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अनुवादक का आवेदन
प्रस्तुत पुस्तक "राजस्थान के इतिहास" - लेखक कर्नल जेम्स टॉड कृत 'ट्रेवल्स् इन वेस्टर्न इण्डिया' का हिन्दी अनुवाद है । मूल ग्रन्थ की रचना, उद्देश्य, रचनासमय, इसका वैशिष्ट्य, ग्रन्थकार की मान्यताओं, इसके एकमात्र संस्करण के प्रकाशन, इसके स्वरूप प्रचार इसके अभिनव संस्करण तथा अनुवाद की आवश्यकता आदि विषयों पर आगामी पृष्ठों में मुद्रित 'ग्रन्थकर्त्ता विषयक संस्मरण', विज्ञापन, और प्रस्तावना में विस्तार के साथ विवरण दिया गया है । अतः इन विषयों पर इस आवेदन में कुछ लिखना अनावश्यक प्रवृत्ति ही होगी ।
सन् १९५५ ई० में हमारे विभाग के सम्मान्य संचालक श्रीमान् मुनि जिनविजयजी पुरातत्त्वाचार्य ने मुझे इस ग्रन्थ की प्रति अपने निजी संग्रह में से लाकर दी और यह आदेश दिया कि "यह बहुत दुर्लभ्य पुस्तक है और राजस्थान तथा उससे सम्बद्ध गुजरात एवं सौराष्ट्र प्रदेशों के इतिहास, संस्कृति और तत्कालीन राजनैतिक परिस्थितियों तथा भौगोलिक वर्णनों के कारण अत्यधिक महत्त्वपूर्ण है । इसका यदि हिन्दी रूपान्तर हो जाय तो बहुत उत्तम होगा; इससे इतिहास और संस्कृति के शोधविद्वानों को बहुत सहायता मिल सकती है । इसका अंग्रेजी में पुनर्मुद्रण दुष्कर है; इस ओर किसी का ध्यान भी नहीं है और न इस पुस्तक की प्रतियाँ कहीं आसानी से मिल ही सकती हैं। कर्नल टॉड के समय से लेकर अब तक बहुत-सी खोज होकर कई नई बातें सामने आ चुकी हैं और उनके द्वारा उसकी मान्यताओं का संस्थापन या निराकरण भी किया जा सकता है। आपने अलेक्जेण्डर किन्लॉक फार्टस् कृत 'रासमाला' का अनुवाद किया है। उस पुस्तक का विषय बहुत कुछ इस पुस्तक में वर्णित स्थलों, श्राख्यानों और ऐतिहासिक घटनाओं आदि से मेल खाता है । यदि इस कार्य को अवकाश के समय धीरे-धीरे कर डालो तो अच्छा है। हम इसे अपने तत्वावधान में काम करने वाली किसी संस्था से प्रकाशित करना चाहते हैं ।" मुझे अपनी सीमित योग्यता, इतिहास, अंग्रेजी और हिन्दी भाषा पर अपेक्षित अधिकार की कमी तथा कार्यालयीय दायित्व के होते हुये अवकाश की स्वल्पोपलब्धि का ध्यान था, परन्तु कुछ तो पुस्तक की आकर्षकता और विशेषता और कुछ "आज्ञा गुरूणां परिपालनीया" | अनुवादक का आवेदन प्रस्तुत पुस्तक "राजस्थान के इतिहास" - लेखक कर्नल जेम्स टॉड कृत 'ट्रेवल्स् इन वेस्टर्न इण्डिया' का हिन्दी अनुवाद है । मूल ग्रन्थ की रचना, उद्देश्य, रचनासमय, इसका वैशिष्ट्य, ग्रन्थकार की मान्यताओं, इसके एकमात्र संस्करण के प्रकाशन, इसके स्वरूप प्रचार इसके अभिनव संस्करण तथा अनुवाद की आवश्यकता आदि विषयों पर आगामी पृष्ठों में मुद्रित 'ग्रन्थकर्त्ता विषयक संस्मरण', विज्ञापन, और प्रस्तावना में विस्तार के साथ विवरण दिया गया है । अतः इन विषयों पर इस आवेदन में कुछ लिखना अनावश्यक प्रवृत्ति ही होगी । सन् एक हज़ार नौ सौ पचपन ईशून्य में हमारे विभाग के सम्मान्य संचालक श्रीमान् मुनि जिनविजयजी पुरातत्त्वाचार्य ने मुझे इस ग्रन्थ की प्रति अपने निजी संग्रह में से लाकर दी और यह आदेश दिया कि "यह बहुत दुर्लभ्य पुस्तक है और राजस्थान तथा उससे सम्बद्ध गुजरात एवं सौराष्ट्र प्रदेशों के इतिहास, संस्कृति और तत्कालीन राजनैतिक परिस्थितियों तथा भौगोलिक वर्णनों के कारण अत्यधिक महत्त्वपूर्ण है । इसका यदि हिन्दी रूपान्तर हो जाय तो बहुत उत्तम होगा; इससे इतिहास और संस्कृति के शोधविद्वानों को बहुत सहायता मिल सकती है । इसका अंग्रेजी में पुनर्मुद्रण दुष्कर है; इस ओर किसी का ध्यान भी नहीं है और न इस पुस्तक की प्रतियाँ कहीं आसानी से मिल ही सकती हैं। कर्नल टॉड के समय से लेकर अब तक बहुत-सी खोज होकर कई नई बातें सामने आ चुकी हैं और उनके द्वारा उसकी मान्यताओं का संस्थापन या निराकरण भी किया जा सकता है। आपने अलेक्जेण्डर किन्लॉक फार्टस् कृत 'रासमाला' का अनुवाद किया है। उस पुस्तक का विषय बहुत कुछ इस पुस्तक में वर्णित स्थलों, श्राख्यानों और ऐतिहासिक घटनाओं आदि से मेल खाता है । यदि इस कार्य को अवकाश के समय धीरे-धीरे कर डालो तो अच्छा है। हम इसे अपने तत्वावधान में काम करने वाली किसी संस्था से प्रकाशित करना चाहते हैं ।" मुझे अपनी सीमित योग्यता, इतिहास, अंग्रेजी और हिन्दी भाषा पर अपेक्षित अधिकार की कमी तथा कार्यालयीय दायित्व के होते हुये अवकाश की स्वल्पोपलब्धि का ध्यान था, परन्तु कुछ तो पुस्तक की आकर्षकता और विशेषता और कुछ "आज्ञा गुरूणां परिपालनीया" |
नई दिल्ली, 15 जनवरी (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय के सभी न्यायाधीशों ने यहां अनौपचारिक रूप से सोमवार को मुलाकात की, जिसके बाद महान्यायवादी के. के. वेणुगोपाल ने दावा किया कि शीर्ष अदालत का 'संकट सुलझ गया है। ' वेणुगोपाल ने पत्रकारों से कहा, सर्वोच्च न्यायालय में कार्यवाही शुरू होने से पहले, सुबह यह अनौपचारिक मुलाकात हुई। अब सबकुछ सुलझ गया है।
सर्वोच्च न्यायालय में पिछले सप्ताह उस वक्त संकट गहरा गया था जब इसके चार शीर्ष न्यायाधीशों ने सार्वजनिक रूप से एक संवाददाता सम्मेलन में प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे।
इस मुलाकात के गवाह एक सूत्र ने बताया, सभी न्यायाधीशों ने (सोमवार सुबह) मुलाकात की। ऐसा लग रहा है कि सबकुछ सही हो गया है। सबकुछ ठीक-ठाक है।
| नई दिल्ली, पंद्रह जनवरी । सर्वोच्च न्यायालय के सभी न्यायाधीशों ने यहां अनौपचारिक रूप से सोमवार को मुलाकात की, जिसके बाद महान्यायवादी के. के. वेणुगोपाल ने दावा किया कि शीर्ष अदालत का 'संकट सुलझ गया है। ' वेणुगोपाल ने पत्रकारों से कहा, सर्वोच्च न्यायालय में कार्यवाही शुरू होने से पहले, सुबह यह अनौपचारिक मुलाकात हुई। अब सबकुछ सुलझ गया है। सर्वोच्च न्यायालय में पिछले सप्ताह उस वक्त संकट गहरा गया था जब इसके चार शीर्ष न्यायाधीशों ने सार्वजनिक रूप से एक संवाददाता सम्मेलन में प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। इस मुलाकात के गवाह एक सूत्र ने बताया, सभी न्यायाधीशों ने मुलाकात की। ऐसा लग रहा है कि सबकुछ सही हो गया है। सबकुछ ठीक-ठाक है। |
प्रीतोः तुम इतनी देर से क्या ढूंढ़ रहे हो?
प्रीतोः तुम्हें ऐसा क्यों लगा इस कमरे में हिडन कैमरा लगा है?
संताः अगर हिडन कैमरा नहीं लगा होता तो टी. वी. में आ रहे इस आदमी को कैसे पता होता कि हम स्टार प्लस देख रहे हैं. बार-बार यह आप देख रहे हैं स्टार प्लस क्यों बोल रहा है?
ट्रेन में कुछ लोग बड़े जोर-जोर से अपनी बुद्धिमता का परिचय दे रहे थे.
ऊपर की बर्थ पर बैठा एक व्यक्ति उनकी आवाज से परेशान हो रहा था.
बाते करते-करते एक सज्जन बोलेः पहले पूंजीवाद आया फिर साम्यवाद आया और अंत में समाजवाद आया. ऊपर के बर्थ पर लेटा आदमी जोर से चिल्लायाः भाई साहब मैं सो रहा हूं, जब इलाहाबाद आए तो जगा देना ! !
मालिक (आलसी नौकर से): यहां इतने सारे मच्छर हैं उन्हें मारता क्यों नहीं?
(थोड़ी देर बाद)
मालिक (गुस्से में): तूने अभी तक इन मच्छरों को मारा नहीं.
नौकरः मालिक मच्छर तो मर गए. ये उनकी बीवियां हैं जो रो रही हैं.
पतिः तुम्हें पता है आज एक गधा.... .
इतने में उनकी बच्ची रोकर कहने लगीः मम्मी, मम्मी भैया ने मेरी गुड़िया तोड़ दी.
पति ने फिर कहना शुरू कियाः आज एक गधा.......
फिर उनका बेटा आ गयाः मम्मी छुटकी ने मेरी कार तोड़ दी है.
परेशान पत्नी बोलीः भगवान के लिए चुप करो और मुझे पहले 'गधे' की बात सुन लेने दो.... ! !
| प्रीतोः तुम इतनी देर से क्या ढूंढ़ रहे हो? प्रीतोः तुम्हें ऐसा क्यों लगा इस कमरे में हिडन कैमरा लगा है? संताः अगर हिडन कैमरा नहीं लगा होता तो टी. वी. में आ रहे इस आदमी को कैसे पता होता कि हम स्टार प्लस देख रहे हैं. बार-बार यह आप देख रहे हैं स्टार प्लस क्यों बोल रहा है? ट्रेन में कुछ लोग बड़े जोर-जोर से अपनी बुद्धिमता का परिचय दे रहे थे. ऊपर की बर्थ पर बैठा एक व्यक्ति उनकी आवाज से परेशान हो रहा था. बाते करते-करते एक सज्जन बोलेः पहले पूंजीवाद आया फिर साम्यवाद आया और अंत में समाजवाद आया. ऊपर के बर्थ पर लेटा आदमी जोर से चिल्लायाः भाई साहब मैं सो रहा हूं, जब इलाहाबाद आए तो जगा देना ! ! मालिक : यहां इतने सारे मच्छर हैं उन्हें मारता क्यों नहीं? मालिक : तूने अभी तक इन मच्छरों को मारा नहीं. नौकरः मालिक मच्छर तो मर गए. ये उनकी बीवियां हैं जो रो रही हैं. पतिः तुम्हें पता है आज एक गधा.... . इतने में उनकी बच्ची रोकर कहने लगीः मम्मी, मम्मी भैया ने मेरी गुड़िया तोड़ दी. पति ने फिर कहना शुरू कियाः आज एक गधा....... फिर उनका बेटा आ गयाः मम्मी छुटकी ने मेरी कार तोड़ दी है. परेशान पत्नी बोलीः भगवान के लिए चुप करो और मुझे पहले 'गधे' की बात सुन लेने दो.... ! ! |
आपको जाना होंगा , और ये हमारा लास्ट डिसीजन हे ।
' नही जाना हे हमे , कही नही जाना , समझे आप ! कहते हुये उसने अपने आप को उसकी बाहों मे छुपा लिया और वैसे ही सिसकियाँ लेती रही ।
वो खामोश सा खडा रहा । कुछ पल खामोशी की बाद उसने कहा ।
कल सुबह 11 बजे की फ्लाइट हे । ड्राईवर आपको छोड आयेंगा ।
" कुँवर्जी ।
" " पैक यूअर बैग्स ।
हम आपके बिना नही रह सकते ।
अपना सारा जरुरी सामान रख लो ।
" ह .... हमे रो .... रोक लिजिये ना । "
" मेक श्योर की कुछ रहे ना। "
उसका रो रोकर बुरा हाल हो चुका था । लेकिन उसपर कोई असर नही हो रहा था । वो बिना किसी एक्सप्रेशन के खडा था , जैसे उसे कोई फर्क ही ना पडता हो । लेकिन सिर्फ उसका दिल जानता था , की वो कितने दर्द से गुजर रहा । अपने प्यार से , अपनी जान से , अपने साथी से ये सब कहते हुये ।
| आपको जाना होंगा , और ये हमारा लास्ट डिसीजन हे । ' नही जाना हे हमे , कही नही जाना , समझे आप ! कहते हुये उसने अपने आप को उसकी बाहों मे छुपा लिया और वैसे ही सिसकियाँ लेती रही । वो खामोश सा खडा रहा । कुछ पल खामोशी की बाद उसने कहा । कल सुबह ग्यारह बजे की फ्लाइट हे । ड्राईवर आपको छोड आयेंगा । " कुँवर्जी । " " पैक यूअर बैग्स । हम आपके बिना नही रह सकते । अपना सारा जरुरी सामान रख लो । " ह .... हमे रो .... रोक लिजिये ना । " " मेक श्योर की कुछ रहे ना। " उसका रो रोकर बुरा हाल हो चुका था । लेकिन उसपर कोई असर नही हो रहा था । वो बिना किसी एक्सप्रेशन के खडा था , जैसे उसे कोई फर्क ही ना पडता हो । लेकिन सिर्फ उसका दिल जानता था , की वो कितने दर्द से गुजर रहा । अपने प्यार से , अपनी जान से , अपने साथी से ये सब कहते हुये । |
८४ खोए सो पाए
फोटो क्यो ले रहे हो ? उसने अपना सकल्प बताया और उसके साथ ही वीस साल पहले लिया हुआ वह दूसरा चित्र भी उसे दिखा दिया । चित्र देखकर वह व्यक्ति अट्टहास कर उठा। फोटोग्राफर ने विस्मित होकर पूछायह क्या हो गया आपको ? वह व्यक्ति वोला - यह चित्र भी मेरा है । इस कथन के साथ ही उसने उस समय और स्थान के बारे मे सव कुछ सही-सही बता दिया ।
जिन लोगो ने उन दो चित्रों को देखा और सुना कि ये दो चित्र एक ही व्यक्ति के है, वे सव चकित थे । पर इसमे आश्चर्य जैसी कोई बात नही है । क्योकि वृत्तियो मे बदलाव आने से व्यक्ति की आकृति भी वदल जाती है। भीतरी बदलाव जितना अधिक होता है, वह उतनी ही स्पष्टता से चेहरे पर अक्ति हो जाता है। पर ऐसे बदलाव से किसी भी व्यक्ति का हित नही हो सकता । इसलिए जीवन दर्शन को समझना जरूरी है । जीवन का दर्शन जितना विशद होता है, वृत्तिया उतनी ही उदात्त हो जाती हैं । वृत्तियो के बदलाव से व्यवहार में बदलाव आता है । यह बदलाव निरन्तर अच्छाई की दिशा मे होता रहे तो जीवन का समग्र दर्शन अधिगत हो सकता है। जिस क्षण समग्रता से जीवन जीना आ जाएगा, उसी क्षण साधक अपने आपको सही रूप से पहचान पाएगा।
समता का प्रयोग
माधना का पथ निर्वाध नही है । वहा मुसीबते आती है । वाहर से भी आती है और भीतर में भी आती है । जो साधक उनसे घबरा जाता है, वह पीछे लौट आता है । जो उनका मुकाबला करता है, वह उन्हे प्रतिहत कर सकता है पर कभी-कभी वह स्वयं भी आहत हो सकता है। बाहरी मुसीवतो से सीधी टक्कर होती है, पर भीतरी मुसीवते अप्रत्याशित रूप से आक्रमण करती है । उस आक्रमण को विफल करने के दो उपाय है-उपशम और क्षय । उपशम का अर्थ है दवाना या उपशात करना । इसमे आक्रान्ता वृत्ति का अस्तित्व समाप्त नही होता, पर वह कुछ समय के लिए दव जाती है । क्षय मे वह वृत्ति पूर्णत समाप्त हो जाती है । यह स्थिति शुक्लध्यान के द्वारा प्राप्त होती है। क्योकि यह उपादान पर सीधा प्रहार करता है । वर्तमान मे शुक्लध्यान की ऊचाई तक पहुचना संभव है क्या ? इस सदेह के कारण पुरुषार्थ को छोडने वाला साधक दिग्भ्रान्त वन जाता है । पुरुषार्थहीन व्यक्ति कभी कुछ पा ही नही सकता । पूर्णता की प्राप्ति समय सापेक्ष होती है, पर उसके लिए अभी से पुरुषार्थ न किया जाए तो बाद मे पूर्णता आएगी कहा से ? भावी पर्याय को पाने का पुरुषार्थ अभी और इसी क्षण होना जरूरी है, अन्यथा केवल स्वप्निल कहानी का अर्थ ही क्या है ? एकएक सीढी आगे वढने से ही तो मजिल मिलेगी । एक साथ सब सीढियो को लाघने की क्षमता नही है, यह ठीक है । पर अभी तो मजिल मिलेगी नही, यह सोचकर रुकने वाला व्यक्ति क्या कभी भी मजिल तक पहुच सकता है ?
साधना के क्षेत्र मे आगे वढने के लिए पहला सूत्र है समता का
८६ खोए सो पाए
अभ्यास । समता का अभ्यास किस सदर्भ मे ? निन्दा, स्तुति, लाभ-अलाभ, जीवन-मरण कोई भी स्थिति हो, मन का सन्तुलन नही टूटना चाहिए । निन्दा सुनकर उत्तेजित न होने वाले व्यक्ति फिर भी मिल सकते है, पर अपनी प्रशसा सुन उससे अप्रभावित रहना बहुत कठिन वात है । कठिन है पर असभव नही है । निंदा मे सतुलन बना रह सकता है तो प्रशसा मे क्यो नही रह सकता ? एक चावल हाथ में लेने से पता चल जाता है कि चावल पके हुए है या नही । इसी प्रकार एक स्थिति में सन्तुलन रह जाता है तो यह विश्वास हो जाता है कि किसी भी स्थिति मे सन्तुलित रहा जा सकता है ।
साधक समाज मे जीता है। सामाजिक वातावरण का उस पर प्रभाव होता है। ऐसी स्थिति मे उसे यह नहीं भूल जाना चाहिए कि वह सामाजिक होने के साथ-साथ एक व्यक्ति भी है। समाज का बहुत वडा मूल्य है, पर हकीकत व्यक्ति है। व्यक्ति स्वय को व्यक्ति मानकर चले तो वह किसी भी स्थिति के लिए परिस्थिति या समाज को दोपी न ठहराकर स्वय ही सहन करने का प्रयास करेगा ।
श्री राम मुनिधर्म मे दीक्षित होकर साधना मे लग गए । एक वार वे ध्यान मे लीन थे। उस समय वारहवें स्वर्ग का इन्द्र उनकी परीक्षा लेने आया । उसने सीता का रूप बनाया, वसत ऋतु की विक्रिया की और हावभाव विलास से राम को विचलित करने का प्रयत्न किया । किन्तु वे एक क्षण के लिए भी उससे प्रभावित नही हुए । इन्द्र के सारे प्रयत्न अनदेखे और अनसुने कर वे अपनी आत्मा को देखते रहे। उन्हें परीक्षा में सफलता मिली । ऐसी सफलता उन सबको मिल सकती है जो व्यक्तिगत परिवेश मे मान-अपमान, सुख-दुख आदि को समभाव से सह जाते है । सहना धर्म है, सहना उपशम और श्रेय की दिशा मे गति है, सहना साधना की पहली और अन्तिम सीढी है। इसलिए साधक को सहिष्णु बनकर उससे प्राप्त होने वाले आनन्द का अनुभव करना चाहिए ।
भीतरी वैभव
हमारे सामने दो प्रकार के जगत है - -अन्तर्जगत् और वहिर्जगत् । वहिर्जगत् मे जो कुछ है, स्पष्ट है । उसके लिए मनुष्य जीवन भर दौडधूप करता रहता है । पर अन्तर्जगत् मे जो वैभव है उसका सही अनुमान किसी को है ? जिस व्यक्ति को अपने अन्तर्जगत् के वैभव का अनुमान नहीं है, वह इस ससार में सबसे अधिक विपन्न रहता है। जब तक उस वैभव का वोध नही होता, तब तक व्यक्ति भटकता रहता है। उसे जान लेने के बाद सव कुछ अकिंचित्कर हो जाता है। अर्हतो की अन्तर्सम्पदा पूर्ण रूप से विकसित होती है। उनके जीवन मे कही कोई अभाव नही रहता । उनकी आन्तरिक समृद्धि की चर्चा पढने और सुनने वाले विस्मित रह जाते है ।
वैशेषिक मत के प्रवर्तक महर्षि कणाद अन्वर्थनामा थे । 'कण अत्तीति कणाद' वे भिक्षा के लिए घर-घर मे नही घूमते थे । खेतो मे विकीर्ण कणो को चुन-चुनकर वे अपनी शरीर-यात्रा का निर्वाह करते थे । राज्य के एक वरिष्ठ व्यक्ति ने उनको इस प्रकार पेट पालते देखा । उसने सम्राट् के पास जाकर कहा- आपके राज्य में कितनी अव्यवस्था है । यहा के भिखारी खेतो मे विखरे धान्य-कण खाकर जीवन निर्वाह करते हैं । सम्राट् को यह वात बहुत बुरी लगी । उन्होने अपने एक कर्मचारी के हाथ एक हजार स्वर्ण - मुद्रा कणाद के पास भेजी । पर उन्होने स्वर्ण मुद्राए लेने से इन्कार कर दिया। सम्राट् का महामंत्री वहा गया । उसने अधिक स्वर्ण मुद्राए देनी चाही, पर कणाद ने उनकी ओर आख उठाकर भी नही देखा । विचित्र भिखारी था वह । इस सबन्ध मे सम्राज्ञी को पता चला तो उसे भी आश्चर्य हुआ । उसे कुछ जानकार सूत्रो से ज्ञात हुआ कि कणाद रहता तो भिखारी
८८ खोए सो पाए
की तरह है, पर वडा विलक्षण व्यक्ति है वह । और तो क्या वह सोना बनाने की कला भी जानता है । सम्राज्ञी ने यह सवाद सम्राट् को सुनाया तो वह उससे मिलने के लिए उतावला हो गया । कणाद को राजसभा मे बुलाने के स्थान पर सम्राट् स्वयं उनके पास गया । कणाद के चरणो मे मिर झुकाकर सम्राट् बोला - महाराज ! आपके पास स्वर्ण सिद्धि है ? ! कणाद ने स्वीकृति दी । सम्राट् बोला - मुझे बताओगे ? कणाद ने पूछाक्यो ? सम्राट् ने उत्तर दिया-- राज्य के कोष को समृद्ध बनाने के लिए मुझे सोने की जरूरत है। कणाद मुसकराते हुए बोले- मैं आपको कुछ वताऊ, उससे पहले यह बताओ कि भिखारी कौन है ? आप या मै ? केवल सम्राट् कहलाने से कोई सम्राट् नही होता । सम्राट् वह होता है जिसके मन की लालसा समाप्त हो जाए । सम्राट् महर्षि के चरणो मे प्रणत हो गया । वास्तव मे भिखारी वह होता है, जिसे स्वय की पहचान नही होती । जो अपने अन्तर्जगत् के वैभव को देख नही पाता, वही बाहरी वैभव को पाने के लिए उत्सुक रहता है । अन्तर्जगत् के वैभव की चर्चा आगमो मे उपलब्ध है। उस समय अनेक साधको के पास आमपौषधि, जल्लोपधि, मलौपधि आदि अनेक प्रकार की लब्धिया थी । वर्तमान मे वे लब्धियां नही हो सकती, ऐसी बात नही है। आज भी शक्ति है, पर सबके पास नही है । सवको ज्ञात नही है। शक्ति के लिए साधना होनी भी नही चाहिए। साधना मे जो कुछ उपलब्ध होने का है, वह निश्चित रूप से हो सकता है । उसके लिए निरन्तर अभ्यास करने की अपेक्षा है । अभ्यास भी एक जन्म मे नही अनेक जन्मों तक करना होगा। अभ्यास काल मे धृति भी रखनी होगी। धैर्य के साथ पुरुषार्थ करने वाला माधक सब कुछ पा लेता है। प्रेक्षा ध्यान का प्रयोग साधना का एक अभिनव उपक्रम है । इसके द्वारा अपने आपको देखने को दिशा उपलब्ध होती है। जो स्वयं को देख लेता है वह और भी बहुत कुछ देख सकता है और प्राप्त कर सकता है। | चौरासी खोए सो पाए फोटो क्यो ले रहे हो ? उसने अपना सकल्प बताया और उसके साथ ही वीस साल पहले लिया हुआ वह दूसरा चित्र भी उसे दिखा दिया । चित्र देखकर वह व्यक्ति अट्टहास कर उठा। फोटोग्राफर ने विस्मित होकर पूछायह क्या हो गया आपको ? वह व्यक्ति वोला - यह चित्र भी मेरा है । इस कथन के साथ ही उसने उस समय और स्थान के बारे मे सव कुछ सही-सही बता दिया । जिन लोगो ने उन दो चित्रों को देखा और सुना कि ये दो चित्र एक ही व्यक्ति के है, वे सव चकित थे । पर इसमे आश्चर्य जैसी कोई बात नही है । क्योकि वृत्तियो मे बदलाव आने से व्यक्ति की आकृति भी वदल जाती है। भीतरी बदलाव जितना अधिक होता है, वह उतनी ही स्पष्टता से चेहरे पर अक्ति हो जाता है। पर ऐसे बदलाव से किसी भी व्यक्ति का हित नही हो सकता । इसलिए जीवन दर्शन को समझना जरूरी है । जीवन का दर्शन जितना विशद होता है, वृत्तिया उतनी ही उदात्त हो जाती हैं । वृत्तियो के बदलाव से व्यवहार में बदलाव आता है । यह बदलाव निरन्तर अच्छाई की दिशा मे होता रहे तो जीवन का समग्र दर्शन अधिगत हो सकता है। जिस क्षण समग्रता से जीवन जीना आ जाएगा, उसी क्षण साधक अपने आपको सही रूप से पहचान पाएगा। समता का प्रयोग माधना का पथ निर्वाध नही है । वहा मुसीबते आती है । वाहर से भी आती है और भीतर में भी आती है । जो साधक उनसे घबरा जाता है, वह पीछे लौट आता है । जो उनका मुकाबला करता है, वह उन्हे प्रतिहत कर सकता है पर कभी-कभी वह स्वयं भी आहत हो सकता है। बाहरी मुसीवतो से सीधी टक्कर होती है, पर भीतरी मुसीवते अप्रत्याशित रूप से आक्रमण करती है । उस आक्रमण को विफल करने के दो उपाय है-उपशम और क्षय । उपशम का अर्थ है दवाना या उपशात करना । इसमे आक्रान्ता वृत्ति का अस्तित्व समाप्त नही होता, पर वह कुछ समय के लिए दव जाती है । क्षय मे वह वृत्ति पूर्णत समाप्त हो जाती है । यह स्थिति शुक्लध्यान के द्वारा प्राप्त होती है। क्योकि यह उपादान पर सीधा प्रहार करता है । वर्तमान मे शुक्लध्यान की ऊचाई तक पहुचना संभव है क्या ? इस सदेह के कारण पुरुषार्थ को छोडने वाला साधक दिग्भ्रान्त वन जाता है । पुरुषार्थहीन व्यक्ति कभी कुछ पा ही नही सकता । पूर्णता की प्राप्ति समय सापेक्ष होती है, पर उसके लिए अभी से पुरुषार्थ न किया जाए तो बाद मे पूर्णता आएगी कहा से ? भावी पर्याय को पाने का पुरुषार्थ अभी और इसी क्षण होना जरूरी है, अन्यथा केवल स्वप्निल कहानी का अर्थ ही क्या है ? एकएक सीढी आगे वढने से ही तो मजिल मिलेगी । एक साथ सब सीढियो को लाघने की क्षमता नही है, यह ठीक है । पर अभी तो मजिल मिलेगी नही, यह सोचकर रुकने वाला व्यक्ति क्या कभी भी मजिल तक पहुच सकता है ? साधना के क्षेत्र मे आगे वढने के लिए पहला सूत्र है समता का छियासी खोए सो पाए अभ्यास । समता का अभ्यास किस सदर्भ मे ? निन्दा, स्तुति, लाभ-अलाभ, जीवन-मरण कोई भी स्थिति हो, मन का सन्तुलन नही टूटना चाहिए । निन्दा सुनकर उत्तेजित न होने वाले व्यक्ति फिर भी मिल सकते है, पर अपनी प्रशसा सुन उससे अप्रभावित रहना बहुत कठिन वात है । कठिन है पर असभव नही है । निंदा मे सतुलन बना रह सकता है तो प्रशसा मे क्यो नही रह सकता ? एक चावल हाथ में लेने से पता चल जाता है कि चावल पके हुए है या नही । इसी प्रकार एक स्थिति में सन्तुलन रह जाता है तो यह विश्वास हो जाता है कि किसी भी स्थिति मे सन्तुलित रहा जा सकता है । साधक समाज मे जीता है। सामाजिक वातावरण का उस पर प्रभाव होता है। ऐसी स्थिति मे उसे यह नहीं भूल जाना चाहिए कि वह सामाजिक होने के साथ-साथ एक व्यक्ति भी है। समाज का बहुत वडा मूल्य है, पर हकीकत व्यक्ति है। व्यक्ति स्वय को व्यक्ति मानकर चले तो वह किसी भी स्थिति के लिए परिस्थिति या समाज को दोपी न ठहराकर स्वय ही सहन करने का प्रयास करेगा । श्री राम मुनिधर्म मे दीक्षित होकर साधना मे लग गए । एक वार वे ध्यान मे लीन थे। उस समय वारहवें स्वर्ग का इन्द्र उनकी परीक्षा लेने आया । उसने सीता का रूप बनाया, वसत ऋतु की विक्रिया की और हावभाव विलास से राम को विचलित करने का प्रयत्न किया । किन्तु वे एक क्षण के लिए भी उससे प्रभावित नही हुए । इन्द्र के सारे प्रयत्न अनदेखे और अनसुने कर वे अपनी आत्मा को देखते रहे। उन्हें परीक्षा में सफलता मिली । ऐसी सफलता उन सबको मिल सकती है जो व्यक्तिगत परिवेश मे मान-अपमान, सुख-दुख आदि को समभाव से सह जाते है । सहना धर्म है, सहना उपशम और श्रेय की दिशा मे गति है, सहना साधना की पहली और अन्तिम सीढी है। इसलिए साधक को सहिष्णु बनकर उससे प्राप्त होने वाले आनन्द का अनुभव करना चाहिए । भीतरी वैभव हमारे सामने दो प्रकार के जगत है - -अन्तर्जगत् और वहिर्जगत् । वहिर्जगत् मे जो कुछ है, स्पष्ट है । उसके लिए मनुष्य जीवन भर दौडधूप करता रहता है । पर अन्तर्जगत् मे जो वैभव है उसका सही अनुमान किसी को है ? जिस व्यक्ति को अपने अन्तर्जगत् के वैभव का अनुमान नहीं है, वह इस ससार में सबसे अधिक विपन्न रहता है। जब तक उस वैभव का वोध नही होता, तब तक व्यक्ति भटकता रहता है। उसे जान लेने के बाद सव कुछ अकिंचित्कर हो जाता है। अर्हतो की अन्तर्सम्पदा पूर्ण रूप से विकसित होती है। उनके जीवन मे कही कोई अभाव नही रहता । उनकी आन्तरिक समृद्धि की चर्चा पढने और सुनने वाले विस्मित रह जाते है । वैशेषिक मत के प्रवर्तक महर्षि कणाद अन्वर्थनामा थे । 'कण अत्तीति कणाद' वे भिक्षा के लिए घर-घर मे नही घूमते थे । खेतो मे विकीर्ण कणो को चुन-चुनकर वे अपनी शरीर-यात्रा का निर्वाह करते थे । राज्य के एक वरिष्ठ व्यक्ति ने उनको इस प्रकार पेट पालते देखा । उसने सम्राट् के पास जाकर कहा- आपके राज्य में कितनी अव्यवस्था है । यहा के भिखारी खेतो मे विखरे धान्य-कण खाकर जीवन निर्वाह करते हैं । सम्राट् को यह वात बहुत बुरी लगी । उन्होने अपने एक कर्मचारी के हाथ एक हजार स्वर्ण - मुद्रा कणाद के पास भेजी । पर उन्होने स्वर्ण मुद्राए लेने से इन्कार कर दिया। सम्राट् का महामंत्री वहा गया । उसने अधिक स्वर्ण मुद्राए देनी चाही, पर कणाद ने उनकी ओर आख उठाकर भी नही देखा । विचित्र भिखारी था वह । इस सबन्ध मे सम्राज्ञी को पता चला तो उसे भी आश्चर्य हुआ । उसे कुछ जानकार सूत्रो से ज्ञात हुआ कि कणाद रहता तो भिखारी अठासी खोए सो पाए की तरह है, पर वडा विलक्षण व्यक्ति है वह । और तो क्या वह सोना बनाने की कला भी जानता है । सम्राज्ञी ने यह सवाद सम्राट् को सुनाया तो वह उससे मिलने के लिए उतावला हो गया । कणाद को राजसभा मे बुलाने के स्थान पर सम्राट् स्वयं उनके पास गया । कणाद के चरणो मे मिर झुकाकर सम्राट् बोला - महाराज ! आपके पास स्वर्ण सिद्धि है ? ! कणाद ने स्वीकृति दी । सम्राट् बोला - मुझे बताओगे ? कणाद ने पूछाक्यो ? सम्राट् ने उत्तर दिया-- राज्य के कोष को समृद्ध बनाने के लिए मुझे सोने की जरूरत है। कणाद मुसकराते हुए बोले- मैं आपको कुछ वताऊ, उससे पहले यह बताओ कि भिखारी कौन है ? आप या मै ? केवल सम्राट् कहलाने से कोई सम्राट् नही होता । सम्राट् वह होता है जिसके मन की लालसा समाप्त हो जाए । सम्राट् महर्षि के चरणो मे प्रणत हो गया । वास्तव मे भिखारी वह होता है, जिसे स्वय की पहचान नही होती । जो अपने अन्तर्जगत् के वैभव को देख नही पाता, वही बाहरी वैभव को पाने के लिए उत्सुक रहता है । अन्तर्जगत् के वैभव की चर्चा आगमो मे उपलब्ध है। उस समय अनेक साधको के पास आमपौषधि, जल्लोपधि, मलौपधि आदि अनेक प्रकार की लब्धिया थी । वर्तमान मे वे लब्धियां नही हो सकती, ऐसी बात नही है। आज भी शक्ति है, पर सबके पास नही है । सवको ज्ञात नही है। शक्ति के लिए साधना होनी भी नही चाहिए। साधना मे जो कुछ उपलब्ध होने का है, वह निश्चित रूप से हो सकता है । उसके लिए निरन्तर अभ्यास करने की अपेक्षा है । अभ्यास भी एक जन्म मे नही अनेक जन्मों तक करना होगा। अभ्यास काल मे धृति भी रखनी होगी। धैर्य के साथ पुरुषार्थ करने वाला माधक सब कुछ पा लेता है। प्रेक्षा ध्यान का प्रयोग साधना का एक अभिनव उपक्रम है । इसके द्वारा अपने आपको देखने को दिशा उपलब्ध होती है। जो स्वयं को देख लेता है वह और भी बहुत कुछ देख सकता है और प्राप्त कर सकता है। |
मुंबईःजी टीवी पर प्रसारित सीरियल मीत में जल्द ही नया मोड़ देखने को मिलेगा। शो में एक्टर अंकित व्यास का नकारात्मक किरदार दर्शकों को हैरान कर देगा। अंकित व्यास ने अपने किरदार को लेकर कुछ राज खोले। उन्होंने बताया कि कैसे उनकी एंट्री मीत शो में ट्विस्ट लाने वाली है।
अंकित व्यास ने कहा, उनका किरदार एक अमीर और बिगड़ैल बेटे का होगा, जिसके मन में लड़कियों और बड़ों के लिए कोई सम्मान नहीं है। वह अपने व्यवहार से किसी को भी बेवकूफ बना सकता है।
अंकित ने आगे कहा, मैं छोटे से ब्रेक के बाद टीवी पर वापस आने के लिए बेहद एक्साइटिड हूं। मेरे किरदार की नकारात्मकता सभी को हैरान कर देगी, क्योंकि ऐसा हिस्सा कभी लिखा नहीं गया है। मैं इस हिस्से को लेकर काफी उत्साहित हूं और मुझे उम्मीद है कि लोग मुझे इस नई भूमिका में काफी पसंद करेंगे।
बताया जा रहा है कि शो में अंकित की एंट्री मीत हुड्डा के जीवन में बहुत सारे ट्विस्ट और टर्न लेकर आने वाली है।
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
| मुंबईःजी टीवी पर प्रसारित सीरियल मीत में जल्द ही नया मोड़ देखने को मिलेगा। शो में एक्टर अंकित व्यास का नकारात्मक किरदार दर्शकों को हैरान कर देगा। अंकित व्यास ने अपने किरदार को लेकर कुछ राज खोले। उन्होंने बताया कि कैसे उनकी एंट्री मीत शो में ट्विस्ट लाने वाली है। अंकित व्यास ने कहा, उनका किरदार एक अमीर और बिगड़ैल बेटे का होगा, जिसके मन में लड़कियों और बड़ों के लिए कोई सम्मान नहीं है। वह अपने व्यवहार से किसी को भी बेवकूफ बना सकता है। अंकित ने आगे कहा, मैं छोटे से ब्रेक के बाद टीवी पर वापस आने के लिए बेहद एक्साइटिड हूं। मेरे किरदार की नकारात्मकता सभी को हैरान कर देगी, क्योंकि ऐसा हिस्सा कभी लिखा नहीं गया है। मैं इस हिस्से को लेकर काफी उत्साहित हूं और मुझे उम्मीद है कि लोग मुझे इस नई भूमिका में काफी पसंद करेंगे। बताया जा रहा है कि शो में अंकित की एंट्री मीत हुड्डा के जीवन में बहुत सारे ट्विस्ट और टर्न लेकर आने वाली है। डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी. |
धौलपुर। विधानसभा क्षेत्र से बसपा के पूर्व विधायक बनवारी लाल कुशवाहा को रविवार को 5 दिन के पैरोल पर जेल से छोड़ दिया गया। पूर्व विधायक बीएल कुशवाहा नरेश हत्याकांड के मामले में धौलपुर जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक विधायक बीएल कुशवाहा की मां लंबे समय से बीमार चल रही है। ऐसे में विधायक की पत्नी शोभा रानी ने जेल प्रशासन के यहां पैरोल के लिए आवेदन लगाया था। जेल प्रशासन ने मां के इलाज के लिए पांच दिन का पैरोल स्वीकृत करते हुए पूर्व विधायक को जेल से रिहा कर दिया है। अब पूर्व विधायक कुशवाहा को पांच दिन बाद जेल में समर्पण करना होगा।
| धौलपुर। विधानसभा क्षेत्र से बसपा के पूर्व विधायक बनवारी लाल कुशवाहा को रविवार को पाँच दिन के पैरोल पर जेल से छोड़ दिया गया। पूर्व विधायक बीएल कुशवाहा नरेश हत्याकांड के मामले में धौलपुर जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। जानकारी के मुताबिक विधायक बीएल कुशवाहा की मां लंबे समय से बीमार चल रही है। ऐसे में विधायक की पत्नी शोभा रानी ने जेल प्रशासन के यहां पैरोल के लिए आवेदन लगाया था। जेल प्रशासन ने मां के इलाज के लिए पांच दिन का पैरोल स्वीकृत करते हुए पूर्व विधायक को जेल से रिहा कर दिया है। अब पूर्व विधायक कुशवाहा को पांच दिन बाद जेल में समर्पण करना होगा। |
Viral Video: साही के पूरे शरीर पर लंबे-लंबे कांटे होते हैं। इससे वह अपने बच्चों की सुरक्षा करता है। बता दें कि जब कोई इन कांटों को पकड़ने या छूने की कोशिश करता है तो ये कांटे उसे चुभ जाते हैं।
Manipur में चिंगारी किसने भड़काई, पता चला !
Dhartiputra: Fazil Ahmad के लिए "मुसलमान को समस्या है", पर समस्या पूछ ली तो बातें बनाने लगे !
यश के फेर में मानवी. . . वो निकला तनवीर !
Dhartiputra : दुनिया में Narendra Modi महान. . . Rahul Gandhi करें बदनाम !
Rashtravad : पूजा नहीं रुकेगी. . Worship Act, Waqf कानून लागू नहीं?
| Viral Video: साही के पूरे शरीर पर लंबे-लंबे कांटे होते हैं। इससे वह अपने बच्चों की सुरक्षा करता है। बता दें कि जब कोई इन कांटों को पकड़ने या छूने की कोशिश करता है तो ये कांटे उसे चुभ जाते हैं। Manipur में चिंगारी किसने भड़काई, पता चला ! Dhartiputra: Fazil Ahmad के लिए "मुसलमान को समस्या है", पर समस्या पूछ ली तो बातें बनाने लगे ! यश के फेर में मानवी. . . वो निकला तनवीर ! Dhartiputra : दुनिया में Narendra Modi महान. . . Rahul Gandhi करें बदनाम ! Rashtravad : पूजा नहीं रुकेगी. . Worship Act, Waqf कानून लागू नहीं? |
नई दिल्लीः
बॉलीवुड हॉटी मलाइका अरोड़ा आज अपना 46वां बर्थडे मना रही हैं. सुबह से ही उनके चाहने वालों का बधाई संदेश उनके लिए जारी है.
तो वहीं इस बार मलाइका ने अपना बर्थडे बॉलीवुड सेलेब्स के साथ मुंबई में मनाया. जिसमें अक्षय कुमार, करण जौहर, करीना कपूर खान, जाह्नवी कपूर, अनन्या पांडे, मलाइका के बॉयफ्रेंड अर्जुन कपूर, मलाइका की बहन अमृता अरोड़ा, अर्जुन रामपाल जैसे कई सेलेब्स शामिल हुए.
यह भी पढ़ेंः नेहा के शो में शाहिद कपूर ने किया खुलासा, कहा- सलमान, अजय और ऐश्वर्या के साथ बन सकती थी 'पद्मावत'
इस बर्थडे बैश की कई फोटो और वीडियो भी सोशल मीडिया पक वायरल हो रहा है. फिलहाल अब इनसबके अलावा मलाइका और उनके बॉयफ्रेंड अर्जुन कपूर की एक रोमांटिक फोटो वायरल हो रही है. जिसमें अर्जुन कपूर उन्हें किस करते हुए नजर आ रहे हैं. इस फोटो को अर्जुन ने अपने इंस्टाग्राम पेज से शेयर की है. जिसमें उन्होंने अपने दिल की इमोजी भी लगाई है.
फिलहाल ऐसी भी खबर है कि जल्द ही मलाइका और अर्जुन शादी के बंधन में बंधने वाले हैं. पिछले साल अर्जुन के बर्थडे को मलाइका ने न्यूयॉर्क में सेलिब्रेट किया था.
| नई दिल्लीः बॉलीवुड हॉटी मलाइका अरोड़ा आज अपना छियालीसवां बर्थडे मना रही हैं. सुबह से ही उनके चाहने वालों का बधाई संदेश उनके लिए जारी है. तो वहीं इस बार मलाइका ने अपना बर्थडे बॉलीवुड सेलेब्स के साथ मुंबई में मनाया. जिसमें अक्षय कुमार, करण जौहर, करीना कपूर खान, जाह्नवी कपूर, अनन्या पांडे, मलाइका के बॉयफ्रेंड अर्जुन कपूर, मलाइका की बहन अमृता अरोड़ा, अर्जुन रामपाल जैसे कई सेलेब्स शामिल हुए. यह भी पढ़ेंः नेहा के शो में शाहिद कपूर ने किया खुलासा, कहा- सलमान, अजय और ऐश्वर्या के साथ बन सकती थी 'पद्मावत' इस बर्थडे बैश की कई फोटो और वीडियो भी सोशल मीडिया पक वायरल हो रहा है. फिलहाल अब इनसबके अलावा मलाइका और उनके बॉयफ्रेंड अर्जुन कपूर की एक रोमांटिक फोटो वायरल हो रही है. जिसमें अर्जुन कपूर उन्हें किस करते हुए नजर आ रहे हैं. इस फोटो को अर्जुन ने अपने इंस्टाग्राम पेज से शेयर की है. जिसमें उन्होंने अपने दिल की इमोजी भी लगाई है. फिलहाल ऐसी भी खबर है कि जल्द ही मलाइका और अर्जुन शादी के बंधन में बंधने वाले हैं. पिछले साल अर्जुन के बर्थडे को मलाइका ने न्यूयॉर्क में सेलिब्रेट किया था. |
Ranchi, 04 October : राजधानी में बुधवार को सुबह ट्रेन से कटकर एक व्यक्ति की मौत हो गयी. चुटिया थाना क्षेत्र के कोलकाता गोलपारा गेट के पास वह व्यक्त ट्रेन से कट गया और मौके पर ही उसकी मौत हो गयी. मृतक का नाम उपेन्द्र महतो बताया जा रहा है और वह मुजफ्फरपुर स्थित कर्जा थाना के जियान गांव का रहने वाला था. पुलिस ने शव को कब्जे में कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. वहीं, मृतक के परिजनों को घटना की सूचना दे दी गयी है.
| Ranchi, चार अक्टूबरober : राजधानी में बुधवार को सुबह ट्रेन से कटकर एक व्यक्ति की मौत हो गयी. चुटिया थाना क्षेत्र के कोलकाता गोलपारा गेट के पास वह व्यक्त ट्रेन से कट गया और मौके पर ही उसकी मौत हो गयी. मृतक का नाम उपेन्द्र महतो बताया जा रहा है और वह मुजफ्फरपुर स्थित कर्जा थाना के जियान गांव का रहने वाला था. पुलिस ने शव को कब्जे में कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. वहीं, मृतक के परिजनों को घटना की सूचना दे दी गयी है. |
मेघालय में अब शराब की दुकाने राष्ट्रीय राजमार्गों के करीब दिखेंगी, जी हां राज्य मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को 500 मिटेर की राष्ट्रिय राजमार्गों के भीतर शराब की दुकानों की अनुमति दे दी है।
राज्य मंत्रिमंडल ने राजमार्गों के भीतर शराब की दुकानों की अनुमति नहीं देने के अपने पहले के आदेश में संशोधन करते हुए न्यूनतम दूरी शुन्य से काम कर दी है. हालांकि राज्य के प्रभारी आबकारी मंत्री जेनिथ संगमा ने कहा कि शराब की दुकाने इतनी भी करीब नहीं होनी चाहिए कि वे शराब की वे राष्ट्रीय राजमार्गों से साफ़ दिखे।
कैबिनेट ने शराब क्षेत्र भी चुना है जहां शराब की बिक्री प्रतिबंधित है, शुरू में सरकार ने शिलॉन्ग में ही नौ ऐसे क्षेत्रों और तुरा में सात स्थानों की पहचान की थी जहां शराब नहीं बेचीं जा सकती।
| मेघालय में अब शराब की दुकाने राष्ट्रीय राजमार्गों के करीब दिखेंगी, जी हां राज्य मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को पाँच सौ मिटेर की राष्ट्रिय राजमार्गों के भीतर शराब की दुकानों की अनुमति दे दी है। राज्य मंत्रिमंडल ने राजमार्गों के भीतर शराब की दुकानों की अनुमति नहीं देने के अपने पहले के आदेश में संशोधन करते हुए न्यूनतम दूरी शुन्य से काम कर दी है. हालांकि राज्य के प्रभारी आबकारी मंत्री जेनिथ संगमा ने कहा कि शराब की दुकाने इतनी भी करीब नहीं होनी चाहिए कि वे शराब की वे राष्ट्रीय राजमार्गों से साफ़ दिखे। कैबिनेट ने शराब क्षेत्र भी चुना है जहां शराब की बिक्री प्रतिबंधित है, शुरू में सरकार ने शिलॉन्ग में ही नौ ऐसे क्षेत्रों और तुरा में सात स्थानों की पहचान की थी जहां शराब नहीं बेचीं जा सकती। |
Ranchi : 'यास' तूफान के गुजरने का असर बिहार और झारखंड की ट्रेनों के परिचालन पर भी पड़ा. धनबाद मंडल के पारसनाथ और निमियाघाट स्टेशन के मध्य पेड़ गिरने से रेल परिचालन बाधित हुआ. डाउन लाइन पर 8. 35 बजे से 9. 18 बजे तक परिचालन रुका रहा. इस वजह से 03546 गया- आसनसोल स्पेशल ट्रेन 9. 13 बजे से 9. 23 बजे तक पारसनाथ स्टेशन पर खड़ी रही. समस्तीपुर मंडल के मझौलिया और बेतिया रेलखंड में 03. 55 बजे किमी 201/16 के निकट एक पेड़ रेलवे ट्रैक पर गिर गया. एक घंटे तक रेल आवाजाही ठप रही. सीतामढ़ी-दरभंगा रेलखंड के बीच जनकपुर रोड और बाजपट्टी स्टेशन के बीच एक पेड़ ओएचई तार पर गिर गया. भारी बारिश के कारण हाजीपुर-मुजफ्फरपुर रेलखंड पर भी ओएचई में खराबी आई.
सोनपुर मंडल के नारायणपुर और सिलौत स्टेशन के बीच 03. 45 बजे आकाशीय बिजली गिर गई जिससे एक बूम क्षतिग्रस्त होकर ओएचई वायर में उलझ गया. इससे डाउन लाइन पर ट्रेनें बाधित हुईं. बखरी और काढ़ागोला के मध्य भी बारिश से परिचालन पर असर पड़ा. मुजफ्फरपुर- हाजीपुर रेलखंड में भारी बारिश से सुबह इस रेलखंड के अप लाइन पर ट्रेनें बाधित रहीं. अत्यधिक बारिश के कारण 6. 50 बजे डाउन लाइन पर भी ट्रेनों को खड़ा करना पड़ा. 7. 50 बजे बारिश के कारण ओएचई में खराबी आ गई. इसे दिन के 12. 15 बजे ठीक कर रुकी हुई ट्रेनों को रवाना किया गया. ओएचई में खराबी से कारण हाजीपुर- मुजफ्फरपुर रेलखंड के बीच लगभग 11 एक्सप्रेस ट्रेनें विभिन्न स्टेशनों पर खड़ी रही.
इसे भी पढ़ें - 'यास' तो सिर्फ बहाना था, कांची पुल ढहने की असली वजह है 'अवैध बालू उत्खनन'!
इसे भी पढ़ें - पंकज मिश्रा ने कहा- बाबूलाल मरांडी, निशिकांत दुबे और सुनील तिवारी से उन्हें जान का खतरा (देखें Video)
| Ranchi : 'यास' तूफान के गुजरने का असर बिहार और झारखंड की ट्रेनों के परिचालन पर भी पड़ा. धनबाद मंडल के पारसनाथ और निमियाघाट स्टेशन के मध्य पेड़ गिरने से रेल परिचालन बाधित हुआ. डाउन लाइन पर आठ. पैंतीस बजे से नौ. अट्ठारह बजे तक परिचालन रुका रहा. इस वजह से तीन हज़ार पाँच सौ छियालीस गया- आसनसोल स्पेशल ट्रेन नौ. तेरह बजे से नौ. तेईस बजे तक पारसनाथ स्टेशन पर खड़ी रही. समस्तीपुर मंडल के मझौलिया और बेतिया रेलखंड में तीन. पचपन बजे किमी दो सौ एक/सोलह के निकट एक पेड़ रेलवे ट्रैक पर गिर गया. एक घंटे तक रेल आवाजाही ठप रही. सीतामढ़ी-दरभंगा रेलखंड के बीच जनकपुर रोड और बाजपट्टी स्टेशन के बीच एक पेड़ ओएचई तार पर गिर गया. भारी बारिश के कारण हाजीपुर-मुजफ्फरपुर रेलखंड पर भी ओएचई में खराबी आई. सोनपुर मंडल के नारायणपुर और सिलौत स्टेशन के बीच तीन. पैंतालीस बजे आकाशीय बिजली गिर गई जिससे एक बूम क्षतिग्रस्त होकर ओएचई वायर में उलझ गया. इससे डाउन लाइन पर ट्रेनें बाधित हुईं. बखरी और काढ़ागोला के मध्य भी बारिश से परिचालन पर असर पड़ा. मुजफ्फरपुर- हाजीपुर रेलखंड में भारी बारिश से सुबह इस रेलखंड के अप लाइन पर ट्रेनें बाधित रहीं. अत्यधिक बारिश के कारण छः. पचास बजे डाउन लाइन पर भी ट्रेनों को खड़ा करना पड़ा. सात. पचास बजे बारिश के कारण ओएचई में खराबी आ गई. इसे दिन के बारह. पंद्रह बजे ठीक कर रुकी हुई ट्रेनों को रवाना किया गया. ओएचई में खराबी से कारण हाजीपुर- मुजफ्फरपुर रेलखंड के बीच लगभग ग्यारह एक्सप्रेस ट्रेनें विभिन्न स्टेशनों पर खड़ी रही. इसे भी पढ़ें - 'यास' तो सिर्फ बहाना था, कांची पुल ढहने की असली वजह है 'अवैध बालू उत्खनन'! इसे भी पढ़ें - पंकज मिश्रा ने कहा- बाबूलाल मरांडी, निशिकांत दुबे और सुनील तिवारी से उन्हें जान का खतरा |
कोरोना वायरस की महामारी से उत्पन्न स्थिति की समीक्षा के लिए 15 अप्रैल, 2020 को संघ लोक सेवा आयोग की एक विशेष बैठक आयोजित की गई।
बैठक में सामाजिक दूरी के मानदंडों समेत लॉकडाउन के वर्तमान प्रतिबंधों के मद्देनजर, यह निर्णय लिया गया कि सभी साक्षात्कारों, परीक्षाओं और भर्ती बोर्डों, जिसके लिए उम्मीदवारों एवं सलाहकारों को देश के सभी हिस्सों से यात्रा करने की आवश्यकता होती है, की तिथियों की समय-समय पर समीक्षा की जाएगी। सिविल सेवा- 2019 के बाकी बचे हुए व्यक्तित्व परीक्षण (पर्सनालिटी टेस्ट) की तिथि के बारे में नये सिरे से फैसला 3 मई 2020 को लॉकडाउन के दूसरे चरण की समाप्ति के बाद लिया जायेगा। सिविल सेवा 2020 (प्रारंभिक), इंजीनियरिंग सेवा (मुख्य) और भू-वैज्ञानिक सेवा (मुख्य) परीक्षाओं की तिथियां पहले ही घोषित की जा चुकी थीं। नयी परिस्थितियों में जरूरी होने पर इन परीक्षाओं की तिथियों में किसी भी किस्म के पुनर्निर्धारण की सूचना संघ लोक सेवा आयोग की वेबसाइट पर दी जायेगी। संयुक्त चिकित्सा सेवा परीक्षा, भारतीय आर्थिक सेवा और भारतीय सांख्यिकीय सेवा परीक्षा 2020 के टाले जाने की सूचना पहले ही दी जा चुकी है। सीएपीएफ परीक्षा 2020 की तिथियां भी संघ लोक सेवा आयोग की वेबसाइट पर अधिसूचित की जाएंगी। नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA-I) की परीक्षा को पहले ही अगली सूचना तक स्थगित कर दिया गया है। NDA -II परीक्षा के बारे में लिये जाने वाले निर्णय की जानकारी 10 जून, 2020, इसकी अधिसूचना के लिए निर्धारित तिथि, को पोस्ट कर दी जायेगी। सभी परीक्षाओं, साक्षात्कार और भर्ती बोर्डों से जुड़े आयोग के अन्य निर्णयों की जानकारी तुरंत आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध करायी जायेगी।
आयोग ने कोरोना वायरस महामारी से राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को होने वाले नुकसान की समीक्षा की। राष्ट्रीय स्तर पर वित्तीय संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता को स्वीकार करते हुए, संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं अन्य सदस्यों ने अप्रैल, 2020 से एक वर्ष की अवधि के लिए आयोग से प्राप्त अपने मूल वेतन का 30% हिस्सा स्वेच्छा से त्यागने का निर्णय लिया है।
इसके अलावा, संघ लोक सेवा आयोग के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने प्रधानमंत्री के आपातकालीन स्थिति में नागरिक सहायता एवं राहत निधि (पीएम केयर्स फंड) में एक दिन का वेतन दान दिया है।
| कोरोना वायरस की महामारी से उत्पन्न स्थिति की समीक्षा के लिए पंद्रह अप्रैल, दो हज़ार बीस को संघ लोक सेवा आयोग की एक विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक में सामाजिक दूरी के मानदंडों समेत लॉकडाउन के वर्तमान प्रतिबंधों के मद्देनजर, यह निर्णय लिया गया कि सभी साक्षात्कारों, परीक्षाओं और भर्ती बोर्डों, जिसके लिए उम्मीदवारों एवं सलाहकारों को देश के सभी हिस्सों से यात्रा करने की आवश्यकता होती है, की तिथियों की समय-समय पर समीक्षा की जाएगी। सिविल सेवा- दो हज़ार उन्नीस के बाकी बचे हुए व्यक्तित्व परीक्षण की तिथि के बारे में नये सिरे से फैसला तीन मई दो हज़ार बीस को लॉकडाउन के दूसरे चरण की समाप्ति के बाद लिया जायेगा। सिविल सेवा दो हज़ार बीस , इंजीनियरिंग सेवा और भू-वैज्ञानिक सेवा परीक्षाओं की तिथियां पहले ही घोषित की जा चुकी थीं। नयी परिस्थितियों में जरूरी होने पर इन परीक्षाओं की तिथियों में किसी भी किस्म के पुनर्निर्धारण की सूचना संघ लोक सेवा आयोग की वेबसाइट पर दी जायेगी। संयुक्त चिकित्सा सेवा परीक्षा, भारतीय आर्थिक सेवा और भारतीय सांख्यिकीय सेवा परीक्षा दो हज़ार बीस के टाले जाने की सूचना पहले ही दी जा चुकी है। सीएपीएफ परीक्षा दो हज़ार बीस की तिथियां भी संघ लोक सेवा आयोग की वेबसाइट पर अधिसूचित की जाएंगी। नेशनल डिफेंस एकेडमी की परीक्षा को पहले ही अगली सूचना तक स्थगित कर दिया गया है। NDA -II परीक्षा के बारे में लिये जाने वाले निर्णय की जानकारी दस जून, दो हज़ार बीस, इसकी अधिसूचना के लिए निर्धारित तिथि, को पोस्ट कर दी जायेगी। सभी परीक्षाओं, साक्षात्कार और भर्ती बोर्डों से जुड़े आयोग के अन्य निर्णयों की जानकारी तुरंत आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध करायी जायेगी। आयोग ने कोरोना वायरस महामारी से राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को होने वाले नुकसान की समीक्षा की। राष्ट्रीय स्तर पर वित्तीय संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता को स्वीकार करते हुए, संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं अन्य सदस्यों ने अप्रैल, दो हज़ार बीस से एक वर्ष की अवधि के लिए आयोग से प्राप्त अपने मूल वेतन का तीस% हिस्सा स्वेच्छा से त्यागने का निर्णय लिया है। इसके अलावा, संघ लोक सेवा आयोग के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने प्रधानमंत्री के आपातकालीन स्थिति में नागरिक सहायता एवं राहत निधि में एक दिन का वेतन दान दिया है। |
टेलीविजन अभिनेता गौतम विज विवादित रियलिटी शो 'बिग बॉस 16' से बाहर होने वाले पहले पुरुष प्रतियोगी बन गए हैं। गौतम को इस हफ्ते शालिन भनोट, टीना दत्ता और सौंदर्या शर्मा के साथ नॉमिनेट किया गया था।
बातचीत में गौतम ने कहा कि उन्हें इतनी जल्दी बाहर होने की उम्मीद नहीं थी।
उन्होंने कहा, "नहीं, मैंने इसके बारे में कभी नहीं सोचा था। यह अचानक हुआ। मुझे उम्मीद नहीं थी कि यह सात सप्ताह में खत्म हो जाएगा। उन्होंने अपने बाहर होने के लिए सौंदर्या के साथ अपने संबंध को भी दोष नहीं दिया। "
उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि जब मैं अन्य प्रतियोगियों से बात कर रहा था तो यह सिर्फ दूसरी तरफ से मेरे प्रति प्रतिक्रिया थी। उसे मुझ पर और अधिक भरोसा करना चाहिए था। "
गौतम 'इश्क सुभान अल्लाह', 'नामकरण', 'इश्क सुभान अल्लाह', 'पिंजरा खूबसुरती का', 'तंत्र', 'साथ निभाना साथिया 2' और 'अग्नि वायु' जैसे शो में अपने प्रदर्शन के लिए जाने जाते हैं।
| टेलीविजन अभिनेता गौतम विज विवादित रियलिटी शो 'बिग बॉस सोलह' से बाहर होने वाले पहले पुरुष प्रतियोगी बन गए हैं। गौतम को इस हफ्ते शालिन भनोट, टीना दत्ता और सौंदर्या शर्मा के साथ नॉमिनेट किया गया था। बातचीत में गौतम ने कहा कि उन्हें इतनी जल्दी बाहर होने की उम्मीद नहीं थी। उन्होंने कहा, "नहीं, मैंने इसके बारे में कभी नहीं सोचा था। यह अचानक हुआ। मुझे उम्मीद नहीं थी कि यह सात सप्ताह में खत्म हो जाएगा। उन्होंने अपने बाहर होने के लिए सौंदर्या के साथ अपने संबंध को भी दोष नहीं दिया। " उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि जब मैं अन्य प्रतियोगियों से बात कर रहा था तो यह सिर्फ दूसरी तरफ से मेरे प्रति प्रतिक्रिया थी। उसे मुझ पर और अधिक भरोसा करना चाहिए था। " गौतम 'इश्क सुभान अल्लाह', 'नामकरण', 'इश्क सुभान अल्लाह', 'पिंजरा खूबसुरती का', 'तंत्र', 'साथ निभाना साथिया दो' और 'अग्नि वायु' जैसे शो में अपने प्रदर्शन के लिए जाने जाते हैं। |
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Lalit Kumar (चर्चा । योगदान)
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खड़ाक् से दरवाजा खुला। इतनी रात गये पिछले दरवाजे से कोई आ रहा है! सुनंदा ने डरते हुए अपने पति को जगाया। "अरे चिंता मत करो। ये जगदीश भाई होंगे। हर छुट्टी पर ऐसे ही पीकर आते है।"
खड़ाक् से दरवाजा खुला। इतनी रात गये पिछले दरवाजे से कोई आ रहा है! सुनंदा ने डरते हुए अपने पति को जगाया। "अरे चिंता मत करो। ये जगदीश भाई होंगे। हर छुट्टी पर ऐसे ही पीकर आते है।"
"लेकिन अब वो क्या करेंगे!" सुनंदा अब भी भयभीत ही थी।
"कुछ नहीं। खाना खाकर सो रहेंगे। घर में कोई है नहीं¸ खाना साथ ही लाए होंगे। तुम सो भी जाओ अब।"
सोते हुए भी सुनंदा के मन में असंख्य प्रश्न आ जा रहे थे। इस तरह से पीने का क्या अर्थ हो सकता है? सिर्फ छुट्टी पर! उसके मायके में भी तो घर के सामने तिवारी काका ऐसे ही पीकर आया करते थे। घर में कितना कोहराम मचा करता था। तभी तो उसे मालूम पड़ा था कि पीने की आदत पड़ जाने पर आदमी का कोई भरोसा नहीं रह जाता। रोज चाहिये मतलब चाहिये ही। आज तक कई फिल्मों में भी देखा था उसने कि लोग गम भुलाने के लिये शराब का सहारा लेते है। अभिजात्य वर्ग का यह प्रिय शगल है आदी।
जगदीश भाई के बारे में बस इतना ही मालूम था कि वे अस्पताल में काम करते है। छुट्टी कभी नहीं करते। इसके पीछे भी कारण यह है कि वहीं पर दोनों वक्त का खाना मिल जाता है। उनकी पत्नी और पुत्र सालों पहले एक दुर्घटना में मारे गये थे।
तब से छुट्टी के दिन ही इस तरह से दिखाई देते है। अन्यथा कब आते है कब जाते है¸ किसी को भी पता नहीं चलता। इसीलिये उन्हें पिछवाड़े का कमरा सालों से दिया हुआ है। किराया देते समय ही उससे जो संवाद होता है बस उतना ही।
लेकिन जगदीश भाई के संबंध में मोहल्ले में हवा अच्छी नहीं थी। सभी का एक मत था कि वे चरित्र के अच्छे नहीं है। उनका शराब पीना इस मत के पुख्ता होने में आग में घी का काम करता हालाँकि आज तक किसी ने भी उन्हें शराब खरीदते¸ बोतल हाथ में लिये हुए आदी नहीं देखा था। सुनंदा की शादी से पहले सामने की पंडिताइन बोली भी थी कि अब जगदीश भाई को यहाँ से निकाल देना चाहिये। खैर! वे जो टिके है सो टिके है वहीं।
के पति को भी ऑफिस में फोन नहीं लग पा रहा था। किसी तरह से उन्हें ऑटो में डालकर¸ रास्ता पूछते ताछते नजदीकी अस्पताल ले गई। समय पर पहुंचने के कारण जल्दी से भर्ती मिली। वहीं पर जगदीश भाई भी थे। उन्होने बिना किसी बातचीत या औपचारिकता के¸ बिल्कुल अपनी माँ के लिये करते वैसी ही सारी व्यवस्था कर दी।
अस्पताल से लौटकर जब सब कुछ सामान्य हो गया¸ एक दिन सुनंदा ने पकवानों की थाली परोसी और जगदीश भाई को देने पहुँची। उन्होने बड़े आदर से उसे बैठाया। उम्र में वे उसके पिता समान थे। उसे व्यवहार में देवता समान लगे। थोड़ी बातचीत बढ़ने पर सुनंदा ने उनसे पूछ ही लिया। यही कि वे हर छुट्टी पर पीते क्यों है¸ क्या उन्हें कोई दुख है?
वे गंभीर हो उठे। सुनंदा को एक क्षण के लिये लगा कि उसने ये प्रश्न पूछकर कहीं कोई गलती तो नहीं की है? शायद अब वे खाना भी न खाएँ। लेकिन आशंका के विपरीत¸ वे स्वाद लेकर भोजन करते रहे। उठकर हाथ धोए और पालथी लगाकर बैठ गये।
"बेटी! क्या तुम जानती हो कि मैं अस्पताल में क्या काम करता हूँ?"
"जी! नहीं तो।"
जगदीश भाई गंभीर हो उठे।
"मैं एक जल्लाद हूँ बेटी। अस्पताल में होने वाली प्रत्येक मौत के बाद उस शरीर को चीर फाड़ कर पोस्ट मार्टम के लिये तैयार रखना मेरा काम है।"
सुनंदा सन्न रह गई। जगदीश भाई कहते चले।
"रोज देखता हूँ अभागी जवान लड़कियों को जो मार डाली जाती है। दुर्घटना में मरे पाए गए किसी माँ के नन्हे मुन्ने लाड़ले को। नई नवेली दुल्हन को विधवा कर इस जग से जाते उसके पति को। किसी बुढ़िया के अकेले सहारे को। रंजिश में मारे गये बुढ़ापे के सहारे होते है वहाँ तो खुद से नाराज होकर आत्महत्या करते स्वार्थी बंदे भी। अब क्या क्या गिनाऊँ तुम्हें।" जगदीश भाई का चेहरा काठ के जैसा हो चला था और सुनंदा का चोरी करते पकड़ी गई बिल्ली के जैसा।
"इस दुनिया के नए निराले सभी खेल इस मौत के आगे फीके है बेटी और उसी मौत से जाने कितने तरीक़ों से मैं रोज मिलता हूँ। दिन भर के काम में सोचने को समय तो मिलता नहीं।"
वे कहते चले "छुट्टी पर अपने पाप याद आते है। जिस शरीर को माँ कितने जतन से अपने खून से शरीर पर पालती है¸ जन्म के बाद उसकी सालों देखभाल करती है खिलाती पिलाती है¸ उसके लाड़ करती है। ऐसे ही जाने कितने लाड़ले शरीरों को मैं अब तक चीर चुका हूँ। ऐसा लगता है जैसे हज़ारों माताओं का कलेजा चीरा है मैंने। नौकरी ही ऐसी है। क्या करुँ!"
जगदीश भाई ने उठकर पानी पिया। सुनंदा के आँसुओं से भीगे मुख की ओर प्रेम से देखते हुए उसे भी दिया।
"छुट्टी के दिन मैं प्रायश्चित्त करता हूँ बेटी। शहर से बाहर के उस उजाड़ मंदिर में जाकर वहाँ के बूढ़े पुजारी के साथ दिन भर रहता हूँ। उनकी सेवा करता हूँ¸ मंदिर में झाडू देता हूँ¸ आँगन की धुलाई करता हूँ। जो भी काम बन पड़े बस दिन भर भूखे पेट करता रहता हूँ। फिर वहाँ जो भी प्रसाद मिले उसी को लेकर घर आ जाता हूँ। मंदिर शहर से दूर है¸ आठ किलोमीटर चलना पड़ता है इसीलिये देर हो जाती है। फिर थकान और दूसरे दिन के काम का सोचकर कदम लड़खड़ाने भी लगते है। मेरा यही नशा है बस।"
सुनंदा मूक हो सोचती रही¸ "काश ऐसा नशा इस दुनिया के सभी लोग कर सकते हो।"
| Lalit Kumar छो । ।पंक्ति तीन: ।पंक्ति तीन: खड़ाक् से दरवाजा खुला। इतनी रात गये पिछले दरवाजे से कोई आ रहा है! सुनंदा ने डरते हुए अपने पति को जगाया। "अरे चिंता मत करो। ये जगदीश भाई होंगे। हर छुट्टी पर ऐसे ही पीकर आते है।" खड़ाक् से दरवाजा खुला। इतनी रात गये पिछले दरवाजे से कोई आ रहा है! सुनंदा ने डरते हुए अपने पति को जगाया। "अरे चिंता मत करो। ये जगदीश भाई होंगे। हर छुट्टी पर ऐसे ही पीकर आते है।" "लेकिन अब वो क्या करेंगे!" सुनंदा अब भी भयभीत ही थी। "कुछ नहीं। खाना खाकर सो रहेंगे। घर में कोई है नहीं¸ खाना साथ ही लाए होंगे। तुम सो भी जाओ अब।" सोते हुए भी सुनंदा के मन में असंख्य प्रश्न आ जा रहे थे। इस तरह से पीने का क्या अर्थ हो सकता है? सिर्फ छुट्टी पर! उसके मायके में भी तो घर के सामने तिवारी काका ऐसे ही पीकर आया करते थे। घर में कितना कोहराम मचा करता था। तभी तो उसे मालूम पड़ा था कि पीने की आदत पड़ जाने पर आदमी का कोई भरोसा नहीं रह जाता। रोज चाहिये मतलब चाहिये ही। आज तक कई फिल्मों में भी देखा था उसने कि लोग गम भुलाने के लिये शराब का सहारा लेते है। अभिजात्य वर्ग का यह प्रिय शगल है आदी। जगदीश भाई के बारे में बस इतना ही मालूम था कि वे अस्पताल में काम करते है। छुट्टी कभी नहीं करते। इसके पीछे भी कारण यह है कि वहीं पर दोनों वक्त का खाना मिल जाता है। उनकी पत्नी और पुत्र सालों पहले एक दुर्घटना में मारे गये थे। तब से छुट्टी के दिन ही इस तरह से दिखाई देते है। अन्यथा कब आते है कब जाते है¸ किसी को भी पता नहीं चलता। इसीलिये उन्हें पिछवाड़े का कमरा सालों से दिया हुआ है। किराया देते समय ही उससे जो संवाद होता है बस उतना ही। लेकिन जगदीश भाई के संबंध में मोहल्ले में हवा अच्छी नहीं थी। सभी का एक मत था कि वे चरित्र के अच्छे नहीं है। उनका शराब पीना इस मत के पुख्ता होने में आग में घी का काम करता हालाँकि आज तक किसी ने भी उन्हें शराब खरीदते¸ बोतल हाथ में लिये हुए आदी नहीं देखा था। सुनंदा की शादी से पहले सामने की पंडिताइन बोली भी थी कि अब जगदीश भाई को यहाँ से निकाल देना चाहिये। खैर! वे जो टिके है सो टिके है वहीं। के पति को भी ऑफिस में फोन नहीं लग पा रहा था। किसी तरह से उन्हें ऑटो में डालकर¸ रास्ता पूछते ताछते नजदीकी अस्पताल ले गई। समय पर पहुंचने के कारण जल्दी से भर्ती मिली। वहीं पर जगदीश भाई भी थे। उन्होने बिना किसी बातचीत या औपचारिकता के¸ बिल्कुल अपनी माँ के लिये करते वैसी ही सारी व्यवस्था कर दी। अस्पताल से लौटकर जब सब कुछ सामान्य हो गया¸ एक दिन सुनंदा ने पकवानों की थाली परोसी और जगदीश भाई को देने पहुँची। उन्होने बड़े आदर से उसे बैठाया। उम्र में वे उसके पिता समान थे। उसे व्यवहार में देवता समान लगे। थोड़ी बातचीत बढ़ने पर सुनंदा ने उनसे पूछ ही लिया। यही कि वे हर छुट्टी पर पीते क्यों है¸ क्या उन्हें कोई दुख है? वे गंभीर हो उठे। सुनंदा को एक क्षण के लिये लगा कि उसने ये प्रश्न पूछकर कहीं कोई गलती तो नहीं की है? शायद अब वे खाना भी न खाएँ। लेकिन आशंका के विपरीत¸ वे स्वाद लेकर भोजन करते रहे। उठकर हाथ धोए और पालथी लगाकर बैठ गये। "बेटी! क्या तुम जानती हो कि मैं अस्पताल में क्या काम करता हूँ?" "जी! नहीं तो।" जगदीश भाई गंभीर हो उठे। "मैं एक जल्लाद हूँ बेटी। अस्पताल में होने वाली प्रत्येक मौत के बाद उस शरीर को चीर फाड़ कर पोस्ट मार्टम के लिये तैयार रखना मेरा काम है।" सुनंदा सन्न रह गई। जगदीश भाई कहते चले। "रोज देखता हूँ अभागी जवान लड़कियों को जो मार डाली जाती है। दुर्घटना में मरे पाए गए किसी माँ के नन्हे मुन्ने लाड़ले को। नई नवेली दुल्हन को विधवा कर इस जग से जाते उसके पति को। किसी बुढ़िया के अकेले सहारे को। रंजिश में मारे गये बुढ़ापे के सहारे होते है वहाँ तो खुद से नाराज होकर आत्महत्या करते स्वार्थी बंदे भी। अब क्या क्या गिनाऊँ तुम्हें।" जगदीश भाई का चेहरा काठ के जैसा हो चला था और सुनंदा का चोरी करते पकड़ी गई बिल्ली के जैसा। "इस दुनिया के नए निराले सभी खेल इस मौत के आगे फीके है बेटी और उसी मौत से जाने कितने तरीक़ों से मैं रोज मिलता हूँ। दिन भर के काम में सोचने को समय तो मिलता नहीं।" वे कहते चले "छुट्टी पर अपने पाप याद आते है। जिस शरीर को माँ कितने जतन से अपने खून से शरीर पर पालती है¸ जन्म के बाद उसकी सालों देखभाल करती है खिलाती पिलाती है¸ उसके लाड़ करती है। ऐसे ही जाने कितने लाड़ले शरीरों को मैं अब तक चीर चुका हूँ। ऐसा लगता है जैसे हज़ारों माताओं का कलेजा चीरा है मैंने। नौकरी ही ऐसी है। क्या करुँ!" जगदीश भाई ने उठकर पानी पिया। सुनंदा के आँसुओं से भीगे मुख की ओर प्रेम से देखते हुए उसे भी दिया। "छुट्टी के दिन मैं प्रायश्चित्त करता हूँ बेटी। शहर से बाहर के उस उजाड़ मंदिर में जाकर वहाँ के बूढ़े पुजारी के साथ दिन भर रहता हूँ। उनकी सेवा करता हूँ¸ मंदिर में झाडू देता हूँ¸ आँगन की धुलाई करता हूँ। जो भी काम बन पड़े बस दिन भर भूखे पेट करता रहता हूँ। फिर वहाँ जो भी प्रसाद मिले उसी को लेकर घर आ जाता हूँ। मंदिर शहर से दूर है¸ आठ किलोमीटर चलना पड़ता है इसीलिये देर हो जाती है। फिर थकान और दूसरे दिन के काम का सोचकर कदम लड़खड़ाने भी लगते है। मेरा यही नशा है बस।" सुनंदा मूक हो सोचती रही¸ "काश ऐसा नशा इस दुनिया के सभी लोग कर सकते हो।" |
गुडगाँव न्यूज़ः महावीर चौक अंडरपास में सुबह सात बजे हरियाणा रोडवेज और डीटीसी बस की आमने-सामने जोरदार टक्कर हो गई. टक्कर इतनी तेज थी कि दोनों बसों के परखच्चे उड़ गए. डीटीसी बस का चालक सुखबीर और किलोमीटर स्कीम के तहत कार्यरत चालक घायल हो गया. जबकि डीटीसी बस में सवार एक दर्जन से ज्यादा सवारी इस हादसे में बाल-बाल बच गईं.
हादसे के बाद कुछ सवारियों ने आनन-फानन में खिड़की से कूदी,तो कुछ दरवाजा खोलकर सकुशल निकाला गया. पुलिसकर्मियों ने जांच की और लगभग तीन घंटे की मशक्कत के बाद क्रेन की मदद से दोनों बसों को बाहर निकाला गया. इस दुर्घटना में पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई.
दोनों बसों के परखच्चे उड़े सुबह सात बजे किलोमीटर स्कीम की बस गुरुग्राम बस डिपो से जयपुर के लिए निकली. बस चालक ने शॉर्टकट के चक्कर में बस को गलत दिशा में चलाते हुए महावीर चौक पर बने अंडरपास में घुसा दिया. सामने से आ रही डीटीसी बस से आमने-सामने टक्कर हो गई. टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों बसों को परखच्चे उड़ गए.
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि किलोमीटर स्कीम के तहत चालक अपने समय से लेट था, इसने इफ्को चौक से जयपुर जाने के लिए सवारियां भरनी थी. जल्दबाजी में बस गलत दिशा से आगे निकालने का प्रयास किया और बस अड्डे के बाहर बने अंडरपास से प्रवेश करते हुए बस को तेजी से भगाने लगा. तभी दूसरी साइड से आ रही डीटीसी बस से इसकी जोरदार टक्कर हो गई.
दोनों बसों की भिंड़त की सूचना के बाद मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने जांच के बाद अंडरपास को बंद कर दिया. तीन घंटे तक अंडरपास में यातायात प्रभावित रहा. पुलिस ने अंडरपास को बंद करवाया,ताकि दोबारा हादसा न हो. वहीं सुबह पीक आवर के दौरान जाम की भी स्थिति बन गई. क्रेन की मदद से दोनों बसों को बाहर निकाला गया. इसके बाद वाहनों का आवगमन शुरू हुआ.
| गुडगाँव न्यूज़ः महावीर चौक अंडरपास में सुबह सात बजे हरियाणा रोडवेज और डीटीसी बस की आमने-सामने जोरदार टक्कर हो गई. टक्कर इतनी तेज थी कि दोनों बसों के परखच्चे उड़ गए. डीटीसी बस का चालक सुखबीर और किलोमीटर स्कीम के तहत कार्यरत चालक घायल हो गया. जबकि डीटीसी बस में सवार एक दर्जन से ज्यादा सवारी इस हादसे में बाल-बाल बच गईं. हादसे के बाद कुछ सवारियों ने आनन-फानन में खिड़की से कूदी,तो कुछ दरवाजा खोलकर सकुशल निकाला गया. पुलिसकर्मियों ने जांच की और लगभग तीन घंटे की मशक्कत के बाद क्रेन की मदद से दोनों बसों को बाहर निकाला गया. इस दुर्घटना में पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई. दोनों बसों के परखच्चे उड़े सुबह सात बजे किलोमीटर स्कीम की बस गुरुग्राम बस डिपो से जयपुर के लिए निकली. बस चालक ने शॉर्टकट के चक्कर में बस को गलत दिशा में चलाते हुए महावीर चौक पर बने अंडरपास में घुसा दिया. सामने से आ रही डीटीसी बस से आमने-सामने टक्कर हो गई. टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों बसों को परखच्चे उड़ गए. पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि किलोमीटर स्कीम के तहत चालक अपने समय से लेट था, इसने इफ्को चौक से जयपुर जाने के लिए सवारियां भरनी थी. जल्दबाजी में बस गलत दिशा से आगे निकालने का प्रयास किया और बस अड्डे के बाहर बने अंडरपास से प्रवेश करते हुए बस को तेजी से भगाने लगा. तभी दूसरी साइड से आ रही डीटीसी बस से इसकी जोरदार टक्कर हो गई. दोनों बसों की भिंड़त की सूचना के बाद मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने जांच के बाद अंडरपास को बंद कर दिया. तीन घंटे तक अंडरपास में यातायात प्रभावित रहा. पुलिस ने अंडरपास को बंद करवाया,ताकि दोबारा हादसा न हो. वहीं सुबह पीक आवर के दौरान जाम की भी स्थिति बन गई. क्रेन की मदद से दोनों बसों को बाहर निकाला गया. इसके बाद वाहनों का आवगमन शुरू हुआ. |
चंदौली। मुख्यालय स्थित एक वाटिका में रविवार की देर शाम जायसवाल समाज की ओर से होली मिलन समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान समाज के लोगों ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर होली पर्व की खुशियां बांटी। साथ ही समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने के अलावा समाज के गरीब कुटुम्ब को हरसंभव मदद पहुंचाने और गरीब बच्चों को शिक्षित बनाने का संकल्प लिया। वही आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में ओम तिवारी ने भक्ति गीतों को सुना कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। नगर अध्यक्ष नारायण दास जयसवाल ने कहा कि जयसवाल समाज संगठित और शिक्षित होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी उद्देश्य के साथ संगठन का गठन किया गया है। इसमें अशोक जायसवाल, प्रदीप, आशुतोष, सुनील, संजय, अजय, संदीप जायसवाल आदि उपस्थित रहे। चकिया प्रतिनिधि के अनुसार आदित्य पुस्तकालय परिसर में अखिल भारती मद्धेशीय वैश्य सभा ने होली मिलन समारोह का आयोजन किया। इसमें सभी स्वजाति बंधुओं ने एक दूसरे को अबीर और गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दी। समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अलावा समाज के चार सफल युवाओं को मद्धेशिया रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि अखिल भारतीय मद्धेशिया महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री मनोज मद्धेशिया ने कहा कि संगठन और उसकी ताकत ही एक समाज की पहचान होती है। रामनगर औद्योगिक क्षेत्र के चेयरमैन देव भट्टाचार्य ने कहा कि संगठित समाज भरोसे की नींव होता है। भजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष गीता रानी गुप्ता ने कहा कि समाज की बेटियां नए-नए क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं। बेटियों को प्रोत्साहन की जरूरत है। समारोह में सहायक लोको पायलट चांदनी गुप्ता, डीआरडीओ में मिसाइल मैन चंदन गुप्ता, करण गुप्ता और एड. मारुति नंदन आनंद सहित अन्य को मद्धेशिया वैश्य रत्न से सम्मानित किया गया। इस मौके पर अध्यक्ष रघुनायक मद्धेशिया, अजय, शिवजी, रामनरायण, बलिस्टर, गनेश, दिनेश, जय प्रकाश, रामेश्वर, फुदरू, नरेन्द्र, अंकित, सुनील, मारूति नंदन, आनंद, सचिन, ओमप्रकाश, सत्येंद्र, विकास, बलराम आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता जिलाध्यक्ष कृष्णा गुप्ता, स्वागत जिला उपाध्यक्ष अजय मद्धेशिया और संचालन रुद्राक्षी मद्धेशिया ने किया।
| चंदौली। मुख्यालय स्थित एक वाटिका में रविवार की देर शाम जायसवाल समाज की ओर से होली मिलन समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान समाज के लोगों ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर होली पर्व की खुशियां बांटी। साथ ही समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने के अलावा समाज के गरीब कुटुम्ब को हरसंभव मदद पहुंचाने और गरीब बच्चों को शिक्षित बनाने का संकल्प लिया। वही आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में ओम तिवारी ने भक्ति गीतों को सुना कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। नगर अध्यक्ष नारायण दास जयसवाल ने कहा कि जयसवाल समाज संगठित और शिक्षित होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी उद्देश्य के साथ संगठन का गठन किया गया है। इसमें अशोक जायसवाल, प्रदीप, आशुतोष, सुनील, संजय, अजय, संदीप जायसवाल आदि उपस्थित रहे। चकिया प्रतिनिधि के अनुसार आदित्य पुस्तकालय परिसर में अखिल भारती मद्धेशीय वैश्य सभा ने होली मिलन समारोह का आयोजन किया। इसमें सभी स्वजाति बंधुओं ने एक दूसरे को अबीर और गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दी। समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अलावा समाज के चार सफल युवाओं को मद्धेशिया रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि अखिल भारतीय मद्धेशिया महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री मनोज मद्धेशिया ने कहा कि संगठन और उसकी ताकत ही एक समाज की पहचान होती है। रामनगर औद्योगिक क्षेत्र के चेयरमैन देव भट्टाचार्य ने कहा कि संगठित समाज भरोसे की नींव होता है। भजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष गीता रानी गुप्ता ने कहा कि समाज की बेटियां नए-नए क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं। बेटियों को प्रोत्साहन की जरूरत है। समारोह में सहायक लोको पायलट चांदनी गुप्ता, डीआरडीओ में मिसाइल मैन चंदन गुप्ता, करण गुप्ता और एड. मारुति नंदन आनंद सहित अन्य को मद्धेशिया वैश्य रत्न से सम्मानित किया गया। इस मौके पर अध्यक्ष रघुनायक मद्धेशिया, अजय, शिवजी, रामनरायण, बलिस्टर, गनेश, दिनेश, जय प्रकाश, रामेश्वर, फुदरू, नरेन्द्र, अंकित, सुनील, मारूति नंदन, आनंद, सचिन, ओमप्रकाश, सत्येंद्र, विकास, बलराम आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता जिलाध्यक्ष कृष्णा गुप्ता, स्वागत जिला उपाध्यक्ष अजय मद्धेशिया और संचालन रुद्राक्षी मद्धेशिया ने किया। |
रीवा जिले में एक भ्रष्टाचारी लिपिक को 4 वर्ष का सश्रम कारावास व 7 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा लोकायुक्त विशेष न्यायालय ने सुनाई है। अभियोजन अधिकारी ने बताया कि शिकायतकर्ता महेंद्र तिवारी से आरोपी राजकुमार वर्मा सहायक ग्रेड 3 पद परियोजना अधिकारी ने आंगनबाड़ी केंद्र के बिल भुगतान करने के एवज में 2,000 रुपए की डिमांड की।
शासकीय अभिभाषक की मानें तो आरोपी राजकुमार वर्मा सहायक ग्रेड 3 पद परियोजना अधिकारी महिला एवं बाल विकास सिरमौर को धारा 7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 में 3 वर्ष का सश्रम कारावास व 2,000 रुपए का अर्थदंड और 13(1) डी एवं 13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 में 4 वर्ष का सश्रम कारावास व 5,000 रुपए के अर्थदंड से दंडित किया गया है।
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| रीवा जिले में एक भ्रष्टाचारी लिपिक को चार वर्ष का सश्रम कारावास व सात हजार रुपए के अर्थदंड की सजा लोकायुक्त विशेष न्यायालय ने सुनाई है। अभियोजन अधिकारी ने बताया कि शिकायतकर्ता महेंद्र तिवारी से आरोपी राजकुमार वर्मा सहायक ग्रेड तीन पद परियोजना अधिकारी ने आंगनबाड़ी केंद्र के बिल भुगतान करने के एवज में दो,शून्य रुपयापए की डिमांड की। शासकीय अभिभाषक की मानें तो आरोपी राजकुमार वर्मा सहायक ग्रेड तीन पद परियोजना अधिकारी महिला एवं बाल विकास सिरमौर को धारा सात भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम एक हज़ार नौ सौ अठासी में तीन वर्ष का सश्रम कारावास व दो,शून्य रुपयापए का अर्थदंड और तेरह डी एवं तेरह भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम एक हज़ार नौ सौ अठासी में चार वर्ष का सश्रम कारावास व पाँच,शून्य रुपयापए के अर्थदंड से दंडित किया गया है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
नई दिल्ली : अगर आप दिल्ली में रहते हैं और Mcdonald ब्रांड के फ़ास्ट फ़ूड के शौक़ीन हैं तो ये खबर आपके लिए है. दरअसल Mcdonald आज से दिल्ली में अपने आउटलेट्स बंद करने जा रहा है जिससे अब दिल्ली वालों को Mcdonald के बर्गर और बाकी के फ़ास्ट फ़ूड खरीदने के लिए लम्बा सफ़र करना पड़ सकता है.
दिल्ली के 55 मैकडॉनल्ड शॉप्स में से 43 बंद होने वाले हैं। जी हां यह सच है आज यानी 29 जून से दिल्ली के 43 मैकडॉनल्ड आउटलेट बंद हो जाएंगे। इसका मतलब है कि दिल्ली अब मैकडॉनल्ड के केवल 12 आउटलेट बचेंगे। Mcdonald आउटलेट्स बंद होने की वजह से जहाँ लोगों को फ़ास्ट फ़ूड नहीं मिल पाएगा वहीँ इस फ़ास्ट फ़ूड चैन के 1700 कर्मचारी भी अब बेरोजगार हो जाएंगे.
मैकडॉनल्ड के यूएस स्थित हेडक्वार्टर के साथ मिलकर उत्तर व पूर्वी भारत में जो संस्था यह आउटलेट्स चलाती है उसने इस आउटलेट को बंद करने का फैसला लिया है। उस संस्था का नाम कनॉट प्लाजा रेस्त्रां(सीपीआरएल) है और यह मैकडॉनल्ड के साथ मिलकर 50-50 प्रतिशत पर यह ज्वाइंट वेंचर चलाती है।
इन दोनों ही संस्थाओं में काफी समय से विवाद चल रहा हैं जिसकी वजह से दोनों के बीच हालात काफी खराब हो चुके हैं और यही वजह है कि दिल्ली स्थित ज़्यादातर Mcdonald आउटलेट्स को बंद करने का फैसला लिया गया है. अगर आप में से भी कोई दिल्ली में रहता है तो अब आपको भी Mcdonald के बर्गर खाने के लिए लम्बी लाइन लगानी पड़ सकती है.
| नई दिल्ली : अगर आप दिल्ली में रहते हैं और Mcdonald ब्रांड के फ़ास्ट फ़ूड के शौक़ीन हैं तो ये खबर आपके लिए है. दरअसल Mcdonald आज से दिल्ली में अपने आउटलेट्स बंद करने जा रहा है जिससे अब दिल्ली वालों को Mcdonald के बर्गर और बाकी के फ़ास्ट फ़ूड खरीदने के लिए लम्बा सफ़र करना पड़ सकता है. दिल्ली के पचपन मैकडॉनल्ड शॉप्स में से तैंतालीस बंद होने वाले हैं। जी हां यह सच है आज यानी उनतीस जून से दिल्ली के तैंतालीस मैकडॉनल्ड आउटलेट बंद हो जाएंगे। इसका मतलब है कि दिल्ली अब मैकडॉनल्ड के केवल बारह आउटलेट बचेंगे। Mcdonald आउटलेट्स बंद होने की वजह से जहाँ लोगों को फ़ास्ट फ़ूड नहीं मिल पाएगा वहीँ इस फ़ास्ट फ़ूड चैन के एक हज़ार सात सौ कर्मचारी भी अब बेरोजगार हो जाएंगे. मैकडॉनल्ड के यूएस स्थित हेडक्वार्टर के साथ मिलकर उत्तर व पूर्वी भारत में जो संस्था यह आउटलेट्स चलाती है उसने इस आउटलेट को बंद करने का फैसला लिया है। उस संस्था का नाम कनॉट प्लाजा रेस्त्रां है और यह मैकडॉनल्ड के साथ मिलकर पचास-पचास प्रतिशत पर यह ज्वाइंट वेंचर चलाती है। इन दोनों ही संस्थाओं में काफी समय से विवाद चल रहा हैं जिसकी वजह से दोनों के बीच हालात काफी खराब हो चुके हैं और यही वजह है कि दिल्ली स्थित ज़्यादातर Mcdonald आउटलेट्स को बंद करने का फैसला लिया गया है. अगर आप में से भी कोई दिल्ली में रहता है तो अब आपको भी Mcdonald के बर्गर खाने के लिए लम्बी लाइन लगानी पड़ सकती है. |
पिछले कई महीनों से लगातार काम करने के बाद अभिनेत्री सोनाली कुलकर्णी अपने परिवार के साथ कुछ वक्त बिताने के लिए दीवाली की छुट्टियों में हांगकांग निकल गयी थीं। बेटी कावेरी के साथ हांगकांग के डिस्नेलैंड की सफर करने पहुंची सोनाली को अपनी छुट्टियाँ जल्दी खत्म करके मुंबई लौटना पड़ा हैं।
सोनाली को मुंबई पुलिस की ओर से उनके वार्षिक स्वरतरंग कार्यक्रम का न्यौता मिला। मुंबई पुलिस के इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए सोनाली हांगकांग से लौट कर आयीं।
| पिछले कई महीनों से लगातार काम करने के बाद अभिनेत्री सोनाली कुलकर्णी अपने परिवार के साथ कुछ वक्त बिताने के लिए दीवाली की छुट्टियों में हांगकांग निकल गयी थीं। बेटी कावेरी के साथ हांगकांग के डिस्नेलैंड की सफर करने पहुंची सोनाली को अपनी छुट्टियाँ जल्दी खत्म करके मुंबई लौटना पड़ा हैं। सोनाली को मुंबई पुलिस की ओर से उनके वार्षिक स्वरतरंग कार्यक्रम का न्यौता मिला। मुंबई पुलिस के इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए सोनाली हांगकांग से लौट कर आयीं। |
बुढ़ापा आते ही लोगों को बीमारियां जकड़ लेती हैं और वो बिस्तर पकड़ लेते हैं। मगर, आज हम एक ऐसी दादी के बारे में बताने जा रहे हैं जो बुढ़ापे में भी कुछ ना कुछ नया सीखती रहती हैं। यही नहीं, वह अपने नातियों को भी कुछ अलग सीखाती रहती हैं। हम बात कर रहे हैं मल्टीटैलेंड सुनीता खन्ना की जो एक टीवी चेहरा, लेखक, शिक्षक, फेमस शिल्प प्रशिक्षक, कार्यशाला सलाहकार हैं। इसके अलावा वह एक पर्यावरणविद् (Environmentalist) भी हैं, जो आने वाली पीढ़ी को बेहतर भविष्य देने के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं।
सुनीता बचपन से एक ही होनहार स्टूडेंट रही। उन्होंने मदर्स इंटरनेशनल स्कूल और कॉन्वेंट ऑफ जीसस एंड मैरीज, नई दिल्ली में पढ़ाई की और पटियाला के गवर्नमेंट कॉलेज से B. A. और नेपाल यूनिवर्सिटी से B. ed किया। एक प्राथमिक शिक्षक और DPS मथुरा रोड के प्रभारी संसाधन केंद्र के रूप में अपनी पहचान बनाई। 26 की उम्र में पहली प्रेगनेंसी के बाद सुनीता को माइनर रूमेटोइड गठिया अटैक आया, जिसके कारण उन्हें बहुत-सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। मगर, वह कभी हार न मानने के रवैए से बढ़ती रही।
36 वर्षों के लंबे ट्रैक रिकॉर्ड के बाद सुनीता ने बच्चों के लिए प्रमुख समाचार पत्रों और पत्रिकाओं / पुस्तकों में कई लेख लिखे हैं। इसके अलावा वह छोटे बच्चों को स्कूल में लाइफ स्किल्स और नैतिक मूल्य भी सिखा रही थी। इसके साथ ही वह बच्चों को पर्यावरण का मूल्य भी सिखाती हैं। लगभग 2 साल पहले वह एनजीओ ग्रामर के संपर्क में आई थी, जो सीड पेंसिल और पेन और सीड नोट पैड, सीड राखी, सीड नेशनल फ्लैग्स इको-फ्रेंडली रिटर्न गिफ्ट्स जैसे सभी पर्यावरण के अनुकूल उत्पाद बना रहा है। एनजीओ उन्हें मुफ्त और बहुत सस्ती कीमतों पर बेच रहा है। उनके पोते अरहान ने पुरानी प्लास्टिक की बोतलों का इस्तेमाल करके 'बेस्ट आउट वेस्ट' की पहल शुरु की है।
उनका कहना है कि मुझे सभी के साथ साझा करते हुए बहुत गर्व हो रहा है कि मैंने 36 वर्षों तक डीपीएस मथुरा रोड में काम किया है। मैंने हमेशा अपने स्टूडेंट को अलग-अलग एक्टिविटीज में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित किया। सुनीता ने बताया कि मैं बच्चों को टीवी कार्यक्रमों के लिए ले गई, उन्हें लेख लिखने और पत्रिकाओं और पत्रिकाओं में प्रकाशित करने के लिए प्रेरित किया, जिससे उनमें पढ़ने और लिखने के लिए प्यार पैदा हुआ।
वह अब तक 10 से अधिक पुस्तकें लिख चुकी हैं, जिसमें से 'डू इट योरसेल्फ क्राफ्ट' सबसे फेमस है। इसके अलावा वह बच्चों के लिए कई कहानियों की किताबें भी लिख चुकी हैं। हाल ही में सुनीता को सेकेंड इनिंग्स सेंटर, गुड़गांव में एक वर्कशॉप करने के लिए आमंत्रित किया गया था, जहां उन्होंने पुराने अखबारों और पत्रिकाओं के इस्तेमाल से सीड पेंसिल और पेन बनाने का तरीका बताया। इसके बाद उन्होंने स्टूडेंट्स को एनजीओ के साथ जोड़ा।
वह पिछले 16 सालों से इंडिया हैबिटेट सेंटर, नई दिल्ली में कार्यशालाएं आयोजित कर रही हैं। इसके अलावा वह ग्लास पेंटिंग, टाइल पेंटिंग, लाइफ स्किल्स से रिलेटिड वर्कशॉप भी लगा चुकी हैं। उन्होंने इंडिया हैबिटेट सेंटर, एपिसेंटर, दिल्ली हाट, ताज पैलेस होटल, डीएलएफ मॉल, रैडिसन जैसी फेमस जगहों पर भी वर्कशॉप लगाई हैं। इसके अलावा उन्होंने टीसीएस, फ्रेस्का, एबीबी आदि जैसे कॉरपोरेट्स के लिए कई शिविर आयोजित किए हैं।
ये पेंसिलें पुराने अखबारों और पत्रिकाओं से बनी होती हैं, जिससे पेड़ों की बचत होती है क्योंकि इसमें लकड़ी का इस्तेमाल नहीं होता है और सीड पेन का इस्तेमाल कर प्लास्टिक को NO कहा जा सकता है। सीड पेंसिल में टमाटर, गाजर, धनिया आदि सब्जियों के बीज होते हैं और उनके पीछे फूल भी लगाए जाते हैं।
| बुढ़ापा आते ही लोगों को बीमारियां जकड़ लेती हैं और वो बिस्तर पकड़ लेते हैं। मगर, आज हम एक ऐसी दादी के बारे में बताने जा रहे हैं जो बुढ़ापे में भी कुछ ना कुछ नया सीखती रहती हैं। यही नहीं, वह अपने नातियों को भी कुछ अलग सीखाती रहती हैं। हम बात कर रहे हैं मल्टीटैलेंड सुनीता खन्ना की जो एक टीवी चेहरा, लेखक, शिक्षक, फेमस शिल्प प्रशिक्षक, कार्यशाला सलाहकार हैं। इसके अलावा वह एक पर्यावरणविद् भी हैं, जो आने वाली पीढ़ी को बेहतर भविष्य देने के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं। सुनीता बचपन से एक ही होनहार स्टूडेंट रही। उन्होंने मदर्स इंटरनेशनल स्कूल और कॉन्वेंट ऑफ जीसस एंड मैरीज, नई दिल्ली में पढ़ाई की और पटियाला के गवर्नमेंट कॉलेज से B. A. और नेपाल यूनिवर्सिटी से B. ed किया। एक प्राथमिक शिक्षक और DPS मथुरा रोड के प्रभारी संसाधन केंद्र के रूप में अपनी पहचान बनाई। छब्बीस की उम्र में पहली प्रेगनेंसी के बाद सुनीता को माइनर रूमेटोइड गठिया अटैक आया, जिसके कारण उन्हें बहुत-सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। मगर, वह कभी हार न मानने के रवैए से बढ़ती रही। छत्तीस वर्षों के लंबे ट्रैक रिकॉर्ड के बाद सुनीता ने बच्चों के लिए प्रमुख समाचार पत्रों और पत्रिकाओं / पुस्तकों में कई लेख लिखे हैं। इसके अलावा वह छोटे बच्चों को स्कूल में लाइफ स्किल्स और नैतिक मूल्य भी सिखा रही थी। इसके साथ ही वह बच्चों को पर्यावरण का मूल्य भी सिखाती हैं। लगभग दो साल पहले वह एनजीओ ग्रामर के संपर्क में आई थी, जो सीड पेंसिल और पेन और सीड नोट पैड, सीड राखी, सीड नेशनल फ्लैग्स इको-फ्रेंडली रिटर्न गिफ्ट्स जैसे सभी पर्यावरण के अनुकूल उत्पाद बना रहा है। एनजीओ उन्हें मुफ्त और बहुत सस्ती कीमतों पर बेच रहा है। उनके पोते अरहान ने पुरानी प्लास्टिक की बोतलों का इस्तेमाल करके 'बेस्ट आउट वेस्ट' की पहल शुरु की है। उनका कहना है कि मुझे सभी के साथ साझा करते हुए बहुत गर्व हो रहा है कि मैंने छत्तीस वर्षों तक डीपीएस मथुरा रोड में काम किया है। मैंने हमेशा अपने स्टूडेंट को अलग-अलग एक्टिविटीज में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित किया। सुनीता ने बताया कि मैं बच्चों को टीवी कार्यक्रमों के लिए ले गई, उन्हें लेख लिखने और पत्रिकाओं और पत्रिकाओं में प्रकाशित करने के लिए प्रेरित किया, जिससे उनमें पढ़ने और लिखने के लिए प्यार पैदा हुआ। वह अब तक दस से अधिक पुस्तकें लिख चुकी हैं, जिसमें से 'डू इट योरसेल्फ क्राफ्ट' सबसे फेमस है। इसके अलावा वह बच्चों के लिए कई कहानियों की किताबें भी लिख चुकी हैं। हाल ही में सुनीता को सेकेंड इनिंग्स सेंटर, गुड़गांव में एक वर्कशॉप करने के लिए आमंत्रित किया गया था, जहां उन्होंने पुराने अखबारों और पत्रिकाओं के इस्तेमाल से सीड पेंसिल और पेन बनाने का तरीका बताया। इसके बाद उन्होंने स्टूडेंट्स को एनजीओ के साथ जोड़ा। वह पिछले सोलह सालों से इंडिया हैबिटेट सेंटर, नई दिल्ली में कार्यशालाएं आयोजित कर रही हैं। इसके अलावा वह ग्लास पेंटिंग, टाइल पेंटिंग, लाइफ स्किल्स से रिलेटिड वर्कशॉप भी लगा चुकी हैं। उन्होंने इंडिया हैबिटेट सेंटर, एपिसेंटर, दिल्ली हाट, ताज पैलेस होटल, डीएलएफ मॉल, रैडिसन जैसी फेमस जगहों पर भी वर्कशॉप लगाई हैं। इसके अलावा उन्होंने टीसीएस, फ्रेस्का, एबीबी आदि जैसे कॉरपोरेट्स के लिए कई शिविर आयोजित किए हैं। ये पेंसिलें पुराने अखबारों और पत्रिकाओं से बनी होती हैं, जिससे पेड़ों की बचत होती है क्योंकि इसमें लकड़ी का इस्तेमाल नहीं होता है और सीड पेन का इस्तेमाल कर प्लास्टिक को NO कहा जा सकता है। सीड पेंसिल में टमाटर, गाजर, धनिया आदि सब्जियों के बीज होते हैं और उनके पीछे फूल भी लगाए जाते हैं। |
नई दिल्लीः पपीता के फायदों के बारे में आपने सुना होगा. यह पेट से लेकर आंखों की सेहत तक के लिए कितना लाभकारी है. पपीता त्वचा और बालों की खूबसूरती बढ़ाने में भी कारगर है. खासतौर से गर्मियों में इसे खाने की सलाह डॉक्टर भी देते हैं. लेकिन हमेशा बात पपीते की होती है. पपीते के बीज के फायदों के बारे में कम ही लोग जानते हैं. इसलिए पपीता खाने से पहले ही उसके बीज को एक तरफ हटा दिया जाता है.
कई अध्ययन की रिपोर्ट में पाया गया है कि पपीते का बीज पेट के बैक्टीरियल इंफेक्शन को कम करता है. इसे खाने वाले लोगों को पेट में बैक्टीरियल इंफेक्शन होता ही नहीं है.
जानें पपीता के बीज के फायदेः
1. पपीते के बीज में डाइजेस्टिव एंजाइम होते हैं. यह प्रोटीन फाइबर को तोड़ने में मददगार होता है. इसके कारण पाचन क्रिया ठीक रहती है.
2. पपीते के बीज में जीवाणुरोधी गुण होते हैं. यानी कि इसमें एंटी-बैक्टीरियल प्रोपर्टीज होती हैं. इसके चलते इसे खाने से ईकोली (E. coli) साल्मोनेला (Salmonella) और स्टेफेलोकोकस जैसे संक्रमण नहीं होते. यह फूड प्वाइजनिंग से बचाते हैं.
3. साल 2007 में द जरनल ऑफ मेडिसिन फूड में एक अध्ययन की रिपोर्ट प्रकाशित की गई थी, जिसमें यह दावा किया गया था कि पपीते के बीज पेट में होने वाले कीड़ों का खात्मा करता है. यह उन कीड़ों के अंडों को भी समाप्त कर देता है.
4. पपीते के बीज में फेनोलिक और फ्लैवोनॉइड होता है. इसके कारण इसकी एंटीऑक्सीडेंट गुणवत्ता और भी ज्यादा बढ़ जाती है. इसमें एक खास तत्व पाया जाता है, जिसे फिऑन्यूट्रियेंट आइसोथियोसाइनेट कहते हैं. यह कैंसर को रोकता है. पपीता का बीज खाने से ब्रेस्ट कैंसर, लंग कैंसर आदि होने की आशंका कम हो जाती है.
5. अगर आपको अस्थमा या जोड़ों में दर्द जैसी समस्या है तो भी पपीता का बीज फायदेमंद हो सकता है. क्योंकि इसमें मौजूद पपैन एंजाइम और काइमोपपैन एंजाइम गठिया, जोड़ों के दर्द, गाउट और अस्थमा जैसे रोगों से निजात दिलाते हैं. पपीता का बीज एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी होते हैं, इसे खाने के बाद सूजन की समस्या दूर होती है.
इस बात का रखें ध्यान :
ध्यान रहे कि शुरुआत में एक छोटे चम्मच से ही शुरुआत करें. धीरे-धीरे इसकी मात्रा बढ़ाकर दिन में दो चम्मच तक ले सकते हैं. यह भी गौर करें कि इसकी ज्यादा खुराक लूज मोशन करा सकती है. अगर आप प्रेग्नेंट हैं तो इसका सेवन ना करें. हालांकि आप इसे कूट कर या दूध के साथ पी सकते हैं लेकिन इसे खाने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप पपीते के साथ ही इसके बीजों को भी खा लें.
| नई दिल्लीः पपीता के फायदों के बारे में आपने सुना होगा. यह पेट से लेकर आंखों की सेहत तक के लिए कितना लाभकारी है. पपीता त्वचा और बालों की खूबसूरती बढ़ाने में भी कारगर है. खासतौर से गर्मियों में इसे खाने की सलाह डॉक्टर भी देते हैं. लेकिन हमेशा बात पपीते की होती है. पपीते के बीज के फायदों के बारे में कम ही लोग जानते हैं. इसलिए पपीता खाने से पहले ही उसके बीज को एक तरफ हटा दिया जाता है. कई अध्ययन की रिपोर्ट में पाया गया है कि पपीते का बीज पेट के बैक्टीरियल इंफेक्शन को कम करता है. इसे खाने वाले लोगों को पेट में बैक्टीरियल इंफेक्शन होता ही नहीं है. जानें पपीता के बीज के फायदेः एक. पपीते के बीज में डाइजेस्टिव एंजाइम होते हैं. यह प्रोटीन फाइबर को तोड़ने में मददगार होता है. इसके कारण पाचन क्रिया ठीक रहती है. दो. पपीते के बीज में जीवाणुरोधी गुण होते हैं. यानी कि इसमें एंटी-बैक्टीरियल प्रोपर्टीज होती हैं. इसके चलते इसे खाने से ईकोली साल्मोनेला और स्टेफेलोकोकस जैसे संक्रमण नहीं होते. यह फूड प्वाइजनिंग से बचाते हैं. तीन. साल दो हज़ार सात में द जरनल ऑफ मेडिसिन फूड में एक अध्ययन की रिपोर्ट प्रकाशित की गई थी, जिसमें यह दावा किया गया था कि पपीते के बीज पेट में होने वाले कीड़ों का खात्मा करता है. यह उन कीड़ों के अंडों को भी समाप्त कर देता है. चार. पपीते के बीज में फेनोलिक और फ्लैवोनॉइड होता है. इसके कारण इसकी एंटीऑक्सीडेंट गुणवत्ता और भी ज्यादा बढ़ जाती है. इसमें एक खास तत्व पाया जाता है, जिसे फिऑन्यूट्रियेंट आइसोथियोसाइनेट कहते हैं. यह कैंसर को रोकता है. पपीता का बीज खाने से ब्रेस्ट कैंसर, लंग कैंसर आदि होने की आशंका कम हो जाती है. पाँच. अगर आपको अस्थमा या जोड़ों में दर्द जैसी समस्या है तो भी पपीता का बीज फायदेमंद हो सकता है. क्योंकि इसमें मौजूद पपैन एंजाइम और काइमोपपैन एंजाइम गठिया, जोड़ों के दर्द, गाउट और अस्थमा जैसे रोगों से निजात दिलाते हैं. पपीता का बीज एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी होते हैं, इसे खाने के बाद सूजन की समस्या दूर होती है. इस बात का रखें ध्यान : ध्यान रहे कि शुरुआत में एक छोटे चम्मच से ही शुरुआत करें. धीरे-धीरे इसकी मात्रा बढ़ाकर दिन में दो चम्मच तक ले सकते हैं. यह भी गौर करें कि इसकी ज्यादा खुराक लूज मोशन करा सकती है. अगर आप प्रेग्नेंट हैं तो इसका सेवन ना करें. हालांकि आप इसे कूट कर या दूध के साथ पी सकते हैं लेकिन इसे खाने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप पपीते के साथ ही इसके बीजों को भी खा लें. |
मनेन्द्रगढ़, 23 जून। श्री यमुना प्रसाद शास्त्री हायर सेकेंडरी स्कूल खोंगापानी में अध्ययनरत कक्षा 10वीं की छात्रा सुष्मिता पॉल ने हाई स्कूल बोर्ड परीक्षा में 600 में कुल 585 अर्थात 97. 50 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रदेश की मेरिट सूची में 10वें स्थान पर रहीं। वहीं उन्होंने कोरिया जिले में पहला स्थान प्राप्त किया है। सुष्मिता ने अपनी सफलता का श्रेय पिता दिनेश-माता रीता पॉल एवं गुरूजनों को दिया है।
| मनेन्द्रगढ़, तेईस जून। श्री यमुना प्रसाद शास्त्री हायर सेकेंडरी स्कूल खोंगापानी में अध्ययनरत कक्षा दसवीं की छात्रा सुष्मिता पॉल ने हाई स्कूल बोर्ड परीक्षा में छः सौ में कुल पाँच सौ पचासी अर्थात सत्तानवे. पचास प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रदेश की मेरिट सूची में दसवें स्थान पर रहीं। वहीं उन्होंने कोरिया जिले में पहला स्थान प्राप्त किया है। सुष्मिता ने अपनी सफलता का श्रेय पिता दिनेश-माता रीता पॉल एवं गुरूजनों को दिया है। |
बीकानेर में जिला प्रशासन के निर्देशन में विशेष रूप से संचालित मिशन अगेंस्ट एनीमिया यानिकी 'माँ' कार्यक्रम के तहत जिला मुख्यालय स्थित महारानी सुदर्शन कन्या महाविद्यालय में हीमोग्लोबिन जांच के विशेष 2 दिवसीय शिविर का शुभारम्भ हुआ। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. देवेन्द्र चौधरी ने बताया की संभाग के सबसे बड़े कन्या महाविद्यालय में आयोजित शिविर के प्रथम दिन 585 बालिकाओं के रक्त में हीमोग्लोबिन की जांच की गई तथा 9 ग्राम से कम हीमोग्लोबिन पाए जाने पर 200 बालिकाओं को आयरन फोलिक एसिड की गोली की महीने भर की खुराक वितरित की गई। इन बालिकाओं का एक माह पश्चात् फिर से फॉलो अप भी किया जाएगा। शिविर में लैब तकनीशियन इदरीश अहमद जोईया, सुनील सैन व इन्दुबाला खत्री सहित 14 कार्मिकों के दल ने अपनी सेवाएं दी। बालिकाओं को एनीमिया के कारण, बचाव व उपचार के बारे में जानकारी दी गई। विशेष रूप से पोषण व आहार में हरी सब्जियों व अन्य आयरन युक्त खाद्यों को प्रचुर मात्रा में शामिल करने पर जोर दिया गया। शिविर में कोलेज के प्राचार्य डॉ. उमाकांत गुप्त, उप प्राचार्य डॉ. पुष्पा चौहान सहित छात्र संघ सदस्यों व स्टाफ का सहयोग रहा। सीएमएचओ ने बताया कि शुक्रवार को भी कॉलेज में शिविर जारी रहेगा।
| बीकानेर में जिला प्रशासन के निर्देशन में विशेष रूप से संचालित मिशन अगेंस्ट एनीमिया यानिकी 'माँ' कार्यक्रम के तहत जिला मुख्यालय स्थित महारानी सुदर्शन कन्या महाविद्यालय में हीमोग्लोबिन जांच के विशेष दो दिवसीय शिविर का शुभारम्भ हुआ। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. देवेन्द्र चौधरी ने बताया की संभाग के सबसे बड़े कन्या महाविद्यालय में आयोजित शिविर के प्रथम दिन पाँच सौ पचासी बालिकाओं के रक्त में हीमोग्लोबिन की जांच की गई तथा नौ ग्राम से कम हीमोग्लोबिन पाए जाने पर दो सौ बालिकाओं को आयरन फोलिक एसिड की गोली की महीने भर की खुराक वितरित की गई। इन बालिकाओं का एक माह पश्चात् फिर से फॉलो अप भी किया जाएगा। शिविर में लैब तकनीशियन इदरीश अहमद जोईया, सुनील सैन व इन्दुबाला खत्री सहित चौदह कार्मिकों के दल ने अपनी सेवाएं दी। बालिकाओं को एनीमिया के कारण, बचाव व उपचार के बारे में जानकारी दी गई। विशेष रूप से पोषण व आहार में हरी सब्जियों व अन्य आयरन युक्त खाद्यों को प्रचुर मात्रा में शामिल करने पर जोर दिया गया। शिविर में कोलेज के प्राचार्य डॉ. उमाकांत गुप्त, उप प्राचार्य डॉ. पुष्पा चौहान सहित छात्र संघ सदस्यों व स्टाफ का सहयोग रहा। सीएमएचओ ने बताया कि शुक्रवार को भी कॉलेज में शिविर जारी रहेगा। |
ग्रामीण विकास मंत्रालय का ग्रामीण पेयजल आपूर्ति विभाग ग्रामीण पेयजल आपूर्ति और स्वच्छता के लिए रणनीतियों पर एक गोलमेज वार्ता का आयोजन 21 अक्तूबर, 09 को नई दिल्ली के मिर्जा गालिब हाल में करने जा रहा है । इस वार्ता का उद्देश्य भारत निर्माण कार्यक्रम के अंतर्गत ग्रामीण पेयजल आपूर्ति और स्वच्छता जैसे व्यापक कार्य के लिए गैर-सरकारी संगठनों और महिला समूहों की बड़े स्तर पर भागीदारी को सुनिश्चित करने के लिए प्रोत्साहित करना और इन कार्यकारी समूहों में जागरूकता लाना हैं । दिन भर चलने वाले इन विचार-विमर्शों में उन रणनीतियों पर ध्यान दिया जाएगा जो राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल आपूर्ति कार्यक्रम और संपूर्ण स्वच्छता अभियान के अंतर्गत गतिविधियों को बढाने में राज्य सरकारों और पंचायती राज संस्थाओं को सहयोग प्रदान कर सके ।
बैठक का उद्धाटन ग्रामीण विकास राज्य मंत्री सुश्री अगाथा संगमा द्वारा किया जाएगा । बाद में केन्द्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री डॉ. सी पी जोशी बैठक को संबोधित करेंगे । बैठक में, राज्य सरकारोंसंघ शासित प्रदेशों के विभिन्न प्रतिनिधियों के अलावा सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे, दीप जोशी, जीन ड्रीज और एन सी सक्सेना उपस्थित होंगे ।
आशा है कि इन विचार-विमर्शों के माध्यम से कुछ ऐसी रणनीतियां बनाई जा सकेंगी, जिनके तहत लघु अवधि और मध्यावधि योजनाओं के अंतर्गत ग्रामीण जनसंख्या के लिए सुरक्षित पेयजल आसानी से और निरंतर उपलब्ध होता रहे ।
| ग्रामीण विकास मंत्रालय का ग्रामीण पेयजल आपूर्ति विभाग ग्रामीण पेयजल आपूर्ति और स्वच्छता के लिए रणनीतियों पर एक गोलमेज वार्ता का आयोजन इक्कीस अक्तूबर, नौ को नई दिल्ली के मिर्जा गालिब हाल में करने जा रहा है । इस वार्ता का उद्देश्य भारत निर्माण कार्यक्रम के अंतर्गत ग्रामीण पेयजल आपूर्ति और स्वच्छता जैसे व्यापक कार्य के लिए गैर-सरकारी संगठनों और महिला समूहों की बड़े स्तर पर भागीदारी को सुनिश्चित करने के लिए प्रोत्साहित करना और इन कार्यकारी समूहों में जागरूकता लाना हैं । दिन भर चलने वाले इन विचार-विमर्शों में उन रणनीतियों पर ध्यान दिया जाएगा जो राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल आपूर्ति कार्यक्रम और संपूर्ण स्वच्छता अभियान के अंतर्गत गतिविधियों को बढाने में राज्य सरकारों और पंचायती राज संस्थाओं को सहयोग प्रदान कर सके । बैठक का उद्धाटन ग्रामीण विकास राज्य मंत्री सुश्री अगाथा संगमा द्वारा किया जाएगा । बाद में केन्द्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री डॉ. सी पी जोशी बैठक को संबोधित करेंगे । बैठक में, राज्य सरकारोंसंघ शासित प्रदेशों के विभिन्न प्रतिनिधियों के अलावा सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे, दीप जोशी, जीन ड्रीज और एन सी सक्सेना उपस्थित होंगे । आशा है कि इन विचार-विमर्शों के माध्यम से कुछ ऐसी रणनीतियां बनाई जा सकेंगी, जिनके तहत लघु अवधि और मध्यावधि योजनाओं के अंतर्गत ग्रामीण जनसंख्या के लिए सुरक्षित पेयजल आसानी से और निरंतर उपलब्ध होता रहे । |
लातेहारः लातेहार जिले में स्कॉर्पियो और कार के बीच आज सुबह हुई भीषण टक्कर में एक व्यक्ति की मौत हो गयी, जबकि छह अन्य लोग घायल हो गये.
घटना के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार स्कॉर्पियो डाल्टेनगंज से रांची जा रही थी, वहीं कार गढ़वा से रांची जा रही थी. तभी दोनों गाड़ियों में टक्कर हो गयी और कार में सवार व्यक्ति की मौत हो गयी.
मृतक गढ़वा जिले के कांडी निवासी उपेन्द्र दुबे बताये जा रहे है. वहीं स्कॉर्पियो में सवार 6 लोगों को काफी चोट आयी है. सभी घायलों को नजदीक के अस्पताल में भर्ती कराया गया है. जहां डॉक्टर सभी का इलाज कर रहे है.
स्थानीय लोगों ने पुलिस को पूरे घटना की जानकारी दी. जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच कर मृतक को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया. पुलिस के पूछताछ में यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि दोनों गाड़ियों की रफ्तार काफी तेज होने के कारण यह दुर्घटना हुई है.
| लातेहारः लातेहार जिले में स्कॉर्पियो और कार के बीच आज सुबह हुई भीषण टक्कर में एक व्यक्ति की मौत हो गयी, जबकि छह अन्य लोग घायल हो गये. घटना के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार स्कॉर्पियो डाल्टेनगंज से रांची जा रही थी, वहीं कार गढ़वा से रांची जा रही थी. तभी दोनों गाड़ियों में टक्कर हो गयी और कार में सवार व्यक्ति की मौत हो गयी. मृतक गढ़वा जिले के कांडी निवासी उपेन्द्र दुबे बताये जा रहे है. वहीं स्कॉर्पियो में सवार छः लोगों को काफी चोट आयी है. सभी घायलों को नजदीक के अस्पताल में भर्ती कराया गया है. जहां डॉक्टर सभी का इलाज कर रहे है. स्थानीय लोगों ने पुलिस को पूरे घटना की जानकारी दी. जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच कर मृतक को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया. पुलिस के पूछताछ में यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि दोनों गाड़ियों की रफ्तार काफी तेज होने के कारण यह दुर्घटना हुई है. |
स्मार्ट सिटी के राउंड-4 लिस्ट में बरेली की लाज जरी-जरदोजी ने बचा ली है। देश के 20 शहरों में चौथे और यूपी में नंबर वन का ताज बना बरेली स्मार्ट हो गया है। 1902. 77 करोड़ से शहर का विकास होगा। शहर का नाम स्मार्ट सिटी की लिस्ट में आते ही नगर निगम अफसर ऐक्शन मोड में आ गए हैं। शुक्रवार को स्मार्ट सिटी प्रपोजल के तहत प्रस्तावित हर काम की डेडलाइन तय कर दी। इसके मुताबिक, 2021 तक बरेली पूरी तरह से स्मार्ट बन जाएगा।
गिरते, पड़ते पिछड़ते बरेली को जरी-जरदोजी ने स्मार्ट सिटी का ताज पहना दिया है। 4. 50 लाख जरी कारीगर और कारोबारी की मेहनत रंग लाई है। स्मार्ट सिटी में जरी-जरदोजी सहित छोटे बड़े उद्योगों को रोजगार और तरक्की के रास्ते खुलेंगे। इसके अलावा स्मार्ट सिटी में शामिल बरेली शहर के शहरवासियों को ऑन लाइन सुविधाएं दी जाएगी। शॉपिंग से लेकर वाहन पार्किंग भी स्मार्ट कर दी जाएगी। कंसलटेंट एजेंसी दाराशाह ऑन लाइन शॉपिंग वेबसाइट को स्मार्ट करने में जुट गई है।
ऑन लाइन शॉपिंग से दस लाख लोगों को सीधे जोड़ने की कवायद स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट प्लान में की गई है। इसके अलावा मोबाइल एप भी तैयार होगा जिससे घर बैठे पार्किंग की जगह मिल जाएगी। शॉपिंग में ब्रांडेड कंपनियों के सामानों की सेल की जाएगी। वेबसाइट के लिए प्रचार-प्रसार और जनता से सीधे मुलाकात की जाएगी।
इन कंपनियों से होगा करार नोकिया, डेल्टा, सैमसेंग, एलजी, सोनी, फिलिप्स, ऑनिडा, वीडियोकॉन, टाइटन, इमरशन, जीई वाटर सोल्यूशन, नोवस टैक सोल्यूशन, पार्क जैप, यूनाइटेड टेक्नोलॉजी कारपोरेशन समेत कई कंपनियों के एक्सपर्ट के साथ मीटिंग होगी। स्मार्ट शहरों में शामिल बरेली को इन तमाम कंपनियों से ऑन लाइन शॉपिंग के लिए करार किया जाएगा।
स्मार्टफोन बेस्ड पार्किग मैनेजमेंट सिस्टम के तहत शहर की जनता को स्मार्ट बनाया जाएगा। घर बैठे ही लोग पार्किंग में अपना वाहन खड़ा करने के लिए जगह पहले ही तय कर लेंगे। शहर की पार्किंग में सेंसर लगाकर एक एप से जोड़ा जाएगा। लोग घर से निकलने से पहले ही पता कर सकेंगे कि जहां वह जा रहे हैं वहां पार्किंग में जगह खाली है या नहीं। मोबाइल से वह पार्किंगकी एडवांस बुकिंग भी करा सकेंगे। विदेशी टेक्नॉलाजी से होगा आईटेक विदेशी कंपनी की टेक्नॉलाजी से ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम को बेहतर किया जाएगा। कंपनी के एक्सपर्ट ने बताया कि स्मार्ट सीसीटीवी कैमरों और ट्रैफिक सिग्नल के जरिए किस तरह ट्रैफिक मैनेजमेंट किया जा सकता है।
आर्थिक रूप से शहर मजबूत हो -क्षेत्र लोगों से अधिक जुड़ा हो -कामर्शियल सेंटर के रूप में दिखाई दे -इनकम के लिए शहर को फायदा हो यह मिलेगी सुविधाएं -बिजनेस सेंटर-ड्रैनेज सिस्टम -वाईफाई जोन-ट्रैफिक सिस्टम-ट्रांसपोर्ट के साधन-पानी की सप्लाई -सॉलिड वेस्ट का निस्तारण -जीरो वेस्ट डिस्पोजल -पार्क -साइकिल ट्रैक, फुटपाथ -स्मार्ट पार्किंग स्मार्ट सिटी के लिए बरेली के सामने चुनौतियां-ढाई लाख कदाताओं से टैक्स वसूना, अभी तक 80 हजार देर रहे टैक्स -ग्राउंड वाटर दोहन, गिरता जल स्तर -शहर में चारों ओर नदियां है, लेकिन गंदगी, अतिक्रमण कम नहीं -50 से ज्यादा कॉलोनियों में न तो वाटर सप्लाई न सीवर लाइन -शहर के ड्रैनेज सिस्टम, सीवर लाइन की बिगड़ी व्यवस्था -शिकायतों का समय पर निस्तारण न होना, परेशान पब्लिक -ई गवर्नेंस, टैक्स बिल, टेंडर, विकास कार्य आन लाइन करना-सॉलिड वेस्ट का निस्तारण न होना, कूड़ा बना मुसीबत -शहर के मुख्य मार्गों पर लगा जाम, ट्रैफिक व्यवस्था ठीक नहीं -शहर में होर्डिंग, बैनर और पोस्टर हटाकर तस्वीर होगी साफबरेली के पब्लिक ट्रांसपोर्ट को स्मार्ट बनाएंगी प्लानिंग ड्रेनेज-सीवरेज अलगड्रेनेज और सीवरेज सिस्टम पूरी तरह से अलग किया जाएगा। सीवेज ट्रीटमेंट के लिए प्लांट जाएगा। वहीं ड्रेन का वेस्ट वॉटर भी ट्रीट होकर दोबारा उपयोग में लाया जाएगा। इसके लिए ड्रेनेज ट्रीटमेंट प्लांट प्रस्तावित है। मशीनों से होगी सफाईनगर निगम मोहल्लों और सड़कों की सफाई के लिए 52 रोड़ स्वीपिंग मशीने खरीदेगा। मार्च 2019 तक यह प्रक्रिया काम करने लगेगी। मैनुअल काम खत्म होगा। पब्लिक और कम्युनिटी टॉयलेट बनवाए जाएंगे।
खत्म होंगे डलावघरशहर में डलावघर को खत्म कर दिए जाएगे। बाजार और मोहल्लों में 550 डस्टबिन लगाए जाएंगे। यह डस्टबिन सेंसर आधारित होंगे जो कूड़ा भर जाने के बाद कंट्रोल रूम को संकेत देंगे। सॉलिड वेस्ट प्लांट में जाएगा कूड़ा2018 में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट शुरू हो जाएगा। वार्ड में 100 फीसदी कूड़ा घर और बाजार से उठकर प्लांट को जाएगा। यूजर चार्ज भी जीपीएस लैस मशीनों से लिया जाएगा। जिसका डाटा तुरंत सर्वर पर दर्ज होगा। सीवेज ड्रेनेज सिस्टम फेलपूरे शहर में सीवरेज और ड्रेनेज का सिस्टम फेल है। यहां ड्रेनेज सिस्टम में ही सीवेज बहता है। शहर के कई इलाकों के आधे घरों का सीवरेज कनेक्शन नहीं है। इनका सीवेज नालियों से बहकर नदी में जाता है। खुली नालियां-नाले गंदगी की वजह हैं। हर बस में जीपीएस और सीसीटीवीशहर में सिटी बसें चलाई जाएगी। शहर से देहात तक जाने के लिए नई बसें खरीदी जाएंगी। इन बसों में ऑन-बोर्ड सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। जीपीएस तकनीक से लैस इन बसों की लोकेशन और भीतर निगरानी की जा सकेगी। चौराहों का सौन्दर्यीकरण स्मार्ट सिटी सर्विलांस सिस्टम के तहत शहर के चौराहों पर पीटीजेड कैमरों का इंस्टॉलेशन होगा। पूरे शहर में इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम के तहत 100 ज्यादा स्थानो पर स्मार्ट ट्रैफिक सिग्नल और सेंसर का इंस्टॉलेशन होगा। चौराहों और मार्गों पर स्मार्ट साइन बोर्ड लगेंगे। आधुनिकीकरण स्मार्ट बस शेल्टर्स और 1. 90 लाख लोगों को स्मार्ट मोबिलिटी कार्ड मिलेंगे। यह मिलेंगी सुविधाएं 17 किमी नाले बंद नाले का निर्माण 8400 घरों तक वाटर सप्लाई कनेक्शन50 फीसदी घरों तक पीएनजी कनेक्शन5 शेल्टर होम्स की मरम्मत24 किमी सड़क की मरम्मत19 चौराहों का सौंदर्यीकरण नालों के साथ 3 किमी की सीवर लाइन80 फीसदी सीवेज लाइंस की मरम्मतसड़क की सफाई के लिए 52 रोड स्वीपिंग मशीन की खरीदपब्लिक लाइब्रेरीप्रोजेक्ट में शामिल इन बिंदुओं ने बनाया स्मार्ट -जरी जरदोजी के साथ छोटे उद्योग किए शामिल। -महानगर में गंगाजल की आपूर्ति विधिवत हो रही है। -कूड़ा निस्तारण प्लांट के लिए अनुबंध हो चुका है। -एलईडी लाइट के लिए कंपनी से अनुबंध हो चुका है। -सीवर लाइन के लिए प्रोजेक्ट बनाया गया है। -नगर निगम का समस्त लेखाजोखा ऑनलाइन है। -टैक्स वसूली में भी काफी इजाफा हुआ है। -ट्रांसपोर्टेशन के प्रोजेक्ट बनाए गए। -मुफ्त में पब्लिक को वाटर कनेक्शन दिए जा रहे।
बरेली स्मार्ट सिटी का तमगा मिलते ही नगर निगम ने खुद को भी स्मार्ट बनाने की कवायद शुरू कर दी है। नगर निगम प्रशासन ने अब अपने नए मुख्यालय और स्मार्ट सिटी के नए ऑफिस के लिए कवायद शुरू कर दी है। नए ऑफिस के डीपीआर के लिए आर्किटेक्ट भी अपॉइंट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यहां 7. 5 करोड़ रुपये में हाईटेक ऑफिस और स्मार्ट सिटी मैनेजमेंट सिस्टम बनेगा।
नगर निगम की स्मार्ट सिटी के लिए नई बिल्डिंग बनेगी और कमांड सेंटर को हाईटेक किया जाएगा। जीपीएस मॉनीटरिंग आधरित सेंटर शहर के हर हिस्से के ट्रैफिक की निगरानी एक क्लिक पर कर सकेगा। कंप्यूटर्स पर मॉनीटरिंग होगी। जाम होने पर जानकारी मिलेगी। सभी रास्तों की गूगल मैपिंग करवाए जाने का प्रस्ताव भी है। अभी कुछ खास रास्तों की ही पहचान गूगल मैप के जरिए होगी। इन रास्ते में बैंक, एटीएम, रेस्त्रां, स्कूल, कमर्शल बिल्डिंग की जानकारी मिलेगी। कंट्रोल रूम से जुड़े होने के कारण लोग मोबाइल ऐप या स्मार्ट सिटी की वेबसाइट पर ट्रैफिक लोड भी देख सकेंगे।
बरेली के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के लिए पहले यानी इस साल 1000 करोड़ रुपए मिलेंगे। यह धनराशि केंद्र और राज्य सरकार देंगी। इसके बाद दोनों सरकारें रिव्यू करेंगी। रिव्यू में खर्च के नतीजे सकारात्मक निकले तो अगले साल दोनों सरकारें सौ-सौ करोड़ (कुल 200 करोड़) और देंगी। लेकिन रिव्यू खराब आया तो पैसे रोक दिए जाएंगे। इस सिस्टम से चार साल में दोनों सरकार बरेली के लिए रुपए देंगी। इस चार वर्षों में शहर में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप से कुछ प्रोजेक्ट शुरू होंगे, जिनसे 487. 08 करोड़ रुपए का फंड मिलेगा। चार साल में ही शहर को प्रदेश की अलग-अलग योजनाओं के लिए 962 करोड़ रुपए और मिलेंगे।
स्मार्ट सिटी के नाम की घोषणा होने के बाद बरेलियंस ने जमकर धूम मचाई है। शहर में जगह-जगह आतिशबाजी और मिठाई खिलाकर स्मार्ट शहर बनने पर खुशी मनाई गई। नगर निगम में भी मेयर डा. उमेश गौतम, नगरायुक्त आरके श्रीवास्तव, अपर नगरायुक्त ईश शक्ति कुमार सिंह, चीफ इंजीनियर एसके अंबेडकर, एक्सईएन विकास कुरील आदि शामिल रहे। मेरा हक फाउंडेशन की फरहत नकवी के साथ तमाम महिलाओं और बरेली युवा क्लब के गुलफाम अंसारी, जनसेवा के पम्मी वारसी, साकिब रजा, हाजी अब्दुल, लतीफ कुरैशी आदि ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी का इजहार किया।
तीन राउंड में बरेली शहर को स्मार्ट बनाने के लिए पहले कोई प्लानिंग नहीं हुई। जो पहले कुर्सियों पर बैठे थे उनकी सोच स्मार्ट नहीं थी। वो जनता से जुड़े कामों को करना ही नहीं चाहते थे। यही वजह थी कि स्मार्ट सिटी में बरेली तीन बार पिछड़ गया था। इस बार हमने और नगर निगम टीम ने पूरी तैयारी के साथ प्लान बनाया जिसका नतीजा हम शहर को स्मार्ट शहरों में शामिल कर पाए।
स्मार्ट सिटी के पिछली प्रोजेक्ट को देखने के बाद हमने पूरी प्लानिंग ही बदल दी थी। शहर के लिए जो खास है उसको प्राथमिकता दी। जरी-जरदोजी के प्रोजेक्ट को हाजी शकील कुरैशी की मदद से आगे बढ़ाया गया। केंद्र से लेकर यूपी सरकार ने प्रोजेक्ट को सराहा था। यही वजह है कि आज हम स्मार्ट शहरों में शामिल हो चुके हैं।
| स्मार्ट सिटी के राउंड-चार लिस्ट में बरेली की लाज जरी-जरदोजी ने बचा ली है। देश के बीस शहरों में चौथे और यूपी में नंबर वन का ताज बना बरेली स्मार्ट हो गया है। एक हज़ार नौ सौ दो. सतहत्तर करोड़ से शहर का विकास होगा। शहर का नाम स्मार्ट सिटी की लिस्ट में आते ही नगर निगम अफसर ऐक्शन मोड में आ गए हैं। शुक्रवार को स्मार्ट सिटी प्रपोजल के तहत प्रस्तावित हर काम की डेडलाइन तय कर दी। इसके मुताबिक, दो हज़ार इक्कीस तक बरेली पूरी तरह से स्मार्ट बन जाएगा। गिरते, पड़ते पिछड़ते बरेली को जरी-जरदोजी ने स्मार्ट सिटी का ताज पहना दिया है। चार. पचास लाख जरी कारीगर और कारोबारी की मेहनत रंग लाई है। स्मार्ट सिटी में जरी-जरदोजी सहित छोटे बड़े उद्योगों को रोजगार और तरक्की के रास्ते खुलेंगे। इसके अलावा स्मार्ट सिटी में शामिल बरेली शहर के शहरवासियों को ऑन लाइन सुविधाएं दी जाएगी। शॉपिंग से लेकर वाहन पार्किंग भी स्मार्ट कर दी जाएगी। कंसलटेंट एजेंसी दाराशाह ऑन लाइन शॉपिंग वेबसाइट को स्मार्ट करने में जुट गई है। ऑन लाइन शॉपिंग से दस लाख लोगों को सीधे जोड़ने की कवायद स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट प्लान में की गई है। इसके अलावा मोबाइल एप भी तैयार होगा जिससे घर बैठे पार्किंग की जगह मिल जाएगी। शॉपिंग में ब्रांडेड कंपनियों के सामानों की सेल की जाएगी। वेबसाइट के लिए प्रचार-प्रसार और जनता से सीधे मुलाकात की जाएगी। इन कंपनियों से होगा करार नोकिया, डेल्टा, सैमसेंग, एलजी, सोनी, फिलिप्स, ऑनिडा, वीडियोकॉन, टाइटन, इमरशन, जीई वाटर सोल्यूशन, नोवस टैक सोल्यूशन, पार्क जैप, यूनाइटेड टेक्नोलॉजी कारपोरेशन समेत कई कंपनियों के एक्सपर्ट के साथ मीटिंग होगी। स्मार्ट शहरों में शामिल बरेली को इन तमाम कंपनियों से ऑन लाइन शॉपिंग के लिए करार किया जाएगा। स्मार्टफोन बेस्ड पार्किग मैनेजमेंट सिस्टम के तहत शहर की जनता को स्मार्ट बनाया जाएगा। घर बैठे ही लोग पार्किंग में अपना वाहन खड़ा करने के लिए जगह पहले ही तय कर लेंगे। शहर की पार्किंग में सेंसर लगाकर एक एप से जोड़ा जाएगा। लोग घर से निकलने से पहले ही पता कर सकेंगे कि जहां वह जा रहे हैं वहां पार्किंग में जगह खाली है या नहीं। मोबाइल से वह पार्किंगकी एडवांस बुकिंग भी करा सकेंगे। विदेशी टेक्नॉलाजी से होगा आईटेक विदेशी कंपनी की टेक्नॉलाजी से ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम को बेहतर किया जाएगा। कंपनी के एक्सपर्ट ने बताया कि स्मार्ट सीसीटीवी कैमरों और ट्रैफिक सिग्नल के जरिए किस तरह ट्रैफिक मैनेजमेंट किया जा सकता है। आर्थिक रूप से शहर मजबूत हो -क्षेत्र लोगों से अधिक जुड़ा हो -कामर्शियल सेंटर के रूप में दिखाई दे -इनकम के लिए शहर को फायदा हो यह मिलेगी सुविधाएं -बिजनेस सेंटर-ड्रैनेज सिस्टम -वाईफाई जोन-ट्रैफिक सिस्टम-ट्रांसपोर्ट के साधन-पानी की सप्लाई -सॉलिड वेस्ट का निस्तारण -जीरो वेस्ट डिस्पोजल -पार्क -साइकिल ट्रैक, फुटपाथ -स्मार्ट पार्किंग स्मार्ट सिटी के लिए बरेली के सामने चुनौतियां-ढाई लाख कदाताओं से टैक्स वसूना, अभी तक अस्सी हजार देर रहे टैक्स -ग्राउंड वाटर दोहन, गिरता जल स्तर -शहर में चारों ओर नदियां है, लेकिन गंदगी, अतिक्रमण कम नहीं -पचास से ज्यादा कॉलोनियों में न तो वाटर सप्लाई न सीवर लाइन -शहर के ड्रैनेज सिस्टम, सीवर लाइन की बिगड़ी व्यवस्था -शिकायतों का समय पर निस्तारण न होना, परेशान पब्लिक -ई गवर्नेंस, टैक्स बिल, टेंडर, विकास कार्य आन लाइन करना-सॉलिड वेस्ट का निस्तारण न होना, कूड़ा बना मुसीबत -शहर के मुख्य मार्गों पर लगा जाम, ट्रैफिक व्यवस्था ठीक नहीं -शहर में होर्डिंग, बैनर और पोस्टर हटाकर तस्वीर होगी साफबरेली के पब्लिक ट्रांसपोर्ट को स्मार्ट बनाएंगी प्लानिंग ड्रेनेज-सीवरेज अलगड्रेनेज और सीवरेज सिस्टम पूरी तरह से अलग किया जाएगा। सीवेज ट्रीटमेंट के लिए प्लांट जाएगा। वहीं ड्रेन का वेस्ट वॉटर भी ट्रीट होकर दोबारा उपयोग में लाया जाएगा। इसके लिए ड्रेनेज ट्रीटमेंट प्लांट प्रस्तावित है। मशीनों से होगी सफाईनगर निगम मोहल्लों और सड़कों की सफाई के लिए बावन रोड़ स्वीपिंग मशीने खरीदेगा। मार्च दो हज़ार उन्नीस तक यह प्रक्रिया काम करने लगेगी। मैनुअल काम खत्म होगा। पब्लिक और कम्युनिटी टॉयलेट बनवाए जाएंगे। खत्म होंगे डलावघरशहर में डलावघर को खत्म कर दिए जाएगे। बाजार और मोहल्लों में पाँच सौ पचास डस्टबिन लगाए जाएंगे। यह डस्टबिन सेंसर आधारित होंगे जो कूड़ा भर जाने के बाद कंट्रोल रूम को संकेत देंगे। सॉलिड वेस्ट प्लांट में जाएगा कूड़ादो हज़ार अट्ठारह में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट शुरू हो जाएगा। वार्ड में एक सौ फीसदी कूड़ा घर और बाजार से उठकर प्लांट को जाएगा। यूजर चार्ज भी जीपीएस लैस मशीनों से लिया जाएगा। जिसका डाटा तुरंत सर्वर पर दर्ज होगा। सीवेज ड्रेनेज सिस्टम फेलपूरे शहर में सीवरेज और ड्रेनेज का सिस्टम फेल है। यहां ड्रेनेज सिस्टम में ही सीवेज बहता है। शहर के कई इलाकों के आधे घरों का सीवरेज कनेक्शन नहीं है। इनका सीवेज नालियों से बहकर नदी में जाता है। खुली नालियां-नाले गंदगी की वजह हैं। हर बस में जीपीएस और सीसीटीवीशहर में सिटी बसें चलाई जाएगी। शहर से देहात तक जाने के लिए नई बसें खरीदी जाएंगी। इन बसों में ऑन-बोर्ड सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। जीपीएस तकनीक से लैस इन बसों की लोकेशन और भीतर निगरानी की जा सकेगी। चौराहों का सौन्दर्यीकरण स्मार्ट सिटी सर्विलांस सिस्टम के तहत शहर के चौराहों पर पीटीजेड कैमरों का इंस्टॉलेशन होगा। पूरे शहर में इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम के तहत एक सौ ज्यादा स्थानो पर स्मार्ट ट्रैफिक सिग्नल और सेंसर का इंस्टॉलेशन होगा। चौराहों और मार्गों पर स्मार्ट साइन बोर्ड लगेंगे। आधुनिकीकरण स्मार्ट बस शेल्टर्स और एक. नब्बे लाख लोगों को स्मार्ट मोबिलिटी कार्ड मिलेंगे। यह मिलेंगी सुविधाएं सत्रह किमी नाले बंद नाले का निर्माण आठ हज़ार चार सौ घरों तक वाटर सप्लाई कनेक्शनपचास फीसदी घरों तक पीएनजी कनेक्शनपाँच शेल्टर होम्स की मरम्मतचौबीस किमी सड़क की मरम्मतउन्नीस चौराहों का सौंदर्यीकरण नालों के साथ तीन किमी की सीवर लाइनअस्सी फीसदी सीवेज लाइंस की मरम्मतसड़क की सफाई के लिए बावन रोड स्वीपिंग मशीन की खरीदपब्लिक लाइब्रेरीप्रोजेक्ट में शामिल इन बिंदुओं ने बनाया स्मार्ट -जरी जरदोजी के साथ छोटे उद्योग किए शामिल। -महानगर में गंगाजल की आपूर्ति विधिवत हो रही है। -कूड़ा निस्तारण प्लांट के लिए अनुबंध हो चुका है। -एलईडी लाइट के लिए कंपनी से अनुबंध हो चुका है। -सीवर लाइन के लिए प्रोजेक्ट बनाया गया है। -नगर निगम का समस्त लेखाजोखा ऑनलाइन है। -टैक्स वसूली में भी काफी इजाफा हुआ है। -ट्रांसपोर्टेशन के प्रोजेक्ट बनाए गए। -मुफ्त में पब्लिक को वाटर कनेक्शन दिए जा रहे। बरेली स्मार्ट सिटी का तमगा मिलते ही नगर निगम ने खुद को भी स्मार्ट बनाने की कवायद शुरू कर दी है। नगर निगम प्रशासन ने अब अपने नए मुख्यालय और स्मार्ट सिटी के नए ऑफिस के लिए कवायद शुरू कर दी है। नए ऑफिस के डीपीआर के लिए आर्किटेक्ट भी अपॉइंट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यहां सात. पाँच करोड़ रुपये में हाईटेक ऑफिस और स्मार्ट सिटी मैनेजमेंट सिस्टम बनेगा। नगर निगम की स्मार्ट सिटी के लिए नई बिल्डिंग बनेगी और कमांड सेंटर को हाईटेक किया जाएगा। जीपीएस मॉनीटरिंग आधरित सेंटर शहर के हर हिस्से के ट्रैफिक की निगरानी एक क्लिक पर कर सकेगा। कंप्यूटर्स पर मॉनीटरिंग होगी। जाम होने पर जानकारी मिलेगी। सभी रास्तों की गूगल मैपिंग करवाए जाने का प्रस्ताव भी है। अभी कुछ खास रास्तों की ही पहचान गूगल मैप के जरिए होगी। इन रास्ते में बैंक, एटीएम, रेस्त्रां, स्कूल, कमर्शल बिल्डिंग की जानकारी मिलेगी। कंट्रोल रूम से जुड़े होने के कारण लोग मोबाइल ऐप या स्मार्ट सिटी की वेबसाइट पर ट्रैफिक लोड भी देख सकेंगे। बरेली के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के लिए पहले यानी इस साल एक हज़ार करोड़ रुपए मिलेंगे। यह धनराशि केंद्र और राज्य सरकार देंगी। इसके बाद दोनों सरकारें रिव्यू करेंगी। रिव्यू में खर्च के नतीजे सकारात्मक निकले तो अगले साल दोनों सरकारें सौ-सौ करोड़ और देंगी। लेकिन रिव्यू खराब आया तो पैसे रोक दिए जाएंगे। इस सिस्टम से चार साल में दोनों सरकार बरेली के लिए रुपए देंगी। इस चार वर्षों में शहर में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप से कुछ प्रोजेक्ट शुरू होंगे, जिनसे चार सौ सत्तासी. आठ करोड़ रुपए का फंड मिलेगा। चार साल में ही शहर को प्रदेश की अलग-अलग योजनाओं के लिए नौ सौ बासठ करोड़ रुपए और मिलेंगे। स्मार्ट सिटी के नाम की घोषणा होने के बाद बरेलियंस ने जमकर धूम मचाई है। शहर में जगह-जगह आतिशबाजी और मिठाई खिलाकर स्मार्ट शहर बनने पर खुशी मनाई गई। नगर निगम में भी मेयर डा. उमेश गौतम, नगरायुक्त आरके श्रीवास्तव, अपर नगरायुक्त ईश शक्ति कुमार सिंह, चीफ इंजीनियर एसके अंबेडकर, एक्सईएन विकास कुरील आदि शामिल रहे। मेरा हक फाउंडेशन की फरहत नकवी के साथ तमाम महिलाओं और बरेली युवा क्लब के गुलफाम अंसारी, जनसेवा के पम्मी वारसी, साकिब रजा, हाजी अब्दुल, लतीफ कुरैशी आदि ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी का इजहार किया। तीन राउंड में बरेली शहर को स्मार्ट बनाने के लिए पहले कोई प्लानिंग नहीं हुई। जो पहले कुर्सियों पर बैठे थे उनकी सोच स्मार्ट नहीं थी। वो जनता से जुड़े कामों को करना ही नहीं चाहते थे। यही वजह थी कि स्मार्ट सिटी में बरेली तीन बार पिछड़ गया था। इस बार हमने और नगर निगम टीम ने पूरी तैयारी के साथ प्लान बनाया जिसका नतीजा हम शहर को स्मार्ट शहरों में शामिल कर पाए। स्मार्ट सिटी के पिछली प्रोजेक्ट को देखने के बाद हमने पूरी प्लानिंग ही बदल दी थी। शहर के लिए जो खास है उसको प्राथमिकता दी। जरी-जरदोजी के प्रोजेक्ट को हाजी शकील कुरैशी की मदद से आगे बढ़ाया गया। केंद्र से लेकर यूपी सरकार ने प्रोजेक्ट को सराहा था। यही वजह है कि आज हम स्मार्ट शहरों में शामिल हो चुके हैं। |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
में सगरिका निराश होकर आत्महत्या का करन प्रयत्न करती है परन्तु वह बचा ली जाती है। वह अपने गले में फांसी लगा लेती है और ज्यों ही मरने के लिए उसत होती है त्यों ही उसको बचा लिया जाता हूँ । "मृच्छकटिक" नाटक में पुष्पकण्ड उदयान में शकार वसन्तसेना का गला घोंट देता है और जब वह यह समझता है कि वह मर गई है तब वह उसके शरीर को पत्तों से ढक कर चला जाता है । पीछे वसन्तसेना पुनर्जीवित हो जाती है ।
ऐसा प्रतीत होता है कि स्टेज पर पीछे से मृत्यु को न प्रदर्शित करने के कई कारण हो सकते हैं जिनमें कि कलासम्बन्धी कारण मुख्य प्रतीत होते हैं । उन वस्तुओं की सूची को देखने से जिन्हें कि स्टेज पर प्रदर्शित करने की वर्जना की गई है यह स्पष्टतया प्रतीत होता है कि सुन्दरता को दृष्टि में रखकर ही पीछे से मृत्यु को दिखाने की वर्जना की गई है । परन्तु यदि मृत्यु को दिखाने की वर्जना की गई तो प्रवेशक" आदि के द्वारा मृत्यु की सूचना देने का नियम बनाया गया । महान् और प्रसिद्ध व्यक्तियों के सम्बन्ध में उसे भी रोका गया -- परन्तु इसका कारण नाटक के क्षेत्र को संकुचित करना नहीं था जैसा कि कल्पना की जाती है । इसके कारण भी कलात्मक ही मुख्यतया प्रतीत होते हैं ।
ऐसा प्रतीत होता है कि संस्कृत के नाटकों में मृत्यु के बिना ही करुण रस के नाटकों को विकसित करने का प्रयत्न किया गया । मृत्यु ही तो एकमात्र ऐसी वस्तु नहीं है जिसके कारण ट्रेजेडी बन सके । जिस प्रकार एक मनुष्य जीवित रहता हुआ भी ऐसी अवस्था में रह सकता है कि उससे मृत्यु अच्छी हो--- उसी प्रकार मृत्यु के विना भी ऐसी ट्रेजेडी बनाई जा सकती है जो मृत्यु से भी अधिक गम्भीर और दुःखान्त हो और जिसके सम्मुख मृत्यु का कुछ विशेष महत्व ही न रहे । ऐसे नाटकों को शेक्सपीयरी या पाश्चात्य ट्रेजेडी न कहा जा सके परन्तु यह ट्रेजेडी के अतिरिक्त अन्य कुछ नहीं हो सकती। हम इस बात को स्पष्ट कर चुके हैं कि करुण-रस के नाटक का अर्थ 'ट्रेजेडी' है, क्योंकि उसका स्थायिभाव शोक है । इस प्रकार के नाटकों का केन्द्र बिन्दु एक ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण विपत्ति होता है जिसका कि किसी भी प्रकार निराकरण नहीं किया जा सकता । यद्यपि इस प्रकार की विपत्ति का पर्यवसान मृत्यु में नहीं होता परन्तु फिर भी यह भय और करुणा को जागृत करती है और इसमें उन समस्त तत्वों का समावेश होता है जिनका कि एक पाश्चात्य ट्रेजेडी में होता है । इस प्रकार की अवस्थाएँ भी महान् शोचनीय अवस्थाओं को उत्पन्न करती हैं" यद्यपि उनमें मृत्यु का अंश नहीं होता । इस प्रकार की ट्रेजेडी में अति प्राकृत तत्व का समावेश किया जाता है । इस अति प्राकृत तत्व से किसी न किसी प्रकार अन्त में नायक और नायिका का सम्मिलन हो तो जाता है परन्तु उनके सम्मिलन के पश्चात् भी भय और करुणा की स्थिति पूर्वत् ही बनी रहती है । जिन नाटकों में नायक और नायिका की पृथक्ता ऐसी करुणाजनक परिस्थितियों द्वारा उत्पन्न होती है कि उनका सम्मिलन न केवल असम्भव होता है परन्तु उस सम्मिलन में किसी प्रकार का महत्व ही नहीं रह जाता ओर जिसे एकमात्र अति प्राकृत साधनों के द्वारा सम्भव बनाया जाता है वे ट्रेजेडी होते हैं क्योंकि उनका रस मुख्यतया शोक पर आधारित होता है, जो कि करुण की आत्मा है । हम " शकुन्तला " ओर "उत्तररामचरित " को ट्रेजेडी मानते हैं यद्यपि उनमें अति प्राकृत दंवीय साधनों द्वारा नायक और नायिका का मिलन अन्त में करा दिया गया है
इन दोनों नाटकों में नायकों ने नायिका के प्रति ऐसा सर्वथा अनपेक्षित और अमानुषीय है। दोनों की नायिकाएँ
अन्याय और क्रूरता प्रदर्शित की है जो कि भोली-भाली और पवित्र हैं। उनके साथ | में सगरिका निराश होकर आत्महत्या का करन प्रयत्न करती है परन्तु वह बचा ली जाती है। वह अपने गले में फांसी लगा लेती है और ज्यों ही मरने के लिए उसत होती है त्यों ही उसको बचा लिया जाता हूँ । "मृच्छकटिक" नाटक में पुष्पकण्ड उदयान में शकार वसन्तसेना का गला घोंट देता है और जब वह यह समझता है कि वह मर गई है तब वह उसके शरीर को पत्तों से ढक कर चला जाता है । पीछे वसन्तसेना पुनर्जीवित हो जाती है । ऐसा प्रतीत होता है कि स्टेज पर पीछे से मृत्यु को न प्रदर्शित करने के कई कारण हो सकते हैं जिनमें कि कलासम्बन्धी कारण मुख्य प्रतीत होते हैं । उन वस्तुओं की सूची को देखने से जिन्हें कि स्टेज पर प्रदर्शित करने की वर्जना की गई है यह स्पष्टतया प्रतीत होता है कि सुन्दरता को दृष्टि में रखकर ही पीछे से मृत्यु को दिखाने की वर्जना की गई है । परन्तु यदि मृत्यु को दिखाने की वर्जना की गई तो प्रवेशक" आदि के द्वारा मृत्यु की सूचना देने का नियम बनाया गया । महान् और प्रसिद्ध व्यक्तियों के सम्बन्ध में उसे भी रोका गया -- परन्तु इसका कारण नाटक के क्षेत्र को संकुचित करना नहीं था जैसा कि कल्पना की जाती है । इसके कारण भी कलात्मक ही मुख्यतया प्रतीत होते हैं । ऐसा प्रतीत होता है कि संस्कृत के नाटकों में मृत्यु के बिना ही करुण रस के नाटकों को विकसित करने का प्रयत्न किया गया । मृत्यु ही तो एकमात्र ऐसी वस्तु नहीं है जिसके कारण ट्रेजेडी बन सके । जिस प्रकार एक मनुष्य जीवित रहता हुआ भी ऐसी अवस्था में रह सकता है कि उससे मृत्यु अच्छी हो--- उसी प्रकार मृत्यु के विना भी ऐसी ट्रेजेडी बनाई जा सकती है जो मृत्यु से भी अधिक गम्भीर और दुःखान्त हो और जिसके सम्मुख मृत्यु का कुछ विशेष महत्व ही न रहे । ऐसे नाटकों को शेक्सपीयरी या पाश्चात्य ट्रेजेडी न कहा जा सके परन्तु यह ट्रेजेडी के अतिरिक्त अन्य कुछ नहीं हो सकती। हम इस बात को स्पष्ट कर चुके हैं कि करुण-रस के नाटक का अर्थ 'ट्रेजेडी' है, क्योंकि उसका स्थायिभाव शोक है । इस प्रकार के नाटकों का केन्द्र बिन्दु एक ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण विपत्ति होता है जिसका कि किसी भी प्रकार निराकरण नहीं किया जा सकता । यद्यपि इस प्रकार की विपत्ति का पर्यवसान मृत्यु में नहीं होता परन्तु फिर भी यह भय और करुणा को जागृत करती है और इसमें उन समस्त तत्वों का समावेश होता है जिनका कि एक पाश्चात्य ट्रेजेडी में होता है । इस प्रकार की अवस्थाएँ भी महान् शोचनीय अवस्थाओं को उत्पन्न करती हैं" यद्यपि उनमें मृत्यु का अंश नहीं होता । इस प्रकार की ट्रेजेडी में अति प्राकृत तत्व का समावेश किया जाता है । इस अति प्राकृत तत्व से किसी न किसी प्रकार अन्त में नायक और नायिका का सम्मिलन हो तो जाता है परन्तु उनके सम्मिलन के पश्चात् भी भय और करुणा की स्थिति पूर्वत् ही बनी रहती है । जिन नाटकों में नायक और नायिका की पृथक्ता ऐसी करुणाजनक परिस्थितियों द्वारा उत्पन्न होती है कि उनका सम्मिलन न केवल असम्भव होता है परन्तु उस सम्मिलन में किसी प्रकार का महत्व ही नहीं रह जाता ओर जिसे एकमात्र अति प्राकृत साधनों के द्वारा सम्भव बनाया जाता है वे ट्रेजेडी होते हैं क्योंकि उनका रस मुख्यतया शोक पर आधारित होता है, जो कि करुण की आत्मा है । हम " शकुन्तला " ओर "उत्तररामचरित " को ट्रेजेडी मानते हैं यद्यपि उनमें अति प्राकृत दंवीय साधनों द्वारा नायक और नायिका का मिलन अन्त में करा दिया गया है इन दोनों नाटकों में नायकों ने नायिका के प्रति ऐसा सर्वथा अनपेक्षित और अमानुषीय है। दोनों की नायिकाएँ अन्याय और क्रूरता प्रदर्शित की है जो कि भोली-भाली और पवित्र हैं। उनके साथ |
तुर्की के 8 की कहरामनमारस Turkoglu जिले में स्थापित। 22 अक्टूबर 2017 की भागीदारी के साथ लॉजिस्टिक्स सेंटर, ट्रांसपोर्ट मैरीटाइम और संचार मंत्री अहमत अर्सलान को सेवा में रखा गया था।
कहरमनमरास उप माहिर Governorनाल, कहरमनमारास के गवर्नर वहदतीन ofज़कान, TCDD के जनरल डायरेक्टर İsa Apaydınमहाप्रबंधक वेसी कर्ट, महानगर के मेयर फतह मेहमत एरको, रेलवे और नागरिकों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।
इसके अलावा, अर्सलान ने कहा, "हम यूरोप के छठे हाई-स्पीड ट्रेन ऑपरेटर बन गए हैं। यह हमारा गौरव है। हम इससे संतुष्ट नहीं हैं। 5 हजार किलोमीटर लाइन पर हमारा काम जारी है। हम पुनर्जनन, विद्युतीकरण, सिग्नलाइजेशन पर भी काम कर रहे हैं। इस लिहाज से हम 2 हजार 505 सिग्नल वाली लाइनों की संख्या बढ़ाकर 5 हजार 462 किलोमीटर करेंगे।' उसने कहा।
कहरमनारस के सांसद माहिर उनल ने कहा कि कहरानमरस एक ऐसा केंद्र बन गया है, जहां सभी सड़कें चौराहे हैं।
TCDD महाप्रबंधक İsa Apaydın 805 की वार्षिक क्षमता 1.9 मिलियन टन है।
यह समारोह केंद्र से रवाना होने वाली पहली मालगाड़ी के साथ समाप्त हुआ।
जैसा कि ज्ञात है, जब सभी 21 लॉजिस्टिक्स केंद्रों ने तुर्की को एशियाई और यूरोपीय महाद्वीपों के बीच एक लॉजिस्टिक्स बेस बनाने की योजना बनाई थी, तो 35,6 मिलियन वर्ग मीटर खुली जगह, स्टॉक क्षेत्र, 12,8 मिलियन टन अतिरिक्त परिवहन अवसर तुर्की को प्रदान किए जाएंगे। लॉजिस्टिक्स क्षेत्र। कंटेनर स्टॉक और हैंडलिंग स्पेस जोड़ा जाएगा।
| तुर्की के आठ की कहरामनमारस Turkoglu जिले में स्थापित। बाईस अक्टूबर दो हज़ार सत्रह की भागीदारी के साथ लॉजिस्टिक्स सेंटर, ट्रांसपोर्ट मैरीटाइम और संचार मंत्री अहमत अर्सलान को सेवा में रखा गया था। कहरमनमरास उप माहिर Governorनाल, कहरमनमारास के गवर्नर वहदतीन ofज़कान, TCDD के जनरल डायरेक्टर İsa Apaydınमहाप्रबंधक वेसी कर्ट, महानगर के मेयर फतह मेहमत एरको, रेलवे और नागरिकों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। इसके अलावा, अर्सलान ने कहा, "हम यूरोप के छठे हाई-स्पीड ट्रेन ऑपरेटर बन गए हैं। यह हमारा गौरव है। हम इससे संतुष्ट नहीं हैं। पाँच हजार किलोमीटर लाइन पर हमारा काम जारी है। हम पुनर्जनन, विद्युतीकरण, सिग्नलाइजेशन पर भी काम कर रहे हैं। इस लिहाज से हम दो हजार पाँच सौ पाँच सिग्नल वाली लाइनों की संख्या बढ़ाकर पाँच हजार चार सौ बासठ किलोग्राममीटर करेंगे।' उसने कहा। कहरमनारस के सांसद माहिर उनल ने कहा कि कहरानमरस एक ऐसा केंद्र बन गया है, जहां सभी सड़कें चौराहे हैं। TCDD महाप्रबंधक İsa Apaydın आठ सौ पाँच की वार्षिक क्षमता एक.नौ मिलियन टन है। यह समारोह केंद्र से रवाना होने वाली पहली मालगाड़ी के साथ समाप्त हुआ। जैसा कि ज्ञात है, जब सभी इक्कीस लॉजिस्टिक्स केंद्रों ने तुर्की को एशियाई और यूरोपीय महाद्वीपों के बीच एक लॉजिस्टिक्स बेस बनाने की योजना बनाई थी, तो पैंतीस,छः मिलियन वर्ग मीटर खुली जगह, स्टॉक क्षेत्र, बारह,आठ मिलियन टन अतिरिक्त परिवहन अवसर तुर्की को प्रदान किए जाएंगे। लॉजिस्टिक्स क्षेत्र। कंटेनर स्टॉक और हैंडलिंग स्पेस जोड़ा जाएगा। |
3 फिर बादशाह ने मुड़कर रब के घर के सामने खड़ी इसराईल की पूरी जमात की तरफ़ रुख़ किया। उसने उन्हें बरकत देकर कहा,
12 फिर सुलेमान ने इसराईल की पूरी जमात के देखते देखते रब की क़ुरबानगाह के सामने खड़े होकर अपने हाथ आसमान की तरफ़ उठाए। 13 उसने इस मौक़े के लिए पीतल का एक चबूतरा बनवाकर उसे बैरूनी सहन के बीच में रखवा दिया था। चबूतरा साढ़े 7 फ़ुट लंबा, साढ़े 7 फ़ुट चौड़ा और साढ़े 4 फ़ुट ऊँचा था। अब सुलेमान उस पर चढ़कर पूरी जमात के देखते देखते झुक गया। अपने हाथों को आसमान की तरफ़ उठाकर 14 उसने दुआ की,
"ऐ रब इसराईल के ख़ुदा, तुझ जैसा कोई ख़ुदा नहीं है, न आसमान और न ज़मीन पर। तू अपना वह अहद क़ायम रखता है जिसे तूने अपनी क़ौम के साथ बाँधा है और अपनी मेहरबानी उन सब पर ज़ाहिर करता है जो पूरे दिल से तेरी राह पर चलते हैं। 15 तूने अपने ख़ादिम दाऊद से किया हुआ वादा पूरा किया है। जो बात तूने अपने मुँह से मेरे बाप से की वह तूने अपने हाथ से आज ही पूरी की है। 16 ऐ रब इसराईल के ख़ुदा, अब अपनी दूसरी बात भी पूरी कर जो तूने अपने ख़ादिम दाऊद से की थी। क्योंकि तूने मेरे बाप से वादा किया था, 'अगर तेरी औलाद तेरी तरह अपने चाल-चलन पर ध्यान देकर मेरी शरीअत के मुताबिक़ मेरे हुज़ूर चलती रहे तो इसराईल पर उस की हुकूमत हमेशा तक क़ायम रहेगी।' 17 ऐ रब इसराईल के ख़ुदा, अब बराहे-करम अपना यह वादा पूरा कर जो तूने अपने ख़ादिम दाऊद से किया है।
18 लेकिन क्या अल्लाह वाक़ई ज़मीन पर इनसान के दरमियान सुकूनत करेगा? नहीं, तू तो बुलंदतरीन आसमान में भी समा नहीं सकता! तो फिर यह मकान जो मैंने बनाया है किस तरह तेरी सुकूनतगाह बन सकता है? 19 ऐ रब मेरे ख़ुदा, तो भी अपने ख़ादिम की दुआ और इल्तिजा सुन जब मैं तेरे हुज़ूर पुकारते हुए इलतमास करता हूँ 20 कि बराहे-करम दिन-रात इस इमारत की निगरानी कर! क्योंकि यह वह जगह है जिसके बारे में तूने ख़ुद फ़रमाया, 'यहाँ मेरा नाम सुकूनत करेगा।' चुनाँचे अपने ख़ादिम की गुज़ारिश सुन जो मैं इस मक़ाम की तरफ़ रुख़ किए हुए करता हूँ। 21 जब हम इस मक़ाम की तरफ़ रुख़ करके दुआ करें तो अपने ख़ादिम और अपनी क़ौम की इल्तिजाएँ सुन। आसमान पर अपने तख़्त से हमारी सुन। और जब सुनेगा तो हमारे गुनाहों को मुआफ़ कर!
22 अगर किसी पर इलज़ाम लगाया जाए और उसे यहाँ तेरी क़ुरबानगाह के सामने लाया जाए ताकि हलफ़ उठाकर वादा करे कि मैं बेक़ुसूर हूँ 23 तो बराहे-करम आसमान पर से सुनकर अपने ख़ादिमों का इनसाफ़ कर। क़ुसूरवार को सज़ा देकर उसके अपने सर पर वह कुछ आने दे जो उससे सरज़द हुआ है, और बेक़ुसूर को बेइलज़ाम क़रार दे और उस की रास्तबाज़ी का बदला दे।
24 हो सकता है किसी वक़्त तेरी क़ौम इसराईल तेरा गुनाह करे और नतीजे में दुश्मन के सामने शिकस्त खाए। अगर इसराईली आख़िरकार तेरे पास लौट आएँ और तेरे नाम की तमजीद करके यहाँ इस घर में तेरे हुज़ूर दुआ और इलतमास करें 25 तो आसमान पर से उनकी फ़रियाद सुन लेना। अपनी क़ौम इसराईल का गुनाह मुआफ़ करके उन्हें दुबारा उस मुल्क में वापस लाना जो तूने उन्हें और उनके बापदादा को दे दिया था।
26 हो सकता है इसराईली तेरा इतना संगीन गुनाह करें कि काल पड़े और बड़ी देर तक बारिश न बरसे। अगर वह आख़िरकार इस घर की तरफ़ रुख़ करके तेरे नाम की तमजीद करें और तेरी सज़ा के बाइस अपना गुनाह छोड़कर लौट आएँ 27 तो आसमान पर से उनकी फ़रियाद सुन लेना। अपने ख़ादिमों और अपनी क़ौम इसराईल को मुआफ़ कर, क्योंकि तू ही उन्हें अच्छी राह की तालीम देता है। तब उस मुल्क पर दुबारा बारिश बरसा दे जो तूने अपनी क़ौम को मीरास में दे दिया है।
28 हो सकता है इसराईल में काल पड़ जाए, अनाज की फ़सल किसी बीमारी, फफूँदी, टिड्डियों या कीड़ों से मुतअस्सिर हो जाए, या दुश्मन किसी शहर का मुहासरा करे। जो भी मुसीबत या बीमारी हो, 29 अगर कोई इसराईली या तेरी पूरी क़ौम उसका सबब जानकर अपने हाथों को इस घर की तरफ़ बढ़ाए और तुझसे इलतमास करे 30 तो आसमान पर अपने तख़्त से उनकी फ़रियाद सुन लेना। उन्हें मुआफ़ करके हर एक को उस की तमाम हरकतों का बदला दे, क्योंकि सिर्फ़ तू ही हर इनसान के दिल को जानता है। 31 फिर जितनी देर वह उस मुल्क में ज़िंदगी गुज़ारेंगे जो तूने हमारे बापदादा को दिया था उतनी देर वह तेरा ख़ौफ़ मानकर तेरी राहों पर चलते रहेंगे।
32 आइंदा परदेसी भी तेरे अज़ीम नाम, तेरी बड़ी क़ुदरत और तेरे ज़बरदस्त कामों के सबब से आएँगे और इस घर की तरफ़ रुख़ करके दुआ करेंगे। अगरचे वह तेरी क़ौम इसराईल के नहीं होंगे 33 तो भी आसमान पर से उनकी फ़रियाद सुन लेना। जो भी दरख़ास्त वह पेश करें वह पूरी करना ताकि दुनिया की तमाम अक़वाम तेरा नाम जानकर तेरी क़ौम इसराईल की तरह ही तेरा ख़ौफ़ मानें और जान लें कि जो इमारत मैंने तामीर की है उस पर तेरे ही नाम का ठप्पा लगा है।
34 हो सकता है तेरी क़ौम के मर्द तेरी हिदायत के मुताबिक़ अपने दुश्मन से लड़ने के लिए निकलें। अगर वह तेरे चुने हुए शहर और उस इमारत की तरफ़ रुख़ करके दुआ करें जो मैंने तेरे नाम के लिए तामीर की है 35 तो आसमान पर से उनकी दुआ और इलतमास सुनकर उनके हक़ में इनसाफ़ क़ायम रखना।
38 अगर वह ऐसा करके अपनी क़ैद के मुल्क में अपने पूरे दिलो-जान से दुबारा तेरी तरफ़ रुजू करें और तेरी तरफ़ से बापदादा को दिए गए मुल्क, तेरे चुने हुए शहर और उस इमारत की तरफ़ रुख़ करके दुआ करें जो मैंने तेरे नाम के लिए तामीर की है 39 तो आसमान पर अपने तख़्त से उनकी दुआ और इलतमास सुन लेना। उनके हक़ में इनसाफ़ क़ायम करना, और अपनी क़ौम के गुनाहों को मुआफ़ कर देना। 40 ऐ मेरे ख़ुदा, तेरी आँखें और तेरे कान उन दुआओं के लिए खुले रहें जो इस जगह पर की जाती हैं।
| तीन फिर बादशाह ने मुड़कर रब के घर के सामने खड़ी इसराईल की पूरी जमात की तरफ़ रुख़ किया। उसने उन्हें बरकत देकर कहा, बारह फिर सुलेमान ने इसराईल की पूरी जमात के देखते देखते रब की क़ुरबानगाह के सामने खड़े होकर अपने हाथ आसमान की तरफ़ उठाए। तेरह उसने इस मौक़े के लिए पीतल का एक चबूतरा बनवाकर उसे बैरूनी सहन के बीच में रखवा दिया था। चबूतरा साढ़े सात फ़ुट लंबा, साढ़े सात फ़ुट चौड़ा और साढ़े चार फ़ुट ऊँचा था। अब सुलेमान उस पर चढ़कर पूरी जमात के देखते देखते झुक गया। अपने हाथों को आसमान की तरफ़ उठाकर चौदह उसने दुआ की, "ऐ रब इसराईल के ख़ुदा, तुझ जैसा कोई ख़ुदा नहीं है, न आसमान और न ज़मीन पर। तू अपना वह अहद क़ायम रखता है जिसे तूने अपनी क़ौम के साथ बाँधा है और अपनी मेहरबानी उन सब पर ज़ाहिर करता है जो पूरे दिल से तेरी राह पर चलते हैं। पंद्रह तूने अपने ख़ादिम दाऊद से किया हुआ वादा पूरा किया है। जो बात तूने अपने मुँह से मेरे बाप से की वह तूने अपने हाथ से आज ही पूरी की है। सोलह ऐ रब इसराईल के ख़ुदा, अब अपनी दूसरी बात भी पूरी कर जो तूने अपने ख़ादिम दाऊद से की थी। क्योंकि तूने मेरे बाप से वादा किया था, 'अगर तेरी औलाद तेरी तरह अपने चाल-चलन पर ध्यान देकर मेरी शरीअत के मुताबिक़ मेरे हुज़ूर चलती रहे तो इसराईल पर उस की हुकूमत हमेशा तक क़ायम रहेगी।' सत्रह ऐ रब इसराईल के ख़ुदा, अब बराहे-करम अपना यह वादा पूरा कर जो तूने अपने ख़ादिम दाऊद से किया है। अट्ठारह लेकिन क्या अल्लाह वाक़ई ज़मीन पर इनसान के दरमियान सुकूनत करेगा? नहीं, तू तो बुलंदतरीन आसमान में भी समा नहीं सकता! तो फिर यह मकान जो मैंने बनाया है किस तरह तेरी सुकूनतगाह बन सकता है? उन्नीस ऐ रब मेरे ख़ुदा, तो भी अपने ख़ादिम की दुआ और इल्तिजा सुन जब मैं तेरे हुज़ूर पुकारते हुए इलतमास करता हूँ बीस कि बराहे-करम दिन-रात इस इमारत की निगरानी कर! क्योंकि यह वह जगह है जिसके बारे में तूने ख़ुद फ़रमाया, 'यहाँ मेरा नाम सुकूनत करेगा।' चुनाँचे अपने ख़ादिम की गुज़ारिश सुन जो मैं इस मक़ाम की तरफ़ रुख़ किए हुए करता हूँ। इक्कीस जब हम इस मक़ाम की तरफ़ रुख़ करके दुआ करें तो अपने ख़ादिम और अपनी क़ौम की इल्तिजाएँ सुन। आसमान पर अपने तख़्त से हमारी सुन। और जब सुनेगा तो हमारे गुनाहों को मुआफ़ कर! बाईस अगर किसी पर इलज़ाम लगाया जाए और उसे यहाँ तेरी क़ुरबानगाह के सामने लाया जाए ताकि हलफ़ उठाकर वादा करे कि मैं बेक़ुसूर हूँ तेईस तो बराहे-करम आसमान पर से सुनकर अपने ख़ादिमों का इनसाफ़ कर। क़ुसूरवार को सज़ा देकर उसके अपने सर पर वह कुछ आने दे जो उससे सरज़द हुआ है, और बेक़ुसूर को बेइलज़ाम क़रार दे और उस की रास्तबाज़ी का बदला दे। चौबीस हो सकता है किसी वक़्त तेरी क़ौम इसराईल तेरा गुनाह करे और नतीजे में दुश्मन के सामने शिकस्त खाए। अगर इसराईली आख़िरकार तेरे पास लौट आएँ और तेरे नाम की तमजीद करके यहाँ इस घर में तेरे हुज़ूर दुआ और इलतमास करें पच्चीस तो आसमान पर से उनकी फ़रियाद सुन लेना। अपनी क़ौम इसराईल का गुनाह मुआफ़ करके उन्हें दुबारा उस मुल्क में वापस लाना जो तूने उन्हें और उनके बापदादा को दे दिया था। छब्बीस हो सकता है इसराईली तेरा इतना संगीन गुनाह करें कि काल पड़े और बड़ी देर तक बारिश न बरसे। अगर वह आख़िरकार इस घर की तरफ़ रुख़ करके तेरे नाम की तमजीद करें और तेरी सज़ा के बाइस अपना गुनाह छोड़कर लौट आएँ सत्ताईस तो आसमान पर से उनकी फ़रियाद सुन लेना। अपने ख़ादिमों और अपनी क़ौम इसराईल को मुआफ़ कर, क्योंकि तू ही उन्हें अच्छी राह की तालीम देता है। तब उस मुल्क पर दुबारा बारिश बरसा दे जो तूने अपनी क़ौम को मीरास में दे दिया है। अट्ठाईस हो सकता है इसराईल में काल पड़ जाए, अनाज की फ़सल किसी बीमारी, फफूँदी, टिड्डियों या कीड़ों से मुतअस्सिर हो जाए, या दुश्मन किसी शहर का मुहासरा करे। जो भी मुसीबत या बीमारी हो, उनतीस अगर कोई इसराईली या तेरी पूरी क़ौम उसका सबब जानकर अपने हाथों को इस घर की तरफ़ बढ़ाए और तुझसे इलतमास करे तीस तो आसमान पर अपने तख़्त से उनकी फ़रियाद सुन लेना। उन्हें मुआफ़ करके हर एक को उस की तमाम हरकतों का बदला दे, क्योंकि सिर्फ़ तू ही हर इनसान के दिल को जानता है। इकतीस फिर जितनी देर वह उस मुल्क में ज़िंदगी गुज़ारेंगे जो तूने हमारे बापदादा को दिया था उतनी देर वह तेरा ख़ौफ़ मानकर तेरी राहों पर चलते रहेंगे। बत्तीस आइंदा परदेसी भी तेरे अज़ीम नाम, तेरी बड़ी क़ुदरत और तेरे ज़बरदस्त कामों के सबब से आएँगे और इस घर की तरफ़ रुख़ करके दुआ करेंगे। अगरचे वह तेरी क़ौम इसराईल के नहीं होंगे तैंतीस तो भी आसमान पर से उनकी फ़रियाद सुन लेना। जो भी दरख़ास्त वह पेश करें वह पूरी करना ताकि दुनिया की तमाम अक़वाम तेरा नाम जानकर तेरी क़ौम इसराईल की तरह ही तेरा ख़ौफ़ मानें और जान लें कि जो इमारत मैंने तामीर की है उस पर तेरे ही नाम का ठप्पा लगा है। चौंतीस हो सकता है तेरी क़ौम के मर्द तेरी हिदायत के मुताबिक़ अपने दुश्मन से लड़ने के लिए निकलें। अगर वह तेरे चुने हुए शहर और उस इमारत की तरफ़ रुख़ करके दुआ करें जो मैंने तेरे नाम के लिए तामीर की है पैंतीस तो आसमान पर से उनकी दुआ और इलतमास सुनकर उनके हक़ में इनसाफ़ क़ायम रखना। अड़तीस अगर वह ऐसा करके अपनी क़ैद के मुल्क में अपने पूरे दिलो-जान से दुबारा तेरी तरफ़ रुजू करें और तेरी तरफ़ से बापदादा को दिए गए मुल्क, तेरे चुने हुए शहर और उस इमारत की तरफ़ रुख़ करके दुआ करें जो मैंने तेरे नाम के लिए तामीर की है उनतालीस तो आसमान पर अपने तख़्त से उनकी दुआ और इलतमास सुन लेना। उनके हक़ में इनसाफ़ क़ायम करना, और अपनी क़ौम के गुनाहों को मुआफ़ कर देना। चालीस ऐ मेरे ख़ुदा, तेरी आँखें और तेरे कान उन दुआओं के लिए खुले रहें जो इस जगह पर की जाती हैं। |
अमेरिकी मीडिया ने परीक्षण पायलट, पांचवीं पीढ़ी के एफ -22 रैप्टर लड़ाकू स्क्वाड्रन कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल रैंडी गॉर्डन के व्याख्यान पर सामग्री प्रकाशित की। मैसाचुसेट्स यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी में निजी पायलट ग्राउंड स्कूल के छात्रों को 2019 में व्याख्यान दिया गया था।
अमेरिकी पायलट F-22 फाइटर को पायलट करने की विशेषताओं के बारे में बात करता है, यह देखते हुए कि फाइटर के एयरबोर्न सिस्टम हवा में जटिल आंकड़े प्रदर्शन करते हुए भी पायलट पर लोड को कम करने के लिए सब कुछ करते हैं।
रैंडी गॉर्डन, जिनके अमेरिकी मीडिया में व्याख्यान को उन लोगों के लिए भी बहुत सुलभ कहा जाता था, जो नई पीढ़ी के सेनानियों और उनकी क्षमताओं से सतही रूप से परिचित हैंः
अल्ट्रासोनिक उड़ान के लिए पायलट और ऑन-बोर्ड सिस्टम से तुरंत प्रतिक्रिया की आवश्यकता होती है। पायलट की किसी भी त्रुटि, उड़ान नियंत्रण प्रणाली के किसी भी आकस्मिक स्पर्श से गंभीर परिणाम हो सकते हैं। पायलट सावधानीपूर्वक निगरानी करते हैं कि उनके हाथ नियंत्रण इकाइयों के आकस्मिक स्पर्श की अनुमति नहीं दे सकते हैं।
यह ध्यान दिया जाता है कि आकस्मिक स्पर्श के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए "कम संवेदनशीलता" विधि का उपयोग किया जाता है। उदाहरण के लिए, जॉयस्टिक में लगभग 1 सेमी की "गैप" प्रतिक्रिया होती है - यदि उड़ान नियंत्रण प्रणाली कम विचलन करती है, तो यह पायलट के कार्यों पर प्रतिक्रिया नहीं करेगी। पहली बार, अमेरिकी वायु सेना ने एफ -16 लड़ाकू विमानों पर इस दृष्टिकोण का उपयोग करने का निर्णय लिया।
अमेरिकी वायु सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल रैंडी गॉर्डन का कहना है कि एफ -22 में "स्वचालन का एक बड़ा स्तर" है।
अमेरिकी अधिकारीः
एयर कॉम्बैट मोड में, आप कंट्रोल तत्व का बटन दबाते हैं और यह उड़ान की गति को ठीक करता है। यदि आप नियंत्रण से अपना हाथ हटाते हैं तो भी यह गति बनी रहेगी।
एक परीक्षण पायलट दर्शकों को बताता है कि कैसे गिराए जाने पर एफ -22 आंदोलन की क्षतिपूर्ति करता है। विमान JDAM प्रणाली के साथ गोला बारूद। रैंडी गॉर्डन बताते हैं कि एफ -22 हवाई जहाज-ड्रॉप बम प्रणाली के गुरुत्वाकर्षण के केंद्र में बदलाव का मुकाबला करने के लिए एक स्वचालित ईंधन विस्थापन सिद्धांत का उपयोग करता है। परीक्षण पायलट का कहना है कि पायलट इस प्रक्रिया को नियंत्रित नहीं करता है, और गुरुत्वाकर्षण केंद्र के विस्थापन के लिए क्षतिपूर्ति करने के लिए टैंक में आवश्यक मात्रा में ईंधन डाला जाता है।
वीडियो हवा में ईंधन भरने के दौरान पाठ्यक्रम के स्वचालन को नोट करता है (सभी आवश्यक गति बनाए रखने के बारे में एक ही बात):
हवा टैंकर के पीछे बेहतर हैंडलिंग प्रदान करने के लिए हवा में ईंधन भरने के लिए एक मोड है। स्वचालन को सावधानीपूर्वक "मॉनिटर" करता है ताकि पायलट पर लोड को कम करने के लिए एक साथ कई चीजों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता के बिंदु सेः क्षैतिज, ऊर्ध्वाधर और पार्श्व गति बनाए रखें, ईंधन भरने वाले बोर्ड के साथ डेटा का आदान-प्रदान करें।
रैंडी गॉर्डन बात करता है कि कैसे स्वचालित प्रणाली खुद को प्रस्थान के लिए विमान तैयार करती है। यह उस समय पायलट के काम को भी सुविधाजनक बनाता है जब F-22 के पास जाना शुरू होता है।
अंग्रेजी में व्याख्यान का पूर्ण संस्करणः
| अमेरिकी मीडिया ने परीक्षण पायलट, पांचवीं पीढ़ी के एफ -बाईस रैप्टर लड़ाकू स्क्वाड्रन कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल रैंडी गॉर्डन के व्याख्यान पर सामग्री प्रकाशित की। मैसाचुसेट्स यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी में निजी पायलट ग्राउंड स्कूल के छात्रों को दो हज़ार उन्नीस में व्याख्यान दिया गया था। अमेरिकी पायलट F-बाईस फाइटर को पायलट करने की विशेषताओं के बारे में बात करता है, यह देखते हुए कि फाइटर के एयरबोर्न सिस्टम हवा में जटिल आंकड़े प्रदर्शन करते हुए भी पायलट पर लोड को कम करने के लिए सब कुछ करते हैं। रैंडी गॉर्डन, जिनके अमेरिकी मीडिया में व्याख्यान को उन लोगों के लिए भी बहुत सुलभ कहा जाता था, जो नई पीढ़ी के सेनानियों और उनकी क्षमताओं से सतही रूप से परिचित हैंः अल्ट्रासोनिक उड़ान के लिए पायलट और ऑन-बोर्ड सिस्टम से तुरंत प्रतिक्रिया की आवश्यकता होती है। पायलट की किसी भी त्रुटि, उड़ान नियंत्रण प्रणाली के किसी भी आकस्मिक स्पर्श से गंभीर परिणाम हो सकते हैं। पायलट सावधानीपूर्वक निगरानी करते हैं कि उनके हाथ नियंत्रण इकाइयों के आकस्मिक स्पर्श की अनुमति नहीं दे सकते हैं। यह ध्यान दिया जाता है कि आकस्मिक स्पर्श के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए "कम संवेदनशीलता" विधि का उपयोग किया जाता है। उदाहरण के लिए, जॉयस्टिक में लगभग एक सेमी की "गैप" प्रतिक्रिया होती है - यदि उड़ान नियंत्रण प्रणाली कम विचलन करती है, तो यह पायलट के कार्यों पर प्रतिक्रिया नहीं करेगी। पहली बार, अमेरिकी वायु सेना ने एफ -सोलह लड़ाकू विमानों पर इस दृष्टिकोण का उपयोग करने का निर्णय लिया। अमेरिकी वायु सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल रैंडी गॉर्डन का कहना है कि एफ -बाईस में "स्वचालन का एक बड़ा स्तर" है। अमेरिकी अधिकारीः एयर कॉम्बैट मोड में, आप कंट्रोल तत्व का बटन दबाते हैं और यह उड़ान की गति को ठीक करता है। यदि आप नियंत्रण से अपना हाथ हटाते हैं तो भी यह गति बनी रहेगी। एक परीक्षण पायलट दर्शकों को बताता है कि कैसे गिराए जाने पर एफ -बाईस आंदोलन की क्षतिपूर्ति करता है। विमान JDAM प्रणाली के साथ गोला बारूद। रैंडी गॉर्डन बताते हैं कि एफ -बाईस हवाई जहाज-ड्रॉप बम प्रणाली के गुरुत्वाकर्षण के केंद्र में बदलाव का मुकाबला करने के लिए एक स्वचालित ईंधन विस्थापन सिद्धांत का उपयोग करता है। परीक्षण पायलट का कहना है कि पायलट इस प्रक्रिया को नियंत्रित नहीं करता है, और गुरुत्वाकर्षण केंद्र के विस्थापन के लिए क्षतिपूर्ति करने के लिए टैंक में आवश्यक मात्रा में ईंधन डाला जाता है। वीडियो हवा में ईंधन भरने के दौरान पाठ्यक्रम के स्वचालन को नोट करता है : हवा टैंकर के पीछे बेहतर हैंडलिंग प्रदान करने के लिए हवा में ईंधन भरने के लिए एक मोड है। स्वचालन को सावधानीपूर्वक "मॉनिटर" करता है ताकि पायलट पर लोड को कम करने के लिए एक साथ कई चीजों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता के बिंदु सेः क्षैतिज, ऊर्ध्वाधर और पार्श्व गति बनाए रखें, ईंधन भरने वाले बोर्ड के साथ डेटा का आदान-प्रदान करें। रैंडी गॉर्डन बात करता है कि कैसे स्वचालित प्रणाली खुद को प्रस्थान के लिए विमान तैयार करती है। यह उस समय पायलट के काम को भी सुविधाजनक बनाता है जब F-बाईस के पास जाना शुरू होता है। अंग्रेजी में व्याख्यान का पूर्ण संस्करणः |
मोंकार ध्वनिसार, द्वादशांग वाणी विमल । नमों भक्ति उर धार, ज्ञान करै जड़ता हरै ॥ पहलो ग्राचारांग वखानो, पद अष्टादश सहस प्रमानों । दुजो सूत्रकृतं अभिलापं, पद छत्तीस सहस गुरु भापं ।। तीजो ठाना अंग सुजानं, सहस बयालिस पद सरधानं । चौथो संमवायांग निहारं, चौंसठ सहस लाख इक धारम् ॥ पंचम व्याख्या प्रगपति दरसं, दोय लाख अट्ठाइस सहसं । छट्ठो ज्ञातृकया विसतारं, पांच लाख छप्पन हज्जारं ।। सप्तम उपासकाव्ययनंगं, सत्तर सहस ग्यारलख भंगं ।
कृतं दस ईस, सहस अठाइस लाख तेईस ।। नवम अनुत्तरदश सुविशालं, लाख वानव सहस चवालं । दशम प्रश्न व्याकरण विचारं, लाख तिरानव सोल हजारं ।। ग्यारम सूत्रविपाक मु भाखं, एक कोड़ चौरासी लाखं । चार कोड़ि अरु पंद्रह लाख, दो हजार सव पद गुरुशा ।। द्वादश दृष्टिवाद पनभेदं, इकसी आठ कोड़ि पन वेदं । अड़सठ लाख सहस छप्पन हैं, सहित पंचपद मिथ्या हन हैं। इक सौ बारह कोड़ि बखानो, लाख तिरासी ऊपर जानो ठावन सहस पंच अधिकाने, द्वादश अंग सर्वपद माने । कोड़ि इकावन श्राठ हि नाम, सहस चुरासी छह सो भाखं साढे इफीस इलोक बताये, एक एक पद के ये गाये ।। | मोंकार ध्वनिसार, द्वादशांग वाणी विमल । नमों भक्ति उर धार, ज्ञान करै जड़ता हरै ॥ पहलो ग्राचारांग वखानो, पद अष्टादश सहस प्रमानों । दुजो सूत्रकृतं अभिलापं, पद छत्तीस सहस गुरु भापं ।। तीजो ठाना अंग सुजानं, सहस बयालिस पद सरधानं । चौथो संमवायांग निहारं, चौंसठ सहस लाख इक धारम् ॥ पंचम व्याख्या प्रगपति दरसं, दोय लाख अट्ठाइस सहसं । छट्ठो ज्ञातृकया विसतारं, पांच लाख छप्पन हज्जारं ।। सप्तम उपासकाव्ययनंगं, सत्तर सहस ग्यारलख भंगं । कृतं दस ईस, सहस अठाइस लाख तेईस ।। नवम अनुत्तरदश सुविशालं, लाख वानव सहस चवालं । दशम प्रश्न व्याकरण विचारं, लाख तिरानव सोल हजारं ।। ग्यारम सूत्रविपाक मु भाखं, एक कोड़ चौरासी लाखं । चार कोड़ि अरु पंद्रह लाख, दो हजार सव पद गुरुशा ।। द्वादश दृष्टिवाद पनभेदं, इकसी आठ कोड़ि पन वेदं । अड़सठ लाख सहस छप्पन हैं, सहित पंचपद मिथ्या हन हैं। इक सौ बारह कोड़ि बखानो, लाख तिरासी ऊपर जानो ठावन सहस पंच अधिकाने, द्वादश अंग सर्वपद माने । कोड़ि इकावन श्राठ हि नाम, सहस चुरासी छह सो भाखं साढे इफीस इलोक बताये, एक एक पद के ये गाये ।। |
केकड़े लाठी एक लंबे समय पहले अलमारियों की दुकान पर प्रकट हुए और तुरंत बहुत लोकप्रिय हो गया। उनमें से भोजन की एक बड़ी राशि खाना बना सकते हैं, यह सब आपकी कल्पना पर निर्भर करता है। लेकिन एक बात निश्चित हैः एक सलाद केकड़ा चावल के साथ अपने पसंदीदा खाद्य पदार्थों की एक सूची है निश्चित है। हर गृहिणी अपने अवयवों को जोड़कर एक विशेष तरीके से यह तैयार करता है। हमारे देश के कई निवासियों के बहुत शौकीन हैं केकड़ा सलाद। चावल, मक्का केकड़ा लाठी की असामान्य स्वाद, जो और अधिक स्वादिष्ट हो सकता है के साथ पूरी तरह गठबंधन?
कई परिवारों के लिए उत्सव की मेज पर वहाँ हमेशा इस सलाद है। चावल, केकड़ा लाठी, अंडे - सार्वजनिक उत्पादों किसी भी दुकान पर खरीदा जा सकता है। इसके तृप्ति पकवान के कारण जल्दी से मेहमान जो अप्रत्याशित रूप से आया था की भूख बुझाने, और आप कुछ और पकाने के लिए जरूरत नहीं होगी। तो अब इसकी तैयारी के लिए सीधे आगे बढ़ें। चावल के साथ केकड़ा सलाद निम्नलिखित सामग्री में शामिल हैंः
- चित्रा - 100 ग्राम;
- अंडे - 4 पीसी।
- मक्का - 1 बैंक;
- crabsticks - 200 ग्राम;
- मेयोनेज़।
अब हम वास्तव में इस व्यंजन पकाने के लिए कैसे को देखो। पहले हम चावल और अंडे खाना बनाना की जरूरत है। बस सुनिश्चित करें कि चावल भुरभुरा निकली हैं। केकड़े लाठी छोटे टुकड़ों में काट दिया जाना चाहिए। यह अंडे से शांत है और फिर उन्हें साथ ही साथ केकड़ा लाठी काटना पीछा किया जाता है। मकई के बाद से तरल निकास के लिए आवश्यक है। रिज़ ठंड होना चाहिए। और उसके बाद ही आप सभी अवयवों मिश्रण और मेयोनेज़ जोड़ सकते हैं। केकड़ा लाठी को धीरे मिक्स न फैल जाएं!
केकड़ा सलाद और चावल ताजा या मसालेदार ककड़ी के साथ पूरक किया जा सकता है, यह मूल पकवान दे देंगे। इसके अलावा, कुछ गृहिणियों मिर्च या जैतून जोड़ रहे हैं, यह पता चला है एक और अधिक विदेशी विकल्प (एक शौकिया के लिए) है। गर्मियों में, आप जड़ी बूटी या chives, जो आपके सलाद का स्वाद में विविधता लाने जाएगा जोड़ सकते हैं। कुछ ड्रेसिंग और मेयोनेज़ मलाई के बजाय प्रयोग किया जाता है के साथ प्रयोग कर रहे हैं। यहाँ, मैं सलाद की एक छोटी राशि है कि मलाई के साथ तैयार है कोशिश करने के लिए शुरू करने के लिए सलाह देने के लिए, और उसके बाद ही, यदि आप चाहें, यह सब मिला दें। एक और टिपः आप सलाद की एक बड़ी राशि तैयार करता है, तो कर दिया है और सभी को एक बार इस्तेमाल किया जा रहा है, यह फिर से भरना नहीं है नहीं जा रहे हैं, और फ्रिज में एक सील बंद कंटेनर में डाल दिया और परोसने से पहले ड्रेसिंग जोड़ें।
चावल के साथ केकड़ा सलाद - केकड़ा लाठी से तैयार किया जा सकता है कि एक भी पकवान। चलो एक और पर नजर डालते हैं असामान्य नुस्खा। इसे में, हम केकड़ा लाठी और पनीर मिश्रण होगा। तो, हम निम्नलिखित सामग्री की जरूरत हैः
- crabsticks - 250 ग्राम;
- टमाटर - 2 पीसी;।
- प्याज - 1 पीसी;।
अब हम खाना पकाने की प्रक्रिया के लिए बदल जाते हैं। मुख्य शर्त - सभी सामग्री बहुत बारीक कटी हुई किया जाना चाहिए। स्वाद के लिए नुस्खा जोड़ने के लिए, आप नींबू और जड़ी बूटियों का प्रयोग कर सकते हैं। आवश्यक मेयोनेज़ के साथ इस सलाद को भरने के लिए। आप मक्का के बहुत शौकीन हैं, तो आप यह यह नुस्खा में उपयोग कर सकते हैं। यहाँ आप यह भी प्रयोग करके अपनी खुद की सामग्री जोड़ सकते हैं।
चावल के साथ केकड़ा सलाद अपने परिवार के लिए पसंदीदा होना निश्चित है। और अब हर उत्सव मेज पर अन्य व्यंजन के बीच एक योग्य जगह पर कब्जा होगा।
| केकड़े लाठी एक लंबे समय पहले अलमारियों की दुकान पर प्रकट हुए और तुरंत बहुत लोकप्रिय हो गया। उनमें से भोजन की एक बड़ी राशि खाना बना सकते हैं, यह सब आपकी कल्पना पर निर्भर करता है। लेकिन एक बात निश्चित हैः एक सलाद केकड़ा चावल के साथ अपने पसंदीदा खाद्य पदार्थों की एक सूची है निश्चित है। हर गृहिणी अपने अवयवों को जोड़कर एक विशेष तरीके से यह तैयार करता है। हमारे देश के कई निवासियों के बहुत शौकीन हैं केकड़ा सलाद। चावल, मक्का केकड़ा लाठी की असामान्य स्वाद, जो और अधिक स्वादिष्ट हो सकता है के साथ पूरी तरह गठबंधन? कई परिवारों के लिए उत्सव की मेज पर वहाँ हमेशा इस सलाद है। चावल, केकड़ा लाठी, अंडे - सार्वजनिक उत्पादों किसी भी दुकान पर खरीदा जा सकता है। इसके तृप्ति पकवान के कारण जल्दी से मेहमान जो अप्रत्याशित रूप से आया था की भूख बुझाने, और आप कुछ और पकाने के लिए जरूरत नहीं होगी। तो अब इसकी तैयारी के लिए सीधे आगे बढ़ें। चावल के साथ केकड़ा सलाद निम्नलिखित सामग्री में शामिल हैंः - चित्रा - एक सौ ग्राम; - अंडे - चार पीसी। - मक्का - एक बैंक; - crabsticks - दो सौ ग्राम; - मेयोनेज़। अब हम वास्तव में इस व्यंजन पकाने के लिए कैसे को देखो। पहले हम चावल और अंडे खाना बनाना की जरूरत है। बस सुनिश्चित करें कि चावल भुरभुरा निकली हैं। केकड़े लाठी छोटे टुकड़ों में काट दिया जाना चाहिए। यह अंडे से शांत है और फिर उन्हें साथ ही साथ केकड़ा लाठी काटना पीछा किया जाता है। मकई के बाद से तरल निकास के लिए आवश्यक है। रिज़ ठंड होना चाहिए। और उसके बाद ही आप सभी अवयवों मिश्रण और मेयोनेज़ जोड़ सकते हैं। केकड़ा लाठी को धीरे मिक्स न फैल जाएं! केकड़ा सलाद और चावल ताजा या मसालेदार ककड़ी के साथ पूरक किया जा सकता है, यह मूल पकवान दे देंगे। इसके अलावा, कुछ गृहिणियों मिर्च या जैतून जोड़ रहे हैं, यह पता चला है एक और अधिक विदेशी विकल्प है। गर्मियों में, आप जड़ी बूटी या chives, जो आपके सलाद का स्वाद में विविधता लाने जाएगा जोड़ सकते हैं। कुछ ड्रेसिंग और मेयोनेज़ मलाई के बजाय प्रयोग किया जाता है के साथ प्रयोग कर रहे हैं। यहाँ, मैं सलाद की एक छोटी राशि है कि मलाई के साथ तैयार है कोशिश करने के लिए शुरू करने के लिए सलाह देने के लिए, और उसके बाद ही, यदि आप चाहें, यह सब मिला दें। एक और टिपः आप सलाद की एक बड़ी राशि तैयार करता है, तो कर दिया है और सभी को एक बार इस्तेमाल किया जा रहा है, यह फिर से भरना नहीं है नहीं जा रहे हैं, और फ्रिज में एक सील बंद कंटेनर में डाल दिया और परोसने से पहले ड्रेसिंग जोड़ें। चावल के साथ केकड़ा सलाद - केकड़ा लाठी से तैयार किया जा सकता है कि एक भी पकवान। चलो एक और पर नजर डालते हैं असामान्य नुस्खा। इसे में, हम केकड़ा लाठी और पनीर मिश्रण होगा। तो, हम निम्नलिखित सामग्री की जरूरत हैः - crabsticks - दो सौ पचास ग्राम; - टमाटर - दो पीसी;। - प्याज - एक पीसी;। अब हम खाना पकाने की प्रक्रिया के लिए बदल जाते हैं। मुख्य शर्त - सभी सामग्री बहुत बारीक कटी हुई किया जाना चाहिए। स्वाद के लिए नुस्खा जोड़ने के लिए, आप नींबू और जड़ी बूटियों का प्रयोग कर सकते हैं। आवश्यक मेयोनेज़ के साथ इस सलाद को भरने के लिए। आप मक्का के बहुत शौकीन हैं, तो आप यह यह नुस्खा में उपयोग कर सकते हैं। यहाँ आप यह भी प्रयोग करके अपनी खुद की सामग्री जोड़ सकते हैं। चावल के साथ केकड़ा सलाद अपने परिवार के लिए पसंदीदा होना निश्चित है। और अब हर उत्सव मेज पर अन्य व्यंजन के बीच एक योग्य जगह पर कब्जा होगा। |
Posted On:
ओडिशा में लगभग 7500 करोड़ रुपये की लागत से 415 किलोमीटर लम्बी दो समुद्र तटीय हाईवे परियोजनाएं शुरू करने की योजना है। हाईवे के निर्माण के लिए 6000 करोड़ रुपये और भूमि अधिग्रहण के लिए 1500 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित है। एनएचएआई ने पिछले साल ही इन परियोजनाओं के नक्शे को मंजूरी दे दी थी।
252 किलोमीटर लम्बे गोपालपुर-रतनपुर मार्ग वाया छतरपुर-सतापदा-कोणार्क-आस्ट्रांग-नौगांव-पारादीप-रतनपुर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जा रही है। प्रारंभिक नक्शे को मंजूरी मिल गई है और इसमें कुछ बदलाव करने पर विचार चल रहा है। 162 किलोमीटर लम्बी दूसरी परियोजना रतनपुर-दीघा मार्ग वाया बासुदेवपुर-चांदीपुर-चंदनेश्वर की भी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जा रही है। अंतिम संभाव्यता रिपोर्ट जमा करने के बाद नक्शे को अंतिम रूप दे दिया गया है। दोनों परियोजनाओं को भारतमाला के तहत पूरा किया जाएगा।
दोनों परियोजनाओं के लिए ओडिशा सरकार की मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है।
| Posted On: ओडिशा में लगभग सात हज़ार पाँच सौ करोड़ रुपये की लागत से चार सौ पंद्रह किलोग्राममीटर लम्बी दो समुद्र तटीय हाईवे परियोजनाएं शुरू करने की योजना है। हाईवे के निर्माण के लिए छः हज़ार करोड़ रुपये और भूमि अधिग्रहण के लिए एक हज़ार पाँच सौ करोड़ रुपये की राशि निर्धारित है। एनएचएआई ने पिछले साल ही इन परियोजनाओं के नक्शे को मंजूरी दे दी थी। दो सौ बावन किलोग्राममीटर लम्बे गोपालपुर-रतनपुर मार्ग वाया छतरपुर-सतापदा-कोणार्क-आस्ट्रांग-नौगांव-पारादीप-रतनपुर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जा रही है। प्रारंभिक नक्शे को मंजूरी मिल गई है और इसमें कुछ बदलाव करने पर विचार चल रहा है। एक सौ बासठ किलोग्राममीटर लम्बी दूसरी परियोजना रतनपुर-दीघा मार्ग वाया बासुदेवपुर-चांदीपुर-चंदनेश्वर की भी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जा रही है। अंतिम संभाव्यता रिपोर्ट जमा करने के बाद नक्शे को अंतिम रूप दे दिया गया है। दोनों परियोजनाओं को भारतमाला के तहत पूरा किया जाएगा। दोनों परियोजनाओं के लिए ओडिशा सरकार की मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है। |
प्रिलिम्स के लियेः
वैश्विक भुखमरी सूचकांक (GHI) 2022, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, फूड फोर्टिफिकेशन, सूक्ष्म पोषक तत्त्वों की कमी, मध्याह्न भोजन, सार्वजनिक वितरण प्रणाली।
मेन्स के लियेः
वैश्विक भुखमरी सूचकांक (GHI), भारत में भुखमरी और कुपोषण के लिये ज़िम्मेदार कारक, भुखमरी से निपटने के लिये हालिया सरकारी पहल।
चर्चा में क्यों?
वर्ष 2022 में भारत सहित दुनिया के कई हिस्सों में भुखमरी इतनी विकट बनी हुई है कि संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने 2022 को 'अभूतपूर्व भुखमरी का वर्ष (The year of Unprecedented Hunger)' कहा है।
- खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के अनुसार, वर्ष 2020 में दुनिया भर में लगभग 307 करोड़ लोग स्वस्थ आहार नहीं ले सके। भारत इस वैश्विक आबादी का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है।
विभिन्न रिपोर्टों के मुख्य अंशः
- विश्व खाद्य कार्यक्रमः
- विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के अनुसार, वर्ष 2019 के बाद से गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना करने वाले लोगों की संख्या लगभग तीन गुना हो गई है और लगभग 828 मिलियन लोग हर रात भूखे पेट सोते हैं।
- खाद्य सुरक्षा ने विशेष रूप से युद्धग्रस्त स्थानों और जलवायु आपदाओं से बर्बाद हुए स्थानों में पूर्व-महामारी के स्तर को पार कर लिया है।
- फ्यूचर ऑफ फूड एंड एग्रीकल्चरः
- खाद्य एवं कृषि संगठन (Food and Agriculture Organization- FAO) की नई रिपोर्ट, द फ्यूचर ऑफ फूड एंड एग्रीकल्चर - ड्राइवर्स और ट्रिगर्स फॉर ट्रांसफॉर्मेशन के अनुसार, अगर कृषि और खाद्य प्रणाली भविष्य में भी वर्तमान जैसी ही रही तो आने वाले समय में विश्व को निरंतर खाद्य असुरक्षा की समस्या का सामना करना पड़ेगा।
- यदि कृषि खाद्य प्रणाली समान बनी रहती है तो भविष्य में विश्व लगातार खाद्य असुरक्षा, घटते संसाधनों और अस्थिर आर्थिक विकास का सामना करेगा।
- कृषि खाद्य लक्ष्यों सहित सतत् विकास लक्ष्यों (SDGs) को पूरा करने के लिये विश्व "ऑफ ट्रैक" है।
- वर्ष 2050 तक विश्व में 10 बिलियन लोगों के लिये भोजन की आवश्यकता होगी तथा यदि वर्तमान रुझानों को बदलने के लिये महत्त्वपूर्ण प्रयास नहीं किये गए तो यह एक अभूतपूर्व चुनौती होगी।
- वैश्विक भुखमरी सूचकांक (GHI):
- वैश्विक भुखमरी सूचकांक (GHI) 2022 में भारत 121 देशों में से 107वें स्थान पर है।
- दक्षिण एशियाई देशों में भारत (107), श्रीलंका (64), नेपाल (81), बांग्लादेश (84) तथा पाकिस्तान (99) भी अच्छी स्थिति में नहीं है।
- विश्व स्तर पर हाल के वर्षों में भुखमरी के खिलाफ प्रगति काफी हद तक स्थिर रही है, वर्ष 2022 में 18.2 का वैश्विक स्कोर वर्ष 2014 में 19.1 की तुलना में थोड़ा बेहतर हुआ है। हालाँकि वर्ष 2022 का GHI स्कोर अभी भी 'मध्यम' है।
- FSSAI का राज्य खाद्य सुरक्षा सूचकांक (SFSI):
- राज्य खाद्य सुरक्षा सूचकांक में तमिलनाडु शीर्ष पर है, उसके बाद गुजरात और महाराष्ट्र हैं।
- तमिलनाडु ने 100 के पैमाने पर कुल 82.5 अंक हासिल किये। मापदंडों में मानव संसाधन और संस्थागत डेटा, अनुपालन, खाद्य परीक्षण- बुनियादी ढांँचा तथा निगरानी, प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण व उपभोक्ता अधिकारिता शामिल हैं।
- केंद्रशासित प्रदेशों (UT) में जम्मू-कश्मीर 68.5 के स्कोर के साथ राष्ट्रीय राजधानी से बेहतर प्रदर्शन करते हुए सूची में सबसे ऊपर है, इसके बाद राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (66) और चंडीगढ़ (58) का स्थान है।
- राज्य खाद्य सुरक्षा सूचकांक में तमिलनाडु शीर्ष पर है, उसके बाद गुजरात और महाराष्ट्र हैं।
- वास्तविक रिपोर्टः
- खाद्य असुरक्षा से निपटने के लिये भारत के उपकरण लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (TDPS) के तहत 90 मिलियन से अधिक पात्र लोगों को कानूनी अधिकारों से बाहर रखा गया है।
- भारत की जनगणना 2011 योजना द्वारा कवर किये जाने वाले लोगों की संख्या पर पहुँचने के लिये डेटा का स्रोत बनी हुई है। परिणामस्वरूप बाद के वर्षों में आबादी के एक बड़े हिस्से का बहिष्कार देखा गया है।
- कानूनी ढाँचे में इस अंतर्निर्मित भ्रांति के कारण कम-से-कम 12% आबादी कानूनी अधिकारों से बाहर हो गई।
विभिन्न रिपोर्टों द्वारा दिये गए सुझावः
- प्रणालीगत नीति परिवर्तनः
- प्रणालीगत नीतिगत परिवर्तन द्वारा लोगों की स्थिति को सुधारने और 2030 तक संयुक्त राष्ट्र द्वारा अनिवार्य 'ज़ीरो हंगर' के सतत् विकास लक्ष्य को पूरा करने के लिये वैश्विक ठोस प्रयास आवश्यक हैं।
- सतत् कृषि प्रणालीः
- जनसंख्या के तेज़ी से विकास के साथ ही भोजन की मांग भी बढ़ी है।
- इससे निपटने के लिये कृषि प्रणालियों को भविष्य में स्थायी तरीके से और अधिक भोजन का उत्पादन करने की आवश्यकता होगी।
- कीड़ों की जनसंख्या में गिरावटः
- कीट परागणकर्त्ताओं की बहुतायत के बिना मनुष्यों को बड़े पैमाने पर भोजन और अन्य कृषि उत्पादों के उत्पादन में चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
- कीट अपनी विविधता, कृषि, मानव स्वास्थ्य और प्राकृतिक संसाधनों पर पारिस्थितिक भूमिका के प्रभाव के कारण महत्त्वपूर्ण हैं।
- वे सभी स्थलीय पारिस्थितिक तंत्रों के लिये जैविक आधार बनाते हैं, वे पोषक तत्त्वों का चक्रण करते हैं, पौधों को परागण करते हैं, बीजों को फैलाते हैं, मिट्टी की संरचना और उर्वरता को बनाए रखते हैं, अन्य जीवों की आबादी को नियंत्रित करते हैं तथा अन्य जीवों के लिये एक प्रमुख खाद्य स्रोत प्रदान करते हैं।
- अल्पावधि आवश्यकताओं से परे सोचेंः
- प्रक्रियाओं को तत्काल बदलने की आवश्यकता है ताकि कृषि खाद्य प्रणालियों के लिये अधिक टिकाऊ और लचीला भविष्य बनाया जा सके।
- विभिन्न दृष्टिकोण के माध्यम से पोषणः
- बेहतर पोषण में भोजन के साथ-साथ स्वास्थ्य, पानी, स्वच्छता, लिंग संबंधी दृष्टिकोण और सामाजिक मानदंड शामिल हैं। अतः पोषण संबंधी अंतर को भरने के लिये व्यापक नीति को लाने की आवश्यकता है।
- सामाजिक अंकेक्षण क्रियाविधि की आवश्यकताः
- राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को अनिवार्य रूप से स्थानीय अधिकारियों की मदद से हर ज़िले में मध्याह्न भोजन योजना का सोशल ऑडिट करना चाहिये और साथ ही पोषण संबंधी जागरूकता पर काम करना चाहिये।
- कार्यक्रम की निगरानी में सुधार के लिये सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग पर भी विचार किया जा सकता है।
- PDS को फिर से उन्मुख करनाः
- इसे और अधिक पारदर्शी व भरोसेमंद बनाने तथा पौष्टिक भोजन की उपलब्धता, पहूँच और सामर्थ्य सुनिश्चित करने के लिये निम्न सामाजिक-आर्थिक लोगों की क्रय शक्ति पर सकारात्मक प्रभाव डालने के हेतु पुनः एक उन्नत सार्वजनिक वितरण प्रणाली की आवश्यकता है।
- महिलाओं के नेतृत्व में SDG मिशनः
- मौजूदा पोषण कार्यक्रमों को फिर से डिज़ाइन करने और इसे महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों के साथ जोड़ने की आवश्यकता है, जिससे भारत वर्ष 2030 तक भुखमरी और सभी प्रकार के कुपोषण को समाप्त करने के सतत् विकास लक्ष्य-2 को साकार कर सके।
- अपशिष्ट कम करना, भूख कम करनाः
- भारत अपने कुल वार्षिक खाद्य उत्पादन का लगभग 7% और फलों और सब्जियों का लगभग 30% अपर्याप्त भंडारण सुविधाओं एवं कोल्ड स्टोरेज के कारण बर्बाद कर देता है।
- इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रेफ्रिजरेशन के अनुसार, यदि विकासशील देशों में विकसित देशों के समान स्तर का रेफ्रिजरेशन इंफ्रास्ट्रक्चर होता, तो वे 200 मिलियन टन भोजन या अपनी खाद्य आपूर्ति का लगभग 14% बचा सकते थे, जो भूख और कुपोषण से निपटने में मदद कर सकता है।
भूख/कुपोषण उन्मूलन के लिये भारत की पहलेंः
- भारत को ट्रांस फैट मुक्त बनाएँ।
- अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष।
- प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY)
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
प्रश्न. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत किये गए प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः (2018)
उपर्युत्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
उत्तरः (b)
अतः विकल्प (b) सही है।
प्रश्न. प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के साथ मूल्य सब्सिडी के प्रतिस्थापन से भारत में सब्सिडी का परिदृश्य कैसे बदल सकता है? विचार-विमर्श कीजिये। (मुख्य परीक्षा, 2015)
प्रश्न. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं? खाद्य सुरक्षा विधेयक ने भारत में भूख और कुपोषण को दूर करने में किस प्रकार सहायता की है? (मुख्य परीक्षा, 2021)
प्रश्न. भारत में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं? इसे प्रभावी और पारदर्शी कैसे बनाया जा सकता है? (मुख्य परीक्षा, 2022)
| प्रिलिम्स के लियेः वैश्विक भुखमरी सूचकांक दो हज़ार बाईस, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, फूड फोर्टिफिकेशन, सूक्ष्म पोषक तत्त्वों की कमी, मध्याह्न भोजन, सार्वजनिक वितरण प्रणाली। मेन्स के लियेः वैश्विक भुखमरी सूचकांक , भारत में भुखमरी और कुपोषण के लिये ज़िम्मेदार कारक, भुखमरी से निपटने के लिये हालिया सरकारी पहल। चर्चा में क्यों? वर्ष दो हज़ार बाईस में भारत सहित दुनिया के कई हिस्सों में भुखमरी इतनी विकट बनी हुई है कि संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम ने दो हज़ार बाईस को 'अभूतपूर्व भुखमरी का वर्ष ' कहा है। - खाद्य एवं कृषि संगठन के अनुसार, वर्ष दो हज़ार बीस में दुनिया भर में लगभग तीन सौ सात करोड़ लोग स्वस्थ आहार नहीं ले सके। भारत इस वैश्विक आबादी का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है। विभिन्न रिपोर्टों के मुख्य अंशः - विश्व खाद्य कार्यक्रमः - विश्व खाद्य कार्यक्रम के अनुसार, वर्ष दो हज़ार उन्नीस के बाद से गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना करने वाले लोगों की संख्या लगभग तीन गुना हो गई है और लगभग आठ सौ अट्ठाईस मिलियन लोग हर रात भूखे पेट सोते हैं। - खाद्य सुरक्षा ने विशेष रूप से युद्धग्रस्त स्थानों और जलवायु आपदाओं से बर्बाद हुए स्थानों में पूर्व-महामारी के स्तर को पार कर लिया है। - फ्यूचर ऑफ फूड एंड एग्रीकल्चरः - खाद्य एवं कृषि संगठन की नई रिपोर्ट, द फ्यूचर ऑफ फूड एंड एग्रीकल्चर - ड्राइवर्स और ट्रिगर्स फॉर ट्रांसफॉर्मेशन के अनुसार, अगर कृषि और खाद्य प्रणाली भविष्य में भी वर्तमान जैसी ही रही तो आने वाले समय में विश्व को निरंतर खाद्य असुरक्षा की समस्या का सामना करना पड़ेगा। - यदि कृषि खाद्य प्रणाली समान बनी रहती है तो भविष्य में विश्व लगातार खाद्य असुरक्षा, घटते संसाधनों और अस्थिर आर्थिक विकास का सामना करेगा। - कृषि खाद्य लक्ष्यों सहित सतत् विकास लक्ष्यों को पूरा करने के लिये विश्व "ऑफ ट्रैक" है। - वर्ष दो हज़ार पचास तक विश्व में दस बिलियन लोगों के लिये भोजन की आवश्यकता होगी तथा यदि वर्तमान रुझानों को बदलने के लिये महत्त्वपूर्ण प्रयास नहीं किये गए तो यह एक अभूतपूर्व चुनौती होगी। - वैश्विक भुखमरी सूचकांक : - वैश्विक भुखमरी सूचकांक दो हज़ार बाईस में भारत एक सौ इक्कीस देशों में से एक सौ सातवें स्थान पर है। - दक्षिण एशियाई देशों में भारत , श्रीलंका , नेपाल , बांग्लादेश तथा पाकिस्तान भी अच्छी स्थिति में नहीं है। - विश्व स्तर पर हाल के वर्षों में भुखमरी के खिलाफ प्रगति काफी हद तक स्थिर रही है, वर्ष दो हज़ार बाईस में अट्ठारह.दो का वैश्विक स्कोर वर्ष दो हज़ार चौदह में उन्नीस.एक की तुलना में थोड़ा बेहतर हुआ है। हालाँकि वर्ष दो हज़ार बाईस का GHI स्कोर अभी भी 'मध्यम' है। - FSSAI का राज्य खाद्य सुरक्षा सूचकांक : - राज्य खाद्य सुरक्षा सूचकांक में तमिलनाडु शीर्ष पर है, उसके बाद गुजरात और महाराष्ट्र हैं। - तमिलनाडु ने एक सौ के पैमाने पर कुल बयासी.पाँच अंक हासिल किये। मापदंडों में मानव संसाधन और संस्थागत डेटा, अनुपालन, खाद्य परीक्षण- बुनियादी ढांँचा तथा निगरानी, प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण व उपभोक्ता अधिकारिता शामिल हैं। - केंद्रशासित प्रदेशों में जम्मू-कश्मीर अड़सठ.पाँच के स्कोर के साथ राष्ट्रीय राजधानी से बेहतर प्रदर्शन करते हुए सूची में सबसे ऊपर है, इसके बाद राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और चंडीगढ़ का स्थान है। - राज्य खाद्य सुरक्षा सूचकांक में तमिलनाडु शीर्ष पर है, उसके बाद गुजरात और महाराष्ट्र हैं। - वास्तविक रिपोर्टः - खाद्य असुरक्षा से निपटने के लिये भारत के उपकरण लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत नब्बे मिलियन से अधिक पात्र लोगों को कानूनी अधिकारों से बाहर रखा गया है। - भारत की जनगणना दो हज़ार ग्यारह योजना द्वारा कवर किये जाने वाले लोगों की संख्या पर पहुँचने के लिये डेटा का स्रोत बनी हुई है। परिणामस्वरूप बाद के वर्षों में आबादी के एक बड़े हिस्से का बहिष्कार देखा गया है। - कानूनी ढाँचे में इस अंतर्निर्मित भ्रांति के कारण कम-से-कम बारह% आबादी कानूनी अधिकारों से बाहर हो गई। विभिन्न रिपोर्टों द्वारा दिये गए सुझावः - प्रणालीगत नीति परिवर्तनः - प्रणालीगत नीतिगत परिवर्तन द्वारा लोगों की स्थिति को सुधारने और दो हज़ार तीस तक संयुक्त राष्ट्र द्वारा अनिवार्य 'ज़ीरो हंगर' के सतत् विकास लक्ष्य को पूरा करने के लिये वैश्विक ठोस प्रयास आवश्यक हैं। - सतत् कृषि प्रणालीः - जनसंख्या के तेज़ी से विकास के साथ ही भोजन की मांग भी बढ़ी है। - इससे निपटने के लिये कृषि प्रणालियों को भविष्य में स्थायी तरीके से और अधिक भोजन का उत्पादन करने की आवश्यकता होगी। - कीड़ों की जनसंख्या में गिरावटः - कीट परागणकर्त्ताओं की बहुतायत के बिना मनुष्यों को बड़े पैमाने पर भोजन और अन्य कृषि उत्पादों के उत्पादन में चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। - कीट अपनी विविधता, कृषि, मानव स्वास्थ्य और प्राकृतिक संसाधनों पर पारिस्थितिक भूमिका के प्रभाव के कारण महत्त्वपूर्ण हैं। - वे सभी स्थलीय पारिस्थितिक तंत्रों के लिये जैविक आधार बनाते हैं, वे पोषक तत्त्वों का चक्रण करते हैं, पौधों को परागण करते हैं, बीजों को फैलाते हैं, मिट्टी की संरचना और उर्वरता को बनाए रखते हैं, अन्य जीवों की आबादी को नियंत्रित करते हैं तथा अन्य जीवों के लिये एक प्रमुख खाद्य स्रोत प्रदान करते हैं। - अल्पावधि आवश्यकताओं से परे सोचेंः - प्रक्रियाओं को तत्काल बदलने की आवश्यकता है ताकि कृषि खाद्य प्रणालियों के लिये अधिक टिकाऊ और लचीला भविष्य बनाया जा सके। - विभिन्न दृष्टिकोण के माध्यम से पोषणः - बेहतर पोषण में भोजन के साथ-साथ स्वास्थ्य, पानी, स्वच्छता, लिंग संबंधी दृष्टिकोण और सामाजिक मानदंड शामिल हैं। अतः पोषण संबंधी अंतर को भरने के लिये व्यापक नीति को लाने की आवश्यकता है। - सामाजिक अंकेक्षण क्रियाविधि की आवश्यकताः - राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को अनिवार्य रूप से स्थानीय अधिकारियों की मदद से हर ज़िले में मध्याह्न भोजन योजना का सोशल ऑडिट करना चाहिये और साथ ही पोषण संबंधी जागरूकता पर काम करना चाहिये। - कार्यक्रम की निगरानी में सुधार के लिये सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग पर भी विचार किया जा सकता है। - PDS को फिर से उन्मुख करनाः - इसे और अधिक पारदर्शी व भरोसेमंद बनाने तथा पौष्टिक भोजन की उपलब्धता, पहूँच और सामर्थ्य सुनिश्चित करने के लिये निम्न सामाजिक-आर्थिक लोगों की क्रय शक्ति पर सकारात्मक प्रभाव डालने के हेतु पुनः एक उन्नत सार्वजनिक वितरण प्रणाली की आवश्यकता है। - महिलाओं के नेतृत्व में SDG मिशनः - मौजूदा पोषण कार्यक्रमों को फिर से डिज़ाइन करने और इसे महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों के साथ जोड़ने की आवश्यकता है, जिससे भारत वर्ष दो हज़ार तीस तक भुखमरी और सभी प्रकार के कुपोषण को समाप्त करने के सतत् विकास लक्ष्य-दो को साकार कर सके। - अपशिष्ट कम करना, भूख कम करनाः - भारत अपने कुल वार्षिक खाद्य उत्पादन का लगभग सात% और फलों और सब्जियों का लगभग तीस% अपर्याप्त भंडारण सुविधाओं एवं कोल्ड स्टोरेज के कारण बर्बाद कर देता है। - इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रेफ्रिजरेशन के अनुसार, यदि विकासशील देशों में विकसित देशों के समान स्तर का रेफ्रिजरेशन इंफ्रास्ट्रक्चर होता, तो वे दो सौ मिलियन टन भोजन या अपनी खाद्य आपूर्ति का लगभग चौदह% बचा सकते थे, जो भूख और कुपोषण से निपटने में मदद कर सकता है। भूख/कुपोषण उन्मूलन के लिये भारत की पहलेंः - भारत को ट्रांस फैट मुक्त बनाएँ। - अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष। - प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न प्रश्न. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, दो हज़ार तेरह के तहत किये गए प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः उपर्युत्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? उत्तरः अतः विकल्प सही है। प्रश्न. प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के साथ मूल्य सब्सिडी के प्रतिस्थापन से भारत में सब्सिडी का परिदृश्य कैसे बदल सकता है? विचार-विमर्श कीजिये। प्रश्न. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, दो हज़ार तेरह की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं? खाद्य सुरक्षा विधेयक ने भारत में भूख और कुपोषण को दूर करने में किस प्रकार सहायता की है? प्रश्न. भारत में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं? इसे प्रभावी और पारदर्शी कैसे बनाया जा सकता है? |
शिमला, 8 सितंबर (निस)
हिमाचल प्रदेश में आत्महत्या की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है। बीते तीन साल में राज्य में 1946 लोग आत्महत्या कर चुके हैं। इनमें से 481 आत्महत्याएं अकेले इसी साल पहली जनवरी से 31 जुलाई के बीच हो चुकी हैं। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने आज विधानसभा में विपक्ष के नेता मुकेश अग्निहोत्री के एक सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आत्महत्या करने वाले इन लोगों के 1196 पुरुष और 749 महिलाएं शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस साल पहली जनवरी से 31 जुलाई तक हुई आत्महत्याएं पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में कुछ ज्यादा है। उन्होंने कहा कि अधिकतर आत्महत्याएं घरेलू समस्याओं, लम्बे समय से बीमारी के कारण, मानसिक संतुलन खो देने, तनाव, पारिवारिक कलह, आधुनिक जीवन शैली, नशे की बढ़ती प्रवृत्ति, प्रेमी-प्रेमिका के संबंधों में तनाव, आर्थिक स्थिति और सहनशीलता की कमी के कारण हो रही हैं।
लंबित हैं।
विधायक सुखविंद्र सिंह सुक्खू के एक सवाल के लिखित जवाब में स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्री ने कहा कि कोरोना महामारी से पहले प्रदेश के आंचलिक, क्षेत्रीय और नागरिक अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 135 वेंटिलेटर उपलब्ध थे। कोरोना महामारी के बाद सरकारी और निजी क्षेत्र के अस्पतालों में प्रदेश में 610 वेंटिलेटर उपलब्ध हैं। सुक्खू के ही एक अन्य सवाल के लिखित उत्तर में मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि हिमाचल में 14 सुरंगों का निर्माण प्रस्तावित है। इनमें से केवल दो सुरंगों के लिए धनराशि का प्रावधान किया गया है।
विधायक आशीष बुटेल के सवाल के लिखित जवाब में मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में राष्ट्रीय पैराग्लाइडिंग स्कूल स्थापित करने की कोई योजना नहीं है। विधायक आशा कुमारी, रामलाल ठाकुर, मोहन लाल ब्राक्टा, किशोरी लाल, धनीराम शांडिल, कमलेश कुमारी, हीरालाल, पवन नैयर, इंद्रदत लखनपाल, नंदलाल, जगत सिंह नेगी, राजेंद्र राणा और नरेंद्र ठाकुर ने भी अपने-अपने क्षेत्र से जुड़े सवाल पूछे।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा में आज विपक्ष ने कोरोना महामारी पर चल रही बहस के दौरान स्थगन प्रस्ताव पर कांग्रेस सदस्यों को बोलने का मौका न दिए जाने से खफा होकर सदन से वॉकआउट किया। सदन में विपक्षी सदस्यों की मांग थी कि स्वास्थ्य मंत्री से पहले कांग्रेस के सदस्यों को बोलने का मौका दिया जाए, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने उनकी यह बात नहीं मानी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. राजीव सैजल को अपनी बात रखने के लिए कह दिया। इससे खफा विपक्ष ने सदन में नारेबाजी की। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि सदन का समय बढ़ाया जाए और उनके सदस्यों को बोलने का मौका दिया जाए, लेकिन इस पर भी बात नहीं बनी और फिर विपक्ष नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर चला गया। सदन के बाहर मीडिया से बात करते हुए नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने पूछा कि ऐसी क्या जल्दी थी कि सदन की कार्यवाही पांच बजे ही समाप्त करनी थी। उन्होंने कहा कि सदन का समय बढ़ाया जा सकता था। उन्होंने कहा कि मंत्री कल जवाब दे सकते थे और आज उनके चार सदस्यों को बोलने का मौका देना चाहिए था। प्रदेश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के मामले पर नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री समेत सभी मंत्रियों से इस्तीफे की मांग की। संसदीय कार्यमंत्री सुरेश भारद्वाज ने विपक्ष के वॉकआउट के बाद कहा कि विपक्ष इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर चर्चा से भाग रहा है।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. राजीव सैजल ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए दावा किया कि हिमाचल कोरोना महामारी से सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने इस संक्रमण से लड़ने के लिए छह सूत्रीय रणनीति अपनाई है और इसके बूते प्रसार को काफी हद तक रोका है।
| शिमला, आठ सितंबर हिमाचल प्रदेश में आत्महत्या की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है। बीते तीन साल में राज्य में एक हज़ार नौ सौ छियालीस लोग आत्महत्या कर चुके हैं। इनमें से चार सौ इक्यासी आत्महत्याएं अकेले इसी साल पहली जनवरी से इकतीस जुलाई के बीच हो चुकी हैं। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने आज विधानसभा में विपक्ष के नेता मुकेश अग्निहोत्री के एक सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आत्महत्या करने वाले इन लोगों के एक हज़ार एक सौ छियानवे पुरुष और सात सौ उनचास महिलाएं शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस साल पहली जनवरी से इकतीस जुलाई तक हुई आत्महत्याएं पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में कुछ ज्यादा है। उन्होंने कहा कि अधिकतर आत्महत्याएं घरेलू समस्याओं, लम्बे समय से बीमारी के कारण, मानसिक संतुलन खो देने, तनाव, पारिवारिक कलह, आधुनिक जीवन शैली, नशे की बढ़ती प्रवृत्ति, प्रेमी-प्रेमिका के संबंधों में तनाव, आर्थिक स्थिति और सहनशीलता की कमी के कारण हो रही हैं। लंबित हैं। विधायक सुखविंद्र सिंह सुक्खू के एक सवाल के लिखित जवाब में स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्री ने कहा कि कोरोना महामारी से पहले प्रदेश के आंचलिक, क्षेत्रीय और नागरिक अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में एक सौ पैंतीस वेंटिलेटर उपलब्ध थे। कोरोना महामारी के बाद सरकारी और निजी क्षेत्र के अस्पतालों में प्रदेश में छः सौ दस वेंटिलेटर उपलब्ध हैं। सुक्खू के ही एक अन्य सवाल के लिखित उत्तर में मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि हिमाचल में चौदह सुरंगों का निर्माण प्रस्तावित है। इनमें से केवल दो सुरंगों के लिए धनराशि का प्रावधान किया गया है। विधायक आशीष बुटेल के सवाल के लिखित जवाब में मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में राष्ट्रीय पैराग्लाइडिंग स्कूल स्थापित करने की कोई योजना नहीं है। विधायक आशा कुमारी, रामलाल ठाकुर, मोहन लाल ब्राक्टा, किशोरी लाल, धनीराम शांडिल, कमलेश कुमारी, हीरालाल, पवन नैयर, इंद्रदत लखनपाल, नंदलाल, जगत सिंह नेगी, राजेंद्र राणा और नरेंद्र ठाकुर ने भी अपने-अपने क्षेत्र से जुड़े सवाल पूछे। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में आज विपक्ष ने कोरोना महामारी पर चल रही बहस के दौरान स्थगन प्रस्ताव पर कांग्रेस सदस्यों को बोलने का मौका न दिए जाने से खफा होकर सदन से वॉकआउट किया। सदन में विपक्षी सदस्यों की मांग थी कि स्वास्थ्य मंत्री से पहले कांग्रेस के सदस्यों को बोलने का मौका दिया जाए, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने उनकी यह बात नहीं मानी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. राजीव सैजल को अपनी बात रखने के लिए कह दिया। इससे खफा विपक्ष ने सदन में नारेबाजी की। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि सदन का समय बढ़ाया जाए और उनके सदस्यों को बोलने का मौका दिया जाए, लेकिन इस पर भी बात नहीं बनी और फिर विपक्ष नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर चला गया। सदन के बाहर मीडिया से बात करते हुए नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने पूछा कि ऐसी क्या जल्दी थी कि सदन की कार्यवाही पांच बजे ही समाप्त करनी थी। उन्होंने कहा कि सदन का समय बढ़ाया जा सकता था। उन्होंने कहा कि मंत्री कल जवाब दे सकते थे और आज उनके चार सदस्यों को बोलने का मौका देना चाहिए था। प्रदेश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के मामले पर नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री समेत सभी मंत्रियों से इस्तीफे की मांग की। संसदीय कार्यमंत्री सुरेश भारद्वाज ने विपक्ष के वॉकआउट के बाद कहा कि विपक्ष इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर चर्चा से भाग रहा है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. राजीव सैजल ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए दावा किया कि हिमाचल कोरोना महामारी से सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने इस संक्रमण से लड़ने के लिए छह सूत्रीय रणनीति अपनाई है और इसके बूते प्रसार को काफी हद तक रोका है। |
आज के इस लेख में हम आपको जनरल इंश्योरेंस एजेंट बनने के ऊपर ही सब जानकारी देने (General insurance agent kaise ban sakte hai) वाले हैं। इसे पढ़कर आप जनरल इंश्योरेंस एजेंट बनने के ऊपर शुरू से लेकर अंत तक सब जानकारी जान पाएंगे।
सबसे पहले बात की जाए कि यह जनरल इंश्योरेंस एजेंट होता क्या है या फिर जनरल इंश्योरेंस एजेंट किसे कहा जाता हैं। तो आज हम आपको बता दे कि जनरल इंश्योरेंस एजेंट उस व्यक्ति को कहा जाता हैं जो किसी भी कंपनी का इंश्योरेंस करवाने की क्षमता रखता हैं।
सबसे पहले तो आपका कम से कम दसवीं पास होना आवश्यक हैं। यदि आप दसवीं कक्षा भी पास नही कर सकते हैं तो आप किसी भी स्थिति में जनरल इंश्योरेंस एजेंट नही बन सकते हैं।
आप जितनी भी बीमा कंपनियां हैं उनके लिए जनरल इंश्योरेंस एजेंट बनने का काम करेंगे तभी तो आपको जनरल इंश्योरेंस एजेंट कहा जाएगा अर्थात सभी तरह का बीमा करवाने वाला व्यक्ति।
जनरल इंश्योरेंस के एजेंट बनने के लिए आपको सभी तरह की बीमा कंपनियों के बारे में रिसर्च करनी होगी और फिर उनके लिए आवेदन करना होगा।
आप भारत में बीमा एजेंट बनने के लिए सभी तरह की बीमा कंपनियों का डाटा जुटाए और उनके कार्यालय में जाकर आवेदन करें।
जनरल इंश्योरेंस एजेंट कैसे बने? अधिक जानकारी गए लिंक पर क्लिक करे?
| आज के इस लेख में हम आपको जनरल इंश्योरेंस एजेंट बनने के ऊपर ही सब जानकारी देने वाले हैं। इसे पढ़कर आप जनरल इंश्योरेंस एजेंट बनने के ऊपर शुरू से लेकर अंत तक सब जानकारी जान पाएंगे। सबसे पहले बात की जाए कि यह जनरल इंश्योरेंस एजेंट होता क्या है या फिर जनरल इंश्योरेंस एजेंट किसे कहा जाता हैं। तो आज हम आपको बता दे कि जनरल इंश्योरेंस एजेंट उस व्यक्ति को कहा जाता हैं जो किसी भी कंपनी का इंश्योरेंस करवाने की क्षमता रखता हैं। सबसे पहले तो आपका कम से कम दसवीं पास होना आवश्यक हैं। यदि आप दसवीं कक्षा भी पास नही कर सकते हैं तो आप किसी भी स्थिति में जनरल इंश्योरेंस एजेंट नही बन सकते हैं। आप जितनी भी बीमा कंपनियां हैं उनके लिए जनरल इंश्योरेंस एजेंट बनने का काम करेंगे तभी तो आपको जनरल इंश्योरेंस एजेंट कहा जाएगा अर्थात सभी तरह का बीमा करवाने वाला व्यक्ति। जनरल इंश्योरेंस के एजेंट बनने के लिए आपको सभी तरह की बीमा कंपनियों के बारे में रिसर्च करनी होगी और फिर उनके लिए आवेदन करना होगा। आप भारत में बीमा एजेंट बनने के लिए सभी तरह की बीमा कंपनियों का डाटा जुटाए और उनके कार्यालय में जाकर आवेदन करें। जनरल इंश्योरेंस एजेंट कैसे बने? अधिक जानकारी गए लिंक पर क्लिक करे? |
लखनऊ। कोयले की आपूर्ति में कमी की खबरों के बीच, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को स्थिति की समीक्षा के लिए अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में सीएम योगी ने अधिकारियों से दो टूक कहा कि प्रदेश में निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएं. इस दौरान वह ओवरबिलिंग, फर्जी बिलिंग पर भी सख्त रहे। सीएम ने कहा कि प्रदेश में अबाध बिजली आपूर्ति की मांग को लेकर अतिरिक्त बिजली खरीदी जाए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विजिलेंस टीम किसी भी उपभोक्ता को बेवजह परेशान न करे. ओटीएस योजना को राज्य में तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए और साथ ही गलत मीटर रीडिंग करने वाली एजेंसी को काली सूची में डाला जाए। सीएम ने राज्य के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में शाम 06 बजे से सुबह 07 बजे तक लगातार बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए. सीएम योगी ने कहा कि त्योहारों और त्योहारों के समय रात में निर्बाध बिजली आपूर्ति जरूरी है. बिजली बिलों के संबंध में वन टाइम सेटलमेंट योजना ओटीएस को भी जल्द लागू करने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने कहा कि खराब ट्रांसफार्मरों को ग्रामीण क्षेत्रों में 48 घंटे और शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे में निर्धारित व्यवस्था के अनुसार बदला जाए. ट्रांसफार्मरों की क्षमता में वृद्धि के संबंध में पूर्व की व्यवस्था को पुनः लागू किया जाए। किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी के संबंध में तत्काल कार्रवाई की जाए। ट्यूबवेल कनेक्शन समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराए जाने चाहिए। सीएम योगी ने कहा कि सौभाग्य योजना समेत अन्य योजनाओं के लाभार्थियों के बिजली बिल में अनियमितता के प्रकरणों का तत्काल निराकरण किया जाए. सभी बिजली वितरण निगमों को बिजली व्यवस्था सुचारू रूप से चलाने और लाइन लॉस कम करने के निर्देश भी दिए गए।
| लखनऊ। कोयले की आपूर्ति में कमी की खबरों के बीच, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को स्थिति की समीक्षा के लिए अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में सीएम योगी ने अधिकारियों से दो टूक कहा कि प्रदेश में निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएं. इस दौरान वह ओवरबिलिंग, फर्जी बिलिंग पर भी सख्त रहे। सीएम ने कहा कि प्रदेश में अबाध बिजली आपूर्ति की मांग को लेकर अतिरिक्त बिजली खरीदी जाए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विजिलेंस टीम किसी भी उपभोक्ता को बेवजह परेशान न करे. ओटीएस योजना को राज्य में तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए और साथ ही गलत मीटर रीडिंग करने वाली एजेंसी को काली सूची में डाला जाए। सीएम ने राज्य के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में शाम छः बजे से सुबह सात बजे तक लगातार बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए. सीएम योगी ने कहा कि त्योहारों और त्योहारों के समय रात में निर्बाध बिजली आपूर्ति जरूरी है. बिजली बिलों के संबंध में वन टाइम सेटलमेंट योजना ओटीएस को भी जल्द लागू करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि खराब ट्रांसफार्मरों को ग्रामीण क्षेत्रों में अड़तालीस घंटाटे और शहरी क्षेत्रों में चौबीस घंटाटे में निर्धारित व्यवस्था के अनुसार बदला जाए. ट्रांसफार्मरों की क्षमता में वृद्धि के संबंध में पूर्व की व्यवस्था को पुनः लागू किया जाए। किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी के संबंध में तत्काल कार्रवाई की जाए। ट्यूबवेल कनेक्शन समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराए जाने चाहिए। सीएम योगी ने कहा कि सौभाग्य योजना समेत अन्य योजनाओं के लाभार्थियों के बिजली बिल में अनियमितता के प्रकरणों का तत्काल निराकरण किया जाए. सभी बिजली वितरण निगमों को बिजली व्यवस्था सुचारू रूप से चलाने और लाइन लॉस कम करने के निर्देश भी दिए गए। |
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में सैकड़ों छात्रों की मौजूदगी में 'द केरल स्टोरी' की स्क्रीनिंग की गई। विवेकानंद विचार मंच, जेएनयू द्वारा इसका आयोजन किया गया। फिल्म की स्क्रीनिंग जेएनयू के कनवेंशन सेंटर, सभागार संख्या 1 में की गई थी। वहां मौजूद छात्रों का उत्साह देखने लायक था। कई दृश्य ऐसे थे, जिन्होंने दर्शकों को झकझोर दिया। ऑडिटोरियम खचाखच भरा था। जय श्री राम और हर हर महादेव का जयघोष भी हुआ।
स्क्रीनिंग के दौरान फिल्म के निर्देशक सुदीप्तो सेन, निर्माता विपुल अमृतलाल शाह और मुख्य अभिनेत्री अदा शर्मा जेएनयू में मौजूद रहीं। स्क्रीनिंग के बाद मौके पर मौजूद छात्रों ने मुख्य अतिथियों से सवाल भी पूछे। सुदीप्तो सेन ने बताया कि इस फिल्म को बनाने में उन्हें कैसी परिस्थितियों और कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि फिल्म में 32000 लड़कियों के लापता होने की कहानी दिखाई गई है, लेकिन असल में ये मामले 50,000 से भी ऊपर हैं।
निर्माता विपुल अमृतलाल शाह ने बताया कि उन्हें इस तरह की फिल्म बनाने के लिए फिल्म इंडस्ट्री में बहुत कुछ सहना पड़ा। शुरुआत में जो लोग इस फिल्म से अपने आप को दूर करते थे वो अब स्वयं को इस फिल्म का अंग बनाने की कोशिश में लगे हैं। मुख्य अभिनेत्री अदा शर्मा ने जैसे ही माइक अपने हाथ में लिया, वैसे ही जय श्री राम और हर हर महादेव के नारे लगने लगे। उन्होंने बताया कि फ़िल्म के किरदार को उन्होंने न केवल निभाया बल्कि जिया भी।
| नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में सैकड़ों छात्रों की मौजूदगी में 'द केरल स्टोरी' की स्क्रीनिंग की गई। विवेकानंद विचार मंच, जेएनयू द्वारा इसका आयोजन किया गया। फिल्म की स्क्रीनिंग जेएनयू के कनवेंशन सेंटर, सभागार संख्या एक में की गई थी। वहां मौजूद छात्रों का उत्साह देखने लायक था। कई दृश्य ऐसे थे, जिन्होंने दर्शकों को झकझोर दिया। ऑडिटोरियम खचाखच भरा था। जय श्री राम और हर हर महादेव का जयघोष भी हुआ। स्क्रीनिंग के दौरान फिल्म के निर्देशक सुदीप्तो सेन, निर्माता विपुल अमृतलाल शाह और मुख्य अभिनेत्री अदा शर्मा जेएनयू में मौजूद रहीं। स्क्रीनिंग के बाद मौके पर मौजूद छात्रों ने मुख्य अतिथियों से सवाल भी पूछे। सुदीप्तो सेन ने बताया कि इस फिल्म को बनाने में उन्हें कैसी परिस्थितियों और कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि फिल्म में बत्तीस हज़ार लड़कियों के लापता होने की कहानी दिखाई गई है, लेकिन असल में ये मामले पचास,शून्य से भी ऊपर हैं। निर्माता विपुल अमृतलाल शाह ने बताया कि उन्हें इस तरह की फिल्म बनाने के लिए फिल्म इंडस्ट्री में बहुत कुछ सहना पड़ा। शुरुआत में जो लोग इस फिल्म से अपने आप को दूर करते थे वो अब स्वयं को इस फिल्म का अंग बनाने की कोशिश में लगे हैं। मुख्य अभिनेत्री अदा शर्मा ने जैसे ही माइक अपने हाथ में लिया, वैसे ही जय श्री राम और हर हर महादेव के नारे लगने लगे। उन्होंने बताया कि फ़िल्म के किरदार को उन्होंने न केवल निभाया बल्कि जिया भी। |
अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की संदिग्ध मौत के दो महीने बाद भी पुलिस किसी नतीजे तक नहीं पहुंच सकी है. वहीं मामले में जनता का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है. इसी क्रम में अयोध्या में करणी सेना के कार्यर्ताओं ने भी विरोध जताया है. करणी सेना के कार्यर्ताओं ने अवध विश्वविद्यालय के गेट के सामने कैंडल मार्च निकालकर महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार के खिलाफ विरोध जताया. इस दौरान मौजूद प्रदेश के संगठन मंत्री श्वेता राज सिंह ने शिवसेना सांसद संजय राउत को उद्धव ठाकरे का भोंपू बताया. साथ ही उन्होंने सीबीआई जांच की वकालत करते हुए उद्धव ठाकरे पर अपने बेटे आदित्य ठाकरे को बचाने की कोशिश का आरोप लगाया.
| अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की संदिग्ध मौत के दो महीने बाद भी पुलिस किसी नतीजे तक नहीं पहुंच सकी है. वहीं मामले में जनता का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है. इसी क्रम में अयोध्या में करणी सेना के कार्यर्ताओं ने भी विरोध जताया है. करणी सेना के कार्यर्ताओं ने अवध विश्वविद्यालय के गेट के सामने कैंडल मार्च निकालकर महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार के खिलाफ विरोध जताया. इस दौरान मौजूद प्रदेश के संगठन मंत्री श्वेता राज सिंह ने शिवसेना सांसद संजय राउत को उद्धव ठाकरे का भोंपू बताया. साथ ही उन्होंने सीबीआई जांच की वकालत करते हुए उद्धव ठाकरे पर अपने बेटे आदित्य ठाकरे को बचाने की कोशिश का आरोप लगाया. |
भरूच, 12 मई (एजेंसी) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि किसी भी सरकारी योजना में जब शत प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया जाता है तो इससे तुष्टीकरण की राजनीति समाप्त होती है। प्रधानमंत्री यहां आयोजित 'उत्कर्ष समारोह' को वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से संबोधित कर रहे थे। यह आयोजन भरूच जिले में राज्य सरकार की चार प्रमुख सरकारी योजनाओं के शत प्रतिशत लक्ष्य पूरा होने के अवसर पर किया गया है। मोदी ने कहा कि उनके नेतृत्व में केंद्र सरकार के पिछले आठ वर्ष सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण को समर्पित रहे हैं और उनकी सरकार का निरंतर प्रयास रहा है कि कोई भी हकदार सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित ना रह जाए। उन्होंने कहा, 'जब हम किसी भी योजना में शत प्रतिशत लक्ष्य को हासिल करते हैं, तो इसका मतलब होता है शासन-प्रशासन संवेदनशील है...जब 'सेचुरेशन' होता है तो भेदभाव की सारी गुंजाइश खत्म हो जाती है। किसी की सिफारिश की जरूरत नहीं होती... जब शत प्रतिशत लक्ष्य हासिल होता है तो तुष्टीकरण की राजनीति समाप्त हो जाती है, उसके लिए कोई जगह ही नहीं बचती।' प्रधानमंत्री ने कहा कि जानकारी के अभाव में अक्सर बहुत से लोग योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाते हैं। उन्होंने कहा, 'कभी कभी तो योजनाएं कागज पर ही रह जाती हैं। कभी-कभी इन योजनाओं का फायदा बेईमान लोग उठा ले जाते हैं।' उन्होंने कहा कि 2014 में जब उन्हें देश की सेवा का मौका दिया गया था तो देश की करीब-करीब आधी आबादी शौचालय की सुविधा से, टीकाकरण की सुविधा से, बिजली कनेक्शन की सुविधा से, बैंक खाते की सुविधा से वंचित थी।
दूरदृष्टा, जनचेतना के अग्रदूत, वैचारिक स्वतंत्रता के पुरोधा एवं समाजसेवी सरदार दयालसिंह मजीठिया ने 2 फरवरी, 1881 को लाहौर (अब पाकिस्तान) से 'द ट्रिब्यून' का प्रकाशन शुरू किया। विभाजन के बाद लाहौर से शिमला व अंबाला होते हुए यह समाचार पत्र अब चंडीगढ़ से प्रकाशित हो रहा है।
'द ट्रिब्यून' के सहयोगी प्रकाशनों के रूप में 15 अगस्त, 1978 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दैनिक ट्रिब्यून व पंजाबी ट्रिब्यून की शुरुआत हुई। द ट्रिब्यून प्रकाशन समूह का संचालन एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।
हमें दूरदर्शी ट्रस्टियों डॉ. तुलसीदास (प्रेसीडेंट), न्यायमूर्ति डी. के. महाजन, लेफ्टिनेंट जनरल पी. एस. ज्ञानी, एच. आर. भाटिया, डॉ. एम. एस. रंधावा तथा तत्कालीन प्रधान संपादक प्रेम भाटिया का भावपूर्ण स्मरण करना जरूरी लगता है, जिनके प्रयासों से दैनिक ट्रिब्यून अस्तित्व में आया।
| भरूच, बारह मई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि किसी भी सरकारी योजना में जब शत प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया जाता है तो इससे तुष्टीकरण की राजनीति समाप्त होती है। प्रधानमंत्री यहां आयोजित 'उत्कर्ष समारोह' को वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से संबोधित कर रहे थे। यह आयोजन भरूच जिले में राज्य सरकार की चार प्रमुख सरकारी योजनाओं के शत प्रतिशत लक्ष्य पूरा होने के अवसर पर किया गया है। मोदी ने कहा कि उनके नेतृत्व में केंद्र सरकार के पिछले आठ वर्ष सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण को समर्पित रहे हैं और उनकी सरकार का निरंतर प्रयास रहा है कि कोई भी हकदार सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित ना रह जाए। उन्होंने कहा, 'जब हम किसी भी योजना में शत प्रतिशत लक्ष्य को हासिल करते हैं, तो इसका मतलब होता है शासन-प्रशासन संवेदनशील है...जब 'सेचुरेशन' होता है तो भेदभाव की सारी गुंजाइश खत्म हो जाती है। किसी की सिफारिश की जरूरत नहीं होती... जब शत प्रतिशत लक्ष्य हासिल होता है तो तुष्टीकरण की राजनीति समाप्त हो जाती है, उसके लिए कोई जगह ही नहीं बचती।' प्रधानमंत्री ने कहा कि जानकारी के अभाव में अक्सर बहुत से लोग योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाते हैं। उन्होंने कहा, 'कभी कभी तो योजनाएं कागज पर ही रह जाती हैं। कभी-कभी इन योजनाओं का फायदा बेईमान लोग उठा ले जाते हैं।' उन्होंने कहा कि दो हज़ार चौदह में जब उन्हें देश की सेवा का मौका दिया गया था तो देश की करीब-करीब आधी आबादी शौचालय की सुविधा से, टीकाकरण की सुविधा से, बिजली कनेक्शन की सुविधा से, बैंक खाते की सुविधा से वंचित थी। दूरदृष्टा, जनचेतना के अग्रदूत, वैचारिक स्वतंत्रता के पुरोधा एवं समाजसेवी सरदार दयालसिंह मजीठिया ने दो फरवरी, एक हज़ार आठ सौ इक्यासी को लाहौर से 'द ट्रिब्यून' का प्रकाशन शुरू किया। विभाजन के बाद लाहौर से शिमला व अंबाला होते हुए यह समाचार पत्र अब चंडीगढ़ से प्रकाशित हो रहा है। 'द ट्रिब्यून' के सहयोगी प्रकाशनों के रूप में पंद्रह अगस्त, एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दैनिक ट्रिब्यून व पंजाबी ट्रिब्यून की शुरुआत हुई। द ट्रिब्यून प्रकाशन समूह का संचालन एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है। हमें दूरदर्शी ट्रस्टियों डॉ. तुलसीदास , न्यायमूर्ति डी. के. महाजन, लेफ्टिनेंट जनरल पी. एस. ज्ञानी, एच. आर. भाटिया, डॉ. एम. एस. रंधावा तथा तत्कालीन प्रधान संपादक प्रेम भाटिया का भावपूर्ण स्मरण करना जरूरी लगता है, जिनके प्रयासों से दैनिक ट्रिब्यून अस्तित्व में आया। |
जब हार नजर आई तो कैंडिडेट और उनके समर्थक काउंटिंग स्थल के बाहर सारी गणित को फिर से जोडऩे लगे। काउंटिंग को बीच में ही छोड़ सभी से हिसाब मांगने लगे। आपस में बाते हो रही थीं कि फलां के उस क्षेत्र के करीब इतने वोटर पक्के थे और दूसरे ने तो इतने वोट दिलाने का दावा किया। तो फिर बस दो तीन राउंड में क्यों डब्बा गोल हो गया।
होली में एक दिन शेष है लेकिन काउंटिंग के रिजल्ट घोषित होते ही बीजेपी कार्यालय पर ट्यूजडे को होली खेली गई। सिटी से कैंडिडेट अरुण कुमार का सूद धर्मकांटा स्थित पार्टी कार्यालय में जश्न सा माहौल था। कार्यकर्ता ढोल की ताल पर नाच-नाचकर अपनी खुशी जाहिर कर रहे थे। कुछ ऐसा ही माहौल कैंट सीट कैंडिडेट राजेश अग्रवाल के पार्टी कार्यालय पर रहा। एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने होली खेलकर अपनी खुशी जाहिर की।
एडमिनिस्ट्रेशन ने इलेक्शन का सुरक्षात्मक ढांचा मजबूत करने के लिए पार्टी समर्थकों की इंट्री बैन कर दी थी इसलिए लखनऊ हाईवे के दोनों तरफ पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों का हुजूम जमा हो गया। जैसे-जैसे काउंटिंग रिपोर्ट का एनाउंसमेंट लाउडस्पीकर पर होता रहा, बाहर समर्थकों का जोश भी डबल होता रहा। जीतने वाले जश्न मनाते रहे। वहीं सभी समर्थकों ने अबीर और गुलाल से जमकर होली भी खेली गई।
चुनावी जीत या हार, वो भी महज 18 वोट से। है ना इंट्रेस्टिंग मामला। बरेली की बहेड़ी विधान सभा सीट का भाग्य बस इतने ही वोटों से तय हुआ है। इस बात को लेकर दोनों करीबी कैंडिडेट्स के खेमे में पल-पल समीकरण बदलती रहे। बेचैनी का माहौल रहा। इतने कम मतों के अंतर की वजह से यह सीट कैंडिडेट्स के लिए प्रतिष्ठा का सबब बन गई। अंत में एडमिनिस्ट्रेशन को थकहार पोस्टल बैलेट की रीकाउंटिंग करानी पड़ी।
बहेड़ी विधान सभा की मतगणना के लिए बना पंडाल ट्यूजडे को जंग का अखाड़ा बन गया। समाजवादी पार्टी के कैंडिडेट अताउर्रहमान को 48,172 और बीजेपी के छत्रपाल सिंह को 48,154 वोट मिलने की घोषणा हुई। उन दोनों के बीच केवल 18 वोट का डिफरेंस था। मतगणना का रिजल्ट सुनते ही बीजेपी के कैंडिडेट ने अपना आपा खो दिया। वह रीकाउंटिंग की मांग करने लगे।
बीजेपी कैंडिडेट छत्रपाल ने बताया कि उनकी मांग को आरओ ने खारिज कर दिया और केवल पोस्टल बैलेट की रीकाउंटिंग करवाके मामले से पल्ला झाड़ लिया। उनका कहना है कि उनके दूसरे राउंड में 43,061 वोट थे जबकि एडमिनिस्ट्रेशन ने उन्हें 42,866 वोटों की जानकारी दी। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें हराने में एडमिनिस्ट्रेशन का हाथ है। रीकाउंटिंग के दौरान जब मीडिया का जमावड़ा बहेड़ी के काउंटिंग बूथ पर लगने लगा तो डीएम सुभाष चंद्र शर्मा ने हस्तक्षेप किया।
पारदर्शिता के साथ पूरी काउंटिंग करवाई गई है। बहेड़ी वाले केस में आयोग से पोस्टल बैलेट की रीकाउंटिंग करवाने के के निर्देश मिले थे, जिसका हमने पालन किया और तब रिजल्ट डिक्लेयर किया है।
-खराब सड़कों की व्यवस्था में सुधार करना है। नई सड़कों के निर्माण के साथ गलियों और नालियों को दुरुस्त करना है।
-अलखनाथ मंदिर के पास अधूरे पड़े ओवरब्रिज को पहली प्राथमिकता पर कंप्लीट करूंगा।
-पावर सप्लाई को दुरूस्त करना है।
-सिटी को कई ओवरब्रिज की आवश्यकता है इसलिए कोशिश करूंगा कि बरेलियंस को ओवरब्रिज का तोहफा दूं।
-सिटी में अमन चैन बरकरार रखना है और सिटी को विकास के पथ पर आगे लेकर जाना है।
काउंटिंग के अंतिम काउंटडाउन में वोटिंग में पिछड़ते कैंडिडेट कार्यकर्ताओं के साथ बस भागने के रास्ते तलाशते है। हमेशा फोन पर अवेलेबल रहने वाले नेताजी अचानक ही फोन पर अनअवेलबल हो जाते है। सिटी काउंटिंग कॉल नम्बर 7 में चारों कैंडिडेट्स के बीच चुनावी समर की जीत-हार का फैसला तो पहले दो चरणों में ही हो गया था। इसके बाद एक-एक करके नेताजी के खिसकने का क्रम देर तक चलता रहा। केवल बीएसपी कैंडिडेट अनीस बेग ही एक ऐसे थे, जो तीसरे और चौथे स्थान पर बने रहने के बाद भी अंतिम चरण तक हॉल में जमे रहे। अपनी हार के पीछे उन्होंने परिसीमन और जातिगत मुद्दो को कारण मानते हुए पहले से ज्यादा तैयारी के साथ दोबारा इलेक्शन में खड़े होने की बात की। कांग्रेस कैंडिडेट नवाब मुजाहिद बताते है कि हमारा साथ कुछ अपनों ने ही नहीं दिया। इस हार के लिए हम किसी को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते है। वहीं जब हारे हुए बाकि कैंडिडेट्स से फोन पर सम्पर्क करने की कोशिश की तो ज्यादातर के फोन पहुंच के बाहर बताते रहे।
-रोड की हालत बेहद खराब है। मरम्मत से काम नहीं चलेगा। स्मूथ ट्रैफिक के लिए नए सिरे से ही तैयार करना होगा।
-क्षेत्रवासियों को साफ ड्रिंकिंग वाटर मुहैया कराना। आबादी ज्यादा है उसके सापेक्ष सप्लाई बहुत कम। प्लानिंग के साथ इस गैप को भरना होगा।
-ड्रेनेज एक बहुत बड़ी प्रॉब्लम बनकर उभर रही है। पॉश एरिया में भी पानी का जमकर भराव होता है। इसे प्रॉब्लम का सोल्यूशन निकालना होगा।
-सीवरेज की प्रॉब्लम से सभी परेशान हैं। पुराने इलाकों में ज्यादातर लोगों के पास कनेक्शन भी नहीं है। निकासी के लिए नए सिरे से प्लानिंग की आवश्यकता होगी।
-बिजली की प्रॉब्लम सबसे ज्यादा गंभीर है। इसे यहां से हल नहीं किया जा सकता। उच्च स्तरीय मामला है। कोशिश यही होगी कि क्षेत्र को इस संबंध में कुछ राहत दिला सकूं।
मतगणना के दौरान पुलिस मुस्तैद दिखी। मतदान से लेकर मतगणना वाले दिन तक पुलिस कोई रिस्क नहीं लेना चाहती थी। इस लिए पुलिस ने पूरे मतगणना स्थल को कई सुरक्षा घेरों में बांट रखा था। गेट से लेकर काउंटिंग बूथ तक पुलिस नजरें गढ़ाए बैठी थी।
मीडिया के लोगों को भी सुरक्षा घेरे में कैद करके रखा गया था। गेट पर मोबाइल ले जाने पर पुलिस वालों से मीडिया की नोकझोंक भी हुई, जो बाद में डीएम के हस्तक्षेप के बाद खत्म हुई। एडमिनिस्ट्रेशन ने मीडिया से कोऑपरेशन करने की बात कहीं। उन्होंने कहा कि आप लोग कई ग्रुपों में बंट जाएं। इनको लेकर मीडिया सेल में लगे ऑफिसर डिफरेंट काउंटिंग बूथ पर लेकर जाएंगे। एडमिनिस्ट्रेशन से जुड़े ऑफिसर्स ने दावा किया कि मीडिया को हर एरिया के नतीजे मीडिया सेल में ही उपलब्ध कराए जाएंगे। जो बाद में धुआं साबित हुई। आकड़ों को लेकर मीडिया पर्सन को परेशानियों से दो चार होना पड़ा।
काउंटिंग के दौरान पुलिस मुस्तैद रही। नवीन मंडी के पूरे स्थल को तीन हिस्सों में बांटा गया। सुरक्षा के लिए 2 प्लाटून पैरामिलेट्री फोर्स, आईसोलेशन यूनिट, एक डिप्टी एसपी, 8 एसओ, 10 इंस्पेक्टर, 60 कांस्टेबिल, एक प्लाटून पीएसी लगाई गई। पूरे स्थल की निगरानी के लिए 6 वॉच टावर भी बनाए गए।
ट्रांसपोर्ट नगर में मतगणना सुबह आठ बजे से स्टार्ट हो गई। जिसमें सबसे पहले पोस्टल बैलेट पेपर की काउंटिंग की गई। काउंटिंग के लिए कुल 126 टेबल लगाई गई। काउंटिंग के लिए असिस्टेंट व माइक्रो ऑब्र्जवर भी हर एक टेबल पर मौजूद रहे। माइक्रो ऑब्र्जवर्स ने हर राउण्ड के बाद मुख्य आब्र्जवर को रिपोर्ट दी। साढ़े आठ बजे के करीब इवीएम से काउंटिंग शुरू हो गई।
बाजार सजा था। सट्टेबाज जुटे थे। हर एक पल का हिसाब किताब नोट हो रहा था। टीवी सेट से लेकर कई मोबाइल फोन मौजूद थे। यह बाजार सजा था रेलवे स्टेशन के पास सुभाष नगर में। मौका था काउंटिंग का। टीवी पर काउंटिंग की लाइव कवरेज हो रही थी और यहां लाइव सट्टा लग रहा था।
सट्टा बाजार के सबसे बड़े किंग मेकर थे मुलायम और मायावती। इन्हीं दोनों नेताओं पर सबसे बड़ा दांव लगा था। लाइव बोली लग रही थी और पल भर में फैसला भी आ जाता था। जीत की खुशी भी यहां जबर्दस्त देखने को मिल रही थी।
यहां न केवल उत्तर प्रदेश की राजनीतिक उठा पटक पर बाजी लग रही थी बल्कि राष्ट्रीय स्तर की राजनीति पर खेल चल रहा था। पांच प्रदेशों के चुनावी परिणाम पर सट्टेबाजों ने करीबी निगाह रख रखी थी। उत्तर प्रदेश के अलावा सबसे अधिक की बाजी पड़ोसी राज्य उत्तराखंड पर लगी थी।
बरेली के नौ विधानसभा क्षेत्रों के सभी प्रत्याशियों पर सट्टेबाजों ने बिसात बिछा रखी थी। इन प्रत्याशियों के समर्थक भी पल-पल की अपडेट ले रहे थे और दांव लगा रहे थे। हर चरण की गिनती पर बाजी लगी थी। सबसे हॉट प्वाइंट थे बरेली सिटी और कैंट।
सट्टेबाजों की बातों पर विश्वास किया जाए तो सट्टेबाजी का पूरा सिंडिकेट प्रदेश स्तर पर संचालित हो रहा था। अकेले बरेली में करीब साढ़े 17 करोड़ रुपए की बाजी लगी। सट्टेबाजी के इस खेल में कई लोगों की तो बल्ले-बल्ले रही, जबकि कई के जेब खाली हो गए.
बरेली शहर में सट्टेबाजों की पूरी मौज रही। न पुलिस का डर न प्रशासन का। एक तरफ लोकतंत्र के महापर्व का रिजल्ट था, तो दूसरी तरफ लोकतंत्र की प्रथम नागरिक शहर में थीं। राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल के आगमन और रिजल्ट के कारण पूरा पुलिस और प्रशासनिक अमला यहां लगा था। तभी सट्टेबाज भी पूरी मौज में दिखे। खुलेआम बोली लगती रही। इन्हें पता था कि आज के दिन इन्हें कोई रोकने टोकने वाला नहीं है।
| जब हार नजर आई तो कैंडिडेट और उनके समर्थक काउंटिंग स्थल के बाहर सारी गणित को फिर से जोडऩे लगे। काउंटिंग को बीच में ही छोड़ सभी से हिसाब मांगने लगे। आपस में बाते हो रही थीं कि फलां के उस क्षेत्र के करीब इतने वोटर पक्के थे और दूसरे ने तो इतने वोट दिलाने का दावा किया। तो फिर बस दो तीन राउंड में क्यों डब्बा गोल हो गया। होली में एक दिन शेष है लेकिन काउंटिंग के रिजल्ट घोषित होते ही बीजेपी कार्यालय पर ट्यूजडे को होली खेली गई। सिटी से कैंडिडेट अरुण कुमार का सूद धर्मकांटा स्थित पार्टी कार्यालय में जश्न सा माहौल था। कार्यकर्ता ढोल की ताल पर नाच-नाचकर अपनी खुशी जाहिर कर रहे थे। कुछ ऐसा ही माहौल कैंट सीट कैंडिडेट राजेश अग्रवाल के पार्टी कार्यालय पर रहा। एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने होली खेलकर अपनी खुशी जाहिर की। एडमिनिस्ट्रेशन ने इलेक्शन का सुरक्षात्मक ढांचा मजबूत करने के लिए पार्टी समर्थकों की इंट्री बैन कर दी थी इसलिए लखनऊ हाईवे के दोनों तरफ पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों का हुजूम जमा हो गया। जैसे-जैसे काउंटिंग रिपोर्ट का एनाउंसमेंट लाउडस्पीकर पर होता रहा, बाहर समर्थकों का जोश भी डबल होता रहा। जीतने वाले जश्न मनाते रहे। वहीं सभी समर्थकों ने अबीर और गुलाल से जमकर होली भी खेली गई। चुनावी जीत या हार, वो भी महज अट्ठारह वोट से। है ना इंट्रेस्टिंग मामला। बरेली की बहेड़ी विधान सभा सीट का भाग्य बस इतने ही वोटों से तय हुआ है। इस बात को लेकर दोनों करीबी कैंडिडेट्स के खेमे में पल-पल समीकरण बदलती रहे। बेचैनी का माहौल रहा। इतने कम मतों के अंतर की वजह से यह सीट कैंडिडेट्स के लिए प्रतिष्ठा का सबब बन गई। अंत में एडमिनिस्ट्रेशन को थकहार पोस्टल बैलेट की रीकाउंटिंग करानी पड़ी। बहेड़ी विधान सभा की मतगणना के लिए बना पंडाल ट्यूजडे को जंग का अखाड़ा बन गया। समाजवादी पार्टी के कैंडिडेट अताउर्रहमान को अड़तालीस,एक सौ बहत्तर और बीजेपी के छत्रपाल सिंह को अड़तालीस,एक सौ चौवन वोट मिलने की घोषणा हुई। उन दोनों के बीच केवल अट्ठारह वोट का डिफरेंस था। मतगणना का रिजल्ट सुनते ही बीजेपी के कैंडिडेट ने अपना आपा खो दिया। वह रीकाउंटिंग की मांग करने लगे। बीजेपी कैंडिडेट छत्रपाल ने बताया कि उनकी मांग को आरओ ने खारिज कर दिया और केवल पोस्टल बैलेट की रीकाउंटिंग करवाके मामले से पल्ला झाड़ लिया। उनका कहना है कि उनके दूसरे राउंड में तैंतालीस,इकसठ वोट थे जबकि एडमिनिस्ट्रेशन ने उन्हें बयालीस,आठ सौ छयासठ वोटों की जानकारी दी। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें हराने में एडमिनिस्ट्रेशन का हाथ है। रीकाउंटिंग के दौरान जब मीडिया का जमावड़ा बहेड़ी के काउंटिंग बूथ पर लगने लगा तो डीएम सुभाष चंद्र शर्मा ने हस्तक्षेप किया। पारदर्शिता के साथ पूरी काउंटिंग करवाई गई है। बहेड़ी वाले केस में आयोग से पोस्टल बैलेट की रीकाउंटिंग करवाने के के निर्देश मिले थे, जिसका हमने पालन किया और तब रिजल्ट डिक्लेयर किया है। -खराब सड़कों की व्यवस्था में सुधार करना है। नई सड़कों के निर्माण के साथ गलियों और नालियों को दुरुस्त करना है। -अलखनाथ मंदिर के पास अधूरे पड़े ओवरब्रिज को पहली प्राथमिकता पर कंप्लीट करूंगा। -पावर सप्लाई को दुरूस्त करना है। -सिटी को कई ओवरब्रिज की आवश्यकता है इसलिए कोशिश करूंगा कि बरेलियंस को ओवरब्रिज का तोहफा दूं। -सिटी में अमन चैन बरकरार रखना है और सिटी को विकास के पथ पर आगे लेकर जाना है। काउंटिंग के अंतिम काउंटडाउन में वोटिंग में पिछड़ते कैंडिडेट कार्यकर्ताओं के साथ बस भागने के रास्ते तलाशते है। हमेशा फोन पर अवेलेबल रहने वाले नेताजी अचानक ही फोन पर अनअवेलबल हो जाते है। सिटी काउंटिंग कॉल नम्बर सात में चारों कैंडिडेट्स के बीच चुनावी समर की जीत-हार का फैसला तो पहले दो चरणों में ही हो गया था। इसके बाद एक-एक करके नेताजी के खिसकने का क्रम देर तक चलता रहा। केवल बीएसपी कैंडिडेट अनीस बेग ही एक ऐसे थे, जो तीसरे और चौथे स्थान पर बने रहने के बाद भी अंतिम चरण तक हॉल में जमे रहे। अपनी हार के पीछे उन्होंने परिसीमन और जातिगत मुद्दो को कारण मानते हुए पहले से ज्यादा तैयारी के साथ दोबारा इलेक्शन में खड़े होने की बात की। कांग्रेस कैंडिडेट नवाब मुजाहिद बताते है कि हमारा साथ कुछ अपनों ने ही नहीं दिया। इस हार के लिए हम किसी को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते है। वहीं जब हारे हुए बाकि कैंडिडेट्स से फोन पर सम्पर्क करने की कोशिश की तो ज्यादातर के फोन पहुंच के बाहर बताते रहे। -रोड की हालत बेहद खराब है। मरम्मत से काम नहीं चलेगा। स्मूथ ट्रैफिक के लिए नए सिरे से ही तैयार करना होगा। -क्षेत्रवासियों को साफ ड्रिंकिंग वाटर मुहैया कराना। आबादी ज्यादा है उसके सापेक्ष सप्लाई बहुत कम। प्लानिंग के साथ इस गैप को भरना होगा। -ड्रेनेज एक बहुत बड़ी प्रॉब्लम बनकर उभर रही है। पॉश एरिया में भी पानी का जमकर भराव होता है। इसे प्रॉब्लम का सोल्यूशन निकालना होगा। -सीवरेज की प्रॉब्लम से सभी परेशान हैं। पुराने इलाकों में ज्यादातर लोगों के पास कनेक्शन भी नहीं है। निकासी के लिए नए सिरे से प्लानिंग की आवश्यकता होगी। -बिजली की प्रॉब्लम सबसे ज्यादा गंभीर है। इसे यहां से हल नहीं किया जा सकता। उच्च स्तरीय मामला है। कोशिश यही होगी कि क्षेत्र को इस संबंध में कुछ राहत दिला सकूं। मतगणना के दौरान पुलिस मुस्तैद दिखी। मतदान से लेकर मतगणना वाले दिन तक पुलिस कोई रिस्क नहीं लेना चाहती थी। इस लिए पुलिस ने पूरे मतगणना स्थल को कई सुरक्षा घेरों में बांट रखा था। गेट से लेकर काउंटिंग बूथ तक पुलिस नजरें गढ़ाए बैठी थी। मीडिया के लोगों को भी सुरक्षा घेरे में कैद करके रखा गया था। गेट पर मोबाइल ले जाने पर पुलिस वालों से मीडिया की नोकझोंक भी हुई, जो बाद में डीएम के हस्तक्षेप के बाद खत्म हुई। एडमिनिस्ट्रेशन ने मीडिया से कोऑपरेशन करने की बात कहीं। उन्होंने कहा कि आप लोग कई ग्रुपों में बंट जाएं। इनको लेकर मीडिया सेल में लगे ऑफिसर डिफरेंट काउंटिंग बूथ पर लेकर जाएंगे। एडमिनिस्ट्रेशन से जुड़े ऑफिसर्स ने दावा किया कि मीडिया को हर एरिया के नतीजे मीडिया सेल में ही उपलब्ध कराए जाएंगे। जो बाद में धुआं साबित हुई। आकड़ों को लेकर मीडिया पर्सन को परेशानियों से दो चार होना पड़ा। काउंटिंग के दौरान पुलिस मुस्तैद रही। नवीन मंडी के पूरे स्थल को तीन हिस्सों में बांटा गया। सुरक्षा के लिए दो प्लाटून पैरामिलेट्री फोर्स, आईसोलेशन यूनिट, एक डिप्टी एसपी, आठ एसओ, दस इंस्पेक्टर, साठ कांस्टेबिल, एक प्लाटून पीएसी लगाई गई। पूरे स्थल की निगरानी के लिए छः वॉच टावर भी बनाए गए। ट्रांसपोर्ट नगर में मतगणना सुबह आठ बजे से स्टार्ट हो गई। जिसमें सबसे पहले पोस्टल बैलेट पेपर की काउंटिंग की गई। काउंटिंग के लिए कुल एक सौ छब्बीस टेबल लगाई गई। काउंटिंग के लिए असिस्टेंट व माइक्रो ऑब्र्जवर भी हर एक टेबल पर मौजूद रहे। माइक्रो ऑब्र्जवर्स ने हर राउण्ड के बाद मुख्य आब्र्जवर को रिपोर्ट दी। साढ़े आठ बजे के करीब इवीएम से काउंटिंग शुरू हो गई। बाजार सजा था। सट्टेबाज जुटे थे। हर एक पल का हिसाब किताब नोट हो रहा था। टीवी सेट से लेकर कई मोबाइल फोन मौजूद थे। यह बाजार सजा था रेलवे स्टेशन के पास सुभाष नगर में। मौका था काउंटिंग का। टीवी पर काउंटिंग की लाइव कवरेज हो रही थी और यहां लाइव सट्टा लग रहा था। सट्टा बाजार के सबसे बड़े किंग मेकर थे मुलायम और मायावती। इन्हीं दोनों नेताओं पर सबसे बड़ा दांव लगा था। लाइव बोली लग रही थी और पल भर में फैसला भी आ जाता था। जीत की खुशी भी यहां जबर्दस्त देखने को मिल रही थी। यहां न केवल उत्तर प्रदेश की राजनीतिक उठा पटक पर बाजी लग रही थी बल्कि राष्ट्रीय स्तर की राजनीति पर खेल चल रहा था। पांच प्रदेशों के चुनावी परिणाम पर सट्टेबाजों ने करीबी निगाह रख रखी थी। उत्तर प्रदेश के अलावा सबसे अधिक की बाजी पड़ोसी राज्य उत्तराखंड पर लगी थी। बरेली के नौ विधानसभा क्षेत्रों के सभी प्रत्याशियों पर सट्टेबाजों ने बिसात बिछा रखी थी। इन प्रत्याशियों के समर्थक भी पल-पल की अपडेट ले रहे थे और दांव लगा रहे थे। हर चरण की गिनती पर बाजी लगी थी। सबसे हॉट प्वाइंट थे बरेली सिटी और कैंट। सट्टेबाजों की बातों पर विश्वास किया जाए तो सट्टेबाजी का पूरा सिंडिकेट प्रदेश स्तर पर संचालित हो रहा था। अकेले बरेली में करीब साढ़े सत्रह करोड़ रुपए की बाजी लगी। सट्टेबाजी के इस खेल में कई लोगों की तो बल्ले-बल्ले रही, जबकि कई के जेब खाली हो गए. बरेली शहर में सट्टेबाजों की पूरी मौज रही। न पुलिस का डर न प्रशासन का। एक तरफ लोकतंत्र के महापर्व का रिजल्ट था, तो दूसरी तरफ लोकतंत्र की प्रथम नागरिक शहर में थीं। राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल के आगमन और रिजल्ट के कारण पूरा पुलिस और प्रशासनिक अमला यहां लगा था। तभी सट्टेबाज भी पूरी मौज में दिखे। खुलेआम बोली लगती रही। इन्हें पता था कि आज के दिन इन्हें कोई रोकने टोकने वाला नहीं है। |
सुपौल में एक पति ने अपनी दिव्यांग पत्नी को घर से निकाल दिया। उसके घर से जाने के दूसरे दिन ही उसने दूसरी शादी भी कर ली। अब उसका कहना है कि वो दोनों पत्नियों को साथ रखेगा। इधर पहली पत्नी ने अपने पति पर 2 लाख कैश और बुलेट मांगने का आरोप लगाया है।
मामला किशनपुर थाना क्षेत्र के कलदाहा वार्ड-8 का है। जहां मंजीत कुमार (24) ने दिव्यांग प्रतिभा देवी (23) से लव मैरिज की थी। शादी के दो साल भी नहीं हुए और मंजीत ने दिव्यांग प्रतिभा को छोड़कर दूसरी शादी कर ली।
दिव्यांग के पिता त्रिरंजन मंडल ने कहा कि भपटियाही थाना क्षेत्र के इटहरी निवासी बिंदेश्वरी मंडल का बेटा मंजीत घर आता-जाता था। उसी समय मेरी बेटी को उसने पसंद किया। पता चला है कि लड़का 5वीं पास है। इसके बाद उसका स्कूल में एडमिशन करवाया। मैट्रिक तक की पढ़ाई पूरी करवाई। जिसका पूरा खर्चा मैंने ही उठाया था। मैट्रिक पास करने के बाद उसकी शादी अपनी बेटी से कर दी। लड़के के परिवार को एक बीघा जमीन दी। जो अब तक उनके ही कब्जे में है।
पिता त्रिरंजन मंडल का आरोप है कि शादी के छह महीने तक सब कुछ ठीक रहा। फिर लड़के ने दहेज में 2 लाख रुपए और बुलेट की मांग की। डिमांड पूरी नहीं करने पर मारपीट कर दिव्यांग विवाहिता को घर से निकाल दिया गया। प्रतिभा ने थाने में आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई है।
पहली पत्नी प्रतिभा देवी ने कहा कि मंजीत कुमार का मेरे घर पर आना-जाना था। वह मुझे पसंद करता था, जिसके बाद परिवार वालों की सहमति से 12 जून 2021 को शादी हुई। उस वक्त मेरे पिता ने अपने सामर्थ्य अनुसार दहेज दिया था। फिर भी मंजीत ने दहेज के लिए प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। चार जून को दहेज की डिमांड पूरी नहीं होने पर मेरे साथ मारपीट की।
तब मेरे पिता अपने घर लेकर चले गए। दो दिन बाद यानी 6 जून को मंजीत ने दूसरी शादी कर ली। पीड़िता ने कहा कि शादी के वक्त मेरे पिता ने 5 लाख कैश, 3 ग्राम सोना, 16 ग्राम चांदी की पायल दी थी, जो मेरे ससुराल वालों ने रख ली है।
दूसरी तरफ आरोपी पति मंजीत कुमार ने कहा कि लड़की दिव्यांग है। कोई भी काम करने में असमर्थ है। घर का कामकाज नहीं कर सकती थी। इसीलिए दूसरी शादी कर ली। अब दोनों पत्नियों को साथ-साथ रखूंगा।
किशनपुर थाना अध्यक्ष मोहम्मद महबूब आलम ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है। जांच कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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| सुपौल में एक पति ने अपनी दिव्यांग पत्नी को घर से निकाल दिया। उसके घर से जाने के दूसरे दिन ही उसने दूसरी शादी भी कर ली। अब उसका कहना है कि वो दोनों पत्नियों को साथ रखेगा। इधर पहली पत्नी ने अपने पति पर दो लाख कैश और बुलेट मांगने का आरोप लगाया है। मामला किशनपुर थाना क्षेत्र के कलदाहा वार्ड-आठ का है। जहां मंजीत कुमार ने दिव्यांग प्रतिभा देवी से लव मैरिज की थी। शादी के दो साल भी नहीं हुए और मंजीत ने दिव्यांग प्रतिभा को छोड़कर दूसरी शादी कर ली। दिव्यांग के पिता त्रिरंजन मंडल ने कहा कि भपटियाही थाना क्षेत्र के इटहरी निवासी बिंदेश्वरी मंडल का बेटा मंजीत घर आता-जाता था। उसी समय मेरी बेटी को उसने पसंद किया। पता चला है कि लड़का पाँचवीं पास है। इसके बाद उसका स्कूल में एडमिशन करवाया। मैट्रिक तक की पढ़ाई पूरी करवाई। जिसका पूरा खर्चा मैंने ही उठाया था। मैट्रिक पास करने के बाद उसकी शादी अपनी बेटी से कर दी। लड़के के परिवार को एक बीघा जमीन दी। जो अब तक उनके ही कब्जे में है। पिता त्रिरंजन मंडल का आरोप है कि शादी के छह महीने तक सब कुछ ठीक रहा। फिर लड़के ने दहेज में दो लाख रुपए और बुलेट की मांग की। डिमांड पूरी नहीं करने पर मारपीट कर दिव्यांग विवाहिता को घर से निकाल दिया गया। प्रतिभा ने थाने में आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई है। पहली पत्नी प्रतिभा देवी ने कहा कि मंजीत कुमार का मेरे घर पर आना-जाना था। वह मुझे पसंद करता था, जिसके बाद परिवार वालों की सहमति से बारह जून दो हज़ार इक्कीस को शादी हुई। उस वक्त मेरे पिता ने अपने सामर्थ्य अनुसार दहेज दिया था। फिर भी मंजीत ने दहेज के लिए प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। चार जून को दहेज की डिमांड पूरी नहीं होने पर मेरे साथ मारपीट की। तब मेरे पिता अपने घर लेकर चले गए। दो दिन बाद यानी छः जून को मंजीत ने दूसरी शादी कर ली। पीड़िता ने कहा कि शादी के वक्त मेरे पिता ने पाँच लाख कैश, तीन ग्राम सोना, सोलह ग्राम चांदी की पायल दी थी, जो मेरे ससुराल वालों ने रख ली है। दूसरी तरफ आरोपी पति मंजीत कुमार ने कहा कि लड़की दिव्यांग है। कोई भी काम करने में असमर्थ है। घर का कामकाज नहीं कर सकती थी। इसीलिए दूसरी शादी कर ली। अब दोनों पत्नियों को साथ-साथ रखूंगा। किशनपुर थाना अध्यक्ष मोहम्मद महबूब आलम ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है। जांच कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
दहलियोंकी बागवानी
पूर्वक चुनाव एवं वितरण किया जाय तो इनकी बड़ी अच्छी जातियाँ प्राप्त हो सकती हैं। यदि सावधानीसे चुने गये अल्प कन्डल एक प्रसिद्ध दुकानसे मँगाये गये हों; और इस बातका स्मरण रक्खा जाय कि यह कोई आवश्यक बात नहीं है कि सदा अधिक वाले ही अति उत्तम होते हैं, तो ये अल्प सावधानीसे ही जलवायु के अनुकूल किये जा सकते हैं तथा बढ़ाए जा सकते हैं । ( इन दोनों अथवा किसी एक नियम के अनुसार सुन्दर दहलियोंका एक उत्तम समूह शीघ्र ही उगाया जा सकता है । )
अनुभवको बात
मेरे विचारमें इन दहलियोंके साथ वैसा ही व्यवहार करना जैसा कि विलायतवाले अपने यहाँ करते हैं अर्थात् कन्दलको निकालकर और शुष्क कर विश्रामकाल तक के लिए उनको जमा रखना, बड़ी भारी त्रुटि है। विलायत में यह विश्राम काल हठात् वहाँकी जलवायुसम्बन्धी अवस्थाओंके कारण होता है । कारण कि मूलोंको हर प्रकार कोहरोंसे बचाना आवश्यक है परन्तु यहाँकी जलवायुके लिए ऐसा करना केवल व्यर्थ ही नहीं वरन् हानिकारक हैं । कुछ अधिक समयतक रक्खे रहने के कारण कन्दले बहुधा सड़ जाती हैं अथवा इतनी शुष्क हो जाती हैं कि वे व्यर्थ समझी जाती हैं । इसके अतिरिक्त यदि सावधानीके साथ और लेबिल लगाकर न जमा रक्खी जायँ, तो इसमें आश्चर्य नहीं कि उनमें से बहुत सी अच्छी तो खा जावें अथवा विशेष निम्न श्रेणीकी जातियोंमें मिलजुल जायें । जब एक बार शुष्क कर ली जायँ तो यह आवश्यक है कि कन्दलोंको मिट्टीमें लगानेके पूर्व ही उगने दें, कारण कि ऐसा न करनेसे उनमें पृथ्वीके भीतर उगना आरम्भ होनेके पूर्व ही सड़नेकी प्रवृत्ति आ जाती है ।
मूलोंको खोदकर बाहर निकाल लें तथा विभाजित करके उनको पुष्प आनेके समयके पूर्णरूप से बीत जानेके उपरान्त फिर शीघ्र हीं लगा दें तो यह सब कठि३
नाइयाँ सरलतापूर्वक दूर हो जाएगी। ऐसा जान पड़ता है कि अल्प विश्राम जो इस प्रकार उनको मिले जाता है यही उनके लिए सब कुछ है जिसकी उनको आवश्यकता है। पुराने मूलोंको विभाजित करने में एक शक्तिवान तनेको किसी चीज़से दो से चार स्वस्थ तरुण कन्दलों सहित तोड़ लो व काट लो और समस्त कोमल टहनियों और व्यर्थ कन्द्रको काटकर दूर कर दो । ये शक्तिवान तरुण विभाजित पौधे शीघ्र ही बढ़ना आरंभ कर देंगे, नये डंठल पुराने डंडलोंके आधारपर शीघ्र निकलने लग जावेंगे। बिना डंडलके कन्दल बढ़ान आरम्भ करनेमें अधिक समय लेते हैं तथा बहुत देर में पुष्प लाते हैं अतः उनको पृथक् लगाना चाहिए । किसी पुराने मूलको निकालनेके पश्चात् दो-तीन अथवा अधिक नवीन पौधोंमें विभाजित कर देना चाहिए । इस प्रकार मैंने अब इहलियोंको चार-से-पाँच वर्षक उगाया है। पौधे अब भी वैसे ही शक्तिवान हैं तथा पुष्प भी वैसे ही दीर्घ हैं जैसा कि मैंने प्रथम उनको लगाया था। हमारे पास सबसे उत्तम प्रकारकी एक बड़ी संख्या है जिसका प्रत्येक पौधा एक प्राचीन मूलसे ही उत्पन्न हो गया है।
किस प्रकार लगावें ?
विलायत में पुराने कन्दलोंको दूसरे वर्ष व्यवहारमें नहीं लाते । पौधोंकी उगान आरम्भ हो जानेपर तरुण टहनियोंको कलम रूपमें लघु गमलोंमें लगा देते हैं और तबतक लगा रहने देते हैं जबतक कि तरुण कन्द न निकल आएँ और फिर पुराने मूलको फेंक देते हैं । ऐसा ज्ञात हुआ है कि यदि पुराने मूलको व्यवहार में लाएँ तो पुष्प छोटे-छोटे निकलते हैं तथा पौधा कोमल होता है। ऐसा यहाँ भी हो सकता था, परन्तु मेरे विचारमें टहनियोंके मूलोंको विभाजित करनेका मेरा नियम इस जलवायुमें वैसा ही प्रभाव रखता है जैसाकि विलायतमें तरुण डण्डलोंमें कलम लगाना । और इसमें अनेक लाभ हैं। कारण कि पौधे जहां वे
फूलनेको हैं ठीक वहीं रक्खे जाते हैं; कलमोंकी भांति लगाना तथा उखाड़कर फिर दूसरे स्थानपर लगाना नहीं पड़ता। वे अति शीघ्र पुष्प देते हैं और यह नियम निश्चयात्मक तथा ठीक है कारण कि इस प्रकार निस्सन्देह बहुत कम कोई कन्द सड़ता हो ।
एक अधिक प्रसिद्ध अंग्रेज़ी बागबानी सम्बन्धी पत्रसे लिया गया निम्न लिखित आधुनिक उद्धरण मेरे विचार में इस बातको कि जो कुछ मैंने विश्राम करनेवाली दहलियोंके कन्डलोंके बारे में कहा है प्रमाणित करेगा ! "यदि शरदऋतु विशेष शान्त हुई तथा बगीचा छायादार हुआ तो यह सम्भव है कि कुछ दहलिए बाहर जीवित रहजायें । परन्तु निस्सन्देह ऐसे उत्तम भागपर जुआ खेलना बुद्धिमानी नहीं है तथा अनुभव शील माली कन्दलोंको शीत ऋतुकी भयंकरता के उपस्थित होनेके पूर्वही उठा लेता है, और उनको किसी कोहरेसे रक्षित स्थानपर जमाकर लेता है । कोहरेसे रक्षा करना परम आवश्यक है" । आगे कहा गया है । 'समस्त जमा किए हुए कन्दलोंकी समय समयपर सावधानी के साथ अवश्य परीक्षा होनी चाहिए जिससे यह ज्ञात हो जाये कि उनमें कोई सड़ान तो नहीं पैदा हुई । इसके प्रथम चिह्नपर ही, अस्वस्थ कन्दल अवश्य पृथक् कर लिया जाय अथवा फेंक दिया जाय" ।
बीजसे उगाना
दहलियोंके उगानेका सबसे सस्ता नियम प्राकृ तिक रीतिसे बीजसे है । इसको सफलता पूर्वक करनेके लिए बीज किसी विश्वास पात्र दूकानसे विशेषकर उससे जिसने दहलियोंके उगानेमें विशेष परिश्रम किया हो प्राप्त करना चाहिए । विशेष जाने हुए प्रकारों के बीज खरीदना अंब सम्भव है जैसे दीर्घ सजावट वाला ( जायण्ट डेकोरेटिव ), पिवनी कैक्स कॉलारेट-जबकि बौने बिस्तरवाला एकाकी अथवा कोल्टनेस दहलिया अल्प निज वर्णोंमें ( पीत, अरुण
तथा श्वेत ) मिल भी सकता है। इन अन्तिम वालोंको त्यागकर बीजसे दहलियोंको उगानेके संबन्ध में अब भी असीम अनिश्चतता पाई जाती है, कारण कि कोई भी इनके उतने भिन्न प्रकार प्राप्तकर सकता है जितने हीन्ज़ ने किए ।
[ मेसर्स पेस्टनजी पी० पोचा एण्ड संसके अनुग्रहसे]
अच्छा होगा यदि इन बीजोंका बिस्तर प्रकाशवान हो, परन्तु बाग़के बिलकुल खुलेहुए भाग में इनका लगाना ठीक नहीं, कारण कि कभी २ इसके प्रभावसे कुछ हास्यजनक अवस्था उत्पन्न हो जाती है। बड़ी लम्बी टांगवाले सामने तथा छोटे हँटी वाले पीछे होने चाहिए। जब पौधोंमें पुष्प लगते हो तो यह बुद्धिमानी होगी कि छोटे कोमल पौधे उखाड़ डाले जाएं अर्थात् वे पौधे जो फल्की तनेदार हों अथवा जिनके पुष्प पदार्थ-विहीन तथा आकर्षण रंगोंके न हों केवल ऐसोंको रहने दो जो साधारणतया उत्तम हो अथवा वास्तव में उत्तम निकलने वाली जातिके हों । जब फूल देना बन्दुकर दें तथा पत्तियोंकी मृत्यु पीछेकी ओर
दहलियों की बागवानी
आरम्भ हो जाए तब यह काट लिये जायँ और उसी स्थानमें छोड़ दिए जावें ताकि दूसरी बार फूलें ! उस समय तक कन्दल वास्तव में शक्तिवान हो जाएंगे और वे बिना हानि पहुँचाए हटाए जा सकेंगे; यद्यपि विभाजन उस समयतक नहीं हो सकता जब तक कि पौधे वृद्ध न हो जावें ।
इस द्वितीयबार फूलनेपर समस्त बीजोंकी वृद्धि में विशेष उन्नति देखकर तुमको आश्चर्य होगा। पौधे शक्तिवान निकलते हैं तथा फूल बड़े होते हैं; अनेक सन्देह युक्त "साधारणतया उत्तम" श्रेणी 'क' में रखे जा सकते हैं। दूसरी बार फूलनेके पश्चात् पौधे अवश्य हटाए जाएं और आवश्यक है कि उनको रंग ऊँचाई तथा पुष्प वाली मेढ़ोंपर चुने हुए स्थान दिए जाते हैं, जब कि 'ख' श्रेणी ( साधारणतया उत्तम ) झाड़ी वाली मेंढ़ोंपर तथा बाग़के जङ्गली टुकड़ोंपर लगाए जाते हैं, जहां वे विशेष चमकदार रंग उत्पन्न करें तथा कुलम लगानेके काममें आयें । विशेष सुन्दर दहलियों में से दो इस प्रकार बीजसे उगाए गए हैं - एक फ्लेमपिंक तथा एक प्रिय ऐमीकाट । दोनों पाँच फुट ऊँचे, पुष्पके ढेरों तथा प्रलम्बित टहनियों सहित बाग़में शोभा की वृद्धि करते हैं तथा कुलम लगाने के लिए समान रूपसे उत्तम हैं । मुझको ऐसा ज्ञात होता है कि बीजसे उगाये गये दहलिए बाहरसे मंगाये गये कन्दलोंकी अपेक्षा अधिक कठोर होते हैं तथा नियमानुसार अधिक स्वतन्त्रतापूर्वक फूलते हैं । यद्यपि बड़े आकारके पौधोंमें पुष्प छोटे होते हैं ( चौड़ाई में १० से ११ इञ्चकी अपेक्षा ७ से ८ इञ्च ) कारण कि स्वतन्त्रतापूर्वक फूलना मुझको केवल कुदकी अपेक्षा अधिक प्रिय है, इस बातका होना कोई अवगुण नहीं है । यदि बड़े पुष्पोंकी आवश्यकता हो तो पुष्पोंको प्रत्येक मुख्य तनेपर एकाकी पुष्पमें पृथक्कर देना चाहिये और ज्यों २ कलियाँ बनती जाएं उनको तरल खाद देते जाना चाहिये । यदि
दहलियोंको काटनेके पश्चात् ही घरमें सीधे लाकर उनको तनों सहित हो व तीन इञ्च गहराईके उबलते हुए जलमें १० मिनट तक डुबो दें तो वे घरमें बहुत अधिक दिनों तक चल सकते हैं।
रंग बिरंगे दहलिये
कोमल पिंक ( लाल ) एवं पीले रंगसे लेकर समस्त उन चटकीले शराब केसे लाल तथा पर्पिल रंगों तकके दहलिये उगाये जा सकते हैं इससे और अधिक सुन्दर क्या बात हो सकती है ? इसके उपरान्त पिंक रंग हैं जो मूँगे तथा आलाके रंग में मिल जाते हैं और इसी प्रकार ऐग्रीकाट, नारंगी, ताम्र तथा स्वर्ण रंगके भी होते हैं। रेशम तथा मखमलकी चमक जवाहिरातोंकी चमक तथा धातुओंकी दसक सभी प्रकारकी चमक इनमें विद्यमान है। इस प्रकार बाग़में किसी भी रंगकी आयोजना सम्भव है । मेसर्स पेस्टनजी पी० पोचा एण्ड सन्सके पास दो पन्नों में दिये गए अल्प प्रिय दहलियोंके स्टाकके कुछ रंगीन चित्रोंके उदाहरण विद्यमान हैं और यह चित्र वाटिका-प्रेमियोंको जो रंगोंकी आयोजनाके फेरमें रहा करते हैं अधिक सहायक होंगे। उन चटकीले पिंकोंको परस्पर समूहित करने अथवा एक ऐसी क्यारीकी आयोजना निर्माण करनेमें जिसमें रंग स्वर्णसे ऐमीकाट, ज्वाला-वर्ण तथा अरुण आदि रंगोंका अच्छी प्रकार चुनाव किया गया हो, विशेष हर्षकी बात है ।
मुझे आशा है कि यह लेख नवीन शिक्षक मालियोंको दहलिया उगानेमें अधिक उत्साहित करेगा ।
साधारण परिश्रमसे माली जितनी सफलता सुन्दर दहलियोंके उगाने में प्राप्त कर सकते हैं उतना अन्य पौधोंमें नहीं ।
-[ एक अंग्रेज़ी लेखके आधारपर ]
बाज़ारकी ठगीका भण्डाफोड़
[ ले० - श्री स्वा० हरिशरणानन्द जी ]
हींग के सम्बन्धमें पीछे किसी पत्रमें मेरा एक लम्बा लेख निकल चुका है। हींग हमारे देशकी चीज़ नहीं । यह अफग़ानिस्तान, ईरान आदि देशोंसे आती है । मुख्यतया यह दो जातियों में विभक्त है । एक हींग, दूसरा हींगड़ा । हींगका व्यवहार भारतवासी करते हैं, हींगड़ा प्रायः विदेशमें जाता है और उसका व्यवहार विदेश वासी अधिक करते हैं। हींग प्रान्त-भेदसे अर्थात् अफगानिस्तानके भिन्न भिन्न प्रान्तों में उत्पन्न होनेसे वह भिन्न भिन्न नामोंसे कोई ८, ९ प्रकारकी कहलाती है, यथा- गिलमीन, नयी ज़मीन, चाहार सद्दा, शाहबन्दी, कावली, हड्डा, चिरास, पुराना चाल, नया चाल इत्यादि ।
हींगकी मण्डियाँ
भारतवर्ष में इनके व्यापारकी चार पाँच बड़ी मण्डियाँ है - (१) बम्बई (२) हाथरस (३) मुल्तान (४) पेशावर (५) डेरा इस्माईल खाँ, गाज़ी खाँ । ईरानी समस्त हींग बम्बईमें आती है। अफग़ानिस्तानकी समस्त हींग उक्त चारों मण्डियोंमें पहुँचती है । हींग क्या है ?
हींग क्या चीज़ है ? हींग जीरा, धनियाँ वर्गकी एक वनस्पतिका दूध है, जिसमें रासायनिक दृष्टि से ६० प्रतिशतके लगभग राल तथा २० प्रतिशतके लगभग गोंद और १० - १५ प्रतिशत उगायी तेल तथा ५-७ प्रति भाग उसवृक्षका कचरा मिट्टी आदि होता है । यह अंक उस ताज़े हींग दूधके हैं। इस दूधको यदि किसी पात्रमें भर कर रख दिया जाय तो वर्ष डेढ़ वर्षमें जा कर यह जम जाता है और हलका पिंगल•
वर्णी कुछ पारदर्शक तीक्ष्ण-गन्धी डला बन जाता है । जैसे जैसे यह पुराना होता चला जाता है वैसे वैसे इसका वर्ण गहरा होता चला जाता है ।
आयुर्वेद में हींगका काफी उपयोग आया है। हींगको पाचक व वातनाशक समझ कर दाल-भाजी में भी डालते हैं । दाल-भाजीमें इसकी सुगन्ध अनेक व्यक्तियोंको रुचिकर है इसीलिए इसकी लागत काफ़ी है । अर्थात् उत्पत्तिसे अधिक खपत है, इसीलिए इसमें मिलावट होती है । हींग साधारणतया २०) मनसे लेकर २०) सेर तककी बाज़ार में आती है। जो होंग २०) रु० मनसे लेकर ५० ) रु० मन तककी होती है उसमें तो मरकाना या संगमरमरकी जातिका पत्थर स्पष्टतया मिला होता है। कुछमें उर्दका आटा मिला होता है। जो हींग ८० ), १०० ) रु० मनसे लेकर ४००-५००) रु० मनकी होती है, हमारा ख्याल था कि यह बिलकुल ख़ालिस होती होगी, क्योंकि यह माल खालों में बन्दका बन्द काबुलसे आता था । आढ़ती और माल बेचनेवाले पठान कहते थे कि इसमें किसी भी चीज़का मिश्रण नहीं होता । हम यही माल लाकर बेचते तथा स्वयम् भी प्रयोग में लाते थे । इस बार हम जब माल ख़रीदने गये तो हमें कुछ संशय हुआ कि इसमें भी मिलावट होती है। खालोंके अन्दर हींगमें घुसेड़े पत्थर, हड्डियाँ, लोहा आदि तो कई बार निकल आता था, किन्तु इस बातपर विश्वास था कि हींगमें मिलावट न होगी । हम अपने ग्राहकों एवं वैद्योंको भी विश्वास दिलाते थे कि हींग ख़ालिस है । इस बार हम जो जो हींग खरीद कर लाये थे लाहौर के सरकारी एकज़ामिनर ( रसायनिक परीक्षक ) के पास सारे नमूने परीक्षार्थ भेजे । जब उसका परिणाम प्राप्त हुआ तो मेरे आश्चर्यका ठिकाना न रहा कि जहांसे यह | दहलियोंकी बागवानी पूर्वक चुनाव एवं वितरण किया जाय तो इनकी बड़ी अच्छी जातियाँ प्राप्त हो सकती हैं। यदि सावधानीसे चुने गये अल्प कन्डल एक प्रसिद्ध दुकानसे मँगाये गये हों; और इस बातका स्मरण रक्खा जाय कि यह कोई आवश्यक बात नहीं है कि सदा अधिक वाले ही अति उत्तम होते हैं, तो ये अल्प सावधानीसे ही जलवायु के अनुकूल किये जा सकते हैं तथा बढ़ाए जा सकते हैं । अनुभवको बात मेरे विचारमें इन दहलियोंके साथ वैसा ही व्यवहार करना जैसा कि विलायतवाले अपने यहाँ करते हैं अर्थात् कन्दलको निकालकर और शुष्क कर विश्रामकाल तक के लिए उनको जमा रखना, बड़ी भारी त्रुटि है। विलायत में यह विश्राम काल हठात् वहाँकी जलवायुसम्बन्धी अवस्थाओंके कारण होता है । कारण कि मूलोंको हर प्रकार कोहरोंसे बचाना आवश्यक है परन्तु यहाँकी जलवायुके लिए ऐसा करना केवल व्यर्थ ही नहीं वरन् हानिकारक हैं । कुछ अधिक समयतक रक्खे रहने के कारण कन्दले बहुधा सड़ जाती हैं अथवा इतनी शुष्क हो जाती हैं कि वे व्यर्थ समझी जाती हैं । इसके अतिरिक्त यदि सावधानीके साथ और लेबिल लगाकर न जमा रक्खी जायँ, तो इसमें आश्चर्य नहीं कि उनमें से बहुत सी अच्छी तो खा जावें अथवा विशेष निम्न श्रेणीकी जातियोंमें मिलजुल जायें । जब एक बार शुष्क कर ली जायँ तो यह आवश्यक है कि कन्दलोंको मिट्टीमें लगानेके पूर्व ही उगने दें, कारण कि ऐसा न करनेसे उनमें पृथ्वीके भीतर उगना आरम्भ होनेके पूर्व ही सड़नेकी प्रवृत्ति आ जाती है । मूलोंको खोदकर बाहर निकाल लें तथा विभाजित करके उनको पुष्प आनेके समयके पूर्णरूप से बीत जानेके उपरान्त फिर शीघ्र हीं लगा दें तो यह सब कठितीन नाइयाँ सरलतापूर्वक दूर हो जाएगी। ऐसा जान पड़ता है कि अल्प विश्राम जो इस प्रकार उनको मिले जाता है यही उनके लिए सब कुछ है जिसकी उनको आवश्यकता है। पुराने मूलोंको विभाजित करने में एक शक्तिवान तनेको किसी चीज़से दो से चार स्वस्थ तरुण कन्दलों सहित तोड़ लो व काट लो और समस्त कोमल टहनियों और व्यर्थ कन्द्रको काटकर दूर कर दो । ये शक्तिवान तरुण विभाजित पौधे शीघ्र ही बढ़ना आरंभ कर देंगे, नये डंठल पुराने डंडलोंके आधारपर शीघ्र निकलने लग जावेंगे। बिना डंडलके कन्दल बढ़ान आरम्भ करनेमें अधिक समय लेते हैं तथा बहुत देर में पुष्प लाते हैं अतः उनको पृथक् लगाना चाहिए । किसी पुराने मूलको निकालनेके पश्चात् दो-तीन अथवा अधिक नवीन पौधोंमें विभाजित कर देना चाहिए । इस प्रकार मैंने अब इहलियोंको चार-से-पाँच वर्षक उगाया है। पौधे अब भी वैसे ही शक्तिवान हैं तथा पुष्प भी वैसे ही दीर्घ हैं जैसा कि मैंने प्रथम उनको लगाया था। हमारे पास सबसे उत्तम प्रकारकी एक बड़ी संख्या है जिसका प्रत्येक पौधा एक प्राचीन मूलसे ही उत्पन्न हो गया है। किस प्रकार लगावें ? विलायत में पुराने कन्दलोंको दूसरे वर्ष व्यवहारमें नहीं लाते । पौधोंकी उगान आरम्भ हो जानेपर तरुण टहनियोंको कलम रूपमें लघु गमलोंमें लगा देते हैं और तबतक लगा रहने देते हैं जबतक कि तरुण कन्द न निकल आएँ और फिर पुराने मूलको फेंक देते हैं । ऐसा ज्ञात हुआ है कि यदि पुराने मूलको व्यवहार में लाएँ तो पुष्प छोटे-छोटे निकलते हैं तथा पौधा कोमल होता है। ऐसा यहाँ भी हो सकता था, परन्तु मेरे विचारमें टहनियोंके मूलोंको विभाजित करनेका मेरा नियम इस जलवायुमें वैसा ही प्रभाव रखता है जैसाकि विलायतमें तरुण डण्डलोंमें कलम लगाना । और इसमें अनेक लाभ हैं। कारण कि पौधे जहां वे फूलनेको हैं ठीक वहीं रक्खे जाते हैं; कलमोंकी भांति लगाना तथा उखाड़कर फिर दूसरे स्थानपर लगाना नहीं पड़ता। वे अति शीघ्र पुष्प देते हैं और यह नियम निश्चयात्मक तथा ठीक है कारण कि इस प्रकार निस्सन्देह बहुत कम कोई कन्द सड़ता हो । एक अधिक प्रसिद्ध अंग्रेज़ी बागबानी सम्बन्धी पत्रसे लिया गया निम्न लिखित आधुनिक उद्धरण मेरे विचार में इस बातको कि जो कुछ मैंने विश्राम करनेवाली दहलियोंके कन्डलोंके बारे में कहा है प्रमाणित करेगा ! "यदि शरदऋतु विशेष शान्त हुई तथा बगीचा छायादार हुआ तो यह सम्भव है कि कुछ दहलिए बाहर जीवित रहजायें । परन्तु निस्सन्देह ऐसे उत्तम भागपर जुआ खेलना बुद्धिमानी नहीं है तथा अनुभव शील माली कन्दलोंको शीत ऋतुकी भयंकरता के उपस्थित होनेके पूर्वही उठा लेता है, और उनको किसी कोहरेसे रक्षित स्थानपर जमाकर लेता है । कोहरेसे रक्षा करना परम आवश्यक है" । आगे कहा गया है । 'समस्त जमा किए हुए कन्दलोंकी समय समयपर सावधानी के साथ अवश्य परीक्षा होनी चाहिए जिससे यह ज्ञात हो जाये कि उनमें कोई सड़ान तो नहीं पैदा हुई । इसके प्रथम चिह्नपर ही, अस्वस्थ कन्दल अवश्य पृथक् कर लिया जाय अथवा फेंक दिया जाय" । बीजसे उगाना दहलियोंके उगानेका सबसे सस्ता नियम प्राकृ तिक रीतिसे बीजसे है । इसको सफलता पूर्वक करनेके लिए बीज किसी विश्वास पात्र दूकानसे विशेषकर उससे जिसने दहलियोंके उगानेमें विशेष परिश्रम किया हो प्राप्त करना चाहिए । विशेष जाने हुए प्रकारों के बीज खरीदना अंब सम्भव है जैसे दीर्घ सजावट वाला , पिवनी कैक्स कॉलारेट-जबकि बौने बिस्तरवाला एकाकी अथवा कोल्टनेस दहलिया अल्प निज वर्णोंमें मिल भी सकता है। इन अन्तिम वालोंको त्यागकर बीजसे दहलियोंको उगानेके संबन्ध में अब भी असीम अनिश्चतता पाई जाती है, कारण कि कोई भी इनके उतने भिन्न प्रकार प्राप्तकर सकता है जितने हीन्ज़ ने किए । [ मेसर्स पेस्टनजी पीशून्य पोचा एण्ड संसके अनुग्रहसे] अच्छा होगा यदि इन बीजोंका बिस्तर प्रकाशवान हो, परन्तु बाग़के बिलकुल खुलेहुए भाग में इनका लगाना ठीक नहीं, कारण कि कभी दो इसके प्रभावसे कुछ हास्यजनक अवस्था उत्पन्न हो जाती है। बड़ी लम्बी टांगवाले सामने तथा छोटे हँटी वाले पीछे होने चाहिए। जब पौधोंमें पुष्प लगते हो तो यह बुद्धिमानी होगी कि छोटे कोमल पौधे उखाड़ डाले जाएं अर्थात् वे पौधे जो फल्की तनेदार हों अथवा जिनके पुष्प पदार्थ-विहीन तथा आकर्षण रंगोंके न हों केवल ऐसोंको रहने दो जो साधारणतया उत्तम हो अथवा वास्तव में उत्तम निकलने वाली जातिके हों । जब फूल देना बन्दुकर दें तथा पत्तियोंकी मृत्यु पीछेकी ओर दहलियों की बागवानी आरम्भ हो जाए तब यह काट लिये जायँ और उसी स्थानमें छोड़ दिए जावें ताकि दूसरी बार फूलें ! उस समय तक कन्दल वास्तव में शक्तिवान हो जाएंगे और वे बिना हानि पहुँचाए हटाए जा सकेंगे; यद्यपि विभाजन उस समयतक नहीं हो सकता जब तक कि पौधे वृद्ध न हो जावें । इस द्वितीयबार फूलनेपर समस्त बीजोंकी वृद्धि में विशेष उन्नति देखकर तुमको आश्चर्य होगा। पौधे शक्तिवान निकलते हैं तथा फूल बड़े होते हैं; अनेक सन्देह युक्त "साधारणतया उत्तम" श्रेणी 'क' में रखे जा सकते हैं। दूसरी बार फूलनेके पश्चात् पौधे अवश्य हटाए जाएं और आवश्यक है कि उनको रंग ऊँचाई तथा पुष्प वाली मेढ़ोंपर चुने हुए स्थान दिए जाते हैं, जब कि 'ख' श्रेणी झाड़ी वाली मेंढ़ोंपर तथा बाग़के जङ्गली टुकड़ोंपर लगाए जाते हैं, जहां वे विशेष चमकदार रंग उत्पन्न करें तथा कुलम लगानेके काममें आयें । विशेष सुन्दर दहलियों में से दो इस प्रकार बीजसे उगाए गए हैं - एक फ्लेमपिंक तथा एक प्रिय ऐमीकाट । दोनों पाँच फुट ऊँचे, पुष्पके ढेरों तथा प्रलम्बित टहनियों सहित बाग़में शोभा की वृद्धि करते हैं तथा कुलम लगाने के लिए समान रूपसे उत्तम हैं । मुझको ऐसा ज्ञात होता है कि बीजसे उगाये गये दहलिए बाहरसे मंगाये गये कन्दलोंकी अपेक्षा अधिक कठोर होते हैं तथा नियमानुसार अधिक स्वतन्त्रतापूर्वक फूलते हैं । यद्यपि बड़े आकारके पौधोंमें पुष्प छोटे होते हैं कारण कि स्वतन्त्रतापूर्वक फूलना मुझको केवल कुदकी अपेक्षा अधिक प्रिय है, इस बातका होना कोई अवगुण नहीं है । यदि बड़े पुष्पोंकी आवश्यकता हो तो पुष्पोंको प्रत्येक मुख्य तनेपर एकाकी पुष्पमें पृथक्कर देना चाहिये और ज्यों दो कलियाँ बनती जाएं उनको तरल खाद देते जाना चाहिये । यदि दहलियोंको काटनेके पश्चात् ही घरमें सीधे लाकर उनको तनों सहित हो व तीन इञ्च गहराईके उबलते हुए जलमें दस मिनट तक डुबो दें तो वे घरमें बहुत अधिक दिनों तक चल सकते हैं। रंग बिरंगे दहलिये कोमल पिंक एवं पीले रंगसे लेकर समस्त उन चटकीले शराब केसे लाल तथा पर्पिल रंगों तकके दहलिये उगाये जा सकते हैं इससे और अधिक सुन्दर क्या बात हो सकती है ? इसके उपरान्त पिंक रंग हैं जो मूँगे तथा आलाके रंग में मिल जाते हैं और इसी प्रकार ऐग्रीकाट, नारंगी, ताम्र तथा स्वर्ण रंगके भी होते हैं। रेशम तथा मखमलकी चमक जवाहिरातोंकी चमक तथा धातुओंकी दसक सभी प्रकारकी चमक इनमें विद्यमान है। इस प्रकार बाग़में किसी भी रंगकी आयोजना सम्भव है । मेसर्स पेस्टनजी पीशून्य पोचा एण्ड सन्सके पास दो पन्नों में दिये गए अल्प प्रिय दहलियोंके स्टाकके कुछ रंगीन चित्रोंके उदाहरण विद्यमान हैं और यह चित्र वाटिका-प्रेमियोंको जो रंगोंकी आयोजनाके फेरमें रहा करते हैं अधिक सहायक होंगे। उन चटकीले पिंकोंको परस्पर समूहित करने अथवा एक ऐसी क्यारीकी आयोजना निर्माण करनेमें जिसमें रंग स्वर्णसे ऐमीकाट, ज्वाला-वर्ण तथा अरुण आदि रंगोंका अच्छी प्रकार चुनाव किया गया हो, विशेष हर्षकी बात है । मुझे आशा है कि यह लेख नवीन शिक्षक मालियोंको दहलिया उगानेमें अधिक उत्साहित करेगा । साधारण परिश्रमसे माली जितनी सफलता सुन्दर दहलियोंके उगाने में प्राप्त कर सकते हैं उतना अन्य पौधोंमें नहीं । -[ एक अंग्रेज़ी लेखके आधारपर ] बाज़ारकी ठगीका भण्डाफोड़ [ लेशून्य - श्री स्वाशून्य हरिशरणानन्द जी ] हींग के सम्बन्धमें पीछे किसी पत्रमें मेरा एक लम्बा लेख निकल चुका है। हींग हमारे देशकी चीज़ नहीं । यह अफग़ानिस्तान, ईरान आदि देशोंसे आती है । मुख्यतया यह दो जातियों में विभक्त है । एक हींग, दूसरा हींगड़ा । हींगका व्यवहार भारतवासी करते हैं, हींगड़ा प्रायः विदेशमें जाता है और उसका व्यवहार विदेश वासी अधिक करते हैं। हींग प्रान्त-भेदसे अर्थात् अफगानिस्तानके भिन्न भिन्न प्रान्तों में उत्पन्न होनेसे वह भिन्न भिन्न नामोंसे कोई आठ, नौ प्रकारकी कहलाती है, यथा- गिलमीन, नयी ज़मीन, चाहार सद्दा, शाहबन्दी, कावली, हड्डा, चिरास, पुराना चाल, नया चाल इत्यादि । हींगकी मण्डियाँ भारतवर्ष में इनके व्यापारकी चार पाँच बड़ी मण्डियाँ है - बम्बई हाथरस मुल्तान पेशावर डेरा इस्माईल खाँ, गाज़ी खाँ । ईरानी समस्त हींग बम्बईमें आती है। अफग़ानिस्तानकी समस्त हींग उक्त चारों मण्डियोंमें पहुँचती है । हींग क्या है ? हींग क्या चीज़ है ? हींग जीरा, धनियाँ वर्गकी एक वनस्पतिका दूध है, जिसमें रासायनिक दृष्टि से साठ प्रतिशतके लगभग राल तथा बीस प्रतिशतके लगभग गोंद और दस - पंद्रह प्रतिशत उगायी तेल तथा पाँच-सात प्रति भाग उसवृक्षका कचरा मिट्टी आदि होता है । यह अंक उस ताज़े हींग दूधके हैं। इस दूधको यदि किसी पात्रमें भर कर रख दिया जाय तो वर्ष डेढ़ वर्षमें जा कर यह जम जाता है और हलका पिंगल• वर्णी कुछ पारदर्शक तीक्ष्ण-गन्धी डला बन जाता है । जैसे जैसे यह पुराना होता चला जाता है वैसे वैसे इसका वर्ण गहरा होता चला जाता है । आयुर्वेद में हींगका काफी उपयोग आया है। हींगको पाचक व वातनाशक समझ कर दाल-भाजी में भी डालते हैं । दाल-भाजीमें इसकी सुगन्ध अनेक व्यक्तियोंको रुचिकर है इसीलिए इसकी लागत काफ़ी है । अर्थात् उत्पत्तिसे अधिक खपत है, इसीलिए इसमें मिलावट होती है । हींग साधारणतया बीस) मनसे लेकर बीस) सेर तककी बाज़ार में आती है। जो होंग बीस) शून्य रुपया मनसे लेकर पचास ) शून्य रुपया मन तककी होती है उसमें तो मरकाना या संगमरमरकी जातिका पत्थर स्पष्टतया मिला होता है। कुछमें उर्दका आटा मिला होता है। जो हींग अस्सी ), एक सौ ) शून्य रुपया मनसे लेकर चार सौ-पाँच सौ) शून्य रुपया मनकी होती है, हमारा ख्याल था कि यह बिलकुल ख़ालिस होती होगी, क्योंकि यह माल खालों में बन्दका बन्द काबुलसे आता था । आढ़ती और माल बेचनेवाले पठान कहते थे कि इसमें किसी भी चीज़का मिश्रण नहीं होता । हम यही माल लाकर बेचते तथा स्वयम् भी प्रयोग में लाते थे । इस बार हम जब माल ख़रीदने गये तो हमें कुछ संशय हुआ कि इसमें भी मिलावट होती है। खालोंके अन्दर हींगमें घुसेड़े पत्थर, हड्डियाँ, लोहा आदि तो कई बार निकल आता था, किन्तु इस बातपर विश्वास था कि हींगमें मिलावट न होगी । हम अपने ग्राहकों एवं वैद्योंको भी विश्वास दिलाते थे कि हींग ख़ालिस है । इस बार हम जो जो हींग खरीद कर लाये थे लाहौर के सरकारी एकज़ामिनर के पास सारे नमूने परीक्षार्थ भेजे । जब उसका परिणाम प्राप्त हुआ तो मेरे आश्चर्यका ठिकाना न रहा कि जहांसे यह |
अक्टूबर का महीना त्यौहारों व उल्लास का समय है। चारों तरफ आस्था- पूजा संबंधी आयोजन हो रहे हैं और पूरा समाज भक्तिभाव में डूबा हुआ है। न केवल मंदिरों में बाजारों और मोहल्लों में भी स्थान-स्थान पर नवरात्रों के उपलक्ष्य में दुर्गा, लक्ष्मी व सरस्वती की आराधना से वातावरण चौबीसों घंटे गूंजता है। समाज का लगभग हर व्यक्ति, कुछ कम कुछ ज्यादा इन कार्यक्रमों में हिस्सा लेता है। सामाजिक उल्लास व सार्वजनिक सहभागिता का ऐसा उदाहरण और कहीं मिलता नहीं है। बच्चे, किशोर, युवा, वृद्ध, स्त्री, पुरूष, मजदूर, किसान, व्यापारी, व्यवसायी सभी इन सामाजिक व धार्मिक कार्यों में स्वयं प्रेरणा से जुड़े हैं। इन कार्यक्रमों के आयोजन के लिए और लोगों की सहभागिता के लिए कोई बहुत बड़े विज्ञापन अभियान नहीं चलते, छोटे या बड़े समूह इनका आयोजन करते है और स्वयं ही व्यक्ति और परिवार दर्शन-पूजन के लिए आगे आते हैं। कहीं भी न तो सरकारी हस्तक्षेप है और ना ही प्रशासन का सहयोग। उत्तर से दक्षिण, पूर्व से पश्चिम सभी महानगरों, नगरों और गांवों में धार्मिक अनुष्ठानों की गूंज है।
केवल यह अक्टूबर में होता है ऐसा नहीं है, पूरे वर्ष छोटे या बड़े अंतराल से कुछ न कुछ आस्था व पूजा संबंधी कार्यक्रम पूरे देश में चलते रहते हैं। वर्ष में दो बार तो रोजों का ही चलन है, दो बार नवरात्रों में 20 दिन के लिए समारोह होते हैं। अक्टूबर के नवरात्रों का अन्त दशहरे के विशाल आयोजन से होता है और दिवाली के 20 दिनों की गिनती प्रारंभ हो जाती है। ईदज्जुहा पर भी सामूहिकता का परिचय होता है। बीच में करवा चौथ का त्यौहार पड़ता है जो कहने के लिए तो महिलाओं के लिए है परन्तु पूरा परिवार ही उसमें उत्साहित होता है। हर पति करवा चौथ के दिन सामान्य से अधिक प्रेम व महत्व प्राप्त करता है, जिससे पारिवारिक संबंध दृढ़ होते हैं। दिसम्बर में क्रिसमस, जनवरी में लोहड़ी, फरवरी में शिवरात्रि, मार्च में फिर से नवरात्र व होली, अप्रैल में वर्ष प्रतिप्रदा, गुड फ्रायडे व बाद में जन्माष्टमी, रक्षाबंधन और इसी तरह सिलसिला चलता रहता है। संक्रांति, अमावस्या, पूर्णिमा यह सभी हमारे समाज में कुछ न कुछ महत्व रखते हैं और अनुष्ठान, सरोवरों में नहाने आदि की अपेक्षा रखते है।
इन पारंपरिक उत्सवों का रूप और भव्यता दिन पर दिन बढ़ती जा रही है और विशेष कर युवा वर्ग तो इनका आनंद सर्वाधिक लेता है। इसकी तुलना में स्वतंत्रता के बाद तीन राष्ट्रीय पर्वों में जनता की सहभागिता लगभग नगण्य है। गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) तो केवल सरकारी कार्यक्रम बनकर रह गया है। स्वतंत्रता के प्रारंभिक वर्षों में दिल्ली व अन्य प्रान्तों की राजधानियों में झांकियों आदि के कार्यक्रम होते थे और उसमें लोग उत्साह से जाते थे परन्तु वह उत्साह लगभग समाप्त हो गया है और ये कार्यक्रम केवल प्रशासनिक स्तर पर मनाये जाते हैं और जिनको उनमें होना आवश्यक है वही जाते है। इनमें आम जनता की उपस्थिति कम होती जा रही है। स्वतंत्रता दिवस यानि 15 अगस्त का भी यही हाल है। गणतंत्र दिवस और 15 अगस्त के दिन राष्ट्रीय ध्वज यदि घर-घर पर दिखता, तो कह सकते थे कि आम व्यक्ति की भावना इन उत्सवों से जुड़ी है परन्तु ये दोनों दिन एक अवकाश के रूप में तो स्वागत योग्य होते है, परन्तु इनके महत्व को जानकर सामूहिक कार्यक्रमों का ना होना चिन्ता का विषय है। इसी प्रकार गांधी जयन्ती के दिन औपचारिक कार्यक्रम तो गांधी जी से संबंधित संस्थानों में हो जाते हैं परन्तु आम व्यक्ति गांधी को स्मरण कर उनके प्रति श्रद्धा भाव प्रकट करे ऐसा होता नहीं है। 30 जनवरी को प्रातः 11. 00 बजे सायरन तो बजता है परन्तु कितने लोग उस समय मौन होकर गांधीजी को श्रृद्धांजलि देते हैं, यह सब जानते ही हैं। राष्ट्रीय उत्सवों में सहभागिता नहीं होने का अर्थ यह नहीं है कि समाज में राष्ट्रभाव की कमी है, परन्तु इन उत्सवों का सामाजिक चेतना से सम्बन्ध नहीं बन पाया है। इनके कारण एकता और समरसता का वातावरण नहीं हुआ है।
हमारे समाज के पारंपरिक उत्सवों में भी बहुत परिवर्तन आये हैं, झांकियों में आधुनिक प्रौद्योगिकी का प्रयोग करके उनको अधिक आकर्षक बनाया जाता है, कलाकार मूर्तियों को गढ़ने में नित नए-नए प्रयोग करते हैं, गीतकार नए शब्दों, भावों व धुनों से खेलते हैं, गायक गीतों को आम आदमी के गुनगुनाने वाले गानों में बदलते हैं। अब तो इवेन्ट प्रबंधन के कई व्यवसायी संस्थान इन कार्यक्रमों का दायित्व लेते हैं। दांडियां व गरबा जिस प्रकार गुजरात से निकलकर पूरे देश में प्रचलित हो रहा है यह इस बात का द्योतक है कि आम भारतीय उत्सव प्रिय है व समारोहों में स्वप्रेरणा से सहभागिता करने का उसे शौक है। ऐसा इसलिए है कि हर त्यौहार व पूजन का कहीं न कहीं आम आदमी से जीवन की अपेक्षाओं से संबंध है। हर त्यौहार का कोई न कोई सामाजिक उद्देश्य भी है जो कहीं न कहीं इतिहास और परम्पराओं से भी जुड़ता है। जहां होली पूरे समाज को एक रस करती है उसमें सत्य की विजय का भी भाव है। दशहरा समाज की विध्वंसकारी शक्तियों के नाश का द्योतक है और दिवाली परिवारों में वापसी का त्यौहार।
इन सभी त्यौहारों का संबंध भूतकाल में होते हुए भी इनकी प्रासंगिकता वर्तमान की परिस्थितियों से भी है। हजारों या सैकड़ों वर्ष पूर्व समाज में जो घटा उससे मिलता जुलता आज के समाज में भी हो रहा है। दशरथ के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए रावण ने वनों में आश्रमों पर आक्रमण करने के लिए अपने साथियों को भेजा, जिससे दशरथ के राज्य का संबंध उन ऋषि- मुनियों से टूट जाए जहां से राज्य की नीतियों का निर्धारण होता था। आज का आतंकवाद और माओवाद भी इसी श्रेणी में आते हैं। विश्वामित्र सरीखे न तो बुद्धिजीवी आज हैं और न ही अपने प्रिय पुत्रों को राक्षसों के संहार के लिए भेजने का का साहस करने वाले प्रशासक। वास्तव में तो संकल्प शक्ति ही नहीं है। विजयादशमी को आतंक के विरोध में दृढ़ संकल्प का रूप दिया जा सकता है। ऐसा करने से समाज का सहयोग देश के अंदर की अराष्ट्रीय शक्तियों से निपटने के लिए किया जा सकता है। केवल भावनात्मक संवेदनाओं को पुनः परिभाषित करने की आवश्यकता है। इसी प्रकार होली को सामाजिक समरसता के उत्सव के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास होना चाहिए जिससे कि जाति, वर्ण व गरीबी अमीरी का भेद मिटकर समाज राष्ट्र बोध के रंग में ही रंग जाए। पश्चिम व कई अन्य प्रभावों के कारण आज देश में परिवारों का विघटन हो रहा है और सामाजिक भीड़ में व्यक्ति अकेला होता जा रहा है। सर्वमान्य है कि यह समाज के लिए घातक है। करवाचौथ, रक्षाबंधन व भाईदूज जैसे त्यौहार है जिनको फिर से परिवार, विशेषकर संयुक्त, परिवार की स्थापना के लिए प्रयोग किया जा सकता है। रोजे व नवरात्र व्यक्ति के आध्यात्मिक विकास के साधन हैं, उन्हें इस रूप में और प्रचारित करने की भी आवश्यकता है। स्वतंत्रता दिवस व गणतंत्र दिवस राष्ट्र के प्रति बार-बार समर्पण के त्यौहार होने चाहिए जहां व्यक्ति प्रान्त और क्षेत्र से ऊपर उठकर राष्ट्र की सोच से जुड़े। गांधी जयंती के दिन समाज अहिंसा का पाठ तो पढ़े ही, परन्तु गांधी द्वारा स्वदेशी के आग्रह को वैश्वीकरण के संदर्भ में व्यवहारिक रूप में लाने की प्रेरणा भी ले। त्यौहारों के इस देश में उत्सव न केवल सामाजिक परिवर्तन के द्योतक है परन्तु वे सामाजिक, आर्थिक व सांस्कृतिक विकास के साधन भी हैं। करोड़ों के विज्ञापनों के द्वारा जो मानसिक परिवर्तन नहीं हो पाता है वह इन त्यौहारों के माध्यम से सहज ही होगा। इस बात के प्रमाण भी हैं, देश के पश्चिमी भाग में गणेश पूजन के कारण सामाजिक क्रांति लाई गई थी। राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय मार्केटिंग के प्रयास इन त्यौहारों में बखूबी होते है और वस्तुओं व सेवाओं को बेचने का काम प्रभावी रूप से होता है। यदि ये व्यापारिक कार्य हो सकता है तो सामाजिक कार्य इन त्यौहारों के माध्यम से अवश्य ही हो सकता है। केवल मन बनाकर योजनाबद्ध प्रयास करने की आवश्यकता है।
| अक्टूबर का महीना त्यौहारों व उल्लास का समय है। चारों तरफ आस्था- पूजा संबंधी आयोजन हो रहे हैं और पूरा समाज भक्तिभाव में डूबा हुआ है। न केवल मंदिरों में बाजारों और मोहल्लों में भी स्थान-स्थान पर नवरात्रों के उपलक्ष्य में दुर्गा, लक्ष्मी व सरस्वती की आराधना से वातावरण चौबीसों घंटे गूंजता है। समाज का लगभग हर व्यक्ति, कुछ कम कुछ ज्यादा इन कार्यक्रमों में हिस्सा लेता है। सामाजिक उल्लास व सार्वजनिक सहभागिता का ऐसा उदाहरण और कहीं मिलता नहीं है। बच्चे, किशोर, युवा, वृद्ध, स्त्री, पुरूष, मजदूर, किसान, व्यापारी, व्यवसायी सभी इन सामाजिक व धार्मिक कार्यों में स्वयं प्रेरणा से जुड़े हैं। इन कार्यक्रमों के आयोजन के लिए और लोगों की सहभागिता के लिए कोई बहुत बड़े विज्ञापन अभियान नहीं चलते, छोटे या बड़े समूह इनका आयोजन करते है और स्वयं ही व्यक्ति और परिवार दर्शन-पूजन के लिए आगे आते हैं। कहीं भी न तो सरकारी हस्तक्षेप है और ना ही प्रशासन का सहयोग। उत्तर से दक्षिण, पूर्व से पश्चिम सभी महानगरों, नगरों और गांवों में धार्मिक अनुष्ठानों की गूंज है। केवल यह अक्टूबर में होता है ऐसा नहीं है, पूरे वर्ष छोटे या बड़े अंतराल से कुछ न कुछ आस्था व पूजा संबंधी कार्यक्रम पूरे देश में चलते रहते हैं। वर्ष में दो बार तो रोजों का ही चलन है, दो बार नवरात्रों में बीस दिन के लिए समारोह होते हैं। अक्टूबर के नवरात्रों का अन्त दशहरे के विशाल आयोजन से होता है और दिवाली के बीस दिनों की गिनती प्रारंभ हो जाती है। ईदज्जुहा पर भी सामूहिकता का परिचय होता है। बीच में करवा चौथ का त्यौहार पड़ता है जो कहने के लिए तो महिलाओं के लिए है परन्तु पूरा परिवार ही उसमें उत्साहित होता है। हर पति करवा चौथ के दिन सामान्य से अधिक प्रेम व महत्व प्राप्त करता है, जिससे पारिवारिक संबंध दृढ़ होते हैं। दिसम्बर में क्रिसमस, जनवरी में लोहड़ी, फरवरी में शिवरात्रि, मार्च में फिर से नवरात्र व होली, अप्रैल में वर्ष प्रतिप्रदा, गुड फ्रायडे व बाद में जन्माष्टमी, रक्षाबंधन और इसी तरह सिलसिला चलता रहता है। संक्रांति, अमावस्या, पूर्णिमा यह सभी हमारे समाज में कुछ न कुछ महत्व रखते हैं और अनुष्ठान, सरोवरों में नहाने आदि की अपेक्षा रखते है। इन पारंपरिक उत्सवों का रूप और भव्यता दिन पर दिन बढ़ती जा रही है और विशेष कर युवा वर्ग तो इनका आनंद सर्वाधिक लेता है। इसकी तुलना में स्वतंत्रता के बाद तीन राष्ट्रीय पर्वों में जनता की सहभागिता लगभग नगण्य है। गणतंत्र दिवस तो केवल सरकारी कार्यक्रम बनकर रह गया है। स्वतंत्रता के प्रारंभिक वर्षों में दिल्ली व अन्य प्रान्तों की राजधानियों में झांकियों आदि के कार्यक्रम होते थे और उसमें लोग उत्साह से जाते थे परन्तु वह उत्साह लगभग समाप्त हो गया है और ये कार्यक्रम केवल प्रशासनिक स्तर पर मनाये जाते हैं और जिनको उनमें होना आवश्यक है वही जाते है। इनमें आम जनता की उपस्थिति कम होती जा रही है। स्वतंत्रता दिवस यानि पंद्रह अगस्त का भी यही हाल है। गणतंत्र दिवस और पंद्रह अगस्त के दिन राष्ट्रीय ध्वज यदि घर-घर पर दिखता, तो कह सकते थे कि आम व्यक्ति की भावना इन उत्सवों से जुड़ी है परन्तु ये दोनों दिन एक अवकाश के रूप में तो स्वागत योग्य होते है, परन्तु इनके महत्व को जानकर सामूहिक कार्यक्रमों का ना होना चिन्ता का विषय है। इसी प्रकार गांधी जयन्ती के दिन औपचारिक कार्यक्रम तो गांधी जी से संबंधित संस्थानों में हो जाते हैं परन्तु आम व्यक्ति गांधी को स्मरण कर उनके प्रति श्रद्धा भाव प्रकट करे ऐसा होता नहीं है। तीस जनवरी को प्रातः ग्यारह. शून्य बजे सायरन तो बजता है परन्तु कितने लोग उस समय मौन होकर गांधीजी को श्रृद्धांजलि देते हैं, यह सब जानते ही हैं। राष्ट्रीय उत्सवों में सहभागिता नहीं होने का अर्थ यह नहीं है कि समाज में राष्ट्रभाव की कमी है, परन्तु इन उत्सवों का सामाजिक चेतना से सम्बन्ध नहीं बन पाया है। इनके कारण एकता और समरसता का वातावरण नहीं हुआ है। हमारे समाज के पारंपरिक उत्सवों में भी बहुत परिवर्तन आये हैं, झांकियों में आधुनिक प्रौद्योगिकी का प्रयोग करके उनको अधिक आकर्षक बनाया जाता है, कलाकार मूर्तियों को गढ़ने में नित नए-नए प्रयोग करते हैं, गीतकार नए शब्दों, भावों व धुनों से खेलते हैं, गायक गीतों को आम आदमी के गुनगुनाने वाले गानों में बदलते हैं। अब तो इवेन्ट प्रबंधन के कई व्यवसायी संस्थान इन कार्यक्रमों का दायित्व लेते हैं। दांडियां व गरबा जिस प्रकार गुजरात से निकलकर पूरे देश में प्रचलित हो रहा है यह इस बात का द्योतक है कि आम भारतीय उत्सव प्रिय है व समारोहों में स्वप्रेरणा से सहभागिता करने का उसे शौक है। ऐसा इसलिए है कि हर त्यौहार व पूजन का कहीं न कहीं आम आदमी से जीवन की अपेक्षाओं से संबंध है। हर त्यौहार का कोई न कोई सामाजिक उद्देश्य भी है जो कहीं न कहीं इतिहास और परम्पराओं से भी जुड़ता है। जहां होली पूरे समाज को एक रस करती है उसमें सत्य की विजय का भी भाव है। दशहरा समाज की विध्वंसकारी शक्तियों के नाश का द्योतक है और दिवाली परिवारों में वापसी का त्यौहार। इन सभी त्यौहारों का संबंध भूतकाल में होते हुए भी इनकी प्रासंगिकता वर्तमान की परिस्थितियों से भी है। हजारों या सैकड़ों वर्ष पूर्व समाज में जो घटा उससे मिलता जुलता आज के समाज में भी हो रहा है। दशरथ के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए रावण ने वनों में आश्रमों पर आक्रमण करने के लिए अपने साथियों को भेजा, जिससे दशरथ के राज्य का संबंध उन ऋषि- मुनियों से टूट जाए जहां से राज्य की नीतियों का निर्धारण होता था। आज का आतंकवाद और माओवाद भी इसी श्रेणी में आते हैं। विश्वामित्र सरीखे न तो बुद्धिजीवी आज हैं और न ही अपने प्रिय पुत्रों को राक्षसों के संहार के लिए भेजने का का साहस करने वाले प्रशासक। वास्तव में तो संकल्प शक्ति ही नहीं है। विजयादशमी को आतंक के विरोध में दृढ़ संकल्प का रूप दिया जा सकता है। ऐसा करने से समाज का सहयोग देश के अंदर की अराष्ट्रीय शक्तियों से निपटने के लिए किया जा सकता है। केवल भावनात्मक संवेदनाओं को पुनः परिभाषित करने की आवश्यकता है। इसी प्रकार होली को सामाजिक समरसता के उत्सव के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास होना चाहिए जिससे कि जाति, वर्ण व गरीबी अमीरी का भेद मिटकर समाज राष्ट्र बोध के रंग में ही रंग जाए। पश्चिम व कई अन्य प्रभावों के कारण आज देश में परिवारों का विघटन हो रहा है और सामाजिक भीड़ में व्यक्ति अकेला होता जा रहा है। सर्वमान्य है कि यह समाज के लिए घातक है। करवाचौथ, रक्षाबंधन व भाईदूज जैसे त्यौहार है जिनको फिर से परिवार, विशेषकर संयुक्त, परिवार की स्थापना के लिए प्रयोग किया जा सकता है। रोजे व नवरात्र व्यक्ति के आध्यात्मिक विकास के साधन हैं, उन्हें इस रूप में और प्रचारित करने की भी आवश्यकता है। स्वतंत्रता दिवस व गणतंत्र दिवस राष्ट्र के प्रति बार-बार समर्पण के त्यौहार होने चाहिए जहां व्यक्ति प्रान्त और क्षेत्र से ऊपर उठकर राष्ट्र की सोच से जुड़े। गांधी जयंती के दिन समाज अहिंसा का पाठ तो पढ़े ही, परन्तु गांधी द्वारा स्वदेशी के आग्रह को वैश्वीकरण के संदर्भ में व्यवहारिक रूप में लाने की प्रेरणा भी ले। त्यौहारों के इस देश में उत्सव न केवल सामाजिक परिवर्तन के द्योतक है परन्तु वे सामाजिक, आर्थिक व सांस्कृतिक विकास के साधन भी हैं। करोड़ों के विज्ञापनों के द्वारा जो मानसिक परिवर्तन नहीं हो पाता है वह इन त्यौहारों के माध्यम से सहज ही होगा। इस बात के प्रमाण भी हैं, देश के पश्चिमी भाग में गणेश पूजन के कारण सामाजिक क्रांति लाई गई थी। राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय मार्केटिंग के प्रयास इन त्यौहारों में बखूबी होते है और वस्तुओं व सेवाओं को बेचने का काम प्रभावी रूप से होता है। यदि ये व्यापारिक कार्य हो सकता है तो सामाजिक कार्य इन त्यौहारों के माध्यम से अवश्य ही हो सकता है। केवल मन बनाकर योजनाबद्ध प्रयास करने की आवश्यकता है। |
इतना ही नहीं महिला के परिवारवालों ने उसके पति की पिटाई की। जानकारी के अनुसार भूर क्षेत्र की रहने वाली 28 साल की क्षमा शर्मा की शादी कटरा पुलिस थाना अंतर्गत आने वाले मीरनपुर गांव के सतीश शर्मा से दिसबंर 2010 में हुई थी। सतीश की कपड़ो की एक दुकान है। कपल की तीन बेटियां 6 साल की कनिका, 3 साल की आरोही, 2 साल की भूमि और आठ महीने की तनिष्का है।
क्षमा की छोटी बहन एकता ने बताया- क्षमा का पति आरोही के पैदा होने के बाद से उसे प्रताड़ित कर रहा था क्योंकि वह बेटियों को जन्म दे रही थी। गुरुवार को जब क्षमा कमरे में सो रही थी तब सतीश ने अपनी मां, दो भाईयों और पिता की मदद से उसके शरीर पर मिट्टी का तेल छिड़ककर आग लगा दी। उन्होंने बाहर से कमरे का दरवाजा बंद कर दिया। उसकी चीख-पुकार सुनने के बाद कुछ पड़ोसी घर के अंदर आए और उसे शाहजहांपुर जिले के निजी अस्पताल में भर्ती करवाया। बाद में उसे बरेली के अस्पताल रेफर कर दिया गया लेकिन ज्यादा जल जाने की वजह से शनिवार सुबह उसकी मौत हो गई।
| इतना ही नहीं महिला के परिवारवालों ने उसके पति की पिटाई की। जानकारी के अनुसार भूर क्षेत्र की रहने वाली अट्ठाईस साल की क्षमा शर्मा की शादी कटरा पुलिस थाना अंतर्गत आने वाले मीरनपुर गांव के सतीश शर्मा से दिसबंर दो हज़ार दस में हुई थी। सतीश की कपड़ो की एक दुकान है। कपल की तीन बेटियां छः साल की कनिका, तीन साल की आरोही, दो साल की भूमि और आठ महीने की तनिष्का है। क्षमा की छोटी बहन एकता ने बताया- क्षमा का पति आरोही के पैदा होने के बाद से उसे प्रताड़ित कर रहा था क्योंकि वह बेटियों को जन्म दे रही थी। गुरुवार को जब क्षमा कमरे में सो रही थी तब सतीश ने अपनी मां, दो भाईयों और पिता की मदद से उसके शरीर पर मिट्टी का तेल छिड़ककर आग लगा दी। उन्होंने बाहर से कमरे का दरवाजा बंद कर दिया। उसकी चीख-पुकार सुनने के बाद कुछ पड़ोसी घर के अंदर आए और उसे शाहजहांपुर जिले के निजी अस्पताल में भर्ती करवाया। बाद में उसे बरेली के अस्पताल रेफर कर दिया गया लेकिन ज्यादा जल जाने की वजह से शनिवार सुबह उसकी मौत हो गई। |
सबक सीखाः मैं अब भोजन से बचने के रूप में नहीं देखता हूं। यह ईंधन है, और मैं ईंधन कुशल हूँ।
खुफिया हथियारः संगठित खेल। टीम camaraderie बढ़ावा प्रेरणा में मदद करता है।
लाभः अपने शुरुआती किशोरों में, समारा का वजन अपने माता-पिता के तलाक के बाद उछल गया। "मैं जो कुछ भी चाहता था उसे खाने से मैंने अपने अवसाद को शांत करने की कोशिश की," वह कहता है। फ्राइड, चिकना खाना और सोडा उनके लिए आदर्श बन गया। हाईस्कूल के अंत तक, उन्होंने लगभग 300 पाउंड वजन कम किया।
बदलावः अपने जूनियर वर्ष के बाद, समारा के फुटबॉल कोच, पूर्व न्यू इंग्लैंड देशभक्त रक्षात्मक वापस, अपने खिलाड़ियों को कठोर ऑफ-सीजन वर्कआउट्स के माध्यम से डालने लगे। समारा का कहना है, "मैं अभ्यास में इतनी जल्दी पहन रहा था। इससे मुझे दयनीय महसूस हुआ। मैं इस तरह जीवन की भावना से गुजरना नहीं चाहता था, इसलिए मैंने वजन कम करने के लिए सही फैसला किया।"
जीवनशैलीः अपने आराम के भोजन को बहाल करते हुए, समारा ने टर्की, फल चिकनी और ग्रील्ड-चिकन-स्तन सैंडविच खाने लगे। सुबह के फुटबॉल वर्कआउट्स के अलावा, वह रोजाना अंतराल दौड़ता चलाता था और कम से कम एक घंटे के लिए हर दिन एक टीम के साथी के साथ भार उठाता था।
पुरस्कारः जल्द ही समारा का वजन 200 पाउंड से नीचे गिर गया था। उनके नए आत्मविश्वास और ऊर्जा ने उनकी सामाजिक स्थिति को बढ़ाने में मदद की। "यह छेड़छाड़ नहीं करने में मदद करता है। लोगों को शून्य आत्म-सम्मान के साथ एक मोपे वसा बच्चे की तुलना में एक आत्मविश्वास वाले व्यक्ति के लिए निश्चित रूप से अच्छा लगता है।"
अपने आप के लिए ये करो। बहुत से लोग आपको पाउंड खोने के लिए बताएंगे - डॉक्टर, दोस्तों, परिवार - लेकिन मुझे वास्तव में इसे काम करना चाहते थे। कोई भी आपको अपने जैसा प्रेरित नहीं कर सकता है।
अपने आहार को विविधता दें। जब आप दिन में दो बार एक ही पुराने ग्रील्ड चिकन को मजबूर कर रहे होते हैं तो जला देना आसान होता है, इसलिए मोनोटीनी तोड़ने के लिए मछली और अन्य दुबला प्रोटीन जैसे टर्की और पोर्क चॉप में स्वैप करें। संदेह में, काली मिर्च और ताबास्को जोड़ें।
संरचना बनाएं एक सेट कसरत समय और regimen होने से आप पैमाने से परे अपनी फिटनेस प्रगति को ट्रैक करने की अनुमति देता है।
| सबक सीखाः मैं अब भोजन से बचने के रूप में नहीं देखता हूं। यह ईंधन है, और मैं ईंधन कुशल हूँ। खुफिया हथियारः संगठित खेल। टीम camaraderie बढ़ावा प्रेरणा में मदद करता है। लाभः अपने शुरुआती किशोरों में, समारा का वजन अपने माता-पिता के तलाक के बाद उछल गया। "मैं जो कुछ भी चाहता था उसे खाने से मैंने अपने अवसाद को शांत करने की कोशिश की," वह कहता है। फ्राइड, चिकना खाना और सोडा उनके लिए आदर्श बन गया। हाईस्कूल के अंत तक, उन्होंने लगभग तीन सौ पाउंड वजन कम किया। बदलावः अपने जूनियर वर्ष के बाद, समारा के फुटबॉल कोच, पूर्व न्यू इंग्लैंड देशभक्त रक्षात्मक वापस, अपने खिलाड़ियों को कठोर ऑफ-सीजन वर्कआउट्स के माध्यम से डालने लगे। समारा का कहना है, "मैं अभ्यास में इतनी जल्दी पहन रहा था। इससे मुझे दयनीय महसूस हुआ। मैं इस तरह जीवन की भावना से गुजरना नहीं चाहता था, इसलिए मैंने वजन कम करने के लिए सही फैसला किया।" जीवनशैलीः अपने आराम के भोजन को बहाल करते हुए, समारा ने टर्की, फल चिकनी और ग्रील्ड-चिकन-स्तन सैंडविच खाने लगे। सुबह के फुटबॉल वर्कआउट्स के अलावा, वह रोजाना अंतराल दौड़ता चलाता था और कम से कम एक घंटे के लिए हर दिन एक टीम के साथी के साथ भार उठाता था। पुरस्कारः जल्द ही समारा का वजन दो सौ पाउंड से नीचे गिर गया था। उनके नए आत्मविश्वास और ऊर्जा ने उनकी सामाजिक स्थिति को बढ़ाने में मदद की। "यह छेड़छाड़ नहीं करने में मदद करता है। लोगों को शून्य आत्म-सम्मान के साथ एक मोपे वसा बच्चे की तुलना में एक आत्मविश्वास वाले व्यक्ति के लिए निश्चित रूप से अच्छा लगता है।" अपने आप के लिए ये करो। बहुत से लोग आपको पाउंड खोने के लिए बताएंगे - डॉक्टर, दोस्तों, परिवार - लेकिन मुझे वास्तव में इसे काम करना चाहते थे। कोई भी आपको अपने जैसा प्रेरित नहीं कर सकता है। अपने आहार को विविधता दें। जब आप दिन में दो बार एक ही पुराने ग्रील्ड चिकन को मजबूर कर रहे होते हैं तो जला देना आसान होता है, इसलिए मोनोटीनी तोड़ने के लिए मछली और अन्य दुबला प्रोटीन जैसे टर्की और पोर्क चॉप में स्वैप करें। संदेह में, काली मिर्च और ताबास्को जोड़ें। संरचना बनाएं एक सेट कसरत समय और regimen होने से आप पैमाने से परे अपनी फिटनेस प्रगति को ट्रैक करने की अनुमति देता है। |
कुछ ऐसे ही नारों के साथ आज दिल्ली के जंतर-मंतर पर ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन (ऐक्टू) का खुला नेशनल कन्वेंशन (राष्ट्रीय सम्मेलन) हुआ। सम्मेलन में साफ तौर पर मोदी सरकार के "स्वच्छ भारत अभियान" को एक धोखा बताया गया और इसके लिए जाति के विनाश को एक ज़रूरी शर्त बताया गया। जाति का ऐसा विनाश जिसमें सफाई का काम सिर्फ दलित वर्ग के ही हिस्से न हो। इस वर्ग को भी पूरी गरिमा और अस्मिता के साथ जीने और अन्य काम करने का अधिकार और सुविधा हो।
बिल्कुल ऐसा ही नज़ारा दिल्ली ने पिछले 25 सितंबर को देखा था जब सफाई कर्मचारी आंदोलन के आह्वान पर जंतर-मंतर, संसद मार्ग पर ही अन्य लोगों के साथ सैकड़ों सफाईकर्मी और सीवर में मौत का शिकार हुए कर्मचारियों के परिवार जन शामिल हुए थे।
आपको बता दें कि पिछले काफी समय से राजधानी दिल्ली समेत पूरे देश में सीवर में मौतें काफी तेज़ी से बढ़ी हैं। जबकि देश में मैला प्रथा और सीवर या सैप्टिक टैंक में किसी भी व्यक्ति को उतारा जाना गैरकानूनी घोषित हो चुका है। बावजूद इसके ये काम धड़ल्ले से जारी है और सफाईकर्मियों को इसके लिए मजबूर किया जाता रहा है।
ऐक्टू के राष्ट्रीय सम्मेलन में कहा गया कि पूरे देश मे सफाई कर्मचारियों की हालत दिन-ब-दिन और खराब होती जा रही है। विडम्बना तो ये है कि 2014 में जब मोदी सरकार द्वारा 'स्वच्छ भारत मिशन' की घोषणा की तब से अब तक सैकड़ों मजदूर सीवरों और गटर की भेंट चढ़ चुके हैं। 'सफाई कर्मचारी आन्दोलन' द्वारा किये गये सर्वे के अनुसार, हर तीसरे दिन पर एक मजदूर की मौत होती है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अकेले 2017 में 300 सफाई कर्मचारियों की जाने गयी। पिछले सितंबर-अक्टूबर में दिल्ली शहर के ही सीवर के अंदर सात मजदूर मारे गये। मोदीजी चाहे जितनी जुमला बाज़ी कर लें पर सच्चाई तो यही है कि मरने वाले इन मजदूरों के परिवारों को न ही कोई न्याय मिला न ही उचित मुआवजा।
ऐक्टू, जेएनयू यूनिट की अध्यक्ष उर्मिला ने बताया कि ऐक्टू द्वारा चलाये लंबे आंदोलन के बाद दिसंबर, 2014 में हमने इस मामले में एक बड़ी जीत हासिल की थी और जेएनयू प्रशासन को मजबूर किया कि वो ये सर्कुलर लाये कि जेएनयू कैंपस में कोई मजदूर सीवर के अंदर नहीं घुसेगा। पर पूरे देश में अभी भी ये अमानवीय काम जारी है, इसके खिलाफ एकजुट होने की ज़रूरत है।
वरिष्ठ पत्रकार और सफाई कर्मचारी आंदोलन से जुड़ीं भाषा सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में उनके कार्यक्रम की तैयारियों के लिए दो सफाईकर्मी गटर में उतारे जाते हैं लेकिन उनकी मौत पर प्रधानमंत्री दुःख तक नहीं जताते हैं। दो शब्द नहीं कहते हैं। पुलिस एफआईआर तक दर्ज नहीं करती है और मुख्य धारा का मीडिया भी इस खबर को लगभग छुपा देता है।
ऐपवा की महासचिव व सीपीएमएल के नेता कविता कृष्णन ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कई चौंकाने वाले तथ्य बताए। उन्होंने बताया की कर्नाटक में एक अध्ययन किया गया जिसमें पता चला की अधिकतर सफाई कर्मचारी जो महिला हैं, उन्हें बहुत कम उम्र में मुँह का कैंसर हो रहा है जिससे उनकी बहुत ही कम उम्र में मौत हो जाती है। इस कैंसर का मुख्य कारण है कि वो जब सफाई का कम करती हैं तब वे शौचालय नहीं जा सकतीं, इसलिए वो पानी नहीं पीती हैं और उन्हें प्यास न लगे इसलिए वो पान मसाला खाती हैं जिससे उन्हें इस तरह की बीमरी का सामना करना पड़ता है।
इन सबके बीच कर्नाटक से आईं संगठन की नेता निर्मला ने बताया कि किस तरह से उन लोगों ने अपनी एकजुटता और निरंतर संघर्ष के बल पर अपने अधिकार को प्राप्त किया। पहले जहाँ उन्हें ठेकेदार के नीचे काम करना पड़ता था वो अपनी मनमानी से पैसे देता था परन्तु अब उन्हें सरकार द्वार सीधे काम दिया जाता है। पैसा भी ठीक समय पर मिलता है। साथ ही स्वास्थ्य के लिए ईएसआई कार्ड और पीएफ भी मिलता है।
"सफाईकर्मियों की मौतें अब और नहीं" का नारा देते हुए सम्मेलन में ऐक्टू की ओर से सफाईकर्मियों के हक में कई मांगें की गईं।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए भाकपा (माले) के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने वाम दलों की ओर से सफाईकर्मियों के साथ पूरी एकजुटता जताते हुए उनकी मांगों का समर्थन किया और इस लड़ाई को आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया। सम्मेलन में सांस्कृतिक टीम संगवारी की ओर जनगीत भी पेश किए।
अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें।
| कुछ ऐसे ही नारों के साथ आज दिल्ली के जंतर-मंतर पर ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन का खुला नेशनल कन्वेंशन हुआ। सम्मेलन में साफ तौर पर मोदी सरकार के "स्वच्छ भारत अभियान" को एक धोखा बताया गया और इसके लिए जाति के विनाश को एक ज़रूरी शर्त बताया गया। जाति का ऐसा विनाश जिसमें सफाई का काम सिर्फ दलित वर्ग के ही हिस्से न हो। इस वर्ग को भी पूरी गरिमा और अस्मिता के साथ जीने और अन्य काम करने का अधिकार और सुविधा हो। बिल्कुल ऐसा ही नज़ारा दिल्ली ने पिछले पच्चीस सितंबर को देखा था जब सफाई कर्मचारी आंदोलन के आह्वान पर जंतर-मंतर, संसद मार्ग पर ही अन्य लोगों के साथ सैकड़ों सफाईकर्मी और सीवर में मौत का शिकार हुए कर्मचारियों के परिवार जन शामिल हुए थे। आपको बता दें कि पिछले काफी समय से राजधानी दिल्ली समेत पूरे देश में सीवर में मौतें काफी तेज़ी से बढ़ी हैं। जबकि देश में मैला प्रथा और सीवर या सैप्टिक टैंक में किसी भी व्यक्ति को उतारा जाना गैरकानूनी घोषित हो चुका है। बावजूद इसके ये काम धड़ल्ले से जारी है और सफाईकर्मियों को इसके लिए मजबूर किया जाता रहा है। ऐक्टू के राष्ट्रीय सम्मेलन में कहा गया कि पूरे देश मे सफाई कर्मचारियों की हालत दिन-ब-दिन और खराब होती जा रही है। विडम्बना तो ये है कि दो हज़ार चौदह में जब मोदी सरकार द्वारा 'स्वच्छ भारत मिशन' की घोषणा की तब से अब तक सैकड़ों मजदूर सीवरों और गटर की भेंट चढ़ चुके हैं। 'सफाई कर्मचारी आन्दोलन' द्वारा किये गये सर्वे के अनुसार, हर तीसरे दिन पर एक मजदूर की मौत होती है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अकेले दो हज़ार सत्रह में तीन सौ सफाई कर्मचारियों की जाने गयी। पिछले सितंबर-अक्टूबर में दिल्ली शहर के ही सीवर के अंदर सात मजदूर मारे गये। मोदीजी चाहे जितनी जुमला बाज़ी कर लें पर सच्चाई तो यही है कि मरने वाले इन मजदूरों के परिवारों को न ही कोई न्याय मिला न ही उचित मुआवजा। ऐक्टू, जेएनयू यूनिट की अध्यक्ष उर्मिला ने बताया कि ऐक्टू द्वारा चलाये लंबे आंदोलन के बाद दिसंबर, दो हज़ार चौदह में हमने इस मामले में एक बड़ी जीत हासिल की थी और जेएनयू प्रशासन को मजबूर किया कि वो ये सर्कुलर लाये कि जेएनयू कैंपस में कोई मजदूर सीवर के अंदर नहीं घुसेगा। पर पूरे देश में अभी भी ये अमानवीय काम जारी है, इसके खिलाफ एकजुट होने की ज़रूरत है। वरिष्ठ पत्रकार और सफाई कर्मचारी आंदोलन से जुड़ीं भाषा सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में उनके कार्यक्रम की तैयारियों के लिए दो सफाईकर्मी गटर में उतारे जाते हैं लेकिन उनकी मौत पर प्रधानमंत्री दुःख तक नहीं जताते हैं। दो शब्द नहीं कहते हैं। पुलिस एफआईआर तक दर्ज नहीं करती है और मुख्य धारा का मीडिया भी इस खबर को लगभग छुपा देता है। ऐपवा की महासचिव व सीपीएमएल के नेता कविता कृष्णन ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कई चौंकाने वाले तथ्य बताए। उन्होंने बताया की कर्नाटक में एक अध्ययन किया गया जिसमें पता चला की अधिकतर सफाई कर्मचारी जो महिला हैं, उन्हें बहुत कम उम्र में मुँह का कैंसर हो रहा है जिससे उनकी बहुत ही कम उम्र में मौत हो जाती है। इस कैंसर का मुख्य कारण है कि वो जब सफाई का कम करती हैं तब वे शौचालय नहीं जा सकतीं, इसलिए वो पानी नहीं पीती हैं और उन्हें प्यास न लगे इसलिए वो पान मसाला खाती हैं जिससे उन्हें इस तरह की बीमरी का सामना करना पड़ता है। इन सबके बीच कर्नाटक से आईं संगठन की नेता निर्मला ने बताया कि किस तरह से उन लोगों ने अपनी एकजुटता और निरंतर संघर्ष के बल पर अपने अधिकार को प्राप्त किया। पहले जहाँ उन्हें ठेकेदार के नीचे काम करना पड़ता था वो अपनी मनमानी से पैसे देता था परन्तु अब उन्हें सरकार द्वार सीधे काम दिया जाता है। पैसा भी ठीक समय पर मिलता है। साथ ही स्वास्थ्य के लिए ईएसआई कार्ड और पीएफ भी मिलता है। "सफाईकर्मियों की मौतें अब और नहीं" का नारा देते हुए सम्मेलन में ऐक्टू की ओर से सफाईकर्मियों के हक में कई मांगें की गईं। सम्मेलन को संबोधित करते हुए भाकपा के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने वाम दलों की ओर से सफाईकर्मियों के साथ पूरी एकजुटता जताते हुए उनकी मांगों का समर्थन किया और इस लड़ाई को आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया। सम्मेलन में सांस्कृतिक टीम संगवारी की ओर जनगीत भी पेश किए। अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें। |
आगामी फिल्म 'दिल जंगली' की रिलीज के लिए उत्साहित ऐक्ट्रेस तापसी पन्नू ने कहा कि वह असल जिंदगी में फिल्म के किरदार से बिल्कुल विपरीत हैं और वह रोमांटिकनहीं हैं।
तापसी ने बातचीत में कहा, 'मैं बिल्कुल भी रोमांटिक नहीं हूं, हालांकि फिल्म में मेरा किरदार बहुत रोमांटिक है। ' 'पिंक' की ऐक्ट्रेस ने कहा कि उन्हें पर्दे पर रोमांस करना बहुत मुश्किल लगता है।
रोमांटिक फिल्म 'दिल जंगली' दीपशिखा देशमुख और जैकी भगनानी द्वारा निर्मित है। आलिया सेन शर्मा द्वारा निर्देशित फिल्म 6 फरवरी को रिलीज होगी। इसमें साकिब सलीम, अभिलाष थापलियाल, निधि सिंह और श्रृष्टि श्रीवास्तव जैसे सितारे प्रमुख भूमिकाओं में हैं।
| आगामी फिल्म 'दिल जंगली' की रिलीज के लिए उत्साहित ऐक्ट्रेस तापसी पन्नू ने कहा कि वह असल जिंदगी में फिल्म के किरदार से बिल्कुल विपरीत हैं और वह रोमांटिकनहीं हैं। तापसी ने बातचीत में कहा, 'मैं बिल्कुल भी रोमांटिक नहीं हूं, हालांकि फिल्म में मेरा किरदार बहुत रोमांटिक है। ' 'पिंक' की ऐक्ट्रेस ने कहा कि उन्हें पर्दे पर रोमांस करना बहुत मुश्किल लगता है। रोमांटिक फिल्म 'दिल जंगली' दीपशिखा देशमुख और जैकी भगनानी द्वारा निर्मित है। आलिया सेन शर्मा द्वारा निर्देशित फिल्म छः फरवरी को रिलीज होगी। इसमें साकिब सलीम, अभिलाष थापलियाल, निधि सिंह और श्रृष्टि श्रीवास्तव जैसे सितारे प्रमुख भूमिकाओं में हैं। |
जनज्वार ब्यूरो,पटना। कोरोना काल में शादी जैसे सामूहिक आयोजनों में शामिल होने के क्या दुष्परिणाम हो सकते हैं,यह पटना में देखने को मिल रहा है। पटना के पालीगंज की यह घटना इस बात का भी सबूत है कि बाहर से आकर बिना जांच कराए लोगों से मिलना-जुलना कितना खतरनाक हो सकता है। साथ ही यह घटना क्वेरेन्टीन सेंटरों को बंद किए जाने से हो रही दिक्कतों की बानगी भी दिखा रही है। कोरोना के प्रति लोगों और सिस्टम की लापरवाही का भी यह मिसाल बन गया है।
पटना के पालीगंज में 29 जून को एक साथ 80 कोरोना पॉजिटिव मरीज पाए गए हैं। ये सभी लोग एक ही शादी समारोह में शामिल हुए थे। इसके साथ ही इसमें शामिल अबतक 103 लोग संक्रमित पाए जा चुके हैं। कोरोना काल में शादी की जल्दबाजी के क्या दुष्परिणाम हो सकते हैं, इसकी यह प्रत्यक्ष मिसाल है।
बिहार की यह सबसे बड़ी कोरोना चेन बताई जा रही है। इससे पहले मुंगेर और सीवान में कोरोना चेन बनी थी, पर इस चेन के मुकाबले वह बहुत ही छोटी थी। सीवान और मुंगेर की कोरोना चेन अब समाप्त हो गई है।
शादी के दूसरे दिन ना सिर्फ दूल्हे की मौत हो गई, बल्कि अब भी बारात में शामिल लोगों में से कोरोना पॉजिटिव मिलने का सिलसिला जारी है।29 जून सोमवार को भी उस शादी समारोह में शामिल 80 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए। पालीगंज में एक ही गांव में एक साथ इतनी बड़ी संख्या में कोरोना संक्रमित मरीज मिलने से पूरे इलाके में हड़कंप मचा हुआ है।
खास बात यह है कि ये सभी पालीगंज के एक गांव में 15 जून को एक ही शादी समारोह में शामिल हुए थे। जिस शादी से सभी कोरोना से ग्रसित हुए हैं, उस दूल्हे की मौत शादी के दो दिनों के बाद यानी कि सुहागरात के अगले दिन 17 जून को ही इलाज के दौरान हो गई थी।
गांव के लोग दूल्हे की मौत का कारण भी कोरोना बता रहे हैं, लेकिन आधिकारिक तौर पर इसकी कोई पुष्टि नहीं हुई है, क्योंकि उसकी कोरोना जांच ही नहीं कराई गई थी। चूंकि कथित रूप से उसकी मौत पेट दर्द के कारण हुई थी। न तो परिजनों ने उसके मौत की सूचना प्रशासन को दी, न ही गांव वालों ने।
हालांकि जब गांव के लोग एक-एक कर पॉजिटिव पाए जाने लगे, तब प्रशासन अलर्ट मोड में आया। उस शादी में जितने लोग भी शामिल हुए थे, उन लगभग तीन सौ लोगों का सैंपल जांच के लिए भेजा गया। साथ ही उन सभी मुहल्लों को सील कर दिया गया था, जहां से सैंपल लिए गए थे।
बिहार में कोरोना से एक मंत्री, एक विधायक,एक पूर्व सांसद, कई अस्पतालों के डॉक्टर और स्टाफ भी अबतक संक्रमित हो चुके हैं। बिहार में कोरोना संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। स्वास्थ्य विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार 29 जून की रात्रि 11 बजे तक कुल मरीजों की संख्या 9618 तक पहुंच चुकी है। हालांकि इनमें से 7374 मरीज स्वस्थ भी हो चुके हैं।
बताया जा रहा है कि पटना के पालीगंज स्थित डीहपाली गांव निवासी एक युवक की विगत 15 जून को शादी हुई थी। युवक दिल्ली से हाल में ही निजी वाहन से आया था। वह दिल्ली में एक प्राइवेट कंपनी में इंजीनियर था। ग्रामीणों के अनुसार जब वह घर आया उस समय क्वारेंटाइन सेंटर बंद हो चुके थे, जिसके बाद उसे होम क्वारेंटाइन कर दिया गया था।
उसकी शादी के तीसरे दिन यानी 17 जून को पेट दर्द की शिकायत के बाद उसे निजी क्लीनिक में भर्ती कराया गया, जिसके बाद उसे पटना भेज दिया गया जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी थी। बाद में प्रखंड विकास पदाधिकारी चिरंजीवी पांडेय के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मामले की छानबीन की और मृत युवक के स्वजनों सहित कोरोना संक्रमण की जांच के लिए करीब 300 से ज्यादा लोगों का सैंपल लिया गया। संक्रमित पाए जाने वाले गांव व मुहल्ले को चिन्हित कर सील कर दिया गया।
दूल्हे की मौत कोरोना से हुई है या किसी और बीमारी से,अब इसका पता लगाना भी अब संभव नही है, क्योंकि दूल्हे का अंतिम संस्कार किया जा चुका है। अंतिम संस्कार के एक हफ्ते बाद जब इलाके के लोगों की रिपोर्ट कोरोना पॉजेटिव आई तो उस दूल्हे को लोगों ने कोसना शुरू कर दिया। ऐसा इसलिए कि जब तबियत ज्यादा बिगड़ने लगी थी तो उस वक्त उसे अस्पताल भेजा गया था। बताया जाता है कि हॉस्पिटल के गेट पर पहुचने के साथ ही उसकी मौत हो गई थी। मौत के बाद परिजन उसे लेकर सीधे गांव आ गए थे, जहां उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया था। इसी कारण उसकी कहीं भी कोरोना की जांच प्रक्रिया नहीं हुई।
इस मामले में किसकी लापरवाही है,यह तो जांच के बाद सामने आएगा, लेकिन उस नवविवाहिता के हालत की सहज कल्पना की जा सकती है, जिसका ससुराल पहुंचने के साथ ही सुहाग उजड़ गया।
दुल्हन के पिता के अनुसार विवाह में दूल्हे की तबियत कुछ खराब थी। तब बताया गया था कि लूजमोशन के कारण थोड़ी कमजोरी महसूस हो रही है। इस घटना के बाद दुल्हन पक्ष के लगभग 100 लोगों की कोरोना जांच कराई गई। राहत की बात है कि अबतक हुए टेस्ट में दुलहन पक्ष का कोई भी कोरोना से ग्रसित नहीं पाया गया है। सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई है। लेकिन वर पक्ष की तरफ से बारात में शामिल अधिकांश लोग कोरोना पॉजिटिव पाए जा रहे हैं।
| जनज्वार ब्यूरो,पटना। कोरोना काल में शादी जैसे सामूहिक आयोजनों में शामिल होने के क्या दुष्परिणाम हो सकते हैं,यह पटना में देखने को मिल रहा है। पटना के पालीगंज की यह घटना इस बात का भी सबूत है कि बाहर से आकर बिना जांच कराए लोगों से मिलना-जुलना कितना खतरनाक हो सकता है। साथ ही यह घटना क्वेरेन्टीन सेंटरों को बंद किए जाने से हो रही दिक्कतों की बानगी भी दिखा रही है। कोरोना के प्रति लोगों और सिस्टम की लापरवाही का भी यह मिसाल बन गया है। पटना के पालीगंज में उनतीस जून को एक साथ अस्सी कोरोना पॉजिटिव मरीज पाए गए हैं। ये सभी लोग एक ही शादी समारोह में शामिल हुए थे। इसके साथ ही इसमें शामिल अबतक एक सौ तीन लोग संक्रमित पाए जा चुके हैं। कोरोना काल में शादी की जल्दबाजी के क्या दुष्परिणाम हो सकते हैं, इसकी यह प्रत्यक्ष मिसाल है। बिहार की यह सबसे बड़ी कोरोना चेन बताई जा रही है। इससे पहले मुंगेर और सीवान में कोरोना चेन बनी थी, पर इस चेन के मुकाबले वह बहुत ही छोटी थी। सीवान और मुंगेर की कोरोना चेन अब समाप्त हो गई है। शादी के दूसरे दिन ना सिर्फ दूल्हे की मौत हो गई, बल्कि अब भी बारात में शामिल लोगों में से कोरोना पॉजिटिव मिलने का सिलसिला जारी है।उनतीस जून सोमवार को भी उस शादी समारोह में शामिल अस्सी लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए। पालीगंज में एक ही गांव में एक साथ इतनी बड़ी संख्या में कोरोना संक्रमित मरीज मिलने से पूरे इलाके में हड़कंप मचा हुआ है। खास बात यह है कि ये सभी पालीगंज के एक गांव में पंद्रह जून को एक ही शादी समारोह में शामिल हुए थे। जिस शादी से सभी कोरोना से ग्रसित हुए हैं, उस दूल्हे की मौत शादी के दो दिनों के बाद यानी कि सुहागरात के अगले दिन सत्रह जून को ही इलाज के दौरान हो गई थी। गांव के लोग दूल्हे की मौत का कारण भी कोरोना बता रहे हैं, लेकिन आधिकारिक तौर पर इसकी कोई पुष्टि नहीं हुई है, क्योंकि उसकी कोरोना जांच ही नहीं कराई गई थी। चूंकि कथित रूप से उसकी मौत पेट दर्द के कारण हुई थी। न तो परिजनों ने उसके मौत की सूचना प्रशासन को दी, न ही गांव वालों ने। हालांकि जब गांव के लोग एक-एक कर पॉजिटिव पाए जाने लगे, तब प्रशासन अलर्ट मोड में आया। उस शादी में जितने लोग भी शामिल हुए थे, उन लगभग तीन सौ लोगों का सैंपल जांच के लिए भेजा गया। साथ ही उन सभी मुहल्लों को सील कर दिया गया था, जहां से सैंपल लिए गए थे। बिहार में कोरोना से एक मंत्री, एक विधायक,एक पूर्व सांसद, कई अस्पतालों के डॉक्टर और स्टाफ भी अबतक संक्रमित हो चुके हैं। बिहार में कोरोना संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। स्वास्थ्य विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार उनतीस जून की रात्रि ग्यारह बजे तक कुल मरीजों की संख्या नौ हज़ार छः सौ अट्ठारह तक पहुंच चुकी है। हालांकि इनमें से सात हज़ार तीन सौ चौहत्तर मरीज स्वस्थ भी हो चुके हैं। बताया जा रहा है कि पटना के पालीगंज स्थित डीहपाली गांव निवासी एक युवक की विगत पंद्रह जून को शादी हुई थी। युवक दिल्ली से हाल में ही निजी वाहन से आया था। वह दिल्ली में एक प्राइवेट कंपनी में इंजीनियर था। ग्रामीणों के अनुसार जब वह घर आया उस समय क्वारेंटाइन सेंटर बंद हो चुके थे, जिसके बाद उसे होम क्वारेंटाइन कर दिया गया था। उसकी शादी के तीसरे दिन यानी सत्रह जून को पेट दर्द की शिकायत के बाद उसे निजी क्लीनिक में भर्ती कराया गया, जिसके बाद उसे पटना भेज दिया गया जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी थी। बाद में प्रखंड विकास पदाधिकारी चिरंजीवी पांडेय के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मामले की छानबीन की और मृत युवक के स्वजनों सहित कोरोना संक्रमण की जांच के लिए करीब तीन सौ से ज्यादा लोगों का सैंपल लिया गया। संक्रमित पाए जाने वाले गांव व मुहल्ले को चिन्हित कर सील कर दिया गया। दूल्हे की मौत कोरोना से हुई है या किसी और बीमारी से,अब इसका पता लगाना भी अब संभव नही है, क्योंकि दूल्हे का अंतिम संस्कार किया जा चुका है। अंतिम संस्कार के एक हफ्ते बाद जब इलाके के लोगों की रिपोर्ट कोरोना पॉजेटिव आई तो उस दूल्हे को लोगों ने कोसना शुरू कर दिया। ऐसा इसलिए कि जब तबियत ज्यादा बिगड़ने लगी थी तो उस वक्त उसे अस्पताल भेजा गया था। बताया जाता है कि हॉस्पिटल के गेट पर पहुचने के साथ ही उसकी मौत हो गई थी। मौत के बाद परिजन उसे लेकर सीधे गांव आ गए थे, जहां उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया था। इसी कारण उसकी कहीं भी कोरोना की जांच प्रक्रिया नहीं हुई। इस मामले में किसकी लापरवाही है,यह तो जांच के बाद सामने आएगा, लेकिन उस नवविवाहिता के हालत की सहज कल्पना की जा सकती है, जिसका ससुराल पहुंचने के साथ ही सुहाग उजड़ गया। दुल्हन के पिता के अनुसार विवाह में दूल्हे की तबियत कुछ खराब थी। तब बताया गया था कि लूजमोशन के कारण थोड़ी कमजोरी महसूस हो रही है। इस घटना के बाद दुल्हन पक्ष के लगभग एक सौ लोगों की कोरोना जांच कराई गई। राहत की बात है कि अबतक हुए टेस्ट में दुलहन पक्ष का कोई भी कोरोना से ग्रसित नहीं पाया गया है। सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई है। लेकिन वर पक्ष की तरफ से बारात में शामिल अधिकांश लोग कोरोना पॉजिटिव पाए जा रहे हैं। |
जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के सांगठनिक चुनाव का निर्वाचन कार्यक्रम आज घोषित कर दिया गया है. इस घोषणा में राज्य स्तर से लेकर प्रखंड स्तर पर होने वाले निर्वाचन का कार्यक्रम दिया गया है. जारी कार्यक्रम के अनुसार जदयू के बिहार प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए आगामी 27 नवंबर को चुनाव होना है. फिलहाल बिहार जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा है. इस बात की जानकारी पार्टी के राज्य निर्वाचन पदाधिकारी जनार्दन प्रसाद सिंह ने सोमवार को पार्टी कार्यालय में प्रेस कांफ्रेंस में दी.
जदयू के निर्वाचन पदाधिकारी जनार्दन प्रसाद सिंह ने बताया कि बिहार के प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव से पहले पार्टी के प्रखंड अध्यक्षों का चुनाव कराया जाएगा. प्रखंड स्तर पर चुनाव 16 एवं 17 नवंबर को होगा. इसके बाद जिला एवं नगर स्तर पर अध्यक्षों का चुनाव कराया जाएगा. यह चुनाव 20 नवंबर को होगा. उसके बाद 27 नवंबर को प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव होगा और 27 नवंबर को ही परिणाम भी आ जाएगा. आखिरी में राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव होगा हालांकि अभी तक इसका विस्तृत कार्यक्रम जारी नहीं किया गया है.
जदयू के निर्वाचन पदाधिकारी ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के संबंध में बताया कि फिलहाल राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की तैयारी चल रही है. जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष फिलहाल ललन सिंह हैं. ललन सिंह का कार्यकाल जल्द ही खत्म होने वाला है, कार्यकाल खत्म होने के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव दिल्ली में कराया जाएगा. पार्टी के राष्ट्रीय निर्वाचन अधिकारी अनिल हेगड़े राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की घोषणा करेंगे.
| जनता दल यूनाइटेड के सांगठनिक चुनाव का निर्वाचन कार्यक्रम आज घोषित कर दिया गया है. इस घोषणा में राज्य स्तर से लेकर प्रखंड स्तर पर होने वाले निर्वाचन का कार्यक्रम दिया गया है. जारी कार्यक्रम के अनुसार जदयू के बिहार प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए आगामी सत्ताईस नवंबर को चुनाव होना है. फिलहाल बिहार जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा है. इस बात की जानकारी पार्टी के राज्य निर्वाचन पदाधिकारी जनार्दन प्रसाद सिंह ने सोमवार को पार्टी कार्यालय में प्रेस कांफ्रेंस में दी. जदयू के निर्वाचन पदाधिकारी जनार्दन प्रसाद सिंह ने बताया कि बिहार के प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव से पहले पार्टी के प्रखंड अध्यक्षों का चुनाव कराया जाएगा. प्रखंड स्तर पर चुनाव सोलह एवं सत्रह नवंबर को होगा. इसके बाद जिला एवं नगर स्तर पर अध्यक्षों का चुनाव कराया जाएगा. यह चुनाव बीस नवंबर को होगा. उसके बाद सत्ताईस नवंबर को प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव होगा और सत्ताईस नवंबर को ही परिणाम भी आ जाएगा. आखिरी में राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव होगा हालांकि अभी तक इसका विस्तृत कार्यक्रम जारी नहीं किया गया है. जदयू के निर्वाचन पदाधिकारी ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के संबंध में बताया कि फिलहाल राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की तैयारी चल रही है. जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष फिलहाल ललन सिंह हैं. ललन सिंह का कार्यकाल जल्द ही खत्म होने वाला है, कार्यकाल खत्म होने के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव दिल्ली में कराया जाएगा. पार्टी के राष्ट्रीय निर्वाचन अधिकारी अनिल हेगड़े राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की घोषणा करेंगे. |
लावाश के लिए क्लासिक नुस्खा - इनएक विशेष मिट्टी भट्ठी जिसे "टैंडर" कहा जाता है भट्ठी को जमीन में दफन कर दिया गया है और मिट्टी से बने एक विशाल पॉट जैसा है। भट्ठी के अंदर, आग जला दी जाती है, जलाऊ जला दिया जाता है, और तंदूर की दीवारों से काली हटा दी जाती है, रोटी सीधे उनसे जुड़ी होती है। जैसे केक पकाए जाते हैं, उन्हें विशेष हुक के साथ ओवन से निकाल दिया जाता है।
घर में, आप ऐसा कुछ खाना बना सकते हैं, ओवन में पकाना या फ्राइंग पैन में भी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लावाश के लिए सही नुस्खा चुनना है।
अर्मेनियाई लवाश को इस तथ्य की विशेषता है कि वहलगभग पूरी तरह से कोई टुकड़ा नहीं इसकी तैयारी के लिए आटा केवल 1 या 2 ग्रेड लिया जाता है इसे थोड़ा नमकीन पानी में मिलाकर एक निश्चित मात्रा में मिलाया जाता है, आटा में आटा आटा डालता है, जिसके साथ आटा दो घंटे भटक जाता है। इसके बाद, परिणामस्वरूप संरचना को उसी आकार के छोटे टुकड़ों में विभाजित किया जाना चाहिए, रोल आउट करें और सेंकना करें।
इसमें इस डिश को तैयार करने का एक तरीका भी हैओवन। ऐसा करने के लिए, आपको लगभग 3 कप आटा, एक चौथाई कप की राशि, खमीर के दो चम्मच, वनस्पति तेल के तीन बड़े चम्मच, और शक्कर और नमक के स्वाद के लिए गर्म पानी चाहिए। इसके अलावा गर्म पानी, नमक और चीनी में भंग। उसके बाद, आटे में, आपको एक छोटी नाली बनाने और खमीर और तेल के साथ पानी में डालना चाहिए। आटे को बहुत अच्छी तरह से मिलाया जाना चाहिए और अगले 10 मिनट गूंध होना चाहिए। पिटा को स्वादिष्ट बनने के लिए, आटा पकाने से पहले भोजन फिल्म के तहत एक डेढ़ घंटे के लिए रखा जाना चाहिए। बेक्ड पीटा का आकार इस नुस्खा के अनुसार हो सकता है ओवन के पाक ट्रे के समान। बेकिंग को समान रूप से किया जाने के लिए, कोई सूजन नहीं होनी चाहिए, इस उद्देश्य के लिए कई स्थानों पर पीटा के साथ पीटा को छेदने की सिफारिश की जाती है। लावाश को सही तरीके से कैसे पकाने के सवाल के बारे में, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसे गर्म ओवन में नहीं लेना चाहिए, अन्यथा यह बहुत शुष्क हो जाएगा, इसलिए भी छिड़कने में मदद नहीं होगी।
अर्मेनियाई रोटी बेकिंग के वर्णित रूपों -सब नहीं पिटा ब्रेड के लिए व्यंजनों में व्यापक रूप से भिन्नता है। यूरोप के कई देशों में यह पकवान अधिक लोकप्रिय हो रहा है। यह विभिन्न स्नैक्स लपेट सकता हैः सब्जियां, पैट, मछली। खूबसूरती से यह कटा हुआ idiosyncratic रोल के रूप में देखेंगे। आप मशरूम, मांस या सब्जियों के साथ बहु-स्तरित पाई की तरह कुछ भी तैयार कर सकते हैं। इसके अलावा, मिट्टी के बरतन बनाने की प्रक्रिया में आर्मेनियाई लैवैश का उपयोग किया जा सकता है, अगर आप इसे कॉटेज चीज या चॉकलेट से भरते हैं।
| लावाश के लिए क्लासिक नुस्खा - इनएक विशेष मिट्टी भट्ठी जिसे "टैंडर" कहा जाता है भट्ठी को जमीन में दफन कर दिया गया है और मिट्टी से बने एक विशाल पॉट जैसा है। भट्ठी के अंदर, आग जला दी जाती है, जलाऊ जला दिया जाता है, और तंदूर की दीवारों से काली हटा दी जाती है, रोटी सीधे उनसे जुड़ी होती है। जैसे केक पकाए जाते हैं, उन्हें विशेष हुक के साथ ओवन से निकाल दिया जाता है। घर में, आप ऐसा कुछ खाना बना सकते हैं, ओवन में पकाना या फ्राइंग पैन में भी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लावाश के लिए सही नुस्खा चुनना है। अर्मेनियाई लवाश को इस तथ्य की विशेषता है कि वहलगभग पूरी तरह से कोई टुकड़ा नहीं इसकी तैयारी के लिए आटा केवल एक या दो ग्रेड लिया जाता है इसे थोड़ा नमकीन पानी में मिलाकर एक निश्चित मात्रा में मिलाया जाता है, आटा में आटा आटा डालता है, जिसके साथ आटा दो घंटे भटक जाता है। इसके बाद, परिणामस्वरूप संरचना को उसी आकार के छोटे टुकड़ों में विभाजित किया जाना चाहिए, रोल आउट करें और सेंकना करें। इसमें इस डिश को तैयार करने का एक तरीका भी हैओवन। ऐसा करने के लिए, आपको लगभग तीन कप आटा, एक चौथाई कप की राशि, खमीर के दो चम्मच, वनस्पति तेल के तीन बड़े चम्मच, और शक्कर और नमक के स्वाद के लिए गर्म पानी चाहिए। इसके अलावा गर्म पानी, नमक और चीनी में भंग। उसके बाद, आटे में, आपको एक छोटी नाली बनाने और खमीर और तेल के साथ पानी में डालना चाहिए। आटे को बहुत अच्छी तरह से मिलाया जाना चाहिए और अगले दस मिनट गूंध होना चाहिए। पिटा को स्वादिष्ट बनने के लिए, आटा पकाने से पहले भोजन फिल्म के तहत एक डेढ़ घंटे के लिए रखा जाना चाहिए। बेक्ड पीटा का आकार इस नुस्खा के अनुसार हो सकता है ओवन के पाक ट्रे के समान। बेकिंग को समान रूप से किया जाने के लिए, कोई सूजन नहीं होनी चाहिए, इस उद्देश्य के लिए कई स्थानों पर पीटा के साथ पीटा को छेदने की सिफारिश की जाती है। लावाश को सही तरीके से कैसे पकाने के सवाल के बारे में, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसे गर्म ओवन में नहीं लेना चाहिए, अन्यथा यह बहुत शुष्क हो जाएगा, इसलिए भी छिड़कने में मदद नहीं होगी। अर्मेनियाई रोटी बेकिंग के वर्णित रूपों -सब नहीं पिटा ब्रेड के लिए व्यंजनों में व्यापक रूप से भिन्नता है। यूरोप के कई देशों में यह पकवान अधिक लोकप्रिय हो रहा है। यह विभिन्न स्नैक्स लपेट सकता हैः सब्जियां, पैट, मछली। खूबसूरती से यह कटा हुआ idiosyncratic रोल के रूप में देखेंगे। आप मशरूम, मांस या सब्जियों के साथ बहु-स्तरित पाई की तरह कुछ भी तैयार कर सकते हैं। इसके अलावा, मिट्टी के बरतन बनाने की प्रक्रिया में आर्मेनियाई लैवैश का उपयोग किया जा सकता है, अगर आप इसे कॉटेज चीज या चॉकलेट से भरते हैं। |
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
गणित में, क्रमचय (परमुटेशन) की संकल्पना को सूक्ष्म रूप से विभिन्न अर्थों में प्रयोग किया जाता है, सभी अर्थ वस्तुओं या मूल्य के क्रमपरिवर्तन (क्रमबद्ध रूप से पुनर्व्यवस्थित करना) की कार्रवाई से संबंधित हैं। अनौपचारिक रूप से, कुछ मानों (values) के एक सेट को विशेष क्रम में व्यवस्थित करना क्रमचय है। इस प्रकार सेट (1, 2, 3) के छह क्रमचय हैं अर्थात्,,,, और. यह शब्द हिंदी में काफी प्रयुक्त होता है, यदि आप इसका सटीक अर्थ जानते है तो पृष्ठ को संपादित करने में संकोच ना करें (याद रखें - पृष्ठ को संपादित करने के लिये रजिस्टर करना आवश्यक नहीं है)। दिया गया प्रारूप सिर्फ दिशा निर्देशन के लिये है, आप इसमें अपने अनुसार फेर-बदल कर सकते हैं। .
क्रमचय और शिथिल आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)।
क्रमचय 16 संबंध है और शिथिल 1 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (16 + 1)।
यह लेख क्रमचय और शिथिल के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
| शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। गणित में, क्रमचय की संकल्पना को सूक्ष्म रूप से विभिन्न अर्थों में प्रयोग किया जाता है, सभी अर्थ वस्तुओं या मूल्य के क्रमपरिवर्तन की कार्रवाई से संबंधित हैं। अनौपचारिक रूप से, कुछ मानों के एक सेट को विशेष क्रम में व्यवस्थित करना क्रमचय है। इस प्रकार सेट के छह क्रमचय हैं अर्थात्,,,, और. यह शब्द हिंदी में काफी प्रयुक्त होता है, यदि आप इसका सटीक अर्थ जानते है तो पृष्ठ को संपादित करने में संकोच ना करें । दिया गया प्रारूप सिर्फ दिशा निर्देशन के लिये है, आप इसमें अपने अनुसार फेर-बदल कर सकते हैं। . क्रमचय और शिथिल आम में शून्य बातें हैं । क्रमचय सोलह संबंध है और शिथिल एक है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख क्रमचय और शिथिल के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः |
रागु आसा महला ५ घरु १२ १ओ सतिगुर प्रसादि ॥ तिआगि सगल सिआनपा भजु पारब्रहम निरंकारु ।। एक साचे नाम बाझहु सगल दीसै छारु ॥ १ ॥ सो प्रभु जाणीऐ सद संगि ॥ गुर प्रसादी बूझीऐ एक हरि कै रंगि ॥ १ ॥ रहाउ ॥ सरणि समरथ एक केरी दूजा नाही ठाउ ॥ महा भउजलु लंघीऐ सदा हरि गुण गाउ ॥ २ ॥ जनम मरणु निवारीऐ दुखु न जम पुरि होइ ॥ नामु निधानु सोई पाए क्रिपा करे प्रभु सोइ ॥ ३ ॥ एक टेक अधारु एको एक का मनि जोरु ॥ नानक जपीऐ मिलि साधसंगति हरि बिनु अवरु न होरु ॥ ४ ॥ १ ॥ १३६ ॥ आसा महला ५ ॥ जीउ मनु तनु प्रान प्रभ के दीए सभि रस भोग ।। दीन बंधप जीअ दाता सरणि राखण जोगु ॥ १ ॥ मेरे मन धिआइ हरि हरि नाउ ॥ हलति पलति सहाइ संगे एक सिउ लिव लाउ ॥ १ ॥ रहाउ ॥ बेद सासत्र जन धिआवहि तरण कउ संसारु ॥ करम धरम अनेक किरिआ सभ ऊपरि नामु अचारु ॥ २ ॥ कामु क्रोधु अहंकारु बिनसे मिलै सतिगुर देव ॥ नामु द्रिडु करि भगति हरि की भली प्रभ की सेव ॥ ३ ॥ चरण सरण दइआल तेरी तूं निमाणे माणु ॥ जीअ प्राण अधारु तेरा नानक का प्रभु ताणु ॥ ४ ॥ २ ॥ १३७ ॥ आसा महला ५ ॥ डोलि डोलि महा दुखु पाइआ बिना साधू संग ॥ खाटि लाभु गोबिंद हरि रसु पारब्रहम इक रंग ॥ १ ॥ हरि को नामु जपीऐ नीति ॥ सासि सासि धिआइ सो प्रभु तिआगि अवर परीति ॥ १ ॥ रहाउ ॥ करण कारण समस्थ सो प्रभु जीअ दाता आपि ॥ तिआगि सगल सिआणपा आठ पहर प्रभु जापि ॥ २ ॥ मीतु सखा सहाइ संगी ऊच अगम अपारु । चरण कमल बसाइ हिरदै जीअ को आधारु ॥ ३ ॥ करि किरपा प्रभ पारब्रहम गुण तेरा जसु गाउ । सरब सूख वडी वडिआई जपि जीवै नानकु नाउ ॥ ४ ॥ ३ ॥ १३८ ॥ आसा महला ५ ॥ उदमु करउ करावहु ठाकुर पेखत साधू संगि ॥ हरि हरि नामु चरावहु रंगनि आपे ही प्रभ रंगि ॥ १ ॥ मन महि राम नामा जापि ॥ करि किरपा वसहु मेरै हिरदै होइ सहाई आपि ॥ १ ॥ रहाउ ।। सुणि सुणि नामु तुमारा प्रीतम प्रभु पेखन Bage 127
रागु आसा महला ५ घरु १२
हे जीव, तू सारी चतुराईयों को त्याग दे और निराकार परब्रह्म का सुमिरन कर । उसके एक सच्चे नाम के बिना बाकी सब कुछ राख के समान तुच्छ है ।। १ ।। उस प्रभु को सदैव अपने साथ ही जानो और गुरु की कृपा द्वारा ही एक प्रभु के प्रेम रंग में रंगे रहने से उसका सदैव साथ बने रहना समझ में आता है ।। १ ।। रहाउ ।। उस एक प्रभु की ही शरण समर्थ एवं शक्तिशाली है; उसके बिना अन्य कोई आसरा नहीं है। सदा उस प्रभु के गुण गाते हुए संसार रूपी भयंकर समुद्र को पार किया जाता है ।। २ ।। ऐसा करने से जन्म-मरण का चक्र मिट जाता है और यमपुरी का दुःख स्पर्श नहीं करता। जिस पर प्रभु कृपा करता है वही उसके नाम के भण्डार को प्राप्त करता है ।। ३ ।। वह प्रभु ही केवल एक आधार और आसरा है और उस एक का ही मन पर जोर चलता है । हे नानक, साधु-संगति में मिल-बैठकर उसका सुमिरन किया जाए क्योंकि प्रभु के बिना अन्य कोई भी ( स्थायी) नहीं है ।। ४ ।। १ ।। १३६ ।। आसा महला ५ ।। तन, मन, प्राण इस जीव को उस प्रभु ने ही दिए हैं और साथ ही साथ सभी रस और भोगने योग्य पदार्थ भी दिए हैं। वही दीन-बन्धु जीवन दाता प्रभु सबको अपनी शरण में रख लेने में समर्थ है।। १ ।। हे मेरे मन, प्रभु-नाम की ही आराधना कर क्योंकि वही इस लोक और परलोक में सहायक है; तुम उस एक प्रभु में ही अपनी सुरति को लीन करो ।। १ ।। रहाउ ।। लोग संसार सागर से पार उतरने के लिए वेदों शास्त्रों का पठन-पाठन करते हैं। इस प्रकार के अनेकों ही धर्म, कर्म और क्रियाएं हैं परन्तु सबसे ऊपर प्रभु-नाम के अनुरूप आचरण बनाना ही श्रेष्ठ कार्य है ।। २ ।। सच्चे गुरु से मिलाप होने पर काम, क्रोध, अहंकार आदि विनष्ट हो जाते हैं। हे जीव, दृढ़तापूर्वक प्रभु-नाम का सुमिरन और भक्ति कर क्योंकि यही सेवा प्रभु के लिए भली सेवा है ।। ३ ।। हे दयालु प्रभु, तू ही सम्मानविहीन का सम्मान है और मैं तेरी ही शरण में हूँ। हे प्रभु, तू ही नानक के जीवन और प्राणों का आधार है और तू ही नानक का बल है ।। ४ ।। २ ।। १३७ ।। आसा महला ५ ।। साधु-संगति से विहीन होकर भटकते-भटकते मैंने बहुत दुख पा लिया है । हे जीव, अब प्रभु-नाम के रस को चखकर उसके रंग में रंग कर लाभ प्राप्त कर ले ।। १ ।। सदैव प्रभु-नाम का जाप करना चाहिए तथा अन्य पदार्थों से प्रीति त्याग कर हर साँस के साथ प्रभु का सुमिरन करते रहना चाहिए ।। १ ।। रहाउ ।। जीवन - दान देने वाला वह प्रभु स्वयं ही सब कुछ करने कराने में समर्थ है। इसलिए हे जीव, तू सारी चतुराईयों को त्याग कर आठों प्रहर उस प्रभु का ही जाप कर।। २ ।। वह ऊँचा, अगम्य और अपार प्रभु ही तेरा मित्र, सखा और सहायक संगी है। तू उसके चरण कमलों को हृदय में बसा क्योंकि वही तेरे जीवन का आधार है ।। ३ ।। हे प्रभु, परब्रह्म मुझ पर कृपा करो ताकि मैं तेरे गुण और यश का गायन करता रहूँ । नानक प्रभु के नाम का सुमिरन करके ही जीवित बना रहता है यही उसके लिए सबसे बड़ा सुख और बड़प्पन है ।। ४ ।। ३ ।। १३८ । आसा महला ५ ।। हे प्रभु, यदि तुम कराओ तो मैं साधसंगत के दर्शन करने के साथ तुझसे मिलाप के लिए कुछ उद्यम करूँ । हे प्रभु, तू स्वयं ही हरि-नाम का रंग मुझ पर चढ़ा कर मुझे प्रभु रंग में रंग दो ।। १ ।। मेरे मन में राम-नाम का जाप ही चलता रहता है । हे प्रभु, आप मेरी सहायता करो और कृपा करके मेरे हृदय में आन बसो।। १ ।। रहाउ ।। हे प्रियतम प्रभु, तुम्हारा नाम सुनकर मेरे मन में तुम्हें देखने का age 128 | रागु आसा महला पाँच घबारह रुपया एकओ सतिगुर प्रसादि ॥ तिआगि सगल सिआनपा भजु पारब्रहम निरंकारु ।। एक साचे नाम बाझहु सगल दीसै छारु ॥ एक ॥ सो प्रभु जाणीऐ सद संगि ॥ गुर प्रसादी बूझीऐ एक हरि कै रंगि ॥ एक ॥ रहाउ ॥ सरणि समरथ एक केरी दूजा नाही ठाउ ॥ महा भउजलु लंघीऐ सदा हरि गुण गाउ ॥ दो ॥ जनम मरणु निवारीऐ दुखु न जम पुरि होइ ॥ नामु निधानु सोई पाए क्रिपा करे प्रभु सोइ ॥ तीन ॥ एक टेक अधारु एको एक का मनि जोरु ॥ नानक जपीऐ मिलि साधसंगति हरि बिनु अवरु न होरु ॥ चार ॥ एक ॥ एक सौ छत्तीस ॥ आसा महला पाँच ॥ जीउ मनु तनु प्रान प्रभ के दीए सभि रस भोग ।। दीन बंधप जीअ दाता सरणि राखण जोगु ॥ एक ॥ मेरे मन धिआइ हरि हरि नाउ ॥ हलति पलति सहाइ संगे एक सिउ लिव लाउ ॥ एक ॥ रहाउ ॥ बेद सासत्र जन धिआवहि तरण कउ संसारु ॥ करम धरम अनेक किरिआ सभ ऊपरि नामु अचारु ॥ दो ॥ कामु क्रोधु अहंकारु बिनसे मिलै सतिगुर देव ॥ नामु द्रिडु करि भगति हरि की भली प्रभ की सेव ॥ तीन ॥ चरण सरण दइआल तेरी तूं निमाणे माणु ॥ जीअ प्राण अधारु तेरा नानक का प्रभु ताणु ॥ चार ॥ दो ॥ एक सौ सैंतीस ॥ आसा महला पाँच ॥ डोलि डोलि महा दुखु पाइआ बिना साधू संग ॥ खाटि लाभु गोबिंद हरि रसु पारब्रहम इक रंग ॥ एक ॥ हरि को नामु जपीऐ नीति ॥ सासि सासि धिआइ सो प्रभु तिआगि अवर परीति ॥ एक ॥ रहाउ ॥ करण कारण समस्थ सो प्रभु जीअ दाता आपि ॥ तिआगि सगल सिआणपा आठ पहर प्रभु जापि ॥ दो ॥ मीतु सखा सहाइ संगी ऊच अगम अपारु । चरण कमल बसाइ हिरदै जीअ को आधारु ॥ तीन ॥ करि किरपा प्रभ पारब्रहम गुण तेरा जसु गाउ । सरब सूख वडी वडिआई जपि जीवै नानकु नाउ ॥ चार ॥ तीन ॥ एक सौ अड़तीस ॥ आसा महला पाँच ॥ उदमु करउ करावहु ठाकुर पेखत साधू संगि ॥ हरि हरि नामु चरावहु रंगनि आपे ही प्रभ रंगि ॥ एक ॥ मन महि राम नामा जापि ॥ करि किरपा वसहु मेरै हिरदै होइ सहाई आपि ॥ एक ॥ रहाउ ।। सुणि सुणि नामु तुमारा प्रीतम प्रभु पेखन Bage एक सौ सत्ताईस रागु आसा महला पाँच घबारह रुपया हे जीव, तू सारी चतुराईयों को त्याग दे और निराकार परब्रह्म का सुमिरन कर । उसके एक सच्चे नाम के बिना बाकी सब कुछ राख के समान तुच्छ है ।। एक ।। उस प्रभु को सदैव अपने साथ ही जानो और गुरु की कृपा द्वारा ही एक प्रभु के प्रेम रंग में रंगे रहने से उसका सदैव साथ बने रहना समझ में आता है ।। एक ।। रहाउ ।। उस एक प्रभु की ही शरण समर्थ एवं शक्तिशाली है; उसके बिना अन्य कोई आसरा नहीं है। सदा उस प्रभु के गुण गाते हुए संसार रूपी भयंकर समुद्र को पार किया जाता है ।। दो ।। ऐसा करने से जन्म-मरण का चक्र मिट जाता है और यमपुरी का दुःख स्पर्श नहीं करता। जिस पर प्रभु कृपा करता है वही उसके नाम के भण्डार को प्राप्त करता है ।। तीन ।। वह प्रभु ही केवल एक आधार और आसरा है और उस एक का ही मन पर जोर चलता है । हे नानक, साधु-संगति में मिल-बैठकर उसका सुमिरन किया जाए क्योंकि प्रभु के बिना अन्य कोई भी नहीं है ।। चार ।। एक ।। एक सौ छत्तीस ।। आसा महला पाँच ।। तन, मन, प्राण इस जीव को उस प्रभु ने ही दिए हैं और साथ ही साथ सभी रस और भोगने योग्य पदार्थ भी दिए हैं। वही दीन-बन्धु जीवन दाता प्रभु सबको अपनी शरण में रख लेने में समर्थ है।। एक ।। हे मेरे मन, प्रभु-नाम की ही आराधना कर क्योंकि वही इस लोक और परलोक में सहायक है; तुम उस एक प्रभु में ही अपनी सुरति को लीन करो ।। एक ।। रहाउ ।। लोग संसार सागर से पार उतरने के लिए वेदों शास्त्रों का पठन-पाठन करते हैं। इस प्रकार के अनेकों ही धर्म, कर्म और क्रियाएं हैं परन्तु सबसे ऊपर प्रभु-नाम के अनुरूप आचरण बनाना ही श्रेष्ठ कार्य है ।। दो ।। सच्चे गुरु से मिलाप होने पर काम, क्रोध, अहंकार आदि विनष्ट हो जाते हैं। हे जीव, दृढ़तापूर्वक प्रभु-नाम का सुमिरन और भक्ति कर क्योंकि यही सेवा प्रभु के लिए भली सेवा है ।। तीन ।। हे दयालु प्रभु, तू ही सम्मानविहीन का सम्मान है और मैं तेरी ही शरण में हूँ। हे प्रभु, तू ही नानक के जीवन और प्राणों का आधार है और तू ही नानक का बल है ।। चार ।। दो ।। एक सौ सैंतीस ।। आसा महला पाँच ।। साधु-संगति से विहीन होकर भटकते-भटकते मैंने बहुत दुख पा लिया है । हे जीव, अब प्रभु-नाम के रस को चखकर उसके रंग में रंग कर लाभ प्राप्त कर ले ।। एक ।। सदैव प्रभु-नाम का जाप करना चाहिए तथा अन्य पदार्थों से प्रीति त्याग कर हर साँस के साथ प्रभु का सुमिरन करते रहना चाहिए ।। एक ।। रहाउ ।। जीवन - दान देने वाला वह प्रभु स्वयं ही सब कुछ करने कराने में समर्थ है। इसलिए हे जीव, तू सारी चतुराईयों को त्याग कर आठों प्रहर उस प्रभु का ही जाप कर।। दो ।। वह ऊँचा, अगम्य और अपार प्रभु ही तेरा मित्र, सखा और सहायक संगी है। तू उसके चरण कमलों को हृदय में बसा क्योंकि वही तेरे जीवन का आधार है ।। तीन ।। हे प्रभु, परब्रह्म मुझ पर कृपा करो ताकि मैं तेरे गुण और यश का गायन करता रहूँ । नानक प्रभु के नाम का सुमिरन करके ही जीवित बना रहता है यही उसके लिए सबसे बड़ा सुख और बड़प्पन है ।। चार ।। तीन ।। एक सौ अड़तीस । आसा महला पाँच ।। हे प्रभु, यदि तुम कराओ तो मैं साधसंगत के दर्शन करने के साथ तुझसे मिलाप के लिए कुछ उद्यम करूँ । हे प्रभु, तू स्वयं ही हरि-नाम का रंग मुझ पर चढ़ा कर मुझे प्रभु रंग में रंग दो ।। एक ।। मेरे मन में राम-नाम का जाप ही चलता रहता है । हे प्रभु, आप मेरी सहायता करो और कृपा करके मेरे हृदय में आन बसो।। एक ।। रहाउ ।। हे प्रियतम प्रभु, तुम्हारा नाम सुनकर मेरे मन में तुम्हें देखने का age एक सौ अट्ठाईस |
GORAKHPUR: कैंट एरिया के खाले टोला में मंडे नाइट मनबढ़ों ने जमकर उत्पात मचाया। प्रापर्टी के विवाद में बदमाशों ने हवा में गोलियां दागकर दहशत फैला दी। घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस मामले की जांच में जुट गई।
खोला टोला निवासी पप्पू पांडेय का झंगहा एरिया के ब्रह्मपुर निवासी गिरजेश से प्रापर्टी का विवाद चल रहा है। संडे को दोनों के बीच लेनदेन को विवाद हुआ। आरोप है कि मंडे नाइट गिरजेश अपने साथ कुछ लोगों को लेकर पहुंचे। पप्पू के घर पहुंचकर विवाद शुरू कर दिया। तोड़फोड़ भी करने लगे। इस दौरान जब लोगों ने विरोध किया तो गोलियां दागकर फरार हो गए। किसी ने खोराबार पुलिस को सूचना दी। पप्पू पक्ष ने ज्वेलरी और नकदी लूटने का आरोप भी लगाया। जांच के बाद पुलिस ने बताया कि फायरिंग हुई है। लूटपाट के संबंध में जांच की जा रही है।
| GORAKHPUR: कैंट एरिया के खाले टोला में मंडे नाइट मनबढ़ों ने जमकर उत्पात मचाया। प्रापर्टी के विवाद में बदमाशों ने हवा में गोलियां दागकर दहशत फैला दी। घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस मामले की जांच में जुट गई। खोला टोला निवासी पप्पू पांडेय का झंगहा एरिया के ब्रह्मपुर निवासी गिरजेश से प्रापर्टी का विवाद चल रहा है। संडे को दोनों के बीच लेनदेन को विवाद हुआ। आरोप है कि मंडे नाइट गिरजेश अपने साथ कुछ लोगों को लेकर पहुंचे। पप्पू के घर पहुंचकर विवाद शुरू कर दिया। तोड़फोड़ भी करने लगे। इस दौरान जब लोगों ने विरोध किया तो गोलियां दागकर फरार हो गए। किसी ने खोराबार पुलिस को सूचना दी। पप्पू पक्ष ने ज्वेलरी और नकदी लूटने का आरोप भी लगाया। जांच के बाद पुलिस ने बताया कि फायरिंग हुई है। लूटपाट के संबंध में जांच की जा रही है। |
टोरटोसा। स्पेन में विदेशी छात्रों को ले जा रही एक बस के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से उसमें सवार 13 छात्रों की मौत हो गई जबकि 30 अन्य घायल हैं।
खबरों के अनुसार दुर्घटना उस समय हुई जब प्रसिद्ध पारंपरिक महोत्सव से वापस लौट रही बस एक कार से टकराई । मृत छात्रों की उम्र 22 और 29 वर्ष के बीच थी।
कैटालोनिया क्षेत्र में आंतरिक मामलों के प्रमुख जोर्डी जेन ने कहा कि दुर्घटना बार्सिलोना के दक्षिण में करीब 150 किलोमीटर दूर फ्रगिनल्स कस्बे के पास हुई।
उस समय बस पूर्वी शहर वैलेंसिया से एक पारंपरिक महोत्सव से लौट रही थी। बस में चालक सहित 57 लोग सवार थे। 30 घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
वहीं बाकी 13 को स्थानीय होटल में ठहराया गया है। बस के ड्राईवर को पुलिस ने हिरासत में लिया है और उससे पूछताछ जारी है।
जेन ने कहा कि छात्रों का यूरोपीय विनिमय कार्यक्रम के तहत बार्सिलोना विश्वविद्यालय में नामांकन दर्ज था। इसमें ब्रिटेन, नीदरलैंड, यूक्रेन, स्विट्जरलैंड, नार्वे, स्वीडन, जापान और पेरू के छात्र भी शामिल हैं।
| टोरटोसा। स्पेन में विदेशी छात्रों को ले जा रही एक बस के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से उसमें सवार तेरह छात्रों की मौत हो गई जबकि तीस अन्य घायल हैं। खबरों के अनुसार दुर्घटना उस समय हुई जब प्रसिद्ध पारंपरिक महोत्सव से वापस लौट रही बस एक कार से टकराई । मृत छात्रों की उम्र बाईस और उनतीस वर्ष के बीच थी। कैटालोनिया क्षेत्र में आंतरिक मामलों के प्रमुख जोर्डी जेन ने कहा कि दुर्घटना बार्सिलोना के दक्षिण में करीब एक सौ पचास किलोग्राममीटर दूर फ्रगिनल्स कस्बे के पास हुई। उस समय बस पूर्वी शहर वैलेंसिया से एक पारंपरिक महोत्सव से लौट रही थी। बस में चालक सहित सत्तावन लोग सवार थे। तीस घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं बाकी तेरह को स्थानीय होटल में ठहराया गया है। बस के ड्राईवर को पुलिस ने हिरासत में लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जेन ने कहा कि छात्रों का यूरोपीय विनिमय कार्यक्रम के तहत बार्सिलोना विश्वविद्यालय में नामांकन दर्ज था। इसमें ब्रिटेन, नीदरलैंड, यूक्रेन, स्विट्जरलैंड, नार्वे, स्वीडन, जापान और पेरू के छात्र भी शामिल हैं। |
वह भी साथ चलें । वहाँ से उत्तर श्राया--"आप लोग हो आइए । मैं नहीं जा सकता ।"
इस निराशाजनक उत्तर से कलावती को दुःख हुआ । वह मन से चाहती थी कि उसका स्वामी उसके साथ चले । इस पर भी कार्यक्रम बन चुका था। वह जानती थी यदि वह अब इन्कार करेगी तो सरोज और बिनोद भी नहीं जाएँगे उसको अकेली छोड़कर । अतएव निश्चित दिन पबते वाश्मीर-भ्रमरण के लिए पठानकोट की ओर प्रस्थान किया। वहीं में श्रीनगर के लिए सड़क का मार्ग था ।
श्रीनगर पहुँचकर आगे का कार्यक्रम बनने लगा। कुछ दिन पश्चात् वे बस से पहलगाम पहुँचे । श्रीनगर में उलझील में शिकारे की सैर का सबको बहुत शानन्द आया। मुग़ल गार्डन्ज का सौन्दर्य भी अनुपम था। शेष नगर तो पुराने ढंग का ज्यूँ का त्यूँ बना था, जिसकी गलियों में अत्यन्त गन्दगी थी ।
पहलगाम पहुँचकर सबके हृदय प्रफुल्लित हो उठे । कितना प्रानन्द था इस भ्रमण में ! कलावती को खेद था कि विनोद के पिता ने अपना हट नहीं छोड़ा ।
विनोद और सरोज हिमालय पर्वत की शोभा देख ग्रात्म-विभोर हो उठे । श्रमरनाथ की चढ़ाई अति कठिन थी, तो भी विशेष थकान अनुभव नहीं होती थी। बीच-बीच में ठहरने के पड़ाव थे। विश्राम हो ही जाता था।
प्राकृतिक दृश्य अनुपम थे। विनोद सोचता - जिस भारत की भूमि पर इतना सौन्दर्य है, उसी देश की राजधानी तथा बड़े-बड़े नगरों में कितना अनर्थ होता है ! परिवार के सब सदस्य यात्रा का आनन्द लेते तथा ऊंचेउंच पर्वतों के दृश्य देखते उत्साह से आगे बढ़े जा रहे थे । मार्ग में कलकल करते स्वच्छ जल के चश्मों के दृश्य प्रति आकर्षक थे। वहाँ मानव, नगरों के व्यस्त जीवन से दूर प्रकृति की गोद में स्वयं को भूल-सा जाता है। गगनचुम्बी, हिमाच्छादित पर्वत की चोटियों का सौन्दर्य देखते ही जनता है। सबके मुख पर विशेष चमक थी, जो उनके मन में भगवान् के | वह भी साथ चलें । वहाँ से उत्तर श्राया--"आप लोग हो आइए । मैं नहीं जा सकता ।" इस निराशाजनक उत्तर से कलावती को दुःख हुआ । वह मन से चाहती थी कि उसका स्वामी उसके साथ चले । इस पर भी कार्यक्रम बन चुका था। वह जानती थी यदि वह अब इन्कार करेगी तो सरोज और बिनोद भी नहीं जाएँगे उसको अकेली छोड़कर । अतएव निश्चित दिन पबते वाश्मीर-भ्रमरण के लिए पठानकोट की ओर प्रस्थान किया। वहीं में श्रीनगर के लिए सड़क का मार्ग था । श्रीनगर पहुँचकर आगे का कार्यक्रम बनने लगा। कुछ दिन पश्चात् वे बस से पहलगाम पहुँचे । श्रीनगर में उलझील में शिकारे की सैर का सबको बहुत शानन्द आया। मुग़ल गार्डन्ज का सौन्दर्य भी अनुपम था। शेष नगर तो पुराने ढंग का ज्यूँ का त्यूँ बना था, जिसकी गलियों में अत्यन्त गन्दगी थी । पहलगाम पहुँचकर सबके हृदय प्रफुल्लित हो उठे । कितना प्रानन्द था इस भ्रमण में ! कलावती को खेद था कि विनोद के पिता ने अपना हट नहीं छोड़ा । विनोद और सरोज हिमालय पर्वत की शोभा देख ग्रात्म-विभोर हो उठे । श्रमरनाथ की चढ़ाई अति कठिन थी, तो भी विशेष थकान अनुभव नहीं होती थी। बीच-बीच में ठहरने के पड़ाव थे। विश्राम हो ही जाता था। प्राकृतिक दृश्य अनुपम थे। विनोद सोचता - जिस भारत की भूमि पर इतना सौन्दर्य है, उसी देश की राजधानी तथा बड़े-बड़े नगरों में कितना अनर्थ होता है ! परिवार के सब सदस्य यात्रा का आनन्द लेते तथा ऊंचेउंच पर्वतों के दृश्य देखते उत्साह से आगे बढ़े जा रहे थे । मार्ग में कलकल करते स्वच्छ जल के चश्मों के दृश्य प्रति आकर्षक थे। वहाँ मानव, नगरों के व्यस्त जीवन से दूर प्रकृति की गोद में स्वयं को भूल-सा जाता है। गगनचुम्बी, हिमाच्छादित पर्वत की चोटियों का सौन्दर्य देखते ही जनता है। सबके मुख पर विशेष चमक थी, जो उनके मन में भगवान् के |
Giridih : स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर किस तरह आम लोगों के साथ मज़ाक किया जा रहा है. इसकी एक बानगी गिरिडीह सदर अस्पताल में बने जेनेरिक दवा स्टोर के कमरे को देखकर समझी जा सकती है. दो साल पहले राज्य सरकार ने जिला मुख्यालय सहित सभी प्रखंड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जेनेरिक दवा स्टोर खोलने का निर्देश दिया था. जिसके बाद गिरिडाह सदर अस्पताल के मुख्य गेट के पास ही जेनरिक दवा स्टोर के लिए कमरे का निर्माण करवाया गया. कमरा बन गया लेकिन कमरे में अब तक दवाई नहीं पहुंची. जिसके कारण लोगों को अब भी महंगी दवाईयां लेने को मजबूर होना पड़ रहा है.
जन औषधि केन्द्र प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट का हिस्सा है. इसके बावजूद सदर अस्पताल प्रबंधन इसे लेकर गंभीर नहीं है. सदर अस्पताल में सबसे पहले साल 2012 में राज्य के तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री हेमलाल मुर्मू ने जेनेरिक दवा के लिए काउंटर का उद्घाटन किया था. लेकिन थोड़े समय बाद ही काउंटर बंद हो गया. कुछ साल बाद फिर से जेनेरिक दवा काउंटर की शुरुआत की गई. लेकिन वो भी चंद दिनों में ही दम तोड़ दिया.
सदर अस्पताल के चिकित्सकों पर मनमानी के आरोप लगते रहे हैं. लोगों का कहना है कि सदर अस्पताल में दो बार जेनेरिक दवा काउंटर की शुरुआत हुई. लेकिन डॉक्टरों ने ब्रांडेड दवा के आगे जेनेरिक दवा को तरज़ीह नहीं थी. डॉक्टर सिर्फ ब्रांडेड दवा ही लिखते रहे. जिसके कारण जेनेरिक दवा काउंटर की ये हालत हुई.
जेनेरिक दवा ब्रांडेड दवाओं से 50 से 80 प्रतिशत तक सस्ती होती है. जन औषधि केंद्र के तहत मरीजों को सामान्य बीमारियों के अलावा रक्तचाप, ब्लड शुगर, हृदय रोग सहित अन्य बीमारियों की दवाएं सस्ती कीमत पर मिलती है. लेकिन अस्पताल में जन औषधि केन्द्र ना रहने के कारण मरीज़ महंगी दवाएं खरीदनें को मजबूर हैं.
सिविल सर्जन डॉ. एसपी मिश्रा ने कहा बीते साल जेनेरिक दवा के लिए टेंडर निकाली गई. पर किसी ने भाग नहीं लिया. इसके कारण गिरिडीह ज़िले में कहीं भी सरकारी चिकित्सा संस्थान में जेनेरिक दवा का कोई कॉन्टर नहीं है. कहा कि योजना सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जेनेरिक दवा काउंटर खोलने की थी. पर सरकार की ओर से अब तक इस मामले में कोई पहल नहीं की गई है. उन्होंने कहा कि राज्य में मात्र रिम्स में ही जेनेरिक दवा का काउंटर है.
| Giridih : स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर किस तरह आम लोगों के साथ मज़ाक किया जा रहा है. इसकी एक बानगी गिरिडीह सदर अस्पताल में बने जेनेरिक दवा स्टोर के कमरे को देखकर समझी जा सकती है. दो साल पहले राज्य सरकार ने जिला मुख्यालय सहित सभी प्रखंड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जेनेरिक दवा स्टोर खोलने का निर्देश दिया था. जिसके बाद गिरिडाह सदर अस्पताल के मुख्य गेट के पास ही जेनरिक दवा स्टोर के लिए कमरे का निर्माण करवाया गया. कमरा बन गया लेकिन कमरे में अब तक दवाई नहीं पहुंची. जिसके कारण लोगों को अब भी महंगी दवाईयां लेने को मजबूर होना पड़ रहा है. जन औषधि केन्द्र प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट का हिस्सा है. इसके बावजूद सदर अस्पताल प्रबंधन इसे लेकर गंभीर नहीं है. सदर अस्पताल में सबसे पहले साल दो हज़ार बारह में राज्य के तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री हेमलाल मुर्मू ने जेनेरिक दवा के लिए काउंटर का उद्घाटन किया था. लेकिन थोड़े समय बाद ही काउंटर बंद हो गया. कुछ साल बाद फिर से जेनेरिक दवा काउंटर की शुरुआत की गई. लेकिन वो भी चंद दिनों में ही दम तोड़ दिया. सदर अस्पताल के चिकित्सकों पर मनमानी के आरोप लगते रहे हैं. लोगों का कहना है कि सदर अस्पताल में दो बार जेनेरिक दवा काउंटर की शुरुआत हुई. लेकिन डॉक्टरों ने ब्रांडेड दवा के आगे जेनेरिक दवा को तरज़ीह नहीं थी. डॉक्टर सिर्फ ब्रांडेड दवा ही लिखते रहे. जिसके कारण जेनेरिक दवा काउंटर की ये हालत हुई. जेनेरिक दवा ब्रांडेड दवाओं से पचास से अस्सी प्रतिशत तक सस्ती होती है. जन औषधि केंद्र के तहत मरीजों को सामान्य बीमारियों के अलावा रक्तचाप, ब्लड शुगर, हृदय रोग सहित अन्य बीमारियों की दवाएं सस्ती कीमत पर मिलती है. लेकिन अस्पताल में जन औषधि केन्द्र ना रहने के कारण मरीज़ महंगी दवाएं खरीदनें को मजबूर हैं. सिविल सर्जन डॉ. एसपी मिश्रा ने कहा बीते साल जेनेरिक दवा के लिए टेंडर निकाली गई. पर किसी ने भाग नहीं लिया. इसके कारण गिरिडीह ज़िले में कहीं भी सरकारी चिकित्सा संस्थान में जेनेरिक दवा का कोई कॉन्टर नहीं है. कहा कि योजना सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जेनेरिक दवा काउंटर खोलने की थी. पर सरकार की ओर से अब तक इस मामले में कोई पहल नहीं की गई है. उन्होंने कहा कि राज्य में मात्र रिम्स में ही जेनेरिक दवा का काउंटर है. |
Dada Saheb Phalke Award Winners (Photo Credit: social media)
मुंबई :
अभिनेता-फिल्म निर्माता ऋषभ शेट्टी (Rishabh Shetty) को उनकी कन्नड़ फिल्म कांतारा के लिए मोस्ट प्रॉमिसिंग एक्टर का पुरस्कार दिया गया. वरुण धवन ने भी अपनी फिल्म भेड़िया के लिए क्रिटिक्स बेस्ट एक्टर का पुरस्कार जीता. टेलीविज़न सीरिज में, रूपाली गांगुली-स्टारर अनुपमा ने टेलीविज़न सीरीज़ ऑफ़ द ईयर का पुरस्कार जीता.
एक्ट्रेस रेखा को उनके 'फिल्म इंडस्ट्री में बेहतरीन योगदान' के लिए एक पुरस्कार से सम्मानित किया गया. वह एक सुनहरे रंग की साड़ी में इस कार्यक्रम में शामिल हुईं और उन्हें सफेद साड़ी में आलिया के साथ बॉन्डिंग करते देखा गया. दोनों ने एक-दूसरे को गले लगाया और किस किया और साथ में पैपराजी को पोज भी दिए. इस बीच, हरिहरन ने 'संगीत इंडस्ट्री में बेहतर योगदान' के लिए एक पुरस्कार जीता.
टेलीविज़न सीरीज़ में सर्वश्रेष्ठ अभिनेताः फ़ना- इश्क में मरजावां के लिए ज़ैन इमाम को अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है. दूसरी ओर, कंगना रनौत ने इंस्टाग्राम स्टोरीज़ पर स्टार किड्स द्वारा प्रमुख पुरस्कार लेने पर निराशा व्यक्त की और 'योग्य' विजेताओं की अपनी सूची साझा की. उन्होंने यह भी दावा किया कि 'नेपो माफिया' ने स्वयं निर्मित लोगों के करियर को बर्बाद कर दिया है. वहीं दलकीर सलमान ने भी दादा साहब फाल्के अवार्ड्स 2023 में शिरकत की और वह काफी सुंदर लग रहे थे. दलकीर सलमान ने चुप के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार भी जीता. उनके प्रदर्शन को फैंस ने खूब सराहा. हालांकि, अब फैंस अवॉर्ड्स के रेड कार्पेट पर उनके जेंटलमैन बर्ताव के कायल हो गए हैं.
| Dada Saheb Phalke Award Winners मुंबई : अभिनेता-फिल्म निर्माता ऋषभ शेट्टी को उनकी कन्नड़ फिल्म कांतारा के लिए मोस्ट प्रॉमिसिंग एक्टर का पुरस्कार दिया गया. वरुण धवन ने भी अपनी फिल्म भेड़िया के लिए क्रिटिक्स बेस्ट एक्टर का पुरस्कार जीता. टेलीविज़न सीरिज में, रूपाली गांगुली-स्टारर अनुपमा ने टेलीविज़न सीरीज़ ऑफ़ द ईयर का पुरस्कार जीता. एक्ट्रेस रेखा को उनके 'फिल्म इंडस्ट्री में बेहतरीन योगदान' के लिए एक पुरस्कार से सम्मानित किया गया. वह एक सुनहरे रंग की साड़ी में इस कार्यक्रम में शामिल हुईं और उन्हें सफेद साड़ी में आलिया के साथ बॉन्डिंग करते देखा गया. दोनों ने एक-दूसरे को गले लगाया और किस किया और साथ में पैपराजी को पोज भी दिए. इस बीच, हरिहरन ने 'संगीत इंडस्ट्री में बेहतर योगदान' के लिए एक पुरस्कार जीता. टेलीविज़न सीरीज़ में सर्वश्रेष्ठ अभिनेताः फ़ना- इश्क में मरजावां के लिए ज़ैन इमाम को अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है. दूसरी ओर, कंगना रनौत ने इंस्टाग्राम स्टोरीज़ पर स्टार किड्स द्वारा प्रमुख पुरस्कार लेने पर निराशा व्यक्त की और 'योग्य' विजेताओं की अपनी सूची साझा की. उन्होंने यह भी दावा किया कि 'नेपो माफिया' ने स्वयं निर्मित लोगों के करियर को बर्बाद कर दिया है. वहीं दलकीर सलमान ने भी दादा साहब फाल्के अवार्ड्स दो हज़ार तेईस में शिरकत की और वह काफी सुंदर लग रहे थे. दलकीर सलमान ने चुप के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार भी जीता. उनके प्रदर्शन को फैंस ने खूब सराहा. हालांकि, अब फैंस अवॉर्ड्स के रेड कार्पेट पर उनके जेंटलमैन बर्ताव के कायल हो गए हैं. |
पॉप स्टार रिहाना के बाद अब पूर्व एडल्ट स्टार मिया खलीफा भी किसान आंदोलन के सपोर्ट में आ गई हैं. उन्होंने ट्विटर और इंस्टाग्राम पर किसान आंदोलन के सपोर्ट में कई पोस्ट किए हैं. उन्होंने किसान प्रदर्शन की फोटो भी शेयर की है.
मिया खलीफा ने इंस्टा स्टोरी पर किसान आंदोलन की एक फोटो शेयर की है. इसमें एक प्रदर्शनकारी ने पोस्टर भी उठाया हुआ है, जिसमें लिखा है- किसानों को मारना बंद करो. फोटो के नीचे कैप्शन में लिखा है- किसान आंदोलन के दौरान दिल्ली में इंटरनेट काट दिया. ये क्या चल रहा है.
इसके अलावा उन्होंने ट्विटर पर भी किसान आंदोलन की फोटो शेयर की है. उन्होंने किसान आंदोलन के सपोर्ट में दो ट्वीट किए हैं. उन्होंने एक ट्वीट में लिखा- कौन-सा मानवाधिकार उल्लंघन हो रहा? उन्होंने नई दिल्ली के आसपास इंटरनेट काट दिया है? #FarmersProtest. दूसरे ट्वीट में उन्होंने लिखा- Paid actors, huh? मुझे उम्मीद है कि अवॉर्ड सीजन के दौरान उनकी अनदेखी नहीं की जाएगी. मैं किसानों के साथ खड़ी हूं. #FarmersProtest.
अमांडा केर्नी ने पोस्ट कर लिखा ये?
मालूम हो कि मंगलवार को पॉप स्टार रिहाना ने ट्वीट किया था कि हम इस बारे में बात क्यों नहीं कर रहे हैं? इस पर बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत ने जवाब देते हुए कहा था कि इसके बारे में कोई भी बात इसलिए नहीं कर रहा है क्योंकि ये किसान नहीं हैं बल्कि आतंकवादी हैं जो भारत को बांटना चाह रहे हैं. ताकि चीन जैसे देश हमारे राष्ट्र पर कब्जा जमा ले और यूएसए जैसी चाइनीज कॉलोनी बना दें. तुम शांत बैठो बेवकूफ. हम लोग तुम्हारे जैसे बेवकूफ नहीं हैं जो अपने देश को बेच दें.
| पॉप स्टार रिहाना के बाद अब पूर्व एडल्ट स्टार मिया खलीफा भी किसान आंदोलन के सपोर्ट में आ गई हैं. उन्होंने ट्विटर और इंस्टाग्राम पर किसान आंदोलन के सपोर्ट में कई पोस्ट किए हैं. उन्होंने किसान प्रदर्शन की फोटो भी शेयर की है. मिया खलीफा ने इंस्टा स्टोरी पर किसान आंदोलन की एक फोटो शेयर की है. इसमें एक प्रदर्शनकारी ने पोस्टर भी उठाया हुआ है, जिसमें लिखा है- किसानों को मारना बंद करो. फोटो के नीचे कैप्शन में लिखा है- किसान आंदोलन के दौरान दिल्ली में इंटरनेट काट दिया. ये क्या चल रहा है. इसके अलावा उन्होंने ट्विटर पर भी किसान आंदोलन की फोटो शेयर की है. उन्होंने किसान आंदोलन के सपोर्ट में दो ट्वीट किए हैं. उन्होंने एक ट्वीट में लिखा- कौन-सा मानवाधिकार उल्लंघन हो रहा? उन्होंने नई दिल्ली के आसपास इंटरनेट काट दिया है? #FarmersProtest. दूसरे ट्वीट में उन्होंने लिखा- Paid actors, huh? मुझे उम्मीद है कि अवॉर्ड सीजन के दौरान उनकी अनदेखी नहीं की जाएगी. मैं किसानों के साथ खड़ी हूं. #FarmersProtest. अमांडा केर्नी ने पोस्ट कर लिखा ये? मालूम हो कि मंगलवार को पॉप स्टार रिहाना ने ट्वीट किया था कि हम इस बारे में बात क्यों नहीं कर रहे हैं? इस पर बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत ने जवाब देते हुए कहा था कि इसके बारे में कोई भी बात इसलिए नहीं कर रहा है क्योंकि ये किसान नहीं हैं बल्कि आतंकवादी हैं जो भारत को बांटना चाह रहे हैं. ताकि चीन जैसे देश हमारे राष्ट्र पर कब्जा जमा ले और यूएसए जैसी चाइनीज कॉलोनी बना दें. तुम शांत बैठो बेवकूफ. हम लोग तुम्हारे जैसे बेवकूफ नहीं हैं जो अपने देश को बेच दें. |
वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का पहला खिताब जीतने के लिए इस वक्त टीम इंडिया और न्यूजीलैंड के बीच जंग जारी है. फैन्स उस पल का इंतजार कर रहे हैं जब टीम इंडिया और न्यूजीलैंड में से कोई एक टीम आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का खिताब जीतेगी. आज हम अपने इस आर्टिकल में उन तीन टीमों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने अभी तक सबसे ज्यादा बार आईसीसी टेस्ट चैंपियनशिप गदा को जीता है. तो चलिए नजर डालते हैं उन तीन टीमों पर.
1 -ऑस्ट्रेलिया (9 बार)
जब आईसीसी टेस्ट चैंपियनशिप गदा को लेकर ऐलान किया गया था, तो उस समय ऑस्ट्रेलियाई टीम का दबदबा क्रिकेट के सभी फॉर्मेट में देखने को मिल रहा था. साल 2003 से लेकर 2009 तक लगातार 8 सीजन इस गदा पर ऑस्ट्रेलियाई टीम का कब्जा रहा.
साल 2010 में भारतीय टीम ने उन्हें पछाड़ते हुए इस गदा को अपने नाम किया. लेकिन साल 2016 में ऑस्ट्रेलियाई टीम ने इस गदा पर स्टीव स्मिथ की कप्तानी में एकबार फिर से कब्जा किया, लेकिन वह इस खिताब को अपने पास बरकरार नहीं रख सके.
2 -भारत (7 बार)
भारतीय टीम ने पहली बार आईसीसी टेस्ट चैंपियनशिप गदा को साल 2009-10 में खत्म हुए सीजन में महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में जीता था. इसके बाद टीम ने 2011 में भी टेस्ट क्रिकेट में अपनी बादशाहत को कायम रखते हुए गदा पर कब्जा किया.
साल 2012 में इंग्लैंड की टीम ने रैंकिंग में पहला स्थान हासिल करते हुए भारत से इसे छीन लिया. जिसके बाद भारतीय टीम ने साल 2017 में विराट कोहली की कप्तानी में टेस्ट क्रिकेट में फिर से शानदार प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल किया और अगले 5 सीजन से इसे अपने पास बरकरार रखा हुआ है.
3 -दक्षिण अफ्रीका (3 बार)
दक्षिण अफ्रीका टीम ने साल 2013 से लेकर 2015 तक टेस्ट क्रिकेट में बाकी टीमों के मुकाबले शानदार प्रदर्शन करते हुए आईसीसी (ICC) टेस्ट चैंपियनशिप गदा को लगातार 3 बार अपने नाम किया था. ग्रीम स्मिथ की कप्तानी में टीम ने इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ सीरीज में जीत दर्ज की थी.
दक्षिण अफ्रीका से पहले साल 2012 में यह टेस्ट चैंपियनशिप गदा इंग्लैंड की टीम के पास थी. हालांकि इसके बाद दक्षिण अफ्रीका की टीम को इस गदा पर कब्जा करने का मौका नहीं मिला. हाल ही के कुछ वर्षों में टीम का टेस्ट क्रिकेट में प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा.
| वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का पहला खिताब जीतने के लिए इस वक्त टीम इंडिया और न्यूजीलैंड के बीच जंग जारी है. फैन्स उस पल का इंतजार कर रहे हैं जब टीम इंडिया और न्यूजीलैंड में से कोई एक टीम आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का खिताब जीतेगी. आज हम अपने इस आर्टिकल में उन तीन टीमों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने अभी तक सबसे ज्यादा बार आईसीसी टेस्ट चैंपियनशिप गदा को जीता है. तो चलिए नजर डालते हैं उन तीन टीमों पर. एक -ऑस्ट्रेलिया जब आईसीसी टेस्ट चैंपियनशिप गदा को लेकर ऐलान किया गया था, तो उस समय ऑस्ट्रेलियाई टीम का दबदबा क्रिकेट के सभी फॉर्मेट में देखने को मिल रहा था. साल दो हज़ार तीन से लेकर दो हज़ार नौ तक लगातार आठ सीजन इस गदा पर ऑस्ट्रेलियाई टीम का कब्जा रहा. साल दो हज़ार दस में भारतीय टीम ने उन्हें पछाड़ते हुए इस गदा को अपने नाम किया. लेकिन साल दो हज़ार सोलह में ऑस्ट्रेलियाई टीम ने इस गदा पर स्टीव स्मिथ की कप्तानी में एकबार फिर से कब्जा किया, लेकिन वह इस खिताब को अपने पास बरकरार नहीं रख सके. दो -भारत भारतीय टीम ने पहली बार आईसीसी टेस्ट चैंपियनशिप गदा को साल दो हज़ार नौ-दस में खत्म हुए सीजन में महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में जीता था. इसके बाद टीम ने दो हज़ार ग्यारह में भी टेस्ट क्रिकेट में अपनी बादशाहत को कायम रखते हुए गदा पर कब्जा किया. साल दो हज़ार बारह में इंग्लैंड की टीम ने रैंकिंग में पहला स्थान हासिल करते हुए भारत से इसे छीन लिया. जिसके बाद भारतीय टीम ने साल दो हज़ार सत्रह में विराट कोहली की कप्तानी में टेस्ट क्रिकेट में फिर से शानदार प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल किया और अगले पाँच सीजन से इसे अपने पास बरकरार रखा हुआ है. तीन -दक्षिण अफ्रीका दक्षिण अफ्रीका टीम ने साल दो हज़ार तेरह से लेकर दो हज़ार पंद्रह तक टेस्ट क्रिकेट में बाकी टीमों के मुकाबले शानदार प्रदर्शन करते हुए आईसीसी टेस्ट चैंपियनशिप गदा को लगातार तीन बार अपने नाम किया था. ग्रीम स्मिथ की कप्तानी में टीम ने इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ सीरीज में जीत दर्ज की थी. दक्षिण अफ्रीका से पहले साल दो हज़ार बारह में यह टेस्ट चैंपियनशिप गदा इंग्लैंड की टीम के पास थी. हालांकि इसके बाद दक्षिण अफ्रीका की टीम को इस गदा पर कब्जा करने का मौका नहीं मिला. हाल ही के कुछ वर्षों में टीम का टेस्ट क्रिकेट में प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा. |
अजनबी द्वारा फोन कॉल और पीछा करने से डरी 12वीं की छात्रा ने स्कूल जाना ही छोड़ दिया। परिवार के समझाने पर अब वह अपनी मां के साथ स्कूल जाती है। पीड़ित परिवार ने रविवार को कविनगर थाने में शिकायत की है। थाना प्रभारी समरजीत सिंह ने बताया कि पीड़िता ने आरोपी का मोबाइल नंबर दिया है। इसके आधार पर आरोपी की तलाश की जा रही है। उसे जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
जानकारी के अनुसार, सहारनपुर में तैनात सरकारी विभाग के कर्मचारी की बेटी गोविंदपुरम के एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ती है। आरोप है कि एक अनजान शख्स उसे फोन कर मिलने के लिए बोल रहा है। आरोपी विरोध करने पर अंजाम भुगतने की धमकी देता और छात्रा का पीछा भी करता है। छात्रा ने इस बारे में अपने परिवारवालों को बताया। जब घर के लोगों ने उस नंबर पर कॉल किया तो किसी ने फोन नहीं उठाया। छात्रा के मुताबिक, आरोपी फोन पर उसके स्कूल जाने के रास्ते और सहेलियों के बारे में भी बताता है। इस घटना से पीड़िता इतना डर गई कि स्कूल जाना ही छोड़ दिया। अभिभावकों के हिम्मत भरने और मां के साथ जाने पर वह मानी।
| अजनबी द्वारा फोन कॉल और पीछा करने से डरी बारहवीं की छात्रा ने स्कूल जाना ही छोड़ दिया। परिवार के समझाने पर अब वह अपनी मां के साथ स्कूल जाती है। पीड़ित परिवार ने रविवार को कविनगर थाने में शिकायत की है। थाना प्रभारी समरजीत सिंह ने बताया कि पीड़िता ने आरोपी का मोबाइल नंबर दिया है। इसके आधार पर आरोपी की तलाश की जा रही है। उसे जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। जानकारी के अनुसार, सहारनपुर में तैनात सरकारी विभाग के कर्मचारी की बेटी गोविंदपुरम के एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ती है। आरोप है कि एक अनजान शख्स उसे फोन कर मिलने के लिए बोल रहा है। आरोपी विरोध करने पर अंजाम भुगतने की धमकी देता और छात्रा का पीछा भी करता है। छात्रा ने इस बारे में अपने परिवारवालों को बताया। जब घर के लोगों ने उस नंबर पर कॉल किया तो किसी ने फोन नहीं उठाया। छात्रा के मुताबिक, आरोपी फोन पर उसके स्कूल जाने के रास्ते और सहेलियों के बारे में भी बताता है। इस घटना से पीड़िता इतना डर गई कि स्कूल जाना ही छोड़ दिया। अभिभावकों के हिम्मत भरने और मां के साथ जाने पर वह मानी। |
ईरान दुश्मनी में मानवाधिकार की सारी सीमाओं को लांघते अमेरिका और यूरोपीय देश, अपराधियों को अपने दिल में बैठा रहे हैं!
इस्लामी गणतंत्र ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह बात बल देकर कही है कि अवैध ज़ायोनी शासन ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य कार्यवाही करने में असमर्थ है।
इस्लामी गणराज्य ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नासिर कनआनी ने सोमवार को अपनी साप्ताहिक प्रेस वार्ता में अमेरिका और इस्राईल के संयुक्त सैन्य अभ्यास की ओर इशारा करते हुए कहा कि ईरान की ओर से अवैध ज़ायोनी शासन को उसकी सुरक्षा-विरोधी और आक्रामक कार्यवाहियों बार-बार मुंहतोड़ जवाब मिलता रहा है और वह उसका स्वाद भी चख चुका है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ज़ायोनी शासन का सहयोगी और पूर्ण समर्थक है, इसलिए उसे इस अवैध शासन के कार्यों के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अमेरिका में इस्लामी क्रांति के ख़िलाफ़ होने वाले प्रदर्शनों में सावाक के अत्याचारी एजेंट परवेज़ साबेती की उपस्थिति की ओर इशारा करते हुए कहा कि मानवाधिकारों का दावा करने वाली सरकारें अब अपराधियों की प्रायोजक बन गई हैं। एक ऐतिहासिक अपराधी, जिसके ज़ुल्म की कोई इन्तेहा नहीं है वह लोकतंत्र का दावा करने वाले देश के दिल में मौजूद है। नासिर कनआनी ने कहा कि कुल मिलाकर अपराधियों को पनाह देना, यह ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिका की दुश्मनी का एक और प्रतीक है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने म्यूनिख सम्मेलन में भाग लेने के लिए ईरान को आमंत्रित नहीं किए जाने के बारे में भी कहा कि इस तरह की कार्यवाही तटस्थता के सिद्धांत के ख़िलाफ़ है। ख़ासकर ईरान जैसा देश, कि जिसकी क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण, निर्णायक और निर्विवाद भूमिका है। उन्होंने कहा कि इस कार्यवाही का अर्थ है ग़लत आंकलन और ग़लत व्यवहार का जारी रहना है। नासिर कनआनी ने प्रतिबंधों को हटाए जाने के लिए वार्ता के जारी रहने के बारे में कहा कि ईरान बातचीत के रास्ते के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि विरोधी पक्ष और अमेरिका, एक ओर तो यह एलान करते हैं कि वे समझौते में वापस आना चाहते हैं, दूसरी ओर व्यवाहिरक तौर पर ऐसा दिखाते नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका और अन्य पक्षों को चाहिए कि वे अपना स्पष्ट रुख और साफ नियति दिखाते हुए वार्ता की मेज़ पर वापस आएं। इसी तरह नासिर कनआनी ने क़ैदियों की अदला-बदली को लेकर अमेरिका से बातचीत के बारे में कहा कि ईरान ने मानवीय दृष्टिकोण से क़ैदियों की अदला-बदली की बातचीत में यह दिखाया कि वह जल्द से जल्द इस कार्यवाही को अंजाम देने के लिए तैयार है, लेकिन हमें अमेरिकी सरकार की ओर से कोई जवाब और उत्साहजनक कार्यवाही नहीं दिखी। (RZ)
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| ईरान दुश्मनी में मानवाधिकार की सारी सीमाओं को लांघते अमेरिका और यूरोपीय देश, अपराधियों को अपने दिल में बैठा रहे हैं! इस्लामी गणतंत्र ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह बात बल देकर कही है कि अवैध ज़ायोनी शासन ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य कार्यवाही करने में असमर्थ है। इस्लामी गणराज्य ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नासिर कनआनी ने सोमवार को अपनी साप्ताहिक प्रेस वार्ता में अमेरिका और इस्राईल के संयुक्त सैन्य अभ्यास की ओर इशारा करते हुए कहा कि ईरान की ओर से अवैध ज़ायोनी शासन को उसकी सुरक्षा-विरोधी और आक्रामक कार्यवाहियों बार-बार मुंहतोड़ जवाब मिलता रहा है और वह उसका स्वाद भी चख चुका है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ज़ायोनी शासन का सहयोगी और पूर्ण समर्थक है, इसलिए उसे इस अवैध शासन के कार्यों के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अमेरिका में इस्लामी क्रांति के ख़िलाफ़ होने वाले प्रदर्शनों में सावाक के अत्याचारी एजेंट परवेज़ साबेती की उपस्थिति की ओर इशारा करते हुए कहा कि मानवाधिकारों का दावा करने वाली सरकारें अब अपराधियों की प्रायोजक बन गई हैं। एक ऐतिहासिक अपराधी, जिसके ज़ुल्म की कोई इन्तेहा नहीं है वह लोकतंत्र का दावा करने वाले देश के दिल में मौजूद है। नासिर कनआनी ने कहा कि कुल मिलाकर अपराधियों को पनाह देना, यह ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिका की दुश्मनी का एक और प्रतीक है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने म्यूनिख सम्मेलन में भाग लेने के लिए ईरान को आमंत्रित नहीं किए जाने के बारे में भी कहा कि इस तरह की कार्यवाही तटस्थता के सिद्धांत के ख़िलाफ़ है। ख़ासकर ईरान जैसा देश, कि जिसकी क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण, निर्णायक और निर्विवाद भूमिका है। उन्होंने कहा कि इस कार्यवाही का अर्थ है ग़लत आंकलन और ग़लत व्यवहार का जारी रहना है। नासिर कनआनी ने प्रतिबंधों को हटाए जाने के लिए वार्ता के जारी रहने के बारे में कहा कि ईरान बातचीत के रास्ते के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि विरोधी पक्ष और अमेरिका, एक ओर तो यह एलान करते हैं कि वे समझौते में वापस आना चाहते हैं, दूसरी ओर व्यवाहिरक तौर पर ऐसा दिखाते नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका और अन्य पक्षों को चाहिए कि वे अपना स्पष्ट रुख और साफ नियति दिखाते हुए वार्ता की मेज़ पर वापस आएं। इसी तरह नासिर कनआनी ने क़ैदियों की अदला-बदली को लेकर अमेरिका से बातचीत के बारे में कहा कि ईरान ने मानवीय दृष्टिकोण से क़ैदियों की अदला-बदली की बातचीत में यह दिखाया कि वह जल्द से जल्द इस कार्यवाही को अंजाम देने के लिए तैयार है, लेकिन हमें अमेरिकी सरकार की ओर से कोई जवाब और उत्साहजनक कार्यवाही नहीं दिखी। हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब कीजिए! |
Jaya Kishori Ji latest Bhajan Video Speech Qoutes: जया किशोरी देश की चर्चित युवा साध्वी हैं। 23 साल की उम्र में उन्हें बड़ी संख्या में लोग फॉलो करते हैं। जया किशोरी सोशल मीडिया के माध्यम से अपने फॉलोअर्स को मोटिवेट करने का काम भी करती हैं। उनके सोशल मीडिा अकाउंट्स पर कई ऐसे मोटिवेशनल कोट्स हैं जो किसी को भी प्रेरणा दे सकते हैं। आइए देखें उन्हीं में से कुछ कोट्सः
| Jaya Kishori Ji latest Bhajan Video Speech Qoutes: जया किशोरी देश की चर्चित युवा साध्वी हैं। तेईस साल की उम्र में उन्हें बड़ी संख्या में लोग फॉलो करते हैं। जया किशोरी सोशल मीडिया के माध्यम से अपने फॉलोअर्स को मोटिवेट करने का काम भी करती हैं। उनके सोशल मीडिा अकाउंट्स पर कई ऐसे मोटिवेशनल कोट्स हैं जो किसी को भी प्रेरणा दे सकते हैं। आइए देखें उन्हीं में से कुछ कोट्सः |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां मुंडेरवा थाना क्षेत्र के मुजेहना में किशोरी की संदिग्ध हाल में मौत हो गई। उसका शव घर में फंदे से लटका मिला।
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| उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां मुंडेरवा थाना क्षेत्र के मुजेहना में किशोरी की संदिग्ध हाल में मौत हो गई। उसका शव घर में फंदे से लटका मिला। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi. |
Alive News/ Faridabad : डबुआ कालोनी स्थित ए. डी. सी. सै. स्कूल में इंटर हाऊस प्रतियोगिता के अन्तर्गत कविता पाठ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में कक्षा छठी से लेकर 12वीं तक के 20 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपने टैलेंट को दर्शाया। इस प्रतियोगिता में टीमों का चयन हाऊस वाईज किया गया जिसमें ट्रुथ हाऊस, प्राईड हाऊस, जस्टिस हाऊस और विजडम हाऊस के पांच-पांच मेधावी छात्रों ने भाग लिया।
कविता पाठ प्रतियोगिता स्वतंत्र विषय पर आधिारित रहा। प्रतियोगिता में कुछ छात्रों ने मातृ दिवस, सेव गर्ल चाईड और अध्यापक के ऊपर अपनी सुन्दर कविताओं से सभी का दिल जीत लिया और खूब वाह-वाही लूटी। वहीं एक प्रतिभागी ने प्रकृति और मानव के बीच के अटूट संबंधों को रेखांकित करते हुए पर्यावरण-स्वच्छता और प्रदूषण उन्मूलनता पर सार्थक और सटीक विचार कविताओं के माध्यम से व्यक्त किए।
प्रतियोगिता में क्लास-8 से श्रष्ठि, क्लास-10 से सानू और क्लास-10 से राहुल विजयी रहे। विजयी छात्रों को स्कूल के चेयमैन सुभाष श्योरायन ने सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया और उनको सदैव कामयाबी हासिल करने का आशीर्वाद दिया। इस मौके पर स्कूल का पूरा स्टाफ मौजूद रहा।
| Alive News/ Faridabad : डबुआ कालोनी स्थित ए. डी. सी. सै. स्कूल में इंटर हाऊस प्रतियोगिता के अन्तर्गत कविता पाठ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में कक्षा छठी से लेकर बारहवीं तक के बीस प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपने टैलेंट को दर्शाया। इस प्रतियोगिता में टीमों का चयन हाऊस वाईज किया गया जिसमें ट्रुथ हाऊस, प्राईड हाऊस, जस्टिस हाऊस और विजडम हाऊस के पांच-पांच मेधावी छात्रों ने भाग लिया। कविता पाठ प्रतियोगिता स्वतंत्र विषय पर आधिारित रहा। प्रतियोगिता में कुछ छात्रों ने मातृ दिवस, सेव गर्ल चाईड और अध्यापक के ऊपर अपनी सुन्दर कविताओं से सभी का दिल जीत लिया और खूब वाह-वाही लूटी। वहीं एक प्रतिभागी ने प्रकृति और मानव के बीच के अटूट संबंधों को रेखांकित करते हुए पर्यावरण-स्वच्छता और प्रदूषण उन्मूलनता पर सार्थक और सटीक विचार कविताओं के माध्यम से व्यक्त किए। प्रतियोगिता में क्लास-आठ से श्रष्ठि, क्लास-दस से सानू और क्लास-दस से राहुल विजयी रहे। विजयी छात्रों को स्कूल के चेयमैन सुभाष श्योरायन ने सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया और उनको सदैव कामयाबी हासिल करने का आशीर्वाद दिया। इस मौके पर स्कूल का पूरा स्टाफ मौजूद रहा। |
जापान की प्रमुख दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी Suzuki ने इंडियन मार्केट में नई Gixxer रेंज को लॉन्च किया है.
स्पोर्ट्स बाइक्स की इस रेंज में कंपनी ने कई बदलाव किए हैं जो कि इसे पिछले मॉडल के मुकाबले और भी बेहतर बनाते हैं.
ये बाइक्स 'सुजकी राइड कनेक्ट' ब्लूटूथ कनेक्टिविटी सिस्टम से लैस हैं, जिससे आप इन्हें स्मार्टफोन से भी कनेक्ट कर सकते हैं.
शुरुआती कीमत 1. 40 लाख है. स्मार्ट कनेक्टर से इनकमिंग कॉल्स, मैसेज, टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन जैसी सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे.
Suzuki Gixxer रेंज को न केवल नए कनेक्टिविटी फीचर्स दिए गए हैं, बल्कि ये इसे नए रंगों के साथ बाजार में उतारा गया है.
अब जिक्सर 250 मैटे स्टेलर ब्लू कलर में उपलब्ध होगा, वहीं जिक्सर एसएफ 250 को मोटोजीपी टीम कलर से सजाया गया है.
जिक्सर में कंपनी ने 153cc का इंजन है जो कि 13. 6ps की पावर जेनरेट करता है. बाकी खूबियां जानने के लिए नीचे क्लिक करें.
| जापान की प्रमुख दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी Suzuki ने इंडियन मार्केट में नई Gixxer रेंज को लॉन्च किया है. स्पोर्ट्स बाइक्स की इस रेंज में कंपनी ने कई बदलाव किए हैं जो कि इसे पिछले मॉडल के मुकाबले और भी बेहतर बनाते हैं. ये बाइक्स 'सुजकी राइड कनेक्ट' ब्लूटूथ कनेक्टिविटी सिस्टम से लैस हैं, जिससे आप इन्हें स्मार्टफोन से भी कनेक्ट कर सकते हैं. शुरुआती कीमत एक. चालीस लाख है. स्मार्ट कनेक्टर से इनकमिंग कॉल्स, मैसेज, टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन जैसी सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे. Suzuki Gixxer रेंज को न केवल नए कनेक्टिविटी फीचर्स दिए गए हैं, बल्कि ये इसे नए रंगों के साथ बाजार में उतारा गया है. अब जिक्सर दो सौ पचास मैटे स्टेलर ब्लू कलर में उपलब्ध होगा, वहीं जिक्सर एसएफ दो सौ पचास को मोटोजीपी टीम कलर से सजाया गया है. जिक्सर में कंपनी ने एक सौ तिरेपनcc का इंजन है जो कि तेरह. छःps की पावर जेनरेट करता है. बाकी खूबियां जानने के लिए नीचे क्लिक करें. |
रेलवे स्टेशन पर उज्जैनी एक्सप्रेस के पटरी से उतरने की घटना के अच्छा एक दिन बाद मसूरी एक्सप्रेस की दो बोगियां पटरी से उतर गईं. गनीमत रही कि ट्रेन में यात्री नहीं थे. हादसे की वजह से ट्रेनों संचालन प्रभावित रहा, जिससे यात्रियों को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ा. कड़ी मशक्कत के बाद बोगियों को ट्रैक से हटाया गया, जिसके बाद ट्रेनों का संचालन प्रारम्भ हो पाया.
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार शुक्रवार दुपहर करीब 2:30 बजे रेलवे स्टेशन पर देहरादून-मसूरी एक्सप्रेस की शंटिंग हो रही थी. इसी बीच रेलवे लाइन में तकनीकी खामी आने की वजह से ट्रेन की दो बोगियां तेज धमाके साथ पटरी से उतर गईं. इससे अधिकारियों, कर्मचारियों में हड़कंप मच गया. आनन फानन में स्टेशन अधीक्षक एसडी डोभाल के अतिरिक्त तमाम अधिकारी, अभियंता, पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे.
इसी के साथ करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद बोगियों को पटरी पर लाया जा सका. इस दौरान दून- हावडा़, दून-अमृतसर, दून-वाराणसी, दिल्ली से आने वाली जनशताब्दी, लिंक एक्सप्रेस, काठगोदाम जैसी ट्रेनों का संचालन प्रभावित हुआ. जिसकी वजह से यात्रियों को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ा. इसके अतिरिक्तशंटिंग लाइन के क्षतिग्रस्त होने और मरम्मत कार्यों के चलते दिल्ली, प्रयागराज से आने वाले ट्रेनों को प्लेटफार्म पर लाने में परेशानी हुई.
| रेलवे स्टेशन पर उज्जैनी एक्सप्रेस के पटरी से उतरने की घटना के अच्छा एक दिन बाद मसूरी एक्सप्रेस की दो बोगियां पटरी से उतर गईं. गनीमत रही कि ट्रेन में यात्री नहीं थे. हादसे की वजह से ट्रेनों संचालन प्रभावित रहा, जिससे यात्रियों को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ा. कड़ी मशक्कत के बाद बोगियों को ट्रैक से हटाया गया, जिसके बाद ट्रेनों का संचालन प्रारम्भ हो पाया. सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार शुक्रवार दुपहर करीब दो:तीस बजे रेलवे स्टेशन पर देहरादून-मसूरी एक्सप्रेस की शंटिंग हो रही थी. इसी बीच रेलवे लाइन में तकनीकी खामी आने की वजह से ट्रेन की दो बोगियां तेज धमाके साथ पटरी से उतर गईं. इससे अधिकारियों, कर्मचारियों में हड़कंप मच गया. आनन फानन में स्टेशन अधीक्षक एसडी डोभाल के अतिरिक्त तमाम अधिकारी, अभियंता, पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे. इसी के साथ करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद बोगियों को पटरी पर लाया जा सका. इस दौरान दून- हावडा़, दून-अमृतसर, दून-वाराणसी, दिल्ली से आने वाली जनशताब्दी, लिंक एक्सप्रेस, काठगोदाम जैसी ट्रेनों का संचालन प्रभावित हुआ. जिसकी वजह से यात्रियों को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ा. इसके अतिरिक्तशंटिंग लाइन के क्षतिग्रस्त होने और मरम्मत कार्यों के चलते दिल्ली, प्रयागराज से आने वाले ट्रेनों को प्लेटफार्म पर लाने में परेशानी हुई. |
समाचार एजेंसी सवार अमेरिकी जनरल बेन होजेस (यूरोप में अमेरिकी कब्जे की सेनाओं के कमांडर) द्वारा एक बयान का हवाला दिया गया हैः
बेशक, जरूरी नहीं कि हमला हो। लेकिन हम सुवालकी कॉरिडोर के ओवरलैप का विरोध करने के लिए तैयार हैं, क्योंकि अगर यह होता है, तो हमारे तीन सहयोगी गठबंधन से अलग हो जाएंगे।
हॉजेस के अनुसार, इस तरह के अभ्यास किए गए थे, क्योंकि "आप जॉर्जिया और क्रीमिया के आक्रमण के बाद रूस पर भरोसा नहीं कर सकते। " नाटो अभ्यास कथित तौर पर बेलारूस में रूसी-बेलारूसी युद्धाभ्यास से संबंधित हैं।
होजेसः
रूस ने अपनी सीमाओं पर किए गए अभ्यास की पृष्ठभूमि के खिलाफ अन्य देशों पर हमला किया। लेकिन नाटो में पेशेवर हैं। और हम ऐसे परिदृश्य के लिए तैयार हैं।
उसी समय, श्री होजेस ने यह निर्दिष्ट नहीं किया कि इससे पहले कि रूस कोई कार्रवाई करता, दोनों यूक्रेन और जॉर्जिया में, संयुक्त राज्य अमेरिका की अधीनता के साथ, रूसी बोलने वाले आबादी के जीवन के लिए खतरा होने के साथ या तो कूपन डीएटैट थे, या, जैसे कि साकाशविली, एक सैन्य के मामले में। नरसंहार आक्रमण।
पोलिश और लिथुआनियाई सैनिकों और अधिकारियों सहित हजारों नाटो बलों के 1,5 ने तथाकथित सुवालक गलियारे के "रक्षा" अभ्यास में भाग लिया।
| समाचार एजेंसी सवार अमेरिकी जनरल बेन होजेस द्वारा एक बयान का हवाला दिया गया हैः बेशक, जरूरी नहीं कि हमला हो। लेकिन हम सुवालकी कॉरिडोर के ओवरलैप का विरोध करने के लिए तैयार हैं, क्योंकि अगर यह होता है, तो हमारे तीन सहयोगी गठबंधन से अलग हो जाएंगे। हॉजेस के अनुसार, इस तरह के अभ्यास किए गए थे, क्योंकि "आप जॉर्जिया और क्रीमिया के आक्रमण के बाद रूस पर भरोसा नहीं कर सकते। " नाटो अभ्यास कथित तौर पर बेलारूस में रूसी-बेलारूसी युद्धाभ्यास से संबंधित हैं। होजेसः रूस ने अपनी सीमाओं पर किए गए अभ्यास की पृष्ठभूमि के खिलाफ अन्य देशों पर हमला किया। लेकिन नाटो में पेशेवर हैं। और हम ऐसे परिदृश्य के लिए तैयार हैं। उसी समय, श्री होजेस ने यह निर्दिष्ट नहीं किया कि इससे पहले कि रूस कोई कार्रवाई करता, दोनों यूक्रेन और जॉर्जिया में, संयुक्त राज्य अमेरिका की अधीनता के साथ, रूसी बोलने वाले आबादी के जीवन के लिए खतरा होने के साथ या तो कूपन डीएटैट थे, या, जैसे कि साकाशविली, एक सैन्य के मामले में। नरसंहार आक्रमण। पोलिश और लिथुआनियाई सैनिकों और अधिकारियों सहित हजारों नाटो बलों के एक,पाँच ने तथाकथित सुवालक गलियारे के "रक्षा" अभ्यास में भाग लिया। |
बीएचयू के मालवीय भवन में आयोजित महामना भागवत का मंगलवार को समापन हुआ। अंतिम दिन भागवत कथा मर्मज्ञ वृन्दावन से पधारे आचार्य श्रीवत्सगोस्वामी ने श्रीमद् भागवत् पुराण कथा सार एवं होली लीला के प्रसंग का वाचन कर श्रोताओं को भक्ति रस से सराबोर कर दिया।
आचार्य श्रीवत्सगोस्वामी ने ने कहा कि महामना ने शरीरिक बल से अधिक आत्मिक बल की वृद्धि करने के सम्बन्ध में अपने विद्यार्थियों को उपदेश दिया। महामना कहते थे कि "दूध पिओ, कसरत करो और जपो हरिनाम" भागवत का मूल संदेश है हरिभजन करो। ज्ञान शून्य मनुष्य का देह पाना निष्फल है। भागवत मर्मज्ञ ने कहा कि भक्ति का तात्पर्य जहां किसी प्रकार की मांग, जांच न हो। प्रभु तो भक्ति के विज्ञान से चलते हैं और कोई विज्ञान उनको नहीं आता है। उन्होंने श्रोताओं को गंगा को प्रदूषण रहित करने का संकल्प दिलाया। इस अवसर पर विशिष्टजनों को सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में आचार्य कमलेश दत्त त्रिपाठी, आचार्य रेवा प्रसाद द्विवेदी, आचार्य रामहर्ष सिंह, आचार्य चितरंजन ज्योतिषी, आचार्य धनन्जय पाण्डेय, अमेरिका से आए धर्मशास्त्र के प्रो। जौक होली, प्रो। श्याम सुन्दर अग्रवाल रहे। भागवत के संयोजक डॉ। राम मोहन पाण्डेय व संयुक्त सचिव डॉ। एमआर पाठक ने कथा की व्यवस्था का सुचारू संपादन किया। श्रोताओं में मुख्य रूप से कुंवर अनन्त नारायण सिंह, प्रो। वेणीमाधव शुक्ला, प्रो। अन्नपूर्णा शुक्ला, प्रो धनन्जय पाण्डेय, डॉ। बृजमोहन दीक्षित, प्रो एमके सिंह, अरविन्द अग्रवाल, विमल अग्रवाल, अभय अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल थे।
| बीएचयू के मालवीय भवन में आयोजित महामना भागवत का मंगलवार को समापन हुआ। अंतिम दिन भागवत कथा मर्मज्ञ वृन्दावन से पधारे आचार्य श्रीवत्सगोस्वामी ने श्रीमद् भागवत् पुराण कथा सार एवं होली लीला के प्रसंग का वाचन कर श्रोताओं को भक्ति रस से सराबोर कर दिया। आचार्य श्रीवत्सगोस्वामी ने ने कहा कि महामना ने शरीरिक बल से अधिक आत्मिक बल की वृद्धि करने के सम्बन्ध में अपने विद्यार्थियों को उपदेश दिया। महामना कहते थे कि "दूध पिओ, कसरत करो और जपो हरिनाम" भागवत का मूल संदेश है हरिभजन करो। ज्ञान शून्य मनुष्य का देह पाना निष्फल है। भागवत मर्मज्ञ ने कहा कि भक्ति का तात्पर्य जहां किसी प्रकार की मांग, जांच न हो। प्रभु तो भक्ति के विज्ञान से चलते हैं और कोई विज्ञान उनको नहीं आता है। उन्होंने श्रोताओं को गंगा को प्रदूषण रहित करने का संकल्प दिलाया। इस अवसर पर विशिष्टजनों को सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में आचार्य कमलेश दत्त त्रिपाठी, आचार्य रेवा प्रसाद द्विवेदी, आचार्य रामहर्ष सिंह, आचार्य चितरंजन ज्योतिषी, आचार्य धनन्जय पाण्डेय, अमेरिका से आए धर्मशास्त्र के प्रो। जौक होली, प्रो। श्याम सुन्दर अग्रवाल रहे। भागवत के संयोजक डॉ। राम मोहन पाण्डेय व संयुक्त सचिव डॉ। एमआर पाठक ने कथा की व्यवस्था का सुचारू संपादन किया। श्रोताओं में मुख्य रूप से कुंवर अनन्त नारायण सिंह, प्रो। वेणीमाधव शुक्ला, प्रो। अन्नपूर्णा शुक्ला, प्रो धनन्जय पाण्डेय, डॉ। बृजमोहन दीक्षित, प्रो एमके सिंह, अरविन्द अग्रवाल, विमल अग्रवाल, अभय अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल थे। |
रात्रिभुक्तिफलान्मर्त्या जायन्ते व्याधिपीडिताः । वासभृत्याः परेषां च स्ववन्धुजनवर्जिताः ॥८९ आरूढा मत्तमातङ्गं वीज्यमानाः सुचामरैः । ये यान्ति स्वजनैः साधं ते निशाहारवर्जनात् ॥९० याः परुषाङ्गदासाद्या याः पुत्रपतिवर्जिताः । या दौर्भाग्यग्रहग्रस्तास्ता निशाहारभुक्तितः ॥९१ लीलया घोषितो पान्ति या यानगजवाजिषु । वसन्ति दिव्यहम्र्म्येषु ता राज्याहारवर्जनात् ॥ ९२ दृश्यन्ते मर्त्यलोकेऽस्मिन् ये सुन्दरनराधिपाः । राज्यभुक्तिफलं सर्वं तच्चेव हि न संशयः ॥ ९३ दिवसस्याष्टमे भागे मन्दीभूते दिवाकरे । नक्तं तं प्राहुराचार्या न नक्तं रात्रिभोजनम् ॥९४ यथा चन्द्रं विना रात्रिर्वा कमलेविना सरः । तथा न शोभते जीवो बिना धर्मेण सर्वदा ॥९५ अद्य श्वो वा परस्मिन् वा दिने धर्मं करोम्यहम् । चिन्तयन्ति जना एवं क्षणं न सहते यमः ॥९६ दावाग्निः शुष्कमाद्रं वा काष्ठं न सहते ध्रुवम् । यथा तथा यमो लोके वालं वृद्धं च यौवनम् ॥ ९७ कालक्षेपो न कर्तव्य आयुः क्षीणं दिने दिने । यमस्य करुणा नास्ति धर्मस्य त्वरिता गतिः ॥९८ अनित्यानि शरीराणि विभवो नैव शाश्वतः । नित्यं सन्निहितो मृत्युः कर्तव्यो धर्मसंग्रह ॥ ९९ आत्मरूढतरोरपि मागच्छतौ तं नवत्यग्नौ । वृक्षाग्रं वाग्निना लग्नं तत्सुखं कुरुते वनम् ॥१००
निर्मल अंगके धारक और दिव्य वस्त्राभूषण वाले होते हैं ।।८८।। रात्रि भोजन के फलसे मनुष्य सदा व्याधियोंसे पीडित, दूसरोंके घर दास कर्म करनेवाले और स्ववन्धुजनोंसे रहित होते हैं ॥८९१॥ मदोन्मत्त हाथियोंपर आरूढ़, श्वेत चामरोंसे वीज्यमान जो मनुष्य स्वजनोंके साथ आज जाते हुए दिखाई देते हैं, वे रात्रि भोजनके त्यागसे ऐसी सम्पदाको प्राप्त हुए हैं ।।१०।। लोकमें जो पुरुष ( कठोर एवं रूक्ष ) अंगवाली दासी आदि देखी जाती हैं, जो पुत्र और पतिसे रहित स्त्रियाँ हैं और जो दुर्भाग्यरूप ग्रहसे पीड़ित स्त्रियाँ देखने में आती हैं, वे सब रात्रि भोजन के फलसे उत्पन्न हुई हैं, ऐसा जानना चाहिये ।।९१ ।। किन्तु जो स्त्रियां पालको, मियाना आदि यानों पर, हाथी और घोड़ों पर सवार होकर लीलापूर्वक गमन करती हैं और दिव्य भवनोंमें निवास करती हैं, वे सब रात्रिमें आहारके त्यागसे उत्पन्न हुई हैं ।।१२।। इसी प्रकार इस लोकमे जो सुन्दर मनुष्य और उनके स्वामी दिखाई देते हैं, वे सब रात्रि में भोजन नहीं करनेके फलते उत्पन्न हुए हैं, इसमें कोई संशय नहीं है ।।९३।। दिनके आठवें भागमें सूर्यके मन्द प्रकाशके हो जानेपर अवशिष्ट कालको आचार्यगण 'नक्त' ( रात्रि ) कहते हैं। केवल रात्रिमें भोजन करनेको हो नक्त भोजन नहीं कहते हैं। अपितु इस समयमें भोजन करना भी रात्रि भोजन है ।।९४।। जैसे चन्द्र विना रात्रि, और कमलोंके विना सरोवर नहीं शोभित होता है उसी प्रकार घसके विना जीव कभी भी शोभा नहीं पाता है ।।९५।। मनुष्य ऐसा चिन्तवन करते हैं कि मैं आज, कल या परसोंके दिन धर्म करूंगा । किन्तु यमराज एक क्षणका विलम्ब सहन नहीं करता है ।।९६।। जैसे दावाग्नि सूखे या गीले काठको सहन नहीं करती, अर्थात् सबको बिना किसी भेद-भावके भस्म कर देती है, यह ध्रुव सत्य है । इसी प्रकार यमराज भी लोक में बाल, वृद्ध या यौवन अवस्थाको नहीं देखता है, अर्थात् सबको समानरूपसे मार डालता है ।।९७।। आयु दिन दिन क्षीण होती है, इसलिए व्यर्थ काल व्यतीत नहीं करना चाहिये, क्योंकि यमराजके करुणा नहीं है और धर्मकी गति बहुत तेज है ॥९८॥ शरीर अनित्य हैं, विभव शाश्वत रहनेवाले नहीं हैं, और मृत्यु नित्य समीप आ रही है । अतएव धर्मका संग्रह शीघ्र करना चाहिये ।।९९।। यह संसारी प्राणी अन्य पुरुषोंसे नित्य कहता है कि आजके दिन | रात्रिभुक्तिफलान्मर्त्या जायन्ते व्याधिपीडिताः । वासभृत्याः परेषां च स्ववन्धुजनवर्जिताः ॥नवासी आरूढा मत्तमातङ्गं वीज्यमानाः सुचामरैः । ये यान्ति स्वजनैः साधं ते निशाहारवर्जनात् ॥नब्बे याः परुषाङ्गदासाद्या याः पुत्रपतिवर्जिताः । या दौर्भाग्यग्रहग्रस्तास्ता निशाहारभुक्तितः ॥इक्यानवे लीटरलया घोषितो पान्ति या यानगजवाजिषु । वसन्ति दिव्यहम्र्म्येषु ता राज्याहारवर्जनात् ॥ बानवे दृश्यन्ते मर्त्यलोकेऽस्मिन् ये सुन्दरनराधिपाः । राज्यभुक्तिफलं सर्वं तच्चेव हि न संशयः ॥ तिरानवे दिवसस्याष्टमे भागे मन्दीभूते दिवाकरे । नक्तं तं प्राहुराचार्या न नक्तं रात्रिभोजनम् ॥चौरानवे यथा चन्द्रं विना रात्रिर्वा कमलेविना सरः । तथा न शोभते जीवो बिना धर्मेण सर्वदा ॥पचानवे अद्य श्वो वा परस्मिन् वा दिने धर्मं करोम्यहम् । चिन्तयन्ति जना एवं क्षणं न सहते यमः ॥छियानवे दावाग्निः शुष्कमाद्रं वा काष्ठं न सहते ध्रुवम् । यथा तथा यमो लोके वालं वृद्धं च यौवनम् ॥ सत्तानवे कालक्षेपो न कर्तव्य आयुः क्षीणं दिने दिने । यमस्य करुणा नास्ति धर्मस्य त्वरिता गतिः ॥अट्ठानवे अनित्यानि शरीराणि विभवो नैव शाश्वतः । नित्यं सन्निहितो मृत्युः कर्तव्यो धर्मसंग्रह ॥ निन्यानवे आत्मरूढतरोरपि मागच्छतौ तं नवत्यग्नौ । वृक्षाग्रं वाग्निना लग्नं तत्सुखं कुरुते वनम् ॥एक सौ निर्मल अंगके धारक और दिव्य वस्त्राभूषण वाले होते हैं ।।अठासी।। रात्रि भोजन के फलसे मनुष्य सदा व्याधियोंसे पीडित, दूसरोंके घर दास कर्म करनेवाले और स्ववन्धुजनोंसे रहित होते हैं ॥आठ सौ इक्यानवे॥ मदोन्मत्त हाथियोंपर आरूढ़, श्वेत चामरोंसे वीज्यमान जो मनुष्य स्वजनोंके साथ आज जाते हुए दिखाई देते हैं, वे रात्रि भोजनके त्यागसे ऐसी सम्पदाको प्राप्त हुए हैं ।।दस।। लोकमें जो पुरुष अंगवाली दासी आदि देखी जाती हैं, जो पुत्र और पतिसे रहित स्त्रियाँ हैं और जो दुर्भाग्यरूप ग्रहसे पीड़ित स्त्रियाँ देखने में आती हैं, वे सब रात्रि भोजन के फलसे उत्पन्न हुई हैं, ऐसा जानना चाहिये ।।इक्यानवे ।। किन्तु जो स्त्रियां पालको, मियाना आदि यानों पर, हाथी और घोड़ों पर सवार होकर लीलापूर्वक गमन करती हैं और दिव्य भवनोंमें निवास करती हैं, वे सब रात्रिमें आहारके त्यागसे उत्पन्न हुई हैं ।।बारह।। इसी प्रकार इस लोकमे जो सुन्दर मनुष्य और उनके स्वामी दिखाई देते हैं, वे सब रात्रि में भोजन नहीं करनेके फलते उत्पन्न हुए हैं, इसमें कोई संशय नहीं है ।।तिरानवे।। दिनके आठवें भागमें सूर्यके मन्द प्रकाशके हो जानेपर अवशिष्ट कालको आचार्यगण 'नक्त' कहते हैं। केवल रात्रिमें भोजन करनेको हो नक्त भोजन नहीं कहते हैं। अपितु इस समयमें भोजन करना भी रात्रि भोजन है ।।चौरानवे।। जैसे चन्द्र विना रात्रि, और कमलोंके विना सरोवर नहीं शोभित होता है उसी प्रकार घसके विना जीव कभी भी शोभा नहीं पाता है ।।पचानवे।। मनुष्य ऐसा चिन्तवन करते हैं कि मैं आज, कल या परसोंके दिन धर्म करूंगा । किन्तु यमराज एक क्षणका विलम्ब सहन नहीं करता है ।।छियानवे।। जैसे दावाग्नि सूखे या गीले काठको सहन नहीं करती, अर्थात् सबको बिना किसी भेद-भावके भस्म कर देती है, यह ध्रुव सत्य है । इसी प्रकार यमराज भी लोक में बाल, वृद्ध या यौवन अवस्थाको नहीं देखता है, अर्थात् सबको समानरूपसे मार डालता है ।।सत्तानवे।। आयु दिन दिन क्षीण होती है, इसलिए व्यर्थ काल व्यतीत नहीं करना चाहिये, क्योंकि यमराजके करुणा नहीं है और धर्मकी गति बहुत तेज है ॥अट्ठानवे॥ शरीर अनित्य हैं, विभव शाश्वत रहनेवाले नहीं हैं, और मृत्यु नित्य समीप आ रही है । अतएव धर्मका संग्रह शीघ्र करना चाहिये ।।निन्यानवे।। यह संसारी प्राणी अन्य पुरुषोंसे नित्य कहता है कि आजके दिन |
राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, नई दिल्ली के तत्वावधान में वर्ष 2017-18 के पहले क्षेत्रीय सम्मेलन का आयोजन उत्तर-1 एवं उत्तर-2 क्षेत्र के क्षेत्रीय कार्यान्वयन कार्यालयों द्वारा आज चंडीगढ़ में आयोजित किया गया। दिल्ली संघ राज्य क्षेत्र, पंजाब, चंडीगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, एवं उत्तराखंड से आए केंद्र सरकार के कार्मिकों ने इस सम्मेलन में भाग लिया।
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य इन क्षेत्रों में स्थित केंद्र सरकार के विभिन्न कार्यालयों, बैंकों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों एवं नगर राजभाषा कार्यान्वयन समितियों के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान करना था, ताकि संघ की राजभाषा नीति के कार्यान्वयन और प्रचार-प्रसार को बढ़ावा मिल सके।
सम्मेलन के दौरान मुख्य अतिथि माननीय गृह राज्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू ने विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए। अपने विचार व्यक्त करते हुए माननीय गृह राज्य मंत्री श्री रिजिजू ने कहा कि हिन्दी से ऐसे करोड़ों लागों की भावनाएं जुड़ी हैं जो हिन्दी में सोचते हैं, हिन्दी में बोलते हैं और जिनके जीवन में हिन्दी रची-बसी है। हिन्दी भारतीय संस्कृति के मूल तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम होने के साथ-साथ भारत की भावनात्मक एकता को मजबूत करने का सशक्त जरिया भी है। हमें सदैव यह स्मरण रखना होगा कि हिन्दी भारत के जन-मानस की भाषा है परन्तु सभी क्षेत्रीय भाषाएं भी यहां की सभ्यता और संस्कृति की पोषक हैं। पंजाब में बोली जाने वाली पंजाबी भाषा भी बहुत लोकप्रिय भाषा है और जन-जन से जुड़ी हुई है। सरकारी कामकाज में हिन्दी के उपयोग को बढ़ावा देना चाहिए और इसका अनुपालन सुनिश्चित करना चाहिए। इस अवसर पर माननीय मंत्री ने यह भी कहा कि हिन्दी न केवल स्वतंत्रता के समय की प्रमुख भाषा रही थी, बल्कि स्वतंत्रता के पश्चात भी इसने देश को जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। उन्होंने कहा कि मातृभाषा से बढ़कर कुछ भी नहीं है।
इस अवसर पर भारतीय उच्च शिक्षा संस्थान, शिमला के उपाध्यक्ष डॉ. चमन लाल ने कहा कि कोई भी भाषा उपयोग से विकसित होती है और हमें हिन्दी भाषा का उपयोग करना चाहिए। आज हिन्दी भाषा से परिचय और लगाव बढ़ाने की आवश्यकता है।
पंजाब विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के अध्यक्ष डॉ. गुरमीत सिंह ने कहा कि सरल और अच्छी हिन्दी की बात की जानी चाहिए न कि हिन्दी के व्याकरण के साथ उलझना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिन्दी से जुड़े अनुवादकों, पत्रकारों, शिक्षकों के बीच तालमेल होना चाहिए।
माननीय गृह राज्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू सम्मेलन के मुख्य अतिथि थे। सम्मेलन का आयोजन डॉ. बिपिन बिहारी, संयुक्त सचिव, राजभाषा विभाग की अध्यक्षता में किया गया। इस अवसर पर संयुक्त सचिव ने राजभाषा विभाग द्वारा हिन्दी के संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा नए तकनीकी टूल्स जैसे कंठस्थ का मोबाइल वर्जन और मेमोरी आधारित अनुवाद टूल का भी विकास करवाया गया है। उन्होंने सभी कार्यालयों, बैंकों, उपक्रमों, बोर्डों इत्यादि को प्रेरित करते हुए कहा कि उन्हें मूल कार्य हिन्दी में करना चाहिए तथा हिन्दी कार्यान्वयन को आगे बढ़ाना चाहिए। इस अवसर पर श्री संदीप आर्य, निदेशक, राजभाषा विभाग ने राजभाषा कार्यान्वयन की स्थिति पर प्रकाश डाला।
| राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, नई दिल्ली के तत्वावधान में वर्ष दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह के पहले क्षेत्रीय सम्मेलन का आयोजन उत्तर-एक एवं उत्तर-दो क्षेत्र के क्षेत्रीय कार्यान्वयन कार्यालयों द्वारा आज चंडीगढ़ में आयोजित किया गया। दिल्ली संघ राज्य क्षेत्र, पंजाब, चंडीगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, एवं उत्तराखंड से आए केंद्र सरकार के कार्मिकों ने इस सम्मेलन में भाग लिया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य इन क्षेत्रों में स्थित केंद्र सरकार के विभिन्न कार्यालयों, बैंकों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों एवं नगर राजभाषा कार्यान्वयन समितियों के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान करना था, ताकि संघ की राजभाषा नीति के कार्यान्वयन और प्रचार-प्रसार को बढ़ावा मिल सके। सम्मेलन के दौरान मुख्य अतिथि माननीय गृह राज्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू ने विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए। अपने विचार व्यक्त करते हुए माननीय गृह राज्य मंत्री श्री रिजिजू ने कहा कि हिन्दी से ऐसे करोड़ों लागों की भावनाएं जुड़ी हैं जो हिन्दी में सोचते हैं, हिन्दी में बोलते हैं और जिनके जीवन में हिन्दी रची-बसी है। हिन्दी भारतीय संस्कृति के मूल तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम होने के साथ-साथ भारत की भावनात्मक एकता को मजबूत करने का सशक्त जरिया भी है। हमें सदैव यह स्मरण रखना होगा कि हिन्दी भारत के जन-मानस की भाषा है परन्तु सभी क्षेत्रीय भाषाएं भी यहां की सभ्यता और संस्कृति की पोषक हैं। पंजाब में बोली जाने वाली पंजाबी भाषा भी बहुत लोकप्रिय भाषा है और जन-जन से जुड़ी हुई है। सरकारी कामकाज में हिन्दी के उपयोग को बढ़ावा देना चाहिए और इसका अनुपालन सुनिश्चित करना चाहिए। इस अवसर पर माननीय मंत्री ने यह भी कहा कि हिन्दी न केवल स्वतंत्रता के समय की प्रमुख भाषा रही थी, बल्कि स्वतंत्रता के पश्चात भी इसने देश को जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। उन्होंने कहा कि मातृभाषा से बढ़कर कुछ भी नहीं है। इस अवसर पर भारतीय उच्च शिक्षा संस्थान, शिमला के उपाध्यक्ष डॉ. चमन लाल ने कहा कि कोई भी भाषा उपयोग से विकसित होती है और हमें हिन्दी भाषा का उपयोग करना चाहिए। आज हिन्दी भाषा से परिचय और लगाव बढ़ाने की आवश्यकता है। पंजाब विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के अध्यक्ष डॉ. गुरमीत सिंह ने कहा कि सरल और अच्छी हिन्दी की बात की जानी चाहिए न कि हिन्दी के व्याकरण के साथ उलझना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिन्दी से जुड़े अनुवादकों, पत्रकारों, शिक्षकों के बीच तालमेल होना चाहिए। माननीय गृह राज्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू सम्मेलन के मुख्य अतिथि थे। सम्मेलन का आयोजन डॉ. बिपिन बिहारी, संयुक्त सचिव, राजभाषा विभाग की अध्यक्षता में किया गया। इस अवसर पर संयुक्त सचिव ने राजभाषा विभाग द्वारा हिन्दी के संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा नए तकनीकी टूल्स जैसे कंठस्थ का मोबाइल वर्जन और मेमोरी आधारित अनुवाद टूल का भी विकास करवाया गया है। उन्होंने सभी कार्यालयों, बैंकों, उपक्रमों, बोर्डों इत्यादि को प्रेरित करते हुए कहा कि उन्हें मूल कार्य हिन्दी में करना चाहिए तथा हिन्दी कार्यान्वयन को आगे बढ़ाना चाहिए। इस अवसर पर श्री संदीप आर्य, निदेशक, राजभाषा विभाग ने राजभाषा कार्यान्वयन की स्थिति पर प्रकाश डाला। |
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
आदित्य चोपड़ा हिन्दी फ़िल्मों के एक निर्देशक हैं। . फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म पुरस्कार फ़िल्मफ़ेयर पत्रिका द्वारा प्रति वर्ष दिया जाने वाला पुरस्कार है। .
आदित्य चोपड़ा और फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार आम में 3 बातें हैं (यूनियनपीडिया में): दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे, फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार, यश चोपड़ा।
दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे 1995 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है, जो डीडीएलजे के नाम से भी प्रसिद्ध है। इस पहला प्रदर्शन 19 अक्टूबर 1995 को हुआ और 20 अक्टूबर 1995 को यह पूरे भारत में निर्गमित हुई। इस फिल्म का निर्देशन प्रसिद्ध फिल्म निर्माता और निर्देशक यश चोपड़ा के पुत्र आदित्य चोपड़ा ने किया। शाहरुख खान, काजोल और अमरीश पुरी इसके प्रमुख कलाकारों में थे। इस फिल्म के नाम सबसे ज्यादा चलने का रिकॉर्ड है। यह मुंबई के मराठा मंदिर में तेरह सालों से भी ज्यादा समय तक चली.
फिल्मफेयर पुरस्कार समारोह भारतीय सिनेमा के इतिहास की सबसे पुरानी और प्रमुख घटनाओं में से एक रही है। इसकी शुरुआत सबसे पहले 1954 में हुई जब राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार की भी स्थापना हुई थी। पुरस्कार जनता के मत एवं ज्यूरी के सदस्यों के मत दोनों के आधार पर दी हर साल दी जाती है। .
यश चोपड़ा (अंग्रेजीः Yash Chopra जन्मः 27 सितम्बर 1932 - मृत्युः 21 अक्टूबर 2012) हिन्दी फिल्मों के एक प्रसिद्ध निर्देशक थे। बाद में उन्होंने कुछ अच्छी फिल्मों का निर्माण भी किया। उन्होंने अपने भाई बी० आर० चोपड़ा और आई० एस० जौहर के साथ बतौर सहायक निर्देशक फिल्म जगत में प्रवेश किया। 1959 में उन्होंने अपनी पहली फिल्म धूल का फूल बनायी थी। उसके बाद 1961 में धर्मपुत्र आयी। 1965 में बनी फिल्म वक़्त से उन्हें अपार शोहरत हासिल हुई। उन्हें फिल्म निर्माण के क्षेत्र में कई पुरस्कार व सम्मान प्राप्त हुए। बालीवुड जगत से फिल्म फेयर पुरस्कार, राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, दादा साहेब फाल्के पुरस्कार के अतिरिक्त भारत सरकार ने उन्हें 2005 में भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए पद्म भूषण से सम्मानित किया। .
आदित्य चोपड़ा 19 संबंध है और फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार 91 है। वे आम 3 में है, समानता सूचकांक 2.73% है = 3 / (19 + 91)।
यह लेख आदित्य चोपड़ा और फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
| शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। आदित्य चोपड़ा हिन्दी फ़िल्मों के एक निर्देशक हैं। . फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म पुरस्कार फ़िल्मफ़ेयर पत्रिका द्वारा प्रति वर्ष दिया जाने वाला पुरस्कार है। . आदित्य चोपड़ा और फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार आम में तीन बातें हैं : दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे, फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार, यश चोपड़ा। दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे एक हज़ार नौ सौ पचानवे में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है, जो डीडीएलजे के नाम से भी प्रसिद्ध है। इस पहला प्रदर्शन उन्नीस अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ पचानवे को हुआ और बीस अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ पचानवे को यह पूरे भारत में निर्गमित हुई। इस फिल्म का निर्देशन प्रसिद्ध फिल्म निर्माता और निर्देशक यश चोपड़ा के पुत्र आदित्य चोपड़ा ने किया। शाहरुख खान, काजोल और अमरीश पुरी इसके प्रमुख कलाकारों में थे। इस फिल्म के नाम सबसे ज्यादा चलने का रिकॉर्ड है। यह मुंबई के मराठा मंदिर में तेरह सालों से भी ज्यादा समय तक चली. फिल्मफेयर पुरस्कार समारोह भारतीय सिनेमा के इतिहास की सबसे पुरानी और प्रमुख घटनाओं में से एक रही है। इसकी शुरुआत सबसे पहले एक हज़ार नौ सौ चौवन में हुई जब राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार की भी स्थापना हुई थी। पुरस्कार जनता के मत एवं ज्यूरी के सदस्यों के मत दोनों के आधार पर दी हर साल दी जाती है। . यश चोपड़ा हिन्दी फिल्मों के एक प्रसिद्ध निर्देशक थे। बाद में उन्होंने कुछ अच्छी फिल्मों का निर्माण भी किया। उन्होंने अपने भाई बीशून्य आरशून्य चोपड़ा और आईशून्य एसशून्य जौहर के साथ बतौर सहायक निर्देशक फिल्म जगत में प्रवेश किया। एक हज़ार नौ सौ उनसठ में उन्होंने अपनी पहली फिल्म धूल का फूल बनायी थी। उसके बाद एक हज़ार नौ सौ इकसठ में धर्मपुत्र आयी। एक हज़ार नौ सौ पैंसठ में बनी फिल्म वक़्त से उन्हें अपार शोहरत हासिल हुई। उन्हें फिल्म निर्माण के क्षेत्र में कई पुरस्कार व सम्मान प्राप्त हुए। बालीवुड जगत से फिल्म फेयर पुरस्कार, राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, दादा साहेब फाल्के पुरस्कार के अतिरिक्त भारत सरकार ने उन्हें दो हज़ार पाँच में भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए पद्म भूषण से सम्मानित किया। . आदित्य चोपड़ा उन्नीस संबंध है और फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार इक्यानवे है। वे आम तीन में है, समानता सूचकांक दो.तिहत्तर% है = तीन / । यह लेख आदित्य चोपड़ा और फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः |
नई दिल्ली। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामले मंत्री मुख्तार अब्बास नक़वी ने मौलाना आज़ाद शैक्षणिक संगठन में स्वच्छता ही सेवा कार्यक्रम में भाग लिया। मुख्तार अब्बास नक़वी ने फिल्म कलाकार अन्नू कपूर, गायक साबरी बंधु एवं गणमान्य व्यक्तियों के साथ कार्यक्रम स्थल पर श्रमदान गतिविधियों में भाग लिया। उन्होंने मौलाना आज़ाद शैक्षणिक संगठन के परिसर में एक पौधा भी रोपा।
| नई दिल्ली। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामले मंत्री मुख्तार अब्बास नक़वी ने मौलाना आज़ाद शैक्षणिक संगठन में स्वच्छता ही सेवा कार्यक्रम में भाग लिया। मुख्तार अब्बास नक़वी ने फिल्म कलाकार अन्नू कपूर, गायक साबरी बंधु एवं गणमान्य व्यक्तियों के साथ कार्यक्रम स्थल पर श्रमदान गतिविधियों में भाग लिया। उन्होंने मौलाना आज़ाद शैक्षणिक संगठन के परिसर में एक पौधा भी रोपा। |
Maharashtra Cabinet Meeting: महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और एनसीपी नेता जयंत पाटिल ने बुधवार शाम कैबिनेट बैठक के बाद कहा कि फ़्लोर टेस्ट होने की स्थिति में तय होगा कि ये बैठक आख़िरी थी या नहीं।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र कैबिनेट (Maharashtra Cabinet Meeting) की अब से कुछ देर पहले बैठक हुई थी, जिसमें दो शहरों के नाम बदलने के लिए कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। उद्धव कैबिनेट ने राज्य के औरंगाबाद और उसमानाबाद का नाम बदलकर संभाजीनगर और धाराशिव को इजाजत दे दी है।
इसके अलावा नवी मुंबई एयरपोर्ट का नाम भी बदल दिया जाएगा।
गौरतलब है कि महाराष्ट की सियासत का फैसला फ्लोर टेस्ट पर रुका है। राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी ने उद्धव सरकार को फ्लोर टेस्ट साबित करने के लिए बुलाया है। जिसको लेकर अब से कुछ देर पहले सुप्रीम कोर्ट में दलीलें दी गईं। दोनों पक्षों की सुनवाई कोर्ट में पूरी हो गई है। जानकारी के मुताबिक कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। रात 9 बजे तक मामले में फैसला आने की उम्मीद है।
| Maharashtra Cabinet Meeting: महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और एनसीपी नेता जयंत पाटिल ने बुधवार शाम कैबिनेट बैठक के बाद कहा कि फ़्लोर टेस्ट होने की स्थिति में तय होगा कि ये बैठक आख़िरी थी या नहीं। गौरतलब है कि महाराष्ट्र कैबिनेट की अब से कुछ देर पहले बैठक हुई थी, जिसमें दो शहरों के नाम बदलने के लिए कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। उद्धव कैबिनेट ने राज्य के औरंगाबाद और उसमानाबाद का नाम बदलकर संभाजीनगर और धाराशिव को इजाजत दे दी है। इसके अलावा नवी मुंबई एयरपोर्ट का नाम भी बदल दिया जाएगा। गौरतलब है कि महाराष्ट की सियासत का फैसला फ्लोर टेस्ट पर रुका है। राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी ने उद्धव सरकार को फ्लोर टेस्ट साबित करने के लिए बुलाया है। जिसको लेकर अब से कुछ देर पहले सुप्रीम कोर्ट में दलीलें दी गईं। दोनों पक्षों की सुनवाई कोर्ट में पूरी हो गई है। जानकारी के मुताबिक कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। रात नौ बजे तक मामले में फैसला आने की उम्मीद है। |
आशीष शर्मा/दौसा. दौसा पुलिस ने अपहरण के 7 आरोपियों को करौली के चंबल के बीहड़ों से सातों आरोपियों को गिरफ्तार किया है. साथ ही अपहरण हुए व्यक्ति को भी छुड़वाया है. दरअसल 7 जुलाई को बैजूपाडा थाना क्षेत्र के ढिगारिया भीम गांव में शादी विच्छेद को लेकर विवाद हुआ तो गांव में पंचायत बैठ गई. इस पंचायत में महिला के पीहर और ससुराल पक्ष के लोग एकत्रित हुए. इसी दौरान ससुराल पक्ष के एक पटेल ने जब अपनी बात रखी तो पीहर पक्ष से आए पटेलों ने प्रह्लाद मीणा नामक व्यक्ति का अपहरण कर लिया और करौली की तरफ फरार हो गए.
मामले में दौसा एसपी वंदिता राणा के निर्देश पर बैजूपाडा, मानपुर, सिकंदरा और मेहंदीपुर बालाजी थाना अधिकारियों की अलग-अलग टीमें बनाई. इस दौरान दौसा डीएसटी और साइबर सेल के सहयोग से पुलिस ने करौली, धौलपुर और दौसा में कई जगह पर दबिश दी और करौली जिले के डंडापूरा स्थित के चंबल के बीहड़ों से सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है.
मामले में दौसा एसपी वन्दिता राणा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बताया कि करौली जिले के अलग अलग गांवों में रहने वाले रामवतार, रामेश्वर, अनिल, रामनिवास, मुरारीलाल, रामचरण, गोपाल को गिरफ्तार किया है. वहीं अपहरण हुए व्यक्ति प्रह्लाद मीणा को भी छुड़वा लिया गया है.
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| आशीष शर्मा/दौसा. दौसा पुलिस ने अपहरण के सात आरोपियों को करौली के चंबल के बीहड़ों से सातों आरोपियों को गिरफ्तार किया है. साथ ही अपहरण हुए व्यक्ति को भी छुड़वाया है. दरअसल सात जुलाई को बैजूपाडा थाना क्षेत्र के ढिगारिया भीम गांव में शादी विच्छेद को लेकर विवाद हुआ तो गांव में पंचायत बैठ गई. इस पंचायत में महिला के पीहर और ससुराल पक्ष के लोग एकत्रित हुए. इसी दौरान ससुराल पक्ष के एक पटेल ने जब अपनी बात रखी तो पीहर पक्ष से आए पटेलों ने प्रह्लाद मीणा नामक व्यक्ति का अपहरण कर लिया और करौली की तरफ फरार हो गए. मामले में दौसा एसपी वंदिता राणा के निर्देश पर बैजूपाडा, मानपुर, सिकंदरा और मेहंदीपुर बालाजी थाना अधिकारियों की अलग-अलग टीमें बनाई. इस दौरान दौसा डीएसटी और साइबर सेल के सहयोग से पुलिस ने करौली, धौलपुर और दौसा में कई जगह पर दबिश दी और करौली जिले के डंडापूरा स्थित के चंबल के बीहड़ों से सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है. मामले में दौसा एसपी वन्दिता राणा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बताया कि करौली जिले के अलग अलग गांवों में रहने वाले रामवतार, रामेश्वर, अनिल, रामनिवास, मुरारीलाल, रामचरण, गोपाल को गिरफ्तार किया है. वहीं अपहरण हुए व्यक्ति प्रह्लाद मीणा को भी छुड़वा लिया गया है. . |
अजरक। सिबोरी। बगरू। बांदनी। किंगखाब। मालवारी। जायावार। जामदनी। सुने होंगे ये नाम। नहीं सुने तो पढ़ते चलिए। इन्हें बनाने में अनार के छिलके, दाने और पेड़ों की छाल का इस्तेमाल होता है। इनके छापों में दवाओं की तरह अलग-अलग सॉल्ट का प्रयोग होता है। ये कपड़े ऐसे कि वातानुकूलित से लगें। पैक करेंगे तो जरा सी जगह घेरेंगे। जी हां, ये कपड़े ही हैं। गजब की कारीगरी। ज्यादातर सिल्क के। इनकी कारीगरी, नक्काशी देखनी हो, छपाई के डिजाइन समझने हों तो चले जाइये चंडीगढ़ के सेक्टर 28 स्थित हिमाचल भवन में। इन दिनों यहां 'नेशनल सिल्क एक्सपो' चल रहा है। 'वेडिंग समर स्पेशल एक्जिबिशन कम सेल' के तहत यहां देशभर से कारीगरों का जमावड़ा है। एक से बढ़कर एक प्रोडक्ट। प्रत्येक की अपनी अलग ही खासियत।
एक्सपो में गुजरात के कच्छ से आईं स्वाति बताती हैं कि उनकी खास सिबोरी और बागरू साड़ी को आप हर्बल कह सकते हैं। बनारस से नेशनल अवार्डी अबुल हसन का सिल्क साड़ियों का बहुत पुराना कारोबार है। उनके भतीजे वसीम विभिन्न साड़ियों को दिखाते हुए कहते हैं, 'असम से लाया गया मूंगा सिल्क के धागों से बनारस में बुनाई होती है। एक-एक साड़ी को बनाने में महीनों लग जाते हैं।' जायावार और जामदनी साड़ी को दिखाते हुए उन्होंने कहा कि इस साड़ी को चाहें जितनी बार अलग-अलग रंगों में रंग सकते हैं। यानी एक ही साड़ी को विभिन्न शेड में पहनते रहिए। इसी तरह बनारस से ही आए फैजल और मुश्ताक बताते हैं मलवरी साड़ी के बारे में जो बेहद सफ्ट रहता है। लखनऊ से यहां पहुंची रिमशा चिकन के कपड़ों की विस्तृत रेंज के बारे में बताती हैं। तमिलनाडु के कांचीपुरम से आए राना हैंडमेड सिल्क साड़ी को दिखाते हैं जिसकी कीमत 1.2 लाख है। वह कहते हैं शोरूम में यही साड़ी दो लाख की मिलेगी। इसी तरह रामकिशन धारा बताते हैं कांथा के बारे में। वह गुजराती गुदड़ी को भी दिखाते हैं जो अलग-अलग शेड और रंग में हैं। विभिन्न कारीगरों, उनसे जुड़े लोगों को एक मंच पर लाकर इस एक्सपो के ऑर्गनाइजर जयेश कुमार गुप्ता बताते हैं कि उत्पाद को सीधे लोगों तक पहुंचाने के कारण यहां तमाम चीजें शोरूम कीमत से कई गुना कम में मौजूद हैं।
राजस्थान से आए अशोक छीपा अपने विभिन्न उत्पादों को दिखाते हुए बताते हैं कि उनका उपनाम छपाई के व्यवसाय के कारण पड़ा। परंपरागत छापों के अलावा ये लोग विशेष डिमांड पर भी छपाई करते हैं। वह बताते हैं कि रंग बनाने से लेकर विभिन्न तरह की मिट्टी एवं सॉल्ट के जरिये एक-एक कपड़े को तैयार करने में 12 से 15 दिन लगते हैं। कई बार रंग तैयार करने में महीनों लग जाते हैं। फिर ये रंग इतने पक्के हो जाते हैं कि जितनी बार धोएं उतना रंग निखरेगा। अशोक छीपा अलग-अलग तरह के सूट और दुपट्टा दिखाते हैं।
यह प्रदर्शनी 6 से 11 जुलाई तक सुबह 11 से रात 9 बजे तक खुली रहेगी। बताया गया कि नेशनल सिल्क एक्सपो उन लोगों के लिए एक शानदार मौका है जो आने वाले त्योहारों-तीज, रक्षा बंधन, शादियों, या अन्य विशेष अवसरों के लिए शुद्ध रेशम खरीदना चाहते हैं या केवल नियमित उपयोग के लिए कुछ अच्छा खरीदना चाहते हैं। यहां रेशम की साड़ियों, सलवार सूट, दुपट्टे, स्टोल और अन्य टेक्सटाइल मटीरियल का नवीनतम संग्रह और शानदार रेंज आपको एक छत के नीचे देखने को मिलेगी। बिहार की जटिल मधुबनी प्रिंट वाली साड़ियां नेशनल सिल्क एक्सपो के मुख्य आकर्षण में से हैं। वेडिंग समर स्पेशल "नेशनल सिल्क एक्सपो" के इस संस्करण में 100 से अधिक डिज़ाइनर और बुनकर अपना बनाया हुआ सामान लेकर पहुंचे है जिसमें भारत के 14 हथकरघा बुनाई वाले राज्यों के कारीगर 1,50,000 से अधिक किस्मों को आगंतुकों के लिए प्रदर्शित कर रहे हैं।
| अजरक। सिबोरी। बगरू। बांदनी। किंगखाब। मालवारी। जायावार। जामदनी। सुने होंगे ये नाम। नहीं सुने तो पढ़ते चलिए। इन्हें बनाने में अनार के छिलके, दाने और पेड़ों की छाल का इस्तेमाल होता है। इनके छापों में दवाओं की तरह अलग-अलग सॉल्ट का प्रयोग होता है। ये कपड़े ऐसे कि वातानुकूलित से लगें। पैक करेंगे तो जरा सी जगह घेरेंगे। जी हां, ये कपड़े ही हैं। गजब की कारीगरी। ज्यादातर सिल्क के। इनकी कारीगरी, नक्काशी देखनी हो, छपाई के डिजाइन समझने हों तो चले जाइये चंडीगढ़ के सेक्टर अट्ठाईस स्थित हिमाचल भवन में। इन दिनों यहां 'नेशनल सिल्क एक्सपो' चल रहा है। 'वेडिंग समर स्पेशल एक्जिबिशन कम सेल' के तहत यहां देशभर से कारीगरों का जमावड़ा है। एक से बढ़कर एक प्रोडक्ट। प्रत्येक की अपनी अलग ही खासियत। एक्सपो में गुजरात के कच्छ से आईं स्वाति बताती हैं कि उनकी खास सिबोरी और बागरू साड़ी को आप हर्बल कह सकते हैं। बनारस से नेशनल अवार्डी अबुल हसन का सिल्क साड़ियों का बहुत पुराना कारोबार है। उनके भतीजे वसीम विभिन्न साड़ियों को दिखाते हुए कहते हैं, 'असम से लाया गया मूंगा सिल्क के धागों से बनारस में बुनाई होती है। एक-एक साड़ी को बनाने में महीनों लग जाते हैं।' जायावार और जामदनी साड़ी को दिखाते हुए उन्होंने कहा कि इस साड़ी को चाहें जितनी बार अलग-अलग रंगों में रंग सकते हैं। यानी एक ही साड़ी को विभिन्न शेड में पहनते रहिए। इसी तरह बनारस से ही आए फैजल और मुश्ताक बताते हैं मलवरी साड़ी के बारे में जो बेहद सफ्ट रहता है। लखनऊ से यहां पहुंची रिमशा चिकन के कपड़ों की विस्तृत रेंज के बारे में बताती हैं। तमिलनाडु के कांचीपुरम से आए राना हैंडमेड सिल्क साड़ी को दिखाते हैं जिसकी कीमत एक.दो लाख है। वह कहते हैं शोरूम में यही साड़ी दो लाख की मिलेगी। इसी तरह रामकिशन धारा बताते हैं कांथा के बारे में। वह गुजराती गुदड़ी को भी दिखाते हैं जो अलग-अलग शेड और रंग में हैं। विभिन्न कारीगरों, उनसे जुड़े लोगों को एक मंच पर लाकर इस एक्सपो के ऑर्गनाइजर जयेश कुमार गुप्ता बताते हैं कि उत्पाद को सीधे लोगों तक पहुंचाने के कारण यहां तमाम चीजें शोरूम कीमत से कई गुना कम में मौजूद हैं। राजस्थान से आए अशोक छीपा अपने विभिन्न उत्पादों को दिखाते हुए बताते हैं कि उनका उपनाम छपाई के व्यवसाय के कारण पड़ा। परंपरागत छापों के अलावा ये लोग विशेष डिमांड पर भी छपाई करते हैं। वह बताते हैं कि रंग बनाने से लेकर विभिन्न तरह की मिट्टी एवं सॉल्ट के जरिये एक-एक कपड़े को तैयार करने में बारह से पंद्रह दिन लगते हैं। कई बार रंग तैयार करने में महीनों लग जाते हैं। फिर ये रंग इतने पक्के हो जाते हैं कि जितनी बार धोएं उतना रंग निखरेगा। अशोक छीपा अलग-अलग तरह के सूट और दुपट्टा दिखाते हैं। यह प्रदर्शनी छः से ग्यारह जुलाई तक सुबह ग्यारह से रात नौ बजे तक खुली रहेगी। बताया गया कि नेशनल सिल्क एक्सपो उन लोगों के लिए एक शानदार मौका है जो आने वाले त्योहारों-तीज, रक्षा बंधन, शादियों, या अन्य विशेष अवसरों के लिए शुद्ध रेशम खरीदना चाहते हैं या केवल नियमित उपयोग के लिए कुछ अच्छा खरीदना चाहते हैं। यहां रेशम की साड़ियों, सलवार सूट, दुपट्टे, स्टोल और अन्य टेक्सटाइल मटीरियल का नवीनतम संग्रह और शानदार रेंज आपको एक छत के नीचे देखने को मिलेगी। बिहार की जटिल मधुबनी प्रिंट वाली साड़ियां नेशनल सिल्क एक्सपो के मुख्य आकर्षण में से हैं। वेडिंग समर स्पेशल "नेशनल सिल्क एक्सपो" के इस संस्करण में एक सौ से अधिक डिज़ाइनर और बुनकर अपना बनाया हुआ सामान लेकर पहुंचे है जिसमें भारत के चौदह हथकरघा बुनाई वाले राज्यों के कारीगर एक,पचास,शून्य से अधिक किस्मों को आगंतुकों के लिए प्रदर्शित कर रहे हैं। |
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) शुक्रवार को प्रयागराज (Prayagraj) पहुंचे. वहां, उन्होंने 76 फ़्लैटों की चाबियां लाभार्थियों को सौंप दी. इसके पहले सीएम योगी ने इन फ़्लैटों का निरीक्षण किया. इसके बाद सीएम योगी ने उनका उद्घाटन किया. सीएम योगी ने जिन फ़्लैटों का उद्घाटन किया है, ये गैंगस्टर अतीक अहमद की ज़मीन पर बने हैं. यूपी सरकार ने इस ज़मीन को ज़ब्त कर लिया था.
इस दौरान सीएम योगी के साथ डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी भी मौजूद रहे. इसके अलावा बीजेपी विधायक सिद्धार्थ नाथ सिंह, फूलपुर सांसद केशरी देवी पटेल, सांसद रीता बहुगुणा जोशी समेत कई अन्य मौजूद रहे.
बता दें कि, अतीक अहमद पर कार्रवाई करते हुए सितंबर 2020 में ये जमीन उसके कब्जे से खाली करवाई गई थी. जिसके बाद 2021 में सीएम योगी ने इस जमीन पर गरीबों के लिए फ्लैट्स बनाने का ऐलान किया था. जिसके बाद प्रयागराज विकास प्राधिकरण ने इस योजना को अमलीजामा पहनाना शुरू किया.
महज़ डेढ़ साल अंदर ये 76 फ्लैट्स बनाकर तैयार कर दिए गए हैं. लाभार्थियों को सिर्फ साढ़े तीन लाख रुपए में दो कमरे के फ्लैट दिए जाएंगे. इन 76 फ्लैट के लिए 6000 से ज्यादा लोगों ने आवेदन किया था. हालांकि फ्लैट्स का आवंटन लॉटरी के जरिए किया गया है.
| उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को प्रयागराज पहुंचे. वहां, उन्होंने छिहत्तर फ़्लैटों की चाबियां लाभार्थियों को सौंप दी. इसके पहले सीएम योगी ने इन फ़्लैटों का निरीक्षण किया. इसके बाद सीएम योगी ने उनका उद्घाटन किया. सीएम योगी ने जिन फ़्लैटों का उद्घाटन किया है, ये गैंगस्टर अतीक अहमद की ज़मीन पर बने हैं. यूपी सरकार ने इस ज़मीन को ज़ब्त कर लिया था. इस दौरान सीएम योगी के साथ डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी भी मौजूद रहे. इसके अलावा बीजेपी विधायक सिद्धार्थ नाथ सिंह, फूलपुर सांसद केशरी देवी पटेल, सांसद रीता बहुगुणा जोशी समेत कई अन्य मौजूद रहे. बता दें कि, अतीक अहमद पर कार्रवाई करते हुए सितंबर दो हज़ार बीस में ये जमीन उसके कब्जे से खाली करवाई गई थी. जिसके बाद दो हज़ार इक्कीस में सीएम योगी ने इस जमीन पर गरीबों के लिए फ्लैट्स बनाने का ऐलान किया था. जिसके बाद प्रयागराज विकास प्राधिकरण ने इस योजना को अमलीजामा पहनाना शुरू किया. महज़ डेढ़ साल अंदर ये छिहत्तर फ्लैट्स बनाकर तैयार कर दिए गए हैं. लाभार्थियों को सिर्फ साढ़े तीन लाख रुपए में दो कमरे के फ्लैट दिए जाएंगे. इन छिहत्तर फ्लैट के लिए छः हज़ार से ज्यादा लोगों ने आवेदन किया था. हालांकि फ्लैट्स का आवंटन लॉटरी के जरिए किया गया है. |
गोवा में एक घर से चोरी का मामला सामने आया है। यहां चोर ने 20 लाख से ज्यादा के सामान की चोरी की। खास बात यह है कि चोर घर पर "आई लव यू" लिखकर फरार हो गए। पुलिस ने बताया मामला दक्षिणी गोवा के मडगांव का है। मामले में छानबीन की जा रही है।
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| गोवा में एक घर से चोरी का मामला सामने आया है। यहां चोर ने बीस लाख से ज्यादा के सामान की चोरी की। खास बात यह है कि चोर घर पर "आई लव यू" लिखकर फरार हो गए। पुलिस ने बताया मामला दक्षिणी गोवा के मडगांव का है। मामले में छानबीन की जा रही है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi. |
Manish Sisodia: बता दें कि केजरीवाल ने ट्वीट कर केंद्र और पुलिस पर हमला बोलते हुए लिखा," क्या पुलिस को इस तरह मनीष जी के साथ दुर्व्यवहार करने का अधिकार है? क्या पुलिस को ऐसा करने के लिए ऊपर से कहा गया है? " केजरीवाल के अलावा कई आम आदमी पार्टी के नेताओं ने ये वीडियो अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर किया।
इस कानून में केंद्र द्वारा किए गए संशोधन के विरोध में दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट ने याचिका दाखिल की थी। जिस पर बीते गुरुवार को कोर्ट ने दिल्सी सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया और यह स्पष्ट कर दिया कि अब जमीन, कानून व्यवस्था और पुलिस को छोड़कर सभी क्षेत्र के संदर्भ में फैसले लेने का विधायी अधिकार केजरीवाल सरकार को ही है।
Delhi Liquor Scam Case: ईडी ने चार्जशीट में बताया कि तेलंगाना के सीएम केसीआर की बेटी के कविता ने नई आबकारी नीति बनने और उसके लागू होने के बाद विजय नायर के साथ कई बार मीटिंग भी की थी। इसके साथ ही दिनेश अरोड़ा ने बताया कि संजय सिंह के कहने पर उसने दिल्ली के कई रेस्टोरेंट के मालिक से 82 लाख रुपये मैनेज करवाए थे और आप नेता मनीष सिसोदिया को पार्टी फंड के लिए दिए थे।
सीबीआई के ईडी भी इस मामले की जांच कर रही है, तो इस बात की संभावना है कि आगामी दिनों में ईडी भी केजरीवाल पर शिकंसा कस सकती है। उधर, माना जा रहा है कि केजरीवाल को रविवार को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। वहीं, आज दोपहर 12 बजे केजरीवाल ने इस मामले में प्रेसवार्ता की थी ,जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा जांच एजेंसियों का दुरुपयोग का मुद्दा उठाया था।
Liquor Policy Case: बता दें कि 22 मार्च यानी आज आबकारी नीति से संबंधित धनशोधन के एक केस में सिसोदिया की ईडी की रिमांड समाप्त होने के बाद राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया। जहां कोर्ट ने आप नेता को झटका देते हुए पांच अप्रैल तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेजा दिया है।
Manish Sisodia Bungalow: डिप्टी सीएम के पद से सिसोदिया ने इस्तीफा दे दिया था। उनका जो सरकारी बंगला था वो अब पीडब्ल्यूडी के पास जमा हो जाएगा। फिर PWD उस आवास को नए मंत्री को आंवटित करेगा। बता दें कि सिसोदिया के सारे विभाग आतिशी को दिए गए हैं।
ईडी ने इससे पहले 11 मार्च को कविता से करीब 9 घंटे तक पूछताछ की थी। शराब घोटाले में ईडी ने सबसे पहले कविता को 9 मार्च को तलब किया था। तब कविता ने दिल्ली में 10 मार्च को अपनी भूख हड़ताल का हवाला देकर 11 मार्च को पूछताछ में शामिल होने की मंजूरी मांगी थी। सीबीआई भी पहले कविता से पूछताछ कर चुकी है।
Delhi Liquor Policy: शराब घोटाले में घिरी केजरीवाल ने अगले 6 माह के लिए पुरानी आबकारी नीति को एक्सटेंड करने का फैसला लिया है। यानी कि सितंबर महीने तक पुरानी एक्साइज पॉलिसी जारी रहेगी। इसके साथ ही राजधानी में अगले 6 महीने के दौरान 5 दिन ड्राई डे रहेंगे।
K Kavitha: अभी तक बीजेपी की तरफ से इस पर कोई भी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब ऐसे में बीजेपी की क्या प्रतिक्रिया रहती है। यह देखने वाली बात होगी। बता दें कि के कविता से पूछताछ जारी है। यह पूछताछ कथित शराब घोटाला मामले में हो रही है।
| Manish Sisodia: बता दें कि केजरीवाल ने ट्वीट कर केंद्र और पुलिस पर हमला बोलते हुए लिखा," क्या पुलिस को इस तरह मनीष जी के साथ दुर्व्यवहार करने का अधिकार है? क्या पुलिस को ऐसा करने के लिए ऊपर से कहा गया है? " केजरीवाल के अलावा कई आम आदमी पार्टी के नेताओं ने ये वीडियो अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर किया। इस कानून में केंद्र द्वारा किए गए संशोधन के विरोध में दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट ने याचिका दाखिल की थी। जिस पर बीते गुरुवार को कोर्ट ने दिल्सी सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया और यह स्पष्ट कर दिया कि अब जमीन, कानून व्यवस्था और पुलिस को छोड़कर सभी क्षेत्र के संदर्भ में फैसले लेने का विधायी अधिकार केजरीवाल सरकार को ही है। Delhi Liquor Scam Case: ईडी ने चार्जशीट में बताया कि तेलंगाना के सीएम केसीआर की बेटी के कविता ने नई आबकारी नीति बनने और उसके लागू होने के बाद विजय नायर के साथ कई बार मीटिंग भी की थी। इसके साथ ही दिनेश अरोड़ा ने बताया कि संजय सिंह के कहने पर उसने दिल्ली के कई रेस्टोरेंट के मालिक से बयासी लाख रुपये मैनेज करवाए थे और आप नेता मनीष सिसोदिया को पार्टी फंड के लिए दिए थे। सीबीआई के ईडी भी इस मामले की जांच कर रही है, तो इस बात की संभावना है कि आगामी दिनों में ईडी भी केजरीवाल पर शिकंसा कस सकती है। उधर, माना जा रहा है कि केजरीवाल को रविवार को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। वहीं, आज दोपहर बारह बजे केजरीवाल ने इस मामले में प्रेसवार्ता की थी ,जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा जांच एजेंसियों का दुरुपयोग का मुद्दा उठाया था। Liquor Policy Case: बता दें कि बाईस मार्च यानी आज आबकारी नीति से संबंधित धनशोधन के एक केस में सिसोदिया की ईडी की रिमांड समाप्त होने के बाद राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया। जहां कोर्ट ने आप नेता को झटका देते हुए पांच अप्रैल तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेजा दिया है। Manish Sisodia Bungalow: डिप्टी सीएम के पद से सिसोदिया ने इस्तीफा दे दिया था। उनका जो सरकारी बंगला था वो अब पीडब्ल्यूडी के पास जमा हो जाएगा। फिर PWD उस आवास को नए मंत्री को आंवटित करेगा। बता दें कि सिसोदिया के सारे विभाग आतिशी को दिए गए हैं। ईडी ने इससे पहले ग्यारह मार्च को कविता से करीब नौ घंटाटे तक पूछताछ की थी। शराब घोटाले में ईडी ने सबसे पहले कविता को नौ मार्च को तलब किया था। तब कविता ने दिल्ली में दस मार्च को अपनी भूख हड़ताल का हवाला देकर ग्यारह मार्च को पूछताछ में शामिल होने की मंजूरी मांगी थी। सीबीआई भी पहले कविता से पूछताछ कर चुकी है। Delhi Liquor Policy: शराब घोटाले में घिरी केजरीवाल ने अगले छः माह के लिए पुरानी आबकारी नीति को एक्सटेंड करने का फैसला लिया है। यानी कि सितंबर महीने तक पुरानी एक्साइज पॉलिसी जारी रहेगी। इसके साथ ही राजधानी में अगले छः महीने के दौरान पाँच दिन ड्राई डे रहेंगे। K Kavitha: अभी तक बीजेपी की तरफ से इस पर कोई भी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब ऐसे में बीजेपी की क्या प्रतिक्रिया रहती है। यह देखने वाली बात होगी। बता दें कि के कविता से पूछताछ जारी है। यह पूछताछ कथित शराब घोटाला मामले में हो रही है। |
जयपुर. राजस्थान में तबाही मचा रहा बिपरजॉय तूफान। आधी रात के बाद शहर में घुसा बांध और नहर का पानी। प्रदेश के 25000 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया। कई कॉलोनियां रातों-रात खाली कराई। रेलवे को हुआ भारी नुकसान।
अरबों की लागत से बनी फिल्म आदि पुरुष रिलीज होने के बाद से ही विवादों में आ गई है। अब राजस्थान में भी इस मूवी का विरोध होना शुरू हो गया है। ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष ने चेतावनी देने के साथ ही PM मोदी से की फिल्म को पूरे देश में बैन करने की मांग।
वरिष्ठ अध्यापक भर्ती परीक्षा को लेकर राजस्थान से आई सबसे बड़ी खबर। फिर एक बार पेपर लीक होने के चलते कैंसिल हुई एग्जाम। एक आदमी के लालच के कारण 6 लाख छात्रों के जीवन से खिलवाड़। रद्द हुआ पेपर अब 30 जुलाई को होगा।
राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनाव के चलते दिग्गज राजनैतिक पार्टियों ने अपनी तैयारिया शुरू कर दी है। इसी बीच आम आदमी पार्टी कांग्रेस और बीजेपी से टक्कर लेने लेने के लिए मैदान में उतर रही है। रविवार फादर्स डे के दिन गंगानगर में होगी बड़ी रैली।
कुछ दिन पहले ही NEET परीक्षा के रिजल्ट जारी किए है। जिनमें से कई छात्रों को सफलता मिली है। पास होने वाले स्टूडेंट ने कठिन परिस्थितियों में सफलता हासिक की है। ऐसी ही सक्सेस की कहानी है चित्तौड़गढ़ के युवक की जिसने घर छोड़ने के बाद पास की NEET एग्जाम।
राजस्थान के चित्तौड़गढ़ शहर स्थित विश्व प्रसिद्ध सांवलिया सेठ के दरबार में कर्मचारी ने किया शर्मनाक कांड। 500 के नोट की गड्डी देखकर कर्मचारी ने चोरी की वारदात को दिया अंजाम। लेकिन भगवान के आगे नहीं छिप पाई करतूत। एक भक्त ने वीडियो बना पुलिस को सौंपा।
झालावाड़ शहर से सनसनीखेज मामला सामने आया। परिवार के एकलौते बेटे ने जंगल में जाकर अपने लिए दर्दनाक मौत चुनी। इस दौरान उसने वीडियो बनाते हुए अपनी आत्महत्या के लिए मजबूर करने वाले गुनहगारों का किया खुलासा।
झारखंड के पूर्वी सिंह भूम के चाकुलिया में दर्दनाक घटना हुई। शौच के लिए जा रही महिला को जंगली हाथी ने अपनी सूंड में लपेट कर पटक पटककर बुरी तरह घायल कर दिया। गंभीर रूप से घायल होने के चलते महिला की गई जान। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है।
मध्यप्रदेश के सागर शहर से दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है। कुएं में सफाई करने उतरे दो युवकों की करंट लगने से मौत हो गई। हादसा कुएं में पानी निकालने के लिए डली मोटर से करंट फैलने से हुआ। युवकों की मौत के बाद से घर में कोहराम मचा हुआ है।
राजस्थान के टोंक शहर से भीषण हादसे की खबर सामने आई है। फेल्सपार पत्थर खदान में काम कर रहे मजदूरों पर पहाड़ का हिस्सा आकर गिरने से दो मजदूरों की दर्दनाक मौत, एक गंभीर हालात में भर्ती। हादसे के चलते माइन्स में काम हुआ बंद।
| जयपुर. राजस्थान में तबाही मचा रहा बिपरजॉय तूफान। आधी रात के बाद शहर में घुसा बांध और नहर का पानी। प्रदेश के पच्चीस हज़ार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया। कई कॉलोनियां रातों-रात खाली कराई। रेलवे को हुआ भारी नुकसान। अरबों की लागत से बनी फिल्म आदि पुरुष रिलीज होने के बाद से ही विवादों में आ गई है। अब राजस्थान में भी इस मूवी का विरोध होना शुरू हो गया है। ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष ने चेतावनी देने के साथ ही PM मोदी से की फिल्म को पूरे देश में बैन करने की मांग। वरिष्ठ अध्यापक भर्ती परीक्षा को लेकर राजस्थान से आई सबसे बड़ी खबर। फिर एक बार पेपर लीक होने के चलते कैंसिल हुई एग्जाम। एक आदमी के लालच के कारण छः लाख छात्रों के जीवन से खिलवाड़। रद्द हुआ पेपर अब तीस जुलाई को होगा। राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनाव के चलते दिग्गज राजनैतिक पार्टियों ने अपनी तैयारिया शुरू कर दी है। इसी बीच आम आदमी पार्टी कांग्रेस और बीजेपी से टक्कर लेने लेने के लिए मैदान में उतर रही है। रविवार फादर्स डे के दिन गंगानगर में होगी बड़ी रैली। कुछ दिन पहले ही NEET परीक्षा के रिजल्ट जारी किए है। जिनमें से कई छात्रों को सफलता मिली है। पास होने वाले स्टूडेंट ने कठिन परिस्थितियों में सफलता हासिक की है। ऐसी ही सक्सेस की कहानी है चित्तौड़गढ़ के युवक की जिसने घर छोड़ने के बाद पास की NEET एग्जाम। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ शहर स्थित विश्व प्रसिद्ध सांवलिया सेठ के दरबार में कर्मचारी ने किया शर्मनाक कांड। पाँच सौ के नोट की गड्डी देखकर कर्मचारी ने चोरी की वारदात को दिया अंजाम। लेकिन भगवान के आगे नहीं छिप पाई करतूत। एक भक्त ने वीडियो बना पुलिस को सौंपा। झालावाड़ शहर से सनसनीखेज मामला सामने आया। परिवार के एकलौते बेटे ने जंगल में जाकर अपने लिए दर्दनाक मौत चुनी। इस दौरान उसने वीडियो बनाते हुए अपनी आत्महत्या के लिए मजबूर करने वाले गुनहगारों का किया खुलासा। झारखंड के पूर्वी सिंह भूम के चाकुलिया में दर्दनाक घटना हुई। शौच के लिए जा रही महिला को जंगली हाथी ने अपनी सूंड में लपेट कर पटक पटककर बुरी तरह घायल कर दिया। गंभीर रूप से घायल होने के चलते महिला की गई जान। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। मध्यप्रदेश के सागर शहर से दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है। कुएं में सफाई करने उतरे दो युवकों की करंट लगने से मौत हो गई। हादसा कुएं में पानी निकालने के लिए डली मोटर से करंट फैलने से हुआ। युवकों की मौत के बाद से घर में कोहराम मचा हुआ है। राजस्थान के टोंक शहर से भीषण हादसे की खबर सामने आई है। फेल्सपार पत्थर खदान में काम कर रहे मजदूरों पर पहाड़ का हिस्सा आकर गिरने से दो मजदूरों की दर्दनाक मौत, एक गंभीर हालात में भर्ती। हादसे के चलते माइन्स में काम हुआ बंद। |
मानसिंह का था प्रस्थान सत्य- का रिदान ।
तिना र विदारक यान
शत शत पीड़ा का उत्थान ।
रानीमनी और रमसिंह दोनों के दीकी रंगवाव ने उत्प्रेक्षा द्वारा को
जस रूपवती रानी थी वैसा ही था पति पाया
मानो वासव-साथ सर्व का
रूप धरातल पर आज ।
राजपूत वीरों के शत्रु
किस प्रकार पर पंक्तियाँ प्रस्तुत हैमें प्रवेश करने का कार नरा चित्रित हुआ है। शत्रुघुराण दिविधान उपमा द्वारा निम्म
À LA
गैरव वन में दावानल सम खग दल में बंबर बाज-सदृश अरि-कॉटन व्यूह में बीर मृग-रावी मैं मृगराज-सदृश ।
महारानी कोमेज है । राखा मेजने के उपरान्त बाशानिराशा के भाव में कवि ने अलंकारों की सहायता टी । महारानी
करुणा की भाव विश्वल स्थिति के णि उप्रेा का प्रदर्शनीय
रंगाथा T
हृदयगम में चिता सुर-भाय किया मन की मन करूण फ्राप करुणा का था यह रण।
१- हल्लाघाटी, सर्ग ६ः५० ८२ ३- जौहर, चिनगारी दूसरी, पृ०१६
इन्जोहर, वि०पाठपू० ४- चिधौड़ की निता, नवम सर्ग, पृ०७२
बन्द्र भारत की प्राधा का पतिपादन उत्प्रेक्षा और तुरथ्यांगिता शंकारद्वाराशिजहां वीर जयमल पुता मे जीवन दान दिया है
जननी जन्म भूमि के पद पर अर्पण प्राप्त किया जी संग्रामसिंह है माँसा का प्रचंड प्रांगण है
र उटा जिकी नस-नस
प्राण प्राण में रण ।
यवन शत्रुवों से घिरे हुए अन्दा बैरागी की रक्षा की स्थिति को २ष्ट करने के लिए मैथिलीशरण गुप्त ने उपना अलंकार का प्रयोग farज्य राणा प्रताप की दी थी
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राही धन्य होगुलाब में
अपने प्रभु पर आई बोट ।
फांसी की रानी में श्यामनारायण प्रसाद ने ऐतिहासिक पात्रों के मावी कर्ण तथा युद्ध में उनकी भावभंगिमा को देने में अहंकार योग दिये हैन मन्नूबाई के वीरत्व तथा निर्मक भाव को उत्कर्ष प्रदान करने हेतुने मन्न के मुख से भारत के प्राचीन गौरव का उल्लेख अहंकार द्वारा कराय
है तात । वही आकाश घरा हम सबका भी। नम में वही रवि-राशि तारी का वेश अनूप नही ।
१- प्रणवीर प्रताप, १० १६ २- गुरुकुल पृ० २४२ | मानसिंह का था प्रस्थान सत्य- का रिदान । तिना र विदारक यान शत शत पीड़ा का उत्थान । रानीमनी और रमसिंह दोनों के दीकी रंगवाव ने उत्प्रेक्षा द्वारा को जस रूपवती रानी थी वैसा ही था पति पाया मानो वासव-साथ सर्व का रूप धरातल पर आज । राजपूत वीरों के शत्रु किस प्रकार पर पंक्तियाँ प्रस्तुत हैमें प्रवेश करने का कार नरा चित्रित हुआ है। शत्रुघुराण दिविधान उपमा द्वारा निम्म À LA गैरव वन में दावानल सम खग दल में बंबर बाज-सदृश अरि-कॉटन व्यूह में बीर मृग-रावी मैं मृगराज-सदृश । महारानी कोमेज है । राखा मेजने के उपरान्त बाशानिराशा के भाव में कवि ने अलंकारों की सहायता टी । महारानी करुणा की भाव विश्वल स्थिति के णि उप्रेा का प्रदर्शनीय रंगाथा T हृदयगम में चिता सुर-भाय किया मन की मन करूण फ्राप करुणा का था यह रण। एक- हल्लाघाटी, सर्ग छःःपचास बयासी तीन- जौहर, चिनगारी दूसरी, पृसोलह इन्जोहर, विशून्यपाठपूशून्य चार- चिधौड़ की निता, नवम सर्ग, पृबहत्तर बन्द्र भारत की प्राधा का पतिपादन उत्प्रेक्षा और तुरथ्यांगिता शंकारद्वाराशिजहां वीर जयमल पुता मे जीवन दान दिया है जननी जन्म भूमि के पद पर अर्पण प्राप्त किया जी संग्रामसिंह है माँसा का प्रचंड प्रांगण है र उटा जिकी नस-नस प्राण प्राण में रण । यवन शत्रुवों से घिरे हुए अन्दा बैरागी की रक्षा की स्थिति को दोष्ट करने के लिए मैथिलीशरण गुप्त ने उपना अलंकार का प्रयोग farज्य राणा प्रताप की दी थी मानसिंह काला ने ट राही धन्य होगुलाब में अपने प्रभु पर आई बोट । फांसी की रानी में श्यामनारायण प्रसाद ने ऐतिहासिक पात्रों के मावी कर्ण तथा युद्ध में उनकी भावभंगिमा को देने में अहंकार योग दिये हैन मन्नूबाई के वीरत्व तथा निर्मक भाव को उत्कर्ष प्रदान करने हेतुने मन्न के मुख से भारत के प्राचीन गौरव का उल्लेख अहंकार द्वारा कराय है तात । वही आकाश घरा हम सबका भी। नम में वही रवि-राशि तारी का वेश अनूप नही । एक- प्रणवीर प्रताप, दस सोलह दो- गुरुकुल पृशून्य दो सौ बयालीस |
यह पर्व उत्तर भारत के राज्य उत्तर प्रदेश में उत्साह के साथ मनाया जाता है। वहीं ये खासकर बनारस तथा मिर्जापुर में विशेष रूप से मनाया जाता है। इसे कजरी या विवाह गीत की प्रशंसा भी होती है। प्रायः लूनर पर चढ़कर कजरी तीज के गीत गाते हैं और यह वर्षा ऋतु का एक विशेष राग है। यह प्रमुख वर्षा गीत माना जाता है और इस दिन झूला भी पड़ता है। घरों में विभिन्न तरह के पकवान मिष्ठान बनाए जाते हैं।
इस तीज में 7 गायों के लिए आटे के साथ लोई बनाकर के खिलाते हैं। इसके बाद ही भोजन करते हैं। बहुएं इस त्योहार पर अपनी सास के चरण स्पर्श करती हैं। खासकर नर्सरी वैश्य समाज के लोग जो गेहूं चने और चावल के सत्तू में घी मेवा डालकर के भिन्न-भिन्न तरह के पकवान बनाते हैं। चंद्रोदय के बाद उसी का भोजन करते हैं। कहीं-कहीं तो कजरी तीज पर सिंघाणे भी आते हैं। बहुएं सास को चीनी तथा रुपए का बाेयना निकाल कर देती हैं। इस दिन विशेष रूप से गायों की पूजा की जाती है। आटे की सात गोलियां बनाकर उस पर भी गोरख गाय को खिलाने के बाद ही भोजन किया जाता है।
| यह पर्व उत्तर भारत के राज्य उत्तर प्रदेश में उत्साह के साथ मनाया जाता है। वहीं ये खासकर बनारस तथा मिर्जापुर में विशेष रूप से मनाया जाता है। इसे कजरी या विवाह गीत की प्रशंसा भी होती है। प्रायः लूनर पर चढ़कर कजरी तीज के गीत गाते हैं और यह वर्षा ऋतु का एक विशेष राग है। यह प्रमुख वर्षा गीत माना जाता है और इस दिन झूला भी पड़ता है। घरों में विभिन्न तरह के पकवान मिष्ठान बनाए जाते हैं। इस तीज में सात गायों के लिए आटे के साथ लोई बनाकर के खिलाते हैं। इसके बाद ही भोजन करते हैं। बहुएं इस त्योहार पर अपनी सास के चरण स्पर्श करती हैं। खासकर नर्सरी वैश्य समाज के लोग जो गेहूं चने और चावल के सत्तू में घी मेवा डालकर के भिन्न-भिन्न तरह के पकवान बनाते हैं। चंद्रोदय के बाद उसी का भोजन करते हैं। कहीं-कहीं तो कजरी तीज पर सिंघाणे भी आते हैं। बहुएं सास को चीनी तथा रुपए का बाेयना निकाल कर देती हैं। इस दिन विशेष रूप से गायों की पूजा की जाती है। आटे की सात गोलियां बनाकर उस पर भी गोरख गाय को खिलाने के बाद ही भोजन किया जाता है। |
उस अन्न को पचाकर रस बना देता है और फिर उस अन्नको रुधिर में मिला देता है। रुधिर में मिला हुआ यह इस शरीर के प्रत्येक अंग में पहुंच कर उसे भोजन देता है, उसे पुष्टि और बल देवा है, वैश्य समाज का मध्य है, पेट है। पेट जैसे शरीर के सब अंगों के लिये रस तय्यार करके, भोजन तय्यार करके, देता है वैसे ही वैश्य को समाज के ब्राह्मण आदि सब अंगों को भोजन तय्यार करके देना होगा। समाज का जो अंग समाज शरीर के सब अंगों के भरण-पोषण का अपने ऊपर लेता है वह वैश्य कहा जायगा । मध्य भाग में जंघायें भी सम्मि लित की गई हैं। जंघाओं का काम चलना फिरना है । जो जंघाओं की तरह चले फिरेगा- देश - देशान्तर में जाकर व्यापार करेगा वह वैश्य कहलायेगा । देशदेशान्तर में आजाकर व्यापार व्यवसाय करना और उसके द्वारा अपने राष्ट्र के जन-समाज के भरण-पोषण का उपाय करना वैश्य का कर्तव्य है। ये वैश्य राष्ट्र- शरीर के मध्य भाग होते हैं जिसके ऊपर उसके सब अंगों का जीवन निर्भर होता है ।
iv. पैरों के काम के लिए शूद्र है। शूद्र समाज-शरीर का पैर है। पैरों का शरीर में क्या काम है ? पैर सारे शरीर को अपने ऊपर उठाये रहते हैं। सारे शरीर को एक स्थान से दूसरे स्थान में ले जाते हैं। स्वयं धूल, मट्टी, कीचड़ आदि में रहते हैं परन्तु बाकी शरीर को साफ़ बचाये रखते हैं । पैरों में शेष शरीर की सेवा का ही यह एक विशेष गुण है। और कोई विशेष गुण पैरों में नहीं होता । जो लोग ज्ञान आदि विशेष गुण अपने अन्दर नहीं रखते, और इसीलिये वे समाज के ब्राह्मण आदि की सेवा काही कार्य कर सकते हैं, उन्हें शूद्र कहते हैं । ये शूद्र लोग ब्राह्मणादि की सेवा करके उन्हें उनके ज्ञानार्जन और ज्ञान प्रचार के कर्मों के लिए अधिक समय प्राप्त कर सकने में सहायता देकर राष्ट्र-शर्रर की सेवा करते हैं । यदि ब्राह्मण आदिको अपनी सेवा के वस्त्र धोना, भोजन बनाना, बरतन मांजना, झाडू देना, और चौर (हज़ामत ) करना आदि सारे काम स्वयं ही करने पड़ें तो उन्हें उनके ज्ञानार्जन और ज्ञान-प्रचार आदि के कार्यों के लिये समय कम मिलेगा और फलतः वे राष्ट्र के लिये अधिक उपयोगी कार्य कर सकेंगे। शुद्र लोग उनकी इस प्रकार की सेवायें करके उन्हें राष्ट्र के लिए अधिक उपयोगी काम करने का अधिक अवसर प्रदान करते हैं। और इस भांति, वे भी एक प्रकार से राष्ट्र के हित साधन का काम करते हैं । ज्ञान आदि विशेष गुण न होने के कारण जो लोग केवल समाज-शरीर की सेवा का ही कार्य कर सकते हैं उन्हें शूद्र कहा जाता है.
४. चौथी बात जो मन्त्र को ध्यान से देखने से प्रकट होती है वह यह है कि ब्राह्मण आदि का विभाग घृणा पर श्रत ऊँच नीच के भेद पर अवलम्बित नहीं है। यह विभाग अपनी शक्तियों द्वारा समाज की अधिक से सेवा कर सकने के भाव पर अवलम्बित है। शरीर के भुजा आदि अंग एक दूसरे से घृणा नहीं करते। वे एक दूसरे के साथ मिलकर रहते हैं । वे एक दूसरे के सुख दुःख को अपना सुख दुःख समझते हैं । मुख का दुःख जिस प्रकार सारे शरीर का दुःख होता है उसी प्रकार पैर
दुःख भी सारे शरीर का दुःख होता है । एक की पीड़ा सब की पीड़ा होती है और एक का सुख सब. का सुख होता है । जब पैर में काँटा चुभ जाता है तो पैर के उस दुःख को अपना दुख समझ कर क्षत्रिय भुजा उसे निकालने के लिये अपनी अंगुलियें और नाखून वहां भेजती है और ब्राह्मण मुख अपने दांत वहां भेजता है। शूद्र पैर का वह दुःख दूर हो जाने पर ही इनको चैन पड़ती है। यही अवस्था समाजशरीर में उसके मुख, भुजा पेट और पैर ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्रों की होनी चाहिये। उन्हें
परस्पर प्रेम से मिलकर रहना चाहिये । एक दूसरे का सुख-दुःख उन्हें अपना सुख-दुःख समझना चाहिये। एक दूसरे की उन्नति अवनति उन्हें अपनी उन्नति-अवनति समझनी चाहिये । शूद्र का कष्ट और विपत्ति ब्राह्मण को अपना क और विपत्ति समझनी चाहिये और ब्राह्मण का कष्ट और विपत्ति शूद्र को अपनाकर और विपत्ति समझनी चाहिये और ऐसा समझ कर सब को सब के कष्ट और विपत्ति दूर करने में तथा सुख और सम्पत्ति बढ़ाने में निरन्तर भरपूर प्रयत्न करना चाहिये । उन्हें समझना चाहिये कि सब का जीवन सब के सहयोग पर अवलम्बित है । इसलिये कोई किसी से ऐसा ऊँचा नहीं है कि वह घमण्ड में चूर होकर दूसरे से घुरमा करने लगे । यदि कुछ ऊंच-नीच है तो योग्यता और सेवा पर अम्बत है। जो जितना अधिक गुरणवान् है और जितना अधिक दूसरों की सेवा करता है वह उतना ही अधिक ऊंचा है। योग्यता और तजन्य सेवा के कारण ही उसे ऊंचा समझ कर दूसरों को उसका मान और सत्कार करना चाहिये। अपने से अधिक योग्य और राष्ट्र की अपने से अधिक सेवा करने वाले व्यक्ति को अपने से ऊंचा मानना और ऊंचा मान कर उसका मान और सत्कार करना सत्कार करने वाले व्यक्ति के आत्मा को उन्नत करता है और सत्कृत व्यक्ति को राष्ट्र-सेवा के लिये और उत्साहित करता है । इस प्रकार की सात्त्विक ऊंच-नीच के अतिरिक्त और किसी प्रकार की ऊंच-नीच वेद में ब्राह्मणादि विभाग में नहीं है । वैदिक उपदेश के वास्तविक रहस्य को न समझने के कारण आधुनिक हिन्दु समाज में प्रचलित जन्म पर आश्रित वर्णव्यवस्था में जो ऊँच-नीच के भाव पाये जाते हैं वे घृणा पर अवलम्बित भाव वेद के अभीष्ट ब्रह्मरणादि विभाग में नहीं हैं। ब्राह्मण सब से ऊंचा इसलिए है क्योंकि वह सब से योग्य और राष्ट्र का सब से अधिक सेवक है। शरीर में सिर का सब अंगों से अधिक महत्त्व है। क्योंकि सिर पर शरीर का जीवन सब से अधिक अवलम्बित है। इसी प्रकार राष्ट्र में ब्राह्मण का महत्त्व सब से अधिक इसलिये है कि उस पर राष्ट्र के जीवन की उन्नति सब से अधिक अवलम्बित है।
वेद का यह ब्राह्मणादि का विभाग योग्यता, सेवा, सहयोग और प्रेम पर है। इसमें घृणा और मानसिक तुच्छता का स्थान नहीं है । इस प्रकार इस मन्त्र में जो उपदेश दिया गया है उसका निष्कृष्टाथ यह है कि प्रत्येक राष्ट्र का जन-समाज ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र इन चार विभागों में विभक्त होना चाहिये । जो लोग भांति-भांति के विद्या-विज्ञानों के क्षेत्र में जीवन लगा कर ज्ञान के संग्रह और संगृहीत ज्ञान के प्रचार में लगे रहेंगे, तपस्या का जीवन व्यतीत करेंगे, सहनशील, स्वार्थहीन और परोपकारी होंगे, वे ब्राह्मण कहलायेंगे । जो लोग अपने अन्दर बल-वीर्य का विशेष सम्पादन करेंगे और इस संचित शक्ति को राष्ट्र के लोगों की अन्याय-अत्याचार से रक्षा करने में खर्च करेंगे उन्हें क्षत्रिय कहा जायेगा । जो लोग अपना जीवन भांति-भांति के व्यापार व्यवसाय करके भोजन, वस्त्र आदि प्राकृतिक सम्पत्ति उत्पन्न करने और इस सम्पत्ति द्वारा राष्ट्र के लोगों का भरणपोषण करने में लगायेंगे उन्हें वैश्य कहा जायेगा। जो लोग न तो ज्ञान-संचय और ज्ञान प्रचार का काम कर सकेंगे और न ही अन्याय-अत्याचार से राष्ट्र के लोगों की रक्षा तथा प्राकृतिक सम्पत्ति की उत्पत्ति करके उनके भरण-पोषण का काम कर सकेंगे, जो लोग केवल ब्राह्मणादि की सेवा का ही काम कर सकेंगे, उन्हें शूद्र कहा जायेगा। दूसरे शब्दों में जो लोग अज्ञान से पैदा होने वाले राष्ट्र के कष्टों को दूर करने का व्रत लेंगे, वे ब्राह्मण कहलायेंगे, जो लोग अन्याय से होने वाले राष्ट्र के कष्टों को दूर करने का व्रत लेंगे वे क्षत्रिय कहलायेंगे. जो लोग सम्पत्ति के अभाव से होने वाले राष्ट्र के कष्टों को दूर | उस अन्न को पचाकर रस बना देता है और फिर उस अन्नको रुधिर में मिला देता है। रुधिर में मिला हुआ यह इस शरीर के प्रत्येक अंग में पहुंच कर उसे भोजन देता है, उसे पुष्टि और बल देवा है, वैश्य समाज का मध्य है, पेट है। पेट जैसे शरीर के सब अंगों के लिये रस तय्यार करके, भोजन तय्यार करके, देता है वैसे ही वैश्य को समाज के ब्राह्मण आदि सब अंगों को भोजन तय्यार करके देना होगा। समाज का जो अंग समाज शरीर के सब अंगों के भरण-पोषण का अपने ऊपर लेता है वह वैश्य कहा जायगा । मध्य भाग में जंघायें भी सम्मि लित की गई हैं। जंघाओं का काम चलना फिरना है । जो जंघाओं की तरह चले फिरेगा- देश - देशान्तर में जाकर व्यापार करेगा वह वैश्य कहलायेगा । देशदेशान्तर में आजाकर व्यापार व्यवसाय करना और उसके द्वारा अपने राष्ट्र के जन-समाज के भरण-पोषण का उपाय करना वैश्य का कर्तव्य है। ये वैश्य राष्ट्र- शरीर के मध्य भाग होते हैं जिसके ऊपर उसके सब अंगों का जीवन निर्भर होता है । iv. पैरों के काम के लिए शूद्र है। शूद्र समाज-शरीर का पैर है। पैरों का शरीर में क्या काम है ? पैर सारे शरीर को अपने ऊपर उठाये रहते हैं। सारे शरीर को एक स्थान से दूसरे स्थान में ले जाते हैं। स्वयं धूल, मट्टी, कीचड़ आदि में रहते हैं परन्तु बाकी शरीर को साफ़ बचाये रखते हैं । पैरों में शेष शरीर की सेवा का ही यह एक विशेष गुण है। और कोई विशेष गुण पैरों में नहीं होता । जो लोग ज्ञान आदि विशेष गुण अपने अन्दर नहीं रखते, और इसीलिये वे समाज के ब्राह्मण आदि की सेवा काही कार्य कर सकते हैं, उन्हें शूद्र कहते हैं । ये शूद्र लोग ब्राह्मणादि की सेवा करके उन्हें उनके ज्ञानार्जन और ज्ञान प्रचार के कर्मों के लिए अधिक समय प्राप्त कर सकने में सहायता देकर राष्ट्र-शर्रर की सेवा करते हैं । यदि ब्राह्मण आदिको अपनी सेवा के वस्त्र धोना, भोजन बनाना, बरतन मांजना, झाडू देना, और चौर करना आदि सारे काम स्वयं ही करने पड़ें तो उन्हें उनके ज्ञानार्जन और ज्ञान-प्रचार आदि के कार्यों के लिये समय कम मिलेगा और फलतः वे राष्ट्र के लिये अधिक उपयोगी कार्य कर सकेंगे। शुद्र लोग उनकी इस प्रकार की सेवायें करके उन्हें राष्ट्र के लिए अधिक उपयोगी काम करने का अधिक अवसर प्रदान करते हैं। और इस भांति, वे भी एक प्रकार से राष्ट्र के हित साधन का काम करते हैं । ज्ञान आदि विशेष गुण न होने के कारण जो लोग केवल समाज-शरीर की सेवा का ही कार्य कर सकते हैं उन्हें शूद्र कहा जाता है. चार. चौथी बात जो मन्त्र को ध्यान से देखने से प्रकट होती है वह यह है कि ब्राह्मण आदि का विभाग घृणा पर श्रत ऊँच नीच के भेद पर अवलम्बित नहीं है। यह विभाग अपनी शक्तियों द्वारा समाज की अधिक से सेवा कर सकने के भाव पर अवलम्बित है। शरीर के भुजा आदि अंग एक दूसरे से घृणा नहीं करते। वे एक दूसरे के साथ मिलकर रहते हैं । वे एक दूसरे के सुख दुःख को अपना सुख दुःख समझते हैं । मुख का दुःख जिस प्रकार सारे शरीर का दुःख होता है उसी प्रकार पैर दुःख भी सारे शरीर का दुःख होता है । एक की पीड़ा सब की पीड़ा होती है और एक का सुख सब. का सुख होता है । जब पैर में काँटा चुभ जाता है तो पैर के उस दुःख को अपना दुख समझ कर क्षत्रिय भुजा उसे निकालने के लिये अपनी अंगुलियें और नाखून वहां भेजती है और ब्राह्मण मुख अपने दांत वहां भेजता है। शूद्र पैर का वह दुःख दूर हो जाने पर ही इनको चैन पड़ती है। यही अवस्था समाजशरीर में उसके मुख, भुजा पेट और पैर ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्रों की होनी चाहिये। उन्हें परस्पर प्रेम से मिलकर रहना चाहिये । एक दूसरे का सुख-दुःख उन्हें अपना सुख-दुःख समझना चाहिये। एक दूसरे की उन्नति अवनति उन्हें अपनी उन्नति-अवनति समझनी चाहिये । शूद्र का कष्ट और विपत्ति ब्राह्मण को अपना क और विपत्ति समझनी चाहिये और ब्राह्मण का कष्ट और विपत्ति शूद्र को अपनाकर और विपत्ति समझनी चाहिये और ऐसा समझ कर सब को सब के कष्ट और विपत्ति दूर करने में तथा सुख और सम्पत्ति बढ़ाने में निरन्तर भरपूर प्रयत्न करना चाहिये । उन्हें समझना चाहिये कि सब का जीवन सब के सहयोग पर अवलम्बित है । इसलिये कोई किसी से ऐसा ऊँचा नहीं है कि वह घमण्ड में चूर होकर दूसरे से घुरमा करने लगे । यदि कुछ ऊंच-नीच है तो योग्यता और सेवा पर अम्बत है। जो जितना अधिक गुरणवान् है और जितना अधिक दूसरों की सेवा करता है वह उतना ही अधिक ऊंचा है। योग्यता और तजन्य सेवा के कारण ही उसे ऊंचा समझ कर दूसरों को उसका मान और सत्कार करना चाहिये। अपने से अधिक योग्य और राष्ट्र की अपने से अधिक सेवा करने वाले व्यक्ति को अपने से ऊंचा मानना और ऊंचा मान कर उसका मान और सत्कार करना सत्कार करने वाले व्यक्ति के आत्मा को उन्नत करता है और सत्कृत व्यक्ति को राष्ट्र-सेवा के लिये और उत्साहित करता है । इस प्रकार की सात्त्विक ऊंच-नीच के अतिरिक्त और किसी प्रकार की ऊंच-नीच वेद में ब्राह्मणादि विभाग में नहीं है । वैदिक उपदेश के वास्तविक रहस्य को न समझने के कारण आधुनिक हिन्दु समाज में प्रचलित जन्म पर आश्रित वर्णव्यवस्था में जो ऊँच-नीच के भाव पाये जाते हैं वे घृणा पर अवलम्बित भाव वेद के अभीष्ट ब्रह्मरणादि विभाग में नहीं हैं। ब्राह्मण सब से ऊंचा इसलिए है क्योंकि वह सब से योग्य और राष्ट्र का सब से अधिक सेवक है। शरीर में सिर का सब अंगों से अधिक महत्त्व है। क्योंकि सिर पर शरीर का जीवन सब से अधिक अवलम्बित है। इसी प्रकार राष्ट्र में ब्राह्मण का महत्त्व सब से अधिक इसलिये है कि उस पर राष्ट्र के जीवन की उन्नति सब से अधिक अवलम्बित है। वेद का यह ब्राह्मणादि का विभाग योग्यता, सेवा, सहयोग और प्रेम पर है। इसमें घृणा और मानसिक तुच्छता का स्थान नहीं है । इस प्रकार इस मन्त्र में जो उपदेश दिया गया है उसका निष्कृष्टाथ यह है कि प्रत्येक राष्ट्र का जन-समाज ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र इन चार विभागों में विभक्त होना चाहिये । जो लोग भांति-भांति के विद्या-विज्ञानों के क्षेत्र में जीवन लगा कर ज्ञान के संग्रह और संगृहीत ज्ञान के प्रचार में लगे रहेंगे, तपस्या का जीवन व्यतीत करेंगे, सहनशील, स्वार्थहीन और परोपकारी होंगे, वे ब्राह्मण कहलायेंगे । जो लोग अपने अन्दर बल-वीर्य का विशेष सम्पादन करेंगे और इस संचित शक्ति को राष्ट्र के लोगों की अन्याय-अत्याचार से रक्षा करने में खर्च करेंगे उन्हें क्षत्रिय कहा जायेगा । जो लोग अपना जीवन भांति-भांति के व्यापार व्यवसाय करके भोजन, वस्त्र आदि प्राकृतिक सम्पत्ति उत्पन्न करने और इस सम्पत्ति द्वारा राष्ट्र के लोगों का भरणपोषण करने में लगायेंगे उन्हें वैश्य कहा जायेगा। जो लोग न तो ज्ञान-संचय और ज्ञान प्रचार का काम कर सकेंगे और न ही अन्याय-अत्याचार से राष्ट्र के लोगों की रक्षा तथा प्राकृतिक सम्पत्ति की उत्पत्ति करके उनके भरण-पोषण का काम कर सकेंगे, जो लोग केवल ब्राह्मणादि की सेवा का ही काम कर सकेंगे, उन्हें शूद्र कहा जायेगा। दूसरे शब्दों में जो लोग अज्ञान से पैदा होने वाले राष्ट्र के कष्टों को दूर करने का व्रत लेंगे, वे ब्राह्मण कहलायेंगे, जो लोग अन्याय से होने वाले राष्ट्र के कष्टों को दूर करने का व्रत लेंगे वे क्षत्रिय कहलायेंगे. जो लोग सम्पत्ति के अभाव से होने वाले राष्ट्र के कष्टों को दूर |
इन्दौर। नगर निगम (Municipal Corporation) की टीम ने रावजी बाजार थाने (Raoji Bazar Police Station) से लेकर सोनकर धर्मशाला (Sonkar Dharamshala) तक बाधक मकान (houses), दुकानों (shops) के हिस्से में निशान लगाने की कार्रवाई कल शुरू कर दी। इस दौरान कई रहवासियों ने निशान लगाने को लेकर विरोध भी जताया।
पिछले दिनों नगर निगम (Municipal Corporation) ने उक्त क्षेत्र में 100 फीट चौड़ी सडक़ (roads) बनाने की अनुमति दी थी, साथ ही इसके लिए टेंडर की प्रक्रिया भी जारी कर दी थी। अधिकारियों के मुताबिक पूरे मार्ग पर 100 से ज्यादा बाधाएं हैं, जिनमें अधिकांश मकान, दुकानों के हिस्से सडक़ किनारे तक हैं। जवाहर मार्ग से यातायात का दबाव कम करने के लिए निगम आसपास के वैकल्पिक मार्गों का चौड़ीकरण कर रहा है, ताकि यातायात सुचारू रूप से चल सके। निगम ने पांच दिन पहले सभी रहवासियों को नोटिस जारी कर उनके मकान, दुकानों के दस्तावेज और निर्माण संबंधित अनुमतियां लेकर उन्हें झोनल पर बुलाया था, लेकिन कुछ लोग ही दस्तावेज और अनुमतियां लेकर पहुंचे। अधिकारियों का कहना है कि करीब 100 से ज्यादा बाधाएं हैं और इनका पूर्व में सर्वे किया जा चुका है। कल निगम की टीमों ने दोनों छोर के बाधक मकान, दुकानों के हिस्से में निशान लगाने की कार्रवाई की तो कुछ लोगों ने निगम अफसरों से पहले तो यह जानकारी ली कि कितना हिस्सा टूट रहा है और उसके साथ ही कई लोग निशान लगाने की कार्रवाई का विरोध करने लगे। निशान लगाने के बाद निगम संबंधितों को बाधाएं हटाने संबंधी नोटिस देकर मोहलत देगा। इस दौरान अगर रहवासी अपने बाधक मकान, दुकानों के हिस्से नहीं हटाते हैं तो निगम की टीम क्षेत्र में कार्रवाई कर बाधाएं हटाएगी। हालांकि अफसर भी मान रहे हैं कि कार्रवाई के दौरान विवाद हो सकता है। Share:
| इन्दौर। नगर निगम की टीम ने रावजी बाजार थाने से लेकर सोनकर धर्मशाला तक बाधक मकान , दुकानों के हिस्से में निशान लगाने की कार्रवाई कल शुरू कर दी। इस दौरान कई रहवासियों ने निशान लगाने को लेकर विरोध भी जताया। पिछले दिनों नगर निगम ने उक्त क्षेत्र में एक सौ फीट चौड़ी सडक़ बनाने की अनुमति दी थी, साथ ही इसके लिए टेंडर की प्रक्रिया भी जारी कर दी थी। अधिकारियों के मुताबिक पूरे मार्ग पर एक सौ से ज्यादा बाधाएं हैं, जिनमें अधिकांश मकान, दुकानों के हिस्से सडक़ किनारे तक हैं। जवाहर मार्ग से यातायात का दबाव कम करने के लिए निगम आसपास के वैकल्पिक मार्गों का चौड़ीकरण कर रहा है, ताकि यातायात सुचारू रूप से चल सके। निगम ने पांच दिन पहले सभी रहवासियों को नोटिस जारी कर उनके मकान, दुकानों के दस्तावेज और निर्माण संबंधित अनुमतियां लेकर उन्हें झोनल पर बुलाया था, लेकिन कुछ लोग ही दस्तावेज और अनुमतियां लेकर पहुंचे। अधिकारियों का कहना है कि करीब एक सौ से ज्यादा बाधाएं हैं और इनका पूर्व में सर्वे किया जा चुका है। कल निगम की टीमों ने दोनों छोर के बाधक मकान, दुकानों के हिस्से में निशान लगाने की कार्रवाई की तो कुछ लोगों ने निगम अफसरों से पहले तो यह जानकारी ली कि कितना हिस्सा टूट रहा है और उसके साथ ही कई लोग निशान लगाने की कार्रवाई का विरोध करने लगे। निशान लगाने के बाद निगम संबंधितों को बाधाएं हटाने संबंधी नोटिस देकर मोहलत देगा। इस दौरान अगर रहवासी अपने बाधक मकान, दुकानों के हिस्से नहीं हटाते हैं तो निगम की टीम क्षेत्र में कार्रवाई कर बाधाएं हटाएगी। हालांकि अफसर भी मान रहे हैं कि कार्रवाई के दौरान विवाद हो सकता है। Share: |
दर्शक ठीक तरह समझ सकता हो वा न समझ सकता हो किन्तु उसकी कल्पना के लिये कोई स्थान नहीं छोड़ता । हम लोगों के लिये कला वही सर्वोत्तम है जो अंकित रूप में मस्तिष्क को बांध नहीं देती।" और जो व्यक्ति को अपनी कल्पना या अनुमान अपने ढङ्ग से करने में सहायता करता है वह अधिक स्थायी होती है ।
भारतीय कला के नितान्त धार्मिक रूप ने उस सांकेतिकता को जन्म दिया है जो अधिकाधिक विवरणात्मक बनने में प्रवृत्त रहा है। और इस प्रकार सांकेतिकता ने आर्य सङ्घ से पृथक जातियों की स्थूलतर स्थाओं को उच्च बनाने के गौरण अभिप्राय की पूर्ति की है । इस प्रकार यह देखा जा सकता हैं कि किसी के मनोभावों के चित्रण में अधिक विस्तार विकसित होता है जो मुख्य भाव को क्षणिक बनाने में प्रवृत्त होता है जो प्रत्येक द्वारा सुगमता अनुभव नहीं किया जा सकता और इस कमी के प्रतिकार के लिये चित्रकार कुछ सीमा तक कलात्मक अतिशयोक्ति में बर्बस प्रवृत्त होता है । मनोवेगों का जब चित्रांकन करना होता है तो उसमें वे अतिशयोक्तियां अनिवार्य होती हैं और जब यथार्थता का अंकन करना होता है तो उसमें वे असंगत होती हैं। यहां पर फिर भारतीय कला को प्राचीन और नवीन के मध्य, पूर्व और पश्चिम के मध्य, किसी की निजी विश्वासपात्रता और दूसरों के अनुकरण द्वारा संरक्षकता के मध्य, अपने पुनरुद्धार में उद्वेलित होना पड़ता है। | दर्शक ठीक तरह समझ सकता हो वा न समझ सकता हो किन्तु उसकी कल्पना के लिये कोई स्थान नहीं छोड़ता । हम लोगों के लिये कला वही सर्वोत्तम है जो अंकित रूप में मस्तिष्क को बांध नहीं देती।" और जो व्यक्ति को अपनी कल्पना या अनुमान अपने ढङ्ग से करने में सहायता करता है वह अधिक स्थायी होती है । भारतीय कला के नितान्त धार्मिक रूप ने उस सांकेतिकता को जन्म दिया है जो अधिकाधिक विवरणात्मक बनने में प्रवृत्त रहा है। और इस प्रकार सांकेतिकता ने आर्य सङ्घ से पृथक जातियों की स्थूलतर स्थाओं को उच्च बनाने के गौरण अभिप्राय की पूर्ति की है । इस प्रकार यह देखा जा सकता हैं कि किसी के मनोभावों के चित्रण में अधिक विस्तार विकसित होता है जो मुख्य भाव को क्षणिक बनाने में प्रवृत्त होता है जो प्रत्येक द्वारा सुगमता अनुभव नहीं किया जा सकता और इस कमी के प्रतिकार के लिये चित्रकार कुछ सीमा तक कलात्मक अतिशयोक्ति में बर्बस प्रवृत्त होता है । मनोवेगों का जब चित्रांकन करना होता है तो उसमें वे अतिशयोक्तियां अनिवार्य होती हैं और जब यथार्थता का अंकन करना होता है तो उसमें वे असंगत होती हैं। यहां पर फिर भारतीय कला को प्राचीन और नवीन के मध्य, पूर्व और पश्चिम के मध्य, किसी की निजी विश्वासपात्रता और दूसरों के अनुकरण द्वारा संरक्षकता के मध्य, अपने पुनरुद्धार में उद्वेलित होना पड़ता है। |
मुंबई। पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को मांग की कि 'राज्यपाल' की संस्था को खत्म कर दिया जाना चाहिए या इस महत्वपूर्ण पद पर नियुक्ति के लिए एक उचित व्यवस्था होनी चाहिए। ठाकरे ने कहा, महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल (भगत सिंह कोश्यारी) की भूमिका घृणित थी, जैसा कि कल (11 मई) के सुप्रीम कोर्ट के फैसले में स्पष्ट रूप से सामने आया। सुप्रीम कोर्ट का कल का फैसला दिल्ली के राज्यपाल के खिलाफ भी गया है।
ठाकरे ने कहा कि राजनीतिक दलों या आरएसएस जैसे संगठनों के कार्यकर्ता, जिन्हें राज्यपाल के रूप में नामित किया गया है का चलन इस महत्वपूर्ण पद की गरिमा को कम कर रहा है।
ठाकरे ने कहा, वे संविधान की रक्षा और सुरक्षा के लिए राज्यपाल के रूप में पद की शपथ लेते हैं, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है, जैसा कि कल महाराष्ट्र और दिल्ली के दोनों मामलों में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से स्पष्ट है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अतीत में, राज्य के राज्यपाल के पद को बहुत सम्मान दिया जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है क्योंकि अब पदाधिकारियों (राज्यपाल) को कुछ 'घरेलू सामान' की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।
ठाकरे ने मांग की, न्यायाधीशों की तर्ज पर राज्यपाल के पद पर नियुक्त करने के लिए एक उचित प्रणाली विकसित की जानी चाहिए, तब तक, मुझे लगता है कि राज्यपाल की संस्था को खत्म कर देना चाहिए।
ठाकरे की तीखी टिप्पणी पूर्व राज्यपाल पर एक सवाल के जवाब में आई है, जिनकी पिछले साल के संकट के दौरान भूमिका और निर्णयों में महा विकास अघाडी (एमवीए) के सीएम ठाकरे को गिरा दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने तत्कालीन राज्यपाल के कई फैसलों पर तीखी टिप्पणियां कीं, हालांकि कोश्यारी ने अब इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
| मुंबई। पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को मांग की कि 'राज्यपाल' की संस्था को खत्म कर दिया जाना चाहिए या इस महत्वपूर्ण पद पर नियुक्ति के लिए एक उचित व्यवस्था होनी चाहिए। ठाकरे ने कहा, महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल की भूमिका घृणित थी, जैसा कि कल के सुप्रीम कोर्ट के फैसले में स्पष्ट रूप से सामने आया। सुप्रीम कोर्ट का कल का फैसला दिल्ली के राज्यपाल के खिलाफ भी गया है। ठाकरे ने कहा कि राजनीतिक दलों या आरएसएस जैसे संगठनों के कार्यकर्ता, जिन्हें राज्यपाल के रूप में नामित किया गया है का चलन इस महत्वपूर्ण पद की गरिमा को कम कर रहा है। ठाकरे ने कहा, वे संविधान की रक्षा और सुरक्षा के लिए राज्यपाल के रूप में पद की शपथ लेते हैं, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है, जैसा कि कल महाराष्ट्र और दिल्ली के दोनों मामलों में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से स्पष्ट है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अतीत में, राज्य के राज्यपाल के पद को बहुत सम्मान दिया जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है क्योंकि अब पदाधिकारियों को कुछ 'घरेलू सामान' की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। ठाकरे ने मांग की, न्यायाधीशों की तर्ज पर राज्यपाल के पद पर नियुक्त करने के लिए एक उचित प्रणाली विकसित की जानी चाहिए, तब तक, मुझे लगता है कि राज्यपाल की संस्था को खत्म कर देना चाहिए। ठाकरे की तीखी टिप्पणी पूर्व राज्यपाल पर एक सवाल के जवाब में आई है, जिनकी पिछले साल के संकट के दौरान भूमिका और निर्णयों में महा विकास अघाडी के सीएम ठाकरे को गिरा दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने तत्कालीन राज्यपाल के कई फैसलों पर तीखी टिप्पणियां कीं, हालांकि कोश्यारी ने अब इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। |
मनाली - मनाली और लाहुल के पहाड़ों में बर्फ के फाहे गिरने का क्रम बुधवार को दिन भर जारी रहा। मनाली घाटी में दिन को हल्की बारिश हुई तथा बर्फ के फाहे भी गिरे। पहाड़ों पर लगातार हो रही बर्फबारी से घाटी में ठिठुरन भरी ठंड का प्रकोप जारी है। बता दें कि रात को पारा माइनस होने से सड़कों में पानी जमा रहा है। इन दिनों मनाली में रात को सफर करना जान जोखिम में डालने के बराबर है। बुधवार दोपहर को बड़ी बसें भी मनाली बस स्टेंड पर पहुंच गई, जिससे सैलानियों सहित स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली। गौर हो कि बर्फबारी के चलते शनिवार शाम से बड़ी बसें पतलीकूहल से उपर नहीं आ रही थी, जिसके कारण पर्यटकों को भारी भरकम किराया देकर छोटे वाहनों में सफर करना पड़ा। रात को पारा लुढ़कने से पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है, साथ ही लोगों के घरों में नल भी जाम हो रहे हैं, जिससे दिक्कतें बढ़ गई हैं। बुधवार को रोहतांग सहित लाहुल व कुल्लू-मनाली के समस्त उंचाई वाले क्षेत्रों में दिन भर रूक-रूक कर बर्फबारी होती रही। पहाड़ों पर लगातार हो रही बर्फबारी से घाटी के पर्यटन व्यवसायी और बागबान खुश हो उठे हैं। मनाली में इस बार अधिक बर्फबारी होने से लकड़ी की खपत भी बढ़ गई है। ग्रामीण पन्ना लाल और डोले राज का कहना है कि इस बार लकड़ी की खपत बढ़ गई है। मौसम विभाग शिमला के निदेशक मनमोहन सिंह ने बताया कि प्रदेश में केलांग सबसे ठंडा रहा। केलांग में न्यूनतम तापमान माइनस 7. 5 रहा, जबकि मनाली में माइनस चार डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। उन्होंने बताया कि आगामी दो दिनों में मौसम में ठहराव होगा, लेकिन 22 जनवरी के बाद फिर से ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी और मैदान क्षेत्रों में बारिश का संभावना है।
| मनाली - मनाली और लाहुल के पहाड़ों में बर्फ के फाहे गिरने का क्रम बुधवार को दिन भर जारी रहा। मनाली घाटी में दिन को हल्की बारिश हुई तथा बर्फ के फाहे भी गिरे। पहाड़ों पर लगातार हो रही बर्फबारी से घाटी में ठिठुरन भरी ठंड का प्रकोप जारी है। बता दें कि रात को पारा माइनस होने से सड़कों में पानी जमा रहा है। इन दिनों मनाली में रात को सफर करना जान जोखिम में डालने के बराबर है। बुधवार दोपहर को बड़ी बसें भी मनाली बस स्टेंड पर पहुंच गई, जिससे सैलानियों सहित स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली। गौर हो कि बर्फबारी के चलते शनिवार शाम से बड़ी बसें पतलीकूहल से उपर नहीं आ रही थी, जिसके कारण पर्यटकों को भारी भरकम किराया देकर छोटे वाहनों में सफर करना पड़ा। रात को पारा लुढ़कने से पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है, साथ ही लोगों के घरों में नल भी जाम हो रहे हैं, जिससे दिक्कतें बढ़ गई हैं। बुधवार को रोहतांग सहित लाहुल व कुल्लू-मनाली के समस्त उंचाई वाले क्षेत्रों में दिन भर रूक-रूक कर बर्फबारी होती रही। पहाड़ों पर लगातार हो रही बर्फबारी से घाटी के पर्यटन व्यवसायी और बागबान खुश हो उठे हैं। मनाली में इस बार अधिक बर्फबारी होने से लकड़ी की खपत भी बढ़ गई है। ग्रामीण पन्ना लाल और डोले राज का कहना है कि इस बार लकड़ी की खपत बढ़ गई है। मौसम विभाग शिमला के निदेशक मनमोहन सिंह ने बताया कि प्रदेश में केलांग सबसे ठंडा रहा। केलांग में न्यूनतम तापमान माइनस सात. पाँच रहा, जबकि मनाली में माइनस चार डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। उन्होंने बताया कि आगामी दो दिनों में मौसम में ठहराव होगा, लेकिन बाईस जनवरी के बाद फिर से ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी और मैदान क्षेत्रों में बारिश का संभावना है। |
लखनऊः राजनीति का पासा पलटने में देर नहीं लगती। केशव प्रसाद मौर्या के लखनऊ में भाजपा अध्यक्ष बनाए जाने के घोषणा के तुरंत बाद ही जिस तरह पार्टी मुख्यालय से रंग-रोगन के नाम पर लक्ष्मीकांत वाजपेयी से तुरंत कमरा खाली करा लिया गया, वो उनके समर्थकों को नागवार गुजरा।
कैसे क्या हुआ ?
-सोमवार को भाजपा के नए अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या के स्वागत समारोह में जमकर भीड़ पहुंची।
-पार्टी मुख्यालय से रंग रोगन के नाम पर लक्ष्मीकांत वाजपेयी से कमरा खाली करने को कहा गया।
-बड़ी मुश्किल से धक्का मुक्की के बाद वाजपेयी को उनसे मिलने की जगह मिल सकी।
-लेकिन वह भी ज्यादा देर तक टिकी न रह सकी।
-केशव मौर्या को घेरे उनके समर्थकों की भीड़ की धक्कामुक्की में वह बाहर हो गए।
-वाजपेयी भीड़ से दूर काफी देर तक इंतजार करते रहे।
-थोड़ी देर में ही उन्हें समझ में आ गया कि आज कोई और आकर्षण का केंद्र है।
-जिसके बाद वह अपने मुट्ठी भर समर्थकों के साथ बिना कुछ कहे वहां से निकल गए।
-ये दर्द सिर्फ पूर्व अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी का ही नहीं था।
-बीजेपी के कई कद्दावर नेताओं का था।
-बीजेपी के पूर्व एमएलए सुरेश चन्द्र वाजपेयी ने भी नवनिर्वाचित अध्यक्ष को बधाई देने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया।
-लेकिन वह भी सफल नहीं हो पाए।
-ऐसे में कई नेताओं के मुंह से निकल ही पड़ा, अब अच्छे दिन शायद कभी नहीं आएंगे।
| लखनऊः राजनीति का पासा पलटने में देर नहीं लगती। केशव प्रसाद मौर्या के लखनऊ में भाजपा अध्यक्ष बनाए जाने के घोषणा के तुरंत बाद ही जिस तरह पार्टी मुख्यालय से रंग-रोगन के नाम पर लक्ष्मीकांत वाजपेयी से तुरंत कमरा खाली करा लिया गया, वो उनके समर्थकों को नागवार गुजरा। कैसे क्या हुआ ? -सोमवार को भाजपा के नए अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या के स्वागत समारोह में जमकर भीड़ पहुंची। -पार्टी मुख्यालय से रंग रोगन के नाम पर लक्ष्मीकांत वाजपेयी से कमरा खाली करने को कहा गया। -बड़ी मुश्किल से धक्का मुक्की के बाद वाजपेयी को उनसे मिलने की जगह मिल सकी। -लेकिन वह भी ज्यादा देर तक टिकी न रह सकी। -केशव मौर्या को घेरे उनके समर्थकों की भीड़ की धक्कामुक्की में वह बाहर हो गए। -वाजपेयी भीड़ से दूर काफी देर तक इंतजार करते रहे। -थोड़ी देर में ही उन्हें समझ में आ गया कि आज कोई और आकर्षण का केंद्र है। -जिसके बाद वह अपने मुट्ठी भर समर्थकों के साथ बिना कुछ कहे वहां से निकल गए। -ये दर्द सिर्फ पूर्व अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी का ही नहीं था। -बीजेपी के कई कद्दावर नेताओं का था। -बीजेपी के पूर्व एमएलए सुरेश चन्द्र वाजपेयी ने भी नवनिर्वाचित अध्यक्ष को बधाई देने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया। -लेकिन वह भी सफल नहीं हो पाए। -ऐसे में कई नेताओं के मुंह से निकल ही पड़ा, अब अच्छे दिन शायद कभी नहीं आएंगे। |
नई दिल्ली । । Aam Aadmi Party में इस समय जो हालात हैं उन्हें देखकर तो ऐसा ही लगता है कि शायद दिल्ली के तेज तर्रार सीएम और Aam Aadmi Party के संयोजक अरविंद केजरीवाल की आंख में कुमार विश्वास किसी कांटे की तरह चुभ रहे हैं। वो शायद इस कांटे को निकलना चाहते हैं।
वह भी कुछ इस अंदाज में कि सांप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे। दरसअल, इस समय Aam Aadmi Party के भीतर राज्यसभा का घमासान मचा हुआ है। दिल्ली में राज्यसभा की 3 सीटें खाली होने वाली हैं।
सभी सीटों पर Aam Aadmi Party का ही कब्जा होगा। लेकिन, केजरीवाल किसे राज्यसभा भेजेंगे इस बात पर सस्पेंस बना हुआ है। लेकिन, इस चुनावी रेस में कुमार विश्वास के अलावा संजय सिंह और आशुतोष भी शामिल हैं।
ऐसे में आप सोच रहे होंगे कि 3 सीटें और तीन ही लोग रेस में हैं तो फिर दिक्कत कहां है। दिक्कत कुमार विश्वास को लेकर है। इसके साथ ही कई ऐसे भी नाम हैं जो इस वक्त बेशक रेस में ना दिख रहे हों लेकिन, दौड़ में शामिल हैं।
इन सब के बीच कुमार विश्वास को अब राजस्थान से उप-चुनाव लड़ाने की मांग भी जोर पकड़ती जा रही है। पार्टी उन्हें राजस्थान का प्रभारी बना चुकी है। अजमेर में लोकसभा का उपचुनाव होना है। ऐसे में राजस्थान के नेताओं का एक प्रतिनिधि मंडल दिल्ली पहुंचा।
राजस्थान के नेताओं ने दिल्ली में Aam Aadmi Party के Political Affairs Committee यानी पीएसी के सदस्यों से मुलाकात के लिए वक्त मांगा है। ये लोग चाहते हैं कि कुमार विश्वास को लोकसभा उपचुनाव में Aam Aadmi Party का उम्मीदवार बनाया जाए।
बेशक Aam Aadmi Party कई महीनों से राजस्थान में सक्रिय हो लेकिन, वो अजमेर के लोकसभा का उपचुनाव जीत पाएगी इस पर संदेह बरकरार है। माना जा रहा है कि राजस्थान के नेताओं की ओर से ये मांग उठाई नहीं बल्कि उठवाई गई है।
ताकि कुमार विश्वास की राज्यसभा की दावेदारी समाप्त की जा सके। हर किसी को पता है कि Aam Aadmi Party किसी भी सूरत में अजमेर उपचुनाव को जीतने की स्थिति में नहीं है। जबकि राज्यसभा में केजरीवाल जिसे चाहें भेज सकते हैं। वो भी बिना किसी रुकावट के।
हालांकि राजस्थान के नेताओं का कहना है कि कुमार विश्वास राज्य में काफी फेमस हैं। जिसका फायदा पार्टी को मिल सकता है। इसके साथ ही उनकी ससुराल भी राजस्थान में ही है। इस नाते भी वो इस सीट पर अपना हक जता सकते हैं।
राजस्थान के नेताओं का कहना है कि कुमार विश्वास के भीतर युवाओं को एकजुट करने की क्षमता है। वो राज्य में दो हजार से भी ज्यादा कवि सम्मेलन कर चुके हैं। ये नेता दावा करते हैं कि हमारी पार्टी राजस्थान के कॉलेजों में छात्र संघ का भी चुनाव जीत चुकी है।
ऐसे में पार्टी के सामने जीत का बहुत बड़ा संकट नहीं है। अगर कुमार विश्वास यहां से चुनाव जीत जाते हैं तो 2018 में होने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी और भी बेहतर प्रदर्शन कर सकेगी। इससे पहले कुमार विश्वास को Aam Aadmi Party राहुल गांधी के खिलाफ अमेठी का भी चुनाव लड़ा चुकी है।
| नई दिल्ली । । Aam Aadmi Party में इस समय जो हालात हैं उन्हें देखकर तो ऐसा ही लगता है कि शायद दिल्ली के तेज तर्रार सीएम और Aam Aadmi Party के संयोजक अरविंद केजरीवाल की आंख में कुमार विश्वास किसी कांटे की तरह चुभ रहे हैं। वो शायद इस कांटे को निकलना चाहते हैं। वह भी कुछ इस अंदाज में कि सांप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे। दरसअल, इस समय Aam Aadmi Party के भीतर राज्यसभा का घमासान मचा हुआ है। दिल्ली में राज्यसभा की तीन सीटें खाली होने वाली हैं। सभी सीटों पर Aam Aadmi Party का ही कब्जा होगा। लेकिन, केजरीवाल किसे राज्यसभा भेजेंगे इस बात पर सस्पेंस बना हुआ है। लेकिन, इस चुनावी रेस में कुमार विश्वास के अलावा संजय सिंह और आशुतोष भी शामिल हैं। ऐसे में आप सोच रहे होंगे कि तीन सीटें और तीन ही लोग रेस में हैं तो फिर दिक्कत कहां है। दिक्कत कुमार विश्वास को लेकर है। इसके साथ ही कई ऐसे भी नाम हैं जो इस वक्त बेशक रेस में ना दिख रहे हों लेकिन, दौड़ में शामिल हैं। इन सब के बीच कुमार विश्वास को अब राजस्थान से उप-चुनाव लड़ाने की मांग भी जोर पकड़ती जा रही है। पार्टी उन्हें राजस्थान का प्रभारी बना चुकी है। अजमेर में लोकसभा का उपचुनाव होना है। ऐसे में राजस्थान के नेताओं का एक प्रतिनिधि मंडल दिल्ली पहुंचा। राजस्थान के नेताओं ने दिल्ली में Aam Aadmi Party के Political Affairs Committee यानी पीएसी के सदस्यों से मुलाकात के लिए वक्त मांगा है। ये लोग चाहते हैं कि कुमार विश्वास को लोकसभा उपचुनाव में Aam Aadmi Party का उम्मीदवार बनाया जाए। बेशक Aam Aadmi Party कई महीनों से राजस्थान में सक्रिय हो लेकिन, वो अजमेर के लोकसभा का उपचुनाव जीत पाएगी इस पर संदेह बरकरार है। माना जा रहा है कि राजस्थान के नेताओं की ओर से ये मांग उठाई नहीं बल्कि उठवाई गई है। ताकि कुमार विश्वास की राज्यसभा की दावेदारी समाप्त की जा सके। हर किसी को पता है कि Aam Aadmi Party किसी भी सूरत में अजमेर उपचुनाव को जीतने की स्थिति में नहीं है। जबकि राज्यसभा में केजरीवाल जिसे चाहें भेज सकते हैं। वो भी बिना किसी रुकावट के। हालांकि राजस्थान के नेताओं का कहना है कि कुमार विश्वास राज्य में काफी फेमस हैं। जिसका फायदा पार्टी को मिल सकता है। इसके साथ ही उनकी ससुराल भी राजस्थान में ही है। इस नाते भी वो इस सीट पर अपना हक जता सकते हैं। राजस्थान के नेताओं का कहना है कि कुमार विश्वास के भीतर युवाओं को एकजुट करने की क्षमता है। वो राज्य में दो हजार से भी ज्यादा कवि सम्मेलन कर चुके हैं। ये नेता दावा करते हैं कि हमारी पार्टी राजस्थान के कॉलेजों में छात्र संघ का भी चुनाव जीत चुकी है। ऐसे में पार्टी के सामने जीत का बहुत बड़ा संकट नहीं है। अगर कुमार विश्वास यहां से चुनाव जीत जाते हैं तो दो हज़ार अट्ठारह में होने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी और भी बेहतर प्रदर्शन कर सकेगी। इससे पहले कुमार विश्वास को Aam Aadmi Party राहुल गांधी के खिलाफ अमेठी का भी चुनाव लड़ा चुकी है। |
पीयूष मिश्रा (जन्म १३ जनवरी १९६३) एक भारतीय नाटक अभिनेता, संगीत निर्देशक, गायक, गीतकार, पटकथा लेखक हैं। मिश्रा का पालन-पोषण ग्वालियर में हुआ और १९८६ में उन्होंने दिल्ली स्थिति नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने मकबूल, गुलाल, गैंग्स ऑफ वासेपुर जैसी फ़िल्मों में गाने गाये हैं। .
12 संबंधोंः दीवार (2004 फ़िल्म), पिंक (फ़िल्म), ब्लैक फ्राइडे (फ़िल्म एल्बम), भिन्डी बाज़ार इंक॰, मोहेंजो दारो (फ़िल्म), रिवॉल्वर रानी, गुलाल (फ़िल्म), गैंग्स ऑफ वासेपुर - भाग 1, गैंग्स ऑफ वासेपुर - भाग 2, 2009 की बॉलीवुड फिल्में, 2010 की बॉलीवुड फिल्में, 2011 की बॉलीवुड फ़िल्में।
दीवार (2004 फ़िल्म)
दीवार 2004 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। .
पिंक (फ़िल्म)
पिंक अनिरुद्ध रॉय चौधरी द्वारा निर्देशित 2016 की हिन्दी फिल्म है। इसमें अमिताभ बच्चन, तापसी पन्नू, कीर्ति कुल्हरी, अंगद बेदी, एंड्रिया तारियांग, पीयूष मिश्रा, और धृतिमान चटर्जी ने मुख्य किरदार निभाए हैं। फिल्म 16 सितम्बर 2016 को अच्छी समीक्षाओं के साथ रिलीज़ हुई और व्यावसायिक सफल रही। .
ब्लैक फ्राइडे (फ़िल्म एल्बम)
ब्लैक फ्राइडे २००७ की इसी नाम की फ़िल्म की संगीत तथा स्कोर एल्बम है। एल्बम में संगीत इंडियन ओशॅन बैंड द्वारा दिया गया है, और यह उनका पहला फिल्म साउंडट्रैक है। इसमें कुल नौ गीत हैं, जिनमें से तीन में बोल हैं, और शेष छह इंस्ट्रुमेंटल हैं। ब्लैक फ्राइडे ३ मई २००५ को टाइम्स म्यूजिक द्वारा रिलीज़ की गयी थी। .
भिन्डी बाज़ार इंक॰ २०१० की एक बॉलीवुड फ़िल्म है। .
मोहेंजो दारो (फ़िल्म)
मोहेंजो दारो (अंग्रेजी; Mohenjo Daro)(Mound of the Dead Men) वर्ष २०१६ की भारतीय रोमांचक-प्रेम गाथा आधारित हिन्दी भाषा की फ़िल्म है, जिसका लेखन एवं निर्देशन आशुतोष गोवारिकर, तथा निर्माण युटीवी मोशन पिक्चर्स के सिद्धार्थ राॅय कपूर व आशुतोष गोवारिकर प्रोड्क्शन्स लिमिटेड (एजीपीपीएल) की सुनीता गोवारिकर द्वारा किया गया है, और फ़िल्म में ऋतिक रोशन व पूजा हेगड़े मुख्य भूमिकाओं में अदाकारी कर रहे हैं। मोहेंजो दारो विश्व की प्रथम सिनेमाई प्रदर्शन है जो प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता को संदर्भित की गई है, तथा इस महान नगर, मोहेंजो दारो को युनेस्को द्वारा विश्व धरोहर के तौर पर अंकित किया गया है (अब यह क्षेत्र पाकिस्तान स्थित सिंध जिले के लरकाना में पड़ता है)। फ़िल्म की शुरुआत मुताबिक प्राचीन समय के २०१६ के ईसा पूर्व की है जब सिंधु घाटी सभ्यता चरम पर थी, कहानी एक साधारण किसान (रोशन) के मोहेंजो दारो नगर की ओर यात्रा करने और फिर नगर की संभ्रांत वर्ग की औरत (हेगड़े) से हुए प्रेम को लेकर बुना गया है, और जिसके परिणाम में वह नगर के अभिजात वर्ग को चुनौती दे डालता है तथा आखिर में उसी नगर के अपरिहार्य विनाश के विरुद्ध संघर्ष भी करता है। गोवारिकर ने अपने तीन वर्ष शोध करने तथा पटकथा के विकास में व्यतीत किए, अपनी इस काल्पनिक कहानी को प्रामाणिकता पक्का करने के लिए पुरातत्ववेत्ताओं के साथ काफी नजदीकी कार्य किया। फ़िल्मांकन का कार्य भुज एवं मुंबई के साथ संक्षिप्त समयावधि में बेड़ाघाट (जबलपुर) एवं थाणे में भी किया गया। फ़िल्म का संगीत एवं एलबम रचना ए.आर. रहमान के साथ गीत लिखने का काम जावेद अख़्तर ने भी किया। फ़िल्म का प्रदर्शन १२ अगस्त २०१६ में वैश्विक स्तर पर जारी किया गया। .
रिवॉल्वर रानी एक बॉलीवुड हास्य नाटक फ़िल्म है जिसका निर्देशन साई कबीर ने किया है। फ़िल्म वेव सिनेमा ने प्रस्तुत की। इस फ़िल्म में मुख्य अभिनय भूमिका में कंगना राणावत और वीर दास हैं जबकि पीयूष मिश्रा, ज़ाकिर हुसैन और पंकज सारस्वत सहायक अभिनेता हैं। फ़िल्म राजनीतिक पृष्ठभूमि में उपहासात्मक और असामान्य प्रेम कहानी दिखाती है। यह फ़िल्म २५ अप्रैल २०१४ को जारी की गई। .
गुलाल (फ़िल्म)
गुलाल २००९ की एक बॉलीवुड फ़िल्म है। .
गैंग्स ऑफ वासेपुर - भाग 1 (या Gangs of वासेपुर) 2012 की एक भारतीय अपराध फिल्म है, जिसे अनुराग कश्यप द्वारा सह-लिखित, निर्मित और निर्देशित किया गया है। यह धनबाद, झारखंड के कोयला माफिया और तीन अपराधिक परिवारों के बीच अंतर्निहित शक्ति संघर्ष, राजनीति और प्रतिशोध पर केंद्रित फ़िल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर श्रृंखला की पहली फ़िल्म है। फ़िल्म के पहले भाग में मनोज वाजपेई नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी, ऋचा चड्ढा, हुमा कुरेशी, तिग्मांशु धूलिया, पंकज त्रिपाठी आदि कलाकार प्रमुख भुमिकाओं में है। इसकी कहानी 1990 से 2009 तक के कालक्रम में फैली हुई है। फिल्म के दोनों हिस्सों को एक फिल्म के रूप में शूट किया गया था, जो कुल 319 मिनट की थी और इसे 2012 के कान्स फ़िल्म समारोह में प्रदर्शित किया गया था, लेकिन चूंकि कोई भी भारतीय सिनेमाघर पांच घंटे की फिल्म को नहीं दिखाना चाहते थे, इसिलिये इसे भारतीय बाजार के लिए दो भागों (160 मिनट और 159 मिनट क्रमशः) में विभाजित किया गया था। पहले भाग को 22 जून 2012 को भारत भर के 1000 से अधिक थिएटर स्क्रीनों में प्रदर्शित किया गया था। इसे फ्रांस में 25 जुलाई और मध्य पूर्व में 28 जून को प्रदर्शित किया गया था लेकिन कुवैत और कतर में इसे प्रतिबंधित कर दिया गया था। जनवरी 2013 में सनडांस फ़िल्म समारोह में गैंग्स ऑफ वासेपुर फ़िल्म दिखाई गई थी। गैंग्स ऑफ वासेपुर ने 55वें एशिया-प्रशांत फिल्म महोत्सव में सर्वश्रेष्ठ फिल्म और सर्वश्रेष्ठ निर्देशक सहित चार नामांकन प्राप्त किये थे। .
गैंग्स ऑफ वासेपुर - भाग 2 (या Gangs of वासेपुर II) 2012 की एक भारतीय अपराध फिल्म है, जिसे अनुराग कश्यप द्वारा सह-लिखित, निर्मित और निर्देशित किया गया है। यह धनबाद, झारखंड के कोयला माफिया और तीन अपराधिक परिवारों के बीच अंतर्निहित शक्ति संघर्ष, राजनीति और प्रतिशोध पर केंद्रित फ़िल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर श्रृंखला की दूसरी किस्त है। फ़िल्म के दूसरे भाग में प्रमुख भूमिकाओं में नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी, ऋचा चड्ढा, हुमा कुरेशी, तिग्मांशु धूलिया, पंकज त्रिपाठी, राजकुमार राव और ज़ीशन कादरी आदि कलाकार शामिल है। इसकी कहानी 1990 से 2009 तक के कालक्रम में फैली हुई है। फिल्म के दोनों हिस्सों को एक फिल्म के रूप में शूट किया गया था, जो कुल 319 मिनट की थी और इसे 2012 के कान फ़िल्मोत्सव में प्रदर्शित किया गया था, लेकिन चूंकि कोई भी भारतीय सिनेमाघर पांच घंटे की फिल्म को नहीं दिखाना चाहते थे, इसिलिये इसे भारतीय बाजार के लिए दो भागों (160 मिनट और 159 मिनट क्रमशः) में विभाजित किया गया था। फिल्म में भारी मात्रा में अश्लील शब्द और हिंसा के कई दृश्य होने के कारण केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड से इसे केवल वयस्क प्रमाणीकरण मिला। फिल्म का संगीत, पारंपरिक भारतीय लोक गीतों से बहुत प्रभावित था। भाग 2 को पूरे भारत में 8 अगस्त 2012 को प्रदर्शित किया गया था। फिल्म के दोनों भागों का आलोचकों द्वारा प्रशंसित किया गया था। संयुक्त फिल्म ने 60वीं राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ ऑडिगोग्राफी, फाइनल मिश्रित ट्रैक (आलोक डी, सिनोई जोसेफ और श्रीजेश नायर) के पुनः रिकॉर्डिस्ट और अभिनय (नवाजुद्दीन सिद्दीकी) के लिए विशेष उल्लेख जीता था। फिल्म ने 58वें फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में सर्वश्रेष्ठ फिल्म (आलोचकों) और सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री (आलोचकों) समेत चार फिल्मफेयर पुरस्कार जीते, हालांकि किसी भी वित्तीय मानक से भारी सफल नहीं होने के बावजूद, 18.5 करोड़ के कम संयुक्त बजट के कारण, 50.81 करोड़ (2 भागों के संयुक्त) की शुद्ध घरेलू कमाई के साथ व्यावसायिक रूप से सफल रही। इसे कई आधुनिक पंथ फिल्म के रूप में माना जाता है। .
8x10 तस्वीर नामक फ़िल्म के प्रदर्शन के बाद इस वर्ष फ़िल्म निर्माताओं की हड़ताल आरम्भ हो गई थी जिसका कारण टिकटघर से सम्बंधित है, यह हड़ताल जून माह के शुरू में बन्द हुई। .
यह पृष्ठ २०१० में निर्मित बॉलीवुड फ़िल्मों की एक सूची है। टिकट खिड़की पर 30 उच्चतम अर्जक फ़िल्मों की सूची में छः फ़िल्में शामिल हुई। इस वर्ष की उच्चतम 10 फ़िल्मों द्वारा अर्जित राशी थी, जो 2009 में आर्जित राशी से तुलना करने पर इसमें प्रतिशत वृद्धि 11.71% हुई। 2010 में पहली बार यह आँकड़ा पार हुआ केवल उच्चतम अर्जक 10 फ़िल्में के अंक को पार कर गई। यह बॉलीवुड के इतिहास में पहली बार था कि दो फ़िल्में दबंग और गोलमाल 3 ने से अधिक धन अर्जित किया। निम्नलिखित 10 फ़िल्में बॉलीवुड की 2010 की सर्वश्रेष्ठ अर्जक फ़िल्में हैं। .
यह बॉलीवुड फ़िल्म इंडस्ट्री द्वारा २०११ में निर्मित फ़िल्मों की सूची है। वर्ष के दौरान व्यावसायिक तौर पर एवं समीक्षकों की दृष्टि से विभिन्न सफल फ़िल्में जारी की गई। आठ फिल्मों ने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर सबसे अधिक कमाई करने वाली शीर्ष 30 हिन्दी फ़िल्मों की सूची में जगह बनाई। प्रमुख दर्शनीय फ़िल्मों का संक्षिप्त विश्लेषण निम्न प्रकार है.
| पीयूष मिश्रा एक भारतीय नाटक अभिनेता, संगीत निर्देशक, गायक, गीतकार, पटकथा लेखक हैं। मिश्रा का पालन-पोषण ग्वालियर में हुआ और एक हज़ार नौ सौ छियासी में उन्होंने दिल्ली स्थिति नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने मकबूल, गुलाल, गैंग्स ऑफ वासेपुर जैसी फ़िल्मों में गाने गाये हैं। . बारह संबंधोंः दीवार , पिंक , ब्लैक फ्राइडे , भिन्डी बाज़ार इंक॰, मोहेंजो दारो , रिवॉल्वर रानी, गुलाल , गैंग्स ऑफ वासेपुर - भाग एक, गैंग्स ऑफ वासेपुर - भाग दो, दो हज़ार नौ की बॉलीवुड फिल्में, दो हज़ार दस की बॉलीवुड फिल्में, दो हज़ार ग्यारह की बॉलीवुड फ़िल्में। दीवार दीवार दो हज़ार चार में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। . पिंक पिंक अनिरुद्ध रॉय चौधरी द्वारा निर्देशित दो हज़ार सोलह की हिन्दी फिल्म है। इसमें अमिताभ बच्चन, तापसी पन्नू, कीर्ति कुल्हरी, अंगद बेदी, एंड्रिया तारियांग, पीयूष मिश्रा, और धृतिमान चटर्जी ने मुख्य किरदार निभाए हैं। फिल्म सोलह सितम्बर दो हज़ार सोलह को अच्छी समीक्षाओं के साथ रिलीज़ हुई और व्यावसायिक सफल रही। . ब्लैक फ्राइडे ब्लैक फ्राइडे दो हज़ार सात की इसी नाम की फ़िल्म की संगीत तथा स्कोर एल्बम है। एल्बम में संगीत इंडियन ओशॅन बैंड द्वारा दिया गया है, और यह उनका पहला फिल्म साउंडट्रैक है। इसमें कुल नौ गीत हैं, जिनमें से तीन में बोल हैं, और शेष छह इंस्ट्रुमेंटल हैं। ब्लैक फ्राइडे तीन मई दो हज़ार पाँच को टाइम्स म्यूजिक द्वारा रिलीज़ की गयी थी। . भिन्डी बाज़ार इंक॰ दो हज़ार दस की एक बॉलीवुड फ़िल्म है। . मोहेंजो दारो मोहेंजो दारो वर्ष दो हज़ार सोलह की भारतीय रोमांचक-प्रेम गाथा आधारित हिन्दी भाषा की फ़िल्म है, जिसका लेखन एवं निर्देशन आशुतोष गोवारिकर, तथा निर्माण युटीवी मोशन पिक्चर्स के सिद्धार्थ राॅय कपूर व आशुतोष गोवारिकर प्रोड्क्शन्स लिमिटेड की सुनीता गोवारिकर द्वारा किया गया है, और फ़िल्म में ऋतिक रोशन व पूजा हेगड़े मुख्य भूमिकाओं में अदाकारी कर रहे हैं। मोहेंजो दारो विश्व की प्रथम सिनेमाई प्रदर्शन है जो प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता को संदर्भित की गई है, तथा इस महान नगर, मोहेंजो दारो को युनेस्को द्वारा विश्व धरोहर के तौर पर अंकित किया गया है । फ़िल्म की शुरुआत मुताबिक प्राचीन समय के दो हज़ार सोलह के ईसा पूर्व की है जब सिंधु घाटी सभ्यता चरम पर थी, कहानी एक साधारण किसान के मोहेंजो दारो नगर की ओर यात्रा करने और फिर नगर की संभ्रांत वर्ग की औरत से हुए प्रेम को लेकर बुना गया है, और जिसके परिणाम में वह नगर के अभिजात वर्ग को चुनौती दे डालता है तथा आखिर में उसी नगर के अपरिहार्य विनाश के विरुद्ध संघर्ष भी करता है। गोवारिकर ने अपने तीन वर्ष शोध करने तथा पटकथा के विकास में व्यतीत किए, अपनी इस काल्पनिक कहानी को प्रामाणिकता पक्का करने के लिए पुरातत्ववेत्ताओं के साथ काफी नजदीकी कार्य किया। फ़िल्मांकन का कार्य भुज एवं मुंबई के साथ संक्षिप्त समयावधि में बेड़ाघाट एवं थाणे में भी किया गया। फ़िल्म का संगीत एवं एलबम रचना ए.आर. रहमान के साथ गीत लिखने का काम जावेद अख़्तर ने भी किया। फ़िल्म का प्रदर्शन बारह अगस्त दो हज़ार सोलह में वैश्विक स्तर पर जारी किया गया। . रिवॉल्वर रानी एक बॉलीवुड हास्य नाटक फ़िल्म है जिसका निर्देशन साई कबीर ने किया है। फ़िल्म वेव सिनेमा ने प्रस्तुत की। इस फ़िल्म में मुख्य अभिनय भूमिका में कंगना राणावत और वीर दास हैं जबकि पीयूष मिश्रा, ज़ाकिर हुसैन और पंकज सारस्वत सहायक अभिनेता हैं। फ़िल्म राजनीतिक पृष्ठभूमि में उपहासात्मक और असामान्य प्रेम कहानी दिखाती है। यह फ़िल्म पच्चीस अप्रैल दो हज़ार चौदह को जारी की गई। . गुलाल गुलाल दो हज़ार नौ की एक बॉलीवुड फ़िल्म है। . गैंग्स ऑफ वासेपुर - भाग एक दो हज़ार बारह की एक भारतीय अपराध फिल्म है, जिसे अनुराग कश्यप द्वारा सह-लिखित, निर्मित और निर्देशित किया गया है। यह धनबाद, झारखंड के कोयला माफिया और तीन अपराधिक परिवारों के बीच अंतर्निहित शक्ति संघर्ष, राजनीति और प्रतिशोध पर केंद्रित फ़िल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर श्रृंखला की पहली फ़िल्म है। फ़िल्म के पहले भाग में मनोज वाजपेई नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी, ऋचा चड्ढा, हुमा कुरेशी, तिग्मांशु धूलिया, पंकज त्रिपाठी आदि कलाकार प्रमुख भुमिकाओं में है। इसकी कहानी एक हज़ार नौ सौ नब्बे से दो हज़ार नौ तक के कालक्रम में फैली हुई है। फिल्म के दोनों हिस्सों को एक फिल्म के रूप में शूट किया गया था, जो कुल तीन सौ उन्नीस मिनट की थी और इसे दो हज़ार बारह के कान्स फ़िल्म समारोह में प्रदर्शित किया गया था, लेकिन चूंकि कोई भी भारतीय सिनेमाघर पांच घंटे की फिल्म को नहीं दिखाना चाहते थे, इसिलिये इसे भारतीय बाजार के लिए दो भागों में विभाजित किया गया था। पहले भाग को बाईस जून दो हज़ार बारह को भारत भर के एक हज़ार से अधिक थिएटर स्क्रीनों में प्रदर्शित किया गया था। इसे फ्रांस में पच्चीस जुलाई और मध्य पूर्व में अट्ठाईस जून को प्रदर्शित किया गया था लेकिन कुवैत और कतर में इसे प्रतिबंधित कर दिया गया था। जनवरी दो हज़ार तेरह में सनडांस फ़िल्म समारोह में गैंग्स ऑफ वासेपुर फ़िल्म दिखाई गई थी। गैंग्स ऑफ वासेपुर ने पचपनवें एशिया-प्रशांत फिल्म महोत्सव में सर्वश्रेष्ठ फिल्म और सर्वश्रेष्ठ निर्देशक सहित चार नामांकन प्राप्त किये थे। . गैंग्स ऑफ वासेपुर - भाग दो दो हज़ार बारह की एक भारतीय अपराध फिल्म है, जिसे अनुराग कश्यप द्वारा सह-लिखित, निर्मित और निर्देशित किया गया है। यह धनबाद, झारखंड के कोयला माफिया और तीन अपराधिक परिवारों के बीच अंतर्निहित शक्ति संघर्ष, राजनीति और प्रतिशोध पर केंद्रित फ़िल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर श्रृंखला की दूसरी किस्त है। फ़िल्म के दूसरे भाग में प्रमुख भूमिकाओं में नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी, ऋचा चड्ढा, हुमा कुरेशी, तिग्मांशु धूलिया, पंकज त्रिपाठी, राजकुमार राव और ज़ीशन कादरी आदि कलाकार शामिल है। इसकी कहानी एक हज़ार नौ सौ नब्बे से दो हज़ार नौ तक के कालक्रम में फैली हुई है। फिल्म के दोनों हिस्सों को एक फिल्म के रूप में शूट किया गया था, जो कुल तीन सौ उन्नीस मिनट की थी और इसे दो हज़ार बारह के कान फ़िल्मोत्सव में प्रदर्शित किया गया था, लेकिन चूंकि कोई भी भारतीय सिनेमाघर पांच घंटे की फिल्म को नहीं दिखाना चाहते थे, इसिलिये इसे भारतीय बाजार के लिए दो भागों में विभाजित किया गया था। फिल्म में भारी मात्रा में अश्लील शब्द और हिंसा के कई दृश्य होने के कारण केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड से इसे केवल वयस्क प्रमाणीकरण मिला। फिल्म का संगीत, पारंपरिक भारतीय लोक गीतों से बहुत प्रभावित था। भाग दो को पूरे भारत में आठ अगस्त दो हज़ार बारह को प्रदर्शित किया गया था। फिल्म के दोनों भागों का आलोचकों द्वारा प्रशंसित किया गया था। संयुक्त फिल्म ने साठवीं राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ ऑडिगोग्राफी, फाइनल मिश्रित ट्रैक के पुनः रिकॉर्डिस्ट और अभिनय के लिए विशेष उल्लेख जीता था। फिल्म ने अट्ठावनवें फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में सर्वश्रेष्ठ फिल्म और सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री समेत चार फिल्मफेयर पुरस्कार जीते, हालांकि किसी भी वित्तीय मानक से भारी सफल नहीं होने के बावजूद, अट्ठारह.पाँच करोड़ के कम संयुक्त बजट के कारण, पचास.इक्यासी करोड़ की शुद्ध घरेलू कमाई के साथ व्यावसायिक रूप से सफल रही। इसे कई आधुनिक पंथ फिल्म के रूप में माना जाता है। . आठxदस तस्वीर नामक फ़िल्म के प्रदर्शन के बाद इस वर्ष फ़िल्म निर्माताओं की हड़ताल आरम्भ हो गई थी जिसका कारण टिकटघर से सम्बंधित है, यह हड़ताल जून माह के शुरू में बन्द हुई। . यह पृष्ठ दो हज़ार दस में निर्मित बॉलीवुड फ़िल्मों की एक सूची है। टिकट खिड़की पर तीस उच्चतम अर्जक फ़िल्मों की सूची में छः फ़िल्में शामिल हुई। इस वर्ष की उच्चतम दस फ़िल्मों द्वारा अर्जित राशी थी, जो दो हज़ार नौ में आर्जित राशी से तुलना करने पर इसमें प्रतिशत वृद्धि ग्यारह.इकहत्तर% हुई। दो हज़ार दस में पहली बार यह आँकड़ा पार हुआ केवल उच्चतम अर्जक दस फ़िल्में के अंक को पार कर गई। यह बॉलीवुड के इतिहास में पहली बार था कि दो फ़िल्में दबंग और गोलमाल तीन ने से अधिक धन अर्जित किया। निम्नलिखित दस फ़िल्में बॉलीवुड की दो हज़ार दस की सर्वश्रेष्ठ अर्जक फ़िल्में हैं। . यह बॉलीवुड फ़िल्म इंडस्ट्री द्वारा दो हज़ार ग्यारह में निर्मित फ़िल्मों की सूची है। वर्ष के दौरान व्यावसायिक तौर पर एवं समीक्षकों की दृष्टि से विभिन्न सफल फ़िल्में जारी की गई। आठ फिल्मों ने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर सबसे अधिक कमाई करने वाली शीर्ष तीस हिन्दी फ़िल्मों की सूची में जगह बनाई। प्रमुख दर्शनीय फ़िल्मों का संक्षिप्त विश्लेषण निम्न प्रकार है. |
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- 1 hr ago SDM ज्योति मौर्या पर बने Bhojpuri गाने ने किया धमाका, रिलीज होते ही धड़ल्ले से वायरल!
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Esha Gupta Wedding Look: बॉलीवुड बोल्डनेस सेंसेशन ईशा गुप्ता आए दिन अपने बोल्ड अवतार को लेकर छाई रहती हैं। अब एक बार फिर से ईशा गुप्ता ने अपना सुपरबोल्ड अवतार फैंस के साथ शेयर किया है जो कि काफी तेजी से वायरल हो रहा है। दिलचस्प बात ये है कि ये ईशा का वेडिंग सीजन लुक है। दरअसल हाल ही में ईशा किसी शादी में शिरकत करने के लिए पहुंची थीं। ऐसे में उन्होंने तैयार होकर अपना बोल्ड अवतार ड्रॉप कर हर किसी की नींदे उड़ा दी हैं।
ईशा गुप्ता के इस लुक की बात करें तो एक्ट्रेस इस दौरान बॉडी फिट वन पीस में काफी बोल्ड अंदाज में दिखाई दे रही हैं। इसके साथ ही ईशा इस तस्वीर में काफी कॉन्फिटेंड और डेयरिंग लुक में नजर आ रही हैं। ईशा की इस तस्वीर पर फैंस भर भरकर लाइक और शेयर की बरसात कर रहे हैं।
कमेंट सेक्शन में भी ईशा की तारीफों की बाढ़ सी आ रही हैं। इसके साथ ही काफी सारे यूजर्स ईशा के इस बोल्ड लुक पर मजेदार रिएक्शंस भी दे रहे हैं। एक यूजर ने यहां तक लिख दिया, "बाबा निराला के कमरे में हो क्या? " तो वहीं दूसरे यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा, "इस लुक में बाबा निराला से बचकर ही रहना। " तो वहीं एक यूजर ने लिखा, "शादी में जा रही हो या बाबा निराला को बहलाने? " इसके साथ ही एक ने लिखा, "इस हाल में दूल्हे ने देखा तो दुल्हनिया को छोड़ ईशा के पास ही आ बैठएगा। "
बता दें कि ईशा गुप्ता बहुत जल्द एमएक्स प्लेयर की बेव सीरीज 'आश्रम' में दिखाई देने वाली हैं। इस सीरीज का सभी को काफी बेसब्री से इंतजार है। सीरीज के ट्रेलर में ही ईशा का गजब का बोल्ड अंदाज देखने को मिला है। इसी को लेकर फैंस कमेंट सेक्शन में मजेदार रिएक्शन भी दे रहे हैं।
ईशा गुप्ता सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और आए दिन अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ से जुड़े अपडेट्स फैंस के साथ तस्वीरों और वीडियो के जरिए शेयर करती रहती हैं। ईशा के बोल्ड लुक्स मिनटों में वायरल हो जाते हैं।
| - छः मिनट ago Jawan प्रीव्यू में शाहरुख खान के bald लुक पर मचा बवाल, फैंस के उड़ गए होश, बोले- विलेन बनता हूं तो. . - बत्तीस मिनट ago अरशद वारसी से इस दिग्गज एक्टर ने कहा था - 'ये सब एक दिन चला जाएगा, काम ही नहीं होगा' - एक hr ago SDM ज्योति मौर्या पर बने Bhojpuri गाने ने किया धमाका, रिलीज होते ही धड़ल्ले से वायरल! Don't Miss! Esha Gupta Wedding Look: बॉलीवुड बोल्डनेस सेंसेशन ईशा गुप्ता आए दिन अपने बोल्ड अवतार को लेकर छाई रहती हैं। अब एक बार फिर से ईशा गुप्ता ने अपना सुपरबोल्ड अवतार फैंस के साथ शेयर किया है जो कि काफी तेजी से वायरल हो रहा है। दिलचस्प बात ये है कि ये ईशा का वेडिंग सीजन लुक है। दरअसल हाल ही में ईशा किसी शादी में शिरकत करने के लिए पहुंची थीं। ऐसे में उन्होंने तैयार होकर अपना बोल्ड अवतार ड्रॉप कर हर किसी की नींदे उड़ा दी हैं। ईशा गुप्ता के इस लुक की बात करें तो एक्ट्रेस इस दौरान बॉडी फिट वन पीस में काफी बोल्ड अंदाज में दिखाई दे रही हैं। इसके साथ ही ईशा इस तस्वीर में काफी कॉन्फिटेंड और डेयरिंग लुक में नजर आ रही हैं। ईशा की इस तस्वीर पर फैंस भर भरकर लाइक और शेयर की बरसात कर रहे हैं। कमेंट सेक्शन में भी ईशा की तारीफों की बाढ़ सी आ रही हैं। इसके साथ ही काफी सारे यूजर्स ईशा के इस बोल्ड लुक पर मजेदार रिएक्शंस भी दे रहे हैं। एक यूजर ने यहां तक लिख दिया, "बाबा निराला के कमरे में हो क्या? " तो वहीं दूसरे यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा, "इस लुक में बाबा निराला से बचकर ही रहना। " तो वहीं एक यूजर ने लिखा, "शादी में जा रही हो या बाबा निराला को बहलाने? " इसके साथ ही एक ने लिखा, "इस हाल में दूल्हे ने देखा तो दुल्हनिया को छोड़ ईशा के पास ही आ बैठएगा। " बता दें कि ईशा गुप्ता बहुत जल्द एमएक्स प्लेयर की बेव सीरीज 'आश्रम' में दिखाई देने वाली हैं। इस सीरीज का सभी को काफी बेसब्री से इंतजार है। सीरीज के ट्रेलर में ही ईशा का गजब का बोल्ड अंदाज देखने को मिला है। इसी को लेकर फैंस कमेंट सेक्शन में मजेदार रिएक्शन भी दे रहे हैं। ईशा गुप्ता सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और आए दिन अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ से जुड़े अपडेट्स फैंस के साथ तस्वीरों और वीडियो के जरिए शेयर करती रहती हैं। ईशा के बोल्ड लुक्स मिनटों में वायरल हो जाते हैं। |
भारतीय टीम के स्टार बल्लेबाज शुभमन गिल ने बीते कुछ महीनों में शानदार खेल दिखाया है. उनके इस प्रदर्शन ने शिखर धवन की टीम में वापसी की उम्मीदों को कम कर दिया है.
नई दिल्ली. भारतीय टीम के गब्बर यानी शिखर धवन ऐसे खिलाड़ी हैं जो कभी भी अपने दिल की बात कहने से डरते नहीं है. जो उनके दिल में होता है वहीं जुबान पर भी. पूरी दुनिया ये मान कर चल रही है कि युवा बल्लेबाज शुभमन गिल के रहते हुए टीम में धवन की वापसी नहीं होने वाली है. धवन का कहना है कि उन्हें अपनी वापसी का यकीन है लेकिन साथ ही ये भी माना कि मौजूदा समय में शुभमन गिल टीम इंडिया में बने रहने के हकदार हैं.
शिखर धवन ने बीते साल रोहित शर्मा की गैरमौजूदगी में वनडे टीम की कप्तानी की थी हालांकि रोहित की वापसी के साथ ही टीम से उनका पत्ता कट जाता था. ओपनर के तौर रोहित शर्मा को शुभमन गिल में एक अच्छा पार्टनर मिला है. इस बात से शिखर धवन भी सहमत हैं.
धवन का मानना है कि वो दो साल से टीम इंडिया से बाहर हैं लेकिन ऐसा समय हर खिलाड़ी के करियर में आता है. वो बीते दो साल से केवल वनडे फॉर्मेट में खेल रहे हैं जबकि शुभमन गिल तीनों फॉर्मेट में शतक लगा चुके हैं. धवन ने एक इंटरव्यू में कहा कि शुभमन को अच्छे प्रदर्शन के दम पर ही टीम में जगह मिली है. टीम इंडिया के गब्बर ने आगे ये भी कहा कि अगर वो चीफ सेलेक्टर होते तो खुद इस समय शुभमन गिल को ही टीम में मौका देते. शुभमन गिल मौजूदा समय में टीम के भरोसेमंद सलामी बल्लेबाज हैं. उन्होंने इसी साल तीनों फॉर्मेट में शतकीय पारी खेली है जिसमें टेस्ट क्रिकेट का दोहरा शतक भी शामिल है.
धवन को टीम इंडिया में वापसी की उम्मीद हैं. उन्होंने अब तक हार नहीं मानी है. इस सलामी बल्लेबाज को मैजिक होने का इंतजार है. जब भी ये मैजिक होगा और उन्हें टीम में जगह मिलेगी वो इसे हाथ से जाने नहीं देंगे. 31 मार्च से शुरू होने वाले आईपीएल में धवन पंजाब किंग्स की कप्तानी करते हुए नजर आएंगे. इस खिलाड़ी को अपने इस रोल पर गर्व हैं. उन्हें लगता है कि करियर के किसी भी मोड़ पर एक टीम की कप्तानी करना बहुत बड़ी बात होती है.
| भारतीय टीम के स्टार बल्लेबाज शुभमन गिल ने बीते कुछ महीनों में शानदार खेल दिखाया है. उनके इस प्रदर्शन ने शिखर धवन की टीम में वापसी की उम्मीदों को कम कर दिया है. नई दिल्ली. भारतीय टीम के गब्बर यानी शिखर धवन ऐसे खिलाड़ी हैं जो कभी भी अपने दिल की बात कहने से डरते नहीं है. जो उनके दिल में होता है वहीं जुबान पर भी. पूरी दुनिया ये मान कर चल रही है कि युवा बल्लेबाज शुभमन गिल के रहते हुए टीम में धवन की वापसी नहीं होने वाली है. धवन का कहना है कि उन्हें अपनी वापसी का यकीन है लेकिन साथ ही ये भी माना कि मौजूदा समय में शुभमन गिल टीम इंडिया में बने रहने के हकदार हैं. शिखर धवन ने बीते साल रोहित शर्मा की गैरमौजूदगी में वनडे टीम की कप्तानी की थी हालांकि रोहित की वापसी के साथ ही टीम से उनका पत्ता कट जाता था. ओपनर के तौर रोहित शर्मा को शुभमन गिल में एक अच्छा पार्टनर मिला है. इस बात से शिखर धवन भी सहमत हैं. धवन का मानना है कि वो दो साल से टीम इंडिया से बाहर हैं लेकिन ऐसा समय हर खिलाड़ी के करियर में आता है. वो बीते दो साल से केवल वनडे फॉर्मेट में खेल रहे हैं जबकि शुभमन गिल तीनों फॉर्मेट में शतक लगा चुके हैं. धवन ने एक इंटरव्यू में कहा कि शुभमन को अच्छे प्रदर्शन के दम पर ही टीम में जगह मिली है. टीम इंडिया के गब्बर ने आगे ये भी कहा कि अगर वो चीफ सेलेक्टर होते तो खुद इस समय शुभमन गिल को ही टीम में मौका देते. शुभमन गिल मौजूदा समय में टीम के भरोसेमंद सलामी बल्लेबाज हैं. उन्होंने इसी साल तीनों फॉर्मेट में शतकीय पारी खेली है जिसमें टेस्ट क्रिकेट का दोहरा शतक भी शामिल है. धवन को टीम इंडिया में वापसी की उम्मीद हैं. उन्होंने अब तक हार नहीं मानी है. इस सलामी बल्लेबाज को मैजिक होने का इंतजार है. जब भी ये मैजिक होगा और उन्हें टीम में जगह मिलेगी वो इसे हाथ से जाने नहीं देंगे. इकतीस मार्च से शुरू होने वाले आईपीएल में धवन पंजाब किंग्स की कप्तानी करते हुए नजर आएंगे. इस खिलाड़ी को अपने इस रोल पर गर्व हैं. उन्हें लगता है कि करियर के किसी भी मोड़ पर एक टीम की कप्तानी करना बहुत बड़ी बात होती है. |
हाल ही में लॉन्च हुए एक वीडियो में आंटियों से रेप की वजहों पर बात कमेंट करने की बजाय रेप की सोच से लड़ने की बात कही गई है.
ये वो समझाइश है जो हर लड़की को वक्त-बेवक्त मुफ्त में मिलती है. कहां से मिलती है? आपकी शुभचिन्तक आंटी हैं ना उन्हें सबकी फिकर है, वो सब जानती हैं, वही हैं जो आपको सलाह देती हैं, सलाह देने के चक्कर में ताने मार जाती हैं, आप पर भड़ास उतारती हैं फिर कहती हैं कि उनका इरादा नेक है.
इसी पर फोकस करते हुए 'युवा' नाम के यू-ट्यूब चैनल पर एक वीडियो पोस्ट किया गया है. ये वीडियो देश में बढ़ रहे रेप कल्चर, उससे जुड़ी डर और समझाइशों की बात कर रहा है.
इस वीडियो की खास बात ये है कि इसमें किसी को गलत बताने की बजाय मामले को सुलझाने की सोच रखी गई है. वीडियो शुरू होता है तो लगता है कि यंग लड़कियां सिर्फ आंटी पर दोषी ठहरा रही थीं, मगर धीरे-धीरे वीडियो में नया मोड़ आता है. लड़कियां आंटी के बीते कल की बात करती हैं. आंटियों ने भी ये सब खूब झेला है, उन्हें भी डीप नेक ब्लाउज पहनने पर जज किया जाता था.
आखिर में लड़कियां आंटी से एक-दूसरे पर की जा रही तानेबाजी से दूर होने की बात करती हैं. वो कहती हैं- अब बस हो गया, चलो और मैं एक बार बैठ कर बात करते हैं, ये रेप के कमेन्ट पे नही, इस रेप के कल्चर से ही लड़ते हैं.
जाहिर है कि हाल में ही दिल्ली की कुछ लडकियों का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें एक लड़की के छोटे कपड़े पहनने पर वहां मौजूद एक आंटी ने लड़की के रेप हो जाने की बात कही थी. इस वजह से आंटी को खूब ट्रोल किया गया था. 'युवा' का ये वीडियो उसी वीडियो का जवाब है.
| हाल ही में लॉन्च हुए एक वीडियो में आंटियों से रेप की वजहों पर बात कमेंट करने की बजाय रेप की सोच से लड़ने की बात कही गई है. ये वो समझाइश है जो हर लड़की को वक्त-बेवक्त मुफ्त में मिलती है. कहां से मिलती है? आपकी शुभचिन्तक आंटी हैं ना उन्हें सबकी फिकर है, वो सब जानती हैं, वही हैं जो आपको सलाह देती हैं, सलाह देने के चक्कर में ताने मार जाती हैं, आप पर भड़ास उतारती हैं फिर कहती हैं कि उनका इरादा नेक है. इसी पर फोकस करते हुए 'युवा' नाम के यू-ट्यूब चैनल पर एक वीडियो पोस्ट किया गया है. ये वीडियो देश में बढ़ रहे रेप कल्चर, उससे जुड़ी डर और समझाइशों की बात कर रहा है. इस वीडियो की खास बात ये है कि इसमें किसी को गलत बताने की बजाय मामले को सुलझाने की सोच रखी गई है. वीडियो शुरू होता है तो लगता है कि यंग लड़कियां सिर्फ आंटी पर दोषी ठहरा रही थीं, मगर धीरे-धीरे वीडियो में नया मोड़ आता है. लड़कियां आंटी के बीते कल की बात करती हैं. आंटियों ने भी ये सब खूब झेला है, उन्हें भी डीप नेक ब्लाउज पहनने पर जज किया जाता था. आखिर में लड़कियां आंटी से एक-दूसरे पर की जा रही तानेबाजी से दूर होने की बात करती हैं. वो कहती हैं- अब बस हो गया, चलो और मैं एक बार बैठ कर बात करते हैं, ये रेप के कमेन्ट पे नही, इस रेप के कल्चर से ही लड़ते हैं. जाहिर है कि हाल में ही दिल्ली की कुछ लडकियों का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें एक लड़की के छोटे कपड़े पहनने पर वहां मौजूद एक आंटी ने लड़की के रेप हो जाने की बात कही थी. इस वजह से आंटी को खूब ट्रोल किया गया था. 'युवा' का ये वीडियो उसी वीडियो का जवाब है. |
Thursday Remedies in Hindi: गुरुवार का दिन भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए अति उत्तम माना गया है। मान्यता है कि इस दिन कुछ खास उपायों को करके धन प्राप्ति की जा सकती है।
Guruwar Ke Upay, Thursday Remedies in Hindi: गुरुवार का दिन भगवान विष्णु, देवगुरु बृहस्पति व माता लक्ष्मी को समर्पित है। इस दिन लोग भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी के साथ गुरु ग्रह को प्रसन्न करने के लिए कई उपाय करते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अगर जातक की जन्मकुंडली में गुरु ग्रह मजबूत स्थिति में हो तो जातक को जीवन में खूब तरक्की हासिल होती है। सभी कार्यों में सफलता हासिल होती है। आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। अगर गुरु ग्रह कमजोर स्थिति में हो तो जातक को कार्यों में असफलताओं का सामना करना पड़ता है। आर्थिक तंगी घेरती है। ऐसे में ज्योतिष शास्त्र में कुछ खास उपाय बताए गए हैं जिन्हें अपनाकर आप धन संबंधी परेशानियों से मुक्ति पा सकते हैं।
इस साल विजया एकादशी 16 फरवरी 2023, गुरुवार को पड़ रही है। एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है। ऐसे में गुरुवार के दिन एकादशी पड़ने से इस दिन का महत्व और बढ़ रहा है।
1. मान्यता है कि गुरुवार के दिन पानी में हल्दी डालकर नहाने से भगवान बृहस्पति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसके साथ ही गुरुवार के दिन केले के पेड़ की पूजा करना फलकारी माना जाता है।
2. बृहस्पतिवार (गुरुवार) के दिन भगवान सत्यनारायण की कथा सुनना शुभ माना जाता हैं। इसके साथ ही पीले रंग के कपड़े और पपीते की डल गले में पहनना शुभ माना जाता है।
3. कहते हैं कि गुरुवार को किसी को न ही उधार देना चाहिए और न ही लेना चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से जातक की कुंडली में गुरु की स्थिति खराब हो सकती है, जिसके कारण आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है।
4. गुरुवार के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना चाहिए। कहते हैं कि स्नान के बाद 'ॐ बृ बृहस्पते नमः' का जाप करने से धन-संपदा में तरक्की होती है।
5. मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की प्रतिमा व चित्र का सामने घी का दीया जलाने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
5. कहते हैं कि भगवान बृहस्पति को पीले रंग अतिप्रिय है। इसलिए इस दिन ब्राह्मणों को पीले रंग की वस्तुएं जैसे- चने की दाल, फल आदि दान करना चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से घर में बरकत होती है।
6. अगर प्रमोशन या रोजगार संबंधी बाधा आ रही हो तो गुरुवार को किसी मंदिर में पीली वस्तुएं जैसे फल, कपड़े इत्यादि का दान करना शुभ माना जाता है। कहते हैं कि ऐसा करने से विवाह संबंधी और अन्य बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
7. घर से दरिद्रता दूर करने के लिए गुरुवार के दिन घर के सदस्य खासतौर पर महिलाओं के बाल धोने से मनाही होती है। कहते हैं कि इस दिन नाखून काटना भी अशुभ होता है।
(नोट-इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। )
| Thursday Remedies in Hindi: गुरुवार का दिन भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए अति उत्तम माना गया है। मान्यता है कि इस दिन कुछ खास उपायों को करके धन प्राप्ति की जा सकती है। Guruwar Ke Upay, Thursday Remedies in Hindi: गुरुवार का दिन भगवान विष्णु, देवगुरु बृहस्पति व माता लक्ष्मी को समर्पित है। इस दिन लोग भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी के साथ गुरु ग्रह को प्रसन्न करने के लिए कई उपाय करते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अगर जातक की जन्मकुंडली में गुरु ग्रह मजबूत स्थिति में हो तो जातक को जीवन में खूब तरक्की हासिल होती है। सभी कार्यों में सफलता हासिल होती है। आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। अगर गुरु ग्रह कमजोर स्थिति में हो तो जातक को कार्यों में असफलताओं का सामना करना पड़ता है। आर्थिक तंगी घेरती है। ऐसे में ज्योतिष शास्त्र में कुछ खास उपाय बताए गए हैं जिन्हें अपनाकर आप धन संबंधी परेशानियों से मुक्ति पा सकते हैं। इस साल विजया एकादशी सोलह फरवरी दो हज़ार तेईस, गुरुवार को पड़ रही है। एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है। ऐसे में गुरुवार के दिन एकादशी पड़ने से इस दिन का महत्व और बढ़ रहा है। एक. मान्यता है कि गुरुवार के दिन पानी में हल्दी डालकर नहाने से भगवान बृहस्पति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसके साथ ही गुरुवार के दिन केले के पेड़ की पूजा करना फलकारी माना जाता है। दो. बृहस्पतिवार के दिन भगवान सत्यनारायण की कथा सुनना शुभ माना जाता हैं। इसके साथ ही पीले रंग के कपड़े और पपीते की डल गले में पहनना शुभ माना जाता है। तीन. कहते हैं कि गुरुवार को किसी को न ही उधार देना चाहिए और न ही लेना चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से जातक की कुंडली में गुरु की स्थिति खराब हो सकती है, जिसके कारण आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है। चार. गुरुवार के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना चाहिए। कहते हैं कि स्नान के बाद 'ॐ बृ बृहस्पते नमः' का जाप करने से धन-संपदा में तरक्की होती है। पाँच. मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की प्रतिमा व चित्र का सामने घी का दीया जलाने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। पाँच. कहते हैं कि भगवान बृहस्पति को पीले रंग अतिप्रिय है। इसलिए इस दिन ब्राह्मणों को पीले रंग की वस्तुएं जैसे- चने की दाल, फल आदि दान करना चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से घर में बरकत होती है। छः. अगर प्रमोशन या रोजगार संबंधी बाधा आ रही हो तो गुरुवार को किसी मंदिर में पीली वस्तुएं जैसे फल, कपड़े इत्यादि का दान करना शुभ माना जाता है। कहते हैं कि ऐसा करने से विवाह संबंधी और अन्य बाधाओं से मुक्ति मिलती है। सात. घर से दरिद्रता दूर करने के लिए गुरुवार के दिन घर के सदस्य खासतौर पर महिलाओं के बाल धोने से मनाही होती है। कहते हैं कि इस दिन नाखून काटना भी अशुभ होता है। |
कुछ कहा, उसने ध्यान से सुना, सवालों के जवाब भी दिए, लेकिन सिर्फ उन्हींके सहारे किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सकता था। मैं कभीकभी सोचने लगी, मेरी और उसकी ज़िन्दगी की रूप-रेखा क्या वनेगी ?
लेकिन उसका सम्मोहन था कि उसे देखते ही मैं सब कुछ भूल जाती । उसके घर होती तो लगता, वह मेरा अपना घर है । हमेशा से मैं वहां रहती जा रही हूं । अपने घर आती तो भरोसा नहीं होता, मैं उसके पास से आ रही हूं। उसका घर मेरा अपना घर था ।...अजीव कशमकश थी ।
"एक उलझन होने लगी है मुझे ।" एक दिन मैंने उससे कहा । "उलझन होने लगी ?" वह मुस्कराया । "मजाक नहीं, मैं सच कह रही हूं । " "कहिए ।"
"आपके पास रहती हूं तो लगता है, कभी अलग नहीं होना । ऐसे ही रहती जाऊंगी । चली जाती हूं तो लगता है, पता नहीं फिर कव मुलाकातं हो ।
"रोज़ ही तो मिलते हैं । ऐसा क्यों लगता है ?" "पता नहीं । यही तो पूछना चाहती थी ।" "यह तो आप बताएंगी ।"
"मुझे पता होता तो मैं आपसे क्यों पूछती ?"
"आपको मुझसे कोई शिकायत है ?"
सत्यजित से किसीको क्या शिकायत हो सकती है ? ••• शिकायत का मौका वह कभी किसीको नहीं देता ।
"नहीं।" मैंने कहा । "मुझपर भरोसा नहीं ?" "है।"
"ऐसा क्यों लगता है आपको ?" जरा देर रुककर उसने फिर कहा : "अच्छा छोड़िए, इस विषय पर फिर बात करेंगे।"
उसकी इतनी बात से मुझे तब तसल्ली मिल गई थी। मैं जानती थी, यह उसकी पुरानी आदत है । किसी उलझन में दिमाग पड़ जाए तो विषय
I कोर्ट | कुछ कहा, उसने ध्यान से सुना, सवालों के जवाब भी दिए, लेकिन सिर्फ उन्हींके सहारे किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सकता था। मैं कभीकभी सोचने लगी, मेरी और उसकी ज़िन्दगी की रूप-रेखा क्या वनेगी ? लेकिन उसका सम्मोहन था कि उसे देखते ही मैं सब कुछ भूल जाती । उसके घर होती तो लगता, वह मेरा अपना घर है । हमेशा से मैं वहां रहती जा रही हूं । अपने घर आती तो भरोसा नहीं होता, मैं उसके पास से आ रही हूं। उसका घर मेरा अपना घर था ।...अजीव कशमकश थी । "एक उलझन होने लगी है मुझे ।" एक दिन मैंने उससे कहा । "उलझन होने लगी ?" वह मुस्कराया । "मजाक नहीं, मैं सच कह रही हूं । " "कहिए ।" "आपके पास रहती हूं तो लगता है, कभी अलग नहीं होना । ऐसे ही रहती जाऊंगी । चली जाती हूं तो लगता है, पता नहीं फिर कव मुलाकातं हो । "रोज़ ही तो मिलते हैं । ऐसा क्यों लगता है ?" "पता नहीं । यही तो पूछना चाहती थी ।" "यह तो आप बताएंगी ।" "मुझे पता होता तो मैं आपसे क्यों पूछती ?" "आपको मुझसे कोई शिकायत है ?" सत्यजित से किसीको क्या शिकायत हो सकती है ? ••• शिकायत का मौका वह कभी किसीको नहीं देता । "नहीं।" मैंने कहा । "मुझपर भरोसा नहीं ?" "है।" "ऐसा क्यों लगता है आपको ?" जरा देर रुककर उसने फिर कहा : "अच्छा छोड़िए, इस विषय पर फिर बात करेंगे।" उसकी इतनी बात से मुझे तब तसल्ली मिल गई थी। मैं जानती थी, यह उसकी पुरानी आदत है । किसी उलझन में दिमाग पड़ जाए तो विषय I कोर्ट |
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
उत्तरी भाई द्वीप भारत के अण्डमान व निकोबार द्वीपसमूह के अण्डमान द्वीपसमूह भाग में रटलैण्ड द्वीप और छोटे अण्डमान के बीच डंकन जलसन्धि में स्थित एक छोटा-सा टापू है। यह एक निर्जन द्वीप है (यहाँ कोई नहीं रहता)। यह महात्मा गांधी समुद्री राष्ट्रीय उद्यान का हिस्सा है। यह छोटे अण्डमान द्वीप से १९ किमी पूर्वोत्तर पर स्थित है। . नियाग्रा जल प्रपात के निकट एक पोखर मध्य यूरोप का एक पोखर उदयपुर में एक छोटा सा कृत्रिम तालाब, जो कि जल महल के निकट बना है। एक औपचारिक रॉक गार्डन जिसमें सरोवर और झरना है। तालाब या पोखर ऐसे जल-भरे गड्ढे को कहते हैं जो झील से छोटा हो, हालाँकि झील और तालाब के आकारों में अंतर बताने के लिये कोई औपचारिक मापदंड नहीं है। इनका मोटा-मोटा नाप लगभग २ हेक्टेयर से ८ हेक्टेयर तक का होता है। संयुक्त राजशाही में चैरिटी पॉण्ड कन्ज़र्वेशन नामक संस्था की परिभाषा के अनुसार 'तालाब एक कृत्रिम या प्राकृतिक जलाशय है जिसका सतही माप १ वर्ग मी.
उत्तरी भाई द्वीप और तालाब आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)।
उत्तरी भाई द्वीप 18 संबंध है और तालाब 3 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (18 + 3)।
यह लेख उत्तरी भाई द्वीप और तालाब के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
| शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। उत्तरी भाई द्वीप भारत के अण्डमान व निकोबार द्वीपसमूह के अण्डमान द्वीपसमूह भाग में रटलैण्ड द्वीप और छोटे अण्डमान के बीच डंकन जलसन्धि में स्थित एक छोटा-सा टापू है। यह एक निर्जन द्वीप है । यह महात्मा गांधी समुद्री राष्ट्रीय उद्यान का हिस्सा है। यह छोटे अण्डमान द्वीप से उन्नीस किमी पूर्वोत्तर पर स्थित है। . नियाग्रा जल प्रपात के निकट एक पोखर मध्य यूरोप का एक पोखर उदयपुर में एक छोटा सा कृत्रिम तालाब, जो कि जल महल के निकट बना है। एक औपचारिक रॉक गार्डन जिसमें सरोवर और झरना है। तालाब या पोखर ऐसे जल-भरे गड्ढे को कहते हैं जो झील से छोटा हो, हालाँकि झील और तालाब के आकारों में अंतर बताने के लिये कोई औपचारिक मापदंड नहीं है। इनका मोटा-मोटा नाप लगभग दो हेक्टेयर से आठ हेक्टेयर तक का होता है। संयुक्त राजशाही में चैरिटी पॉण्ड कन्ज़र्वेशन नामक संस्था की परिभाषा के अनुसार 'तालाब एक कृत्रिम या प्राकृतिक जलाशय है जिसका सतही माप एक वर्ग मी. उत्तरी भाई द्वीप और तालाब आम में शून्य बातें हैं । उत्तरी भाई द्वीप अट्ठारह संबंध है और तालाब तीन है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख उत्तरी भाई द्वीप और तालाब के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः |
किसान फसलों में यूरिया के अलावा फास्फोरस और पोटाश जैसे पोषक उर्वरकों का भी उपयोग बढाए, इसके लिए केंद्र सरकार ने पोषक तत्वों पर आधारित उर्वरकों पर मिलने वाली सब्सिडी बढाने का फैसला किया है। वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान फॉस्फोरस, पोटाश, सल्फर और नाइट्रोजन वाले इन उर्वरकों पर सब्सिडी बढ़ाने से खजाने पर 22875. 50 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा। इस आशय का फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को यहां आयोजित हुई मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति -सीसीईए- की बैठक में लिया गया।
बैठक के बाद केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि देश में यूरिया की अधिक खपत होती है, लेकिन खेती के लिए नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और सल्फर वाले पोषक तत्वों पर आधारित उर्वरक भी महत्वपूर्ण हैं। इन उर्वरकों की खपत बढ़ सके, इसके लिए सरकार इस पर दी जा रही सब्सिडी में बढ़ोतरी का फैसला किया है।
उन्होंने बताया कि अभी सल्फर पर प्रति किलो 2. 77 रुपए की सब्सिडी दी जा रही है जिसे अब बढ़ाकर 3. 56 रुपए प्रति किलो कर दिया गया है। इसी प्रकार अब नाइट्रोजन पर 18. 90 रुपये, फास्फोरस पर 15. 11 रुपये और पोटाश पर 11. 12 रुपये प्रति किलो को मंजूरी दी गई है। उल्लेखनीय है कि पोषण आधारित सब्सिडी कार्यक्रम की शुरुआत एक अप्रैल 2010 से की गई थी।
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| किसान फसलों में यूरिया के अलावा फास्फोरस और पोटाश जैसे पोषक उर्वरकों का भी उपयोग बढाए, इसके लिए केंद्र सरकार ने पोषक तत्वों पर आधारित उर्वरकों पर मिलने वाली सब्सिडी बढाने का फैसला किया है। वित्त वर्ष दो हज़ार उन्नीस-बीस के दौरान फॉस्फोरस, पोटाश, सल्फर और नाइट्रोजन वाले इन उर्वरकों पर सब्सिडी बढ़ाने से खजाने पर बाईस हज़ार आठ सौ पचहत्तर. पचास करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा। इस आशय का फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को यहां आयोजित हुई मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति -सीसीईए- की बैठक में लिया गया। बैठक के बाद केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि देश में यूरिया की अधिक खपत होती है, लेकिन खेती के लिए नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और सल्फर वाले पोषक तत्वों पर आधारित उर्वरक भी महत्वपूर्ण हैं। इन उर्वरकों की खपत बढ़ सके, इसके लिए सरकार इस पर दी जा रही सब्सिडी में बढ़ोतरी का फैसला किया है। उन्होंने बताया कि अभी सल्फर पर प्रति किलो दो. सतहत्तर रुपयापए की सब्सिडी दी जा रही है जिसे अब बढ़ाकर तीन. छप्पन रुपयापए प्रति किलो कर दिया गया है। इसी प्रकार अब नाइट्रोजन पर अट्ठारह. नब्बे रुपयापये, फास्फोरस पर पंद्रह. ग्यारह रुपयापये और पोटाश पर ग्यारह. बारह रुपयापये प्रति किलो को मंजूरी दी गई है। उल्लेखनीय है कि पोषण आधारित सब्सिडी कार्यक्रम की शुरुआत एक अप्रैल दो हज़ार दस से की गई थी। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen. |
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