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आज रोज़गार सबसे बड़ी चिंता है। इसलिए हमने तय किया है कि हम मध्य प्रदेश में हर महीने में एक दिन रोज़गार दिवस के रूप में मनाएंगे और उस दिन हम कई युवाओं को एकसाथ रोज़गार दिलाने का काम करेंगे। मेरे बच्चों आप में प्रतिभा, क्षमता, योग्यता किसी चीज़ की कमी नहीं है। मेरा सपना है कि मध्य प्रदेश के बेटा, बेटियां रोज़गार मांगने वाले नहीं बल्कि रोज़गार देने वाले बन जाए। यह हो सकता है, असंभव नहीं है।
आज रोज़गार सबसे बड़ी चिंता है। इसलिए हमने तय किया है कि हम मध्य प्रदेश में हर महीने में एक दिन रोज़गार दिवस के रूप में मनाएंगे और उस दिन हम कई युवाओं को एकसाथ रोज़गार दिलाने का काम करेंगे। मेरे बच्चों आप में प्रतिभा, क्षमता, योग्यता किसी चीज़ की कमी नहीं है। मेरा सपना है कि मध्य प्रदेश के बेटा, बेटियां रोज़गार मांगने वाले नहीं बल्कि रोज़गार देने वाले बन जाए। यह हो सकता है, असंभव नहीं है।
उत्तर प्रदेश सरकार धार्मिक केंद्रों के विकास के साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार भी उपलब्ध करा रही है. योगी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में ही अयोध्या, काशी और मथुरा सहित अन्य धार्मिक स्थलों का तेजी से विकास कराया. अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है. इसके साथ ही अयोध्या में आधारभूत ढांचे का विकास भी तेजी से हो रहा है. अयोध्या में 138 करोड़ रुपये की 17 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं. 54 परियोजनाओं में 3,126 करोड़ की लागत से काम युद्धस्तर पर चल रहा है. 84 कोसी परिक्रमा मार्ग पर पड़ने वाले तीर्थ स्थलों का विकास किया जा रहा है. अयोध्या को वैदिक सिटी के रूप में विकसित करने की योजना है. इसके लिए पंचकोसी, चौदह कोसी और चौरासी कोसी परिक्रमा के लिए मार्ग का निर्माण किया जा रहा है. हवाई अड्डे का निर्माण, सड़कों का निर्माण और बाजारों को व्यवस्थित किया जा रहा है ताकि पर्यटन को सुगम बनाया जा सके. वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम का निर्माण कराया गया. पर्यटकों के लिए क्रूज सेवा का संचालन किया जा रहा है. 70 किलोमीटर लंबे पंचकोसी मार्ग को लेकर नई विकास परियोजना तैयार की गई है. देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या में वृद्धि लगातार हो रही है. पवित्रता को बनाए रखते हुए ब्रज क्षेत्र की पहचान को देश-दुनिया तक पहुंचाया जा रहा है. ब्रज क्षेत्र को विश्व स्तर का पर्यटन स्थल बनाने के लिए लगातार प्रयत्न किया जा रहा है. इसके लिए ब्रज तीर्थ विकास परिषद का गठन किया गया है. ब्रज क्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़े प्रमुख स्थलों का पर्यटन की दृष्टि से विकास किया जा रहा है. बरसाना में रोप-वे का निर्माण हो रहा है. वर्ष 2017 में ही वृंदावन, नंदगांव, गोवर्धन, गोकुल, बलदेव और राधाकुंड को तीर्थ क्षेत्र घोषित कर दिया गया था. वृंदावन में पर्यटन सुविधा केंद्र, गीता शोध संस्थान और ऑडिटोरियम, अन्नपूर्णा भवन का निर्माण, मथुरा में जुबली पार्क समेत बरसाना और नंदगांव में भी पर्यटकों की सुविधा के विकास कार्य किए जा रहे हैं. धार्मिक स्थलों और आसपास के क्षेत्र के विकास को नई गति मिली है.
उत्तर प्रदेश सरकार धार्मिक केंद्रों के विकास के साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार भी उपलब्ध करा रही है. योगी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में ही अयोध्या, काशी और मथुरा सहित अन्य धार्मिक स्थलों का तेजी से विकास कराया. अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है. इसके साथ ही अयोध्या में आधारभूत ढांचे का विकास भी तेजी से हो रहा है. अयोध्या में एक सौ अड़तीस करोड़ रुपये की सत्रह परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं. चौवन परियोजनाओं में तीन,एक सौ छब्बीस करोड़ की लागत से काम युद्धस्तर पर चल रहा है. चौरासी कोसी परिक्रमा मार्ग पर पड़ने वाले तीर्थ स्थलों का विकास किया जा रहा है. अयोध्या को वैदिक सिटी के रूप में विकसित करने की योजना है. इसके लिए पंचकोसी, चौदह कोसी और चौरासी कोसी परिक्रमा के लिए मार्ग का निर्माण किया जा रहा है. हवाई अड्डे का निर्माण, सड़कों का निर्माण और बाजारों को व्यवस्थित किया जा रहा है ताकि पर्यटन को सुगम बनाया जा सके. वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम का निर्माण कराया गया. पर्यटकों के लिए क्रूज सेवा का संचालन किया जा रहा है. सत्तर किलोग्राममीटर लंबे पंचकोसी मार्ग को लेकर नई विकास परियोजना तैयार की गई है. देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या में वृद्धि लगातार हो रही है. पवित्रता को बनाए रखते हुए ब्रज क्षेत्र की पहचान को देश-दुनिया तक पहुंचाया जा रहा है. ब्रज क्षेत्र को विश्व स्तर का पर्यटन स्थल बनाने के लिए लगातार प्रयत्न किया जा रहा है. इसके लिए ब्रज तीर्थ विकास परिषद का गठन किया गया है. ब्रज क्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़े प्रमुख स्थलों का पर्यटन की दृष्टि से विकास किया जा रहा है. बरसाना में रोप-वे का निर्माण हो रहा है. वर्ष दो हज़ार सत्रह में ही वृंदावन, नंदगांव, गोवर्धन, गोकुल, बलदेव और राधाकुंड को तीर्थ क्षेत्र घोषित कर दिया गया था. वृंदावन में पर्यटन सुविधा केंद्र, गीता शोध संस्थान और ऑडिटोरियम, अन्नपूर्णा भवन का निर्माण, मथुरा में जुबली पार्क समेत बरसाना और नंदगांव में भी पर्यटकों की सुविधा के विकास कार्य किए जा रहे हैं. धार्मिक स्थलों और आसपास के क्षेत्र के विकास को नई गति मिली है.
किया है कि बाह्य सृष्टि का अर्थात् ब्रह्माण्ड का जो अगम्य तत्व है वहा आत्मस्व रूप से पिण्ड में अर्थात् मनुष्यन्देह में अंशतः प्रादुर्भूत हुआ है । इसके अन्तर उसने यह प्रतिपादन किया है, कि मनुष्य शरीर में एक नित्य और स्वतंत्र तव है ( अर्थात् जिसे छात्मा कहते हैं जिसमें यह बत्कट इच्छा होती है कि सर्वभूतान्तर्गत अपने सामाजिक पूर्ण स्वरूप को अवश्य पहुँच जाना चाहिये; और यही इच्छा मनुष्य को सदाचार की और प्रवृत्त किया करती है, इसी में मनुष्य का नित्य और चिरकालिक कल्याण है, तथा विषय-सुख अनित्य है। सारांश यही देख पड़ता है कि यद्यपि कान्ट और ग्रीन दोनों ही की दृष्टि आध्यात्मिक है, तथापि ग्रीन व्यवसायात्मक बुद्धि के व्यापारों में ही लिपट नहीं रहा, किन्तु उसने कर्म-अकर्म-विवेचन की तथा वासना स्वातंत्र्य की उपपत्ति को, पिराई और ब्रह्माण्ड दोनों में एकता से व्यक्त होनेवाले शुद्ध यात्मस्वरूप तक पहुँचा दिया है । कान्ड और ग्रीन जैसे आध्यात्मिक पाश्चात्य नोतिशास्त्रज्ञों के उक्त सिद्धान्तों की और नीचे लिखे गये गीता प्रतिपादित कुछ सिद्धान्तों की तुलना करने से देख पड़ेगा, कि यद्यपि वे दोनों अक्षरशः एक वरावर नहीं हैं, तथापि उनमें कुछ भभुत समता अवश्य है। देखिये, गीता के सिद्धान्त ये हैः- (१) वाह्य कर्म की अपेक्षा कर्त्ता की ( चासनात्मक ) बुद्धि ही श्रेष्ट है; (२) व्यवसायात्मक बुद्धि आत्मनिष्ट हो कर जय सन्देहनत तथा सम हो जाती है, तब फिर वासनात्मक बुदि आप ही आप शुद्ध और पवित्र हो जाती हैः (३) इस रीति से जिसकी बुद्धि सम और स्थिर हो जाती है, वह स्थितप्रज्ञ पुरुष हमेशा विधि और नियमों से परे रक्षा करता है, (४) और उसके आचरंगा तथा उसकी श्रात्मैश्यबुद्धि से सिद्ध होनेवाले नीति नियम सामान्य पुरुषों के लिये आदर्श के समान पूजनीय तथा प्रमाणभूत हो जाते हैं और (५) पिराड अर्थात् देह में तथा ब्रह्माण्ड अर्थात् सृष्टि में एक ही आत्मस्वरूपी तत्व है, देहान्तर्गत आत्मा अपने शुद्ध और पूर्ण स्वरूप (मोन ) को प्राप्त कर लेने के लिये सदा उत्सुक रहता है तथा इस शुद्ध स्वरूप का ज्ञान हो जाने पर सब प्राणियों के विषय में आत्मौपन्य-दृष्टि हो जाती है। परन्तु यह बात ध्यान देने योग्य है कि ब्रह्म, आत्मा, माया, आत्म-स्वातंत्र्य, ब्रह्मात्मैश्य, कर्मविपाक इत्यादि विषयों पर हमारे वेदान्तशास्त्र के जो सिद्धान्त हैं, वे कान्ट और ग्रीन के सिद्धान्तों से भी बहुत आगे बढ़े हुए तथा अधिक निश्चित हैं। इसलिये उपनिपड़ान्तर्गत वेदान्त के आधार पर किया हुआ गीता का कर्मयोग-विवेचन आध्यात्मिक दृष्टि से असंदिग्ध, पूर्ण तथा दोपराहत हुआ है; और, आजकल के चेदान्ती जर्मन पंडित प्रोफेसर ढायशन नं नोति विवेचन की इसी पद्धति को, अपने " अध्यात्म शास्त्र के मूलतत्व " नामक ग्रन्थ में, स्वीकार किया है। डायन, शोपेनहार का अनुपायी है; उसे शोपेनहर का यह सिद्धान्त पूर्णतया मन्य है, कि "संसार का Green's Prolegomena to Ethics, §§ 99, 172-19 and मूलकारण वासना ही है" इसलिये इसका क्षय किये बिना दुःख की निवृति होना असम्भव है; अतएव वासेना का क्षय करना ही प्रत्येक मनुष्य का कर्त्तव्य है; " और इसी आध्यात्मिक सिद्धान्तद्वारा नीति की उपपत्ति का विवेचन उसने अपने उक्त अन्य के तीसरे भाग में स्पष्ट रीति से किया है। उसने पहले यह सिद्ध कर दिखलाया है कि वासना का क्षय होने के लिये या हो जाने पर भी कर्मों को छोड़ देने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि 'वासना का पूरा क्षय हुआ है कि नहीं' यह बात परोपकारार्य किये गये निष्काम कर्म से जैसे प्रगट होती है, वैसे छअन्य किसी भी प्रकार से व्यक्त नहीं होती, अतएव निष्काम कर्म वासनाक्षय का ही लक्षण और फल है। इसके बाद उसने यह प्रतिपादन किया है, कि वासना की निष्कामता ही सदाचरण और नीतिमता का भी मूल है; और, इसके अन्त में गीता का " तस्मादसक्तः सततं कार्य कर्म समाचर" (गी. ३. १, ६) यह श्लोक दिया है। इससे मालूम होता है, कि ढायसन को इस उपपत्ति का ज्ञान गीता से ही हुआ होगा । जो हो यह यात कुछ काम गौरव की नहीं, कि ढायसन, ग्रीन, शोपेनहर और कान्ट के पूर्व-अधिक क्या कहें, अरिस्टाटल के भी सैकड़ों वर्ष पूर्व ही ये विचार हमारे देश में प्रचलित हो चुके थे। आज कल बहुतेरे लोगों की यह समझ हो रही है, कि वेदान्त केवल एक ऐसा कोरा वखेड़ा है जो हमें इस संसार को छोड़ देने और मोच की प्राप्ति करने का उपदेश देता है; परन्तु यह समझ ठीक नहीं। संसार में जो कुछ आँखों से दीख रहा है उसके आगे विचार करने पर ये प्रभ उठा करते हैं, कि "मैं कौन हूँ? इस सृष्टि की जड़ में कौनसा तत्त्व है ? इस तत्व से मेरा क्या सम्बन्ध है ? इस सम्बन्ध पर ध्यान दे कर इस संसार में मेरा परमसाध्य या अन्तिम ध्येय क्या है ? इस साध्य या ध्येय को प्राप्त करने के लिये मुझे जीवनयात्रा के किस मार्ग को स्वीकार करना चाहिये अथवा किस मार्ग से कौन सा ध्येय सिद्ध होगा?" और, इन गहन प्रश्नों का ययाशक्ति शास्त्रीय रीति से विचार करने के लिये ही वेदान्तशास्त्र प्रवृत्त हुआ है, बल्कि निप्पच दृष्टि से देखा जाय तो यह मालूम होगा कि समस्त नीतिशास्त्र अर्थात् मनुष्यों के पारस्प रिक व्यवहार का विचार, उस गहन शास्त्र का ही एक अङ्ग है। सारांश यह है कि कर्मयोग की उपपत्ति वेदान्तशास्त्र ही के आधार पर की जा सकती है, और अव संन्यासमार्गीय लोग चाहे कुछ भी कहें, परन्तु गणितशास्त्र के जैसे- शुद्ध गणित और व्यावहारिक गणित - दो भेद प्रकार वेदान्तशास्त्र के भी दो भाग-अर्थात् शुद्ध वेदान्त और नैतिक अथवा व्यावहारिक वेदान्त - होते हैं। कान्ट तो यहाँ तक कहता है, कि मनुष्य के मन में 'परमेश्वर' (परमात्मा) 'अमृतत्त्व' और ' (इच्छा) स्वातंत्र्य के सम्बन्ध के गूढ़ विचार इस नीतिप्रश्न का विचार करते करते ही उत्पन्न हुए हैं, कि " में संसार में किस * See Denssen's Elements of Metaphysics Eng. trans. 1909, तरह से बर्ताव करूँ या संसार में मेरा सचा कर्तव्य क्या है ? " और ऐसे प्रक्षों का उत्तर न देकर नीति की उपपत्ति केवल किसी वाल सुख की घंटे से ही घतलाना, मानो मनुष्य के मन की उस पशुवृत्ति को, जो स्वभावतः विषयसुख में लिप्त रहा करती है, उत्तेजित करना एवं सघी नीतिमत्ता की जड़ पर ही कुल्हाड़ी मारना है। भय इस घात को अलग करके समझाने की कोई आवश्यकता नहाँ, कि यद्यपि गीता का प्रतिपाद्य विषय कर्मयोग ही है तो भी उसमें शुद्ध वेदास्त क्यों और कैसे भागया। कान्ट में इस विषय पर "शुद्ध ( व्यवसायात्मक ) बुद्धि की मीमांसा " और " व्यावहारिक ( वासनात्मक ) युद्धि की मीमांसा " नामक दो अलग अलग प्रन्य लिखे हैं। परन्तु हमारे औपनिषदिक तत्वज्ञान के अनुसार भगवनीता ही में इन दोनों विषयों का समावेश किया गया है। यत्कि श्रद्धा मूलक मतिमार्ग का भी विवेचन उसी में होने के कारगण गीता सय से अधिक प्राल और प्रमाणभूत हो गई है। मोदधर्म को क्षग्गुमर के लिये एक ओर रख कर केवल कर्म-भकर्म को परीक्षा के नैतिक तत्व की दृष्टि से भी जब 'साम्यवृद्धि' ही श्रेष्ठ सिद्ध होती है; तय यहाँ पर इस बात का भी घोड़ासा विचार कर लेना चाहिये कि गीता के अध्यात्मिक पच को छोड़ कर नीतिशाखों में अन्य दूसरे पन्थ कैसे और क्यों निर्माण हुए? डास्टर पाल कारस नामक एक प्रसिद्ध अमेरिकन प्रन्थकार अपने नीतिशास्त्र. Empiricism, on the contrary cuts up at the roots the morality of intentions (in which, and not in actions only consists the high worth that men can and ought to give themselves)... Empiricism, moreover, being on this acount allied with all the inclinations which ( no matter what fashion they put on) degrade humanity when they are raised to the dignity of a sup reme practical principle, is for that asason much more dangeTons. " Kant's Theory of Elltics, PP. 163, and 236-238. See also Kant's Crstique of Pure Rensong ( trans. by MaxMuller ) 2 nd Ed. PP, 610-657. † See The Ethical Problem, by Dr. Carus, 2nd Ed. p. 111. "Our proposition is that the leading principle in ethics mnst be derived from the philosophical view baok of it. The world. conception a man has, can alone give character to the principlo in his ethics, Without any world-conception we can have no ethics. (i.c. ethics in the highest sense of the ward). We may act morally like dreamers cr somnambulists, but our ethios would in that case be a mere moral instinot without any rational 'insight into its raison d'etre." विषयक ग्रन्यं में इस प्रश्न का यह उत्तर देता है, कि "पिंड ब्रह्मांड की रचना के सम्बन्ध में मनुष्य की जैसी समझ (राय ) होती है, उसी तरह नीतिशास्त्र के मूल तत्वों के सम्बन्ध में उसके विचारों का रङ्ग बदलता रहता है। सच पूछो तो, पिंढब्रह्मांड की रचना के सम्बन्ध में कुछ न कुछ निश्चित मत हुए विना नैतिक प्रश्न ही उपस्थित नही हो सकता। पिंढ-ब्रह्मांड की रचना के सम्बन्ध में कुछ पक्का, मत न रहने पर भी हम लोगों से कुछ नैतिक आचरण कदाचित हो सकता है; परन्तु यह आचरण स्वप्नावस्था के व्यापार के समान होगा, इसलिये इसे नैतिक कहने के बदले देह धर्मानुसार होनेवाली केवल एक कायिक क्रिया ही कहना चाहिये। " उदाहरणार्थ, वाघिन अपने यच्चों की रक्षा के लिये प्राण देने को तैयार हो जाती है; परन्तु इसे हम उसका नैतिक आचरण न कह कर उसका जन्म-सिद्ध स्वभाव ही कहते हैं। इस उत्तर से इस बात का अच्छी तरह स्पष्टीकरण हो जाता है, कि नीतिशास्त्र के उपपादन में अनेक पन्थ क्यों हो गये हैं। इसमें कुछ सन्देह नहाँ कि " मैं कौन हूँ, यह जगत् कैसे उत्पन्न हुआ, मेरा इस संसार में क्या उपयोग हो सकता है" इत्यादि गृढ प्रमों का निर्णय जिस तत्व से हो सकेगा, उसी तत्व के अनुसार प्रत्येक विचारवान् पुरुष इस बात का भी निर्णय अवश्य करेगा, कि मुझे अपने जीवन काल में अन्य लोगों के साथ कैसा बर्ताव करना चाहिये । परन्तु इम गृढ़ प्रश्नों का उत्तर मिन्न भिन्न काल में तथा मिन भिन्न देशों में एक ही प्रकार का नहीं हो सकता। यूरोपखंड में जो ईसाई धर्म प्रचलित है उसमें यह वर्गान पाया जाता है, कि मनुष्य और सृष्टि का कर्त्ता, बाइबल में वर्णित सगुण परमेश्वर है और उसी ने पहले पहल संसार को उत्पन्न करके सदाचरण के नियमादि बनाकर मनुष्यों को शिक्षा दी है; तथा भारम्भ में ईसाई पंडितों का भी यही अभिप्राय या कि वाइवल में वर्णित पिंड-ब्रह्मांड की इस कल्पना के अनुसार बाइबल में कहे गये नीति-नियम ही नीतिशास्त्र के मूल तत्व हैं फिर जब यह मालूम होने लगा कि ये नियम व्यावहारिक दृष्टि से अपूर्ण हैं, तब इनकी पूर्ति करने के लिये अथवा स्पष्टीकरणार्थं यह प्रतिपादन किया जाने लगा, कि परमेश्वर ही ने मनुष्य को सदसद्विवेक शक्ति दी है। परन्तु अनुभव से फिर यह अड़चन दिख पड़ने लगी, कि चोर और साह दोनों की सदसद्विवेक शक्ति एक समान नहीं रहती; तब इस मत का प्रचार होने लगा कि परमेश्वर की इच्छा नीति शास्त्र की नींव भले ही हो, परन्तु इस ईश्वरी इच्छा के स्वरूप को जानने के लिए केवल इसी एक बात का विचार करना चाहिये, कि अधिकांश लोगों का अधिक सुख किसमें है-इसके सिवा परमेश्वर की इच्छा को जानने का अन्य कोई मार्ग नहीं है। पिंड-ब्रह्मांढ की रचना के सम्बन्ध के में ईसाई लोगों की जो यह समझ है कि वाइवल में वर्णित सगुण परमेश्वर ही संसार का कर्ता है और यह उसकी ही इच्छा या आज्ञा है कि मनुष्य नीति के नियमानुसार वर्ताव करे उसी के आधार पर उक्त सब मत प्रचलित हुए हैं। परन्तु आधिभौतिक शास्त्रों की उन्नति तथा वृद्धि होने पर जब यह मालूम होने लगा कि इसाई धर्मपुस्तकों में पिंड़-ग्रह्मांढ की रचना के विषय में कहे गये सिद्धान्त ठीक नहीं तव यह विचार छोड़ दिया गया कि परमेश्वर के समान कोई सृष्टि का कर्त्ता है या नहीं, और यही विचार किया जाने लगा कि मोतिशास्त्र की इमारत प्रत्यक्ष दिखनेवाली बातों की नींव पर क्योंकर खड़ी की जा सकती है । तब से फिर यह माना जाने लगा. कि अधिकांश लोगों का अधिक सुख या कल्याण अथवा मनुप्यत्व की वृद्धि, यही दृश्य तत्त्व नीतिशास्त्र के मूल कारण हैं। इस प्रतिपादन में इस बात की किसी उपपत्ति या कारण का कोई उल्लेख नहीं किया गया है, कि कोई मनुष्य अधिकांश लोगों का अधिक हित क्यों करे ? सिर्फ इतना ही कह दिया जाता है, कि यह मनुष्य की नित्य बढ़नेवाली एक स्वभाविक प्रवृत्ति है। परन्तु मनुष्य-त्वमात्र में स्वार्थ सरीखी और भी दूसरी वृत्तियाँ देख पड़ती हैं इसलिये इस पंथ में भी फिर भेद होने लगे । नीतिमत्ता की ये सच उपपत्तियाँ कुछ सर्वथा निर्दोष नहीं हैं। क्योंकि उक्त पंथों के सभी पंडितों में सृष्टि के दृश्य पदार्थों से परे सृष्टि की जड़ में कुछ न कुछ अव्यक तत्त्व अवश्य है, " इस सिद्धान्त पर एक ही सा विश्वास और श्रद्धा है, इस कारण उनके विषय प्रतिपादन में चाहे कुछ भी अड़चन क्यों न हो, वे लोग केवल बाह्य और दृश्य तत्वों से ही किसी तरह निर्वाह कर लेने का हमेशा प्रयत्न किया करते हैं। नीति तो सभी को चाहिये, क्योंकि वह सब के लिये आवश्यक है; परन्तु उक्त कथन से यह मालूम हो जायगा, कि पिंडब्रह्मांड की रचना के सम्बन्ध में मिन भिन्न मत होने के कारण उन लोगों की नीतिशास्त्र - विषयक उपपत्तियों में हमेशा कैसे भेद हो जाया करते हैं। इसी कारण से पिंढब्रह्मांड की रचना के विषय में आधिभौतिक, आधिदैविक और आध्यात्मिक मतों के अनुसार हमने नीतिशास्त्र के प्रतिपादन के ( तीसरे प्रकरण में ) तीन भेद किये हैं और आगे फिर प्रत्येक पंच के मुख्य मुख्य सिद्धान्तों का भिन्न भिन्न विचार किया है। जिनका यह मत है कि सगुण परमेश्वर ने सर्व दृश्य सृष्टि को बनाया है, वे नीतिशास्त्र का केवल यहीं तक विचार करते हैं, कि अपने धर्म ग्रन्थों में परमेश्वर की जो आज्ञा है वह, तथा परमेश्वर की ही सत्ता से निर्मित सदसद्विवेचन शक्तिरूप देवता ही सब कुछ है-इसके बाद और कुछ नहीं है। इसको हमने' आधिदैविक पन्थ कहा है; क्योंकि सगुण परमेश्वर भी तो एक देवता ही है न । अव, जिनका यह मत है, कि दृश्य सृष्टि का आदि कारण कोई भी अदृश्य मूल-तत्व नहीं है, और यदि हो भी तो वह मनुष्य की बुद्धि के लिये अगम्य है; वे लोग ' अधिकांश लोगों का अधिक कल्याण' या ' मनुष्यत्व का परम उत्कर्ष ' जैसे केवल दृश्य तत्त्व द्वारा ही नीतिशास्त्र का प्रतिपादन किया करते हैं और यह मानते हैं कि इस बाह्य और दृश्य तत्व के परे विचार करने की कोई आवश्यकता नहीं है। इस पन्य को हमने 'आधिभौतिक ' नाम दिया है। जिनका यह सिद्धान्त हैं, कि नामरूपात्मक दृश्य सृष्टि की जड़ में आत्मा सरीखा कुछ न कुछ नित्य और अध्यक्तं तत्त्व अवश्य है, वे लोग अपने नीतिशाब की उपपत्ति को आधिभौतिक उपपत्ति से भो परे ले जाते हैं, और आत्मज्ञान तथा नीति या धर्म का मेल करके इस बात का निर्माण करते हैं कि संसार में मनुष्य का सच्चा कर्तव्य क्या है। इस पन्य को हमने' आध्यात्मिक' कहा है। इन तीनों पन्थों में आचार-नीति एक ही है परन्तु पिराड-ब्रह्मांड की रचना के सम्बन्ध में प्रत्येक पन्थ का मत मिन्न भिन्न है इससे नीतिशास्त्र के भूलतत्वों का स्वरूप हर एक पन्थ में थोड़ा थोड़ा बदलता गया है। यह बात प्रगट है कि व्याकरण-शास्त्र कोई नई भाषा नहीं बनाता, किन्तु जो भाषा व्यवहार में प्रचलित रहती है उसी के नियमों की वह खोज करता है और भाषा की उन्नति में सहायक होता है; ठीक यही हाल नीतिशास्त्र का भी है। मनुष्य इस संसार में जब से पैदा हुआ है उसी दिन से वह स्वयं अपनी ही बुद्धि से अपने आचरण को देशकालानुसार शुद्ध रखने का प्रयत्न भी करता चला भाया है; और समय समय पर जो प्रसिद्ध पुरुष या महात्मा हो गये हैं उन्होंने अपनी अपनी समझ के अनुसार आचार शुद्धि के लिये ' चोदना ' या प्रेरणारूपी कानेक नियम भी बना दिये हैं। नीतिशाक्त की सत्पत्ति कुछ इस लिये नहीं हुई है, कि वह इन नियमों को तोड़ कर नये नियम बनाने लगे। हिंसा मत कर, सच बोल, परोपकार कर, इत्यादि नीति के नियम प्राचीन काल से ही चलते आये हैं । अव नीतिशास्त्र का सिर्फ यही देखने का काम है, कि नीति की यथोचित वृद्धि होने के लिये सब नीति नियमों में मूलतत्व क्या है। यही कारण है कि जब हम नीतिशास्त्र के किसी भी पन्थ को देखते हैं, तब हम वर्तमान प्रचलित नीति के प्रायः सब नियमों को सभी पयों में एक से पाते हैं, उनमें जो कुछ भेद दिखलाई पड़ता है, वह उपपत्ति के स्वरूपभेद के कारण है, और, इसलिये ढा० पाल कारस का यह कथन सच मालूम होता है कि इस मेद के होने का मुख्य कारण यही है कि हररक पंथ में पिंढ. ब्रह्मांड की रचना Pa के सम्बन्ध में भिन्न भिन्न मत है । अब यह बात सिद्ध हो गई कि मिल, स्पेन्सर, कान्ट आदि आधिभौतिक पंथ के आधुनिक पाश्चात्य नीतिशास्त्र विषयक प्रन्यकारों ने आत्मौपम्य दृष्टि के सुलम तथा व्यापक तत्व को छोड़कर, " सर्वभूतहित " या " अधिकांश लोगों का अधिक हित " जैसे आधिभौतिक और बाह्य " तत्व पर ही नीतिमत्ता को स्थापित करने का जो प्रयत्न किया है वह इसी लिये किया है कि पिंडब्रह्मांड सम्बन्धी उनके मत प्राचीन मतों से भिन्न हैं। परन्तु जो लोग उक्त नूतन मतों को नहीं मानते और जो इन प्रमों का स्पष्ट तथा गंभीर विचार कर लेना चाहते हैंकि " मै कौन हूँ ? सृष्टि क्या है ? मुझे इस सृष्टि का ज्ञान कैसे होता है ? जो सृष्टि मुझ से बाहर है वह स्वतंत्र है या नहीं ? यदि है, तो उसका मूलतत्व क्या है? इस तत्व से मेरा क्या सम्बन्ध है ? एक मनुष्य दूसरे के सुख के लिये अपनी जान क्यों देवे ?' जो जन्म लेते हैं वेभरते भी हैं' इस नियम के अनुसार यदि यह बात निमित है, कि जिस पृथ्वी पर हम रहते हैं उसका और उसके साथ समस्त प्राणियों का तथा हमारा भी किसी दिन अवश्य नाश हो जायगा, तो नाशवान् भविष्य पीढ़ियाँ के लिये हम अपने सुख का नाश क्यों करें ? " -- मथवा, जिन लोगों का केवल इस उत्तर से पूरा समाधान नहीं होता, कि " परोपकार आदि मनोवृत्तियाँ इस कर्ममय, अनित्य और दृश्य सृष्टि की नैसर्गिक प्रवृत्ति ही हैं", और जो यह जानना चाहते हैं कि इस नैसर्गिक प्रवृत्ति का मूलकारण क्या है - उनके लिये अध्यात्मशास्त्र के मित्य तत्वज्ञाम का सहारा लेने के सिवा और कोई दूसरा मार्ग नहीं है । और, इसी कारण से मीन ने अपने मोतिशास्त्र के अन्य का आरम्म इसी तत्व के प्रतिपादन से किया है, कि जिस माला को जड़सृष्टि का ज्ञान होता है वह आत्मा जड़सृष्टि से अवश्य ही भित होगा; और, कान्ट ने पहले व्यव सायात्मक बुद्धि का विवेचन करके फिर वासनात्मक बुद्धि की तथा नीतिशास्त्र की मीमांसा की है। मनुष्य अपने सुख के लिये या अधिकांश लोगों को सुख देने के लिये पैदा हुआ है'-यह कथन ऊपर ऊपर से चाहे कितना ही मोहक तथा उत्तम दिखे, परन्तु वस्तुतः यह सच नहीं है। यदि हम क्षणभर इस बात का विचार करें, कि जो महात्मा केवल सत्य के लिये प्रागा दान करने को तैयार रहते हैं, उनके मन में क्या यही हेतु रहता है, कि भविष्य पीढ़ी के लोगों को आधिकाधिक विषयसुख होवे; तो यही कहना पड़ता है, कि अपने तथा अन्य लोगों के भनित्य आधिमौ. तिक सुखों की अपेक्षा इस संसार में मनुष्य का और भी कुछ दूसरा अधिक महत्व का परमसाध्य या उद्देश अवश्य है। यह उद्देश क्या है ? जिन्होंने पिंडह्मांड के नामरूपात्मक, (अतएव ) नाशवान्, (परन्तु ) दृश्य स्वरूप से आच्छादित प्रात्म. स्वरूपी नित्य तत्व को अपनी आत्मप्रतीति के द्वारा जान लिया है; वे लोग उक प्रश्न का यह उत्तर देते हैं, कि अपने आत्मा के अमर, श्रेष्ठ, शुद्ध, नित्य तथा सर्वव्यापी स्वरूप की पहचान करके उसी में रम रद्दमा ज्ञानवान् मनुष्य का इस नाशवान् संसार में पहला कर्त्तव्य है । जिसे सर्वभूतान्तर्गत प्रात्मैक्य की इस तरह से पहचान हो जाती है तथा यह ज्ञान जिसकी देह तथा इंद्रियों में समा जाता है, चह पुरुप इस बात के सोच में पढ़ा नहीं रहता कि यह संसार झूठ है या सच; किंतु वह सर्वभूतहित के लिये उद्योग करने में आप ही आप प्रवृत्त हो जाता है और सत्य मार्ग का अप्रेसर बन जाता है; क्योंकि उसे यह पूरी तौर से मालूम रहता है कि अविनाशी तथा त्रिकाल अबाधित सत्य कौनसा है। मनुष्य की यही आध्यात्मिक पूर्णावस्या सय नीति-नियमों का मूल उद्गम स्थान है और इसे ही वेदान्त में 'मोक्ष' कहते हैं। किसी भी नीति को लीजिये, वह इस अंतिम साध्य से अलग नहीं हो सकती; इसलिये नीतिशास्त्र का या कर्मयोगशास्त्र का विवेचन करते समय आखिर इसी तत्व की शरण में जाना पड़ता है। सर्वात्मक्यरूप अव्यक्त मूल तत्व का ही एक व्यक्त स्वरूप सर्वभूतहितेच्छा है; धौर, सगुण परमेश्वर तथा दृश्य सृष्टि दोनों उस आत्मा के ही व्यंक्तस्वरूप हैं जो सर्वभूतान्तर्गत सर्वव्यापी और अन्यक्त है। इस व्यक्त स्वरूप के आगे गये बिना अर्थात् अव्यक्त आत्मा का ज्ञान प्राप्त किये बिना, ज्ञान की पूर्ति तो होती ही नहीं; किन्तु इस संसार में हर एक मनुष्य का जो यह परम कर्त्तव्य है, किशरीरस्य यात्मा को पूर्णावस्या में पहुँचा दे, वह भी इस ज्ञान के बिना सिद्ध नहीं हो सकता। चाहे नीति को लीजिये, व्यवहार को लीजिये, धर्म को लीजिये अथवा किसी भी दूसरे शास्त्र को लीजिये, अध्यात्मज्ञान ही सब की अंतिम गति है जैसे कहा है " सर्व कर्माखिलं पार्थ शाने परिसमाप्यते । " हमारा भक्तिमार्ग भी इसी तत्त्वज्ञान का अनुसरगा करता है इसलिये उसमें भी यही सिद्धांत स्थिर रहता है, कि ज्ञानदृष्टि से निप्पन्न होनेवाला साम्यबुद्धिरूपी तत्त्व ही मोक्ष का तथा सदाचरगा का मूलस्थान है। वेदान्तशास्त्र से सिद्ध होनेवाले इस तत्व पर एक ही महत्त्वपूर्ण आक्षेप किया जा सकता है; वह यह है कि कुछ वेदान्ती ज्ञानप्राप्ति के अनन्तर, सव कर्मों का संन्यास कर देगा उचित मानते हैं। इसीलिये यह दिखला कर किज्ञान और कर्म में विरोध नहीं है, गीता में कर्मयोग के इस सिद्धान्त का विस्तार सहित वर्णन किया गया है, कि वासना का क्षय होने पर भी ज्ञानी पुरुष अपने सव कर्मों को परमेश्वरापणपूर्वक बुद्धि से लोकसंग्रह के लिये केवल कर्त्तव्य समझ कर ही करता 'चला आवे । अर्जुन को युद्ध में प्रवृत्त करने के लिये यह उपदेश अवश्य दिया गया है कि तू परमेश्वर को सब कर्म समर्पण करके युद्ध कर; परन्तु यह उपदेश केवल तत्कालीन प्रसंग को देख कर ही किया गया है (गी. ८. ७ ) । उक्त उपदेश का भावार्थ यही मालूम होता है कि अर्जुन के समान ही किसान, सुनार, लोहार, बढ़ई, वनिया, ब्राह्मण, व्यापारी, लेखक, उद्यमी इत्यादि सभी लोग अपने अपने अधिकारानुरूप व्यवहारों को परमेश्वरार्पण-बुद्धि से करते हुए संसार का धारा-पोषणा करते रहें; जिसे जो रोज़गार निसर्गतः प्राप्त हुआ है उसे यदि वह निष्काम बुद्धि से करता रहे तो उस कर्त्ता को कुछ भी पाप नहीं लगेगा; सब कर्म एक ही से हैं; दोष केवल कर्त्ता की बुद्धि में है, न कि उसके कर्मों में अतएव वुद्धि को सम करके यदि सब कर्म किये जायँ तो परमेश्वर की उपासना हो जाती है, पाप नहीं लगता और अंत में सिद्धि भी मिल जाती है। परन्तु जिन ( विशेषतः अर्वाचीन काल के ) लोगों का यह दृढ़ संकल्प सा हो गया है कि चाहे कुछ भी गया है; कि चाहे कुछ भी हो जाय, इस भाशवान् दृश्य सृष्टि के आगे बढ़ कर आत्म-अनात्म विचार के गहरे पानी में पैठना ठीक नहीं है, वे के अपने नीतिशास्त्र का विवेचन, ब्रह्मात्मैक्यरूप परमसाध्य की उच्च श्रेणी को छोड़ कर, मानव जाति का कल्याण या सर्वभूतहित जैसे निम्न कोटि के आधिभौतिक दृश्य ( परन्तु अनित्य ) तत्त्व से ही शुरू किया करते हैं। स्मरण रहे कि किसी पेड़ की चोटी को तोड़ देने से वह नया पेड़ नहीं कहलाता; उसी तरह आधिभौ तिक पंडितों का निर्माण किया हुआ नीतिशास्त्र भाँडा या 'अपूर्ण भले ही हो, परन्तु वह नया नहीं हो सकता। यह्मात्मज्य को न मानकर प्रत्येक पुरुष को स्वतंत्र माननेवाले हमारे यहाँ के सांख्यशास्त्रज्ञ पंडितों ने भी, यही देख कर किदृश्य जगत् का धारण-पोषण और विनाश किन गुणों के द्वारा होता है, सत्वरज-तम तीनों गुणों के लक्षण निश्चित किये हैं; और फिर प्रतिपादन किया है कि इनमें से सात्विक सद्गुणों का परम उत्कर्ष करना ही मनुष्य का कर्त्तव्य है तथा मनुष्य को इसी से अंत में त्रिगुणातीत अवस्था मिल कर मोक्ष की प्राप्ति होती है । भगवङ्गीता के सत्रहवें तथा अठारहवें अध्याय में थोड़े भेद के साथ इसी अर्थ का वर्णन है । सच देखा जाय तो, क्या सात्त्विक सद्गुणों का परम उत्कर्षं, और ( आधिभौतिक बाद के अनुसार ) क्या परोपकार वुद्धि की तथा मनुष्यत्व की वृद्धि, दोनों का अर्थ एक ही है। महाभारत और गीता में इन सब प्राधिभौतिक तत्त्वों का स्पष्ट उल्लेख तो है ही, बल्कि महाभारत में यह भी साफ़ साफ़ कहा गया है, कि धर्म-अधर्म के नियमों के लौकिक या वाह्य उपयोग का विचार करने पर यही जान पड़ता है कि ये नीतिधर्म सर्वभूतहितार्थ अर्थात् लोककल्याणार्थ ही हैं। परन्तु पश्चिमी आधिमौतिक पंडितों का किसी अव्यक्त तत्त्व पर विश्वास नहीं है, इसलियें यद्यपि वे जानते हैं कि तात्विक दृष्टि से कार्य-कार्य का निर्णय करने के लिये आधिभौतिक तत्व पूरा काम नहीं देते, तो भी वे निरर्थक शब्दों का आइंस्थर बढ़ाकर व्यक्त तत्व से ही अपना निर्वाह किसी तरह कर लिया करते हैं। गीता में ऐसा नहीं किया गया है; किन्तु इन तत्वों की परंपरा को पिंढयह्मांड के मूल अव्यक्त तथा नित्य तत्त्व का ले जाकर मोक्ष, मीतिधर्म और व्यवहार ( इन तीनों ) की भी पूरी एकवाक्यता तत्त्वज्ञान के आधार से गीता में भगवान् ने सिद्ध कर दिखाई है, और, इसीलिये अनुगीता के आरंभ में स्पष्ट कहा गया है कि कार्य-कार्य-निर्णयार्थ जो धर्म बतलाया गया है वही मोक्षप्राप्ति करा देने के लिये भी समर्थ है (ममा. अश्व. १६. १२) । जिनका यह मत होगा, कि मोक्षधर्म और नीतिशास्त्र को अथवा अध्यात्मज्ञान और नीति को एक में मिला देने की आवश्यकता नहीं है, उन्हें उक्त उपपादन का महत्त्व ही मालूम नहीं हो सकता। परन्तु जो लोग इसके संबंध में उदासीन नहीं हैं, उन्हें निस्संदेह यह मालूम हो जायगा, कि गीता में किया गया कर्मयोग का प्रतिपादन आधिमौ तिक विवेचन की अपेक्षा अधिक श्रेष्ठ तथा ग्राह्य है। अध्यात्मज्ञान को वृद्धि प्राचीन काल में हिन्दुस्थान में जैसी हो चुकी है, वैसी और कहीं भी नहीं हुई; इसलिये पहले पहल किसी अन्य देश में, कर्मयोग के ऐसे आध्यात्मिक उपपादन का पाया जाना बिलकुल सम्भव नहीं - और, यह विदित ही है कि ऐसा उपपादन कहीं पाया भी नहीं जांता । यह स्वीकार होने पर भी कि इस संसार के अशाश्वत होने के कारण इस में सुख की अपेक्षा दुःख ही अधिक है (गी. ६.३३), गीता में जो यह सिद्धान्त स्थापित किया गया है कि " कर्म ज्यायो ह्यकर्मणः " अर्थात्, सांसारिक कर्मों का कमीन बाबू किशोरीलाल सरकार एम्. ए. वी. एल. ने The Hindu Systent of Moral Serence नामक जो एक छोटासा ग्रंथ लिखा है वह इसी ढंग का है, व्यर्यात उसमें सत्त्व, रज और तम तीनों गुणों के आधार पर विवेचन किया गया है ।
किया है कि बाह्य सृष्टि का अर्थात् ब्रह्माण्ड का जो अगम्य तत्व है वहा आत्मस्व रूप से पिण्ड में अर्थात् मनुष्यन्देह में अंशतः प्रादुर्भूत हुआ है । इसके अन्तर उसने यह प्रतिपादन किया है, कि मनुष्य शरीर में एक नित्य और स्वतंत्र तव है वाह्य कर्म की अपेक्षा कर्त्ता की बुद्धि ही श्रेष्ट है; व्यवसायात्मक बुद्धि आत्मनिष्ट हो कर जय सन्देहनत तथा सम हो जाती है, तब फिर वासनात्मक बुदि आप ही आप शुद्ध और पवित्र हो जाती हैः इस रीति से जिसकी बुद्धि सम और स्थिर हो जाती है, वह स्थितप्रज्ञ पुरुष हमेशा विधि और नियमों से परे रक्षा करता है, और उसके आचरंगा तथा उसकी श्रात्मैश्यबुद्धि से सिद्ध होनेवाले नीति नियम सामान्य पुरुषों के लिये आदर्श के समान पूजनीय तथा प्रमाणभूत हो जाते हैं और पिराड अर्थात् देह में तथा ब्रह्माण्ड अर्थात् सृष्टि में एक ही आत्मस्वरूपी तत्व है, देहान्तर्गत आत्मा अपने शुद्ध और पूर्ण स्वरूप को प्राप्त कर लेने के लिये सदा उत्सुक रहता है तथा इस शुद्ध स्वरूप का ज्ञान हो जाने पर सब प्राणियों के विषय में आत्मौपन्य-दृष्टि हो जाती है। परन्तु यह बात ध्यान देने योग्य है कि ब्रह्म, आत्मा, माया, आत्म-स्वातंत्र्य, ब्रह्मात्मैश्य, कर्मविपाक इत्यादि विषयों पर हमारे वेदान्तशास्त्र के जो सिद्धान्त हैं, वे कान्ट और ग्रीन के सिद्धान्तों से भी बहुत आगे बढ़े हुए तथा अधिक निश्चित हैं। इसलिये उपनिपड़ान्तर्गत वेदान्त के आधार पर किया हुआ गीता का कर्मयोग-विवेचन आध्यात्मिक दृष्टि से असंदिग्ध, पूर्ण तथा दोपराहत हुआ है; और, आजकल के चेदान्ती जर्मन पंडित प्रोफेसर ढायशन नं नोति विवेचन की इसी पद्धति को, अपने " अध्यात्म शास्त्र के मूलतत्व " नामक ग्रन्थ में, स्वीकार किया है। डायन, शोपेनहार का अनुपायी है; उसे शोपेनहर का यह सिद्धान्त पूर्णतया मन्य है, कि "संसार का Green's Prolegomena to Ethics, §§ निन्यानवे, एक सौ बहत्तर-उन्नीस and मूलकारण वासना ही है" इसलिये इसका क्षय किये बिना दुःख की निवृति होना असम्भव है; अतएव वासेना का क्षय करना ही प्रत्येक मनुष्य का कर्त्तव्य है; " और इसी आध्यात्मिक सिद्धान्तद्वारा नीति की उपपत्ति का विवेचन उसने अपने उक्त अन्य के तीसरे भाग में स्पष्ट रीति से किया है। उसने पहले यह सिद्ध कर दिखलाया है कि वासना का क्षय होने के लिये या हो जाने पर भी कर्मों को छोड़ देने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि 'वासना का पूरा क्षय हुआ है कि नहीं' यह बात परोपकारार्य किये गये निष्काम कर्म से जैसे प्रगट होती है, वैसे छअन्य किसी भी प्रकार से व्यक्त नहीं होती, अतएव निष्काम कर्म वासनाक्षय का ही लक्षण और फल है। इसके बाद उसने यह प्रतिपादन किया है, कि वासना की निष्कामता ही सदाचरण और नीतिमता का भी मूल है; और, इसके अन्त में गीता का " तस्मादसक्तः सततं कार्य कर्म समाचर" यह श्लोक दिया है। इससे मालूम होता है, कि ढायसन को इस उपपत्ति का ज्ञान गीता से ही हुआ होगा । जो हो यह यात कुछ काम गौरव की नहीं, कि ढायसन, ग्रीन, शोपेनहर और कान्ट के पूर्व-अधिक क्या कहें, अरिस्टाटल के भी सैकड़ों वर्ष पूर्व ही ये विचार हमारे देश में प्रचलित हो चुके थे। आज कल बहुतेरे लोगों की यह समझ हो रही है, कि वेदान्त केवल एक ऐसा कोरा वखेड़ा है जो हमें इस संसार को छोड़ देने और मोच की प्राप्ति करने का उपदेश देता है; परन्तु यह समझ ठीक नहीं। संसार में जो कुछ आँखों से दीख रहा है उसके आगे विचार करने पर ये प्रभ उठा करते हैं, कि "मैं कौन हूँ? इस सृष्टि की जड़ में कौनसा तत्त्व है ? इस तत्व से मेरा क्या सम्बन्ध है ? इस सम्बन्ध पर ध्यान दे कर इस संसार में मेरा परमसाध्य या अन्तिम ध्येय क्या है ? इस साध्य या ध्येय को प्राप्त करने के लिये मुझे जीवनयात्रा के किस मार्ग को स्वीकार करना चाहिये अथवा किस मार्ग से कौन सा ध्येय सिद्ध होगा?" और, इन गहन प्रश्नों का ययाशक्ति शास्त्रीय रीति से विचार करने के लिये ही वेदान्तशास्त्र प्रवृत्त हुआ है, बल्कि निप्पच दृष्टि से देखा जाय तो यह मालूम होगा कि समस्त नीतिशास्त्र अर्थात् मनुष्यों के पारस्प रिक व्यवहार का विचार, उस गहन शास्त्र का ही एक अङ्ग है। सारांश यह है कि कर्मयोग की उपपत्ति वेदान्तशास्त्र ही के आधार पर की जा सकती है, और अव संन्यासमार्गीय लोग चाहे कुछ भी कहें, परन्तु गणितशास्त्र के जैसे- शुद्ध गणित और व्यावहारिक गणित - दो भेद प्रकार वेदान्तशास्त्र के भी दो भाग-अर्थात् शुद्ध वेदान्त और नैतिक अथवा व्यावहारिक वेदान्त - होते हैं। कान्ट तो यहाँ तक कहता है, कि मनुष्य के मन में 'परमेश्वर' 'अमृतत्त्व' और ' स्वातंत्र्य के सम्बन्ध के गूढ़ विचार इस नीतिप्रश्न का विचार करते करते ही उत्पन्न हुए हैं, कि " में संसार में किस * See Denssen's Elements of Metaphysics Eng. trans. एक हज़ार नौ सौ नौ, तरह से बर्ताव करूँ या संसार में मेरा सचा कर्तव्य क्या है ? " और ऐसे प्रक्षों का उत्तर न देकर नीति की उपपत्ति केवल किसी वाल सुख की घंटे से ही घतलाना, मानो मनुष्य के मन की उस पशुवृत्ति को, जो स्वभावतः विषयसुख में लिप्त रहा करती है, उत्तेजित करना एवं सघी नीतिमत्ता की जड़ पर ही कुल्हाड़ी मारना है। भय इस घात को अलग करके समझाने की कोई आवश्यकता नहाँ, कि यद्यपि गीता का प्रतिपाद्य विषय कर्मयोग ही है तो भी उसमें शुद्ध वेदास्त क्यों और कैसे भागया। कान्ट में इस विषय पर "शुद्ध बुद्धि की मीमांसा " और " व्यावहारिक युद्धि की मीमांसा " नामक दो अलग अलग प्रन्य लिखे हैं। परन्तु हमारे औपनिषदिक तत्वज्ञान के अनुसार भगवनीता ही में इन दोनों विषयों का समावेश किया गया है। यत्कि श्रद्धा मूलक मतिमार्ग का भी विवेचन उसी में होने के कारगण गीता सय से अधिक प्राल और प्रमाणभूत हो गई है। मोदधर्म को क्षग्गुमर के लिये एक ओर रख कर केवल कर्म-भकर्म को परीक्षा के नैतिक तत्व की दृष्टि से भी जब 'साम्यवृद्धि' ही श्रेष्ठ सिद्ध होती है; तय यहाँ पर इस बात का भी घोड़ासा विचार कर लेना चाहिये कि गीता के अध्यात्मिक पच को छोड़ कर नीतिशाखों में अन्य दूसरे पन्थ कैसे और क्यों निर्माण हुए? डास्टर पाल कारस नामक एक प्रसिद्ध अमेरिकन प्रन्थकार अपने नीतिशास्त्र. Empiricism, on the contrary cuts up at the roots the morality of intentions ... Empiricism, moreover, being on this acount allied with all the inclinations which degrade humanity when they are raised to the dignity of a sup reme practical principle, is for that asason much more dangeTons. " Kant's Theory of Elltics, PP. एक सौ तिरेसठ, and दो सौ छत्तीस-दो सौ अड़तीस. See also Kant's Crstique of Pure Rensong दो nd Ed. PP, छः सौ दस-छः सौ सत्तावन. † See The Ethical Problem, by Dr. Carus, दोnd Ed. p. एक सौ ग्यारह. "Our proposition is that the leading principle in ethics mnst be derived from the philosophical view baok of it. The world. conception a man has, can alone give character to the principlo in his ethics, Without any world-conception we can have no ethics. . We may act morally like dreamers cr somnambulists, but our ethios would in that case be a mere moral instinot without any rational 'insight into its raison d'etre." विषयक ग्रन्यं में इस प्रश्न का यह उत्तर देता है, कि "पिंड ब्रह्मांड की रचना के सम्बन्ध में मनुष्य की जैसी समझ होती है, उसी तरह नीतिशास्त्र के मूल तत्वों के सम्बन्ध में उसके विचारों का रङ्ग बदलता रहता है। सच पूछो तो, पिंढब्रह्मांड की रचना के सम्बन्ध में कुछ न कुछ निश्चित मत हुए विना नैतिक प्रश्न ही उपस्थित नही हो सकता। पिंढ-ब्रह्मांड की रचना के सम्बन्ध में कुछ पक्का, मत न रहने पर भी हम लोगों से कुछ नैतिक आचरण कदाचित हो सकता है; परन्तु यह आचरण स्वप्नावस्था के व्यापार के समान होगा, इसलिये इसे नैतिक कहने के बदले देह धर्मानुसार होनेवाली केवल एक कायिक क्रिया ही कहना चाहिये। " उदाहरणार्थ, वाघिन अपने यच्चों की रक्षा के लिये प्राण देने को तैयार हो जाती है; परन्तु इसे हम उसका नैतिक आचरण न कह कर उसका जन्म-सिद्ध स्वभाव ही कहते हैं। इस उत्तर से इस बात का अच्छी तरह स्पष्टीकरण हो जाता है, कि नीतिशास्त्र के उपपादन में अनेक पन्थ क्यों हो गये हैं। इसमें कुछ सन्देह नहाँ कि " मैं कौन हूँ, यह जगत् कैसे उत्पन्न हुआ, मेरा इस संसार में क्या उपयोग हो सकता है" इत्यादि गृढ प्रमों का निर्णय जिस तत्व से हो सकेगा, उसी तत्व के अनुसार प्रत्येक विचारवान् पुरुष इस बात का भी निर्णय अवश्य करेगा, कि मुझे अपने जीवन काल में अन्य लोगों के साथ कैसा बर्ताव करना चाहिये । परन्तु इम गृढ़ प्रश्नों का उत्तर मिन्न भिन्न काल में तथा मिन भिन्न देशों में एक ही प्रकार का नहीं हो सकता। यूरोपखंड में जो ईसाई धर्म प्रचलित है उसमें यह वर्गान पाया जाता है, कि मनुष्य और सृष्टि का कर्त्ता, बाइबल में वर्णित सगुण परमेश्वर है और उसी ने पहले पहल संसार को उत्पन्न करके सदाचरण के नियमादि बनाकर मनुष्यों को शिक्षा दी है; तथा भारम्भ में ईसाई पंडितों का भी यही अभिप्राय या कि वाइवल में वर्णित पिंड-ब्रह्मांड की इस कल्पना के अनुसार बाइबल में कहे गये नीति-नियम ही नीतिशास्त्र के मूल तत्व हैं फिर जब यह मालूम होने लगा कि ये नियम व्यावहारिक दृष्टि से अपूर्ण हैं, तब इनकी पूर्ति करने के लिये अथवा स्पष्टीकरणार्थं यह प्रतिपादन किया जाने लगा, कि परमेश्वर ही ने मनुष्य को सदसद्विवेक शक्ति दी है। परन्तु अनुभव से फिर यह अड़चन दिख पड़ने लगी, कि चोर और साह दोनों की सदसद्विवेक शक्ति एक समान नहीं रहती; तब इस मत का प्रचार होने लगा कि परमेश्वर की इच्छा नीति शास्त्र की नींव भले ही हो, परन्तु इस ईश्वरी इच्छा के स्वरूप को जानने के लिए केवल इसी एक बात का विचार करना चाहिये, कि अधिकांश लोगों का अधिक सुख किसमें है-इसके सिवा परमेश्वर की इच्छा को जानने का अन्य कोई मार्ग नहीं है। पिंड-ब्रह्मांढ की रचना के सम्बन्ध के में ईसाई लोगों की जो यह समझ है कि वाइवल में वर्णित सगुण परमेश्वर ही संसार का कर्ता है और यह उसकी ही इच्छा या आज्ञा है कि मनुष्य नीति के नियमानुसार वर्ताव करे उसी के आधार पर उक्त सब मत प्रचलित हुए हैं। परन्तु आधिभौतिक शास्त्रों की उन्नति तथा वृद्धि होने पर जब यह मालूम होने लगा कि इसाई धर्मपुस्तकों में पिंड़-ग्रह्मांढ की रचना के विषय में कहे गये सिद्धान्त ठीक नहीं तव यह विचार छोड़ दिया गया कि परमेश्वर के समान कोई सृष्टि का कर्त्ता है या नहीं, और यही विचार किया जाने लगा कि मोतिशास्त्र की इमारत प्रत्यक्ष दिखनेवाली बातों की नींव पर क्योंकर खड़ी की जा सकती है । तब से फिर यह माना जाने लगा. कि अधिकांश लोगों का अधिक सुख या कल्याण अथवा मनुप्यत्व की वृद्धि, यही दृश्य तत्त्व नीतिशास्त्र के मूल कारण हैं। इस प्रतिपादन में इस बात की किसी उपपत्ति या कारण का कोई उल्लेख नहीं किया गया है, कि कोई मनुष्य अधिकांश लोगों का अधिक हित क्यों करे ? सिर्फ इतना ही कह दिया जाता है, कि यह मनुष्य की नित्य बढ़नेवाली एक स्वभाविक प्रवृत्ति है। परन्तु मनुष्य-त्वमात्र में स्वार्थ सरीखी और भी दूसरी वृत्तियाँ देख पड़ती हैं इसलिये इस पंथ में भी फिर भेद होने लगे । नीतिमत्ता की ये सच उपपत्तियाँ कुछ सर्वथा निर्दोष नहीं हैं। क्योंकि उक्त पंथों के सभी पंडितों में सृष्टि के दृश्य पदार्थों से परे सृष्टि की जड़ में कुछ न कुछ अव्यक तत्त्व अवश्य है, " इस सिद्धान्त पर एक ही सा विश्वास और श्रद्धा है, इस कारण उनके विषय प्रतिपादन में चाहे कुछ भी अड़चन क्यों न हो, वे लोग केवल बाह्य और दृश्य तत्वों से ही किसी तरह निर्वाह कर लेने का हमेशा प्रयत्न किया करते हैं। नीति तो सभी को चाहिये, क्योंकि वह सब के लिये आवश्यक है; परन्तु उक्त कथन से यह मालूम हो जायगा, कि पिंडब्रह्मांड की रचना के सम्बन्ध में मिन भिन्न मत होने के कारण उन लोगों की नीतिशास्त्र - विषयक उपपत्तियों में हमेशा कैसे भेद हो जाया करते हैं। इसी कारण से पिंढब्रह्मांड की रचना के विषय में आधिभौतिक, आधिदैविक और आध्यात्मिक मतों के अनुसार हमने नीतिशास्त्र के प्रतिपादन के तीन भेद किये हैं और आगे फिर प्रत्येक पंच के मुख्य मुख्य सिद्धान्तों का भिन्न भिन्न विचार किया है। जिनका यह मत है कि सगुण परमेश्वर ने सर्व दृश्य सृष्टि को बनाया है, वे नीतिशास्त्र का केवल यहीं तक विचार करते हैं, कि अपने धर्म ग्रन्थों में परमेश्वर की जो आज्ञा है वह, तथा परमेश्वर की ही सत्ता से निर्मित सदसद्विवेचन शक्तिरूप देवता ही सब कुछ है-इसके बाद और कुछ नहीं है। इसको हमने' आधिदैविक पन्थ कहा है; क्योंकि सगुण परमेश्वर भी तो एक देवता ही है न । अव, जिनका यह मत है, कि दृश्य सृष्टि का आदि कारण कोई भी अदृश्य मूल-तत्व नहीं है, और यदि हो भी तो वह मनुष्य की बुद्धि के लिये अगम्य है; वे लोग ' अधिकांश लोगों का अधिक कल्याण' या ' मनुष्यत्व का परम उत्कर्ष ' जैसे केवल दृश्य तत्त्व द्वारा ही नीतिशास्त्र का प्रतिपादन किया करते हैं और यह मानते हैं कि इस बाह्य और दृश्य तत्व के परे विचार करने की कोई आवश्यकता नहीं है। इस पन्य को हमने 'आधिभौतिक ' नाम दिया है। जिनका यह सिद्धान्त हैं, कि नामरूपात्मक दृश्य सृष्टि की जड़ में आत्मा सरीखा कुछ न कुछ नित्य और अध्यक्तं तत्त्व अवश्य है, वे लोग अपने नीतिशाब की उपपत्ति को आधिभौतिक उपपत्ति से भो परे ले जाते हैं, और आत्मज्ञान तथा नीति या धर्म का मेल करके इस बात का निर्माण करते हैं कि संसार में मनुष्य का सच्चा कर्तव्य क्या है। इस पन्य को हमने' आध्यात्मिक' कहा है। इन तीनों पन्थों में आचार-नीति एक ही है परन्तु पिराड-ब्रह्मांड की रचना के सम्बन्ध में प्रत्येक पन्थ का मत मिन्न भिन्न है इससे नीतिशास्त्र के भूलतत्वों का स्वरूप हर एक पन्थ में थोड़ा थोड़ा बदलता गया है। यह बात प्रगट है कि व्याकरण-शास्त्र कोई नई भाषा नहीं बनाता, किन्तु जो भाषा व्यवहार में प्रचलित रहती है उसी के नियमों की वह खोज करता है और भाषा की उन्नति में सहायक होता है; ठीक यही हाल नीतिशास्त्र का भी है। मनुष्य इस संसार में जब से पैदा हुआ है उसी दिन से वह स्वयं अपनी ही बुद्धि से अपने आचरण को देशकालानुसार शुद्ध रखने का प्रयत्न भी करता चला भाया है; और समय समय पर जो प्रसिद्ध पुरुष या महात्मा हो गये हैं उन्होंने अपनी अपनी समझ के अनुसार आचार शुद्धि के लिये ' चोदना ' या प्रेरणारूपी कानेक नियम भी बना दिये हैं। नीतिशाक्त की सत्पत्ति कुछ इस लिये नहीं हुई है, कि वह इन नियमों को तोड़ कर नये नियम बनाने लगे। हिंसा मत कर, सच बोल, परोपकार कर, इत्यादि नीति के नियम प्राचीन काल से ही चलते आये हैं । अव नीतिशास्त्र का सिर्फ यही देखने का काम है, कि नीति की यथोचित वृद्धि होने के लिये सब नीति नियमों में मूलतत्व क्या है। यही कारण है कि जब हम नीतिशास्त्र के किसी भी पन्थ को देखते हैं, तब हम वर्तमान प्रचलित नीति के प्रायः सब नियमों को सभी पयों में एक से पाते हैं, उनमें जो कुछ भेद दिखलाई पड़ता है, वह उपपत्ति के स्वरूपभेद के कारण है, और, इसलिये ढाशून्य पाल कारस का यह कथन सच मालूम होता है कि इस मेद के होने का मुख्य कारण यही है कि हररक पंथ में पिंढ. ब्रह्मांड की रचना Pa के सम्बन्ध में भिन्न भिन्न मत है । अब यह बात सिद्ध हो गई कि मिल, स्पेन्सर, कान्ट आदि आधिभौतिक पंथ के आधुनिक पाश्चात्य नीतिशास्त्र विषयक प्रन्यकारों ने आत्मौपम्य दृष्टि के सुलम तथा व्यापक तत्व को छोड़कर, " सर्वभूतहित " या " अधिकांश लोगों का अधिक हित " जैसे आधिभौतिक और बाह्य " तत्व पर ही नीतिमत्ता को स्थापित करने का जो प्रयत्न किया है वह इसी लिये किया है कि पिंडब्रह्मांड सम्बन्धी उनके मत प्राचीन मतों से भिन्न हैं। परन्तु जो लोग उक्त नूतन मतों को नहीं मानते और जो इन प्रमों का स्पष्ट तथा गंभीर विचार कर लेना चाहते हैंकि " मै कौन हूँ ? सृष्टि क्या है ? मुझे इस सृष्टि का ज्ञान कैसे होता है ? जो सृष्टि मुझ से बाहर है वह स्वतंत्र है या नहीं ? यदि है, तो उसका मूलतत्व क्या है? इस तत्व से मेरा क्या सम्बन्ध है ? एक मनुष्य दूसरे के सुख के लिये अपनी जान क्यों देवे ?' जो जन्म लेते हैं वेभरते भी हैं' इस नियम के अनुसार यदि यह बात निमित है, कि जिस पृथ्वी पर हम रहते हैं उसका और उसके साथ समस्त प्राणियों का तथा हमारा भी किसी दिन अवश्य नाश हो जायगा, तो नाशवान् भविष्य पीढ़ियाँ के लिये हम अपने सुख का नाश क्यों करें ? " -- मथवा, जिन लोगों का केवल इस उत्तर से पूरा समाधान नहीं होता, कि " परोपकार आदि मनोवृत्तियाँ इस कर्ममय, अनित्य और दृश्य सृष्टि की नैसर्गिक प्रवृत्ति ही हैं", और जो यह जानना चाहते हैं कि इस नैसर्गिक प्रवृत्ति का मूलकारण क्या है - उनके लिये अध्यात्मशास्त्र के मित्य तत्वज्ञाम का सहारा लेने के सिवा और कोई दूसरा मार्ग नहीं है । और, इसी कारण से मीन ने अपने मोतिशास्त्र के अन्य का आरम्म इसी तत्व के प्रतिपादन से किया है, कि जिस माला को जड़सृष्टि का ज्ञान होता है वह आत्मा जड़सृष्टि से अवश्य ही भित होगा; और, कान्ट ने पहले व्यव सायात्मक बुद्धि का विवेचन करके फिर वासनात्मक बुद्धि की तथा नीतिशास्त्र की मीमांसा की है। मनुष्य अपने सुख के लिये या अधिकांश लोगों को सुख देने के लिये पैदा हुआ है'-यह कथन ऊपर ऊपर से चाहे कितना ही मोहक तथा उत्तम दिखे, परन्तु वस्तुतः यह सच नहीं है। यदि हम क्षणभर इस बात का विचार करें, कि जो महात्मा केवल सत्य के लिये प्रागा दान करने को तैयार रहते हैं, उनके मन में क्या यही हेतु रहता है, कि भविष्य पीढ़ी के लोगों को आधिकाधिक विषयसुख होवे; तो यही कहना पड़ता है, कि अपने तथा अन्य लोगों के भनित्य आधिमौ. तिक सुखों की अपेक्षा इस संसार में मनुष्य का और भी कुछ दूसरा अधिक महत्व का परमसाध्य या उद्देश अवश्य है। यह उद्देश क्या है ? जिन्होंने पिंडह्मांड के नामरूपात्मक, नाशवान्, दृश्य स्वरूप से आच्छादित प्रात्म. स्वरूपी नित्य तत्व को अपनी आत्मप्रतीति के द्वारा जान लिया है; वे लोग उक प्रश्न का यह उत्तर देते हैं, कि अपने आत्मा के अमर, श्रेष्ठ, शुद्ध, नित्य तथा सर्वव्यापी स्वरूप की पहचान करके उसी में रम रद्दमा ज्ञानवान् मनुष्य का इस नाशवान् संसार में पहला कर्त्तव्य है । जिसे सर्वभूतान्तर्गत प्रात्मैक्य की इस तरह से पहचान हो जाती है तथा यह ज्ञान जिसकी देह तथा इंद्रियों में समा जाता है, चह पुरुप इस बात के सोच में पढ़ा नहीं रहता कि यह संसार झूठ है या सच; किंतु वह सर्वभूतहित के लिये उद्योग करने में आप ही आप प्रवृत्त हो जाता है और सत्य मार्ग का अप्रेसर बन जाता है; क्योंकि उसे यह पूरी तौर से मालूम रहता है कि अविनाशी तथा त्रिकाल अबाधित सत्य कौनसा है। मनुष्य की यही आध्यात्मिक पूर्णावस्या सय नीति-नियमों का मूल उद्गम स्थान है और इसे ही वेदान्त में 'मोक्ष' कहते हैं। किसी भी नीति को लीजिये, वह इस अंतिम साध्य से अलग नहीं हो सकती; इसलिये नीतिशास्त्र का या कर्मयोगशास्त्र का विवेचन करते समय आखिर इसी तत्व की शरण में जाना पड़ता है। सर्वात्मक्यरूप अव्यक्त मूल तत्व का ही एक व्यक्त स्वरूप सर्वभूतहितेच्छा है; धौर, सगुण परमेश्वर तथा दृश्य सृष्टि दोनों उस आत्मा के ही व्यंक्तस्वरूप हैं जो सर्वभूतान्तर्गत सर्वव्यापी और अन्यक्त है। इस व्यक्त स्वरूप के आगे गये बिना अर्थात् अव्यक्त आत्मा का ज्ञान प्राप्त किये बिना, ज्ञान की पूर्ति तो होती ही नहीं; किन्तु इस संसार में हर एक मनुष्य का जो यह परम कर्त्तव्य है, किशरीरस्य यात्मा को पूर्णावस्या में पहुँचा दे, वह भी इस ज्ञान के बिना सिद्ध नहीं हो सकता। चाहे नीति को लीजिये, व्यवहार को लीजिये, धर्म को लीजिये अथवा किसी भी दूसरे शास्त्र को लीजिये, अध्यात्मज्ञान ही सब की अंतिम गति है जैसे कहा है " सर्व कर्माखिलं पार्थ शाने परिसमाप्यते । " हमारा भक्तिमार्ग भी इसी तत्त्वज्ञान का अनुसरगा करता है इसलिये उसमें भी यही सिद्धांत स्थिर रहता है, कि ज्ञानदृष्टि से निप्पन्न होनेवाला साम्यबुद्धिरूपी तत्त्व ही मोक्ष का तथा सदाचरगा का मूलस्थान है। वेदान्तशास्त्र से सिद्ध होनेवाले इस तत्व पर एक ही महत्त्वपूर्ण आक्षेप किया जा सकता है; वह यह है कि कुछ वेदान्ती ज्ञानप्राप्ति के अनन्तर, सव कर्मों का संन्यास कर देगा उचित मानते हैं। इसीलिये यह दिखला कर किज्ञान और कर्म में विरोध नहीं है, गीता में कर्मयोग के इस सिद्धान्त का विस्तार सहित वर्णन किया गया है, कि वासना का क्षय होने पर भी ज्ञानी पुरुष अपने सव कर्मों को परमेश्वरापणपूर्वक बुद्धि से लोकसंग्रह के लिये केवल कर्त्तव्य समझ कर ही करता 'चला आवे । अर्जुन को युद्ध में प्रवृत्त करने के लिये यह उपदेश अवश्य दिया गया है कि तू परमेश्वर को सब कर्म समर्पण करके युद्ध कर; परन्तु यह उपदेश केवल तत्कालीन प्रसंग को देख कर ही किया गया है । उक्त उपदेश का भावार्थ यही मालूम होता है कि अर्जुन के समान ही किसान, सुनार, लोहार, बढ़ई, वनिया, ब्राह्मण, व्यापारी, लेखक, उद्यमी इत्यादि सभी लोग अपने अपने अधिकारानुरूप व्यवहारों को परमेश्वरार्पण-बुद्धि से करते हुए संसार का धारा-पोषणा करते रहें; जिसे जो रोज़गार निसर्गतः प्राप्त हुआ है उसे यदि वह निष्काम बुद्धि से करता रहे तो उस कर्त्ता को कुछ भी पाप नहीं लगेगा; सब कर्म एक ही से हैं; दोष केवल कर्त्ता की बुद्धि में है, न कि उसके कर्मों में अतएव वुद्धि को सम करके यदि सब कर्म किये जायँ तो परमेश्वर की उपासना हो जाती है, पाप नहीं लगता और अंत में सिद्धि भी मिल जाती है। परन्तु जिन लोगों का यह दृढ़ संकल्प सा हो गया है कि चाहे कुछ भी गया है; कि चाहे कुछ भी हो जाय, इस भाशवान् दृश्य सृष्टि के आगे बढ़ कर आत्म-अनात्म विचार के गहरे पानी में पैठना ठीक नहीं है, वे के अपने नीतिशास्त्र का विवेचन, ब्रह्मात्मैक्यरूप परमसाध्य की उच्च श्रेणी को छोड़ कर, मानव जाति का कल्याण या सर्वभूतहित जैसे निम्न कोटि के आधिभौतिक दृश्य तत्त्व से ही शुरू किया करते हैं। स्मरण रहे कि किसी पेड़ की चोटी को तोड़ देने से वह नया पेड़ नहीं कहलाता; उसी तरह आधिभौ तिक पंडितों का निर्माण किया हुआ नीतिशास्त्र भाँडा या 'अपूर्ण भले ही हो, परन्तु वह नया नहीं हो सकता। यह्मात्मज्य को न मानकर प्रत्येक पुरुष को स्वतंत्र माननेवाले हमारे यहाँ के सांख्यशास्त्रज्ञ पंडितों ने भी, यही देख कर किदृश्य जगत् का धारण-पोषण और विनाश किन गुणों के द्वारा होता है, सत्वरज-तम तीनों गुणों के लक्षण निश्चित किये हैं; और फिर प्रतिपादन किया है कि इनमें से सात्विक सद्गुणों का परम उत्कर्ष करना ही मनुष्य का कर्त्तव्य है तथा मनुष्य को इसी से अंत में त्रिगुणातीत अवस्था मिल कर मोक्ष की प्राप्ति होती है । भगवङ्गीता के सत्रहवें तथा अठारहवें अध्याय में थोड़े भेद के साथ इसी अर्थ का वर्णन है । सच देखा जाय तो, क्या सात्त्विक सद्गुणों का परम उत्कर्षं, और क्या परोपकार वुद्धि की तथा मनुष्यत्व की वृद्धि, दोनों का अर्थ एक ही है। महाभारत और गीता में इन सब प्राधिभौतिक तत्त्वों का स्पष्ट उल्लेख तो है ही, बल्कि महाभारत में यह भी साफ़ साफ़ कहा गया है, कि धर्म-अधर्म के नियमों के लौकिक या वाह्य उपयोग का विचार करने पर यही जान पड़ता है कि ये नीतिधर्म सर्वभूतहितार्थ अर्थात् लोककल्याणार्थ ही हैं। परन्तु पश्चिमी आधिमौतिक पंडितों का किसी अव्यक्त तत्त्व पर विश्वास नहीं है, इसलियें यद्यपि वे जानते हैं कि तात्विक दृष्टि से कार्य-कार्य का निर्णय करने के लिये आधिभौतिक तत्व पूरा काम नहीं देते, तो भी वे निरर्थक शब्दों का आइंस्थर बढ़ाकर व्यक्त तत्व से ही अपना निर्वाह किसी तरह कर लिया करते हैं। गीता में ऐसा नहीं किया गया है; किन्तु इन तत्वों की परंपरा को पिंढयह्मांड के मूल अव्यक्त तथा नित्य तत्त्व का ले जाकर मोक्ष, मीतिधर्म और व्यवहार की भी पूरी एकवाक्यता तत्त्वज्ञान के आधार से गीता में भगवान् ने सिद्ध कर दिखाई है, और, इसीलिये अनुगीता के आरंभ में स्पष्ट कहा गया है कि कार्य-कार्य-निर्णयार्थ जो धर्म बतलाया गया है वही मोक्षप्राप्ति करा देने के लिये भी समर्थ है । जिनका यह मत होगा, कि मोक्षधर्म और नीतिशास्त्र को अथवा अध्यात्मज्ञान और नीति को एक में मिला देने की आवश्यकता नहीं है, उन्हें उक्त उपपादन का महत्त्व ही मालूम नहीं हो सकता। परन्तु जो लोग इसके संबंध में उदासीन नहीं हैं, उन्हें निस्संदेह यह मालूम हो जायगा, कि गीता में किया गया कर्मयोग का प्रतिपादन आधिमौ तिक विवेचन की अपेक्षा अधिक श्रेष्ठ तथा ग्राह्य है। अध्यात्मज्ञान को वृद्धि प्राचीन काल में हिन्दुस्थान में जैसी हो चुकी है, वैसी और कहीं भी नहीं हुई; इसलिये पहले पहल किसी अन्य देश में, कर्मयोग के ऐसे आध्यात्मिक उपपादन का पाया जाना बिलकुल सम्भव नहीं - और, यह विदित ही है कि ऐसा उपपादन कहीं पाया भी नहीं जांता । यह स्वीकार होने पर भी कि इस संसार के अशाश्वत होने के कारण इस में सुख की अपेक्षा दुःख ही अधिक है , गीता में जो यह सिद्धान्त स्थापित किया गया है कि " कर्म ज्यायो ह्यकर्मणः " अर्थात्, सांसारिक कर्मों का कमीन बाबू किशोरीलाल सरकार एम्. ए. वी. एल. ने The Hindu Systent of Moral Serence नामक जो एक छोटासा ग्रंथ लिखा है वह इसी ढंग का है, व्यर्यात उसमें सत्त्व, रज और तम तीनों गुणों के आधार पर विवेचन किया गया है ।
एफ़ 2 : फन एंड फ़्रस्ट्रेशन एक आगामी बॉलीवुड ड्रामा फिल्म है, जिसका निर्देशन अनीस बज़्मी द्वारा किया जा रहा है। फिल्म, साउथ फिल्म F 2 की रीमेक है। फिल्म में अर्जुन कपूर लीड रोल में नज़र आयेंगे। पार्टी से निकलीं जान्हवी कपूर की हालत देख चौंके यूजर्स, ट्रोल करते हुए बोले- 'फुल पीकर टाइट है' Ayodhya प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में पहुंचेंगे ये बॉलीवुड और साउथ के सितारे? चौकाने वाली लिस्ट वायरल! Nora Fatehi की हमशक्ल को देखकर चकराया लोगों का दिमाग, वीडियो देखकर बोले- 'कौन है असली?' बीच पर बेड डालकर बैठी हसीना ने दिखाई हॉटनेस, लोग बोले- 'हर चीज की एक सीमा होती है यार' सैफ अली खान के बारे में बात करते हुए ये क्या बोल गई करीना कपूर खान- मेरी आंखें भर आती हैं क्योंकि..
एफ़ दो : फन एंड फ़्रस्ट्रेशन एक आगामी बॉलीवुड ड्रामा फिल्म है, जिसका निर्देशन अनीस बज़्मी द्वारा किया जा रहा है। फिल्म, साउथ फिल्म F दो की रीमेक है। फिल्म में अर्जुन कपूर लीड रोल में नज़र आयेंगे। पार्टी से निकलीं जान्हवी कपूर की हालत देख चौंके यूजर्स, ट्रोल करते हुए बोले- 'फुल पीकर टाइट है' Ayodhya प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में पहुंचेंगे ये बॉलीवुड और साउथ के सितारे? चौकाने वाली लिस्ट वायरल! Nora Fatehi की हमशक्ल को देखकर चकराया लोगों का दिमाग, वीडियो देखकर बोले- 'कौन है असली?' बीच पर बेड डालकर बैठी हसीना ने दिखाई हॉटनेस, लोग बोले- 'हर चीज की एक सीमा होती है यार' सैफ अली खान के बारे में बात करते हुए ये क्या बोल गई करीना कपूर खान- मेरी आंखें भर आती हैं क्योंकि..
प्रताप सिंह खाचरियावास (Pratap Singh Khachariyawas) राजस्थान के एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं. वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य और राजस्थान सरकार में खाद्य और नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के विभागों के कैबिनेट मंत्री हैं (Khachariyawas ministry). वह राजस्थान विधानसभा में सिविल लाइंस, जयपुर निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं (Khachariyawas constituency). प्रताप सिंह 2015 से राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता और जयपुर कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर हैं. प्रताप सिंह खाचरियावास का जन्म 16 मई 1969 को जोधपुर में हुआ था (Khachariyawas age). वह लक्ष्मण सिंह शेखावत और हिम्मत कंवर के पुत्र हैं (Khachariyawas parents). प्रताप सिंह खाचरियावास पूर्व उपराष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत के भतीजे हैं (Khachariyawas uncle). उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा आदर्श विद्या मंदिर, किशनगढ़ रेनेवाल, टैगोर विद्या भवन, जयपुर से की और बाद में 9वीं से 11वीं तक की पढ़ाई माहेश्वरी हायर सेकेंडरी स्कूल, जयपुर से की. इसके अलावा उन्होंने राजस्थान कॉलेज से राजनीति विज्ञान में एमए की डिग्री ली और राजस्थान यूनिवर्सिटी, जयपुर से एलएलबी की (Khachariyawas education) खाचरियावास ने नीरज कंवर से शादी की (Khachariyawas wife), उनके दो बेटे आदित्य वर्धन और कृष्ण वर्धन हैं (Khachariyawas son). खाचरियावास ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत राजस्थान विश्वविद्यालय के एक स्वतंत्र अध्यक्ष के रूप में की थी. वह 2008 से 2013 तक सिविल लाइंस, जयपुर से विधान सभा के सदस्य थे. वह राजस्थान सरकार में कैबिनेट मंत्री और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के राज्य प्रवक्ता और जयपुर के अध्यक्ष हैं (Khachariyawas political career). राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार में प्रताप सिंह खाचरियावास कैबिनेट मंत्री हैं. उन्होंने रविवार को एक कार्यक्रम में अपने ही मुख्यमंत्री को लेकर विवादित बयान दिया. खाचरियावास ने कहा- मैं पूरी कैबिनेट का दिल निकालकर आपको (गहलोत) दे दूंगा. फिर भी आप कहेंगे, मजा नहीं आ रहा. खाचरियावास 2018 के विधानसभा चुनाव में जयपुर की सिविल लाइंस सीट से जीते थे. राजस्थान सरकार ने मेवाड़ और उदयपुर जिले में अगले 2 महीने तक सार्वजनिक स्थलों पर धार्मिक ध्वज और प्रतीक चिह्न लगाने पर रोक लगाई गई है. इस मामले पर अब राजनीति तेज हो गई है. बीजेपी इस फैसले को लेकर गहलोत सरकार पर हमलावर है. अडानी मामले पर संसद में विपक्ष लामबंद. दिल्ली में सारे विपक्षी नेता गांधी प्रतिमा पर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं. इन लोगों में लगभग 16 दलों के नेता शामिल हैं. तो वहीं राजस्थान में भी कांग्रेस ने अडानी के खिलाफ प्रदर्शन किया. देखें. राजस्थान कांग्रेस का सियासी घमासान जारी है. अशोक गहलोत के तेवर नरम पड़े हैं तो वहीं उनके समर्थक विधायकों के सुर भी बदले-बदले नजर आ रहे हैं. आलाकमान को चैलेंज करते नजर आए समर्थक विधायकों के तेवर सोनिया गांधी और राहुल गांधी को लेकर नरम पड़े हैं तो वहीं ये विधायक सचिन पायलट के नाम पर अब भी तल्ख तेवर दिखा रहे हैं.
प्रताप सिंह खाचरियावास राजस्थान के एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं. वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य और राजस्थान सरकार में खाद्य और नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के विभागों के कैबिनेट मंत्री हैं . वह राजस्थान विधानसभा में सिविल लाइंस, जयपुर निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं . प्रताप सिंह दो हज़ार पंद्रह से राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता और जयपुर कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर हैं. प्रताप सिंह खाचरियावास का जन्म सोलह मई एक हज़ार नौ सौ उनहत्तर को जोधपुर में हुआ था . वह लक्ष्मण सिंह शेखावत और हिम्मत कंवर के पुत्र हैं . प्रताप सिंह खाचरियावास पूर्व उपराष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत के भतीजे हैं . उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा आदर्श विद्या मंदिर, किशनगढ़ रेनेवाल, टैगोर विद्या भवन, जयपुर से की और बाद में नौवीं से ग्यारहवीं तक की पढ़ाई माहेश्वरी हायर सेकेंडरी स्कूल, जयपुर से की. इसके अलावा उन्होंने राजस्थान कॉलेज से राजनीति विज्ञान में एमए की डिग्री ली और राजस्थान यूनिवर्सिटी, जयपुर से एलएलबी की खाचरियावास ने नीरज कंवर से शादी की , उनके दो बेटे आदित्य वर्धन और कृष्ण वर्धन हैं . खाचरियावास ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत राजस्थान विश्वविद्यालय के एक स्वतंत्र अध्यक्ष के रूप में की थी. वह दो हज़ार आठ से दो हज़ार तेरह तक सिविल लाइंस, जयपुर से विधान सभा के सदस्य थे. वह राजस्थान सरकार में कैबिनेट मंत्री और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के राज्य प्रवक्ता और जयपुर के अध्यक्ष हैं . राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार में प्रताप सिंह खाचरियावास कैबिनेट मंत्री हैं. उन्होंने रविवार को एक कार्यक्रम में अपने ही मुख्यमंत्री को लेकर विवादित बयान दिया. खाचरियावास ने कहा- मैं पूरी कैबिनेट का दिल निकालकर आपको दे दूंगा. फिर भी आप कहेंगे, मजा नहीं आ रहा. खाचरियावास दो हज़ार अट्ठारह के विधानसभा चुनाव में जयपुर की सिविल लाइंस सीट से जीते थे. राजस्थान सरकार ने मेवाड़ और उदयपुर जिले में अगले दो महीने तक सार्वजनिक स्थलों पर धार्मिक ध्वज और प्रतीक चिह्न लगाने पर रोक लगाई गई है. इस मामले पर अब राजनीति तेज हो गई है. बीजेपी इस फैसले को लेकर गहलोत सरकार पर हमलावर है. अडानी मामले पर संसद में विपक्ष लामबंद. दिल्ली में सारे विपक्षी नेता गांधी प्रतिमा पर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं. इन लोगों में लगभग सोलह दलों के नेता शामिल हैं. तो वहीं राजस्थान में भी कांग्रेस ने अडानी के खिलाफ प्रदर्शन किया. देखें. राजस्थान कांग्रेस का सियासी घमासान जारी है. अशोक गहलोत के तेवर नरम पड़े हैं तो वहीं उनके समर्थक विधायकों के सुर भी बदले-बदले नजर आ रहे हैं. आलाकमान को चैलेंज करते नजर आए समर्थक विधायकों के तेवर सोनिया गांधी और राहुल गांधी को लेकर नरम पड़े हैं तो वहीं ये विधायक सचिन पायलट के नाम पर अब भी तल्ख तेवर दिखा रहे हैं.
बरेली के अपर जिला अधिकारी संतोष बहादुर सिंह ने बताया कि थाना भोजीपुरा क्षेत्र के नवाबगंज तहसील अंतर्गत ग्राम मिलक अलीगंज में तीन मजदूर खेतों में मजदूरी कर रहे थे। उन्होंने बताया कि उनके बच्चे दोपहर में खाना लेकर खेत पर गए थे। उन्होंने बताया कि खेत से वापसी के दौरान तीनों बच्चे आशीष (8), सुमित (7)और लव सागर (7) रास्ते में अमृत सरोवर में नहाने लगे और इस दौरान गहराई में चले गए और एकदूसरे को बचाने में तीनों डूब गए। उन्होंने बताया कि वहीं पास में बकरियां चरा रहे लोगों ने बच्चों के डूबने की सूचना गांव में दी। उन्होंने बताया कि गांव वाले तत्काल वहां पहुंचे और तीनों बच्चों को तत्काल सरोवर से निकालकर उन्हें बरेली के स्थानीय मेडिकल कॉलेज ले गए जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
बरेली के अपर जिला अधिकारी संतोष बहादुर सिंह ने बताया कि थाना भोजीपुरा क्षेत्र के नवाबगंज तहसील अंतर्गत ग्राम मिलक अलीगंज में तीन मजदूर खेतों में मजदूरी कर रहे थे। उन्होंने बताया कि उनके बच्चे दोपहर में खाना लेकर खेत पर गए थे। उन्होंने बताया कि खेत से वापसी के दौरान तीनों बच्चे आशीष , सुमित और लव सागर रास्ते में अमृत सरोवर में नहाने लगे और इस दौरान गहराई में चले गए और एकदूसरे को बचाने में तीनों डूब गए। उन्होंने बताया कि वहीं पास में बकरियां चरा रहे लोगों ने बच्चों के डूबने की सूचना गांव में दी। उन्होंने बताया कि गांव वाले तत्काल वहां पहुंचे और तीनों बच्चों को तत्काल सरोवर से निकालकर उन्हें बरेली के स्थानीय मेडिकल कॉलेज ले गए जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
नवादा. शराब के नशे में एक कलयुगी पिता ने अपनी 9 महीने की मासूम बेटी की जमीन पर पटक कर हत्या कर दी। घटना वारिसलीगंज थाना क्षेत्र के बरनावा पंचायत की अनुसूचित टोला की है। घटना के बाद आरोपी की पत्नी ने वारिसलीगंज थाना को सूचना देकर हत्यारे पति को गिरफ्तार करवाई है। पीड़ित मां के द्वारा थाना में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार बरनावा ग्रामीण होरिल मांझी गुरुवार को काफी शराब पी रखा था। इस दौरान घर पहुंचकर पत्नी को गाली गलौज करते हुए खाना मांगकर खाया। काफी फजीहत झेल चुकी 27 वर्षीय किरण ने जब गाली देने से मना करते हुए बच्चों के साथ अपने जाने की धमकी दिए और पटक-पटक कर बच्ची की हत्या कर दी। पत्नी की गोद से 9 माह की मासूम सुंदरी को खींचकर जमीन पर पटक दिया। नशेड़ी पिता ने मासूम को इतना जोर से पटका मारा कि बच्ची के प्राण तुरंत उड़ गया। घटना आहत पत्नी ने वारिसलीगंज थाना को सूचना देकर घटना की जानकारी दी। वारिसलीगंज पुलिस बिना देर किए बरनावा पहुंचकर मृत बच्ची के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को ले नवादा भेज दिया। जबकि हत्यारा पिता को गिरफ्तार कर थाना लाया। दर्ज प्राथमिकी के अनुसार बच्ची की हत्या का मूल कारण बाप के नशे में होना बताया गया है। पुलिस ने आवश्यक लिखा पढ़ी कर हत्या आरोपित होरिल को पुलिस अभिरक्षा में न्यायालय भेज दिया है।
नवादा. शराब के नशे में एक कलयुगी पिता ने अपनी नौ महीने की मासूम बेटी की जमीन पर पटक कर हत्या कर दी। घटना वारिसलीगंज थाना क्षेत्र के बरनावा पंचायत की अनुसूचित टोला की है। घटना के बाद आरोपी की पत्नी ने वारिसलीगंज थाना को सूचना देकर हत्यारे पति को गिरफ्तार करवाई है। पीड़ित मां के द्वारा थाना में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार बरनावा ग्रामीण होरिल मांझी गुरुवार को काफी शराब पी रखा था। इस दौरान घर पहुंचकर पत्नी को गाली गलौज करते हुए खाना मांगकर खाया। काफी फजीहत झेल चुकी सत्ताईस वर्षीय किरण ने जब गाली देने से मना करते हुए बच्चों के साथ अपने जाने की धमकी दिए और पटक-पटक कर बच्ची की हत्या कर दी। पत्नी की गोद से नौ माह की मासूम सुंदरी को खींचकर जमीन पर पटक दिया। नशेड़ी पिता ने मासूम को इतना जोर से पटका मारा कि बच्ची के प्राण तुरंत उड़ गया। घटना आहत पत्नी ने वारिसलीगंज थाना को सूचना देकर घटना की जानकारी दी। वारिसलीगंज पुलिस बिना देर किए बरनावा पहुंचकर मृत बच्ची के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को ले नवादा भेज दिया। जबकि हत्यारा पिता को गिरफ्तार कर थाना लाया। दर्ज प्राथमिकी के अनुसार बच्ची की हत्या का मूल कारण बाप के नशे में होना बताया गया है। पुलिस ने आवश्यक लिखा पढ़ी कर हत्या आरोपित होरिल को पुलिस अभिरक्षा में न्यायालय भेज दिया है।
हिन्दू धर्मो में सुपारी का प्रयोग धार्मिक कार्यो में किया जाता है इसकी बहुत मान्यता है, वैसे तो आपने सुपारी को गुटखा, पान में बहुत खाया होगा या फिर खाते देखा होगा, लेकिन क्या आपको पता है की ये सुपारी आपकी समस्याएं भी हल कर सकती है. हिन्दू धर्म की मान्यताओं के मुताबिक सुपारी देवी देवताओं को चढ़ाई जाती है तथा भोग में उन्हें सुपारी चढ़ाते है, कुछ मान्यताओं के अनुसार सुपारी के ऐसे टोटके बताये गए हैं जिनके माध्यम से आप अपने घर में सुख और समृद्धि ला सकते हैं लेकिन इसके लिए आपको सुपारी का प्रयोग करना होगा. आप सुपारी के कुछ बेहद चमत्कारी प्रयोग करके अपनी समस्याओं को दूर कर सकते हैं. यदि आपका कोई काम रुका हो तो या आप कोई काम की शुरूआत करने जा रहे हो तो आप एक साबुत सुपारी और एक लौंग को हमेशा अपने पास रखें, और एक लौंग को चूसते हुए "ॐ श्री गणेशाय नमः" का जाप करना चाहिए. यदि आप काम से घर आ रहें हो तो घर पहुचने के बाद जो आप सुपारी अपने साथ ले गए थे उस सुपारी को अर्चा विग्रह पर फिर रख दे. ऐसी क्रिया अपनाकर आप पाएंगे कि आपके काम कुछ दिनों में बनने लगेंगे. सुपारी को गौरी गणेश का रूप माना जाता है. इसलिए जिस सुपारी को पूजा में इस्तेमाल किया जाता है उस सुपारी को तिजोरी में रखना भी लाभदायक होता है. सुपारी को धागे में लपेटें और अक्षत, कुमकुम लगाकर पूजा जरूर कर लें. पूजा करके तिजोरी में रखी गयी सुपारी बहुत लाभदायक होती है.
हिन्दू धर्मो में सुपारी का प्रयोग धार्मिक कार्यो में किया जाता है इसकी बहुत मान्यता है, वैसे तो आपने सुपारी को गुटखा, पान में बहुत खाया होगा या फिर खाते देखा होगा, लेकिन क्या आपको पता है की ये सुपारी आपकी समस्याएं भी हल कर सकती है. हिन्दू धर्म की मान्यताओं के मुताबिक सुपारी देवी देवताओं को चढ़ाई जाती है तथा भोग में उन्हें सुपारी चढ़ाते है, कुछ मान्यताओं के अनुसार सुपारी के ऐसे टोटके बताये गए हैं जिनके माध्यम से आप अपने घर में सुख और समृद्धि ला सकते हैं लेकिन इसके लिए आपको सुपारी का प्रयोग करना होगा. आप सुपारी के कुछ बेहद चमत्कारी प्रयोग करके अपनी समस्याओं को दूर कर सकते हैं. यदि आपका कोई काम रुका हो तो या आप कोई काम की शुरूआत करने जा रहे हो तो आप एक साबुत सुपारी और एक लौंग को हमेशा अपने पास रखें, और एक लौंग को चूसते हुए "ॐ श्री गणेशाय नमः" का जाप करना चाहिए. यदि आप काम से घर आ रहें हो तो घर पहुचने के बाद जो आप सुपारी अपने साथ ले गए थे उस सुपारी को अर्चा विग्रह पर फिर रख दे. ऐसी क्रिया अपनाकर आप पाएंगे कि आपके काम कुछ दिनों में बनने लगेंगे. सुपारी को गौरी गणेश का रूप माना जाता है. इसलिए जिस सुपारी को पूजा में इस्तेमाल किया जाता है उस सुपारी को तिजोरी में रखना भी लाभदायक होता है. सुपारी को धागे में लपेटें और अक्षत, कुमकुम लगाकर पूजा जरूर कर लें. पूजा करके तिजोरी में रखी गयी सुपारी बहुत लाभदायक होती है.
रायपुर। छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल होने के बाद एक और अच्छी खबर आई है। राज्य सरकार ने कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में पांच प्रतिशत की बढ़ोत्तरी कर दी है। मिली जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने श्रम दिवस के अवसर पर शासकीय कर्मचारियों को पांच प्रतिशत महंगाई भत्ता का तोहफा दिया है। उन्होंने कर्मचारियों के हित में लिए गए इस फैसले की जानकारी ट्वीट कर दी। राज्य सरकार के निर्णय के अनुसार, शासकीय कर्मचारियों को महंगाई भत्ते की यह दर एक मई से ही लागू होगी। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में राज्य के कर्मचारियों को 17 प्रतिशत महंगाई भत्ता प्राप्त हो रहा है, जो अब बढ़कर 22 प्रतिशत हो जाएगा। ज्ञात हो कि भूपेश बघेल सरकार ने पिछले दिनों ही कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था को फिर लागू किया है। इससे कर्मचारी जगत में खुशी है और मुख्यमंत्री का सभी कर्मचारी संगठन आभार जता रहे हैं। अब महंगाई भत्ते में पांच प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की गई है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल होने के बाद एक और अच्छी खबर आई है। राज्य सरकार ने कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में पांच प्रतिशत की बढ़ोत्तरी कर दी है। मिली जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने श्रम दिवस के अवसर पर शासकीय कर्मचारियों को पांच प्रतिशत महंगाई भत्ता का तोहफा दिया है। उन्होंने कर्मचारियों के हित में लिए गए इस फैसले की जानकारी ट्वीट कर दी। राज्य सरकार के निर्णय के अनुसार, शासकीय कर्मचारियों को महंगाई भत्ते की यह दर एक मई से ही लागू होगी। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में राज्य के कर्मचारियों को सत्रह प्रतिशत महंगाई भत्ता प्राप्त हो रहा है, जो अब बढ़कर बाईस प्रतिशत हो जाएगा। ज्ञात हो कि भूपेश बघेल सरकार ने पिछले दिनों ही कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था को फिर लागू किया है। इससे कर्मचारी जगत में खुशी है और मुख्यमंत्री का सभी कर्मचारी संगठन आभार जता रहे हैं। अब महंगाई भत्ते में पांच प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की गई है।
बॉलीवुड एक्टर कार्तिक आर्यन और सारा अली खान अपनी आगामी फिल्म "लव आजकल" को लेकर चर्चा में बने हुए हैं। हाल ही में फिल्म का नया पोस्टर रिलीज किया गया है जिसमें कार्तिक और सारा एक दूसरे के साथ रोमांस करते हुए नजर आ रहे है। अयान मुखर्जी (ayaan mukherji) इन दिनों अपनी आगामी फिल्म "ब्रह्मास्त्र" (brahmastra) की शूटिंग में काफी व्यस्त चल रहे हैं। हाल ही में फिल्म के लीड एक्टर रणबीर कपूर (ranbir kapoor) और आलिया भट्ट (alia bhatt) को पहली बार किसी फिल्म में साथ देखा जाएगा। प्यार (Love) एक ऐसी फीलिंग (Feeling) है जो दुनिया में या तो माता-पिता को देखकर या फिर किसी ऐसे को देखकर आती है, जो आपके लिए बिल्कुल अंजान हो मगर उसको देखने के बाद दिल में अजीब सा कुछ ऐहसास होने लगता हो जैसे कि वो आपका अपना ही हो। इन दिनों प्रियंका चोपड़ा और निक जोनस सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं। 1 दिसंबर को निकयंका ने ईसाई रीति-रिवाजों से एक-दूसरे को पति-पत्नी स्वीकारा और 2 दिसंबर को दोनों हिन्दू रीती-रिवाज के अनुसार सात फेरे लेंगे। प्रियंका ने अपनी मेहंदी सेरेमनी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की हैं। क्रिकेट से पहले माही का ये पहला प्यार था जिसे वो आज भी नहीं भुला पाते। माही को किक्रेट के अलावा है इसका शौक। जानिए क्या है उनका साक्षी से पहले, पहला प्यार। बॉलीवुड के सुपरस्टार आमिर खान ने बुधवार को वेलेंटाइन डे के मौके पर जहां अपने फैंस को शुभकामनाएं दीं, वहीं अपने पहले प्यार का खुलासा भी किया। उन्होंने बताया कि जब वह 10 के थे, तो उन्हें पहला प्यार हुआ था। लेकिन, वह प्यार एकतरफा था। अगर अापको लगता है कि सचमुच प्यार पहली नजर में होता है तो इसे बदल दे। क्योंकि साइंटिस्ट ऐसा नहीं मानते भैया. . . इनकी रिसर्च तो कुछ और ही कहती है, जिसे सुनकर शायद आप भी चौंक जाएंगे। भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान एम एस धोनी के जीवन पर आधारित फिल्म जल्द पर्दे पर पेश होने वाली है। स्कूल के दिन जिंदगी के सबसे खूबसूरत दिन होते हैं। जहां न कोई टेंशन होती है न ही कोई जिम्मेदारी।
बॉलीवुड एक्टर कार्तिक आर्यन और सारा अली खान अपनी आगामी फिल्म "लव आजकल" को लेकर चर्चा में बने हुए हैं। हाल ही में फिल्म का नया पोस्टर रिलीज किया गया है जिसमें कार्तिक और सारा एक दूसरे के साथ रोमांस करते हुए नजर आ रहे है। अयान मुखर्जी इन दिनों अपनी आगामी फिल्म "ब्रह्मास्त्र" की शूटिंग में काफी व्यस्त चल रहे हैं। हाल ही में फिल्म के लीड एक्टर रणबीर कपूर और आलिया भट्ट को पहली बार किसी फिल्म में साथ देखा जाएगा। प्यार एक ऐसी फीलिंग है जो दुनिया में या तो माता-पिता को देखकर या फिर किसी ऐसे को देखकर आती है, जो आपके लिए बिल्कुल अंजान हो मगर उसको देखने के बाद दिल में अजीब सा कुछ ऐहसास होने लगता हो जैसे कि वो आपका अपना ही हो। इन दिनों प्रियंका चोपड़ा और निक जोनस सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं। एक दिसंबर को निकयंका ने ईसाई रीति-रिवाजों से एक-दूसरे को पति-पत्नी स्वीकारा और दो दिसंबर को दोनों हिन्दू रीती-रिवाज के अनुसार सात फेरे लेंगे। प्रियंका ने अपनी मेहंदी सेरेमनी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की हैं। क्रिकेट से पहले माही का ये पहला प्यार था जिसे वो आज भी नहीं भुला पाते। माही को किक्रेट के अलावा है इसका शौक। जानिए क्या है उनका साक्षी से पहले, पहला प्यार। बॉलीवुड के सुपरस्टार आमिर खान ने बुधवार को वेलेंटाइन डे के मौके पर जहां अपने फैंस को शुभकामनाएं दीं, वहीं अपने पहले प्यार का खुलासा भी किया। उन्होंने बताया कि जब वह दस के थे, तो उन्हें पहला प्यार हुआ था। लेकिन, वह प्यार एकतरफा था। अगर अापको लगता है कि सचमुच प्यार पहली नजर में होता है तो इसे बदल दे। क्योंकि साइंटिस्ट ऐसा नहीं मानते भैया. . . इनकी रिसर्च तो कुछ और ही कहती है, जिसे सुनकर शायद आप भी चौंक जाएंगे। भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान एम एस धोनी के जीवन पर आधारित फिल्म जल्द पर्दे पर पेश होने वाली है। स्कूल के दिन जिंदगी के सबसे खूबसूरत दिन होते हैं। जहां न कोई टेंशन होती है न ही कोई जिम्मेदारी।
- अज्ञात (प्रचलित जापानी कहावत) करिअर फंडा में स्वागत! बहुत प्रसिद्ध जापानी फिलॉसफी रही है वाबी-साबी। अर्थ समझाने के लिए ढेरों किताबें लिखी जा सकती है। एक लाइन में समझना है तो जो नेचुरली जैसा है उसे वैसा ही स्वीकार करना, फिर चाहे वह कोई व्यक्ति हो, कोई वस्तु हो, आपकी कोई कमी हो; उसी में ब्यूटी और शक्ति को देखना और उसे परफेक्ट बनाना। A) एक छोटा और सुखी परिवार थाः माता, पिता और उनका 4 वर्षीय बेटा। B) दुर्भाग्य से परिवार एक बार कार दुर्घटना का शिकार हो गया। माता-पिता को कोई बड़ी चोट नहीं आई लेकिन प्यारे बेटे का सीधा हाथ काटना पड़ा। माता-पिता ने बड़ी मुश्किल से इसे नियति मान स्वीकार किया। C) लेकिन पिता तब दुविधा में पड़ गए जब बेटे ने जूडो सीखने की इच्छा जताई। पिता की चिंता एक हाथ के साथ जूडो सीखने को लेकर थी। फिर भी, पिता ने कहा, ओके अपने लिए कोई जूडो मास्टर ढूंढ लीजिए, जो आपको सिखा सके। D) अगले कुछ दिन बेटा शहर के कई मास्टर्स के पास गया लेकिन उसका एक हाथ न देख कर किसी ने भी उसे सिखाना स्वीकार नहीं किया। E) एक दिन बहुत आग्रह करने पर एक मास्टर इस शर्त पर बेटे को जूडो सिखाने पर राजी हुआ कि वह पूरी ट्रेनिंग के दौरान उससे जैसा बोला जाएगा वैसा ही करेगा और कोई प्रश्न नहीं करेगा। F) जूडो ट्रेनिंग शुरू हो गई, मास्टर ने बेटे को एक दांव सिखाया और कहा इसकी प्रैक्टिस करो, दिन हफ्तों में बदले और हफ्ते महीनों में जब भी बेटा मास्टर के पास जाता, मास्टर उसे उसी दांव की प्रैक्टिस करने को कह देता। G) बेटा अंदर से निराश ही था क्योंकि वो समझने लगा की मास्टर बला टाल रहे हैं, लेकिन प्रश्न ना करने की शर्त के कारण वह कुछ भी नहीं बोल पाया। H) खैर, करीब दो साल बाद प्रतियोगिता का दिन आया और मास्टर की टीम में एक खिलाडी कम था तो उन्होंने बेटे को भी प्रतियोगिता में उतारा। बेटा बहुत घबराया और उसे अंदर ही अंदर मास्टर पर बहुत गुस्सा आया कि सिखाया तो कुछ है नहीं। I) प्रतियोगिता शुरू हुई और पहले राउंड में बेटे को बुरी तरह हार मिली। J) मास्टर ने बेटे को जो दांव सिखाया था उसे उपयोग करने की सलाह दी। अगले राउंड में बेटे ने वही दांव चलना शुरू किया जिसमें वह अत्यधिक फोकस्ड प्रैक्टिस के कारण सबसे अधिक पारगंत बन चुका था, और आश्चर्यजनक रूप से वह जीतने लगा। K) प्रतियोगिता जीतने के बाद बेटा मास्टर के पास गया, और पूछा कि ये बताइए की क्या मुझे मेरे प्रतिद्वंदी ने मेरे अपाहिज होने के कारण दया खाकर जीतने दिया? L) इस पर मास्टर फाइनली मौन तोड़ते हैं और बेटे को बताते हैं नहीं यदि ऐसा होता तो पहले राउंड में उसकी इतनी पिटाई नहीं होती। M) दरअसल बात यह थी कि मास्टर ने बेटे को जो दांव सिखाया था उसको तोड़ने का काउंटर दांव यह था कि प्रतिद्वंदी को उसका सीधा हाथ पकड़ कर पटकनी खिलाई जाए, लेकिन क्योंकि बेटे का सीधा हाथ था ही नहीं ऐसा संभव नहीं हो पा रहा था और वह राउंड पर राउंड जीतता गया। यदि आप के अंदर दुनिया के स्थापित मानदंडों के अनुसार कोई कथित इम्परफेक्शन है, तो हो सकता है उसमें कुछ शक्ति छुपी हो, उसे पहचानिए, और अपनी उस इम्परफेक्शन को ही परफेक्ट बनाइए, सफलता आप के कदम चूमेगी। आप को लगान फिल्म का 'कचरा' याद होगा जिसकी उंगलियां 'पोलियो' के कारण टेढ़ी-मेढ़ी थीं (या स्थापित मानदंडों के अनुसार इम्परफेक्ट), लेकिन गेंद को आश्चर्यजनक रूप से घुमाने के लिए परफेक्ट। फिल्म में यह कैरेक्टर भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा रहे प्रसिद्द स्पिनर 'बी चंद्रशेखर' से प्रेरित था, उनकी उंगलियों में भी पोलियो के कारण समस्या थी। 1) SWOT: स्ट्रेंथ, वीकनेस, अपॉर्चुनिटी एंड थ्रेट एनॅलिसिस करे। मतलब अपनी कमजोरियों और ताकत का पता लगाएं। 2) फिर वाबी-साबी फिलॉसफी के अनुसार अपने आप को ज्यादा बदले बिना, अपनी कमजोरियों को मैनेज करें और ताकत वाले क्षेत्र को बहुत अच्छा बना ले। 3) उदाहरण के लिए आप का मैथ्स अच्छा और इंग्लिश खराब, तो आप इंग्लिश को पास होने के स्तर तक ठीक कर लें और उससे होने वाले अंकों की कमी को मैथ्स में बहुत अच्छा बनकर पूरा करें। 4) ऐसा करने से आप कम समय और ऊर्जा से अधिक रिजल्ट पा सकेंगे। 5) सभी क्षेत्रों में परफेक्ट बनने की कोशिश न करें। तो आज का करिअर फंडा यह है कि इम्परफेक्शन को ही परफेक्शन में बदल कर हम जीवन और कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स की तैयारी में एक नया आत्म-विश्वास पा सकते हैं। कर के दिखाएंगे! इस कॉलम पर अपनी राय देने के लिए यहां क्लिक करें। This website follows the DNPA Code of Ethics.
- अज्ञात करिअर फंडा में स्वागत! बहुत प्रसिद्ध जापानी फिलॉसफी रही है वाबी-साबी। अर्थ समझाने के लिए ढेरों किताबें लिखी जा सकती है। एक लाइन में समझना है तो जो नेचुरली जैसा है उसे वैसा ही स्वीकार करना, फिर चाहे वह कोई व्यक्ति हो, कोई वस्तु हो, आपकी कोई कमी हो; उसी में ब्यूटी और शक्ति को देखना और उसे परफेक्ट बनाना। A) एक छोटा और सुखी परिवार थाः माता, पिता और उनका चार वर्षीय बेटा। B) दुर्भाग्य से परिवार एक बार कार दुर्घटना का शिकार हो गया। माता-पिता को कोई बड़ी चोट नहीं आई लेकिन प्यारे बेटे का सीधा हाथ काटना पड़ा। माता-पिता ने बड़ी मुश्किल से इसे नियति मान स्वीकार किया। C) लेकिन पिता तब दुविधा में पड़ गए जब बेटे ने जूडो सीखने की इच्छा जताई। पिता की चिंता एक हाथ के साथ जूडो सीखने को लेकर थी। फिर भी, पिता ने कहा, ओके अपने लिए कोई जूडो मास्टर ढूंढ लीजिए, जो आपको सिखा सके। D) अगले कुछ दिन बेटा शहर के कई मास्टर्स के पास गया लेकिन उसका एक हाथ न देख कर किसी ने भी उसे सिखाना स्वीकार नहीं किया। E) एक दिन बहुत आग्रह करने पर एक मास्टर इस शर्त पर बेटे को जूडो सिखाने पर राजी हुआ कि वह पूरी ट्रेनिंग के दौरान उससे जैसा बोला जाएगा वैसा ही करेगा और कोई प्रश्न नहीं करेगा। F) जूडो ट्रेनिंग शुरू हो गई, मास्टर ने बेटे को एक दांव सिखाया और कहा इसकी प्रैक्टिस करो, दिन हफ्तों में बदले और हफ्ते महीनों में जब भी बेटा मास्टर के पास जाता, मास्टर उसे उसी दांव की प्रैक्टिस करने को कह देता। G) बेटा अंदर से निराश ही था क्योंकि वो समझने लगा की मास्टर बला टाल रहे हैं, लेकिन प्रश्न ना करने की शर्त के कारण वह कुछ भी नहीं बोल पाया। H) खैर, करीब दो साल बाद प्रतियोगिता का दिन आया और मास्टर की टीम में एक खिलाडी कम था तो उन्होंने बेटे को भी प्रतियोगिता में उतारा। बेटा बहुत घबराया और उसे अंदर ही अंदर मास्टर पर बहुत गुस्सा आया कि सिखाया तो कुछ है नहीं। I) प्रतियोगिता शुरू हुई और पहले राउंड में बेटे को बुरी तरह हार मिली। J) मास्टर ने बेटे को जो दांव सिखाया था उसे उपयोग करने की सलाह दी। अगले राउंड में बेटे ने वही दांव चलना शुरू किया जिसमें वह अत्यधिक फोकस्ड प्रैक्टिस के कारण सबसे अधिक पारगंत बन चुका था, और आश्चर्यजनक रूप से वह जीतने लगा। K) प्रतियोगिता जीतने के बाद बेटा मास्टर के पास गया, और पूछा कि ये बताइए की क्या मुझे मेरे प्रतिद्वंदी ने मेरे अपाहिज होने के कारण दया खाकर जीतने दिया? L) इस पर मास्टर फाइनली मौन तोड़ते हैं और बेटे को बताते हैं नहीं यदि ऐसा होता तो पहले राउंड में उसकी इतनी पिटाई नहीं होती। M) दरअसल बात यह थी कि मास्टर ने बेटे को जो दांव सिखाया था उसको तोड़ने का काउंटर दांव यह था कि प्रतिद्वंदी को उसका सीधा हाथ पकड़ कर पटकनी खिलाई जाए, लेकिन क्योंकि बेटे का सीधा हाथ था ही नहीं ऐसा संभव नहीं हो पा रहा था और वह राउंड पर राउंड जीतता गया। यदि आप के अंदर दुनिया के स्थापित मानदंडों के अनुसार कोई कथित इम्परफेक्शन है, तो हो सकता है उसमें कुछ शक्ति छुपी हो, उसे पहचानिए, और अपनी उस इम्परफेक्शन को ही परफेक्ट बनाइए, सफलता आप के कदम चूमेगी। आप को लगान फिल्म का 'कचरा' याद होगा जिसकी उंगलियां 'पोलियो' के कारण टेढ़ी-मेढ़ी थीं , लेकिन गेंद को आश्चर्यजनक रूप से घुमाने के लिए परफेक्ट। फिल्म में यह कैरेक्टर भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा रहे प्रसिद्द स्पिनर 'बी चंद्रशेखर' से प्रेरित था, उनकी उंगलियों में भी पोलियो के कारण समस्या थी। एक) SWOT: स्ट्रेंथ, वीकनेस, अपॉर्चुनिटी एंड थ्रेट एनॅलिसिस करे। मतलब अपनी कमजोरियों और ताकत का पता लगाएं। दो) फिर वाबी-साबी फिलॉसफी के अनुसार अपने आप को ज्यादा बदले बिना, अपनी कमजोरियों को मैनेज करें और ताकत वाले क्षेत्र को बहुत अच्छा बना ले। तीन) उदाहरण के लिए आप का मैथ्स अच्छा और इंग्लिश खराब, तो आप इंग्लिश को पास होने के स्तर तक ठीक कर लें और उससे होने वाले अंकों की कमी को मैथ्स में बहुत अच्छा बनकर पूरा करें। चार) ऐसा करने से आप कम समय और ऊर्जा से अधिक रिजल्ट पा सकेंगे। पाँच) सभी क्षेत्रों में परफेक्ट बनने की कोशिश न करें। तो आज का करिअर फंडा यह है कि इम्परफेक्शन को ही परफेक्शन में बदल कर हम जीवन और कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स की तैयारी में एक नया आत्म-विश्वास पा सकते हैं। कर के दिखाएंगे! इस कॉलम पर अपनी राय देने के लिए यहां क्लिक करें। This website follows the DNPA Code of Ethics.
अमरावती (महाराष्ट्र) (एएनआई): अमरावती के सांसद नवनीत राणा ने शनिवार को महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर कटाक्ष किया, जब चुनाव आयोग ने शुक्रवार को फैसला किया कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाला शिवसेना गुट असली शिवसेना और प्रतीक है। शिंदे समूह द्वारा 'धनुष और तीर' को बरकरार रखा जाएगा। उन्होंने कहा, "जो राम का नहीं जो हनुमान का नहीं, वो किसी काम का नहीं और धनुष-बाण उनका नहीं. " उन्होंने पिछले साल हनुमान चालीसा पंक्ति का जिक्र करते हुए कहा, "उद्धव ठाकरे को भगवान शिव के प्रसाद के रूप में परिणाम मिला है। " उन्होंने कहा, "महाराष्ट्र की जनता इसकी उम्मीद कर रही थी। पिछले ढाई साल में जनता, हम सभी और विधायकों के साथ जो क्रूर व्यवहार किया गया, उसका परिणाम यह हुआ है। चुनाव आयोग ने उन लोगों के पक्ष में परिणाम दिया है। सही विचारधाराओं के साथ," उसने जोड़ा। यह उल्लेख करना उचित है कि अमरावती के सांसद नवनीत राणा ने शिवसेना में हिंदुत्व की लौ को फिर से जगाने के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के आवास के बाहर "हनुमान चालीसा" का जाप किया था (जब उद्धव ठाकरे महा विकास अघडी सरकार के दौरान सीएम थे)। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक स्पष्टीकरण जारी करते हुए लिखा कि वह शिवसेना में 'हिंदुत्व' की लौ को प्रज्वलित करना चाहती हैं, न कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के आवास के बाहर "हनुमान चालीसा" का जाप करके कोई धार्मिक तनाव पैदा करना। पत्र में राणा ने लिखा है, 'मैंने शिवसेना में हिंदुत्व की लौ को फिर से जगाने की सच्ची आशा के साथ घोषणा की थी कि मैं मुख्यमंत्री के आवास पर जाऊंगा और उनके आवास के बाहर हनुमान चालीसा का जाप करूंगा। इसका मतलब यह नहीं था। किसी भी धार्मिक तनाव को भड़काएं। " राणा ने कहा कि यह उनका "ईमानदार विश्वास" है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में शिवसेना स्पष्ट कारणों से अपने हिंदुत्व सिद्धांतों से पूरी तरह भटक गई। उन्होंने कहा, "यह मेरा ईमानदार और प्रामाणिक विश्वास है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में शिवसेना स्पष्ट कारणों से अपने हिंदुत्व सिद्धांतों से पूरी तरह से भटक गई क्योंकि वह जनता के जनादेश को धोखा देना चाहती थी और कांग्रेस-एनसीपी के साथ चुनाव के बाद गठबंधन करना चाहती थी। " दंपति को पहले 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया और बाद में स्थानीय मजिस्ट्रेट के आदेश पर नवनीत राणा को भायखला महिला जेल भेज दिया गया। एक महीने बाद विशेष अदालत ने उन्हें जमानत दे दी थी। जबकि शिंदे गुट ने असली शिवसेना के रूप में मान्यता दिए जाने के फैसले का स्वागत किया, उद्धव ठाकरे गुट ने कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे। उद्धव ठाकरे के धड़े ने चुनाव आयोग पर जल्दबाजी का आरोप लगाया और कहा कि यह फैसला दिखाता है कि "यह बीजेपी एजेंट के रूप में काम करता है. " आयोग ने अपने आदेश में पाया कि शिवसेना पार्टी का वर्तमान संविधान अलोकतांत्रिक है और "बिना किसी चुनाव के पदाधिकारियों के रूप में एक मंडली के लोगों को अलोकतांत्रिक रूप से नियुक्त करने के लिए विकृत" किया गया है। इसमें कहा गया है कि इस तरह की पार्टी संरचना विश्वास जगाने में विफल रहती है। पोल पैनल ने सभी राजनीतिक दलों को सलाह दी कि वे लोकतांत्रिक लोकाचार और आंतरिक पार्टी लोकतंत्र के सिद्धांतों को प्रतिबिंबित करें और अपनी संबंधित वेबसाइटों पर नियमित रूप से अपनी आंतरिक पार्टी के कामकाज के पहलुओं का खुलासा करें, जैसे संगठनात्मक विवरण, चुनाव कराना, संविधान की प्रति और पदाधिकारियों की सूची . "राजनीतिक दलों के संविधान में पदाधिकारियों के पदों के लिए स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव और आंतरिक विवादों के समाधान के लिए एक और स्वतंत्र और निष्पक्ष प्रक्रिया प्रदान करनी चाहिए। इन प्रक्रियाओं में संशोधन करना मुश्किल होना चाहिए और केवल बाद में संशोधन योग्य होना चाहिए। " उसी के लिए संगठनात्मक सदस्यों का बड़ा समर्थन सुनिश्चित करना," ईसीआई ने कहा। पिछले महीने, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और शिवसेना के पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुटों ने पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अपने दावों के समर्थन में अपने लिखित बयान चुनाव आयोग को सौंपे थे। (एएनआई)
अमरावती : अमरावती के सांसद नवनीत राणा ने शनिवार को महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर कटाक्ष किया, जब चुनाव आयोग ने शुक्रवार को फैसला किया कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाला शिवसेना गुट असली शिवसेना और प्रतीक है। शिंदे समूह द्वारा 'धनुष और तीर' को बरकरार रखा जाएगा। उन्होंने कहा, "जो राम का नहीं जो हनुमान का नहीं, वो किसी काम का नहीं और धनुष-बाण उनका नहीं. " उन्होंने पिछले साल हनुमान चालीसा पंक्ति का जिक्र करते हुए कहा, "उद्धव ठाकरे को भगवान शिव के प्रसाद के रूप में परिणाम मिला है। " उन्होंने कहा, "महाराष्ट्र की जनता इसकी उम्मीद कर रही थी। पिछले ढाई साल में जनता, हम सभी और विधायकों के साथ जो क्रूर व्यवहार किया गया, उसका परिणाम यह हुआ है। चुनाव आयोग ने उन लोगों के पक्ष में परिणाम दिया है। सही विचारधाराओं के साथ," उसने जोड़ा। यह उल्लेख करना उचित है कि अमरावती के सांसद नवनीत राणा ने शिवसेना में हिंदुत्व की लौ को फिर से जगाने के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के आवास के बाहर "हनुमान चालीसा" का जाप किया था । उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक स्पष्टीकरण जारी करते हुए लिखा कि वह शिवसेना में 'हिंदुत्व' की लौ को प्रज्वलित करना चाहती हैं, न कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के आवास के बाहर "हनुमान चालीसा" का जाप करके कोई धार्मिक तनाव पैदा करना। पत्र में राणा ने लिखा है, 'मैंने शिवसेना में हिंदुत्व की लौ को फिर से जगाने की सच्ची आशा के साथ घोषणा की थी कि मैं मुख्यमंत्री के आवास पर जाऊंगा और उनके आवास के बाहर हनुमान चालीसा का जाप करूंगा। इसका मतलब यह नहीं था। किसी भी धार्मिक तनाव को भड़काएं। " राणा ने कहा कि यह उनका "ईमानदार विश्वास" है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में शिवसेना स्पष्ट कारणों से अपने हिंदुत्व सिद्धांतों से पूरी तरह भटक गई। उन्होंने कहा, "यह मेरा ईमानदार और प्रामाणिक विश्वास है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में शिवसेना स्पष्ट कारणों से अपने हिंदुत्व सिद्धांतों से पूरी तरह से भटक गई क्योंकि वह जनता के जनादेश को धोखा देना चाहती थी और कांग्रेस-एनसीपी के साथ चुनाव के बाद गठबंधन करना चाहती थी। " दंपति को पहले चौदह दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया और बाद में स्थानीय मजिस्ट्रेट के आदेश पर नवनीत राणा को भायखला महिला जेल भेज दिया गया। एक महीने बाद विशेष अदालत ने उन्हें जमानत दे दी थी। जबकि शिंदे गुट ने असली शिवसेना के रूप में मान्यता दिए जाने के फैसले का स्वागत किया, उद्धव ठाकरे गुट ने कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे। उद्धव ठाकरे के धड़े ने चुनाव आयोग पर जल्दबाजी का आरोप लगाया और कहा कि यह फैसला दिखाता है कि "यह बीजेपी एजेंट के रूप में काम करता है. " आयोग ने अपने आदेश में पाया कि शिवसेना पार्टी का वर्तमान संविधान अलोकतांत्रिक है और "बिना किसी चुनाव के पदाधिकारियों के रूप में एक मंडली के लोगों को अलोकतांत्रिक रूप से नियुक्त करने के लिए विकृत" किया गया है। इसमें कहा गया है कि इस तरह की पार्टी संरचना विश्वास जगाने में विफल रहती है। पोल पैनल ने सभी राजनीतिक दलों को सलाह दी कि वे लोकतांत्रिक लोकाचार और आंतरिक पार्टी लोकतंत्र के सिद्धांतों को प्रतिबिंबित करें और अपनी संबंधित वेबसाइटों पर नियमित रूप से अपनी आंतरिक पार्टी के कामकाज के पहलुओं का खुलासा करें, जैसे संगठनात्मक विवरण, चुनाव कराना, संविधान की प्रति और पदाधिकारियों की सूची . "राजनीतिक दलों के संविधान में पदाधिकारियों के पदों के लिए स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव और आंतरिक विवादों के समाधान के लिए एक और स्वतंत्र और निष्पक्ष प्रक्रिया प्रदान करनी चाहिए। इन प्रक्रियाओं में संशोधन करना मुश्किल होना चाहिए और केवल बाद में संशोधन योग्य होना चाहिए। " उसी के लिए संगठनात्मक सदस्यों का बड़ा समर्थन सुनिश्चित करना," ईसीआई ने कहा। पिछले महीने, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और शिवसेना के पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुटों ने पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अपने दावों के समर्थन में अपने लिखित बयान चुनाव आयोग को सौंपे थे।
शायद आप ऐड ब्लॉकर का इस्तेमाल कर रहे हैं। पढ़ना जारी रखने के लिए ऐड ब्लॉकर को बंद करके पेज रिफ्रेश करें। नमस्ते। आप सभी का स्वागत है Fever FM के Brand new show Techpanti में। आज के show में आप जानेंगे देश और दुनिया से जुड़ी सभी tech updates के बारे में साथ ही जुड़ेंगे technology expert technical guruji ke sath जानें budding creators कैसे करें अपनी YouTube journey की शुरुवात कैसे रखे अपने data को safe Photography के लिए क्या है बेस्ट mobile camera या professional camera Stocks में invest करने से पहले किन बातों का रखना है ध्यान । अधिक और स्पष्ट जानकारी के लिए पूरा वीडियो जरूर देखिये।
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नई दिल्ली। प्रमुख शेयर बाजार बीएसई अपने मंच पर सभी सूचीबद्ध कंपनियों के बाजार पूंजीकरण के लिहाज से दुनिया के 10 बड़े एक्सचेंज में शामिल हो गया है। वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ एक्सचेंज के ताजा आकड़े से यह पता चला है। बीएसई (पूर्व में बंबई शेयर बाजार) 1,700 अरब डॉलर के बाजार पूंजीकरण (एम कैप) के साथ शीर्ष 10 शेयर बाजारों में 10वें स्थान पर है। सूची में न्यूयार्क स्टॉक एक्सचेंज 19,300 अरब डॉलर के बाजार मूल्यांकन के साथ पहले स्थान पर है। वहीं नैसडैक 13,800 अरब डॉलर के बाजार पूंजीकरण के साथ दूसरे स्थान पर है। भारत का पहला सूचीबद्ध शेयर बाजार देश के प्रमुख शेयर बाजारों में से एक है। इससे 5 करोड़ से अधिक पंजीकृत निवेशक जुड़े हैं। इसके मानक सूचकांक बीएसई सेंसेक्स पर शेयर बाजार सूचकांक में प्रमुखता से नजर रखी जाती है। वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ एक्सचेंज के अनुसार टोक्यो स्टॉक एक्सचेंज सूची में 5,700 अरब डॉलर के बाजार पूंजीकरण के साथ तीसरे, जबकि शंघाई स्टॉक एक्सचेंज 4,900 अरब डॉलर के एम कैप के साथ चौथे पायदान पर है। वहीं हांगकांग स्टॉक एक्सचेंज पांचवें (4,400 अरब डॉलर एमकैप), यूरो नेक्स्ट 3,900 अरब डॉलर के बाजार पूंजीकरण के साथ छठे, शेनझेन 3,500 डॉलर के एमकैप के साथ सातवें और लंदन स्टॉक एक्कसचेंज 3,200 अरब डॉलर के बाजार पूंजीकरण के साथ आठवें स्थान पर है। टोरंटो स्टॉक एक्सचेंज 2,100 अरब डॉलर के बाजार पूंजीकरण के साथ नौवें स्थान पर है।
नई दिल्ली। प्रमुख शेयर बाजार बीएसई अपने मंच पर सभी सूचीबद्ध कंपनियों के बाजार पूंजीकरण के लिहाज से दुनिया के दस बड़े एक्सचेंज में शामिल हो गया है। वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ एक्सचेंज के ताजा आकड़े से यह पता चला है। बीएसई एक,सात सौ अरब डॉलर के बाजार पूंजीकरण के साथ शीर्ष दस शेयर बाजारों में दसवें स्थान पर है। सूची में न्यूयार्क स्टॉक एक्सचेंज उन्नीस,तीन सौ अरब डॉलर के बाजार मूल्यांकन के साथ पहले स्थान पर है। वहीं नैसडैक तेरह,आठ सौ अरब डॉलर के बाजार पूंजीकरण के साथ दूसरे स्थान पर है। भारत का पहला सूचीबद्ध शेयर बाजार देश के प्रमुख शेयर बाजारों में से एक है। इससे पाँच करोड़ से अधिक पंजीकृत निवेशक जुड़े हैं। इसके मानक सूचकांक बीएसई सेंसेक्स पर शेयर बाजार सूचकांक में प्रमुखता से नजर रखी जाती है। वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ एक्सचेंज के अनुसार टोक्यो स्टॉक एक्सचेंज सूची में पाँच,सात सौ अरब डॉलर के बाजार पूंजीकरण के साथ तीसरे, जबकि शंघाई स्टॉक एक्सचेंज चार,नौ सौ अरब डॉलर के एम कैप के साथ चौथे पायदान पर है। वहीं हांगकांग स्टॉक एक्सचेंज पांचवें , यूरो नेक्स्ट तीन,नौ सौ अरब डॉलर के बाजार पूंजीकरण के साथ छठे, शेनझेन तीन,पाँच सौ डॉलर के एमकैप के साथ सातवें और लंदन स्टॉक एक्कसचेंज तीन,दो सौ अरब डॉलर के बाजार पूंजीकरण के साथ आठवें स्थान पर है। टोरंटो स्टॉक एक्सचेंज दो,एक सौ अरब डॉलर के बाजार पूंजीकरण के साथ नौवें स्थान पर है।
हरियाणा की रहने वाली 15 साल की शेफाली वर्मा पहली बार टीम में आई हैं. उन्हें मिताली राज की जगह शामिल किया गया है. अखिल भारतीय सीनियर महिला चयन समिति ने गुरुवार को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ होने वाली टी-20 और वनडे सीरीज के लिए टीम का ऐलान कर दिया. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने एक बयान जारी कर इस बात की जानकारी दी. टी-20 के लिए शेफाली वर्मा को भारतीय टीम में चुना गया है. शेफाली पहली बार टीम में आई हैं. हरियाणा की रहने वाली 15 साल की शेफाली को मिताली राज के स्थान पर टीम में जगह मिली है. मिताली ने हाल ही में खेल के सबसे छोटे प्रारुप से संन्यास ले लिया है. शेफाली दाएं हाथ की बल्लेबाज हैं साथ ही दाएं हाथ से ऑफ स्पिन भी करती हैं. वह महिलाओं की इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में वेलोसिटी की तरफ से खेल चुकी हैं. तीन मैचों में उन्होंने क्रमशः 34, 2 और 11 रन बनाए थे. भारतीय महिलाओं को दक्षिण अफ्रीका के साथ भारत में ही पांच मैचों की टी-20 सीरीज और तीन मैचों की वनडे सीरीज खेलनी हैं. टी-20 में हरमनप्रीत कौर की टीम में वापसी हुई है और वह कप्तान बनी हैं. इंग्लैंड के खिलाफ खेली गई पिछली टी-20 सीरीज में चोट के कारण बाहर हो गई थीं. उनकी जगह स्मृति मंधाना कप्तान थीं. इस सीरीज में मंधाना को उप-कप्तान नियुक्त किया गया है. टी-20 में भारती फुलमाली को बाहर जाना पड़ा है. टी-20 में कोमल जांजड़ और राधा यादव को भी बाहर कर दिया गया है. पूजा वास्त्रकार और मानषी जोशी को टी-20 में जगह मिली है. वनडे टीम की कमान हालांकि मिताली के पास ही है. यहां भी कुछ बदलाव हुए हैं. विकेटकीपर रवि कल्पना, मोना मेश्राम, हरलीन देयोल को बाहर जाना पड़ा है. वनडे में हरमनप्रीत और हेमलता की वापसी हुई है. पांच मैचों की टी-20 सीरीज सूरत में 24 से चार अक्टूबर के बीच खेली जाएगी जबकि तीन मैचों की वनडे सीरीज नौ से 14 अक्टूबर के बीच वडोदरा में खेली जाएगी. वनडे टीमः मिताली राज (कप्तान), हरमनप्रीत कौर (उप-कप्तान), जेम्मिाह रोड्रिगेज, पूनम राउत, स्मृति मंधाना, दीप्ति शर्मा, तान्या भाटिया (विकेटकीपर), झूलन गोस्वामी, शिखा पांडे, मानषी जोशी, एकता बिष्ट, पूनम यादव, हेमलता, राजेश्वारी गायकवाड़. टी-20 टीमः हरमनप्रीत कौर (कप्तान), स्मृति मंधाना (उप-कप्तान), जेम्मिाह रोड्रिगेज, दीप्ति शर्मा, तान्या भाटिया (विकेटकीपर), पूनम यादव, शिखा पांडे, अरुं धति रेड्डी, पूजा वास्त्रकार, वेदा कृष्णामूर्ति, हरलीन देयोल, अनुजा पाटिल, शेफाली वर्मा, मानषी जोशी. सोशल मीडिया पर विराट कोहली की ऐसी तस्वीर देख बोले फैंस- अनुष्का ने घर से बाहर निकाल दिया क्या?
हरियाणा की रहने वाली पंद्रह साल की शेफाली वर्मा पहली बार टीम में आई हैं. उन्हें मिताली राज की जगह शामिल किया गया है. अखिल भारतीय सीनियर महिला चयन समिति ने गुरुवार को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ होने वाली टी-बीस और वनडे सीरीज के लिए टीम का ऐलान कर दिया. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने एक बयान जारी कर इस बात की जानकारी दी. टी-बीस के लिए शेफाली वर्मा को भारतीय टीम में चुना गया है. शेफाली पहली बार टीम में आई हैं. हरियाणा की रहने वाली पंद्रह साल की शेफाली को मिताली राज के स्थान पर टीम में जगह मिली है. मिताली ने हाल ही में खेल के सबसे छोटे प्रारुप से संन्यास ले लिया है. शेफाली दाएं हाथ की बल्लेबाज हैं साथ ही दाएं हाथ से ऑफ स्पिन भी करती हैं. वह महिलाओं की इंडियन प्रीमियर लीग में वेलोसिटी की तरफ से खेल चुकी हैं. तीन मैचों में उन्होंने क्रमशः चौंतीस, दो और ग्यारह रन बनाए थे. भारतीय महिलाओं को दक्षिण अफ्रीका के साथ भारत में ही पांच मैचों की टी-बीस सीरीज और तीन मैचों की वनडे सीरीज खेलनी हैं. टी-बीस में हरमनप्रीत कौर की टीम में वापसी हुई है और वह कप्तान बनी हैं. इंग्लैंड के खिलाफ खेली गई पिछली टी-बीस सीरीज में चोट के कारण बाहर हो गई थीं. उनकी जगह स्मृति मंधाना कप्तान थीं. इस सीरीज में मंधाना को उप-कप्तान नियुक्त किया गया है. टी-बीस में भारती फुलमाली को बाहर जाना पड़ा है. टी-बीस में कोमल जांजड़ और राधा यादव को भी बाहर कर दिया गया है. पूजा वास्त्रकार और मानषी जोशी को टी-बीस में जगह मिली है. वनडे टीम की कमान हालांकि मिताली के पास ही है. यहां भी कुछ बदलाव हुए हैं. विकेटकीपर रवि कल्पना, मोना मेश्राम, हरलीन देयोल को बाहर जाना पड़ा है. वनडे में हरमनप्रीत और हेमलता की वापसी हुई है. पांच मैचों की टी-बीस सीरीज सूरत में चौबीस से चार अक्टूबर के बीच खेली जाएगी जबकि तीन मैचों की वनडे सीरीज नौ से चौदह अक्टूबर के बीच वडोदरा में खेली जाएगी. वनडे टीमः मिताली राज , हरमनप्रीत कौर , जेम्मिाह रोड्रिगेज, पूनम राउत, स्मृति मंधाना, दीप्ति शर्मा, तान्या भाटिया , झूलन गोस्वामी, शिखा पांडे, मानषी जोशी, एकता बिष्ट, पूनम यादव, हेमलता, राजेश्वारी गायकवाड़. टी-बीस टीमः हरमनप्रीत कौर , स्मृति मंधाना , जेम्मिाह रोड्रिगेज, दीप्ति शर्मा, तान्या भाटिया , पूनम यादव, शिखा पांडे, अरुं धति रेड्डी, पूजा वास्त्रकार, वेदा कृष्णामूर्ति, हरलीन देयोल, अनुजा पाटिल, शेफाली वर्मा, मानषी जोशी. सोशल मीडिया पर विराट कोहली की ऐसी तस्वीर देख बोले फैंस- अनुष्का ने घर से बाहर निकाल दिया क्या?
छन्द - विधान एव अलकार - सौन्दर्य छद भारतीय वाड मय का प्रत्यत्त गौरवपूर्ण स्थित सूक्ष्म एव विस्तृत अध्ययन भारत में हुआ है उतना विश्व की प्राचीन प्राचीन किसी भी भाषा मक्यचित आज तक नहीं हो पाया। प्राचीनता की दृष्टि से तो यह कथन और भी अनि सत्य है । कारण छन् का प्रयोग विश्व के प्राचीनतम ग्रंथ ऋग्वद सही प्राप्त हो जाता है । पीय ब्लूमफील्ड तथा निववधु गास्नी की वदिक पदा नुक्रमणिकामा म छद और उसके यावरणिक रूपा के गन प्रयोग मुगमतापूर्वक हैं । छत की बहुलता व वारण ही वरिष भाषा को छन्स की सना दी गइ थी । श्रौतसूत्र निदान सून ऋवप्रतिमान्य तथा निरक्त म यदि छदा वा सुदर विवचन किया गया है । वैवाट मय में छत का इतना महत्व हाने के कारण ही छद कामे सम्मिलित किया गया है। इन बंद पडागा (क्षिा कल्पनरत छन्, ज्यातिष और व्याकरण ) म सक्स पहन छद की गणना करते हुए, पाणिनीय शिक्षा म उस बद के चरण की सना दी गई है - छद पादौ तु वेदस्य ।। छद का व्युत्पत्ति लभ्य श्रर्थ निघण्टु में छद यो प्रसन्न करने के प्रथम एवं पृथक धातु ही मान लिया गया है। वस सामान्यत छद की व्युत्पत्ति छन्' धातु स है, इसका अथ है प्राच्छादितवरना प्रावृत्त करना, रक्षा वरना यवस्थित करना तथा प्रसनवरना आदि छका काय भी यही है । छ द्वारा आच्छादित और व्यवस्थित होन पर कवि के विचार सुरक्षित, श्रमर पठनीय एवं प्रसन्नताप्रत हो जाते है । वदाचिन इसीलिए सायणा चायन कहा था--- अपमृत्यु वारयितु माच्छादयतीति छ । इस प्रकार और भी बहुत से उस है। छान्दोग्य उपनिषद् म दवनाश्रा द्वारा मृत्यु भय के कारण अपन १ छद पादौ तु वेदस्य हस्तो पोय पठयते ज्योतिषामयन चक्षु निरुक्त श्रोत्रमुच्यते ॥ गिया प्राण तु वेश्य भुख व्याकरण स्मृतम । तस्मात सांगमधीपव ब्रह्मलोके महीयते ॥ २ निरक्त, ७ १२
छन्द - विधान एव अलकार - सौन्दर्य छद भारतीय वाड मय का प्रत्यत्त गौरवपूर्ण स्थित सूक्ष्म एव विस्तृत अध्ययन भारत में हुआ है उतना विश्व की प्राचीन प्राचीन किसी भी भाषा मक्यचित आज तक नहीं हो पाया। प्राचीनता की दृष्टि से तो यह कथन और भी अनि सत्य है । कारण छन् का प्रयोग विश्व के प्राचीनतम ग्रंथ ऋग्वद सही प्राप्त हो जाता है । पीय ब्लूमफील्ड तथा निववधु गास्नी की वदिक पदा नुक्रमणिकामा म छद और उसके यावरणिक रूपा के गन प्रयोग मुगमतापूर्वक हैं । छत की बहुलता व वारण ही वरिष भाषा को छन्स की सना दी गइ थी । श्रौतसूत्र निदान सून ऋवप्रतिमान्य तथा निरक्त म यदि छदा वा सुदर विवचन किया गया है । वैवाट मय में छत का इतना महत्व हाने के कारण ही छद कामे सम्मिलित किया गया है। इन बंद पडागा म सक्स पहन छद की गणना करते हुए, पाणिनीय शिक्षा म उस बद के चरण की सना दी गई है - छद पादौ तु वेदस्य ।। छद का व्युत्पत्ति लभ्य श्रर्थ निघण्टु में छद यो प्रसन्न करने के प्रथम एवं पृथक धातु ही मान लिया गया है। वस सामान्यत छद की व्युत्पत्ति छन्' धातु स है, इसका अथ है प्राच्छादितवरना प्रावृत्त करना, रक्षा वरना यवस्थित करना तथा प्रसनवरना आदि छका काय भी यही है । छ द्वारा आच्छादित और व्यवस्थित होन पर कवि के विचार सुरक्षित, श्रमर पठनीय एवं प्रसन्नताप्रत हो जाते है । वदाचिन इसीलिए सायणा चायन कहा था--- अपमृत्यु वारयितु माच्छादयतीति छ । इस प्रकार और भी बहुत से उस है। छान्दोग्य उपनिषद् म दवनाश्रा द्वारा मृत्यु भय के कारण अपन एक छद पादौ तु वेदस्य हस्तो पोय पठयते ज्योतिषामयन चक्षु निरुक्त श्रोत्रमुच्यते ॥ गिया प्राण तु वेश्य भुख व्याकरण स्मृतम । तस्मात सांगमधीपव ब्रह्मलोके महीयते ॥ दो निरक्त, सात बारह
आदिवासी लोगों की आजीविका मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है जिसे आगे एमएफपी के संग्रह द्वारा पूरक किया जाता है।. आंध्र प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में महत्वपूर्ण एमएफपी में से एक है नरमीमेडी चक्का । यह विशेष रूप से गर्मी के मौसम में एकत्र किया जाता है और आय के स्रोत के रूप में कार्य करता है।
आदिवासी लोगों की आजीविका मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है जिसे आगे एमएफपी के संग्रह द्वारा पूरक किया जाता है।. आंध्र प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में महत्वपूर्ण एमएफपी में से एक है नरमीमेडी चक्का । यह विशेष रूप से गर्मी के मौसम में एकत्र किया जाता है और आय के स्रोत के रूप में कार्य करता है।
सरसिजमनुविद्धं शैवलेनापि रम्यं, मलिनमपि हिमांशोर्लक्ष्म लक्ष्मीं तनोति । इयमधिकमनोज्ञा वल्कलेनापि तन्वी, किमिवहि मधुराणां मण्डनं नाकृतीनाम् ।। यह आठ अङ्ग मिलना बहुत दुर्लभ है, किन्तु जितने हों उतने ही अच्छे हैं । इस अष्टांग नायिका के वर्णन में स्त्रियों के लिये एक अच्छा आदर्श मिलता है जो सदा अनुकरणीय है । यदि प्रत्येक घर में ऐसी नायिकाएँ हों तो स्वर्ग के लिये मरने का कष्ट न उठाना पड़े। नायिकाओं के तीन मुख्य भेद हैं --- ( १ ) स्वकीया ( २ ) परकीया ( ३ ) सामान्या वा गणिका :जो अपनी हो वह स्वकीया, जो अपनी न हो वह परकीया, जो सबकी हो अर्थात् जो धन खर्च करनेवाले की हो, वह गणिकाइनके इस प्रकार लक्षण दिये गए हैं :स्वकीया - लाजवती निशिदिन पगी, निज पति के अनुराग । कहत स्वकीया शीलमय, ताको पति बड़भाग ।। साहित्य-दर्पण में यह भाव बहुत अच्छे शब्दों से बतलाया है। लज्जापञ्जत्तपसाहणाइँ, परभत्तिणिप्पिवासाइँ । अविण अदुम्मे धाइँ, धण्णाणं घरे कलत्ताइँ । अर्थात् लज्जा ही जिसका पर्याप्त आभूषण है, जो अन्य पुरुष की इच्छा से शून्य है । अविनय करना जो जानती ही से नहीं, ऐसी सौभाग्यवती रमणी किसी पुण्यवान पुरुषों की ही होती है । सील सुधाई सुधर ई, सुभ गुन सकुच सनेह । सुबरन बरन सुहाग सों, सनी बनी तुव देह ॥ मतिरामजी ने स्वकीया का इस प्रकार लक्षण दिया है जानति सौति अनीति है, जानति सखी सुनीति । गुरुजन जानति लाज है, प्रीतम जानति प्रीति ॥ कविवर कालिदास ने अपने नाटकों में प्रायः स्वकीया नायिकाओं का ही वर्णन किया है । देखिये, कितना ऊँचा सतीत्व का दर्शक है । सती सीता श्री रामचन्द्र जी से परित्यक्त होने पर भी उनको दोष नहीं देतीं । देखिये : कल्याणबुथवा तवायं न कामचारो मयि शङ्कनीयः । ममैव जन्मान्तरपातकानां विपाक विस्फूर्जथुरप्रसह्यः ॥ साहं तपः सूर्यनिविष्टदृष्टिरूवं प्रसूतश्चरितुं यतिष्ये । भूयो यथा मे जननान्तरेऽपि त्वमेव भर्तान च विप्रयोगः ॥ अर्थात् मेरा परित्याग जान-बूझ कर अपनी इच्छा से किया है, मुझे ऐसी शङ्का भी नहीं करनी चाहिये । मैं आपको दोषी नहीं ठहराती कि इसका यही प्रमाण है कि सन्तान उत्पत्ति के उपरान्त ( जब कि मैं परिश्रम करने योग्य हो जाऊँगी ) मैं सूर्य की ओर एकाग्रदृष्टि कर यही प्रार्थना किया करूंगी कि आप जन्मान्तर में भी मुझे भर्ता - रूप से प्राप्त हों। परकीया - प्रेम करै पर पुरुष सों, परकीया सो जानि । दोउ भेद ऊढ़ा' प्रथम, बहुरि अनूदा जानि ॥ (१) ब्याही (२) अनब्याहो
सरसिजमनुविद्धं शैवलेनापि रम्यं, मलिनमपि हिमांशोर्लक्ष्म लक्ष्मीं तनोति । इयमधिकमनोज्ञा वल्कलेनापि तन्वी, किमिवहि मधुराणां मण्डनं नाकृतीनाम् ।। यह आठ अङ्ग मिलना बहुत दुर्लभ है, किन्तु जितने हों उतने ही अच्छे हैं । इस अष्टांग नायिका के वर्णन में स्त्रियों के लिये एक अच्छा आदर्श मिलता है जो सदा अनुकरणीय है । यदि प्रत्येक घर में ऐसी नायिकाएँ हों तो स्वर्ग के लिये मरने का कष्ट न उठाना पड़े। नायिकाओं के तीन मुख्य भेद हैं --- स्वकीया परकीया सामान्या वा गणिका :जो अपनी हो वह स्वकीया, जो अपनी न हो वह परकीया, जो सबकी हो अर्थात् जो धन खर्च करनेवाले की हो, वह गणिकाइनके इस प्रकार लक्षण दिये गए हैं :स्वकीया - लाजवती निशिदिन पगी, निज पति के अनुराग । कहत स्वकीया शीलमय, ताको पति बड़भाग ।। साहित्य-दर्पण में यह भाव बहुत अच्छे शब्दों से बतलाया है। लज्जापञ्जत्तपसाहणाइँ, परभत्तिणिप्पिवासाइँ । अविण अदुम्मे धाइँ, धण्णाणं घरे कलत्ताइँ । अर्थात् लज्जा ही जिसका पर्याप्त आभूषण है, जो अन्य पुरुष की इच्छा से शून्य है । अविनय करना जो जानती ही से नहीं, ऐसी सौभाग्यवती रमणी किसी पुण्यवान पुरुषों की ही होती है । सील सुधाई सुधर ई, सुभ गुन सकुच सनेह । सुबरन बरन सुहाग सों, सनी बनी तुव देह ॥ मतिरामजी ने स्वकीया का इस प्रकार लक्षण दिया है जानति सौति अनीति है, जानति सखी सुनीति । गुरुजन जानति लाज है, प्रीतम जानति प्रीति ॥ कविवर कालिदास ने अपने नाटकों में प्रायः स्वकीया नायिकाओं का ही वर्णन किया है । देखिये, कितना ऊँचा सतीत्व का दर्शक है । सती सीता श्री रामचन्द्र जी से परित्यक्त होने पर भी उनको दोष नहीं देतीं । देखिये : कल्याणबुथवा तवायं न कामचारो मयि शङ्कनीयः । ममैव जन्मान्तरपातकानां विपाक विस्फूर्जथुरप्रसह्यः ॥ साहं तपः सूर्यनिविष्टदृष्टिरूवं प्रसूतश्चरितुं यतिष्ये । भूयो यथा मे जननान्तरेऽपि त्वमेव भर्तान च विप्रयोगः ॥ अर्थात् मेरा परित्याग जान-बूझ कर अपनी इच्छा से किया है, मुझे ऐसी शङ्का भी नहीं करनी चाहिये । मैं आपको दोषी नहीं ठहराती कि इसका यही प्रमाण है कि सन्तान उत्पत्ति के उपरान्त मैं सूर्य की ओर एकाग्रदृष्टि कर यही प्रार्थना किया करूंगी कि आप जन्मान्तर में भी मुझे भर्ता - रूप से प्राप्त हों। परकीया - प्रेम करै पर पुरुष सों, परकीया सो जानि । दोउ भेद ऊढ़ा' प्रथम, बहुरि अनूदा जानि ॥ ब्याही अनब्याहो
साउथ सुपरस्टार महेश बाबू का जन्मदिन 9 अगस्त को आने वाला है। लेकिन अभी से ही वो ट्विटर पर ट्रेंड कर रहे हैं। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ट्विटर पर उनके 1 करोड़ से ज्यादा फॉलोवर हैं। नई दिल्ली। साउथ सुपरस्टार महेश बाबू का जन्मदिन 9 अगस्त को आने वाला है। लेकिन अभी से ही वो ट्विटर पर ट्रेंड कर रहे हैं। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ट्विटर पर उनके 1 करोड़ से ज्यादा फॉलोवर हैं। उन्होंने बचपन से ही फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया था। महेश ने साल 1979 में आई फिल्साम नीडा में एक बाल कलाकार के तौर पर काम किया, और करीब 8 फिल्मों में बाल कलाकार के रूप में की। 1999 में उन्होंने राजाकुमरुडू के साथ एक लीड हीरो के रूप में अपने करियर की शुरुआत की और पहली ही फिल्म के लिए उन्होंने सर्वश्रेष्ठ पुरुष कलाकर का अवार्ड अपने नाम किया। तब से अब तक उन्होंने कई फिल्मों में काम किया। आज की तारीख में उन्होंने सात नंदी पुरस्कार, पांच फिल्मफेयर पुरस्कार, तीन सिनेमा पुरस्कार, तीन दक्षिण भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और एक अंतर्राष्ट्रीय भारतीय फिल्म अकादमी पुरस्कार जीते हैं। आज लाइम लाइट से दूर रहने वाली नम्रता ने 1993 में 'फेमिना मिस इंडिया' का ताज अपने नाम दर्ज कराया था। नम्रता ने हिंदी फिल्मों के बाद तेलुगू फिल्म 'वामसी' साइन की थी जिसमें उनके साथ लीड रोल में महेश बाबू थे। इस फिल्म की शूटिंग के दौरान दोनों एक दूसरे के करीब आये और उन्हें प्यार हो गया। बता दें कि करीब 4 साल एक दूसरे को डेट करने के बाद नम्रता और महेश बाबू ने 10 फरवरी 2005 को शादी कर ली थी। महेश बाबू के दो बच्चे हैं। बेटी का नाम सितारा है। जिसका जन्म 2012 में हुआ था। महेश और नम्रता का एक बेटा भी है जिसका नाम गौतम है। महेश बाबू अपने दोनों के बच्चों के काफी करीब हैं। आये दिन नम्रता और महेश बच्चों की वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करते रहते हैं।
साउथ सुपरस्टार महेश बाबू का जन्मदिन नौ अगस्त को आने वाला है। लेकिन अभी से ही वो ट्विटर पर ट्रेंड कर रहे हैं। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ट्विटर पर उनके एक करोड़ से ज्यादा फॉलोवर हैं। नई दिल्ली। साउथ सुपरस्टार महेश बाबू का जन्मदिन नौ अगस्त को आने वाला है। लेकिन अभी से ही वो ट्विटर पर ट्रेंड कर रहे हैं। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ट्विटर पर उनके एक करोड़ से ज्यादा फॉलोवर हैं। उन्होंने बचपन से ही फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया था। महेश ने साल एक हज़ार नौ सौ उन्यासी में आई फिल्साम नीडा में एक बाल कलाकार के तौर पर काम किया, और करीब आठ फिल्मों में बाल कलाकार के रूप में की। एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में उन्होंने राजाकुमरुडू के साथ एक लीड हीरो के रूप में अपने करियर की शुरुआत की और पहली ही फिल्म के लिए उन्होंने सर्वश्रेष्ठ पुरुष कलाकर का अवार्ड अपने नाम किया। तब से अब तक उन्होंने कई फिल्मों में काम किया। आज की तारीख में उन्होंने सात नंदी पुरस्कार, पांच फिल्मफेयर पुरस्कार, तीन सिनेमा पुरस्कार, तीन दक्षिण भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और एक अंतर्राष्ट्रीय भारतीय फिल्म अकादमी पुरस्कार जीते हैं। आज लाइम लाइट से दूर रहने वाली नम्रता ने एक हज़ार नौ सौ तिरानवे में 'फेमिना मिस इंडिया' का ताज अपने नाम दर्ज कराया था। नम्रता ने हिंदी फिल्मों के बाद तेलुगू फिल्म 'वामसी' साइन की थी जिसमें उनके साथ लीड रोल में महेश बाबू थे। इस फिल्म की शूटिंग के दौरान दोनों एक दूसरे के करीब आये और उन्हें प्यार हो गया। बता दें कि करीब चार साल एक दूसरे को डेट करने के बाद नम्रता और महेश बाबू ने दस फरवरी दो हज़ार पाँच को शादी कर ली थी। महेश बाबू के दो बच्चे हैं। बेटी का नाम सितारा है। जिसका जन्म दो हज़ार बारह में हुआ था। महेश और नम्रता का एक बेटा भी है जिसका नाम गौतम है। महेश बाबू अपने दोनों के बच्चों के काफी करीब हैं। आये दिन नम्रता और महेश बच्चों की वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करते रहते हैं।
दशमोत्तर छात्रवृत्ति घोटाले में उत्तर प्रदेश के छह और शैक्षिक संस्थानों के खिलाफ एसआइटी को साक्ष्य मिले हैं। इसके आधार पर एसआइटी ने रिपोर्ट तैयार कर पीएचक्यू भेज दी है। रुद्रपुर, जेएनएन : दशमोत्तर छात्रवृत्ति घोटाले में उत्तर प्रदेश के छह और शैक्षिक संस्थानों के खिलाफ एसआइटी को साक्ष्य मिले हैं। इसके आधार पर एसआइटी ने रिपोर्ट तैयार कर पीएचक्यू भेज दी है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक संस्तुति मिलने के बाद मुकदमा दर्ज कर लिया जाएगा। बता दें कि दशमोत्तर छात्रवृत्ति घोटाले में एसआइटी बाहरी राज्यों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं से पूछताछ कर रही है। अब तक हुई पूछताछ में मिले साक्ष्य के आधार पर एसआइटी यूपी, हरियाणा, चंडीगढ़ की करीब 29 शैक्षिक संस्थानों के खिलाफ केस दर्ज कर चुकी है। इसमें 50 से अधिक बिचौलियों को नामजद किया था। जबकि 500 लाभार्थियों से जसपुर, काशीपुर, बाजपुर, गदरपुर, किच्छा, खटीमा, नानकमत्ता और सितारगंज में पूछताछ जारी है। एसआइटी अधिकारियों के मुताबिक पूछताछ में छह और शैक्षिक संस्थानों के खिलाफ एसआइटी को साक्ष्य मिले हैं। इसमें शैक्षिक संस्थानों ने फर्जी तरीके से छात्रों का प्रवेश कर लाखों रुपये की छात्रवृत्ति हड़पी थी। साक्ष्य मिलने के बाद एसआइटी ने रिपोर्ट तैयार कर पीएचक्यू भेज दी है। एसएसपी बरिंदरजीत सिंह ने बताया कि रिपोर्ट पीएचक्यू भेजी गई है। संस्तुति मिलने के बाद शैक्षिक संस्थानों पर केस दर्ज किया जाएगा। दशमोत्तर छात्रवृत्ति घोटाले में एसआइटी 29 केस दर्ज कर चुकी है। जिसमें 50 बिचौलियों को भी नामजद किया था। इनमें से सितारगंज, काशीपुर, बाजपुर और जसपुर के 16 बिचौलियों को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। जबकि 34 बिचौलिए अभी फरार चल रहे हैं। ऐसे में पुलिस फरार बिचौलियों की धरपकड़ में जुटी हुई है। इसके लिए रविवार को पुलिस ने संदिग्ध ठिकानों पर दबिश भी दी, लेकिन कोई हत्थे नहीं चढ़ा।
दशमोत्तर छात्रवृत्ति घोटाले में उत्तर प्रदेश के छह और शैक्षिक संस्थानों के खिलाफ एसआइटी को साक्ष्य मिले हैं। इसके आधार पर एसआइटी ने रिपोर्ट तैयार कर पीएचक्यू भेज दी है। रुद्रपुर, जेएनएन : दशमोत्तर छात्रवृत्ति घोटाले में उत्तर प्रदेश के छह और शैक्षिक संस्थानों के खिलाफ एसआइटी को साक्ष्य मिले हैं। इसके आधार पर एसआइटी ने रिपोर्ट तैयार कर पीएचक्यू भेज दी है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक संस्तुति मिलने के बाद मुकदमा दर्ज कर लिया जाएगा। बता दें कि दशमोत्तर छात्रवृत्ति घोटाले में एसआइटी बाहरी राज्यों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं से पूछताछ कर रही है। अब तक हुई पूछताछ में मिले साक्ष्य के आधार पर एसआइटी यूपी, हरियाणा, चंडीगढ़ की करीब उनतीस शैक्षिक संस्थानों के खिलाफ केस दर्ज कर चुकी है। इसमें पचास से अधिक बिचौलियों को नामजद किया था। जबकि पाँच सौ लाभार्थियों से जसपुर, काशीपुर, बाजपुर, गदरपुर, किच्छा, खटीमा, नानकमत्ता और सितारगंज में पूछताछ जारी है। एसआइटी अधिकारियों के मुताबिक पूछताछ में छह और शैक्षिक संस्थानों के खिलाफ एसआइटी को साक्ष्य मिले हैं। इसमें शैक्षिक संस्थानों ने फर्जी तरीके से छात्रों का प्रवेश कर लाखों रुपये की छात्रवृत्ति हड़पी थी। साक्ष्य मिलने के बाद एसआइटी ने रिपोर्ट तैयार कर पीएचक्यू भेज दी है। एसएसपी बरिंदरजीत सिंह ने बताया कि रिपोर्ट पीएचक्यू भेजी गई है। संस्तुति मिलने के बाद शैक्षिक संस्थानों पर केस दर्ज किया जाएगा। दशमोत्तर छात्रवृत्ति घोटाले में एसआइटी उनतीस केस दर्ज कर चुकी है। जिसमें पचास बिचौलियों को भी नामजद किया था। इनमें से सितारगंज, काशीपुर, बाजपुर और जसपुर के सोलह बिचौलियों को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। जबकि चौंतीस बिचौलिए अभी फरार चल रहे हैं। ऐसे में पुलिस फरार बिचौलियों की धरपकड़ में जुटी हुई है। इसके लिए रविवार को पुलिस ने संदिग्ध ठिकानों पर दबिश भी दी, लेकिन कोई हत्थे नहीं चढ़ा।
अजिंक्य रहाणे ने बताया कि भारतीय बल्लेबाज शार्ट पिच गेंद को अच्छे तरीके से खेलते हैं। मुंबई, प्रेट्र। Ajinkya Rahane gave the reason for the defeat in New Zealand: विराट कोहली की कप्तानी में पहली बार भारतीय क्रिकेट टीम को न्यूजीलैंड में वनडे और टेस्ट सीरीज में क्लीन स्वीप का सामना करना पड़ा। टीम इंडिया इन दोनों ही सीरीज में उस तरह से नहीं खेल पाई जिसके लिए वो जानी जाती है। हालांकि टीम इंडिया की हार की कई वजह रही, लेकिन अब टेस्ट टीम के उप-कप्तान अजिंक्य रहाणे ने टीम की हार की मुख्य वजह बताई है। अजिंक्य रहाणे ने कहा कि भारतीय क्रिकेट टीम के बल्लेबाज शार्ट पिच गेंदों के सामने खराब खिलाड़ी नहीं हैं और न्यूजीलैंड में टीम को मिली असफलता या हार की मुख्य वजह हवा का बहाव था। उन्होंने कहा कि भारतीय बल्लेबाजी की आलोचना ये कहकर नहीं की जानी चाहिए कि वे शार्ट पिच गेंदों को अच्छी तरह से नहीं खेल पाते हैं। रहाणे ने कहा कि शार्ट पिच गेंदों को लेकर काफी सारी बातें की जा रही हैं। उन्होंने साल 2018 में की गई ऑस्ट्रेलिया दौरे का हवाला देते हुए कहा कि अगर आप मेलबर्न की पारी देखें तो हमने दबदबा बनाया था और सभी शार्ट पिच गेंदों को अच्छी तरह से खेला था। एक मैच की वजह से आप शार्ट पिच गेंदों के खराब खिलाड़ी नहीं बन जाते। उन्होंने कहा कि कीवी टीम के गेंदबाजों ने हवा के बहाव का काफी अच्छा इस्तेमाल किया क्योंकि न्यूजीलैंड में ये सबसे बड़ा कारक था। गेंदबाजों ने तिरछे रनअप के साथ एक कोण में गेंदबाजी की और उनकी गति भी एक अहम कारक था। अब हमारी अगली सीरीज ऑस्ट्रेलिया में है और हमें इसे लेकर सकारात्मक बने रहना होगा। हालांकि अभी इसके लिए वक्त है, लेकिन हम उसके लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि टेस्ट में पिछले तीन-चार साल में हम काफी अच्छे रहे हैं और अब टेस्ट चैंपियनशिप की शुरुआत हो गई है। हमें कुछ मैच में जीत मिलेगी तो कुछ में हार भी मिलेगी। अपनी खराब फॉर्म को लेकर अजिंक्य रहाणे ने कहा कि वो अपनी खराब फॉर्म को लेकर ज्यादा चिंता में नहीं हैं और ना ही इसे लेकर कुछ ज्यादा सोच रहा हूं। टेस्ट चैंपियनशिप एक समय में एक मैच और एक सीरीज से जुड़ी है क्योंकि इसमें अंक जुड़े हुए है। एक या दो खराब मैच से आप बुरी टीम बन जाओगे। रहाणे ने कहा कि हमने न्यूजीलैंड सीरीज से काफी कुछ सीखा है। वे अच्छा खेले और एक टीम के तौर पर बल्लेबाजी और गेंदबाजी इकाई के लिये यह अच्छी सीख रही। रहाणे ने न्यूजीलैंड दौरे पर वेलिंग्टन टेस्ट मैच में 46,29 जबकि क्राइस्टचर्च में 7,9 रन की पारी खेली थी।
अजिंक्य रहाणे ने बताया कि भारतीय बल्लेबाज शार्ट पिच गेंद को अच्छे तरीके से खेलते हैं। मुंबई, प्रेट्र। Ajinkya Rahane gave the reason for the defeat in New Zealand: विराट कोहली की कप्तानी में पहली बार भारतीय क्रिकेट टीम को न्यूजीलैंड में वनडे और टेस्ट सीरीज में क्लीन स्वीप का सामना करना पड़ा। टीम इंडिया इन दोनों ही सीरीज में उस तरह से नहीं खेल पाई जिसके लिए वो जानी जाती है। हालांकि टीम इंडिया की हार की कई वजह रही, लेकिन अब टेस्ट टीम के उप-कप्तान अजिंक्य रहाणे ने टीम की हार की मुख्य वजह बताई है। अजिंक्य रहाणे ने कहा कि भारतीय क्रिकेट टीम के बल्लेबाज शार्ट पिच गेंदों के सामने खराब खिलाड़ी नहीं हैं और न्यूजीलैंड में टीम को मिली असफलता या हार की मुख्य वजह हवा का बहाव था। उन्होंने कहा कि भारतीय बल्लेबाजी की आलोचना ये कहकर नहीं की जानी चाहिए कि वे शार्ट पिच गेंदों को अच्छी तरह से नहीं खेल पाते हैं। रहाणे ने कहा कि शार्ट पिच गेंदों को लेकर काफी सारी बातें की जा रही हैं। उन्होंने साल दो हज़ार अट्ठारह में की गई ऑस्ट्रेलिया दौरे का हवाला देते हुए कहा कि अगर आप मेलबर्न की पारी देखें तो हमने दबदबा बनाया था और सभी शार्ट पिच गेंदों को अच्छी तरह से खेला था। एक मैच की वजह से आप शार्ट पिच गेंदों के खराब खिलाड़ी नहीं बन जाते। उन्होंने कहा कि कीवी टीम के गेंदबाजों ने हवा के बहाव का काफी अच्छा इस्तेमाल किया क्योंकि न्यूजीलैंड में ये सबसे बड़ा कारक था। गेंदबाजों ने तिरछे रनअप के साथ एक कोण में गेंदबाजी की और उनकी गति भी एक अहम कारक था। अब हमारी अगली सीरीज ऑस्ट्रेलिया में है और हमें इसे लेकर सकारात्मक बने रहना होगा। हालांकि अभी इसके लिए वक्त है, लेकिन हम उसके लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि टेस्ट में पिछले तीन-चार साल में हम काफी अच्छे रहे हैं और अब टेस्ट चैंपियनशिप की शुरुआत हो गई है। हमें कुछ मैच में जीत मिलेगी तो कुछ में हार भी मिलेगी। अपनी खराब फॉर्म को लेकर अजिंक्य रहाणे ने कहा कि वो अपनी खराब फॉर्म को लेकर ज्यादा चिंता में नहीं हैं और ना ही इसे लेकर कुछ ज्यादा सोच रहा हूं। टेस्ट चैंपियनशिप एक समय में एक मैच और एक सीरीज से जुड़ी है क्योंकि इसमें अंक जुड़े हुए है। एक या दो खराब मैच से आप बुरी टीम बन जाओगे। रहाणे ने कहा कि हमने न्यूजीलैंड सीरीज से काफी कुछ सीखा है। वे अच्छा खेले और एक टीम के तौर पर बल्लेबाजी और गेंदबाजी इकाई के लिये यह अच्छी सीख रही। रहाणे ने न्यूजीलैंड दौरे पर वेलिंग्टन टेस्ट मैच में छियालीस,उनतीस जबकि क्राइस्टचर्च में सात,नौ रन की पारी खेली थी।
देहरादूनः उत्तराखंड इस समय गहन शोक में डूबा हुआ है। आप सभी को बता दें कि इस समय शोक में पूरा देश ही डूबा हुआ है क्योंकि यह दुःख का समय है। देश ने अपनी तीनों सेनाओं का पहला सर्वोच्च अफसर खोया है। लेकिन इस बीच उत्तराखंड की विडंबना यह है कि सैन्य क्षेत्र में सर्वोच्चता के शिखर पर पहुंचा कोई भी अधिकारी अलग-अलग कारणों से अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया। जी हाँ, इस लिस्ट में जहाँ जनरल बिपिन रावत और जनरल बिपिन चंद्र जोशी का कार्यकाल उनके असमय निधन के कारण पूरा नहीं हो पाया। वहीं, उत्तराखंड से नौसेना के शीर्ष पर पहुंचे अल्मोड़ा निवासी एकमात्र एडमिरल डीके जोशी ने साल-2014 में सिंधुरत्न हादसे के बाद बीच कार्यकाल में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उत्तराखंड एक ऐसी जगह है जहाँ हर दूसरे-तीसरे घर से सैनिक निकलता है। हालाँकि, पहले पहल सेना के शीर्ष पर पहुंचने का मौका उत्तराखंड को 1993 में मिला। यह उस समय की बात है जब पिथौरागढ़ के जनरल बिपिन चंद्र जोशी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (थल सेनाध्यक्ष) बने। हालाँकि जनरल जोशी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए। केवल सालभर में 18 नवम्बर 1994 को उनका असामयिक निधन हो गया। वह 17वें आर्मी चीफ थे। वहीं जनरल जोशी के 22 साल बाद देश को 27वें आर्मी चीफ मिले उत्तराखंड से। वह रहे जनरल बिपिन रावत। जनरल रावत थल सेना प्रमुख के बाद देश की तीनों सेनाओं के प्रमुख यानी 'चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ' बनाए गए। हालाँकि सीडीएस के तौर पर उनका कार्यकाल बाकी था, जो वे पूरा नहीं कर पाए। अब इसे हादसा कहे या फिर इत्तेफाक कुछ कहा नहीं जा सकता। दोनों को ही उत्तराखंड और यहां के पहाड़ के प्रति गहरा लगाव था। देहरादून से भी दोनों का शैक्षणिक जुड़ाव रहा है।
देहरादूनः उत्तराखंड इस समय गहन शोक में डूबा हुआ है। आप सभी को बता दें कि इस समय शोक में पूरा देश ही डूबा हुआ है क्योंकि यह दुःख का समय है। देश ने अपनी तीनों सेनाओं का पहला सर्वोच्च अफसर खोया है। लेकिन इस बीच उत्तराखंड की विडंबना यह है कि सैन्य क्षेत्र में सर्वोच्चता के शिखर पर पहुंचा कोई भी अधिकारी अलग-अलग कारणों से अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया। जी हाँ, इस लिस्ट में जहाँ जनरल बिपिन रावत और जनरल बिपिन चंद्र जोशी का कार्यकाल उनके असमय निधन के कारण पूरा नहीं हो पाया। वहीं, उत्तराखंड से नौसेना के शीर्ष पर पहुंचे अल्मोड़ा निवासी एकमात्र एडमिरल डीके जोशी ने साल-दो हज़ार चौदह में सिंधुरत्न हादसे के बाद बीच कार्यकाल में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उत्तराखंड एक ऐसी जगह है जहाँ हर दूसरे-तीसरे घर से सैनिक निकलता है। हालाँकि, पहले पहल सेना के शीर्ष पर पहुंचने का मौका उत्तराखंड को एक हज़ार नौ सौ तिरानवे में मिला। यह उस समय की बात है जब पिथौरागढ़ के जनरल बिपिन चंद्र जोशी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ बने। हालाँकि जनरल जोशी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए। केवल सालभर में अट्ठारह नवम्बर एक हज़ार नौ सौ चौरानवे को उनका असामयिक निधन हो गया। वह सत्रहवें आर्मी चीफ थे। वहीं जनरल जोशी के बाईस साल बाद देश को सत्ताईसवें आर्मी चीफ मिले उत्तराखंड से। वह रहे जनरल बिपिन रावत। जनरल रावत थल सेना प्रमुख के बाद देश की तीनों सेनाओं के प्रमुख यानी 'चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ' बनाए गए। हालाँकि सीडीएस के तौर पर उनका कार्यकाल बाकी था, जो वे पूरा नहीं कर पाए। अब इसे हादसा कहे या फिर इत्तेफाक कुछ कहा नहीं जा सकता। दोनों को ही उत्तराखंड और यहां के पहाड़ के प्रति गहरा लगाव था। देहरादून से भी दोनों का शैक्षणिक जुड़ाव रहा है।
नगरोटा सूरियां - नगरोटा सूरियां। आवारा पशुओं के कारण नगरोटा सूरियां तथा आसपास की के पंचायतों के ग्रामीणों ने अपनी खेतीबाड़ी करना छोड़ दी है। एक तो लोग पहले ही जंगली जानवरों तथा बंदरों से परेशान है। वहीं, अब आवारा पशुओं के कारण और परेशानी बढ़ गई है। यह सैकड़ों आवारा पशु पौंग डैम के खाली क्षेत्र व नगरोटा सूरियां के स्कूल के खेल के मैदान अलग-अलग पंचायतों में खुले मैदान में बैठे देखे जा सकते हैं। हर दिन इस कड़कती ठंड के कारण हर रोज कहीं न कहीं किसी दुकान के सामने या फिर सड़क के किनारे यह आवारा पशु मरे हुए पड़े होते हैं तथा इन मरे हुए पशुओं को उठाने के लिए 1000 रुपए लोगों को देने पड़ रहे हैं। इसके कारण लोग परेशान हैं। स्थानीय लोगों ने सरकार व प्रशासन से आग्रह किया है कि नगरोटा सूरियां में आवारा पशुओं के लिए गोसदन खोला जाए, ताकि जो आवारा पशु है, उन्हें कोई ठिकाना मिल सके तथा जो लोग अपने इन पशुओं को ऐसे आवारा छोड़ रहे हैं, उनकी पहचान करने के बाद उन पर कार्रवाई की जाए।
नगरोटा सूरियां - नगरोटा सूरियां। आवारा पशुओं के कारण नगरोटा सूरियां तथा आसपास की के पंचायतों के ग्रामीणों ने अपनी खेतीबाड़ी करना छोड़ दी है। एक तो लोग पहले ही जंगली जानवरों तथा बंदरों से परेशान है। वहीं, अब आवारा पशुओं के कारण और परेशानी बढ़ गई है। यह सैकड़ों आवारा पशु पौंग डैम के खाली क्षेत्र व नगरोटा सूरियां के स्कूल के खेल के मैदान अलग-अलग पंचायतों में खुले मैदान में बैठे देखे जा सकते हैं। हर दिन इस कड़कती ठंड के कारण हर रोज कहीं न कहीं किसी दुकान के सामने या फिर सड़क के किनारे यह आवारा पशु मरे हुए पड़े होते हैं तथा इन मरे हुए पशुओं को उठाने के लिए एक हज़ार रुपयापए लोगों को देने पड़ रहे हैं। इसके कारण लोग परेशान हैं। स्थानीय लोगों ने सरकार व प्रशासन से आग्रह किया है कि नगरोटा सूरियां में आवारा पशुओं के लिए गोसदन खोला जाए, ताकि जो आवारा पशु है, उन्हें कोई ठिकाना मिल सके तथा जो लोग अपने इन पशुओं को ऐसे आवारा छोड़ रहे हैं, उनकी पहचान करने के बाद उन पर कार्रवाई की जाए।
डॉक्टरों के पास सुरक्षित हेडफ़ोन उपयोग के लिए 60-60 नियम हैं, जिसका अर्थ है कि हर 60 मिनट में सुनने के लिए 60 प्रतिशत मात्रा हानिरहित है। जब हम इस नियम को तोड़ते हैं, तो हम कताई, मतली की भावना का अनुभव कर सकते हैं, और यहां तक कि नींद की बीमारी से पीड़ित हो सकते हैं। ये कुछ ही प्रभाव हैं जो हेडफ़ोन हमारे शरीर पर पड़ सकते हैं यदि हम उनका उपयोग बहुत लंबे समय तक और अक्सर करते हैं। यहां हम मानते हैं कि कोई भी उपकरण एक हथियार में बदल सकता है अगर बुद्धिमानी से उपयोग नहीं किया जाता है। हमने निर्णय लिया कि यदि हम अपने हेडफ़ोन का उपयोग करते हैं, और यहां हमें जो पता चला है, उस पर एक विशेषज्ञ की राय देख सकते हैं। 1. पको एक संपीड़न सिरदर्द मिल सकता है। जो लोग बहुत लंबे समय तक हेडफ़ोन पहनते हैं, वे अपने सिर को दबाव में डालते हैं कि प्रकृति द्वारा ऐसा नहीं होता है। परिणामस्वरूप, हमारी खोपड़ी और आंतरिक कान संकुचित हो जाते हैं और हमें सिरदर्द हो सकता है। अगर आपको उनसे खतरा है तो हेडफ़ोन पहनने से भी माइग्रेन बिगड़ सकता है। 2. प बिगड़ा हुआ सुनवाई विकसित कर सकते हैं। विज्ञान के अनुसार, अधिकांश 30-वर्षीय बच्चों को 17-किलोहर्ट्ज़ ध्वनि सुनने में सक्षम होना चाहिए, जिसका अर्थ है कि वे एक मच्छर के बारे में सुन सकते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि अधिक से अधिक युवा अपनी उम्र में इस स्तर पर नहीं सुन सकते हैं। क्या अधिक है, क्या हम सभी के जन्म के समय 15,000 सुनवाई कोशिकाएं हैं, लेकिन एक बार जब हम एक खो देते हैं, तो इसे बहाल नहीं किया जा सकता वैज्ञानिकों ने हेडफोन के लगातार उपयोग से इस सेल लॉस प्रॉब्लम को टाई किया है। 3. आपके कानों में वैक्स ब्लॉकेज हो सकता है। इयर वैक्स का निर्माण इसलिए होता है क्योंकि इयरफ़ोन वैक्स को कान की नहरों से प्राकृतिक रूप से बाहर आने से रोकता है। बदले में, आपके कान अवरुद्ध हो सकते हैं, जिससे कान में संक्रमण हो सकता है। इसके अलावा, इयरफ़ोन कॉटन स्वैब की तरह काम करते हैं और वैक्स को कान की नहर में गहराई तक धकेल सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप कान का दर्द और चक्कर आ सकते हैं। 4. वर्टिगो नामक एक विशेष स्थिति विकसित कर सकते हैं। वर्टिगो संतुलन खोने की एक कताई सनसनी है, आंदोलन का एक भ्रम जो वहां नहीं है। यह अक्सर मतली और चक्कर के साथ होता है। यह तब होता है जब हमारे कान शोर-पृथक ईयरबड्स से घिर जाते हैं। अतिरिक्त कारक जो कताई की भावना का कारण हो सकता है वह उच्चतम मात्रा में संगीत सुन रहा है। इन छोटी वस्तुओं को अपने कानों में डालते हुए, हम आंतरिक कान तंत्रिका को उत्तेजित करते हैं और इसके अंदर अप्राकृतिक दबाव बनाते हैं। 5. आप गैर-मौजूद ध्वनियों को सुनना शुरू कर सकते हैं, यहां तक कि पूर्ण मौन में भी। यदि आप ईयरफोन-पहनने पर ओवरडोज करते हैं, तो आप टिनिटस की कष्टप्रद सनसनी विकसित कर सकते हैं। जब आप पूरी तरह मौन और आराम कर रहे हों, तब भी आप अपने कानों में बजना, क्लिक करना, गूंजना, फुफकारना या गर्जना सुनना शुरू कर सकते हैं। इस सनसनी का कोई इलाज नहीं है, लेकिन इसे आसानी से हेडफोन के समय को कम करके और अपने इयरप्लग में मात्रा कम करके रोका जा सकता है, वैज्ञानिकों का दावा है। 6. पको त्वचा की समस्या और मुंहासे हो सकते हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, जो अक्सर बड़े, अधिक कान वाले हेडफ़ोन पहनते हैं, खासकर जब वे बाहर काम करते हैं और पसीना करते हैं, हजारों अप्रिय बैक्टीरिया को गुणा करने की अनुमति देते हैं। इससे मुंहासे और त्वचा में संक्रमण हो सकता है। इसके अतिरिक्त, यदि आप इयरप्लग का उपयोग करते हैं, तो आपके कान के अंदर से अत्यधिक तेल जमा होना शुरू हो सकता है, जिससे बैक्टीरिया के लिए एक अद्भुत मिट्टी का निर्माण हो सकता है जो कानों के दाने का कारण बन सकता है।
डॉक्टरों के पास सुरक्षित हेडफ़ोन उपयोग के लिए साठ-साठ नियम हैं, जिसका अर्थ है कि हर साठ मिनट में सुनने के लिए साठ प्रतिशत मात्रा हानिरहित है। जब हम इस नियम को तोड़ते हैं, तो हम कताई, मतली की भावना का अनुभव कर सकते हैं, और यहां तक कि नींद की बीमारी से पीड़ित हो सकते हैं। ये कुछ ही प्रभाव हैं जो हेडफ़ोन हमारे शरीर पर पड़ सकते हैं यदि हम उनका उपयोग बहुत लंबे समय तक और अक्सर करते हैं। यहां हम मानते हैं कि कोई भी उपकरण एक हथियार में बदल सकता है अगर बुद्धिमानी से उपयोग नहीं किया जाता है। हमने निर्णय लिया कि यदि हम अपने हेडफ़ोन का उपयोग करते हैं, और यहां हमें जो पता चला है, उस पर एक विशेषज्ञ की राय देख सकते हैं। एक. पको एक संपीड़न सिरदर्द मिल सकता है। जो लोग बहुत लंबे समय तक हेडफ़ोन पहनते हैं, वे अपने सिर को दबाव में डालते हैं कि प्रकृति द्वारा ऐसा नहीं होता है। परिणामस्वरूप, हमारी खोपड़ी और आंतरिक कान संकुचित हो जाते हैं और हमें सिरदर्द हो सकता है। अगर आपको उनसे खतरा है तो हेडफ़ोन पहनने से भी माइग्रेन बिगड़ सकता है। दो. प बिगड़ा हुआ सुनवाई विकसित कर सकते हैं। विज्ञान के अनुसार, अधिकांश तीस-वर्षीय बच्चों को सत्रह-किलोहर्ट्ज़ ध्वनि सुनने में सक्षम होना चाहिए, जिसका अर्थ है कि वे एक मच्छर के बारे में सुन सकते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि अधिक से अधिक युवा अपनी उम्र में इस स्तर पर नहीं सुन सकते हैं। क्या अधिक है, क्या हम सभी के जन्म के समय पंद्रह,शून्य सुनवाई कोशिकाएं हैं, लेकिन एक बार जब हम एक खो देते हैं, तो इसे बहाल नहीं किया जा सकता वैज्ञानिकों ने हेडफोन के लगातार उपयोग से इस सेल लॉस प्रॉब्लम को टाई किया है। तीन. आपके कानों में वैक्स ब्लॉकेज हो सकता है। इयर वैक्स का निर्माण इसलिए होता है क्योंकि इयरफ़ोन वैक्स को कान की नहरों से प्राकृतिक रूप से बाहर आने से रोकता है। बदले में, आपके कान अवरुद्ध हो सकते हैं, जिससे कान में संक्रमण हो सकता है। इसके अलावा, इयरफ़ोन कॉटन स्वैब की तरह काम करते हैं और वैक्स को कान की नहर में गहराई तक धकेल सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप कान का दर्द और चक्कर आ सकते हैं। चार. वर्टिगो नामक एक विशेष स्थिति विकसित कर सकते हैं। वर्टिगो संतुलन खोने की एक कताई सनसनी है, आंदोलन का एक भ्रम जो वहां नहीं है। यह अक्सर मतली और चक्कर के साथ होता है। यह तब होता है जब हमारे कान शोर-पृथक ईयरबड्स से घिर जाते हैं। अतिरिक्त कारक जो कताई की भावना का कारण हो सकता है वह उच्चतम मात्रा में संगीत सुन रहा है। इन छोटी वस्तुओं को अपने कानों में डालते हुए, हम आंतरिक कान तंत्रिका को उत्तेजित करते हैं और इसके अंदर अप्राकृतिक दबाव बनाते हैं। पाँच. आप गैर-मौजूद ध्वनियों को सुनना शुरू कर सकते हैं, यहां तक कि पूर्ण मौन में भी। यदि आप ईयरफोन-पहनने पर ओवरडोज करते हैं, तो आप टिनिटस की कष्टप्रद सनसनी विकसित कर सकते हैं। जब आप पूरी तरह मौन और आराम कर रहे हों, तब भी आप अपने कानों में बजना, क्लिक करना, गूंजना, फुफकारना या गर्जना सुनना शुरू कर सकते हैं। इस सनसनी का कोई इलाज नहीं है, लेकिन इसे आसानी से हेडफोन के समय को कम करके और अपने इयरप्लग में मात्रा कम करके रोका जा सकता है, वैज्ञानिकों का दावा है। छः. पको त्वचा की समस्या और मुंहासे हो सकते हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, जो अक्सर बड़े, अधिक कान वाले हेडफ़ोन पहनते हैं, खासकर जब वे बाहर काम करते हैं और पसीना करते हैं, हजारों अप्रिय बैक्टीरिया को गुणा करने की अनुमति देते हैं। इससे मुंहासे और त्वचा में संक्रमण हो सकता है। इसके अतिरिक्त, यदि आप इयरप्लग का उपयोग करते हैं, तो आपके कान के अंदर से अत्यधिक तेल जमा होना शुरू हो सकता है, जिससे बैक्टीरिया के लिए एक अद्भुत मिट्टी का निर्माण हो सकता है जो कानों के दाने का कारण बन सकता है।
Cyber Crime: दिल्ली के लक्ष्मी नगर से साइबर क्राइम का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जहां एक मैसेज के जरिए रोमांस की शुरुआत हुई और युवक से लाखों रुपये लूट लिए गए। Cyber Crime : दिल्ली के लक्ष्मी नगर में रहने वाले 22 साल के नावेद खान के पास वॉट्सऐप पर 1 मैसेज आया, जिसमें लिखा था, "क्या आप मेरे साथ रोमांस करना चाहेंगे? 'हां' या 'ना' में जवाब दीजिए। " नावेद ने जैसे की 'हां' में जवाब दिया, उसे एक लड़की ने वीडियो कॉल किया, जिसने खुद को आगरा की रहने वाली पूजा बताया। शिकायत के मुताबिक, खुद को साइबर सेल का अधिकारी बताने वाले व्यक्ति ने नावेद से वीडियो कॉल करने को कहा, जिसके कारण उसने अपने फोन में दोबारा वॉट्सऐप डाउनलोड किया और उससे बात की। बाद में उस व्यक्ति ने वीडियो डिलीट कराने में मदद के लिए नावेद से मोनू पांचाल नाम के व्यक्ति से बात करने के लिए कहा। शिकायत के अनुसार, जब नावेद ने मोनू को फोन किया तो उसने इस काम के लिए 21,800 रुपये मांगे। उसने ये भी वादा किया कि वह बाद में ये पैसे लौटा देगा। नावेद ने कहा कि उसके पास पुलिस में मामला दर्ज कराने के सिवा कोई चारा नहीं बचा। पुलिस ने इस संबंध में रिपोर्ट दर्ज कर ली है। साइबर सेल ने कहा कि वे मामले की जांच कर रहे हैं और अपराधियों को पकड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। जांचकर्ताओं ने कहा कि रिकॉर्ड किए गए अश्लील वीडियो दिखाकर लोगों को फंसाना और पैसे ऐंठना साइबर अपराधियों का आम हथकंडा बन गया है। बताते चलें कि साइबर क्राइम की दुनिया में लोगों को ठगने के कई तरीके अपनाए जा रहे हैं। अगर आपके पास भी रोमांटिक बात करने से जुड़ा इस तरह का कोई मैसेज आता है तो सावधान हो जाएं और उस नंबर को तुरंत ब्लॉक कर दें। आप ऐसे नंबर की शिकायत अपने स्थानीय पुलिस थाना या साइबर सेल में भी कर सकते हैं। साइबर ठग इसी तरह से सीधे-सादे लोगों को अपने जाल में फंसाकर उनसे मोटा पैसा ठग लेते हैं। अगर आप किसी भी तरह के साइबर क्राइम का शिकार होते हैं तो आप नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल https://cybercrime. gov. in/ पर शिकायत दर्ज कराएं। इसके अलावा अगर आप किसी भी तरह के वित्तीय साइबर फ्रॉड का शिकार होते हैं तो 1930 पर तुरंत कॉल करें। ट्रेंडिंगः
Cyber Crime: दिल्ली के लक्ष्मी नगर से साइबर क्राइम का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जहां एक मैसेज के जरिए रोमांस की शुरुआत हुई और युवक से लाखों रुपये लूट लिए गए। Cyber Crime : दिल्ली के लक्ष्मी नगर में रहने वाले बाईस साल के नावेद खान के पास वॉट्सऐप पर एक मैसेज आया, जिसमें लिखा था, "क्या आप मेरे साथ रोमांस करना चाहेंगे? 'हां' या 'ना' में जवाब दीजिए। " नावेद ने जैसे की 'हां' में जवाब दिया, उसे एक लड़की ने वीडियो कॉल किया, जिसने खुद को आगरा की रहने वाली पूजा बताया। शिकायत के मुताबिक, खुद को साइबर सेल का अधिकारी बताने वाले व्यक्ति ने नावेद से वीडियो कॉल करने को कहा, जिसके कारण उसने अपने फोन में दोबारा वॉट्सऐप डाउनलोड किया और उससे बात की। बाद में उस व्यक्ति ने वीडियो डिलीट कराने में मदद के लिए नावेद से मोनू पांचाल नाम के व्यक्ति से बात करने के लिए कहा। शिकायत के अनुसार, जब नावेद ने मोनू को फोन किया तो उसने इस काम के लिए इक्कीस,आठ सौ रुपयापये मांगे। उसने ये भी वादा किया कि वह बाद में ये पैसे लौटा देगा। नावेद ने कहा कि उसके पास पुलिस में मामला दर्ज कराने के सिवा कोई चारा नहीं बचा। पुलिस ने इस संबंध में रिपोर्ट दर्ज कर ली है। साइबर सेल ने कहा कि वे मामले की जांच कर रहे हैं और अपराधियों को पकड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। जांचकर्ताओं ने कहा कि रिकॉर्ड किए गए अश्लील वीडियो दिखाकर लोगों को फंसाना और पैसे ऐंठना साइबर अपराधियों का आम हथकंडा बन गया है। बताते चलें कि साइबर क्राइम की दुनिया में लोगों को ठगने के कई तरीके अपनाए जा रहे हैं। अगर आपके पास भी रोमांटिक बात करने से जुड़ा इस तरह का कोई मैसेज आता है तो सावधान हो जाएं और उस नंबर को तुरंत ब्लॉक कर दें। आप ऐसे नंबर की शिकायत अपने स्थानीय पुलिस थाना या साइबर सेल में भी कर सकते हैं। साइबर ठग इसी तरह से सीधे-सादे लोगों को अपने जाल में फंसाकर उनसे मोटा पैसा ठग लेते हैं। अगर आप किसी भी तरह के साइबर क्राइम का शिकार होते हैं तो आप नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल https://cybercrime. gov. in/ पर शिकायत दर्ज कराएं। इसके अलावा अगर आप किसी भी तरह के वित्तीय साइबर फ्रॉड का शिकार होते हैं तो एक हज़ार नौ सौ तीस पर तुरंत कॉल करें। ट्रेंडिंगः
Unique Railway: आपने अपने जीवन में कई तरह के ट्रेनों के बारे में सुना होगा। कई ट्रेनों की रफ्तार कम होती है, जो पहाड़ों पर चलती है, वहीं ट्रेनों का विभाजन पैसेंजर या फिर सुपरफास्ट ट्रेन के रूप में भी किया जाता है। ये सभी ट्रेनें एक ही तरह के रेलवे ट्रैक पर उसके ऊपर चलती है। लेकिन क्या आप जानते दुनिया में ऐसी ट्रेने भी चलती है जो ट्रैक के ऊपर नहीं बल्कि नीचे चलती है। आईए जानते है। इस तरह की ट्रेन जर्मनी के वप्पर्टल में चलती है। ट्रेन की तस्वीरें देखकर ही आप डर जाएंगे, लेकिन इसमें सफर करने वाले लोगों को इससे ज़रा भी डर नहीं लगता। दुनिया भर से हज़ारों-लाखों लोग यहां सिर्फ और सिर्फ उल्टी-पुल्टी ट्रेन देखने के लिए और उसमें सफर करने के लिए पहुंचते है। The Wuppertal 🇩🇪 Suspension Railway opened in 1901. बता दें कि जर्मनी में 13.3 किलोमीटर का दूरी तय करने वाली इस ट्रेन को मोनरेल भी कहा जाता है। ये ट्रेन लटके हुए नदी, रास्ते, झरने और दूसरी चीज़ों को क्रॉस करती हुई अपना रास्ता तय करती है। CNN की रिपोर्ट के अनुसार, जर्मनी के अलावा दुनिया में सिर्फ जापान ऐसा देश है, जहां सस्पेंशन रेलवे पाया जाता है।
Unique Railway: आपने अपने जीवन में कई तरह के ट्रेनों के बारे में सुना होगा। कई ट्रेनों की रफ्तार कम होती है, जो पहाड़ों पर चलती है, वहीं ट्रेनों का विभाजन पैसेंजर या फिर सुपरफास्ट ट्रेन के रूप में भी किया जाता है। ये सभी ट्रेनें एक ही तरह के रेलवे ट्रैक पर उसके ऊपर चलती है। लेकिन क्या आप जानते दुनिया में ऐसी ट्रेने भी चलती है जो ट्रैक के ऊपर नहीं बल्कि नीचे चलती है। आईए जानते है। इस तरह की ट्रेन जर्मनी के वप्पर्टल में चलती है। ट्रेन की तस्वीरें देखकर ही आप डर जाएंगे, लेकिन इसमें सफर करने वाले लोगों को इससे ज़रा भी डर नहीं लगता। दुनिया भर से हज़ारों-लाखों लोग यहां सिर्फ और सिर्फ उल्टी-पुल्टी ट्रेन देखने के लिए और उसमें सफर करने के लिए पहुंचते है। The Wuppertal 🇩🇪 Suspension Railway opened in एक हज़ार नौ सौ एक. बता दें कि जर्मनी में तेरह दशमलव तीन किलोग्राममीटर का दूरी तय करने वाली इस ट्रेन को मोनरेल भी कहा जाता है। ये ट्रेन लटके हुए नदी, रास्ते, झरने और दूसरी चीज़ों को क्रॉस करती हुई अपना रास्ता तय करती है। CNN की रिपोर्ट के अनुसार, जर्मनी के अलावा दुनिया में सिर्फ जापान ऐसा देश है, जहां सस्पेंशन रेलवे पाया जाता है।
कलाकार जॉन अब्राहम बहुत ही जल्द 'सत्यमेव जयते 2' के साथ दर्शकों के सामने होंगे, जिसमें कलाकार दया शंकर पांडे अहम किरदार निभाते दिखेंगे। टीवी सीरियल 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' टीआरपी लिस्ट में हमेशा धमाल मचाता है। इस शो में नजर आने वाले कलाकार अपने किरदारों को इस तरह से निभाते हैं कि दर्शक अपना पेट पकड़ लेते हैं। सब टीवी का यह सीरियल सबसे लम्बे वक्त तक चलने वाले शोज में से एक है। ऐसे बहुत कम शोज हैं, जिन्हें दर्शकों का इतना प्यार मिला है। शो से सामने आई ताजा रिपोर्ट की मानें तो इसमें काम करने वाला एक कलाकार जॉन अब्राहम की अपकमिंग फिल्म 'सत्यमेव जयते 2' में दिखाई देगा। अगर आप सोच रहे हैं कि हम 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' में जेठालाल का किरदार निभाने वाले कलाकार दिलीप जोशी की बात कर रहे हैं तो आप पूरी तरह से गलते हैं। हम बात कर रहे हैं दया शंकर पांडे की, जो शो में इंस्पेक्टर चालू पांडे का किरदार निभाते हैं। दया शंकर पांडे ने फिल्मीबीट से बात करते हुए बताया है कि वो जॉन अब्राहम की फिल्म 'सत्यमेव जयते 2' का हिस्सा बनने जा रहे हैं। इसके साथ-साथ उन्होंने यह जानकारी भी शेयर की है कि वो तापसी पन्नू और विक्रांत मैसी की अपकमिंग फिल्म 'हसीन दिलरुबा' में भी अहम किरदार निभाते दिखेंगे। दया शंकर पांडे के अनुसार, 'मैं तापसी पन्नू और विक्रांत मैसी की फिल्म की शूटिंग लॉकडाउन से पहले कर रहा था। इसका कुछ भाग अभी भी बाकी है। इसके साथ-साथ मैं सत्यमेव जयते 2 और रंगबाज का भी हिस्सा हूं। मैं इन दोनों फिल्मों में अपने दमदार किरदार निभाने के लिए काफी उत्साहित हूं।' 'सत्यमेव जयते 2' में जॉन अब्राहम के साथ-साथ दिव्या खोसला कुमार भी नजर आएंगी। यह फिल्म टी-सीरीज के मालिक भूषण कुमार, निखिल आडवणी के साथ मिलकर प्रोड्यूस करेंगे। फिल्म का निर्देशन मिलाप जावेरी करेंगे, जो 'सत्यमेव जयते' और 'मरजावां' जैसी फिल्में बना चुके हैं। मिलाप जावेरी धमाकेदार सिंगल स्क्रीन थिएटर की फिल्मों के लिए जाने जाते हैं और दर्शकों को उम्मीद है कि उनकी अपकमिंग फिल्म 'सत्यमेव जयते 2' भी दर्शकों का खूब मनोरंजन करेगी। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
कलाकार जॉन अब्राहम बहुत ही जल्द 'सत्यमेव जयते दो' के साथ दर्शकों के सामने होंगे, जिसमें कलाकार दया शंकर पांडे अहम किरदार निभाते दिखेंगे। टीवी सीरियल 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' टीआरपी लिस्ट में हमेशा धमाल मचाता है। इस शो में नजर आने वाले कलाकार अपने किरदारों को इस तरह से निभाते हैं कि दर्शक अपना पेट पकड़ लेते हैं। सब टीवी का यह सीरियल सबसे लम्बे वक्त तक चलने वाले शोज में से एक है। ऐसे बहुत कम शोज हैं, जिन्हें दर्शकों का इतना प्यार मिला है। शो से सामने आई ताजा रिपोर्ट की मानें तो इसमें काम करने वाला एक कलाकार जॉन अब्राहम की अपकमिंग फिल्म 'सत्यमेव जयते दो' में दिखाई देगा। अगर आप सोच रहे हैं कि हम 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' में जेठालाल का किरदार निभाने वाले कलाकार दिलीप जोशी की बात कर रहे हैं तो आप पूरी तरह से गलते हैं। हम बात कर रहे हैं दया शंकर पांडे की, जो शो में इंस्पेक्टर चालू पांडे का किरदार निभाते हैं। दया शंकर पांडे ने फिल्मीबीट से बात करते हुए बताया है कि वो जॉन अब्राहम की फिल्म 'सत्यमेव जयते दो' का हिस्सा बनने जा रहे हैं। इसके साथ-साथ उन्होंने यह जानकारी भी शेयर की है कि वो तापसी पन्नू और विक्रांत मैसी की अपकमिंग फिल्म 'हसीन दिलरुबा' में भी अहम किरदार निभाते दिखेंगे। दया शंकर पांडे के अनुसार, 'मैं तापसी पन्नू और विक्रांत मैसी की फिल्म की शूटिंग लॉकडाउन से पहले कर रहा था। इसका कुछ भाग अभी भी बाकी है। इसके साथ-साथ मैं सत्यमेव जयते दो और रंगबाज का भी हिस्सा हूं। मैं इन दोनों फिल्मों में अपने दमदार किरदार निभाने के लिए काफी उत्साहित हूं।' 'सत्यमेव जयते दो' में जॉन अब्राहम के साथ-साथ दिव्या खोसला कुमार भी नजर आएंगी। यह फिल्म टी-सीरीज के मालिक भूषण कुमार, निखिल आडवणी के साथ मिलकर प्रोड्यूस करेंगे। फिल्म का निर्देशन मिलाप जावेरी करेंगे, जो 'सत्यमेव जयते' और 'मरजावां' जैसी फिल्में बना चुके हैं। मिलाप जावेरी धमाकेदार सिंगल स्क्रीन थिएटर की फिल्मों के लिए जाने जाते हैं और दर्शकों को उम्मीद है कि उनकी अपकमिंग फिल्म 'सत्यमेव जयते दो' भी दर्शकों का खूब मनोरंजन करेगी। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
Meerut News: रविवार रात हुए हादसे में मारे गए दोनों लोग एक बैंक के कर्मचारी थी। हादसा रात में दो बजे हुआ था। हादसे के बाद ड्राइवर बस छोड़कर फरार हो गया था। पुलिस ने बस कब्जे में लेकर ड्राइवर के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। मृतकों के शव पोस्टमॉर्टम के बाद परिवार को सौंप दिए गए हैं।
Meerut News: रविवार रात हुए हादसे में मारे गए दोनों लोग एक बैंक के कर्मचारी थी। हादसा रात में दो बजे हुआ था। हादसे के बाद ड्राइवर बस छोड़कर फरार हो गया था। पुलिस ने बस कब्जे में लेकर ड्राइवर के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। मृतकों के शव पोस्टमॉर्टम के बाद परिवार को सौंप दिए गए हैं।
सेवा की मिसाल देखनी हो तो मधुबनी के घोघरडीहा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चले जाइए। यहां कार्यरत ANM बबीता कुमारी को देखकर दंग रह जाएंगे। घर में कोरोना संक्रमित पति अकेले पड़े हैं। दो छोटे बच्चे और बुजुर्ग सास की अलग चिंता, लेकिन ड्यूटी के दौरान चेहरे पर शिकन तक नहीं। महामारी में जिस सेवा से वह मरीजों के इलाज में जुटी रहती हैं, वह औरों के लिए प्रेरणा है। बबीता बीते कई महीनों से कोरोना योद्धा के रूप में बिना थके रोजाना अपनी ड्यूटी निभा रही हैं। ANM बबीता का घर खगड़िया है, जहां अकेली बुजुर्ग सास और उनके दो छोटे-छोटे बच्चे अकेले हैं। इन तमाम उलझनों के बावजूद कभी हिम्मत नहीं हारी। कोरोना काल में वह अपना हर दायित्व निभा रही हैं। उनके चेहरे पर थकान या शिकन तक नहीं दिखता। कोरोना वॉरियर ANM बबीता कुमारी ने बताया कि बीमार पति, बुजुर्ग सास और छोटे बच्चों की चिंता तो सताती है, लेकिन यह वक्त भी ऐसा है कि आमजन की सेवा सबसे जरूरी है। घर की बहुत याद आती है तो VIIDEO कॉल या फोन पर सबको ढाढस बंधा देती हूं। उन्होंने कहा कि सभी के मन में कहीं न कहीं अपने बच्चों व परिवार से दूर रहने का दर्द जरूर होता है, लेकिन वह इस दर्द को भुलाकर ड्यूटी निभा रही हैं। बबीता ने बताया कि अस्पताल के कई चिकित्सक व स्वास्थ्य कर्मी ड्यूटी के दौरान कोरोना पॉजिटिव हो गए हैं, जिससे स्टाफ की कमी है। कोरोना की दूसरी लहर भयंकर रूप धारण करती जा रही है, ऐसे में हमारा कर्तव्य है कि अपनी जिम्मेदारी को सही ढंग से निभाएं। यह एक जंग है, जिसमें योद्धा कैसे पीछे रह सकता है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
सेवा की मिसाल देखनी हो तो मधुबनी के घोघरडीहा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चले जाइए। यहां कार्यरत ANM बबीता कुमारी को देखकर दंग रह जाएंगे। घर में कोरोना संक्रमित पति अकेले पड़े हैं। दो छोटे बच्चे और बुजुर्ग सास की अलग चिंता, लेकिन ड्यूटी के दौरान चेहरे पर शिकन तक नहीं। महामारी में जिस सेवा से वह मरीजों के इलाज में जुटी रहती हैं, वह औरों के लिए प्रेरणा है। बबीता बीते कई महीनों से कोरोना योद्धा के रूप में बिना थके रोजाना अपनी ड्यूटी निभा रही हैं। ANM बबीता का घर खगड़िया है, जहां अकेली बुजुर्ग सास और उनके दो छोटे-छोटे बच्चे अकेले हैं। इन तमाम उलझनों के बावजूद कभी हिम्मत नहीं हारी। कोरोना काल में वह अपना हर दायित्व निभा रही हैं। उनके चेहरे पर थकान या शिकन तक नहीं दिखता। कोरोना वॉरियर ANM बबीता कुमारी ने बताया कि बीमार पति, बुजुर्ग सास और छोटे बच्चों की चिंता तो सताती है, लेकिन यह वक्त भी ऐसा है कि आमजन की सेवा सबसे जरूरी है। घर की बहुत याद आती है तो VIIDEO कॉल या फोन पर सबको ढाढस बंधा देती हूं। उन्होंने कहा कि सभी के मन में कहीं न कहीं अपने बच्चों व परिवार से दूर रहने का दर्द जरूर होता है, लेकिन वह इस दर्द को भुलाकर ड्यूटी निभा रही हैं। बबीता ने बताया कि अस्पताल के कई चिकित्सक व स्वास्थ्य कर्मी ड्यूटी के दौरान कोरोना पॉजिटिव हो गए हैं, जिससे स्टाफ की कमी है। कोरोना की दूसरी लहर भयंकर रूप धारण करती जा रही है, ऐसे में हमारा कर्तव्य है कि अपनी जिम्मेदारी को सही ढंग से निभाएं। यह एक जंग है, जिसमें योद्धा कैसे पीछे रह सकता है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
नाहन - बुराई पर अच्छाई की जीत के पर्व दशहरा को जिला मुख्यालय नाहन में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। शनिवार देर शाम को चौगान मैदान में आयोजित कार्यक्रम में उपायुक्त सिरमौर बीसी बडालिया ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। इस मौके पर जिला प्रशासन की ओर से मतदान के अधिकार को लेकर भी लोगों को जागरूक किया गया। शनिवार देर शाम को नगर परिषद की ओर से आयोजित दशहरा पर्व कार्यक्रम में उपायुक्त सिरमौर ने विजय दशमी के मौके पर रावण, कुंभकर्ण व मेघनाथ के पुतलों को आग लगाई। चौगान मैदान में पहली बार रावण के पुतले को रथ पर आरूढ़ किया गया था जो उपस्थित लोगों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा। लोगों ने नगर परिषद के इस नए प्रयास की न केवल सराहना की बल्कि सुझाव भी दिया कि जिला मुख्यालय में होने वाले जिला स्तरीय कार्यक्रम विजय दशमी के अवसर पर शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाने चाहिए। शहर के लोगों का कहना है कि नाहन शहर में कोई भी कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाता है, जबकि अन्य सभी शहरों व कस्बों में जिला स्तरीय व उपमंडलीय कई सांस्कृतिक संध्याएं लोगों के मनोरंजन के लिए आयोजित की जाती हैं।
नाहन - बुराई पर अच्छाई की जीत के पर्व दशहरा को जिला मुख्यालय नाहन में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। शनिवार देर शाम को चौगान मैदान में आयोजित कार्यक्रम में उपायुक्त सिरमौर बीसी बडालिया ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। इस मौके पर जिला प्रशासन की ओर से मतदान के अधिकार को लेकर भी लोगों को जागरूक किया गया। शनिवार देर शाम को नगर परिषद की ओर से आयोजित दशहरा पर्व कार्यक्रम में उपायुक्त सिरमौर ने विजय दशमी के मौके पर रावण, कुंभकर्ण व मेघनाथ के पुतलों को आग लगाई। चौगान मैदान में पहली बार रावण के पुतले को रथ पर आरूढ़ किया गया था जो उपस्थित लोगों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा। लोगों ने नगर परिषद के इस नए प्रयास की न केवल सराहना की बल्कि सुझाव भी दिया कि जिला मुख्यालय में होने वाले जिला स्तरीय कार्यक्रम विजय दशमी के अवसर पर शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाने चाहिए। शहर के लोगों का कहना है कि नाहन शहर में कोई भी कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाता है, जबकि अन्य सभी शहरों व कस्बों में जिला स्तरीय व उपमंडलीय कई सांस्कृतिक संध्याएं लोगों के मनोरंजन के लिए आयोजित की जाती हैं।
सामान नष्ट करने या बीमारी फैलाने वाले कीड़ों को नष्ट करने के काम में आते हैं। आजकल प्रचलित कीटाणुनाशकों में से एक बहुत अच्छा नाशक द्वितीय विश्वयुद्ध के समय अमेरिका के सरकारी रसायनज्ञों ने बनाया था । इस यौगिक का रासायनिक नाम डाईक्लोरो डाईफ़ेनिल ट्राईक्लोरोईथेन है और मेरा ख्याल है कि अब आप समझ गये होंगे कि इसे डी० डी० टी० ( पूरे का नाम का संक्षिप्त ) क्यों कहा जाता है । डी० डी० टी० का घोल जब हवा में छिड़का जाता है तो उसके रवों की एक पतली परत हर उस जगह पर जम जाती है जहां यह फुहार पड़ती है । इसके बाद महीनों तक ये रवे कुछ विशेष कीटाणुओं को मारते रहते हैं । इसके अलावा दर्जनों और कीटाणुनाशक हैं। कुछ फसलों पर पाउडर के रूप में छिड़के या घोल बनाकर फुहारों के रूप में छोड़े जाते हैं। दूसरे गैस के ही रूप में कीड़े मारते हैं । लकड़ी की चीजें : शहतीरों, प्लाइवुड और इमारती लकड़ी के अलावा लकड़ी का उपयोग प्लास्टिक के लिए सेल्यूलोज़ बनाने में होता है । लकड़ी से रासायनिक क्रियाओं द्वारा अल्कोहल, तेज़ाब, गोंद और चीनी तक बनाई जा सकती है । लकड़ी का एक बहुत फ़ायदेमंद उपयोग कागज़ बनाने में होता है । लकड़ी - साधारणतः स्प्रूस, पोलर या चीड़ -- पहले पीसकर लुगदी बनाई जाती है । बढ़िया किस्म का कागज़ बनाने के लिए रसायनों का उपयोग किया जाता है, जिससे दूषित पदार्थ हो जाते हैं शुद्ध सेल्यूलोज़ बच रहती है । लुगदी का रंग उड़ाकर मिट्टी या माड़ उसमें मिलाया जाता है और रेशों को जाल में बुनकर पतले तत्व बना लिये जाते हैं । तब उन्हें गर्म रोलरों पर दौड़ाकर उनकी सतह चिकनी बना ली जाती है । फ़ोटोग्राफ़ी : तस्वीर उतारने में हर कदम पर रसायन शास्त्र की ज़रूरत पड़ती है। जब आप कैमरे का बटन दबाकर फ़ोटो खींचते हैं तो उस दृश्य से आती प्रकाश की किरणें कैमरे के लेंस वाले छेद से प्रवेश करके 'फ़िल्म' पर प्रभाव डालती हैं। इससे फ़िल्म पर पुते चांदी के यौगिकों में रासायनिक परिवर्तन होते हैं । तब उसे एक रासायनिक घोल में स्थिर करके उलटा चित्र बना लिया जाता है । फिर उलटे चित्र को पार करती हुई रोशनी रसायनों की परत वाले एक कागज़ पर डाली जाती है और उसे स्थिर करके सीधा चित्र तैयार कर लिया जाता है । रंगीन फ़ोटोग्राफ़ी में इस्तेमाल होने वाली रासायनिक क्रियाएं इस हड्डी का चित्र सक्रिय परमाणु प्रकाश से लिया गया था । और जटिल होती हैं और उनमें स्वाभाविक रंग भरने के लिए विभिन्न रंगों को काम में लाया जाता है । परमाणु ऊर्जा : इसे तो असल में व्यष्टि ऊर्जा कहा जाना चाहिए क्योंकि इसका सम्बन्ध परमाणु के केन्द्र न्यष्टि से है । इसीलिये यह विषय रसायन शास्त्र का न होकर भौतिक विज्ञान का है । फिर भी रसायनज्ञ कुछ ऐसे पदार्थों को अलग और साफ़ करते हैं जो 'परमाणु भट्टियों को बनाने में काम आते हैं । 'परमाणु भट्टियों' को कुछ दिनों बाद शक्ति उत्पादन केन्द्रों के रूप में प्रयोग किया जाने लगेगा । 'परमाणु भट्टियों' के भीतर बनने वाले सक्रिय पदार्थ रसायनज्ञों को अपना काम आगे बढ़ाने में मदद करते हैं। किसी यौगिक में कुछ परमाणु सक्रिय बनाकर रसायनज्ञ अणुओं की रचना के बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त कर सकते हैं । जीव रसायनज्ञ पौधों या जानवरों को सक्रिय रसायन खिला कर पता लगाते हैं कि जानदार प्रारणी भोजन कैसे हज़म करते हैं । रसायन शास्त्र और आप रसायन शास्त्र और उसकी उपलब्धियों के बारे में पढ़ते समय आपने शायद सोचा होगाः "क्या मैं रसायन शास्त्र को अपने जीवन का ध्येय बना सकता हूं ?" आइये, हम इस सम्भावना पर विचार करें । अमेरिका में रसायन उद्योग में डेढ़ लाख से ज्यादा आदमी काम करते हैं और यह संख्या रोज़-ब-रोज़ बढ़ती ही जा रही है । कारखानों, विश्वविद्यालयों, अजायबघरों, शोधसंस्थाओं, अस्पतालों, सरकारी प्रयोगशालाओं, परीक्षात्मक प्रयोगशालाओं तथा अन्य अनेक जगहों पर रसायनज्ञों की ज़रूरत पड़ती है। यहां तरह-तरह के काम होते हैं और हर एक में एक विशेष प्रकार की ट्रेनिंग की ज़रूरत होती है । सबसे पहले तो शोध रसायनज्ञ होते हैं जो अपना सारा समय प्रयोग करने और नये सिद्धान्त बनाने में लगाते हैं, जिससे हमारा रसायन शास्त्र का ज्ञान बढ़ सके । ये लोग कालेजों में रसायन शास्त्र का अध्ययन करके और उसके बाद शोध करके डॉक्टर की उपाधि पहले ही ले चुके होते हैं। कुछ शोध रसायनज्ञ
सामान नष्ट करने या बीमारी फैलाने वाले कीड़ों को नष्ट करने के काम में आते हैं। आजकल प्रचलित कीटाणुनाशकों में से एक बहुत अच्छा नाशक द्वितीय विश्वयुद्ध के समय अमेरिका के सरकारी रसायनज्ञों ने बनाया था । इस यौगिक का रासायनिक नाम डाईक्लोरो डाईफ़ेनिल ट्राईक्लोरोईथेन है और मेरा ख्याल है कि अब आप समझ गये होंगे कि इसे डीशून्य डीशून्य टीशून्य क्यों कहा जाता है । डीशून्य डीशून्य टीशून्य का घोल जब हवा में छिड़का जाता है तो उसके रवों की एक पतली परत हर उस जगह पर जम जाती है जहां यह फुहार पड़ती है । इसके बाद महीनों तक ये रवे कुछ विशेष कीटाणुओं को मारते रहते हैं । इसके अलावा दर्जनों और कीटाणुनाशक हैं। कुछ फसलों पर पाउडर के रूप में छिड़के या घोल बनाकर फुहारों के रूप में छोड़े जाते हैं। दूसरे गैस के ही रूप में कीड़े मारते हैं । लकड़ी की चीजें : शहतीरों, प्लाइवुड और इमारती लकड़ी के अलावा लकड़ी का उपयोग प्लास्टिक के लिए सेल्यूलोज़ बनाने में होता है । लकड़ी से रासायनिक क्रियाओं द्वारा अल्कोहल, तेज़ाब, गोंद और चीनी तक बनाई जा सकती है । लकड़ी का एक बहुत फ़ायदेमंद उपयोग कागज़ बनाने में होता है । लकड़ी - साधारणतः स्प्रूस, पोलर या चीड़ -- पहले पीसकर लुगदी बनाई जाती है । बढ़िया किस्म का कागज़ बनाने के लिए रसायनों का उपयोग किया जाता है, जिससे दूषित पदार्थ हो जाते हैं शुद्ध सेल्यूलोज़ बच रहती है । लुगदी का रंग उड़ाकर मिट्टी या माड़ उसमें मिलाया जाता है और रेशों को जाल में बुनकर पतले तत्व बना लिये जाते हैं । तब उन्हें गर्म रोलरों पर दौड़ाकर उनकी सतह चिकनी बना ली जाती है । फ़ोटोग्राफ़ी : तस्वीर उतारने में हर कदम पर रसायन शास्त्र की ज़रूरत पड़ती है। जब आप कैमरे का बटन दबाकर फ़ोटो खींचते हैं तो उस दृश्य से आती प्रकाश की किरणें कैमरे के लेंस वाले छेद से प्रवेश करके 'फ़िल्म' पर प्रभाव डालती हैं। इससे फ़िल्म पर पुते चांदी के यौगिकों में रासायनिक परिवर्तन होते हैं । तब उसे एक रासायनिक घोल में स्थिर करके उलटा चित्र बना लिया जाता है । फिर उलटे चित्र को पार करती हुई रोशनी रसायनों की परत वाले एक कागज़ पर डाली जाती है और उसे स्थिर करके सीधा चित्र तैयार कर लिया जाता है । रंगीन फ़ोटोग्राफ़ी में इस्तेमाल होने वाली रासायनिक क्रियाएं इस हड्डी का चित्र सक्रिय परमाणु प्रकाश से लिया गया था । और जटिल होती हैं और उनमें स्वाभाविक रंग भरने के लिए विभिन्न रंगों को काम में लाया जाता है । परमाणु ऊर्जा : इसे तो असल में व्यष्टि ऊर्जा कहा जाना चाहिए क्योंकि इसका सम्बन्ध परमाणु के केन्द्र न्यष्टि से है । इसीलिये यह विषय रसायन शास्त्र का न होकर भौतिक विज्ञान का है । फिर भी रसायनज्ञ कुछ ऐसे पदार्थों को अलग और साफ़ करते हैं जो 'परमाणु भट्टियों को बनाने में काम आते हैं । 'परमाणु भट्टियों' को कुछ दिनों बाद शक्ति उत्पादन केन्द्रों के रूप में प्रयोग किया जाने लगेगा । 'परमाणु भट्टियों' के भीतर बनने वाले सक्रिय पदार्थ रसायनज्ञों को अपना काम आगे बढ़ाने में मदद करते हैं। किसी यौगिक में कुछ परमाणु सक्रिय बनाकर रसायनज्ञ अणुओं की रचना के बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त कर सकते हैं । जीव रसायनज्ञ पौधों या जानवरों को सक्रिय रसायन खिला कर पता लगाते हैं कि जानदार प्रारणी भोजन कैसे हज़म करते हैं । रसायन शास्त्र और आप रसायन शास्त्र और उसकी उपलब्धियों के बारे में पढ़ते समय आपने शायद सोचा होगाः "क्या मैं रसायन शास्त्र को अपने जीवन का ध्येय बना सकता हूं ?" आइये, हम इस सम्भावना पर विचार करें । अमेरिका में रसायन उद्योग में डेढ़ लाख से ज्यादा आदमी काम करते हैं और यह संख्या रोज़-ब-रोज़ बढ़ती ही जा रही है । कारखानों, विश्वविद्यालयों, अजायबघरों, शोधसंस्थाओं, अस्पतालों, सरकारी प्रयोगशालाओं, परीक्षात्मक प्रयोगशालाओं तथा अन्य अनेक जगहों पर रसायनज्ञों की ज़रूरत पड़ती है। यहां तरह-तरह के काम होते हैं और हर एक में एक विशेष प्रकार की ट्रेनिंग की ज़रूरत होती है । सबसे पहले तो शोध रसायनज्ञ होते हैं जो अपना सारा समय प्रयोग करने और नये सिद्धान्त बनाने में लगाते हैं, जिससे हमारा रसायन शास्त्र का ज्ञान बढ़ सके । ये लोग कालेजों में रसायन शास्त्र का अध्ययन करके और उसके बाद शोध करके डॉक्टर की उपाधि पहले ही ले चुके होते हैं। कुछ शोध रसायनज्ञ
रायपुर में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एक कांवड़ यात्रा में शामिल हुए। शिव भक्ति में मस्त भूपेश बघेल सड़क पर बोल बम का नारा लगाते हुए कंधे पर कांवड़ लेकर चलते दिखे । उनके साथ रायपुर पश्चिम के विधायक विकास उपाध्याय भी मौजूद थे। यह कार्यक्रम रायपुर के गुढ़ियारी स्थित मारुति मंगलम भवन में आयोजित हुआ। यहां पहले कांवड़ की मंत्रोच्चार के साथ पूजा की गई। इसके बाद भगवान शिव का आशीर्वाद लेकर कांवड़ यात्रा शुरू की गई। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल मच्छी तालाब स्थित हनुमान मंदिर में पूजा करने पहुंचे, यहां उन्होंने प्रदेश के लोगों के सुख समृद्धि की कामना की। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि सावन का यह त्योहार तप, त्याग का त्योहार है, जिसमें कांवड़ यात्रा के रूप में श्रद्धालुओं को भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करने का अवसर मिलता है, यह हमारी संस्कृति का अटूट हिस्सा है। मुख्यमंत्री पूजा अर्चना के बाद कुछ दूर कांवड़ लेकर पैदल यात्रा करते भी नजर आए । इस कावड़ यात्रा में गुढ़ियारी, दीनदयाल नगर, रायपुरा, सुंदर नगर, गंगनिया जैसे इलाकों से 500 से अधिक कावड़िए रायपुरा के महादेव घाट हाटकेश्वर धाम के लिए रवाना हुए। This website follows the DNPA Code of Ethics.
रायपुर में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एक कांवड़ यात्रा में शामिल हुए। शिव भक्ति में मस्त भूपेश बघेल सड़क पर बोल बम का नारा लगाते हुए कंधे पर कांवड़ लेकर चलते दिखे । उनके साथ रायपुर पश्चिम के विधायक विकास उपाध्याय भी मौजूद थे। यह कार्यक्रम रायपुर के गुढ़ियारी स्थित मारुति मंगलम भवन में आयोजित हुआ। यहां पहले कांवड़ की मंत्रोच्चार के साथ पूजा की गई। इसके बाद भगवान शिव का आशीर्वाद लेकर कांवड़ यात्रा शुरू की गई। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल मच्छी तालाब स्थित हनुमान मंदिर में पूजा करने पहुंचे, यहां उन्होंने प्रदेश के लोगों के सुख समृद्धि की कामना की। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि सावन का यह त्योहार तप, त्याग का त्योहार है, जिसमें कांवड़ यात्रा के रूप में श्रद्धालुओं को भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करने का अवसर मिलता है, यह हमारी संस्कृति का अटूट हिस्सा है। मुख्यमंत्री पूजा अर्चना के बाद कुछ दूर कांवड़ लेकर पैदल यात्रा करते भी नजर आए । इस कावड़ यात्रा में गुढ़ियारी, दीनदयाल नगर, रायपुरा, सुंदर नगर, गंगनिया जैसे इलाकों से पाँच सौ से अधिक कावड़िए रायपुरा के महादेव घाट हाटकेश्वर धाम के लिए रवाना हुए। This website follows the DNPA Code of Ethics.
अंक ज्योतिष की गणना में किसी व्यक्ति का मूलांक उस व्यक्ति की तारीख का योग होता है। उदाहरण के लिए समझिए यदि किसी व्यक्ति का जन्म 23 अप्रैल को हुआ है तो उसकी जन्म तारीख के अंकों का योग 2+3=5 आता है। यानि 5 उस व्यक्ति का मूलांक कहा जाएगा। अगर किसी की जन्मतिथि दो अंकों यानी 11 है तो उसका मूलांक 1+1= 2 होगा। वहीं जन्म तिथि, जन्म माह और जन्म वर्ष का कुल योग भाग्यांक कहलाता है। जैसे अगर किसी का जन्म 22-04-1996 को हुआ है तो इन सभी अंकों के योग को भाग्यांक कहा जाता है। 2+2+0+4+1+9+9+6=33=6 यानि उसका भाग्यांक 6 है। इस अंक ज्योतिष को पढ़कर आप अपनी दैनिक योजनाओं को सफल बनाने में कामयाब रहेंगे। जैसे दैनिक अंक ज्योतिष आपके मूलांक के आधार पर आपको यह बताएगा कि आज के दिन आपके सितारे आपके अनुकूल हैं या नहीं। आज आपको किन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है या फिर किस तरह के अवसर आपको प्राप्त हो सकते हैं। दैनिक अंक ज्योतिष की भविष्यवाणी को पढ़कर आप दोनों ही परिस्थिति के लिए तैयार हो सकते हैं। तो चलिए अंक शास्त्र के माध्यम से जानते हैं आपका मूलांक, शुभ अंक और लकी कलर कौन सा है। आज कुछ लोगों के साथ आपकी पैसों की लेनदेन हो सकती है। लेन-देन करते समय सावधानी बरतें। आज जीवनसाथी से मतभेद समाप्त हो सकता है। प्यार के पल लौटेंगे। काम को लेकर चिंता रहेगी परंतु जल्दी ही परिस्थितियों में सुधार होगा। आज आप बच्चों के साथ समय अधिक से अधिक बिताएं। शाम को साथियों का साथ अच्छा बीतेगा। महत्वपूर्ण लोगों से बातचीत करते समय अपने शब्दो का चयन सही करें। भौतिक आवश्यकताओं की खरीददारी को लेकर जीवनसाथी से वाद-विवाद हो सकता है। आज आपको सुनहरे और अच्छे परिणाम मिलेंगे। परीक्षा परिणाम आपके पक्ष में आएंगे। अपने साथी के लिए कुछ बेहतरीन पकवान बनाएंगे। आज का दिन आपके कमजोर पड़े रिश्तों में जोश भर सकता है। खुशी का माहौल रहेगा। नौकरीपेशा लोगों को थोड़ी समस्या रहेगी लेकिन शीघ्र ही इसका निदान हो जायेगा। प्रचार सम्बन्धी अपनी गतिविधियों में व्यस्त रहेंगे। जीवनसाथी से प्रेम-सम्बन्ध मधुर बना रहेगा।
अंक ज्योतिष की गणना में किसी व्यक्ति का मूलांक उस व्यक्ति की तारीख का योग होता है। उदाहरण के लिए समझिए यदि किसी व्यक्ति का जन्म तेईस अप्रैल को हुआ है तो उसकी जन्म तारीख के अंकों का योग दो+तीन=पाँच आता है। यानि पाँच उस व्यक्ति का मूलांक कहा जाएगा। अगर किसी की जन्मतिथि दो अंकों यानी ग्यारह है तो उसका मूलांक एक+एक= दो होगा। वहीं जन्म तिथि, जन्म माह और जन्म वर्ष का कुल योग भाग्यांक कहलाता है। जैसे अगर किसी का जन्म बाईस अप्रैल एक हज़ार नौ सौ छियानवे को हुआ है तो इन सभी अंकों के योग को भाग्यांक कहा जाता है। दो+दो+शून्य+चार+एक+नौ+नौ+छः=तैंतीस=छः यानि उसका भाग्यांक छः है। इस अंक ज्योतिष को पढ़कर आप अपनी दैनिक योजनाओं को सफल बनाने में कामयाब रहेंगे। जैसे दैनिक अंक ज्योतिष आपके मूलांक के आधार पर आपको यह बताएगा कि आज के दिन आपके सितारे आपके अनुकूल हैं या नहीं। आज आपको किन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है या फिर किस तरह के अवसर आपको प्राप्त हो सकते हैं। दैनिक अंक ज्योतिष की भविष्यवाणी को पढ़कर आप दोनों ही परिस्थिति के लिए तैयार हो सकते हैं। तो चलिए अंक शास्त्र के माध्यम से जानते हैं आपका मूलांक, शुभ अंक और लकी कलर कौन सा है। आज कुछ लोगों के साथ आपकी पैसों की लेनदेन हो सकती है। लेन-देन करते समय सावधानी बरतें। आज जीवनसाथी से मतभेद समाप्त हो सकता है। प्यार के पल लौटेंगे। काम को लेकर चिंता रहेगी परंतु जल्दी ही परिस्थितियों में सुधार होगा। आज आप बच्चों के साथ समय अधिक से अधिक बिताएं। शाम को साथियों का साथ अच्छा बीतेगा। महत्वपूर्ण लोगों से बातचीत करते समय अपने शब्दो का चयन सही करें। भौतिक आवश्यकताओं की खरीददारी को लेकर जीवनसाथी से वाद-विवाद हो सकता है। आज आपको सुनहरे और अच्छे परिणाम मिलेंगे। परीक्षा परिणाम आपके पक्ष में आएंगे। अपने साथी के लिए कुछ बेहतरीन पकवान बनाएंगे। आज का दिन आपके कमजोर पड़े रिश्तों में जोश भर सकता है। खुशी का माहौल रहेगा। नौकरीपेशा लोगों को थोड़ी समस्या रहेगी लेकिन शीघ्र ही इसका निदान हो जायेगा। प्रचार सम्बन्धी अपनी गतिविधियों में व्यस्त रहेंगे। जीवनसाथी से प्रेम-सम्बन्ध मधुर बना रहेगा।
यूपी के प्रयागराज में नैनी जेल का कैदी पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। जिसके बाद पुलिस ने 25 हजार का ईनाम घोषित कर दिया है। जेल में खून की उल्टियां होने की वजह से शहर के एसआरएन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जानलेवा हमला होने पर रात के अंधेरे में मवेशीबाड़े के अहाते प्रेमी भागकर दूसरे मकान में घुस गया, जबकि घायल अवस्था में किशोरी भागते हुए खेत में जाकर बेहोश हो गई। थाना प्रभारी किशन सिंह व अमौली चौकी प्रभारी रामनरेश यादव पुलिस टीम के साथ पहुंचे और हमलावर पिता को हिरासत में लिया। जौनपुर में रविवार को निकाह के बाद एक दुल्हन ने ससुराल जाने से इंकार कर दिया। यहां बारातियों को बिना दुल्हन के ही वापस लौटना पड़ा। दूल्हे के दिव्यांग होने का पता चलते ही यह पूरा मामला सामने आया। हरदोई के शाहाबाद कोतवाली क्षेत्र के हरदोई-शाहजहांपुर हाइवे पर उधरनपुर के पास एक बाइक सवार सांड़ से टकरा गई है। साड़ से टकराने से चालक युवक के सीने में सींग घुस गई, जिससे उसकी मौत हो गई है। महिला के सब्र का बांध टूटते ही अपने शराबी पति को सबक सिखाने के लिए जमीन पर गिराकर मारा। इतना ही नहीं उसको अच्छे से सबक सिखाने के लिए रस्सी के जरिए खंभे में बांध दिया। शराबी पति रोजाना अपने साथियों के साथ आकर मारपीट करता था। गोरखपुर की जिस सीट से सीएम योगी आदित्यनाथ वर्तमान में विधायक है उस पर कभी डॉ राधा मोहन दास अग्रवाल विधायक हुआ करते थे। 1998 में राधा मोहन दास अग्रवाल सीएम योगी के चुनाव संयोजक हुआ करते थे। डेडबॉडी को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा है। हालांकि पता चला है कि लड़की के माता-पिता घर पर नहीं थे और जब घर लौटे तो उनकी बेटी का शव खून से लथपथ मिला। शरीर पर कई जगह चोट के निशान हैं। लड़की 15 साल की थी और इस साल उसने 10वीं के पेपर दिए थे। कानपुर देहात के मूसानगर के जसौरा गांव से लोग वैन से चित्रकूट दर्शन के लिए जा रहे थे। मुगल रोड पर पीछे से आई प्राइवेट बस ने वैन में टक्कर मार दी। टक्कर के बाद वैन पलट गई और बस सड़क किनारे खड्ड में घुस गई। हादसे में वैन सवार पांच लोगों की मौत हो गई, वहीं बस में सवार चार यात्री घायल हुए हैं। यूपी के महोबा जिले में स्वास्थ्यकर्मियों की शर्मनाक हरकत सामने आई है। बेटे के इलाज के लिए पहुंची मां ने अपने जेवर बेचे लेकिन उसके बाद भी खून की जगह ग्लूकोज की बोतल में लाल रंग मिलाकर चढ़ा दिया। जिसके बाद से बेटे की हालत बिगड़ने लगी। लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में आशीष मिश्रा की जमानत पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में सोमवार को सुनवाई होगी। आशीष मिश्रा को दी गई जमानत को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था जिसके बाद इस मामले में सुनवाई हो रही थी।
यूपी के प्रयागराज में नैनी जेल का कैदी पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। जिसके बाद पुलिस ने पच्चीस हजार का ईनाम घोषित कर दिया है। जेल में खून की उल्टियां होने की वजह से शहर के एसआरएन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जानलेवा हमला होने पर रात के अंधेरे में मवेशीबाड़े के अहाते प्रेमी भागकर दूसरे मकान में घुस गया, जबकि घायल अवस्था में किशोरी भागते हुए खेत में जाकर बेहोश हो गई। थाना प्रभारी किशन सिंह व अमौली चौकी प्रभारी रामनरेश यादव पुलिस टीम के साथ पहुंचे और हमलावर पिता को हिरासत में लिया। जौनपुर में रविवार को निकाह के बाद एक दुल्हन ने ससुराल जाने से इंकार कर दिया। यहां बारातियों को बिना दुल्हन के ही वापस लौटना पड़ा। दूल्हे के दिव्यांग होने का पता चलते ही यह पूरा मामला सामने आया। हरदोई के शाहाबाद कोतवाली क्षेत्र के हरदोई-शाहजहांपुर हाइवे पर उधरनपुर के पास एक बाइक सवार सांड़ से टकरा गई है। साड़ से टकराने से चालक युवक के सीने में सींग घुस गई, जिससे उसकी मौत हो गई है। महिला के सब्र का बांध टूटते ही अपने शराबी पति को सबक सिखाने के लिए जमीन पर गिराकर मारा। इतना ही नहीं उसको अच्छे से सबक सिखाने के लिए रस्सी के जरिए खंभे में बांध दिया। शराबी पति रोजाना अपने साथियों के साथ आकर मारपीट करता था। गोरखपुर की जिस सीट से सीएम योगी आदित्यनाथ वर्तमान में विधायक है उस पर कभी डॉ राधा मोहन दास अग्रवाल विधायक हुआ करते थे। एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में राधा मोहन दास अग्रवाल सीएम योगी के चुनाव संयोजक हुआ करते थे। डेडबॉडी को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा है। हालांकि पता चला है कि लड़की के माता-पिता घर पर नहीं थे और जब घर लौटे तो उनकी बेटी का शव खून से लथपथ मिला। शरीर पर कई जगह चोट के निशान हैं। लड़की पंद्रह साल की थी और इस साल उसने दसवीं के पेपर दिए थे। कानपुर देहात के मूसानगर के जसौरा गांव से लोग वैन से चित्रकूट दर्शन के लिए जा रहे थे। मुगल रोड पर पीछे से आई प्राइवेट बस ने वैन में टक्कर मार दी। टक्कर के बाद वैन पलट गई और बस सड़क किनारे खड्ड में घुस गई। हादसे में वैन सवार पांच लोगों की मौत हो गई, वहीं बस में सवार चार यात्री घायल हुए हैं। यूपी के महोबा जिले में स्वास्थ्यकर्मियों की शर्मनाक हरकत सामने आई है। बेटे के इलाज के लिए पहुंची मां ने अपने जेवर बेचे लेकिन उसके बाद भी खून की जगह ग्लूकोज की बोतल में लाल रंग मिलाकर चढ़ा दिया। जिसके बाद से बेटे की हालत बिगड़ने लगी। लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में आशीष मिश्रा की जमानत पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में सोमवार को सुनवाई होगी। आशीष मिश्रा को दी गई जमानत को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था जिसके बाद इस मामले में सुनवाई हो रही थी।
हरीश यादव महासमुंद- प्रदेश के प्रमुख बार अभ्यारण्य से जंगलो में छोड़े गए दो काले हिरणों की मौत हो गई। जिसमें एक की कुत्ते के काटने से एवं दूसरे की मौत खाना न पचने के कारण होना बताया जा रहा है। ज्ञात हो कि 4 वर्ष पहले बलौदाबाजार वनमंडल के बारनवापारा अभयारण्य में कोई 50 काले हिरणों को कानन पेंडारी जंगल बिलासपुर से लाया गया था। इन्हें बारनवापारा के पास एक बाडा बना कर रखा गया था। जो अभी तक वहीं रखे हुए पले बढ़े। लिहाजा अब काले हिरणों का कुनबा बढ़कर 80 पार हो गया है। विगत पांच वर्षों से बाड़े में कैद काले हिरण अब जंगल मे घूम कर अपना पेट भरने से परहेज करते दिख रहे है। लिहाजा छोड़े गए अधिकांस काले हिरण वन ग्रामो के आसपास ही नजर आ रहे है। विगत सप्ताह प्रायोगिक तौर पर 11 काले हिरण छोड़े गए उसके बाद जंगल के माहौल में ढालने के लिए जंगल के अंदर वनभैंसा के लिए बनाए गए एक बाड़े में उसमें लाये गए हिरणों में से कुछ और काले हिरणों को जंगल मे छोड़ा गया था। जिससे छोड़े गए हिरणों की संख्या 40 हो गयी थी। इनमे 17 नर एवं 23 मादा हैं। वन विभाग के सूत्रों के अनुसार जंगल के अंदर स्थित खैर छापर स्थित वनभैसों के लिए बनाए गए बाड़े में रखा गया है। ये बाड़ा प्राकृतिक तौर पर हिरणों के रहने के लायक समझकर उन्हें वहां रख दिया गया। परन्तु, वहां एक काले हिरण की मौत हो गई। जिसका पोस्टमॉर्टम करवा कर उसका अंतिम संस्कार करवा दिया गया। पोस्टमॉर्टम करने वाले पशु चिकित्सक लोकेश वर्मा ने बताया कि खाना न पचने के कारण हिरण का पेट फूल गया था, जिससे उसकी मौत हो गई। वही दूसरा हिरन देबपुर वन परिक्षेत्र के तहत ग्राम पकरीद के मुहाने पर आवारा कुत्तों के काटने से मारा गया। इसका भी पोस्टमार्टम करवा कर अंतिम संस्कार कर दिया गया। वन विभाग द्वारा काले हिरणों को लगभग 10 दिनों तक जंगल स्थित वनभैंसा बाड़े में निगरानी में रखकर 11 फरवरी को पहली खेप जंगल में छोड़ा गया तथा दूसरी खेप को 4 मार्च को जंगल में छोड़ा गया। इस तरह 17 नर एवं 23 मादाओं को जंगल में छोड़ा गया है।
हरीश यादव महासमुंद- प्रदेश के प्रमुख बार अभ्यारण्य से जंगलो में छोड़े गए दो काले हिरणों की मौत हो गई। जिसमें एक की कुत्ते के काटने से एवं दूसरे की मौत खाना न पचने के कारण होना बताया जा रहा है। ज्ञात हो कि चार वर्ष पहले बलौदाबाजार वनमंडल के बारनवापारा अभयारण्य में कोई पचास काले हिरणों को कानन पेंडारी जंगल बिलासपुर से लाया गया था। इन्हें बारनवापारा के पास एक बाडा बना कर रखा गया था। जो अभी तक वहीं रखे हुए पले बढ़े। लिहाजा अब काले हिरणों का कुनबा बढ़कर अस्सी पार हो गया है। विगत पांच वर्षों से बाड़े में कैद काले हिरण अब जंगल मे घूम कर अपना पेट भरने से परहेज करते दिख रहे है। लिहाजा छोड़े गए अधिकांस काले हिरण वन ग्रामो के आसपास ही नजर आ रहे है। विगत सप्ताह प्रायोगिक तौर पर ग्यारह काले हिरण छोड़े गए उसके बाद जंगल के माहौल में ढालने के लिए जंगल के अंदर वनभैंसा के लिए बनाए गए एक बाड़े में उसमें लाये गए हिरणों में से कुछ और काले हिरणों को जंगल मे छोड़ा गया था। जिससे छोड़े गए हिरणों की संख्या चालीस हो गयी थी। इनमे सत्रह नर एवं तेईस मादा हैं। वन विभाग के सूत्रों के अनुसार जंगल के अंदर स्थित खैर छापर स्थित वनभैसों के लिए बनाए गए बाड़े में रखा गया है। ये बाड़ा प्राकृतिक तौर पर हिरणों के रहने के लायक समझकर उन्हें वहां रख दिया गया। परन्तु, वहां एक काले हिरण की मौत हो गई। जिसका पोस्टमॉर्टम करवा कर उसका अंतिम संस्कार करवा दिया गया। पोस्टमॉर्टम करने वाले पशु चिकित्सक लोकेश वर्मा ने बताया कि खाना न पचने के कारण हिरण का पेट फूल गया था, जिससे उसकी मौत हो गई। वही दूसरा हिरन देबपुर वन परिक्षेत्र के तहत ग्राम पकरीद के मुहाने पर आवारा कुत्तों के काटने से मारा गया। इसका भी पोस्टमार्टम करवा कर अंतिम संस्कार कर दिया गया। वन विभाग द्वारा काले हिरणों को लगभग दस दिनों तक जंगल स्थित वनभैंसा बाड़े में निगरानी में रखकर ग्यारह फरवरी को पहली खेप जंगल में छोड़ा गया तथा दूसरी खेप को चार मार्च को जंगल में छोड़ा गया। इस तरह सत्रह नर एवं तेईस मादाओं को जंगल में छोड़ा गया है।
जान लेविस किलेद्वारा चित्रित फिलाडेलिकमा के नगर चुनाव ( १८१६ ) का दृश्य । बाहिनी ओर की पेंक्ति में मतदाता भीतर बैठे बलकों को अपने मत-पत्र मे रहे है । मताधिकार के प्रसार ने शिक्षा की कल्पना को एक नयी दिशा प्रदान की क्योंकि स्पष्ट दृष्टा राजनीतिज्ञों ने समझ लिया कि अशिक्षा और सार्वजनिक मताधिकार मिलकर कैसी आपत्ति उत्पन्न कर सकते हैं। न्यूयार्क के डी विट क्लिन्टन, इलीनोय के अब्राहम लिंकन, मैसाचुसेट्स के हारेस मान, जैसे व्यक्तियों के प्रयत्नों को नगरों में संगठित किए जाने वाले अविरल मजदूर प्रदर्शनों और आन्दोलनों से बड़ा बल मिला। मज़दूर नेताओं ने मांग की कि बिना किसी दानशीलता की भावना के ऐसे कर-समर्थित और निशुल्क स्कूल स्थापित किए जाएं जिनमें हर बच्चे का निस्संकोच प्रवेश हो सके । १८३० में फिलाडेल्फिया के कामगारों ने कहा, मच्चे ज्ञान के व्यापक प्रसारण के बिना वास्तविक स्वाधीनता नहीं हो सकतो... जब तक सर्वसाधारण के लिए समान शिक्षा तथा समान साधन उपलब्ध नहीं हो जाते तब तक स्वाधीनता एक अर्थहीन शब्द है और समानता एक खोखली छाया ।" धीरे-धीरे एक राज्य के बाद दूसरे में वैधानिक कार्रवाई के द्वारा निःशुल्क शिक्षा संयोजित को गयो । १८४०-५० के बीज उत्तर में पब्लिक स्कूलों की पद्धति सर्वसामान्य हो चुकी थी और अन्य क्षेत्रों में उसको प्राप्ति के लिए संघर्ष होता रहा जब तक कि उनकी जीत नहीं हो गयी । उस आदर्शवाद ने, जिसने पुरुषों को प्राचीन बेड़ियों से मुक्त कराया, नारियों को समाज में अपनी असमान स्थिति को समझने के लिए बाध्य किया। उपनिवेशकाल से अविवाहित स्त्री को लगभग उतने हो कानूनी अधिकार में जितने पुरुष को । पर रिवाज के अनुसार शीघ्र हो विवाह कर लेना जरूरी माना जाता था जिसके बाद कानून को दृष्टि में उसका अपना व्यक्तित्व लुप्तप्रायः हो जाता था। स्त्री शिक्षा अधिकतर पढ़ने-लिखने, गाने-नाचते और सोने-काढ़ने तक ही सीमित थो । और हां, स्त्रियों को मतदान का अधिकार भी नहीं था । एक उन्नत विचारों वाली स्काटिश महिला फांसिस राइट के अमरीका आगमन के बाद वहां नारियों में जागृति आरम्भ हुई। बड़ी-बड़ी भीड़ों के बीच उसके जाने तथा धर्मशास्त्र और स्त्रियों के अधिकारों पर व्याख्यान देने से जनता को बहुत आश्चर्य हुआ । फिर भी उसको देखादेखी फिलाडेल्फिया की क्वेरेसलूक्रेटिया मोट, सूसन बो. ऐन्थनी और ऐलोजाबेथ केडी स्टैन्टन जैसी बड़ी विभूतियों को सक्रिय होने को प्रेरणा दी। उन्होंने पुरुषों तथा बहुत-सी स्त्रियों की पूजा को झलते हुए दामता- उन्मूलन, नारी अधिकार तथा मजदूर कल्याण के क्षेत्रों में अपनी शक्ति लगाई । १८४८ में संसार के इतिहास का सर्वप्रथम नारी अधिकार सम्मेलन सेनेका फाल्म, ( न्यूयार्क) में हुआ । प्रतिनिधियों ने घोषणा पत्र तैयार किया
जान लेविस किलेद्वारा चित्रित फिलाडेलिकमा के नगर चुनाव का दृश्य । बाहिनी ओर की पेंक्ति में मतदाता भीतर बैठे बलकों को अपने मत-पत्र मे रहे है । मताधिकार के प्रसार ने शिक्षा की कल्पना को एक नयी दिशा प्रदान की क्योंकि स्पष्ट दृष्टा राजनीतिज्ञों ने समझ लिया कि अशिक्षा और सार्वजनिक मताधिकार मिलकर कैसी आपत्ति उत्पन्न कर सकते हैं। न्यूयार्क के डी विट क्लिन्टन, इलीनोय के अब्राहम लिंकन, मैसाचुसेट्स के हारेस मान, जैसे व्यक्तियों के प्रयत्नों को नगरों में संगठित किए जाने वाले अविरल मजदूर प्रदर्शनों और आन्दोलनों से बड़ा बल मिला। मज़दूर नेताओं ने मांग की कि बिना किसी दानशीलता की भावना के ऐसे कर-समर्थित और निशुल्क स्कूल स्थापित किए जाएं जिनमें हर बच्चे का निस्संकोच प्रवेश हो सके । एक हज़ार आठ सौ तीस में फिलाडेल्फिया के कामगारों ने कहा, मच्चे ज्ञान के व्यापक प्रसारण के बिना वास्तविक स्वाधीनता नहीं हो सकतो... जब तक सर्वसाधारण के लिए समान शिक्षा तथा समान साधन उपलब्ध नहीं हो जाते तब तक स्वाधीनता एक अर्थहीन शब्द है और समानता एक खोखली छाया ।" धीरे-धीरे एक राज्य के बाद दूसरे में वैधानिक कार्रवाई के द्वारा निःशुल्क शिक्षा संयोजित को गयो । एक हज़ार आठ सौ चालीस-पचास के बीज उत्तर में पब्लिक स्कूलों की पद्धति सर्वसामान्य हो चुकी थी और अन्य क्षेत्रों में उसको प्राप्ति के लिए संघर्ष होता रहा जब तक कि उनकी जीत नहीं हो गयी । उस आदर्शवाद ने, जिसने पुरुषों को प्राचीन बेड़ियों से मुक्त कराया, नारियों को समाज में अपनी असमान स्थिति को समझने के लिए बाध्य किया। उपनिवेशकाल से अविवाहित स्त्री को लगभग उतने हो कानूनी अधिकार में जितने पुरुष को । पर रिवाज के अनुसार शीघ्र हो विवाह कर लेना जरूरी माना जाता था जिसके बाद कानून को दृष्टि में उसका अपना व्यक्तित्व लुप्तप्रायः हो जाता था। स्त्री शिक्षा अधिकतर पढ़ने-लिखने, गाने-नाचते और सोने-काढ़ने तक ही सीमित थो । और हां, स्त्रियों को मतदान का अधिकार भी नहीं था । एक उन्नत विचारों वाली स्काटिश महिला फांसिस राइट के अमरीका आगमन के बाद वहां नारियों में जागृति आरम्भ हुई। बड़ी-बड़ी भीड़ों के बीच उसके जाने तथा धर्मशास्त्र और स्त्रियों के अधिकारों पर व्याख्यान देने से जनता को बहुत आश्चर्य हुआ । फिर भी उसको देखादेखी फिलाडेल्फिया की क्वेरेसलूक्रेटिया मोट, सूसन बो. ऐन्थनी और ऐलोजाबेथ केडी स्टैन्टन जैसी बड़ी विभूतियों को सक्रिय होने को प्रेरणा दी। उन्होंने पुरुषों तथा बहुत-सी स्त्रियों की पूजा को झलते हुए दामता- उन्मूलन, नारी अधिकार तथा मजदूर कल्याण के क्षेत्रों में अपनी शक्ति लगाई । एक हज़ार आठ सौ अड़तालीस में संसार के इतिहास का सर्वप्रथम नारी अधिकार सम्मेलन सेनेका फाल्म, में हुआ । प्रतिनिधियों ने घोषणा पत्र तैयार किया
ऐंग्लो-इंडियन शकीरा ने भी तिहाड़ में साढ़े चार साल बिताए हैं। यह युवती बालविहार में शिक्षिका थी । वह कहती हैं, अभी तक मेरे मामले की सुनवाई शुरू भी नहीं हुई। न्याय व्यवस्था के साथ यही बुराई है। मामले घिसटते जाते हैं और अगर आप रिहा हो भी गए तो पता चलता है कि दोषी होने पर जितनी सज़ा मिलती, निर्दोष होने पर भी आप उसका आधे से अधिक हिस्सा तो काट ही चुके हैं। मेरी सहेली मारिया का ही मामला ले लीजिए । स्पेन से भारत घूमने आई वह लड़की यहां करीब-करीब छः साल बंद रही। पिछले हफ्ते ही वह रिहा हुई है । " एक भूतपूर्व अंग्रेज़ सैनिक माइकल पर भांग की तस्करी का आरोप है । वह सात वर्ष से अधिक हवालात में बिता चुका है। वह क्या महसूस करता है ? "कुंठा। हां, और क्रोध। मैं दैहिक स्तर पर जीने वाला आदमी हूं, और नास्तिक भी। मुझे सिद्धांतों में भी विश्वास नहीं है। खुद देखे बिना मुझे किसी बात पर यकीन नहीं आता। इस हवालात ने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी है, मेरे अस्तित्व को तबाह कर दिया है । इसने मेरे और मेरी सह-अभियुक्त मित्र के बीच के रिश्तों को तबाह कर दिया है। वह यहीं महिला विभाग में है। जज तो, लगता है, जान-बूझकर फ़ैसला टाल रहे हैं। छः अलग-अलग न्यायाधीशों ने मेरा मुकदमा सुना है, पर सब मानो इसे टालते ही जा रहे हैं। " ये लोग, और इन जैसे ही और भी अनेक लोग देश की बुरी तरह अवरुद्ध न्याय-व्यवस्था के 'शिकार' हैं। न्यायपालिका पर इतना अधिक बोझ है कि विचाराधीन कैदियों को जरूरत से बहुत-बहुत अधिक समय जेल की हवालात में बिताना पड़ता है। किरण को विरासत में यही कुछ मिला था । 1 मई, 1993 को वह जेल की नई इंस्पेक्टरजनरल के रूप में नियुक्त हुई । तिहाड़ जेल के संचालन का जो काम उन्हें सौंपा गया था उसे कोई भी खुशी से संभालने को शायद ही राज़ी होता।
ऐंग्लो-इंडियन शकीरा ने भी तिहाड़ में साढ़े चार साल बिताए हैं। यह युवती बालविहार में शिक्षिका थी । वह कहती हैं, अभी तक मेरे मामले की सुनवाई शुरू भी नहीं हुई। न्याय व्यवस्था के साथ यही बुराई है। मामले घिसटते जाते हैं और अगर आप रिहा हो भी गए तो पता चलता है कि दोषी होने पर जितनी सज़ा मिलती, निर्दोष होने पर भी आप उसका आधे से अधिक हिस्सा तो काट ही चुके हैं। मेरी सहेली मारिया का ही मामला ले लीजिए । स्पेन से भारत घूमने आई वह लड़की यहां करीब-करीब छः साल बंद रही। पिछले हफ्ते ही वह रिहा हुई है । " एक भूतपूर्व अंग्रेज़ सैनिक माइकल पर भांग की तस्करी का आरोप है । वह सात वर्ष से अधिक हवालात में बिता चुका है। वह क्या महसूस करता है ? "कुंठा। हां, और क्रोध। मैं दैहिक स्तर पर जीने वाला आदमी हूं, और नास्तिक भी। मुझे सिद्धांतों में भी विश्वास नहीं है। खुद देखे बिना मुझे किसी बात पर यकीन नहीं आता। इस हवालात ने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी है, मेरे अस्तित्व को तबाह कर दिया है । इसने मेरे और मेरी सह-अभियुक्त मित्र के बीच के रिश्तों को तबाह कर दिया है। वह यहीं महिला विभाग में है। जज तो, लगता है, जान-बूझकर फ़ैसला टाल रहे हैं। छः अलग-अलग न्यायाधीशों ने मेरा मुकदमा सुना है, पर सब मानो इसे टालते ही जा रहे हैं। " ये लोग, और इन जैसे ही और भी अनेक लोग देश की बुरी तरह अवरुद्ध न्याय-व्यवस्था के 'शिकार' हैं। न्यायपालिका पर इतना अधिक बोझ है कि विचाराधीन कैदियों को जरूरत से बहुत-बहुत अधिक समय जेल की हवालात में बिताना पड़ता है। किरण को विरासत में यही कुछ मिला था । एक मई, एक हज़ार नौ सौ तिरानवे को वह जेल की नई इंस्पेक्टरजनरल के रूप में नियुक्त हुई । तिहाड़ जेल के संचालन का जो काम उन्हें सौंपा गया था उसे कोई भी खुशी से संभालने को शायद ही राज़ी होता।
केन्द्र सरकार के खाद्य मामलों के मंत्रालय के तहत आने वाले फूड एंड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन की ओर से राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों को जारी की गई एडवायजरी में कहा गया है कि कोविड19 महामारी के मौजूदा दौर में ऐसी कई रिपोर्ट्स सामने आई हैं कि गरीब, कमजोर और वंचित वर्ग के अभी भी कई लोग ऐसे हैं जिनका राशन कार्ड नहीं बना है। उन्हें अनाज की बेहद ज्यादा जरूरत है लेकिन वे राशन कार्ड बनवाने में सक्षम नहीं हैं। कुछ गरीब और जरूरतमंद लोग ऐसे भी हैं, जिनके पास हो सकता है कि घर के पते का प्रमाण न हो और इसलिए उनके लिए राशन कार्ड बनवाना मुश्किल है। एडवायजरी में आगे कहा गया है कि इसलिए राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों से गुजारिश की जाती है कि वे शहरी और ग्रामीण इलाकों में गरीब और वंचित वर्ग के लोगों तक पहुंच विकसित करने के लिए एक स्पेशल ड्राइव चलाएं और जिनके राशन कार्ड न बने हों, उनके राशन कार्ड बनाए जाएं। इस बारे में विभाग को 15 दिन की एक रिपोर्ट भेजी जाए। कोरोनावायरस की दूसरी लहर के मद्देनजर केंद्र सरकार ने गरीब परिवारों के लिए एक बार फिर प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PM Gareeb Kalyan Ann Yojana) का ऐलान किया हुआ है। इस योजना के तहत केन्द्र सरकार राशनकार्ड धारकों को मई और जून महीने में प्रति व्यक्ति 5 किलो अतिरिक्त अन्न (चावल/गेहूं) मुफ्त में दे रही है। यह मुफ्त 5 किलो अनाज, राशन कार्ड पर रहने वाले अनाज के कोटे के अतिरिक्त रहेगा। राशन कार्ड वैसे तो एक एक सरकारी डॉक्युमेंट है, जिसकी मदद से सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत उचित दर की दुकानों से गेहूं, चावल आदि बाजार मूल्य से बेहद कम दाम पर खरीद सकते हैं। लेकिन राशन कार्ड का इस्तेमाल कई जगहों पर आईडी प्रूफ के तौर पर भी होता है। उदाहरण के तौर पर एलपीजी कनेक्शन, ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने आदि में। इसे पते के प्रूफ के तौर पर भी मान्य किया जाता है। लेकिन यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि राशन कार्ड हर किसी का नहीं बन सकता। यह एक निश्चित आयवर्ग के लिए ही होता है, जिसकी सीमा अलग-अलग राज्य में अलग-अलग होती है। - राशन कार्ड बनवाने के लिए व्यक्ति का भारत का नागरिक होना अनिवार्य है। - व्यक्ति के पास किसी अन्य राज्य का राशन कार्ड नहीं होना चाहिए। - जिसके नाम पर राशन कार्ड बन रहा है, उसकी उम्र 18 साल से ज्यादा होनी चाहिए। - 18 साल से कम उम्र के बच्चों का नाम माता-पिता के राशन कार्ड में शामिल किया जाता है। - एक परिवार में परिवार के मुखिया के नाम पर राशन कार्ड होता है। - राशन कार्ड में जिन सदस्यों को शामिल किया जा रहा है, उनका परिवार के मुखिया से नजदीकी संबंध होना जरूरी है। - परिवार के किसी भी सदस्य का उससे पहले से कोई भी राशन कार्ड में नाम नहीं होना चाहिए। आम तौर पर 3 प्रकार के राशन कार्ड होते हैं- गरीबी रेखा के ऊपर (APL), गरीबी रेखा के नीचे (BPL) और अन्त्योदय परिवारों के लिए। अंत्योदय कैटेगरी में बेहद ज्यादा गरीब लोग रखे जाते हैं। ये कैटेगरीज व्यक्ति की सालाना आय के आधार पर तय होती हैं। इसके अलावा अलग-अलग राशन कार्ड पर सस्ती दरों पर मिलने वाली चीजें, उनकी मात्रा अलग-अलग रहती है। यह ग्रामीण व नगरीय क्षेत्र के आधार पर भी अलग-अलग हो सकती है। राशन कार्ड राज्य सरकारों द्वारा जारी किया जाता है। इसलिए हर राज्य में राशन कार्ड के लिए अप्लाई करने की प्रॉसेस अलग-अलग हो सकती है। उदाहरण के लिए उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की बात करें तो आवेदनकर्ता कॉमन सर्विस सेंटर पर जाकर राशन कार्ड बनवाने का फॉर्म ले सकता है। कुछ राशन डीलर भी फॉर्म अपने पास रखते हैं, जिसे मामूली शुल्क पर आप ले सकते हैं। फॉर्म को भरकर राशन कार्ड डीलर या तहसील में मौजूद खाद्य आपूर्ति अधिकारी को देना होता है। इसके बाद वह प्रॉसेस को आगे बढ़ाता है। राशन कार्ड बनवाने के लिए आवेदनकर्ता को फीस का भुगतान भी करना होता है, जो अलग-अलग राज्य व क्षेत्र के आधार पर अलग-अलग है। आवदेन होने के बाद इसे फील्ड वेरिफिकेशन के लिए भेजा जाता है। अधिकारी फॉर्म में भरी जानकारियों की जांच कर पुष्टि करता है। इसके बाद आगे की प्रक्रिया होती है। सभी डिटेल वेरिफाई होने के बाद राशन कार्ड बन जाता है, जिसके बारे में अपने क्षेत्र के राशन डीलर से पता किया जा सकता है। आपका राशन कार्ड बन जाने पर राशन डीलर आपको बुलाकर वह दे देता है। राशन कार्ड बनने में 30 दिन या 50 दिन तक का वक्त लग सकता है। अगर कोई डिटेल गलत पाई जाती है तो आवेदनकर्ता पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। राशन कार्ड बनवाने के लिए आईडी प्रूफ के तौर पर आधार कार्ड, वोटर आईडी, पासपोर्ट, सरकार के द्वारा जारी किया गया कोई आई कार्ड, हेल्थ कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस दिया जा सकता है। इसके अलावा पैन कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो, आय प्रमाण पत्र, पते के प्रमाण के तौर पर बिजली बिल, गैस कनेक्शन बुक, टेलिफोन बिल, बैंक स्टेटमेंट या पासबुक, रेंटल एग्रीमेंट जैसे दस्तावेज भी लगेंगे।
केन्द्र सरकार के खाद्य मामलों के मंत्रालय के तहत आने वाले फूड एंड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन की ओर से राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों को जारी की गई एडवायजरी में कहा गया है कि कोविडउन्नीस महामारी के मौजूदा दौर में ऐसी कई रिपोर्ट्स सामने आई हैं कि गरीब, कमजोर और वंचित वर्ग के अभी भी कई लोग ऐसे हैं जिनका राशन कार्ड नहीं बना है। उन्हें अनाज की बेहद ज्यादा जरूरत है लेकिन वे राशन कार्ड बनवाने में सक्षम नहीं हैं। कुछ गरीब और जरूरतमंद लोग ऐसे भी हैं, जिनके पास हो सकता है कि घर के पते का प्रमाण न हो और इसलिए उनके लिए राशन कार्ड बनवाना मुश्किल है। एडवायजरी में आगे कहा गया है कि इसलिए राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों से गुजारिश की जाती है कि वे शहरी और ग्रामीण इलाकों में गरीब और वंचित वर्ग के लोगों तक पहुंच विकसित करने के लिए एक स्पेशल ड्राइव चलाएं और जिनके राशन कार्ड न बने हों, उनके राशन कार्ड बनाए जाएं। इस बारे में विभाग को पंद्रह दिन की एक रिपोर्ट भेजी जाए। कोरोनावायरस की दूसरी लहर के मद्देनजर केंद्र सरकार ने गरीब परिवारों के लिए एक बार फिर प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का ऐलान किया हुआ है। इस योजना के तहत केन्द्र सरकार राशनकार्ड धारकों को मई और जून महीने में प्रति व्यक्ति पाँच किलो अतिरिक्त अन्न मुफ्त में दे रही है। यह मुफ्त पाँच किलो अनाज, राशन कार्ड पर रहने वाले अनाज के कोटे के अतिरिक्त रहेगा। राशन कार्ड वैसे तो एक एक सरकारी डॉक्युमेंट है, जिसकी मदद से सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत उचित दर की दुकानों से गेहूं, चावल आदि बाजार मूल्य से बेहद कम दाम पर खरीद सकते हैं। लेकिन राशन कार्ड का इस्तेमाल कई जगहों पर आईडी प्रूफ के तौर पर भी होता है। उदाहरण के तौर पर एलपीजी कनेक्शन, ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने आदि में। इसे पते के प्रूफ के तौर पर भी मान्य किया जाता है। लेकिन यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि राशन कार्ड हर किसी का नहीं बन सकता। यह एक निश्चित आयवर्ग के लिए ही होता है, जिसकी सीमा अलग-अलग राज्य में अलग-अलग होती है। - राशन कार्ड बनवाने के लिए व्यक्ति का भारत का नागरिक होना अनिवार्य है। - व्यक्ति के पास किसी अन्य राज्य का राशन कार्ड नहीं होना चाहिए। - जिसके नाम पर राशन कार्ड बन रहा है, उसकी उम्र अट्ठारह साल से ज्यादा होनी चाहिए। - अट्ठारह साल से कम उम्र के बच्चों का नाम माता-पिता के राशन कार्ड में शामिल किया जाता है। - एक परिवार में परिवार के मुखिया के नाम पर राशन कार्ड होता है। - राशन कार्ड में जिन सदस्यों को शामिल किया जा रहा है, उनका परिवार के मुखिया से नजदीकी संबंध होना जरूरी है। - परिवार के किसी भी सदस्य का उससे पहले से कोई भी राशन कार्ड में नाम नहीं होना चाहिए। आम तौर पर तीन प्रकार के राशन कार्ड होते हैं- गरीबी रेखा के ऊपर , गरीबी रेखा के नीचे और अन्त्योदय परिवारों के लिए। अंत्योदय कैटेगरी में बेहद ज्यादा गरीब लोग रखे जाते हैं। ये कैटेगरीज व्यक्ति की सालाना आय के आधार पर तय होती हैं। इसके अलावा अलग-अलग राशन कार्ड पर सस्ती दरों पर मिलने वाली चीजें, उनकी मात्रा अलग-अलग रहती है। यह ग्रामीण व नगरीय क्षेत्र के आधार पर भी अलग-अलग हो सकती है। राशन कार्ड राज्य सरकारों द्वारा जारी किया जाता है। इसलिए हर राज्य में राशन कार्ड के लिए अप्लाई करने की प्रॉसेस अलग-अलग हो सकती है। उदाहरण के लिए उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की बात करें तो आवेदनकर्ता कॉमन सर्विस सेंटर पर जाकर राशन कार्ड बनवाने का फॉर्म ले सकता है। कुछ राशन डीलर भी फॉर्म अपने पास रखते हैं, जिसे मामूली शुल्क पर आप ले सकते हैं। फॉर्म को भरकर राशन कार्ड डीलर या तहसील में मौजूद खाद्य आपूर्ति अधिकारी को देना होता है। इसके बाद वह प्रॉसेस को आगे बढ़ाता है। राशन कार्ड बनवाने के लिए आवेदनकर्ता को फीस का भुगतान भी करना होता है, जो अलग-अलग राज्य व क्षेत्र के आधार पर अलग-अलग है। आवदेन होने के बाद इसे फील्ड वेरिफिकेशन के लिए भेजा जाता है। अधिकारी फॉर्म में भरी जानकारियों की जांच कर पुष्टि करता है। इसके बाद आगे की प्रक्रिया होती है। सभी डिटेल वेरिफाई होने के बाद राशन कार्ड बन जाता है, जिसके बारे में अपने क्षेत्र के राशन डीलर से पता किया जा सकता है। आपका राशन कार्ड बन जाने पर राशन डीलर आपको बुलाकर वह दे देता है। राशन कार्ड बनने में तीस दिन या पचास दिन तक का वक्त लग सकता है। अगर कोई डिटेल गलत पाई जाती है तो आवेदनकर्ता पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। राशन कार्ड बनवाने के लिए आईडी प्रूफ के तौर पर आधार कार्ड, वोटर आईडी, पासपोर्ट, सरकार के द्वारा जारी किया गया कोई आई कार्ड, हेल्थ कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस दिया जा सकता है। इसके अलावा पैन कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो, आय प्रमाण पत्र, पते के प्रमाण के तौर पर बिजली बिल, गैस कनेक्शन बुक, टेलिफोन बिल, बैंक स्टेटमेंट या पासबुक, रेंटल एग्रीमेंट जैसे दस्तावेज भी लगेंगे।
नयी दिल्ली, 29 दिसंबर आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा ने मंगलवार को बताया कि सिंघू बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों के लिए मुफ्त वाईफाई उपलब्ध कराने के लिए हॉटस्पॉट लगाए जाएंगे। चड्ढा ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यह फैसला 'किसानों के सेवादार अरविंद केजरीवाल' ने किया है। उन्होंने कहा कि पहला हॉटस्पॉट एक-दो दिन में लगा दिया जाएगा। मांग होने पर और हॉटस्पॉट लगाए जाएंगे। आप नेता ने कहा, " प्रत्येक वाईफाई हॉटस्पॉट 100 मीटर का दायरा कवर करेगा। किसानों ने इलाके में इंटरनेट की सीमित उपलब्धता की शिकायत की थी जिसके बाद यह कदम उठाया गया है। " चड्ढा ने कहा, " हम इसकी शुरुआत सिंघू बॉर्डर से कर रहे हैं, लेकिन मांग होने पर हम इसका विस्तार अन्य सीमाओं (जहां किसान प्रदर्शन कर रहे वहां) पर भी करेंगे तथा ऐसे और हॉटस्पॉट लगाएंगे। " केंद्र के नए कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों से किसान दिल्ली की सीमाओं पर पिछले एक महीने से प्रदर्शन कर रहे हैं। केजरीवाल और आम आदमी पार्टी (आप) किसानों का समर्थन कर रही है। इस महीने की शुरुआत में केजरीवाल ने सिंघू बॉर्डर का दौरा किया था और वहां इंतजामों का जायजा लिया था। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
नयी दिल्ली, उनतीस दिसंबर आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा ने मंगलवार को बताया कि सिंघू बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों के लिए मुफ्त वाईफाई उपलब्ध कराने के लिए हॉटस्पॉट लगाए जाएंगे। चड्ढा ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यह फैसला 'किसानों के सेवादार अरविंद केजरीवाल' ने किया है। उन्होंने कहा कि पहला हॉटस्पॉट एक-दो दिन में लगा दिया जाएगा। मांग होने पर और हॉटस्पॉट लगाए जाएंगे। आप नेता ने कहा, " प्रत्येक वाईफाई हॉटस्पॉट एक सौ मीटर का दायरा कवर करेगा। किसानों ने इलाके में इंटरनेट की सीमित उपलब्धता की शिकायत की थी जिसके बाद यह कदम उठाया गया है। " चड्ढा ने कहा, " हम इसकी शुरुआत सिंघू बॉर्डर से कर रहे हैं, लेकिन मांग होने पर हम इसका विस्तार अन्य सीमाओं पर भी करेंगे तथा ऐसे और हॉटस्पॉट लगाएंगे। " केंद्र के नए कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों से किसान दिल्ली की सीमाओं पर पिछले एक महीने से प्रदर्शन कर रहे हैं। केजरीवाल और आम आदमी पार्टी किसानों का समर्थन कर रही है। इस महीने की शुरुआत में केजरीवाल ने सिंघू बॉर्डर का दौरा किया था और वहां इंतजामों का जायजा लिया था। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
बिहार के औरंगाबाद से अजब प्रेम की गजब कहानी सामने आई है। जिसमें दो बच्चों की मां प्रेमी के साथ फरार है। वहीं इस प्रेम कहानी में ब्लैकमेलिंग का भी आरोप लग रहा है। विवाहिता के साथ प्रेमी ने पहले अश्लील वीडियो बना लिया। उसी वीडियो को विवाहिता के पति को भेजकर ब्लैकमेल करने लगा। क्या है पूरी कहानी आइए जानते हैं।
बिहार के औरंगाबाद से अजब प्रेम की गजब कहानी सामने आई है। जिसमें दो बच्चों की मां प्रेमी के साथ फरार है। वहीं इस प्रेम कहानी में ब्लैकमेलिंग का भी आरोप लग रहा है। विवाहिता के साथ प्रेमी ने पहले अश्लील वीडियो बना लिया। उसी वीडियो को विवाहिता के पति को भेजकर ब्लैकमेल करने लगा। क्या है पूरी कहानी आइए जानते हैं।
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री एवं पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने टी-20 वर्ल्ड कप में भारत-पाकिस्तान के मुकाबले में पाकिस्तान की जीत का जश्न मनाने वाले कश्मीरी छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि केंद्र शासित प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में कश्मीरी छात्रों के खिलाफ की गई कार्रवाई निंदनीय है। सुश्री महबूबा ने उत्तर प्रदेश के आगरा में तीन कश्मीरी छात्रों की गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि वे छात्र किसी भी तरह की राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में लिप्त नहीं थे और इसके बावजूद उन्हें गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने गुरुवार को ट्वीट कर कहा, "जम्मू-कश्मीर में तथा देश के अन्य हिस्सों में कश्मीरी छात्रों के खिलाफ कार्रवाई निंदनीय है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का राष्ट्रवाद भारतीय अवधारणा के खिलाफ है। इन छात्रों को तत्काल रिहा किया जाए। " उल्लेखनीय है कि इस सप्ताह के शुरू में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने चिकित्सा की पढ़ाई करने वाल दो छात्रों के खिलाफ आतंकवाद निरोधक कानून के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। इन छात्रों के खिलाफ यह मामला दुबई में टी-20 वर्ल्ड कप के दौरान भारत-पाकिस्तान के बीच खेले गए मुकाबले में पाकिस्तान की जीत के बाद नारेबाजी करने तथा जीत का जश्न मनाने को लेकर दर्ज किया गया था। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें सरकारी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) श्रीनगर तथा शेर ए-कश्मीर इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के छात्रावास में पाकिस्तान के समर्थन में छात्र नारे लगाते हुए दिख रहे हैं। इस वीडियो को देखने के बाद पुलिस ने इन छात्रों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री एवं पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने टी-बीस वर्ल्ड कप में भारत-पाकिस्तान के मुकाबले में पाकिस्तान की जीत का जश्न मनाने वाले कश्मीरी छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि केंद्र शासित प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में कश्मीरी छात्रों के खिलाफ की गई कार्रवाई निंदनीय है। सुश्री महबूबा ने उत्तर प्रदेश के आगरा में तीन कश्मीरी छात्रों की गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि वे छात्र किसी भी तरह की राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में लिप्त नहीं थे और इसके बावजूद उन्हें गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने गुरुवार को ट्वीट कर कहा, "जम्मू-कश्मीर में तथा देश के अन्य हिस्सों में कश्मीरी छात्रों के खिलाफ कार्रवाई निंदनीय है। भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रवाद भारतीय अवधारणा के खिलाफ है। इन छात्रों को तत्काल रिहा किया जाए। " उल्लेखनीय है कि इस सप्ताह के शुरू में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने चिकित्सा की पढ़ाई करने वाल दो छात्रों के खिलाफ आतंकवाद निरोधक कानून के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। इन छात्रों के खिलाफ यह मामला दुबई में टी-बीस वर्ल्ड कप के दौरान भारत-पाकिस्तान के बीच खेले गए मुकाबले में पाकिस्तान की जीत के बाद नारेबाजी करने तथा जीत का जश्न मनाने को लेकर दर्ज किया गया था। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें सरकारी मेडिकल कॉलेज श्रीनगर तथा शेर ए-कश्मीर इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के छात्रावास में पाकिस्तान के समर्थन में छात्र नारे लगाते हुए दिख रहे हैं। इस वीडियो को देखने के बाद पुलिस ने इन छात्रों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।
नए बजट में इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है। आमदनी में से 40 हजार रुपये घटाकर टैक्स लगेगा । यानि जितनी आमदनी है उसमें 40 हजार घटाकर टैक्स लगेगा। 40 हजार रुपये तक स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलेगा। नौकरी पेशा को कोई छूट नहीं मिलेगी। डिपॉजिट पर मिलने वाली छूट 10 हजार से बढ़ाकर 50 हजार हुई। सीनियर सिटीजन को राहत दी गई है। नए बजट में सरकार ने 70 लाख नई नौकरियों का वादा किया। वहीं नए कर्मचारियों के ईपीएफ में सरकार द्वारा 12 फीसदी का योगदान दिया जाएगा। वहीं बजट 2018 में किसानों को लागत का डेढ़ गुना मिलेगा। खरीफ का समर्थन मूल्य उत्पादन लागत से डेढ़ गुना होगा। 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करेंगे। सभी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलेगा। समर्थन मूल्य को 1. 5 गुना बढ़ाने का ऐलान किया गया। आलू, टमाटर और प्याज के लिए ऑपरेशन ग्रीन होगा जिसके लिए 500 करोड़ रुपये दिये जाएंगे। 42 मेगा फूड पार्क बनाए जाएंगे। 1290 करोड़ रुपयों से बांस मिशन चलाया जायेगा। इस साल 2 करोड़ शौचालय बनाए जाएंगे, पीएम आवास योजना के तहत घर दिये जाएंगे, 2022 तक हर नागरिक को घर देंगे।
नए बजट में इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है। आमदनी में से चालीस हजार रुपये घटाकर टैक्स लगेगा । यानि जितनी आमदनी है उसमें चालीस हजार घटाकर टैक्स लगेगा। चालीस हजार रुपये तक स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलेगा। नौकरी पेशा को कोई छूट नहीं मिलेगी। डिपॉजिट पर मिलने वाली छूट दस हजार से बढ़ाकर पचास हजार हुई। सीनियर सिटीजन को राहत दी गई है। नए बजट में सरकार ने सत्तर लाख नई नौकरियों का वादा किया। वहीं नए कर्मचारियों के ईपीएफ में सरकार द्वारा बारह फीसदी का योगदान दिया जाएगा। वहीं बजट दो हज़ार अट्ठारह में किसानों को लागत का डेढ़ गुना मिलेगा। खरीफ का समर्थन मूल्य उत्पादन लागत से डेढ़ गुना होगा। दो हज़ार बाईस तक किसानों की आय दोगुनी करेंगे। सभी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलेगा। समर्थन मूल्य को एक. पाँच गुना बढ़ाने का ऐलान किया गया। आलू, टमाटर और प्याज के लिए ऑपरेशन ग्रीन होगा जिसके लिए पाँच सौ करोड़ रुपये दिये जाएंगे। बयालीस मेगा फूड पार्क बनाए जाएंगे। एक हज़ार दो सौ नब्बे करोड़ रुपयों से बांस मिशन चलाया जायेगा। इस साल दो करोड़ शौचालय बनाए जाएंगे, पीएम आवास योजना के तहत घर दिये जाएंगे, दो हज़ार बाईस तक हर नागरिक को घर देंगे।
बर्लिन की दीवार शीत युद्ध काल के प्रतीकों में से एक थी। बर्लिन की दीवार के उद्भव में योगदान दियाबर्लिन के आसपास के राजनीतिक परिस्थिति में एक गंभीर उत्तेजना पश्चिम जर्मन सरकार ने 1 9 57 में "हेलस्टीन सिद्धांत" को सक्रिय किया। यह जीडीआर को मान्यता देने वाले किसी भी राज्य के साथ राजनयिक संबंधों में तत्काल तोड़ने के लिए प्रदान किया गया था। इसके अलावा, जर्मन सरकार ने जर्मन राज्यों के एक संघ के गठन पर जर्मनी के पूर्वी हिस्से के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इसके बजाय, पश्चिम बर्लिन ने चुनाव कराने पर जोर दिया इसके साथ ही, 1 9 58 में, जीडीआर के अधिकारियों ने "जीडीआर के क्षेत्र में इसे ढूंढने" के आधार पर देश के पश्चिमी भाग पर संप्रभुता का दावा किया। स्थिति की बर्लिन के आसपास एक गड़बड़ी की स्थिति मेंमॉस्को में 3 से 5 अगस्त 1 9 61 की अवधि, एटीएस के प्रमुखों की एक बैठक बुलाई गई थी। उस पर वाल्टर उलब्रिक्ट (जीडीआर के नेता) ने सीमा को बंद करने पर ज़ोर दिया 12 अगस्त को मित्र राष्ट्रों के समर्थन प्राप्त करने के बाद, इसके अनुसार, जीडीआर में मंत्रिपरिषद द्वारा एक निर्णय लिया गया। पूर्वी बर्लिन में, पुलिस को पूरी तैयारी में लाया गया था। 13 अगस्त को सुबह एक बजे, "चीन वॉल 2" नामक एक परियोजना शुरू हुई। करीब 25 हजार सशस्त्र समूहों ने सीमा पर कब्जा कर लिया उनका कार्य पूर्वी जर्मन सेना के कवर के तहत किया गया था। और सोवियत सेना भी तत्परता की स्थिति में थी। 15 अगस्त तक, पूरी तरह से पश्चिमी भाग कांटेदार तार द्वारा सीमांकित किया गया था। बर्लिन की दीवार निर्माणाधीन है इसका निर्माण और पुनः उपकरण 1 9 62 से 1 9 75 तक जारी रहे। बर्लिन की दीवार के निर्माण के बाद,जीडीआर के नागरिकों को शहर के पश्चिमी भाग में जाने के लिए एक विशेष परमिट की आवश्यकता होती है। केवल पेंशनभोगी अनियंत्रित हो सकते हैं जीडीआर भागने का प्रयास आठ साल तक कारावास से दंडनीय था। बाड़ लगाने वाले संरचनाओं को नष्ट करने की कोशिश में पांच साल से कम समय तक कारावास भी शामिल नहीं है। जीडीआर से भागने की कोशिश में सहायता के लिए सरकार ने जीवन के लिए स्वतंत्रता वंचित की। 18 9 8 में, सोवियत पुनर्गठन के प्रभाव मेंहंगरी ने आस्ट्रिया के साथ सीमा पर बॉर्डर के किलेबंदी को नष्ट कर दिया। हालांकि, जीडीआर (वारसॉ संधि में ऑस्ट्रिया का साथी) इसके उदाहरण का पालन करने वाला नहीं था। जल्द ही, जर्मन गणराज्य ने तेजी से होने वाली घटनाओं पर नियंत्रण खो दिया। जीडीआर के हजारों निवासियों ने दूसरे पूर्वी यूरोपीय राज्यों की यात्रा शुरू कर दी, जहां से एफआरजी तक पहुंचने के लिए देखा गया। पश्चिम में, जर्मन भाग गए और हंगरी के माध्यम से हंगरियन सीमाओं का उद्घाटन बर्लिन की दीवार के अर्थ से वंचित था।
बर्लिन की दीवार शीत युद्ध काल के प्रतीकों में से एक थी। बर्लिन की दीवार के उद्भव में योगदान दियाबर्लिन के आसपास के राजनीतिक परिस्थिति में एक गंभीर उत्तेजना पश्चिम जर्मन सरकार ने एक नौ सत्तावन में "हेलस्टीन सिद्धांत" को सक्रिय किया। यह जीडीआर को मान्यता देने वाले किसी भी राज्य के साथ राजनयिक संबंधों में तत्काल तोड़ने के लिए प्रदान किया गया था। इसके अलावा, जर्मन सरकार ने जर्मन राज्यों के एक संघ के गठन पर जर्मनी के पूर्वी हिस्से के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इसके बजाय, पश्चिम बर्लिन ने चुनाव कराने पर जोर दिया इसके साथ ही, एक नौ अट्ठावन में, जीडीआर के अधिकारियों ने "जीडीआर के क्षेत्र में इसे ढूंढने" के आधार पर देश के पश्चिमी भाग पर संप्रभुता का दावा किया। स्थिति की बर्लिन के आसपास एक गड़बड़ी की स्थिति मेंमॉस्को में तीन से पाँच अगस्त एक नौ इकसठ की अवधि, एटीएस के प्रमुखों की एक बैठक बुलाई गई थी। उस पर वाल्टर उलब्रिक्ट ने सीमा को बंद करने पर ज़ोर दिया बारह अगस्त को मित्र राष्ट्रों के समर्थन प्राप्त करने के बाद, इसके अनुसार, जीडीआर में मंत्रिपरिषद द्वारा एक निर्णय लिया गया। पूर्वी बर्लिन में, पुलिस को पूरी तैयारी में लाया गया था। तेरह अगस्त को सुबह एक बजे, "चीन वॉल दो" नामक एक परियोजना शुरू हुई। करीब पच्चीस हजार सशस्त्र समूहों ने सीमा पर कब्जा कर लिया उनका कार्य पूर्वी जर्मन सेना के कवर के तहत किया गया था। और सोवियत सेना भी तत्परता की स्थिति में थी। पंद्रह अगस्त तक, पूरी तरह से पश्चिमी भाग कांटेदार तार द्वारा सीमांकित किया गया था। बर्लिन की दीवार निर्माणाधीन है इसका निर्माण और पुनः उपकरण एक नौ बासठ से एक नौ पचहत्तर तक जारी रहे। बर्लिन की दीवार के निर्माण के बाद,जीडीआर के नागरिकों को शहर के पश्चिमी भाग में जाने के लिए एक विशेष परमिट की आवश्यकता होती है। केवल पेंशनभोगी अनियंत्रित हो सकते हैं जीडीआर भागने का प्रयास आठ साल तक कारावास से दंडनीय था। बाड़ लगाने वाले संरचनाओं को नष्ट करने की कोशिश में पांच साल से कम समय तक कारावास भी शामिल नहीं है। जीडीआर से भागने की कोशिश में सहायता के लिए सरकार ने जीवन के लिए स्वतंत्रता वंचित की। अट्ठारह नौ आठ में, सोवियत पुनर्गठन के प्रभाव मेंहंगरी ने आस्ट्रिया के साथ सीमा पर बॉर्डर के किलेबंदी को नष्ट कर दिया। हालांकि, जीडीआर इसके उदाहरण का पालन करने वाला नहीं था। जल्द ही, जर्मन गणराज्य ने तेजी से होने वाली घटनाओं पर नियंत्रण खो दिया। जीडीआर के हजारों निवासियों ने दूसरे पूर्वी यूरोपीय राज्यों की यात्रा शुरू कर दी, जहां से एफआरजी तक पहुंचने के लिए देखा गया। पश्चिम में, जर्मन भाग गए और हंगरी के माध्यम से हंगरियन सीमाओं का उद्घाटन बर्लिन की दीवार के अर्थ से वंचित था।
नई दिल्ली. छठ महापर्व कल यानी 31 अक्टूबर से शुरू हो रहा है. ये पर्व पूरे चार दिनों तक चलता है. छठ पूजा सूर्य देव की उपासना कर उनकी कृपा पाने के लिए की जाती है. हिंदू शास्त्रों के अनुसार सूर्य देव की पूजा करने से घर में धन-धान्य का भंडार रहता है. इस पर्व को खासतौर पर बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश सहित पड़ोसी देश नेपाल में देखने को मिलती है. मान्यता है कि छठ पूजा करने से छठी मैया प्रसन्न होकर व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी कर देती हैं. हिंदू धर्म में छठी मैया को सूर्य भगवान की बहन भी कहा जाता है. छठ पूजा का ये पर्व कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मनाया जाता है. कल नहाय-खाय के साथ छठ पूजा का आगाज होगा. इसके बाद 1 नवंबर को खरना और 2 नवंबर को सूर्य षष्ठी का मुख्य पर्व होगा. इसी दिन व्रतीजन डूबते हुए सूरज को अर्घ्य देते हैं. वहीं 3 नवंबर को उदित सूर्य को अर्घ्य देने के साथ छठ पूजा का समाधान होगा. खरना में व्रत रखने वाले व्यक्ति प्रसाद ग्रहण करते हैं और उसके बाद अगले दिन अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने और फिर सुबह सूर्य को अर्घ्य देने के बाद पूजा करके ही प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोलते हैं. छठ व्रत को दिवाली के छठे दिन मनाया जाता है. छठ व्रत एक साल में दो बार होता है. हिंदू कैलेंडर के अनुसार, चैत्र मास और कार्तिक मास में. कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी को बड़े पैमाने पर यह पर्व मनाया जाता है.
नई दिल्ली. छठ महापर्व कल यानी इकतीस अक्टूबर से शुरू हो रहा है. ये पर्व पूरे चार दिनों तक चलता है. छठ पूजा सूर्य देव की उपासना कर उनकी कृपा पाने के लिए की जाती है. हिंदू शास्त्रों के अनुसार सूर्य देव की पूजा करने से घर में धन-धान्य का भंडार रहता है. इस पर्व को खासतौर पर बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश सहित पड़ोसी देश नेपाल में देखने को मिलती है. मान्यता है कि छठ पूजा करने से छठी मैया प्रसन्न होकर व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी कर देती हैं. हिंदू धर्म में छठी मैया को सूर्य भगवान की बहन भी कहा जाता है. छठ पूजा का ये पर्व कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मनाया जाता है. कल नहाय-खाय के साथ छठ पूजा का आगाज होगा. इसके बाद एक नवंबर को खरना और दो नवंबर को सूर्य षष्ठी का मुख्य पर्व होगा. इसी दिन व्रतीजन डूबते हुए सूरज को अर्घ्य देते हैं. वहीं तीन नवंबर को उदित सूर्य को अर्घ्य देने के साथ छठ पूजा का समाधान होगा. खरना में व्रत रखने वाले व्यक्ति प्रसाद ग्रहण करते हैं और उसके बाद अगले दिन अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने और फिर सुबह सूर्य को अर्घ्य देने के बाद पूजा करके ही प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोलते हैं. छठ व्रत को दिवाली के छठे दिन मनाया जाता है. छठ व्रत एक साल में दो बार होता है. हिंदू कैलेंडर के अनुसार, चैत्र मास और कार्तिक मास में. कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी को बड़े पैमाने पर यह पर्व मनाया जाता है.
गांधी और लिंकन तो उनकी प्रगति ही अवरुद्ध हो जायेगी । कवीर तो निन्दकों को परम हितैषी मान कर उनको समीप ही रखने की बात कहते थे । व्यर्थ ही शत्रुभाव रखने वाले व्यक्तियों के लिये कवि कहता है"जीवन्तु से शत्रुगणाः सदैव येषां प्रसादात्सुविचक्षणोऽहम् । यदा यदा मे विकृति लभन्ते तदा तदा मां प्रतिबोधयन्ति ॥" कटु विरोधी सदैव जीवित रहें जिनकी कृपा से मैं सुविचक्षण हो गया हूँ । जब भी मुझ में विकार उत्पन्न होता है तभी वे मुझे जगा देते हैं । द्विन्ति मन्दारचरितं महात्मनाम् । मन्द लोग महापुरुषों के चरित से द्वेप किया ही करते हैं ! अतएव कटुतम आलोचना एवं निन्दा सुनकर भी मार्ग से विचलित नहीं होना चाहिये । महात्मा गांधी निन्दा और स्तुति में सम रहते थे । व्यक्तिगत निन्दा से वे कभी विचलित न होते थे । एक बार उन्हें कटु आलोचना से पूर्ण एक पत्र मिला । उन्होंने उसे पढ़कर उसकी उपेक्षा कर दी और उसमें से पित निकाल कर उपयोग के लिये रख लिये । महात्मा गांधी कटुतम शब्द सुनकर भी शान्त रहते थे । कटु शब्द उन्हें उनके मार्ग से नहीं हटा सकते थे । गांधी जी और लिंकन के अनेक गुणों, में साम्य स्पष्ट है । प्रशासन सदैव एक कला रही है किंतु लोकतंत्र के परिप्रेक्ष्य में उसका विशेष महत्त्व हो गया है। प्रशासक प्रशासन -श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण कड़ी होता है । उसका सम्बन्ध उपरिस्थित अधिकारियों, अधीनस्थ कर्मचारियों, जनता आदि से रहता है । विभिन्न क्षेत्रों में प्रशासक के विभिन्न दायित्व होते हैं जिनके समुचित निर्वाह पर उस की सफलता निर्भर है । किसी बड़ी मिल के मुख्य अथवा विभागीय प्रशासक के लिये श्रमिकों की समस्याएँ भीषण हो सकती हैं तथा किसी प्रधानाचार्य के लिये कुछ छात्र एक कष्टप्रद कारण बन सकते हैं । प्रशासक के लिये नित्य नवीन समस्याएँ उभर कर आती रहती हैं जो अकुशल हाथों में आकर जटिल एवं कष्टकारक हो जाती हैं। समस्याओं के समाधान की शैली प्रशासक के महत्त्व को घटा अथवा बढ़ा देती है। प्रशासक के उत्तम होने पर भी उसकी अपनी सीमाएं होती हैं जिसे प्रायः कोई सुनना और समझना नहीं चाहता तथा विषम परिस्थितियों में उसे स्वयं ही आत्मरक्षा करनी पड़ती है । प्रशासक को अपने व्यक्तित्व से ही सबसे अधिक सहायता प्राप्त होती है तथा उसे अपने व्यक्तित्व को संवार सुधार कर उसे एक प्रभावी शस्त्र बनाकर रखनां चाहिये । व्यक्तित्व का एक जादू होता है, जो मनुष्य के लिये सर्वाधिक सहायक होता है। एक प्रसिद्ध उक्ति है कि वेश-भूषा व्यक्तित्व को घोषित कर देती है । वेश- भूपा साधारण हो सकती है किन्तु वह उपयुक्त एवं स्वच्छ होनी चाहिये । किन्तु वास्तविक व्यक्तित्व चारित्रिक गुणों में अन्तनिहित होता है । व्यक्तित्व का धनी मनुष्य अन्य जन को अपने व्यक्तित्व के प्रभाव से ही विजित कर आधी समस्या का समाधान कर लेता है । वह अपने उठने-बैठने, चलने और वोलने से दूसरों को प्रभावित कर लेता है । मधुर मुस्कान के बिना व्यक्तित्व का समस्त प्रसाधन निष्प्रभाव हो जाता है । मनोहारी मुस्कान व्यक्ति के माधुर्य को प्रतिविम्बित करने के अतिरिक्त सद्भावना की भी द्योतक होती है । कुशल प्रशासक छोटी-छोटी बातों में भी आदर्श - प्रेरक होता है । वह यथासमय कार्यालय इत्यादि निर्धारित स्थान पर पहुँचकर समयनिष्ठता का शिक्षाप्रद पाठ • सिखा देता है । वह साधारण बातों में भी किसी को व्यर्थ आलोचना का अवसर नहीं "देता । अधीनस्थ कर्मचारी उसकी कर्मनिष्ठा एवं कर्त्तव्यपरायणता से शिक्षा ग्रहण · करते हैं । वह दूसरों को ईमानदारी, सचाई आदि का उपदेश देने की अपेक्षा उदाहरण प्रस्तुत करके प्रेरणा देता है । लोकव्यवहारनिपुणता सिद्धान्तवादिता की पूरक होती है । सत्य और न्याय ' आदि सिद्धांतों का पालन मनुष्य को दृढ़ता प्रदान करता है, उसके आत्मविश्वास को • बल देता है किन्तु लोकव्यवहार में कुशल होना मनुष्य को लोकप्रिय बना देता है । व्यवहारकुशलता के बिना मनुष्य रूक्ष होकर तिरस्कृत हो जाता है तथा निन्दा एवं कटु आलोचना का पात्र बन जाता है । लोकव्यवहारपटु व्यक्ति सवको आदर देता है किन्तु विशेष आदरणीय को विशेष आदर देता है । वह सम्पर्क में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति पर सद्भावना की छाप छोड़कर उसे आत्मीयता से प्रभावित कर देता है ! प्रशासक की व्यवहारकुशलता की पुष्टि तब होती है जब कार्य सिद्ध न होने पर भी कार्यार्थी प्रशासक को दोप नहीं देता तथा उसकी असमर्थता को स्वीकार करते हुए उसके सुन्दर व्यवहार की सराहना करता है । यह बहुत कठिन एवं दुस्साध्य है तथापि इसके लिये प्रयत्न होना ही चाहिये । अब रहीम मुश्किल परी, गाढ़े दोऊ काम । सांचे से तो जग नहीं, झूठे मिले न राम । सत्य और संसार दोनो का मथुर निर्वाह करना व्यवहारकुशलता है । सत्य और न्याय का सहारा प्रशासक के लिये सबसे बड़ा संवल होता है । 'किन्तु प्रायः सच्चा और ईमानदार आदमी अपनी सचाई और ईमानदारी का घमंड करने लगता है तथा व्यवहार में जिद्दी और रूखा हो जाता है जिससे चतुर्दिक उनके शत्रु उत्पन्न हो जाते हैं और उसको कहीं सम्मान नहीं मिलता। ऐसा व्यक्ति अकेला 'पड़ जाता है तथा अपने व्यवहार के दोप को न देखकर वह इमानदारी और सच्चाई को ही कोसने लगता है । युग के बदलते हुए मूल्यों और बदली हुई परिस्थितियों की अवहेलना करना भी यथार्थ का त्याग एवं अविवेक है । सत्य का व्यवहार श्रेयस्कर होता है किन्तु वह हितकर एवं मधुर अवश्य होना चाहिये । सत्यस्य वचनं श्रेयः सत्यादपि हितं वदेत् । सत्यनिष्ठा के अतिरिक्त प्रशासक को विनम्र होना चाहिये ताकि दुराग्रह छोड़कर वह आवश्यकता पड़ने पर उचित समझौता कर सके । कुछ लोग वात-बात में आत्मप्रतिष्ठा का प्रश्न बनाकर समस्या को जटिन कर देते हैं । अपनी व्यक्तिगत आलोचना अथवा निन्दा को विवाद का विषय बना देना अविवेक ही है । प्रशासक को खुले दिमाग से सबके हित में समस्या का हल करने के लिये तत्पर रहना चाहिये । किसी भी उत्तम प्रकार से कार्यसिद्धि करना लक्ष्य होना चाहिये । आत्मगौरव दर्प बनकर बाधक ही नहीं, क्लेशप्रद भी हो जाता है । कभी
गांधी और लिंकन तो उनकी प्रगति ही अवरुद्ध हो जायेगी । कवीर तो निन्दकों को परम हितैषी मान कर उनको समीप ही रखने की बात कहते थे । व्यर्थ ही शत्रुभाव रखने वाले व्यक्तियों के लिये कवि कहता है"जीवन्तु से शत्रुगणाः सदैव येषां प्रसादात्सुविचक्षणोऽहम् । यदा यदा मे विकृति लभन्ते तदा तदा मां प्रतिबोधयन्ति ॥" कटु विरोधी सदैव जीवित रहें जिनकी कृपा से मैं सुविचक्षण हो गया हूँ । जब भी मुझ में विकार उत्पन्न होता है तभी वे मुझे जगा देते हैं । द्विन्ति मन्दारचरितं महात्मनाम् । मन्द लोग महापुरुषों के चरित से द्वेप किया ही करते हैं ! अतएव कटुतम आलोचना एवं निन्दा सुनकर भी मार्ग से विचलित नहीं होना चाहिये । महात्मा गांधी निन्दा और स्तुति में सम रहते थे । व्यक्तिगत निन्दा से वे कभी विचलित न होते थे । एक बार उन्हें कटु आलोचना से पूर्ण एक पत्र मिला । उन्होंने उसे पढ़कर उसकी उपेक्षा कर दी और उसमें से पित निकाल कर उपयोग के लिये रख लिये । महात्मा गांधी कटुतम शब्द सुनकर भी शान्त रहते थे । कटु शब्द उन्हें उनके मार्ग से नहीं हटा सकते थे । गांधी जी और लिंकन के अनेक गुणों, में साम्य स्पष्ट है । प्रशासन सदैव एक कला रही है किंतु लोकतंत्र के परिप्रेक्ष्य में उसका विशेष महत्त्व हो गया है। प्रशासक प्रशासन -श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण कड़ी होता है । उसका सम्बन्ध उपरिस्थित अधिकारियों, अधीनस्थ कर्मचारियों, जनता आदि से रहता है । विभिन्न क्षेत्रों में प्रशासक के विभिन्न दायित्व होते हैं जिनके समुचित निर्वाह पर उस की सफलता निर्भर है । किसी बड़ी मिल के मुख्य अथवा विभागीय प्रशासक के लिये श्रमिकों की समस्याएँ भीषण हो सकती हैं तथा किसी प्रधानाचार्य के लिये कुछ छात्र एक कष्टप्रद कारण बन सकते हैं । प्रशासक के लिये नित्य नवीन समस्याएँ उभर कर आती रहती हैं जो अकुशल हाथों में आकर जटिल एवं कष्टकारक हो जाती हैं। समस्याओं के समाधान की शैली प्रशासक के महत्त्व को घटा अथवा बढ़ा देती है। प्रशासक के उत्तम होने पर भी उसकी अपनी सीमाएं होती हैं जिसे प्रायः कोई सुनना और समझना नहीं चाहता तथा विषम परिस्थितियों में उसे स्वयं ही आत्मरक्षा करनी पड़ती है । प्रशासक को अपने व्यक्तित्व से ही सबसे अधिक सहायता प्राप्त होती है तथा उसे अपने व्यक्तित्व को संवार सुधार कर उसे एक प्रभावी शस्त्र बनाकर रखनां चाहिये । व्यक्तित्व का एक जादू होता है, जो मनुष्य के लिये सर्वाधिक सहायक होता है। एक प्रसिद्ध उक्ति है कि वेश-भूषा व्यक्तित्व को घोषित कर देती है । वेश- भूपा साधारण हो सकती है किन्तु वह उपयुक्त एवं स्वच्छ होनी चाहिये । किन्तु वास्तविक व्यक्तित्व चारित्रिक गुणों में अन्तनिहित होता है । व्यक्तित्व का धनी मनुष्य अन्य जन को अपने व्यक्तित्व के प्रभाव से ही विजित कर आधी समस्या का समाधान कर लेता है । वह अपने उठने-बैठने, चलने और वोलने से दूसरों को प्रभावित कर लेता है । मधुर मुस्कान के बिना व्यक्तित्व का समस्त प्रसाधन निष्प्रभाव हो जाता है । मनोहारी मुस्कान व्यक्ति के माधुर्य को प्रतिविम्बित करने के अतिरिक्त सद्भावना की भी द्योतक होती है । कुशल प्रशासक छोटी-छोटी बातों में भी आदर्श - प्रेरक होता है । वह यथासमय कार्यालय इत्यादि निर्धारित स्थान पर पहुँचकर समयनिष्ठता का शिक्षाप्रद पाठ • सिखा देता है । वह साधारण बातों में भी किसी को व्यर्थ आलोचना का अवसर नहीं "देता । अधीनस्थ कर्मचारी उसकी कर्मनिष्ठा एवं कर्त्तव्यपरायणता से शिक्षा ग्रहण · करते हैं । वह दूसरों को ईमानदारी, सचाई आदि का उपदेश देने की अपेक्षा उदाहरण प्रस्तुत करके प्रेरणा देता है । लोकव्यवहारनिपुणता सिद्धान्तवादिता की पूरक होती है । सत्य और न्याय ' आदि सिद्धांतों का पालन मनुष्य को दृढ़ता प्रदान करता है, उसके आत्मविश्वास को • बल देता है किन्तु लोकव्यवहार में कुशल होना मनुष्य को लोकप्रिय बना देता है । व्यवहारकुशलता के बिना मनुष्य रूक्ष होकर तिरस्कृत हो जाता है तथा निन्दा एवं कटु आलोचना का पात्र बन जाता है । लोकव्यवहारपटु व्यक्ति सवको आदर देता है किन्तु विशेष आदरणीय को विशेष आदर देता है । वह सम्पर्क में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति पर सद्भावना की छाप छोड़कर उसे आत्मीयता से प्रभावित कर देता है ! प्रशासक की व्यवहारकुशलता की पुष्टि तब होती है जब कार्य सिद्ध न होने पर भी कार्यार्थी प्रशासक को दोप नहीं देता तथा उसकी असमर्थता को स्वीकार करते हुए उसके सुन्दर व्यवहार की सराहना करता है । यह बहुत कठिन एवं दुस्साध्य है तथापि इसके लिये प्रयत्न होना ही चाहिये । अब रहीम मुश्किल परी, गाढ़े दोऊ काम । सांचे से तो जग नहीं, झूठे मिले न राम । सत्य और संसार दोनो का मथुर निर्वाह करना व्यवहारकुशलता है । सत्य और न्याय का सहारा प्रशासक के लिये सबसे बड़ा संवल होता है । 'किन्तु प्रायः सच्चा और ईमानदार आदमी अपनी सचाई और ईमानदारी का घमंड करने लगता है तथा व्यवहार में जिद्दी और रूखा हो जाता है जिससे चतुर्दिक उनके शत्रु उत्पन्न हो जाते हैं और उसको कहीं सम्मान नहीं मिलता। ऐसा व्यक्ति अकेला 'पड़ जाता है तथा अपने व्यवहार के दोप को न देखकर वह इमानदारी और सच्चाई को ही कोसने लगता है । युग के बदलते हुए मूल्यों और बदली हुई परिस्थितियों की अवहेलना करना भी यथार्थ का त्याग एवं अविवेक है । सत्य का व्यवहार श्रेयस्कर होता है किन्तु वह हितकर एवं मधुर अवश्य होना चाहिये । सत्यस्य वचनं श्रेयः सत्यादपि हितं वदेत् । सत्यनिष्ठा के अतिरिक्त प्रशासक को विनम्र होना चाहिये ताकि दुराग्रह छोड़कर वह आवश्यकता पड़ने पर उचित समझौता कर सके । कुछ लोग वात-बात में आत्मप्रतिष्ठा का प्रश्न बनाकर समस्या को जटिन कर देते हैं । अपनी व्यक्तिगत आलोचना अथवा निन्दा को विवाद का विषय बना देना अविवेक ही है । प्रशासक को खुले दिमाग से सबके हित में समस्या का हल करने के लिये तत्पर रहना चाहिये । किसी भी उत्तम प्रकार से कार्यसिद्धि करना लक्ष्य होना चाहिये । आत्मगौरव दर्प बनकर बाधक ही नहीं, क्लेशप्रद भी हो जाता है । कभी
कटक (ओड़िशा), (भाषा)। राष्ट्रीय मानवाधिकार अयोग ने रेलवे को निर्देश दिए हैं कि वह वर्ष 2009 के अगस्त माह में यात्रा टिकट निरीक्षक ःटीटीईः द्वारा चलती ट्रेन से फेंके गए युवक को चार लाख रूपए का मुआवजा प्रदान करे। इस घटना में ओड़िशा के संबलपुर जिले के बेनुधर भोई को अपनी दायीं टांग गंवानी पड़ी थी और तीन महीने तक अस्पताल में रहना पड़ा था। पीड़ित की ओर से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में अर्जी देने वाले वकील प्रबीर दास के अनुसार, आयोग ने इस घटना को मानव अधिकारों का उल्लंघन बताया। उन्होंने इस टिकट निरीक्षक को 25 वर्षीय युवक का भविष्य बर्बाद करने का दोषी "हराते हुए रेलवे को आदेश दिया कि वह छह सप्ताह के भीतर इस युवक को मुआवजा दे। आयोग ने रेलवे बोर्ड के प्रमुख से पीड़ित को तय समयावधि के भीतर पूरी राशि का भुगतान करने के सबूत के साथ अनुपालन रिपोर्ट भी मांगी है। घटना वाले दिन बेनुधर संतरागाची-पुरी पैसेंजर ट्रेन में बालेश्वर से कटक तक बिना टिकट के यात्रा कर रहा था। टिकट निरीक्षक ने बिना टिकट सफर करने की वजह से उसे चलती ट्रेन से धक्का दे दिया। एससीबी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के डॉक्टरों को उसकी जिंदगी बचाने के लिए उसकी टांग काटनी पड़ी। रेलवे ने पीड़ित को कोई मुआवजा देने से यह कहकर इनकार कर दिया था कि वह बिना टिकट यात्रा कर रहा था और बिना टिकट के यात्री किसी मुआवजे के अधिकारी नहीं होते। विभागीय पूछताछ में टीटीई को क्लीन चिट दे दी गई थी। टीटीई का कहना था कि बेनुधर से अगले स्टेशन पर ट्रेन से उतर जाने के लिए कहा गया था लेकिन वह चलती ट्रेन से कूद गया और घायल हो गया। हालांकि राजकीय रेलवे पुलिस ःजीआरपीः की जांच में प्रथम दृष्टया यही पाया गया कि असल में टीटीई ने बेनुधर को चलती ट्रेन से धक्का दिया था।
कटक , । राष्ट्रीय मानवाधिकार अयोग ने रेलवे को निर्देश दिए हैं कि वह वर्ष दो हज़ार नौ के अगस्त माह में यात्रा टिकट निरीक्षक ःटीटीईः द्वारा चलती ट्रेन से फेंके गए युवक को चार लाख रूपए का मुआवजा प्रदान करे। इस घटना में ओड़िशा के संबलपुर जिले के बेनुधर भोई को अपनी दायीं टांग गंवानी पड़ी थी और तीन महीने तक अस्पताल में रहना पड़ा था। पीड़ित की ओर से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में अर्जी देने वाले वकील प्रबीर दास के अनुसार, आयोग ने इस घटना को मानव अधिकारों का उल्लंघन बताया। उन्होंने इस टिकट निरीक्षक को पच्चीस वर्षीय युवक का भविष्य बर्बाद करने का दोषी "हराते हुए रेलवे को आदेश दिया कि वह छह सप्ताह के भीतर इस युवक को मुआवजा दे। आयोग ने रेलवे बोर्ड के प्रमुख से पीड़ित को तय समयावधि के भीतर पूरी राशि का भुगतान करने के सबूत के साथ अनुपालन रिपोर्ट भी मांगी है। घटना वाले दिन बेनुधर संतरागाची-पुरी पैसेंजर ट्रेन में बालेश्वर से कटक तक बिना टिकट के यात्रा कर रहा था। टिकट निरीक्षक ने बिना टिकट सफर करने की वजह से उसे चलती ट्रेन से धक्का दे दिया। एससीबी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के डॉक्टरों को उसकी जिंदगी बचाने के लिए उसकी टांग काटनी पड़ी। रेलवे ने पीड़ित को कोई मुआवजा देने से यह कहकर इनकार कर दिया था कि वह बिना टिकट यात्रा कर रहा था और बिना टिकट के यात्री किसी मुआवजे के अधिकारी नहीं होते। विभागीय पूछताछ में टीटीई को क्लीन चिट दे दी गई थी। टीटीई का कहना था कि बेनुधर से अगले स्टेशन पर ट्रेन से उतर जाने के लिए कहा गया था लेकिन वह चलती ट्रेन से कूद गया और घायल हो गया। हालांकि राजकीय रेलवे पुलिस ःजीआरपीः की जांच में प्रथम दृष्टया यही पाया गया कि असल में टीटीई ने बेनुधर को चलती ट्रेन से धक्का दिया था।
बाबूजी के लाल आपने कर दिया कमाल मिली पद्मश्री आपको हम सबका ऊंचा हुआ भाल। । गणतंत्र दिवस का यह सूरज, एक नई रोशनी लाया है। गर्वोन्नात हुए हम सभी साथी तन मन सब हर्ष आया है। झूम झूम कर नाचे गाए कदम थिरकते गलबहिया डाल। बाबूजी के लाल आपने कर दिया कमाल। । आप ही से सीखा हमने, संघर्षों में भी मुस्कुराना, अभय होकर लक्ष्य सामने रख हर चुनौती पर विजय पाना। लगन निष्ठा ईमानदारी भी खुश होकर बजा रहे करताल, बाबूजी के लाल आपने कर दिया कमाल। खुशी का और गर्व का पैगाम लाई है नई भोर। नई दुनिया के आंगन में नाच रहा हर मन का मोर। उपलब्धियों के नव को छुए और मनाए जश्न हर साल। बाबूजी के लाल आपने कर दिया कमाल। । सकारात्मक सोच को मिला आज सम्मान। अभय जी पर करते हम सब गर्व और अभिमान ऊंचा हुआ पत्रकारों का मस्तक, आज बहुत है हम खुशहाल। बाबूजी के लाल आपने कर दिया कमाल। । संकल्प का दिवस है आज एकता का बजाए साज। शिखर पर पहुंचे नईदुनिया हम सबका है बस यही काज। अभय जी के आदर्शों को बना लो अपनी ढाल। । बाबूजी के लाल आपने कर दिया कमाल। ।
बाबूजी के लाल आपने कर दिया कमाल मिली पद्मश्री आपको हम सबका ऊंचा हुआ भाल। । गणतंत्र दिवस का यह सूरज, एक नई रोशनी लाया है। गर्वोन्नात हुए हम सभी साथी तन मन सब हर्ष आया है। झूम झूम कर नाचे गाए कदम थिरकते गलबहिया डाल। बाबूजी के लाल आपने कर दिया कमाल। । आप ही से सीखा हमने, संघर्षों में भी मुस्कुराना, अभय होकर लक्ष्य सामने रख हर चुनौती पर विजय पाना। लगन निष्ठा ईमानदारी भी खुश होकर बजा रहे करताल, बाबूजी के लाल आपने कर दिया कमाल। खुशी का और गर्व का पैगाम लाई है नई भोर। नई दुनिया के आंगन में नाच रहा हर मन का मोर। उपलब्धियों के नव को छुए और मनाए जश्न हर साल। बाबूजी के लाल आपने कर दिया कमाल। । सकारात्मक सोच को मिला आज सम्मान। अभय जी पर करते हम सब गर्व और अभिमान ऊंचा हुआ पत्रकारों का मस्तक, आज बहुत है हम खुशहाल। बाबूजी के लाल आपने कर दिया कमाल। । संकल्प का दिवस है आज एकता का बजाए साज। शिखर पर पहुंचे नईदुनिया हम सबका है बस यही काज। अभय जी के आदर्शों को बना लो अपनी ढाल। । बाबूजी के लाल आपने कर दिया कमाल। ।
सवाल ये भी है कि यदि सीएम के कार्यक्रम स्थल पर ही कूड़ा हो तो पूरे शहर का क्या हाल होगा। कार्यक्रम की फोटो देखने पर तो यही लगता है कि या तो क्षेत्र में सुबह सफाई कर्मी ने सफाई नहीं की। या फिर सीएम और मेयर के लिए सड़क पर कुछ कूड़ा छोड़ दिया। यदि सफाई ही करनी थी तो एक दिन बरसाती नदियों-रिस्पना और बिंदाल में अभियान चलाया जा सकता था। क्योंकि इन दोनों नदियों में शहरभर का पानी गिरता है और इन नदियों में हर तरफ गंदगी देखी जा सकती है। यदि मोहल्लों की गलियों और सड़कों पर सफाई अभियान चलाने की नौबत आती है तो वहां की सफाई व्यवस्था की स्थिति साफ बयां हो जाती है। खैर कल के समाचार पत्रों की हेडलाइन सफाई को लेकर होगी। क्योंकि ऐसे कार्यक्रमों में मीडिया भी ताली बजाता है और ऐसे ड्रामों को तव्वजो देता रहता है। मूल सवाल सबकी डिक्शनेरी से गायब हो चुके हैं। बारिश शुरू हो चुकी है। गर्मी भी है। डेंगू का खतरा है और नगर निगम की ओर से फागिंग सिर्फ सड़क पर हो रही है। गली मोहल्लों में के घरों में फागिंग का धुआं तक नहीं पहुंच रहा है। सवाल ये भी है कि जब पहली बार धामी ने सीएम की शपथ ली थी तो छह माह के भीतर 22 हजार सरकारी पदों को भरने की घोषणा की थी। वह दूसरी बार भी शपथ ले चुके हैं, आखिर उन सरकारी नौकरी में कितने पद भरे गए। ये सवाल भी मीडिया से गायब हैं। खैर अब हम यहां कार्यक्रम के बारे में जानकारी दे रहे हैं। जैसा कि सरकारी प्रेस नोट में बताया गया है। देहरादून में सहस्त्रधारा रोड में दून डिफेंस ड्रीम और नगर निगम देहरादून की ओर से कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम को- क्लीन सिटी, ग्रीन सिटी, यही है मेरा ड्रीम सिटी, का नाम दिया गया। इसमें उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वच्छता कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस दौरान उन्होंने छात्रों के साथ सड़क पर स्वयं सफाई कर स्वच्छता का संदेश दिया, एवं स्वच्छता की शपथ दिलवाई। कार्यक्रम में संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि क्लीन सिटी, ग्रीन सिटी एवं देहरादून को स्वच्छ करने का कार्य समाज सेवा, प्रकृति, पर्यावरण एवं श्रमदान का कार्य है। उन्होंने कहा हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रकृति द्वारा दिए गए संसाधन एवं सुंदरता आने वाले भविष्य के लिए भी बचे। इसके लिए आज हमें स्वच्छता का संकल्प लेना है। उन्होंने कहा देहरादून शहर देश के प्रमुख शहरों में से एक है इसकी स्वच्छता से हम पूरे देश में पर्यावरण के प्रति सकारात्मक संकेत दे सकते हैं। शहर की सुंदरता एवं स्वच्छता से ही पर्यटक में शहर के प्रति अच्छा संदेश जाता है। उन्होंने देहरादून शहर को पूरी तरह क्लीन एवं ग्रीन रखने की बात कहते हुए स्वच्छता को सहभागिता से किया जाने वाला कार्य बताया। उन्होंने कहा प्रत्येक व्यक्ति के योगदान से ही स्वच्छता संभव हो सकती है उन्होंने युवाओं से विशेष तौर पर स्वच्छता जैसे कार्यक्रमों में ज्यादा से ज्यादा जुड़ने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सर्वप्रथम स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत स्वयं झाड़ू पकड़ देश को स्वच्छता का संदेश दिया। उन्होंने कहा स्वच्छ भारत अभियान एक आंदोलन के रूप में पूरे भारत में उभरा, जिसके अंतर्गत तमाम योजनाओं का संचालन किया गया। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आने वाले समय में 10 लाख नौकरी दिए जाने पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा हमें उत्तराखंड राज्य को आने वाले समय में स्वच्छता के साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाना है, जिसके लिए राज्य सरकार विकल्प रहित संकल्प के साथ कार्य कर रही है। मेयर सुनील उनियाल गामा ने मुख्यमंत्री धामी को चंपावत उप चुनाव में विजय पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में क्लीन दून ग्रीन दून पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहां देहरादून को सुंदर एवं स्वच्छ रखे जाने के कार्य में नगर निगम का मुख्यमंत्री श्री धामी द्वारा हमेशा पूर्ण रूप से सहयोग किया है। उन्होंने कहा मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड राज्य को स्वच्छता के क्षेत्र में नंबर-1 बनेगा। इस दौरान विधायक खजान दास दून डिफेंस ड्रीमर्स के अध्यक्ष हरिओम चौधरी एवं अन्य लोग मौजूद रहे। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
सवाल ये भी है कि यदि सीएम के कार्यक्रम स्थल पर ही कूड़ा हो तो पूरे शहर का क्या हाल होगा। कार्यक्रम की फोटो देखने पर तो यही लगता है कि या तो क्षेत्र में सुबह सफाई कर्मी ने सफाई नहीं की। या फिर सीएम और मेयर के लिए सड़क पर कुछ कूड़ा छोड़ दिया। यदि सफाई ही करनी थी तो एक दिन बरसाती नदियों-रिस्पना और बिंदाल में अभियान चलाया जा सकता था। क्योंकि इन दोनों नदियों में शहरभर का पानी गिरता है और इन नदियों में हर तरफ गंदगी देखी जा सकती है। यदि मोहल्लों की गलियों और सड़कों पर सफाई अभियान चलाने की नौबत आती है तो वहां की सफाई व्यवस्था की स्थिति साफ बयां हो जाती है। खैर कल के समाचार पत्रों की हेडलाइन सफाई को लेकर होगी। क्योंकि ऐसे कार्यक्रमों में मीडिया भी ताली बजाता है और ऐसे ड्रामों को तव्वजो देता रहता है। मूल सवाल सबकी डिक्शनेरी से गायब हो चुके हैं। बारिश शुरू हो चुकी है। गर्मी भी है। डेंगू का खतरा है और नगर निगम की ओर से फागिंग सिर्फ सड़क पर हो रही है। गली मोहल्लों में के घरों में फागिंग का धुआं तक नहीं पहुंच रहा है। सवाल ये भी है कि जब पहली बार धामी ने सीएम की शपथ ली थी तो छह माह के भीतर बाईस हजार सरकारी पदों को भरने की घोषणा की थी। वह दूसरी बार भी शपथ ले चुके हैं, आखिर उन सरकारी नौकरी में कितने पद भरे गए। ये सवाल भी मीडिया से गायब हैं। खैर अब हम यहां कार्यक्रम के बारे में जानकारी दे रहे हैं। जैसा कि सरकारी प्रेस नोट में बताया गया है। देहरादून में सहस्त्रधारा रोड में दून डिफेंस ड्रीम और नगर निगम देहरादून की ओर से कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम को- क्लीन सिटी, ग्रीन सिटी, यही है मेरा ड्रीम सिटी, का नाम दिया गया। इसमें उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वच्छता कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस दौरान उन्होंने छात्रों के साथ सड़क पर स्वयं सफाई कर स्वच्छता का संदेश दिया, एवं स्वच्छता की शपथ दिलवाई। कार्यक्रम में संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि क्लीन सिटी, ग्रीन सिटी एवं देहरादून को स्वच्छ करने का कार्य समाज सेवा, प्रकृति, पर्यावरण एवं श्रमदान का कार्य है। उन्होंने कहा हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रकृति द्वारा दिए गए संसाधन एवं सुंदरता आने वाले भविष्य के लिए भी बचे। इसके लिए आज हमें स्वच्छता का संकल्प लेना है। उन्होंने कहा देहरादून शहर देश के प्रमुख शहरों में से एक है इसकी स्वच्छता से हम पूरे देश में पर्यावरण के प्रति सकारात्मक संकेत दे सकते हैं। शहर की सुंदरता एवं स्वच्छता से ही पर्यटक में शहर के प्रति अच्छा संदेश जाता है। उन्होंने देहरादून शहर को पूरी तरह क्लीन एवं ग्रीन रखने की बात कहते हुए स्वच्छता को सहभागिता से किया जाने वाला कार्य बताया। उन्होंने कहा प्रत्येक व्यक्ति के योगदान से ही स्वच्छता संभव हो सकती है उन्होंने युवाओं से विशेष तौर पर स्वच्छता जैसे कार्यक्रमों में ज्यादा से ज्यादा जुड़ने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सर्वप्रथम स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत स्वयं झाड़ू पकड़ देश को स्वच्छता का संदेश दिया। उन्होंने कहा स्वच्छ भारत अभियान एक आंदोलन के रूप में पूरे भारत में उभरा, जिसके अंतर्गत तमाम योजनाओं का संचालन किया गया। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आने वाले समय में दस लाख नौकरी दिए जाने पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा हमें उत्तराखंड राज्य को आने वाले समय में स्वच्छता के साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाना है, जिसके लिए राज्य सरकार विकल्प रहित संकल्प के साथ कार्य कर रही है। मेयर सुनील उनियाल गामा ने मुख्यमंत्री धामी को चंपावत उप चुनाव में विजय पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में क्लीन दून ग्रीन दून पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहां देहरादून को सुंदर एवं स्वच्छ रखे जाने के कार्य में नगर निगम का मुख्यमंत्री श्री धामी द्वारा हमेशा पूर्ण रूप से सहयोग किया है। उन्होंने कहा मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड राज्य को स्वच्छता के क्षेत्र में नंबर-एक बनेगा। इस दौरान विधायक खजान दास दून डिफेंस ड्रीमर्स के अध्यक्ष हरिओम चौधरी एवं अन्य लोग मौजूद रहे। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
नगर परिषद डलहौजी की ओर से शनिवार को स्वच्छता लीग कार्यक्रम के तहत आमजन को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से विभिन्न स्कूलों के सहयोग से जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। इस जागरूकता रैली को एसडीएम जगन ठाकुर ने गांधी चौक से झंडी दिखा कर रवाना किया। यह रैली गांधी चौक से आरंभ होकर सुभाष चौक से होकर गुजरी। इस दौरान एसडीएम जगन ठाकुर ने स्वयं भी रैली में शामिल होकर सफाई कर लोगों को स्वच्छता बनाए रखने का आह्वान किया। एसडीएम जगन ठाकुर ने कहा कि इस कार्यक्रम को प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिवस से भी जोड़ा गया है। उन्होंने रैली में भाग लेने के लिए डलहौजी के विभिन्न स्कूलों और उनके शिक्षकों का आभार जताया। उन्होंने लोगों से आह्वान करते हुए कहा कि पर्यटन नगरी को सुंदर व स्वच्छ बनाने में सहभागिता सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि जल्द डलहौजी में सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट का एक प्लांट लगाया जाएगा, जिसके लिए प्रदेश सरकार को एस्टीमेट भेजा गया है। उन्होंने कहा कि इसमें बनीखेत पुखरी व ढलोग पंचायतों को भी साथ जोडऩे की भी योजना है। नगर परिषद डलहौजी की कार्यकारी अधिकारी राखी कौशल ने कहा कि स्वच्छता लीग कार्यक्रम के अंतर्गत पूरे देश में इस प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसी के तहत शनिवार को नगर परिषद डलहौजी ने भी इस रैली का आयोजन किया है। इस जागरूकता रैली में नगर पार्षद वंदना देवी, रेणु बाला, मनोनीत पार्षद तिलक शर्मा, नगर परिषद के कर्मचारियों सहित डलहौजी के विभिन्न स्कूल डीपीएस, जीएनपीएस व डलहौजी हिलटॉप पब्लिक स्कूल और राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला डलहौजी के छात्रों व शिक्षकों ने अपनी भागेदारी सुनिश्चित की।
नगर परिषद डलहौजी की ओर से शनिवार को स्वच्छता लीग कार्यक्रम के तहत आमजन को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से विभिन्न स्कूलों के सहयोग से जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। इस जागरूकता रैली को एसडीएम जगन ठाकुर ने गांधी चौक से झंडी दिखा कर रवाना किया। यह रैली गांधी चौक से आरंभ होकर सुभाष चौक से होकर गुजरी। इस दौरान एसडीएम जगन ठाकुर ने स्वयं भी रैली में शामिल होकर सफाई कर लोगों को स्वच्छता बनाए रखने का आह्वान किया। एसडीएम जगन ठाकुर ने कहा कि इस कार्यक्रम को प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिवस से भी जोड़ा गया है। उन्होंने रैली में भाग लेने के लिए डलहौजी के विभिन्न स्कूलों और उनके शिक्षकों का आभार जताया। उन्होंने लोगों से आह्वान करते हुए कहा कि पर्यटन नगरी को सुंदर व स्वच्छ बनाने में सहभागिता सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि जल्द डलहौजी में सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट का एक प्लांट लगाया जाएगा, जिसके लिए प्रदेश सरकार को एस्टीमेट भेजा गया है। उन्होंने कहा कि इसमें बनीखेत पुखरी व ढलोग पंचायतों को भी साथ जोडऩे की भी योजना है। नगर परिषद डलहौजी की कार्यकारी अधिकारी राखी कौशल ने कहा कि स्वच्छता लीग कार्यक्रम के अंतर्गत पूरे देश में इस प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसी के तहत शनिवार को नगर परिषद डलहौजी ने भी इस रैली का आयोजन किया है। इस जागरूकता रैली में नगर पार्षद वंदना देवी, रेणु बाला, मनोनीत पार्षद तिलक शर्मा, नगर परिषद के कर्मचारियों सहित डलहौजी के विभिन्न स्कूल डीपीएस, जीएनपीएस व डलहौजी हिलटॉप पब्लिक स्कूल और राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला डलहौजी के छात्रों व शिक्षकों ने अपनी भागेदारी सुनिश्चित की।
Home Made Herbal Shampoo. इन सभी वस्तुओं को मिलाकर रातभर 1 ltr. पानी में भिगो दीजिये : सुबह इसे 15 मिनट उबाल लीजिये. जब ये ठंडा हो जाये तो इसे छानकर इसका पानी अलग कर लीजिये. अब इस पानी में 1 नीबू का रस डालकर अच्छी तरह मिला लीजिये. एक बेहतरीन हर्बल शैम्पू तैयार है. आप इसे एक बोतल में भरकर रख लीजिये और जब भी बाल धोने हों तो इस शैम्पू का इस्तेमाल कीजिये. यह शैम्पू बालों के लिये बहुत ही फायदेमंद है. हाँ इस से झाग थोड़ा कम मिलेगा, मगर स्वस्थ बाल ज़रूर मिलेंगे।
Home Made Herbal Shampoo. इन सभी वस्तुओं को मिलाकर रातभर एक ltr. पानी में भिगो दीजिये : सुबह इसे पंद्रह मिनट उबाल लीजिये. जब ये ठंडा हो जाये तो इसे छानकर इसका पानी अलग कर लीजिये. अब इस पानी में एक नीबू का रस डालकर अच्छी तरह मिला लीजिये. एक बेहतरीन हर्बल शैम्पू तैयार है. आप इसे एक बोतल में भरकर रख लीजिये और जब भी बाल धोने हों तो इस शैम्पू का इस्तेमाल कीजिये. यह शैम्पू बालों के लिये बहुत ही फायदेमंद है. हाँ इस से झाग थोड़ा कम मिलेगा, मगर स्वस्थ बाल ज़रूर मिलेंगे।
नूरपुर हादसे के बाद सभी शव नूरपुर स्थानीय अस्पताल में रख़े गए हैं। ये शव मुख्यमंत्री के आने के बाद ही परिजनों को सौंपे जाएंगे। लेकिन, इसी बीच परिजन तो अपनों के शवों को लेने पहुंच चुके हैं, लेकिन मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में किन्हीं कारणों के चलते लेटलतिफी दिख रही है। जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर नूरपुर में सवा 9 बजे पहुंचने वाले थे। लेकिन ख़बर लिखने तक मुख्यमंत्री नूरपुर नहीं पहुंच पाए हैं। हालांकि, इसका एक कारण पड्डल मैदान में एक कार्यक्रम भी बताया जा रहा है। ग़ौरतलब है कि सोमवार को हुए हादसे में 27 बच्चों सहित 30 लोगों की मौत हो गई थी।
नूरपुर हादसे के बाद सभी शव नूरपुर स्थानीय अस्पताल में रख़े गए हैं। ये शव मुख्यमंत्री के आने के बाद ही परिजनों को सौंपे जाएंगे। लेकिन, इसी बीच परिजन तो अपनों के शवों को लेने पहुंच चुके हैं, लेकिन मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में किन्हीं कारणों के चलते लेटलतिफी दिख रही है। जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर नूरपुर में सवा नौ बजे पहुंचने वाले थे। लेकिन ख़बर लिखने तक मुख्यमंत्री नूरपुर नहीं पहुंच पाए हैं। हालांकि, इसका एक कारण पड्डल मैदान में एक कार्यक्रम भी बताया जा रहा है। ग़ौरतलब है कि सोमवार को हुए हादसे में सत्ताईस बच्चों सहित तीस लोगों की मौत हो गई थी।
Welcome! Forgot your password? A password will be e-mailed to you. मजेदार जोक्स :-दुकानदारः कैसा सूट दिखाऊं? मजेदार जोक्स :-टीचरः मंजू यमुना नदी कहां बहती है? मजेदार जोक्स :-डॉक्टरः चश्मा किसके लिए बनवाना है? मजेदार जोक्स :-गोलू : तुम्हारी आंख क्यों सूजी हुई हैं? © Copyright 2020 Navyug Sandesh, All Rights Reserved.
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उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने 27 प्रत्याशियों की लिस्ट जारी की है. पार्टी ने लखनऊ पूर्व से पंकज तिवारी की जगह मनोज तिवारी को मैदान में उतारा है. वहीं बाराबंकी से गौरी यादव के स्थान पर रूही अरशद को उम्मीदवार बनाया है. उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव (Uttar Pradesh Assembly Election 2022) के लिए कांग्रेस ने 27 प्रत्याशियों की लिस्ट जारी की है (Congress Candidate List). इसमें 11 महिलाएं हैं (Women Candidates). ताजा जारी लिस्ट में पार्टी ने लखनऊ पूर्व से पंकज तिवारी की जगह मनोज तिवारी को मैदान में उतारा है. वहीं बाराबंकी से गौरी यादव के स्थान पर रूही अरशद, पिपराइच से मेनिका पांडे के स्थान पर सुमन चौहान, देवरिया से पुरुषोत्तम एन. सिंह, मऊ से मानवेंद्र बहादुर सिंह के स्थान पर माधवेंद्र सिंह, मिर्जापुर से भगवान दत्त उर्फ राजन पाठक को उम्मीदवार बनाया है. वहीं पार्टी ने सिराथू से सीमा देवी, कुर्सी से उर्मिला पटेल (जमील अहमद की जगह), गोशैनगंज से शारदा जायसवाल, तुलसीपुर से दीपेंद्र सिंह (दीपांकर), भिंग से गजला चौधरी (वंदना शर्मा के स्थान पर), महनून से कुतुबुद्दीन खान डायमंड, कटरा बाजार से ताहिरा बेगम तवाज़ खान, गौरा से सतेंद्र दुबे, महादेवा (एससी) से बृजेश आर्य, मेंहदावल से रफीका खातून, खलीलाबाद से अमरेंद्र भूषण (सबिहा खातून के स्थान पर), धनघाट (एससी) से शांति देवी, नौतनवा से सदामोहन उपाध्याय, सिसवा से राजू कुमार गुप्ता को प्रत्याशी बनाया है. ।मनोज तिवारी (पंकज तिवारी की जगह) ।उर्मिला पटेल (जमील अहमद की जगह) ।रूही अरशद (गौरी यादव के स्थान पर) ।(वंदना शर्मा के स्थान पर) ।दीपेंद्र सिंह (दीपांकर) ।महादेवा (एससी) ।अमरेंद्र भूषण (सबिहा खातून के स्थान पर) ।धनघाट (एससी) ।सुमन चौहान (मेनिका पांडे के स्थान पर) ।लालगंज (एससी) ।माधवेंद्र सिंह (मानवेंद्र बहादुर सिंह के स्थान पर) ।बेलथरा रोड (एससी) उत्तर प्रदेश में 7 चरणों में चुनाव आयोजित कराए जाएंगे. इसके तहत 10 फरवरी से 7 मार्च तक वोटिंग की जाएगी. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे 10 मार्च को आएंगे. चुनाव आयोग के मुताबिक उत्तर प्रदेश में 10 फरवरी को पहले चरण के तहत मतदान किया जाएगा. इसके बाद दूसरे चरण का 14 फरवरी, तीसरे चरण का 20 फरवरी, चौथे चरण का 23 फरवरी, पांचवे चरण का 27 फरवरी, छठे चरण का 3 मार्च और सातवें चरण का 7 मार्च को मतदान होगा.
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने सत्ताईस प्रत्याशियों की लिस्ट जारी की है. पार्टी ने लखनऊ पूर्व से पंकज तिवारी की जगह मनोज तिवारी को मैदान में उतारा है. वहीं बाराबंकी से गौरी यादव के स्थान पर रूही अरशद को उम्मीदवार बनाया है. उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने सत्ताईस प्रत्याशियों की लिस्ट जारी की है . इसमें ग्यारह महिलाएं हैं . ताजा जारी लिस्ट में पार्टी ने लखनऊ पूर्व से पंकज तिवारी की जगह मनोज तिवारी को मैदान में उतारा है. वहीं बाराबंकी से गौरी यादव के स्थान पर रूही अरशद, पिपराइच से मेनिका पांडे के स्थान पर सुमन चौहान, देवरिया से पुरुषोत्तम एन. सिंह, मऊ से मानवेंद्र बहादुर सिंह के स्थान पर माधवेंद्र सिंह, मिर्जापुर से भगवान दत्त उर्फ राजन पाठक को उम्मीदवार बनाया है. वहीं पार्टी ने सिराथू से सीमा देवी, कुर्सी से उर्मिला पटेल , गोशैनगंज से शारदा जायसवाल, तुलसीपुर से दीपेंद्र सिंह , भिंग से गजला चौधरी , महनून से कुतुबुद्दीन खान डायमंड, कटरा बाजार से ताहिरा बेगम तवाज़ खान, गौरा से सतेंद्र दुबे, महादेवा से बृजेश आर्य, मेंहदावल से रफीका खातून, खलीलाबाद से अमरेंद्र भूषण , धनघाट से शांति देवी, नौतनवा से सदामोहन उपाध्याय, सिसवा से राजू कुमार गुप्ता को प्रत्याशी बनाया है. ।मनोज तिवारी ।उर्मिला पटेल ।रूही अरशद । ।दीपेंद्र सिंह ।महादेवा ।अमरेंद्र भूषण ।धनघाट ।सुमन चौहान ।लालगंज ।माधवेंद्र सिंह ।बेलथरा रोड उत्तर प्रदेश में सात चरणों में चुनाव आयोजित कराए जाएंगे. इसके तहत दस फरवरी से सात मार्च तक वोटिंग की जाएगी. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे दस मार्च को आएंगे. चुनाव आयोग के मुताबिक उत्तर प्रदेश में दस फरवरी को पहले चरण के तहत मतदान किया जाएगा. इसके बाद दूसरे चरण का चौदह फरवरी, तीसरे चरण का बीस फरवरी, चौथे चरण का तेईस फरवरी, पांचवे चरण का सत्ताईस फरवरी, छठे चरण का तीन मार्च और सातवें चरण का सात मार्च को मतदान होगा.
चन्द्र यानी सोम, चन्द्रमा जो की नव ग्रहों में से एक है, चंद्र एक बहुत सुंदर व युवा ग्रह है। दस सफेद घोड़ों पर सवार होकर वह रात्रि में आकाश में भ्रमण के लिए निकलता है। चंद्र का विवाह राजा दक्ष की 27 पुत्रियों के साथ हुआ है जिसमें रोहिनी इनको अधिक प्रिय है, वैदिक साहित्य के अनुसार इन्होंने ब्रहस्पति पत्नी तारा के साथ अनैतिक संबंध रखे जिसके फलस्वरूप इनके पुत्र रूप में बुद्ध की उत्पत्ति हुई जिसके कारण न बुद्ध ने इनको पिता माना और ब्रहस्पति भी इनके विरुद्ध हो गये, एक बार इन्होंने जब गणेश जी का मजाक बनाया तो गणेश जी ने इनको काले और प्रकाश हीन होने का शाप दिया जिसके फलस्वरूप पूरे संसार में रात्रि में अंधकार छा गया परंतु चंद्र को जब अपनी गलती का एहसास हुआ तब उन्होंने गणेश जी से माफी मांगी तब गणेश जी ने कहा कि आपके शरीर का एक भाग काला रहेगा और भादों की चतुर्थी को जो आपका दर्शन करेगा उसको एक साल के अंदर झूठा कलंक लगेगा परंतु यदि इस दिन आपको देखने के बाद अगर वो व्यक्ति आपको पत्थर मारेगा या थूकेगा तो आपको इस दिन देखने पर भी उसको कलंक नहीं लगेगा। चंद्र कोई ग्रह नहीं बल्कि धरती का उपग्रह माना गया है पृथ्वी के मुकाबले यह एक चौथाई अंश के बराबर है। पृथ्वी से इसकी दूरी 406860 किलोमीटर मानी गयी है। चंद्र पृथ्वी की परिक्रमा 27 दिन में पूर्ण कर लेता है। इतने ही समय में ये अपनी धुरी पर भी चक्कर लगा लेता है। 15 दिन तक इसकी कलाएं क्षीण होती हैं जिसको कृष्ण पक्ष कहते हंै व 15 दिन तक इसकी कलाएं बढ़ती हैं जिसको शुक्ल पक्ष कहते हंै। चंद्रमा सूर्य से प्रकाश लेकर धरती को प्रकाशित करता है। देवता-शिव गोत्र-अगि दिशा-वायव दिन-सोमवार वस्त्र-धोती पशु-घोड़ा अंग-दिल व बायां भाग पेशा-कुम्हार स्वभाव-शांत, शीतल वर्ण-श्वेत जाति-ब्राह्मïण भम्रण-एक राशि में सवा दो दिन नक्षत्र-रोहिणी, हस्त, श्रवण गुण-माता वृक्ष-पोस्त का हरा पौधा दूध वाला वाहन-हिस व दस श्वेत घोड़ों वाला रथ राशि-कर्क समग्रह-मंगल, गुरु, शुक्र, शनि शत्रु ग्रह-सूर्य, बुद्ध, राहु, केतु, शत्रु अन्य नाम-सोम, रजनीपति, राशि, कला, निधि, इंदू, शशांक, मंयक, सुधाकर आदि। चांद पूरी पृथ्वी पर अकेला वो ग्रह है जो कि वैज्ञानिकों अनुसार आज से लगभग 500 करोड़ साल पूर्व थैया नामक उल्का धरती से टकराया था और इससे धरती का जो टुकड़ा टूटकर अलग हुआ वह ही चांद बना। उस वक्त धरती द्रव्य रूप में थी। चांद 27. 3 दिनों में धरती का एक पूरा चक्कर लगाता है। जिसके परिणामनुसार धरती पर समुद्रों में अक्सर ज्वार भाटे आते हैं। चांद धरती के आकार का कुल 27 प्रतिशत हिस्सा हैं। चांद का कुल वजन 81 अरब टन है। पूरे चांद में आधे चांद से 9 गुना ज्यादा चमक है। अगर चांद गायब हो जाए तो धरती पर मात्र 6 घंटे का दिन होगा। अगर आपका वजन धरती पर 70 किलो ग्राम है तो चांद पर वो 10 किलोग्राम ही होगा। चांद का सिर्फ 60 प्रतिशत हिस्सा ही धरती से दिखता है। चांद धरती के चारों ओर घूमते समय अपना सिर्फ एक हिस्सा ही धरती की तरफ रखता है। इसलिए चांद का दूसरा रूप आज तक धरती पर नहीं दिखाई दिया परंतु चांद के दूसरे हिस्से की तस्वीर ली जा सकती है। चांद हर साल धरती से 4 सेंटीमीटर दूर जा रहा है। सौर मंडल के 181 उपग्रहों में चांद का आकार 5वें नंबर पर है। चांद का दिन का तापमान 180 डिग्री सेल्सियस व रात का -153 डिग्री सेल्सियस है। चांद का क्षेत्रफल अफ्रीका के बराबर है व चांद पर पानी है। जब भी किसी ग्रह की महादशा शुरू होती है तो उस वक्त जीवन में अनेक उतार-चढ़ाव आते हैं जो जीवन के हर पक्ष को प्रभावित करते है। जीवन से जुड़े सारे सुख-दुख इसी महादशा का प्रभाव कहे जा सकते हैं। कुछ महादशा इंसान के बचपन में आती है, कुछ जवानी में तो, कुछ बुढ़ापे में आती है। महादशा एक समय सारणी होती है। चंद्रमा की दशा 10 वर्ष की होती है। आइए जानें चन्द्रमा की महादशा अपनी समयअवधि में किस-किस तरह से आपको प्रभावित करती है। चन्द्रमा में चन्द्रमा- चन्द्रमा की महादशा में चन्द्रमा की अन्तरदशा में यदि चन्द्रमा पूर्ण व खाली हो तो शुभ फल देता है इसमें जातक को मान सम्मान मिलता है। धनयोग पूर्ण होते हैं। कला में रुचि बढ़ती है व अशुभ होने पर अपमान व रोगों कीसंभावना प्रबल हो जाती है। व्यक्ति आलसी बन जाता है। चन्द्रमा में मंगल- मंगल यदि शुभ हो तो जातक के उत्साह में वृद्धि होती है उसे धन व ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। पत्नी व संतान सुख मिलता है परिजनों व मित्रों का सहयोग बढ़ता है, कार्यों में लाभ मिलता है परंतु यदि मंगल अशुभ हो तो शत्रु से पीड़ा, रक्त व पित्त विकारों में वृद्धि होती है। चन्द्रमा में राहू- यदि राहु शुभ राशि कारक से युक्त हो तो जातक को अचानक धन लाभ होता है शत्रु शान्त रहते हैं। हर कार्य में सफलता मिलती है। अशुभ राहु की स्थिति में पैतृक धन समाप्त हो जाता है हृदय भयग्रस्त हो जाता है शरीर रोगी हो जाता है। चन्द्रमा में गुरु- गुरु की स्थिति अच्छी होने पर अच्छे गुरु की प्राप्ति होती है धर्म के कार्यों में रुचि बढ़ती है। परिवार व समाज में मान बढ़ता है। मित्र बनते हैं परंतु यदि गुरु अशुभ हो तो माता को पीड़ा व मामा से वियोग होता है। चन्द्रमा में शनि- शनि शुभ हो तो तीर्थ यात्राओं का सुख मिलता है मन शांत रहता है परंतु शनि अगर अशुभ हो तो परिवार से विछोह, मन में अशान्ति, व्यसन वृद्धि, उदर, मस्तिष्क, नेत्र पीड़ा होती है। वात, पित्त, रोग में वृद्धि होती है। चन्द्रमा में बुद्ध- बुद्ध अगर शुभ हो तो जातक को ज्ञान की प्राप्ति होती है घर में मंगल काम होते हैं। नौकरी में लाभ, वाहन की प्राप्ति होती है। बुद्ध अगर अशुभ हो तो धन हानि, चर्म रोग पीड़ा होती है। चन्द्रमा में केतु- केतु अगर शुभ भाव में भी हो तो भी ज्यादा लाभकारी नहीं होता है इसके साथ ही अशुभ भाव में हो तो जातक के लिये अत्यधिक कवटकारी व कई बार मृत्यु का कारण भी बन जाता है। विषपान की लत लगी रहती है व दुर्घटना का प्रबल योग भी बन जाता है। इस समय काल में जातक का सुख खत्म व धन हास भी बना ही रहता है। चन्द्रमा में शुक्र- शुक्र अगर शुभ भाव में हो तो जातक को धन, यश, सुख तीनों में ही वृद्धि होती है रोजगार में सफलता मिलती है। प्रकृति के प्रति लगाव बढ़ जाता है परंतु शुक्र अशुभ की स्थिति में जातक को जलोदर की बीमारी का भय रहता है जातक का चरित्र भी खराब हो जाता है। चन्द्रमा में सूर्य-सूर्य यदि शुभ भाव में हो तो जातक को सर्वत्र विजय मिलती है, घर में अन्न भंडार सदैव भरे रहते हैं, राज्य से सम्मान की प्राप्ति होती है, सुख सौभाग्य में वृद्धि होती है। यदि सूर्य अशुभ हो तो नकसीर फूटना व रक्त विकारों का भय बना रहता है। शरीर में वेदना बनी रहती है। इस तरह से चन्द्र की महादशा व उसके अनुसार महादशा के अन्तर्गत आने वाली अन्तरदशा के प्रभाव उपरोक्त विवरण के अनुसार ही पड़ते हंै महादशा के दौरान यद्यपि अन्तरदशा व अन्तरदशा के दौरान प्रत्यन्तरदशा भी आती है चूंकि अन्तरदशा कई सालों के लिए आती है अतः उसका प्रभाव मानव पर दिखाई देता है परंतु प्रत्यन्तरदशा कुछ दिनों या कुछ माहों के लिए ही आती है। इसलिए उसका प्रभाव या कुप्रभाव किसी भी इंसान पर इतना अधिक नहीं पड़ता है। परंतु महादशा के समय व्यक्ति को विशेष रूप से गृह अनुसार दान व जप करते रहना चाहिए इसके साथ ही महादशा के दौरान आने वाली अन्तरदशाओं में भी विशेष सावधानियों की जरूरत है बशर्ते आप किसी अच्छे ज्योतिषाचार्य से समय-समय पर संपर्क करते रहें और महादशाओं की जानकारी प्राप्त करते रहें। सूर्य के बाद धरती पर सबसे अधिक प्रभाव चन्द्रमा का पड़ता है और पूर्णिमा के दिन चन्द्र का प्रभाव चाहे वो शुभ हो या अशुभ धरती पर रहने वाले हर जीव को झेलना ही पड़ता है। पूर्णिमा का चन्द्र मानव, पशु पक्षी सभी के जीवन में हलचल देता है सबसे ज्यादा समुद्र में ज्वार भाटे पूर्णिमा में ही आते हैं। 01. घर का वायव्य कोण दूषित होने पर चन्द्र दोषपूर्ण होता है। 02. घर में जल यदि गलत दिशा में रखा हो तो भी चन्द्र धीमा हो जाता है। 03. पूर्वजों का अपमान करने व श्राद्ध आदि नहीं करने पर चन्द्रमा दूषित हो जाता है। 04. माता का अपमान करने पर भी चन्द्रमा खराब हो जाता है। 05. गृह कलेश व पारिवारिक सदस्यों के लड़ने से भी चन्द्रखराब हो जाता है। 06. चंद्र के साथ राहु, केतु, शनि उसी भाव में होने से या इनकी दृष्टिï चन्द्र पर होने से भी चन्द्र खराब हो जाता है। यदि माता का स्वास्थ्य निस्तर खराब रहे ता चन्द्र खराब है। खराब चन्द्र का संकेत माता की मृत्यु भी है। 01. दूध देने वाला जानवर मर जाये तो। 02. अगर घोड़ा पाल रखा हो अगर वो भी मर जाए तो। 03. घर में अगर कुआं हो और वो सूख जाए। 04. सूंघने समझने की क्षमता कम हो जाना। 05. मानसिक रोग हो जाना, मन में घबराहट, आमदनी का कम हो जाना, पानी की समस्याएं बढ़ जाती हैं, जीवन भयग्रस्त हो जाता है यदि ऐसा हो तो चन्द्र खराब माना जाता है। चन्द्रदोष क्या है- ज्योतिष अनुसार जब चन्द्रमा के साथ राहु की युति हो तो चन्द्र दोष होता है इसी अवस्था को चन्द्र ग्रहण भी कहते हैं। इस अवस्था में चन्द्रमा दूषित हो जाता है और मन का कारक होने के कारण मन में विकार उत्पन्न करता है। साथ ही जब चन्द्रमा पर केतु की नजर हो तब भी चन्द्रमा खराब हो जाता है। चन्द्रमा यदि नीच राशि का हो या फिर नीच या अशुभ ग्रहों से ग्रसित हो तो भी चन्द्र होता है। जब सूर्य व चन्द्रसाथ हो तो भी चन्द्र दोष होता है। चन्द्र दोष चाहे किसी भी तरह बने ये जीवन को उथल-पुथल ही देता है जिसके चलते मानव का जीवन शंकाओं व कवरों से भर जाता है। चन्द्र की खराबी से दिल, पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ता है, मिर्गी के व पागलपन के रोग भी इसकी खराबी से होते हंै फेफड़ों, मासिक धर्म पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है सर्दी जुकाम बना रहता है चन्द्र की खराबी से कई बार लोग आत्महत्या तक कर लेते है। 01. चन्द्रमा को अनुकूल करने के लिए माता के चरण छुएं। 02. शिवजी की पूजा करें, वृत्त रखें, शिवलिंग पर दूध चीनी चढ़ाएं। 03. पानी मिले दूध को सिरहाने रख कर सोएं व सुबह कीकर में डाल दें। 04. छोटी अंगुली में मोती धारण करें परंतु ज्योतिष को जन्म कुंडली दिखाकर। 05. सोमवार को दूध, दही, घी, चीनी, जनैऊ, सफेद वस्त्र, सफेद मिठाई दान करें। 06. चंद्र मंत्रों का जाप करें। 07. महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। 08. गणेश स्त्रोत, दुर्गा सप्तसदी, गौरी, काली, भैरव साधना करें। परंतु कोई भी साधना तभी फलीभूत होती है जबकि उसको विधिवत रूप से किया जाए। साथ ही चन्द्रमा को शुभ करने के लिए श्वेत रंग के कपड़े पहने व काले व लाल रंग के कपड़ों से दूर रहे, चमेली, लिली, कमल, चंदन जैसे फूलों की सुगंध का प्रयोग करने से चन्द्रमा शुभ फल देता है। भक्ति योग, भ्रामणी प्राणायाम, नियमित वज्रासन व नौकायन आसन करने से भी चंद्र सकारात्मक ऊर्जा देता है रोजाना 108 बार ओम का उच्चारण करने से ओम की शक्ति चन्द्र को शुद्ध करती है। घर का वास्तु दोष दूर करने से भी चन्द्र सही होता है। चन्द्रमा पश्चिम दिशा को ऊंचा रखने से भी चन्द्र शुद्ध होता है। पश्चिम दिशा में दिन ढलते ही गुलाबी बल्व जलाने से चन्द्र को बल मिलता है। घर के खराब नलकों को सही कराएं रिसते जल को रोकने से भी चन्द्र शुभ फल देता है। घर के मुख्य द्वार पर 8 कोनो वाला दर्पण कुछ ऐसे लगाएं की आने वाले को उसमें अपना चेहरा दिखे इससे भी चंद्र शुभ फल देता है। चन्द्र रत्न मोती- अगर चन्द्र जातक के सही भाव में बैठा हो तो जातक चन्द्र का रत्न मोती धारण करके और भी लाभ उठा सकता है। सादगी का प्रतीक रत्न माना जाता है, मोती इसे मुक्ता, शीश रत्न और पर्ल के नाम से जाना जाता है। मोती सफेद, गुलाबी, पीले रंग का होता है, मोती समुद्र के भीतर स्थित घोंघे नामक कीट में पाया जाता है। कर्क राशि के जातकों के लिए मोती धारण करना लाभकारी होता है। चन्द्रमा जनित बिमारियों को सही करने में मोती धारण करना सही होता है। मोती धारण करने से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है, मानसिक शान्ति, अनिद्रा आदि पीड़ा शान्त होती है, गर्भाशय संबंधी रोगों, नेत्र रोगों हृदय रोगों में भी मोती धारण करने से लाभ होता है मोती धारण करते वक्त ध्यान रखें की दिन सोमवार ही हो चन्द्रमा का मंत्र करते हुए मोती शुद्ध करे व धारण करे चांदी की अंगूठी या लाकेट में मोती न धारण करने की स्थिति में जातक मूनस्टोन, सफेद मूंगा या ओपल भी धारण कर सकता है। जिस जातक के 4,6,8,12 भाव में चन्द्र हो तो वो जातक कभी भी मोती ना धारण करें। अन्यथा लाभ की जगह हानि होगी। मोती को धारण करने से पूर्व किसी ज्योतिषाचार्य की सलाह अवश्य लें तभी मोती धारण करें। चन्द्र शान्ति व चंद्र रूप से मजबूत करने में दान के अलावा जाप का भी विशेष महत्त्व है। बशर्ते जाप सही मंत्र से व सही समय पर किये जाएं। - ऊं सोम सोमाय नमः- ये मंत्र न केवल जातक के चंद्र को शुद्ध करता है बल्कि जातक की खूबसूरती को बढ़ाता है। इस मंत्र की प्रतिदिन एक माला करने से जातक के चेहरे पर सौंदर्य की आभा आती है। - चन्द्र ध्यान मंत्र- चन्द्र ध्यान मंत्र की अपनी अलग ही शक्ति होती है योग साधना करते वक्त अगर पूरी शुद्धता व सही उच्चारण के साथ इस मंत्र का जाप किया जाए तो इसके प्रभाव स्वरूप इंसान में अद्ïभुत शक्ति, मानसिक बल व आकर्षण पैदा करता है। श्रेतांबरः श्रेतविभूषणश्र श्रेतधुतिर्दण्डधरो द्विबाहुः चन्द्रोमृतात्मा वरदः किरीटी मयि प्रसादं विदधातु देवः - चन्द्र तांत्रिक मंत्र- तांत्रिक पूजा करने वाले लोग अधिकतर चन्द्र तांत्रिक मंत्र का प्रयोग करते हैं। इस मंत्र का जाप आधी रात में करने से न केवल अशुभ चन्द्र को सकारात्मक ऊर्जा मिलती है बल्कि बुद्धिमता का भी संचार होता है। ऊं श्रीं श्रीं श्रौं सः चन्द्राय नमः ऐं क्लीं सोमाय नमः सार रूप में इतना अवश्य कह सकते हैं कि चन्द्र ग्रह मन का कारक माना जाता है। भगवान शिव ने चन्द्र को मस्तक पर धारण किया है इसलिए अपने चन्द्रमा को शुद्ध व शुभ रखें और लाभ उठाएं।
चन्द्र यानी सोम, चन्द्रमा जो की नव ग्रहों में से एक है, चंद्र एक बहुत सुंदर व युवा ग्रह है। दस सफेद घोड़ों पर सवार होकर वह रात्रि में आकाश में भ्रमण के लिए निकलता है। चंद्र का विवाह राजा दक्ष की सत्ताईस पुत्रियों के साथ हुआ है जिसमें रोहिनी इनको अधिक प्रिय है, वैदिक साहित्य के अनुसार इन्होंने ब्रहस्पति पत्नी तारा के साथ अनैतिक संबंध रखे जिसके फलस्वरूप इनके पुत्र रूप में बुद्ध की उत्पत्ति हुई जिसके कारण न बुद्ध ने इनको पिता माना और ब्रहस्पति भी इनके विरुद्ध हो गये, एक बार इन्होंने जब गणेश जी का मजाक बनाया तो गणेश जी ने इनको काले और प्रकाश हीन होने का शाप दिया जिसके फलस्वरूप पूरे संसार में रात्रि में अंधकार छा गया परंतु चंद्र को जब अपनी गलती का एहसास हुआ तब उन्होंने गणेश जी से माफी मांगी तब गणेश जी ने कहा कि आपके शरीर का एक भाग काला रहेगा और भादों की चतुर्थी को जो आपका दर्शन करेगा उसको एक साल के अंदर झूठा कलंक लगेगा परंतु यदि इस दिन आपको देखने के बाद अगर वो व्यक्ति आपको पत्थर मारेगा या थूकेगा तो आपको इस दिन देखने पर भी उसको कलंक नहीं लगेगा। चंद्र कोई ग्रह नहीं बल्कि धरती का उपग्रह माना गया है पृथ्वी के मुकाबले यह एक चौथाई अंश के बराबर है। पृथ्वी से इसकी दूरी चार लाख छः हज़ार आठ सौ साठ किलोग्राममीटर मानी गयी है। चंद्र पृथ्वी की परिक्रमा सत्ताईस दिन में पूर्ण कर लेता है। इतने ही समय में ये अपनी धुरी पर भी चक्कर लगा लेता है। पंद्रह दिन तक इसकी कलाएं क्षीण होती हैं जिसको कृष्ण पक्ष कहते हंै व पंद्रह दिन तक इसकी कलाएं बढ़ती हैं जिसको शुक्ल पक्ष कहते हंै। चंद्रमा सूर्य से प्रकाश लेकर धरती को प्रकाशित करता है। देवता-शिव गोत्र-अगि दिशा-वायव दिन-सोमवार वस्त्र-धोती पशु-घोड़ा अंग-दिल व बायां भाग पेशा-कुम्हार स्वभाव-शांत, शीतल वर्ण-श्वेत जाति-ब्राह्मïण भम्रण-एक राशि में सवा दो दिन नक्षत्र-रोहिणी, हस्त, श्रवण गुण-माता वृक्ष-पोस्त का हरा पौधा दूध वाला वाहन-हिस व दस श्वेत घोड़ों वाला रथ राशि-कर्क समग्रह-मंगल, गुरु, शुक्र, शनि शत्रु ग्रह-सूर्य, बुद्ध, राहु, केतु, शत्रु अन्य नाम-सोम, रजनीपति, राशि, कला, निधि, इंदू, शशांक, मंयक, सुधाकर आदि। चांद पूरी पृथ्वी पर अकेला वो ग्रह है जो कि वैज्ञानिकों अनुसार आज से लगभग पाँच सौ करोड़ साल पूर्व थैया नामक उल्का धरती से टकराया था और इससे धरती का जो टुकड़ा टूटकर अलग हुआ वह ही चांद बना। उस वक्त धरती द्रव्य रूप में थी। चांद सत्ताईस. तीन दिनों में धरती का एक पूरा चक्कर लगाता है। जिसके परिणामनुसार धरती पर समुद्रों में अक्सर ज्वार भाटे आते हैं। चांद धरती के आकार का कुल सत्ताईस प्रतिशत हिस्सा हैं। चांद का कुल वजन इक्यासी अरब टन है। पूरे चांद में आधे चांद से नौ गुना ज्यादा चमक है। अगर चांद गायब हो जाए तो धरती पर मात्र छः घंटाटे का दिन होगा। अगर आपका वजन धरती पर सत्तर किलो ग्राम है तो चांद पर वो दस किलोग्रामग्राम ही होगा। चांद का सिर्फ साठ प्रतिशत हिस्सा ही धरती से दिखता है। चांद धरती के चारों ओर घूमते समय अपना सिर्फ एक हिस्सा ही धरती की तरफ रखता है। इसलिए चांद का दूसरा रूप आज तक धरती पर नहीं दिखाई दिया परंतु चांद के दूसरे हिस्से की तस्वीर ली जा सकती है। चांद हर साल धरती से चार सेंटीमीटर दूर जा रहा है। सौर मंडल के एक सौ इक्यासी उपग्रहों में चांद का आकार पाँचवें नंबर पर है। चांद का दिन का तापमान एक सौ अस्सी डिग्री सेल्सियस व रात का -एक सौ तिरेपन डिग्री सेल्सियस है। चांद का क्षेत्रफल अफ्रीका के बराबर है व चांद पर पानी है। जब भी किसी ग्रह की महादशा शुरू होती है तो उस वक्त जीवन में अनेक उतार-चढ़ाव आते हैं जो जीवन के हर पक्ष को प्रभावित करते है। जीवन से जुड़े सारे सुख-दुख इसी महादशा का प्रभाव कहे जा सकते हैं। कुछ महादशा इंसान के बचपन में आती है, कुछ जवानी में तो, कुछ बुढ़ापे में आती है। महादशा एक समय सारणी होती है। चंद्रमा की दशा दस वर्ष की होती है। आइए जानें चन्द्रमा की महादशा अपनी समयअवधि में किस-किस तरह से आपको प्रभावित करती है। चन्द्रमा में चन्द्रमा- चन्द्रमा की महादशा में चन्द्रमा की अन्तरदशा में यदि चन्द्रमा पूर्ण व खाली हो तो शुभ फल देता है इसमें जातक को मान सम्मान मिलता है। धनयोग पूर्ण होते हैं। कला में रुचि बढ़ती है व अशुभ होने पर अपमान व रोगों कीसंभावना प्रबल हो जाती है। व्यक्ति आलसी बन जाता है। चन्द्रमा में मंगल- मंगल यदि शुभ हो तो जातक के उत्साह में वृद्धि होती है उसे धन व ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। पत्नी व संतान सुख मिलता है परिजनों व मित्रों का सहयोग बढ़ता है, कार्यों में लाभ मिलता है परंतु यदि मंगल अशुभ हो तो शत्रु से पीड़ा, रक्त व पित्त विकारों में वृद्धि होती है। चन्द्रमा में राहू- यदि राहु शुभ राशि कारक से युक्त हो तो जातक को अचानक धन लाभ होता है शत्रु शान्त रहते हैं। हर कार्य में सफलता मिलती है। अशुभ राहु की स्थिति में पैतृक धन समाप्त हो जाता है हृदय भयग्रस्त हो जाता है शरीर रोगी हो जाता है। चन्द्रमा में गुरु- गुरु की स्थिति अच्छी होने पर अच्छे गुरु की प्राप्ति होती है धर्म के कार्यों में रुचि बढ़ती है। परिवार व समाज में मान बढ़ता है। मित्र बनते हैं परंतु यदि गुरु अशुभ हो तो माता को पीड़ा व मामा से वियोग होता है। चन्द्रमा में शनि- शनि शुभ हो तो तीर्थ यात्राओं का सुख मिलता है मन शांत रहता है परंतु शनि अगर अशुभ हो तो परिवार से विछोह, मन में अशान्ति, व्यसन वृद्धि, उदर, मस्तिष्क, नेत्र पीड़ा होती है। वात, पित्त, रोग में वृद्धि होती है। चन्द्रमा में बुद्ध- बुद्ध अगर शुभ हो तो जातक को ज्ञान की प्राप्ति होती है घर में मंगल काम होते हैं। नौकरी में लाभ, वाहन की प्राप्ति होती है। बुद्ध अगर अशुभ हो तो धन हानि, चर्म रोग पीड़ा होती है। चन्द्रमा में केतु- केतु अगर शुभ भाव में भी हो तो भी ज्यादा लाभकारी नहीं होता है इसके साथ ही अशुभ भाव में हो तो जातक के लिये अत्यधिक कवटकारी व कई बार मृत्यु का कारण भी बन जाता है। विषपान की लत लगी रहती है व दुर्घटना का प्रबल योग भी बन जाता है। इस समय काल में जातक का सुख खत्म व धन हास भी बना ही रहता है। चन्द्रमा में शुक्र- शुक्र अगर शुभ भाव में हो तो जातक को धन, यश, सुख तीनों में ही वृद्धि होती है रोजगार में सफलता मिलती है। प्रकृति के प्रति लगाव बढ़ जाता है परंतु शुक्र अशुभ की स्थिति में जातक को जलोदर की बीमारी का भय रहता है जातक का चरित्र भी खराब हो जाता है। चन्द्रमा में सूर्य-सूर्य यदि शुभ भाव में हो तो जातक को सर्वत्र विजय मिलती है, घर में अन्न भंडार सदैव भरे रहते हैं, राज्य से सम्मान की प्राप्ति होती है, सुख सौभाग्य में वृद्धि होती है। यदि सूर्य अशुभ हो तो नकसीर फूटना व रक्त विकारों का भय बना रहता है। शरीर में वेदना बनी रहती है। इस तरह से चन्द्र की महादशा व उसके अनुसार महादशा के अन्तर्गत आने वाली अन्तरदशा के प्रभाव उपरोक्त विवरण के अनुसार ही पड़ते हंै महादशा के दौरान यद्यपि अन्तरदशा व अन्तरदशा के दौरान प्रत्यन्तरदशा भी आती है चूंकि अन्तरदशा कई सालों के लिए आती है अतः उसका प्रभाव मानव पर दिखाई देता है परंतु प्रत्यन्तरदशा कुछ दिनों या कुछ माहों के लिए ही आती है। इसलिए उसका प्रभाव या कुप्रभाव किसी भी इंसान पर इतना अधिक नहीं पड़ता है। परंतु महादशा के समय व्यक्ति को विशेष रूप से गृह अनुसार दान व जप करते रहना चाहिए इसके साथ ही महादशा के दौरान आने वाली अन्तरदशाओं में भी विशेष सावधानियों की जरूरत है बशर्ते आप किसी अच्छे ज्योतिषाचार्य से समय-समय पर संपर्क करते रहें और महादशाओं की जानकारी प्राप्त करते रहें। सूर्य के बाद धरती पर सबसे अधिक प्रभाव चन्द्रमा का पड़ता है और पूर्णिमा के दिन चन्द्र का प्रभाव चाहे वो शुभ हो या अशुभ धरती पर रहने वाले हर जीव को झेलना ही पड़ता है। पूर्णिमा का चन्द्र मानव, पशु पक्षी सभी के जीवन में हलचल देता है सबसे ज्यादा समुद्र में ज्वार भाटे पूर्णिमा में ही आते हैं। एक. घर का वायव्य कोण दूषित होने पर चन्द्र दोषपूर्ण होता है। दो. घर में जल यदि गलत दिशा में रखा हो तो भी चन्द्र धीमा हो जाता है। तीन. पूर्वजों का अपमान करने व श्राद्ध आदि नहीं करने पर चन्द्रमा दूषित हो जाता है। चार. माता का अपमान करने पर भी चन्द्रमा खराब हो जाता है। पाँच. गृह कलेश व पारिवारिक सदस्यों के लड़ने से भी चन्द्रखराब हो जाता है। छः. चंद्र के साथ राहु, केतु, शनि उसी भाव में होने से या इनकी दृष्टिï चन्द्र पर होने से भी चन्द्र खराब हो जाता है। यदि माता का स्वास्थ्य निस्तर खराब रहे ता चन्द्र खराब है। खराब चन्द्र का संकेत माता की मृत्यु भी है। एक. दूध देने वाला जानवर मर जाये तो। दो. अगर घोड़ा पाल रखा हो अगर वो भी मर जाए तो। तीन. घर में अगर कुआं हो और वो सूख जाए। चार. सूंघने समझने की क्षमता कम हो जाना। पाँच. मानसिक रोग हो जाना, मन में घबराहट, आमदनी का कम हो जाना, पानी की समस्याएं बढ़ जाती हैं, जीवन भयग्रस्त हो जाता है यदि ऐसा हो तो चन्द्र खराब माना जाता है। चन्द्रदोष क्या है- ज्योतिष अनुसार जब चन्द्रमा के साथ राहु की युति हो तो चन्द्र दोष होता है इसी अवस्था को चन्द्र ग्रहण भी कहते हैं। इस अवस्था में चन्द्रमा दूषित हो जाता है और मन का कारक होने के कारण मन में विकार उत्पन्न करता है। साथ ही जब चन्द्रमा पर केतु की नजर हो तब भी चन्द्रमा खराब हो जाता है। चन्द्रमा यदि नीच राशि का हो या फिर नीच या अशुभ ग्रहों से ग्रसित हो तो भी चन्द्र होता है। जब सूर्य व चन्द्रसाथ हो तो भी चन्द्र दोष होता है। चन्द्र दोष चाहे किसी भी तरह बने ये जीवन को उथल-पुथल ही देता है जिसके चलते मानव का जीवन शंकाओं व कवरों से भर जाता है। चन्द्र की खराबी से दिल, पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ता है, मिर्गी के व पागलपन के रोग भी इसकी खराबी से होते हंै फेफड़ों, मासिक धर्म पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है सर्दी जुकाम बना रहता है चन्द्र की खराबी से कई बार लोग आत्महत्या तक कर लेते है। एक. चन्द्रमा को अनुकूल करने के लिए माता के चरण छुएं। दो. शिवजी की पूजा करें, वृत्त रखें, शिवलिंग पर दूध चीनी चढ़ाएं। तीन. पानी मिले दूध को सिरहाने रख कर सोएं व सुबह कीकर में डाल दें। चार. छोटी अंगुली में मोती धारण करें परंतु ज्योतिष को जन्म कुंडली दिखाकर। पाँच. सोमवार को दूध, दही, घी, चीनी, जनैऊ, सफेद वस्त्र, सफेद मिठाई दान करें। छः. चंद्र मंत्रों का जाप करें। सात. महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। आठ. गणेश स्त्रोत, दुर्गा सप्तसदी, गौरी, काली, भैरव साधना करें। परंतु कोई भी साधना तभी फलीभूत होती है जबकि उसको विधिवत रूप से किया जाए। साथ ही चन्द्रमा को शुभ करने के लिए श्वेत रंग के कपड़े पहने व काले व लाल रंग के कपड़ों से दूर रहे, चमेली, लिली, कमल, चंदन जैसे फूलों की सुगंध का प्रयोग करने से चन्द्रमा शुभ फल देता है। भक्ति योग, भ्रामणी प्राणायाम, नियमित वज्रासन व नौकायन आसन करने से भी चंद्र सकारात्मक ऊर्जा देता है रोजाना एक सौ आठ बार ओम का उच्चारण करने से ओम की शक्ति चन्द्र को शुद्ध करती है। घर का वास्तु दोष दूर करने से भी चन्द्र सही होता है। चन्द्रमा पश्चिम दिशा को ऊंचा रखने से भी चन्द्र शुद्ध होता है। पश्चिम दिशा में दिन ढलते ही गुलाबी बल्व जलाने से चन्द्र को बल मिलता है। घर के खराब नलकों को सही कराएं रिसते जल को रोकने से भी चन्द्र शुभ फल देता है। घर के मुख्य द्वार पर आठ कोनो वाला दर्पण कुछ ऐसे लगाएं की आने वाले को उसमें अपना चेहरा दिखे इससे भी चंद्र शुभ फल देता है। चन्द्र रत्न मोती- अगर चन्द्र जातक के सही भाव में बैठा हो तो जातक चन्द्र का रत्न मोती धारण करके और भी लाभ उठा सकता है। सादगी का प्रतीक रत्न माना जाता है, मोती इसे मुक्ता, शीश रत्न और पर्ल के नाम से जाना जाता है। मोती सफेद, गुलाबी, पीले रंग का होता है, मोती समुद्र के भीतर स्थित घोंघे नामक कीट में पाया जाता है। कर्क राशि के जातकों के लिए मोती धारण करना लाभकारी होता है। चन्द्रमा जनित बिमारियों को सही करने में मोती धारण करना सही होता है। मोती धारण करने से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है, मानसिक शान्ति, अनिद्रा आदि पीड़ा शान्त होती है, गर्भाशय संबंधी रोगों, नेत्र रोगों हृदय रोगों में भी मोती धारण करने से लाभ होता है मोती धारण करते वक्त ध्यान रखें की दिन सोमवार ही हो चन्द्रमा का मंत्र करते हुए मोती शुद्ध करे व धारण करे चांदी की अंगूठी या लाकेट में मोती न धारण करने की स्थिति में जातक मूनस्टोन, सफेद मूंगा या ओपल भी धारण कर सकता है। जिस जातक के चार,छः,आठ,बारह भाव में चन्द्र हो तो वो जातक कभी भी मोती ना धारण करें। अन्यथा लाभ की जगह हानि होगी। मोती को धारण करने से पूर्व किसी ज्योतिषाचार्य की सलाह अवश्य लें तभी मोती धारण करें। चन्द्र शान्ति व चंद्र रूप से मजबूत करने में दान के अलावा जाप का भी विशेष महत्त्व है। बशर्ते जाप सही मंत्र से व सही समय पर किये जाएं। - ऊं सोम सोमाय नमः- ये मंत्र न केवल जातक के चंद्र को शुद्ध करता है बल्कि जातक की खूबसूरती को बढ़ाता है। इस मंत्र की प्रतिदिन एक माला करने से जातक के चेहरे पर सौंदर्य की आभा आती है। - चन्द्र ध्यान मंत्र- चन्द्र ध्यान मंत्र की अपनी अलग ही शक्ति होती है योग साधना करते वक्त अगर पूरी शुद्धता व सही उच्चारण के साथ इस मंत्र का जाप किया जाए तो इसके प्रभाव स्वरूप इंसान में अद्ïभुत शक्ति, मानसिक बल व आकर्षण पैदा करता है। श्रेतांबरः श्रेतविभूषणश्र श्रेतधुतिर्दण्डधरो द्विबाहुः चन्द्रोमृतात्मा वरदः किरीटी मयि प्रसादं विदधातु देवः - चन्द्र तांत्रिक मंत्र- तांत्रिक पूजा करने वाले लोग अधिकतर चन्द्र तांत्रिक मंत्र का प्रयोग करते हैं। इस मंत्र का जाप आधी रात में करने से न केवल अशुभ चन्द्र को सकारात्मक ऊर्जा मिलती है बल्कि बुद्धिमता का भी संचार होता है। ऊं श्रीं श्रीं श्रौं सः चन्द्राय नमः ऐं क्लीं सोमाय नमः सार रूप में इतना अवश्य कह सकते हैं कि चन्द्र ग्रह मन का कारक माना जाता है। भगवान शिव ने चन्द्र को मस्तक पर धारण किया है इसलिए अपने चन्द्रमा को शुद्ध व शुभ रखें और लाभ उठाएं।
मुंबई (एजेंसी): महाराष्ट्र के राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी ने सोमवार को राज्य के गृहमंत्री अनिल देशमुख को फोन कर वरिष्ठ पत्रकार अर्नब गोस्वामी की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। साथ ही राज्यपाल ने अर्नब से उनके रिश्तेदारों को मिलने देने का भी निर्देश दिया है। राजभवन के प्रवक्ता के अनुसार राज्यपाल कोश्यारी ने अर्नब गोस्वामी की गिरफ्तारी पर भी ऐतराज जताया है। उल्लेखनीय है कि अर्नब सहित तीन लोगों को इंटीरियर डिजाईनर अन्वय नाईक और उनकी मां की आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में 4 नवंबर को गिरफ्तार किया गया था। इन तीनों की अंतरिम जमानत याचिका पर बाॅम्बे हाईकोर्ट सोमवार को निर्णय सुना सकता है। देश दुनिया की ताजातरीन सच्ची और अच्छी खबरों को जानने के लिए बनें रहें www. dastaktimes. org के साथ। हमें फेसबुक पर फॉलों करने के लिए https://www. facebook. com/dastak. times. 9 और ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @TimesDastak पर क्लिक करें। साथ ही देश और प्रदेश की बड़ी और चुनिंदा खबरों के 'न्यूज़-वीडियो' आप देख सकते हैं हमारे youtube चैनल https://www. youtube. com/c/DastakTimes/videos पर। तो फिर बने रहिये www. dastaktimes. org के साथ और खुद को रखिये लेटेस्ट खबरों से अपडेटेड।
मुंबई : महाराष्ट्र के राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी ने सोमवार को राज्य के गृहमंत्री अनिल देशमुख को फोन कर वरिष्ठ पत्रकार अर्नब गोस्वामी की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। साथ ही राज्यपाल ने अर्नब से उनके रिश्तेदारों को मिलने देने का भी निर्देश दिया है। राजभवन के प्रवक्ता के अनुसार राज्यपाल कोश्यारी ने अर्नब गोस्वामी की गिरफ्तारी पर भी ऐतराज जताया है। उल्लेखनीय है कि अर्नब सहित तीन लोगों को इंटीरियर डिजाईनर अन्वय नाईक और उनकी मां की आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में चार नवंबर को गिरफ्तार किया गया था। इन तीनों की अंतरिम जमानत याचिका पर बाॅम्बे हाईकोर्ट सोमवार को निर्णय सुना सकता है। देश दुनिया की ताजातरीन सच्ची और अच्छी खबरों को जानने के लिए बनें रहें www. dastaktimes. org के साथ। हमें फेसबुक पर फॉलों करने के लिए https://www. facebook. com/dastak. times. नौ और ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @TimesDastak पर क्लिक करें। साथ ही देश और प्रदेश की बड़ी और चुनिंदा खबरों के 'न्यूज़-वीडियो' आप देख सकते हैं हमारे youtube चैनल https://www. youtube. com/c/DastakTimes/videos पर। तो फिर बने रहिये www. dastaktimes. org के साथ और खुद को रखिये लेटेस्ट खबरों से अपडेटेड।
जयपुर । राजस्थान प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष सचिन पायलट ने आज यहां स्थित सिंधी कैम्प बस अड्डा पहुंच कर गत । 8 दिनों से विभिन्न मांगों को लेकर धरने पर बैठे रोडवेज कर्मचारियों से मुलाकात की और उनकी समस्याओं को सुना। पायलट ने कर्मचारियों की समस्याएं एवं मांगो को सुना। उन्होंने कहा कि कर्मचारी हड़ताल पर बैठे है, लेकिन मुख्यमंत्री जी चुनाव प्रचार में व्यस्त है, उन्हें कर्मचारियों की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है। कर्मचारियों के प्रति वसुंधरा सरकार का ये लापरवाह बर्ताव निंदनीय है और आश्चर्य है कि वादा करने के बावजूद अब इनकी माँगो को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले । 8 दिनों में सरकार ने धरने पर बैठे कर्मचारियों की सुध लेना भी ज़रूरी नहीं समझा, अब मोदी के दौरे में विरोध प्रदर्शन के डर से कमेटी का गठन कर गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है और यदि सरकार चाहती तो पहले उनकी समस्याओं का समाधान कर चुकी होती। उन्होंने कर्मचारियों को हर संभव मदद का भराेसा भी दिलाया।
जयपुर । राजस्थान प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष सचिन पायलट ने आज यहां स्थित सिंधी कैम्प बस अड्डा पहुंच कर गत । आठ दिनों से विभिन्न मांगों को लेकर धरने पर बैठे रोडवेज कर्मचारियों से मुलाकात की और उनकी समस्याओं को सुना। पायलट ने कर्मचारियों की समस्याएं एवं मांगो को सुना। उन्होंने कहा कि कर्मचारी हड़ताल पर बैठे है, लेकिन मुख्यमंत्री जी चुनाव प्रचार में व्यस्त है, उन्हें कर्मचारियों की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है। कर्मचारियों के प्रति वसुंधरा सरकार का ये लापरवाह बर्ताव निंदनीय है और आश्चर्य है कि वादा करने के बावजूद अब इनकी माँगो को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले । आठ दिनों में सरकार ने धरने पर बैठे कर्मचारियों की सुध लेना भी ज़रूरी नहीं समझा, अब मोदी के दौरे में विरोध प्रदर्शन के डर से कमेटी का गठन कर गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है और यदि सरकार चाहती तो पहले उनकी समस्याओं का समाधान कर चुकी होती। उन्होंने कर्मचारियों को हर संभव मदद का भराेसा भी दिलाया।
18 वीं शताब्दी के भारत में मराठों ने खुद को एक महाशक्ति के रूप में साबित किया जो भारत में अंग्रेजों के आने से पहले भारत पर शासन करने वाली मुस्लिम शक्तियों से भी श्रेष्ठ थे। लेकिन इतिहासकारों ने इस बात का विरोध किया है कि उस समय भौतिक संसाधनों, सैन्य संगठन, कूटनीति और नेतृत्व में देशी शक्तियां अंग्रेजी से कम थीं। हालाँकि एंग्लो मराठा युद्धों में मराठों की हार केवल कमजोर सैन्य संगठन और अक्षम कूटनीति और नेतृत्व के लिए जिम्मेदार नहीं थी। समकालीन काल की सामाजिक-राजनैतिक स्थिति मराठा संघ के पतन के लिए समान रूप से जिम्मेदार थी। मराठा परिसंघ का चरित्र निरंकुश था। इसलिए पूर्ण संप्रभु मराठा राज्य का एकमात्र अधिकार बन गया। उस समय एक व्यवस्थित संविधान के अभाव के कारण प्रशासनिक तंत्र कमजोर शासकों के अधीन उत्पीड़न में से एक बन गया। पेशवा बाजीराव द्वितीय और दौलत राव सिंधिया, जिन्होंने पूना में सर्वोच्च सरकार को नियंत्रित किया, अपने साम्राज्य की अखंडता को बरकरार नहीं रख सके। बाजी राव द्वितीय ने कंपनी के साथ बसीन की संधि पर हस्ताक्षर किए और कंपनी के साथ सहायक गठबंधन में प्रवेश किया। इस तरह उसने सभी मराठा प्रमुखों को शत्रु खेमे में शामिल कर लिया। इस प्रकार वह मराठा संघ की स्वतंत्र संप्रभुता से दूर हो गए। दौलत राव सिंधिया महादजी सिंधिया के एक योग्य उत्तराधिकारी थे। अंतिम परिणाम यह हुआ कि इन कमजोर शासकों के अधीन मराठा संघशासन उत्पीड़न और कुशासन का साधन बन गया। कुशल व्यक्तित्वों की कुल अनुपस्थिति मराठा वर्चस्व के टूटने का एक महत्वपूर्ण कारण थी। मराठा राज्य की आर्थिक नीति स्थिर राजनीतिक स्थापित करने के लिए अनुकूल नहीं थी। लंबे युद्धों के कारण किसानों ने खेती छोड़ दी और एक सैनिक के पेशे में शामिल हो गए। प्रारंभिक पेशवाओं के दौरान राज्य के युद्धों पर विजय प्राप्त की गई क्षेत्रों की लूट द्वारा वित्तपोषित किया गया था। आश्रित प्रदेशों से चौथ और सरदेशमुखी के संग्रह ने युद्धों के लिए वित्तीय सहायता भी प्रदान की। इस प्रकार मराठा साम्राज्य महाराष्ट्र के संसाधनों पर नहीं बल्कि नए अधिगृहीत राज्य पर लगाए गए करों पर निर्भर हो गया। मराठों की विस्तारवादी नीति के कारण, जिन प्रांतों का उन्होंने अधिग्रहण किया, वे पूरी तरह से कुचल गए। उन प्रांतों की अर्थव्यवस्था टूट गई। इसलिए इन क्षेत्रों से आय के स्रोत भी सूख गए। बाद के मराठा शासकों ने गृहयुद्धों से स्थिति और खराब कर दी। गृह युद्धों ने महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दिया। अंत में एंग्लो-मराठा युद्ध में, मराठों के पास अंग्रेजी के खिलाफ लड़ने के लिए पर्याप्त वित्त नहीं था। 1804 में एक भयानक अकाल पड़ा और साथ ही मराठा प्रमुख आर्थिक रूप से दिवालिया हो गए। इसलिए अयोग्य आर्थिक मशीनरी भी कंपनी के समक्ष मराठा शक्ति की विफलता का एक महत्वपूर्ण कारण थी। जब मराठा साम्राज्य अपने क्षेत्र में था, तब भी मराठा छत्रपति और बाद में पेशवाओं के नेतृत्व में एक हार गए थे। प्रारंभ में पेशवाओं ने छत्रपति की शक्तियों को जब्त कर लिया। बाद में उसी तरह से सरदारों ने पेशवा की शक्ति को छीन लिया। गायकवाड़, सिंधिया, भोंसले और होल्कर जैसे शक्तिशाली प्रमुखों ने उनके लिए अर्ध-स्वतंत्र राज्य का निर्माण किया। सिंधिया और होल्कर के बीच अपूरणीय शत्रुता थी, जबकि नागपुर के भोंसले राजा को मराठा साम्राज्य के राजा के लिए दावा किया गया था। मराठा प्रमुखों के बीच आपसी ईर्ष्या ने उन्हें ईस्ट इंडिया कंपनी के एकजुट प्रतिरोध की पेशकश करने से रोका। अंग्रेजी की तुलना में मराठों की सैन्य ताकत में बेहद कमी थी। हालांकि व्यक्तिगत कौशल और वीरता में कमी नहीं थी लेकिन भी युद्ध के हथियारों में कमी थी। इसके अलावा मराठों के भाड़े के सैनिकों का निजी स्वार्थ से बड़ा कोई मकसद नहीं था। इसके अलावा मराठों की जासूसी प्रणाली अंग्रेजी की तुलना में बेहद कमजोर थी। इस प्रकार मराठों की सैन्य बुद्धि में बाधा आ गई। इस तरह कमजोर सैन्य स्थापना को भी आंग्ल-मराठा युद्ध में मराठा शक्ति की हार के महत्वपूर्ण कारणों में से एक माना जाता है। सामरिक नीतियों और राजनयिक प्रशासन में मराठों की तुलना में अंग्रेजी बहुत बेहतर थी। मराठा प्रमुखों के बीच एकता और सहयोग की कमी ने अंग्रेजों के काम को सरल बना दिया। दूसरे मराठा युद्ध में अंग्रेजों ने गायकवाड़ और दक्षिणी मराठा जागीरदारों को अपनी तरफ कर लिया। कंपनी अहमदनगर और भरूच में अपने क्षेत्रों से सिंधिया के वर्चस्व को उखाड़ फेंकने में सक्षम हो गई। अंग्रेजों की कूटनीतिक नीति एंग्लो मराठा युद्ध में मराठों की हार के लिए कुछ हद तक जिम्मेदार थी। इन कारणों के अलावा देश की सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियाँ अत्यंत अराजक थीं, जिसके कारण अंग्रेजों ने मराठा संघ के प्रशासन में मध्यस्थता की। नतीजतन, मराठा साम्राज्य की प्रशासनिक शक्ति को मराठों के खिलाफ हथियार डालने के लिए अंग्रेजी द्वारा एक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया गया था। इसके अलावा कमजोर प्रशासन, सैन्य ताकत और कुशल नेतृत्व की कमी ने हिंसक मराठा संघर्ष को पूरी तरह से कुचल दिया।
अट्ठारह वीं शताब्दी के भारत में मराठों ने खुद को एक महाशक्ति के रूप में साबित किया जो भारत में अंग्रेजों के आने से पहले भारत पर शासन करने वाली मुस्लिम शक्तियों से भी श्रेष्ठ थे। लेकिन इतिहासकारों ने इस बात का विरोध किया है कि उस समय भौतिक संसाधनों, सैन्य संगठन, कूटनीति और नेतृत्व में देशी शक्तियां अंग्रेजी से कम थीं। हालाँकि एंग्लो मराठा युद्धों में मराठों की हार केवल कमजोर सैन्य संगठन और अक्षम कूटनीति और नेतृत्व के लिए जिम्मेदार नहीं थी। समकालीन काल की सामाजिक-राजनैतिक स्थिति मराठा संघ के पतन के लिए समान रूप से जिम्मेदार थी। मराठा परिसंघ का चरित्र निरंकुश था। इसलिए पूर्ण संप्रभु मराठा राज्य का एकमात्र अधिकार बन गया। उस समय एक व्यवस्थित संविधान के अभाव के कारण प्रशासनिक तंत्र कमजोर शासकों के अधीन उत्पीड़न में से एक बन गया। पेशवा बाजीराव द्वितीय और दौलत राव सिंधिया, जिन्होंने पूना में सर्वोच्च सरकार को नियंत्रित किया, अपने साम्राज्य की अखंडता को बरकरार नहीं रख सके। बाजी राव द्वितीय ने कंपनी के साथ बसीन की संधि पर हस्ताक्षर किए और कंपनी के साथ सहायक गठबंधन में प्रवेश किया। इस तरह उसने सभी मराठा प्रमुखों को शत्रु खेमे में शामिल कर लिया। इस प्रकार वह मराठा संघ की स्वतंत्र संप्रभुता से दूर हो गए। दौलत राव सिंधिया महादजी सिंधिया के एक योग्य उत्तराधिकारी थे। अंतिम परिणाम यह हुआ कि इन कमजोर शासकों के अधीन मराठा संघशासन उत्पीड़न और कुशासन का साधन बन गया। कुशल व्यक्तित्वों की कुल अनुपस्थिति मराठा वर्चस्व के टूटने का एक महत्वपूर्ण कारण थी। मराठा राज्य की आर्थिक नीति स्थिर राजनीतिक स्थापित करने के लिए अनुकूल नहीं थी। लंबे युद्धों के कारण किसानों ने खेती छोड़ दी और एक सैनिक के पेशे में शामिल हो गए। प्रारंभिक पेशवाओं के दौरान राज्य के युद्धों पर विजय प्राप्त की गई क्षेत्रों की लूट द्वारा वित्तपोषित किया गया था। आश्रित प्रदेशों से चौथ और सरदेशमुखी के संग्रह ने युद्धों के लिए वित्तीय सहायता भी प्रदान की। इस प्रकार मराठा साम्राज्य महाराष्ट्र के संसाधनों पर नहीं बल्कि नए अधिगृहीत राज्य पर लगाए गए करों पर निर्भर हो गया। मराठों की विस्तारवादी नीति के कारण, जिन प्रांतों का उन्होंने अधिग्रहण किया, वे पूरी तरह से कुचल गए। उन प्रांतों की अर्थव्यवस्था टूट गई। इसलिए इन क्षेत्रों से आय के स्रोत भी सूख गए। बाद के मराठा शासकों ने गृहयुद्धों से स्थिति और खराब कर दी। गृह युद्धों ने महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दिया। अंत में एंग्लो-मराठा युद्ध में, मराठों के पास अंग्रेजी के खिलाफ लड़ने के लिए पर्याप्त वित्त नहीं था। एक हज़ार आठ सौ चार में एक भयानक अकाल पड़ा और साथ ही मराठा प्रमुख आर्थिक रूप से दिवालिया हो गए। इसलिए अयोग्य आर्थिक मशीनरी भी कंपनी के समक्ष मराठा शक्ति की विफलता का एक महत्वपूर्ण कारण थी। जब मराठा साम्राज्य अपने क्षेत्र में था, तब भी मराठा छत्रपति और बाद में पेशवाओं के नेतृत्व में एक हार गए थे। प्रारंभ में पेशवाओं ने छत्रपति की शक्तियों को जब्त कर लिया। बाद में उसी तरह से सरदारों ने पेशवा की शक्ति को छीन लिया। गायकवाड़, सिंधिया, भोंसले और होल्कर जैसे शक्तिशाली प्रमुखों ने उनके लिए अर्ध-स्वतंत्र राज्य का निर्माण किया। सिंधिया और होल्कर के बीच अपूरणीय शत्रुता थी, जबकि नागपुर के भोंसले राजा को मराठा साम्राज्य के राजा के लिए दावा किया गया था। मराठा प्रमुखों के बीच आपसी ईर्ष्या ने उन्हें ईस्ट इंडिया कंपनी के एकजुट प्रतिरोध की पेशकश करने से रोका। अंग्रेजी की तुलना में मराठों की सैन्य ताकत में बेहद कमी थी। हालांकि व्यक्तिगत कौशल और वीरता में कमी नहीं थी लेकिन भी युद्ध के हथियारों में कमी थी। इसके अलावा मराठों के भाड़े के सैनिकों का निजी स्वार्थ से बड़ा कोई मकसद नहीं था। इसके अलावा मराठों की जासूसी प्रणाली अंग्रेजी की तुलना में बेहद कमजोर थी। इस प्रकार मराठों की सैन्य बुद्धि में बाधा आ गई। इस तरह कमजोर सैन्य स्थापना को भी आंग्ल-मराठा युद्ध में मराठा शक्ति की हार के महत्वपूर्ण कारणों में से एक माना जाता है। सामरिक नीतियों और राजनयिक प्रशासन में मराठों की तुलना में अंग्रेजी बहुत बेहतर थी। मराठा प्रमुखों के बीच एकता और सहयोग की कमी ने अंग्रेजों के काम को सरल बना दिया। दूसरे मराठा युद्ध में अंग्रेजों ने गायकवाड़ और दक्षिणी मराठा जागीरदारों को अपनी तरफ कर लिया। कंपनी अहमदनगर और भरूच में अपने क्षेत्रों से सिंधिया के वर्चस्व को उखाड़ फेंकने में सक्षम हो गई। अंग्रेजों की कूटनीतिक नीति एंग्लो मराठा युद्ध में मराठों की हार के लिए कुछ हद तक जिम्मेदार थी। इन कारणों के अलावा देश की सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियाँ अत्यंत अराजक थीं, जिसके कारण अंग्रेजों ने मराठा संघ के प्रशासन में मध्यस्थता की। नतीजतन, मराठा साम्राज्य की प्रशासनिक शक्ति को मराठों के खिलाफ हथियार डालने के लिए अंग्रेजी द्वारा एक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया गया था। इसके अलावा कमजोर प्रशासन, सैन्य ताकत और कुशल नेतृत्व की कमी ने हिंसक मराठा संघर्ष को पूरी तरह से कुचल दिया।
हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत फस्र्ट टर्म परीक्षाओं के लिए तैयारियां पूरी कर ली हैं। शिक्षा बोर्ड इस बार 2113 परीक्षा केंद्र बनाए हैं। इसमें दसवीं व जमा दो के छात्रों की परीक्षाएं करवाई जाएंगी। वहीं, नौवीं और जमा एक के लिए स्कूल अपने स्तर पर ही परीक्षाएं करवाएंगे। 18 नवंबर को प्रदेश भर के तीन लाख 85 हजार नौवीं से जमा दो तक के छात्रों की परीक्षाएं शुरू हो जाएंगी। इसके लिए शिक्षा बोर्ड ने अलग-अलग से शेड्यूल जारी किया है, जिससे कि कोरोना संक्रमण में अधिक बच्चे एक साथ स्कूल में पहुंचने की संभावना न रहे। प्रत्येक परीक्षा केंद्र में सीसीटीवी कैमरा सुनिश्चित करने के लिए करने लिए कहा है। उधर, हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डा. सुरेश कुमार सोनी ने बताया कि फस्र्ट टर्म परीक्षा के लिए व्यापक प्रबंध कर लिए गए हैं। इसके लिए शिक्षा उपनिदेशक व एसडीएम को भी पत्र जारी किए जा चुके हैं, जिन्हें समय-समय पर परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण करने को कहा है। पुलिस विभाग से भी सहयोग के लिए पत्र लिखा है। 2113 परीक्षा केंद्र प्रदेश भर में स्थापित किए हैं और 84 परीक्षा केंद्रों को सावित्री वाई फूले के नाम पर स्थापित किया है, जिसमें पूरा महिला स्टाफ होगा।
हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत फस्र्ट टर्म परीक्षाओं के लिए तैयारियां पूरी कर ली हैं। शिक्षा बोर्ड इस बार दो हज़ार एक सौ तेरह परीक्षा केंद्र बनाए हैं। इसमें दसवीं व जमा दो के छात्रों की परीक्षाएं करवाई जाएंगी। वहीं, नौवीं और जमा एक के लिए स्कूल अपने स्तर पर ही परीक्षाएं करवाएंगे। अट्ठारह नवंबर को प्रदेश भर के तीन लाख पचासी हजार नौवीं से जमा दो तक के छात्रों की परीक्षाएं शुरू हो जाएंगी। इसके लिए शिक्षा बोर्ड ने अलग-अलग से शेड्यूल जारी किया है, जिससे कि कोरोना संक्रमण में अधिक बच्चे एक साथ स्कूल में पहुंचने की संभावना न रहे। प्रत्येक परीक्षा केंद्र में सीसीटीवी कैमरा सुनिश्चित करने के लिए करने लिए कहा है। उधर, हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डा. सुरेश कुमार सोनी ने बताया कि फस्र्ट टर्म परीक्षा के लिए व्यापक प्रबंध कर लिए गए हैं। इसके लिए शिक्षा उपनिदेशक व एसडीएम को भी पत्र जारी किए जा चुके हैं, जिन्हें समय-समय पर परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण करने को कहा है। पुलिस विभाग से भी सहयोग के लिए पत्र लिखा है। दो हज़ार एक सौ तेरह परीक्षा केंद्र प्रदेश भर में स्थापित किए हैं और चौरासी परीक्षा केंद्रों को सावित्री वाई फूले के नाम पर स्थापित किया है, जिसमें पूरा महिला स्टाफ होगा।
खाद्य मंत्री ( श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ) : (क) रबी विपणन वर्ष 2019-20 में समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन हेतु शिवपुरी जिले में 95 उपार्जन केन्द्र बनाए गए थे। ई-उपार्जन पोर्टल पर जिले के 69,594 किसानों द्वारा समर्थन मूल्य पर गेहूं विक्रय हेतु पंजीयन कराया गया था, जिसमें से 26,713 किसानों द्वारा गेहूं का विक्रय उपार्जन केन्द्रों पर किया गया। (ख) शिवपुरी जिले में ग्राम गुरूकुदवाया के किसानों को समर्थन मूल्य पर गेहूं विक्रय करने हेतु सेवा सहकारी संस्था, पिपरौदा ऊवारी-राजपुरा केन्द्र-2 पर मैप किया गया था। (ग) रबी विपणन वर्ष 2019-20 में जारी उपार्जन नीति के अनुसार उपार्जन केन्द्र के स्थल चयन के संबंध में प्रावधान इस प्रकार किए गए हैं- सामान्यतः उपार्जन केन्द्र गोदाम परिसर पर खोले जाएंगे। केन्द्र पर पूर्ण पंचायत ही टैग की जाएगी। एक उपार्जन केन्द्र पर यथासम्भव 200 से 750 तक किसान संलग्न किए जाएंगे। साथ ही, किसी भी उपार्जन केन्द्र पर 5000 मे.टन से अधिक मात्रा का उपार्जन नहीं किया जाएगा तथा यथासम्भव सम्बद्ध ग्राम पंचायतों के केन्द्र बिन्दु में उपार्जन केन्द्र होगा जिससे किसानों को अपनी उपज विक्रय करने हेतु लगभग 25 कि.मी. से अधिक दूरी तय न करना पड़े। (घ) जी हाँ। ग्राम गुरूकुदवाया के किसानों द्वारा समर्थन `मूल्य पर गेहूं विक्रय करने हेतु उपार्जन केन्द्र ग्राम आकाझिरी से संलग्न करने की मांग की गई थी किन्तु, केन्द्र पर निर्धारित संख्या तक किसानों को मैप किए जाने के कारण ग्राम गुरूकुदवाया के किसानों को उपार्जन केन्द्र आकाझिरी से मैप नहीं किया जा सका है। नल-जल योजनाएं [लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी] 80. ( क्र. 1222 ) श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया : क्या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र में कुल कितनी नल-जल योजनायें संचालित हैं? उनमें से कितनी नज-जल योजनाएं चालू हैं? (ख) शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र में कितनी नल-जल योजनाएं बंद हैं? उन्हें कब तक चालू किया जायेगा? (ग) ग्रामीण अंचलों में संचालित ऐसी कितनी नल-जल योजनाएं हैं? जिनके बोर का जल स्तर नीचे चले जाने से बंद हो गये हैं? ऐसे स्थलों पर नल-जल योजना को चालू किये जाने हेतु विभाग द्वारा क्या कार्यवाही की जा रही है? (घ) आगामी ग्रीष्म काल में पेयजल संकट और बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्र में पेयजल उपलब्ध कराने हेतु विभाग द्वारा क्या व्यवस्था की जायेगी? लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री ( श्री सुखदेव पांसे ) : (क) 17 नल-जल योजनाएं। 15 नलजल योजनाएं चालू हैं। (ख) 02 नल-जल योजनाएं। बंद योजनाओं को चालू करने का दायित्व संबंधित ग्राम पंचायतों का है, स्त्रोत विकसित करने का दायित्व विभाग का है। निश्चित समयावधि नहीं बताई जा सकती। (ग) वर्तमान में एक भी नहीं, शेष प्रश्नांश उपस्थित नहीं होता है। (घ) ग्रीष्मकाल में पेयजल उपलब्ध करवाने हेतु विभागीय कार्य योजना के अंतर्गत आवश्यकता अनुसार नवीन नलकूपों का खनन, जलस्तर नीचे जाने से बंद हैण्डपंपों में राइजर पाईप बढ़ाने एवं सिंगलफेस मोटरपंप स्थापित करने एवं नलकूपों में हाइड्रो फ्रैक्चरिंग के कार्य करवाये जाते हैं। आंगनवाड़ी केन्द्र 81. ( क्र. 1223 ) श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्या शिवपुरी नगर में 128 आंगनवाड़ी केन्द्र संचालित हैं? यदि हाँ, तो वहां क्या 13 समूह भोजन वितरण कर रहे हैं। (ख) यदि हाँ, तो विगत दो वर्षों में विभाग द्वारा इन्हें कितनी राशि का भुगतान किया गया? (ग) क्या एक स्व-सहायता समूह को दो या उससे अधिक आंगनवाड़ियों में भोजन प्रदान देने का प्रावधान है। (घ) यदि नहीं, तो इन समूहों को एक से अधिक आंगनवाड़ी में भोजन का कार्य क्यों दिया गया? (ड.) क्या शिवपुरी नगर में इन 13 समूहों के अलावा अन्य समूहों के आवेदन विभाग में प्राप्त हुए थे? यदि हाँ, तो उन्हें भोजन प्रदाय का कार्य क्यों दिया गया? महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती इमरती देवी ) : (क) जी हाँ । शिवपुरी नगर में 126 आंगनवाड़ी केन्द्र एवं 02 उप आंगनवाड़ी केन्द्र संचालित है। शिवपुरी नगर के इन आंगनवाड़ी केन्द्रों पर 05 महिला स्व-सहायता समूह एवं 08 महिला मण्डल भोजन वितरण का कार्य कर रहे हैं। (ख) विगत 02 वर्षों में विभाग द्वारा 05 स्व-सहायता समूह एवं 08 महिला मण्डलों को राशि रू. 2,12,71,675/- (राशि दो करोड़ बारह लाख इकहत्तर हजार छः सौ पचहत्तर मात्र) का भुगतान किया गया है। (ग) जी हाँ। विभाग के पत्र क्र. 2103/2830/2018/50-2/ए.एन. दिनांक 12.09.18 के माध्यम से प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में संचालित आंगनवाड़ी उप आंगनवाड़ी केन्द्रों में 03 से 06 वर्ष तक के बच्चों को पूरक पोषण आहार प्रदाय के संबंध में जारी निर्देश अनुसार शहरी क्षेत्रों में दो या दो से अधिक आंगनवाड़ी केन्द्रों पर एक स्थानीय संस्था को पूरक पोषण आहार प्रदाय कार्य देने के प्रावधान हैं। (घ) (ग) के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ड.) जी हाँ। वर्ष 2016-17 में 15 महिला स्व-सहायता समूहों / महिला मण्डल के आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से कलेक्टर शिवपुरी द्वारा गठित समिति की अनुशंसा के आधार पर 08 महिला स्व-सहायता समूह/महिला मण्डल को शिवपुरी नगर में संचालित आंगनवाड़ी केन्द्रों पर पूरक पोषण आहार प्रदाय का कार्य दिया गया है तथा शेष 07 महिला स्व-सहायता समूह महिला मण्डल के संबंध में समिति द्वारा प्रतिकूल टीप अंकित किए जाने के कारण पूरक पोषण आहार प्रदाय का कार्य नहीं दिया गया है। इस प्रकार शिवपुरी नगर में संचालित आंगनवाड़ी केन्द्रों पर पूरक पोषण आहार का प्रदाय पूर्व से कार्यरत 05 महिला स्व-सहायता समूह/महिला मण्डल सहित कुल 13 महिला स्व-सहायता समूह / महिला मण्डल द्वारा किया जा रहा है। विस्तृत जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। परिशिष्ट - "उन्नीस" बुरहानपुर जिले के ग्राम पंचायत एमागिर्द में निर्मित पानी की टंकी [लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी] 82. ( क्र. 1228 ) ठाकुर सुरेन्द्र नवल सिंह : क्या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) बुरहानपुर जिले के ग्राम पंचायत एमागिर्द के आजाद नगर में मीठा मौला के पास निर्मित पानी की टंकी का निर्माण कार्य किस सन् में, कितनी लागत से, किस योजना के माध्यम से पूर्ण किया गया? (ख) उक्त निर्माण कार्य किस दिनांक को पूर्ण हुआ? साथ ही पूर्ण होने के पश्चात् आज दिनांक तक टंकी से ग्रामवासियों को पानी वितरण क्यों नहीं किया जा रहा है? क्या टंकी के निर्माण कार्य की गुणवत्ता में खामियां हैं या अन्य किसी कारण से आज दिनांक तक पानी का वितरण नहीं किया गया? यदि खामियां हैं तो उन दोषियों के विरूद्ध क्या कार्यवाही का जावेगी? (ग) कब तक उक्त पानी की टंकी से ग्रामवासियों को पानी वितरण प्रारंभ कर दिया जावेगा? लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री (श्री सुखदेव पांसे ) : (क) वर्ष 2013-14 में रूपये 20.15 लाख लागत से नलजल योजना मद में निर्माण किया था। (ख) एवं (ग) दिनांक 15.03.2018। वर्तमान में टंकी के माध्यम से ग्राम में पेयजल प्रदाय किया जा रहा है। शेष प्रश्नांश उपस्थित नहीं होता है। खाद्यान खरीदी केन्द्र की स्थापना 83. ( क्र. 1258 ) श्री संजय सत्येन्द्र पाठक : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) कटनी जिला एवं विधानसभा क्षेत्र विजयराघवगढ़ में कितने नवीन खरीदी केन्द्र प्रस्तावित किए गए हैं? (ख) क्या पूर्व से कॉटी में संचालित खरीदी केन्द्र बंद कर दिया गया है? जिससे किसानों को कृषि उपज विक्रय करने में पन्द्रह से बीस किलोमीटर दूरस्थ आना-जाना पड़ता है? विक्रय करने जिन्स को लेकर जाने में साधन नहीं मिल पाते जिसके कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है? (ग) विक्रय केन्द्र कॉटी को बंद करने का कारण क्या बतलाया गया है? उसकी प्रति उपलब्ध कराई जाये। (घ) कॉटी विक्रय केन्द्र के भौगोलिक दृष्टि से लगे हुये 18 ग्राम हैं, उन ग्रामों के किसान अतिरिक्त भाड़ा देकर जिन्स की विक्रय करते है? जिससे उन्हें लाभ की बजाय हानि हो रही है? क्या इस विक्रय केन्द्र को फिर से प्रारंभ करने का आदेश देगें? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्यों? खाद्य मंत्री ( श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ) : (क) खरीफ विपणन वर्ष 2019-20 में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन हेतु जिला कटनी-04 एवं विधानसभा क्षेत्र विजयराघवगढ़ में 01 नवीन खरीदी केन्द्र प्रस्तावित किए गए हैं। (ख) जी नहीं। पूर्व वर्ष में कांटी में स्वतंत्र खरीदी केन्द्र संचालित नहीं था। खरीफ विपणन वर्ष 2019-20 में कांटी में धान खरीदी हेतु उपार्जन केन्द्र स्थापित किया गया है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ग) प्रश्नांश (ख) के उत्तर के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (घ) ग्राम कांटी में उपार्जन केन्द्र स्थापित करने के कारण किसानों को अपनी उपज विक्रय करने के लिए अतिरिक्त भाड़ा भुगतान आवश्यकता नहीं है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। नल-जल प्रदाय योजना [लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी] 84. ( क्र. 1259 ) श्री संजय सत्येन्द्र पाठक : क्या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या डी.एम.एफ. योजना (खनिज मद) से वर्ष 2017-18 से प्रश्न दिनांक तक विधान सभा क्षेत्र विजयराघवगढ़ में नल-जल प्रदाय योजना हेतु किन-किन ग्रामों में योजना स्वीकृत की गई एवं कितने ग्रामों में कार्य प्रारंभ किया गया? कितने जल प्रदाय योजना का कार्य प्रगति पर है एवं कितनी जल प्रदाय योजनाओं कार्य प्रारंभ नहीं हुआ? (ख) क्या स्वीकृत कार्य योजनाओं के कार्य पूर्ण कर गांव की पेयजल समस्या का तत्काल निराकरण किया जायेगा? नहीं तो क्यों? कार्य में हो रहे विलम्ब के लिए कौन-कौन अधिकारी उत्तरदायी हैं? नाम एवं पदनाम का उल्लेख करें। दोषियों के विरूद्ध क्या कार्यवाही की जायेगी? लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री ( श्री सुखदेव पांसे ) : (क) 07 ग्रामों में योजनाएं स्वीकृत, सभी योजनाओं के कार्य अप्रारंभ हैं। शेष जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है । (ख) जी हाँ, निविदाएं आमंत्रित की गई हैं। उपरोक्तानुसार किसी अधिकारी के दोषी होने का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। परिशिष्ट - "बीस" सांस्कृतिक, धार्मिक एवं अन्य आयोजन [संस्कृति] 85. ( क्र. 1268 ) श्री फुन्देलाल सिंह मार्को : क्या चिकित्सा शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला अनूपपुर में संस्कृति विभाग द्वारा विगत पाँच वर्षों में कुल कितने सांस्कृतिक, धार्मिक एवं अन्य आयोजन / महोत्सव आयोजन किये गये? विधान सभा क्षेत्रवार आयोजन दिनांक, आयोजन का नाम, स्थान तथा व्यय की गई राशि सहित जानकारी उपलब्ध करावें। (ख) क्या पुष्पराजगढ़ विधान सभा क्षेत्र अंतर्गत माँ नर्मदा की उद्गम स्थली, अमरकंटक में विगत वर्षों से महाशिवरात्रि के पर्व पर नर्मदा जयंती के अवसर पर नर्मदा महोत्सव का आयोजन विभाग द्वारा कराया गया? यदि हाँ, तो इस महोत्सव पर किस कार्य हेतु कितना व्यय किया गया? विगत तीन वित्तीय वर्ष की जानकारी उपलब्ध करावें। (ग) आगामी वर्ष में इस महोत्सव को कराये जाने हेतु शासन द्वारा क्या कोई कार्य योजना तैयार की गई है? यदि हाँ, तो आगामी महोत्सव हेतु किस-किस विभाग द्वारा क्या-क्या आयोजन किये जायेंगे? क्या कलेक्टर, अनूपपुर के अर्द्धशासकीय पत्र क्रमांक 5111 दिनांक 15.10.2019 के माध्यम से विभाग के अपर मुख्य सचिव को इस आयोजन हेतु बजट आवंटन की मांग की गई थी? यदि हाँ, तो प्रस्तावित राशि कब तक आवंटित कर दी जावेगी? चिकित्सा शिक्षा मंत्री (डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ ) : (क) संस्कृति विभाग द्वारा विगत 05 वर्षों में जिला अनूपपुर में कुल 07 सांस्कृतिक/धार्मिक एवं अन्य आयोजन/महोत्सव आयोजित किये गये हैं. जिन पर कुल व्यय राशि रू. 23,23,307.00 लाख हुआ है. विस्तृत विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार. (ख) जी नहीं. शेष का प्रश्न उपस्थित नहीं होता. (ग) यह योजना है कि साहित्यिक/सांस्कृतिक कार्यक्रमों में यथोचित समयानुकूल सहयोग प्रदान किया जा सकता है. वर्ष 2020 में इस महोत्सव के संबंध में जिला कलेक्टर, अनूपपुर से प्राप्त प्रस्ताव का परीक्षण किया जा रहा है. भूमिहीन व्यक्तियों के नाम फसलों का उपार्जन 86. ( क्र. 1271 ) श्री राकेश गिरि : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) टीकमगढ़ जिले के विकासखण्ड टीकमगढ़ के अन्तर्गत प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति मबई, लार, दरगुवां उपार्जन केन्द्रों में वर्ष 2019-20 में कितने कृषकों का कितना अनाज (चना, मसूर, सरसो, गेहूँ) उपार्जन हेतु पंजीकृत हुआ? (ख) क्या उक्त केन्द्रों पर दर्ज रकवा से अधिक तथा भूमिहीन व्यक्तियों के नाम फसलों का उपार्जन किया गया है? यदि हाँ, तो अनाधिकृत/अनुचित उपार्जन पंजीकृत करने के लिये कौन-कौन जिम्मेदार है, इनके विरूद्ध कया कार्यवाही कब तक की जावेगी तथा सुनियोजित रूप से आहरित शासकीय राशि कब तक वसूल की जावेगी? खाद्य मंत्री ( श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ) : (क) रबी विपणन वर्ष 2019-20 में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति मबई, लार में पंजीकृत किसान एवं पंजीयन में उल्लेखित रकबे अनुसार उपज की मात्रा की जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति, दरगुंवा द्वारा किसान पंजीयन नहीं किया गया है। (ख) उक्त केन्द्रों पर ई19 दिसम्बर 2019] उपार्जन पोर्टल पर दर्ज भू-रकबे से अधिक एवं भूमि किसानों से फसल का उपार्जन नहीं किया गया है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। परिशिष्ट- "इक्कीस" फर्जी तरीके से भूमि की अदला बदली [राजस्व] 87. ( क्र. 1272 ) श्री राकेश गिरि : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या जिला टीकमगढ़ की तहसील टीकमगढ़ अंतर्गत ग्राम सापौन खास में राजस्व प्रकरण क्रमांक 61/अ-19 (4)/95-96 आदेश दिनांक 24/08/1996, द्वारा भूमि खसरा नम्बर 1495 में से अंश रकवा 2.000 हेक्टेयर का पट्टा अरूण पुत्री बृजलाल सोनी के नाम पर प्रदान किया गया था? यदि हाँ, तो किस अधिकारी/कर्मचारी द्वारा पट्टा जारी किया गया था? पट्टा जारी करने में पात्रता की शर्तों का उल्लंघन तो नहीं किया गया एवं पट्टा के वैध/अवैध होने की जानकारी उपलब्ध करायें। (ख) क्या प्रश्नांश (क) में वर्णित भूमि की अदला बदली ग्राम नचनवारा की शासकीय भूमि खसरा नम्बर 235,237 रकवा क्रमांक 0.781 व 3.140 में से 1.219 कुल 2.000 है का प्रकरण क्रमांक 204/बी-121/95-96 दिनांक 24/07/1996 को प्रारंभ किया गया था, तो क्या पट्टा जारी होने के पूर्व प्रत्याशा में ही भूमि की अदला बदली का प्रकरण चालू कर दिया गया जो कि पूर्व योजना के तहत फर्जी कार्यवाही की गई है? यदि हाँ, तो उक्त कूट रचना में कौन-कौन अधिकारी कर्मचारी दोषी हैं? उन पर अभी तक क्या कार्यवाही की गई? यदि नहीं, तो कब तक जांच कर कार्यवाही की जावेगी? (ग) क्या ग्राम नचनवारा की भूमि खसरा नम्बर 233,234 को हथियाने के लिये तत्कालीन सरपंच मोहन सिंह ठाकुर ने प्रस्ताव क्रमांक 3 दिनांक 12/06/1996 की स्वयं कूटरचना कर नायब तहसीलदार टीकमगढ़ के न्यायालय में पेश किया था, जिसके आधार पर प्रकरण क्रमांक 46/अः 59/95-96 आदेश दिनांक 28/06/1996 से अदला बदली स्वीकृत की गई थी? प्रस्ताव क्रमांक 3 दिनांक 12/06/1996 के संबंध में जांच कब तक की जावेगी? यदि उक्त प्रस्ताव कूटरचित पाया जाता है तो दोषियों के विरूद्ध कब तक कार्यवाही की जावेगी? (घ) प्रश्नांश (क), (ख), (ग) में कूटरचित फर्जी दस्तावेज तैयार करने में दोषियों के विरूद्ध क्या कार्यवाही की गई है? यदि तथ्य सही है तो पात्रता शर्तों सहित प्रतिवेदन उपलब्ध करायें। राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : क) जी हाँ, सक्षम प्राधिकृत अधिकारी द्वारा पट्टा जारी किया गया था, पट्टा जारी करने वाले अधिकारी एवं पट्टा के वैध / अवैध होने के संबंध में विस्तृत जांच हेतु डिप्टी कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया है । (ख) जी हाँ, पट्टा जारी होने के पूर्व दिनांक 24.07.1996 को अदला बदली हेतु प्रकरण क्रमांक 204/बी-121/1995-96 दर्ज हो गया था परन्तु खसरा नंबर 1495 के अंश रकवा 2.000 हेक्टेयर का पट्टा अरुण पुत्री बृजलाल सोनी के पट्टा का प्रकरण क्रमांक 61/अ-19-4/95-96 दिनांक 01.08.1996 को दर्ज हुआ एवं अंतिम आदेश 24.08.1996 को पारित किया गया। प्रकरण की विस्तृत जांच अपेक्षित है। (ग) प्रकरण की विस्तृत जांच अपेक्षित है। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है । (घ) प्रश्नांश (ग) के उत्तर के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता। काबिज लोगों को पट्टे का प्रदाय [राजस्व] 88. ( क्र. 1278 ) श्री विजयपाल सिंह : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) होशंगाबाद जिले के विधान सभा क्षेत्र सोहागपुर में कितने ग्रामों में बड़े झाड़ की जमीन आरक्षित है? ग्रामवार एवं रकबे की जानकारी देवें। (ख) क्या राजस्व एवं वन विभाग में बड़े झाड़ के नाम से जमीन दर्ज है और विगत 100 वर्षों से उक्त जमीन पर लोग खेती का कार्य करते आ रहे हैं, जिस पर पेड़ नहीं लगे हैं, उन्हें पट्टे नहीं मिल पाये हैं, जिसके कारण उन्हें शासन की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है? इन लोगों को उक्त जमीन के पट्टे कब तक दिये जायेंगे? (ग) शासन द्वारा विगत कई वर्षों से बड़े झाड़ की जमीन पर काबिज लोगों को पट्टे दिये जाने हेतु क्या कार्यवाही की जा रही है? राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) होशंगाबाद जिले के विधान सभा क्षेत्र सोहागपुर के तहसील सोहागपुर अन्तर्गत 22 ग्रामों में एवं तहसील इटारसी अन्तर्गत 10 ग्रामों में तथा तहसील बाबई अन्तर्गत 22 ग्रामों में बड़े झाड़ का जंगल मद में जमीन राजस्व अभिलेख में दर्ज है ग्रामवार एवं रकबे की जानकारी संलग्न परिशिष्ट पर है। (ख) जी हाँ। राजस्व विभाग अन्तर्गत राजस्व अभिलेखों में दर्ज है। बड़े झाड़ के जंगल मद की भूमि पर पट्टे नहीं बांटे गए। वन विभाग में बड़े झाड़ के नाम से जमीन दर्ज नहीं है। वन क्षेत्र में स्थित वनग्रामों के ग्रामीणों को पूर्व में वन अधिकार पट्टे प्रदाय किये जा चुके हैं। (ग) वन की परिभाषा अंतर्गत आने वाली भूमि पर वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत वन अधिकार पट्टा दिये जाने की कार्यवाही की जाती है। परिशिष्ट- "बाईस" जांच प्रतिवेदन पर कार्यवाही 89. ( क्र. 1290 ) श्री राजेश कुमार प्रजापति : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या प्रश्नकर्ता के प्रश्न क्रमांक 3549, दिनांक 24/07/2019 को उत्तर दिया गया था कि प्रकरण के संबंध में मूल दस्तावेज एवं नस्ती का परीक्षण करने हेतु कलेक्टर को लिखा गया है तो कब किसके द्वारा कलेक्टर को लिखा गया था? क्या कलेक्टर द्वारा उक्त प्रकरण के मूल दस्तावेज एवं नस्ती का परीक्षण कर कार्यवाही को पूर्ण कर लिया गया है? यदि हाँ, तो उक्त प्रकरण से संबंधित सम्पूर्ण नस्ती की प्रति उपलब्ध करायें। यदि नहीं, तो कारण स्पष्ट करें। (ख) क्या श्री प्रेम गुप्ता द्वारा प्रश्न क्रमांक 3549 दिनांक 24/07/2019 के संबंध में खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण संचालनालय भोपाल को सूचना का अधिकार आवेदन रजिस्टर्ड डॉक द्वारा भेजा गया था? (ग) प्रश्नांश (ग) के अनुसार यदि हाँ, तो क्या उक्त व्यक्ति को उक्त विभाग द्वारा जानकारी प्रदाय कर दी गयी है? यदि हाँ, तो कब? यदि नहीं, तो कारण स्पष्ट करें। खाद्य मंत्री ( श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ) : (क) से (ग) जानकारी एकत्रित की जा रही है। पोषण आहार वितरण की विकेन्द्रीकृत नीति 90. ( क्र. 1302 ) श्री भूपेन्द्र सिंह : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्या प्रदेश की आंगनवाड़ियों में पोषण आहार वितरण को लेकर सरकार द्वारा माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में दाखिल पुनरीक्षण याचिका 21 नवम्बर 2019 को वापिस ले ली गई है? (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार यदि हाँ, तो प्रदेश में स्व-सहायता समूहों के माध्यम से पोषण आहार वितरण की विकेन्द्रीकृत नीति क्या बनाई गई है? नई व्यवस्था के तहत कब से पोषण आहार वितरण प्रारंभ कर दिया जायेगा? महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती इमरती देवी ) : (क) जी हाँ, मा. उच्च न्यायालय जबलपुर में प्रचलित RP 1145/17 दिनांक 21.11.19 को वापस हो गई है। (ख) मंत्री परिषद् के निर्णयानुसार प्रदेश के आंगनवाड़ी केन्द्रों में 06 माह से 03 वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती/धात्री माताओं एवं 11-14 वर्ष तक की शाला त्यागी किशोरी बालिकाओं हेतु पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग अन्तर्गत संचालित म.प्र.राज्य ग्रामीण आजीविका फोरम के तहत गठित महिला स्व सहायता समूहों के परिसंघों द्वारा, प्रदेश के 07 चिन्हित स्थानों क्रमशः देवास, धार, होंशगाबाद, सागर, मण्डला, रीवा एवं शिवपुरी में स्थापित किए जा रहे पोषण आहार संयंत्रों के माध्यम से पूरक पोषण आहार (टेकहोम राशन) का प्रदाय करने की नीति है। माह मार्च 2019 से आजीविका मिशन द्वारा स्थापित संयंत्रों में से क्रमबद्ध रूप से क्रमशः देवास, धार, होशंगाबाद, सागर एवं मण्डला जिलों में स्थापित संयंत्रो से टेकहोम राशन का उत्पादन एवं वितरण प्रारम्भ कर दिया गया हैं। नियम विरूद्ध सामग्री क्रय करने वालों पर कार्यवाही [चिकित्सा शिक्षा] 91. ( क्र. 1309 ) श्री संजय शुक्ला : क्या चिकित्सा शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय एवं मेडिकल कॉलेज इन्दौर में भण्डार क्रय नियमों के अंतर्गत पिछले 05 वर्षों में क्या-क्या सामग्री क्रय की गई? लोकल पर्चेसिंग एवं जे. एम. पोर्टल के माध्यम से क्रय की गई सामग्रियों का भण्डारण/स्टॉक रिकार्ड किस-किस के द्वारा कब-कब रखा गया? (ख) पूर्व अतारांकित प्रश्न क्र. 1599 दिनांक 17/07/19 के अनुसार लोकल पर्चेसिंग भण्डार क्रय नियमों के माध्यम से कैंसर चिकित्सालय, चाचा नेहरू चिकित्सालय, मानसिक चिकित्सालय इन्दौर में क्या-क्या पर्चेसिंग की गई? 05 वर्षों में किन-किन फर्मों के द्वारा सामग्री सप्लाई की गई? भुगतान आदि की जानकारी उपलब्ध करावें। (ग) प्रश्नांश (क) एवं (ख) के संदर्भ में सामग्री क्रय का भुगतान किस-किस दिनांक को किया गया? किस-किस फर्म को कितनी राशि दी गई? भुगतान की स्वीकृति किन के द्वारा की गई? (घ) पूर्व अ.ता. प्रश्न क्र. 1599 दिनांक 17/07/2019 (घ) के संदर्भ में नियमों के विपरीत सामग्री क्रय करने वाले कौन-कौन अधिकारी/कर्मचारी हैं? उनके नाम स्पष्ट करें। उनके विरूद्ध क्या जांच की जा रही है? जांच कब तक पूर्ण की जायेगी व दोषियों पर क्या कार्यवाही की जायेगी? जांच की समय-सीमा बतायें। चिकित्सा शिक्षा मंत्री ( डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ ) : (क) महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय इन्दौर की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 01 अनुसार है। चिकित्सा महाविद्यालय में लोकल पर्चेस नहीं की जाती है। जे.एम. पोर्टल के माध्यम से क्रय की गई साम्रगी का भण्डारण/स्टॉक रिकार्ड महाविद्यालय के क्रय विभाग एवं भण्डार शाखा एवं उपयोगकर्ता द्वारा साम्रगी का रिकार्ड रखा जाता है। (ख) कैंसर चिकित्सालय की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 02 अनुसार है। चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 03 अनुसार है। मानसिक चिकित्सालय इन्दौर की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 04 अनुसार है। (ग) महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय की साम्रगी क्रय भुगतान की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 01 अनुसार है। कैंसर चिकित्सालय के कार्यकर्ता अधिकारी अधीक्षक है। शेष जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 05 अनुसार है। चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 03 अनुसार है। मानसिक चिकित्सालय की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 04 अनुसार है। (घ) भण्डार क्रय नियमों के विपरीत साम्रगी क्रय करने के संबंध में सात अधिकारी/कर्मचारियों के विरूद्ध आरोप पत्र जारी किये गये थे, जिनके नाम 1. डॉ. रामगुलाम राजदान 2. डॉ. सिद्धार्थ गौतम 3. डॉ. जे. के. वर्मा 4. श्री संजय उपाध्याय 5. श्री शैलेष राठौर 6. श्री राजेश व्यास 7. श्री घनश्याम पवार। जी हाँ। जांच उपरांत कार्यवाही की जावेगी। समयसीमा बताया जाना संभव नहीं है। बालाघाट जिले में संचालित समूह नल-जल योजना [लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी] 92. ( क्र. 1311 ) श्री रामकिशोर कावरे : क्या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) बालाघाट जिले में समूह नल-जल योजना से कितने गाँव तक पानी प्रदाय किया जा रहा है? सूची प्रदाय करें। कितने ग्राम में पानी प्रदाय नहीं कर पा रहे हैं? कारण सहित जानकारी देवें। (ख) जल समिति बालाघाट जिले के समूह नलजल योजना में कितने बने? ग्रामवार जानकारी देवें। क्या जल समिति कार्यरत है? ग्रामवार जानकारी देवें। यदि कार्यरत नहीं है तो कारण सहित बतावें। (ग) जल समिति बनाने का कार्य किसे दिया गया था? क्या निविदा शर्तों का पालन किया गया? यदि नहीं, तो क्या कार्यवाही की? (घ) क्या जल समिति कागज में बताकर जल समिति के कार्य को पूर्ण बताकर राशि भुगतान कर लिया गया? यदि हाँ, तो दोषी कौन है? वर्तमान में स्थल का निरीक्षण कर जल समिति की जांच करेंगे? यदि हाँ, तो कब तक? बतावें । लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री ( श्री सुखदेव पांसे ) : (क) समूह नल-जल योजनाओं में सम्मिलित सभी 182 ग्रामों में, जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-1 अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-2 अनुसार है। (ग) म.प्र. जल निगम द्वारा क्रियान्वित 04 समूह जलप्रदाय योजनाओं में मेसर्स अनुपमा एजुकेशन सोसायटी सतना (एन.जी.ओ.) को दिया गया था, विभाग द्वारा क्रियान्वित लालबर्रा समूह जलप्रदाय योजना अंतर्गत मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत के द्वारा ग्राम सभा में अनुमोदन पश्चात समितियों का गठन किया गया था। जी हाँ, शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (घ) जी नहीं। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। कृषकों की भूमि का अधिग्रहण [राजस्व] 93. ( क्र. 1313 ) श्री मनोज चावला : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) रतलाम जिले से निकल रही मुंबई-दिल्ली 8 लाइन एक्सप्रेस-वे में कुल कितने कृषकों की कितने हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की गई है? कृषक, गाँव, खसरा नंबर तथा रकवा सहित सूची उपलब्ध करावें तथा बतावें कि भूमि अर्जन पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम 2013 के अनुसार किस-किस कृषक को कितना मुआवजा दे दिया गया है या दिया जावेगा? (ख) क्या अधिकार अधिनियम 2013 के अनुसार कलेक्टर गाइड-लाइन से मात्र 2 गुना मुआवजा दिया जा रहा है जबकि आसपास के राज्यों में 4 से 6 गुना मुआवजा दिया जा रहा है? क्या शासन अधिनियम में संशोधन कर 6 गुना मुआवजा देगी? अधिनियम की प्रति देवें। (ग) प्रश्नांश (क) में उल्लेखित जमीन पर मुआवजे में 12% ब्याज किस-किस दिनांक से देय हैं तथा मुआवजे के विरोध में उच्च न्यायालय इंदौर में कितने परिवाद दायर किए गए हैं? उनके क्रमांक तथा दिनाँक बतावें। (घ) क्या पूर्व सरकार ने सड़कों के निर्माण में लगे ठेकेदारों को लाभ देने के लिए अधिनियम में दोगुना मुआवजा तय किया था? शासन किसानों को 6 गुना मुआवजा दिलाने के लिए कोई कदम उठाएगा? राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) मुम्बई-दिल्ली 8-लेन एक्सप्रेस-वे में रतलाम जिले के अन्तर्गत कुल 58 ग्रामों की भूमि प्रभावित हो रही है। ग्राम के नाम, कृषकों की संख्या तथा अधिगृहित किये जाने वाला क्षेत्रफल की विस्तृत जानकारी जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र - 1 अनुसार है। भूमि अर्जन पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम 2013 के अन्तर्गत पारित किये गये अवार्ड की छायाप्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-2 अनुसार है। पारित किये गये अवार्ड के विरूद्ध वर्तमान तक 50 ग्रामों के कुल 1371 कृषकों को 8, 66, 45, 055 रुपये का भुगतान किया जा चुका है। शेष कृषकों को भुगतान की प्रक्रिया जारी है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-3 अनुसार है। (ख) अधिनियम के प्रावधानों तथा राज्य शासन द्वारा निर्धारित कारक के आधार पर मुआवजा भुगतान किया जा रहा है। अधिनियम की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ग) एवं (घ) जानकारी एकत्रित की जा रही है। मुआवजा वितरण एवं पुनर्वास कार्य में लापरवाही [राजस्व] 94. ( क्र. 1314 ) श्रीमती रामबाई गोविंद सिंह : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सीतानगर बांध जिला दमोह के डूब क्षेत्र में डूब रही सैड़ारा तिन्दुआ समिति के सदस्यों को भूमि को मुआवजा वितरण सूची में क्यों शामिल नहीं किया गया है? (ख) इस समिति के सदस्यों कि जमीन डूब जाने के उपरांत शासन ने इन परिवारों के पुनर्वास की क्या योजना बनाई है? (ग) यदि इन्हें मुआवजा और इनके पुनर्वास के कार्य में लापरवाही हुई है तो क्या दोषी अधिकारियों पर कोई कार्यवाही की गई है? राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) सीतानगर मध्यम सिंचाई परियोजना में रा.प्र. क्रमांक 05अ-82 वर्ष 2017-18 में भू-अर्जन हेतु अवार्ड पारित करने की प्रक्रिया प्रचलन में है। (ख) एवं (ग) अंतिम निर्णय पारित न होने के कारण प्रश्न उत्पन्न नहीं होता है। जिला भिण्ड अंतर्गत हैण्डपंप एवं नल-जल योजनाओं की स्थिति [लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी 95. ( क्र. 1333 ) श्री संजीव सिंह : क्या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्न दिनांक की स्थिति में विधान सभा क्षेत्र भिण्ड में कितने हैण्डपंप स्थापित हैं? कितने चालू एवं कितने बंद एवं कितने स्थाई बंद है? कितनी नल-जल योजनाएं संचालित हैं? योजनावार बताएं। कितनी चालू कितनी बंद है? कितनी योजनाएं निर्माणाधीन है? बंद का कारण सहित बताएं। (ख) क्या स्थाई बंद हैण्डपंप के स्थान पर नीवन हैण्डपंप खनन किया जाएगा तथा निर्माणाधीन योजनाएं कब तक पूर्ण की जाकर जल प्रदाय चालू कर दिया जायेगा? लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री ( श्री सुखदेव पांसे ) : (क) 3280 हैण्डपंप स्थापित, 3141 चालू, 12 हैण्डपंप साधारण खराबी से एवं 127 हैण्डपंप स्थायी रूप से बंद हैं। 39 नल-जल योजनाएं संचालित हैं, जिसमें से 19 चालू एवं 20 योजनाएं बंद हैं, जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। 02 योजनाएं निर्माणाधीन हैं। (ख) निर्धारित मापदण्ड 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन के मान से कम जल प्रदाय होने पर वित्तीय संयोजन के अनुसार नवीन नलकूप खनन कर हैण्डपंप स्थापना का प्रावधान है। दिनांक 31.03.2020 तक पूर्ण किया जाना लक्षित है। परिशिष्ट - "तेईस" एन.आर.आई. कोटे में भर्ती अभ्यर्थियों की जांच [चिकित्सा शिक्षा] 96. ( क्र. 1349 ) श्री कुणाल चौधरी : क्या चिकित्सा शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्नकर्ता के प्रश्न क्र.3358 दिनांक 24 जुलाई 2019 के संदर्भ में बतावें कि एन.आर.आई. कोटे में प्रवेश विद्यार्थी की पात्रता की जांच शासन द्वारा किस-किस वर्ष में की गई? यदि नहीं, तो बतावें कि इस संदर्भ मा. सर्वोच्च न्यायालय के प्रकरण क्र. 4060/2007 के निर्देशों का पालन क्यों नहीं किया गया कि निजी महाविद्यालय से योग्य एवं पात्र विद्यार्थी चयनित हैं, यह देखना शासन का दायित्व है। (ख) प्रश्नकर्ता के प्रश्न क्र. 3358 के खण्ड (ग) के उत्तर के संदर्भ में बतायें
खाद्य मंत्री : रबी विपणन वर्ष दो हज़ार उन्नीस-बीस में समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन हेतु शिवपुरी जिले में पचानवे उपार्जन केन्द्र बनाए गए थे। ई-उपार्जन पोर्टल पर जिले के उनहत्तर,पाँच सौ चौरानवे किसानों द्वारा समर्थन मूल्य पर गेहूं विक्रय हेतु पंजीयन कराया गया था, जिसमें से छब्बीस,सात सौ तेरह किसानों द्वारा गेहूं का विक्रय उपार्जन केन्द्रों पर किया गया। शिवपुरी जिले में ग्राम गुरूकुदवाया के किसानों को समर्थन मूल्य पर गेहूं विक्रय करने हेतु सेवा सहकारी संस्था, पिपरौदा ऊवारी-राजपुरा केन्द्र-दो पर मैप किया गया था। रबी विपणन वर्ष दो हज़ार उन्नीस-बीस में जारी उपार्जन नीति के अनुसार उपार्जन केन्द्र के स्थल चयन के संबंध में प्रावधान इस प्रकार किए गए हैं- सामान्यतः उपार्जन केन्द्र गोदाम परिसर पर खोले जाएंगे। केन्द्र पर पूर्ण पंचायत ही टैग की जाएगी। एक उपार्जन केन्द्र पर यथासम्भव दो सौ से सात सौ पचास तक किसान संलग्न किए जाएंगे। साथ ही, किसी भी उपार्जन केन्द्र पर पाँच हज़ार मे.टन से अधिक मात्रा का उपार्जन नहीं किया जाएगा तथा यथासम्भव सम्बद्ध ग्राम पंचायतों के केन्द्र बिन्दु में उपार्जन केन्द्र होगा जिससे किसानों को अपनी उपज विक्रय करने हेतु लगभग पच्चीस कि.मी. से अधिक दूरी तय न करना पड़े। जी हाँ। ग्राम गुरूकुदवाया के किसानों द्वारा समर्थन `मूल्य पर गेहूं विक्रय करने हेतु उपार्जन केन्द्र ग्राम आकाझिरी से संलग्न करने की मांग की गई थी किन्तु, केन्द्र पर निर्धारित संख्या तक किसानों को मैप किए जाने के कारण ग्राम गुरूकुदवाया के किसानों को उपार्जन केन्द्र आकाझिरी से मैप नहीं किया जा सका है। नल-जल योजनाएं [लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी] अस्सी. श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया : क्या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र में कुल कितनी नल-जल योजनायें संचालित हैं? उनमें से कितनी नज-जल योजनाएं चालू हैं? शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र में कितनी नल-जल योजनाएं बंद हैं? उन्हें कब तक चालू किया जायेगा? ग्रामीण अंचलों में संचालित ऐसी कितनी नल-जल योजनाएं हैं? जिनके बोर का जल स्तर नीचे चले जाने से बंद हो गये हैं? ऐसे स्थलों पर नल-जल योजना को चालू किये जाने हेतु विभाग द्वारा क्या कार्यवाही की जा रही है? आगामी ग्रीष्म काल में पेयजल संकट और बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्र में पेयजल उपलब्ध कराने हेतु विभाग द्वारा क्या व्यवस्था की जायेगी? लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री : सत्रह नल-जल योजनाएं। पंद्रह नलजल योजनाएं चालू हैं। दो नल-जल योजनाएं। बंद योजनाओं को चालू करने का दायित्व संबंधित ग्राम पंचायतों का है, स्त्रोत विकसित करने का दायित्व विभाग का है। निश्चित समयावधि नहीं बताई जा सकती। वर्तमान में एक भी नहीं, शेष प्रश्नांश उपस्थित नहीं होता है। ग्रीष्मकाल में पेयजल उपलब्ध करवाने हेतु विभागीय कार्य योजना के अंतर्गत आवश्यकता अनुसार नवीन नलकूपों का खनन, जलस्तर नीचे जाने से बंद हैण्डपंपों में राइजर पाईप बढ़ाने एवं सिंगलफेस मोटरपंप स्थापित करने एवं नलकूपों में हाइड्रो फ्रैक्चरिंग के कार्य करवाये जाते हैं। आंगनवाड़ी केन्द्र इक्यासी. श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि क्या शिवपुरी नगर में एक सौ अट्ठाईस आंगनवाड़ी केन्द्र संचालित हैं? यदि हाँ, तो वहां क्या तेरह समूह भोजन वितरण कर रहे हैं। यदि हाँ, तो विगत दो वर्षों में विभाग द्वारा इन्हें कितनी राशि का भुगतान किया गया? क्या एक स्व-सहायता समूह को दो या उससे अधिक आंगनवाड़ियों में भोजन प्रदान देने का प्रावधान है। यदि नहीं, तो इन समूहों को एक से अधिक आंगनवाड़ी में भोजन का कार्य क्यों दिया गया? क्या शिवपुरी नगर में इन तेरह समूहों के अलावा अन्य समूहों के आवेदन विभाग में प्राप्त हुए थे? यदि हाँ, तो उन्हें भोजन प्रदाय का कार्य क्यों दिया गया? महिला एवं बाल विकास मंत्री : जी हाँ । शिवपुरी नगर में एक सौ छब्बीस आंगनवाड़ी केन्द्र एवं दो उप आंगनवाड़ी केन्द्र संचालित है। शिवपुरी नगर के इन आंगनवाड़ी केन्द्रों पर पाँच महिला स्व-सहायता समूह एवं आठ महिला मण्डल भोजन वितरण का कार्य कर रहे हैं। विगत दो वर्षों में विभाग द्वारा पाँच स्व-सहायता समूह एवं आठ महिला मण्डलों को राशि रू. दो,बारह,इकहत्तर,छः सौ पचहत्तर/- का भुगतान किया गया है। जी हाँ। विभाग के पत्र क्र. दो हज़ार एक सौ तीन/दो हज़ार आठ सौ तीस/दो पचास दो हज़ार अट्ठारह/ए.एन. दिनांक बारह.नौ.अट्ठारह के माध्यम से प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में संचालित आंगनवाड़ी उप आंगनवाड़ी केन्द्रों में तीन से छः वर्ष तक के बच्चों को पूरक पोषण आहार प्रदाय के संबंध में जारी निर्देश अनुसार शहरी क्षेत्रों में दो या दो से अधिक आंगनवाड़ी केन्द्रों पर एक स्थानीय संस्था को पूरक पोषण आहार प्रदाय कार्य देने के प्रावधान हैं। के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता। जी हाँ। वर्ष दो हज़ार सोलह-सत्रह में पंद्रह महिला स्व-सहायता समूहों / महिला मण्डल के आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से कलेक्टर शिवपुरी द्वारा गठित समिति की अनुशंसा के आधार पर आठ महिला स्व-सहायता समूह/महिला मण्डल को शिवपुरी नगर में संचालित आंगनवाड़ी केन्द्रों पर पूरक पोषण आहार प्रदाय का कार्य दिया गया है तथा शेष सात महिला स्व-सहायता समूह महिला मण्डल के संबंध में समिति द्वारा प्रतिकूल टीप अंकित किए जाने के कारण पूरक पोषण आहार प्रदाय का कार्य नहीं दिया गया है। इस प्रकार शिवपुरी नगर में संचालित आंगनवाड़ी केन्द्रों पर पूरक पोषण आहार का प्रदाय पूर्व से कार्यरत पाँच महिला स्व-सहायता समूह/महिला मण्डल सहित कुल तेरह महिला स्व-सहायता समूह / महिला मण्डल द्वारा किया जा रहा है। विस्तृत जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। परिशिष्ट - "उन्नीस" बुरहानपुर जिले के ग्राम पंचायत एमागिर्द में निर्मित पानी की टंकी [लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी] बयासी. ठाकुर सुरेन्द्र नवल सिंह : क्या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि बुरहानपुर जिले के ग्राम पंचायत एमागिर्द के आजाद नगर में मीठा मौला के पास निर्मित पानी की टंकी का निर्माण कार्य किस सन् में, कितनी लागत से, किस योजना के माध्यम से पूर्ण किया गया? उक्त निर्माण कार्य किस दिनांक को पूर्ण हुआ? साथ ही पूर्ण होने के पश्चात् आज दिनांक तक टंकी से ग्रामवासियों को पानी वितरण क्यों नहीं किया जा रहा है? क्या टंकी के निर्माण कार्य की गुणवत्ता में खामियां हैं या अन्य किसी कारण से आज दिनांक तक पानी का वितरण नहीं किया गया? यदि खामियां हैं तो उन दोषियों के विरूद्ध क्या कार्यवाही का जावेगी? कब तक उक्त पानी की टंकी से ग्रामवासियों को पानी वितरण प्रारंभ कर दिया जावेगा? लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री : वर्ष दो हज़ार तेरह-चौदह में रूपये बीस.पंद्रह लाख लागत से नलजल योजना मद में निर्माण किया था। एवं दिनांक पंद्रह.तीन.दो हज़ार अट्ठारह। वर्तमान में टंकी के माध्यम से ग्राम में पेयजल प्रदाय किया जा रहा है। शेष प्रश्नांश उपस्थित नहीं होता है। खाद्यान खरीदी केन्द्र की स्थापना तिरासी. श्री संजय सत्येन्द्र पाठक : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि कटनी जिला एवं विधानसभा क्षेत्र विजयराघवगढ़ में कितने नवीन खरीदी केन्द्र प्रस्तावित किए गए हैं? क्या पूर्व से कॉटी में संचालित खरीदी केन्द्र बंद कर दिया गया है? जिससे किसानों को कृषि उपज विक्रय करने में पन्द्रह से बीस किलोमीटर दूरस्थ आना-जाना पड़ता है? विक्रय करने जिन्स को लेकर जाने में साधन नहीं मिल पाते जिसके कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है? विक्रय केन्द्र कॉटी को बंद करने का कारण क्या बतलाया गया है? उसकी प्रति उपलब्ध कराई जाये। कॉटी विक्रय केन्द्र के भौगोलिक दृष्टि से लगे हुये अट्ठारह ग्राम हैं, उन ग्रामों के किसान अतिरिक्त भाड़ा देकर जिन्स की विक्रय करते है? जिससे उन्हें लाभ की बजाय हानि हो रही है? क्या इस विक्रय केन्द्र को फिर से प्रारंभ करने का आदेश देगें? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्यों? खाद्य मंत्री : खरीफ विपणन वर्ष दो हज़ार उन्नीस-बीस में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन हेतु जिला कटनी-चार एवं विधानसभा क्षेत्र विजयराघवगढ़ में एक नवीन खरीदी केन्द्र प्रस्तावित किए गए हैं। जी नहीं। पूर्व वर्ष में कांटी में स्वतंत्र खरीदी केन्द्र संचालित नहीं था। खरीफ विपणन वर्ष दो हज़ार उन्नीस-बीस में कांटी में धान खरीदी हेतु उपार्जन केन्द्र स्थापित किया गया है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। प्रश्नांश के उत्तर के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता। ग्राम कांटी में उपार्जन केन्द्र स्थापित करने के कारण किसानों को अपनी उपज विक्रय करने के लिए अतिरिक्त भाड़ा भुगतान आवश्यकता नहीं है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। नल-जल प्रदाय योजना [लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी] चौरासी. श्री संजय सत्येन्द्र पाठक : क्या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या डी.एम.एफ. योजना से वर्ष दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह से प्रश्न दिनांक तक विधान सभा क्षेत्र विजयराघवगढ़ में नल-जल प्रदाय योजना हेतु किन-किन ग्रामों में योजना स्वीकृत की गई एवं कितने ग्रामों में कार्य प्रारंभ किया गया? कितने जल प्रदाय योजना का कार्य प्रगति पर है एवं कितनी जल प्रदाय योजनाओं कार्य प्रारंभ नहीं हुआ? क्या स्वीकृत कार्य योजनाओं के कार्य पूर्ण कर गांव की पेयजल समस्या का तत्काल निराकरण किया जायेगा? नहीं तो क्यों? कार्य में हो रहे विलम्ब के लिए कौन-कौन अधिकारी उत्तरदायी हैं? नाम एवं पदनाम का उल्लेख करें। दोषियों के विरूद्ध क्या कार्यवाही की जायेगी? लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री : सात ग्रामों में योजनाएं स्वीकृत, सभी योजनाओं के कार्य अप्रारंभ हैं। शेष जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है । जी हाँ, निविदाएं आमंत्रित की गई हैं। उपरोक्तानुसार किसी अधिकारी के दोषी होने का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। परिशिष्ट - "बीस" सांस्कृतिक, धार्मिक एवं अन्य आयोजन [संस्कृति] पचासी. श्री फुन्देलाल सिंह मार्को : क्या चिकित्सा शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि जिला अनूपपुर में संस्कृति विभाग द्वारा विगत पाँच वर्षों में कुल कितने सांस्कृतिक, धार्मिक एवं अन्य आयोजन / महोत्सव आयोजन किये गये? विधान सभा क्षेत्रवार आयोजन दिनांक, आयोजन का नाम, स्थान तथा व्यय की गई राशि सहित जानकारी उपलब्ध करावें। क्या पुष्पराजगढ़ विधान सभा क्षेत्र अंतर्गत माँ नर्मदा की उद्गम स्थली, अमरकंटक में विगत वर्षों से महाशिवरात्रि के पर्व पर नर्मदा जयंती के अवसर पर नर्मदा महोत्सव का आयोजन विभाग द्वारा कराया गया? यदि हाँ, तो इस महोत्सव पर किस कार्य हेतु कितना व्यय किया गया? विगत तीन वित्तीय वर्ष की जानकारी उपलब्ध करावें। आगामी वर्ष में इस महोत्सव को कराये जाने हेतु शासन द्वारा क्या कोई कार्य योजना तैयार की गई है? यदि हाँ, तो आगामी महोत्सव हेतु किस-किस विभाग द्वारा क्या-क्या आयोजन किये जायेंगे? क्या कलेक्टर, अनूपपुर के अर्द्धशासकीय पत्र क्रमांक पाँच हज़ार एक सौ ग्यारह दिनांक पंद्रह.दस.दो हज़ार उन्नीस के माध्यम से विभाग के अपर मुख्य सचिव को इस आयोजन हेतु बजट आवंटन की मांग की गई थी? यदि हाँ, तो प्रस्तावित राशि कब तक आवंटित कर दी जावेगी? चिकित्सा शिक्षा मंत्री : संस्कृति विभाग द्वारा विगत पाँच वर्षों में जिला अनूपपुर में कुल सात सांस्कृतिक/धार्मिक एवं अन्य आयोजन/महोत्सव आयोजित किये गये हैं. जिन पर कुल व्यय राशि रू. तेईस,तेईस,तीन सौ सात.शून्य लाख हुआ है. विस्तृत विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार. जी नहीं. शेष का प्रश्न उपस्थित नहीं होता. यह योजना है कि साहित्यिक/सांस्कृतिक कार्यक्रमों में यथोचित समयानुकूल सहयोग प्रदान किया जा सकता है. वर्ष दो हज़ार बीस में इस महोत्सव के संबंध में जिला कलेक्टर, अनूपपुर से प्राप्त प्रस्ताव का परीक्षण किया जा रहा है. भूमिहीन व्यक्तियों के नाम फसलों का उपार्जन छियासी. श्री राकेश गिरि : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि टीकमगढ़ जिले के विकासखण्ड टीकमगढ़ के अन्तर्गत प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति मबई, लार, दरगुवां उपार्जन केन्द्रों में वर्ष दो हज़ार उन्नीस-बीस में कितने कृषकों का कितना अनाज उपार्जन हेतु पंजीकृत हुआ? क्या उक्त केन्द्रों पर दर्ज रकवा से अधिक तथा भूमिहीन व्यक्तियों के नाम फसलों का उपार्जन किया गया है? यदि हाँ, तो अनाधिकृत/अनुचित उपार्जन पंजीकृत करने के लिये कौन-कौन जिम्मेदार है, इनके विरूद्ध कया कार्यवाही कब तक की जावेगी तथा सुनियोजित रूप से आहरित शासकीय राशि कब तक वसूल की जावेगी? खाद्य मंत्री : रबी विपणन वर्ष दो हज़ार उन्नीस-बीस में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति मबई, लार में पंजीकृत किसान एवं पंजीयन में उल्लेखित रकबे अनुसार उपज की मात्रा की जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति, दरगुंवा द्वारा किसान पंजीयन नहीं किया गया है। उक्त केन्द्रों पर ईउन्नीस दिसम्बर दो हज़ार उन्नीस] उपार्जन पोर्टल पर दर्ज भू-रकबे से अधिक एवं भूमि किसानों से फसल का उपार्जन नहीं किया गया है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। परिशिष्ट- "इक्कीस" फर्जी तरीके से भूमि की अदला बदली [राजस्व] सत्तासी. श्री राकेश गिरि : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या जिला टीकमगढ़ की तहसील टीकमगढ़ अंतर्गत ग्राम सापौन खास में राजस्व प्रकरण क्रमांक इकसठ/अ-उन्नीस /पचानवे-छियानवे आदेश दिनांक चौबीस अगस्त एक हज़ार नौ सौ छियानवे, द्वारा भूमि खसरा नम्बर एक हज़ार चार सौ पचानवे में से अंश रकवा दो.शून्य हेक्टेयर का पट्टा अरूण पुत्री बृजलाल सोनी के नाम पर प्रदान किया गया था? यदि हाँ, तो किस अधिकारी/कर्मचारी द्वारा पट्टा जारी किया गया था? पट्टा जारी करने में पात्रता की शर्तों का उल्लंघन तो नहीं किया गया एवं पट्टा के वैध/अवैध होने की जानकारी उपलब्ध करायें। क्या प्रश्नांश में वर्णित भूमि की अदला बदली ग्राम नचनवारा की शासकीय भूमि खसरा नम्बर दो सौ पैंतीस,दो सौ सैंतीस रकवा क्रमांक शून्य.सात सौ इक्यासी व तीन.एक सौ चालीस में से एक.दो सौ उन्नीस कुल दो.शून्य है का प्रकरण क्रमांक दो सौ चार/बी-एकइक्कीस पचानवे छियानवे दिनांक चौबीस जुलाई एक हज़ार नौ सौ छियानवे को प्रारंभ किया गया था, तो क्या पट्टा जारी होने के पूर्व प्रत्याशा में ही भूमि की अदला बदली का प्रकरण चालू कर दिया गया जो कि पूर्व योजना के तहत फर्जी कार्यवाही की गई है? यदि हाँ, तो उक्त कूट रचना में कौन-कौन अधिकारी कर्मचारी दोषी हैं? उन पर अभी तक क्या कार्यवाही की गई? यदि नहीं, तो कब तक जांच कर कार्यवाही की जावेगी? क्या ग्राम नचनवारा की भूमि खसरा नम्बर दो सौ तैंतीस,दो सौ चौंतीस को हथियाने के लिये तत्कालीन सरपंच मोहन सिंह ठाकुर ने प्रस्ताव क्रमांक तीन दिनांक बारह जून एक हज़ार नौ सौ छियानवे की स्वयं कूटरचना कर नायब तहसीलदार टीकमगढ़ के न्यायालय में पेश किया था, जिसके आधार पर प्रकरण क्रमांक छियालीस/अः उनसठ पचानवे छियानवे आदेश दिनांक अट्ठाईस जून एक हज़ार नौ सौ छियानवे से अदला बदली स्वीकृत की गई थी? प्रस्ताव क्रमांक तीन दिनांक बारह जून एक हज़ार नौ सौ छियानवे के संबंध में जांच कब तक की जावेगी? यदि उक्त प्रस्ताव कूटरचित पाया जाता है तो दोषियों के विरूद्ध कब तक कार्यवाही की जावेगी? प्रश्नांश , , में कूटरचित फर्जी दस्तावेज तैयार करने में दोषियों के विरूद्ध क्या कार्यवाही की गई है? यदि तथ्य सही है तो पात्रता शर्तों सहित प्रतिवेदन उपलब्ध करायें। राजस्व मंत्री : क) जी हाँ, सक्षम प्राधिकृत अधिकारी द्वारा पट्टा जारी किया गया था, पट्टा जारी करने वाले अधिकारी एवं पट्टा के वैध / अवैध होने के संबंध में विस्तृत जांच हेतु डिप्टी कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया है । जी हाँ, पट्टा जारी होने के पूर्व दिनांक चौबीस.सात.एक हज़ार नौ सौ छियानवे को अदला बदली हेतु प्रकरण क्रमांक दो सौ चार/बी-एक सौ इक्कीस/एक हज़ार नौ सौ पचानवे-छियानवे दर्ज हो गया था परन्तु खसरा नंबर एक हज़ार चार सौ पचानवे के अंश रकवा दो.शून्य हेक्टेयर का पट्टा अरुण पुत्री बृजलाल सोनी के पट्टा का प्रकरण क्रमांक इकसठ/अ-उन्नीस अप्रैल पचानवे-छियानवे दिनांक एक.आठ.एक हज़ार नौ सौ छियानवे को दर्ज हुआ एवं अंतिम आदेश चौबीस.आठ.एक हज़ार नौ सौ छियानवे को पारित किया गया। प्रकरण की विस्तृत जांच अपेक्षित है। प्रकरण की विस्तृत जांच अपेक्षित है। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है । प्रश्नांश के उत्तर के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता। काबिज लोगों को पट्टे का प्रदाय [राजस्व] अठासी. श्री विजयपाल सिंह : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि होशंगाबाद जिले के विधान सभा क्षेत्र सोहागपुर में कितने ग्रामों में बड़े झाड़ की जमीन आरक्षित है? ग्रामवार एवं रकबे की जानकारी देवें। क्या राजस्व एवं वन विभाग में बड़े झाड़ के नाम से जमीन दर्ज है और विगत एक सौ वर्षों से उक्त जमीन पर लोग खेती का कार्य करते आ रहे हैं, जिस पर पेड़ नहीं लगे हैं, उन्हें पट्टे नहीं मिल पाये हैं, जिसके कारण उन्हें शासन की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है? इन लोगों को उक्त जमीन के पट्टे कब तक दिये जायेंगे? शासन द्वारा विगत कई वर्षों से बड़े झाड़ की जमीन पर काबिज लोगों को पट्टे दिये जाने हेतु क्या कार्यवाही की जा रही है? राजस्व मंत्री : होशंगाबाद जिले के विधान सभा क्षेत्र सोहागपुर के तहसील सोहागपुर अन्तर्गत बाईस ग्रामों में एवं तहसील इटारसी अन्तर्गत दस ग्रामों में तथा तहसील बाबई अन्तर्गत बाईस ग्रामों में बड़े झाड़ का जंगल मद में जमीन राजस्व अभिलेख में दर्ज है ग्रामवार एवं रकबे की जानकारी संलग्न परिशिष्ट पर है। जी हाँ। राजस्व विभाग अन्तर्गत राजस्व अभिलेखों में दर्ज है। बड़े झाड़ के जंगल मद की भूमि पर पट्टे नहीं बांटे गए। वन विभाग में बड़े झाड़ के नाम से जमीन दर्ज नहीं है। वन क्षेत्र में स्थित वनग्रामों के ग्रामीणों को पूर्व में वन अधिकार पट्टे प्रदाय किये जा चुके हैं। वन की परिभाषा अंतर्गत आने वाली भूमि पर वन अधिकार अधिनियम दो हज़ार छः के तहत वन अधिकार पट्टा दिये जाने की कार्यवाही की जाती है। परिशिष्ट- "बाईस" जांच प्रतिवेदन पर कार्यवाही नवासी. श्री राजेश कुमार प्रजापति : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या प्रश्नकर्ता के प्रश्न क्रमांक तीन हज़ार पाँच सौ उनचास, दिनांक चौबीस जुलाई दो हज़ार उन्नीस को उत्तर दिया गया था कि प्रकरण के संबंध में मूल दस्तावेज एवं नस्ती का परीक्षण करने हेतु कलेक्टर को लिखा गया है तो कब किसके द्वारा कलेक्टर को लिखा गया था? क्या कलेक्टर द्वारा उक्त प्रकरण के मूल दस्तावेज एवं नस्ती का परीक्षण कर कार्यवाही को पूर्ण कर लिया गया है? यदि हाँ, तो उक्त प्रकरण से संबंधित सम्पूर्ण नस्ती की प्रति उपलब्ध करायें। यदि नहीं, तो कारण स्पष्ट करें। क्या श्री प्रेम गुप्ता द्वारा प्रश्न क्रमांक तीन हज़ार पाँच सौ उनचास दिनांक चौबीस जुलाई दो हज़ार उन्नीस के संबंध में खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण संचालनालय भोपाल को सूचना का अधिकार आवेदन रजिस्टर्ड डॉक द्वारा भेजा गया था? प्रश्नांश के अनुसार यदि हाँ, तो क्या उक्त व्यक्ति को उक्त विभाग द्वारा जानकारी प्रदाय कर दी गयी है? यदि हाँ, तो कब? यदि नहीं, तो कारण स्पष्ट करें। खाद्य मंत्री : से जानकारी एकत्रित की जा रही है। पोषण आहार वितरण की विकेन्द्रीकृत नीति नब्बे. श्री भूपेन्द्र सिंह : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि क्या प्रदेश की आंगनवाड़ियों में पोषण आहार वितरण को लेकर सरकार द्वारा माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में दाखिल पुनरीक्षण याचिका इक्कीस नवम्बर दो हज़ार उन्नीस को वापिस ले ली गई है? प्रश्नांश अनुसार यदि हाँ, तो प्रदेश में स्व-सहायता समूहों के माध्यम से पोषण आहार वितरण की विकेन्द्रीकृत नीति क्या बनाई गई है? नई व्यवस्था के तहत कब से पोषण आहार वितरण प्रारंभ कर दिया जायेगा? महिला एवं बाल विकास मंत्री : जी हाँ, मा. उच्च न्यायालय जबलपुर में प्रचलित RP एक हज़ार एक सौ पैंतालीस/सत्रह दिनांक इक्कीस.ग्यारह.उन्नीस को वापस हो गई है। मंत्री परिषद् के निर्णयानुसार प्रदेश के आंगनवाड़ी केन्द्रों में छः माह से तीन वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती/धात्री माताओं एवं ग्यारह-चौदह वर्ष तक की शाला त्यागी किशोरी बालिकाओं हेतु पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग अन्तर्गत संचालित म.प्र.राज्य ग्रामीण आजीविका फोरम के तहत गठित महिला स्व सहायता समूहों के परिसंघों द्वारा, प्रदेश के सात चिन्हित स्थानों क्रमशः देवास, धार, होंशगाबाद, सागर, मण्डला, रीवा एवं शिवपुरी में स्थापित किए जा रहे पोषण आहार संयंत्रों के माध्यम से पूरक पोषण आहार का प्रदाय करने की नीति है। माह मार्च दो हज़ार उन्नीस से आजीविका मिशन द्वारा स्थापित संयंत्रों में से क्रमबद्ध रूप से क्रमशः देवास, धार, होशंगाबाद, सागर एवं मण्डला जिलों में स्थापित संयंत्रो से टेकहोम राशन का उत्पादन एवं वितरण प्रारम्भ कर दिया गया हैं। नियम विरूद्ध सामग्री क्रय करने वालों पर कार्यवाही [चिकित्सा शिक्षा] इक्यानवे. श्री संजय शुक्ला : क्या चिकित्सा शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय एवं मेडिकल कॉलेज इन्दौर में भण्डार क्रय नियमों के अंतर्गत पिछले पाँच वर्षों में क्या-क्या सामग्री क्रय की गई? लोकल पर्चेसिंग एवं जे. एम. पोर्टल के माध्यम से क्रय की गई सामग्रियों का भण्डारण/स्टॉक रिकार्ड किस-किस के द्वारा कब-कब रखा गया? पूर्व अतारांकित प्रश्न क्र. एक हज़ार पाँच सौ निन्यानवे दिनांक सत्रह जुलाई उन्नीस के अनुसार लोकल पर्चेसिंग भण्डार क्रय नियमों के माध्यम से कैंसर चिकित्सालय, चाचा नेहरू चिकित्सालय, मानसिक चिकित्सालय इन्दौर में क्या-क्या पर्चेसिंग की गई? पाँच वर्षों में किन-किन फर्मों के द्वारा सामग्री सप्लाई की गई? भुगतान आदि की जानकारी उपलब्ध करावें। प्रश्नांश एवं के संदर्भ में सामग्री क्रय का भुगतान किस-किस दिनांक को किया गया? किस-किस फर्म को कितनी राशि दी गई? भुगतान की स्वीकृति किन के द्वारा की गई? पूर्व अ.ता. प्रश्न क्र. एक हज़ार पाँच सौ निन्यानवे दिनांक सत्रह जुलाई दो हज़ार उन्नीस के संदर्भ में नियमों के विपरीत सामग्री क्रय करने वाले कौन-कौन अधिकारी/कर्मचारी हैं? उनके नाम स्पष्ट करें। उनके विरूद्ध क्या जांच की जा रही है? जांच कब तक पूर्ण की जायेगी व दोषियों पर क्या कार्यवाही की जायेगी? जांच की समय-सीमा बतायें। चिकित्सा शिक्षा मंत्री : महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय इन्दौर की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र एक अनुसार है। चिकित्सा महाविद्यालय में लोकल पर्चेस नहीं की जाती है। जे.एम. पोर्टल के माध्यम से क्रय की गई साम्रगी का भण्डारण/स्टॉक रिकार्ड महाविद्यालय के क्रय विभाग एवं भण्डार शाखा एवं उपयोगकर्ता द्वारा साम्रगी का रिकार्ड रखा जाता है। कैंसर चिकित्सालय की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र दो अनुसार है। चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र तीन अनुसार है। मानसिक चिकित्सालय इन्दौर की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र चार अनुसार है। महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय की साम्रगी क्रय भुगतान की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र एक अनुसार है। कैंसर चिकित्सालय के कार्यकर्ता अधिकारी अधीक्षक है। शेष जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र पाँच अनुसार है। चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र तीन अनुसार है। मानसिक चिकित्सालय की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र चार अनुसार है। भण्डार क्रय नियमों के विपरीत साम्रगी क्रय करने के संबंध में सात अधिकारी/कर्मचारियों के विरूद्ध आरोप पत्र जारी किये गये थे, जिनके नाम एक. डॉ. रामगुलाम राजदान दो. डॉ. सिद्धार्थ गौतम तीन. डॉ. जे. के. वर्मा चार. श्री संजय उपाध्याय पाँच. श्री शैलेष राठौर छः. श्री राजेश व्यास सात. श्री घनश्याम पवार। जी हाँ। जांच उपरांत कार्यवाही की जावेगी। समयसीमा बताया जाना संभव नहीं है। बालाघाट जिले में संचालित समूह नल-जल योजना [लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी] बानवे. श्री रामकिशोर कावरे : क्या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि बालाघाट जिले में समूह नल-जल योजना से कितने गाँव तक पानी प्रदाय किया जा रहा है? सूची प्रदाय करें। कितने ग्राम में पानी प्रदाय नहीं कर पा रहे हैं? कारण सहित जानकारी देवें। जल समिति बालाघाट जिले के समूह नलजल योजना में कितने बने? ग्रामवार जानकारी देवें। क्या जल समिति कार्यरत है? ग्रामवार जानकारी देवें। यदि कार्यरत नहीं है तो कारण सहित बतावें। जल समिति बनाने का कार्य किसे दिया गया था? क्या निविदा शर्तों का पालन किया गया? यदि नहीं, तो क्या कार्यवाही की? क्या जल समिति कागज में बताकर जल समिति के कार्य को पूर्ण बताकर राशि भुगतान कर लिया गया? यदि हाँ, तो दोषी कौन है? वर्तमान में स्थल का निरीक्षण कर जल समिति की जांच करेंगे? यदि हाँ, तो कब तक? बतावें । लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री : समूह नल-जल योजनाओं में सम्मिलित सभी एक सौ बयासी ग्रामों में, जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-एक अनुसार है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-दो अनुसार है। म.प्र. जल निगम द्वारा क्रियान्वित चार समूह जलप्रदाय योजनाओं में मेसर्स अनुपमा एजुकेशन सोसायटी सतना को दिया गया था, विभाग द्वारा क्रियान्वित लालबर्रा समूह जलप्रदाय योजना अंतर्गत मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत के द्वारा ग्राम सभा में अनुमोदन पश्चात समितियों का गठन किया गया था। जी हाँ, शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। जी नहीं। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। कृषकों की भूमि का अधिग्रहण [राजस्व] तिरानवे. श्री मनोज चावला : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि रतलाम जिले से निकल रही मुंबई-दिल्ली आठ लाइन एक्सप्रेस-वे में कुल कितने कृषकों की कितने हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की गई है? कृषक, गाँव, खसरा नंबर तथा रकवा सहित सूची उपलब्ध करावें तथा बतावें कि भूमि अर्जन पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम दो हज़ार तेरह के अनुसार किस-किस कृषक को कितना मुआवजा दे दिया गया है या दिया जावेगा? क्या अधिकार अधिनियम दो हज़ार तेरह के अनुसार कलेक्टर गाइड-लाइन से मात्र दो गुना मुआवजा दिया जा रहा है जबकि आसपास के राज्यों में चार से छः गुना मुआवजा दिया जा रहा है? क्या शासन अधिनियम में संशोधन कर छः गुना मुआवजा देगी? अधिनियम की प्रति देवें। प्रश्नांश में उल्लेखित जमीन पर मुआवजे में बारह% ब्याज किस-किस दिनांक से देय हैं तथा मुआवजे के विरोध में उच्च न्यायालय इंदौर में कितने परिवाद दायर किए गए हैं? उनके क्रमांक तथा दिनाँक बतावें। क्या पूर्व सरकार ने सड़कों के निर्माण में लगे ठेकेदारों को लाभ देने के लिए अधिनियम में दोगुना मुआवजा तय किया था? शासन किसानों को छः गुना मुआवजा दिलाने के लिए कोई कदम उठाएगा? राजस्व मंत्री : मुम्बई-दिल्ली आठ-लेन एक्सप्रेस-वे में रतलाम जिले के अन्तर्गत कुल अट्ठावन ग्रामों की भूमि प्रभावित हो रही है। ग्राम के नाम, कृषकों की संख्या तथा अधिगृहित किये जाने वाला क्षेत्रफल की विस्तृत जानकारी जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र - एक अनुसार है। भूमि अर्जन पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम दो हज़ार तेरह के अन्तर्गत पारित किये गये अवार्ड की छायाप्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-दो अनुसार है। पारित किये गये अवार्ड के विरूद्ध वर्तमान तक पचास ग्रामों के कुल एक हज़ार तीन सौ इकहत्तर कृषकों को आठ, छयासठ, पैंतालीस, पचपन रुपयापये का भुगतान किया जा चुका है। शेष कृषकों को भुगतान की प्रक्रिया जारी है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-तीन अनुसार है। अधिनियम के प्रावधानों तथा राज्य शासन द्वारा निर्धारित कारक के आधार पर मुआवजा भुगतान किया जा रहा है। अधिनियम की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। एवं जानकारी एकत्रित की जा रही है। मुआवजा वितरण एवं पुनर्वास कार्य में लापरवाही [राजस्व] चौरानवे. श्रीमती रामबाई गोविंद सिंह : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि सीतानगर बांध जिला दमोह के डूब क्षेत्र में डूब रही सैड़ारा तिन्दुआ समिति के सदस्यों को भूमि को मुआवजा वितरण सूची में क्यों शामिल नहीं किया गया है? इस समिति के सदस्यों कि जमीन डूब जाने के उपरांत शासन ने इन परिवारों के पुनर्वास की क्या योजना बनाई है? यदि इन्हें मुआवजा और इनके पुनर्वास के कार्य में लापरवाही हुई है तो क्या दोषी अधिकारियों पर कोई कार्यवाही की गई है? राजस्व मंत्री : सीतानगर मध्यम सिंचाई परियोजना में रा.प्र. क्रमांक पाँचअ-बयासी वर्ष दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह में भू-अर्जन हेतु अवार्ड पारित करने की प्रक्रिया प्रचलन में है। एवं अंतिम निर्णय पारित न होने के कारण प्रश्न उत्पन्न नहीं होता है। जिला भिण्ड अंतर्गत हैण्डपंप एवं नल-जल योजनाओं की स्थिति [लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी पचानवे. श्री संजीव सिंह : क्या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि प्रश्न दिनांक की स्थिति में विधान सभा क्षेत्र भिण्ड में कितने हैण्डपंप स्थापित हैं? कितने चालू एवं कितने बंद एवं कितने स्थाई बंद है? कितनी नल-जल योजनाएं संचालित हैं? योजनावार बताएं। कितनी चालू कितनी बंद है? कितनी योजनाएं निर्माणाधीन है? बंद का कारण सहित बताएं। क्या स्थाई बंद हैण्डपंप के स्थान पर नीवन हैण्डपंप खनन किया जाएगा तथा निर्माणाधीन योजनाएं कब तक पूर्ण की जाकर जल प्रदाय चालू कर दिया जायेगा? लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री : तीन हज़ार दो सौ अस्सी हैण्डपंप स्थापित, तीन हज़ार एक सौ इकतालीस चालू, बारह हैण्डपंप साधारण खराबी से एवं एक सौ सत्ताईस हैण्डपंप स्थायी रूप से बंद हैं। उनतालीस नल-जल योजनाएं संचालित हैं, जिसमें से उन्नीस चालू एवं बीस योजनाएं बंद हैं, जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। दो योजनाएं निर्माणाधीन हैं। निर्धारित मापदण्ड पचपन लीटरटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन के मान से कम जल प्रदाय होने पर वित्तीय संयोजन के अनुसार नवीन नलकूप खनन कर हैण्डपंप स्थापना का प्रावधान है। दिनांक इकतीस.तीन.दो हज़ार बीस तक पूर्ण किया जाना लक्षित है। परिशिष्ट - "तेईस" एन.आर.आई. कोटे में भर्ती अभ्यर्थियों की जांच [चिकित्सा शिक्षा] छियानवे. श्री कुणाल चौधरी : क्या चिकित्सा शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि प्रश्नकर्ता के प्रश्न क्र.तीन हज़ार तीन सौ अट्ठावन दिनांक चौबीस जुलाई दो हज़ार उन्नीस के संदर्भ में बतावें कि एन.आर.आई. कोटे में प्रवेश विद्यार्थी की पात्रता की जांच शासन द्वारा किस-किस वर्ष में की गई? यदि नहीं, तो बतावें कि इस संदर्भ मा. सर्वोच्च न्यायालय के प्रकरण क्र. चार हज़ार साठ/दो हज़ार सात के निर्देशों का पालन क्यों नहीं किया गया कि निजी महाविद्यालय से योग्य एवं पात्र विद्यार्थी चयनित हैं, यह देखना शासन का दायित्व है। प्रश्नकर्ता के प्रश्न क्र. तीन हज़ार तीन सौ अट्ठावन के खण्ड के उत्तर के संदर्भ में बतायें
kiara advani and sidharth malhotra sweet boxes Inside: बॉलीवुड कपल सिद्धार्थ मल्होत्रा और कियारा आडवाणी का वेडिंग रिसेप्शन बेहद खास होने वाला है। 12 फरवरी को मुंबई में दोनों का रिसेप्शन होने जा रहा है, जिसमें बॉलीवुड के बड़े-बड़े सितारों के आने की उम्मीद है और सभी इस इवेंट के फोटोज का इंतजार कर रहे हैं। PM Modi के USA दौरे को लेकर राजदूत ने क्या कहा ? Exclusive Interview में Ashwini Vaishnaw ने कहा, 'पिछले 9 सालों में PM Modi ने रेलवे को ट्रांसफॉर्म किया' Sawal Public Ka : Navika से पहलवानों के प्रदर्शन पर क्या बोली स्मृति ईरानी ? Opinion India Ka : 'गॉडमदर' कहां फरार. . एक्सपोज हुए सारे मददगार !
kiara advani and sidharth malhotra sweet boxes Inside: बॉलीवुड कपल सिद्धार्थ मल्होत्रा और कियारा आडवाणी का वेडिंग रिसेप्शन बेहद खास होने वाला है। बारह फरवरी को मुंबई में दोनों का रिसेप्शन होने जा रहा है, जिसमें बॉलीवुड के बड़े-बड़े सितारों के आने की उम्मीद है और सभी इस इवेंट के फोटोज का इंतजार कर रहे हैं। PM Modi के USA दौरे को लेकर राजदूत ने क्या कहा ? Exclusive Interview में Ashwini Vaishnaw ने कहा, 'पिछले नौ सालों में PM Modi ने रेलवे को ट्रांसफॉर्म किया' Sawal Public Ka : Navika से पहलवानों के प्रदर्शन पर क्या बोली स्मृति ईरानी ? Opinion India Ka : 'गॉडमदर' कहां फरार. . एक्सपोज हुए सारे मददगार !
सुरेंद्र जैन, धरसींवा. रविवार सुबह तड़के एक तेल गोदाम में भीषण आग गई है. आग इतनी भयावह है कि आग पर काबू नहीं पाया जा सका है. आग बूझाने के लिए करीब आधा दर्जन भर दमकल की गाड़िया मौके पर मौजूद है. खमतराई थाना के रावाभाटा का मामला बताया जा रहा है. सूचना मिलने के बाद दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं है. लेकिन आग पर काबू नहीं पाया जा सका है. सुबह 5 बजे ये आग लगी. जिसके बाद देखते ही देखते गोदाम की दो मंजिला भवन भी धरासाई हो गई है. गोदाम में तेल ज्यादा होने की वजह से आग और ही फैलती चली गई है. जिससे आग की लपटे और तेज हो गई है. आसमान में चारों तरफ आग की वजह से धुआं ही धुआं दिखाई दे रहा है. बताया जा रहा है कि रायपुर बिलासपुर राजमार्ग के किनारे यह गोदाम है. यह गोदाम किसी गुप्ता नामक व्यक्ति की है. जिसमें रिफाइन तेल का भंडारण रखा गया था. आग किस वजह से लगी इसका पता नहीं चल सका. आग लगने की वजह से गोदाम में रखा पूरा सामान जलकर खाक हो गया है. वहीं पुलिस अधिकारी आरएस राजपूत का कहना है कि एक तेल की गोदाम में आग लग लगी है. लेकिन आग किन वजहों से लगी इसका पता नहीं चल सका है. साथ ही इस आग की वजह से कितना नुकसान हुआ यह बताना मुश्किल है. फिलहाल पुलिस मौके पर पहुंचकर जांच कर रही है.
सुरेंद्र जैन, धरसींवा. रविवार सुबह तड़के एक तेल गोदाम में भीषण आग गई है. आग इतनी भयावह है कि आग पर काबू नहीं पाया जा सका है. आग बूझाने के लिए करीब आधा दर्जन भर दमकल की गाड़िया मौके पर मौजूद है. खमतराई थाना के रावाभाटा का मामला बताया जा रहा है. सूचना मिलने के बाद दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं है. लेकिन आग पर काबू नहीं पाया जा सका है. सुबह पाँच बजे ये आग लगी. जिसके बाद देखते ही देखते गोदाम की दो मंजिला भवन भी धरासाई हो गई है. गोदाम में तेल ज्यादा होने की वजह से आग और ही फैलती चली गई है. जिससे आग की लपटे और तेज हो गई है. आसमान में चारों तरफ आग की वजह से धुआं ही धुआं दिखाई दे रहा है. बताया जा रहा है कि रायपुर बिलासपुर राजमार्ग के किनारे यह गोदाम है. यह गोदाम किसी गुप्ता नामक व्यक्ति की है. जिसमें रिफाइन तेल का भंडारण रखा गया था. आग किस वजह से लगी इसका पता नहीं चल सका. आग लगने की वजह से गोदाम में रखा पूरा सामान जलकर खाक हो गया है. वहीं पुलिस अधिकारी आरएस राजपूत का कहना है कि एक तेल की गोदाम में आग लग लगी है. लेकिन आग किन वजहों से लगी इसका पता नहीं चल सका है. साथ ही इस आग की वजह से कितना नुकसान हुआ यह बताना मुश्किल है. फिलहाल पुलिस मौके पर पहुंचकर जांच कर रही है.
बेंगालुरूः जद (एस) के पहले परिवार के भीतर सस्पेंस खत्म हो गया है, लेकिन शायद पहले परिवार के भीतर तकरार बिगड़ गई है, पार्टी ने अपने गृह क्षेत्र हासन सीट से एचपी स्वरूप को मैदान में उतारा, जो पार्टी के संरक्षक और पूर्व प्रधान मंत्री की बहू भवानी रेवन्ना की जगह है। एचडी देवेगौड़ा, जो वहां से चुनाव लड़ने पर अड़े थे। यह सीट कर्नाटक में 10 मई को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी द्वारा शुक्रवार को घोषित 50 उम्मीदवारों की दूसरी सूची का हिस्सा थी। हासन जिला पंचायत की पूर्व सदस्य भवानी रेवन्ना जद (एस) नेता एचडी कुमारस्वामी के बड़े भाई एचडी रेवन्ना की पत्नी हैं। भवानी द्वारा रिंग में अपनी टोपी फेंकने के बाद हासन सीट विवाद का एक प्रमुख मुद्दा बन गई थी, और कुमारस्वामी द्वारा बार-बार यह स्पष्ट करने के बावजूद मना कर दिया कि उन्हें मैदान में नहीं उतारा जाएगा, और इसके बजाय एक "वफादार पार्टी कार्यकर्ता" को चुनाव लड़ने के लिए बनाया जाएगा।
बेंगालुरूः जद के पहले परिवार के भीतर सस्पेंस खत्म हो गया है, लेकिन शायद पहले परिवार के भीतर तकरार बिगड़ गई है, पार्टी ने अपने गृह क्षेत्र हासन सीट से एचपी स्वरूप को मैदान में उतारा, जो पार्टी के संरक्षक और पूर्व प्रधान मंत्री की बहू भवानी रेवन्ना की जगह है। एचडी देवेगौड़ा, जो वहां से चुनाव लड़ने पर अड़े थे। यह सीट कर्नाटक में दस मई को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी द्वारा शुक्रवार को घोषित पचास उम्मीदवारों की दूसरी सूची का हिस्सा थी। हासन जिला पंचायत की पूर्व सदस्य भवानी रेवन्ना जद नेता एचडी कुमारस्वामी के बड़े भाई एचडी रेवन्ना की पत्नी हैं। भवानी द्वारा रिंग में अपनी टोपी फेंकने के बाद हासन सीट विवाद का एक प्रमुख मुद्दा बन गई थी, और कुमारस्वामी द्वारा बार-बार यह स्पष्ट करने के बावजूद मना कर दिया कि उन्हें मैदान में नहीं उतारा जाएगा, और इसके बजाय एक "वफादार पार्टी कार्यकर्ता" को चुनाव लड़ने के लिए बनाया जाएगा।
करीब 80 प्रतिशत नहरे झाड़ियों से आज भी पटी पड़ी है. जिले पर तैनात अफसर और बिचौलियों ने साफ-सफाई के नामपर आए करोड़ों रुपयों का बंदर बांट कर लिया. भारत सरकार जीरो टॉलरेंस नीति के दावो का दम भर रही है, लेकिन जिले पर भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी का खुल्ला खेल चल रहा है. ऐसे में जिम्मेदार अफसर और बिचौलिए मालामाल हो रहे हैं. किसानों के लिऐ चलाई जा रही महत्वाकांक्षी परियोजनाओं का लाभ आज भी किसानों को नहीं मिल पा रहा है. पूरा मामला यूपी के गोंडा जिले के सिंचाई विभाग के ड्रेनेज खंड एक का है. यहां 15 जून से पहले ही सभी नहरों की साफ-सफाई के आदेश दिए गए थे, अगर हम कागजों की बात करे तो 159 नहरों को साफ भी कर दिया गया, जबकि जमीन पर इसकी हकीकत कुछ और ही है. क्योंकि टीवी 9 भारतवर्ष की पड़ताल में करीब 80 प्रतिशत नहरे झाड़ियों से आज भी पटी पड़ी है. जिले पर तैनात अफसर और बिचौलियों ने साफ-सफाई के नामपर आए करोड़ों रुपयों का बंदर बांट कर लिया. हर साल नहरों की साफ-सफाई के लिए आता है भारी भरकम बजट सरयू नहर ड्रेनेज खंड में इस बार भी 159 नहरों की साफ-सफाई के लिए एक करोड़ 39 लाख रुपए जारी हुए थे, लेकिन पैसों का बंदरबांट कर लिया गया. आज भी करीब 80 प्रतिशत नहरों में सफाई नहीं हो पाई. जिसके चलते दर्जी कुआं के रानियापुर मनकापुर के गोबिनपारा, जमुनहा, काजीदेवर कटरा बाजार के चुर्रा मुर्रा खैरीताल ग्रामसभा पूरे दीक्षित में बेहरास बेची पुरवा जैसे सैकड़ों ग्राम सभाओं तक गई नहरे झाड़ियों से पटी पड़ी है. सिंचाई विभाग में बैठे क्या कहते है जिम्मेदार? सिंचाई विभाग ड्रेनेज खंड के अधिशासी अभियंता राधेश्याम ने बताया कि शासन स्तर से जिन नहरों की सूचीमिली थी, वह काम कराए गए हैं. जबकि चिन्हित नहरों पर काम न होने की बात पूछी गई, तो अधिशाषी अभियंता राधेश्याम ने कहा कि अभी तक इस विषय पर कोई जानकारी नहीं है. अब ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब जिम्मेदार अफसर ग्राउंड जीरो पर इसकी हकीकत खुद जाकर नहीं देखेंगे तो क्या भ्रष्टाचार में लिप्त बिचौलिये इसकी जानकारी देंगे. कैसे होगा भ्रष्टाचार का सफाया ? इस बात से इसका अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस कदर सिंचाई विभाग के ड्रेनेज खंड में भ्रष्टाचार फैला हुआ है. क्योंकि जिन पर भ्रष्टाचार रोके जाने की जिम्मेवारी है, वह जिम्मेदार कहीं न कहीं जवाबदेही से बचते नजर आ रहे हैं. ऐसे में जिन किसानों को इन नहरों के द्वारा फसलों की सिंचाई करनी थी वह आज भी सरकार की उस महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं जिसके चलते उनको मायूसी हाथ लग रही है अब अगर वक्त रहने पर फसलों की सिंचाई नहीं की गई तो ऐसे में फसल उगा पाना किसान के लिए टेढ़ी खीर से कम नहीं है.
करीब अस्सी प्रतिशत नहरे झाड़ियों से आज भी पटी पड़ी है. जिले पर तैनात अफसर और बिचौलियों ने साफ-सफाई के नामपर आए करोड़ों रुपयों का बंदर बांट कर लिया. भारत सरकार जीरो टॉलरेंस नीति के दावो का दम भर रही है, लेकिन जिले पर भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी का खुल्ला खेल चल रहा है. ऐसे में जिम्मेदार अफसर और बिचौलिए मालामाल हो रहे हैं. किसानों के लिऐ चलाई जा रही महत्वाकांक्षी परियोजनाओं का लाभ आज भी किसानों को नहीं मिल पा रहा है. पूरा मामला यूपी के गोंडा जिले के सिंचाई विभाग के ड्रेनेज खंड एक का है. यहां पंद्रह जून से पहले ही सभी नहरों की साफ-सफाई के आदेश दिए गए थे, अगर हम कागजों की बात करे तो एक सौ उनसठ नहरों को साफ भी कर दिया गया, जबकि जमीन पर इसकी हकीकत कुछ और ही है. क्योंकि टीवी नौ भारतवर्ष की पड़ताल में करीब अस्सी प्रतिशत नहरे झाड़ियों से आज भी पटी पड़ी है. जिले पर तैनात अफसर और बिचौलियों ने साफ-सफाई के नामपर आए करोड़ों रुपयों का बंदर बांट कर लिया. हर साल नहरों की साफ-सफाई के लिए आता है भारी भरकम बजट सरयू नहर ड्रेनेज खंड में इस बार भी एक सौ उनसठ नहरों की साफ-सफाई के लिए एक करोड़ उनतालीस लाख रुपए जारी हुए थे, लेकिन पैसों का बंदरबांट कर लिया गया. आज भी करीब अस्सी प्रतिशत नहरों में सफाई नहीं हो पाई. जिसके चलते दर्जी कुआं के रानियापुर मनकापुर के गोबिनपारा, जमुनहा, काजीदेवर कटरा बाजार के चुर्रा मुर्रा खैरीताल ग्रामसभा पूरे दीक्षित में बेहरास बेची पुरवा जैसे सैकड़ों ग्राम सभाओं तक गई नहरे झाड़ियों से पटी पड़ी है. सिंचाई विभाग में बैठे क्या कहते है जिम्मेदार? सिंचाई विभाग ड्रेनेज खंड के अधिशासी अभियंता राधेश्याम ने बताया कि शासन स्तर से जिन नहरों की सूचीमिली थी, वह काम कराए गए हैं. जबकि चिन्हित नहरों पर काम न होने की बात पूछी गई, तो अधिशाषी अभियंता राधेश्याम ने कहा कि अभी तक इस विषय पर कोई जानकारी नहीं है. अब ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब जिम्मेदार अफसर ग्राउंड जीरो पर इसकी हकीकत खुद जाकर नहीं देखेंगे तो क्या भ्रष्टाचार में लिप्त बिचौलिये इसकी जानकारी देंगे. कैसे होगा भ्रष्टाचार का सफाया ? इस बात से इसका अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस कदर सिंचाई विभाग के ड्रेनेज खंड में भ्रष्टाचार फैला हुआ है. क्योंकि जिन पर भ्रष्टाचार रोके जाने की जिम्मेवारी है, वह जिम्मेदार कहीं न कहीं जवाबदेही से बचते नजर आ रहे हैं. ऐसे में जिन किसानों को इन नहरों के द्वारा फसलों की सिंचाई करनी थी वह आज भी सरकार की उस महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं जिसके चलते उनको मायूसी हाथ लग रही है अब अगर वक्त रहने पर फसलों की सिंचाई नहीं की गई तो ऐसे में फसल उगा पाना किसान के लिए टेढ़ी खीर से कम नहीं है.
Gujarat Election 2022 Result। Live Updates: गुजरात विधानसभा चुनावों की मतगणना आज यानी गुरुवार 8 दिसंबर को शुरू हो गई है। यहां सबसे पहले पोस्टल बैलट की गिनती की जा रही है। काउंटिंग शुरू होते ही गुजरात से पहला रुझान आया है। ये रुझान बीजेपी के पक्ष में है। इसके अगले ही पल दूसरा रुझान भी बीजेपी के पक्ष में आया। गुजरात के 33 जिलों की 182 विधानसभा सीटों के नतीजे आने के बाद आज ये साफ हो जाएगा कि सत्ता की चाबी किसके हाथ आएगी। पिछले 27 सालों से गुजरात में बीजेपी का शासन रहा है। इस बार कांग्रेस के अलावा आम आदमी पार्टी ने भी गुजरात में जीत के लिए दांव खेला है। ऐसे में अब से कुछ ही देर में ये साफ हो जाएगा कि पुराने इतिहास को दोहराने में क्या भाजपा कामयाब रहेगी या फिर कांग्रेस या आम आदमी पार्टी कुर्सी अपने नाम करने में आगे रहेगी। बता दें कि गुजरात में दो चरणों में चुनाव हुआ था। पहले चरण के चुनाव 1 दिसंबर को 89 सीटों के लिए मतदान हुए थे। वहीं, दूसरे चरण का चुनाव 5 दिसंबर को 93 सीटों के लिए मतदान हुआ था। बता दें कि गुजरात में 182 विधानसभा सीटों में 13 सीटें अनुसूचित जाति और 27 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुजरात की जनता का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी राष्ट्रीय पार्टी बन गई है। हमें पॉजिटिव राजनीति करनी है। हम शरीफ और ईमानदार लोग हैं। गुजरात के लोगों ने बहुत प्यार और इज्जत दी है। हमने मुद्दों की राजनीति की है, हम अपने काम गिनाते हैं और जाति और धर्म की राजनीति नहीं करते हैं। गुजरात के आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष गोपाल इटालिया हार गए हैं। हार के बाद उन्होंने कहा कि हमने गुजरात में जगह बना ली है। हमें 40 लाख लोगों ने वोट दिया है। हमने सबसे बड़ी पार्टी के खिलाफ लड़ाई लड़ी है। भारतीय जनता पार्टी अभी 157 सीटों से आगे चल रही है। वहीं, कांग्रेस 16 सीटों पर फिसड्डी साबित हुई है। इसके अलावा बात करे आम आदमी पार्टी की तो वह 5 सीटों पर आगे है। जबकि अन्य 4 सीटों पर बढ़त बना रही है। कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गुजरात के रुझानों पर कहा कि हार जीत होती रहती है। उन्होंने कहा कि जो हार है हमें वो स्वीकार है। मगर हम अपने उसूल नहीं छोड़ेंगे। कमियों पर काम करेंगे। इंचार्ज सेक्रेटी और ऑब्जर्वर्स हिमाचल प्रदेश जा रहे हैं और वही आगे तय करेंगे। CM भूपेंद्र पटेल ने घाटलोडिया सीट से 1. 92 लाख मतों के अंतर से जीत दर्ज की हैं। गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजे आने से पहले ही कांग्रेस में इस्तीफे का सिलसिला शुरू हो गया है। रुझानों में कांग्रेस 20 सीटों पर आगे चल रही है। बीजेपी 149 सीटों पर आगे चल रही है। गुजरात में बीजेपी के पक्ष में आ रहे रुझानों पर प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि दोनों जगहों पर दिलचस्प चुनाव रहे। गुजरात में बीजेपी ने इतिहास बनाया है। रिकॉर्ड मर्जिन से जीत रही है। कांग्रेस सबसे कम सीट का रिकॉर्ड बना रही हैं। पात्रा ने गुजरात की जीत का श्रेय पीएम मोदी को दिया है। चुनाव आयोग के मुताबिक, बीजेपी 22 सीटों पर जीत दर्ज करा कर 136 सीटों से आगे चल रही है। वहीं कांग्रेस 2 सीट पर जीत कर 14 सीटों से आगे चल रही है। गुजरात में तस्वीर लगभग साफ हो गई है। एक बार फिर प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनने जा रही है। इस बीच बीजेपी अध्यक्ष केसीआर पाटिल ने बताया कि एक बार फिर सीएम के रूप में भूपेंद्र पटेल शपथ लेंगे। ये शपथ ग्रहण 12 दिसंबर को होगा, जिसमें खुद पीएम मोदी भी शामिल होंगे। इस मौके पर सीएम भूपेंद्र पटेल ने कहा कि गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजे बिल्कुल साफ हैं। लोगों ने गुजरात में विकास की यात्रा को आगे भी रखने का मन बना लिया है। हम जनता के जनादेश को विनम्रता से स्वीकार करते हैं। गुजरात में इस बार बीजेपी ऐतिहासिक जीत दर्ज करा रही है। ऐसा पहली बार होने जा रहा है कि नरेंद्र मोदी के राज्य का सीएम रहते हुए भी बीजेपी ने इतनी सीटें हासिल नहीं की थी जितनी इस बार उसे मिल रही हैं। करीब 158 सीटों पर बीजेपी आगे चल रही हैं। जिसमें से 5 सीटों पर उसने जीत दर्ज करा ली है। इस बीच पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाना शुरू कर दी है। सूरत में बीजेपी के कार्यकर्ता ढोल पर नाचते दिखाई दे रहे हैं। सीएम भूपेंद्र पटेल और राज्य के भाजपा अध्यक्ष सीआर पाटिल ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर गुजरात में जीत का जश्न मनाया। बता दें कि इस समय मुख्यमंत्री अपने निर्वाचन क्षेत्र घाटलोडिया से भी 1,07,960 मतों के अंतर से आगे चल रहे हैं। विधानसभा सीट के लिए मतगणना जारी है। भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर प्रदेश में अपनी सरकार बनाने जा रही हैं। बीजेपी 155 सीटों से आगे हैं, वहीं कांग्रेस 18 सीटों से आगे चल रही है। दाहोद से बीजेपी उम्मीदवार कनैयालाल बच्चूभाई किशोरी 29,350 मतों के अंतर से जीते। दाहोद सीट जीतने के अलावा बीजेपी 149 सीटों पर आगे चल रही है। इस बीच पीएम मोदी जल्द कार्यकर्ताओं को संबोधित करने वाले हैं। बीजेपी के प्रहलाद जोशी का कहना है कि जनता गुजरात मॉडल का समर्थन कर रही है और उसे स्वीकार भी किया जा रहा। उसी का नतीजा है कि गुजरात में भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर अपनी सरकार बनाने जा रही है। भारतीय जनता पार्टी लगातार गुजरात में बढ़त कायम किए हुए हैं। ऐसा लगता है कि एक बार फिर गुजरात में बीजेपी की ही सरकार बनने वाली है। फिलहाल रुझानों पर नजर डाले तो 154 सीटों से बीजेपी आगे चल रही है। इसके अलावा 18 सीटों पर अटक गई है। अपनी जीत का दम भरने वाली 'आप' 6 सीटों से आगे चलकर बुरे हाल में हैं। पाटीदार नेता का अहम चेहरा रहे हार्दिक पटेल लगातार रेस में आगे चल रहे हैं। गुजरात में मतगणना जारी है हाल के आंकड़ों की बात करें तो बीजेपी 152 सीटों से आगे है तो कांग्रेस 17 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं। बात करें आम आदमी पार्टी और अन्य की तो AAP 7 और अन्य 6 सीटों से आगे चल रही है। 182 सीटों के लिए मतगणना जारी है। जिसमें करीब 150 सीटों पर बीजेपी आगे चल रही है। वहीं, कांग्रेस 18 सीटों से आगे हैं और 'आप' 6 सीटों से बढ़त बना रही है। गुजरात में विधानसभा सीटों के लिए लगातार मतगणना जारी है। जहां 144 सीटों से बीजेपी आगे है, वहीं कांग्रेस 26 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं। बात करें AAP की तो फिलहाल पार्टी ने रफ्तार पकड़ी हुई है। जिसमें 10 सीटों पर AAP आगे हैं। गुजरात की 182 सीटों में से 143 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं, कांग्रेस 28, आम आदमी पार्टी 9 और अन्य 2 सीटों पर बढ़त बनाती दिख रही है। अब तक के मतगणना रुझानों के मुताबिक एक बार फिर प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनने जा रही है। इस समय बीजेपी 137 सीटों से आगे हैं, वहीं कांग्रेस 35 सीटों पर और 'आप' 6 सीटों पर सिमटी हुई है। बात करें अन्य की तो अन्य 2 सीटों पर कायम है। गुजरात में 180 सीटों के रुझान लगभग आ चुके हैं। इस वक्त बीजेपी पुराने सभी रिकॉडों को तोड़ती दिख रही है। रुझानों पर अगर नजर डाले तो ऐसा लग रहा कि एक बार फिर गुजरात में भाजपा की सरकार बनने जा रही है। गुजरात विधानसभा सीटों पर मतगणना जारी है। 182 सीटों में से बीजेपी 129 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं कछुए की चाल में चल रही 'आप' की स्थिति सुधरी है और वह 6 सीटों से आगे चल रही है। यही नहीं अन्य 2 सीटों से आगे हैं और कांग्रेस 41 सीटों पर बढ़त बनाती दिख रही है। गुजरात में बीजेपी 128 सीटों से आगे चल रही है। जबकि कांग्रेस 44 सीटों से मैदान में बनी हुई है। वहीं आम आदमी पार्टी का जादू गुजरात में चलता नजर नहीं आ रहा है। यहां 'आप' 4 सीटों से और अन्य 1 सीट से आगे हैं। बीजेपी की ओर से चुनावी मैदान में वीरमगाम विधानसभा सीट से हार्दिक पटेल आगे चल रहे हैं। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी लाखाभाई भारवाड़ पीछे है। इस समय मतगणना को पूरे एक घंटे बीचत चुके हैं और चुनाव आयोग के आंकड़ों की बात करे तो 2 सीटों बीजेपी के खाते में आती दिख रही है वहीं कांग्रेस 1 सीट से आगे बढ़ रही है। गुरुवार सुबह 8 बजे से राज्य में वोटों की गिनती जारी है। इस समय बीजेपी एक बार फिर राज्य में अपनी सरकार बनाती नजर आ रही है क्योंकि बीजेपी 122 सीटों से आगे चल रही है। वहीं, कांग्रेस ने भी रफ्तार पकड़ी है और फिलहाल 56 सीटों से आगे चल रही है। गुजरात के सूरत पश्चिम से भाजपा उम्मीदवार पूर्णेश मोदी ने दावा करते हुए बयान दिया है कि बीजेपी तोड़ेगी रिकॉर्ड इसे अधिकतम सीटें और उच्चतम मतदान प्रतिशत मिलेगा। हमारे सभी प्रत्याशी अपने प्रतिद्वंद्वी प्रत्याशियों से भारी अंतर से आगे होंगे। भाजपा की भारी जीत होगी। गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए मतगणना जारी है। शुरुआती रुझानों में तेजी से आंकड़ें बदल रहे हैं। इस समय भाजपा 100 से ज्यादा सीटों पर आगे चल रही है। वहीं कांग्रेस भी रेस में पीछे नहीं है। भाजपा प्रत्याशी हार्दिक पटेल ने गुजरात में अपनी जीत का बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि प्रदेश में बीजेपी 135 से 145 सीटे लाकर अपनी सरकार बनाएगी। विधानसभा चुनावों के वोटों की गिनती सुबह 8 बजे से जारी है। फिलहाल शुरुआती रुझानों में बीजेपी 109 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं कांग्रेस 43 सीटों पर आगे चल रही है। जबकि आम आदमी पार्टी 1 सीटों से आगे चल रही है। गुजरात विधानसभा चुनाव के वोटों की गिनती जारी है। बीजेपी इस समय 60 सीटों से आगे है, जबकि कांग्रेस 20 सीटों पर आगे है। वहीं, 'आप' 3 सीटों पर आगे है। काउंटिंग शुरू होते ही गुजरात से पहला रुझान आया है। ये रुझान बीजेपी के पक्ष में है। इसके अगले ही पल दूसरा रुझान भी बीजेपी के पक्ष में आया। भाजपा के पक्ष में आए 10 रूझान, 'आप' ने 1 सीट पर खोला खाता। Gujarat Election 2022 Result। Live Updates: कहां कितना हुआ मतदान? गौरतलब है कि अहमदाबाद जिले में साक्षरता दर 85. 3 फीसदी है लेकिन चुनाव में केवल 59 फीसदी ही मतदान हुआ। गुजरात के सूरत जिले में औसतन 62. 23 फीसदी मतदान हुआ था। राजकोट जिले में भी मतदान 60. 6 फीसदी से कम रहा। 2017 की तुलना में इस साल गुजरात में मतदान प्रतिशत काफी कम रहा। बता दें कि मतदान में सबसे बड़ी गिरावट शहरी सीटों में थी जो 8 नगर निगमों में आती हैं। अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत, गांधीनगर, राजकोट, भावनगर, जामनगर और जूनागढ़। सबसे तेज गिरावट अहमदाबाद के 16 विधानसभा क्षेत्रों में देखी गई। गुजरात के पहले चरण में 89 सीटों पर वोटिंग हुई थी। वहीं, दूसरे चरण में 93 सीटों पर वोटिंग पूरी हुई थी। गुजरात में 33 जिले हैं। पहले चरण में सौराष्ट्र-कच्छ और राज्य के दक्षिणी हिस्सों के 19 जिलों की 89 सीटों पर वोटिंग हुई थी। करीब 63. 31 प्रतिशत मतदान हुआ था। पहले चरण में बीजेपी, कांग्रेस और AAP के अलावा 36 अन्य राजनीतिक दलों ने अपने उम्मीदवार मैदान में उतारे थे। कुल 788 उम्मीदवारों की किस्मत का आज फैसला होने वाला है। इनमें 339 निर्दलीय शामिल हैं। सभी 89 सीटों पर बीजेपी और कांग्रेस चुनाव लड़ रही हैं। जबकि AAP के 88 सीटों पर उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। सूरत पूर्व सीट से AAP के प्रत्याशी ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली थी। अन्य पार्टियों में बसपा ने 57, बीटीपी ने 14 और माकपा ने चार उम्मीदवार उतारे हैं। संबंधित खबरेंः
Gujarat Election दो हज़ार बाईस Result। Live Updates: गुजरात विधानसभा चुनावों की मतगणना आज यानी गुरुवार आठ दिसंबर को शुरू हो गई है। यहां सबसे पहले पोस्टल बैलट की गिनती की जा रही है। काउंटिंग शुरू होते ही गुजरात से पहला रुझान आया है। ये रुझान बीजेपी के पक्ष में है। इसके अगले ही पल दूसरा रुझान भी बीजेपी के पक्ष में आया। गुजरात के तैंतीस जिलों की एक सौ बयासी विधानसभा सीटों के नतीजे आने के बाद आज ये साफ हो जाएगा कि सत्ता की चाबी किसके हाथ आएगी। पिछले सत्ताईस सालों से गुजरात में बीजेपी का शासन रहा है। इस बार कांग्रेस के अलावा आम आदमी पार्टी ने भी गुजरात में जीत के लिए दांव खेला है। ऐसे में अब से कुछ ही देर में ये साफ हो जाएगा कि पुराने इतिहास को दोहराने में क्या भाजपा कामयाब रहेगी या फिर कांग्रेस या आम आदमी पार्टी कुर्सी अपने नाम करने में आगे रहेगी। बता दें कि गुजरात में दो चरणों में चुनाव हुआ था। पहले चरण के चुनाव एक दिसंबर को नवासी सीटों के लिए मतदान हुए थे। वहीं, दूसरे चरण का चुनाव पाँच दिसंबर को तिरानवे सीटों के लिए मतदान हुआ था। बता दें कि गुजरात में एक सौ बयासी विधानसभा सीटों में तेरह सीटें अनुसूचित जाति और सत्ताईस सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुजरात की जनता का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी राष्ट्रीय पार्टी बन गई है। हमें पॉजिटिव राजनीति करनी है। हम शरीफ और ईमानदार लोग हैं। गुजरात के लोगों ने बहुत प्यार और इज्जत दी है। हमने मुद्दों की राजनीति की है, हम अपने काम गिनाते हैं और जाति और धर्म की राजनीति नहीं करते हैं। गुजरात के आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष गोपाल इटालिया हार गए हैं। हार के बाद उन्होंने कहा कि हमने गुजरात में जगह बना ली है। हमें चालीस लाख लोगों ने वोट दिया है। हमने सबसे बड़ी पार्टी के खिलाफ लड़ाई लड़ी है। भारतीय जनता पार्टी अभी एक सौ सत्तावन सीटों से आगे चल रही है। वहीं, कांग्रेस सोलह सीटों पर फिसड्डी साबित हुई है। इसके अलावा बात करे आम आदमी पार्टी की तो वह पाँच सीटों पर आगे है। जबकि अन्य चार सीटों पर बढ़त बना रही है। कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गुजरात के रुझानों पर कहा कि हार जीत होती रहती है। उन्होंने कहा कि जो हार है हमें वो स्वीकार है। मगर हम अपने उसूल नहीं छोड़ेंगे। कमियों पर काम करेंगे। इंचार्ज सेक्रेटी और ऑब्जर्वर्स हिमाचल प्रदेश जा रहे हैं और वही आगे तय करेंगे। CM भूपेंद्र पटेल ने घाटलोडिया सीट से एक. बानवे लाख मतों के अंतर से जीत दर्ज की हैं। गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजे आने से पहले ही कांग्रेस में इस्तीफे का सिलसिला शुरू हो गया है। रुझानों में कांग्रेस बीस सीटों पर आगे चल रही है। बीजेपी एक सौ उनचास सीटों पर आगे चल रही है। गुजरात में बीजेपी के पक्ष में आ रहे रुझानों पर प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि दोनों जगहों पर दिलचस्प चुनाव रहे। गुजरात में बीजेपी ने इतिहास बनाया है। रिकॉर्ड मर्जिन से जीत रही है। कांग्रेस सबसे कम सीट का रिकॉर्ड बना रही हैं। पात्रा ने गुजरात की जीत का श्रेय पीएम मोदी को दिया है। चुनाव आयोग के मुताबिक, बीजेपी बाईस सीटों पर जीत दर्ज करा कर एक सौ छत्तीस सीटों से आगे चल रही है। वहीं कांग्रेस दो सीट पर जीत कर चौदह सीटों से आगे चल रही है। गुजरात में तस्वीर लगभग साफ हो गई है। एक बार फिर प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनने जा रही है। इस बीच बीजेपी अध्यक्ष केसीआर पाटिल ने बताया कि एक बार फिर सीएम के रूप में भूपेंद्र पटेल शपथ लेंगे। ये शपथ ग्रहण बारह दिसंबर को होगा, जिसमें खुद पीएम मोदी भी शामिल होंगे। इस मौके पर सीएम भूपेंद्र पटेल ने कहा कि गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजे बिल्कुल साफ हैं। लोगों ने गुजरात में विकास की यात्रा को आगे भी रखने का मन बना लिया है। हम जनता के जनादेश को विनम्रता से स्वीकार करते हैं। गुजरात में इस बार बीजेपी ऐतिहासिक जीत दर्ज करा रही है। ऐसा पहली बार होने जा रहा है कि नरेंद्र मोदी के राज्य का सीएम रहते हुए भी बीजेपी ने इतनी सीटें हासिल नहीं की थी जितनी इस बार उसे मिल रही हैं। करीब एक सौ अट्ठावन सीटों पर बीजेपी आगे चल रही हैं। जिसमें से पाँच सीटों पर उसने जीत दर्ज करा ली है। इस बीच पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाना शुरू कर दी है। सूरत में बीजेपी के कार्यकर्ता ढोल पर नाचते दिखाई दे रहे हैं। सीएम भूपेंद्र पटेल और राज्य के भाजपा अध्यक्ष सीआर पाटिल ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर गुजरात में जीत का जश्न मनाया। बता दें कि इस समय मुख्यमंत्री अपने निर्वाचन क्षेत्र घाटलोडिया से भी एक,सात,नौ सौ साठ मतों के अंतर से आगे चल रहे हैं। विधानसभा सीट के लिए मतगणना जारी है। भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर प्रदेश में अपनी सरकार बनाने जा रही हैं। बीजेपी एक सौ पचपन सीटों से आगे हैं, वहीं कांग्रेस अट्ठारह सीटों से आगे चल रही है। दाहोद से बीजेपी उम्मीदवार कनैयालाल बच्चूभाई किशोरी उनतीस,तीन सौ पचास मतों के अंतर से जीते। दाहोद सीट जीतने के अलावा बीजेपी एक सौ उनचास सीटों पर आगे चल रही है। इस बीच पीएम मोदी जल्द कार्यकर्ताओं को संबोधित करने वाले हैं। बीजेपी के प्रहलाद जोशी का कहना है कि जनता गुजरात मॉडल का समर्थन कर रही है और उसे स्वीकार भी किया जा रहा। उसी का नतीजा है कि गुजरात में भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर अपनी सरकार बनाने जा रही है। भारतीय जनता पार्टी लगातार गुजरात में बढ़त कायम किए हुए हैं। ऐसा लगता है कि एक बार फिर गुजरात में बीजेपी की ही सरकार बनने वाली है। फिलहाल रुझानों पर नजर डाले तो एक सौ चौवन सीटों से बीजेपी आगे चल रही है। इसके अलावा अट्ठारह सीटों पर अटक गई है। अपनी जीत का दम भरने वाली 'आप' छः सीटों से आगे चलकर बुरे हाल में हैं। पाटीदार नेता का अहम चेहरा रहे हार्दिक पटेल लगातार रेस में आगे चल रहे हैं। गुजरात में मतगणना जारी है हाल के आंकड़ों की बात करें तो बीजेपी एक सौ बावन सीटों से आगे है तो कांग्रेस सत्रह सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं। बात करें आम आदमी पार्टी और अन्य की तो AAP सात और अन्य छः सीटों से आगे चल रही है। एक सौ बयासी सीटों के लिए मतगणना जारी है। जिसमें करीब एक सौ पचास सीटों पर बीजेपी आगे चल रही है। वहीं, कांग्रेस अट्ठारह सीटों से आगे हैं और 'आप' छः सीटों से बढ़त बना रही है। गुजरात में विधानसभा सीटों के लिए लगातार मतगणना जारी है। जहां एक सौ चौंतालीस सीटों से बीजेपी आगे है, वहीं कांग्रेस छब्बीस सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं। बात करें AAP की तो फिलहाल पार्टी ने रफ्तार पकड़ी हुई है। जिसमें दस सीटों पर AAP आगे हैं। गुजरात की एक सौ बयासी सीटों में से एक सौ तैंतालीस सीटों पर आगे चल रही है। वहीं, कांग्रेस अट्ठाईस, आम आदमी पार्टी नौ और अन्य दो सीटों पर बढ़त बनाती दिख रही है। अब तक के मतगणना रुझानों के मुताबिक एक बार फिर प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनने जा रही है। इस समय बीजेपी एक सौ सैंतीस सीटों से आगे हैं, वहीं कांग्रेस पैंतीस सीटों पर और 'आप' छः सीटों पर सिमटी हुई है। बात करें अन्य की तो अन्य दो सीटों पर कायम है। गुजरात में एक सौ अस्सी सीटों के रुझान लगभग आ चुके हैं। इस वक्त बीजेपी पुराने सभी रिकॉडों को तोड़ती दिख रही है। रुझानों पर अगर नजर डाले तो ऐसा लग रहा कि एक बार फिर गुजरात में भाजपा की सरकार बनने जा रही है। गुजरात विधानसभा सीटों पर मतगणना जारी है। एक सौ बयासी सीटों में से बीजेपी एक सौ उनतीस सीटों पर आगे चल रही है। वहीं कछुए की चाल में चल रही 'आप' की स्थिति सुधरी है और वह छः सीटों से आगे चल रही है। यही नहीं अन्य दो सीटों से आगे हैं और कांग्रेस इकतालीस सीटों पर बढ़त बनाती दिख रही है। गुजरात में बीजेपी एक सौ अट्ठाईस सीटों से आगे चल रही है। जबकि कांग्रेस चौंतालीस सीटों से मैदान में बनी हुई है। वहीं आम आदमी पार्टी का जादू गुजरात में चलता नजर नहीं आ रहा है। यहां 'आप' चार सीटों से और अन्य एक सीट से आगे हैं। बीजेपी की ओर से चुनावी मैदान में वीरमगाम विधानसभा सीट से हार्दिक पटेल आगे चल रहे हैं। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी लाखाभाई भारवाड़ पीछे है। इस समय मतगणना को पूरे एक घंटे बीचत चुके हैं और चुनाव आयोग के आंकड़ों की बात करे तो दो सीटों बीजेपी के खाते में आती दिख रही है वहीं कांग्रेस एक सीट से आगे बढ़ रही है। गुरुवार सुबह आठ बजे से राज्य में वोटों की गिनती जारी है। इस समय बीजेपी एक बार फिर राज्य में अपनी सरकार बनाती नजर आ रही है क्योंकि बीजेपी एक सौ बाईस सीटों से आगे चल रही है। वहीं, कांग्रेस ने भी रफ्तार पकड़ी है और फिलहाल छप्पन सीटों से आगे चल रही है। गुजरात के सूरत पश्चिम से भाजपा उम्मीदवार पूर्णेश मोदी ने दावा करते हुए बयान दिया है कि बीजेपी तोड़ेगी रिकॉर्ड इसे अधिकतम सीटें और उच्चतम मतदान प्रतिशत मिलेगा। हमारे सभी प्रत्याशी अपने प्रतिद्वंद्वी प्रत्याशियों से भारी अंतर से आगे होंगे। भाजपा की भारी जीत होगी। गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए मतगणना जारी है। शुरुआती रुझानों में तेजी से आंकड़ें बदल रहे हैं। इस समय भाजपा एक सौ से ज्यादा सीटों पर आगे चल रही है। वहीं कांग्रेस भी रेस में पीछे नहीं है। भाजपा प्रत्याशी हार्दिक पटेल ने गुजरात में अपनी जीत का बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि प्रदेश में बीजेपी एक सौ पैंतीस से एक सौ पैंतालीस सीटे लाकर अपनी सरकार बनाएगी। विधानसभा चुनावों के वोटों की गिनती सुबह आठ बजे से जारी है। फिलहाल शुरुआती रुझानों में बीजेपी एक सौ नौ सीटों पर आगे चल रही है। वहीं कांग्रेस तैंतालीस सीटों पर आगे चल रही है। जबकि आम आदमी पार्टी एक सीटों से आगे चल रही है। गुजरात विधानसभा चुनाव के वोटों की गिनती जारी है। बीजेपी इस समय साठ सीटों से आगे है, जबकि कांग्रेस बीस सीटों पर आगे है। वहीं, 'आप' तीन सीटों पर आगे है। काउंटिंग शुरू होते ही गुजरात से पहला रुझान आया है। ये रुझान बीजेपी के पक्ष में है। इसके अगले ही पल दूसरा रुझान भी बीजेपी के पक्ष में आया। भाजपा के पक्ष में आए दस रूझान, 'आप' ने एक सीट पर खोला खाता। Gujarat Election दो हज़ार बाईस Result। Live Updates: कहां कितना हुआ मतदान? गौरतलब है कि अहमदाबाद जिले में साक्षरता दर पचासी. तीन फीसदी है लेकिन चुनाव में केवल उनसठ फीसदी ही मतदान हुआ। गुजरात के सूरत जिले में औसतन बासठ. तेईस फीसदी मतदान हुआ था। राजकोट जिले में भी मतदान साठ. छः फीसदी से कम रहा। दो हज़ार सत्रह की तुलना में इस साल गुजरात में मतदान प्रतिशत काफी कम रहा। बता दें कि मतदान में सबसे बड़ी गिरावट शहरी सीटों में थी जो आठ नगर निगमों में आती हैं। अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत, गांधीनगर, राजकोट, भावनगर, जामनगर और जूनागढ़। सबसे तेज गिरावट अहमदाबाद के सोलह विधानसभा क्षेत्रों में देखी गई। गुजरात के पहले चरण में नवासी सीटों पर वोटिंग हुई थी। वहीं, दूसरे चरण में तिरानवे सीटों पर वोटिंग पूरी हुई थी। गुजरात में तैंतीस जिले हैं। पहले चरण में सौराष्ट्र-कच्छ और राज्य के दक्षिणी हिस्सों के उन्नीस जिलों की नवासी सीटों पर वोटिंग हुई थी। करीब तिरेसठ. इकतीस प्रतिशत मतदान हुआ था। पहले चरण में बीजेपी, कांग्रेस और AAP के अलावा छत्तीस अन्य राजनीतिक दलों ने अपने उम्मीदवार मैदान में उतारे थे। कुल सात सौ अठासी उम्मीदवारों की किस्मत का आज फैसला होने वाला है। इनमें तीन सौ उनतालीस निर्दलीय शामिल हैं। सभी नवासी सीटों पर बीजेपी और कांग्रेस चुनाव लड़ रही हैं। जबकि AAP के अठासी सीटों पर उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। सूरत पूर्व सीट से AAP के प्रत्याशी ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली थी। अन्य पार्टियों में बसपा ने सत्तावन, बीटीपी ने चौदह और माकपा ने चार उम्मीदवार उतारे हैं। संबंधित खबरेंः
होते ही मानदेव (देवजननी ) ने स्वयं उस जैनके सम्मुख जाकर कहा कि इस मंदिर में मैं वास करनेकी इच्छा करती हूँ। जैन यद्यपि हिन्दूधर्मका विरोधी था परन्तु माताकी इस इच्छाको अपूर्ण न कर सका, जैनने कहा कि मैं कभी आपकी मूर्तिके सामने अपने हाथसे किसी पशुका बलिदान नहीं करूंगा देवीके मंदिर में निवास होने के समाचारको सुनकर संतुष्ट हो कहा कि " तुम चित्तौडके सौनगडे के पास जाओ, वही बालेदानादि कार्यको निर्वाह करेंगे । जैनदेवीकी आज्ञानुसार वह सोनगडेके निकट गये और पीछे उस मंदिरके निकट पार्श्वनाथका एक मंदिर बनवा दिया। मेरे वृद्ध बन्धुने माताजीके मंदिर में एक अत्यन्त प्रयोजनीय ऐतिहासिक तथ्यका अविष्कार किया। उन्होंने एक प्राचीन खोदी हुई लिपिको पढा उसीकी जो अनुलिपि लाये थे उससे सौलङ्की राजवंशके समयके निर्धारण के सम्बन्धका प्रमाण पाया जाता था । मुझे पीछे चित्तौडसे एक खड़ा हुआ पत्र मिला उसके साथ इस पत्रका समय सम्पूर्णतः एक हो गया। उन दोनों पत्रोंसे भलीभांति जाना जाता है कि सौलङ्की राजाने एक समयमें वास्तव में ही गिहलोतकी राजधानीको अपने अधिकारमें कर लिया था । पालोदसे जो खुदा हुआ पत्र मिला था उसमें केवल यही लिखा हुआ देखा कि कुमारपाल संवत् १२०७ में पूसके महीनेमें पालोद माताजीके मंदिर में पूजा करनेके लिये आये । परन्तु शीशोदियोंने अपनी जातिके गौरवकी रक्षा के लिये कहा था; सदराजने जिस समय कुमारपालको निकाल दिया था, उस समय कुमार पालने चित्तौड़ में आकर आश्रय लिया, और दिल्ली के चौहानपृथ्वीराजके बहनोई राणा समरसिंह जो चित्तौडके अधीश्वर थे अन्तमें उनके अधीन में मन्त्रीके पदपर नियुक्त हुए। छठी फर्वरी मार्ग में व्यतीत हुई । भ्रमणाकारी कर्नल टाड साहब ७ वीं फर्जरीको निकुंपनामक स्थानसे चलकर ८ तारीखको मुरलानामक स्थान में आये । वह लिखते हैं, "कि मुरला एक श्रेष्ठ ग्राम है, यहाँ कूचौलिया जातिके चारण लोग निवास करते हैं । यद्यपि वह लोग भाटवंशके हैं परन्तु इस समय वह वाणिज्य द्रव्य रक्षकके कार्यसे अपना निर्वाह करते हैं । ये चारण इस देशमें सभी श्रेणी और सब वर्णोके समीप पूजनीय हैं, और सभीकी भक्ति के पात्र हैं, इसी कारण - से कोई भी इनके प्रति किसी प्रकारका हस्ताक्षेप नहीं कर सकता, और इसी कारण से वह निष्कर भूमि सम्भोग और निर्भय हो चोरोंसे भरे हुए मार्गम वाणिज्य द्रव्य भेजते । चोर डाकू भी इनके रक्षित किये हुए द्रव्योंको मार्गमें नहीं लूटते । यह समस्त राजपूताने में एकमात्र स्वाधीन होकर वाणिज्य करते हैं, कारण कि राजा भी इनसे वाणिज्यपर कर नहीं लेता है । यह चारणसम्प्रदाय हमारी जिस प्रकारसे अभ्यर्थना करती है उससे हम अत्यन्त आनन्दित हुए। उन्होंने नगरसे दलबद्ध होकर आगे बढ़ हमारा अधिक सत्कार किया। सबसे आगे ग्रामके बाजा बजानेवाले मनुष्योंका एक दल बाजा बजाता हुआ चला। इसके पीछे सुन्दरी चारणी स्त्रियाँ धोरे २ समीप आकर अंगके उत्तरीय समान्दोलनसे हावभाव कटाक्ष करती हुई धीरे २ नृत्य करती थीं । अन्तमें मुझे मुरळाकी उन स्त्रियोंने बंदी कर लिया, तब वह शान्त हुई। यह दृश्य जैसा नवीन था उसी प्रकार से चित्तको हरनेवाला था। वीरवपु चारणोंने सुन्दर वस्त्र पहरकर शिरपर पगडी
होते ही मानदेव ने स्वयं उस जैनके सम्मुख जाकर कहा कि इस मंदिर में मैं वास करनेकी इच्छा करती हूँ। जैन यद्यपि हिन्दूधर्मका विरोधी था परन्तु माताकी इस इच्छाको अपूर्ण न कर सका, जैनने कहा कि मैं कभी आपकी मूर्तिके सामने अपने हाथसे किसी पशुका बलिदान नहीं करूंगा देवीके मंदिर में निवास होने के समाचारको सुनकर संतुष्ट हो कहा कि " तुम चित्तौडके सौनगडे के पास जाओ, वही बालेदानादि कार्यको निर्वाह करेंगे । जैनदेवीकी आज्ञानुसार वह सोनगडेके निकट गये और पीछे उस मंदिरके निकट पार्श्वनाथका एक मंदिर बनवा दिया। मेरे वृद्ध बन्धुने माताजीके मंदिर में एक अत्यन्त प्रयोजनीय ऐतिहासिक तथ्यका अविष्कार किया। उन्होंने एक प्राचीन खोदी हुई लिपिको पढा उसीकी जो अनुलिपि लाये थे उससे सौलङ्की राजवंशके समयके निर्धारण के सम्बन्धका प्रमाण पाया जाता था । मुझे पीछे चित्तौडसे एक खड़ा हुआ पत्र मिला उसके साथ इस पत्रका समय सम्पूर्णतः एक हो गया। उन दोनों पत्रोंसे भलीभांति जाना जाता है कि सौलङ्की राजाने एक समयमें वास्तव में ही गिहलोतकी राजधानीको अपने अधिकारमें कर लिया था । पालोदसे जो खुदा हुआ पत्र मिला था उसमें केवल यही लिखा हुआ देखा कि कुमारपाल संवत् एक हज़ार दो सौ सात में पूसके महीनेमें पालोद माताजीके मंदिर में पूजा करनेके लिये आये । परन्तु शीशोदियोंने अपनी जातिके गौरवकी रक्षा के लिये कहा था; सदराजने जिस समय कुमारपालको निकाल दिया था, उस समय कुमार पालने चित्तौड़ में आकर आश्रय लिया, और दिल्ली के चौहानपृथ्वीराजके बहनोई राणा समरसिंह जो चित्तौडके अधीश्वर थे अन्तमें उनके अधीन में मन्त्रीके पदपर नियुक्त हुए। छठी फर्वरी मार्ग में व्यतीत हुई । भ्रमणाकारी कर्नल टाड साहब सात वीं फर्जरीको निकुंपनामक स्थानसे चलकर आठ तारीखको मुरलानामक स्थान में आये । वह लिखते हैं, "कि मुरला एक श्रेष्ठ ग्राम है, यहाँ कूचौलिया जातिके चारण लोग निवास करते हैं । यद्यपि वह लोग भाटवंशके हैं परन्तु इस समय वह वाणिज्य द्रव्य रक्षकके कार्यसे अपना निर्वाह करते हैं । ये चारण इस देशमें सभी श्रेणी और सब वर्णोके समीप पूजनीय हैं, और सभीकी भक्ति के पात्र हैं, इसी कारण - से कोई भी इनके प्रति किसी प्रकारका हस्ताक्षेप नहीं कर सकता, और इसी कारण से वह निष्कर भूमि सम्भोग और निर्भय हो चोरोंसे भरे हुए मार्गम वाणिज्य द्रव्य भेजते । चोर डाकू भी इनके रक्षित किये हुए द्रव्योंको मार्गमें नहीं लूटते । यह समस्त राजपूताने में एकमात्र स्वाधीन होकर वाणिज्य करते हैं, कारण कि राजा भी इनसे वाणिज्यपर कर नहीं लेता है । यह चारणसम्प्रदाय हमारी जिस प्रकारसे अभ्यर्थना करती है उससे हम अत्यन्त आनन्दित हुए। उन्होंने नगरसे दलबद्ध होकर आगे बढ़ हमारा अधिक सत्कार किया। सबसे आगे ग्रामके बाजा बजानेवाले मनुष्योंका एक दल बाजा बजाता हुआ चला। इसके पीछे सुन्दरी चारणी स्त्रियाँ धोरे दो समीप आकर अंगके उत्तरीय समान्दोलनसे हावभाव कटाक्ष करती हुई धीरे दो नृत्य करती थीं । अन्तमें मुझे मुरळाकी उन स्त्रियोंने बंदी कर लिया, तब वह शान्त हुई। यह दृश्य जैसा नवीन था उसी प्रकार से चित्तको हरनेवाला था। वीरवपु चारणोंने सुन्दर वस्त्र पहरकर शिरपर पगडी
साउथ स्टार चिरंजीवी की अपकमिंग तेलुगु फिल्म 'सई रा नरसिम्हा रेड्डी' के सेट पर आग लग गई। हालांकि इसमें कोई घायल नहीं हुआ। अग्निशमन विभाग के कर्मियों ने आग को काबू में कर लिया है। चिरंजीवी की फिल्म के सेट पर अचानक आग लग गई और देखते ही देखते सेट जल गया। फायर ब्रिगेड जब तक लोकेशन पर पहुंची तब तक नुकसान हो चुका था। घटना की वजह से 2 करोड़ का नुकसान होना बताया जा रहा है। यह फिल्म ऐतिहासिक घटनाक्रम पर आधारित है। गांदीपेट झील के निकट किले की तरह दिखनेवाला सेट बनाया गया था जो कि जल कर खाक हो गया। इस घटना के समय कोई भी वहां मौजूद नहीं था। अग्निशमन विभाग के एक अधिकारी ने बताया, हमें सुबह पांच बजकर 30 मिनट पर एक फोन कॉल मिली थी। इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ है। चिरंजीवी के बेटे और फिल्म के प्रोड्यूसर राम चरण ने अपने एक फेसबुक पोस्ट में कहा, दुर्भाग्यवश, कोकापेट के 'सई रा' सेट पर आज सुबह आग लग गई। इस फिल्म में मुख्य भूमिका में अमिताभ बच्चन, मुकेश ऋषि, तमन्ना भाटिया हैं। यह फिल्म ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ विद्रोह करनेवाले उययलवाड़ा नरसिम्हा रेड्डी के जीवन पर आधारित है।
साउथ स्टार चिरंजीवी की अपकमिंग तेलुगु फिल्म 'सई रा नरसिम्हा रेड्डी' के सेट पर आग लग गई। हालांकि इसमें कोई घायल नहीं हुआ। अग्निशमन विभाग के कर्मियों ने आग को काबू में कर लिया है। चिरंजीवी की फिल्म के सेट पर अचानक आग लग गई और देखते ही देखते सेट जल गया। फायर ब्रिगेड जब तक लोकेशन पर पहुंची तब तक नुकसान हो चुका था। घटना की वजह से दो करोड़ का नुकसान होना बताया जा रहा है। यह फिल्म ऐतिहासिक घटनाक्रम पर आधारित है। गांदीपेट झील के निकट किले की तरह दिखनेवाला सेट बनाया गया था जो कि जल कर खाक हो गया। इस घटना के समय कोई भी वहां मौजूद नहीं था। अग्निशमन विभाग के एक अधिकारी ने बताया, हमें सुबह पांच बजकर तीस मिनट पर एक फोन कॉल मिली थी। इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ है। चिरंजीवी के बेटे और फिल्म के प्रोड्यूसर राम चरण ने अपने एक फेसबुक पोस्ट में कहा, दुर्भाग्यवश, कोकापेट के 'सई रा' सेट पर आज सुबह आग लग गई। इस फिल्म में मुख्य भूमिका में अमिताभ बच्चन, मुकेश ऋषि, तमन्ना भाटिया हैं। यह फिल्म ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ विद्रोह करनेवाले उययलवाड़ा नरसिम्हा रेड्डी के जीवन पर आधारित है।
दूसरों पर लागना चाहता है उसकी सम्मेदमायें, इन्द्रियपरायण होती है, उसकी इच्छायें हिडिसी और नवाँक होती है। यह स्कूल इद्धि बीर स्वार्थ परायण ही सकता है। वह सवयों में एक संसारी न होता है और इसलिए पूर्व और व्यसनी होता है । बव्य की मुख्य विशेषता उसकी बविजय कल्पमा प्रवणता और मता होती है इसलिए उसमें सहिष्णुता का बना होता है । प्रेम बौरा के मानस रूप में वर्तमान होते हैं। उसकी संवेदना कमी वो क्या के पत्र में व्यक होती है क्या मंदिरा प्रेम, मोचन पुल, की इच्छा बाद में व्यक होती है। उसकी रहस्यवादी प्रवृति अविश्वसनीयता बर पोवेवाची में भी की है। इस प्रकार बाबुकबाद की भूमिका पर मनुष्य के व्यक्तित्व वीर वाचरण का विश्लेषण करते हुये उसमे मीतिक अस्तित्व और बाचरण का टिम लामित कियायमा उपचन में निवि उन सामान्यतः करत थी। य में भी अपरामप्रवृति कारण दे डिपस ग्रन्थि नन्धि वा मनुष्य की ओर है। वाधुनिक मनोविज्ञान मे मानव मन का विश्लेषण करते हुए बता के साथ साथ पर्यावरण की भी त्या महत्व दिया विशिष्ट परिण के बीच बालक के कि विकास में कराया यह क्या है इसका विश्लेषण वानिक ली कोविज्ञान की विशेन । कोविज्ञान और बान्य कोविज्ञान विज्ञान की विचारवारों की ऐसी बदन है कि जिस और इष्ट के प्रति ही नहीं न्याय की दृष्टि की भी परिवर्तित करने की प्रेरणा दी है। या इंटर ने बकाया है कि व्यक्ति में गणिशैवी है जो कियो न किसी रूप में अभिव्यक्ति पाना ही चाहती है पर धमाल में उन बन्न व्य में बाबा के भी बनाम बम से भिव्यक्किामी अनिवार्यतः संभ की स्थिति उत्पन्न बीर, मिरीष, संतुलन, वमन, होती है उपाधीकरण, वादात्म्य विश्वास और की बावश्यक्ता शैवी हे १९ १- बैनर्स एण्ड टीटर -
दूसरों पर लागना चाहता है उसकी सम्मेदमायें, इन्द्रियपरायण होती है, उसकी इच्छायें हिडिसी और नवाँक होती है। यह स्कूल इद्धि बीर स्वार्थ परायण ही सकता है। वह सवयों में एक संसारी न होता है और इसलिए पूर्व और व्यसनी होता है । बव्य की मुख्य विशेषता उसकी बविजय कल्पमा प्रवणता और मता होती है इसलिए उसमें सहिष्णुता का बना होता है । प्रेम बौरा के मानस रूप में वर्तमान होते हैं। उसकी संवेदना कमी वो क्या के पत्र में व्यक होती है क्या मंदिरा प्रेम, मोचन पुल, की इच्छा बाद में व्यक होती है। उसकी रहस्यवादी प्रवृति अविश्वसनीयता बर पोवेवाची में भी की है। इस प्रकार बाबुकबाद की भूमिका पर मनुष्य के व्यक्तित्व वीर वाचरण का विश्लेषण करते हुये उसमे मीतिक अस्तित्व और बाचरण का टिम लामित कियायमा उपचन में निवि उन सामान्यतः करत थी। य में भी अपरामप्रवृति कारण दे डिपस ग्रन्थि नन्धि वा मनुष्य की ओर है। वाधुनिक मनोविज्ञान मे मानव मन का विश्लेषण करते हुए बता के साथ साथ पर्यावरण की भी त्या महत्व दिया विशिष्ट परिण के बीच बालक के कि विकास में कराया यह क्या है इसका विश्लेषण वानिक ली कोविज्ञान की विशेन । कोविज्ञान और बान्य कोविज्ञान विज्ञान की विचारवारों की ऐसी बदन है कि जिस और इष्ट के प्रति ही नहीं न्याय की दृष्टि की भी परिवर्तित करने की प्रेरणा दी है। या इंटर ने बकाया है कि व्यक्ति में गणिशैवी है जो कियो न किसी रूप में अभिव्यक्ति पाना ही चाहती है पर धमाल में उन बन्न व्य में बाबा के भी बनाम बम से भिव्यक्किामी अनिवार्यतः संभ की स्थिति उत्पन्न बीर, मिरीष, संतुलन, वमन, होती है उपाधीकरण, वादात्म्य विश्वास और की बावश्यक्ता शैवी हे उन्नीस एक- बैनर्स एण्ड टीटर -
चंद ने चूड़ो शालिकेर वाहन का अनुवाद बूढ़े मुँह मुँहासे लोग देखें तमासे के नाम से किया और ब्रजनाथ शर्मा ने माइकेल मधूसूदन के एई कि बोले सभ्यता का अनुवाद क्या इसी को सभ्यता कहते हैं ( १८८४) भारत जीवन प्रेस से प्रकाशित कराया। राधाचरण गोस्वामी द्वारा लिखित चूढ़े मुँह मुँहासे ( १८८७ ) भी प्रसिद्ध है । निश्चय नहीं कि यह मौलिक है अथवा बँगला के प्रहसन का रूपान्तर । पं० केशवराम भट्ट ने शरत और सरोजिनी के आधार पर सजादसंबुल ( १८७७) और सुरेन्द्र - विनोदिनी के आधार पर शमशाद - सौसन ( १८८० ) की रचना की । सज्जाद-संबुल में सज्जाद और संबुल के प्रेम की कथा है। नायक और नायिका दोनों मुसलमान हैं। प्रगतिशील दृष्टिकोण के सुसंस्कृत व्यक्ति हैं, समाज के अनावश्यक बंधनों को तोड़ फेंकने के पक्षपाती हैं। इस नाटक की भाषा वड़ी सुन्दर और रसीली है यद्यपि उर्दू प्रधान है और विषय के बहुत ही उपयुक्त है। शमशाद सौसन में रो (Roe) महाशय एक ज्वाइंट मजिस्ट्रेट हैं। वह बदमिजाज सिविलियन ब्रिटिश नौकरशाही का अच्छा नमुना है जो अपने को विजयी देश का बताकर भारत को घृणा की दृष्टि से देखता है और न्यायअन्याय का भेद भाव न कर मनमानी करने में नहीं हिचकता । शमशाद भी एक वीर, शिक्षित, राष्ट्र प्रेसी और निर्भीक युवक की भाँति उसका मुकावला करता है। उससे तत्कालीन राजनीतिक और . सामाजिक जागृति का अच्छा परिचय मिलता है । ये दोनों रूपान्तरित नाटक हिन्दी में भारतेन्दु-काल में बहुत च्छे निकले और इन्होंने भारतेन्दु की रूपान्तरित धारा का प्रवाह टूटने नहीं दिया। इसी सम्बन्ध में एक तीसरा नाटक और उल्लेखनीय नाटक है और वह है प्रभास- मिलन ( १८९९ ) । इसके ऊपर दुर्गाप्रसाद मिश्र *डा० लक्ष्मीसागर वार्ष्णेय कृत आधुनिक हिंदी साहित्य, पृ० १२५ । का नाम है परन्तु अन्दर उन्होंने कहा है कि पुस्तक वंगभाषा के प्रभास यज्ञ का हिन्दी रूपान्तर है और इनका सारा श्रेय सधूसूदन लाल को है । उनका कथन इसका द्योतक है कि मिश्र जी केवल निमित्त मात्र हैं। कुछ भी हो ये तीनों रूपान्तरित नाटक कला और साहित्य की दृष्टि से उत्कृष्ट कोटि के हैं। अँगरेजी अनुवाद जी के कुछ नाटकों का अनुवाद भी इस काल में हुआ । इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं कि अङ्गरेजी लेखकों में अनुवादकों का प्रिय रचनाकार शेक्सपियर रहा । सब से पहले तोताराम जी ने १८७६ में जोजेफ एडीसन के Cato का केटो कृतान्त के नाम से अनुवाद किया । अनुवाद के सम्बन्ध में कुछ नहीं कहा जा सकता क्योंकि पुस्तक प्राप्य है । शेक्सपियर का Merchant of Venice अनुवादकों का प्रिय नाटक रहा । उसके कई अनुवाद हुए । बालेश्वर प्रसाद और दयाल सिंह ठाकुर ने वेनिस का सौदागर नाम से इसका उल्था किया । कब और कैसा ? कुछ नहीं कहा जा सकता । सन् १८८८ में जबलपुर की आर्या नामक महिला ने वेनिस नगर का व्यापारी नाम से इसका अविकल अनुवाद किया। यह अनुवाद गद्य और पद्य दोनों में है तथा अनुवादिका को इसमें पूरी सफलता मिली है। शेक्सपियर के अन्य नाटकों में से रतनचन्द जी ने Comedy of Errors का भ्रमजालक के नाम से सन १८८७ में एक अनुवाद किया। यह स्वतंत्र अनुबाद है और अनुवादक ने मूल कथा - वस्तु को सुरक्षित रखते हुए उसे भारतीय वातावरण प्रदान किया है। जयपुर के पुरोहित गोपीनाथ ने às You Like It और Romeo Juliet का अनुवाद मन भावन ( १८२६ ) और प्रेमलीला ( १८६७ ) के नाम से किया। पुरोहित जी भारतेन्दु के समकालीन और हिन्दी नाटक साहित्य... ८ह के दोनों अनुवाद मूल के अनुकूल हैं। शेक्सपियर के Macbeth का अनुवाद 'प्रेमघन' जी के भाई मथुराप्रसाद उपाध्याय ने साहसेन्द्र साहस के नाम से १८९३ में किया । यह भी स्वतंत्र अनुवाद है और कथानक को भारतीय आवरण दे देने का प्रयोग है । सन् १९०३ में जयपुर मेडिकल डिपार्टमेंट के सेकिंड क्लार्क पं० बद्रीनारायण बी० ए० ने King Lear का अनुवाद किया। यह अनुवाद सब गद्य में हैं। भाषा साफ और सुथरी है परन्तु कहीं कहीं भावों को समझने में कठिनता होती है । नाटक साहित्य का कलात्मक विकास भारतेन्दु काल के अनुवादित एवं रूपान्तरित नाटक साहित्य में से किसी का कोई स्पष्ट प्रभाव नाटक-सृजन एवं उसके विकास पर नहीं पड़ा। संस्कृत के नाटकों के अनुवादों ने केवल प्राचीन नाटकसाहित्य को पढ़े लिखों में जानकारी होने का ही कार्य किया । अरेजी के अनुवाद और रूपान्तर भी संख्या की श्रीवृद्धि में सहायक रहे। वास्तव में यदि देखा जाय तो उनके यथातथ्य सुन्दर अनुवाद हुए भी नहीं । १६०४ तक अङ्ग्रेजी का पठन-पाठन इतना अधिक हो जाने पर भी अनुवादों का एक आश्चर्य जनक सत्य है । बँगला ने एक दो नाटकों के लिखने में कुछ अधिक सहायता की परन्तु पूर्ण रूप से इस भाषा साहित्य का भी कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ा । एक वात यह अवश्य दृष्टिगोचर होती है कि Scene का पर्याय बंगभाषा में 'गर्भाक' है और यही प्रयोग हमें हिन्दी के प्रारम्भिक नाटकों में मिलता है । यद्यपि 'गर्भाक' मूल में संस्कृत का शब्द है परन्तु उसका प्रयोग संस्कृत नाट्य शास्त्र के अनुसार वर्जित विषयों अथवा उसी के समान मूल कथानक से सम्बन्धित परन्तु रस-निष्पत्ति में वाधक कार्यव्यापार को बताने के कारण होता है। बँगला और हिन्दी में इसका प्रयोग संस्कृत के अनुसार नहीं है। अतएव संभव है हिन्दी पर यह प्रभाव बँगला का ही पड़ा हो । आगे चलकर इसका चलन उठ गया । आलोच्य काल की मूल प्रेरणा उसकी मौलिक चिंता-धारायें ही हैं और उन्हीं से नाटक - साहित्य के कलात्मक विकास पर प्रकाश पड़ता है। भारतेन्दु की अपेक्षा उनके समकालीन लेखकों की विचारों की पढ़गुसी धारा स्पष्ट है। नये नये विषयों का समावेश बढ़ती हुई जनजागृति में आवश्यक भी था और स्वाभाविक भी। इन नूतन प्रेरणाओं को लेकर उनके प्रतिपादन की शैली में भी पर्याप्त विकास हुआ।
चंद ने चूड़ो शालिकेर वाहन का अनुवाद बूढ़े मुँह मुँहासे लोग देखें तमासे के नाम से किया और ब्रजनाथ शर्मा ने माइकेल मधूसूदन के एई कि बोले सभ्यता का अनुवाद क्या इसी को सभ्यता कहते हैं भारत जीवन प्रेस से प्रकाशित कराया। राधाचरण गोस्वामी द्वारा लिखित चूढ़े मुँह मुँहासे भी प्रसिद्ध है । निश्चय नहीं कि यह मौलिक है अथवा बँगला के प्रहसन का रूपान्तर । पंशून्य केशवराम भट्ट ने शरत और सरोजिनी के आधार पर सजादसंबुल और सुरेन्द्र - विनोदिनी के आधार पर शमशाद - सौसन की रचना की । सज्जाद-संबुल में सज्जाद और संबुल के प्रेम की कथा है। नायक और नायिका दोनों मुसलमान हैं। प्रगतिशील दृष्टिकोण के सुसंस्कृत व्यक्ति हैं, समाज के अनावश्यक बंधनों को तोड़ फेंकने के पक्षपाती हैं। इस नाटक की भाषा वड़ी सुन्दर और रसीली है यद्यपि उर्दू प्रधान है और विषय के बहुत ही उपयुक्त है। शमशाद सौसन में रो महाशय एक ज्वाइंट मजिस्ट्रेट हैं। वह बदमिजाज सिविलियन ब्रिटिश नौकरशाही का अच्छा नमुना है जो अपने को विजयी देश का बताकर भारत को घृणा की दृष्टि से देखता है और न्यायअन्याय का भेद भाव न कर मनमानी करने में नहीं हिचकता । शमशाद भी एक वीर, शिक्षित, राष्ट्र प्रेसी और निर्भीक युवक की भाँति उसका मुकावला करता है। उससे तत्कालीन राजनीतिक और . सामाजिक जागृति का अच्छा परिचय मिलता है । ये दोनों रूपान्तरित नाटक हिन्दी में भारतेन्दु-काल में बहुत च्छे निकले और इन्होंने भारतेन्दु की रूपान्तरित धारा का प्रवाह टूटने नहीं दिया। इसी सम्बन्ध में एक तीसरा नाटक और उल्लेखनीय नाटक है और वह है प्रभास- मिलन । इसके ऊपर दुर्गाप्रसाद मिश्र *डाशून्य लक्ष्मीसागर वार्ष्णेय कृत आधुनिक हिंदी साहित्य, पृशून्य एक सौ पच्चीस । का नाम है परन्तु अन्दर उन्होंने कहा है कि पुस्तक वंगभाषा के प्रभास यज्ञ का हिन्दी रूपान्तर है और इनका सारा श्रेय सधूसूदन लाल को है । उनका कथन इसका द्योतक है कि मिश्र जी केवल निमित्त मात्र हैं। कुछ भी हो ये तीनों रूपान्तरित नाटक कला और साहित्य की दृष्टि से उत्कृष्ट कोटि के हैं। अँगरेजी अनुवाद जी के कुछ नाटकों का अनुवाद भी इस काल में हुआ । इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं कि अङ्गरेजी लेखकों में अनुवादकों का प्रिय रचनाकार शेक्सपियर रहा । सब से पहले तोताराम जी ने एक हज़ार आठ सौ छिहत्तर में जोजेफ एडीसन के Cato का केटो कृतान्त के नाम से अनुवाद किया । अनुवाद के सम्बन्ध में कुछ नहीं कहा जा सकता क्योंकि पुस्तक प्राप्य है । शेक्सपियर का Merchant of Venice अनुवादकों का प्रिय नाटक रहा । उसके कई अनुवाद हुए । बालेश्वर प्रसाद और दयाल सिंह ठाकुर ने वेनिस का सौदागर नाम से इसका उल्था किया । कब और कैसा ? कुछ नहीं कहा जा सकता । सन् एक हज़ार आठ सौ अठासी में जबलपुर की आर्या नामक महिला ने वेनिस नगर का व्यापारी नाम से इसका अविकल अनुवाद किया। यह अनुवाद गद्य और पद्य दोनों में है तथा अनुवादिका को इसमें पूरी सफलता मिली है। शेक्सपियर के अन्य नाटकों में से रतनचन्द जी ने Comedy of Errors का भ्रमजालक के नाम से सन एक हज़ार आठ सौ सत्तासी में एक अनुवाद किया। यह स्वतंत्र अनुबाद है और अनुवादक ने मूल कथा - वस्तु को सुरक्षित रखते हुए उसे भारतीय वातावरण प्रदान किया है। जयपुर के पुरोहित गोपीनाथ ने às You Like It और Romeo Juliet का अनुवाद मन भावन और प्रेमलीला के नाम से किया। पुरोहित जी भारतेन्दु के समकालीन और हिन्दी नाटक साहित्य... आठह के दोनों अनुवाद मूल के अनुकूल हैं। शेक्सपियर के Macbeth का अनुवाद 'प्रेमघन' जी के भाई मथुराप्रसाद उपाध्याय ने साहसेन्द्र साहस के नाम से एक हज़ार आठ सौ तिरानवे में किया । यह भी स्वतंत्र अनुवाद है और कथानक को भारतीय आवरण दे देने का प्रयोग है । सन् एक हज़ार नौ सौ तीन में जयपुर मेडिकल डिपार्टमेंट के सेकिंड क्लार्क पंशून्य बद्रीनारायण बीशून्य एशून्य ने King Lear का अनुवाद किया। यह अनुवाद सब गद्य में हैं। भाषा साफ और सुथरी है परन्तु कहीं कहीं भावों को समझने में कठिनता होती है । नाटक साहित्य का कलात्मक विकास भारतेन्दु काल के अनुवादित एवं रूपान्तरित नाटक साहित्य में से किसी का कोई स्पष्ट प्रभाव नाटक-सृजन एवं उसके विकास पर नहीं पड़ा। संस्कृत के नाटकों के अनुवादों ने केवल प्राचीन नाटकसाहित्य को पढ़े लिखों में जानकारी होने का ही कार्य किया । अरेजी के अनुवाद और रूपान्तर भी संख्या की श्रीवृद्धि में सहायक रहे। वास्तव में यदि देखा जाय तो उनके यथातथ्य सुन्दर अनुवाद हुए भी नहीं । एक हज़ार छः सौ चार तक अङ्ग्रेजी का पठन-पाठन इतना अधिक हो जाने पर भी अनुवादों का एक आश्चर्य जनक सत्य है । बँगला ने एक दो नाटकों के लिखने में कुछ अधिक सहायता की परन्तु पूर्ण रूप से इस भाषा साहित्य का भी कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ा । एक वात यह अवश्य दृष्टिगोचर होती है कि Scene का पर्याय बंगभाषा में 'गर्भाक' है और यही प्रयोग हमें हिन्दी के प्रारम्भिक नाटकों में मिलता है । यद्यपि 'गर्भाक' मूल में संस्कृत का शब्द है परन्तु उसका प्रयोग संस्कृत नाट्य शास्त्र के अनुसार वर्जित विषयों अथवा उसी के समान मूल कथानक से सम्बन्धित परन्तु रस-निष्पत्ति में वाधक कार्यव्यापार को बताने के कारण होता है। बँगला और हिन्दी में इसका प्रयोग संस्कृत के अनुसार नहीं है। अतएव संभव है हिन्दी पर यह प्रभाव बँगला का ही पड़ा हो । आगे चलकर इसका चलन उठ गया । आलोच्य काल की मूल प्रेरणा उसकी मौलिक चिंता-धारायें ही हैं और उन्हीं से नाटक - साहित्य के कलात्मक विकास पर प्रकाश पड़ता है। भारतेन्दु की अपेक्षा उनके समकालीन लेखकों की विचारों की पढ़गुसी धारा स्पष्ट है। नये नये विषयों का समावेश बढ़ती हुई जनजागृति में आवश्यक भी था और स्वाभाविक भी। इन नूतन प्रेरणाओं को लेकर उनके प्रतिपादन की शैली में भी पर्याप्त विकास हुआ।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
Vegetable-Themed Condoms: सुरक्षित यौन संबंध का महत्व समझने वाले लोग कंडोम का इस्तेमाल करना नहीं भूलते हैं. बेशक कंडोम के इस्तेमाल से यौन संचारित रोगों और अनचाहे गर्भ का खतरा टल जाता है. मार्केट में कई फ्लेवर्स के कंडोम उपलब्ध हैं, लेकिन अब जल्द ही मार्केट में सब्जी-थीम वाले कंडोम (Vegetable-Themed Condoms) की एंट्री हो सकती है. दरअसल, द हॉर्टिकल्चरल सोसायटी (The Horticultural Society) के नेतृत्व में सब्जी-थीम वाले कंडोम अभियान की शुरुआत की गई है, जिसका मकसद सेक्स लाइफ (Sex Life) और इंटीमेसी (Intimacy) में नया रोमांच लाना है. इस संगठन ने विभिन्न फलों (Fruits) और सब्जियों (Vegetables) के फ्लेवर में कंडोम (Condom) की एक स्वस्थ श्रेणी का उत्पादन किया है. बगीचे के केंद्र से देखने में कंडोम के ये पैकेट असल में बीज की तरह दिखते हैं. सब्जी थीम वाले कंडोम को देखने के बाद तो यही लगता है कि गर्भनिरोधक (Contraception) के एक नए युग की जल्द ही शुरुआत होने वाली है. जी हां, कंडोम एसटीआई/एचआईवी की रोकथाम के लिए अधिक महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं, क्योंकि स्थायी नसबंदी अब अधिक आम हो गई है. इसके साथ ही आपातकालीन गर्भनिरोधक गोली का प्रचार भी हो रहा है. हालांकि हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका में एक नए प्रकार के अंडरवियर को स्वीकृति दी गई है जिसे लेकर दावा किया जा रहा है कि यह उपयोगकर्ताओं को ओरल सेक्स के दौरान एसटीआई से बचाने में मदद करता है. रिलेट वेजी कंडोम उन अध्ययनों के जवाब में बनाए गए थे, जिनसे पता चला था कि 60 के दशक के अच्छे स्वास्थ्य और आर्थिक रूप से संपन्न लोग पहले से कहीं अधिक सेक्स कर रहे हैं. पिछले साल 52 फीसदी लोगों ने कंडोम नहीं खरीदने की बात स्वीकार की थी, बावजूद इसके उनका मानना है कि वो यौन रूप से बेहद साहसी हैं. अधिकांश ब्रितानियों (51 फीसदी) को सेक्स के मुद्दे पर बातचीत करना मुश्किल लगता है, क्योंकि इससे उन्हें असहज महसूस होता है. हालांकि, सर्वेक्षण में यह भी पाया गया है कि 65 वर्ष से अधिक आयु के 80 फीसदी लोगों ने पिछले छह महीनों में कंडोम नहीं खरीदा है और पिछले 10 सालों में इस आयु वर्ग में एसटीआई जैसे यौन संचारित रोगों में वृद्धि हुई है. एज यूके के अनुसार, पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड ने बताया कि महामारी से पहले 65 से अधिक आयु के लोगों में सिफलिस के मामलों में 86 फीसदी की वृद्धि हुई थी, फिर भी 65 साल की आयु से अधिक लोगों में 38 फीसदी लोग सुरक्षित सेक्स पर चर्चा करने से बचते हैं, क्योंकि यह उन्हें असहज बनाता है.
Vegetable-Themed Condoms: सुरक्षित यौन संबंध का महत्व समझने वाले लोग कंडोम का इस्तेमाल करना नहीं भूलते हैं. बेशक कंडोम के इस्तेमाल से यौन संचारित रोगों और अनचाहे गर्भ का खतरा टल जाता है. मार्केट में कई फ्लेवर्स के कंडोम उपलब्ध हैं, लेकिन अब जल्द ही मार्केट में सब्जी-थीम वाले कंडोम की एंट्री हो सकती है. दरअसल, द हॉर्टिकल्चरल सोसायटी के नेतृत्व में सब्जी-थीम वाले कंडोम अभियान की शुरुआत की गई है, जिसका मकसद सेक्स लाइफ और इंटीमेसी में नया रोमांच लाना है. इस संगठन ने विभिन्न फलों और सब्जियों के फ्लेवर में कंडोम की एक स्वस्थ श्रेणी का उत्पादन किया है. बगीचे के केंद्र से देखने में कंडोम के ये पैकेट असल में बीज की तरह दिखते हैं. सब्जी थीम वाले कंडोम को देखने के बाद तो यही लगता है कि गर्भनिरोधक के एक नए युग की जल्द ही शुरुआत होने वाली है. जी हां, कंडोम एसटीआई/एचआईवी की रोकथाम के लिए अधिक महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं, क्योंकि स्थायी नसबंदी अब अधिक आम हो गई है. इसके साथ ही आपातकालीन गर्भनिरोधक गोली का प्रचार भी हो रहा है. हालांकि हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका में एक नए प्रकार के अंडरवियर को स्वीकृति दी गई है जिसे लेकर दावा किया जा रहा है कि यह उपयोगकर्ताओं को ओरल सेक्स के दौरान एसटीआई से बचाने में मदद करता है. रिलेट वेजी कंडोम उन अध्ययनों के जवाब में बनाए गए थे, जिनसे पता चला था कि साठ के दशक के अच्छे स्वास्थ्य और आर्थिक रूप से संपन्न लोग पहले से कहीं अधिक सेक्स कर रहे हैं. पिछले साल बावन फीसदी लोगों ने कंडोम नहीं खरीदने की बात स्वीकार की थी, बावजूद इसके उनका मानना है कि वो यौन रूप से बेहद साहसी हैं. अधिकांश ब्रितानियों को सेक्स के मुद्दे पर बातचीत करना मुश्किल लगता है, क्योंकि इससे उन्हें असहज महसूस होता है. हालांकि, सर्वेक्षण में यह भी पाया गया है कि पैंसठ वर्ष से अधिक आयु के अस्सी फीसदी लोगों ने पिछले छह महीनों में कंडोम नहीं खरीदा है और पिछले दस सालों में इस आयु वर्ग में एसटीआई जैसे यौन संचारित रोगों में वृद्धि हुई है. एज यूके के अनुसार, पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड ने बताया कि महामारी से पहले पैंसठ से अधिक आयु के लोगों में सिफलिस के मामलों में छियासी फीसदी की वृद्धि हुई थी, फिर भी पैंसठ साल की आयु से अधिक लोगों में अड़तीस फीसदी लोग सुरक्षित सेक्स पर चर्चा करने से बचते हैं, क्योंकि यह उन्हें असहज बनाता है.
पत्र 'ए' फ्रेंच भाषा में समान है क्योंकि यह अंग्रेजी में है। आप अक्सर अकेले इस पत्र का उपयोग करेंगे, या एक उच्चारण कब्र के साथ, या अन्य अक्षरों के साथ कई संयोजनों में। प्रत्येक उदाहरण में थोड़ा अलग उच्चारण होता है और यह फ्रेंच पाठ आपको प्रत्येक को सीखने में मदद करेगा। फ्रेंच में 'ए' अक्षर का उच्चारण काफी सरल है। इसे आम तौर पर "पिता" में 'ए' की तरह कम या ज्यादा उच्चारण किया जाता है, लेकिन अंग्रेजी में फ्रांसीसी में होंठ के साथ व्यापकः सुनो। उच्चारण कब्र के साथ एक 'ए' एक ही तरीके से उच्चारण किया जाता है। 'ए' को कभी-कभी मुंह में आगे की ओर सुनाया जाता है और ऊपर वर्णित 'ए' ध्वनि के मुकाबले होंठ अधिक गोलाकार होते हैंः सुनो। यह आवाज अप्रचलित हो रही है, लेकिन जब अक्षर 'ए' लिखा जाता है तो तकनीकी रूप से उच्चारण किया जाना चाहिएः अब आप जानते हैं कि फ्रेंच में विभिन्न ए के उच्चारण कैसे करें, यह अभ्यास करने का समय है। उच्चारण सुनने के लिए इन शब्दों में से प्रत्येक पर क्लिक करें और जितनी बार आपको आवश्यकता हो उतनी बार दोहराएं। जब हमने चर्चा की विभिन्न संदर्भों में उपयोग किया जाता है तो ध्वनि के बीच अंतर पर ध्यान दें। - Quatre (चार) - अमी (दोस्त) - agreéable (अच्छा) - टैबैक (तंबाकू की दुकान) - आत्मागर (छुटकारा पाने के लिए) - पैट्स (पास्ता) - बेस (कम) - ब्रा (हाथ) फ्रांसीसी में विशिष्ट ध्वनियां उत्पन्न करने के लिए अक्षर 'ए' का प्रयोग अन्य स्वरों और व्यंजनों के संयोजन में भी किया जाता है। यह बहुत कुछ है कि कैसे सेब में 'ए' अंग्रेजी में पढ़ाए जाने वाले 'ए' से अलग है। अपने फ्रेंच उच्चारण पाठों को जारी रखने के लिए, इन 'ए' संयोजनों का पता लगाएंः - एआईएल - उच्चारण [ ahy ], अंग्रेजी "आंख" के समान। - एएन - उच्चारण [ आह ( एन )], आह एक जैसा लगता है और एन में नाक की आवाज है। तन्ते (चाची) में। - AU - उच्चारण एक "बंद" 'ओ' की तरह ही ' eau ' के समान तरीके से।
पत्र 'ए' फ्रेंच भाषा में समान है क्योंकि यह अंग्रेजी में है। आप अक्सर अकेले इस पत्र का उपयोग करेंगे, या एक उच्चारण कब्र के साथ, या अन्य अक्षरों के साथ कई संयोजनों में। प्रत्येक उदाहरण में थोड़ा अलग उच्चारण होता है और यह फ्रेंच पाठ आपको प्रत्येक को सीखने में मदद करेगा। फ्रेंच में 'ए' अक्षर का उच्चारण काफी सरल है। इसे आम तौर पर "पिता" में 'ए' की तरह कम या ज्यादा उच्चारण किया जाता है, लेकिन अंग्रेजी में फ्रांसीसी में होंठ के साथ व्यापकः सुनो। उच्चारण कब्र के साथ एक 'ए' एक ही तरीके से उच्चारण किया जाता है। 'ए' को कभी-कभी मुंह में आगे की ओर सुनाया जाता है और ऊपर वर्णित 'ए' ध्वनि के मुकाबले होंठ अधिक गोलाकार होते हैंः सुनो। यह आवाज अप्रचलित हो रही है, लेकिन जब अक्षर 'ए' लिखा जाता है तो तकनीकी रूप से उच्चारण किया जाना चाहिएः अब आप जानते हैं कि फ्रेंच में विभिन्न ए के उच्चारण कैसे करें, यह अभ्यास करने का समय है। उच्चारण सुनने के लिए इन शब्दों में से प्रत्येक पर क्लिक करें और जितनी बार आपको आवश्यकता हो उतनी बार दोहराएं। जब हमने चर्चा की विभिन्न संदर्भों में उपयोग किया जाता है तो ध्वनि के बीच अंतर पर ध्यान दें। - Quatre - अमी - agreéable - टैबैक - आत्मागर - पैट्स - बेस - ब्रा फ्रांसीसी में विशिष्ट ध्वनियां उत्पन्न करने के लिए अक्षर 'ए' का प्रयोग अन्य स्वरों और व्यंजनों के संयोजन में भी किया जाता है। यह बहुत कुछ है कि कैसे सेब में 'ए' अंग्रेजी में पढ़ाए जाने वाले 'ए' से अलग है। अपने फ्रेंच उच्चारण पाठों को जारी रखने के लिए, इन 'ए' संयोजनों का पता लगाएंः - एआईएल - उच्चारण [ ahy ], अंग्रेजी "आंख" के समान। - एएन - उच्चारण [ आह ], आह एक जैसा लगता है और एन में नाक की आवाज है। तन्ते में। - AU - उच्चारण एक "बंद" 'ओ' की तरह ही ' eau ' के समान तरीके से।
केपटाउन। उपमहाद्वीप की शीर्ष टीम भारत शुक्रवार को यहां दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ शुरू हो रहे पहले क्रिकेट टेस्ट के साथ जब विदेशी सरजमीं पर 12 टेस्ट के अपने अभियान की शुरुआत करेगा तो उसका लक्ष्य विदेशी सरजमीं पर भी अपना दबदबा बनाना होगा। भारत के कड़े 2018-19 सत्र की शुरुआत दक्षिण अफ्रीका में 3 टेस्टों के दौरे से होगी जबकि इसके बाद उसे इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के कठिन दौरों पर भी जाना है। यह सत्र भारतीय कप्तान विराट कोहली और उनके खिलाड़ियों के लिए काफी महत्वपूर्ण है जिनके सामने विदेशी सरजमीं पर भारत के प्रदर्शन में सुधार करने की चुनौती है। इसके लिए हालांकि भारतीय टीम अपने तेज गेंदबाजों पर काफी निर्भर करेगी। दुनिया की नंबर 1 टीम भारत ने दूसरे स्थान की टीम दक्षिण अफ्रीका पर मजबूत बढ़त बना रखी है और अगर टीम को टेस्ट श्रृंखला में 0-3 से क्लीनस्वीप का सामना करना पड़ता है तो भी वह अपनी शीर्ष रैंकिंग नहीं गंवाएगी। कोहली की टीम के लिए हालांकि यह सिर्फ अंक और रैंकिंग से जुड़ी श्रृंखला नहीं है। मेजबान दक्षिण अफ्रीका को अपने तेज गेंदबाजी आक्रमण से उम्मीद है कि वह भारत के मजबूत बल्लेबाजी क्रम को ध्वस्त कर देगा लेकिन लगातार 9 श्रृंखला जीतने के बाद भारतीय टीम आत्मविश्वास से भरी है कि वह किसी भी हालात में जीत दर्ज कर सकती है। भारत ने इन 9 में से 6 श्रृंखला स्वदेश में जीती जबकि 2 श्रीलंका और 1 विंडीज में अपने नाम की जहां हालात उसके अनुकूल थे। भारत ने पिछली श्रृंखला ऑस्ट्रेलिया में 2014-15 में गंवाई थी, जब उसे 4 टेस्टों की श्रृंखला में 0-2 से हार का सामना करना पड़ा था। दक्षिण अफ्रीका में हालांकि भारत का रिकॉर्ड काफी खराब है, जहां उसने 6 में से 5 श्रृंखला गंवाई हैं जबकि 1 ड्रॉ रही। भारत ने 1992 से दक्षिण अफ्रीका की सरजमीं पर खेले 17 टेस्टों में से सिर्फ 2 में जीत दर्ज की है। टीम ने 1 जीत 2006-07 में राहुल द्रविड़ के नेतृत्व में जबकि 1 2010-11 में महेंद्र सिंह धोनी के नेतृत्व में दर्ज की। भारत ने हालांकि पिछले 2 दौरों पर दक्षिण अफ्रीका में बेहतर प्रदर्शन किया है। टीम ने 2010-11 में श्रृंखला ड्रॉ कराई जबकि 2013-14 में उसे कड़ी टक्कर देने के बावजूद हार का सामना करना पड़ा। भारत की 2013-14 टीम के 13 खिलाड़ी मौजूदा टीम के सदस्य हैं, जो काफी अनुभव हासिल कर चुकी है और जीत दर्ज कर रही है। जहां तक इस आयोजन स्थल का सवाल है तो न्यूलैंड्स में 4 टेस्टों में भारतीय टीम कभी जीत दर्ज नहीं कर पाई और इस दौरान उसे 2 मैचों में हार का सामना करना पड़ा जबकि 2 मैच ड्रॉ रहे। अब देखना यह होगा कि कोहली की टीम एक कदम आगे बढ़ पाती है या नहीं, जो मेहमान कप्तान का दक्षिण अफ्रीकी सरजमीं पर सिर्फ तीसरा टेस्ट होगा। इस बार भारत का तेज गेंदबाजी आक्रमण मजबूत है, जो किसी भी बल्लेबाजी क्रम को ध्वस्त करने में सक्षम है। यहां सूखे की स्थिति के बावजूद न्यूजीलैंड्स का घसियाला विकेट आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पहले टेस्ट के विकेट को देखते हुए भारत कम से कम 3 गेंदबाजों के साथ उतरेगा और ऐसे में भुवनेश्वर कुमार, ईशांत शर्मा और मोहम्मद शमी को मौका मिलने की संभावना है। वायरल बीमारी के कारण रवीन्द्र जडेजा का खेलना संदिग्ध है और इससे अंतिम एकादश में एकमात्र स्पिनर के स्थान के लिए रविचन्द्रन अश्विन का दावा मजबूत होता है। भारत फॉर्म में चल रहे रोहित शर्मा के रूप में अतिरिक्त बल्लेबाज के साथ उतर सकता है जबकि हार्दिक पंड्या को ऑलराउंडर के रूप में मौका दिया जा सकता है। भारत के बल्लेबाजी क्रम में बदलाव की संभावना बेहद कम है। सलामी बल्लेबाज शिखर धवन फिट घोषित हो चुके हैं और वे मुरली विजय के साथ पारी की शुरुआत करने के लिए पहले विकल्प होंगे। लोकेश राहुल को ऐसे में बाहर बैठना होगा। उपकप्तान अजिंक्य रहाणे खराब फॉर्म से जूझ रहे हैं लेकिन इसके बावजूद विदेशी अभियान के पहले ही मैच में उन्हें बाहर किए जाने की संभावना नहीं है। रोहित श्रीलंका के खिलाफ कोलकाता टेस्ट का हिस्सा नहीं थे, जब भारत पिछली बार घसियाली पिच पर खेला था। लेकिन इसके बाद उन्होंने सभी प्रारूपों में 3 शतक के साथ अपना दावा मजबूत किया है। भारत की तरह दक्षिण अफ्रीकी टीम में भी चयन को लेकर अभी कुछ स्पष्ट नहीं है। डेल स्टेन को फिट घोषित किया गया है लेकिन इस तेज गेंदबाज का खेलना तय नहीं है। मेजबान टीम पिछले कुछ समय से 3 तेज गेंदबाजों और 1 स्पिनर के संयोजन के साथ उतर रही है जिसमें बाएं हाथ के स्पिनर केशव महाराज तेज गेंदबाजों का साथ दे रहे हैं। कागिसो रबादा, वर्नन फिलेंडर और मोर्ने मोर्कल मेजबान टीम के तेज गेंदबाजी आक्रमण का हिस्सा हो सकते हैं, क्योंकि तेज पिच को देखते हुए दक्षिण अफ्रीका भी अतिरिक्त बल्लेबाज के साथ उतरना चाहेगा। केटकीपर क्विंटन डिकॉक पैर की मांसपेशियों के खिंचाव से उबर चुके हैं और एकमात्र चिंता एबी डिविलियर्स की फिटनेस को लेकर है। डिविलियर्स जिम्बाब्वे के खिलाफ कार्यवाहक कप्तान थे लेकिन तब से नियमित कप्तान फॉफ डु प्लेसिस पूर्ण फिटनेस हासिल कर चुके हैं। डिविलियर्स अगर फिट होते हैं तो उन्हें मौका देने के लिए टीम ऑलराउंडर को बाहर कर सकती है। भारत : विराट कोहली (कप्तान), शिखर धवन, मुरली विजय, लोकेश राहुल, चेतेश्वर पुजारा, अजिंक्य रहाणे, रोहित शर्मा, ऋद्धिमान साहा, हार्दिक पंड्या, आर. अश्विन, रवीन्द्र जडेजा, भुवनेश्वर कुमार, ईशांत शर्मा, उमेश यादव, मोहम्मद शमी, जसप्रीत बुमराह और पार्थिव पटेल में से। दक्षिण अफ्रीका : फॉफ डु प्लेसिस (कप्तान), डीन एल्गर, एडेन मार्कराम, हाशिम अमला, तेम्बा बावुमा, थ्यूनिस डि ब्रुएन, क्विंटन डिकॉक, केशव महाराज, मोर्ने मोर्कल, डेल स्टेन, क्रिस मौरिस, वर्नन फिलेंडर, कागिसो रबादा और एंडिले फेहलुकवाओ। समय : मैच भारतीय समयानुसार दोपहर 2 बजे शुरू होगा। (भाषा)
केपटाउन। उपमहाद्वीप की शीर्ष टीम भारत शुक्रवार को यहां दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ शुरू हो रहे पहले क्रिकेट टेस्ट के साथ जब विदेशी सरजमीं पर बारह टेस्ट के अपने अभियान की शुरुआत करेगा तो उसका लक्ष्य विदेशी सरजमीं पर भी अपना दबदबा बनाना होगा। भारत के कड़े दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस सत्र की शुरुआत दक्षिण अफ्रीका में तीन टेस्टों के दौरे से होगी जबकि इसके बाद उसे इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के कठिन दौरों पर भी जाना है। यह सत्र भारतीय कप्तान विराट कोहली और उनके खिलाड़ियों के लिए काफी महत्वपूर्ण है जिनके सामने विदेशी सरजमीं पर भारत के प्रदर्शन में सुधार करने की चुनौती है। इसके लिए हालांकि भारतीय टीम अपने तेज गेंदबाजों पर काफी निर्भर करेगी। दुनिया की नंबर एक टीम भारत ने दूसरे स्थान की टीम दक्षिण अफ्रीका पर मजबूत बढ़त बना रखी है और अगर टीम को टेस्ट श्रृंखला में शून्य-तीन से क्लीनस्वीप का सामना करना पड़ता है तो भी वह अपनी शीर्ष रैंकिंग नहीं गंवाएगी। कोहली की टीम के लिए हालांकि यह सिर्फ अंक और रैंकिंग से जुड़ी श्रृंखला नहीं है। मेजबान दक्षिण अफ्रीका को अपने तेज गेंदबाजी आक्रमण से उम्मीद है कि वह भारत के मजबूत बल्लेबाजी क्रम को ध्वस्त कर देगा लेकिन लगातार नौ श्रृंखला जीतने के बाद भारतीय टीम आत्मविश्वास से भरी है कि वह किसी भी हालात में जीत दर्ज कर सकती है। भारत ने इन नौ में से छः श्रृंखला स्वदेश में जीती जबकि दो श्रीलंका और एक विंडीज में अपने नाम की जहां हालात उसके अनुकूल थे। भारत ने पिछली श्रृंखला ऑस्ट्रेलिया में दो हज़ार चौदह-पंद्रह में गंवाई थी, जब उसे चार टेस्टों की श्रृंखला में शून्य-दो से हार का सामना करना पड़ा था। दक्षिण अफ्रीका में हालांकि भारत का रिकॉर्ड काफी खराब है, जहां उसने छः में से पाँच श्रृंखला गंवाई हैं जबकि एक ड्रॉ रही। भारत ने एक हज़ार नौ सौ बानवे से दक्षिण अफ्रीका की सरजमीं पर खेले सत्रह टेस्टों में से सिर्फ दो में जीत दर्ज की है। टीम ने एक जीत दो हज़ार छः-सात में राहुल द्रविड़ के नेतृत्व में जबकि एक दो हज़ार दस-ग्यारह में महेंद्र सिंह धोनी के नेतृत्व में दर्ज की। भारत ने हालांकि पिछले दो दौरों पर दक्षिण अफ्रीका में बेहतर प्रदर्शन किया है। टीम ने दो हज़ार दस-ग्यारह में श्रृंखला ड्रॉ कराई जबकि दो हज़ार तेरह-चौदह में उसे कड़ी टक्कर देने के बावजूद हार का सामना करना पड़ा। भारत की दो हज़ार तेरह-चौदह टीम के तेरह खिलाड़ी मौजूदा टीम के सदस्य हैं, जो काफी अनुभव हासिल कर चुकी है और जीत दर्ज कर रही है। जहां तक इस आयोजन स्थल का सवाल है तो न्यूलैंड्स में चार टेस्टों में भारतीय टीम कभी जीत दर्ज नहीं कर पाई और इस दौरान उसे दो मैचों में हार का सामना करना पड़ा जबकि दो मैच ड्रॉ रहे। अब देखना यह होगा कि कोहली की टीम एक कदम आगे बढ़ पाती है या नहीं, जो मेहमान कप्तान का दक्षिण अफ्रीकी सरजमीं पर सिर्फ तीसरा टेस्ट होगा। इस बार भारत का तेज गेंदबाजी आक्रमण मजबूत है, जो किसी भी बल्लेबाजी क्रम को ध्वस्त करने में सक्षम है। यहां सूखे की स्थिति के बावजूद न्यूजीलैंड्स का घसियाला विकेट आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पहले टेस्ट के विकेट को देखते हुए भारत कम से कम तीन गेंदबाजों के साथ उतरेगा और ऐसे में भुवनेश्वर कुमार, ईशांत शर्मा और मोहम्मद शमी को मौका मिलने की संभावना है। वायरल बीमारी के कारण रवीन्द्र जडेजा का खेलना संदिग्ध है और इससे अंतिम एकादश में एकमात्र स्पिनर के स्थान के लिए रविचन्द्रन अश्विन का दावा मजबूत होता है। भारत फॉर्म में चल रहे रोहित शर्मा के रूप में अतिरिक्त बल्लेबाज के साथ उतर सकता है जबकि हार्दिक पंड्या को ऑलराउंडर के रूप में मौका दिया जा सकता है। भारत के बल्लेबाजी क्रम में बदलाव की संभावना बेहद कम है। सलामी बल्लेबाज शिखर धवन फिट घोषित हो चुके हैं और वे मुरली विजय के साथ पारी की शुरुआत करने के लिए पहले विकल्प होंगे। लोकेश राहुल को ऐसे में बाहर बैठना होगा। उपकप्तान अजिंक्य रहाणे खराब फॉर्म से जूझ रहे हैं लेकिन इसके बावजूद विदेशी अभियान के पहले ही मैच में उन्हें बाहर किए जाने की संभावना नहीं है। रोहित श्रीलंका के खिलाफ कोलकाता टेस्ट का हिस्सा नहीं थे, जब भारत पिछली बार घसियाली पिच पर खेला था। लेकिन इसके बाद उन्होंने सभी प्रारूपों में तीन शतक के साथ अपना दावा मजबूत किया है। भारत की तरह दक्षिण अफ्रीकी टीम में भी चयन को लेकर अभी कुछ स्पष्ट नहीं है। डेल स्टेन को फिट घोषित किया गया है लेकिन इस तेज गेंदबाज का खेलना तय नहीं है। मेजबान टीम पिछले कुछ समय से तीन तेज गेंदबाजों और एक स्पिनर के संयोजन के साथ उतर रही है जिसमें बाएं हाथ के स्पिनर केशव महाराज तेज गेंदबाजों का साथ दे रहे हैं। कागिसो रबादा, वर्नन फिलेंडर और मोर्ने मोर्कल मेजबान टीम के तेज गेंदबाजी आक्रमण का हिस्सा हो सकते हैं, क्योंकि तेज पिच को देखते हुए दक्षिण अफ्रीका भी अतिरिक्त बल्लेबाज के साथ उतरना चाहेगा। केटकीपर क्विंटन डिकॉक पैर की मांसपेशियों के खिंचाव से उबर चुके हैं और एकमात्र चिंता एबी डिविलियर्स की फिटनेस को लेकर है। डिविलियर्स जिम्बाब्वे के खिलाफ कार्यवाहक कप्तान थे लेकिन तब से नियमित कप्तान फॉफ डु प्लेसिस पूर्ण फिटनेस हासिल कर चुके हैं। डिविलियर्स अगर फिट होते हैं तो उन्हें मौका देने के लिए टीम ऑलराउंडर को बाहर कर सकती है। भारत : विराट कोहली , शिखर धवन, मुरली विजय, लोकेश राहुल, चेतेश्वर पुजारा, अजिंक्य रहाणे, रोहित शर्मा, ऋद्धिमान साहा, हार्दिक पंड्या, आर. अश्विन, रवीन्द्र जडेजा, भुवनेश्वर कुमार, ईशांत शर्मा, उमेश यादव, मोहम्मद शमी, जसप्रीत बुमराह और पार्थिव पटेल में से। दक्षिण अफ्रीका : फॉफ डु प्लेसिस , डीन एल्गर, एडेन मार्कराम, हाशिम अमला, तेम्बा बावुमा, थ्यूनिस डि ब्रुएन, क्विंटन डिकॉक, केशव महाराज, मोर्ने मोर्कल, डेल स्टेन, क्रिस मौरिस, वर्नन फिलेंडर, कागिसो रबादा और एंडिले फेहलुकवाओ। समय : मैच भारतीय समयानुसार दोपहर दो बजे शुरू होगा।
लालू यादव इसी साल अक्टूबर में जमानत के बाद सिंगापुर गए थे। वहां डॉक्टरों ने उनको किडनी ट्रांसप्लांट करने का सुझाव दिया था। लालू यादव के परिजनों के साथ किडनी की मैचिंग देखी गई थी। जिसमें रोहिणी की किडनी मैच हुई थी। जिसके बाद बीती 25 नवंबर को लालू यादव सिंगापुर चले गए थे। जहां किडनी ट्रांसप्लांट हुआ। Bihar: पटना में रविवार को जेडीयू के खुले अधिवेशन में नीतीश ने कुढ़नी की हार की जिम्मेदारी अपने ही प्रत्याशी मनोज कुमार सिंह पर डाल दी। इस दौरान नीतीश ने एक बार फिर जेडीयू और अन्य विपक्षी दलों में एकजुटता का राग भी अलापा। बता दें कि नीतीश ने मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करने का काम बीते दिनों शुरू किया था। बिहार की कुढ़नी विधानसभा सीट को जेडीयू ने उपचुनाव में गंवा दिया। इसके साथ ही सीएम नीतीश कुमार पर मुसीबतें चौतरफा टूट पड़ती दिख रही हैं। सरकार यानी महागठबंधन में शामिल राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की तरफ से नीतीश पर इस्तीफा देने का दबाव पड़ने लगा है। बीजेपी भी नीतीश कुमार पर बुरी तरह हमलावर है। एक तरफ गुजरात विधानसभा चुनाव 2022 का आज दूसरा दौर है। वहीं, यूपी की मैनपुरी लोकसभा सीट के अलावा रामपुर और खतौली विधानसभा सीटों पर भी उपचुनाव हैं। इनके अलावा 4 और विधानसभा सीटों पर भी आज उपचुनाव के लिए वोट डाले जाएंगे। Bihar: बिहार में आरजेडी के साथ बनी इस सरकार में लालू के छोटे लाल तेजस्वी यादव उपमुख्यमंत्री बने हैं। नीतीश सरकार में आने के बाद से ही वो तेजस्वी यादव चर्चा में बने हुए हैं लेकिन अब इस बीच लालू के इन छोटे लाल ने ऐसा बयान दे दिया है जिसके बाद माना जा रहा है कि वो नीतीश कुमार को दगा दे सकते हैं। बिहार में सीएम नीतीश कुमार ने बीजेपी का दामन छुड़ाकर आरजेडी और कांग्रेस से नाता जोड़ा है। जबसे उन्होंने पुराने पाले में वापसी की है, तभी से बिहार के अलग-अलग इलाकों में हत्या और अन्य वारदात बढ़ गए हैं। राजधानी पटना में भी एक छात्रा के सिर में गोली मार दी गई थी। इस घटना के अलावा सेना के जवान को भी बदमाशों ने मार डाला था। Gopalganj By-Election: बता दें कि इस उपुचनाव में एआईएमआईएम ने भी किस्मत आजमाई थी। ध्यान रहे कि एआईएमआईएम प्रत्याशी अब्दुल सलाम को 12, 214 वोट प्राप्त हुए हैं। वहीं, राजद प्रत्याशी साधु यादव की पत्नी इंदिरा यादव को 8,854 वोट मिले हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, गोपालगंज की 2 हजार 170 वोटरों ने मोटा बटन दबाकर अपनी भावनाओं को जाहिर किया है। वैसे महज 6 राज्यों की 7 विधानसभा सीटों के चुनाव नतीजों का मसला है, लेकिन आज शाम तक ये सीटें बीजेपी के अलावा विपक्षी कांग्रेस, शिवसेना, आरजेडी और टीआरएस के लिए बड़ा संदेश लेकर आने वाली हैं। इन सीटों पर बीते दिनों उपचुनाव हुए थे और इसके नतीजे आज आ रहे हैं। जिनमें जीत और हार अगले चुनावों का रुख तय कर सकते हैं। बिहार में नीतीश कुमार ने बीजेपी का साथ छोड़कर आरजेडी और कांग्रेस से हाथ मिलाया और सरकार चलाने लगे। नीतीश ने कहा था कि वो अब इनका साथ छोड़कर नहीं जाएंगे। अब घटनाक्रम ऐसे हो रहे हैं कि ये सवाल उठ रहा है कि बिहार में सत्तारूढ़ गठबंधन में सब ठीक है या नहीं? इसकी वजह नीतीश और हम पार्टी के जीतनराम बने हैं। अगर ये भी मान लिया जाए कि मोकामा सीट तो आरजेडी की थी और वहां तेजस्वी उम्मीदवार उतार रहे हैं, लेकिन गोपालगंज पर भी दावा ठोककर तेजस्वी ने नीतीश कुमार को झटका दिया है। क्योंकि ये सीट वो चाहते, तो नीतीश की पार्टी को दे सकते थे। गोपालगंज सीट को 2020 में बीजेपी ने जीता था। नीतीश इस सीट के लिए दावेदारी कर सकते थे।
लालू यादव इसी साल अक्टूबर में जमानत के बाद सिंगापुर गए थे। वहां डॉक्टरों ने उनको किडनी ट्रांसप्लांट करने का सुझाव दिया था। लालू यादव के परिजनों के साथ किडनी की मैचिंग देखी गई थी। जिसमें रोहिणी की किडनी मैच हुई थी। जिसके बाद बीती पच्चीस नवंबर को लालू यादव सिंगापुर चले गए थे। जहां किडनी ट्रांसप्लांट हुआ। Bihar: पटना में रविवार को जेडीयू के खुले अधिवेशन में नीतीश ने कुढ़नी की हार की जिम्मेदारी अपने ही प्रत्याशी मनोज कुमार सिंह पर डाल दी। इस दौरान नीतीश ने एक बार फिर जेडीयू और अन्य विपक्षी दलों में एकजुटता का राग भी अलापा। बता दें कि नीतीश ने मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करने का काम बीते दिनों शुरू किया था। बिहार की कुढ़नी विधानसभा सीट को जेडीयू ने उपचुनाव में गंवा दिया। इसके साथ ही सीएम नीतीश कुमार पर मुसीबतें चौतरफा टूट पड़ती दिख रही हैं। सरकार यानी महागठबंधन में शामिल राष्ट्रीय जनता दल की तरफ से नीतीश पर इस्तीफा देने का दबाव पड़ने लगा है। बीजेपी भी नीतीश कुमार पर बुरी तरह हमलावर है। एक तरफ गुजरात विधानसभा चुनाव दो हज़ार बाईस का आज दूसरा दौर है। वहीं, यूपी की मैनपुरी लोकसभा सीट के अलावा रामपुर और खतौली विधानसभा सीटों पर भी उपचुनाव हैं। इनके अलावा चार और विधानसभा सीटों पर भी आज उपचुनाव के लिए वोट डाले जाएंगे। Bihar: बिहार में आरजेडी के साथ बनी इस सरकार में लालू के छोटे लाल तेजस्वी यादव उपमुख्यमंत्री बने हैं। नीतीश सरकार में आने के बाद से ही वो तेजस्वी यादव चर्चा में बने हुए हैं लेकिन अब इस बीच लालू के इन छोटे लाल ने ऐसा बयान दे दिया है जिसके बाद माना जा रहा है कि वो नीतीश कुमार को दगा दे सकते हैं। बिहार में सीएम नीतीश कुमार ने बीजेपी का दामन छुड़ाकर आरजेडी और कांग्रेस से नाता जोड़ा है। जबसे उन्होंने पुराने पाले में वापसी की है, तभी से बिहार के अलग-अलग इलाकों में हत्या और अन्य वारदात बढ़ गए हैं। राजधानी पटना में भी एक छात्रा के सिर में गोली मार दी गई थी। इस घटना के अलावा सेना के जवान को भी बदमाशों ने मार डाला था। Gopalganj By-Election: बता दें कि इस उपुचनाव में एआईएमआईएम ने भी किस्मत आजमाई थी। ध्यान रहे कि एआईएमआईएम प्रत्याशी अब्दुल सलाम को बारह, दो सौ चौदह वोट प्राप्त हुए हैं। वहीं, राजद प्रत्याशी साधु यादव की पत्नी इंदिरा यादव को आठ,आठ सौ चौवन वोट मिले हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, गोपालगंज की दो हजार एक सौ सत्तर वोटरों ने मोटा बटन दबाकर अपनी भावनाओं को जाहिर किया है। वैसे महज छः राज्यों की सात विधानसभा सीटों के चुनाव नतीजों का मसला है, लेकिन आज शाम तक ये सीटें बीजेपी के अलावा विपक्षी कांग्रेस, शिवसेना, आरजेडी और टीआरएस के लिए बड़ा संदेश लेकर आने वाली हैं। इन सीटों पर बीते दिनों उपचुनाव हुए थे और इसके नतीजे आज आ रहे हैं। जिनमें जीत और हार अगले चुनावों का रुख तय कर सकते हैं। बिहार में नीतीश कुमार ने बीजेपी का साथ छोड़कर आरजेडी और कांग्रेस से हाथ मिलाया और सरकार चलाने लगे। नीतीश ने कहा था कि वो अब इनका साथ छोड़कर नहीं जाएंगे। अब घटनाक्रम ऐसे हो रहे हैं कि ये सवाल उठ रहा है कि बिहार में सत्तारूढ़ गठबंधन में सब ठीक है या नहीं? इसकी वजह नीतीश और हम पार्टी के जीतनराम बने हैं। अगर ये भी मान लिया जाए कि मोकामा सीट तो आरजेडी की थी और वहां तेजस्वी उम्मीदवार उतार रहे हैं, लेकिन गोपालगंज पर भी दावा ठोककर तेजस्वी ने नीतीश कुमार को झटका दिया है। क्योंकि ये सीट वो चाहते, तो नीतीश की पार्टी को दे सकते थे। गोपालगंज सीट को दो हज़ार बीस में बीजेपी ने जीता था। नीतीश इस सीट के लिए दावेदारी कर सकते थे।
पेरिस, (आईएएनएस)। फांस में सीमा शुल्क विभाग के अधिकारियों को उस समय बड़ी सफलता हाथ लगी जब उन्होंने स्पेन की सीमा के निकट लगभग 175 किलोग्राम कोकीन जब्त कर लिया। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार स्पेन की सीमा के निकट दक्षिणी इलाके में पेरिनेस-ओरियंटालेस क्षेत्र के समीप कोकीन की बरामदगी की गई। पुलिस का कहना है कि कोकीन की कीमत अभी नहीं आंकी गई है और अभी यह पता नहीं चल पया है कि इसे कहां से लाया गया था और कहां ले जाया जाना था। फांस में जनवरी में नारकोटिक्स विभाग ने 700 किलोग्राम कोकीन की बरामदगी की थी उसके बाद से ही अब जाकर इतनी बड़ी मात्रा में कोकीन की बरामदगी की गई है।
पेरिस, । फांस में सीमा शुल्क विभाग के अधिकारियों को उस समय बड़ी सफलता हाथ लगी जब उन्होंने स्पेन की सीमा के निकट लगभग एक सौ पचहत्तर किलोग्रामग्राम कोकीन जब्त कर लिया। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार स्पेन की सीमा के निकट दक्षिणी इलाके में पेरिनेस-ओरियंटालेस क्षेत्र के समीप कोकीन की बरामदगी की गई। पुलिस का कहना है कि कोकीन की कीमत अभी नहीं आंकी गई है और अभी यह पता नहीं चल पया है कि इसे कहां से लाया गया था और कहां ले जाया जाना था। फांस में जनवरी में नारकोटिक्स विभाग ने सात सौ किलोग्रामग्राम कोकीन की बरामदगी की थी उसके बाद से ही अब जाकर इतनी बड़ी मात्रा में कोकीन की बरामदगी की गई है।
* अहिंसा और व्रत - विधान निकाल देना अवसरवादिता है; उस झोंके के समक्ष पेड़ की तरह खड़े होकर उसके आघातो को सहना, अपनी शक्ति भर जूझना दृढ़ता है, भले ही वायु के बेग की शक्ति अपेक्षाकृत होने के कारण धराशायी ही क्यों न होना पड़े; और एक पर्वत की भाँति खड़े होकर वायु के उस प्रबल झोंके को सह जाना, विचलित न होना, उस वायु को रोक देना और उसकी दिशा मोड़ देना है। ससार में मनुष्य भी इसी प्रकार चार प्रकार के हैं। एक वे, जो पापों के सामने सदा ही उड़ते रहते हैं। पाप जिनका सहज रूप बन गया है। उन्हें पापों से कोई सकोच, कोई घृणा मनुष्यों के चार प्रकार नहीं रह गई बल्कि पापों में रस लेते हैं। दूसरे वे हैं, जो पाप को तो बुरा नहीं मानते, किन्तु लोकलाज या दूसरे कारणों से करते नहीं। तीसरे व्यक्ति वे हैं, जिन्हें पापों से भय भी है, घृणा भी है, वे अपनी हार्दिक प्रेरणा से उनसे बचना भी चाहते हैं, किन्तु कभी-कभी परिस्थितियों के कारण अन्य विवश समझते हुए फिर भी वह करना पड़ता है। और करने के बाद उन्हें अपने उस कृत्य पर पश्चाताप भी होता है और ग्लानि भी । चौथे व्यक्ति वे हैं, जो पाप को हर काल और हर परिस्थिति में प्रवाछनीय मानकर उसका सदा प्रतिरोध करते हैं, आत्मा की अनन्त शक्ति में जिनका विश्वास है, इसलिये विवशता नाम की कोई भी चीज उनके सामने तुच्छ है, जो न केवल पाप को अपनी निरोध शक्ति से प्रभावहीन बना डालते हैं, बल्कि पाप को मोड़ देकर पापी पर भी पाप की व्यर्थता सिद्ध कर देते और उसे धार्मिक बना लेते हैं । पहले व्यक्ति मिथ्यादृष्टि है; दूसरे पाक्षिक गृहस्थ; तीसरे नैष्ठिक
* अहिंसा और व्रत - विधान निकाल देना अवसरवादिता है; उस झोंके के समक्ष पेड़ की तरह खड़े होकर उसके आघातो को सहना, अपनी शक्ति भर जूझना दृढ़ता है, भले ही वायु के बेग की शक्ति अपेक्षाकृत होने के कारण धराशायी ही क्यों न होना पड़े; और एक पर्वत की भाँति खड़े होकर वायु के उस प्रबल झोंके को सह जाना, विचलित न होना, उस वायु को रोक देना और उसकी दिशा मोड़ देना है। ससार में मनुष्य भी इसी प्रकार चार प्रकार के हैं। एक वे, जो पापों के सामने सदा ही उड़ते रहते हैं। पाप जिनका सहज रूप बन गया है। उन्हें पापों से कोई सकोच, कोई घृणा मनुष्यों के चार प्रकार नहीं रह गई बल्कि पापों में रस लेते हैं। दूसरे वे हैं, जो पाप को तो बुरा नहीं मानते, किन्तु लोकलाज या दूसरे कारणों से करते नहीं। तीसरे व्यक्ति वे हैं, जिन्हें पापों से भय भी है, घृणा भी है, वे अपनी हार्दिक प्रेरणा से उनसे बचना भी चाहते हैं, किन्तु कभी-कभी परिस्थितियों के कारण अन्य विवश समझते हुए फिर भी वह करना पड़ता है। और करने के बाद उन्हें अपने उस कृत्य पर पश्चाताप भी होता है और ग्लानि भी । चौथे व्यक्ति वे हैं, जो पाप को हर काल और हर परिस्थिति में प्रवाछनीय मानकर उसका सदा प्रतिरोध करते हैं, आत्मा की अनन्त शक्ति में जिनका विश्वास है, इसलिये विवशता नाम की कोई भी चीज उनके सामने तुच्छ है, जो न केवल पाप को अपनी निरोध शक्ति से प्रभावहीन बना डालते हैं, बल्कि पाप को मोड़ देकर पापी पर भी पाप की व्यर्थता सिद्ध कर देते और उसे धार्मिक बना लेते हैं । पहले व्यक्ति मिथ्यादृष्टि है; दूसरे पाक्षिक गृहस्थ; तीसरे नैष्ठिक
नई दिल्लीः बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान (Aamir Khan) की बेटी इरा खान (Ira Khan) सोशल मीडिया (Social Media) पर काफी एक्टिव रहती हैं. इरा खान (Ira Khan) अक्सर अलग अलग मुद्दों पर अपनी राय एक दम बेबाकी से रखती हैं. इरा लोगों को मेंटल हेल्थ के प्रति जागरूक करने के लिए सराहनीय प्रयास कर रही हैं, और ऐसे में अब उन्हें 25 इंटर्न्स की जरूरत है. इरा ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट डालकर इसको लेकर जॉब वैकेंसी निकाली है. अपनी पोस्ट में इरा ने जानकारी दी है कि उन्हें मेंटल हेल्थ में लोगों की मदद करने में रुचि रखने वाले 25 इंटर्न्स की जरूरत है. इरा खान ने बताया कि यह इंटर्नशिप एक महीने की होगी. हर कैंडिडेट को 5 हजार रूपये दिए जाएंगे. इरा खान (Ira Khan) ने पोस्ट में बताया कि उन्हें 25 इंटर्न्स की जरूरत है जो कि मेंटल हेल्थ में लोगों की मदद करने में इंटरेस्ट रखते हों. यह एक महीने की इंटर्नशिप होगी जिसके लिए कैंडिडेट को 5 हजार रुपये सैलरी भी दी जाएगी. इरा को देशभर के अलग-अलग राज्यों से इंटर्न्स की जरूरत है. इस तरह वे लोग अलग-अलग भाषा बोलने वाले सभी लोगों की सहायता कर सकते हैं. इंटर्न का काम जरूरतमंद को कॉल करना और ईमेल के जरिए उनसे संपर्क करना होगा. यह 8 घंटे की शिफ्ट होगी जो कि 22 मार्च से शुरू हो जाएगी. इस पोस्ट में इरा खान ने एक ईमेल एड्रेस भी लिखा है. उन्होंने ऐसे लोगों से भी आवेदन मांगे हैं, जो इस काम को मुफ्त में करने के लिए इच्छुक हैं. आपको बता दें कि इरा ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के मौके पर खुद के डिप्रेशन में होने के अनुभवों के बारे में बताया था. डिप्रेशन पर खुलकर बोलने के लिए इरा की काफी तारीफ हुई थी. इसके अलावा इरा हमेशा हर मुद्दे पर अपनी राय बड़ी बेबाकी के साथ रखती हैं. उन्होंने 14 फरवरी को यानी वैलेंटाइन डे के मौके पर अपने जिम ट्रेनर नुपुर शिखरे के साथ रिलेशनशिप पर मुहर लगाई है. इससे पहले वे म्युजिक कंपोजर मिशाल कृपलानी के साथ रिलेशनशिप में थीं. नुपुर के प्यार में पागल इरा उनके नाम का टैटू भी गुदवा चुकी हैं. इरा सबसे ज्यादा तब चर्चा में आई थीं, जब उन्होंने अपने साथ यौन शोषण होने का खुलासा किया था. उन्होंने सोशल मीडिया पर बताया था कि वो जब महज 14 साल की थी, तो उनका यौन शोषण हुआ था.
नई दिल्लीः बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान की बेटी इरा खान सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. इरा खान अक्सर अलग अलग मुद्दों पर अपनी राय एक दम बेबाकी से रखती हैं. इरा लोगों को मेंटल हेल्थ के प्रति जागरूक करने के लिए सराहनीय प्रयास कर रही हैं, और ऐसे में अब उन्हें पच्चीस इंटर्न्स की जरूरत है. इरा ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट डालकर इसको लेकर जॉब वैकेंसी निकाली है. अपनी पोस्ट में इरा ने जानकारी दी है कि उन्हें मेंटल हेल्थ में लोगों की मदद करने में रुचि रखने वाले पच्चीस इंटर्न्स की जरूरत है. इरा खान ने बताया कि यह इंटर्नशिप एक महीने की होगी. हर कैंडिडेट को पाँच हजार रूपये दिए जाएंगे. इरा खान ने पोस्ट में बताया कि उन्हें पच्चीस इंटर्न्स की जरूरत है जो कि मेंटल हेल्थ में लोगों की मदद करने में इंटरेस्ट रखते हों. यह एक महीने की इंटर्नशिप होगी जिसके लिए कैंडिडेट को पाँच हजार रुपये सैलरी भी दी जाएगी. इरा को देशभर के अलग-अलग राज्यों से इंटर्न्स की जरूरत है. इस तरह वे लोग अलग-अलग भाषा बोलने वाले सभी लोगों की सहायता कर सकते हैं. इंटर्न का काम जरूरतमंद को कॉल करना और ईमेल के जरिए उनसे संपर्क करना होगा. यह आठ घंटाटे की शिफ्ट होगी जो कि बाईस मार्च से शुरू हो जाएगी. इस पोस्ट में इरा खान ने एक ईमेल एड्रेस भी लिखा है. उन्होंने ऐसे लोगों से भी आवेदन मांगे हैं, जो इस काम को मुफ्त में करने के लिए इच्छुक हैं. आपको बता दें कि इरा ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के मौके पर खुद के डिप्रेशन में होने के अनुभवों के बारे में बताया था. डिप्रेशन पर खुलकर बोलने के लिए इरा की काफी तारीफ हुई थी. इसके अलावा इरा हमेशा हर मुद्दे पर अपनी राय बड़ी बेबाकी के साथ रखती हैं. उन्होंने चौदह फरवरी को यानी वैलेंटाइन डे के मौके पर अपने जिम ट्रेनर नुपुर शिखरे के साथ रिलेशनशिप पर मुहर लगाई है. इससे पहले वे म्युजिक कंपोजर मिशाल कृपलानी के साथ रिलेशनशिप में थीं. नुपुर के प्यार में पागल इरा उनके नाम का टैटू भी गुदवा चुकी हैं. इरा सबसे ज्यादा तब चर्चा में आई थीं, जब उन्होंने अपने साथ यौन शोषण होने का खुलासा किया था. उन्होंने सोशल मीडिया पर बताया था कि वो जब महज चौदह साल की थी, तो उनका यौन शोषण हुआ था.
(ड) कारणवोधक (Causal) - हि, तत्, तेन, इत्यादि । ( च ) प्रश्नबोधक ( Interrogative ) --आहो, आहोस्विन्, उत्, उताहो, विम्, किंतु, विभुत, किंस्वित्, ननु, नवा, नु, इत्यादि । निषेधार्थक ( Affirmatives and (छ) स्वीकृतिसूचक और निषेधार्यक Negatives ) -- अग, अथ किम्, आम्, अद्धा, इत्यादि । (ज) समय-बोधक ( Conjunctions of time ) -- यावत्- तावत्, यदा, तदा, आदि । (झ) अथ प्रारम्भ - सूचव अव्यय है और इति समाप्ति सूचक । ५. विस्मय-सूचक अव्यय (Interjections ) ३७७. प्रो० बेन ( Bain ) का कथन है कि-- विस्मय-सूचक अव्यय वस्तुन भाषणावयवो मे नही है, क्योंकि ये वाक्य-रचना मे अन्तर्गत नही होते हैं, ये आकस्मिक भावोद्रेक के कारण सहसा उच्चरित विस्मय-सूचक शब्द हैं । हृदय के भावोद्रेक की विभिन्न अवस्थाओं के सूचक विभिन्न शब्द हैं । (क) ये है -- आ, इ, उ, ए, ऐ, ओ, अह, अहह, अहो, वत, ह, हा, हाहा, आदि । ये आश्चर्य, सेद या दुस आदि के बोध है । (ख) किम्, धिक् आदि। ये घृणा-सूचक हैं । (ग) हा, बत आदि । ये शोक, दुखादि के सूचक हैं । (घ) हा, हाहा, हन्त । ये दुस-बोधक हैं । (ङ) आ, हम्, हुम् आदि। ये त्रोध और घृणा आदि के सूचक हैं । (च) हन्त आदि । ये हर्ष-सूचक हैं । (छ) कुछ विस्मय-सूचक अव्यय संबोधन या पुकारने के अर्थ में आते हैं । इनमे से कुछ ये है ( १ ) इनमे से कुछ आदर का भाव प्रकट करते हैं। जैसे- अग, अये, अहो, बत, उ, ए, ओ, प्याट्, भो, हहो, हे, है, हो, आदि । (२) कुछ घृणा या अनादर का भाव प्रकट करते हैं। जैसे - अग, अरे, अवे, रे, रेरे, अरेरे, आदि । (३) श्रीषट्, वौषट् और वपट्, ये देवो और पितरो को आहुति आदि देने में प्रयुक्त होते हैं । (४) स्वाहा देवो के लिए और स्वधा पितरो को आहुति देने में प्रयुक्त होता है।
कारणवोधक - हि, तत्, तेन, इत्यादि । प्रश्नबोधक --आहो, आहोस्विन्, उत्, उताहो, विम्, किंतु, विभुत, किंस्वित्, ननु, नवा, नु, इत्यादि । निषेधार्थक स्वीकृतिसूचक और निषेधार्यक Negatives ) -- अग, अथ किम्, आम्, अद्धा, इत्यादि । समय-बोधक -- यावत्- तावत्, यदा, तदा, आदि । अथ प्रारम्भ - सूचव अव्यय है और इति समाप्ति सूचक । पाँच. विस्मय-सूचक अव्यय तीन सौ सतहत्तर. प्रोशून्य बेन का कथन है कि-- विस्मय-सूचक अव्यय वस्तुन भाषणावयवो मे नही है, क्योंकि ये वाक्य-रचना मे अन्तर्गत नही होते हैं, ये आकस्मिक भावोद्रेक के कारण सहसा उच्चरित विस्मय-सूचक शब्द हैं । हृदय के भावोद्रेक की विभिन्न अवस्थाओं के सूचक विभिन्न शब्द हैं । ये है -- आ, इ, उ, ए, ऐ, ओ, अह, अहह, अहो, वत, ह, हा, हाहा, आदि । ये आश्चर्य, सेद या दुस आदि के बोध है । किम्, धिक् आदि। ये घृणा-सूचक हैं । हा, बत आदि । ये शोक, दुखादि के सूचक हैं । हा, हाहा, हन्त । ये दुस-बोधक हैं । आ, हम्, हुम् आदि। ये त्रोध और घृणा आदि के सूचक हैं । हन्त आदि । ये हर्ष-सूचक हैं । कुछ विस्मय-सूचक अव्यय संबोधन या पुकारने के अर्थ में आते हैं । इनमे से कुछ ये है इनमे से कुछ आदर का भाव प्रकट करते हैं। जैसे- अग, अये, अहो, बत, उ, ए, ओ, प्याट्, भो, हहो, हे, है, हो, आदि । कुछ घृणा या अनादर का भाव प्रकट करते हैं। जैसे - अग, अरे, अवे, रे, रेरे, अरेरे, आदि । श्रीषट्, वौषट् और वपट्, ये देवो और पितरो को आहुति आदि देने में प्रयुक्त होते हैं । स्वाहा देवो के लिए और स्वधा पितरो को आहुति देने में प्रयुक्त होता है।
देहरादूनः मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मंगलवार सुबह केदारनाथ पहुंचे। बाबा केदार के दर्शन के बाद उन्होंने पुनर्निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। सीएम बनने के बाद पुष्कर सिंह धामी पहली बार केदारनाथ पहंचे हैं। उनका केदारनाथ जाने का कार्यक्रम खराब मौसम के कारण इससे पहले तीन बार स्थगित हो चुका था। उनका दोपहर को देहरादून लौटने का कार्यक्रम है। बता दें कि पीएम मोदी सात अक्तूबर को उत्तराखंड आ रहे हैं। हालांकि अभी तक उनका केदारनाथ जाने का कोई कार्यक्रम तय नहीं है, लेकिन उनके केदारनाथ जाने की चर्चा जरूर है। पीएम ऋषिकेश स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में ऑक्सीजन प्लांट के उद्घाटन के कार्यक्रम में शामिल होंगे। पीएम के दौरे से पूर्व सीएम के केदारनाथ जाने को लेकर एक बार फिर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
देहरादूनः मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मंगलवार सुबह केदारनाथ पहुंचे। बाबा केदार के दर्शन के बाद उन्होंने पुनर्निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। सीएम बनने के बाद पुष्कर सिंह धामी पहली बार केदारनाथ पहंचे हैं। उनका केदारनाथ जाने का कार्यक्रम खराब मौसम के कारण इससे पहले तीन बार स्थगित हो चुका था। उनका दोपहर को देहरादून लौटने का कार्यक्रम है। बता दें कि पीएम मोदी सात अक्तूबर को उत्तराखंड आ रहे हैं। हालांकि अभी तक उनका केदारनाथ जाने का कोई कार्यक्रम तय नहीं है, लेकिन उनके केदारनाथ जाने की चर्चा जरूर है। पीएम ऋषिकेश स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में ऑक्सीजन प्लांट के उद्घाटन के कार्यक्रम में शामिल होंगे। पीएम के दौरे से पूर्व सीएम के केदारनाथ जाने को लेकर एक बार फिर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राष्ट्रीय राजधानी में 'जहां वोट, वहां वैक्सीन' अभियान की शुरुआत के एक दिन बाद बुधवार को एक टीकाकरण केंद्र का मुआयना किया। इस अभियान का लक्ष्य 45 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को अपने विधानसभा क्षेत्र के पोलिंग स्टेशन पर जाकर टीके की खुराक लेने के लिए प्रेरित करना है। केजरीवाल ने एक ट्वीट में कहा, "जहां वोट, वहीं वैक्सीन अभियान के तहत शुरू हुए एक केंद्र का आज दौरा किया। वहां लोग इस बात को लेकर बेहद खुश नजर आए कि उनके घर के पास ही जहां वे मतदान करने आए थे, वहीं अब टीके की खुराक भी दी जा रही है। ऑनलाइन बुकिंग का भी झंझट नहीं, बूथ अधिकारी लोगों के घर जाकर समय दे कर आ रहे हैं। " इस अभियान की शुरुआत बल्लीमारान विधानसभा क्षेत्र से मंगलवार को हुई। बता दें कि दिल्ली में 45 वर्ष से अधिक उम्र की श्रेणी के लिए कोवैक्सीन की डोज मंगलवार को लगभग खत्म हो गईं। सरकारी अस्पतालों और वैक्सीनेशन केंद्रों पर कोवैक्सीन का टीकाकरण बुधवार से बंद रहेगा। दिल्ली सरकार ने मंगलवार शाम को आधिकारिक रूप से यह जानकारी दी। दिल्ली सरकार के मुताबिक दिल्ली में 45 वर्ष से अधिक उम्र की श्रेणी के लिए मंगलवार सुबह तक 5. 50 लाख वैक्सीन की डोज उपलब्ध थीं। इनमें 5. 44 लाख कोवीशील्ड और 8 हजार कोवैक्सीन की डोज शामिल थीं। वहीं मंगलवार को दिल्ली के 70 वाडरें में जहां वोट वहीं वैक्सीनेशन अभियान की शुरूआत भी हुई है। इसके तहत जहां पर व्यक्ति वोट डालने जाता है, उसी बूथ पर उनके लिए वैक्सीनेशन सेंटर बनाया गया है। इसके लिए दिल्ली सरकार की टीमें बूथ के हिसाब से स्थानीय लोगों के पास जा रही हैं और 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए स्लॉट बुक कर रही हैं। केजरीवाल सरकार ने जानकारी देते हुए कहा कि 18 से 44 वर्ष के युवाओं के लिए कोवैक्सीन की डोज उपलब्ध हैं। कोवीशील्ड का स्टॉक अभी केंद्र सरकार से नहीं मिला है। केंद्र सरकार से अपील है कि युवाओं के लिए जल्द से जल्द वैक्सीन उपलब्ध करवाएं।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राष्ट्रीय राजधानी में 'जहां वोट, वहां वैक्सीन' अभियान की शुरुआत के एक दिन बाद बुधवार को एक टीकाकरण केंद्र का मुआयना किया। इस अभियान का लक्ष्य पैंतालीस साल से ज्यादा उम्र के लोगों को अपने विधानसभा क्षेत्र के पोलिंग स्टेशन पर जाकर टीके की खुराक लेने के लिए प्रेरित करना है। केजरीवाल ने एक ट्वीट में कहा, "जहां वोट, वहीं वैक्सीन अभियान के तहत शुरू हुए एक केंद्र का आज दौरा किया। वहां लोग इस बात को लेकर बेहद खुश नजर आए कि उनके घर के पास ही जहां वे मतदान करने आए थे, वहीं अब टीके की खुराक भी दी जा रही है। ऑनलाइन बुकिंग का भी झंझट नहीं, बूथ अधिकारी लोगों के घर जाकर समय दे कर आ रहे हैं। " इस अभियान की शुरुआत बल्लीमारान विधानसभा क्षेत्र से मंगलवार को हुई। बता दें कि दिल्ली में पैंतालीस वर्ष से अधिक उम्र की श्रेणी के लिए कोवैक्सीन की डोज मंगलवार को लगभग खत्म हो गईं। सरकारी अस्पतालों और वैक्सीनेशन केंद्रों पर कोवैक्सीन का टीकाकरण बुधवार से बंद रहेगा। दिल्ली सरकार ने मंगलवार शाम को आधिकारिक रूप से यह जानकारी दी। दिल्ली सरकार के मुताबिक दिल्ली में पैंतालीस वर्ष से अधिक उम्र की श्रेणी के लिए मंगलवार सुबह तक पाँच. पचास लाख वैक्सीन की डोज उपलब्ध थीं। इनमें पाँच. चौंतालीस लाख कोवीशील्ड और आठ हजार कोवैक्सीन की डोज शामिल थीं। वहीं मंगलवार को दिल्ली के सत्तर वाडरें में जहां वोट वहीं वैक्सीनेशन अभियान की शुरूआत भी हुई है। इसके तहत जहां पर व्यक्ति वोट डालने जाता है, उसी बूथ पर उनके लिए वैक्सीनेशन सेंटर बनाया गया है। इसके लिए दिल्ली सरकार की टीमें बूथ के हिसाब से स्थानीय लोगों के पास जा रही हैं और पैंतालीस वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए स्लॉट बुक कर रही हैं। केजरीवाल सरकार ने जानकारी देते हुए कहा कि अट्ठारह से चौंतालीस वर्ष के युवाओं के लिए कोवैक्सीन की डोज उपलब्ध हैं। कोवीशील्ड का स्टॉक अभी केंद्र सरकार से नहीं मिला है। केंद्र सरकार से अपील है कि युवाओं के लिए जल्द से जल्द वैक्सीन उपलब्ध करवाएं।
हमीरपुर - हिमाचल प्रदेश मुख्याध्यापक, प्रधानाचार्य अधिकारी संवर्ग संघ के प्रदेश कार्यकारिणी ने सभी शिक्षक संघों से सुंदरनगर में संयुक्त बैठक करके निर्णय लिया है कि अगर भूतपूर्व सैनिक 15 अगस्त से सरकार के विरोध में धरना करेंगे, तो सभी अध्यापक संघ तथा भूतपूर्व सैनिकों के आश्रित, जो बेरोजगार हैं, सरकार के समर्थन में प्रदर्शन करेंगे। यह जानकारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष विजय गौतम ने दी। इसके अलावा संघ ने भूतपूर्व सैनिकों को उच्च व उच्चतम न्यायालय के आदेशों को मानने पर प्रदेश सरकार द्वारा वित्तीय लाभों दिए जाने पर आभार जताया है। प्रदेशाध्यक्ष के अनुसार सरकार द्वारा एक वर्ष की छूट देने के बाद अब सभी अध्यापक कोर्ट का निर्णय लागू करने के लिए लामबंद हो गए हैं। संघ ने सरकार द्वारा अविलंब टीजीटी की नई वरीयता सूची, जो उच्चतम न्यायालय के निर्णय के अनुरूप भूतपूर्व सैनिकों को पुनः नियुक्ति पर सिविल के नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता निर्धारित करने के साथ शिक्षा उपनिदेशकों के 18 रिक्त पद भरने, प्रधानाचार्य के 217 पद व मुख्याध्यापकों के 160 पद भरने, पीजीटी के 1200 से अधिक पद भरने के लिए टीजीटी वरिष्ठता सूची का संशोधन अविलंब करने की मांग की है। बैठक में प्रदेश पदोन्नत प्रवक्ता संघ के प्रदेशाध्यक्ष रत्नेश्वर सलारिया, प्रदेश विज्ञान अध्यापक संघ के प्रदेशाध्यक्ष अजय शर्मा, प्रदेश कला अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कौशल, पीटीएफ के प्रदेश महासचिव रणजीत गुलेरिया, प्रधानाचार्य महेंद्र ठाकुर, मंडी अध्यक्ष राजेश गुप्ता, बिलासपुर महासचिव ओपी परमार, प्रधान संजीव शर्मा, प्रवीण चंदेल, दर्शन राणा, महिंद्र गुप्ता, नरेंद्र कुमार, जय सिंह, विजय भरवाल, बृजलाल, बोधराज, आन्नद कुमार, कमला देवी, सहित अन्य सदस्यों ने भाग लिया।
हमीरपुर - हिमाचल प्रदेश मुख्याध्यापक, प्रधानाचार्य अधिकारी संवर्ग संघ के प्रदेश कार्यकारिणी ने सभी शिक्षक संघों से सुंदरनगर में संयुक्त बैठक करके निर्णय लिया है कि अगर भूतपूर्व सैनिक पंद्रह अगस्त से सरकार के विरोध में धरना करेंगे, तो सभी अध्यापक संघ तथा भूतपूर्व सैनिकों के आश्रित, जो बेरोजगार हैं, सरकार के समर्थन में प्रदर्शन करेंगे। यह जानकारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष विजय गौतम ने दी। इसके अलावा संघ ने भूतपूर्व सैनिकों को उच्च व उच्चतम न्यायालय के आदेशों को मानने पर प्रदेश सरकार द्वारा वित्तीय लाभों दिए जाने पर आभार जताया है। प्रदेशाध्यक्ष के अनुसार सरकार द्वारा एक वर्ष की छूट देने के बाद अब सभी अध्यापक कोर्ट का निर्णय लागू करने के लिए लामबंद हो गए हैं। संघ ने सरकार द्वारा अविलंब टीजीटी की नई वरीयता सूची, जो उच्चतम न्यायालय के निर्णय के अनुरूप भूतपूर्व सैनिकों को पुनः नियुक्ति पर सिविल के नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता निर्धारित करने के साथ शिक्षा उपनिदेशकों के अट्ठारह रिक्त पद भरने, प्रधानाचार्य के दो सौ सत्रह पद व मुख्याध्यापकों के एक सौ साठ पद भरने, पीजीटी के एक हज़ार दो सौ से अधिक पद भरने के लिए टीजीटी वरिष्ठता सूची का संशोधन अविलंब करने की मांग की है। बैठक में प्रदेश पदोन्नत प्रवक्ता संघ के प्रदेशाध्यक्ष रत्नेश्वर सलारिया, प्रदेश विज्ञान अध्यापक संघ के प्रदेशाध्यक्ष अजय शर्मा, प्रदेश कला अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कौशल, पीटीएफ के प्रदेश महासचिव रणजीत गुलेरिया, प्रधानाचार्य महेंद्र ठाकुर, मंडी अध्यक्ष राजेश गुप्ता, बिलासपुर महासचिव ओपी परमार, प्रधान संजीव शर्मा, प्रवीण चंदेल, दर्शन राणा, महिंद्र गुप्ता, नरेंद्र कुमार, जय सिंह, विजय भरवाल, बृजलाल, बोधराज, आन्नद कुमार, कमला देवी, सहित अन्य सदस्यों ने भाग लिया।
होंडा पांचवी जनरेशन सिटी को छोड़कर बाकी मॉडल्स पर फ्री एसेसरीज का ऑप्शन भी दे रही है। - पांचवी जनरेशन सिटी पर 72,145 रुपये तक की छूट मिल रही है, वहीं चौथी जनरेशन मॉडल पर केवल 5,000 रुपये का डिस्काउंट मिल रहा है। - होंडा डब्ल्यूआर-वी पर कुल 72,340 रुपये तक की बचत की जा सकती है। - जैज पर 37,047 रुपये तक का डिस्काउंट ऑफर मिल रहा है। - अमेज कार पर 43,144 रुपये तक की बचत की जा सकती है। - डीजल मॉडल्स पर कोई ऑफर नहीं मिल रहा है। - यह डिस्काउंट ऑफर 2022 के आखिर तक मान्य है। अगर आप इस महीने होंडा कार खरीदने का प्लान बना रहे हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है। दिसंबर में होंडा अपनी गाड़ियों पर भारी डिस्काउंट ऑफर्स की पेशकश कर रही है, जिसके चलते ग्राहक इन पर 72,000 रुपये से ज्यादा की बचत कर सकते हैं। यह डिस्काउंट ऑफर 2022 के आखिर तक मान्य रहेंगे। सिटी (पांचवी जनरेशन) सिटी (पांचवी जनरेशन) - ऊपर बताए सभी ऑफर्स केवल पेट्रोल मॉडल्स पर मान्य है। पांचवी जनरेशन सिटी, अमेज और डब्ल्यूआर-वी के डीजल वेरिएंट पर कोई छूट नहीं मिल रही है। - चौथी जनरेशन सिटी सेडान को छोड़कर बाकी सभी होंडा कार पर नगद डिस्काउंट और फ्री एसेसरीज का ऑप्शन मिल रहा है। - पांचवी जनरेशन सिटी के पेट्रोल-मैनुअल वेरिएंट पर 30,000 रुपये का नगद डिस्काउंट या 32,145 रुपये की फ्री एसेसरीज में से ग्राहक कोई एक ऑप्शन चुन सकते हैं। इसके सीवीटी वेरिएंट्स पर नगद डिस्काउंट 20,000 रुपये और फ्री एसेसरीज ऑफर 22,642 रुपये का है। इस कार पर कुल 72,145 रुपये तक की बचत की जा सकती है। - चौथी जनरेशन सिटी पर केवल 5,000 रुपये का लॉयल्टी बोनस दिया जा रहा है। - डब्ल्यूआर-वी पर इस महीने सबसे ज्यादा डिस्काउंट ऑफर मिल रहा है। इस कार पर अधिकतम 72,340 रुपये तक की बचत की जा सकती है। - होंडा जैज हैचबैक पर 37,047 रुपये तक की बचत की जा सकती है, जिसमें 10,000 रुपये का नगद डिस्काउंट और 10,000 रुपये का एक्सचेंज बोनस भी शामिल है। - होंडा अमेज पर ग्राहक दिसंबर 2022 में कुल 43,144 रुपये तक की बचत कर सकते हैं। इस कार पर लॉयल्टी एक्सचेंज बेनेफिट नहीं दिया जा रहा है। - जानकारी के लिए बता दें कि आने वाले महीनों में होंडा जैज, डब्ल्यूआर-वी और चौथी जनरेशन सिटी को बंद किया जा सकता है। नोटः ऊपर बताए डिस्काउंट ऑफर्स आपके शहर और राज्य में अलग-अलग हो सकते हैं। ऐसे में ऑफर्स की सही जानकारी के लिए अपने नजदीकी होंडा शोरूम पर संपर्क करें।
होंडा पांचवी जनरेशन सिटी को छोड़कर बाकी मॉडल्स पर फ्री एसेसरीज का ऑप्शन भी दे रही है। - पांचवी जनरेशन सिटी पर बहत्तर,एक सौ पैंतालीस रुपयापये तक की छूट मिल रही है, वहीं चौथी जनरेशन मॉडल पर केवल पाँच,शून्य रुपयापये का डिस्काउंट मिल रहा है। - होंडा डब्ल्यूआर-वी पर कुल बहत्तर,तीन सौ चालीस रुपयापये तक की बचत की जा सकती है। - जैज पर सैंतीस,सैंतालीस रुपयापये तक का डिस्काउंट ऑफर मिल रहा है। - अमेज कार पर तैंतालीस,एक सौ चौंतालीस रुपयापये तक की बचत की जा सकती है। - डीजल मॉडल्स पर कोई ऑफर नहीं मिल रहा है। - यह डिस्काउंट ऑफर दो हज़ार बाईस के आखिर तक मान्य है। अगर आप इस महीने होंडा कार खरीदने का प्लान बना रहे हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है। दिसंबर में होंडा अपनी गाड़ियों पर भारी डिस्काउंट ऑफर्स की पेशकश कर रही है, जिसके चलते ग्राहक इन पर बहत्तर,शून्य रुपयापये से ज्यादा की बचत कर सकते हैं। यह डिस्काउंट ऑफर दो हज़ार बाईस के आखिर तक मान्य रहेंगे। सिटी सिटी - ऊपर बताए सभी ऑफर्स केवल पेट्रोल मॉडल्स पर मान्य है। पांचवी जनरेशन सिटी, अमेज और डब्ल्यूआर-वी के डीजल वेरिएंट पर कोई छूट नहीं मिल रही है। - चौथी जनरेशन सिटी सेडान को छोड़कर बाकी सभी होंडा कार पर नगद डिस्काउंट और फ्री एसेसरीज का ऑप्शन मिल रहा है। - पांचवी जनरेशन सिटी के पेट्रोल-मैनुअल वेरिएंट पर तीस,शून्य रुपयापये का नगद डिस्काउंट या बत्तीस,एक सौ पैंतालीस रुपयापये की फ्री एसेसरीज में से ग्राहक कोई एक ऑप्शन चुन सकते हैं। इसके सीवीटी वेरिएंट्स पर नगद डिस्काउंट बीस,शून्य रुपयापये और फ्री एसेसरीज ऑफर बाईस,छः सौ बयालीस रुपयापये का है। इस कार पर कुल बहत्तर,एक सौ पैंतालीस रुपयापये तक की बचत की जा सकती है। - चौथी जनरेशन सिटी पर केवल पाँच,शून्य रुपयापये का लॉयल्टी बोनस दिया जा रहा है। - डब्ल्यूआर-वी पर इस महीने सबसे ज्यादा डिस्काउंट ऑफर मिल रहा है। इस कार पर अधिकतम बहत्तर,तीन सौ चालीस रुपयापये तक की बचत की जा सकती है। - होंडा जैज हैचबैक पर सैंतीस,सैंतालीस रुपयापये तक की बचत की जा सकती है, जिसमें दस,शून्य रुपयापये का नगद डिस्काउंट और दस,शून्य रुपयापये का एक्सचेंज बोनस भी शामिल है। - होंडा अमेज पर ग्राहक दिसंबर दो हज़ार बाईस में कुल तैंतालीस,एक सौ चौंतालीस रुपयापये तक की बचत कर सकते हैं। इस कार पर लॉयल्टी एक्सचेंज बेनेफिट नहीं दिया जा रहा है। - जानकारी के लिए बता दें कि आने वाले महीनों में होंडा जैज, डब्ल्यूआर-वी और चौथी जनरेशन सिटी को बंद किया जा सकता है। नोटः ऊपर बताए डिस्काउंट ऑफर्स आपके शहर और राज्य में अलग-अलग हो सकते हैं। ऐसे में ऑफर्स की सही जानकारी के लिए अपने नजदीकी होंडा शोरूम पर संपर्क करें।
अजमेर के बिड़ला वाटर सिटी पार्क में स्लाइड से आए युवक के टकराने से पूल में खड़े युवक की मौत हो गई। इसके बाद वाटर सिटी पार्क की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खडे़ हो गए हैं। वहीं, हादसे के समय मौजूद लोगों से भास्कर ने बात की तो उनका कहना था कि पार्क में सुरक्षा उपाय प्रोपर नहीं हैं। क्षमता से ज्यादा लोग वहां मौजूद थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि वाटर स्लाइड पर आए यूवक ने नीचे खड़े युवक को बहुत तेज टक्कर मारी। इससे वो चिल्लाने लगा। बाद में पता चला कि युवक की आंतें डेमेज हो गई थीं। सुरक्षा उपायों का अन्दाज इसी से लगाया जा सकता है कि जब भास्कर ने फायर ऑफिस से पता किया तो मुख्य फायर ऑफिसर संजय शर्मा का कहना था कि पार्क संचालक ने कोई एनओसी नहीं ली है। जबकि नॉर्म्स के अनुसार एनओसी लेनी चाहिए। इसकी जांच की जाएगी। वहीं पार्क संचालन को लेकर सक्षम स्वीकृति कहां से ली गई, इसका भी पता नहीं चला है। मृतक के दोस्त ने अज्ञात के खिलाफ आदर्श नगर पुलिस थाने में हत्या का मामला दर्ज करा दिया। लेकिन संचालक पवन जैन ने वाटर पार्क में ऐसे किसी हादसे से ही इनकार कर दिया। युवक अपने दोस्तों-परिवार के साथ घूमने के लिए आया था। हादसा 30 मई को हुआ था। युवक ने शुक्रवार को इलाज के दौरान दम तोड़ा। प्रत्यक्षदर्शी रायपुर मारवाड़ निवासी पूजा किशनानी व अजमेर निवासी जया जया जोधानी ने बताया कि 30 मई को हम सभी पार्क में एन्जॉय करने गए। वे भी पूल में थे। इसी दौरान तेज गति से युवक आया और उनकी आंखों के सामने दूसरे युवक के पेट से जा टकराया। बाद में पता चला की युवक की आतें और नसें डेमेज हो गई। युवक दर्द से चीख रहा था। वहां सिक्योरिटी की कोई व्यवस्था नहीं थी। संचालको को अलर्ट भी किया कि यहां लिमिट से ज्यादा लोग है, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। हादसे में मरे महबूब खान को न्याय दिलाना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसा कोई हादसा नहीं हो। मृतक के साथ में मौजूद दोस्त नरेश आहूजा ने कहा कि स्लाइड के ऊपर और नीचे दोनों तरफ वाटर पार्क के प्रशिक्षित कर्मचारियों की मौजूदगी जरूरी है। ताकि काेई हादसे का शिकार नहीं हाे, मौजूद तो थे, लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहे। हादसा होने के बाद भी हम लोग ही उसे अस्पताल लेकर आए। वहां कोई ध्यान नहीं दिया गया। अभी गर्मी का सीजन है और यहां भीड़ ज्यादा ही रहती है। उसके हिसाब से सुरक्षा को लेकर कोई इंतजाम नहीं है। शेख जियादुल ने बताया कि 30 मई को महबूब व हम लोग परिवार सहित अजमेर आए थे। दोपहर 2 बजे बिड़ला वाटर सिटी पार्क पहुंचे। 5 बजे करीब ऊपर से आ रहे पाइप में तेज गति से एक युवक आया। पूल में खड़े महबूब से टकराया, जिससे वह गिर गया। जोर-जोर से चिल्लाने लगा और वो उठ नहीं पा रहा था। उसे हॉस्पिटल लेकर गए। हॉस्पिटल में सब कुछ ठीक बताया। इसके बाद उसे घर ले गए। दूसरे दिन पेट में तकलीफ हुई तो फिर हॉस्पिटल आए। लेट हो गए तो उस दिन जांच नहीं हुई। दूसरे दिन जांच हुई और जांच में पाया कि आंत डैमेज है और ऑपरेशन करना पड़ा। इलाज चल रहा था और शुक्रवार को मौत हो गई। This website follows the DNPA Code of Ethics.
अजमेर के बिड़ला वाटर सिटी पार्क में स्लाइड से आए युवक के टकराने से पूल में खड़े युवक की मौत हो गई। इसके बाद वाटर सिटी पार्क की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खडे़ हो गए हैं। वहीं, हादसे के समय मौजूद लोगों से भास्कर ने बात की तो उनका कहना था कि पार्क में सुरक्षा उपाय प्रोपर नहीं हैं। क्षमता से ज्यादा लोग वहां मौजूद थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि वाटर स्लाइड पर आए यूवक ने नीचे खड़े युवक को बहुत तेज टक्कर मारी। इससे वो चिल्लाने लगा। बाद में पता चला कि युवक की आंतें डेमेज हो गई थीं। सुरक्षा उपायों का अन्दाज इसी से लगाया जा सकता है कि जब भास्कर ने फायर ऑफिस से पता किया तो मुख्य फायर ऑफिसर संजय शर्मा का कहना था कि पार्क संचालक ने कोई एनओसी नहीं ली है। जबकि नॉर्म्स के अनुसार एनओसी लेनी चाहिए। इसकी जांच की जाएगी। वहीं पार्क संचालन को लेकर सक्षम स्वीकृति कहां से ली गई, इसका भी पता नहीं चला है। मृतक के दोस्त ने अज्ञात के खिलाफ आदर्श नगर पुलिस थाने में हत्या का मामला दर्ज करा दिया। लेकिन संचालक पवन जैन ने वाटर पार्क में ऐसे किसी हादसे से ही इनकार कर दिया। युवक अपने दोस्तों-परिवार के साथ घूमने के लिए आया था। हादसा तीस मई को हुआ था। युवक ने शुक्रवार को इलाज के दौरान दम तोड़ा। प्रत्यक्षदर्शी रायपुर मारवाड़ निवासी पूजा किशनानी व अजमेर निवासी जया जया जोधानी ने बताया कि तीस मई को हम सभी पार्क में एन्जॉय करने गए। वे भी पूल में थे। इसी दौरान तेज गति से युवक आया और उनकी आंखों के सामने दूसरे युवक के पेट से जा टकराया। बाद में पता चला की युवक की आतें और नसें डेमेज हो गई। युवक दर्द से चीख रहा था। वहां सिक्योरिटी की कोई व्यवस्था नहीं थी। संचालको को अलर्ट भी किया कि यहां लिमिट से ज्यादा लोग है, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। हादसे में मरे महबूब खान को न्याय दिलाना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसा कोई हादसा नहीं हो। मृतक के साथ में मौजूद दोस्त नरेश आहूजा ने कहा कि स्लाइड के ऊपर और नीचे दोनों तरफ वाटर पार्क के प्रशिक्षित कर्मचारियों की मौजूदगी जरूरी है। ताकि काेई हादसे का शिकार नहीं हाे, मौजूद तो थे, लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहे। हादसा होने के बाद भी हम लोग ही उसे अस्पताल लेकर आए। वहां कोई ध्यान नहीं दिया गया। अभी गर्मी का सीजन है और यहां भीड़ ज्यादा ही रहती है। उसके हिसाब से सुरक्षा को लेकर कोई इंतजाम नहीं है। शेख जियादुल ने बताया कि तीस मई को महबूब व हम लोग परिवार सहित अजमेर आए थे। दोपहर दो बजे बिड़ला वाटर सिटी पार्क पहुंचे। पाँच बजे करीब ऊपर से आ रहे पाइप में तेज गति से एक युवक आया। पूल में खड़े महबूब से टकराया, जिससे वह गिर गया। जोर-जोर से चिल्लाने लगा और वो उठ नहीं पा रहा था। उसे हॉस्पिटल लेकर गए। हॉस्पिटल में सब कुछ ठीक बताया। इसके बाद उसे घर ले गए। दूसरे दिन पेट में तकलीफ हुई तो फिर हॉस्पिटल आए। लेट हो गए तो उस दिन जांच नहीं हुई। दूसरे दिन जांच हुई और जांच में पाया कि आंत डैमेज है और ऑपरेशन करना पड़ा। इलाज चल रहा था और शुक्रवार को मौत हो गई। This website follows the DNPA Code of Ethics.
लीबिया में शुक्रवार को पूर्वी लिबयन आर्मी कमांडर खलीफा हफ्तार और यूएन समर्थित सरकार के सैनिको के बीच भारी संघर्ष हुआ था। सूत्रों के हवाले से सीएनएन ने कहा कि लीबिया की राजधानी से 50 किलोमीटर की दूरी तक संघर्ष का प्रभाव रहा था। गुरूवार को त्रिपोली में सैन्य तनाव को खत्म करने के लिए यूएन के अध्यक्ष लीबिया की यात्रा पर आये थे। गुटेरेस ने हफ्तार से बेनग़ाज़ी में मुलाकात की थी। इसके एक दिन बाद ही सैनिकों ने त्रिपोली में यूएन सामर्थीत सरकार के खिलाफ आक्रमक हमला किया था। पूर्वी कमांडर को आतंकवादी कहा जाता है। हाल ही यूएन के अध्यक्ष ने लीबिया की यात्रा पर थे और देश में नए सिरे से चुनावो के आयोजन का रोडमैप तैयार करना उनकी यात्रा का मकसद था।
लीबिया में शुक्रवार को पूर्वी लिबयन आर्मी कमांडर खलीफा हफ्तार और यूएन समर्थित सरकार के सैनिको के बीच भारी संघर्ष हुआ था। सूत्रों के हवाले से सीएनएन ने कहा कि लीबिया की राजधानी से पचास किलोग्राममीटर की दूरी तक संघर्ष का प्रभाव रहा था। गुरूवार को त्रिपोली में सैन्य तनाव को खत्म करने के लिए यूएन के अध्यक्ष लीबिया की यात्रा पर आये थे। गुटेरेस ने हफ्तार से बेनग़ाज़ी में मुलाकात की थी। इसके एक दिन बाद ही सैनिकों ने त्रिपोली में यूएन सामर्थीत सरकार के खिलाफ आक्रमक हमला किया था। पूर्वी कमांडर को आतंकवादी कहा जाता है। हाल ही यूएन के अध्यक्ष ने लीबिया की यात्रा पर थे और देश में नए सिरे से चुनावो के आयोजन का रोडमैप तैयार करना उनकी यात्रा का मकसद था।
अभिनेता टाइगर श्रॉफ इन दिनों दिशा पाटनी के साथ अपने ब्रेकअप को लेकर मीडिया की सुर्खियों में हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब छह साल के रिलेशनशिप के बाद दोनों की राहें जुदा हो गई हैं। दोनों के ब्रेकअप पर इनके फैंस निराश हैं। वैसे, ब्रेकअप की खबरों के बीच टाइगर श्रॉफ का एक पुराना बयान भी खूब चर्चा में है, जब उन्होंने कहा था कि वो कैसी लड़की से शादी करना पसंद करेंगे। दरअसल, एक बातचीत के दौरान टाइगर ने कहा था, 'मैं गांव की लड़की से शादी करूंगा। वह घर में रहे। घर को साफ रखे और मुझे घर का बना खाना खिलाए। मुझे हाउस वाइफ टाइप की लड़कियां पसंद हैं। ' हालांकि, टाइगर ने यह सभी बातें मजाक में कही थीं, लेकिन उनका यह इंटरव्यू खूब वायरल हुआ। आखिर में उन्हें इस पर स्पष्टीकरण देना पड़ा था। टाइगर श्रॉफ ने कहा था, 'कोई मुझे बेवजह नीचा दिखाने की कोशिश कर रहा है और मेरे बारे में खराब बातें कहने की कोशिश में था। मैंने जब यह बात कही तो कमरे में जो भी मौजूद था, सब हंस रहे थे। वह एक अच्छा टाइम था। मैं उस समय मजाक कर रहा था और यह क्लियर था कि मैं मजाक में यह बात कह रहा था। मैंने ऐसा हकीकत में कुछ नहीं कहा। लेकिन, आगे से मैं इन सभी चीजों को लेकर सतर्क रहूंगा। ' टाइगर श्रॉफ और दिशा पाटनी भले ही अब रिलेशनशिप में नहीं हैं। लेकिन, टाइगर की बहन कृष्णा श्रॉफ से दिशा की अब भी अच्छी बॉन्डिंग है। दिशा पाटनी के सोशल मीडिया अकाउंट पर इसकी झलक देखी जा सकती है। दरअसल, दिशा ने अपनी कुछ तस्वीरें इंस्टाग्राम पर साझा की हैं। इस पर कृष्णा श्रॉफ ने शानदार कमेंट किया है। कृष्णा ने लिखा है, 'आपकी ये तस्वीर मेरी फेवरेट है। '
अभिनेता टाइगर श्रॉफ इन दिनों दिशा पाटनी के साथ अपने ब्रेकअप को लेकर मीडिया की सुर्खियों में हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब छह साल के रिलेशनशिप के बाद दोनों की राहें जुदा हो गई हैं। दोनों के ब्रेकअप पर इनके फैंस निराश हैं। वैसे, ब्रेकअप की खबरों के बीच टाइगर श्रॉफ का एक पुराना बयान भी खूब चर्चा में है, जब उन्होंने कहा था कि वो कैसी लड़की से शादी करना पसंद करेंगे। दरअसल, एक बातचीत के दौरान टाइगर ने कहा था, 'मैं गांव की लड़की से शादी करूंगा। वह घर में रहे। घर को साफ रखे और मुझे घर का बना खाना खिलाए। मुझे हाउस वाइफ टाइप की लड़कियां पसंद हैं। ' हालांकि, टाइगर ने यह सभी बातें मजाक में कही थीं, लेकिन उनका यह इंटरव्यू खूब वायरल हुआ। आखिर में उन्हें इस पर स्पष्टीकरण देना पड़ा था। टाइगर श्रॉफ ने कहा था, 'कोई मुझे बेवजह नीचा दिखाने की कोशिश कर रहा है और मेरे बारे में खराब बातें कहने की कोशिश में था। मैंने जब यह बात कही तो कमरे में जो भी मौजूद था, सब हंस रहे थे। वह एक अच्छा टाइम था। मैं उस समय मजाक कर रहा था और यह क्लियर था कि मैं मजाक में यह बात कह रहा था। मैंने ऐसा हकीकत में कुछ नहीं कहा। लेकिन, आगे से मैं इन सभी चीजों को लेकर सतर्क रहूंगा। ' टाइगर श्रॉफ और दिशा पाटनी भले ही अब रिलेशनशिप में नहीं हैं। लेकिन, टाइगर की बहन कृष्णा श्रॉफ से दिशा की अब भी अच्छी बॉन्डिंग है। दिशा पाटनी के सोशल मीडिया अकाउंट पर इसकी झलक देखी जा सकती है। दरअसल, दिशा ने अपनी कुछ तस्वीरें इंस्टाग्राम पर साझा की हैं। इस पर कृष्णा श्रॉफ ने शानदार कमेंट किया है। कृष्णा ने लिखा है, 'आपकी ये तस्वीर मेरी फेवरेट है। '
पूर्व मान्यता या रूढि के कारण कुछ व्यक्ति या राष्ट्र स्थिति का यथार्थ मूल्य नहीं नहीं चाहते अतीतदर्शी है। अतीत - दर्शन के आधार पर वर्तमान ( ऋजुसूत्र नय ) की अवहेलना करना निरपेक्ष-नीति है। इसका परिणाम है सामञ्जस्य । इसके निदर्शन जनवादी चीन और उसे मान्यता न देनेवाले राष्ट्र बन सकते हैं। वस्तु का मूल्याकन करते समय हमारा दृष्टिकोण एवम्भूत होना चाहिए। जो वर्ग वर्तमान में चीन के भू-भाग का शासक नहीं है, वह उसका सर्व-सत्ता सम्पन्न प्रभु कैसे होगा ? च्याग का राष्ट्रवादी चीन और मात्र का जनवादी चीन एक नहीं हूँ । अवस्था - भेद से नाम-भेद जो होता है, वह मूल्याकन की महत्त्वपूर्ण दिशा ( समभिरूढ-नय ) है । डलेस ने गोश्रा को पुर्तगाल का उपनिवेश कहा और खलबली मच गई। इस अधिकार- जागरण के युग में उपनिवेश का स्वर एवम्भूत दृष्टिकोण का परिचायक नहीं है। अमरीकी मजदूर नेता श्री वाल्टर रूथर के शब्दों में "एशिया में अमरीका की विदेश नीति शक्ति और सैनिक गठबन्धनो पर आधारित है, अवास्तविक है। अमेरिका ने एशिया की सद्भावना को बुरी तरह से खो दिया है। गोत्रा के बारे में अमरीकी परराष्ट्र मन्त्री श्री डलेस ने जो कुछ कहा, इस से स्पष्ट है कि वे एशियाई भावना को नहीं समझते ५५ । यह असदिग्ध सत्य है - शक्ति प्रयोग निरपेक्षता को मनोवृत्ति का परिणाम है। निरपेक्षता से सद्भावना का अन्त और बटुता का विकास होता है। कटुसा की परिसमाति अहिंसा में निहित है। क्रूरता का भाव तीव्र होता है, समन्वय की बात नहीं सूकती। समन्वय और हिंसा अन्योन्याश्रित है । शान्ति से समन्वय और समन्वय से शान्ति होती है । सह-अस्तित्व की धारा प्रभु-सत्ता की दृष्टि से सब स्वतन्त्र राष्ट्र समान है किन्तु सामर्थ्य की दृष्टि से सच समान नहीं भी हैं। अमेरिका शस्त्र-वल और धन चल दोनों से समृद्ध है। रूस सैन्य-चल और श्रम चल से समृद्ध है। चीन और भारत जन चल से समृद्ध है। ब्रिटेन व्यापार विस्तार की कला से समृद्ध है। कुछ राष्ट्र प्राकृतिक साधनों से समृद्ध हैं। समृद्धि का कोई न कोई भाग सभी को मिला है। सामर्थ्य की विभिन्न कक्षाएं बॅटी हुई है। सब पर किसी एक की प्रभु-सत्ता नहीं है । एक दूसरे में पूर्ण साम्य और वैषम्य भी नहीं है। कुछ साम्य- और कुछ वैषम्य से बचित भी कोई नहीं है। इसलिए कोई किसी को मिटा भी नही सकता और मिट भी नहीं सकता। वैषम्य को ही प्रधान मान जो दूसरे को मिटाने की सोचता है, वह वैषम्यवादी नीति के एकान्तीकरण द्वारा असामञ्जस्य की स्थिति पेदा कर डालता है। साम्य को ही एकमात्र प्रधान मानना भी साम्यवादी नीति का ऐकान्तिक ग्रह है। दोनों के ऐकान्तिक आग्रह के परिणाम स्वरूप ही आज शीत युद्ध का बोलवाला है । वैषम्य और साम्य दोनो विरोधी अवश्य है पर निरपेक्ष नहीं हैं। दोनों सापेक्ष हैं और दोनों एक साथ टिक सकते हैं । विरोधी युगलो के सह-अस्तित्व का प्रतिपादन करते हुए भगवान् महावीर ने कहा - नित्य-अनित्य, सामान्य असामान्य, वाच्य अवाच्य, सत्-असत् जैसे विरोधी युगल एक साथ ही रहते हैं। जिस पदार्थ में कुछ गुणों की आस्तिता है, उसमें कुछ नास्तिता है। यह आस्तिता और नास्तिता एक ही पदार्थ के दो विरोधी किन्तु सह-अवस्थित धर्म है । सहावस्थान विश्व की विराट् व्यवस्था का अंग है। यह जैसे पदार्थाश्रित है, वैसे ही व्यवहाराश्रित है। इसी की प्रतिध्वनि भारतीय प्रधान मन्त्री पण्डित नेहरू के पंचशील में है। साम्यवादी और जनतन्त्री राष्ट्र एक साथ जी सकते हैं - राजनीति के रगमच पर यह घोष बलशाली बन रहा है। यह समन्वय के दर्शन का जीवन-व्यवहार में पड़नेवाला प्रतिविम्ब है । वैयक्तिकता, जातीयता, सामाजिकता, प्रान्तीयता और राष्ट्रीयतानिरपेक्ष रूप में बढ़ते हैं, तव असामञ्जस्य को लिए ही वढते हैं । व्यक्ति और सत्ता दोनो भिन्न ही हैं, यह दोनों के सम्बन्ध की वहेलना है । व्यक्ति ही तत्त्व है-~-यह राज्य की प्रभु सत्ता का तिरस्कार है। राज्य ही तत्त्व है - यह व्यक्ति की सत्ता का तिरस्कार है। सरकार ही तत्त्व है - यह स्थायी तत्त्व जनता का तिरस्कार है। जहाँ तिरस्कार है, वहाँ निरपेक्षता है। जहाँ निरपेक्षता है, वहाँ असत्य है। असत्य की भूमिका पर सह-अस्तित्व का सिद्धान्त पनप नहीं सकता। सह-अस्तित्व का आधार-संयम - सत्य का वल सजोकर सबके साथ मैत्री साधो ५६ । सत्य मैत्री के विना सह-अस्तित्व का विकास नहीं । सत्य का अर्थ है - सयम । सयम से वैर विरोध मिटता है, मैत्री विकास पाती है। सह-अस्तित्व चमक उठता है। असयम से बैर वढता ६५७ । मैत्री का स्वर क्षीण हो जाता है। स्त्र के अस्तित्व और पर के नास्तित्व से वस्तु की स्वतंत्र सत्ता बनती है। इसीलिए स्व और पर दोनों एक साथ रह सकते हैं। अगर सहानवस्थान व परस्पर-परिहार स्थिति जैसा विरोध व्यापक होता तो न स्व और पर ये दो मिलते और न सह अस्तित्व का प्रश्न ही खड़ा होता । - सह-अस्तित्व का सिद्धान्त राजनयिकों ने भी समझा है। राष्ट्रो के आपसी सम्बन्ध का आधार जो कूटनीति था, वह बदलने लगा है। उसका स्थान सहअस्तित्व ने लिया है। अब समस्याओं का समाधान इसी को आधार मान खोजा जाने लगा है। किन्तु अभी एक मजिल और पार करनी है। भगवान् ने कहा के विना मैत्री नहीं । दूसरों के स्वत्व को आत्मसात् करने की भावना त्यागे विना सह-अस्तित्व का सिद्धान्त सफल नहीं होता। स्याद्वाद की भाषा में स्वयं की सत्ता जैसे पदार्थ का गुण है, वैसे ही दूसरे पदार्थों की असत्ता भी उसका गुण है। स्वापेक्षा से सत्ता और परापेक्षा से असता- ये दोनों गुण पदार्थ की स्वतन्त्र व्यवस्था के हेतु हैं। स्वापेक्षया सत्ता जैसे पदार्थ या गुण है, जैसे ही परापेक्षया असत्ता उसका गुण नहीं होता तो द्वैत होता ही नहीं । द्वैत का आधार स्व-गुण-सत्ता और पर-गुण-सत्ता का सहावस्थान है। सह-अस्तित्व में विरोध तभी आता है जब एक व्यक्ति, जाति या राष्ट्र दूसरे व्यक्ति, जाति या राष्ट्र के स्वत्व को हडप जाना चाहते हैं। यह आक्रामक नीति ही सह-अस्तित्व की बाधा है। अपने से भिन्न वस्तु के स्वत्व का निर्णय करना सरल कार्य नहीं है। स्व के आरोप में एक विचित्र प्रकार का मानसिक झुकाव होता है । वह सत्य पर आवरण डाल देता है । सत्ता शक्ति या अधिकार विस्तार की भावना के पीछे यही तत्त्व सक्रिय होता है । स्वत्व की मर्यादा आन्तरिक क्षेत्र में व्यक्ति की अनुभूतिया व अन्तर् का आलोक ही उसका स्व है। बाहरी सम्बन्धों में स्व की मर्यादा जटिल बनती है। दूसरों के स्वत्व या अधिकारों का हरण स्व नही - यह स्पष्ट नहीं है। सघर्ष या अशान्ति का मूल दूसरो के स्व का अपहरण ही है। युग-भावना के साथ-साथ 'स्व' की मर्यादा वदलती भी है । उसे समझने बाला मर्यादित हो जाता है । वह सघर्ष की चिनगारी नही उछालता । रूढिपरक लोग 'स्व' की शाश्वत स्थिति से चिपके बैठे रहते हैं । वे अशान्ति पैदा करते हैं । बाहरी सम्वन्धों में स्त्र की मर्यादा शाश्वत या स्थिर हो भी नहीं सकती । इसलिए भावना परिवर्तन के साथ-साथ स्वयं को बदलना भी जरूरी हो जाता है। बाहर से सिमट कर अधिकारों में आना शान्ति का सर्व प्रधान सूत्र है। उसमें खतरा है ही नही। इस जन-जागरण के युग मे उपनिवेशवाद, सामन्तवाद और एकाधिकारवाद मिटते जा रहे हैं। विचारशील व्यक्ति और राष्ट्र दूसरों के स्वत्व से बने अपने विशाल रूप को छोड़ अपने रूप में सिकुडते जा रहे हैं। यह सामञ्जस्य की रेखा है । वर्ग-विग्रह और अन्तर्राष्ट्रीय विग्रह की समापन रेखा भी यही है। इसीके आधार पर कहा जा सकता है कि आज का विश्व व्यावहारिक समन्वय की दिशा में प्रगति कर रहा है। शान्ति का आधार व्यवस्था 1 व्यवस्था का आधार - सह अस्तित्व है । सह-अस्तित्व का आधार समन्वय है। समन्वय का आाधार- सत्य है । सत्य का आधार - अभय है । अभय का आधार - अहिंसा है ।
पूर्व मान्यता या रूढि के कारण कुछ व्यक्ति या राष्ट्र स्थिति का यथार्थ मूल्य नहीं नहीं चाहते अतीतदर्शी है। अतीत - दर्शन के आधार पर वर्तमान की अवहेलना करना निरपेक्ष-नीति है। इसका परिणाम है सामञ्जस्य । इसके निदर्शन जनवादी चीन और उसे मान्यता न देनेवाले राष्ट्र बन सकते हैं। वस्तु का मूल्याकन करते समय हमारा दृष्टिकोण एवम्भूत होना चाहिए। जो वर्ग वर्तमान में चीन के भू-भाग का शासक नहीं है, वह उसका सर्व-सत्ता सम्पन्न प्रभु कैसे होगा ? च्याग का राष्ट्रवादी चीन और मात्र का जनवादी चीन एक नहीं हूँ । अवस्था - भेद से नाम-भेद जो होता है, वह मूल्याकन की महत्त्वपूर्ण दिशा है । डलेस ने गोश्रा को पुर्तगाल का उपनिवेश कहा और खलबली मच गई। इस अधिकार- जागरण के युग में उपनिवेश का स्वर एवम्भूत दृष्टिकोण का परिचायक नहीं है। अमरीकी मजदूर नेता श्री वाल्टर रूथर के शब्दों में "एशिया में अमरीका की विदेश नीति शक्ति और सैनिक गठबन्धनो पर आधारित है, अवास्तविक है। अमेरिका ने एशिया की सद्भावना को बुरी तरह से खो दिया है। गोत्रा के बारे में अमरीकी परराष्ट्र मन्त्री श्री डलेस ने जो कुछ कहा, इस से स्पष्ट है कि वे एशियाई भावना को नहीं समझते पचपन । यह असदिग्ध सत्य है - शक्ति प्रयोग निरपेक्षता को मनोवृत्ति का परिणाम है। निरपेक्षता से सद्भावना का अन्त और बटुता का विकास होता है। कटुसा की परिसमाति अहिंसा में निहित है। क्रूरता का भाव तीव्र होता है, समन्वय की बात नहीं सूकती। समन्वय और हिंसा अन्योन्याश्रित है । शान्ति से समन्वय और समन्वय से शान्ति होती है । सह-अस्तित्व की धारा प्रभु-सत्ता की दृष्टि से सब स्वतन्त्र राष्ट्र समान है किन्तु सामर्थ्य की दृष्टि से सच समान नहीं भी हैं। अमेरिका शस्त्र-वल और धन चल दोनों से समृद्ध है। रूस सैन्य-चल और श्रम चल से समृद्ध है। चीन और भारत जन चल से समृद्ध है। ब्रिटेन व्यापार विस्तार की कला से समृद्ध है। कुछ राष्ट्र प्राकृतिक साधनों से समृद्ध हैं। समृद्धि का कोई न कोई भाग सभी को मिला है। सामर्थ्य की विभिन्न कक्षाएं बॅटी हुई है। सब पर किसी एक की प्रभु-सत्ता नहीं है । एक दूसरे में पूर्ण साम्य और वैषम्य भी नहीं है। कुछ साम्य- और कुछ वैषम्य से बचित भी कोई नहीं है। इसलिए कोई किसी को मिटा भी नही सकता और मिट भी नहीं सकता। वैषम्य को ही प्रधान मान जो दूसरे को मिटाने की सोचता है, वह वैषम्यवादी नीति के एकान्तीकरण द्वारा असामञ्जस्य की स्थिति पेदा कर डालता है। साम्य को ही एकमात्र प्रधान मानना भी साम्यवादी नीति का ऐकान्तिक ग्रह है। दोनों के ऐकान्तिक आग्रह के परिणाम स्वरूप ही आज शीत युद्ध का बोलवाला है । वैषम्य और साम्य दोनो विरोधी अवश्य है पर निरपेक्ष नहीं हैं। दोनों सापेक्ष हैं और दोनों एक साथ टिक सकते हैं । विरोधी युगलो के सह-अस्तित्व का प्रतिपादन करते हुए भगवान् महावीर ने कहा - नित्य-अनित्य, सामान्य असामान्य, वाच्य अवाच्य, सत्-असत् जैसे विरोधी युगल एक साथ ही रहते हैं। जिस पदार्थ में कुछ गुणों की आस्तिता है, उसमें कुछ नास्तिता है। यह आस्तिता और नास्तिता एक ही पदार्थ के दो विरोधी किन्तु सह-अवस्थित धर्म है । सहावस्थान विश्व की विराट् व्यवस्था का अंग है। यह जैसे पदार्थाश्रित है, वैसे ही व्यवहाराश्रित है। इसी की प्रतिध्वनि भारतीय प्रधान मन्त्री पण्डित नेहरू के पंचशील में है। साम्यवादी और जनतन्त्री राष्ट्र एक साथ जी सकते हैं - राजनीति के रगमच पर यह घोष बलशाली बन रहा है। यह समन्वय के दर्शन का जीवन-व्यवहार में पड़नेवाला प्रतिविम्ब है । वैयक्तिकता, जातीयता, सामाजिकता, प्रान्तीयता और राष्ट्रीयतानिरपेक्ष रूप में बढ़ते हैं, तव असामञ्जस्य को लिए ही वढते हैं । व्यक्ति और सत्ता दोनो भिन्न ही हैं, यह दोनों के सम्बन्ध की वहेलना है । व्यक्ति ही तत्त्व है-~-यह राज्य की प्रभु सत्ता का तिरस्कार है। राज्य ही तत्त्व है - यह व्यक्ति की सत्ता का तिरस्कार है। सरकार ही तत्त्व है - यह स्थायी तत्त्व जनता का तिरस्कार है। जहाँ तिरस्कार है, वहाँ निरपेक्षता है। जहाँ निरपेक्षता है, वहाँ असत्य है। असत्य की भूमिका पर सह-अस्तित्व का सिद्धान्त पनप नहीं सकता। सह-अस्तित्व का आधार-संयम - सत्य का वल सजोकर सबके साथ मैत्री साधो छप्पन । सत्य मैत्री के विना सह-अस्तित्व का विकास नहीं । सत्य का अर्थ है - सयम । सयम से वैर विरोध मिटता है, मैत्री विकास पाती है। सह-अस्तित्व चमक उठता है। असयम से बैर वढता छः सौ सत्तावन । मैत्री का स्वर क्षीण हो जाता है। स्त्र के अस्तित्व और पर के नास्तित्व से वस्तु की स्वतंत्र सत्ता बनती है। इसीलिए स्व और पर दोनों एक साथ रह सकते हैं। अगर सहानवस्थान व परस्पर-परिहार स्थिति जैसा विरोध व्यापक होता तो न स्व और पर ये दो मिलते और न सह अस्तित्व का प्रश्न ही खड़ा होता । - सह-अस्तित्व का सिद्धान्त राजनयिकों ने भी समझा है। राष्ट्रो के आपसी सम्बन्ध का आधार जो कूटनीति था, वह बदलने लगा है। उसका स्थान सहअस्तित्व ने लिया है। अब समस्याओं का समाधान इसी को आधार मान खोजा जाने लगा है। किन्तु अभी एक मजिल और पार करनी है। भगवान् ने कहा के विना मैत्री नहीं । दूसरों के स्वत्व को आत्मसात् करने की भावना त्यागे विना सह-अस्तित्व का सिद्धान्त सफल नहीं होता। स्याद्वाद की भाषा में स्वयं की सत्ता जैसे पदार्थ का गुण है, वैसे ही दूसरे पदार्थों की असत्ता भी उसका गुण है। स्वापेक्षा से सत्ता और परापेक्षा से असता- ये दोनों गुण पदार्थ की स्वतन्त्र व्यवस्था के हेतु हैं। स्वापेक्षया सत्ता जैसे पदार्थ या गुण है, जैसे ही परापेक्षया असत्ता उसका गुण नहीं होता तो द्वैत होता ही नहीं । द्वैत का आधार स्व-गुण-सत्ता और पर-गुण-सत्ता का सहावस्थान है। सह-अस्तित्व में विरोध तभी आता है जब एक व्यक्ति, जाति या राष्ट्र दूसरे व्यक्ति, जाति या राष्ट्र के स्वत्व को हडप जाना चाहते हैं। यह आक्रामक नीति ही सह-अस्तित्व की बाधा है। अपने से भिन्न वस्तु के स्वत्व का निर्णय करना सरल कार्य नहीं है। स्व के आरोप में एक विचित्र प्रकार का मानसिक झुकाव होता है । वह सत्य पर आवरण डाल देता है । सत्ता शक्ति या अधिकार विस्तार की भावना के पीछे यही तत्त्व सक्रिय होता है । स्वत्व की मर्यादा आन्तरिक क्षेत्र में व्यक्ति की अनुभूतिया व अन्तर् का आलोक ही उसका स्व है। बाहरी सम्बन्धों में स्व की मर्यादा जटिल बनती है। दूसरों के स्वत्व या अधिकारों का हरण स्व नही - यह स्पष्ट नहीं है। सघर्ष या अशान्ति का मूल दूसरो के स्व का अपहरण ही है। युग-भावना के साथ-साथ 'स्व' की मर्यादा वदलती भी है । उसे समझने बाला मर्यादित हो जाता है । वह सघर्ष की चिनगारी नही उछालता । रूढिपरक लोग 'स्व' की शाश्वत स्थिति से चिपके बैठे रहते हैं । वे अशान्ति पैदा करते हैं । बाहरी सम्वन्धों में स्त्र की मर्यादा शाश्वत या स्थिर हो भी नहीं सकती । इसलिए भावना परिवर्तन के साथ-साथ स्वयं को बदलना भी जरूरी हो जाता है। बाहर से सिमट कर अधिकारों में आना शान्ति का सर्व प्रधान सूत्र है। उसमें खतरा है ही नही। इस जन-जागरण के युग मे उपनिवेशवाद, सामन्तवाद और एकाधिकारवाद मिटते जा रहे हैं। विचारशील व्यक्ति और राष्ट्र दूसरों के स्वत्व से बने अपने विशाल रूप को छोड़ अपने रूप में सिकुडते जा रहे हैं। यह सामञ्जस्य की रेखा है । वर्ग-विग्रह और अन्तर्राष्ट्रीय विग्रह की समापन रेखा भी यही है। इसीके आधार पर कहा जा सकता है कि आज का विश्व व्यावहारिक समन्वय की दिशा में प्रगति कर रहा है। शान्ति का आधार व्यवस्था एक व्यवस्था का आधार - सह अस्तित्व है । सह-अस्तित्व का आधार समन्वय है। समन्वय का आाधार- सत्य है । सत्य का आधार - अभय है । अभय का आधार - अहिंसा है ।
रायपुर। रायपुर के जांजगीर में बोरवेल Rahul Rescue Update में फसा राहुल बीते 85 घंटे से CG Big News बाहर निकलने की राह देख रहा CG breaking news है। आपको बता दें उस CG google trend news तक पहुंचने में बस कुछ ही समय शेष बताया जा रहा है। उसके बाहर निकलते ही चिकित्सकीय सुविधा देने के लिए पूरी तरह कमर कस ली गई है। जांजगीर से बिलासपुर तक एक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया है। सभी चौक चौराहों पर पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। आपको बता दें रेस्क्यू के बाद राहुल को सीध बिलासपुर के अपोला अस्पताल में भर्ती करया जाएगा। राहुल बीते करीब 85 घंटों से बोलवेल में फसा है। अभी भी राहुल के सकुशल रेस्क्यू का इंतजार किया जा रहा है। परिजनों की आंखें राहुल को सकुशल देखने के लिए जमी हुई हैं। टनल के भीतर अब भी चट्टान कटिंग का काम चल रहा है। पर पत्थर राहुल को बाहर निकालने में रोढ़ा बना हुआ है। हालांकि कटिंग कर मलबा भी बाहर निकाला जा रहा है। सबसे बड़ी राहत की बात ये है कि भले ही राहुल शारीरिक रूप से थोड़ा शिथिल हो गया हो लेकिन मानसिक तौर पर उसने अभी भी हिम्मत नहीं हारी है। हांलाकि पहले की तुलना में थोड़ा बहुत कमजोर बताया जा रहा है। लेकिन इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि बढ़ते वक्त के साथ राहुल के स्वास्थ्य को लेकर चिंता भी बढ़ रही है।
रायपुर। रायपुर के जांजगीर में बोरवेल Rahul Rescue Update में फसा राहुल बीते पचासी घंटाटे से CG Big News बाहर निकलने की राह देख रहा CG breaking news है। आपको बता दें उस CG google trend news तक पहुंचने में बस कुछ ही समय शेष बताया जा रहा है। उसके बाहर निकलते ही चिकित्सकीय सुविधा देने के लिए पूरी तरह कमर कस ली गई है। जांजगीर से बिलासपुर तक एक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया है। सभी चौक चौराहों पर पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। आपको बता दें रेस्क्यू के बाद राहुल को सीध बिलासपुर के अपोला अस्पताल में भर्ती करया जाएगा। राहुल बीते करीब पचासी घंटाटों से बोलवेल में फसा है। अभी भी राहुल के सकुशल रेस्क्यू का इंतजार किया जा रहा है। परिजनों की आंखें राहुल को सकुशल देखने के लिए जमी हुई हैं। टनल के भीतर अब भी चट्टान कटिंग का काम चल रहा है। पर पत्थर राहुल को बाहर निकालने में रोढ़ा बना हुआ है। हालांकि कटिंग कर मलबा भी बाहर निकाला जा रहा है। सबसे बड़ी राहत की बात ये है कि भले ही राहुल शारीरिक रूप से थोड़ा शिथिल हो गया हो लेकिन मानसिक तौर पर उसने अभी भी हिम्मत नहीं हारी है। हांलाकि पहले की तुलना में थोड़ा बहुत कमजोर बताया जा रहा है। लेकिन इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि बढ़ते वक्त के साथ राहुल के स्वास्थ्य को लेकर चिंता भी बढ़ रही है।
नई दिल्लीः अंग्रेजी न्यूज चैनल NDTV की पूर्व पत्रकार निधि राजदान (Nidhi Razdan) ने सोशल मीडिया पर खुलासा किया है कि वह बहुत बड़ी जालसाजी का शिकार हुईं हैं। पिछले साल जून में निधि राजदान ने घोषणा की थी कि वो हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर के तौर पर जॉइन करेंगी, इसलिए 21 साल बिताने के बाद NDTV को छोड़ रही हैं। हालांकि शुक्रवार को उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि उन्हें जर्नलिज्म फैकल्टी के तौर पर जॉइन करने के लिए यूनिवर्सिटी से अब तक कोई ऑफर नहीं मिला है। वह फिशिंग की शिकार हुई हैं। उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस से की है और ईमेल के जरिए हुए कम्युनिकेशन की डीटेल्स पुलिस के साथ-साथ हार्वर्ड यूनिवर्सिटी प्रशासन को जांच के लिए सौंपी है। ट्वीट में निधि ने लिखा है, ' जनू 2020 में मैंने यह कहते हुए 21 सालों की एनडीटीवी की नौकरी छोड़ी कि मैं हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में जर्नलिज्म के एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में जॉइन करने जा रही हूं। मुझे बताया गया था कि मैं सितंबर 2020 में यूनिवर्सिटी जॉइन करूंगी। मैं अपने नए असाइनमेंट की तैयारी कर रही थी इसी दौरान मुझे बताया गया कि महामारी की वजह से मेरी क्लासेस जनवरी 2021 में शुरू होंगी। वहीँ अमेरिका के पत्रकार Joshua Benton ने इसे शर्मनाक बताया है। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, वाह - यह शर्मनाक है। मैं आपको जानकारी के लिए बता दूँ की हार्वर्ड में न तो पत्रकारिता का कोई स्कूल है, न ही पत्रकारिता का कोई विभाग है और न ही पत्रकारिता के प्रोफेसर हैं। (इसमें @niemanfdn है लेकिन हमारे पास कोई संकाय नहीं है और न ही कोई कक्षा है। और इसमें @ShorensteinCtr नहीं है, लेकिन पत्रकारिता की कोई specific faculty नहीं है। ) Wow - this is awful. For the record, @Harvard has no school of journalism, no department of journalism, and no professors of journalism.
नई दिल्लीः अंग्रेजी न्यूज चैनल NDTV की पूर्व पत्रकार निधि राजदान ने सोशल मीडिया पर खुलासा किया है कि वह बहुत बड़ी जालसाजी का शिकार हुईं हैं। पिछले साल जून में निधि राजदान ने घोषणा की थी कि वो हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर के तौर पर जॉइन करेंगी, इसलिए इक्कीस साल बिताने के बाद NDTV को छोड़ रही हैं। हालांकि शुक्रवार को उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि उन्हें जर्नलिज्म फैकल्टी के तौर पर जॉइन करने के लिए यूनिवर्सिटी से अब तक कोई ऑफर नहीं मिला है। वह फिशिंग की शिकार हुई हैं। उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस से की है और ईमेल के जरिए हुए कम्युनिकेशन की डीटेल्स पुलिस के साथ-साथ हार्वर्ड यूनिवर्सिटी प्रशासन को जांच के लिए सौंपी है। ट्वीट में निधि ने लिखा है, ' जनू दो हज़ार बीस में मैंने यह कहते हुए इक्कीस सालों की एनडीटीवी की नौकरी छोड़ी कि मैं हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में जर्नलिज्म के एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में जॉइन करने जा रही हूं। मुझे बताया गया था कि मैं सितंबर दो हज़ार बीस में यूनिवर्सिटी जॉइन करूंगी। मैं अपने नए असाइनमेंट की तैयारी कर रही थी इसी दौरान मुझे बताया गया कि महामारी की वजह से मेरी क्लासेस जनवरी दो हज़ार इक्कीस में शुरू होंगी। वहीँ अमेरिका के पत्रकार Joshua Benton ने इसे शर्मनाक बताया है। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, वाह - यह शर्मनाक है। मैं आपको जानकारी के लिए बता दूँ की हार्वर्ड में न तो पत्रकारिता का कोई स्कूल है, न ही पत्रकारिता का कोई विभाग है और न ही पत्रकारिता के प्रोफेसर हैं। Wow - this is awful. For the record, @Harvard has no school of journalism, no department of journalism, and no professors of journalism.
भावुक होते हुए संतोष दहिया ने कहा कि किसानों पर किए गए लाठीचार्ज से वे बहुत दुखी है। संतोष दहिया ने कहा कि जब पिपली में किसानों पर लाठीचार्ज व आंसू गैस के गोले छोड़े थे वे तभी से ही आहत थी लेकिन उन्हें उम्मीद थी कि किसानों के मुद्दे का हल निकल जाएगा। उन्होंने बहुत इंतजार किया। इसके बाद किसी भी पार्टी का दामन थामने बारे जब संतोष दहिया से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वे किसी भी पार्टी में शामिल नही होेंगी, वे सर्व जातीय सर्व खाप के बैनर तले समाजसेवा करती रहेंगी। करनाल में किसानों पर हुए लाठीचार्ज से आहत जननायक जनता पार्टी की नेता संतोष दहिया ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। संतोष दहिया वर्ष 2019 में लाडवा विधानसभा से जजपा की टिकट पर चुनाव लड़ चुकी है। संतोष दहिया जननायक जनता पार्टी में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्य और चार जिलों कैथल, कुरुक्षेत्र, करनाल, अंबाला की महिला प्रभारी भी रही हैं। इसके अलावा संतोष दहिया सर्व जातीय सर्व खाप महिला हरियाणा की अध्य्क्ष भी है। अपने सेक्टर 9 स्थित आवास पर पत्रकारोें से बातचीत करते हुए संतोष दहिया ने बताया कि जजपा पार्टी से शुरू से ही जुड़ी हुई थी उन्हें उम्मीद थी कि किसानों का मुद्दा हल हो जाएगा लेकिन अभी तक हल नही हुआ। 9 महीने में 500 से ज्यादा किसान शहादत दे चुके है। अब जब शनिवार को करनाल में बस्ताडा टोल प्लाजा पर निहत्थे किसानों पर लाठीचार्ज किया गया, उन लोगों पर लाठियां बरसाई जा रही है जो देश का अन्नदाता है। किसान से ही देश की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। संतोष दहिया ने बताया कि इस दौरान एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें करनाल के एसडीएम पुलिसकर्मियों को आदेश देते दिख रहे हैं। वीडियो में एसडीएम पुलिसकर्मियों से कहते सुनाई दे रहे हैं कि मैं किसी भी हाल में किसानों को यहां नहीं देखना चाहता। अगर कोई अंदर आता है तो उसका सिर फूटा होना चाहिए। संतोष दहिया ने बताया कि त्याग पत्र के बारे में उनकी अभी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से बातचीत नही हुई है। पत्रकारों से बातचीत के दौरान भावुक होते हुए संतोष दहिया ने कहा कि किसानों पर किए गए लाठीचार्ज से वे बहुत दुखी है। संतोष दहिया ने कहा कि जब पिपली में किसानों पर लाठीचार्ज व आंसू गैस के गोले छोड़े थे वे तभी से ही आहत थी लेकिन उन्हें उम्मीद थी कि किसानों के मुद्दे का हल निकल जाएगा। उन्होंने बहुत इंतजार किया। इसके बाद किसी भी पार्टी का दामन थामने बारे जब संतोष दहिया से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वे किसी भी पार्टी में शामिल नही होेंगी, वे सर्व जातीय सर्व खाप के बैनर तले समाजसेवा करती रहेंगी। संतोष दहिया ने कहा कि उन्हें दुष्यंत चौटाला से उम्मीद थी कि वे किसानों की मांगों का हल करवाएंगे और इसके लिए उन्होंने कोशिश भी की। इसलिए उनका मानना है कि जब भाजपा सरकार के साथ उनका गठबंधन है और वहां उनकी बात नही सुनी जा रही है तो ऐसे में दुष्यंत चौटाला को भी इस्तीफा दे देना चाहिए।
भावुक होते हुए संतोष दहिया ने कहा कि किसानों पर किए गए लाठीचार्ज से वे बहुत दुखी है। संतोष दहिया ने कहा कि जब पिपली में किसानों पर लाठीचार्ज व आंसू गैस के गोले छोड़े थे वे तभी से ही आहत थी लेकिन उन्हें उम्मीद थी कि किसानों के मुद्दे का हल निकल जाएगा। उन्होंने बहुत इंतजार किया। इसके बाद किसी भी पार्टी का दामन थामने बारे जब संतोष दहिया से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वे किसी भी पार्टी में शामिल नही होेंगी, वे सर्व जातीय सर्व खाप के बैनर तले समाजसेवा करती रहेंगी। करनाल में किसानों पर हुए लाठीचार्ज से आहत जननायक जनता पार्टी की नेता संतोष दहिया ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। संतोष दहिया वर्ष दो हज़ार उन्नीस में लाडवा विधानसभा से जजपा की टिकट पर चुनाव लड़ चुकी है। संतोष दहिया जननायक जनता पार्टी में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्य और चार जिलों कैथल, कुरुक्षेत्र, करनाल, अंबाला की महिला प्रभारी भी रही हैं। इसके अलावा संतोष दहिया सर्व जातीय सर्व खाप महिला हरियाणा की अध्य्क्ष भी है। अपने सेक्टर नौ स्थित आवास पर पत्रकारोें से बातचीत करते हुए संतोष दहिया ने बताया कि जजपा पार्टी से शुरू से ही जुड़ी हुई थी उन्हें उम्मीद थी कि किसानों का मुद्दा हल हो जाएगा लेकिन अभी तक हल नही हुआ। नौ महीने में पाँच सौ से ज्यादा किसान शहादत दे चुके है। अब जब शनिवार को करनाल में बस्ताडा टोल प्लाजा पर निहत्थे किसानों पर लाठीचार्ज किया गया, उन लोगों पर लाठियां बरसाई जा रही है जो देश का अन्नदाता है। किसान से ही देश की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। संतोष दहिया ने बताया कि इस दौरान एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें करनाल के एसडीएम पुलिसकर्मियों को आदेश देते दिख रहे हैं। वीडियो में एसडीएम पुलिसकर्मियों से कहते सुनाई दे रहे हैं कि मैं किसी भी हाल में किसानों को यहां नहीं देखना चाहता। अगर कोई अंदर आता है तो उसका सिर फूटा होना चाहिए। संतोष दहिया ने बताया कि त्याग पत्र के बारे में उनकी अभी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से बातचीत नही हुई है। पत्रकारों से बातचीत के दौरान भावुक होते हुए संतोष दहिया ने कहा कि किसानों पर किए गए लाठीचार्ज से वे बहुत दुखी है। संतोष दहिया ने कहा कि जब पिपली में किसानों पर लाठीचार्ज व आंसू गैस के गोले छोड़े थे वे तभी से ही आहत थी लेकिन उन्हें उम्मीद थी कि किसानों के मुद्दे का हल निकल जाएगा। उन्होंने बहुत इंतजार किया। इसके बाद किसी भी पार्टी का दामन थामने बारे जब संतोष दहिया से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वे किसी भी पार्टी में शामिल नही होेंगी, वे सर्व जातीय सर्व खाप के बैनर तले समाजसेवा करती रहेंगी। संतोष दहिया ने कहा कि उन्हें दुष्यंत चौटाला से उम्मीद थी कि वे किसानों की मांगों का हल करवाएंगे और इसके लिए उन्होंने कोशिश भी की। इसलिए उनका मानना है कि जब भाजपा सरकार के साथ उनका गठबंधन है और वहां उनकी बात नही सुनी जा रही है तो ऐसे में दुष्यंत चौटाला को भी इस्तीफा दे देना चाहिए।
कोलकाता, सात अगस्त पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को तोक्यो ओलंपिक में भाला फेंक प्रतियोगिता में भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाने वाले नीरज चोपड़ा को इस ऐतिहासिक जीत पर बधाई दी। स्टार एथलीट चोपड़ा ने भाला फेंक का स्वर्ण पदक अपने नाम करके भारत को ओलंपिक ट्रैक एवं फील्ड प्रतियोगिताओं में अब तक का पहला पदक दिलाकर नया इतिहास रचा। हरियाणा के खांद्रा गांव के एक किसान के बेटे 23 वर्षीय नीरज ने अपने दूसरे प्रयास में 87. 58 मीटर भाला फेंककर स्वर्ण पदक के लिये देश का लंबा इंतजार समाप्त कर दिया। एथलेटिक्स में पिछले 100 वर्ष से अधिक समय में भारत का यह पहला ओलंपिक पदक है। चोपड़ा भारत की तरफ से व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतने वाले दूसरे भारतीय खिलाड़ी हैं। इससे पहले निशानेबाज अभिनव बिंद्रा ने बीजिंग ओलंपिक 2008 में पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल में स्वर्ण पदक जीता था। बनर्जी ने ट्वीट किया कि हरियाणा के एथलीट की जीत ने पूरे देश में खुशी की लहर भर दी है। उन्होंने कहा, " इतिहास रचा गया है। ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले एथलीट नीरज चोपड़ा पर गर्व है। आज, इस शानदार जीत पर पूरा देश खुशी मना रहा है। आपको बहुत, बहुत बधाई। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
कोलकाता, सात अगस्त पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को तोक्यो ओलंपिक में भाला फेंक प्रतियोगिता में भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाने वाले नीरज चोपड़ा को इस ऐतिहासिक जीत पर बधाई दी। स्टार एथलीट चोपड़ा ने भाला फेंक का स्वर्ण पदक अपने नाम करके भारत को ओलंपिक ट्रैक एवं फील्ड प्रतियोगिताओं में अब तक का पहला पदक दिलाकर नया इतिहास रचा। हरियाणा के खांद्रा गांव के एक किसान के बेटे तेईस वर्षीय नीरज ने अपने दूसरे प्रयास में सत्तासी. अट्ठावन मीटर भाला फेंककर स्वर्ण पदक के लिये देश का लंबा इंतजार समाप्त कर दिया। एथलेटिक्स में पिछले एक सौ वर्ष से अधिक समय में भारत का यह पहला ओलंपिक पदक है। चोपड़ा भारत की तरफ से व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतने वाले दूसरे भारतीय खिलाड़ी हैं। इससे पहले निशानेबाज अभिनव बिंद्रा ने बीजिंग ओलंपिक दो हज़ार आठ में पुरुषों की दस मीटर एयर राइफल में स्वर्ण पदक जीता था। बनर्जी ने ट्वीट किया कि हरियाणा के एथलीट की जीत ने पूरे देश में खुशी की लहर भर दी है। उन्होंने कहा, " इतिहास रचा गया है। ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले एथलीट नीरज चोपड़ा पर गर्व है। आज, इस शानदार जीत पर पूरा देश खुशी मना रहा है। आपको बहुत, बहुत बधाई। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
शब्बीर अहमद, भोपाल। राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के भोपाल दौरे के ठीक एक दिन पहले देर रात प्रदेश बीजेपी कार्यसमिति का ऐलान कर दिया गया। जारी करते ही सूची विवादों में आ गई। सूची पर जमकर विवाद हुआ, कांग्रेस ने भी बीजेपी की सूची पर सवाल उठाए। जिसके बाद देर रात नई सूची जारी की गई। दरअसल बीजपी द्वारा जो सूची जारी की गई उसमें कार्यसमिति में शामिल किये गए सदस्यों की जाति का उल्लेख किया गया है। पहली बार नेताओं की जाति बताई गई है कि वे किस वर्ग से आते हैं। इसके साथ ही कुछ नेताओं की जाति को लेकर भी विवाद हुआ, सूची में कई बड़े नेताओं की जातियां तक गलत अंकित की गई थी। सूची में कैलाश विजयवर्गीय को ब्राह्मण बताया गया है वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया को राजपूत। जबकि विजयवर्गीय वैश्य हैं तो सिंधिया कुर्मी मराठा वर्ग से हैं। जो सूची जारी की गई है उसमें कार्यसमिति में 162 कार्यसमिति सदस्य बनाए गए हैं, विशेष आमंत्रित सदस्य 218 और स्थाई आमंत्रित सदस्यों में 23 को नियुक्त किया गया है। जारी की गई सूची में सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़कर आए नेताओं को बीजेपी की कार्यसमिति और आमंत्रित सदस्यों में अच्छी खासी जगह मिली। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती को पार्टी ने दरकिनार कर दिया, उन्हें किसी भी सूची में जगह नहीं दी गई है जबकि आमंत्रित सदस्यों में धर्मेन्द्र प्रधान, प्रभात झा समेत कई नेताओं को शामिल किया गया है। आपको बता दें वीडी शर्मा को प्रदेश अध्यक्ष बने 15 महीने बीत चुके हैं। लंबे समय से प्रदेश कार्यसमिति की सूची अटकी हुई थी। जिसे सिंधिया के दौरे के एक दिन पहले जारी किया गया। बीजेपी की सूची पर कांग्रेस ने एक के बाद एक ट्वीट कर सवाल उठाए। कांग्रेस प्रवक्ता नरेन्द्र सलूजा ने ट्वीट कर कहा कि मध्यप्रदेश भाजपा की देर रात अंधेरे में घोषित कार्यकारिणी में नामों के आगे पहली बार जाति-वर्ग का उल्लेख ? लोगों को जाति-वर्ग के आधार पर बाटने की कोशिश. . ? 162 कार्यसमिति सदस्य , 218 विशेष आमंत्रित सदस्य ,23 स्थायी आमंत्रित सदस्यों की भारी भरकम सूची में भी उमा भारती का नाम नदारद ? मध्यप्रदेश भाजपा की देर रात अंधेरे में घोषित कार्यकारिणी में नामों के आगे पहली बार जाति-वर्ग का उल्लेख ? लोगों को जाति-वर्ग के आधार पर बाटने की कोशिश. . ? 162 कार्यसमिति सदस्य , 218 विशेष आमंत्रित सदस्य ,23 स्थायी आमंत्रित सदस्यों की भारी भरकम सूची में भी उमा भारती का नाम नदारद ? इसके साथ ही कांग्रेस ने ट्वीट कर कहा कि सूची में शिवराज समर्थकों की जगह विरोधियों को शामिल किया गया है। सलूजा ने ट्वीट कर कहा, "भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी - अब एक घाट में पानी पियेंगे ज्योतिरदित्य सिंधिया और जयभान पवैया...? कैलाश विजयवर्गीय का नाम 4 थे न. पर और सिंधिया का नाम 7 वे न. पर...? सागर से शिवराज समर्थक भूपेन्द्र सिंह का नाम ग़ायब , गोपाल भार्गव का नाम शामिल...? शिवराज के सारे विरोधी शामिल...? -अब एक घाट में पानी पियेंगे ज्योतिरदित्य सिंधिया और जयभान पवैया...? -कैलाश विजयवर्गीय का नाम 4 थे न. पर और सिंधिया का नाम 7 वे न. पर...? -सागर से शिवराज समर्थक भूपेन्द्र सिंह का नाम ग़ायब , गोपाल भार्गव का नाम शामिल...? -शिवराज के सारे विरोधी शामिल...? एक और ट्वीट में सलूजा ने बीजेपी की सूची में नेताओं की जातियों को गलत उल्लेख करने पर तंज कसा है, उन्होंने कहा कि भाजपा संगठन को अपने नेताओं की जातियां ही नहीं पता। भाजपा संगठन को अपने नेताओ की जाति ही नहीं पता ? भाजपा संगठन को अपने नेताओ की जाति तक पता नहीं और थोक में पद बाँट दिये.... ? भाजपा के लिये आज का दिन शुभ नहीं...? कल शिवराज जी के ओएसडी घोषित , आज नाम वापस. . ? भाजपा की देर रात अंधेरे में सूची घोषित और देर रात सूची वापस...? उमा भारती का नाम नहीं , नेताओ के जाति- वर्ग लिखे , वो भी ग़लत...? क्या मज़ाक़ बना दिया है विश्व की सबसे बड़ी पार्टी का...? विवादित सूची को वापस लेकर नई सूची जारी करने पर कांग्रेस प्रवक्ता ने फिर बीजेपी पर निशाना साधा। कांग्रेस प्रवक्ता नरेन्द्र सलूजा ने कहा कि जाति उल्लेख करने की गलती सुधार ली। बीजेपी को मध्य प्रदेश में सत्ता में लाने वाली उमा भारती का नाम शामिल कर इस त्रुटि को भी सुधार लेते। आख़िरकार कांग्रेस की आपत्ति के बाद भाजपा ने अपनी गलती सुधारी , पदाधिकारियों के नाम के आगे से जाति-वर्ग का उल्लेख हटाया...? बस प्रदेश में भाजपा को वापस सत्ता में लाने वाली पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती का नाम भी शामिल कर लेते और त्रुटि सुधार लेते...? बन गयी थी.... ?
शब्बीर अहमद, भोपाल। राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के भोपाल दौरे के ठीक एक दिन पहले देर रात प्रदेश बीजेपी कार्यसमिति का ऐलान कर दिया गया। जारी करते ही सूची विवादों में आ गई। सूची पर जमकर विवाद हुआ, कांग्रेस ने भी बीजेपी की सूची पर सवाल उठाए। जिसके बाद देर रात नई सूची जारी की गई। दरअसल बीजपी द्वारा जो सूची जारी की गई उसमें कार्यसमिति में शामिल किये गए सदस्यों की जाति का उल्लेख किया गया है। पहली बार नेताओं की जाति बताई गई है कि वे किस वर्ग से आते हैं। इसके साथ ही कुछ नेताओं की जाति को लेकर भी विवाद हुआ, सूची में कई बड़े नेताओं की जातियां तक गलत अंकित की गई थी। सूची में कैलाश विजयवर्गीय को ब्राह्मण बताया गया है वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया को राजपूत। जबकि विजयवर्गीय वैश्य हैं तो सिंधिया कुर्मी मराठा वर्ग से हैं। जो सूची जारी की गई है उसमें कार्यसमिति में एक सौ बासठ कार्यसमिति सदस्य बनाए गए हैं, विशेष आमंत्रित सदस्य दो सौ अट्ठारह और स्थाई आमंत्रित सदस्यों में तेईस को नियुक्त किया गया है। जारी की गई सूची में सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़कर आए नेताओं को बीजेपी की कार्यसमिति और आमंत्रित सदस्यों में अच्छी खासी जगह मिली। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती को पार्टी ने दरकिनार कर दिया, उन्हें किसी भी सूची में जगह नहीं दी गई है जबकि आमंत्रित सदस्यों में धर्मेन्द्र प्रधान, प्रभात झा समेत कई नेताओं को शामिल किया गया है। आपको बता दें वीडी शर्मा को प्रदेश अध्यक्ष बने पंद्रह महीने बीत चुके हैं। लंबे समय से प्रदेश कार्यसमिति की सूची अटकी हुई थी। जिसे सिंधिया के दौरे के एक दिन पहले जारी किया गया। बीजेपी की सूची पर कांग्रेस ने एक के बाद एक ट्वीट कर सवाल उठाए। कांग्रेस प्रवक्ता नरेन्द्र सलूजा ने ट्वीट कर कहा कि मध्यप्रदेश भाजपा की देर रात अंधेरे में घोषित कार्यकारिणी में नामों के आगे पहली बार जाति-वर्ग का उल्लेख ? लोगों को जाति-वर्ग के आधार पर बाटने की कोशिश. . ? एक सौ बासठ कार्यसमिति सदस्य , दो सौ अट्ठारह विशेष आमंत्रित सदस्य ,तेईस स्थायी आमंत्रित सदस्यों की भारी भरकम सूची में भी उमा भारती का नाम नदारद ? मध्यप्रदेश भाजपा की देर रात अंधेरे में घोषित कार्यकारिणी में नामों के आगे पहली बार जाति-वर्ग का उल्लेख ? लोगों को जाति-वर्ग के आधार पर बाटने की कोशिश. . ? एक सौ बासठ कार्यसमिति सदस्य , दो सौ अट्ठारह विशेष आमंत्रित सदस्य ,तेईस स्थायी आमंत्रित सदस्यों की भारी भरकम सूची में भी उमा भारती का नाम नदारद ? इसके साथ ही कांग्रेस ने ट्वीट कर कहा कि सूची में शिवराज समर्थकों की जगह विरोधियों को शामिल किया गया है। सलूजा ने ट्वीट कर कहा, "भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी - अब एक घाट में पानी पियेंगे ज्योतिरदित्य सिंधिया और जयभान पवैया...? कैलाश विजयवर्गीय का नाम चार थे न. पर और सिंधिया का नाम सात वे न. पर...? सागर से शिवराज समर्थक भूपेन्द्र सिंह का नाम ग़ायब , गोपाल भार्गव का नाम शामिल...? शिवराज के सारे विरोधी शामिल...? -अब एक घाट में पानी पियेंगे ज्योतिरदित्य सिंधिया और जयभान पवैया...? -कैलाश विजयवर्गीय का नाम चार थे न. पर और सिंधिया का नाम सात वे न. पर...? -सागर से शिवराज समर्थक भूपेन्द्र सिंह का नाम ग़ायब , गोपाल भार्गव का नाम शामिल...? -शिवराज के सारे विरोधी शामिल...? एक और ट्वीट में सलूजा ने बीजेपी की सूची में नेताओं की जातियों को गलत उल्लेख करने पर तंज कसा है, उन्होंने कहा कि भाजपा संगठन को अपने नेताओं की जातियां ही नहीं पता। भाजपा संगठन को अपने नेताओ की जाति ही नहीं पता ? भाजपा संगठन को अपने नेताओ की जाति तक पता नहीं और थोक में पद बाँट दिये.... ? भाजपा के लिये आज का दिन शुभ नहीं...? कल शिवराज जी के ओएसडी घोषित , आज नाम वापस. . ? भाजपा की देर रात अंधेरे में सूची घोषित और देर रात सूची वापस...? उमा भारती का नाम नहीं , नेताओ के जाति- वर्ग लिखे , वो भी ग़लत...? क्या मज़ाक़ बना दिया है विश्व की सबसे बड़ी पार्टी का...? विवादित सूची को वापस लेकर नई सूची जारी करने पर कांग्रेस प्रवक्ता ने फिर बीजेपी पर निशाना साधा। कांग्रेस प्रवक्ता नरेन्द्र सलूजा ने कहा कि जाति उल्लेख करने की गलती सुधार ली। बीजेपी को मध्य प्रदेश में सत्ता में लाने वाली उमा भारती का नाम शामिल कर इस त्रुटि को भी सुधार लेते। आख़िरकार कांग्रेस की आपत्ति के बाद भाजपा ने अपनी गलती सुधारी , पदाधिकारियों के नाम के आगे से जाति-वर्ग का उल्लेख हटाया...? बस प्रदेश में भाजपा को वापस सत्ता में लाने वाली पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती का नाम भी शामिल कर लेते और त्रुटि सुधार लेते...? बन गयी थी.... ?
रायपुर, 17 अक्टूबर (आईएएनएस/वीएनएस)। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के खमतराई थाना इलाके में जूट मिल में मंगलवार दोपहर आग लग गई, जिससे मिल में रखा करोड़ों का जूट जलकर खाक हो गया। खमतराई थाना प्रभारी पूर्णिमा लांबा ने कहा कि आग पर काबू पा लिया गया है। भनपुरी स्थित छत्तीसगढ़ जूट इंडस्ट्रीज के अकाउंट मैनेजर पी. आर. नायक ने कहा, मंगलवार दोपहर 12. 30 बजे आग लगी। आग किन कारणों से लगी, इसका पता अभी तक नहीं चल सका है। जूट बहुत जल्दी आग पकड़ता है। निर्माण के दौरान आपस में घर्षण से भी इसमें आग लग सकती है। नायक ने कहा कि इस आग में कंपनी को करोड़ों का नुकसान हुआ है।
रायपुर, सत्रह अक्टूबर । छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के खमतराई थाना इलाके में जूट मिल में मंगलवार दोपहर आग लग गई, जिससे मिल में रखा करोड़ों का जूट जलकर खाक हो गया। खमतराई थाना प्रभारी पूर्णिमा लांबा ने कहा कि आग पर काबू पा लिया गया है। भनपुरी स्थित छत्तीसगढ़ जूट इंडस्ट्रीज के अकाउंट मैनेजर पी. आर. नायक ने कहा, मंगलवार दोपहर बारह. तीस बजे आग लगी। आग किन कारणों से लगी, इसका पता अभी तक नहीं चल सका है। जूट बहुत जल्दी आग पकड़ता है। निर्माण के दौरान आपस में घर्षण से भी इसमें आग लग सकती है। नायक ने कहा कि इस आग में कंपनी को करोड़ों का नुकसान हुआ है।
और भामोदयाचा भुमी कूपना घूमना-फिरना ट्रिप तफरीह पर्यटन परिभ्रमण प्रमन यात्रा मटरमस्ती यायावरी बिहार सुपर सैर-सपाटस इमाखोरी । संसानी बुमक्का टूरिस्ट पायावर । मागबाड़ ( २ ) 1 २ विशिष्ट रेल डा/ टिसाठी २ छडी मासा (घाबरदार) मुठि शुष्फमदरक । सौधा विशिष्ट मुर्तधवावा पहली बप से पृथ्वी सेवामा मिट्टी के बर्तन में पानी पहने या चना मेन बादि भुनने से उत्पन्न वाला दोहा। १ नाई की दुकाम साईखाना कंपार्टमेंट । १ मई २ मय इसलिए निदान । मैं हूँ मैं बहीबाहूँईस्मि । सोयना चुममा चूसनेमा रस वाँचमा देकरमा सोमोमा तानेबाला समाना। १पेपर स्पाइस २ दिम्न बमा हुमा बग्छ । लोग सोम इधरेम लोक । सोमीट करनेवाला इम/इय/र/शोक मनानेवाला बुधित लोशल मोकादुर । १ फ्रि पिता दुषिता २ मा कारभ मेग संपराविषय सोन-विचार ४ा पश्चाताप । बरला बहाना अक्स के पो दोमामा और करना और घरमामा मिलन बरमा विन-मनन करना दिमाम बहामा मनन करना विचार करना होच-विचार करमा गोषमा विचारता । १ नमन । लोटा है मो
और भामोदयाचा भुमी कूपना घूमना-फिरना ट्रिप तफरीह पर्यटन परिभ्रमण प्रमन यात्रा मटरमस्ती यायावरी बिहार सुपर सैर-सपाटस इमाखोरी । संसानी बुमक्का टूरिस्ट पायावर । मागबाड़ एक दो विशिष्ट रेल डा/ टिसाठी दो छडी मासा मुठि शुष्फमदरक । सौधा विशिष्ट मुर्तधवावा पहली बप से पृथ्वी सेवामा मिट्टी के बर्तन में पानी पहने या चना मेन बादि भुनने से उत्पन्न वाला दोहा। एक नाई की दुकाम साईखाना कंपार्टमेंट । एक मई दो मय इसलिए निदान । मैं हूँ मैं बहीबाहूँईस्मि । सोयना चुममा चूसनेमा रस वाँचमा देकरमा सोमोमा तानेबाला समाना। एकपेपर स्पाइस दो दिम्न बमा हुमा बग्छ । लोग सोम इधरेम लोक । सोमीट करनेवाला इम/इय/र/शोक मनानेवाला बुधित लोशल मोकादुर । एक फ्रि पिता दुषिता दो मा कारभ मेग संपराविषय सोन-विचार चारा पश्चाताप । बरला बहाना अक्स के पो दोमामा और करना और घरमामा मिलन बरमा विन-मनन करना दिमाम बहामा मनन करना विचार करना होच-विचार करमा गोषमा विचारता । एक नमन । लोटा है मो
टोक्यो ओलंपिक 2020 खेलों (Tokyo Olympics) में भारतीय एथलीट नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra) ने पुरुष जेवलिन थ्रो का गोल्ड मेडल (Gold Medal) जीता है. ये एथलेटिक्स में भारतीय इतिहास का पहला ओलंपिक मेडल (First Olympic medal in Athletics for India) है. इसके साथ ही ओलंपिक खेलों में शूटर अभिनव बिंद्रा के बाद ये भारत का व्यक्तिगत स्पर्धा में सिर्फ दूसरा गोल्ड मेडल है. बता दें कि धावक मिल्खा सिंह, पीटी उषा और अंजू बॉबी जॉर्ज जैसे एथलीट बहुत कम मार्जिन से एथलेटिक्स में भारत के लिए ओलंपिक मेडल लाने से चूके थे. हरियाणा के नीरज चोपड़ा ने अपने 87. 58 मीटर की बेस्ट थ्रो के बूते गोल्ड मेडल जीता. दूसरे नंबर पर चेक गणराज्य के VADLEJCH Jakub अपनी बेस्ट थ्रो 86. 67 के साथ रहे और तीसरे स्थान पर भी चेक गणराज्य का ही कब्जा रहा. Vitezslav VESELY ने अपनी सीजन बेस्ट 85. 44 मीटर थ्रो के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता. 23 साल के नीरज चोपड़ा फाइनल में बेस्ट प्रदर्शन करने के साथ ही क्वालिफिकेशन राउंड में 86. 65 मीटर के थ्रो के साथ पहले नंबर पर रहे थे. नीरज ने भारतीय एथलेटिक्स के दिग्गज मिल्खा सिंह की एक भारतीय को ट्रैक और फील्ड में ओलंपिक पदक जीतते देखने की आखिरी ख्वाहिश को भी पूरा कर दिया. 'फ्लाइंग सिख' के नाम से मशहूर मिल्खा सिंह का इस साल जून में कोविड-19 से लंबी लड़ाई के बाद निधन हो गया था. वह रोम 1960 में 400 मीटर में पदक जीतने के बेहद करीब पहुंच गए थे. वो फोटो-फिनिश में कांस्य पदक से चूक गए, दक्षिण अफ्रीका के मालकम स्पेंस ने उन्हें अंतिम पोडियम स्थान पर हरा दिया. मिल्खा सिंह ने निधन से पहले 2020 में एक इवेंट के दौरान एथलेटिक्स में एक भारतीय द्वारा स्वर्ण पदक जीतने की इच्छा व्यक्त की थी. मिल्खा सिंह के बाद पीटी उषा भी भारत के लिए पदक जीतने के सबसे करीब पहुंच गई थीं. उषा 1984 में लॉस एंजिल्स ओलंपिक की 400 मीटर हर्डल्स में एक सेकंड के 1/100वें हिस्से से कांस्य पदक से चूक गईं. 96 मीटर से ज्यादा जैवलिन फेंकने का रिकॉर्ड अपने नाम रखने वाले जर्मनी के Johannes VETTER अपने पहले प्रयास में महज 82. 52 मीटर की थ्रो करने के बाद दूसरे प्रयास में फाउल कर बैठे और नीचे गिर गए. हालांकि उन्होंने तीसरे प्रयास में भी जैवलिन फेंकने की कोशिश की, लेकिन दोबारा फाउल कर गए. वह फाइनल 8 में भी जगह नहीं बना पाए. नीरज चोपड़ा ने जकार्ता में 2018 एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता, जहां उन्होंने 88. 06 मीटर का एक नया भारतीय राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया, और उद्घाटन समारोह में ध्वजवाहक थे. नीरज चोपड़ा ने तब से 2021 में इंडियन ग्रां प्री में 88. 07 मीटर फेंककर अपना ही रिकॉर्ड तोड़ा है. उन्होंने गोल्ड कोस्ट 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में भी स्वर्ण पदक जीता, 2016 IAAF विश्व U20 चैंपियन थे, और 86. 48 मीटर का विश्व जूनियर रिकॉर्ड बनाया.
टोक्यो ओलंपिक दो हज़ार बीस खेलों में भारतीय एथलीट नीरज चोपड़ा ने पुरुष जेवलिन थ्रो का गोल्ड मेडल जीता है. ये एथलेटिक्स में भारतीय इतिहास का पहला ओलंपिक मेडल है. इसके साथ ही ओलंपिक खेलों में शूटर अभिनव बिंद्रा के बाद ये भारत का व्यक्तिगत स्पर्धा में सिर्फ दूसरा गोल्ड मेडल है. बता दें कि धावक मिल्खा सिंह, पीटी उषा और अंजू बॉबी जॉर्ज जैसे एथलीट बहुत कम मार्जिन से एथलेटिक्स में भारत के लिए ओलंपिक मेडल लाने से चूके थे. हरियाणा के नीरज चोपड़ा ने अपने सत्तासी. अट्ठावन मीटर की बेस्ट थ्रो के बूते गोल्ड मेडल जीता. दूसरे नंबर पर चेक गणराज्य के VADLEJCH Jakub अपनी बेस्ट थ्रो छियासी. सरसठ के साथ रहे और तीसरे स्थान पर भी चेक गणराज्य का ही कब्जा रहा. Vitezslav VESELY ने अपनी सीजन बेस्ट पचासी. चौंतालीस मीटर थ्रो के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता. तेईस साल के नीरज चोपड़ा फाइनल में बेस्ट प्रदर्शन करने के साथ ही क्वालिफिकेशन राउंड में छियासी. पैंसठ मीटर के थ्रो के साथ पहले नंबर पर रहे थे. नीरज ने भारतीय एथलेटिक्स के दिग्गज मिल्खा सिंह की एक भारतीय को ट्रैक और फील्ड में ओलंपिक पदक जीतते देखने की आखिरी ख्वाहिश को भी पूरा कर दिया. 'फ्लाइंग सिख' के नाम से मशहूर मिल्खा सिंह का इस साल जून में कोविड-उन्नीस से लंबी लड़ाई के बाद निधन हो गया था. वह रोम एक हज़ार नौ सौ साठ में चार सौ मीटर में पदक जीतने के बेहद करीब पहुंच गए थे. वो फोटो-फिनिश में कांस्य पदक से चूक गए, दक्षिण अफ्रीका के मालकम स्पेंस ने उन्हें अंतिम पोडियम स्थान पर हरा दिया. मिल्खा सिंह ने निधन से पहले दो हज़ार बीस में एक इवेंट के दौरान एथलेटिक्स में एक भारतीय द्वारा स्वर्ण पदक जीतने की इच्छा व्यक्त की थी. मिल्खा सिंह के बाद पीटी उषा भी भारत के लिए पदक जीतने के सबसे करीब पहुंच गई थीं. उषा एक हज़ार नौ सौ चौरासी में लॉस एंजिल्स ओलंपिक की चार सौ मीटर हर्डल्स में एक सेकंड के एक/एक सौवें हिस्से से कांस्य पदक से चूक गईं. छियानवे मीटर से ज्यादा जैवलिन फेंकने का रिकॉर्ड अपने नाम रखने वाले जर्मनी के Johannes VETTER अपने पहले प्रयास में महज बयासी. बावन मीटर की थ्रो करने के बाद दूसरे प्रयास में फाउल कर बैठे और नीचे गिर गए. हालांकि उन्होंने तीसरे प्रयास में भी जैवलिन फेंकने की कोशिश की, लेकिन दोबारा फाउल कर गए. वह फाइनल आठ में भी जगह नहीं बना पाए. नीरज चोपड़ा ने जकार्ता में दो हज़ार अट्ठारह एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता, जहां उन्होंने अठासी. छः मीटर का एक नया भारतीय राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया, और उद्घाटन समारोह में ध्वजवाहक थे. नीरज चोपड़ा ने तब से दो हज़ार इक्कीस में इंडियन ग्रां प्री में अठासी. सात मीटर फेंककर अपना ही रिकॉर्ड तोड़ा है. उन्होंने गोल्ड कोस्ट दो हज़ार अट्ठारह राष्ट्रमंडल खेलों में भी स्वर्ण पदक जीता, दो हज़ार सोलह IAAF विश्व Uबीस चैंपियन थे, और छियासी. अड़तालीस मीटर का विश्व जूनियर रिकॉर्ड बनाया.
समीक्षा के मान और हिदी समीक्षा की विशिष्ट प्रवृत्तियाँ विषयक धारणा - ७३२, अभिव्यंजना का अर्थ - ७३२ अभिव्यंजन की प्रक्रिया - ७३३, अभिव्यंजनावाद की समीक्षात्मक परिणति-७३४, भारतीय सिद्धान्त से अन्तर७३४ । पाश्चात्य समीक्षा और यथार्थवादी आन्दोलन- ७३४, प्रतिक्रियात्मकता--- ७३४, स्वरूप - ७३५, हिन्दी साहित्य और यथार्थवाद -- ७३५, यथार्थवाद और आदर्शवाद७३६, यथार्थवाद का हिन्दी साहित्य पर प्रभाव - ७३६ । पाश्चात्य साहित्य में प्रतीकवाद - ७३७, वैचारिक विरोध - ७३७, प्रतीकों का क्षेत्र और महत्व - ७३७, भारतीय साहित्य मे प्रतीकवाद - ७३८ अति यथार्थबाद का वैचारिक आधार- ७३९, संध्यांतिक प्रसार- ७३९, अन्य विचारधाराओं से तुलना- ७४० । अस्तित्ववादी विचार प्रणाली - ७४०, आध्यात्मिक संकट का दर्शन-७४१, मूल्य परिवर्तन - ७४१, अस्तित्ववाद और उसकी साहित्यिक परिणति -७४१ । आदर्शवादी वैचारिक प्रसार - ७४३, हिन्दी साहित्य और आदर्शवाद-७४३, पाश्चात्य प्रभाव से पूर्व की स्थिति - ७४४ । भारतीय रस सिद्धांत - १४५, भरत सूत्र - ७४६, रस वर्गीकरण - ७४६, रस संख्या -- ७४७, रसानुभूति की प्रक्रिया - ७४७, भारतीय रस सिद्धांत और पाश्चात्य मान्यताएं--७४७ । भारतीय अलंकार सिद्धात ७७८, प्राचीनता - ७७८, भामह का अलकार विवेचन ७७८, दटी का दृष्टिकोण - ७७९, उद्भट की अलंकार व्याख्या ७४९, अन्य अलंकार शास्त्री और अलंकार भेद - ७५०, महत्व - ७५०, पाश्चात्य यूनानी साहित्य शास्त्र और भारतीय अलंकार सिद्धांत -- ७५१ । भारतीय ध्वनि सिद्धांत - ७५१, व्याख्या और क्षेत्र विस्तार-७५१, भारतीय ध्वनि सिद्धांत और पाश्चात्य दृष्टिकोण-७५२ । भारतीय रीति सिद्धांत - ७५३, रीति और गुण- ७५३, भारतीय रीति सिद्धात तथा पाश्चात्य प्रतीकवाद-- ७५४, भारतीय वक्रोक्ति सिद्धात ७५४ स्वरूप-७५५, वक्रोक्ति सिद्धांत तथा अभिव्यंजनावाद, - ७५५, निष्कर्ष - ७५६ । अध्याय : ९ आधुनिक हिवो सभीक्षा की विशिष्ट प्रवृत्तियाँ ७४९, आधुनिक हिंदी समीक्षा की पृष्ठभूमि - ७६१, रीति साहित्य चितन का स्वरूप७६२ आधुनिक हिंदी समीक्षा का आरंभ - ७६३ ॥ ऐतिहासिक समीक्षा की प्रवृत्ति ७६४, स्वरूप - ७६४, प्रमुख विशेषता - ७६५, आरभ और विकास - ७६६, प्रमुख समीक्षक - ७६६, गार्सा द तासी-७६७, शिवसिंह सेगर - ७६७, डा० ग्रियर्सन- ७६७, खोज रिपोर्ट - ७६८, मिश्रबन्धु ७६८, रामचन्द्र शुक्ल - ७६९, अन्य समीक्षक डॉ० श्यामसुन्दर दास, डा० सूर्यकांत शास्त्री डा० हजारी प्रसाद द्विवेदी, अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' डा० रामशंकर शुम्ल 'रसाल' डा० रामकुमार वर्मा - ७७११ सुधारपरक समीक्षा की प्रवृत्ति - ७७१ स्वरूप -- ७७१, आरंभ और विकास७७१, महावीर प्रसाद द्विवेदी - ७७२, साहित्यिक सान्यताएँ - ७६३१ तुलनात्मक समीक्षा की प्रवृत्ति - ७८१, स्वरूप - ७८१, पूर्ण रूप ७८२, आरंभ और विकास - ७८२, मिश्रबन्धु ७८३, पद्मसिंह शर्मा - ७८३, सतसई संहार -- ७८४, बिहारी की सतसई - ७८५, मौलिकता का स्वरूप ७८६, महत्व - ७८६, कृष्णबिहारी मिश्र - ७८७, देव और बिहारी - ७०७, शास्त्रीय दृष्टि - ७८५, निर्णयात्मक स्पष्टत ७८८ काव्य की भाषा - ७८९, देव और केशव - ७८९, मतिराम ग्रंथावली - ७९०, महत्व - ७९० भगवान दीन - ७९१, बिहारी और देव- ७९१, अन्य कृतियाँ - ७९२, महत्व - ७९२, शचीगनी गुर्टू - ७९२, दृष्टिकोण ७९३, सीमाएँ - ७९४, महत्व -- ७९५, संभावनाएँ - ७९६, समीक्षा की प्रवृत्ति ७९६, स्वरूप - ७९६. परम्पराः कविराज मुरारिदान - ७९७. प्रतापनारायण सिंह - ७९७. कन्हैयालाल पोद्दार - ७९७. जगन्नाथ प्रसाद 'भानु' - ७९८. भगवानदीन - रामशंकर शुक्ल 'रसाल - ७९९. सीताराम शास्त्री७९९ अर्जुनदास केडिया - ८००, आयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध - ८००० बिहारीलाल भट्ट - ८०० मिश्रबन्धु - ००१, हिन्दी नवरत्न ८०१, साहित्य पारिजात-८०२, महत्व - ८०२ श्यामसुन्दर दास - ८०३. कृत्तियाँ-८०४ दृष्टिकोण - ८०४, कला का स्वरूप - ८०४, काव्य -- ८०५. काव्य और नीति - ८०६, व्यावहारिक समीक्षा - ८०७ महत्व - ८००. रामचन्द्र शुक्ल ८०८. काव्य का स्वरूप -- ८०८ काव्य का उद्देश्य ८०९. काव्य और कल्पना - ८१०, काव्य और भाषा-८११ काव्य और अलंकार - ८१२, रस - ८१२. महत्व -- ८१३, गुलाबराय- ६१४, काव्य८१४, काव्य और कला - ८१५, काव्य और कल्पना-८१५. रस-८१५. सीताराम चतुर्वेदी -- ८१६. लक्ष्मीनारायण सुधांशु -८१६ हजारी प्रसाद द्विवेदी - ८१७, विश्वनाथ प्रसाद मिश्र - ८१७, संभावनाएं - ८२० । छायावादी समीक्षा की प्रवृत्ति- ८१० स्वरूप ८२० जयशंकर प्रसाद'-८२१. काव्य और कला - ८२१, रस - ८२२, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'-८२२. काव्य और कला-८२४. काव्य और छंद-८२५, सुमित्रानन्दन पंत ८२६, काव्य ८२६, भाषा८२७, -- छायावाद - ८२७ महादेवी वर्मा -८२८, काव्य ७२८. छायावाद - ६२९, शांतिप्रिय द्विवेदी - ८३०. गंगाप्रसाद पांडेय-८३२, महत्व और संभावनाएँ-- ८३२ प्रगतिवादी समीक्षा की प्रवृत्ति - ८३२, स्वरूप -- ८३२, प्रारंभ - ८३३, राहुल सांकृत्यायन ३३, प्रगतिवाद को एकांगिता-८३४, प्रकाशचंद्र गुप्त - ६३५, डॉ० रामविलास शर्मा - ३६, शिवदानसिंह चौहान -८३९, प्रयोग की कसौटी-८४०, प्रगति और प्रचार-८४० मन्थनाथ गुप्त -८४१, प्रगतिवाद की अनिवार्यता- ८४२, वैचक्तिक स्वातंत्र्य - ८४३, अतीत का ज्ञान-८४३, प्रगतिवादी दृष्टि-८४४, डॉ० रांगेय राघक -८४५, रामेश्वर शर्मा - ८४६, महत्व और संभावनाएँ-८४८, व्यक्तिवादी समीक्षा की प्रकृत्ति-८४८, स्वरूप-८४८, प्रारंभ-८४९, सच्चिदानंद हौरानंद वात्स्यायन 'अक्षेय'८४९, अनुभूति की व्यापकता - ८५०, साहित्य में प्रयोगात्यमकता-८५०, नीति नत्व -८५७, प्रयोग की कसौटी-८५२, गिरिजाकुमार माथुर-८५२, डॉ धर्मवीर भारती -६५४, लक्ष्मीकांत वर्मा - ८५५, महत्व तथा संम्भावनाएँ-८५६ । मनोविश्लेषणात्मक समीक्षा की प्रवृत्ति - ८५७, स्वरूप-८५७, बारंभ -८५६, जैनेन्द्र कुमार-८५८, वैयक्तिकता का आग्रह -८५९, सर्वोदय-८५९, पंचशील -- ८६०, व्यक्ति का उन्नयन - ८६०, रचनात्मक जीवन दृष्टि-८६१, इलाचंद्र जोशी-८६१, युग भावना और आडम्बर की प्रकृति -८६२, छायावाद की उपलद्धि-८६३, साहित्य और वैयक्तिक कुंठा-८६४, मनोविज्ञान की ऐकांतिकता-८६४, मनोविश्लेषणवाद-८६५, महत्व तथा संभावानाएँ-८६६ । शोध परक समीक्षा की प्रवृत्ति -८६६, स्वरूप - ८६६, आरंभ - ८६७ वर्गीकरण -८६७, साहित्य विषयक शोध की प्रवृत्ति - ८६७, कविपरक शोध प्रवृत्ति -८६८, डा० बल्देवप्रसाद मिश्र -८६८, अन्य समीक्षक - ८६८, डा० व्रजेश्वर वर्मा- ८६८ अन्य समीक्षक ८६९ सम्प्रदायपरक शोध प्रवृति -८६९, डॉ० पीताम्बरदत्त- - बड़थ्वाल - ८६९, डॉ० दीनदयालु गुप्त - ८७०, डॉ० मुन्शीराम शर्मा - ८७० डॉ० विनय मोहन शर्मा - ८७१, अन्य समीक्षक - ८७१, शास्त्रपरक शोध प्रवृति-८७१, डॉ० राम शकर शुक्ल 'रसाल - ८७१, डॉ० भागीरथ मिश्र - ८७२, अन्य समीक्षक-८७२, भाषा वैज्ञानिक शोध प्रवृत्ति - ८७२, स्वरूप - ८७२, ऐतिहासिक - ८७२, व्याकराणिक - ८७३, खोलीपरक - ८७३, तुलनात्मक - ८७३, महत्व तथा सम्भावनाएँ - ८७३ व्याख्यात्मक समीक्षा की प्रवृत्ति -८७४, स्वरूप-८७४ आरम्भ-८७४, ललिता प्रसाद सुकुल - ८७५, परशुराम चतुर्वेदी - ८७५, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी - ८७६, सत्येन्द्र -- ८७७, डॉ० प्रभाकर माचवे -८७७, रामकृष्ण शुक्ल शिलीमुख ८७५, महत्व तथा सम्भावनाएँ ८७८ । समन्वयात्मक समीक्षा की प्रवृति - ८७९, स्वरूप ८७९, आरम्भ-८७९, डॉ० विनय मोहन शर्मा -- ८७९, नाट्य स्वरूप - ८८०, सृजनात्यकता ८८१, समालोचना का स्वरूप ८८१, नन्दुलारे वाजपेयी ८८२, काव्य-८८२, आधुनिक काव्य प्रवृत्तियाँ८८३, समीक्षा का रूप - ८८४ वैचारिक आन्दोलन-८८४, समीक्षात्मक मान्यताएँ८८५, डॉ० नगेन्द्र-८८६, काव्य-८८६, रस- ८८७, नैतिक मूल्य ८८७, छायाबाद८८८, प्रयोगवाद-८८९, डॉ० देवराज-८८९, साहित्य - ८९०, समीक्षक-८९०, छायाबाद ---८९१, प्रगतिवाद -८९१, प्रयोगवाद-८९२, महत्व शौर सम्भावनाएँ--८९३, निष्कर्ष -८९३ । अध्याय १० सम्यक् मान निर्धारण की आवश्यकता और सम्भावनाएँ-८९७, आवश्यकता - ८९७, रूपात्मक आधार की प्रधानता - ८९८, सैद्धान्तिक एकांगिता-८९५, संस्कृत, समीक्षा सिद्धान्त - ८९९, हिन्दी रीति सिद्धान्त - ९०० । आधुनिक सिद्धान्त - ९०१ अनुभूति का महत्व - ९०१, क्षेत्रीय प्रशास्त- ९०१ सामायिक मान - ९०२ श्रेणीकरण की आवश्यकता - ९०२ सिद्धान्त समीक्षा - ९०३ औचित्य समीक्षा के मान और हिन्दी समीक्षा को विशिष्ट प्रवृत्तियाँ का परीक्षण - १०३, परिवर्तन शीलता-९०३, परिवर्तन शीलता के कारण-९०४, विकास शीलता - ९०५, मानों की अपूर्णता - ९०६, मानदण्डों का औचित्य परीक्षण९०६, मूल्य निर्धारण और नियन्त्रण ९०७, अलंकरण और अभिव्यक्ति - ९०८, अनुभूति और अभिव्यक्ति - ९०८, सौन्दर्यात्मकताः निहिति और प्रभाव -- ९०९ युगीन सत्य और चेतना - ९१०, यथार्थात्मकता--९११, तुलनात्मकता - ९१२, दार्शनिकता -९१३, नैतिकता ९१३, प्रभाव वादिता - ९१४, समाज शास्त्रीयता और ऐतिहासिकता - ९१४, अस्थिरता ९१५, सिद्धान्त और व्यवहार -- ९१६, विकास युगीन मान - मूल्यगत ह्रास एंव संक्रमण --- ९१७, युगीन उपलब्धियाँ - ९१८, अनुभूति तथा अभिव्यक्तिः एकात्मक स्वरूप-९१९, श्रेष्ठता ओर कलात्मकता - ९२०, कृतित्व की कसौटी ९२१, उपलब्धियों की अवगति+ ९२२, मान का प्रयोग - ९२२, सम्यक् मान का स्वरूप ९२३ । परिशिष्ट १ सहायक ग्रन्थों की सूची - ९२५ । :) प्रस्थानुक्रमणिका
समीक्षा के मान और हिदी समीक्षा की विशिष्ट प्रवृत्तियाँ विषयक धारणा - सात सौ बत्तीस, अभिव्यंजना का अर्थ - सात सौ बत्तीस अभिव्यंजन की प्रक्रिया - सात सौ तैंतीस, अभिव्यंजनावाद की समीक्षात्मक परिणति-सात सौ चौंतीस, भारतीय सिद्धान्त से अन्तरसात सौ चौंतीस । पाश्चात्य समीक्षा और यथार्थवादी आन्दोलन- सात सौ चौंतीस, प्रतिक्रियात्मकता--- सात सौ चौंतीस, स्वरूप - सात सौ पैंतीस, हिन्दी साहित्य और यथार्थवाद -- सात सौ पैंतीस, यथार्थवाद और आदर्शवादसात सौ छत्तीस, यथार्थवाद का हिन्दी साहित्य पर प्रभाव - सात सौ छत्तीस । पाश्चात्य साहित्य में प्रतीकवाद - सात सौ सैंतीस, वैचारिक विरोध - सात सौ सैंतीस, प्रतीकों का क्षेत्र और महत्व - सात सौ सैंतीस, भारतीय साहित्य मे प्रतीकवाद - सात सौ अड़तीस अति यथार्थबाद का वैचारिक आधार- सात सौ उनतालीस, संध्यांतिक प्रसार- सात सौ उनतालीस, अन्य विचारधाराओं से तुलना- सात सौ चालीस । अस्तित्ववादी विचार प्रणाली - सात सौ चालीस, आध्यात्मिक संकट का दर्शन-सात सौ इकतालीस, मूल्य परिवर्तन - सात सौ इकतालीस, अस्तित्ववाद और उसकी साहित्यिक परिणति -सात सौ इकतालीस । आदर्शवादी वैचारिक प्रसार - सात सौ तैंतालीस, हिन्दी साहित्य और आदर्शवाद-सात सौ तैंतालीस, पाश्चात्य प्रभाव से पूर्व की स्थिति - सात सौ चौंतालीस । भारतीय रस सिद्धांत - एक सौ पैंतालीस, भरत सूत्र - सात सौ छियालीस, रस वर्गीकरण - सात सौ छियालीस, रस संख्या -- सात सौ सैंतालीस, रसानुभूति की प्रक्रिया - सात सौ सैंतालीस, भारतीय रस सिद्धांत और पाश्चात्य मान्यताएं--सात सौ सैंतालीस । भारतीय अलंकार सिद्धात सात सौ अठहत्तर, प्राचीनता - सात सौ अठहत्तर, भामह का अलकार विवेचन सात सौ अठहत्तर, दटी का दृष्टिकोण - सात सौ उन्यासी, उद्भट की अलंकार व्याख्या सात सौ उनचास, अन्य अलंकार शास्त्री और अलंकार भेद - सात सौ पचास, महत्व - सात सौ पचास, पाश्चात्य यूनानी साहित्य शास्त्र और भारतीय अलंकार सिद्धांत -- सात सौ इक्यावन । भारतीय ध्वनि सिद्धांत - सात सौ इक्यावन, व्याख्या और क्षेत्र विस्तार-सात सौ इक्यावन, भारतीय ध्वनि सिद्धांत और पाश्चात्य दृष्टिकोण-सात सौ बावन । भारतीय रीति सिद्धांत - सात सौ तिरेपन, रीति और गुण- सात सौ तिरेपन, भारतीय रीति सिद्धात तथा पाश्चात्य प्रतीकवाद-- सात सौ चौवन, भारतीय वक्रोक्ति सिद्धात सात सौ चौवन स्वरूप-सात सौ पचपन, वक्रोक्ति सिद्धांत तथा अभिव्यंजनावाद, - सात सौ पचपन, निष्कर्ष - सात सौ छप्पन । अध्याय : नौ आधुनिक हिवो सभीक्षा की विशिष्ट प्रवृत्तियाँ सात सौ उनचास, आधुनिक हिंदी समीक्षा की पृष्ठभूमि - सात सौ इकसठ, रीति साहित्य चितन का स्वरूपसात सौ बासठ आधुनिक हिंदी समीक्षा का आरंभ - सात सौ तिरेसठ ॥ ऐतिहासिक समीक्षा की प्रवृत्ति सात सौ चौंसठ, स्वरूप - सात सौ चौंसठ, प्रमुख विशेषता - सात सौ पैंसठ, आरभ और विकास - सात सौ छयासठ, प्रमुख समीक्षक - सात सौ छयासठ, गार्सा द तासी-सात सौ सरसठ, शिवसिंह सेगर - सात सौ सरसठ, डाशून्य ग्रियर्सन- सात सौ सरसठ, खोज रिपोर्ट - सात सौ अड़सठ, मिश्रबन्धु सात सौ अड़सठ, रामचन्द्र शुक्ल - सात सौ उनहत्तर, अन्य समीक्षक डॉशून्य श्यामसुन्दर दास, डाशून्य सूर्यकांत शास्त्री डाशून्य हजारी प्रसाद द्विवेदी, अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' डाशून्य रामशंकर शुम्ल 'रसाल' डाशून्य रामकुमार वर्मा - सात हज़ार सात सौ ग्यारह सुधारपरक समीक्षा की प्रवृत्ति - सात सौ इकहत्तर स्वरूप -- सात सौ इकहत्तर, आरंभ और विकाससात सौ इकहत्तर, महावीर प्रसाद द्विवेदी - सात सौ बहत्तर, साहित्यिक सान्यताएँ - सात हज़ार छः सौ इकतीस तुलनात्मक समीक्षा की प्रवृत्ति - सात सौ इक्यासी, स्वरूप - सात सौ इक्यासी, पूर्ण रूप सात सौ बयासी, आरंभ और विकास - सात सौ बयासी, मिश्रबन्धु सात सौ तिरासी, पद्मसिंह शर्मा - सात सौ तिरासी, सतसई संहार -- सात सौ चौरासी, बिहारी की सतसई - सात सौ पचासी, मौलिकता का स्वरूप सात सौ छियासी, महत्व - सात सौ छियासी, कृष्णबिहारी मिश्र - सात सौ सत्तासी, देव और बिहारी - सात सौ सात, शास्त्रीय दृष्टि - सात सौ पचासी, निर्णयात्मक स्पष्टत सात सौ अठासी काव्य की भाषा - सात सौ नवासी, देव और केशव - सात सौ नवासी, मतिराम ग्रंथावली - सात सौ नब्बे, महत्व - सात सौ नब्बे भगवान दीन - सात सौ इक्यानवे, बिहारी और देव- सात सौ इक्यानवे, अन्य कृतियाँ - सात सौ बानवे, महत्व - सात सौ बानवे, शचीगनी गुर्टू - सात सौ बानवे, दृष्टिकोण सात सौ तिरानवे, सीमाएँ - सात सौ चौरानवे, महत्व -- सात सौ पचानवे, संभावनाएँ - सात सौ छियानवे, समीक्षा की प्रवृत्ति सात सौ छियानवे, स्वरूप - सात सौ छियानवे. परम्पराः कविराज मुरारिदान - सात सौ सत्तानवे. प्रतापनारायण सिंह - सात सौ सत्तानवे. कन्हैयालाल पोद्दार - सात सौ सत्तानवे. जगन्नाथ प्रसाद 'भानु' - सात सौ अट्ठानवे. भगवानदीन - रामशंकर शुक्ल 'रसाल - सात सौ निन्यानवे. सीताराम शास्त्रीसात सौ निन्यानवे अर्जुनदास केडिया - आठ सौ, आयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध - आठ हज़ार बिहारीलाल भट्ट - आठ सौ मिश्रबन्धु - एक, हिन्दी नवरत्न आठ सौ एक, साहित्य पारिजात-आठ सौ दो, महत्व - आठ सौ दो श्यामसुन्दर दास - आठ सौ तीन. कृत्तियाँ-आठ सौ चार दृष्टिकोण - आठ सौ चार, कला का स्वरूप - आठ सौ चार, काव्य -- आठ सौ पाँच. काव्य और नीति - आठ सौ छः, व्यावहारिक समीक्षा - आठ सौ सात महत्व - आठ सौ. रामचन्द्र शुक्ल आठ सौ आठ. काव्य का स्वरूप -- आठ सौ आठ काव्य का उद्देश्य आठ सौ नौ. काव्य और कल्पना - आठ सौ दस, काव्य और भाषा-आठ सौ ग्यारह काव्य और अलंकार - आठ सौ बारह, रस - आठ सौ बारह. महत्व -- आठ सौ तेरह, गुलाबराय- छः सौ चौदह, काव्यआठ सौ चौदह, काव्य और कला - आठ सौ पंद्रह, काव्य और कल्पना-आठ सौ पंद्रह. रस-आठ सौ पंद्रह. सीताराम चतुर्वेदी -- आठ सौ सोलह. लक्ष्मीनारायण सुधांशु -आठ सौ सोलह हजारी प्रसाद द्विवेदी - आठ सौ सत्रह, विश्वनाथ प्रसाद मिश्र - आठ सौ सत्रह, संभावनाएं - आठ सौ बीस । छायावादी समीक्षा की प्रवृत्ति- आठ सौ दस स्वरूप आठ सौ बीस जयशंकर प्रसाद'-आठ सौ इक्कीस. काव्य और कला - आठ सौ इक्कीस, रस - आठ सौ बाईस, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'-आठ सौ बाईस. काव्य और कला-आठ सौ चौबीस. काव्य और छंद-आठ सौ पच्चीस, सुमित्रानन्दन पंत आठ सौ छब्बीस, काव्य आठ सौ छब्बीस, भाषाआठ सौ सत्ताईस, -- छायावाद - आठ सौ सत्ताईस महादेवी वर्मा -आठ सौ अट्ठाईस, काव्य सात सौ अट्ठाईस. छायावाद - छः सौ उनतीस, शांतिप्रिय द्विवेदी - आठ सौ तीस. गंगाप्रसाद पांडेय-आठ सौ बत्तीस, महत्व और संभावनाएँ-- आठ सौ बत्तीस प्रगतिवादी समीक्षा की प्रवृत्ति - आठ सौ बत्तीस, स्वरूप -- आठ सौ बत्तीस, प्रारंभ - आठ सौ तैंतीस, राहुल सांकृत्यायन तैंतीस, प्रगतिवाद को एकांगिता-आठ सौ चौंतीस, प्रकाशचंद्र गुप्त - छः सौ पैंतीस, डॉशून्य रामविलास शर्मा - छत्तीस, शिवदानसिंह चौहान -आठ सौ उनतालीस, प्रयोग की कसौटी-आठ सौ चालीस, प्रगति और प्रचार-आठ सौ चालीस मन्थनाथ गुप्त -आठ सौ इकतालीस, प्रगतिवाद की अनिवार्यता- आठ सौ बयालीस, वैचक्तिक स्वातंत्र्य - आठ सौ तैंतालीस, अतीत का ज्ञान-आठ सौ तैंतालीस, प्रगतिवादी दृष्टि-आठ सौ चौंतालीस, डॉशून्य रांगेय राघक -आठ सौ पैंतालीस, रामेश्वर शर्मा - आठ सौ छियालीस, महत्व और संभावनाएँ-आठ सौ अड़तालीस, व्यक्तिवादी समीक्षा की प्रकृत्ति-आठ सौ अड़तालीस, स्वरूप-आठ सौ अड़तालीस, प्रारंभ-आठ सौ उनचास, सच्चिदानंद हौरानंद वात्स्यायन 'अक्षेय'आठ सौ उनचास, अनुभूति की व्यापकता - आठ सौ पचास, साहित्य में प्रयोगात्यमकता-आठ सौ पचास, नीति नत्व -आठ सौ सत्तावन, प्रयोग की कसौटी-आठ सौ बावन, गिरिजाकुमार माथुर-आठ सौ बावन, डॉ धर्मवीर भारती -छः सौ चौवन, लक्ष्मीकांत वर्मा - आठ सौ पचपन, महत्व तथा संम्भावनाएँ-आठ सौ छप्पन । मनोविश्लेषणात्मक समीक्षा की प्रवृत्ति - आठ सौ सत्तावन, स्वरूप-आठ सौ सत्तावन, बारंभ -आठ सौ छप्पन, जैनेन्द्र कुमार-आठ सौ अट्ठावन, वैयक्तिकता का आग्रह -आठ सौ उनसठ, सर्वोदय-आठ सौ उनसठ, पंचशील -- आठ सौ साठ, व्यक्ति का उन्नयन - आठ सौ साठ, रचनात्मक जीवन दृष्टि-आठ सौ इकसठ, इलाचंद्र जोशी-आठ सौ इकसठ, युग भावना और आडम्बर की प्रकृति -आठ सौ बासठ, छायावाद की उपलद्धि-आठ सौ तिरेसठ, साहित्य और वैयक्तिक कुंठा-आठ सौ चौंसठ, मनोविज्ञान की ऐकांतिकता-आठ सौ चौंसठ, मनोविश्लेषणवाद-आठ सौ पैंसठ, महत्व तथा संभावानाएँ-आठ सौ छयासठ । शोध परक समीक्षा की प्रवृत्ति -आठ सौ छयासठ, स्वरूप - आठ सौ छयासठ, आरंभ - आठ सौ सरसठ वर्गीकरण -आठ सौ सरसठ, साहित्य विषयक शोध की प्रवृत्ति - आठ सौ सरसठ, कविपरक शोध प्रवृत्ति -आठ सौ अड़सठ, डाशून्य बल्देवप्रसाद मिश्र -आठ सौ अड़सठ, अन्य समीक्षक - आठ सौ अड़सठ, डाशून्य व्रजेश्वर वर्मा- आठ सौ अड़सठ अन्य समीक्षक आठ सौ उनहत्तर सम्प्रदायपरक शोध प्रवृति -आठ सौ उनहत्तर, डॉशून्य पीताम्बरदत्त- - बड़थ्वाल - आठ सौ उनहत्तर, डॉशून्य दीनदयालु गुप्त - आठ सौ सत्तर, डॉशून्य मुन्शीराम शर्मा - आठ सौ सत्तर डॉशून्य विनय मोहन शर्मा - आठ सौ इकहत्तर, अन्य समीक्षक - आठ सौ इकहत्तर, शास्त्रपरक शोध प्रवृति-आठ सौ इकहत्तर, डॉशून्य राम शकर शुक्ल 'रसाल - आठ सौ इकहत्तर, डॉशून्य भागीरथ मिश्र - आठ सौ बहत्तर, अन्य समीक्षक-आठ सौ बहत्तर, भाषा वैज्ञानिक शोध प्रवृत्ति - आठ सौ बहत्तर, स्वरूप - आठ सौ बहत्तर, ऐतिहासिक - आठ सौ बहत्तर, व्याकराणिक - आठ सौ तिहत्तर, खोलीपरक - आठ सौ तिहत्तर, तुलनात्मक - आठ सौ तिहत्तर, महत्व तथा सम्भावनाएँ - आठ सौ तिहत्तर व्याख्यात्मक समीक्षा की प्रवृत्ति -आठ सौ चौहत्तर, स्वरूप-आठ सौ चौहत्तर आरम्भ-आठ सौ चौहत्तर, ललिता प्रसाद सुकुल - आठ सौ पचहत्तर, परशुराम चतुर्वेदी - आठ सौ पचहत्तर, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी - आठ सौ छिहत्तर, सत्येन्द्र -- आठ सौ सतहत्तर, डॉशून्य प्रभाकर माचवे -आठ सौ सतहत्तर, रामकृष्ण शुक्ल शिलीमुख आठ सौ पचहत्तर, महत्व तथा सम्भावनाएँ आठ सौ अठहत्तर । समन्वयात्मक समीक्षा की प्रवृति - आठ सौ उन्यासी, स्वरूप आठ सौ उन्यासी, आरम्भ-आठ सौ उन्यासी, डॉशून्य विनय मोहन शर्मा -- आठ सौ उन्यासी, नाट्य स्वरूप - आठ सौ अस्सी, सृजनात्यकता आठ सौ इक्यासी, समालोचना का स्वरूप आठ सौ इक्यासी, नन्दुलारे वाजपेयी आठ सौ बयासी, काव्य-आठ सौ बयासी, आधुनिक काव्य प्रवृत्तियाँआठ सौ तिरासी, समीक्षा का रूप - आठ सौ चौरासी वैचारिक आन्दोलन-आठ सौ चौरासी, समीक्षात्मक मान्यताएँआठ सौ पचासी, डॉशून्य नगेन्द्र-आठ सौ छियासी, काव्य-आठ सौ छियासी, रस- आठ सौ सत्तासी, नैतिक मूल्य आठ सौ सत्तासी, छायाबादआठ सौ अठासी, प्रयोगवाद-आठ सौ नवासी, डॉशून्य देवराज-आठ सौ नवासी, साहित्य - आठ सौ नब्बे, समीक्षक-आठ सौ नब्बे, छायाबाद ---आठ सौ इक्यानवे, प्रगतिवाद -आठ सौ इक्यानवे, प्रयोगवाद-आठ सौ बानवे, महत्व शौर सम्भावनाएँ--आठ सौ तिरानवे, निष्कर्ष -आठ सौ तिरानवे । अध्याय दस सम्यक् मान निर्धारण की आवश्यकता और सम्भावनाएँ-आठ सौ सत्तानवे, आवश्यकता - आठ सौ सत्तानवे, रूपात्मक आधार की प्रधानता - आठ सौ अट्ठानवे, सैद्धान्तिक एकांगिता-आठ सौ पचानवे, संस्कृत, समीक्षा सिद्धान्त - आठ सौ निन्यानवे, हिन्दी रीति सिद्धान्त - नौ सौ । आधुनिक सिद्धान्त - नौ सौ एक अनुभूति का महत्व - नौ सौ एक, क्षेत्रीय प्रशास्त- नौ सौ एक सामायिक मान - नौ सौ दो श्रेणीकरण की आवश्यकता - नौ सौ दो सिद्धान्त समीक्षा - नौ सौ तीन औचित्य समीक्षा के मान और हिन्दी समीक्षा को विशिष्ट प्रवृत्तियाँ का परीक्षण - एक सौ तीन, परिवर्तन शीलता-नौ सौ तीन, परिवर्तन शीलता के कारण-नौ सौ चार, विकास शीलता - नौ सौ पाँच, मानों की अपूर्णता - नौ सौ छः, मानदण्डों का औचित्य परीक्षणनौ सौ छः, मूल्य निर्धारण और नियन्त्रण नौ सौ सात, अलंकरण और अभिव्यक्ति - नौ सौ आठ, अनुभूति और अभिव्यक्ति - नौ सौ आठ, सौन्दर्यात्मकताः निहिति और प्रभाव -- नौ सौ नौ युगीन सत्य और चेतना - नौ सौ दस, यथार्थात्मकता--नौ सौ ग्यारह, तुलनात्मकता - नौ सौ बारह, दार्शनिकता -नौ सौ तेरह, नैतिकता नौ सौ तेरह, प्रभाव वादिता - नौ सौ चौदह, समाज शास्त्रीयता और ऐतिहासिकता - नौ सौ चौदह, अस्थिरता नौ सौ पंद्रह, सिद्धान्त और व्यवहार -- नौ सौ सोलह, विकास युगीन मान - मूल्यगत ह्रास एंव संक्रमण --- नौ सौ सत्रह, युगीन उपलब्धियाँ - नौ सौ अट्ठारह, अनुभूति तथा अभिव्यक्तिः एकात्मक स्वरूप-नौ सौ उन्नीस, श्रेष्ठता ओर कलात्मकता - नौ सौ बीस, कृतित्व की कसौटी नौ सौ इक्कीस, उपलब्धियों की अवगति+ नौ सौ बाईस, मान का प्रयोग - नौ सौ बाईस, सम्यक् मान का स्वरूप नौ सौ तेईस । परिशिष्ट एक सहायक ग्रन्थों की सूची - नौ सौ पच्चीस । :) प्रस्थानुक्रमणिका
दिल्ली के अनाज मंडी क्षेत्र में सोमवार सुबह फिर उसी इमारत में आग लग गई जहां एक दिन पहले आग लगने की घटना में 43 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद दमकल की चार गाड़ियां मौके पर मौजदू हैं। आग पर काबू पाने की कोशिश जारी है। दिल्ली की अनाज मंडी के पास जिस इमारत में आग लगने से रविवार को 43 लोगों की जान चली गई थी, उस इमारत में एक बार फिर आग लगने की खबर है। आग की खबर मिलने के बाद प्रशासन के एक बार फिर हाथ पांव फूल गए और आनन फानन में मौके पर पहुंचे। खबर मिलने के बाद दमकल की चार गाड़ियां मौके पर मौजदू हैं। आग पर काबू पाने की कोशिश जारी है। गौरतलब है कि रविवार सुबह दिल्ली उस वक्त दहल गई जब रानी झांसी रोड स्थित अनाज मंडी की तीन मंजिला इमारत में आग लग गई। ये आग शॉट सर्किट के कारण लगी थी। ये आग सुबह करीब 5-6 बजे के करीब लगी। आग की सूचना मिलते ही मौके पर दमकल की 30 गाड़ियां पहुंची और लोगों को निकालने का काम शुरु किया गया। लेकिन इस बचाव कार्य में आग और धुआं की वजह से 43 लोगों की मौत हो गई, जबकि कइ लोग घायल हो गए। हालात अभी यह है कि आग लगे हुए 24 घंटे से ज्यादा हो गए हैं लेकिन अब भी वहां से धुआं निकल रहा है। बचाए गए लोगों को दिल्ली के लेडी हार्डिंग अस्पताल और एलएनजेपी अस्पताल समेत 5 अन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया। इस हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने मुआवजे का ऐलान किया। सीएम केजरीवाल ने ऐलान किया है कि मरने वालों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये की मदद की जाएगी। इसके साथ ही हादसे में घायलों का इलाज दिल्ली सराकर मुफ्त में कराएगी। साथ ही घायलों को भी 1-1 लाख रुपये मुआवजे के तौर पर दिया जाएगा। सीएम केजरीवाल ने अस्पतालों में जाकर घायलों का हाल चाल भी जाना। वहीं अनाजमंडी में जिस फैक्ट्री की बिल्डिंग में आग लगी थी, उसके मालिक रेहान को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। बिल्डिंग के मालिक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 304 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
दिल्ली के अनाज मंडी क्षेत्र में सोमवार सुबह फिर उसी इमारत में आग लग गई जहां एक दिन पहले आग लगने की घटना में तैंतालीस लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद दमकल की चार गाड़ियां मौके पर मौजदू हैं। आग पर काबू पाने की कोशिश जारी है। दिल्ली की अनाज मंडी के पास जिस इमारत में आग लगने से रविवार को तैंतालीस लोगों की जान चली गई थी, उस इमारत में एक बार फिर आग लगने की खबर है। आग की खबर मिलने के बाद प्रशासन के एक बार फिर हाथ पांव फूल गए और आनन फानन में मौके पर पहुंचे। खबर मिलने के बाद दमकल की चार गाड़ियां मौके पर मौजदू हैं। आग पर काबू पाने की कोशिश जारी है। गौरतलब है कि रविवार सुबह दिल्ली उस वक्त दहल गई जब रानी झांसी रोड स्थित अनाज मंडी की तीन मंजिला इमारत में आग लग गई। ये आग शॉट सर्किट के कारण लगी थी। ये आग सुबह करीब पाँच-छः बजे के करीब लगी। आग की सूचना मिलते ही मौके पर दमकल की तीस गाड़ियां पहुंची और लोगों को निकालने का काम शुरु किया गया। लेकिन इस बचाव कार्य में आग और धुआं की वजह से तैंतालीस लोगों की मौत हो गई, जबकि कइ लोग घायल हो गए। हालात अभी यह है कि आग लगे हुए चौबीस घंटाटे से ज्यादा हो गए हैं लेकिन अब भी वहां से धुआं निकल रहा है। बचाए गए लोगों को दिल्ली के लेडी हार्डिंग अस्पताल और एलएनजेपी अस्पताल समेत पाँच अन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया। इस हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने मुआवजे का ऐलान किया। सीएम केजरीवाल ने ऐलान किया है कि मरने वालों के परिवारों को दस-दस लाख रुपये की मदद की जाएगी। इसके साथ ही हादसे में घायलों का इलाज दिल्ली सराकर मुफ्त में कराएगी। साथ ही घायलों को भी एक-एक लाख रुपये मुआवजे के तौर पर दिया जाएगा। सीएम केजरीवाल ने अस्पतालों में जाकर घायलों का हाल चाल भी जाना। वहीं अनाजमंडी में जिस फैक्ट्री की बिल्डिंग में आग लगी थी, उसके मालिक रेहान को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। बिल्डिंग के मालिक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा तीन सौ चार के तहत मामला दर्ज किया गया है।
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। हिन्दु जर्मन षडयन्त्र(नाम), १९१४ से १९१७ के (प्रथम विश्व युद्ध) दौरान ब्रिटिश राज के विरुद्ध एक अखिल भारतीय विद्रोह का प्रारम्भ करने के लिये बनाई योजनायो से सम्बद्ध है। इस षडयन्त्र मे भारतीय राष्ट्वादी सन्गठन के भारत, अमेरिका और जर्मनी के सदस्य शामिल थे। Irish Republicans और जर्मन विदेश विभाग ने इस षड्यन्त्र में भारतीयो का सहयोग किया था। यह षडयन्त्र अमेरिका मे स्थित गदर पार्टी, जर्मनी मे स्थित बर्लिन कमिटी, भारत मे स्थित Indian revolutionary Underground और सान फ़्रांसिसको स्थित दूतावास के द्वारा जर्मन विदेश विभाग ने साथ मिलकर रचा था। सबसे महत्वपूर्ण योजना पंजाब से लेकर सिंगापुर तक सम्पूर्ण भारत में ब्रिटिश भारतीय सेना के अन्दर बगावत फैलाकर विद्रोह का प्रयास करने की थी। यह योजना फरवरी १९१५ मे क्रियान्वित करके, हिन्दुस्तान से ब्रिटिश साम्राज्य को नेस्तनाबूत करने का उद्देश्य लेकर बनाई गयी थी। अन्ततः यह योजना ब्रिटिश गुप्तचर सेवा ने, गदर आन्दोलन मे सेंध लगाकर और कुछ महत्वपूर्ण लोगो को गिरफ्तार करके विफल कर दी थी। उसी तरह भारत की छोटी इकाइयों मे और बटालियनो मे भी विद्रोह को दबा दिया गया था। युगांतर जर्मन साजिश, अन्य संबंधित घटनाओं 1915 सिंगापुर विद्रोह, एनी लार्सन हथियार साजिश एनी लार्सन चक्कर शामिल हैंकाबुल, के विद्रोह. 1961 ग्रेगोरी कैलंडर का एक साधारण वर्ष है। . हिंदु-जर्मन षडयंत्र और १९६१ आम में एक बात है (यूनियनपीडिया में): उत्तर प्रदेश। आगरा और अवध संयुक्त प्रांत 1903 उत्तर प्रदेश सरकार का राजचिन्ह उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा (जनसंख्या के आधार पर) राज्य है। लखनऊ प्रदेश की प्रशासनिक व विधायिक राजधानी है और इलाहाबाद न्यायिक राजधानी है। आगरा, अयोध्या, कानपुर, झाँसी, बरेली, मेरठ, वाराणसी, गोरखपुर, मथुरा, मुरादाबाद तथा आज़मगढ़ प्रदेश के अन्य महत्त्वपूर्ण शहर हैं। राज्य के उत्तर में उत्तराखण्ड तथा हिमाचल प्रदेश, पश्चिम में हरियाणा, दिल्ली तथा राजस्थान, दक्षिण में मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ और पूर्व में बिहार तथा झारखंड राज्य स्थित हैं। इनके अतिरिक्त राज्य की की पूर्वोत्तर दिशा में नेपाल देश है। सन २००० में भारतीय संसद ने उत्तर प्रदेश के उत्तर पश्चिमी (मुख्यतः पहाड़ी) भाग से उत्तरांचल (वर्तमान में उत्तराखंड) राज्य का निर्माण किया। उत्तर प्रदेश का अधिकतर हिस्सा सघन आबादी वाले गंगा और यमुना। विश्व में केवल पाँच राष्ट्र चीन, स्वयं भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, इंडोनिशिया और ब्राज़ील की जनसंख्या उत्तर प्रदेश की जनसंख्या से अधिक है। उत्तर प्रदेश भारत के उत्तर में स्थित है। यह राज्य उत्तर में नेपाल व उत्तराखण्ड, दक्षिण में मध्य प्रदेश, पश्चिम में हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान तथा पूर्व में बिहार तथा दक्षिण-पूर्व में झारखण्ड व छत्तीसगढ़ से घिरा हुआ है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ है। यह राज्य २,३८,५६६ वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला हुआ है। यहाँ का मुख्य न्यायालय इलाहाबाद में है। कानपुर, झाँसी, बाँदा, हमीरपुर, चित्रकूट, जालौन, महोबा, ललितपुर, लखीमपुर खीरी, वाराणसी, इलाहाबाद, मेरठ, गोरखपुर, नोएडा, मथुरा, मुरादाबाद, गाजियाबाद, अलीगढ़, सुल्तानपुर, फैजाबाद, बरेली, आज़मगढ़, मुज़फ्फरनगर, सहारनपुर यहाँ के मुख्य शहर हैं। . हिंदु-जर्मन षडयंत्र 81 संबंध है और १९६१ 19 है। वे आम 1 में है, समानता सूचकांक 1.00% है = 1 / (81 + 19)। यह लेख हिंदु-जर्मन षडयंत्र और १९६१ के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। हिन्दु जर्मन षडयन्त्र, एक हज़ार नौ सौ चौदह से एक हज़ार नौ सौ सत्रह के दौरान ब्रिटिश राज के विरुद्ध एक अखिल भारतीय विद्रोह का प्रारम्भ करने के लिये बनाई योजनायो से सम्बद्ध है। इस षडयन्त्र मे भारतीय राष्ट्वादी सन्गठन के भारत, अमेरिका और जर्मनी के सदस्य शामिल थे। Irish Republicans और जर्मन विदेश विभाग ने इस षड्यन्त्र में भारतीयो का सहयोग किया था। यह षडयन्त्र अमेरिका मे स्थित गदर पार्टी, जर्मनी मे स्थित बर्लिन कमिटी, भारत मे स्थित Indian revolutionary Underground और सान फ़्रांसिसको स्थित दूतावास के द्वारा जर्मन विदेश विभाग ने साथ मिलकर रचा था। सबसे महत्वपूर्ण योजना पंजाब से लेकर सिंगापुर तक सम्पूर्ण भारत में ब्रिटिश भारतीय सेना के अन्दर बगावत फैलाकर विद्रोह का प्रयास करने की थी। यह योजना फरवरी एक हज़ार नौ सौ पंद्रह मे क्रियान्वित करके, हिन्दुस्तान से ब्रिटिश साम्राज्य को नेस्तनाबूत करने का उद्देश्य लेकर बनाई गयी थी। अन्ततः यह योजना ब्रिटिश गुप्तचर सेवा ने, गदर आन्दोलन मे सेंध लगाकर और कुछ महत्वपूर्ण लोगो को गिरफ्तार करके विफल कर दी थी। उसी तरह भारत की छोटी इकाइयों मे और बटालियनो मे भी विद्रोह को दबा दिया गया था। युगांतर जर्मन साजिश, अन्य संबंधित घटनाओं एक हज़ार नौ सौ पंद्रह सिंगापुर विद्रोह, एनी लार्सन हथियार साजिश एनी लार्सन चक्कर शामिल हैंकाबुल, के विद्रोह. एक हज़ार नौ सौ इकसठ ग्रेगोरी कैलंडर का एक साधारण वर्ष है। . हिंदु-जर्मन षडयंत्र और एक हज़ार नौ सौ इकसठ आम में एक बात है : उत्तर प्रदेश। आगरा और अवध संयुक्त प्रांत एक हज़ार नौ सौ तीन उत्तर प्रदेश सरकार का राजचिन्ह उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा राज्य है। लखनऊ प्रदेश की प्रशासनिक व विधायिक राजधानी है और इलाहाबाद न्यायिक राजधानी है। आगरा, अयोध्या, कानपुर, झाँसी, बरेली, मेरठ, वाराणसी, गोरखपुर, मथुरा, मुरादाबाद तथा आज़मगढ़ प्रदेश के अन्य महत्त्वपूर्ण शहर हैं। राज्य के उत्तर में उत्तराखण्ड तथा हिमाचल प्रदेश, पश्चिम में हरियाणा, दिल्ली तथा राजस्थान, दक्षिण में मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ और पूर्व में बिहार तथा झारखंड राज्य स्थित हैं। इनके अतिरिक्त राज्य की की पूर्वोत्तर दिशा में नेपाल देश है। सन दो हज़ार में भारतीय संसद ने उत्तर प्रदेश के उत्तर पश्चिमी भाग से उत्तरांचल राज्य का निर्माण किया। उत्तर प्रदेश का अधिकतर हिस्सा सघन आबादी वाले गंगा और यमुना। विश्व में केवल पाँच राष्ट्र चीन, स्वयं भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, इंडोनिशिया और ब्राज़ील की जनसंख्या उत्तर प्रदेश की जनसंख्या से अधिक है। उत्तर प्रदेश भारत के उत्तर में स्थित है। यह राज्य उत्तर में नेपाल व उत्तराखण्ड, दक्षिण में मध्य प्रदेश, पश्चिम में हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान तथा पूर्व में बिहार तथा दक्षिण-पूर्व में झारखण्ड व छत्तीसगढ़ से घिरा हुआ है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ है। यह राज्य दो,अड़तीस,पाँच सौ छयासठ वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला हुआ है। यहाँ का मुख्य न्यायालय इलाहाबाद में है। कानपुर, झाँसी, बाँदा, हमीरपुर, चित्रकूट, जालौन, महोबा, ललितपुर, लखीमपुर खीरी, वाराणसी, इलाहाबाद, मेरठ, गोरखपुर, नोएडा, मथुरा, मुरादाबाद, गाजियाबाद, अलीगढ़, सुल्तानपुर, फैजाबाद, बरेली, आज़मगढ़, मुज़फ्फरनगर, सहारनपुर यहाँ के मुख्य शहर हैं। . हिंदु-जर्मन षडयंत्र इक्यासी संबंध है और एक हज़ार नौ सौ इकसठ उन्नीस है। वे आम एक में है, समानता सूचकांक एक.शून्य% है = एक / । यह लेख हिंदु-जर्मन षडयंत्र और एक हज़ार नौ सौ इकसठ के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
"श सुनेसि स्वमाव न मोरा" तथा "विश्व विदित क्षत्रिय कुल द्रोही" "मो समान को पाप निवासी, जेटि लगि सीय राम वनवासी" "हा जगदीश देव रघुराया, केहि श्रपराध विसारेड दाया" "घरि गाल फार्यहं उर विदारहिं गज अंतावलि मेलही" "चिकरहीं दिग्गज दशन गहि महि देखि कौतुक सुर हँसे" "जइहौं श्रवध कवन मुख लाई, नारि हेतु प्रिय बंधु गँवाई" "कट कढाई मर्कड विकट भट तनु कोटि कोटिन घावहीं" तुलसीदास ने उपमा, रूपक और धनुप्रास बहुत अच्छे कहे हैं। उपमा में इनका सामना संसार में केवल एक कालिदास हो कर सकते हैं। इनकी उपमाओं और रूपकों में यथार्थता और मनोहरता के प्रतिरिक एक भारी गुण यह है कि सुनते सुनते वे हृदयंगम हो जाते हैं। जैसेः "लोचन जल रद्द लोचन कोना, जैसे परम कृपण कर सोना" "लोचन मग रामहि डरानी, दोन्हें पलक कपाठ सयानी" "सुंदरता फहँ सुंदर कई छवि गृह दीप शिखा जनु वरई "जिमि पिपीलिका सागर थाहा " "नवग्रयंद रघुवीर मन, राज थजान समान छूट जानि वन गवन सुनि, हृदय हर्ष अघिकान ॥ " "सेवक कर पढ़ नयन से, मुख से साहित्र होय । "रामहि चितर चितइ महि, राजत लोचन जोल ॥ खेलत मनसिज मीन युग जनु विधु मंडल डोल । " "राका शशि रघुपति पुरी, सिन्धु देखि हरपान ।। वढेड कोलाहल करत जनु, नारि तरंग समान 1."
"श सुनेसि स्वमाव न मोरा" तथा "विश्व विदित क्षत्रिय कुल द्रोही" "मो समान को पाप निवासी, जेटि लगि सीय राम वनवासी" "हा जगदीश देव रघुराया, केहि श्रपराध विसारेड दाया" "घरि गाल फार्यहं उर विदारहिं गज अंतावलि मेलही" "चिकरहीं दिग्गज दशन गहि महि देखि कौतुक सुर हँसे" "जइहौं श्रवध कवन मुख लाई, नारि हेतु प्रिय बंधु गँवाई" "कट कढाई मर्कड विकट भट तनु कोटि कोटिन घावहीं" तुलसीदास ने उपमा, रूपक और धनुप्रास बहुत अच्छे कहे हैं। उपमा में इनका सामना संसार में केवल एक कालिदास हो कर सकते हैं। इनकी उपमाओं और रूपकों में यथार्थता और मनोहरता के प्रतिरिक एक भारी गुण यह है कि सुनते सुनते वे हृदयंगम हो जाते हैं। जैसेः "लोचन जल रद्द लोचन कोना, जैसे परम कृपण कर सोना" "लोचन मग रामहि डरानी, दोन्हें पलक कपाठ सयानी" "सुंदरता फहँ सुंदर कई छवि गृह दीप शिखा जनु वरई "जिमि पिपीलिका सागर थाहा " "नवग्रयंद रघुवीर मन, राज थजान समान छूट जानि वन गवन सुनि, हृदय हर्ष अघिकान ॥ " "सेवक कर पढ़ नयन से, मुख से साहित्र होय । "रामहि चितर चितइ महि, राजत लोचन जोल ॥ खेलत मनसिज मीन युग जनु विधु मंडल डोल । " "राका शशि रघुपति पुरी, सिन्धु देखि हरपान ।। वढेड कोलाहल करत जनु, नारि तरंग समान एक."
महाराष्ट्र के अगले मुख्यमंत्री को लेकर कांग्रेस के भीतर असमंजस का दौर जारी है, लेकिन ऐसी ख़बरें हैं कि अशोक चव्हाण इस दौड़ में सबसे आगे हैं. हालांकि मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सुशील कुमार शिंदे, नारायण राणे और बालासाहेब विखे पाटिल का भी नाम चल रहा हैं. उल्लेखनीय है कि अशोक चव्हाण महाराष्ट्र के उद्योग मंत्री हैं, साथ ही वो पूर्व केंद्रीय मंत्री एसबी चव्हाण के बेटे हैं. इसके पहले नए मुख्यमंत्री के चयन को लेकर मुंबई में कांग्रेस विधायक दल की बैठक हुई जिसमें प्रणव मुखर्जी और एके एंटनी भी शामिल हुए लेकिन इसमें कोई निर्णय नहीं हो सका. इससे पहले देशमुख ने गुरुवार को अपना इस्तीफ़ा राजभवन में राज्यपाल एससी जमीर को सौंप दिया. राज्यपाल ने उनका इस्तीफ़ा स्वीकार कर लिया और वैकल्पिक व्यवस्था होने तक पद संभालने को कहा. राज्यपाल को इस्तीफ़ा सौंपने के बाद देशमुख ने पत्रकारों से बात करते हुए दो बार राज्य की ज़िम्मेदारी सौंपने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के प्रति आभार जताया. उन्होंने कहा, "लोकतंत्र में हमें लोगों की नाराज़गी का सम्मान करना चाहिए. " मुंबई पर हुए चरमपंथी हमले को अपने कार्यकाल का सबसे दुखद क्षण बताते हुए देशमुख ने कहा, "हम बहुत से लोगों की जान नहीं बचा सके. " हमलों के बाद ताज होटल के दौरे के समय निर्माता-निर्देशक राम गोपाल वर्मा को अपने साथ ले जाने को देशमुख ने 'एक भूल' बताया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस आलाकमान के मुख्यमंत्री बदलने के फ़ैसले से राज्य सरकार में सहयोगी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) का कोई लेना-देना नहीं है. मुंबई हमलों को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के सदस्य और उपमुख्यमंत्री व गृहमंत्री आरआर पाटिल के इस्तीफ़े के बाद मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख पर भी इस्तीफ़े का दबाव था. इससे पहले इसी मामले को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री शिवराज पाटिल ने भी इस्तीफ़ा दिया था.
महाराष्ट्र के अगले मुख्यमंत्री को लेकर कांग्रेस के भीतर असमंजस का दौर जारी है, लेकिन ऐसी ख़बरें हैं कि अशोक चव्हाण इस दौड़ में सबसे आगे हैं. हालांकि मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सुशील कुमार शिंदे, नारायण राणे और बालासाहेब विखे पाटिल का भी नाम चल रहा हैं. उल्लेखनीय है कि अशोक चव्हाण महाराष्ट्र के उद्योग मंत्री हैं, साथ ही वो पूर्व केंद्रीय मंत्री एसबी चव्हाण के बेटे हैं. इसके पहले नए मुख्यमंत्री के चयन को लेकर मुंबई में कांग्रेस विधायक दल की बैठक हुई जिसमें प्रणव मुखर्जी और एके एंटनी भी शामिल हुए लेकिन इसमें कोई निर्णय नहीं हो सका. इससे पहले देशमुख ने गुरुवार को अपना इस्तीफ़ा राजभवन में राज्यपाल एससी जमीर को सौंप दिया. राज्यपाल ने उनका इस्तीफ़ा स्वीकार कर लिया और वैकल्पिक व्यवस्था होने तक पद संभालने को कहा. राज्यपाल को इस्तीफ़ा सौंपने के बाद देशमुख ने पत्रकारों से बात करते हुए दो बार राज्य की ज़िम्मेदारी सौंपने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के प्रति आभार जताया. उन्होंने कहा, "लोकतंत्र में हमें लोगों की नाराज़गी का सम्मान करना चाहिए. " मुंबई पर हुए चरमपंथी हमले को अपने कार्यकाल का सबसे दुखद क्षण बताते हुए देशमुख ने कहा, "हम बहुत से लोगों की जान नहीं बचा सके. " हमलों के बाद ताज होटल के दौरे के समय निर्माता-निर्देशक राम गोपाल वर्मा को अपने साथ ले जाने को देशमुख ने 'एक भूल' बताया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस आलाकमान के मुख्यमंत्री बदलने के फ़ैसले से राज्य सरकार में सहयोगी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है. मुंबई हमलों को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सदस्य और उपमुख्यमंत्री व गृहमंत्री आरआर पाटिल के इस्तीफ़े के बाद मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख पर भी इस्तीफ़े का दबाव था. इससे पहले इसी मामले को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री शिवराज पाटिल ने भी इस्तीफ़ा दिया था.
पाकिस्तान के क्रिकेट कप्तान बाबर आजम एक और विश्व रिकॉर्ड तोड़ने की कगार पर हैं। कराची में न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की सीरीज के तीसरे वनडे में, बाबर ने शानदार पारी खेली, 54 रन बनाए और इस के साथ ही वनडे में उनके रन की संख्या को 4981 हो गयी है। वर्तमान में, सबसे तेज 5000 ODIरन बनाने का रिकॉर्ड दक्षिण अफ्रीका के दिग्गज हाशिम अमला के पास है, जिन्होंने अपने शानदार करियर के दौरान 101 पारियों में यह उपलब्धि हासिल की। बाबर आजम ने अब तक 96 पारियां खेली हैं और अगर वह अगले दो मैचों में बचे हुए 19 रन बनाने में सफल रहते हैं तो वह अमला के रिकॉर्ड को तोड़ कर इतिहास रच देंगे। अमला के पीछे वेस्टइंडीज के दिग्गज विवियन रिचर्ड्स हैं, जिन्होंने इस उपलब्धि तक पहुंचने के लिए 114 पारियां लीं। भारतीय बल्लेबाजी की रीढ़ कहे जाने वाले विराट कोहली ने भी रिचर्ड्स के समान 114 पारियों में 5000 एकदिवसीय रन पूरे किए। हालांकि, अगर बाबर अगले मैच में यह उपलब्धि हासिल कर लेते हैं, तो वह वनडे में सबसे तेज 5000 रन बनाने वाले खिलाड़ी बन जाएंगे। न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरे वनडे में, पाकिस्तान पहले बल्लेबाजी करने उतरा, लेकिन सलामी बल्लेबाज फखर जमान आउट होने से पहले केवल 19 रन ही बना सके। हालांकि, इमाम-उल-हक ने शानदार पारी खेलते हुए 107 गेंदों में सात चौकों और एक छक्के की मदद से 90 रन बनाए। बाबर आजम ने 29वें ओवर में मैट हेनरी की गेंद पर बोल्ड होने से पहले 54 रन बनाने के लिए तीन चौके और एक छक्का लगाकर एक अच्छी पारी खेली। बाबर आज़म हाल के दिनों में शानदार फॉर्म में हैं और पाकिस्तान की टीम की कप्तानी कर रहे हैं। उनके प्रभावशाली प्रदर्शन ने उन्हें अभी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में से एक का दर्जा दिलाया है। सबसे तेज 5000 एकदिवसीय रन बनाने के विश्व रिकॉर्ड को तोड़ने के अवसर के साथ, बाबर अपने प्रभावशाली फॉर्म को जारी रखने और आने वाले मैचों में इतिहास रचने के लिए उत्सुक होंगे।
पाकिस्तान के क्रिकेट कप्तान बाबर आजम एक और विश्व रिकॉर्ड तोड़ने की कगार पर हैं। कराची में न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की सीरीज के तीसरे वनडे में, बाबर ने शानदार पारी खेली, चौवन रन बनाए और इस के साथ ही वनडे में उनके रन की संख्या को चार हज़ार नौ सौ इक्यासी हो गयी है। वर्तमान में, सबसे तेज पाँच हज़ार ODIरन बनाने का रिकॉर्ड दक्षिण अफ्रीका के दिग्गज हाशिम अमला के पास है, जिन्होंने अपने शानदार करियर के दौरान एक सौ एक पारियों में यह उपलब्धि हासिल की। बाबर आजम ने अब तक छियानवे पारियां खेली हैं और अगर वह अगले दो मैचों में बचे हुए उन्नीस रन बनाने में सफल रहते हैं तो वह अमला के रिकॉर्ड को तोड़ कर इतिहास रच देंगे। अमला के पीछे वेस्टइंडीज के दिग्गज विवियन रिचर्ड्स हैं, जिन्होंने इस उपलब्धि तक पहुंचने के लिए एक सौ चौदह पारियां लीं। भारतीय बल्लेबाजी की रीढ़ कहे जाने वाले विराट कोहली ने भी रिचर्ड्स के समान एक सौ चौदह पारियों में पाँच हज़ार एकदिवसीय रन पूरे किए। हालांकि, अगर बाबर अगले मैच में यह उपलब्धि हासिल कर लेते हैं, तो वह वनडे में सबसे तेज पाँच हज़ार रन बनाने वाले खिलाड़ी बन जाएंगे। न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरे वनडे में, पाकिस्तान पहले बल्लेबाजी करने उतरा, लेकिन सलामी बल्लेबाज फखर जमान आउट होने से पहले केवल उन्नीस रन ही बना सके। हालांकि, इमाम-उल-हक ने शानदार पारी खेलते हुए एक सौ सात गेंदों में सात चौकों और एक छक्के की मदद से नब्बे रन बनाए। बाबर आजम ने उनतीसवें ओवर में मैट हेनरी की गेंद पर बोल्ड होने से पहले चौवन रन बनाने के लिए तीन चौके और एक छक्का लगाकर एक अच्छी पारी खेली। बाबर आज़म हाल के दिनों में शानदार फॉर्म में हैं और पाकिस्तान की टीम की कप्तानी कर रहे हैं। उनके प्रभावशाली प्रदर्शन ने उन्हें अभी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में से एक का दर्जा दिलाया है। सबसे तेज पाँच हज़ार एकदिवसीय रन बनाने के विश्व रिकॉर्ड को तोड़ने के अवसर के साथ, बाबर अपने प्रभावशाली फॉर्म को जारी रखने और आने वाले मैचों में इतिहास रचने के लिए उत्सुक होंगे।
पाकिस्तान में लाहौर की पंजाब यूनिवर्सिटी में होली मना रहे हिंदू छात्रों के एक समूह पर सोमवार को हमला किया गया. एक राजनीतिक पार्टी की छात्र इकाई ने कथित रूप से होली समारोह रोकने की धमकी दी थी और रंगों का त्योहार मना रहे हिंदू-मुसलमान छात्रों पर हमला कर दिया. मंगलवार को इसी तरह का हमला कराची में होने की ख़बर भी आई है. (बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक,ट्विटर,इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं. )
पाकिस्तान में लाहौर की पंजाब यूनिवर्सिटी में होली मना रहे हिंदू छात्रों के एक समूह पर सोमवार को हमला किया गया. एक राजनीतिक पार्टी की छात्र इकाई ने कथित रूप से होली समारोह रोकने की धमकी दी थी और रंगों का त्योहार मना रहे हिंदू-मुसलमान छात्रों पर हमला कर दिया. मंगलवार को इसी तरह का हमला कराची में होने की ख़बर भी आई है.