक्षिक कारण से अपने गाँव/राज्य से बाहर जाना पड़ता है। - मतदान प्रतिशत में कमीः - वर्ष दो हज़ार उन्नीस के आम चुनावों के दौरान कुल नौ सौ दस मिलियन मतदाताओं में से लगभग तीन सौ मिलियन नागरिकों ने अपना वोट नहीं डाला। - महानगरीय क्षेत्रों से संबंधित चिंताएँः - चुनाव आयोग द्वारा शहरी क्षेत्रों में मतदाता के लिये दो किमी. के भीतर मतदान केंद्र स्थापित किये जाने के बावजूद कुछ महानगरों/शहर क्षेत्रों में कम मतदान के बारे में चिंता व्यक्त की गई। शहरी क्षेत्रों में मतदान को लेकर उदासीनता को दूर करने की आवश्यकता महसूस की गई। - असंगठित श्रमिकों का बढ़ता पंजीकरणः - प्रवासी श्रमिकों की संख्या लगभग दस मिलियन हैं, जो असंगठित क्षेत्र से हैं और सरकार के ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत हैं। यदि रिमोट वोटिंग परियोजना को लागू किया जाता है, तो इसके दूरगामी प्रभाव होंगे। - स्वास्थ्य संबंधी चिंताएँः - मुख्य रूप से वरिष्ठ नागरिकों की स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं पर भी चर्चा करने की आवश्यकता है क्योंकि वे भी मुख्य विचार-विमर्श बन रहे हैं। दूरस्थ मतदान सुविधा के परिणामस्वरूप शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी मतदान प्रतिशत में वृद्धि होगी। रिमोट वोटिंग से संबंधित समस्याएँ : - सुरक्षाः - कोई भी नई प्रौद्योगिकी प्रणाली जिसमें ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी और अन्य पर आधारित प्रणाली शामिल है, साइबर हमलों एवं अन्य सुरक्षा कमज़ोरियों के प्रति संवेदनशील हैं। - सत्यता और पुष्टिकरणः - इसके अलावा एक मतदाता सत्यापन प्रणाली जो बायोमेट्रिक सॉफ्टवेयर का उपयोग करती है, जैसे कि चेहरे की पहचान, मतदाता पहचान में सकारात्मक या नकारात्मक झूठी जानकारी दे सकती है, इस प्रकार से धोखाधड़ी को बल मिलता है। - इंटरनेट कनेक्शन और मालवेयर सुरक्षाः - मतदान हेतु मतदाताओं की निर्भरता विश्वसनीय इंटरनेट कनेक्शन पर रहती है कुछ देशों में इंटरनेट की पहुँच और उपलब्धता एवं ई-सरकारी सेवाओं का उपयोग सीमित है। - मतदाताओं के उपकरणों पर सॉफ्टवेयर त्रुटियाँ या मालवेयर भी वोट कास्टिंग को प्रभावित कर सकते हैं। - गोपनीयताः - मतदाता गोपनीयता और अंतिम परिणामों की अखंडता की रक्षा के लिये चुनावों में हमेशा उच्च स्तर की सुरक्षा की आवश्यकता होती है। चुनावों की सुरक्षा ज़रूरतों को पूरा करने का मतलब है कि ऑनलाइन वोटिंग तकनीक से उन बाधाओं को दूर करना होगा जो मतदाता की गोपनीयता के लिये खतरा उत्पन्न कर सकती हैं। - पसंदीदा वातावरणः यह भी संभव है कि मतदान अनियंत्रित वातावरण में हो। अतः यह सुनिश्चित करना मुश्किल है कि व्यक्ति स्वतंत्र रूप से और बिना ज़बरदस्ती के मतदान करे। - इसमें जोखिम यह है कि कोई अन्य व्यक्ति मतदाता की ओर से मतदान करता है, इसलिये मतदाता की पहचान करना मुश्किल है। भारतीय चुनावों में प्रवासी मतदाताओं के लिये वर्तमान मतदान प्रक्रियाः - जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, दो हज़ार दस के माध्यम से पात्र एनआरआई जो छह महीने से अधिक समय तक विदेश में रहे थे, को मतदान करने की अनुमति दी गई थी, लेकिन केवल मतदान केंद्र पर व्यक्तिगत रूप से जहाँ उन्हें एक विदेशी मतदाता के रूप में नामांकित किया गया था। - वर्ष दो हज़ार दस से पहले एक भारतीय नागरिक जो एक पात्र मतदाता है तथा छह महीने से अधिक समय से विदेश में रह रहा हो, चुनाव में मतदान नहीं कर सकता था। ऐसा इसलिये था क्योंकि वह देश से बाहर छह महीने से अधिक समय तक रहा है और NRI का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया था। - NRI, निर्वाचन क्षेत्र में अपने निवास स्थान पर मतदान कर सकता है, जैसा कि पासपोर्ट में उल्लिखित है। - वह केवल व्यक्तिगत रूप से मतदान कर सकता है और पहचान के लिये उसे मतदान केंद्र पर अपना पासपोर्ट मूल रूप में प्रस्तुत करना होगा। - ऑनलाइन मतदान प्रणाली को यह सत्यापन करने में भी सक्षम होना चाहिये कि इसमें चुनाव की अखंडता बनी रहने के साथ मतदान प्रक्रिया के दौरान कोई हेरफेर नहीं हुई हो। - यह महत्त्वपूर्ण है कि रिमोट वोटिंग की किसी भी प्रणाली में चुनावी प्रणाली के सभी हितधारकों- मतदाताओं, राजनीतिक दलों और चुनाव मशीनरी के विश्वास एवं स्वीकार्यता को ध्यान में रखने के साथ राजनीतिक सहमति भी रिमोट वोटिंग शुरू करने का एक रास्ता है। - यदि सरकार या आम जनता इसकी सुरक्षा, अखंडता और सटीकता को लेकर आश्वस्त नहीं है तो उचित कानूनी ढाँचे के बावजूद ऑनलाइन वोटिंग प्रणाली का उपयोग करना व्यर्थ होगा। - प्रभावी डाक प्रणाली तथा डाक मतपत्र तंत्र, जो नामित कांसुलर/दूतावास कार्यालयों में मतपत्र के उचित प्रमाणीकरण की अनुमति देता है, को अनिवासी भारतीयों के लिये आसान बनाया जाना चाहिये, लेकिन देश से दूर बिताए गए समय के आधार पर पात्रता हेतु नियमों को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जाना चाहिये। भारत में मतदान करने और निर्वाचित होने का अधिकार हैः उत्तरः अतः विकल्प सही उत्तर है। Q. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत भ्रष्ट आचरण के दोषी पाए गए व्यक्तियों की अयोग्यता निर्धारण प्रक्रिया के सरलीकरण की आवश्यकता है"। टिप्पणी कीजिये। प्रिलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्च में क्यों? "पहाड़ी जातीय समूह" को अब राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग द्वारा केंद्रशासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर की अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल करने के लिये मंज़ूरी दे दी गई है। - आयोग ने "पद्दारी जनजाति", "कोली" और "गड्डा ब्राह्मण" समुदायों को जम्मू-कश्मीर की एसटी सूची में शामिल करने का भी आह्वान किया। - वर्तमान में जम्मू और कश्मीर में बारह ऐसे समुदाय हैं जिन्हें अनुसूचित जनजाति के रूप में अधिसूचित किया गया है। किसी समुदाय को अनुसूचित जनजातियों की सूची में शामिल करने की प्रक्रियाः - जनजातियों को ST की सूची में शामिल करने की प्रक्रिया संबंधित राज्य सरकारों की सिफारिश से शुरू होती है, जिसे बाद में जनजातीय मामलों के मंत्रालय को भेजा जाता है, जो समीक्षा करता है और अनुमोदन के लिये भारत के महापंजीयक को इसे प्रेषित करता है। - इसके बाद अंतिम निर्णय के लिये कैबिनेट को सूची भेजे जाने से पहले राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का अनुमोदन आवश्यक है। - इसका अंतिम निर्णय अनुच्छेद तीन सौ बयालीस में निहित शक्तियों के तहत राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है। - किसी भी समुदाय को अनुसूचित जनजाति में शामिल करना तभी प्रभावी होता है जब राष्ट्रपति संविधान आदेश, एक हज़ार नौ सौ पचास में संशोधन करने वाले विधेयक को लोकसभा और राज्यसभा दोनों द्वारा पारित किये जाने के बाद, अपनी सहमति देता है। ST सूची में शामिल होने के फायदेः - यह कदम अनुसूचित जनजातियों की संशोधित सूची में नए सूचीबद्ध समुदायों के सदस्यों को सरकार की मौजूदा योजनाओं के तहत लाभ प्राप्त करने में सक्षम बनाएगा। - कुछ प्रमुख लाभों में पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति, विदेशी छात्रवृत्ति और राष्ट्रीय फेलोशिप, शिक्षा के अलावा राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त और विकास निगम से रियायती ऋण तथा छात्रों के लिये छात्रावास शामिल हैं। - इसके अलावा वे सरकारी नीति के अनुसार सेवाओं में आरक्षण और शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश पाने के भी हकदार होंगे। भारत में जनजातियों से संबंधित संवैधानिक प्रावधान और पहलः - संवैधानिक प्रावधानः - वर्ष एक हज़ार नौ सौ इकतीस की जनगणना के अनुसार, अनुसूचित जनजातियों को "बहिष्कृत" और "आंशिक रूप से बहिष्कृत" क्षेत्रों में रहने वाली "पिछड़ी जनजाति" कहा जाता है। वर्ष एक हज़ार नौ सौ पैंतीस के भारत सरकार अधिनियम ने पहली बार प्रांतीय विधानसभाओं में "पिछड़ी जनजातियों" के प्रतिनिधियों को शामिल करने हेतु प्रावधान किया। - संविधान अनुसूचित जनजातियों की मान्यता के मानदंडों को परिभाषित नहीं करता है, इसलिये वर्ष एक हज़ार नौ सौ इकतीस की जनगणना में निहित परिभाषा का उपयोग स्वतंत्रता के बाद के प्रारंभिक वर्षों में किया गया था। - हालाँकि संविधान का अनुच्छेद तीन सौ छयासठ केवल अनुसूचित जनजातियों को परिभाषित करने के लिये प्रक्रिया प्रदान करता हैः "अनुसूचित जनजातियों का अर्थ ऐसी जनजातियों या जनजातीय समुदायों या जनजातियों या जनजातीय समुदायों के कुछ हिस्सों या समूहों से है जिन्हें संविधान के अनुच्छेद तीन सौ बयालीस के तहत अनुसूचित जनजाति माना जाता है। - तीन सौ बयालीस : राष्ट्रपति किसी भी राज्य या केंद्रशासित प्रदेश के संबंध में, जबकि राज्य के संदर्भ में राज्यपाल के परामर्श के बाद सार्वजनिक अधिसूचना द्वारा उस राज्य या संघ राज्य क्षेत्र के संबंध में जनजातियों या जनजातीय समुदायों के हिस्से या जनजातियों या जनजातीय समुदायों के भीतर के समूहों को अनुसूचित जनजाति के रूप में निर्दिष्ट कर सकता है। - संविधान की पाँचवीं अनुसूची में असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिज़ोरम को छोड़कर अन्य राज्यों में अनुसूचित क्षेत्रों तथा अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन एवं नियंत्रण से संबंधित प्रावधान है। - छठी अनुसूची असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिज़ोरम में जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन से संबंधित है। - कानूनी प्रावधानः अनुसूचित जनजातियों के लिये सरकार की पहलः - संबंधित समितियाँः - शाशा समिति - लोकुर समिति प्रश्न. यदि किसी विशेष क्षेत्र को भारत के संविधान की पाँचवीं अनुसूची के अधीन लाया जाता है, तो निम्नलिखित कथनों में से कौन सा इसके परिणाम को सर्वोत्तम तरीके से प्रतिबिंबित करता है? ) इससे जनजातियों की भूमि गैर-जनजातीय लोगों को हस्तांतरित होने से रोका जा सकेगा। उत्तरः प्रश्न. भारत के संविधान की किस अनुसूची के अधीन जनजातीय भूमि के खनन के लिये निजी पक्षकारों के अंतरण को शून्य घोषित किया जा सकता है? उत्तरः प्रश्न. स्वतंत्रता के बाद से अनुसूचित जनजातियों के प्रति भेदभाव को दूर करने के लिये राज्य द्वारा की गई दो मुख्य विधिक पहलें क्या हैं? प्रिलिम्स के लियेः जैविक हथियार सम्मेलन, जिनेवा प्रोटोकॉल एक हज़ार नौ सौ पच्चीस, संयुक्त राष्ट्र संकल्प, रूस-यूक्रेन संघर्ष, सामूहिक विनाश के हथियार । मेन्स के लियेः रूस-यूक्रेन संकट पर भारत का रुख, जैविक हथियार सम्मेलन- विशेषताएँ और इसका महत्त्व। चर्चा में क्यों? भारत, रूस द्वारा प्रस्तावित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के उस प्रस्ताव से अनुपस्थित रहा जिसमें अमेरिका और यूक्रेन पर जैविक हथियार सम्मेलन का उल्लंघन करने के लिये "सैन्य जैविक गतिविधियों" को अंजाम देने का आरोप लगाया गया है। - इस प्रस्ताव से पहले भारत हाल ही में UNSC के एक अन्य प्रस्ताव से अनुपस्थित रहा, जिसमें रूस के चार यूक्रेनी क्षेत्रों के कब्ज़े को अमान्य घोषित करने की मांग की गई थी। जैविक हथियार सम्मेलनः - परिचयः - जैविक हथियार सूक्ष्मजीवविज्ञानी एजेंटों या विषाक्त पदार्थों का उपयोग जान-बूझकर मनुष्यों, जानवरों या पौधों की मौत या उन्हें नुकसान पहुँचाने के लिये किया जाता है। - जैविक हथियार अभिसमयः - परिचयः - औपचारिक रूप से "बैक्टीरियोलॉजिकल और विषाक्त हथियारों के विकास, उत्पादन तथा भंडारण एवं उनके विनाश के निषेध पर अभिसमय" के रूप में जाना जाता है, अभिसमय पर जिनेवा, स्विट्रज़लैंड में निरस्त्रीकरण समिति के सम्मेलन में वार्ता की गई थी। - यह छब्बीस मार्च, एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर को लागू हुआ। - दायराः - यह जैविक और विषाक्त हथियारों के विकास, उत्पादन, अधिग्रहण, हस्तांतरण, भंडारण एवं उपयोग को प्रभावी ढंग से प्रतिबंधित करता है। - महत्त्वः - यह सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार को सीमित करने के लिये अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के प्रयासों में एक प्रमुख तत्त्व है और इसने जैविक हथियारों के खिलाफ एक मज़बूत मानदंड स्थापित किया है। - WMD की सभी श्रेणियों पर प्रतिबंध लगाने वाली यह पहली बहुपक्षीय निरस्त्रीकरण संधि थी। - यह वर्ष एक हज़ार नौ सौ पच्चीस के जिनेवा प्रोटोकॉल का पूरक है, जिसके द्वारा युद्ध में जैविक हथियारों के उपयोग को प्रतिबंधित किया गया था। - लीग ऑफ नेशन के तत्त्वाधान में जिनेवा में आयोजित एक सम्मेलन में जिनेवा प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किये गए थे। - यह वर्ष एक हज़ार नौ सौ अट्ठाईस में प्रभावी हुआ। - भारत ने इस प्रोटोकॉल की पुष्टि की है। - सदस्यः - एक सौ चौरासी भागीदार देशों और चार हस्ताक्षरकर्त्ताओं के साथ इसकी लगभग सार्वभौमिक सदस्यता है। - भारत इस कन्वेंशन का हस्ताक्षरकर्त्ता देश है। - परिचयः UNGA का प्रस्तावः - परिचयः संयुक्त राष्ट्र के संकल्प और निर्णय संयुक्त राष्ट्र के अंगों की राय या इच्छा की औपचारिक अभिव्यक्ति हैं। - संकल्प की प्रकृति निर्धारित करती है कि क्या इसे राज्यों के लिये बाध्यकारी माना जाता है। - UNGA प्रस्तावः संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद दस और चौदह में महासभा के प्रस्तावों को "सिफारिशें" कहा गया है। - अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय द्वारा महासभा के प्रस्तावों की 'सिफारिशी प्रकृति' पर बार-बार ज़ोर दिया गया है। - हालाँकि संयुक्त राष्ट्र के आंतरिक मामलों से संबंधित महासभा के कुछ प्रस्ताव- जैसे कि बजटीय निर्णय या निम्न-श्रेणी के निकायों को निर्देश देना, स्पष्ट रूप से बाध्यकारी हैं। - UNSC प्रस्तावः सामान्य तौर पर चार्टर के अध्याय VII के तहत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा अपनाए गए प्रस्तावों को चार्टर के अनुच्छेद पच्चीस के अनुसार बाध्यकारी माना जाता है। - हालाँकि वे UNSC के स्थायी सदस्यों द्वारा प्रयोग किये जाने वाले वीटो के अधीन हैं। रूस और यूक्रेन से जुड़े संयुक्त राष्ट्र के पिछले प्रस्तावों पर भारत का रुखः - भारत ने संयुक्त राष्ट्र के निम्नलिखित प्रस्तावों का बहिष्कार कियाः - यूएस-प्रायोजित UNSC प्रस्ताव जिसने यूक्रेन के खिलाफ रूस की आक्रामकता की कड़े शब्दों में निंदा की। - रूस ने यूक्रेन में मानवीय स्थिति पर UNSC के प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया, जिसमें नागरिकों की सुरक्षित, तीव्र, स्वैच्छिक और निर्बाध निकासी सुनिश्चित करने के लिये बातचीत के ज़रिये संघर्ष विराम का आह्वान किया गया। - यूक्रेन में रूस के कार्यों की जाँच के लिये एक अंतर्राष्ट्रीय आयोग की स्थापना हेतु संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में प्रस्ताव पारित किया गया। - UNGA का प्रस्ताव, जिसने यूक्रेन में रूस की सैन्य कार्रवाइयों के लिये उसकी निंदा की। - इस प्रस्ताव से अनुपस्थित रहने वाले चौंतीस अन्य देश भी थे जिनमें चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका के अलावा मध्य एशियाई और कुछ अफ्रीकी देश शामिल थे। - अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी का प्रस्ताव चार परमाणु ऊर्जा स्टेशनों और चेरनोबिल सहित कई परमाणु अपशिष्ट स्थलों पर सुरक्षा से संबंधित है, क्योंकि रूसियों ने उन पर नियंत्रण कर लिया था। प्रश्न. हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका ने 'ऑस्ट्रेलिया समूह' तथा 'वासेनार व्यवस्था' के नाम से ज्ञात बहुपक्षीय निर्यात नियंत्रण व्यवस्थाओं में भारत को सदस्य बनाए जाने का समर्थन करने का निर्णय लिया है। इन दोनों व्यवस्थाओं के बीच क्या अंतर है? उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? उत्तरः प्रश्न. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट प्राप्त करने में भारत के सामने आने वाली बाधाओं पर चर्चा कीजिये। प्रिलिम्स के लियेः जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, राजनीति का अपराधीकरण। मेन्स के लियेः राजनीति के अपराधीकरण के कारण, प्रभाव और समाधान। चर्चा में क्यों? हाल ही में उत्तर प्रदेश के दो विधायकों को आपराधिक आरोपों में दोषी ठहराया गया था, लेकिन उनमें से केवल एक को अयोग्य घोषित किया गया है और उसकी सीट को राज्य के विधानसभा सचिवालय द्वारा रिक्त घोषित किया गया है। राजनीति का अपराधीकरणः - परिचयः - इसका अर्थ राजनीति में अपराधियों की भागीदारी से है, जिसमें अपराधी चुनाव लड़ सकते हैं और संसद तथा राज्य विधायिका के सदस्य के रूप में चुने जा सकते हैं। - यह मुख्य रूप से राजनेताओं और अपराधियों के बीच साँठगाँठ के कारण होता है। आपराधिक छवि के उम्मीदवारों की अयोग्यता के कानूनी पहलूः - भारतीय संविधान में संसद या विधानमंडल का चुनाव लड़ने वाले किसी आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्ति की अयोग्यता के विषय में उपबंध नहीं किया गया है। - लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ इक्यावन में विधानमंडल का चुनाव लड़ने के लिये किसी व्यक्ति को अयोग्य घोषित करने के मानदंडों का उल्लेख है। - इस अधिनियम की धारा आठ के तहत दो साल से अधिक की जेल की सज़ा पाने वाला व्यक्ति जेल की अवधि समाप्त होने के बाद छह साल तक चुनाव नहीं लड़ सकता है। - अयोग्यता के खिलाफ संरक्षणः - RPA की धारा आठ के तहत वर्ष दो हज़ार तेरह तक विधानमंडल सदस्य तत्काल अयोग्यता से बच सकते थे। - इस प्रावधान के अनुसार, संसद या राज्य विधानमंडल के सदस्य तीन महीने के लिये अयोग्य नहीं होंगे। - यदि इस अवधि के दौरान दोषी विधानमंडल सदस्य अपील या पुनरीक्षण आवेदन करता है, तो अपील के निपटारे तक यह प्रभावी नहीं होगा। - वर्ष दो हज़ार तेरह में 'लिली थॉमस बनाम यूनियन ऑफ इंडिया' के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने धारा आठ को असंवैधानिक ठहरा कर इसे निरस्त कर दिया था। - आरपीए की धारा आठ के तहत विधायक वर्ष दो हज़ार तेरह तक तत्काल अयोग्यता से बच सकते हैं। - प्रावधान के अनुसार संसद सदस्य या राज्य के विधायक तीन महीने के लिये अयोग्य नहीं होंगे। - यदि उस अवधि के भीतर दोषी विधायक अपील या पुनरीक्षण आवेदन दायर करता है, तो यह अपील या आवेदन के निपटारे तक प्रभावी नहीं होगा। - लिली थॉमस बनाम भारत संघ, दो हज़ार तेरह में सर्वोच्च न्यायालय ने खंड को असंवैधानिक करार दिया, इस प्रकार सांसदों द्वारा प्राप्त सुरक्षा को हटा दिया गया। - RPA की धारा आठ के तहत वर्ष दो हज़ार तेरह तक विधानमंडल सदस्य तत्काल अयोग्यता से बच सकते थे। - सर्वोच्च न्यायालय की संबंधित शक्तिः - सुप्रीम कोर्ट के पास न केवल सज़ा देने बल्कि किसी व्यक्ति की दोषसिद्धि पर भी रोक लगाने की शक्ति है। कुछ दुर्लभ मामलों में अपीलकर्त्ता को चुनाव लड़ने में सक्षम बनाने के लिये दोषसिद्धि पर रोक लगाई गई है। - हालाँकि सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस तरह की रोक बहुत दुर्लभ और विशेष कारणों से होनी चाहिये। आरपीए स्वयं चुनाव आयोग के माध्यम से एक उपाय प्रदान करता है। अधिनियम की धारा ग्यारह के तहत चुनाव आयोग कारणों को रिकॉर्ड कर सकता है और किसी व्यक्ति की अयोग्यता की अवधि को हटा सकता है या कम कर सकता है। - राजनीति के अपराधीकरण का कारणः - प्रवर्तन की कमीः कानूनों और निर्णयों के प्रवर्तन की कमी के कारण कई कानूनों और न्यायालयी निर्णयों ने ज़्यादा मदद नहीं की है। - निहित स्वार्थः राजनीतिक दलों द्वारा चुने गए उम्मीदवारों के संपूर्ण आपराधिक इतिहास का प्रकाशन बहुत प्रभावी नहीं हो सकता है, क्योंकि मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा जाति या धर्म जैसे सामुदायिक हितों से प्रभावित होकर मतदान करता है। - बाहुबल और धन का उपयोगः - गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों के पास अक्सर धन और संपदा काफी अधिक मात्रा में होती है, इसलिये वे दल के चुनावी अभियान में अधिक-से-अधिक पैसा खर्च करते हैं और उनकी राजनीति में प्रवेश करने तथा जीतने की संभावना बढ़ जाती है। - इसके अलावा कभी-कभी मतदाताओं के पास कोई विकल्प नहीं बचता है, क्योंकि सभी प्रतिस्पर्द्धी उम्मीदवारों की आपराधिक पृष्ठभूमि होती है। राजनीति के अपराधीकरण के प्रभावः - स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के सिद्धांत के विरुद्धः यह एक उपयुक्त उम्मीदवार का चुनाव करने के संबंध में मतदाताओं की पसंद को सीमित करता है। - यह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लोकाचार के खिलाफ है जिससे लोकतंत्र का आधार माना जाता है। - सुशासन पर प्रभावः प्रमुख समस्या यह है कि कानून तोड़ने वाले कानून बनाने वाले बन जाते हैं, इससे सुशासन सुनिश्चित करने में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की प्रभावकारिता प्रभावित होती है। - लोकतांत्रिक व्यवस्था में ये अस्वस्थ प्रवृत्तियाँ भारत के राज्य संस्थानों की प्रकृति और इसके निर्वाचित प्रतिनिधियों की गुणवत्ता की खराब छवि को दर्शाती हैं। - लोक सेवकों की सत्यनिष्ठा पर प्रभावः इससे चुनाव के दौरान और बाद में काले धन का प्रचलन भी बढ़ता है, जो बदले में समाज में भ्रष्टाचार को बढ़ाता है और लोक सेवकों के कामकाज को प्रभावित करता है। - सामाजिक विषमता का कारण बननाः इससे समाज में हिंसा की संस्कृति का प्रसार होता है और युवाओं के भविष्य के खिलवाड़ के साथ शासन प्रणाली के रूप में लोकतंत्र में लोगों के विश्वास को कम करता है। - चुनावों का राज्य वित्तपोषणः चुनाव सुधार पर बनी विभिन्न समितियों ने राज्य द्वारा चुनावी खर्च वहन किये जाने की सिफारिश की, जिससे काफी हद तक चुनावों में काले धन के उपयोग पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी और परिणामस्वरूप राजनीति के अपराधीकरण को सीमित किया जा सकेगा। - चुनाव आयोग को सुदृढ़ बनानाः एक स्वच्छ चुनावी प्रक्रिया हेतु राजनीतिक पार्टियों के मामलों को विनियमित करना आवश्यक है, जिसके लिये निर्वाचन आयोग को मज़बूत करना ज़रूरी है। - जागरूक मतदाताः मतदाताओं को चुनाव के दौरान धन, उपहार जैसे अन्य प्रलोभनों के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता है। - न्यायपालिका की सक्रिय भूमिकाः भारत के राजनीतिक दलों की राजनीति के अपराधीकरण और भारतीय लोकतंत्र पर इसके बढ़ते हानिकारक प्रभावों को रोकने के प्रति अनिच्छा को देखते हुए यहाँ के न्यायालयों को अब गंभीर आपराधिक प्रवृत्ति वाले उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाने जैसे फैसले पर विचार करना चाहिये। UPSC सिविल सेवा परीक्षा विगत वर्ष के प्रश्न प्रश्नः अक्सर कहा जाता है कि 'राजनीति' और 'नैतिकता' एक साथ नहीं चलते हैं। इस संबंध में आपकी क्या राय है? दृष्टांतों के साथ अपने उत्तर की पुष्टि कीजिये। प्रश्न. जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ इक्यावन के तहत संसद या राज्य विधानमंडल के सदस्य के चुनाव से उत्पन्न विवादों को तय करने के लिये प्रक्रियाओं पर चर्चा कीजिये। ऐसे कौन से आधार हैं जिन पर किसी भी उम्मीदवार का चुनाव शून्य घोषित किया जा सकता है? निर्णय के विरुद्ध पीड़ित पक्ष के पास क्या उपाय उपलब्ध है? केस कानूनों का संदर्भ लीजिये। प्रिलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? हाल ही में एक शोध में पाया गया है कि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में वृद्धि के कारण क्लाउड कवर और वर्षा में परिवर्तन से औसत वैश्विक वार्षिक इंद्रधनुष दिनों में वृद्धि होने का अनुमान है। - वर्ष दो हज़ार एक सौ तक विश्व स्तर पर इंद्रधनुष के औसत दिनों में चार.शून्य-चार.नौ% की वृद्धि होने की उम्मीद है। अध्ययन से इंद्रधनुष के बारे में निष्कर्षः - कम इंद्रधनुष वाले क्षेत्रः - लगभग इक्कीस-चौंतीस% भूमि क्षेत्र इंद्रधनुष के दिनों को खो देंगे। - मध्य अफ्रीका, मेडागास्कर और मध्य दक्षिण अमेरिका को छोड़कर जिन क्षेत्रों में इंद्रधनुष के दिनों में कमी आएगी, उनमें वर्ष दो हज़ार एक सौ तक कुल वर्षा में कमी का अनुमान है। - सभी में अधिक वार्षिक शुष्क दिन और कम कुल वार्षिक क्लाउड कवर होने का अनुमान है। - उच्च इंद्रधनुष वाले क्षेत्रः - उच्च उत्सर्जन वाले क्षेत्र इंद्रधनुष के दिनों को प्राप्त करेंगे। - भारत उन देशों में से एक है जहाँ इंद्रधनुष के दिनों की संख्या बढ़ेगी। - माली, नाइजर, चाड, सूडान और इथियोपिया जैसे अफ्रीकी देशों में भी अधिक इंद्रधनुष बनने की संभावना है। - रेनबो गेन हॉटस्पॉट ज़्यादातर उच्च अक्षांशों पर या बहुत अधिक ऊँचाई पर स्थित होते हैं, जैसे तिब्बती पठार, जहाँ कम बर्फ और अधिक बारिश होने की संभावना होती है। - पूर्वी बोर्नियो और उत्तरी जापान जैसे दो इंद्रधनुष हॉटस्पॉट में कुल वर्षा में वृद्धि होगी लेकिन प्रति वर्ष अधिक शुष्क दिन होंगे। इंद्रधनुष और जलवायु परिवर्तन में परस्पर संबंधः - विषयः - इंद्रधनुष एक सामान्य वायुमंडलीय प्रकाशीय घटना है। बरसात के मौसम में जब पानी की बूँदे सूर्य के प्रकाश पर पड़ती है तब सूर्य की किरणों का विक्षेपण ही इंद्रधनुष के सुंदर रंगों का कारण बनता है। - जब सूरज की रोशनी बारिश की बूँदों से टकराती है, तो कुछ प्रकाश परावर्तित हो जाता है। इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम कई अलग-अलग वेवलेंथ के साथ प्रकाश से बना होता है और प्रत्येक वेवलेंथ एक अलग कोण पर परावर्तित होता है। इस प्रकार स्पेक्ट्रम अलग हो जाता है, जिससे इंद्रधनुष बनता है। - इंद्रधनुष को कोहरे, समुद्री फुहारें या झरनों के आसपास भी देखा जा सकता है। - यह एक दृष्टि संबंधी/ऑप्टिकल भ्रम है, यह वास्तव में आकाश में किसी विशिष्ट स्थान पर मौजूद नहीं होता है। - इंद्रधनुष प्रकाश के अपवर्तन और परावर्तन का परिणाम है। - अपवर्तन और परावर्तन दोनों ही ऐसी घटनाएँ हैं जिनमें तरंग की दिशा में परिवर्तन शामिल होता है। - अपवर्तित तरंग "झुकी हुई" दिखाई दे सकती है, जबकि परावर्तित तरंग किसी सतह या अन्य तरंगाग्र से "वापस आती हुई" प्रतीत हो सकती है। - प्राथमिक इंद्रधनुष पर रंग हमेशा उनकी तरंग दैर्ध्य के क्रम में होते हैं, दीर्घ से सबसे लघु तकः लाल, नारंगी, पीला, हरा, नीला, इंडिगो और बैंगनी। - इंद्रधनुष एक सामान्य वायुमंडलीय प्रकाशीय घटना है। बरसात के मौसम में जब पानी की बूँदे सूर्य के प्रकाश पर पड़ती है तब सूर्य की किरणों का विक्षेपण ही इंद्रधनुष के सुंदर रंगों का कारण बनता है। - जलवायु परिवर्तन के साथ संबंधः - जीवाश्म ईंधन जलाने जैसी मानवीय गतिविधियाँ वातावरण को गर्म कर रही हैं, जिससे स्वरूप और वर्षा एवं बादलों की मात्रा में परिवर्तन होता है। - जलवायु परिवर्तन वाष्पीकरण और नमी के अभिसरण को प्रभावित करके इंद्रधनुषी घटना के वितरण को बदल देगा। - यह वर्षा और बादल अच्छादन के स्वरूप को बदल देता है। वर्षा की बूँदों पर सूर्य की रोशनी पड़ने पर इंद्रधनुष बनता है। निम्नलिखित में से कौन-सी भौतिक घटनाएँ इसके लिये उत्तरदायी हैं? नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनियेः उत्तरः अतः विकल्प सही उत्तर है। प्रिलिम्स के लियेः बायोस्फीयर रिज़र्व, संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन , भारत में बायोस्फीयर रिज़र्व, मैन एंड बायोस्फीयर प्रोग्राम। मेन्स के लियेः बायोस्फीयर रिज़र्वः निर्धारण के लिये मानदंड, मुख्य क्षेत्र, कार्य, अंतर्राष्ट्रीय स्थिति। चर्चा में क्यों? वर्ष दो हज़ार बाईस से प्रत्येक वर्ष तीन नवंबर को 'अंतर्राष्ट्रीय बायोस्फीयर रिज़र्व दिवस' के रूप में मनाया जाएगा। बायोस्फीयर रिज़र्वः - परिचयः - बायोस्फीयर रिज़र्व , यूनेस्को द्वारा प्राकृतिक और सांस्कृतिक परिदृश्यों के सांकेतिक भागों के लिये दिया गया एक अंतर्राष्ट्रीय पदनाम है, जो स्थलीय या तटीय/समुद्री पारिस्थितिक तंत्रों के बड़े क्षेत्रों या दोनों के संयोजन को शामिल करता है। - बायोस्फीयर रिज़र्व प्रकृति के संरक्षण के साथ आर्थिक एवं सामाजिक विकास तथा संबद्ध सांस्कृतिक मूल्यों के रखरखाव को भी संतुलित करने का प्रयास करता है। - बायोस्फीयर रिज़र्व को राष्ट्रीय स्तर पर सरकारों द्वारा नामित किया जाता है और वे उन राज्यों के संप्रभु अधिकार क्षेत्र में आते हैं जहाँ वे स्थित हैं। - इन्हें 'MAB अंतर्राष्ट्रीय समन्वय परिषद' के निर्णयों के बाद यूनेस्को के महानिदेशक द्वारा अंतर-सरकारी MAB कार्यक्रम के तहत नामित किया जाता है। - मैन एंड बायोस्फीयर रिज़र्व प्रोग्राम एक अंतर-सरकारी वैज्ञानिक कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य लोगों और उनके वातावरण के बीच संबंधों में सुधार के लिये वैज्ञानिक आधार स्थापित करना है। - इनकी स्थिति अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है। - तीन मुख्य क्षेत्र : - कोर क्षेत्र : इसमें एक जटिल या सुभेद्य संरक्षित क्षेत्र शामिल है जो परिदृश्य, पारिस्थितिकी तंत्र, प्रजातियों और आनुवंशिक भिन्नता के संरक्षण में योगदान देता है। - बफर क्षेत्र : यह मुख्य क्षेत्र को चारों तरफ से संरक्षित करता है या जोड़ता है तथा इसका उपयोग ध्वनि पारिस्थितिक गतिविधियों को संतुलित करने हेतु किया जाता है जो वैज्ञानिक अनुसंधान, निगरानी, प्रशिक्षण एवं शिक्षा को सुदृढ़ कर सकते हैं। - संक्रमण क्षेत्र : संक्रमण क्षेत्र वह स्थान है जहाँ समुदाय सामाजिक- सांस्कृतिक और पारिस्थितिक रूप से टिकाऊ आर्थिक एवं मानवीय गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं। भारत/विश्व में बायोस्फीयर रिज़र्व की स्थितिः - भारत मेंः - भारत में वर्तमान में साठ,शून्य वर्ग किमी में फैले अट्ठारह अधिसूचित बायोस्फीयर रिज़र्व हैं। - भारत में पहला बायोस्फीयर रिज़र्व तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल में फैले नीलगिीरि के नीले पहाड़ थे। - सबसे बड़ा बायोस्फीयर रिज़र्व कच्छ की खाड़ी है और सबसे छोटा डिब्रू-सैखोवा है। - अन्य बड़े बायोस्फीयर रिज़र्व मन्नार की खाड़ी , सुंदरबन और शीत रेगिस्तान हैं। - वैश्विक स्तर परः - परिचयः - यूनेस्को के अनुसार, बाईस ट्रांसबाउंड्री साइटों सहित एक सौ चौंतीस देशों में सात सौ अड़तीस बायोस्फीयर रिज़र्व हैं। - क्षेत्र के आधार परः - सबसे अधिक बायोस्फीयर रिज़र्व यूरोप और उत्तरी अमेरिका में हैं, इसके बाद एशिया और प्रशांत, लैटिन अमेरिका तथा कैरिबियन, अफ्रीका एवं अरब देशों का नाम आता है। - दक्षिण एशिया मे, तीस से अधिक बायोस्फीयर रिज़र्व स्थापित किये गए हैं। पहला श्रीलंका में हुरुलु बायोस्फीयर रिज़र्व था, जिसमें पच्चीस,पाँच सौ हेक्टेयर उष्णकटिबंधीय शुष्क सदाबहार वन शामिल था। - बांग्लादेश, भूटान और नेपाल में अब तक कोई बायोस्फीयर रिज़र्व नहीं है। - देशों के आधार पर : - ऐसी साइटों की सबसे अधिक संख्या स्पेन, रूस और मैक्सिको में है। - विश्व का प्रथम 'पाँच देशों का बायोस्फीयर रिज़र्व': - यह बायोस्फीयर रिज़र्व मुरा, द्रवा और डेन्यूब नदियों के सात सौ किलोग्राममीटर के क्षेत्र और ऑस्ट्रिया, स्लोवेनिया, क्रोएशिया, हंगरी तथा सर्बिया में फैला हुआ है, जिसे यूनेस्को द्वारा सितंबर दो हज़ार इक्कीस में घोषित किया गया । - इस रिज़र्व का कुल क्षेत्रफल एक मिलियन हेक्टेयर है जिसे 'यूरोप का अमेज़न' कहा जाता है तथा यह अब यूरोप में सबसे बड़ा नदी संरक्षित क्षेत्र है। - परिचयः - संक्रमण क्षेत्रों में वन संसाधनों पर निर्भर आदिवासियों के भूमि अधिकारों को सुरक्षित किया जाना चाहिये। - मुन्नार घोषणा पत्र जो बताता है कि बायोस्फीयर रिज़र्व को रेगिस्तान और गंगा के मैदानी जैव-भौगोलिक क्षेत्रों से बाहर रखा जा सकता है, को भी लागू किया जाना चाहिये।। - चूँकि बायोस्फीयर रिज़र्व अवधारणा का उद्देश्य सतत् विकास था, इसलिये शब्द आरक्षित को एक उपयुक्त शब्द के साथ प्रतिस्थापित किया जाना चाहिये। - सरकार को विभिन्न बायोस्फीयर रिज़र्व जैसे नीलगिरि बायोस्फीयर रिज़र्व पर आक्रमण करने वाली विदेशी प्रजातियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने चाहिये। प्रश्न. निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजियेः उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं? उत्तरः प्रश्न. जैवविविधता के साथ-साथ मनुष्य के परंपरागत जीवन के संरक्षण के लिये सबसे महत्त्वपूर्ण रणनीति निम्नलिखित में से किस एक की स्थापना करने में निहित है? जीवमंडल निचय उत्तरः प्रश्न. भारत के सभी बायोस्फीयर रिज़र्व में से चार को यूनेस्को द्वारा वर्ल्ड नेटवर्क के रूप में मान्यता दी गई है। निम्नलिखित में से कौन-सा उनमें से एक नहीं है? उत्तरः
भारत मे रेल की शुरूआत 1853 मे मुम्बई से थाने तक के बीच 34 किमी० मार्ग पर हुई। आज देश भर मे रेलो का एक व्यापक जाल बिछा हुआ है। रेलवे स्टेशनो की संख्या 6,877 और रेलमार्गो की कुल लम्बाई 62,789 किमी0 है। 31 मार्च 2000 की स्थिति के अनुसार भारतीय रेलो के पास 7,517 इजन, 36,510 यात्री डिब्बे 4,838 अन्य सवारियो गाडियो के डिब्बे और 2,44,419 माल डिब्बे थे । अब तक लगभग 325% कुल रेल पटरी का विद्युतीकरण हो चुका है। आवागमन तथा यातायात व्यवस्था मे रेलो का योगदान काफी महत्वपूर्ण है। बस्ती जनपद मे बडी लाइने उपलब्ध है। बडी लाइन मुण्डेरवा से बभनान तक है। जिसके अर्न्तगत 6 स्टेशन है जिसकी कुल लम्बाई 54 किमी० है। तहसील की आमा स्टेशन इसी लाइन पर है। तहसील मे इसकी लम्बाई लगभग 10 किमी० है। अन्य किसी भी तरफ तहसील को रेल की सुविधा नही मिलती है । जनपद मुख्यालय से पर तहसील वासियो के रेल यातायात की पूर्ति होती है। यातायात-नियोजन :उपरोक्त विश्लेषण से स्पष्ट है कि भानपुर तहसील में लगभग 55% गाँव पक्की सडक से 5 किमी दूर है। जबकि 3018% गाव सडक है या 1किमी० से भी कम दूरी पर है। तहसील मे जो राजकीय जिला एवं ग्रामीण पक्की सडके है। निर्माणाधीन हो या पूरी बन गयी हो उनकी स्थिति दयनीय है । प्रान्तीय सड़कों को जोड़ने वाले मार्ग की स्थिति का आकलन दसिया - महनुआ मार्ग तथा मानिक चन्द - सल्टौवा मार्ग से देखा जा सकता है दसिया - महुनुआ मार्ग सन 1988-89 के पहले से ही निर्माणाधीन है। दोनो प्रान्तीय मार्गों से कुछ ही किलोमीटर तक पक्की हुई है। अन्य क्षेत्र खडन्जा तथा कच्ची सडको के है । मानिकचन्द्र सल्टौवा मार्ग की स्थिति भी दयनीय है। तहसील के विकास खण्ड मुख्यालय को जोडने वाली सडक है। ग्रामीण मार्गों पर कही भी भारी वाहनो के यातायात वर्ष पर्यन्त असम्भव है। अत क्षेत्र के विकासार्थ प्रथम आवश्यकता वर्तमान सडको की स्थिति मे सुधार की है, जिससे सुरक्षित एव तीव्र यातायात तथा सुविधाओ का आदान प्रदान हो सके। अभी भी क्षेत्र के बहुत से गाव ऐसे है, जो कि कच्ची सडक से भी नही जुडे है या जुड भी गये है तो खडजा नही पहुॅचा है। अत क्षेत्र के विकास हेतु आवश्यकता है खडजा मार्ग को पक्की सडको मे परिवर्तित किया जाय तथा कच्ची सडको पर खडजा का निर्माण किया जाय । किसी भी क्षेत्र के विकास हेतु उच्च एव सघन सडक जाल के साथ-साथ उत्तम रेलमार्ग भी अपेक्षित है। अध्ययन क्षेत्र मे मात्र 10 किमी० लम्बा (ब्राडगेज का) रेलमार्ग है। आया स्टेशन ही इसका स्टेशन है। कोई रेलमार्ग बस्ती से सिद्धार्थनगर न होने के कारण यात्री सुविधाओ तथा आवागमन में कठिनाई होती है इस प्रकार तहसील के सम्यक विकास हेतु कम से कम एक नूतन रेलमार्ग के विकास की महती आवश्यकता है, आमा - रूघौली - बासी रेलमार्ग । संचार प्रतिरूप :भारत मे डाक सेवाओ की शुरूआत 1837 मे हुई। कराची मे 1852 मे पहला डाक टिकट जारी किया गया । जो केवल सिन्ध सूबे मे वैद्य था । वर्ष 1854 मे भारतीय डाक विभाग का एक संस्था के रूप मे पुनर्गठन किया गया। जिसके अध्यक्ष एक महानिदेशक थे। इसके बाद से डाक नेटवर्क का विस्तार हुआ और अनेक नई सेवाओ के जरिये इसमे विविधता आयी । भारत में डाक सेवाये 1989 के भारतीय डाकघर अधिनियम के अंतर्गत निर्धारित होती है। यह अधिनियम सरकार को देश मे पत्रो को जमा करने, ले जाने और पहुॅचाने का एकाधिकार देता है। ग्रामीण विकास एवं सामाजिक परिवर्तन मे सचार माध्यमो की विशिष्ट भूमिका होती है। जिसके द्वारा समय तथा अर्थ दोनो की बचत होती है। इनके द्वारा भी क्षेत्र मे त्वरित कार्य सम्भव होता है। सचार माध्यमो द्वारा नवीन विचारो, नवाचारो तथा अन्वेषणो को दूरस्थ ग्रामो तक पहुँचाया जाता है। सचार माध्यम के अर्न्तगत डाकघर, दूरभाष तारघर, दूरदर्शन, आकाशवाणी आदि केन्द्रो को सम्मिलित किया जाता है। बस्ती जनपद के भानपुर तहसील में विद्यमान प्रमुख सचार सेवाओ का विवरण तालिका क्रमाक -55 मे दर्शाया गया है 53.1. डाकघर :भारतीय डाक नेटवर्क विश्व का सबसे बडा नेटवर्क है। देश मे डाकघरो की संख्या अब 1,54,551 है। इनमे 16,402 शहरी और 1, 38,149 ग्रामीण क्षेत्रो मे है। स्वाधीनता प्राप्त होने के समय देश में कुल 23,344 डाकघर थे। इनमे से 19,184 डाकघर ग्रामीण और 4,160 शहरी इलाको मे थे। उसके बाद से डाक नेटवर्क मे करीब सात गुना वृद्धि हो चुकी है। (भारत 2002 पृ0648)। डाक नेटवर्क का विस्तार, खासकर ग्रामीण क्षेत्रो मे विभोगतर डाकघरो की प्रणाली के जरिये हुआ है। डाक नेटवर्क मे चार प्रकार के डाक घर आते है ये है। मुख्य डाकघर, उप डाकघर, विभागोत्तर उप-डाकघर और विभागोत्तर शाखा डाकघर । सदेश वाहक कार्यक्रमो के अर्न्तगत डाकघरो का प्रमुख स्थान है इसके माध्यम से सूचनाओ का आदान प्रदान तथा वित्तीय संसाधनों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजने में काफी सुविधा मिलती है। जो स्थान इस सुविधा से सम्पन्न है। वहाँ की जनता अपने को साधन सम्पन्न मानती है ।
भारत मे रेल की शुरूआत एक हज़ार आठ सौ तिरेपन मे मुम्बई से थाने तक के बीच चौंतीस किमीशून्य मार्ग पर हुई। आज देश भर मे रेलो का एक व्यापक जाल बिछा हुआ है। रेलवे स्टेशनो की संख्या छः,आठ सौ सतहत्तर और रेलमार्गो की कुल लम्बाई बासठ,सात सौ नवासी किमीशून्य है। इकतीस मार्च दो हज़ार की स्थिति के अनुसार भारतीय रेलो के पास सात,पाँच सौ सत्रह इजन, छत्तीस,पाँच सौ दस यात्री डिब्बे चार,आठ सौ अड़तीस अन्य सवारियो गाडियो के डिब्बे और दो,चौंतालीस,चार सौ उन्नीस माल डिब्बे थे । अब तक लगभग तीन सौ पच्चीस% कुल रेल पटरी का विद्युतीकरण हो चुका है। आवागमन तथा यातायात व्यवस्था मे रेलो का योगदान काफी महत्वपूर्ण है। बस्ती जनपद मे बडी लाइने उपलब्ध है। बडी लाइन मुण्डेरवा से बभनान तक है। जिसके अर्न्तगत छः स्टेशन है जिसकी कुल लम्बाई चौवन किमीशून्य है। तहसील की आमा स्टेशन इसी लाइन पर है। तहसील मे इसकी लम्बाई लगभग दस किमीशून्य है। अन्य किसी भी तरफ तहसील को रेल की सुविधा नही मिलती है । जनपद मुख्यालय से पर तहसील वासियो के रेल यातायात की पूर्ति होती है। यातायात-नियोजन :उपरोक्त विश्लेषण से स्पष्ट है कि भानपुर तहसील में लगभग पचपन% गाँव पक्की सडक से पाँच किमी दूर है। जबकि तीन हज़ार अट्ठारह% गाव सडक है या एककिमीशून्य से भी कम दूरी पर है। तहसील मे जो राजकीय जिला एवं ग्रामीण पक्की सडके है। निर्माणाधीन हो या पूरी बन गयी हो उनकी स्थिति दयनीय है । प्रान्तीय सड़कों को जोड़ने वाले मार्ग की स्थिति का आकलन दसिया - महनुआ मार्ग तथा मानिक चन्द - सल्टौवा मार्ग से देखा जा सकता है दसिया - महुनुआ मार्ग सन एक हज़ार नौ सौ अठासी-नवासी के पहले से ही निर्माणाधीन है। दोनो प्रान्तीय मार्गों से कुछ ही किलोमीटर तक पक्की हुई है। अन्य क्षेत्र खडन्जा तथा कच्ची सडको के है । मानिकचन्द्र सल्टौवा मार्ग की स्थिति भी दयनीय है। तहसील के विकास खण्ड मुख्यालय को जोडने वाली सडक है। ग्रामीण मार्गों पर कही भी भारी वाहनो के यातायात वर्ष पर्यन्त असम्भव है। अत क्षेत्र के विकासार्थ प्रथम आवश्यकता वर्तमान सडको की स्थिति मे सुधार की है, जिससे सुरक्षित एव तीव्र यातायात तथा सुविधाओ का आदान प्रदान हो सके। अभी भी क्षेत्र के बहुत से गाव ऐसे है, जो कि कच्ची सडक से भी नही जुडे है या जुड भी गये है तो खडजा नही पहुॅचा है। अत क्षेत्र के विकास हेतु आवश्यकता है खडजा मार्ग को पक्की सडको मे परिवर्तित किया जाय तथा कच्ची सडको पर खडजा का निर्माण किया जाय । किसी भी क्षेत्र के विकास हेतु उच्च एव सघन सडक जाल के साथ-साथ उत्तम रेलमार्ग भी अपेक्षित है। अध्ययन क्षेत्र मे मात्र दस किमीशून्य लम्बा रेलमार्ग है। आया स्टेशन ही इसका स्टेशन है। कोई रेलमार्ग बस्ती से सिद्धार्थनगर न होने के कारण यात्री सुविधाओ तथा आवागमन में कठिनाई होती है इस प्रकार तहसील के सम्यक विकास हेतु कम से कम एक नूतन रेलमार्ग के विकास की महती आवश्यकता है, आमा - रूघौली - बासी रेलमार्ग । संचार प्रतिरूप :भारत मे डाक सेवाओ की शुरूआत एक हज़ार आठ सौ सैंतीस मे हुई। कराची मे एक हज़ार आठ सौ बावन मे पहला डाक टिकट जारी किया गया । जो केवल सिन्ध सूबे मे वैद्य था । वर्ष एक हज़ार आठ सौ चौवन मे भारतीय डाक विभाग का एक संस्था के रूप मे पुनर्गठन किया गया। जिसके अध्यक्ष एक महानिदेशक थे। इसके बाद से डाक नेटवर्क का विस्तार हुआ और अनेक नई सेवाओ के जरिये इसमे विविधता आयी । भारत में डाक सेवाये एक हज़ार नौ सौ नवासी के भारतीय डाकघर अधिनियम के अंतर्गत निर्धारित होती है। यह अधिनियम सरकार को देश मे पत्रो को जमा करने, ले जाने और पहुॅचाने का एकाधिकार देता है। ग्रामीण विकास एवं सामाजिक परिवर्तन मे सचार माध्यमो की विशिष्ट भूमिका होती है। जिसके द्वारा समय तथा अर्थ दोनो की बचत होती है। इनके द्वारा भी क्षेत्र मे त्वरित कार्य सम्भव होता है। सचार माध्यमो द्वारा नवीन विचारो, नवाचारो तथा अन्वेषणो को दूरस्थ ग्रामो तक पहुँचाया जाता है। सचार माध्यम के अर्न्तगत डाकघर, दूरभाष तारघर, दूरदर्शन, आकाशवाणी आदि केन्द्रो को सम्मिलित किया जाता है। बस्ती जनपद के भानपुर तहसील में विद्यमान प्रमुख सचार सेवाओ का विवरण तालिका क्रमाक -पचपन मे दर्शाया गया है तिरेपन.एक. डाकघर :भारतीय डाक नेटवर्क विश्व का सबसे बडा नेटवर्क है। देश मे डाकघरो की संख्या अब एक,चौवन,पाँच सौ इक्यावन है। इनमे सोलह,चार सौ दो शहरी और एक, अड़तीस,एक सौ उनचास ग्रामीण क्षेत्रो मे है। स्वाधीनता प्राप्त होने के समय देश में कुल तेईस,तीन सौ चौंतालीस डाकघर थे। इनमे से उन्नीस,एक सौ चौरासी डाकघर ग्रामीण और चार,एक सौ साठ शहरी इलाको मे थे। उसके बाद से डाक नेटवर्क मे करीब सात गुना वृद्धि हो चुकी है। । डाक नेटवर्क का विस्तार, खासकर ग्रामीण क्षेत्रो मे विभोगतर डाकघरो की प्रणाली के जरिये हुआ है। डाक नेटवर्क मे चार प्रकार के डाक घर आते है ये है। मुख्य डाकघर, उप डाकघर, विभागोत्तर उप-डाकघर और विभागोत्तर शाखा डाकघर । सदेश वाहक कार्यक्रमो के अर्न्तगत डाकघरो का प्रमुख स्थान है इसके माध्यम से सूचनाओ का आदान प्रदान तथा वित्तीय संसाधनों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजने में काफी सुविधा मिलती है। जो स्थान इस सुविधा से सम्पन्न है। वहाँ की जनता अपने को साधन सम्पन्न मानती है ।
हिमाचल प्रदेश में चुनावी शंखनाद लगभग हो गया है। वहीं, अब भाजपा ने फिर प्रदेश में सत्ता हासिल करने के लिए प्रदेश में कार्यक्रमों के आयोजनों का सिलसिला शुरू कर दिया है। वहीं, महिला मोर्चा ने भी प्रदेश में भाजपा सरकार बनाने की कवायद शुरू कर दी है। प्रदेश की विधानसभा सीटों पर नारी शक्ति को उतारने के लिए भाजपा महिला मोर्चा ने श्वेत पत्र तैयार किया है। इस बात का खुलासा भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेशाध्यक्ष रश्मिधर सूद ने कुल्लू में महिला मोर्चा के सम्मेलन के दौरान किया। वहीं, बड़ा ऐलान किया कि इस बार विधानसभा चुनाव प्रदेश की विधानसभा में ज्यादा से ज्यादा नारी शक्ति को उतारा जाएगा। इसके लिए महिला मोर्चा संठगन से मांग करेगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं में जोश है। चुनाव की दशा और दिशा महिला के बिना नहीं है। इस बार रिवाज बदलने में भाजपा महिलाओं का अहम योगदान होगा। 68 विधानसभा क्षेत्र में कार्यक्रम होंगे। रिवाज बदलने में महिला मोर्चा जमीन पर काम करेगा। उन्होंने कहा कि कुल्लू मंडल के इस कार्यक्रम में दो से अढ़ाई हजार महिलाओं का कार्यक्रम में आने से सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदेश में रिवाज बदलेगा। फिर सत्ता में जयराम सरकार आएगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं में जोश है। महिलाओं में शक्ति है। आने वाले चुनाव में 68 विधानसभा सीटों पर चुनाव में महिलाओं को उतारने के लिए संगठन से मांग की जाएगी। वहीं, उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस हाल ही में दस योजना का जुमला लेकर कर आई। 70 सालों में महिलाओं के बारे में चिंता नहीं है और महिलाओं की आर्थिकी को मजबूती नहीं किया। ओपीएस को उनके मुख्य ने हटाया है। इसे जनता जानती है। देश में मोदी और प्रदेश में जयराम ठाकुर ने अथाह विकास किए। उन्होंने कहा कि विकास की गाथा पर चुनाव भाजपा लड़ेगी। इस बार जनता रिवाज बदलेगी। प्रदेश में महिलाओं की ज्यादा आबादी है। ज्यादा से ज्यादा सीटों पर महिलाओं को चुनाव में उतारने की संगठन से मांग करेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा की जो संगठन में में मजबूती से अपना दावा पेश करती हैं और सक्ष्म हैं और सीट निकालने की क्षमता रखती है, उसके लिए टिकट की मांग की जाएगी। वहीं, उन्होंने हंसते हुए यह भी कहा कि आने वाले समय में महिला शक्ति ही चुनाव लड़े, यह भगवान से प्रार्थना है। उन्होंने कहा कि रिवाज भाजपा की नारी शक्ति बदलेगी। चुनावी बेला का शंखनाद हो चुका है। भाजपा नारियों का मान-सम्मान करती है। चाहे केंद्र में हो चाहे प्रदेश में। केंद्र में मोदी शिव का अवतार है। महिलाओं की शक्ति को समझते हैं। केंद्र की योजनाओं को बनाते हैं। हिमाचल में जयराम ठाकुर महिलाओं के हित्त में नीतियों को लागू करते हैं।
हिमाचल प्रदेश में चुनावी शंखनाद लगभग हो गया है। वहीं, अब भाजपा ने फिर प्रदेश में सत्ता हासिल करने के लिए प्रदेश में कार्यक्रमों के आयोजनों का सिलसिला शुरू कर दिया है। वहीं, महिला मोर्चा ने भी प्रदेश में भाजपा सरकार बनाने की कवायद शुरू कर दी है। प्रदेश की विधानसभा सीटों पर नारी शक्ति को उतारने के लिए भाजपा महिला मोर्चा ने श्वेत पत्र तैयार किया है। इस बात का खुलासा भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेशाध्यक्ष रश्मिधर सूद ने कुल्लू में महिला मोर्चा के सम्मेलन के दौरान किया। वहीं, बड़ा ऐलान किया कि इस बार विधानसभा चुनाव प्रदेश की विधानसभा में ज्यादा से ज्यादा नारी शक्ति को उतारा जाएगा। इसके लिए महिला मोर्चा संठगन से मांग करेगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं में जोश है। चुनाव की दशा और दिशा महिला के बिना नहीं है। इस बार रिवाज बदलने में भाजपा महिलाओं का अहम योगदान होगा। अड़सठ विधानसभा क्षेत्र में कार्यक्रम होंगे। रिवाज बदलने में महिला मोर्चा जमीन पर काम करेगा। उन्होंने कहा कि कुल्लू मंडल के इस कार्यक्रम में दो से अढ़ाई हजार महिलाओं का कार्यक्रम में आने से सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदेश में रिवाज बदलेगा। फिर सत्ता में जयराम सरकार आएगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं में जोश है। महिलाओं में शक्ति है। आने वाले चुनाव में अड़सठ विधानसभा सीटों पर चुनाव में महिलाओं को उतारने के लिए संगठन से मांग की जाएगी। वहीं, उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस हाल ही में दस योजना का जुमला लेकर कर आई। सत्तर सालों में महिलाओं के बारे में चिंता नहीं है और महिलाओं की आर्थिकी को मजबूती नहीं किया। ओपीएस को उनके मुख्य ने हटाया है। इसे जनता जानती है। देश में मोदी और प्रदेश में जयराम ठाकुर ने अथाह विकास किए। उन्होंने कहा कि विकास की गाथा पर चुनाव भाजपा लड़ेगी। इस बार जनता रिवाज बदलेगी। प्रदेश में महिलाओं की ज्यादा आबादी है। ज्यादा से ज्यादा सीटों पर महिलाओं को चुनाव में उतारने की संगठन से मांग करेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा की जो संगठन में में मजबूती से अपना दावा पेश करती हैं और सक्ष्म हैं और सीट निकालने की क्षमता रखती है, उसके लिए टिकट की मांग की जाएगी। वहीं, उन्होंने हंसते हुए यह भी कहा कि आने वाले समय में महिला शक्ति ही चुनाव लड़े, यह भगवान से प्रार्थना है। उन्होंने कहा कि रिवाज भाजपा की नारी शक्ति बदलेगी। चुनावी बेला का शंखनाद हो चुका है। भाजपा नारियों का मान-सम्मान करती है। चाहे केंद्र में हो चाहे प्रदेश में। केंद्र में मोदी शिव का अवतार है। महिलाओं की शक्ति को समझते हैं। केंद्र की योजनाओं को बनाते हैं। हिमाचल में जयराम ठाकुर महिलाओं के हित्त में नीतियों को लागू करते हैं।
"हमने ओएससीई मॉनिटरिंग मिशन के प्रतिनिधियों को चेतावनी दी कि, यदि स्थिति आगे बढ़ती है, तो हम तोपखाने की रक्षा के लिए जो तोपखाने को सौंपा गया है उसकी पहली पंक्ति में लौटने के लिए तैयार हैं। " - उन्होंने हवा पर कहा "112 यूक्रेन"। सेलज़ेनोव ने उल्लेख किया कि आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है, सशस्त्र बल मिलिशिया द्वारा हथियारों की वापसी पर ओएससीई एसएमएम रिपोर्ट की प्रतीक्षा कर रहे हैं। "एटीओ ज़ोन में होने वाली हाल की घटनाओं से संकेत मिलता है कि सभी हथियार जो आतंकवादियों को वापस लेने के लिए नहीं थे, उन्हें वापस ले लिया गया," उन्होंने कहा। उसी समय, डीपीआर रक्षा मंत्रालय के प्रतिनिधि एडुआर्ड बसुरिन के अनुसार, पर्यवेक्षकों ने सीमांकन रेखा के पास यूक्रेनी पक्ष पर भारी हथियारों की उपस्थिति की पुष्टि की। "नवंबर 14 के लिए अपनी रिपोर्ट में, OSCE मिशन ने संपर्क लाइन के पास यूक्रेनी उपकरणों की एकाग्रता को नोट किया, विशेष रूप से, जलकुंभी-बी तोपखाने प्रणालियों और पांच ग्रैड एमएलआरएस की चार इकाइयों की उपस्थिति दर्ज की गई थी। इस प्रकार, यूक्रेनी पक्ष सक्रिय रूप से भड़काऊ गोलाबारी करने के लिए उपकरण और बल का निर्माण कर रहा है, "बसुरिन ने कहा। इसी समय, यूक्रेनी मीडिया मिलिशिया और गोलाबारी द्वारा हथियारों के संकुचन के बारे में झूठी खबरें प्रकाशित करना जारी रखता है। "आज के लिए, उन्होंने उपकरणों को एक साथ खींचने और उत्तेजक गोलाबारी करने के बारे में भराई की, जिससे वे विश्व समुदाय को डोनबास के नागरिकों के प्रति आक्रामकता के प्रकोप की शुरुआत के लिए तैयार करते हैं," उन्होंने कहा। बेसुरिन के शब्दों की पुष्टि वास्तव में पोरोशेंको के बयान से होती है। "हम पूर्व (यूक्रेन) में स्थिति को आगे बढ़ाने के लिए ठोस प्रदर्शन करते हैं, गोलाबारी की संख्या में वृद्धि हुई है। हमारी प्रतिक्रिया तत्काल थी, मैंने स्पष्ट आदेश दियाः जैसे ही यूक्रेनी सेना के जीवन के लिए खतरा है, उन्हें जवाब में आग खोलने का अधिकार है। ", - यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कल 24 चैनल की हवा पर कहा। उन्होंने यह भी कहा कि हाल के दिनों में सेना ने "मिलिशिया के चार तोड़फोड़ समूहों को नष्ट कर दिया। "
"हमने ओएससीई मॉनिटरिंग मिशन के प्रतिनिधियों को चेतावनी दी कि, यदि स्थिति आगे बढ़ती है, तो हम तोपखाने की रक्षा के लिए जो तोपखाने को सौंपा गया है उसकी पहली पंक्ति में लौटने के लिए तैयार हैं। " - उन्होंने हवा पर कहा "एक सौ बारह यूक्रेन"। सेलज़ेनोव ने उल्लेख किया कि आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है, सशस्त्र बल मिलिशिया द्वारा हथियारों की वापसी पर ओएससीई एसएमएम रिपोर्ट की प्रतीक्षा कर रहे हैं। "एटीओ ज़ोन में होने वाली हाल की घटनाओं से संकेत मिलता है कि सभी हथियार जो आतंकवादियों को वापस लेने के लिए नहीं थे, उन्हें वापस ले लिया गया," उन्होंने कहा। उसी समय, डीपीआर रक्षा मंत्रालय के प्रतिनिधि एडुआर्ड बसुरिन के अनुसार, पर्यवेक्षकों ने सीमांकन रेखा के पास यूक्रेनी पक्ष पर भारी हथियारों की उपस्थिति की पुष्टि की। "नवंबर चौदह के लिए अपनी रिपोर्ट में, OSCE मिशन ने संपर्क लाइन के पास यूक्रेनी उपकरणों की एकाग्रता को नोट किया, विशेष रूप से, जलकुंभी-बी तोपखाने प्रणालियों और पांच ग्रैड एमएलआरएस की चार इकाइयों की उपस्थिति दर्ज की गई थी। इस प्रकार, यूक्रेनी पक्ष सक्रिय रूप से भड़काऊ गोलाबारी करने के लिए उपकरण और बल का निर्माण कर रहा है, "बसुरिन ने कहा। इसी समय, यूक्रेनी मीडिया मिलिशिया और गोलाबारी द्वारा हथियारों के संकुचन के बारे में झूठी खबरें प्रकाशित करना जारी रखता है। "आज के लिए, उन्होंने उपकरणों को एक साथ खींचने और उत्तेजक गोलाबारी करने के बारे में भराई की, जिससे वे विश्व समुदाय को डोनबास के नागरिकों के प्रति आक्रामकता के प्रकोप की शुरुआत के लिए तैयार करते हैं," उन्होंने कहा। बेसुरिन के शब्दों की पुष्टि वास्तव में पोरोशेंको के बयान से होती है। "हम पूर्व में स्थिति को आगे बढ़ाने के लिए ठोस प्रदर्शन करते हैं, गोलाबारी की संख्या में वृद्धि हुई है। हमारी प्रतिक्रिया तत्काल थी, मैंने स्पष्ट आदेश दियाः जैसे ही यूक्रेनी सेना के जीवन के लिए खतरा है, उन्हें जवाब में आग खोलने का अधिकार है। ", - यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कल चौबीस चैनल की हवा पर कहा। उन्होंने यह भी कहा कि हाल के दिनों में सेना ने "मिलिशिया के चार तोड़फोड़ समूहों को नष्ट कर दिया। "
नागौर, राजस्थान. यह तस्वीर नागौर जिले के मकराना कस्बे की है। युवकों के पीछे डंडा लेकर दौड़ता यह कोई पुलिसवाला नहीं है, बल्कि डॉक्टर हैं। इनका गुस्सा बाजिव था। दरअसल, कस्बे के लुहारपुरा इलाके में बाहर से आए 38 युवकों को होम क्वारेंटाइन किया गया है। गुरुवार को मेडिकल टीम उनका चेकअप करने पहुंची। देखा कि कुछ युवक बेफिक्र होकर घर के बाहर टहल रहे हैं। डॉक्टर ने उन्हें कोरोना संक्रमण के खतरे से अवगत कराया। इस पर युवक मजाक करने लगे। इस बात पर डॉक्टर को गुस्सा आ गया। डॉक्टर ने स्टेथेस्कोप को छोड़कर डंडा उठाया और युवकों की अच्छे से खबर ले डाली। डॉ. आबिद हुसैन की यह तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई है। लोगों ने डॉक्टर के गुस्से को जायज ठहराया। कोरोना वायरस से बचने का सबसे कारगर तरीका है सोशल डिस्टेंस इसके अलावा कुछ सावधानियां है जिन्हें रखा जाना चाहिए। लोग अपने-अपने तरीकों से सोशल डिस्टेंस कर रहे हैं। कोरोना से बचने के लिए यूपी के हापुड़ जिले के रहने वाले एक शख्स ने पेड़ के ऊपर ही घर बना लिया। पेश से वकील मुकुल त्यागी ने अपने घर के पास एक पेड़ पर अपना आशियाना बनाया है। मुकुल का कहना है कि इस महामारी से बचने का एक ही तरीका है। वो है सोशल डिस्टेंसिंग। इसी कारण उन्होंने एकांत में रहने का मन बना लिया है। वो इसका आनंद भी ले रहे हैं। 4000 करोड़ रुपए के घोटाले में फंसकर जेल यात्रा कर चुके हैं मधु कोड़ा। खेती-किसानी का बहुत शौक है इन्हें। अकसर खेतों में निंदाई-गुड़ाई करते देखे जा सकते हैं। इन दिनों लॉक डाउन के चलते इन्हें खेतों में देखा जा सकता है। मां-बेटे को रिश्ते को शर्मसार करने वाला एक मामला बिहार के किशनगंज जिले से सामने आया है। जहां मां ने अपने 2. 5 साल के मासूम बेटे की गला दबाकर हत्या कर दी और फिर फंदे से लटककर अपनी जान भी दे दी। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में जमीन की खुदाई करते समय किसान को बेशकीमती खजाना मिला है। ये किसान अपने घर के सामने अपनी ही जमीन से मिट्टी की खुदाई कर रहा था। तभी उसे एक घड़े में खजाना मिला। मामला बिहार के सीतामढ़ी जिले का है। जहां खेत में घास काटने गई एक नाबालिग लड़की के साथ गैंगरेप की घटना की अंजाम दिया गया। दरिंदों ने रेप का वीडियो भी बनाया और उसे वायरल करने की धमकी देकर पीड़िता को फिर से बुला रहे थे। कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बिहार में तेजी से बढ़ रही है। राज्य में कोरोना के सबसे ज्यादा मरीज सीवान जिले से सामने आए है। जहां के एक युवक की गलती से राज्य का यह जिला चीन का वुहान बनने के रास्ते पर है। महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण और लॉकडाउन के बीच लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां आईपीएफ अफसर ने डीएचएफएल के प्रमोटर कपिल और धीरज वाधवान के परिवार के लिए इमरजेंसी पास करते हुए 23 लोगों को फार्महाउस पहुंचाया। हिसार, हरियाणा. कोरोना वायरस ने दुनियाभर की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिए हैं। क्या रिश्ते-नाते. . सबके बीच दूरियां पैदा कर दी हैं। लेकिन महामारी कोई भी है, दिलों से प्यार दूर नहीं कर पाती। ये कहानियां भी ऐसे ही लोगों की हैं, जो 14 दिनों तक क्वारेंटाइन के चलते अपने बच्चों से दूर रहे। अपने परिजनों से दूर रहे। कोरोना संक्रमण से बचने सोशल डिस्टेंसिंग ही एक मात्र उपाय है। इसलिए अपनी और अपनों की जिंदगी बचाने इसके अलावा कोई दूसरा तरीका नहीं था। हिसार जिले के हांसी में विदेश से लौटे 33 लोगों को 14 दिनों के लिए क्वारेंटाइन किया गया था। जब वे यह अवधि पूरी करके बाहर निकले, तो अपने बच्चों से मिलकर खूब रोये। मां-बाप हों या दादा-दादी. . मासूम बच्चों को गोदी में उठाकर घंटों चूमते रहे। रोते रहे। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि यहां क्वारेंटाइन किए गए सभी 58 लोग पूरी तरह स्वस्थ हैं। जालसाजों ने प्रधानमंत्री राहत कोष से मिलती जुलती UPI ID बनाकर लोगों से ठगी करने की कोशिश कर रहे हैं। यूपी पुलिस की साइबर सेल इस मामले के सामने आने के बाद पूरी तरह से एक्टिव हो गई है। इन जालसाजों ट्रेस करने की कोशिश की जा रही है।
नागौर, राजस्थान. यह तस्वीर नागौर जिले के मकराना कस्बे की है। युवकों के पीछे डंडा लेकर दौड़ता यह कोई पुलिसवाला नहीं है, बल्कि डॉक्टर हैं। इनका गुस्सा बाजिव था। दरअसल, कस्बे के लुहारपुरा इलाके में बाहर से आए अड़तीस युवकों को होम क्वारेंटाइन किया गया है। गुरुवार को मेडिकल टीम उनका चेकअप करने पहुंची। देखा कि कुछ युवक बेफिक्र होकर घर के बाहर टहल रहे हैं। डॉक्टर ने उन्हें कोरोना संक्रमण के खतरे से अवगत कराया। इस पर युवक मजाक करने लगे। इस बात पर डॉक्टर को गुस्सा आ गया। डॉक्टर ने स्टेथेस्कोप को छोड़कर डंडा उठाया और युवकों की अच्छे से खबर ले डाली। डॉ. आबिद हुसैन की यह तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई है। लोगों ने डॉक्टर के गुस्से को जायज ठहराया। कोरोना वायरस से बचने का सबसे कारगर तरीका है सोशल डिस्टेंस इसके अलावा कुछ सावधानियां है जिन्हें रखा जाना चाहिए। लोग अपने-अपने तरीकों से सोशल डिस्टेंस कर रहे हैं। कोरोना से बचने के लिए यूपी के हापुड़ जिले के रहने वाले एक शख्स ने पेड़ के ऊपर ही घर बना लिया। पेश से वकील मुकुल त्यागी ने अपने घर के पास एक पेड़ पर अपना आशियाना बनाया है। मुकुल का कहना है कि इस महामारी से बचने का एक ही तरीका है। वो है सोशल डिस्टेंसिंग। इसी कारण उन्होंने एकांत में रहने का मन बना लिया है। वो इसका आनंद भी ले रहे हैं। चार हज़ार करोड़ रुपए के घोटाले में फंसकर जेल यात्रा कर चुके हैं मधु कोड़ा। खेती-किसानी का बहुत शौक है इन्हें। अकसर खेतों में निंदाई-गुड़ाई करते देखे जा सकते हैं। इन दिनों लॉक डाउन के चलते इन्हें खेतों में देखा जा सकता है। मां-बेटे को रिश्ते को शर्मसार करने वाला एक मामला बिहार के किशनगंज जिले से सामने आया है। जहां मां ने अपने दो. पाँच साल के मासूम बेटे की गला दबाकर हत्या कर दी और फिर फंदे से लटककर अपनी जान भी दे दी। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में जमीन की खुदाई करते समय किसान को बेशकीमती खजाना मिला है। ये किसान अपने घर के सामने अपनी ही जमीन से मिट्टी की खुदाई कर रहा था। तभी उसे एक घड़े में खजाना मिला। मामला बिहार के सीतामढ़ी जिले का है। जहां खेत में घास काटने गई एक नाबालिग लड़की के साथ गैंगरेप की घटना की अंजाम दिया गया। दरिंदों ने रेप का वीडियो भी बनाया और उसे वायरल करने की धमकी देकर पीड़िता को फिर से बुला रहे थे। कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बिहार में तेजी से बढ़ रही है। राज्य में कोरोना के सबसे ज्यादा मरीज सीवान जिले से सामने आए है। जहां के एक युवक की गलती से राज्य का यह जिला चीन का वुहान बनने के रास्ते पर है। महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण और लॉकडाउन के बीच लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां आईपीएफ अफसर ने डीएचएफएल के प्रमोटर कपिल और धीरज वाधवान के परिवार के लिए इमरजेंसी पास करते हुए तेईस लोगों को फार्महाउस पहुंचाया। हिसार, हरियाणा. कोरोना वायरस ने दुनियाभर की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिए हैं। क्या रिश्ते-नाते. . सबके बीच दूरियां पैदा कर दी हैं। लेकिन महामारी कोई भी है, दिलों से प्यार दूर नहीं कर पाती। ये कहानियां भी ऐसे ही लोगों की हैं, जो चौदह दिनों तक क्वारेंटाइन के चलते अपने बच्चों से दूर रहे। अपने परिजनों से दूर रहे। कोरोना संक्रमण से बचने सोशल डिस्टेंसिंग ही एक मात्र उपाय है। इसलिए अपनी और अपनों की जिंदगी बचाने इसके अलावा कोई दूसरा तरीका नहीं था। हिसार जिले के हांसी में विदेश से लौटे तैंतीस लोगों को चौदह दिनों के लिए क्वारेंटाइन किया गया था। जब वे यह अवधि पूरी करके बाहर निकले, तो अपने बच्चों से मिलकर खूब रोये। मां-बाप हों या दादा-दादी. . मासूम बच्चों को गोदी में उठाकर घंटों चूमते रहे। रोते रहे। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि यहां क्वारेंटाइन किए गए सभी अट्ठावन लोग पूरी तरह स्वस्थ हैं। जालसाजों ने प्रधानमंत्री राहत कोष से मिलती जुलती UPI ID बनाकर लोगों से ठगी करने की कोशिश कर रहे हैं। यूपी पुलिस की साइबर सेल इस मामले के सामने आने के बाद पूरी तरह से एक्टिव हो गई है। इन जालसाजों ट्रेस करने की कोशिश की जा रही है।
गुरुवार को बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग एक फिर से देवप्रयाग के समीप बोल्डर आने से बाधित हो गया है। इस कारण यहां वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है। वाहनों को वाया चंबा भेजा जा रहा है। वहीं हाईवे को खोलने के प्रयास हो रहे हैं। जागरण संवाददता, ऋषिकेश। ऋषिकेश बदरीनाथ मार्ग पर देर रात यातायात सुचारू होने के बाद एक बार फिर से देवप्रयाग के समीप मार्ग अवरुद्ध हो गया। जिस वजह से यहां वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है। फिलहाल श्रीनगर की ओर जाने वाले ट्रैफिक को वाया चंबा भेजा जा रहा है। भारी बारिश के चलते बुधवार को बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई जगह बोल्डर आने से मार्ग अवरुद्ध हो गया था। किसी तरह देर रात मार्ग को दुरुस्त कर यहां फंसे वाहनों को निकाला गया। मगर, गुरुवार तड़के एक बार फिर देवप्रयाग के निकट शिव मूर्ति के पास फिर से चट्टान टूट गई और हाईवे अवरुद्ध हो गया। थाना प्रभारी निरीक्षक मुनीकीरेती कमल मोहन भंडारी ने बताया कि इस मार्ग से फिलहाल सिर्फ आपातकालीन वाहनों का संचालन किया जा रहा है। सामान्य ट्रैफिक को वाया चंबा गडोलिया श्रीनगर के लिए भेजा जा रहा है। उन्होंने बताया कि फिलहाल मुनीकीरेती से 82 तक मार्ग सुचारू है। उधर, लगातार बारिश के चलते गंगा के जलस्तर में भी वृद्धि हुई है। ऋषिकेश में गंगा का जलस्तर चेतावनी रेखा 339. 50 मीटर से करीब एक मीटर नीचे 338. 55 मीटर बना हुआ है। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक पर्वतीय क्षेत्रों में मैदानी क्षेत्र की तुलना में काम बारिश हुई, जिससे गंगा के जलस्तर में मामूली वृद्धि हुई है। वही ऋषिकेश तथा आसपास क्षेत्र के सभी नदी नाले अभी भी उफान पर है। संवाद सूत्र, डोईवालाः बारिश के दौरान पुराने लच्छीवाला रेलवे अंडर बाईपास मार्ग के नीचे जलभराव होने से राहगीरों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वहीं भानियावाला बाजार से हरिद्वार तिराहे तक सड़कों पर हुए जलभराव हुआ। जिस कारण लोग परेशान रहे। डोईवाला तहसीलदार सुनील सैनी ने बताया कि बारिश के चलते बुधवार को कुछ जगहों पर जलभराव की समस्या सामने आई। जिसके समाधान के लिए क्षेत्र की बंद नालियों को खोल जाएगा। डोईवाला तहसील के पटवारी सुधीर सैनी ने बताया कि शेरगढ़ के किनारे जाखन नदी में उफान आने से यहां नदी के समीपवर्ती भूमि का कटाव साथ ही पुश्ते को भी नुकसान पहुंचा। पूर्व कनिष्ठ उप प्रमुख नवीन चौधरी व रानीपोखरी के प्रधान सुधीर रतूड़ी ने रानीपोखरी में जाखन नदी किनारे बाढ़ सुरक्षा बंदोबस्त करने की मांग की।
गुरुवार को बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग एक फिर से देवप्रयाग के समीप बोल्डर आने से बाधित हो गया है। इस कारण यहां वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है। वाहनों को वाया चंबा भेजा जा रहा है। वहीं हाईवे को खोलने के प्रयास हो रहे हैं। जागरण संवाददता, ऋषिकेश। ऋषिकेश बदरीनाथ मार्ग पर देर रात यातायात सुचारू होने के बाद एक बार फिर से देवप्रयाग के समीप मार्ग अवरुद्ध हो गया। जिस वजह से यहां वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है। फिलहाल श्रीनगर की ओर जाने वाले ट्रैफिक को वाया चंबा भेजा जा रहा है। भारी बारिश के चलते बुधवार को बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई जगह बोल्डर आने से मार्ग अवरुद्ध हो गया था। किसी तरह देर रात मार्ग को दुरुस्त कर यहां फंसे वाहनों को निकाला गया। मगर, गुरुवार तड़के एक बार फिर देवप्रयाग के निकट शिव मूर्ति के पास फिर से चट्टान टूट गई और हाईवे अवरुद्ध हो गया। थाना प्रभारी निरीक्षक मुनीकीरेती कमल मोहन भंडारी ने बताया कि इस मार्ग से फिलहाल सिर्फ आपातकालीन वाहनों का संचालन किया जा रहा है। सामान्य ट्रैफिक को वाया चंबा गडोलिया श्रीनगर के लिए भेजा जा रहा है। उन्होंने बताया कि फिलहाल मुनीकीरेती से बयासी तक मार्ग सुचारू है। उधर, लगातार बारिश के चलते गंगा के जलस्तर में भी वृद्धि हुई है। ऋषिकेश में गंगा का जलस्तर चेतावनी रेखा तीन सौ उनतालीस. पचास मीटर से करीब एक मीटर नीचे तीन सौ अड़तीस. पचपन मीटर बना हुआ है। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक पर्वतीय क्षेत्रों में मैदानी क्षेत्र की तुलना में काम बारिश हुई, जिससे गंगा के जलस्तर में मामूली वृद्धि हुई है। वही ऋषिकेश तथा आसपास क्षेत्र के सभी नदी नाले अभी भी उफान पर है। संवाद सूत्र, डोईवालाः बारिश के दौरान पुराने लच्छीवाला रेलवे अंडर बाईपास मार्ग के नीचे जलभराव होने से राहगीरों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वहीं भानियावाला बाजार से हरिद्वार तिराहे तक सड़कों पर हुए जलभराव हुआ। जिस कारण लोग परेशान रहे। डोईवाला तहसीलदार सुनील सैनी ने बताया कि बारिश के चलते बुधवार को कुछ जगहों पर जलभराव की समस्या सामने आई। जिसके समाधान के लिए क्षेत्र की बंद नालियों को खोल जाएगा। डोईवाला तहसील के पटवारी सुधीर सैनी ने बताया कि शेरगढ़ के किनारे जाखन नदी में उफान आने से यहां नदी के समीपवर्ती भूमि का कटाव साथ ही पुश्ते को भी नुकसान पहुंचा। पूर्व कनिष्ठ उप प्रमुख नवीन चौधरी व रानीपोखरी के प्रधान सुधीर रतूड़ी ने रानीपोखरी में जाखन नदी किनारे बाढ़ सुरक्षा बंदोबस्त करने की मांग की।
लड़को की तरह लड़कियों का भी क्रश होता है. जिसे वह चोरी-चोरी, चुपके-चुपके प्यार करती है. लेकिन आपको ये पता नहीं होगा की लड़कियां अपने क्रश के सामने आने पर रियेक्ट कैसे करती है. ये बताने के लिए हम आपको एक वीडियो दिखाएंगे. जिससे यूट्यूब चॅनेल PROBAK द्वारा तैयार किया गया है. इस वीडियो में काफी अच्छी तरह से दिखाया गया है की लड़कियां अपने क्रश के सामने कैसे रियेक्ट करती है. तो चलिए आपको भी दिखातें है ये वीडियो.
लड़को की तरह लड़कियों का भी क्रश होता है. जिसे वह चोरी-चोरी, चुपके-चुपके प्यार करती है. लेकिन आपको ये पता नहीं होगा की लड़कियां अपने क्रश के सामने आने पर रियेक्ट कैसे करती है. ये बताने के लिए हम आपको एक वीडियो दिखाएंगे. जिससे यूट्यूब चॅनेल PROBAK द्वारा तैयार किया गया है. इस वीडियो में काफी अच्छी तरह से दिखाया गया है की लड़कियां अपने क्रश के सामने कैसे रियेक्ट करती है. तो चलिए आपको भी दिखातें है ये वीडियो.
शेखपुरा. अरियरी प्रखंड की कसार पंचायत के कसार गांव में पंचायत चुनाव के बाद विकास कार्य में तेजी लाने के लिए सचिव का चुनाव किया जा रहा है। ऐसे में ग्रामीणों ने शिकायत की है कि गोंगू सरदार नाम के शख्स ने लोगों को डरा धमकाकर सचिव की कुर्सी पर कब्जा जमा लिया है। बता दें कि आर्म्स एक्ट का अभियुक्त मंटू उर्फ गोंगू सरदार को लेकर 13 वार्ड के लोगों ने डीएम और एसपी को आवेदन देकर दबंगई से वार्ड सचिव बने शख्स को चयनमुक्त करने और हिरासत में लेने की गुहार लगाई है। इस मुद्दे को लेकर वार्ड 13 के निवासी और कसार गांव के युवक राहुल कुमार, कमलेश कुमार, सदन कुमार दास, रामदेव रविदास, जनार्दन रविदास, शांति देवी इत्यादि लोगों ने बताया कि 15 फरवरी को को संपन्न हुए वार्ड चुनाव में मानिकचंद रविदास के पुत्र मंटू कुमार उर्फ गोंगू को वार्ड सिचव के लिए चयन किया गया जो कि आर्म्स एक्ट कांड संख्या 73/21 और थाना कांड संख्या 38/22 का मुद्दालय है। उसके बाद भी काफी धांधली करके उसका चयन किया गया है। आंगनबाड़ी केंद्र में दबंग शख्स मंटू ने आकर पहले प्रतिनिधि राहुल को मारपीट कर बाहर कर दिया। हमलोगों ने इसका विरोध भी किया लेकिन फिर भी मंटू कुमार को सचिव बना दिया गया।
शेखपुरा. अरियरी प्रखंड की कसार पंचायत के कसार गांव में पंचायत चुनाव के बाद विकास कार्य में तेजी लाने के लिए सचिव का चुनाव किया जा रहा है। ऐसे में ग्रामीणों ने शिकायत की है कि गोंगू सरदार नाम के शख्स ने लोगों को डरा धमकाकर सचिव की कुर्सी पर कब्जा जमा लिया है। बता दें कि आर्म्स एक्ट का अभियुक्त मंटू उर्फ गोंगू सरदार को लेकर तेरह वार्ड के लोगों ने डीएम और एसपी को आवेदन देकर दबंगई से वार्ड सचिव बने शख्स को चयनमुक्त करने और हिरासत में लेने की गुहार लगाई है। इस मुद्दे को लेकर वार्ड तेरह के निवासी और कसार गांव के युवक राहुल कुमार, कमलेश कुमार, सदन कुमार दास, रामदेव रविदास, जनार्दन रविदास, शांति देवी इत्यादि लोगों ने बताया कि पंद्रह फरवरी को को संपन्न हुए वार्ड चुनाव में मानिकचंद रविदास के पुत्र मंटू कुमार उर्फ गोंगू को वार्ड सिचव के लिए चयन किया गया जो कि आर्म्स एक्ट कांड संख्या तिहत्तर/इक्कीस और थाना कांड संख्या अड़तीस/बाईस का मुद्दालय है। उसके बाद भी काफी धांधली करके उसका चयन किया गया है। आंगनबाड़ी केंद्र में दबंग शख्स मंटू ने आकर पहले प्रतिनिधि राहुल को मारपीट कर बाहर कर दिया। हमलोगों ने इसका विरोध भी किया लेकिन फिर भी मंटू कुमार को सचिव बना दिया गया।
भारत ने आज विश्व रिकॉर्ड बनाया है. बिहार में शनिवार को बाबू वीर कुंवर सिंह विजयोत्सव समारोह मनाया गया. गृह मंत्री अमित शाह भी इस कार्यक्रम में मौजूद रहे. इस दौरान अमित शाह की मौजूदगी में भारत ने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपने नाम किया एक साथ 77 हजार 900 तिरंगा फहराने का खिताब. इससे पहले 57 हजार 500 ध्वज फहराने का वर्ल्डे रिकॉर्ड फिलहाल पाकिस्तान के नाम दर्ज था. गौरतलब है कि इस समारोह को लेकर बीजेपी काफी लंबे अरसे से तैयारी कर रही थी. बिहार में आज पाकिस्तान का रिकॉर्ड टूट गया है। 77 हजार 900 तिरंगे फहराकर पाकिस्तान का विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया है। स्वतंत्रता संग्राम के महानायक बाबू वीर कुंवर सिंह के विजयोत्सव पर भोजपुर के जगदीशपुर में केंद्रीय मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में यह रिकॉर्ड बनाया गया। इस कार्यक्रम में 5 मिनट तक झंडा फहराया गया। इसके पहले पाकिस्तान में एक साथ 57 हजार झंडे लहरा कर रिकॉर्ड बनाया था। जगदीशपुर में जनता को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा, 'आज हम सब बाबू कुंवर सिंह जी को श्रद्धांजलि देने आए हैं। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आजादी के 75वें साल में आजादी का अमृत महोत्सव मनाने का निर्णय लिया। जिसमें 3 पहलू थे।' उन्होंने आगे कहा, 'इतिहास में बाबू कुंवर सिंह के साथ अन्याय हुआ और उनकी वीरता और योग्यता के अनुरूप में इतिहासकारों ने इतिहास में उनको स्थान नहीं दिया। लेकिन आज बिहार की जनता ने बाबू जी को श्रद्धांजलि देकर वीर कुंवर सिंह का नाम इतिहास में फिर से अमर करने का काम किया है।'
भारत ने आज विश्व रिकॉर्ड बनाया है. बिहार में शनिवार को बाबू वीर कुंवर सिंह विजयोत्सव समारोह मनाया गया. गृह मंत्री अमित शाह भी इस कार्यक्रम में मौजूद रहे. इस दौरान अमित शाह की मौजूदगी में भारत ने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपने नाम किया एक साथ सतहत्तर हजार नौ सौ तिरंगा फहराने का खिताब. इससे पहले सत्तावन हजार पाँच सौ ध्वज फहराने का वर्ल्डे रिकॉर्ड फिलहाल पाकिस्तान के नाम दर्ज था. गौरतलब है कि इस समारोह को लेकर बीजेपी काफी लंबे अरसे से तैयारी कर रही थी. बिहार में आज पाकिस्तान का रिकॉर्ड टूट गया है। सतहत्तर हजार नौ सौ तिरंगे फहराकर पाकिस्तान का विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया है। स्वतंत्रता संग्राम के महानायक बाबू वीर कुंवर सिंह के विजयोत्सव पर भोजपुर के जगदीशपुर में केंद्रीय मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में यह रिकॉर्ड बनाया गया। इस कार्यक्रम में पाँच मिनट तक झंडा फहराया गया। इसके पहले पाकिस्तान में एक साथ सत्तावन हजार झंडे लहरा कर रिकॉर्ड बनाया था। जगदीशपुर में जनता को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा, 'आज हम सब बाबू कुंवर सिंह जी को श्रद्धांजलि देने आए हैं। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आजादी के पचहत्तरवें साल में आजादी का अमृत महोत्सव मनाने का निर्णय लिया। जिसमें तीन पहलू थे।' उन्होंने आगे कहा, 'इतिहास में बाबू कुंवर सिंह के साथ अन्याय हुआ और उनकी वीरता और योग्यता के अनुरूप में इतिहासकारों ने इतिहास में उनको स्थान नहीं दिया। लेकिन आज बिहार की जनता ने बाबू जी को श्रद्धांजलि देकर वीर कुंवर सिंह का नाम इतिहास में फिर से अमर करने का काम किया है।'
सीडीएस जनरल चौहान ने कहा कि चीन की सेना की तैनाती उत्तरी सीमा पर बढ़ नहीं रही, वह उतनी है जितनी 2020 में थी। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना हर संभव प्रयास कर रही है कि स्थिति न बिगड़े। महाराष्ट्र के पुणे में नेशनल डिफेंस एकेडमी (एनडीए) की पासिंग आउट परेड चल रही है। इस दौरान चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान भी शिरकत हुए। उन्होंने मंगलवार को एनडीए के 144वें कोर्स की पासिंग आउट परेड की समीक्षा करते हुए महिलाओं की तारीफ की। साथ ही उत्तरी सीमा पर बढ़ रही चीन को लेकर भी बात की। मौके पर सीडीएस जनरल ने कैडेट्स को संबोधित करते हुए कहा कि आज मैं आपको बधाई देता हूं। साथ ही उन्होंने महिला कैडेटों को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि आज देश की महिलाएं राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए आगे आ रही हैं। उन्होंने एनडीए को समान स्तर पर ला दिया है, जहां पहले सिर्फ पुरुष होते थे, वहीं अब महिलाएं भी इसका हिस्सा है। सीडीएस ने कहा कि मुझे खुशी हो रही है कि महिलाओं ने अपने पुरुष भाइयों के समान जिम्मेदारियों को उठाने का संकल्प लिया है। चौहान ने चीन के मुद्दे पर भी बात की। उन्होंने कहा कि चीन की सेना की तैनाती उत्तरी सीमा पर बढ़ नहीं रही, वह उतनी है जितनी 2020 में थी। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना हर संभव प्रयास कर रही है कि स्थिति न बिगड़े। चौहान ने कहा कि हमें अपने दावे की वैधता बनाए रखनी होगी। सीमा विवाद को सुलझाना अलग मुद्दा है, जिन इलाकों में हम 2020 से पहले पेट्रोलिंग करते थे, जिनपर हमारा दावा है, वहां यथास्थिति बनानी होगी। जनरल ने कहा कि दो जगह स्थिती अभी भी वैसी ही है, जैसी थी। देपसांग और डेमचोक को छोड़कर सभी जगह सही स्थिती है। इसे लेकर बातचीत जारी है। अनिल चौहान ने देश के सामने आने वाली चुनौतियों पर कहा कि यूरोप में युद्ध, हमारी उत्तरी सीमाओं पर पीएलए की निरंतर तैनाती और हमारे निकट पड़ोस में राजनीतिक एवं आर्थिक उथल-पुथल ये सभी भारतीय सेना के लिए एक अलग तरह की चुनौती सामने खड़ी कर रहे हैं। उन्होंने कहा आगे कि सशस्त्र बल नियंत्रण रेखा पर शांति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। चौहान ने कहा कि सेना की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। इसलिए हम अपने देश ही नहीं, बल्कि पड़ोस में भी शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए सक्रिय रहें। चौहान ने आगे कहा कि हम आज सेना में एक नई क्रांति देख रहे हैं, जो ज्यादातर टेक्नोलॉजी द्वारा संचालित है। वहीं, उन्होंने भारत की सशस्त्र सेनाओं के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि सशस्त्र सेना भी एक बड़े परिवर्तन की राह पर हैं। संयुक्तता, एकीकरण और रंगमंचीय कमानों का निर्माण विचाराधीन है। इस बीच, सीडीएस ने कहा कि हम ऐसे समय में रह रहे हैं जब वैश्विक सुरक्षा की स्थिति सबसे अच्छी नहीं है और अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक व्यवस्था प्रवाह की स्थिति में है। वहीं, उन्होंने मणिपुर हिंसा को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि मणिपुर में हो रही हिंसा का आंतकवादियों से कोई लेना देना नहीं है। वह मुख्य रूप से दो जातियों के बीच की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि यह कानून और व्यवस्था की तरह की स्थिति है। हम राज्य सरकार की मदद कर रहे हैं। जनरल ने कहा कि हमने बड़ी संख्या में लोगों की जान बचाई है। हालांकि, मणिपुर में चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं और इसमें कुछ समय लगेगा। चौहान ने कहा कि उम्मीद है, दोनों पक्षों के लोग शांत हो जाएंगे। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
सीडीएस जनरल चौहान ने कहा कि चीन की सेना की तैनाती उत्तरी सीमा पर बढ़ नहीं रही, वह उतनी है जितनी दो हज़ार बीस में थी। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना हर संभव प्रयास कर रही है कि स्थिति न बिगड़े। महाराष्ट्र के पुणे में नेशनल डिफेंस एकेडमी की पासिंग आउट परेड चल रही है। इस दौरान चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान भी शिरकत हुए। उन्होंने मंगलवार को एनडीए के एक सौ चौंतालीसवें कोर्स की पासिंग आउट परेड की समीक्षा करते हुए महिलाओं की तारीफ की। साथ ही उत्तरी सीमा पर बढ़ रही चीन को लेकर भी बात की। मौके पर सीडीएस जनरल ने कैडेट्स को संबोधित करते हुए कहा कि आज मैं आपको बधाई देता हूं। साथ ही उन्होंने महिला कैडेटों को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि आज देश की महिलाएं राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए आगे आ रही हैं। उन्होंने एनडीए को समान स्तर पर ला दिया है, जहां पहले सिर्फ पुरुष होते थे, वहीं अब महिलाएं भी इसका हिस्सा है। सीडीएस ने कहा कि मुझे खुशी हो रही है कि महिलाओं ने अपने पुरुष भाइयों के समान जिम्मेदारियों को उठाने का संकल्प लिया है। चौहान ने चीन के मुद्दे पर भी बात की। उन्होंने कहा कि चीन की सेना की तैनाती उत्तरी सीमा पर बढ़ नहीं रही, वह उतनी है जितनी दो हज़ार बीस में थी। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना हर संभव प्रयास कर रही है कि स्थिति न बिगड़े। चौहान ने कहा कि हमें अपने दावे की वैधता बनाए रखनी होगी। सीमा विवाद को सुलझाना अलग मुद्दा है, जिन इलाकों में हम दो हज़ार बीस से पहले पेट्रोलिंग करते थे, जिनपर हमारा दावा है, वहां यथास्थिति बनानी होगी। जनरल ने कहा कि दो जगह स्थिती अभी भी वैसी ही है, जैसी थी। देपसांग और डेमचोक को छोड़कर सभी जगह सही स्थिती है। इसे लेकर बातचीत जारी है। अनिल चौहान ने देश के सामने आने वाली चुनौतियों पर कहा कि यूरोप में युद्ध, हमारी उत्तरी सीमाओं पर पीएलए की निरंतर तैनाती और हमारे निकट पड़ोस में राजनीतिक एवं आर्थिक उथल-पुथल ये सभी भारतीय सेना के लिए एक अलग तरह की चुनौती सामने खड़ी कर रहे हैं। उन्होंने कहा आगे कि सशस्त्र बल नियंत्रण रेखा पर शांति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। चौहान ने कहा कि सेना की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। इसलिए हम अपने देश ही नहीं, बल्कि पड़ोस में भी शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए सक्रिय रहें। चौहान ने आगे कहा कि हम आज सेना में एक नई क्रांति देख रहे हैं, जो ज्यादातर टेक्नोलॉजी द्वारा संचालित है। वहीं, उन्होंने भारत की सशस्त्र सेनाओं के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि सशस्त्र सेना भी एक बड़े परिवर्तन की राह पर हैं। संयुक्तता, एकीकरण और रंगमंचीय कमानों का निर्माण विचाराधीन है। इस बीच, सीडीएस ने कहा कि हम ऐसे समय में रह रहे हैं जब वैश्विक सुरक्षा की स्थिति सबसे अच्छी नहीं है और अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक व्यवस्था प्रवाह की स्थिति में है। वहीं, उन्होंने मणिपुर हिंसा को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि मणिपुर में हो रही हिंसा का आंतकवादियों से कोई लेना देना नहीं है। वह मुख्य रूप से दो जातियों के बीच की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि यह कानून और व्यवस्था की तरह की स्थिति है। हम राज्य सरकार की मदद कर रहे हैं। जनरल ने कहा कि हमने बड़ी संख्या में लोगों की जान बचाई है। हालांकि, मणिपुर में चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं और इसमें कुछ समय लगेगा। चौहान ने कहा कि उम्मीद है, दोनों पक्षों के लोग शांत हो जाएंगे। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
अलीगढ़ के क्वार्सी थाना क्षेत्र के स्वर्ण जयंती नगर इलाके में नगर निगम के नगर स्वास्थ्य अधिकारी के घर पर एक महिला ने संदिग्ध परिस्थितियों में जलती हुई मिली। महिला की चीख पुकार सुनकर पड़ोसियों ने उसे बचाया और पुलिस को सूचना दी। नगर स्वास्थ्य अधिकारी के अंदर महिला के जलने की जानकारी मिलने पर पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया और क्षेत्रिय थाना समेत पुलिस के आलाधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने आनन फानन में महिला को जेएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया और मामले की जांच शुरू की। स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत डॉ कमल ने बीते दिनों ही नगर निगम में नगर स्वास्थ्य अधिकारी पर की जिम्मेदारी संभाली है। क्वार्सी थाना क्षेत्र के स्वर्ण जयंती नगर में उनका अपना मकान है और वह अपने परिवार के साथ यही रहते हैं। सोमवार देर रात एक महिला जिसका नाम विमला बताया जा रहा है, उनके घर पहुंची। बताया जा रहा है कि वह घर के अंदर गई और खुद को आग लगा ली। आग लगाने के बाद महिला की चीख पुकार सुनकर पड़ोसी एकत्रित हो गए और उन्होंने महिला को घर का मुख्य दरवाजा तोड़कर बचाया। पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद आनन फानन में पुलिस मौके पर पहुंची और अपनी कार्रवाई शुरू की। महिला कौन है और वह कहां से आर्इ है, इस बारे में पुलिस अभी कुछ भी पता नहीं लगा सकी है। लेकिन प्रारंभिक जांच में यह सामने निकलकर आया है कि महिला का नाम विमला (35) पत्नी प्रेमचंद है और वह क्वार्सी क्षेत्र के ही देवसैनी गांव की रहने वाली है। वह अपने गांव से ही ही डॉक्टर के घर पहुंची थी और इसके बाद उसने खुद को मारने की कोशिश की। नगर निगम में नगर स्वास्थ्य अधिकारी के पद पर कार्यरत डॉ कमल पिछले कुछ दिनों से अपने परिवार से अलग रह रहे हैं। उनकी पत्नी बच्चे तो घर पर ही रह रहे हैं, लेकिन वह पिछले कई दिनों से अपने घर आ जा नहीं रहे हैं। जिसके बाद डॉक्टर की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। वहीं घटना के बाद जब पुलिस ने डॉक्टर का नंबर मिलाया तो उनका मोबाइल स्विच ऑफ आया। जिसके बाद पुलिस उनसे संपर्क करने की कोशिश कर रही है। पड़ोसियों की सूचना मिलने के बाद एसपी सिटी कुलदीप गुनावत, सीओ श्वेताभ पांडेय, क्वार्सी इंस्पेक्टर विजय सिंह मौके पर पहुंचे। महिला को आनन फानन में मेडिकल कॉलेज भेजा गया, लेकिन तब तक महिला 40 प्रतिशत से ज्यादा जल चुकी थी। लोगों का कहना था कि जलने वाली महिला विमला को जब अस्पताल ले जाया जा रहा था तो वह आरोप लगा रही थी कि डॉक्टर की पत्नी से उसे अपने घर बुलाया था और इसके बाद उसने उसके ऊपर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। जिसके बाद पुलिस मामले की जांच कर रही है। एसपी सिटी डॉ कुलदीप गुनावत ने बताया कि महिला के संदिग्ध परिस्थितियों में खुद को आग लगाने का मामला सामने आया है। मामले की सच्चाई को सामने लाने के लिए सीसीटीवी कैमरे खंगाले जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि महिला को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है और उसकी हालत नाजुक है। महिला अभी बात करने की स्थिति में नहीं है। महिला के होश में आने के बाद उसके बयान लिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि जल्दी ही सारे मामले का खुलासा किया जाएगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
अलीगढ़ के क्वार्सी थाना क्षेत्र के स्वर्ण जयंती नगर इलाके में नगर निगम के नगर स्वास्थ्य अधिकारी के घर पर एक महिला ने संदिग्ध परिस्थितियों में जलती हुई मिली। महिला की चीख पुकार सुनकर पड़ोसियों ने उसे बचाया और पुलिस को सूचना दी। नगर स्वास्थ्य अधिकारी के अंदर महिला के जलने की जानकारी मिलने पर पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया और क्षेत्रिय थाना समेत पुलिस के आलाधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने आनन फानन में महिला को जेएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया और मामले की जांच शुरू की। स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत डॉ कमल ने बीते दिनों ही नगर निगम में नगर स्वास्थ्य अधिकारी पर की जिम्मेदारी संभाली है। क्वार्सी थाना क्षेत्र के स्वर्ण जयंती नगर में उनका अपना मकान है और वह अपने परिवार के साथ यही रहते हैं। सोमवार देर रात एक महिला जिसका नाम विमला बताया जा रहा है, उनके घर पहुंची। बताया जा रहा है कि वह घर के अंदर गई और खुद को आग लगा ली। आग लगाने के बाद महिला की चीख पुकार सुनकर पड़ोसी एकत्रित हो गए और उन्होंने महिला को घर का मुख्य दरवाजा तोड़कर बचाया। पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद आनन फानन में पुलिस मौके पर पहुंची और अपनी कार्रवाई शुरू की। महिला कौन है और वह कहां से आर्इ है, इस बारे में पुलिस अभी कुछ भी पता नहीं लगा सकी है। लेकिन प्रारंभिक जांच में यह सामने निकलकर आया है कि महिला का नाम विमला पत्नी प्रेमचंद है और वह क्वार्सी क्षेत्र के ही देवसैनी गांव की रहने वाली है। वह अपने गांव से ही ही डॉक्टर के घर पहुंची थी और इसके बाद उसने खुद को मारने की कोशिश की। नगर निगम में नगर स्वास्थ्य अधिकारी के पद पर कार्यरत डॉ कमल पिछले कुछ दिनों से अपने परिवार से अलग रह रहे हैं। उनकी पत्नी बच्चे तो घर पर ही रह रहे हैं, लेकिन वह पिछले कई दिनों से अपने घर आ जा नहीं रहे हैं। जिसके बाद डॉक्टर की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। वहीं घटना के बाद जब पुलिस ने डॉक्टर का नंबर मिलाया तो उनका मोबाइल स्विच ऑफ आया। जिसके बाद पुलिस उनसे संपर्क करने की कोशिश कर रही है। पड़ोसियों की सूचना मिलने के बाद एसपी सिटी कुलदीप गुनावत, सीओ श्वेताभ पांडेय, क्वार्सी इंस्पेक्टर विजय सिंह मौके पर पहुंचे। महिला को आनन फानन में मेडिकल कॉलेज भेजा गया, लेकिन तब तक महिला चालीस प्रतिशत से ज्यादा जल चुकी थी। लोगों का कहना था कि जलने वाली महिला विमला को जब अस्पताल ले जाया जा रहा था तो वह आरोप लगा रही थी कि डॉक्टर की पत्नी से उसे अपने घर बुलाया था और इसके बाद उसने उसके ऊपर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। जिसके बाद पुलिस मामले की जांच कर रही है। एसपी सिटी डॉ कुलदीप गुनावत ने बताया कि महिला के संदिग्ध परिस्थितियों में खुद को आग लगाने का मामला सामने आया है। मामले की सच्चाई को सामने लाने के लिए सीसीटीवी कैमरे खंगाले जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि महिला को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है और उसकी हालत नाजुक है। महिला अभी बात करने की स्थिति में नहीं है। महिला के होश में आने के बाद उसके बयान लिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि जल्दी ही सारे मामले का खुलासा किया जाएगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
नई दिल्ली, 15 दिसंबर (आईएएनएस)। उर्वरक क्षेत्र की प्रमुख सहकारी संस्था इंडियन फारमर्स फर्टिलाइजर कोआपरेटिव लिमिटेड (इफको) द्वारा प्रतिवर्ष दिए जाने वाले 'श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य सम्मान' के लिए इस वर्ष मॉरीशस के वरिष्ठ हिंदी कथाकार रामदेव धुरंधर को चुना गया है। देवी प्रसाद त्रिपाठी की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने धुरंधर का चयन उनकी साहित्य-साधना और व्यापक साहित्यिक अवदान को ध्यान में रखकर किया है। चयन समिति में वरिष्ठ आलोचक नित्यानंद तिवारी और मुरली मनोहर प्रसाद सिंह के अलावा वरिष्ठ कथाकार चंद्रकांता और वरिष्ठ कवि डॉ. दिनेश कुमार शुक्ल शामिल थे। निर्णायक मंडल के निर्णय पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इफको के प्रबंध निदेशक डॉ. उदय शंकर अवस्थी ने कहा, मॉरीशस के हिंदी लेखक के चयन से इस सम्मान को अंतर्राष्ट्रीय पहचान मिलेगी। भारतवंशियों की संघर्ष गाथा को मुखरित करने वाले रामदेव धुरंधर का सम्मान भारतीय परंपरा और संस्कृति का भी सम्मान है। धुरंधर का चर्चित उपन्यास 'पथरीला सोना' छह खंडों में प्रकाशित है। अपने इस महाकाव्यात्मक उपन्यास में उन्होंने किसानों-मजदूरों के रूप में भारत से मॉरीशस आए अपने पूर्वजों की संघर्षमय जीवन-यात्रा का कारुणिक चित्रण किया है। उन्होंने 'छोटी मछली बड़ी मछली', 'चेहरों का आदमी', 'बनते बिगड़ते रिश्ते', 'पूछो इस माटी से' जैसे अन्य उपन्यास भी लिखे हैं। 'विष-मंथन' तथा 'जन्म की एक भूल' उनके दो कहानी संग्रह हैं। इसके अलावा उनके कई व्यंग्य संग्रह और लघुकथा संग्रह भी प्रकाशित हैं। मूर्धन्य कथाशिल्पी श्रीलाल शुक्ल की स्मृति में वर्ष 2011 में शुरू किया गया यह सम्मान प्रति वर्ष किसी ऐसे हिंदी लेखक को दिया जाता है, जिसकी रचनाओं में ग्रामीण और कृषि जीवन से जुड़ी समस्याओं, आकांक्षाओं और संघर्षों को मुखरित किया गया हो। अब तक विद्यासागर नौटियाल, शेखर जोशी, संजीव, मिथिलेश्वर, अष्टभुजा शुक्ल एवं कमलाकांत त्रिपाठी को यह सम्मान प्रदान किया गया है। सम्मानित साहित्यकार को एक प्रतीक चिह्न्, प्रशस्तिपत्र तथा ग्यारह लाख रुपये का चेक प्रदान किया जाता है। रामदेव धुरंधर को यह सम्मान 31 जनवरी, 2018 को नई दिल्ली में एक समारोह में दिया जाएगा। नई दिल्ली। पितृपक्ष का आरंभ शुक्रवार 29 सितंबर से हो चुका है और 14 अक्टूबर तक रहेगा। इस दौरान पूर्वजों और पितरों के नाम से श्राद्ध आदि के कार्य किए जाते हैं। पितृपक्ष में कुछ कार्य करने के लिए मना किया गया है पितृ पक्ष में ये पांच कार्य करना प्रतिबंधित है। आइए जानते हैं पितृपक्ष में क्या करें क्या न करें। पितृ पक्ष का आरंभ 29 सितंबर शुक्रवार से हो चुका है। पितृ पक्ष 16 दिनों तक चलने वाला है। पितृ पक्ष में कई कार्यों को करने के लिए मना किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि पितृ पक्ष में यदि आपको कोई पूर्वज है या अशांत पितृ है तो वह आपसे नाराज हो सकते हैं। पितरों और पूर्वजों के नाराज होने से आपके जीवन में कई तरह की समस्या आ सकती है। आइए जानते हैं पितृ पक्ष में कौनसे कार्य करना वर्जित माना जाता है। पितृ पक्ष में शराब, मांसाहार, पान, बैंगन, प्याज, लहसुन, बासी भोजन, सफेद तिल, लौकी, मूली, काला नमक, सत्तू, जीरा, मसूर की दाल, सरसों का साग, आदि वर्जित माना गया है। श्राद्ध में कोई इनक चीजों का सेवन करना है या इन चीजों का उपयोग करता है। उससे पितर नाराज हो जाते हैं। पितृ पक्ष के दौरान मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए। जैसे विवाह, गृह प्रवेश, दुकान का मुहूर्त आदि तरह के मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए। साथ ही इस समय में कोई नया सामान भी नहीं खरीदना चाहिए। पितृ पक्ष में किसी से भी झूठ नहीं बोलना चाहिए। इसके अलावा किसी को अपशब्द नहीं कहना चाहिए। सट्टा खेलना किसे के साथ छल कपट करना इस तरह के कार्य नहीं करने चाहिए। ऐसा करने से पितृ नाराज हो जाते हैं। साथ ही श्राद्ध पक्ष में ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। पितृपक्ष में आपके दरवाजे पर यदि कोई भी जानवर, साधु आदि आता है तो उनका अपमान न करें। इन लोगों का अपमान करने से आपके पितृ आपसे नाराज हो सकते हैं। साथ ही घर की चौखट पर यदि कोई गाय, कुत्ता, भिखारी आता है तो उनका अपमान भी न करें। साथ ही श्राद्ध करने वाले को बाल नाखून और दाढ़ी नहीं कटवानी चाहिए। श्राद्ध के दौरान तर्पण के लिए काले तिल का प्रयोग किया जाता है। इस दौरान भूलकर भी लाल या सफेद तिल के इस्तेमाल न करें। साथ ही श्राद्ध करने के लिए लोहे के बर्तन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। न ही स्टील के बर्तन का प्रयोग करना चाहिए। इस दौरान आप पीतल के बर्तन में भोजन कर सकते हैं और तांबे के बर्तन में पानी पीना चाहिए। श्राद्ध के लिए आप जो भोजन बना रहे हैं उसको न तो चखना चाहिए न ही पहले खुद खाना चाहिए।
नई दिल्ली, पंद्रह दिसंबर । उर्वरक क्षेत्र की प्रमुख सहकारी संस्था इंडियन फारमर्स फर्टिलाइजर कोआपरेटिव लिमिटेड द्वारा प्रतिवर्ष दिए जाने वाले 'श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य सम्मान' के लिए इस वर्ष मॉरीशस के वरिष्ठ हिंदी कथाकार रामदेव धुरंधर को चुना गया है। देवी प्रसाद त्रिपाठी की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने धुरंधर का चयन उनकी साहित्य-साधना और व्यापक साहित्यिक अवदान को ध्यान में रखकर किया है। चयन समिति में वरिष्ठ आलोचक नित्यानंद तिवारी और मुरली मनोहर प्रसाद सिंह के अलावा वरिष्ठ कथाकार चंद्रकांता और वरिष्ठ कवि डॉ. दिनेश कुमार शुक्ल शामिल थे। निर्णायक मंडल के निर्णय पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इफको के प्रबंध निदेशक डॉ. उदय शंकर अवस्थी ने कहा, मॉरीशस के हिंदी लेखक के चयन से इस सम्मान को अंतर्राष्ट्रीय पहचान मिलेगी। भारतवंशियों की संघर्ष गाथा को मुखरित करने वाले रामदेव धुरंधर का सम्मान भारतीय परंपरा और संस्कृति का भी सम्मान है। धुरंधर का चर्चित उपन्यास 'पथरीला सोना' छह खंडों में प्रकाशित है। अपने इस महाकाव्यात्मक उपन्यास में उन्होंने किसानों-मजदूरों के रूप में भारत से मॉरीशस आए अपने पूर्वजों की संघर्षमय जीवन-यात्रा का कारुणिक चित्रण किया है। उन्होंने 'छोटी मछली बड़ी मछली', 'चेहरों का आदमी', 'बनते बिगड़ते रिश्ते', 'पूछो इस माटी से' जैसे अन्य उपन्यास भी लिखे हैं। 'विष-मंथन' तथा 'जन्म की एक भूल' उनके दो कहानी संग्रह हैं। इसके अलावा उनके कई व्यंग्य संग्रह और लघुकथा संग्रह भी प्रकाशित हैं। मूर्धन्य कथाशिल्पी श्रीलाल शुक्ल की स्मृति में वर्ष दो हज़ार ग्यारह में शुरू किया गया यह सम्मान प्रति वर्ष किसी ऐसे हिंदी लेखक को दिया जाता है, जिसकी रचनाओं में ग्रामीण और कृषि जीवन से जुड़ी समस्याओं, आकांक्षाओं और संघर्षों को मुखरित किया गया हो। अब तक विद्यासागर नौटियाल, शेखर जोशी, संजीव, मिथिलेश्वर, अष्टभुजा शुक्ल एवं कमलाकांत त्रिपाठी को यह सम्मान प्रदान किया गया है। सम्मानित साहित्यकार को एक प्रतीक चिह्न्, प्रशस्तिपत्र तथा ग्यारह लाख रुपये का चेक प्रदान किया जाता है। रामदेव धुरंधर को यह सम्मान इकतीस जनवरी, दो हज़ार अट्ठारह को नई दिल्ली में एक समारोह में दिया जाएगा। नई दिल्ली। पितृपक्ष का आरंभ शुक्रवार उनतीस सितंबर से हो चुका है और चौदह अक्टूबर तक रहेगा। इस दौरान पूर्वजों और पितरों के नाम से श्राद्ध आदि के कार्य किए जाते हैं। पितृपक्ष में कुछ कार्य करने के लिए मना किया गया है पितृ पक्ष में ये पांच कार्य करना प्रतिबंधित है। आइए जानते हैं पितृपक्ष में क्या करें क्या न करें। पितृ पक्ष का आरंभ उनतीस सितंबर शुक्रवार से हो चुका है। पितृ पक्ष सोलह दिनों तक चलने वाला है। पितृ पक्ष में कई कार्यों को करने के लिए मना किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि पितृ पक्ष में यदि आपको कोई पूर्वज है या अशांत पितृ है तो वह आपसे नाराज हो सकते हैं। पितरों और पूर्वजों के नाराज होने से आपके जीवन में कई तरह की समस्या आ सकती है। आइए जानते हैं पितृ पक्ष में कौनसे कार्य करना वर्जित माना जाता है। पितृ पक्ष में शराब, मांसाहार, पान, बैंगन, प्याज, लहसुन, बासी भोजन, सफेद तिल, लौकी, मूली, काला नमक, सत्तू, जीरा, मसूर की दाल, सरसों का साग, आदि वर्जित माना गया है। श्राद्ध में कोई इनक चीजों का सेवन करना है या इन चीजों का उपयोग करता है। उससे पितर नाराज हो जाते हैं। पितृ पक्ष के दौरान मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए। जैसे विवाह, गृह प्रवेश, दुकान का मुहूर्त आदि तरह के मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए। साथ ही इस समय में कोई नया सामान भी नहीं खरीदना चाहिए। पितृ पक्ष में किसी से भी झूठ नहीं बोलना चाहिए। इसके अलावा किसी को अपशब्द नहीं कहना चाहिए। सट्टा खेलना किसे के साथ छल कपट करना इस तरह के कार्य नहीं करने चाहिए। ऐसा करने से पितृ नाराज हो जाते हैं। साथ ही श्राद्ध पक्ष में ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। पितृपक्ष में आपके दरवाजे पर यदि कोई भी जानवर, साधु आदि आता है तो उनका अपमान न करें। इन लोगों का अपमान करने से आपके पितृ आपसे नाराज हो सकते हैं। साथ ही घर की चौखट पर यदि कोई गाय, कुत्ता, भिखारी आता है तो उनका अपमान भी न करें। साथ ही श्राद्ध करने वाले को बाल नाखून और दाढ़ी नहीं कटवानी चाहिए। श्राद्ध के दौरान तर्पण के लिए काले तिल का प्रयोग किया जाता है। इस दौरान भूलकर भी लाल या सफेद तिल के इस्तेमाल न करें। साथ ही श्राद्ध करने के लिए लोहे के बर्तन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। न ही स्टील के बर्तन का प्रयोग करना चाहिए। इस दौरान आप पीतल के बर्तन में भोजन कर सकते हैं और तांबे के बर्तन में पानी पीना चाहिए। श्राद्ध के लिए आप जो भोजन बना रहे हैं उसको न तो चखना चाहिए न ही पहले खुद खाना चाहिए।
नोटबंदी के बाद से फैल रही सभी अफवाहों की जानिए क्या है सच्चाई! क्या केजरीवाल DTC बसों के ज़रिए कर रहें है अपनी ब्लैकमनी को सफ़ेद? जानें क्या है सच्चाई! परमाणु हमले की धमकी देने वाले पाकिस्तान के परमाणु बमों की खुली पोल. . !
नोटबंदी के बाद से फैल रही सभी अफवाहों की जानिए क्या है सच्चाई! क्या केजरीवाल DTC बसों के ज़रिए कर रहें है अपनी ब्लैकमनी को सफ़ेद? जानें क्या है सच्चाई! परमाणु हमले की धमकी देने वाले पाकिस्तान के परमाणु बमों की खुली पोल. . !
नई दिल्लीः अगर आपका ई-श्रम कार्ड बना हुआ है तो फिर अब आपकी किस्मत जागने जा रही है। सरकार ने इन लोगों को बड़ा फायदा दे रही है, जिससे पहले आप अपना ई-श्रम कार्ड बनवा सकते हैं। अगर आपका ई-श्रम कार्ड नहीं बना हुआ है तो फिर तुरंत बनवा लें। ई-श्रम कार्डधारकों को घऱ बैठे मोटी रकम कमाने का मौका मिल रहा है। सरकार इ-श्रम कार्डधारकों को 2 लाख रुपये तक का फायदा दे रही है, जिसके लिए कुछ शर्तें तय की गई हैं। अगर आप सभी शर्तों का पालन करते हैं तो फिर यह खबर बड़े ही काम की साबित होने जा रही है। सबसे पहले आपको ई-श्रम के पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराने की आवश्यकता होगी। मोदी सरकार ने कुछ दिन पहले असंगठित वर्ग के लोगों के ई-श्रम कार्ड बनवाए थे, जिसमें हर किसी ने बढ़चढकर हिस्सा लिया था। इसका असर इतना हुई कि करीब 20 करोड़ से ज्यादा लोगों ने ई-श्रम कार्ड बनवा विया है, जिनके लिए सरकार नए-नए लाभ दे रही है। अब ई-श्रम कार्डधारकों को आराम से 2 लाख रुपये का बीमा कवर का लाभ दिया जा रहा है। आपने इसमें रजिस्ट्रेशन कराया है तो फिर आपको किसी सड़क हादसे में विकलांग होने पर भी दो लाख रुपये की धनराशि आराम लाभ मिल जाएगा। सबसे खास बात यह है कि यूपी की एक बड़ी आबादी इसमें शामिल हैं, जहां 13 करोड़ से ज्यादा लोगों ने कार्ड बनवाकर लाभ दे रही है। सरकार इन लोगों को अब नई-नई योजनाओं से जोड़ रही है। मोदी सरकार ने असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए कई बेहतरीन सुविधाएं चला रही है। इससे जुड़कर आप मालामाल होने का ख्वाब पूरा कर सकते हैं। इसे सबसे खास पीएम श्रम योगी मान धन योजना, स्वरोजगारों के लिए एनपीएस योजना, पीएम जीवन ज्योति योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा कवर योजना और एपीवाई सहित कई धांसू स्कीम शामिल की गई हैं।
नई दिल्लीः अगर आपका ई-श्रम कार्ड बना हुआ है तो फिर अब आपकी किस्मत जागने जा रही है। सरकार ने इन लोगों को बड़ा फायदा दे रही है, जिससे पहले आप अपना ई-श्रम कार्ड बनवा सकते हैं। अगर आपका ई-श्रम कार्ड नहीं बना हुआ है तो फिर तुरंत बनवा लें। ई-श्रम कार्डधारकों को घऱ बैठे मोटी रकम कमाने का मौका मिल रहा है। सरकार इ-श्रम कार्डधारकों को दो लाख रुपये तक का फायदा दे रही है, जिसके लिए कुछ शर्तें तय की गई हैं। अगर आप सभी शर्तों का पालन करते हैं तो फिर यह खबर बड़े ही काम की साबित होने जा रही है। सबसे पहले आपको ई-श्रम के पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराने की आवश्यकता होगी। मोदी सरकार ने कुछ दिन पहले असंगठित वर्ग के लोगों के ई-श्रम कार्ड बनवाए थे, जिसमें हर किसी ने बढ़चढकर हिस्सा लिया था। इसका असर इतना हुई कि करीब बीस करोड़ से ज्यादा लोगों ने ई-श्रम कार्ड बनवा विया है, जिनके लिए सरकार नए-नए लाभ दे रही है। अब ई-श्रम कार्डधारकों को आराम से दो लाख रुपये का बीमा कवर का लाभ दिया जा रहा है। आपने इसमें रजिस्ट्रेशन कराया है तो फिर आपको किसी सड़क हादसे में विकलांग होने पर भी दो लाख रुपये की धनराशि आराम लाभ मिल जाएगा। सबसे खास बात यह है कि यूपी की एक बड़ी आबादी इसमें शामिल हैं, जहां तेरह करोड़ से ज्यादा लोगों ने कार्ड बनवाकर लाभ दे रही है। सरकार इन लोगों को अब नई-नई योजनाओं से जोड़ रही है। मोदी सरकार ने असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए कई बेहतरीन सुविधाएं चला रही है। इससे जुड़कर आप मालामाल होने का ख्वाब पूरा कर सकते हैं। इसे सबसे खास पीएम श्रम योगी मान धन योजना, स्वरोजगारों के लिए एनपीएस योजना, पीएम जीवन ज्योति योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा कवर योजना और एपीवाई सहित कई धांसू स्कीम शामिल की गई हैं।
कोटा में एक युवक ने दहेज में ऐसी चीज मांगी की चारो तरफ लोग उसकी तारीफ कर रहे हैं। लड़के के सास-ससुर भी कह रहे हैं- हे भगवान ऐसा दामाद सबको देना। कोटा. दहेज हमारे समाज की एक बड़ी बुराई है और दहेज मांगने वाले को आमतौर पर नीच समझा जाता है। समाज में ऐले लोगों की इज्जत भी नहीं होती है, पर कोटा में एक युवक ने दहेज में ऐसी चीज मांगी की चारो तरफ लोग उसकी तारीफ कर रहे हैं। लड़के के सास-ससुर भी कह रहे हैं- हे भगवान ऐसा दामाद सबको देना। कोटा के रहने वाले विवेक गौतम ने जब दहेज की मांग की तो सभी चौक गए। विवेक ने दहेज में सोना चांदी या पैसा नहीं मांगा था। उन्होंने दहेज के रूप में एक गाय की मांग की थी। विवेक की बात सुनकर सभी बहुत खुश हुए। विवेक बचपन से ही गायों से बहुत प्रेम करते हैं और सड़क पर रहने वाली आवारा गायों का भी मुफ्त में इलाज करते रहते हैं। अपनी शादी के समय भी विवेक ने दहेज भी मांगा और समाज सेवा का अपना इरादा भी स्पष्ट कर दिया। अपने इस कार्य से उन्होंने दहेज लेने वालों के मुंह पर तमाचा जड़ा है। विवेक के ससुर ने भी अपने दामाद का समर्थन किया और कहा कि दहेज वास्तव में एक कुप्रथा है और विवेक जैसे लोगों के प्रयास से समाज में बदलाव आने की उम्मीद है।
कोटा में एक युवक ने दहेज में ऐसी चीज मांगी की चारो तरफ लोग उसकी तारीफ कर रहे हैं। लड़के के सास-ससुर भी कह रहे हैं- हे भगवान ऐसा दामाद सबको देना। कोटा. दहेज हमारे समाज की एक बड़ी बुराई है और दहेज मांगने वाले को आमतौर पर नीच समझा जाता है। समाज में ऐले लोगों की इज्जत भी नहीं होती है, पर कोटा में एक युवक ने दहेज में ऐसी चीज मांगी की चारो तरफ लोग उसकी तारीफ कर रहे हैं। लड़के के सास-ससुर भी कह रहे हैं- हे भगवान ऐसा दामाद सबको देना। कोटा के रहने वाले विवेक गौतम ने जब दहेज की मांग की तो सभी चौक गए। विवेक ने दहेज में सोना चांदी या पैसा नहीं मांगा था। उन्होंने दहेज के रूप में एक गाय की मांग की थी। विवेक की बात सुनकर सभी बहुत खुश हुए। विवेक बचपन से ही गायों से बहुत प्रेम करते हैं और सड़क पर रहने वाली आवारा गायों का भी मुफ्त में इलाज करते रहते हैं। अपनी शादी के समय भी विवेक ने दहेज भी मांगा और समाज सेवा का अपना इरादा भी स्पष्ट कर दिया। अपने इस कार्य से उन्होंने दहेज लेने वालों के मुंह पर तमाचा जड़ा है। विवेक के ससुर ने भी अपने दामाद का समर्थन किया और कहा कि दहेज वास्तव में एक कुप्रथा है और विवेक जैसे लोगों के प्रयास से समाज में बदलाव आने की उम्मीद है।
उत्तर प्रदेश स्थित अयोध्या में प्रस्तावित राम मंदिर के निर्माण के लिए बनाए गए ट्रस्ट- श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र को इलाके के नौ मुस्लिम लोगों ने चिट्ठी लिखी है। कहा गया है कि सरकार द्वारा 67 एकड़ की जमीन राम मंदिर के लिए उपयोग करना मुस्लिमों के दावे को 'पूरी तरह से छीनना' और कानून के विपरीत है। रिपोर्ट के अनुसार चिट्ठी में ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला देते हुए कहा गया है कि साल 1855 के दंगों में 75 मुस्लिम मारे गए और सभी को यहीं दफ्न किया गया। बजट सत्र 2020 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में ऐलान किया था कि अयोध्या में अधिग्रहीत 67 एकड़ जमीन राम मंदिर ट्रस्ट को दी गई है। पीएम ने कहा कि उत्तर प्रदेश अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ जमीन देने पर सहमत हो गया है।
उत्तर प्रदेश स्थित अयोध्या में प्रस्तावित राम मंदिर के निर्माण के लिए बनाए गए ट्रस्ट- श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र को इलाके के नौ मुस्लिम लोगों ने चिट्ठी लिखी है। कहा गया है कि सरकार द्वारा सरसठ एकड़ की जमीन राम मंदिर के लिए उपयोग करना मुस्लिमों के दावे को 'पूरी तरह से छीनना' और कानून के विपरीत है। रिपोर्ट के अनुसार चिट्ठी में ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला देते हुए कहा गया है कि साल एक हज़ार आठ सौ पचपन के दंगों में पचहत्तर मुस्लिम मारे गए और सभी को यहीं दफ्न किया गया। बजट सत्र दो हज़ार बीस के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में ऐलान किया था कि अयोध्या में अधिग्रहीत सरसठ एकड़ जमीन राम मंदिर ट्रस्ट को दी गई है। पीएम ने कहा कि उत्तर प्रदेश अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ जमीन देने पर सहमत हो गया है।
यूपी गेट से राजनगर एक्सटेंशन तक बनाई जाने वाली एलिवेटेड रोड के लिए हिंडन के चौथे पुल के पास सेंट्रल वर्ज पर पिलर्स बनाए जाएंगे। दरअसल, अभी तक 4 लेन रोड के साइड में खाली पड़ी जमीन पर एलिवेटेड रोड के पिलर्स बनाने की तैयारी थी, मगर जब इस जमीन की जांच की गई तो पाया गया कि यहां से गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया की अंडरग्राउंड पाइपलाइन गई हुई है और ये काफी पुरानी है। इसको लेकर जीडीए के अधिकारियों की गेल के अफसरों के साथ मीटिंग भी हुई थी, लेकिन गेल के अधिकारियों ने पाइपलाइन को शिफ्ट करने से मना कर दिया। अब इस जगह को मिट्टी डालकर सड़क के रूप में इस्तेमाल करने का प्लान बनाया गया है। जीडीए के ओएसडी आर. एस. दिवाकर ने बताया कि पहले प्लान था कि हिंडन पुल के पास एलिवेटेड रोड के पिलर्स को किनारे से बनाया जाएगा, ताकि ट्रैफिक पर कोई असर न पड़े, मगर अब पाइपलाइन शिफ्ट न होने की वजह से यहां खाली पड़ी जगह पर मिट्टी डालकर उसको नई सड़क के लेवल में लाया जाएगा, तब यहां सेंट्रल वर्ज पर पिलर्स बनाने का काम हो सकेगा। इससे ट्रैफिक जाम की समस्या से भी राहत हो जाएगी। उन्होंने बताया कि एलिवेटेड रोड का काम तीन चरण में हो रहा है। पहले चरण में यूपी गेट से कनावनी पुलिया, दूसरे चरण में कनावनी पुलिया से रेलवे पुल और तीसरे चरण में रेलवे पुल से राजनगर एक्सटेंशन तक एलिवेटेड रोड बनाई जानी हैं। ऐसे में काम के दौरान बिजली और गैस कंपनियों की जो भी छोटी लाइनें आएंगे उन्हें शिफ्ट कराया जाएगा। कुछ ही जगहों पर पाइपलाइन शिफ्ट करने में समस्या आ रही है। इसलिए वहां दूसरे विकल्प तलाशे जा रहे हैं।
यूपी गेट से राजनगर एक्सटेंशन तक बनाई जाने वाली एलिवेटेड रोड के लिए हिंडन के चौथे पुल के पास सेंट्रल वर्ज पर पिलर्स बनाए जाएंगे। दरअसल, अभी तक चार लेन रोड के साइड में खाली पड़ी जमीन पर एलिवेटेड रोड के पिलर्स बनाने की तैयारी थी, मगर जब इस जमीन की जांच की गई तो पाया गया कि यहां से गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया की अंडरग्राउंड पाइपलाइन गई हुई है और ये काफी पुरानी है। इसको लेकर जीडीए के अधिकारियों की गेल के अफसरों के साथ मीटिंग भी हुई थी, लेकिन गेल के अधिकारियों ने पाइपलाइन को शिफ्ट करने से मना कर दिया। अब इस जगह को मिट्टी डालकर सड़क के रूप में इस्तेमाल करने का प्लान बनाया गया है। जीडीए के ओएसडी आर. एस. दिवाकर ने बताया कि पहले प्लान था कि हिंडन पुल के पास एलिवेटेड रोड के पिलर्स को किनारे से बनाया जाएगा, ताकि ट्रैफिक पर कोई असर न पड़े, मगर अब पाइपलाइन शिफ्ट न होने की वजह से यहां खाली पड़ी जगह पर मिट्टी डालकर उसको नई सड़क के लेवल में लाया जाएगा, तब यहां सेंट्रल वर्ज पर पिलर्स बनाने का काम हो सकेगा। इससे ट्रैफिक जाम की समस्या से भी राहत हो जाएगी। उन्होंने बताया कि एलिवेटेड रोड का काम तीन चरण में हो रहा है। पहले चरण में यूपी गेट से कनावनी पुलिया, दूसरे चरण में कनावनी पुलिया से रेलवे पुल और तीसरे चरण में रेलवे पुल से राजनगर एक्सटेंशन तक एलिवेटेड रोड बनाई जानी हैं। ऐसे में काम के दौरान बिजली और गैस कंपनियों की जो भी छोटी लाइनें आएंगे उन्हें शिफ्ट कराया जाएगा। कुछ ही जगहों पर पाइपलाइन शिफ्ट करने में समस्या आ रही है। इसलिए वहां दूसरे विकल्प तलाशे जा रहे हैं।
विकास एआई द्वारा संचालित संक्षिप्त सारांश के लिए 'सारांश सामग्री' पर क्लिक करें। श्री निकोलस बरजो, ग्राम - कल्हाटोली, प्रखंड - कोलेबिरा, जिला - सिमडेगा के रहने वाले एक शिक्षित बेरोजगार हैं। इनका जन्म एक आदिवासी किसान परिवार में हुआ था। निकोलस ने उच्चत्तर माध्यमिक तक की शिक्षा प्राप्त करने के बाद रोजगार/नौकरी के लिए बहुत प्रयास किया, पर सफलता नहीं मिली। किसान परिवार से होने के कारण शुरू से ही खेती के प्रति उनका लगाव था। वे पारंपरिक विधि से सभी फसलों की खेती किया करते थे, किन्तु मेहनत करने पर भी उत्पादन बहुत कम होता था। जिसके कारण परिवार का भरण-पोषण करने में भी कठिनाई होती थी। एक दिन उन्होंने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन, सिमडेगा के द्वारा चलाये जा रहे कृषक प्रक्षेत्र पाठशाला कार्यक्रम में भाग लिया, जिसमें यह बतलाया गया कि वैज्ञानिक विधि अपनाकर उत्पादन में वृद्धि किया जा सकता है। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें भारत सरकार द्वारा सम्पोषित राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन योजना अंतर्गत आयोजित संकुल प्रत्यक्षण के माध्यम से उरद कही खेती के बारे में बताया गया। जिससे वे काफी प्रभावित हुए और उन्होंने अपनी खेत में उरद का प्रत्यक्षण करने का विचार किया। आत्मा - सिमडेगा के कार्यालय में जाकर उन्होंने परियोजना निदेशक से भेंट की और प्रत्यक्षण के बारे में विस्तृत जानकारी ली। परियोजना निदेशक आत्मा, सिमडेगा से उरद की खेती करने की इच्छा व्यक्त करने पर श्री निकोलस को शत प्रतिशत अनुदान पर 0.2 हें. क्षेत्र के लिए उरद के 4.0 किलो उन्नत बीज (T9) तथा 1.0 हें. क्षेत्र के लिए अन्य उपादान जैसे - चूना - 3 क्विं., बोरेक्स - 10 किलो, यूरिया - 10 किलो, बीजोपचार हेतु कार्बेन्डाजिम (बेवीस्टीन) उपलब्ध कराया गया। निकोलस को 0.8 हें. क्षेत्र के लिए 16.0 किलो उन्नत किस्म का उरद बीज भी पचास प्रतिशत अनुदान पर दिया गया। अधिक उत्पादन के लिए जीवाणु खाद जैसे राईजोबियम कल्चर 100 ग्राम x 5 पैकेट, पी.एस.बी. के 100 ग्राम x 5 पैकेट, शतप्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराया गया तथा प्रशिक्षण के दौरान राईजोबियम कल्चर के उपयोग हेतु जानकारी दी गई, जिसका श्री निकोलस ने अक्षरशः पालन कर बीज की बुआई की। बुआई के पूर्व खेत में चूना 3.0 क्विं. तथा एक ट्रैक्टर सड़ा हुआ गोबर का खाद भी मिलाया। बीज की बुआई 30 सें.मी. पंक्ति से पंक्ति तथा 10 सें. मी. बीज से बीज की दूरी बनाते हुए की। बीज का संतोषप्रद अंकुरण हुआ। निकोलस ने दो बार निकाई-गुड़ाई की। पहली निकाई-गुड़ाई बुआई के 20-25 दिनों के बाद तथा दूसरी बुआई के 40-45 दिनों बाद। फसल को कीट तथा व्याधि से बचाने के लिए आत्मा, सिमडेगा के अंतर्गत पदस्थापित राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन योजना तथा आत्मा के तकनीकी विशेषज्ञ समय-समय पर फसल का निरीक्षण करते रहे और फेरोमोन ट्रेप + ल्यूर तथा फसल पर लगने वाले भुआ पिल्लू से बचाव के लिए डायक्लोभॉस तरल कीटनाशी, कवक जनित रोगों से बचाव के लिए कार्बेन्डाजिम, मेनकोजेब तथा विषाणु जनित रोगों के लिए मेटासिस्टॉक्स का छिड़काव किया गया। श्री निकोलस के फसल के देखकर आस-पास के पंचायत एवं प्रखंडों के किसान उरद की खेती देखने आने लगे और फसल देखकर इसे लगाने की तकनीकी के बारे में निकोलस जी से जानकारी प्राप्त करने लगे। फसल की कटाई परियोजना निदेशक आत्मा, सिमडेगा एवं उनके विशेषज्ञों की उपस्थिति में हुई। प्रक्षेत्र दिवस-सह-किसान गोष्ठी का कार्यक्रम श्री निकोलस के खेत पर हुआ। कटनी के पश्चात कुल दाना का उपज 22.50 क्विं./हें. हुआ। डंठल तथा भूसा का व्यवहार निकोलस ने खाद रूप में लिया। 15 क्विं. बीज अपने गाँव तथा आस-पास के गाँवों के किसानों को बेचा। शेष दाना का उपयोग दाल के रूप में किया। खाने के बाद जो बचा, आवश्यकतानुसार समय-समय पर उसकी बिक्री भी की। आज श्री निकोलस बारजो अपने गाँव ही नहीं बल्कि पूरे प्रखंड में कृषकों के लिए प्रेरणा श्रोत बने हुए हैं और वैज्ञानिक विधि द्वारा उरद की खेती करने के लिए अन्य कृषकों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। इनकी सफलता को देखकर इनके गाँव के पुरुष एवं महिला कृषकों ने अगले खरीफ में वैज्ञानिक विधि से उरद की खेती करने का निश्चय किया है। उरद की खेती ने निकोलस को खेती की ओर आकर्षित किया। निकोलस जी ने आत्मा, सिमडेगा के सहयोग से फसलों के साथ-साथ गौ पालन, मुर्गी पालन, बकरी पालन आदि का प्रशिक्षण प्राप्त कर अपनी आजीविका को नया आयाम दिया है। अन्य गाँवों के किसान आज श्री निकोलस की सलाह पर खेती कर रहे हैं। उन्नत तकनीकी से उरद की खेती कर श्री निकोलस ने आज जिला के प्रगतिशील किसानों की सूची में खुद को शामिल कर लिया है। वे कहते हैं राष्ट्रीय खाद्य मिशन द्वारा संचालित विभिन्न फसलों से संबंधित कार्यक्रम आज किसानों के लिए रोजगार तथा धनोपार्जन का माध्यम साबित हो रहा है। निकोलस आज वैज्ञानिक विधि से उरद की खेती कर अपनी आमदनी बढ़ाने में जुटे हैं। आमदनी बढ़ी तो निकोलस की सामाजिक प्रतिष्ठा भी बढ़ी। आज निकोलस जहाँ अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दे रहे हैं, वहीं उन्नत कृषि यंत्रों जैसे सिंचाई पंप, पाइप आदि के सहारे एक साथ कई फसलें उगा रहे हैं। ( यदि आपके पास उपरोक्त सामग्री पर कोई टिप्पणी / सुझाव हैं, तो कृपया उन्हें यहां पोस्ट करें)
विकास एआई द्वारा संचालित संक्षिप्त सारांश के लिए 'सारांश सामग्री' पर क्लिक करें। श्री निकोलस बरजो, ग्राम - कल्हाटोली, प्रखंड - कोलेबिरा, जिला - सिमडेगा के रहने वाले एक शिक्षित बेरोजगार हैं। इनका जन्म एक आदिवासी किसान परिवार में हुआ था। निकोलस ने उच्चत्तर माध्यमिक तक की शिक्षा प्राप्त करने के बाद रोजगार/नौकरी के लिए बहुत प्रयास किया, पर सफलता नहीं मिली। किसान परिवार से होने के कारण शुरू से ही खेती के प्रति उनका लगाव था। वे पारंपरिक विधि से सभी फसलों की खेती किया करते थे, किन्तु मेहनत करने पर भी उत्पादन बहुत कम होता था। जिसके कारण परिवार का भरण-पोषण करने में भी कठिनाई होती थी। एक दिन उन्होंने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन, सिमडेगा के द्वारा चलाये जा रहे कृषक प्रक्षेत्र पाठशाला कार्यक्रम में भाग लिया, जिसमें यह बतलाया गया कि वैज्ञानिक विधि अपनाकर उत्पादन में वृद्धि किया जा सकता है। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें भारत सरकार द्वारा सम्पोषित राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन योजना अंतर्गत आयोजित संकुल प्रत्यक्षण के माध्यम से उरद कही खेती के बारे में बताया गया। जिससे वे काफी प्रभावित हुए और उन्होंने अपनी खेत में उरद का प्रत्यक्षण करने का विचार किया। आत्मा - सिमडेगा के कार्यालय में जाकर उन्होंने परियोजना निदेशक से भेंट की और प्रत्यक्षण के बारे में विस्तृत जानकारी ली। परियोजना निदेशक आत्मा, सिमडेगा से उरद की खेती करने की इच्छा व्यक्त करने पर श्री निकोलस को शत प्रतिशत अनुदान पर शून्य.दो हें. क्षेत्र के लिए उरद के चार.शून्य किलो उन्नत बीज तथा एक.शून्य हें. क्षेत्र के लिए अन्य उपादान जैसे - चूना - तीन क्विं., बोरेक्स - दस किलो, यूरिया - दस किलो, बीजोपचार हेतु कार्बेन्डाजिम उपलब्ध कराया गया। निकोलस को शून्य.आठ हें. क्षेत्र के लिए सोलह.शून्य किलो उन्नत किस्म का उरद बीज भी पचास प्रतिशत अनुदान पर दिया गया। अधिक उत्पादन के लिए जीवाणु खाद जैसे राईजोबियम कल्चर एक सौ ग्राम x पाँच पैकेट, पी.एस.बी. के एक सौ ग्राम x पाँच पैकेट, शतप्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराया गया तथा प्रशिक्षण के दौरान राईजोबियम कल्चर के उपयोग हेतु जानकारी दी गई, जिसका श्री निकोलस ने अक्षरशः पालन कर बीज की बुआई की। बुआई के पूर्व खेत में चूना तीन.शून्य क्विं. तथा एक ट्रैक्टर सड़ा हुआ गोबर का खाद भी मिलाया। बीज की बुआई तीस सें.मी. पंक्ति से पंक्ति तथा दस सें. मी. बीज से बीज की दूरी बनाते हुए की। बीज का संतोषप्रद अंकुरण हुआ। निकोलस ने दो बार निकाई-गुड़ाई की। पहली निकाई-गुड़ाई बुआई के बीस-पच्चीस दिनों के बाद तथा दूसरी बुआई के चालीस-पैंतालीस दिनों बाद। फसल को कीट तथा व्याधि से बचाने के लिए आत्मा, सिमडेगा के अंतर्गत पदस्थापित राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन योजना तथा आत्मा के तकनीकी विशेषज्ञ समय-समय पर फसल का निरीक्षण करते रहे और फेरोमोन ट्रेप + ल्यूर तथा फसल पर लगने वाले भुआ पिल्लू से बचाव के लिए डायक्लोभॉस तरल कीटनाशी, कवक जनित रोगों से बचाव के लिए कार्बेन्डाजिम, मेनकोजेब तथा विषाणु जनित रोगों के लिए मेटासिस्टॉक्स का छिड़काव किया गया। श्री निकोलस के फसल के देखकर आस-पास के पंचायत एवं प्रखंडों के किसान उरद की खेती देखने आने लगे और फसल देखकर इसे लगाने की तकनीकी के बारे में निकोलस जी से जानकारी प्राप्त करने लगे। फसल की कटाई परियोजना निदेशक आत्मा, सिमडेगा एवं उनके विशेषज्ञों की उपस्थिति में हुई। प्रक्षेत्र दिवस-सह-किसान गोष्ठी का कार्यक्रम श्री निकोलस के खेत पर हुआ। कटनी के पश्चात कुल दाना का उपज बाईस.पचास क्विं./हें. हुआ। डंठल तथा भूसा का व्यवहार निकोलस ने खाद रूप में लिया। पंद्रह क्विं. बीज अपने गाँव तथा आस-पास के गाँवों के किसानों को बेचा। शेष दाना का उपयोग दाल के रूप में किया। खाने के बाद जो बचा, आवश्यकतानुसार समय-समय पर उसकी बिक्री भी की। आज श्री निकोलस बारजो अपने गाँव ही नहीं बल्कि पूरे प्रखंड में कृषकों के लिए प्रेरणा श्रोत बने हुए हैं और वैज्ञानिक विधि द्वारा उरद की खेती करने के लिए अन्य कृषकों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। इनकी सफलता को देखकर इनके गाँव के पुरुष एवं महिला कृषकों ने अगले खरीफ में वैज्ञानिक विधि से उरद की खेती करने का निश्चय किया है। उरद की खेती ने निकोलस को खेती की ओर आकर्षित किया। निकोलस जी ने आत्मा, सिमडेगा के सहयोग से फसलों के साथ-साथ गौ पालन, मुर्गी पालन, बकरी पालन आदि का प्रशिक्षण प्राप्त कर अपनी आजीविका को नया आयाम दिया है। अन्य गाँवों के किसान आज श्री निकोलस की सलाह पर खेती कर रहे हैं। उन्नत तकनीकी से उरद की खेती कर श्री निकोलस ने आज जिला के प्रगतिशील किसानों की सूची में खुद को शामिल कर लिया है। वे कहते हैं राष्ट्रीय खाद्य मिशन द्वारा संचालित विभिन्न फसलों से संबंधित कार्यक्रम आज किसानों के लिए रोजगार तथा धनोपार्जन का माध्यम साबित हो रहा है। निकोलस आज वैज्ञानिक विधि से उरद की खेती कर अपनी आमदनी बढ़ाने में जुटे हैं। आमदनी बढ़ी तो निकोलस की सामाजिक प्रतिष्ठा भी बढ़ी। आज निकोलस जहाँ अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दे रहे हैं, वहीं उन्नत कृषि यंत्रों जैसे सिंचाई पंप, पाइप आदि के सहारे एक साथ कई फसलें उगा रहे हैं।
आ तो कोजी करी । म्हारा वरग रा छोरां नैं ई अबै काणी चईजै । आजकालै बै भणबा में चित-मन कोनी राखै । हर बगत आई बात कै म्हें काणी सांभळया जास्यां नंईतर थैं ई कैवौ ।' हूँ बोल्यौ : 'तो थोड़ी-बोत कैयां करौ !' बै बोल्याः 'पण कैणौ आवै कींनै है ? अंक ई काणी आंवती हुवै जणां कैवां नीं?' हूँ मूंछयां में मुळकतौ रैयौ । दूजै दिन दीतवार हो । हूँ बडा साब सूं मिलया गयौ । साब बोल्या : 'हैडमास्टरजी कैता हा के थैं तोआखी बगत काणी ई कैयां करौ हो । हूँ बोल्यौः 'हाँ साब' हणै- अबार तौ काण्यां ई चाल रैयी है। साब पूछ्यौ : 'जणां प्रयोग कद करस्यौ ? पाठ्यक्रम पूरौ कियां हूसी ?" हूँ कैयौः 'प्रयोग तो साब चालू ई है। सिक्पकां अर निसाळियां नै ओक-दूजा रै नैड़ा लाबा में काणी कित्ती जादूगरी नीवड़े, ई चीज रौ हूँ खुदौखुद अनभव कर रैयौ हूँ। जिका छोरा पैलड़ै दिन मनै सुणता ई नी हा अर जिका मनै 'हा-हा, हू-हू' कर र अमूजौ अणा देता, बै ई काण्यां सुणबा नै मिळतां ई स्यांत होयग्या है। बै म्हारै खांनी हेत सूं जोवै। म्हारौ कैयौ मानै । कैवूं बियां ई बैठे अर 'चुप रैवौ, गड़बड़ नंई' इयां तो मनै कैणौ ई नी पड़े ! निसाळ सूं बै टोक्यां ई कोनी टुरै । बडा साय बोल्याः 'भलौ, आ तो ठा पड़ी। पण अबै नुंवी रीत-भांत सूं पढ़ाणौ कद सरू करणौ है ?" हूँ कैयौः' क्यूं साब पढ़ाबा-सिखाबा री आ ई तौ नुंवी रीत है। काणी रै मारफत आज ब्यौस्ता सिखा रैया हां, अभिमुखता री त्यारी करा रैया हां. भाषा री शुद्धि अर साहित्य री जाणकारी देय रैया हां। काल कीं दूजी बातां री सिखाई भणाई चालैला ।' साय बोल्याः 'निगै राखीज्यौ, काणी ई काणी मे बरस नी वै ज्यावै ' धौळे दिन से सुपनौ/२०
आ तो कोजी करी । म्हारा वरग रा छोरां नैं ई अबै काणी चईजै । आजकालै बै भणबा में चित-मन कोनी राखै । हर बगत आई बात कै म्हें काणी सांभळया जास्यां नंईतर थैं ई कैवौ ।' हूँ बोल्यौ : 'तो थोड़ी-बोत कैयां करौ !' बै बोल्याः 'पण कैणौ आवै कींनै है ? अंक ई काणी आंवती हुवै जणां कैवां नीं?' हूँ मूंछयां में मुळकतौ रैयौ । दूजै दिन दीतवार हो । हूँ बडा साब सूं मिलया गयौ । साब बोल्या : 'हैडमास्टरजी कैता हा के थैं तोआखी बगत काणी ई कैयां करौ हो । हूँ बोल्यौः 'हाँ साब' हणै- अबार तौ काण्यां ई चाल रैयी है। साब पूछ्यौ : 'जणां प्रयोग कद करस्यौ ? पाठ्यक्रम पूरौ कियां हूसी ?" हूँ कैयौः 'प्रयोग तो साब चालू ई है। सिक्पकां अर निसाळियां नै ओक-दूजा रै नैड़ा लाबा में काणी कित्ती जादूगरी नीवड़े, ई चीज रौ हूँ खुदौखुद अनभव कर रैयौ हूँ। जिका छोरा पैलड़ै दिन मनै सुणता ई नी हा अर जिका मनै 'हा-हा, हू-हू' कर र अमूजौ अणा देता, बै ई काण्यां सुणबा नै मिळतां ई स्यांत होयग्या है। बै म्हारै खांनी हेत सूं जोवै। म्हारौ कैयौ मानै । कैवूं बियां ई बैठे अर 'चुप रैवौ, गड़बड़ नंई' इयां तो मनै कैणौ ई नी पड़े ! निसाळ सूं बै टोक्यां ई कोनी टुरै । बडा साय बोल्याः 'भलौ, आ तो ठा पड़ी। पण अबै नुंवी रीत-भांत सूं पढ़ाणौ कद सरू करणौ है ?" हूँ कैयौः' क्यूं साब पढ़ाबा-सिखाबा री आ ई तौ नुंवी रीत है। काणी रै मारफत आज ब्यौस्ता सिखा रैया हां, अभिमुखता री त्यारी करा रैया हां. भाषा री शुद्धि अर साहित्य री जाणकारी देय रैया हां। काल कीं दूजी बातां री सिखाई भणाई चालैला ।' साय बोल्याः 'निगै राखीज्यौ, काणी ई काणी मे बरस नी वै ज्यावै ' धौळे दिन से सुपनौ/बीस
सोचिए, मीडिया के लोग वैसे तो पूरे देश समाज सत्ता की पोल खोलने के लिए जाने जाते हैं लेकिन जब इनकी पोल खुलती है तो ये कैसे पागल होकर हिंसक हो उठते हैं... जिसका पेशा कलम के जरिए दूसरों की पोल खोलना और आलोचना करना हो, वह खुद की सही-सही आलोचना छापे जाने से तिलमिलाकर कलम छोड़ बाहुबल पर उतर जाता हो, उसे क्या कहेंगे? पत्रकार के वेश में अपराधी या पत्रकार के वेश में पशु या पत्रकार के वेश में लंपट? आजतक के ब्यूरो चीफ का हुआ स्टिंग? आजतक प्रबंधन ने अपने ब्यूरो चीफ को बर्खास्त किया? महुआ न्यूज चैनल के हिस्से हो गए भूपेंद्र नारायण सिंह भुप्पी! हमलावरों भुप्पी और अनुराग के घर का एड्रेस चाहिए ताकि उन्हें 'गेट वेल सून' कहते हुए फूल सौंप सकें! क्या 'भड़ास टास्क फोर्स' बनाने का वक्त आ गया है? हे ईश्वर, हमलावर भुप्पी और अनुराग को क्षमा करना, वे नहीं जानते कि वे क्या कर रहे हैं. . पत्रकारिता में 'सुपारी किलर' और 'शार्प शूटर' घुस आए हैं, इनकी रोकथाम न हुई तो सबके चश्मे टूटेंगे! दो बददिमाग और मानसिक रूप से विक्षिप्त कथित पत्रकारों द्वारा यशवंत पर किये गए हमले पर हमारी बिरादरी को क्यों सांप सूंघ गया? यशवंत किसी विचारधारा-गिरोहबाजी के आधार पर किसी को रियायत नहीं देते, इसलिए गिरोहबाजों ने चुप्पी साध रखी है! क्या 'न्यूजलांड्री' वाले अपराधी और मानसिक रोगी पत्रकार अनुराग त्रिपाठी को नौकरी से निकालेंगे? यशवंत सिंह पर कैसे हुआ हमला, सुनिए उनकी जुबानी (देखें वीडियो) यशवंत पर हमले का मामला : अब तो प्रेस क्लब आफ इंडिया में ही पत्रकार सुरक्षित नहीं!
सोचिए, मीडिया के लोग वैसे तो पूरे देश समाज सत्ता की पोल खोलने के लिए जाने जाते हैं लेकिन जब इनकी पोल खुलती है तो ये कैसे पागल होकर हिंसक हो उठते हैं... जिसका पेशा कलम के जरिए दूसरों की पोल खोलना और आलोचना करना हो, वह खुद की सही-सही आलोचना छापे जाने से तिलमिलाकर कलम छोड़ बाहुबल पर उतर जाता हो, उसे क्या कहेंगे? पत्रकार के वेश में अपराधी या पत्रकार के वेश में पशु या पत्रकार के वेश में लंपट? आजतक के ब्यूरो चीफ का हुआ स्टिंग? आजतक प्रबंधन ने अपने ब्यूरो चीफ को बर्खास्त किया? महुआ न्यूज चैनल के हिस्से हो गए भूपेंद्र नारायण सिंह भुप्पी! हमलावरों भुप्पी और अनुराग के घर का एड्रेस चाहिए ताकि उन्हें 'गेट वेल सून' कहते हुए फूल सौंप सकें! क्या 'भड़ास टास्क फोर्स' बनाने का वक्त आ गया है? हे ईश्वर, हमलावर भुप्पी और अनुराग को क्षमा करना, वे नहीं जानते कि वे क्या कर रहे हैं. . पत्रकारिता में 'सुपारी किलर' और 'शार्प शूटर' घुस आए हैं, इनकी रोकथाम न हुई तो सबके चश्मे टूटेंगे! दो बददिमाग और मानसिक रूप से विक्षिप्त कथित पत्रकारों द्वारा यशवंत पर किये गए हमले पर हमारी बिरादरी को क्यों सांप सूंघ गया? यशवंत किसी विचारधारा-गिरोहबाजी के आधार पर किसी को रियायत नहीं देते, इसलिए गिरोहबाजों ने चुप्पी साध रखी है! क्या 'न्यूजलांड्री' वाले अपराधी और मानसिक रोगी पत्रकार अनुराग त्रिपाठी को नौकरी से निकालेंगे? यशवंत सिंह पर कैसे हुआ हमला, सुनिए उनकी जुबानी यशवंत पर हमले का मामला : अब तो प्रेस क्लब आफ इंडिया में ही पत्रकार सुरक्षित नहीं!
नित्थर (कुल्लू)। जिला कुल्लू की उप तहसील नित्थर की दुराह और लोट पंचायतों के पांच दर्जन से अधिक मतदाता इस बार चुनाव में मत का प्रयोग नहीं कर पाएंगे। मतदाता सूची से मतदाताओं के नाम गायब है। अब अंतिम सूची आने के बाद मतदाताओं को अपने मत के अधिकार का प्रयोग करने से वंचित रहना होगा। गौरतलब है कि उप तहसील नित्थर की दुराह और लोट पंचायत 50-60 लोगों को वोट देने के अधिकार से वंचित रहना पड़ेगा। लोगों का कहना है कि उन्होंने सभी दस्तावेज संबंधित अधिकारी को सौंप दिए थे। इसके बावजूद उनके नाम वोटर लिस्ट में शामिल क्यों नहीं हो पाए। सूची में नाम न होने के कारण उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दुराह पंचायत के शरटी गांव के संतोष कुमार ने बताया कि उनके गांव के करीब 25 लोग मतदाता सूची से गायब हैं जबकि उनके बच्चों के नाम भी शामिल नहीं है, जबकि वे वयस्क हैं। संबंधित अधिकारी यशपाल ठाकुर का कहना है कि जिस सूची के लिए उन्होंने ये नाम दिए थे, वे विधानसभा और लोकसभा की मतदाता सूची के लिए थी, जबकि पंचायत चुनाव के लिए अलग से तिथि निर्धारित थी। खंड विकास अधिकारी निरमंड प्रिया नागटा ने कहा कि विकास खंड निरमंड से अब यह संभव नहीं है। बार-बार सूचना देकर लोगों से अपील की थी कि जिसके नाम छूट हैं, वे अपने नाम वोटर लिस्ट में शामिल कर लें। नागटा ने कहा कि पंचायत सचिव से मिलकर इस संबंध में जानकारी ली जा सकती है।
नित्थर । जिला कुल्लू की उप तहसील नित्थर की दुराह और लोट पंचायतों के पांच दर्जन से अधिक मतदाता इस बार चुनाव में मत का प्रयोग नहीं कर पाएंगे। मतदाता सूची से मतदाताओं के नाम गायब है। अब अंतिम सूची आने के बाद मतदाताओं को अपने मत के अधिकार का प्रयोग करने से वंचित रहना होगा। गौरतलब है कि उप तहसील नित्थर की दुराह और लोट पंचायत पचास-साठ लोगों को वोट देने के अधिकार से वंचित रहना पड़ेगा। लोगों का कहना है कि उन्होंने सभी दस्तावेज संबंधित अधिकारी को सौंप दिए थे। इसके बावजूद उनके नाम वोटर लिस्ट में शामिल क्यों नहीं हो पाए। सूची में नाम न होने के कारण उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दुराह पंचायत के शरटी गांव के संतोष कुमार ने बताया कि उनके गांव के करीब पच्चीस लोग मतदाता सूची से गायब हैं जबकि उनके बच्चों के नाम भी शामिल नहीं है, जबकि वे वयस्क हैं। संबंधित अधिकारी यशपाल ठाकुर का कहना है कि जिस सूची के लिए उन्होंने ये नाम दिए थे, वे विधानसभा और लोकसभा की मतदाता सूची के लिए थी, जबकि पंचायत चुनाव के लिए अलग से तिथि निर्धारित थी। खंड विकास अधिकारी निरमंड प्रिया नागटा ने कहा कि विकास खंड निरमंड से अब यह संभव नहीं है। बार-बार सूचना देकर लोगों से अपील की थी कि जिसके नाम छूट हैं, वे अपने नाम वोटर लिस्ट में शामिल कर लें। नागटा ने कहा कि पंचायत सचिव से मिलकर इस संबंध में जानकारी ली जा सकती है।
शायद आप ऐड ब्लॉकर का इस्तेमाल कर रहे हैं। पढ़ना जारी रखने के लिए ऐड ब्लॉकर को बंद करके पेज रिफ्रेश करें। भोजपुरी सिनेमा लवर्स और पवन सिंह के फैंस के लिए यहां है उनका तड़कता-फड़कता गाना 'मेरे मरद महोदय जी'। इस गाने को यूट्यूब पर धुआंधार देखा जा रहा है। गाना फिल्म शेर सिंह से है। गाया है पवन सिंह और प्रियंका सिंह ने। लिरिक्स हैं श्याम देहाती और आजाद सिंह की। देखिए वीडियो।
शायद आप ऐड ब्लॉकर का इस्तेमाल कर रहे हैं। पढ़ना जारी रखने के लिए ऐड ब्लॉकर को बंद करके पेज रिफ्रेश करें। भोजपुरी सिनेमा लवर्स और पवन सिंह के फैंस के लिए यहां है उनका तड़कता-फड़कता गाना 'मेरे मरद महोदय जी'। इस गाने को यूट्यूब पर धुआंधार देखा जा रहा है। गाना फिल्म शेर सिंह से है। गाया है पवन सिंह और प्रियंका सिंह ने। लिरिक्स हैं श्याम देहाती और आजाद सिंह की। देखिए वीडियो।
नई दिल्लीः CNG की कीमत बढ़ा दी गई है। अब आम आदमी पर और बोझ बढ़ गया है। अब आपको CNG के लिए ज्यादा पैसा देने होंगे। यह बढ़ी हुई कीमत 2 मार्च सुबह 6 बजे से लागू होंगी। CNG की कीमत में 70 पैसे और PNG की कीमत में 91 पैसे की बढोत्तरी की गई है। रेट में बढ़ोंत्तरी के बाद दिल्ली में CNG की कीमत 43. 40 रुपए प्रति किलोग्राम और PNG की कीमत 28. 41 रुपए हो गई है। वहीं नोएडा गाजियाबाद में CNG की कीतम 49. 08 रुपए प्रति किलोग्राम और PNG की कीमत 28. 36 रुपए हो गई है। इसके अलावा करनाल और कैथल में भी CNG के दाम में बढ़ोत्तरी की गई है। वहां अब CNG 51. 38 रुपए प्रति किलोग्राम और PNG 28. 46 रुपए में मिलेगी। हालांकि गुरुग्राम में CNG के दाम में कोई बदलाव नही हुआ है वहां CNG के दाम 53. 40 प्रति किलोग्राम है। पेट्रोल, डीजल, सीएनजी के अलावा तेल कंपनियों ने एक बार फिर रसोई गैस की कीमतों में इजाफा किया है। पिछले 4 दिनों में ये दूसरी बढ़त है। देश की सबसे बड़ी ऑयल मार्केटिंग कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL) की एलपीजी ईकाई इंडेन गैस ने पहली मार्च से एलपीजी गैस की कीमतों में 25 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है। ताजा वृद्धि के बाद दिल्ली में एलपीजी की कीमत 819 रुपये हो गई है। जबकि एक महीने पहले दिल्ली में रसोई गैस 719 रुपये में मिल रही थी। आमतौर पर गैस कंपनियां महीने के पहले दिन गैस की नई कीमतें निर्धारित करती हैं। इससे पहले 25 फरवरी को कीमतों में 25 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़त देखने को मिली थी। जो कि फरवरी के महीने में तीसरी बढ़त थी। बीते महीने 14 फरवरी और 4 फरवरी को भी कीमतों में बढ़त दर्ज की गई थी। यानि की बढ़त के साथ बीते एक महीने में 4 बार कीमतें बढ़ गई है। रसोई गैस में बढ़त के बीच आज पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ये लगातार दूसरा दिन रहा जब कीमतें नहीं बदली। सरकार ने हाल ही में संकेत दिए हैं कि अगले एक महीने के अंदर कीमतों में राहत मिल सकती है।
नई दिल्लीः CNG की कीमत बढ़ा दी गई है। अब आम आदमी पर और बोझ बढ़ गया है। अब आपको CNG के लिए ज्यादा पैसा देने होंगे। यह बढ़ी हुई कीमत दो मार्च सुबह छः बजे से लागू होंगी। CNG की कीमत में सत्तर पैसे और PNG की कीमत में इक्यानवे पैसे की बढोत्तरी की गई है। रेट में बढ़ोंत्तरी के बाद दिल्ली में CNG की कीमत तैंतालीस. चालीस रुपयापए प्रति किलोग्राम और PNG की कीमत अट्ठाईस. इकतालीस रुपयापए हो गई है। वहीं नोएडा गाजियाबाद में CNG की कीतम उनचास. आठ रुपयापए प्रति किलोग्राम और PNG की कीमत अट्ठाईस. छत्तीस रुपयापए हो गई है। इसके अलावा करनाल और कैथल में भी CNG के दाम में बढ़ोत्तरी की गई है। वहां अब CNG इक्यावन. अड़तीस रुपयापए प्रति किलोग्राम और PNG अट्ठाईस. छियालीस रुपयापए में मिलेगी। हालांकि गुरुग्राम में CNG के दाम में कोई बदलाव नही हुआ है वहां CNG के दाम तिरेपन. चालीस प्रति किलोग्राम है। पेट्रोल, डीजल, सीएनजी के अलावा तेल कंपनियों ने एक बार फिर रसोई गैस की कीमतों में इजाफा किया है। पिछले चार दिनों में ये दूसरी बढ़त है। देश की सबसे बड़ी ऑयल मार्केटिंग कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड की एलपीजी ईकाई इंडेन गैस ने पहली मार्च से एलपीजी गैस की कीमतों में पच्चीस रुपयापये की बढ़ोतरी कर दी है। ताजा वृद्धि के बाद दिल्ली में एलपीजी की कीमत आठ सौ उन्नीस रुपयापये हो गई है। जबकि एक महीने पहले दिल्ली में रसोई गैस सात सौ उन्नीस रुपयापये में मिल रही थी। आमतौर पर गैस कंपनियां महीने के पहले दिन गैस की नई कीमतें निर्धारित करती हैं। इससे पहले पच्चीस फरवरी को कीमतों में पच्चीस रुपयापये प्रति सिलेंडर की बढ़त देखने को मिली थी। जो कि फरवरी के महीने में तीसरी बढ़त थी। बीते महीने चौदह फरवरी और चार फरवरी को भी कीमतों में बढ़त दर्ज की गई थी। यानि की बढ़त के साथ बीते एक महीने में चार बार कीमतें बढ़ गई है। रसोई गैस में बढ़त के बीच आज पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ये लगातार दूसरा दिन रहा जब कीमतें नहीं बदली। सरकार ने हाल ही में संकेत दिए हैं कि अगले एक महीने के अंदर कीमतों में राहत मिल सकती है।
यहाँ जाकर शिर-पीड़ा का बहाना करके द्वारपाल द्वारा नगाड़े पर घोषणा कराकर राजा ने नगर के सभी बैद्यों को बुलवाया ।। १४८।। और, एक-एक वैद्य को अलग-अलग बुलवाकर पूछने लगा कि तुम्हारे कितने रोगी हैं और तुमने किसे किसे कौन-कौन-सी दवा दी है ? ॥ १४९ ।। उन वैद्यों ने भी, एक-एक करके अपना-अपना विवरण राजा को सुनाया। उनमें से एक वैद्य ने क्रमशः अपनी बारी आने पर राजा से यह कहा ॥ १५० ।। 'महाराज, रोगी मातृदत्त नामक वैश्य को मैंने नागबला नाम की ओषधि बताई थी, आज दूसरा दिन है। यह सुनकर राजा ने मातृदत्त वैश्य को बुलवाकर कहा, ~ तुम्हारे लिए नागबला कौन लाया था ? बताओ ।।१५१-१५२॥ 'महाराज, मेरा भृत्य ( नौकर ) लाया था ।' बनिये के ऐसा उत्तर देने पर राजा ने उस भृत्य को बुलवाकर कहा, 'तू ने नागवला के लिए भूमि खोदते हुए जो मुहरों की राशि प्राप्त की है, वह ब्राह्मण का धन है, उसे दे दे ॥१५३-१५४॥ राजा के ऐसा कहने पर भयभीत नौकर ने, उसी समय मुहरें लाकर वहाँ रख दीं ।।१५५ ।। तदनन्तर राजा ने अनशन करते हुए ब्राह्मण को बुलवाकर, उस कंजूस ब्राह्मण के बाहरी प्राणो के समान चोरी होकर मिली हुई मुहरें उसे दे दी ।। १५६।। इस प्रकार राजा ने वृक्ष के नीचे से ले जाये गये घन को बुद्धिबल से ब्राह्मण को प्राप्त करा दिया; क्योंकि यहाँ उत्पन्न हुई ओषधि को वह जानता था ।॥ १५७॥ अतएव, पुरुषार्थ के ऊपर सदा बुद्धि की प्रधानता रहती है। ऐसे कार्यों में पौरुष क्या कर सकता है ? ॥१५८॥ इसलिए हे योगेश्वर ! तुम भी बुद्धिबल से कुछ ऐसा करना, जिससे कलिंगसेना का कोई दोष जाना जा सके ॥ १५९॥ यह बात तो है कि उस कलिंगसेना पर देवता और असुर सभी ललचा रहे हैं और रात में तुमने ऐसा कुछ शब्द भी सुना है ॥ १६०॥ उसका दोष मिलने पर उसका और हमारा अकल्याण न होगा। राजा उससे विवाह न करेगा, इसलिए अधर्म भी न होगा ॥ १६१॥ उदार बुद्धिवाले यौगन्धरायण से यह सुनकर ब्रह्मराक्षस योगेश्वर प्रसन्न होकर बोला ---।।१६२।।
यहाँ जाकर शिर-पीड़ा का बहाना करके द्वारपाल द्वारा नगाड़े पर घोषणा कराकर राजा ने नगर के सभी बैद्यों को बुलवाया ।। एक सौ अड़तालीस।। और, एक-एक वैद्य को अलग-अलग बुलवाकर पूछने लगा कि तुम्हारे कितने रोगी हैं और तुमने किसे किसे कौन-कौन-सी दवा दी है ? ॥ एक सौ उनचास ।। उन वैद्यों ने भी, एक-एक करके अपना-अपना विवरण राजा को सुनाया। उनमें से एक वैद्य ने क्रमशः अपनी बारी आने पर राजा से यह कहा ॥ एक सौ पचास ।। 'महाराज, रोगी मातृदत्त नामक वैश्य को मैंने नागबला नाम की ओषधि बताई थी, आज दूसरा दिन है। यह सुनकर राजा ने मातृदत्त वैश्य को बुलवाकर कहा, ~ तुम्हारे लिए नागबला कौन लाया था ? बताओ ।।एक सौ इक्यावन-एक सौ बावन॥ 'महाराज, मेरा भृत्य लाया था ।' बनिये के ऐसा उत्तर देने पर राजा ने उस भृत्य को बुलवाकर कहा, 'तू ने नागवला के लिए भूमि खोदते हुए जो मुहरों की राशि प्राप्त की है, वह ब्राह्मण का धन है, उसे दे दे ॥एक सौ तिरेपन-एक सौ चौवन॥ राजा के ऐसा कहने पर भयभीत नौकर ने, उसी समय मुहरें लाकर वहाँ रख दीं ।।एक सौ पचपन ।। तदनन्तर राजा ने अनशन करते हुए ब्राह्मण को बुलवाकर, उस कंजूस ब्राह्मण के बाहरी प्राणो के समान चोरी होकर मिली हुई मुहरें उसे दे दी ।। एक सौ छप्पन।। इस प्रकार राजा ने वृक्ष के नीचे से ले जाये गये घन को बुद्धिबल से ब्राह्मण को प्राप्त करा दिया; क्योंकि यहाँ उत्पन्न हुई ओषधि को वह जानता था ।॥ एक सौ सत्तावन॥ अतएव, पुरुषार्थ के ऊपर सदा बुद्धि की प्रधानता रहती है। ऐसे कार्यों में पौरुष क्या कर सकता है ? ॥एक सौ अट्ठावन॥ इसलिए हे योगेश्वर ! तुम भी बुद्धिबल से कुछ ऐसा करना, जिससे कलिंगसेना का कोई दोष जाना जा सके ॥ एक सौ उनसठ॥ यह बात तो है कि उस कलिंगसेना पर देवता और असुर सभी ललचा रहे हैं और रात में तुमने ऐसा कुछ शब्द भी सुना है ॥ एक सौ साठ॥ उसका दोष मिलने पर उसका और हमारा अकल्याण न होगा। राजा उससे विवाह न करेगा, इसलिए अधर्म भी न होगा ॥ एक सौ इकसठ॥ उदार बुद्धिवाले यौगन्धरायण से यह सुनकर ब्रह्मराक्षस योगेश्वर प्रसन्न होकर बोला ---।।एक सौ बासठ।।
नई दिल्लीः विक्की कौशल (Vicky Kaushal) और कैटरीना कैफ (Katrina Kaif) की जोड़ी अपनी शादी के बाद से ही लगातार चर्चा में बनी हुई है. जिस पर उनके फैंस खूब प्यार लुटाते हैं. साथ ही दोनों को हमेशा साथ देखने की ख्वाहिश जताते रहते हैं. लेकिन इस बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आयी है. जिसने लोगों को हैरान कर दिया है. हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि इस तस्वीर में विक्की किसी और हसीना के साथ दिख रहे हैं. उनकी ये तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है. जिस बारे में आज हम बात करने वाले हैं. आपको बता दें कि ये तस्वीर भले तमाम पैपराजी के ऑफिशियल इंस्टाग्राम पेज से वायरल हो रही हो. लेकिन सबसे पहले इसे फराह खान (Farah Khan Kunder) ने अपनी स्टोरी पर शेयर किया है. वहीं, विक्की कौशल के साथ कोई और नहीं, बल्कि फराह ही दिख रही हैं. दोनों (Vicky Kaushal Farah Khan) फोटो के लिए पोज देते नज़र आ रहे हैं. वहीं, इसके साथ मजेदार कैप्शन देते हुए फराह ने लिखा है, 'सॉरी कैटरीना कैफ. विक्की कौशल को कोई और मिल गया.' उनकी इस फोटो के साथ दिए गए कैप्शन को फैंस खूब पसंद कर रहे हैं. जिस पर कैटरीना कैफ (Katrina Kaif on Vicky Kaushal) ने भी मजेदार अंदाज में रिएक्ट किया. उन्होंने लिखा, 'आपको अनुमति है फराह'. वहीं, विक्की ने भी फराह की ये स्टोरी अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर करते हुए लिखा, 'हम केवल अच्छे दोस्त हैं'. खैर, बात कर ली जाए विक्की और कैटरीना के वर्कफ्रंट की तो जहां एक तरफ विक्की (Vicky Kaushal upcoming movies) के पास 'सैम बहादुर' और 'गोविंदा नाम मेरा' जैसी फिल्में हैं. वहीं, कैटरीना (Katrina Kaif upcoming projects) भी आने वाले दिनों में कई फिल्मों में दिखने वाली हैं. जिनमें 'टाइगर 3', 'मैरी क्रिसमस', 'फोन भूत', 'जी ले जरा' का नाम शामिल है. फैंस दोनों ही कलाकारों की इन फिल्मों के लिए काफी ज्यादा एक्साइटेड हैं.
नई दिल्लीः विक्की कौशल और कैटरीना कैफ की जोड़ी अपनी शादी के बाद से ही लगातार चर्चा में बनी हुई है. जिस पर उनके फैंस खूब प्यार लुटाते हैं. साथ ही दोनों को हमेशा साथ देखने की ख्वाहिश जताते रहते हैं. लेकिन इस बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आयी है. जिसने लोगों को हैरान कर दिया है. हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि इस तस्वीर में विक्की किसी और हसीना के साथ दिख रहे हैं. उनकी ये तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है. जिस बारे में आज हम बात करने वाले हैं. आपको बता दें कि ये तस्वीर भले तमाम पैपराजी के ऑफिशियल इंस्टाग्राम पेज से वायरल हो रही हो. लेकिन सबसे पहले इसे फराह खान ने अपनी स्टोरी पर शेयर किया है. वहीं, विक्की कौशल के साथ कोई और नहीं, बल्कि फराह ही दिख रही हैं. दोनों फोटो के लिए पोज देते नज़र आ रहे हैं. वहीं, इसके साथ मजेदार कैप्शन देते हुए फराह ने लिखा है, 'सॉरी कैटरीना कैफ. विक्की कौशल को कोई और मिल गया.' उनकी इस फोटो के साथ दिए गए कैप्शन को फैंस खूब पसंद कर रहे हैं. जिस पर कैटरीना कैफ ने भी मजेदार अंदाज में रिएक्ट किया. उन्होंने लिखा, 'आपको अनुमति है फराह'. वहीं, विक्की ने भी फराह की ये स्टोरी अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर करते हुए लिखा, 'हम केवल अच्छे दोस्त हैं'. खैर, बात कर ली जाए विक्की और कैटरीना के वर्कफ्रंट की तो जहां एक तरफ विक्की के पास 'सैम बहादुर' और 'गोविंदा नाम मेरा' जैसी फिल्में हैं. वहीं, कैटरीना भी आने वाले दिनों में कई फिल्मों में दिखने वाली हैं. जिनमें 'टाइगर तीन', 'मैरी क्रिसमस', 'फोन भूत', 'जी ले जरा' का नाम शामिल है. फैंस दोनों ही कलाकारों की इन फिल्मों के लिए काफी ज्यादा एक्साइटेड हैं.
वाराणसी में नगर निगम चुनाव प्रक्रिया का आज गुरुवार को तीसरा दिन है। पिछले दो दिनों में किसी बड़े दल की ओर से नामांकन पत्र नहीं खरीदा गया लेकिन आज इसकी संभावना है। इन प्रमुख दलों ने अब तक अपने प्रत्याशियों के पत्ते नहीं खोले लेकिन कांग्रेस ने सबसे पहले प्रत्याशी की घोषणा कर दी। आज कांग्रेस की ओर से नगर निगम में नामांकन पत्र भी खरीदा जाएगा। वहीं अन्य राजनीतिक दल भी प्रत्याशी की घोषणा कर सकते हैं। गुरुवार को चुनावी कार्यक्रम के तीसरे दिन नगर निगम कार्यालय से महापौर के लिए नामांकन पत्रों की बिक्री की जाएगी। सुबह 11 बजे से दोपहर तीन बजे तक मेयर और पार्षद के लिए पर्चे खरीदे जाएंगे। महापौर के प्रत्याशी एडीएम कोर्ट और पार्षद के दावेदान जोन कार्यालय पर नामांकन करेंगे। नामांकन के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है, जहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहेंगे। मेयर का नामांकन बुधवार को कलेक्ट्रेट एडीएम प्रशासन की कोर्ट में होगा। नामांकन के दौरान बैरिकेडिंग और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहेंगे। नामांकन फार्म की बिक्री नगर निगम मुख्यालय सिगरा पर होगी। पार्षद वरुणापार जोन के प्रत्याशियों का नामांकन कार्यालय जोन, वरुणापार, नदेसर में होगा तथा नामांकन फार्म की बिक्री कार्यालय जोन, वरुणापार नदेसर, पार्षद कोतवाली जोन के प्रत्याशियों का नामांकन टाउनहॉल मैदागिन में होगा तथा नामांकन फार्म की बिक्री कार्यालय जोन, कोतवाली मैदागिन, पार्षद आदमपुर जोन के प्रत्याशियों का नामांकन कार्यालय जोन, आदमपुर कज्जाकपुरा में होगा। नामांकन फार्म की बिक्री कार्यालय जोन, आदमपुर कज्जाकपुरा, पार्षद दशाश्वमेध जोन के प्रत्याशियों का नामांकन कार्यालय जोन, दशाश्वमेध बेनियाबाग में होगा। नामांकन फार्म की बिक्री कार्यालय जोन, दशाश्वमेध बेनियाबाग तथा पार्षद भेलूपुर जोन के प्रत्याशियों का नामांकन कार्यालय जोन, भेलूपुर दुर्गाकुंड में होगा तथा नामांकन फार्म की बिक्री कार्यालय जोन, कार्यालय जोन, भेलूपुर दुर्गाकुंड में होगा। जबकि नगर पंचायत गंगापुर के अध्यक्ष एवं सदस्य हेतु प्रत्याशियों का नामांकन तहसील राजातालाब में होगा तथा नामांकन फार्म की बिक्री नगर पंचायत, गंगापुर में होगा। कांग्रेस ने बुधवार रात अधिकृत प्रत्याशी के रूप में अनिल श्रीवास्तव को मैदान में उतारा है। अनिल श्रीवास्तव लंबे समय से कांग्रेस के साथ जुड़े रहे। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के छात्र संघ अध्यक्ष से सक्रिय राजनीति में आकर एनएसयूआई के सदस्य बने और उसके बाद से कांग्रेस पार्टी में कई पदों पर काबिज रहे। वाराणसी में पार्टी के जिला अध्यक्ष, कई जिलों के चुनाव प्रभारी के अलावा कई बार कैंट विधानसभा से चुनाव भी लड़े। This website follows the DNPA Code of Ethics.
वाराणसी में नगर निगम चुनाव प्रक्रिया का आज गुरुवार को तीसरा दिन है। पिछले दो दिनों में किसी बड़े दल की ओर से नामांकन पत्र नहीं खरीदा गया लेकिन आज इसकी संभावना है। इन प्रमुख दलों ने अब तक अपने प्रत्याशियों के पत्ते नहीं खोले लेकिन कांग्रेस ने सबसे पहले प्रत्याशी की घोषणा कर दी। आज कांग्रेस की ओर से नगर निगम में नामांकन पत्र भी खरीदा जाएगा। वहीं अन्य राजनीतिक दल भी प्रत्याशी की घोषणा कर सकते हैं। गुरुवार को चुनावी कार्यक्रम के तीसरे दिन नगर निगम कार्यालय से महापौर के लिए नामांकन पत्रों की बिक्री की जाएगी। सुबह ग्यारह बजे से दोपहर तीन बजे तक मेयर और पार्षद के लिए पर्चे खरीदे जाएंगे। महापौर के प्रत्याशी एडीएम कोर्ट और पार्षद के दावेदान जोन कार्यालय पर नामांकन करेंगे। नामांकन के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है, जहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहेंगे। मेयर का नामांकन बुधवार को कलेक्ट्रेट एडीएम प्रशासन की कोर्ट में होगा। नामांकन के दौरान बैरिकेडिंग और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहेंगे। नामांकन फार्म की बिक्री नगर निगम मुख्यालय सिगरा पर होगी। पार्षद वरुणापार जोन के प्रत्याशियों का नामांकन कार्यालय जोन, वरुणापार, नदेसर में होगा तथा नामांकन फार्म की बिक्री कार्यालय जोन, वरुणापार नदेसर, पार्षद कोतवाली जोन के प्रत्याशियों का नामांकन टाउनहॉल मैदागिन में होगा तथा नामांकन फार्म की बिक्री कार्यालय जोन, कोतवाली मैदागिन, पार्षद आदमपुर जोन के प्रत्याशियों का नामांकन कार्यालय जोन, आदमपुर कज्जाकपुरा में होगा। नामांकन फार्म की बिक्री कार्यालय जोन, आदमपुर कज्जाकपुरा, पार्षद दशाश्वमेध जोन के प्रत्याशियों का नामांकन कार्यालय जोन, दशाश्वमेध बेनियाबाग में होगा। नामांकन फार्म की बिक्री कार्यालय जोन, दशाश्वमेध बेनियाबाग तथा पार्षद भेलूपुर जोन के प्रत्याशियों का नामांकन कार्यालय जोन, भेलूपुर दुर्गाकुंड में होगा तथा नामांकन फार्म की बिक्री कार्यालय जोन, कार्यालय जोन, भेलूपुर दुर्गाकुंड में होगा। जबकि नगर पंचायत गंगापुर के अध्यक्ष एवं सदस्य हेतु प्रत्याशियों का नामांकन तहसील राजातालाब में होगा तथा नामांकन फार्म की बिक्री नगर पंचायत, गंगापुर में होगा। कांग्रेस ने बुधवार रात अधिकृत प्रत्याशी के रूप में अनिल श्रीवास्तव को मैदान में उतारा है। अनिल श्रीवास्तव लंबे समय से कांग्रेस के साथ जुड़े रहे। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के छात्र संघ अध्यक्ष से सक्रिय राजनीति में आकर एनएसयूआई के सदस्य बने और उसके बाद से कांग्रेस पार्टी में कई पदों पर काबिज रहे। वाराणसी में पार्टी के जिला अध्यक्ष, कई जिलों के चुनाव प्रभारी के अलावा कई बार कैंट विधानसभा से चुनाव भी लड़े। This website follows the DNPA Code of Ethics.
मकर संक्रांति के दिन सूर्यदेव धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश किया था। उस समय उन्होंने शनिदेव को धन-संपत्ति का आशीर्वाद किया था। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही खरमास या धनुर्मास भी समाप्त हो जाएगा। आचार्य इंदु प्रकाश के अनुसार मकर संक्रांति के मौके पर स्नान-दान के साथ-साथ कुछ खास उपाय भी अपनाने चाहिए। इससे आपको सुख-शांति के साथ धनलाभ भी मिलेगा। मकर संक्रांति के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर, सूर्य के उगने पर तांबे के लोटे या गिलास में शुद्ध जल लेकर, उसमें कुमकुम और लाल फूल डालकर भगवान को अर्घ्य दें । फिर कुश के आसन पर बैठकर सूर्य गायत्री मंत्र का इच्छानुसार जाप करें । मंत्र है- ऊं आदित्याय विदमहे दिवाकराय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात्। । अपने सुख-सौभाग्य में वृद्धि के लिये मकर संक्रांति के दिन चौदह की संख्या में किसी भी एक चीज़ का सुहागिन औरतों को दान करना चाहिए। सूर्यदेव के शुभ फल प्राप्त करने के लिये कल गुड़ और कच्चे चावल बहते हुए जल में प्रवाहित करें। अपने मन की कोई इच्छा पूरी करना चाहते हैं, तो मकर संक्रांति को तांबे का सिक्का या तांबे का चौकोर टुकड़ा बहते पानी में प्रवाहित करें, साथ ही एक लाल कपड़े में गेहूं और गुड़ बांधकर किसी जरूरमंद को दान करें।
मकर संक्रांति के दिन सूर्यदेव धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश किया था। उस समय उन्होंने शनिदेव को धन-संपत्ति का आशीर्वाद किया था। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही खरमास या धनुर्मास भी समाप्त हो जाएगा। आचार्य इंदु प्रकाश के अनुसार मकर संक्रांति के मौके पर स्नान-दान के साथ-साथ कुछ खास उपाय भी अपनाने चाहिए। इससे आपको सुख-शांति के साथ धनलाभ भी मिलेगा। मकर संक्रांति के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर, सूर्य के उगने पर तांबे के लोटे या गिलास में शुद्ध जल लेकर, उसमें कुमकुम और लाल फूल डालकर भगवान को अर्घ्य दें । फिर कुश के आसन पर बैठकर सूर्य गायत्री मंत्र का इच्छानुसार जाप करें । मंत्र है- ऊं आदित्याय विदमहे दिवाकराय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात्। । अपने सुख-सौभाग्य में वृद्धि के लिये मकर संक्रांति के दिन चौदह की संख्या में किसी भी एक चीज़ का सुहागिन औरतों को दान करना चाहिए। सूर्यदेव के शुभ फल प्राप्त करने के लिये कल गुड़ और कच्चे चावल बहते हुए जल में प्रवाहित करें। अपने मन की कोई इच्छा पूरी करना चाहते हैं, तो मकर संक्रांति को तांबे का सिक्का या तांबे का चौकोर टुकड़ा बहते पानी में प्रवाहित करें, साथ ही एक लाल कपड़े में गेहूं और गुड़ बांधकर किसी जरूरमंद को दान करें।
Priyanka Chaturvedi: प्रियंका चतुर्वेदी ने संसद टीवी के शो की एंकर का पद छोड़ दिया है. उन्होंने इस्तीफा दे दिया है. इससे पहले उन्हें संसद के शीतकालीन सत्र से निलंबित किया गया था. चतुर्वेदी ने नायडू और लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला को इस जिम्मेदारी के योग्य समझने और अवसर देने के लिए धन्यवाद भी कहा है. अगस्त में पिछले सत्र में अपने 'अशांत' आचरण के लिए संसद के पूरे शीतकालीन सत्र से 12 विपक्षी सांसदों को राज्यसभा से निलंबित कर दिया गया है (Priyanka Chaturvedi News). विपक्ष ने निलंबन को उच्च सदन के 'अलोकतांत्रिक और प्रक्रिया के सभी नियमों का उल्लंघन' करार दिया है. निलंबित सांसदों में कांग्रेस के छह, तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना के दो-दो और सीपीआई और सीपीआई (एम) के एक-एक सांसद शामिल हैं. ये संसद परिसर के अंदर महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) की प्रतिमा के सामने दिनभर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और उन्होंने निलंबन रद्द होने तक हर दिन ऐसा करना जारी रखने का फैसला किया है. प्रियंका चतुर्वेदी ने इससे पहले केंद्र को 'कमजोर' करार दिया था और उस नियम 256 का हवाला दिया था, जो राज्यसभा के एक सदस्य को संसद के शेष सत्र के लिए निलंबित करने की अनुमति नहीं देता है.
Priyanka Chaturvedi: प्रियंका चतुर्वेदी ने संसद टीवी के शो की एंकर का पद छोड़ दिया है. उन्होंने इस्तीफा दे दिया है. इससे पहले उन्हें संसद के शीतकालीन सत्र से निलंबित किया गया था. चतुर्वेदी ने नायडू और लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला को इस जिम्मेदारी के योग्य समझने और अवसर देने के लिए धन्यवाद भी कहा है. अगस्त में पिछले सत्र में अपने 'अशांत' आचरण के लिए संसद के पूरे शीतकालीन सत्र से बारह विपक्षी सांसदों को राज्यसभा से निलंबित कर दिया गया है . विपक्ष ने निलंबन को उच्च सदन के 'अलोकतांत्रिक और प्रक्रिया के सभी नियमों का उल्लंघन' करार दिया है. निलंबित सांसदों में कांग्रेस के छह, तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना के दो-दो और सीपीआई और सीपीआई के एक-एक सांसद शामिल हैं. ये संसद परिसर के अंदर महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने दिनभर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और उन्होंने निलंबन रद्द होने तक हर दिन ऐसा करना जारी रखने का फैसला किया है. प्रियंका चतुर्वेदी ने इससे पहले केंद्र को 'कमजोर' करार दिया था और उस नियम दो सौ छप्पन का हवाला दिया था, जो राज्यसभा के एक सदस्य को संसद के शेष सत्र के लिए निलंबित करने की अनुमति नहीं देता है.
राशन कार्ड ( फाइल फोटो ) Ration Card Status Check: डिजिटल मीडिया के इस दौर ने लोगों के काम करने के तरीकों में बड़ा बदलाव किया है. आज घर बैठे ही अधिकतर लोग ऑनलाइन माध्यम से अपने कई काम पूरे कर लेते हैं, जिनमें कई तरह के फॉर्म भरना, उन्हें अपडेट करना, उस अपडेट किए हुए फॉर्म का स्टेटस चेक करना, साथ ही अपने दस्तावेजों से जुड़ी जानकारियों को इकट्ठा करना, ये सभी कुछ आज घर बैठे संभव है. कई तरह के कामों के ऑनलाइन हो जाने से लोगों की सुविधाएं बढ़ गई हैं. पहले जहां लोगों को राशन कार्ड बना या नहीं, ये देखने के लिए कई बार जाना पड़ता था, आज इन सुविधाओं के इंटरनेट से जुड़ जाने की वजह से इसके बारे में जानकारी वेब पोर्टल से ही ली जा सकती है. इसी तरह की सहूलियत को झारखंड सरकार ने अपनी जनता के लिए लागू किया गया है. अगर आप झारखंड के रहने वाले हैं और आपने राशन कार्ड बनवाने के लिए आवेदन किया है या राशन कार्ड में कोई अपडेट कराने के लिए दिया है, तो आपके द्वारा किया गया आवेदन पूरा हुआ या नहीं, इसकी जानकारी को कुछ स्टेप्स को फॉलो करके जाना जा सकता है. राशन कार्ड स्टेटस चेक करने के लिए आपके पास राशन कार्ड संख्या या राशन कार्ड पंजीयन नंबर होना आवश्यक है. स्टेप 1 इसके लिए सबसे पहले सरकार की ओर से जारी ऑफिशियल वेबसाइट jsfss. jharkhand. gov. in/ पोर्टल पर जाएं. स्टेप 2 इस वेबसाइट के होम पेज पर ही चेक एप्लीकेशन स्टेटस के नाम से ऑप्शन आएगा, उस पर क्लिक करें. स्टेप 3 इसके बाद राशन कार्ड संख्या या राशन कार्ड पंजीयन नंबर डालने का ऑप्शन आएगा, उसमें इस नंबर को दर्ज करें. इन तीन आसान स्टेप्स को फॉलो करने के बाद आपको आपके राशन कार्ड से संबंधित जानकारी पोर्टल पर दिखाई देगी. वहीं इसमें किसी भी तरह के संशोधन के लिए झारखंड राशन कार्ड फॉर्म को डाउनलोड भी किया जा सकता है. साथ ही झारखंड सरकार के खाद्य सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता विभाग की ओर से aahar. jharkhand. gov. in पोर्टल लांच किया गया है, जिसकी सहायता से जनता राशन कार्ड से जुड़ी सेवीओं के बारे में ऑनलाइन जान सकती है. ये भी पढ़ेंः Degree Vs Skills: हर 10 में से 8 भारतीयों की राय. . . बेकार हो जाएगी डिग्रियां, काम आएगी सिर्फ ये एक चीज!
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बिहार का सीतामढ़ी राज्य का पहला खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) जिला बन चुका है. इस बात की जानकारी डीएम डा. रणजीत कुमार सिंह ने दी. जानकारी के मुताबिक, इस बात की घोषणा जल्द ही सीएम नीतीश कुमार के द्वार एक कार्यक्रम के माध्यम से की जाएगी. भारत स्वच्छता अभियान में पीछे चल रहे बिहार में सीतामढी ने इस उपलब्धि को पूरा कर राज्य का मान बढाया हैं. सीतामढी के जिलाधिकारी डा. रणजीत कुमार सिंह के लगातार प्रयासों के बाद सत्रह जुलाई को वो दिन आ ही गया जब सीतामढ़ी जिला खुले में शौच मुक्त घोषित किया गया. इससे पहले सीतामढ़ी जिला ने पिछले दो महीनों में कई बार इतिहास रचा है. चाहे एक दिन में रिकॉर्ड एक लाख दस हज़ार गड्ढों की खुदाई हो या 100 घंटे में एक लाख बीस हजार शौचालय निर्माण का कीर्तिमान बनाना हो. जिलाधिकारी ने सीतामढ़ी को यह सम्मान दिलाने में खुद बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया. इस दौरान वो खुद हाथ में कुदाल लेकर गड्ढे खोदते देखे गए. जिलाधिकारी ने क्षेत्र में जागरुकता के लिए साइकिल रैली भी निकाली और शिक्षा में जागरूकता फैलाने के लिए विशाल रैली का आयोजन भी किया. सीतामढ़ी के खुले में शौच मुक्त होने पर डीएम डा. रणजीत कुमार सिंह का कहना है कि अंत भला तो सब भला. सीतामढ़ी जिला बिहार का पहला खुले में शौच मुक्त जिला घोषित कर दिया गया है. इसकी घोषणा सर्वप्रथम जिला परिषद अध्यक्ष उमा देवी ने की.
बिहार का सीतामढ़ी राज्य का पहला खुले में शौच मुक्त जिला बन चुका है. इस बात की जानकारी डीएम डा. रणजीत कुमार सिंह ने दी. जानकारी के मुताबिक, इस बात की घोषणा जल्द ही सीएम नीतीश कुमार के द्वार एक कार्यक्रम के माध्यम से की जाएगी. भारत स्वच्छता अभियान में पीछे चल रहे बिहार में सीतामढी ने इस उपलब्धि को पूरा कर राज्य का मान बढाया हैं. सीतामढी के जिलाधिकारी डा. रणजीत कुमार सिंह के लगातार प्रयासों के बाद सत्रह जुलाई को वो दिन आ ही गया जब सीतामढ़ी जिला खुले में शौच मुक्त घोषित किया गया. इससे पहले सीतामढ़ी जिला ने पिछले दो महीनों में कई बार इतिहास रचा है. चाहे एक दिन में रिकॉर्ड एक लाख दस हज़ार गड्ढों की खुदाई हो या एक सौ घंटाटे में एक लाख बीस हजार शौचालय निर्माण का कीर्तिमान बनाना हो. जिलाधिकारी ने सीतामढ़ी को यह सम्मान दिलाने में खुद बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया. इस दौरान वो खुद हाथ में कुदाल लेकर गड्ढे खोदते देखे गए. जिलाधिकारी ने क्षेत्र में जागरुकता के लिए साइकिल रैली भी निकाली और शिक्षा में जागरूकता फैलाने के लिए विशाल रैली का आयोजन भी किया. सीतामढ़ी के खुले में शौच मुक्त होने पर डीएम डा. रणजीत कुमार सिंह का कहना है कि अंत भला तो सब भला. सीतामढ़ी जिला बिहार का पहला खुले में शौच मुक्त जिला घोषित कर दिया गया है. इसकी घोषणा सर्वप्रथम जिला परिषद अध्यक्ष उमा देवी ने की.
गुड न्यूज! ये खुशखबरी बिग बॉस ओटीटी विनर दिव्या अग्रवाल और वरुण सूद के फैंस के लिये हैं. दिव्या अग्रवाल और उनके बॉयफ्रेंड वरुण सूद ने अपना नया घर ले लिया है. काफी वक्त से कपल अपने नये आशियाने की प्लानिंग कर रहा था. आखिरकार इनकी जिंदगी में वो दिन आ ही गया. जब दोनों ने अपनी मेहनत से घर बना लिया. हर इंसान जिंदगी में एक बार अपना खुद का घर बनाना चाहता है. अपने इस सपने को पूरा करने के लिये कई लोग दिन-रात मेहनत भी करते हैं. ठीक उसी तरह जैसे दिव्या और वरुण ने की. दिव्या अग्रवाल और वरुण कई रियलिटी शोज में साथ नजर आ चुके हैं. रियलिटी शो से ही इनकी मोहब्बत की शुरुआत हुई. दोनों ने साथ मेहनत की और साथ ही घर भी बना लिया. सेलेब्स की जिंदगी का कोई भी लम्हा उनके फैंस के बिना अधूरा माना जाता है. इस बात को दिव्या और वरुण काफी अच्छे से समझते हैं. इसलिये उन्होंने बिना देरी किये. इंस्टाग्राम पर अपने चाहने वालों से नये घर की खुशखबरी शेयर की. तस्वीरों में वरुण-दिव्या मनमोहक पलों को लोगों से शेयर करते दिख रहे हैं. दोनों के चेहरे पर अपने नए घर की खुशी देखने लायक है. दिव्या ने इंस्टाग्राम पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि मेरे पेरेंट्स ने हमेशा मुझे मजबूत बनाया और अपना साम्राज्य बनाने के लिये प्रेरित किया. आप लोगों से शेयर करते हुए खुशी हो रही है कि हमने अपना घर खरीद लिया है. वरुण और मैंने हमेशा छोटी-छोटी चीजों से बड़ी चीजें बनाई हैं. 1405- दिव्या 1505- वरुण. वहीं वरुण सूद ने इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिये बताया कि उनका और दिव्या का घर 14वें और 15वें फ्लोर पर है. सच में अपने पैसों से खरीदे गये घर की बात ही अलग होती है.
गुड न्यूज! ये खुशखबरी बिग बॉस ओटीटी विनर दिव्या अग्रवाल और वरुण सूद के फैंस के लिये हैं. दिव्या अग्रवाल और उनके बॉयफ्रेंड वरुण सूद ने अपना नया घर ले लिया है. काफी वक्त से कपल अपने नये आशियाने की प्लानिंग कर रहा था. आखिरकार इनकी जिंदगी में वो दिन आ ही गया. जब दोनों ने अपनी मेहनत से घर बना लिया. हर इंसान जिंदगी में एक बार अपना खुद का घर बनाना चाहता है. अपने इस सपने को पूरा करने के लिये कई लोग दिन-रात मेहनत भी करते हैं. ठीक उसी तरह जैसे दिव्या और वरुण ने की. दिव्या अग्रवाल और वरुण कई रियलिटी शोज में साथ नजर आ चुके हैं. रियलिटी शो से ही इनकी मोहब्बत की शुरुआत हुई. दोनों ने साथ मेहनत की और साथ ही घर भी बना लिया. सेलेब्स की जिंदगी का कोई भी लम्हा उनके फैंस के बिना अधूरा माना जाता है. इस बात को दिव्या और वरुण काफी अच्छे से समझते हैं. इसलिये उन्होंने बिना देरी किये. इंस्टाग्राम पर अपने चाहने वालों से नये घर की खुशखबरी शेयर की. तस्वीरों में वरुण-दिव्या मनमोहक पलों को लोगों से शेयर करते दिख रहे हैं. दोनों के चेहरे पर अपने नए घर की खुशी देखने लायक है. दिव्या ने इंस्टाग्राम पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि मेरे पेरेंट्स ने हमेशा मुझे मजबूत बनाया और अपना साम्राज्य बनाने के लिये प्रेरित किया. आप लोगों से शेयर करते हुए खुशी हो रही है कि हमने अपना घर खरीद लिया है. वरुण और मैंने हमेशा छोटी-छोटी चीजों से बड़ी चीजें बनाई हैं. एक हज़ार चार सौ पाँच- दिव्या एक हज़ार पाँच सौ पाँच- वरुण. वहीं वरुण सूद ने इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिये बताया कि उनका और दिव्या का घर चौदहवें और पंद्रहवें फ्लोर पर है. सच में अपने पैसों से खरीदे गये घर की बात ही अलग होती है.
उस सम्यग्ज्ञानी की स्वात्मचेतना कैमी विचित्र है कि वह कर्म करता है फिर भी कर्म से उपयुक्त नहीं होता है। नैव यतोऽस्त्यनिष्टार्थ सर्व कर्मोदयात्मकः । तस्मान्नाकाङ क्षते ज्ञानो यावत् कर्म च तत्फलम् ।। [पाध्याय २५६४ ] जितना भी कर्म के उदयस्वरूप है, मब अनिष्टार्थ है अतः कर्म और कर्मफल को ज्ञानी नही चाहता है । भाव यह है कि सम्यक्त्वी की क्रिया बन्ध का हेतु न होकर निर्जरा का हेतु है । उत्तर - यद्यपि सम्यग्दृष्टि के दर्शनमोह सम्बन्धी रागभाव ( अज्ञानभाव, ममत्वभाव - विषयों मे सुख भ्रान्तिभाव ) नष्ट हो गया है तथापि उसके चारित्रमोह सम्बन्धी शुभरागभाव ( मन्द कषाय ) विद्यमान है अतः वह सर्वथा अवन्धक नहीं है। सम्यग्दृष्टि को अबन्धक कहने में आचार्य की तीन विवक्षाएं है - प्रथम यह कि सम्यग्दर्शन बन्ध का कारण नहीं है। सम्यग्दर्शन के काल में चतुर्थादि गुणस्थानों में जो बन्ध होता है वह उस काल में पाये जाने वाले रागादि भावो के कारण होता है, सम्यग्दर्शन के कारण नहीं । जहाँ सम्यग्दर्शन को देवायु आदि पुण्य प्रकृतियों के बन्ध का कारण बताया है वहाँ उपचरित कथन समझना चाहिये । परमार्थ यह है कि सम्यक्त्वभाव न बन्ध का कारण है और न चेतन - अचेतन द्रव्यों के उपभोग का भाव निर्जरा का कारण है। मे कर्मोदय को सम्यक्त्व के काल में पाया जाने वाला रागभाव ही है और निर्जरा का कारण उपभोग काल में पाया जाने वाला विरागभाव ही है। परन्तु सहकाल में अस्तित्व होने से वैमा कथन किया जाता है। द्वितीय विवक्षा यह है कि सम्यग्दृष्टि शब्द से वीतराग सम्यग्दृष्टि का ग्रहण है। यह वीतराग सम्यग्दृष्टि अवस्था यथार्थ में ग्यारहवें आदि गुणस्थानों से होती है। यहाँ बन्ध होता नहीं है, सातावेदनीय का जो ईर्यापथ आसव पूर्वक प्रकृति और प्रदेशबन्ध होता है वह स्थिति और अनुभागबन्ध से रहित होने के कारण बन्ध नहीं माना गया है । तृतीय विवक्षा यह है कि चतुर्थादि गुणस्थानों में जो बन्ध होता है वह अनन्त संसार का कारगा नहीं होने से प्रबन्ध कहा गया है यहां 'अ' का अर्थ ईपत् किंचित् है। अथवा पूर्व गुणस्थानों की अपेक्षा अपरितन गुणस्थानों में बन्ध न्यून होता जाता है। सम्यग्दृष्टि के ज्ञान की अद्भुत महिमा है जैसा कि कहा है-तज्ज्ञानस्यैव सामर्थ्य विरागस्य च वा किल । यत्कोऽपि कर्मभिः कर्म भुञ्जानोऽपि न बध्यते ॥ । समयमार कलगा १३८ ] वह ज्ञान की ही सामर्थ्य है अथवा निश्चय कर वीतरागभाव की महिमा है कोई जीव ( सम्यग्दृष्टि जीव ) कर्म का उपभोग करता हुआ भी कर्मों के द्वारा नहीं बंधता है । मोक्ष का हेतु रत्नत्रय धर्म है या शुभकर्म ] नाश्नुते विषयसेवनेऽपि यत् स्वं फलं विषयसेवनस्य ना । ज्ञानवैभवविरागताबलात् सेवकोऽपितदसावसेवकः ।। [ समयसार कलशा १३५ ] जिस कारण ज्ञानी पुरुष विषयों का सेवन होने पर भी विषय सेवन के अपने फल को नही प्राप्त होता है उस कारण ज्ञान के वैभव और वैराग्य के बल से वह विषयों का सेवन करने वाला होकर भी सेवन करने वाला नहीं कहा जाता । स्यक्तं येन फलं स कर्म कुरुते नेति प्रतीमो वयं किन्त्वस्यापि कुतोऽपि किचिदपितत्कर्मावशेनापतेत् । तस्मिन्नापतिते त्वकम्पपरमज्ञानस्वभावे स्थितो ज्ञानी कि कुरुते ऽथ कि न कुरुते कर्मेति जानाति कः ।। [ समयसार कलशा १५३ ] जिसने कर्म का फल त्याग दिया है, वह कर्म करता है, इसकी हम प्रतीति नहीं करते किन्तु इस ज्ञानी के भी किसी कारण से कुछ कर्म इसके वश बिना आ पड़ते है और उनके आ पड़ने पर यह ज्ञानी निश्चल परमस्वभाव में स्थित रहता है। इस स्थिति में ज्ञानी क्या करता है और क्या नहीं करता है यह कौन जानता है ? तात्पर्य यह है कि कर्म का बन्ध, कर्मफल के इच्छुक प्राणी के होता है । जिसने कर्मफल की इच्छा छोड दी उसे कर्म का बन्ध नहीं होता। यहा सम्यग्दृष्टि जीव को ज्ञानी कहा गया है । यद्यपि ज्ञानी के ज्ञानचेनता है, कर्मचेतना और कर्मफलचेतना नहीं है फिर भी कालान्तर मे जो कर्म अर्जित किये है वे उदय में आकर अपना रम देते हैं, उन्हें यह नहीं चाहता किन्तु चारित्रमोह के सद्भाव मे पराधीनता से भोगने पड़ते है । भांगने पर भी अपने परम ज्ञानस्वभाव में अकम्प स्थिर रहने से कर्म, जानी का कुछ विगाड करने में समर्थ नहीं होते अत निष्कर्ष निकला कि ज्ञान। क्या करता है और क्या नहीं करता है ? इसको कौन जाने ? वही जाने । जीव के भाव, अशुभ, शुभ ओर शुद्ध की अपेक्षा तीन प्रकार के है । तीव्रकपाय के समय होने वाले विषयकवाय सम्बन्धी भाव अशुभभाव है, मन्द कषाय के समय होने वाले दव पुजा, पात्रदान तथा वैयावृत्य आदि के भाव शुभभाव है और कपाय के अभाव में होने वाले भाव, शुद्धभाव है । इनमे अशुभ भाव पापबन्त्र का का है, शुभभाव पुष्यबन्ध का कारण है और शुद्धभाव निर्जरा तथा मोक्ष का कारण है । अशुभभाव सर्वथा हेय ही है और शुद्धभाव उपादेय ही है परन्तु शुभभाव, पात्रभेद की अपेक्षा उपादेय तथा हेय दोनो रूप है। अशुभभाव की अपेक्षा शुभभाव उपादेय है - ग्रहगा करने के योग्य है और शुद्धभाव की अपेक्षा हेय है - छोड़ने के योग्य है। क्योंकि अशुभभाव का फल नरक है तो शुभभाव का फल स्वर्गं है। नरक में दुःख उठाने की अपेक्षा जहाँ सम्यक्त्वादि प्राप्ति के विशेष साधन मिलने की सम्भावना है ऐसे स्वर्ग में समय व्यतीत हो यह अपेक्षा कृत उत्तम बात है। कहा हैवरं व्रतैः पदं दैवं नाव्रतैर्वत नारकम् । छायात पस्थयोर्भेदः प्रतिपालयतोर्महान् ।। [ इष्टोपदेश ३ ] व्रतों के द्वारा देव पद प्राप्त करना अच्छा है परन्तु अव्रतो के द्वारा नरक का पद प्राप्त करना अच्छा नही है क्योंकि छाया और आतप में बैठकर प्रतीक्षा करने वाले लोगो मे बड़ा अन्तर होता है । जिनागम का उपदेश नय विवक्षा को लिये हुए है और नयी की विवक्षा शिष्यों की योग्यता के अनुसार की जाती है । जो मानव, निरन्तर हिंसा, झूठ तथा क्रोध, मान आदि पाप कार्यों में निमग्न रहता है, आचार्यों ने उसे अहिंसा, सत्य, क्षमा, विनय, दया आदि शुभभावों में प्रवृत्त होने का उपदेश दिया है और जो इन्हीं शुभोपयोग के कार्यों में ही निमग्न है उसे आचार्य कहते है कि देख, यह शुभभाव सुवर्ण की बेड़ी है जब तक तू इसमे बँधा रहेगा तब तक बन्धन मुक्त - मोक्ष अवस्था को प्राप्त नही हो सकता । शुभभाव के कारण तेरा सागरी पर्यन्त का महान् काल विषयोपभोग में- अविरत अवस्था में व्यतीत हो जाता है परन्तु शुद्धभाव - वीतरागभाव के प्रभाव से तू अन्तमु हूर्त में ही बन्धनमुक्त हो सकता है। अतः शुभ के विकल्प को छोड़कर मोक्ष का साक्षात् मार्ग जो रत्नत्रय है उसे ग्रहण कर । ज्ञानी जीव ( श्रमण ) अपने पद के अनुरूप शुभभाव करता हुआ भी उससे अपने आपको निलिप्त रखता है। जिनागम में कही विरुद्ध कथन नही है। विरुद्ध कथन तो नयविवक्षा का परिज्ञान न होने से मालूम पड़ता है इसलिये नयविवक्षा को समझने का पुरुषार्थ करना चाहिये । वक्ता को भी चाहिये कि वे शिष्यो की अज्ञानदशा पर करुणा दृष्टि रखकर अपनी नयविवक्षा को स्पष्ट करते चलें । अनुपचरित कथन की अपेक्षा रत्नत्रय ही मोक्ष का मार्ग है और उपचरित कथन की अपेक्षा शुभभाव भी मोक्ष का मार्ग है। विशेषता यह है कि अनुपचारित कथन माक्षात् मोक्षमार्ग का प्रतिपादन करता है और उपचरित कथन परम्परा मोक्षमार्ग का ।
उस सम्यग्ज्ञानी की स्वात्मचेतना कैमी विचित्र है कि वह कर्म करता है फिर भी कर्म से उपयुक्त नहीं होता है। नैव यतोऽस्त्यनिष्टार्थ सर्व कर्मोदयात्मकः । तस्मान्नाकाङ क्षते ज्ञानो यावत् कर्म च तत्फलम् ।। [पाध्याय दो हज़ार पाँच सौ चौंसठ ] जितना भी कर्म के उदयस्वरूप है, मब अनिष्टार्थ है अतः कर्म और कर्मफल को ज्ञानी नही चाहता है । भाव यह है कि सम्यक्त्वी की क्रिया बन्ध का हेतु न होकर निर्जरा का हेतु है । उत्तर - यद्यपि सम्यग्दृष्टि के दर्शनमोह सम्बन्धी रागभाव नष्ट हो गया है तथापि उसके चारित्रमोह सम्बन्धी शुभरागभाव विद्यमान है अतः वह सर्वथा अवन्धक नहीं है। सम्यग्दृष्टि को अबन्धक कहने में आचार्य की तीन विवक्षाएं है - प्रथम यह कि सम्यग्दर्शन बन्ध का कारण नहीं है। सम्यग्दर्शन के काल में चतुर्थादि गुणस्थानों में जो बन्ध होता है वह उस काल में पाये जाने वाले रागादि भावो के कारण होता है, सम्यग्दर्शन के कारण नहीं । जहाँ सम्यग्दर्शन को देवायु आदि पुण्य प्रकृतियों के बन्ध का कारण बताया है वहाँ उपचरित कथन समझना चाहिये । परमार्थ यह है कि सम्यक्त्वभाव न बन्ध का कारण है और न चेतन - अचेतन द्रव्यों के उपभोग का भाव निर्जरा का कारण है। मे कर्मोदय को सम्यक्त्व के काल में पाया जाने वाला रागभाव ही है और निर्जरा का कारण उपभोग काल में पाया जाने वाला विरागभाव ही है। परन्तु सहकाल में अस्तित्व होने से वैमा कथन किया जाता है। द्वितीय विवक्षा यह है कि सम्यग्दृष्टि शब्द से वीतराग सम्यग्दृष्टि का ग्रहण है। यह वीतराग सम्यग्दृष्टि अवस्था यथार्थ में ग्यारहवें आदि गुणस्थानों से होती है। यहाँ बन्ध होता नहीं है, सातावेदनीय का जो ईर्यापथ आसव पूर्वक प्रकृति और प्रदेशबन्ध होता है वह स्थिति और अनुभागबन्ध से रहित होने के कारण बन्ध नहीं माना गया है । तृतीय विवक्षा यह है कि चतुर्थादि गुणस्थानों में जो बन्ध होता है वह अनन्त संसार का कारगा नहीं होने से प्रबन्ध कहा गया है यहां 'अ' का अर्थ ईपत् किंचित् है। अथवा पूर्व गुणस्थानों की अपेक्षा अपरितन गुणस्थानों में बन्ध न्यून होता जाता है। सम्यग्दृष्टि के ज्ञान की अद्भुत महिमा है जैसा कि कहा है-तज्ज्ञानस्यैव सामर्थ्य विरागस्य च वा किल । यत्कोऽपि कर्मभिः कर्म भुञ्जानोऽपि न बध्यते ॥ । समयमार कलगा एक सौ अड़तीस ] वह ज्ञान की ही सामर्थ्य है अथवा निश्चय कर वीतरागभाव की महिमा है कोई जीव कर्म का उपभोग करता हुआ भी कर्मों के द्वारा नहीं बंधता है । मोक्ष का हेतु रत्नत्रय धर्म है या शुभकर्म ] नाश्नुते विषयसेवनेऽपि यत् स्वं फलं विषयसेवनस्य ना । ज्ञानवैभवविरागताबलात् सेवकोऽपितदसावसेवकः ।। [ समयसार कलशा एक सौ पैंतीस ] जिस कारण ज्ञानी पुरुष विषयों का सेवन होने पर भी विषय सेवन के अपने फल को नही प्राप्त होता है उस कारण ज्ञान के वैभव और वैराग्य के बल से वह विषयों का सेवन करने वाला होकर भी सेवन करने वाला नहीं कहा जाता । स्यक्तं येन फलं स कर्म कुरुते नेति प्रतीमो वयं किन्त्वस्यापि कुतोऽपि किचिदपितत्कर्मावशेनापतेत् । तस्मिन्नापतिते त्वकम्पपरमज्ञानस्वभावे स्थितो ज्ञानी कि कुरुते ऽथ कि न कुरुते कर्मेति जानाति कः ।। [ समयसार कलशा एक सौ तिरेपन ] जिसने कर्म का फल त्याग दिया है, वह कर्म करता है, इसकी हम प्रतीति नहीं करते किन्तु इस ज्ञानी के भी किसी कारण से कुछ कर्म इसके वश बिना आ पड़ते है और उनके आ पड़ने पर यह ज्ञानी निश्चल परमस्वभाव में स्थित रहता है। इस स्थिति में ज्ञानी क्या करता है और क्या नहीं करता है यह कौन जानता है ? तात्पर्य यह है कि कर्म का बन्ध, कर्मफल के इच्छुक प्राणी के होता है । जिसने कर्मफल की इच्छा छोड दी उसे कर्म का बन्ध नहीं होता। यहा सम्यग्दृष्टि जीव को ज्ञानी कहा गया है । यद्यपि ज्ञानी के ज्ञानचेनता है, कर्मचेतना और कर्मफलचेतना नहीं है फिर भी कालान्तर मे जो कर्म अर्जित किये है वे उदय में आकर अपना रम देते हैं, उन्हें यह नहीं चाहता किन्तु चारित्रमोह के सद्भाव मे पराधीनता से भोगने पड़ते है । भांगने पर भी अपने परम ज्ञानस्वभाव में अकम्प स्थिर रहने से कर्म, जानी का कुछ विगाड करने में समर्थ नहीं होते अत निष्कर्ष निकला कि ज्ञान। क्या करता है और क्या नहीं करता है ? इसको कौन जाने ? वही जाने । जीव के भाव, अशुभ, शुभ ओर शुद्ध की अपेक्षा तीन प्रकार के है । तीव्रकपाय के समय होने वाले विषयकवाय सम्बन्धी भाव अशुभभाव है, मन्द कषाय के समय होने वाले दव पुजा, पात्रदान तथा वैयावृत्य आदि के भाव शुभभाव है और कपाय के अभाव में होने वाले भाव, शुद्धभाव है । इनमे अशुभ भाव पापबन्त्र का का है, शुभभाव पुष्यबन्ध का कारण है और शुद्धभाव निर्जरा तथा मोक्ष का कारण है । अशुभभाव सर्वथा हेय ही है और शुद्धभाव उपादेय ही है परन्तु शुभभाव, पात्रभेद की अपेक्षा उपादेय तथा हेय दोनो रूप है। अशुभभाव की अपेक्षा शुभभाव उपादेय है - ग्रहगा करने के योग्य है और शुद्धभाव की अपेक्षा हेय है - छोड़ने के योग्य है। क्योंकि अशुभभाव का फल नरक है तो शुभभाव का फल स्वर्गं है। नरक में दुःख उठाने की अपेक्षा जहाँ सम्यक्त्वादि प्राप्ति के विशेष साधन मिलने की सम्भावना है ऐसे स्वर्ग में समय व्यतीत हो यह अपेक्षा कृत उत्तम बात है। कहा हैवरं व्रतैः पदं दैवं नाव्रतैर्वत नारकम् । छायात पस्थयोर्भेदः प्रतिपालयतोर्महान् ।। [ इष्टोपदेश तीन ] व्रतों के द्वारा देव पद प्राप्त करना अच्छा है परन्तु अव्रतो के द्वारा नरक का पद प्राप्त करना अच्छा नही है क्योंकि छाया और आतप में बैठकर प्रतीक्षा करने वाले लोगो मे बड़ा अन्तर होता है । जिनागम का उपदेश नय विवक्षा को लिये हुए है और नयी की विवक्षा शिष्यों की योग्यता के अनुसार की जाती है । जो मानव, निरन्तर हिंसा, झूठ तथा क्रोध, मान आदि पाप कार्यों में निमग्न रहता है, आचार्यों ने उसे अहिंसा, सत्य, क्षमा, विनय, दया आदि शुभभावों में प्रवृत्त होने का उपदेश दिया है और जो इन्हीं शुभोपयोग के कार्यों में ही निमग्न है उसे आचार्य कहते है कि देख, यह शुभभाव सुवर्ण की बेड़ी है जब तक तू इसमे बँधा रहेगा तब तक बन्धन मुक्त - मोक्ष अवस्था को प्राप्त नही हो सकता । शुभभाव के कारण तेरा सागरी पर्यन्त का महान् काल विषयोपभोग में- अविरत अवस्था में व्यतीत हो जाता है परन्तु शुद्धभाव - वीतरागभाव के प्रभाव से तू अन्तमु हूर्त में ही बन्धनमुक्त हो सकता है। अतः शुभ के विकल्प को छोड़कर मोक्ष का साक्षात् मार्ग जो रत्नत्रय है उसे ग्रहण कर । ज्ञानी जीव अपने पद के अनुरूप शुभभाव करता हुआ भी उससे अपने आपको निलिप्त रखता है। जिनागम में कही विरुद्ध कथन नही है। विरुद्ध कथन तो नयविवक्षा का परिज्ञान न होने से मालूम पड़ता है इसलिये नयविवक्षा को समझने का पुरुषार्थ करना चाहिये । वक्ता को भी चाहिये कि वे शिष्यो की अज्ञानदशा पर करुणा दृष्टि रखकर अपनी नयविवक्षा को स्पष्ट करते चलें । अनुपचरित कथन की अपेक्षा रत्नत्रय ही मोक्ष का मार्ग है और उपचरित कथन की अपेक्षा शुभभाव भी मोक्ष का मार्ग है। विशेषता यह है कि अनुपचारित कथन माक्षात् मोक्षमार्ग का प्रतिपादन करता है और उपचरित कथन परम्परा मोक्षमार्ग का ।
नई दिल्ली। अफगानिस्तान के खिलाफ खेले गए एकमात्र टेस्ट मुकाबले में शिखर धवन ने पहली पारी में धमाकेदार बल्लेबाजी करते हुए पहले सेशन में ही शतक जड़कर कई कीर्तिमान अपने नाम कर लिए थे। वहीं मुरली विजय ने भी इस मुकाबले में शानदार शतक जड़ा था। इस शानदार बल्लेबाजी के दम और धारदार गेंदबाजी की बदौलत भारतीय टीम ने अपना पहला टेस्ट क्रिकेट खेल रही अफगानिस्तान को पारी और 262 रनों के बडे़ अंतर से हराकर इतिहास दर्ज किया था। इस मुकाबले में जीत के साथ-साथ गब्बर को एक और गिफ्ट मिला है और वो है उनकी रैंकिंग में उछाल का। यहां भी धवन ने किया धमालः आईसीसी ने हाल ही में ताजा रैंकिंग जारी की है। इस बार की रैंकिंग में अगर किसी खिलाड़ी को सबसे ज्यादा फायदा हुआ है तो वह हैं शिखर धवन जो दस स्थान की छलांग लगाकर 24वें नंबर पर पहुंच गए हैं। उनके अलावा सलामी बल्लेबाज मुरली विजय और ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा को भी रैंकिंग में फायदा मिला है। वहीं मुरली विजय इस रैंकिंग में छह पायदान ऊपर 23वें स्थान पर पहुंच गए। सर जडेजा भी भी एक पायदान ऊपर तीसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। वहीं तेज गेंदबाज इशांत शर्मा (दो पायदान ऊपर 25वें) और उमेश यादव (दो पायदान ऊपर 26वें) की रैंकिंग में भी सुधार हुआ है। गौरतलब हो की राशिद अभी टी20 अंतरराष्ट्रीय में शीर्ष रैंकिंग और वनडे में दूसरी रैंकिंग के गेंदबाज हैं। वहीं भारत ने इस बीच टीम रैंकिंग में अपना शीर्ष स्थान बरकरार रखा है।
नई दिल्ली। अफगानिस्तान के खिलाफ खेले गए एकमात्र टेस्ट मुकाबले में शिखर धवन ने पहली पारी में धमाकेदार बल्लेबाजी करते हुए पहले सेशन में ही शतक जड़कर कई कीर्तिमान अपने नाम कर लिए थे। वहीं मुरली विजय ने भी इस मुकाबले में शानदार शतक जड़ा था। इस शानदार बल्लेबाजी के दम और धारदार गेंदबाजी की बदौलत भारतीय टीम ने अपना पहला टेस्ट क्रिकेट खेल रही अफगानिस्तान को पारी और दो सौ बासठ रनों के बडे़ अंतर से हराकर इतिहास दर्ज किया था। इस मुकाबले में जीत के साथ-साथ गब्बर को एक और गिफ्ट मिला है और वो है उनकी रैंकिंग में उछाल का। यहां भी धवन ने किया धमालः आईसीसी ने हाल ही में ताजा रैंकिंग जारी की है। इस बार की रैंकिंग में अगर किसी खिलाड़ी को सबसे ज्यादा फायदा हुआ है तो वह हैं शिखर धवन जो दस स्थान की छलांग लगाकर चौबीसवें नंबर पर पहुंच गए हैं। उनके अलावा सलामी बल्लेबाज मुरली विजय और ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा को भी रैंकिंग में फायदा मिला है। वहीं मुरली विजय इस रैंकिंग में छह पायदान ऊपर तेईसवें स्थान पर पहुंच गए। सर जडेजा भी भी एक पायदान ऊपर तीसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। वहीं तेज गेंदबाज इशांत शर्मा और उमेश यादव की रैंकिंग में भी सुधार हुआ है। गौरतलब हो की राशिद अभी टीबीस अंतरराष्ट्रीय में शीर्ष रैंकिंग और वनडे में दूसरी रैंकिंग के गेंदबाज हैं। वहीं भारत ने इस बीच टीम रैंकिंग में अपना शीर्ष स्थान बरकरार रखा है।
महाराष्ट्र में बीते 24 घंटे में 121 पुलिसकर्मी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं, और 2 की मौत हुई है। यहां अब तक मरने वालों की संख्या 102 पहुंच गई है। भारत में चल रही चीनी कंपनियों की कई बड़े प्रोजेक्ट्स की डील को भारत ने कैंसिल कर दिया था। इससे तिलमिलाया चीन (China) अब भारत को गीदड़भभकी दे रहा है। सेना ने महिला मिलिट्री पुलिस की भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी कर आवेदन मांगे हैं। नोटिफिकेशन के अनुसार भारतीय सेना में कुल 99 महिलाओं को नौकरी करने का अवसर मिलेगा। सीमा पार से आतंकी घुसपैठ में सफल नहीं हो पा रहे हैं इसलिए स्थानीय पढ़े-लिखे बेरोजगार कश्मीरी नौजवानों को गुमराह करके आतंकवाद (Terrorism) के नरक में धकेला जा रहा है। करीब 7000 किलोमीटर का सफर के दौरान पाकिस्तान (Pakistan) के हुए एयरस्पेस से सटकर गुजरात के रास्ते अंबाला एयर बेस पहुंचे इन राफेल फाइटर जेट (Rafale Fighters Jet) ने पाकिस्तानी वायुसेना की बेचैनी बढ़ा दी है। Today History (31 July): जानें आज के दिन देश और दुनिया में क्या हुआ था? Today History: मोहम्मद रफी को अपने गांव की गली में गाने वाले फ़क़ीर की आवाज़ सुनकर गाने की प्रेरणा मिली थी। कहा जाता है कि उस फक़ीर ने रफी साहब को आशीर्वाद दिया था कि यह लड़का आगे चलकर खूब नाम कमाएगा। कांकेर जिले में भी सीमा सुरक्षा बल (एसएसबी) के 4 जवान कोरोना पॉजिटिव हुए हैं। बता दें कि सुरक्षाबलों की तैनाती छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में की गई है। इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म्स पर आतंकवाद को लेकर अपनी भद्द पिटवा चुका पाकिस्तान भारत के सामने खुद को बौना महसूस कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारियों का कहना है कि भारत के इस कदम से LAC पर स्थिति बदल जाएगी। कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख समेत 395 वर्ग किलोमीटर के भारतीय क्षेत्र में नेपालियों के घुसपैठ पर रोक लगाने की अपील की गई थी। आवेदन करने के लिए इच्छुक अभ्यर्थी की उम्र कम से कम 18 वर्ष और अधिकतम 27 वर्ष होनी आवश्यक है। इंजीनियरिंग डिग्री प्राप्त या फाइनल इयर के अभ्यर्थी ही आवेदन कर सकेंगे। राम जन्मभूमि पर राम लला की सेवा में पांच पुजारी लगाए गए हैं। जिनमें से एक पुजारी प्रदीप दास की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई है। ये घटना बुधवार रात करीब सवा एक बजे की है। हमला चंदेल में हुआ है, जिसे उग्रवादियों ने अंजाम दिया। राफेल विमान को भारत लाने वाले इन 5 पायलटों के बारे में कितना जानते हैं आप? राफेल विमान 7000 किलोमीटर का सफर तय कर बुधवार को हरियाणा के अंबाला एयरबेस पर पहुंचे। भारतीय नौसेना (Indian Navy) ने गलवान घाटी (Galwan Valley) में 15 जून को हिंसक झड़पों में भारत के 20 जवानों की शहादत के बाद बढ़ते तनाव के बीच हिंद महासागर क्षेत्र में युद्धपोत और पनडुब्बियों को तैनात किया था। वैज्ञानिकों का दावा है कि वे इस वैक्सीन (Covid Vaccine) को आम जनता के उपयोग के लिए 10 अगस्त तक मंजूरी दिला लेंगे। डॉ. मुत्तू लक्ष्मी रेड्डी लड़कों के स्कूल में पढ़ने वाली पहली लड़की, डॉक्टर बनने वाली पहली महिला, विधानसभा की पहली सदस्य और उपाध्यक्ष बनने वाली पहली महिला थीं।
महाराष्ट्र में बीते चौबीस घंटाटे में एक सौ इक्कीस पुलिसकर्मी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं, और दो की मौत हुई है। यहां अब तक मरने वालों की संख्या एक सौ दो पहुंच गई है। भारत में चल रही चीनी कंपनियों की कई बड़े प्रोजेक्ट्स की डील को भारत ने कैंसिल कर दिया था। इससे तिलमिलाया चीन अब भारत को गीदड़भभकी दे रहा है। सेना ने महिला मिलिट्री पुलिस की भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी कर आवेदन मांगे हैं। नोटिफिकेशन के अनुसार भारतीय सेना में कुल निन्यानवे महिलाओं को नौकरी करने का अवसर मिलेगा। सीमा पार से आतंकी घुसपैठ में सफल नहीं हो पा रहे हैं इसलिए स्थानीय पढ़े-लिखे बेरोजगार कश्मीरी नौजवानों को गुमराह करके आतंकवाद के नरक में धकेला जा रहा है। करीब सात हज़ार किलोग्राममीटर का सफर के दौरान पाकिस्तान के हुए एयरस्पेस से सटकर गुजरात के रास्ते अंबाला एयर बेस पहुंचे इन राफेल फाइटर जेट ने पाकिस्तानी वायुसेना की बेचैनी बढ़ा दी है। Today History : जानें आज के दिन देश और दुनिया में क्या हुआ था? Today History: मोहम्मद रफी को अपने गांव की गली में गाने वाले फ़क़ीर की आवाज़ सुनकर गाने की प्रेरणा मिली थी। कहा जाता है कि उस फक़ीर ने रफी साहब को आशीर्वाद दिया था कि यह लड़का आगे चलकर खूब नाम कमाएगा। कांकेर जिले में भी सीमा सुरक्षा बल के चार जवान कोरोना पॉजिटिव हुए हैं। बता दें कि सुरक्षाबलों की तैनाती छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में की गई है। इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म्स पर आतंकवाद को लेकर अपनी भद्द पिटवा चुका पाकिस्तान भारत के सामने खुद को बौना महसूस कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारियों का कहना है कि भारत के इस कदम से LAC पर स्थिति बदल जाएगी। कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख समेत तीन सौ पचानवे वर्ग किलोमीटर के भारतीय क्षेत्र में नेपालियों के घुसपैठ पर रोक लगाने की अपील की गई थी। आवेदन करने के लिए इच्छुक अभ्यर्थी की उम्र कम से कम अट्ठारह वर्ष और अधिकतम सत्ताईस वर्ष होनी आवश्यक है। इंजीनियरिंग डिग्री प्राप्त या फाइनल इयर के अभ्यर्थी ही आवेदन कर सकेंगे। राम जन्मभूमि पर राम लला की सेवा में पांच पुजारी लगाए गए हैं। जिनमें से एक पुजारी प्रदीप दास की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई है। ये घटना बुधवार रात करीब सवा एक बजे की है। हमला चंदेल में हुआ है, जिसे उग्रवादियों ने अंजाम दिया। राफेल विमान को भारत लाने वाले इन पाँच पायलटों के बारे में कितना जानते हैं आप? राफेल विमान सात हज़ार किलोग्राममीटर का सफर तय कर बुधवार को हरियाणा के अंबाला एयरबेस पर पहुंचे। भारतीय नौसेना ने गलवान घाटी में पंद्रह जून को हिंसक झड़पों में भारत के बीस जवानों की शहादत के बाद बढ़ते तनाव के बीच हिंद महासागर क्षेत्र में युद्धपोत और पनडुब्बियों को तैनात किया था। वैज्ञानिकों का दावा है कि वे इस वैक्सीन को आम जनता के उपयोग के लिए दस अगस्त तक मंजूरी दिला लेंगे। डॉ. मुत्तू लक्ष्मी रेड्डी लड़कों के स्कूल में पढ़ने वाली पहली लड़की, डॉक्टर बनने वाली पहली महिला, विधानसभा की पहली सदस्य और उपाध्यक्ष बनने वाली पहली महिला थीं।
Updated :19 Sep, 2022, 03:11 PM(IST) सरायकेला : खबर है सरायकेला की जहां पुलिस ने 24 घंटे के अंदर गुरुवारी महली की हत्या के आरोपी पति को नीमडीह थाना क्षेत्र के समानपुर टोला चिरुगोड़ा गांव से गिरफ्तार कर लिया है. मामले की जानकारी देते हुए नीमडीह थाना प्रभारी अमित गुप्ता ने बताया कि मृतका नाबालिग था. रविवार को नहाने के दौरान उसे डूबोकर हत्या कर दी गई. 15 वर्षीय मृतका गुरुवारी महली की तीन महीना पूर्व समानपुर गांव निवासी संतोष महली के साथ प्रेम विवाह हुआ था. शादी के बाद से ही पति-पत्नी में अनबन चल रही थी. घटना के बाद से आरोपी पति संतोष महली फरार था. आज सरायकेला पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.
Updated :उन्नीस सितंबर, दो हज़ार बाईस, तीन:ग्यारह PM सरायकेला : खबर है सरायकेला की जहां पुलिस ने चौबीस घंटाटे के अंदर गुरुवारी महली की हत्या के आरोपी पति को नीमडीह थाना क्षेत्र के समानपुर टोला चिरुगोड़ा गांव से गिरफ्तार कर लिया है. मामले की जानकारी देते हुए नीमडीह थाना प्रभारी अमित गुप्ता ने बताया कि मृतका नाबालिग था. रविवार को नहाने के दौरान उसे डूबोकर हत्या कर दी गई. पंद्रह वर्षीय मृतका गुरुवारी महली की तीन महीना पूर्व समानपुर गांव निवासी संतोष महली के साथ प्रेम विवाह हुआ था. शादी के बाद से ही पति-पत्नी में अनबन चल रही थी. घटना के बाद से आरोपी पति संतोष महली फरार था. आज सरायकेला पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.
वास्तु शास्त्र के अनुसार अगर आप कहीं बाहर से या ऑफिस से आकर घर पर किसी ऐसी जगह पर बैठते हैं जहां सामने दीवार पर कुछ न हो। वह बिल्कुल खाली हो तो और यह आपके रोज बैठने की निश्चित जगह है। उस दीवार पर कोई पॉजिटिव तस्वीर लगाएं या अपने ही परिवार के सदस्यों की एक तस्वीर उस दीवार पर लगा दें। इससे आपका मन हमेशा सकारात्मक रहेगा।
वास्तु शास्त्र के अनुसार अगर आप कहीं बाहर से या ऑफिस से आकर घर पर किसी ऐसी जगह पर बैठते हैं जहां सामने दीवार पर कुछ न हो। वह बिल्कुल खाली हो तो और यह आपके रोज बैठने की निश्चित जगह है। उस दीवार पर कोई पॉजिटिव तस्वीर लगाएं या अपने ही परिवार के सदस्यों की एक तस्वीर उस दीवार पर लगा दें। इससे आपका मन हमेशा सकारात्मक रहेगा।
योग में रुचि रखते हैं,लेकिन निश्चित नहीं है कि योग डिप्लोमा,योग शिक्षक कोर्स,योगा अध्यापक कैसे बने,योग कोर्स की जानकारी के अवसर कहां से प्राप्त करें। तो यह लेख आपके लिए पढ़ना आवश्यक है। योग में रुचि रखते हैं,लेकिन निश्चित नहीं है कि योग डिप्लोमा,योग शिक्षक कोर्स,योगा अध्यापक कैसे बने,योग कोर्स की जानकारी के अवसर कहां से प्राप्त करें । तो यह लेख आपके लिए पढ़ना आवश्यक है । कैरियर स्कोप (योग में करियर) योग प्रशिक्षक 12 कक्षा के बाद का कैरियर एक जोखिम भरा कदम नहीं है,जब योग दुनिया भर में लहर की मांग में है क्योंकि जीवनशैली संबंधी विकारों और मनोदैहिक रोगों के उपचार और रोकथाम में इसकी प्रभावकारीता है । Yoga Teacher वेतन संतोषजनक है और योग शिक्षक को बाजार मानक पर ध्यान नहीं देता है । योग में डिप्लोमा करने के बाद,कई योग प्रशिक्षकों ने अच्छा वेतन कमाया है । दुनिया भर में भारत के सभी कम्युनिकेशंस अच्छे वेतन में योग प्रशिक्षक की भर्ती कर रहे हैं । Yoga Teacher कैरियर भी आकर्षक हो रहा है क्योंकि विकासशील और विकसित समाज दोनों में योग को महत्व दिया जा रहा है । 21 जून को विश्व योग दिवस घोषित करने के बाद,yoga trainer और योग शिक्षक के योग में कैरियर के अवसरों में कई गुना बढ़ गया है । कई लोग योग चिकित्सा के लिए Yoga Teacher की मांग करते हैं,जहां योग विशिष्ट रोगों पर केंद्रित होता है । इस प्रकार,हम कह सकते हैं कि योग शिक्षक कैरियर बहुत तेजी से बढ़ रहा है । ( yoga teacher vacancy 2019) जीवन शैली संबंधी विकारों को नियंत्रित करने के लिए योग की प्रभावकारिता अद्वितीय है योग अपनी सादगी और बड़ी हद तक दुनिया भर में जाना जाता है,यह कोई दुष्प्रभाव नहीं दिखाता है । योग और योग चिकित्सा अनुसंधान,अकादमिक,प्रबंधन,प्रशासन,अस्पताल,हीथ रिजॉर्ट आदि के क्षेत्र में कई नौकरियां खुलती है । सरकार ने हर स्कूल में योग प्रशिक्षक बनाना अनिवार्य कर दिया है । उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद,सरकारी अस्पतालों,डिस्पेंसरी,स्वास्थ्य रिसॉर्ट,निजी अस्पतालों,शिक्षण रोजगार आदि में अपना कैरियर अपना सकता है । सरकार ने योग के प्रचार के लिए अनुसंधान केंद्र,संस्थान और परिषद स्थापित की हैं । निजी क्षेत्र आकर्षक प्रशिक्षकों के साथ yoga trainer को भी भर्ती कर रहा है । yoga teacher vacancy 2019,yoga teacher result 2018 up,yoga teacher bharti,yoga teacher news,yoga diploma course in up,yoga teacher ki bharti,yoga teacher vacancy video,
योग में रुचि रखते हैं,लेकिन निश्चित नहीं है कि योग डिप्लोमा,योग शिक्षक कोर्स,योगा अध्यापक कैसे बने,योग कोर्स की जानकारी के अवसर कहां से प्राप्त करें। तो यह लेख आपके लिए पढ़ना आवश्यक है। योग में रुचि रखते हैं,लेकिन निश्चित नहीं है कि योग डिप्लोमा,योग शिक्षक कोर्स,योगा अध्यापक कैसे बने,योग कोर्स की जानकारी के अवसर कहां से प्राप्त करें । तो यह लेख आपके लिए पढ़ना आवश्यक है । कैरियर स्कोप योग प्रशिक्षक बारह कक्षा के बाद का कैरियर एक जोखिम भरा कदम नहीं है,जब योग दुनिया भर में लहर की मांग में है क्योंकि जीवनशैली संबंधी विकारों और मनोदैहिक रोगों के उपचार और रोकथाम में इसकी प्रभावकारीता है । Yoga Teacher वेतन संतोषजनक है और योग शिक्षक को बाजार मानक पर ध्यान नहीं देता है । योग में डिप्लोमा करने के बाद,कई योग प्रशिक्षकों ने अच्छा वेतन कमाया है । दुनिया भर में भारत के सभी कम्युनिकेशंस अच्छे वेतन में योग प्रशिक्षक की भर्ती कर रहे हैं । Yoga Teacher कैरियर भी आकर्षक हो रहा है क्योंकि विकासशील और विकसित समाज दोनों में योग को महत्व दिया जा रहा है । इक्कीस जून को विश्व योग दिवस घोषित करने के बाद,yoga trainer और योग शिक्षक के योग में कैरियर के अवसरों में कई गुना बढ़ गया है । कई लोग योग चिकित्सा के लिए Yoga Teacher की मांग करते हैं,जहां योग विशिष्ट रोगों पर केंद्रित होता है । इस प्रकार,हम कह सकते हैं कि योग शिक्षक कैरियर बहुत तेजी से बढ़ रहा है । जीवन शैली संबंधी विकारों को नियंत्रित करने के लिए योग की प्रभावकारिता अद्वितीय है योग अपनी सादगी और बड़ी हद तक दुनिया भर में जाना जाता है,यह कोई दुष्प्रभाव नहीं दिखाता है । योग और योग चिकित्सा अनुसंधान,अकादमिक,प्रबंधन,प्रशासन,अस्पताल,हीथ रिजॉर्ट आदि के क्षेत्र में कई नौकरियां खुलती है । सरकार ने हर स्कूल में योग प्रशिक्षक बनाना अनिवार्य कर दिया है । उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद,सरकारी अस्पतालों,डिस्पेंसरी,स्वास्थ्य रिसॉर्ट,निजी अस्पतालों,शिक्षण रोजगार आदि में अपना कैरियर अपना सकता है । सरकार ने योग के प्रचार के लिए अनुसंधान केंद्र,संस्थान और परिषद स्थापित की हैं । निजी क्षेत्र आकर्षक प्रशिक्षकों के साथ yoga trainer को भी भर्ती कर रहा है । yoga teacher vacancy दो हज़ार उन्नीस,yoga teacher result दो हज़ार अट्ठारह up,yoga teacher bharti,yoga teacher news,yoga diploma course in up,yoga teacher ki bharti,yoga teacher vacancy video,
जिस समय मोनाति-पुत्र तिष्य ब्राह्मण-ग्रन्थों का अध्ययन कर रहे थे, उस समय सिमाव' नामक बौद्ध स्थविर सात वर्षों से तिष्य के घर पिण्डपात के लिए आया करते थे। विका इतने दिनों से निरन्तर पिण्डपात के लिए तिष्य के यहां आने में एक ही कारण था कि विष्य-जैसे प्रतिभाशाली छात्र की बौद्धधर्म में लाया जाय। सिगाव परिचय प्रभाव की प्रगाढता तथा अनुकूल अवसर की ही ताक लगाये चुप थे। एक दिन वह अवसर आ हो गया। तिष्य विद्याध्ययन के लिए अपने गुरु के घर गये थे। ऐसा जानकर ही उनके घर आये। अकस्मात् तथा अनवसर बौद्धमित्तु को उपस्थित हो जाने पर तिप्प के पिता ने जल्दी में, विष्य का ही आसन 'सिसाब' के लिए बैठने को दे दिया। सिमाव उसी स्थान पर बैठकर तिष्य के पिता से बातचीत करने लगे। इसी बीच तिप्प घर आ गये। कहते है कि अपने आसन पर बैठे बौद्ध भिक्षु को देखकर तिष्य का चेहरा आया, जिसे सिग्गव ने अच्छी तरह माँप लिया। 'सिसव' ने अनुकूल अवसर देखकर तिष्य से पूछा- क्या तुम शास्त्र जानते हो । तिष्य ने भी सिमाव से ऐसा ही प्रश्न किया। इसपर स्थविर सिमाव ने कहा- 'हा, मैं तो शास्त्र जानता हूँ।' सिमाब का इतना कहना था कि तमतमायें तिष्य ने तुरत वेद-मंत्रों की व्याख्या पूछ दी। किन्तु सिग्गव साधारण भिक्षु तो थे नहीं, उन्होंने उन मंत्रों की सुन्दर और विस्तृत व्याख्या कर दी। सिगाव स्वयं वेदश थे और पाटलिपुत्र के किसी ब्राह्मणाश्रमाल्य के पुत्र थे। बादास ग्रंथ का अध्ययन कर लेने के बाद उन्होंने बुद्ध धर्म में प्रवा ली थी। सिष्य के प्रश्नों के उत्तर दे लेने के बाद सिगाव ने विष्य से अभिधर्मपिटक के 'चित्तयमक' प्रकरण की कुछ बातें, जिनका उत्तर तिष्य नहीं दे सके। वि के अपार ज्ञान को देखकर तिष्य ने उनसे शिक्षा लेने की प्रार्थना की, जिसे सिगाव ने स्वीकार कर लिया और तिष्य को शिष्य बनाया। तिष्य ने सिमाव के अतिरिक्त पाटलिपुत्र के प्रसिद्ध दूसरे भिक्षु 'चण्डवदिन' से बौद्धधर्म ग्रन्थों की भी शिक्षा ती चण्डवज्जि भी पाटलिपुत्र के एक ब्राह्मण-अमात्य के ही पुत्र थे और सिगाव के साथी थे। दोनों ने साथ-साथ ब्राह्मणग्रन्थों का अध्ययन किया था। यह सारी कथा 'महावंस' के पाँचवें परिच्छेद में मिलती है। उसके अनुसार अशोक तक की शिष्य परम्परा क्रमशः इस तरह थी- (१) बुद्ध, (२) उपालि, (३) दासक (वैशाली निवासी ), (४) सोशक (काशी-निवासी), (५) सिग्गव और चण्डवजि, (६) मोमालिपुत्र तिष्य और (७) अशोक । यहाँ एक बात का स्पष्टीकरण आवश्यक है कि 'ललितविस्तर' और 'महावस्तु' नामक दोनों बौद्धग्रंथ अशोक के गुरु का नाम 'उपगुप्त बतलाते हैं। किन्तु यह नितान्त भ्रामक है। उपगुप्त को आनन्द के शिष्य 'माध्यन्दिन' का शिष्य कहा गया है। इसके अतिरिक्त साक वासी का शिष्य भी उन्हें कहा गया है। साथ ही यह भी कहा जाता है कि उपगुप्त सर्वास्तिवादी सिद्धान्त के उन्नायकों में से थे किन्तु ये सारी बातें ऐतिहासिक पद्धति तथा अशोक के विचारों के प्रतिकूल हैं। आनन्द से लगभग २५० वर्ष बाद सम्राट अशोक हुए, इसलिए
जिस समय मोनाति-पुत्र तिष्य ब्राह्मण-ग्रन्थों का अध्ययन कर रहे थे, उस समय सिमाव' नामक बौद्ध स्थविर सात वर्षों से तिष्य के घर पिण्डपात के लिए आया करते थे। विका इतने दिनों से निरन्तर पिण्डपात के लिए तिष्य के यहां आने में एक ही कारण था कि विष्य-जैसे प्रतिभाशाली छात्र की बौद्धधर्म में लाया जाय। सिगाव परिचय प्रभाव की प्रगाढता तथा अनुकूल अवसर की ही ताक लगाये चुप थे। एक दिन वह अवसर आ हो गया। तिष्य विद्याध्ययन के लिए अपने गुरु के घर गये थे। ऐसा जानकर ही उनके घर आये। अकस्मात् तथा अनवसर बौद्धमित्तु को उपस्थित हो जाने पर तिप्प के पिता ने जल्दी में, विष्य का ही आसन 'सिसाब' के लिए बैठने को दे दिया। सिमाव उसी स्थान पर बैठकर तिष्य के पिता से बातचीत करने लगे। इसी बीच तिप्प घर आ गये। कहते है कि अपने आसन पर बैठे बौद्ध भिक्षु को देखकर तिष्य का चेहरा आया, जिसे सिग्गव ने अच्छी तरह माँप लिया। 'सिसव' ने अनुकूल अवसर देखकर तिष्य से पूछा- क्या तुम शास्त्र जानते हो । तिष्य ने भी सिमाव से ऐसा ही प्रश्न किया। इसपर स्थविर सिमाव ने कहा- 'हा, मैं तो शास्त्र जानता हूँ।' सिमाब का इतना कहना था कि तमतमायें तिष्य ने तुरत वेद-मंत्रों की व्याख्या पूछ दी। किन्तु सिग्गव साधारण भिक्षु तो थे नहीं, उन्होंने उन मंत्रों की सुन्दर और विस्तृत व्याख्या कर दी। सिगाव स्वयं वेदश थे और पाटलिपुत्र के किसी ब्राह्मणाश्रमाल्य के पुत्र थे। बादास ग्रंथ का अध्ययन कर लेने के बाद उन्होंने बुद्ध धर्म में प्रवा ली थी। सिष्य के प्रश्नों के उत्तर दे लेने के बाद सिगाव ने विष्य से अभिधर्मपिटक के 'चित्तयमक' प्रकरण की कुछ बातें, जिनका उत्तर तिष्य नहीं दे सके। वि के अपार ज्ञान को देखकर तिष्य ने उनसे शिक्षा लेने की प्रार्थना की, जिसे सिगाव ने स्वीकार कर लिया और तिष्य को शिष्य बनाया। तिष्य ने सिमाव के अतिरिक्त पाटलिपुत्र के प्रसिद्ध दूसरे भिक्षु 'चण्डवदिन' से बौद्धधर्म ग्रन्थों की भी शिक्षा ती चण्डवज्जि भी पाटलिपुत्र के एक ब्राह्मण-अमात्य के ही पुत्र थे और सिगाव के साथी थे। दोनों ने साथ-साथ ब्राह्मणग्रन्थों का अध्ययन किया था। यह सारी कथा 'महावंस' के पाँचवें परिच्छेद में मिलती है। उसके अनुसार अशोक तक की शिष्य परम्परा क्रमशः इस तरह थी- बुद्ध, उपालि, दासक , सोशक , सिग्गव और चण्डवजि, मोमालिपुत्र तिष्य और अशोक । यहाँ एक बात का स्पष्टीकरण आवश्यक है कि 'ललितविस्तर' और 'महावस्तु' नामक दोनों बौद्धग्रंथ अशोक के गुरु का नाम 'उपगुप्त बतलाते हैं। किन्तु यह नितान्त भ्रामक है। उपगुप्त को आनन्द के शिष्य 'माध्यन्दिन' का शिष्य कहा गया है। इसके अतिरिक्त साक वासी का शिष्य भी उन्हें कहा गया है। साथ ही यह भी कहा जाता है कि उपगुप्त सर्वास्तिवादी सिद्धान्त के उन्नायकों में से थे किन्तु ये सारी बातें ऐतिहासिक पद्धति तथा अशोक के विचारों के प्रतिकूल हैं। आनन्द से लगभग दो सौ पचास वर्ष बाद सम्राट अशोक हुए, इसलिए
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में शुक्रवार को लगभग 20 से अधिक छात्रों ने छात्रसंघ बहाली के लिए प्रशासनिक भवन के बाहर धरना दिया। छात्रसंघ बहाली मोर्चा से जुडे छात्रों ने अपने अभियान के 146वें दिन कुलसचिव को ज्ञापन दिया। इसमें छात्रों की ओर से कहा गया है कि विश्वविद्यालय में अगर शिक्षक संघ व कर्मचारी संघ का चुनाव हो सकता है तो छात्रसंघ का भी हो। छात्र विंध्या शुक्ला ने बताया कि छात्रों द्वारा प्रशासन से जल्द चुनाव तिथि की घोषणा करने की मांग की गई और समय अवधि के अंदर मांग पूरी न होने पर हम आंदोलन को बाध्य होंगे। इस मौके पर विपुल यादव, सिद्धार्थ मिश्रा, अभिनय, यश, हर्ष, आकाश सहित कई अन्य छात्र उपस्थित रहे।
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में शुक्रवार को लगभग बीस से अधिक छात्रों ने छात्रसंघ बहाली के लिए प्रशासनिक भवन के बाहर धरना दिया। छात्रसंघ बहाली मोर्चा से जुडे छात्रों ने अपने अभियान के एक सौ छियालीसवें दिन कुलसचिव को ज्ञापन दिया। इसमें छात्रों की ओर से कहा गया है कि विश्वविद्यालय में अगर शिक्षक संघ व कर्मचारी संघ का चुनाव हो सकता है तो छात्रसंघ का भी हो। छात्र विंध्या शुक्ला ने बताया कि छात्रों द्वारा प्रशासन से जल्द चुनाव तिथि की घोषणा करने की मांग की गई और समय अवधि के अंदर मांग पूरी न होने पर हम आंदोलन को बाध्य होंगे। इस मौके पर विपुल यादव, सिद्धार्थ मिश्रा, अभिनय, यश, हर्ष, आकाश सहित कई अन्य छात्र उपस्थित रहे।
पीसीसी चीफ पद से हटाये जाने के बाद पायलट पहली बार यहां आये थे. जयपुर. करीब एक महीने से ज्यादा लंबे समय तक चले सियासी संग्राम (Political crisis) के पटाक्षेप के बाद पूर्व पीसीसी चीफ सचिन पायलट (Sachin Pilot) गुरुवार को पहली बार प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय (PCC) पहुंचे. पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) की जयंती के मौके पर आये पायलट ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सबको साथ लेकर चलना है. सबकी भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि बात नगर निगम चुनाव की ही नहीं है. 3 साल बाद पार्टी को फिर से चुनाव में जाना है. सब मिलकर चलेंगे तो ही सफलता मिलेगी. श्रद्धाजंलि सभा में पहले सीएम अशोक गहलोत के आने का भी कार्यक्रम था. लेकिन ऐन वक्त पर उनका पीसीसी आने का कार्यक्रम रद्द हो गया. इसके पीछे कारण इंदिरा रसोई योजना का उद्घाटन बताया जा रहा है. श्रद्धाजंलि कार्यक्रम के समय ही इंदिरा रसोई योजना का उद्घाटन कार्यक्रम था. लिहाजा गहलोत वहां चले गये. गहलोत ने ट्वीट कर राजीव गांधी को श्रद्धाजंलि दी. उन्होंने ट्वीट करके कहा कि "कोरोना महामारी से प्रभावी मुकाबले में संचार तकनीक की बड़ी भूमिका रही, यह देश में संचार क्रांति की नींव रखने वाले राजीव गांधी के कारण ही संभव हो पाया". .
पीसीसी चीफ पद से हटाये जाने के बाद पायलट पहली बार यहां आये थे. जयपुर. करीब एक महीने से ज्यादा लंबे समय तक चले सियासी संग्राम के पटाक्षेप के बाद पूर्व पीसीसी चीफ सचिन पायलट गुरुवार को पहली बार प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय पहुंचे. पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती के मौके पर आये पायलट ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सबको साथ लेकर चलना है. सबकी भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि बात नगर निगम चुनाव की ही नहीं है. तीन साल बाद पार्टी को फिर से चुनाव में जाना है. सब मिलकर चलेंगे तो ही सफलता मिलेगी. श्रद्धाजंलि सभा में पहले सीएम अशोक गहलोत के आने का भी कार्यक्रम था. लेकिन ऐन वक्त पर उनका पीसीसी आने का कार्यक्रम रद्द हो गया. इसके पीछे कारण इंदिरा रसोई योजना का उद्घाटन बताया जा रहा है. श्रद्धाजंलि कार्यक्रम के समय ही इंदिरा रसोई योजना का उद्घाटन कार्यक्रम था. लिहाजा गहलोत वहां चले गये. गहलोत ने ट्वीट कर राजीव गांधी को श्रद्धाजंलि दी. उन्होंने ट्वीट करके कहा कि "कोरोना महामारी से प्रभावी मुकाबले में संचार तकनीक की बड़ी भूमिका रही, यह देश में संचार क्रांति की नींव रखने वाले राजीव गांधी के कारण ही संभव हो पाया". .
शिमला. हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में अब स्कूली शिक्षा (School Education) को सियासी रंग में रंगा जा रहा है. सरकारी स्कूलों में वर्दी का रंग बदलने के बाद अब हिमाचल की जयराम सरकार स्कूलों में अब पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narender Modi) और सीएम जयराम ठाकुर (CM Jairam Thakur) के फोटो लगे हुए बैग बच्चों को बाटेंगी. मैरून रंग के इन बै्ग्स में ' शिक्षा की अखंड ज्योति, हम भविष्य के मोती', लिखा गया है. यह बैग्स पहली, तीसरी, छठी और 9वीं क्लास के बच्चों को इसी माह से बांटे जाने का प्लान है. सरकार ने उत्तर प्रदेश की एक निजी फर्म से बैग खरीदें हैं. पीएम मोदी ने कहा- वर्कफोर्स को स्किल्ड बनाना वक्त की जरूरत, जानें और क्या कहा? अमर उजाला की खबर के अनुसार, सरकार ने कुछ समय पहले ही बैग (School Bags) सप्लाई का ऑर्डर दिया था और अब पहली खेप पहुंच चुकी है. बैग सभी जिलों में भेज दिए गए हैं. जिलों में शिक्षा उपनिदेशकों ने बैग खंड शिक्षा अधिकारी और बीआरसीसी की देखरेख में बांटने की तैयारी के लिए सैंपल भेजे हैं. शिक्षा विभाग ने निर्देश दिए हैं कि अगर बैग सैंपल से मेल नहीं खाते हैं तो इसकी सूचना निदेशालय में दी जाए. उधर, हाल ही में सूबे के स्कूलों में दो साल बाद नई वर्दी बांटने की प्रक्रिया शुरू हुई है. समय पर टेंडर प्रक्रिया पूरी न होने से बच्चों को बीते वर्ष स्कूली वर्दी नहीं मिल पाई थी. सी पाल रासू, प्रधान सचिव, शिक्षा, हिमाचल प्रदेश (कार्यकारी) का कहना है कि राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के जरिये स्कूल बैग के टेंडर हुए हैं. फर्म ने सप्लाई देना शुरू कर दिया है और धीरे-धीरे स्टॉक पहुंचेगा. आचार संहिता के कारण कांगड़ा (Kangra) और सिरमौर (Sirmour) को छोड़ शेष जिलों में स्कूल बैग बांटे जाएंगे. ये भी पढ़ेंः रिवालसर में समाधि में लामाः 49 दिन बाद होगा लामा रिम्पोछे का अंतिम संस्कार! .
शिमला. हिमाचल प्रदेश में अब स्कूली शिक्षा को सियासी रंग में रंगा जा रहा है. सरकारी स्कूलों में वर्दी का रंग बदलने के बाद अब हिमाचल की जयराम सरकार स्कूलों में अब पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम जयराम ठाकुर के फोटो लगे हुए बैग बच्चों को बाटेंगी. मैरून रंग के इन बै्ग्स में ' शिक्षा की अखंड ज्योति, हम भविष्य के मोती', लिखा गया है. यह बैग्स पहली, तीसरी, छठी और नौवीं क्लास के बच्चों को इसी माह से बांटे जाने का प्लान है. सरकार ने उत्तर प्रदेश की एक निजी फर्म से बैग खरीदें हैं. पीएम मोदी ने कहा- वर्कफोर्स को स्किल्ड बनाना वक्त की जरूरत, जानें और क्या कहा? अमर उजाला की खबर के अनुसार, सरकार ने कुछ समय पहले ही बैग सप्लाई का ऑर्डर दिया था और अब पहली खेप पहुंच चुकी है. बैग सभी जिलों में भेज दिए गए हैं. जिलों में शिक्षा उपनिदेशकों ने बैग खंड शिक्षा अधिकारी और बीआरसीसी की देखरेख में बांटने की तैयारी के लिए सैंपल भेजे हैं. शिक्षा विभाग ने निर्देश दिए हैं कि अगर बैग सैंपल से मेल नहीं खाते हैं तो इसकी सूचना निदेशालय में दी जाए. उधर, हाल ही में सूबे के स्कूलों में दो साल बाद नई वर्दी बांटने की प्रक्रिया शुरू हुई है. समय पर टेंडर प्रक्रिया पूरी न होने से बच्चों को बीते वर्ष स्कूली वर्दी नहीं मिल पाई थी. सी पाल रासू, प्रधान सचिव, शिक्षा, हिमाचल प्रदेश का कहना है कि राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के जरिये स्कूल बैग के टेंडर हुए हैं. फर्म ने सप्लाई देना शुरू कर दिया है और धीरे-धीरे स्टॉक पहुंचेगा. आचार संहिता के कारण कांगड़ा और सिरमौर को छोड़ शेष जिलों में स्कूल बैग बांटे जाएंगे. ये भी पढ़ेंः रिवालसर में समाधि में लामाः उनचास दिन बाद होगा लामा रिम्पोछे का अंतिम संस्कार! .
पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान शाहिद आफरीदी के कश्मीर से जुड़े दिए गए बयान पर टीम इंडिया के 'गब्बर' ने पलटवार किया है. भारतीय क्रिकेट टीम के ओपनर शिखर धवन ने गुरुवार को ट्वीट कर शाहिद से कहा कि पहले खुदके देश की हालत सुधारो, अपनी सोच अपने पास रखो. शिखर ने लिखा कि ज्यादा दिमाग मत लगाओ. शिखर धवन ने अपने ट्वीट में लिखा, " पहले खुदके देश की हालत सुधारो. अपनी सोच अपने पास रखो. अपने देश का जो हमें कर रहे हैं वो अच्छा ही है और आगे जो करना है वो हमें अच्छे से पता है. ज्यादा दिमाग मत लगाओ. आपको बता दें कि आफरीदी को इससे पहले कई भारतीय क्रिकेटर उन्हें जवाब दे चुके हैं. इसके अलावा आम लोग भी सोशल मीडिया के जरिए आफरीदी को लताड़ लगा रहे हैं. क्या लिखा था आफरीदी ने? आपको बता दें कि शाहिद आफरीदी ने अपने ट्विटर पर लिखा था कि 'भारत के कब्जे वाले कश्मीर में स्थिति नाजुक होती जा रही है. ' आफरीदी ने लिखा, 'वहां पर आज़ादी की आवाज़ को दबाया जा रहा है और बेगुनाहों को मारा जा रहा है. लेकिन यह देख कर हैरानी हो रही है कि अभी तक सयुंक्त राष्ट्र कहां पर है. संयुक्त राष्ट्र इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कोई कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा है'.
पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान शाहिद आफरीदी के कश्मीर से जुड़े दिए गए बयान पर टीम इंडिया के 'गब्बर' ने पलटवार किया है. भारतीय क्रिकेट टीम के ओपनर शिखर धवन ने गुरुवार को ट्वीट कर शाहिद से कहा कि पहले खुदके देश की हालत सुधारो, अपनी सोच अपने पास रखो. शिखर ने लिखा कि ज्यादा दिमाग मत लगाओ. शिखर धवन ने अपने ट्वीट में लिखा, " पहले खुदके देश की हालत सुधारो. अपनी सोच अपने पास रखो. अपने देश का जो हमें कर रहे हैं वो अच्छा ही है और आगे जो करना है वो हमें अच्छे से पता है. ज्यादा दिमाग मत लगाओ. आपको बता दें कि आफरीदी को इससे पहले कई भारतीय क्रिकेटर उन्हें जवाब दे चुके हैं. इसके अलावा आम लोग भी सोशल मीडिया के जरिए आफरीदी को लताड़ लगा रहे हैं. क्या लिखा था आफरीदी ने? आपको बता दें कि शाहिद आफरीदी ने अपने ट्विटर पर लिखा था कि 'भारत के कब्जे वाले कश्मीर में स्थिति नाजुक होती जा रही है. ' आफरीदी ने लिखा, 'वहां पर आज़ादी की आवाज़ को दबाया जा रहा है और बेगुनाहों को मारा जा रहा है. लेकिन यह देख कर हैरानी हो रही है कि अभी तक सयुंक्त राष्ट्र कहां पर है. संयुक्त राष्ट्र इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कोई कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा है'.
बॉलीवुड तड़का टीम. सलमान खान का मोस्ट कॉन्ट्रोवर्सियल टीवी रियलिटी शो बिग बॉस 16 भले ही अब खत्म हो चुका है। हालांकि, शो के कंटेस्टेंट्स अभी भी सुर्खियों में बने हुए हैं। रैपर एमसी स्टेन जहां शो के विनर रहे तो वहीं, शिव ठाकरे शो के फर्स्ट रनर अप रहे। जबकि प्रियंका चाहर चौधरी सैंकण्ड रनरअप रहीं। वहीं, शो में फर्स्ट रनरअप का खिताब जीतने के बाद शिव ठाकरे अपने होमटाउन अमरावती (महाराष्ट्र) पहुंचे, जहां उनका जोरदार स्वागत हुआ। गृहनगर में शिव के वेलकम का ये वीडियो अब सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। सामने आए वीडियो में देखा जा सकता है कि होमटाउन अमरावती पहुंचे शिव ठाकरे भारी भीड़ में घिरे नजर आ रहे हैं। लाखों की संख्या में लोग एक्टर का स्वागत करते दिख रहे हैं। इस दौरान शिव महाराष्ट्रियन अंदाज में सिर पर पगड़ी बांधे और तिलक लगाए नजर आ रहे हैं और उनके चेहरे पर खुशी साफ झलक रही है। फैंस इस वीडियो को खूब लाइक कर रहे हैं और कमेंट कर शिव ठाकरे को ही बिग बॉस 16 का रियल विनर बता रहे हैं।
बॉलीवुड तड़का टीम. सलमान खान का मोस्ट कॉन्ट्रोवर्सियल टीवी रियलिटी शो बिग बॉस सोलह भले ही अब खत्म हो चुका है। हालांकि, शो के कंटेस्टेंट्स अभी भी सुर्खियों में बने हुए हैं। रैपर एमसी स्टेन जहां शो के विनर रहे तो वहीं, शिव ठाकरे शो के फर्स्ट रनर अप रहे। जबकि प्रियंका चाहर चौधरी सैंकण्ड रनरअप रहीं। वहीं, शो में फर्स्ट रनरअप का खिताब जीतने के बाद शिव ठाकरे अपने होमटाउन अमरावती पहुंचे, जहां उनका जोरदार स्वागत हुआ। गृहनगर में शिव के वेलकम का ये वीडियो अब सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। सामने आए वीडियो में देखा जा सकता है कि होमटाउन अमरावती पहुंचे शिव ठाकरे भारी भीड़ में घिरे नजर आ रहे हैं। लाखों की संख्या में लोग एक्टर का स्वागत करते दिख रहे हैं। इस दौरान शिव महाराष्ट्रियन अंदाज में सिर पर पगड़ी बांधे और तिलक लगाए नजर आ रहे हैं और उनके चेहरे पर खुशी साफ झलक रही है। फैंस इस वीडियो को खूब लाइक कर रहे हैं और कमेंट कर शिव ठाकरे को ही बिग बॉस सोलह का रियल विनर बता रहे हैं।
नई दिल्ली। जियो ने जबसे मार्केट में कदम रखा है तबसे कई कंपनियों में तहलका मचा हुआ है। टेलीकॉम कंपनियां जियो को टक्कर देने के लिए और अपने ग्राहक बेस को बचाकर रखने के लिए ऐड़ी-चोटी का जोड़ लगा रखी हैं। बता दें कि बीते सालों में जियो ने अपने ग्राहकों के लिए बेहतरीन ऑपर पेश किया है। जिसको देखते हुए अब बीएसएनएल ने जियो को टक्कर देने के लिए कमर कस ली है। सरकारी ऑपरेटर BSNL ने एक धांसू ऑफर के तहत 399 रुपये का रिचार्ज प्लान सिर्फ 100 रुपये में उतारा है। यह ऑफर उनके लिए है जो BSNL के नए यूजर्स होंगे या फिर जो मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी के तहत सरकारी टेलीकॉम की सेवा पर शिफ्ट होंगे। बीएसएनएल ने इसे मेगा ऑफर के नाम से जारी किया है। यह प्लान सात राज्यों में वैध होगा। इसमें यूपी, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और जम्मू और कश्मीर शामिल है। BSNL के Mega Offer का फायदा उठाना चाहते हैं तो फिर आपको IOCL/HPSC के घरेलू एलपीजी बिलों पर BSNL के कूपन्स को प्रिंट कराना होगा। इसके बाद ऑपरेटर यूजर को नया सिम कार्ड इश्यू करेगा। जिसके बाद BSNL का पहला 399 रुपये का रिचार्ज प्लान सिर्फ 100 रुपये में पड़ेगा। बीएसएनएल के इस ऑफर में यूजर्स को Unlimited Local+STD Call का फायदा मिलेगा। इसके अलावा रोजाना एक जीबी डाटा भी ग्राहकों को मिलेगा। इस पैक की वैलिडिटी है 74 दिनों की। हाई स्पीड डाटा की लिमिट खत्म होने के बाद डाटा का स्पीड 80 केबीपीएस हो जाएगी।
नई दिल्ली। जियो ने जबसे मार्केट में कदम रखा है तबसे कई कंपनियों में तहलका मचा हुआ है। टेलीकॉम कंपनियां जियो को टक्कर देने के लिए और अपने ग्राहक बेस को बचाकर रखने के लिए ऐड़ी-चोटी का जोड़ लगा रखी हैं। बता दें कि बीते सालों में जियो ने अपने ग्राहकों के लिए बेहतरीन ऑपर पेश किया है। जिसको देखते हुए अब बीएसएनएल ने जियो को टक्कर देने के लिए कमर कस ली है। सरकारी ऑपरेटर BSNL ने एक धांसू ऑफर के तहत तीन सौ निन्यानवे रुपयापये का रिचार्ज प्लान सिर्फ एक सौ रुपयापये में उतारा है। यह ऑफर उनके लिए है जो BSNL के नए यूजर्स होंगे या फिर जो मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी के तहत सरकारी टेलीकॉम की सेवा पर शिफ्ट होंगे। बीएसएनएल ने इसे मेगा ऑफर के नाम से जारी किया है। यह प्लान सात राज्यों में वैध होगा। इसमें यूपी, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और जम्मू और कश्मीर शामिल है। BSNL के Mega Offer का फायदा उठाना चाहते हैं तो फिर आपको IOCL/HPSC के घरेलू एलपीजी बिलों पर BSNL के कूपन्स को प्रिंट कराना होगा। इसके बाद ऑपरेटर यूजर को नया सिम कार्ड इश्यू करेगा। जिसके बाद BSNL का पहला तीन सौ निन्यानवे रुपयापये का रिचार्ज प्लान सिर्फ एक सौ रुपयापये में पड़ेगा। बीएसएनएल के इस ऑफर में यूजर्स को Unlimited Local+STD Call का फायदा मिलेगा। इसके अलावा रोजाना एक जीबी डाटा भी ग्राहकों को मिलेगा। इस पैक की वैलिडिटी है चौहत्तर दिनों की। हाई स्पीड डाटा की लिमिट खत्म होने के बाद डाटा का स्पीड अस्सी केबीपीएस हो जाएगी।
'राहुल गांधी का दावा गलत, मसूद अजहर के साथ नहीं गए थे अजीत डोभाल' अजित डोभाल (फाइल फोटो) सैन्य प्रतिष्ठान के सूत्रों ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के उस बयान को खारिज किया है जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल पर गंभीर आरोप लगाए थे। गांधी ने कहा था कि डोभाल जैश-ए-मोहम्मद के मुखिया मसूद अजहर के साथ 1999 में कंधार गए थे जहां उसे भारतीय विमान यात्रियों को छुड़ाने की एवज में मुक्त किया गया था। मसूद की रिहाई के लिए आतंकियों ने एक भारतीय विमान का अपहरण कर लिया था। एक वरिष्ठ सूत्र ने कहा, 'वह (डोभाल) उस विमान में सवार नहीं थे जिसमें कि अजहर को कंधार ले जाया गया था ताकि आईसी-814 में सवाल 161 यात्रियों को सकुशल बचाया जा सके। ' उस समय डोभाल खुफिया ब्यूरो के अतिरिक्त निदेशक थे। डोभाल अजहर की रिहाई से पहले कंधार गए थे ताकि आईएसआई नियंत्रित हाईजैकर्स और तालिबान के नेताओं के साथ बातचीत कर सकें। यह दावा तत्कालीन गृहमंत्री लालाकृष्ण आडवाणी और रॉ के मुखिया रहे एएस दुलात ने अपनी किताबों माई कंट्री, माई लाइफ और द वाजपेयी ईयर्स में किया है। उस समय विदेश मंत्री रहे जसवंत सिंह आतंकी अजहर और दो आतंकियों के साथ विमान में सवार थे। इन दोनों आतंकियों ने बाद में अमेरिकन पत्रकार डेनियल पर्ल और मुश्ताक जारगर की हत्या कर दी थी। सूत्र ने कहा, 'वाजपेयी सरकार ने अजहर को छोड़ने का फैसला किया था ताकि 161 भारतीयों की जिंदगी को बचाया जा सके। आतंकियों ने शपथ ली थी कि यदि उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाएगा तो वह उन सभी को मार देंगे। यह अच्छा या बुरा जैसा निर्णय था इसपर चर्चा हो सकती है लेकिन इससे उस अधिकारी पर उंगली नहीं उठाई जा सकती जिसने निर्देशों का पालन किया था। ' आतंकी 13 अरब 94 करोड़ 27 लाख रुपये की फिरौती के साथ ही भारतीय यात्रियों के बदले भारतीय जेलों में कैद 36 आतंकवादियों की रिहाई चाहते थे। डोभार और दूसरे भारतीय वार्ताकार जिसमें खुफिया ब्यूरो के एनएस संधू और वरिष्ठ रॉ अधिकारी सीडी सहाय भी शामिल थे उन्होंने आतंकियों से उनकी मांगे कम करवाने में सफलता हासिल की। हालांकि आतकियों ने धमकी दी थी कि अगर अजहर और ओमार शेख को रिहा नहीं किया गया तो वह यात्रियों को मार देंगे। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
'राहुल गांधी का दावा गलत, मसूद अजहर के साथ नहीं गए थे अजीत डोभाल' अजित डोभाल सैन्य प्रतिष्ठान के सूत्रों ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के उस बयान को खारिज किया है जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल पर गंभीर आरोप लगाए थे। गांधी ने कहा था कि डोभाल जैश-ए-मोहम्मद के मुखिया मसूद अजहर के साथ एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में कंधार गए थे जहां उसे भारतीय विमान यात्रियों को छुड़ाने की एवज में मुक्त किया गया था। मसूद की रिहाई के लिए आतंकियों ने एक भारतीय विमान का अपहरण कर लिया था। एक वरिष्ठ सूत्र ने कहा, 'वह उस विमान में सवार नहीं थे जिसमें कि अजहर को कंधार ले जाया गया था ताकि आईसी-आठ सौ चौदह में सवाल एक सौ इकसठ यात्रियों को सकुशल बचाया जा सके। ' उस समय डोभाल खुफिया ब्यूरो के अतिरिक्त निदेशक थे। डोभाल अजहर की रिहाई से पहले कंधार गए थे ताकि आईएसआई नियंत्रित हाईजैकर्स और तालिबान के नेताओं के साथ बातचीत कर सकें। यह दावा तत्कालीन गृहमंत्री लालाकृष्ण आडवाणी और रॉ के मुखिया रहे एएस दुलात ने अपनी किताबों माई कंट्री, माई लाइफ और द वाजपेयी ईयर्स में किया है। उस समय विदेश मंत्री रहे जसवंत सिंह आतंकी अजहर और दो आतंकियों के साथ विमान में सवार थे। इन दोनों आतंकियों ने बाद में अमेरिकन पत्रकार डेनियल पर्ल और मुश्ताक जारगर की हत्या कर दी थी। सूत्र ने कहा, 'वाजपेयी सरकार ने अजहर को छोड़ने का फैसला किया था ताकि एक सौ इकसठ भारतीयों की जिंदगी को बचाया जा सके। आतंकियों ने शपथ ली थी कि यदि उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाएगा तो वह उन सभी को मार देंगे। यह अच्छा या बुरा जैसा निर्णय था इसपर चर्चा हो सकती है लेकिन इससे उस अधिकारी पर उंगली नहीं उठाई जा सकती जिसने निर्देशों का पालन किया था। ' आतंकी तेरह अरब चौरानवे करोड़ सत्ताईस लाख रुपये की फिरौती के साथ ही भारतीय यात्रियों के बदले भारतीय जेलों में कैद छत्तीस आतंकवादियों की रिहाई चाहते थे। डोभार और दूसरे भारतीय वार्ताकार जिसमें खुफिया ब्यूरो के एनएस संधू और वरिष्ठ रॉ अधिकारी सीडी सहाय भी शामिल थे उन्होंने आतंकियों से उनकी मांगे कम करवाने में सफलता हासिल की। हालांकि आतकियों ने धमकी दी थी कि अगर अजहर और ओमार शेख को रिहा नहीं किया गया तो वह यात्रियों को मार देंगे। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
क्रिकेट जगत से आई बेहद दुखद खबर, प्रैक्टिस के दौरान क्रिकेटर की मौत- इंग्लैंड में 24 वर्षीय क्रिकेटर Josh Downie की मौत हो गई है, वह क्रिकेट अभ्यास कर रहे थे तभी उनकी तबियत बिगड़ी जिसके बाद उनको हॉस्पिटल ले जाया गया. उसी शाम को हॉस्पिटल अथॉरिटी ने उन्हें मृत घोषित कर दिया गया. आपको बता दें कि 24 वर्षीय Josh Downie ओलिम्पियन्स बेकि और एली (Becky and Ellie) के भाई थे. Becky Downie मशहूर इंग्लिश जिमनास्टिक हैं, जिन्होंने 2008 और 2016 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक्स में पार्टिसिपेट किया था. Josh Downie की मां ने अपने क्रिकेटर बेटे को याद करते हुए कहा, वह मिलनसार था और दिल से बहुत अच्छे विचारों वाला था. उसके बेटे के पास सबकुछ था, वह अपनी जिंदगी को एन्जॉय भी कर रहा था. वह अपने बेटे को बहुत याद करेगी. उन्होंने उन आर्गेनाईजेशन का धन्यवाद भी दिया, जिन्होंने उनके बेटे को श्रद्धांजलि अर्पित की. वहीं उनकी बहन (जिमनास्टिक प्लेयर) ने कहा, इस हादसे को बयां करने के लिए हमारे पास शब्द नहीं है. तुम हमेशा हमारे दिल में रहोगे.
क्रिकेट जगत से आई बेहद दुखद खबर, प्रैक्टिस के दौरान क्रिकेटर की मौत- इंग्लैंड में चौबीस वर्षीय क्रिकेटर Josh Downie की मौत हो गई है, वह क्रिकेट अभ्यास कर रहे थे तभी उनकी तबियत बिगड़ी जिसके बाद उनको हॉस्पिटल ले जाया गया. उसी शाम को हॉस्पिटल अथॉरिटी ने उन्हें मृत घोषित कर दिया गया. आपको बता दें कि चौबीस वर्षीय Josh Downie ओलिम्पियन्स बेकि और एली के भाई थे. Becky Downie मशहूर इंग्लिश जिमनास्टिक हैं, जिन्होंने दो हज़ार आठ और दो हज़ार सोलह ग्रीष्मकालीन ओलंपिक्स में पार्टिसिपेट किया था. Josh Downie की मां ने अपने क्रिकेटर बेटे को याद करते हुए कहा, वह मिलनसार था और दिल से बहुत अच्छे विचारों वाला था. उसके बेटे के पास सबकुछ था, वह अपनी जिंदगी को एन्जॉय भी कर रहा था. वह अपने बेटे को बहुत याद करेगी. उन्होंने उन आर्गेनाईजेशन का धन्यवाद भी दिया, जिन्होंने उनके बेटे को श्रद्धांजलि अर्पित की. वहीं उनकी बहन ने कहा, इस हादसे को बयां करने के लिए हमारे पास शब्द नहीं है. तुम हमेशा हमारे दिल में रहोगे.
भारत में बेजोरगारी की समस्या बहुत बड़ी है. देश के युवा शिक्षित होने के बाद भी बोरोजगार हैं. इसके लिए सरकार हर एक युवा को रोजगार देने के लिए प्रयास कर रही है. इसी को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के शिक्षित बेरोजगारों के लिए एक अहम फैसला लिया है, जिसके तहत उन्हें 2500 रुपए मासिक भत्ते के तौर पर दिया जाएगा. छत्तीसगढ़ सरकार ने सोमवार को विधानसभा में बजट पेश किया, जिसमें कई नई नीतियों और योजनाओं की घोषणाएं की गईं. इन्हीं में से एक राज्य सरकार ने राज्य के शिक्षित बेरोजगारों को 2500 रुपप मासिक भत्ता देने का ऐलान किया है, यानि कि सालाना 30000 रुपए दिए जाएंगे. छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के बेजोरगार युवाओं को प्रति माह 2500 रुपए देने का ऐलान तो किया है, मगर इसका लाभ राज्य के हर एक बेजोरगार युवा को नहीं मिलेगा. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विधानसभा में बजट पेश करते हुए कहा कि इस भत्ते का लाभ 18 साल के 35 साल के युवा बेरोजगारों को ही मिलेगा. इसके अलावा सरकार इन भत्ते का लाभ पाने के लिए एक और शर्त रखी है, जिसके तहत परिवार के सालाना आय 2. 50 लाख रुपए से अधिक नहीं होनी चाहिए. ये भी पढ़ेंः जेब खर्च के लिए मिलेंगे इतने रुपये, बस देने होंगे ये 5 कागज!
भारत में बेजोरगारी की समस्या बहुत बड़ी है. देश के युवा शिक्षित होने के बाद भी बोरोजगार हैं. इसके लिए सरकार हर एक युवा को रोजगार देने के लिए प्रयास कर रही है. इसी को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के शिक्षित बेरोजगारों के लिए एक अहम फैसला लिया है, जिसके तहत उन्हें दो हज़ार पाँच सौ रुपयापए मासिक भत्ते के तौर पर दिया जाएगा. छत्तीसगढ़ सरकार ने सोमवार को विधानसभा में बजट पेश किया, जिसमें कई नई नीतियों और योजनाओं की घोषणाएं की गईं. इन्हीं में से एक राज्य सरकार ने राज्य के शिक्षित बेरोजगारों को दो हज़ार पाँच सौ रुपयापप मासिक भत्ता देने का ऐलान किया है, यानि कि सालाना तीस हज़ार रुपयापए दिए जाएंगे. छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के बेजोरगार युवाओं को प्रति माह दो हज़ार पाँच सौ रुपयापए देने का ऐलान तो किया है, मगर इसका लाभ राज्य के हर एक बेजोरगार युवा को नहीं मिलेगा. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विधानसभा में बजट पेश करते हुए कहा कि इस भत्ते का लाभ अट्ठारह साल के पैंतीस साल के युवा बेरोजगारों को ही मिलेगा. इसके अलावा सरकार इन भत्ते का लाभ पाने के लिए एक और शर्त रखी है, जिसके तहत परिवार के सालाना आय दो. पचास लाख रुपए से अधिक नहीं होनी चाहिए. ये भी पढ़ेंः जेब खर्च के लिए मिलेंगे इतने रुपये, बस देने होंगे ये पाँच कागज!
उतारने के बाद, आर्टिलरी डिवीजन, पोलिश सशस्त्र बलों के सदस्यों द्वारा स्टाफ, संभवतः पहले मसूरियन आर्टिलरी ब्रिगेड से, रज़्डेलनाया रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्मों पर गोता लगाने के लिए गया था। स्थिति से परिचित सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह "मिलिशिया के लिए आश्चर्यचकित करने वाला अप्रिय" हो सकता है, जो कि यूक्रेनी राष्ट्रपति पेट्रो पोरोशेंको ने पहले बात की थी। पूर्वी यूक्रेन में गृह युद्ध में दूसरे देश की नियमित सेना की खुली प्रविष्टि मूल रूप से क्षेत्र में सैन्य-राजनीतिक स्थिति को बदल देती है, रूस और उसके सहयोगियों को पर्याप्त प्रतिक्रिया का अधिकार देती है, नोट Novorus. info.
उतारने के बाद, आर्टिलरी डिवीजन, पोलिश सशस्त्र बलों के सदस्यों द्वारा स्टाफ, संभवतः पहले मसूरियन आर्टिलरी ब्रिगेड से, रज़्डेलनाया रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्मों पर गोता लगाने के लिए गया था। स्थिति से परिचित सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह "मिलिशिया के लिए आश्चर्यचकित करने वाला अप्रिय" हो सकता है, जो कि यूक्रेनी राष्ट्रपति पेट्रो पोरोशेंको ने पहले बात की थी। पूर्वी यूक्रेन में गृह युद्ध में दूसरे देश की नियमित सेना की खुली प्रविष्टि मूल रूप से क्षेत्र में सैन्य-राजनीतिक स्थिति को बदल देती है, रूस और उसके सहयोगियों को पर्याप्त प्रतिक्रिया का अधिकार देती है, नोट Novorus. info.
नई दिल्ली। जब किसी विशेष काम के लिए घर से बाहर निकलें तो दही-चीनी खाकर निकले। ऐसा लगभग सभी घरों में कहा जाता है। इसके काम में शुभ होने की बात तो अलग है। दही से होते हैं कई तरह के फायदें। दही में मौजूद पौष्टिक तत्व शरीर में कैल्शियम की कमी को पूरा कर दांत और हड्डियों को मजबूत बनाते हैं। इसके साथ ही दही खाने को जल्दी पचाने में काफी मदद करता है। अगर आप की इम्यूनिटी मजबूत नहीं है तो आपके बीमार होने का खतरा हमेशा बना रहता है। दही में ऐसे पौष्टक चीजें होती हैं जो इम्यनिटी को मजबूत बनाती हैं। ये महिलाओं के लिए भी बहुत ज्यादा अच्छा होता। बाल चमकाने के लिए घरेलू उपाय करने की सोच रहें हैं तो दही का प्रयोग करना सबसे बेहतर होता है। दही में मौजूद लैक्टिक एसिड में एंटी-फंगल प्रॉपर्टीज़ मौजूद होती है, जिससे ये सिर से डैंड्रफ को खत्म करने में मदद करता है। दही में मौजूद कैल्शियम शरीर में कॉर्टिसॉल हार्मोन को बनने से रोकता है। ये हार्मोन हाइपर टेंशन, ओबेसिटी और कोलेस्ट्रोल का कारण बनता। ऐसे में दही का सेवन बहुत लाभकारी होता है।
नई दिल्ली। जब किसी विशेष काम के लिए घर से बाहर निकलें तो दही-चीनी खाकर निकले। ऐसा लगभग सभी घरों में कहा जाता है। इसके काम में शुभ होने की बात तो अलग है। दही से होते हैं कई तरह के फायदें। दही में मौजूद पौष्टिक तत्व शरीर में कैल्शियम की कमी को पूरा कर दांत और हड्डियों को मजबूत बनाते हैं। इसके साथ ही दही खाने को जल्दी पचाने में काफी मदद करता है। अगर आप की इम्यूनिटी मजबूत नहीं है तो आपके बीमार होने का खतरा हमेशा बना रहता है। दही में ऐसे पौष्टक चीजें होती हैं जो इम्यनिटी को मजबूत बनाती हैं। ये महिलाओं के लिए भी बहुत ज्यादा अच्छा होता। बाल चमकाने के लिए घरेलू उपाय करने की सोच रहें हैं तो दही का प्रयोग करना सबसे बेहतर होता है। दही में मौजूद लैक्टिक एसिड में एंटी-फंगल प्रॉपर्टीज़ मौजूद होती है, जिससे ये सिर से डैंड्रफ को खत्म करने में मदद करता है। दही में मौजूद कैल्शियम शरीर में कॉर्टिसॉल हार्मोन को बनने से रोकता है। ये हार्मोन हाइपर टेंशन, ओबेसिटी और कोलेस्ट्रोल का कारण बनता। ऐसे में दही का सेवन बहुत लाभकारी होता है।
एक समय खुद को देश के लिए शुभ होने का ढिंढोरा देश भर में पीटने वाले पीएम नरेंद्र मोदी कितने शुभ हैं इस बात का पता पूरे देश को चल गया है। पीएम बनने के बाद से कोई न कोई प्राकृतिक आपदा आ रही है। इस बात तो लगभग पूरा देश पानी की किल्लत से जूझ रहा है। बिहार तक का पानी पाताल में पहुंच गया है। गेहूं तो ऐसा हुआ है कि मानो नाखून में घुस जाएगा। वहीं अगस्ता हेलीकॉप्टर प्रकरण में भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि सोनिया गांधी इस मामले में संलिप्त नहीं हो सकती हैं। वे भ्रष्ट नहीं हैं। ये कटाक्ष लालू यादव ने कैप्टन अजय यादव के सहारनवास स्थित श्रीमती शांति देवी लॉ कॉलेज के दीक्षांत समारोह व वार्षिकोत्सव के दौरान मंच से केंद्र सरकार पर कटाक्ष किया। दीक्षांत और वार्षिकोत्सव के रंगारंग कार्यक्रम के दौरान उन्होंने पासआउट होने वाले बच्चों को डिग्री भी वितरित कीं। समारोह के दौरान कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर, कैप्टन अजय यादव, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमेन मनन कुमार मिश्रा व चिरंजीव राव ने भी लोगों को संबोधित किया। इसके अलावा कॉलेज चेयरपर्सन शकुंतला यादव, परिजन, पूर्व विधायक नरेश यादव आदि मौजूद थे। दीक्षांत समारोह के दौरान पासआउट करने वाले एलएलबी के स्टूडेंट्स को सीख देते हुए कहा कि वकील जिंदगी भर सीखते हैं और सबसे ज्यादा सीख उन्हें क्लाइंटों से मिलती है। वकालत के खुद के अनुभव साझा करने के बाद कहा कि वकालत के पेशे में करोड़ों रुपये मिलते हैं। इसके साथ ही उन्होंने सभी स्टूडेंट्स को मन से वकालत करने को कहा। मंच से कैप्टन अजय यादव की तारीफ करते हुए कहा कि कांग्रेस की केंद्र और राज्य सरकार के समय सीएम हुड्डा ने अहीरवाल में एक भी यूनिवर्सिटी नहीं खोली। कैप्टन ने खुले तौर पर इसका विरोध किया और सोनिया गांधी से बात कर इंदिरा गांधी यूनिवर्सिटी तैयार कराकर ही दम लिया। उन्होंने कहा कि यह तारीफ वह इसलिए नहीं कर रहे हैं कि कैप्टन उनके समधी हैं। इस दौरान उन्होंने समधिन शकुंतला यादव के सामने न दिखने पर मजाकिया लहजे में कहा कि समधिन को सामने बैठना चाहिए, पता नहीं कहां छुपी हैं। बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने एलएलबी स्टूडेंट्स को संबोधित करते हुए कहा कि वकालत ऐसी करना कि न्याय गरीबों की पहुंच से दूर न हो। सुप्रीम कोर्ट तक में प्रैक्टिस करने वाले मनन मिश्रा ने स्टूडेंट्स से अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि पढ़ाई खत्म नहीं बल्कि अभी शुरू हुई है। वहीं प्रदेश की स्थिति पर कहा कि हो सकता है कि आगामी चुनाव तय समय से पहले हो जाएं और कैप्टन अजय सीएम हों। । हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
एक समय खुद को देश के लिए शुभ होने का ढिंढोरा देश भर में पीटने वाले पीएम नरेंद्र मोदी कितने शुभ हैं इस बात का पता पूरे देश को चल गया है। पीएम बनने के बाद से कोई न कोई प्राकृतिक आपदा आ रही है। इस बात तो लगभग पूरा देश पानी की किल्लत से जूझ रहा है। बिहार तक का पानी पाताल में पहुंच गया है। गेहूं तो ऐसा हुआ है कि मानो नाखून में घुस जाएगा। वहीं अगस्ता हेलीकॉप्टर प्रकरण में भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि सोनिया गांधी इस मामले में संलिप्त नहीं हो सकती हैं। वे भ्रष्ट नहीं हैं। ये कटाक्ष लालू यादव ने कैप्टन अजय यादव के सहारनवास स्थित श्रीमती शांति देवी लॉ कॉलेज के दीक्षांत समारोह व वार्षिकोत्सव के दौरान मंच से केंद्र सरकार पर कटाक्ष किया। दीक्षांत और वार्षिकोत्सव के रंगारंग कार्यक्रम के दौरान उन्होंने पासआउट होने वाले बच्चों को डिग्री भी वितरित कीं। समारोह के दौरान कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर, कैप्टन अजय यादव, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमेन मनन कुमार मिश्रा व चिरंजीव राव ने भी लोगों को संबोधित किया। इसके अलावा कॉलेज चेयरपर्सन शकुंतला यादव, परिजन, पूर्व विधायक नरेश यादव आदि मौजूद थे। दीक्षांत समारोह के दौरान पासआउट करने वाले एलएलबी के स्टूडेंट्स को सीख देते हुए कहा कि वकील जिंदगी भर सीखते हैं और सबसे ज्यादा सीख उन्हें क्लाइंटों से मिलती है। वकालत के खुद के अनुभव साझा करने के बाद कहा कि वकालत के पेशे में करोड़ों रुपये मिलते हैं। इसके साथ ही उन्होंने सभी स्टूडेंट्स को मन से वकालत करने को कहा। मंच से कैप्टन अजय यादव की तारीफ करते हुए कहा कि कांग्रेस की केंद्र और राज्य सरकार के समय सीएम हुड्डा ने अहीरवाल में एक भी यूनिवर्सिटी नहीं खोली। कैप्टन ने खुले तौर पर इसका विरोध किया और सोनिया गांधी से बात कर इंदिरा गांधी यूनिवर्सिटी तैयार कराकर ही दम लिया। उन्होंने कहा कि यह तारीफ वह इसलिए नहीं कर रहे हैं कि कैप्टन उनके समधी हैं। इस दौरान उन्होंने समधिन शकुंतला यादव के सामने न दिखने पर मजाकिया लहजे में कहा कि समधिन को सामने बैठना चाहिए, पता नहीं कहां छुपी हैं। बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने एलएलबी स्टूडेंट्स को संबोधित करते हुए कहा कि वकालत ऐसी करना कि न्याय गरीबों की पहुंच से दूर न हो। सुप्रीम कोर्ट तक में प्रैक्टिस करने वाले मनन मिश्रा ने स्टूडेंट्स से अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि पढ़ाई खत्म नहीं बल्कि अभी शुरू हुई है। वहीं प्रदेश की स्थिति पर कहा कि हो सकता है कि आगामी चुनाव तय समय से पहले हो जाएं और कैप्टन अजय सीएम हों। । हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
१६० :: श्रेणिक चरित्र कुंताकुंति महातीव्रं भुजाभुजि पदापदि । वक्त्रावक्त्रि भटास्तत्र मुंडामुंडि गदागद ॥१५६॥ बाणाबाणि महातीव्रा घोटकाघोटकि स्फुटं । द्विरदाद्विरदि क्रोधाद्रथारथि नरारि ॥ १५७॥ शब्दाशब्दि क्रुधाक्रोधि लोष्टलोष्टि नृपानृपि । योयुध्यते च वैरेण भटाभटि शिलाशिलि ॥१५८ ॥ वंशावंशिभटा केचिद् वृक्षावृक्षि हलाहलि । (कुलक) ॥१५९ ॥ इत्थं रणे तयोर्जाते प्रजापालो विषण्णधीः । प्रचंडं दुर्दमं मत्वा सचिंतोऽभूत्स्वमानसे ॥१६०॥ से कटे हुए मनुष्यों के मुखरूपी मत्स्य थे । महासागर - जैसा जल पूर्ण रहता है, संग्राम भी घावों से निकलते हुए रक्तरूपी जल से पूर्ण था । महासागर - जैसा मणि- रत्नों से व्याप्त रहता है, संग्राम भी मृत योद्धाओं के दाँतरूपी मणि-रत्नों से व्याप्त था । महासागर में जैसे भयंकर शब्द होते हैं, संग्राम में भी हाथियों के चीत्काररूपी भीषण शब्द थे । महासागर जिस प्रकार बालू सहित होता है, संग्राम भी पिसी हुई हड्डीरूपी बालू सहित था । महासमुद्र - जैसा कीचड़ व्याप्त रहता है, संग्राम भी मांसरूपी कीचड़ से व्याप्त था । महासागर में जैसे मेढ़क और कछुवे रहते हैं, संग्राम में भी वैसे ही कटे हुए घोड़ों के पैर मेढ़क और हाथियों के पैर कछुवे थे । महासागर जैसा खंड पर्वत युक्त www. होता है। संग्राम भी मृत शरीरों का ढेररूप खंड पर्वतयुक्त था । महासागर में जैसे सर्प रहते हैं, संग्राम में भी कटी हुई हाथियों की पूँछे सर्प थीं। महासागर - जैसा पवन परिपूर्ण रहता है, संग्राम भी योद्धाओं के श्वासोच्छ्वासरूपी पवन से परिपूर्ण था । महासागर में जैसा बड़वानल होता है, संग्राम में भी उसी प्रकार चमकते हुए चक्र बड़वानल थे । महासागर - जैसा बेला युक्त होता है, उसी प्रकार संग्राम में भी समस्त दिशाओं में घूमते हुए योद्धारूपी बेला थी । सागर में जैसे नाव और जहाज होते हैं, संग्राम में भी घोड़ेरूपी नाव और जहाज थे तथा संग्राम में खड्गधारी खड्गों से युद्ध करते थे। मुष्टि-युद्ध करने वाले मुष्टियों से लड़ते थे । कोई-कोई आपस में केश पकड़कर युद्ध करते थे। अनेक वीर पुरुष भुजाओं से लड़ते थे। पैरों से लड़ाई करने वाले पैरों से लड़ते थे । सिर लड़ाने वाले सुभट सिर लड़ाकर युद्ध करते थे । बहुत से सुभट आपस में मुख भिड़ाकर लड़ते थे। गदाधारी और तीरंदाज गदाधारी और तीरंदाजों से लड़ते थे । घुड़सवार घुड़सवारों से, गजसवार गजसवारों से, रथसवार रथसवारों से एवं पयादे पयादों से भयंकर युद्ध करते थे। उस संग्राम में अनेक वीर पुरुष शब्द - युद्ध करने वाले थे इसलिए वे शब्द - युद्ध करते थे । लाठी चलाने वाले लाठियों से युद्ध करते थे एवं राजा राजाओं से युद्ध करते थे तथा शिलायुद्ध करने वाले शिलाओं से, बाँस युद्ध करने वाले सुभट बांसों से, वृक्ष उखाड़कर युद्ध करने वाले वृक्षों से करते थे । हल के धारक अपने हलों से युद्ध करते थे । इस प्रकार दोनों राजाओं का आपस में कई दिन तक भयंकर युद्ध होता रहा । अन्त में जब प्रजापाल ने यह देखा कि राजा चंड़प्रद्योतन जीता नहीं जा सकता तो उसे बड़ी चिंता हुई वह उसके जीतने के लिए अनेक उपाय सोचने लगा ॥१३५-१६०॥
एक सौ साठ :: श्रेणिक चरित्र कुंताकुंति महातीव्रं भुजाभुजि पदापदि । वक्त्रावक्त्रि भटास्तत्र मुंडामुंडि गदागद ॥एक सौ छप्पन॥ बाणाबाणि महातीव्रा घोटकाघोटकि स्फुटं । द्विरदाद्विरदि क्रोधाद्रथारथि नरारि ॥ एक सौ सत्तावन॥ शब्दाशब्दि क्रुधाक्रोधि लोष्टलोष्टि नृपानृपि । योयुध्यते च वैरेण भटाभटि शिलाशिलि ॥एक सौ अट्ठावन ॥ वंशावंशिभटा केचिद् वृक्षावृक्षि हलाहलि । ॥एक सौ उनसठ ॥ इत्थं रणे तयोर्जाते प्रजापालो विषण्णधीः । प्रचंडं दुर्दमं मत्वा सचिंतोऽभूत्स्वमानसे ॥एक सौ साठ॥ से कटे हुए मनुष्यों के मुखरूपी मत्स्य थे । महासागर - जैसा जल पूर्ण रहता है, संग्राम भी घावों से निकलते हुए रक्तरूपी जल से पूर्ण था । महासागर - जैसा मणि- रत्नों से व्याप्त रहता है, संग्राम भी मृत योद्धाओं के दाँतरूपी मणि-रत्नों से व्याप्त था । महासागर में जैसे भयंकर शब्द होते हैं, संग्राम में भी हाथियों के चीत्काररूपी भीषण शब्द थे । महासागर जिस प्रकार बालू सहित होता है, संग्राम भी पिसी हुई हड्डीरूपी बालू सहित था । महासमुद्र - जैसा कीचड़ व्याप्त रहता है, संग्राम भी मांसरूपी कीचड़ से व्याप्त था । महासागर में जैसे मेढ़क और कछुवे रहते हैं, संग्राम में भी वैसे ही कटे हुए घोड़ों के पैर मेढ़क और हाथियों के पैर कछुवे थे । महासागर जैसा खंड पर्वत युक्त www. होता है। संग्राम भी मृत शरीरों का ढेररूप खंड पर्वतयुक्त था । महासागर में जैसे सर्प रहते हैं, संग्राम में भी कटी हुई हाथियों की पूँछे सर्प थीं। महासागर - जैसा पवन परिपूर्ण रहता है, संग्राम भी योद्धाओं के श्वासोच्छ्वासरूपी पवन से परिपूर्ण था । महासागर में जैसा बड़वानल होता है, संग्राम में भी उसी प्रकार चमकते हुए चक्र बड़वानल थे । महासागर - जैसा बेला युक्त होता है, उसी प्रकार संग्राम में भी समस्त दिशाओं में घूमते हुए योद्धारूपी बेला थी । सागर में जैसे नाव और जहाज होते हैं, संग्राम में भी घोड़ेरूपी नाव और जहाज थे तथा संग्राम में खड्गधारी खड्गों से युद्ध करते थे। मुष्टि-युद्ध करने वाले मुष्टियों से लड़ते थे । कोई-कोई आपस में केश पकड़कर युद्ध करते थे। अनेक वीर पुरुष भुजाओं से लड़ते थे। पैरों से लड़ाई करने वाले पैरों से लड़ते थे । सिर लड़ाने वाले सुभट सिर लड़ाकर युद्ध करते थे । बहुत से सुभट आपस में मुख भिड़ाकर लड़ते थे। गदाधारी और तीरंदाज गदाधारी और तीरंदाजों से लड़ते थे । घुड़सवार घुड़सवारों से, गजसवार गजसवारों से, रथसवार रथसवारों से एवं पयादे पयादों से भयंकर युद्ध करते थे। उस संग्राम में अनेक वीर पुरुष शब्द - युद्ध करने वाले थे इसलिए वे शब्द - युद्ध करते थे । लाठी चलाने वाले लाठियों से युद्ध करते थे एवं राजा राजाओं से युद्ध करते थे तथा शिलायुद्ध करने वाले शिलाओं से, बाँस युद्ध करने वाले सुभट बांसों से, वृक्ष उखाड़कर युद्ध करने वाले वृक्षों से करते थे । हल के धारक अपने हलों से युद्ध करते थे । इस प्रकार दोनों राजाओं का आपस में कई दिन तक भयंकर युद्ध होता रहा । अन्त में जब प्रजापाल ने यह देखा कि राजा चंड़प्रद्योतन जीता नहीं जा सकता तो उसे बड़ी चिंता हुई वह उसके जीतने के लिए अनेक उपाय सोचने लगा ॥एक सौ पैंतीस-एक सौ साठ॥
मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicle Act): New Traffic Rules (Photo Credit: NewsNation) नई दिल्लीः केंद्र सरकार ने सड़क पर आवागमन को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाए रखने के लिए यातायात के नियमों को काफी सख्त कर दिए हैं. मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicle Act) में चालान की राशि में भी भारी बढ़ोतरी कर दी गई है. इसके अलावा सड़क पर अनुशासन बनाए रखने के लिए भी नए प्रावधान लागू कर दिए गए हैं. नए नियमों के मुताबिक आपके पास भले ही गाड़ी के वैध डॉक्यूमेंट, ड्राइविंग लाइसेंस और इंश्योरेंस हो, लेकिन अगर आपने जिम्मेदार नागरिक होने का कर्तव्य नहीं निभाया तो आपको मोटा जुर्माना भरना पड़ सकता है. गैर जिम्मेदार वाहन चालकों को 10 हजार रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ेगा और 6 महीने तक की जेल भी हो सकती है. दरअसल, नए मोटर वाहन अधिनियम में एक नई धारा 194E को जोड़ा गया है. इस धारा के तहत एमरजेंसी वाहन जैसे एंबुलेंस आदि को रास्ता नहीं देने या फिर अवरोध पैदा करने पर वाहन चालक को महंगा पड़ सकता है. ऐसे वाहन चालकों के ऊपर ट्रैफिक पुलिस 10 हजार रुपये का जुर्माना ठोक सकती है. साथ ही वाहन चालकों को 6 महीने तक जेल की सजा भी हो सकती है या फिर जुर्माने के साथ जेल भी जाना पड़ सकता है. बता दें कि पुराने मोटर व्हीकल एक्ट में इसके लिए किसी भी तरह के जुर्माने और सजा का प्रावधान नहीं था. ऐसे में अब अगर आप सड़क पर चल रहे हों और किसी इमरजेंसी वाहन की आवाज सुनें तो उस वाहन को तुरंत रास्ता दे दीजिए. गौरतलब है कि दुर्घटना के दौरान पीड़ित के लिए सबसे अहम समय होता है. अक्सर देखा गया है कि आपातकालीन स्थिति में भी एंबुलेंस को सड़क पर रास्ता नहीं मिल पाता है और उसे कई बार जाम का भी सामना करना पड़ता है. इसके अलावा कई बार वाहन चालक जानबूझकर भी इमरजेंसी वाहनों को रास्ता नहीं देते हैं जो कि नैतिक रूप से उचित नहीं है. इन्हीं सब चीजों को देखते हुए नए मोटर वाहन अधिनियम में जुर्माने के साथ जेल की सजा का प्रावधान किया गया है.
मोटर वाहन अधिनियम : New Traffic Rules नई दिल्लीः केंद्र सरकार ने सड़क पर आवागमन को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाए रखने के लिए यातायात के नियमों को काफी सख्त कर दिए हैं. मोटर वाहन अधिनियम में चालान की राशि में भी भारी बढ़ोतरी कर दी गई है. इसके अलावा सड़क पर अनुशासन बनाए रखने के लिए भी नए प्रावधान लागू कर दिए गए हैं. नए नियमों के मुताबिक आपके पास भले ही गाड़ी के वैध डॉक्यूमेंट, ड्राइविंग लाइसेंस और इंश्योरेंस हो, लेकिन अगर आपने जिम्मेदार नागरिक होने का कर्तव्य नहीं निभाया तो आपको मोटा जुर्माना भरना पड़ सकता है. गैर जिम्मेदार वाहन चालकों को दस हजार रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ेगा और छः महीने तक की जेल भी हो सकती है. दरअसल, नए मोटर वाहन अधिनियम में एक नई धारा एक सौ चौरानवेE को जोड़ा गया है. इस धारा के तहत एमरजेंसी वाहन जैसे एंबुलेंस आदि को रास्ता नहीं देने या फिर अवरोध पैदा करने पर वाहन चालक को महंगा पड़ सकता है. ऐसे वाहन चालकों के ऊपर ट्रैफिक पुलिस दस हजार रुपये का जुर्माना ठोक सकती है. साथ ही वाहन चालकों को छः महीने तक जेल की सजा भी हो सकती है या फिर जुर्माने के साथ जेल भी जाना पड़ सकता है. बता दें कि पुराने मोटर व्हीकल एक्ट में इसके लिए किसी भी तरह के जुर्माने और सजा का प्रावधान नहीं था. ऐसे में अब अगर आप सड़क पर चल रहे हों और किसी इमरजेंसी वाहन की आवाज सुनें तो उस वाहन को तुरंत रास्ता दे दीजिए. गौरतलब है कि दुर्घटना के दौरान पीड़ित के लिए सबसे अहम समय होता है. अक्सर देखा गया है कि आपातकालीन स्थिति में भी एंबुलेंस को सड़क पर रास्ता नहीं मिल पाता है और उसे कई बार जाम का भी सामना करना पड़ता है. इसके अलावा कई बार वाहन चालक जानबूझकर भी इमरजेंसी वाहनों को रास्ता नहीं देते हैं जो कि नैतिक रूप से उचित नहीं है. इन्हीं सब चीजों को देखते हुए नए मोटर वाहन अधिनियम में जुर्माने के साथ जेल की सजा का प्रावधान किया गया है.
ऑटो डेस्क. मारुति सुजुकी अपनी पॉपुलर और मोस्ट सेलिंग SUV विटारा ब्रेजा का नया फेसलिफ्ट वैरिएंट 6 फरवरी को ऑटो एक्सपो 2020 में पेश करेगी। ऑटो एक्सपो का मीडिया इवेंट 5 फरवरी से शुरू होगा। जबकि विजिटर्स के लिए इवेंट की शुरुआत 7 फरवरी से होगी। न्यू ब्रेजा में कुछ कॉस्मेटिक चेंजेस देखने को मिलेंगे। वहीं, इसमें पहले से ज्यादा पावरफुल इंजन भी मिलेगा। न्यू विटारा ब्रेजा में अपडेटेड BS6 नॉर्म्स वाला 1. 5-लीटर का पेट्रोल इंजन मिलेगा। इससे पहले इसमें 1. 3-लीटर का डीजल इंजन था। 1. 5-लीटर K15B पेट्रोल इंजन कंपनी पहले से अर्टिगा और सियाज में दे रही है। ये 105hp पावर और 138Nm टॉर्क जनरेट करता है। विटारा में ये इंजन 5 स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स और 4 स्पीड ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के लैस होगा। ऐसा माना जा रहा है कि विटारा ब्रेजा पेट्रोल ऑटोमैटिक में SHVS (स्मार्ट हाइब्रिड) इंजन होगा। जो फ्यूल सेविंग का काम करेगा। न्यू ब्रेजा को नया लुक देने के लिए कुछ चेंजेस भी किए गए हैं, जैसे इसके फ्रंट को चौड़ा बनाया गया है। इसमें पहले से ज्यादा बड़े फॉग-लैम्प दिए हैं। वहीं, टर्न इंडीकेटर्स को जगह बदलकर हेडलैम्प यूनिट में फिक्स किया गया है। हालांकि, हेललैम्प के आकार में कोई बदलाव नहीं किया है। डेटाइम एलईडी रनिंग लैम्प को नीचे की तरफ लगाया गया है। कार के फ्रंट और बैक बंपर में स्किड प्लेट भी लगाई गई हैं। इसके मिड वैरिएंट में ब्लैक अलॉय व्हील और टॉप वैरिएंट में डायमंड-कट अलॉय व्हील मिलेंगे। इसमें नया स्मार्टप्ले स्टूडियो इन्फोटेनमेंट सिस्टम के साथ रिवर्स कैमरा डिस्प्ले भी मिलेगा। मारुति विटारा ब्रेजा को ऑटो एक्सपो 2016 में लॉन्च किया गया था। सब-फोर मीटर कैटेगरी में ब्रेजा सबसे ज्यादा बिकने वाली एसयूवी भी है। भारतीय बाजार में अब तक इसकी 5 लाख यूनिट बिक चुकी हैं। पिछले महीने यानी दिसंबर 2019 में इसकी 13,658 यूनिट सेल हुई थीं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
ऑटो डेस्क. मारुति सुजुकी अपनी पॉपुलर और मोस्ट सेलिंग SUV विटारा ब्रेजा का नया फेसलिफ्ट वैरिएंट छः फरवरी को ऑटो एक्सपो दो हज़ार बीस में पेश करेगी। ऑटो एक्सपो का मीडिया इवेंट पाँच फरवरी से शुरू होगा। जबकि विजिटर्स के लिए इवेंट की शुरुआत सात फरवरी से होगी। न्यू ब्रेजा में कुछ कॉस्मेटिक चेंजेस देखने को मिलेंगे। वहीं, इसमें पहले से ज्यादा पावरफुल इंजन भी मिलेगा। न्यू विटारा ब्रेजा में अपडेटेड BSछः नॉर्म्स वाला एक. पाँच-लीटर का पेट्रोल इंजन मिलेगा। इससे पहले इसमें एक. तीन-लीटर का डीजल इंजन था। एक. पाँच-लीटर Kपंद्रहB पेट्रोल इंजन कंपनी पहले से अर्टिगा और सियाज में दे रही है। ये एक सौ पाँचhp पावर और एक सौ अड़तीसNm टॉर्क जनरेट करता है। विटारा में ये इंजन पाँच स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स और चार स्पीड ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के लैस होगा। ऐसा माना जा रहा है कि विटारा ब्रेजा पेट्रोल ऑटोमैटिक में SHVS इंजन होगा। जो फ्यूल सेविंग का काम करेगा। न्यू ब्रेजा को नया लुक देने के लिए कुछ चेंजेस भी किए गए हैं, जैसे इसके फ्रंट को चौड़ा बनाया गया है। इसमें पहले से ज्यादा बड़े फॉग-लैम्प दिए हैं। वहीं, टर्न इंडीकेटर्स को जगह बदलकर हेडलैम्प यूनिट में फिक्स किया गया है। हालांकि, हेललैम्प के आकार में कोई बदलाव नहीं किया है। डेटाइम एलईडी रनिंग लैम्प को नीचे की तरफ लगाया गया है। कार के फ्रंट और बैक बंपर में स्किड प्लेट भी लगाई गई हैं। इसके मिड वैरिएंट में ब्लैक अलॉय व्हील और टॉप वैरिएंट में डायमंड-कट अलॉय व्हील मिलेंगे। इसमें नया स्मार्टप्ले स्टूडियो इन्फोटेनमेंट सिस्टम के साथ रिवर्स कैमरा डिस्प्ले भी मिलेगा। मारुति विटारा ब्रेजा को ऑटो एक्सपो दो हज़ार सोलह में लॉन्च किया गया था। सब-फोर मीटर कैटेगरी में ब्रेजा सबसे ज्यादा बिकने वाली एसयूवी भी है। भारतीय बाजार में अब तक इसकी पाँच लाख यूनिट बिक चुकी हैं। पिछले महीने यानी दिसंबर दो हज़ार उन्नीस में इसकी तेरह,छः सौ अट्ठावन यूनिट सेल हुई थीं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
Ranchi : आगामी 21 से 31 अक्टूबर तक झांसी (उत्तर प्रदेश ) में आयोजित होने वाली 11वीं हॉकी इंडिया सीनियर महिला चैंपियनशिप के लिए झारखंड का ट्रायल गत 29 अगस्त को सिमडेगा में किया गया था. इस ट्रायल में कुल 31 खिलाड़ियों का चयन किया गया है. इन खिलाड़ियों का विशेष प्रशिक्षण शिविर 25 सितंबर से सिमडेगा में आयोजित किया गया है. यह जानकारी रजनीश कुमार (सीईओ हॉकी झारखंड) ने एक प्रेस वक्तव्य के माध्यम से दी है. उन्होंने बताया है कि कैंप के लिए चयनित सभी खिलाड़ी हॉकी सिमडेगा के अध्यक्ष मनोज कोनबेगी को रिपोर्ट करेंगे. इन सभी खिलाड़ियों को अंतर्राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी बिगन सोय विशेष प्रशिक्षण देगी और उनमें से बेहतर 18 खिलाड़ियों का चयन झारखंड महिला टीम के लिये किया जायेगा. ये खिलाड़ी झांसी में आयोजित होने वाली सीनियर राष्ट्रीय हॉकी प्रतियोगिता में भाग लेंगी. कैंप के लिए चयनित खिलाड़ियों में अंजलि बिंझिया,रेशमा सोरेंग, . अलबेला रानी टोप्पो, दिप्ती टोप्पो, रीमा बखला, सम्मी बड़ा, अंजू केरकेट्टा, रोशनी डुंगडुंग, अनिमा तिरु, मरियम सोरेंग, दिव्या डुंगडुंग, नमिता खलखो, नीतू कुमारी, सीता मनी टोपनो, विनीता तिर्की, सिमता मिंज, वेतन डुंगडुंग, प्रमिला सोरेंग, सुभाषी हेमरोम, सोनल मिंज, बिरजनी, पूनम बरला, अलका डुंगडुंग (जूनियर), नील प्रोजिता झी, कुनूल भेंगरा, रूमाना खातून, सोनामती कुमारी, अजंती कुमारी, एंटोनिया सोरेंग, स्मिता टेटे,अंशु लकड़ा शामिल हैं.
Ranchi : आगामी इक्कीस से इकतीस अक्टूबर तक झांसी में आयोजित होने वाली ग्यारहवीं हॉकी इंडिया सीनियर महिला चैंपियनशिप के लिए झारखंड का ट्रायल गत उनतीस अगस्त को सिमडेगा में किया गया था. इस ट्रायल में कुल इकतीस खिलाड़ियों का चयन किया गया है. इन खिलाड़ियों का विशेष प्रशिक्षण शिविर पच्चीस सितंबर से सिमडेगा में आयोजित किया गया है. यह जानकारी रजनीश कुमार ने एक प्रेस वक्तव्य के माध्यम से दी है. उन्होंने बताया है कि कैंप के लिए चयनित सभी खिलाड़ी हॉकी सिमडेगा के अध्यक्ष मनोज कोनबेगी को रिपोर्ट करेंगे. इन सभी खिलाड़ियों को अंतर्राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी बिगन सोय विशेष प्रशिक्षण देगी और उनमें से बेहतर अट्ठारह खिलाड़ियों का चयन झारखंड महिला टीम के लिये किया जायेगा. ये खिलाड़ी झांसी में आयोजित होने वाली सीनियर राष्ट्रीय हॉकी प्रतियोगिता में भाग लेंगी. कैंप के लिए चयनित खिलाड़ियों में अंजलि बिंझिया,रेशमा सोरेंग, . अलबेला रानी टोप्पो, दिप्ती टोप्पो, रीमा बखला, सम्मी बड़ा, अंजू केरकेट्टा, रोशनी डुंगडुंग, अनिमा तिरु, मरियम सोरेंग, दिव्या डुंगडुंग, नमिता खलखो, नीतू कुमारी, सीता मनी टोपनो, विनीता तिर्की, सिमता मिंज, वेतन डुंगडुंग, प्रमिला सोरेंग, सुभाषी हेमरोम, सोनल मिंज, बिरजनी, पूनम बरला, अलका डुंगडुंग , नील प्रोजिता झी, कुनूल भेंगरा, रूमाना खातून, सोनामती कुमारी, अजंती कुमारी, एंटोनिया सोरेंग, स्मिता टेटे,अंशु लकड़ा शामिल हैं.
दिल्ली में रामलीला के मंचन का इतिहास सदियों पुराना है। मुगल शासक औरंगजेब ने फरमान जारी कर रामलीला का मंचन ही बंद करा दिया था। बाद में कुछ ऐसे हालात बने कि दिल्ली में फिर से रामलीला का मंचन शुरू हुआ। नई दिल्ली, जागरण डिजिटल डेस्क। रावण दहन के साथ ही 5 अक्टूबर को रामलीला का समापन हो जाएगा। भारतीय जनमानस के रोम-रोम में बसे मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीरामचंद्र की लालाओं का मंचन सदियों से होता रहा है। समूचे देश में रामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम को जानने और समझने की जो परंपरा सदियों पहले शुरू हुई वह आज भी जारी है। खासतौर से दिल्ली में रामलीला का रोचक इतिहास है। क्या आप जानते हैं कि दिल्ली में कुछ सालों के रामलीला का मंचन बंद हो गया था। दिल्ली में जो रामलीला आज भव्य रूप में मंचित की जाती है वह कभी कुछ स्थानों तक ही सिमटी हुई थी। यह हाल देशभर का था। शहर और कस्बों में गिनती की ही रामलीला होती थी। मुगलकाल में भी रामलीला सिमट गई थी। दिल्ली पर भी इसका असर पड़ा था और कुछ समय तक रामलीला का मंचन बंद ही रहा। बताया जाता है कि क्रूर मुगल शासकों में शुमार औरंगजेब ने रामलीला के मंचन पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिससे काफी समय तक रामलीला का मंचन दिल्ली में नहीं हुआ। राम भक्तों को औरंगजेब का यह आदेश नागवार गुजरा, लेकिन वह क्रूर शासक से लड़ नहीं सकते थे। माना जाता है कि औरंगजेब के उत्तराधिकारियों को दिल्ली में कर्ज लेकर दिल्ली में रामलीला शुरू कराई गई थी। कई पुस्तकों में इसका उल्लेख भी मिलता है। वर्तमान में दिल्ली में कई संगठन रामलीला का भव्य मंचन करते हैं। मत यह है कि दिल्ली में रामलीला का इतिहास सदियों बहुत पुराना है। माना जाता है कि रामलीला सदियों से होती थी, लेकिन क्रूर मुगल शासक औरंगजेब ने 17वीं सदी में रामलीला पर प्रतिबंध लगा दिया। कहा जाता है कि उसके उत्तराधिकारियों को कर्ज देकर फिर से इसकी शुरुआत की गई थी। इसमें लाला सीताराम का अहम योगदान रहा। कहा जाता है कि मुगल बादशाह रंगीला (मोहम्मद शाह रंगीला के नाम से भी जाना जाता है) ने लाला सीताराम से सरकारी खजाने के लिए कर्ज की मांग की थी। लाला सीताराम कर्ज देने के लिए तुरंत तैयार हो गए, लेकिन उन्होंने कहा कि वह कर्ज तो दे देंगे, लेकिन इसकी एवज में वह अपनी हवेली में रामलीला का आयोजन करने की अनुमति चाहते हैं। यह शर्त रंगीला ने मान ली। इसके बाद पुरानी दिल्ली स्थित सीताराम बाजार में रामलीला का आयोजन होता रहा। कभी यह रामलीला दिल्ली की भव्य रामलीलाओं में शुमार थी। बताया जाता है कि मुगल काल में कई साल तक पुरानी दिल्ली का सीताराम बाजार रामलीला का केंद्र रहा था। यहां पर रामलीला के मंचन का आनंद लेने के लिए लोग बहुत दूर से आते थे। कई लोग को रिश्तेदारों के घर रुक कर 10 दिनों तक रोजाना राम लीला के मंचन का आनंद लेते थे। इसके बाद ही अपने घर लौटते थे। दिल्ली तकरीबन दर्जन भर सामाजिक संगठन हैं जो अपने स्तर पर रामलीला का भव्य मंचन करवाते हैं। लवकुश रामलीला सर्वाधिक चर्चित है। पिछले दो साल से कोरोना वायरस के संक्रमण ने रामलीला मंचन को प्रभावित किया है, लेकिन लोगों को क्रेज कायम है। यही वजह है कि कोरोना का असर कम होने पर इस बार रामलीला का भव्य मंचन करने की तैयारी कई संगठनों ने की है। अखिरी मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर के बारे में कहा जाता है वह अपने पूर्वजों की तुलना में बेहद उदार थे। बहादुर शाह सफर ने भी रामलीला का मंचन शुरू करवाया था। दिल्ली के जिसे रामलाला मैदान को आज प्रदर्शन और रैली के लिए देशभर में जाना जाता है, यह जगह कभी रामलीला के लिए मशहूर थी। अंग्रेजों ने रामलीला मैदान में होने वाले इस आयोजन को रुकवा दिया। इतना ही नहीं, रामलीला मैदान में सेना के ठहरने का स्थान बनाने के साथ घोड़ों का अस्तबल भी बना दिया गया। अंग्रेजी शासन में बंद हुई रामलीला का मंचन 1911 में पंडित मदन मोहन मालवीय के प्रयासों से संभव हो पाया। उन्होंने ही रामलीला मैदान में फिर से रामलीला की शुरुआत की। रामलीला के मंचन के तरीकों में समय के साथ बहुत बदलाव आया है, लेकिन रंगमंच के जरिये जो आनंद आता है वह अकल्पनीय है। शायद यही वजह है कि भगवान श्रीराम को लेकर टेलीविजन धारावाहिकों के बावजूद रामलीला का जादू आज भी बरकरार है। - कांग्रेस के पूर्व सांसद जयप्रकाश अग्रवाल के पिता का लवकुश रामलीला कराने में अहम योगदान रहा था। - देश के प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद, प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने नव श्री धार्मिक लीला कमेटी की लीला को देखने पहुंचे थे। - राजनीतिक हस्ती विजयादशमी के दिन रामलीला देखने पहुंचते हैं। यहां पर पीएम ही रावण दहन करते हैं।
दिल्ली में रामलीला के मंचन का इतिहास सदियों पुराना है। मुगल शासक औरंगजेब ने फरमान जारी कर रामलीला का मंचन ही बंद करा दिया था। बाद में कुछ ऐसे हालात बने कि दिल्ली में फिर से रामलीला का मंचन शुरू हुआ। नई दिल्ली, जागरण डिजिटल डेस्क। रावण दहन के साथ ही पाँच अक्टूबर को रामलीला का समापन हो जाएगा। भारतीय जनमानस के रोम-रोम में बसे मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीरामचंद्र की लालाओं का मंचन सदियों से होता रहा है। समूचे देश में रामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम को जानने और समझने की जो परंपरा सदियों पहले शुरू हुई वह आज भी जारी है। खासतौर से दिल्ली में रामलीला का रोचक इतिहास है। क्या आप जानते हैं कि दिल्ली में कुछ सालों के रामलीला का मंचन बंद हो गया था। दिल्ली में जो रामलीला आज भव्य रूप में मंचित की जाती है वह कभी कुछ स्थानों तक ही सिमटी हुई थी। यह हाल देशभर का था। शहर और कस्बों में गिनती की ही रामलीला होती थी। मुगलकाल में भी रामलीला सिमट गई थी। दिल्ली पर भी इसका असर पड़ा था और कुछ समय तक रामलीला का मंचन बंद ही रहा। बताया जाता है कि क्रूर मुगल शासकों में शुमार औरंगजेब ने रामलीला के मंचन पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिससे काफी समय तक रामलीला का मंचन दिल्ली में नहीं हुआ। राम भक्तों को औरंगजेब का यह आदेश नागवार गुजरा, लेकिन वह क्रूर शासक से लड़ नहीं सकते थे। माना जाता है कि औरंगजेब के उत्तराधिकारियों को दिल्ली में कर्ज लेकर दिल्ली में रामलीला शुरू कराई गई थी। कई पुस्तकों में इसका उल्लेख भी मिलता है। वर्तमान में दिल्ली में कई संगठन रामलीला का भव्य मंचन करते हैं। मत यह है कि दिल्ली में रामलीला का इतिहास सदियों बहुत पुराना है। माना जाता है कि रामलीला सदियों से होती थी, लेकिन क्रूर मुगल शासक औरंगजेब ने सत्रहवीं सदी में रामलीला पर प्रतिबंध लगा दिया। कहा जाता है कि उसके उत्तराधिकारियों को कर्ज देकर फिर से इसकी शुरुआत की गई थी। इसमें लाला सीताराम का अहम योगदान रहा। कहा जाता है कि मुगल बादशाह रंगीला ने लाला सीताराम से सरकारी खजाने के लिए कर्ज की मांग की थी। लाला सीताराम कर्ज देने के लिए तुरंत तैयार हो गए, लेकिन उन्होंने कहा कि वह कर्ज तो दे देंगे, लेकिन इसकी एवज में वह अपनी हवेली में रामलीला का आयोजन करने की अनुमति चाहते हैं। यह शर्त रंगीला ने मान ली। इसके बाद पुरानी दिल्ली स्थित सीताराम बाजार में रामलीला का आयोजन होता रहा। कभी यह रामलीला दिल्ली की भव्य रामलीलाओं में शुमार थी। बताया जाता है कि मुगल काल में कई साल तक पुरानी दिल्ली का सीताराम बाजार रामलीला का केंद्र रहा था। यहां पर रामलीला के मंचन का आनंद लेने के लिए लोग बहुत दूर से आते थे। कई लोग को रिश्तेदारों के घर रुक कर दस दिनों तक रोजाना राम लीला के मंचन का आनंद लेते थे। इसके बाद ही अपने घर लौटते थे। दिल्ली तकरीबन दर्जन भर सामाजिक संगठन हैं जो अपने स्तर पर रामलीला का भव्य मंचन करवाते हैं। लवकुश रामलीला सर्वाधिक चर्चित है। पिछले दो साल से कोरोना वायरस के संक्रमण ने रामलीला मंचन को प्रभावित किया है, लेकिन लोगों को क्रेज कायम है। यही वजह है कि कोरोना का असर कम होने पर इस बार रामलीला का भव्य मंचन करने की तैयारी कई संगठनों ने की है। अखिरी मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर के बारे में कहा जाता है वह अपने पूर्वजों की तुलना में बेहद उदार थे। बहादुर शाह सफर ने भी रामलीला का मंचन शुरू करवाया था। दिल्ली के जिसे रामलाला मैदान को आज प्रदर्शन और रैली के लिए देशभर में जाना जाता है, यह जगह कभी रामलीला के लिए मशहूर थी। अंग्रेजों ने रामलीला मैदान में होने वाले इस आयोजन को रुकवा दिया। इतना ही नहीं, रामलीला मैदान में सेना के ठहरने का स्थान बनाने के साथ घोड़ों का अस्तबल भी बना दिया गया। अंग्रेजी शासन में बंद हुई रामलीला का मंचन एक हज़ार नौ सौ ग्यारह में पंडित मदन मोहन मालवीय के प्रयासों से संभव हो पाया। उन्होंने ही रामलीला मैदान में फिर से रामलीला की शुरुआत की। रामलीला के मंचन के तरीकों में समय के साथ बहुत बदलाव आया है, लेकिन रंगमंच के जरिये जो आनंद आता है वह अकल्पनीय है। शायद यही वजह है कि भगवान श्रीराम को लेकर टेलीविजन धारावाहिकों के बावजूद रामलीला का जादू आज भी बरकरार है। - कांग्रेस के पूर्व सांसद जयप्रकाश अग्रवाल के पिता का लवकुश रामलीला कराने में अहम योगदान रहा था। - देश के प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद, प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने नव श्री धार्मिक लीला कमेटी की लीला को देखने पहुंचे थे। - राजनीतिक हस्ती विजयादशमी के दिन रामलीला देखने पहुंचते हैं। यहां पर पीएम ही रावण दहन करते हैं।
Don't Miss Out on the Latest Updates. Subscribe to Our Newsletter Today! Strengthen mother-in-law's relationship: बड़े-बुजुर्गों को अक्सर कहते हुए सुना होगा कि शादी दो परिवारों का मिलन होती है। शादी के बाद हर लड़की को ससुराल जाकर अपने परिवार को संभालना होता है। किसी भी नए रिश्ते को मजबूत करने के लिए काफी बातें ध्यान में रखनी होती है। जब कोई बहू शादी के बाद अपने ससुराल जाती है, तो पूरे परिवार का केंद्र बन जाती है। ऐसे में बहू को अपने सास (Healthy Relationship) के साथ रिश्ते को मजबूत (Strengthen mother-in-law's relationship) करना जरूरी होता है। अक्सर आपने देखा होगा कि सास और बहू (mother-in-law's relationship) के बीच काफी नोकझोंक होती रहती है। इसका कारण ये होता है कि जब सास बहू के कामों में आपकी गलतियां निकालती है, तो बहू उनके सास बहस करने लगती है। अगर आपके साथ ऐसी स्थिति है, तो थोड़ा अपना रवैया बदलें। अगर आपकी सास आपके काम में कुछ कमी निकाल रही है। तो उनकी बातों पर ध्यान दें और बहस करने की जगह पर चुप रहें। ऐसा व्यबहार अगर आप बार-बार करेंगी, तो एक वक्त ऐसा आएगा कि वो आपकी कमियां निकालनी बंद कर देगीं। किसी भी लोगों के साथ बहस या नोकझोंक तब बढ़ती है, जब आप उनको जबाव देना शुरू कर देते हैं। अगर आप लोगों को जबाव नहीं देंगे। तो बहस या फिर नोकझोंक की उम्मीद खत्म हो जाती है। अगर आपकी सास आपके लिए कुछ अच्छा करती है, तो उनकी तारीफ करना ना भूलें। अगर आप उनकी तारीफ करेंगी, तो जाहिर सी बात है। वे आपके काम की भी तारीफ करेंगी। ऐसे में दोनों के बीच एक-दूसरे के लिए प्यार बढ़ेगा। साथ ही नोकझोंक की नौबत भी (mother-in-law's relationship) नहीं आएगी। यदि आप ऐसी किसी परिस्थिति में हों, जब आपको लगे कि आपकी सास के साथ लड़ाई हो जाएगी। तो ऐसी स्थिति में आप वहां बहस करना छोड़ दें। अगर झगड़े का मौका बन भी रहा हो, तो वहां कम बोलें और चुपचाप अपने काम में लग जाएं। ऐसे में झगड़े की स्थिति अपने आप खत्म हो जाएगी।
Don't Miss Out on the Latest Updates. Subscribe to Our Newsletter Today! Strengthen mother-in-law's relationship: बड़े-बुजुर्गों को अक्सर कहते हुए सुना होगा कि शादी दो परिवारों का मिलन होती है। शादी के बाद हर लड़की को ससुराल जाकर अपने परिवार को संभालना होता है। किसी भी नए रिश्ते को मजबूत करने के लिए काफी बातें ध्यान में रखनी होती है। जब कोई बहू शादी के बाद अपने ससुराल जाती है, तो पूरे परिवार का केंद्र बन जाती है। ऐसे में बहू को अपने सास के साथ रिश्ते को मजबूत करना जरूरी होता है। अक्सर आपने देखा होगा कि सास और बहू के बीच काफी नोकझोंक होती रहती है। इसका कारण ये होता है कि जब सास बहू के कामों में आपकी गलतियां निकालती है, तो बहू उनके सास बहस करने लगती है। अगर आपके साथ ऐसी स्थिति है, तो थोड़ा अपना रवैया बदलें। अगर आपकी सास आपके काम में कुछ कमी निकाल रही है। तो उनकी बातों पर ध्यान दें और बहस करने की जगह पर चुप रहें। ऐसा व्यबहार अगर आप बार-बार करेंगी, तो एक वक्त ऐसा आएगा कि वो आपकी कमियां निकालनी बंद कर देगीं। किसी भी लोगों के साथ बहस या नोकझोंक तब बढ़ती है, जब आप उनको जबाव देना शुरू कर देते हैं। अगर आप लोगों को जबाव नहीं देंगे। तो बहस या फिर नोकझोंक की उम्मीद खत्म हो जाती है। अगर आपकी सास आपके लिए कुछ अच्छा करती है, तो उनकी तारीफ करना ना भूलें। अगर आप उनकी तारीफ करेंगी, तो जाहिर सी बात है। वे आपके काम की भी तारीफ करेंगी। ऐसे में दोनों के बीच एक-दूसरे के लिए प्यार बढ़ेगा। साथ ही नोकझोंक की नौबत भी नहीं आएगी। यदि आप ऐसी किसी परिस्थिति में हों, जब आपको लगे कि आपकी सास के साथ लड़ाई हो जाएगी। तो ऐसी स्थिति में आप वहां बहस करना छोड़ दें। अगर झगड़े का मौका बन भी रहा हो, तो वहां कम बोलें और चुपचाप अपने काम में लग जाएं। ऐसे में झगड़े की स्थिति अपने आप खत्म हो जाएगी।
नई दिल्लीः उरी आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ कए गये सर्जिकल स्ट्राइक बीएसएफ ने पंजाब में रावी नदी से एक नाव पकड़ी है। ये अमृतसर के खासा पोस्ट इलाके से मिली। सुबह गश्त के दौरान बीएसएफ ने नाव को रावी नदी में तोतगुरु पोस्ट के पास देखा और अपने कब्जे में लिया। नाव चूंकि खाली थी इसलिए अंदेशा जताया जा रहा है कि आतंकियों ने घुसपैठ के लिए इसका इस्तेमाल किया होगा। ये नाव पाकिस्तान की ओर से आई है। नाव के फ्रंट पर एक आयरन एंगल लगा हुआ है। बताया जा रहा है कि इस तरह की नाव का प्रयोग सेना करती है। स्थानीय महिलाओं के मुताबिक उन्होंने बोट से कुछ संदिग्धों को उतरते हुए देखा है। नाव मिलने के बाद रावी नदी के किनारे के इलाकों में बीएसएफ और पुलिस ने सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया है। इससे पहले गुजरात के पोरबंदर से पाकिस्तानी नाव कब्जे में ली गई थी और 9 संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी। रविवार देर रात 1.30 बजे दीनानगर में चक्करी पोस्ट के सामने गेट नंबर-19 के पास करीब 8 आतंकियों की घुसपैठ को बीएसएफ के जवानों ने नाकाम कर दिया था। इसके बाद पंजाब पुलिस के जवानों ने सोमवार को भी इस इलाके में तलाशी अभियान चलाया। पाकिस्तान की सीमा से सटे इलाकों में बीएसएफ और पंजाब पुलिस ने अलर्ट जारी कर सुरक्षा बढ़ा दी है। 30 सितंबर को केन्द्र ने पंजाब सरकार को इंटेलिजेंस इनपुट भेजा था। इसमें कहा गया था कि सर्जिकल स्ट्राइक का बदला लेने की कोशिश के तहत पाकिस्तान त्योहारों के दौरान रिहायशी इलाकों को निशाना बना सकता है। केन्द्र के अलर्ट के बाद पंजाब सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी। पंजाब सरकार ने केन्द्र से पैरामिलिट्री फोर्सेज की 15 कंपनियां भी मांगी है, जिन्हें पंजाब पुलिस के साथ बाजारों और भीड़ भाड़ वाले इलाकों में तैनात किया जा सके।
नई दिल्लीः उरी आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ कए गये सर्जिकल स्ट्राइक बीएसएफ ने पंजाब में रावी नदी से एक नाव पकड़ी है। ये अमृतसर के खासा पोस्ट इलाके से मिली। सुबह गश्त के दौरान बीएसएफ ने नाव को रावी नदी में तोतगुरु पोस्ट के पास देखा और अपने कब्जे में लिया। नाव चूंकि खाली थी इसलिए अंदेशा जताया जा रहा है कि आतंकियों ने घुसपैठ के लिए इसका इस्तेमाल किया होगा। ये नाव पाकिस्तान की ओर से आई है। नाव के फ्रंट पर एक आयरन एंगल लगा हुआ है। बताया जा रहा है कि इस तरह की नाव का प्रयोग सेना करती है। स्थानीय महिलाओं के मुताबिक उन्होंने बोट से कुछ संदिग्धों को उतरते हुए देखा है। नाव मिलने के बाद रावी नदी के किनारे के इलाकों में बीएसएफ और पुलिस ने सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया है। इससे पहले गुजरात के पोरबंदर से पाकिस्तानी नाव कब्जे में ली गई थी और नौ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी। रविवार देर रात एक.तीस बजे दीनानगर में चक्करी पोस्ट के सामने गेट नंबर-उन्नीस के पास करीब आठ आतंकियों की घुसपैठ को बीएसएफ के जवानों ने नाकाम कर दिया था। इसके बाद पंजाब पुलिस के जवानों ने सोमवार को भी इस इलाके में तलाशी अभियान चलाया। पाकिस्तान की सीमा से सटे इलाकों में बीएसएफ और पंजाब पुलिस ने अलर्ट जारी कर सुरक्षा बढ़ा दी है। तीस सितंबर को केन्द्र ने पंजाब सरकार को इंटेलिजेंस इनपुट भेजा था। इसमें कहा गया था कि सर्जिकल स्ट्राइक का बदला लेने की कोशिश के तहत पाकिस्तान त्योहारों के दौरान रिहायशी इलाकों को निशाना बना सकता है। केन्द्र के अलर्ट के बाद पंजाब सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी। पंजाब सरकार ने केन्द्र से पैरामिलिट्री फोर्सेज की पंद्रह कंपनियां भी मांगी है, जिन्हें पंजाब पुलिस के साथ बाजारों और भीड़ भाड़ वाले इलाकों में तैनात किया जा सके।
लातेहारः लातेहार पुलिस ने सोमवार को गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए सदर थाना क्षेत्र के सासंग गांव के निकट जंगल में चल रहे अवैध कोयला खदान को ध्वस्त कर दिया। इस दौरान पुलिस ने अवैध कोयला लदे पांच ट्रैक्टर को भी जब्त किया है। वहीं छह लोगों को संदेह के आधार पर हिरासत में लेकर पूछताछ किया जा रहा है। लातेहार पुलिस इंस्पेक्टर अमित कुमार गुप्ता ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ अपराधियों के द्वारा सदर थाना क्षेत्र के सासंग गांव के निकट अवैध कोयले का उत्खनन किया जा रहा है। इस सूचना पर पुलिस ने टीम बनाकर छापामारी की। पुलिस टीम को देखकर अवैध उत्खनन कर रहे अपराधी वहां से फरार हो गए। घटनास्थल से पुलिस ने अवैध कोयला लदे 5 ट्रैक्टर और वहां खड़े दो मोटरसाइकिल को जब्त कर लिया । वहीं संदेह के आधार पर छह लोगों को हिरासत में लिया गया है और उनसे पूछताछ किया जा रहा है। इधर अवैध कोयला खदान संचालन की जानकारी मिलने के बाद लातेहार जिला खनन पदाधिकारी आनंद कुमार उत्खनन स्थल पर पहुंचकर जांच किया। वही अवैध कोयला खदान को ध्वस्त कर दिया।
लातेहारः लातेहार पुलिस ने सोमवार को गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए सदर थाना क्षेत्र के सासंग गांव के निकट जंगल में चल रहे अवैध कोयला खदान को ध्वस्त कर दिया। इस दौरान पुलिस ने अवैध कोयला लदे पांच ट्रैक्टर को भी जब्त किया है। वहीं छह लोगों को संदेह के आधार पर हिरासत में लेकर पूछताछ किया जा रहा है। लातेहार पुलिस इंस्पेक्टर अमित कुमार गुप्ता ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ अपराधियों के द्वारा सदर थाना क्षेत्र के सासंग गांव के निकट अवैध कोयले का उत्खनन किया जा रहा है। इस सूचना पर पुलिस ने टीम बनाकर छापामारी की। पुलिस टीम को देखकर अवैध उत्खनन कर रहे अपराधी वहां से फरार हो गए। घटनास्थल से पुलिस ने अवैध कोयला लदे पाँच ट्रैक्टर और वहां खड़े दो मोटरसाइकिल को जब्त कर लिया । वहीं संदेह के आधार पर छह लोगों को हिरासत में लिया गया है और उनसे पूछताछ किया जा रहा है। इधर अवैध कोयला खदान संचालन की जानकारी मिलने के बाद लातेहार जिला खनन पदाधिकारी आनंद कुमार उत्खनन स्थल पर पहुंचकर जांच किया। वही अवैध कोयला खदान को ध्वस्त कर दिया।
श्रादि(३६) छन्द विचार । रचयिता - सुखदेव मिश्र । साइज ६-१X८-३ इंच । पत्रसंख्या ३० । लिपिकाल-सम्बत १७५१ । प्रति बहुत जीर्णवस्था में है। इसके प्रत्येक पृष्ठ पर २१ पंक्तियां और प्रति पंक्ति में २१।२३ अक्षर हैं। लिखावट सुन्दर है। इसमें छन्दों का लक्षण- उदाहरण सहित विवेचन है । चित्रकूट के तीरथनि जाया कमहि निवेरि । कहन कहाँ मैं सास पुनि पूछिस तन तिन हेरि ॥ जाना सब संवत्सरी को फल ताको क्षेत । : बृहत्तर भापन को है यह माहाश्म उदोत ।। अन्त( सरस्वती भंडार) गनपति गौरि गिरीस के पाइ नाइ निजु सीस ॥ मिश्र सुकवि सुपदेव को देत बनाइ असीस ॥१॥ रजत पंभ पर मनहुँ फनक जंजीर विराजति । विसद सरद धन मद्धि मनहुँ छन दुति छबि छाजति ॥ मनहुँ कुमुद कदंव मिलित चंपक प्रसून तति । मनहुँ मध्य धनसार लसति कुंकुम लकीर अति ॥ हिम गिरि पर मानहुँ रवि किरिनि इमि धन धरि घरघंग मह । सुखदेव सदासिव मुदित मन हिम्मतिसिंघ नरिंद कह ।।२।। रतन जटित भू भाल कौं मनो विभूषन चेस । जाहिर जंबूदीप के सिरें थमेठी देस ।।३।। एक वरन प्रस्तार तें छुब्बिस ल ए नाम । क्रम से कहत फनिदु सुनि होत त्रवन विस्राम ॥ (४०) जगत-विनीद । रचयिता - पद्माकर । साइज ८५५०५ इंच । पत्र संख्या ७१ । प्रति सजिल्द है । लिपिकाल-०१८७५ चैत्र सुदी १० । पाठ शुद्ध है। सिद्धि सदन सुंदर बदन नंद नंद मृदु मूल । रसिक सिरोमनि सांबरे सदा रहहु अनुकूल ॥१॥ जगतसिंह नृप हुकम पदमाकर लहि मोद । रसिकन के बस करन वीं कीन्ही जगत विनोद ॥ १२३ ॥ (४१) जगविलास । रचयिता - कवि नन्दराम । सीइञ्च-४X६.२ इंच । पत्र संख्या ३० । प्रत्येक पृष्ट पर २४ पंक्तियों और प्रति पंक्ति में १७२० अक्षर लिपिकाल - सं० १८७८ भाद्रपद कृष्णा, बुधवार। यह प्रति महाराणा जवानसिंह जी के पढ़ने के लिये लिखी गई थी। पद्यसंख्या ४०४ । छप्पय, दोहा, कवित्त आदि विविध छन्दों का प्रयोग किया गया है। इसमें मेवाड़ के महाराणा जगतसिंहजी को दिनचर्या, उनके वैभव और राज प्रबंध का वर्णन है। श्री लम्बोदर समरि सदा मंगल सुप कारिय । शति प्रचंड भुज डंढ मुंढ सोहत प्रति मारिय । एक दंत भयमंत संत संबक सुपदायक । गुन पूरन गुन गेह गुन सुहाता गुन नायक ॥१॥ बहु रिद्धि सिद्धि नव निद्धि कर सुन्दर संकर सुत सरस । भति बुद्धि दियन दिऐ सुबुद्धि तो किये जगतेस अप ।।१।। श्रो सामति दीजें सुमति की बुद्धि विमेम । पायु वर धराइनो गाउं जम जगतेम ।।२। जग निवास जग रांग कियो महुरत सुपकारिय । कविजन परिग तिन्हें दई तप रीक मुभारिय ॥ भोजन विविध प्रकार गोठ है भई तहाँ तत्र । मन धन यसन अपार दये जग रांन बाज जय ॥ सब देस सुबस थानंद प्रति कहत नन्द्र यानी सरस जगतेस शंन संग्राम सुत्र चिरजीवो कोरिक यरस ॥४०४।। ( सरस्वती भंडार ) (४२) जवानसिंहजी री कविता । साइज ६-५९६-६ इंच । पत्र संख्या ५३ । लिपिकाल- सं० १८८३। इसके दो भाग हैं। पहले भाग में जवानसिंह जी के भक्ति-शृङ्गार के फुटकर कवित्त सवैये और दूसरे में पद है। कवित्त सवैयों की संख्या १४३ और पदों की १२३ है। भाषा सरस प्रजभाषा है। इस संग्रह का पहला कवित्त यह है :विघन हरन अति धानंद करन नित सिद्धि के सदन सब कारज सुधारोगे । एक है रहन गज बदन धनंद रूप करि सहाय स संकट निवारोगे ।। फरसीधरन सुभ चर घौ अभय देन मन के मनोरथ के काज तुम सारोगे । दीन के दयाल रछपाल सदा जीवन के रावरे सुभाव ही के विरद विचारोगे । के (४३) जहाँगीर चन्द्रिका रचयिता - केशवदास । साइज ६५४८-४ इंच पत्र संख्या ४६ । लिपिकाल- सं १७६६ श्रावण चदि १४, सोमवार । प्रति बहुत सुन्दर अक्षरों में लिखी हुई है। सुनहु गनेस दिनेस देस परदेस हेमकर । अंबरेस प्रानेस सेस नपतेस वेस घर !!
श्रादि छन्द विचार । रचयिता - सुखदेव मिश्र । साइज छः-एकXआठ-तीन इंच । पत्रसंख्या तीस । लिपिकाल-सम्बत एक हज़ार सात सौ इक्यावन । प्रति बहुत जीर्णवस्था में है। इसके प्रत्येक पृष्ठ पर इक्कीस पंक्तियां और प्रति पंक्ति में इक्कीस।तेईस अक्षर हैं। लिखावट सुन्दर है। इसमें छन्दों का लक्षण- उदाहरण सहित विवेचन है । चित्रकूट के तीरथनि जाया कमहि निवेरि । कहन कहाँ मैं सास पुनि पूछिस तन तिन हेरि ॥ जाना सब संवत्सरी को फल ताको क्षेत । : बृहत्तर भापन को है यह माहाश्म उदोत ।। अन्त गनपति गौरि गिरीस के पाइ नाइ निजु सीस ॥ मिश्र सुकवि सुपदेव को देत बनाइ असीस ॥एक॥ रजत पंभ पर मनहुँ फनक जंजीर विराजति । विसद सरद धन मद्धि मनहुँ छन दुति छबि छाजति ॥ मनहुँ कुमुद कदंव मिलित चंपक प्रसून तति । मनहुँ मध्य धनसार लसति कुंकुम लकीर अति ॥ हिम गिरि पर मानहुँ रवि किरिनि इमि धन धरि घरघंग मह । सुखदेव सदासिव मुदित मन हिम्मतिसिंघ नरिंद कह ।।दो।। रतन जटित भू भाल कौं मनो विभूषन चेस । जाहिर जंबूदीप के सिरें थमेठी देस ।।तीन।। एक वरन प्रस्तार तें छुब्बिस ल ए नाम । क्रम से कहत फनिदु सुनि होत त्रवन विस्राम ॥ जगत-विनीद । रचयिता - पद्माकर । साइज पचासी हज़ार पाँच सौ पाँच इंच । पत्र संख्या इकहत्तर । प्रति सजिल्द है । लिपिकाल-एक हज़ार आठ सौ पचहत्तर चैत्र सुदी दस । पाठ शुद्ध है। सिद्धि सदन सुंदर बदन नंद नंद मृदु मूल । रसिक सिरोमनि सांबरे सदा रहहु अनुकूल ॥एक॥ जगतसिंह नृप हुकम पदमाकर लहि मोद । रसिकन के बस करन वीं कीन्ही जगत विनोद ॥ एक सौ तेईस ॥ जगविलास । रचयिता - कवि नन्दराम । सीइञ्च-चारXछः.दो इंच । पत्र संख्या तीस । प्रत्येक पृष्ट पर चौबीस पंक्तियों और प्रति पंक्ति में एक हज़ार सात सौ बीस अक्षर लिपिकाल - संशून्य एक हज़ार आठ सौ अठहत्तर भाद्रपद कृष्णा, बुधवार। यह प्रति महाराणा जवानसिंह जी के पढ़ने के लिये लिखी गई थी। पद्यसंख्या चार सौ चार । छप्पय, दोहा, कवित्त आदि विविध छन्दों का प्रयोग किया गया है। इसमें मेवाड़ के महाराणा जगतसिंहजी को दिनचर्या, उनके वैभव और राज प्रबंध का वर्णन है। श्री लम्बोदर समरि सदा मंगल सुप कारिय । शति प्रचंड भुज डंढ मुंढ सोहत प्रति मारिय । एक दंत भयमंत संत संबक सुपदायक । गुन पूरन गुन गेह गुन सुहाता गुन नायक ॥एक॥ बहु रिद्धि सिद्धि नव निद्धि कर सुन्दर संकर सुत सरस । भति बुद्धि दियन दिऐ सुबुद्धि तो किये जगतेस अप ।।एक।। श्रो सामति दीजें सुमति की बुद्धि विमेम । पायु वर धराइनो गाउं जम जगतेम ।।दो। जग निवास जग रांग कियो महुरत सुपकारिय । कविजन परिग तिन्हें दई तप रीक मुभारिय ॥ भोजन विविध प्रकार गोठ है भई तहाँ तत्र । मन धन यसन अपार दये जग रांन बाज जय ॥ सब देस सुबस थानंद प्रति कहत नन्द्र यानी सरस जगतेस शंन संग्राम सुत्र चिरजीवो कोरिक यरस ॥चार सौ चार।। जवानसिंहजी री कविता । साइज छः-पाँच सौ छियानवे-छः इंच । पत्र संख्या तिरेपन । लिपिकाल- संशून्य एक हज़ार आठ सौ तिरासी। इसके दो भाग हैं। पहले भाग में जवानसिंह जी के भक्ति-शृङ्गार के फुटकर कवित्त सवैये और दूसरे में पद है। कवित्त सवैयों की संख्या एक सौ तैंतालीस और पदों की एक सौ तेईस है। भाषा सरस प्रजभाषा है। इस संग्रह का पहला कवित्त यह है :विघन हरन अति धानंद करन नित सिद्धि के सदन सब कारज सुधारोगे । एक है रहन गज बदन धनंद रूप करि सहाय स संकट निवारोगे ।। फरसीधरन सुभ चर घौ अभय देन मन के मनोरथ के काज तुम सारोगे । दीन के दयाल रछपाल सदा जीवन के रावरे सुभाव ही के विरद विचारोगे । के जहाँगीर चन्द्रिका रचयिता - केशवदास । साइज छः हज़ार पाँच सौ अड़तालीस-चार इंच पत्र संख्या छियालीस । लिपिकाल- सं एक हज़ार सात सौ छयासठ श्रावण चदि चौदह, सोमवार । प्रति बहुत सुन्दर अक्षरों में लिखी हुई है। सुनहु गनेस दिनेस देस परदेस हेमकर । अंबरेस प्रानेस सेस नपतेस वेस घर !!
एक तालाब में एक कछुआ रहता था. उसी तालाब में दो हंस भी तैरने आया करते थे. हंस बहुत हंसमुख और मिलनसार स्वभाव के थे. इसलिए कछुए और हंस में दोस्ती होते देर नहीं लगी. कुछ ही दिनों में वे बहुत अच्छे दोस्त बन गएं. हंसों को कछुए का धीरे-धीरे चलना और उसका भोलापन बहुत अच्छा लगता था. हंस बहुत बुद्धिमान भी थे. वे कछुए को अनोखी बातें बताते. ॠषि-मुनियों की कहानियां सुनाते. हंस दूर-दूर तक घूमकर आते थे, इसलिए उन्हें सारी दुनिया की बहुत-सी बातें पता होती थी. दूसरी जगहों की अनोखी बातें वो कछुए को बताते. कछुआ मंत्रमुग्ध होकर उनकी बातें सुनता. बाकी तो सब ठीक था, पर कछुए को बीच में टोका-टाकी करने की बहुत आदत थी. अपने सज्जन स्वभाव के कारण हंस उसकी इस आदत का बुरा नहीं मानते थे. गुज़रते व़क्त के साथ उन तीनों की दोस्ती और गहरी होती गई. एक बार भीषण सूखा पड़ा. बरसात के मौसम में भी एक बूंद पानी नहीं बरसा. इससे तालाब का पानी सूखने लगा. प्राणी मरने लगे, मछलियां तो तड़प-तड़पकर मर गईं. तालाब का पानी और तेज़ी से सूखने लगा. एक समय ऐसा भी आया कि तालाब में पानी की बजाय स़िर्फ कीचड़ रह गया. कछुआ बहुत संकट में पड़ गया. उसके लिए जीवन-मरण का प्रश्न खड़ा हो गया. वहीं पड़ा रहता तो कछुए का अंत निश्चित था. हंस अपने मित्र पर आए संकट को दूर करने का उपाय सोचने लगे. वे अपने मित्र कछुए को ढाढ़स बंधाने का प्रयास करते और हिम्म्त न हारने की सलाह देते. हंस केवल झूठा दिलासा नहीं दे रहे थे. वे दूर-दूर तक उड़कर समस्या का हल ढूढ़ते. एक दिन लौटकर हंसों ने कहा, "मित्र, यहां से पचास कोस दूर एक झील है. उसमें काफ़ी पानी हैं तुम वहां मज़े से रहोगे." कछुआ रोनी आवाज़ में बोला, "पचास कोस? इतनी दूर जाने में मुझे महीनों लग जाएंगे. तब तक तो मैं मर जाऊंगा." कछुए की बात भी ठीक थी. हंसों ने अक्ल लगाई और एक तरीक़ा सोच निकाला. कछुए ने हामी में सिर हिलाया. बस, लकड़ी पकड़कर हंस उड़ चले. उनके बीच में लकड़ी मुंह में दाबे कछुआ. वे एक कस्बे के ऊपर से उड़ रहे थे कि नीचे खड़े लोगों ने आकाश में अदभुत नज़ारा देखा. सब एक-दूसरे को ऊपर आकाश का दृश्य दिखाने लगे. लोग दौड़-दौड़कर अपने छज्जों पर निकल आए. कुछ अपने मकानों की छतों की ओर दौड़े. बच्चे, बूढ़े, औरतें व जवान सब ऊपर देखने लगे. ख़ूब शोर मचा. कछुए की नज़र नीचे उन लोगों पर पड़ी. उसे आश्चर्य हुआ कि उन्हें इतने लोग देख रहे हैं. वह अपने मित्रों की चेतावनी भूल गया और चिल्लाया "देखो, कितने लोग हमें देख रहे है!" मुंह खोलते ही वह नीचे गिर पड़ा. नीचे उसकी हड्डी-पसली का भी पता नहीं लगा. सीख- बेमौके मुंह खोलना बहुत महंगा पड़ता है.
एक तालाब में एक कछुआ रहता था. उसी तालाब में दो हंस भी तैरने आया करते थे. हंस बहुत हंसमुख और मिलनसार स्वभाव के थे. इसलिए कछुए और हंस में दोस्ती होते देर नहीं लगी. कुछ ही दिनों में वे बहुत अच्छे दोस्त बन गएं. हंसों को कछुए का धीरे-धीरे चलना और उसका भोलापन बहुत अच्छा लगता था. हंस बहुत बुद्धिमान भी थे. वे कछुए को अनोखी बातें बताते. ॠषि-मुनियों की कहानियां सुनाते. हंस दूर-दूर तक घूमकर आते थे, इसलिए उन्हें सारी दुनिया की बहुत-सी बातें पता होती थी. दूसरी जगहों की अनोखी बातें वो कछुए को बताते. कछुआ मंत्रमुग्ध होकर उनकी बातें सुनता. बाकी तो सब ठीक था, पर कछुए को बीच में टोका-टाकी करने की बहुत आदत थी. अपने सज्जन स्वभाव के कारण हंस उसकी इस आदत का बुरा नहीं मानते थे. गुज़रते व़क्त के साथ उन तीनों की दोस्ती और गहरी होती गई. एक बार भीषण सूखा पड़ा. बरसात के मौसम में भी एक बूंद पानी नहीं बरसा. इससे तालाब का पानी सूखने लगा. प्राणी मरने लगे, मछलियां तो तड़प-तड़पकर मर गईं. तालाब का पानी और तेज़ी से सूखने लगा. एक समय ऐसा भी आया कि तालाब में पानी की बजाय स़िर्फ कीचड़ रह गया. कछुआ बहुत संकट में पड़ गया. उसके लिए जीवन-मरण का प्रश्न खड़ा हो गया. वहीं पड़ा रहता तो कछुए का अंत निश्चित था. हंस अपने मित्र पर आए संकट को दूर करने का उपाय सोचने लगे. वे अपने मित्र कछुए को ढाढ़स बंधाने का प्रयास करते और हिम्म्त न हारने की सलाह देते. हंस केवल झूठा दिलासा नहीं दे रहे थे. वे दूर-दूर तक उड़कर समस्या का हल ढूढ़ते. एक दिन लौटकर हंसों ने कहा, "मित्र, यहां से पचास कोस दूर एक झील है. उसमें काफ़ी पानी हैं तुम वहां मज़े से रहोगे." कछुआ रोनी आवाज़ में बोला, "पचास कोस? इतनी दूर जाने में मुझे महीनों लग जाएंगे. तब तक तो मैं मर जाऊंगा." कछुए की बात भी ठीक थी. हंसों ने अक्ल लगाई और एक तरीक़ा सोच निकाला. कछुए ने हामी में सिर हिलाया. बस, लकड़ी पकड़कर हंस उड़ चले. उनके बीच में लकड़ी मुंह में दाबे कछुआ. वे एक कस्बे के ऊपर से उड़ रहे थे कि नीचे खड़े लोगों ने आकाश में अदभुत नज़ारा देखा. सब एक-दूसरे को ऊपर आकाश का दृश्य दिखाने लगे. लोग दौड़-दौड़कर अपने छज्जों पर निकल आए. कुछ अपने मकानों की छतों की ओर दौड़े. बच्चे, बूढ़े, औरतें व जवान सब ऊपर देखने लगे. ख़ूब शोर मचा. कछुए की नज़र नीचे उन लोगों पर पड़ी. उसे आश्चर्य हुआ कि उन्हें इतने लोग देख रहे हैं. वह अपने मित्रों की चेतावनी भूल गया और चिल्लाया "देखो, कितने लोग हमें देख रहे है!" मुंह खोलते ही वह नीचे गिर पड़ा. नीचे उसकी हड्डी-पसली का भी पता नहीं लगा. सीख- बेमौके मुंह खोलना बहुत महंगा पड़ता है.
तसलीस गीतिकाः संजीव 'सलिल' बिना नागा निकलता है सूरज. कभी आलस नहीं करते देखा. तभी पाता सफलता है सूरज. सुबह खिड़की से झांकता सूरज. कह रहा तंम को जीत लूँगा मैं. कम नहीं ख़ुद को आंकता सूरज. उजाला सबको दे रहा सूरज. कोई अपना न पराया कोई. दुआएं सबकी ले रहा सूरज. आँख रजनी से चुराता सूरज. बांह में एक चाह में दूजी. आँख ऊषा से लडाता सूरज. जाल किरणों का बिछाता सूरज. कोई अपना न पराया कोई. सभी सोयों को जगाता सूरज. भोर पूरब में सुहाता सूरज. दोपहर देखना भी मुश्किल हो. शाम पश्चिम को सजाता सूरज. कम निष्काम हर करता सूरज. मंजिलें नित नयी वरता सूरज. भाग्य अपना खुदी गढ़ता सूरज.
तसलीस गीतिकाः संजीव 'सलिल' बिना नागा निकलता है सूरज. कभी आलस नहीं करते देखा. तभी पाता सफलता है सूरज. सुबह खिड़की से झांकता सूरज. कह रहा तंम को जीत लूँगा मैं. कम नहीं ख़ुद को आंकता सूरज. उजाला सबको दे रहा सूरज. कोई अपना न पराया कोई. दुआएं सबकी ले रहा सूरज. आँख रजनी से चुराता सूरज. बांह में एक चाह में दूजी. आँख ऊषा से लडाता सूरज. जाल किरणों का बिछाता सूरज. कोई अपना न पराया कोई. सभी सोयों को जगाता सूरज. भोर पूरब में सुहाता सूरज. दोपहर देखना भी मुश्किल हो. शाम पश्चिम को सजाता सूरज. कम निष्काम हर करता सूरज. मंजिलें नित नयी वरता सूरज. भाग्य अपना खुदी गढ़ता सूरज.
सीरिया के विदेश मंत्री की तेहरान यात्रा कितनी अहम? प्रतिरोध के मोर्चे को कमज़ोर बनाने की साज़िशों को नाकाम बनाने में प्रभावी होगी? सीरिया के नए विदेश मंत्री फ़ैसल मिक़दाद ने अपने पहले विदेशी दौरे के लिए ईरान का चयन किया और अपने ईरानी समकक्ष मुहम्मतद जवाद ज़रीफ़ व अन्य ईरानी उच्चाधिकारियों से मुलाक़ात और बातचीत के लिए वे रविवार को तेहरान पहुंचे हैं। सीरिया के पूर्व विदेश मंत्री वलीद अलमुअल्लिम के निधन के बाद 22 नवम्बर को इस देश के राष्ट्रपति बश्शार असद ने फ़ैसल मिक़दाद को देश के नए विदेश मंत्री के रूप में नियुक्त किया है। सीरिया के विदेश मंत्री की तेहरान यात्रा कई पहलुओं से बहुत अहम है। आस्ताना वार्ता प्रक्रिया, सीरिया व इलाक़े के ताज़ा हालात और द्विपक्षीय संबंधों के विस्तार पर बातचीत व समीक्षा, फ़ैसल मिक़दाद के तेहरान के दौरे के अहम बिंदु हैं। आस्ताना वार्ता प्रक्रिया, सीरिया संकट के समाधान के सबसे अहम राजनैतिक मार्ग के रूप में जानी जाती है। यह प्रक्रिया ईरान की पहल पर और रूस व तुर्की के सहयोग से सीरिया में शांति स्थापना के लिए शुरू हुई है। पश्चिमी एशिया में अमरीका की एकपक्षीय कार्यवाहियां इस बात का कारण बनीं कि सीरिया एक गहरे संकट में ग्रस्त हो जाए और आतंकी गुटों की गतिविधियों के एक सबसे ख़तरनाक केंद्र में बदल जाए। इस ख़तरनाक स्थिति में ईरान, रूस व तुर्की जैसी तीन देशों की एकजुटता इस बात का कारण बनी कि सीरिया के बंटवारे की अमरीकियों की साज़िश पूरी तरह नाकाम हो जाए। आस्ताना प्रक्रिया में हुए समझौतों के चलते इस समय सीरिया युद्ध व झड़पों के चरण से निकल कर संकट के राजनैतिक समाधान के चरण में दाख़िल हो चुका है। सीरिया की अखंडता की रक्षा, आतंकवाद से संघर्ष और इस देश के संविधान के संकलन का मार्ग प्रशस्त करना, आस्ताना प्रक्रिया की अहम उपलब्धियां हैं। सीरिया के नए विदेश मंत्री का तेहरान का दौरा ऐसी हालत में हो रहा है कि जब विश्व साम्राज्य और ज़ायोनिज़्म क्षेत्र की सुरक्षा को तबाह करने और प्रतिरोध के मोर्चे में शामिल देशों को कमज़ोर करने की कोशिश कर रहे हैं। अमरीका व इस्राईल की ओर से क्षेत्र के आतंकी गुटों के समर्थन के माध्यम से क्षेत्रीय देशों पर दबाव डालने का क्रम अब भी जारी है। इन हालात में ईरान व सीरिया की ओर से दबावों के मुक़ाबले में प्रतिरोध और क्षेत्रीय साज़िशों से मुक़ाबले ने तेहरान व दमिश्क़ के संबंधों को रणनैतिक स्तर का महत्व प्रदान कर दिया है। इसी परिप्रेक्ष्य में ईरान के सशस्त्र बल के जनरल स्टाफ़ के चीफ़ जनरल मुहम्मद बाक़ेरी की जुलाई में की गई दमिश्क़ की यात्रा बहुत अहम थी जिसमें ईरान व सीरिया के बीच एक अहम सैन्य समझौता किया गया। इस समझौते से पहले तक ईरान व सीरिया के बीच सैन्य सहयोग का स्तर ज़्यादातर सैन्य परामर्श की हद तक था और ईरान, सीरिया की सरकार के औपचारिक निमंत्रण पर इस देश की अखंडता की रक्षा और आतंकियों से संघर्ष के लिए सीरियाई सेना के साथ सैन्य सलाहकार की भूमिका निभा रहा था लेकिन अब यह सहयोग अधिक विविध व रणनैतिक हो गया है और इसका स्तर काफ़ी ऊंचा हो चुका है। दूसरे शब्दों में अब ईरान व सीरिया के संबंधों में राजनैतिक, आर्थिक, धार्मिक व सांस्कृतिक पहलुओं के अलावा सुरक्षा व रणनैतिक आयाम भी शामिल हो गए हैं। यह रिश्ते वास्तव में वर्चस्ववादी व्यवस्था, आतंकवादियों और उनके समर्थकों के मुक़ाबले में दोनों देशों के बीच अटूट एकता व एकजुटता का कारण बने हैं। स्वाभाविक है कि जब तक अमरीका, इस्राईल, सऊदी अरब और आतंकवाद के अन्य समर्थक क्षेत्र को अशांत बनाने की कोशिश करते रहेंगे, तब तक ईरान, सीरिया के साथ मिल कर आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ता रहेगा क्योंकि आतंकवाद, पूरी दुनिया के लिए एक व्यापक ख़तरा है। तेहरान में सीरिया के विदेश मंत्री की वार्ताओं को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिए। (HN) ताज़ातरीन ख़बरों, समीक्षाओं और आर्टिकल्ज़ के लिए हमारा फ़ेसबुक पेज लाइक कीजिए! हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब कीजिए!
सीरिया के विदेश मंत्री की तेहरान यात्रा कितनी अहम? प्रतिरोध के मोर्चे को कमज़ोर बनाने की साज़िशों को नाकाम बनाने में प्रभावी होगी? सीरिया के नए विदेश मंत्री फ़ैसल मिक़दाद ने अपने पहले विदेशी दौरे के लिए ईरान का चयन किया और अपने ईरानी समकक्ष मुहम्मतद जवाद ज़रीफ़ व अन्य ईरानी उच्चाधिकारियों से मुलाक़ात और बातचीत के लिए वे रविवार को तेहरान पहुंचे हैं। सीरिया के पूर्व विदेश मंत्री वलीद अलमुअल्लिम के निधन के बाद बाईस नवम्बर को इस देश के राष्ट्रपति बश्शार असद ने फ़ैसल मिक़दाद को देश के नए विदेश मंत्री के रूप में नियुक्त किया है। सीरिया के विदेश मंत्री की तेहरान यात्रा कई पहलुओं से बहुत अहम है। आस्ताना वार्ता प्रक्रिया, सीरिया व इलाक़े के ताज़ा हालात और द्विपक्षीय संबंधों के विस्तार पर बातचीत व समीक्षा, फ़ैसल मिक़दाद के तेहरान के दौरे के अहम बिंदु हैं। आस्ताना वार्ता प्रक्रिया, सीरिया संकट के समाधान के सबसे अहम राजनैतिक मार्ग के रूप में जानी जाती है। यह प्रक्रिया ईरान की पहल पर और रूस व तुर्की के सहयोग से सीरिया में शांति स्थापना के लिए शुरू हुई है। पश्चिमी एशिया में अमरीका की एकपक्षीय कार्यवाहियां इस बात का कारण बनीं कि सीरिया एक गहरे संकट में ग्रस्त हो जाए और आतंकी गुटों की गतिविधियों के एक सबसे ख़तरनाक केंद्र में बदल जाए। इस ख़तरनाक स्थिति में ईरान, रूस व तुर्की जैसी तीन देशों की एकजुटता इस बात का कारण बनी कि सीरिया के बंटवारे की अमरीकियों की साज़िश पूरी तरह नाकाम हो जाए। आस्ताना प्रक्रिया में हुए समझौतों के चलते इस समय सीरिया युद्ध व झड़पों के चरण से निकल कर संकट के राजनैतिक समाधान के चरण में दाख़िल हो चुका है। सीरिया की अखंडता की रक्षा, आतंकवाद से संघर्ष और इस देश के संविधान के संकलन का मार्ग प्रशस्त करना, आस्ताना प्रक्रिया की अहम उपलब्धियां हैं। सीरिया के नए विदेश मंत्री का तेहरान का दौरा ऐसी हालत में हो रहा है कि जब विश्व साम्राज्य और ज़ायोनिज़्म क्षेत्र की सुरक्षा को तबाह करने और प्रतिरोध के मोर्चे में शामिल देशों को कमज़ोर करने की कोशिश कर रहे हैं। अमरीका व इस्राईल की ओर से क्षेत्र के आतंकी गुटों के समर्थन के माध्यम से क्षेत्रीय देशों पर दबाव डालने का क्रम अब भी जारी है। इन हालात में ईरान व सीरिया की ओर से दबावों के मुक़ाबले में प्रतिरोध और क्षेत्रीय साज़िशों से मुक़ाबले ने तेहरान व दमिश्क़ के संबंधों को रणनैतिक स्तर का महत्व प्रदान कर दिया है। इसी परिप्रेक्ष्य में ईरान के सशस्त्र बल के जनरल स्टाफ़ के चीफ़ जनरल मुहम्मद बाक़ेरी की जुलाई में की गई दमिश्क़ की यात्रा बहुत अहम थी जिसमें ईरान व सीरिया के बीच एक अहम सैन्य समझौता किया गया। इस समझौते से पहले तक ईरान व सीरिया के बीच सैन्य सहयोग का स्तर ज़्यादातर सैन्य परामर्श की हद तक था और ईरान, सीरिया की सरकार के औपचारिक निमंत्रण पर इस देश की अखंडता की रक्षा और आतंकियों से संघर्ष के लिए सीरियाई सेना के साथ सैन्य सलाहकार की भूमिका निभा रहा था लेकिन अब यह सहयोग अधिक विविध व रणनैतिक हो गया है और इसका स्तर काफ़ी ऊंचा हो चुका है। दूसरे शब्दों में अब ईरान व सीरिया के संबंधों में राजनैतिक, आर्थिक, धार्मिक व सांस्कृतिक पहलुओं के अलावा सुरक्षा व रणनैतिक आयाम भी शामिल हो गए हैं। यह रिश्ते वास्तव में वर्चस्ववादी व्यवस्था, आतंकवादियों और उनके समर्थकों के मुक़ाबले में दोनों देशों के बीच अटूट एकता व एकजुटता का कारण बने हैं। स्वाभाविक है कि जब तक अमरीका, इस्राईल, सऊदी अरब और आतंकवाद के अन्य समर्थक क्षेत्र को अशांत बनाने की कोशिश करते रहेंगे, तब तक ईरान, सीरिया के साथ मिल कर आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ता रहेगा क्योंकि आतंकवाद, पूरी दुनिया के लिए एक व्यापक ख़तरा है। तेहरान में सीरिया के विदेश मंत्री की वार्ताओं को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिए। ताज़ातरीन ख़बरों, समीक्षाओं और आर्टिकल्ज़ के लिए हमारा फ़ेसबुक पेज लाइक कीजिए! हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब कीजिए!
Hyundai ने इस कैलेंडर वर्ष में भारतीय बाजार में अपना तीसरा सब-नया उत्पाद लॉन्च किया है। इस साल की शुरुआत में all-new Aura और Creta को लॉन्च करने के बाद, All-new i20 इस साल का आखिरी लॉन्च होगा। बहुप्रतीक्षित प्रीमियम हैचबैक का मूल्य 6.79 रुपये है, जो कि Tata Altroz, Toyota Glanza और Maruti Suzuki Baleno जैसे सेगमेंट के अन्य वाहनों की तुलना में महंगा है। Hyundai ने "एलीट" को मॉडल के नाम से हटा दिया है। लेकिन यहां केवल यही बदलाव नहीं है। नए-नए i20 में हर तरह से बदलाव आया है। यह अब अलग दिखता है और इंजन के विभिन्न विकल्पों के द्वारा संचालित होता है। Hyundai यह सुनिश्चित करने के लिए कई प्रकार के वेरिएंट पेश करेगी कि हर किसी की पसंद है। सभी नए i20 चार प्रमुख ट्रिम्स - Magna, स्पोर्ट्ज़, एस्टा और एस्टा (ओ) उपलब्ध होंगे। कुल 24 वैरिएंट्स हैं और यहां ऑल-न्यू i20 की वैरिएंट-वाइज प्राइस लिस्ट है। ये परिचयात्मक मूल्य हैं जो 31 दिसंबर तक मान्य हैं। अन्य आधुनिक दिनों की Hyundai वाहनों की तरह, नया i20 सेंसुअस डिज़ाइन का अनुसरण करता है। इसके फ्रंट में एक आक्रामक ग्रिल मिलती है जिसमें दो अलग-अलग डिज़ाइन मिलते हैं। टॉप-एंड मॉडल को ग्रिल की एक अलग बनावट मिलती है जबकि निचले छोर के मॉडल को थोड़ा अलग डिज़ाइन मिलता है। हेडलैम्प्स को इस तरह से लगाया जाता है कि वे ग्रिल के ही विस्तार की तरह दिखते हैं। फीचर सूची में एलईडी प्रोजेक्टर लैंप, एलईडी डीआरएल, त्रिकोणीय हाउसिंग में रखे गए हैलोजन प्रोजेक्टर फॉग लैंप शामिल हैं। ऑल-न्यू i20 में भी ड्यूल-टोन अलॉय व्हील्स और साइड प्रोफाइल बेहद स्लीक दिखती है, खासकर क्रोम विंडो लाइन और अप-डाउन सी-पिलर के साथ। यह आक्रामक रूप को जोड़ने वाले दरवाजों पर भी तेज रेखाएं प्राप्त करता है। रियर को जेड-आकार का टेल लैंप मिलता है और बहुत विशिष्ट दिखता है। एक क्रोम स्ट्रिप है जो दोनों टेल लैंप से जुड़ती है। निचले-छोर वाले वेरिएंट एक चिंतनशील पट्टी पेश करते हैं। अंदर पर, i20 केबिन में एक विस्तृत रूप जोड़ते हुए डैशबोर्ड के चारों ओर क्षैतिज रेखाएं मिलती हैं। यह खंड-प्रथम सुविधाओं की एक श्रृंखला के साथ आता है, जिसमें Bose से 7-स्पीकर सिस्टम के साथ बड़े पैमाने पर 10.25-इंच इंफोटेनमेंट सिस्टम शामिल है। ब्ल्यूलिंक इंटरनेट से जुड़ी सेवाओं की पेशकश करने के लिए i20 सेगमेंट की एकमात्र कार है। इसके अलावा, यह एक सनरूफ, एक वायु शोधक और सुविधाओं की एक लंबी सूची के साथ आता है। Hyundai चार्जिंग के समय फोन को ठंडा रखने के लिए कूलिंग तकनीक के साथ एक वायरलेस कार चार्जिंग सिस्टम प्रदान करता है। ऑल-न्यू i20 के साथ तीन इंजन विकल्प उपलब्ध हैं। एक 1.2 लीटर स्वाभाविक रूप से एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन है जो MTT के साथ 83PS की अधिकतम शक्ति और CVT स्वचालित के साथ 88 PS उत्पन्न करता है। अधिक शक्तिशाली वेरिएंट में 1.0-लीटर टर्बो-पेट्रोल मिलेगा जो अधिकतम 120 पीएस की शक्ति उत्पन्न करता है। इसमें 6-स्पीड IMT और 7-स्पीड DCT मिलता है। डीजल वेरिएंट में 1.5-लीयर टर्बो मिलता है जो अधिकतम 100 पीएस उत्पन्न करता है। यह 25.2 किमी / एल प्रमाणित दक्षता के साथ खंड में सबसे अधिक ईंधन-कुशल कार है।
Hyundai ने इस कैलेंडर वर्ष में भारतीय बाजार में अपना तीसरा सब-नया उत्पाद लॉन्च किया है। इस साल की शुरुआत में all-new Aura और Creta को लॉन्च करने के बाद, All-new iबीस इस साल का आखिरी लॉन्च होगा। बहुप्रतीक्षित प्रीमियम हैचबैक का मूल्य छः दशमलव उन्यासी रुपयापये है, जो कि Tata Altroz, Toyota Glanza और Maruti Suzuki Baleno जैसे सेगमेंट के अन्य वाहनों की तुलना में महंगा है। Hyundai ने "एलीट" को मॉडल के नाम से हटा दिया है। लेकिन यहां केवल यही बदलाव नहीं है। नए-नए iबीस में हर तरह से बदलाव आया है। यह अब अलग दिखता है और इंजन के विभिन्न विकल्पों के द्वारा संचालित होता है। Hyundai यह सुनिश्चित करने के लिए कई प्रकार के वेरिएंट पेश करेगी कि हर किसी की पसंद है। सभी नए iबीस चार प्रमुख ट्रिम्स - Magna, स्पोर्ट्ज़, एस्टा और एस्टा उपलब्ध होंगे। कुल चौबीस वैरिएंट्स हैं और यहां ऑल-न्यू iबीस की वैरिएंट-वाइज प्राइस लिस्ट है। ये परिचयात्मक मूल्य हैं जो इकतीस दिसंबर तक मान्य हैं। अन्य आधुनिक दिनों की Hyundai वाहनों की तरह, नया iबीस सेंसुअस डिज़ाइन का अनुसरण करता है। इसके फ्रंट में एक आक्रामक ग्रिल मिलती है जिसमें दो अलग-अलग डिज़ाइन मिलते हैं। टॉप-एंड मॉडल को ग्रिल की एक अलग बनावट मिलती है जबकि निचले छोर के मॉडल को थोड़ा अलग डिज़ाइन मिलता है। हेडलैम्प्स को इस तरह से लगाया जाता है कि वे ग्रिल के ही विस्तार की तरह दिखते हैं। फीचर सूची में एलईडी प्रोजेक्टर लैंप, एलईडी डीआरएल, त्रिकोणीय हाउसिंग में रखे गए हैलोजन प्रोजेक्टर फॉग लैंप शामिल हैं। ऑल-न्यू iबीस में भी ड्यूल-टोन अलॉय व्हील्स और साइड प्रोफाइल बेहद स्लीक दिखती है, खासकर क्रोम विंडो लाइन और अप-डाउन सी-पिलर के साथ। यह आक्रामक रूप को जोड़ने वाले दरवाजों पर भी तेज रेखाएं प्राप्त करता है। रियर को जेड-आकार का टेल लैंप मिलता है और बहुत विशिष्ट दिखता है। एक क्रोम स्ट्रिप है जो दोनों टेल लैंप से जुड़ती है। निचले-छोर वाले वेरिएंट एक चिंतनशील पट्टी पेश करते हैं। अंदर पर, iबीस केबिन में एक विस्तृत रूप जोड़ते हुए डैशबोर्ड के चारों ओर क्षैतिज रेखाएं मिलती हैं। यह खंड-प्रथम सुविधाओं की एक श्रृंखला के साथ आता है, जिसमें Bose से सात-स्पीकर सिस्टम के साथ बड़े पैमाने पर दस.पच्चीस-इंच इंफोटेनमेंट सिस्टम शामिल है। ब्ल्यूलिंक इंटरनेट से जुड़ी सेवाओं की पेशकश करने के लिए iबीस सेगमेंट की एकमात्र कार है। इसके अलावा, यह एक सनरूफ, एक वायु शोधक और सुविधाओं की एक लंबी सूची के साथ आता है। Hyundai चार्जिंग के समय फोन को ठंडा रखने के लिए कूलिंग तकनीक के साथ एक वायरलेस कार चार्जिंग सिस्टम प्रदान करता है। ऑल-न्यू iबीस के साथ तीन इंजन विकल्प उपलब्ध हैं। एक एक दशमलव दो लीटरटर स्वाभाविक रूप से एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन है जो MTT के साथ तिरासीPS की अधिकतम शक्ति और CVT स्वचालित के साथ अठासी PS उत्पन्न करता है। अधिक शक्तिशाली वेरिएंट में एक.शून्य-लीटर टर्बो-पेट्रोल मिलेगा जो अधिकतम एक सौ बीस पीएस की शक्ति उत्पन्न करता है। इसमें छः-स्पीड IMT और सात-स्पीड DCT मिलता है। डीजल वेरिएंट में एक.पाँच-लीयर टर्बो मिलता है जो अधिकतम एक सौ पीएस उत्पन्न करता है। यह पच्चीस.दो किमी / एल प्रमाणित दक्षता के साथ खंड में सबसे अधिक ईंधन-कुशल कार है।
जनजात्तीय जिला लाहुल-स्पीति के लाहुल क्षेत्र के विकासात्मक कार्य पर वित्तीय वर्ष 2022- 23 में 59 करोड़ 95 लाख की धनराशि व्यय की जा रही है। शुक्रवार को देर शाम तक चली विधायक रवि ठाकुर की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक में जिला के विभिन्न विकासात्मक कार्यों पर तथा चालू वित्त वर्ष में करवाए जा रहे कार्य पर विस्तार से अधिकारियों के साथ चर्चा की गई। विधायक रवि ठाकुर ने विभिन्न विकासात्मक कार्यों की समीक्षा के दौरान कहा कि अधिकारी विकास कार्यों में विशेष कर ढांचा गत निर्माण कार्यों में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखें और पारदर्शिता बनाए रखें। क्योंकि जिला का कठिन भौगोलिक क्षेत्र होने के चलते यहां कार्य अवधि बहुत ही सीमित है। बैठक में विधायक ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि विधायक प्राथमिकता के लिए कार्य योजनाओं का प्रारूप भी तैयार कर जल्द प्रस्तुत करें। उन्होंने यह भी कहा कि जिला लाहुल-स्पीति बॉर्डर एरिया के साथ जुड़ा हुआ क्षेत्र है। लिहाजा यहां के लिए अलग से अतिरिक्त धनराशि का भी प्रदेश सरकार से आग्रह किया जाएगा ताकि यहां के विकास को और तेज गति प्रदान की जा सके। बैठक में उन्होंने यह आग्रह करते हुए कहा कि जिला लाहौल स्पीति को प्रदेश में अग्रणी जिला बनाने व अलग पहचान दिलवाने में अधिकारी व कर्मचारी कर्तव्य निष्ठा, इमानदारी व मेहनत से धरातल पर अमलीजामा पहनाने की भरसक प्रयास करें और जनहित से जुड़े मुद्दों को विशेष प्राथमिकता दें। बैठक में मौजूद उपायुक्त सुमित खिमटा ने विधायक रवि ठाकुर को आश्वस्त करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार की कल्याणकारी योजनाओं व नीतियों की अनु पालना सुनिश्चित बनाई जा रही है द्य सरकार द्वारा निर्धारित मापदंडों के अनुरूप जनजातिय उपयोजना के तहत आबंटित धनराशि का प्रत्येक तिमाही में व्यय सुनिश्चित बनाया जा रहा है । केलांग। खराब मौसम और भारी बर्फ के बीच भी शनिवार को लाहुल-स्पीति के विधायक ने उदयपुर घाटी का दौरा किया। दो से तीन फीट बर्फ के बीच विधायक रवि ठाकुर ने विभिन्न स्थलों पर पैदल चल जहां ग्रामीणों से मुलाकात की। वहीं जाहलमा में आयोजित जनसभा में विधायक रवि ठाकुर ने कहा है कि लाहुल घाटी में दूरसंचार व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने मास्टर प्लान तैयार किया है। विधायक रवि ठाकुर ने इस बात का खुलासा किया है कि उनके आग्रह पर लाहुल घाटी में बीएसएनल के 19 4 जी टावर विभिन्न स्थानों पर लगाए जाएंगे, जिससे लाहौल घाटी के दूरदराज के क्षेत्रों में जहां मोबाइल कनेक्टिविटी बहाल होगी। वहीं खासकर छात्रों को पढ़ाई करने में किसी भी तरह का दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा। विधायक रवि ठाकुर ने कहा है कि इसके अलावा घाटी की सडक़ों को चौड़ा करने और चकाचक करने के लिए योजना बना ली गई है।
जनजात्तीय जिला लाहुल-स्पीति के लाहुल क्षेत्र के विकासात्मक कार्य पर वित्तीय वर्ष दो हज़ार बाईस- तेईस में उनसठ करोड़ पचानवे लाख की धनराशि व्यय की जा रही है। शुक्रवार को देर शाम तक चली विधायक रवि ठाकुर की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक में जिला के विभिन्न विकासात्मक कार्यों पर तथा चालू वित्त वर्ष में करवाए जा रहे कार्य पर विस्तार से अधिकारियों के साथ चर्चा की गई। विधायक रवि ठाकुर ने विभिन्न विकासात्मक कार्यों की समीक्षा के दौरान कहा कि अधिकारी विकास कार्यों में विशेष कर ढांचा गत निर्माण कार्यों में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखें और पारदर्शिता बनाए रखें। क्योंकि जिला का कठिन भौगोलिक क्षेत्र होने के चलते यहां कार्य अवधि बहुत ही सीमित है। बैठक में विधायक ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि विधायक प्राथमिकता के लिए कार्य योजनाओं का प्रारूप भी तैयार कर जल्द प्रस्तुत करें। उन्होंने यह भी कहा कि जिला लाहुल-स्पीति बॉर्डर एरिया के साथ जुड़ा हुआ क्षेत्र है। लिहाजा यहां के लिए अलग से अतिरिक्त धनराशि का भी प्रदेश सरकार से आग्रह किया जाएगा ताकि यहां के विकास को और तेज गति प्रदान की जा सके। बैठक में उन्होंने यह आग्रह करते हुए कहा कि जिला लाहौल स्पीति को प्रदेश में अग्रणी जिला बनाने व अलग पहचान दिलवाने में अधिकारी व कर्मचारी कर्तव्य निष्ठा, इमानदारी व मेहनत से धरातल पर अमलीजामा पहनाने की भरसक प्रयास करें और जनहित से जुड़े मुद्दों को विशेष प्राथमिकता दें। बैठक में मौजूद उपायुक्त सुमित खिमटा ने विधायक रवि ठाकुर को आश्वस्त करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार की कल्याणकारी योजनाओं व नीतियों की अनु पालना सुनिश्चित बनाई जा रही है द्य सरकार द्वारा निर्धारित मापदंडों के अनुरूप जनजातिय उपयोजना के तहत आबंटित धनराशि का प्रत्येक तिमाही में व्यय सुनिश्चित बनाया जा रहा है । केलांग। खराब मौसम और भारी बर्फ के बीच भी शनिवार को लाहुल-स्पीति के विधायक ने उदयपुर घाटी का दौरा किया। दो से तीन फीट बर्फ के बीच विधायक रवि ठाकुर ने विभिन्न स्थलों पर पैदल चल जहां ग्रामीणों से मुलाकात की। वहीं जाहलमा में आयोजित जनसभा में विधायक रवि ठाकुर ने कहा है कि लाहुल घाटी में दूरसंचार व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने मास्टर प्लान तैयार किया है। विधायक रवि ठाकुर ने इस बात का खुलासा किया है कि उनके आग्रह पर लाहुल घाटी में बीएसएनल के उन्नीस चार जी टावर विभिन्न स्थानों पर लगाए जाएंगे, जिससे लाहौल घाटी के दूरदराज के क्षेत्रों में जहां मोबाइल कनेक्टिविटी बहाल होगी। वहीं खासकर छात्रों को पढ़ाई करने में किसी भी तरह का दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा। विधायक रवि ठाकुर ने कहा है कि इसके अलावा घाटी की सडक़ों को चौड़ा करने और चकाचक करने के लिए योजना बना ली गई है।
भोपाल, 15 मई (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष अमित शाह के रोडशो के दौरान मंगलवार को पश्चिम बंगाल में हुए उपद्रव के विरोध में यहां पार्टी कार्यकर्ताओं ने मौन जुलूस निकाला और धरना दिया। भाजपा की जिला इकाई के आह्वान पर रोशनपुरा चौराहे पर पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के रोडशो के दौरान पश्चिम बंगाल में हुए हमले के विरोध में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ मौन जुलूस और धरने का आयोजन कर विरोध प्रदर्शन किया गया। इस अवसर पर पार्टी के प्रदेश उपायक्ष विजेश लुणावत, पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता, विधायक विश्वास सारंग, जिलाध्यक्ष विकास विरानी सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।
भोपाल, पंद्रह मई । भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह के रोडशो के दौरान मंगलवार को पश्चिम बंगाल में हुए उपद्रव के विरोध में यहां पार्टी कार्यकर्ताओं ने मौन जुलूस निकाला और धरना दिया। भाजपा की जिला इकाई के आह्वान पर रोशनपुरा चौराहे पर पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के रोडशो के दौरान पश्चिम बंगाल में हुए हमले के विरोध में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ मौन जुलूस और धरने का आयोजन कर विरोध प्रदर्शन किया गया। इस अवसर पर पार्टी के प्रदेश उपायक्ष विजेश लुणावत, पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता, विधायक विश्वास सारंग, जिलाध्यक्ष विकास विरानी सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।
राज कपूर पर बायोपिक बनी तो इतने खुलासे होंगे कि लोग हैरान रह जाएंगे, मशहूर अभिनेता ऋषि कपूर का कहना है कि अगर उनके पिता राज कपूर पर बायोपिक बनी तो परिवार यह सुनिश्चित करेगा कि उसे सनसनीखेज बनाए बिना सच्चे अर्थों में बयां किया जाए। उन्होंने कहा, 'हम ऐसा कुछ भी नहीं बनाना चाहते जो फिल्म इंडस्ट्री के किसी परिवार को ठेस पहुंचाए।आप ऐसी बायॉपिक नहीं बना सकते जिसमें काम के अलावा अन्य निजी बातों को शामिल न किया जाए। मेरे पिता की कुछ रिलेशनशिप थीं जिनके बारे में मैंने अपनी किताब में चर्चा की है और आप इससे इनकार नहीं कर सकते। मैं किसी की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाना चाहता और न ही हम कोई सनसनी फैलाना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि यंग जेनरेशन बायॉपिक के जरिए राज कपूर की वास्तविकता को जाने। अभिनेता ने कहा कि मैं समझ सकता हूं कि आज की पीढ़ी कपूर की निजी एवं पेशेवर जिंदगी के बारे में जानने को इच्छुक है, लेकिन अगर बायोपिक बनी तो कहानी के साथ पूरी सावधानी बरती जाएगी। मनोरंजन की ताज़ातरीन खबरों के लिए Gossipganj के साथ जुड़ें रहें और इस खबर को अपने दोस्तों के साथ शेयर करें और हमें Twitter पर लेटेस्ट अपडेट के लिए फॉलो करें।
राज कपूर पर बायोपिक बनी तो इतने खुलासे होंगे कि लोग हैरान रह जाएंगे, मशहूर अभिनेता ऋषि कपूर का कहना है कि अगर उनके पिता राज कपूर पर बायोपिक बनी तो परिवार यह सुनिश्चित करेगा कि उसे सनसनीखेज बनाए बिना सच्चे अर्थों में बयां किया जाए। उन्होंने कहा, 'हम ऐसा कुछ भी नहीं बनाना चाहते जो फिल्म इंडस्ट्री के किसी परिवार को ठेस पहुंचाए।आप ऐसी बायॉपिक नहीं बना सकते जिसमें काम के अलावा अन्य निजी बातों को शामिल न किया जाए। मेरे पिता की कुछ रिलेशनशिप थीं जिनके बारे में मैंने अपनी किताब में चर्चा की है और आप इससे इनकार नहीं कर सकते। मैं किसी की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाना चाहता और न ही हम कोई सनसनी फैलाना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि यंग जेनरेशन बायॉपिक के जरिए राज कपूर की वास्तविकता को जाने। अभिनेता ने कहा कि मैं समझ सकता हूं कि आज की पीढ़ी कपूर की निजी एवं पेशेवर जिंदगी के बारे में जानने को इच्छुक है, लेकिन अगर बायोपिक बनी तो कहानी के साथ पूरी सावधानी बरती जाएगी। मनोरंजन की ताज़ातरीन खबरों के लिए Gossipganj के साथ जुड़ें रहें और इस खबर को अपने दोस्तों के साथ शेयर करें और हमें Twitter पर लेटेस्ट अपडेट के लिए फॉलो करें।
भीतर और हर एक दांत के निशान के भीतर भी कार्बोलिक एसिड लगा दो । खाल के ऊपर के और कुछ दूर तक रगों के भीतर पहुंचे हुए जन्तुओं को खालिस कार्बोलिक एसिड जला देता है और मार डालता है । इसे लगाते समय पहले तो यह लगता है परन्तु थोड़ी देर पीछे कुछ मालूम नहीं देता । यदि यह कभी आंख के आस-पास लगानी ही पड़े तो बहुत हल्की-हल्की लगाओ । यदि खालिस कार्बोलिक एसिड न मिले तो ऊपर को खाल के जखमों के लिये लाल गर्म करके चिमटे से और गहरे घाव के लिये कुसिया (Knitting needle ) को लाल गर्म करके घाव को जला दो । पोटाशियम परमेंगनेट के दाने या उसका गाढ़ा गाढ़ा घोल भी लगाया जा सकता है । सिलवर नायट्रेट और तेज नायट्रिक ऐसिड भी लगाये जा सकते है । जब कभी कोई जानवर काट खाय तो यही चिकित्सा करनी चाहिये, चाहे रैबीज की सम्भावना हो या जहर फैल जाने का डर हो । यदि ऊपर लिखी हुई विधि को सावधानी से काम में लाया जाय तो विश्वास के साथ कहा जा सकता है कि रैबीज का जहर फैलने का डर बहुत कम हो जायगा । साथ ही साथ काटने की दुर्घटना के विषय में जो जो बातें मालूम हो सकें सो सब मालूम कर लो । ध्यान देने योग्य कुछ आवश्यक बातें-१. यह निश्चय करो कि जानवर ने बिना छेड़े काटा है या छेड़ने पर । यह अन्तर बहुत आवश्यक है। २. यदि किसी जंगली जानवर या आवारा कुत्ते ने काटा हो और काटने के बाद वह भाग गया हो तो यही कल्पना करना उचित है कि वह पागल था, विशेषकर ऐसी दशा में जब कि दस दिन वाली परीक्षा करने या काटने वाले जानवर के भेजे की जांच करने का अवसर न हो । ३. यदि जाना - पहिचाना कुत्ता हो तो उसके मालिक से आग्रह करो कि वह उसे बांधकर रक्खे जिससे कि डाक्टर साहिब उसकी जांच कर सकें और वह किसी और को न काट सके । ४. यदि काटने वाला कुत्ता या दूसरा जानवर जाहिर में पागल मालम हो तो उसे गोली से मरवा दो, परन्तु गोलो जहां तक हो सके सिर मन लगे क्योंकि रैबीज को पहचान करने के लिये उसके भेजे की जांच बहुत सहायता देगी । इन बातों पर ध्यान देकर तुम डाक्टर साहिब को इस बात का निश्चय करने में सहायता दे सकोगे कि रोगी पैस्टियोर साहब के ऐन्टीरैबिक (Anti-rabic) इलाज के योग्य है या नहीं । यद्यपि बहुत-सी दशाओं में रैबीज का असर होने की बहुत कम सम्भावना होगी, फिर भी बहुत से डाक्टर बहुत सी दशाओं में यही मशवरा देंगे कि ऐन्टी- रैबिक चिकित्सा कराई जाय । डाक्टर साहिब की राय पर काम करने में पूर्ण सहायता देनी चाहिये । भारत सरकार ने ऐसा प्रबन्ध किया है कि अब देश भर में यह चिकित्सा हो सकती है । सरकार ने न केवल बहुत से पैस्टियोर इन्स्टीट्यूट (Pasteur Institutes) खोल दिये हैं बल्कि बहुत से सिविल और मिलिट्रो शफाखानों में ऐन्टी-रैबिक वैक्सोन (Anti-rabic Vaccine ) मिल सकता है, जिसके टीके साधारण डाक्टर लगा सकते हैं । कभी-कभी पालतू या कीमती कुत्तों को पागल जानवर काट खाता है । ऐसी दशा में घाव को जलाने की वही क्रिया करनी चाहिये जो ऊपर लिखी है। परन्तु कुत्ते को हाथ लगाते समय मालिक को चमड़े के मेटे दस्तानो पहन लेने चाहिएं । इसका कारण यह है कि कुत्ते के घाव में ही नहीं, बल्कि उसके बालों में भी जरूर उसका थूक लगा रहता है जो बहुत ज्यादा विषैला हो सकता है । कुत्ते के मालिक को मवेशी डाक्टर से जरूर मशवरा कर लेना चाहिये कि काटे हुए कुत्ते की बाद में क्या देख-भाल की जाय । अब कुत्तों को भी ऐन्टी- रैबिक (Antirabic) चिकित्सा होने लगी है । तीसरा अध्याय हिन्दुस्तानी सांप और उनका काटना नं० १ पेट की परीक्षा-पीठ और बगलों में जो चकत्तेदार परत होते हैं वैसे ही और उनसे मिले हुए परत, कद में छोटे या बड़े सारे पेट में होते हैं । नं० १ पेट की परीक्षा - पेट पर इधर-उधर छोटे-छोटे चकत्तेदार परत और बीच में तिर्धी धारियां दिखाई पड़ती हैं, परन्तु तिर्धी धारियां सारे पेट पर नहीं होती । नं० १ पेट की परीक्षा-सारे पेट पर दुम तक एक तरफ से दूसरी तरफ तक तिर्धी धारियां होती है । FIG. 1 बिना जहर का सांप FIG. 2 बिना जहर का सांप FIG. 3 जहरीला सांप नं० २ सिर के ऊपरी भाग की परीक्षा- सिर के ऊपर का भाग तीर की शक्ल का होता है । यह भाग बाकी तमाम शरीर से ज्यादा चौड़ा होता है। शरीर के साथ यह एक पतली गर्दन द्वारा जुड़ा रहता है । सिर पर छोटे-छोटे परत होते हैं, यह सब प्रकार के वायपर (Viper ) ( एक प्रकार का जहरीला सांप होता है ) में सिवाय पिट वायपर के, पाये जाते हैं ।
भीतर और हर एक दांत के निशान के भीतर भी कार्बोलिक एसिड लगा दो । खाल के ऊपर के और कुछ दूर तक रगों के भीतर पहुंचे हुए जन्तुओं को खालिस कार्बोलिक एसिड जला देता है और मार डालता है । इसे लगाते समय पहले तो यह लगता है परन्तु थोड़ी देर पीछे कुछ मालूम नहीं देता । यदि यह कभी आंख के आस-पास लगानी ही पड़े तो बहुत हल्की-हल्की लगाओ । यदि खालिस कार्बोलिक एसिड न मिले तो ऊपर को खाल के जखमों के लिये लाल गर्म करके चिमटे से और गहरे घाव के लिये कुसिया को लाल गर्म करके घाव को जला दो । पोटाशियम परमेंगनेट के दाने या उसका गाढ़ा गाढ़ा घोल भी लगाया जा सकता है । सिलवर नायट्रेट और तेज नायट्रिक ऐसिड भी लगाये जा सकते है । जब कभी कोई जानवर काट खाय तो यही चिकित्सा करनी चाहिये, चाहे रैबीज की सम्भावना हो या जहर फैल जाने का डर हो । यदि ऊपर लिखी हुई विधि को सावधानी से काम में लाया जाय तो विश्वास के साथ कहा जा सकता है कि रैबीज का जहर फैलने का डर बहुत कम हो जायगा । साथ ही साथ काटने की दुर्घटना के विषय में जो जो बातें मालूम हो सकें सो सब मालूम कर लो । ध्यान देने योग्य कुछ आवश्यक बातें-एक. यह निश्चय करो कि जानवर ने बिना छेड़े काटा है या छेड़ने पर । यह अन्तर बहुत आवश्यक है। दो. यदि किसी जंगली जानवर या आवारा कुत्ते ने काटा हो और काटने के बाद वह भाग गया हो तो यही कल्पना करना उचित है कि वह पागल था, विशेषकर ऐसी दशा में जब कि दस दिन वाली परीक्षा करने या काटने वाले जानवर के भेजे की जांच करने का अवसर न हो । तीन. यदि जाना - पहिचाना कुत्ता हो तो उसके मालिक से आग्रह करो कि वह उसे बांधकर रक्खे जिससे कि डाक्टर साहिब उसकी जांच कर सकें और वह किसी और को न काट सके । चार. यदि काटने वाला कुत्ता या दूसरा जानवर जाहिर में पागल मालम हो तो उसे गोली से मरवा दो, परन्तु गोलो जहां तक हो सके सिर मन लगे क्योंकि रैबीज को पहचान करने के लिये उसके भेजे की जांच बहुत सहायता देगी । इन बातों पर ध्यान देकर तुम डाक्टर साहिब को इस बात का निश्चय करने में सहायता दे सकोगे कि रोगी पैस्टियोर साहब के ऐन्टीरैबिक इलाज के योग्य है या नहीं । यद्यपि बहुत-सी दशाओं में रैबीज का असर होने की बहुत कम सम्भावना होगी, फिर भी बहुत से डाक्टर बहुत सी दशाओं में यही मशवरा देंगे कि ऐन्टी- रैबिक चिकित्सा कराई जाय । डाक्टर साहिब की राय पर काम करने में पूर्ण सहायता देनी चाहिये । भारत सरकार ने ऐसा प्रबन्ध किया है कि अब देश भर में यह चिकित्सा हो सकती है । सरकार ने न केवल बहुत से पैस्टियोर इन्स्टीट्यूट खोल दिये हैं बल्कि बहुत से सिविल और मिलिट्रो शफाखानों में ऐन्टी-रैबिक वैक्सोन मिल सकता है, जिसके टीके साधारण डाक्टर लगा सकते हैं । कभी-कभी पालतू या कीमती कुत्तों को पागल जानवर काट खाता है । ऐसी दशा में घाव को जलाने की वही क्रिया करनी चाहिये जो ऊपर लिखी है। परन्तु कुत्ते को हाथ लगाते समय मालिक को चमड़े के मेटे दस्तानो पहन लेने चाहिएं । इसका कारण यह है कि कुत्ते के घाव में ही नहीं, बल्कि उसके बालों में भी जरूर उसका थूक लगा रहता है जो बहुत ज्यादा विषैला हो सकता है । कुत्ते के मालिक को मवेशी डाक्टर से जरूर मशवरा कर लेना चाहिये कि काटे हुए कुत्ते की बाद में क्या देख-भाल की जाय । अब कुत्तों को भी ऐन्टी- रैबिक चिकित्सा होने लगी है । तीसरा अध्याय हिन्दुस्तानी सांप और उनका काटना नंशून्य एक पेट की परीक्षा-पीठ और बगलों में जो चकत्तेदार परत होते हैं वैसे ही और उनसे मिले हुए परत, कद में छोटे या बड़े सारे पेट में होते हैं । नंशून्य एक पेट की परीक्षा - पेट पर इधर-उधर छोटे-छोटे चकत्तेदार परत और बीच में तिर्धी धारियां दिखाई पड़ती हैं, परन्तु तिर्धी धारियां सारे पेट पर नहीं होती । नंशून्य एक पेट की परीक्षा-सारे पेट पर दुम तक एक तरफ से दूसरी तरफ तक तिर्धी धारियां होती है । FIG. एक बिना जहर का सांप FIG. दो बिना जहर का सांप FIG. तीन जहरीला सांप नंशून्य दो सिर के ऊपरी भाग की परीक्षा- सिर के ऊपर का भाग तीर की शक्ल का होता है । यह भाग बाकी तमाम शरीर से ज्यादा चौड़ा होता है। शरीर के साथ यह एक पतली गर्दन द्वारा जुड़ा रहता है । सिर पर छोटे-छोटे परत होते हैं, यह सब प्रकार के वायपर में सिवाय पिट वायपर के, पाये जाते हैं ।
देहरादूनः ऑस्ट्रेलियन आर्मी का एक प्रतिनिधिमंडल भारत दौरे पर है. इसी कड़ी में भारत और ऑस्ट्रेलियाई थल सेना के बीच रक्षा समझौते को आगे बढ़ाने के लिए दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच 9वीं वार्ता देहरादून की इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA) में हुई. बैठक में आस्ट्रेलिया और भारतीय सेना के स्टाफ ने संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण सहयोग और दोनों सेनाओं के बीच रक्षा सहयोग को बढ़ाने के लिए रोड मैप तैयार करने पर जोर दिया. जानकारी के मुताबिक, ऑस्ट्रेलियाई सेना का एक विशेष प्रतिनिधिमंडल 25 जून से 1 अगस्त तक रक्षा सहयोग के मद्देनजर भारत दौरे पर है. इस कार्यक्रम के तहत ऑस्ट्रेलिया के सैन्य मंडल की ओर से देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी, बंगाल इन्फेंट्री डिविजन इंजीनियरिंग ग्रुप सेंटर रुड़की, वारगेम रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर दिल्ली और सेंटर फॉर लैंड वारफेयर स्टडी (CLAWS) का दौरा किया जा रहा है. ये भी पढ़ेंः IMA POP: पास आउट हुआ अफगानिस्तान का अंतिम बैच, इन 43 कैडेट्स का आगे क्या होगा? भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा सहयोग पर ध्यान केंद्रितः भारत और ऑस्ट्रेलियाई थल सेना के अधिकारियों के बीच आईएमए में हुई बातचीत के दौरान दोनों पक्षों ने रक्षा समझौतों को सहयोग के जरिए आगे बढ़ाने की गतिविधियों पर चर्चा की. साथ ही इसकी समीक्षा भी की. इसके अलावा दोनों सेनाओं के बीच बेहतर प्रशिक्षण पाठ्यक्रम को लेकर भी बातचीत हुई. दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच इस बात पर भी जोर दिया गया कि पूर्व कमीशन प्रशिक्षण अकादमी के बीच कैडेट एक्सचेंज कार्यक्रम और द्विपक्षीय पूर्व ऑस्ट्रेलिया आलाडोमेन के वस्तु विशेषज्ञ के आदान-प्रदान को लेकर भी सहमति बनाने का प्रयास किया गया. वहीं, इस महत्वपूर्ण वार्ता में टैंक अभ्यास और चिकित्सा जैसे सैद्धांतिक मामलों के आदान-प्रदान पर भी जोर दिया गया. इससे पहले ऑस्ट्रेलिया के थल सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल मैक्सवेल बूर ने 4 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ रक्षा सहयोग पर भारत का दौरा किया था. अपनी भारत यात्रा के दौरान आस्ट्रेलिया सेना प्रमुख ने भारत के थल सेनाध्यक्ष, नौसेनाध्यक्ष और वायुसेना प्रमुख समेत वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों से मुलाकात की थी. बताया जा रहा है कि इस दौरान दोनों ही थल सेना अध्यक्षों के बीच गर्मजोशी से बातचीत हुई और एक दूसरे देश के सैन्य सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए सकारात्मक बातचीत की गई. दोनों ही देशों के प्रमुखों ने रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए किन-किन नए आधुनिक उपायों का इस्तेमाल सैन्य अभ्यास और प्रशिक्षण में किया जा सकता है, इसको लेकर तैयारियों पर बातचीत भी की थी. वहीं, इसके अलावा वर्तमान में वैश्विक स्थिति के दृष्टिगत विचारों का आदान प्रदान करने पर बात हुई. साथ ही भारत और ऑस्ट्रेलियाई सेनाओं के बीच बेहतर रक्षा सहयोग तालमेल पर जोर दिया गया था.
देहरादूनः ऑस्ट्रेलियन आर्मी का एक प्रतिनिधिमंडल भारत दौरे पर है. इसी कड़ी में भारत और ऑस्ट्रेलियाई थल सेना के बीच रक्षा समझौते को आगे बढ़ाने के लिए दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच नौवीं वार्ता देहरादून की इंडियन मिलिट्री एकेडमी में हुई. बैठक में आस्ट्रेलिया और भारतीय सेना के स्टाफ ने संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण सहयोग और दोनों सेनाओं के बीच रक्षा सहयोग को बढ़ाने के लिए रोड मैप तैयार करने पर जोर दिया. जानकारी के मुताबिक, ऑस्ट्रेलियाई सेना का एक विशेष प्रतिनिधिमंडल पच्चीस जून से एक अगस्त तक रक्षा सहयोग के मद्देनजर भारत दौरे पर है. इस कार्यक्रम के तहत ऑस्ट्रेलिया के सैन्य मंडल की ओर से देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी, बंगाल इन्फेंट्री डिविजन इंजीनियरिंग ग्रुप सेंटर रुड़की, वारगेम रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर दिल्ली और सेंटर फॉर लैंड वारफेयर स्टडी का दौरा किया जा रहा है. ये भी पढ़ेंः IMA POP: पास आउट हुआ अफगानिस्तान का अंतिम बैच, इन तैंतालीस कैडेट्स का आगे क्या होगा? भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा सहयोग पर ध्यान केंद्रितः भारत और ऑस्ट्रेलियाई थल सेना के अधिकारियों के बीच आईएमए में हुई बातचीत के दौरान दोनों पक्षों ने रक्षा समझौतों को सहयोग के जरिए आगे बढ़ाने की गतिविधियों पर चर्चा की. साथ ही इसकी समीक्षा भी की. इसके अलावा दोनों सेनाओं के बीच बेहतर प्रशिक्षण पाठ्यक्रम को लेकर भी बातचीत हुई. दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच इस बात पर भी जोर दिया गया कि पूर्व कमीशन प्रशिक्षण अकादमी के बीच कैडेट एक्सचेंज कार्यक्रम और द्विपक्षीय पूर्व ऑस्ट्रेलिया आलाडोमेन के वस्तु विशेषज्ञ के आदान-प्रदान को लेकर भी सहमति बनाने का प्रयास किया गया. वहीं, इस महत्वपूर्ण वार्ता में टैंक अभ्यास और चिकित्सा जैसे सैद्धांतिक मामलों के आदान-प्रदान पर भी जोर दिया गया. इससे पहले ऑस्ट्रेलिया के थल सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल मैक्सवेल बूर ने चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ रक्षा सहयोग पर भारत का दौरा किया था. अपनी भारत यात्रा के दौरान आस्ट्रेलिया सेना प्रमुख ने भारत के थल सेनाध्यक्ष, नौसेनाध्यक्ष और वायुसेना प्रमुख समेत वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों से मुलाकात की थी. बताया जा रहा है कि इस दौरान दोनों ही थल सेना अध्यक्षों के बीच गर्मजोशी से बातचीत हुई और एक दूसरे देश के सैन्य सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए सकारात्मक बातचीत की गई. दोनों ही देशों के प्रमुखों ने रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए किन-किन नए आधुनिक उपायों का इस्तेमाल सैन्य अभ्यास और प्रशिक्षण में किया जा सकता है, इसको लेकर तैयारियों पर बातचीत भी की थी. वहीं, इसके अलावा वर्तमान में वैश्विक स्थिति के दृष्टिगत विचारों का आदान प्रदान करने पर बात हुई. साथ ही भारत और ऑस्ट्रेलियाई सेनाओं के बीच बेहतर रक्षा सहयोग तालमेल पर जोर दिया गया था.
"हमारे सोचने का तरीका एक सा नहीं है। मैं एक अशांत हिंदू राष्ट्र नहीं चाहता। धर्म को इस्तेमाल करके सत्ता हासिल करना मेरे हिंदुत्व का हिस्सा नहीं है। मैं ऐसे हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना नहीं करता। " इसकी शुरुआत भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर के साथ दूसरे बड़े शहरों के मंदिरों से होगी। जिस व्यक्ति को जमीन दी जाएगी, वो उस पर निर्माण कार्य कर बेच सकेगा। बिल्डर अपनी मर्जी के मुताबिक उस जमीन पर फ्लैट, डुप्लेक्स, दुकान, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स सहित दूसरा कर्मिशियल निर्माण कर सकता है। वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने दिल्ली में आयोजित एक जनसभा में लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि दिल्ली में चल रहे शाहीन बाग धरने को विपक्षी दलों का पूरा साथ मिल रहा है। समीर द्विवेदी कॉन्ग्रेस के महासचिव रहे जर्नादन द्विवेदी के बेटे हैं। इंदिरा से लेकर सोनिया तक कॉन्ग्रेस अध्यक्षों के साथ काम कर चुके जर्नादन द्विवेदी ने 2018 में सक्रिय राजनीति से खुद को दूर कर लिया था। उद्धव के अनुसार उन्होंने पिता से किया वादा पूरा करने के लिए कॉन्ग्रेस और एनसीपी के साथ सरकार बनाई है। इसके लिए उन्होंने किसी भी हद तक जाने का फैसला किया था, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि भविष्य में बीजेपी के साथ गठबंधन नहीं करेंगे। आप के 70 उम्मीदवारों में से 42 यानी 60% के खिलाफ आपराधिक मामले चल रहे हैं। 51 फीसदी यानी 36 आप उम्मीदवारों पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। ऑपइंडिया ने अपनी ख़बर में दिवंगत नीरज के परिजनों के हवाले से बताया था कि झारखण्ड की हेमंत सोरेन सरकार पीड़ित परिवार पर लगातार दबाव बना रही है कि वो मीडिया व पुलिस में कहें कि नीरज प्रजापति की मौत बाथरूम में फिसलने के कारण हुई। अमित मालवीय ने भी इस आरोप की पुष्टि की है। मोहल्ला क्लीनिक में दवाएँ तो दूर न तो सुई है और न ही पट्टी। बीपी चेक कराने के लिए भी बाहर जाने को बोल दिया जाता है। वहीं दूसरे लोग कहते हुए सुनाई देते हैं कि मोहल्ला क्लीनिक अधिक समय तक बंद ही रहते हैं। इसी कारण लोग यहाँ आस-पास गंदगी फैलाते रहते हैं, जिससे ये अब मोहल्ला क्लीनिक नहीं, पेशाब घर बन चुके हैं। कॉन्ग्रेस नेता की भारत तोड़ने की इस टिप्पणी पर न्यूज एंकर और भाजपा प्रवक्ता ने तीखी प्रतिक्रियाएँ दी। उन्होंने कॉन्ग्रेस नेता कि इस भड़काऊ और विभाजनकारी टिप्पणियों के लिए काफी आलोचना की। इसके बाद ट्विटर यूजर ने भी आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि क्या कॉन्ग्रेस सच में 'जिन्ना वाली आजादी' चाहती है।
"हमारे सोचने का तरीका एक सा नहीं है। मैं एक अशांत हिंदू राष्ट्र नहीं चाहता। धर्म को इस्तेमाल करके सत्ता हासिल करना मेरे हिंदुत्व का हिस्सा नहीं है। मैं ऐसे हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना नहीं करता। " इसकी शुरुआत भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर के साथ दूसरे बड़े शहरों के मंदिरों से होगी। जिस व्यक्ति को जमीन दी जाएगी, वो उस पर निर्माण कार्य कर बेच सकेगा। बिल्डर अपनी मर्जी के मुताबिक उस जमीन पर फ्लैट, डुप्लेक्स, दुकान, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स सहित दूसरा कर्मिशियल निर्माण कर सकता है। वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने दिल्ली में आयोजित एक जनसभा में लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि दिल्ली में चल रहे शाहीन बाग धरने को विपक्षी दलों का पूरा साथ मिल रहा है। समीर द्विवेदी कॉन्ग्रेस के महासचिव रहे जर्नादन द्विवेदी के बेटे हैं। इंदिरा से लेकर सोनिया तक कॉन्ग्रेस अध्यक्षों के साथ काम कर चुके जर्नादन द्विवेदी ने दो हज़ार अट्ठारह में सक्रिय राजनीति से खुद को दूर कर लिया था। उद्धव के अनुसार उन्होंने पिता से किया वादा पूरा करने के लिए कॉन्ग्रेस और एनसीपी के साथ सरकार बनाई है। इसके लिए उन्होंने किसी भी हद तक जाने का फैसला किया था, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि भविष्य में बीजेपी के साथ गठबंधन नहीं करेंगे। आप के सत्तर उम्मीदवारों में से बयालीस यानी साठ% के खिलाफ आपराधिक मामले चल रहे हैं। इक्यावन फीसदी यानी छत्तीस आप उम्मीदवारों पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। ऑपइंडिया ने अपनी ख़बर में दिवंगत नीरज के परिजनों के हवाले से बताया था कि झारखण्ड की हेमंत सोरेन सरकार पीड़ित परिवार पर लगातार दबाव बना रही है कि वो मीडिया व पुलिस में कहें कि नीरज प्रजापति की मौत बाथरूम में फिसलने के कारण हुई। अमित मालवीय ने भी इस आरोप की पुष्टि की है। मोहल्ला क्लीनिक में दवाएँ तो दूर न तो सुई है और न ही पट्टी। बीपी चेक कराने के लिए भी बाहर जाने को बोल दिया जाता है। वहीं दूसरे लोग कहते हुए सुनाई देते हैं कि मोहल्ला क्लीनिक अधिक समय तक बंद ही रहते हैं। इसी कारण लोग यहाँ आस-पास गंदगी फैलाते रहते हैं, जिससे ये अब मोहल्ला क्लीनिक नहीं, पेशाब घर बन चुके हैं। कॉन्ग्रेस नेता की भारत तोड़ने की इस टिप्पणी पर न्यूज एंकर और भाजपा प्रवक्ता ने तीखी प्रतिक्रियाएँ दी। उन्होंने कॉन्ग्रेस नेता कि इस भड़काऊ और विभाजनकारी टिप्पणियों के लिए काफी आलोचना की। इसके बाद ट्विटर यूजर ने भी आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि क्या कॉन्ग्रेस सच में 'जिन्ना वाली आजादी' चाहती है।
फ्रिज में कितने अंडे जमा किए जाते हैं? रेफ्रिजरेटर में कितने अंडे जमा किए जाते हैं? इस सवाल का जवाब देने के लिए, आपको यह निर्धारित करने की आवश्यकता है कि आपने स्टोर में कौन से अंडे खरीदे हैं और वे कितने ताजा हैं। यदि अंडे आहार (चिकन के नीचे से) हैं, तो शेल्फ जीवन बहुत कम है - 7 दिनों का औसत। यदि डाइनिंग रूम हैं, तो उन्हें 25 से 9 0 दिनों तक स्टोर किया जा सकता है। लंबे समय तक रेफ्रिजरेटर में अनचाहे अंडे जमा किए जाते हैं। धोया हुआ खोल छिद्रपूर्ण और कमजोर हो रहा है, नतीजतन, रोगजनक बैक्टीरिया के अंदर पहुंच की सुविधा है। लेकिन अगर अंडे भारी गंदे होते हैं, तो,स्वाभाविक रूप से, उन्हें पूरी तरह से धोया जाना चाहिए, ताकि बैक्टीरिया और रोगाणु अन्य खाद्य पदार्थों में फैल न जाएं। उन्हें ठंडे पानी में धोने की सिफारिश की जाती है, और इसे रेफ्रिजरेटर में डालने से पहले, इसे सूखना अच्छा होता है। कैसे रखना है, रेफ्रिजरेटर में कितने अंडे संग्रहीत किए जाते हैं, इस पर निर्भर करता है। उन्हें विशेष कंटेनर में या शॉपिंग बैग में पैक करना सबसे अच्छा है, अन्यथा खोल इसकी प्राकृतिक नमी खो देता है। सबसे लंबा शेल्फ जीवन जमे हुए में हैफॉर्म, यह फ्रीजर में बंधक से पहले सच है, उन्हें खोल से मुक्त करना और कंटेनरों में बैचों में रखना वांछनीय है। फ्रीजर में, अंडे एक वर्ष तक रह सकते हैं। अगर वे रेफ्रिजरेटर में अंडे स्टोर करते हैंउबला हुआ? यदि वे कठोर उबले हुए हैं, तो उन्हें लगभग एक सप्ताह तक संग्रहीत किया जा सकता है, उबला हुआ नरम उबला हुआ पानी खाने के लिए बेहतर होता है। टूटा एक दिन के भीतर खो जाएगा। प्रोटीन और योल की शेल्फ लाइफ अलग हैः योलक्स - एक दिन, और प्रोटीन - 12 घंटे, इस कारण से, उन्हें अलग से स्टोर करने की आवश्यकता होती है।
फ्रिज में कितने अंडे जमा किए जाते हैं? रेफ्रिजरेटर में कितने अंडे जमा किए जाते हैं? इस सवाल का जवाब देने के लिए, आपको यह निर्धारित करने की आवश्यकता है कि आपने स्टोर में कौन से अंडे खरीदे हैं और वे कितने ताजा हैं। यदि अंडे आहार हैं, तो शेल्फ जीवन बहुत कम है - सात दिनों का औसत। यदि डाइनिंग रूम हैं, तो उन्हें पच्चीस से नौ शून्य दिनों तक स्टोर किया जा सकता है। लंबे समय तक रेफ्रिजरेटर में अनचाहे अंडे जमा किए जाते हैं। धोया हुआ खोल छिद्रपूर्ण और कमजोर हो रहा है, नतीजतन, रोगजनक बैक्टीरिया के अंदर पहुंच की सुविधा है। लेकिन अगर अंडे भारी गंदे होते हैं, तो,स्वाभाविक रूप से, उन्हें पूरी तरह से धोया जाना चाहिए, ताकि बैक्टीरिया और रोगाणु अन्य खाद्य पदार्थों में फैल न जाएं। उन्हें ठंडे पानी में धोने की सिफारिश की जाती है, और इसे रेफ्रिजरेटर में डालने से पहले, इसे सूखना अच्छा होता है। कैसे रखना है, रेफ्रिजरेटर में कितने अंडे संग्रहीत किए जाते हैं, इस पर निर्भर करता है। उन्हें विशेष कंटेनर में या शॉपिंग बैग में पैक करना सबसे अच्छा है, अन्यथा खोल इसकी प्राकृतिक नमी खो देता है। सबसे लंबा शेल्फ जीवन जमे हुए में हैफॉर्म, यह फ्रीजर में बंधक से पहले सच है, उन्हें खोल से मुक्त करना और कंटेनरों में बैचों में रखना वांछनीय है। फ्रीजर में, अंडे एक वर्ष तक रह सकते हैं। अगर वे रेफ्रिजरेटर में अंडे स्टोर करते हैंउबला हुआ? यदि वे कठोर उबले हुए हैं, तो उन्हें लगभग एक सप्ताह तक संग्रहीत किया जा सकता है, उबला हुआ नरम उबला हुआ पानी खाने के लिए बेहतर होता है। टूटा एक दिन के भीतर खो जाएगा। प्रोटीन और योल की शेल्फ लाइफ अलग हैः योलक्स - एक दिन, और प्रोटीन - बारह घंटाटे, इस कारण से, उन्हें अलग से स्टोर करने की आवश्यकता होती है।
रिपोर्ट्स में कहा गया है कि होटल के स्टाफ ने खुद ही आग पर काबू पा लिया और इसकी सूचना दमकल विभाग को नहीं दी। महाराष्ट्र के मुंबई में स्थित ट्राइडेंट होटल में रविवार सुबह आग लगने की बात सामने आई है। बताया गया है कि यह आग होटल के टॉप फ्लोर में लगी थी। हालांकि, इस पर कुछ ही देर में काबू पा लिया गया। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि होटल के स्टाफ ने खुद ही आग पर काबू पा लिया और इसकी सूचना दमकल विभाग को नहीं दी। बताया गया है कि 34 मंजिला इस आलीशान होटल की सबसे ऊपरी मंजिल से धुआं निकलते देख एक पैदल यात्री ने शोर मचाया था। हालांकि, घटना की शिकायत मिलते ही होटल पहुंचे अग्निशमन अधिकारी ने बताया कि होटल में आग नहीं लगी थी, बल्कि तकनीकी खराबी के कारण छत पर लगी चिमनी से धुआं निकल रहा था। अधिकारी के मुताबिक, एक व्यक्ति ने नरीमन प्वाइंट स्थित ट्राइडेंट होटल से धुआं निकलता देखा और सुबह करीब आठ बजकर 20 मिनट पर अग्निशमन विभाग को इसकी सूचना मिली, जिसके बाद दमकल की एक गाड़ी और एक जंबो टैंकर को मौके पर भेजा गया। उन्होंने बताया कि दमकलकर्मियों ने मौके पर पहुंचने के बाद पाया कि होटल में रखे ट्यूब बॉयलर में तकनीकी खराबी के कारण इमारत की छत पर लगी चिमनी से धुआं निकल रहा था। अधिकारी ने बताया कि अग्निशमन दल ने होटल के अधिकारियों से पूछताछ की और परिसर का पूरी तरह से निरीक्षण किया, लेकिन वहां आग नहीं लगी थी। उन्होंने बताया कि राहगीर द्वारा अच्छी मंशा से लेकिन गलत संदेश भेज दिया गया। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
रिपोर्ट्स में कहा गया है कि होटल के स्टाफ ने खुद ही आग पर काबू पा लिया और इसकी सूचना दमकल विभाग को नहीं दी। महाराष्ट्र के मुंबई में स्थित ट्राइडेंट होटल में रविवार सुबह आग लगने की बात सामने आई है। बताया गया है कि यह आग होटल के टॉप फ्लोर में लगी थी। हालांकि, इस पर कुछ ही देर में काबू पा लिया गया। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि होटल के स्टाफ ने खुद ही आग पर काबू पा लिया और इसकी सूचना दमकल विभाग को नहीं दी। बताया गया है कि चौंतीस मंजिला इस आलीशान होटल की सबसे ऊपरी मंजिल से धुआं निकलते देख एक पैदल यात्री ने शोर मचाया था। हालांकि, घटना की शिकायत मिलते ही होटल पहुंचे अग्निशमन अधिकारी ने बताया कि होटल में आग नहीं लगी थी, बल्कि तकनीकी खराबी के कारण छत पर लगी चिमनी से धुआं निकल रहा था। अधिकारी के मुताबिक, एक व्यक्ति ने नरीमन प्वाइंट स्थित ट्राइडेंट होटल से धुआं निकलता देखा और सुबह करीब आठ बजकर बीस मिनट पर अग्निशमन विभाग को इसकी सूचना मिली, जिसके बाद दमकल की एक गाड़ी और एक जंबो टैंकर को मौके पर भेजा गया। उन्होंने बताया कि दमकलकर्मियों ने मौके पर पहुंचने के बाद पाया कि होटल में रखे ट्यूब बॉयलर में तकनीकी खराबी के कारण इमारत की छत पर लगी चिमनी से धुआं निकल रहा था। अधिकारी ने बताया कि अग्निशमन दल ने होटल के अधिकारियों से पूछताछ की और परिसर का पूरी तरह से निरीक्षण किया, लेकिन वहां आग नहीं लगी थी। उन्होंने बताया कि राहगीर द्वारा अच्छी मंशा से लेकिन गलत संदेश भेज दिया गया। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
श्रीगंगानगर। नगर परिषद में चल रही धांधली की लोकायुक्त में हुई शिकायतों के बाद जांच करने के लिए बीकानेर से स्थानीय निकाय विभाग के डीडीआर नरेंद्र कुल्हरी नगरपरिषद में जांच शुरू की है। नगरपरिषद पहुंचने के साथ ही अनेक पार्षद आयुक्त के चैंबर में जा पहुचें। पार्षदों ने डीडीआर के सामने अनेक शिकायतों का अम्बार लगा दिया। पार्षदों की ओर से दी गई शिकायतों के बाद डीडीआर ने सभी प्रकरणों की ठीक से पड़ताल करने के बाद रिपोर्ट बनाने की बात कहीं है। नगर परिषद के कनिष्ठ अभियंता सरदूल सिंह ने ठेकेदार से मिलीभगत कर परिषद को लाखो रुपए के राजस्व का नुकसान पहुंचाया है। सरदूल सिंह के खिलाफ शिकायत है कि वे नगरपरिषद में ड्राफ्ट मैन के पद पर लगा था, जिसने पंजाब के एक इंस्टीट्यूट से फर्जी प्रमाण पत्र लेकर श्रीगंगानगर नगर परिषद में कनिष्ठ अभियंता के पद पर पद्दोनती प्राप्त कर ली। इसके बाद पुरानी आबादी में 51 नंबर भूखंड मालिक को खांचा भूमि आवंटित कर दी। 10-11 ब्लाक को डीएलसी का लाभ पहुंचाने के लिए गोशाला मार्ग की बजाए के ब्लाक का पट्टा दे दिया। वार्ड में 46 नंबर भूखंड आवासीय क्षेत्र में है, जबकि पट्टा कच्ची बस्ती का रेजिडेंशियल में दे दिया।
श्रीगंगानगर। नगर परिषद में चल रही धांधली की लोकायुक्त में हुई शिकायतों के बाद जांच करने के लिए बीकानेर से स्थानीय निकाय विभाग के डीडीआर नरेंद्र कुल्हरी नगरपरिषद में जांच शुरू की है। नगरपरिषद पहुंचने के साथ ही अनेक पार्षद आयुक्त के चैंबर में जा पहुचें। पार्षदों ने डीडीआर के सामने अनेक शिकायतों का अम्बार लगा दिया। पार्षदों की ओर से दी गई शिकायतों के बाद डीडीआर ने सभी प्रकरणों की ठीक से पड़ताल करने के बाद रिपोर्ट बनाने की बात कहीं है। नगर परिषद के कनिष्ठ अभियंता सरदूल सिंह ने ठेकेदार से मिलीभगत कर परिषद को लाखो रुपए के राजस्व का नुकसान पहुंचाया है। सरदूल सिंह के खिलाफ शिकायत है कि वे नगरपरिषद में ड्राफ्ट मैन के पद पर लगा था, जिसने पंजाब के एक इंस्टीट्यूट से फर्जी प्रमाण पत्र लेकर श्रीगंगानगर नगर परिषद में कनिष्ठ अभियंता के पद पर पद्दोनती प्राप्त कर ली। इसके बाद पुरानी आबादी में इक्यावन नंबर भूखंड मालिक को खांचा भूमि आवंटित कर दी। दस-ग्यारह ब्लाक को डीएलसी का लाभ पहुंचाने के लिए गोशाला मार्ग की बजाए के ब्लाक का पट्टा दे दिया। वार्ड में छियालीस नंबर भूखंड आवासीय क्षेत्र में है, जबकि पट्टा कच्ची बस्ती का रेजिडेंशियल में दे दिया।
शिवपुरी। मानकपुर गांव का युवक कानों में ईयरफोन लगाकर रेलवे ट्रैक पार कर रहा था। अचानक ट्रेन आ गई और ट्रेन से टकरा गया। घायल अवस्था में जिला अस्पताल शिवपुरी में भर्ती कराया, जहां इलाज के कुछ देर बार दम तोड़ दिया। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामला विवेचना में ले लिया है। जानकारी के मुताबिक दिलीप (26) पुत्र बृजलाल जाटव निवासी मानकपुर सुबह करीब 8 बजे खेतों की तरफ शौच करने जा रहा था। रेलवे ट्रैक पार करते समय शिवपुरी से गुना की ओर जा रही ट्रेन की चपेट में आ गया। गंभीर रूप से घायल दिलीप को परिजन जिला अस्पताल लेकर आए जहां इलाज के दौरान 10. 20 बजे मौत हो गई। पुलिस को परिजनों ने बातचीत में बताया कि घायल अवस्था में मिले दीपक के कानों में ईयरफोन लगे हुए थे। इसलिए अनुमान लगाया जा रहा है कि ईयरफोन लगे रहने के कारण उसे ट्रेन की आवाज सुनाई नहीं दी और चपेट की चपेट में आ गया।
शिवपुरी। मानकपुर गांव का युवक कानों में ईयरफोन लगाकर रेलवे ट्रैक पार कर रहा था। अचानक ट्रेन आ गई और ट्रेन से टकरा गया। घायल अवस्था में जिला अस्पताल शिवपुरी में भर्ती कराया, जहां इलाज के कुछ देर बार दम तोड़ दिया। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामला विवेचना में ले लिया है। जानकारी के मुताबिक दिलीप पुत्र बृजलाल जाटव निवासी मानकपुर सुबह करीब आठ बजे खेतों की तरफ शौच करने जा रहा था। रेलवे ट्रैक पार करते समय शिवपुरी से गुना की ओर जा रही ट्रेन की चपेट में आ गया। गंभीर रूप से घायल दिलीप को परिजन जिला अस्पताल लेकर आए जहां इलाज के दौरान दस. बीस बजे मौत हो गई। पुलिस को परिजनों ने बातचीत में बताया कि घायल अवस्था में मिले दीपक के कानों में ईयरफोन लगे हुए थे। इसलिए अनुमान लगाया जा रहा है कि ईयरफोन लगे रहने के कारण उसे ट्रेन की आवाज सुनाई नहीं दी और चपेट की चपेट में आ गया।
हरिका ने महज छह साल की उम्र में अपने पिता को खो दिया था। उसकी मां एक बीड़ी फैक्ट्री में काम कर के किसी तरह से घर चलाती थी। लेकिन तमाम मुश्किलों बावजूद हरिका ने बिना ट्यूशन लिए यूट्यूब वीडियो की मदद से एमबीबीएस की सीट हांसिल की है। Motivational Story: सोशल मीडिया (Social Media) पर अक्सर कई ऐसी चीजे वायरल होती रहती हैं जो हमें जीवन भर का ज्ञान दें जाती हैं। ऐसी ही एक कहानी ने लोगों का दिल जीत लिया है। कई लोग हैदराबाद की एक लड़की की कहानी से प्रेरित हो रहे हैं। हैदराबाद (Hyderabad) की रहने वाली इस युवती ने जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत और लगन के महत्व को साबित किया है। बीड़ी फैक्ट्री में काम करने वाली सिंगल मदर (Single Mother) की बेटी ने यूट्यूब वीडियो (You Tube Video) से पढ़कर एमबीबीएस की परीक्षा (MBBS Exam) पास की। एमबीबीएस की परीक्षा पास करने वाली हरिका हैदराबाद के निजामाबाद की रहने वाली हैं। बुधवार को निजामाबाद विधानसभा क्षेत्र टीआरएस विधायक कविता कल्वकुंतला (TRS MLA Kavitha Kalvakuntla) ने हरिका की प्रेरक कहानी ट्वीट की। पूर्व सांसद कल्वकुंतला ने कहा कि वह हरिका और उनकी मां से मिलीं और हरिका की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उन्हें ट्यूशन की पहली किस्त देकर उनकी आकांक्षाओं को प्रोत्साहित किया। रास्ते में आने वाली बाधाओं के बावजूद, हरिका ने डॉक्टर बनने के अपने सपने को साकार करने और अपने भविष्य को चमकाने के लिए दृढ़ संकल्प किया। टीआरएस नेता कल्वकुंता ने अपने ट्वीट में लिखा, "सपने देखने की हिम्मत करें और तब तक काम करना बंद न करें जब तक आप उन्हें हासिल नहीं कर लेते। " टीआरएस नेता का दावा है कि हरिका यूट्यूब वीडियो देखकर और अध्ययन करके अपने दम पर उत्कृष्ट स्कोर के साथ एमबीबीएस परीक्षा पास करने में सक्षम रही हैं। हरिका की कहानी आज के युवा पीढ़ी के लिए एक सिख है। जिसने अपनी तमाम परेशानियों को दरकिनार कर के सफलता की उड़ान भरी। कल्वकुंतला के अनुसार, बीड़ी कार्यकर्ता हरिका और उनकी मां को जानना और उनकी उल्लेखनीय यात्रा में शामिल होना वास्तव में एक आशीर्वाद है। उन्होंने सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हुए हरिका की प्रेरक कहानी पोस्ट की। इंटरनेट यूजर्स ने टीआरएस नेता कविता कल्वकुंतला द्वारा किए गए इस तरह के इशारे की सराहना की है।
हरिका ने महज छह साल की उम्र में अपने पिता को खो दिया था। उसकी मां एक बीड़ी फैक्ट्री में काम कर के किसी तरह से घर चलाती थी। लेकिन तमाम मुश्किलों बावजूद हरिका ने बिना ट्यूशन लिए यूट्यूब वीडियो की मदद से एमबीबीएस की सीट हांसिल की है। Motivational Story: सोशल मीडिया पर अक्सर कई ऐसी चीजे वायरल होती रहती हैं जो हमें जीवन भर का ज्ञान दें जाती हैं। ऐसी ही एक कहानी ने लोगों का दिल जीत लिया है। कई लोग हैदराबाद की एक लड़की की कहानी से प्रेरित हो रहे हैं। हैदराबाद की रहने वाली इस युवती ने जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत और लगन के महत्व को साबित किया है। बीड़ी फैक्ट्री में काम करने वाली सिंगल मदर की बेटी ने यूट्यूब वीडियो से पढ़कर एमबीबीएस की परीक्षा पास की। एमबीबीएस की परीक्षा पास करने वाली हरिका हैदराबाद के निजामाबाद की रहने वाली हैं। बुधवार को निजामाबाद विधानसभा क्षेत्र टीआरएस विधायक कविता कल्वकुंतला ने हरिका की प्रेरक कहानी ट्वीट की। पूर्व सांसद कल्वकुंतला ने कहा कि वह हरिका और उनकी मां से मिलीं और हरिका की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उन्हें ट्यूशन की पहली किस्त देकर उनकी आकांक्षाओं को प्रोत्साहित किया। रास्ते में आने वाली बाधाओं के बावजूद, हरिका ने डॉक्टर बनने के अपने सपने को साकार करने और अपने भविष्य को चमकाने के लिए दृढ़ संकल्प किया। टीआरएस नेता कल्वकुंता ने अपने ट्वीट में लिखा, "सपने देखने की हिम्मत करें और तब तक काम करना बंद न करें जब तक आप उन्हें हासिल नहीं कर लेते। " टीआरएस नेता का दावा है कि हरिका यूट्यूब वीडियो देखकर और अध्ययन करके अपने दम पर उत्कृष्ट स्कोर के साथ एमबीबीएस परीक्षा पास करने में सक्षम रही हैं। हरिका की कहानी आज के युवा पीढ़ी के लिए एक सिख है। जिसने अपनी तमाम परेशानियों को दरकिनार कर के सफलता की उड़ान भरी। कल्वकुंतला के अनुसार, बीड़ी कार्यकर्ता हरिका और उनकी मां को जानना और उनकी उल्लेखनीय यात्रा में शामिल होना वास्तव में एक आशीर्वाद है। उन्होंने सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हुए हरिका की प्रेरक कहानी पोस्ट की। इंटरनेट यूजर्स ने टीआरएस नेता कविता कल्वकुंतला द्वारा किए गए इस तरह के इशारे की सराहना की है।
हैं अर्थात् प्रकारान्तर से वे उनके लिए विषय उपस्थित करते हैं। वे कभी तो आप से आप विषयों को मन के सामने लाते हैं, कभी किसी विषय के सामने आने पर उससे सम्बन्ध ( पूर्वापर वा कार्य कारण सम्बन्ध ) रखनेवाले और बहुत से विषय उपस्थित करते हैं जो कभी तो सब के सब एक ही भाव के विषय होते हैं और उस प्रत्यक्ष विषय से उत्पन्न भाव को तीव्र करते हैं, कभी भिन्न-भिन्न भावों के विषय होकर प्रत्यक्ष विषय से उत्पन्न भावों को परिवर्त्तित या धीमा करते हैं । इससे यह स्पष्ट है कि मनोवेग या भावों को मंद या दूर करनेवाली, स्मृति, अनुमान या बुद्धि कोई दूसरी अन्तःकरण वृत्ति नहीं है, मन का दूसरा भाव या वेग ही है । मनुष्य की सजीवता मनोवेग या प्रवृत्ति में, भावों का तत्परता में, है। नीतिज्ञों और धार्मिकों का मनोविकारों को दूर करने का उपदेश घोर पाषण्ड है । इस विषय में कवियों का प्रयत्न ही सच्चा है जो मनोविकारों पर सान ही नहीं चढ़ाते बल्कि उन्हें परमार्जित करते हुए सृष्टि के पदार्थों के साथ उनके उपयुक्त सम्बन्ध निर्वाह पर जोर देते हैं। यदि मनोवेग न हों तो स्मृति अनुमान बुद्धि आदि के रहते भी मनुष्य बिलकुल जड़ है । प्रचलित सभ्यता और जीवन की कठिनता से मनुष्य अपने इन मनोवेगों को मारने और अशक्त करने पर विवश होता है, इनका पूर्ण और सच्चा निर्वाह उसके लिए कठिन होता है और इस प्रकार उसके जीवन का स्वाद निकल जाता है । वन, नदी, पर्वत आदि को देख आनन्दित होने के लिए अब उसके हृदय में उतनी जगह नहीं । दुराचार पर उसे क्रोध या घृणा होती है पर झूठे शिष्टाचार के अनुसार उसे दुराचारी की भी मुँह पर प्रशंसा करनी पड़ती है। जीवन निर्वाह की कठिनता से उत्पन्न स्वार्थ की शुष्क प्रेरणा के कारण उसे दूसरे के दुःख की ओर ध्यान देने, उस पर दया करने और उसके दुःख की निवृत्ति का सुख प्राप्त करने की फुरसत नहीं । इस प्रकार मनुष्य हृदय को दबाकर केवल क्रूर आवश्यकता और कृत्रिम नियमों के अनुसार ही चलने पर विवश और कठपुतली सा जड़ होता जाता है। उसकी भावुकता का नाश होता जाता है पाषण्डी लोग मनोवेगों का सच्चा निर्वाह न देख, हताश हो मुह बनाकर कहने लगे हैं - "करुणा छोड़ो, प्रेम छोड़ो, आनन्द छोड़ो । बस हाथ-पैर हिलाओ काम करो।" यह ठीक है कि मनोवेग उत्पन्न होना और बात है और मनोवेग के अनुसार व्यवहार करना और बात; पर अनुसारी परिणाम के निरन्तर भाव से मनोवेगों का अभ्यास भी घटने लगता है। यदि कोई मनुष्य आवश्यकतावश कोई निष्ठुर कार्य अपने ऊपर ले लेता तो पहले दो-चार बार उसे उत्पन्न होगी; पर जब बार-बार दया की प्रेरणा के अनुसार कोई परिणाम वह उपस्थित न कर सकेगा तब धीरे-धीरे उसका दया का अभ्यास कम होने लगेगा । यहाँ तक कि उसकी दया की वृत्ति ही मारी जायगी । बहुत से ऐसे अवसर पड़ते हैं जिसमें करुणा आदि मनोवेगों अनुसार काम नहीं किया जा सकता। पर ऐसे अवसरों की संख्या का बहुत बढ़ना ठीक नहीं है। जीवन में मनोवेगों के अनुसार परिणामों का विरोध प्रायः तीन वस्तुओं से होता है - १ आवश्यकता २ नियम और ३ न्याय । हमारा कोई नौकर बहुत बुड्ढा और कार्य करने में अशक्त हो गया है जिससे हमारे काम में हर्ज होता है। हमें उसकी अवस्था पर दया तो है पर आवश्यकता के अनुरोध से उसे अलग करना पड़ता है। किसी दुष्ट अफसर के कुवाक्य पर क्रोध तो आता है पर मातहत लोग आवश्यकता के वश उस क्रोध के अनुसार कार्य करने की कौन कहे, उसका चिह्न तक नहीं प्रकट होने देते । यदि कहीं पर यह नियम है कि इतना रुपया देकर लोग कोई कार्य करने पाएँ तो जो व्यक्ति रुपया वसूल करने पर नियुक्त होगा वह किसी ऐसे दीन अकिञ्चन को देख जिसके पास एक पैसा भी न होगा, दया तो करेगा पर नियम के वशीभूत हो उसे वह उस कार्य को करने से रोकेगा । राजा हरिश्चन्द्र ने अपनी रानी शैव्या से अपने ही मृतपुत्र के कफन का टुकड़ा फड़वा नियम का अद्भुत पालन किया था । पर यह समझ रखना चाहिए कि यदि शैव्या के स्थान पर कोई दूसरी स्त्री होती तो राजा हरिश्चन्द्र के उस नियम पालन का उतना महत्त्व न दिखाई पड़ता; करुणा ही लोगों की श्रद्धा को अपनी ओर खींचती है। करुणा का विषय दूसरे का दुःख है; अपना दुःख नहीं । आत्मीय जनों का दुःख एक प्रकार से अपना ही दुःख है। इससे राजा हरिश्चन्द्र के नियम पालन का जितना स्वार्थ से विरोध था उतना करुणा से नहीं । न्याय और करुणा का विरोध प्रायः सुनने में आता है। न्याय से ठीक प्रतीकार का भाव समझा जाता है। यदि किसी ने हमसे १०००) उधार लिया तो न्याय यह है कि वह हमें १०००) लौटा दे । यदि किसी ने कोई अपराध किया तो न्याय यह है कि उसको दण्ड मिले । यदि १००९) लेने के उपरान्त उस व्यक्ति पर कोई आपत्ति पड़ी और उसकी दशा अत्यन्त शोचनीय हो गई तो न्याय पालने के विचार का विरोध करुणा कर सकती है। इसी प्रकार यदि अपराधी मनुष्य बहुत रोता गिड़गिड़ाता और कान पकड़ता है तथा पूर्ण दण्ड की अवस्था में अपने परिवार की घोर दुर्दशा का वर्णन करता है, तो न्याय के पूर्ण निर्वाह का विरोध करुणा कर सकती है। ऐसी अवस्थाओं में करुणा करने का सारा अर्थात् जिसका रुपया चाहिए या जिसका अपराध किया गया है उसको है, न्यायकर्त्ता या तीसरे व्यक्ति को नहीं। जिसने अपनी कमाई के १०००) अलग किए, या अपराध द्वारा जो क्षति- प्रस्त हुआ, विश्वात्मा उसी के हाथ में करुणा ऐसी उच्च सद्वृत्ति के पालन का शुभ देती है। करुणा सेंत का सौदा नहीं है । यदि न्यायकर्त्ता को करुणा है तो वह उसकी शान्ति पृथक् रूप से कर सकता है, जैसे ऊपर लिखे मामलों में वह चाहे तो दुखिया ऋणी को हजार पाँच सौ अपने पास से दे दे या दण्डित व्यक्ति तथा उसके परिवार की और प्रकार से सहायता कर दे। उसके लिए भी करुणा का द्वार खुला है। हम जिन लोगों के बीच रहते हैं अपने विषय में उनकी धारणा का जितना ही अधिक ध्यान रखते हैं उतना ही अधिक प्रतिबन्ध अपने आचरण पर रखते हैं। जो हमारी बुराई, मूर्खता या तुच्छता के प्रमाण पा चुके रहते हैं, उनके सामने हम उसी धड़ाके के साथ नहीं जाते जिस धड़ाके के साथ औरों के सामने जाते हैं। यहीं तक नहीं, जिन्हें इस प्रकार का प्रमाण नहीं भी मिला रहता है उनके आगे भी कोई काम करते हुए यह सोचकर कुछ आगा-पीछा होता है कि कहीं इस प्रकार का प्रमाण उन्हें मिल न रहा हो। दूसरों के चित्त में अपने विषय में बुरी यह तुच्छ धारणा होने के निश्चय या आशंका मात्र से वृत्तियों का जो संकोच होता है - उनकी स्वच्छंदता के विघात का जो अनुभव होता है - उसे लज्जा कहते हैं । इस मनोवेग के मारे लोग सिर ऊँचा नहीं करते, मुँह नहीं दिखाते, सामने नहीं आते, साफ-साफ कहते नहीं, और भी न जाने क्या-क्या नहीं करते । 'हम बुरे न समझे जायँ' यह स्थायी भावना जिसमें जितनी ही अधिक होगी, वह उतना ही लज्जशील होगा । 'कोई बुरा कहे चाहे भला' इसकी परवा न करके जो काम किया करते हैं वे ही निर्लज्ज कहलाते हैं । जिस समाज में हम कोई बुराई करते हैं, जिस समाज में हम मूर्खता धृष्टता आदि का प्रमाण दे चुके रहते हैं, उसके अंग होने का स्वत्व हम जता नहीं सकते, अतः उसके सामने अपनी सजीवता के लक्षणों को उपस्थित करते या रखते नहीं बनता - यह प्रकट करते नहीं बनता कि हम भी इस संसार में हैं। जिसके साथ हमने कोई बुराई की होती है उसे देखते ही हमारी क्या दशा होती है !
हैं अर्थात् प्रकारान्तर से वे उनके लिए विषय उपस्थित करते हैं। वे कभी तो आप से आप विषयों को मन के सामने लाते हैं, कभी किसी विषय के सामने आने पर उससे सम्बन्ध रखनेवाले और बहुत से विषय उपस्थित करते हैं जो कभी तो सब के सब एक ही भाव के विषय होते हैं और उस प्रत्यक्ष विषय से उत्पन्न भाव को तीव्र करते हैं, कभी भिन्न-भिन्न भावों के विषय होकर प्रत्यक्ष विषय से उत्पन्न भावों को परिवर्त्तित या धीमा करते हैं । इससे यह स्पष्ट है कि मनोवेग या भावों को मंद या दूर करनेवाली, स्मृति, अनुमान या बुद्धि कोई दूसरी अन्तःकरण वृत्ति नहीं है, मन का दूसरा भाव या वेग ही है । मनुष्य की सजीवता मनोवेग या प्रवृत्ति में, भावों का तत्परता में, है। नीतिज्ञों और धार्मिकों का मनोविकारों को दूर करने का उपदेश घोर पाषण्ड है । इस विषय में कवियों का प्रयत्न ही सच्चा है जो मनोविकारों पर सान ही नहीं चढ़ाते बल्कि उन्हें परमार्जित करते हुए सृष्टि के पदार्थों के साथ उनके उपयुक्त सम्बन्ध निर्वाह पर जोर देते हैं। यदि मनोवेग न हों तो स्मृति अनुमान बुद्धि आदि के रहते भी मनुष्य बिलकुल जड़ है । प्रचलित सभ्यता और जीवन की कठिनता से मनुष्य अपने इन मनोवेगों को मारने और अशक्त करने पर विवश होता है, इनका पूर्ण और सच्चा निर्वाह उसके लिए कठिन होता है और इस प्रकार उसके जीवन का स्वाद निकल जाता है । वन, नदी, पर्वत आदि को देख आनन्दित होने के लिए अब उसके हृदय में उतनी जगह नहीं । दुराचार पर उसे क्रोध या घृणा होती है पर झूठे शिष्टाचार के अनुसार उसे दुराचारी की भी मुँह पर प्रशंसा करनी पड़ती है। जीवन निर्वाह की कठिनता से उत्पन्न स्वार्थ की शुष्क प्रेरणा के कारण उसे दूसरे के दुःख की ओर ध्यान देने, उस पर दया करने और उसके दुःख की निवृत्ति का सुख प्राप्त करने की फुरसत नहीं । इस प्रकार मनुष्य हृदय को दबाकर केवल क्रूर आवश्यकता और कृत्रिम नियमों के अनुसार ही चलने पर विवश और कठपुतली सा जड़ होता जाता है। उसकी भावुकता का नाश होता जाता है पाषण्डी लोग मनोवेगों का सच्चा निर्वाह न देख, हताश हो मुह बनाकर कहने लगे हैं - "करुणा छोड़ो, प्रेम छोड़ो, आनन्द छोड़ो । बस हाथ-पैर हिलाओ काम करो।" यह ठीक है कि मनोवेग उत्पन्न होना और बात है और मनोवेग के अनुसार व्यवहार करना और बात; पर अनुसारी परिणाम के निरन्तर भाव से मनोवेगों का अभ्यास भी घटने लगता है। यदि कोई मनुष्य आवश्यकतावश कोई निष्ठुर कार्य अपने ऊपर ले लेता तो पहले दो-चार बार उसे उत्पन्न होगी; पर जब बार-बार दया की प्रेरणा के अनुसार कोई परिणाम वह उपस्थित न कर सकेगा तब धीरे-धीरे उसका दया का अभ्यास कम होने लगेगा । यहाँ तक कि उसकी दया की वृत्ति ही मारी जायगी । बहुत से ऐसे अवसर पड़ते हैं जिसमें करुणा आदि मनोवेगों अनुसार काम नहीं किया जा सकता। पर ऐसे अवसरों की संख्या का बहुत बढ़ना ठीक नहीं है। जीवन में मनोवेगों के अनुसार परिणामों का विरोध प्रायः तीन वस्तुओं से होता है - एक आवश्यकता दो नियम और तीन न्याय । हमारा कोई नौकर बहुत बुड्ढा और कार्य करने में अशक्त हो गया है जिससे हमारे काम में हर्ज होता है। हमें उसकी अवस्था पर दया तो है पर आवश्यकता के अनुरोध से उसे अलग करना पड़ता है। किसी दुष्ट अफसर के कुवाक्य पर क्रोध तो आता है पर मातहत लोग आवश्यकता के वश उस क्रोध के अनुसार कार्य करने की कौन कहे, उसका चिह्न तक नहीं प्रकट होने देते । यदि कहीं पर यह नियम है कि इतना रुपया देकर लोग कोई कार्य करने पाएँ तो जो व्यक्ति रुपया वसूल करने पर नियुक्त होगा वह किसी ऐसे दीन अकिञ्चन को देख जिसके पास एक पैसा भी न होगा, दया तो करेगा पर नियम के वशीभूत हो उसे वह उस कार्य को करने से रोकेगा । राजा हरिश्चन्द्र ने अपनी रानी शैव्या से अपने ही मृतपुत्र के कफन का टुकड़ा फड़वा नियम का अद्भुत पालन किया था । पर यह समझ रखना चाहिए कि यदि शैव्या के स्थान पर कोई दूसरी स्त्री होती तो राजा हरिश्चन्द्र के उस नियम पालन का उतना महत्त्व न दिखाई पड़ता; करुणा ही लोगों की श्रद्धा को अपनी ओर खींचती है। करुणा का विषय दूसरे का दुःख है; अपना दुःख नहीं । आत्मीय जनों का दुःख एक प्रकार से अपना ही दुःख है। इससे राजा हरिश्चन्द्र के नियम पालन का जितना स्वार्थ से विरोध था उतना करुणा से नहीं । न्याय और करुणा का विरोध प्रायः सुनने में आता है। न्याय से ठीक प्रतीकार का भाव समझा जाता है। यदि किसी ने हमसे एक हज़ार) उधार लिया तो न्याय यह है कि वह हमें एक हज़ार) लौटा दे । यदि किसी ने कोई अपराध किया तो न्याय यह है कि उसको दण्ड मिले । यदि एक हज़ार नौ) लेने के उपरान्त उस व्यक्ति पर कोई आपत्ति पड़ी और उसकी दशा अत्यन्त शोचनीय हो गई तो न्याय पालने के विचार का विरोध करुणा कर सकती है। इसी प्रकार यदि अपराधी मनुष्य बहुत रोता गिड़गिड़ाता और कान पकड़ता है तथा पूर्ण दण्ड की अवस्था में अपने परिवार की घोर दुर्दशा का वर्णन करता है, तो न्याय के पूर्ण निर्वाह का विरोध करुणा कर सकती है। ऐसी अवस्थाओं में करुणा करने का सारा अर्थात् जिसका रुपया चाहिए या जिसका अपराध किया गया है उसको है, न्यायकर्त्ता या तीसरे व्यक्ति को नहीं। जिसने अपनी कमाई के एक हज़ार) अलग किए, या अपराध द्वारा जो क्षति- प्रस्त हुआ, विश्वात्मा उसी के हाथ में करुणा ऐसी उच्च सद्वृत्ति के पालन का शुभ देती है। करुणा सेंत का सौदा नहीं है । यदि न्यायकर्त्ता को करुणा है तो वह उसकी शान्ति पृथक् रूप से कर सकता है, जैसे ऊपर लिखे मामलों में वह चाहे तो दुखिया ऋणी को हजार पाँच सौ अपने पास से दे दे या दण्डित व्यक्ति तथा उसके परिवार की और प्रकार से सहायता कर दे। उसके लिए भी करुणा का द्वार खुला है। हम जिन लोगों के बीच रहते हैं अपने विषय में उनकी धारणा का जितना ही अधिक ध्यान रखते हैं उतना ही अधिक प्रतिबन्ध अपने आचरण पर रखते हैं। जो हमारी बुराई, मूर्खता या तुच्छता के प्रमाण पा चुके रहते हैं, उनके सामने हम उसी धड़ाके के साथ नहीं जाते जिस धड़ाके के साथ औरों के सामने जाते हैं। यहीं तक नहीं, जिन्हें इस प्रकार का प्रमाण नहीं भी मिला रहता है उनके आगे भी कोई काम करते हुए यह सोचकर कुछ आगा-पीछा होता है कि कहीं इस प्रकार का प्रमाण उन्हें मिल न रहा हो। दूसरों के चित्त में अपने विषय में बुरी यह तुच्छ धारणा होने के निश्चय या आशंका मात्र से वृत्तियों का जो संकोच होता है - उनकी स्वच्छंदता के विघात का जो अनुभव होता है - उसे लज्जा कहते हैं । इस मनोवेग के मारे लोग सिर ऊँचा नहीं करते, मुँह नहीं दिखाते, सामने नहीं आते, साफ-साफ कहते नहीं, और भी न जाने क्या-क्या नहीं करते । 'हम बुरे न समझे जायँ' यह स्थायी भावना जिसमें जितनी ही अधिक होगी, वह उतना ही लज्जशील होगा । 'कोई बुरा कहे चाहे भला' इसकी परवा न करके जो काम किया करते हैं वे ही निर्लज्ज कहलाते हैं । जिस समाज में हम कोई बुराई करते हैं, जिस समाज में हम मूर्खता धृष्टता आदि का प्रमाण दे चुके रहते हैं, उसके अंग होने का स्वत्व हम जता नहीं सकते, अतः उसके सामने अपनी सजीवता के लक्षणों को उपस्थित करते या रखते नहीं बनता - यह प्रकट करते नहीं बनता कि हम भी इस संसार में हैं। जिसके साथ हमने कोई बुराई की होती है उसे देखते ही हमारी क्या दशा होती है !
हमारी बदनामी की लपेट में वे भी आने लगे। जिस परिमाण में कुर्बान भाई का जो समय हमें मिलता, उसी परिमाण में वह उनके पुराने दोस्तों-लतीफ़ साहब, हाजी साहब, इमाम साहब वगैरह के हिस्से में कम हो जाता । नमाज़ पढ़ने वे सिर्फ शुक्र को जाते थे, अब वह भी बंद कर दिया । वाज़ वगैरह में चलने को कोई पहले भी उनसे कहीं कहता था, अब भी नहीं कहता। मदरसे को पहले भी चंदा देते थे, अब भी देते । हाँ, कभी-कभी होने वाली राजनीतिक सभाओं में जाने को और कस्बे की राजनीति में दिलचस्पी लेने को उनके लिए खतरनाक समझकर बिरादरी वाले उन्हें टोकने ज़रूर लगे । पॉलिटिक्स अपने लोगों के लिए नहीं है, समझे? चुपचाप सालन-रोटी खाओ और अल्लाह का नाम लो । चैन से जीना है तो इन लफड़ों में मत पड़ों । बेकार कभी धर लिए जाओगे....हमें भी फंसवाओगे। अब यहां रहना ही है तो .... पानी में रहकर मगरमच्छों को मुंह चिढ़ाने से क्या फायदा? लेकिन अपनी मस्ती में मस्त थे हम लोग । न हमें पता चला न खुद कुर्बान भाई को कि उन्हें इमामबाड़े वाले ही नहीं, शाखा वाले भी घूरते हुए निकलने लगे हैं। शाम को उनकी दुकान पर आने वाले देशप्रेमी किस्म के लोगों की सतत अनुपस्थिति का गूढ़ार्थ भी हमने नहीं समझा। इसलिए आख़िर वह घटना हो गई जिसने इस कहानी को एक ऐसे अप्रिय मुकाम तक पहुंचा दिया जो मन को कड़वाहट से भर देता है । एक दिन दोपहर की बात है। एक बैलगाड़ी वाले ने ठीक गाड़ी दुकान के सामने रोकी । खड़ी की । अकसर बैल गाड़ी वाले वहां गाड़ी खड़ी कर, बैलों की चारा डालकर अपना काम-काज निपटाने चले जाते हैं। शाम को लौटते हैं और जोतकर चले जाते हैं लेकिन वे गाड़ी किसी की दुकान के ऐन सामने खड़ी नहीं करते और किसी के चबूतरे पर रखने का तो सवाल ही नहीं उठता। इस शख़्स ने तो इस तरह गाड़ी खड़ी की थी कि अब कोई ग्राहक कुर्बान भाई की दुकान तक पहुंच ही नहीं सकता था, बल्कि वे खुद भी पड़ोसी के चबूतरे पर से हुए बिना नीचे नहीं उतर सकते थे । गाड़ी वाला वकील ऊखचंद का हाली था और कुर्बान भाई को मालूम था कि अभी वह गाड़ी खड़ी करके गया और शाम को ही लौटेगा। कुर्बान भाई ने उससे गाड़ी ज़रा बाजू में खड़ी करने और बैलों को किनारे बांध देने को कहा । उसने अनसुनी कर दी। कुर्बान भाई ने फिर कहा तो एक नज़र उन्हें देखकर अपने रास्ते चल पड़ा । कुर्बान भाई ने खुद उठकर चबूतरे पर टिके उसकी गाड़ी के अगले छोर को उठाया और गाड़ी को धकाकर.... लेकिन तभी उस आदमी ने कुर्बान भाई का गरेबान पकड़ लिया और गालियां बकने लगा। और कुर्बान भाई का चश्मा नोच लिया और धक्का-मुक्की करने लगा । ठीक इसी समय कोर्ट से लौटते वकील ऊखचंद उधर से गुजरे और उन्होंने आवाज़ मारकर पूछा, "क्या हुआ रे गोम्या?" गोम्या बोला, "म्हने कूटै !" यानी मुझे मार रहा है । वकील ऊखचंद ने पूछा, "कौन?" "गोम्या बोला, "ये मींयों !" कुर्बान भाई सन्न रह गए। बात समझ में आते-आते भीतर हचमचा गए। आंखों के आगे तारे नाचने लगे। वहीं जमीन पर उकडूं बैठ गए । और सिर पकड़ लिया। अंधेरे का एक ठोस गोला कलेजे से उठा और हलक में आकर फंस गया । बरसों से जमी रुलाई एक साथ फूट पड़ने को जोर मारने लगी। यह क्या हुआ? कैसे हुआ? क्या गोम्या उन्हें जानता नहीं? एक ही मिनट में वह 'कुर्बान भाई' से 'मियां' कैसे बन गए? एक मिनट भी नहीं लगा । बरसों से तिल-तिल मरकर जो प्रतिष्ठा उन्होने बनाई.... हर दिन हर पल जैसे एक अगिनपरीक्षा से गुजरकर, जो सम्मान, जो प्यार अर्जित किया.... दिन खुद को समझाकर....कि पाकिस्तान जाकर भी कोई नवाबीं नहीं मिल जाती.... जैसे हैं यही मस्त हैं। अल्लाह सब देखता है । जाने दो जोश को, डूबने दो सुरैया का सितारा.... भुला देने दो दोस्तों को... लुट जाने दो कारोबार को.....झूठे बदमाशों.... के कब्जे में चली जाने दो हवेलियां.... गुमनाम पड़ी रहने दो भाइयों की कब्रें, दफ़ना दो भरे - पूरे घर का सपना.... ..शायद कभी फिर अपना भी दिन आए..... तब तक सब कर लो....क्याक्या कीमत रोज़ चुकाकर कस्बे में थोड़ा सा अपनापन.... ..थोड़ी सी सामाजिक सुरक्षा, थोड़ा सा आत्म-विश्वास....थोड़ी सी सहजता उन्होंने अर्जित की थी.... और कितनी बड़ी दौलत समझ रहे थे इसको.... और लो ! तिल-तिल करके बना पहाड़ एक फूक में उड़ गया ! एक जाहिल आदमी .... लेकिन जाहिल वो है या मैं? मैं एक मिनट-भर में 'कुर्बान भाई' से 'मियां' हो जाऊंगा यह कभी सोचा क्यों नहीं? अपनी मेहनत का खाते हैं। फिर भी ये लोग हमें अपनी छाती का बोझ ही समझते हैं । यह बात कभी नजर क्यों नहीं आई? पाकिस्तान चले जाते....तो लाख गुर्बत बर्दाश्त कर लेते..... कम से कम ऐसी ओछी बात तो नहीं सुननी पड़ती । हैफ़ है ! धिक्कार है ! लानत है ऐसी जिंदगी पर ! अल्लाह! या अल्लाह ! वकील ऊखचंद गोम्या हाली को समझाते-बुझाते साथ ले गए। गाड़ी-बैल वहीं छोड़ गए । अड़ोसियों - पड़ोसियों ने कुर्बान भाई को संभाला । उनकी बत्तीसी भिंच गई थी और होठों के कोनों से झाग निकल रहे थे । लोगों ने गाड़ी - बैल हटाए। कुर्बान भाई को चबूतरे पर लिटाया ! हवा की ! मुंह पर ठंडे पानी की छींटे दिए । वकील ऊखंचद को गालियां दी । कुर्बान भाई को आश्वस्त करने का प्रयतन किया । उन्हें क्या मालूम था, कुर्बान भाई, के भीतर पर टूट गया? अभी-अभी । जिसे उन्होंने इतने बरस नहीं टूटने दिया था । अंदर की चोट दिखाई कहां देती है? लोग इकट्ठे हो गए। सारे कस्बे में खबर फैल गई। जिसजिस को पता चलता गया, आता गया । हम लोग भी पहुंच गए। अब बीसियों लोग थे और यह बदतमीजी चुपचाप बर्दाश्त नहीं करनी चाहिए। थाने में रपट लिखानी चाहिए । लिहाजा चला जुलूस थाने ।.... पर रास्ते में किसी को पेशाब लग गया, किसी को हगास । थाने पहुंचते-पहुंचते सिर्फ हम लोग रह गए कुर्बान भाई के साथ। थानेदार नहीं थे। अभी-अभी मोटर साइकिल लेकर कहीं निकल गए। मुंशी था। मुंशी ने रपट लिखने से साफ इंकार कर दिया। क्यों न करता? थानेदार के पास पहले ही वकील ऊखंचद का टेलीफोन आ चुका था । वकील ऊखचंद सत्ता पार्टी के जिला मंत्री थे। कुर्बान भाई कौन थे? हम लोग कौन थे? आधे घंटे तक हुज्जत और डेढ़ घंटे तक थानेदार की प्रतीक्षा करने के बाद अपना सा मुंह लेकर लौट आए । शाम को फिर आएंगे। शाम को हम लोगों के सिवा दुकान पर कोई नहीं पहुंचा। और हम लोगों के साथ थाने चलने का ज़रा भी उत्साह कुर्बान भाई ने नहीं दिखाया । दुकानदारी ने उन्हें जैसे एकदम व्यस्त कर लिया, जैसे हमसे बात करने का भी समय नहीं । एक अपराध-बोध के तहत हम भी कुर्बान भाई से कटेकटे रहने लगे। हालांकि घटना इतनी बड़ी नहीं थी, जिसे तूल दिया जाए। थानेदार तो कोई भी होता.... खुद पुलिसउलिस के चक्कर में पड़ने की बजाय जो हो गया, उसे एक जाहिल आदमी की मूर्खता मानकर भूल जाने को तैयार हो जाता। पर हम....हमें लग रहा था.... हमारे दोस्त पर हमला हुआ और हम कुछ नहीं कर सके, किसी काम नहीं आ सके। यह भी लग रहा था कि ज्यादा उत्साह दिखाया तो कुर्बान भाई के लिए और मुसीबतें खड़ी हो जाएंगी, हम कुछ नहीं कर पाएंगे। यह भी लग रहा था कि जो हुआ, उसमें पुलिस से हस्तक्षेप और सहायता की उम्मीद बेकार है। इसका मुकाबला राजनीतिक स्तर पर ही किया जा सकता है, जिसके लिए जल्दी से जल्दी अपनी शक्ति बढ़ानी चाहिए, पांच से पचास हो जाना चाहिए। लेकिन यह सब बहाने बाज़ी थी । यह सच है कि कुर्बान भाई को एकदम अकेला छोड़ दिया था । शायद हम उनकी तकलीफ को शेयर कर ही नहीं सकते थे, पर हमें कोशिश ज़रूर करनी चाहिए थी । कुर्बान भाई की दुकान पर कई दिन पहले का सा रंगतदार जमावड़ा नहीं हुआ । वह बुझे बुझे से रहते थे, बहुत कम बोलते थे और हमें देखते ही दुकानदारी में व्यस्त हो जाते थे वे घुट रहे थे और घुल रहे थे.... पर खुल नहीं रहे थे । हम उन्हें नहीं खोल पाए । एक दिन जब मैं पहुंचा, मेरी तरफ उनकी पीठ थी, किसी से कह रहे थे- "आप क्या खाक हिस्ट्री पढ़ाते हैं? कह रहे हैं पार्टीशन हुआ था ! हुआ था नहीं, हो रहा है, जारी है...." और मुझे देखते ही चुप होकर काम में लग गए। इस कहानी का अंत अच्छा नहीं है। मैं चाहता हूँ कि आप उसे नहीं पढ़ें और पढ़े तो यह ज़रूर सोचें कि क्या इसका कोई और अंत हो सकता था? अच्छा अंत? अगर हां, तो कैसे ? बात बस यह बची है कि कई दिन बाद जब एक दोपहर में आजाद चौक से गुजर रहा था जिसका नाम अब संजय चौक कर दिया गया था और वह शुक्रवार का दिन था-मैने देखा कि कुर्बान भाई की दुकान के सामने लतीफ भाई खड़े हैं.... और कुर्बान भाई दुकान में ताला लगा रहे हैं.... और उन्होंने टोपी पहन रखी है..... और फिर दोनों मस्जिद की तरफ चल दिए हैं। कुर्सी ख़तरे में हैं तो प्रजातंत्र ख़तरे में है कुर्सी ख़तरे में है तो देश ख़तरे में है कुर्सी ख़तरे में है तो दुनीया ख़तरे में है कुर्सी न बचे तो भाड़ में जाये प्रजातंत्र देश और दुनीयां । गोरख पाण्डेय भारत हिंदू राष्ट्र बनने के रास्ते पर भारत के स्वतंत्रता संग्राम में तीन विभिन्न विभिन्न ताकतों के बीच भारत का भविष्य बुनने और बनाने की मुहिम जारी थी। पहली ताकत कांग्रेस थी जो अंग्रेजों से भारत को मुक्त कराकर भारत को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद करा कर भारत में स्वराज कायम करना चाहती थी । दूसरी तरफ से भारत का कम्युनिस्ट खेमा और भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में हिंदुस्तानी समाजवादी गणतंत्र संघ का क्रांतिकारी शहीदों का खेमा था जो गुलाम भारत को साम्राज्यवादी लुटेरे अंग्रेजों से आजाद कराकर भारत में समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, जनतांत्रिक और गणतांत्रिक व्यवस्था कायम करना चाहता था । तीसरी ताकतें हिंदू और मुसलमान भारत की एकता और अखंडता को खंडित करने के रास्ते पर चल रही थीं । ये ताकतें भारत में हिंदू मुस्लिम विभाजन के लिए 1906 से ही काम कर रही थीं। अंग्रेज इस मुहिम को आगे बढ़ा रहे थे और हिंदू मुसलमान के नाम पर पार्टियां गठित कर रहे थे । 1925 में सांप्रदायिक आधार पर आर एस एस का निर्माण किया गया जो अपने बनने के समय से ही भारत की एकता को सांप्रदायिक आधार पर खंडित करके साम्राज्यवादी लुटेरों का साथ दे रही थी। यही काम मुस्लिम लीग जिन्ना के नेतृत्व में 1939 से कर रही थी । 1923 में वी डी सावरकर ने एक निबंध लिखा जिसका नाम "हिंदुत्व" था जिसमें उसने अवधारित किया कि "यहां दो राष्ट्र हैं, एक हिंदू और दूसरा मुसलमान, ये दोनों एक साथ नहीं रह सकते।" सावरकर अपनी सारी जिंदगी इसी सिद्धांत पर कार्य करता रहा। 1925 के बाद, अपनी स्थापना के समय से ही आर. एस. एस. ने यही विभानकारी एजेंडा अपना लिया और पहले आजादी के आंदोलन में वे लुटेरों अंग्रेजों के साथ थे और आज यह ताकतें पूंजीवादी ताकतों, धन्नासेठों और पैसे वालों के साथ हैं। उनके लुटेरे साम्राज्यवादी निजाम को बनाए रखने और उन्हीं का मुनाफा बढ़ाने का काम कर रही हैं और आज तो यह चाहते सत्ता में है अतः खुलकर हिंदुत्व की नीतियों को लागू कर रही हैं । - मुनेश त्यागी जब 1950 में भारत का संविधान लागू किया गया तो ये हिंदुत्ववादी ताकतें तब भी भारत के संविधान का और तिरंगे का विरोध कर रही थीं । इनका मानना था कि भारत में किसी संविधान को लागू करने की जरूरत नहीं है। यहां पर तो पहले से ही मनुस्मृति लागू है। मनुस्मृति के रहते किसी अन्य संविधान की जरूरत नहीं है । ये हिंदुत्ववादी ताकतें पहले से चली आ रही वर्ण व्यवस्था ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र की हामी थीं । मनुस्मृति के अनुसार शूद्रों, दलितों, और तमाम किसानों मजदूरों को पढ़ने, धन रखने का अधिकार नहीं था। उन्हें शस्त्र धारण करने का भी अधिकार नहीं था । बस उनका काम केवल ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य की सेवा करना था, उनकी गुलामी करना था, उनकी दासता करना था। ये मनुवादी ताकतें आजादी के बाद से ही इन्हीं नीतियों को लागू करने की अलंबरदार रही हैं। उन्होंने प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से आरक्षण का विरोध किया है। ये ताकतें तब भी हिंदू राष्ट्र कायम करने का काम कर रही थी और आज भी हिंदुत्ववादी सांप्रदायिक ताकतों के 84 संगठन भारत में हिंदू राष्ट्र कायम करने की कोशिश कर रहे हैं। आज हकीकत यह है कि हिंदुत्ववादी ताकतें सबको शिक्षा, सब को काम, देने को तैयार नहीं हैं। आरक्षण को लगभग खत्म कर दिया गया है क्योंकि सरकारी क्षेत्र में नौकरियां खत्म कर दी गई हैं। आज जनता के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा पर खर्च होने वाले बजट को लगातार कम किया जा रहा है, उसमें कटौती की जा रही है । अब इन जन विरोधी ताकतों ने अपने मंसूबों को पूरा करने के लिए संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों को भी ताक पर रख दिया है और अपनी साजिश को पूरा करने के लिए इन्होंने आई. ए. एस. जैसी परीक्षाओं को भी धता बता दिया है और अभी पिछले दिनों 40 आई.ए.एस. मनमाने ढंग से प्रमोटिड किए गए हैं जिन्हें यू.पी.एस.सी. की परीक्षा में शामिल नहीं होना पड़ा है और ये सारे के सारे नियुक्त किए गए लोग द्विज वर्ग के हैं। इनमें से कोई भी एस. सी., एसटी या ओबीसी वर्ग का व्यक्ति शामिल नहीं है । यह हिंदू शेष पृष्ठ 17 पर
हमारी बदनामी की लपेट में वे भी आने लगे। जिस परिमाण में कुर्बान भाई का जो समय हमें मिलता, उसी परिमाण में वह उनके पुराने दोस्तों-लतीफ़ साहब, हाजी साहब, इमाम साहब वगैरह के हिस्से में कम हो जाता । नमाज़ पढ़ने वे सिर्फ शुक्र को जाते थे, अब वह भी बंद कर दिया । वाज़ वगैरह में चलने को कोई पहले भी उनसे कहीं कहता था, अब भी नहीं कहता। मदरसे को पहले भी चंदा देते थे, अब भी देते । हाँ, कभी-कभी होने वाली राजनीतिक सभाओं में जाने को और कस्बे की राजनीति में दिलचस्पी लेने को उनके लिए खतरनाक समझकर बिरादरी वाले उन्हें टोकने ज़रूर लगे । पॉलिटिक्स अपने लोगों के लिए नहीं है, समझे? चुपचाप सालन-रोटी खाओ और अल्लाह का नाम लो । चैन से जीना है तो इन लफड़ों में मत पड़ों । बेकार कभी धर लिए जाओगे....हमें भी फंसवाओगे। अब यहां रहना ही है तो .... पानी में रहकर मगरमच्छों को मुंह चिढ़ाने से क्या फायदा? लेकिन अपनी मस्ती में मस्त थे हम लोग । न हमें पता चला न खुद कुर्बान भाई को कि उन्हें इमामबाड़े वाले ही नहीं, शाखा वाले भी घूरते हुए निकलने लगे हैं। शाम को उनकी दुकान पर आने वाले देशप्रेमी किस्म के लोगों की सतत अनुपस्थिति का गूढ़ार्थ भी हमने नहीं समझा। इसलिए आख़िर वह घटना हो गई जिसने इस कहानी को एक ऐसे अप्रिय मुकाम तक पहुंचा दिया जो मन को कड़वाहट से भर देता है । एक दिन दोपहर की बात है। एक बैलगाड़ी वाले ने ठीक गाड़ी दुकान के सामने रोकी । खड़ी की । अकसर बैल गाड़ी वाले वहां गाड़ी खड़ी कर, बैलों की चारा डालकर अपना काम-काज निपटाने चले जाते हैं। शाम को लौटते हैं और जोतकर चले जाते हैं लेकिन वे गाड़ी किसी की दुकान के ऐन सामने खड़ी नहीं करते और किसी के चबूतरे पर रखने का तो सवाल ही नहीं उठता। इस शख़्स ने तो इस तरह गाड़ी खड़ी की थी कि अब कोई ग्राहक कुर्बान भाई की दुकान तक पहुंच ही नहीं सकता था, बल्कि वे खुद भी पड़ोसी के चबूतरे पर से हुए बिना नीचे नहीं उतर सकते थे । गाड़ी वाला वकील ऊखचंद का हाली था और कुर्बान भाई को मालूम था कि अभी वह गाड़ी खड़ी करके गया और शाम को ही लौटेगा। कुर्बान भाई ने उससे गाड़ी ज़रा बाजू में खड़ी करने और बैलों को किनारे बांध देने को कहा । उसने अनसुनी कर दी। कुर्बान भाई ने फिर कहा तो एक नज़र उन्हें देखकर अपने रास्ते चल पड़ा । कुर्बान भाई ने खुद उठकर चबूतरे पर टिके उसकी गाड़ी के अगले छोर को उठाया और गाड़ी को धकाकर.... लेकिन तभी उस आदमी ने कुर्बान भाई का गरेबान पकड़ लिया और गालियां बकने लगा। और कुर्बान भाई का चश्मा नोच लिया और धक्का-मुक्की करने लगा । ठीक इसी समय कोर्ट से लौटते वकील ऊखचंद उधर से गुजरे और उन्होंने आवाज़ मारकर पूछा, "क्या हुआ रे गोम्या?" गोम्या बोला, "म्हने कूटै !" यानी मुझे मार रहा है । वकील ऊखचंद ने पूछा, "कौन?" "गोम्या बोला, "ये मींयों !" कुर्बान भाई सन्न रह गए। बात समझ में आते-आते भीतर हचमचा गए। आंखों के आगे तारे नाचने लगे। वहीं जमीन पर उकडूं बैठ गए । और सिर पकड़ लिया। अंधेरे का एक ठोस गोला कलेजे से उठा और हलक में आकर फंस गया । बरसों से जमी रुलाई एक साथ फूट पड़ने को जोर मारने लगी। यह क्या हुआ? कैसे हुआ? क्या गोम्या उन्हें जानता नहीं? एक ही मिनट में वह 'कुर्बान भाई' से 'मियां' कैसे बन गए? एक मिनट भी नहीं लगा । बरसों से तिल-तिल मरकर जो प्रतिष्ठा उन्होने बनाई.... हर दिन हर पल जैसे एक अगिनपरीक्षा से गुजरकर, जो सम्मान, जो प्यार अर्जित किया.... दिन खुद को समझाकर....कि पाकिस्तान जाकर भी कोई नवाबीं नहीं मिल जाती.... जैसे हैं यही मस्त हैं। अल्लाह सब देखता है । जाने दो जोश को, डूबने दो सुरैया का सितारा.... भुला देने दो दोस्तों को... लुट जाने दो कारोबार को.....झूठे बदमाशों.... के कब्जे में चली जाने दो हवेलियां.... गुमनाम पड़ी रहने दो भाइयों की कब्रें, दफ़ना दो भरे - पूरे घर का सपना.... ..शायद कभी फिर अपना भी दिन आए..... तब तक सब कर लो....क्याक्या कीमत रोज़ चुकाकर कस्बे में थोड़ा सा अपनापन.... ..थोड़ी सी सामाजिक सुरक्षा, थोड़ा सा आत्म-विश्वास....थोड़ी सी सहजता उन्होंने अर्जित की थी.... और कितनी बड़ी दौलत समझ रहे थे इसको.... और लो ! तिल-तिल करके बना पहाड़ एक फूक में उड़ गया ! एक जाहिल आदमी .... लेकिन जाहिल वो है या मैं? मैं एक मिनट-भर में 'कुर्बान भाई' से 'मियां' हो जाऊंगा यह कभी सोचा क्यों नहीं? अपनी मेहनत का खाते हैं। फिर भी ये लोग हमें अपनी छाती का बोझ ही समझते हैं । यह बात कभी नजर क्यों नहीं आई? पाकिस्तान चले जाते....तो लाख गुर्बत बर्दाश्त कर लेते..... कम से कम ऐसी ओछी बात तो नहीं सुननी पड़ती । हैफ़ है ! धिक्कार है ! लानत है ऐसी जिंदगी पर ! अल्लाह! या अल्लाह ! वकील ऊखचंद गोम्या हाली को समझाते-बुझाते साथ ले गए। गाड़ी-बैल वहीं छोड़ गए । अड़ोसियों - पड़ोसियों ने कुर्बान भाई को संभाला । उनकी बत्तीसी भिंच गई थी और होठों के कोनों से झाग निकल रहे थे । लोगों ने गाड़ी - बैल हटाए। कुर्बान भाई को चबूतरे पर लिटाया ! हवा की ! मुंह पर ठंडे पानी की छींटे दिए । वकील ऊखंचद को गालियां दी । कुर्बान भाई को आश्वस्त करने का प्रयतन किया । उन्हें क्या मालूम था, कुर्बान भाई, के भीतर पर टूट गया? अभी-अभी । जिसे उन्होंने इतने बरस नहीं टूटने दिया था । अंदर की चोट दिखाई कहां देती है? लोग इकट्ठे हो गए। सारे कस्बे में खबर फैल गई। जिसजिस को पता चलता गया, आता गया । हम लोग भी पहुंच गए। अब बीसियों लोग थे और यह बदतमीजी चुपचाप बर्दाश्त नहीं करनी चाहिए। थाने में रपट लिखानी चाहिए । लिहाजा चला जुलूस थाने ।.... पर रास्ते में किसी को पेशाब लग गया, किसी को हगास । थाने पहुंचते-पहुंचते सिर्फ हम लोग रह गए कुर्बान भाई के साथ। थानेदार नहीं थे। अभी-अभी मोटर साइकिल लेकर कहीं निकल गए। मुंशी था। मुंशी ने रपट लिखने से साफ इंकार कर दिया। क्यों न करता? थानेदार के पास पहले ही वकील ऊखंचद का टेलीफोन आ चुका था । वकील ऊखचंद सत्ता पार्टी के जिला मंत्री थे। कुर्बान भाई कौन थे? हम लोग कौन थे? आधे घंटे तक हुज्जत और डेढ़ घंटे तक थानेदार की प्रतीक्षा करने के बाद अपना सा मुंह लेकर लौट आए । शाम को फिर आएंगे। शाम को हम लोगों के सिवा दुकान पर कोई नहीं पहुंचा। और हम लोगों के साथ थाने चलने का ज़रा भी उत्साह कुर्बान भाई ने नहीं दिखाया । दुकानदारी ने उन्हें जैसे एकदम व्यस्त कर लिया, जैसे हमसे बात करने का भी समय नहीं । एक अपराध-बोध के तहत हम भी कुर्बान भाई से कटेकटे रहने लगे। हालांकि घटना इतनी बड़ी नहीं थी, जिसे तूल दिया जाए। थानेदार तो कोई भी होता.... खुद पुलिसउलिस के चक्कर में पड़ने की बजाय जो हो गया, उसे एक जाहिल आदमी की मूर्खता मानकर भूल जाने को तैयार हो जाता। पर हम....हमें लग रहा था.... हमारे दोस्त पर हमला हुआ और हम कुछ नहीं कर सके, किसी काम नहीं आ सके। यह भी लग रहा था कि ज्यादा उत्साह दिखाया तो कुर्बान भाई के लिए और मुसीबतें खड़ी हो जाएंगी, हम कुछ नहीं कर पाएंगे। यह भी लग रहा था कि जो हुआ, उसमें पुलिस से हस्तक्षेप और सहायता की उम्मीद बेकार है। इसका मुकाबला राजनीतिक स्तर पर ही किया जा सकता है, जिसके लिए जल्दी से जल्दी अपनी शक्ति बढ़ानी चाहिए, पांच से पचास हो जाना चाहिए। लेकिन यह सब बहाने बाज़ी थी । यह सच है कि कुर्बान भाई को एकदम अकेला छोड़ दिया था । शायद हम उनकी तकलीफ को शेयर कर ही नहीं सकते थे, पर हमें कोशिश ज़रूर करनी चाहिए थी । कुर्बान भाई की दुकान पर कई दिन पहले का सा रंगतदार जमावड़ा नहीं हुआ । वह बुझे बुझे से रहते थे, बहुत कम बोलते थे और हमें देखते ही दुकानदारी में व्यस्त हो जाते थे वे घुट रहे थे और घुल रहे थे.... पर खुल नहीं रहे थे । हम उन्हें नहीं खोल पाए । एक दिन जब मैं पहुंचा, मेरी तरफ उनकी पीठ थी, किसी से कह रहे थे- "आप क्या खाक हिस्ट्री पढ़ाते हैं? कह रहे हैं पार्टीशन हुआ था ! हुआ था नहीं, हो रहा है, जारी है...." और मुझे देखते ही चुप होकर काम में लग गए। इस कहानी का अंत अच्छा नहीं है। मैं चाहता हूँ कि आप उसे नहीं पढ़ें और पढ़े तो यह ज़रूर सोचें कि क्या इसका कोई और अंत हो सकता था? अच्छा अंत? अगर हां, तो कैसे ? बात बस यह बची है कि कई दिन बाद जब एक दोपहर में आजाद चौक से गुजर रहा था जिसका नाम अब संजय चौक कर दिया गया था और वह शुक्रवार का दिन था-मैने देखा कि कुर्बान भाई की दुकान के सामने लतीफ भाई खड़े हैं.... और कुर्बान भाई दुकान में ताला लगा रहे हैं.... और उन्होंने टोपी पहन रखी है..... और फिर दोनों मस्जिद की तरफ चल दिए हैं। कुर्सी ख़तरे में हैं तो प्रजातंत्र ख़तरे में है कुर्सी ख़तरे में है तो देश ख़तरे में है कुर्सी ख़तरे में है तो दुनीया ख़तरे में है कुर्सी न बचे तो भाड़ में जाये प्रजातंत्र देश और दुनीयां । गोरख पाण्डेय भारत हिंदू राष्ट्र बनने के रास्ते पर भारत के स्वतंत्रता संग्राम में तीन विभिन्न विभिन्न ताकतों के बीच भारत का भविष्य बुनने और बनाने की मुहिम जारी थी। पहली ताकत कांग्रेस थी जो अंग्रेजों से भारत को मुक्त कराकर भारत को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद करा कर भारत में स्वराज कायम करना चाहती थी । दूसरी तरफ से भारत का कम्युनिस्ट खेमा और भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में हिंदुस्तानी समाजवादी गणतंत्र संघ का क्रांतिकारी शहीदों का खेमा था जो गुलाम भारत को साम्राज्यवादी लुटेरे अंग्रेजों से आजाद कराकर भारत में समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, जनतांत्रिक और गणतांत्रिक व्यवस्था कायम करना चाहता था । तीसरी ताकतें हिंदू और मुसलमान भारत की एकता और अखंडता को खंडित करने के रास्ते पर चल रही थीं । ये ताकतें भारत में हिंदू मुस्लिम विभाजन के लिए एक हज़ार नौ सौ छः से ही काम कर रही थीं। अंग्रेज इस मुहिम को आगे बढ़ा रहे थे और हिंदू मुसलमान के नाम पर पार्टियां गठित कर रहे थे । एक हज़ार नौ सौ पच्चीस में सांप्रदायिक आधार पर आर एस एस का निर्माण किया गया जो अपने बनने के समय से ही भारत की एकता को सांप्रदायिक आधार पर खंडित करके साम्राज्यवादी लुटेरों का साथ दे रही थी। यही काम मुस्लिम लीग जिन्ना के नेतृत्व में एक हज़ार नौ सौ उनतालीस से कर रही थी । एक हज़ार नौ सौ तेईस में वी डी सावरकर ने एक निबंध लिखा जिसका नाम "हिंदुत्व" था जिसमें उसने अवधारित किया कि "यहां दो राष्ट्र हैं, एक हिंदू और दूसरा मुसलमान, ये दोनों एक साथ नहीं रह सकते।" सावरकर अपनी सारी जिंदगी इसी सिद्धांत पर कार्य करता रहा। एक हज़ार नौ सौ पच्चीस के बाद, अपनी स्थापना के समय से ही आर. एस. एस. ने यही विभानकारी एजेंडा अपना लिया और पहले आजादी के आंदोलन में वे लुटेरों अंग्रेजों के साथ थे और आज यह ताकतें पूंजीवादी ताकतों, धन्नासेठों और पैसे वालों के साथ हैं। उनके लुटेरे साम्राज्यवादी निजाम को बनाए रखने और उन्हीं का मुनाफा बढ़ाने का काम कर रही हैं और आज तो यह चाहते सत्ता में है अतः खुलकर हिंदुत्व की नीतियों को लागू कर रही हैं । - मुनेश त्यागी जब एक हज़ार नौ सौ पचास में भारत का संविधान लागू किया गया तो ये हिंदुत्ववादी ताकतें तब भी भारत के संविधान का और तिरंगे का विरोध कर रही थीं । इनका मानना था कि भारत में किसी संविधान को लागू करने की जरूरत नहीं है। यहां पर तो पहले से ही मनुस्मृति लागू है। मनुस्मृति के रहते किसी अन्य संविधान की जरूरत नहीं है । ये हिंदुत्ववादी ताकतें पहले से चली आ रही वर्ण व्यवस्था ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र की हामी थीं । मनुस्मृति के अनुसार शूद्रों, दलितों, और तमाम किसानों मजदूरों को पढ़ने, धन रखने का अधिकार नहीं था। उन्हें शस्त्र धारण करने का भी अधिकार नहीं था । बस उनका काम केवल ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य की सेवा करना था, उनकी गुलामी करना था, उनकी दासता करना था। ये मनुवादी ताकतें आजादी के बाद से ही इन्हीं नीतियों को लागू करने की अलंबरदार रही हैं। उन्होंने प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से आरक्षण का विरोध किया है। ये ताकतें तब भी हिंदू राष्ट्र कायम करने का काम कर रही थी और आज भी हिंदुत्ववादी सांप्रदायिक ताकतों के चौरासी संगठन भारत में हिंदू राष्ट्र कायम करने की कोशिश कर रहे हैं। आज हकीकत यह है कि हिंदुत्ववादी ताकतें सबको शिक्षा, सब को काम, देने को तैयार नहीं हैं। आरक्षण को लगभग खत्म कर दिया गया है क्योंकि सरकारी क्षेत्र में नौकरियां खत्म कर दी गई हैं। आज जनता के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा पर खर्च होने वाले बजट को लगातार कम किया जा रहा है, उसमें कटौती की जा रही है । अब इन जन विरोधी ताकतों ने अपने मंसूबों को पूरा करने के लिए संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों को भी ताक पर रख दिया है और अपनी साजिश को पूरा करने के लिए इन्होंने आई. ए. एस. जैसी परीक्षाओं को भी धता बता दिया है और अभी पिछले दिनों चालीस आई.ए.एस. मनमाने ढंग से प्रमोटिड किए गए हैं जिन्हें यू.पी.एस.सी. की परीक्षा में शामिल नहीं होना पड़ा है और ये सारे के सारे नियुक्त किए गए लोग द्विज वर्ग के हैं। इनमें से कोई भी एस. सी., एसटी या ओबीसी वर्ग का व्यक्ति शामिल नहीं है । यह हिंदू शेष पृष्ठ सत्रह पर
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। नीदरलैण्ड नीदरलैंड युरोप महाद्वीप का एक प्रमुख देश है। यह उत्तरी-पूर्वी यूरोप में स्थित है। इसकी उत्तरी तथा पश्चिमी सीमा पर उत्तरी समुद्र स्थित है, दक्षिण में बेल्जियम एवं पूर्व में जर्मनी है। नीदरलैंड की राजधानी एम्सटर्डम है। "द हेग" को प्रशासनिक राजधानी का दर्जा दिया जाता है। नीदरलैंड को अक्सर हॉलैंड के नाम संबोधित किया जाता है एवं सामान्यतः नीदरलैंड के निवासियों तथा इसकी भाषा दोनों के लिए डच शब्द का उपयोग किया जाता है। . बेसिल दिवसः १४ जुलाई १७८९ फ्रांसीसी क्रांति (फ्रेंचः Révolution française / रेवोलुस्योँ फ़्राँसेज़; 1789-1799) फ्रांस के इतिहास की राजनैतिक और सामाजिक उथल-पुथल एवं आमूल परिवर्तन की अवधि थी जो 1789 से 1799 तक चली। बाद में, नेपोलियन बोनापार्ट ने फ्रांसीसी साम्राज्य के विस्तार द्वारा कुछ अंश तक इस क्रांति को आगे बढ़ाया। क्रांति के फलस्वरूप राजा को गद्दी से हटा दिया गया, एक गणतंत्र की स्थापना हुई, खूनी संघर्षों का दौर चला, और अन्ततः नेपोलियन की तानाशाही स्थापित हुई जिससे इस क्रांति के अनेकों मूल्यों का पश्चिमी यूरोप में तथा उसके बाहर प्रसार हुआ। इस क्रान्ति ने आधुनिक इतिहास की दिशा बदल दी। इससे विश्व भर में निरपेक्ष राजतन्त्र का ह्रास होना शुरू हुआ, नये गणतन्त्र एव्ं उदार प्रजातन्त्र बने। आधुनिक युग में जिन महापरिवर्तनों ने पाश्चात्य सभ्यता को हिला दिया उसमें फ्रांस की राज्यक्रांति सर्वाधिक नाटकीय और जटिल साबित हुई। इस क्रांति ने केवल फ्रांस को ही नहीं अपितु समस्त यूरोप के जन-जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया। फ्रांसीसी क्रांति को पूरे विश्व के इतिहास में मील का पत्थर कहा जाता है। इस क्रान्ति ने अन्य यूरोपीय देशों में भी स्वतन्त्रता की ललक कायम की और अन्य देश भी राजशाही से मुक्ति के लिए संघर्ष करने लगे। इसने यूरोपीय राष्ट्रों सहित एशियाई देशों में राजशाही और निरंकुशता के खिलाफ वातावरण तैयार किया। . नीदरलैण्ड और फ़्रान्सीसी क्रान्ति आम में 3 बातें हैं (यूनियनपीडिया में): फ़्रान्सीसी भाषा, बेल्जियम, जर्मनी। फ़्रांसीसी भाषा (फ़्रांसीसीः français उच्चारणः फ़्रांसे) एक रोमांस भाषा है जो विश्वभर में लगभग ९ करोड़ लोगों द्वारा प्रथम भाषा के रूप में बोली जाती है। मूल रूप से इस भाषा को बोलने वाले अधिकांश लोग फ़्राँस में रहते हैं जहाँ इस भाषा का जन्म हुआ था। इस भाषा को बोलने वाले अन्य क्षेत्र ये हैं- अधिकांश कनाडा, बेल्जियम, स्विटज़रलैंड, अफ़्रीकी फ़्रेंकोफ़ोन, लक्ज़म्बर्ग और मोनाको। फ्रांसी भाषा १९ करोड़ लोगों द्वारा दूसरी भाषा के रूप में और अन्य २० करोड़ द्वारा अधिग्रहित भाषा के रूप में बोली जाती है। विश्व के ५४ देशों में इस भाषा को बोलने वालों की अच्छी भली संख्या है। फ़्रांसीसी रोमन साम्राज्य की लैटिन भाषा से निकली भाषा है, जैसे अन्य राष्ट्रीय भाषाएँ - पुर्तगाली, स्पैनिश, इटालियन, रोमानियन और अन्य अल्पसंख्यक भाषाएँ जैसे कैटेलान इत्यादि। इस भाषा के विकासक्रम में इसपर मूल रोमन गौल की कैल्टिक भाषाओं और बाद के रोमन फ़्रैकिश आक्रमणकारियों की जर्मनेक भाषा का प्रभाव पड़ा। यह २९ देशों में एक आधिकारिक भाषा है, जिनमें से अधिकांशतः ला फ़्रेंकोफ़ोनी नामक फ़्रांसीसी भाषी देशों के समुह से हैं। यह सयुंक्त राष्ट्र की सभी संस्थाओं की और अन्य बहुत से अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की भी आधिकारिक भाषा है। यूरोपीय संघ के अनुसार, उसके २७ सदस्य राष्ट्रों के १२.९ करोड़ (४९,७१,९८,७४० का २६%) लोग फ़्रांसीसी बोल सकते हैं, किसमें से ६.५ करोड़ (१२%) मूलभाष्ई हैं और ६.९ करोड़ (१४%) इसे दूसरी भाषा के रूप में बोल सकते हैं, जो इसे अंग्रेज़ी और जर्मन के बाद संघ की तीसरी सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा बनाता है। इसके अतिरिक्त २० वीं शताब्दी के प्रारंभ में अंग्रेज़ी के अधिरोहण से पहले, फ़्रांसीसी यूरोपीय और औपनिवेशिक शक्तियों के मध्य कूटनीति और संवाद की प्रमुख भाषा थी और साथ ही साथ यूरोप के शिक्षित वर्ग की बोलचाल की भाषा भी थी। . किंगडम ऑफ़ बेल्जियम उत्तर-पश्चिमी यूरोप में एक देश है। यह यूरोपीय संघ का संस्थापक सदस्य है और उसके मुख्यालय का मेज़बान है, साथ ही, अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठनों का, जिसमें NATO भी शामिल है। 10.7 मीलियन की जनसंख्या वाले बेल्जियम का क्षेत्रफल है। जर्मनिक और लैटिन यूरोप के मध्य अपनी सांस्कृतिक सीमा को विस्तृत किये हुए बेल्जियम, दो मुख्य भाषाई समूहों, फ्लेमिश और फ्रेंच-भाषी, मुख्यतः वलून्स सहित जर्मन भाषियों के एक छोटे समूह का आवास है। बेल्जियम के दो सबसे बड़े क्षेत्र हैं, उत्तर में 59% जनसंख्या सहित फ्लेंडर्स का डच भाषी क्षेत्र और वालोनिया का फ्रेंच भाषी दक्षिणी क्षेत्र, जहाँ 31% लोग बसे हैं। ब्रुसेल्स-राजधानी क्षेत्र, जो आधिकारिक तौर पर द्विभाषी है, मुख्यतः फ्लेमिश क्षेत्र के अंतर्गत एक फ्रेंच भाषी एन्क्लेव है और यहाँ 10% जनसंख्या बसी है। * * * * पूर्वी वालोनिया में एक छोटा जर्मन भाषी समुदाय मौजूद है। मूल (पहले ही) 71,500 निवासियों के बजाय 73,000 का उल्लेख करता है। बेल्जियम की भाषाई विविधता और संबंधित राजनीतिक तथा सांस्कृतिक संघर्ष, राजनीतिक इतिहास और एक जटिल शासन प्रणाली में प्रतिबिंबित होता है। बेल्जियम नाम, गॉल के उत्तरी भाग में एक रोमन प्रान्त, गैलिया बेल्जिका से लिया गया है, जो केल्टिक और जर्मन लोगों के एक मिश्रण बेल्जी का निवास स्थान था। ऐतिहासिक रूप से, बेल्जियम, नीदरलैंड और लक्ज़मबर्ग, निचले देश के रूप में जाने जाते थे, जो राज्यों के मौजूदा बेनेलक्स समूह की तुलना में अपेक्षाकृत कुछ बड़े क्षेत्र को आवृत किया करते थे। मध्य युग की समाप्ति से लेकर 17 वीं सदी तक, यह वाणिज्य और संस्कृति का एक समृद्ध केन्द्र था। 16वीं शताब्दी से लेकर 1830 में बेल्जियम की क्रांति तक, यूरोपीय शक्तियों के बीच बेल्जियम के क्षेत्र में कई लड़ाइयाँ लड़ी गईं, जिससे इसे यूरोप के युद्ध मैदान का तमगा मिला - एक छवि जिसे दोनों विश्व युद्ध ने और पुष्ट किया। अपनी स्वतंत्रता पर, बेल्जियम ने उत्सुकता के साथ औद्योगिक क्रांति में भाग लिया और उन्नीसवीं सदी के अंत में, अफ्रीका में कई उपनिवेशों पर अधिकार जमाया। 20वीं सदी के उत्तरार्ध को फ्लेमिंग्स और फ्रैंकोफ़ोन के बीच साँप्रदायिक संघर्ष की वृद्धि के लिए जाना जाता है, जिसे एक तरफ तो सांस्कृतिक मतभेद ने भड़काया, तो दूसरी तरफ फ्लेनडर्स और वालोनिया के विषम आर्थिक विकास ने. अब भी सक्रिय इन संघर्षों ने पूर्व में एक एकात्मक राज्य बेल्जियम को संघीय राज्य बनाने के दूरगामी सुधारों को प्रेरित किया। . कोई विवरण नहीं। नीदरलैण्ड 38 संबंध है और फ़्रान्सीसी क्रान्ति 34 है। वे आम 3 में है, समानता सूचकांक 4.17% है = 3 / (38 + 34)। यह लेख नीदरलैण्ड और फ़्रान्सीसी क्रान्ति के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। नीदरलैण्ड नीदरलैंड युरोप महाद्वीप का एक प्रमुख देश है। यह उत्तरी-पूर्वी यूरोप में स्थित है। इसकी उत्तरी तथा पश्चिमी सीमा पर उत्तरी समुद्र स्थित है, दक्षिण में बेल्जियम एवं पूर्व में जर्मनी है। नीदरलैंड की राजधानी एम्सटर्डम है। "द हेग" को प्रशासनिक राजधानी का दर्जा दिया जाता है। नीदरलैंड को अक्सर हॉलैंड के नाम संबोधित किया जाता है एवं सामान्यतः नीदरलैंड के निवासियों तथा इसकी भाषा दोनों के लिए डच शब्द का उपयोग किया जाता है। . बेसिल दिवसः चौदह जुलाई एक हज़ार सात सौ नवासी फ्रांसीसी क्रांति फ्रांस के इतिहास की राजनैतिक और सामाजिक उथल-पुथल एवं आमूल परिवर्तन की अवधि थी जो एक हज़ार सात सौ नवासी से एक हज़ार सात सौ निन्यानवे तक चली। बाद में, नेपोलियन बोनापार्ट ने फ्रांसीसी साम्राज्य के विस्तार द्वारा कुछ अंश तक इस क्रांति को आगे बढ़ाया। क्रांति के फलस्वरूप राजा को गद्दी से हटा दिया गया, एक गणतंत्र की स्थापना हुई, खूनी संघर्षों का दौर चला, और अन्ततः नेपोलियन की तानाशाही स्थापित हुई जिससे इस क्रांति के अनेकों मूल्यों का पश्चिमी यूरोप में तथा उसके बाहर प्रसार हुआ। इस क्रान्ति ने आधुनिक इतिहास की दिशा बदल दी। इससे विश्व भर में निरपेक्ष राजतन्त्र का ह्रास होना शुरू हुआ, नये गणतन्त्र एव्ं उदार प्रजातन्त्र बने। आधुनिक युग में जिन महापरिवर्तनों ने पाश्चात्य सभ्यता को हिला दिया उसमें फ्रांस की राज्यक्रांति सर्वाधिक नाटकीय और जटिल साबित हुई। इस क्रांति ने केवल फ्रांस को ही नहीं अपितु समस्त यूरोप के जन-जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया। फ्रांसीसी क्रांति को पूरे विश्व के इतिहास में मील का पत्थर कहा जाता है। इस क्रान्ति ने अन्य यूरोपीय देशों में भी स्वतन्त्रता की ललक कायम की और अन्य देश भी राजशाही से मुक्ति के लिए संघर्ष करने लगे। इसने यूरोपीय राष्ट्रों सहित एशियाई देशों में राजशाही और निरंकुशता के खिलाफ वातावरण तैयार किया। . नीदरलैण्ड और फ़्रान्सीसी क्रान्ति आम में तीन बातें हैं : फ़्रान्सीसी भाषा, बेल्जियम, जर्मनी। फ़्रांसीसी भाषा एक रोमांस भाषा है जो विश्वभर में लगभग नौ करोड़ लोगों द्वारा प्रथम भाषा के रूप में बोली जाती है। मूल रूप से इस भाषा को बोलने वाले अधिकांश लोग फ़्राँस में रहते हैं जहाँ इस भाषा का जन्म हुआ था। इस भाषा को बोलने वाले अन्य क्षेत्र ये हैं- अधिकांश कनाडा, बेल्जियम, स्विटज़रलैंड, अफ़्रीकी फ़्रेंकोफ़ोन, लक्ज़म्बर्ग और मोनाको। फ्रांसी भाषा उन्नीस करोड़ लोगों द्वारा दूसरी भाषा के रूप में और अन्य बीस करोड़ द्वारा अधिग्रहित भाषा के रूप में बोली जाती है। विश्व के चौवन देशों में इस भाषा को बोलने वालों की अच्छी भली संख्या है। फ़्रांसीसी रोमन साम्राज्य की लैटिन भाषा से निकली भाषा है, जैसे अन्य राष्ट्रीय भाषाएँ - पुर्तगाली, स्पैनिश, इटालियन, रोमानियन और अन्य अल्पसंख्यक भाषाएँ जैसे कैटेलान इत्यादि। इस भाषा के विकासक्रम में इसपर मूल रोमन गौल की कैल्टिक भाषाओं और बाद के रोमन फ़्रैकिश आक्रमणकारियों की जर्मनेक भाषा का प्रभाव पड़ा। यह उनतीस देशों में एक आधिकारिक भाषा है, जिनमें से अधिकांशतः ला फ़्रेंकोफ़ोनी नामक फ़्रांसीसी भाषी देशों के समुह से हैं। यह सयुंक्त राष्ट्र की सभी संस्थाओं की और अन्य बहुत से अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की भी आधिकारिक भाषा है। यूरोपीय संघ के अनुसार, उसके सत्ताईस सदस्य राष्ट्रों के बारह.नौ करोड़ लोग फ़्रांसीसी बोल सकते हैं, किसमें से छः.पाँच करोड़ मूलभाष्ई हैं और छः.नौ करोड़ इसे दूसरी भाषा के रूप में बोल सकते हैं, जो इसे अंग्रेज़ी और जर्मन के बाद संघ की तीसरी सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा बनाता है। इसके अतिरिक्त बीस वीं शताब्दी के प्रारंभ में अंग्रेज़ी के अधिरोहण से पहले, फ़्रांसीसी यूरोपीय और औपनिवेशिक शक्तियों के मध्य कूटनीति और संवाद की प्रमुख भाषा थी और साथ ही साथ यूरोप के शिक्षित वर्ग की बोलचाल की भाषा भी थी। . किंगडम ऑफ़ बेल्जियम उत्तर-पश्चिमी यूरोप में एक देश है। यह यूरोपीय संघ का संस्थापक सदस्य है और उसके मुख्यालय का मेज़बान है, साथ ही, अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठनों का, जिसमें NATO भी शामिल है। दस.सात मीलियन की जनसंख्या वाले बेल्जियम का क्षेत्रफल है। जर्मनिक और लैटिन यूरोप के मध्य अपनी सांस्कृतिक सीमा को विस्तृत किये हुए बेल्जियम, दो मुख्य भाषाई समूहों, फ्लेमिश और फ्रेंच-भाषी, मुख्यतः वलून्स सहित जर्मन भाषियों के एक छोटे समूह का आवास है। बेल्जियम के दो सबसे बड़े क्षेत्र हैं, उत्तर में उनसठ% जनसंख्या सहित फ्लेंडर्स का डच भाषी क्षेत्र और वालोनिया का फ्रेंच भाषी दक्षिणी क्षेत्र, जहाँ इकतीस% लोग बसे हैं। ब्रुसेल्स-राजधानी क्षेत्र, जो आधिकारिक तौर पर द्विभाषी है, मुख्यतः फ्लेमिश क्षेत्र के अंतर्गत एक फ्रेंच भाषी एन्क्लेव है और यहाँ दस% जनसंख्या बसी है। * * * * पूर्वी वालोनिया में एक छोटा जर्मन भाषी समुदाय मौजूद है। मूल इकहत्तर,पाँच सौ निवासियों के बजाय तिहत्तर,शून्य का उल्लेख करता है। बेल्जियम की भाषाई विविधता और संबंधित राजनीतिक तथा सांस्कृतिक संघर्ष, राजनीतिक इतिहास और एक जटिल शासन प्रणाली में प्रतिबिंबित होता है। बेल्जियम नाम, गॉल के उत्तरी भाग में एक रोमन प्रान्त, गैलिया बेल्जिका से लिया गया है, जो केल्टिक और जर्मन लोगों के एक मिश्रण बेल्जी का निवास स्थान था। ऐतिहासिक रूप से, बेल्जियम, नीदरलैंड और लक्ज़मबर्ग, निचले देश के रूप में जाने जाते थे, जो राज्यों के मौजूदा बेनेलक्स समूह की तुलना में अपेक्षाकृत कुछ बड़े क्षेत्र को आवृत किया करते थे। मध्य युग की समाप्ति से लेकर सत्रह वीं सदी तक, यह वाणिज्य और संस्कृति का एक समृद्ध केन्द्र था। सोलहवीं शताब्दी से लेकर एक हज़ार आठ सौ तीस में बेल्जियम की क्रांति तक, यूरोपीय शक्तियों के बीच बेल्जियम के क्षेत्र में कई लड़ाइयाँ लड़ी गईं, जिससे इसे यूरोप के युद्ध मैदान का तमगा मिला - एक छवि जिसे दोनों विश्व युद्ध ने और पुष्ट किया। अपनी स्वतंत्रता पर, बेल्जियम ने उत्सुकता के साथ औद्योगिक क्रांति में भाग लिया और उन्नीसवीं सदी के अंत में, अफ्रीका में कई उपनिवेशों पर अधिकार जमाया। बीसवीं सदी के उत्तरार्ध को फ्लेमिंग्स और फ्रैंकोफ़ोन के बीच साँप्रदायिक संघर्ष की वृद्धि के लिए जाना जाता है, जिसे एक तरफ तो सांस्कृतिक मतभेद ने भड़काया, तो दूसरी तरफ फ्लेनडर्स और वालोनिया के विषम आर्थिक विकास ने. अब भी सक्रिय इन संघर्षों ने पूर्व में एक एकात्मक राज्य बेल्जियम को संघीय राज्य बनाने के दूरगामी सुधारों को प्रेरित किया। . कोई विवरण नहीं। नीदरलैण्ड अड़तीस संबंध है और फ़्रान्सीसी क्रान्ति चौंतीस है। वे आम तीन में है, समानता सूचकांक चार.सत्रह% है = तीन / । यह लेख नीदरलैण्ड और फ़्रान्सीसी क्रान्ति के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
कोरोना वायरस की वजह से सभी क्रिकेट इवेंट पर ब्रेक लगा हुआ है। आईपीएल 2020 भी अनिश्चितकाल के स्थगित हो गया है। इस बीच क्रिकेटर्स घरों में अपने परिवार के साथ वक्त बिता रहे हैं। भारत की वनडे और टी20 टीम के उपकप्तान रोहित शर्मा भी अपने परिवार संग मुंबई में हैं। मुंबई कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित शहर है और यहां कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या अन्य शहरों के मुकाबले सबसे अधिक है। कोविड-19 के कारण लगे लॉकडाउन ने भारतीय क्रिकेट टीम के बल्लेबाज रोहित शर्मा को इस बात का एहसास कराया है कि वह अपनी पत्नी रितिका सजदेह के साथ क्या मिस कर रहे थे। रोहित ने इंस्टाग्राम पर रितिका के साथ एक फोटो पोस्ट कर लिखा है कि जैसे कहा जाता है, सीखना कभी बंद नहीं होता। मैं इस समय का शुक्रगुजार हूं कि इस समय हम एक दूसरे के बारे में और ज्यादा समझ और सीख सके। इस समय ने मुझे बताया है कि हमने तब क्या मिस किया जब हम एक साथ नहीं थे। इससे पहले रोहित ने सोशल मीडिया पर युवराज सिंह द्वारा दिए गए चैलेंज को भी कबूल किया और कोविड-19 के दौरान घर में ही रहने की बात को माना। युवराज ने सचिन तेंदुलकर, रोहित और हरभजन सिंह को ट्विटर चैलेंज दिया था कि वह बल्ले के साइड से गेंद को मारें। रोहित ने ऐसा करते हुए का एक वीडियो सोशल मीडिया पर डाला। रोहित ने इसके बाद ऋषभ पंत, श्रेयस अय्यर और अजिंक्य रहाणे को यह चैलेंज दिया।
कोरोना वायरस की वजह से सभी क्रिकेट इवेंट पर ब्रेक लगा हुआ है। आईपीएल दो हज़ार बीस भी अनिश्चितकाल के स्थगित हो गया है। इस बीच क्रिकेटर्स घरों में अपने परिवार के साथ वक्त बिता रहे हैं। भारत की वनडे और टीबीस टीम के उपकप्तान रोहित शर्मा भी अपने परिवार संग मुंबई में हैं। मुंबई कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित शहर है और यहां कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या अन्य शहरों के मुकाबले सबसे अधिक है। कोविड-उन्नीस के कारण लगे लॉकडाउन ने भारतीय क्रिकेट टीम के बल्लेबाज रोहित शर्मा को इस बात का एहसास कराया है कि वह अपनी पत्नी रितिका सजदेह के साथ क्या मिस कर रहे थे। रोहित ने इंस्टाग्राम पर रितिका के साथ एक फोटो पोस्ट कर लिखा है कि जैसे कहा जाता है, सीखना कभी बंद नहीं होता। मैं इस समय का शुक्रगुजार हूं कि इस समय हम एक दूसरे के बारे में और ज्यादा समझ और सीख सके। इस समय ने मुझे बताया है कि हमने तब क्या मिस किया जब हम एक साथ नहीं थे। इससे पहले रोहित ने सोशल मीडिया पर युवराज सिंह द्वारा दिए गए चैलेंज को भी कबूल किया और कोविड-उन्नीस के दौरान घर में ही रहने की बात को माना। युवराज ने सचिन तेंदुलकर, रोहित और हरभजन सिंह को ट्विटर चैलेंज दिया था कि वह बल्ले के साइड से गेंद को मारें। रोहित ने ऐसा करते हुए का एक वीडियो सोशल मीडिया पर डाला। रोहित ने इसके बाद ऋषभ पंत, श्रेयस अय्यर और अजिंक्य रहाणे को यह चैलेंज दिया।
दिल्लीः सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए हैं जिसमें कुछ लोग अजीबोगरीब कपड़े पहनकर घूमते हुए दिखाई दिए। ऐसे कपड़े जिसे देखने के बाद पब्लिक में आने-जाने वाले हैरान रह जाते हैं। ऐसा ही एक और वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स में से एक इंस्टाग्राम पर वायरल हुआ है, जहां दो लड़के दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) में "डेनिम स्कर्ट" (Denim Skirt) पहने नजर आ रहे हैं. भव्य कुमार और समीर खान नाम के यूजर्स ने 16 अप्रैल 2023 को इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट किया। उन्हें लॉन्ग डेनिम स्कर्ट पहने देखा गया और वे दिल्ली मेट्रो में यात्रा कर रहे थे। उनके आउटफिट ने कई लोगों का ध्यान खींचा। वीडियो की शुरुआत तब होती है, जब दो लड़के मेट्रो में वॉक रहे थे। उनमें से एक ने लॉन्ग डेनिम स्कर्ट पहना हुआ था। इतना ही नहीं, उसने काला चश्मा और ब्लू रंग की टी-शर्ट भी पहन रखी थी। जबकि उसके साथ चल रहे लड़के ने भी कुछ ऐसा ही ड्रेस पहना था। दोनों ही बेहद ही अजीबोगरीब दिखाई दे रहे थे। वीडियो में इंटरेस्ट तब बढ़ा, जब वह इसी ड्रेस में मेट्रो ट्रेन में घुस गए। अंदर घुसने के बाद जैसे ही वह यात्रियों के बीच खड़े हुए तो सभी उसे ही घूर रहे थे। उनके रिएक्शन दोनों ने किसी अन्य के जरिए मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड कर लिए. अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है।
दिल्लीः सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए हैं जिसमें कुछ लोग अजीबोगरीब कपड़े पहनकर घूमते हुए दिखाई दिए। ऐसे कपड़े जिसे देखने के बाद पब्लिक में आने-जाने वाले हैरान रह जाते हैं। ऐसा ही एक और वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स में से एक इंस्टाग्राम पर वायरल हुआ है, जहां दो लड़के दिल्ली मेट्रो में "डेनिम स्कर्ट" पहने नजर आ रहे हैं. भव्य कुमार और समीर खान नाम के यूजर्स ने सोलह अप्रैल दो हज़ार तेईस को इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट किया। उन्हें लॉन्ग डेनिम स्कर्ट पहने देखा गया और वे दिल्ली मेट्रो में यात्रा कर रहे थे। उनके आउटफिट ने कई लोगों का ध्यान खींचा। वीडियो की शुरुआत तब होती है, जब दो लड़के मेट्रो में वॉक रहे थे। उनमें से एक ने लॉन्ग डेनिम स्कर्ट पहना हुआ था। इतना ही नहीं, उसने काला चश्मा और ब्लू रंग की टी-शर्ट भी पहन रखी थी। जबकि उसके साथ चल रहे लड़के ने भी कुछ ऐसा ही ड्रेस पहना था। दोनों ही बेहद ही अजीबोगरीब दिखाई दे रहे थे। वीडियो में इंटरेस्ट तब बढ़ा, जब वह इसी ड्रेस में मेट्रो ट्रेन में घुस गए। अंदर घुसने के बाद जैसे ही वह यात्रियों के बीच खड़े हुए तो सभी उसे ही घूर रहे थे। उनके रिएक्शन दोनों ने किसी अन्य के जरिए मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड कर लिए. अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है।
कई वर्षों से, जापानी आत्म-रक्षा बलों को कोमात्सु प्रकार 87 6x6 टोही वाहन और टाइप 82 6x6 ऑपरेटिंग कंट्रोल वाहन के अलावा मुख्य रूप से ट्रैक किए गए वाहनों से लैस किया गया है, जिनमें उच्च स्तर की एकरूपता है। इन दोनों विकल्पों का उत्पादन पूर्ण है। जैसा कि बाकी जापानी बख्तरबंद वाहनों के मामले में, जापान ने विदेशों में अपनी कारें नहीं बेचीं। टाइप एक्सएनयूएमएक्स बख्तरबंद कर्मियों के वाहक के लिए मुख्य ठेकेदार कोमात्सु डिफेंस सिस्टम डिवीजन है, जो टाइप एक्सएनयूएमएक्स एक्सएनयूएमएक्सएक्सएक्सएनयूएमएक्स टोही और गश्ती वाहन का निर्माण और निर्माण करता है, जो अभी भी संचालन में है। पहले उत्पादन प्रकार 96 BTR का निर्माण 1995 वर्ष में किया गया था, लगभग 55 मशीनों को 1999 वर्ष के अंत तक बनाया गया था, और तब से 31 वर्ष में 2003 मशीनों से 14 मशीनों से वार्षिक आय के साथ उत्पादन जारी रहा। अनुमानों के अनुसार, डिलीवरी की शुरुआत से लेकर 2004 तक, लगभग 2009 टाइप 270 मशीनों की आपूर्ति की गई थी, लेकिन 96 में, 2010 मशीनों का निर्माण किया गया था और वर्ष में 17 2011 मशीनों का निर्माण किया गया था। कुल मिलाकर, सभी वर्षों में 11 मशीनों का निर्माण किया गया है। बीएन प्रकार 96 ऑल-वेल्डेड पतवार बख़्तरबंद स्टील से बना है, इंजन-ट्रांसमिशन डिब्बे बाईं ओर स्थित है। निकास प्रणाली का निकास पाइप पतवार की छत के बाईं ओर स्थित है। चालक दाईं ओर स्थित है, उसके पास एक ठोस आवरण है जिसमें पीछे की ओर खुलता है और सामने के दृश्य के लिए तीन दिन के पेरिस्कोप हैं। केंद्रीय पेरिस्कोप को रात में ड्राइविंग के लिए रोशनी वाले पेरिस्कोप द्वारा प्रतिस्थापित किया जा सकता है। कमांडर / गनर चालक के पीछे बैठता है, उसके पास ऑल-राउंड दृश्यता के लिए दिन के पेरिस्कोप के साथ एक उठी बुर्ज है, हैच कवर वापस खुलता है। बुर्ज के सामने स्थापित एक्सएनयूएमएक्स-एमएम मशीन गन एमएक्सएनयूएमएक्स एचबी, जिससे बुर्ज के अंदर से निशाना लगाना और गोली मारना संभव है। बाद में, कुछ मशीनें स्थानीय रूप से निर्मित एक्सएनयूएमएक्स-मिमी स्वचालित ग्रेनेड लांचर से लैस थीं। टुकड़ी कम्पार्टमेंट वाहन के पीछे के हिस्से में, आठ पैराट्रूपर्स भूमि में स्थित है और पावर ड्राइव के साथ पिछाड़ी रैंप के माध्यम से आता है। फ़ौज के डिब्बे की छत पर, पाँच हैच हैं जो बाहर की ओर खुलते हैं, दो दाईं ओर और तीन बाईं ओर हैं। टुकड़ी के डिब्बे के प्रत्येक तरफ कम से कम दो फायर इम्ब्रैसर्स और संबंधित देखने के उपकरण हैं। प्रत्येक तरफ स्टर्न के करीब टुकड़ी डिब्बे की छत पर चार फॉरवर्ड-फेसिंग ग्रेनेड लांचर लगाए गए हैं। मशीन के मानक उपकरणों में सामने के चार पहियों के लिए पावर स्टीयरिंग, एक केंद्रीकृत पहिया मुद्रास्फीति प्रणाली शामिल है जो चालक को इलाके के प्रकार के आधार पर दबाव को समायोजित करने की अनुमति देती है, बड़े पैमाने पर विनाश के हथियारों के खिलाफ सुरक्षा की प्रणाली और सामने बाईं ओर स्थापित एक लेजर चेतावनी प्रणाली। एक समान प्रणाली अन्य जापानी बख्तरबंद वाहनों पर स्थापित की जाती है, उदाहरण के लिए टैंक 90 टाइप करें। जापान ने टाइप 96 8x8 चेसिस पर आधारित एक विकिरण, रासायनिक और जैविक टोही वाहन भी विकसित किया। यह सेंसर और सेंसर के एक सेट के साथ-साथ एक मौसम विज्ञान स्टेशन, एक स्व-कीटाणुनाशक प्रणाली और एक एकीकृत वायु शोधन इकाई से सुसज्जित है। 40-mm स्वचालित ग्रेनेड लांचर; सामूहिक विनाश के हथियारों के खिलाफ सुरक्षा की व्यवस्थाः प्रयुक्त सामग्रीः - लेखकः
कई वर्षों से, जापानी आत्म-रक्षा बलों को कोमात्सु प्रकार सत्तासी छःxछः टोही वाहन और टाइप बयासी छःxछः ऑपरेटिंग कंट्रोल वाहन के अलावा मुख्य रूप से ट्रैक किए गए वाहनों से लैस किया गया है, जिनमें उच्च स्तर की एकरूपता है। इन दोनों विकल्पों का उत्पादन पूर्ण है। जैसा कि बाकी जापानी बख्तरबंद वाहनों के मामले में, जापान ने विदेशों में अपनी कारें नहीं बेचीं। टाइप एक्सएनयूएमएक्स बख्तरबंद कर्मियों के वाहक के लिए मुख्य ठेकेदार कोमात्सु डिफेंस सिस्टम डिवीजन है, जो टाइप एक्सएनयूएमएक्स एक्सएनयूएमएक्सएक्सएक्सएनयूएमएक्स टोही और गश्ती वाहन का निर्माण और निर्माण करता है, जो अभी भी संचालन में है। पहले उत्पादन प्रकार छियानवे BTR का निर्माण एक हज़ार नौ सौ पचानवे वर्ष में किया गया था, लगभग पचपन मशीनों को एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे वर्ष के अंत तक बनाया गया था, और तब से इकतीस वर्ष में दो हज़ार तीन मशीनों से चौदह मशीनों से वार्षिक आय के साथ उत्पादन जारी रहा। अनुमानों के अनुसार, डिलीवरी की शुरुआत से लेकर दो हज़ार चार तक, लगभग दो हज़ार नौ टाइप दो सौ सत्तर मशीनों की आपूर्ति की गई थी, लेकिन छियानवे में, दो हज़ार दस मशीनों का निर्माण किया गया था और वर्ष में सत्रह दो हज़ार ग्यारह मशीनों का निर्माण किया गया था। कुल मिलाकर, सभी वर्षों में ग्यारह मशीनों का निर्माण किया गया है। बीएन प्रकार छियानवे ऑल-वेल्डेड पतवार बख़्तरबंद स्टील से बना है, इंजन-ट्रांसमिशन डिब्बे बाईं ओर स्थित है। निकास प्रणाली का निकास पाइप पतवार की छत के बाईं ओर स्थित है। चालक दाईं ओर स्थित है, उसके पास एक ठोस आवरण है जिसमें पीछे की ओर खुलता है और सामने के दृश्य के लिए तीन दिन के पेरिस्कोप हैं। केंद्रीय पेरिस्कोप को रात में ड्राइविंग के लिए रोशनी वाले पेरिस्कोप द्वारा प्रतिस्थापित किया जा सकता है। कमांडर / गनर चालक के पीछे बैठता है, उसके पास ऑल-राउंड दृश्यता के लिए दिन के पेरिस्कोप के साथ एक उठी बुर्ज है, हैच कवर वापस खुलता है। बुर्ज के सामने स्थापित एक्सएनयूएमएक्स-एमएम मशीन गन एमएक्सएनयूएमएक्स एचबी, जिससे बुर्ज के अंदर से निशाना लगाना और गोली मारना संभव है। बाद में, कुछ मशीनें स्थानीय रूप से निर्मित एक्सएनयूएमएक्स-मिमी स्वचालित ग्रेनेड लांचर से लैस थीं। टुकड़ी कम्पार्टमेंट वाहन के पीछे के हिस्से में, आठ पैराट्रूपर्स भूमि में स्थित है और पावर ड्राइव के साथ पिछाड़ी रैंप के माध्यम से आता है। फ़ौज के डिब्बे की छत पर, पाँच हैच हैं जो बाहर की ओर खुलते हैं, दो दाईं ओर और तीन बाईं ओर हैं। टुकड़ी के डिब्बे के प्रत्येक तरफ कम से कम दो फायर इम्ब्रैसर्स और संबंधित देखने के उपकरण हैं। प्रत्येक तरफ स्टर्न के करीब टुकड़ी डिब्बे की छत पर चार फॉरवर्ड-फेसिंग ग्रेनेड लांचर लगाए गए हैं। मशीन के मानक उपकरणों में सामने के चार पहियों के लिए पावर स्टीयरिंग, एक केंद्रीकृत पहिया मुद्रास्फीति प्रणाली शामिल है जो चालक को इलाके के प्रकार के आधार पर दबाव को समायोजित करने की अनुमति देती है, बड़े पैमाने पर विनाश के हथियारों के खिलाफ सुरक्षा की प्रणाली और सामने बाईं ओर स्थापित एक लेजर चेतावनी प्रणाली। एक समान प्रणाली अन्य जापानी बख्तरबंद वाहनों पर स्थापित की जाती है, उदाहरण के लिए टैंक नब्बे टाइप करें। जापान ने टाइप छियानवे आठxआठ चेसिस पर आधारित एक विकिरण, रासायनिक और जैविक टोही वाहन भी विकसित किया। यह सेंसर और सेंसर के एक सेट के साथ-साथ एक मौसम विज्ञान स्टेशन, एक स्व-कीटाणुनाशक प्रणाली और एक एकीकृत वायु शोधन इकाई से सुसज्जित है। चालीस-mm स्वचालित ग्रेनेड लांचर; सामूहिक विनाश के हथियारों के खिलाफ सुरक्षा की व्यवस्थाः प्रयुक्त सामग्रीः - लेखकः
शिवपुरी। जिले के मायापुर थाना क्षेत्रांतर्गत आने वाले ग्राम गुरूकुदवाया में दो भाईयों में जमीनी विवाद को लेकर एक भाई ने अपने ही भाई को देशी कट्टे से गोली मार दी। गोली से घायल युवक को तुरंत अन्य परिजनों द्वारा उपचार के लिए जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया। यहां गंभीर अवस्था के देखते हुए घायल को ग्वालियर रैफर कर दिया गया। पुलिस थाना मायापुर ने आरोपी भाई के खिलाफ प्रकरण पंजीबद्ध कर मामला जांच में ले लिया है। जानकार के अनुसार मायापुर थाने के ग्राम गुरूकुदवाया निवासी पहलवान पुत्र प्रभु जाटव उम्र 30 वर्ष का अपने ही बड़े भाई सरवन पुत्र प्रभु जाटव के साथ जमीनी विवाद चल रहा था। यह विवाद आज उस मोड़ पर आ गया जब दोनों भाईयों में जमीनी बंटवारे को लेकर बहस होने लगी और यह बहस मुंहवाद फिर मारपीट में बदल गई। इतने में सरवन ने अपने पास रखा देशी कट्टे से पहलवार को गोली मार दी। गोली पहलवान की कनपटी में जाकर लगी जिससे वह अचेत अवस्था में मौके पर ही गिर पड़ा। जिसे घर के अन्य परिजनों ने तुरंत उपचार के लिए जिला चिकित्सालय लेकर आए। यहां चिकित्सकों ने जब पहलवान को देख तो सीधे आईसीयू में भर्ती कराया लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं दिखा तो उसे तुंरत ही ग्वालियर के लिए रैफर कर दिया गया। पुलिस ने मामला विवेचना में ले लिया है। बताया जाता है कि सरवन की पत्नि का देहांत हो गया है और वह अकेला है ऐसे अपने भाई से जमीनी विवाद लगभग तीन साल से चल रहा है जिसके चलते बीते रोज सरवन ने जमीन बेचने को लकर अपने भाई से विवाद किया और आज यह विवाद इतना बढ़ा कि बड़े भाई ने छोटे भाई को गोली मार दी और उसकी जान लेने का प्रयास किया।
शिवपुरी। जिले के मायापुर थाना क्षेत्रांतर्गत आने वाले ग्राम गुरूकुदवाया में दो भाईयों में जमीनी विवाद को लेकर एक भाई ने अपने ही भाई को देशी कट्टे से गोली मार दी। गोली से घायल युवक को तुरंत अन्य परिजनों द्वारा उपचार के लिए जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया। यहां गंभीर अवस्था के देखते हुए घायल को ग्वालियर रैफर कर दिया गया। पुलिस थाना मायापुर ने आरोपी भाई के खिलाफ प्रकरण पंजीबद्ध कर मामला जांच में ले लिया है। जानकार के अनुसार मायापुर थाने के ग्राम गुरूकुदवाया निवासी पहलवान पुत्र प्रभु जाटव उम्र तीस वर्ष का अपने ही बड़े भाई सरवन पुत्र प्रभु जाटव के साथ जमीनी विवाद चल रहा था। यह विवाद आज उस मोड़ पर आ गया जब दोनों भाईयों में जमीनी बंटवारे को लेकर बहस होने लगी और यह बहस मुंहवाद फिर मारपीट में बदल गई। इतने में सरवन ने अपने पास रखा देशी कट्टे से पहलवार को गोली मार दी। गोली पहलवान की कनपटी में जाकर लगी जिससे वह अचेत अवस्था में मौके पर ही गिर पड़ा। जिसे घर के अन्य परिजनों ने तुरंत उपचार के लिए जिला चिकित्सालय लेकर आए। यहां चिकित्सकों ने जब पहलवान को देख तो सीधे आईसीयू में भर्ती कराया लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं दिखा तो उसे तुंरत ही ग्वालियर के लिए रैफर कर दिया गया। पुलिस ने मामला विवेचना में ले लिया है। बताया जाता है कि सरवन की पत्नि का देहांत हो गया है और वह अकेला है ऐसे अपने भाई से जमीनी विवाद लगभग तीन साल से चल रहा है जिसके चलते बीते रोज सरवन ने जमीन बेचने को लकर अपने भाई से विवाद किया और आज यह विवाद इतना बढ़ा कि बड़े भाई ने छोटे भाई को गोली मार दी और उसकी जान लेने का प्रयास किया।