raw_text
stringlengths
113
616k
normalized_text
stringlengths
98
618k
इंडियन क्रिकेटर विराट कोहली और अनुष्का शर्मा जल्द ही पापा-मम्मी बनने वाले हैं, जी हां, अनुष्का-विराट के घर जल्द ही एक नन्हा मेहमान आने वाला है। एक अंग्रेजी बेवसाइट के मुताबिक, अनुष्का शर्मा प्रेग्नेंट हैं और वो लंबे समय से इस बात को छिपा रही हैं। अनुष्का और विराट एक साथ बहुत समय बिताते हैं, क्योंकि वो अब अपने पति से दूर नहीं रहना चाहती हैं। इससे भी ज्यादा बड़ी बात ये है कि अब वह इतनी नाजुक स्थिति में है, इसलिए विराट ने उन्हें करीब रहने के लिए कहा। यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि अनुष्का शर्मा ने अभी किसी नई फिल्म की घोषणा नहीं की है। इस बीच विराट कोहली बैंगलोर की टीम से आईपीएल में खेल रहे थे। अनुष्का ने हाल ही में एक मैगजीन फोटोशूट से तस्वीरें पोस्ट की हैं, लेकिन ये फोटो पुरानी बताई जा रही हैं। विराट कोहली और अनुष्का शर्मा की शादी को अब लगभग 2 साल हो गए हैं और वो दोनों नन्हें मेहमान के आने की तैयारी कर रहे हैं। अनुष्का ने विराट से पहले ही कहा था कि बच्चे के बाद भी वह फिल्मों में काम करना जारी रखेंगी। यह जोड़ी आने वाले महीनों में बेबीशॉवर की मेजबानी करती नजर आएगी।
इंडियन क्रिकेटर विराट कोहली और अनुष्का शर्मा जल्द ही पापा-मम्मी बनने वाले हैं, जी हां, अनुष्का-विराट के घर जल्द ही एक नन्हा मेहमान आने वाला है। एक अंग्रेजी बेवसाइट के मुताबिक, अनुष्का शर्मा प्रेग्नेंट हैं और वो लंबे समय से इस बात को छिपा रही हैं। अनुष्का और विराट एक साथ बहुत समय बिताते हैं, क्योंकि वो अब अपने पति से दूर नहीं रहना चाहती हैं। इससे भी ज्यादा बड़ी बात ये है कि अब वह इतनी नाजुक स्थिति में है, इसलिए विराट ने उन्हें करीब रहने के लिए कहा। यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि अनुष्का शर्मा ने अभी किसी नई फिल्म की घोषणा नहीं की है। इस बीच विराट कोहली बैंगलोर की टीम से आईपीएल में खेल रहे थे। अनुष्का ने हाल ही में एक मैगजीन फोटोशूट से तस्वीरें पोस्ट की हैं, लेकिन ये फोटो पुरानी बताई जा रही हैं। विराट कोहली और अनुष्का शर्मा की शादी को अब लगभग दो साल हो गए हैं और वो दोनों नन्हें मेहमान के आने की तैयारी कर रहे हैं। अनुष्का ने विराट से पहले ही कहा था कि बच्चे के बाद भी वह फिल्मों में काम करना जारी रखेंगी। यह जोड़ी आने वाले महीनों में बेबीशॉवर की मेजबानी करती नजर आएगी।
खुदा के सजदे में रविवार को एक साथ हजारों सिर झुक गए। नमाजियों ने अल्लाह ताला के सामने हाथ उठाकर अमन चैन की दुआ मांगी और सिर झुकाकर सजदा किया। ईद-उल-जुहा (बकरीद) की नमाज शाहजमाल स्थित ईदगाह में हुई। कोरोना के कारण पिछले दो साल बकरीद की नमाज घरों में ही हुई है। दो साल बाद रविवार को नमाज अदा की गई। खुदा की इबादत के लिए सुबह ही लोग ईदगाह पहुंचने शुरू हो गए और फिर हजारों नमाजियों ने एक साथ खुदा की इबादत की। इस दौरान बूढ़ों से लेकर बच्चों तक का उत्साह देखने लायक था। नमाज के बाद सभी ने एक दूसरे को गले लगकर बधाइयां दी। शाहजमाल स्थित ईदगाह के साथ शहर की छोटी बड़ी सभी मस्जिदों में भी नमाज अदा की गई। एएमयू स्थित मस्जिद, दोदपुर मस्जिद, जीवनगढ़ मस्जिद, शमशाद मार्केट स्थित मस्जिद, ऊपरकोट जमा मस्जिद समेत शहर के सभी मस्जिद में नमाज अदा की गई। नमाज के बाद घरों में कुर्बानी की रस्म शुरू हुई और अल्लाह की शान में कुर्बानियां की गई। बकरीद की नमाज के दौरान डीएम इन्द्र विक्रम सिंह और एसएसपी कलानिधि नैथानी ने पैदल गश्त करके कानून का जायजा लिया। अधिकारियों ने पुराने शहर की गलियों में घूम कर लोगों से बातचीत की और शांति की अपील की। जमालपुर, चरकवालान, तुर्कमान गेट, भुजपुरा, सामनापाड़ा, शब्ज़ी मंडी, जमालपुर, फूल चौराहा, नादा पल खैर रोड, सिविल लाइन, क्वार्सी क्षेत्र में अधिकारी मुस्तैद रहे। बकरीद के त्योहार और जिले की संवेदनशीलता का देखते हुए ईदगाह, ऊपरकोट, देहलीगेट, शाहजमाल समेत विभिन्न मुस्लिम बाहुल्य व मिश्रित आबादी वाले इलाकों में पुलिस की टीमें मुस्तैद रही। वहीं ड्रोन से नमाज के दौरान निगरानी की गई। पुलिस के साथ आरएएफ, दंगा नियंत्रण व पुलिस की स्पेशल टीमें मुस्तैद रही। वहीं स्पेशल टीमें ड्रोन उड़ाकर सारी गतिविधियों पर निगरानी करती रही और वीडियो रिकॉर्डिंग की गर्ठ। एलआईयू के अधिकारी भी लगातार अपनी पैनी नजर बनाए रहे, जिससे किसी तरह की गड़बड़ी न हो। This website follows the DNPA Code of Ethics.
खुदा के सजदे में रविवार को एक साथ हजारों सिर झुक गए। नमाजियों ने अल्लाह ताला के सामने हाथ उठाकर अमन चैन की दुआ मांगी और सिर झुकाकर सजदा किया। ईद-उल-जुहा की नमाज शाहजमाल स्थित ईदगाह में हुई। कोरोना के कारण पिछले दो साल बकरीद की नमाज घरों में ही हुई है। दो साल बाद रविवार को नमाज अदा की गई। खुदा की इबादत के लिए सुबह ही लोग ईदगाह पहुंचने शुरू हो गए और फिर हजारों नमाजियों ने एक साथ खुदा की इबादत की। इस दौरान बूढ़ों से लेकर बच्चों तक का उत्साह देखने लायक था। नमाज के बाद सभी ने एक दूसरे को गले लगकर बधाइयां दी। शाहजमाल स्थित ईदगाह के साथ शहर की छोटी बड़ी सभी मस्जिदों में भी नमाज अदा की गई। एएमयू स्थित मस्जिद, दोदपुर मस्जिद, जीवनगढ़ मस्जिद, शमशाद मार्केट स्थित मस्जिद, ऊपरकोट जमा मस्जिद समेत शहर के सभी मस्जिद में नमाज अदा की गई। नमाज के बाद घरों में कुर्बानी की रस्म शुरू हुई और अल्लाह की शान में कुर्बानियां की गई। बकरीद की नमाज के दौरान डीएम इन्द्र विक्रम सिंह और एसएसपी कलानिधि नैथानी ने पैदल गश्त करके कानून का जायजा लिया। अधिकारियों ने पुराने शहर की गलियों में घूम कर लोगों से बातचीत की और शांति की अपील की। जमालपुर, चरकवालान, तुर्कमान गेट, भुजपुरा, सामनापाड़ा, शब्ज़ी मंडी, जमालपुर, फूल चौराहा, नादा पल खैर रोड, सिविल लाइन, क्वार्सी क्षेत्र में अधिकारी मुस्तैद रहे। बकरीद के त्योहार और जिले की संवेदनशीलता का देखते हुए ईदगाह, ऊपरकोट, देहलीगेट, शाहजमाल समेत विभिन्न मुस्लिम बाहुल्य व मिश्रित आबादी वाले इलाकों में पुलिस की टीमें मुस्तैद रही। वहीं ड्रोन से नमाज के दौरान निगरानी की गई। पुलिस के साथ आरएएफ, दंगा नियंत्रण व पुलिस की स्पेशल टीमें मुस्तैद रही। वहीं स्पेशल टीमें ड्रोन उड़ाकर सारी गतिविधियों पर निगरानी करती रही और वीडियो रिकॉर्डिंग की गर्ठ। एलआईयू के अधिकारी भी लगातार अपनी पैनी नजर बनाए रहे, जिससे किसी तरह की गड़बड़ी न हो। This website follows the DNPA Code of Ethics.
खेती में नए तरीके और आइडिया से किसान मुनाफा कमा रहे हैं। ऐसे ही एक आइडिया ने दौसा के किसान की किस्मत बदल दी। 18 हजार की प्राइवेट जॉब करने वाले दौसा के विनेश शर्मा खीरे की खेती से लाखों रुपए की कमाई कर रहे हैं। दौसा से 30 किलोमीटर दूर खवारावजी के रहने वाले विनेश पहले जयपुर में प्राइवेट कंपनी में जॉब करते हैं। साथ में अपने डेढ़ बीघा के खेत में पॉली हाउस में खीरे की खेती भी। खीरे की पहली उपज को उन्होंने 18 लाख रुपए में बेचा। लगभग 9 लाख रुपए कमाए। 4 महीने में यह रकम कम नहीं है। कोरोनाकाल के दौरान प्राइवेट जॉब में वर्क फ्रॉम होम करने का मौका मिला। इसी दौरान खीरे की खेती का आइडिया आया। 35 साल के विनेश का पूरा परिवार ही खेती करता है। जब खीरे की खेती के बारे में उन्होंने रिसर्च शुरू किया तो पॉली हाउस का भी आइडिया आया। फिर यू-ट्यूब से इसके बारे में जानकारी ली। मई 2021 में अपने डेढ़ बीघा (4 हजार वर्ग मीटर) के खेत में 30 लाख रुपए की लागत से पॉली हाउस लगाया। कैप्टन स्टार किस्म की खीरे की पौध रोपाई की। नवंबर के आखिरी सप्ताह में पहली बार 70 टन खीरे का प्रोडक्शन हुआ था। पहली उपज नवंबर 2021 से अप्रैल 2022 तक चली। यह खीरे जयपुर व दौसा के मार्केट में कुल 18 लाख रुपए में बेची। ट्रांसपोर्ट व अन्य खर्च कटौती करने के बाद पहली बार में करीब 9 लाख रुपए की बचत हुई। विनेश ने बताया कि अब अगली उपज में 25 लाख रुपए की कमाई का टारगेट रखा है। विनेश कस्टम में पार्सल एक्सपोर्ट करने वाली फर्म में नौकरी करते हैं। वे अपने गांव खवारावजी से रोजाना जयपुर अप-डाउन करते हैं। परिवार में 7 भाई हैं, सभी खेती व प्राइवेट जॉब करते हैं। खेत में पॉली हाउस लगाने के बाद विनेश की इनकम बढ़ गई है। परिवार के सभी लोग इस तरह की खेती में रुचि ले रहे हैं। उन्होंंने बताया कि पानी की कमी ज्यादा होने की वजह से परिवार का खेती में कोई इंटरेस्ट नहीं रहा। सभी प्राइवेट जॉब करने लगे। लेकिन, कोरोना के बाद वे नौकरी और खेती दोनों कर रहे हैं। 12वीं पास विनेश ने पहले पॉली हाउस के लिए एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट के अधिकारियों कॉन्टैक्ट किया। पूरा प्रोसेस होने के बाद खीरे की खेती शुरू की। विनेश ने बताया कि खीरे का सीजन सालभर रहता है। हर मार्केट में इसकी डिमांड है। साल में तीन बार यानी हर 4 महीने में इसका प्रोडक्शन मिल जाता है। ऐसे में प्रॉफिट भी लगातार मिलता रहता है। उन्होंने बताया कि इसके प्रोडक्शन से 35 लाख रुपए तक कमा सकते हैं। इतना ही नहीं पानी की कमी के चलते खेत में पौंड भी विनेश ने बना दिए। इस मानसून में हुई बारिश में वे 54 लाख लीटर पानी स्टोरेज कर चुके हैं। यानी खेती के लिए दो साल तक जितना पानी उनके पौंड में जमा है। विनेश के इस इनोवेशन के बारे में जब दौसा कलेक्टर कमर चौधरी को पता चला तो वे भी खेत में पहुंच गए। उन्होंने सारे सिस्टम को देखा तो वे भी युवा किसान के दीवाने हो गए। This website follows the DNPA Code of Ethics.
खेती में नए तरीके और आइडिया से किसान मुनाफा कमा रहे हैं। ऐसे ही एक आइडिया ने दौसा के किसान की किस्मत बदल दी। अट्ठारह हजार की प्राइवेट जॉब करने वाले दौसा के विनेश शर्मा खीरे की खेती से लाखों रुपए की कमाई कर रहे हैं। दौसा से तीस किलोग्राममीटर दूर खवारावजी के रहने वाले विनेश पहले जयपुर में प्राइवेट कंपनी में जॉब करते हैं। साथ में अपने डेढ़ बीघा के खेत में पॉली हाउस में खीरे की खेती भी। खीरे की पहली उपज को उन्होंने अट्ठारह लाख रुपए में बेचा। लगभग नौ लाख रुपए कमाए। चार महीने में यह रकम कम नहीं है। कोरोनाकाल के दौरान प्राइवेट जॉब में वर्क फ्रॉम होम करने का मौका मिला। इसी दौरान खीरे की खेती का आइडिया आया। पैंतीस साल के विनेश का पूरा परिवार ही खेती करता है। जब खीरे की खेती के बारे में उन्होंने रिसर्च शुरू किया तो पॉली हाउस का भी आइडिया आया। फिर यू-ट्यूब से इसके बारे में जानकारी ली। मई दो हज़ार इक्कीस में अपने डेढ़ बीघा के खेत में तीस लाख रुपए की लागत से पॉली हाउस लगाया। कैप्टन स्टार किस्म की खीरे की पौध रोपाई की। नवंबर के आखिरी सप्ताह में पहली बार सत्तर टन खीरे का प्रोडक्शन हुआ था। पहली उपज नवंबर दो हज़ार इक्कीस से अप्रैल दो हज़ार बाईस तक चली। यह खीरे जयपुर व दौसा के मार्केट में कुल अट्ठारह लाख रुपए में बेची। ट्रांसपोर्ट व अन्य खर्च कटौती करने के बाद पहली बार में करीब नौ लाख रुपए की बचत हुई। विनेश ने बताया कि अब अगली उपज में पच्चीस लाख रुपए की कमाई का टारगेट रखा है। विनेश कस्टम में पार्सल एक्सपोर्ट करने वाली फर्म में नौकरी करते हैं। वे अपने गांव खवारावजी से रोजाना जयपुर अप-डाउन करते हैं। परिवार में सात भाई हैं, सभी खेती व प्राइवेट जॉब करते हैं। खेत में पॉली हाउस लगाने के बाद विनेश की इनकम बढ़ गई है। परिवार के सभी लोग इस तरह की खेती में रुचि ले रहे हैं। उन्होंंने बताया कि पानी की कमी ज्यादा होने की वजह से परिवार का खेती में कोई इंटरेस्ट नहीं रहा। सभी प्राइवेट जॉब करने लगे। लेकिन, कोरोना के बाद वे नौकरी और खेती दोनों कर रहे हैं। बारहवीं पास विनेश ने पहले पॉली हाउस के लिए एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट के अधिकारियों कॉन्टैक्ट किया। पूरा प्रोसेस होने के बाद खीरे की खेती शुरू की। विनेश ने बताया कि खीरे का सीजन सालभर रहता है। हर मार्केट में इसकी डिमांड है। साल में तीन बार यानी हर चार महीने में इसका प्रोडक्शन मिल जाता है। ऐसे में प्रॉफिट भी लगातार मिलता रहता है। उन्होंने बताया कि इसके प्रोडक्शन से पैंतीस लाख रुपए तक कमा सकते हैं। इतना ही नहीं पानी की कमी के चलते खेत में पौंड भी विनेश ने बना दिए। इस मानसून में हुई बारिश में वे चौवन लाख लीटर पानी स्टोरेज कर चुके हैं। यानी खेती के लिए दो साल तक जितना पानी उनके पौंड में जमा है। विनेश के इस इनोवेशन के बारे में जब दौसा कलेक्टर कमर चौधरी को पता चला तो वे भी खेत में पहुंच गए। उन्होंने सारे सिस्टम को देखा तो वे भी युवा किसान के दीवाने हो गए। This website follows the DNPA Code of Ethics.
वीर अर्जुन संवाददाता सीकर। जिला पमुख रीटा सिंह ने विद्युत, पेयजल एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से कहा है कि जिला परिषद की पशासन स्थापना स्थायी समिति की बैठक में लिए निर्णयों की अक्षरशः पालना करना सुनिश्चित करें। वे स्थायी समिति की मंगलवार को अपने कक्ष में आयोजित बैठक में बोल रही थी। उन्होंने कहा कि विद्युत विभाग ने कृषि के 520 डिमांड नोटिस जारी किए हैं उनके कनेक्शन शीघ्र करें ताकि कृषकों को राहत मिल सके। समिति के सदस्यों ने अनु. जाति, जनजाति के छात्रावासों में आरओ लगाने का पस्ताव पस्तुत किया। जिसे सर्व सम्मति से पारित किया गया। उन्होंने पशासन गांवों के संग अभियान में राजकीय स्कूलों को भूमि पट्टे जारी होने की जानकारी एवं राजस्थान लोक सेवा आयोग से नव नियुक्त होने वाले 8 शिक्षकों का पदस्थापन करने, पंचायत समिति स्तर के कृषि मेलों में जिला परिषद सदस्यों को आमंत्रित करने के लिए सम्बन्धित विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। सदस्य फूलचन्द खटाणा ने न्योराणा (डोकन) पंचायत में आंगनबाडक्वी केन्द भवन का कार्य पूरा नहीं होने की जानकारी दी जिस पर पंचायत राज एक्ट में सम्बन्धित दोषी के विरूद्व कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए। सदस्यों ने बिडक्वोदी, बीदसर, तिहावली में महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की नियुक्ति शीघ्र करवाने, विद्यालय भवनों से गुजरने वाली विद्युत लाइन हटाने की बात रखी जिसके निराकरण के लिए सम्बन्धित को आवश्यक हिदायत दी गई। बैठक में जिला परिषद के सीईओ हनुमान सहाय मीणा, विद्युत शिक्षा, पेयजल, कृषि, चिकित्सा, आईसीडीएस, सम्बन्धित विभागीय अधिकारी, उप जिला पमुख पूरण कंवर, समिति के सदस्य रामेश्वरी देवी, महावीर भास्कर, बनवारी लाल पिलानिया, रामस्वरूप माहिचा, सुनीता गठाला ने हिस्सा लिया।
वीर अर्जुन संवाददाता सीकर। जिला पमुख रीटा सिंह ने विद्युत, पेयजल एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से कहा है कि जिला परिषद की पशासन स्थापना स्थायी समिति की बैठक में लिए निर्णयों की अक्षरशः पालना करना सुनिश्चित करें। वे स्थायी समिति की मंगलवार को अपने कक्ष में आयोजित बैठक में बोल रही थी। उन्होंने कहा कि विद्युत विभाग ने कृषि के पाँच सौ बीस डिमांड नोटिस जारी किए हैं उनके कनेक्शन शीघ्र करें ताकि कृषकों को राहत मिल सके। समिति के सदस्यों ने अनु. जाति, जनजाति के छात्रावासों में आरओ लगाने का पस्ताव पस्तुत किया। जिसे सर्व सम्मति से पारित किया गया। उन्होंने पशासन गांवों के संग अभियान में राजकीय स्कूलों को भूमि पट्टे जारी होने की जानकारी एवं राजस्थान लोक सेवा आयोग से नव नियुक्त होने वाले आठ शिक्षकों का पदस्थापन करने, पंचायत समिति स्तर के कृषि मेलों में जिला परिषद सदस्यों को आमंत्रित करने के लिए सम्बन्धित विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। सदस्य फूलचन्द खटाणा ने न्योराणा पंचायत में आंगनबाडक्वी केन्द भवन का कार्य पूरा नहीं होने की जानकारी दी जिस पर पंचायत राज एक्ट में सम्बन्धित दोषी के विरूद्व कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए। सदस्यों ने बिडक्वोदी, बीदसर, तिहावली में महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की नियुक्ति शीघ्र करवाने, विद्यालय भवनों से गुजरने वाली विद्युत लाइन हटाने की बात रखी जिसके निराकरण के लिए सम्बन्धित को आवश्यक हिदायत दी गई। बैठक में जिला परिषद के सीईओ हनुमान सहाय मीणा, विद्युत शिक्षा, पेयजल, कृषि, चिकित्सा, आईसीडीएस, सम्बन्धित विभागीय अधिकारी, उप जिला पमुख पूरण कंवर, समिति के सदस्य रामेश्वरी देवी, महावीर भास्कर, बनवारी लाल पिलानिया, रामस्वरूप माहिचा, सुनीता गठाला ने हिस्सा लिया।
सरमा और पणिः स्पति जब विश्वेदेवता होता है तब वह इसी सप्तक में भौतिकात्मा धारण करता है वह सर्वगण देवता है, सर्वमान्य भी, उसी के भय में पणि भी आ जाते हैं । पणि आसुरी वृत्ति की चौरवृत्ति की प्रतिष्ठा करने के लिए दैवी वृत्ति की देवदूती देवशुनी को लालच में नहीं ला सके, भले ही ये उसे बहिन बनाकर अपने यहाँ रखने को तत्पर् थे। यहाँ देवासुर वृत्तियों और कर्मों का रहस्यमय व्याख्यान देते हुए साथ में आध्यात्मिक और भौतिक तत्त्वों की भिन्नता या आध्यात्मिकता और भौतिकता के - जिससे यह ब्रह्माण्ड चल रहा है - का दार्शनिक विवेचन दिया गया है । उन दिनों पणि नाम की कोई व्यापारी जाति रही हो जिन्हें असुर भी कहते रहे हों यह सम्भव है, ये थे तो, कहीं भारत में ही होंगे, क्योंकि वहाँ 'रसा' माने एक नदी ही होगी। यह बात दक्षिण पूर्व भारत की ओर संकेत करती है ।
सरमा और पणिः स्पति जब विश्वेदेवता होता है तब वह इसी सप्तक में भौतिकात्मा धारण करता है वह सर्वगण देवता है, सर्वमान्य भी, उसी के भय में पणि भी आ जाते हैं । पणि आसुरी वृत्ति की चौरवृत्ति की प्रतिष्ठा करने के लिए दैवी वृत्ति की देवदूती देवशुनी को लालच में नहीं ला सके, भले ही ये उसे बहिन बनाकर अपने यहाँ रखने को तत्पर् थे। यहाँ देवासुर वृत्तियों और कर्मों का रहस्यमय व्याख्यान देते हुए साथ में आध्यात्मिक और भौतिक तत्त्वों की भिन्नता या आध्यात्मिकता और भौतिकता के - जिससे यह ब्रह्माण्ड चल रहा है - का दार्शनिक विवेचन दिया गया है । उन दिनों पणि नाम की कोई व्यापारी जाति रही हो जिन्हें असुर भी कहते रहे हों यह सम्भव है, ये थे तो, कहीं भारत में ही होंगे, क्योंकि वहाँ 'रसा' माने एक नदी ही होगी। यह बात दक्षिण पूर्व भारत की ओर संकेत करती है ।
झांसी के शिवाजी नगर में टीचर की पत्नी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। आत्महत्या की वजह घरेलु कलह बताई जा रही है। मायके पक्ष के लोग मारपीट कर परेशान करने का आरोप लगा रहे हैं। पुलिस ने शव काे कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। पुलिस पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम की कार्रवाई कर रही है। 11 साल पहले हुई थी शादी उरई के शांति नगर निवासी महेश चंद ने बताया कि इकलौती बेटी दीप्ति (30) की शादी करीब 11 साल पहले हमीरपुर के कुरारा निवासी आशू जवालिया के साथ की थी। आशू बामोर के सरकारी स्कूल में टीचर है और कुछ सालों से वह पत्नी व दो बेटियों के साथ शिवाजी नगर में रह रहा था। पति आशू ने बताया कि बुधवार शाम को वह स्कूल से घर लौटा। खाना खाकर वह बेटियों के साथ सोने की तैयारी कर रहा था। रात करीब 9:30 बजे पत्नी दीप्ति दूसरे कमरे में चली गई। थोड़ी देर बाद बेटी कमरे में गई तो दीप्ति फंदे पर लटकी थी। बेटी ने आकर बताया तो कमरा में गया। दीप्ति की मौत की सूचना पर मायके पक्ष के लोग सुबह झांसी पहुंच गए। पिता महेश चंद राजस्व विभाग में आरआई हैं। उन्होंने बताया कि ससुराल वाले बेटी दीप्ति को काफी परेशान कर रहे थे। बुधवार शाम करीब 5:30 बजे बेटी ने अपनी मां राजकुमारी से बात की तो सब ठीक था। इसके बाद रात 12 बजे मौत की सूचना मिली। पिता ने बताया कि, दामाद के माता-पिता एक साल से अपने बड़े बेटे के पास रह रहे थे। दादाम बेटी से कहता था कि तुम्हारी वजह से मेरे माता-पिता घर पर नहीं रह पा रहे हैं। इसको लेकर विवाद होता था। एक साल पहले मारपीट की थी। तब हम लोग बेटी के ससुराल गए थे। वहां भी मारपीट कर दी थी। दीप्ति की दो बेटियां 8 साल की अनन्या और 5 साल की रेशी है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
झांसी के शिवाजी नगर में टीचर की पत्नी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। आत्महत्या की वजह घरेलु कलह बताई जा रही है। मायके पक्ष के लोग मारपीट कर परेशान करने का आरोप लगा रहे हैं। पुलिस ने शव काे कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। पुलिस पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम की कार्रवाई कर रही है। ग्यारह साल पहले हुई थी शादी उरई के शांति नगर निवासी महेश चंद ने बताया कि इकलौती बेटी दीप्ति की शादी करीब ग्यारह साल पहले हमीरपुर के कुरारा निवासी आशू जवालिया के साथ की थी। आशू बामोर के सरकारी स्कूल में टीचर है और कुछ सालों से वह पत्नी व दो बेटियों के साथ शिवाजी नगर में रह रहा था। पति आशू ने बताया कि बुधवार शाम को वह स्कूल से घर लौटा। खाना खाकर वह बेटियों के साथ सोने की तैयारी कर रहा था। रात करीब नौ:तीस बजे पत्नी दीप्ति दूसरे कमरे में चली गई। थोड़ी देर बाद बेटी कमरे में गई तो दीप्ति फंदे पर लटकी थी। बेटी ने आकर बताया तो कमरा में गया। दीप्ति की मौत की सूचना पर मायके पक्ष के लोग सुबह झांसी पहुंच गए। पिता महेश चंद राजस्व विभाग में आरआई हैं। उन्होंने बताया कि ससुराल वाले बेटी दीप्ति को काफी परेशान कर रहे थे। बुधवार शाम करीब पाँच:तीस बजे बेटी ने अपनी मां राजकुमारी से बात की तो सब ठीक था। इसके बाद रात बारह बजे मौत की सूचना मिली। पिता ने बताया कि, दामाद के माता-पिता एक साल से अपने बड़े बेटे के पास रह रहे थे। दादाम बेटी से कहता था कि तुम्हारी वजह से मेरे माता-पिता घर पर नहीं रह पा रहे हैं। इसको लेकर विवाद होता था। एक साल पहले मारपीट की थी। तब हम लोग बेटी के ससुराल गए थे। वहां भी मारपीट कर दी थी। दीप्ति की दो बेटियां आठ साल की अनन्या और पाँच साल की रेशी है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
रायपुर : छत्तीसगढ़ से लोकसभा सांसद व भाजपा के वरिष्ठ नेता सुनील सोनी कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए हैं. उन्होंने सोशल मीडिया में इसकी जानकारी दी है. इसके साथ ही अपने संपर्क में आए लोगों से भी सुरक्षित रहने की अपील की है. वह अभी डॉक्टरों से सलाह ले रहे हैं. इसके बाद ही होम आइसोलेशन या हॉस्पिटल में भर्ती होने पर विचार करेंगे. कांग्रेस प्रवक्ता विकास तिवारी ने उनके जल्द स्वास्थ होने की कामना की है. जानकारी के मुताबिक, सुनील सोनी ने पहले एंटीजन टेस्ट कराया था. जिसमें उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई थी, लेकिन तबीयत खराब होने पर दोबारा जांच कराने का फैसला लिया. मेकाहारा को इसकी सूचना दी. एक टीम सांसद के घर पहुंचकर आरटीपीआर टेस्ट किया. इसमें उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई. इससे पहले सुनील सोनी के पीएसओ भी कोरोना संक्रमित हो चुके हैं, जिसके चलते वह दो बार क्वारंटाइन हो चुके हैं. बता दें प्रदेश में कोरोना की स्थिति थोड़ी सुधरती नजर आ रही है. प्रदेश अब तक कुल 1 लाख 60 हजार 396 संक्रमित मरीजों की पुष्टि हुई है. इनमें से 1 लाख 32 हजार 168 मरीज स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुके हैं. 27 हजार 750 मरीजों का अभी भी अस्पतालों में इलाज जारी है. जबकि 1478 लोगों की मौत हो चुकी है.
रायपुर : छत्तीसगढ़ से लोकसभा सांसद व भाजपा के वरिष्ठ नेता सुनील सोनी कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए हैं. उन्होंने सोशल मीडिया में इसकी जानकारी दी है. इसके साथ ही अपने संपर्क में आए लोगों से भी सुरक्षित रहने की अपील की है. वह अभी डॉक्टरों से सलाह ले रहे हैं. इसके बाद ही होम आइसोलेशन या हॉस्पिटल में भर्ती होने पर विचार करेंगे. कांग्रेस प्रवक्ता विकास तिवारी ने उनके जल्द स्वास्थ होने की कामना की है. जानकारी के मुताबिक, सुनील सोनी ने पहले एंटीजन टेस्ट कराया था. जिसमें उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई थी, लेकिन तबीयत खराब होने पर दोबारा जांच कराने का फैसला लिया. मेकाहारा को इसकी सूचना दी. एक टीम सांसद के घर पहुंचकर आरटीपीआर टेस्ट किया. इसमें उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई. इससे पहले सुनील सोनी के पीएसओ भी कोरोना संक्रमित हो चुके हैं, जिसके चलते वह दो बार क्वारंटाइन हो चुके हैं. बता दें प्रदेश में कोरोना की स्थिति थोड़ी सुधरती नजर आ रही है. प्रदेश अब तक कुल एक लाख साठ हजार तीन सौ छियानवे संक्रमित मरीजों की पुष्टि हुई है. इनमें से एक लाख बत्तीस हजार एक सौ अड़सठ मरीज स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुके हैं. सत्ताईस हजार सात सौ पचास मरीजों का अभी भी अस्पतालों में इलाज जारी है. जबकि एक हज़ार चार सौ अठहत्तर लोगों की मौत हो चुकी है.
तीन दिन पहले जीतन राम मांझी ने महागठबंधन से अलग होने का फैसला किया। उनके बेटे ने कहा कि हमारी पार्टी को जेडीयू में विलय कराने का दबाव डाला जा रहा था। इस वजह से महागठबंधन से अलग हटने का फैसला किया। जीतन राम मांझी के महागठबंधन से अलग होने के बाद ये चर्चा जोरों पर है कि इससे नुकसान होगा या नहीं? बिहार के महागठबंधन से पूर्व सीएम जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा यानी 'हम' ने किनारा कर लिया। इसके बाद वहां आरोप और प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। वहीं, बीजेपी भी जीतन राम मांझी के महागठबंधन से हटने को मुद्दा बनाकर नीतीश कुमार पर हमलावर है। अब आरोप-प्रत्यारोप का नया दौर चला है। तभी कुछ बाइक सवार आये और लहरिया कट मारने लग गए , और जब तक सुरक्षा में तैनात जवान कुछ समझ पाते वो बाइकर्स मुख्यमंत्री के काफी नजदीक आ गए जिसकी वजह से नितीश कुमार को खुद को बचने के लिए फुटपाथ पे भागना पड़ा. Bihar: नीतीश कुमार ने कार्यक्रम में अधिकारियों से कहा, काम को जल्दी कर दीजिए। मैं तो शुरू से कह रहा हूं और जल्दी कीजिए। जितनी जल्द करवा देंगे उतना अच्छा है। कब चुनाव होगा कोई नहीं जानता है। कोई जरूर है कि अगले साल ही चुनाव होगा। कोई ठिकाना है पहले चुनाव हो जाए। Santosh Manjhi: आगे की कार्रवाई को लेकर हम सभी से चर्चा करके निर्णय लिया जाएगा। हमारी पार्टी ने अब तक महागठबंधन से अलग कर लिया है। हम तो रुख करना चाहते थे, लेकिन बड़ी पार्टियाँ हमें शामिल नहीं करना चाहती हैं। वे हमारी पार्टी का समापन करना चाहती हैं, इसलिए हमने महागठबंधन से भी अलग होने का निर्णय लिया है। Santosh Suman Manjhi resigns: बता दें कि कई दिनों से अटकलें लगाई जा रही थी कि जीतन राम मांझी और उनकी हम पार्टी महागठबंधन सरकार से खुश नहीं थी। इसके संकेत खुद जीतनराम मांझी लगातार दे रहे थे। उनके बेटे संतोष मांझी भी महागठबंधन पर सवाल उठा रहे थे। जिसके बाद आज उन्होंने नीतीश कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया है। Opposition Meeting: बिहार के बहुजन समाजवादी पार्टी (बीएसपी) के प्रभारी अनिल सिंह ने कहा है कि उनकी पार्टी ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया है कि वह विपक्ष की एकता का हिस्सा नहीं बनेंगे। उन्होंने कहा है कि उनकी पार्टी लगभग पांच राज्यों में अकेले ही चुनाव लड़ती है और इस बार भी वे अकेले ही चुनाव लड़ेंगे। बीएसपी बिहार के सभी 40 सीटों पर अपने उम्मीदवारों को उतारेगी। सियासी विश्लेषकों की मानें तो आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोलने के ध्येय विपक्षी दलो की बैठक बुलाई गई है। जिसमें कई नेताओंं के शामिल होने की खबर है। आइए, आगे कि रिपोर्ट में जानते हैं कि कौन-कौन इस बैठक में शामिल होने जा रहे हैं? Bihar: आज से एक साल पहले भी यह पुल इसी तरह गिरी थी। तब विपक्ष में नेता तेजस्वी यादव ने सरकार पर जमकर हमला बोला था, लेकिन अब जब उनके पास बाकायदा पथ निर्माण विभाग है, तो हैरानी इस बात को लेकर हो रही है कि अभी तक उनका इस पर कोई रिएक्शन तक सामने नहीं आया है।
तीन दिन पहले जीतन राम मांझी ने महागठबंधन से अलग होने का फैसला किया। उनके बेटे ने कहा कि हमारी पार्टी को जेडीयू में विलय कराने का दबाव डाला जा रहा था। इस वजह से महागठबंधन से अलग हटने का फैसला किया। जीतन राम मांझी के महागठबंधन से अलग होने के बाद ये चर्चा जोरों पर है कि इससे नुकसान होगा या नहीं? बिहार के महागठबंधन से पूर्व सीएम जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा यानी 'हम' ने किनारा कर लिया। इसके बाद वहां आरोप और प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। वहीं, बीजेपी भी जीतन राम मांझी के महागठबंधन से हटने को मुद्दा बनाकर नीतीश कुमार पर हमलावर है। अब आरोप-प्रत्यारोप का नया दौर चला है। तभी कुछ बाइक सवार आये और लहरिया कट मारने लग गए , और जब तक सुरक्षा में तैनात जवान कुछ समझ पाते वो बाइकर्स मुख्यमंत्री के काफी नजदीक आ गए जिसकी वजह से नितीश कुमार को खुद को बचने के लिए फुटपाथ पे भागना पड़ा. Bihar: नीतीश कुमार ने कार्यक्रम में अधिकारियों से कहा, काम को जल्दी कर दीजिए। मैं तो शुरू से कह रहा हूं और जल्दी कीजिए। जितनी जल्द करवा देंगे उतना अच्छा है। कब चुनाव होगा कोई नहीं जानता है। कोई जरूर है कि अगले साल ही चुनाव होगा। कोई ठिकाना है पहले चुनाव हो जाए। Santosh Manjhi: आगे की कार्रवाई को लेकर हम सभी से चर्चा करके निर्णय लिया जाएगा। हमारी पार्टी ने अब तक महागठबंधन से अलग कर लिया है। हम तो रुख करना चाहते थे, लेकिन बड़ी पार्टियाँ हमें शामिल नहीं करना चाहती हैं। वे हमारी पार्टी का समापन करना चाहती हैं, इसलिए हमने महागठबंधन से भी अलग होने का निर्णय लिया है। Santosh Suman Manjhi resigns: बता दें कि कई दिनों से अटकलें लगाई जा रही थी कि जीतन राम मांझी और उनकी हम पार्टी महागठबंधन सरकार से खुश नहीं थी। इसके संकेत खुद जीतनराम मांझी लगातार दे रहे थे। उनके बेटे संतोष मांझी भी महागठबंधन पर सवाल उठा रहे थे। जिसके बाद आज उन्होंने नीतीश कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया है। Opposition Meeting: बिहार के बहुजन समाजवादी पार्टी के प्रभारी अनिल सिंह ने कहा है कि उनकी पार्टी ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया है कि वह विपक्ष की एकता का हिस्सा नहीं बनेंगे। उन्होंने कहा है कि उनकी पार्टी लगभग पांच राज्यों में अकेले ही चुनाव लड़ती है और इस बार भी वे अकेले ही चुनाव लड़ेंगे। बीएसपी बिहार के सभी चालीस सीटों पर अपने उम्मीदवारों को उतारेगी। सियासी विश्लेषकों की मानें तो आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोलने के ध्येय विपक्षी दलो की बैठक बुलाई गई है। जिसमें कई नेताओंं के शामिल होने की खबर है। आइए, आगे कि रिपोर्ट में जानते हैं कि कौन-कौन इस बैठक में शामिल होने जा रहे हैं? Bihar: आज से एक साल पहले भी यह पुल इसी तरह गिरी थी। तब विपक्ष में नेता तेजस्वी यादव ने सरकार पर जमकर हमला बोला था, लेकिन अब जब उनके पास बाकायदा पथ निर्माण विभाग है, तो हैरानी इस बात को लेकर हो रही है कि अभी तक उनका इस पर कोई रिएक्शन तक सामने नहीं आया है।
देश में मुस्लिम महिलाओं की हालत को सुधारने की मुहिम में कदम बढ़ाते हुए भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन ने एक ड्राफ्ट तैयार किया है। इस ड्राफ्ट के तहत मुस्लिम समाज में बोलकर तलाक दिए जाने, बहुविवाह और मेहर की रकम पर नए कानून बनाए जाने की बात कही गई है। इस ड्राफ्ट को मुस्लिम मैरिज और डाइवोर्स एक्ट का नाम दिया गया है जिसे बुधवार को जारी किया जाएगा। भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन पिछले सात सालों से इस ड्राफ्ट पर काम कर रहा था जिसमें मुस्लिम विवाह और तलाक के कानून में बदलाव को संहिताबद्ध किया गया है, का मानना है कि इस ड्राफ्ट से देश की मुस्लिम महिलाओं के मौजूदा हालात में सुधार होगा। इस ड्राफ्ट में निकाह के लिए लिए लड़के और लड़कियों की उम्र सीमा भी तय की गई है। इसके तहत निकाह के लिए लड़के की उम्र 21 साल और लड़की की उम्र कम से कम 18 साल होनी चाहिए। ड्राफ्ट में ये भी कहा गया है कि शादी करने वाले लड़के या लड़की में से किसी की भी पहले से शादी ना हुई हो और अगर हुई भी हो तो उसका साथी जीवित ना हो, का मानना है कि इससे बहुविवाह की प्रथा पर रोक लगाई जा सकती है। गौरतलब है कि इस्लामिक लॉ के मुताबिक कोई भी मुस्लिम मर्द चार शादियां कर सकता है। इस ड्राफ्ट में निकाह के वक्त लड़के वालों की तरफ से दी जाने वाली मेहर की रकम पर भी कानून बनाने की बात कही गई है। जिसके तहत मेहर की रकम लड़के के सालाना कमाई से कम नहीं होनी चाहिए और अगर निकाह के 6 महीने के भीतर ये रकम अदा नहीं की गई तो लड़के वालों को इसकी दोगुनी कीमत अदा करनी होगी। फिलहाल कुछ लड़के वाले मेहर के तौर पर 786 रुपये या उससे कम अदा करते हैं। इस ड्राफ्ट में बोलकर दिए जाने वाले तलाक को खत्म करने की वकालत करते हुए तलाक-ए-अहसान के तरीके को अपनाने की हात कही गई है। तलाक के बाद जोड़ों को मतभेद सुलझाने के लिए 3 महीने का वक्त दिया जाएगा और अगर दोनों सहमत हों तो तलाक की अर्जी वापस भी ली जी सकेगी। -सुभाष बुड़ावन वाला, 18, शांतिनाथ कार्नर, खाचरौद।
देश में मुस्लिम महिलाओं की हालत को सुधारने की मुहिम में कदम बढ़ाते हुए भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन ने एक ड्राफ्ट तैयार किया है। इस ड्राफ्ट के तहत मुस्लिम समाज में बोलकर तलाक दिए जाने, बहुविवाह और मेहर की रकम पर नए कानून बनाए जाने की बात कही गई है। इस ड्राफ्ट को मुस्लिम मैरिज और डाइवोर्स एक्ट का नाम दिया गया है जिसे बुधवार को जारी किया जाएगा। भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन पिछले सात सालों से इस ड्राफ्ट पर काम कर रहा था जिसमें मुस्लिम विवाह और तलाक के कानून में बदलाव को संहिताबद्ध किया गया है, का मानना है कि इस ड्राफ्ट से देश की मुस्लिम महिलाओं के मौजूदा हालात में सुधार होगा। इस ड्राफ्ट में निकाह के लिए लिए लड़के और लड़कियों की उम्र सीमा भी तय की गई है। इसके तहत निकाह के लिए लड़के की उम्र इक्कीस साल और लड़की की उम्र कम से कम अट्ठारह साल होनी चाहिए। ड्राफ्ट में ये भी कहा गया है कि शादी करने वाले लड़के या लड़की में से किसी की भी पहले से शादी ना हुई हो और अगर हुई भी हो तो उसका साथी जीवित ना हो, का मानना है कि इससे बहुविवाह की प्रथा पर रोक लगाई जा सकती है। गौरतलब है कि इस्लामिक लॉ के मुताबिक कोई भी मुस्लिम मर्द चार शादियां कर सकता है। इस ड्राफ्ट में निकाह के वक्त लड़के वालों की तरफ से दी जाने वाली मेहर की रकम पर भी कानून बनाने की बात कही गई है। जिसके तहत मेहर की रकम लड़के के सालाना कमाई से कम नहीं होनी चाहिए और अगर निकाह के छः महीने के भीतर ये रकम अदा नहीं की गई तो लड़के वालों को इसकी दोगुनी कीमत अदा करनी होगी। फिलहाल कुछ लड़के वाले मेहर के तौर पर सात सौ छियासी रुपयापये या उससे कम अदा करते हैं। इस ड्राफ्ट में बोलकर दिए जाने वाले तलाक को खत्म करने की वकालत करते हुए तलाक-ए-अहसान के तरीके को अपनाने की हात कही गई है। तलाक के बाद जोड़ों को मतभेद सुलझाने के लिए तीन महीने का वक्त दिया जाएगा और अगर दोनों सहमत हों तो तलाक की अर्जी वापस भी ली जी सकेगी। -सुभाष बुड़ावन वाला, अट्ठारह, शांतिनाथ कार्नर, खाचरौद।
सात विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द से पेगासस मुद्दे पर उन्हें अवगत कराने के लिए समय मांगा है। नई दिल्ली, सात विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द से पेगासस मुद्दे पर उन्हें अवगत कराने के लिए समय मांगा है और कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग की है, उनसे सरकार को संसद सत्र के दौरान दोनों मुद्दों पर चर्चा करने का निर्देश देने का आग्रह किया है। कांग्रेस को छोड़कर सात विपक्षी दलों शिअद, राकांपा, बसपा, जेकेएनसी, माकपा, भाकपा, रालोद ने राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद से "भारत के संविधान और संसदीय नियमों और प्रक्रियाओं की गरिमा को बनाए रखने के लिए" हस्तक्षेप करने के लिए समय मांगा है। राजद के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने कहा कि हम चाहते हैं प्रधानमंत्री और गृहमंत्री आएं और पेगासस पर चर्चा हो क्योंकि पेगासस 4 कॉलम में पढ़ी जाने वाली खबर नहीं। किसी को नहीं पता किसने उपकरण खरीदे और किसने अधिकृत किया? ऐसे कई सवाल हैं। हम चाहते हैं सुप्रीम कोर्ट की अध्यक्षता में इसकी जांच हो। केंद्रीय मंत्री मुख़्तार अब्बास नकवी ने कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे और अधीर रंजन चौधरी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर ऑल पार्टी मीटिंग की मांग रखी थी लेकिन कांग्रेस ने इसका बहिष्कार किया। सरकार सारी चर्चाओं पर बहस के लिए तैयार है लेकिन कांग्रेस पार्टी लगातार सदन को बाधित करने में लगी हुई है।
सात विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द से पेगासस मुद्दे पर उन्हें अवगत कराने के लिए समय मांगा है। नई दिल्ली, सात विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द से पेगासस मुद्दे पर उन्हें अवगत कराने के लिए समय मांगा है और कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग की है, उनसे सरकार को संसद सत्र के दौरान दोनों मुद्दों पर चर्चा करने का निर्देश देने का आग्रह किया है। कांग्रेस को छोड़कर सात विपक्षी दलों शिअद, राकांपा, बसपा, जेकेएनसी, माकपा, भाकपा, रालोद ने राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद से "भारत के संविधान और संसदीय नियमों और प्रक्रियाओं की गरिमा को बनाए रखने के लिए" हस्तक्षेप करने के लिए समय मांगा है। राजद के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने कहा कि हम चाहते हैं प्रधानमंत्री और गृहमंत्री आएं और पेगासस पर चर्चा हो क्योंकि पेगासस चार कॉलम में पढ़ी जाने वाली खबर नहीं। किसी को नहीं पता किसने उपकरण खरीदे और किसने अधिकृत किया? ऐसे कई सवाल हैं। हम चाहते हैं सुप्रीम कोर्ट की अध्यक्षता में इसकी जांच हो। केंद्रीय मंत्री मुख़्तार अब्बास नकवी ने कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे और अधीर रंजन चौधरी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर ऑल पार्टी मीटिंग की मांग रखी थी लेकिन कांग्रेस ने इसका बहिष्कार किया। सरकार सारी चर्चाओं पर बहस के लिए तैयार है लेकिन कांग्रेस पार्टी लगातार सदन को बाधित करने में लगी हुई है।
England vs New Zealand Test 2022: इंग्लैंड में तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में उतरने से पहले न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम को बल्लेबाज हेनरी निकोल्स (Henry Nicholls) के रूप में बड़ा झटका लगा, जो चोट के कारण पूरे दौरे से बाहर हो सकते हैं। कीवी के मुख्य कोच गैरी स्टीड ने खुलासा किया कि माउंट माउंगानुई में कैंप में 30 वर्षीय खिलाड़ी को बल्लेबाजी करते समय चोट लगी थी। सोमवार को चल रहे अभ्यास के बाद उनका स्कैन किया गया। 2 जून से लॉर्डस में सीरीज का पहला टेस्ट मैच खेला जाएगा। दूसरा टेस्ट 10 जून से ट्रेंट ब्रिज में होगा, जबकि अंतिम टेस्ट 23 जून से लीड्स के हेडिंग्ले में होगा।
England vs New Zealand Test दो हज़ार बाईस: इंग्लैंड में तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में उतरने से पहले न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम को बल्लेबाज हेनरी निकोल्स के रूप में बड़ा झटका लगा, जो चोट के कारण पूरे दौरे से बाहर हो सकते हैं। कीवी के मुख्य कोच गैरी स्टीड ने खुलासा किया कि माउंट माउंगानुई में कैंप में तीस वर्षीय खिलाड़ी को बल्लेबाजी करते समय चोट लगी थी। सोमवार को चल रहे अभ्यास के बाद उनका स्कैन किया गया। दो जून से लॉर्डस में सीरीज का पहला टेस्ट मैच खेला जाएगा। दूसरा टेस्ट दस जून से ट्रेंट ब्रिज में होगा, जबकि अंतिम टेस्ट तेईस जून से लीड्स के हेडिंग्ले में होगा।
OGAON SX धर्मोका अनुष्ठान करना आवश्यक है उसी प्रकार उसे दूषित अन्नका भोजन भी त्याग करने योग्य है । अन्नमाश्रित्य तिष्ठन्ति पुंसां पापानि वै यतः । तस्मात्सत्त्वविशुद्धयर्थी दुष्टान्नस्याशनं त्यजेत् ॥ ११ ॥ क्योंकि मनुष्यके सम्पूर्ण पाप अन्नके आश्रय ही स्थित रहते हैं, इसलिये चित्तशुद्धिकी इच्छावाले पुरुषको दुष्टान्न भक्षण करना छोड़ देना चाहिये । दुष्टान्नभक्षणस्यापि सच्चायुद्धेहिं हेतुता । पराशरादिभिः प्रोक्ता तद्वाक्यानि लिखाम्यतः ॥१२॥ पराशरादि स्मृतिकारोंने भी चित्तकी अशुद्धिमें दुष्टान्न-भक्षण - को कारण बतलाया है । अतः अब मैं उनके वचन लिखता हूँ । पराशरस्मृतौ अन्नदोषेण चित्तस्य कालुष्यं सर्वदा भवेत् । कलुपाकृष्टचित्तानां धर्मः सम्यङ् न भासते ॥ १३ ॥ अन्नके दोपसे सदा ही चित्त अशुद्ध होता है, और जिनका चित्त दृपित होता है उन्हें धर्म की यथावत् प्रतीति नहीं हुआ करती । दुष्कृतं निखिलं नृणामन्नाधारे व्यवस्थितम् । तस्य प्रतिग्रहं कुर्यान्नापरीक्ष्य कथञ्चन ॥ १४ ॥ मनुष्योंका सारा पाप अन्नके ही आधारपर स्थित है; अतः अनकी परीक्षा किये बिना उसे कभी ग्रहण न करना चाहिये । सुमुक्षु सर्वस्वसार DOG VOD अकर्तव्यमकर्तव्यं प्राणैः कण्ठगतैरपि । कर्तव्यमेव कर्तव्यं प्राणैः कण्ठगतैरपि ॥१५॥ जो अकर्त्तव्य है उसे प्राणोंके कण्ठगत होनेपर भी नहीं करना चाहिये और जो कर्त्तव्य है उसे ही प्राणोंकी बाजी लगाकर भी करना चाहिये । कर्तव्याशयशुद्धिस्तु भिक्षुकेण विशेषतः । ज्ञानोत्पत्तिनिमित्तत्वात्स्वातन्त्र्यकरणाय च ॥ १६ ॥ ज्ञानोत्पत्तिकी निमित्तरूप होनेसे भिक्षुको स्वातन्त्र्य-प्राप्तिके लिये विशेषरूपसे चित्तकी शुद्धि करनी चाहिये । दुष्टान्नान्यपि चोक्तानि धर्मशास्त्रे हि मानवे । भारतेऽपि तथोक्तान्यनुवदास्यत्र तान्यपि ॥१७॥ इन दुष्टानोंका वर्णन मानव धर्मशास्त्र ( मनुस्मृति ) और महाभारतमें भी किया है; यहाँ मैं उनके वाक्योंको उद्धृत करता हूँ । राजानं तेज आदते शूद्रानं ब्रह्मवर्चसम् । आयुर्हि स्वर्णकारानं यशधर्मावकर्तिनः ॥ १८ ॥ राजाका अन्न प्रभावको, शुद्रका अन्न ब्रह्मतेजको, सुनारका अन्न आयुको और चर्मकारका अन्न यशको क्षीण करता है ।
OGAON SX धर्मोका अनुष्ठान करना आवश्यक है उसी प्रकार उसे दूषित अन्नका भोजन भी त्याग करने योग्य है । अन्नमाश्रित्य तिष्ठन्ति पुंसां पापानि वै यतः । तस्मात्सत्त्वविशुद्धयर्थी दुष्टान्नस्याशनं त्यजेत् ॥ ग्यारह ॥ क्योंकि मनुष्यके सम्पूर्ण पाप अन्नके आश्रय ही स्थित रहते हैं, इसलिये चित्तशुद्धिकी इच्छावाले पुरुषको दुष्टान्न भक्षण करना छोड़ देना चाहिये । दुष्टान्नभक्षणस्यापि सच्चायुद्धेहिं हेतुता । पराशरादिभिः प्रोक्ता तद्वाक्यानि लिखाम्यतः ॥बारह॥ पराशरादि स्मृतिकारोंने भी चित्तकी अशुद्धिमें दुष्टान्न-भक्षण - को कारण बतलाया है । अतः अब मैं उनके वचन लिखता हूँ । पराशरस्मृतौ अन्नदोषेण चित्तस्य कालुष्यं सर्वदा भवेत् । कलुपाकृष्टचित्तानां धर्मः सम्यङ् न भासते ॥ तेरह ॥ अन्नके दोपसे सदा ही चित्त अशुद्ध होता है, और जिनका चित्त दृपित होता है उन्हें धर्म की यथावत् प्रतीति नहीं हुआ करती । दुष्कृतं निखिलं नृणामन्नाधारे व्यवस्थितम् । तस्य प्रतिग्रहं कुर्यान्नापरीक्ष्य कथञ्चन ॥ चौदह ॥ मनुष्योंका सारा पाप अन्नके ही आधारपर स्थित है; अतः अनकी परीक्षा किये बिना उसे कभी ग्रहण न करना चाहिये । सुमुक्षु सर्वस्वसार DOG VOD अकर्तव्यमकर्तव्यं प्राणैः कण्ठगतैरपि । कर्तव्यमेव कर्तव्यं प्राणैः कण्ठगतैरपि ॥पंद्रह॥ जो अकर्त्तव्य है उसे प्राणोंके कण्ठगत होनेपर भी नहीं करना चाहिये और जो कर्त्तव्य है उसे ही प्राणोंकी बाजी लगाकर भी करना चाहिये । कर्तव्याशयशुद्धिस्तु भिक्षुकेण विशेषतः । ज्ञानोत्पत्तिनिमित्तत्वात्स्वातन्त्र्यकरणाय च ॥ सोलह ॥ ज्ञानोत्पत्तिकी निमित्तरूप होनेसे भिक्षुको स्वातन्त्र्य-प्राप्तिके लिये विशेषरूपसे चित्तकी शुद्धि करनी चाहिये । दुष्टान्नान्यपि चोक्तानि धर्मशास्त्रे हि मानवे । भारतेऽपि तथोक्तान्यनुवदास्यत्र तान्यपि ॥सत्रह॥ इन दुष्टानोंका वर्णन मानव धर्मशास्त्र और महाभारतमें भी किया है; यहाँ मैं उनके वाक्योंको उद्धृत करता हूँ । राजानं तेज आदते शूद्रानं ब्रह्मवर्चसम् । आयुर्हि स्वर्णकारानं यशधर्मावकर्तिनः ॥ अट्ठारह ॥ राजाका अन्न प्रभावको, शुद्रका अन्न ब्रह्मतेजको, सुनारका अन्न आयुको और चर्मकारका अन्न यशको क्षीण करता है ।
सर्दियों के मौसम की एक बेहद ठंडी रात। रात केे बारह बज चुके थे। बरखा के सास श्वसुर और ननद कब के अपने अपने कमरों में सो चुके थे।बरखा भी इस समय तक रोज़ सो जाती थी।लेकिन आज उसकी आँखों मे नींद नहीी थी। बरखा ने शेखर से सबंध विचछेद का निरणय कर लिया था।अपने निरणय की सूचना वह उसे देना चाहती थी।वह अभी घर नहीं लौौटा था।इसलिए वह जगकर उसका इन्तजार कर रही थी। बरखा की शादी शेेेखर से दो साल पहले हुई थी।शादी के बाद काफी दिनों तक बरखा का ध्यान पति की उस कमी ली तरफ नही गया था।एक दिन अचानक उसका ध्यान गया।फिर भो नारी सुलभ लज्जा, संकोच और झिझक से वह पति से कुछ कह न सकी।पर कब तक? एक रात शेखर अंतरंग क्षणों के बीच मझधार में छोड़कर उससे अलग हो गया तब उसके मुंह से अनायास निकल गया,"क्या हुआ?" "कुछ नही।"शेखर संछिप्त उत्तर देकर मुँह फेरकर चुपचाप लेट गया।वह प्यासी मछली की तरह बिस्तर में पड़ी छटपटाती रही।उस रात की छटपटाहट ने उसे सोचने के लिए मजबूर कर दिया। शेखर उसे क्यो नही मंज़िल तक पहुंचा पाता?उसे बीच मझधार में छोड़कर क्यो अलग हो जाता है?उसकी कामाग्नि जगाकर शांत क्यो नही कर पाता?उसके शरीर की भूख क्यो नही मिटा पाता? बरखा न अनपढ़ थी।न सेक्स के मामले में अनजान।वह पढ़ती थी।तभी औरतों से सम्बंधित पत्रिकाए पढ़ने लगी थी।उन पत्रिकाओं में स्त्री पुरुष सम्बन्ध और सेक्स के बारे में भी बहुत कुछ होता था।अपनी शादी से पहले उसने रतिकिर्या और कामकला की भी कुछ पुस्तके पढ़ डाली थी।किताबो से अर्जित ज्ञान के द्वारा उसने अपने मन मे उठे प्रश्नो का उत्तर तलाशना चाहा।इस तलाश के दौरान ही उसके दिल मे अचानक विचार आया।कंही शेखर ना मर्द तो नही? छि छि। उसने अपने आप को धिक्कारा।पति के बारे में उसे ऐसा नही सोचना चाहिए था।अपनी सोच पर उसे मन मे दुख हुआ।उसने मन मे आये विचार को झटक कर दिल से अलग कर देना चाहा।लेकिन विचार था कि गीले कपड़े की तरह उससे लिपटता चला गया। उसे शादी के बाद पति के साथ गुज़ारी राते याद आने लगी।हर रात एक सी ही कहानी दोराही गई थी।हर रात पति ने उसके तन की प्यास जगा तो दी थी।लेकिन बुझाया नही था।उसे प्यासा ही तड़पता हुआ छोड़ दिया था।हर रात का अधूरा मिलन, मन मे आये विचार को बल प्रदान करता प्रतीत होता था।। लेकिन मन मे आये विचार को उसने झटक दिया था।हो सकता है,यह सच न होकर मात्र उसका भरम हो।कोई अन्य कारण हो जिसकी वजह से पति उसका साथ न दे पाता हो। वास्विकता क्या है?यह जानने के लिए पति की गतिविधियों पर नज़र रखने लगी। शेखर बिस्तर में आते ही उसके शरीर से छेड़छाड़ करके उसकी काम वासना को जाग्रत कर तो देता।लेकिन पूरी न कर पाता।मंज़िल तक पहुचाने से पहले ही उससे अलग हो जाता।उसके अलग होने पर वह पूछे बिना न रहती,"क्या हुआ?" पत्नी के प्रश्न का उत्तर उसके पास न होता। शेखर चाहे शर्म,झिझक की वजह से बरखा को न बताता हो लेकिन उसे खुद को अपनी कमी का पता चल चुका था। अपनी शारीरिक कमी को दूर करने के लिए उसने शराब का सहारा लिया।वह रोज़ शराब पीकर घर आने लगा।लेकिन शराब उसकी कोई मदद नही कर सकी।शराब पीने के बावजूद वही कहानी दोहराई जाने लगी।तब बरखा को विश्वास हो गया कि शेखर नामर्द है।वह उसकी शारीरिक ज़रूरत को पूरी नही कर सकता।
सर्दियों के मौसम की एक बेहद ठंडी रात। रात केे बारह बज चुके थे। बरखा के सास श्वसुर और ननद कब के अपने अपने कमरों में सो चुके थे।बरखा भी इस समय तक रोज़ सो जाती थी।लेकिन आज उसकी आँखों मे नींद नहीी थी। बरखा ने शेखर से सबंध विचछेद का निरणय कर लिया था।अपने निरणय की सूचना वह उसे देना चाहती थी।वह अभी घर नहीं लौौटा था।इसलिए वह जगकर उसका इन्तजार कर रही थी। बरखा की शादी शेेेखर से दो साल पहले हुई थी।शादी के बाद काफी दिनों तक बरखा का ध्यान पति की उस कमी ली तरफ नही गया था।एक दिन अचानक उसका ध्यान गया।फिर भो नारी सुलभ लज्जा, संकोच और झिझक से वह पति से कुछ कह न सकी।पर कब तक? एक रात शेखर अंतरंग क्षणों के बीच मझधार में छोड़कर उससे अलग हो गया तब उसके मुंह से अनायास निकल गया,"क्या हुआ?" "कुछ नही।"शेखर संछिप्त उत्तर देकर मुँह फेरकर चुपचाप लेट गया।वह प्यासी मछली की तरह बिस्तर में पड़ी छटपटाती रही।उस रात की छटपटाहट ने उसे सोचने के लिए मजबूर कर दिया। शेखर उसे क्यो नही मंज़िल तक पहुंचा पाता?उसे बीच मझधार में छोड़कर क्यो अलग हो जाता है?उसकी कामाग्नि जगाकर शांत क्यो नही कर पाता?उसके शरीर की भूख क्यो नही मिटा पाता? बरखा न अनपढ़ थी।न सेक्स के मामले में अनजान।वह पढ़ती थी।तभी औरतों से सम्बंधित पत्रिकाए पढ़ने लगी थी।उन पत्रिकाओं में स्त्री पुरुष सम्बन्ध और सेक्स के बारे में भी बहुत कुछ होता था।अपनी शादी से पहले उसने रतिकिर्या और कामकला की भी कुछ पुस्तके पढ़ डाली थी।किताबो से अर्जित ज्ञान के द्वारा उसने अपने मन मे उठे प्रश्नो का उत्तर तलाशना चाहा।इस तलाश के दौरान ही उसके दिल मे अचानक विचार आया।कंही शेखर ना मर्द तो नही? छि छि। उसने अपने आप को धिक्कारा।पति के बारे में उसे ऐसा नही सोचना चाहिए था।अपनी सोच पर उसे मन मे दुख हुआ।उसने मन मे आये विचार को झटक कर दिल से अलग कर देना चाहा।लेकिन विचार था कि गीले कपड़े की तरह उससे लिपटता चला गया। उसे शादी के बाद पति के साथ गुज़ारी राते याद आने लगी।हर रात एक सी ही कहानी दोराही गई थी।हर रात पति ने उसके तन की प्यास जगा तो दी थी।लेकिन बुझाया नही था।उसे प्यासा ही तड़पता हुआ छोड़ दिया था।हर रात का अधूरा मिलन, मन मे आये विचार को बल प्रदान करता प्रतीत होता था।। लेकिन मन मे आये विचार को उसने झटक दिया था।हो सकता है,यह सच न होकर मात्र उसका भरम हो।कोई अन्य कारण हो जिसकी वजह से पति उसका साथ न दे पाता हो। वास्विकता क्या है?यह जानने के लिए पति की गतिविधियों पर नज़र रखने लगी। शेखर बिस्तर में आते ही उसके शरीर से छेड़छाड़ करके उसकी काम वासना को जाग्रत कर तो देता।लेकिन पूरी न कर पाता।मंज़िल तक पहुचाने से पहले ही उससे अलग हो जाता।उसके अलग होने पर वह पूछे बिना न रहती,"क्या हुआ?" पत्नी के प्रश्न का उत्तर उसके पास न होता। शेखर चाहे शर्म,झिझक की वजह से बरखा को न बताता हो लेकिन उसे खुद को अपनी कमी का पता चल चुका था। अपनी शारीरिक कमी को दूर करने के लिए उसने शराब का सहारा लिया।वह रोज़ शराब पीकर घर आने लगा।लेकिन शराब उसकी कोई मदद नही कर सकी।शराब पीने के बावजूद वही कहानी दोहराई जाने लगी।तब बरखा को विश्वास हो गया कि शेखर नामर्द है।वह उसकी शारीरिक ज़रूरत को पूरी नही कर सकता।
उदयपुर-हिम्मतनगर आमान परिवर्तन परियोजना में शेष रहा खारवां-चांसदा और जयसमंद के बीच ट्रैक बिछाने का कार्य अब अंतिम चरण में है। इसके बाद इलेक्ट्रिफिकेशन का होगा। उदयपुर से अहमदाबाद ब्रॉडगेज लाइन पर ट्रेन का सफर का सपना अगस्त में ही पूरा होता दिख रहा है। फिलहाल रेलवे उदयपुर जयसमंद के बीच ट्रैक का इसी महीने रेलवे संरक्षा आयुक्त से निरीक्षण करवाने की तैयारी कर रहा है। डूंगरपुर से जयसमंद तक ट्रेक का रेलवे संरक्षा आयुक्त ने पूर्व में निरीक्षण किया था। तबपरियोजना में खरवा चांदा से जयसमंद तक करीब 22 किलोमीटर ट्रैक का निर्माण अधूरा रह गया था, जो अब तकरीबन पूरा हो गया है। माना जा रहा है कि जून के अंतिम या जुलाई के प्रथम सप्ताह तक रेलवे संरक्षा आयुक्त से ट्रेक का निरीक्षण कर सकते हैं। सब कुछ सही रहा तो अगस्त 2022 तक उदयपुर से अहमदाबाद ब्राडगेज पर ट्रेन दौड़ती नजर आएगी। फिलहाल उदयपुर-अहमदाबाद ट्रैक पर डूंगरपुर से असरवा के बीच रेल सेवा का संचालन भी शुरू हो चुका है। एआरओ बद्री प्रसाद का कहना है कि उदयपुर- हिम्मतनगर आमान परिवर्तन को लेकर सिर्फ खरवाचांदा व जयसमंद के बीच निर्माण कार्य शेष बचा था, जो अब लगभग पूरा हो गया है। रेलवे संरक्षा आयुक्त द्वारा खरवा चांदा जयसमंद ट्रेक का निरीक्षण संबंधी कार्य जल्दी पूरा होने की उम्मीद है। खारवा चांदा से जयसमंद के बीच ओडा पुलिया के पास प्रदेश की दूसरी सबसे 821 मीटर लंबी सुरंग है। उदयपुर से अहमदाबाद के रास्ते में नए ट्रेक पर 22 स्टेशन बनाए गए हैं। सीआरएस निरीक्षण के बाद डेमो ट्रेन चलाकर ट्रेक को परखा जाएगा। पहले उदयपुर से हिम्मतनगर तक मीटरगेज लाइन की सुविधा थी। परियोजना में उदयपुर से हिम्मतनगर तक मीटरगेज के स्थान पर ब्रॉडगेज ट्रेक तैयार किया गया है। हिम्मतनगर से अहमदाबाद तक पहले से ब्रॉडगेज लाइन है जिससे उदयपुर से अहमदाबाद तक सीधी कनेक्टिविटी हो जाएगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
उदयपुर-हिम्मतनगर आमान परिवर्तन परियोजना में शेष रहा खारवां-चांसदा और जयसमंद के बीच ट्रैक बिछाने का कार्य अब अंतिम चरण में है। इसके बाद इलेक्ट्रिफिकेशन का होगा। उदयपुर से अहमदाबाद ब्रॉडगेज लाइन पर ट्रेन का सफर का सपना अगस्त में ही पूरा होता दिख रहा है। फिलहाल रेलवे उदयपुर जयसमंद के बीच ट्रैक का इसी महीने रेलवे संरक्षा आयुक्त से निरीक्षण करवाने की तैयारी कर रहा है। डूंगरपुर से जयसमंद तक ट्रेक का रेलवे संरक्षा आयुक्त ने पूर्व में निरीक्षण किया था। तबपरियोजना में खरवा चांदा से जयसमंद तक करीब बाईस किलोग्राममीटर ट्रैक का निर्माण अधूरा रह गया था, जो अब तकरीबन पूरा हो गया है। माना जा रहा है कि जून के अंतिम या जुलाई के प्रथम सप्ताह तक रेलवे संरक्षा आयुक्त से ट्रेक का निरीक्षण कर सकते हैं। सब कुछ सही रहा तो अगस्त दो हज़ार बाईस तक उदयपुर से अहमदाबाद ब्राडगेज पर ट्रेन दौड़ती नजर आएगी। फिलहाल उदयपुर-अहमदाबाद ट्रैक पर डूंगरपुर से असरवा के बीच रेल सेवा का संचालन भी शुरू हो चुका है। एआरओ बद्री प्रसाद का कहना है कि उदयपुर- हिम्मतनगर आमान परिवर्तन को लेकर सिर्फ खरवाचांदा व जयसमंद के बीच निर्माण कार्य शेष बचा था, जो अब लगभग पूरा हो गया है। रेलवे संरक्षा आयुक्त द्वारा खरवा चांदा जयसमंद ट्रेक का निरीक्षण संबंधी कार्य जल्दी पूरा होने की उम्मीद है। खारवा चांदा से जयसमंद के बीच ओडा पुलिया के पास प्रदेश की दूसरी सबसे आठ सौ इक्कीस मीटर लंबी सुरंग है। उदयपुर से अहमदाबाद के रास्ते में नए ट्रेक पर बाईस स्टेशन बनाए गए हैं। सीआरएस निरीक्षण के बाद डेमो ट्रेन चलाकर ट्रेक को परखा जाएगा। पहले उदयपुर से हिम्मतनगर तक मीटरगेज लाइन की सुविधा थी। परियोजना में उदयपुर से हिम्मतनगर तक मीटरगेज के स्थान पर ब्रॉडगेज ट्रेक तैयार किया गया है। हिम्मतनगर से अहमदाबाद तक पहले से ब्रॉडगेज लाइन है जिससे उदयपुर से अहमदाबाद तक सीधी कनेक्टिविटी हो जाएगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
गोड्डाः नगर थाना क्षेत्र के धर्मूडीह गांव के पास मजदूरी मांगने पर एक मजदूर (Laborer) की पिटाई कर दी गई। आठ की आये लोगों ने जमकर पीटा जिससे वो घायल हो गया। बताया जाता है कि वो मुर्शिदाबाद (Murshidabad) के थाना जंगीपुर के दस्तमारा का रहने वाला है। पीड़ित व्यक्ति ने पुलिस को जानकारी देते हुए बताया कि पैसे की मांग पर उनलोगों ने मारपीट की। यहां पुलिस लाइन के भवन निर्माण का कार्य चल रहा है। उसने बताया कि मजदूर एवं महिला मजदूर (Laborers And Women Laborers) भवन निर्माण में कार्य करती हैं। शाम के बाद मजदूरी मांगने के लिए गये तो उनलोगों ने मारपीट करना शुरू कर दिया। को लेकर मामला बढ़ने पर मारपीट की घटना को अंजाम दिया गया। घटना के बाद पुलिस ने उसे सदर अस्पताल (Sadar Hospital) में इलाज के लिए पहुंचाया। वहीं नगर थाना के ASI ने घायल व्यक्ति से रात में ही फर्द बयान ले लिया है। वहीं मामले की जांच में पुलिस जुट गई है। जल्दी ही आरोपियों को दबोच लिया जायेगा।
गोड्डाः नगर थाना क्षेत्र के धर्मूडीह गांव के पास मजदूरी मांगने पर एक मजदूर की पिटाई कर दी गई। आठ की आये लोगों ने जमकर पीटा जिससे वो घायल हो गया। बताया जाता है कि वो मुर्शिदाबाद के थाना जंगीपुर के दस्तमारा का रहने वाला है। पीड़ित व्यक्ति ने पुलिस को जानकारी देते हुए बताया कि पैसे की मांग पर उनलोगों ने मारपीट की। यहां पुलिस लाइन के भवन निर्माण का कार्य चल रहा है। उसने बताया कि मजदूर एवं महिला मजदूर भवन निर्माण में कार्य करती हैं। शाम के बाद मजदूरी मांगने के लिए गये तो उनलोगों ने मारपीट करना शुरू कर दिया। को लेकर मामला बढ़ने पर मारपीट की घटना को अंजाम दिया गया। घटना के बाद पुलिस ने उसे सदर अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचाया। वहीं नगर थाना के ASI ने घायल व्यक्ति से रात में ही फर्द बयान ले लिया है। वहीं मामले की जांच में पुलिस जुट गई है। जल्दी ही आरोपियों को दबोच लिया जायेगा।
कोई भी भावनात्मक जुड़ाव दो लोगों के बीच के बंधन को मजबूत नहीं कर सकता। चाहे दोस्ती हो, प्यार हो या शादी। किसी भी रिश्ते को मजबूत बनाने में भावनात्मक जुड़ाव अहम भूमिका निभाता है। साथ ही पार्टनर के बीच अंतरंगता, विश्वास, पसंद और प्यार बनाए रखना भी जरूरी है। लेकिन समय के साथ दोस्ती, प्यार, शादी जैसे किसी भी रिश्ते में भले ही दिन बीत जाएं, कुछ भावनात्मक जुड़ाव कुछ कम होने की संभावना रहती है। इससे आपके रिश्तों में काफी समय लगेगा। लेकिन अगर आप चाहते हैं कि आपका रिश्ता ऐसी गलतियों के बिना आराम से और सुचारू रूप से चले, तो आपको भावनात्मक जुड़ाव बढ़ाने की जरूरत है। लेकिन ऐसे संकेत हैं कि आपके बीच का भावनात्मक जुड़ाव कम हो गया है। आइए अब इसका पता लगाएं। संचार किसी भी रिश्ते में महत्वपूर्ण है। इसकी कमी के कारण दो लोगों के बीच समस्याएं और संघर्ष उत्पन्न होते हैं। अगर पार्टनर अपने विचार, फीलिंग्स और एक्सपीरियंस शेयर न करें. . तो दोनों एक दूसरे से अलग-थलग महसूस करते हैं। साथ ही भावनात्मक रूप से जुड़ने में भी दिक्कत होती है। अंतरंगता सिर्फ शारीरिक नहीं है। भावना भी। अंतरंगता की कमी, जैसे हाथ पकड़ना, गले मिलना या व्यक्तिगत मामलों के बारे में बात करना, भावनात्मक जुड़ाव की कमी को दर्शाता है। भावनात्मक संबंध बनाने और बनाए रखने के लिए एक साथ समय बिताना महत्वपूर्ण है। यदि साथी एक साथ समय बिताने का प्रयास नहीं करते हैं, तो यह भावनात्मक जुड़ाव की कमी को दर्शाता है। किसी भी रिश्ते में दिक्कतें आना आम बात है। लेकिन भागीदारों को मिलकर मतभेदों को सुलझाना चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता है, तो यह भावनात्मक जुड़ाव की कमी को दर्शाता है। ट्रस्ट भावनात्मक संबंधों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि यह एक न हो तो सब कुछ खो जाता है। अगर कोई भरोसा नहीं है, तो पार्टनर अपने बगल में आदमी होने पर भी दूरी महसूस करता है। भावनात्मक संबंध बनाए रखने के लिए भावनात्मक समर्थन महत्वपूर्ण है। अगर पार्टनर एक-दूसरे को इमोशनल सपोर्ट नहीं देते हैं. . तो यह इमोशनल कनेक्शन की कमी को दर्शाता है। यदि इनमें से कोई भी लक्षण आपके रिश्ते में दिखाई दे तो तुरंत उसका समाधान करें। एक भावनात्मक बंधन विकसित करें। तभी आपका प्यार दशकों तक सुरक्षित रहेगा। आपका जीवन भी आरामदायक और सुगम होगा। दोनों को साथ में क्वालिटी टाइम स्पेंड करना चाहिए, जब कोई प्रॉब्लम हो तो साथ में बैठकर बातें करनी चाहिए, साथ में चीजें करनी चाहिए, एक-दूसरे में प्यार और भरोसा पैदा करना चाहिए। किसी भी रिश्ते में इमोशनल बॉन्ड बहुत जरूरी होता है। लेकिन यही बात तय कर सकती है कि आप दोनों के बीच प्यार बढ़ेगा या घटेगा। पहले संकेत देता है। इन्हें पहचानिए और जीवन को खुशहाल बनाइए। जीवनसाथी के कार्यों के माध्यम से उनकी भावनाओं का निरीक्षण करना चाहिए और उसके अनुसार समायोजन करना चाहिए।
कोई भी भावनात्मक जुड़ाव दो लोगों के बीच के बंधन को मजबूत नहीं कर सकता। चाहे दोस्ती हो, प्यार हो या शादी। किसी भी रिश्ते को मजबूत बनाने में भावनात्मक जुड़ाव अहम भूमिका निभाता है। साथ ही पार्टनर के बीच अंतरंगता, विश्वास, पसंद और प्यार बनाए रखना भी जरूरी है। लेकिन समय के साथ दोस्ती, प्यार, शादी जैसे किसी भी रिश्ते में भले ही दिन बीत जाएं, कुछ भावनात्मक जुड़ाव कुछ कम होने की संभावना रहती है। इससे आपके रिश्तों में काफी समय लगेगा। लेकिन अगर आप चाहते हैं कि आपका रिश्ता ऐसी गलतियों के बिना आराम से और सुचारू रूप से चले, तो आपको भावनात्मक जुड़ाव बढ़ाने की जरूरत है। लेकिन ऐसे संकेत हैं कि आपके बीच का भावनात्मक जुड़ाव कम हो गया है। आइए अब इसका पता लगाएं। संचार किसी भी रिश्ते में महत्वपूर्ण है। इसकी कमी के कारण दो लोगों के बीच समस्याएं और संघर्ष उत्पन्न होते हैं। अगर पार्टनर अपने विचार, फीलिंग्स और एक्सपीरियंस शेयर न करें. . तो दोनों एक दूसरे से अलग-थलग महसूस करते हैं। साथ ही भावनात्मक रूप से जुड़ने में भी दिक्कत होती है। अंतरंगता सिर्फ शारीरिक नहीं है। भावना भी। अंतरंगता की कमी, जैसे हाथ पकड़ना, गले मिलना या व्यक्तिगत मामलों के बारे में बात करना, भावनात्मक जुड़ाव की कमी को दर्शाता है। भावनात्मक संबंध बनाने और बनाए रखने के लिए एक साथ समय बिताना महत्वपूर्ण है। यदि साथी एक साथ समय बिताने का प्रयास नहीं करते हैं, तो यह भावनात्मक जुड़ाव की कमी को दर्शाता है। किसी भी रिश्ते में दिक्कतें आना आम बात है। लेकिन भागीदारों को मिलकर मतभेदों को सुलझाना चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता है, तो यह भावनात्मक जुड़ाव की कमी को दर्शाता है। ट्रस्ट भावनात्मक संबंधों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि यह एक न हो तो सब कुछ खो जाता है। अगर कोई भरोसा नहीं है, तो पार्टनर अपने बगल में आदमी होने पर भी दूरी महसूस करता है। भावनात्मक संबंध बनाए रखने के लिए भावनात्मक समर्थन महत्वपूर्ण है। अगर पार्टनर एक-दूसरे को इमोशनल सपोर्ट नहीं देते हैं. . तो यह इमोशनल कनेक्शन की कमी को दर्शाता है। यदि इनमें से कोई भी लक्षण आपके रिश्ते में दिखाई दे तो तुरंत उसका समाधान करें। एक भावनात्मक बंधन विकसित करें। तभी आपका प्यार दशकों तक सुरक्षित रहेगा। आपका जीवन भी आरामदायक और सुगम होगा। दोनों को साथ में क्वालिटी टाइम स्पेंड करना चाहिए, जब कोई प्रॉब्लम हो तो साथ में बैठकर बातें करनी चाहिए, साथ में चीजें करनी चाहिए, एक-दूसरे में प्यार और भरोसा पैदा करना चाहिए। किसी भी रिश्ते में इमोशनल बॉन्ड बहुत जरूरी होता है। लेकिन यही बात तय कर सकती है कि आप दोनों के बीच प्यार बढ़ेगा या घटेगा। पहले संकेत देता है। इन्हें पहचानिए और जीवन को खुशहाल बनाइए। जीवनसाथी के कार्यों के माध्यम से उनकी भावनाओं का निरीक्षण करना चाहिए और उसके अनुसार समायोजन करना चाहिए।
कैसा रहेगा आपके लिए मंगलवार, 18 अप्रैल, 2023 का राशिफल (Horoscope) और पंचांग (Panchang)। ज्योतिष के अनुसार 18 अप्रैल 2023, मंगलवार का दिन बहुत ही खास है और साथ ही देखिए आज का पंचांग। आज का पंचांग (Panchang) दैनिक सूर्योदय : दिल्ली-प्रातः 05:53, काशी-प्रातः 05. 33, कानपुर-प्रातः 05:42, पटना-प्रातः 05:24, देहरादून-प्रातः 05:48, गोरखपुर-प्रातः 05:30, लखनऊ-प्रातः 05:40 बजे। दैनिक सूर्यास्त : दिल्ली-सायं 06:48, काशी-सायं 06:21, कानपुर-सायं 06:33, पटना-सायं 06:13, देहरादून-सायं 06:45, गोरखपुर-सायं 06:21, लखनऊ-सायं 06. 31 बजे। दैनिक चंद्रोदय : दिल्ली-अर्धरात्रियोत्तर 05. 18, काशी-अर्धरात्रियोत्तर 04:56, कानपुर-सायं 05:06, पटना-04:47, देहरादून-अर्धरात्रियोत्तर 05:14, गोरखपुर-अर्धरात्रियोत्तर 04. 54, लखनऊ-अर्धरात्रियोत्तर 05. 04 बजे। दैनिक चंद्रास्त : दिल्ली-सायं 05:01, काशी-सायं 04:37, कानपुर-सायं 04:49, पटना-सायं 04:28, देहरादून-सायं 04:58, गोरखपुर-सायं 04:36, लखनऊ-सायं 04:46। राहुकालम 03:00 बजे से 04:30 बजे तक। राष्ट्रीय चैत्र 28, शक् संवत् 1945। वैशाख कृष्ण त्रयोदशी, संवत् 2080, सौर (मेष) वैशाख मास की 05, प्रविष्टें। रमजान 26, हिजरी 1444 (मुस्लिम)। बसन्त ऋतु। वैशाख कृष्ण पक्ष त्रयोदशी अप. 13:27 बजे तक, तदन्तर चतुर्दशी तिथि प्रारम्भ। उत्तराभाद्रपद नक्षत्र अर्धरात्रियोत्तर 01:01 बजे तक, तदन्तर रेवती नक्षत्र प्रारम्भ। ऐन्द्र योग सायं 18:10 बजे तक, तदन्तर वैधृति योग प्रारम्भ। चन्द्रमा पूरा दिन-रात मीन राशि में ही संचरण करेगा। पंचक (पचखा), भद्रा अप. 13:28 बजे से अर्धरात्रियोत्तर 00:26 बजे तक, मास शिवरात्रि व्रत। मौसम : उत्तर के अधिकांश क्षेत्रों में तापमान बढ़ेगा। उत्तर-मध्य क्षेत्रों में दिन में तेज धूप होगी और गर्मी बढ़ेगी। कुछ पूर्वोत्तर तराई क्षेत्रों में भी दिन का तापमान थोड़ा बढ़ेगा। मेष : कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेने में मन दुबिधाग्रस्त होगा। नाजुक संबंधों में तालमेल बिठाने का प्रयत्न करें। नये कायार्ें के क्रियान्वयन हेतु प्रयत्न तीव्र होगा। कुछ नई सफलताएं सुखों का आगाज करेंगी। बृषभ : आवेश में लिये निर्णय से पश्चाताप संभव। निर्थक दूसरों की पीठ पीछे आलोचना न करें। विरोधियों की प्रबलता से कार्यक्षेत्र कुछ कठिनाइयां संभव। योजनाओं फलीभूत होंगी। मिथुन : दूसरों की बात इधर से उधर न करें। बिना वजह दूसरों की आलोचना न करें। किसी सहकर्मी के खराब व्यवहार से कष्ट संभव। सगे-संबंधियों के साथ कटुता जैसी स्थिति न बनने दें। कर्क : किसी विपरीतलिंगी संबंध के प्रति आकषर्ण बढ़ेगा। किसी पुराने संबंधी से आकस्मिक भेंट संभव। कार्यक्षेत्र में क्षमताओं का भरपूर लाभ उठाएंगे। रोजगार में समस्याओं से हतोत्साहित न हों। सिंह : असीम प्रतिभाओं के बावजूद भी हीन मन प्रतिभाओं के लाभ से वंचित करेगा। राजनीतिज्ञों की ब्यस्तता बढ़ेगी। मित्रवत संबंधों का लाभ मिलेगा। अच्छी अभिव्यक्ति से संबंधों में मधुरता बढ़ेगी। कन्या : बीती बातों को भूल वर्तमान में जीने की चेष्ठा करें। रोजगार में समस्याओं को लेकर चिंतित होंगे। किसी नई दिशा में सकारात्मक सोच रंग लायेगी। पुरानी घटनाओं के स्मरण से मन को कष्ट संभव। तुला : नैतिक-अनैतिक के बारे में सोचने वाला मन भौतिक परिवेश के साथ तालमेल बिठाने में असमर्थ होगा। आर्थिक प्रगति के लिए मन नई युक्तियों पर केंद्रित होगा। कल्पनाओं में जीना छोड़ें। वृश्चिक : आर्थिक सुदृढ़ता हेतु मन प्रयत्नशील होगा। शिक्षा-प्रतियोगिता में परिश्रम तीव्र होगा। कुछ नये उत्साह व कार्य क्षमता की अनुभूति करेंगे। जीविका क्षेत्र में नये आयाम उत्साहित करेंगे। धनु : नौकरी का वातावरण थोड़ा अरुचिकर होगा। दूसरों की आलोचना से मनोबल कमजोर न होने दें। अपनी क्षमताओं व गुणवत्ता पर भरोसा रखें क्योंकि आगे बहुत सारी सफलताएं मिलेंगी। मकर : प्रयासरत कोई महत्वपूर्ण कार्य हल होने से मन प्रसन्न होगा। रोजगार में कुछ आकस्मिक सफलता का योग है। कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेने में मन दुबिधाग्रस्त होगा। पारिवारिक दायित्वों की पूर्ति में व्यय संभव। कुंभ : परिजनों की छोटी-छोटी बातों का बुरा न माने। रोजगार में नये अवसर उत्साह का संचार करेंगे। आवेश में लिया निर्णय हानिकारक हो सकता है। पुरानी सभी समस्याएं खुद-ब-खुद सुलझ जाएंगी। मीन : ग्रहों की अनुकूलता प्रगति के अच्छे अवसर प्रदान करेगी। किसी बड़ी यात्रा के प्रति उत्साहित होंगे। कोई महत्वपूर्ण आकांक्षा अपनी सार्थकता हेतु उद्वेलित करेगी। महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मन पर दबाव डालेंगी।
कैसा रहेगा आपके लिए मंगलवार, अट्ठारह अप्रैल, दो हज़ार तेईस का राशिफल और पंचांग । ज्योतिष के अनुसार अट्ठारह अप्रैल दो हज़ार तेईस, मंगलवार का दिन बहुत ही खास है और साथ ही देखिए आज का पंचांग। आज का पंचांग दैनिक सूर्योदय : दिल्ली-प्रातः पाँच:तिरेपन, काशी-प्रातः पाँच. तैंतीस, कानपुर-प्रातः पाँच:बयालीस, पटना-प्रातः पाँच:चौबीस, देहरादून-प्रातः पाँच:अड़तालीस, गोरखपुर-प्रातः पाँच:तीस, लखनऊ-प्रातः पाँच:चालीस बजे। दैनिक सूर्यास्त : दिल्ली-सायं छः:अड़तालीस, काशी-सायं छः:इक्कीस, कानपुर-सायं छः:तैंतीस, पटना-सायं छः:तेरह, देहरादून-सायं छः:पैंतालीस, गोरखपुर-सायं छः:इक्कीस, लखनऊ-सायं छः. इकतीस बजे। दैनिक चंद्रोदय : दिल्ली-अर्धरात्रियोत्तर पाँच. अट्ठारह, काशी-अर्धरात्रियोत्तर चार:छप्पन, कानपुर-सायं पाँच:छः, पटना-चार:सैंतालीस, देहरादून-अर्धरात्रियोत्तर पाँच:चौदह, गोरखपुर-अर्धरात्रियोत्तर चार. चौवन, लखनऊ-अर्धरात्रियोत्तर पाँच. चार बजे। दैनिक चंद्रास्त : दिल्ली-सायं पाँच:एक, काशी-सायं चार:सैंतीस, कानपुर-सायं चार:उनचास, पटना-सायं चार:अट्ठाईस, देहरादून-सायं चार:अट्ठावन, गोरखपुर-सायं चार:छत्तीस, लखनऊ-सायं चार:छियालीस। राहुकालम तीन:शून्य बजे से चार:तीस बजे तक। राष्ट्रीय चैत्र अट्ठाईस, शक् संवत् एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस। वैशाख कृष्ण त्रयोदशी, संवत् दो हज़ार अस्सी, सौर वैशाख मास की पाँच, प्रविष्टें। रमजान छब्बीस, हिजरी एक हज़ार चार सौ चौंतालीस । बसन्त ऋतु। वैशाख कृष्ण पक्ष त्रयोदशी अप. तेरह:सत्ताईस बजे तक, तदन्तर चतुर्दशी तिथि प्रारम्भ। उत्तराभाद्रपद नक्षत्र अर्धरात्रियोत्तर एक:एक बजे तक, तदन्तर रेवती नक्षत्र प्रारम्भ। ऐन्द्र योग सायं अट्ठारह:दस बजे तक, तदन्तर वैधृति योग प्रारम्भ। चन्द्रमा पूरा दिन-रात मीन राशि में ही संचरण करेगा। पंचक , भद्रा अप. तेरह:अट्ठाईस बजे से अर्धरात्रियोत्तर शून्य:छब्बीस बजे तक, मास शिवरात्रि व्रत। मौसम : उत्तर के अधिकांश क्षेत्रों में तापमान बढ़ेगा। उत्तर-मध्य क्षेत्रों में दिन में तेज धूप होगी और गर्मी बढ़ेगी। कुछ पूर्वोत्तर तराई क्षेत्रों में भी दिन का तापमान थोड़ा बढ़ेगा। मेष : कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेने में मन दुबिधाग्रस्त होगा। नाजुक संबंधों में तालमेल बिठाने का प्रयत्न करें। नये कायार्ें के क्रियान्वयन हेतु प्रयत्न तीव्र होगा। कुछ नई सफलताएं सुखों का आगाज करेंगी। बृषभ : आवेश में लिये निर्णय से पश्चाताप संभव। निर्थक दूसरों की पीठ पीछे आलोचना न करें। विरोधियों की प्रबलता से कार्यक्षेत्र कुछ कठिनाइयां संभव। योजनाओं फलीभूत होंगी। मिथुन : दूसरों की बात इधर से उधर न करें। बिना वजह दूसरों की आलोचना न करें। किसी सहकर्मी के खराब व्यवहार से कष्ट संभव। सगे-संबंधियों के साथ कटुता जैसी स्थिति न बनने दें। कर्क : किसी विपरीतलिंगी संबंध के प्रति आकषर्ण बढ़ेगा। किसी पुराने संबंधी से आकस्मिक भेंट संभव। कार्यक्षेत्र में क्षमताओं का भरपूर लाभ उठाएंगे। रोजगार में समस्याओं से हतोत्साहित न हों। सिंह : असीम प्रतिभाओं के बावजूद भी हीन मन प्रतिभाओं के लाभ से वंचित करेगा। राजनीतिज्ञों की ब्यस्तता बढ़ेगी। मित्रवत संबंधों का लाभ मिलेगा। अच्छी अभिव्यक्ति से संबंधों में मधुरता बढ़ेगी। कन्या : बीती बातों को भूल वर्तमान में जीने की चेष्ठा करें। रोजगार में समस्याओं को लेकर चिंतित होंगे। किसी नई दिशा में सकारात्मक सोच रंग लायेगी। पुरानी घटनाओं के स्मरण से मन को कष्ट संभव। तुला : नैतिक-अनैतिक के बारे में सोचने वाला मन भौतिक परिवेश के साथ तालमेल बिठाने में असमर्थ होगा। आर्थिक प्रगति के लिए मन नई युक्तियों पर केंद्रित होगा। कल्पनाओं में जीना छोड़ें। वृश्चिक : आर्थिक सुदृढ़ता हेतु मन प्रयत्नशील होगा। शिक्षा-प्रतियोगिता में परिश्रम तीव्र होगा। कुछ नये उत्साह व कार्य क्षमता की अनुभूति करेंगे। जीविका क्षेत्र में नये आयाम उत्साहित करेंगे। धनु : नौकरी का वातावरण थोड़ा अरुचिकर होगा। दूसरों की आलोचना से मनोबल कमजोर न होने दें। अपनी क्षमताओं व गुणवत्ता पर भरोसा रखें क्योंकि आगे बहुत सारी सफलताएं मिलेंगी। मकर : प्रयासरत कोई महत्वपूर्ण कार्य हल होने से मन प्रसन्न होगा। रोजगार में कुछ आकस्मिक सफलता का योग है। कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेने में मन दुबिधाग्रस्त होगा। पारिवारिक दायित्वों की पूर्ति में व्यय संभव। कुंभ : परिजनों की छोटी-छोटी बातों का बुरा न माने। रोजगार में नये अवसर उत्साह का संचार करेंगे। आवेश में लिया निर्णय हानिकारक हो सकता है। पुरानी सभी समस्याएं खुद-ब-खुद सुलझ जाएंगी। मीन : ग्रहों की अनुकूलता प्रगति के अच्छे अवसर प्रदान करेगी। किसी बड़ी यात्रा के प्रति उत्साहित होंगे। कोई महत्वपूर्ण आकांक्षा अपनी सार्थकता हेतु उद्वेलित करेगी। महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मन पर दबाव डालेंगी।
लोहा मनवाया और अपने हुनर के जरिये देश-दुनिया में प्रदेश का नाम रौशन किया। सम्मान दिया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे आयोजन देश की प्रगति, साहित्य, कला, आदि सभी क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित करते हैं। पर पहुंचेगा। विकास के लिए भी बहुत से काम किए हैं, जिनमें आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे, गरीब महिलाओं को 500 रुपये प्रतिमाह की सहायता प्रदान की जा रही है। सपनों को पूरा कर सकें। यह भी पढ़े :इलाहाबाद में हो आना तो इस प्रतिबंध पर ध्यान दें. . . . . . . ! राज कृष्ण मिश्र (साहित्यकार), श्री केवल कुमार (संगीत निर्देशक), डॉ. अनिल कुमार रस्तोगी (अभिनय), प्रो. (डॉ) कमर रहमान (वैज्ञानिक), अनुसंधान) शामिल हैं। यह भी पढ़े :खासखबर EXCLUSIVE:यूपी चुनाव में किसकी क्या है चाल? श्री वेंकट चंगावल्ली (समाज सेवा), डॉ. रतीश चन्द्र अग्रवाल (चिकित्सा), विश्वनाथ (शास्तीय संगीत), श्री काशीनाथ यादव (लोक गीत 'बिरहा'), यादव (कुश्ती), श्री राजेन्द्र सिंह (जल संरक्षण), डॉ. गायन), श्री फारूक अहमद (समाज सेवा) तथा श्री आत्म प्रकाश मिश्र (ब्रॉडकास्टर) यादव (चिकित्सा), डॉ. शिवानी मातनहेलिया (शास्त्रीय संगीत), ज्ञानेन्द्र पाण्डेय (क्रिकेट), श्री विजय शेखर शर्मा (मोबाइल बैंकिंग), पद्मा गिडवानी (गायिका) को भी यश भारती से सम्मानित किया गया है। यह भी पढ़े :मिस्त्री को ग्रुप कंपनियों से हटा सकेंगे टाटा! यह भी पढ़े :मुलायम के लिए इतने अहम् क्यों हैं अमर सिंह? (निर्यातक एवं उद्योगपति), डॉ. आलोक पारीक (होम्योपैथिक चिकित्सा), राजपुरोहित), शेफ श्री गुलाम मोइनुद्दीन कुरैशी (पाक कला), रामकुमार मिश्र (तबला वादक), प्रो0 (डॉ. ) राममोहन पाठक (पत्रकारिता), डॉ. शाहदाब रुदौलवी (साहित्यकार), डॉ. मंसूर हसन (चिकित्सा शिक्षा), दीन मोहम्मद दीन (साहित्य), सुश्री शिखा द्विवेदी (दूरदर्शन), मंत्रीगण एवं जनप्रतिनिधिगण, प्रमुख सचिव सूचना श्री नवनीत सहगल, सहित अन्य अधिकारी एवं सम्मान प्राप्त करने वाले व्यक्तियों की परिजन उपस्थित थे।
लोहा मनवाया और अपने हुनर के जरिये देश-दुनिया में प्रदेश का नाम रौशन किया। सम्मान दिया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे आयोजन देश की प्रगति, साहित्य, कला, आदि सभी क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित करते हैं। पर पहुंचेगा। विकास के लिए भी बहुत से काम किए हैं, जिनमें आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे, गरीब महिलाओं को पाँच सौ रुपयापये प्रतिमाह की सहायता प्रदान की जा रही है। सपनों को पूरा कर सकें। यह भी पढ़े :इलाहाबाद में हो आना तो इस प्रतिबंध पर ध्यान दें. . . . . . . ! राज कृष्ण मिश्र , श्री केवल कुमार , डॉ. अनिल कुमार रस्तोगी , प्रो. कमर रहमान , अनुसंधान) शामिल हैं। यह भी पढ़े :खासखबर EXCLUSIVE:यूपी चुनाव में किसकी क्या है चाल? श्री वेंकट चंगावल्ली , डॉ. रतीश चन्द्र अग्रवाल , विश्वनाथ , श्री काशीनाथ यादव , यादव , श्री राजेन्द्र सिंह , डॉ. गायन), श्री फारूक अहमद तथा श्री आत्म प्रकाश मिश्र यादव , डॉ. शिवानी मातनहेलिया , ज्ञानेन्द्र पाण्डेय , श्री विजय शेखर शर्मा , पद्मा गिडवानी को भी यश भारती से सम्मानित किया गया है। यह भी पढ़े :मिस्त्री को ग्रुप कंपनियों से हटा सकेंगे टाटा! यह भी पढ़े :मुलायम के लिए इतने अहम् क्यों हैं अमर सिंह? , डॉ. आलोक पारीक , राजपुरोहित), शेफ श्री गुलाम मोइनुद्दीन कुरैशी , रामकुमार मिश्र , प्रोशून्य राममोहन पाठक , डॉ. शाहदाब रुदौलवी , डॉ. मंसूर हसन , दीन मोहम्मद दीन , सुश्री शिखा द्विवेदी , मंत्रीगण एवं जनप्रतिनिधिगण, प्रमुख सचिव सूचना श्री नवनीत सहगल, सहित अन्य अधिकारी एवं सम्मान प्राप्त करने वाले व्यक्तियों की परिजन उपस्थित थे।
no entry in garba pandal (Photo Credit: social media) इंदौरः गरबा पंडाल में बिना पहचान पत्र के नो एंट्री. न्यूज नेशन, न्यूज स्टेट की टीम ने नवरात्रि के पहले दिन इंदौर के गरबा पंडाल का रियल्टी चेक किया. रियल्टी चेक में गरबा आयोजन स्थल के मुख्य द्वार पर पहचान पत्र को आयोजक जांचेत हुए मिले. आयोजकों ने गैर हिन्दू के प्रवेश पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है. आयोजकों का कहना है कि गैर हिन्दू अकेले नहीं आ सकते हैं. परिवार के साथ उनका स्वागत है. लव जिहादी मानसिकता वाले लोगों के लिए यह प्रतिबंध लगाया है. गरबा पंडाल में प्रवेश द्वार से लेकर पूरे पंडाल में वॉलिंटियर युवाओं के पहचान पत्र चेक करते हुए मिले गरबा देखने आए लोगों ने कहा यह निर्णय सरकार ने जो लिया है उसका हम समर्थन करते हैं यह निर्णय बहुत पहले ले लेना चाहिए था. गरबा देखने आई लड़कियों और गरबा नृत्य कर रही युवतियों ने कहा सरकार के इस फैसले से हम लोग अपने आप को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं और इस फैसले का स्वागत करते हैं कि अब हम सुरक्षित माहौल के बीच गरबा कर सकेंगे. कुछ लोग पहचान छुपाकर गरबा पंडाल में घुस जाते थे. ऐसे लोगों के लिए यह निर्णय एक बड़ा तमाचा है. हालांकि पहचान पत्र के बिना गरबा पंडाल में एंट्री नहीं होगी इसकी शुरुआत मध्य प्रदेश की कैबिनेट मंत्री उषा ठाकुर के कुछ दिन पहले दिए बयान के बाद से शुरू हुई हो गई थी. उनके इस बयान के बाद से प्रदेश की सियासत गरमाई थी विपक्ष लगातार मंत्री के बयान को लेकर सरकार पर हमलावर है, तो वहीं नवरात्रि के पहले दिन प्रदेश के गृहमंत्री डॉक्टर नरोत्तम मिश्रा ने भी मंत्री उषा ठाकुर के बयान का समर्थन करते हुए बिना पहचान पत्र के गरबा पंडाल में प्रवेश पर प्रतिबंध इसका समर्थन करते हुए गृहमंत्री ने भी मुहर लगा दी. वहीं दूसरी तरफ हिंदूवादी संगठनों ने गैर हिंदू युवकों के गरबा पंडाल में प्रतिबंध को लेकर मोर्चा खोल दिया था इंदौर बजरंग दल के संयोजक तनु शर्मा ने खुली चुनौती देते हुए कह डाला अगर गैर हिंदू युवक गरबा में घुसे तो आएंगे दो पैर में जाएंगे चार कंधों में लगातार धमकी भरी खुली चुनौती हिंदूवादी संगठनों के द्वारा दिया जा रहा है. इस बार मध्य प्रदेश में पहली बार गरबा पंडाल में पहचान पत्र देखकर दी प्रवेश की अनुमति दी जा रही है. लव जिहाद के बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार ने उठाया सख्त कदम विपक्ष सरकार के फैसले पर हुई. हमलावर विपक्ष का कहना है, गरबा गुजरात का लोक नृत्य है मां की उपासना का एक तरीका है ना की पूजा है. फिल्मी धुनों से लेकर जन्मदिन पार्टी और पंडाल से लेकर सड़कों पर लोग गरबा कर रहे हैं. सरकार ने जो फैसला किया है वह सही नहीं है. पहले इसके बारे में हिंदूवादी संगठन के नेताओं को पढ़ना चाहिए था, उसके बाद फिर देना चाहिए था बयान. (रिपोर्ट- मिथलेश)
no entry in garba pandal इंदौरः गरबा पंडाल में बिना पहचान पत्र के नो एंट्री. न्यूज नेशन, न्यूज स्टेट की टीम ने नवरात्रि के पहले दिन इंदौर के गरबा पंडाल का रियल्टी चेक किया. रियल्टी चेक में गरबा आयोजन स्थल के मुख्य द्वार पर पहचान पत्र को आयोजक जांचेत हुए मिले. आयोजकों ने गैर हिन्दू के प्रवेश पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है. आयोजकों का कहना है कि गैर हिन्दू अकेले नहीं आ सकते हैं. परिवार के साथ उनका स्वागत है. लव जिहादी मानसिकता वाले लोगों के लिए यह प्रतिबंध लगाया है. गरबा पंडाल में प्रवेश द्वार से लेकर पूरे पंडाल में वॉलिंटियर युवाओं के पहचान पत्र चेक करते हुए मिले गरबा देखने आए लोगों ने कहा यह निर्णय सरकार ने जो लिया है उसका हम समर्थन करते हैं यह निर्णय बहुत पहले ले लेना चाहिए था. गरबा देखने आई लड़कियों और गरबा नृत्य कर रही युवतियों ने कहा सरकार के इस फैसले से हम लोग अपने आप को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं और इस फैसले का स्वागत करते हैं कि अब हम सुरक्षित माहौल के बीच गरबा कर सकेंगे. कुछ लोग पहचान छुपाकर गरबा पंडाल में घुस जाते थे. ऐसे लोगों के लिए यह निर्णय एक बड़ा तमाचा है. हालांकि पहचान पत्र के बिना गरबा पंडाल में एंट्री नहीं होगी इसकी शुरुआत मध्य प्रदेश की कैबिनेट मंत्री उषा ठाकुर के कुछ दिन पहले दिए बयान के बाद से शुरू हुई हो गई थी. उनके इस बयान के बाद से प्रदेश की सियासत गरमाई थी विपक्ष लगातार मंत्री के बयान को लेकर सरकार पर हमलावर है, तो वहीं नवरात्रि के पहले दिन प्रदेश के गृहमंत्री डॉक्टर नरोत्तम मिश्रा ने भी मंत्री उषा ठाकुर के बयान का समर्थन करते हुए बिना पहचान पत्र के गरबा पंडाल में प्रवेश पर प्रतिबंध इसका समर्थन करते हुए गृहमंत्री ने भी मुहर लगा दी. वहीं दूसरी तरफ हिंदूवादी संगठनों ने गैर हिंदू युवकों के गरबा पंडाल में प्रतिबंध को लेकर मोर्चा खोल दिया था इंदौर बजरंग दल के संयोजक तनु शर्मा ने खुली चुनौती देते हुए कह डाला अगर गैर हिंदू युवक गरबा में घुसे तो आएंगे दो पैर में जाएंगे चार कंधों में लगातार धमकी भरी खुली चुनौती हिंदूवादी संगठनों के द्वारा दिया जा रहा है. इस बार मध्य प्रदेश में पहली बार गरबा पंडाल में पहचान पत्र देखकर दी प्रवेश की अनुमति दी जा रही है. लव जिहाद के बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार ने उठाया सख्त कदम विपक्ष सरकार के फैसले पर हुई. हमलावर विपक्ष का कहना है, गरबा गुजरात का लोक नृत्य है मां की उपासना का एक तरीका है ना की पूजा है. फिल्मी धुनों से लेकर जन्मदिन पार्टी और पंडाल से लेकर सड़कों पर लोग गरबा कर रहे हैं. सरकार ने जो फैसला किया है वह सही नहीं है. पहले इसके बारे में हिंदूवादी संगठन के नेताओं को पढ़ना चाहिए था, उसके बाद फिर देना चाहिए था बयान.
लखनऊ सुपरजाइंट्स से जुड़े खिलाड़ी क्विंटन डी कॉक की तस्वीरें। वियतनाम में पति अभिनव शुक्ला संग रोमांटिक छुट्टियां बिता रही रूबीना दिलाईक। देखिए तस्वीरें। ऋषभ पंत के फिटनेस को लेकर आया बड़ा अपडेट। उनकी हाल की कुछ तस्वीरें। न्यूजीलैंड के कप्तान टॉम लाथम की पत्नी के साथ तस्वीरें। जिया खान सुसाइड मामले में सुनवाई के लिए कोर्ट पहुंचे सूरज पंचोली। राजस्थान रॉयल्स ने सीएसके को 32 रनों से हराया। देखिए मैच से जुड़ी तस्वीरें। फिल्म "यू टर्न" की स्क्रीनिंग पर पहुंची तेजस्वी प्रकाश। नागिन फेम एक्ट्रेस की खूबसूरत तस्वीरें। अक्षय कुमार ने लॉन्च किया अपने क्लॉथिंग ब्रांड का शोरूम। अब कपड़े बेचेंगे खिलाड़ी कुमार। देखिए तस्वीरें।
लखनऊ सुपरजाइंट्स से जुड़े खिलाड़ी क्विंटन डी कॉक की तस्वीरें। वियतनाम में पति अभिनव शुक्ला संग रोमांटिक छुट्टियां बिता रही रूबीना दिलाईक। देखिए तस्वीरें। ऋषभ पंत के फिटनेस को लेकर आया बड़ा अपडेट। उनकी हाल की कुछ तस्वीरें। न्यूजीलैंड के कप्तान टॉम लाथम की पत्नी के साथ तस्वीरें। जिया खान सुसाइड मामले में सुनवाई के लिए कोर्ट पहुंचे सूरज पंचोली। राजस्थान रॉयल्स ने सीएसके को बत्तीस रनों से हराया। देखिए मैच से जुड़ी तस्वीरें। फिल्म "यू टर्न" की स्क्रीनिंग पर पहुंची तेजस्वी प्रकाश। नागिन फेम एक्ट्रेस की खूबसूरत तस्वीरें। अक्षय कुमार ने लॉन्च किया अपने क्लॉथिंग ब्रांड का शोरूम। अब कपड़े बेचेंगे खिलाड़ी कुमार। देखिए तस्वीरें।
लोशन एक निम्न से मध्यम श्यानता का, स्थानिक सम्पाक (चिकित्सीय निर्मिति) है, जिसका प्रयोग बिना कटी-फटी त्वचा पर लगाने के लिए किया जाता है, लोशन के विपरीत क्रीम और जेल की श्यानता उच्च होती है। अधिकांश लोशन जल-में-तेल प्रकार के पायसन (इमल्शन) होते हैं जिनमे सीटायरिल अल्कोहल जैसे पदार्थों का प्रयोग विभिन्न घटकों को पायसन में बनाये रखने के लिए किया जाता है, हालाँकि तेल-में-जल जैसे पायसन लोशन भी तैयार किये जाते हैं। लोशन को आमतौर पर बाहरी त्वचा पर हाथों, एक साफ कपड़े या रूई या चिकित्सीय पट्टी की सहायता से लगाया जाता है, जबकि क्रीम और जेल को आमतौर से एक व्यक्ति अपनी उंगलियों या हथेलियों से ही लगाता है। कई लोशनों को विशेषकर हाथों की क्रीम और चेहरे की क्रीम को एक औषधि के रूप में प्रयोग में नहीं लाया जाता अपितु इनका प्रयोग, विशेष रूप से त्वचा को सिर्फ नरम और मुलायम बनाने में किया जाता है और यह विशेषकर प्रौढ़ और वृद्ध लोगों में बहुत लोकप्रिय हैं। जहाँ तक चेहरे पर उपयोग का प्रश्न है, इन्हें कई मामलों में एक प्रसाधन सामग्री के रूप में भी वर्गीकृत किया जा सकता है। एक त्वचा की देखभाल संबंधी लोशन, क्रीम या जेल पायसन (तेल और पानी का मिश्रण) के प्रमुख घटक जलीय और तैलीय दो प्रावस्थायें, इन दो प्रावस्थाओं के विभाजन को रोकने के लिए पायसीकर और यदि मिलाना हो तो भेषज या भेषज पदार्थ, इसके अतिरिक्त सुगंध, ग्लिसरॉल, पेट्रोलियम जेली, रंजक, परिरक्षक, प्रोटीन और स्थिरण एजेंट जैसे घटक सामान्यतः लोशन में मिलाये जाते हैं।. 5 संबंधोंः त्वचा, पायस (इमल्शन), प्रावस्था, श्यानता, कपास। त्वचा या त्वक् (skin) शरीर का बाह्य आवरण होती है जिसे बाह्यत्वचा (एपिडरमिस) भी कहते हैं। यह वेष्टन प्रणाली का सबसे बड़ा अंग है जो उपकला ऊतकों की कई परतों द्वारा निर्मित होती है और अंतर्निहित मांसपेशियों, अस्थियों, अस्थिबंध (लिगामेंट) और अन्य आंतरिक अंगों की रक्षा करती है। चूंकि यह सीधे वातावरण के संपर्क मे आती है, इसलिए त्वचा रोगजनकों के खिलाफ शरीर की सुरक्षा में एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके अन्य कार्यों मे जैसे तापावरोधन (इन्सुलेशन), तापमान विनियमन, संवेदना, विटामिन डी का संश्लेषण और विटामिन बी फोलेट का संरक्षण करती है। बुरी तरह से क्षतिग्रस्त त्वचा निशान ऊतक बना कर चंगा होने की कोशिश करती है। यह अक्सर रंगहीन और वर्णहीन होता है। मानव मे त्वचा का वर्ण प्रजाति के अनुसार बदलता है और त्वचा का प्रकार शुष्क से लेकर तैलीय हो सकता है। . पायस (इमल्शन) A. दो अमिश्रणीय तरल जिनका अभी पायसन नहीं बना है; B. प्रावस्था II, प्रावस्था I मे परिक्षेपित होने से बना पायसन; C. एक अस्थिर पायसन समय के साथ अलग होता है; D. पृष्ठसक्रियकारक (सरफैक्टेंट) (बैंगनी रेखा) खुद को प्रावस्था II और प्रावस्था I के मध्य लाकर पायसन को स्थायित्व प्रदान करता है। पायस (emulsion) दो या इससे अधिक अमिश्रणीय तरल पदार्थों से बना एक मिश्रण है। एक तरल (परिक्षेपण प्रावस्था) अन्य तरल (सतत प्रावस्था) में परिक्षेपित (फैलता) होता है। कई पायसन तेल/पानी के पायसन होते हैं, जिनमे आहार वसा प्रतिदिन प्रयोग मे आने वाले तेल का एक सामान्य उदाहरण है। पायसन के उदाहरण में शामिल हैं, मक्खन और मार्जरीन, दूध और क्रीम, फोटो फिल्म का प्रकाश संवेदी पक्ष, मैग्मा और धातु काटने मे काम आने वाले तरल। मक्खन और मार्जरीन, मे वसा पानी की बूंदों को चारो ओर से ढक लेता है (एक पानी में तेल पायसन)। दूध और क्रीम, मे पानी, वसा की बूंदों के चारों ओर रहता है (एक तेल में पानी पायसन)। मैग्मा के कुछ प्रकार में, तरल की गोलिकायें NiFe तरल सिलिकेट की एक सतत प्रावस्था के भीतर परिक्षेपित हो सकती हैं। पायसीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा पायसन का निर्माण होता है। पायसन शब्द को तेल क्षेत्र में भी इस्तेमाल किया जाता है जैसे अपरिशोधित कच्चा तेल, तेल और पानी का मिश्रण होता है। श्रेणीःरासायनिक मिश्रण श्रेणीःकलिल श्रेणीःनरम पदार्थ. एक जार में रखा जल तथा तेल का मिश्रण 'द्रव' अवस्था में है किन्तु इसकी दो पूर्नतः भिन्न प्रास्थाएँ हैं। भौतिक विज्ञानों में प्रावस्था (phase) से तात्पर्य किसी ऊष्मागतिकीय प्रणाली के उस प्रक्षेत्र से है जिसमें पदार्थ के सभी भौतिक गुण अपरिवर्तित रहते हैं। घनत्व, परावर्तन गुणांक, रासायनिक संरचना आदि भौतिक गुणों के अन्तर्गत आते हैं। . उपर के द्रव की श्यानता नीचे के द्रव की श्यानता से बहुत कम है। श्यानता (Viscosity) किसी तरल का वह गुण है जिसके कारण वह किसी बाहरी प्रतिबल (स्ट्रेस) या अपरूपक प्रतिबल (शीयर स्ट्रेस) के कारण अपने को विकृत (deform) करने का विरोध करता है। सामान्य शब्दों में, यह उस तरल के गाढे़पन या उसके बहने का प्रतिरोध करने की क्षमता का परिचायक है। उदाहरण के लिये, पानी पतला होता है एवं उसकी श्यानता वनस्पति तेल की अपेक्षा कम होती है जो कि गाढा़ होता है। . कपास चुनती हुई स्त्री मशीन से संस्कारित करने के पहले हाथ से बीज निकालते हुए (२०१०) विश्व के कपास उत्पादक क्षेत्र कपास एक नकदी फसल हैं। इससे रुई तैयार की जाती हैं, जिसे "सफेद सोना" कहा जाता हैं । .
लोशन एक निम्न से मध्यम श्यानता का, स्थानिक सम्पाक है, जिसका प्रयोग बिना कटी-फटी त्वचा पर लगाने के लिए किया जाता है, लोशन के विपरीत क्रीम और जेल की श्यानता उच्च होती है। अधिकांश लोशन जल-में-तेल प्रकार के पायसन होते हैं जिनमे सीटायरिल अल्कोहल जैसे पदार्थों का प्रयोग विभिन्न घटकों को पायसन में बनाये रखने के लिए किया जाता है, हालाँकि तेल-में-जल जैसे पायसन लोशन भी तैयार किये जाते हैं। लोशन को आमतौर पर बाहरी त्वचा पर हाथों, एक साफ कपड़े या रूई या चिकित्सीय पट्टी की सहायता से लगाया जाता है, जबकि क्रीम और जेल को आमतौर से एक व्यक्ति अपनी उंगलियों या हथेलियों से ही लगाता है। कई लोशनों को विशेषकर हाथों की क्रीम और चेहरे की क्रीम को एक औषधि के रूप में प्रयोग में नहीं लाया जाता अपितु इनका प्रयोग, विशेष रूप से त्वचा को सिर्फ नरम और मुलायम बनाने में किया जाता है और यह विशेषकर प्रौढ़ और वृद्ध लोगों में बहुत लोकप्रिय हैं। जहाँ तक चेहरे पर उपयोग का प्रश्न है, इन्हें कई मामलों में एक प्रसाधन सामग्री के रूप में भी वर्गीकृत किया जा सकता है। एक त्वचा की देखभाल संबंधी लोशन, क्रीम या जेल पायसन के प्रमुख घटक जलीय और तैलीय दो प्रावस्थायें, इन दो प्रावस्थाओं के विभाजन को रोकने के लिए पायसीकर और यदि मिलाना हो तो भेषज या भेषज पदार्थ, इसके अतिरिक्त सुगंध, ग्लिसरॉल, पेट्रोलियम जेली, रंजक, परिरक्षक, प्रोटीन और स्थिरण एजेंट जैसे घटक सामान्यतः लोशन में मिलाये जाते हैं।. पाँच संबंधोंः त्वचा, पायस , प्रावस्था, श्यानता, कपास। त्वचा या त्वक् शरीर का बाह्य आवरण होती है जिसे बाह्यत्वचा भी कहते हैं। यह वेष्टन प्रणाली का सबसे बड़ा अंग है जो उपकला ऊतकों की कई परतों द्वारा निर्मित होती है और अंतर्निहित मांसपेशियों, अस्थियों, अस्थिबंध और अन्य आंतरिक अंगों की रक्षा करती है। चूंकि यह सीधे वातावरण के संपर्क मे आती है, इसलिए त्वचा रोगजनकों के खिलाफ शरीर की सुरक्षा में एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके अन्य कार्यों मे जैसे तापावरोधन , तापमान विनियमन, संवेदना, विटामिन डी का संश्लेषण और विटामिन बी फोलेट का संरक्षण करती है। बुरी तरह से क्षतिग्रस्त त्वचा निशान ऊतक बना कर चंगा होने की कोशिश करती है। यह अक्सर रंगहीन और वर्णहीन होता है। मानव मे त्वचा का वर्ण प्रजाति के अनुसार बदलता है और त्वचा का प्रकार शुष्क से लेकर तैलीय हो सकता है। . पायस A. दो अमिश्रणीय तरल जिनका अभी पायसन नहीं बना है; B. प्रावस्था II, प्रावस्था I मे परिक्षेपित होने से बना पायसन; C. एक अस्थिर पायसन समय के साथ अलग होता है; D. पृष्ठसक्रियकारक खुद को प्रावस्था II और प्रावस्था I के मध्य लाकर पायसन को स्थायित्व प्रदान करता है। पायस दो या इससे अधिक अमिश्रणीय तरल पदार्थों से बना एक मिश्रण है। एक तरल अन्य तरल में परिक्षेपित होता है। कई पायसन तेल/पानी के पायसन होते हैं, जिनमे आहार वसा प्रतिदिन प्रयोग मे आने वाले तेल का एक सामान्य उदाहरण है। पायसन के उदाहरण में शामिल हैं, मक्खन और मार्जरीन, दूध और क्रीम, फोटो फिल्म का प्रकाश संवेदी पक्ष, मैग्मा और धातु काटने मे काम आने वाले तरल। मक्खन और मार्जरीन, मे वसा पानी की बूंदों को चारो ओर से ढक लेता है । दूध और क्रीम, मे पानी, वसा की बूंदों के चारों ओर रहता है । मैग्मा के कुछ प्रकार में, तरल की गोलिकायें NiFe तरल सिलिकेट की एक सतत प्रावस्था के भीतर परिक्षेपित हो सकती हैं। पायसीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा पायसन का निर्माण होता है। पायसन शब्द को तेल क्षेत्र में भी इस्तेमाल किया जाता है जैसे अपरिशोधित कच्चा तेल, तेल और पानी का मिश्रण होता है। श्रेणीःरासायनिक मिश्रण श्रेणीःकलिल श्रेणीःनरम पदार्थ. एक जार में रखा जल तथा तेल का मिश्रण 'द्रव' अवस्था में है किन्तु इसकी दो पूर्नतः भिन्न प्रास्थाएँ हैं। भौतिक विज्ञानों में प्रावस्था से तात्पर्य किसी ऊष्मागतिकीय प्रणाली के उस प्रक्षेत्र से है जिसमें पदार्थ के सभी भौतिक गुण अपरिवर्तित रहते हैं। घनत्व, परावर्तन गुणांक, रासायनिक संरचना आदि भौतिक गुणों के अन्तर्गत आते हैं। . उपर के द्रव की श्यानता नीचे के द्रव की श्यानता से बहुत कम है। श्यानता किसी तरल का वह गुण है जिसके कारण वह किसी बाहरी प्रतिबल या अपरूपक प्रतिबल के कारण अपने को विकृत करने का विरोध करता है। सामान्य शब्दों में, यह उस तरल के गाढे़पन या उसके बहने का प्रतिरोध करने की क्षमता का परिचायक है। उदाहरण के लिये, पानी पतला होता है एवं उसकी श्यानता वनस्पति तेल की अपेक्षा कम होती है जो कि गाढा़ होता है। . कपास चुनती हुई स्त्री मशीन से संस्कारित करने के पहले हाथ से बीज निकालते हुए विश्व के कपास उत्पादक क्षेत्र कपास एक नकदी फसल हैं। इससे रुई तैयार की जाती हैं, जिसे "सफेद सोना" कहा जाता हैं । .
जैसे बुझ सा गया था । अढाई सौ रुपये की नौकरी करके उसने सिर्फ अपना ही नहीं, सारी बंगाली जाति का मुँह काला किया है। कम-से-कम सदाव्रत को तो यही लगा। सदाव्रत जैसे खुद ससुर के यहाँ काम करके अपने को खत्म कर रहा है, विनय का भी वही हाल है। हो सकता है मन-ही-मन विनय को सदाव्रत से जलन होती हो। लेकिन उसे क्या मालूम कि दोनो का ही एक हाल है। दोनों ही इस शताब्दी के अर्थ कोलिन्य की बलि है। इंडिया के इस नये वर्णाश्रम धर्म को वेदी पर उन दोनों की बलि चढायी गयी है। क्यों विनय विद्रोह नही कर पाया ? आदमी जिस तरह पहले धर्म के लिए लड़ता था, दुश्मन से लडता था, भूख, नीद, हर चीज से लड़ा है? विनय के सामने तो उस जैसी लाचारी नहीं थी । विनय को तो टी० बी० अस्पताल के रोगी का खर्च चलाना नहीं होता। फिर ? लेकिन अढाई सौ रुपये में विनय को क्या मिला ? डेढ सौ रुपये का टेरिलिन या गैबरडीन मूट ? और लोगों को दिखाने के लिए एक काम । विनय इतने से के लिए फँस गया ! इतने सस्ते दामो मे अपने को बेच दिया ! "पता है एक सूट और दिया है बनने। मोहम्मद अली की दुकान में । तुझे बाद में किसी दिन दिसलाऊंगा । एकदम नये डिज़ाइन की कोटिंग है, चालीस रुपये गज ।" फिर जरा रुककर कहा, "तू जो भी कह भाई, मुसलमान दर्जियो की सो बढ़िया सिलाई कोई नही कर सकता।" अचानक अन्दर से गोविन्द आया । बोला, "छोटे बाबू, आपका टेलीफ़ोन ! " "मेरा टेलीफोन ? कोन है, रे?" विनय ने कहा, "अच्छा तो भाई, मैं चलता हूँ। मेरी बात याद रमना । जल्दी से अन्दर आकर रिसीवर उठाते ही सदाव्रत अवाक् रह गया। मिस्टर बोस का फोन था । "तुम जरा अभी सोघे चले आओ, सदाव्रत । मनिला खूब रो रही है। एक सीरियस मामला हो गया है।" "क्या हुआ ?" "वह तुम आकर ही जान पाओगे । मनिला के नाम एक चिद्री आ है । तुम्हारे अगेन्स्ट कई 'एलिगेशन' हैं । येरी गोरियस ऐलिगेशन्न।" "मेरे अगेन्स्ट ? किसने लिया है ? "नाम नहीं है। लेकिन लगता है ऐसे किसी ने लिखा है, जो तुम्हे बा
जैसे बुझ सा गया था । अढाई सौ रुपये की नौकरी करके उसने सिर्फ अपना ही नहीं, सारी बंगाली जाति का मुँह काला किया है। कम-से-कम सदाव्रत को तो यही लगा। सदाव्रत जैसे खुद ससुर के यहाँ काम करके अपने को खत्म कर रहा है, विनय का भी वही हाल है। हो सकता है मन-ही-मन विनय को सदाव्रत से जलन होती हो। लेकिन उसे क्या मालूम कि दोनो का ही एक हाल है। दोनों ही इस शताब्दी के अर्थ कोलिन्य की बलि है। इंडिया के इस नये वर्णाश्रम धर्म को वेदी पर उन दोनों की बलि चढायी गयी है। क्यों विनय विद्रोह नही कर पाया ? आदमी जिस तरह पहले धर्म के लिए लड़ता था, दुश्मन से लडता था, भूख, नीद, हर चीज से लड़ा है? विनय के सामने तो उस जैसी लाचारी नहीं थी । विनय को तो टीशून्य बीशून्य अस्पताल के रोगी का खर्च चलाना नहीं होता। फिर ? लेकिन अढाई सौ रुपये में विनय को क्या मिला ? डेढ सौ रुपये का टेरिलिन या गैबरडीन मूट ? और लोगों को दिखाने के लिए एक काम । विनय इतने से के लिए फँस गया ! इतने सस्ते दामो मे अपने को बेच दिया ! "पता है एक सूट और दिया है बनने। मोहम्मद अली की दुकान में । तुझे बाद में किसी दिन दिसलाऊंगा । एकदम नये डिज़ाइन की कोटिंग है, चालीस रुपये गज ।" फिर जरा रुककर कहा, "तू जो भी कह भाई, मुसलमान दर्जियो की सो बढ़िया सिलाई कोई नही कर सकता।" अचानक अन्दर से गोविन्द आया । बोला, "छोटे बाबू, आपका टेलीफ़ोन ! " "मेरा टेलीफोन ? कोन है, रे?" विनय ने कहा, "अच्छा तो भाई, मैं चलता हूँ। मेरी बात याद रमना । जल्दी से अन्दर आकर रिसीवर उठाते ही सदाव्रत अवाक् रह गया। मिस्टर बोस का फोन था । "तुम जरा अभी सोघे चले आओ, सदाव्रत । मनिला खूब रो रही है। एक सीरियस मामला हो गया है।" "क्या हुआ ?" "वह तुम आकर ही जान पाओगे । मनिला के नाम एक चिद्री आ है । तुम्हारे अगेन्स्ट कई 'एलिगेशन' हैं । येरी गोरियस ऐलिगेशन्न।" "मेरे अगेन्स्ट ? किसने लिया है ? "नाम नहीं है। लेकिन लगता है ऐसे किसी ने लिखा है, जो तुम्हे बा
चल रहे बुनियादी ढांचे के विकास की समीक्षा के लिए 30 मार्च से लेकर 01 अप्रैल 2019 तक वाइस एडमिरल ए के चावला, एवीएसएम, एनएम, वीएसएम, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, दक्षिणी नौसेना कमान ने लक्षद्वीप और मिनिकॉय द्वीपों में नौसेना यूनिटों का दौरा किया। सबसे पहले उन्होंने बिट्रा द्वीप का दौरा किया, जहां हाल ही में एक नए नौसेना दस्ते के निर्माण की योजना बनाई गई है। सी-इन-सी ने एलएंडएम द्वीपों के भविष्य के विकास सहित आपसी हित के विषयों पर श्री फारूक खान, मुख्य प्रशासक, केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप के साथ चर्चा की। श्रीमती सपना चावला, अध्यक्ष, नौसेना पत्नी कल्याण संघ (दक्षिणी क्षेत्र) दौरे के दौरान सी-इन-सी के साथ थी। 30 मार्च 2019 को, कवारत्ती में सागर प्रहरी बल के कर्मियों के लिए एक नए कॉम्प्लेक्स के और नाविक के पारगमन आवास का उद्घाटन क्रमशः सी-इन-सी और नव्वा अध्यक्षा (एसआर) द्वारा किया गया।
चल रहे बुनियादी ढांचे के विकास की समीक्षा के लिए तीस मार्च से लेकर एक अप्रैल दो हज़ार उन्नीस तक वाइस एडमिरल ए के चावला, एवीएसएम, एनएम, वीएसएम, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, दक्षिणी नौसेना कमान ने लक्षद्वीप और मिनिकॉय द्वीपों में नौसेना यूनिटों का दौरा किया। सबसे पहले उन्होंने बिट्रा द्वीप का दौरा किया, जहां हाल ही में एक नए नौसेना दस्ते के निर्माण की योजना बनाई गई है। सी-इन-सी ने एलएंडएम द्वीपों के भविष्य के विकास सहित आपसी हित के विषयों पर श्री फारूक खान, मुख्य प्रशासक, केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप के साथ चर्चा की। श्रीमती सपना चावला, अध्यक्ष, नौसेना पत्नी कल्याण संघ दौरे के दौरान सी-इन-सी के साथ थी। तीस मार्च दो हज़ार उन्नीस को, कवारत्ती में सागर प्रहरी बल के कर्मियों के लिए एक नए कॉम्प्लेक्स के और नाविक के पारगमन आवास का उद्घाटन क्रमशः सी-इन-सी और नव्वा अध्यक्षा द्वारा किया गया।
Agniveer first batch: अग्निपथ योजना के तहत भर्ती सैनिकों का पहला बैच मंगलवार को नौसेना में शामिल हो गया. अग्निवीर सैनिकों के पहले जत्थे ने आईएनएस चिल्का में पासिंग आउट परेड के साथ अपना प्रशिक्षण पूरा किया। इसकी सबसे खास बात यह है कि परंपरागत रूप से सुबह के समय निकलने वाली परेड अब पहली बार सूर्यास्त के बाद होगी। इस बैच में कितनी महिलाएं हैं? अग्निवीरों के पहले जत्थे में 273 महिला सैनिकों सहित कुल 2,600 अग्निवीर हैं। इन सभी 2,600 अग्निवीरों ने भारतीय नौसेना में अपना 16 सप्ताह का प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा कर लिया है। यह भी पढ़ेंः - पहले अग्निवीर बैच की पासिंग आउट परेड को भारतीय नौसेना के आधिकारिक यूट्यूब चैनल और इंस्टाग्राम पेज पर ऑनलाइन देखा जा सकता है। इसका सीधा प्रसारण दूरदर्शन नेटवर्क पर भी होगा। - पहली बार परेड 28 मार्च को ओडिशा के आईएनएस चिल्का में सूर्यास्त के बाद होगी। 2,600 अग्निवीरों ने पीओपी सेवा, शैक्षणिक और आउटडोर सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रारंभिक चरण के प्रशिक्षण के 16 सप्ताह पूरे कर लिए हैं। - पहले जत्थे में अग्निवीर भी शामिल हैं जो इस साल 26 जनवरी को ड्यूटी के दौरान भारतीय नौसेना के गणतंत्र दिवस परेड दल का हिस्सा थे। - परेड खिलाड़ियों और वरिष्ठ नौसेना अधिकारियों की उपस्थिति में होगी। - भारतीय महिला क्रिकेट टीम की पूर्व कप्तान मिताली राज और पीटी उषा भी इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे। - भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की बेटियां महिला दमकलकर्मियों को पुरस्कार देंगी। - भारतीय नौसेना की योग्य महिला अग्निशामकों में प्रशिक्षण में अव्वल रहने वाली महिला सैनिक को 'जनरल बिपिन रावत रोलिंग ट्रॉफी' भी दी जाएगी। - इस कार्यक्रम में पीओपी वाइस एडमिरल एमए हम्पीहोली, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के अधिकारी शामिल होंगे। - इन अग्निवीरों का प्रशिक्षण अग्निपथ भर्ती योजना के तहत नवंबर 2022 में आईएनएस चिल्का में शुरू हुआ था।
Agniveer first batch: अग्निपथ योजना के तहत भर्ती सैनिकों का पहला बैच मंगलवार को नौसेना में शामिल हो गया. अग्निवीर सैनिकों के पहले जत्थे ने आईएनएस चिल्का में पासिंग आउट परेड के साथ अपना प्रशिक्षण पूरा किया। इसकी सबसे खास बात यह है कि परंपरागत रूप से सुबह के समय निकलने वाली परेड अब पहली बार सूर्यास्त के बाद होगी। इस बैच में कितनी महिलाएं हैं? अग्निवीरों के पहले जत्थे में दो सौ तिहत्तर महिला सैनिकों सहित कुल दो,छः सौ अग्निवीर हैं। इन सभी दो,छः सौ अग्निवीरों ने भारतीय नौसेना में अपना सोलह सप्ताह का प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा कर लिया है। यह भी पढ़ेंः - पहले अग्निवीर बैच की पासिंग आउट परेड को भारतीय नौसेना के आधिकारिक यूट्यूब चैनल और इंस्टाग्राम पेज पर ऑनलाइन देखा जा सकता है। इसका सीधा प्रसारण दूरदर्शन नेटवर्क पर भी होगा। - पहली बार परेड अट्ठाईस मार्च को ओडिशा के आईएनएस चिल्का में सूर्यास्त के बाद होगी। दो,छः सौ अग्निवीरों ने पीओपी सेवा, शैक्षणिक और आउटडोर सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रारंभिक चरण के प्रशिक्षण के सोलह सप्ताह पूरे कर लिए हैं। - पहले जत्थे में अग्निवीर भी शामिल हैं जो इस साल छब्बीस जनवरी को ड्यूटी के दौरान भारतीय नौसेना के गणतंत्र दिवस परेड दल का हिस्सा थे। - परेड खिलाड़ियों और वरिष्ठ नौसेना अधिकारियों की उपस्थिति में होगी। - भारतीय महिला क्रिकेट टीम की पूर्व कप्तान मिताली राज और पीटी उषा भी इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे। - भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की बेटियां महिला दमकलकर्मियों को पुरस्कार देंगी। - भारतीय नौसेना की योग्य महिला अग्निशामकों में प्रशिक्षण में अव्वल रहने वाली महिला सैनिक को 'जनरल बिपिन रावत रोलिंग ट्रॉफी' भी दी जाएगी। - इस कार्यक्रम में पीओपी वाइस एडमिरल एमए हम्पीहोली, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के अधिकारी शामिल होंगे। - इन अग्निवीरों का प्रशिक्षण अग्निपथ भर्ती योजना के तहत नवंबर दो हज़ार बाईस में आईएनएस चिल्का में शुरू हुआ था।
भोजपुर जिले के उदवंतनगर थाना क्षेत्र के आरा-अरवल मुख्य मार्ग पर खरौनी गांव के समीप दो बाइक की आमने-सामने की भिड़ंत हो गई। हादसे में सवार दंपती समेत चार लोग घायलों हो गए। जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए आरा सदर अस्पताल लाया गया। जहां से प्राथमिक उपचार करने के बाद एक की हालत को चिंताजनक देते हुए पटना रेफर कर दिया गया है। जबकि अन्य घायलों का इलाज आरा सदर अस्पताल में कराया जा रहा है। घायलों में एक बाइक पर सवार टाउन थाना क्षेत्र के सी. के. रोड तरी निवासी कमलेश प्रसाद चौरसिया का पुत्र गोलू चौरसिया, नारायणपुर थाना क्षेत्र के धोबड़ी गांव निवासी व उसका मौसेरा भाई सोनू कुमार एवं दूसरे बाइक पर सहार थाना क्षेत्र के नानउर गांव निवासी संतोष कुमार एवं उसकी पत्नी गुड़िया कुमारी शामिल है। घटना के संबंध में बताया जाता है कि संतोष कुमार अपनी पत्नी गुड़िया देवी के साथ एक बाइक पर सवार होकर नानउर गांव से आरा की ओर आ रहे थे। वहीं, गोलू चौरसिया अपने मौसेरे भाई सोनू कुमार के साथ अपने घर सी. के. रोड चौधरियाना से नारायणपुर थाना क्षेत्र के धोबड़ी गांव जा रहा था। इसी बीच उदवंतनगर थाना क्षेत्र के खरौनी गांव के समीप दोनों बाइक में आमने-सामने भिड़ंत हो गई। जिससे चारों बाइक से गिर पड़े और गंभीर रूप से जख्मी हो गए। जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए आरा सदर अस्पताल लाया गया। जहां से प्राथमिक उपचार करने के बाद सोनू कुमार की हालत चिंताजनक देखते हुए पटना रेफर कर दिया गया। जबकि गोलू चौरसिया, संतोष कुमार एवं उसकी पत्नी गुड़िया कुमारी का इलाज आरा सदर अस्पताल में कराया जा रहा है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
भोजपुर जिले के उदवंतनगर थाना क्षेत्र के आरा-अरवल मुख्य मार्ग पर खरौनी गांव के समीप दो बाइक की आमने-सामने की भिड़ंत हो गई। हादसे में सवार दंपती समेत चार लोग घायलों हो गए। जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए आरा सदर अस्पताल लाया गया। जहां से प्राथमिक उपचार करने के बाद एक की हालत को चिंताजनक देते हुए पटना रेफर कर दिया गया है। जबकि अन्य घायलों का इलाज आरा सदर अस्पताल में कराया जा रहा है। घायलों में एक बाइक पर सवार टाउन थाना क्षेत्र के सी. के. रोड तरी निवासी कमलेश प्रसाद चौरसिया का पुत्र गोलू चौरसिया, नारायणपुर थाना क्षेत्र के धोबड़ी गांव निवासी व उसका मौसेरा भाई सोनू कुमार एवं दूसरे बाइक पर सहार थाना क्षेत्र के नानउर गांव निवासी संतोष कुमार एवं उसकी पत्नी गुड़िया कुमारी शामिल है। घटना के संबंध में बताया जाता है कि संतोष कुमार अपनी पत्नी गुड़िया देवी के साथ एक बाइक पर सवार होकर नानउर गांव से आरा की ओर आ रहे थे। वहीं, गोलू चौरसिया अपने मौसेरे भाई सोनू कुमार के साथ अपने घर सी. के. रोड चौधरियाना से नारायणपुर थाना क्षेत्र के धोबड़ी गांव जा रहा था। इसी बीच उदवंतनगर थाना क्षेत्र के खरौनी गांव के समीप दोनों बाइक में आमने-सामने भिड़ंत हो गई। जिससे चारों बाइक से गिर पड़े और गंभीर रूप से जख्मी हो गए। जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए आरा सदर अस्पताल लाया गया। जहां से प्राथमिक उपचार करने के बाद सोनू कुमार की हालत चिंताजनक देखते हुए पटना रेफर कर दिया गया। जबकि गोलू चौरसिया, संतोष कुमार एवं उसकी पत्नी गुड़िया कुमारी का इलाज आरा सदर अस्पताल में कराया जा रहा है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
नयी दिल्ली, 30 जुलाई उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज धन शोधन मामले में किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण के लिए महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख की याचिका पर तीन अगस्त को सुनवाई होगी। देशमुख के वकील ने जब कहा कि राजनीतिज्ञ को दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण दिया जाना चाहिए, तो न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अगले सप्ताह अन्य संबंधित मामलों के साथ याचिका पर सुनवाई की जायेगी और इस पहलू पर भी विचार किया जायेगा। उच्चतम न्यायालय धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के कुछ प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं सहित कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। ईडी ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के 71 वर्षीय नेता को कथित तौर पर 100 करोड़ रुपए की रिश्वत लेने एवं जबरन वसूली करने वाले रैकेट से संबंधित पीएमएलए के तहत दर्ज आपराधिक मामले के संबंध में समन जारी किया था। इसी प्रकरण की वजह से इस साल अप्रैल में देशमुख को इस्तीफा देना पड़ा था। देशमुख और अन्य के खिलाफ ईडी ने उस समय मामला दर्ज किया जब केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने राज्य के पूर्व गृह मंत्री के खिलाफ मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परम बीर सिंह द्वारा लगाये गये कम से कम 100 करोड़ रुपये की रिश्वत के आरोपों से संबंधित भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया। मुंबई के पुलिस आयुक्त के पद से हटाए जाने के बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लिखे अपने पत्र में, सिंह ने आरोप लगाया था कि देशमुख ने निलंबित मुंबई पुलिस सहायक पुलिस निरीक्षक (एपीआई) सचिन वाजे को मुंबई में बार और रेस्तरां से एक महीने में 100 करोड़ रुपये से अधिक की उगाही करने के लिए कहा था। देशमुख को इन आरोपों के बाद अप्रैल में अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था और उन्होंने इन आरोपों को गलत बताते हुये ऐसा कोई काम करने से इनकार किया था। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
नयी दिल्ली, तीस जुलाई उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज धन शोधन मामले में किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण के लिए महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख की याचिका पर तीन अगस्त को सुनवाई होगी। देशमुख के वकील ने जब कहा कि राजनीतिज्ञ को दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण दिया जाना चाहिए, तो न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अगले सप्ताह अन्य संबंधित मामलों के साथ याचिका पर सुनवाई की जायेगी और इस पहलू पर भी विचार किया जायेगा। उच्चतम न्यायालय धन शोधन निवारण अधिनियम के कुछ प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं सहित कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। ईडी ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के इकहत्तर वर्षीय नेता को कथित तौर पर एक सौ करोड़ रुपए की रिश्वत लेने एवं जबरन वसूली करने वाले रैकेट से संबंधित पीएमएलए के तहत दर्ज आपराधिक मामले के संबंध में समन जारी किया था। इसी प्रकरण की वजह से इस साल अप्रैल में देशमुख को इस्तीफा देना पड़ा था। देशमुख और अन्य के खिलाफ ईडी ने उस समय मामला दर्ज किया जब केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने राज्य के पूर्व गृह मंत्री के खिलाफ मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परम बीर सिंह द्वारा लगाये गये कम से कम एक सौ करोड़ रुपये की रिश्वत के आरोपों से संबंधित भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया। मुंबई के पुलिस आयुक्त के पद से हटाए जाने के बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लिखे अपने पत्र में, सिंह ने आरोप लगाया था कि देशमुख ने निलंबित मुंबई पुलिस सहायक पुलिस निरीक्षक सचिन वाजे को मुंबई में बार और रेस्तरां से एक महीने में एक सौ करोड़ रुपये से अधिक की उगाही करने के लिए कहा था। देशमुख को इन आरोपों के बाद अप्रैल में अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था और उन्होंने इन आरोपों को गलत बताते हुये ऐसा कोई काम करने से इनकार किया था। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
सीबीएसई द्वारा हाल ही में जारी विज्ञप्ति के अनुसार अगस्त-सितंबर 2021 की पुनर्परीक्षाओं के लिए स्टूडेंट्स के चार समूह निर्धारित किये गये हैं। नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड कक्षा 12 के ऐसे छात्र-छात्राओं के लिए इंप्रूवमेंट परीक्षाओं का आयोजन 16 अगस्त से 15 सितंबर 2021 तक करेगा, जो कि हाल ही में घोषित कक्षा 12 के नतीजों के अंकों से असंतुष्ट हैं। सीबीएसई के सम्बद्ध स्कूलों में शैक्षणिक वर्ष 2020-21 के दौरान कक्षा 12 के जो भी छात्र-छात्राएं अपने अंकों से असंतुष्ट हैं और अंक सुधार के लिए परीक्षाएं देना चाहते हैं, वे बोर्ड द्वारा इस माह से आयोजित होने वाली इंप्रूवमेंट एग्जाम के लिए आवेदन कर सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार सीबीएसई बोर्ड द्वारा इंप्रूवमेंट एग्जाम को लेकर एक समिति का गठन किया जाना है, जो कि इन परीक्षाओं के आयोजन पर अंतिम निर्णय लेगी। दूसरी तरफ, बोर्ड द्वारा सीबीएसई 12वीं इंप्रूवमेंट एग्जाम को लेकर अधिक जानकारी अभी तक साझा नहीं की गयी है। विषयवार परीक्षा की तारीखों और अन्य अपडेट के लिए स्टूडेंट्स बोर्ड की आफिशियल वेबसाइट पर समय-समय पर विजिट करते रहें। सीबीएसई द्वारा हाल ही में जारी विज्ञप्ति के अनुसार अगस्त-सितंबर 2021 की पुनर्परीक्षाओं के लिए स्टूडेंट्स के चार समूह निर्धारित किये गये हैं। इनमें पत्राचार, प्राइवेट और अंक सुधार के लिए फिर से परीक्षा वाले छात्र। सीबीएसई मार्किंग पालिसी से मिले अंकों से असंतुष्ट छात्र। पहली बार कंपार्टमेंट वाले छात्रों के अलावा सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं के लिए रजिस्ट्रेशन किये ऐसे छात्र जो कि सिर्फ एक विषय की परीक्षा में सम्मिलित होना चाहते हैं। बताया गया है कि सीबीएसई द्वारा इंप्रूवमेंट एग्जाम के लिए सब्जेक्ट के अनुसार टाईम-टेबल और पंजीकरण तिथियां अगस्त 2021 के पहले सप्ताह में घोषित होने की उम्मीद है।
सीबीएसई द्वारा हाल ही में जारी विज्ञप्ति के अनुसार अगस्त-सितंबर दो हज़ार इक्कीस की पुनर्परीक्षाओं के लिए स्टूडेंट्स के चार समूह निर्धारित किये गये हैं। नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड कक्षा बारह के ऐसे छात्र-छात्राओं के लिए इंप्रूवमेंट परीक्षाओं का आयोजन सोलह अगस्त से पंद्रह सितंबर दो हज़ार इक्कीस तक करेगा, जो कि हाल ही में घोषित कक्षा बारह के नतीजों के अंकों से असंतुष्ट हैं। सीबीएसई के सम्बद्ध स्कूलों में शैक्षणिक वर्ष दो हज़ार बीस-इक्कीस के दौरान कक्षा बारह के जो भी छात्र-छात्राएं अपने अंकों से असंतुष्ट हैं और अंक सुधार के लिए परीक्षाएं देना चाहते हैं, वे बोर्ड द्वारा इस माह से आयोजित होने वाली इंप्रूवमेंट एग्जाम के लिए आवेदन कर सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार सीबीएसई बोर्ड द्वारा इंप्रूवमेंट एग्जाम को लेकर एक समिति का गठन किया जाना है, जो कि इन परीक्षाओं के आयोजन पर अंतिम निर्णय लेगी। दूसरी तरफ, बोर्ड द्वारा सीबीएसई बारहवीं इंप्रूवमेंट एग्जाम को लेकर अधिक जानकारी अभी तक साझा नहीं की गयी है। विषयवार परीक्षा की तारीखों और अन्य अपडेट के लिए स्टूडेंट्स बोर्ड की आफिशियल वेबसाइट पर समय-समय पर विजिट करते रहें। सीबीएसई द्वारा हाल ही में जारी विज्ञप्ति के अनुसार अगस्त-सितंबर दो हज़ार इक्कीस की पुनर्परीक्षाओं के लिए स्टूडेंट्स के चार समूह निर्धारित किये गये हैं। इनमें पत्राचार, प्राइवेट और अंक सुधार के लिए फिर से परीक्षा वाले छात्र। सीबीएसई मार्किंग पालिसी से मिले अंकों से असंतुष्ट छात्र। पहली बार कंपार्टमेंट वाले छात्रों के अलावा सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं के लिए रजिस्ट्रेशन किये ऐसे छात्र जो कि सिर्फ एक विषय की परीक्षा में सम्मिलित होना चाहते हैं। बताया गया है कि सीबीएसई द्वारा इंप्रूवमेंट एग्जाम के लिए सब्जेक्ट के अनुसार टाईम-टेबल और पंजीकरण तिथियां अगस्त दो हज़ार इक्कीस के पहले सप्ताह में घोषित होने की उम्मीद है।
नई दिल्लीः लखनऊ यूनिवर्सिटी ने अंडरग्रेजुएट एंट्रेंस टेस्ट (UGET 2022) प्रवेश परीक्षा के एडमिट कार्ड जारी कर दिए हैं. यूनिवर्सिटी ने कई तरह के प्रोग्राम के लिए एडमिट कार्ड जारी किया है. जिन उम्मीदवारों ने लखनऊ यूनिवर्सिटी की यूजीईटी 2022 प्रवेश परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन किया है, वे यूनिवर्सिटी की आधिकारिक वेबसाइट kouniv. ac. in के माध्यम से यूजीईटी प्रवेश पत्र (Lucknow University UGET Admit Card 2022) डाउनलोड कर सकते हैं. यूजीईटी 2022 एडमिट कार्ड ( UGET 2022 admit card) डाउनलोड करने के लिए उम्मीदवारों को अपनी पंजीकरण आईडी और पासवर्ड की आवश्यकता होगी. यूजीईटी 2022 एडमिट कार्ड में उम्मीदवार का नाम, रोल नंबर, परीक्षा का नाम, परीक्षा की तारीख, समय, स्थान, कार्यक्रम, परीक्षा की शिफ्ट, रिपोर्टिंग समय और परीक्षा के दिन के दिशा-निर्देशों दिए गए हैं. लखनऊ यूनिवर्सिटी अंडरग्रेजुएट एंट्रेंस टेस्ट (UGET 2022) का आयोजन 29 अगस्त से करेगा. यह परीक्षा अगले महीने की चार तारीख तक चलेगी. बता दें कि लखनऊ यूनिवर्सिटी यूजीईटी परीक्षा दो पालियों में आयोजित की जाएगी. पहली पाली की परीक्षा सुबह 11:30 बजे से शुरू होकर दोपहर 1 बजे तक चलेगी. जबकि दूसरी पाली की परीक्षा शाम 4 से 5:30 बजे तक होगी. 5. अपना प्रवेश पत्र डाउनलोड करें और भविष्य के संदर्भ के लिए एक प्रिंटआउट लें.
नई दिल्लीः लखनऊ यूनिवर्सिटी ने अंडरग्रेजुएट एंट्रेंस टेस्ट प्रवेश परीक्षा के एडमिट कार्ड जारी कर दिए हैं. यूनिवर्सिटी ने कई तरह के प्रोग्राम के लिए एडमिट कार्ड जारी किया है. जिन उम्मीदवारों ने लखनऊ यूनिवर्सिटी की यूजीईटी दो हज़ार बाईस प्रवेश परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन किया है, वे यूनिवर्सिटी की आधिकारिक वेबसाइट kouniv. ac. in के माध्यम से यूजीईटी प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकते हैं. यूजीईटी दो हज़ार बाईस एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के लिए उम्मीदवारों को अपनी पंजीकरण आईडी और पासवर्ड की आवश्यकता होगी. यूजीईटी दो हज़ार बाईस एडमिट कार्ड में उम्मीदवार का नाम, रोल नंबर, परीक्षा का नाम, परीक्षा की तारीख, समय, स्थान, कार्यक्रम, परीक्षा की शिफ्ट, रिपोर्टिंग समय और परीक्षा के दिन के दिशा-निर्देशों दिए गए हैं. लखनऊ यूनिवर्सिटी अंडरग्रेजुएट एंट्रेंस टेस्ट का आयोजन उनतीस अगस्त से करेगा. यह परीक्षा अगले महीने की चार तारीख तक चलेगी. बता दें कि लखनऊ यूनिवर्सिटी यूजीईटी परीक्षा दो पालियों में आयोजित की जाएगी. पहली पाली की परीक्षा सुबह ग्यारह:तीस बजे से शुरू होकर दोपहर एक बजे तक चलेगी. जबकि दूसरी पाली की परीक्षा शाम चार से पाँच:तीस बजे तक होगी. पाँच. अपना प्रवेश पत्र डाउनलोड करें और भविष्य के संदर्भ के लिए एक प्रिंटआउट लें.
नई दिल्ली - विदेशी बाजारों में मिश्रित रुख रहने के बीच स्थानीय स्तर पर मांग उतरने से बीते सप्ताह दिल्ली थोक जिंस बाजार में खाद्य तेलों में 620 रुपए प्रति क्विंटल तक की गिरावट दर्ज की गई। इनके अलावा चीनी और चना में भी नरमी का रूख रहा, जबकि गेहूं के भाव चढ़ गए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मलेशिया के बुरसा मलेशिया डेरिवेटिव एक्सचेंज में पाम ऑयल का जनवरी वायदा 13 रिंगिट की गिरावट में 2804 रिंगिट प्रति टन पर आ गया। दिसंबर का अमरीकी सोया तेल वायदा हालांकि 1. 19 सेंट की बढ़त में 34. 69 सेंट प्रति पाउंड बोला गया। बीते सप्ताह चीनी के सभी ग्रेडों की कीमतों में दस से 100 रुपए प्रति क्विंटल की नरमी रही।
नई दिल्ली - विदेशी बाजारों में मिश्रित रुख रहने के बीच स्थानीय स्तर पर मांग उतरने से बीते सप्ताह दिल्ली थोक जिंस बाजार में खाद्य तेलों में छः सौ बीस रुपयापए प्रति क्विंटल तक की गिरावट दर्ज की गई। इनके अलावा चीनी और चना में भी नरमी का रूख रहा, जबकि गेहूं के भाव चढ़ गए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मलेशिया के बुरसा मलेशिया डेरिवेटिव एक्सचेंज में पाम ऑयल का जनवरी वायदा तेरह रिंगिट की गिरावट में दो हज़ार आठ सौ चार रिंगिट प्रति टन पर आ गया। दिसंबर का अमरीकी सोया तेल वायदा हालांकि एक. उन्नीस सेंट की बढ़त में चौंतीस. उनहत्तर सेंट प्रति पाउंड बोला गया। बीते सप्ताह चीनी के सभी ग्रेडों की कीमतों में दस से एक सौ रुपयापए प्रति क्विंटल की नरमी रही।
काल में सार्थक होगा। चन्द्रबली जी का कहना है कि संवती विक्रमादित्य के समय में 'पारसीक' नहीं पह्नव प्रभुत्व में थे और पारस पर उनका हो शासन था । हूण भी इस समय थे। अतः रघुवंश के आधार पर यही गुप्त काल कवि का ठीक बैठता है । अभिज्ञानशाकुन्तल का आधार समुद्र व्यवहारी सार्थवाह का संदर्भ इस प्रकार मिलता है - 'समुद्रव्यवहारी सार्थवाहो धनमित्रो नाम नौव्यसने विपन्नः । अनपत्यश्च किल तपस्वी । राजगामी तस्यार्थसंचय इत्येतदमा त्येन लिखितम् । कष्टं खल्वन पत्यता । वेत्रवति । बहुघनत्वाद्बहुपत्नीकेन तत्रभवता भवितव्यम् । विचार्यताम् यदि काचिदापन्सत्त्वा तस्य भार्यासु स्यात् । प्रतिहारी उत्तर देता है - देव इदानीमेव साकेतकस्य श्रेष्ठिनो दुहिता निवृत्तपुंसवना जायाऽस्य श्रूयते । राजा निर्णय देता है --तनु गर्भः रिक्यमर्हति । गच्छ एवममात्यं ब्रूहि ।' -- अभि०, अंक ६ रघुवंश के सर्ग १९ में भो 'गर्भ' का ही राज्याभिषेक होता है ( रघु०, १९९५५, ५६ ) और यहाँ भी गर्भस्थ बालक ही अधिकारी होता है । इतिहास इसकी साक्षी देता है कि पारसीक शापुर, जो समुद्रगुप्त का समकालीन प्रतापी सम्राट् था, गर्भ में ही अभिषिक्त हुआ था और यहाँ भी प्रभावती गुप्ता का शासन अपने बाल तनयों के लिए हुआ था। अतएव इन आधारों पर फिर यह कहा जा सकता है कि वस्तुतः कालिदास चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के राजकवि थे और अपने समय के इतिहास से पूर्ण परिचित थे । समुद्रव्यवहारी घनमित्र की भार्या साकेत के श्रेष्ठी की कन्या है । श्री चन्द्रबली जी का कहना है कि साकेत का नाम भी साभिप्राय लिया गया है। कहा तो यहाँ तक जाता है कि चन्द्रगुप्त के अन्तिम दिन साकेत में बीते थे । जो भी हो, सार्थवाह घनमित्र राजधानी हस्तिनापुर का प्रतीत होता है, क्योंकि प्रतिहारी उसी समय सूचना देता है कि इसकी भार्या साकेत दुहिता अभी पुंसवन से निवृत्त हुई है। अतः इन बातों से जान पड़ता है कि इस समय मध्यदेश के व्यापारी भी समुद्रव्यवहार में प्रमुख बन गए थे । यह प्रमुखता गुप्त शासन की देन है, ऐसा कहा जा सकता है ? । १. कालिदास, चन्द्रबली पाण्डे, पृ० २३ २. कालिदास, चन्द्रबली पाण्डे, पृ० २३
काल में सार्थक होगा। चन्द्रबली जी का कहना है कि संवती विक्रमादित्य के समय में 'पारसीक' नहीं पह्नव प्रभुत्व में थे और पारस पर उनका हो शासन था । हूण भी इस समय थे। अतः रघुवंश के आधार पर यही गुप्त काल कवि का ठीक बैठता है । अभिज्ञानशाकुन्तल का आधार समुद्र व्यवहारी सार्थवाह का संदर्भ इस प्रकार मिलता है - 'समुद्रव्यवहारी सार्थवाहो धनमित्रो नाम नौव्यसने विपन्नः । अनपत्यश्च किल तपस्वी । राजगामी तस्यार्थसंचय इत्येतदमा त्येन लिखितम् । कष्टं खल्वन पत्यता । वेत्रवति । बहुघनत्वाद्बहुपत्नीकेन तत्रभवता भवितव्यम् । विचार्यताम् यदि काचिदापन्सत्त्वा तस्य भार्यासु स्यात् । प्रतिहारी उत्तर देता है - देव इदानीमेव साकेतकस्य श्रेष्ठिनो दुहिता निवृत्तपुंसवना जायाऽस्य श्रूयते । राजा निर्णय देता है --तनु गर्भः रिक्यमर्हति । गच्छ एवममात्यं ब्रूहि ।' -- अभिशून्य, अंक छः रघुवंश के सर्ग उन्नीस में भो 'गर्भ' का ही राज्याभिषेक होता है और यहाँ भी गर्भस्थ बालक ही अधिकारी होता है । इतिहास इसकी साक्षी देता है कि पारसीक शापुर, जो समुद्रगुप्त का समकालीन प्रतापी सम्राट् था, गर्भ में ही अभिषिक्त हुआ था और यहाँ भी प्रभावती गुप्ता का शासन अपने बाल तनयों के लिए हुआ था। अतएव इन आधारों पर फिर यह कहा जा सकता है कि वस्तुतः कालिदास चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के राजकवि थे और अपने समय के इतिहास से पूर्ण परिचित थे । समुद्रव्यवहारी घनमित्र की भार्या साकेत के श्रेष्ठी की कन्या है । श्री चन्द्रबली जी का कहना है कि साकेत का नाम भी साभिप्राय लिया गया है। कहा तो यहाँ तक जाता है कि चन्द्रगुप्त के अन्तिम दिन साकेत में बीते थे । जो भी हो, सार्थवाह घनमित्र राजधानी हस्तिनापुर का प्रतीत होता है, क्योंकि प्रतिहारी उसी समय सूचना देता है कि इसकी भार्या साकेत दुहिता अभी पुंसवन से निवृत्त हुई है। अतः इन बातों से जान पड़ता है कि इस समय मध्यदेश के व्यापारी भी समुद्रव्यवहार में प्रमुख बन गए थे । यह प्रमुखता गुप्त शासन की देन है, ऐसा कहा जा सकता है ? । एक. कालिदास, चन्द्रबली पाण्डे, पृशून्य तेईस दो. कालिदास, चन्द्रबली पाण्डे, पृशून्य तेईस
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। कोरिफ़ेनिडाए (Coryphaenidae) समुद्र में मिलने वाली पर्सिफ़ोर्मेज़ गण की किरण-फ़िन मछलियाँ हैं। इस गण में केवल एक ही 'कोरिफ़ेना' (Coryphaena) नामक वंश आता है जिसमें दो जीववैज्ञानिक जातियाँ हैं। इन मछिलयों की सबसे बड़ी पहचान एक बड़ा, चकोर लेकिन चपटा सिर, दो गहरे काँटों वाली दुम और पीठ पर शरीर के आगे से लेकर अंत तक चलने वाला एक फ़िन होतीं हैं। इसे आम भाषा में 'डॉलफ़िनफ़िश' (Dolphinfish) कहा जाता है हालांकि इस मछली का डॉलफ़िन (सूंस) से कोई सम्बन्ध नहीं है - डॉलफ़िन वायु से सांस लेने वाली एक स्तनधारी होती है जबकि डॉलफ़िनफ़िश पानी में सांस लेने वाली एक मछली है। डॉलफ़िनफ़िश समुद्र में सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली मछिलियों में से एक है और इसका आकार ६ फ़ुट लम्बा और वज़न ४० किलो तक पहुँच सकता है। इसलिए अन्य मछलियाँ इसका बहुत शिकार करती हैं और मछुआरे भी इन्हें बहुत पकड़ते हैं। क्योंकि डॉलफ़िन एक बुद्धिमान स्तनधारी माना जाता है इसलिए बहुत से लोग उसे खाना नापसंद करते हैं इसलिए डॉलफ़िनफ़िश को अक्सर 'माही-माही' के नाम से बेचा जाता है ताकि लोग इसे ग़लती से डॉलफ़िन न समझ बैठें।, Maurice Burton, Robert Burton, pp. प्राणी या जंतु या जानवर 'ऐनिमेलिया' (Animalia) या मेटाज़ोआ (Metazoa) जगत के बहुकोशिकीय और सुकेंद्रिक जीवों का एक मुख्य समूह है। पैदा होने के बाद जैसे-जैसे कोई प्राणी बड़ा होता है उसकी शारीरिक योजना निर्धारित रूप से विकसित होती जाती है, हालांकि कुछ प्राणी जीवन में आगे जाकर कायान्तरण (metamorphosis) की प्रकिया से गुज़रते हैं। अधिकांश जंतु गतिशील होते हैं, अर्थात अपने आप और स्वतंत्र रूप से गति कर सकते हैं। ज्यादातर जंतु परपोषी भी होते हैं, अर्थात वे जीने के लिए दूसरे जंतु पर निर्भर रहते हैं। अधिकतम ज्ञात जंतु संघ 542 करोड़ साल पहले कैम्ब्रियन विस्फोट के दौरान जीवाश्म रिकॉर्ड में समुद्री प्रजातियों के रूप में प्रकट हुए। . कोरिफ़ेनिडाए और प्राणी आम में 3 बातें हैं (यूनियनपीडिया में): प्राणी, स्तनधारी, कार्ल लीनियस। प्राणी या जंतु या जानवर 'ऐनिमेलिया' (Animalia) या मेटाज़ोआ (Metazoa) जगत के बहुकोशिकीय और सुकेंद्रिक जीवों का एक मुख्य समूह है। पैदा होने के बाद जैसे-जैसे कोई प्राणी बड़ा होता है उसकी शारीरिक योजना निर्धारित रूप से विकसित होती जाती है, हालांकि कुछ प्राणी जीवन में आगे जाकर कायान्तरण (metamorphosis) की प्रकिया से गुज़रते हैं। अधिकांश जंतु गतिशील होते हैं, अर्थात अपने आप और स्वतंत्र रूप से गति कर सकते हैं। ज्यादातर जंतु परपोषी भी होते हैं, अर्थात वे जीने के लिए दूसरे जंतु पर निर्भर रहते हैं। अधिकतम ज्ञात जंतु संघ 542 करोड़ साल पहले कैम्ब्रियन विस्फोट के दौरान जीवाश्म रिकॉर्ड में समुद्री प्रजातियों के रूप में प्रकट हुए। . यह प्राणी जगत का एक समूह है, जो अपने नवजात को दूध पिलाते हैं जो इनकी (मादाओं के) स्तन ग्रंथियों से निकलता है। यह कशेरुकी होते हैं और इनकी विशेषताओं में इनके शरीर में बाल, कान के मध्य भाग में तीन हड्डियाँ तथा यह नियततापी प्राणी हैं। स्तनधारियों का आकार २९-३३ से.मी. कार्ल लीनियस (लैटिनः Carolus Linnaeus) या कार्ल वॉन लिने (२३ मई १७०७ - १० जनवरी १७७८) एक स्वीडिश वनस्पतिशास्त्री, चिकित्सक और जीव विज्ञानी थे, जिन्होने द्विपद नामकरण की आधुनिक अवधारणा की नींव रखी थी। इन्हें आधुनिक वर्गिकी (वर्गीकरण) के पिता के रूप में जाना जाता है साथ ही यह आधुनिक पारिस्थितिकी के प्रणेताओं मे से भी एक हैं। . कोरिफ़ेनिडाए 15 संबंध है और प्राणी 66 है। वे आम 3 में है, समानता सूचकांक 3.70% है = 3 / (15 + 66)। यह लेख कोरिफ़ेनिडाए और प्राणी के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। कोरिफ़ेनिडाए समुद्र में मिलने वाली पर्सिफ़ोर्मेज़ गण की किरण-फ़िन मछलियाँ हैं। इस गण में केवल एक ही 'कोरिफ़ेना' नामक वंश आता है जिसमें दो जीववैज्ञानिक जातियाँ हैं। इन मछिलयों की सबसे बड़ी पहचान एक बड़ा, चकोर लेकिन चपटा सिर, दो गहरे काँटों वाली दुम और पीठ पर शरीर के आगे से लेकर अंत तक चलने वाला एक फ़िन होतीं हैं। इसे आम भाषा में 'डॉलफ़िनफ़िश' कहा जाता है हालांकि इस मछली का डॉलफ़िन से कोई सम्बन्ध नहीं है - डॉलफ़िन वायु से सांस लेने वाली एक स्तनधारी होती है जबकि डॉलफ़िनफ़िश पानी में सांस लेने वाली एक मछली है। डॉलफ़िनफ़िश समुद्र में सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली मछिलियों में से एक है और इसका आकार छः फ़ुट लम्बा और वज़न चालीस किलो तक पहुँच सकता है। इसलिए अन्य मछलियाँ इसका बहुत शिकार करती हैं और मछुआरे भी इन्हें बहुत पकड़ते हैं। क्योंकि डॉलफ़िन एक बुद्धिमान स्तनधारी माना जाता है इसलिए बहुत से लोग उसे खाना नापसंद करते हैं इसलिए डॉलफ़िनफ़िश को अक्सर 'माही-माही' के नाम से बेचा जाता है ताकि लोग इसे ग़लती से डॉलफ़िन न समझ बैठें।, Maurice Burton, Robert Burton, pp. प्राणी या जंतु या जानवर 'ऐनिमेलिया' या मेटाज़ोआ जगत के बहुकोशिकीय और सुकेंद्रिक जीवों का एक मुख्य समूह है। पैदा होने के बाद जैसे-जैसे कोई प्राणी बड़ा होता है उसकी शारीरिक योजना निर्धारित रूप से विकसित होती जाती है, हालांकि कुछ प्राणी जीवन में आगे जाकर कायान्तरण की प्रकिया से गुज़रते हैं। अधिकांश जंतु गतिशील होते हैं, अर्थात अपने आप और स्वतंत्र रूप से गति कर सकते हैं। ज्यादातर जंतु परपोषी भी होते हैं, अर्थात वे जीने के लिए दूसरे जंतु पर निर्भर रहते हैं। अधिकतम ज्ञात जंतु संघ पाँच सौ बयालीस करोड़ साल पहले कैम्ब्रियन विस्फोट के दौरान जीवाश्म रिकॉर्ड में समुद्री प्रजातियों के रूप में प्रकट हुए। . कोरिफ़ेनिडाए और प्राणी आम में तीन बातें हैं : प्राणी, स्तनधारी, कार्ल लीनियस। प्राणी या जंतु या जानवर 'ऐनिमेलिया' या मेटाज़ोआ जगत के बहुकोशिकीय और सुकेंद्रिक जीवों का एक मुख्य समूह है। पैदा होने के बाद जैसे-जैसे कोई प्राणी बड़ा होता है उसकी शारीरिक योजना निर्धारित रूप से विकसित होती जाती है, हालांकि कुछ प्राणी जीवन में आगे जाकर कायान्तरण की प्रकिया से गुज़रते हैं। अधिकांश जंतु गतिशील होते हैं, अर्थात अपने आप और स्वतंत्र रूप से गति कर सकते हैं। ज्यादातर जंतु परपोषी भी होते हैं, अर्थात वे जीने के लिए दूसरे जंतु पर निर्भर रहते हैं। अधिकतम ज्ञात जंतु संघ पाँच सौ बयालीस करोड़ साल पहले कैम्ब्रियन विस्फोट के दौरान जीवाश्म रिकॉर्ड में समुद्री प्रजातियों के रूप में प्रकट हुए। . यह प्राणी जगत का एक समूह है, जो अपने नवजात को दूध पिलाते हैं जो इनकी स्तन ग्रंथियों से निकलता है। यह कशेरुकी होते हैं और इनकी विशेषताओं में इनके शरीर में बाल, कान के मध्य भाग में तीन हड्डियाँ तथा यह नियततापी प्राणी हैं। स्तनधारियों का आकार उनतीस-तैंतीस से.मी. कार्ल लीनियस या कार्ल वॉन लिने एक स्वीडिश वनस्पतिशास्त्री, चिकित्सक और जीव विज्ञानी थे, जिन्होने द्विपद नामकरण की आधुनिक अवधारणा की नींव रखी थी। इन्हें आधुनिक वर्गिकी के पिता के रूप में जाना जाता है साथ ही यह आधुनिक पारिस्थितिकी के प्रणेताओं मे से भी एक हैं। . कोरिफ़ेनिडाए पंद्रह संबंध है और प्राणी छयासठ है। वे आम तीन में है, समानता सूचकांक तीन.सत्तर% है = तीन / । यह लेख कोरिफ़ेनिडाए और प्राणी के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
: लोकतंत्र के चौथे खंभे (पत्रकारिता) को सूचना के अधिकार के दायरे में लाने के संदर्भ में आरटीआई एक्टिविस्ट अफरोज आलम साहिल का एक खुला पत्र : सेवा में, महोदय, मैं अफ़रोज़ आलम साहिल। पत्रकार होने के साथ-साथ एक आरटीआई एक्टिविस्ट भी हूं। मैं कुछ कहना-मांगना चाहता हूं। मेरी मांग है कि लोकतंत्र के चौथे खंभे यानी मीडिया को सूचना के अधिकार अधिनियम-2005 के दायरे में लाया जाए। लोकतंत्र के पहले तीनों खंभे सूचना के अधिकार अधिनियम-2005 के दायरे में आते हैं। यह कानून कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका तीनों पर लागू होता है। इसका मक़सद साफ है कि लोकतंत्र को मज़बूत किया जा सके। इसी मक़सद की मज़बूती की खातिर मेरी ये मांग है कि लोकतंत्र के चौथे खंभे यानी मीडिया को भी सूचना के अधिकार अधिनियम-2005 के दायरे में लाया जाए, ताकि लोकतंत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता को हर स्तर पर लागू किया जा सके। दरअसल, पिछले कुछ दिनों में कई ऐसे वाक़्यात हुए हैं, जिन्होंने मीडिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे कई मीडिया समूह हैं, जिनकी आमदनी और निवेश संदेह के दायरे में है। ऐसे कई पत्रकार भी हैं जिनकी संपत्ति उनकी आय के ज्ञात स्त्रोतों से कई गुना ज़्यादा है और ये सब उसी मीडिया के हिस्सा हैं, जो समाज के तमाम तबकों से लोकतंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करता है। ये उसी मीडिया के लोग हैं, जो राजनेताओं से लेकर अधिकारियों और न्यायपालिका के प्रतिनिधियों की आय के स्त्रोतों की छानबीन में खासी दिलचस्पी दिखाता है और उस पर तमाम तरह के सवाल खड़े करता है। मीडिया इस बात की वकालत करता है कि समाज और लोकतंत्र के ये तमाम तबके अपनी आय का ब्यौरा सार्वजनिक करें। सार्वजनिक तौर पर अपनी ईमानदारी और पारदर्शिता का सबूत दें। फिर सवाल ये उठता है कि आखिर ये मानक खुद मीडिया पर लागू क्यों न हो। समाज और लोकतंत्र के दूसरे तबकों की खातिर जवाबदेही और पारदर्शिता की वकालत करने वाला मीडिया अपनी जवाबदेही और अपनी पारदर्शिता के सवाल से क्यों बचना चाहता है। आख़िर मीडिया इस बात की मांग क्यों नहीं करता कि ख़ुद उसे भी सूचना के अधिकार अधिनियम-2005 के दायरे में लाया जाए। 1. अगर NDTV 24X7 की ग्रुप एडिटर बरखा दत्त और हिन्दुस्तान टाईम्स ग्रुप के एडिटर वीर सांघवी का नाम टेलीकॉम घोटाले के मामले में सीबीआई के दस्तावेज़ों में बतौर दलाल दर्ज है, तो इन लोगों की आय का ब्यौरा सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाना चाहिए या इस घटना (या दुर्घटना) के सामने आने के बाद सभी पत्रकारों और माडिया हाउस को स्वेच्छा से अपनी संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक क्यों नहीं कर देना चाहिए? 2. अगर संसद नोटकांड मामले में CNN-IBN के एडिटर-इन-चीफ और मालिक राजदीप सरदेसाई का नाम बतौर सीडी मैनेजर सामने आता है तो उनकी संपत्ति की छानबीन क्यों नहीं की जानी चाहिए? एक पत्रकार के मालिक बनने की राह में लिए गए तमाम फायदों की कलई सूचना के अधिकार अधिनियम-2005 के ज़रिए क्यों नहीं खुलनी चाहिए? क्या पत्रकारों को पत्रकार होने के नाते सूचना के अधिकार का इस्तेमाल सिर्फ दूसरों के खिलाफ करने का कोई विशेषाधिकार हासिल है? 3. अगर इंडिया टुडे के ग्रुप एडिटर रहे प्रभु चावला अमर सिंह की चर्चित सीडी में डिलिंग करते हुए सुनाई दे रहे हैं और उनके बेटे अंकुर चावला का नाम सीबीआई के दस्तावेजों में बतौर वित्तीय घालमेल के दलाल के तौर पर दर्ज है तो क्यों नहीं प्रभु चावला की वित्तीय और ज़मीनी संपत्तियों का ब्यौरा सामने लाया जाए? ये तीन सवाल तो सिर्फ उदहारण भर हैं। ऐसे न जाने कितने मीडिया हाउस और पत्रकार हैं, जिन्होंने लोकतंत्र के चौथे खंभे की आड़ में भ्रष्टाचार की गंगोत्री बहा रखी है। इन तमाम तथ्यों और लोकतंत्र की प्रतिबद्धता के नाम पर मेरी आपसे ये मांग है कि कृपया मीडिया को भी सूचना के अधिकार अधिनियम-2005 के दायरे में लाने की पहल की जाए। ये लोकतंत्र की आत्मा के हक़ में होगा।
: लोकतंत्र के चौथे खंभे को सूचना के अधिकार के दायरे में लाने के संदर्भ में आरटीआई एक्टिविस्ट अफरोज आलम साहिल का एक खुला पत्र : सेवा में, महोदय, मैं अफ़रोज़ आलम साहिल। पत्रकार होने के साथ-साथ एक आरटीआई एक्टिविस्ट भी हूं। मैं कुछ कहना-मांगना चाहता हूं। मेरी मांग है कि लोकतंत्र के चौथे खंभे यानी मीडिया को सूचना के अधिकार अधिनियम-दो हज़ार पाँच के दायरे में लाया जाए। लोकतंत्र के पहले तीनों खंभे सूचना के अधिकार अधिनियम-दो हज़ार पाँच के दायरे में आते हैं। यह कानून कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका तीनों पर लागू होता है। इसका मक़सद साफ है कि लोकतंत्र को मज़बूत किया जा सके। इसी मक़सद की मज़बूती की खातिर मेरी ये मांग है कि लोकतंत्र के चौथे खंभे यानी मीडिया को भी सूचना के अधिकार अधिनियम-दो हज़ार पाँच के दायरे में लाया जाए, ताकि लोकतंत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता को हर स्तर पर लागू किया जा सके। दरअसल, पिछले कुछ दिनों में कई ऐसे वाक़्यात हुए हैं, जिन्होंने मीडिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे कई मीडिया समूह हैं, जिनकी आमदनी और निवेश संदेह के दायरे में है। ऐसे कई पत्रकार भी हैं जिनकी संपत्ति उनकी आय के ज्ञात स्त्रोतों से कई गुना ज़्यादा है और ये सब उसी मीडिया के हिस्सा हैं, जो समाज के तमाम तबकों से लोकतंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करता है। ये उसी मीडिया के लोग हैं, जो राजनेताओं से लेकर अधिकारियों और न्यायपालिका के प्रतिनिधियों की आय के स्त्रोतों की छानबीन में खासी दिलचस्पी दिखाता है और उस पर तमाम तरह के सवाल खड़े करता है। मीडिया इस बात की वकालत करता है कि समाज और लोकतंत्र के ये तमाम तबके अपनी आय का ब्यौरा सार्वजनिक करें। सार्वजनिक तौर पर अपनी ईमानदारी और पारदर्शिता का सबूत दें। फिर सवाल ये उठता है कि आखिर ये मानक खुद मीडिया पर लागू क्यों न हो। समाज और लोकतंत्र के दूसरे तबकों की खातिर जवाबदेही और पारदर्शिता की वकालत करने वाला मीडिया अपनी जवाबदेही और अपनी पारदर्शिता के सवाल से क्यों बचना चाहता है। आख़िर मीडिया इस बात की मांग क्यों नहीं करता कि ख़ुद उसे भी सूचना के अधिकार अधिनियम-दो हज़ार पाँच के दायरे में लाया जाए। एक. अगर NDTV चौबीसXसात की ग्रुप एडिटर बरखा दत्त और हिन्दुस्तान टाईम्स ग्रुप के एडिटर वीर सांघवी का नाम टेलीकॉम घोटाले के मामले में सीबीआई के दस्तावेज़ों में बतौर दलाल दर्ज है, तो इन लोगों की आय का ब्यौरा सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाना चाहिए या इस घटना के सामने आने के बाद सभी पत्रकारों और माडिया हाउस को स्वेच्छा से अपनी संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक क्यों नहीं कर देना चाहिए? दो. अगर संसद नोटकांड मामले में CNN-IBN के एडिटर-इन-चीफ और मालिक राजदीप सरदेसाई का नाम बतौर सीडी मैनेजर सामने आता है तो उनकी संपत्ति की छानबीन क्यों नहीं की जानी चाहिए? एक पत्रकार के मालिक बनने की राह में लिए गए तमाम फायदों की कलई सूचना के अधिकार अधिनियम-दो हज़ार पाँच के ज़रिए क्यों नहीं खुलनी चाहिए? क्या पत्रकारों को पत्रकार होने के नाते सूचना के अधिकार का इस्तेमाल सिर्फ दूसरों के खिलाफ करने का कोई विशेषाधिकार हासिल है? तीन. अगर इंडिया टुडे के ग्रुप एडिटर रहे प्रभु चावला अमर सिंह की चर्चित सीडी में डिलिंग करते हुए सुनाई दे रहे हैं और उनके बेटे अंकुर चावला का नाम सीबीआई के दस्तावेजों में बतौर वित्तीय घालमेल के दलाल के तौर पर दर्ज है तो क्यों नहीं प्रभु चावला की वित्तीय और ज़मीनी संपत्तियों का ब्यौरा सामने लाया जाए? ये तीन सवाल तो सिर्फ उदहारण भर हैं। ऐसे न जाने कितने मीडिया हाउस और पत्रकार हैं, जिन्होंने लोकतंत्र के चौथे खंभे की आड़ में भ्रष्टाचार की गंगोत्री बहा रखी है। इन तमाम तथ्यों और लोकतंत्र की प्रतिबद्धता के नाम पर मेरी आपसे ये मांग है कि कृपया मीडिया को भी सूचना के अधिकार अधिनियम-दो हज़ार पाँच के दायरे में लाने की पहल की जाए। ये लोकतंत्र की आत्मा के हक़ में होगा।
छोटे परदे से आज बड़ी खबर आई। रिपोर्टों के अनुसार, मुंबई पुलिस ने अभिनेता करण मेहरा के खिलाफ उनकी पत्नी निशा रावल की शिकायत के आधार पर शुक्रवार रात मामला दर्ज किया है। मामला गोरेगांव थाने में दर्ज कराया गया है। करण के परिवार के सदस्यों जैसे अजय मेहरा, बेला मेहरा और कुणाल मेहरा पर भी कथित तौर पर मारपीट और जानबूझकर उत्पीड़न का आरोप लगाया गया है। इतना ही नहीं, निशा रावल ने मेहरा पर उनके बैंक खाते से 1 करोड़ रुपये से अधिक निकालने का भी आरोप लगाया है। गोरेगांव पुलिस फिलहाल मामले की जांच कर रही है। अंकिता लोखंडे बिग बॉस को लेकर लंबे वक्त से सुर्खियों में हैं। रिपोर्ट्स थीं कि अंकिता रियलिटी शो बिग बॉस 15 में नजर आने वाली हैं। टीम ने उनको अप्रोच किया है लेकिन अब अंकिता ने साफ कर दिया है कि वो इस शो का हिस्सा नहीं बनने वाली हैं। अंकिता लोखंडे ने सोशल मीडिया पोस्ट कर इस बात की जानकारी दी है और जो लोग ये गलत खबर फैला रहे थे उनकी क्लास लगाई है। शहनाज गिल की चमकी किस्मत! बिग बॉस 13 फेम शहनाज गिल की रियलिटी शो से बाहर निकलने के बाद किस्मत बदल चुकी है। अभिनेत्री को न केवल बड़े पैमाने पर लोग पसंद कर रहे हैं बल्कि वो छोटे पर्दे की लोकप्रिय स्टार बन चुकी हैं। दिलजीत दोसांझ के साथ एक फिल्म हासिल करने के बाद, शहनाज गिल ने अपने करियर में अब कुछ और भी हासिल किया है। पंजाबी अभिनेत्री शहनाज गिल ने हाल ही में मशहूर फोटोग्राफर डब्बू रत्नानी के लिए एक फोटोशूट कराया है जिसके बारे में जानकर फैन्स उत्साहित हो गए हैं। डब्बू रत्नानी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर फोटोशूट के बिहाइंड का सीन्स शेयर किए हैं। वीडियो में शहनाज गिल का स्टनिंग लुक दिख रहा है। शाहीर शेख जल्द पापा बनने वाले हैं उनकी पत्नी रुचिका कपूर प्रेग्नेंट हैं। कपल पहले बच्चे की खबरों को लेकर सुर्खियों में है। शाहीर शेख ने हाल ही एक ऐसी तस्वीर शेयर की है, जिसे देख फैन्स कन्फर्म मान रहे हैं कि रुचिका प्रेग्नेंट हैं। अब शाहीर शेख ने इंस्टाग्राम पर एक फैमिली फोटो शेयर की है। इस तस्वीर में रुचिका का बेबी बंप साफ नजर आ रहा है। बता दें, कुछ दिन पहले रुचिका का एक दोस्त की पार्टी में बेबी बंप दिखा था। तब उनकी प्रेग्नेंसी की न्यूज कन्फर्म हुई थी। शाहीर शेख और रुचिका कपूर ने बीते साल नवंबर में मुंबई में कोर्ट मैरिज की थी। तारक मेहता का हिस्सा बनेंगी दिव्यांका त्रिपाठी? दिव्यांका त्रिपाठी हाल के दिनों में दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन से अपने पोस्ट को लेकर चर्चा में हैं। अफवाहें उड़ी थीं कि दिव्यांका को तारक मेहता का उल्टा चश्मा में दयाबेन की भूमिका निभाने के लिए संपर्क किया गया था। दिव्यांका ने हाल ही में ईटाइम्स के साथ एक इंटरव्यू में, अफवाहों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, 'ये अफवाहें हैं, ज्यादातर निराधार और गैर-तथ्यात्मक। यह एक शानदार शो है, जिसके प्रशंसकों की बड़ी संख्या है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि मैं इसे करने के लिए उत्सुक नहीं हूं। मैं एक नई अवधारणा और नई चुनौती की तलाश में हूं। ' आने वाला सप्ताह इमली के दर्शकों को लिए महत्वपूर्ण होगा। क्योंकि अब इमली के सामने सबसे बड़ा राज खुलने वाला है। जी हां आप सही समझ रहे हैं जिसका हम सबको इंतजार था वो आखिर होने जा रहा है। इमली को अपनी असलियत पता चलने वाली है। इमली को पता चल जाएगा कि वो देव (इंद्रनील भट्टाचार्य) की बेटी है और मालिनी की बहन है। ये बड़ा सच अब इमली को पता चल जाएगा। इमली की कहानी में इस मोड़ तक ले जाने वाले कई हाईपॉइंट होंगे! यह देखना वाकई रोमांचक होगा कि इमली इस सच पर क्या प्रतिक्रिया देगी। Times Now Navbharat पर पढ़ें Entertainment News in Hindi, साथ ही ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें ।
छोटे परदे से आज बड़ी खबर आई। रिपोर्टों के अनुसार, मुंबई पुलिस ने अभिनेता करण मेहरा के खिलाफ उनकी पत्नी निशा रावल की शिकायत के आधार पर शुक्रवार रात मामला दर्ज किया है। मामला गोरेगांव थाने में दर्ज कराया गया है। करण के परिवार के सदस्यों जैसे अजय मेहरा, बेला मेहरा और कुणाल मेहरा पर भी कथित तौर पर मारपीट और जानबूझकर उत्पीड़न का आरोप लगाया गया है। इतना ही नहीं, निशा रावल ने मेहरा पर उनके बैंक खाते से एक करोड़ रुपये से अधिक निकालने का भी आरोप लगाया है। गोरेगांव पुलिस फिलहाल मामले की जांच कर रही है। अंकिता लोखंडे बिग बॉस को लेकर लंबे वक्त से सुर्खियों में हैं। रिपोर्ट्स थीं कि अंकिता रियलिटी शो बिग बॉस पंद्रह में नजर आने वाली हैं। टीम ने उनको अप्रोच किया है लेकिन अब अंकिता ने साफ कर दिया है कि वो इस शो का हिस्सा नहीं बनने वाली हैं। अंकिता लोखंडे ने सोशल मीडिया पोस्ट कर इस बात की जानकारी दी है और जो लोग ये गलत खबर फैला रहे थे उनकी क्लास लगाई है। शहनाज गिल की चमकी किस्मत! बिग बॉस तेरह फेम शहनाज गिल की रियलिटी शो से बाहर निकलने के बाद किस्मत बदल चुकी है। अभिनेत्री को न केवल बड़े पैमाने पर लोग पसंद कर रहे हैं बल्कि वो छोटे पर्दे की लोकप्रिय स्टार बन चुकी हैं। दिलजीत दोसांझ के साथ एक फिल्म हासिल करने के बाद, शहनाज गिल ने अपने करियर में अब कुछ और भी हासिल किया है। पंजाबी अभिनेत्री शहनाज गिल ने हाल ही में मशहूर फोटोग्राफर डब्बू रत्नानी के लिए एक फोटोशूट कराया है जिसके बारे में जानकर फैन्स उत्साहित हो गए हैं। डब्बू रत्नानी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर फोटोशूट के बिहाइंड का सीन्स शेयर किए हैं। वीडियो में शहनाज गिल का स्टनिंग लुक दिख रहा है। शाहीर शेख जल्द पापा बनने वाले हैं उनकी पत्नी रुचिका कपूर प्रेग्नेंट हैं। कपल पहले बच्चे की खबरों को लेकर सुर्खियों में है। शाहीर शेख ने हाल ही एक ऐसी तस्वीर शेयर की है, जिसे देख फैन्स कन्फर्म मान रहे हैं कि रुचिका प्रेग्नेंट हैं। अब शाहीर शेख ने इंस्टाग्राम पर एक फैमिली फोटो शेयर की है। इस तस्वीर में रुचिका का बेबी बंप साफ नजर आ रहा है। बता दें, कुछ दिन पहले रुचिका का एक दोस्त की पार्टी में बेबी बंप दिखा था। तब उनकी प्रेग्नेंसी की न्यूज कन्फर्म हुई थी। शाहीर शेख और रुचिका कपूर ने बीते साल नवंबर में मुंबई में कोर्ट मैरिज की थी। तारक मेहता का हिस्सा बनेंगी दिव्यांका त्रिपाठी? दिव्यांका त्रिपाठी हाल के दिनों में दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन से अपने पोस्ट को लेकर चर्चा में हैं। अफवाहें उड़ी थीं कि दिव्यांका को तारक मेहता का उल्टा चश्मा में दयाबेन की भूमिका निभाने के लिए संपर्क किया गया था। दिव्यांका ने हाल ही में ईटाइम्स के साथ एक इंटरव्यू में, अफवाहों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, 'ये अफवाहें हैं, ज्यादातर निराधार और गैर-तथ्यात्मक। यह एक शानदार शो है, जिसके प्रशंसकों की बड़ी संख्या है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि मैं इसे करने के लिए उत्सुक नहीं हूं। मैं एक नई अवधारणा और नई चुनौती की तलाश में हूं। ' आने वाला सप्ताह इमली के दर्शकों को लिए महत्वपूर्ण होगा। क्योंकि अब इमली के सामने सबसे बड़ा राज खुलने वाला है। जी हां आप सही समझ रहे हैं जिसका हम सबको इंतजार था वो आखिर होने जा रहा है। इमली को अपनी असलियत पता चलने वाली है। इमली को पता चल जाएगा कि वो देव की बेटी है और मालिनी की बहन है। ये बड़ा सच अब इमली को पता चल जाएगा। इमली की कहानी में इस मोड़ तक ले जाने वाले कई हाईपॉइंट होंगे! यह देखना वाकई रोमांचक होगा कि इमली इस सच पर क्या प्रतिक्रिया देगी। Times Now Navbharat पर पढ़ें Entertainment News in Hindi, साथ ही ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें ।
- #Irom Sharmilaतो 'मंगेतर' की वजह से हारीं इरोम शर्मिला? नई दिल्ली। सामाजिकअधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला ने अपने ब्रिटिश ब्वॉय फ्रेंड डेसमंड कुटिन्हो से शादी कर ली है। तमिलनाडु के कोडाईकनल के सब रजिस्टार कार्यालय में ईरोम और डेसमंड की शादी हुई। शादी बिल्कुल सादे तरीके से की गई ईरोम और उनके ब्वॉयफ्रेंड ने शादी में अपने किसी रिश्तेदार को नहीं बुलाया था। इरोम शर्मिला अभी कोडाईकनल में ही रह रही हैं। इससे पहले दोनों ने हिंदू विवाह अधिनियम के तहत विवाह किया था। अंतर-धार्मिक विवाह होने के कारण सब-रजिस्ट्रार ने उन्हें विशेष विवाह अधिनियम के तहत विवाह पंजीकरण कराने के लिए कहा था। शर्मिला ने संवाददाताओं को बताया कि कोडईकनाल एक शांतिपूर्ण स्थान है और शांति के लिए उनकी तलाश यहां आकर खत्म हो गयी है। उन्होंने कहा कि वह कोडईकनाल पर्वतीय क्षेत्र में आदिवासियों के कल्याण के लिए अपनी आवाज उठाएंगी। इरोम और डेसमंड की शादी को लेकर वी महेंद्रन नामक एक स्थानीय कार्यकर्ता ने आपत्ति जतायी थी। उसने दलील दी कि दंपती के पर्वतीय क्षेत्र में रहने से इलाके के आदिवासियों को कानूनी एवं अन्य तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। सब-रजिस्ट्रार ने इस आपत्ति को खारिज करते हुए कुटिन्हो के साथ शर्मिला के विवाह का रास्ता साफ कर दिया। दंपती ने विशेष विवाह अधिनियम के तहत विवाह पंजीकरण के लिए १२ जुलाई को अपना आवेदन जमा किया था और किसी को आपत्ति होने की स्थिति में सब रजिस्ट्रार ने 30 दिन के अंदर इस पर आपत्तियां मंगायी थी। आपको बता दें कि मार्च में मणिपुर विधानसभा चुनाव में इरोम भी प्रत्याशी थीं। चुनाव में हारने के बाद वह कोउटिन्हो के साथ हिल स्टेशन आ गई थीं।
- #Irom Sharmilaतो 'मंगेतर' की वजह से हारीं इरोम शर्मिला? नई दिल्ली। सामाजिकअधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला ने अपने ब्रिटिश ब्वॉय फ्रेंड डेसमंड कुटिन्हो से शादी कर ली है। तमिलनाडु के कोडाईकनल के सब रजिस्टार कार्यालय में ईरोम और डेसमंड की शादी हुई। शादी बिल्कुल सादे तरीके से की गई ईरोम और उनके ब्वॉयफ्रेंड ने शादी में अपने किसी रिश्तेदार को नहीं बुलाया था। इरोम शर्मिला अभी कोडाईकनल में ही रह रही हैं। इससे पहले दोनों ने हिंदू विवाह अधिनियम के तहत विवाह किया था। अंतर-धार्मिक विवाह होने के कारण सब-रजिस्ट्रार ने उन्हें विशेष विवाह अधिनियम के तहत विवाह पंजीकरण कराने के लिए कहा था। शर्मिला ने संवाददाताओं को बताया कि कोडईकनाल एक शांतिपूर्ण स्थान है और शांति के लिए उनकी तलाश यहां आकर खत्म हो गयी है। उन्होंने कहा कि वह कोडईकनाल पर्वतीय क्षेत्र में आदिवासियों के कल्याण के लिए अपनी आवाज उठाएंगी। इरोम और डेसमंड की शादी को लेकर वी महेंद्रन नामक एक स्थानीय कार्यकर्ता ने आपत्ति जतायी थी। उसने दलील दी कि दंपती के पर्वतीय क्षेत्र में रहने से इलाके के आदिवासियों को कानूनी एवं अन्य तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। सब-रजिस्ट्रार ने इस आपत्ति को खारिज करते हुए कुटिन्हो के साथ शर्मिला के विवाह का रास्ता साफ कर दिया। दंपती ने विशेष विवाह अधिनियम के तहत विवाह पंजीकरण के लिए बारह जुलाई को अपना आवेदन जमा किया था और किसी को आपत्ति होने की स्थिति में सब रजिस्ट्रार ने तीस दिन के अंदर इस पर आपत्तियां मंगायी थी। आपको बता दें कि मार्च में मणिपुर विधानसभा चुनाव में इरोम भी प्रत्याशी थीं। चुनाव में हारने के बाद वह कोउटिन्हो के साथ हिल स्टेशन आ गई थीं।
झांसी। कोरोना वायरस के संक्रमण के नियंत्रण के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित किए गए 21 दिन के लॉकडाउन की मियाद मंगलवार को पूरी होने वाली है। इसके अंतिम दिन सुबह 10 बजे प्रधानमंत्री देश को संबोधित करेंगे। कयास लगाए जा रहे हैं कि प्रधानमंत्री अपने संबोधन में लॉकडाउन को बढ़ाने की घोषणा कर सकते हैं। इसके लिए झांसी की जनता पूरी तरह से तैयार है। लोगों का कहना है कि कोरोना वायरस से निपटने के लिए प्रधानमंत्री जो भी एलान करेंगे, उसको स्वीकार किया जाएगा। फिर चाहे लॉकडाउन की मियाद बढ़ाई जाए या फिर इससे भी कड़े कदम उठाए जाएं। प्रधानमंत्री का हर फैसला कोरोना वायरस के खिलाफ होगा, जो आम जनता के पक्ष में ही जाएगा। देश इस समय आपदा के दौर से गुजर रहा है। देश को कोरोना वायरस के छुटकारा दिलाने के लिए सरकार एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए है। आम जनता को भी अपना फर्ज निभाना चाहिए। प्रधानमंत्री की हर बात पर अमल किया जाएगा। लॉकडाउन की वजह से कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा काफी हद तक कम हुआ है। लेकिन, इसका पूरी तरह से खत्म होना जरूरी है। ये तब ही संभव है जब लोगों के बीच दूरी बनी रहेगी। पीएम लॉकडाउन बढ़ाने की घोषणा करते हैं तो भी हम साथ हैं। जान है तो जहान है, वरना सब बेकार है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री द्वारा किए गए लॉकडाउन की घोषणा पर जनता पूरी तरह से एकजुट नजर आई। आगे भी जो प्रधानमंत्री कहेंगे, उसका पूरी तरह से पालन किया जाएगा। इंतजार तो सिर्फ उनके आदेश का है। आज पूरा देश संकट के दौर से गुजर रहा है। नागरिकों को इस संकट से उबारने में सरकार पूरा जोर लगाए हुए हैं। ऐसे में देश के हर नागरिक को कर्तव्य है कि वो सरकार के साथ खड़ा नजर आए। मंगलवार को प्रधानमंत्री जो भी एलान करेंगे, वो हमें स्वीकार होगा। लॉकडाउन की वजह से कोरोना वायरस का संक्रमण नियंत्रित तो हुआ है, परंतु ये खतरा अभी पूरी तरह से टला नहीं है। हो सकता है कि प्रधानमंत्री मंगलवार को अपने संबोधन में इसकी मियाद बढ़ाने की घोषणा कर दें। इसका हम सभी पालन करने को तैयार हैं। लॉकडाउन की वजह से बहुत सारी परेशानियां सामने आईं हैं, लेकिन ये समस्याएं जिंदगी से बड़ी नहीं हैं। प्रधानमंत्री ने इक्कीस दिन का लॉकडाउन जनता के हित में घोषित किया था। अब भी वे जो घोषणा करेंगे, उसको सहर्ष स्वीकार किया जाएगा। कोरोना वायरस के संक्रमण के नियंत्रण का लॉकडाउन ही सबसे बड़ा विकल्प है। इक्कीस दिन के लॉकडाउन की वजह से बीमारी का संक्रमण काफी हद तक नियंत्रित हुआ है। आगे भी प्रधानमंत्री कितना भी कड़ा कदम उठाएं, हम सब उनके साथ हैं। प्रधानमंत्री ने कहा घर पर रहिये, हम घर पर रहे, उन्होंने कहा ताली बजाएं और दीप जलाएं, हमने वैसा ही किया। क्योंकि, ये सभी बातें उन्होंने हमारे और देश की बेहतरी के लिए कहीं थीं। आगे भी प्रधानमंत्री जो कहेेंगे, हम उसका पूरा पालन करेंगे, फिर चाहे परेशानियां कितनी ही उठानी पड़ें। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
झांसी। कोरोना वायरस के संक्रमण के नियंत्रण के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित किए गए इक्कीस दिन के लॉकडाउन की मियाद मंगलवार को पूरी होने वाली है। इसके अंतिम दिन सुबह दस बजे प्रधानमंत्री देश को संबोधित करेंगे। कयास लगाए जा रहे हैं कि प्रधानमंत्री अपने संबोधन में लॉकडाउन को बढ़ाने की घोषणा कर सकते हैं। इसके लिए झांसी की जनता पूरी तरह से तैयार है। लोगों का कहना है कि कोरोना वायरस से निपटने के लिए प्रधानमंत्री जो भी एलान करेंगे, उसको स्वीकार किया जाएगा। फिर चाहे लॉकडाउन की मियाद बढ़ाई जाए या फिर इससे भी कड़े कदम उठाए जाएं। प्रधानमंत्री का हर फैसला कोरोना वायरस के खिलाफ होगा, जो आम जनता के पक्ष में ही जाएगा। देश इस समय आपदा के दौर से गुजर रहा है। देश को कोरोना वायरस के छुटकारा दिलाने के लिए सरकार एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए है। आम जनता को भी अपना फर्ज निभाना चाहिए। प्रधानमंत्री की हर बात पर अमल किया जाएगा। लॉकडाउन की वजह से कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा काफी हद तक कम हुआ है। लेकिन, इसका पूरी तरह से खत्म होना जरूरी है। ये तब ही संभव है जब लोगों के बीच दूरी बनी रहेगी। पीएम लॉकडाउन बढ़ाने की घोषणा करते हैं तो भी हम साथ हैं। जान है तो जहान है, वरना सब बेकार है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री द्वारा किए गए लॉकडाउन की घोषणा पर जनता पूरी तरह से एकजुट नजर आई। आगे भी जो प्रधानमंत्री कहेंगे, उसका पूरी तरह से पालन किया जाएगा। इंतजार तो सिर्फ उनके आदेश का है। आज पूरा देश संकट के दौर से गुजर रहा है। नागरिकों को इस संकट से उबारने में सरकार पूरा जोर लगाए हुए हैं। ऐसे में देश के हर नागरिक को कर्तव्य है कि वो सरकार के साथ खड़ा नजर आए। मंगलवार को प्रधानमंत्री जो भी एलान करेंगे, वो हमें स्वीकार होगा। लॉकडाउन की वजह से कोरोना वायरस का संक्रमण नियंत्रित तो हुआ है, परंतु ये खतरा अभी पूरी तरह से टला नहीं है। हो सकता है कि प्रधानमंत्री मंगलवार को अपने संबोधन में इसकी मियाद बढ़ाने की घोषणा कर दें। इसका हम सभी पालन करने को तैयार हैं। लॉकडाउन की वजह से बहुत सारी परेशानियां सामने आईं हैं, लेकिन ये समस्याएं जिंदगी से बड़ी नहीं हैं। प्रधानमंत्री ने इक्कीस दिन का लॉकडाउन जनता के हित में घोषित किया था। अब भी वे जो घोषणा करेंगे, उसको सहर्ष स्वीकार किया जाएगा। कोरोना वायरस के संक्रमण के नियंत्रण का लॉकडाउन ही सबसे बड़ा विकल्प है। इक्कीस दिन के लॉकडाउन की वजह से बीमारी का संक्रमण काफी हद तक नियंत्रित हुआ है। आगे भी प्रधानमंत्री कितना भी कड़ा कदम उठाएं, हम सब उनके साथ हैं। प्रधानमंत्री ने कहा घर पर रहिये, हम घर पर रहे, उन्होंने कहा ताली बजाएं और दीप जलाएं, हमने वैसा ही किया। क्योंकि, ये सभी बातें उन्होंने हमारे और देश की बेहतरी के लिए कहीं थीं। आगे भी प्रधानमंत्री जो कहेेंगे, हम उसका पूरा पालन करेंगे, फिर चाहे परेशानियां कितनी ही उठानी पड़ें। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
अपने अपकमिंग नए टीवी शो 'हम रहे ना रहे हम' की तैयारी कर रहीं एक्ट्रेस टीना दत्ता ने एक एक्टर के रूप में अपने शुरूआती दिनों में मतभेदों का सामना करने के बारे में खुलकर बात की है। टीना ने 2009 के शो 'उतरन' में अपने शानदार परफॉर्मेस से सुर्खियां बटोरी थीं। यह शो 'आम और खास' की थीम पर है। आईएएनएस ने टीना से पूछा कि क्या उन्होंने कभी मतभेदों का सामना किया है? टीना ने कहा, हां, मेरे जीवन के शुरूआती दौर में एक अभिनेता के रूप में 'आम और खास' रहे। एक न्यूकमर की तुलना एक सीनियर एक्टर से की गई, जो पहले से ही इंडस्ट्री का हिस्सा रहे हैं। उन मतभेदों का मैंने सामना किया है। मैंने उन बाधाओं को देखा है और उन सभी से गुजरी हूं। उनका अपकमिंग शो, 'हम रहे न रहे हम' लोकप्रिय तुर्की ड्रामा इस्तांबुल गेलिन (इस्तांबुल की दुल्हन) का रीमेक है, जो 10 अप्रैल से सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन पर प्रसारित होगा। 'हम रहे ना रहे हम' मानव स्वभाव पर ध्यान केंद्रित करता है। इसमें जय भानुशाली और किटू गिडवानी भी हैं। क्या वह मानती है कि असामान्य जोड़ी जादुई कहानियां बनाती है? इस सवाल के जवाब में टीना दत्ता ने कहा, निश्चित रूप से, हां। मुझे केमिस्ट्री के बारे में ऐसा ही लगता है। मेरे द्वारा निभाई गई सुरीली का किरदार और जय की शिवेंद्र का किरदार दर्शकों को काफी पसंद आएगा। मुझे लगता है कि दर्शकों को हमारी जोड़ी की केमिस्ट्री भी पसंद आएगी।
अपने अपकमिंग नए टीवी शो 'हम रहे ना रहे हम' की तैयारी कर रहीं एक्ट्रेस टीना दत्ता ने एक एक्टर के रूप में अपने शुरूआती दिनों में मतभेदों का सामना करने के बारे में खुलकर बात की है। टीना ने दो हज़ार नौ के शो 'उतरन' में अपने शानदार परफॉर्मेस से सुर्खियां बटोरी थीं। यह शो 'आम और खास' की थीम पर है। आईएएनएस ने टीना से पूछा कि क्या उन्होंने कभी मतभेदों का सामना किया है? टीना ने कहा, हां, मेरे जीवन के शुरूआती दौर में एक अभिनेता के रूप में 'आम और खास' रहे। एक न्यूकमर की तुलना एक सीनियर एक्टर से की गई, जो पहले से ही इंडस्ट्री का हिस्सा रहे हैं। उन मतभेदों का मैंने सामना किया है। मैंने उन बाधाओं को देखा है और उन सभी से गुजरी हूं। उनका अपकमिंग शो, 'हम रहे न रहे हम' लोकप्रिय तुर्की ड्रामा इस्तांबुल गेलिन का रीमेक है, जो दस अप्रैल से सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन पर प्रसारित होगा। 'हम रहे ना रहे हम' मानव स्वभाव पर ध्यान केंद्रित करता है। इसमें जय भानुशाली और किटू गिडवानी भी हैं। क्या वह मानती है कि असामान्य जोड़ी जादुई कहानियां बनाती है? इस सवाल के जवाब में टीना दत्ता ने कहा, निश्चित रूप से, हां। मुझे केमिस्ट्री के बारे में ऐसा ही लगता है। मेरे द्वारा निभाई गई सुरीली का किरदार और जय की शिवेंद्र का किरदार दर्शकों को काफी पसंद आएगा। मुझे लगता है कि दर्शकों को हमारी जोड़ी की केमिस्ट्री भी पसंद आएगी।
महानगर के नूनमाटी थाना अंतर्गत नारंगी इलाके में खाने बनाते समय स्टोव से झुलसने के चलते एक महिला की मौत हो गई। मृतक की पहचान सोना देवी(21) के रूप में की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार नारंगी इलाके के रहने वाले जगदीश महतो की पत्नी सोना देवी गत रविवार की रात करीब 10 बजे घर में स्टोव पर खाना बना रही थी। इसी दौरान रहस्यमय ढंग से वह आग की चपेट में आ गई। बुरी तरह से झुलसी अवस्था में उसे जीएमसीएच में भर्ती कराया गया, जहां उसकी मौत हो गई। महिला की मौत के बाद पुलिस ने शव का पंचनामा कर उसे अंत्यपरीक्षण के लिए जीएमसीएच भेज दिया। बाद में पुलिस ने शव को परिजनों के हवाले कर दिया। स्थानीय लोगो को संदेह है कि महिला की हत्या की गई है। घटना के संदर्भ में पुलिस एक मामला दर्ज कर जांच कर रही है।
महानगर के नूनमाटी थाना अंतर्गत नारंगी इलाके में खाने बनाते समय स्टोव से झुलसने के चलते एक महिला की मौत हो गई। मृतक की पहचान सोना देवी के रूप में की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार नारंगी इलाके के रहने वाले जगदीश महतो की पत्नी सोना देवी गत रविवार की रात करीब दस बजे घर में स्टोव पर खाना बना रही थी। इसी दौरान रहस्यमय ढंग से वह आग की चपेट में आ गई। बुरी तरह से झुलसी अवस्था में उसे जीएमसीएच में भर्ती कराया गया, जहां उसकी मौत हो गई। महिला की मौत के बाद पुलिस ने शव का पंचनामा कर उसे अंत्यपरीक्षण के लिए जीएमसीएच भेज दिया। बाद में पुलिस ने शव को परिजनों के हवाले कर दिया। स्थानीय लोगो को संदेह है कि महिला की हत्या की गई है। घटना के संदर्भ में पुलिस एक मामला दर्ज कर जांच कर रही है।
प. बंगाल में विपक्षी भाजपा और माकपा ने शनिवार को कहा कि राज्य चुनाव आयोग को पश्चिम बंगाल में चार नगर निगमों में मतदान तीन सप्ताह से अधिक समय के लिए स्थगित कर देना चाहिए था और उसके द्वारा चुनाव की तारीख को टालने से यह साबित हो गया कि राज्य चुनाव आयोग की कोई आवाज नहीं है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस द्वारा उसकी आवाज तय की जाती है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
प. बंगाल में विपक्षी भाजपा और माकपा ने शनिवार को कहा कि राज्य चुनाव आयोग को पश्चिम बंगाल में चार नगर निगमों में मतदान तीन सप्ताह से अधिक समय के लिए स्थगित कर देना चाहिए था और उसके द्वारा चुनाव की तारीख को टालने से यह साबित हो गया कि राज्य चुनाव आयोग की कोई आवाज नहीं है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस द्वारा उसकी आवाज तय की जाती है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
लोहारू, 23 दिसंबर (निस) क्षेत्र के एक गांव निवासी एक युवती ने अपने ससुराल पक्ष के लोगों पर दहेज प्रताड़ना और साढ़े पांच लाख रुपये में बेचने का आरोप लगाया। जैसे-तैसे वह अपनी जान बचाकर अपने मायके गांव पहुंची। पुलिस को दी शिकायत में पीड़िता ने बताया कि उसकी शादी एक साल पूर्व हिसार के गांव खारिया डोबी निवासी युवक के साथ हुई थी। आरोप है कि ससुराल में कुछ दिनों के बाद ही उसे और अधिक दहेज लाने के लिए परेशान किया जाने लगा। उससे मार-पिटाई की जाने लगी। कई-कई दिनों तक भूखा-प्यासा रखा जाता था। युवती ने आरोप लगाया कि गत दिनों उसे बेहोश करके उसे 800 किमी दूर किसी गांव में साढे पांच लाख रुपये में बेच दिया। यहां से वह बचकर किसी तरह अपने मायके गांव पहुंची। उसने महिला थाने में शिकायत दी। पुलिस ने उसके पति, ससुर, सास और 5 अन्य के खिलाफ बुधवार देर रात को विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया।
लोहारू, तेईस दिसंबर क्षेत्र के एक गांव निवासी एक युवती ने अपने ससुराल पक्ष के लोगों पर दहेज प्रताड़ना और साढ़े पांच लाख रुपये में बेचने का आरोप लगाया। जैसे-तैसे वह अपनी जान बचाकर अपने मायके गांव पहुंची। पुलिस को दी शिकायत में पीड़िता ने बताया कि उसकी शादी एक साल पूर्व हिसार के गांव खारिया डोबी निवासी युवक के साथ हुई थी। आरोप है कि ससुराल में कुछ दिनों के बाद ही उसे और अधिक दहेज लाने के लिए परेशान किया जाने लगा। उससे मार-पिटाई की जाने लगी। कई-कई दिनों तक भूखा-प्यासा रखा जाता था। युवती ने आरोप लगाया कि गत दिनों उसे बेहोश करके उसे आठ सौ किमी दूर किसी गांव में साढे पांच लाख रुपये में बेच दिया। यहां से वह बचकर किसी तरह अपने मायके गांव पहुंची। उसने महिला थाने में शिकायत दी। पुलिस ने उसके पति, ससुर, सास और पाँच अन्य के खिलाफ बुधवार देर रात को विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया।
यहीं से 'मुक्ति-मन्त्र' ले जाकर विश्व के कान में फूका था । हम इस मन्दिर के आराधक होने में अपने को परम कृतार्थ समझते थे । पर यह कौन जानता था, कि तुम्हारा अपवित्र पदार्पण इस दिव्य मन्दिर को पैशाचिक कांडों का अड्डा बना देगा ? तुम यहाँ साधक होकर आये थे । अच्छी साधना की ! किसने कहा था कि तुम इस मन्दिर की सफेद दीवारों पर विषय-वासना की कालिमा पोत दो, धर्म ग्रन्थों को हमारे हाथ से छीन कर रास्ते पर फेंक दो, या हमारी फूलों की डलिया देवता के आगे से हटाकर अपने पैरों से कुचल डालो ? तुम्हारे पदार्पण ने मन्दिर को मदिरालय, श्रद्धा को अन्धता, साधना को कवि-कल्पना, और धर्म को आडम्बर बना डाला । हमारी प्राणाधिक आस्तिकता भी आज चौपट कर दी गयी । आज न हम लोक के रहे, न परलोक के ! इतने पर यह कहने का दुस्साहस करते हो कि हम तुम्हें निर्मल, उदार और धार्मिक बनाने आये हैं !
यहीं से 'मुक्ति-मन्त्र' ले जाकर विश्व के कान में फूका था । हम इस मन्दिर के आराधक होने में अपने को परम कृतार्थ समझते थे । पर यह कौन जानता था, कि तुम्हारा अपवित्र पदार्पण इस दिव्य मन्दिर को पैशाचिक कांडों का अड्डा बना देगा ? तुम यहाँ साधक होकर आये थे । अच्छी साधना की ! किसने कहा था कि तुम इस मन्दिर की सफेद दीवारों पर विषय-वासना की कालिमा पोत दो, धर्म ग्रन्थों को हमारे हाथ से छीन कर रास्ते पर फेंक दो, या हमारी फूलों की डलिया देवता के आगे से हटाकर अपने पैरों से कुचल डालो ? तुम्हारे पदार्पण ने मन्दिर को मदिरालय, श्रद्धा को अन्धता, साधना को कवि-कल्पना, और धर्म को आडम्बर बना डाला । हमारी प्राणाधिक आस्तिकता भी आज चौपट कर दी गयी । आज न हम लोक के रहे, न परलोक के ! इतने पर यह कहने का दुस्साहस करते हो कि हम तुम्हें निर्मल, उदार और धार्मिक बनाने आये हैं !
सिंह ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद, पी. सी. सका। उन्होंने कहा कि दोनों पार्टियां दिल्ली में 4:3 सीट बंटवारे के लिए सहमत थीं, जिसमें चार सीटें आप को दी जातीं। उन्होंने कहा कि आप ने हरियाणा के लिए 6:3:1 सीट बंटवारे का प्रस्ताव दिया था, जिसके तहत कांग्रेस छह सीटों पर लड़ती, जननायक जनता पार्टी तीन सीटों पर और आप एक उम्मीदवार उतारती। सिंह ने कहा, "कांग्रेस की गठगबंधन करने में रुचि नहीं है। हमने हर संभव व्यवस्था के लिए कोशिश की। ऐसा लगता है कि कांग्रेस आप के लिए एक इंच पीछे हटने को तैयार नहीं है। गठबंधन पर बातचीत समाप्त हो चुकी है। "
सिंह ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद, पी. सी. सका। उन्होंने कहा कि दोनों पार्टियां दिल्ली में चार:तीन सीट बंटवारे के लिए सहमत थीं, जिसमें चार सीटें आप को दी जातीं। उन्होंने कहा कि आप ने हरियाणा के लिए छः:तीन:एक सीट बंटवारे का प्रस्ताव दिया था, जिसके तहत कांग्रेस छह सीटों पर लड़ती, जननायक जनता पार्टी तीन सीटों पर और आप एक उम्मीदवार उतारती। सिंह ने कहा, "कांग्रेस की गठगबंधन करने में रुचि नहीं है। हमने हर संभव व्यवस्था के लिए कोशिश की। ऐसा लगता है कि कांग्रेस आप के लिए एक इंच पीछे हटने को तैयार नहीं है। गठबंधन पर बातचीत समाप्त हो चुकी है। "
भारतीय स्पिन गेंदबाज रविचंद्रन अश्विन को एक बेहद ही समझदार और चतुर क्रिकेटर माना जाता है। वह काफी सोच समझकर अपनी रणनीति बनाते हैं। भारत के लिए 270 मैच खेल चुके अश्विन ने गेंदबाजी से तो कई बार विरोधियों को चित किया ही है लेकिन बल्ले से भी कमाल कर चुके हैं। बतौर बल्लेबाज उन्होंने कई अहम पारियां खेली हैं। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तानी गेंदबाज की एक ऐसी गेंद का सामना किया जिसके बारे में वह हर रोज सोने से पहले सोचते हैं। आईसीसी से बातचीत में अश्विन ने उस पल के बारे में बताया जब हजारों लोगों से भरे स्टेडियम में वह बल्लेबाजी करने उतरे तो उन पर पाकिस्तान के खिलाफ टीम इंडिया को जीत दिलाने का दबाव था। यह वाकया 2022 के टी20 वर्ल्ड कप का है। जहां आखिरी गेंद पर भारत को जीत के लिए दो रन चाहिए थे और स्ट्राइक पर थे आर अश्विन। अश्विन ने बताया कि हर रोज सोने से पहले उस एक गेंद के बारे में सोचते हैं जिसे उन्होंने छोड़ा, कि अगर वह गेंद पैड पर लग जाती तो क्या होता। हालांकि उन्हें अब ऐसा लगता है कि वह मैच उन्हीं के हाथों खत्म होना लिखा था। भारत में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप का शेड्यूल जारी हो चुका है। फैंस ने कैलेंडर पर 15 अक्टूबर की तारीख भी मार्क कर ली है। इसी दिन अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में भारत और पाकिस्तान का आमना-सामना होने वाला है। जब भी इन टीमों का सामना होता है तो मैच हाई वोल्टेज होना तय होता है। इस बार भी ऐसा ही कुछ होगा।
भारतीय स्पिन गेंदबाज रविचंद्रन अश्विन को एक बेहद ही समझदार और चतुर क्रिकेटर माना जाता है। वह काफी सोच समझकर अपनी रणनीति बनाते हैं। भारत के लिए दो सौ सत्तर मैच खेल चुके अश्विन ने गेंदबाजी से तो कई बार विरोधियों को चित किया ही है लेकिन बल्ले से भी कमाल कर चुके हैं। बतौर बल्लेबाज उन्होंने कई अहम पारियां खेली हैं। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तानी गेंदबाज की एक ऐसी गेंद का सामना किया जिसके बारे में वह हर रोज सोने से पहले सोचते हैं। आईसीसी से बातचीत में अश्विन ने उस पल के बारे में बताया जब हजारों लोगों से भरे स्टेडियम में वह बल्लेबाजी करने उतरे तो उन पर पाकिस्तान के खिलाफ टीम इंडिया को जीत दिलाने का दबाव था। यह वाकया दो हज़ार बाईस के टीबीस वर्ल्ड कप का है। जहां आखिरी गेंद पर भारत को जीत के लिए दो रन चाहिए थे और स्ट्राइक पर थे आर अश्विन। अश्विन ने बताया कि हर रोज सोने से पहले उस एक गेंद के बारे में सोचते हैं जिसे उन्होंने छोड़ा, कि अगर वह गेंद पैड पर लग जाती तो क्या होता। हालांकि उन्हें अब ऐसा लगता है कि वह मैच उन्हीं के हाथों खत्म होना लिखा था। भारत में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप का शेड्यूल जारी हो चुका है। फैंस ने कैलेंडर पर पंद्रह अक्टूबर की तारीख भी मार्क कर ली है। इसी दिन अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में भारत और पाकिस्तान का आमना-सामना होने वाला है। जब भी इन टीमों का सामना होता है तो मैच हाई वोल्टेज होना तय होता है। इस बार भी ऐसा ही कुछ होगा।
स्वभावदशा मे रमण कठिन है । केवल शरीर / इन्द्रिय और मन ही आत्मा को स्वभावावस्था मे लाने मे सक्षम नहीं हैं । श्रीमद् आगे के पद मे कहते हैं - "आवे ज्या एवी दशा, सद्गुरु बोध सुहाय । ते बोधे सुविचारणा, त्यां प्रगटे सुखदाय ॥४०॥" " अर्थात् जीवन मे जहाँ ऐसी यानि अठतीस वे पद मे आयी हुई बाते / ज्ञान / उपदेश / मार्गदर्शन अच्छा नहीं लगता / सुहाता नहीं । उपशान्त दशा मे ही बोध परिणाम वाला होता है वह शोभित होता है, सुहाता है तथा उस सद्बोध से सुखदायी सुविचारणा प्रकट होती है ।" होती है ।" इस पर तनिक विस्तार से विचार चर्चा कर लेवे इस पद मे कहा गया है " आवे ज्यां ऐवी दशा सद्गुरु बोध सुहाय" सद्गुरु की शिक्षा, सद्गुरु के द्वारा बताया गया मार्ग, उनकी सीख किसको सुहाती है, किसको अच्छी लगती है, उसके लिए उन्होंने एक पृष्ठ भूमि बताई है । क्योकि आपने अक्सर देखा होगा किसी को क्रोध आया हो और उस समय उसके आगे हाथ जोडे, विनय करे / समझने की कोशिश करें, तो क्या होता है और अधिक बढ़ता है । क्यों, आप तो शान्तिलाल हो, तो क्या कहा "चढ़ते पानी पैठते, तामस में अरदास 1 कच्चे ताप में औषधि, तीनों होत विनाश ॥" पानी का बहाव चढ रहा हो किसी नदी/नाले मे और आदमी उसमे प्रवेश करें, तो क्या होगा, बह जायेगा और तमस/ क्रोध चढ गया हो और उसमे आप अरदास करते हो "नहीं, भाई नहीं, मत करो तो और ज्यादा चढता है । लेकिन यह भी सामने वाला व्यक्ति कमजोर होता है, एक बात मैं और कह जाऊँ यह भी ध्यान देने वाली बात है, गुस्सा बहुत सयाना होता है, बडा समझदार होता है । वह कमजोर को देखकर ज्यादा बढता है, यदि सेर को सवा सेर मिल जाये तो शान्त हो जाता है । एक बाणिये का बेटा बहुत तेजतर्रार था । बाप को डराने के लिए "मै मरता हूँ, त्या आत्मार्थ निवास मैतीम मैं मरता हूँ" कहकर कोठे पर चला जाता जिसको मारवाडी में "डागला" कहते हैं, वहाँ जाकर मुडेर पर खड़ा होकर कहता है, मैं छलाग लगाता हूँ, मै गिर के मरता हूँ, कभी दौड कर कुँए की माड पर चला जाए, मै तो कुँए में गिर कर मरूँगा," कहता । विचारा पिता बहुत तग आ गया, रोज धकडी-हाथा जोडी करता है, पकड़ कर लाता है उसको । वस, जो चाहता था उसे मिल जाता है । अब ये तो रोज का ही काम था, बहुत दुखी हो गया । दुकान के ऊपर एक जमींदार / जाट आता था, लाला को उदास बैठे हुए देखकर पूछा- लालाजी ! क्या बात है आज उदास क्यों हैं, कहता है "क्या बताये रोज का ही घर मे क्लेश रहता है और लडका कहता है मैं मर जाऊँगा ।" उपाय तो मैं बता देता हूँ किन्तु तुम्हारे से नहीं होगा, मेरे से होगा । अगर किसी वक्त वह जिह करे ऐसी, मुझे बुला लेना । - उसका तो रोज का ही काम था । हर दूसरे-चौथे दिन करता ही रहता था, जमींदार की कही बात याद आ गई और सन्देश भेजा उसको कि जल्दी आ जा भाई आ जा भाई । वह दौडकर आया । इतने मे घर से निकल कर लडका कहाँ पहुँच गया, कुँए की माड पर, "मै तो गिरकर मरूँगा, तो अव पीछे वाप, माँ, भाई दौड़ते हैं, सब पकड़ते है उसको, किन्तु जमींदार आवाज लगाता है ठहरो-ठहरो! तगडा आदमी था, दिल से तगडा शरीर से भी तगडा पहुँच गया वहाँ पर और लड़के को पकड़ कर कहता है -"ले मरना है न तूने इसमें, ले मैं धक्का देता हूँ, शायद तू न गिर सके पूरी तरह, मैं धक्का देता हूँ तेरे को, वह कहता है नहीं, नहीं, तू गिरना चाहता है न, मरना चाहता है न, इसलिए मैं धक्का देता हूँ, पकड़कर उसको कुएँ में लटकाने लगा, नहीं नहीं! कहता है - "मैं तो अपने बाप को डराता था मरता थोड़ा ही था ।" "हाँ तो क्रोध भी वडा सयाना होता है । शरावी/मदिरापायी देखा देखा है आपने कभी, शरावी रोड पर इधर-उधर रोज गली-कूचों में वडके/चागरे मारते फिरते हैं, लेकिन अगर दो-चार सेवा करने वाले उसको मिल जाएँ तो पता नहीं लगता शराव गयी कहाँ, चली जाती है पता ही
स्वभावदशा मे रमण कठिन है । केवल शरीर / इन्द्रिय और मन ही आत्मा को स्वभावावस्था मे लाने मे सक्षम नहीं हैं । श्रीमद् आगे के पद मे कहते हैं - "आवे ज्या एवी दशा, सद्गुरु बोध सुहाय । ते बोधे सुविचारणा, त्यां प्रगटे सुखदाय ॥चालीस॥" " अर्थात् जीवन मे जहाँ ऐसी यानि अठतीस वे पद मे आयी हुई बाते / ज्ञान / उपदेश / मार्गदर्शन अच्छा नहीं लगता / सुहाता नहीं । उपशान्त दशा मे ही बोध परिणाम वाला होता है वह शोभित होता है, सुहाता है तथा उस सद्बोध से सुखदायी सुविचारणा प्रकट होती है ।" होती है ।" इस पर तनिक विस्तार से विचार चर्चा कर लेवे इस पद मे कहा गया है " आवे ज्यां ऐवी दशा सद्गुरु बोध सुहाय" सद्गुरु की शिक्षा, सद्गुरु के द्वारा बताया गया मार्ग, उनकी सीख किसको सुहाती है, किसको अच्छी लगती है, उसके लिए उन्होंने एक पृष्ठ भूमि बताई है । क्योकि आपने अक्सर देखा होगा किसी को क्रोध आया हो और उस समय उसके आगे हाथ जोडे, विनय करे / समझने की कोशिश करें, तो क्या होता है और अधिक बढ़ता है । क्यों, आप तो शान्तिलाल हो, तो क्या कहा "चढ़ते पानी पैठते, तामस में अरदास एक कच्चे ताप में औषधि, तीनों होत विनाश ॥" पानी का बहाव चढ रहा हो किसी नदी/नाले मे और आदमी उसमे प्रवेश करें, तो क्या होगा, बह जायेगा और तमस/ क्रोध चढ गया हो और उसमे आप अरदास करते हो "नहीं, भाई नहीं, मत करो तो और ज्यादा चढता है । लेकिन यह भी सामने वाला व्यक्ति कमजोर होता है, एक बात मैं और कह जाऊँ यह भी ध्यान देने वाली बात है, गुस्सा बहुत सयाना होता है, बडा समझदार होता है । वह कमजोर को देखकर ज्यादा बढता है, यदि सेर को सवा सेर मिल जाये तो शान्त हो जाता है । एक बाणिये का बेटा बहुत तेजतर्रार था । बाप को डराने के लिए "मै मरता हूँ, त्या आत्मार्थ निवास मैतीम मैं मरता हूँ" कहकर कोठे पर चला जाता जिसको मारवाडी में "डागला" कहते हैं, वहाँ जाकर मुडेर पर खड़ा होकर कहता है, मैं छलाग लगाता हूँ, मै गिर के मरता हूँ, कभी दौड कर कुँए की माड पर चला जाए, मै तो कुँए में गिर कर मरूँगा," कहता । विचारा पिता बहुत तग आ गया, रोज धकडी-हाथा जोडी करता है, पकड़ कर लाता है उसको । वस, जो चाहता था उसे मिल जाता है । अब ये तो रोज का ही काम था, बहुत दुखी हो गया । दुकान के ऊपर एक जमींदार / जाट आता था, लाला को उदास बैठे हुए देखकर पूछा- लालाजी ! क्या बात है आज उदास क्यों हैं, कहता है "क्या बताये रोज का ही घर मे क्लेश रहता है और लडका कहता है मैं मर जाऊँगा ।" उपाय तो मैं बता देता हूँ किन्तु तुम्हारे से नहीं होगा, मेरे से होगा । अगर किसी वक्त वह जिह करे ऐसी, मुझे बुला लेना । - उसका तो रोज का ही काम था । हर दूसरे-चौथे दिन करता ही रहता था, जमींदार की कही बात याद आ गई और सन्देश भेजा उसको कि जल्दी आ जा भाई आ जा भाई । वह दौडकर आया । इतने मे घर से निकल कर लडका कहाँ पहुँच गया, कुँए की माड पर, "मै तो गिरकर मरूँगा, तो अव पीछे वाप, माँ, भाई दौड़ते हैं, सब पकड़ते है उसको, किन्तु जमींदार आवाज लगाता है ठहरो-ठहरो! तगडा आदमी था, दिल से तगडा शरीर से भी तगडा पहुँच गया वहाँ पर और लड़के को पकड़ कर कहता है -"ले मरना है न तूने इसमें, ले मैं धक्का देता हूँ, शायद तू न गिर सके पूरी तरह, मैं धक्का देता हूँ तेरे को, वह कहता है नहीं, नहीं, तू गिरना चाहता है न, मरना चाहता है न, इसलिए मैं धक्का देता हूँ, पकड़कर उसको कुएँ में लटकाने लगा, नहीं नहीं! कहता है - "मैं तो अपने बाप को डराता था मरता थोड़ा ही था ।" "हाँ तो क्रोध भी वडा सयाना होता है । शरावी/मदिरापायी देखा देखा है आपने कभी, शरावी रोड पर इधर-उधर रोज गली-कूचों में वडके/चागरे मारते फिरते हैं, लेकिन अगर दो-चार सेवा करने वाले उसको मिल जाएँ तो पता नहीं लगता शराव गयी कहाँ, चली जाती है पता ही
सुंदरगढ़ जिले के लेफरीपाड़ा थाना क्षेत्र के तारिणी मंदिर के समीप गुरुवार की तड़के बाइक सवार तीन नकाबपोश बदमाशों ने एक बकरी पर गोली चला दी, जिससे एक व्यापारी की मौत हो गयी, जबकि दो अन्य घायल हो गये. तीनों से नौ लाख रुपये छीनकर बदमाश मौके से फरार हो गए। जबकि मृतकों और घायलों की पहचान भस्म पुलिस थाना अंतर्गत शारदापाली क्षेत्र के निवासी के रूप में की गई है, पुलिस ने बदमाशों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू कर दी है. सूत्रों के अनुसार आज सुबह करीब पांच बजे तीनों लेफरीपाड़ा थाना क्षेत्र के हंडीपानी इलाके में बकरी बाजार जा रहे थे. बकरियां खरीदने के लिए वे अपने साथ 9 लाख रुपए ले गए। जैसे ही वे सुरुगुडा के तारिणी मंदिर से गुजर रहे थे, बाइक सवार तीन नकाबपोश बदमाशों ने उनका रास्ता रोक लिया। बदमाशों को देख बकरी व्यापारियों के सवार ने बाइक तेज कर दी। लेकिन बदमाशों ने बाइक को लात मार दी जिससे बकरी व्यापारी बाइक से गिर पड़े। रुपये की थैली रखने वाला रुपये बचाने के लिए मौके से भागने लगा। लेकिन एक बदमाश ने उन पर फायरिंग कर दी और सभी कैश बैग लेकर मौके से फरार हो गए। सूचना मिलने पर लेफरीपाड़ा थाने की टीम वैज्ञानिक टीम के साथ मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए बरामद किया। घायल बकरी व्यापारियों के अनुसार बदमाश बिना नंबर की बाइक पर सवार थे।
सुंदरगढ़ जिले के लेफरीपाड़ा थाना क्षेत्र के तारिणी मंदिर के समीप गुरुवार की तड़के बाइक सवार तीन नकाबपोश बदमाशों ने एक बकरी पर गोली चला दी, जिससे एक व्यापारी की मौत हो गयी, जबकि दो अन्य घायल हो गये. तीनों से नौ लाख रुपये छीनकर बदमाश मौके से फरार हो गए। जबकि मृतकों और घायलों की पहचान भस्म पुलिस थाना अंतर्गत शारदापाली क्षेत्र के निवासी के रूप में की गई है, पुलिस ने बदमाशों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू कर दी है. सूत्रों के अनुसार आज सुबह करीब पांच बजे तीनों लेफरीपाड़ा थाना क्षेत्र के हंडीपानी इलाके में बकरी बाजार जा रहे थे. बकरियां खरीदने के लिए वे अपने साथ नौ लाख रुपए ले गए। जैसे ही वे सुरुगुडा के तारिणी मंदिर से गुजर रहे थे, बाइक सवार तीन नकाबपोश बदमाशों ने उनका रास्ता रोक लिया। बदमाशों को देख बकरी व्यापारियों के सवार ने बाइक तेज कर दी। लेकिन बदमाशों ने बाइक को लात मार दी जिससे बकरी व्यापारी बाइक से गिर पड़े। रुपये की थैली रखने वाला रुपये बचाने के लिए मौके से भागने लगा। लेकिन एक बदमाश ने उन पर फायरिंग कर दी और सभी कैश बैग लेकर मौके से फरार हो गए। सूचना मिलने पर लेफरीपाड़ा थाने की टीम वैज्ञानिक टीम के साथ मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए बरामद किया। घायल बकरी व्यापारियों के अनुसार बदमाश बिना नंबर की बाइक पर सवार थे।
साधारण प्रीपेड और पोस्टपेड प्लान्स के साथ-साथ आज कल टेलीकॉम कंपनियां फाइबरनेट या यूं कहें कि ब्रॉडबैंड कनेक्शन की सुविधा भी प्रदान की जा रही है. आज हम जियो (Jio) और एयरटेल (Airtel) के ब्रॉडबैंड कनेक्शन्स के बारे में जानकारी देने जा रहा है. आइए जानते हैं कि इन दोनों कंपनियों में से किस कंपनी ने बाजी मार ली है और कम कीमत में जबरदस्त इंटरनेट स्पीड की सुविधा दे रही है. . JioFiber के बेस्ट प्लान्सः जिस प्लान की हम सबसे पहले बात करने वाले है, उसका मूल्य 399 रुपये है, इसमें आपको 30Mbps की स्पीड पर कुल 3,300GB इंटरनेट भी दिया जा रहा है, इस प्लान में कोई OTT फायदे शामिल नहीं हैं. जियोफाइबर का 699 रुपये वाला प्लान भी 3,300GB DATA दे रहा है लेकिन इसकी स्पीड 100Mbps है. इसमें भी आपको कोई ओटीटी बेनिफिट्स भी दिए जा रहे है. जियो का 999 रुपये वाला प्लान 150Mbps की स्पीड पर 3,300GB इंटरनेट देता है और जिसमे आपको हॉटस्टार और अमेजन प्राइम वीडियो सहित 16 OTT ऐप्स का एक्सेस भी दिया जा रहाहै. जियोफाइबर का सबसे महंगा प्लान 2,499 रुपये का है, जिसमें आपको 500Mbps की स्पीड पर 4,000GB डेटा प्रदान किया जा रहा है. इसमें भी अधिकतर OTT ऐप्स का एक्सेस दिया जा रहा है. AirtelFiber के प्लान्सः एयरटेल-फाइबर का सबसे सस्ता प्लान 499 रुपये में दिया जा रहा है, इसमें आपको 40Mbps की स्पीड पर 3,300GB डेटा, सात ओटीटी प्लेटफॉर्म्स और 5 स्टूडियो ऐप्स का एक्सेस भी मिल रहा है. एयरटेल के आने वाले है प्लान में भी आपको 3,300GB डेटा, 7 OTT ऐप्स और 5 स्टूडियो ऐप्स की सुविधा प्रदान की जा रही है, लेकिन इसमें इंटरनेट की स्पीड 200Mbps है. इस प्लान का मूल्य 799 रुपये है. एयरटेल के एक प्लान का मूल्य 999 रुपये है जिसमें आपको 200Mbps की स्पीड पर 3,300GB DATA और कई सारे OTT और स्टूडियो ऐप्स की मेंबरशिप भी दी जा रही. एयरटेल का सबसे महंगा प्लान 3,999 रुपये का है जिसमें आपको 1Gbps की स्पीड पर इंटरनेट दिया जाता है और इसमें भी कई सारे ओटीटी और स्टूडियो ऐप्स का एक्सेस शामिल है. खबरों की माने तो प्लान्स का मूल्य के साथ-साथ आपको इंस्टॉलेशन कॉस्ट भी देना होता है. एयरटेल का प्लान लेने पर आपको एक हजार रुपये और देने होंगे वहीं जियो 1,500 रुपये कनेक्शन कॉस्ट लेता है.
साधारण प्रीपेड और पोस्टपेड प्लान्स के साथ-साथ आज कल टेलीकॉम कंपनियां फाइबरनेट या यूं कहें कि ब्रॉडबैंड कनेक्शन की सुविधा भी प्रदान की जा रही है. आज हम जियो और एयरटेल के ब्रॉडबैंड कनेक्शन्स के बारे में जानकारी देने जा रहा है. आइए जानते हैं कि इन दोनों कंपनियों में से किस कंपनी ने बाजी मार ली है और कम कीमत में जबरदस्त इंटरनेट स्पीड की सुविधा दे रही है. . JioFiber के बेस्ट प्लान्सः जिस प्लान की हम सबसे पहले बात करने वाले है, उसका मूल्य तीन सौ निन्यानवे रुपयापये है, इसमें आपको तीसMbps की स्पीड पर कुल तीन,तीन सौGB इंटरनेट भी दिया जा रहा है, इस प्लान में कोई OTT फायदे शामिल नहीं हैं. जियोफाइबर का छः सौ निन्यानवे रुपयापये वाला प्लान भी तीन,तीन सौGB DATA दे रहा है लेकिन इसकी स्पीड एक सौMbps है. इसमें भी आपको कोई ओटीटी बेनिफिट्स भी दिए जा रहे है. जियो का नौ सौ निन्यानवे रुपयापये वाला प्लान एक सौ पचासMbps की स्पीड पर तीन,तीन सौGB इंटरनेट देता है और जिसमे आपको हॉटस्टार और अमेजन प्राइम वीडियो सहित सोलह OTT ऐप्स का एक्सेस भी दिया जा रहाहै. जियोफाइबर का सबसे महंगा प्लान दो,चार सौ निन्यानवे रुपयापये का है, जिसमें आपको पाँच सौMbps की स्पीड पर चार,शून्यGB डेटा प्रदान किया जा रहा है. इसमें भी अधिकतर OTT ऐप्स का एक्सेस दिया जा रहा है. AirtelFiber के प्लान्सः एयरटेल-फाइबर का सबसे सस्ता प्लान चार सौ निन्यानवे रुपयापये में दिया जा रहा है, इसमें आपको चालीसMbps की स्पीड पर तीन,तीन सौGB डेटा, सात ओटीटी प्लेटफॉर्म्स और पाँच स्टूडियो ऐप्स का एक्सेस भी मिल रहा है. एयरटेल के आने वाले है प्लान में भी आपको तीन,तीन सौGB डेटा, सात OTT ऐप्स और पाँच स्टूडियो ऐप्स की सुविधा प्रदान की जा रही है, लेकिन इसमें इंटरनेट की स्पीड दो सौMbps है. इस प्लान का मूल्य सात सौ निन्यानवे रुपयापये है. एयरटेल के एक प्लान का मूल्य नौ सौ निन्यानवे रुपयापये है जिसमें आपको दो सौMbps की स्पीड पर तीन,तीन सौGB DATA और कई सारे OTT और स्टूडियो ऐप्स की मेंबरशिप भी दी जा रही. एयरटेल का सबसे महंगा प्लान तीन,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये का है जिसमें आपको एकGbps की स्पीड पर इंटरनेट दिया जाता है और इसमें भी कई सारे ओटीटी और स्टूडियो ऐप्स का एक्सेस शामिल है. खबरों की माने तो प्लान्स का मूल्य के साथ-साथ आपको इंस्टॉलेशन कॉस्ट भी देना होता है. एयरटेल का प्लान लेने पर आपको एक हजार रुपये और देने होंगे वहीं जियो एक,पाँच सौ रुपयापये कनेक्शन कॉस्ट लेता है.
मेडिकल पीजी एडमिशन 2021 के लिए नीट पीजी काउंसलिंग 2021 की तारीखों की घोषणा हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडावियाने बताया कि, 12 जनवरी से नीट पीजी की काउंसलिंग शुरू हो जाएगी। दरअसल नीट पीजी 2021 काउंसलिंग और आरक्षण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए नीट पीजी काउंसलिंग 2021 को मंजूरी दे दी है। इससे पहले नीट-पीजी काउंसलिंग में देरी के विरोध में रेजिडेंट डॉक्टर हड़ताल पर चले गए थे। फैसला देते हुए कोर्ट ने कहा- हम ओबीसी आरक्षण की वैधता को बरकरार रख रहे हैं। यानी ओबीसी वर्ग के छात्रों को इसी बार से एडमिशन में 27 फीसदी आरक्षण का लाभ मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा- काउंसलिंग तुरंत शुरू करने जरूरत है। इसके साथ ही 10% EWS आरक्षण भी हो। आरक्षण इसी सत्र से लागू होगा। इसके साथ ही EWS आरक्षण को लेकर मार्च में विस्तार से सुनवाई होगी। 1. अखिल भारतीय कोटा की सीटों पर नीट काउंसलिंग 4 राउंड एआईक्यू राउंड-1, एआईक्यू राउंड-2, एआईक्यू मॉपअप राउंड और एआईक्यू स्ट्रे वैकेंसी के अनुसार होगी। 2. दो राउंड के बाद बची हुई सीटों को एआईक्यू मॉपअप राउंड और एआईक्यू स्ट्रे वैकेंसी से भरा जाएगा। 3. नए (फ्रेश) पंजीयन की सुविधा केवल पहले तीन राउंड में दी जाएगी। 4. सीट अपग्रेड का मौका केवल पहले राउंड में मिलेगा। 5. जिन उम्मीदवारों ने दो राउंड या इसके बाद की काउंसलिंग में सीट ज्वाइन कर ली है, उन्हें सीट छोड़ने या अगली काउंसलिंग में भाग लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। NEET परीक्षा कार्यक्रम के अनुसार, NEET PG Result 2021 की घोषणा के बाद, परीक्षा उत्तीर्ण करने वालों की काउंसलिंग प्रक्रिया 24 से 29 अक्टूबर तक होनी थी। लेकिन मामला सुप्रीम कोर्ट में जाने के बाद डेट आगे बढ़ती गई।
मेडिकल पीजी एडमिशन दो हज़ार इक्कीस के लिए नीट पीजी काउंसलिंग दो हज़ार इक्कीस की तारीखों की घोषणा हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडावियाने बताया कि, बारह जनवरी से नीट पीजी की काउंसलिंग शुरू हो जाएगी। दरअसल नीट पीजी दो हज़ार इक्कीस काउंसलिंग और आरक्षण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए नीट पीजी काउंसलिंग दो हज़ार इक्कीस को मंजूरी दे दी है। इससे पहले नीट-पीजी काउंसलिंग में देरी के विरोध में रेजिडेंट डॉक्टर हड़ताल पर चले गए थे। फैसला देते हुए कोर्ट ने कहा- हम ओबीसी आरक्षण की वैधता को बरकरार रख रहे हैं। यानी ओबीसी वर्ग के छात्रों को इसी बार से एडमिशन में सत्ताईस फीसदी आरक्षण का लाभ मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा- काउंसलिंग तुरंत शुरू करने जरूरत है। इसके साथ ही दस% EWS आरक्षण भी हो। आरक्षण इसी सत्र से लागू होगा। इसके साथ ही EWS आरक्षण को लेकर मार्च में विस्तार से सुनवाई होगी। एक. अखिल भारतीय कोटा की सीटों पर नीट काउंसलिंग चार राउंड एआईक्यू राउंड-एक, एआईक्यू राउंड-दो, एआईक्यू मॉपअप राउंड और एआईक्यू स्ट्रे वैकेंसी के अनुसार होगी। दो. दो राउंड के बाद बची हुई सीटों को एआईक्यू मॉपअप राउंड और एआईक्यू स्ट्रे वैकेंसी से भरा जाएगा। तीन. नए पंजीयन की सुविधा केवल पहले तीन राउंड में दी जाएगी। चार. सीट अपग्रेड का मौका केवल पहले राउंड में मिलेगा। पाँच. जिन उम्मीदवारों ने दो राउंड या इसके बाद की काउंसलिंग में सीट ज्वाइन कर ली है, उन्हें सीट छोड़ने या अगली काउंसलिंग में भाग लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। NEET परीक्षा कार्यक्रम के अनुसार, NEET PG Result दो हज़ार इक्कीस की घोषणा के बाद, परीक्षा उत्तीर्ण करने वालों की काउंसलिंग प्रक्रिया चौबीस से उनतीस अक्टूबर तक होनी थी। लेकिन मामला सुप्रीम कोर्ट में जाने के बाद डेट आगे बढ़ती गई।
रानीगंज प्रखंड क्षेत्र के बौसी थाना क्षेत्र अर्तगत धोबनिया पंचायत के करंकिया गांव वार्ड संख्या 06 में ट्रैक्टर ड्राइवर की अज्ञात लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी है। हत्या कर शव को बांस के खेत में छोड़ दिया। स्थानीय लोगों ने जब खेत में शव को देखा तो इसकी सूचना परिजनों को दी गयी। परिजनों ने घटना की सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने ट्रैक्टर चालक तारिकूल इस्लाम के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए शनिवार को 4:00 बजे के करीब सदर अस्पताल अररिया लाया। शव का पोस्टमॉर्टम कराकर परिजनों को सौंप दी गई। मृतक धोबनिया पंचायत के करंकिया गांव वार्ड संख्या 06 निवासी मोहम्मद जुबेर के 35 वर्षीय पुत्र तारिकूल इस्लाम बताए जा रहे हैं। घटना को लेकर जानकारी देते हुए मृतक तारिकूल इस्लाम की पत्नी ने बताया कि शुक्रवार की देर शाम उनके पति घर से कुछ ही दूरी पर करंकिया चौक पर गए थे। जब देर रात वह घर नहीं लौटा तो परिजनों ने उसकी खोजबीन की। जब उसके नंबर पर फोन लगाया गया तो नंबर भी स्विच ऑफ आ रहा था। शनिवार की सुबह कुछ लोगों ने ही घर के कुछ दूरी पर शव को बांस की झाड़ी में देखा गया। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची बौसी थाना पुलिस ने शव को कब्जे में लेते हुए घटना की जांच में जुट गई। इस मामले में सदर एसडीपीओ ने बताया की हत्या करने वाला कोई जान पहचान का व्यक्ति है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है जल्द ही अपराधियों की गिरफ्तारी कर ली जाएगी। पुलिस एफएसएल टीम की भी मदद ले रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
रानीगंज प्रखंड क्षेत्र के बौसी थाना क्षेत्र अर्तगत धोबनिया पंचायत के करंकिया गांव वार्ड संख्या छः में ट्रैक्टर ड्राइवर की अज्ञात लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी है। हत्या कर शव को बांस के खेत में छोड़ दिया। स्थानीय लोगों ने जब खेत में शव को देखा तो इसकी सूचना परिजनों को दी गयी। परिजनों ने घटना की सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने ट्रैक्टर चालक तारिकूल इस्लाम के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए शनिवार को चार:शून्य बजे के करीब सदर अस्पताल अररिया लाया। शव का पोस्टमॉर्टम कराकर परिजनों को सौंप दी गई। मृतक धोबनिया पंचायत के करंकिया गांव वार्ड संख्या छः निवासी मोहम्मद जुबेर के पैंतीस वर्षीय पुत्र तारिकूल इस्लाम बताए जा रहे हैं। घटना को लेकर जानकारी देते हुए मृतक तारिकूल इस्लाम की पत्नी ने बताया कि शुक्रवार की देर शाम उनके पति घर से कुछ ही दूरी पर करंकिया चौक पर गए थे। जब देर रात वह घर नहीं लौटा तो परिजनों ने उसकी खोजबीन की। जब उसके नंबर पर फोन लगाया गया तो नंबर भी स्विच ऑफ आ रहा था। शनिवार की सुबह कुछ लोगों ने ही घर के कुछ दूरी पर शव को बांस की झाड़ी में देखा गया। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची बौसी थाना पुलिस ने शव को कब्जे में लेते हुए घटना की जांच में जुट गई। इस मामले में सदर एसडीपीओ ने बताया की हत्या करने वाला कोई जान पहचान का व्यक्ति है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है जल्द ही अपराधियों की गिरफ्तारी कर ली जाएगी। पुलिस एफएसएल टीम की भी मदद ले रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
Dhanbad News शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के ओपीडी में मरीजों की संख्या घट गई है। हालांकि लू लगने के मामले बढ़ गए हैं। इसको देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइजरी जारी की है। इसके अलावा स्वास्थ्य केंद्रों में ORS निशुल्क दिया जा रहा है। जागरण संवाददाता, धनबाद। धनबाद सहित पूरे राज्य में प्रचंड गर्मी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइजरी जारी की है। इसमें लोगों से दोपहर 11 बजे से 3 बजे के बीच गर्मी से बचने की सलाह दी है। धनबाद में गर्मी के कहर से लोग परेशान हैं। शहर में भीषण गर्मी का असर अब अस्पताल पर भी पड़ रहा है। शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के ओपीडी में मरीजों की संख्या घट गई है। जबकि हीट स्ट्रोक के केस में वृद्धि हुई है। मेडिसिन विभाग के डॉ. मणि कुमार ने बताया कि 40 डिग्री टेंपरेचर होने के बाद मानव शरीर इसका प्रभाव दिखने लगता है। लू लगने के अलावा शरीर पर कई प्रकार के चकत्ते हो सकते हैं। पिछले दिनों अस्पताल में ऐसे मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि लोग शरीर में पानी की कमी, सिर दर्द, तेज बुखार, कमजोरी की शिकायत लेकर अस्पताल में आ रहे हैं। शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के ओपीडी में अमूमन हर दिन 1500 से 1600 मरीज आते हैं लेकिन पिछले कुछ दिनों की बात करें तो मरीजों की संख्या घटकर 1000 से नीचे चली गई है। भारी गर्मी के वजह से लोग अस्पताल नहीं आ रहे हैं। जबकि मेडिसिन विभाग में गर्मी से होने वाले प्रभाव को लेकर मरीजों की संख्या बढ़ी है। अस्पताल में लगभग 50 प्रतिशत मरीज लू लगने की शिकायत को लेकर मेडिसिन विभाग में पहुंच रहे हैं। इसमें बड़ों के अलावा बच्चे भी शामिल हैं। स्वास्थ्य केंद्रों में ओआरएस का पैकेट निशुल्क वितरण किया जा रहा है।
Dhanbad News शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के ओपीडी में मरीजों की संख्या घट गई है। हालांकि लू लगने के मामले बढ़ गए हैं। इसको देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइजरी जारी की है। इसके अलावा स्वास्थ्य केंद्रों में ORS निशुल्क दिया जा रहा है। जागरण संवाददाता, धनबाद। धनबाद सहित पूरे राज्य में प्रचंड गर्मी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइजरी जारी की है। इसमें लोगों से दोपहर ग्यारह बजे से तीन बजे के बीच गर्मी से बचने की सलाह दी है। धनबाद में गर्मी के कहर से लोग परेशान हैं। शहर में भीषण गर्मी का असर अब अस्पताल पर भी पड़ रहा है। शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के ओपीडी में मरीजों की संख्या घट गई है। जबकि हीट स्ट्रोक के केस में वृद्धि हुई है। मेडिसिन विभाग के डॉ. मणि कुमार ने बताया कि चालीस डिग्री टेंपरेचर होने के बाद मानव शरीर इसका प्रभाव दिखने लगता है। लू लगने के अलावा शरीर पर कई प्रकार के चकत्ते हो सकते हैं। पिछले दिनों अस्पताल में ऐसे मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि लोग शरीर में पानी की कमी, सिर दर्द, तेज बुखार, कमजोरी की शिकायत लेकर अस्पताल में आ रहे हैं। शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के ओपीडी में अमूमन हर दिन एक हज़ार पाँच सौ से एक हज़ार छः सौ मरीज आते हैं लेकिन पिछले कुछ दिनों की बात करें तो मरीजों की संख्या घटकर एक हज़ार से नीचे चली गई है। भारी गर्मी के वजह से लोग अस्पताल नहीं आ रहे हैं। जबकि मेडिसिन विभाग में गर्मी से होने वाले प्रभाव को लेकर मरीजों की संख्या बढ़ी है। अस्पताल में लगभग पचास प्रतिशत मरीज लू लगने की शिकायत को लेकर मेडिसिन विभाग में पहुंच रहे हैं। इसमें बड़ों के अलावा बच्चे भी शामिल हैं। स्वास्थ्य केंद्रों में ओआरएस का पैकेट निशुल्क वितरण किया जा रहा है।
नारनौल, 16 जुलाई (हप्र) जजपा के जिला प्रधान डा. मनीष शर्मा ने बताया कि 23 जुलाई को प्रातः 11 बजे गांव नायन में हरी चुनरी चौपाल का आयोजन किया जाएगा, जिसमें विधायक नैना चौटाला मुख्यातिथि होंगी। वे यहां पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने बताया कि हरी चुनरी चौपाल के दूसरे चरण की शुरुआत प्रदेश के अंतिम छोर पर स्थित नांगल चौधरी विधानसभा के गांव नायन से की जा रही है। प्रदेश में अब तक 70 विधानसभाओं में हरी चुनरी चौपाल हो चुकी हैं तथा अब मिशन-2024 के मद्देनजर हरी चुनरी चौपाल के दूसरे चरण की शुरुआत हो रही है। जिसकी संयोजक पार्टी की सक्रिय कार्यकर्ता सावित्री गुर्जर होंगी। इस मौके पर पार्टी के प्रदेश महासचिव एडवोकेट तेजप्रकाश यादव ने कहा कि जजपा ने महिलाओं को हमेशा पूरा मान-सम्मान दिया है। पंचायती राज चुनावों में जहां पुरुषों के बराबर 50 प्रतिशत सीटों पर महिलाओं को हक दिलाया, वहीं राशन डिपुओं में 33 प्रतिशत आरक्षण दिलाया। इस मौके पर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कंवर सिंह कलवाड़ी, अशोक सैनी, युवा जिलाध्यक्ष युद्धवीर पालड़ी, महिला जिलाध्यक्ष सुविधा शास्त्री, हलका अध्यक्ष बेदू राता, हजारी लाल लंबौरा, उपजिला प्रमुख भीमसिंह गुर्जर, नगर पार्षद संदीप भांखर, पार्षद प्रतिनिधि सुमेर कांडा, धर्मबीर प्रधान, विजय छिलरो, विष्णु सरपंच, कृष्ण यादव व अन्य मौजूद रहे।
नारनौल, सोलह जुलाई जजपा के जिला प्रधान डा. मनीष शर्मा ने बताया कि तेईस जुलाई को प्रातः ग्यारह बजे गांव नायन में हरी चुनरी चौपाल का आयोजन किया जाएगा, जिसमें विधायक नैना चौटाला मुख्यातिथि होंगी। वे यहां पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने बताया कि हरी चुनरी चौपाल के दूसरे चरण की शुरुआत प्रदेश के अंतिम छोर पर स्थित नांगल चौधरी विधानसभा के गांव नायन से की जा रही है। प्रदेश में अब तक सत्तर विधानसभाओं में हरी चुनरी चौपाल हो चुकी हैं तथा अब मिशन-दो हज़ार चौबीस के मद्देनजर हरी चुनरी चौपाल के दूसरे चरण की शुरुआत हो रही है। जिसकी संयोजक पार्टी की सक्रिय कार्यकर्ता सावित्री गुर्जर होंगी। इस मौके पर पार्टी के प्रदेश महासचिव एडवोकेट तेजप्रकाश यादव ने कहा कि जजपा ने महिलाओं को हमेशा पूरा मान-सम्मान दिया है। पंचायती राज चुनावों में जहां पुरुषों के बराबर पचास प्रतिशत सीटों पर महिलाओं को हक दिलाया, वहीं राशन डिपुओं में तैंतीस प्रतिशत आरक्षण दिलाया। इस मौके पर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कंवर सिंह कलवाड़ी, अशोक सैनी, युवा जिलाध्यक्ष युद्धवीर पालड़ी, महिला जिलाध्यक्ष सुविधा शास्त्री, हलका अध्यक्ष बेदू राता, हजारी लाल लंबौरा, उपजिला प्रमुख भीमसिंह गुर्जर, नगर पार्षद संदीप भांखर, पार्षद प्रतिनिधि सुमेर कांडा, धर्मबीर प्रधान, विजय छिलरो, विष्णु सरपंच, कृष्ण यादव व अन्य मौजूद रहे।
योगेन्द्र यादव (Yogendra Yadav) ने कहा कि राकेश टिकैत के चार बूंद आंसुओं ने किसानों पर लगा कलंक धो दिया, अब हम बैकफुट पर नहीं है. उन्होंने कहा कि लाल किले की घटना के जरिए सरकार को आंदोलन को उखाड़ने का मौका मिल गया. योगेन्द्र यादव ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि दीप सिद्धू कौन है और पीएम मोदी के साथ उसकी तस्वीर कैसे आई. उन्होंने सोनीपत, पानीपत, हरियाणा के लोगों से सिंघु बार्डर पर पहुंचने की अपील की. सिंघु बॉर्डर पर आज हुई झड़प पर योगेंद्र यादव ने आरोप लगाते हुए कहा, "आज BJP-RSS के 400 गुंडों ने सिंघु बॉर्डर पर हमला किया, पुलिस ने उन गुंडों को नहीं रोका." उन्होंने कहा कि राकेश टिकैत के चार बूंद आंसुओं ने किसानों पर लगा कलंक धो दिया, अब हम बैकफुट पर नहीं है. जिन्होंने पहले ही घोषणा की थी उनके साथ हम नहीं थे, फिर भी हमने नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार की, इसके लिए 30 जनवरी के दिन शहीद दिवस पर उपवास रखेगें. गुरुवार को भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राकेश टिकैत की भावुक अपील के बाद कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन को समर्थन देने के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश से कई किसान गाजीपुर बॉर्डर पहुंच रहे हैं. मेरठ, बागपत, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद और बुलंदशहर जिलों से बड़ी संख्या में किसान दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर पहुंचे थे. सुरक्षाबलों द्वारा वापस जाने की अपील के बाद भी ये किसान वहीं मौजूद हैं. गाजियाबाद प्रशासन ने गुरुवार रात को प्रदर्शनकारी किसानों को यूपी गेट प्रदर्शन स्थल खाली करने का अल्टीमेटम दिया था, लेकिन राकेश टिकैत यह कहते हुए डटे रहे कि वह आत्महत्या कर लेंगे, लेकिन आंदोलन खत्म नहीं करेंगे. इसके बाद कई जिलों के किसान गुरुवार रात से ही प्रदर्शन स्थल की तरफ बढ़ने लगे.
योगेन्द्र यादव ने कहा कि राकेश टिकैत के चार बूंद आंसुओं ने किसानों पर लगा कलंक धो दिया, अब हम बैकफुट पर नहीं है. उन्होंने कहा कि लाल किले की घटना के जरिए सरकार को आंदोलन को उखाड़ने का मौका मिल गया. योगेन्द्र यादव ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि दीप सिद्धू कौन है और पीएम मोदी के साथ उसकी तस्वीर कैसे आई. उन्होंने सोनीपत, पानीपत, हरियाणा के लोगों से सिंघु बार्डर पर पहुंचने की अपील की. सिंघु बॉर्डर पर आज हुई झड़प पर योगेंद्र यादव ने आरोप लगाते हुए कहा, "आज BJP-RSS के चार सौ गुंडों ने सिंघु बॉर्डर पर हमला किया, पुलिस ने उन गुंडों को नहीं रोका." उन्होंने कहा कि राकेश टिकैत के चार बूंद आंसुओं ने किसानों पर लगा कलंक धो दिया, अब हम बैकफुट पर नहीं है. जिन्होंने पहले ही घोषणा की थी उनके साथ हम नहीं थे, फिर भी हमने नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार की, इसके लिए तीस जनवरी के दिन शहीद दिवस पर उपवास रखेगें. गुरुवार को भारतीय किसान यूनियन के राकेश टिकैत की भावुक अपील के बाद कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन को समर्थन देने के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश से कई किसान गाजीपुर बॉर्डर पहुंच रहे हैं. मेरठ, बागपत, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद और बुलंदशहर जिलों से बड़ी संख्या में किसान दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर पहुंचे थे. सुरक्षाबलों द्वारा वापस जाने की अपील के बाद भी ये किसान वहीं मौजूद हैं. गाजियाबाद प्रशासन ने गुरुवार रात को प्रदर्शनकारी किसानों को यूपी गेट प्रदर्शन स्थल खाली करने का अल्टीमेटम दिया था, लेकिन राकेश टिकैत यह कहते हुए डटे रहे कि वह आत्महत्या कर लेंगे, लेकिन आंदोलन खत्म नहीं करेंगे. इसके बाद कई जिलों के किसान गुरुवार रात से ही प्रदर्शन स्थल की तरफ बढ़ने लगे.
आए दिन सभी लोगों को इस तरह के शब्द अपने परिवार में सुनने को मिलता रहता है। इसमें कोई नई बात नहीं है। होनी भी नहीं चाहिए। लेकिन हर परिवार में कहने का अंदाज अलग होता है। परिस्थिति अलग होती है। कभी पत्नी (हाउसवाइफ, कामकाजी औरतें नहीं) कहेगी कि खाली दिन भर बैठकर समाचारपत्र पढ़ते या टीवी देखते हैं तो कभी कहेगी कि दिन भर कोई काम नहीं खाली सोते रहते हैं। । या... ऐसे ही कुछ. . नित... नए अनुभवों से . . हर किसी को . . दो. . चार होना पड़ता है। कई बार, पत्नी अगर पति से गुस्से में हो तो वो अपनी खींझ उतारने के लिए कभी बच्चों पर बरसती है तो कभी अपने पड़ोसन पर गुस्सा उतारती है, लेकिन अगर पड़ोसन उस पर भारी हो तो अपना गुस्सा उतारने के लिए वह बहाने ढ़ूंढ़ते रहती है। इस बीच, अगर भूलवश पति ने खाना मांग लिया तो उसकी खैर नहीं। मेरा सर खा लो... से लेकर पता नहीं, वो क्या-क्या बक सकती है। तो ऐसे मौके पर जरा सावधान ही रहें। विशेषकर परिवार की शांति की खातिर। अगर, आपको फूलगोभी के साथ मटर या आलू-पनीर की सब्जी पसंद है तो आपको बैंगन का भर्ता मिलेगा। चाहे आप इसे खाना पसंद करते हैं या नहीं, लेकिन आपको अभी मौके की नजाकत को भांपते हुए चुपचाप से खाना पड़ेगा। वैसे भी आजकल जमाना आपकी बात सुनने से रहा। औरतों का जमाना है। आप पर औरतों को प्रताड़ित करने का आरोप लग सकता है। आपको सजा हो सकती है। समाज भी आपका साथ देने से रहा। जो लोग आपके साथ हमकदम-हमप्याला बने रहते थे। अब वो भी आप पर शक करने लगेंगे। कोई तो बात है। इन्हीं दिनों के लिए पुरानी कहावत है - धुंआ तभी उठता है, जब कहीं आग लगी होती है। लोग मॉर्निंग वाक के समय आपके बारे में चटखारे लेकर बातें करेंगे - कुछ तो बात होगी, तभी तो आज शर्मा जी उदास चल रहे हैं। शायद, फिर से उनकी पत्नी से मनमुटाव हो गया है। आखिर, शर्मा जी भी करें, तो क्या करें। बेचारे! सहने की भी एक सीमा होती है, कुछ कह दिया होगा, सुनते-सुनते। लेकिन उनकी पत्नी भी कहां कम है। हर बात में जवाब तो जैसे उनके जुबान पर ही होता है। एक बात कहो नहीं कि पूरा खानदान लपेटे में ले लेती है। सारा उदाहरण दे देती है कि मेरे मायके में तो ऐसा होता था। वहां मेरी मां का राज चलता है। किसी की हिम्मत जो उनसे कुछ कहे। अब बात कुछ, वो ले जायें कहीं और!
आए दिन सभी लोगों को इस तरह के शब्द अपने परिवार में सुनने को मिलता रहता है। इसमें कोई नई बात नहीं है। होनी भी नहीं चाहिए। लेकिन हर परिवार में कहने का अंदाज अलग होता है। परिस्थिति अलग होती है। कभी पत्नी कहेगी कि खाली दिन भर बैठकर समाचारपत्र पढ़ते या टीवी देखते हैं तो कभी कहेगी कि दिन भर कोई काम नहीं खाली सोते रहते हैं। । या... ऐसे ही कुछ. . नित... नए अनुभवों से . . हर किसी को . . दो. . चार होना पड़ता है। कई बार, पत्नी अगर पति से गुस्से में हो तो वो अपनी खींझ उतारने के लिए कभी बच्चों पर बरसती है तो कभी अपने पड़ोसन पर गुस्सा उतारती है, लेकिन अगर पड़ोसन उस पर भारी हो तो अपना गुस्सा उतारने के लिए वह बहाने ढ़ूंढ़ते रहती है। इस बीच, अगर भूलवश पति ने खाना मांग लिया तो उसकी खैर नहीं। मेरा सर खा लो... से लेकर पता नहीं, वो क्या-क्या बक सकती है। तो ऐसे मौके पर जरा सावधान ही रहें। विशेषकर परिवार की शांति की खातिर। अगर, आपको फूलगोभी के साथ मटर या आलू-पनीर की सब्जी पसंद है तो आपको बैंगन का भर्ता मिलेगा। चाहे आप इसे खाना पसंद करते हैं या नहीं, लेकिन आपको अभी मौके की नजाकत को भांपते हुए चुपचाप से खाना पड़ेगा। वैसे भी आजकल जमाना आपकी बात सुनने से रहा। औरतों का जमाना है। आप पर औरतों को प्रताड़ित करने का आरोप लग सकता है। आपको सजा हो सकती है। समाज भी आपका साथ देने से रहा। जो लोग आपके साथ हमकदम-हमप्याला बने रहते थे। अब वो भी आप पर शक करने लगेंगे। कोई तो बात है। इन्हीं दिनों के लिए पुरानी कहावत है - धुंआ तभी उठता है, जब कहीं आग लगी होती है। लोग मॉर्निंग वाक के समय आपके बारे में चटखारे लेकर बातें करेंगे - कुछ तो बात होगी, तभी तो आज शर्मा जी उदास चल रहे हैं। शायद, फिर से उनकी पत्नी से मनमुटाव हो गया है। आखिर, शर्मा जी भी करें, तो क्या करें। बेचारे! सहने की भी एक सीमा होती है, कुछ कह दिया होगा, सुनते-सुनते। लेकिन उनकी पत्नी भी कहां कम है। हर बात में जवाब तो जैसे उनके जुबान पर ही होता है। एक बात कहो नहीं कि पूरा खानदान लपेटे में ले लेती है। सारा उदाहरण दे देती है कि मेरे मायके में तो ऐसा होता था। वहां मेरी मां का राज चलता है। किसी की हिम्मत जो उनसे कुछ कहे। अब बात कुछ, वो ले जायें कहीं और!
मौसम विज्ञान की समाज में मौसम के खतरों को कम कर सकता है. मौसम के खतरों को रोकना संभव नहीं है मगर इससे निपटने के लिए की गई तैयारी और योजना के जरिए हानि को कम किया जा सकता है. राज्य के विभिन्न हिस्सों में विभिन्न प्रकार की जल-मौसम संबंधी प्राकृतिक आपदाएं होती रहती हैं. लखनऊ. यूपी की गवर्नर आनंदीबेन पटेल ने सोमवार को मौसम विज्ञान की समाज के लिए उपयोगिता बताते हुए बोला कि हम मौसम के खतरों को रोक नहीं सकते, लेकिन बेहतर तैयारी और योजना के साथ हम निश्चित रूप से हानि को कम कर सकते हैं. आनंदीबेन पटेल ने सोमवार को यहां अमौसी में हिंदुस्तान मौसम विज्ञान विभाग, मौसम केंद्र, लखनऊ के नवनिर्मित भवन का उद्घाटन करने के बाद आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया. उन्होंने बोला कि मौसम विज्ञान समाज के लिए विज्ञान के प्रत्यक्ष फायदा का एक बेहतरीन उदाहरण है और आज की दुनिया में शायद ही कोई ऐसा तत्व हो जो मौसम और जलवायु के असर से अछूता हो. उन्होंने बोला कि विज्ञान और प्राचीन भारतीय ज्ञान का सममिलन समाज की विभिन्न समस्याओं का व्यवहारिक निवारण ला सकता है. राजभवन से जारी बयान के मुताबिक उन्होंने बोला कि तेजी से बदलते परिवेश ने भूमंडलीय तापमान में बढ़ोतरी, मौसमी चक्र में बदलाव, कहीं सूखा तो कहीं अधिक वर्षा, ग्लेशियरों का पिघलना, समुद्री जलस्तर में बढ़ोतरी आदि के रूप में मुश्किल परिस्थितियों को जन्म दिया है. पटेल ने बोला कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में विभिन्न प्रकार की जल-मौसम संबंधी प्राकृतिक आपदाएं होती रहती हैं, जो न सिर्फ राज्य की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती हैं, बल्कि जनसामान्य की आजीविका पर भी प्रतिकूल असर डालती हैं. गुजरात की चर्चा करते हुए गवर्नर ने बोला कि गुजरात राज्य चक्रवात, गर्म हवा (लू), भारी वर्षा, सूखा, बाढ़ आदि जैसी अनेक गम्भीर मौसम आपदाओं एवं चुनौतियों का सामना करता है, लेकिन अब मौसम वैज्ञानिकों के अथक प्रयासों से पूर्व में प्रसारित सूचनाओं एवं संकेतो से इन आपदाओं के कारण होने वाले हानि से बचा जा सकता है. कार्यक्रम में गवर्नर को पुस्तक और पौधा भेंट किया गया. इस अवसर पर पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय हिंदुस्तान गवर्नमेंट के सचिव डाक्टर एम। रविचंद्रन, नई दिल्ली स्थित हिंदुस्तान मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डाक्टर मृत्युंजय महापात्र, लखनऊ के मौसम केन्द्र के प्रमुख जेपी गुप्ता, मौसम विभाग के वैज्ञानिक, अधिकारी एवं कर्मचारी गण मौजूद थे.
मौसम विज्ञान की समाज में मौसम के खतरों को कम कर सकता है. मौसम के खतरों को रोकना संभव नहीं है मगर इससे निपटने के लिए की गई तैयारी और योजना के जरिए हानि को कम किया जा सकता है. राज्य के विभिन्न हिस्सों में विभिन्न प्रकार की जल-मौसम संबंधी प्राकृतिक आपदाएं होती रहती हैं. लखनऊ. यूपी की गवर्नर आनंदीबेन पटेल ने सोमवार को मौसम विज्ञान की समाज के लिए उपयोगिता बताते हुए बोला कि हम मौसम के खतरों को रोक नहीं सकते, लेकिन बेहतर तैयारी और योजना के साथ हम निश्चित रूप से हानि को कम कर सकते हैं. आनंदीबेन पटेल ने सोमवार को यहां अमौसी में हिंदुस्तान मौसम विज्ञान विभाग, मौसम केंद्र, लखनऊ के नवनिर्मित भवन का उद्घाटन करने के बाद आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया. उन्होंने बोला कि मौसम विज्ञान समाज के लिए विज्ञान के प्रत्यक्ष फायदा का एक बेहतरीन उदाहरण है और आज की दुनिया में शायद ही कोई ऐसा तत्व हो जो मौसम और जलवायु के असर से अछूता हो. उन्होंने बोला कि विज्ञान और प्राचीन भारतीय ज्ञान का सममिलन समाज की विभिन्न समस्याओं का व्यवहारिक निवारण ला सकता है. राजभवन से जारी बयान के मुताबिक उन्होंने बोला कि तेजी से बदलते परिवेश ने भूमंडलीय तापमान में बढ़ोतरी, मौसमी चक्र में बदलाव, कहीं सूखा तो कहीं अधिक वर्षा, ग्लेशियरों का पिघलना, समुद्री जलस्तर में बढ़ोतरी आदि के रूप में मुश्किल परिस्थितियों को जन्म दिया है. पटेल ने बोला कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में विभिन्न प्रकार की जल-मौसम संबंधी प्राकृतिक आपदाएं होती रहती हैं, जो न सिर्फ राज्य की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती हैं, बल्कि जनसामान्य की आजीविका पर भी प्रतिकूल असर डालती हैं. गुजरात की चर्चा करते हुए गवर्नर ने बोला कि गुजरात राज्य चक्रवात, गर्म हवा , भारी वर्षा, सूखा, बाढ़ आदि जैसी अनेक गम्भीर मौसम आपदाओं एवं चुनौतियों का सामना करता है, लेकिन अब मौसम वैज्ञानिकों के अथक प्रयासों से पूर्व में प्रसारित सूचनाओं एवं संकेतो से इन आपदाओं के कारण होने वाले हानि से बचा जा सकता है. कार्यक्रम में गवर्नर को पुस्तक और पौधा भेंट किया गया. इस अवसर पर पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय हिंदुस्तान गवर्नमेंट के सचिव डाक्टर एम। रविचंद्रन, नई दिल्ली स्थित हिंदुस्तान मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डाक्टर मृत्युंजय महापात्र, लखनऊ के मौसम केन्द्र के प्रमुख जेपी गुप्ता, मौसम विभाग के वैज्ञानिक, अधिकारी एवं कर्मचारी गण मौजूद थे.
साइटों को बनाने के लिए फ्री इंजिनजूमला है, लंबे समय तक बहुत प्रशंसकों को मिला है। यह समझाना आसान है, क्योंकि एक नौसिख उपयोगकर्ता को विशेष रूप से प्रोग्रामिंग भाषाओं में तल्लीन करने की ज़रूरत नहीं है, बल्कि सिर्फ सीएमएस (कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम) को स्थापित करें और आप जिस टेम्पलेट को पसंद करते हैं उसका चयन करें। स्वाभाविक रूप से, यह इस मुद्दे को बनाता हैकैसे जूमला टेम्पलेट स्थापित है एक बार यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि यह प्रक्रिया बहुत सरल है और नये नौसिखिए उपयोगकर्ता के लिए भी कठिनाइयों का कारण नहीं होना चाहिए। नतीजतन, आप एक खूबसूरत वेबसाइट प्रबंधित करने के द्वारा किसी और के काम के परिणामों का आनंद ले पाएंगे, जिसे चुने हुए विषय की सामग्री से भरने की जरूरत है। की मदद से दो मुख्य तरीके हैंजो आप जूमला में उपस्थिति के रूप को अनुकूलित कर सकते हैं। टेम्पलेट स्वचालित रूप से व्यवस्थापक कंसोल के कार्यों का उपयोग करते हुए पहले तरीके से इंस्टॉल किए जाते हैं, और दूसरे को Quickstart फ़ोल्डर से डेटा की प्रतिलिपि बनाकर मैन्युअल रूप से किया जाता है। जूमला टेम्पलेट स्थापना मेनू के माध्यम से किया जाता है"एक्सटेंशन", जहां आपको "एक्सटेंशन प्रबंधक" चुनने की आवश्यकता है खुलने वाली विंडो में, "डाउनलोड और इंस्टॉल करें" विकल्प को सक्रिय करें, जिसके बाद यह केवल साइट डिजाइन के चयनित विषय को पता निर्दिष्ट करने के लिए ही रहता है। टेम्पलेट लोड होने पर, आपको इसकी आवश्यकता होगीइसे सक्रिय करें ऐसा करने के लिए, "एक्सटेंशन" पुनः दर्ज करें और "टेम्पलेट प्रबंधक" चलाएं। विषयों की खुली सूची में, वांछित एक का चयन करें और "डिफ़ॉल्ट रूप से उपयोग करें" पर क्लिक करें। यह नोट किया जाना चाहिए कि टेम्पलेट नाम मिलान नहीं किए जा सकते। यदि आप एक नया स्थापित करने का प्रयास करते हैं जिसका नाम पहले से ही उपलब्ध है, तो CMS एक त्रुटि संदेश प्रदर्शित करेगा और स्थापना बाधित हो जाएगी। मैनुअल विधि जिसके द्वाराजूमला टेम्पलेट स्थापित करने में अधिक समय लगेगा। शुरू करने के लिए, आपको वह थीम डाउनलोड और अनज़िप करनी चाहिए, जो आपको पसंद है। कार्य जारी रखने के लिए, आपको केवल एक फ़ोल्डर की आवश्यकता है - क्विकस्टार्ट यह बहुत महत्वपूर्ण है कि इसमें नेस्टेड अभिलेखागार शामिल नहीं हैं, सभी डेटा अनपैक होना चाहिए, अन्यथा स्थापना विफल हो सकती है। इसके अलावा, किसी भी सुविधाजनक का लाभ उठाते हुएएफ़टीपी ग्राहक, साइट के रूट निर्देशिका में इस फ़ोल्डर की सामग्री को डाउनलोड करें। सर्वर पर अपलोड करने के बाद, ब्राउज़र में साइट का पता डालें। यह सेटिंग मेनू खोलने के लिए प्रेरित करेगा, जहां आपको लॉगिन, पासवर्ड, ई-मेल आदि के साथ फ़ील्ड भरने की आवश्यकता होगी। इस प्रकार, जूमला टेम्पलेट की स्थापना पूरी हो जाएगी। इसके बाद, आप adminpanel पर जा सकते हैं और चयनित विषय की स्थापना और डिजाइन के साथ आगे बढ़ सकते हैं। हालांकि, आपको पहले साइट फ़ोल्डर से "स्थापना" खंड को निकालना होगा।
साइटों को बनाने के लिए फ्री इंजिनजूमला है, लंबे समय तक बहुत प्रशंसकों को मिला है। यह समझाना आसान है, क्योंकि एक नौसिख उपयोगकर्ता को विशेष रूप से प्रोग्रामिंग भाषाओं में तल्लीन करने की ज़रूरत नहीं है, बल्कि सिर्फ सीएमएस को स्थापित करें और आप जिस टेम्पलेट को पसंद करते हैं उसका चयन करें। स्वाभाविक रूप से, यह इस मुद्दे को बनाता हैकैसे जूमला टेम्पलेट स्थापित है एक बार यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि यह प्रक्रिया बहुत सरल है और नये नौसिखिए उपयोगकर्ता के लिए भी कठिनाइयों का कारण नहीं होना चाहिए। नतीजतन, आप एक खूबसूरत वेबसाइट प्रबंधित करने के द्वारा किसी और के काम के परिणामों का आनंद ले पाएंगे, जिसे चुने हुए विषय की सामग्री से भरने की जरूरत है। की मदद से दो मुख्य तरीके हैंजो आप जूमला में उपस्थिति के रूप को अनुकूलित कर सकते हैं। टेम्पलेट स्वचालित रूप से व्यवस्थापक कंसोल के कार्यों का उपयोग करते हुए पहले तरीके से इंस्टॉल किए जाते हैं, और दूसरे को Quickstart फ़ोल्डर से डेटा की प्रतिलिपि बनाकर मैन्युअल रूप से किया जाता है। जूमला टेम्पलेट स्थापना मेनू के माध्यम से किया जाता है"एक्सटेंशन", जहां आपको "एक्सटेंशन प्रबंधक" चुनने की आवश्यकता है खुलने वाली विंडो में, "डाउनलोड और इंस्टॉल करें" विकल्प को सक्रिय करें, जिसके बाद यह केवल साइट डिजाइन के चयनित विषय को पता निर्दिष्ट करने के लिए ही रहता है। टेम्पलेट लोड होने पर, आपको इसकी आवश्यकता होगीइसे सक्रिय करें ऐसा करने के लिए, "एक्सटेंशन" पुनः दर्ज करें और "टेम्पलेट प्रबंधक" चलाएं। विषयों की खुली सूची में, वांछित एक का चयन करें और "डिफ़ॉल्ट रूप से उपयोग करें" पर क्लिक करें। यह नोट किया जाना चाहिए कि टेम्पलेट नाम मिलान नहीं किए जा सकते। यदि आप एक नया स्थापित करने का प्रयास करते हैं जिसका नाम पहले से ही उपलब्ध है, तो CMS एक त्रुटि संदेश प्रदर्शित करेगा और स्थापना बाधित हो जाएगी। मैनुअल विधि जिसके द्वाराजूमला टेम्पलेट स्थापित करने में अधिक समय लगेगा। शुरू करने के लिए, आपको वह थीम डाउनलोड और अनज़िप करनी चाहिए, जो आपको पसंद है। कार्य जारी रखने के लिए, आपको केवल एक फ़ोल्डर की आवश्यकता है - क्विकस्टार्ट यह बहुत महत्वपूर्ण है कि इसमें नेस्टेड अभिलेखागार शामिल नहीं हैं, सभी डेटा अनपैक होना चाहिए, अन्यथा स्थापना विफल हो सकती है। इसके अलावा, किसी भी सुविधाजनक का लाभ उठाते हुएएफ़टीपी ग्राहक, साइट के रूट निर्देशिका में इस फ़ोल्डर की सामग्री को डाउनलोड करें। सर्वर पर अपलोड करने के बाद, ब्राउज़र में साइट का पता डालें। यह सेटिंग मेनू खोलने के लिए प्रेरित करेगा, जहां आपको लॉगिन, पासवर्ड, ई-मेल आदि के साथ फ़ील्ड भरने की आवश्यकता होगी। इस प्रकार, जूमला टेम्पलेट की स्थापना पूरी हो जाएगी। इसके बाद, आप adminpanel पर जा सकते हैं और चयनित विषय की स्थापना और डिजाइन के साथ आगे बढ़ सकते हैं। हालांकि, आपको पहले साइट फ़ोल्डर से "स्थापना" खंड को निकालना होगा।
नोटिफिकेशन से मिली जानकारी के मुताबिक इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, पटना में जूनियर रिसर्च फेलो के पदों पर भर्ती को लेकर युवाओं से आवेदन आमंत्रित किया गया हैं। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 6 फरवरी 2020 तक आवेदन कर सकते हैं। ऐसे करें आवेदन : इच्छुक और योग्य उम्मीदवार IIT पटना के आधिकारिक वेबसाइट पर जा कर जारी नोटिफिकेशन को पढ़ें और दिए गए दिशा निर्देशों के मुताबिक फटाफट आवेदन करें। उम्मीदवारों का चयन : इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, पटना द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार इन पदों पर उम्मीदवारों का चयन ऑनलाइन इंटरव्यू के द्वारा किया जायेगा। पूरी डिटेल्स के लिए आप प्रकाशित नोटिफिकेशन देखें। इंटरव्यू की तिथि : 15 फरवरी 2021 . वेतनमान : 35000 रुपये प्रतिमाह।
नोटिफिकेशन से मिली जानकारी के मुताबिक इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, पटना में जूनियर रिसर्च फेलो के पदों पर भर्ती को लेकर युवाओं से आवेदन आमंत्रित किया गया हैं। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार छः फरवरी दो हज़ार बीस तक आवेदन कर सकते हैं। ऐसे करें आवेदन : इच्छुक और योग्य उम्मीदवार IIT पटना के आधिकारिक वेबसाइट पर जा कर जारी नोटिफिकेशन को पढ़ें और दिए गए दिशा निर्देशों के मुताबिक फटाफट आवेदन करें। उम्मीदवारों का चयन : इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, पटना द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार इन पदों पर उम्मीदवारों का चयन ऑनलाइन इंटरव्यू के द्वारा किया जायेगा। पूरी डिटेल्स के लिए आप प्रकाशित नोटिफिकेशन देखें। इंटरव्यू की तिथि : पंद्रह फरवरी दो हज़ार इक्कीस . वेतनमान : पैंतीस हज़ार रुपयापये प्रतिमाह।
भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ दूसरा सेमीफाइनल गंवाया, टी20 वर्ल्ड कप से बाहर. हेल्स-बटलर की जोड़ी की शतकीय साझेदारी पड़ी भारी. आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2022 के दूसरे सेमीफाइनल में टीम इंडिया को हार मिली. पहले बल्लेबाजी करते हुए मात्र 168 रन बनाने के बाद इंग्लैंड ने कमाल की बल्लेबाजी की और इस स्कोर को काफी छोटा साबित किया. इंग्लैंड के ओपनर एलेक्स हेल्स और कप्तान जॉस बटलर ने शतकीय साझेदारी कर इंग्लैंड की फाइनल में एंट्री की. सेमीफाइनल मैच में विराट कोहली-हार्दिक पंड्या ने अर्धशतक लगाया लेकिन गेंदबाजी बिल्कुल नाकाम रही. यही वजह है कि टीम इंडिया फाइनल में नहीं पहुंच सकी. वहीं दूसरी ओर इंग्लैंड ने तीसरी बार टी20 वर्ल्ड कप के फाइनल में जगह बनाई. 2010 में टी20 वर्ल्ड कप जीतने वाला इंग्लैंड, 2016 में भी फाइनल में पहुंचा था और अब पूरे 6 साल बाद ये टीम फाइनल में पहुंची है. वहीं दूसरी ओर भारतीय टीम साल 2007 में चैंपियन बनी थी और एक बार फिर उसका टी20 वर्ल्ड कप जीतने का ख्वाब टूट गया. आइए आपको बताते हैं टी20 वर्ल्ड कप 2022 के सेमीफाइनल में आखिर टीम इंडिया क्यों हार गई, जानिए 4 बड़ी वजहें. टीम इंडिया की ओपनिंग पार्टनरशिप सुपर-12 में तो नाकाम रही ही थी और सेमीफाइनल में भी वही देखने को मिला. इंग्लैंड के खिलाफ रोहित-राहुल सिर्फ 9 रन बनाकर आउट हुए. टीम इंडिया को फिर अच्छी शुरुआत नहीं मिली और वो पावरप्ले में 38 ही रन बना सकी. कप्तान रोहित शर्मा का बल्ला पूरे टी20 वर्ल्ड कप में नहीं चला और सेमीफाइनल में भी यही देखने को मिला. रोहित ने 28 गेंदों में 27 रन बनाए, उनका स्ट्राइक रेट 100 से भी कम रहा. दूसरी ओर सूर्यकुमार यादव ने 10 गेंदों में 14 रन बनाए. सुपर-12 में शानदार गेंदबाजी करने वाले अर्शदीप सिंह और भुवनेश्वर कुमार ने सेमीफाइनल में निराश किया. दोनों पावरप्ले में ना विकेट ले पाए ना रन रोक पाए. भुवनेश्वर कुमार का इकॉनमी रेट 10 रन प्रति ओवर से ज्यादा रहा. शमी, अश्विन और पंड्या भी प्रति ओवर 10 रन से ज्यादा लुटा बैठे. टीम इंडिया की प्लेइंग इलेवन का सेलेक्शन भी कहीं ना कहीं हार की वजह रहा. प्लेइंग इलेवन में भारत ने विकेट टेकिंग स्पिनर को जगह नहीं दी. अक्षर पटेल को मौका दिया गया जो सिर्फ रन रोकने का काम करते हैं युजवेंद्र को पूरे टूर्नामेंट में मौका नहीं दिया गया.
भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ दूसरा सेमीफाइनल गंवाया, टीबीस वर्ल्ड कप से बाहर. हेल्स-बटलर की जोड़ी की शतकीय साझेदारी पड़ी भारी. आईसीसी टीबीस वर्ल्ड कप दो हज़ार बाईस के दूसरे सेमीफाइनल में टीम इंडिया को हार मिली. पहले बल्लेबाजी करते हुए मात्र एक सौ अड़सठ रन बनाने के बाद इंग्लैंड ने कमाल की बल्लेबाजी की और इस स्कोर को काफी छोटा साबित किया. इंग्लैंड के ओपनर एलेक्स हेल्स और कप्तान जॉस बटलर ने शतकीय साझेदारी कर इंग्लैंड की फाइनल में एंट्री की. सेमीफाइनल मैच में विराट कोहली-हार्दिक पंड्या ने अर्धशतक लगाया लेकिन गेंदबाजी बिल्कुल नाकाम रही. यही वजह है कि टीम इंडिया फाइनल में नहीं पहुंच सकी. वहीं दूसरी ओर इंग्लैंड ने तीसरी बार टीबीस वर्ल्ड कप के फाइनल में जगह बनाई. दो हज़ार दस में टीबीस वर्ल्ड कप जीतने वाला इंग्लैंड, दो हज़ार सोलह में भी फाइनल में पहुंचा था और अब पूरे छः साल बाद ये टीम फाइनल में पहुंची है. वहीं दूसरी ओर भारतीय टीम साल दो हज़ार सात में चैंपियन बनी थी और एक बार फिर उसका टीबीस वर्ल्ड कप जीतने का ख्वाब टूट गया. आइए आपको बताते हैं टीबीस वर्ल्ड कप दो हज़ार बाईस के सेमीफाइनल में आखिर टीम इंडिया क्यों हार गई, जानिए चार बड़ी वजहें. टीम इंडिया की ओपनिंग पार्टनरशिप सुपर-बारह में तो नाकाम रही ही थी और सेमीफाइनल में भी वही देखने को मिला. इंग्लैंड के खिलाफ रोहित-राहुल सिर्फ नौ रन बनाकर आउट हुए. टीम इंडिया को फिर अच्छी शुरुआत नहीं मिली और वो पावरप्ले में अड़तीस ही रन बना सकी. कप्तान रोहित शर्मा का बल्ला पूरे टीबीस वर्ल्ड कप में नहीं चला और सेमीफाइनल में भी यही देखने को मिला. रोहित ने अट्ठाईस गेंदों में सत्ताईस रन बनाए, उनका स्ट्राइक रेट एक सौ से भी कम रहा. दूसरी ओर सूर्यकुमार यादव ने दस गेंदों में चौदह रन बनाए. सुपर-बारह में शानदार गेंदबाजी करने वाले अर्शदीप सिंह और भुवनेश्वर कुमार ने सेमीफाइनल में निराश किया. दोनों पावरप्ले में ना विकेट ले पाए ना रन रोक पाए. भुवनेश्वर कुमार का इकॉनमी रेट दस रन प्रति ओवर से ज्यादा रहा. शमी, अश्विन और पंड्या भी प्रति ओवर दस रन से ज्यादा लुटा बैठे. टीम इंडिया की प्लेइंग इलेवन का सेलेक्शन भी कहीं ना कहीं हार की वजह रहा. प्लेइंग इलेवन में भारत ने विकेट टेकिंग स्पिनर को जगह नहीं दी. अक्षर पटेल को मौका दिया गया जो सिर्फ रन रोकने का काम करते हैं युजवेंद्र को पूरे टूर्नामेंट में मौका नहीं दिया गया.
चर्चगेट - बीएमसी शिक्षा विभाग की ओर से प्रगति शैक्षणिक महाराष्ट्र कार्यक्रम (माध्यमिक स्तर) का आयोजन बुधवार को जयहिंद कॉलेज के सभागृह में किया गया। इस कार्यशाला में बीएमसी शिक्षा विभाग के सभी अधिकारी, स्कूलों के प्रिंसिपल और शहर साधन केंद्र के विशेषज्ञ उपस्थित थे। शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों में विद्यार्थियों की उपस्थिति और उनकी शिक्षा में विकास के लिए अनेक उपाय योजना चला रही है, फिर भी सही मायने में इसका नतीजा सामने नहीं आ रहा है। इसलिए वक्त आ गया है कि शिक्षा को और प्रभावी बनाया जाए तभी सौ फीसदी नतीजा मिलेगा। इस तरह का वक्तव्य शिक्षा और खेल विभाग के प्रधान सचिव नंदकुमार ने दिया।
चर्चगेट - बीएमसी शिक्षा विभाग की ओर से प्रगति शैक्षणिक महाराष्ट्र कार्यक्रम का आयोजन बुधवार को जयहिंद कॉलेज के सभागृह में किया गया। इस कार्यशाला में बीएमसी शिक्षा विभाग के सभी अधिकारी, स्कूलों के प्रिंसिपल और शहर साधन केंद्र के विशेषज्ञ उपस्थित थे। शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों में विद्यार्थियों की उपस्थिति और उनकी शिक्षा में विकास के लिए अनेक उपाय योजना चला रही है, फिर भी सही मायने में इसका नतीजा सामने नहीं आ रहा है। इसलिए वक्त आ गया है कि शिक्षा को और प्रभावी बनाया जाए तभी सौ फीसदी नतीजा मिलेगा। इस तरह का वक्तव्य शिक्षा और खेल विभाग के प्रधान सचिव नंदकुमार ने दिया।
ग्रहीय मण्डल और ड्यून (उपन्यास) शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। ग्रहीय मण्डल vs. ड्यून (उपन्यास) एक काल्पनिक ग्रहीय मण्डल एक और काल्पनिक ग्रहीय मण्डल का नज़दीकी दृश्य - इसमें पत्थर, गैस और धूल अपने तारे के इर्द-गिर्द परिक्रमा कर रहें हैं ग्रहीय मण्डल किसी तारे के इर्द गिर्द परिक्रमा करते हुई उन खगोलीय वस्तुओं के समूह को कहा जाता है जो अन्य तारे न हों, जैसे की ग्रह, बौने ग्रह, प्राकृतिक उपग्रह, क्षुद्रग्रह, उल्का, धूमकेतु और खगोलीय धूल। हमारे सूरज और उसके ग्रहीय मण्डल को मिलाकर हमारा सौर मण्डल बनता है। . फ़्रैंक हर्बर्ट द्वारा बनाया गया काल्पनिक रेगिस्तानी ग्रह अर्राकिस का एक चित्र ड्यून अमेरिकी लेखक फ़्रैंक हर्बर्ट द्वारा सन् १९६५ में प्रकाशित विज्ञान कथा उपन्यास है। १९६६ में इसने ह्यूगो पुरस्कार जीता और १९६६ में नॅब्युला पुरस्कार जीताः यह दोनों ही हर साल छपने वाली सर्वश्रेष्ठ विज्ञान कथा को दिए जाते हैं। ड्यून की १.२ करोड़ से अधिक प्रतियाँ बिक चुकी हैं और इसे विश्व का सब से ज़्यादा बिकने वाला विज्ञान कथा उपन्यास माना जाता है। इसके प्रकाशन के बाद फ़्रैंक हर्बर्ट ने इसकी कथा को पाँच और ड्यून उपन्यासों में आगे बढ़ाया। . ग्रहीय मण्डल और ड्यून (उपन्यास) आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)। ग्रहीय मण्डल 23 संबंध है और ड्यून (उपन्यास) 12 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (23 + 12)। यह लेख ग्रहीय मण्डल और ड्यून (उपन्यास) के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
ग्रहीय मण्डल और ड्यून शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। ग्रहीय मण्डल vs. ड्यून एक काल्पनिक ग्रहीय मण्डल एक और काल्पनिक ग्रहीय मण्डल का नज़दीकी दृश्य - इसमें पत्थर, गैस और धूल अपने तारे के इर्द-गिर्द परिक्रमा कर रहें हैं ग्रहीय मण्डल किसी तारे के इर्द गिर्द परिक्रमा करते हुई उन खगोलीय वस्तुओं के समूह को कहा जाता है जो अन्य तारे न हों, जैसे की ग्रह, बौने ग्रह, प्राकृतिक उपग्रह, क्षुद्रग्रह, उल्का, धूमकेतु और खगोलीय धूल। हमारे सूरज और उसके ग्रहीय मण्डल को मिलाकर हमारा सौर मण्डल बनता है। . फ़्रैंक हर्बर्ट द्वारा बनाया गया काल्पनिक रेगिस्तानी ग्रह अर्राकिस का एक चित्र ड्यून अमेरिकी लेखक फ़्रैंक हर्बर्ट द्वारा सन् एक हज़ार नौ सौ पैंसठ में प्रकाशित विज्ञान कथा उपन्यास है। एक हज़ार नौ सौ छयासठ में इसने ह्यूगो पुरस्कार जीता और एक हज़ार नौ सौ छयासठ में नॅब्युला पुरस्कार जीताः यह दोनों ही हर साल छपने वाली सर्वश्रेष्ठ विज्ञान कथा को दिए जाते हैं। ड्यून की एक.दो करोड़ से अधिक प्रतियाँ बिक चुकी हैं और इसे विश्व का सब से ज़्यादा बिकने वाला विज्ञान कथा उपन्यास माना जाता है। इसके प्रकाशन के बाद फ़्रैंक हर्बर्ट ने इसकी कथा को पाँच और ड्यून उपन्यासों में आगे बढ़ाया। . ग्रहीय मण्डल और ड्यून आम में शून्य बातें हैं । ग्रहीय मण्डल तेईस संबंध है और ड्यून बारह है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख ग्रहीय मण्डल और ड्यून के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
Acharya Trailer Out: साउथ फिल्में इस समय बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा रही हैं। इसी बीच फैंस के लिए एक और खुशखबरी सामने आई है। बता दें कि फिल्म आरआरआर के बाद अब रामचरण (Ram Charan) फिल्म 'आचार्य' (Acharya) से लोगों का दिल जीतने फिर आ रहे हैं। फिल्म का ट्रेलर भी रिलीज हो चुका है। ट्रेलर में चिरंजीवी (Chiranjeevi) और रामचरण धांसू अवतार में नजर आ रहे हैं। ट्रेलर एकदम धांसू है जिसे देखकर ही फिल्म का अंदाजा लगाया जा सकता है। ट्रेलर में राम चरण (Ram Charan) का लुक काफी जबरदस्त नजर आ रहा है। वहीं चिरंजीवी (Chiranjeevi) का भी दमदार लुक देखने को मिला। इस ट्रेलर में दोनों का एक्शन काफी जबरदस्त हैं। जिसे लोग खूब पसंद कर रहे है। 'आचार्य'के ट्रेलर को राम चरण ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर भी शेयर किया है। इस ट्रेलर को शेयर करते हुए राम चरण ने लिखा, 'मेरे अप्पा और अपने मेगास्टार। 'आचार्य' (Acharya Release Date) 29 अप्रैल को पर्दे पर दस्तक देने के लिए पूरी तरह से तैयार है। यह एक तेलुगु एक्शन-ड्रामा फिल्म है। इस फिल्म में मेगा स्टार चिरंजीवी और उनके बेटे राम चरण नजर आएंगे। इसके अलावा एक्ट्रेस में पूजा हेगड़े (Pooja Hegde) और काजल अग्रवाल (Kajal Aggarwal) भी नजर आएंगी। फिल्म के निर्माता 'अन्वेश रेड्डी' (Anvesh Reddy) हैं। बताते चले कि ऐसा पहली बार नही हुआ है जब चिरंजीवी और रामचरण साथ नजर आने वाले हैं। इससे पहले भी साल 2013 में आईं राम चरण की फिल्म 'मगधीरा' (Magadheera) में 'चिरंजीवी' ने कैमियो किया था। वहीं अब फैंस फिल्म का ट्रेलर देखकर काफी एक्साइटेड हो गए है और फिल्म के रिलीज का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। रामचरण के आरआरआर की बात करें तो फिल्म बॉक्स ऑफिस पर लगातार रिकॉर्ड्स तोड़ रही है। 550 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने अब तीसरे हफ्ते के दूसरे दिन यानी 16 दिनों में ही 1000 करोड़ रुपए से ज्यादा का वर्ल्ड वाइड बिजनेस कर लिया है। यह भी पढ़ेंः
Acharya Trailer Out: साउथ फिल्में इस समय बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा रही हैं। इसी बीच फैंस के लिए एक और खुशखबरी सामने आई है। बता दें कि फिल्म आरआरआर के बाद अब रामचरण फिल्म 'आचार्य' से लोगों का दिल जीतने फिर आ रहे हैं। फिल्म का ट्रेलर भी रिलीज हो चुका है। ट्रेलर में चिरंजीवी और रामचरण धांसू अवतार में नजर आ रहे हैं। ट्रेलर एकदम धांसू है जिसे देखकर ही फिल्म का अंदाजा लगाया जा सकता है। ट्रेलर में राम चरण का लुक काफी जबरदस्त नजर आ रहा है। वहीं चिरंजीवी का भी दमदार लुक देखने को मिला। इस ट्रेलर में दोनों का एक्शन काफी जबरदस्त हैं। जिसे लोग खूब पसंद कर रहे है। 'आचार्य'के ट्रेलर को राम चरण ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर भी शेयर किया है। इस ट्रेलर को शेयर करते हुए राम चरण ने लिखा, 'मेरे अप्पा और अपने मेगास्टार। 'आचार्य' उनतीस अप्रैल को पर्दे पर दस्तक देने के लिए पूरी तरह से तैयार है। यह एक तेलुगु एक्शन-ड्रामा फिल्म है। इस फिल्म में मेगा स्टार चिरंजीवी और उनके बेटे राम चरण नजर आएंगे। इसके अलावा एक्ट्रेस में पूजा हेगड़े और काजल अग्रवाल भी नजर आएंगी। फिल्म के निर्माता 'अन्वेश रेड्डी' हैं। बताते चले कि ऐसा पहली बार नही हुआ है जब चिरंजीवी और रामचरण साथ नजर आने वाले हैं। इससे पहले भी साल दो हज़ार तेरह में आईं राम चरण की फिल्म 'मगधीरा' में 'चिरंजीवी' ने कैमियो किया था। वहीं अब फैंस फिल्म का ट्रेलर देखकर काफी एक्साइटेड हो गए है और फिल्म के रिलीज का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। रामचरण के आरआरआर की बात करें तो फिल्म बॉक्स ऑफिस पर लगातार रिकॉर्ड्स तोड़ रही है। पाँच सौ पचास करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने अब तीसरे हफ्ते के दूसरे दिन यानी सोलह दिनों में ही एक हज़ार करोड़ रुपए से ज्यादा का वर्ल्ड वाइड बिजनेस कर लिया है। यह भी पढ़ेंः
श्रीकृष्णः शरणं मम. ब्रह्मसूत्र भाष्य ( उपोद्धात ) श्री शङ्कराचार्य जी ने ब्रह्मसूत्र पर भाष्य लिखने के पहले भूमिका के रूप अध्यासभाष्य लिखा है। उस अध्यासमाष्य पर विचार करने के पहले कुछ प्रश्न उठते हैं जिन पर विचार करना आवश्यक है। सर्वप्रथम यह प्रश्न उठता हैं कि चार्य ने अध्यासमाष्य से सूत्रभाष्य प्रारंभ क्यों किया । ऐसा किसी अन्य आचार्य ने नहीं किया है। इस प्रश्न पर विचार करने से कई एक तथ्यों पर प्रकाश पड़ेगा । सर्वप्रथम तो दार्शनिक दृष्टि से अध्यास पर विचार करना और प्रारंभ में ही विचार करना अत्यन्त आवश्यक है क्योंकि प्रत्येक दर्शन का उद्देश्य अविद्या या अज्ञान का नाश होता है। अतः सर्वप्रथम हमारा यह कर्तव्य है कि हम सिद्ध करें कि अविद्या है और यह भी विचार करें कि अविद्या का स्वरूप क्या है। संभवतः इन्हीं प्रश्नों को दृष्टि में रखकर शङ्कराचार्य ने सर्वप्रथम यह सिद्ध किया है कि अध्यास है और वह अध्यास अविद्या के कारण ही हो सकता है। दूसरी बात जो शङ्कराचार्य अध्यास भाष्य में दिखाना चाहते हैं वह यह है कि अविद्या नैसर्गिक है और सभी अनयों का कारण है अर्थात् बिना अविद्या नाश किये तज्जन्य अनर्थों से मुक्ति नहीं मिल सकती । अध्यास पर विचार करने का एक और भी दार्शनिक कारण मालूम पड़ता है। वह यह है कि उससे हमको सत्यासत्य के स्वरूप के विषय में भी संकेत मिलता है, क्योंकि इसी प्रसंग में शङ्कराचार्य का यह कहता है अध्यास में अध्यस्त और अध्यासवान दो तत्त्व होते हैं । वे दोनों न तो सत्य हो सकते हैं और न दोनों असत् हो सकते हैं क्योंकि इन दोनों ही स्थितियों में बाघ नहीं हो सकता । अभ्यास का बाघ होता है। अतः अध्यस्त को मिथ्या मानना आवश्यक है जो सत् और असत् दोनों से भिन्न होता है। इस प्रकार मिथ्यात्व के स्वरूप का ज्ञान होने पर (मिथ्या वह है जिसका बाब होता है) सत्य के स्वरूप की ओर भी संकेत मिलता है क्योंकि तब हम यह कह सकते हैं कि सत् वह है जिसका बाघ नहीं होता है (त्रिकालाबाधित सतु ) । दर्शन की विधि की दृष्टि से भी अध्यास भाष्य में एक महत्व की बात मिलती । अध्यासभाष्य में शङ्कराचार्य हमारे अनुभव और व्यवहार का विश्लेषण करते २ : ब्रह्मसूत्रशाङ्करभाष्यचतुःसूत्री हैं और उसी विश्लेषण से सत्यासत्य के स्वरूप पर पहुँचते हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि दर्शन को अनुभव का आधार लेकर चलना चाहिये और अनुभव का विश्लेषण करके सत्यासत्य का विचार करना चाहिये । दर्शन की यह अवधारणा पाश्चात्य दर्शन में प्राप्त दो अवधारणाओं से सर्वथा भिन्न है; वहाँ पर एक तो अनुभववाद है जो हमारे साधारण अनुभव को सर्वथा सत्य मानकर उसकी छानबीन करता है और दूसरा बुद्धिवाद है जो अनुभव से कोई संबंध न रखते हुए बुद्धि के सहारे तत्त्वातत्व पर विचार करता है । ये दोनों विधियाँ अपूर्ण ही नहीं वरन् दोषपूर्ण भी है । यदि हमारा साधारण अनुभव सत्य है तो दर्शन की आवश्यकता ही क्या ? अतः अनुभववादी दर्शन के वास्तविक अर्थ को नहीं समझते और बुद्धिवादी यह नहीं समझते कि तत्त्व को यदि हम अनुभव के किसी स्तर पर नहीं प्राप्त करेंगे तो केवल प्रत्ययों द्वारा प्राप्त तत्व कोरी कल्पना मात्र होगा। अतः शङ्कराचार्य अनुभव का विश्लेषण तो करते हैं किन्तु अनुभव को सर्वथा सत्य न मानकर उसमें क्या सत्य है और क्या असत्य है इस प्रकार का प्रश्न उठाते हैं । इस अनुभव में भी जो सबसे महत्त्व का अध्यास है और जिसके आधार पर हमारे जीवन का सुख दुख निर्भर करता है वह है अहं विषयक अध्यास। इसलिये शङ्कराचार्य किसी अन्य विषयक अध्यास को न लेकर अहं विषयक अध्यास से प्रारंभ करते हैं। क्योंकि उनको यहीं दिखाना है कि अहं विषयक अध्यास ही सर्व अनर्थों का मूल है। अहं का विश्लेषण ही प्रधान दार्शनिक प्रश्न है और सब प्रश्न प्रासंगिक हैं । श्री शङ्कराचार्य अध्यास की सिद्धि के लिये युष्मद् और अस्मद् प्रत्यय अर्थात् मैं और तुम को विषयी और विषय के रूप में लेकर कहते हैं कि ये दोनों तमः प्रकाशवत विरुद्ध स्वभाव के हैं तब भी हम एक पर दूसरे का आरोप करते हैं यह सिद्ध है । ऊपर बताया जा चुका है कि पुष्मद् और अस्मद् के अध्यास को वे इसलिये लेते हैं कि अहं विषयक प्रश्न ही दर्शन का मुख्य प्रश्न है। जीवन की दृष्टि से अहं विषयक प्रश्न सबसे महत्त्व का है क्योंकि हम अपने विषय में जो धारणा रखते हैं उसी पर हमारे सारे दुख सुख, सारे व्यवहार और मूल्य निर्भर करते हैं। पदार्थों की गणना करना या सृष्टि संबंधी प्रश्न अहं विषयक प्रश्न के प्रसंग में आते हैं। अतः ये प्रश्न गौण हैं यही बताना यहाँ पर शङ्कराचार्य का ध्येय है। तमः प्रकाशवत् विरुद्ध स्वभाव । कहने का अर्थ यह न समझ लिया जाय कि जैसे प्रकाश अंधकार का नाश कर देता है वैसे ही विषयी विषय का नाश करता है। विषय और विषयी विरुद्ध स्वभाव वाले है किन्तु विरुद्धत्व का अर्थ यह है कि एक ही वस्तु दोनों नहीं हो सकती (विषय और विषयी दोनों नहीं हो सकती ) । स्वभाव शब्द भी यहां पर स्वरूप के अर्थ में आया है अर्थात् विषय और विषयी दोनों स्वरूपतः विरुद्ध हैं। इसलिए उनके मुषों को या धर्मों को विरुद्ध कहना भी ठीक ही है। यहाँ पर एक और प्रश्न विचारणीय है कि वे क्यों अस्मद् युष्मद् को हो विषय विषयी के रूप में लेते हैं क्यों नहीं अह सः को या त्वं सः को लेते है। इसका कारण यह है कि व्यवहार में उत्तम और अन्य पुरुष अथवा मध्यम पुरुष और अन्यपुरुष का योग या संबंध मिलता है जैसे एते वयम्, इमे वयं, तत्त्वयम् आदि प्रयोग मिलते हैं किन्तु उत्तम पुरुष और मध्यम पुरुष का योग नहीं बनता है। अतः उनको बिरुद्ध कहना ठीक नहीं है। अहंत्वम् को हो विरुद्ध कहा जा सकता है। यदि हम विषय और विषयी का अध्यारोप एक दूसरे पर करते हैं यद्यपि वे विरुद्ध स्वभाव वाले हैं, तो यह बघ्यारोप मिथ्या ही हो सकता है। यहाँ सर्वप्रथम यह विचारणीय है कि यह कैसे सिद्ध है कि हम इस प्रकार का अध्यारोप करते ही हैं। इसका प्रमाण यह है कि हम अहं शब्द का प्रयोग शरीर के लिए करते हैं, जब कहते हैं कि मैं बालक हूँ या वृद्ध हूं, या लम्बा हूँ या नाटा हूँ और शरीर को हम चैतन्य समझते हैं । इससे यह सिद्ध हुआ कि हम अहं को शरीर और शरीर को अहं समझकर व्यवहार करते हैं यद्यपि विषयी रूप से अहं और विषयी रूप से शरीर दोनों से विरुद्ध स्वभाव वाले हैं। दूसरा प्रश्न यह उठता है कि इस प्रकार के परस्पर आरोपण को मिथ्या क्यों कहा गया है और किस अर्थ में मिष्या कहा गया है ? मिथ्या तो इसलिए कहा गया है कि ये दोनों एक नहीं हो सकते क्योंकि विरुद्ध स्वभाव वाले हैं, परन्तु प्रश्न यह है कि इस अध्यास के मिथ्यारोप का अर्थ क्या है ? क्या ये दोनों सत् हैं और इनका अध्यारोप मिथ्या है ? अथवा ये तीनों मिथ्या हैं (विषय, विषयी और उनका अध्यारोप) अथवा इनमें से एक मिथ्या है इसलिए अध्यास भी मिथ्या । यदि एक मिथ्या है तो उनमें से कौन मिथ्या है ? इनमें से विषय और विषयी दोनों को सतु नहीं कहा जा सकता क्योंकि उनका संबंध (अध्यारोप) मिथ्या है और दो सतु वस्तुओं का अध्यारोप ( संबंध) मिघ्या नहीं हो सकता। दोनों को असतु भी भी नहीं कहा जा सकता क्योंकि इन दोनों में जो विषयी है उसका निराकरण कमी नहीं किया जा सकता। इसीलिए यह कहना कि ये तीनों (विषय विषयी अध्यारोप्र ) मिथ्या हैं यह भी ठीक नहीं है । अतः यही कहना पड़ेगा कि दोनों में से एक ही में ४ : ब्रह्मसूमशाङ्करभाष्यचतुःसूत्र मिथ्या है विषय अथवा विषयी। किन्तु जैसे कि ऊपर बताया गया है विषयी का कभी निराकरण नहीं हो सकता । अतः विषय और उसके अध्यारोप को मिथ्या कहना शेष रह जाता है क्योंकि जैसा रज्जु-सर्प के छान्त से स्पष्ट है, जो आरोपित है उसका बाघ होता है। बाघ ही मिथ्यात्व है इसको स्थातिवाद के प्रसंग में स्पष्ट किया जायमा । इस प्रकार यद्यपि विषय और विषयी नितान्त विरुद्ध स्वभाव वाले है और उनके धर्म भी नितान्त विरुद्ध हैं फिर भी उनका परस्पर अध्यारोप अविवेकजन्य ही हो सकता है । इस अविवेक के ही कारण हम सत्य और असत्य का सम्मिश्रण करके अहम् इदं, मम् इदं आदि शब्दों का व्यवहार करते हैं । शङ्कराचार्य के (सत्यानृते मिथुनीकृत्य) शब्दों से स्पष्ट है कि अध्यास में सब कुछ मिथ्या नहीं होता बल्कि सत्यासत्य का सम्मिश्रण होता है। जैसे यह समं है इसमें 'यह' सत्य है और सर्पांश मिध्या है वैसे ही अहम् इदं में अहं सत्य है और इदं मिथ्या है। आगे शङ्कराचार्य कहते हैं कि अहम् इदं मम इदं व्यवहार नैसर्गिक है । इस व्यवहार को नैसर्गिक कहने शङ्करा चार्य का तात्पर्य यह है कि यह व्यवहार (अध्यास) कोई जानबूझकर नहीं करता बल्कि अज्ञात रूप से होता है अर्थात् (अध्यास) अचेतन मन की प्रतीति है और यह प्रतीति सर्वमान्य है, किसी एक दो की नहीं है, किन्तु यह प्रतीति मिथ्या है । यहाँ पर व्यंजना इस बात की है कि प्रतीति मात्र होने से हम किसी वस्तु को सत्य नहीं कह सकते भले ही वह प्रतीति सर्वसामान्य ही क्यों न हो । जैसे सर्वसामान्य की प्रतीति है कि सूर्य और चन्द्रमा छोटे आकार के हैं एवं गतिमान हैं फिर भी विचार करने पर हम इस प्रतीति को मिथ्या ठहराते हैं। शङ्कराचार्य प्रतीति और ज्ञान का भेद स्पष्ट करना चाहते हैं । ज्ञान विवेकपूर्ण है और प्रतीति अविवेकपूर्ण । इसी से ज्ञान द्वारा प्रतीति का बाध होता है किन्तु ज्ञान का बाध संभव नहीं है। बहुत से दार्शनिक हमारी सामान्य प्रतीतियों के आधार पर ही दर्शन का महल खड़ा करना चाहते किन्तु यह प्रक्रिया ठीक नहीं है । सामान्य प्रतीति को दर्शन का आधार सत्यासत्य के विचार के बाद ही बनाया जा सकता है पहले नहीं । अर्थात् प्रतीति को ही ज्ञान मानकर के दार्शनिक विचार शुरू करना गलत है। इसके अनन्तर शङ्कराचार्य अध्यास के विषय में प्रचलित विभिन्न दार्शनिक धारणाओं का उल्लेख करते है। उनकी मीमांसा करके यह दिखाते हैं कि उनमें कौन अंश ग्राह्य है और कौन सा अंश अग्राह्य है। अध्यास के विषय में दो तीन मुख्य व्याख्या : ५ प्रश्न है जिनको ध्यान में रखकर हमको अध्यास के स्वरूप का निर्णय करना होगा । प्रथम प्रश्न तो यह है कि रज्जु-सर्प वष्यास में सर्प दिखायी पड़ता है या नहीं ? दूसरा प्रश्न यह है कि क्या वह सर्प अन्य स्थल या अन्य काल में कहीं प्राप्त हो सकता है ? तीसरा प्रश्न यह है कि भ्रमनिवारण के बाद उस सर्प की क्या स्थिति होती है ? इन तीनों प्रश्नों को ध्यान में रखकर अब हम विभिन्न ख्यातिवादों पर विचार करेंगे और दिखायेंगे कि क्यो अनिर्वचनीय ख्यातिवाद ही मान्य है । पूर्व और पश्चिम दोनों जगह कुछ दार्शनिकों का यह मत है कि मिथ्या ज्ञान नाम की कोई वस्तु नहीं है । जिस वस्तु का ज्ञान होता है वह सन् है । "यथार्थ सर्वविज्ञानम्" । ज्ञान का विषय मिथ्या हो ही नहीं सकता है। रज्जुसर्प और स्वप्नादि भी सत्य हैं। ऐसे विचारवालो को सत्ख्यातिवादी कहा जाता है। आचार्य रामानुज इसी मत के हैं और हेगेल भी। रामानुज ने पंचीकरण के सिद्धान्त के आधार पर सर्व सर्वात्मकम् को स्वीकार किया है। यदि रज्जु सर्पवत् दिखायी पड़ती है तो रज्जु में सर्प का अंश है। सर्प सर्वथा मिथ्या नहीं है। विचार करने पर मालूम पड़ता है कि सत्ख्याति का सिद्धान्त असंगत है। प्रश्न यह है कि सभी ज्ञान पूर्णरूप से सत्य है या अंशतः ? यदि अंशतः सत्य है तो कोई एक अंश असत्य हुआ। यदि सभी ज्ञान पूर्णरूप से सत्य है तो सर्वसामान्य का विश्वास कि स्वप्नादि पदार्थ या रज्जु-सर्प मिथ्या है यह मिथ्या सिद्ध हुआ। इतना ही नहीं सतुख्यातिवादी को किसी अन्य सिद्धान्त को मिथ्या कहने का अधिकार नहीं रहेगा क्योंकि सभी ज्ञान सत्य है । यदि यह कहा जाय कि अन्य सिद्धान्त ज्ञान नहीं बल्कि कल्पना मात्र हैं तो यह सिद्ध होगा कि हमारे मन में ज्ञान के अतिरिक्त अन्य वृत्तियाँ भी हैं । तब यह कैसे निश्चित होगा कि कौन सी वृत्ति कल्पना और कौन सी वृत्ति यथार्थ ज्ञान की है ? अतः सत् ख्यातिवाद को स्वीकार नहीं किया जा सकता । अख्यातिवाद यह सिद्धान्त प्रभाकर का है। उनका भी कहना है कि सभी ज्ञान यथार्थ है। जिसे हम भ्रम कहते हैं वास्तव में वह किसी मिथ्या वस्तु का ज्ञान नहीं है बल्कि ६ : ह्मसूत्रशाङ्करभाष्यचतुःसूत्री रज्जु और सर्प इन दोनों के भेद को ग्रहण न करना है। रज्जु प्रत्यक्ष है और सर्प की स्मृति होतो है और इस भेद को न देखकर हम यह सर्प है ऐसा कह देते हैं। यह किसी दोष के कारण होता है । अतः दोष के कारण भेद के ज्ञान का अभाव हो सकता है किसी मिथ्या वस्तु का ज्ञान नहीं हो सकता। किसी भी ज्ञान को मिथ्या कहना उसे ज्ञान न कहने के समान है जो आत्म-विरोष है। प्रश्न यह है कि क्या इदं और रजतम् का अलग-अलग ज्ञान होता है ? यदि कहा जाय कि होता है तब दोनों के भेद का ज्ञान क्यों नहीं होता ? और दोनों का ज्ञान अलग-अलग नहीं होता है तब यह मानना होगा कि इदं रजतम् यह एक ज्ञान है। दूसरी बात यह है कि यदि यह सर्प है या रजत है ऐसा ज्ञान न होता तो केवल भेद-ज्ञान के अभाव से हम सर्प से डरते क्यों ? और रजत से आकृष्ट कैसे होते ? ज्ञानाभाव से क्रिया कैसे हो सकती है ? यदि यह कहें कि समानता के कारण क्रिया हो सकती है तो जहां भेद का ज्ञान नहीं वहीं समानता का ज्ञान कैसे होंगा ? यदि सर्प को स्मृति माना जाता है तो दो प्रश्न उठते हैं। एक तो यह कि सर्प यदि स्मृति है तो दिखाई कैसे पड़ता है ? और यदि यह कहें कि सर्प स्मृति होते हुए दिखाई पड़ता है तब यहाँ स्मृति और प्रत्यक्ष के विषय में भ्रम मानना पड़ेगा। यह कहना कि सर्प दिखाई नहीं पड़ता है सर्वथा अनुभव के विरुद्ध होगा। दूसरा प्रश्न यह है कि सर्प- विशेष जो यहाँ दिखाई पड़ता है वह स्मृति है तो उसे परिचित सा मालूम पड़ना चाहिये परन्तु ऐसा अनुभव नहीं होता। प्रभाकर के लिये यह समझाना कि सर्प इदं के रूप में कैसे मालूम पड़ता है कठिन है। भ्रम का जब निवारण होता है तब हम यह नहीं कहते है कि अरे सर्प तो स्मृतिमात्र था किन्तु यह कहते हैं कि अरे हमने रज्जु को सर्प समझा था। नैयायिक इस बात को स्वीकार करते है कि सर्प स्मृतिमांत्र नहीं है। उनका कथन यह है कि सर्प सत्य हैं और उसका प्रत्यक्ष ज्ञान होता है किन्तु यह ज्ञान साधारण प्रत्यक्ष नहीं है प्रत्युत एक प्रकार का असाधारण प्रत्यक्ष है जिसे वे ज्ञान-लक्षणाप्रत्यासत्ति कहते हैं । अतः इदं का सर्पवत् होना मिथ्या होते हुए भी सर्प सत्य है । सर्प कहीं अन्यत्र है। भ्रम भेदज्ञान का अभाब मात्र नहीं, उसमें अन्थया ख्याति है । इदं और सर्प का सम्बन्ध मात्र मिथ्या है न इदं मिथ्या हैं न सर्प । भ्रम निवारण का अर्थ यह है कि सर्प यहीं नहीं है अन्यत्र है। व्याख्या : ७ नैयायिक लोगों की यह विशेषता है कि वे सर्प को प्रत्यक्ष मानते हैं; परन्तु इदं और सर्प दोनों सत्य है तो उनके बीच का सम्बन्ध मिथ्या कैसे हो सकता है ? दो सत् पदार्थों का सम्बन्ध भी सत् ही होगा। दूसरी बात यह है कि यदि सर्प अन्यत्र है तो वह यहाँ इस क्षण कैसे दिखाई देगा ? जब हम यह कहते हैं कि सर्प मिथ्या तो यहाँ दिखाई पड़ने वाले सर्प की मिथ्या कहते हैं। अन्यत्र रहने वाले सर्प को नहीं । यदि सर्प कहीं अन्यत्र हो तो भी यहाँ दिखाई पड़ने वाला सर्प तो नहीं ही है। तैयायिकों के असाधारण प्रत्यक्ष को भी मान लिया तो एक कठिनाई यह होगी कि अनुमान की आवश्यकता नहीं रहेगी और हम यह कह सकेंगे कि धूम्र को देखने से अग्नि का असाधारण प्रत्यक्ष हो गया। इन्द्रियों से सन्निकर्ष न रखने वाली किसी दूरस्थ वस्तु का प्रत्यक्ष मानना नैयायिकों की असाधारण चाल है। अन्यथाख्यातिवादी को भी यह भ्रम तो मानना ही पड़ेगा कि जो असाधारण प्रत्यक्ष है वह साधारण प्रत्यक्ष की तरह से भासता है। अर्थात् यहाँ पर शानाध्यास है। विज्ञानवादी बौद्धों के अनुसार न तो कोई बाह्य पदार्थ है और न तो कोई नित्य आत्म-तत्त्व है । जो कुछ है वह विज्ञानमात्र है और वह क्षणिक है । अतः रज्जु-सर्प के विषय में उनका कहना है कि विज्ञान के रूप में रज्जु और सर्प दोनों सत्य हैं किन्तु बाह्य पदार्थ के रूप में दोनों असत्य हैं । इदं रजतम् के मिथ्यात्व का अर्थ वे यह लगाते हैं कि "रजतम् इदं न " अर्थात् रजत कोई बाह्य पदार्थ नहीं है। भ्रम के कारण बाह्य पदार्थवत् मालूम पड़ता है। प्रश्न यह है कि भ्रम का निवारण वास्तव में इस रूप में होता है कि यह रजत नहीं है या इस रूप में कि रजत यह नहीं है। स्पष्ट है कि निवारण का बाघक स्वरूप यह नहीं है कि रजत यह नहीं है बल्कि यह है कि यह रजत नहीं है। दूसरी बात यह है कि यदि रजत के बाह्यत्व मात्र का निषेध करना है तो उसके लिये सीप के ज्ञान की आवश्यकता है ? परन्तु क्या सीप के ज्ञान के बिना हम यह कह सकते हैं कि यह रजत नहीं है ? विज्ञानवादियों के अनुसार बायार्थ न मानने से ज्ञान तथा स्मृति अथवा कल्पना का भेद नहीं किया जा सकता है। विज्ञान को स्वसंवेद्य मानने से विज्ञान में शाता और ज्ञेय का भेद हो जाता है। यदि प्रत्येक ज्ञान स्वसंवेद्य और क्षणिक है तो यह सर्प है इस प्रकार का ज्ञान ही संभव नहीं है। भ्रम के विश्लेषण से ८ः ब्रह्मसूत्रशाङ्करभाष्यचतुःसूत्री सहोपलम्भ नियम भी गलत सिद्ध होता है। जिस समय हमको सर्प का प्रत्यक्ष होता है उस समय रज्जु का ज्ञान नहीं रहता फिर भी जब भ्रम का बाघ होता है तो हम यही कहते हैं रज्जु वहाँ थी किन्तु हमने उसे सर्प समझ लिया था। अर्थात् रज्जु का अस्तित्व जिस समय रज्जु का ज्ञान नहीं था उस समय भी सिद्ध होता है। शून्यख्यातिवाद माध्यमिकों का कहना है कि तत्त्व का स्वरूप शून्य है । भ्रम के कारण हमको तरह तरह की वस्तुएँ दिखायी पड़ती हैं। वास्तव में माध्यमिक रज्जु सर्प आदि प्रत्यक्ष संबंधी भ्रम का विचार नहीं करते। वे विचार संबंधी भ्रम को ही लेते हैं और कहते हैं कि बुद्धि द्वारा प्रदत्त चतुष्कोटि या चारों प्रकार के संभव सिद्धान्त असत्य हैं क्योंकि असंगत हैं। प्रश्न यह है कि माध्यमिक जिसे मिघ्या कहते हैं उसका स्वरूप क्या है ? अवश्य ही वह आकाशपुष्प के समान नहीं है क्योंकि वह प्रतीति का विषय है। परन्तु वह सत् भी नहीं है अतः उसे सत् और असत् से भिन्न कहना पड़ेगा । किन्तु माध्यमिक ऐसा नहीं कहते। वे लोग प्रत्यक्ष अनुभव वाले रज्जु सर्प का दृष्टान्त मी स्वीकार नहीं करते । वास्तव में वे किसी प्रकार का दृष्टान्त सामने नहीं रखते । अतः वे न तो यह कह सकते हैं कि जगत् किस प्रकार मिघ्या है और न तो यही कह सकते हैं कि भ्रम का कोई अधिष्ठान है । वे यह नहीं कह सकते कि शून्य जगत् का अधिष्ठान है । तब फिर यह मिथ्या जगत् आया कहाँ से ? ये सब प्रश्न ऐसे हैं कि माध्यमिक या तो उनका उत्तर नहीं देते या देते हैं तो वेदान्ती हो जाते हैं। अधिष्ठान मानने पर वे वेदान्ती होंगे और न मानने पर वैनाशिक । अनिर्वचनीय ख्यातिवाद यदि सूक्ष्म दृष्टि से विचार किया जाय तो ऊपर के सभी सिद्धान्तों में किसी प्रकार का अध्यास अवश्य स्वीकार किया गया है। इसी से शङ्कराचार्य कहते हैं कि "सर्वथापि त्वन्यस्यान्यधर्मावभासतां व्यभिचरति" । अतः भ्रम में एक वस्तु के गुणों को अथवा एक वस्तु को दूसरे पर आरोपित करना ही अध्यास है। भ्रम में जो आरोपित वस्तु है उसे न तो स्मृति कह सकते हैं और न उसे अन्यत्र सत्य कह सकते हैं और न तो उसे सर्वदा असत् कह सकते हैं। रज्जु-सर्प यहाँ इस समय दिखाई पड़ता है और उसका बाघ भी यहीं होता है। रज्जुसर्प सत् नहीं है क्योंकि उसका बाघ होता है, और न तो आकाश पुष्प के समान असत् है क्योंकि वह दिखाई पड़ता है। और न तो उसे सत् और असत् दोनों कह सकते हैं क्योंकि उसका कोई अंश स्वीकार नहीं किया जा सकता । देश, काल, स्वरूप, संबंध सम रज्जु के होते हैं। सर्प में सत् अंश कुछ भी नहीं होता है। दिखाई पड़ने के कारण वह असतू भी नहीं है। अतः उसे सत्-असत्-विलक्षण या अनिर्वचनीय कहना ठीक ही है । ब्रह्म को शब्द से परे कहा जाता है, किन्तु उसे अनिर्वचनीय कहना ठीक न होगा क्योंकि वह सत् है, और यद्यपि आकाश-पुष्प का भी वर्णन नहीं किया जा सकता फिर भी वह आकाश-पुष्प अनिर्वचनीय नहीं असतु या अलीक है । अनिर्वचनीय ख्यातिवाद के विरुद्ध कई प्रकार की आपत्तियाँ उठाई जा सकती हैं। मध्यम परिहार के नियम (ला आफ एक्स्क्ल्यूडेड मिडिल ) के अनुसार कोई वस्तु या तो सत् या असत् होती है। उसके अतिरिक्त अनिर्वचीय नाम की कोई चीज नहीं हो सकती । इसका उत्तर यह है कि मध्यम परिहार नियम को पहले मानना अनिवार्य नहीं है । विचार करने के बाद ही हम कह सकते हैं कि उसको स्वीकार किया जाय या नहीं। सारी वस्तुओं को सत् या असत् दो ही वर्गों में बाँट देना तो इस बात का द्योतक है कि मानों हम विचार कर चुके हैं और सब कुछ जान गये हैं। जहाँ अभी अन्वेषण का कार्य चल रहा है वहाँ इस तरह का विभाजन नहीं हो सकता। एक दूसरी आपत्ति यह भी है कि हम जो कुछ देखते हैं सत् है और सत् को ही हम देख सकते हैं, अतः सर्प सत् है । यह आपत्ति सत्ख्यातिवादियों की है और इसका उत्तर दिया जा चुका । यह भी कहा जाता है कि व्यवहार में तो केवल सत् और असत् का ही प्रयोग होता है । यह ठीक है कि साधारणतया व्यवहार में सत् और असत् का ही प्रयोग होता है किन्तु अनिर्वचनीय साधारण व्यवहार का शब्द नहीं है। यह दो दार्शनिक विवेचन की प्राप्ति है । विचार करने पर हम पाते हैं कि रज्जु-सर्प को हम न सत् कह सकते हैं और न असत् और न दोनों । अतः इसे अनिर्वचनीय कहीं जाता है। वेदान्त की भाषा में कहा जाता है कि अनिर्वचनीय को हम अर्थापत्ति द्वारा प्राप्त करते हैं । रज्जु-सर्प और जगत् दोनों मिथ्या है परन्तु दोनों में भेद है । अतः रज्जु सर्प को प्रातिभासिक एवं जगत् को व्यावहारिक कहा गया है। उन दोनों का भेद यह है कि प्रातिमासिक व्यक्तिगत भ्रम है किन्तु व्यावहारिक ( जगत्) सर्वसामान्य का भ्रम है। व्यावहारिक जगत् दिखने के पहले और दिखने के बाद भी रहता है। परन्तु प्रातिमासिक जब तक दिखता है तभी तक रहता है। व्यावहारिक का बाघ किसी १० : ब्रह्मसूत्रशाङ्करभाष्यचतुःसूत्री वस्तु- विशेष के ज्ञान से नहीं होता किन्तु ब्रह्म के ज्ञान से होता है; परन्तु प्रातिमासिक के बाघ के लिए वस्तु विशेष का ज्ञान पर्याप्त है । व्यावहारिक का ज्ञान प्रत्यक्षादि से होता है किन्तु प्रातिमासिक केवल साक्षीदृष्ट है । इदं रजतम् में इदं का ज्ञान प्रत्यक्ष से और रजतम् का ज्ञान साक्षी से होता है । अद्वैतवेदान्त में साक्षी की अवधारणा का बड़ा महत्व है, क्योंकि साक्षी के द्वारा ज्ञात, अज्ञात, यथार्थ, मिथ्या आदि सभी वस्तुयें प्रकाशित होतो हैं । तर्कतः एक ऐसे चैतन्य को मानना आवश्यक है जिसे अज्ञात भी ज्ञात हो अर्थात् प्रमाता को जो अज्ञात है वह भी उसे (साक्षी को ) ज्ञात है । जब हम किसी वस्तु का प्रत्यक्ष करते हैं तो हमको ऐसा लगता है कि वस्तु यहाँ थी किन्तु हमको उसका ज्ञान नहीं था अर्थात् वस्तु की उत्पत्ति ज्ञान के साथ ही नहीं होती है नहीं तो ज्ञान और कल्पना में भेद नहीं रह जायगा । ज्ञान भूतवस्तुविषयक ( सिद्धवस्तुविषयक) होता है और कल्पना से वस्तु की सृष्टि होती है। अतः वेदान्त मानता है कि प्रमाता को अज्ञात वस्तु भी साक्षी कों ज्ञात रहती है। इसी तरह से प्रमाता द्वारा मिथ्यारूप से तिरस्कृत वस्तु भी साक्षी को आभासित होती है। दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है साक्षी सर्वज्ञ अर्थात् सब कुछ का प्रकाशित करनेवाला है । परन्तु सर्वज्ञ होते हुए भी साक्षी निर्णायक या प्रमाता नहीं है बल्कि निष्पक्ष है और निष्पक्षत्व के कारण ही साक्षी को सत् और मिथ्या, ज्ञात और अज्ञात दोनों भासित होते हैं। प्रमाता को ऐसा नहीं हो सकता है क्योंकि प्रमाता को एक विशेष दृष्टि होती है। साक्षी चैतन्य सर्व सामान्य, निष्पक्ष एवं सर्वज्ञ है । प्रमाता जो एक मापदण्ड रखने वाला है वह साक्षी चैतन्य पर अध्यस्त होकर साक्षी चैतन्य द्वारा प्रकाशित वृत्तियों का उपयोग करता है । साक्षी एक ही होता है जबकि प्रमाता अनेक होते हैं। साक्षी को सत्यासत्य के द्वैत का ज्ञान नहीं होता है किन्तु प्रमाता को होता है। साक्षी प्रमाता की प्रमाण वृत्तियों के अतिरिक्त अन्य वृत्तियों को भी प्रकाशित करता है। प्रमाताा सोता है, स्वप्न देखता है, जागता है किन्तु साक्षी सदा जागरूक हैं । उसके चैतन्य में ये सब भेद नहीं होते हैं । साक्षी का ज्ञान असीम और प्रमाता का ज्ञान सीमित है। अनिर्वचनीय ख्याति के विरुद्ध एक यह आशंका की जा सकती है कि अध्यास दो बाह्य वस्तुओं में हुआ करता है परन्तु आत्मा सम्बन्धी अध्यास में आत्मा कोई बाह्य वस्तु नहीं है फिर भी शरीर के साथ उसका अध्यास कैसे हो सकता व्याख्या : ९९, है ? इसका उत्तर यह दिया जाता है कि यह कोई नियम नहीं हैं कि अध्यास में दोनों वस्तुएँ हमारे सामने रहने वाले पदार्थ हों। दूसरी बात यह है कि आत्मा भी एक अर्थ में अहं प्रत्यय का विषय है । विषय कहने से यह शंका नहीं होनी चाहिए कि आत्मा विषयी न होकर विषय हो गया क्योंकि प्रत्यगात्मा का ज्ञान अपरोक्ष है। यहाँ पर शंकराचार्य प्रत्यक्ष न कहकर अपरोक्ष शब्द का प्रयोग करने हैं। इससे यह दिखाते हैं कि आत्मा का अपरोक्षत्व विषय के प्रत्यक्षत्व से भिन्न है । विषयों का प्रत्यक्षत्व सोपाधिक है अर्थात् इन्द्रियादि साधनों निर्भर करता है किन्तु आत्मा का अपरोक्षत्व ऐसा नहीं है। यहाँ पर यह भी शंका नहीं होनी चाहिये कि यदि आत्मा अपरोक्ष है तो उसके विषय में अध्यास कैसे होता ? क्योंकि अध्यास न तो वहीं हो सकता है जहाँ सर्वथा अज्ञान हो और न वहीं हो सकता है जहाँ पूर्ण ज्ञान हो । अध्यास नहीं होता है जहाँ हमारा ज्ञान अपूर्ण रहता है जैसे अयम् का ज्ञान तो रहता है किन्तु अयम् के रज्जु होने का ज्ञान नहीं रहता। आत्मा इसका अपरोक्ष ज्ञान है किन्तु आत्मा अनंत है इसका अपरोक्ष ज्ञान नहीं है। इसीसे तद्वविषयक ( आत्मविषयक) जिज्ञासा को अवसर मिलता है। उन लोगों को जो प्रत्यक्ष वस्तुओं में ही अध्यास मानते हैं ध्यान में रखकर शङ्कराचार्य ने यह भी कहा है कि आकाश के अप्रत्यक्ष होने भी लोग उस पर मालिन्य आरोप करते हैं । अर्थात् अध्यास केवल प्रत्यक्ष वस्तु पर ही नहीं होता। अभ्यास के उक्त विवेचन से यह स्पष्ट हो जाना चाहिये कि अध्यास किसी वस्तु में वास्तविक परिवर्तन नहीं है किन्तु केवल अविद्याजन्य है । अतः उसका नाश विद्या या विवेक से हो जाता है अर्थात् वस्तु में परिवर्तन न तो विद्या से होता है और न तो अविद्या से। अध्यास के कारण वस्तुमें किसी प्रकार का गुण दोष उत्पन्न • नहीं होता अर्थात् अध्यस्त वस्तु के गुण दोष अध्यासवान पर कोई प्रभाव नहीं डालते क्योंकि केवल आरोपण ही नहीं बल्कि जिसका आरोपण करते हैं वह भी मिथ्या है । विषय विषयी का यह अध्यास जो अविद्या के कारण होता है वही सब प्रकार के लौकिक प्रमाण प्रमेय व्यवहार तथा सभी शास्त्रों का चाहे वह कर्म परक या मोक्ष परक हों आधार है अर्थात् शरीर में विश्वास के बाद ही सभी व्यवहार प्रारम्भ होते हैं। हम सबका शरीर में विश्वास किसी प्रमाण के आधार पर नहीं होता बल्कि स्वयं सभी प्रमाण शरीर में विश्वास के आधार पर निर्भर हैं। इसी लिए अध्यास जो १२ : ब्रह्मसूत्रशाङ्करभाष्य चतुःसूत्री अविद्या-जन्य हैं उसे प्रमाण प्रमेय व्यवहार का आधार कहा गया है। यह आशंका कि प्रत्यक्षादि प्रमाण और श्रुति अविद्याजन्य कैसे हो सकते हैं निराधार है। क्योंकि आशंका करने वाले यह मूल जाते हैं कि जिस व्यक्ति को अपने शरीर के विषय में अहं मम भाव नहीं रहेगा उस व्यक्ति के लिए उपर्युक्त व्यवहार असंभव है; जैसे सुषुति की अवस्था में जबकि अहं भाव नहीं होता है ये व्यवहार नहीं हो पाते । बिना अहं प्रत्यय के इन्द्रियाँ अपने आप कार्य नहीं कर सकतीं और न शरीर ही काम कर सकता है जैसे सुषुप्ति में । अतः आत्मा के विषय में शरीर इन्द्रिय अहंकार आदि की प्रतीति व्यवहार के लिये आवश्यक है और बिना प्रमातृ रूप अध्यास के प्रमाण प्रमेय व्यवहार नहीं हो सकता। हमारा प्रमाण प्रमेय व्यवहार अविवेकपूर्ण है यह इस बात से सिद्ध होता है कि ये व्यवहार पशुओं में भी पाये जाते हैं जिनकों सब कोई अविवेकी कहता है । सबसे बड़ी कठिनाई शास्त्रों के विषय ये मालूम पड़ती है क्योकि यह कहना कि शास्त्र मी अविद्या पर आधारित है अटपट मालूम पडता । किन्तु विचार करके देखा जा सकता कि शास्त्र (कर्मकाण्ड ) उस आत्मा के प्रति जो सर्वथा असंग निर्गुण और अव्यवहार्य है लागू नहीं हो सकते क्योंकि विधि निषेध का व्यवहार ब्राह्मण क्षत्रिय आदि भेद पर अवलंबित है और ये भेद शरीर पर आधारित हैं जो अविद्याजन्य हैं । शुद्ध चैतन्य रूप आत्मा कर्मकांड का विषय नहीं हो सकता क्योंकि वह असंसारी है, जन्म मरण के परे हैं। कर्मकांड विषयक शास्त्र तो उस जीवात्मा से संबंध रखते हैं जिसका जन्म-मरण होता है जो कर्म करता है और स्वर्ग नरक में जाता है। शुद्ध चैतन्य के विषय में तो कहा गया है कि "नैव कुर्वन्नकारयन्' । यही बात मोक्षपरक शास्त्र के विषय में कही जा सकती है क्योंकि वे शास्त्र भी उसी जीवात्मा के लिए सार्थक हैं जिसमें भेद बुद्धि है अहंकार है या अविद्या है। जिसे आत्मा के शुद्ध चैतन्य रूप का ज्ञान हो गया है उसके लिए न शास्त्र की उपयोगिता है न गुरु की । ऐसी शंका की जा सकती है सि शास्त्र गुरु आदि मिथ्या है या अविद्या जन्य है तो इनके द्वारा ज्ञानप्राप्ति या अबिद्यानाश कैसे होगा ? यह शंका निर्मूल है क्योंकि अविद्याजन्य वस्तु से अविद्याजन्य वस्तु का नाश देखा जाता है जैसे स्वप्न में दृष्ट शेर की हत्या स्वप्न की तलवार से हो की जा सकती है, जागृत अवस्था वाली तलवार से नहीं अर्थात् ब्रह्म अविद्या का नाश नहीं करता है नहीं तो अविद्या रहती ही कैसे ? अविद्या का नाश तो अविद्याजन्य प्रमाण प्रमेय व्यवहार से ही होता है। व्याख्या : १३ अध्यास के कारण हम बाह्य वस्तुओं का जैसे पुत्रादि का, शरीर धर्मों का जैसे स्थूलता आदि का; इन्द्रिय धर्मों का जैसे बहरापन आदि का, अन्तः करण धर्मों का जैसे इच्छा आदि का आरोप आत्मा पर करते हैं और आत्मा का आरोप बाह्य वस्तुओं पर करते हैं। इस प्रकार हम परस्पर एक दूसरे का अभ्यास करते हैं। यह अध्यास अनादि और अनंत ( सीमा रहित ), है किन्तु ब्रह्म ज्ञान द्वारा नष्ट होने वाला है। यही हमारे भीतर कर्तृत्व और मोतृत्व माव पैदा करता है जो वास्तव में आत्मा में नहीं है। यह अध्यास अनादि है क्योंकि इसका कोई कारण नहीं है। कार्य कारण व्यापार और कार्यकारण बुद्धि दोनों ही इस थध्यास के अनन्तर प्रारंभ होते हैं इसलिये इसको अनादि कहा गया है। अनादि शब्द में इस बात की भी व्यंजना है यह अध्यास जानबूझकर उत्पन्न की हुई कोई वस्तु नहीं है बल्कि नैसर्गिक या अज्ञातरूप से है । यद्यपि वेदान्त में केवल ब्रह्म सीमा रहित है फिर भी अध्यास को अनंत इसलिये कहा गया है कि यह अनंत ब्रह्म विषयक है ( अर्थात् अविद्या अनंत ब्रह्म को आच्छादित करती है) इसलिये यह अध्यास भी अनंत हो गया । यहाँ पर अध्यास का अर्थ हमारे जीवन में आनेवाले रज्जु सर्प नामक अध्यासों से नहीं है बल्कि मूलाध्यास है जो कि अनंत हैं । दूसरी बात जो कि शङ्कराचार्य यहाँ कहना चाहते हैं कि वह यह है कि यह अध्यास सभी अनर्थों का कारण है । अतः इसका नाश आत्मविद्या द्वारा जो कि उपनिषदों से प्राप्त होती है आवश्यक है। यहाँ पर यह शंका हो सकती है कि जीवन में अनर्थ किन्हीं अन्य कारणों से भी हो सकते हैं जैसे प्रकृति प्रकोप, दैव प्रकोप पाप पुण्य आदि । किन्तु किसी भी बाह्य सांसारिक कारण को जीवन के अनर्थ का हेतु कहना इस बात को भूल जाना है कि वे सब कारण आत्मा पर शरीर इन्द्रिय अन्तः करण आदि के आरोपण के बाद ही प्रभाव कर सकते हैं। जिस व्यक्ति को आत्मविषयक देहाध्यास न हो उसपर किसी बाह्य कारण का प्रभाव नहीं हो सकता। अतः आत्म-विषयक अध्यास को सभी अनर्थ का मूल कारण कहना ठीक है। सभी उपनिषदों का उपदेश आत्मैकत्व प्रतिपादन करना है और उसी उद्देश्य से शङ्कराचार्य ने शारीरक मीमांसा प्रारम्भ की है। भक्ति संप्रदाय के लोगों द्वारा यहाँ एक शंका उठायी जा सकती है कि सभी अनर्थो का मूल कारण भगवद्विमुख होना है। अतः अनयों के मूल कारण के नाश हेतु भक्ति आवश्यक है यही उपनिषदों का आशय है। यह बात सही है कि उपनिषदों १४ : ब्रह्मसूत्रशाङ्करभाष्यचतुःसूत्री में तरह तरह की उपासनाओं का, ईश्वर भक्ति तथा ईश्वर कृपा का उल्लेख है। फिर भी इस बात को अस्वीकार नहीं किया जा सकता कि उपनिषदों में आत्मज्ञान द्वारा अमरत्व की प्राप्ति और शोक से मुक्ति कही गई है। विवेक के आधार पर भी यही जान पड़ता है कि यदि सारे क्लेश भेद बुद्धि के कारण हैं तो उनका नाश अभेद बुद्धि आत्मैकत्व ज्ञान से हो होगा। सभी आचार्य अविद्या को तो मूल कारण मानते ही हैं तो उसके नाश के लिये विद्या को मूल उपाय मानना या आत्मविषयक ज्ञान को उपाय मानने में क्या आपत्ति हो सकती है ? ब्रह्म ज्ञान के उपरान्त यदि अविद्या का नाश न होता तो उसके बाद मी भक्ति आदि की आवश्यकता मानी जाती किन्तु ऐसी बात नहीं है । अतः अविद्या को सभी अनर्थों का मूल हेतु और विद्या अर्थात् आत्मज्ञान को उसके निवारण का साधन कहना ठीक ही है । ब्रह्मसूत्र की व्याख्या करने मे आचार्य लोग केवल सूत्रों के विषय में ही नहीं बल्कि सूत्रों को विभिन्न अधिकरणों में बांटने के विषय में भी मतभेद रखते हैं और ब्रह्मसूत्र के प्रथम चार सूत्रों पर विशेष बल देते हैं। जिज्ञासाधिकरण या प्रथम सूत्र "अथातो ब्रह्मजिज्ञासा" में प्रयुक्त चार शब्दों का अर्थ शङ्कराचार्य ने अलग अलग किया है। "अथ" शब्द के विषय में उन्होंने कई विकल्प उठाये हैं और सबका निराकरण करके आनन्तर्य अर्थ को स्वीकार किया है। यह उन्होंने स्पष्ट किया है कि "अर्थ" का अर्थ प्रारम्भ का द्योतक मात्र नहीं है क्योंकि ब्रह्मजिज्ञासा का प्रारम्भ नहीं किया जा सकता । जानने की इच्छा होने पर ज्ञान के लिये प्रयत्न का प्रारम्भ किया जा सकता है किन्तु स्वयं इच्छा का प्रारम्भ प्रयत्नाधीन नहीं है। इसलिये अथ का अर्थ प्रारम्भ नहीं है और न तो उसका अर्थ केवल मंगलमात्र है क्योंकि अथ शब्द का अन्य अर्थ में प्रयोग होने पर भी वह मंगल सूचक हो जाता है। पूर्व प्रकृतापेक्षा के अर्थ में भी अथ शब्द को लेने पर आनन्तर्य से फल में कोई भेद नहीं पड़ता। अतः "अथ" शब्द का अर्थ आनन्तर्य ही मानना चाहिये । यहाँ पर प्रश्न यह उठता कि किस चीज के बाद तुरन्त ब्रह्मजिज्ञासा प्रारम्भ होती है । वैष्णवाचार्य एवं मीमांसकों का कहना यह है कि "धर्म जिज्ञासा" के बाद ब्रह्मजिज्ञासा प्रारम्भ होती हैं। अतः आनन्तर्य को हम इस अर्थ में लें कि ब्रह्मजिज्ञासा के पहले धर्म-जिज्ञासा की अपेक्षा होती है। किन्तु शङ्कराचार्य इस प्रकार के आनन्तर्य को नहीं स्वीकार करते । उनका व्याख्या : १५ कहना यह है कि धर्म-जिज्ञासा के पहले भी ब्रह्मजिज्ञासा हो सकती है। जहाँ पर कर्मकांड में कम विवक्षित है वहाँ पर स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अमुक कर्म के बाद अमुक कर्म होना चाहिये। किन्तु धर्म जिज्ञासा के बाद ही ब्रह्मजिज्ञासा हो इस क्रम के लिये कोई श्रुति प्रमाण नहीं है। मीमांसकों का यह सिद्धान्त है कि स्वाध्याय का मुख्य तात्पर्य कर्मविषयक ज्ञान प्राप्त करना है क्योंकि श्रुति में यह स्पष्ट आाया है कि यश, दान, तपस्या से ब्राह्मण उस आत्मा को जानने की चेष्टा करते हैं । "तमेस वेवानुवचनेन ब्रह्मणा विविविवन्ति यज्ञेन बामेन तपसाऽनाशकेन इति" इसका उत्तर शङ्कराचार्य यह देते हैं कि यद्यपि तपस्या और दान बुद्धि की शुद्धता के लिए उपयोगी है फिर भी यह आवश्यक नहीं हैं कि इन्हीं द्वारा वैराग्य उत्पन्न हो । पूर्व जन्म के संस्कारों के कारण भी वैराग्य उपन्न हो सकता है और तदनन्तर ब्रह्मजिज्ञासा उत्पन्न हो सकती है। श्रुति ने स्पष्ट कहा है कि अन्य किसी आश्रम से अर्थात् ब्रह्मचर्यादि से ही संन्यास ग्रहण करें। ( यदि वेतरथा ब्रह्मचर्यादेव प्रव्रजेत् ) । यदि यह वहा जाता है कि मनुष्य को तीन ऋणों ( देव ऋण, पितृ ऋण, ऋषि ऋण) से मुक्त होने पर ही संन्यास लेना चाहिए तो उसका अर्थ यह है कि ऋण का बंधन उसी को होता है जो गृहस्थ आश्रम में प्रवेश कर जाता है। यदि बिना गृहस्थ आश्रम में प्रवेश किये कोई संन्यास ले लेता है तो उसे ऋण का बंधन नहीं होता। मीमांसक लोग कभी कभी इस वाक्य का उद्धरण देते हैं कि 'गृही भूत्वा बनी भवेत् वनी भूत्वा प्रव्रजेत', किन्तु ऐसे वाक्यों का भी अर्थ हमको श्रुति के अन्य वाक्यों पर ध्यान रखकर करना चाहिये । "यदहरेव विरजेत तदहरेव प्रव्रजेत" अर्थात् जिस क्षण वैराग्य हो उसी क्षण संन्यास लेना चाहिए । जो श्रुति वाक्य विना स्वाध्याय के संन्यास का बिरोध करते हैं ( अनधीत्य द्विजो वेदान्) उनका भी यही अर्थ है कि जिनका मन शुद्ध नहीं हुआ है और जिनमें वैराग्य उत्पन्न नहीं हुआ है उनको संन्यास नहीं लेना चाहिये । मीमांसक लोग श्रुति, अर्थ ( उपयोगिता ), पाठक्रम इत्यादि के आधार पर कर्मों का क्रम निश्चित करते हैं और कहते है कि धर्मजिज्ञासा और ब्रह्मजिज्ञासा में मुख्य और गौण का संबंध है किन्तु शङ्कराचार्य का कथन है कि इसके लिए कोई प्रमाण नहीं है और न तो कहीं स्पष्ट कहा गया है कि अमुक कर्म करने बाद ही ब्रह्मजिज्ञासा हो सकती है। उपर्युक्त उत्तरों के अतिरिक्त शङ्कराचार्य ने कुछ प्रबल तर्क दिए हैं जिनसे धर्मजिज्ञासा और ब्रह्मजिज्ञासा का मौलिक भेद सिद्ध होता है और यह कथन खंडित होता है कि इन दोनों में कम है या मुख्य गौण का संबंध है। प्रथम यह कि दोनों के फल में भेद है। धर्म ऐहिक उन्नति के लिए किया जाता है किन्तु ब्रह्मज्ञान का फल निःश्रेयस की प्राप्ति है और वह किसी कर्म पर निर्भर नहीं करता। दूसरी बात यह है कि धार्मिक कार्यों का फल भव्य (अर्थात् भविष्य में होने वाला ) हैं क्योंकि वे कर्मसापेक्ष हैं किन्तु ब्रह्मज्ञान में ब्रह्म भूतवस्तु (सिद्ध वस्तु ) है और नित्य होने के कारण कर्म से उनकी प्राप्ति का प्रश्न नहीं उठता है। तीसरी वात यह है कि धर्म विषयक श्रुति मनुष्य को कर्म में प्रवृत्त करती है जबकि ब्रह्मविषयक श्रुति केवल ज्ञानमात्र देती कोई कर्म करने को नहीं कहती। जिस प्रकार प्रत्यक्षादि प्रमाण केवल बस्तु का ज्ञान कराते हैं, कर्म करने की प्रेरणा नहीं देते। ज्ञान मनुष्य की इच्छा पर निर्भर नहीं करता जब कि धर्म मनुष्य की इच्छा पर निर्भर करता है। ज्ञान केवल प्रमाण पर निर्भर करता है। यह बात सही है कि उपनिषदों में ऐसे वाक्यों का भी प्रयोग हुआ है जिनसे जान पड़ता है मानो ब्रह्मज्ञान उपासना आदि क्रियाओं पर निर्भर करता है । ( आत्मावारे द्रष्टव्यः श्रोतव्यः मन्तव्यः निदिध्यासितव्यः ) किन्तु ये सब क्रियायें तो हमको ब्रह्मज्ञान के लिये उपयुक्त बनाने में ही सार्थक हैं न कि ब्रह्मज्ञान उत्पन्न करने में । अतः यदि ब्रह्मज्ञान के पहले घर्मजिज्ञासा आवश्यक नहीं है तो क्या आव है श्यक है जिसके लिए "अथ" शब्द का प्रयोग किया है ? उत्तर में शङ्कराचार्य का कहना यह है कि नित्यानित्यवस्तुविवेक, इहामुत्रार्थंभोगविराग, शमदमादि साधनसम्पत् और मुमुक्षुत्व ये चार ब्रह्मजिज्ञासा के पहले होना आवश्यक है। इन गुणों के रहने पर ही ब्रह्मजिज्ञासा फलवती होती है । इन गुणों के बिना ब्रह्मज्ञान केवल शब्दज्ञान मात्र रहता है। यहाँ पर स्पष्ट कर देना आवश्यक है कि ब्रह्मज्ञान केवल बौद्धिक विलक्षणता पर ही निर्भर नहीं करता है। ब्रह्मज्ञान को हृदयंगम करने के लिये अर्थात् ब्रह्मज्ञान को साक्षात् अनुभव करके उसका फल भोगने के लिये उपर्युक्त चार गुणों की आवश्यकता है। आजकल ब्रह्मसूत्र उपनिषद् आदि ग्रंथ पढ़ने और समझने के बाद भी ब्रह्मज्ञान नहीं होता है तो उसका एक मात्र कारण उपर्युक्त गुणों का अभाव ही है। ब्रह्मज्ञान के लिये नैतिक जीवन मात्र भी पर्याप्त नहीं है। भारतवर्ष में तो नैतिक जीवन की उपयोगिता जीवन को दिशाबद्ध और नियमबद्ध करके वैराग्य उत्पन्न करने में ही मानी गयी है। पाश्चात्य देशों में नैतिक जीवन को ही सबकुछ माना जाता । किन्तु भारतवर्य में ऐसी बात नहीं है। यूनान के कुछ दार्शनिक प्लेटो आदि
श्रीकृष्णः शरणं मम. ब्रह्मसूत्र भाष्य श्री शङ्कराचार्य जी ने ब्रह्मसूत्र पर भाष्य लिखने के पहले भूमिका के रूप अध्यासभाष्य लिखा है। उस अध्यासमाष्य पर विचार करने के पहले कुछ प्रश्न उठते हैं जिन पर विचार करना आवश्यक है। सर्वप्रथम यह प्रश्न उठता हैं कि चार्य ने अध्यासमाष्य से सूत्रभाष्य प्रारंभ क्यों किया । ऐसा किसी अन्य आचार्य ने नहीं किया है। इस प्रश्न पर विचार करने से कई एक तथ्यों पर प्रकाश पड़ेगा । सर्वप्रथम तो दार्शनिक दृष्टि से अध्यास पर विचार करना और प्रारंभ में ही विचार करना अत्यन्त आवश्यक है क्योंकि प्रत्येक दर्शन का उद्देश्य अविद्या या अज्ञान का नाश होता है। अतः सर्वप्रथम हमारा यह कर्तव्य है कि हम सिद्ध करें कि अविद्या है और यह भी विचार करें कि अविद्या का स्वरूप क्या है। संभवतः इन्हीं प्रश्नों को दृष्टि में रखकर शङ्कराचार्य ने सर्वप्रथम यह सिद्ध किया है कि अध्यास है और वह अध्यास अविद्या के कारण ही हो सकता है। दूसरी बात जो शङ्कराचार्य अध्यास भाष्य में दिखाना चाहते हैं वह यह है कि अविद्या नैसर्गिक है और सभी अनयों का कारण है अर्थात् बिना अविद्या नाश किये तज्जन्य अनर्थों से मुक्ति नहीं मिल सकती । अध्यास पर विचार करने का एक और भी दार्शनिक कारण मालूम पड़ता है। वह यह है कि उससे हमको सत्यासत्य के स्वरूप के विषय में भी संकेत मिलता है, क्योंकि इसी प्रसंग में शङ्कराचार्य का यह कहता है अध्यास में अध्यस्त और अध्यासवान दो तत्त्व होते हैं । वे दोनों न तो सत्य हो सकते हैं और न दोनों असत् हो सकते हैं क्योंकि इन दोनों ही स्थितियों में बाघ नहीं हो सकता । अभ्यास का बाघ होता है। अतः अध्यस्त को मिथ्या मानना आवश्यक है जो सत् और असत् दोनों से भिन्न होता है। इस प्रकार मिथ्यात्व के स्वरूप का ज्ञान होने पर सत्य के स्वरूप की ओर भी संकेत मिलता है क्योंकि तब हम यह कह सकते हैं कि सत् वह है जिसका बाघ नहीं होता है । दर्शन की विधि की दृष्टि से भी अध्यास भाष्य में एक महत्व की बात मिलती । अध्यासभाष्य में शङ्कराचार्य हमारे अनुभव और व्यवहार का विश्लेषण करते दो : ब्रह्मसूत्रशाङ्करभाष्यचतुःसूत्री हैं और उसी विश्लेषण से सत्यासत्य के स्वरूप पर पहुँचते हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि दर्शन को अनुभव का आधार लेकर चलना चाहिये और अनुभव का विश्लेषण करके सत्यासत्य का विचार करना चाहिये । दर्शन की यह अवधारणा पाश्चात्य दर्शन में प्राप्त दो अवधारणाओं से सर्वथा भिन्न है; वहाँ पर एक तो अनुभववाद है जो हमारे साधारण अनुभव को सर्वथा सत्य मानकर उसकी छानबीन करता है और दूसरा बुद्धिवाद है जो अनुभव से कोई संबंध न रखते हुए बुद्धि के सहारे तत्त्वातत्व पर विचार करता है । ये दोनों विधियाँ अपूर्ण ही नहीं वरन् दोषपूर्ण भी है । यदि हमारा साधारण अनुभव सत्य है तो दर्शन की आवश्यकता ही क्या ? अतः अनुभववादी दर्शन के वास्तविक अर्थ को नहीं समझते और बुद्धिवादी यह नहीं समझते कि तत्त्व को यदि हम अनुभव के किसी स्तर पर नहीं प्राप्त करेंगे तो केवल प्रत्ययों द्वारा प्राप्त तत्व कोरी कल्पना मात्र होगा। अतः शङ्कराचार्य अनुभव का विश्लेषण तो करते हैं किन्तु अनुभव को सर्वथा सत्य न मानकर उसमें क्या सत्य है और क्या असत्य है इस प्रकार का प्रश्न उठाते हैं । इस अनुभव में भी जो सबसे महत्त्व का अध्यास है और जिसके आधार पर हमारे जीवन का सुख दुख निर्भर करता है वह है अहं विषयक अध्यास। इसलिये शङ्कराचार्य किसी अन्य विषयक अध्यास को न लेकर अहं विषयक अध्यास से प्रारंभ करते हैं। क्योंकि उनको यहीं दिखाना है कि अहं विषयक अध्यास ही सर्व अनर्थों का मूल है। अहं का विश्लेषण ही प्रधान दार्शनिक प्रश्न है और सब प्रश्न प्रासंगिक हैं । श्री शङ्कराचार्य अध्यास की सिद्धि के लिये युष्मद् और अस्मद् प्रत्यय अर्थात् मैं और तुम को विषयी और विषय के रूप में लेकर कहते हैं कि ये दोनों तमः प्रकाशवत विरुद्ध स्वभाव के हैं तब भी हम एक पर दूसरे का आरोप करते हैं यह सिद्ध है । ऊपर बताया जा चुका है कि पुष्मद् और अस्मद् के अध्यास को वे इसलिये लेते हैं कि अहं विषयक प्रश्न ही दर्शन का मुख्य प्रश्न है। जीवन की दृष्टि से अहं विषयक प्रश्न सबसे महत्त्व का है क्योंकि हम अपने विषय में जो धारणा रखते हैं उसी पर हमारे सारे दुख सुख, सारे व्यवहार और मूल्य निर्भर करते हैं। पदार्थों की गणना करना या सृष्टि संबंधी प्रश्न अहं विषयक प्रश्न के प्रसंग में आते हैं। अतः ये प्रश्न गौण हैं यही बताना यहाँ पर शङ्कराचार्य का ध्येय है। तमः प्रकाशवत् विरुद्ध स्वभाव । कहने का अर्थ यह न समझ लिया जाय कि जैसे प्रकाश अंधकार का नाश कर देता है वैसे ही विषयी विषय का नाश करता है। विषय और विषयी विरुद्ध स्वभाव वाले है किन्तु विरुद्धत्व का अर्थ यह है कि एक ही वस्तु दोनों नहीं हो सकती । स्वभाव शब्द भी यहां पर स्वरूप के अर्थ में आया है अर्थात् विषय और विषयी दोनों स्वरूपतः विरुद्ध हैं। इसलिए उनके मुषों को या धर्मों को विरुद्ध कहना भी ठीक ही है। यहाँ पर एक और प्रश्न विचारणीय है कि वे क्यों अस्मद् युष्मद् को हो विषय विषयी के रूप में लेते हैं क्यों नहीं अह सः को या त्वं सः को लेते है। इसका कारण यह है कि व्यवहार में उत्तम और अन्य पुरुष अथवा मध्यम पुरुष और अन्यपुरुष का योग या संबंध मिलता है जैसे एते वयम्, इमे वयं, तत्त्वयम् आदि प्रयोग मिलते हैं किन्तु उत्तम पुरुष और मध्यम पुरुष का योग नहीं बनता है। अतः उनको बिरुद्ध कहना ठीक नहीं है। अहंत्वम् को हो विरुद्ध कहा जा सकता है। यदि हम विषय और विषयी का अध्यारोप एक दूसरे पर करते हैं यद्यपि वे विरुद्ध स्वभाव वाले हैं, तो यह बघ्यारोप मिथ्या ही हो सकता है। यहाँ सर्वप्रथम यह विचारणीय है कि यह कैसे सिद्ध है कि हम इस प्रकार का अध्यारोप करते ही हैं। इसका प्रमाण यह है कि हम अहं शब्द का प्रयोग शरीर के लिए करते हैं, जब कहते हैं कि मैं बालक हूँ या वृद्ध हूं, या लम्बा हूँ या नाटा हूँ और शरीर को हम चैतन्य समझते हैं । इससे यह सिद्ध हुआ कि हम अहं को शरीर और शरीर को अहं समझकर व्यवहार करते हैं यद्यपि विषयी रूप से अहं और विषयी रूप से शरीर दोनों से विरुद्ध स्वभाव वाले हैं। दूसरा प्रश्न यह उठता है कि इस प्रकार के परस्पर आरोपण को मिथ्या क्यों कहा गया है और किस अर्थ में मिष्या कहा गया है ? मिथ्या तो इसलिए कहा गया है कि ये दोनों एक नहीं हो सकते क्योंकि विरुद्ध स्वभाव वाले हैं, परन्तु प्रश्न यह है कि इस अध्यास के मिथ्यारोप का अर्थ क्या है ? क्या ये दोनों सत् हैं और इनका अध्यारोप मिथ्या है ? अथवा ये तीनों मिथ्या हैं अथवा इनमें से एक मिथ्या है इसलिए अध्यास भी मिथ्या । यदि एक मिथ्या है तो उनमें से कौन मिथ्या है ? इनमें से विषय और विषयी दोनों को सतु नहीं कहा जा सकता क्योंकि उनका संबंध मिथ्या है और दो सतु वस्तुओं का अध्यारोप मिघ्या नहीं हो सकता। दोनों को असतु भी भी नहीं कहा जा सकता क्योंकि इन दोनों में जो विषयी है उसका निराकरण कमी नहीं किया जा सकता। इसीलिए यह कहना कि ये तीनों मिथ्या हैं यह भी ठीक नहीं है । अतः यही कहना पड़ेगा कि दोनों में से एक ही में चार : ब्रह्मसूमशाङ्करभाष्यचतुःसूत्र मिथ्या है विषय अथवा विषयी। किन्तु जैसे कि ऊपर बताया गया है विषयी का कभी निराकरण नहीं हो सकता । अतः विषय और उसके अध्यारोप को मिथ्या कहना शेष रह जाता है क्योंकि जैसा रज्जु-सर्प के छान्त से स्पष्ट है, जो आरोपित है उसका बाघ होता है। बाघ ही मिथ्यात्व है इसको स्थातिवाद के प्रसंग में स्पष्ट किया जायमा । इस प्रकार यद्यपि विषय और विषयी नितान्त विरुद्ध स्वभाव वाले है और उनके धर्म भी नितान्त विरुद्ध हैं फिर भी उनका परस्पर अध्यारोप अविवेकजन्य ही हो सकता है । इस अविवेक के ही कारण हम सत्य और असत्य का सम्मिश्रण करके अहम् इदं, मम् इदं आदि शब्दों का व्यवहार करते हैं । शङ्कराचार्य के शब्दों से स्पष्ट है कि अध्यास में सब कुछ मिथ्या नहीं होता बल्कि सत्यासत्य का सम्मिश्रण होता है। जैसे यह समं है इसमें 'यह' सत्य है और सर्पांश मिध्या है वैसे ही अहम् इदं में अहं सत्य है और इदं मिथ्या है। आगे शङ्कराचार्य कहते हैं कि अहम् इदं मम इदं व्यवहार नैसर्गिक है । इस व्यवहार को नैसर्गिक कहने शङ्करा चार्य का तात्पर्य यह है कि यह व्यवहार कोई जानबूझकर नहीं करता बल्कि अज्ञात रूप से होता है अर्थात् अचेतन मन की प्रतीति है और यह प्रतीति सर्वमान्य है, किसी एक दो की नहीं है, किन्तु यह प्रतीति मिथ्या है । यहाँ पर व्यंजना इस बात की है कि प्रतीति मात्र होने से हम किसी वस्तु को सत्य नहीं कह सकते भले ही वह प्रतीति सर्वसामान्य ही क्यों न हो । जैसे सर्वसामान्य की प्रतीति है कि सूर्य और चन्द्रमा छोटे आकार के हैं एवं गतिमान हैं फिर भी विचार करने पर हम इस प्रतीति को मिथ्या ठहराते हैं। शङ्कराचार्य प्रतीति और ज्ञान का भेद स्पष्ट करना चाहते हैं । ज्ञान विवेकपूर्ण है और प्रतीति अविवेकपूर्ण । इसी से ज्ञान द्वारा प्रतीति का बाध होता है किन्तु ज्ञान का बाध संभव नहीं है। बहुत से दार्शनिक हमारी सामान्य प्रतीतियों के आधार पर ही दर्शन का महल खड़ा करना चाहते किन्तु यह प्रक्रिया ठीक नहीं है । सामान्य प्रतीति को दर्शन का आधार सत्यासत्य के विचार के बाद ही बनाया जा सकता है पहले नहीं । अर्थात् प्रतीति को ही ज्ञान मानकर के दार्शनिक विचार शुरू करना गलत है। इसके अनन्तर शङ्कराचार्य अध्यास के विषय में प्रचलित विभिन्न दार्शनिक धारणाओं का उल्लेख करते है। उनकी मीमांसा करके यह दिखाते हैं कि उनमें कौन अंश ग्राह्य है और कौन सा अंश अग्राह्य है। अध्यास के विषय में दो तीन मुख्य व्याख्या : पाँच प्रश्न है जिनको ध्यान में रखकर हमको अध्यास के स्वरूप का निर्णय करना होगा । प्रथम प्रश्न तो यह है कि रज्जु-सर्प वष्यास में सर्प दिखायी पड़ता है या नहीं ? दूसरा प्रश्न यह है कि क्या वह सर्प अन्य स्थल या अन्य काल में कहीं प्राप्त हो सकता है ? तीसरा प्रश्न यह है कि भ्रमनिवारण के बाद उस सर्प की क्या स्थिति होती है ? इन तीनों प्रश्नों को ध्यान में रखकर अब हम विभिन्न ख्यातिवादों पर विचार करेंगे और दिखायेंगे कि क्यो अनिर्वचनीय ख्यातिवाद ही मान्य है । पूर्व और पश्चिम दोनों जगह कुछ दार्शनिकों का यह मत है कि मिथ्या ज्ञान नाम की कोई वस्तु नहीं है । जिस वस्तु का ज्ञान होता है वह सन् है । "यथार्थ सर्वविज्ञानम्" । ज्ञान का विषय मिथ्या हो ही नहीं सकता है। रज्जुसर्प और स्वप्नादि भी सत्य हैं। ऐसे विचारवालो को सत्ख्यातिवादी कहा जाता है। आचार्य रामानुज इसी मत के हैं और हेगेल भी। रामानुज ने पंचीकरण के सिद्धान्त के आधार पर सर्व सर्वात्मकम् को स्वीकार किया है। यदि रज्जु सर्पवत् दिखायी पड़ती है तो रज्जु में सर्प का अंश है। सर्प सर्वथा मिथ्या नहीं है। विचार करने पर मालूम पड़ता है कि सत्ख्याति का सिद्धान्त असंगत है। प्रश्न यह है कि सभी ज्ञान पूर्णरूप से सत्य है या अंशतः ? यदि अंशतः सत्य है तो कोई एक अंश असत्य हुआ। यदि सभी ज्ञान पूर्णरूप से सत्य है तो सर्वसामान्य का विश्वास कि स्वप्नादि पदार्थ या रज्जु-सर्प मिथ्या है यह मिथ्या सिद्ध हुआ। इतना ही नहीं सतुख्यातिवादी को किसी अन्य सिद्धान्त को मिथ्या कहने का अधिकार नहीं रहेगा क्योंकि सभी ज्ञान सत्य है । यदि यह कहा जाय कि अन्य सिद्धान्त ज्ञान नहीं बल्कि कल्पना मात्र हैं तो यह सिद्ध होगा कि हमारे मन में ज्ञान के अतिरिक्त अन्य वृत्तियाँ भी हैं । तब यह कैसे निश्चित होगा कि कौन सी वृत्ति कल्पना और कौन सी वृत्ति यथार्थ ज्ञान की है ? अतः सत् ख्यातिवाद को स्वीकार नहीं किया जा सकता । अख्यातिवाद यह सिद्धान्त प्रभाकर का है। उनका भी कहना है कि सभी ज्ञान यथार्थ है। जिसे हम भ्रम कहते हैं वास्तव में वह किसी मिथ्या वस्तु का ज्ञान नहीं है बल्कि छः : ह्मसूत्रशाङ्करभाष्यचतुःसूत्री रज्जु और सर्प इन दोनों के भेद को ग्रहण न करना है। रज्जु प्रत्यक्ष है और सर्प की स्मृति होतो है और इस भेद को न देखकर हम यह सर्प है ऐसा कह देते हैं। यह किसी दोष के कारण होता है । अतः दोष के कारण भेद के ज्ञान का अभाव हो सकता है किसी मिथ्या वस्तु का ज्ञान नहीं हो सकता। किसी भी ज्ञान को मिथ्या कहना उसे ज्ञान न कहने के समान है जो आत्म-विरोष है। प्रश्न यह है कि क्या इदं और रजतम् का अलग-अलग ज्ञान होता है ? यदि कहा जाय कि होता है तब दोनों के भेद का ज्ञान क्यों नहीं होता ? और दोनों का ज्ञान अलग-अलग नहीं होता है तब यह मानना होगा कि इदं रजतम् यह एक ज्ञान है। दूसरी बात यह है कि यदि यह सर्प है या रजत है ऐसा ज्ञान न होता तो केवल भेद-ज्ञान के अभाव से हम सर्प से डरते क्यों ? और रजत से आकृष्ट कैसे होते ? ज्ञानाभाव से क्रिया कैसे हो सकती है ? यदि यह कहें कि समानता के कारण क्रिया हो सकती है तो जहां भेद का ज्ञान नहीं वहीं समानता का ज्ञान कैसे होंगा ? यदि सर्प को स्मृति माना जाता है तो दो प्रश्न उठते हैं। एक तो यह कि सर्प यदि स्मृति है तो दिखाई कैसे पड़ता है ? और यदि यह कहें कि सर्प स्मृति होते हुए दिखाई पड़ता है तब यहाँ स्मृति और प्रत्यक्ष के विषय में भ्रम मानना पड़ेगा। यह कहना कि सर्प दिखाई नहीं पड़ता है सर्वथा अनुभव के विरुद्ध होगा। दूसरा प्रश्न यह है कि सर्प- विशेष जो यहाँ दिखाई पड़ता है वह स्मृति है तो उसे परिचित सा मालूम पड़ना चाहिये परन्तु ऐसा अनुभव नहीं होता। प्रभाकर के लिये यह समझाना कि सर्प इदं के रूप में कैसे मालूम पड़ता है कठिन है। भ्रम का जब निवारण होता है तब हम यह नहीं कहते है कि अरे सर्प तो स्मृतिमात्र था किन्तु यह कहते हैं कि अरे हमने रज्जु को सर्प समझा था। नैयायिक इस बात को स्वीकार करते है कि सर्प स्मृतिमांत्र नहीं है। उनका कथन यह है कि सर्प सत्य हैं और उसका प्रत्यक्ष ज्ञान होता है किन्तु यह ज्ञान साधारण प्रत्यक्ष नहीं है प्रत्युत एक प्रकार का असाधारण प्रत्यक्ष है जिसे वे ज्ञान-लक्षणाप्रत्यासत्ति कहते हैं । अतः इदं का सर्पवत् होना मिथ्या होते हुए भी सर्प सत्य है । सर्प कहीं अन्यत्र है। भ्रम भेदज्ञान का अभाब मात्र नहीं, उसमें अन्थया ख्याति है । इदं और सर्प का सम्बन्ध मात्र मिथ्या है न इदं मिथ्या हैं न सर्प । भ्रम निवारण का अर्थ यह है कि सर्प यहीं नहीं है अन्यत्र है। व्याख्या : सात नैयायिक लोगों की यह विशेषता है कि वे सर्प को प्रत्यक्ष मानते हैं; परन्तु इदं और सर्प दोनों सत्य है तो उनके बीच का सम्बन्ध मिथ्या कैसे हो सकता है ? दो सत् पदार्थों का सम्बन्ध भी सत् ही होगा। दूसरी बात यह है कि यदि सर्प अन्यत्र है तो वह यहाँ इस क्षण कैसे दिखाई देगा ? जब हम यह कहते हैं कि सर्प मिथ्या तो यहाँ दिखाई पड़ने वाले सर्प की मिथ्या कहते हैं। अन्यत्र रहने वाले सर्प को नहीं । यदि सर्प कहीं अन्यत्र हो तो भी यहाँ दिखाई पड़ने वाला सर्प तो नहीं ही है। तैयायिकों के असाधारण प्रत्यक्ष को भी मान लिया तो एक कठिनाई यह होगी कि अनुमान की आवश्यकता नहीं रहेगी और हम यह कह सकेंगे कि धूम्र को देखने से अग्नि का असाधारण प्रत्यक्ष हो गया। इन्द्रियों से सन्निकर्ष न रखने वाली किसी दूरस्थ वस्तु का प्रत्यक्ष मानना नैयायिकों की असाधारण चाल है। अन्यथाख्यातिवादी को भी यह भ्रम तो मानना ही पड़ेगा कि जो असाधारण प्रत्यक्ष है वह साधारण प्रत्यक्ष की तरह से भासता है। अर्थात् यहाँ पर शानाध्यास है। विज्ञानवादी बौद्धों के अनुसार न तो कोई बाह्य पदार्थ है और न तो कोई नित्य आत्म-तत्त्व है । जो कुछ है वह विज्ञानमात्र है और वह क्षणिक है । अतः रज्जु-सर्प के विषय में उनका कहना है कि विज्ञान के रूप में रज्जु और सर्प दोनों सत्य हैं किन्तु बाह्य पदार्थ के रूप में दोनों असत्य हैं । इदं रजतम् के मिथ्यात्व का अर्थ वे यह लगाते हैं कि "रजतम् इदं न " अर्थात् रजत कोई बाह्य पदार्थ नहीं है। भ्रम के कारण बाह्य पदार्थवत् मालूम पड़ता है। प्रश्न यह है कि भ्रम का निवारण वास्तव में इस रूप में होता है कि यह रजत नहीं है या इस रूप में कि रजत यह नहीं है। स्पष्ट है कि निवारण का बाघक स्वरूप यह नहीं है कि रजत यह नहीं है बल्कि यह है कि यह रजत नहीं है। दूसरी बात यह है कि यदि रजत के बाह्यत्व मात्र का निषेध करना है तो उसके लिये सीप के ज्ञान की आवश्यकता है ? परन्तु क्या सीप के ज्ञान के बिना हम यह कह सकते हैं कि यह रजत नहीं है ? विज्ञानवादियों के अनुसार बायार्थ न मानने से ज्ञान तथा स्मृति अथवा कल्पना का भेद नहीं किया जा सकता है। विज्ञान को स्वसंवेद्य मानने से विज्ञान में शाता और ज्ञेय का भेद हो जाता है। यदि प्रत्येक ज्ञान स्वसंवेद्य और क्षणिक है तो यह सर्प है इस प्रकार का ज्ञान ही संभव नहीं है। भ्रम के विश्लेषण से आठः ब्रह्मसूत्रशाङ्करभाष्यचतुःसूत्री सहोपलम्भ नियम भी गलत सिद्ध होता है। जिस समय हमको सर्प का प्रत्यक्ष होता है उस समय रज्जु का ज्ञान नहीं रहता फिर भी जब भ्रम का बाघ होता है तो हम यही कहते हैं रज्जु वहाँ थी किन्तु हमने उसे सर्प समझ लिया था। अर्थात् रज्जु का अस्तित्व जिस समय रज्जु का ज्ञान नहीं था उस समय भी सिद्ध होता है। शून्यख्यातिवाद माध्यमिकों का कहना है कि तत्त्व का स्वरूप शून्य है । भ्रम के कारण हमको तरह तरह की वस्तुएँ दिखायी पड़ती हैं। वास्तव में माध्यमिक रज्जु सर्प आदि प्रत्यक्ष संबंधी भ्रम का विचार नहीं करते। वे विचार संबंधी भ्रम को ही लेते हैं और कहते हैं कि बुद्धि द्वारा प्रदत्त चतुष्कोटि या चारों प्रकार के संभव सिद्धान्त असत्य हैं क्योंकि असंगत हैं। प्रश्न यह है कि माध्यमिक जिसे मिघ्या कहते हैं उसका स्वरूप क्या है ? अवश्य ही वह आकाशपुष्प के समान नहीं है क्योंकि वह प्रतीति का विषय है। परन्तु वह सत् भी नहीं है अतः उसे सत् और असत् से भिन्न कहना पड़ेगा । किन्तु माध्यमिक ऐसा नहीं कहते। वे लोग प्रत्यक्ष अनुभव वाले रज्जु सर्प का दृष्टान्त मी स्वीकार नहीं करते । वास्तव में वे किसी प्रकार का दृष्टान्त सामने नहीं रखते । अतः वे न तो यह कह सकते हैं कि जगत् किस प्रकार मिघ्या है और न तो यही कह सकते हैं कि भ्रम का कोई अधिष्ठान है । वे यह नहीं कह सकते कि शून्य जगत् का अधिष्ठान है । तब फिर यह मिथ्या जगत् आया कहाँ से ? ये सब प्रश्न ऐसे हैं कि माध्यमिक या तो उनका उत्तर नहीं देते या देते हैं तो वेदान्ती हो जाते हैं। अधिष्ठान मानने पर वे वेदान्ती होंगे और न मानने पर वैनाशिक । अनिर्वचनीय ख्यातिवाद यदि सूक्ष्म दृष्टि से विचार किया जाय तो ऊपर के सभी सिद्धान्तों में किसी प्रकार का अध्यास अवश्य स्वीकार किया गया है। इसी से शङ्कराचार्य कहते हैं कि "सर्वथापि त्वन्यस्यान्यधर्मावभासतां व्यभिचरति" । अतः भ्रम में एक वस्तु के गुणों को अथवा एक वस्तु को दूसरे पर आरोपित करना ही अध्यास है। भ्रम में जो आरोपित वस्तु है उसे न तो स्मृति कह सकते हैं और न उसे अन्यत्र सत्य कह सकते हैं और न तो उसे सर्वदा असत् कह सकते हैं। रज्जु-सर्प यहाँ इस समय दिखाई पड़ता है और उसका बाघ भी यहीं होता है। रज्जुसर्प सत् नहीं है क्योंकि उसका बाघ होता है, और न तो आकाश पुष्प के समान असत् है क्योंकि वह दिखाई पड़ता है। और न तो उसे सत् और असत् दोनों कह सकते हैं क्योंकि उसका कोई अंश स्वीकार नहीं किया जा सकता । देश, काल, स्वरूप, संबंध सम रज्जु के होते हैं। सर्प में सत् अंश कुछ भी नहीं होता है। दिखाई पड़ने के कारण वह असतू भी नहीं है। अतः उसे सत्-असत्-विलक्षण या अनिर्वचनीय कहना ठीक ही है । ब्रह्म को शब्द से परे कहा जाता है, किन्तु उसे अनिर्वचनीय कहना ठीक न होगा क्योंकि वह सत् है, और यद्यपि आकाश-पुष्प का भी वर्णन नहीं किया जा सकता फिर भी वह आकाश-पुष्प अनिर्वचनीय नहीं असतु या अलीक है । अनिर्वचनीय ख्यातिवाद के विरुद्ध कई प्रकार की आपत्तियाँ उठाई जा सकती हैं। मध्यम परिहार के नियम के अनुसार कोई वस्तु या तो सत् या असत् होती है। उसके अतिरिक्त अनिर्वचीय नाम की कोई चीज नहीं हो सकती । इसका उत्तर यह है कि मध्यम परिहार नियम को पहले मानना अनिवार्य नहीं है । विचार करने के बाद ही हम कह सकते हैं कि उसको स्वीकार किया जाय या नहीं। सारी वस्तुओं को सत् या असत् दो ही वर्गों में बाँट देना तो इस बात का द्योतक है कि मानों हम विचार कर चुके हैं और सब कुछ जान गये हैं। जहाँ अभी अन्वेषण का कार्य चल रहा है वहाँ इस तरह का विभाजन नहीं हो सकता। एक दूसरी आपत्ति यह भी है कि हम जो कुछ देखते हैं सत् है और सत् को ही हम देख सकते हैं, अतः सर्प सत् है । यह आपत्ति सत्ख्यातिवादियों की है और इसका उत्तर दिया जा चुका । यह भी कहा जाता है कि व्यवहार में तो केवल सत् और असत् का ही प्रयोग होता है । यह ठीक है कि साधारणतया व्यवहार में सत् और असत् का ही प्रयोग होता है किन्तु अनिर्वचनीय साधारण व्यवहार का शब्द नहीं है। यह दो दार्शनिक विवेचन की प्राप्ति है । विचार करने पर हम पाते हैं कि रज्जु-सर्प को हम न सत् कह सकते हैं और न असत् और न दोनों । अतः इसे अनिर्वचनीय कहीं जाता है। वेदान्त की भाषा में कहा जाता है कि अनिर्वचनीय को हम अर्थापत्ति द्वारा प्राप्त करते हैं । रज्जु-सर्प और जगत् दोनों मिथ्या है परन्तु दोनों में भेद है । अतः रज्जु सर्प को प्रातिभासिक एवं जगत् को व्यावहारिक कहा गया है। उन दोनों का भेद यह है कि प्रातिमासिक व्यक्तिगत भ्रम है किन्तु व्यावहारिक सर्वसामान्य का भ्रम है। व्यावहारिक जगत् दिखने के पहले और दिखने के बाद भी रहता है। परन्तु प्रातिमासिक जब तक दिखता है तभी तक रहता है। व्यावहारिक का बाघ किसी दस : ब्रह्मसूत्रशाङ्करभाष्यचतुःसूत्री वस्तु- विशेष के ज्ञान से नहीं होता किन्तु ब्रह्म के ज्ञान से होता है; परन्तु प्रातिमासिक के बाघ के लिए वस्तु विशेष का ज्ञान पर्याप्त है । व्यावहारिक का ज्ञान प्रत्यक्षादि से होता है किन्तु प्रातिमासिक केवल साक्षीदृष्ट है । इदं रजतम् में इदं का ज्ञान प्रत्यक्ष से और रजतम् का ज्ञान साक्षी से होता है । अद्वैतवेदान्त में साक्षी की अवधारणा का बड़ा महत्व है, क्योंकि साक्षी के द्वारा ज्ञात, अज्ञात, यथार्थ, मिथ्या आदि सभी वस्तुयें प्रकाशित होतो हैं । तर्कतः एक ऐसे चैतन्य को मानना आवश्यक है जिसे अज्ञात भी ज्ञात हो अर्थात् प्रमाता को जो अज्ञात है वह भी उसे ज्ञात है । जब हम किसी वस्तु का प्रत्यक्ष करते हैं तो हमको ऐसा लगता है कि वस्तु यहाँ थी किन्तु हमको उसका ज्ञान नहीं था अर्थात् वस्तु की उत्पत्ति ज्ञान के साथ ही नहीं होती है नहीं तो ज्ञान और कल्पना में भेद नहीं रह जायगा । ज्ञान भूतवस्तुविषयक होता है और कल्पना से वस्तु की सृष्टि होती है। अतः वेदान्त मानता है कि प्रमाता को अज्ञात वस्तु भी साक्षी कों ज्ञात रहती है। इसी तरह से प्रमाता द्वारा मिथ्यारूप से तिरस्कृत वस्तु भी साक्षी को आभासित होती है। दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है साक्षी सर्वज्ञ अर्थात् सब कुछ का प्रकाशित करनेवाला है । परन्तु सर्वज्ञ होते हुए भी साक्षी निर्णायक या प्रमाता नहीं है बल्कि निष्पक्ष है और निष्पक्षत्व के कारण ही साक्षी को सत् और मिथ्या, ज्ञात और अज्ञात दोनों भासित होते हैं। प्रमाता को ऐसा नहीं हो सकता है क्योंकि प्रमाता को एक विशेष दृष्टि होती है। साक्षी चैतन्य सर्व सामान्य, निष्पक्ष एवं सर्वज्ञ है । प्रमाता जो एक मापदण्ड रखने वाला है वह साक्षी चैतन्य पर अध्यस्त होकर साक्षी चैतन्य द्वारा प्रकाशित वृत्तियों का उपयोग करता है । साक्षी एक ही होता है जबकि प्रमाता अनेक होते हैं। साक्षी को सत्यासत्य के द्वैत का ज्ञान नहीं होता है किन्तु प्रमाता को होता है। साक्षी प्रमाता की प्रमाण वृत्तियों के अतिरिक्त अन्य वृत्तियों को भी प्रकाशित करता है। प्रमाताा सोता है, स्वप्न देखता है, जागता है किन्तु साक्षी सदा जागरूक हैं । उसके चैतन्य में ये सब भेद नहीं होते हैं । साक्षी का ज्ञान असीम और प्रमाता का ज्ञान सीमित है। अनिर्वचनीय ख्याति के विरुद्ध एक यह आशंका की जा सकती है कि अध्यास दो बाह्य वस्तुओं में हुआ करता है परन्तु आत्मा सम्बन्धी अध्यास में आत्मा कोई बाह्य वस्तु नहीं है फिर भी शरीर के साथ उसका अध्यास कैसे हो सकता व्याख्या : निन्यानवे, है ? इसका उत्तर यह दिया जाता है कि यह कोई नियम नहीं हैं कि अध्यास में दोनों वस्तुएँ हमारे सामने रहने वाले पदार्थ हों। दूसरी बात यह है कि आत्मा भी एक अर्थ में अहं प्रत्यय का विषय है । विषय कहने से यह शंका नहीं होनी चाहिए कि आत्मा विषयी न होकर विषय हो गया क्योंकि प्रत्यगात्मा का ज्ञान अपरोक्ष है। यहाँ पर शंकराचार्य प्रत्यक्ष न कहकर अपरोक्ष शब्द का प्रयोग करने हैं। इससे यह दिखाते हैं कि आत्मा का अपरोक्षत्व विषय के प्रत्यक्षत्व से भिन्न है । विषयों का प्रत्यक्षत्व सोपाधिक है अर्थात् इन्द्रियादि साधनों निर्भर करता है किन्तु आत्मा का अपरोक्षत्व ऐसा नहीं है। यहाँ पर यह भी शंका नहीं होनी चाहिये कि यदि आत्मा अपरोक्ष है तो उसके विषय में अध्यास कैसे होता ? क्योंकि अध्यास न तो वहीं हो सकता है जहाँ सर्वथा अज्ञान हो और न वहीं हो सकता है जहाँ पूर्ण ज्ञान हो । अध्यास नहीं होता है जहाँ हमारा ज्ञान अपूर्ण रहता है जैसे अयम् का ज्ञान तो रहता है किन्तु अयम् के रज्जु होने का ज्ञान नहीं रहता। आत्मा इसका अपरोक्ष ज्ञान है किन्तु आत्मा अनंत है इसका अपरोक्ष ज्ञान नहीं है। इसीसे तद्वविषयक जिज्ञासा को अवसर मिलता है। उन लोगों को जो प्रत्यक्ष वस्तुओं में ही अध्यास मानते हैं ध्यान में रखकर शङ्कराचार्य ने यह भी कहा है कि आकाश के अप्रत्यक्ष होने भी लोग उस पर मालिन्य आरोप करते हैं । अर्थात् अध्यास केवल प्रत्यक्ष वस्तु पर ही नहीं होता। अभ्यास के उक्त विवेचन से यह स्पष्ट हो जाना चाहिये कि अध्यास किसी वस्तु में वास्तविक परिवर्तन नहीं है किन्तु केवल अविद्याजन्य है । अतः उसका नाश विद्या या विवेक से हो जाता है अर्थात् वस्तु में परिवर्तन न तो विद्या से होता है और न तो अविद्या से। अध्यास के कारण वस्तुमें किसी प्रकार का गुण दोष उत्पन्न • नहीं होता अर्थात् अध्यस्त वस्तु के गुण दोष अध्यासवान पर कोई प्रभाव नहीं डालते क्योंकि केवल आरोपण ही नहीं बल्कि जिसका आरोपण करते हैं वह भी मिथ्या है । विषय विषयी का यह अध्यास जो अविद्या के कारण होता है वही सब प्रकार के लौकिक प्रमाण प्रमेय व्यवहार तथा सभी शास्त्रों का चाहे वह कर्म परक या मोक्ष परक हों आधार है अर्थात् शरीर में विश्वास के बाद ही सभी व्यवहार प्रारम्भ होते हैं। हम सबका शरीर में विश्वास किसी प्रमाण के आधार पर नहीं होता बल्कि स्वयं सभी प्रमाण शरीर में विश्वास के आधार पर निर्भर हैं। इसी लिए अध्यास जो बारह : ब्रह्मसूत्रशाङ्करभाष्य चतुःसूत्री अविद्या-जन्य हैं उसे प्रमाण प्रमेय व्यवहार का आधार कहा गया है। यह आशंका कि प्रत्यक्षादि प्रमाण और श्रुति अविद्याजन्य कैसे हो सकते हैं निराधार है। क्योंकि आशंका करने वाले यह मूल जाते हैं कि जिस व्यक्ति को अपने शरीर के विषय में अहं मम भाव नहीं रहेगा उस व्यक्ति के लिए उपर्युक्त व्यवहार असंभव है; जैसे सुषुति की अवस्था में जबकि अहं भाव नहीं होता है ये व्यवहार नहीं हो पाते । बिना अहं प्रत्यय के इन्द्रियाँ अपने आप कार्य नहीं कर सकतीं और न शरीर ही काम कर सकता है जैसे सुषुप्ति में । अतः आत्मा के विषय में शरीर इन्द्रिय अहंकार आदि की प्रतीति व्यवहार के लिये आवश्यक है और बिना प्रमातृ रूप अध्यास के प्रमाण प्रमेय व्यवहार नहीं हो सकता। हमारा प्रमाण प्रमेय व्यवहार अविवेकपूर्ण है यह इस बात से सिद्ध होता है कि ये व्यवहार पशुओं में भी पाये जाते हैं जिनकों सब कोई अविवेकी कहता है । सबसे बड़ी कठिनाई शास्त्रों के विषय ये मालूम पड़ती है क्योकि यह कहना कि शास्त्र मी अविद्या पर आधारित है अटपट मालूम पडता । किन्तु विचार करके देखा जा सकता कि शास्त्र उस आत्मा के प्रति जो सर्वथा असंग निर्गुण और अव्यवहार्य है लागू नहीं हो सकते क्योंकि विधि निषेध का व्यवहार ब्राह्मण क्षत्रिय आदि भेद पर अवलंबित है और ये भेद शरीर पर आधारित हैं जो अविद्याजन्य हैं । शुद्ध चैतन्य रूप आत्मा कर्मकांड का विषय नहीं हो सकता क्योंकि वह असंसारी है, जन्म मरण के परे हैं। कर्मकांड विषयक शास्त्र तो उस जीवात्मा से संबंध रखते हैं जिसका जन्म-मरण होता है जो कर्म करता है और स्वर्ग नरक में जाता है। शुद्ध चैतन्य के विषय में तो कहा गया है कि "नैव कुर्वन्नकारयन्' । यही बात मोक्षपरक शास्त्र के विषय में कही जा सकती है क्योंकि वे शास्त्र भी उसी जीवात्मा के लिए सार्थक हैं जिसमें भेद बुद्धि है अहंकार है या अविद्या है। जिसे आत्मा के शुद्ध चैतन्य रूप का ज्ञान हो गया है उसके लिए न शास्त्र की उपयोगिता है न गुरु की । ऐसी शंका की जा सकती है सि शास्त्र गुरु आदि मिथ्या है या अविद्या जन्य है तो इनके द्वारा ज्ञानप्राप्ति या अबिद्यानाश कैसे होगा ? यह शंका निर्मूल है क्योंकि अविद्याजन्य वस्तु से अविद्याजन्य वस्तु का नाश देखा जाता है जैसे स्वप्न में दृष्ट शेर की हत्या स्वप्न की तलवार से हो की जा सकती है, जागृत अवस्था वाली तलवार से नहीं अर्थात् ब्रह्म अविद्या का नाश नहीं करता है नहीं तो अविद्या रहती ही कैसे ? अविद्या का नाश तो अविद्याजन्य प्रमाण प्रमेय व्यवहार से ही होता है। व्याख्या : तेरह अध्यास के कारण हम बाह्य वस्तुओं का जैसे पुत्रादि का, शरीर धर्मों का जैसे स्थूलता आदि का; इन्द्रिय धर्मों का जैसे बहरापन आदि का, अन्तः करण धर्मों का जैसे इच्छा आदि का आरोप आत्मा पर करते हैं और आत्मा का आरोप बाह्य वस्तुओं पर करते हैं। इस प्रकार हम परस्पर एक दूसरे का अभ्यास करते हैं। यह अध्यास अनादि और अनंत , है किन्तु ब्रह्म ज्ञान द्वारा नष्ट होने वाला है। यही हमारे भीतर कर्तृत्व और मोतृत्व माव पैदा करता है जो वास्तव में आत्मा में नहीं है। यह अध्यास अनादि है क्योंकि इसका कोई कारण नहीं है। कार्य कारण व्यापार और कार्यकारण बुद्धि दोनों ही इस थध्यास के अनन्तर प्रारंभ होते हैं इसलिये इसको अनादि कहा गया है। अनादि शब्द में इस बात की भी व्यंजना है यह अध्यास जानबूझकर उत्पन्न की हुई कोई वस्तु नहीं है बल्कि नैसर्गिक या अज्ञातरूप से है । यद्यपि वेदान्त में केवल ब्रह्म सीमा रहित है फिर भी अध्यास को अनंत इसलिये कहा गया है कि यह अनंत ब्रह्म विषयक है इसलिये यह अध्यास भी अनंत हो गया । यहाँ पर अध्यास का अर्थ हमारे जीवन में आनेवाले रज्जु सर्प नामक अध्यासों से नहीं है बल्कि मूलाध्यास है जो कि अनंत हैं । दूसरी बात जो कि शङ्कराचार्य यहाँ कहना चाहते हैं कि वह यह है कि यह अध्यास सभी अनर्थों का कारण है । अतः इसका नाश आत्मविद्या द्वारा जो कि उपनिषदों से प्राप्त होती है आवश्यक है। यहाँ पर यह शंका हो सकती है कि जीवन में अनर्थ किन्हीं अन्य कारणों से भी हो सकते हैं जैसे प्रकृति प्रकोप, दैव प्रकोप पाप पुण्य आदि । किन्तु किसी भी बाह्य सांसारिक कारण को जीवन के अनर्थ का हेतु कहना इस बात को भूल जाना है कि वे सब कारण आत्मा पर शरीर इन्द्रिय अन्तः करण आदि के आरोपण के बाद ही प्रभाव कर सकते हैं। जिस व्यक्ति को आत्मविषयक देहाध्यास न हो उसपर किसी बाह्य कारण का प्रभाव नहीं हो सकता। अतः आत्म-विषयक अध्यास को सभी अनर्थ का मूल कारण कहना ठीक है। सभी उपनिषदों का उपदेश आत्मैकत्व प्रतिपादन करना है और उसी उद्देश्य से शङ्कराचार्य ने शारीरक मीमांसा प्रारम्भ की है। भक्ति संप्रदाय के लोगों द्वारा यहाँ एक शंका उठायी जा सकती है कि सभी अनर्थो का मूल कारण भगवद्विमुख होना है। अतः अनयों के मूल कारण के नाश हेतु भक्ति आवश्यक है यही उपनिषदों का आशय है। यह बात सही है कि उपनिषदों चौदह : ब्रह्मसूत्रशाङ्करभाष्यचतुःसूत्री में तरह तरह की उपासनाओं का, ईश्वर भक्ति तथा ईश्वर कृपा का उल्लेख है। फिर भी इस बात को अस्वीकार नहीं किया जा सकता कि उपनिषदों में आत्मज्ञान द्वारा अमरत्व की प्राप्ति और शोक से मुक्ति कही गई है। विवेक के आधार पर भी यही जान पड़ता है कि यदि सारे क्लेश भेद बुद्धि के कारण हैं तो उनका नाश अभेद बुद्धि आत्मैकत्व ज्ञान से हो होगा। सभी आचार्य अविद्या को तो मूल कारण मानते ही हैं तो उसके नाश के लिये विद्या को मूल उपाय मानना या आत्मविषयक ज्ञान को उपाय मानने में क्या आपत्ति हो सकती है ? ब्रह्म ज्ञान के उपरान्त यदि अविद्या का नाश न होता तो उसके बाद मी भक्ति आदि की आवश्यकता मानी जाती किन्तु ऐसी बात नहीं है । अतः अविद्या को सभी अनर्थों का मूल हेतु और विद्या अर्थात् आत्मज्ञान को उसके निवारण का साधन कहना ठीक ही है । ब्रह्मसूत्र की व्याख्या करने मे आचार्य लोग केवल सूत्रों के विषय में ही नहीं बल्कि सूत्रों को विभिन्न अधिकरणों में बांटने के विषय में भी मतभेद रखते हैं और ब्रह्मसूत्र के प्रथम चार सूत्रों पर विशेष बल देते हैं। जिज्ञासाधिकरण या प्रथम सूत्र "अथातो ब्रह्मजिज्ञासा" में प्रयुक्त चार शब्दों का अर्थ शङ्कराचार्य ने अलग अलग किया है। "अथ" शब्द के विषय में उन्होंने कई विकल्प उठाये हैं और सबका निराकरण करके आनन्तर्य अर्थ को स्वीकार किया है। यह उन्होंने स्पष्ट किया है कि "अर्थ" का अर्थ प्रारम्भ का द्योतक मात्र नहीं है क्योंकि ब्रह्मजिज्ञासा का प्रारम्भ नहीं किया जा सकता । जानने की इच्छा होने पर ज्ञान के लिये प्रयत्न का प्रारम्भ किया जा सकता है किन्तु स्वयं इच्छा का प्रारम्भ प्रयत्नाधीन नहीं है। इसलिये अथ का अर्थ प्रारम्भ नहीं है और न तो उसका अर्थ केवल मंगलमात्र है क्योंकि अथ शब्द का अन्य अर्थ में प्रयोग होने पर भी वह मंगल सूचक हो जाता है। पूर्व प्रकृतापेक्षा के अर्थ में भी अथ शब्द को लेने पर आनन्तर्य से फल में कोई भेद नहीं पड़ता। अतः "अथ" शब्द का अर्थ आनन्तर्य ही मानना चाहिये । यहाँ पर प्रश्न यह उठता कि किस चीज के बाद तुरन्त ब्रह्मजिज्ञासा प्रारम्भ होती है । वैष्णवाचार्य एवं मीमांसकों का कहना यह है कि "धर्म जिज्ञासा" के बाद ब्रह्मजिज्ञासा प्रारम्भ होती हैं। अतः आनन्तर्य को हम इस अर्थ में लें कि ब्रह्मजिज्ञासा के पहले धर्म-जिज्ञासा की अपेक्षा होती है। किन्तु शङ्कराचार्य इस प्रकार के आनन्तर्य को नहीं स्वीकार करते । उनका व्याख्या : पंद्रह कहना यह है कि धर्म-जिज्ञासा के पहले भी ब्रह्मजिज्ञासा हो सकती है। जहाँ पर कर्मकांड में कम विवक्षित है वहाँ पर स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अमुक कर्म के बाद अमुक कर्म होना चाहिये। किन्तु धर्म जिज्ञासा के बाद ही ब्रह्मजिज्ञासा हो इस क्रम के लिये कोई श्रुति प्रमाण नहीं है। मीमांसकों का यह सिद्धान्त है कि स्वाध्याय का मुख्य तात्पर्य कर्मविषयक ज्ञान प्राप्त करना है क्योंकि श्रुति में यह स्पष्ट आाया है कि यश, दान, तपस्या से ब्राह्मण उस आत्मा को जानने की चेष्टा करते हैं । "तमेस वेवानुवचनेन ब्रह्मणा विविविवन्ति यज्ञेन बामेन तपसाऽनाशकेन इति" इसका उत्तर शङ्कराचार्य यह देते हैं कि यद्यपि तपस्या और दान बुद्धि की शुद्धता के लिए उपयोगी है फिर भी यह आवश्यक नहीं हैं कि इन्हीं द्वारा वैराग्य उत्पन्न हो । पूर्व जन्म के संस्कारों के कारण भी वैराग्य उपन्न हो सकता है और तदनन्तर ब्रह्मजिज्ञासा उत्पन्न हो सकती है। श्रुति ने स्पष्ट कहा है कि अन्य किसी आश्रम से अर्थात् ब्रह्मचर्यादि से ही संन्यास ग्रहण करें। । यदि यह वहा जाता है कि मनुष्य को तीन ऋणों से मुक्त होने पर ही संन्यास लेना चाहिए तो उसका अर्थ यह है कि ऋण का बंधन उसी को होता है जो गृहस्थ आश्रम में प्रवेश कर जाता है। यदि बिना गृहस्थ आश्रम में प्रवेश किये कोई संन्यास ले लेता है तो उसे ऋण का बंधन नहीं होता। मीमांसक लोग कभी कभी इस वाक्य का उद्धरण देते हैं कि 'गृही भूत्वा बनी भवेत् वनी भूत्वा प्रव्रजेत', किन्तु ऐसे वाक्यों का भी अर्थ हमको श्रुति के अन्य वाक्यों पर ध्यान रखकर करना चाहिये । "यदहरेव विरजेत तदहरेव प्रव्रजेत" अर्थात् जिस क्षण वैराग्य हो उसी क्षण संन्यास लेना चाहिए । जो श्रुति वाक्य विना स्वाध्याय के संन्यास का बिरोध करते हैं उनका भी यही अर्थ है कि जिनका मन शुद्ध नहीं हुआ है और जिनमें वैराग्य उत्पन्न नहीं हुआ है उनको संन्यास नहीं लेना चाहिये । मीमांसक लोग श्रुति, अर्थ , पाठक्रम इत्यादि के आधार पर कर्मों का क्रम निश्चित करते हैं और कहते है कि धर्मजिज्ञासा और ब्रह्मजिज्ञासा में मुख्य और गौण का संबंध है किन्तु शङ्कराचार्य का कथन है कि इसके लिए कोई प्रमाण नहीं है और न तो कहीं स्पष्ट कहा गया है कि अमुक कर्म करने बाद ही ब्रह्मजिज्ञासा हो सकती है। उपर्युक्त उत्तरों के अतिरिक्त शङ्कराचार्य ने कुछ प्रबल तर्क दिए हैं जिनसे धर्मजिज्ञासा और ब्रह्मजिज्ञासा का मौलिक भेद सिद्ध होता है और यह कथन खंडित होता है कि इन दोनों में कम है या मुख्य गौण का संबंध है। प्रथम यह कि दोनों के फल में भेद है। धर्म ऐहिक उन्नति के लिए किया जाता है किन्तु ब्रह्मज्ञान का फल निःश्रेयस की प्राप्ति है और वह किसी कर्म पर निर्भर नहीं करता। दूसरी बात यह है कि धार्मिक कार्यों का फल भव्य हैं क्योंकि वे कर्मसापेक्ष हैं किन्तु ब्रह्मज्ञान में ब्रह्म भूतवस्तु है और नित्य होने के कारण कर्म से उनकी प्राप्ति का प्रश्न नहीं उठता है। तीसरी वात यह है कि धर्म विषयक श्रुति मनुष्य को कर्म में प्रवृत्त करती है जबकि ब्रह्मविषयक श्रुति केवल ज्ञानमात्र देती कोई कर्म करने को नहीं कहती। जिस प्रकार प्रत्यक्षादि प्रमाण केवल बस्तु का ज्ञान कराते हैं, कर्म करने की प्रेरणा नहीं देते। ज्ञान मनुष्य की इच्छा पर निर्भर नहीं करता जब कि धर्म मनुष्य की इच्छा पर निर्भर करता है। ज्ञान केवल प्रमाण पर निर्भर करता है। यह बात सही है कि उपनिषदों में ऐसे वाक्यों का भी प्रयोग हुआ है जिनसे जान पड़ता है मानो ब्रह्मज्ञान उपासना आदि क्रियाओं पर निर्भर करता है । किन्तु ये सब क्रियायें तो हमको ब्रह्मज्ञान के लिये उपयुक्त बनाने में ही सार्थक हैं न कि ब्रह्मज्ञान उत्पन्न करने में । अतः यदि ब्रह्मज्ञान के पहले घर्मजिज्ञासा आवश्यक नहीं है तो क्या आव है श्यक है जिसके लिए "अथ" शब्द का प्रयोग किया है ? उत्तर में शङ्कराचार्य का कहना यह है कि नित्यानित्यवस्तुविवेक, इहामुत्रार्थंभोगविराग, शमदमादि साधनसम्पत् और मुमुक्षुत्व ये चार ब्रह्मजिज्ञासा के पहले होना आवश्यक है। इन गुणों के रहने पर ही ब्रह्मजिज्ञासा फलवती होती है । इन गुणों के बिना ब्रह्मज्ञान केवल शब्दज्ञान मात्र रहता है। यहाँ पर स्पष्ट कर देना आवश्यक है कि ब्रह्मज्ञान केवल बौद्धिक विलक्षणता पर ही निर्भर नहीं करता है। ब्रह्मज्ञान को हृदयंगम करने के लिये अर्थात् ब्रह्मज्ञान को साक्षात् अनुभव करके उसका फल भोगने के लिये उपर्युक्त चार गुणों की आवश्यकता है। आजकल ब्रह्मसूत्र उपनिषद् आदि ग्रंथ पढ़ने और समझने के बाद भी ब्रह्मज्ञान नहीं होता है तो उसका एक मात्र कारण उपर्युक्त गुणों का अभाव ही है। ब्रह्मज्ञान के लिये नैतिक जीवन मात्र भी पर्याप्त नहीं है। भारतवर्ष में तो नैतिक जीवन की उपयोगिता जीवन को दिशाबद्ध और नियमबद्ध करके वैराग्य उत्पन्न करने में ही मानी गयी है। पाश्चात्य देशों में नैतिक जीवन को ही सबकुछ माना जाता । किन्तु भारतवर्य में ऐसी बात नहीं है। यूनान के कुछ दार्शनिक प्लेटो आदि
उत्तराखंड के देवप्रयाग में शराब फैक्ट्री पर जहां एक ओर विरोध तेज होता जा रहा है वहीं, राज्य की रावत सरकार को समर्थन भी मिल रहा है। इस मुद्दे पर तीन बार भारतीय जनता पार्टी की विधायक रहीं और अब महिला आयोग की अध्यक्ष विजया बड़थ्वाल ने सरकार के पक्ष में बयान दिया है। उनका कहना है कि, बैन सही नहीं है। शराबी कहीं से भी लाकर पिएगा ही। यहां एक शराब फैक्ट्री का मुद्दा राजनीतिक रंग भी लेता जा रहा है। बीते दिनों पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री रहे हरीश रावत ने सीएम से लोगों की भावनाओं का ख्याल करने की अपील की थी। महिला आयोग की अध्यक्ष विजया बड़थ्वाल बीते दिन महिला सशक्तिकरण पर आयोजित एक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंची थीं। जहां पत्रकारों ने उनसे शराब फैक्ट्री पर जारी विवाद को लेकर सवाल दाग दिया। इस दौरान उन्होंने कहा, 'प्रदेश में शराब बैन कर देना समाधान नहीं है। शराब पीने वाला तो कहीं से भी लाकर पिएगा। शराब पीने वाला पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश, हिमाचल से लाकर पिएगा। अगर ऐसा होता है तो इससे् अच्छा है कि इसी राज्य में शराब बने'। उन्होंने आगे कहा कि, वह शराब पीने के समर्थन में बिल्कुल नहीं हैं। बड़थ्वाल ने कहा, शराब बैन कर देने से काम नहीं चलने वाला। इसे रोकना है तो इसके लिए जागरूकता फैलानी होगी। केवल विरोध करना सही नहीं। इसके साथ ही उन्होंने सवाल दागा कि, यहां के लोग पहले शराब नहीं पीते थे क्या ? पीते रहे हैं तो फिर केवल फैक्ट्री का विरोध क्यों किया जा रहा है। बता दें कि, रिकॉर्ड्स के मुताबिक करीब तीन साल पहले 2016 में टिहरी जिले के डुडवा-भांडली गांव में शराब फैक्ट्री लगाने का लाइसेंस एक कंपनी ने लिया था। हालांकि, इसका काम कुछ समय पहले ही शुरू हुआ था। जिसकी खबरें आने के बाद विरोध शुरू हो गया। फैक्ट्री के विरोध में लोग सोशल मीडिया पर कैम्पेन भी चला रहे हैं।
उत्तराखंड के देवप्रयाग में शराब फैक्ट्री पर जहां एक ओर विरोध तेज होता जा रहा है वहीं, राज्य की रावत सरकार को समर्थन भी मिल रहा है। इस मुद्दे पर तीन बार भारतीय जनता पार्टी की विधायक रहीं और अब महिला आयोग की अध्यक्ष विजया बड़थ्वाल ने सरकार के पक्ष में बयान दिया है। उनका कहना है कि, बैन सही नहीं है। शराबी कहीं से भी लाकर पिएगा ही। यहां एक शराब फैक्ट्री का मुद्दा राजनीतिक रंग भी लेता जा रहा है। बीते दिनों पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री रहे हरीश रावत ने सीएम से लोगों की भावनाओं का ख्याल करने की अपील की थी। महिला आयोग की अध्यक्ष विजया बड़थ्वाल बीते दिन महिला सशक्तिकरण पर आयोजित एक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंची थीं। जहां पत्रकारों ने उनसे शराब फैक्ट्री पर जारी विवाद को लेकर सवाल दाग दिया। इस दौरान उन्होंने कहा, 'प्रदेश में शराब बैन कर देना समाधान नहीं है। शराब पीने वाला तो कहीं से भी लाकर पिएगा। शराब पीने वाला पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश, हिमाचल से लाकर पिएगा। अगर ऐसा होता है तो इससे् अच्छा है कि इसी राज्य में शराब बने'। उन्होंने आगे कहा कि, वह शराब पीने के समर्थन में बिल्कुल नहीं हैं। बड़थ्वाल ने कहा, शराब बैन कर देने से काम नहीं चलने वाला। इसे रोकना है तो इसके लिए जागरूकता फैलानी होगी। केवल विरोध करना सही नहीं। इसके साथ ही उन्होंने सवाल दागा कि, यहां के लोग पहले शराब नहीं पीते थे क्या ? पीते रहे हैं तो फिर केवल फैक्ट्री का विरोध क्यों किया जा रहा है। बता दें कि, रिकॉर्ड्स के मुताबिक करीब तीन साल पहले दो हज़ार सोलह में टिहरी जिले के डुडवा-भांडली गांव में शराब फैक्ट्री लगाने का लाइसेंस एक कंपनी ने लिया था। हालांकि, इसका काम कुछ समय पहले ही शुरू हुआ था। जिसकी खबरें आने के बाद विरोध शुरू हो गया। फैक्ट्री के विरोध में लोग सोशल मीडिया पर कैम्पेन भी चला रहे हैं।
हेलेन और सलीम खान ने 1981 में शादी की थी. (फोटो साभारः Instagram@arpitakhansharma) नई दिल्लीः हेलेन (Helen) ने अरबाज खान के चैट शो में उन दिनों को याद किया, जब वे शादीशुदा सलीम खान को दिल दे बैठी थीं. उन्होंने अपनी सौतन सलमा खान के साथ अपनी बॉन्डिंग के बारे में भी बात की. सलीम खान (Salim Khan) ने जब हेलेन से 1981 में शादी की थी, तब वे चार बच्चों अरबाज, सलमान खान, सोहेल और अलवीरा खान के पिता थे. उन्होंने हेलेन से शादी करके सभी को चौंका दिया था. इससे उनकी सौतन को काफी कुछ सहना पड़ा था. 84 साल की हेलेन 1950 और 1960 के दशक में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपने डांस के लिए मशहूर थीं. जब उन्होंने सलीम खान से शादी की थी, तब उनकी उम्र 42 साल थी और सलीम खान 45 साल के थे. एक्ट्रेस ने फिल्मों में डांस को लेकर कहा, 'मैं लकी रही कि 42 साल की उम्र तक फिल्मों में डांस करती रही. लोग सोचते थे कि फिल्मों में काम नहीं करना चाहिए, ये अच्छी बात नहीं है. ' दूसरी ओर, सुशीला चरक से सलमा खान बनी सलमान खान की मां ने सलीम खान को कुछ साल डेट करने के बाद शादी की थी. . सनी देओल की हीरोइन को जब ज्यादा पढ़ी-लिखी होना पड़ा भारी, एक्ट्रेस ने खूब सुने थे ताने, बोलीं- इंडस्ट्री में. .
हेलेन और सलीम खान ने एक हज़ार नौ सौ इक्यासी में शादी की थी. नई दिल्लीः हेलेन ने अरबाज खान के चैट शो में उन दिनों को याद किया, जब वे शादीशुदा सलीम खान को दिल दे बैठी थीं. उन्होंने अपनी सौतन सलमा खान के साथ अपनी बॉन्डिंग के बारे में भी बात की. सलीम खान ने जब हेलेन से एक हज़ार नौ सौ इक्यासी में शादी की थी, तब वे चार बच्चों अरबाज, सलमान खान, सोहेल और अलवीरा खान के पिता थे. उन्होंने हेलेन से शादी करके सभी को चौंका दिया था. इससे उनकी सौतन को काफी कुछ सहना पड़ा था. चौरासी साल की हेलेन एक हज़ार नौ सौ पचास और एक हज़ार नौ सौ साठ के दशक में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपने डांस के लिए मशहूर थीं. जब उन्होंने सलीम खान से शादी की थी, तब उनकी उम्र बयालीस साल थी और सलीम खान पैंतालीस साल के थे. एक्ट्रेस ने फिल्मों में डांस को लेकर कहा, 'मैं लकी रही कि बयालीस साल की उम्र तक फिल्मों में डांस करती रही. लोग सोचते थे कि फिल्मों में काम नहीं करना चाहिए, ये अच्छी बात नहीं है. ' दूसरी ओर, सुशीला चरक से सलमा खान बनी सलमान खान की मां ने सलीम खान को कुछ साल डेट करने के बाद शादी की थी. . सनी देओल की हीरोइन को जब ज्यादा पढ़ी-लिखी होना पड़ा भारी, एक्ट्रेस ने खूब सुने थे ताने, बोलीं- इंडस्ट्री में. .
उन्द १० है । द्रव्य तो अनादि-अनन्त है, इसलिए 'वन्ध' और 'मोक्ष' - ऐगो दो अवस्थारूप गंद की कल्पना में ज्ञानी अटकता नहीं है । बानी को भव-मसार के प्रति खेद नहीं। एक-दो भव बाकी हो या भव का अभाव किया हो, उसमे मंगारी और मुक्त का शोक या हर्ष करने का समय नहीं - एंगी अप्रगत भूमिका कर आगे क्षपकश्रेणी में आम हो - ऐसा वीतरागभाव (स्वगमय) क आवेगा, यह भावना यहाँको हूँ । सिद्धसमान सदा पद मेरो - ज्ञानी व्यभाव में तो पूर्ण पवित्र • शाश्वत चिद्धन है, किन्तु उनके वर्तमान अवस्था में कमजोरी के कारण अस्थिरता रहती है । छठवे गुणस्थान में व्यान-अव्यवन शुभचिन्न होते हैं, उनमें की इच्छा का विकल्प रहता है, उस विकल्प को भी नष्ट कर ऐसी उत्कृष्ट दूहतर स्थिरता - एकाग्रता कर्म कि केवलज्ञान को उत्कृष्ट यि उघड जावे, ऐसा बहा गया है। उसे पाने की योग्यता वा कृष्ट दशावाला समभाव हो, वहीं मोक्ष-दशा प्रगट होती है । बन्ध और मोक्ष - ये दो तो आत्मा की अवस्थाये है और आत्मा नित्य है । ममार पर्याय बन्धनरूप है। शुभ या अगम रिणाम भाववन्धम्य अवस्था है, उसके अभाव की अपेक्षा मोक्ष कहा ता है । ससार और मुक्ति पर्यायदृष्टि से पर- निमित्त को अपेक्षा दो न है । आत्मा उन दो भङ्ग जितना नहीं है, क्योंकि आत्मा त की अपेक्षारहित नित्य एकरूप है । आत्मभानपूर्वक चारित्रटालने के लिए उग्र पुरपार्थ की भावना से उग्र निर्जरा भाव का इस पद में किया गया है । दोखे देहाध्यास से, आत्मा देह समान । पर वे दोनो भिन्न है, जैसे अति और म्यान ॥५०॥ जो दृष्टा है एकाकी विचरतो वली श्मशान में, वली पर्वत में वाघ सिंह संयोग जो; अडोल आसन ने मन में नहि क्षोभता, परम मित्रनो जाणे पाम्या योग जो । अपूर्व अवसर एवो क्यारे आवशे ॥११॥ हिन्दी पद्यानुवाद एकाकी विचरूँ निर्जन शमशान में, वन-पर्वत में मिले सिंह-सयोग जो, आसन रहे अडोल न मन में क्षोभ हो, परम मित्र मम जानूं ऐसे योग को । अपूर्व अवसर ऐसा कब मेरे आएगा ।।११।। छन्द ११ पर प्रवचन गृहस्थाश्रम में रहते हुए भी श्रीमद् राजचन्द्र कितनी उत्कृष्ट भावना करते थे । उनके अन्तरग मे पवित्र उदासीनता, निवृत्तिभाव, मोक्षस्वरूप को प्राप्त करने का उत्साह जागृत था । यह निर्ग्रन्थ दशासाधक दशा धन्य है, जो माहात्म्य करने योग्य है । श्मशान, जङ्गल, पहाड, गुफा आदि स्थानो मे, जहाँ मिह आदि रहते है वहाँ एकाकी रूप से विचर सके - ऐसी महापवित्र दशा धन्य • है । वे मुनिवर भी धन्य है - जो ऐसे शान्त, एकान्तक्षेत्र में एकत्वदशा की साधना करते हैं। किसी पर्वत को गुफा में या शिखर पर रहकर वेहद आनन्दघन स्वभाव की मस्ती में लीन होकर जाग्रत ज्ञान-दशा की एकाग्रता द्वारा केवलज्ञान शक्ति को प्रगट करें, या एकात निर्जन वन मे नग्न निर्ग्रन्थ मुनि बनकर, सहज-स्वरूप में मग्न होकर पूर्णपद प्रगट करूँ - ऐसी पूर्ण पवित्रदशा कव आवेगी, यही भावना प्रस्तुत पद में की गई है । छन्द १९ जहाँ सिंह बाघ गर्जन करते हैं, जहाँ साधारण जीव काँप उठें - ऐसे वन क्षेत्र मे शान्त, एकाकी, निस्सग परिणामवाले, महावैराग्यवान, उपशम-समता की मूर्ति, चैतन्य ज्योतिस्वरूप बनकर आनन्दमय, सहज समाधि में लीन हो जाऊँ - ऐसा अपूर्व अवसर कब आवेगा ? जिनके अन्तरग अभिप्राय मे अशरीरी चैतन्यभाव वर्तता है, वर्तमान चारित्र में कुछ परिपक्वता होने से जङ्गल की एकात स्थिनि का विकल्प आता है और उत्कृष्ट साधकदशा की भावना को पूर्ण करने के लिये सिंहों से परिपूर्ण घने जङ्गल, पर्वत की गुफा या एकात स्थान में जाकर निश्चल आसन लगाऊँ और वाह्य व अन्तरग मे अक्षोभता रखूं - ऐसा चिन्तवन होता है, उनके क्षोभरहित परिणाम सहज ही होते है । शरीर स्थिर रहे या न रहे - यह भिन्न बात है, क्योंकि वह आत्मा के आधीन नहीं है, किन्तु अन्तरग मे वीतरागमय निश्चल स्थिर भाव की एकाग्रता वढती जाती है । ऐसी स्वरूप जागृति की स्थिति में सिंह आकर क्या करेगा ? यह शरीर तो मुझे नही चाहिये, इसलिए उसे लेने के लिए आनेवाला अर्थात् उसकी निवृत्ति करानेवाला मेरा उपकारी मित्र है- ऐसी भावना का उत्साह ऐसे साधक को ही होता है । कोई वाह्य- मावना का पक्ष करता है, किन्तु यहाँ तो पूर्ण स्वरूप के उत्साह की भावना है । जो आत्मा से हो सके - ऐसी ज्ञानक्रिया या स्वरूप में रमणता का विचार है । इसप्रकार के अडिग, निश्चल असीम स्वरूप का विश्वास और स्वीकारता तो करो ! कभी सिह शरीर के टुकडे भी कर दे तो भी क्षोभ न हो । यह भावना विवेकसहित है, मूढतायुक्त नहीं है । हठयोगजनित मन की बाह्य स्थिरता से मूढ हुए लोगो की यहाँ वात नहीं है । यहाँ तो असली साधकदशा की भावना है । कहा भी है ऋषभ जिनेश्वर प्रीतम म्हारो रे और न चाहुँ रे कंथ । रोझ्यो साहेब सग न परिहरे रे माँगे सादि अनन्त ।। इसप्रकार अखण्ड वीतराग-दशा की भावना की गई है । इसलिए आगे बढकर अपनी शुद्ध चेतना-सखी को कहते है। चलो सखी वहाँ जाइए जहाँ अपना नहीं कोई । माटी खाय जानवरा, मुवाँ न रोये कोई ॥ 'देह का चाहे जो हो, किन्तु अखण्ड समाधि का मङ्गल - उत्सव हो' - ऐसी स्वरूप की सावधानी, नि शकता, निर्भयता कैसे आवे ? ऐसी भावना यहाँ की गई है । जैसे राजमहल में राजा निर्भय होकर सोता है, वैसे ही मुनिराज वाह्याभ्यतर निर्ग्रन्थ दिगम्बर दशा मे पर्वत, वन आदि क्षेत्र मे जहाँ सिंह- बाघ रहते है, वहाँ भी वे स्वसन्मुखता द्वारा बाह्य अभ्यतर असग एकत्वदशा साधते है और ध्यान में निश्चल रहकर स्वरूप - मस्ती मे सहज आनन्द की रमणता में रहते है । जैसे स्वच्छ जल से भरा हुआ सरोवर हो, और जब हवा न चलती हो, तब स्थिर दिखता है, उससमय वह पूर्णचन्द्र के विम्ब से विशेप उज्ज्वल दिखता है । वैसे ही मुनिराज शान्त, धीर, गम्भीर, उज्ज्वल समाधि मे मस्त रहकर, जैसे मानो अभी केवलज्ञान प्राप्त करेगे - ऐसे बेहद पूर्णस्वभाव मे दृष्टि लगाकर एकाग्र होते है । ऐसी अवस्था मे कभी बाघ अथवा सिंह भूख से गर्जना करता हुआ आये, तव भी वे जानते है कि 'परम मित्र का योग मिला है, क्योकि मुझे तो शरीर की आवश्यकता नही है और जो शरीर को अपना नही मानता है, उसके लिये शरीर को ले जानेवाला सिंह मित्रसमान है । अहो । देह से मेरे दर्शन-ज्ञान-चारित्र का लाभ या नुकसान नही है । समयसार में कहा है "यह शरीर छेदा जाय, भेदा जाय, या कोई इसे ले जाय, या इसे नष्ट कर दे या इसका चाहे जो कुछ हो, किन्तु यह मेरा नहीं है।" शरीर के प्रति जिसे अणुमात्र मी ममत्व नहीं है - ऐसी अशरीरी भावना में रहनेवाले धर्मात्मा का भाव कितना उत्कृष्ट होता है, यह देखने की चीज है । अहो । विचार करो कि ऐसा विचार करते समय श्रीमद् जवाहरात के व्यापार में थे या नात्मा मे ? जिससमय श्रीमद् ने इस काव्य की रचना की थी, उससमय उनका बम्बई मे जवाहरात का व्यापार था, किन्तु फिर भी सब परिग्रह से निवृत्त होने की और उत्कृष्ट सावकदशा की भावना भाते थे । इस काव्य का एक-एक शब्द गम्भीर भावार्थयुक्त है। वे महावैराग्यवान थे और पुरुषार्थ द्वारा मोक्षस्वभाव दशा प्रगट करूँ - ऐसी भावनासहित आशिक स्वरूप की स्थिरता की सावधानी रखकर मुनित्व को भावना यहाँ की गई है, इसीलिए श्रीमद् कहते हैं कि इस शरीर की हैं स्थिति पूरी होने ही वाली है, उसमे निमित्त होनेवाले वाघ सिंह का सयोग मित्र - समान है । ससार प्रवृत्ति मे अमुक समय तक निवृत्ति लेकर सत्समागम, सत्शास्त्र के अध्ययन, श्रवण, मनन की रुचि न करे तो उनको इस जाति की भावना का अश भी कहाँ से आवे ? श्रीमद् राजचन्द्र गृहस्थवेश में होते हुए भी, वीतरागी मूनित्व की दशा प्राप्त हो - ऐसी भावना भाते थे । मै जङ्गन मे बैठा होऊँ और हरिण मेरे शरीर को लकडी का ठूंठ समझकर उससे अपने शरीर की खाज खुजाते होवे, फिर भी क्षोभ न हो - ऐसी स्थिरता की भावना करते थे । वाह्य से योग हो या न हो - यह उदयाधीन है, किन्तु इस अशरीरी भाव की स्वीकारता तो उत्पन्न करो । पुरुषार्थ करना उदयाधीन नहीं है, बल्कि अपने आधीन है। ऐसी उत्कृष्ट भावना का उत्साह धर्मात्मा को आता ही है । ससारी जीवो को बाह्य भयोग, उपाधिरूप वैभव का उत्साह होता है कि मेरे बगला हो, मेरे टेविल, कुर्सी, गद्दी, तकिया, पखा वगैरह हो । उनमे मोहाभिभूत होकर हर्ष अनुभव हो - ऐसी विपरीत भावना वे करते रहते है, क्योंकि उनके ससार का ही अपार प्रेमतृष्णाभाव रहता है । जो परवस्तु मे सुखबुद्धि करने और रागी-द्वेषी बनने में ही सतोष मानता हो, उसके रागरहित, पवित्र आत्मा की रुचि, श्रद्धा कैसे हो ? एक वार एक भाई श्रीमद् के पास गये और उनके सम्मुख गद्दी पर वैठकर बीडी पीते-पीते पूछा "आप ज्ञानी है इसलिए बताइये कि मोक्ष कैसे मिले ।"
उन्द दस है । द्रव्य तो अनादि-अनन्त है, इसलिए 'वन्ध' और 'मोक्ष' - ऐगो दो अवस्थारूप गंद की कल्पना में ज्ञानी अटकता नहीं है । बानी को भव-मसार के प्रति खेद नहीं। एक-दो भव बाकी हो या भव का अभाव किया हो, उसमे मंगारी और मुक्त का शोक या हर्ष करने का समय नहीं - एंगी अप्रगत भूमिका कर आगे क्षपकश्रेणी में आम हो - ऐसा वीतरागभाव क आवेगा, यह भावना यहाँको हूँ । सिद्धसमान सदा पद मेरो - ज्ञानी व्यभाव में तो पूर्ण पवित्र • शाश्वत चिद्धन है, किन्तु उनके वर्तमान अवस्था में कमजोरी के कारण अस्थिरता रहती है । छठवे गुणस्थान में व्यान-अव्यवन शुभचिन्न होते हैं, उनमें की इच्छा का विकल्प रहता है, उस विकल्प को भी नष्ट कर ऐसी उत्कृष्ट दूहतर स्थिरता - एकाग्रता कर्म कि केवलज्ञान को उत्कृष्ट यि उघड जावे, ऐसा बहा गया है। उसे पाने की योग्यता वा कृष्ट दशावाला समभाव हो, वहीं मोक्ष-दशा प्रगट होती है । बन्ध और मोक्ष - ये दो तो आत्मा की अवस्थाये है और आत्मा नित्य है । ममार पर्याय बन्धनरूप है। शुभ या अगम रिणाम भाववन्धम्य अवस्था है, उसके अभाव की अपेक्षा मोक्ष कहा ता है । ससार और मुक्ति पर्यायदृष्टि से पर- निमित्त को अपेक्षा दो न है । आत्मा उन दो भङ्ग जितना नहीं है, क्योंकि आत्मा त की अपेक्षारहित नित्य एकरूप है । आत्मभानपूर्वक चारित्रटालने के लिए उग्र पुरपार्थ की भावना से उग्र निर्जरा भाव का इस पद में किया गया है । दोखे देहाध्यास से, आत्मा देह समान । पर वे दोनो भिन्न है, जैसे अति और म्यान ॥पचास॥ जो दृष्टा है एकाकी विचरतो वली श्मशान में, वली पर्वत में वाघ सिंह संयोग जो; अडोल आसन ने मन में नहि क्षोभता, परम मित्रनो जाणे पाम्या योग जो । अपूर्व अवसर एवो क्यारे आवशे ॥ग्यारह॥ हिन्दी पद्यानुवाद एकाकी विचरूँ निर्जन शमशान में, वन-पर्वत में मिले सिंह-सयोग जो, आसन रहे अडोल न मन में क्षोभ हो, परम मित्र मम जानूं ऐसे योग को । अपूर्व अवसर ऐसा कब मेरे आएगा ।।ग्यारह।। छन्द ग्यारह पर प्रवचन गृहस्थाश्रम में रहते हुए भी श्रीमद् राजचन्द्र कितनी उत्कृष्ट भावना करते थे । उनके अन्तरग मे पवित्र उदासीनता, निवृत्तिभाव, मोक्षस्वरूप को प्राप्त करने का उत्साह जागृत था । यह निर्ग्रन्थ दशासाधक दशा धन्य है, जो माहात्म्य करने योग्य है । श्मशान, जङ्गल, पहाड, गुफा आदि स्थानो मे, जहाँ मिह आदि रहते है वहाँ एकाकी रूप से विचर सके - ऐसी महापवित्र दशा धन्य • है । वे मुनिवर भी धन्य है - जो ऐसे शान्त, एकान्तक्षेत्र में एकत्वदशा की साधना करते हैं। किसी पर्वत को गुफा में या शिखर पर रहकर वेहद आनन्दघन स्वभाव की मस्ती में लीन होकर जाग्रत ज्ञान-दशा की एकाग्रता द्वारा केवलज्ञान शक्ति को प्रगट करें, या एकात निर्जन वन मे नग्न निर्ग्रन्थ मुनि बनकर, सहज-स्वरूप में मग्न होकर पूर्णपद प्रगट करूँ - ऐसी पूर्ण पवित्रदशा कव आवेगी, यही भावना प्रस्तुत पद में की गई है । छन्द उन्नीस जहाँ सिंह बाघ गर्जन करते हैं, जहाँ साधारण जीव काँप उठें - ऐसे वन क्षेत्र मे शान्त, एकाकी, निस्सग परिणामवाले, महावैराग्यवान, उपशम-समता की मूर्ति, चैतन्य ज्योतिस्वरूप बनकर आनन्दमय, सहज समाधि में लीन हो जाऊँ - ऐसा अपूर्व अवसर कब आवेगा ? जिनके अन्तरग अभिप्राय मे अशरीरी चैतन्यभाव वर्तता है, वर्तमान चारित्र में कुछ परिपक्वता होने से जङ्गल की एकात स्थिनि का विकल्प आता है और उत्कृष्ट साधकदशा की भावना को पूर्ण करने के लिये सिंहों से परिपूर्ण घने जङ्गल, पर्वत की गुफा या एकात स्थान में जाकर निश्चल आसन लगाऊँ और वाह्य व अन्तरग मे अक्षोभता रखूं - ऐसा चिन्तवन होता है, उनके क्षोभरहित परिणाम सहज ही होते है । शरीर स्थिर रहे या न रहे - यह भिन्न बात है, क्योंकि वह आत्मा के आधीन नहीं है, किन्तु अन्तरग मे वीतरागमय निश्चल स्थिर भाव की एकाग्रता वढती जाती है । ऐसी स्वरूप जागृति की स्थिति में सिंह आकर क्या करेगा ? यह शरीर तो मुझे नही चाहिये, इसलिए उसे लेने के लिए आनेवाला अर्थात् उसकी निवृत्ति करानेवाला मेरा उपकारी मित्र है- ऐसी भावना का उत्साह ऐसे साधक को ही होता है । कोई वाह्य- मावना का पक्ष करता है, किन्तु यहाँ तो पूर्ण स्वरूप के उत्साह की भावना है । जो आत्मा से हो सके - ऐसी ज्ञानक्रिया या स्वरूप में रमणता का विचार है । इसप्रकार के अडिग, निश्चल असीम स्वरूप का विश्वास और स्वीकारता तो करो ! कभी सिह शरीर के टुकडे भी कर दे तो भी क्षोभ न हो । यह भावना विवेकसहित है, मूढतायुक्त नहीं है । हठयोगजनित मन की बाह्य स्थिरता से मूढ हुए लोगो की यहाँ वात नहीं है । यहाँ तो असली साधकदशा की भावना है । कहा भी है ऋषभ जिनेश्वर प्रीतम म्हारो रे और न चाहुँ रे कंथ । रोझ्यो साहेब सग न परिहरे रे माँगे सादि अनन्त ।। इसप्रकार अखण्ड वीतराग-दशा की भावना की गई है । इसलिए आगे बढकर अपनी शुद्ध चेतना-सखी को कहते है। चलो सखी वहाँ जाइए जहाँ अपना नहीं कोई । माटी खाय जानवरा, मुवाँ न रोये कोई ॥ 'देह का चाहे जो हो, किन्तु अखण्ड समाधि का मङ्गल - उत्सव हो' - ऐसी स्वरूप की सावधानी, नि शकता, निर्भयता कैसे आवे ? ऐसी भावना यहाँ की गई है । जैसे राजमहल में राजा निर्भय होकर सोता है, वैसे ही मुनिराज वाह्याभ्यतर निर्ग्रन्थ दिगम्बर दशा मे पर्वत, वन आदि क्षेत्र मे जहाँ सिंह- बाघ रहते है, वहाँ भी वे स्वसन्मुखता द्वारा बाह्य अभ्यतर असग एकत्वदशा साधते है और ध्यान में निश्चल रहकर स्वरूप - मस्ती मे सहज आनन्द की रमणता में रहते है । जैसे स्वच्छ जल से भरा हुआ सरोवर हो, और जब हवा न चलती हो, तब स्थिर दिखता है, उससमय वह पूर्णचन्द्र के विम्ब से विशेप उज्ज्वल दिखता है । वैसे ही मुनिराज शान्त, धीर, गम्भीर, उज्ज्वल समाधि मे मस्त रहकर, जैसे मानो अभी केवलज्ञान प्राप्त करेगे - ऐसे बेहद पूर्णस्वभाव मे दृष्टि लगाकर एकाग्र होते है । ऐसी अवस्था मे कभी बाघ अथवा सिंह भूख से गर्जना करता हुआ आये, तव भी वे जानते है कि 'परम मित्र का योग मिला है, क्योकि मुझे तो शरीर की आवश्यकता नही है और जो शरीर को अपना नही मानता है, उसके लिये शरीर को ले जानेवाला सिंह मित्रसमान है । अहो । देह से मेरे दर्शन-ज्ञान-चारित्र का लाभ या नुकसान नही है । समयसार में कहा है "यह शरीर छेदा जाय, भेदा जाय, या कोई इसे ले जाय, या इसे नष्ट कर दे या इसका चाहे जो कुछ हो, किन्तु यह मेरा नहीं है।" शरीर के प्रति जिसे अणुमात्र मी ममत्व नहीं है - ऐसी अशरीरी भावना में रहनेवाले धर्मात्मा का भाव कितना उत्कृष्ट होता है, यह देखने की चीज है । अहो । विचार करो कि ऐसा विचार करते समय श्रीमद् जवाहरात के व्यापार में थे या नात्मा मे ? जिससमय श्रीमद् ने इस काव्य की रचना की थी, उससमय उनका बम्बई मे जवाहरात का व्यापार था, किन्तु फिर भी सब परिग्रह से निवृत्त होने की और उत्कृष्ट सावकदशा की भावना भाते थे । इस काव्य का एक-एक शब्द गम्भीर भावार्थयुक्त है। वे महावैराग्यवान थे और पुरुषार्थ द्वारा मोक्षस्वभाव दशा प्रगट करूँ - ऐसी भावनासहित आशिक स्वरूप की स्थिरता की सावधानी रखकर मुनित्व को भावना यहाँ की गई है, इसीलिए श्रीमद् कहते हैं कि इस शरीर की हैं स्थिति पूरी होने ही वाली है, उसमे निमित्त होनेवाले वाघ सिंह का सयोग मित्र - समान है । ससार प्रवृत्ति मे अमुक समय तक निवृत्ति लेकर सत्समागम, सत्शास्त्र के अध्ययन, श्रवण, मनन की रुचि न करे तो उनको इस जाति की भावना का अश भी कहाँ से आवे ? श्रीमद् राजचन्द्र गृहस्थवेश में होते हुए भी, वीतरागी मूनित्व की दशा प्राप्त हो - ऐसी भावना भाते थे । मै जङ्गन मे बैठा होऊँ और हरिण मेरे शरीर को लकडी का ठूंठ समझकर उससे अपने शरीर की खाज खुजाते होवे, फिर भी क्षोभ न हो - ऐसी स्थिरता की भावना करते थे । वाह्य से योग हो या न हो - यह उदयाधीन है, किन्तु इस अशरीरी भाव की स्वीकारता तो उत्पन्न करो । पुरुषार्थ करना उदयाधीन नहीं है, बल्कि अपने आधीन है। ऐसी उत्कृष्ट भावना का उत्साह धर्मात्मा को आता ही है । ससारी जीवो को बाह्य भयोग, उपाधिरूप वैभव का उत्साह होता है कि मेरे बगला हो, मेरे टेविल, कुर्सी, गद्दी, तकिया, पखा वगैरह हो । उनमे मोहाभिभूत होकर हर्ष अनुभव हो - ऐसी विपरीत भावना वे करते रहते है, क्योंकि उनके ससार का ही अपार प्रेमतृष्णाभाव रहता है । जो परवस्तु मे सुखबुद्धि करने और रागी-द्वेषी बनने में ही सतोष मानता हो, उसके रागरहित, पवित्र आत्मा की रुचि, श्रद्धा कैसे हो ? एक वार एक भाई श्रीमद् के पास गये और उनके सम्मुख गद्दी पर वैठकर बीडी पीते-पीते पूछा "आप ज्ञानी है इसलिए बताइये कि मोक्ष कैसे मिले ।"
नई दिल्लीः कॉमेडी किंग कपिल शर्मा (Kapil Sharma) के शो 'द कपिल शर्मा शो' (The Kapil Sharma Show) में लगातार कॉमेडी का तड़का देखने को मिल रहा है. आने वाले शो में पॉवर कपल नेहा धूपिया और अंगद बेदी नजर आएंगे. 'द कपिल शर्मा शो' (The Kapil Sharma Show) के मेकर्स ने सोशल मीडिया पर नया प्रोमो वीडियो शेयर किया है. इस वीडियो में नेहा धूपिया और अंगद बेदी (Angad Bedi) अपनी बॉन्डिंग के बारे में बता रहे हैं और साथ ही साथ फनी मोमेंट्स भी शेयर कर रहे हैं. कपिल शर्मा (Kapil Sharma) के शो के इस वीडियो में नेहा धूपिया (Neha Dhupia) और उनके पति अंगद एक दूसरे से जुड़े कई राज खोलते हैं. शो के होस्ट कपिल शर्मा (Kapil Sharma) ने दोनों से कई मजेदार सवाल किए. कपिल शर्मा ने अंगद से पूछा हैं कि आपने अपने पिता बिशन सिंह बेदी से जब पूछा कि मैं शादी करने वाला हूं तो उनका क्या रिएक्शन था. इस पर अंगद बेदी (Angad Bedi) ने कहा कि पापा ने उनसे कहा कि पुत्तर, क्या जरूरी है शादी करना. वहीं कॉमेडी किंग कपिल शर्मा (Kapil Sharma) ने नेहा से भी कई मजेदार सवाल किये. वहीं इस शो की जान कीकू शारदा और कृष्णा अभिषेक ने भी काफी मस्ती की. इस शो में कीकू शारदा जहां एक तरफ सनी देओल के रोल में दिखे वहीं दूसरी तरफ कृष्णा अभिषेक धर्मेंद्र का रोल निभाते नजर आए. बता दें कि 'द कपिल शर्मा शो' (The Kapil Sharma Show) लॉकडाउन के बाद दोबारा शुरू हो गया है. एक छोटे से शहर से आकर कपिल शर्मा ने इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाई है. लॉकडाउन के दौरान सभी टीवी शो और फिल्मों की शूटिंग रोक दी गई थी. शो की शूटिंग के दौरान कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के लिए सुरक्षा के पूरे इंतजाम भी किए जा रहे हैं.
नई दिल्लीः कॉमेडी किंग कपिल शर्मा के शो 'द कपिल शर्मा शो' में लगातार कॉमेडी का तड़का देखने को मिल रहा है. आने वाले शो में पॉवर कपल नेहा धूपिया और अंगद बेदी नजर आएंगे. 'द कपिल शर्मा शो' के मेकर्स ने सोशल मीडिया पर नया प्रोमो वीडियो शेयर किया है. इस वीडियो में नेहा धूपिया और अंगद बेदी अपनी बॉन्डिंग के बारे में बता रहे हैं और साथ ही साथ फनी मोमेंट्स भी शेयर कर रहे हैं. कपिल शर्मा के शो के इस वीडियो में नेहा धूपिया और उनके पति अंगद एक दूसरे से जुड़े कई राज खोलते हैं. शो के होस्ट कपिल शर्मा ने दोनों से कई मजेदार सवाल किए. कपिल शर्मा ने अंगद से पूछा हैं कि आपने अपने पिता बिशन सिंह बेदी से जब पूछा कि मैं शादी करने वाला हूं तो उनका क्या रिएक्शन था. इस पर अंगद बेदी ने कहा कि पापा ने उनसे कहा कि पुत्तर, क्या जरूरी है शादी करना. वहीं कॉमेडी किंग कपिल शर्मा ने नेहा से भी कई मजेदार सवाल किये. वहीं इस शो की जान कीकू शारदा और कृष्णा अभिषेक ने भी काफी मस्ती की. इस शो में कीकू शारदा जहां एक तरफ सनी देओल के रोल में दिखे वहीं दूसरी तरफ कृष्णा अभिषेक धर्मेंद्र का रोल निभाते नजर आए. बता दें कि 'द कपिल शर्मा शो' लॉकडाउन के बाद दोबारा शुरू हो गया है. एक छोटे से शहर से आकर कपिल शर्मा ने इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाई है. लॉकडाउन के दौरान सभी टीवी शो और फिल्मों की शूटिंग रोक दी गई थी. शो की शूटिंग के दौरान कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के लिए सुरक्षा के पूरे इंतजाम भी किए जा रहे हैं.
मारवाड़ी कॉलेज के नोटिस बोर्ड पर स्टूडेंट का हूजुम जुटा हुआ था. इसमें ग्रेजुएशन पार्ट वन एडमिशन की फस्र्ट लिस्ट जारी की गई थी. इसमें साइंस,आट्र्स और कॉमर्स के स्टूडेंट्स की लिस्ट निकाली गई थी. अपना नाम देखने के लिए कॉलेज कैंपस में सुबह से ही भीड़ लगनी शुरू हो गई थी. गेट के पास सटे नोटिस बोर्ड पर फस्र्ट लिस्ट को लगाया गया था। मेरा BCA में नाम है या नहीं? कॉलेज गेट में इंट्री करते ही एक और नोटिस बोर्ड पर दूसरी लिस्ट लगी थी. जिसमें वोकेशनल कोर्स बीसीए की फस्र्ट लिस्ट लगाई गई थी. राजेश ने अपने दोस्त रवि से पूछा कि अरे यार मेरा नाम बीसीए के लिस्ट में है या नहीं. उसी समय एक स्टूडेंट के गार्जियन भी नोटिस बोर्ड के पास पहुंचे और अपने बेटे का नाम लिस्ट में खोजने लगे. आखिरकार राजेश और गार्जियन को लिस्ट में अपना नाम मिल गया। उन्होंने चैन की सांस ली और आगे बढ़ गए।
मारवाड़ी कॉलेज के नोटिस बोर्ड पर स्टूडेंट का हूजुम जुटा हुआ था. इसमें ग्रेजुएशन पार्ट वन एडमिशन की फस्र्ट लिस्ट जारी की गई थी. इसमें साइंस,आट्र्स और कॉमर्स के स्टूडेंट्स की लिस्ट निकाली गई थी. अपना नाम देखने के लिए कॉलेज कैंपस में सुबह से ही भीड़ लगनी शुरू हो गई थी. गेट के पास सटे नोटिस बोर्ड पर फस्र्ट लिस्ट को लगाया गया था। मेरा BCA में नाम है या नहीं? कॉलेज गेट में इंट्री करते ही एक और नोटिस बोर्ड पर दूसरी लिस्ट लगी थी. जिसमें वोकेशनल कोर्स बीसीए की फस्र्ट लिस्ट लगाई गई थी. राजेश ने अपने दोस्त रवि से पूछा कि अरे यार मेरा नाम बीसीए के लिस्ट में है या नहीं. उसी समय एक स्टूडेंट के गार्जियन भी नोटिस बोर्ड के पास पहुंचे और अपने बेटे का नाम लिस्ट में खोजने लगे. आखिरकार राजेश और गार्जियन को लिस्ट में अपना नाम मिल गया। उन्होंने चैन की सांस ली और आगे बढ़ गए।
मुख्य अभियंता गिरफ्तार सहायक अभियंता राधेश्याम सिंह से जहां स्पष्टीकरण पूछने की कार्रवाई कर चुके है वहीं प्राथमिकी दर्ज करने वाले कनीय अभियंता असरफ कमाल शमशी की कार्यशैली पर भी सवाल खड़ा हो गया है। शोकाज के जवाब का इंतजार वरीय अधिकारी कर रहे हैं। जागरण संवाददाता, सासाराम : रोहतास। यह किसी ने कभी सोचा भी नहीं था कि जिसके निर्देश पर लोहा पुल चोरी की प्राथमिकी दर्ज होगी, वही इस चोरी मामले का मास्टरमाइंड निकलेगा तथा उसे जेल की हवा खानी पड़ेगी। हालांकि नासरीगंज में नहर पर बने पुराने लोहा पुल अवशेष चोरी में संलिप्त लोगों की हुई गिरफ्तारी के बाद सिंचाई विभाग से लेकर राजनीतिक दल अपने दामन को साफ करने में जुट गया है। सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता गिरफ्तार सहायक अभियंता राधेश्याम सिंह से जहां स्पष्टीकरण पूछने की कार्रवाई कर चुके है, वहीं प्राथमिकी दर्ज करने वाले कनीय अभियंता असरफ कमाल शमशी की कार्यशैली पर भी सवाल खड़ा हो गया है। शोकाज के जवाब का इंतजार वरीय अधिकारी कर रहे हैं। सहायक अभियंता के निलंबन की कार्रवाई भी तय मानी जा रही है। राजद ने नासरीगंज के अपने प्रखंड अध्यक्ष शिवकल्याण भारद्वाज को भी पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित करते हुए उनके स्थान पर कृष्णा चौधरी को कमान सौंपा है। बगैर किसी आदेश के लोहा पुल के अवशेष को काट कर उसे बेचने का मामला प्रकाश में आने के बाद हुई विभाग की हुई किरकिरी के बाद हरकत में आए पुलिस व प्रशासन के आला अधिकारियों के तेवर भी कड़े हो गए हैं। पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए एसआइटी गठित होने के 24 घंटे के अंदर मामले का भंडाफोड़ कर अपनी साख को बचाने का काम किया है। आरोपित सहायक अभियंता गत दो वर्षों से अधिक समय से नासरीगंज में पदस्थापित हैं। पूरा षडयंत्र एसडीओ राधेश्याम सिंह के ही मास्टरमाइंड का नतीजा निकला। बाकायदा उन्होंने ऐसा करने का निर्देश दे रखा था कि मलबा चोरी करते समय यदि कोई पूछे तो उसे विभागीय आदेश बता उसे आगे चलता कर देना। इस मामले में कनीय अभियंता असरफ कमाल शमशी की कार्यशैली पर भी सवाल खड़ा हो गया है। उनसे भी शोकाज कर जवाब की प्रतीक्षा की जा रही है। इस प्लानिंग में स्थानीय राजद नेता व पार्टी के पूर्व प्रखंड अध्यक्ष तथा अमियावर निवासी शिवकल्याण भारद्वाज ने साथ दिया। इस काम के एवज में शिवकल्याण भारद्वाज ने अपना मुंह बंद रखने के लिए शातिरों से दस हजार रुपये बतौर नजराना के रूप में भी लिया था। उसे राजद ने छह वर्षों के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। पुल चोरी मामले में राजद के वरिष्ठ नेता व नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सरकार को ही कठघरे में खड़ा किया था। राजद नेता की गिरफ्तारी ने चर्चा के बाजार को गर्म कर दिया है।
मुख्य अभियंता गिरफ्तार सहायक अभियंता राधेश्याम सिंह से जहां स्पष्टीकरण पूछने की कार्रवाई कर चुके है वहीं प्राथमिकी दर्ज करने वाले कनीय अभियंता असरफ कमाल शमशी की कार्यशैली पर भी सवाल खड़ा हो गया है। शोकाज के जवाब का इंतजार वरीय अधिकारी कर रहे हैं। जागरण संवाददाता, सासाराम : रोहतास। यह किसी ने कभी सोचा भी नहीं था कि जिसके निर्देश पर लोहा पुल चोरी की प्राथमिकी दर्ज होगी, वही इस चोरी मामले का मास्टरमाइंड निकलेगा तथा उसे जेल की हवा खानी पड़ेगी। हालांकि नासरीगंज में नहर पर बने पुराने लोहा पुल अवशेष चोरी में संलिप्त लोगों की हुई गिरफ्तारी के बाद सिंचाई विभाग से लेकर राजनीतिक दल अपने दामन को साफ करने में जुट गया है। सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता गिरफ्तार सहायक अभियंता राधेश्याम सिंह से जहां स्पष्टीकरण पूछने की कार्रवाई कर चुके है, वहीं प्राथमिकी दर्ज करने वाले कनीय अभियंता असरफ कमाल शमशी की कार्यशैली पर भी सवाल खड़ा हो गया है। शोकाज के जवाब का इंतजार वरीय अधिकारी कर रहे हैं। सहायक अभियंता के निलंबन की कार्रवाई भी तय मानी जा रही है। राजद ने नासरीगंज के अपने प्रखंड अध्यक्ष शिवकल्याण भारद्वाज को भी पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित करते हुए उनके स्थान पर कृष्णा चौधरी को कमान सौंपा है। बगैर किसी आदेश के लोहा पुल के अवशेष को काट कर उसे बेचने का मामला प्रकाश में आने के बाद हुई विभाग की हुई किरकिरी के बाद हरकत में आए पुलिस व प्रशासन के आला अधिकारियों के तेवर भी कड़े हो गए हैं। पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए एसआइटी गठित होने के चौबीस घंटाटे के अंदर मामले का भंडाफोड़ कर अपनी साख को बचाने का काम किया है। आरोपित सहायक अभियंता गत दो वर्षों से अधिक समय से नासरीगंज में पदस्थापित हैं। पूरा षडयंत्र एसडीओ राधेश्याम सिंह के ही मास्टरमाइंड का नतीजा निकला। बाकायदा उन्होंने ऐसा करने का निर्देश दे रखा था कि मलबा चोरी करते समय यदि कोई पूछे तो उसे विभागीय आदेश बता उसे आगे चलता कर देना। इस मामले में कनीय अभियंता असरफ कमाल शमशी की कार्यशैली पर भी सवाल खड़ा हो गया है। उनसे भी शोकाज कर जवाब की प्रतीक्षा की जा रही है। इस प्लानिंग में स्थानीय राजद नेता व पार्टी के पूर्व प्रखंड अध्यक्ष तथा अमियावर निवासी शिवकल्याण भारद्वाज ने साथ दिया। इस काम के एवज में शिवकल्याण भारद्वाज ने अपना मुंह बंद रखने के लिए शातिरों से दस हजार रुपये बतौर नजराना के रूप में भी लिया था। उसे राजद ने छह वर्षों के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। पुल चोरी मामले में राजद के वरिष्ठ नेता व नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सरकार को ही कठघरे में खड़ा किया था। राजद नेता की गिरफ्तारी ने चर्चा के बाजार को गर्म कर दिया है।
यदि आप पृथ्वी पर सोचते हैं तो आप गलत हैंआदमी शासन करता है। लंबे समय तक सभी महाद्वीपों, शहरों, गांवों और प्रकृति के लगभग हर कोने को चूहे के नाम पर रखा गया जानवर या केवल भूरे रंग के द्वारा किया गया है। हम में से ज्यादातर उन्हें नफरत करते हैं। और सही भी है, क्योंकि चूहों फसल का एक बड़ा हिस्सा खा, घरेलू पशुओं और पक्षियों को घायल, हम घातक बीमारियों से सम्मानित किया। लेकिन दूसरी तरफ, हजारों की प्रयोगशालाओं में वे अपने जीवन देना, की मदद से हमें कैंसर और एड्स सहित अन्य बीमारियों, समझने के लिए, जो अपने आप पर विषाक्त पदार्थों और नई दवाओं, आनुवंशिकी और मनोविज्ञान के रहस्यों पर "काम" की कार्रवाई का परीक्षण होगा। क्या आप जानते हैं कि चूहा कैसे रहता है? एक जोड़े को कैसे देखता है? संतान कैसे बढ़ता है? क्यों एक आदमी के बगल में सुलझेगी? हम आपको बताएँगे चूहों सब मजा के बारे में। वे कहाँ से आए थे? 12 हजार साल पहले भूरे चूहों केवल पूर्वी एशिया में रहते थे। बर्फ की उम्र ने उन्हें एक छोटी सी जगह छोड़ी, जहां पूर्वी चीन अब है। रिश्तेदारों में इन कृन्तकों पर विचार किया जाता हैबड़े। नर 25 सेमी तक की लंबाई तक बढ़ते हैं, साथ ही 1 9 सेमी की गंजा पूंछ भी होती है। इस मामले में, वयस्क का वजन 400 ग्राम तक हो सकता है। महिलाओं का आकार थोड़ा अधिक मामूली है। कोई अन्य बाहरी मतभेद नहीं हैं। पसीकुक का थूथन अक्सर बहुत लंबा नहीं होता है, कान छोटे होते हैं। चूहों का ऊन सशर्त रूप से भूरा होता है, लेकिन लाल, काले, भूरे रंग के रंग मौजूद हो सकते हैं, agouti के समान, उन्हें विदेश में ब्राउन क्यों कहा जाता है। शायद ही कभी, लेकिन पासजुक शुद्ध काला और शुद्ध सफेद हैं। सभी का पेट भी सफेद है, और पूरे शरीर में लंबे मोटे बाल अक्सर आधार पर अंधेरे होते हैं। पसीकोव - भारतीय और पूर्वी एशियाई की दो उप-प्रजातियां हैं। चूहों में, गुणसूत्र सेट 42 इकाइयां होती है, और उनके जीन 25,000 होते हैं, इसलिए कोई भी संयोजन संभव है। ग्रे चूहा pasyuk - प्रकृति में एक सामाजिक जानवरसमूहों में रहता है, अकेलापन बेहद दुर्लभ है। एक परिवार 2 वर्ग किलोमीटर तक के क्षेत्र पर कब्जा कर सकता है, जो इसे ध्यान से चिह्नित करता है और गार्ड करता है। लेकिन यदि आवश्यक हो, तो "खाद्य उत्पादन" कहा जाता है, क्षेत्र की सीमाएं आसानी से बढ़ती हैं। एक परिवार में 100 से 2,000 सदस्य हो सकते हैं। नर चूहों में, अन्य स्तनधारियों की तरह, एक सख्त पदानुक्रम होता है, जिसमें जीनस के विस्तार के लिए महिलाओं के चयन में शामिल होता है। लेकिन यहां एक दूसरे के लिए कोई मदद और सुरक्षा नहीं है। चूहों हमेशा अपने लिए हैं। वे बहुत बुद्धिमान हैं, उनकी अच्छी याददाश्त है, अगर वे सही हैं, तो वे आक्रामक नहीं हैं, लेकिन वे खुद के लिए खड़े हो सकते हैं। चूहों न केवल अपने रिश्तेदारों के साथ, बल्कि बड़े जानवरों के साथ भी लड़ते हैं। इससे पहले, अंग्रेजी बहनों ने भी मनोरंजक चूहे-कुत्ते के झगड़े की व्यवस्था की, जो कि सौभाग्य से पहले से ही प्रतिबंधित कर दिया गया था। चूहा pasyuk - जानवर omnivorous है। प्रकृति में, उसके मेनू में अनाज, सब्जियां, फल और आवश्यक प्रोटीन शामिल हैंः अंडे, लड़कियों, मछली, समुद्री भोजन (जमीन पर चोरी या फेंक दिया), कीड़े, छोटे कृंतक, और कभी-कभी मल भी। एक आदमी के पास झुकाव, चूहों ने अपने पेटू स्वाद बदल दिया है। अब उनके मेनू में, किसी भी खाद्य बचे हुए, अनुपयुक्त उत्पादों (विशेष रूप से अनाज में अनाज), साथ ही तारों, किताबों, अन्य चीजों को लोगों की आवश्यकता होती है। एक दिलचस्प तथ्यः एक टिड्बिट प्राप्त करने के लिए, चूहा एक छेद में निचोड़ने में सक्षम होता है जहां इसके अपेक्षाकृत छोटे सिर चढ़ सकते हैं। Pasyuki खुद गोदामों, cellars, मेट्रो, और घरों में स्वतंत्र रूप से सीवर नेटवर्क और कचरा chutes के माध्यम से यात्रा के लिए चुना है। बस fantastically शानदार चूहा pasyuk! उपरोक्त तस्वीर एक 3-दिन ब्रूड कैप्चर करती है। ये कड़वाहट 3 महीने की उम्र में यौन परिपक्व हो गई! महिलाओं में शावक को कूड़े में 20 टुकड़े हो सकते हैं। अक्सर 3-4 मां बच्चों की देखभाल करने के लिए एक आम घोंसला की व्यवस्था करती हैं। वैज्ञानिकों ने देखा है कि ऐसे क्यूब्स में नवजात शिशुओं के शरीर कभी-कभी अंतर्निहित होते हैं, और ऐसा लगता है कि उगने वाली चूहे दो-तीन-सिर वाली हैं। शायद यह नटकेकर के चूहा राजा का प्रोटोटाइप बन गया। प्रकृति में, जानवर हेलो में घोंसले बनाते हैं याउथले उछाल खींचो। शहरों में उन्हें किसी भी उपयुक्त स्थान पर व्यवस्थित किया जाता है। मादा, जिसे बोझ से मुक्त कर दिया गया है, 18 घंटों के बाद फिर से गर्भ धारण कर सकता है, और गर्भावस्था केवल 24 दिन तक चलती है। क्या आप चूहे की आबादी की प्रगति की कल्पना कर सकते हैं? नवजात शिशु वजन असली crumbs वजन कर रहे हैं5 ग्राम तक। वे भूखे पिताजी और कभी-कभी एक मां खा सकते हैं, अगर ऐसा लगता है कि बच्चे बहुत कमजोर हैं। लेकिन अधिकतर मादाएं देखभाल की जाती हैं, वे अपने कथित बच्चों को चाटना, उन्हें बहुत पौष्टिक दूध से खिलाते हैं, घोंसले में चीजें डालते हैं। Rat pasyuk उसकी क्षमताओं के साथ आश्चर्यचकित कर सकते हैं। खतरे के मामले में, यह ऊंचाई में 80 सेमी तक बढ़ता है, लंबाई में 1 मीटर तक, 10 किमी / घंटा तक बढ़ता है, पानी में 3 दिनों के लिए तैर सकता है, और एक दिन के लिए 17 किमी ओवरलैंड तक हवाएं चला सकता है। ये जानवर, आप कह सकते हैं, चरम हैं। वे जीवित रह सकते हैं और यहां तक कि -18 डिग्री सेल्सियस पर गुणा कर सकते हैं। इस प्रकार, मांस फ्रीजर में से एक में, टोडलर के साथ चूहे के घोंसले जमे हुए शवों में पाए जाते थे। वे शांत रूप से + 45 डिग्री सेल्सियस तक गर्मी को सहन करते हैं, और प्रति घंटे 300 roentgen तक विकिरण भी सहन करते हैं। जहां परमाणु विस्फोट आयोजित किए गए थे और सभी पशुधन नष्ट हो गए थे, केवल चूहा पसीकु बेकार था। उनके छोटे कान 40kHz की सीमा में सबसे छोटे शोर को पकड़ सकते हैं। हम केवल 20 kHz तक पकड़ते हैं, जो पूरी तरह से अल्ट्रासोनिक repellents में उपयोग किया जाता है। लेकिन चूहों की दृष्टि कमजोर है। उनके पास केवल 16 डिग्री का देखने वाला कोण होता है, इसलिए उन्हें अक्सर अपने सिर बदलना पड़ता है। फूलों में से वे केवल नीली-हरे रंग की पहचान करते हैं, लेकिन ज्यादातर लोग भूरे रंग के रंगों में देखते हैं। प्रति व्यक्ति प्रत्येक व्यक्ति को केवल 20 ग्राम भोजन की आवश्यकता होती है,लेकिन साल के लिए यह पहले से ही 10 किलो है। भोजन के बिना, चूहों केवल 4 दिनों तक रह सकते हैं। यह भोजन की तलाश थी जिसने नए क्षेत्रों में अपने पुनर्वास की शुरुआत की। पसीकम और पानी की कोई कम आवश्यकता नहीं है। यदि उनका मेनू केवल सूखे भोजन से बना है, बिना पीने के वे केवल 5 दिन जीवित रह सकते हैं। यदि फ़ीड में कम से कम 50% नमी होती है, तो वे लगभग एक महीने तक बिना पानी के रहते हैं। कृंतक, केवल प्रकृति में रहते हैं, लोगथोड़ा सा vex। वे सब कुछ कर सकते हैं बगीचे में सब्जियों काटने या खेतों में मकई काटने। यह घर के चूहे एक pasyuk है और अधिक अप्रिय है। यहां दो किस्में हैं - वे जो लगातार एक व्यक्ति के साथ रहते हैं, और जो लोग केवल ठंड में लोगों के पास जाते हैं। वे दोनों भोजन की आपूर्ति पूरी तरह से नष्ट करने, घर और पूरे क्षेत्रों को डिस्कनेक्ट करने, तारों के माध्यम से काटने, कुक्कुट और खरगोशों के पंजे को साफ करने, खरगोशों, मुर्गियों और अन्य लड़कियों को मारने में सक्षम हैं। लेकिन सबसे भयानक बात यह है कि चूहों को एक प्लेग, टाइफस, क्यू का बुखार, सैल्मोनेलोसिस, हेल्मिंथ और अन्य संक्रमण होता है। इन सभी कारणों से, रूस के लोगों के साथ, लोग लगातार लड़ रहे हैं, जहरों से जहर कर रहे हैं, जाल लगा रहे हैं। लेकिन दूसरी तरफ, यह चूहे है, धन्यवादउनकी शानदार प्रजनन क्षमता, मुख्य प्रयोगात्मक जानवर हैं जिन पर वे दवाओं का परीक्षण करते हैं, बहुत से प्रयोग करते हैं, उन्हें सभी प्रकार की बीमारियों से संक्रमित करते हैं, और फिर उनके लिए एक इलाज पाते हैं। इसलिए, Pasukians द्वारा किए गए नुकसान के बावजूद, किसी को उनके लिए सम्मान होना चाहिए। यह पता चला है कि बहुत खुशी वाले लोग हैंचूहों में लगे हुए हैं और उन्हें परेशानी से भी बचाते हैं। चूहे मछलियों के ऐसे समुदायों में से एक को फेलिस लिंक्स (चूहों) कहा जाता है। "पसीक के साथ क्या हुआ?" - यह इंटरनेट पर उनके मंचों पर विषयों में से एक है। एक समुदाय बनाया गया है, ताकि कोई भी जो घर पर थोड़ा चूहा चाहता है, सलाह के साथ मदद कर सकता है, क्योंकि एक बच्चा उठाना इतना आसान नहीं है। समुदाय में ऐसे लोग हैं जो विशेष रूप से पालतू जानवरों को विकसित करते हैं, जो अधिक मिलनसार होते हैं, आक्रामक नहीं, ऐसे छोटे छोटे गांठ जिन्हें प्यार और देखभाल की आवश्यकता होती है। लेकिन ऐसे लोग हैं जो जंगली चूहों से बाहर निकलने जा रहे हैं। कैद के लिए फेलो भी इसका उपयोग करते हैं, कठिनाई के साथ, लेकिन नाम, जवाब का जवाब देते हैं, वे उन्हें उनके साथ खेलने भी दे सकते हैं। लेकिन उदाहरण के लिए, पुरुषों को अपने पिंजरे में एक अजनबी की उपस्थिति को सहन करना अधिक कठिन होता है, वे इसे भी काट सकते हैं, पहले वे पिंजरे या भोजन के कटोरे की सफाई के साथ शायद ही कभी सामना करते हैं।
यदि आप पृथ्वी पर सोचते हैं तो आप गलत हैंआदमी शासन करता है। लंबे समय तक सभी महाद्वीपों, शहरों, गांवों और प्रकृति के लगभग हर कोने को चूहे के नाम पर रखा गया जानवर या केवल भूरे रंग के द्वारा किया गया है। हम में से ज्यादातर उन्हें नफरत करते हैं। और सही भी है, क्योंकि चूहों फसल का एक बड़ा हिस्सा खा, घरेलू पशुओं और पक्षियों को घायल, हम घातक बीमारियों से सम्मानित किया। लेकिन दूसरी तरफ, हजारों की प्रयोगशालाओं में वे अपने जीवन देना, की मदद से हमें कैंसर और एड्स सहित अन्य बीमारियों, समझने के लिए, जो अपने आप पर विषाक्त पदार्थों और नई दवाओं, आनुवंशिकी और मनोविज्ञान के रहस्यों पर "काम" की कार्रवाई का परीक्षण होगा। क्या आप जानते हैं कि चूहा कैसे रहता है? एक जोड़े को कैसे देखता है? संतान कैसे बढ़ता है? क्यों एक आदमी के बगल में सुलझेगी? हम आपको बताएँगे चूहों सब मजा के बारे में। वे कहाँ से आए थे? बारह हजार साल पहले भूरे चूहों केवल पूर्वी एशिया में रहते थे। बर्फ की उम्र ने उन्हें एक छोटी सी जगह छोड़ी, जहां पूर्वी चीन अब है। रिश्तेदारों में इन कृन्तकों पर विचार किया जाता हैबड़े। नर पच्चीस सेमी तक की लंबाई तक बढ़ते हैं, साथ ही एक नौ सेमी की गंजा पूंछ भी होती है। इस मामले में, वयस्क का वजन चार सौ ग्राम तक हो सकता है। महिलाओं का आकार थोड़ा अधिक मामूली है। कोई अन्य बाहरी मतभेद नहीं हैं। पसीकुक का थूथन अक्सर बहुत लंबा नहीं होता है, कान छोटे होते हैं। चूहों का ऊन सशर्त रूप से भूरा होता है, लेकिन लाल, काले, भूरे रंग के रंग मौजूद हो सकते हैं, agouti के समान, उन्हें विदेश में ब्राउन क्यों कहा जाता है। शायद ही कभी, लेकिन पासजुक शुद्ध काला और शुद्ध सफेद हैं। सभी का पेट भी सफेद है, और पूरे शरीर में लंबे मोटे बाल अक्सर आधार पर अंधेरे होते हैं। पसीकोव - भारतीय और पूर्वी एशियाई की दो उप-प्रजातियां हैं। चूहों में, गुणसूत्र सेट बयालीस इकाइयां होती है, और उनके जीन पच्चीस,शून्य होते हैं, इसलिए कोई भी संयोजन संभव है। ग्रे चूहा pasyuk - प्रकृति में एक सामाजिक जानवरसमूहों में रहता है, अकेलापन बेहद दुर्लभ है। एक परिवार दो वर्ग किलोमीटर तक के क्षेत्र पर कब्जा कर सकता है, जो इसे ध्यान से चिह्नित करता है और गार्ड करता है। लेकिन यदि आवश्यक हो, तो "खाद्य उत्पादन" कहा जाता है, क्षेत्र की सीमाएं आसानी से बढ़ती हैं। एक परिवार में एक सौ से दो,शून्य सदस्य हो सकते हैं। नर चूहों में, अन्य स्तनधारियों की तरह, एक सख्त पदानुक्रम होता है, जिसमें जीनस के विस्तार के लिए महिलाओं के चयन में शामिल होता है। लेकिन यहां एक दूसरे के लिए कोई मदद और सुरक्षा नहीं है। चूहों हमेशा अपने लिए हैं। वे बहुत बुद्धिमान हैं, उनकी अच्छी याददाश्त है, अगर वे सही हैं, तो वे आक्रामक नहीं हैं, लेकिन वे खुद के लिए खड़े हो सकते हैं। चूहों न केवल अपने रिश्तेदारों के साथ, बल्कि बड़े जानवरों के साथ भी लड़ते हैं। इससे पहले, अंग्रेजी बहनों ने भी मनोरंजक चूहे-कुत्ते के झगड़े की व्यवस्था की, जो कि सौभाग्य से पहले से ही प्रतिबंधित कर दिया गया था। चूहा pasyuk - जानवर omnivorous है। प्रकृति में, उसके मेनू में अनाज, सब्जियां, फल और आवश्यक प्रोटीन शामिल हैंः अंडे, लड़कियों, मछली, समुद्री भोजन , कीड़े, छोटे कृंतक, और कभी-कभी मल भी। एक आदमी के पास झुकाव, चूहों ने अपने पेटू स्वाद बदल दिया है। अब उनके मेनू में, किसी भी खाद्य बचे हुए, अनुपयुक्त उत्पादों , साथ ही तारों, किताबों, अन्य चीजों को लोगों की आवश्यकता होती है। एक दिलचस्प तथ्यः एक टिड्बिट प्राप्त करने के लिए, चूहा एक छेद में निचोड़ने में सक्षम होता है जहां इसके अपेक्षाकृत छोटे सिर चढ़ सकते हैं। Pasyuki खुद गोदामों, cellars, मेट्रो, और घरों में स्वतंत्र रूप से सीवर नेटवर्क और कचरा chutes के माध्यम से यात्रा के लिए चुना है। बस fantastically शानदार चूहा pasyuk! उपरोक्त तस्वीर एक तीन-दिन ब्रूड कैप्चर करती है। ये कड़वाहट तीन महीने की उम्र में यौन परिपक्व हो गई! महिलाओं में शावक को कूड़े में बीस टुकड़े हो सकते हैं। अक्सर तीन-चार मां बच्चों की देखभाल करने के लिए एक आम घोंसला की व्यवस्था करती हैं। वैज्ञानिकों ने देखा है कि ऐसे क्यूब्स में नवजात शिशुओं के शरीर कभी-कभी अंतर्निहित होते हैं, और ऐसा लगता है कि उगने वाली चूहे दो-तीन-सिर वाली हैं। शायद यह नटकेकर के चूहा राजा का प्रोटोटाइप बन गया। प्रकृति में, जानवर हेलो में घोंसले बनाते हैं याउथले उछाल खींचो। शहरों में उन्हें किसी भी उपयुक्त स्थान पर व्यवस्थित किया जाता है। मादा, जिसे बोझ से मुक्त कर दिया गया है, अट्ठारह घंटाटों के बाद फिर से गर्भ धारण कर सकता है, और गर्भावस्था केवल चौबीस दिन तक चलती है। क्या आप चूहे की आबादी की प्रगति की कल्पना कर सकते हैं? नवजात शिशु वजन असली crumbs वजन कर रहे हैंपाँच ग्राम तक। वे भूखे पिताजी और कभी-कभी एक मां खा सकते हैं, अगर ऐसा लगता है कि बच्चे बहुत कमजोर हैं। लेकिन अधिकतर मादाएं देखभाल की जाती हैं, वे अपने कथित बच्चों को चाटना, उन्हें बहुत पौष्टिक दूध से खिलाते हैं, घोंसले में चीजें डालते हैं। Rat pasyuk उसकी क्षमताओं के साथ आश्चर्यचकित कर सकते हैं। खतरे के मामले में, यह ऊंचाई में अस्सी सेमी तक बढ़ता है, लंबाई में एक मीटर तक, दस किमी / घंटा तक बढ़ता है, पानी में तीन दिनों के लिए तैर सकता है, और एक दिन के लिए सत्रह किमी ओवरलैंड तक हवाएं चला सकता है। ये जानवर, आप कह सकते हैं, चरम हैं। वे जीवित रह सकते हैं और यहां तक कि -अट्ठारह डिग्री सेल्सियस पर गुणा कर सकते हैं। इस प्रकार, मांस फ्रीजर में से एक में, टोडलर के साथ चूहे के घोंसले जमे हुए शवों में पाए जाते थे। वे शांत रूप से + पैंतालीस डिग्री सेल्सियस तक गर्मी को सहन करते हैं, और प्रति घंटे तीन सौ roentgen तक विकिरण भी सहन करते हैं। जहां परमाणु विस्फोट आयोजित किए गए थे और सभी पशुधन नष्ट हो गए थे, केवल चूहा पसीकु बेकार था। उनके छोटे कान चालीसkHz की सीमा में सबसे छोटे शोर को पकड़ सकते हैं। हम केवल बीस kHz तक पकड़ते हैं, जो पूरी तरह से अल्ट्रासोनिक repellents में उपयोग किया जाता है। लेकिन चूहों की दृष्टि कमजोर है। उनके पास केवल सोलह डिग्री का देखने वाला कोण होता है, इसलिए उन्हें अक्सर अपने सिर बदलना पड़ता है। फूलों में से वे केवल नीली-हरे रंग की पहचान करते हैं, लेकिन ज्यादातर लोग भूरे रंग के रंगों में देखते हैं। प्रति व्यक्ति प्रत्येक व्यक्ति को केवल बीस ग्राम भोजन की आवश्यकता होती है,लेकिन साल के लिए यह पहले से ही दस किलो है। भोजन के बिना, चूहों केवल चार दिनों तक रह सकते हैं। यह भोजन की तलाश थी जिसने नए क्षेत्रों में अपने पुनर्वास की शुरुआत की। पसीकम और पानी की कोई कम आवश्यकता नहीं है। यदि उनका मेनू केवल सूखे भोजन से बना है, बिना पीने के वे केवल पाँच दिन जीवित रह सकते हैं। यदि फ़ीड में कम से कम पचास% नमी होती है, तो वे लगभग एक महीने तक बिना पानी के रहते हैं। कृंतक, केवल प्रकृति में रहते हैं, लोगथोड़ा सा vex। वे सब कुछ कर सकते हैं बगीचे में सब्जियों काटने या खेतों में मकई काटने। यह घर के चूहे एक pasyuk है और अधिक अप्रिय है। यहां दो किस्में हैं - वे जो लगातार एक व्यक्ति के साथ रहते हैं, और जो लोग केवल ठंड में लोगों के पास जाते हैं। वे दोनों भोजन की आपूर्ति पूरी तरह से नष्ट करने, घर और पूरे क्षेत्रों को डिस्कनेक्ट करने, तारों के माध्यम से काटने, कुक्कुट और खरगोशों के पंजे को साफ करने, खरगोशों, मुर्गियों और अन्य लड़कियों को मारने में सक्षम हैं। लेकिन सबसे भयानक बात यह है कि चूहों को एक प्लेग, टाइफस, क्यू का बुखार, सैल्मोनेलोसिस, हेल्मिंथ और अन्य संक्रमण होता है। इन सभी कारणों से, रूस के लोगों के साथ, लोग लगातार लड़ रहे हैं, जहरों से जहर कर रहे हैं, जाल लगा रहे हैं। लेकिन दूसरी तरफ, यह चूहे है, धन्यवादउनकी शानदार प्रजनन क्षमता, मुख्य प्रयोगात्मक जानवर हैं जिन पर वे दवाओं का परीक्षण करते हैं, बहुत से प्रयोग करते हैं, उन्हें सभी प्रकार की बीमारियों से संक्रमित करते हैं, और फिर उनके लिए एक इलाज पाते हैं। इसलिए, Pasukians द्वारा किए गए नुकसान के बावजूद, किसी को उनके लिए सम्मान होना चाहिए। यह पता चला है कि बहुत खुशी वाले लोग हैंचूहों में लगे हुए हैं और उन्हें परेशानी से भी बचाते हैं। चूहे मछलियों के ऐसे समुदायों में से एक को फेलिस लिंक्स कहा जाता है। "पसीक के साथ क्या हुआ?" - यह इंटरनेट पर उनके मंचों पर विषयों में से एक है। एक समुदाय बनाया गया है, ताकि कोई भी जो घर पर थोड़ा चूहा चाहता है, सलाह के साथ मदद कर सकता है, क्योंकि एक बच्चा उठाना इतना आसान नहीं है। समुदाय में ऐसे लोग हैं जो विशेष रूप से पालतू जानवरों को विकसित करते हैं, जो अधिक मिलनसार होते हैं, आक्रामक नहीं, ऐसे छोटे छोटे गांठ जिन्हें प्यार और देखभाल की आवश्यकता होती है। लेकिन ऐसे लोग हैं जो जंगली चूहों से बाहर निकलने जा रहे हैं। कैद के लिए फेलो भी इसका उपयोग करते हैं, कठिनाई के साथ, लेकिन नाम, जवाब का जवाब देते हैं, वे उन्हें उनके साथ खेलने भी दे सकते हैं। लेकिन उदाहरण के लिए, पुरुषों को अपने पिंजरे में एक अजनबी की उपस्थिति को सहन करना अधिक कठिन होता है, वे इसे भी काट सकते हैं, पहले वे पिंजरे या भोजन के कटोरे की सफाई के साथ शायद ही कभी सामना करते हैं।
पटना। बिहार में आखिरकार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 131 विधायकों के समर्थन से शक्ति परीक्षण में सफलता प्राप्त की। नीतीश के सहयोगी रहे मगर शक्ति परीक्षण में विपक्षी बने दल आरजेडी को 108 विधायकों का समर्थन मिला। ऐसे में जेडीयू, भाजपा गठबंधन की सरकार बिहार में अस्तित्व में आई। सीएम नीतीश कुमार ने अपने समर्थन में साथ आए विभिन्न दलों के विधायकों और नेताओं को धन्यवाद दिया और विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यह पहला ऐसा अवसर है जब राज्य में और केंद्र में एक ही प्रकार की सरकार अस्तित्व में आई है। ये सरकारें विकास करेंगी। हम काम करने के लिए राजनीति में आए हैं राजभोग के लिए नहीं आए हैं। हालांकि विधानसभा में सीएम नीतीश कुमार के उद्बोधन के दौरान विपक्षी हंगामा करते रहे लेकिन उन्होंने अपना वक्तव्य प्रभावी तरह से दिया। अब सभी का ध्यान नीतीश सरकार के मंत्रिमंडल पर जा रहा है। अभी से ही मंत्रियों के नाम को लेकर कयास लगने लगे हैं। माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल में हम के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी शामिल हो सकते हैं। साथ ही विजेंदर प्रसाद यादव,ललन सिंह,लेसी सिंह,श्रवण कुमार,जय कुमार सिंह,खुर्शीद अहमद,बीजेपी कोटे से नंदकिशोर यादव,डॉ. प्रेम कुमार,मंगल पांडेय,रजनीश कुमार ,ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू,रामप्रीत पासवान आदि के नाम शामिल हैं। सीएम नीतीश कुमार ने अपने वक्तव्य में कहा कि सेक्युलर हम भी हैं हमें धर्मनिरपेक्षता का पाठ न पढाया जाए। उन्होंने स्पष्टतौर पर कहा कि राज्य में भ्रष्टाचार को सहन नहीं किया जाएगा। सीएम नीतीश के इस तरह के वक्तव्य से यह माना जा रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और उनके परिजन की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
पटना। बिहार में आखिरकार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक सौ इकतीस विधायकों के समर्थन से शक्ति परीक्षण में सफलता प्राप्त की। नीतीश के सहयोगी रहे मगर शक्ति परीक्षण में विपक्षी बने दल आरजेडी को एक सौ आठ विधायकों का समर्थन मिला। ऐसे में जेडीयू, भाजपा गठबंधन की सरकार बिहार में अस्तित्व में आई। सीएम नीतीश कुमार ने अपने समर्थन में साथ आए विभिन्न दलों के विधायकों और नेताओं को धन्यवाद दिया और विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यह पहला ऐसा अवसर है जब राज्य में और केंद्र में एक ही प्रकार की सरकार अस्तित्व में आई है। ये सरकारें विकास करेंगी। हम काम करने के लिए राजनीति में आए हैं राजभोग के लिए नहीं आए हैं। हालांकि विधानसभा में सीएम नीतीश कुमार के उद्बोधन के दौरान विपक्षी हंगामा करते रहे लेकिन उन्होंने अपना वक्तव्य प्रभावी तरह से दिया। अब सभी का ध्यान नीतीश सरकार के मंत्रिमंडल पर जा रहा है। अभी से ही मंत्रियों के नाम को लेकर कयास लगने लगे हैं। माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल में हम के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी शामिल हो सकते हैं। साथ ही विजेंदर प्रसाद यादव,ललन सिंह,लेसी सिंह,श्रवण कुमार,जय कुमार सिंह,खुर्शीद अहमद,बीजेपी कोटे से नंदकिशोर यादव,डॉ. प्रेम कुमार,मंगल पांडेय,रजनीश कुमार ,ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू,रामप्रीत पासवान आदि के नाम शामिल हैं। सीएम नीतीश कुमार ने अपने वक्तव्य में कहा कि सेक्युलर हम भी हैं हमें धर्मनिरपेक्षता का पाठ न पढाया जाए। उन्होंने स्पष्टतौर पर कहा कि राज्य में भ्रष्टाचार को सहन नहीं किया जाएगा। सीएम नीतीश के इस तरह के वक्तव्य से यह माना जा रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और उनके परिजन की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
नई दिल्ली (JEE Main 2022, Board Exams). बोर्ड परीक्षाओं (Board Exams) का दौर शुरू हो चुका है. जेईई मेन 2022 का शेड्यूल (JEE Main 2022 Schedule) भी जारी किया जा चुका है. ऐसे में 12वीं बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों पर पढ़ाई और परीक्षा का डबल प्रेशर आ गया है. ज्यादातर छात्र 12वीं परीक्षा के साथ उसी साल जेईई परीक्षा (JEE Exam) में भी शामिल होते हैं. इससे उनका एक साल बर्बाद होने से बच जाता है. अगर जेईई परीक्षा में अच्छे अंक हासिल नहीं कर पाए तो भी उसके पैटर्न (JEE Exam Pattern) का अंदाजा लग जाता है. साल 2021 में कोरोना वायरस संक्रमण (Coronavirus In India) का प्रकोप देखते हुए जेईई मेन परीक्षा (JEE Main) के 4 अटेंप्ट दिए गए थे. हालांकि इस साल जेईई परीक्षा (JEE Exam) के लिए सभी उम्मीदवारों को दो ही अटेंप्ट दिए जाएंगे. छात्र दोनों अटेंप्ट में शामिल हो सकते हैं. अगर आप बोर्ड परीक्षा (Board Exams) और जेईई मेन परीक्षा (JEE Main 2022) की एक साथ तैयारी कर रहे हैं तो ये टिप्स आपके काम आ सकते हैं (Exam Tips). जेईई परीक्षा (JEE Exam) में 11वीं और 12वीं, दोनों एग्जाम सिलेबस (Exam Syllabus) से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं. लेकिन 12वीं की परीक्षा में सिर्फ उस साल पढ़ाए गए सिलेबस के प्रश्न आते हैं. इसलिए सबसे पहले दोनों सिलेबस के महत्वपूर्ण टॉपिक की एक अलग लिस्ट बना लें. परीक्षा चाहे जो भी हो, उसकी तैयारी करते वक्त अपने नोट्स खुद बनाएं (Exam Tips). नोट्स को आसान भाषा में और क्रिस्प फॉर्मेट में बनाएं. इससे परीक्षा की तैयारी बेहतर तरीके से की जा सकेगी. जेईई परीक्षा (JEE Exam) और 12वीं की बोर्ड परीक्षा (Board Exam Tips) की एक साथ तैयारी करने के लिए अपना फिक्स शेड्यूल बनाएं. उसमें दोनों परीक्षाओं की तैयारी के लिए समय निर्धारित करें. इस दौरान डबल मेहनत करने के लिए तैयार रहें. ये भी पढ़ेंः .
नई दिल्ली . बोर्ड परीक्षाओं का दौर शुरू हो चुका है. जेईई मेन दो हज़ार बाईस का शेड्यूल भी जारी किया जा चुका है. ऐसे में बारहवीं बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों पर पढ़ाई और परीक्षा का डबल प्रेशर आ गया है. ज्यादातर छात्र बारहवीं परीक्षा के साथ उसी साल जेईई परीक्षा में भी शामिल होते हैं. इससे उनका एक साल बर्बाद होने से बच जाता है. अगर जेईई परीक्षा में अच्छे अंक हासिल नहीं कर पाए तो भी उसके पैटर्न का अंदाजा लग जाता है. साल दो हज़ार इक्कीस में कोरोना वायरस संक्रमण का प्रकोप देखते हुए जेईई मेन परीक्षा के चार अटेंप्ट दिए गए थे. हालांकि इस साल जेईई परीक्षा के लिए सभी उम्मीदवारों को दो ही अटेंप्ट दिए जाएंगे. छात्र दोनों अटेंप्ट में शामिल हो सकते हैं. अगर आप बोर्ड परीक्षा और जेईई मेन परीक्षा की एक साथ तैयारी कर रहे हैं तो ये टिप्स आपके काम आ सकते हैं . जेईई परीक्षा में ग्यारहवीं और बारहवीं, दोनों एग्जाम सिलेबस से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं. लेकिन बारहवीं की परीक्षा में सिर्फ उस साल पढ़ाए गए सिलेबस के प्रश्न आते हैं. इसलिए सबसे पहले दोनों सिलेबस के महत्वपूर्ण टॉपिक की एक अलग लिस्ट बना लें. परीक्षा चाहे जो भी हो, उसकी तैयारी करते वक्त अपने नोट्स खुद बनाएं . नोट्स को आसान भाषा में और क्रिस्प फॉर्मेट में बनाएं. इससे परीक्षा की तैयारी बेहतर तरीके से की जा सकेगी. जेईई परीक्षा और बारहवीं की बोर्ड परीक्षा की एक साथ तैयारी करने के लिए अपना फिक्स शेड्यूल बनाएं. उसमें दोनों परीक्षाओं की तैयारी के लिए समय निर्धारित करें. इस दौरान डबल मेहनत करने के लिए तैयार रहें. ये भी पढ़ेंः .
केरल के कोल्लम जिले में टमाटर फ्लू का पहला मामला 6 मई, 2022 को खोजा गया था. अत्यंत संक्रामक टमाटर फ्लू फेसेस, नाक स्राव, गले के स्राव, ब्लिस्टर फ्लूइड और मौखिक मार्गों द्वारा फैलता है. टमाटर फ्लू का नाम दर्दनाक, लाल ब्लिस्टर के व्यापक रूप से दिखाई देने के बाद दिया जाता है जो अंततः टमाटर के आकार में बढ़ते हैं. टमाटर फ्लू जैसी संक्रामक बीमारियां कई वायरस द्वारा लाई जाती हैं. पांच वर्ष से कम आयु के शिशु और युवा बच्चे अक्सर प्रभावित होते हैं, हालांकि, कभी-कभी वयस्क इसे भी संकुचित करेंगे. - थकान, - मिचली, - बुखार, टमाटर फ्लू एक स्व-सीमित संक्रामक स्थिति है, जिसमें संकेत और लक्षण सात से दस दिनों के भीतर गायब हो जाते हैं. किसी भी लक्षण के विकास के बाद 5-7 दिनों के लिए, बीमारी को अन्य बच्चों या वयस्कों में फैलने से रोकने के लिए आइसोलेशन का उपयोग किया जाना चाहिए. हाइड्रेटेड रहने के लिए, वायरस के संपर्क में आने वाले बच्चों को बहुत सारा उबलते पानी पीना चाहिए. ब्लिस्टर और रैशेस को स्क्रेप करने की सलाह नहीं दी जाती है. एक स्वच्छ और पूर्ण वातावरण सुरक्षित रखें. गर्म स्नान या शॉवर लें. अभी तक, कोई एंटीवायरल दवाएं या टीकाएं नहीं हैं जिनका उपयोग टमाटर फ्लू के इलाज या रोकथाम के लिए किया जा सकता है. इसलिए बच्चे की खुशहाली के लिए पहले सुरक्षित रहना और इसे रोकना बेहतर है. (डिस्क्लेमरः इस साइट पर उपलब्ध कंटेंट केवल जानकारी के उद्देश्यों के लिए है, और इसे प्रोफेशनल मेडिकल सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए. अपने स्वास्थ्य या मेडिकल स्थिति के संबंध में आपके किसी भी प्रश्न के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या अन्य हेल्थ प्रोफेशनल के मार्गदर्शन प्राप्त करें. )
केरल के कोल्लम जिले में टमाटर फ्लू का पहला मामला छः मई, दो हज़ार बाईस को खोजा गया था. अत्यंत संक्रामक टमाटर फ्लू फेसेस, नाक स्राव, गले के स्राव, ब्लिस्टर फ्लूइड और मौखिक मार्गों द्वारा फैलता है. टमाटर फ्लू का नाम दर्दनाक, लाल ब्लिस्टर के व्यापक रूप से दिखाई देने के बाद दिया जाता है जो अंततः टमाटर के आकार में बढ़ते हैं. टमाटर फ्लू जैसी संक्रामक बीमारियां कई वायरस द्वारा लाई जाती हैं. पांच वर्ष से कम आयु के शिशु और युवा बच्चे अक्सर प्रभावित होते हैं, हालांकि, कभी-कभी वयस्क इसे भी संकुचित करेंगे. - थकान, - मिचली, - बुखार, टमाटर फ्लू एक स्व-सीमित संक्रामक स्थिति है, जिसमें संकेत और लक्षण सात से दस दिनों के भीतर गायब हो जाते हैं. किसी भी लक्षण के विकास के बाद पाँच-सात दिनों के लिए, बीमारी को अन्य बच्चों या वयस्कों में फैलने से रोकने के लिए आइसोलेशन का उपयोग किया जाना चाहिए. हाइड्रेटेड रहने के लिए, वायरस के संपर्क में आने वाले बच्चों को बहुत सारा उबलते पानी पीना चाहिए. ब्लिस्टर और रैशेस को स्क्रेप करने की सलाह नहीं दी जाती है. एक स्वच्छ और पूर्ण वातावरण सुरक्षित रखें. गर्म स्नान या शॉवर लें. अभी तक, कोई एंटीवायरल दवाएं या टीकाएं नहीं हैं जिनका उपयोग टमाटर फ्लू के इलाज या रोकथाम के लिए किया जा सकता है. इसलिए बच्चे की खुशहाली के लिए पहले सुरक्षित रहना और इसे रोकना बेहतर है.
पाक के अजीब कानून - भारत से दुश्मनी को लेकर पाकिस्तान अकसर सुर्खियों में बना रहता है। पड़ोसी देश पाकिस्तान की नापाक हरकतों के साथ उसके कानून भी दुनिया की नज़र में आते रहते हैं। इस देश में इतने बेमतलब और अजीब कानून बने हुए हैं कि इनकी वजह से पाक का मज़ाक उड़ता रहता है। आज हम आपको पाक के अजीब कानून के बारे में बताने जा रहे हैं। - पाकिस्तान के नागरिकों को इज़रायल जाने की इजाजत नहीं है। पाकिस्तान ने इज़रायल को एक देश के रूप में मान्यता नहीं दी है। इस वजह से इन दोनों देशों के बीच किसी भी तरह के डिप्लोमेटिक रिलेशन नहीं है। - हुदूद ऑर्डिनेंस के तहत पाक में लोगों को गर्लर्फेंड के साथ रहने की मनाही है। यहां पर लिव इन रिलेशन जैसा कोई कॉन्सेप्ट नहीं है। इस पर रोक के लिए 1977 में ही कानून बना दिया गया था। - अगर किसी स्टूडेंट की पढ़ाई पर साल में 2 लाख से ज्यादा का खर्च आता है तो उसे 5 प्रतिशत टैक्स भरना पड़ता है। - पाक सरकार ने एक साइबर बिल पास किया था जिसमें अगर आप सीएम या फिर किसी गवर्नमेंट ऑफिशियल का मज़ाक उडाते हैं तो आपको सज़ा हो सकती है और जुर्माना भी भरना पड़ सकता है। इस कानून के बावजूद पाक के न्यूज़ चैनल्स पर नेताओं की खिल्ली उड़ती रहती है। यहां पर सिर्फ आर्मी का मज़ाक नहीं उड़ाया जाता है। - पाक में किसी की परमिशन के बिना उसका फोन छूना इलीगल है। इसके लिए आपको 6 महीने की जेल हो सकती है। - भारत में जहां स्पैम मैसेज की झड़ी लगी रहती है वहीं पाक में स्पैम मैसेज भेजने पर 10 लाख रुपए का जुर्माना देना पड़ता है। - पाक में कुछ अरबी शब्दों जैसे अल्लाह, मस्जिद, रसूल या नबी का अंग्रेजी अनुवाद करना भी इलीगल माना जाता है। - पाकिस्तान में ये जो नियम-कानून बनाए गए हैं बिलकुल बेतुके से लगते हैं। पाक में मदरसों के अंदर छोटे बच्चों को हथियार चलाना सिखाया जाता है बल्कि भारत में बच्चों को भगवान का रूप माना जाता है। पाकिस्तान में महिलाओं के साथ-साथ बच्चों की स्थिति भी बहुत खराब है। वहां पर उनके अधिकारों का हनन कर उन्हें अच्छी तालीम से वंचित कर दिया जाता है। कई जगहों पर तो आंतकी तालीम भी दी जाती है। चूंकि, पाकिस्तान एक इस्लामिक देश है इसलिए वहां पर मर्दों को एक से ज्यादा विवाह करने की छूट है और वहां पर तीन तलाक भी खूब जोरो से चलता है जबकि हाल ही में महिलाओं के विरोध पर भारत में तीन तलाक को बैन कर दिया गया है। इस तीन तलाक की वजह से ना जाने कितने ही घर उजड़ गए और कितने ही बच्चे अनाथ हो गए। पाक में भी भी ये सिलसिला जारी है। ये है पाक के अजीब कानून - पाकिस्तान को इन मुद्दों पर कानून बनाने के बारे में सोचना चाहिए। हालांकि, जब से से देश बना है तभी से ये बस बेतुके कामों में ही लगा रहता है। जमीनी रूप से विकास करना शायद पाक भूल गया है। इस देश को अब आतंकवादियों को समर्थन देने वाले देश के रूप में घोषित किए जाने की मांग उठ रही है।
पाक के अजीब कानून - भारत से दुश्मनी को लेकर पाकिस्तान अकसर सुर्खियों में बना रहता है। पड़ोसी देश पाकिस्तान की नापाक हरकतों के साथ उसके कानून भी दुनिया की नज़र में आते रहते हैं। इस देश में इतने बेमतलब और अजीब कानून बने हुए हैं कि इनकी वजह से पाक का मज़ाक उड़ता रहता है। आज हम आपको पाक के अजीब कानून के बारे में बताने जा रहे हैं। - पाकिस्तान के नागरिकों को इज़रायल जाने की इजाजत नहीं है। पाकिस्तान ने इज़रायल को एक देश के रूप में मान्यता नहीं दी है। इस वजह से इन दोनों देशों के बीच किसी भी तरह के डिप्लोमेटिक रिलेशन नहीं है। - हुदूद ऑर्डिनेंस के तहत पाक में लोगों को गर्लर्फेंड के साथ रहने की मनाही है। यहां पर लिव इन रिलेशन जैसा कोई कॉन्सेप्ट नहीं है। इस पर रोक के लिए एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर में ही कानून बना दिया गया था। - अगर किसी स्टूडेंट की पढ़ाई पर साल में दो लाख से ज्यादा का खर्च आता है तो उसे पाँच प्रतिशत टैक्स भरना पड़ता है। - पाक सरकार ने एक साइबर बिल पास किया था जिसमें अगर आप सीएम या फिर किसी गवर्नमेंट ऑफिशियल का मज़ाक उडाते हैं तो आपको सज़ा हो सकती है और जुर्माना भी भरना पड़ सकता है। इस कानून के बावजूद पाक के न्यूज़ चैनल्स पर नेताओं की खिल्ली उड़ती रहती है। यहां पर सिर्फ आर्मी का मज़ाक नहीं उड़ाया जाता है। - पाक में किसी की परमिशन के बिना उसका फोन छूना इलीगल है। इसके लिए आपको छः महीने की जेल हो सकती है। - भारत में जहां स्पैम मैसेज की झड़ी लगी रहती है वहीं पाक में स्पैम मैसेज भेजने पर दस लाख रुपए का जुर्माना देना पड़ता है। - पाक में कुछ अरबी शब्दों जैसे अल्लाह, मस्जिद, रसूल या नबी का अंग्रेजी अनुवाद करना भी इलीगल माना जाता है। - पाकिस्तान में ये जो नियम-कानून बनाए गए हैं बिलकुल बेतुके से लगते हैं। पाक में मदरसों के अंदर छोटे बच्चों को हथियार चलाना सिखाया जाता है बल्कि भारत में बच्चों को भगवान का रूप माना जाता है। पाकिस्तान में महिलाओं के साथ-साथ बच्चों की स्थिति भी बहुत खराब है। वहां पर उनके अधिकारों का हनन कर उन्हें अच्छी तालीम से वंचित कर दिया जाता है। कई जगहों पर तो आंतकी तालीम भी दी जाती है। चूंकि, पाकिस्तान एक इस्लामिक देश है इसलिए वहां पर मर्दों को एक से ज्यादा विवाह करने की छूट है और वहां पर तीन तलाक भी खूब जोरो से चलता है जबकि हाल ही में महिलाओं के विरोध पर भारत में तीन तलाक को बैन कर दिया गया है। इस तीन तलाक की वजह से ना जाने कितने ही घर उजड़ गए और कितने ही बच्चे अनाथ हो गए। पाक में भी भी ये सिलसिला जारी है। ये है पाक के अजीब कानून - पाकिस्तान को इन मुद्दों पर कानून बनाने के बारे में सोचना चाहिए। हालांकि, जब से से देश बना है तभी से ये बस बेतुके कामों में ही लगा रहता है। जमीनी रूप से विकास करना शायद पाक भूल गया है। इस देश को अब आतंकवादियों को समर्थन देने वाले देश के रूप में घोषित किए जाने की मांग उठ रही है।
श्रनुच्छेद ११ ] वैशम्पायन शुक आपके चरण कमलों में लाई है । तो कृपया इसे स्वीकार कीजिए ।' यह कहकर उसने पिंजड़ा राजा के सामने रख दिया और स्वयं हट गया । उसके हट जाने पर उस पक्षिराज ने राजा की ओर अभिमुख होकर अपना दाहिना पैर उठाकर झुकाया और अत्यंत स्पष्ट और स्वर वाली वाणी में जय युक्त आशीर्वाद देकर राजा के लिये एक आर्या पढ़कर सुनाई'आपके वैरियों की स्त्रियों के स्तन अश्रुओं से भीगे हुए रहते हैं, समीपस्थ हृदय की शोकाभि से दग्ध रहते हैं, और हार आभूषण आदि उन्होंने सर्वथा त्याग दिए हैं, मानों वे नित्य स्नान, अग्नितापन और आहार त्याग कर कोई व्रत साध रहे हों ।' श्लोक सुनकर राजा को विस्मय हुआ। उसने पास में सुवर्ण के आसन पर सकल राजशास्त्र में पारंगत अपने कुमारपालित नामक प्रधानामात्य से कहा - 'आपने इस तोते की वाणी की स्पष्टता और स्वर की मधुरता सुनी ? पहले तो यही बड़ी अचरज की बात है कि इसके कंठ से इतने स्पष्ट अक्षर, स्वर, अनुस्वारयुक्त शब्दों का उच्चारण हो रहा है। फिर यह और विस्मय की बात है कि पक्षी होकर भी यह अधीत मनुष्य की तरह बुद्धिपूर्वक इच्छानुकूल व्यवहार कर सकता है। इसने दाहिना पैर उठाकर जय शब्द का उच्चारण किया और फिर मेरे लिये यह आर्या गाकर पढ़ी। प्रायः तो पशु-पक्षी आहार निद्रा, भय, मैथुन - इन्हीं के विषय में जानते हैं। पर यह तो सचमुच बहुत विचित्र है।' राजा की यह बात सुनकर कुमारपालित कुछ मुस्कराए और बोले - देव, इसमें अचरज कैसा ? पक्षियों में शुरू-सारिका सुनी हुई बात को वैसे ही कह देते हैं यह आपको विदित ही है । और भी पूर्व जन्म में प्राप्त संस्कारों के कारण या इसी जन्म में किसी के सिखाने पढ़ाने से उनमें और भी विशेषता आ जाती है। कहते हैं कि इनकी वाणी भी पहले मनुष्यों की तरह बिल्कुल स्फुट थी, पर अग्नि के शाप से हाथियों की जिह्वा उलट गई और तोता की वाणी में कुछ अस्फुटता आ गई ।' मंत्री के इतना कहने पर उसी समय मध्याह्न की सूचक जलघड़ी के अनुसार पहले धौंसा बजा और फिर उसी के साथ मध्याह्न शंख बज उठा। उसे सुनकर राजा ने स्नान का समय जानकर सभा विसर्जित की और वे आस्थान-मंडप से उठ गए । राजा की मंत्रिपरिषद् महत्वपूर्ण संस्था थी । पाणिनि मे मंत्रिपरिषद् के आधार पर एक मए राजनीतिक विशेषण परिषद्लो राजा का उल्लेख किया है । शिशुनाग वंश से लेकर शुंगकाल तक बड़े-बड़े प्रधानामात्यों का उल्लेख आता है; जैसे, मगधराज अजातशत्रु के महामंत्री वर्षकार, कोसलराज विहूडभ के दीर्घचारायण, वत्सराज उदयन के यौगंधरायण, मगधराज चंद्रगुप्त मौर्य के आर्य चाणक्य, अशोक के राधगुप्त, अवंतिराज पालक के आचार्य पिशुन, राजा की सभा का विसर्जन [ अनुच्छेद १२ पंचालराज ब्रह्मदत्त के आचार्य बाभ्रव्य । प्रधानामास्य को आर्य ब्राह्मण भी कहते थे । राजा के समान ही मंत्रियों का व्यक्तित्व भी प्रसिद्ध और प्रभावशाली होता था । कुषाण काल में मंत्रिपरिषद् का स्पष्ट चित्र नहीं मिलता, किंतु महाक्षत्रप रुद्रदामा की मंत्रिपरिषद के मतिसचिव और कर्मसचिव इतने प्रभावशाली थे कि उन्होंने सुदर्शन तड़ाग के पुनः सेतुबंध के लिये आवश्यक द्रव्य सार्वजनिक कोष से देना अस्वीकृत कर दिया। गुप्त सम्राटों के समय मंत्रिपरिषद और उसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री के पद का गौरव पूर्व की भाँति फिर उभर आया । कामंदक नीतिसार और शुक्रनीति से इस पर अच्छा प्रकाश पड़ता है । बाण का यह उल्लेख मंत्रिमंडल और प्रधानामास्य के सक्रिय अस्तित्व के विषय में प्रामाणिक है । प्राचीन काल में समय नापने के लिये दो उपाय काम में लाए जाते थे - एक छाया दूसरी नालिका । आगे अनुच्छेद ६३ में इन दोनों का एक साथ उल्लेख आया है। पहली धूपघड़ी और दूसरी जलघड़ी समझनी चाहिए । धूप में शंकु की छाया का प्रमाण नापकर समय जाना जाता था। मध्याह्न तक दिन के चार भाग और उसके बाद फिर चार भाग किए जाते थे। पहले भाग में उसी शंकु की छाया तीन पुरुष प्रमाण लंबी, दूसरे भाग में एक पुरुष-प्रमाण लंबी, तीसरे भाग में चार अंगुल और चौथे भाग में बिल्कुल सिमटी हुई होती थी । दिन के दूसरे भाग में विपरीत क्रम से छाया नापी जाती थी । नालिका को घटिका भी कहते थे । दिन और रात के आठ-आठ भाग किये जाते थे एक नालिका के भरने में डेढ़ घंटे का समय लगता था और प्रत्येक नालिका की समाप्त पर पटह ( नगाड़ा ) बजाया जाता था जैसा बाण ने लिखा है; और जब चार नालिकाएँ पूरी हो जाती तो ठीक मध्याह्न की सूचक शंख ध्वनि की जाती थी । अर्थशास्त्र १११९ के अनुसार तीसरे भाग में राजा को स्नान, भोजन और स्वाध्याय करना चाहिए । बाग के समय में मध्याह्न काल में राजाओं के लिये स्नानादिक का समय नियत था । संभवतः पहली परिपाटी में कुछ परिवर्तन किया गया था । राजा के उठ जाने पर विसर्जित हुए दरबार की हलचल का बड़ा सटीक चित्र बाण ने खींचा है। सबसे पहले दरबारी राजाओं की भीड़ का उल्लेख है । फिर जितने भी लोग दरबार में थे सबको आपा-धापी पड़ती थी, इसलिये विचित्र कोलाहल वहाँ मच जाता था। जिस समय सम्राट् भद्रासन से उठते राजाओं में आगे बढ़कर बिदाई का प्रणाम करने के लिए कशमकश होती । उनके भुजबंधों में जो पत्रभंगमकरिकाएँ बनी हुई थीं। उनकी निकली हुई कोरों से किसी दूसरे का रेशमी उत्तरीय ( अंक ) नुच जाता । गले में पड़ी हुई लंबी माला झटके से एक ओर को फिक जाती। कंधे पर बने हुए कुंकुम की धूलि वायु में फैल जाती। मालती के पुष्पों का शेखर हिलकर भौंरों को छितरा देता । लटकते हुए कर्णोरपल गालों तक आ जाते । बक्षस्थल के हार धक्काबुक्की में बिथुर जाते । प्यामरग्राहिणी अनुच्छेद १२ ] राजसभा का विसर्जन [ कादम्बरी २६ कंधों पर चँवर रखे जब वहाँ से चलतीं तो उनके मणि-नूपुर झंकारते थे । राजसभा में जो परिचारिकाएँ, वार-विलासिनियाँ रहती थीं उनकी मेखलानों से लटकती हुई रत्नमालाएँ मनोहर शब्द करती थीं। भवन दीर्घिकाओं में जो कलहंस पाले गए थे वे इस कोलाहल को सुनकर समझते न जाने क्या हुआ और आस्थान मंडप की ऊँची सीढ़ियों पर चढ़ आते और स्वयं भी किलकारने लगते थे । राजकुल में जो सारस पाले गए थे वे भी स्त्रियों के कांचीदाम का शब्द सुनकर कें कें करने लगते थे, मानों कोई कसेरा खराद पर काँसे के बर्तन फेर रहा हो । सम्राटों के आस्थान मंडप में जहाँ बहुत से राजा एकत्र होते वहीं उनसे छोटी पदवी के सामन्त, ठिकानेदार भी इकठ्ठ होते थे । वे भी बड़ी धमक के साथ आस्थान मंडप की धरती को कँपाते हुए उठते थे। अपराजितपृच्छा में तो यहाँ तक लिखा है कि बड़े महाराजाधिराज परमेश्वर की सभा में १२ दंड नायक, ४ मंडलेश्वर, १२ मांडलिक, १६ महासामंत, ३२ सामंत, और १६० लघुसामंत तथा ४८४ चौधरी रहते थे। बाण ने सामान्य तौर पर सामंतशत का उल्लेख कर दिया है। सम्राट् के साथ जो प्रतिहारी चलते उनसे भी आगे लोगों को हटाने के लिये दंडधारी भागते हुए 'आलोकयत-आलोकयत' इस शब्द को जोर-जोर से बोलते थे। वह शब्द महल के कुंजों में दूर तक गूँज जाता था। राजा की सवारी के समय भीड़-भाड़ को हटाना प्राचीन शिष्टाचार था जिसे समुत्सारण कहते थे । आलोकयत आलोकयत ( देखो-देखो, आजकल का हटो-बचो ) उस समय की शब्दावली में आलोक शब्द कहा जाता था । कालिदास ने भी इसका उल्लेख किया है ( रघु० २ । ९ ) । आलोक शब्द का उच्चारण कुछ डाँट-डपट के साथ या धमकाकर नहीं बल्कि बहुत रस पूर्वक हलके-फुलके ढंग से किया जाता था ( समारब्ध हेलम् ) । इस शब्द के उब्चारण की यह भी विशेषता थी कि उसकी गूंज महल के दूसरे हिस्सों में भी फैलती हुई सुनाई पड़ती थी और उन-उन स्थानों में नियुक्त परिचारक आदि भी उसी टेर में उसका उच्चारण कर देते थे जिससे सम्राट् की सवारी का समाचार महल के हर भाग में लोगों को मिल जाता था। इस बात को स्पष्ट करने के लिये आलोक शब्द के विषय में पहले उच्चैः उच्चारण, फिर तारतर दीर्घ और फिर दीर्घतरता को प्राप्त कहा गया है। प्रणाम करने वाले राजाओं की शिरोभूषा में दो आभूषण कहे गए हैं - एक मौलि में लोलचूड़ामणि और दूसरा मणि-शालाकाओं से बना हुआ किरीट । लोलचूड़ामणि उस प्रकार का आभूषण था जिसका एक सिरा बाल या मुकुट में फँसा रहता था और दूसरा छुटा हुआ। इसे चटुला या लोलक भी कहते थे । मणिशालाकाओं से दंतुर किरीट का स्पष्ट चित्रण अजंता की पहली गुफा में वजूपाणि के चित्र में मिलता है ( औध कृत अजंता, फलक ७७, हर्षचरित ० ) सम्राट् के पथ में उनके आगे-आगे मंगल पाठक बंदी लोग मीठे स्वर से जयजीव जयजीव कहते चलते थे । आस्थान-भवन के मणिस्तंभों में सजावट के लिये रत्न और मोतियों के झुग्गे लटकाए जाते थे जिन्हें 'रत्नदाम कहा जाता था । इन्हें ही आगे चलकर लंबन भी कहने लगे । मोतियों के जाले (मुक्ताजाल) और रत्नों की लड़ियाँ ( रखदाम ) ये गुप्तकालीन सजावट का आवश्यक अंग थीं । जिस आस्थान मंडप की भीड़-भाड़ का यह चित्र कवि ने प्रस्तुत किया है वह अवश्य ही बाह्यस्थान मंडप या सर्वावसर ( दरबार आम ) ही था । नृपस्नानादि वर्णन सभा विसर्जन करके राजा ने चांढाल कन्या से तो विश्राम करने के लिये कहा और अपनी तांबूलकरंकवाहिनी को आदेश दिया कि वैशम्पायन को भीतर ले जाओ। फिर कुछ चुने हुए विश्वसनीय राजपुत्रों के साथ राजा स्वयं भी महल के भीतरी भाग में गए । अभ्यंतर का तात्पर्य धवलगृह के भीतर से था। तीसरी कक्ष्या में गृहावग्रहणी अर्थात् धवलगृह की देहली पार करने के बाद अंतःपुर आरंभ होता था। बाह्यास्थान-मंडप तक तो सामान्यतः सभी राजा आ सकते थे पर अभ्यंतर प्रवेश कुछ चुने हुए लोगों का ही संभव था जो आप्त अर्थात् राजभक्त और विश्वसनीय समझे जाते थे। सबसे पहले राजा ने सब आभूषण उतार डाले और तब विशेष रूप से सजाई गई व्यायामभूमि में प्रवेश किया जहाँ व्यायाम करने की आवश्यक सामग्री एकत्र थी । अपने समान वयस राजपुत्रों के साथ हलका व्यायाम किया और फिर स्नान करने के स्थान ( स्नानभूमि ) में गए । यद्यपि व्यायामभूमि से स्नानभूमि तक जाने तक का मार्ग बहुत दूर या लंबा न रहा होगा फिर भी कवि ने सूचित किया है कि अपने महल में भी राजा लोग विना उत्सारण के कहीं आते-जाते न थे । यद्यपि राजकुल में बाहरी मनुष्यों की भीड़-भाड़ की संभावना ही न थी ( विरल जनेपि राजकुले ) फिर भी समुत्सारण कर्तव्य में नियुक्त दंडी या दंडधारी लोग राजा के आगे-आगे चलते हुए हटो बचो का अपना कर्तव्य पूरा करते और यों उसे मार्ग भी दिखाते थे । स्नान की सामग्री जुटाने वाले परिजन इधर से उधर दौड़कर अपना कर्तव्य निबाह रहे थे । स्नानभूमि या मार्जनगृह राजप्रासाद का विशेष स्थान होता था। उसके ऊपर श्वेत चंदोवा ताना गया था। उसके बीच में सोने की सुगंधित जल से भरी हुई जलद्रोणी बनी हुई थी । स्नान के समय बैठने के लिये बिल्लौरी पीढ़ा रखा हुआ था ( स्फाटिकस्नानपीठ ) । एक ओर अत्यन्त सुगंधित जल से भरे हुए स्नानकलश रखे थे जिनका मुँह नीले कपड़े से ढका था । पहले द्रोणी में स्नान करने के बाद फिर कलसों से विशेष परिचारक राजा को स्नान कराते थे । स्नान-कलशों द्वारा अभिषेक का दृश्य अजन्ता के एक भित्तिचित्र में आया है। ज्ञात होता है स्नान के समय भी राजा का यश बखानने के लिये विशेष चारण स्नानभूमि के समीप विद्यमान रहते थे। राजा के स्नान करने की भी नियत विधि थी । पहले वार- विलासिनी स्त्रियाँ, जिन्हें हम आस्थानमंडप में भी उपस्थित देख चुके हैं, सुगंधित आँवले का चूर्ण राजा के सिर पर मलती थीं। फिर स्तनांशुक से उरस्थल को कसकर भुजाओं के कंगन को अलग हटाकर कान के लटकते हुए आभूषण और कान के पास की अलकावली को भी पीछे करके वे स्त्रियाँ राजा को स्नान कराने का उपक्रम करती थीं जिससे उनके वस्त्र या आभूषणों का राजा के शरीर से स्पर्श न हो सके। पहले राजा ने जलकुंड में स्नान किया । पुनः नहाने के शुभ्र पीढ़े पर बैठ गए। तभी वार स्त्रियाँ मरकत, चाँदी, स्फटिक और स्वर्ण के बने हुए विभिन्न कलसों से स्नान कराने लगीं। किसी में स्वच्छ सलिल था, किसी में ज्योत्स्ना में रखा हुआ चांद्रजल, किसी में तीर्थजल, किसी में कुंकुमजल और किसी में चंदन-रस मिला हुआ सुगंधित जल स्नान कराने [ [अनुच्छेद १३ अनुच्छेद १४ ] राजा का श्राहारादि वर्णन में भी जलों का क्रम यही रखा जाता था । ऊँचे उठाए हुए कलसे के मुँह के पास हाथ लगाकर उँगलियों के बीच से जल गिराती हुई वे मानों फव्वारा सा बना रही थीं । महल के ऊँचे भाग में रहट से या पुर से पानी चढ़ाकर फिर उसे छिपी हुई नालियों से महल के भिन्न-भिन्न भागों में ले जाते थे और विशेषतः स्नानगृह में किसी युक्ति से फव्वारे बनाते थे जिन्हें गुप्तकाल की भाषा में यंत्रधारा गृह कहा जाता था । इन फव्वारों में भाँति-भाँति की शालभंजिकाएँ या पुतलियों बनाई जाती थीं और उनके मुख, नेत्र, कर्ण, हाथ आदि से जल की फुहारें निकलती हुई दिखाई जाती थीं। भारतीय प्रासादों की यह पुरानी विशेषता थी जो मध्यकाल में भी जारी रही, जैसा हेमचंद्र के द्वयाश्रयकाव्य के विवरण से ज्ञात होता है । भाँति-भांति की उन पुतलियों को ही यहाँ सलिलयंत्रदेवता कहा गया है । राजा स्नान कर चुके इस बात की सूचना महल भर में पहुँचाने के लिये अनेक शंख बजाए जाते थे जिसे स्नान-शंखध्वनि कहा जाता था। उसी के साथ बंदी लोग राजा का यश बखान करने के लिये समयोधित श्लोक पढ़ते और नौबतखाने में भी बहुत से बाजे बजाए जाने लगते थे । अभिषेक से निवृत होकर राजा ने सांप की केचुली की तरह अत्यंत झीने और हल्के दो धुले हुए श्वेत वस्त्र ( उत्तरीय और धोती ) धारण किए और सिर पर रेशमी वस्त्र के पल्ले का उष्णीष धारण किया तब मंत्रपूत जल से पितरों को जलांजलि देकर सूर्य को प्रणाम किया और देव मंदिर में आए । जैसा हर्षचरित में हम राजकुल के वर्णन में दिखा चुके हैं ( हर्ष ०, फलक २६ ), राजकुल के भीतर ही व्यायामभूमि और स्नानगृह के अतिरिक्त सुंदर देवगृह की भी व्यवस्था रहती थी। उसमें सम्राट और राजपरिवार के निजी दर्शन और पूजन के लिए कुल देवता की मूर्ति स्थापित की जाती थी । राजप्रासाद के मंदिर में भगवान् शिव की प्रतिमा स्थापित थी । राजा ने उसका पूजन किया और देवमंदिर से बाहर निकलकर पहले अग्निहोत्र किया और फिर विलेपन भूमि में जाकर केसर कपूर, कस्तूरी से मिले हुए चन्दन का शरीर में अनुलेपन किया। इन चारों से जो उत्तम सुगंधि बनती थी उसे उस युग की परिभाषा में यक्षकर्दम कहते थे । अमरकोश में कपूर, कस्तूरी, अगरु और कंकोल की सुगंधि को यक्षकम लिखा है । धन्वंतरि ने कुंकुम, कस्तूरी, कपूर, चंदन और अगुरु से बनी हुई महा मुगंधि को यक्षकर्दम नाम दिया है। लगभग नवीं शती के बाद इसे ही चतुःसम सुगंधि कहने लगे ( काव्य-मीमांसा अ० १८, पृ० १००, चतुःसमं यन्मृगनाभिगर्भम्; चउसम कस्तुरि सिल्हा कपर लाइअइ, दोहाकोश पृ० ५५; पद्मावत २७६ । ४ ) । तदनंतर राजा ने सुगंधित मालती के पुष्पों का शेखर धारण किया, अवसरोचित नए वस्त्र पहने और कान में रत्नजटित कर्णपूर का आभूषण पहनकर अपने संगी साथियों के साथ समुचित भोजन किया । भुक्त्वास्थानमंडप का वर्णन इसके बाद राजा ने धूमवर्त्ति का पान किया और तब जल से मुख शुद्ध करके पान खाया । उसके बाद वे प्रतिहारी के हाथ का अवलंब लेकर चुने हुए अभ्यंतर परिजनों के साथ भुक्त्वास्थान मंडप में गए। भोजनोपरांत सम्राट जहाँ बैठकर विश्राम करते थे वही भुक्त्वास्थानमंडप था जिसे मध्यकाल में दरबार-खास कहा जाता है। बाण की हपं से पहली भेंट भुक्त्वास्थानमंडप में हुई थी जो तीन कक्ष्याएँ पार करने के बाद महल के भीतरी भाग में स्थित था । हर्षचरित और कादंबरी दोनों में तत्संबंधी वर्णन में बहुत साम्य है । उस आस्थानमंडप में चारों ओर धवलांशुक की जवनिकाएँ पड़ी हुई थीं। इसका तात्पर्य यह हुआ कि वह मुख्यतः खुला हुआ मंडप था जिसकी छत स्तंभों पर टिकी हुई थी। दिल्ली के किले में बना हुआ दरबार-खास भी चारो ओर से खुला हुआ केवल खंभों पर टिका है। उसकी छत और खंभों पर सोने का काम है । बाण ने यहाँ कहा है कि आस्थानमंडप में सुनहले खंभों का समूह था । खंभों पर शालभंजिकाओं की प्रतिमाएँ उत्कीर्ण थीं। गुसाई जी ने भी लिखा है 'प्रतिमा खंभनि गढ़ि- गदि काढ़ीं' । गढ़ कर काढ़ी हुई मूर्तियों का तात्पर्य उभारदार उकेरी से था । कालिदास ने इन्हें ही स्तंभों पर बनी हुई योषित प्रतियातना कहा है। भारतीय स्थापत्य की यह विशेषता लगभग दो सहस्र वर्षों तक अक्षुण्ण रही। शुंगकाल और कुषाणकाल के स्तंभों पर बनी हुई शालभंजिकाएँ बहुत ही सुंदर और आकर्षक मानी जाती है । इन मूर्तियों को शालभंजिका कहने का हेतु यह था कि आरंभ में फूले हुए शाल-वृक्षों के नीचे खड़ी होकर स्त्रियाँ उनकी डालों को झुका कर और पुष्पों के झुग्गे तोड़कर क्रीड़ा करती थीं जिसे शालभंजिका क्रीड़ा कहते थे । क्रीड़ा की मुद्रा और उस मुद्रा में खड़ी हुई स्त्री भी शालभंजिका कही जाने लगी । तोरण के स्तंभ और बँडेरी के बाह्य कोने में झुके हुए शरीर वाली जो स्त्री मूर्ति बनाई जाती थी उसे तोरण-शालभंजिका कहा गया ( अश्वघोष, बुद्धचरित ५। ५२ )। [[अनुच्छेद १५ १ - चरक में कई श्रोषधि द्रव्यों को मिलाकर धूमवर्ति बनाने का उल्लेख है। इसका जौ के समान बीच में मोटा, किनारों पर पतला होता था ( सूत्रस्थान ५ । २० - २५ ) । कुट्टनीमतम् में भी प्राया है - में मृदु धौत धूपिताम्बरमग्राम्यं मंडनञ्च बिभ्राणा । परिपीत धूमवर्तिः स्थास्यासि रमणांतिके सुतनु ।। नागर सर्वस्व में धूमवर्ति का नुसखा इस प्रकार हैकर्पूरागुरु चंदनमुस्ता पूति प्रियंगुवालं च । मांसी चेति नृपाणां योग्या रतिनाथ धूमवर्तिः ॥ इस सूचना के लिए मैं अपने मित्र श्री त्रिदेव श्रायुर्वेदाचार्य का अनुगृहीत हूँ । अनुच्छेद १६ ] वैशम्पायन से राजा का प्रश्न आस्थान मंडप के फर्श पर कस्तूरी मिश्रित चंदन का जल छिड़का गया था और थोड़ी-थोड़ी दूर पर पुष्पों की सजावट की गई थी । अगुरु की धूप की सुगंधि से वह महमहा रहा था । उसमें एक वेदिका या कुछ ऊँचा चबूतरा बना था जिस पर एक पलँग बिछा था । पलँग के एक ओर रखों का पादपीठ रखा था। उसके ऊपर कुसुमों की सुगंधि से बसाई हुई चादर (प्रच्छदपट ) बिछी थी और उसके सिरहाने रेशमी तकिया लगा था। शयन पर लेटकर राजा ने मुहूर्तं भर विश्राम किया। उस समय उनकी खड्ग-वाहिनी अंगरक्षिका तलवार गोद में रखकर फर्श पर बैठकर धीरे-धीरे हाथों से उनके पैर दबा रही थी। जो मित्र और मंत्री भुक्त्वास्थानमंडप में प्रवेश के अधिकारी थे, उनके साथ राजा बात चीत भी करते जाते थे । इस प्रकार स्वस्थ होकर राजा ने पास में स्थित प्रतिहारी से कहा'जाओ, अंतःपुर से वैशम्पायन को ले आओ ।' 'देव की जो आज्ञा यह कहकर उसने वैसा ही किया। राजा जब आज्ञा देते तो प्रतीहारी जैसी परिचारिकाओं को पृथिवी में मस्तक टेकने की मुद्रा में होकर उसे स्वीकार करना महल के शिष्टाचार का अंग था। इस मुद्रा को क्षितितलनिहितजानुकरतलमुद्रा कहा गया है । प्रतिहारी वैशम्पायन का पिंजड़ा लेकर जब लौटी तो उसके पीछे-पीछे सोने की वेत्रलता लिए बुड्ढा कंचुकी भी आया । उसके शरीर का ऊपरी भाग कुछ झुक गया था । वह श्वेत कंचुक पहने था और उसके सिर के बाल भी पक गए थे। उसका स्वर कुछ काँपता था और वह बहुत धीरे ही चल पाता था । उसने भी धरती पर हाथ टेककर राजा से विनती की - 'देव, देवियों निवेदन करती है कि वैशम्पायन ने स्नान और आहार कर लिया है और आपकी आज्ञा से प्रतिहारी इसे आपके पास लाई है।" यह कहकर वह हट गया और राजा ने वैशम्पायन से पूछा- 'कहिए, आपने अंतःपुर में कुछ रुचिकर आहार लिया ?" उसने कहा - 'देव, मैंने क्या नहीं खाया ? इच्छानुसार कसैला, मीठा जामुन का रस पिया । लाल-लाल अनार के दाने खाए । पके हुए द्राक्षा जैसे मीठे आँवले चखे । बहुत क्या, देवियाँ अपने हाथ से जो देतीं उसमें अमृत का स्वाद था। राजा ने ही बीच में रोककर कहा - 'अच्छा, यह सब हुआ । अब हमारा कुतूहल दूर करो और आरंभ से अपने जन्म की कथा कहो। किस देश में कैसे उत्पन्न हुए ? किसने नाम रखा ? माता कौन थी ? पिता कौन था ? वेदों का ज्ञान और शास्त्रों का परिचय कैसे हुआ ? कलाओं की उपलब्धि कैसे हुई ? क्या जन्मान्तर की सिद्धि थी या किसी ने वरदान दिया ? क्या पक्षी के वेश में कोई महापुरुष तो छिपा नहीं है ? पहले कहाँ रहते थे ? क्या आयु हुई ? पिंजड़े में कैसे फँस गए ? चांडाल के हाथ में कैसे पड़े और यहाँ तक कैसे पहुँचे ?' कुतूहलवान् राजा के इन प्रश्नों से सम्मानित हुए वैशम्पायन ने कुछ देर सोचकर सादर कहा - 'देव, यह कथा लंबी है । यदि कुतूहल है तो कृपया सुनें ।'
श्रनुच्छेद ग्यारह ] वैशम्पायन शुक आपके चरण कमलों में लाई है । तो कृपया इसे स्वीकार कीजिए ।' यह कहकर उसने पिंजड़ा राजा के सामने रख दिया और स्वयं हट गया । उसके हट जाने पर उस पक्षिराज ने राजा की ओर अभिमुख होकर अपना दाहिना पैर उठाकर झुकाया और अत्यंत स्पष्ट और स्वर वाली वाणी में जय युक्त आशीर्वाद देकर राजा के लिये एक आर्या पढ़कर सुनाई'आपके वैरियों की स्त्रियों के स्तन अश्रुओं से भीगे हुए रहते हैं, समीपस्थ हृदय की शोकाभि से दग्ध रहते हैं, और हार आभूषण आदि उन्होंने सर्वथा त्याग दिए हैं, मानों वे नित्य स्नान, अग्नितापन और आहार त्याग कर कोई व्रत साध रहे हों ।' श्लोक सुनकर राजा को विस्मय हुआ। उसने पास में सुवर्ण के आसन पर सकल राजशास्त्र में पारंगत अपने कुमारपालित नामक प्रधानामात्य से कहा - 'आपने इस तोते की वाणी की स्पष्टता और स्वर की मधुरता सुनी ? पहले तो यही बड़ी अचरज की बात है कि इसके कंठ से इतने स्पष्ट अक्षर, स्वर, अनुस्वारयुक्त शब्दों का उच्चारण हो रहा है। फिर यह और विस्मय की बात है कि पक्षी होकर भी यह अधीत मनुष्य की तरह बुद्धिपूर्वक इच्छानुकूल व्यवहार कर सकता है। इसने दाहिना पैर उठाकर जय शब्द का उच्चारण किया और फिर मेरे लिये यह आर्या गाकर पढ़ी। प्रायः तो पशु-पक्षी आहार निद्रा, भय, मैथुन - इन्हीं के विषय में जानते हैं। पर यह तो सचमुच बहुत विचित्र है।' राजा की यह बात सुनकर कुमारपालित कुछ मुस्कराए और बोले - देव, इसमें अचरज कैसा ? पक्षियों में शुरू-सारिका सुनी हुई बात को वैसे ही कह देते हैं यह आपको विदित ही है । और भी पूर्व जन्म में प्राप्त संस्कारों के कारण या इसी जन्म में किसी के सिखाने पढ़ाने से उनमें और भी विशेषता आ जाती है। कहते हैं कि इनकी वाणी भी पहले मनुष्यों की तरह बिल्कुल स्फुट थी, पर अग्नि के शाप से हाथियों की जिह्वा उलट गई और तोता की वाणी में कुछ अस्फुटता आ गई ।' मंत्री के इतना कहने पर उसी समय मध्याह्न की सूचक जलघड़ी के अनुसार पहले धौंसा बजा और फिर उसी के साथ मध्याह्न शंख बज उठा। उसे सुनकर राजा ने स्नान का समय जानकर सभा विसर्जित की और वे आस्थान-मंडप से उठ गए । राजा की मंत्रिपरिषद् महत्वपूर्ण संस्था थी । पाणिनि मे मंत्रिपरिषद् के आधार पर एक मए राजनीतिक विशेषण परिषद्लो राजा का उल्लेख किया है । शिशुनाग वंश से लेकर शुंगकाल तक बड़े-बड़े प्रधानामात्यों का उल्लेख आता है; जैसे, मगधराज अजातशत्रु के महामंत्री वर्षकार, कोसलराज विहूडभ के दीर्घचारायण, वत्सराज उदयन के यौगंधरायण, मगधराज चंद्रगुप्त मौर्य के आर्य चाणक्य, अशोक के राधगुप्त, अवंतिराज पालक के आचार्य पिशुन, राजा की सभा का विसर्जन [ अनुच्छेद बारह पंचालराज ब्रह्मदत्त के आचार्य बाभ्रव्य । प्रधानामास्य को आर्य ब्राह्मण भी कहते थे । राजा के समान ही मंत्रियों का व्यक्तित्व भी प्रसिद्ध और प्रभावशाली होता था । कुषाण काल में मंत्रिपरिषद् का स्पष्ट चित्र नहीं मिलता, किंतु महाक्षत्रप रुद्रदामा की मंत्रिपरिषद के मतिसचिव और कर्मसचिव इतने प्रभावशाली थे कि उन्होंने सुदर्शन तड़ाग के पुनः सेतुबंध के लिये आवश्यक द्रव्य सार्वजनिक कोष से देना अस्वीकृत कर दिया। गुप्त सम्राटों के समय मंत्रिपरिषद और उसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री के पद का गौरव पूर्व की भाँति फिर उभर आया । कामंदक नीतिसार और शुक्रनीति से इस पर अच्छा प्रकाश पड़ता है । बाण का यह उल्लेख मंत्रिमंडल और प्रधानामास्य के सक्रिय अस्तित्व के विषय में प्रामाणिक है । प्राचीन काल में समय नापने के लिये दो उपाय काम में लाए जाते थे - एक छाया दूसरी नालिका । आगे अनुच्छेद तिरेसठ में इन दोनों का एक साथ उल्लेख आया है। पहली धूपघड़ी और दूसरी जलघड़ी समझनी चाहिए । धूप में शंकु की छाया का प्रमाण नापकर समय जाना जाता था। मध्याह्न तक दिन के चार भाग और उसके बाद फिर चार भाग किए जाते थे। पहले भाग में उसी शंकु की छाया तीन पुरुष प्रमाण लंबी, दूसरे भाग में एक पुरुष-प्रमाण लंबी, तीसरे भाग में चार अंगुल और चौथे भाग में बिल्कुल सिमटी हुई होती थी । दिन के दूसरे भाग में विपरीत क्रम से छाया नापी जाती थी । नालिका को घटिका भी कहते थे । दिन और रात के आठ-आठ भाग किये जाते थे एक नालिका के भरने में डेढ़ घंटे का समय लगता था और प्रत्येक नालिका की समाप्त पर पटह बजाया जाता था जैसा बाण ने लिखा है; और जब चार नालिकाएँ पूरी हो जाती तो ठीक मध्याह्न की सूचक शंख ध्वनि की जाती थी । अर्थशास्त्र एक हज़ार एक सौ उन्नीस के अनुसार तीसरे भाग में राजा को स्नान, भोजन और स्वाध्याय करना चाहिए । बाग के समय में मध्याह्न काल में राजाओं के लिये स्नानादिक का समय नियत था । संभवतः पहली परिपाटी में कुछ परिवर्तन किया गया था । राजा के उठ जाने पर विसर्जित हुए दरबार की हलचल का बड़ा सटीक चित्र बाण ने खींचा है। सबसे पहले दरबारी राजाओं की भीड़ का उल्लेख है । फिर जितने भी लोग दरबार में थे सबको आपा-धापी पड़ती थी, इसलिये विचित्र कोलाहल वहाँ मच जाता था। जिस समय सम्राट् भद्रासन से उठते राजाओं में आगे बढ़कर बिदाई का प्रणाम करने के लिए कशमकश होती । उनके भुजबंधों में जो पत्रभंगमकरिकाएँ बनी हुई थीं। उनकी निकली हुई कोरों से किसी दूसरे का रेशमी उत्तरीय नुच जाता । गले में पड़ी हुई लंबी माला झटके से एक ओर को फिक जाती। कंधे पर बने हुए कुंकुम की धूलि वायु में फैल जाती। मालती के पुष्पों का शेखर हिलकर भौंरों को छितरा देता । लटकते हुए कर्णोरपल गालों तक आ जाते । बक्षस्थल के हार धक्काबुक्की में बिथुर जाते । प्यामरग्राहिणी अनुच्छेद बारह ] राजसभा का विसर्जन [ कादम्बरी छब्बीस कंधों पर चँवर रखे जब वहाँ से चलतीं तो उनके मणि-नूपुर झंकारते थे । राजसभा में जो परिचारिकाएँ, वार-विलासिनियाँ रहती थीं उनकी मेखलानों से लटकती हुई रत्नमालाएँ मनोहर शब्द करती थीं। भवन दीर्घिकाओं में जो कलहंस पाले गए थे वे इस कोलाहल को सुनकर समझते न जाने क्या हुआ और आस्थान मंडप की ऊँची सीढ़ियों पर चढ़ आते और स्वयं भी किलकारने लगते थे । राजकुल में जो सारस पाले गए थे वे भी स्त्रियों के कांचीदाम का शब्द सुनकर कें कें करने लगते थे, मानों कोई कसेरा खराद पर काँसे के बर्तन फेर रहा हो । सम्राटों के आस्थान मंडप में जहाँ बहुत से राजा एकत्र होते वहीं उनसे छोटी पदवी के सामन्त, ठिकानेदार भी इकठ्ठ होते थे । वे भी बड़ी धमक के साथ आस्थान मंडप की धरती को कँपाते हुए उठते थे। अपराजितपृच्छा में तो यहाँ तक लिखा है कि बड़े महाराजाधिराज परमेश्वर की सभा में बारह दंड नायक, चार मंडलेश्वर, बारह मांडलिक, सोलह महासामंत, बत्तीस सामंत, और एक सौ साठ लघुसामंत तथा चार सौ चौरासी चौधरी रहते थे। बाण ने सामान्य तौर पर सामंतशत का उल्लेख कर दिया है। सम्राट् के साथ जो प्रतिहारी चलते उनसे भी आगे लोगों को हटाने के लिये दंडधारी भागते हुए 'आलोकयत-आलोकयत' इस शब्द को जोर-जोर से बोलते थे। वह शब्द महल के कुंजों में दूर तक गूँज जाता था। राजा की सवारी के समय भीड़-भाड़ को हटाना प्राचीन शिष्टाचार था जिसे समुत्सारण कहते थे । आलोकयत आलोकयत उस समय की शब्दावली में आलोक शब्द कहा जाता था । कालिदास ने भी इसका उल्लेख किया है । आलोक शब्द का उच्चारण कुछ डाँट-डपट के साथ या धमकाकर नहीं बल्कि बहुत रस पूर्वक हलके-फुलके ढंग से किया जाता था । इस शब्द के उब्चारण की यह भी विशेषता थी कि उसकी गूंज महल के दूसरे हिस्सों में भी फैलती हुई सुनाई पड़ती थी और उन-उन स्थानों में नियुक्त परिचारक आदि भी उसी टेर में उसका उच्चारण कर देते थे जिससे सम्राट् की सवारी का समाचार महल के हर भाग में लोगों को मिल जाता था। इस बात को स्पष्ट करने के लिये आलोक शब्द के विषय में पहले उच्चैः उच्चारण, फिर तारतर दीर्घ और फिर दीर्घतरता को प्राप्त कहा गया है। प्रणाम करने वाले राजाओं की शिरोभूषा में दो आभूषण कहे गए हैं - एक मौलि में लोलचूड़ामणि और दूसरा मणि-शालाकाओं से बना हुआ किरीट । लोलचूड़ामणि उस प्रकार का आभूषण था जिसका एक सिरा बाल या मुकुट में फँसा रहता था और दूसरा छुटा हुआ। इसे चटुला या लोलक भी कहते थे । मणिशालाकाओं से दंतुर किरीट का स्पष्ट चित्रण अजंता की पहली गुफा में वजूपाणि के चित्र में मिलता है सम्राट् के पथ में उनके आगे-आगे मंगल पाठक बंदी लोग मीठे स्वर से जयजीव जयजीव कहते चलते थे । आस्थान-भवन के मणिस्तंभों में सजावट के लिये रत्न और मोतियों के झुग्गे लटकाए जाते थे जिन्हें 'रत्नदाम कहा जाता था । इन्हें ही आगे चलकर लंबन भी कहने लगे । मोतियों के जाले और रत्नों की लड़ियाँ ये गुप्तकालीन सजावट का आवश्यक अंग थीं । जिस आस्थान मंडप की भीड़-भाड़ का यह चित्र कवि ने प्रस्तुत किया है वह अवश्य ही बाह्यस्थान मंडप या सर्वावसर ही था । नृपस्नानादि वर्णन सभा विसर्जन करके राजा ने चांढाल कन्या से तो विश्राम करने के लिये कहा और अपनी तांबूलकरंकवाहिनी को आदेश दिया कि वैशम्पायन को भीतर ले जाओ। फिर कुछ चुने हुए विश्वसनीय राजपुत्रों के साथ राजा स्वयं भी महल के भीतरी भाग में गए । अभ्यंतर का तात्पर्य धवलगृह के भीतर से था। तीसरी कक्ष्या में गृहावग्रहणी अर्थात् धवलगृह की देहली पार करने के बाद अंतःपुर आरंभ होता था। बाह्यास्थान-मंडप तक तो सामान्यतः सभी राजा आ सकते थे पर अभ्यंतर प्रवेश कुछ चुने हुए लोगों का ही संभव था जो आप्त अर्थात् राजभक्त और विश्वसनीय समझे जाते थे। सबसे पहले राजा ने सब आभूषण उतार डाले और तब विशेष रूप से सजाई गई व्यायामभूमि में प्रवेश किया जहाँ व्यायाम करने की आवश्यक सामग्री एकत्र थी । अपने समान वयस राजपुत्रों के साथ हलका व्यायाम किया और फिर स्नान करने के स्थान में गए । यद्यपि व्यायामभूमि से स्नानभूमि तक जाने तक का मार्ग बहुत दूर या लंबा न रहा होगा फिर भी कवि ने सूचित किया है कि अपने महल में भी राजा लोग विना उत्सारण के कहीं आते-जाते न थे । यद्यपि राजकुल में बाहरी मनुष्यों की भीड़-भाड़ की संभावना ही न थी फिर भी समुत्सारण कर्तव्य में नियुक्त दंडी या दंडधारी लोग राजा के आगे-आगे चलते हुए हटो बचो का अपना कर्तव्य पूरा करते और यों उसे मार्ग भी दिखाते थे । स्नान की सामग्री जुटाने वाले परिजन इधर से उधर दौड़कर अपना कर्तव्य निबाह रहे थे । स्नानभूमि या मार्जनगृह राजप्रासाद का विशेष स्थान होता था। उसके ऊपर श्वेत चंदोवा ताना गया था। उसके बीच में सोने की सुगंधित जल से भरी हुई जलद्रोणी बनी हुई थी । स्नान के समय बैठने के लिये बिल्लौरी पीढ़ा रखा हुआ था । एक ओर अत्यन्त सुगंधित जल से भरे हुए स्नानकलश रखे थे जिनका मुँह नीले कपड़े से ढका था । पहले द्रोणी में स्नान करने के बाद फिर कलसों से विशेष परिचारक राजा को स्नान कराते थे । स्नान-कलशों द्वारा अभिषेक का दृश्य अजन्ता के एक भित्तिचित्र में आया है। ज्ञात होता है स्नान के समय भी राजा का यश बखानने के लिये विशेष चारण स्नानभूमि के समीप विद्यमान रहते थे। राजा के स्नान करने की भी नियत विधि थी । पहले वार- विलासिनी स्त्रियाँ, जिन्हें हम आस्थानमंडप में भी उपस्थित देख चुके हैं, सुगंधित आँवले का चूर्ण राजा के सिर पर मलती थीं। फिर स्तनांशुक से उरस्थल को कसकर भुजाओं के कंगन को अलग हटाकर कान के लटकते हुए आभूषण और कान के पास की अलकावली को भी पीछे करके वे स्त्रियाँ राजा को स्नान कराने का उपक्रम करती थीं जिससे उनके वस्त्र या आभूषणों का राजा के शरीर से स्पर्श न हो सके। पहले राजा ने जलकुंड में स्नान किया । पुनः नहाने के शुभ्र पीढ़े पर बैठ गए। तभी वार स्त्रियाँ मरकत, चाँदी, स्फटिक और स्वर्ण के बने हुए विभिन्न कलसों से स्नान कराने लगीं। किसी में स्वच्छ सलिल था, किसी में ज्योत्स्ना में रखा हुआ चांद्रजल, किसी में तीर्थजल, किसी में कुंकुमजल और किसी में चंदन-रस मिला हुआ सुगंधित जल स्नान कराने [ [अनुच्छेद तेरह अनुच्छेद चौदह ] राजा का श्राहारादि वर्णन में भी जलों का क्रम यही रखा जाता था । ऊँचे उठाए हुए कलसे के मुँह के पास हाथ लगाकर उँगलियों के बीच से जल गिराती हुई वे मानों फव्वारा सा बना रही थीं । महल के ऊँचे भाग में रहट से या पुर से पानी चढ़ाकर फिर उसे छिपी हुई नालियों से महल के भिन्न-भिन्न भागों में ले जाते थे और विशेषतः स्नानगृह में किसी युक्ति से फव्वारे बनाते थे जिन्हें गुप्तकाल की भाषा में यंत्रधारा गृह कहा जाता था । इन फव्वारों में भाँति-भाँति की शालभंजिकाएँ या पुतलियों बनाई जाती थीं और उनके मुख, नेत्र, कर्ण, हाथ आदि से जल की फुहारें निकलती हुई दिखाई जाती थीं। भारतीय प्रासादों की यह पुरानी विशेषता थी जो मध्यकाल में भी जारी रही, जैसा हेमचंद्र के द्वयाश्रयकाव्य के विवरण से ज्ञात होता है । भाँति-भांति की उन पुतलियों को ही यहाँ सलिलयंत्रदेवता कहा गया है । राजा स्नान कर चुके इस बात की सूचना महल भर में पहुँचाने के लिये अनेक शंख बजाए जाते थे जिसे स्नान-शंखध्वनि कहा जाता था। उसी के साथ बंदी लोग राजा का यश बखान करने के लिये समयोधित श्लोक पढ़ते और नौबतखाने में भी बहुत से बाजे बजाए जाने लगते थे । अभिषेक से निवृत होकर राजा ने सांप की केचुली की तरह अत्यंत झीने और हल्के दो धुले हुए श्वेत वस्त्र धारण किए और सिर पर रेशमी वस्त्र के पल्ले का उष्णीष धारण किया तब मंत्रपूत जल से पितरों को जलांजलि देकर सूर्य को प्रणाम किया और देव मंदिर में आए । जैसा हर्षचरित में हम राजकुल के वर्णन में दिखा चुके हैं , राजकुल के भीतर ही व्यायामभूमि और स्नानगृह के अतिरिक्त सुंदर देवगृह की भी व्यवस्था रहती थी। उसमें सम्राट और राजपरिवार के निजी दर्शन और पूजन के लिए कुल देवता की मूर्ति स्थापित की जाती थी । राजप्रासाद के मंदिर में भगवान् शिव की प्रतिमा स्थापित थी । राजा ने उसका पूजन किया और देवमंदिर से बाहर निकलकर पहले अग्निहोत्र किया और फिर विलेपन भूमि में जाकर केसर कपूर, कस्तूरी से मिले हुए चन्दन का शरीर में अनुलेपन किया। इन चारों से जो उत्तम सुगंधि बनती थी उसे उस युग की परिभाषा में यक्षकर्दम कहते थे । अमरकोश में कपूर, कस्तूरी, अगरु और कंकोल की सुगंधि को यक्षकम लिखा है । धन्वंतरि ने कुंकुम, कस्तूरी, कपूर, चंदन और अगुरु से बनी हुई महा मुगंधि को यक्षकर्दम नाम दिया है। लगभग नवीं शती के बाद इसे ही चतुःसम सुगंधि कहने लगे । तदनंतर राजा ने सुगंधित मालती के पुष्पों का शेखर धारण किया, अवसरोचित नए वस्त्र पहने और कान में रत्नजटित कर्णपूर का आभूषण पहनकर अपने संगी साथियों के साथ समुचित भोजन किया । भुक्त्वास्थानमंडप का वर्णन इसके बाद राजा ने धूमवर्त्ति का पान किया और तब जल से मुख शुद्ध करके पान खाया । उसके बाद वे प्रतिहारी के हाथ का अवलंब लेकर चुने हुए अभ्यंतर परिजनों के साथ भुक्त्वास्थान मंडप में गए। भोजनोपरांत सम्राट जहाँ बैठकर विश्राम करते थे वही भुक्त्वास्थानमंडप था जिसे मध्यकाल में दरबार-खास कहा जाता है। बाण की हपं से पहली भेंट भुक्त्वास्थानमंडप में हुई थी जो तीन कक्ष्याएँ पार करने के बाद महल के भीतरी भाग में स्थित था । हर्षचरित और कादंबरी दोनों में तत्संबंधी वर्णन में बहुत साम्य है । उस आस्थानमंडप में चारों ओर धवलांशुक की जवनिकाएँ पड़ी हुई थीं। इसका तात्पर्य यह हुआ कि वह मुख्यतः खुला हुआ मंडप था जिसकी छत स्तंभों पर टिकी हुई थी। दिल्ली के किले में बना हुआ दरबार-खास भी चारो ओर से खुला हुआ केवल खंभों पर टिका है। उसकी छत और खंभों पर सोने का काम है । बाण ने यहाँ कहा है कि आस्थानमंडप में सुनहले खंभों का समूह था । खंभों पर शालभंजिकाओं की प्रतिमाएँ उत्कीर्ण थीं। गुसाई जी ने भी लिखा है 'प्रतिमा खंभनि गढ़ि- गदि काढ़ीं' । गढ़ कर काढ़ी हुई मूर्तियों का तात्पर्य उभारदार उकेरी से था । कालिदास ने इन्हें ही स्तंभों पर बनी हुई योषित प्रतियातना कहा है। भारतीय स्थापत्य की यह विशेषता लगभग दो सहस्र वर्षों तक अक्षुण्ण रही। शुंगकाल और कुषाणकाल के स्तंभों पर बनी हुई शालभंजिकाएँ बहुत ही सुंदर और आकर्षक मानी जाती है । इन मूर्तियों को शालभंजिका कहने का हेतु यह था कि आरंभ में फूले हुए शाल-वृक्षों के नीचे खड़ी होकर स्त्रियाँ उनकी डालों को झुका कर और पुष्पों के झुग्गे तोड़कर क्रीड़ा करती थीं जिसे शालभंजिका क्रीड़ा कहते थे । क्रीड़ा की मुद्रा और उस मुद्रा में खड़ी हुई स्त्री भी शालभंजिका कही जाने लगी । तोरण के स्तंभ और बँडेरी के बाह्य कोने में झुके हुए शरीर वाली जो स्त्री मूर्ति बनाई जाती थी उसे तोरण-शालभंजिका कहा गया । [[अनुच्छेद पंद्रह एक - चरक में कई श्रोषधि द्रव्यों को मिलाकर धूमवर्ति बनाने का उल्लेख है। इसका जौ के समान बीच में मोटा, किनारों पर पतला होता था । कुट्टनीमतम् में भी प्राया है - में मृदु धौत धूपिताम्बरमग्राम्यं मंडनञ्च बिभ्राणा । परिपीत धूमवर्तिः स्थास्यासि रमणांतिके सुतनु ।। नागर सर्वस्व में धूमवर्ति का नुसखा इस प्रकार हैकर्पूरागुरु चंदनमुस्ता पूति प्रियंगुवालं च । मांसी चेति नृपाणां योग्या रतिनाथ धूमवर्तिः ॥ इस सूचना के लिए मैं अपने मित्र श्री त्रिदेव श्रायुर्वेदाचार्य का अनुगृहीत हूँ । अनुच्छेद सोलह ] वैशम्पायन से राजा का प्रश्न आस्थान मंडप के फर्श पर कस्तूरी मिश्रित चंदन का जल छिड़का गया था और थोड़ी-थोड़ी दूर पर पुष्पों की सजावट की गई थी । अगुरु की धूप की सुगंधि से वह महमहा रहा था । उसमें एक वेदिका या कुछ ऊँचा चबूतरा बना था जिस पर एक पलँग बिछा था । पलँग के एक ओर रखों का पादपीठ रखा था। उसके ऊपर कुसुमों की सुगंधि से बसाई हुई चादर बिछी थी और उसके सिरहाने रेशमी तकिया लगा था। शयन पर लेटकर राजा ने मुहूर्तं भर विश्राम किया। उस समय उनकी खड्ग-वाहिनी अंगरक्षिका तलवार गोद में रखकर फर्श पर बैठकर धीरे-धीरे हाथों से उनके पैर दबा रही थी। जो मित्र और मंत्री भुक्त्वास्थानमंडप में प्रवेश के अधिकारी थे, उनके साथ राजा बात चीत भी करते जाते थे । इस प्रकार स्वस्थ होकर राजा ने पास में स्थित प्रतिहारी से कहा'जाओ, अंतःपुर से वैशम्पायन को ले आओ ।' 'देव की जो आज्ञा यह कहकर उसने वैसा ही किया। राजा जब आज्ञा देते तो प्रतीहारी जैसी परिचारिकाओं को पृथिवी में मस्तक टेकने की मुद्रा में होकर उसे स्वीकार करना महल के शिष्टाचार का अंग था। इस मुद्रा को क्षितितलनिहितजानुकरतलमुद्रा कहा गया है । प्रतिहारी वैशम्पायन का पिंजड़ा लेकर जब लौटी तो उसके पीछे-पीछे सोने की वेत्रलता लिए बुड्ढा कंचुकी भी आया । उसके शरीर का ऊपरी भाग कुछ झुक गया था । वह श्वेत कंचुक पहने था और उसके सिर के बाल भी पक गए थे। उसका स्वर कुछ काँपता था और वह बहुत धीरे ही चल पाता था । उसने भी धरती पर हाथ टेककर राजा से विनती की - 'देव, देवियों निवेदन करती है कि वैशम्पायन ने स्नान और आहार कर लिया है और आपकी आज्ञा से प्रतिहारी इसे आपके पास लाई है।" यह कहकर वह हट गया और राजा ने वैशम्पायन से पूछा- 'कहिए, आपने अंतःपुर में कुछ रुचिकर आहार लिया ?" उसने कहा - 'देव, मैंने क्या नहीं खाया ? इच्छानुसार कसैला, मीठा जामुन का रस पिया । लाल-लाल अनार के दाने खाए । पके हुए द्राक्षा जैसे मीठे आँवले चखे । बहुत क्या, देवियाँ अपने हाथ से जो देतीं उसमें अमृत का स्वाद था। राजा ने ही बीच में रोककर कहा - 'अच्छा, यह सब हुआ । अब हमारा कुतूहल दूर करो और आरंभ से अपने जन्म की कथा कहो। किस देश में कैसे उत्पन्न हुए ? किसने नाम रखा ? माता कौन थी ? पिता कौन था ? वेदों का ज्ञान और शास्त्रों का परिचय कैसे हुआ ? कलाओं की उपलब्धि कैसे हुई ? क्या जन्मान्तर की सिद्धि थी या किसी ने वरदान दिया ? क्या पक्षी के वेश में कोई महापुरुष तो छिपा नहीं है ? पहले कहाँ रहते थे ? क्या आयु हुई ? पिंजड़े में कैसे फँस गए ? चांडाल के हाथ में कैसे पड़े और यहाँ तक कैसे पहुँचे ?' कुतूहलवान् राजा के इन प्रश्नों से सम्मानित हुए वैशम्पायन ने कुछ देर सोचकर सादर कहा - 'देव, यह कथा लंबी है । यदि कुतूहल है तो कृपया सुनें ।'
मुंबईः इन दिनों सलमान खान अपनी अपकमिंग फिल्म 'टाइगर 3' की शूटिंग में बिजी हैं। साथ ही एक्टर सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहते हैं और आये दिन अपनी पोस्ट शेयर कर फैंस को अपनी डेली रूटीन की झलक दिखाते रहते हैं। वहीं इस बार सलमान ने जो तस्वीर शेयर की है उससे उनके फैंस परेशान हो सकते हैं। बता दें कि हाल ही में सलमान को 'टाइगर 3' की शूटिंग के दौरान चोट लग गई और वह जख्मी हो गए। बता दें कि इसी साल ईद के मौके पर 21 अप्रैल को सलमान खान की फिल्म 'किसी का भाई किसी की जान' रिलीज हुई थी। जो बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई। अब सलमान जल्द ही फिल्म 'टाइगर 3' में नजर आएंगे। इसके अलावा सलमान 'नो एंट्री 2' और चिरंजीवी के 'गॉडफादर' में विशेष भूमिका निभाते नजर आएंगे।
मुंबईः इन दिनों सलमान खान अपनी अपकमिंग फिल्म 'टाइगर तीन' की शूटिंग में बिजी हैं। साथ ही एक्टर सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहते हैं और आये दिन अपनी पोस्ट शेयर कर फैंस को अपनी डेली रूटीन की झलक दिखाते रहते हैं। वहीं इस बार सलमान ने जो तस्वीर शेयर की है उससे उनके फैंस परेशान हो सकते हैं। बता दें कि हाल ही में सलमान को 'टाइगर तीन' की शूटिंग के दौरान चोट लग गई और वह जख्मी हो गए। बता दें कि इसी साल ईद के मौके पर इक्कीस अप्रैल को सलमान खान की फिल्म 'किसी का भाई किसी की जान' रिलीज हुई थी। जो बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई। अब सलमान जल्द ही फिल्म 'टाइगर तीन' में नजर आएंगे। इसके अलावा सलमान 'नो एंट्री दो' और चिरंजीवी के 'गॉडफादर' में विशेष भूमिका निभाते नजर आएंगे।
ईरान की पार्स पेट्रोल व गैस कंपनी के मुख्य कार्यकारी निदेशक ने ईरान-भारत के बीच दक्षिणी पार्स गैस फ़ील्ड के 'फ़र्ज़ाद बी' फ़ेज़ के विकास पर सहमति होने की सूचना दी है। तेहरान के जुमे के इमाम ने कहा है कि ईरानी राष्ट्र के ख़िलाफ़ साम्राज्य और विश्व ज़ायोनीवाद की नई चाल, आतंकवादी गुट एमकेओ का समर्थन करना है। तुर्की के विदेश मंत्री ने कहा है कि सीरिया संकट का स्थायी हल ईरान और रूस को शामिल किए बिना नहीं निकल सकता। ईरान की ताइक्वांडो खिलाड़ी कीमिया अलीज़ादे ने रियो ओलंपिक 2016 में ताइक्वांडो प्रतियोगिता के 57 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया है, ओलंपिक खेलों में पदक जीतने वाली वह पहली ईरानी महिला खिलाड़ी बन गई हैं। ईरान ने तुर्की में हालिया भीषण बम हमलों की निंदा करते हुए तुर्क सरकार और जनता से हमदर्दी जताई है। ईरान की न्याय पालिका की मानवाधिकार परिषद ने कहा है कि ब्रिटेन अपने यहां की दयनीय मानवाधिकार स्थिति के मद्देनज़र, अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों में सदस्यता के लायक़ नहीं है। संसद सभापति ने नॉर्वे के विदेश मंत्री से मुलाक़ात में जेसीपीओए को ईरान के निष्ठापूर्ण व्यवहार का चरम बताया है। ईरान के हज विभाग के प्रमुख ने कहा है कि ईरानी श्रद्धालुओं को हज के लिए भेजने हेतु हज कोटे को बचाए रखने की कोशिश जारी है। ईरान के संसद सभापति ने कहा है कि ईरान, क्षेत्र में आतंकवाद के संकट के हल में रूस से सहयोग कर रहा है लेकिन उसने अपनी कोई सैन्य छावनी इस देश के हवाले नहीं की है। ईरान की उच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रवक्ता ने कहा है कि तकफ़ीरी आतंकवाद के विरुद्ध ईरान, सीरिया व दमिश्क़ का संयुक्त सहयोग व्यापक रूप से जारी है।
ईरान की पार्स पेट्रोल व गैस कंपनी के मुख्य कार्यकारी निदेशक ने ईरान-भारत के बीच दक्षिणी पार्स गैस फ़ील्ड के 'फ़र्ज़ाद बी' फ़ेज़ के विकास पर सहमति होने की सूचना दी है। तेहरान के जुमे के इमाम ने कहा है कि ईरानी राष्ट्र के ख़िलाफ़ साम्राज्य और विश्व ज़ायोनीवाद की नई चाल, आतंकवादी गुट एमकेओ का समर्थन करना है। तुर्की के विदेश मंत्री ने कहा है कि सीरिया संकट का स्थायी हल ईरान और रूस को शामिल किए बिना नहीं निकल सकता। ईरान की ताइक्वांडो खिलाड़ी कीमिया अलीज़ादे ने रियो ओलंपिक दो हज़ार सोलह में ताइक्वांडो प्रतियोगिता के सत्तावन किग्रा वर्ग में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया है, ओलंपिक खेलों में पदक जीतने वाली वह पहली ईरानी महिला खिलाड़ी बन गई हैं। ईरान ने तुर्की में हालिया भीषण बम हमलों की निंदा करते हुए तुर्क सरकार और जनता से हमदर्दी जताई है। ईरान की न्याय पालिका की मानवाधिकार परिषद ने कहा है कि ब्रिटेन अपने यहां की दयनीय मानवाधिकार स्थिति के मद्देनज़र, अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों में सदस्यता के लायक़ नहीं है। संसद सभापति ने नॉर्वे के विदेश मंत्री से मुलाक़ात में जेसीपीओए को ईरान के निष्ठापूर्ण व्यवहार का चरम बताया है। ईरान के हज विभाग के प्रमुख ने कहा है कि ईरानी श्रद्धालुओं को हज के लिए भेजने हेतु हज कोटे को बचाए रखने की कोशिश जारी है। ईरान के संसद सभापति ने कहा है कि ईरान, क्षेत्र में आतंकवाद के संकट के हल में रूस से सहयोग कर रहा है लेकिन उसने अपनी कोई सैन्य छावनी इस देश के हवाले नहीं की है। ईरान की उच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रवक्ता ने कहा है कि तकफ़ीरी आतंकवाद के विरुद्ध ईरान, सीरिया व दमिश्क़ का संयुक्त सहयोग व्यापक रूप से जारी है।
आजमगढ़ जिले में एक दिन पूर्व हुई बारिश से लगभग सैकड़ों एकड़ फसल को नुकसान पहुंचा है। इस बारिश से सबसे ज्यादा नुकसान बूढ़नपुर तहसील में हुआ है। बूढ़नपुर क्षेत्र के इश्वरपुर, कोयलसा, रतानावे, पुरखीपुर, भैरोपुर, केशवपुर, भरौली, टोडर, चुमुकुनी, गाजीपुर, बभनपुर, पियरिया, मोहननगर, मुबारकपुर, सरैय्या, हुसेपुर, रानीपुर सहित बड़ी संख्या में गोवों की फसल प्रभावित हुई है। लगभग 70 प्रतिशत पक चुकी गेहूं की इस फसल को पानी से नुकसान हुआ है। बारिश के कारण गेहूं की फसल खेतों में गिर गई है, जिसके कारण निश्चित रूप से किसानों को नुकसान होगा। दैनिक भास्कर से बातचीत करते हुए किसान ज्वाला प्रसाद मिश्र का कहना है कि बारिश होने के कारण गेहूं की खड़ी फसल को बहुत ही नुकसान हुआ है। गेहूं की लगभग तैयार हुई फसल बर्बाद हो गई है। किसानों का कहना है कि यही बारिश यदि जनवरी माह में हुई होती तो गेहूं की फसलों के लिए वरदान साबित होगी। मगर, मार्च महीने में हुई इस बारिश से हम लोगों की फसलें प्रभावित हो रही हैं। वहीं जिले में बारिश के कारण फसलों के नुकसान के सवाल पर जिला कृषि अधिकारी गगनदीप सिंह ने पहले तो फसलों के नुकसान को सिरे से खारिज कर दिया। हालांकि बाद में जिले में एक प्रतिशित किसानों की फसल नुकसान होने की बात को स्वीकार किया है। जिस तरह से बड़ी संख्या में खेतों की फसलें जमीन पर गिर गई हैं उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिले में किसानों की कितनी फसल को नुकसान हुआ है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
आजमगढ़ जिले में एक दिन पूर्व हुई बारिश से लगभग सैकड़ों एकड़ फसल को नुकसान पहुंचा है। इस बारिश से सबसे ज्यादा नुकसान बूढ़नपुर तहसील में हुआ है। बूढ़नपुर क्षेत्र के इश्वरपुर, कोयलसा, रतानावे, पुरखीपुर, भैरोपुर, केशवपुर, भरौली, टोडर, चुमुकुनी, गाजीपुर, बभनपुर, पियरिया, मोहननगर, मुबारकपुर, सरैय्या, हुसेपुर, रानीपुर सहित बड़ी संख्या में गोवों की फसल प्रभावित हुई है। लगभग सत्तर प्रतिशत पक चुकी गेहूं की इस फसल को पानी से नुकसान हुआ है। बारिश के कारण गेहूं की फसल खेतों में गिर गई है, जिसके कारण निश्चित रूप से किसानों को नुकसान होगा। दैनिक भास्कर से बातचीत करते हुए किसान ज्वाला प्रसाद मिश्र का कहना है कि बारिश होने के कारण गेहूं की खड़ी फसल को बहुत ही नुकसान हुआ है। गेहूं की लगभग तैयार हुई फसल बर्बाद हो गई है। किसानों का कहना है कि यही बारिश यदि जनवरी माह में हुई होती तो गेहूं की फसलों के लिए वरदान साबित होगी। मगर, मार्च महीने में हुई इस बारिश से हम लोगों की फसलें प्रभावित हो रही हैं। वहीं जिले में बारिश के कारण फसलों के नुकसान के सवाल पर जिला कृषि अधिकारी गगनदीप सिंह ने पहले तो फसलों के नुकसान को सिरे से खारिज कर दिया। हालांकि बाद में जिले में एक प्रतिशित किसानों की फसल नुकसान होने की बात को स्वीकार किया है। जिस तरह से बड़ी संख्या में खेतों की फसलें जमीन पर गिर गई हैं उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिले में किसानों की कितनी फसल को नुकसान हुआ है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
मधेपुरा। बिहार के मधेपुरा जिले में मंगलवार को कोसी नदी में सेना के 15 जवानों और एक अधिकारी को ले जा रही एक नाव पलट गई। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ ) के जवानों ने हालांकि सभी लोगों को सुरक्षित निकाल लिया। मधेपुरा के वरीय उपसमाहर्ता (एडीएम) विनय कुमार सिंह ने बताया कि एक नाव पर सवार होकर बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने के लिए वे खुद 15 सेना के जवानों के साथ निकले थे। इसी क्रम में वे लोग रतवारा से बपसिया गांव जा रहे थे कि कोसी की मुख्य धारा में तेज हवा के कारण उनकी नाव अनियंत्रित हो गई और पलट गई। एक अन्य मोटरबोट पर गश्त कर रहे एनडीआरएफ के जवानों ने नाव को डूबते देखते और तत्काल कारवाई करते हुए सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
मधेपुरा। बिहार के मधेपुरा जिले में मंगलवार को कोसी नदी में सेना के पंद्रह जवानों और एक अधिकारी को ले जा रही एक नाव पलट गई। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल के जवानों ने हालांकि सभी लोगों को सुरक्षित निकाल लिया। मधेपुरा के वरीय उपसमाहर्ता विनय कुमार सिंह ने बताया कि एक नाव पर सवार होकर बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने के लिए वे खुद पंद्रह सेना के जवानों के साथ निकले थे। इसी क्रम में वे लोग रतवारा से बपसिया गांव जा रहे थे कि कोसी की मुख्य धारा में तेज हवा के कारण उनकी नाव अनियंत्रित हो गई और पलट गई। एक अन्य मोटरबोट पर गश्त कर रहे एनडीआरएफ के जवानों ने नाव को डूबते देखते और तत्काल कारवाई करते हुए सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
LUCKNOW:सीएम योगी आदित्यनाथ ने स्मार्ट सिटी मिशन में सूबे के तीन नये शहरों को शामिल किये जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय शहरी विकास मंत्री एम। वेंकैया नायडू को धन्यवाद देते करते हुए केंद्र सरकार के प्रति आभार जताया है। सीएम ने आश्वस्त किया कि प्रदेश सरकार स्मार्ट सिटी मिशन के तहत चयनित शहरों के विकास के लिए तत्परता से काम शुरू कर उन्हें समय से पूरा कराने का हरसंभव प्रयास करेगी। प्रदेश के जिन तीन शहरों को स्मार्ट सिटी मिशन में शामिल किया गया है, उनमें वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई का शहर झांसी, क्राफ्ट नगरी अलीगढ़ एवं संगम नगरी इलाहाबाद शामिल हैं। सीएम ने कहा कि स्मार्ट सिटी मिशन के तहत लखनऊ के साथ वाराणसी, कानपुर व आगरा को पहले ही सूचीबद्ध किया जा चुका है। मिशन के अनुरूप इन शहरों में कई परियोजनाओं को अंतिम रूप देने की कार्यवाही तेजी से चल रही है। विगत 5 मई, 2017 को लखनऊ में केंद्रीय शहरी विकास मंत्री के साथ सम्पन्न बैठक प्रदेश के अन्य शहरों को स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत आच्छादित कराने के लिए तैयारी शुरू करने की बात कही गयी थी। उन्होंने खुशी जताई कि केंद्रीय मंत्री ने अपने आश्वासन के अनुरूप मिशन के तहत चयनित किये जाने वाले संभावित शहरों पर गंभीरता से विचार करते हुए इन्हें स्मार्ट सिटी मिशन के तहत आच्छादित करने की स्वीकृति प्रदान कर दी है। नये शहरों को सम्मिलित करते हुए यूपी में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत अब शहरों की संख्या सात हो गयी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शेष पांच शहरों मेरठ, रायबरेली, गाजियाबाद, सहारनपुर व रामपुर को स्मार्ट सिटी मिशन परियोजना में शामिल कराने के लिए राज्य सरकार द्वारा गम्भीरता से प्रयास किये जाएंगे। स एम ने कहा कि स्मार्ट सिटी मिशन के तहत चुने गये शहरों में आधारभूत सुविधाओं एवं सेवाओं का विकास मानक के अनुरूप कराने के लिए कार्य शुरू कर दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार इन शहरों के विकास में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों एवं कार्यदायी संस्थाओं के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने में कतई नहीं हिचकेगी। उल्लेखनीय है कि स्मार्ट सिटी मिशन के तहत प्रत्येक नागरिक को किफायती घर, प्रत्येक तरह की आधारभूत सुविधा, 24 घंटे पानी एवं विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था, शिक्षा के पर्याप्त विकल्प, सुरक्षा की आधुनिक सुविधा, मनोरंजन और खेलकूद के साधन सहित अच्छे स्कूल और अस्पताल के अलावा, आसपास के क्षेत्रों से अच्छी और तेज कनेक्टिविटी की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना बनायी गयी है।
LUCKNOW:सीएम योगी आदित्यनाथ ने स्मार्ट सिटी मिशन में सूबे के तीन नये शहरों को शामिल किये जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय शहरी विकास मंत्री एम। वेंकैया नायडू को धन्यवाद देते करते हुए केंद्र सरकार के प्रति आभार जताया है। सीएम ने आश्वस्त किया कि प्रदेश सरकार स्मार्ट सिटी मिशन के तहत चयनित शहरों के विकास के लिए तत्परता से काम शुरू कर उन्हें समय से पूरा कराने का हरसंभव प्रयास करेगी। प्रदेश के जिन तीन शहरों को स्मार्ट सिटी मिशन में शामिल किया गया है, उनमें वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई का शहर झांसी, क्राफ्ट नगरी अलीगढ़ एवं संगम नगरी इलाहाबाद शामिल हैं। सीएम ने कहा कि स्मार्ट सिटी मिशन के तहत लखनऊ के साथ वाराणसी, कानपुर व आगरा को पहले ही सूचीबद्ध किया जा चुका है। मिशन के अनुरूप इन शहरों में कई परियोजनाओं को अंतिम रूप देने की कार्यवाही तेजी से चल रही है। विगत पाँच मई, दो हज़ार सत्रह को लखनऊ में केंद्रीय शहरी विकास मंत्री के साथ सम्पन्न बैठक प्रदेश के अन्य शहरों को स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत आच्छादित कराने के लिए तैयारी शुरू करने की बात कही गयी थी। उन्होंने खुशी जताई कि केंद्रीय मंत्री ने अपने आश्वासन के अनुरूप मिशन के तहत चयनित किये जाने वाले संभावित शहरों पर गंभीरता से विचार करते हुए इन्हें स्मार्ट सिटी मिशन के तहत आच्छादित करने की स्वीकृति प्रदान कर दी है। नये शहरों को सम्मिलित करते हुए यूपी में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत अब शहरों की संख्या सात हो गयी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शेष पांच शहरों मेरठ, रायबरेली, गाजियाबाद, सहारनपुर व रामपुर को स्मार्ट सिटी मिशन परियोजना में शामिल कराने के लिए राज्य सरकार द्वारा गम्भीरता से प्रयास किये जाएंगे। स एम ने कहा कि स्मार्ट सिटी मिशन के तहत चुने गये शहरों में आधारभूत सुविधाओं एवं सेवाओं का विकास मानक के अनुरूप कराने के लिए कार्य शुरू कर दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार इन शहरों के विकास में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों एवं कार्यदायी संस्थाओं के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने में कतई नहीं हिचकेगी। उल्लेखनीय है कि स्मार्ट सिटी मिशन के तहत प्रत्येक नागरिक को किफायती घर, प्रत्येक तरह की आधारभूत सुविधा, चौबीस घंटाटे पानी एवं विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था, शिक्षा के पर्याप्त विकल्प, सुरक्षा की आधुनिक सुविधा, मनोरंजन और खेलकूद के साधन सहित अच्छे स्कूल और अस्पताल के अलावा, आसपास के क्षेत्रों से अच्छी और तेज कनेक्टिविटी की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना बनायी गयी है।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
कोरोना के कारण हर क्षेत्र के कार्य में रुकावट आई है वही इसका असर मनोरंजन जगत में देखने को मिला। इस बीच 90's के दशक की मशहूर अभिनेत्री रवीना टंडन तथा अक्षय खन्ना पहली बार निर्देशक विजय गुट्टे की वेबसीरीज 'Legecy' में एक दूसरे का आमना-सामना करते दिखाई देंगे। पहली बार अभिनय के इन दो दिग्गजों को एक साथ, एक मंच पर देखना बहुत शानदार अनुभव होगा। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इस सीरीज में दोनों किरदारों के बीच के हाई वोल्टेज ड्रामा तथा पावर का टकराव देखने को मिलने वाला है। इन दोनों के मध्य के इस झगड़े को दिखाने के लिए और दुनिया भर के ऑडियंस तक इस ड्रामा सीरीज को पहुंचाने के लिए वेबसीरीज की शूटिंग कई देशों में हो चुकी है। निर्देशक विजय गुट्टे इसके पहले 'द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर ' बना चुके हैं। जिसने बहुत तारीफें बटोरी थीं तथा अब वेबसीरीज 'Legecy' के माध्यम से वह डिजिटल जगत एंट्री वह अक्षय खन्ना तथा रवीना टंडन के साथ कर रहे हैं। प्रोजेक्ट के बारे में अक्षय खन्ना बोलते हैं कि बहुत जबरदस्त एक्सपीरियंस होता है उन कहानी पर काम करने में, जहां आप अपनी सीमा से परे, अपनी शक्तियों का प्रदर्शन करते हैं। हम कहानी के बारे में जानकर थे, इसीलिए ये हमारी जिम्मेदारी थी कि हम अपना सर्वश्रेष्ठ दें, जिससे ऑडियंस तक वो बात पहुंच सके जो हम पहुंचाना चाहते हैं और मैं खुश हूं कि 'legecy' मेरा आरम्भ है वेबसीरीज के जगत में। अभिनेत्री रवीना टंडन भी खुशी से फूली नहीं समा रहीं हैं।
कोरोना के कारण हर क्षेत्र के कार्य में रुकावट आई है वही इसका असर मनोरंजन जगत में देखने को मिला। इस बीच नब्बे's के दशक की मशहूर अभिनेत्री रवीना टंडन तथा अक्षय खन्ना पहली बार निर्देशक विजय गुट्टे की वेबसीरीज 'Legecy' में एक दूसरे का आमना-सामना करते दिखाई देंगे। पहली बार अभिनय के इन दो दिग्गजों को एक साथ, एक मंच पर देखना बहुत शानदार अनुभव होगा। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इस सीरीज में दोनों किरदारों के बीच के हाई वोल्टेज ड्रामा तथा पावर का टकराव देखने को मिलने वाला है। इन दोनों के मध्य के इस झगड़े को दिखाने के लिए और दुनिया भर के ऑडियंस तक इस ड्रामा सीरीज को पहुंचाने के लिए वेबसीरीज की शूटिंग कई देशों में हो चुकी है। निर्देशक विजय गुट्टे इसके पहले 'द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर ' बना चुके हैं। जिसने बहुत तारीफें बटोरी थीं तथा अब वेबसीरीज 'Legecy' के माध्यम से वह डिजिटल जगत एंट्री वह अक्षय खन्ना तथा रवीना टंडन के साथ कर रहे हैं। प्रोजेक्ट के बारे में अक्षय खन्ना बोलते हैं कि बहुत जबरदस्त एक्सपीरियंस होता है उन कहानी पर काम करने में, जहां आप अपनी सीमा से परे, अपनी शक्तियों का प्रदर्शन करते हैं। हम कहानी के बारे में जानकर थे, इसीलिए ये हमारी जिम्मेदारी थी कि हम अपना सर्वश्रेष्ठ दें, जिससे ऑडियंस तक वो बात पहुंच सके जो हम पहुंचाना चाहते हैं और मैं खुश हूं कि 'legecy' मेरा आरम्भ है वेबसीरीज के जगत में। अभिनेत्री रवीना टंडन भी खुशी से फूली नहीं समा रहीं हैं।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव व रोहडू विधानसभा क्षेत्र के विधायक मोहन लाल ब्राक्टा का मंदिर कमेटी देवता महेश्ववर महाराज समरेरी के लोगों ने तीन पंचायत का कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें ग्राम पंचायत समरकोट, ग्राम पंचायत भमनोली व ग्राम पंचायत भलून द्वारा देवता साहिब महेश्वर के प्रांगण में विधायक का फूल की मालाओं से भव्य स्वागत किया। समरेरी वासियों ने विधायक को अपनी -अपनी समस्याओं से अवगत करवाया। विधायक ने कहा कि देवी-देवता हमारे आस्था के प्रतीत हंै, जिससे हमारी सदियों पुरानी देव सस्कृति संजोए हुए हैं। हम सबका यह नैतिक कत्र्तव्य बनता है कि हम इस इस देव समाज को संजोए रखें। हमारे क्षेत्र व हिमाचल की पहचान हमारी देव संस्कृति से है। विधायक ने लोगों की समस्याओं को सुना व हर संभव सहायता करने का आश्वासन भी दिया। विधायक के साथ कांग्रेस मंडल अध्यक्ष करतार सिंह कुल्ला, उपाध्यक्ष कांग्रेस मंडल रोहडू राजा राम चौहान, महासचिव कांग्रेस मंडल रोहडू पवन चौहान, महासचिव कॉंग्रेस मंडल रोहडू रवी रावत, महासचिव कांग्रेस मंडल रोहडू रविंद्र जोरटा, महासचिव कांग्रेस मंडल रोहडू कहान चंद चौहान, जिला शिमला महिला कांग्रेस कमेटी की महासचिव राजकुमारी सोनी, जिला शिमला कांग्रेस सेवा दल अध्यक्ष अजीत राणा, कॉंग्रेस मंडल रोहडू सेवा दल अध्यक्ष सुदेश भरेट, कांग्रेस मण्डल युवा कांग्रेस मंडल के अध्यक्ष बलदेव सिंटियान, कांग्रेस मण्डल रोहडू युवा उपाध्यक्ष अशोक डांडा, कांग्रेस मंडल रोहडू युवा कांग्रेस सोशल मीडिया को-आडिनेटर रजत हामटा, प्रधान ग्राम पंचायत भलून रोशन लाल नशिंटू, प्रधान ग्राम पंचायत समरकोट शकुतला घामटा, पंचयात समिति सदस्य जीतेंद्र व मंदिर कमेटी के मोतमीन व समस्त मंदिर के सदस्य, समस्त पंचायत के महिला मंडल की महिलाएं व समस्त पंचायत के ग्रामवासी मौजूद रहे।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव व रोहडू विधानसभा क्षेत्र के विधायक मोहन लाल ब्राक्टा का मंदिर कमेटी देवता महेश्ववर महाराज समरेरी के लोगों ने तीन पंचायत का कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें ग्राम पंचायत समरकोट, ग्राम पंचायत भमनोली व ग्राम पंचायत भलून द्वारा देवता साहिब महेश्वर के प्रांगण में विधायक का फूल की मालाओं से भव्य स्वागत किया। समरेरी वासियों ने विधायक को अपनी -अपनी समस्याओं से अवगत करवाया। विधायक ने कहा कि देवी-देवता हमारे आस्था के प्रतीत हंै, जिससे हमारी सदियों पुरानी देव सस्कृति संजोए हुए हैं। हम सबका यह नैतिक कत्र्तव्य बनता है कि हम इस इस देव समाज को संजोए रखें। हमारे क्षेत्र व हिमाचल की पहचान हमारी देव संस्कृति से है। विधायक ने लोगों की समस्याओं को सुना व हर संभव सहायता करने का आश्वासन भी दिया। विधायक के साथ कांग्रेस मंडल अध्यक्ष करतार सिंह कुल्ला, उपाध्यक्ष कांग्रेस मंडल रोहडू राजा राम चौहान, महासचिव कांग्रेस मंडल रोहडू पवन चौहान, महासचिव कॉंग्रेस मंडल रोहडू रवी रावत, महासचिव कांग्रेस मंडल रोहडू रविंद्र जोरटा, महासचिव कांग्रेस मंडल रोहडू कहान चंद चौहान, जिला शिमला महिला कांग्रेस कमेटी की महासचिव राजकुमारी सोनी, जिला शिमला कांग्रेस सेवा दल अध्यक्ष अजीत राणा, कॉंग्रेस मंडल रोहडू सेवा दल अध्यक्ष सुदेश भरेट, कांग्रेस मण्डल युवा कांग्रेस मंडल के अध्यक्ष बलदेव सिंटियान, कांग्रेस मण्डल रोहडू युवा उपाध्यक्ष अशोक डांडा, कांग्रेस मंडल रोहडू युवा कांग्रेस सोशल मीडिया को-आडिनेटर रजत हामटा, प्रधान ग्राम पंचायत भलून रोशन लाल नशिंटू, प्रधान ग्राम पंचायत समरकोट शकुतला घामटा, पंचयात समिति सदस्य जीतेंद्र व मंदिर कमेटी के मोतमीन व समस्त मंदिर के सदस्य, समस्त पंचायत के महिला मंडल की महिलाएं व समस्त पंचायत के ग्रामवासी मौजूद रहे।
बिहार में जब से नीतीश कुमार ने भाजपा का दामन छोड़ आरजेडी के साथ मिलकर सरकार बनाई है, तब से आये दिन महागठबंधन पर बीजेपी निशाना साधती नज़र आती है. दरअसल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बीजेपी नेता सुशील मोदी के उस बात का जवाब दिया जिसमें उन्होंने नीतीश कुमार पर सरकार गिरने की भविष्यवाणी की थी. सीएम नीतीश कुमार ने सुशील मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि अब बेचारे कुछ बोल रहे हैं तो उन्हें रोज-रोज बोलना चाहिए क्योंकि केंद्र सरकार को भी तो खुश करना है. जिससे उन्हें न्हें बीजेपी में कोई खास पद पर जगह मिल जाएगी. जब जेडीयू की बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनी तो उन्हें कोई पद नहीं दिया गया इसलिए उन्हें तकलीफ थी. दरअसल, बीजेपी नेता सुशील मोदी ने बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जल्दी से जल्दी आईआरसीटीसी घोटाले की जांच चाहते हैं. जिससे कि बिहार सरकार के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव जेल चले जाएं, ताकि वे जल्द से जल्द आरजेड़ी को तोड़ा जा सकें. इस दौरान नीतीश कुमार ने कहा कि सुशील मोदी से जल्दी कहिए कि महागठबंधन सरकार को गिरा दें. चूंकि, जब से प्रदेश में साल 2020 में सरकार बनी हैं तब से उनको किसी भी पद से नवाजा नहीं गया है. इसके चलते मुझे तकलीफ थी. जब से जेडीयू-आरजेडी की सरकार बनी है तब से बीजेपी लगातार हमलावर हो गई है. ऐसे में मुख्यमंत्री नीतीश के पुराने सहयोगी रह चुके सुशील मोदी लगातार नीतीश कुमार पर निशाना साध रहे हैं. उन्होंने इससे पहले भी कहा था कि नीतीश कुमार उपराष्ट्रपति बनना चाहते थे. इस पर सीएम नीतीश कुमार ने पलटवार करते हुए कहा था कि एक आदमी को यह कहते सुना कि मैं उपराष्ट्रपति बनना चाहता था. यह फर्जी है. एकदम बोगस बात है.
बिहार में जब से नीतीश कुमार ने भाजपा का दामन छोड़ आरजेडी के साथ मिलकर सरकार बनाई है, तब से आये दिन महागठबंधन पर बीजेपी निशाना साधती नज़र आती है. दरअसल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बीजेपी नेता सुशील मोदी के उस बात का जवाब दिया जिसमें उन्होंने नीतीश कुमार पर सरकार गिरने की भविष्यवाणी की थी. सीएम नीतीश कुमार ने सुशील मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि अब बेचारे कुछ बोल रहे हैं तो उन्हें रोज-रोज बोलना चाहिए क्योंकि केंद्र सरकार को भी तो खुश करना है. जिससे उन्हें न्हें बीजेपी में कोई खास पद पर जगह मिल जाएगी. जब जेडीयू की बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनी तो उन्हें कोई पद नहीं दिया गया इसलिए उन्हें तकलीफ थी. दरअसल, बीजेपी नेता सुशील मोदी ने बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जल्दी से जल्दी आईआरसीटीसी घोटाले की जांच चाहते हैं. जिससे कि बिहार सरकार के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव जेल चले जाएं, ताकि वे जल्द से जल्द आरजेड़ी को तोड़ा जा सकें. इस दौरान नीतीश कुमार ने कहा कि सुशील मोदी से जल्दी कहिए कि महागठबंधन सरकार को गिरा दें. चूंकि, जब से प्रदेश में साल दो हज़ार बीस में सरकार बनी हैं तब से उनको किसी भी पद से नवाजा नहीं गया है. इसके चलते मुझे तकलीफ थी. जब से जेडीयू-आरजेडी की सरकार बनी है तब से बीजेपी लगातार हमलावर हो गई है. ऐसे में मुख्यमंत्री नीतीश के पुराने सहयोगी रह चुके सुशील मोदी लगातार नीतीश कुमार पर निशाना साध रहे हैं. उन्होंने इससे पहले भी कहा था कि नीतीश कुमार उपराष्ट्रपति बनना चाहते थे. इस पर सीएम नीतीश कुमार ने पलटवार करते हुए कहा था कि एक आदमी को यह कहते सुना कि मैं उपराष्ट्रपति बनना चाहता था. यह फर्जी है. एकदम बोगस बात है.
नई दिल्ली. वनप्लस के आने वाले स्मार्टफोन OnePlus 5T को लेकर काफी समय से चर्चा जारी है, जिनके अनुसार कंपनी जल्द ही इस फोन को लॉन्च कर सकती है और अभी तक इसके कई स्पेसिफिकेशन और फीचर्स भी लीक के माध्यम से सामने आ चुके हैं. इस फोन में 3. 5mm ऑडियो जैक दिया जाएगा और एक ट्वीट में कंपनी ने हिंट दिया कि यह फोन कंपनी सबसे पहले न्यू यॉर्क में पेश कर सकती है. अब फोन के सबसे जरुरी और यूज़र्स के लिए सबसे दिलचस्प जानकारी मिली है. Weibo के जरिए कंपनी के CEO Pate Lau ने बताया है कि इस स्मार्टफोन की कीमत CNY 4,000 रुपए के अंदर होगी. यानी कि करीब $600, जो कि भारत के हिसाब से 39,000 रुपए के करीब हो सकती है। हालांकि भारत में यह फोन 40,000 रुपए के करीब हो सकता है. यदि इन दिनों आने वाले स्मार्टफोन से तुलना करें तो वनप्लस का यह स्मार्टफोन स्पेसिफिकेशन के हिसाब से कुछ अधिक कीमत का नहीं लगता है. इस फोन के बारे में यह भी कहा जा रहा है कि यह हाल ही में लॉन्च हुए Oppo R11S से मिलता जुलता हो सकता है. जानकारियों के अनुसार OnePlus 5T में 18:9 एस्पेक्ट रेशियो के साथ 6-इंच का फुल एचडी+ डिसप्ले हो सकता है. जिसका स्क्रीन रेजल्यूशन 2160×१०८० पिक्सल होगा. यह स्मार्टफोन 2. 4गीगाहर्ट्ज स्नैपड्रैगन 835 आॅक्टाकोर प्रोसेसर पर पेश होगा. ये फ़ोन दो स्टोरेज वेरिएंट में लॉन्च होगा. जिसमें एक वेरिएंट में 6जीबी रैम के साथ 64जीबी इंटरनल स्टोरेज और 8जीबी रैम के साथ 128जीबी इंटरनल स्टोरेज उपलब्ध होगी. फोटोग्राफी के लिए इसमें 16-मेगापिक्सल का रियर कैमरा दिया गया है, जिसमें 4के वीडियो रिकॉर्डिंग की क्षमता होगा. वहीं, वीडियो कॉलिंग और सेल्फी के लिए 20-मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा होगा और इसकी मदद से फुल एचडी वीडियो रिकॉर्डिंग की जा सकती है.
नई दिल्ली. वनप्लस के आने वाले स्मार्टफोन OnePlus पाँचT को लेकर काफी समय से चर्चा जारी है, जिनके अनुसार कंपनी जल्द ही इस फोन को लॉन्च कर सकती है और अभी तक इसके कई स्पेसिफिकेशन और फीचर्स भी लीक के माध्यम से सामने आ चुके हैं. इस फोन में तीन. पाँच मिलीमीटर ऑडियो जैक दिया जाएगा और एक ट्वीट में कंपनी ने हिंट दिया कि यह फोन कंपनी सबसे पहले न्यू यॉर्क में पेश कर सकती है. अब फोन के सबसे जरुरी और यूज़र्स के लिए सबसे दिलचस्प जानकारी मिली है. Weibo के जरिए कंपनी के CEO Pate Lau ने बताया है कि इस स्मार्टफोन की कीमत CNY चार,शून्य रुपयापए के अंदर होगी. यानी कि करीब छः सौ डॉलर, जो कि भारत के हिसाब से उनतालीस,शून्य रुपयापए के करीब हो सकती है। हालांकि भारत में यह फोन चालीस,शून्य रुपयापए के करीब हो सकता है. यदि इन दिनों आने वाले स्मार्टफोन से तुलना करें तो वनप्लस का यह स्मार्टफोन स्पेसिफिकेशन के हिसाब से कुछ अधिक कीमत का नहीं लगता है. इस फोन के बारे में यह भी कहा जा रहा है कि यह हाल ही में लॉन्च हुए Oppo Rग्यारहS से मिलता जुलता हो सकता है. जानकारियों के अनुसार OnePlus पाँचT में अट्ठारह:नौ एस्पेक्ट रेशियो के साथ छः-इंच का फुल एचडी+ डिसप्ले हो सकता है. जिसका स्क्रीन रेजल्यूशन दो हज़ार एक सौ साठ×एक हज़ार अस्सी पिक्सल होगा. यह स्मार्टफोन दो. चारगीगाहर्ट्ज स्नैपड्रैगन आठ सौ पैंतीस आॅक्टाकोर प्रोसेसर पर पेश होगा. ये फ़ोन दो स्टोरेज वेरिएंट में लॉन्च होगा. जिसमें एक वेरिएंट में छःजीबी रैम के साथ चौंसठजीबी इंटरनल स्टोरेज और आठजीबी रैम के साथ एक सौ अट्ठाईसजीबी इंटरनल स्टोरेज उपलब्ध होगी. फोटोग्राफी के लिए इसमें सोलह-मेगापिक्सल का रियर कैमरा दिया गया है, जिसमें चारके वीडियो रिकॉर्डिंग की क्षमता होगा. वहीं, वीडियो कॉलिंग और सेल्फी के लिए बीस-मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा होगा और इसकी मदद से फुल एचडी वीडियो रिकॉर्डिंग की जा सकती है.
Team India: भारत के एक दिग्गज क्रिकेटर पर टीम इंडिया से ड्रॉप होने का खतरा है, लेकिन फिर भी उसने वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC Final) के फाइनल मैच में ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम को तबाह करने का प्लान बना डाला है. बता दें कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC Final) का फाइनल मैच कल से 11 जून तक इंग्लैंड के केनिंगटन ओवल (लंदन) के मैदान पर खेला जाएगा. WTC Final 2023: भारत के एक दिग्गज क्रिकेटर पर टीम इंडिया से ड्रॉप होने का खतरा है, लेकिन फिर भी उसने वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC Final) के फाइनल मैच में ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम को तबाह करने का प्लान बना डाला है. बता दें कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC Final) का फाइनल मैच कल से 11 जून तक इंग्लैंड के केनिंगटन ओवल (लंदन) के मैदान पर खेला जाएगा. वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल मैच में टीम इंडिया को ओवल में हरी घास वाली पिच मिलेगी. इस हरी भरी पिच पर ऑस्ट्रेलिया के गेंदबाज भारत के सामने मुश्किलें पैदा कर सकते हैं. हरी पिच पर तेज गेंदबाजों को मदद मिलेगी. इंग्लैंड की ठंड, ड्यूक्स की लहराती गेंदों के सामने भारतीय बल्लेबाज बेबस नजर आए हैं. ओवल में तेज गेंदबाजों की मददगार पिच को देखते हुए टीम इंडिया की प्लेइंग इलेवन से ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन को ड्रॉप किया जा सकता है, लेकिन फिर भी इस दिग्गज स्पिनर ने ऑस्ट्रेलिया को वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC Final) के फाइनल में तबाह करने का प्लान बना लिया है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक रविचंद्रन अश्विन ने आईपीएल के बीच में ही डेटा एनालिस्ट प्रसन्ना एगोराम के साथ वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC Final) के फाइनल की तैयारी शुरू कर दी थी. रविचंद्रन अश्विन ने रिकॉर्ड्स इकट्ठे करने शुरू किए कि हर दिन ओवल में स्पिनर्स को कितना टर्न और उछाल मिल रहा है. रविचंद्रन अश्विन ने स्टीव स्मिथ, मार्नस लाबुशेन और उस्मान ख्वाजा के काउंटी में मौजूदा रिकॉर्ड्स निकाले कि ये बल्लेबाज स्पिनर्स के खिलाफ कैसे आउट हुए हैं. वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल मैच में रविचंद्रन अश्विन की टीम इंडिया की प्लेइंग इलेवन में जगह पक्की नहीं है. बता दें कि रविंद्र जडेजा और रविचंद्रन अश्विन की स्पिन जोड़ी दो साल पहले वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC Final) फाइनल 2021 में प्रभाव डालने में नाकाम रही थी और न्यूजीलैंड ने बारिश से प्रभावित यह मैच आठ विकेट से जीता था. रविचंद्रन अश्विन ने 92 टेस्ट मैचों में 474 विकेट हासिल किए हैं और 3129 रन भी बनाए हैं. रविचंद्रन अश्विन के नाम टेस्ट क्रिकेट में 5 शतक हैं और उनका बेस्ट स्कोर 124 है. रविचंद्रन अश्विन ने 113 वनडे मैचों में 151 विकेट और 65 टी20 इंटरनेशनल मैचों में 72 विकेट हासिल किए हैं. रविचंद्रन अश्विन ने वनडे मैचों में 707 रन और टी20 इंटरनेशनल मैचों में 184 रन बनाए हैं. 197 IPL मैचों में रविचंद्रन अश्विन ने 171 विकेट हासिल किए हैं और 714 रन भी बनाए हैं.
Team India: भारत के एक दिग्गज क्रिकेटर पर टीम इंडिया से ड्रॉप होने का खतरा है, लेकिन फिर भी उसने वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल मैच में ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम को तबाह करने का प्लान बना डाला है. बता दें कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल मैच कल से ग्यारह जून तक इंग्लैंड के केनिंगटन ओवल के मैदान पर खेला जाएगा. WTC Final दो हज़ार तेईस: भारत के एक दिग्गज क्रिकेटर पर टीम इंडिया से ड्रॉप होने का खतरा है, लेकिन फिर भी उसने वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल मैच में ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम को तबाह करने का प्लान बना डाला है. बता दें कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल मैच कल से ग्यारह जून तक इंग्लैंड के केनिंगटन ओवल के मैदान पर खेला जाएगा. वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल मैच में टीम इंडिया को ओवल में हरी घास वाली पिच मिलेगी. इस हरी भरी पिच पर ऑस्ट्रेलिया के गेंदबाज भारत के सामने मुश्किलें पैदा कर सकते हैं. हरी पिच पर तेज गेंदबाजों को मदद मिलेगी. इंग्लैंड की ठंड, ड्यूक्स की लहराती गेंदों के सामने भारतीय बल्लेबाज बेबस नजर आए हैं. ओवल में तेज गेंदबाजों की मददगार पिच को देखते हुए टीम इंडिया की प्लेइंग इलेवन से ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन को ड्रॉप किया जा सकता है, लेकिन फिर भी इस दिग्गज स्पिनर ने ऑस्ट्रेलिया को वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में तबाह करने का प्लान बना लिया है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक रविचंद्रन अश्विन ने आईपीएल के बीच में ही डेटा एनालिस्ट प्रसन्ना एगोराम के साथ वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल की तैयारी शुरू कर दी थी. रविचंद्रन अश्विन ने रिकॉर्ड्स इकट्ठे करने शुरू किए कि हर दिन ओवल में स्पिनर्स को कितना टर्न और उछाल मिल रहा है. रविचंद्रन अश्विन ने स्टीव स्मिथ, मार्नस लाबुशेन और उस्मान ख्वाजा के काउंटी में मौजूदा रिकॉर्ड्स निकाले कि ये बल्लेबाज स्पिनर्स के खिलाफ कैसे आउट हुए हैं. वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल मैच में रविचंद्रन अश्विन की टीम इंडिया की प्लेइंग इलेवन में जगह पक्की नहीं है. बता दें कि रविंद्र जडेजा और रविचंद्रन अश्विन की स्पिन जोड़ी दो साल पहले वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल दो हज़ार इक्कीस में प्रभाव डालने में नाकाम रही थी और न्यूजीलैंड ने बारिश से प्रभावित यह मैच आठ विकेट से जीता था. रविचंद्रन अश्विन ने बानवे टेस्ट मैचों में चार सौ चौहत्तर विकेट हासिल किए हैं और तीन हज़ार एक सौ उनतीस रन भी बनाए हैं. रविचंद्रन अश्विन के नाम टेस्ट क्रिकेट में पाँच शतक हैं और उनका बेस्ट स्कोर एक सौ चौबीस है. रविचंद्रन अश्विन ने एक सौ तेरह वनडे मैचों में एक सौ इक्यावन विकेट और पैंसठ टीबीस इंटरनेशनल मैचों में बहत्तर विकेट हासिल किए हैं. रविचंद्रन अश्विन ने वनडे मैचों में सात सौ सात रन और टीबीस इंटरनेशनल मैचों में एक सौ चौरासी रन बनाए हैं. एक सौ सत्तानवे IPL मैचों में रविचंद्रन अश्विन ने एक सौ इकहत्तर विकेट हासिल किए हैं और सात सौ चौदह रन भी बनाए हैं.
पत्नी गौरी के साथ होली खेलते शाहरुख। दूसरी ओर होली पर सनी लियोनी ने मचाया कुछ ऐसा हुड़दंग। पति श्रीराम नेने के साथ होली के मौके पर माधुरी दीक्षित। दूसरी ओर होली पर राखी सावंत और सोफिया हयात। शाहरुख के कंधे पर हाथ रख सलमान ने कभी ऐसे खेली थी होली। दूसरी ओर पत्नी गौरी के साथ शाहरुख। होली पर कुछ इस अंदाज में नजर आए थे अक्षय कुमार। दूसरी ओर पति जीन गुडइनफ के साथ प्रिटी जिंटा। होली के मौके पर सोनाक्षी सिन्हा का अंदाज। दूसरी ओर बच्चों के साथ होली सेलिब्रेट करतीं करिश्मा कपूर। पिछले साल होली के दौरान प्रियंका चोपड़ा पति निक जोनास के साथ कुछ इस तरह नजर आई थीं। पत्नी सुनीता, बेटी टीना और बेटे के साथ होली के मौके पर गोविंदा। होली के दौरान उर्वशी रौतेला और टीना दत्ता। पिछले साल कैटरीना कैफ ने कुछ इस अंदाज में मनाई थी होली। होली के मौके पर मां तनुजा के साथ काजोल और उनकी छोटी बहन तनीषा मुखर्जी। होली के दौरान अलग-अलग मौकों पर सलमान-शाहरुख, अमिताभ बच्चन, ऋतिक रोशन और अजय देवगन।
पत्नी गौरी के साथ होली खेलते शाहरुख। दूसरी ओर होली पर सनी लियोनी ने मचाया कुछ ऐसा हुड़दंग। पति श्रीराम नेने के साथ होली के मौके पर माधुरी दीक्षित। दूसरी ओर होली पर राखी सावंत और सोफिया हयात। शाहरुख के कंधे पर हाथ रख सलमान ने कभी ऐसे खेली थी होली। दूसरी ओर पत्नी गौरी के साथ शाहरुख। होली पर कुछ इस अंदाज में नजर आए थे अक्षय कुमार। दूसरी ओर पति जीन गुडइनफ के साथ प्रिटी जिंटा। होली के मौके पर सोनाक्षी सिन्हा का अंदाज। दूसरी ओर बच्चों के साथ होली सेलिब्रेट करतीं करिश्मा कपूर। पिछले साल होली के दौरान प्रियंका चोपड़ा पति निक जोनास के साथ कुछ इस तरह नजर आई थीं। पत्नी सुनीता, बेटी टीना और बेटे के साथ होली के मौके पर गोविंदा। होली के दौरान उर्वशी रौतेला और टीना दत्ता। पिछले साल कैटरीना कैफ ने कुछ इस अंदाज में मनाई थी होली। होली के मौके पर मां तनुजा के साथ काजोल और उनकी छोटी बहन तनीषा मुखर्जी। होली के दौरान अलग-अलग मौकों पर सलमान-शाहरुख, अमिताभ बच्चन, ऋतिक रोशन और अजय देवगन।
हिंदी धर्म ग्रंथों के मुताबिक मंगलवार दिन हनुमान जी का दिन माना जाता है। इसके अलवा यह भी कहा जाता है कि मंगलवार का दिन मंगल ग्रह का होता है। ज्योतिष विज्ञान के मुताबिक मंगल ग्रह पराक्रम, शौर्य, साहस, भूमि, सेना, रक्त, लाल रंग आदि का कारक माना जाता है। हिंदू धर्म के मुताबिक मंगलवार हनुमान जी का दिन है। इस दिन भक्त भगवान श्री राम के दूत बजरंग बली की पूजा पाठ करते है। धर्मग्रथों के मुताबिक इस दिन हनुमान जी की पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और हनुमान जी की कृपा भी खूब बरसती है। नहीं बनवानी चाहिए दाढ़ीः- ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक मंगलवार के दिन दाढ़ी बनवाना अशुभ माना जाता है। कहा जाता है कि ऐसा करना बहुत ही अशुभ होता है। इससे मंगल दोष भी लगता है। बता दें, इसके लिए बुधवार का दिन बेस्ट माना जाता है। नहीं खरीदने चाहिए ये सामानः-मंगलवार के दिन शृंगार का सामान न खरीदें। ऐसा माना जाता है कि इस दिन शृंगार का सामान खरीदने से वैवाहिक संबंधों में दरार आ जाती है। बता दें, इसके लिए सोमवार और शुक्रवार का दिन सबसे अच्छा माना जाता है। उड़द की दाल का न करें सेवनः- मंगलवार को गलती से भी उड़द दाल का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन उड़द खाने से शनि मंगल का संयोग आपकी सेहत के लिए कष्टकारी हो सकता है। उड़द का संबंध शनि से है। नहीं काटना चाहिए नाखूनः- मंगलवार के दिन नाखून काटना अशुभ माना जाता है। इस दिन ऐसा करने से आपको कई मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। न करें भाई से झगड़ाः- मंगलवार के दिन बड़े भाई से झगड़ा न करें। मंगल का संबंध बड़े भाई से माना गया है। भाई से विवाद मंगल को खराब करता है जिससे दुर्घटना और कष्ट का सामना करना पड़ता है। पारिवारिक जीवन में परेशानी बढ़ती है। मछली का सेवन न करेंः- इस दिन मछली नहीं खानी चाहिए। इस दिन मछली खरीदने और खाने वाले व्यक्ति का पैसा पानी की तरह बहकर खत्म हो जाता है। काले रंग के वस्त्र न खरीदें और न पहनेः- मंगलवार के दिन काले रंग के वस्त्र न खरीदें और न ही पहनें। इस दिन लाल रंग के वस्त्र पहनने से मंगल दोष का प्रभाव कम होता है। इस दिन भूमि नहीं खोदनी चाहिए। ऐसा करने से मंगल ग्रह का अशुभ प्रभाव बढ़ता है। इसका कारण यह है कि मंगल भूमिपुत्र माना गया है। इसलिए मंगलवार के दिन घर की नींव रखना भी शुभ नहीं माना गया है।
हिंदी धर्म ग्रंथों के मुताबिक मंगलवार दिन हनुमान जी का दिन माना जाता है। इसके अलवा यह भी कहा जाता है कि मंगलवार का दिन मंगल ग्रह का होता है। ज्योतिष विज्ञान के मुताबिक मंगल ग्रह पराक्रम, शौर्य, साहस, भूमि, सेना, रक्त, लाल रंग आदि का कारक माना जाता है। हिंदू धर्म के मुताबिक मंगलवार हनुमान जी का दिन है। इस दिन भक्त भगवान श्री राम के दूत बजरंग बली की पूजा पाठ करते है। धर्मग्रथों के मुताबिक इस दिन हनुमान जी की पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और हनुमान जी की कृपा भी खूब बरसती है। नहीं बनवानी चाहिए दाढ़ीः- ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक मंगलवार के दिन दाढ़ी बनवाना अशुभ माना जाता है। कहा जाता है कि ऐसा करना बहुत ही अशुभ होता है। इससे मंगल दोष भी लगता है। बता दें, इसके लिए बुधवार का दिन बेस्ट माना जाता है। नहीं खरीदने चाहिए ये सामानः-मंगलवार के दिन शृंगार का सामान न खरीदें। ऐसा माना जाता है कि इस दिन शृंगार का सामान खरीदने से वैवाहिक संबंधों में दरार आ जाती है। बता दें, इसके लिए सोमवार और शुक्रवार का दिन सबसे अच्छा माना जाता है। उड़द की दाल का न करें सेवनः- मंगलवार को गलती से भी उड़द दाल का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन उड़द खाने से शनि मंगल का संयोग आपकी सेहत के लिए कष्टकारी हो सकता है। उड़द का संबंध शनि से है। नहीं काटना चाहिए नाखूनः- मंगलवार के दिन नाखून काटना अशुभ माना जाता है। इस दिन ऐसा करने से आपको कई मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। न करें भाई से झगड़ाः- मंगलवार के दिन बड़े भाई से झगड़ा न करें। मंगल का संबंध बड़े भाई से माना गया है। भाई से विवाद मंगल को खराब करता है जिससे दुर्घटना और कष्ट का सामना करना पड़ता है। पारिवारिक जीवन में परेशानी बढ़ती है। मछली का सेवन न करेंः- इस दिन मछली नहीं खानी चाहिए। इस दिन मछली खरीदने और खाने वाले व्यक्ति का पैसा पानी की तरह बहकर खत्म हो जाता है। काले रंग के वस्त्र न खरीदें और न पहनेः- मंगलवार के दिन काले रंग के वस्त्र न खरीदें और न ही पहनें। इस दिन लाल रंग के वस्त्र पहनने से मंगल दोष का प्रभाव कम होता है। इस दिन भूमि नहीं खोदनी चाहिए। ऐसा करने से मंगल ग्रह का अशुभ प्रभाव बढ़ता है। इसका कारण यह है कि मंगल भूमिपुत्र माना गया है। इसलिए मंगलवार के दिन घर की नींव रखना भी शुभ नहीं माना गया है।
बुधवार को पुलिस ने एक टीवी चैनल में काम करने वाले सीनियर जर्नलिस्ट को अरेस्ट किया। जर्नलिस्ट पर अपनी एक कॉलीग का यौन शोषण करने का आरोप है। आरोपी अमल विष्णुदास पर आईपीसी की धाराओं 376(रेप), 377(अप्राकृतिक सेक्स) और 506) के तहत मामला दर्ज किया गया है। रजित बालाकृष्णन, तिरुवनंतपुरम बुधवार को पुलिस ने एक टीवी चैनल में काम करने वाले सीनियर जर्नलिस्ट को अरेस्ट किया। जर्नलिस्ट पर अपनी एक कॉलीग का यौन शोषण करने का आरोप है। आरोपी अमल विष्णुदास पर आईपीसी की धाराओं 376(रेप), 377(अप्राकृतिक सेक्स) और 506) के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपी विष्णुदास मातृभूमि न्यूज चैनल में बतौर न्यूज एडिटर काम करता है। पेता पुलिस से विष्णुदास को अरेस्ट किया। सर्कल इंस्पेक्टर एसएम रियास ने कहा कि मंगलवार शाम को सिटी पुलिस कमिश्नर को मिली शिकायत के आधार पर विष्णुदास के खिलाफ केस दर्ज किया गया। शिकायतकर्ता के मुताबिक, 'जब आरोपी विष्णुदास ने मुझसे अपने प्यार का इजहार किया तब वह पहले से ही शादीशुदा था। उसने कानूनी रूप से अपनी पत्नी से अलग हो जाने के बाद जल्द से जल्द मुझसे शादी करने का वादा किया था और यही वादा कर कई जगहों पर मेरा रेप किया। कई बार ऑफिस में भी यौन शोषण किया। ' जब शिकायतकर्ता को यह विश्वास हो गया कि विष्णुदास उससे शादी नहीं करने वाला तो उसने उसके खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी। हालांकि, आरोपी विष्णुदास का कहना है, 'शिकायतकर्ता ने ही संबंध बनाने की पहल की, जबकि वह जानती थी कि मैं शादीशुदा हूं। ' विष्णुदास को पुलिस ने कस्टडी में ले लिया और लंबी पूछताछ के बाद अरेस्ट कर लिया गया। मातृभूमि न्यूज चैनल ने भी यौन शोषण के केस के मद्देनजर विष्णुदास को सस्पेंड कर दिया है। यह जानकारी चैनल ने एक स्टेटमेंट जारी कर दी।
बुधवार को पुलिस ने एक टीवी चैनल में काम करने वाले सीनियर जर्नलिस्ट को अरेस्ट किया। जर्नलिस्ट पर अपनी एक कॉलीग का यौन शोषण करने का आरोप है। आरोपी अमल विष्णुदास पर आईपीसी की धाराओं तीन सौ छिहत्तर, तीन सौ सतहत्तर और पाँच सौ छः) के तहत मामला दर्ज किया गया है। रजित बालाकृष्णन, तिरुवनंतपुरम बुधवार को पुलिस ने एक टीवी चैनल में काम करने वाले सीनियर जर्नलिस्ट को अरेस्ट किया। जर्नलिस्ट पर अपनी एक कॉलीग का यौन शोषण करने का आरोप है। आरोपी अमल विष्णुदास पर आईपीसी की धाराओं तीन सौ छिहत्तर, तीन सौ सतहत्तर और पाँच सौ छः) के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपी विष्णुदास मातृभूमि न्यूज चैनल में बतौर न्यूज एडिटर काम करता है। पेता पुलिस से विष्णुदास को अरेस्ट किया। सर्कल इंस्पेक्टर एसएम रियास ने कहा कि मंगलवार शाम को सिटी पुलिस कमिश्नर को मिली शिकायत के आधार पर विष्णुदास के खिलाफ केस दर्ज किया गया। शिकायतकर्ता के मुताबिक, 'जब आरोपी विष्णुदास ने मुझसे अपने प्यार का इजहार किया तब वह पहले से ही शादीशुदा था। उसने कानूनी रूप से अपनी पत्नी से अलग हो जाने के बाद जल्द से जल्द मुझसे शादी करने का वादा किया था और यही वादा कर कई जगहों पर मेरा रेप किया। कई बार ऑफिस में भी यौन शोषण किया। ' जब शिकायतकर्ता को यह विश्वास हो गया कि विष्णुदास उससे शादी नहीं करने वाला तो उसने उसके खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी। हालांकि, आरोपी विष्णुदास का कहना है, 'शिकायतकर्ता ने ही संबंध बनाने की पहल की, जबकि वह जानती थी कि मैं शादीशुदा हूं। ' विष्णुदास को पुलिस ने कस्टडी में ले लिया और लंबी पूछताछ के बाद अरेस्ट कर लिया गया। मातृभूमि न्यूज चैनल ने भी यौन शोषण के केस के मद्देनजर विष्णुदास को सस्पेंड कर दिया है। यह जानकारी चैनल ने एक स्टेटमेंट जारी कर दी।
तुलना (लैटिन तुलना से ) तुलना करने की क्रिया और प्रभाव है । यह क्रिया उनके अंतर और समानता को पहचानने और उनके रिश्तों की खोज करने के लिए दो या अधिक चीजों पर ध्यान देने को संदर्भित करती है। इसलिए, तुलना करना है । उदाहरण के लिएः "दो अंतरिक्ष रॉकेटों के बीच तुलना से पता चलता है कि अमेरिकी बहुत अधिक उन्नत है", "कोई भी फुटबॉल खिलाड़ी डिएगो माराडोना के साथ तुलना का विरोध करने का प्रबंधन नहीं करता है", मैंने सोचा कि विश्लेषक ने दो मामलों की तुलना करना बहुत दिलचस्प था "। तुलना भौतिक पहलुओं या प्रतीकात्मक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर सकती है। इस तरह, यदि आप दो लोगों की तुलना करना चाहते हैं, तो यह एक भौतिक दृष्टिकोण से करना संभव है, जो दिखाएगा, उदाहरण के लिए, उनमें से एक लंबा, अधिक मजबूत और दूसरे की तुलना में अधिक ग्रे है, या उनके व्यक्तित्व को एक संदर्भ के रूप में लेते हुए, जिसके बाद यह कहा जा सकता था कि दो लोगों में से एक अधिक मिलनसार है, आमतौर पर बैठकों में खुद को जोर से व्यक्त करता है और अधिक आसानी से लिंक स्थापित करता है। किसी भी मामले में, तुलनात्मकता आमतौर पर उतनी सटीक नहीं होती है यदि व्यक्तिपरक विशेषताएं देखी जाती हैं, यह देखते हुए कि चर की संख्या बहुत अधिक है और उन सभी तक पहुंच प्राप्त करना आमतौर पर असंभव है। उदाहरण के लिए, यदि आप दो ओपेरा गायकों के बीच तुलना स्थापित करना चाहते हैं (कुछ ऐसा है जो प्रशंसक अक्सर अपनी मूर्तियों के साथ अपने प्रतिद्वंद्वियों को अलग करने की कोशिश करते हैं), प्रत्येक आवाज का विस्तार, इसका टेसिटुरा (जिसमें क्षेत्र जो अधिक आसानी से चलते हैं), इसका रंग, इसका आकार, इसके कंपन की विशेषताएँ, कौशल और क्षमताएँ जो प्रत्येक के पास होती हैं (जैसे कि ट्रिल्स, कलरटुरा और महारत हासिल करने के लिए बहुत तीव्र नोट्स में)। सेवाओं के क्षेत्र में एक प्रभावी तुलना हो सकती है, हालांकि व्यक्तिपरक चर भी हैं, जैसे कि ग्राहक सेवा की गुणवत्ता, क्योंकि यह वास्तव में शानदार या बहुत खराब है, मूल्यांकन अलग-अलग लोगों के अनुभव पर निर्भर करेगा, प्रत्येक एक अनोखी धारणा के साथ। हालांकि, जैसा कि अक्सर बीमा कंपनियों और इंटरनेट प्रदाताओं के साथ होता है, पंजीकरण की कीमत, मासिक भुगतान, उपलब्ध योजनाओं, और इसी तरह के बिंदुओं की तुलना करने के लिए तुलनात्मक तालिकाओं को बनाना संभव है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को उच्च स्तर की प्रभावशीलता के साथ एक तकनीकी तुलना के अधीन किया जा सकता है, हालांकि इस मामले में ऐसे मुद्दे भी हैं जिनका विश्लेषण करना मुश्किल है, यह देखते हुए कि प्रत्येक लेख में उपयोग की जाने वाली तकनीक किस प्रकार का बना सकती है, उदाहरण के लिए, दो समान गति के साथ संख्याओं में व्यक्त प्रोसेसर समान रूप से सक्षम नहीं हैं। व्याकरण में, तुलना विशेषणों में तीन अलग-अलग डिग्री इंगित करती हैः सकारात्मक, तुलनात्मक और अतिशयोक्ति। स्वच्छ विशेषण सकारात्मक रूप से प्रकट हो सकता है ( "पानी साफ है" ), तुलनात्मक डिग्री में ( "इस तालाब में पानी उस स्रोत में पानी की तुलना में क्लीनर है" ) या अतिशयोक्ति से ( "इस तालाब में पानी है " ) बहुत साफ " )। तुलना का संसाधन उपमा के रूप में ज्ञात एक आलंकारिक आकृति बनाने की भी अनुमति देता है, जो "जो" या "के रूप में" जैसे संबंधों के तत्वों के साथ स्थापित हैः "उसके हाथ हथौड़ों के रूप में दरवाजे को नष्ट कर दिया", "चोर छतों पर चला गया रात में कौन सी बिल्ली । "
तुलना तुलना करने की क्रिया और प्रभाव है । यह क्रिया उनके अंतर और समानता को पहचानने और उनके रिश्तों की खोज करने के लिए दो या अधिक चीजों पर ध्यान देने को संदर्भित करती है। इसलिए, तुलना करना है । उदाहरण के लिएः "दो अंतरिक्ष रॉकेटों के बीच तुलना से पता चलता है कि अमेरिकी बहुत अधिक उन्नत है", "कोई भी फुटबॉल खिलाड़ी डिएगो माराडोना के साथ तुलना का विरोध करने का प्रबंधन नहीं करता है", मैंने सोचा कि विश्लेषक ने दो मामलों की तुलना करना बहुत दिलचस्प था "। तुलना भौतिक पहलुओं या प्रतीकात्मक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर सकती है। इस तरह, यदि आप दो लोगों की तुलना करना चाहते हैं, तो यह एक भौतिक दृष्टिकोण से करना संभव है, जो दिखाएगा, उदाहरण के लिए, उनमें से एक लंबा, अधिक मजबूत और दूसरे की तुलना में अधिक ग्रे है, या उनके व्यक्तित्व को एक संदर्भ के रूप में लेते हुए, जिसके बाद यह कहा जा सकता था कि दो लोगों में से एक अधिक मिलनसार है, आमतौर पर बैठकों में खुद को जोर से व्यक्त करता है और अधिक आसानी से लिंक स्थापित करता है। किसी भी मामले में, तुलनात्मकता आमतौर पर उतनी सटीक नहीं होती है यदि व्यक्तिपरक विशेषताएं देखी जाती हैं, यह देखते हुए कि चर की संख्या बहुत अधिक है और उन सभी तक पहुंच प्राप्त करना आमतौर पर असंभव है। उदाहरण के लिए, यदि आप दो ओपेरा गायकों के बीच तुलना स्थापित करना चाहते हैं , प्रत्येक आवाज का विस्तार, इसका टेसिटुरा , इसका रंग, इसका आकार, इसके कंपन की विशेषताएँ, कौशल और क्षमताएँ जो प्रत्येक के पास होती हैं । सेवाओं के क्षेत्र में एक प्रभावी तुलना हो सकती है, हालांकि व्यक्तिपरक चर भी हैं, जैसे कि ग्राहक सेवा की गुणवत्ता, क्योंकि यह वास्तव में शानदार या बहुत खराब है, मूल्यांकन अलग-अलग लोगों के अनुभव पर निर्भर करेगा, प्रत्येक एक अनोखी धारणा के साथ। हालांकि, जैसा कि अक्सर बीमा कंपनियों और इंटरनेट प्रदाताओं के साथ होता है, पंजीकरण की कीमत, मासिक भुगतान, उपलब्ध योजनाओं, और इसी तरह के बिंदुओं की तुलना करने के लिए तुलनात्मक तालिकाओं को बनाना संभव है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को उच्च स्तर की प्रभावशीलता के साथ एक तकनीकी तुलना के अधीन किया जा सकता है, हालांकि इस मामले में ऐसे मुद्दे भी हैं जिनका विश्लेषण करना मुश्किल है, यह देखते हुए कि प्रत्येक लेख में उपयोग की जाने वाली तकनीक किस प्रकार का बना सकती है, उदाहरण के लिए, दो समान गति के साथ संख्याओं में व्यक्त प्रोसेसर समान रूप से सक्षम नहीं हैं। व्याकरण में, तुलना विशेषणों में तीन अलग-अलग डिग्री इंगित करती हैः सकारात्मक, तुलनात्मक और अतिशयोक्ति। स्वच्छ विशेषण सकारात्मक रूप से प्रकट हो सकता है , तुलनात्मक डिग्री में या अतिशयोक्ति से बहुत साफ " )। तुलना का संसाधन उपमा के रूप में ज्ञात एक आलंकारिक आकृति बनाने की भी अनुमति देता है, जो "जो" या "के रूप में" जैसे संबंधों के तत्वों के साथ स्थापित हैः "उसके हाथ हथौड़ों के रूप में दरवाजे को नष्ट कर दिया", "चोर छतों पर चला गया रात में कौन सी बिल्ली । "
शादी से इनकार करने पर चलाई गोलीपीड़ित युवती ने बताया कि तीन से चार साल से आरोपी असद के कारण पढ़ाई छोड़ दी और जब घर से बाहर नहीं निकली तो शादी के लिए लगातार दबाव बनाता रहा। इनकार करने पर पूरे परिवार को जान से मारने की बात कहते हुए घर पर तमंचे से कई राउंड फायर किए। कार्रवाई न होने से हौसले बुलंदपीड़िता ने बताया कि पुलिस में कई बार शिकायत की, लेकिन हर बार पुलिस से परेशान न करने की बात कहते हुए फिर से परेशान करने लगता है। पुलिस से कहो तो कोई सुनवाई नहीं होती है। इससे उसके हौसले बढ़ते गए और आज (शुक्रवार) उसने घर पर निशाना लगाते हुए कई राउंड फायर किए। नाली में मिले खोखेगोली की आवाज सुनकर आसपास के लोग इक्कठा हो गए। वहीं, आरोपी फायर करता हुआ भाग गया। गोली के खोखे नाली में से बरामद हुए हैं। पीड़िता ने बताया कि आज की फायर वाली घटना से अब परिवार की चिंता हो रही है। कहीं किसी परिवार के सदस्य के साथ कोई अनहोनी न कर दे। अगर कुछ भी परिवार के साथ अनहोनी होती है तो उसका जिम्मेदार असद और उसका परिवार होगा। पुलिस अधिकार कर रहे है पूरे मामले की जांचपुलिस अधिकारी कह रहे हैं कि युवती को धमकाने का मामला सामने आया है। उसके घर पर फायरिंग की बात की जानकारी हुई है। शिकायत पत्र लेकर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
शादी से इनकार करने पर चलाई गोलीपीड़ित युवती ने बताया कि तीन से चार साल से आरोपी असद के कारण पढ़ाई छोड़ दी और जब घर से बाहर नहीं निकली तो शादी के लिए लगातार दबाव बनाता रहा। इनकार करने पर पूरे परिवार को जान से मारने की बात कहते हुए घर पर तमंचे से कई राउंड फायर किए। कार्रवाई न होने से हौसले बुलंदपीड़िता ने बताया कि पुलिस में कई बार शिकायत की, लेकिन हर बार पुलिस से परेशान न करने की बात कहते हुए फिर से परेशान करने लगता है। पुलिस से कहो तो कोई सुनवाई नहीं होती है। इससे उसके हौसले बढ़ते गए और आज उसने घर पर निशाना लगाते हुए कई राउंड फायर किए। नाली में मिले खोखेगोली की आवाज सुनकर आसपास के लोग इक्कठा हो गए। वहीं, आरोपी फायर करता हुआ भाग गया। गोली के खोखे नाली में से बरामद हुए हैं। पीड़िता ने बताया कि आज की फायर वाली घटना से अब परिवार की चिंता हो रही है। कहीं किसी परिवार के सदस्य के साथ कोई अनहोनी न कर दे। अगर कुछ भी परिवार के साथ अनहोनी होती है तो उसका जिम्मेदार असद और उसका परिवार होगा। पुलिस अधिकार कर रहे है पूरे मामले की जांचपुलिस अधिकारी कह रहे हैं कि युवती को धमकाने का मामला सामने आया है। उसके घर पर फायरिंग की बात की जानकारी हुई है। शिकायत पत्र लेकर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
आत्मगौरव, स्वधर्म और स्वाभिमानपूर्ण तेजस्वी-यशस्वी जीवन की रक्षा श्रीराम के कर्मपथ का अनुसरण करके ही संभव है। आत्मगौरव, स्वधर्म और स्वाभिमानपूर्ण तेजस्वी-यशस्वी जीवन की रक्षा श्रीराम के कर्मपथ का अनुसरण करके ही संभव है। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय का कहना है कि देश की सुरक्षा और अखंडता के लिए समान नागरिक संहिता जरूरी है। महाराजा रणजीत सिंह की सेना में भगत सिंह के पूर्वज खालसा सरदार थे। 'नेशनल कॉलेज' में गुलामी की ज़ंजीरें मुक्त करने के विचारों की शिक्षा दी जा रही थी। देश में विभिन्न कारणों से समान नागरिक संहिता की विशेष जरूरत है। सरकार को इसे तुरंत लागू करना चाहिए ताकि न्याय में विलंब को रोका जा सके। प्रथम तमिल संगम मदुरै में हुआ था जो पाण्ड्य राजाओं की राजधानी थी और उस समय अगस्त्य, शिव, मुरुगवेल आदि विद्वानों ने इसमें हिस्सा लिया था। आयोजन के दूसरे हिस्से में कई लोक परंपराओं का प्रदर्शन किया गया, जिनमें असम के माँ कामख्या मंदिर की झाँकी विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र रही। "यदि क़ुतुब मीनार का भी स्थानांतरण करना हो तो एक व्यक्ति है जो ये काम कर सकता है और वह हैं एकनाथ रानाडे। " - जानिए ऐसा क्यों कहने लगे थे लोग।
आत्मगौरव, स्वधर्म और स्वाभिमानपूर्ण तेजस्वी-यशस्वी जीवन की रक्षा श्रीराम के कर्मपथ का अनुसरण करके ही संभव है। आत्मगौरव, स्वधर्म और स्वाभिमानपूर्ण तेजस्वी-यशस्वी जीवन की रक्षा श्रीराम के कर्मपथ का अनुसरण करके ही संभव है। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय का कहना है कि देश की सुरक्षा और अखंडता के लिए समान नागरिक संहिता जरूरी है। महाराजा रणजीत सिंह की सेना में भगत सिंह के पूर्वज खालसा सरदार थे। 'नेशनल कॉलेज' में गुलामी की ज़ंजीरें मुक्त करने के विचारों की शिक्षा दी जा रही थी। देश में विभिन्न कारणों से समान नागरिक संहिता की विशेष जरूरत है। सरकार को इसे तुरंत लागू करना चाहिए ताकि न्याय में विलंब को रोका जा सके। प्रथम तमिल संगम मदुरै में हुआ था जो पाण्ड्य राजाओं की राजधानी थी और उस समय अगस्त्य, शिव, मुरुगवेल आदि विद्वानों ने इसमें हिस्सा लिया था। आयोजन के दूसरे हिस्से में कई लोक परंपराओं का प्रदर्शन किया गया, जिनमें असम के माँ कामख्या मंदिर की झाँकी विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र रही। "यदि क़ुतुब मीनार का भी स्थानांतरण करना हो तो एक व्यक्ति है जो ये काम कर सकता है और वह हैं एकनाथ रानाडे। " - जानिए ऐसा क्यों कहने लगे थे लोग।
मुंबई, 20 मार्च महाराष्ट्र के मंत्री आदित्य ठाकरे ने शनिवार को कहा कि वह जांच में कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं। उन्होंने लोगों से अपनी सावधानी को कम न करने का आग्रह किया है। ठाकरे ने ट्विटर पर कहा, "कोविड-19 के हल्के लक्षण होने पर मैंने खुद की जांच करवाई थी और मैं कोविड-19 पॉजिटिव हूं। " मुंबई उपनगर के संरक्षक मंत्री ने उनके संपर्क में आए लोगों से भी अपनी जांच करवाने का अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे ने कहा, "मैं सभी से यह आग्रह करता हूं कि अपनी सतर्कता को कम ना करें, यह बेहद जरूरी है। कृपया कोविड-19 दिशानिर्देशों का पालन करें और सुरक्षित रहें। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
मुंबई, बीस मार्च महाराष्ट्र के मंत्री आदित्य ठाकरे ने शनिवार को कहा कि वह जांच में कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं। उन्होंने लोगों से अपनी सावधानी को कम न करने का आग्रह किया है। ठाकरे ने ट्विटर पर कहा, "कोविड-उन्नीस के हल्के लक्षण होने पर मैंने खुद की जांच करवाई थी और मैं कोविड-उन्नीस पॉजिटिव हूं। " मुंबई उपनगर के संरक्षक मंत्री ने उनके संपर्क में आए लोगों से भी अपनी जांच करवाने का अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे ने कहा, "मैं सभी से यह आग्रह करता हूं कि अपनी सतर्कता को कम ना करें, यह बेहद जरूरी है। कृपया कोविड-उन्नीस दिशानिर्देशों का पालन करें और सुरक्षित रहें। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
Don't Miss! कॅामेडियन सुनील ग्रोवर की हार्ट सर्जरी की खबर सामने आने के साथ फैंस से लेकर सेलेब्स उनके जल्द ठीक होने की कामना कर रहे हैं। खास तौर पर सलमान खान ने इस दौरान सुनील ग्रोवर के इलाज की सारी जानकारी ली है। मीडिया रिपोर्ट अनुसार एक वेब सीरीज की शूटिंग के दौरान सुनील ग्रोवर की तबीयत खराब हुई। जांच कराने पर सुनील ग्रोवर को इस बात की जानकारी मिली कि उनके दिल में चार ब्लॉकेज नजर आई है। वेब सीरीज की शूटिंग को खत्म करने के बाद सुनील ग्रोवर ने डॉक्टरों की सलाह अनुसार अपनी हार्ट सर्जरी करवाई। एक वेबसाइट की रिपोर्ट अनुसार सुनील ग्रोवर की सेहत को लेकर सलमान खान ने अपनी टीम को इस पर निगरानी रखने को बोला है। सलमान खान और सुनील ग्रोवर की पहचान काफी समय से है। सुनील ग्रोवर और सलमान खान ने साथ में भारत फिल्म में काम किया है। साथ ही कपिल शर्मा शो में सुनील ग्रोवर की वापसी को लेकर सलमान खान ने बात भी की थी। हालांकि अभी तक इस पर सुनील ग्रोवर या सलमान खान की टीम की तरफ से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं आयी है। रिपोर्ट अनुसार सलमान खान के डॅाक्टर्स की टीम सुनील के इलाज पर काफी कड़ी निगरानी रख रही है। इसके साथ सलमान खान ने अपनी टीम से लगातार सुनील ग्रोवर की हार्ट सर्जरी के दौरान और बाद में सारी अपडेट भी ली है। बताया जा रहा है कि सुनील ग्रोवर के साथ सलमान खान लगातार अस्पताल में भर्ती होने से लेकर सर्जरी के बाद संपर्क बनाकर रखा है। हालांकि सुनील ग्रोवर हार्ट सर्जरी के बाद अस्पताल से बाहर आकर अपने घर जा चुके हैं। सुनील ग्रोवर के घर पहुंचने के बाद भी सलमान खान ने अपनी डॅाक्टर्स की टीम को हिदायत दी है कि किसी भी तरह की कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए। इसके साथ सुनील ग्रोवर की हार्ट सर्जरी को सुन कपिल शर्मा भी घबरा गए हैं। एक अन्य वेब साइट से बातचीत में कपिल शर्मा ने कहा है कि मैं यह सुनकर चौंक गया हूं। मैंने उन्हें मैसेज किया है। लेकिन वह अभी आराम कर रहे हैं। वैसे भी उन्हें आराम की जरूरत है। बहुत कम उम्र में उनकी बायपास सर्जरी हुई है। मैं प्रार्थना करता हूं कि वह जल्द ठीक हो जायेंगे। आपको बता दें कि सुनील ग्रोवर ने बतौर कॅामेडियन द कपिल शर्मा शो से लोकप्रियता हासिल की। लेकिन साल 2017 में फ्लाइट में हुई एक गंभीर लड़ाई के बाद सुनील ग्रोवर और कपिल शर्मा ने अपने रास्ते अलग कर लिए। कई दफा सुनील ग्रोवर की द कपिल शर्मा शो में वापसी की घर भी सामने आयी। लेकिन सुनील ग्रोवर ने कपिल शर्मा शो में इतने साल में कभी वापसी नहीं की है। लेकिन दोनों के बीच कुछ साल बाद फिर से बातचीत शुरू हो गई।
Don't Miss! कॅामेडियन सुनील ग्रोवर की हार्ट सर्जरी की खबर सामने आने के साथ फैंस से लेकर सेलेब्स उनके जल्द ठीक होने की कामना कर रहे हैं। खास तौर पर सलमान खान ने इस दौरान सुनील ग्रोवर के इलाज की सारी जानकारी ली है। मीडिया रिपोर्ट अनुसार एक वेब सीरीज की शूटिंग के दौरान सुनील ग्रोवर की तबीयत खराब हुई। जांच कराने पर सुनील ग्रोवर को इस बात की जानकारी मिली कि उनके दिल में चार ब्लॉकेज नजर आई है। वेब सीरीज की शूटिंग को खत्म करने के बाद सुनील ग्रोवर ने डॉक्टरों की सलाह अनुसार अपनी हार्ट सर्जरी करवाई। एक वेबसाइट की रिपोर्ट अनुसार सुनील ग्रोवर की सेहत को लेकर सलमान खान ने अपनी टीम को इस पर निगरानी रखने को बोला है। सलमान खान और सुनील ग्रोवर की पहचान काफी समय से है। सुनील ग्रोवर और सलमान खान ने साथ में भारत फिल्म में काम किया है। साथ ही कपिल शर्मा शो में सुनील ग्रोवर की वापसी को लेकर सलमान खान ने बात भी की थी। हालांकि अभी तक इस पर सुनील ग्रोवर या सलमान खान की टीम की तरफ से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं आयी है। रिपोर्ट अनुसार सलमान खान के डॅाक्टर्स की टीम सुनील के इलाज पर काफी कड़ी निगरानी रख रही है। इसके साथ सलमान खान ने अपनी टीम से लगातार सुनील ग्रोवर की हार्ट सर्जरी के दौरान और बाद में सारी अपडेट भी ली है। बताया जा रहा है कि सुनील ग्रोवर के साथ सलमान खान लगातार अस्पताल में भर्ती होने से लेकर सर्जरी के बाद संपर्क बनाकर रखा है। हालांकि सुनील ग्रोवर हार्ट सर्जरी के बाद अस्पताल से बाहर आकर अपने घर जा चुके हैं। सुनील ग्रोवर के घर पहुंचने के बाद भी सलमान खान ने अपनी डॅाक्टर्स की टीम को हिदायत दी है कि किसी भी तरह की कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए। इसके साथ सुनील ग्रोवर की हार्ट सर्जरी को सुन कपिल शर्मा भी घबरा गए हैं। एक अन्य वेब साइट से बातचीत में कपिल शर्मा ने कहा है कि मैं यह सुनकर चौंक गया हूं। मैंने उन्हें मैसेज किया है। लेकिन वह अभी आराम कर रहे हैं। वैसे भी उन्हें आराम की जरूरत है। बहुत कम उम्र में उनकी बायपास सर्जरी हुई है। मैं प्रार्थना करता हूं कि वह जल्द ठीक हो जायेंगे। आपको बता दें कि सुनील ग्रोवर ने बतौर कॅामेडियन द कपिल शर्मा शो से लोकप्रियता हासिल की। लेकिन साल दो हज़ार सत्रह में फ्लाइट में हुई एक गंभीर लड़ाई के बाद सुनील ग्रोवर और कपिल शर्मा ने अपने रास्ते अलग कर लिए। कई दफा सुनील ग्रोवर की द कपिल शर्मा शो में वापसी की घर भी सामने आयी। लेकिन सुनील ग्रोवर ने कपिल शर्मा शो में इतने साल में कभी वापसी नहीं की है। लेकिन दोनों के बीच कुछ साल बाद फिर से बातचीत शुरू हो गई।
नई दिल्ली / टीम डिजिटल। आरबीआई की 2 दिवसीय मौद्रिक समीक्षा नीति की बैठक में पिछली बार की तरह रेपो रेट में 50 आधार अंकों की बढ़ोतरी की है। देश में उच्च मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने वाले इस प्रयास का असर होम लोन के ब्याज दरों पर पड़ सकता है। क्योंकि बैंक इस बढ़ी हुई दर के अनुसार अपनी ब्याज दरों को बढ़ा सकते हैं, जिसका सीधा असर इएमआई पर पडे़गा। रेपो रेट की बढ़ोतरी पर दिल्ली एनसीआर के रियल एस्टेट डेवलपर्स ने आवश्यक कदम बताते हुए मिली जुली प्रतिक्रिया दी। क्रेडाई वेस्टर्न यूपी के अध्यक्ष अमित मोदी ने कही- आरबीआई के रेपो रेट में 50 आधार अंकों की बढ़ोतरी ने एक बार फिर कर्ज पर ब्याज दरों में इजाफा कर दिया है। यह निश्चित रूप से घर खरीदारों की क्षमता को प्रभावित करने वाला है, विशेष रूप से मध्यम वर्ग के लोगों पर इसका असर दिखाई देगा। इस बढ़ोतरी के बाद, लाखों घर खरीदार संपत्ति बाजार से दूर हो सकते हैं। इससे अचल संपत्ति बाजार में परियोजनाओं की बिक्री की गति कम हो जाएगी। गुलशन ग्रुप के निदेशक दीपक कपूर ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि आरबीआई द्वारा रेपो दर में 50 आधार अंकों की वर्तमान वृद्धि का मुद्रास्फीति पर नियंत्रण पाने की कोशिश है। भले ही सरकार इनपुट लागत पर मुद्रास्फीति के दबाव पर लगाम लगाने के प्रयास कर रही है, मगर फिर भी यह अभी कम्फर्ट जोन में नहीं है। आवासीय और वाणिज्यिक दोनों क्षेत्रों में काम कर रहे एक रियल एस्टेट डेवलपर के रूप में, यह समग्र परिदृश्य पर एक तटस्थ प्रभाव डालने वाला है। मिगसन ग्रुप के एमडी यश मिगलानी ने कहा कि देश को महामारी से निपटने में मदद करने के लिए आरबीआई द्वारा रेपो दर में काफी समय तक बढ़ोतरी नहीं की गई थी, मगर अब आरबीआई मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए धीरे-धीरे आधार अंकों को बढ़ाना शुरू कर दिया है। पिछली एमपीसी बैठक में 50 आधार अंकों की बढ़ोतरी के बाद आरबीआई ने फिर से रेपो दर को 50 बीपीएस बढ़ाने का फैसला किया है। यदि इस वृद्धि के अनुसार बैंक भी वृद्धि करते हैं, तो निश्चित रूप से होम लोन की सर्विसिंग की लागत में वृद्धि होगी, लेकिन इसका प्रभाव, अनुमानित दृष्टिकोण और सकारात्मक भावनाओं को देखते हुए, अचल संपत्ति पर न्यूनतम होगा। महागुन ग्रुप के निदेशक अमित जैन के अनुसार रेपो दर में वृद्धि ने मुद्रास्फीति की चुनौतियों को कम करने के लिए आरबीआई की प्रतिबद्धता को दिखाया है जिसका भारत लंबे समय से सामना कर रहा है। इसका रियल एस्टेट सेक्टर पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। जाहिर है, बाजार की मांगों में शुरुआती नर्मी आयेगी लेकिन संपत्ति की खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि और बाजार में नए खरीदारों की भरमार है, इसलिए शुरुआती चुनौतियां बहुत आसानी से दूर हो जाएंगी। मुद्रास्फीति की बाधाओं से निपटना और उन पर अंकुश लगाना अभी प्राथमिकता है और आरबीआई की कार्रवाई मुख्य रूप से इसी से प्रेरित है।
नई दिल्ली / टीम डिजिटल। आरबीआई की दो दिवसीय मौद्रिक समीक्षा नीति की बैठक में पिछली बार की तरह रेपो रेट में पचास आधार अंकों की बढ़ोतरी की है। देश में उच्च मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने वाले इस प्रयास का असर होम लोन के ब्याज दरों पर पड़ सकता है। क्योंकि बैंक इस बढ़ी हुई दर के अनुसार अपनी ब्याज दरों को बढ़ा सकते हैं, जिसका सीधा असर इएमआई पर पडे़गा। रेपो रेट की बढ़ोतरी पर दिल्ली एनसीआर के रियल एस्टेट डेवलपर्स ने आवश्यक कदम बताते हुए मिली जुली प्रतिक्रिया दी। क्रेडाई वेस्टर्न यूपी के अध्यक्ष अमित मोदी ने कही- आरबीआई के रेपो रेट में पचास आधार अंकों की बढ़ोतरी ने एक बार फिर कर्ज पर ब्याज दरों में इजाफा कर दिया है। यह निश्चित रूप से घर खरीदारों की क्षमता को प्रभावित करने वाला है, विशेष रूप से मध्यम वर्ग के लोगों पर इसका असर दिखाई देगा। इस बढ़ोतरी के बाद, लाखों घर खरीदार संपत्ति बाजार से दूर हो सकते हैं। इससे अचल संपत्ति बाजार में परियोजनाओं की बिक्री की गति कम हो जाएगी। गुलशन ग्रुप के निदेशक दीपक कपूर ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि आरबीआई द्वारा रेपो दर में पचास आधार अंकों की वर्तमान वृद्धि का मुद्रास्फीति पर नियंत्रण पाने की कोशिश है। भले ही सरकार इनपुट लागत पर मुद्रास्फीति के दबाव पर लगाम लगाने के प्रयास कर रही है, मगर फिर भी यह अभी कम्फर्ट जोन में नहीं है। आवासीय और वाणिज्यिक दोनों क्षेत्रों में काम कर रहे एक रियल एस्टेट डेवलपर के रूप में, यह समग्र परिदृश्य पर एक तटस्थ प्रभाव डालने वाला है। मिगसन ग्रुप के एमडी यश मिगलानी ने कहा कि देश को महामारी से निपटने में मदद करने के लिए आरबीआई द्वारा रेपो दर में काफी समय तक बढ़ोतरी नहीं की गई थी, मगर अब आरबीआई मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए धीरे-धीरे आधार अंकों को बढ़ाना शुरू कर दिया है। पिछली एमपीसी बैठक में पचास आधार अंकों की बढ़ोतरी के बाद आरबीआई ने फिर से रेपो दर को पचास बीपीएस बढ़ाने का फैसला किया है। यदि इस वृद्धि के अनुसार बैंक भी वृद्धि करते हैं, तो निश्चित रूप से होम लोन की सर्विसिंग की लागत में वृद्धि होगी, लेकिन इसका प्रभाव, अनुमानित दृष्टिकोण और सकारात्मक भावनाओं को देखते हुए, अचल संपत्ति पर न्यूनतम होगा। महागुन ग्रुप के निदेशक अमित जैन के अनुसार रेपो दर में वृद्धि ने मुद्रास्फीति की चुनौतियों को कम करने के लिए आरबीआई की प्रतिबद्धता को दिखाया है जिसका भारत लंबे समय से सामना कर रहा है। इसका रियल एस्टेट सेक्टर पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। जाहिर है, बाजार की मांगों में शुरुआती नर्मी आयेगी लेकिन संपत्ति की खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि और बाजार में नए खरीदारों की भरमार है, इसलिए शुरुआती चुनौतियां बहुत आसानी से दूर हो जाएंगी। मुद्रास्फीति की बाधाओं से निपटना और उन पर अंकुश लगाना अभी प्राथमिकता है और आरबीआई की कार्रवाई मुख्य रूप से इसी से प्रेरित है।
देवास। बहुचर्चित आरएसएस के पूर्व प्रचारक सुनील जोशी हत्याकांड में आज देवास न्यायालय में फैसला आया। कोर्ट ने सभी आठ आरोपियों को दोष मुक्त कर दिया। प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव म. आपटे की कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है। साध्वी प्रज्ञा ठाकुर सहित सभी 8 आरोपी दोष मुक्त किए गए हैं। 29 दिसंबर 2007 को संघ के पूर्व प्रचारक सुनील जोशी की चूना खदान क्षेत्र में गोली मारकर हत्या की गई थी। मामले में 4 आरोपी न्यायिक अभिरक्षा में थे और 4 आरोपी जितेंद्र शर्मा, रामचरण पटेल, वासुदेव परमार और आनंदराज कटारिया जमानत पर थे। बीमार होने की वजह से प्रज्ञा सिंह ठाकुर पेश नहीं हुईं, उनके साथ हर्षद सोलंकी, लोकेश शर्मा, राजेंद्र चौधरी, जितेंद्र शर्मा, रामचरण पटेल, वासुदेव परमार और आनंदराज कटारिया आरोपी थे। जिनमे जितेंद्र शर्मा, रामचरण पटेल, वासुदेव परमार और आनंदराज कटारिया चारों जमानत पर थे। कोर्ट का फैसला आते ही कोर्ट परिसर में समर्थकों ने नारे लगा कर ख़ुशी जाहिर की। फैसला आने के बाद आनंद राज कटारिया और वासुदेव परमार कोर्ट में रो पड़े थे।
देवास। बहुचर्चित आरएसएस के पूर्व प्रचारक सुनील जोशी हत्याकांड में आज देवास न्यायालय में फैसला आया। कोर्ट ने सभी आठ आरोपियों को दोष मुक्त कर दिया। प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव म. आपटे की कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है। साध्वी प्रज्ञा ठाकुर सहित सभी आठ आरोपी दोष मुक्त किए गए हैं। उनतीस दिसंबर दो हज़ार सात को संघ के पूर्व प्रचारक सुनील जोशी की चूना खदान क्षेत्र में गोली मारकर हत्या की गई थी। मामले में चार आरोपी न्यायिक अभिरक्षा में थे और चार आरोपी जितेंद्र शर्मा, रामचरण पटेल, वासुदेव परमार और आनंदराज कटारिया जमानत पर थे। बीमार होने की वजह से प्रज्ञा सिंह ठाकुर पेश नहीं हुईं, उनके साथ हर्षद सोलंकी, लोकेश शर्मा, राजेंद्र चौधरी, जितेंद्र शर्मा, रामचरण पटेल, वासुदेव परमार और आनंदराज कटारिया आरोपी थे। जिनमे जितेंद्र शर्मा, रामचरण पटेल, वासुदेव परमार और आनंदराज कटारिया चारों जमानत पर थे। कोर्ट का फैसला आते ही कोर्ट परिसर में समर्थकों ने नारे लगा कर ख़ुशी जाहिर की। फैसला आने के बाद आनंद राज कटारिया और वासुदेव परमार कोर्ट में रो पड़े थे।
२६६ : पूज्य आर्यिका श्री रत्नमती अभिनन्दन ग्रन्थ कर यह विधान करना प्रारम्भ कर दिया। उस अवसर पर जिनकी प्रेरणा से यह विधान रचा गया था वे मदनलालजी चांदवाड, रामगंज मण्डी भी सपत्नीक आ गये। विधान में इतना आनन्द आया कि जो अकथनीय है। विधान के समापन पर श्री भगवान् महावीर स्वामी का १००८ कलशों से महाभिषेक किया गया था। यहाँ हस्तिनापुर के इतिहास में सर्वप्रथम इन्द्रध्वज विधान का आयोजन अपने आप में बहुत ही महत्त्वपूर्ण रहा। अनन्तर पुस्तक छपने के बाद तो जगह-जगह इस विधान की धूम मच गई है। दिल्ली में माताजी के सान्निध्य में यह विधान १६ बार हो चुका है। और यहाँ भी ७-८ बार हो चुका है। जो भी इस विधान को करते हैं, पढ़ते हैं, वे यही लिखते हैं कि ऐसा सुन्दर विधान आज तक हमने न देखा था, न सुना था और न इससे बढ़िया विधान और कोई देखने को मिलेगा ही। माताजी ने इसमे ४० से अधिक छन्दों का प्रयोग किया है। इसकी भाषा बहुत ही सरल और बहुत हो मधुर है। इसमें तिलोयपण्णत्ति आदि आगम का सार भरा हुआ है। कोई कैसा ही क्यों न हो, विधान पढते समय उसको आनन्द आता ही आता है और इस विधान का फल भी तात्कालिक देखा जा रहा है। जिन्होंने भी विधिवत् इस इन्द्रध्वज विधान को किया है उन्हें इच्छित फल की प्राप्ति अवश्य हुई है। हस्तिनापुर में चातुर्मास सन् १९७७ में संस्थान के कार्यकताओं की प्रार्थना से माताजी ने अपने संघ का चातुर्मास यहीं पर स्थापित कर दिया। माताजी प्रातः सामूहिक स्वाध्याय मे मूलाचार चलाती थी। उसका हिन्दी अनुवाद करना भी प्रारम्भ कर दिया था। इस समय माताजी सतत अपने लेखन कार्य मे लगी रहती थीं। संघस्थ बालिकायें पूजन, आहारदान आदि से निवृत्त होकर माताजी के पास मध्याह्न मे घण्टे, दो घण्टे पञ्चसंग्रह आदि ग्रन्थों को पढ़ती थी । आ० रत्नमती माताजी इन सब स्वाध्यायों में बैठती थीं । पुनः स्वयं भी स्वाध्याय में और चौबीस ठाणा की चर्चा में लगी रहती थीं। इस प्रकार चातुर्मास धमंध्यान पूर्वक चल रहा था। यहाँ चातुर्मास के प्रारम्भ मे ही श्री सेठ हीरालाल जी, रानीवाला जयपुर पधारे और कई दिनों तक रहकर संघ को आहारदान देते हुए माताजी से स्वाध्याय का लाभ लेते रहे । कलकत्ते से श्री चाँदमल जी बडजात्या सपत्नीक आये थे। कई दिनों रहकर आहारदान देते हुए पूजन और स्वाध्याय का लाभ ले रहे थे । समय-समय पर इस जम्बूद्वीप रचना के बारे में माताजी से चर्चा भी किया करते थे । पुनः आपने स्वयं कहा"मैं इस सुमेरु पर्वत में कुछ करना चाहता हूँ।" तब मैंने कहा"इसके १६ चैत्यालय के दातार हो चुके हैं आप चूलिका को ले लीजिए।" तब उन्होंने उसके लिए १५०००) की स्वीकृति कर दी थी। माताजी को ज्वर से अस्वस्थता इस चातुर्मास में माताजी को एकान्तर से ज्वर आने लगा था जिससे माताजी बहुत ही कमजोर हो गई थीं। फिर भी माताजी अपने आवश्यक क्रियाओं में लगी रहती थीं और लेखन कार्य भी नहीं छोड़ती थीं।
दो सौ छयासठ : पूज्य आर्यिका श्री रत्नमती अभिनन्दन ग्रन्थ कर यह विधान करना प्रारम्भ कर दिया। उस अवसर पर जिनकी प्रेरणा से यह विधान रचा गया था वे मदनलालजी चांदवाड, रामगंज मण्डी भी सपत्नीक आ गये। विधान में इतना आनन्द आया कि जो अकथनीय है। विधान के समापन पर श्री भगवान् महावीर स्वामी का एक हज़ार आठ कलशों से महाभिषेक किया गया था। यहाँ हस्तिनापुर के इतिहास में सर्वप्रथम इन्द्रध्वज विधान का आयोजन अपने आप में बहुत ही महत्त्वपूर्ण रहा। अनन्तर पुस्तक छपने के बाद तो जगह-जगह इस विधान की धूम मच गई है। दिल्ली में माताजी के सान्निध्य में यह विधान सोलह बार हो चुका है। और यहाँ भी सात-आठ बार हो चुका है। जो भी इस विधान को करते हैं, पढ़ते हैं, वे यही लिखते हैं कि ऐसा सुन्दर विधान आज तक हमने न देखा था, न सुना था और न इससे बढ़िया विधान और कोई देखने को मिलेगा ही। माताजी ने इसमे चालीस से अधिक छन्दों का प्रयोग किया है। इसकी भाषा बहुत ही सरल और बहुत हो मधुर है। इसमें तिलोयपण्णत्ति आदि आगम का सार भरा हुआ है। कोई कैसा ही क्यों न हो, विधान पढते समय उसको आनन्द आता ही आता है और इस विधान का फल भी तात्कालिक देखा जा रहा है। जिन्होंने भी विधिवत् इस इन्द्रध्वज विधान को किया है उन्हें इच्छित फल की प्राप्ति अवश्य हुई है। हस्तिनापुर में चातुर्मास सन् एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर में संस्थान के कार्यकताओं की प्रार्थना से माताजी ने अपने संघ का चातुर्मास यहीं पर स्थापित कर दिया। माताजी प्रातः सामूहिक स्वाध्याय मे मूलाचार चलाती थी। उसका हिन्दी अनुवाद करना भी प्रारम्भ कर दिया था। इस समय माताजी सतत अपने लेखन कार्य मे लगी रहती थीं। संघस्थ बालिकायें पूजन, आहारदान आदि से निवृत्त होकर माताजी के पास मध्याह्न मे घण्टे, दो घण्टे पञ्चसंग्रह आदि ग्रन्थों को पढ़ती थी । आशून्य रत्नमती माताजी इन सब स्वाध्यायों में बैठती थीं । पुनः स्वयं भी स्वाध्याय में और चौबीस ठाणा की चर्चा में लगी रहती थीं। इस प्रकार चातुर्मास धमंध्यान पूर्वक चल रहा था। यहाँ चातुर्मास के प्रारम्भ मे ही श्री सेठ हीरालाल जी, रानीवाला जयपुर पधारे और कई दिनों तक रहकर संघ को आहारदान देते हुए माताजी से स्वाध्याय का लाभ लेते रहे । कलकत्ते से श्री चाँदमल जी बडजात्या सपत्नीक आये थे। कई दिनों रहकर आहारदान देते हुए पूजन और स्वाध्याय का लाभ ले रहे थे । समय-समय पर इस जम्बूद्वीप रचना के बारे में माताजी से चर्चा भी किया करते थे । पुनः आपने स्वयं कहा"मैं इस सुमेरु पर्वत में कुछ करना चाहता हूँ।" तब मैंने कहा"इसके सोलह चैत्यालय के दातार हो चुके हैं आप चूलिका को ले लीजिए।" तब उन्होंने उसके लिए पंद्रह हज़ार) की स्वीकृति कर दी थी। माताजी को ज्वर से अस्वस्थता इस चातुर्मास में माताजी को एकान्तर से ज्वर आने लगा था जिससे माताजी बहुत ही कमजोर हो गई थीं। फिर भी माताजी अपने आवश्यक क्रियाओं में लगी रहती थीं और लेखन कार्य भी नहीं छोड़ती थीं।
शहर के सरकारी अस्पतालों में प्रदेश सरकार लोगों को इलाज और सभी जांचों की सुविधा निशुल्क उपलब्ध करा रही है, लेकिन पार्किंग शुल्क के नाम पर मरीज व उनके परिजनों से मनमानी वसूली की जा रही है। View More जरा सोचिए सरकार! अस्पतालों में इलाज, दवा, जांच 'सब फ्री' तो पार्किंग शुल्क वसूली क्यों? एक्शन में गहलोत सरकार : RTH बिल का विरोध करने वाले निजी अस्पतालों के डॉक्टरों पर सख्ती की तैयारी! प्रदेश सरकार ने RTH बिल को लेकर जारी आंदोलन पर सख्ती की तैयारी शुरू कर दी है। View More एक्शन में गहलोत सरकार : RTH बिल का विरोध करने वाले निजी अस्पतालों के डॉक्टरों पर सख्ती की तैयारी!
शहर के सरकारी अस्पतालों में प्रदेश सरकार लोगों को इलाज और सभी जांचों की सुविधा निशुल्क उपलब्ध करा रही है, लेकिन पार्किंग शुल्क के नाम पर मरीज व उनके परिजनों से मनमानी वसूली की जा रही है। View More जरा सोचिए सरकार! अस्पतालों में इलाज, दवा, जांच 'सब फ्री' तो पार्किंग शुल्क वसूली क्यों? एक्शन में गहलोत सरकार : RTH बिल का विरोध करने वाले निजी अस्पतालों के डॉक्टरों पर सख्ती की तैयारी! प्रदेश सरकार ने RTH बिल को लेकर जारी आंदोलन पर सख्ती की तैयारी शुरू कर दी है। View More एक्शन में गहलोत सरकार : RTH बिल का विरोध करने वाले निजी अस्पतालों के डॉक्टरों पर सख्ती की तैयारी!
नई दिल्लीः पाकिस्तान टीम के टी-20 वर्ल्ड कप के खिताबी मुकाबले में इंग्लैंड के हाथों हार का सामना करना पड़ा है। मेलबर्न में खेले गए मैच में पाकिस्तानी टीम की शुरुआत काफी धीमी रही है, जिससे बड़ा स्कोर बनाने में नाकाम साबित हुई। आसान से लक्ष्य का पीछा करते हुए इंग्लैंड ने 5 विकेट और 6 गेंद से मुकाबला जीत लिया। इस पूरे टूर्नामेंट में पाकिस्तानी कप्तान बाबर आजम अपनी निराशाजनक बल्लेबाजी को लेकर काफी सुर्खियों में रहे हैं। बाबर ने पूरे टूर्नामेंट में महज एक ही अर्धशतक लगाया। अब हार के बाद बाबर आजम ने एक एक ऐसा बयान दिया, जिससे सबका दिल जीत लिया। खिताबी मुकाबले में हार के बाद पाकिस्तान कप्तान ने बड़ी बात कही हैं, जिससे सबका दिल जीत लिया है। आजम ने सबसे पहले जीत के लिए इंग्लैंड को बधाई दी और वह चैंपियन बनने लायक हैं, जो टूर्नामेंट मे अच्छी तरस से खेले। उन्होंने कहा कि हमें ऑस्ट्रेलिया की जमी पर खेलते हुए घर जैसा महसूस हुआ। हर वेन्यू पर अच्छा समर्थन मिला। आपके समर्थन के लिए धन्यवाद। हां, हम पहले दो गेम हारे लेकिन आखिरी चार गेम में हम जिस तरह से पहुंचे वह अविश्वसनीय था। आगे बाबर आजम ने कहा कि मैंने लड़कों को अपना स्वाभाविक खेल खेलने के लिए कहा, लेकिन हम 20 रन से कम हो गए और लड़कों ने गेंद से अच्छा कमाल का प्रदर्शन किया। हमारी गेंदबाजी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ आक्रमणों में से एक मानी जाती है। दुर्भाग्यवश शाहीन अफरीदी की चोट ने हमें निराशा दी। फिर भी यह खेल का हिस्सा है। आखिरी मुकाबले में इंग्लैंड की ओर से महत्वपूर्ण प्रदर्शन करने वाले तेज गेंदबाज सैम करेन को टी20 विश्वकप 2022 का टूर्नामेंट के बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है। चोट से उबरने के बाद वापसी करने वाले करेन को फाइनल में मैन ऑफ द मैच भी चुन लिया गया है। इस मुकाबले में उन्होंने चार ओवर में 12 रन देकर तीन विकेट लिए। करेन ने टूर्नामेंट में 13 विकेट लिए।
नई दिल्लीः पाकिस्तान टीम के टी-बीस वर्ल्ड कप के खिताबी मुकाबले में इंग्लैंड के हाथों हार का सामना करना पड़ा है। मेलबर्न में खेले गए मैच में पाकिस्तानी टीम की शुरुआत काफी धीमी रही है, जिससे बड़ा स्कोर बनाने में नाकाम साबित हुई। आसान से लक्ष्य का पीछा करते हुए इंग्लैंड ने पाँच विकेट और छः गेंद से मुकाबला जीत लिया। इस पूरे टूर्नामेंट में पाकिस्तानी कप्तान बाबर आजम अपनी निराशाजनक बल्लेबाजी को लेकर काफी सुर्खियों में रहे हैं। बाबर ने पूरे टूर्नामेंट में महज एक ही अर्धशतक लगाया। अब हार के बाद बाबर आजम ने एक एक ऐसा बयान दिया, जिससे सबका दिल जीत लिया। खिताबी मुकाबले में हार के बाद पाकिस्तान कप्तान ने बड़ी बात कही हैं, जिससे सबका दिल जीत लिया है। आजम ने सबसे पहले जीत के लिए इंग्लैंड को बधाई दी और वह चैंपियन बनने लायक हैं, जो टूर्नामेंट मे अच्छी तरस से खेले। उन्होंने कहा कि हमें ऑस्ट्रेलिया की जमी पर खेलते हुए घर जैसा महसूस हुआ। हर वेन्यू पर अच्छा समर्थन मिला। आपके समर्थन के लिए धन्यवाद। हां, हम पहले दो गेम हारे लेकिन आखिरी चार गेम में हम जिस तरह से पहुंचे वह अविश्वसनीय था। आगे बाबर आजम ने कहा कि मैंने लड़कों को अपना स्वाभाविक खेल खेलने के लिए कहा, लेकिन हम बीस रन से कम हो गए और लड़कों ने गेंद से अच्छा कमाल का प्रदर्शन किया। हमारी गेंदबाजी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ आक्रमणों में से एक मानी जाती है। दुर्भाग्यवश शाहीन अफरीदी की चोट ने हमें निराशा दी। फिर भी यह खेल का हिस्सा है। आखिरी मुकाबले में इंग्लैंड की ओर से महत्वपूर्ण प्रदर्शन करने वाले तेज गेंदबाज सैम करेन को टीबीस विश्वकप दो हज़ार बाईस का टूर्नामेंट के बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है। चोट से उबरने के बाद वापसी करने वाले करेन को फाइनल में मैन ऑफ द मैच भी चुन लिया गया है। इस मुकाबले में उन्होंने चार ओवर में बारह रन देकर तीन विकेट लिए। करेन ने टूर्नामेंट में तेरह विकेट लिए।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
अभिनेता रनवीर सिंह ने दीपिका पदुकोण की नयी फिल्म 'पिकू' में उनके अभिनय को उनके करियर में सबसे अच्छा बताया है। ट्विटर पर दीपिका की तारीफ करते हुए 29 वर्षीय अभिनेता ने दोनों के संबंधों के बारे में भी संकेत दिए। Pure magic in th performances by @SrBachchan @irrfan_k & a career-best display from @deepikapadukone. . Bravo! ! (And no, I'm not being biased) रनवीर ने ट्वीट करके फिल्म के निर्देशक सुजीत सरकार की भी तारीफ की है। 29 वर्षीय दीपिका ने रनवीर के ट्वीट को रीट्वीट किया है। PIKU...Absolutely marvelous! ! ! @ShoojitSircar @writeonj take a bow! RIP-ROARING (! ) heart-warming, endearing & poignant...sheer quality! रनवीर और दीपिका ने 2013 में संजय लीला भंसाली की फिल्म 'राम लीला' में पहली बार साथ काम किया था। इसके बात दोनों के बीच प्यार की चर्चा होने लगी थी। दोनों एकबार फिर भंसाली की फिल्म 'बाजीराव मस्तानी' में साथ नजर आएंगे।
अभिनेता रनवीर सिंह ने दीपिका पदुकोण की नयी फिल्म 'पिकू' में उनके अभिनय को उनके करियर में सबसे अच्छा बताया है। ट्विटर पर दीपिका की तारीफ करते हुए उनतीस वर्षीय अभिनेता ने दोनों के संबंधों के बारे में भी संकेत दिए। Pure magic in th performances by @SrBachchan @irrfan_k & a career-best display from @deepikapadukone. . Bravo! ! रनवीर ने ट्वीट करके फिल्म के निर्देशक सुजीत सरकार की भी तारीफ की है। उनतीस वर्षीय दीपिका ने रनवीर के ट्वीट को रीट्वीट किया है। PIKU...Absolutely marvelous! ! ! @ShoojitSircar @writeonj take a bow! RIP-ROARING heart-warming, endearing & poignant...sheer quality! रनवीर और दीपिका ने दो हज़ार तेरह में संजय लीला भंसाली की फिल्म 'राम लीला' में पहली बार साथ काम किया था। इसके बात दोनों के बीच प्यार की चर्चा होने लगी थी। दोनों एकबार फिर भंसाली की फिल्म 'बाजीराव मस्तानी' में साथ नजर आएंगे।
इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन का मानना है कि भारतीय कप्तान विराट कोहली की गैर मौजूदगी में ऑस्ट्रेलियाई टीम आगामी टेस्ट सीरीज के अंतिम तीन मैचों में भारत को आसानी से हरा देगी। कोहली जनवरी में पिता बनने वाले हैं और इसके चलते वह 17 दिसंबर से एडिलेड में होने वाले डे-नाइट टेस्ट मैच के बाद सीरीज के बाकी बचे तीन टेस्ट मैचों में नहीं खेल पाएंगे और स्वदेश लौट आएंगे। बीसीसीआई ने सोमवार को ही कोहली के पितृत्व अवकाश को अपनी मंजूरी दी है। कोहली के स्थान पर रोहित शर्मा को टीम में शामिल किया गया है लेकिन टीम की कमान अजिंक्य रहाणे के हाथों मे होगी क्योंकि अभी टीम के उपकप्तान वही हैं। वॉन ने एक ट्वीट में कहा, "ऑस्ट्रेलिया में तीन टेस्ट मैचों के लिए विराट कोहली नहीं है। अपने पहले बच्चे के जन्म के लिए उन्होंने अच्छा और सही फैसला किया है। लेकिन इसका मतलब है कि ऑस्ट्रेलियाई टीम आसानी से ये सीरीज जीत जाएगी। मैं बस ऐसा कह रहा हूं।" 32 वर्षीय कोहली हालांकि तीन वनडे और इतने ही टी-20 मैचों की सीरीज में खेलेंगे। एडिलेड में होने वाले पहले डे नाइट टेस्ट मैच के बाद दोनों टीमें 26 दिसंबर से मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (एमसीजी) में दूसरा टेस्ट, 7 जनवरी 2021 से सिडनी क्रिकेट ग्राउंड (एसजीसी) में तीसरा टेस्ट और 15 जनवरी 2021 से गॉबा में चौथा और अंतिम टेस्ट मैच खेलेगी।
इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन का मानना है कि भारतीय कप्तान विराट कोहली की गैर मौजूदगी में ऑस्ट्रेलियाई टीम आगामी टेस्ट सीरीज के अंतिम तीन मैचों में भारत को आसानी से हरा देगी। कोहली जनवरी में पिता बनने वाले हैं और इसके चलते वह सत्रह दिसंबर से एडिलेड में होने वाले डे-नाइट टेस्ट मैच के बाद सीरीज के बाकी बचे तीन टेस्ट मैचों में नहीं खेल पाएंगे और स्वदेश लौट आएंगे। बीसीसीआई ने सोमवार को ही कोहली के पितृत्व अवकाश को अपनी मंजूरी दी है। कोहली के स्थान पर रोहित शर्मा को टीम में शामिल किया गया है लेकिन टीम की कमान अजिंक्य रहाणे के हाथों मे होगी क्योंकि अभी टीम के उपकप्तान वही हैं। वॉन ने एक ट्वीट में कहा, "ऑस्ट्रेलिया में तीन टेस्ट मैचों के लिए विराट कोहली नहीं है। अपने पहले बच्चे के जन्म के लिए उन्होंने अच्छा और सही फैसला किया है। लेकिन इसका मतलब है कि ऑस्ट्रेलियाई टीम आसानी से ये सीरीज जीत जाएगी। मैं बस ऐसा कह रहा हूं।" बत्तीस वर्षीय कोहली हालांकि तीन वनडे और इतने ही टी-बीस मैचों की सीरीज में खेलेंगे। एडिलेड में होने वाले पहले डे नाइट टेस्ट मैच के बाद दोनों टीमें छब्बीस दिसंबर से मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में दूसरा टेस्ट, सात जनवरी दो हज़ार इक्कीस से सिडनी क्रिकेट ग्राउंड में तीसरा टेस्ट और पंद्रह जनवरी दो हज़ार इक्कीस से गॉबा में चौथा और अंतिम टेस्ट मैच खेलेगी।
देहरादून : नोटबंदी की परेशानी के बीच एक अच्छी खबर है। अब मोदी सरकार फ्री में रसोई गैस दे रही है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धमेंद्र प्रधान ने कहा कि चार माह पहले शुरू की गयी प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत अब तक 1. 1 करोड़ से ज्यादा रसोई गैस कनेक्शन जारी किये जा चुके हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री की पहल पर बनायी गयी इस योजना का सबसे ज्यादा असर गरीबी रेखा के नीचे रहने वाली महिलाओं के जीवन पर होगा जिससे वातावरण प्रदूषित करने वाले ईंधन से खाना बनाने में उन्हें होने वाली तकलीफ कम होने के साथ ही उनकी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में भी कमी आयेगी। उन्होंने कहा कि इससे अस्वच्छ ईंधन से खाना बनाने के कारण होने वाली मृत्यु दर में कमी भी आयेगी। प्रधान ने कहा कि इस योजना से पांच करोड़ परिवार लाभान्वित होंगे।
देहरादून : नोटबंदी की परेशानी के बीच एक अच्छी खबर है। अब मोदी सरकार फ्री में रसोई गैस दे रही है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री धमेंद्र प्रधान ने कहा कि चार माह पहले शुरू की गयी प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत अब तक एक. एक करोड़ से ज्यादा रसोई गैस कनेक्शन जारी किये जा चुके हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री की पहल पर बनायी गयी इस योजना का सबसे ज्यादा असर गरीबी रेखा के नीचे रहने वाली महिलाओं के जीवन पर होगा जिससे वातावरण प्रदूषित करने वाले ईंधन से खाना बनाने में उन्हें होने वाली तकलीफ कम होने के साथ ही उनकी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में भी कमी आयेगी। उन्होंने कहा कि इससे अस्वच्छ ईंधन से खाना बनाने के कारण होने वाली मृत्यु दर में कमी भी आयेगी। प्रधान ने कहा कि इस योजना से पांच करोड़ परिवार लाभान्वित होंगे।
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दिल्ली को इस सप्ताह वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें मिलनी शुरू होंगी। ये बसें दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के बेड़े में शामिल हो रही हैं। अभी तीन बसें आ रही हैं। कुल 300 लो-फ्लोर इलेक्ट्रिक बसें आनी हैं। इस साल मार्च में दिल्ली कैबिनेट ने डीटीसी की इन बसों की खरीद को मंजूरी दी थी। जो तीन बसें आ रही हैं, इन्हें निरीक्षण के बाद ट्रायल रन के लिए तैनात किया जाएगा। बसें और ड्राइवर निजी संस्थाओं द्वारा प्रदान किए जाएंगे और डीटीसी इन्हें अपने मार्गों पर संचालित करेगी तथा अपने कंडक्टरों को तैनात करेगा। बाकी 297 इलेक्ट्रिक बसें अलग-अलग बैच में आएंगी और उनकी अलग योजना होगी। इलेक्ट्रिक बसें रोहिणी, सुभाष प्लेस, मायापुरी, राजघाट और मुंडेला कलां डिपो में खड़ी होंगी। रोहिणी में दो बस डिपो और मुंडेला कलां में एक बस डिपो तैयार है और बसों को चार्ज करने के लिए ट्रांसफॉर्मर के माध्यम से बिजली कनेक्टिविटी दी गई है। कार्यक्रम के अनुसार अक्टूबर में कुल 118 बसें, नवंबर तक 100 और दिसंबर 2021 तक 60 बसें आनी थीं। शेष 20 बसें जनवरी 2022 तक आने वाली थीं। हालांकि कोविड -19 मामलों की दूसरी लहर ने काम प्रभावित किया है, इलेक्ट्रिक बसों की डिलीवरी और नामित बस डिपो पर चार्जिंग स्टेशन जैसे सहायक बुनियादी ढांचे के निर्माण में देरी हुई है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) 15 साल से अधिक पुराने पुलों, फ्लाईओवरों का निरीक्षण करेगा। विभाग द्वारा जारी एक परिपत्र के अनुसार पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर-इन-चीफ की अध्यक्षता में वरिष्ठ इंजीनियरों और अन्य लोगों की हालिया बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया। परिपत्र में पीडब्ल्यूडी ने 15 साल से अधिक पुराने पुलों, फ्लाईओवर, अंडरपास और अन्य संरचनाओं का निरीक्षण करने और विस्तृत अध्ययन करने के निर्देश जारी किए हैं। संरचनाओं में किसी भी दोष भी आवश्यक सुधार के लिए फ्लाईओवर जोन के तहत मरम्मत विभाग को तुरंत सूचित किया जाएगा। Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें। हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दिल्ली को इस सप्ताह वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें मिलनी शुरू होंगी। ये बसें दिल्ली परिवहन निगम के बेड़े में शामिल हो रही हैं। अभी तीन बसें आ रही हैं। कुल तीन सौ लो-फ्लोर इलेक्ट्रिक बसें आनी हैं। इस साल मार्च में दिल्ली कैबिनेट ने डीटीसी की इन बसों की खरीद को मंजूरी दी थी। जो तीन बसें आ रही हैं, इन्हें निरीक्षण के बाद ट्रायल रन के लिए तैनात किया जाएगा। बसें और ड्राइवर निजी संस्थाओं द्वारा प्रदान किए जाएंगे और डीटीसी इन्हें अपने मार्गों पर संचालित करेगी तथा अपने कंडक्टरों को तैनात करेगा। बाकी दो सौ सत्तानवे इलेक्ट्रिक बसें अलग-अलग बैच में आएंगी और उनकी अलग योजना होगी। इलेक्ट्रिक बसें रोहिणी, सुभाष प्लेस, मायापुरी, राजघाट और मुंडेला कलां डिपो में खड़ी होंगी। रोहिणी में दो बस डिपो और मुंडेला कलां में एक बस डिपो तैयार है और बसों को चार्ज करने के लिए ट्रांसफॉर्मर के माध्यम से बिजली कनेक्टिविटी दी गई है। कार्यक्रम के अनुसार अक्टूबर में कुल एक सौ अट्ठारह बसें, नवंबर तक एक सौ और दिसंबर दो हज़ार इक्कीस तक साठ बसें आनी थीं। शेष बीस बसें जनवरी दो हज़ार बाईस तक आने वाली थीं। हालांकि कोविड -उन्नीस मामलों की दूसरी लहर ने काम प्रभावित किया है, इलेक्ट्रिक बसों की डिलीवरी और नामित बस डिपो पर चार्जिंग स्टेशन जैसे सहायक बुनियादी ढांचे के निर्माण में देरी हुई है। लोक निर्माण विभाग पंद्रह साल से अधिक पुराने पुलों, फ्लाईओवरों का निरीक्षण करेगा। विभाग द्वारा जारी एक परिपत्र के अनुसार पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर-इन-चीफ की अध्यक्षता में वरिष्ठ इंजीनियरों और अन्य लोगों की हालिया बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया। परिपत्र में पीडब्ल्यूडी ने पंद्रह साल से अधिक पुराने पुलों, फ्लाईओवर, अंडरपास और अन्य संरचनाओं का निरीक्षण करने और विस्तृत अध्ययन करने के निर्देश जारी किए हैं। संरचनाओं में किसी भी दोष भी आवश्यक सुधार के लिए फ्लाईओवर जोन के तहत मरम्मत विभाग को तुरंत सूचित किया जाएगा। Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें। हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।