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रांचीः राज्यसभा चुनाव 2016 हॉर्स ट्रेडिंग मामले में अभियुक्त निलंबित एडीजी अनुराग गुप्ता की याचिका पर झारखंड हाई कोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई।
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट से एडीजी अनुराग गुप्ता को बड़ी राहत मिली है। अदालत ने गुप्ता को मिली राहत फिलहाल बरकरार रखा है।
साथ ही हाई कोर्ट ने निलंबित एडीजी अनुराग गुप्ता को सरकार के जवाब का प्रतिउत्तर दाखिल करने का निर्देश दिया है।
हाई कोर्ट के निर्देश के बाद अब आईपीएस अनुराग गुप्ता के खिलाफ छह सितंबर तक किसी भी तरह की पीड़क कार्रवाई पर रोक लग गयी है।
अनुराग गुप्ता की ओर से दायर याचिका पर हाई कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनाई हुई।
बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा और अधिवक्ता अंकित ने अदालत के समक्ष पक्ष रखते हुए सरकार की ओर से कोर्ट में दाखिल किए गए जवाब का प्रतिउत्तर जमा करने के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा।
बचाव पक्ष के आग्रह को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए छह सितंबर की तिथि निर्धारित की है।
उल्लेखनीय है कि राज्यसभा चुनाव 2016 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट) लगाए जाने के राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ एडीजी अनुराग गुप्ता ने झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दायर की है।
रांची पुलिस ने तत्कालीन एडीजी सीआईडी अनिल पालटा की ओर से जारी समीक्षा रिपोर्ट के आधार पर केस में पीसी एक्ट जोड़ने के लिए गृह विभाग से पत्राचार किया था।
इसके बाद राज्य सरकार ने पीसी एक्ट जोड़ने की अनुमति रांची पुलिस केस के अनुसंधान पदाधिकारी को दे दी थी।
मामले में राज्य पुलिस के निलंबित एडीजी ने अब कोर्ट में गुहार लगाई है। एडीजी अनुराग गुप्ता ने इस मामले में अपने निलंबन वापसी को लेकर भी कोर्ट में याचिका दायर की थी।
साथ ही इस मामले में चुनाव आयोग को भेजी गई सीडी और मूलयंत्र की जल्द-से-जल्द जांच कराने की मांग भी की है।
अदालत ने उनके खिलाफ पीड़क कार्रवाई पर रोक के आदेश को अगली सुनवाई तक विस्तार दिया है।
| रांचीः राज्यसभा चुनाव दो हज़ार सोलह हॉर्स ट्रेडिंग मामले में अभियुक्त निलंबित एडीजी अनुराग गुप्ता की याचिका पर झारखंड हाई कोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट से एडीजी अनुराग गुप्ता को बड़ी राहत मिली है। अदालत ने गुप्ता को मिली राहत फिलहाल बरकरार रखा है। साथ ही हाई कोर्ट ने निलंबित एडीजी अनुराग गुप्ता को सरकार के जवाब का प्रतिउत्तर दाखिल करने का निर्देश दिया है। हाई कोर्ट के निर्देश के बाद अब आईपीएस अनुराग गुप्ता के खिलाफ छह सितंबर तक किसी भी तरह की पीड़क कार्रवाई पर रोक लग गयी है। अनुराग गुप्ता की ओर से दायर याचिका पर हाई कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनाई हुई। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा और अधिवक्ता अंकित ने अदालत के समक्ष पक्ष रखते हुए सरकार की ओर से कोर्ट में दाखिल किए गए जवाब का प्रतिउत्तर जमा करने के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा। बचाव पक्ष के आग्रह को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए छह सितंबर की तिथि निर्धारित की है। उल्लेखनीय है कि राज्यसभा चुनाव दो हज़ार सोलह में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम लगाए जाने के राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ एडीजी अनुराग गुप्ता ने झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। रांची पुलिस ने तत्कालीन एडीजी सीआईडी अनिल पालटा की ओर से जारी समीक्षा रिपोर्ट के आधार पर केस में पीसी एक्ट जोड़ने के लिए गृह विभाग से पत्राचार किया था। इसके बाद राज्य सरकार ने पीसी एक्ट जोड़ने की अनुमति रांची पुलिस केस के अनुसंधान पदाधिकारी को दे दी थी। मामले में राज्य पुलिस के निलंबित एडीजी ने अब कोर्ट में गुहार लगाई है। एडीजी अनुराग गुप्ता ने इस मामले में अपने निलंबन वापसी को लेकर भी कोर्ट में याचिका दायर की थी। साथ ही इस मामले में चुनाव आयोग को भेजी गई सीडी और मूलयंत्र की जल्द-से-जल्द जांच कराने की मांग भी की है। अदालत ने उनके खिलाफ पीड़क कार्रवाई पर रोक के आदेश को अगली सुनवाई तक विस्तार दिया है। |
नगर क्षेत्र के सहादतपुरा बाजार में खड़ी एक जिला पंचायत सदस्य के वाहन पर लगे तिरंगे झंडे को मंगलवार को सिटी मजिस्ट्रेट अमरनाथ राय ने उतरवा दिया। झंडा उतरवाने के बाद वाहन का यातायात प्रभारी ने चालान काटा। बाद में जुर्माना की राशि जमा होने के बाद वाहन को छोड़ा गया। वहीं इस दौरान सिटी मजिस्ट्रेट ने आगे से ऐसा कार्य न करने की कड़ी चेतावनी भी दी।
मंगलवार को जिला पंचायत सदस्य अवधेश बागी की कार सहादपुरा हाइडिल कालोनी के पास खड़ी थी। कार पर तिरंगा झंडा लगा हुआ था। इस दौरान उधर से सिटी मजिस्ट्रेट अमरनाथ राय गुजर रहे थे।
उनकी नजर कार पर पड़ी। उन्होंने फौरन इसको संज्ञान में लेते हुए अपनी गाड़ी से उतरकर वहां पहुंचे। जिसके बाद चालक से झंडा लगाने के संबंध में पूछताछ किया। साथ ही चालक से झंडा उतरवा लिया।
उन्होंने इसकी सूचना यातायात पुलिस को दी। जिस पर यातायात पुलिस के प्रभारी एमपी सिंह मौके पर पहुंचे और उस वाहन का चालान कर दिया। इस दौरान वहां पर काफी भीड़ जुट गई।
तभी वहां पर जिला पंचायत सदस्य अवधेश बागी भी पहुंचे। सिटी मजिस्ट्रेट ने उनको आगे से ऐसा कार्य न करने की नसीहत दी। जुर्माना भरने के बाद जिला पंचायत सदस्य अपनी गाड़ी को लेकर गए।
| नगर क्षेत्र के सहादतपुरा बाजार में खड़ी एक जिला पंचायत सदस्य के वाहन पर लगे तिरंगे झंडे को मंगलवार को सिटी मजिस्ट्रेट अमरनाथ राय ने उतरवा दिया। झंडा उतरवाने के बाद वाहन का यातायात प्रभारी ने चालान काटा। बाद में जुर्माना की राशि जमा होने के बाद वाहन को छोड़ा गया। वहीं इस दौरान सिटी मजिस्ट्रेट ने आगे से ऐसा कार्य न करने की कड़ी चेतावनी भी दी। मंगलवार को जिला पंचायत सदस्य अवधेश बागी की कार सहादपुरा हाइडिल कालोनी के पास खड़ी थी। कार पर तिरंगा झंडा लगा हुआ था। इस दौरान उधर से सिटी मजिस्ट्रेट अमरनाथ राय गुजर रहे थे। उनकी नजर कार पर पड़ी। उन्होंने फौरन इसको संज्ञान में लेते हुए अपनी गाड़ी से उतरकर वहां पहुंचे। जिसके बाद चालक से झंडा लगाने के संबंध में पूछताछ किया। साथ ही चालक से झंडा उतरवा लिया। उन्होंने इसकी सूचना यातायात पुलिस को दी। जिस पर यातायात पुलिस के प्रभारी एमपी सिंह मौके पर पहुंचे और उस वाहन का चालान कर दिया। इस दौरान वहां पर काफी भीड़ जुट गई। तभी वहां पर जिला पंचायत सदस्य अवधेश बागी भी पहुंचे। सिटी मजिस्ट्रेट ने उनको आगे से ऐसा कार्य न करने की नसीहत दी। जुर्माना भरने के बाद जिला पंचायत सदस्य अपनी गाड़ी को लेकर गए। |
चर्चा में क्यों?
केंद्र सरकार ने के.के. वेणुगोपाल के कार्यकाल को एक वर्ष के लिये बढ़ा दिया है और वेणुगोपाल को महान्यायवादी (Attorney General- AG) के रूप में नियुक्त किया है।
- यह दूसरी बार है जब केंद्र ने उनका कार्यकाल बढ़ाया है। वर्ष 2020 में वेणुगोपाल के पहले कार्यकाल को बढ़ाया गया था।
- वेणुगोपाल को वर्ष 2017 में भारत का 15वाँ महान्यायवादी नियुक्त किया गया था। उन्होंने मुकुल रोहतगी का स्थान लिया जो वर्ष 2014-2017 तक महान्यायवादी रहे।
- वह सर्वोच्च न्यायालय में लंबित कई संवेदनशील मामलों में सरकार के कानूनी बचाव की कमान संभालेंगे जिसमें संविधान के अनुच्छेद 370 और नागरिकता संशोधन अधिनियम को निरस्त करने की चुनौती शामिल है।
- परिचयः
- भारत का महान्यायवादी (AG) संघ की कार्यकारिणी का एक अंग है। AG देश का सर्वोच्च कानून अधिकारी है।
- संविधान के अनुच्छेद 76 में भारत के महान्यायवादी के पद का प्रावधान है।
- नियुक्ति और पात्रताः
- महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा सरकार की सलाह पर की जाती है।
- वह एक ऐसा व्यक्ति होना चाहिये जो सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के योग्य हो, अर्थात् वह भारत का नागरिक हो, उसे उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में कार्य करने का पाँच वर्षों का अनुभव हो या किसी उच्च न्यायालय में वकालत का 10 वर्षों का अनुभव हो अथवा राष्ट्रपति के मतानुसार वह न्यायिक मामलों का योग्य व्यक्ति हो।
- कार्यालय की अवधिः संविधान द्वारा तय नहीं।
- निष्कासनः महान्यायवादी को हटाने की प्रक्रिया और आधार संविधान में नहीं बताए गए हैं। वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है (राष्ट्रपति द्वारा किसी भी समय हटाया जा सकता है)।
- कर्तव्य और कार्यः
- ऐसे कानूनी मामलों पर भारत सरकार (Government of India- GoI) को सलाह देना, जो राष्ट्रपति द्वारा उसे भेजे जाते हैं।
- कानूनी रूप से ऐसे अन्य कर्तव्यों का पालन करना जो उसे राष्ट्रपति द्वारा सौंपे जाते हैं।
- भारत सरकार की ओर से उन सभी मामलों में जो कि भारत सरकार से संबंधित हैं, सर्वोच्च न्यायालय या किसी भी उच्च न्यायालय में उपस्थित होना।
- संविधान के अनुच्छेद 143 (सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श करने की राष्ट्रपति की शक्ति) के तहत राष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में किये गए किसी भी संदर्भ में भारत सरकार का प्रतिनिधित्व करना।
- संविधान या किसी अन्य कानून द्वारा उसे प्रदत्त कार्यों का निर्वहन करना।
- अधिकार और सीमाएंँः
- वोट देने के अधिकार के बिना उसे संसद के दोनों सदनों या उनकी संयुक्त बैठक और संसद की किसी भी समिति की कार्यवाही में बोलने तथा भाग लेने का अधिकार है, जिसका वह सदस्य नामित किया जाता है।
- वह उन सभी विशेषाधिकारों और उन्मुक्तियों का हकदार होता है जो एक संसद सदस्य को प्राप्त होते हैं।
- वह सरकारी सेवकों की श्रेणी में नहीं आता है, अतः उसे निजी कानूनी अभ्यास से वंचित नहीं किया जाता है।
- हालाँकि उसे भारत सरकार के खिलाफ किसी मामले में सलाह या संक्षिप्त जानकारी देने का अधिकार नहीं है।
- भारत के सॉलिसिटर जनरल (Solicitor General of India) और भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (Additional Solicitor General) आधिकारिक ज़िम्मेदारियों को पूरा करने में महान्यायवादी की सहायता करते हैं।
- महाधिवक्ता (अनुच्छेद 165): राज्यों से संबंधित ।
| चर्चा में क्यों? केंद्र सरकार ने के.के. वेणुगोपाल के कार्यकाल को एक वर्ष के लिये बढ़ा दिया है और वेणुगोपाल को महान्यायवादी के रूप में नियुक्त किया है। - यह दूसरी बार है जब केंद्र ने उनका कार्यकाल बढ़ाया है। वर्ष दो हज़ार बीस में वेणुगोपाल के पहले कार्यकाल को बढ़ाया गया था। - वेणुगोपाल को वर्ष दो हज़ार सत्रह में भारत का पंद्रहवाँ महान्यायवादी नियुक्त किया गया था। उन्होंने मुकुल रोहतगी का स्थान लिया जो वर्ष दो हज़ार चौदह-दो हज़ार सत्रह तक महान्यायवादी रहे। - वह सर्वोच्च न्यायालय में लंबित कई संवेदनशील मामलों में सरकार के कानूनी बचाव की कमान संभालेंगे जिसमें संविधान के अनुच्छेद तीन सौ सत्तर और नागरिकता संशोधन अधिनियम को निरस्त करने की चुनौती शामिल है। - परिचयः - भारत का महान्यायवादी संघ की कार्यकारिणी का एक अंग है। AG देश का सर्वोच्च कानून अधिकारी है। - संविधान के अनुच्छेद छिहत्तर में भारत के महान्यायवादी के पद का प्रावधान है। - नियुक्ति और पात्रताः - महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा सरकार की सलाह पर की जाती है। - वह एक ऐसा व्यक्ति होना चाहिये जो सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के योग्य हो, अर्थात् वह भारत का नागरिक हो, उसे उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में कार्य करने का पाँच वर्षों का अनुभव हो या किसी उच्च न्यायालय में वकालत का दस वर्षों का अनुभव हो अथवा राष्ट्रपति के मतानुसार वह न्यायिक मामलों का योग्य व्यक्ति हो। - कार्यालय की अवधिः संविधान द्वारा तय नहीं। - निष्कासनः महान्यायवादी को हटाने की प्रक्रिया और आधार संविधान में नहीं बताए गए हैं। वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है । - कर्तव्य और कार्यः - ऐसे कानूनी मामलों पर भारत सरकार को सलाह देना, जो राष्ट्रपति द्वारा उसे भेजे जाते हैं। - कानूनी रूप से ऐसे अन्य कर्तव्यों का पालन करना जो उसे राष्ट्रपति द्वारा सौंपे जाते हैं। - भारत सरकार की ओर से उन सभी मामलों में जो कि भारत सरकार से संबंधित हैं, सर्वोच्च न्यायालय या किसी भी उच्च न्यायालय में उपस्थित होना। - संविधान के अनुच्छेद एक सौ तैंतालीस के तहत राष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में किये गए किसी भी संदर्भ में भारत सरकार का प्रतिनिधित्व करना। - संविधान या किसी अन्य कानून द्वारा उसे प्रदत्त कार्यों का निर्वहन करना। - अधिकार और सीमाएंँः - वोट देने के अधिकार के बिना उसे संसद के दोनों सदनों या उनकी संयुक्त बैठक और संसद की किसी भी समिति की कार्यवाही में बोलने तथा भाग लेने का अधिकार है, जिसका वह सदस्य नामित किया जाता है। - वह उन सभी विशेषाधिकारों और उन्मुक्तियों का हकदार होता है जो एक संसद सदस्य को प्राप्त होते हैं। - वह सरकारी सेवकों की श्रेणी में नहीं आता है, अतः उसे निजी कानूनी अभ्यास से वंचित नहीं किया जाता है। - हालाँकि उसे भारत सरकार के खिलाफ किसी मामले में सलाह या संक्षिप्त जानकारी देने का अधिकार नहीं है। - भारत के सॉलिसिटर जनरल और भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल आधिकारिक ज़िम्मेदारियों को पूरा करने में महान्यायवादी की सहायता करते हैं। - महाधिवक्ता : राज्यों से संबंधित । |
तसव्वुफ या इस्लामी रहस्यवाद
संसार में ईश्वर की कल्पना कई रूपों में की गई है। एक रूप वह है जिसमें ईश्वर सृष्टि का कर्त्ता नहीं माना जाता है और न यही समझा जाता है कि उसे दुनिया की हालतों के जानने की कोई फिक्र है। चूंकि ईश्वर निविकार समझा जाता है, इसलिए, यदि यह कहा जाय कि उसने सृष्टि रची है अथवा वह भक्तों की प्रार्थना सुनने को कान खोले रहता है तो इससे ईश्वर में विकार का आरोप हो जाता है। यह ईश्वर वेदांत की कल्पना का ईश्वर है।
इसके विपरीत, ईसाइयों की कल्पना का ईश्वर प्रेमी और दयालु है तथा वह संसार की रक्षा और पालन उसी प्रकार करता है जैसे कोई पिता अपने परिवार का पालन करता है।
किन्तु, इस्लाम ने मूल रूप में जिस ईश्वर की कल्पना की थी, वह प्रतापी और स्वेच्छाचारी प्रभु की कल्पना थी । इस ईश्वर के सामने दलील कोई चीज नहीं थी, न मानवीय न्याय-बुद्धि का उसके आगे कोई जोर चल सकता था । अल्ला शब्द का अर्थ ही शक्ति संपन्न पुरुष होता है । इस्लाम ने ईश्वर के उन गुणों को प्रधानता दी, जिनसे प्रेम कम, भय अधिक हो सकता था । इस्लाम की धार्मिक चेतना का रूप यह था कि ईश्वर बहुत समीप से सब कुछ देख रहा है और उसकी छोटी सी भी अवज्ञा हुई तो इसका परिणाम भयानक हो सकता है। इसलिए, मनुष्य के लिए उचित यह है कि वह ईश्वर की कृपा और इच्छा पर आँखें मूंद कर निर्भर रहे । परमात्मा की दया के सामने संपूर्ण रूप से झुके रहने का भाव इस्लाम की सबसे बड़ी विशेषता थी ।
किन्तु, यह संबंध, मुख्यतः, भय और आतंक का संबंध था, जिसमें बन्दा खुदा की ओर आंख उठा कर देख भी नहीं सकता था । मनुष्य का हृदय, स्वभावतः ही, प्रेम चाहता है । आदमी की इच्छा होती है कि उसका भगवान भी उससे प्रेम करे, उसे अपने साथ हँसनेबोलने और खेलने-कूदने की आजादी दे। अतएव, खुदा और बन्देके संबंध के बारे में मुहम्मद साहब ने जो कठोरता रखी थी, यह, कालक्रम में, ढीली होने लगी और बन्दा धीरे-धीरे खुदा को वह रूप देने लगा जो प्रेम और माधुर्य के अधिक अनुकूल था । इस विकास का पहला सोपान तब प्रकट हुआ, जब नबी की मृत्यु के बाद, शियों के एक उग्र संप्रदाय ने "गुलूब और "तकसीर" के सिद्धांतों की घोषणा की। गुलूब यानी यह विश्वास कि मनुष्य ईश्वरकोटि तक पहुँच सकता है। अर्थात् स्वयं ईश्वर बन सकता है; और "तकसीर" यानी यह
विश्वास कि ईश्वर भी चाहे तो मनुष्य-रूप में प्रकट हो सकता है। इसी सिद्धांत के अनुसार, शियों ने हजरत अली में देवत्व का आरोप किया।
इसके साथ ही, एक घटना और घटी कि इस्लाम के द्वारा धार्मिकता के स्तर पर जाग्रत किये जाने पर मुस्लिम जनता के भीतर ऐसे चिन्तक उत्पन्न होने लगे जिन्हें अनेक प्रकार के प्रश्न झकझोर रहे थे। ईश्वर की प्रकृति क्या है ? सृष्टि और मानवात्मा के साथ उसका क्या संबंध है ? आत्मा का रूप क्या है और ईश्वरीय ज्ञान किसे कहते हैं ? स्पष्ट हो, ये ऐसे प्रश्न हैं जिनसे दर्शनों का उद्भव और विकास होता है । कुरान में व्यावहारिक धर्म का उपदेश तो किया गया था, किन्तु, उसमें गंभीर दर्शन का अभाव था। अब जो सृष्टिसंबंधी जिज्ञासा उत्पन्न हुई तो धीरे-धीरे इस्लामी दर्शन का भी विकास होने लगा ।
इन प्रश्नों का समाधान खोजने वालों में मोतजली संप्रदाय सब से आगे था । ये मोतजली पंडित बुद्धिवादी थे और बुद्धि के द्वारा ही वे ईश्वर का पता लगाना चाहते थे। ये बहुत कुछ उसी रास्ते से चल रहे थे जिसे उपनिषदों का ज्ञान मार्ग कहते है अथवा जिस मार्ग से शंकराचार्य ने ईश्वरसिद्धि की है । इस्लाम ने यतीवृत्ति को प्रोत्साहित नहीं किया था। किन्तु, मोतजली संप्रदाय में यती वृत्ति की भी प्रधानता होने लगी। बुद्धि के कर्कस मार्ग से चलते-चलते, यह संप्रदाय इस निष्कर्ष पर जा पहुँचा कि कुरान अपौरुषेय नहीं है और न उसे अन्तिम सत्य का व्याख्यान ही मानना चाहिए। कुरान में जो ज्ञान झलका है वह ठीक है, किन्तु त्रिकाल के लिए वह यथेष्ट समझा नहीं जा सकता। मनुष्य को और भी नई प्रेरणाएँ और नया प्रकाश मिल सकता है।
मोतजली चिन्तक निर्मुक्त विचारक थे और उनकी दृष्टि बहुत ही उदार थी। इन चिन्तकों में अलगजालो (१०५१-१११२ ई.) सर्वश्रेष्ठ दार्शनिक निकले । किन्तु, धर्म पर सोचते सोचते, वे नास्तिकता पर जा पहुँचे और धर्म मात्र से उनका विश्वास उठ गया । कुछ दिनों तक उनकी अवस्था नास्तिकों की-सी बनी रही। किन्तु, शीघ्र ही, तमाम शंकाओं के भीतर से रहस्यवाद ने उनका उद्धार किया। बुद्धि के क्लान्त हो कर बैठ जाने पर, उनके भीतर सहज ज्ञान ( इंटुइशन ) की ज्वाला घघक उठी और इस आलोकित मनोदशा में उन्होंने अभीप्सित सत्य का साक्षात्कार किया । तब से, परम्परावादियों की दलीलों को उन्होंने, बचपने का खेल, समझ कर छोड़ दिया तथा विज्ञान, दर्शन, बुद्धि और तर्क की राह उन्हें अघूरी दीखने लगी। उन्होंने कहा है कि तर्क से हम उसे प्राप्त कर सकते हैं जो सापेक्ष ( अर्थात् बुद्धिगम्य) है; उसे नहीं, जो निरपेक्ष ( अथवा ज्ञानातीत ) है । निरपेक्ष सत्य को जानने के लिए मनुष्य को सहज ज्ञान को छोड़कर और कोई चारा नहीं है। इस अनुभूति के प्राप्त होते ही, गजाली सिमट कर एकांत में चले गये और समाधि एवं सहज ज्ञान के द्वारा अपनी साधना में संलग्न हो गये। इस समाधि से सुनिश्चित सिद्धांत प्राप्त करके वे
बाहर आये और तभी उन्होंने दर्शन के खंडन में अपनी प्रसिद्ध पुस्तक "तहफातुल फिलसफा" की रचना की । गजाली को पं० चन्द्रबली पाण्डेय ने इस्लाम का व्यास कहा है - जो उपाधि अनुचित नहीं दीखती, क्योंकि इस्लाम के भीतर ज्ञान और भक्ति के समन्वय का आरंभ उन्हीं से होता है। शियों की तरह, गजाली ने भी एलान किया कि ईश्वर और जीव के स्वभाव में मौलिक एकता है, इसलिए, जीव ईश्वर को जान सकता है तथा मृत्यु के बाद उस तक पहुँच सकता है ।
बुद्धि और सहज ज्ञान, दोनों दो चीजें हैं या नहीं, इस विषय में पहले भी मतभेद था और आज भी है। किन्तु, सामान्यतः, मनुष्य सृष्टि को दो दृष्टियों से देखने का आदी रहा है । एक दृष्टि बुद्धिकी दृष्टि है, जिससे विज्ञान का विकास हुआ है। दूसरी दृष्टि हृदय की दृष्टि है, जिसका सहारा सन्त और महात्मा, कवि और कलाकार लेते हैं। प्राचीन काल में, द्रष्टा की उपाधि उन्हें दी जाती थी जो हृदयवादी होते थे, जो सत्य को समझते नहीं, देख लेते थे। किन्तु अठारहवीं सदी में विज्ञान के आरंभ के बाद, बुद्धि प्रधान हो उठी और बुद्धिवादी व्याख्या से ही मनुष्य को अधिक संतोष होने लगा। किन्तु, रूसो' के समय में, प्रधानता फिर से सहज ज्ञान (यानी हृदय) को दी जाने लगी। फिर जब रोमाण्टिक आन्दोलन उठा, तब सहज ज्ञान की प्रधानता और भी बढ़ गई। कारण यह था कि सरकारों और विचारों के नियंत्रण के विरुद्ध विद्रोह करने के लिए, सहजज्ञान की दुहाई देना जरूरी था। दूसरे, विज्ञान की किरणों के सामने, जब धर्म फीका पड़ने लगा, अंधविश्वास की परम्परा बिखरने लगी, तब धर्म और धार्मिक परम्परा का समर्थन करने के लिए भी, सहज ज्ञान का सहारा लेना आव श्यक हो गया। फ्रांसीसी दार्शनिक बर्गसन ने अलौकिक सत्योंके संधान में सहजज्ञान के प्रकाश
१. शिक्षा के विषय में, रूसो का विचार था कि इससे मनुष्य अच्छा नहीं, चालाक होता है। वह कहता है "चिन्ता की मुद्रा ही प्रकृति के विरुद्ध है। सोचने वाला मनुष्य पतित प्राणी होता है। जब से समाज में पंडितों की संख्या बढ़ी, तभी से ईमानदार लोगों की संख्या घटने लगी है। बुद्धि का जो क्षिप्र विकास हो रहा है, उसे रोक देने में ही मानवता का कल्याण है । इसके बदले, हमें मनुष्य के हृदय और उसकी भावना का विकास करना चाहिए।" संयोग की बात कि अभिनव मुस्लिम सूफी इकबाल भी अशिक्षा को दोष नहीं मानते, प्रत्युत्, अपनी एक कविता में उन्होंने इसे गुण बना दिया है
तेरी बेडमी में रख ली, बेइल्मों की लाज, आलिम-काबिल बेच रहे हैं अपना बीन-ईमान ।
( बाले-जिवरील ) | तसव्वुफ या इस्लामी रहस्यवाद संसार में ईश्वर की कल्पना कई रूपों में की गई है। एक रूप वह है जिसमें ईश्वर सृष्टि का कर्त्ता नहीं माना जाता है और न यही समझा जाता है कि उसे दुनिया की हालतों के जानने की कोई फिक्र है। चूंकि ईश्वर निविकार समझा जाता है, इसलिए, यदि यह कहा जाय कि उसने सृष्टि रची है अथवा वह भक्तों की प्रार्थना सुनने को कान खोले रहता है तो इससे ईश्वर में विकार का आरोप हो जाता है। यह ईश्वर वेदांत की कल्पना का ईश्वर है। इसके विपरीत, ईसाइयों की कल्पना का ईश्वर प्रेमी और दयालु है तथा वह संसार की रक्षा और पालन उसी प्रकार करता है जैसे कोई पिता अपने परिवार का पालन करता है। किन्तु, इस्लाम ने मूल रूप में जिस ईश्वर की कल्पना की थी, वह प्रतापी और स्वेच्छाचारी प्रभु की कल्पना थी । इस ईश्वर के सामने दलील कोई चीज नहीं थी, न मानवीय न्याय-बुद्धि का उसके आगे कोई जोर चल सकता था । अल्ला शब्द का अर्थ ही शक्ति संपन्न पुरुष होता है । इस्लाम ने ईश्वर के उन गुणों को प्रधानता दी, जिनसे प्रेम कम, भय अधिक हो सकता था । इस्लाम की धार्मिक चेतना का रूप यह था कि ईश्वर बहुत समीप से सब कुछ देख रहा है और उसकी छोटी सी भी अवज्ञा हुई तो इसका परिणाम भयानक हो सकता है। इसलिए, मनुष्य के लिए उचित यह है कि वह ईश्वर की कृपा और इच्छा पर आँखें मूंद कर निर्भर रहे । परमात्मा की दया के सामने संपूर्ण रूप से झुके रहने का भाव इस्लाम की सबसे बड़ी विशेषता थी । किन्तु, यह संबंध, मुख्यतः, भय और आतंक का संबंध था, जिसमें बन्दा खुदा की ओर आंख उठा कर देख भी नहीं सकता था । मनुष्य का हृदय, स्वभावतः ही, प्रेम चाहता है । आदमी की इच्छा होती है कि उसका भगवान भी उससे प्रेम करे, उसे अपने साथ हँसनेबोलने और खेलने-कूदने की आजादी दे। अतएव, खुदा और बन्देके संबंध के बारे में मुहम्मद साहब ने जो कठोरता रखी थी, यह, कालक्रम में, ढीली होने लगी और बन्दा धीरे-धीरे खुदा को वह रूप देने लगा जो प्रेम और माधुर्य के अधिक अनुकूल था । इस विकास का पहला सोपान तब प्रकट हुआ, जब नबी की मृत्यु के बाद, शियों के एक उग्र संप्रदाय ने "गुलूब और "तकसीर" के सिद्धांतों की घोषणा की। गुलूब यानी यह विश्वास कि मनुष्य ईश्वरकोटि तक पहुँच सकता है। अर्थात् स्वयं ईश्वर बन सकता है; और "तकसीर" यानी यह विश्वास कि ईश्वर भी चाहे तो मनुष्य-रूप में प्रकट हो सकता है। इसी सिद्धांत के अनुसार, शियों ने हजरत अली में देवत्व का आरोप किया। इसके साथ ही, एक घटना और घटी कि इस्लाम के द्वारा धार्मिकता के स्तर पर जाग्रत किये जाने पर मुस्लिम जनता के भीतर ऐसे चिन्तक उत्पन्न होने लगे जिन्हें अनेक प्रकार के प्रश्न झकझोर रहे थे। ईश्वर की प्रकृति क्या है ? सृष्टि और मानवात्मा के साथ उसका क्या संबंध है ? आत्मा का रूप क्या है और ईश्वरीय ज्ञान किसे कहते हैं ? स्पष्ट हो, ये ऐसे प्रश्न हैं जिनसे दर्शनों का उद्भव और विकास होता है । कुरान में व्यावहारिक धर्म का उपदेश तो किया गया था, किन्तु, उसमें गंभीर दर्शन का अभाव था। अब जो सृष्टिसंबंधी जिज्ञासा उत्पन्न हुई तो धीरे-धीरे इस्लामी दर्शन का भी विकास होने लगा । इन प्रश्नों का समाधान खोजने वालों में मोतजली संप्रदाय सब से आगे था । ये मोतजली पंडित बुद्धिवादी थे और बुद्धि के द्वारा ही वे ईश्वर का पता लगाना चाहते थे। ये बहुत कुछ उसी रास्ते से चल रहे थे जिसे उपनिषदों का ज्ञान मार्ग कहते है अथवा जिस मार्ग से शंकराचार्य ने ईश्वरसिद्धि की है । इस्लाम ने यतीवृत्ति को प्रोत्साहित नहीं किया था। किन्तु, मोतजली संप्रदाय में यती वृत्ति की भी प्रधानता होने लगी। बुद्धि के कर्कस मार्ग से चलते-चलते, यह संप्रदाय इस निष्कर्ष पर जा पहुँचा कि कुरान अपौरुषेय नहीं है और न उसे अन्तिम सत्य का व्याख्यान ही मानना चाहिए। कुरान में जो ज्ञान झलका है वह ठीक है, किन्तु त्रिकाल के लिए वह यथेष्ट समझा नहीं जा सकता। मनुष्य को और भी नई प्रेरणाएँ और नया प्रकाश मिल सकता है। मोतजली चिन्तक निर्मुक्त विचारक थे और उनकी दृष्टि बहुत ही उदार थी। इन चिन्तकों में अलगजालो सर्वश्रेष्ठ दार्शनिक निकले । किन्तु, धर्म पर सोचते सोचते, वे नास्तिकता पर जा पहुँचे और धर्म मात्र से उनका विश्वास उठ गया । कुछ दिनों तक उनकी अवस्था नास्तिकों की-सी बनी रही। किन्तु, शीघ्र ही, तमाम शंकाओं के भीतर से रहस्यवाद ने उनका उद्धार किया। बुद्धि के क्लान्त हो कर बैठ जाने पर, उनके भीतर सहज ज्ञान की ज्वाला घघक उठी और इस आलोकित मनोदशा में उन्होंने अभीप्सित सत्य का साक्षात्कार किया । तब से, परम्परावादियों की दलीलों को उन्होंने, बचपने का खेल, समझ कर छोड़ दिया तथा विज्ञान, दर्शन, बुद्धि और तर्क की राह उन्हें अघूरी दीखने लगी। उन्होंने कहा है कि तर्क से हम उसे प्राप्त कर सकते हैं जो सापेक्ष है; उसे नहीं, जो निरपेक्ष है । निरपेक्ष सत्य को जानने के लिए मनुष्य को सहज ज्ञान को छोड़कर और कोई चारा नहीं है। इस अनुभूति के प्राप्त होते ही, गजाली सिमट कर एकांत में चले गये और समाधि एवं सहज ज्ञान के द्वारा अपनी साधना में संलग्न हो गये। इस समाधि से सुनिश्चित सिद्धांत प्राप्त करके वे बाहर आये और तभी उन्होंने दर्शन के खंडन में अपनी प्रसिद्ध पुस्तक "तहफातुल फिलसफा" की रचना की । गजाली को पंशून्य चन्द्रबली पाण्डेय ने इस्लाम का व्यास कहा है - जो उपाधि अनुचित नहीं दीखती, क्योंकि इस्लाम के भीतर ज्ञान और भक्ति के समन्वय का आरंभ उन्हीं से होता है। शियों की तरह, गजाली ने भी एलान किया कि ईश्वर और जीव के स्वभाव में मौलिक एकता है, इसलिए, जीव ईश्वर को जान सकता है तथा मृत्यु के बाद उस तक पहुँच सकता है । बुद्धि और सहज ज्ञान, दोनों दो चीजें हैं या नहीं, इस विषय में पहले भी मतभेद था और आज भी है। किन्तु, सामान्यतः, मनुष्य सृष्टि को दो दृष्टियों से देखने का आदी रहा है । एक दृष्टि बुद्धिकी दृष्टि है, जिससे विज्ञान का विकास हुआ है। दूसरी दृष्टि हृदय की दृष्टि है, जिसका सहारा सन्त और महात्मा, कवि और कलाकार लेते हैं। प्राचीन काल में, द्रष्टा की उपाधि उन्हें दी जाती थी जो हृदयवादी होते थे, जो सत्य को समझते नहीं, देख लेते थे। किन्तु अठारहवीं सदी में विज्ञान के आरंभ के बाद, बुद्धि प्रधान हो उठी और बुद्धिवादी व्याख्या से ही मनुष्य को अधिक संतोष होने लगा। किन्तु, रूसो' के समय में, प्रधानता फिर से सहज ज्ञान को दी जाने लगी। फिर जब रोमाण्टिक आन्दोलन उठा, तब सहज ज्ञान की प्रधानता और भी बढ़ गई। कारण यह था कि सरकारों और विचारों के नियंत्रण के विरुद्ध विद्रोह करने के लिए, सहजज्ञान की दुहाई देना जरूरी था। दूसरे, विज्ञान की किरणों के सामने, जब धर्म फीका पड़ने लगा, अंधविश्वास की परम्परा बिखरने लगी, तब धर्म और धार्मिक परम्परा का समर्थन करने के लिए भी, सहज ज्ञान का सहारा लेना आव श्यक हो गया। फ्रांसीसी दार्शनिक बर्गसन ने अलौकिक सत्योंके संधान में सहजज्ञान के प्रकाश एक. शिक्षा के विषय में, रूसो का विचार था कि इससे मनुष्य अच्छा नहीं, चालाक होता है। वह कहता है "चिन्ता की मुद्रा ही प्रकृति के विरुद्ध है। सोचने वाला मनुष्य पतित प्राणी होता है। जब से समाज में पंडितों की संख्या बढ़ी, तभी से ईमानदार लोगों की संख्या घटने लगी है। बुद्धि का जो क्षिप्र विकास हो रहा है, उसे रोक देने में ही मानवता का कल्याण है । इसके बदले, हमें मनुष्य के हृदय और उसकी भावना का विकास करना चाहिए।" संयोग की बात कि अभिनव मुस्लिम सूफी इकबाल भी अशिक्षा को दोष नहीं मानते, प्रत्युत्, अपनी एक कविता में उन्होंने इसे गुण बना दिया है तेरी बेडमी में रख ली, बेइल्मों की लाज, आलिम-काबिल बेच रहे हैं अपना बीन-ईमान । |
नई देहली - विश्व में सुरक्षा के मामले में पाकिस्तान चौथा सबसे खतरनाक देश है। विश्व आर्थिक मंच के ग्लोबल ट्रैवल एंड टूरिजम रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान सुरक्षा की दृष्टि से चौथा सबसे असुरक्षित देश है। इस सूची में फिनलैंड दुनिया काे सबसे सुरक्षित देश बताया गया है। सबसे खतरनाक देशों की सूची में नाइजीरिया का नाम पहले नंबर है। वहीं कोलंबिया और यमन दूसरे और तीसरे नंबर पर हैं।
सुरक्षित देशों की सूची में फिनलैंड के बाद कतर, और संयुक्त अरब अमीरात का नंबर आता है।
| नई देहली - विश्व में सुरक्षा के मामले में पाकिस्तान चौथा सबसे खतरनाक देश है। विश्व आर्थिक मंच के ग्लोबल ट्रैवल एंड टूरिजम रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान सुरक्षा की दृष्टि से चौथा सबसे असुरक्षित देश है। इस सूची में फिनलैंड दुनिया काे सबसे सुरक्षित देश बताया गया है। सबसे खतरनाक देशों की सूची में नाइजीरिया का नाम पहले नंबर है। वहीं कोलंबिया और यमन दूसरे और तीसरे नंबर पर हैं। सुरक्षित देशों की सूची में फिनलैंड के बाद कतर, और संयुक्त अरब अमीरात का नंबर आता है। |
मुख्तार की पत्नी अफशा अंसारी के स्वामित्व वाली कंपनी विकास कंस्ट्रक्शन से जुड़े रविंद्र नरायन सिंह, जाकिर हुसैन, विक्रम अग्रहरि और शादाब अहमद की चल-अचल संपत्तियों को ईडी मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत चिन्हित कर जब्त करने की कवायद में जुटी है।
माफिया मुख्तार अंसारी के करीबी जितेंद्र सापरा और गणेश दत्त मिश्रा की तरह चार अन्य लोग भी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रडार पर आ चुके हैं। मुख्तार की पत्नी अफशा अंसारी के स्वामित्व वाली कंपनी विकास कंस्ट्रक्शन से जुड़े रविंद्र नरायन सिंह, जाकिर हुसैन, विक्रम अग्रहरि और शादाब अहमद की चल-अचल संपत्तियों को ईडी मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत चिन्हित कर जब्त करने की कवायद में जुटी है।
दरअसल, ईडी की जांच में सामने आया है कि मुख्तार की काली कमाई को विकास कंस्ट्रक्शन के बैंक खाते में जमा किया जा रहा था। बैंक में नगदी जमा करने के बाद उसे तुरंत निकाल कर संपत्तियों को खरीदा जाता था। इतना ही नहीं, जांच एजेंसियों को चकमा देने के लिए विकास कंस्ट्रक्शन में जमा रकम को मुख्तार के ससुर जमशेद राना के स्वामित्व वाली कंपनी आगाज प्रोजेक्ट एंड इंजीनियरिंग के खाते में ट्रांसफर किया जाता था।
बाद में ये रकम दोबारा विकास कंस्ट्रक्शन के खाते में भेज दी जाती थी। इस रकम से मऊ, गाजीपुर, जालौन, दिल्ली, लखनऊ में 23 संपत्तियां खरीदी गई। जांच में ये भी पता चला है कि इनमें से अधिकतर संपत्तियों को मुख्तार ने अपना खौफ दिखाकर बाजार भाव से आधी से कम कीमत में खरीदा था।
ईडी की जांच में सामने आया है कि गणेश दत्त मिश्रा ने गाजीपुर में जिन दो संपत्तियों को खरीदा था, उसके पास इसके लिए पर्याप्त रकम नहीं थी। इन संपत्तियों को 1. 29 करोड़ में खरीदा गया, हालांकि इसके भुगतान के प्रमाण जांच एजेंसी को नहीं मिले।
दरअसल, ये संपत्तियां मुख्तार की बेनामी संपत्तियां थी, जिसे गणेश दत्त मिश्रा के नाम से खरीदा गया था। बाद में गणेश दत्त मिश्रा ने इन संपत्तियों को आगाज प्रोजेक्ट एंड इंजीनियरिंग को यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से 1. 60 करोड़ रुपये का लोन लेने के लिए बंधक रखा था। मुख्तार के ससुर की इस कंपनी में गणेश दत्त मिश्रा का कोई संबंध नहीं पाया गया।
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| मुख्तार की पत्नी अफशा अंसारी के स्वामित्व वाली कंपनी विकास कंस्ट्रक्शन से जुड़े रविंद्र नरायन सिंह, जाकिर हुसैन, विक्रम अग्रहरि और शादाब अहमद की चल-अचल संपत्तियों को ईडी मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत चिन्हित कर जब्त करने की कवायद में जुटी है। माफिया मुख्तार अंसारी के करीबी जितेंद्र सापरा और गणेश दत्त मिश्रा की तरह चार अन्य लोग भी प्रवर्तन निदेशालय के रडार पर आ चुके हैं। मुख्तार की पत्नी अफशा अंसारी के स्वामित्व वाली कंपनी विकास कंस्ट्रक्शन से जुड़े रविंद्र नरायन सिंह, जाकिर हुसैन, विक्रम अग्रहरि और शादाब अहमद की चल-अचल संपत्तियों को ईडी मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत चिन्हित कर जब्त करने की कवायद में जुटी है। दरअसल, ईडी की जांच में सामने आया है कि मुख्तार की काली कमाई को विकास कंस्ट्रक्शन के बैंक खाते में जमा किया जा रहा था। बैंक में नगदी जमा करने के बाद उसे तुरंत निकाल कर संपत्तियों को खरीदा जाता था। इतना ही नहीं, जांच एजेंसियों को चकमा देने के लिए विकास कंस्ट्रक्शन में जमा रकम को मुख्तार के ससुर जमशेद राना के स्वामित्व वाली कंपनी आगाज प्रोजेक्ट एंड इंजीनियरिंग के खाते में ट्रांसफर किया जाता था। बाद में ये रकम दोबारा विकास कंस्ट्रक्शन के खाते में भेज दी जाती थी। इस रकम से मऊ, गाजीपुर, जालौन, दिल्ली, लखनऊ में तेईस संपत्तियां खरीदी गई। जांच में ये भी पता चला है कि इनमें से अधिकतर संपत्तियों को मुख्तार ने अपना खौफ दिखाकर बाजार भाव से आधी से कम कीमत में खरीदा था। ईडी की जांच में सामने आया है कि गणेश दत्त मिश्रा ने गाजीपुर में जिन दो संपत्तियों को खरीदा था, उसके पास इसके लिए पर्याप्त रकम नहीं थी। इन संपत्तियों को एक. उनतीस करोड़ में खरीदा गया, हालांकि इसके भुगतान के प्रमाण जांच एजेंसी को नहीं मिले। दरअसल, ये संपत्तियां मुख्तार की बेनामी संपत्तियां थी, जिसे गणेश दत्त मिश्रा के नाम से खरीदा गया था। बाद में गणेश दत्त मिश्रा ने इन संपत्तियों को आगाज प्रोजेक्ट एंड इंजीनियरिंग को यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से एक. साठ करोड़ रुपये का लोन लेने के लिए बंधक रखा था। मुख्तार के ससुर की इस कंपनी में गणेश दत्त मिश्रा का कोई संबंध नहीं पाया गया। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen. |
उत्तराखंड के चमोली के देवाल विकासखंड में तेज बारिश और बादल फटने से गांव में भारी नुकसान हुआ है.
एसडीएम थराली फल्दिया गांव पहुंचे, उनके साथ अन्य अधिकारी भी मौजूद थे. उन्होंने बादल फटने से गांव में हुए नुकसान का जायजा लिया.
सनी देओल की हीरोइन को जब ज्यादा पढ़ी-लिखी होना पड़ा भारी, एक्ट्रेस ने खूब सुने थे ताने, बोलीं- इंडस्ट्री में. .
उत्तराखंड के चमोली के देवाल विकासखंड में तेज बारिश और बादल फटने से गांव में भारी नुकसान हुआ है.
| उत्तराखंड के चमोली के देवाल विकासखंड में तेज बारिश और बादल फटने से गांव में भारी नुकसान हुआ है. एसडीएम थराली फल्दिया गांव पहुंचे, उनके साथ अन्य अधिकारी भी मौजूद थे. उन्होंने बादल फटने से गांव में हुए नुकसान का जायजा लिया. सनी देओल की हीरोइन को जब ज्यादा पढ़ी-लिखी होना पड़ा भारी, एक्ट्रेस ने खूब सुने थे ताने, बोलीं- इंडस्ट्री में. . उत्तराखंड के चमोली के देवाल विकासखंड में तेज बारिश और बादल फटने से गांव में भारी नुकसान हुआ है. |
फाल्गुन मास में आज कालाष्टमी मनाई जा रहा है। इस दिन भगवान शिव के उग्र रूप काल भैरव की पूजा की जाती है। आपको जानकर हैरानी होगी कि अघोरी समाज के लोग कालाष्टमी को उत्सव के रूप में मनाते हैं क्योंकि गुप्त नवरात्रि के अलावा कालाष्टमी की रात को तांत्रिक साधक तंत्र मंत्र करते हैं। इस दिन शिवालयों और मठों में विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है, जिसमें भगवान शिव के रूप में काल भैरव देव का आह्वान किया जाता है। इस दिन का व्रत भी रखा जाता है और व्रत में कथा सुनना जरूरी होता है।
शिवपुराण में भगवान शिव के विभिन्न अवतारों का वर्णन मिलता है। इस कथा के अनुसार एक बार ब्रह्मा जी और विष्णु जी में में श्रेष्ठता को लेकर बहस छिड़ गई। सभी देवताओं के साथ ब्रह्मा जी और विष्णु जी भगवान भोलेनाथ के पास कैलाश पहुंचे। भोलेनाथ ने सबकी बात सुनी और तुरंत ही भगवान शिव जी के तेजोमय और कांतिमय शरीर से ज्योति निकली, जो आकाश और पाताल की दिशा में बढ़ रही थी।
तब महादेव ने ब्रह्मा और विष्णु जी से कहा आप दोनों में जो सबसे पहले इस ज्योति की अंतिम छोर पर पहुंचेंगे, वही सबसे श्रेष्ठ है। इसके बाद ब्रह्मा और विष्णु जी अनंत ज्योति की छोर तक पहुंचने के लिए निकल पड़े। कुछ समय बाद ब्रह्मा जी और विष्णु जी वापस लौटे। विष्णु जी ने तो सच बता दिया लेकिन ब्रह्मा जी ने झूठ बोल दिया कि उन्हें छोर प्राप्त हो गया।
भगवान भोलेनाथ सत्य जानते थे उन्होंने विष्णु जी को सर्वश्रेष्ठ घोषित कर दिया। इस बात से ब्रह्मा जी क्रोधित हो गए और उन्होंने शिवजी को अपशब्द कह दिए। इस बात पर शिवजी को क्रोध आ गया और शिवजी ने उस क्रोध में अपने रूप से भैरव को जन्म दिया। इस भैरव अवतार का वाहन काला कुत्ता है। इनके एक हाथ में छड़ी है। इस अवतार को 'महाकालेश्वर' के नाम से भी जाना जाता है इसलिए ही इन्हें दंडाधिपति कहा गया है।
भगवान भोलेनाथ का यह उग्र रूप देखकर देवतागण घबरा गए। भैरव ने क्रोध में ब्रह्माजी के 5 मुखों में से 1 मुख को काट दिया, तब से ब्रह्माजी के पास 4 मुख ही हैं। ब्रह्माजी ने भैरव बाबा से माफी मांगी तब जाकर भगवान शिव अपने असली रूप में आए।
परंतु ब्रह्माजी का सिर काटने के कारण भैरवजी पर ब्रह्महत्या का पाप लग गया जिस वजह से भैरव बाबा को कई दिनों तक भिखारी की तरह रहना पड़ा। कई वर्षों बाद वाराणसी में भैरव बाब का दंड समाप्त हुआ इसी कारण उनका भैरव बाबा को 'दंडपाणी' के नाम से जाना जाता है।
फाल्गुन मास में आज कालाष्टमी मनाई जा रहा है। इस दिन भगवान शिव के उग्र रूप काल भैरव की पूजा की जाती है। आपको जानकर हैरानी होगी कि अघोरी समाज के लोग कालाष्टमी को उत्सव के रूप में मनाते हैं क्योंकि गुप्त नवरात्रि के अलावा कालाष्टमी की रात को तांत्रिक साधक तंत्र मंत्र करते हैं। इस दिन शिवालयों और मठों में विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है, जिसमें भगवान शिव के रूप में काल भैरव देव का आह्वान किया जाता है। इस दिन का व्रत भी रखा जाता है और व्रत में कथा सुनना जरूरी होता है।
| फाल्गुन मास में आज कालाष्टमी मनाई जा रहा है। इस दिन भगवान शिव के उग्र रूप काल भैरव की पूजा की जाती है। आपको जानकर हैरानी होगी कि अघोरी समाज के लोग कालाष्टमी को उत्सव के रूप में मनाते हैं क्योंकि गुप्त नवरात्रि के अलावा कालाष्टमी की रात को तांत्रिक साधक तंत्र मंत्र करते हैं। इस दिन शिवालयों और मठों में विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है, जिसमें भगवान शिव के रूप में काल भैरव देव का आह्वान किया जाता है। इस दिन का व्रत भी रखा जाता है और व्रत में कथा सुनना जरूरी होता है। शिवपुराण में भगवान शिव के विभिन्न अवतारों का वर्णन मिलता है। इस कथा के अनुसार एक बार ब्रह्मा जी और विष्णु जी में में श्रेष्ठता को लेकर बहस छिड़ गई। सभी देवताओं के साथ ब्रह्मा जी और विष्णु जी भगवान भोलेनाथ के पास कैलाश पहुंचे। भोलेनाथ ने सबकी बात सुनी और तुरंत ही भगवान शिव जी के तेजोमय और कांतिमय शरीर से ज्योति निकली, जो आकाश और पाताल की दिशा में बढ़ रही थी। तब महादेव ने ब्रह्मा और विष्णु जी से कहा आप दोनों में जो सबसे पहले इस ज्योति की अंतिम छोर पर पहुंचेंगे, वही सबसे श्रेष्ठ है। इसके बाद ब्रह्मा और विष्णु जी अनंत ज्योति की छोर तक पहुंचने के लिए निकल पड़े। कुछ समय बाद ब्रह्मा जी और विष्णु जी वापस लौटे। विष्णु जी ने तो सच बता दिया लेकिन ब्रह्मा जी ने झूठ बोल दिया कि उन्हें छोर प्राप्त हो गया। भगवान भोलेनाथ सत्य जानते थे उन्होंने विष्णु जी को सर्वश्रेष्ठ घोषित कर दिया। इस बात से ब्रह्मा जी क्रोधित हो गए और उन्होंने शिवजी को अपशब्द कह दिए। इस बात पर शिवजी को क्रोध आ गया और शिवजी ने उस क्रोध में अपने रूप से भैरव को जन्म दिया। इस भैरव अवतार का वाहन काला कुत्ता है। इनके एक हाथ में छड़ी है। इस अवतार को 'महाकालेश्वर' के नाम से भी जाना जाता है इसलिए ही इन्हें दंडाधिपति कहा गया है। भगवान भोलेनाथ का यह उग्र रूप देखकर देवतागण घबरा गए। भैरव ने क्रोध में ब्रह्माजी के पाँच मुखों में से एक मुख को काट दिया, तब से ब्रह्माजी के पास चार मुख ही हैं। ब्रह्माजी ने भैरव बाबा से माफी मांगी तब जाकर भगवान शिव अपने असली रूप में आए। परंतु ब्रह्माजी का सिर काटने के कारण भैरवजी पर ब्रह्महत्या का पाप लग गया जिस वजह से भैरव बाबा को कई दिनों तक भिखारी की तरह रहना पड़ा। कई वर्षों बाद वाराणसी में भैरव बाब का दंड समाप्त हुआ इसी कारण उनका भैरव बाबा को 'दंडपाणी' के नाम से जाना जाता है। फाल्गुन मास में आज कालाष्टमी मनाई जा रहा है। इस दिन भगवान शिव के उग्र रूप काल भैरव की पूजा की जाती है। आपको जानकर हैरानी होगी कि अघोरी समाज के लोग कालाष्टमी को उत्सव के रूप में मनाते हैं क्योंकि गुप्त नवरात्रि के अलावा कालाष्टमी की रात को तांत्रिक साधक तंत्र मंत्र करते हैं। इस दिन शिवालयों और मठों में विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है, जिसमें भगवान शिव के रूप में काल भैरव देव का आह्वान किया जाता है। इस दिन का व्रत भी रखा जाता है और व्रत में कथा सुनना जरूरी होता है। |
जयपुर। राज्य पात्रता परीक्षा 26 मार्च को आयोजित होगी। इसको लेकर गोविन्द गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय, बासंवाड़ा ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। प्रदेश में परीक्षा के लिए 1 लाख 35 हजार 232 परीक्षार्थी (State Eligibility Test) भाग लेंगे। परीक्षा आयोजन के लिए संभाग स्तर पर 349 परीक्षा केंद्र बनाए हैं। परीक्षा 26 मार्च को पूर्वाह्न 11 बजे से 2 बजे तक होगी। निजी शिक्षण संस्थानों में बनाए गए परीक्षा केन्द्रों पर 50 फीसदी सरकारी वीक्षकों की नियुक्ति की गई है।
वहीं परीक्षा से एक घंटे पूर्व तक ही केंद्र में अभ्यर्थियों को प्रवेश दिया जाएगा। सुबह 10 बजे परीक्षा केन्द्रों के गेट बंद कर दिए जाएंगे। अभ्यर्थियों को परीक्षा केन्द्र पर मोबाइल, कैलकुलेटर, ब्लुटूथ सहित किसी प्रकार का संचार अथवा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाने की अनुमति नहीं होगी। जयपुर में परीक्षा के लिए 104 परीक्षा केन्द्र बनाए गए हैं, जिनमें 50 हजार 20 अभ्यर्थी शामिल होंगे।
विश्वविद्यालय की ओर से रसायन विज्ञान, इतिहास, राजनीति विज्ञान, कॉमर्स, गृह विज्ञान, जनसंख्या अध्ययन, कंप्यूटर विज्ञान और अनुप्रयोग, लॉ (कानून), मनोविज्ञान, पृथ्वी विज्ञान, जीवन विज्ञान, लोक प्रशासन, अर्थशास्त्र, प्रबंधन, राजस्थानी, शिक्षा, गणितीय विज्ञान, संस्कृत, अंग्रेजी, संगीत, समाज शास्त्र, पर्यावरण विज्ञान, दर्शन शास्त्र, उर्दू, भूगोल, शारीरिक शिक्षा, चित्रकला, हिंदी और भौतिक विज्ञान विषय में परीक्षा आयोजित की जा रही हैं।
इससे पहले सेट का आयोजन वर्ष 2013 में आरपीएससी द्वारा कराया गया था। वर्ष 2013 में आयोजित हुई सेट परीक्षा में 40,216 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी। इनमें से 6235 अभ्यर्थियों को (State Eligibility Test) असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए पात्र घोषित किया गया था। नौ साल बाद परीक्षा आयोजन से परीक्षार्थियों की संख्या भी बढ़ गई है। 2013 भर्ती के मुकाबले इस बार 3 गुणा अभ्यर्थियों ने आवेदन किए हैं।
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| जयपुर। राज्य पात्रता परीक्षा छब्बीस मार्च को आयोजित होगी। इसको लेकर गोविन्द गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय, बासंवाड़ा ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। प्रदेश में परीक्षा के लिए एक लाख पैंतीस हजार दो सौ बत्तीस परीक्षार्थी भाग लेंगे। परीक्षा आयोजन के लिए संभाग स्तर पर तीन सौ उनचास परीक्षा केंद्र बनाए हैं। परीक्षा छब्बीस मार्च को पूर्वाह्न ग्यारह बजे से दो बजे तक होगी। निजी शिक्षण संस्थानों में बनाए गए परीक्षा केन्द्रों पर पचास फीसदी सरकारी वीक्षकों की नियुक्ति की गई है। वहीं परीक्षा से एक घंटे पूर्व तक ही केंद्र में अभ्यर्थियों को प्रवेश दिया जाएगा। सुबह दस बजे परीक्षा केन्द्रों के गेट बंद कर दिए जाएंगे। अभ्यर्थियों को परीक्षा केन्द्र पर मोबाइल, कैलकुलेटर, ब्लुटूथ सहित किसी प्रकार का संचार अथवा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाने की अनुमति नहीं होगी। जयपुर में परीक्षा के लिए एक सौ चार परीक्षा केन्द्र बनाए गए हैं, जिनमें पचास हजार बीस अभ्यर्थी शामिल होंगे। विश्वविद्यालय की ओर से रसायन विज्ञान, इतिहास, राजनीति विज्ञान, कॉमर्स, गृह विज्ञान, जनसंख्या अध्ययन, कंप्यूटर विज्ञान और अनुप्रयोग, लॉ , मनोविज्ञान, पृथ्वी विज्ञान, जीवन विज्ञान, लोक प्रशासन, अर्थशास्त्र, प्रबंधन, राजस्थानी, शिक्षा, गणितीय विज्ञान, संस्कृत, अंग्रेजी, संगीत, समाज शास्त्र, पर्यावरण विज्ञान, दर्शन शास्त्र, उर्दू, भूगोल, शारीरिक शिक्षा, चित्रकला, हिंदी और भौतिक विज्ञान विषय में परीक्षा आयोजित की जा रही हैं। इससे पहले सेट का आयोजन वर्ष दो हज़ार तेरह में आरपीएससी द्वारा कराया गया था। वर्ष दो हज़ार तेरह में आयोजित हुई सेट परीक्षा में चालीस,दो सौ सोलह अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी। इनमें से छः हज़ार दो सौ पैंतीस अभ्यर्थियों को असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए पात्र घोषित किया गया था। नौ साल बाद परीक्षा आयोजन से परीक्षार्थियों की संख्या भी बढ़ गई है। दो हज़ार तेरह भर्ती के मुकाबले इस बार तीन गुणा अभ्यर्थियों ने आवेदन किए हैं। |
नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट टीम ने वेस्टइंडीज के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज के पहले मैच में शानदार शुरुआत की है. पहली पारी में मेजबान टीम के 150 रन पर समेटने के बाद मैच के दूसरे दिन बड़ी बढ़त हासिल की. इस मैच में यशस्वी जायसवाल और ईशान किशन ने डेब्यू किया. टीम में बतौर ओपनर अपनी जगह पक्की कर चुके शुभमन गिल ने इस मैच में कुछ ऐसा किया जो उनको काफी महंगा पड़ सकता है.
भारतीय टीम में बतौर ओपनर अपनी जगह पक्की कर चुके शुभमन गिल ने वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज में तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी की. डेब्यू कर रहे यशस्वी जायसवाल ने कप्तान रोहित शर्मा के साथ पारी की शुरुआत की. इस मैच से पहले ही रोहित ने मीडिया को इस बात की जानकारी दे दी थी कि यशस्वी डेब्यू करने जा रहे हैं और वह पारी का आगाज करेंगे. शुभमन गिल अब ओपनिंग की जगह पर तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरेंगे.
अब तक बतौर ओपनर टीम इंडिया के लिए अच्छा कर रहे शुभमन गिल ने अचानक से तीसरे नंबर पर खेलने का फैसला लिया. कोच राहुल द्रविड़ से इस युवा बैटर ने अपनी बात बताई और उन्होंने इस मान लिया. कप्तान रोहित शर्मा ने बताया कि गिल का कहना था वह तीसरे नंबर पर खेलते आए हैं और इस नंबर पर ज्यादा अच्छा कर सकते हैं.
कप्तान और कोच से कहकर अपनी बल्लेबाजी क्रम में बदलाव करने के बाद शुभमन गिल का बल्ला पहली पारी में नहीं चला. वेस्टइंडीज के खिलाफ जिस मैच में यशस्वी ने शतक जमाया उसमें गिल 10 गेंद पर महज 6 रन बनाकर वापस लौटे. महज 23 साल की उम्र में क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में शतक जमाकर उन्होंने खलबली मचाई थी. अब कहीं बल्लेबाजी क्रम बदलना उनको महंगा ना पड़ जाए.
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| नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट टीम ने वेस्टइंडीज के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज के पहले मैच में शानदार शुरुआत की है. पहली पारी में मेजबान टीम के एक सौ पचास रन पर समेटने के बाद मैच के दूसरे दिन बड़ी बढ़त हासिल की. इस मैच में यशस्वी जायसवाल और ईशान किशन ने डेब्यू किया. टीम में बतौर ओपनर अपनी जगह पक्की कर चुके शुभमन गिल ने इस मैच में कुछ ऐसा किया जो उनको काफी महंगा पड़ सकता है. भारतीय टीम में बतौर ओपनर अपनी जगह पक्की कर चुके शुभमन गिल ने वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज में तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी की. डेब्यू कर रहे यशस्वी जायसवाल ने कप्तान रोहित शर्मा के साथ पारी की शुरुआत की. इस मैच से पहले ही रोहित ने मीडिया को इस बात की जानकारी दे दी थी कि यशस्वी डेब्यू करने जा रहे हैं और वह पारी का आगाज करेंगे. शुभमन गिल अब ओपनिंग की जगह पर तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरेंगे. अब तक बतौर ओपनर टीम इंडिया के लिए अच्छा कर रहे शुभमन गिल ने अचानक से तीसरे नंबर पर खेलने का फैसला लिया. कोच राहुल द्रविड़ से इस युवा बैटर ने अपनी बात बताई और उन्होंने इस मान लिया. कप्तान रोहित शर्मा ने बताया कि गिल का कहना था वह तीसरे नंबर पर खेलते आए हैं और इस नंबर पर ज्यादा अच्छा कर सकते हैं. कप्तान और कोच से कहकर अपनी बल्लेबाजी क्रम में बदलाव करने के बाद शुभमन गिल का बल्ला पहली पारी में नहीं चला. वेस्टइंडीज के खिलाफ जिस मैच में यशस्वी ने शतक जमाया उसमें गिल दस गेंद पर महज छः रन बनाकर वापस लौटे. महज तेईस साल की उम्र में क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में शतक जमाकर उन्होंने खलबली मचाई थी. अब कहीं बल्लेबाजी क्रम बदलना उनको महंगा ना पड़ जाए. . |
हरिद्वार की हरकी पैड़ी में सोमवार को होने वाले सोमवती अमावस्या स्नान (Somvati Amavasya Snan) पर्व को लेकर भी पुलिस-प्रशासन द्वारा ट्रैफिक डायवर्जन प्लान जारी किया है. हरिद्वार में रविवार शाम चार बजे से लेकर सोमवार सुबह 10 दस बजे तक जिले में भारी गाड़ी प्रतिबंधित रहेंगे, यानि कुल 30 घंटे तक भारी वाहनों पर प्रतिबंध रहेगा. दिल्ली-हरिद्वार हाईवे पर ट्रैफिक का दबाव बढ़ने पर कई स्थान पर डायवर्जन प्लान लागू किया जाएगा.
यहां पार्क किए जाएंगे वाहनः दिल्ली की तरफ से आ रहे गाड़ी नारसन, मंगलौर, कोर कालेज ख्याति ढ़ाबा गुरुकुल कांगड़ी, शंकराचार्य चौक से होते हुए अलकनंदा, दीनदयाल पंतद्वीप-चमगादड टापू पार्किंग में पार्क होंगे. यातायात का अधिक दबाव होने पर यातायात को सिंहद्द्वार से डायवर्ट कर देशरक्षक तिराहा, बुढ़ीमाता, श्रीयंत्र पुलिया से होते हुए बैरागी कैंप पार्किंग में पार्क कराया जाएगा. यातायात का अधिक दबाव होने पर डायवर्जन प्रबंध लागू की जाएगी.
ऐसे में दिल्ली से आ रहे गाड़ी नारसन-मंगलौर, नगला इमरती-लक्सर-फेरुपुर-जगजीतपुर- एसएम तिराहा, शनि चौक, मातृसदन पुलिया होते हुए बैरागी कैंप में पहुंचेंगे. पंजाब की तरफ से आ रहे गाड़ी सहारनपुर, मंडावर, भगवानपुर, सालियर, बिजौली चौक, एनएच 344, नगला इमरती, कोर कालेज, बहादराबाद बाईपास, हरिलोक तिराहा, गुरुकुल कांगड़ी से होते हुए अलकनंदा, दीनदयाल पतद्वीप, चमगादड् टापू में पार्क होंगे.
हरिद्वार में सोमवार को होने वाले सोमवती अमावस्या स्नान को सकुशल सम्पन्न कराने के लिए जिला प्रशासन-पुलिस महकमे ने कमर कस ली है. मेला क्षेत्र को पांच सुपर जोन, 16 जोन एवं 39 सेक्टरों बांटते हुए पुलिस फोर्स की तैनाती कर दी गई है. एसपी सिटी को मेला क्षेत्र की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
जिले के दोनों शीर्ष ऑफिसरों ने स्नान पर्व को लेकर ढिलाई न बरतने के निर्देश दिए हैं. रविवार को ऋषिकुल आयुर्वेदिक कालेज कैंपस के ऑडिटोरियम में आयोजित फोर्स की ब्रीफिंग में जिलाधिकारी विनय शंकर पांडेय और एसएसपी अजय सिंह ने संयुक्त रूप से बोला कि सोमवती अमावस्या स्नान पर्व पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की आसार है.
कर्मचारी अपने-अपने ड्यूटी स्थल पर पहुंचकर भौगोलिक परिवेश की जानकारी ले लें, जिससे उन्हें परेशानी न हो. हाईवे पर तैनात हर पुलिसकर्मी को यातायात प्लान की जानकारी होना भी महत्वपूर्ण है, लिहाजा हर कोई यातायात प्लान का कठोरता से पालन कराए. डीएम-एसएसपी ने बोला कि पिछले स्नान पर्वों की तुलना में इस बार श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि होने की आशा है, वैसे भी स्नान पर्व के दौरान भीड़ का दबाव बढ़ता जाता है.
उन्होंने बोला कि जोनल अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में एक-एक वैकल्पिक मार्ग चयन जरूर कर लें. ड्यूटी प्वाइंट पर तैनात पुलिसकर्मी को पूरी तरह से चौकस रहना है. मनसा देवी एवं चंडी देवी मंदिर कैंपस में अव्यवस्था का आलम न हो, इसलिए कतारबद्ध संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आगे बढ़ते रहें. प्वाइंट को किसी भी सूरत में पुलिसकर्मी नहीं छोड़े, अन्यथा कार्रवाई होना तय है. इस दौरान एसपी क्राइम रेखा यादव, एसपी सिटी स्वतंत्र कुमार सिंह, एसपी देहात एसके सिंह आदि उपस्थित रहे.
एसएसपी अजय सिंह ने जल पुलिस को पूरी तरह से चौकस रहने के निर्देश दिए हैं. गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं के डूबने की घटनाएं न हों, इसलिए हर पुलिसकर्मी को चौकन्ना रहना है. जल पुलिस की टीमें मुस्तैद रहेगी. हरकी पैड़ी क्षेत्र से भिखारियों को भी हटाया जाए. बम निरोधक दस्ते के साथ साथ डॉग स्क्वॉयड की भी तैनाती की गई है.
पांच अपर पुलिस अधीक्षक, 13 पुलिस उपाधीक्षक, 21 निरीक्षक/थानाध्यक्ष, 65 उपनिरीक्षक, 19 स्त्री उपनिरीक्षक, 143 अपर उप निरीक्षक पीटीसी, 40 पीएसी अ। गुल्म नायक, 220 हेड कांस्टेबल प्रशिक्षु एटीसी, 107 मुख्य आरक्षी, 292 आरक्षी, 74 स्त्री आरक्षी, दो यातायात निरीक्षक, दो टीइसआई, 16 हेट कांस्टेबल टीपी, 27 कांस्टेबल टीपी, 12 अभिसूचना ईकाई के जवान, तीन टीमें बीडीएस/डॉग स्क्वायड, घुड़सवार पुलिस की दो टीम, चार घोड़े, जल पुलिस- 20 कर्मचारी, पीएसी तीन कंपनी, दो प्लाटून, डेढ़ सेक्शन की तैनाती रहेगी.
| हरिद्वार की हरकी पैड़ी में सोमवार को होने वाले सोमवती अमावस्या स्नान पर्व को लेकर भी पुलिस-प्रशासन द्वारा ट्रैफिक डायवर्जन प्लान जारी किया है. हरिद्वार में रविवार शाम चार बजे से लेकर सोमवार सुबह दस दस बजे तक जिले में भारी गाड़ी प्रतिबंधित रहेंगे, यानि कुल तीस घंटाटे तक भारी वाहनों पर प्रतिबंध रहेगा. दिल्ली-हरिद्वार हाईवे पर ट्रैफिक का दबाव बढ़ने पर कई स्थान पर डायवर्जन प्लान लागू किया जाएगा. यहां पार्क किए जाएंगे वाहनः दिल्ली की तरफ से आ रहे गाड़ी नारसन, मंगलौर, कोर कालेज ख्याति ढ़ाबा गुरुकुल कांगड़ी, शंकराचार्य चौक से होते हुए अलकनंदा, दीनदयाल पंतद्वीप-चमगादड टापू पार्किंग में पार्क होंगे. यातायात का अधिक दबाव होने पर यातायात को सिंहद्द्वार से डायवर्ट कर देशरक्षक तिराहा, बुढ़ीमाता, श्रीयंत्र पुलिया से होते हुए बैरागी कैंप पार्किंग में पार्क कराया जाएगा. यातायात का अधिक दबाव होने पर डायवर्जन प्रबंध लागू की जाएगी. ऐसे में दिल्ली से आ रहे गाड़ी नारसन-मंगलौर, नगला इमरती-लक्सर-फेरुपुर-जगजीतपुर- एसएम तिराहा, शनि चौक, मातृसदन पुलिया होते हुए बैरागी कैंप में पहुंचेंगे. पंजाब की तरफ से आ रहे गाड़ी सहारनपुर, मंडावर, भगवानपुर, सालियर, बिजौली चौक, एनएच तीन सौ चौंतालीस, नगला इमरती, कोर कालेज, बहादराबाद बाईपास, हरिलोक तिराहा, गुरुकुल कांगड़ी से होते हुए अलकनंदा, दीनदयाल पतद्वीप, चमगादड् टापू में पार्क होंगे. हरिद्वार में सोमवार को होने वाले सोमवती अमावस्या स्नान को सकुशल सम्पन्न कराने के लिए जिला प्रशासन-पुलिस महकमे ने कमर कस ली है. मेला क्षेत्र को पांच सुपर जोन, सोलह जोन एवं उनतालीस सेक्टरों बांटते हुए पुलिस फोर्स की तैनाती कर दी गई है. एसपी सिटी को मेला क्षेत्र की जिम्मेदारी सौंपी गई है. जिले के दोनों शीर्ष ऑफिसरों ने स्नान पर्व को लेकर ढिलाई न बरतने के निर्देश दिए हैं. रविवार को ऋषिकुल आयुर्वेदिक कालेज कैंपस के ऑडिटोरियम में आयोजित फोर्स की ब्रीफिंग में जिलाधिकारी विनय शंकर पांडेय और एसएसपी अजय सिंह ने संयुक्त रूप से बोला कि सोमवती अमावस्या स्नान पर्व पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की आसार है. कर्मचारी अपने-अपने ड्यूटी स्थल पर पहुंचकर भौगोलिक परिवेश की जानकारी ले लें, जिससे उन्हें परेशानी न हो. हाईवे पर तैनात हर पुलिसकर्मी को यातायात प्लान की जानकारी होना भी महत्वपूर्ण है, लिहाजा हर कोई यातायात प्लान का कठोरता से पालन कराए. डीएम-एसएसपी ने बोला कि पिछले स्नान पर्वों की तुलना में इस बार श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि होने की आशा है, वैसे भी स्नान पर्व के दौरान भीड़ का दबाव बढ़ता जाता है. उन्होंने बोला कि जोनल अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में एक-एक वैकल्पिक मार्ग चयन जरूर कर लें. ड्यूटी प्वाइंट पर तैनात पुलिसकर्मी को पूरी तरह से चौकस रहना है. मनसा देवी एवं चंडी देवी मंदिर कैंपस में अव्यवस्था का आलम न हो, इसलिए कतारबद्ध संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आगे बढ़ते रहें. प्वाइंट को किसी भी सूरत में पुलिसकर्मी नहीं छोड़े, अन्यथा कार्रवाई होना तय है. इस दौरान एसपी क्राइम रेखा यादव, एसपी सिटी स्वतंत्र कुमार सिंह, एसपी देहात एसके सिंह आदि उपस्थित रहे. एसएसपी अजय सिंह ने जल पुलिस को पूरी तरह से चौकस रहने के निर्देश दिए हैं. गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं के डूबने की घटनाएं न हों, इसलिए हर पुलिसकर्मी को चौकन्ना रहना है. जल पुलिस की टीमें मुस्तैद रहेगी. हरकी पैड़ी क्षेत्र से भिखारियों को भी हटाया जाए. बम निरोधक दस्ते के साथ साथ डॉग स्क्वॉयड की भी तैनाती की गई है. पांच अपर पुलिस अधीक्षक, तेरह पुलिस उपाधीक्षक, इक्कीस निरीक्षक/थानाध्यक्ष, पैंसठ उपनिरीक्षक, उन्नीस स्त्री उपनिरीक्षक, एक सौ तैंतालीस अपर उप निरीक्षक पीटीसी, चालीस पीएसी अ। गुल्म नायक, दो सौ बीस हेड कांस्टेबल प्रशिक्षु एटीसी, एक सौ सात मुख्य आरक्षी, दो सौ बानवे आरक्षी, चौहत्तर स्त्री आरक्षी, दो यातायात निरीक्षक, दो टीइसआई, सोलह हेट कांस्टेबल टीपी, सत्ताईस कांस्टेबल टीपी, बारह अभिसूचना ईकाई के जवान, तीन टीमें बीडीएस/डॉग स्क्वायड, घुड़सवार पुलिस की दो टीम, चार घोड़े, जल पुलिस- बीस कर्मचारी, पीएसी तीन कंपनी, दो प्लाटून, डेढ़ सेक्शन की तैनाती रहेगी. |
शिमला । भारत के राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द आज शिमला में राष्ट्रीय लेखा परीक्षा तथा लेखा अकादमी द्वारा आयोजित भारतीय लेखा परीक्षा एवं लेखा सेवाएं बैच 2018 और 2019 के प्रशिक्षु अधिकारियोें के विदाई समारोह के अवसर पर मुख्यातिथि के रूप में शामिल हुए।
इस अवसर पर राष्ट्रपति ने मेधावी प्रशिक्षु अधिकारियों को पद्क प्रदान किए। भारत की प्रथम महिला सविता कोविन्द, राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक गिरीश चन्द्रा मुरमू ने राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री का स्वागत किया। राष्ट्रीय लेखा परीक्षा तथा लेखा अकादमी के महानिदेशक सुनील एस. दाढे ने अकादमी की विभिन्न गतिविधियों के बारे मंे विस्तृत जानकारी दी।
मुख्य सचिव राम सुभग सिंह, पुलिस महानिदेशक संजय कुडू और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
| शिमला । भारत के राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द आज शिमला में राष्ट्रीय लेखा परीक्षा तथा लेखा अकादमी द्वारा आयोजित भारतीय लेखा परीक्षा एवं लेखा सेवाएं बैच दो हज़ार अट्ठारह और दो हज़ार उन्नीस के प्रशिक्षु अधिकारियोें के विदाई समारोह के अवसर पर मुख्यातिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने मेधावी प्रशिक्षु अधिकारियों को पद्क प्रदान किए। भारत की प्रथम महिला सविता कोविन्द, राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी इस अवसर पर उपस्थित थे। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक गिरीश चन्द्रा मुरमू ने राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री का स्वागत किया। राष्ट्रीय लेखा परीक्षा तथा लेखा अकादमी के महानिदेशक सुनील एस. दाढे ने अकादमी की विभिन्न गतिविधियों के बारे मंे विस्तृत जानकारी दी। मुख्य सचिव राम सुभग सिंह, पुलिस महानिदेशक संजय कुडू और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे। |
रखते हुए इस सूत्र द्वारा "श्राज्यभागौ यजति", "यज्ञस्यैव चक्षुषी नान्तरेति" इस ब्राह्मणवाक्य को 'श्रुति' पद से कहा गया है।
"भुत्यानर्थक्यमिति चेत्" (१०।७।५६) - यहाँ "वाजपेय आदि यूप का खादिरत्व आदि नियमित है" इस सिद्धान्त पक्ष में आशङ्का उठाते हुए इस सूत्र द्वारा "यवमयो मध्यः" इस ब्राह्मणवाक्य को 'श्रुति' पद से कहा गया है ।
" यावच्छुतीति चेत्" ( १०/७/७२ ) - यहाँ 'काम्येष्टियों में प्रकृति से प्राप्त द्रव्य और देवता की निवृत्ति हो जाती है' इस विचार के प्रसङ्ग में इस सूत्र में "श्रौदुम्बरो यूपो भवति" इस ब्राह्मणवाक्य को 'श्रुति' शब्द से कहा गया है ।
"न प्राकृतावशब्दत्वात्" (१०।७।६३) - यहाँ 'सौमा पौष्ण-पशुयाग में खादिर यूप नियमित है' इस विचार के प्रसङ्ग में इस सूत्र द्वारा ब्राह्मणभाग के विधिवाक्यों को 'शब्द' पद से कहा गया है।
"यथाश्रुतीति चेत्'" ( १०.७७७२) यहाँ 'पञ्चावदानता सर्वाङ्गसाधारण है' इस पक्ष में पूर्वपक्ष रखते हुए इस सूत्र द्वारा "चतुरवत्ती यजमानः पञ्चावत्तैव वपा कार्या" इस ब्राह्मणवाक्य को 'श्रुति' शब्द से कहा गया है।
"न तुल्यहेतुत्वादुभयं शब्दलक्षणम्" (१०।८।३) - यहाँ 'नअर्थविचार' के प्रसङ्ग में इस सूत्र द्वारा "यजतिषु ये यजामहं करोति, नानुयाजेषु" इस ब्राह्मणवाक्य को 'शब्द' पद से कहा गया है। | रखते हुए इस सूत्र द्वारा "श्राज्यभागौ यजति", "यज्ञस्यैव चक्षुषी नान्तरेति" इस ब्राह्मणवाक्य को 'श्रुति' पद से कहा गया है। "भुत्यानर्थक्यमिति चेत्" - यहाँ "वाजपेय आदि यूप का खादिरत्व आदि नियमित है" इस सिद्धान्त पक्ष में आशङ्का उठाते हुए इस सूत्र द्वारा "यवमयो मध्यः" इस ब्राह्मणवाक्य को 'श्रुति' पद से कहा गया है । " यावच्छुतीति चेत्" - यहाँ 'काम्येष्टियों में प्रकृति से प्राप्त द्रव्य और देवता की निवृत्ति हो जाती है' इस विचार के प्रसङ्ग में इस सूत्र में "श्रौदुम्बरो यूपो भवति" इस ब्राह्मणवाक्य को 'श्रुति' शब्द से कहा गया है । "न प्राकृतावशब्दत्वात्" - यहाँ 'सौमा पौष्ण-पशुयाग में खादिर यूप नियमित है' इस विचार के प्रसङ्ग में इस सूत्र द्वारा ब्राह्मणभाग के विधिवाक्यों को 'शब्द' पद से कहा गया है। "यथाश्रुतीति चेत्'" यहाँ 'पञ्चावदानता सर्वाङ्गसाधारण है' इस पक्ष में पूर्वपक्ष रखते हुए इस सूत्र द्वारा "चतुरवत्ती यजमानः पञ्चावत्तैव वपा कार्या" इस ब्राह्मणवाक्य को 'श्रुति' शब्द से कहा गया है। "न तुल्यहेतुत्वादुभयं शब्दलक्षणम्" - यहाँ 'नअर्थविचार' के प्रसङ्ग में इस सूत्र द्वारा "यजतिषु ये यजामहं करोति, नानुयाजेषु" इस ब्राह्मणवाक्य को 'शब्द' पद से कहा गया है। |
5. विराट कोहलीः
विराट कोहली बनाम वेस्टइंडीज 200 फिलहाल चल रहीं वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट सीरिज में कप्तान विराट कोहली ने अपने टेस्ट करियर का पहला दोहरा शतक लगाया. विराट कोहली ने बतौर कप्तान ये उनकी सबसे बड़ी पारी खेली. विराट कोहली के इस पारी के बदौलत भारत ने वो टेस्ट मैच भी जीता.
| पाँच. विराट कोहलीः विराट कोहली बनाम वेस्टइंडीज दो सौ फिलहाल चल रहीं वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट सीरिज में कप्तान विराट कोहली ने अपने टेस्ट करियर का पहला दोहरा शतक लगाया. विराट कोहली ने बतौर कप्तान ये उनकी सबसे बड़ी पारी खेली. विराट कोहली के इस पारी के बदौलत भारत ने वो टेस्ट मैच भी जीता. |
शिवपुरी। शिवपुरी एसपी राजेश हिंगणकर ने बदरवास, सतनवाड़ा और सुभाषपुरा के थाना प्रभारी बदल दिए हैं। इसके चलते कृपाल सिंह राठौर को सतनवाड़ा की कमान सौंपी है। सतनवाडा थाना प्रभारी गोपाल चौबे को सुभाषपुरा थाना प्रभारी बनाया गया है। वही सुभाषपुरा थाना प्रभारी सुरेन्द्र यादव को पुलिस लाईन अटैच किया है। इसी के साथ बदरवास थाना प्रभारी दीनबंधु सिंह तोमर को बनाया है।
| शिवपुरी। शिवपुरी एसपी राजेश हिंगणकर ने बदरवास, सतनवाड़ा और सुभाषपुरा के थाना प्रभारी बदल दिए हैं। इसके चलते कृपाल सिंह राठौर को सतनवाड़ा की कमान सौंपी है। सतनवाडा थाना प्रभारी गोपाल चौबे को सुभाषपुरा थाना प्रभारी बनाया गया है। वही सुभाषपुरा थाना प्रभारी सुरेन्द्र यादव को पुलिस लाईन अटैच किया है। इसी के साथ बदरवास थाना प्रभारी दीनबंधु सिंह तोमर को बनाया है। |
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
ज़रीना स्क्रूवाला (पूर्व नामः ज़रीना मेहता, जन्मः 1961) एक भारतीय महिला उद्यमी और परोपकारी है। वर्तमान में वे फिल्म निर्माण से जुड़ी हैं और स्वदेश फाउंडेशन के प्रबंध न्यासी है। . स्नातक शब्द के कई अर्थ हैं।.
ज़रीना स्क्रूवाला और स्नातक आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)।
ज़रीना स्क्रूवाला 11 संबंध है और स्नातक 4 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (11 + 4)।
यह लेख ज़रीना स्क्रूवाला और स्नातक के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
| शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। ज़रीना स्क्रूवाला एक भारतीय महिला उद्यमी और परोपकारी है। वर्तमान में वे फिल्म निर्माण से जुड़ी हैं और स्वदेश फाउंडेशन के प्रबंध न्यासी है। . स्नातक शब्द के कई अर्थ हैं।. ज़रीना स्क्रूवाला और स्नातक आम में शून्य बातें हैं । ज़रीना स्क्रूवाला ग्यारह संबंध है और स्नातक चार है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख ज़रीना स्क्रूवाला और स्नातक के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः |
एमपी के रीवा में दुनिया का एकमात्र महामृत्युंजय मंदिर है। सावन महीने के पहले सोमवार को यहां सुबह ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। माना जाता है कि यहां हर मन्नत पूरी होती है।
रीवा सावन का पहला सोमवार आज यानी 26 जुलाई को है। हिंदू धर्म में सावन मास के साथ ही इसके सोमवार का भी विशेष महत्व है। पूरे प्रदेश में सावन के पहले सोमवार को शिवालयों में श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला सुबह से ही शुरू हो गया। रीवा के महामृत्युंजय मंदिर में भी दिन भर शिव के जयकारों की गूंज गूंजती रही।
भगवान महामृत्युंजय की नगरी रीवा में सावन के पहले सोमवार को लेकर भक्तों में खासा उत्साह देखने को मिला। सुबह से ही छोटे-बड़े शिवालयों में हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी और मंदिर परिसर हर हर महादेव के जयकारे से गूंज उठे। सबसे ज्यादा भीड़ किला परिसर स्थित महामृत्युंजय मंदिर में रही जहां महिलाएं, बच्चे सहित बड़ी संख्या में पुरुष शामिल रहे।
कोरोना महामारी के चलते प्रशासन ने मंदिर में एक साथ केवल छह लोगों के अंदर जाने की व्यवस्था की थी, लेकिन श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के चलते यह नियम ज्यादा देर तक नहीं चल सका।
मंदिर के मुख्य पुजारी ने बताया कि यह दुनिया का एकमात्र महामृत्युंजय मंदिर है। सावन में इसका महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है। यहां श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और यही कारण है कि रीवा में श्रावण के महीने में श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक और दर्शन करने पहुंचते हैं। प्रशासन के द्वारा सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी की गई है।
| एमपी के रीवा में दुनिया का एकमात्र महामृत्युंजय मंदिर है। सावन महीने के पहले सोमवार को यहां सुबह ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। माना जाता है कि यहां हर मन्नत पूरी होती है। रीवा सावन का पहला सोमवार आज यानी छब्बीस जुलाई को है। हिंदू धर्म में सावन मास के साथ ही इसके सोमवार का भी विशेष महत्व है। पूरे प्रदेश में सावन के पहले सोमवार को शिवालयों में श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला सुबह से ही शुरू हो गया। रीवा के महामृत्युंजय मंदिर में भी दिन भर शिव के जयकारों की गूंज गूंजती रही। भगवान महामृत्युंजय की नगरी रीवा में सावन के पहले सोमवार को लेकर भक्तों में खासा उत्साह देखने को मिला। सुबह से ही छोटे-बड़े शिवालयों में हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी और मंदिर परिसर हर हर महादेव के जयकारे से गूंज उठे। सबसे ज्यादा भीड़ किला परिसर स्थित महामृत्युंजय मंदिर में रही जहां महिलाएं, बच्चे सहित बड़ी संख्या में पुरुष शामिल रहे। कोरोना महामारी के चलते प्रशासन ने मंदिर में एक साथ केवल छह लोगों के अंदर जाने की व्यवस्था की थी, लेकिन श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के चलते यह नियम ज्यादा देर तक नहीं चल सका। मंदिर के मुख्य पुजारी ने बताया कि यह दुनिया का एकमात्र महामृत्युंजय मंदिर है। सावन में इसका महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है। यहां श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और यही कारण है कि रीवा में श्रावण के महीने में श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक और दर्शन करने पहुंचते हैं। प्रशासन के द्वारा सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी की गई है। |
इस पृष्ठ में आम बजट 2018 - 19 की प्रमुख झलकियों को प्रस्तुत किया गया है।
इस भाग में सामाजकि न्याय व अधिकारिता मंत्रालय द्वारा वरिष्ठ नागिरकों के उपलब्ध पुरस्कार योजना की जानकारी दी गई है।
तेजी से बदलते हुए समाज में वृद्धावस्था में जीने वाले लोगों के लिए अकेलापन एक बहुत बड़ी समस्या है। इस वीडियो में यह बताया गया है कि ऐसे हालात में वृद्ध लोगों के जीवन में कैसे खुशहाली लाई जा सकती है।
बिहार मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना (एमवीवाईपी)
इस भाग में बिहार मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना के बारे में जानकारी दी गई है।
इस भाग में वृद्ध व्यक्तियों के लिए समेकित कार्यक्रम की जानकारी दी गई है।
इस पृष्ठ में माता - पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरणपोषण तथा कल्याण अधिनियम के बारे में जानकारी दिया गया है।
S.A.G.E. - Seniorcare Aging Growth Entine) क्या है?
इस वीडियो में भारत सिरकर द्वारा वरिष्ठ नागरिकों के फायदे के लिए लागू की गयी इस.ए.जी.ई स्कीम के बारे में बताया गया है.
यह वीडियो वरिष्ठ नागरिकों को उनके शरीर के सभी हिस्सों के लिए सरल व्यायाम के बारे में सुझाव देता है।
| इस पृष्ठ में आम बजट दो हज़ार अट्ठारह - उन्नीस की प्रमुख झलकियों को प्रस्तुत किया गया है। इस भाग में सामाजकि न्याय व अधिकारिता मंत्रालय द्वारा वरिष्ठ नागिरकों के उपलब्ध पुरस्कार योजना की जानकारी दी गई है। तेजी से बदलते हुए समाज में वृद्धावस्था में जीने वाले लोगों के लिए अकेलापन एक बहुत बड़ी समस्या है। इस वीडियो में यह बताया गया है कि ऐसे हालात में वृद्ध लोगों के जीवन में कैसे खुशहाली लाई जा सकती है। बिहार मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना इस भाग में बिहार मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना के बारे में जानकारी दी गई है। इस भाग में वृद्ध व्यक्तियों के लिए समेकित कार्यक्रम की जानकारी दी गई है। इस पृष्ठ में माता - पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरणपोषण तथा कल्याण अधिनियम के बारे में जानकारी दिया गया है। S.A.G.E. - Seniorcare Aging Growth Entine) क्या है? इस वीडियो में भारत सिरकर द्वारा वरिष्ठ नागरिकों के फायदे के लिए लागू की गयी इस.ए.जी.ई स्कीम के बारे में बताया गया है. यह वीडियो वरिष्ठ नागरिकों को उनके शरीर के सभी हिस्सों के लिए सरल व्यायाम के बारे में सुझाव देता है। |
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भगवान भी देखेंगे कमल की 'विश्वरूपम'
अभिनेता कमल हासन और रजनीकांत एक-दूसरे के सबसे अच्छे मित्र और प्रतिद्वंद्वी रहे हैं लेकिन तमिल फिल्म की इन दो बड़ी हस्तियों ने हमेशा एक-दूसरे का साथ दिया है। किसी को इस बात से कोई हैरानी नहीं होगी कि रजनीकांत हासन की विवादित फिल्म 'विश्वरूपम' बुधवार को देखेंगे।
इसके अलावा मुम्बई में बॉलीवुड कलाकारों के लिए भी विशेष प्रदर्शन किए जाने की भी योजना है जिसमें अभिनेता अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, आमिर खान और रोशन परिवार व शत्रुघ्न सिन्हा के परिवार के शामिल होने की सम्भावना है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
| Don't Miss! भगवान भी देखेंगे कमल की 'विश्वरूपम' अभिनेता कमल हासन और रजनीकांत एक-दूसरे के सबसे अच्छे मित्र और प्रतिद्वंद्वी रहे हैं लेकिन तमिल फिल्म की इन दो बड़ी हस्तियों ने हमेशा एक-दूसरे का साथ दिया है। किसी को इस बात से कोई हैरानी नहीं होगी कि रजनीकांत हासन की विवादित फिल्म 'विश्वरूपम' बुधवार को देखेंगे। इसके अलावा मुम्बई में बॉलीवुड कलाकारों के लिए भी विशेष प्रदर्शन किए जाने की भी योजना है जिसमें अभिनेता अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, आमिर खान और रोशन परिवार व शत्रुघ्न सिन्हा के परिवार के शामिल होने की सम्भावना है। इंडो-एशियन न्यूज सर्विस। |
मुखिया ममता बनर्जी ने कहा कि पीएम नरेन्द्र मोदी की किस्मत पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी बुरी होगी। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पूरे देश में झूठ और नफरत फैला रहे हैं।
हुगली। राज्य में चल रहे विधानसभा चुनाव के दौर में सत्तासीन तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के अग्रिम पंक्ति के नेताओं के बीच जुबानी जंग लगातार जारी है, सभी एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाते हुए खुद को पाक साफ साबित करते हुए जीत का दावा कर रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक रैली के दौरान पीएम नरेन्द्र मोदी को देश का सबसे बड़ा दंगाबाज बताते हुए सियासी सरगर्मी को तेज कर दिया है। उन्होंने जनता के बीच सीधा आरोप लगाया कि मोदी और शाह मिलकर भारत में नफरत का जहर घोलने का काम कर रहे हैं।
हुगली जिले के शाहगंज में एक रैली को संबोधित करते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए उन्हें 'सबसे बड़ा दंगाबाज' बताया। तृणमूल कांग्रेस की मुखिया ममता बनर्जी ने कहा कि पीएम नरेन्द्र मोदी की किस्मत पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी बुरी होगी। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पूरे देश में झूठ और नफरत फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी देश के सबसे बड़े दंगाबाज नेता हैं। अमेरिका में जनता के हाथों वहां के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ जो कुछ भी हुआ, भारत में मोदी के साथ साथ उससे भी बुरा हाल होने वाला है। उन्होंने साम्प्रदायिक दंगों की इोर इशारा करते हुए कहा कि हिंसा से कभी भी कुछ हासिल नहीं किया जा सकता।
ममता बनर्जी ने भाजपा को राज्य विधानसभा चुनाव के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करते हुए कहा कि मैं विधानसभा चुनाव 2021 में एक सतर्क गोलकीपर की भूमिका में रहूंगी और तुम ;भाजपाद्ध एक भी गोल नहीं कर पाओगे। तुम्हारे यहां पर मारे गये सभी शाॅट गोल पोस्ट के ऊपर से चले जाएंगे। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा पर द्वेष की राजनीति करने के आरोप लगाते हुए कोयले की हेराफेरी से जुड़े एक घोटाले के सिलसिले में तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी की पत्नी से सीबीआई पूछताछ की भी निंदा की। उन्होंने कहा कि यह हमारी महिलाओं का अपमान था। इस बीच क्रिकेटर मनोज तिवारी और कई बंगाली अभिनेता रैली में ममता बनर्जी की मौजूदगी में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए।
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भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की आबादी ज्यादा हो गई है। नेशनल फैमिली एंड हेल्थ सर्वे के अनुसार देश में अब 1,000 पुरुषों की तुलना में महिलाओं की आबादी 1,020 हो गई है। 90 के दशक में नोबेल प्राइज विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन के एक लेख में महिलाओं की कम आबादी को लेकर 'मिसिंग वूमन' की आरोप झेलने वाले देश के लिए ये आंकड़े किसी खुशखबरी से कम नहीं हैं। वहीं प्रजनन दर का 2.0 पर पहुंचना यह बताता है कि भारत में महिला सशक्तिकरण के कार्यक्रमों का असर हो रहा है। आंकड़े बताते हैं कि समय के साथ भारत में महिलाएं जागरुक हो रही हैं। लेकिन नेशनल फैमिली एंड हेल्थ सर्वे के ये आंकड़े महिलाओं की जागरुकता पर सवाल की स्थिति पैदा कर रहे हैं। क्योंकि इसी सर्वे के अनुसार महिलाएं और पुरुष कुछ कारणों से घरेलू हिंसा को सही बता रहे हैं।
दरअसल, नेशनल फैमिली एंड हेल्थ सर्वे में घरेलू हिंसा के बारे में महिलाओं से एक सवाल पूछा गया था कि पति का पत्नी को पीटना कितना उचित है? सवाल के जवाब देने के लिए नेशनल फैमिली एंड हेल्थ सर्वे ने स्थितियां रखी थी। इनमें पहला पति को बगैर बताए घर से बाहर जाना, घर या बच्चों को नजरअंदाज करने, पति के साथ बहस करने, पति के साथ शारीरिक संबंध बनाने से इंकार करने, खाना ठीक तरह से न बनाने, पति को पत्नी के चाल-चलन पर शक होने, ससुराल वालों का आदर न करने जैसे ऑप्सन रखे गए थे। नेशनल फैमिली एंड हेल्थ सर्वे में 18 राज्यों और जम्मू और कश्मीर के महिलाओं और पुरुषों से इसका जवाब मांगा गया था। जवाब चौंकाने वाले सामने आए हैं। सर्वे में शामिल राज्यों में घरेलू हिंसा को सही मानने वालों का आंकड़ा 80 फीसदी से ज्यादा है। तेलंगाना में सबसे ज्यादा 83.8 फीसदी और आंध्र प्रदेश 83.6 फीसदी महिलाओं का मानना है कि घरेलू हिंसा जायज है। आसान शब्दों में समझा जाए तो घरेलू हिंसा पर महिलाएं खुद ही राजी हैं। वही इसी सर्वे के अनुसार, महिलाओं में शिक्षा का स्तर घर के निर्णयों में उनके अधिकार, भविष्य की सुरक्षा जैसे मामलों पर उनकी जागरुकता लगातार बढ़ रही है।
नेशनल फैमिली एंड हेल्थ सर्वे के 11 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों के आंकड़ों के अनुसार घरेलू हिंसा के मामले में तमिलनाडु (38.1 फीसदी) अव्वल नंबर पर है। उत्तर प्रदेश (34.8 फीसदी) दूसरे नंबर पर है। इसके बाद झारखंड (31.5 फीसदी), ओडिशा (30.6 फीसदी), पुडुचेरी (30.5 फीसदी) मध्य प्रदेश (28.1 फीसदी), अरुणाचल प्रदेश (24.8 फीसदी), राजस्थान (24.3 फीसदी), दिल्ली (22.6 फीसदी), छत्तीसगढ़ (20.2 फीसदी), हरियाणा (18.2 फीसदी), उत्तराखण्ड (15.1 फीसदी), पंजाब (11.6 फीसदी) और चंडीगढ़ (9.7 फीसदी) में है। सर्वे के अनुसार घरेलू हिंसा को सही मानने के सबसे आम कारणों में एक ससुराल वालों का अनादर और घर और बच्चों की अनदेखी करना है। महिलाओं और पुरुषों ने घर से बिना बताए जाने, चाल-चलन पर शक होने जैसे कारणों को घरेलू हिंसा के लिए अनुचित माना है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि जब सभ्य समाज में किसी भी तरह की हिंसा का स्थान नहीं है तो घरेलू हिंसा को महिलाएं सही क्यों मान रही हैं?
सर्वे में यह बात भी सामने आई है कि सरकार सिर्फ कानून बनाने तक ही सीमित है। सरकार के महिला सशक्तिकरण के प्रयासों से महिलाएं अपने अधिकारों को लेकर जागरुक हो रही हैं। लेकिन घरेलू हिंसा पर महिलाओं का मौन चौंकने वाला है। आखिर महिलाएं अपनी सोच के इस दायरे को क्यों नहीं तोड़ पा रही हैं कि घरेलू हिंसा हर प्रकार से गलत है। कर्नाटक में 76.9 फीसदी, मणिपुर में 65.9 फीसदी और केरल में 52.4 फीसदी लोग घरेलू हिंसा से सहमत नजर आते हैं। महिला सशक्तिकरण को लेकर चलाए जा रहे अभियानों पर ये आंकड़े एक दाग हैं। महिलाओं के लिए सरकारें केवल कानून बनाने तक ही सीमित नजर आती है। उनके कड़ाई से पालन को लेकर गंभीरता दिखती ही नहीं है, उसमें भी वैवाहिक बलात्कार यानी मैरिटल रेप के मामलों पर सरकारें और अदालतें भी चुप्पी साध लेते हैं। वैवाहिक बलात्कार को अपराध घोषित करने की मांग करने वाले बिल पर देश की संसद में ही सहमति नहीं बन पाती है। एक संसदीय स्थायी समिति कहती है कि यदि वैवाहिक बलात्कार को अपराध बनाया गया तो परिवार व्यवस्था तनाव में आ जाएगी और इससे व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा हो सकती हैं।
गौरतलब है कि अगर महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा को खत्म करना है तो सरकारों को केवल विज्ञापन तक सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि समाज के सबसे छोटे स्तर पर भी लोगों के बीच जागरुकता अभियानों को चलाना चाहिए। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उनके आर्थिक सशक्तीकरण पर ध्यान देना चाहिए। ये प्रयास केवल शहरों तक ही सीमित नहीं होने चाहिए। घरेलू हिंसा के खिलाफ महिलाओं और पुरुषों में व्यापक समझ विकसित करने के लिए इस देश के कोने-कोने में बसे गांवों की महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाना जरूरी है। तभी महिलाओं की सोच में ये परिवर्तन आएगा कि जिस घरेलू हिंसा को वो जायज मान रही हैं वो किसी भी मायने में जरूरी नहीं है। महिलाओं के आत्मनिर्भर होने से उनके आत्मविश्वास में बढ़ोत्तरी होगी और वो घरेलू हिंसा पर खुलकर अपनी बात रख पाएंगी।
समाज में सभी को कुछ न कुछ काम मिले हुए हैं। महिलाओं को लगता है कि मेरे लिए ये पर्टिकुलर काम है, घर की देख-भला करना,बच्चों की देखभाल करना, किसी से अफेयर नहीं रखना है, बाहर नहीं निकलना है, सोशल लाइफ नहीं रखना है, इत्यादि। अगर इनमें से कोई भी एक मानक पर महिलाएं खड़ी नहीं उतरी तो मर्द का उसे मारना जायज माना जाता है। ऐसा स्वयं महिलाएं मानकर चलती हैं। लेकिन ऐसा नहीं है। इन सबको ठीक करना इतना आसान नहीं है। हमारी शिक्षा व्यवस्था ग्रामीण इलाके में बहुत ही खराब है। स्कूली शिक्षा सही तरीके से बच्चों को मिल ही नहीं पाती है। ग्रामीण इलाके की महिलाओं के पास कोई रोल मॉडल नहीं है।
अद्यतन सर्वेक्षण के अनुसार पहली बार महिलाओं की संख्या का अनुपात पुरुषों के सापेक्ष बढ़ गया है और यह भ्रूण हत्या में आई निर्णायक कमी का द्योतक भी है। शिक्षा के सकारात्मक प्रभाव के कारण सामाजिक चेतना का सम्यक् विकास हुआ है, जिसके कारण नारी-उत्पीड़न में काफी कमी आई है लेकिन कुछ अवांछनीय तत्वों का दुस्साहस बढ़ा है और गैंगरेप जैसी टर्मिनोलॉजी से आचरण की भाषा विचलित हुई है। सीता को महीनों अशोक वाटिका में सुरक्षित रखने वाले रावण ने इस कुत्सित स्वैराचार की कल्पना भी न की होगी। किन्तु शहरी जीवन में घरेलू हिंसा क्षीण हुई है। हां, गांवों में अभी इसके अवशेष प्रभूत मात्रा में उपलब्ध हैं। सूक्ष्म रूप में घरेलू हिंसा की उपस्थिति सार्वभौमिक है और यह श्रेष्ठता-बोध की देन है। पुरुष की यह अधिकार-चेतना अब नारी में भी शिफ्ट हो रही है। इसलिए परिवार में एक लोकतांत्रिक परिवेश निर्मित होता जा रहा है और पति- पत्नी में समन्वय और सहकार उत्तरोत्तर बढ़ता जा रहा है।
बहुत सारी महिलाएं घेरलू हिंसा पर चुप इसलिए रह जाती हैं क्योंकि उन्हें परिवार संभालना है, बहुत सी चुप रहती हैं क्योंकि उन्हें पता होता है समाज का नजरिया क्या होगा। छोटा सा उदाहरण कि अगर कोई तलाकशुदा औरत है तो तलाकशुदा औरत को जिस तरह से देखा जाएगा उस तरह से तलाकशुदा मर्द को नहीं। कई सारे जो तत्व हैं, सामाजिक तत्व हैं जो प्रभावित करते हैं इस मानसिकता को बने रहने के लिए। ये मानसिकता इसलिए बनी हुई हैं, इसलिए महिलाएं चुप्पी तोड़ नहीं पा रही हैं। बहुत सी महिलाएं है जो वोकल होती हैं और आवाज उठाती हैं तो आप देखिए, उनके लिए क्या सिचुएशन बनती है। हां, बशर्ते अगर वो किसी पावरफुल पॉजीशन पर हैं, जैसी वो बड़ी सेलेब्रिटी हैं, टीवी स्टार हैं तो वो अपने निर्णय ले पाती हैं। उसका क्रियान्वयन अपने जीवन में कर पाती है लेकिन निम्न वर्गीय औरतों के पास समझौते के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता क्योंकि सामाजिक सरंचना ऐसी है। लेकिन इस पर काम होना चाहिए।
| भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की आबादी ज्यादा हो गई है। नेशनल फैमिली एंड हेल्थ सर्वे के अनुसार देश में अब एक,शून्य पुरुषों की तुलना में महिलाओं की आबादी एक,बीस हो गई है। नब्बे के दशक में नोबेल प्राइज विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन के एक लेख में महिलाओं की कम आबादी को लेकर 'मिसिंग वूमन' की आरोप झेलने वाले देश के लिए ये आंकड़े किसी खुशखबरी से कम नहीं हैं। वहीं प्रजनन दर का दो.शून्य पर पहुंचना यह बताता है कि भारत में महिला सशक्तिकरण के कार्यक्रमों का असर हो रहा है। आंकड़े बताते हैं कि समय के साथ भारत में महिलाएं जागरुक हो रही हैं। लेकिन नेशनल फैमिली एंड हेल्थ सर्वे के ये आंकड़े महिलाओं की जागरुकता पर सवाल की स्थिति पैदा कर रहे हैं। क्योंकि इसी सर्वे के अनुसार महिलाएं और पुरुष कुछ कारणों से घरेलू हिंसा को सही बता रहे हैं। दरअसल, नेशनल फैमिली एंड हेल्थ सर्वे में घरेलू हिंसा के बारे में महिलाओं से एक सवाल पूछा गया था कि पति का पत्नी को पीटना कितना उचित है? सवाल के जवाब देने के लिए नेशनल फैमिली एंड हेल्थ सर्वे ने स्थितियां रखी थी। इनमें पहला पति को बगैर बताए घर से बाहर जाना, घर या बच्चों को नजरअंदाज करने, पति के साथ बहस करने, पति के साथ शारीरिक संबंध बनाने से इंकार करने, खाना ठीक तरह से न बनाने, पति को पत्नी के चाल-चलन पर शक होने, ससुराल वालों का आदर न करने जैसे ऑप्सन रखे गए थे। नेशनल फैमिली एंड हेल्थ सर्वे में अट्ठारह राज्यों और जम्मू और कश्मीर के महिलाओं और पुरुषों से इसका जवाब मांगा गया था। जवाब चौंकाने वाले सामने आए हैं। सर्वे में शामिल राज्यों में घरेलू हिंसा को सही मानने वालों का आंकड़ा अस्सी फीसदी से ज्यादा है। तेलंगाना में सबसे ज्यादा तिरासी.आठ फीसदी और आंध्र प्रदेश तिरासी.छः फीसदी महिलाओं का मानना है कि घरेलू हिंसा जायज है। आसान शब्दों में समझा जाए तो घरेलू हिंसा पर महिलाएं खुद ही राजी हैं। वही इसी सर्वे के अनुसार, महिलाओं में शिक्षा का स्तर घर के निर्णयों में उनके अधिकार, भविष्य की सुरक्षा जैसे मामलों पर उनकी जागरुकता लगातार बढ़ रही है। नेशनल फैमिली एंड हेल्थ सर्वे के ग्यारह राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों के आंकड़ों के अनुसार घरेलू हिंसा के मामले में तमिलनाडु अव्वल नंबर पर है। उत्तर प्रदेश दूसरे नंबर पर है। इसके बाद झारखंड , ओडिशा , पुडुचेरी मध्य प्रदेश , अरुणाचल प्रदेश , राजस्थान , दिल्ली , छत्तीसगढ़ , हरियाणा , उत्तराखण्ड , पंजाब और चंडीगढ़ में है। सर्वे के अनुसार घरेलू हिंसा को सही मानने के सबसे आम कारणों में एक ससुराल वालों का अनादर और घर और बच्चों की अनदेखी करना है। महिलाओं और पुरुषों ने घर से बिना बताए जाने, चाल-चलन पर शक होने जैसे कारणों को घरेलू हिंसा के लिए अनुचित माना है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि जब सभ्य समाज में किसी भी तरह की हिंसा का स्थान नहीं है तो घरेलू हिंसा को महिलाएं सही क्यों मान रही हैं? सर्वे में यह बात भी सामने आई है कि सरकार सिर्फ कानून बनाने तक ही सीमित है। सरकार के महिला सशक्तिकरण के प्रयासों से महिलाएं अपने अधिकारों को लेकर जागरुक हो रही हैं। लेकिन घरेलू हिंसा पर महिलाओं का मौन चौंकने वाला है। आखिर महिलाएं अपनी सोच के इस दायरे को क्यों नहीं तोड़ पा रही हैं कि घरेलू हिंसा हर प्रकार से गलत है। कर्नाटक में छिहत्तर.नौ फीसदी, मणिपुर में पैंसठ.नौ फीसदी और केरल में बावन.चार फीसदी लोग घरेलू हिंसा से सहमत नजर आते हैं। महिला सशक्तिकरण को लेकर चलाए जा रहे अभियानों पर ये आंकड़े एक दाग हैं। महिलाओं के लिए सरकारें केवल कानून बनाने तक ही सीमित नजर आती है। उनके कड़ाई से पालन को लेकर गंभीरता दिखती ही नहीं है, उसमें भी वैवाहिक बलात्कार यानी मैरिटल रेप के मामलों पर सरकारें और अदालतें भी चुप्पी साध लेते हैं। वैवाहिक बलात्कार को अपराध घोषित करने की मांग करने वाले बिल पर देश की संसद में ही सहमति नहीं बन पाती है। एक संसदीय स्थायी समिति कहती है कि यदि वैवाहिक बलात्कार को अपराध बनाया गया तो परिवार व्यवस्था तनाव में आ जाएगी और इससे व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा हो सकती हैं। गौरतलब है कि अगर महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा को खत्म करना है तो सरकारों को केवल विज्ञापन तक सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि समाज के सबसे छोटे स्तर पर भी लोगों के बीच जागरुकता अभियानों को चलाना चाहिए। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उनके आर्थिक सशक्तीकरण पर ध्यान देना चाहिए। ये प्रयास केवल शहरों तक ही सीमित नहीं होने चाहिए। घरेलू हिंसा के खिलाफ महिलाओं और पुरुषों में व्यापक समझ विकसित करने के लिए इस देश के कोने-कोने में बसे गांवों की महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाना जरूरी है। तभी महिलाओं की सोच में ये परिवर्तन आएगा कि जिस घरेलू हिंसा को वो जायज मान रही हैं वो किसी भी मायने में जरूरी नहीं है। महिलाओं के आत्मनिर्भर होने से उनके आत्मविश्वास में बढ़ोत्तरी होगी और वो घरेलू हिंसा पर खुलकर अपनी बात रख पाएंगी। समाज में सभी को कुछ न कुछ काम मिले हुए हैं। महिलाओं को लगता है कि मेरे लिए ये पर्टिकुलर काम है, घर की देख-भला करना,बच्चों की देखभाल करना, किसी से अफेयर नहीं रखना है, बाहर नहीं निकलना है, सोशल लाइफ नहीं रखना है, इत्यादि। अगर इनमें से कोई भी एक मानक पर महिलाएं खड़ी नहीं उतरी तो मर्द का उसे मारना जायज माना जाता है। ऐसा स्वयं महिलाएं मानकर चलती हैं। लेकिन ऐसा नहीं है। इन सबको ठीक करना इतना आसान नहीं है। हमारी शिक्षा व्यवस्था ग्रामीण इलाके में बहुत ही खराब है। स्कूली शिक्षा सही तरीके से बच्चों को मिल ही नहीं पाती है। ग्रामीण इलाके की महिलाओं के पास कोई रोल मॉडल नहीं है। अद्यतन सर्वेक्षण के अनुसार पहली बार महिलाओं की संख्या का अनुपात पुरुषों के सापेक्ष बढ़ गया है और यह भ्रूण हत्या में आई निर्णायक कमी का द्योतक भी है। शिक्षा के सकारात्मक प्रभाव के कारण सामाजिक चेतना का सम्यक् विकास हुआ है, जिसके कारण नारी-उत्पीड़न में काफी कमी आई है लेकिन कुछ अवांछनीय तत्वों का दुस्साहस बढ़ा है और गैंगरेप जैसी टर्मिनोलॉजी से आचरण की भाषा विचलित हुई है। सीता को महीनों अशोक वाटिका में सुरक्षित रखने वाले रावण ने इस कुत्सित स्वैराचार की कल्पना भी न की होगी। किन्तु शहरी जीवन में घरेलू हिंसा क्षीण हुई है। हां, गांवों में अभी इसके अवशेष प्रभूत मात्रा में उपलब्ध हैं। सूक्ष्म रूप में घरेलू हिंसा की उपस्थिति सार्वभौमिक है और यह श्रेष्ठता-बोध की देन है। पुरुष की यह अधिकार-चेतना अब नारी में भी शिफ्ट हो रही है। इसलिए परिवार में एक लोकतांत्रिक परिवेश निर्मित होता जा रहा है और पति- पत्नी में समन्वय और सहकार उत्तरोत्तर बढ़ता जा रहा है। बहुत सारी महिलाएं घेरलू हिंसा पर चुप इसलिए रह जाती हैं क्योंकि उन्हें परिवार संभालना है, बहुत सी चुप रहती हैं क्योंकि उन्हें पता होता है समाज का नजरिया क्या होगा। छोटा सा उदाहरण कि अगर कोई तलाकशुदा औरत है तो तलाकशुदा औरत को जिस तरह से देखा जाएगा उस तरह से तलाकशुदा मर्द को नहीं। कई सारे जो तत्व हैं, सामाजिक तत्व हैं जो प्रभावित करते हैं इस मानसिकता को बने रहने के लिए। ये मानसिकता इसलिए बनी हुई हैं, इसलिए महिलाएं चुप्पी तोड़ नहीं पा रही हैं। बहुत सी महिलाएं है जो वोकल होती हैं और आवाज उठाती हैं तो आप देखिए, उनके लिए क्या सिचुएशन बनती है। हां, बशर्ते अगर वो किसी पावरफुल पॉजीशन पर हैं, जैसी वो बड़ी सेलेब्रिटी हैं, टीवी स्टार हैं तो वो अपने निर्णय ले पाती हैं। उसका क्रियान्वयन अपने जीवन में कर पाती है लेकिन निम्न वर्गीय औरतों के पास समझौते के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता क्योंकि सामाजिक सरंचना ऐसी है। लेकिन इस पर काम होना चाहिए। |
न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने केंद्र की ओर से पेश वकील से इस याचिका पर निर्देश लेने को कहा और इसे अक्टूबर में आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।
ब्रितानी मानवविज्ञानी फिलिपो ओसेला ने कहा कि वैध वीजा होने के बावजूद उन्हें 23 मार्च को तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे से 'जबरदस्ती' निर्वासित किये जाने और भारत में प्रवेश की अनुमति देने से इनकार करने के कारणों का पता नहीं चल सका है और अधिकारियों के समक्ष उनका अभ्यावेदन अनुत्तरित है।
समाज विज्ञानी ने कहा कि अधिकारियों का आचरण 'अनुचित, अन्यायपूर्ण और मनमाना' होने के साथ-साथ भारत के संविधान, अंतरराष्ट्रीय कानून और मौलिक मानवाधिकारों एवं गरिमा के विरुद्ध है।
याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता के पास भारत के लिए बारह महीने का शोध वीजा मौजूद है, जिसके माध्यम से उन्हें एक से अधिक बार भारत में प्रवेश की अनुमति है, साथ ही उनका एक बेदाग यात्रा रिकॉर्ड भी रहा है। याचिकाकर्ता के अनुसार, इतना ही नहीं निर्वासन के लिए कानूनी रूप से वैध कारणों में से कोई भी उन पर लागू नहीं होता है।
| न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने केंद्र की ओर से पेश वकील से इस याचिका पर निर्देश लेने को कहा और इसे अक्टूबर में आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। ब्रितानी मानवविज्ञानी फिलिपो ओसेला ने कहा कि वैध वीजा होने के बावजूद उन्हें तेईस मार्च को तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे से 'जबरदस्ती' निर्वासित किये जाने और भारत में प्रवेश की अनुमति देने से इनकार करने के कारणों का पता नहीं चल सका है और अधिकारियों के समक्ष उनका अभ्यावेदन अनुत्तरित है। समाज विज्ञानी ने कहा कि अधिकारियों का आचरण 'अनुचित, अन्यायपूर्ण और मनमाना' होने के साथ-साथ भारत के संविधान, अंतरराष्ट्रीय कानून और मौलिक मानवाधिकारों एवं गरिमा के विरुद्ध है। याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता के पास भारत के लिए बारह महीने का शोध वीजा मौजूद है, जिसके माध्यम से उन्हें एक से अधिक बार भारत में प्रवेश की अनुमति है, साथ ही उनका एक बेदाग यात्रा रिकॉर्ड भी रहा है। याचिकाकर्ता के अनुसार, इतना ही नहीं निर्वासन के लिए कानूनी रूप से वैध कारणों में से कोई भी उन पर लागू नहीं होता है। |
मेरे मित्रकी खोटी अठली !
दुर्घटनाकी सम्भावना भी उनके मनमें न थी, पर तांगेवालेने नोट लेकर जब उनकी ही दी हुई खोटी अठन्नी उनके हाथ दी, तो बेचारे भगे भी, के भी, पर करते क्या, राह तो कहीं थी ही नहीं। उनकी जेबसे चली अठली, चल फिरकर उनकी जेबा पहुँची।
एक बार तो लगा कि मेरे भीतर हँसी उफ़न पड़ेगी, पर तभी जैसे गम्भीरताकी गाँठ उलभ-सी गई। मुझे लगा कि यह खोटी अठन्नी जीवनका एक बड़ा पाठ है, पर वह पाठ क्या है ?
नोट तुड़ाकर तीन रुपये मैंने भावनाम हाँ और स्वरोंमें ना कहते, मित्रकी जेबमें डाले और अपने कमरेमें श्री लेटा वह अठन्नीका पाठ क्या है ? [ २ ]
आदमीका मन भी अजीब चीज़ है । सोच रहा था अठन्नीकी बात ओर जा पहुँचा लवसर स्टेशन १६३५-३६ की बात है। एक मुसाफ़िर स्टेशन मास्टर के पास माया । उसकी गाड़ी छूट गई थी। रातभर उसे स्टेशनपर रहना था, पर उसके पास पाँच हजार रुपये और इतनेका ही जेवर था । स्टेशन मास्टरने उसे भरोसा दिलाया और बेटिंग रूममें सुला दिया। साथ ही एक भंगीको इसके लिए भी तैयार कर दिया कि वह रातमें दो बजेके बाद उसे कल कर दे !
स्टेशन मास्टरका लड़का सिनेमा देखकर सहारनपुरसे लौटा तो पिताके उसे घर न जा, उसी वेटिंग रूममें घुस आया और उसने उस मुसाफ़िरको बाहर निकाल दिया।
ठीक समयपर भंगी माया और अपना काम कर गया, पर मुसाफ़िरके पास न रुपये निकले, न जेवर । स्टेशन मास्टरने आकर देखा तो उसका लड़का मरा पड़ा था और वह मुसाफ़िर बाहरके टी स्टालपर चाय पी रहा था ! | मेरे मित्रकी खोटी अठली ! दुर्घटनाकी सम्भावना भी उनके मनमें न थी, पर तांगेवालेने नोट लेकर जब उनकी ही दी हुई खोटी अठन्नी उनके हाथ दी, तो बेचारे भगे भी, के भी, पर करते क्या, राह तो कहीं थी ही नहीं। उनकी जेबसे चली अठली, चल फिरकर उनकी जेबा पहुँची। एक बार तो लगा कि मेरे भीतर हँसी उफ़न पड़ेगी, पर तभी जैसे गम्भीरताकी गाँठ उलभ-सी गई। मुझे लगा कि यह खोटी अठन्नी जीवनका एक बड़ा पाठ है, पर वह पाठ क्या है ? नोट तुड़ाकर तीन रुपये मैंने भावनाम हाँ और स्वरोंमें ना कहते, मित्रकी जेबमें डाले और अपने कमरेमें श्री लेटा वह अठन्नीका पाठ क्या है ? [ दो ] आदमीका मन भी अजीब चीज़ है । सोच रहा था अठन्नीकी बात ओर जा पहुँचा लवसर स्टेशन एक हज़ार छः सौ पैंतीस-छत्तीस की बात है। एक मुसाफ़िर स्टेशन मास्टर के पास माया । उसकी गाड़ी छूट गई थी। रातभर उसे स्टेशनपर रहना था, पर उसके पास पाँच हजार रुपये और इतनेका ही जेवर था । स्टेशन मास्टरने उसे भरोसा दिलाया और बेटिंग रूममें सुला दिया। साथ ही एक भंगीको इसके लिए भी तैयार कर दिया कि वह रातमें दो बजेके बाद उसे कल कर दे ! स्टेशन मास्टरका लड़का सिनेमा देखकर सहारनपुरसे लौटा तो पिताके उसे घर न जा, उसी वेटिंग रूममें घुस आया और उसने उस मुसाफ़िरको बाहर निकाल दिया। ठीक समयपर भंगी माया और अपना काम कर गया, पर मुसाफ़िरके पास न रुपये निकले, न जेवर । स्टेशन मास्टरने आकर देखा तो उसका लड़का मरा पड़ा था और वह मुसाफ़िर बाहरके टी स्टालपर चाय पी रहा था ! |
ओलंपिक गेम्स में अब बस 20 दिन का समय रह गया है। कई देशों के खिलाड़ी खेलों के महाकुंभ में भाग लेने के लिए जापान पहंच रहे हैं। ऐसे में सर्बिया की नौकायन टीम भी जापान पहुंची, लेकिन ये टीम का दुर्भाग्य था कि जापान पहुंचने के बाद उनका एक खिलाड़ी कोरोना संक्रमित पाया गया। सर्बिया की टीम के खिलाड़ी की कोरोना संक्रमित होने की जानकारी जापानी एजेंसी क्योडो ने स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के हवाले से दी। इससे पहले युगांडा टीम के दो एथलीट्स भी जापान पहुंचने के बाद कोरोना पॉजिटिव मिले थे। स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, सर्बिया की नौकायन टीम के कोरोना संक्रमित पाए गए खिलाड़ी को टोक्यो के हानेदा एयरपोर्ट पर पृथकवास में भेज दिया गया है, इसके अलावा चार और खिलाड़ी, जो उसके साथ यात्रा कर रहे थे, उन्हें भी एयरपोर्ट के करीब अलग कर दिया गया। उनका मध्य जापान के नांटो में एक प्रशिक्षण शिविर में जाने का कार्यक्रम था। नांटो अधिकारियों के मुताबिक अब इस प्रशिक्षण शिविर के रद्द होने की संभावना है।
टोक्यो ओलंपिक पर कोरोना का खतरा मंडरा रहा है। इसको लेकर वहां के लोग विरोध भी कर चुके हैं। हालांकि, इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी और ऑर्गेनाइजर्स इसे करवाने को लेकर प्रतिबद्ध हैं। इसके लिए कुछ वेन्यू पर दर्शकों पर बैन लग सकता है। वहीं, कुछ वेन्यू पर दर्शकों की संख्या कम की जा सकती है। अगर मामला गंभीर हुआ तो यहां भी फैन्स की एंट्री पर बैन लगाया जा सकता है। ऑर्गेनाइजर्स का कहना था कि फिलहाल संख्या 10 हजार से घटाकर 5 हजार तक किए जाने पर विचार किया जा रहा है। इसके अलावा जानकारी के मुताबिक, रात 9 बजे के बाद होने वाले इंवेंट्स को बंद दरवाजे के पीछे कराया जाएगा। इसमें ओपनिंग और क्लोजिंग सेरेमनी, बेसबॉल, सॉकर और एथलेटिक्स शामिल है। ऐसे में कुल 750 सेशन में से 300 सेशन दर्शकों के बिना कराए जा सकते हैं।
| ओलंपिक गेम्स में अब बस बीस दिन का समय रह गया है। कई देशों के खिलाड़ी खेलों के महाकुंभ में भाग लेने के लिए जापान पहंच रहे हैं। ऐसे में सर्बिया की नौकायन टीम भी जापान पहुंची, लेकिन ये टीम का दुर्भाग्य था कि जापान पहुंचने के बाद उनका एक खिलाड़ी कोरोना संक्रमित पाया गया। सर्बिया की टीम के खिलाड़ी की कोरोना संक्रमित होने की जानकारी जापानी एजेंसी क्योडो ने स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के हवाले से दी। इससे पहले युगांडा टीम के दो एथलीट्स भी जापान पहुंचने के बाद कोरोना पॉजिटिव मिले थे। स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, सर्बिया की नौकायन टीम के कोरोना संक्रमित पाए गए खिलाड़ी को टोक्यो के हानेदा एयरपोर्ट पर पृथकवास में भेज दिया गया है, इसके अलावा चार और खिलाड़ी, जो उसके साथ यात्रा कर रहे थे, उन्हें भी एयरपोर्ट के करीब अलग कर दिया गया। उनका मध्य जापान के नांटो में एक प्रशिक्षण शिविर में जाने का कार्यक्रम था। नांटो अधिकारियों के मुताबिक अब इस प्रशिक्षण शिविर के रद्द होने की संभावना है। टोक्यो ओलंपिक पर कोरोना का खतरा मंडरा रहा है। इसको लेकर वहां के लोग विरोध भी कर चुके हैं। हालांकि, इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी और ऑर्गेनाइजर्स इसे करवाने को लेकर प्रतिबद्ध हैं। इसके लिए कुछ वेन्यू पर दर्शकों पर बैन लग सकता है। वहीं, कुछ वेन्यू पर दर्शकों की संख्या कम की जा सकती है। अगर मामला गंभीर हुआ तो यहां भी फैन्स की एंट्री पर बैन लगाया जा सकता है। ऑर्गेनाइजर्स का कहना था कि फिलहाल संख्या दस हजार से घटाकर पाँच हजार तक किए जाने पर विचार किया जा रहा है। इसके अलावा जानकारी के मुताबिक, रात नौ बजे के बाद होने वाले इंवेंट्स को बंद दरवाजे के पीछे कराया जाएगा। इसमें ओपनिंग और क्लोजिंग सेरेमनी, बेसबॉल, सॉकर और एथलेटिक्स शामिल है। ऐसे में कुल सात सौ पचास सेशन में से तीन सौ सेशन दर्शकों के बिना कराए जा सकते हैं। |
जबलपुर, यशभारत। गढ़ा थाना अंतर्गत शारदा चौक, नागपुर रोड पर फरियादी ललित सिंगरहा को आरोपियों ने गाली-गलौच की तथा आहत ललित व ओमी को उपहति व हत्या करने का सामान्य आशय बनाया, एवं उसके अग्रशरण में बीच-बचाव करने आये एक अन्य युवक गोलू विश्वकर्मा की चाकू व लात-घूसों से मारपीट कर, साशय हत्या कर दी। पुलिस थाना गढ़ा द्वारा अंतर्गत धारा 294, 323, 307, 302 भा. द. वि. तथा आयुध अधिनियम की धारा 25 (1-बी) (बी) के अंतर्गत मामला पंजीबद्ध कर विवेचना की तथा आरोपीगणों के विरुद्ध सत्र न्यायालय, जबलपुर में आरोप पत्र प्रस्तुत किया, जिसमें प्रकरण की सूक्ष्मता से विचारण करते हुये, माननीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश यशवंत मालवीय ने विगत दिवस हत्या के आरोपीगण धनंजय चक्रवर्ती, कुल्लू उर्फ गोविंद चक्रवर्ती एवं अब्बू उर्फ विशाल चक्रवर्ती को हत्या के अपराध से दोषमुक्त कर दिया, तथा धारा 323 में आरोपी धनंजय व कुल्लू को जेल बिताये हुये, समय को समायोजित करते हुये मुक्त करने का आदेश दिया। आरोपीगणों की ओर से अधिवक्ता नवीन शुक्ला के साथ सहयोगी अधिवक्तागण संतोष दुबे, विजय पाण्डेय, शुभम खंपरिया, श्रीयाश चक्रवर्ती पैरवी कर रहे थे।
| जबलपुर, यशभारत। गढ़ा थाना अंतर्गत शारदा चौक, नागपुर रोड पर फरियादी ललित सिंगरहा को आरोपियों ने गाली-गलौच की तथा आहत ललित व ओमी को उपहति व हत्या करने का सामान्य आशय बनाया, एवं उसके अग्रशरण में बीच-बचाव करने आये एक अन्य युवक गोलू विश्वकर्मा की चाकू व लात-घूसों से मारपीट कर, साशय हत्या कर दी। पुलिस थाना गढ़ा द्वारा अंतर्गत धारा दो सौ चौरानवे, तीन सौ तेईस, तीन सौ सात, तीन सौ दो भा. द. वि. तथा आयुध अधिनियम की धारा पच्चीस के अंतर्गत मामला पंजीबद्ध कर विवेचना की तथा आरोपीगणों के विरुद्ध सत्र न्यायालय, जबलपुर में आरोप पत्र प्रस्तुत किया, जिसमें प्रकरण की सूक्ष्मता से विचारण करते हुये, माननीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश यशवंत मालवीय ने विगत दिवस हत्या के आरोपीगण धनंजय चक्रवर्ती, कुल्लू उर्फ गोविंद चक्रवर्ती एवं अब्बू उर्फ विशाल चक्रवर्ती को हत्या के अपराध से दोषमुक्त कर दिया, तथा धारा तीन सौ तेईस में आरोपी धनंजय व कुल्लू को जेल बिताये हुये, समय को समायोजित करते हुये मुक्त करने का आदेश दिया। आरोपीगणों की ओर से अधिवक्ता नवीन शुक्ला के साथ सहयोगी अधिवक्तागण संतोष दुबे, विजय पाण्डेय, शुभम खंपरिया, श्रीयाश चक्रवर्ती पैरवी कर रहे थे। |
नई दिल्ली (आईएएनएस)। भारत ने रविवार को कहा कि पाकिस्तान ने इस साल अब तक 2,050 से अधिक सीजफायर का उल्लघंन किया है। वहीं इसमें करीब 21 भारतीय मारे गए हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत ने बार-बार पाकिस्तान से 2003 के संघर्ष विराम का पालन करने और नियंत्रण रेखा और अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर शांति बनाए रखने का आह्वान किया है। यह भी कहा कि भारतीय सेना पूरी तरह से संयम बरतती है। वह बस सीजफायर के उल्लंघन और सीमा पार आतंकवादी घुसपैठ के प्रयासों को बस विफल करती है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह भी कहा कि भारत ने पाकिस्तानी बलों द्वारा किए गए सीजफायर के उल्लंघन पर अपनी चिंताओं को उजागर किया है। इसमें सीमा पार से आतंकवादी घुसपैठ आदि शामिल है। यह बयान तब आया जब पाकिस्तानी सेना ने एलओसी पर भारतीय सेना द्वारा मारे गए अपने दो पंजाबी सैनिकों के शव को सफेद झंडा उठाने के बाद वापस ले लिया। 13 सितंबर को पाकिस्तान द्वारा शवों को वापस ले लिया गया। सेना के एक अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा बल द्वारा शवों को ले जाने के सभी प्रयासों को नाकाम कर दिया गया था।
वहीं शनिवार को सेना की उत्तरी कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह ने नियंत्रण रेखा पर राजौरी और सुंदरबनी सेक्टर का दौरा किया। उन्होंने पाकिस्तान से सैन्य खतरे के मद्देनजर नियंत्रण रेखा पर सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा की। इससे पहले, सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने भी नियंत्रण रेखा पर समीक्षा करने के लिए घाटी का दौरा किया था। खुफिया सूत्रों ने बताया था कि पाकिस्तानी सेना ने नियंत्रण रेखा से 30 किलोमीटर दूर एलओसी के पास अपने इलाके में एक ब्रिगेड के आकार की सेना को स्थानांतरित कर दिया था।
| नई दिल्ली । भारत ने रविवार को कहा कि पाकिस्तान ने इस साल अब तक दो,पचास से अधिक सीजफायर का उल्लघंन किया है। वहीं इसमें करीब इक्कीस भारतीय मारे गए हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत ने बार-बार पाकिस्तान से दो हज़ार तीन के संघर्ष विराम का पालन करने और नियंत्रण रेखा और अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर शांति बनाए रखने का आह्वान किया है। यह भी कहा कि भारतीय सेना पूरी तरह से संयम बरतती है। वह बस सीजफायर के उल्लंघन और सीमा पार आतंकवादी घुसपैठ के प्रयासों को बस विफल करती है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह भी कहा कि भारत ने पाकिस्तानी बलों द्वारा किए गए सीजफायर के उल्लंघन पर अपनी चिंताओं को उजागर किया है। इसमें सीमा पार से आतंकवादी घुसपैठ आदि शामिल है। यह बयान तब आया जब पाकिस्तानी सेना ने एलओसी पर भारतीय सेना द्वारा मारे गए अपने दो पंजाबी सैनिकों के शव को सफेद झंडा उठाने के बाद वापस ले लिया। तेरह सितंबर को पाकिस्तान द्वारा शवों को वापस ले लिया गया। सेना के एक अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा बल द्वारा शवों को ले जाने के सभी प्रयासों को नाकाम कर दिया गया था। वहीं शनिवार को सेना की उत्तरी कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह ने नियंत्रण रेखा पर राजौरी और सुंदरबनी सेक्टर का दौरा किया। उन्होंने पाकिस्तान से सैन्य खतरे के मद्देनजर नियंत्रण रेखा पर सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा की। इससे पहले, सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने भी नियंत्रण रेखा पर समीक्षा करने के लिए घाटी का दौरा किया था। खुफिया सूत्रों ने बताया था कि पाकिस्तानी सेना ने नियंत्रण रेखा से तीस किलोग्राममीटर दूर एलओसी के पास अपने इलाके में एक ब्रिगेड के आकार की सेना को स्थानांतरित कर दिया था। |
बिहार के छपरा में मॉब लिंचिंग की दर्दनाक घटना सामने आई. मवेशी चोरी के शक में बेकाबू भीड़ ने तीन लोगों की पीट-पीटकर हत्या कर दी. छपरा के बनियापुर इलाके में आज सुबह हुई वारदात, गाड़ी लेकर पहुंचे 3 लोगों को ग्रामीणों घेर कर पीटा. मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. आरजेडी नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने बेकबू भीड़तंत्र पर पीएम मोदी और सीएम नीतीश से मांगा इस्तीफा. महाराजगंज के सांसद जनार्दन सिग्रीवाल ने कार्रवाई का दिया भरोसा. नॉनस्टॉप 100 में देखें अब तक की बड़ी खबरें.
Three people were lynched on Friday by a violent mob in Baniyapur area of Bihar on suspicion of cattle theft. Family members of the deceased mourning the death of their kin. Taking note of the incident, RJD leader Raghuvansh Prasad Singh lashed out at the ruling Bihar government and demanded resignations of PM Modi and CM Nitish Kumar. Whereas, BJP MP Janardan Singh Sigriwal has assured justice to the kin of deceased. Watch Nonstop 100 for the top headlines.
| बिहार के छपरा में मॉब लिंचिंग की दर्दनाक घटना सामने आई. मवेशी चोरी के शक में बेकाबू भीड़ ने तीन लोगों की पीट-पीटकर हत्या कर दी. छपरा के बनियापुर इलाके में आज सुबह हुई वारदात, गाड़ी लेकर पहुंचे तीन लोगों को ग्रामीणों घेर कर पीटा. मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. आरजेडी नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने बेकबू भीड़तंत्र पर पीएम मोदी और सीएम नीतीश से मांगा इस्तीफा. महाराजगंज के सांसद जनार्दन सिग्रीवाल ने कार्रवाई का दिया भरोसा. नॉनस्टॉप एक सौ में देखें अब तक की बड़ी खबरें. Three people were lynched on Friday by a violent mob in Baniyapur area of Bihar on suspicion of cattle theft. Family members of the deceased mourning the death of their kin. Taking note of the incident, RJD leader Raghuvansh Prasad Singh lashed out at the ruling Bihar government and demanded resignations of PM Modi and CM Nitish Kumar. Whereas, BJP MP Janardan Singh Sigriwal has assured justice to the kin of deceased. Watch Nonstop एक सौ for the top headlines. |
Rajnath Singh (Photo Credit: फाइल फोटो )
Patna:
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज अपने एक दिवसीय दौरे पर बिहार आ रहे हैं. रोहतास के जमुहार स्थित गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल होने के लिए वो आ रहे हैं. इस कार्यक्रम में शामिल होकर वो छात्र-छात्राओं को उपाधि प्रदान करेंगे. जिसे लेकर रोहतास में पूरी तैयारी कर ली गई है. बता दें कि सुब लगभग 11 बजे वो इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे. रक्षा मंत्री के सुरक्षा को लेकर पूरी व्यवस्था की गई हैं. वहीं, इसके साथ ही अधिकारियों की टीमें मौके पर पहुंच कर कैंप कर रही है.
| Rajnath Singh Patna: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज अपने एक दिवसीय दौरे पर बिहार आ रहे हैं. रोहतास के जमुहार स्थित गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल होने के लिए वो आ रहे हैं. इस कार्यक्रम में शामिल होकर वो छात्र-छात्राओं को उपाधि प्रदान करेंगे. जिसे लेकर रोहतास में पूरी तैयारी कर ली गई है. बता दें कि सुब लगभग ग्यारह बजे वो इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे. रक्षा मंत्री के सुरक्षा को लेकर पूरी व्यवस्था की गई हैं. वहीं, इसके साथ ही अधिकारियों की टीमें मौके पर पहुंच कर कैंप कर रही है. |
समता हटाकर जगत से, प्रभु चरण माहि लगा दिया दृढ़ हो गया रख पर उसे, निज एक लक्ष्य बना लिया विश्वास श्रद्धा से भरा है, उर छलकता प्रेम से जिज्ञासु पूररगनाथ है, वह युक्त निज वत नेस से ॥ ४५ ॥ निर्भीक स्वर में है, निकलती प्रेम वाणी माधुरी निज इष्ट से अधिकार की है, बात लेकर चातुरी यह माँग उसकी है नहीं, दावा खुला प्रभु के सामने है युक्तियाँ वह नाथपूर हो विवश पर तुमकोमानने ॥४६॥ प्रत्यूह प्रदल समूह देत, दुरूह दुख फिर भी न जो कम्पायन Frte भी, रटता अपितु शंकर भजो प्रभु की शरण प्रभु का भजन, जग त्याग बल वैराग का निश्चिन्त पूरानाथ माया कोष से रिपु राग का ॥ ४७ ॥
है गौरव निज त्याग का, प्रवलम्ब प्रभु का ही लिये गौरव शौच भार्जव धैर्य का, अवलम्ब प्रभु का ही लिये जप तप उपासन योग का, अवलम्ब प्रभु का ही लिये है गौरव पुरनायकापर अवलम्ब प्रभु का ही लिये ।। ४८ ।। आदर्श उसका प्रेम है, प्रादर्श उसका योग है आदर्श उसके कर्म है, आदर्श उसका भोग है नहि शक्ति जग की एक भी, जो राह उपकी टोक दे श्री नाथपूर इष्ट से सम्बन्ध, उसका रोक दे ॥ ४६ ॥
[ शरणागति-महिमा
कर ले छुड़ा प्रभु, उर छुड़ा सकते न, दावा सूरका तुलसी नाता तज सकें, अति निकट या प्रति सरका है सूर तुलसीदास के, जिज्ञासु के हित वाक्य ये प्रभु मान्य पूररगनाथ संशय रहित, तर्क अकाटय ये ॥५०॥ इस कोटि से भी श्रेष्ठ, जो अनुभूति से निज तृप्त है जग द्वन्द्व से ऊपर उठा हन्तादि है निर्लिप्त से वैराग्य में अनुराग या विद्वोष है नहि राग से सम शांत पूरगनाथ, वह निस्संग संग्रह त्याग से ।। ५१ ।। निज में अपर में खम्भ में, तलवार में, प्रभु एक हो प्रह्लाद को थे दीखते समभाव में प्रभु एक हो रघुवर त्वमेवाहम्, पवनसुत की गिरा निस्संक थी श्री नाथपूर राम प्रतिमा दीप्त अंक मयंक थी ।। ५२ ॥ उनको प्रभु से मांग थी, दावा न प्रभु से था उन्हें निज रूप श्री प्रभु रूप में, अन्तर न मिलता था उन्हें यह सत्य शरणागति विलक्षण है, जिसे यह प्राध्य है कृतकृत्य है वह नाथपूरण, धन्य वह सौभाग्य है ।। ५३ ।। प्रति अगम और अपार महिला है, शरण भगवान को मतिमंद मेरी थी, ढिठाई शरण राम की, बखान की जिहि भाव शरणागत हुआ, जो प्रति श्रधम दुर्नाम भी प्रभु ने दिया गति नाथपूररण सोइ, और शुभ नाम भी । ५४॥
सुनना करो व शेष जिस विधि हो सके धारण करो जग से हटा कर दृष्टि, प्रभु से प्रीति निष्कारण करो अनुभव न करना शेष तुम को, जगत के जंजाल का लख जग वरावर नाथपुर, नृपति का कंगाल का ॥ ५५॥ पत में प्रलय का जायगी, गति बन्द होगी प्रारण की निश्चिन्त हो जग से, सृपा चिन्तातजकरो कल्याण की ऐसा सुअवसर जो गया, खाली तुम्हारे हाथ से रक्षा में पूरणनाथ तव बहु जन्म के भी सत्ताप से ॥५६॥ संसार सागर लें, भयंकर उठ रहा तूफान ऋति जीर्णशीर्ण विदीर्ण, नेरा बह रहा जलयान है अब है दयानिधिकर कृपा अपना सहारा दीजिये
प्रति जानि निर्बल नाथपूरण को, निजशरण में लीजिये ॥ ५७॥ विकराल धारे रूप माया, प्रबल कटक प्रचण्ड है मँडरात सिर पर घोर खत काल अति बरिबण्ड है कामादि खल करि घात, स्वस्य अमोधन चलावहीं
नाथपूर शरण राखु, तीन भय दिखलावहीं । ५८ ।
प्रज्ञान तल धन गगन पूरित दिवस निसि सम हो रहे रदि चन्द्र लखत उदोत कबहुँ न करत जग जन सो रहे भवपन्थ भरमत कछुक अनुदिन चलत पार न पाव हों विनु नाथपूरण तव शरण गति, एक सूझ न प्रायहीं ॥५६॥ | समता हटाकर जगत से, प्रभु चरण माहि लगा दिया दृढ़ हो गया रख पर उसे, निज एक लक्ष्य बना लिया विश्वास श्रद्धा से भरा है, उर छलकता प्रेम से जिज्ञासु पूररगनाथ है, वह युक्त निज वत नेस से ॥ पैंतालीस ॥ निर्भीक स्वर में है, निकलती प्रेम वाणी माधुरी निज इष्ट से अधिकार की है, बात लेकर चातुरी यह माँग उसकी है नहीं, दावा खुला प्रभु के सामने है युक्तियाँ वह नाथपूर हो विवश पर तुमकोमानने ॥छियालीस॥ प्रत्यूह प्रदल समूह देत, दुरूह दुख फिर भी न जो कम्पायन Frte भी, रटता अपितु शंकर भजो प्रभु की शरण प्रभु का भजन, जग त्याग बल वैराग का निश्चिन्त पूरानाथ माया कोष से रिपु राग का ॥ सैंतालीस ॥ है गौरव निज त्याग का, प्रवलम्ब प्रभु का ही लिये गौरव शौच भार्जव धैर्य का, अवलम्ब प्रभु का ही लिये जप तप उपासन योग का, अवलम्ब प्रभु का ही लिये है गौरव पुरनायकापर अवलम्ब प्रभु का ही लिये ।। अड़तालीस ।। आदर्श उसका प्रेम है, प्रादर्श उसका योग है आदर्श उसके कर्म है, आदर्श उसका भोग है नहि शक्ति जग की एक भी, जो राह उपकी टोक दे श्री नाथपूर इष्ट से सम्बन्ध, उसका रोक दे ॥ छियालीस ॥ [ शरणागति-महिमा कर ले छुड़ा प्रभु, उर छुड़ा सकते न, दावा सूरका तुलसी नाता तज सकें, अति निकट या प्रति सरका है सूर तुलसीदास के, जिज्ञासु के हित वाक्य ये प्रभु मान्य पूररगनाथ संशय रहित, तर्क अकाटय ये ॥पचास॥ इस कोटि से भी श्रेष्ठ, जो अनुभूति से निज तृप्त है जग द्वन्द्व से ऊपर उठा हन्तादि है निर्लिप्त से वैराग्य में अनुराग या विद्वोष है नहि राग से सम शांत पूरगनाथ, वह निस्संग संग्रह त्याग से ।। इक्यावन ।। निज में अपर में खम्भ में, तलवार में, प्रभु एक हो प्रह्लाद को थे दीखते समभाव में प्रभु एक हो रघुवर त्वमेवाहम्, पवनसुत की गिरा निस्संक थी श्री नाथपूर राम प्रतिमा दीप्त अंक मयंक थी ।। बावन ॥ उनको प्रभु से मांग थी, दावा न प्रभु से था उन्हें निज रूप श्री प्रभु रूप में, अन्तर न मिलता था उन्हें यह सत्य शरणागति विलक्षण है, जिसे यह प्राध्य है कृतकृत्य है वह नाथपूरण, धन्य वह सौभाग्य है ।। तिरेपन ।। प्रति अगम और अपार महिला है, शरण भगवान को मतिमंद मेरी थी, ढिठाई शरण राम की, बखान की जिहि भाव शरणागत हुआ, जो प्रति श्रधम दुर्नाम भी प्रभु ने दिया गति नाथपूररण सोइ, और शुभ नाम भी । चौवन॥ सुनना करो व शेष जिस विधि हो सके धारण करो जग से हटा कर दृष्टि, प्रभु से प्रीति निष्कारण करो अनुभव न करना शेष तुम को, जगत के जंजाल का लख जग वरावर नाथपुर, नृपति का कंगाल का ॥ पचपन॥ पत में प्रलय का जायगी, गति बन्द होगी प्रारण की निश्चिन्त हो जग से, सृपा चिन्तातजकरो कल्याण की ऐसा सुअवसर जो गया, खाली तुम्हारे हाथ से रक्षा में पूरणनाथ तव बहु जन्म के भी सत्ताप से ॥छप्पन॥ संसार सागर लें, भयंकर उठ रहा तूफान ऋति जीर्णशीर्ण विदीर्ण, नेरा बह रहा जलयान है अब है दयानिधिकर कृपा अपना सहारा दीजिये प्रति जानि निर्बल नाथपूरण को, निजशरण में लीजिये ॥ सत्तावन॥ विकराल धारे रूप माया, प्रबल कटक प्रचण्ड है मँडरात सिर पर घोर खत काल अति बरिबण्ड है कामादि खल करि घात, स्वस्य अमोधन चलावहीं नाथपूर शरण राखु, तीन भय दिखलावहीं । अट्ठावन । प्रज्ञान तल धन गगन पूरित दिवस निसि सम हो रहे रदि चन्द्र लखत उदोत कबहुँ न करत जग जन सो रहे भवपन्थ भरमत कछुक अनुदिन चलत पार न पाव हों विनु नाथपूरण तव शरण गति, एक सूझ न प्रायहीं ॥छप्पन॥ |
North Korea: उत्तर कोरिया के एक और मिसाइल टेस्ट के बाद जापान के प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से अलर्ट जारी किया गया है। दक्षिण कोरिया की मिलिट्री की तरफ से बताया गया है कि लॉन्च की गई मिसाइल पूर्वी सागर में जाकर गिरी है। उत्तर कोरिया की तरफ से कम दूरी वाली दो बैलेस्टिक मिसाइलों के लॉन्च की जानकारी है। पिछले ही हफ्ते उत्तर कोरिया के एक मिसाइल टेस्ट के बाद जापान में अफरा-तफरी का माहौल था। जो मिसाइल टेस्ट किया गया है, उसकी पुष्टि जापान का प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ भी की गई है।
दक्षिण कोरिया का कहना है कि यह मिसाइलें रविवार को समंदर में जाकर गिरी हैं। यह टेस्ट ऐसे समय में किया गया है जब पूर्वी सागर में अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच एक ज्वॉइन्ट मिलिट्री ड्रिल जारी है। दक्षिण कोरिया के मिलिट्री ज्वॉइन्ट चीफ्स ऑफ स्टाफ की तरफ से बताया गया है कि दो हफ्तों में सातवां मिसाइल टेस्ट है।
उन्होंने इसके अलावा कोई और जानकारी देने से साफ इनकार कर दिया। मिलिट्री चीफ के हवाले से बताया कि इस टेस्ट के बाद लगातार उत्तर कोरिया की हरकतों पर नजर रखी जा रही है और चौकसी बढ़ाई जा रही है। जबकि सेना, अमेरिका के साथ आपसी सहयोग के साथ ही किसी भी घटना का जवाब देने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
उत्तर कोरिया की तरफ से मिसाइल परीक्षणों का बचाव किया गया है। उसका कहना है कि अमेरिका की तरफ से पैदा होने वाले खतरों के मद्देनजर ये परीक्षण किए जा रहे हैं। अमेरिका के अलावा उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया और जापान का नाम भी लिया है। जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा की तरफ से निर्देश दिए गए हैं कि इस मिसाइल के बारे में जल्द से जल्द ज्यादा से ज्यादा जानकारी इकट्ठा की जाए और उसका विश्लेषण किया जाए।
| North Korea: उत्तर कोरिया के एक और मिसाइल टेस्ट के बाद जापान के प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से अलर्ट जारी किया गया है। दक्षिण कोरिया की मिलिट्री की तरफ से बताया गया है कि लॉन्च की गई मिसाइल पूर्वी सागर में जाकर गिरी है। उत्तर कोरिया की तरफ से कम दूरी वाली दो बैलेस्टिक मिसाइलों के लॉन्च की जानकारी है। पिछले ही हफ्ते उत्तर कोरिया के एक मिसाइल टेस्ट के बाद जापान में अफरा-तफरी का माहौल था। जो मिसाइल टेस्ट किया गया है, उसकी पुष्टि जापान का प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ भी की गई है। दक्षिण कोरिया का कहना है कि यह मिसाइलें रविवार को समंदर में जाकर गिरी हैं। यह टेस्ट ऐसे समय में किया गया है जब पूर्वी सागर में अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच एक ज्वॉइन्ट मिलिट्री ड्रिल जारी है। दक्षिण कोरिया के मिलिट्री ज्वॉइन्ट चीफ्स ऑफ स्टाफ की तरफ से बताया गया है कि दो हफ्तों में सातवां मिसाइल टेस्ट है। उन्होंने इसके अलावा कोई और जानकारी देने से साफ इनकार कर दिया। मिलिट्री चीफ के हवाले से बताया कि इस टेस्ट के बाद लगातार उत्तर कोरिया की हरकतों पर नजर रखी जा रही है और चौकसी बढ़ाई जा रही है। जबकि सेना, अमेरिका के साथ आपसी सहयोग के साथ ही किसी भी घटना का जवाब देने के लिए पूरी तरह से तैयार है। उत्तर कोरिया की तरफ से मिसाइल परीक्षणों का बचाव किया गया है। उसका कहना है कि अमेरिका की तरफ से पैदा होने वाले खतरों के मद्देनजर ये परीक्षण किए जा रहे हैं। अमेरिका के अलावा उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया और जापान का नाम भी लिया है। जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा की तरफ से निर्देश दिए गए हैं कि इस मिसाइल के बारे में जल्द से जल्द ज्यादा से ज्यादा जानकारी इकट्ठा की जाए और उसका विश्लेषण किया जाए। |
कोलकाता, (भाषा)। भारतीय जनता पार्टी चाहती है सरकार पुणे स्थित घोड़ा व्यापारी हसन अली को कल मुंबई की एक विशेष अदालत द्वारा जमानत पर रिहा किये जाने पर स्पष्ट बयान दे। राज्य सभा में विपक्ष के नेता अरूण जेटली ने आज मंडलों के अध्यक्षों के सम्मेलन से इतर संवाददाताओं से कहा,र हांलाकि मामला अभी अदालत में है लेकिन जो कुछ हुआ वह संदेह के घेरे से परे नहीं है। हम सरकार से कोई स्पष्ट बयान की उम्मीद करते हैं। एक सवाल के जवाब में जेटली ने कहा कि पी जे थामस को केन्दीय सतर्कता आयुक्त के पद से हटाने पर पार्टी नेतृत्व के बीच विचारों में कोई मतभेद नहीं है। उन्होंने कहा, विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने उचित मंच पर मुद्दे को उ"ाया। समूची पार्टी उनके साथ है। उच्चतम न्यायालय के फैसले ने मुद्दे पर उनके और पार्टी के दृष्टिकोण का समर्थन किया है। हमारी समूची पार्टी मुद्दे पर एक है। जेटली ने कहा कि चुनाव से पहले ग"बंधन के लिये उनकी पार्टी पश्चिम बंगाल में कई छोटे दलों से बातचीत कर रही है। अगर हम कोई समान आधार तलाशते हैं, तो हम मिलकर काम कर सकते हैं। तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी का जिक्र करते हुए भाजपा नेता ने कहा, माओवादियों को उनका समर्थन देश के हित में नहीं है और वह केन्द के गुनाह से खुद को दूर नहीं रख सकती।
| कोलकाता, । भारतीय जनता पार्टी चाहती है सरकार पुणे स्थित घोड़ा व्यापारी हसन अली को कल मुंबई की एक विशेष अदालत द्वारा जमानत पर रिहा किये जाने पर स्पष्ट बयान दे। राज्य सभा में विपक्ष के नेता अरूण जेटली ने आज मंडलों के अध्यक्षों के सम्मेलन से इतर संवाददाताओं से कहा,र हांलाकि मामला अभी अदालत में है लेकिन जो कुछ हुआ वह संदेह के घेरे से परे नहीं है। हम सरकार से कोई स्पष्ट बयान की उम्मीद करते हैं। एक सवाल के जवाब में जेटली ने कहा कि पी जे थामस को केन्दीय सतर्कता आयुक्त के पद से हटाने पर पार्टी नेतृत्व के बीच विचारों में कोई मतभेद नहीं है। उन्होंने कहा, विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने उचित मंच पर मुद्दे को उ"ाया। समूची पार्टी उनके साथ है। उच्चतम न्यायालय के फैसले ने मुद्दे पर उनके और पार्टी के दृष्टिकोण का समर्थन किया है। हमारी समूची पार्टी मुद्दे पर एक है। जेटली ने कहा कि चुनाव से पहले ग"बंधन के लिये उनकी पार्टी पश्चिम बंगाल में कई छोटे दलों से बातचीत कर रही है। अगर हम कोई समान आधार तलाशते हैं, तो हम मिलकर काम कर सकते हैं। तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी का जिक्र करते हुए भाजपा नेता ने कहा, माओवादियों को उनका समर्थन देश के हित में नहीं है और वह केन्द के गुनाह से खुद को दूर नहीं रख सकती। |
28 नवंबर को होने वाले 40 सदस्यीय मिजोरम विधानसभा चुनाव में महज एक सीट जनरल के लिए है। बाकी की 39 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। पिछले दस सालों पर इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा रहा है। मिजोरम की राजधानी आईजोल के ईस्ट-I के विधायक फिलहाल आर. ललरिनावमा हैं। जिन्होंने 2013 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस की टिकट पर जीता था। 2008 के विधानसभा चुनाव में भी पेशे से वकील ललरिनावमा ने इस सीट से जीत हासिल की थी।
2013 के विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के आर. ललरिनावमा ने एमएनएफ के एफ. मालसवनमा को 1089 मतों से पराजित किया था। आईजोल के ईस्ट-I विधानसभा सीट पर मतदान में कुल 16409 मत पड़े थे। जिसमें कांग्रेस के पक्ष में 6221 मत पड़े, तो वहीं एमएनएफ के लालहमंगइहा सायलो के पक्ष में 5799 मत पड़े। 2008 के विधानसभा चुनाव के दौरान इस सीट पर कुल 13519 वैध मत पड़े थे। इस चुनाव के दौरान आर. ललरिनावमा ने 1089 मतों से एमएनएफ के एफ मालसवनमा को चुनाव में हराया।
आपको बता दें कि मिजोरम में कुल 40 विधानसभा सीटें हैं। 8 जिलों वाले इस पर्वतीय राज्य में 25 नवंबर 2013 को हुए पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस सत्ता में आर्इ थी। जिसमें कांग्रेस के ललथनहवला राज्य के मुख्यमंत्री बनें। 2013 के विधानसभा चुनाव के दौरान मुख्य मुकाबला कांग्रेस और मिजो नेशनल फ्रंट के बीच था। जिसमे कांग्रेस को 34 सीटें मिली थी। इससे पहले भी 2008 के विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने राज्य विधानसभा की 32 सीटें जीती थीं। 2008 में भी मिजोरम कांग्रेस के नेता ललथनहवला ही मुख्यमंत्री बने थे।
इस साल चुनाव आयोग के चुनावी कार्यक्रम की घोषणा के बाद मिजोरम में चुनाव आचार संहिता 2 अक्टूबर से लागू हो चुकी है। राज्य में चुनाव में नामांकन की अंतिम तारीख 09 नवंबर को रखी गई है। वहीं, नामांकन पत्रों की जांच 12 नवंबर को होगी। नामांकन वापसी 4 नवंबर तक हो सकती है।
गौरतलब है कि मिजोरम विधानसभा चुनाव में 40 सीटों के लिए 28 नवंबर को एकचरण में ही चुनाव होने जा रहे हैं। राज्य में 11 दिसंबर को मतगणना होगी। देश में पहली बार वीवीपैट का इस्तेमाल 2013 में मिजोरम विधानसभा चुनाव के दौरान हुआ था।
| अट्ठाईस नवंबर को होने वाले चालीस सदस्यीय मिजोरम विधानसभा चुनाव में महज एक सीट जनरल के लिए है। बाकी की उनतालीस सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। पिछले दस सालों पर इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा रहा है। मिजोरम की राजधानी आईजोल के ईस्ट-I के विधायक फिलहाल आर. ललरिनावमा हैं। जिन्होंने दो हज़ार तेरह का विधानसभा चुनाव कांग्रेस की टिकट पर जीता था। दो हज़ार आठ के विधानसभा चुनाव में भी पेशे से वकील ललरिनावमा ने इस सीट से जीत हासिल की थी। दो हज़ार तेरह के विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के आर. ललरिनावमा ने एमएनएफ के एफ. मालसवनमा को एक हज़ार नवासी मतों से पराजित किया था। आईजोल के ईस्ट-I विधानसभा सीट पर मतदान में कुल सोलह हज़ार चार सौ नौ मत पड़े थे। जिसमें कांग्रेस के पक्ष में छः हज़ार दो सौ इक्कीस मत पड़े, तो वहीं एमएनएफ के लालहमंगइहा सायलो के पक्ष में पाँच हज़ार सात सौ निन्यानवे मत पड़े। दो हज़ार आठ के विधानसभा चुनाव के दौरान इस सीट पर कुल तेरह हज़ार पाँच सौ उन्नीस वैध मत पड़े थे। इस चुनाव के दौरान आर. ललरिनावमा ने एक हज़ार नवासी मतों से एमएनएफ के एफ मालसवनमा को चुनाव में हराया। आपको बता दें कि मिजोरम में कुल चालीस विधानसभा सीटें हैं। आठ जिलों वाले इस पर्वतीय राज्य में पच्चीस नवंबर दो हज़ार तेरह को हुए पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस सत्ता में आर्इ थी। जिसमें कांग्रेस के ललथनहवला राज्य के मुख्यमंत्री बनें। दो हज़ार तेरह के विधानसभा चुनाव के दौरान मुख्य मुकाबला कांग्रेस और मिजो नेशनल फ्रंट के बीच था। जिसमे कांग्रेस को चौंतीस सीटें मिली थी। इससे पहले भी दो हज़ार आठ के विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने राज्य विधानसभा की बत्तीस सीटें जीती थीं। दो हज़ार आठ में भी मिजोरम कांग्रेस के नेता ललथनहवला ही मुख्यमंत्री बने थे। इस साल चुनाव आयोग के चुनावी कार्यक्रम की घोषणा के बाद मिजोरम में चुनाव आचार संहिता दो अक्टूबर से लागू हो चुकी है। राज्य में चुनाव में नामांकन की अंतिम तारीख नौ नवंबर को रखी गई है। वहीं, नामांकन पत्रों की जांच बारह नवंबर को होगी। नामांकन वापसी चार नवंबर तक हो सकती है। गौरतलब है कि मिजोरम विधानसभा चुनाव में चालीस सीटों के लिए अट्ठाईस नवंबर को एकचरण में ही चुनाव होने जा रहे हैं। राज्य में ग्यारह दिसंबर को मतगणना होगी। देश में पहली बार वीवीपैट का इस्तेमाल दो हज़ार तेरह में मिजोरम विधानसभा चुनाव के दौरान हुआ था। |
अम्बेडकरनगर। फायर स्टेशन जलालपुर में तैनात दीवान निर्मल सिंह चौहान की अचानक तबीयत खराब हुई और कुछ मिनटों में ही मौत हो गई। मौत के कारणों का पता तो नहीं चल सका, लेकिन फायर कर्मियों में शोक व्याप्त है। दीवान निर्मल सिंह चौहान की तबीयत खराब होने, सीएचसी जलालपुर पहुंचने और निधन इतनी जल्दी हुआ कि लोगों को सहसा विश्वास ही नहीं हो रहा है कि उनका साथी अब उनके बीच नहीं है।
दीवान निर्मल सिंह चौहान की तैनाती फायर ब्रिगेड जलालपुर में थी। रविवार को देर शाम उनकी तबीयत बिगड़ी तो साथी जवान उन्हें लेकर सीएचसी जलालपुर पहुंचे। अभी इलाज शुरू ही हुआ था कि दिवान निर्मल ने दम तोड़ दिया। मौके पर थाना कोतवाली जलालपुर के प्रभारी मनीष सिंह, फायर सर्विस के उपनिरीक्षक सचिन शर्मा, महेश नारायण मिश्रा, सुभाष पाठक, रविशंकर यादव, वेदप्रकाश मौजूद रहे। वहीं आरक्षी उदय प्रताप, सूर्यभान, प्रिया मिश्रा, काजल, शिवकुमार, विवेक ने शोक व्यक्त किया है।
| अम्बेडकरनगर। फायर स्टेशन जलालपुर में तैनात दीवान निर्मल सिंह चौहान की अचानक तबीयत खराब हुई और कुछ मिनटों में ही मौत हो गई। मौत के कारणों का पता तो नहीं चल सका, लेकिन फायर कर्मियों में शोक व्याप्त है। दीवान निर्मल सिंह चौहान की तबीयत खराब होने, सीएचसी जलालपुर पहुंचने और निधन इतनी जल्दी हुआ कि लोगों को सहसा विश्वास ही नहीं हो रहा है कि उनका साथी अब उनके बीच नहीं है। दीवान निर्मल सिंह चौहान की तैनाती फायर ब्रिगेड जलालपुर में थी। रविवार को देर शाम उनकी तबीयत बिगड़ी तो साथी जवान उन्हें लेकर सीएचसी जलालपुर पहुंचे। अभी इलाज शुरू ही हुआ था कि दिवान निर्मल ने दम तोड़ दिया। मौके पर थाना कोतवाली जलालपुर के प्रभारी मनीष सिंह, फायर सर्विस के उपनिरीक्षक सचिन शर्मा, महेश नारायण मिश्रा, सुभाष पाठक, रविशंकर यादव, वेदप्रकाश मौजूद रहे। वहीं आरक्षी उदय प्रताप, सूर्यभान, प्रिया मिश्रा, काजल, शिवकुमार, विवेक ने शोक व्यक्त किया है। |
Solar Rooftop Subsidy Yojana: अगर आप सोलर पैनल पेनल लगवाते है तो आपको ज्यादा जगह की जरूरत नहीं है। इसे आप अपने घर या फैक्ट्री की छत पर लगा सकते हैं। आप ऐसे समझिए कि 1KW सौर ऊर्जा के लिए 10 वर्गमीटर जगह की जरूरत होती है। इसके लिए आपको एक मुश्त पैसा देने की भी जरूरत नहीं है।
| Solar Rooftop Subsidy Yojana: अगर आप सोलर पैनल पेनल लगवाते है तो आपको ज्यादा जगह की जरूरत नहीं है। इसे आप अपने घर या फैक्ट्री की छत पर लगा सकते हैं। आप ऐसे समझिए कि एकKW सौर ऊर्जा के लिए दस वर्गमीटर जगह की जरूरत होती है। इसके लिए आपको एक मुश्त पैसा देने की भी जरूरत नहीं है। |
हाल के कुछ वर्षों में मशरूम की खेती को लेकर देश के किसानों के बीच लोकप्रियता बढ़ी है. छोटे गांवों से लेकर आदिवासी इलाकों तक में अच्छे-खासे पैमाने पर मशरूम की खेती की जाने लगी है. इसी कड़ी में महाराष्ट्र के सतपुड़ा जंगल के आदिवासी भी मशरूम की खेती करने लगे हैं.
इस इलाके में कैसे शुरू हुई मशरूम की खेती?
महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले के रहने वाले राजेंद्र वसावे क्षेत्र में मशरूम की खेती कर असंभव चीज को संभव कर दिखाया है. सबसे पहले उन्होंने गुजरात जाकर मशरूम की खेती का प्रशिक्षण लिया. वापस लौटकर, सतपुड़ा डोंगर के गांवों काठी, मोहाड़ी के बेरोजगार युवाओं को प्रशिक्षित किया. अब यही युवा मशरूम की खेती से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं.
नंदुरबार के सतपुड़ा के इलाकों में न मोबाइल नेटवर्क है, न ही पर्याप्त संचार सुविधाएं, पीने का साफ पानी भी नहीं उपलब्ध है, अस्पताल भी नहीं है. यहां के आदिवासी समुदाय के अधिकतर लोग छोटे-मोटे काम करके अपनी आजीविका चलाते हैं और खेती करके आपना पेट भरते हैं. ऐसे में यहां के किसान मशरूम की खेती से अच्छा पैसा हासिल कर रहे हैं.
मशरूम की खेती करने वाले यहां के अधिकतर आदिवासी किसान 10 बाय 10 की छोटी सी जगह में भी ब्लू ऑयस्टर मशरूम की खेती कर रहे हैं. इस मशरूम का उत्पादन मात्र 15 दिनों में हो जाता है. महीने में दो से तीन बार इस मशरूम की खेती करना संभव है. किसान को इससे आराम से महीने में 10 से 12 हजार रुपये का मुनाफा हो जाता है. यही वजह है कि इस गांव के कई युवा अब मशरूम की खेती की ओर रुख कर रहे हैं.
(नंदुरबार से रोहिणी ठाकुर की रिपोर्ट)
| हाल के कुछ वर्षों में मशरूम की खेती को लेकर देश के किसानों के बीच लोकप्रियता बढ़ी है. छोटे गांवों से लेकर आदिवासी इलाकों तक में अच्छे-खासे पैमाने पर मशरूम की खेती की जाने लगी है. इसी कड़ी में महाराष्ट्र के सतपुड़ा जंगल के आदिवासी भी मशरूम की खेती करने लगे हैं. इस इलाके में कैसे शुरू हुई मशरूम की खेती? महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले के रहने वाले राजेंद्र वसावे क्षेत्र में मशरूम की खेती कर असंभव चीज को संभव कर दिखाया है. सबसे पहले उन्होंने गुजरात जाकर मशरूम की खेती का प्रशिक्षण लिया. वापस लौटकर, सतपुड़ा डोंगर के गांवों काठी, मोहाड़ी के बेरोजगार युवाओं को प्रशिक्षित किया. अब यही युवा मशरूम की खेती से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. नंदुरबार के सतपुड़ा के इलाकों में न मोबाइल नेटवर्क है, न ही पर्याप्त संचार सुविधाएं, पीने का साफ पानी भी नहीं उपलब्ध है, अस्पताल भी नहीं है. यहां के आदिवासी समुदाय के अधिकतर लोग छोटे-मोटे काम करके अपनी आजीविका चलाते हैं और खेती करके आपना पेट भरते हैं. ऐसे में यहां के किसान मशरूम की खेती से अच्छा पैसा हासिल कर रहे हैं. मशरूम की खेती करने वाले यहां के अधिकतर आदिवासी किसान दस बाय दस की छोटी सी जगह में भी ब्लू ऑयस्टर मशरूम की खेती कर रहे हैं. इस मशरूम का उत्पादन मात्र पंद्रह दिनों में हो जाता है. महीने में दो से तीन बार इस मशरूम की खेती करना संभव है. किसान को इससे आराम से महीने में दस से बारह हजार रुपये का मुनाफा हो जाता है. यही वजह है कि इस गांव के कई युवा अब मशरूम की खेती की ओर रुख कर रहे हैं. |
- द. भारत आतंकियों के टारगेट पर!
सूत्रों के अनुसार, खुफिया विभाग ने कुछ आतंकियों को पकड़ा है और उन्होंने पूछताछ कर रही है. खुफिया विभाग को कुछ ऐसे सबूत भी मिले हैं, जो इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि चेन्नई स्थित परमाणु पावर प्लांट आतंकियों की सूची में प्राथमिकता में है. यहां तक कि खुफिया एजेंसी ने कुछ ई-मेल सर्वर को ट्रैक किया है, जिनसे पता चला है कि कुछ संवेदनशील प्रतिष्ठानों की पूरी तरह से रेकी करने के पश्चात फोटोग्राफ भेजे गए हैं. खुफिया विभाग इन ई-मेल की जांच कर रहा है.
| - द. भारत आतंकियों के टारगेट पर! सूत्रों के अनुसार, खुफिया विभाग ने कुछ आतंकियों को पकड़ा है और उन्होंने पूछताछ कर रही है. खुफिया विभाग को कुछ ऐसे सबूत भी मिले हैं, जो इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि चेन्नई स्थित परमाणु पावर प्लांट आतंकियों की सूची में प्राथमिकता में है. यहां तक कि खुफिया एजेंसी ने कुछ ई-मेल सर्वर को ट्रैक किया है, जिनसे पता चला है कि कुछ संवेदनशील प्रतिष्ठानों की पूरी तरह से रेकी करने के पश्चात फोटोग्राफ भेजे गए हैं. खुफिया विभाग इन ई-मेल की जांच कर रहा है. |
टेलीविजन के पॉपुलर कपल प्रिंस नरूला और युविका चौधरी इन दिनों अस्पताल में भर्ती डेंगू का इलाज करवा रहे हैं। डेंगू होने से पहले खबरें थीं कि कपल कोरोना पॉजिटिव है जिसके चलते दोनों क्वारैंटाइन हो गए हैं हालांकि दोनों ने इन खबरों से इनकार कर दिया था। अब डेंगू के इलाज के दौरान युविका ने कन्फर्म करते हुए बताया है कि वो कोरोना की चपेट में आ गए थे जिससे उनकी इम्युनिटी काफी कम हो गई है। दोनों ने ना केवल पॉजिटिव होने की बात छिपाई बल्कि इंटरव्यू में इस बारे में झूठ भी कहा।
हाल ही में ई-टाइम्स से बातचीत में युविका चौधरी ने कहा, जी हां, हम पिछले महीने कोविड 19 पॉजिटिव हो गए थे। शायद इसी वजह से हमारी इम्युनिटी लेवल गिर गया है। इसी वजह से हमें दूसरे इन्फेक्शन का खतरा बढ़ गया और डेंगू हो गया। मैं दुआ करती हूं कि ये किसी को ना हो।
प्रिंस युविका ने एक महीने तक कोरोना संक्रमित होने पर चुप्पी साधी थी। अब इसकी वजह बताते हुए एक्टर ने कहा, हमें कोरोना वायरस से ज्यादा परेशानी नहीं दी। हमें बिना लक्षण वाला कोरोना था। हम लोगों को नहीं बताना चाहते थे कि हम ठीक हैं क्योंकि लोग एक्टर्स के बारे में पढ़ते हैं, और अंधों की तरह उन्हें फॉलो करने लगते हैं। सबके शरीर अलग होते हैं, हर केस भी अलग होता है। हमने खुद को 21 दिनों के लिए क्वारैंटाइन किया था। हमने बाहर निकलने से पहले दो बार टेस्ट भी करवाया। लेकिन फिर हमें डेंगू हो गया।
प्रिंस और युविका के आइसोलेट होने पर लोगों ने उनके कोरोना पॉजिटिव होने की अफवाह फैला दी थी जो अब जाकर सही साबित हुई हैं। मगर उस समय युविका ने इस बारे में कहा था, 'हम सभी सावधानियों के साथ चंडीगढ़ से मुंबई आए थे लेकिन उसके बावजूद भी हमने खुद को घर पर आइसोलेट करना बेहतर समझा। इस दौरान हम किसी से भी नहीं मिले। बीते दिन हमने अपना कोविड 19 टेस्ट करवाया है जो खुशकिस्मती से नेगेटिव आया है। हमने खुद को पूरी तरह से घर में बंद कर लिया था तो लोगों को लगने लगा कि हमें कोरोना है और हमारा टेस्ट पॉजिटिव आया है। हालांकि ऐसा नहीं है'।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
| टेलीविजन के पॉपुलर कपल प्रिंस नरूला और युविका चौधरी इन दिनों अस्पताल में भर्ती डेंगू का इलाज करवा रहे हैं। डेंगू होने से पहले खबरें थीं कि कपल कोरोना पॉजिटिव है जिसके चलते दोनों क्वारैंटाइन हो गए हैं हालांकि दोनों ने इन खबरों से इनकार कर दिया था। अब डेंगू के इलाज के दौरान युविका ने कन्फर्म करते हुए बताया है कि वो कोरोना की चपेट में आ गए थे जिससे उनकी इम्युनिटी काफी कम हो गई है। दोनों ने ना केवल पॉजिटिव होने की बात छिपाई बल्कि इंटरव्यू में इस बारे में झूठ भी कहा। हाल ही में ई-टाइम्स से बातचीत में युविका चौधरी ने कहा, जी हां, हम पिछले महीने कोविड उन्नीस पॉजिटिव हो गए थे। शायद इसी वजह से हमारी इम्युनिटी लेवल गिर गया है। इसी वजह से हमें दूसरे इन्फेक्शन का खतरा बढ़ गया और डेंगू हो गया। मैं दुआ करती हूं कि ये किसी को ना हो। प्रिंस युविका ने एक महीने तक कोरोना संक्रमित होने पर चुप्पी साधी थी। अब इसकी वजह बताते हुए एक्टर ने कहा, हमें कोरोना वायरस से ज्यादा परेशानी नहीं दी। हमें बिना लक्षण वाला कोरोना था। हम लोगों को नहीं बताना चाहते थे कि हम ठीक हैं क्योंकि लोग एक्टर्स के बारे में पढ़ते हैं, और अंधों की तरह उन्हें फॉलो करने लगते हैं। सबके शरीर अलग होते हैं, हर केस भी अलग होता है। हमने खुद को इक्कीस दिनों के लिए क्वारैंटाइन किया था। हमने बाहर निकलने से पहले दो बार टेस्ट भी करवाया। लेकिन फिर हमें डेंगू हो गया। प्रिंस और युविका के आइसोलेट होने पर लोगों ने उनके कोरोना पॉजिटिव होने की अफवाह फैला दी थी जो अब जाकर सही साबित हुई हैं। मगर उस समय युविका ने इस बारे में कहा था, 'हम सभी सावधानियों के साथ चंडीगढ़ से मुंबई आए थे लेकिन उसके बावजूद भी हमने खुद को घर पर आइसोलेट करना बेहतर समझा। इस दौरान हम किसी से भी नहीं मिले। बीते दिन हमने अपना कोविड उन्नीस टेस्ट करवाया है जो खुशकिस्मती से नेगेटिव आया है। हमने खुद को पूरी तरह से घर में बंद कर लिया था तो लोगों को लगने लगा कि हमें कोरोना है और हमारा टेस्ट पॉजिटिव आया है। हालांकि ऐसा नहीं है'। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
निशांत राजपूत, सिवनी। जिले के लखनादौन में बीती देर रात तक गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के कार्यकर्ताओं पदाधिकारियों ने एनएच 44 पर चक्का जाम कर दिया। इसके बाद पुलिस प्रशासन ने मोर्चा संभाला। इस दौरान गोगपा के कार्यकर्ताओं और कुछ असामाजिक तत्वों ने पुलिस पर पथराव कर दिया। जिससे 10 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को चोट आई हैं। सभी घायलों का लखनादौन के अस्पताल में उपचार किया गया।
बता दें कि करीब डेढ़ महीने पहले विक्की कहार की लखनादौन सिविल अस्पताल में हत्या कर दी गई थी। हत्या का आरोप अस्पताल के ही गार्ड संतोष धुर्वे पर लगा है। वे आदिवासी समाज से है। आदिवासी समाज और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के पदाधिकारियों का कहना है कि संतोष धुर्वे बेकसूर है असली आरोपी कोई और है। असली आरोपी की गिरफ्तारी की मांग को लेकर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने कल धरना प्रदर्शन किया और रैली निकाली। इसके बाद हालात बेकाबू हो गए और पुलिस को हल्का बल प्रयोग कर आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। इस दौरान आक्रोशित भीड़ ने पुलिस पर पथराव कर दिया।
एसपी रामजी श्रीवास्तव ने बताया कि शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पथराव को लेकर करीब डेढ़ दर्जन लोगों के खिलाफ नामजद मामला दर्ज किया गया है। पुलिस पथराव में शामिल अन्य लोगों को पहचान कर और मामला दर्ज करेगी।
| निशांत राजपूत, सिवनी। जिले के लखनादौन में बीती देर रात तक गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के कार्यकर्ताओं पदाधिकारियों ने एनएच चौंतालीस पर चक्का जाम कर दिया। इसके बाद पुलिस प्रशासन ने मोर्चा संभाला। इस दौरान गोगपा के कार्यकर्ताओं और कुछ असामाजिक तत्वों ने पुलिस पर पथराव कर दिया। जिससे दस से ज्यादा पुलिसकर्मियों को चोट आई हैं। सभी घायलों का लखनादौन के अस्पताल में उपचार किया गया। बता दें कि करीब डेढ़ महीने पहले विक्की कहार की लखनादौन सिविल अस्पताल में हत्या कर दी गई थी। हत्या का आरोप अस्पताल के ही गार्ड संतोष धुर्वे पर लगा है। वे आदिवासी समाज से है। आदिवासी समाज और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के पदाधिकारियों का कहना है कि संतोष धुर्वे बेकसूर है असली आरोपी कोई और है। असली आरोपी की गिरफ्तारी की मांग को लेकर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने कल धरना प्रदर्शन किया और रैली निकाली। इसके बाद हालात बेकाबू हो गए और पुलिस को हल्का बल प्रयोग कर आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। इस दौरान आक्रोशित भीड़ ने पुलिस पर पथराव कर दिया। एसपी रामजी श्रीवास्तव ने बताया कि शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पथराव को लेकर करीब डेढ़ दर्जन लोगों के खिलाफ नामजद मामला दर्ज किया गया है। पुलिस पथराव में शामिल अन्य लोगों को पहचान कर और मामला दर्ज करेगी। |
ग्लास मेनगेरी टेनेसी विलियम्स में से एक है, जो अधिक सशक्त नाटकों में से एक है, लेकिन दक्षिणी आग और ए स्ट्रीटकार नामित डिजायर और ए बिल्ली पर एक हॉट टिन रूफ के जुनून में इसकी कमी है, यह इसकी कविता और भावनात्मकता के लिए तैयार है शक्ति। अर्ध-आत्मकथात्मक - दुनिया के बीच गड़बड़ी के साथ शानदार ढंग से व्यवहार करना क्योंकि यह वास्तव में यह देखना चाहता है और दुनिया वास्तव में है - ग्लास मेनगेरी परिवार के सदस्यों का एक दृढ़ चित्रण है जो एक दूसरे से प्यार करते हैं लेकिन एक साथ नहीं रह सकते हैं।
यह नाटक एक आदमी के अपराध से संबंधित है - क्योंकि वह अपने मार्ग का पालन करता है।
नाटक अपने मुख्य पात्रों में से एक है - टॉम विंगफील्ड - जो जूते के गोदाम में काम करता है लेकिन गुप्त रूप से एक कवि बनना चाहता है। वह अपनी मां और उसकी बहन, लौरा के साथ रहता है; वह घर का आदमी है क्योंकि उसके पिता ने उन्हें कुछ भी नहीं छोड़ा था। टॉम की मां अनुष्ठानों और उसके दक्षिणी उपवास के मूल्यों से ग्रस्त है। वह अपनी बेटी को दक्षिणी बेले बनना चाहती है क्योंकि वह अपने अतीत से याद करती है; इसके बजाय, वह बेहद निराश है।
लौरा उसकी कठोरता से अपंग है। उसके पैर ब्रेस के साथ, वह घर छोड़ने में रूचि नहीं रखती है। वह ग्लास जानवरों के अपने साथी के साथ घर पर अपना समय दूर कर देती है - टुकड़े जो उसके केवल गर्व और खुशी हैं।
महान भगदड़?
अपने परिवार द्वारा टकराया, टॉम पेय। फिर, अपने पिता द्वारा निर्धारित उदाहरण के बाद, वह व्यापारी नौसेना में शामिल होने की योजना बना रहा है। वह साहस देखना और अनुभव हासिल करना चाहता है ताकि वह लिख सके।
वह जाने से पहले, वह अपने काम के सहयोगियों में से एक घर लाता है (उसकी मां का मानना है कि लौरा का भविष्य विवाह में है)। वह जिम ओ'कोनर, एक पूर्व फुटबॉल नायक लाता है (लौरा इस आदमी को जानता था और गुप्त रूप से उससे प्यार करता था)। वह रात के खाने के लिए बहुत शर्मीली है लेकिन जो के साथ आम जमीन पाती है जब वह उसे अपने ग्लास मेनगेरी दिखाती है।
जो और लौरा नृत्य, लेकिन फिर वह गलती से उसके एक गिलास जानवरों को तोड़ देता है। लगता है कि लौरा धीरे-धीरे खुद से बाहर आ रहा है और वे चुंबन करते हैं। जो जल्दी में जो पत्तियां। वह यह भी कहता है कि उसके पास एक मंगेतर है। लौरा के सपनों को कुचल दिया गया है, और टॉम की मां ने उन्हें एक बुरे बेटे और एक क्रूर भाई कहा है। आने वाले तर्क में, टॉम बाहर निकलता है। इस घटना के कुछ देर बाद, वह अपने परिवार को अच्छे से छोड़ देता है। लेकिन, यह वर्णन टॉम के अपराध को आवाज देता है - बहन के लिए जो उसने पीछे छोड़ा था।
टेनेसी विलियम्स अपने पात्रों की उम्मीदों और सपनों को उजागर करता है। टॉम को बचने और रोमांच की जरूरत है। उसकी मां वापस देखती है और एक और अधिक विनम्र दुनिया को फिर से बनाना चाहता है जो शायद कभी अस्तित्व में नहीं है (अपनी कल्पना में छोड़कर। लौरा सख्त दुनिया के एक और सौम्य, सपनों की दुनिया का हिस्सा बनना चाहता है - विशेष रूप से पौराणिक प्राणी, गेंडा।
नाटक के लिए प्रतीकात्मक अनुभव - इसके केंद्रीय पात्रों में से एक की स्मृति के माध्यम से फ़िल्टर किया गया - उम्मीदों और वास्तविकता के बीच भेद को रेखांकित करता है और नाटक को एक अल्पकालिक गुणवत्ता देता है। पात्र टॉम की यादों के एक साथी में फंस गए हैं, और वे ग्लास जानवरों की तरह अवास्तविक हो गए हैं कि लौरा इतना प्यार करता है।
विलियम्स भी पुरानी दक्षिणी दुनिया और नई औद्योगिकीकृत सभ्यता के बीच चक्कर लगाता है। स्पष्टता और शक्ति के साथ, विलियम्स ने अपने दक्षिणी उपवास पर वातावरण और जुनून जोड़ने के लिए आकर्षित किया। यहां, वह पुरानी दुनिया की जांच करता हैः जहां पुरुष महिलाओं के लिए बुला रहे थे, जोड़ों ने नृत्य में भाग लिया, और प्यार आसानी से व्यवस्थित किया गया। वह दिखाता है कि यह पूर्व दक्षिणी अनुभव अप्रचलित है। टॉम की मां इस दुनिया में फंस गई है, टॉम अस्तित्व के इस पूर्व तरीके के झुकाव के लिए बेताब है। यहां तक कि जैसे ही टॉम मुक्त हो जाता है, अतीत उस पर अपना पकड़ बनाए रखता है। यहां तक कि इसके भ्रमपूर्ण राज्य में, अतीत अभी भी उसकी स्मृति में "असली" है।
एक खूबसूरत, थोड़ा हंटिंग खेल, द ग्लास मेनगेरी एक परिवार का अनुसरण करता है क्योंकि यह अलग-अलग होता है - उन सपनों के साथ जो उन्हें कुछ खंडित पदार्थ देते थे।
काम छू रहा है, और उदास है। हालांकि यह नाटक की भ्रमपूर्ण प्रकृति को आत्म-जागरूक रूप से अग्रभूमि बनाता है, टेनेसी विलियम्स सच्चाई की गहरी सीम में आते हैं। विलियम्स ने एक बदलती दुनिया का प्रतिनिधित्व किया है। वह दर्शाता है कि परिवर्तन व्यक्ति (साथ ही साथ समूह) को कैसे प्रभावित करता है, भले ही यह उन्हें अलग करता है।
| ग्लास मेनगेरी टेनेसी विलियम्स में से एक है, जो अधिक सशक्त नाटकों में से एक है, लेकिन दक्षिणी आग और ए स्ट्रीटकार नामित डिजायर और ए बिल्ली पर एक हॉट टिन रूफ के जुनून में इसकी कमी है, यह इसकी कविता और भावनात्मकता के लिए तैयार है शक्ति। अर्ध-आत्मकथात्मक - दुनिया के बीच गड़बड़ी के साथ शानदार ढंग से व्यवहार करना क्योंकि यह वास्तव में यह देखना चाहता है और दुनिया वास्तव में है - ग्लास मेनगेरी परिवार के सदस्यों का एक दृढ़ चित्रण है जो एक दूसरे से प्यार करते हैं लेकिन एक साथ नहीं रह सकते हैं। यह नाटक एक आदमी के अपराध से संबंधित है - क्योंकि वह अपने मार्ग का पालन करता है। नाटक अपने मुख्य पात्रों में से एक है - टॉम विंगफील्ड - जो जूते के गोदाम में काम करता है लेकिन गुप्त रूप से एक कवि बनना चाहता है। वह अपनी मां और उसकी बहन, लौरा के साथ रहता है; वह घर का आदमी है क्योंकि उसके पिता ने उन्हें कुछ भी नहीं छोड़ा था। टॉम की मां अनुष्ठानों और उसके दक्षिणी उपवास के मूल्यों से ग्रस्त है। वह अपनी बेटी को दक्षिणी बेले बनना चाहती है क्योंकि वह अपने अतीत से याद करती है; इसके बजाय, वह बेहद निराश है। लौरा उसकी कठोरता से अपंग है। उसके पैर ब्रेस के साथ, वह घर छोड़ने में रूचि नहीं रखती है। वह ग्लास जानवरों के अपने साथी के साथ घर पर अपना समय दूर कर देती है - टुकड़े जो उसके केवल गर्व और खुशी हैं। महान भगदड़? अपने परिवार द्वारा टकराया, टॉम पेय। फिर, अपने पिता द्वारा निर्धारित उदाहरण के बाद, वह व्यापारी नौसेना में शामिल होने की योजना बना रहा है। वह साहस देखना और अनुभव हासिल करना चाहता है ताकि वह लिख सके। वह जाने से पहले, वह अपने काम के सहयोगियों में से एक घर लाता है । वह जिम ओ'कोनर, एक पूर्व फुटबॉल नायक लाता है । वह रात के खाने के लिए बहुत शर्मीली है लेकिन जो के साथ आम जमीन पाती है जब वह उसे अपने ग्लास मेनगेरी दिखाती है। जो और लौरा नृत्य, लेकिन फिर वह गलती से उसके एक गिलास जानवरों को तोड़ देता है। लगता है कि लौरा धीरे-धीरे खुद से बाहर आ रहा है और वे चुंबन करते हैं। जो जल्दी में जो पत्तियां। वह यह भी कहता है कि उसके पास एक मंगेतर है। लौरा के सपनों को कुचल दिया गया है, और टॉम की मां ने उन्हें एक बुरे बेटे और एक क्रूर भाई कहा है। आने वाले तर्क में, टॉम बाहर निकलता है। इस घटना के कुछ देर बाद, वह अपने परिवार को अच्छे से छोड़ देता है। लेकिन, यह वर्णन टॉम के अपराध को आवाज देता है - बहन के लिए जो उसने पीछे छोड़ा था। टेनेसी विलियम्स अपने पात्रों की उम्मीदों और सपनों को उजागर करता है। टॉम को बचने और रोमांच की जरूरत है। उसकी मां वापस देखती है और एक और अधिक विनम्र दुनिया को फिर से बनाना चाहता है जो शायद कभी अस्तित्व में नहीं है को कैसे प्रभावित करता है, भले ही यह उन्हें अलग करता है। |
नखासा थाना इलाके में बस से उतरने के बाद सड़क पार कर रहे वृद्ध को बाइक में टक्कर मार दी। हादसे में वृद्ध की मौत हो गई। वृद्ध की मौत से परिवार में कोहराम मच गया। थाना क्षेत्र के गांव बराही निवासी अमीर उल्लाह हसन (65 वर्ष) मंगलवार शाम को रिश्तेदारी से लौटे थे। कस्बा सिरसी में बस से उतरने के बाद बह सड़क पार कर रहे थे। इसी दौरान तेज रफ्तार बाइक ने उन्हें टक्कर मार दी थी। हादसे में घायल वृद्ध को लोगों ने महमूदपुर के अस्पताल पहुंचाया था। जहां चिकित्सक ने गंभीर हालत में रेफर कर दिया था। बुधवार सुबह हादसे में घायल वृद्ध की उपचार के दौरान मौत हो गई। वृद्ध की मौत से परिवार में कोहराम मच गया। पत्नी साबरी बेगम और अन्य परिजनों का रो रो कर बुरा हाल हो गया।
| नखासा थाना इलाके में बस से उतरने के बाद सड़क पार कर रहे वृद्ध को बाइक में टक्कर मार दी। हादसे में वृद्ध की मौत हो गई। वृद्ध की मौत से परिवार में कोहराम मच गया। थाना क्षेत्र के गांव बराही निवासी अमीर उल्लाह हसन मंगलवार शाम को रिश्तेदारी से लौटे थे। कस्बा सिरसी में बस से उतरने के बाद बह सड़क पार कर रहे थे। इसी दौरान तेज रफ्तार बाइक ने उन्हें टक्कर मार दी थी। हादसे में घायल वृद्ध को लोगों ने महमूदपुर के अस्पताल पहुंचाया था। जहां चिकित्सक ने गंभीर हालत में रेफर कर दिया था। बुधवार सुबह हादसे में घायल वृद्ध की उपचार के दौरान मौत हो गई। वृद्ध की मौत से परिवार में कोहराम मच गया। पत्नी साबरी बेगम और अन्य परिजनों का रो रो कर बुरा हाल हो गया। |
किसानों (Farmers) ने कहा कि जो खरीद के 72 घंटे के बाद पेमेंट किसानों की करने के दावे सरकार के थे वो हवा-हवाई हो गए है। पेमेंट को कई-कई दिन हो चुके है लेकिन उनके खातों में नहीं आ रही है।
हरिभूमि न्यूज. जींद (उचाना)
गेहूं बेचने के बाद अब किसानों (Farmers) को उनके खाते में पेमेंट आने का इंतजार है। अनेकों किसानों को तो गेहूं बेचे 20 से 22 दिन हो चुके है लेकिन अब तक पेमेंट उनके खाते में नहीं आ रही है। किसानों ने कहा कि जो खरीद के 72 घंटे के बाद पेमेंट किसानों की करने के दावे सरकार के थे वो हवा-हवाई हो गए है। पेमेंट को कई-कई दिन हो चुके है लेकिन उनके खातों में नहीं आ रही है। बार-बार कभी बैंक तो कभी खरीद एजेंसी के पास वो पेमेंट के लिए जा रहे है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
पिरथी, बलवान, बीरभान ने कहा कि छातर सब यार्ड पर वेयर हाऊस तो उचाना मंडी में खाद्य आपूर्ति विभाग को गेहूं बेची थी। गेहूं बेचे 20 से 22 दिन हो चुके है लेकिन आज तक पेमेंट नहीं आई है। कभी बैंक में जाकर खाते चैक कर रहे है तो कभी खरीद एजेंसी, आढ़ती के पास जा रहे है लेकिन कोई समाधान अब तक नहीं हो रहा है। सरकार ने 72 घंटे के दावे किए थे पेमेंट के लेकिन 20 से 22 दिन हो चुके है। सरकार के ये दावे पूरी तरह से हवा-हवाई हो चुके है। अब पेमेंट न आने पर मार्केट कमेटी सचिव को शिकायत किसान देकर आएंगे।
मार्केट कमेटी सचिव नरेंद्र कुंडू ने कहा कि जिन किसानों की पेेमेंट में देरी होने पर शिकायत आती है तो संबंधित एजेंसी को पत्र लिख कर जानकारी मांगी जाती है क्यों पेमेेंट किसान की नहीं हुई है। किसानों को किसी तरह की परेशानी नहीं आने दी जाएगी। किसान की शिकायत आने पर तुरंत कार्यवाही की जाती है।
| किसानों ने कहा कि जो खरीद के बहत्तर घंटाटे के बाद पेमेंट किसानों की करने के दावे सरकार के थे वो हवा-हवाई हो गए है। पेमेंट को कई-कई दिन हो चुके है लेकिन उनके खातों में नहीं आ रही है। हरिभूमि न्यूज. जींद गेहूं बेचने के बाद अब किसानों को उनके खाते में पेमेंट आने का इंतजार है। अनेकों किसानों को तो गेहूं बेचे बीस से बाईस दिन हो चुके है लेकिन अब तक पेमेंट उनके खाते में नहीं आ रही है। किसानों ने कहा कि जो खरीद के बहत्तर घंटाटे के बाद पेमेंट किसानों की करने के दावे सरकार के थे वो हवा-हवाई हो गए है। पेमेंट को कई-कई दिन हो चुके है लेकिन उनके खातों में नहीं आ रही है। बार-बार कभी बैंक तो कभी खरीद एजेंसी के पास वो पेमेंट के लिए जा रहे है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। पिरथी, बलवान, बीरभान ने कहा कि छातर सब यार्ड पर वेयर हाऊस तो उचाना मंडी में खाद्य आपूर्ति विभाग को गेहूं बेची थी। गेहूं बेचे बीस से बाईस दिन हो चुके है लेकिन आज तक पेमेंट नहीं आई है। कभी बैंक में जाकर खाते चैक कर रहे है तो कभी खरीद एजेंसी, आढ़ती के पास जा रहे है लेकिन कोई समाधान अब तक नहीं हो रहा है। सरकार ने बहत्तर घंटाटे के दावे किए थे पेमेंट के लेकिन बीस से बाईस दिन हो चुके है। सरकार के ये दावे पूरी तरह से हवा-हवाई हो चुके है। अब पेमेंट न आने पर मार्केट कमेटी सचिव को शिकायत किसान देकर आएंगे। मार्केट कमेटी सचिव नरेंद्र कुंडू ने कहा कि जिन किसानों की पेेमेंट में देरी होने पर शिकायत आती है तो संबंधित एजेंसी को पत्र लिख कर जानकारी मांगी जाती है क्यों पेमेेंट किसान की नहीं हुई है। किसानों को किसी तरह की परेशानी नहीं आने दी जाएगी। किसान की शिकायत आने पर तुरंत कार्यवाही की जाती है। |
महेंद्र सिंह धोनी (नाबाद 87) और केदार जाधव (नाबाद 61) के बीच चौथे विकेट के लिए हुई 121 रनों की साझेदारी के दम पर भारत ने शुक्रवार को मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (एमसीजी) पर खेले गए तीसरे और निर्णायक वनडे मैच में ऑस्ट्रेलिया को सात से विकेट मात दी. इसी के साथ भारत ने तीन मैचों की वनडे सीरीज 2-1 से अपने नाम कर ली है. इसी के साथ भारत ने इस सीरीज में इतिहास रचा है. यह उसकी ऑस्ट्रेलिया में पहली द्विपक्षीय सीरीज जीत है.
| महेंद्र सिंह धोनी और केदार जाधव के बीच चौथे विकेट के लिए हुई एक सौ इक्कीस रनों की साझेदारी के दम पर भारत ने शुक्रवार को मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर खेले गए तीसरे और निर्णायक वनडे मैच में ऑस्ट्रेलिया को सात से विकेट मात दी. इसी के साथ भारत ने तीन मैचों की वनडे सीरीज दो-एक से अपने नाम कर ली है. इसी के साथ भारत ने इस सीरीज में इतिहास रचा है. यह उसकी ऑस्ट्रेलिया में पहली द्विपक्षीय सीरीज जीत है. |
सुदूर पूर्व में सेवा करना कभी आसान नहीं रहा। यह कोई संयोग नहीं है कि हमारे कोमदीवका ने एक वादे के साथ नारे लगाना पसंद कियाः "मैं सेवा करने के लिए भेजूंगा जहां आप हर समय गाएंगेः" सुदूर पूर्व एक मजबूत समर्थन है! "
यह एक खाली खतरा नहीं था, तब यूराल रिज के पीछे बहुत सारे सैनिक थे, और हमारे बहुत से लोग "ट्रांसबाइकलिया के जंगली कदमों के साथ" घूमने के लिए गए थे, पता चलता है कि कोलीमा वास्तव में एक "चमत्कारी ग्रह" है, और सुदूर पूर्वी ताइगा के मंदी के कोनों को मास्टर करता है जहां "पेवाश" तैनात थे। रेडियो इंजीनियरिंग कंपनियां, बटालियन और रेजिमेंट।
इनमें से एक "भाग्यशाली" सभी फ्लाईवेट प्रतियोगिताओं में हमारे स्कूल चैंपियन बने, इगोर बैरशनिकोवस्की, जिनके पास उपनाम "बैरगा" था।
कुछ के लिए, कामडिवका ने उसे पसंद नहीं किया, अपने वादे को पूरा करते हुए, हेग्लिंग ड्यूटी स्टेशन के बारे में।
हक्स्टर का भाग्य और सेवा हमारे "लोकतांत्रिक" रूस के अपने रक्षकों के दृष्टिकोण का एक ज्वलंत उदाहरण है। अधिकारी विशेषाधिकारों के बारे में सभी सोवियत दायित्वों (और फिर बहुत उदार नहीं), नए शासक सुरक्षित रूप से "पॉहर" थे। यह सैकड़ों हजारों अधिकारियों के भाग्य में कैसे परिलक्षित होता है, यह बरिगा के जीवन के उदाहरण पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
उन्होंने इसके बारे में इस तरह बात कीः
"मुझे 2-कमरे ख्रुश्चेव से सेना में प्रवेश दिया गया था, जिसमें मैं अपने माता-पिता के साथ रहता था। मेरे पिता एक अधिकारी थे और ख्रुश्चेव 6 वीं वायु रक्षा OA के वागनोवो ब्रिगेड के फॉरेस्ट गैरीसन में स्थित थे। वह स्नातक होने के बाद सुदूर पूर्व में पहुंच गया, जहां उसने विभिन्न "छेद" में 20 से अधिक वर्षों तक सेवा की, जिसमें रेडियो-तकनीकी वायु रक्षा बलों की कंपनियां और बटालियन स्थित थीं। GKChP के बाद, बटालियन के मुख्य वित्तीय अधिकारी, जिसमें मैंने सेवा की, सभी पैसे के साथ गायब हो गए।
उसके बाद, बटालियन कमांडर को हटा दिया गया, और नए ने मुझे बटालियन नचफिन बनने की पेशकश की, हालांकि इस मामले में मैं बिल्कुल भी कुछ भी नहीं समझ पाया। (जाहिर है, कमांड ने उचित रूप से तर्क दिया कि अच्छी तैयारी के साथ पेशेवर दुष्ट के साथ ईमानदार पूर्व "राजनीतिक कार्यकर्ता" के साथ व्यवहार करना बेहतर था। या शायद सेट करने के लिए कोई नहीं था। )
सामान्य तौर पर, डेढ़ दर्जन "छेद" और गैरीन्स को बदल दिया गया है, और प्रमुख के पद तक सही स्थान पर पहुंच गया है, मैंने सुरक्षित रूप से ढहते "रूसी" सेना के बहादुर रैंकों को छोड़ दिया और व्यंजन की जगह पर आ गया, अर्थात्। अपनी मातृभूमि के लिए - वागनोवो ब्रिगेड के परिचित पिता ख्रुश्चेवका के लिए। (सौभाग्य से, माता-पिता जीवित थे और "विलक्षण" पुत्र (अपने परिवार के साथ) को उनके अपार्टमेंट में ले गए।
मुझे नौकरी मिल गई और काम करना शुरू कर दिया, क्योंकि आज एक प्रमुख पेंशन पर रहने के लिए (मेरे पास लगभग 7 हजार रूबल हैं, जो सेवा की सभी लंबाई और अधिभार के साथ है (यह कहानी 2011 में दर्ज की गई थी - अब बैराज की पेंशन थोड़ी बढ़ गई है) - यह बस असंभव है।
एक किसान मेरे साथ काम करता है, वाइटोक, जिसके साथ हम दोस्ताना संबंध बनाए रखते हैं। मैंने उसे अपनी सेवा और भाग्य के बारे में बताया, उस पर बहुत प्रहार किया। पहले तो उन्हें भी विश्वास नहीं हुआ कि फौजी अब इतने खट्टे होकर जी रहा है।
उनकी किस्मत भी आसान नहीं थी। अपनी युवावस्था में, वाइटोक को हत्या के आरोप में 15 साल की जेल हुई। जाहिर है, वह कॉलोनी में अनुकरणीय व्यवहार में अलग नहीं था, या तो। पूरे शब्द को "कॉल से कॉल तक" परोस दिया। लेकिन इस समय के दौरान उनके परिवार ने लेनिनग्राद में एक उत्कृष्ट तीन-कमरे वाला अपार्टमेंट प्राप्त करने में कामयाब रहे, जिसमें विटेक सुरक्षित रूप से और नियत अवधि के "कारावास" के बाद खत्म हो गया। मुझे नौकरी मिल गई। 60 साल की उम्र में, उन्हें पेंशन मिली - 12 हजार रूबल।
ठीक है, ठीक है, दुख के बारे में पर्याप्त है।
Huckster कई सुदूर पूर्वी कहानियों को जानता है, जिनमें से एक मैं लेखक के प्रदर्शन में दूंगाः
"मैं आराम से हेलीकॉप्टर द्वारा नए ड्यूटी स्टेशन गया। मैं सेना आरएवी के प्रमुख के साथ उसी "बोर्ड" पर जाने में कामयाब रहा, जो एक निरीक्षण के साथ "मेरी" रेडियो इंजीनियरिंग बटालियन के लिए उड़ान भर रहा था। फिर तातार जलडमरूमध्य के तट पर एमआई -8 पर दो घंटे की उड़ान - सुंदरता। रोपण। स्क्रू का रोटेशन समाप्त होता है, दरवाजा खुलता है, और मैं अपने स्कूल के साथी गेना डेविडेन्का को देखता हूं, उन्होंने हमारे हेलीकॉप्टर से मुलाकात की। रास्ते में, गेना का कहना है कि अस्पताल में बटालियन कमांडर - एक झटके के साथ, स्वयं गेना, केवल छुट्टी से उड़ान भरी, "पश्चिम से। "
उनकी अनुपस्थिति के दौरान बटालियन में - घटनाओं की एक श्रृंखला हुई। बटालियन के कर्मचारियों के प्रमुख कैप्टन मिखालोव थे, जो कमांडर थे, जबकि जीन छुट्टी पर थे।
जैसा कि मैंने इस उपनाम को सुना है, मैंने तुरंत पूछाः "Isn't Vova MikhalOv, by chance? ", "वह सबसे अधिक है," गेना जवाब देता है।
"बधाई हो," मैं कहता हूँ। "मैं इस Vova को अच्छी तरह से जानता हूं, उन्होंने पड़ोसी कंपनियों में सेवा की।
ट्रोट्सकॉए के गांव में "मुख्य विदूषक" के रूप में उनकी प्रतिष्ठा थी (जो नहीं जानते - यह नानाओं का क्षेत्रीय केंद्र है)। मीकलओव ने कंपनी कमांडर के रूप में ऐसी ख्याति अर्जित की। "
अब, जैसा कि यह पता चला है, उन्होंने प्रसिद्ध रूप से बटालियन की कमान संभाली और पहले से ही बहुत कुछ करने में कामयाब रहे, (जेनिन अनुपस्थिति और कमांडर के स्ट्रोक के दौरान)।
मिखालोवा के अनगिनत "कारनामों" के बीच, इस अवधि के दौरान, रूसी स्टोव पर बालिका खेलने के साथ उनकी यात्रा विशेष रूप से खड़ी थी। स्टोव के तहत, उनके आदेश पर, सैनिकों ने GAZ-66 ट्रक को बदल दिया। उन्हें बोर्डों और प्लाईवुड से चित्रित किया गया था, तदनुसार चित्रित किया गया था। इसका परिणाम एक रूसी स्टोव था, जैसा कि कार्टून "बाइ पाइक कमांड" से। उस पर, वोवा और गाँव के माध्यम से बह गया, "स्टोव" पर लेट गया और उस परियों की कहानी की तरह इमलीया की तरह बालिका पर छल किया। उसी समय, वोवा को हरे रंग की पैंट और एक चोटी पहना गया था, जिसे उन्होंने व्यक्तिगत रूप से इस तरह के मामले के लिए सिल दिया था।
(मिखालोव सामान्य रूप से एक अच्छा दर्जी था, उसने कविता लिखी और गाया - सामान्य तौर पर, इसमें एक असाधारण सर्कस कलाकार मारा गया)।
एक और बार, वोवा ने सैनिकों को असाल्ट राइफलें और गोला-बारूद सौंपा, फिर उन्हें पूरी गोला-बारूद के साथ ZPU-4 के किनारे पर रख दिया और मछली निरीक्षकों को इस "डोप मशीन" से अंधाधुंध गोलीबारी से डरा दिया, जिससे उनकी नावें उनके अवैध शिकार से दूर हो गईं। इस शूटिंग के संबंध में, आरएएफ सेना के प्रमुख बटालियन में पहुंचे।
लेकिन मैंने सिर्फ एक "चक्कर" करियर बनाया और कंपनी के राजनीतिक कमिश्नर के रूप में पांच साल के प्रवास के बाद - मुझे निचले स्तर पर नियुक्त किया गया - इस बटालियन में कोम्सोमोल समिति के सचिव, जहाँ जीन राजनीतिक कमांडर थे, और मिखाल्वव स्टाफ के प्रमुख थे।
मुझे तुरंत सत्यापन आयोग में शामिल किया गया हथियारों और बटालियन का गोला बारूद। यह पता चला कि 60% जस्ता का पर्दाफाश किया गया था, और जहां कारतूस को कर्मचारियों के प्रमुख द्वारा समझाया नहीं जा सकता है, यह केवल राज्य के खेत से कागज दिखाता है, जिसमें से यह निम्नानुसार है कि उसने उन्हें शिकार के मौसम की अवधि के लिए 2000 राउंड ऋण दिया था। उसे ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं था, और कागज का टुकड़ा ही एक खुला "डिप्लोमा" था।
ZPU से लगभग 500 गोले दागे गए, इसके अलावा, 40 से अधिक ग्रेनेड उड़ाए गए। इस अपमान का कोई औचित्य दस्तावेज भी नहीं थे।
ब्रिगेड की कमान स्थानीय रयबकोपोव्स्की स्टोर के दावों से भी अवगत हुई, जहां हमारे सशस्त्र सैनिक अंदर गए और वोडका के साथ "क्रेडिट" लिया। सिर्फ 45 दिनों में ये करतब हमारी लंबी-पीड़ित बटालियन को वोवा मिखालोवा की कमान में करने में कामयाब रहे ! ! !
मुझे नहीं पता कि यह कैसे हुआ, लेकिन यह सब "हशेड" था।
मिखालोव फिर से बटालियन का एक अंतरिम कमांडर बन गया।
जीन के तहत उनका एक छोटा चमत्कार था, लेकिन कभी-कभी, मूड में, वह एक सफेद घोड़े पर बटालियन के सामने एक स्थानीय सामूहिक खेत से उधार लिए गए मार्ग पर भागते थे। इस मामले में अधिकारी पक्ष से बाहर थे।
MichalOv ने भी कभी मेगाफोन के साथ भागीदारी नहीं की - इसमें उसने सैनिकों और अधिकारियों दोनों को आदेश दिए।
एक बार जीन डेवीडेनोक ने वायवा के साथ ताईगा गांवों में सोवियत सत्ता के 20 के दशक में स्थापना पर एक नाटकीय उत्पादन करने की कल्पना की।
मुझे नहीं पता कि यह विचार जीन के सिर में क्यों आया, लेकिन मिखालोव उत्साह के साथ व्यापार में उतर गया। शुरू करने के लिए, उसने अपने "पे शा" के लिए एक त्वरक को अटका दिया, फिर उसने एक तलवार बनाई, अपने अंगरखा सोने के "औपचारिक" डबल-चमकदार epaulets से जुड़ी, जैसे कि एक शाही कर्नल।
अपने मित्र-पीने वाले साथी, वारंट अधिकारी ड्राईगेलो के लिए, उन्होंने स्टाफ वर्दी से धारियों के साथ एक हसी ला कोसैक की वर्दी सिलवाई। समय बीतने के साथ, चीजें सेटिंग के साथ बुरी तरह से गुजर गईं। हालांकि, वोवा ने हिम्मत नहीं हारीः कभी-कभी इस अजीब रूप में कपड़े पहने और बैरकों के चारों ओर भागते हुए, सैनिकों को एक मेगाफोन में घबराते हुए। ।
फिर गेना डेविडेनोक (बेवकूफ नाटक की तैयारी के सर्जक) को "पश्चिम" को बदलने के लिए छोड़ दिया। और उसका मंचन विचार ठप हो गया।
एक नए डिप्टी पॉलिटिकल कमांडर, विक्टर इवानोविच एस, को बदलने के लिए आया था - एक आदमी वर्षों में, एक गंभीर, वास्तविक मेहनती कार्यकर्ता - एक "राजनीतिक कार्यकर्ता"। उसने मिखालोव को खींचने के लिए कई बार व्यवस्था की, उसे लग रहा था कि उसने अपनी "चाल" छोड़ दी है। सब कुछ कम या ज्यादा शांत हो गया, खासकर जब से एक नया कमांडर, एक युवा और ऊर्जावान व्यक्ति, कालिनिन अकादमी के बाद बटालियन में नियुक्त किया गया था। उसके साथ, वोवा थोड़ी देर के लिए चुप हो गया . . . ।
लेकिन, एक बार ऐसा हुआ कि प्रशिक्षण शिविर में कमांडर, राजनीतिक अधिकारी, पार्टी संगठन के सचिव और मैं (कोम्सोमोल) एक ही समय में थे।
बटालियन फिर से MichalOv की कमान संभालने के लिए बनी रही। हम प्रशिक्षण शिविर में हैं।
और फिर हमें पता चलता है कि टर्नी जिले के केजीबी के माध्यम से गाँव में मिखालोवा के दुर्भावनापूर्ण, गुंडे और सोवियत-विरोधी (! ! ! ) चाल और हथियारों के इस्तेमाल के बारे में भी जानकारी थी। उस समय - सबसे प्रसिद्ध "बकवास" ! ! !
एक बड़ा आयोग (सोवगावन के माध्यम से) तत्काल बटालियन के लिए रवाना हुआ।
मैंने व्लादिवोस्तोक के माध्यम से प्राप्त करने का फैसला किया, यह महसूस करते हुए कि मैं आयोग के साथ हेलीकाप्टर से नहीं जाऊंगा। हालाँकि, ऐसा हुआ कि मैं बटालियन में जाने वाला पहला व्यक्ति था। मैं अधिकारियों और स्थानीय निवासियों से नवीनतम घटनाओं को सीखता हूंः
मिखालोव और उनके दोस्त एन्साइन ड्रायगैलो ने "नशे में" हो गए जैसा कि उन्हें प्रदर्शन तैयार करने के बारे में याद रखना चाहिए। उन्होंने तुरंत सामूहिक खेत के अस्तबल से घोड़ों को ले लिया, उनके "व्हाइट गार्ड" संगठनों में बदल गए, और एक दर्जन सैनिकों ने उचित वर्दी पहन ली।
अगला - "तेल चित्रकला"। दो घुड़सवार गहरे ताईगा से गाँव में प्रवेश करते हैंः एक में एक व्हाइट गार्ड कर्नल को चित्रित किया गया, दूसरे को यसौल। यसाउल ने अपने हाथों में एक तिरंगा धारण किया (1985 में कार्रवाई हुई, यह सिर्फ "गोरबी" था जिसने इसे "हरी नागिन" के साथ लड़ाई लेने के लिए पागल बना दिया)।
सभी गाँव में कर्नल एक मेगाफोन में चिल्लाता हैः "ग्रामीणों, सोवियतें खत्म हो गईं ! ! ! " लंबे समय तक मुफ्त रूस! लाल बेल वाले के बिना - एक कम्पी! "
सभी स्थानीय आदिवासी संपर्क और वेश्यावृत्ति में हैं, घटनाओं के विकास की प्रतीक्षा कर रहे हैं। और घटनाएं तेजी से विकसित हो रही हैंः सवारों के बाद धूल (कंधों पर कार्बाइन के साथ) "सफेद" सैनिकों की एक टुकड़ी है। यह सैन्य गठन स्थानीय ग्राम सभा को मिलता है। कर्नल प्रसिद्ध रूप से RSFSR ध्वज को फाड़ता है और यसौल द्वारा भवन में लाया गया तिरंगा फहराता है (चूंकि घोड़े की ऊंचाई यह करने की अनुमति देती है)।
तब मेगाफोन के माध्यम से एक आदेश सुना जाता हैः "गांव के श्रमिकों के लिए बाहर जाओ ! ! ! " सैनिकों को सक्रिय रूप से सुस्त "sovdepovets" (चूतड़ और मुट्ठी) में मदद करने के लिए ताजा हवा में बाहर जाना है।
मिखालोवा के माथे में कम से कम एक लीटर है ! ! ! वह बाहरी लोगों के साथ बातचीत में प्रवेश करने का इरादा नहीं करता है।
चीखनाः "लाल-भुनी हुई कमीने की दीवार के लिए ! ! ! ", लेकिन अनुनय के लिए - यह एक पिस्तौल से हवा में गोली मारता है। तब उसकी आज्ञा वितरित की जाती हैः "अग्नि! "।
सैनिकों ने एक साथ लक्ष्य लिया और सहकर्मियों की दिशा में एक खाली सलावो को निकाल दिया ! ! ! ! उन लोगों के बीच मूक दृश्य, जो चेतना नहीं खोते थे और एक डर के साथ अपनी पैंट में नहीं डालते थे।
तब मिखालोव घोड़े पर बैठा हुआ इधर-उधर घूमता रहा और प्रसन्नता से गूंगे लोगों से पूछाः "क्या तुमने हमारे जीवन की रक्षा की है? "
कुछ घंटों के बाद, मिखालोव और उनकी कंपनी ने क्षेत्रीय केजीबी विभाग - व्लादिवोस्तोक के दौरे पर उड़ान भरी।
इसके कुछ समय बाद इतिहास, मैं एक नए ड्यूटी स्टेशन के लिए रवाना हुआ। "मैं गलती से खाबरोवस्क में अनिवासी ड्राईगेलो से मिला - वह अपनी मूल बटालियन, (कुछ महीने बाद) में लौट आया, लेकिन मिखालोव तब लंबे समय तक" पागलखानों "में घूमता रहा - और मुझे उसके आगे के भाग्य का पता नहीं है। "
- लेखकः
- मूल स्रोतः
| सुदूर पूर्व में सेवा करना कभी आसान नहीं रहा। यह कोई संयोग नहीं है कि हमारे कोमदीवका ने एक वादे के साथ नारे लगाना पसंद कियाः "मैं सेवा करने के लिए भेजूंगा जहां आप हर समय गाएंगेः" सुदूर पूर्व एक मजबूत समर्थन है! " यह एक खाली खतरा नहीं था, तब यूराल रिज के पीछे बहुत सारे सैनिक थे, और हमारे बहुत से लोग "ट्रांसबाइकलिया के जंगली कदमों के साथ" घूमने के लिए गए थे, पता चलता है कि कोलीमा वास्तव में एक "चमत्कारी ग्रह" है, और सुदूर पूर्वी ताइगा के मंदी के कोनों को मास्टर करता है जहां "पेवाश" तैनात थे। रेडियो इंजीनियरिंग कंपनियां, बटालियन और रेजिमेंट। इनमें से एक "भाग्यशाली" सभी फ्लाईवेट प्रतियोगिताओं में हमारे स्कूल चैंपियन बने, इगोर बैरशनिकोवस्की, जिनके पास उपनाम "बैरगा" था। कुछ के लिए, कामडिवका ने उसे पसंद नहीं किया, अपने वादे को पूरा करते हुए, हेग्लिंग ड्यूटी स्टेशन के बारे में। हक्स्टर का भाग्य और सेवा हमारे "लोकतांत्रिक" रूस के अपने रक्षकों के दृष्टिकोण का एक ज्वलंत उदाहरण है। अधिकारी विशेषाधिकारों के बारे में सभी सोवियत दायित्वों , नए शासक सुरक्षित रूप से "पॉहर" थे। यह सैकड़ों हजारों अधिकारियों के भाग्य में कैसे परिलक्षित होता है, यह बरिगा के जीवन के उदाहरण पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। उन्होंने इसके बारे में इस तरह बात कीः "मुझे दो-कमरे ख्रुश्चेव से सेना में प्रवेश दिया गया था, जिसमें मैं अपने माता-पिता के साथ रहता था। मेरे पिता एक अधिकारी थे और ख्रुश्चेव छः वीं वायु रक्षा OA के वागनोवो ब्रिगेड के फॉरेस्ट गैरीसन में स्थित थे। वह स्नातक होने के बाद सुदूर पूर्व में पहुंच गया, जहां उसने विभिन्न "छेद" में बीस से अधिक वर्षों तक सेवा की, जिसमें रेडियो-तकनीकी वायु रक्षा बलों की कंपनियां और बटालियन स्थित थीं। GKChP के बाद, बटालियन के मुख्य वित्तीय अधिकारी, जिसमें मैंने सेवा की, सभी पैसे के साथ गायब हो गए। उसके बाद, बटालियन कमांडर को हटा दिया गया, और नए ने मुझे बटालियन नचफिन बनने की पेशकश की, हालांकि इस मामले में मैं बिल्कुल भी कुछ भी नहीं समझ पाया। सामान्य तौर पर, डेढ़ दर्जन "छेद" और गैरीन्स को बदल दिया गया है, और प्रमुख के पद तक सही स्थान पर पहुंच गया है, मैंने सुरक्षित रूप से ढहते "रूसी" सेना के बहादुर रैंकों को छोड़ दिया और व्यंजन की जगह पर आ गया, अर्थात्। अपनी मातृभूमि के लिए - वागनोवो ब्रिगेड के परिचित पिता ख्रुश्चेवका के लिए। को उनके अपार्टमेंट में ले गए। मुझे नौकरी मिल गई और काम करना शुरू कर दिया, क्योंकि आज एक प्रमुख पेंशन पर रहने के लिए - यह बस असंभव है। एक किसान मेरे साथ काम करता है, वाइटोक, जिसके साथ हम दोस्ताना संबंध बनाए रखते हैं। मैंने उसे अपनी सेवा और भाग्य के बारे में बताया, उस पर बहुत प्रहार किया। पहले तो उन्हें भी विश्वास नहीं हुआ कि फौजी अब इतने खट्टे होकर जी रहा है। उनकी किस्मत भी आसान नहीं थी। अपनी युवावस्था में, वाइटोक को हत्या के आरोप में पंद्रह साल की जेल हुई। जाहिर है, वह कॉलोनी में अनुकरणीय व्यवहार में अलग नहीं था, या तो। पूरे शब्द को "कॉल से कॉल तक" परोस दिया। लेकिन इस समय के दौरान उनके परिवार ने लेनिनग्राद में एक उत्कृष्ट तीन-कमरे वाला अपार्टमेंट प्राप्त करने में कामयाब रहे, जिसमें विटेक सुरक्षित रूप से और नियत अवधि के "कारावास" के बाद खत्म हो गया। मुझे नौकरी मिल गई। साठ साल की उम्र में, उन्हें पेंशन मिली - बारह हजार रूबल। ठीक है, ठीक है, दुख के बारे में पर्याप्त है। Huckster कई सुदूर पूर्वी कहानियों को जानता है, जिनमें से एक मैं लेखक के प्रदर्शन में दूंगाः "मैं आराम से हेलीकॉप्टर द्वारा नए ड्यूटी स्टेशन गया। मैं सेना आरएवी के प्रमुख के साथ उसी "बोर्ड" पर जाने में कामयाब रहा, जो एक निरीक्षण के साथ "मेरी" रेडियो इंजीनियरिंग बटालियन के लिए उड़ान भर रहा था। फिर तातार जलडमरूमध्य के तट पर एमआई -आठ पर दो घंटे की उड़ान - सुंदरता। रोपण। स्क्रू का रोटेशन समाप्त होता है, दरवाजा खुलता है, और मैं अपने स्कूल के साथी गेना डेविडेन्का को देखता हूं, उन्होंने हमारे हेलीकॉप्टर से मुलाकात की। रास्ते में, गेना का कहना है कि अस्पताल में बटालियन कमांडर - एक झटके के साथ, स्वयं गेना, केवल छुट्टी से उड़ान भरी, "पश्चिम से। " उनकी अनुपस्थिति के दौरान बटालियन में - घटनाओं की एक श्रृंखला हुई। बटालियन के कर्मचारियों के प्रमुख कैप्टन मिखालोव थे, जो कमांडर थे, जबकि जीन छुट्टी पर थे। जैसा कि मैंने इस उपनाम को सुना है, मैंने तुरंत पूछाः "Isn't Vova MikhalOv, by chance? ", "वह सबसे अधिक है," गेना जवाब देता है। "बधाई हो," मैं कहता हूँ। "मैं इस Vova को अच्छी तरह से जानता हूं, उन्होंने पड़ोसी कंपनियों में सेवा की। ट्रोट्सकॉए के गांव में "मुख्य विदूषक" के रूप में उनकी प्रतिष्ठा थी । मीकलओव ने कंपनी कमांडर के रूप में ऐसी ख्याति अर्जित की। " अब, जैसा कि यह पता चला है, उन्होंने प्रसिद्ध रूप से बटालियन की कमान संभाली और पहले से ही बहुत कुछ करने में कामयाब रहे, । मिखालोवा के अनगिनत "कारनामों" के बीच, इस अवधि के दौरान, रूसी स्टोव पर बालिका खेलने के साथ उनकी यात्रा विशेष रूप से खड़ी थी। स्टोव के तहत, उनके आदेश पर, सैनिकों ने GAZ-छयासठ ट्रक को बदल दिया। उन्हें बोर्डों और प्लाईवुड से चित्रित किया गया था, तदनुसार चित्रित किया गया था। इसका परिणाम एक रूसी स्टोव था, जैसा कि कार्टून "बाइ पाइक कमांड" से। उस पर, वोवा और गाँव के माध्यम से बह गया, "स्टोव" पर लेट गया और उस परियों की कहानी की तरह इमलीया की तरह बालिका पर छल किया। उसी समय, वोवा को हरे रंग की पैंट और एक चोटी पहना गया था, जिसे उन्होंने व्यक्तिगत रूप से इस तरह के मामले के लिए सिल दिया था। । एक और बार, वोवा ने सैनिकों को असाल्ट राइफलें और गोला-बारूद सौंपा, फिर उन्हें पूरी गोला-बारूद के साथ ZPU-चार के किनारे पर रख दिया और मछली निरीक्षकों को इस "डोप मशीन" से अंधाधुंध गोलीबारी से डरा दिया, जिससे उनकी नावें उनके अवैध शिकार से दूर हो गईं। इस शूटिंग के संबंध में, आरएएफ सेना के प्रमुख बटालियन में पहुंचे। लेकिन मैंने सिर्फ एक "चक्कर" करियर बनाया और कंपनी के राजनीतिक कमिश्नर के रूप में पांच साल के प्रवास के बाद - मुझे निचले स्तर पर नियुक्त किया गया - इस बटालियन में कोम्सोमोल समिति के सचिव, जहाँ जीन राजनीतिक कमांडर थे, और मिखाल्वव स्टाफ के प्रमुख थे। मुझे तुरंत सत्यापन आयोग में शामिल किया गया हथियारों और बटालियन का गोला बारूद। यह पता चला कि साठ% जस्ता का पर्दाफाश किया गया था, और जहां कारतूस को कर्मचारियों के प्रमुख द्वारा समझाया नहीं जा सकता है, यह केवल राज्य के खेत से कागज दिखाता है, जिसमें से यह निम्नानुसार है कि उसने उन्हें शिकार के मौसम की अवधि के लिए दो हज़ार राउंड ऋण दिया था। उसे ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं था, और कागज का टुकड़ा ही एक खुला "डिप्लोमा" था। ZPU से लगभग पाँच सौ गोले दागे गए, इसके अलावा, चालीस से अधिक ग्रेनेड उड़ाए गए। इस अपमान का कोई औचित्य दस्तावेज भी नहीं थे। ब्रिगेड की कमान स्थानीय रयबकोपोव्स्की स्टोर के दावों से भी अवगत हुई, जहां हमारे सशस्त्र सैनिक अंदर गए और वोडका के साथ "क्रेडिट" लिया। सिर्फ पैंतालीस दिनों में ये करतब हमारी लंबी-पीड़ित बटालियन को वोवा मिखालोवा की कमान में करने में कामयाब रहे ! ! ! मुझे नहीं पता कि यह कैसे हुआ, लेकिन यह सब "हशेड" था। मिखालोव फिर से बटालियन का एक अंतरिम कमांडर बन गया। जीन के तहत उनका एक छोटा चमत्कार था, लेकिन कभी-कभी, मूड में, वह एक सफेद घोड़े पर बटालियन के सामने एक स्थानीय सामूहिक खेत से उधार लिए गए मार्ग पर भागते थे। इस मामले में अधिकारी पक्ष से बाहर थे। MichalOv ने भी कभी मेगाफोन के साथ भागीदारी नहीं की - इसमें उसने सैनिकों और अधिकारियों दोनों को आदेश दिए। एक बार जीन डेवीडेनोक ने वायवा के साथ ताईगा गांवों में सोवियत सत्ता के बीस के दशक में स्थापना पर एक नाटकीय उत्पादन करने की कल्पना की। मुझे नहीं पता कि यह विचार जीन के सिर में क्यों आया, लेकिन मिखालोव उत्साह के साथ व्यापार में उतर गया। शुरू करने के लिए, उसने अपने "पे शा" के लिए एक त्वरक को अटका दिया, फिर उसने एक तलवार बनाई, अपने अंगरखा सोने के "औपचारिक" डबल-चमकदार epaulets से जुड़ी, जैसे कि एक शाही कर्नल। अपने मित्र-पीने वाले साथी, वारंट अधिकारी ड्राईगेलो के लिए, उन्होंने स्टाफ वर्दी से धारियों के साथ एक हसी ला कोसैक की वर्दी सिलवाई। समय बीतने के साथ, चीजें सेटिंग के साथ बुरी तरह से गुजर गईं। हालांकि, वोवा ने हिम्मत नहीं हारीः कभी-कभी इस अजीब रूप में कपड़े पहने और बैरकों के चारों ओर भागते हुए, सैनिकों को एक मेगाफोन में घबराते हुए। । फिर गेना डेविडेनोक को "पश्चिम" को बदलने के लिए छोड़ दिया। और उसका मंचन विचार ठप हो गया। एक नए डिप्टी पॉलिटिकल कमांडर, विक्टर इवानोविच एस, को बदलने के लिए आया था - एक आदमी वर्षों में, एक गंभीर, वास्तविक मेहनती कार्यकर्ता - एक "राजनीतिक कार्यकर्ता"। उसने मिखालोव को खींचने के लिए कई बार व्यवस्था की, उसे लग रहा था कि उसने अपनी "चाल" छोड़ दी है। सब कुछ कम या ज्यादा शांत हो गया, खासकर जब से एक नया कमांडर, एक युवा और ऊर्जावान व्यक्ति, कालिनिन अकादमी के बाद बटालियन में नियुक्त किया गया था। उसके साथ, वोवा थोड़ी देर के लिए चुप हो गया . . . । लेकिन, एक बार ऐसा हुआ कि प्रशिक्षण शिविर में कमांडर, राजनीतिक अधिकारी, पार्टी संगठन के सचिव और मैं एक ही समय में थे। बटालियन फिर से MichalOv की कमान संभालने के लिए बनी रही। हम प्रशिक्षण शिविर में हैं। और फिर हमें पता चलता है कि टर्नी जिले के केजीबी के माध्यम से गाँव में मिखालोवा के दुर्भावनापूर्ण, गुंडे और सोवियत-विरोधी चाल और हथियारों के इस्तेमाल के बारे में भी जानकारी थी। उस समय - सबसे प्रसिद्ध "बकवास" ! ! ! एक बड़ा आयोग तत्काल बटालियन के लिए रवाना हुआ। मैंने व्लादिवोस्तोक के माध्यम से प्राप्त करने का फैसला किया, यह महसूस करते हुए कि मैं आयोग के साथ हेलीकाप्टर से नहीं जाऊंगा। हालाँकि, ऐसा हुआ कि मैं बटालियन में जाने वाला पहला व्यक्ति था। मैं अधिकारियों और स्थानीय निवासियों से नवीनतम घटनाओं को सीखता हूंः मिखालोव और उनके दोस्त एन्साइन ड्रायगैलो ने "नशे में" हो गए जैसा कि उन्हें प्रदर्शन तैयार करने के बारे में याद रखना चाहिए। उन्होंने तुरंत सामूहिक खेत के अस्तबल से घोड़ों को ले लिया, उनके "व्हाइट गार्ड" संगठनों में बदल गए, और एक दर्जन सैनिकों ने उचित वर्दी पहन ली। अगला - "तेल चित्रकला"। दो घुड़सवार गहरे ताईगा से गाँव में प्रवेश करते हैंः एक में एक व्हाइट गार्ड कर्नल को चित्रित किया गया, दूसरे को यसौल। यसाउल ने अपने हाथों में एक तिरंगा धारण किया । सभी गाँव में कर्नल एक मेगाफोन में चिल्लाता हैः "ग्रामीणों, सोवियतें खत्म हो गईं ! ! ! " लंबे समय तक मुफ्त रूस! लाल बेल वाले के बिना - एक कम्पी! " सभी स्थानीय आदिवासी संपर्क और वेश्यावृत्ति में हैं, घटनाओं के विकास की प्रतीक्षा कर रहे हैं। और घटनाएं तेजी से विकसित हो रही हैंः सवारों के बाद धूल "सफेद" सैनिकों की एक टुकड़ी है। यह सैन्य गठन स्थानीय ग्राम सभा को मिलता है। कर्नल प्रसिद्ध रूप से RSFSR ध्वज को फाड़ता है और यसौल द्वारा भवन में लाया गया तिरंगा फहराता है । तब मेगाफोन के माध्यम से एक आदेश सुना जाता हैः "गांव के श्रमिकों के लिए बाहर जाओ ! ! ! " सैनिकों को सक्रिय रूप से सुस्त "sovdepovets" में मदद करने के लिए ताजा हवा में बाहर जाना है। मिखालोवा के माथे में कम से कम एक लीटर है ! ! ! वह बाहरी लोगों के साथ बातचीत में प्रवेश करने का इरादा नहीं करता है। चीखनाः "लाल-भुनी हुई कमीने की दीवार के लिए ! ! ! ", लेकिन अनुनय के लिए - यह एक पिस्तौल से हवा में गोली मारता है। तब उसकी आज्ञा वितरित की जाती हैः "अग्नि! "। सैनिकों ने एक साथ लक्ष्य लिया और सहकर्मियों की दिशा में एक खाली सलावो को निकाल दिया ! ! ! ! उन लोगों के बीच मूक दृश्य, जो चेतना नहीं खोते थे और एक डर के साथ अपनी पैंट में नहीं डालते थे। तब मिखालोव घोड़े पर बैठा हुआ इधर-उधर घूमता रहा और प्रसन्नता से गूंगे लोगों से पूछाः "क्या तुमने हमारे जीवन की रक्षा की है? " कुछ घंटों के बाद, मिखालोव और उनकी कंपनी ने क्षेत्रीय केजीबी विभाग - व्लादिवोस्तोक के दौरे पर उड़ान भरी। इसके कुछ समय बाद इतिहास, मैं एक नए ड्यूटी स्टेशन के लिए रवाना हुआ। "मैं गलती से खाबरोवस्क में अनिवासी ड्राईगेलो से मिला - वह अपनी मूल बटालियन, में लौट आया, लेकिन मिखालोव तब लंबे समय तक" पागलखानों "में घूमता रहा - और मुझे उसके आगे के भाग्य का पता नहीं है। " - लेखकः - मूल स्रोतः |
प्रदूषण और खतरनाक धुंओं ने पाकिस्तान के लाहौर और पंजाब के लोगों की नाक में दम कर रखा है। इससे निपटने के लिए सरकार ने यहां की ईंट भट्ठियों को दिसंबर तक के लिए बंद कर दिया गया है।
पाकिस्तान सरकार की मानें तो वहां प्रदूषित हवा फैलने की सबसे बड़ी वजह भारत के पंजाब में पराली जलाया जाना है। अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पंजाब, राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में हर साल पराली जलाई जाने की वजह से हवा की गुणवत्ता खराब हो जाती है, जिससे लोगों को सांस लेने में दिक्कत होती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक, वायु प्रदूषण की वजह से दुनियाभर में हर साल 4 मिलियन से ज्यादा लोगों की मौत हो जाती है। यही रिपोर्ट बताती है कि साल 2015 में खतरनाक और जहरीली हवा के कारण 60 हजार से ज्यादा पाकिस्तानी लोगों की मौत हुई थी। प्रदूषण की वजह से मरने वालों में बड़ी संख्या में बच्चे भी शामिल हैं।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के पर्यावरण मामलों के सलाहकार मलिन अमीन असलम का कहना है कि पाकिस्तान में हवा को प्रदूषित करने के लिए चार चीजें जिम्मेदार हैं। इनमें ईंट भट्ठी से निकलने वाला धुंआ, फैक्ट्रियों से निकलने वाला खतरनाक धुंआ, गाड़ियों से निकलने वाला धुंआ और भारत में जलाई जाने वाली पराली शामिल है।
पाकिस्तान में ये वर्कशॉप काफी हद तक फायदेमंद भी साबित हुआ। अब वहां ईंट भट्ठियों को आधुनिक तकनीक से बनाने की कोशिश चल रही है, ताकि वातावरण में धुंआ कम से कम फैले। साथ ही वहां एयर मॉनिटरिंग स्टेशन भी बनाए जा रहे हैं, ताकि हवा में प्रदूषण के स्तर को परखा जा सके।
| प्रदूषण और खतरनाक धुंओं ने पाकिस्तान के लाहौर और पंजाब के लोगों की नाक में दम कर रखा है। इससे निपटने के लिए सरकार ने यहां की ईंट भट्ठियों को दिसंबर तक के लिए बंद कर दिया गया है। पाकिस्तान सरकार की मानें तो वहां प्रदूषित हवा फैलने की सबसे बड़ी वजह भारत के पंजाब में पराली जलाया जाना है। अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पंजाब, राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में हर साल पराली जलाई जाने की वजह से हवा की गुणवत्ता खराब हो जाती है, जिससे लोगों को सांस लेने में दिक्कत होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक, वायु प्रदूषण की वजह से दुनियाभर में हर साल चार मिलियन से ज्यादा लोगों की मौत हो जाती है। यही रिपोर्ट बताती है कि साल दो हज़ार पंद्रह में खतरनाक और जहरीली हवा के कारण साठ हजार से ज्यादा पाकिस्तानी लोगों की मौत हुई थी। प्रदूषण की वजह से मरने वालों में बड़ी संख्या में बच्चे भी शामिल हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के पर्यावरण मामलों के सलाहकार मलिन अमीन असलम का कहना है कि पाकिस्तान में हवा को प्रदूषित करने के लिए चार चीजें जिम्मेदार हैं। इनमें ईंट भट्ठी से निकलने वाला धुंआ, फैक्ट्रियों से निकलने वाला खतरनाक धुंआ, गाड़ियों से निकलने वाला धुंआ और भारत में जलाई जाने वाली पराली शामिल है। पाकिस्तान में ये वर्कशॉप काफी हद तक फायदेमंद भी साबित हुआ। अब वहां ईंट भट्ठियों को आधुनिक तकनीक से बनाने की कोशिश चल रही है, ताकि वातावरण में धुंआ कम से कम फैले। साथ ही वहां एयर मॉनिटरिंग स्टेशन भी बनाए जा रहे हैं, ताकि हवा में प्रदूषण के स्तर को परखा जा सके। |
।'समाचार पत्र' अथवा 'अख़बार' समाज और देश में हो रही घटनाओं पर आधारित एक प्रकाशन है। इसमें मुख्यतः ताजी घटनाएँ, खेल-कूद, व्यक्तित्व, राजनीति, विज्ञापन की जानकारियाँ सस्ते काग़ज़ पर छपी होती है।
।भारत में प्रथम समाचार पत्र निकालने का श्रेय 'जेम्स ऑगस्टस हिक्की' को मिला। उसने 1780 ई. में 'बंगाल गजट' का प्रकाशन किया, किन्तु इसमें कम्पनी सरकार की आलोचना की गई थी, जिस कारण उसका प्रेस जब्त कर लिया गया।
।पहला भारतीय समाचार पत्र अंग्रेज़ी में 1816 ई. में कलकत्ता में गंगाधर भट्टाचार्य द्वारा 'बंगाल गजट' नाम से निकाला गया। यह साप्ताहिक समाचार पत्र था।
।उदन्त मार्तण्ड हिन्दी का प्रथम समाचार पत्र था। इसका प्रकाशन 30 मई, 1826 ई. में कलकत्ता से एक साप्ताहिक पत्र के रूप में शुरू हुआ था।
।समाचार पत्र प्रायः दैनिक होते हैं लेकिन कुछ समाचार पत्र साप्ताहिक, मासिक एवं छमाही भी होते हैं। अधिकतर समाचारपत्र स्थानीय भाषाओं में और स्थानीय विषयों पर केन्द्रित होते हैं।
समाचार पत्र अथवा अख़बार (अंग्रेज़ीःNewspaper) समाज और देश में हो रही घटनाओं पर आधारित एक प्रकाशन है। इसमें मुख्यतः ताजी घटनाएँ, खेल-कूद, व्यक्तित्व, राजनीति, विज्ञापन की जानकारियाँ सस्ते काग़ज़ पर छपी होती है। समाचार पत्र संचार के साधनों में महत्त्वपूर्ण स्थान रखते हैं। ये काग़ज़ पर शब्दों से बने वाक्यों को लिखकर या छापकर तैयार होते हैं। समाचार पत्र प्रायः दैनिक होते हैं लेकिन कुछ समाचार पत्र साप्ताहिक, मासिक एवं छमाही भी होते हैं। अधिकतर समाचारपत्र स्थानीय भाषाओं में और स्थानीय विषयों पर केन्द्रित होते हैं।
भारत में समाचार पत्रों का इतिहास यूरोपीय लोगों के भारत में प्रवेश के साथ ही प्रारम्भ होता है। सर्वप्रथम भारत में प्रिंटिग प्रेस लाने का श्रेय पुर्तग़ालियों को दिया जाता है। 1557 ई. में गोवा के कुछ पादरी लोगों ने भारत की पहली पुस्तक छापी। 1684 ई. में अंग्रेज़ ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने भी भारत की पहली पुस्तक की छपाई की थी। 1684 ई. में ही कम्पनी ने भारत में प्रथम प्रिंटिग प्रेस (मुद्रणालय) की स्थापना की।
- पहला भारतीय अंग्रेज़ी समाचार पत्र 1816 ई. में कलकत्ता में गंगाधर भट्टाचार्य द्वारा 'बंगाल गजट' नाम से निकाला गया। यह साप्ताहिक समाचार पत्र था।
- 1818 ई. में मार्शमैन के नेतृत्व में बंगाली भाषा में 'दिग्दर्शन' मासिक पत्र प्रकाशित हुआ, लेकिन यह पत्र अल्पकालिक सिद्ध हुआ। इसी समय मार्शमैन के संपादन में एक और साप्ताहिक समाचार पत्र 'समाचार दर्पण' प्रकाशित किया गया।
- 1821 ई. में बंगाली भाषा में साप्ताहिक समाचार पत्र 'संवाद कौमुदी' का प्रकाशन हुआ। इस समाचार पत्र का प्रबन्ध राजा राममोहन राय के हाथों में था।
- भारत का प्रथम हिन्दी समाचार पत्र 'उदन्त मार्तण्ड' था।
पहला भारतीय अंग्रेज़ी समाचार पत्र 1816 ई. में कलकत्ता में गंगाधर भट्टाचार्य द्वारा 'बंगाल गजट' नाम से निकाला गया। यह साप्ताहिक समाचार पत्र था। 1818 ई. में मार्शमैन के नेतृत्व में बंगाली भाषा में 'दिग्दर्शन' मासिक पत्र प्रकाशित हुआ, लेकिन यह पत्र अल्पकालिक सिद्ध हुआ। इसी समय मार्शमैन के संपादन में एक और साप्ताहिक समाचार पत्र 'समाचार दर्पण' प्रकाशित किया गया। 1821 ई. में बंगाली भाषा में साप्ताहिक समाचार पत्र 'संवाद कौमुदी' का प्रकाशन हुआ। इस समाचार पत्र का प्रबन्ध राजा राममोहन राय के हाथों में था। राजा राममोहन राय ने सामाजिक तथा धार्मिक विचारों के विरोधस्वरूप 'समाचार चंद्रिका' का मार्च, 1822 ई. में प्रकाशन किया। इसके अतिरिक्त राय ने अप्रैल, 1822 में फ़ारसी भाषा में 'मिरातुल' अख़बार एवं अंग्रेज़ी भाषा में 'ब्राह्मनिकल मैगजीन' का प्रकाशन किया।
- ↑ जब अखबार बने आजादी का हथियार (हिन्दी) (एच.टी.एम.एल) वेब दुनिया हिन्दी। अभिगमन तिथिः 1 सितम्बर, 2012।
| ।'समाचार पत्र' अथवा 'अख़बार' समाज और देश में हो रही घटनाओं पर आधारित एक प्रकाशन है। इसमें मुख्यतः ताजी घटनाएँ, खेल-कूद, व्यक्तित्व, राजनीति, विज्ञापन की जानकारियाँ सस्ते काग़ज़ पर छपी होती है। ।भारत में प्रथम समाचार पत्र निकालने का श्रेय 'जेम्स ऑगस्टस हिक्की' को मिला। उसने एक हज़ार सात सौ अस्सी ई. में 'बंगाल गजट' का प्रकाशन किया, किन्तु इसमें कम्पनी सरकार की आलोचना की गई थी, जिस कारण उसका प्रेस जब्त कर लिया गया। ।पहला भारतीय समाचार पत्र अंग्रेज़ी में एक हज़ार आठ सौ सोलह ई. में कलकत्ता में गंगाधर भट्टाचार्य द्वारा 'बंगाल गजट' नाम से निकाला गया। यह साप्ताहिक समाचार पत्र था। ।उदन्त मार्तण्ड हिन्दी का प्रथम समाचार पत्र था। इसका प्रकाशन तीस मई, एक हज़ार आठ सौ छब्बीस ई. में कलकत्ता से एक साप्ताहिक पत्र के रूप में शुरू हुआ था। ।समाचार पत्र प्रायः दैनिक होते हैं लेकिन कुछ समाचार पत्र साप्ताहिक, मासिक एवं छमाही भी होते हैं। अधिकतर समाचारपत्र स्थानीय भाषाओं में और स्थानीय विषयों पर केन्द्रित होते हैं। समाचार पत्र अथवा अख़बार समाज और देश में हो रही घटनाओं पर आधारित एक प्रकाशन है। इसमें मुख्यतः ताजी घटनाएँ, खेल-कूद, व्यक्तित्व, राजनीति, विज्ञापन की जानकारियाँ सस्ते काग़ज़ पर छपी होती है। समाचार पत्र संचार के साधनों में महत्त्वपूर्ण स्थान रखते हैं। ये काग़ज़ पर शब्दों से बने वाक्यों को लिखकर या छापकर तैयार होते हैं। समाचार पत्र प्रायः दैनिक होते हैं लेकिन कुछ समाचार पत्र साप्ताहिक, मासिक एवं छमाही भी होते हैं। अधिकतर समाचारपत्र स्थानीय भाषाओं में और स्थानीय विषयों पर केन्द्रित होते हैं। भारत में समाचार पत्रों का इतिहास यूरोपीय लोगों के भारत में प्रवेश के साथ ही प्रारम्भ होता है। सर्वप्रथम भारत में प्रिंटिग प्रेस लाने का श्रेय पुर्तग़ालियों को दिया जाता है। एक हज़ार पाँच सौ सत्तावन ई. में गोवा के कुछ पादरी लोगों ने भारत की पहली पुस्तक छापी। एक हज़ार छः सौ चौरासी ई. में अंग्रेज़ ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने भी भारत की पहली पुस्तक की छपाई की थी। एक हज़ार छः सौ चौरासी ई. में ही कम्पनी ने भारत में प्रथम प्रिंटिग प्रेस की स्थापना की। - पहला भारतीय अंग्रेज़ी समाचार पत्र एक हज़ार आठ सौ सोलह ई. में कलकत्ता में गंगाधर भट्टाचार्य द्वारा 'बंगाल गजट' नाम से निकाला गया। यह साप्ताहिक समाचार पत्र था। - एक हज़ार आठ सौ अट्ठारह ई. में मार्शमैन के नेतृत्व में बंगाली भाषा में 'दिग्दर्शन' मासिक पत्र प्रकाशित हुआ, लेकिन यह पत्र अल्पकालिक सिद्ध हुआ। इसी समय मार्शमैन के संपादन में एक और साप्ताहिक समाचार पत्र 'समाचार दर्पण' प्रकाशित किया गया। - एक हज़ार आठ सौ इक्कीस ई. में बंगाली भाषा में साप्ताहिक समाचार पत्र 'संवाद कौमुदी' का प्रकाशन हुआ। इस समाचार पत्र का प्रबन्ध राजा राममोहन राय के हाथों में था। - भारत का प्रथम हिन्दी समाचार पत्र 'उदन्त मार्तण्ड' था। पहला भारतीय अंग्रेज़ी समाचार पत्र एक हज़ार आठ सौ सोलह ई. में कलकत्ता में गंगाधर भट्टाचार्य द्वारा 'बंगाल गजट' नाम से निकाला गया। यह साप्ताहिक समाचार पत्र था। एक हज़ार आठ सौ अट्ठारह ई. में मार्शमैन के नेतृत्व में बंगाली भाषा में 'दिग्दर्शन' मासिक पत्र प्रकाशित हुआ, लेकिन यह पत्र अल्पकालिक सिद्ध हुआ। इसी समय मार्शमैन के संपादन में एक और साप्ताहिक समाचार पत्र 'समाचार दर्पण' प्रकाशित किया गया। एक हज़ार आठ सौ इक्कीस ई. में बंगाली भाषा में साप्ताहिक समाचार पत्र 'संवाद कौमुदी' का प्रकाशन हुआ। इस समाचार पत्र का प्रबन्ध राजा राममोहन राय के हाथों में था। राजा राममोहन राय ने सामाजिक तथा धार्मिक विचारों के विरोधस्वरूप 'समाचार चंद्रिका' का मार्च, एक हज़ार आठ सौ बाईस ई. में प्रकाशन किया। इसके अतिरिक्त राय ने अप्रैल, एक हज़ार आठ सौ बाईस में फ़ारसी भाषा में 'मिरातुल' अख़बार एवं अंग्रेज़ी भाषा में 'ब्राह्मनिकल मैगजीन' का प्रकाशन किया। - ↑ जब अखबार बने आजादी का हथियार वेब दुनिया हिन्दी। अभिगमन तिथिः एक सितम्बर, दो हज़ार बारह। |
अनुपमा के सेट से एक चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है जिसमें बताया जा रहा है कि सीरियल की लीड एक्ट्रेसेस के बीच कोल्ड वॉर चल रही है! इस बार मामला रूपाली गांगुली और मदालसा शर्मा के बीच का है। खबर है कि अनुपमा और काव्या यानि कि एक्ट्रेस रूपाली गांगुली और मदालसा शर्मा के बीच सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। दोनों के बीच कोल्ड वॉर की खबरें हैं। यहां तक कि बताया जा रहा है कि अनुपमा की ये दोनों एक्ट्रेसेस आपस में बात तक नहीं करती हैं। मदालसा और रूपाली सीरियल के सेट पर एक-दूसरे को इग्नोर करती नजर आती हैं। जैसा कि हम सभी जानते हैं सीरियल में काव्या और अनुपमा एक-दूसरे के एंटी हैं। जहां अनुपमा सीधी-सादी परिवार का ख्याल रखने और सबको साथ लेकर चलने वाली महिला है तो वहीं काव्या मॉडर्न और स्वार्थी सोच वाली है। इस वजह से सीरियल में दोनों एक-दूसरे के खिलाफ होती हैं। लेकिन रील लाइफ तक तो ठीक था अब रियल लाइफ में टकराव की खबरें आना काफी शॉकिंग है।
| अनुपमा के सेट से एक चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है जिसमें बताया जा रहा है कि सीरियल की लीड एक्ट्रेसेस के बीच कोल्ड वॉर चल रही है! इस बार मामला रूपाली गांगुली और मदालसा शर्मा के बीच का है। खबर है कि अनुपमा और काव्या यानि कि एक्ट्रेस रूपाली गांगुली और मदालसा शर्मा के बीच सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। दोनों के बीच कोल्ड वॉर की खबरें हैं। यहां तक कि बताया जा रहा है कि अनुपमा की ये दोनों एक्ट्रेसेस आपस में बात तक नहीं करती हैं। मदालसा और रूपाली सीरियल के सेट पर एक-दूसरे को इग्नोर करती नजर आती हैं। जैसा कि हम सभी जानते हैं सीरियल में काव्या और अनुपमा एक-दूसरे के एंटी हैं। जहां अनुपमा सीधी-सादी परिवार का ख्याल रखने और सबको साथ लेकर चलने वाली महिला है तो वहीं काव्या मॉडर्न और स्वार्थी सोच वाली है। इस वजह से सीरियल में दोनों एक-दूसरे के खिलाफ होती हैं। लेकिन रील लाइफ तक तो ठीक था अब रियल लाइफ में टकराव की खबरें आना काफी शॉकिंग है। |
बांग्लादेश क्रिकेट टीम के शीर्ष क्रम के बल्लेबाज सौम्य सरकार को विश्वास है कि उनकी टीम वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे टी-20 में मजबूत वापसी करेगी।
दोनों टीमों के बीच तीन मैचों की सीरीज का दूसरा टी-20 मैच गुरुवार को शेर ए बांग्ला नेशनल स्टेडियम में खेला जाएगा। वेस्टइंडीज की टीम ने पहला टी-20 आठ विकेट से अपने नाम किया था।
सिल्हट में खेले गए पहले टी-20 में बांग्लादेश के कप्तान शाकिब अल हसन अकेले संघर्ष करते रहे। उन्होंने बल्ले से टीम के टोटल में लगभग 47 प्रतिशत रन बनाए। इसके अलावा दो अन्य बांग्लादेशी बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा छूने में सफल रहे थे।
| बांग्लादेश क्रिकेट टीम के शीर्ष क्रम के बल्लेबाज सौम्य सरकार को विश्वास है कि उनकी टीम वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे टी-बीस में मजबूत वापसी करेगी। दोनों टीमों के बीच तीन मैचों की सीरीज का दूसरा टी-बीस मैच गुरुवार को शेर ए बांग्ला नेशनल स्टेडियम में खेला जाएगा। वेस्टइंडीज की टीम ने पहला टी-बीस आठ विकेट से अपने नाम किया था। सिल्हट में खेले गए पहले टी-बीस में बांग्लादेश के कप्तान शाकिब अल हसन अकेले संघर्ष करते रहे। उन्होंने बल्ले से टीम के टोटल में लगभग सैंतालीस प्रतिशत रन बनाए। इसके अलावा दो अन्य बांग्लादेशी बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा छूने में सफल रहे थे। |
Cheque Bounce cases: चेक बाउंस के मामले सुनने के लिए स्पेशल कोर्ट बनेगी. 1 सितंबर से पांच राज्यों में रिटायर्ड जज के साथ स्पेशल कोर्ट का गठन होगा. 31 दिसंबर 2019 तक चेक बाउंस के 35.16 लाख मामले थे.
चेक बाउंस मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा निर्देश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने चेक बाउंस (Cheque Bounce cases) के मामलों के शीघ्र निपटान के लिए 1 सितंबर से पांच राज्यों में रिटायर्ड जज के साथ स्पेशल कोर्ट के गठन का निर्देश दिया है. न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति एस. रवींद्र भट ने कहा कि महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में बड़ी संख्या में लंबित मुकदमों को देखते हुए नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट (NI) के तहत इन राज्यों में विशेष अदालतें गठित की जाएगी. पीठ ने कहा, हमने पायलट अदालतों के गठन के संबंध में न्याय मित्र के सुझावों को शामिल किया है और हमने समयसीमा भी दी है. यह 1 सितंबर 2022 के बाद से शुरू होनी है.
पठी ने कहा कि इस अदालत के महासचिव यह सुनिश्चित करेंगे कि मौजूदा आदेश की प्रति सीधा इन पांच उच्च न्यायालयों के महापंजीयक को मिले, जो उसे तत्काल कार्रवाई के लिए मुख्य न्यायाधीशों के समक्ष पेश कर सकते हैं.
Supreme Court ने अपने महासचिव को इस आदेश के बारे में इन राज्यों के उच्च न्यायालयों के महापंजीयक को सूचित करने का निर्देश दिया और उन्हें इसके अनुपालन पर 21 जुलाई 2022 तक एक हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है.
बता दें कि न्याय मित्र ने सुझाव दिया कि एक पायलट परियोजना के तौर पर प्रत्येक जिले में एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश वाली एक अदालत होनी चाहिए. इस मामले पर सुनवाई अब 28 जुलाई को होगी.
शीर्ष अदालत ने चेक बाउंस मामलों के भारी संख्या में लंबित रहने पर संज्ञान लिया था और ऐसे मामलों के तत्काल निस्तारण का निर्देश दिया था. 31 दिसंबर 2019 तक ऐसे मामले 35.16 लाख थे.
सुप्रीम कोर्ट ने पहले सभी उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरलों को एनआई अधिनियम की धारा 138 के तहत चेक बाउंस के मामलों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए जारी निर्देशों के अनुपालन के संबंध में एक स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था.
इससे पहले, उच्चतम न्यायालय ने देश भर में चेक बाउंस के मामलों का तेजी से निपटान सुनिश्चित करने के लिए कई दिशा-निर्देश जारी किए थे और केंद्र से कहा था कि अगर ऐसे मामलों में एक साल के भीतर किसी व्यक्ति के खिलाफ एक ही लेनदेन के लिए मुकदमा दर्ज किया जाता है, तो ऐसे मामलों में ट्रायल को क्लबिंग सुनिश्चित करने के लिए कानूनों में संशोधन किया जाए.
सुप्रीम कोर्ट ने 35 लाख से अधिक चेक बाउंस मामलों को विचित्र करार दिया था और केंद्र को ऐसे मामलों से निपटने के लिए एक विशेष अवधि के लिए अतिरिक्त अदालतें बनाने के लिए एक कानून बनाने का सुझाव दिया था.
| Cheque Bounce cases: चेक बाउंस के मामले सुनने के लिए स्पेशल कोर्ट बनेगी. एक सितंबर से पांच राज्यों में रिटायर्ड जज के साथ स्पेशल कोर्ट का गठन होगा. इकतीस दिसंबर दो हज़ार उन्नीस तक चेक बाउंस के पैंतीस.सोलह लाख मामले थे. चेक बाउंस मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा निर्देश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने चेक बाउंस के मामलों के शीघ्र निपटान के लिए एक सितंबर से पांच राज्यों में रिटायर्ड जज के साथ स्पेशल कोर्ट के गठन का निर्देश दिया है. न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति एस. रवींद्र भट ने कहा कि महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में बड़ी संख्या में लंबित मुकदमों को देखते हुए नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत इन राज्यों में विशेष अदालतें गठित की जाएगी. पीठ ने कहा, हमने पायलट अदालतों के गठन के संबंध में न्याय मित्र के सुझावों को शामिल किया है और हमने समयसीमा भी दी है. यह एक सितंबर दो हज़ार बाईस के बाद से शुरू होनी है. पठी ने कहा कि इस अदालत के महासचिव यह सुनिश्चित करेंगे कि मौजूदा आदेश की प्रति सीधा इन पांच उच्च न्यायालयों के महापंजीयक को मिले, जो उसे तत्काल कार्रवाई के लिए मुख्य न्यायाधीशों के समक्ष पेश कर सकते हैं. Supreme Court ने अपने महासचिव को इस आदेश के बारे में इन राज्यों के उच्च न्यायालयों के महापंजीयक को सूचित करने का निर्देश दिया और उन्हें इसके अनुपालन पर इक्कीस जुलाई दो हज़ार बाईस तक एक हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है. बता दें कि न्याय मित्र ने सुझाव दिया कि एक पायलट परियोजना के तौर पर प्रत्येक जिले में एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश वाली एक अदालत होनी चाहिए. इस मामले पर सुनवाई अब अट्ठाईस जुलाई को होगी. शीर्ष अदालत ने चेक बाउंस मामलों के भारी संख्या में लंबित रहने पर संज्ञान लिया था और ऐसे मामलों के तत्काल निस्तारण का निर्देश दिया था. इकतीस दिसंबर दो हज़ार उन्नीस तक ऐसे मामले पैंतीस.सोलह लाख थे. सुप्रीम कोर्ट ने पहले सभी उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरलों को एनआई अधिनियम की धारा एक सौ अड़तीस के तहत चेक बाउंस के मामलों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए जारी निर्देशों के अनुपालन के संबंध में एक स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था. इससे पहले, उच्चतम न्यायालय ने देश भर में चेक बाउंस के मामलों का तेजी से निपटान सुनिश्चित करने के लिए कई दिशा-निर्देश जारी किए थे और केंद्र से कहा था कि अगर ऐसे मामलों में एक साल के भीतर किसी व्यक्ति के खिलाफ एक ही लेनदेन के लिए मुकदमा दर्ज किया जाता है, तो ऐसे मामलों में ट्रायल को क्लबिंग सुनिश्चित करने के लिए कानूनों में संशोधन किया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने पैंतीस लाख से अधिक चेक बाउंस मामलों को विचित्र करार दिया था और केंद्र को ऐसे मामलों से निपटने के लिए एक विशेष अवधि के लिए अतिरिक्त अदालतें बनाने के लिए एक कानून बनाने का सुझाव दिया था. |
(1) Stand Still & Focus :- किसी भी फोटो के ब्लर होने के 2 मुख्य रीजन होते हैं। पहला lack of focus और दूसरा movement। अगर आप कुछ मामूली टेक्नीक पर ध्यान देंगे, तो इस समस्या से बच सकते हैं। इसके माध्यम से फोटो को काफी हद तक ब्लर होने से बचाया जा सकता है। सबसे पहले आपको एकदम स्िथर होना पड़ेगा, ताकि फोटो खींचते समय फोन बिल्कुल भी न हिले। वहीं अगर सब्जेक्ट मूव कर रहा है और आपने शटर ऑन कर दिया तो इमेज ब्लर होने के पूर चांस रहते हैं। ऐसे में यूजर्स शटर की बजाए फोकस पर ज्यादा ध्यान दें, तो फोटो काफी क्िलयर आ सकती है। मार्केट में इन दिनों सभी स्मार्टफोन (आईफोन, एंड्रायड, विंडोज) में टच टू फोकस फीचर उपलब्ध होता है, जिसके जरिए एक अच्छी फोटो खींची जा सकती है।
(2) Shutter Tips :- स्मार्टफोन से किसी मूविंग सब्जेक्ट को शूट करना आसान नहीं होता। क्योंकि सेलफोन कैमरे की शटर स्पीड काफी स्लो होती है। जिसके चलते इमेज काफी खराब हो जाती है। हालांकि अगर आप आईफोन यूज कर रहे हैं, तो इसमें एक ऑप्शन है जिसके जरिए मूविंग इमेज अच्छी बन सकती है। आईफोन का कैमरा एप्लीकेशन काफी खास है, जो मल्टीपल शॉट्स के लिए काफी फायदेमंद है।
(3) Get A Better Camera App :- एक अच्छा कैमरा एप किसी भी फोटो को अच्छे से अच्छा बना सकता है। हालांकि यह एप में मौजूद फीचर्स पर भी डिपेंड होता है। आईफोन यूजर्स के लिए Camera+ or Camera Awesome एप काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। यह दोनों ही जबर्दस्त शूटिंग को सपोर्ट करते हैं। वहीं अगर एंड्रायड यूजर्स की बात करें, तो Camera360 और ProCapture एप एक अच्छी फोटो खींचने में आपकी मदद कर सकते हैं। यह एडवांस्ड एप्स फोकस सेट वाले फीचर्स के साथ उपलब्ध होते हैं। व्हॉइट बैलेंस हो या फिर एक्सपोजर, यूजर्स इसे आसानी से कस्टमाइज कर सकते हैं।
(4) Using Blur To Your Advantage :- स्थिरता और फोकस लॉक एक अच्छी फोटो खींचने के लिए काफी होता है। लेकिन यह प्रत्येक फोटो के लिए फायदेमंद नहीं है। अगर आपका सब्जेक्ट मूव कर रहा है, या फिर शॉट मोशन पर है। इन दोनों सिचुएशन में ब्लरनेस आपके लिए एक एडवांटेज है। किसी चलती हुई गाड़ी की फोटो लेना हो या फिर मूविंग सब्जेक्ट, इन दोनों इमेज को आप स्थिरता के साथ शूट करेंगे तो यह बोरिंग लगेगा। ऐसे में स्मार्टफोन कैमरे का ब्लर इसको काफी अट्रैक्टिव बना सकता है।
(5) Photos Lack Contrast :- कोई इमेज अगर धुंधली है, तो इसका कन्ट्रॉस्ट बढ़ाकर इमेज क्वॉलिटी को रिच किया जा सकता है। ऐसे में अगर कोई पिक्चर आपको साफ नहीं लग रही, तो उसे एडिट करके कन्ट्रॉस्ट बढ़ाया जा सकता है। हालांकि इस तरह की प्रॉब्लम्स तब सामने आती हैं, जब लो-लाइट सेटिंग में फोटो क्िलक की जाती है। वैसे फोटो एडिटर और इमेज एडिटर जैसे कई एप्स हैं, जिनकी मदद से आप फोटो का कन्ट्रॉस्ट बढ़ाकर इसे काफी बेहतर बना सकते हैं।
| Stand Still & Focus :- किसी भी फोटो के ब्लर होने के दो मुख्य रीजन होते हैं। पहला lack of focus और दूसरा movement। अगर आप कुछ मामूली टेक्नीक पर ध्यान देंगे, तो इस समस्या से बच सकते हैं। इसके माध्यम से फोटो को काफी हद तक ब्लर होने से बचाया जा सकता है। सबसे पहले आपको एकदम स्िथर होना पड़ेगा, ताकि फोटो खींचते समय फोन बिल्कुल भी न हिले। वहीं अगर सब्जेक्ट मूव कर रहा है और आपने शटर ऑन कर दिया तो इमेज ब्लर होने के पूर चांस रहते हैं। ऐसे में यूजर्स शटर की बजाए फोकस पर ज्यादा ध्यान दें, तो फोटो काफी क्िलयर आ सकती है। मार्केट में इन दिनों सभी स्मार्टफोन में टच टू फोकस फीचर उपलब्ध होता है, जिसके जरिए एक अच्छी फोटो खींची जा सकती है। Shutter Tips :- स्मार्टफोन से किसी मूविंग सब्जेक्ट को शूट करना आसान नहीं होता। क्योंकि सेलफोन कैमरे की शटर स्पीड काफी स्लो होती है। जिसके चलते इमेज काफी खराब हो जाती है। हालांकि अगर आप आईफोन यूज कर रहे हैं, तो इसमें एक ऑप्शन है जिसके जरिए मूविंग इमेज अच्छी बन सकती है। आईफोन का कैमरा एप्लीकेशन काफी खास है, जो मल्टीपल शॉट्स के लिए काफी फायदेमंद है। Get A Better Camera App :- एक अच्छा कैमरा एप किसी भी फोटो को अच्छे से अच्छा बना सकता है। हालांकि यह एप में मौजूद फीचर्स पर भी डिपेंड होता है। आईफोन यूजर्स के लिए Camera+ or Camera Awesome एप काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। यह दोनों ही जबर्दस्त शूटिंग को सपोर्ट करते हैं। वहीं अगर एंड्रायड यूजर्स की बात करें, तो Cameraतीन सौ साठ और ProCapture एप एक अच्छी फोटो खींचने में आपकी मदद कर सकते हैं। यह एडवांस्ड एप्स फोकस सेट वाले फीचर्स के साथ उपलब्ध होते हैं। व्हॉइट बैलेंस हो या फिर एक्सपोजर, यूजर्स इसे आसानी से कस्टमाइज कर सकते हैं। Using Blur To Your Advantage :- स्थिरता और फोकस लॉक एक अच्छी फोटो खींचने के लिए काफी होता है। लेकिन यह प्रत्येक फोटो के लिए फायदेमंद नहीं है। अगर आपका सब्जेक्ट मूव कर रहा है, या फिर शॉट मोशन पर है। इन दोनों सिचुएशन में ब्लरनेस आपके लिए एक एडवांटेज है। किसी चलती हुई गाड़ी की फोटो लेना हो या फिर मूविंग सब्जेक्ट, इन दोनों इमेज को आप स्थिरता के साथ शूट करेंगे तो यह बोरिंग लगेगा। ऐसे में स्मार्टफोन कैमरे का ब्लर इसको काफी अट्रैक्टिव बना सकता है। Photos Lack Contrast :- कोई इमेज अगर धुंधली है, तो इसका कन्ट्रॉस्ट बढ़ाकर इमेज क्वॉलिटी को रिच किया जा सकता है। ऐसे में अगर कोई पिक्चर आपको साफ नहीं लग रही, तो उसे एडिट करके कन्ट्रॉस्ट बढ़ाया जा सकता है। हालांकि इस तरह की प्रॉब्लम्स तब सामने आती हैं, जब लो-लाइट सेटिंग में फोटो क्िलक की जाती है। वैसे फोटो एडिटर और इमेज एडिटर जैसे कई एप्स हैं, जिनकी मदद से आप फोटो का कन्ट्रॉस्ट बढ़ाकर इसे काफी बेहतर बना सकते हैं। |
GORAKHPUR: गोरखपुर जिला बाढ़ की चपेट में है और अब बाढ़ का पानी बेकाबू होने लगा है। रोहिन नदी का पानी गोरखपुर-सौनौली राजमार्ग पर चढ़ गया। पीपीगंज के मखनहा, खोराबार के सेमरौना, करमैनी-पंघाटिया आदि बांधों में रिसाव ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी। रोहिन नदी का पानी चिलुआताल के रास्ते बरगदवा के पास पहुंच गया है। पांच घरों में बाढ़ का पानी घुसने के बाद एसडीआरएफ टीम ने 21 नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। राप्ती नदी पर बने लहसड़ी बांध में लालपुर टीकर खंतापार टोला में रिसाव की सूचना पर डीएम विजय किरन आनन्द मौके पर पहुंचे। जिले में मानसून पीरियड में अब तक 1152. 9 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है।
रोहिन नदी में उफान से गोरखपुर-सोनौली राजमार्ग पर जंगल कौडि़या इलाके में एक फीट की ऊंचाई में पानी चढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है, नदी के बढ़ने का स्तर यदि यही रहा तो आसपास के गांव बाढ़ की चपेट में आ जाएंगे।
कैंपियरगंज क्षेत्र में करमैनी-पंघाटिया बांध पर गायघाट, सोनौरा, सोहतउवा, रामकोला, चंदीपुर, मछरिया घाट, मखनहा आदि स्थानों पर रिसाव होने से नागरिक परेशान हैं। एसडीएम अरुण कुमार सिंह पोकलेन की सहायता से रिसाव बंद कराने में जुटे रहे। करवाल बस्ती में बाढ़ का पानी घुस गया है। रिगौली, बहबोलिया, मुसाबर गांवों के नागरिकों ने बच्चों व महिलाओं को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया है। बसंतपुर गांव के करवाल में 70, गोपालपुर में 40 घरों में बाढ़ का पानी घुसा है। ब्रह्मापुर क्षेत्र के गोर्रा नदी पर बने इटौवा-बोहाबर बांध में मंगलवार सुबह महुवरकोल के पास रिसाव होने लगा। राप्ती के पानी से गजपुर क्षेत्र के भरवलिया-बसावनपुर ¨रग बांध पर दबाव बढ़ गया है। राउतपार ग्राम पंचायत के सीअर और चेतरी गांव पानी से घिर गए।
पीपीगंज में राप्ती नदी पर बनाया गया 11 किमी लंबे मखनहा बांध में अगहीयवा, रबेलिया, घोलहवा, मखनहा, झगरहा में रिसाव हो रहा है। ग्रामीणों के साथ सिंचाई विभाग के कर्मचारी रिसाव बंद करने में जुटे हैं।
आमी नदी का पानी उनवल-गोरखपुर मार्ग पर चढ़ गया है। दो जगह पर चढ़े पानी से सड़क भी कटने लगी है। पानी ऐसे ही बढ़ा तो उनवल क्षेत्र के नागरिकों को खजनी होकर गोरखपुर आना पड़ेगा। आमी में बाढ़ से उनवल क्षेत्र तीन तरफ से घिर गया है। कई घरों में पानी घुसने के बाद नागरिक सड़क पर आ गए हैं। डोमरघाट, डिहवा, जगरनाथपुर, जमौली खुर्द, जमौली बुजुर्ग आदि गांव पानी से घिर गए हैं।
जिले के दर्जनों प्राइमरी स्कूलों में बाढ़ का पानी घुस गया है। कैंपियरगंज क्षेत्र के ककटही, चकदहा भुजौली, रामकोला, बहबोलिया, रिगौली, भैंसला, चकदहा, मुसाबर आदि विद्यालयों में पानी जमा है। उनवल क्षेत्र के प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय जरलही में भी बाढ़ का पानी घुस गया है। खोराबार क्षेत्र के कई विद्यालय बाढ़ के पानी से घिरे हैं।
| GORAKHPUR: गोरखपुर जिला बाढ़ की चपेट में है और अब बाढ़ का पानी बेकाबू होने लगा है। रोहिन नदी का पानी गोरखपुर-सौनौली राजमार्ग पर चढ़ गया। पीपीगंज के मखनहा, खोराबार के सेमरौना, करमैनी-पंघाटिया आदि बांधों में रिसाव ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी। रोहिन नदी का पानी चिलुआताल के रास्ते बरगदवा के पास पहुंच गया है। पांच घरों में बाढ़ का पानी घुसने के बाद एसडीआरएफ टीम ने इक्कीस नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। राप्ती नदी पर बने लहसड़ी बांध में लालपुर टीकर खंतापार टोला में रिसाव की सूचना पर डीएम विजय किरन आनन्द मौके पर पहुंचे। जिले में मानसून पीरियड में अब तक एक हज़ार एक सौ बावन. नौ मिलीमीटर बारिश हो चुकी है। रोहिन नदी में उफान से गोरखपुर-सोनौली राजमार्ग पर जंगल कौडि़या इलाके में एक फीट की ऊंचाई में पानी चढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है, नदी के बढ़ने का स्तर यदि यही रहा तो आसपास के गांव बाढ़ की चपेट में आ जाएंगे। कैंपियरगंज क्षेत्र में करमैनी-पंघाटिया बांध पर गायघाट, सोनौरा, सोहतउवा, रामकोला, चंदीपुर, मछरिया घाट, मखनहा आदि स्थानों पर रिसाव होने से नागरिक परेशान हैं। एसडीएम अरुण कुमार सिंह पोकलेन की सहायता से रिसाव बंद कराने में जुटे रहे। करवाल बस्ती में बाढ़ का पानी घुस गया है। रिगौली, बहबोलिया, मुसाबर गांवों के नागरिकों ने बच्चों व महिलाओं को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया है। बसंतपुर गांव के करवाल में सत्तर, गोपालपुर में चालीस घरों में बाढ़ का पानी घुसा है। ब्रह्मापुर क्षेत्र के गोर्रा नदी पर बने इटौवा-बोहाबर बांध में मंगलवार सुबह महुवरकोल के पास रिसाव होने लगा। राप्ती के पानी से गजपुर क्षेत्र के भरवलिया-बसावनपुर ¨रग बांध पर दबाव बढ़ गया है। राउतपार ग्राम पंचायत के सीअर और चेतरी गांव पानी से घिर गए। पीपीगंज में राप्ती नदी पर बनाया गया ग्यारह किमी लंबे मखनहा बांध में अगहीयवा, रबेलिया, घोलहवा, मखनहा, झगरहा में रिसाव हो रहा है। ग्रामीणों के साथ सिंचाई विभाग के कर्मचारी रिसाव बंद करने में जुटे हैं। आमी नदी का पानी उनवल-गोरखपुर मार्ग पर चढ़ गया है। दो जगह पर चढ़े पानी से सड़क भी कटने लगी है। पानी ऐसे ही बढ़ा तो उनवल क्षेत्र के नागरिकों को खजनी होकर गोरखपुर आना पड़ेगा। आमी में बाढ़ से उनवल क्षेत्र तीन तरफ से घिर गया है। कई घरों में पानी घुसने के बाद नागरिक सड़क पर आ गए हैं। डोमरघाट, डिहवा, जगरनाथपुर, जमौली खुर्द, जमौली बुजुर्ग आदि गांव पानी से घिर गए हैं। जिले के दर्जनों प्राइमरी स्कूलों में बाढ़ का पानी घुस गया है। कैंपियरगंज क्षेत्र के ककटही, चकदहा भुजौली, रामकोला, बहबोलिया, रिगौली, भैंसला, चकदहा, मुसाबर आदि विद्यालयों में पानी जमा है। उनवल क्षेत्र के प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय जरलही में भी बाढ़ का पानी घुस गया है। खोराबार क्षेत्र के कई विद्यालय बाढ़ के पानी से घिरे हैं। |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
अभिनेत्री ने कहा, " 'कहानी 9 महीने की' रोमांस, कॉमेडी, ड्रामा और इमोशन के उदार मिश्रण के साथ एक सकारात्मक और सशक्त शो है। यह पुरानी प्रथा से दूर है जहां लड़का-लड़की मिलते हैं, वे प्यार में पड़ते हैं, शादी करते हैं तब जाकर बच्चा होता है। यह वास्तविक और भरोसेमंद है, और मुझे आलिया का किरदार निभाने में मजा आ रहा है क्योंकि कहीं न कहीं मैं उसकी मानसिकता और विचार प्रक्रिया से जुड़ गई हूं। "
उन्होंने कहा, "चिकित्सा विज्ञान में उन्नति के लिए धन्यवाद, एक महिला अपनी तैयारी के आधार पर मातृत्व का विकल्प चुन सकती है, चाहे वह शारीरिक, मानसिक या भावनात्मक रूप से हो। "
| अभिनेत्री ने कहा, " 'कहानी नौ महीने की' रोमांस, कॉमेडी, ड्रामा और इमोशन के उदार मिश्रण के साथ एक सकारात्मक और सशक्त शो है। यह पुरानी प्रथा से दूर है जहां लड़का-लड़की मिलते हैं, वे प्यार में पड़ते हैं, शादी करते हैं तब जाकर बच्चा होता है। यह वास्तविक और भरोसेमंद है, और मुझे आलिया का किरदार निभाने में मजा आ रहा है क्योंकि कहीं न कहीं मैं उसकी मानसिकता और विचार प्रक्रिया से जुड़ गई हूं। " उन्होंने कहा, "चिकित्सा विज्ञान में उन्नति के लिए धन्यवाद, एक महिला अपनी तैयारी के आधार पर मातृत्व का विकल्प चुन सकती है, चाहे वह शारीरिक, मानसिक या भावनात्मक रूप से हो। " |
(५) पारिणामिक भाव-- कर्मोके उपशमादिके बिना स्वभावरूप में उत्पन्न होनेवाली परिणति ।
जिस भावके उत्पन्न होने में कर्मका उपशम निमित्त होता है, वह ओपशमिक भाव है। कर्मकी अवस्था विशेषका नाम उपशम है। जैसे कतक- निर्मली आदि द्रव्यके निमित्तसे जलमें मिश्रित मैल नीचे जम जाता है और स्वच्छ जल ऊपर निकल आता है, उसी प्रकार परिणाम विशेषके कारण विवक्षित कालमें कर्मनिषेकोंका अन्तर होकर उस कर्मका उपशम हो जाता है, जिससे उस कालके भीतर आत्माका निर्मल भाव प्रकट होता है। कर्मके उपशमसे होनेके कारण इसे औपशमिक कहा जाता है ।
नीचे जमे हुए मैलके हिल जानेपर जिस प्रकार जल पुनः गन्दा हो जाता उसी प्रकार उपशमके दूर होते ही कर्मोदयके पुनः आजाने से भाव में परिवर्त्तन हो जाता है।
जिस भावके होने में कर्मका क्षय निमित्त हो, उसे क्षायिकभाव कहते हैं । जिस प्रकार जलमेंसे मैलके निकाल देनेपर जल सर्वथा स्वच्छ हो जाता है, उसी प्रकार आत्मासे लगे हुए कर्मके सर्वथा दूर हो जानेसे आत्माका निर्मलभाव प्रकट हो जाता है । अतः यह भाव कर्मके सर्वथा क्षय होनेसे क्षायिक कहलाता है ।
जिस भावके होने में कर्मका क्षयोपशम निमित्त है, वह क्षायोपशमिक भाव कहलाता है । जिस प्रकार जलमें से कुछ मलके निकल जानेपर और कुछके बने रहनेपर जलमें मलकी क्षीणाक्षीण वृत्ति पायी जाती है, जिससे जल पूरा निर्मल न होकर समल बना रहता है। इसी प्रकार आत्मासे लगे हुए कर्मके क्षयोपशमके होनेपर जो भाव प्रकट होता है, उसे क्षायोपशमिक भाव कहते हैं ।
कर्मोके उदयसे होनेवाले भावको औदयिक भाव कहते हैं ।
कर्मके, उपशम, क्षय, क्षयोपशम और उदयके विना द्रव्यके परिणाममात्रसे उत्पन्न होनेवाला भाव पारिणामिक कहा जाता है । तात्पर्य यह । तात्पर्य यह है कि बाह्य निमित्तके बिना द्रव्यके स्वाभाविक परिणमनसे जो भाव प्रकट होता है, वह पारिणामिक कहलाता है ।
संसारी अथवा मुक्त आत्माकी जितनी पर्यायें होती हैं, उन सबका अन्तभवि इन पाँच भावों में ही हो जाता है ।
संसारी जोवों में से किसीके तीन, किसोके चार और किसी जीवके पाँच भाव होते हैं। तृतीय गुणस्थान तक के समस्त संसारी जीवोंके क्षायोपशमिक, ३६८ : तीर्थंकर महावीर और उनकी आचार्य परम्परा | पारिणामिक भाव-- कर्मोके उपशमादिके बिना स्वभावरूप में उत्पन्न होनेवाली परिणति । जिस भावके उत्पन्न होने में कर्मका उपशम निमित्त होता है, वह ओपशमिक भाव है। कर्मकी अवस्था विशेषका नाम उपशम है। जैसे कतक- निर्मली आदि द्रव्यके निमित्तसे जलमें मिश्रित मैल नीचे जम जाता है और स्वच्छ जल ऊपर निकल आता है, उसी प्रकार परिणाम विशेषके कारण विवक्षित कालमें कर्मनिषेकोंका अन्तर होकर उस कर्मका उपशम हो जाता है, जिससे उस कालके भीतर आत्माका निर्मल भाव प्रकट होता है। कर्मके उपशमसे होनेके कारण इसे औपशमिक कहा जाता है । नीचे जमे हुए मैलके हिल जानेपर जिस प्रकार जल पुनः गन्दा हो जाता उसी प्रकार उपशमके दूर होते ही कर्मोदयके पुनः आजाने से भाव में परिवर्त्तन हो जाता है। जिस भावके होने में कर्मका क्षय निमित्त हो, उसे क्षायिकभाव कहते हैं । जिस प्रकार जलमेंसे मैलके निकाल देनेपर जल सर्वथा स्वच्छ हो जाता है, उसी प्रकार आत्मासे लगे हुए कर्मके सर्वथा दूर हो जानेसे आत्माका निर्मलभाव प्रकट हो जाता है । अतः यह भाव कर्मके सर्वथा क्षय होनेसे क्षायिक कहलाता है । जिस भावके होने में कर्मका क्षयोपशम निमित्त है, वह क्षायोपशमिक भाव कहलाता है । जिस प्रकार जलमें से कुछ मलके निकल जानेपर और कुछके बने रहनेपर जलमें मलकी क्षीणाक्षीण वृत्ति पायी जाती है, जिससे जल पूरा निर्मल न होकर समल बना रहता है। इसी प्रकार आत्मासे लगे हुए कर्मके क्षयोपशमके होनेपर जो भाव प्रकट होता है, उसे क्षायोपशमिक भाव कहते हैं । कर्मोके उदयसे होनेवाले भावको औदयिक भाव कहते हैं । कर्मके, उपशम, क्षय, क्षयोपशम और उदयके विना द्रव्यके परिणाममात्रसे उत्पन्न होनेवाला भाव पारिणामिक कहा जाता है । तात्पर्य यह । तात्पर्य यह है कि बाह्य निमित्तके बिना द्रव्यके स्वाभाविक परिणमनसे जो भाव प्रकट होता है, वह पारिणामिक कहलाता है । संसारी अथवा मुक्त आत्माकी जितनी पर्यायें होती हैं, उन सबका अन्तभवि इन पाँच भावों में ही हो जाता है । संसारी जोवों में से किसीके तीन, किसोके चार और किसी जीवके पाँच भाव होते हैं। तृतीय गुणस्थान तक के समस्त संसारी जीवोंके क्षायोपशमिक, तीन सौ अड़सठ : तीर्थंकर महावीर और उनकी आचार्य परम्परा |
नई दिल्ली - आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ चंदा कोचर अपने ऊपर लगाए गए आरोपों पर स्वतंत्र जांच पूरी होने तक छुट्टी पर रहेंगी। इस बीच बैंक ने संदीप बख्शी को पांच साल के लिए चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (सीओओ) बनाया है। स्टॉक एक्सचेंजों को बैंक की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक वह बोर्ड को रिपोर्ट करेंगे। चंदा कोचर फिलहाल एमडी और सीईओ बनी रहेंगी। श्री बख्शी भी चंदा कोचर की तरह आईसीआईसीआई बैंक से काफी लंबे समय से जुड़े रहे हैं। उन्होंने 1996 में बैंक ज्वाइन किया। उनका पिछला कामकाज बैंक के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर था और वह रिटेल ऑपरेशंस के हैड थे। अगस्त 2010 में बख्शी को आईसीआईसीआई प्रोडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस के हैड पर तौर पर नियुक्त किया गया था। बख्शी को सीओओ बनाने का फैसला वीडियोकॉन मामले में चंदा कोचर की भूमिका की जांच के लिए जस्टिस बीएन कृष्णा की अगवाई में बनी कमेटी के बाद आया है।
| नई दिल्ली - आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ चंदा कोचर अपने ऊपर लगाए गए आरोपों पर स्वतंत्र जांच पूरी होने तक छुट्टी पर रहेंगी। इस बीच बैंक ने संदीप बख्शी को पांच साल के लिए चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर बनाया है। स्टॉक एक्सचेंजों को बैंक की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक वह बोर्ड को रिपोर्ट करेंगे। चंदा कोचर फिलहाल एमडी और सीईओ बनी रहेंगी। श्री बख्शी भी चंदा कोचर की तरह आईसीआईसीआई बैंक से काफी लंबे समय से जुड़े रहे हैं। उन्होंने एक हज़ार नौ सौ छियानवे में बैंक ज्वाइन किया। उनका पिछला कामकाज बैंक के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर था और वह रिटेल ऑपरेशंस के हैड थे। अगस्त दो हज़ार दस में बख्शी को आईसीआईसीआई प्रोडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस के हैड पर तौर पर नियुक्त किया गया था। बख्शी को सीओओ बनाने का फैसला वीडियोकॉन मामले में चंदा कोचर की भूमिका की जांच के लिए जस्टिस बीएन कृष्णा की अगवाई में बनी कमेटी के बाद आया है। |
नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) दसवीं व बारहवीं की परीक्षाएं 15 फरवरी से आयोजित करेगा। बोर्ड ने परीक्षा की शुरुआत व अंतिम तिथि की घोषणा की है। इस संबंध में बोर्ड की ओर से स्कूलों को एक नोटिफिकेशन जारी किया गया है। इसमें बताया गया है कि परीक्षाएं 55 दिन जारी रहने की उम्मीद है। परीक्षा तिथियों का विस्तृत शेड्यूल दिसंबर में जारी होने की संभावना है।
सीबीएसई परीक्षा नियंत्रक डॉ संयम भारद्वाज की ओर से जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि परीक्षाएं 15 फरवरी से शुरू होंगी और करीब 55 दिन जारी रहने की उम्मीद है। 10 अप्रैल को परीक्षाएं समाप्त होंगी। बोर्ड ने परीक्षा आयोजित करने वाले सभी संगठनों से अनुरोध किया है कि वे बोर्ड परीक्षा की इन तिथियों को ध्यान में रखते हुए अपनी परीक्षाओं की तारीखें तय करें।
बोर्ड ने काफी पहले ही परीक्षाओं की संभावित तिथियों को जारी कर दिया है, जिससे कि वह इनके मुताबिक अपनी तैयारी के लिए रणनीति बना सकें। मालूम हो कि इन परीक्षाओं से पहले जनवरी की शुरुआत से फरवरी के मध्य तक प्रैक्टिकल परीक्षाएं भी होंगी। ऐसे में छात्रों को पहले से परीक्षा तिथियों का पता होने से प्रैक्टिकल व थ्योरी की परीक्षाओं पर पर्याप्त ध्यान दे सकेंगे।
| नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड दसवीं व बारहवीं की परीक्षाएं पंद्रह फरवरी से आयोजित करेगा। बोर्ड ने परीक्षा की शुरुआत व अंतिम तिथि की घोषणा की है। इस संबंध में बोर्ड की ओर से स्कूलों को एक नोटिफिकेशन जारी किया गया है। इसमें बताया गया है कि परीक्षाएं पचपन दिन जारी रहने की उम्मीद है। परीक्षा तिथियों का विस्तृत शेड्यूल दिसंबर में जारी होने की संभावना है। सीबीएसई परीक्षा नियंत्रक डॉ संयम भारद्वाज की ओर से जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि परीक्षाएं पंद्रह फरवरी से शुरू होंगी और करीब पचपन दिन जारी रहने की उम्मीद है। दस अप्रैल को परीक्षाएं समाप्त होंगी। बोर्ड ने परीक्षा आयोजित करने वाले सभी संगठनों से अनुरोध किया है कि वे बोर्ड परीक्षा की इन तिथियों को ध्यान में रखते हुए अपनी परीक्षाओं की तारीखें तय करें। बोर्ड ने काफी पहले ही परीक्षाओं की संभावित तिथियों को जारी कर दिया है, जिससे कि वह इनके मुताबिक अपनी तैयारी के लिए रणनीति बना सकें। मालूम हो कि इन परीक्षाओं से पहले जनवरी की शुरुआत से फरवरी के मध्य तक प्रैक्टिकल परीक्षाएं भी होंगी। ऐसे में छात्रों को पहले से परीक्षा तिथियों का पता होने से प्रैक्टिकल व थ्योरी की परीक्षाओं पर पर्याप्त ध्यान दे सकेंगे। |
पार्टनर का बर्थडे साल का सबसे खास दिन होता है। अगर आप अपनी गर्लफ्रेंड-ब्वॉयफ्रेंड या पति-पत्नी से प्यार करते हैं तो आपका भी मन करेगा कि उनके इस बर्थडे पर कुछ खास किया जाए जिससे वो स्पेशल फील कर सकें और आप दोनों का रिश्ता बेहतर और मजबूत हो सके।
अगर आपके रिलेशनशिप को बहुत साल बीत गए हैं या शादी की भी कई सालगिरह निकल चुकी हैं तो आपको अपने पार्टनर को बर्थडे पर कुछ बढिया सा सरप्राइज़ देने के बारे में जरूर सोचना चाहिए।
आज हम आपको कुछ ऐसे आइडियाज़ के बारे में बताने जा रहे हैं जिनसे आप अपने पार्टनर को बर्थडे पर सरप्राइज़ दे सकती हैं।
सरप्राइज़ में जो भी मिले उसे देखकर मन एक दम खुश हो जाता है और अगर सरप्राइज़ बर्थडे पर मिले तो उसकी खुशी दोगुनी हो जाती है। आप उनके बर्थडे पर सरप्राइज़ पार्टी रख सकते हैं। उन्हें बिना बताए उनके दोस्तों और परिवार के सदस्यों को इंवाइट कर लें और फिर उन्हें अचानक से सरप्राइज़ कर दें। ये सब देखकर उन्हें वाकई में बहुत स्पेशल फील होगा और आपके लिए प्यार और इज्जत देानों ही काफी बढ़ जाएंगीं।
हर किसी की कोई ना कोई फेवरेट डिश तो जरूर होती है। जन्मदिन के मौके पर आप उनके लिए उनकी को पसंदीदा डिश बना सकते हैं। जब मौका खास है तो खाना भी खास बनना ही चाहिए। अगर वो आपसे किसी डिश को खाने की लंबे समय से फरमाईश कर रहे हैं तो आप उनके जन्मदिन पर वो डिश भी बना सकते हैं। इसे देखकर उनका दिल एक दम खुश हो जाएगा।
उनकी पंसद का कोई तोहफा देकर भी आप उनके जन्मदिन को खास बना सकते हैं। उन्हें आप बर्थडे पर कोई बढिया सी ड्रेस, घड़ी या उनकी पंसद का कोई भी तोहफा दे सकते हैं। गिफ्टस मिलना हर किसी को अच्छा लगता है, आपको बस अपने पार्टनर की पसंद पता होनी चाहिए।
अगर आपकी शादी हो चुकी है तो आप अपनी शादी के शुरुआती दिनों को फिर से याद कर सकते हैं। उनके जन्मदिन पर अपने कमरे को फूलों से सजा दें। बिलकुल वैसे ही जैसे शादी की पहली रात पर सजाया गया था। इसे देखकर वाकई में बहुत खुश हो जाएंगें और आपको चूम लेंगें। अपने पार्टनर के स्पेशल दिन को और खास बनाने के लिए ये सबसे बेहतरीन तरीका है। इसके साथ कैंडल लाइट डिनर और रोमांटिक कपल डांस बिलकुल ना भूलें। आपकी कुछ खास करने की चाहत उनके दिल में जरूर जगह बना लेगी।
प्यार से आप इस दुनिया में सब कुछ जीत सकते हैं। अपने पार्टनर को खुश करने के लिए उनके जन्मदिन पर आपका कुछ खास करना आपके रिश्ते के लिए बहुत कुछ कर जाएगा। अगर लंबे समय से आप दोनों एक-दूसरे को वक्त नहीं दे पा रहे थे तो भी आप जन्मदिन के बहाने अपने रिश्ते में नई जान भर सकते हैं। जन्मदिन के बहाने ही सही आप दोनों के बीच की दूरियां खत्म हो जाएंगीं और आपका रिश्ता फिर से प्यार से महकने लगेगा।
| पार्टनर का बर्थडे साल का सबसे खास दिन होता है। अगर आप अपनी गर्लफ्रेंड-ब्वॉयफ्रेंड या पति-पत्नी से प्यार करते हैं तो आपका भी मन करेगा कि उनके इस बर्थडे पर कुछ खास किया जाए जिससे वो स्पेशल फील कर सकें और आप दोनों का रिश्ता बेहतर और मजबूत हो सके। अगर आपके रिलेशनशिप को बहुत साल बीत गए हैं या शादी की भी कई सालगिरह निकल चुकी हैं तो आपको अपने पार्टनर को बर्थडे पर कुछ बढिया सा सरप्राइज़ देने के बारे में जरूर सोचना चाहिए। आज हम आपको कुछ ऐसे आइडियाज़ के बारे में बताने जा रहे हैं जिनसे आप अपने पार्टनर को बर्थडे पर सरप्राइज़ दे सकती हैं। सरप्राइज़ में जो भी मिले उसे देखकर मन एक दम खुश हो जाता है और अगर सरप्राइज़ बर्थडे पर मिले तो उसकी खुशी दोगुनी हो जाती है। आप उनके बर्थडे पर सरप्राइज़ पार्टी रख सकते हैं। उन्हें बिना बताए उनके दोस्तों और परिवार के सदस्यों को इंवाइट कर लें और फिर उन्हें अचानक से सरप्राइज़ कर दें। ये सब देखकर उन्हें वाकई में बहुत स्पेशल फील होगा और आपके लिए प्यार और इज्जत देानों ही काफी बढ़ जाएंगीं। हर किसी की कोई ना कोई फेवरेट डिश तो जरूर होती है। जन्मदिन के मौके पर आप उनके लिए उनकी को पसंदीदा डिश बना सकते हैं। जब मौका खास है तो खाना भी खास बनना ही चाहिए। अगर वो आपसे किसी डिश को खाने की लंबे समय से फरमाईश कर रहे हैं तो आप उनके जन्मदिन पर वो डिश भी बना सकते हैं। इसे देखकर उनका दिल एक दम खुश हो जाएगा। उनकी पंसद का कोई तोहफा देकर भी आप उनके जन्मदिन को खास बना सकते हैं। उन्हें आप बर्थडे पर कोई बढिया सी ड्रेस, घड़ी या उनकी पंसद का कोई भी तोहफा दे सकते हैं। गिफ्टस मिलना हर किसी को अच्छा लगता है, आपको बस अपने पार्टनर की पसंद पता होनी चाहिए। अगर आपकी शादी हो चुकी है तो आप अपनी शादी के शुरुआती दिनों को फिर से याद कर सकते हैं। उनके जन्मदिन पर अपने कमरे को फूलों से सजा दें। बिलकुल वैसे ही जैसे शादी की पहली रात पर सजाया गया था। इसे देखकर वाकई में बहुत खुश हो जाएंगें और आपको चूम लेंगें। अपने पार्टनर के स्पेशल दिन को और खास बनाने के लिए ये सबसे बेहतरीन तरीका है। इसके साथ कैंडल लाइट डिनर और रोमांटिक कपल डांस बिलकुल ना भूलें। आपकी कुछ खास करने की चाहत उनके दिल में जरूर जगह बना लेगी। प्यार से आप इस दुनिया में सब कुछ जीत सकते हैं। अपने पार्टनर को खुश करने के लिए उनके जन्मदिन पर आपका कुछ खास करना आपके रिश्ते के लिए बहुत कुछ कर जाएगा। अगर लंबे समय से आप दोनों एक-दूसरे को वक्त नहीं दे पा रहे थे तो भी आप जन्मदिन के बहाने अपने रिश्ते में नई जान भर सकते हैं। जन्मदिन के बहाने ही सही आप दोनों के बीच की दूरियां खत्म हो जाएंगीं और आपका रिश्ता फिर से प्यार से महकने लगेगा। |
चेन्नई, 9 जनवरी (आईएएनएस)। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के. पलानीस्वामी ने श्रीलंका में श्रीलंकाई सरकार द्वारा जाफना यूनिवर्सिटी में स्थित मुल्लिवैकल मेमोरियल को ध्वस्त किए जाने की शनिवार को निंदा की।
पलानीस्वामी ने एक ट्वीट में कहा कि श्रीलंका में गृहयुद्ध में निर्दयता से मारे गए छात्रों और जनता की याद में बनाए गए स्मारक के विध्वंस बारे में सुनकर बहुत धक्का लगा।
पलानीस्वामी ने श्रीलंकाई सरकार और जाफना यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर की इस कृत्य के लिए निंदा की।
विध्वंस की निंदा करते हुए, द्रमुक अध्यक्ष एम. के. स्टालिन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस तरह के कृत्य की निंदा करनी चाहिए।
| चेन्नई, नौ जनवरी । तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के. पलानीस्वामी ने श्रीलंका में श्रीलंकाई सरकार द्वारा जाफना यूनिवर्सिटी में स्थित मुल्लिवैकल मेमोरियल को ध्वस्त किए जाने की शनिवार को निंदा की। पलानीस्वामी ने एक ट्वीट में कहा कि श्रीलंका में गृहयुद्ध में निर्दयता से मारे गए छात्रों और जनता की याद में बनाए गए स्मारक के विध्वंस बारे में सुनकर बहुत धक्का लगा। पलानीस्वामी ने श्रीलंकाई सरकार और जाफना यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर की इस कृत्य के लिए निंदा की। विध्वंस की निंदा करते हुए, द्रमुक अध्यक्ष एम. के. स्टालिन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस तरह के कृत्य की निंदा करनी चाहिए। |
नई दिल्ली। दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री और आप नेता मनीष सिसोदिया को ईडी (Ed) की तरफ से एक और झटका लगा है। ईडी ने शुक्रवार को मनीष सिसोदिया उनकी पत्नी और अन्य की 52 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति कुर्क की है। मालूम हो कि सिसोदिया को दिल्ली आबकारी नीति घोटाला मामले में गिरफ्तार किया गया था। ईडी के अनुसार, इस 52 करोड़ की चल अचल संपत्ति में 7 करोड़ 29 लाख रुपये की 2 प्रॉपर्टी मनीष सिसोदिया, उनकी पत्नी सीमा सिसोदिया साथ ही राजेश जोशी और गौतम मल्होत्रा के लैंड और फ्लैट शामिल हैं। इस अटैचमेंट में 44 करोड़ 29 लाख रुपये की कैश और चल संपत्ति है।
मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) के अलावा अमनदीप सिंह ढल्ल, राजेश जोशी, गौतम मल्होत्रा सहित अन्य आरोपियों की भी संपत्ति है। ईडी ने आबकारी नीति में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में अभी तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसमें 13वें आरोपी की गिरफ्तारी गुरुवार रात (6 जुलाई) व्यवसायी दिनेश अरोड़ा की हुई। दिल्ली हाईकोर्ट ने 3 जुलाई को ईडी केस में मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
सिसोदिया (Sisodia) को सीबीआई ने 26 फरवरी 2023 को लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया था। फिलहाल वह ईडी और सीबीआई द्वारा दर्ज मामले में न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल में बंद है। सीबीआई मामले में न्यायिक हिरासत के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सिसोदिया से पूछताछ की थी और पर नौ मार्च को गिरफ्तार किया था।
बाद में विशेष अदालत ने ईडी की याचिका पर सिसोदिया को उसकी हिरासत में भेजा दिया था। सिसोदिया की ईडी की हिरासत खत्म होने के बाद इस मामले में भी न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। सीबीआई ने 17 अक्टूबर 2022 को सिसोदिया से पूछताछ की थी और उनके तथा अन्य 14 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।
| नई दिल्ली। दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री और आप नेता मनीष सिसोदिया को ईडी की तरफ से एक और झटका लगा है। ईडी ने शुक्रवार को मनीष सिसोदिया उनकी पत्नी और अन्य की बावन करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति कुर्क की है। मालूम हो कि सिसोदिया को दिल्ली आबकारी नीति घोटाला मामले में गिरफ्तार किया गया था। ईडी के अनुसार, इस बावन करोड़ की चल अचल संपत्ति में सात करोड़ उनतीस लाख रुपये की दो प्रॉपर्टी मनीष सिसोदिया, उनकी पत्नी सीमा सिसोदिया साथ ही राजेश जोशी और गौतम मल्होत्रा के लैंड और फ्लैट शामिल हैं। इस अटैचमेंट में चौंतालीस करोड़ उनतीस लाख रुपये की कैश और चल संपत्ति है। मनीष सिसोदिया के अलावा अमनदीप सिंह ढल्ल, राजेश जोशी, गौतम मल्होत्रा सहित अन्य आरोपियों की भी संपत्ति है। ईडी ने आबकारी नीति में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में अभी तक तेरह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसमें तेरहवें आरोपी की गिरफ्तारी गुरुवार रात व्यवसायी दिनेश अरोड़ा की हुई। दिल्ली हाईकोर्ट ने तीन जुलाई को ईडी केस में मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। सिसोदिया को सीबीआई ने छब्बीस फरवरी दो हज़ार तेईस को लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया था। फिलहाल वह ईडी और सीबीआई द्वारा दर्ज मामले में न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल में बंद है। सीबीआई मामले में न्यायिक हिरासत के दौरान प्रवर्तन निदेशालय ने सिसोदिया से पूछताछ की थी और पर नौ मार्च को गिरफ्तार किया था। बाद में विशेष अदालत ने ईडी की याचिका पर सिसोदिया को उसकी हिरासत में भेजा दिया था। सिसोदिया की ईडी की हिरासत खत्म होने के बाद इस मामले में भी न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। सीबीआई ने सत्रह अक्टूबर दो हज़ार बाईस को सिसोदिया से पूछताछ की थी और उनके तथा अन्य चौदह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। |
Highlightsदूसरे और तीसरे मैच में खाता नहीं खोल सके। पहले मैच में 4 गेंद खेलकर एक रन बनाए। तीसरे मैच में 4 गेंद खेलकर 0 रन का योगदान दिया।
India vs England: भारतीय ओपनर केएल राहुल तीसरे मैच में फ्लॉप हो गए। पहले टी-20 मैच में एक रन का योगदान दिया था।
दूसरे और तीसरे मैच में खाता नहीं खोल सके। पहले मैच में 4 गेंद खेलकर एक रन बनाए। दूसरे मैच में 6 गेंद खेलकर 0 रन बनाए। तीसरे मैच में 4 गेंद खेलकर 0 रन का योगदान दिया। राहुल के कारण नए खिलाड़ी सूर्यकुमार यादव को बाहर कर दिया गया। यादव दूसरे मैच में डेब्यू किया था। बिना कुछ प्रदर्शन किए टीम से बाहर कर दिया गया।
इंग्लैंड के कप्तान इयोन मोर्गन ने भारत के खिलाफ तीसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच में मंगलवार को यहां टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। भारत ने एक बदलाव करते हुए सूर्यकुमार यादव की जगह रोहित शर्मा को टीम में शामिल किया। इंग्लैंड ने भी टॉम कुरेन की जगह मार्क वुड को टीम में स्थान दिया।
भारतीय कप्तान विराट कोहली ने कहा था कि रोहित शर्मा और के एल राहुल इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज में पारी की शुरुआत करेंगे। कोहली ने साफ तौर पर कहा कि वाशिंगटन सुंदर के अच्छा खेलने पर रविचंद्रन अश्विन के लिये सीमित ओवरों की टीम में जगह नहीं है। भारत में इस साल के आखिर में होने वाले टी20 विश्व कप की तैयारी इंग्लैंड के खिलाफ इस सीरीज से शुरू होगी।
| Highlightsदूसरे और तीसरे मैच में खाता नहीं खोल सके। पहले मैच में चार गेंद खेलकर एक रन बनाए। तीसरे मैच में चार गेंद खेलकर शून्य रन का योगदान दिया। India vs England: भारतीय ओपनर केएल राहुल तीसरे मैच में फ्लॉप हो गए। पहले टी-बीस मैच में एक रन का योगदान दिया था। दूसरे और तीसरे मैच में खाता नहीं खोल सके। पहले मैच में चार गेंद खेलकर एक रन बनाए। दूसरे मैच में छः गेंद खेलकर शून्य रन बनाए। तीसरे मैच में चार गेंद खेलकर शून्य रन का योगदान दिया। राहुल के कारण नए खिलाड़ी सूर्यकुमार यादव को बाहर कर दिया गया। यादव दूसरे मैच में डेब्यू किया था। बिना कुछ प्रदर्शन किए टीम से बाहर कर दिया गया। इंग्लैंड के कप्तान इयोन मोर्गन ने भारत के खिलाफ तीसरे टीबीस अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच में मंगलवार को यहां टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। भारत ने एक बदलाव करते हुए सूर्यकुमार यादव की जगह रोहित शर्मा को टीम में शामिल किया। इंग्लैंड ने भी टॉम कुरेन की जगह मार्क वुड को टीम में स्थान दिया। भारतीय कप्तान विराट कोहली ने कहा था कि रोहित शर्मा और के एल राहुल इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की टीबीस सीरीज में पारी की शुरुआत करेंगे। कोहली ने साफ तौर पर कहा कि वाशिंगटन सुंदर के अच्छा खेलने पर रविचंद्रन अश्विन के लिये सीमित ओवरों की टीम में जगह नहीं है। भारत में इस साल के आखिर में होने वाले टीबीस विश्व कप की तैयारी इंग्लैंड के खिलाफ इस सीरीज से शुरू होगी। |
अपर मुख्य सचिव, गृह अवनीश कुमार अवस्थी ने इस पर प्रसन्नता व्यक्त की है और कहा कि भविष्य में भी इसी तरह एनओसी के आवेदन पत्रों का निस्तारण निर्धारित समयावधि में किया जाए। निवेश मित्र, सिंगल पोर्टल के माध्यम से दी जा रही एनओसी के सम्बन्ध में पब्लिक द्वारा फीड बैक लिया गया जिसमें लगभग 75 प्रतिशत से अधिक लोगों ने सराहना व्यक्त की।
लखनऊः अपर मुख्य सचिव, गृह अवनीश कुमार अवस्थी अग्निशमन विभाग से एनओसी के लिए आवेदन करने वाले उन निवेश मित्रों के साथ बैठक करेंगे जिनके आवेदन अक्टूबर व नवंबर माह में अस्वीकृत हुए हैं। ऐसे निवेश मित्रों की संख्या 113 है। इसके अलावा सिंगल विण्डों पोर्टल पर अग्निशमन सेवा से संबधित निवेश मित्रों के अनापत्ति प्रमाण पत्रों (एनओसी) के आवेदन पत्रों का शत-प्रतिशत निस्तारण कराया गया है।
अपर मुख्य सचिव, गृह अवनीश कुमार अवस्थी ने इस पर प्रसन्नता व्यक्त की है और कहा कि भविष्य में भी इसी तरह एनओसी के आवेदन पत्रों का निस्तारण निर्धारित समयावधि में किया जाए। निवेश मित्र, सिंगल पोर्टल के माध्यम से दी जा रही एनओसी के सम्बन्ध में पब्लिक द्वारा फीड बैक लिया गया जिसमें लगभग 75 प्रतिशत से अधिक लोगों ने सराहना व्यक्त की।
अपर मुख्य सचिव, गृह आज अपने कार्यालय कक्ष के सभागार में अग्निशमन सेवा से संबधित प्रकरणों की बैठक कर रहे थे। बैठक में श्री अवस्थी ने अक्टूबर एवं नवम्बर माह के एनओसी के लिए प्राप्त आवेदन पत्रों की जानकारी ली। उन्हे अवगत कराया गया कि माह अक्टूबर में 387 आवेदन पत्रों को स्वीकृति प्रदान करते हुए एनओेसी दी गई है व 78 एनओसी के आवेदन पत्रों को अस्वीकृृत किया गया है।
इसी प्रकार माह नवम्बर में 400 आवेदन पत्रों को स्वीकृति प्रदान करते हुए एनओेसी दी गई है व 35 एनओसी के आवेदन पत्रों को अस्वीकृृत किया गया है। श्री अवस्थी ने अपनी अध्यक्षता में अस्वीकृत किये गये 113 आवेदन पत्रों के आवेदकों की एक बैठक दिसम्बर माह में ही आहूत करने के निर्देश सम्बन्धित अधिकारियों को दिये है।
| अपर मुख्य सचिव, गृह अवनीश कुमार अवस्थी ने इस पर प्रसन्नता व्यक्त की है और कहा कि भविष्य में भी इसी तरह एनओसी के आवेदन पत्रों का निस्तारण निर्धारित समयावधि में किया जाए। निवेश मित्र, सिंगल पोर्टल के माध्यम से दी जा रही एनओसी के सम्बन्ध में पब्लिक द्वारा फीड बैक लिया गया जिसमें लगभग पचहत्तर प्रतिशत से अधिक लोगों ने सराहना व्यक्त की। लखनऊः अपर मुख्य सचिव, गृह अवनीश कुमार अवस्थी अग्निशमन विभाग से एनओसी के लिए आवेदन करने वाले उन निवेश मित्रों के साथ बैठक करेंगे जिनके आवेदन अक्टूबर व नवंबर माह में अस्वीकृत हुए हैं। ऐसे निवेश मित्रों की संख्या एक सौ तेरह है। इसके अलावा सिंगल विण्डों पोर्टल पर अग्निशमन सेवा से संबधित निवेश मित्रों के अनापत्ति प्रमाण पत्रों के आवेदन पत्रों का शत-प्रतिशत निस्तारण कराया गया है। अपर मुख्य सचिव, गृह अवनीश कुमार अवस्थी ने इस पर प्रसन्नता व्यक्त की है और कहा कि भविष्य में भी इसी तरह एनओसी के आवेदन पत्रों का निस्तारण निर्धारित समयावधि में किया जाए। निवेश मित्र, सिंगल पोर्टल के माध्यम से दी जा रही एनओसी के सम्बन्ध में पब्लिक द्वारा फीड बैक लिया गया जिसमें लगभग पचहत्तर प्रतिशत से अधिक लोगों ने सराहना व्यक्त की। अपर मुख्य सचिव, गृह आज अपने कार्यालय कक्ष के सभागार में अग्निशमन सेवा से संबधित प्रकरणों की बैठक कर रहे थे। बैठक में श्री अवस्थी ने अक्टूबर एवं नवम्बर माह के एनओसी के लिए प्राप्त आवेदन पत्रों की जानकारी ली। उन्हे अवगत कराया गया कि माह अक्टूबर में तीन सौ सत्तासी आवेदन पत्रों को स्वीकृति प्रदान करते हुए एनओेसी दी गई है व अठहत्तर एनओसी के आवेदन पत्रों को अस्वीकृृत किया गया है। इसी प्रकार माह नवम्बर में चार सौ आवेदन पत्रों को स्वीकृति प्रदान करते हुए एनओेसी दी गई है व पैंतीस एनओसी के आवेदन पत्रों को अस्वीकृृत किया गया है। श्री अवस्थी ने अपनी अध्यक्षता में अस्वीकृत किये गये एक सौ तेरह आवेदन पत्रों के आवेदकों की एक बैठक दिसम्बर माह में ही आहूत करने के निर्देश सम्बन्धित अधिकारियों को दिये है। |
सुपर चोर सिद्धार्थ को तलाश करने के लिए दिल्ली पुलिस ने एड़ी से चोटी तक का जोर लगा दिया। काफी प्रयासों के बाद पुलिस ने गूगल से आरोपी की पहचान करने का प्रयास किया।
पुलिस के पास आरोपी की सीसीटीवी में कैद फोटो के अलावा कुछ नहीं था। जांच के दौरान नोएडा में गूगल पर छपी खबर 'अधिकारी का बेटा चोरी में गिरफ्तार' देखकर पुलिस को उसे पकड़ने में मदद मिली। पुलिस अधिकारियों ने सिद्धार्थ के परिवार से संपर्क किया तो पता चला कि परिवार उसे काफी समय पूर्व बेदखल कर चुका है। आरोपी परिवार से कोई संपर्क नहीं रख रहा था।
वहीं छानबीन के दौरान पुलिस को पता चला कि वह बार-बार फोन नंबर और अपना घर बदल देता है। फेसबुक पर सिद्धार्थ की प्रोफाइल चेक किया गया तो 27 जुलाई को अपलोड की गई उसकी एक फोटो फेसबुक पर दिखी। फोटो में सिद्धार्थ एक फोर्ड कार पर बैठा हुआ था। कार के रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर पुलिस कार मालिक सिद्धार्थ के दोस्त विकास तक पहुंची। वहां से पुलिस को सिद्धार्थ का एक मोबाइल नंबर मिला।
जांच के दौरान चोरी की वारदात में उस नंबर की लोकेशन वसंतकुंज की ही मिली। पुलिस ने टेक्निकल सर्विलांस के आधार पर सिद्धार्थ को पीतमपुरा से दबोच लिया। इसके बाद माल के खरीदार जीतू व सिद्धार्थ के साथी अनुराग को दबोचा गया। इनकी निशानदेही पर चुराया गया सामान भारी मात्रा में बरामद हुआ।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि सिद्धार्थ इससे पूर्व 2013 में अशोक विहार व मयूर विहार में चोरी की चार और 2015 में नोएडा में चोरी की 7 वारदातों में शामिल रहा है। फिलहाल वसंतकुंज में वह 18 वारदातों में शामिल रहा था। नोएडा में 34 लाख चोरी करने के बाद उसने चोरी के रुपये से नई क्रूज कार व स्पोर्ट्स बाइक खरीदी थी।
| सुपर चोर सिद्धार्थ को तलाश करने के लिए दिल्ली पुलिस ने एड़ी से चोटी तक का जोर लगा दिया। काफी प्रयासों के बाद पुलिस ने गूगल से आरोपी की पहचान करने का प्रयास किया। पुलिस के पास आरोपी की सीसीटीवी में कैद फोटो के अलावा कुछ नहीं था। जांच के दौरान नोएडा में गूगल पर छपी खबर 'अधिकारी का बेटा चोरी में गिरफ्तार' देखकर पुलिस को उसे पकड़ने में मदद मिली। पुलिस अधिकारियों ने सिद्धार्थ के परिवार से संपर्क किया तो पता चला कि परिवार उसे काफी समय पूर्व बेदखल कर चुका है। आरोपी परिवार से कोई संपर्क नहीं रख रहा था। वहीं छानबीन के दौरान पुलिस को पता चला कि वह बार-बार फोन नंबर और अपना घर बदल देता है। फेसबुक पर सिद्धार्थ की प्रोफाइल चेक किया गया तो सत्ताईस जुलाई को अपलोड की गई उसकी एक फोटो फेसबुक पर दिखी। फोटो में सिद्धार्थ एक फोर्ड कार पर बैठा हुआ था। कार के रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर पुलिस कार मालिक सिद्धार्थ के दोस्त विकास तक पहुंची। वहां से पुलिस को सिद्धार्थ का एक मोबाइल नंबर मिला। जांच के दौरान चोरी की वारदात में उस नंबर की लोकेशन वसंतकुंज की ही मिली। पुलिस ने टेक्निकल सर्विलांस के आधार पर सिद्धार्थ को पीतमपुरा से दबोच लिया। इसके बाद माल के खरीदार जीतू व सिद्धार्थ के साथी अनुराग को दबोचा गया। इनकी निशानदेही पर चुराया गया सामान भारी मात्रा में बरामद हुआ। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि सिद्धार्थ इससे पूर्व दो हज़ार तेरह में अशोक विहार व मयूर विहार में चोरी की चार और दो हज़ार पंद्रह में नोएडा में चोरी की सात वारदातों में शामिल रहा है। फिलहाल वसंतकुंज में वह अट्ठारह वारदातों में शामिल रहा था। नोएडा में चौंतीस लाख चोरी करने के बाद उसने चोरी के रुपये से नई क्रूज कार व स्पोर्ट्स बाइक खरीदी थी। |
आज हम आपको बता रहे हैं उन एक्ट्रेस के बारे में जिन्होंने राजनीति से जुड़े नेताओं संग शादी की है।
इन एक्ट्रेस में बॉलीवुड एक्ट्रेस स्वरा भास्कर से लेकर आयशा टाकिया तक शामिल हैं।
हाल ही में स्वरा भास्कर ने समाजवादी पार्टी नेता फहज अहमद संग शादी की है। दोनों एक दूसरे को काफी समय से डेट भी कर रहे थे।
फिल्म इंडस्ट्री से ताल्लुक रखने वाली अमृता फडणवीस ने महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से शादी की है। अमृता फडणवीस सिंगर हैं।
राजनेता रवि राणा से शादी करने के बाद तेलुगु सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री नवनीत कौर राणा इंडस्ट्री से दूरी बनाए हुए है। अब वो पति के साथ राजनीति में कदम रख चुकी है।
एक समय पर बॉलीवुड में नजर आने वाली आयशा टाकिया ने समाजवादी पार्टी नेता फरहान आजमी से शादी की है।
साउथ सिनेमा से नाता रखने वाली राधिका कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की पत्नी हैं। दोनों ने गुपचुप शादी की थी।
| आज हम आपको बता रहे हैं उन एक्ट्रेस के बारे में जिन्होंने राजनीति से जुड़े नेताओं संग शादी की है। इन एक्ट्रेस में बॉलीवुड एक्ट्रेस स्वरा भास्कर से लेकर आयशा टाकिया तक शामिल हैं। हाल ही में स्वरा भास्कर ने समाजवादी पार्टी नेता फहज अहमद संग शादी की है। दोनों एक दूसरे को काफी समय से डेट भी कर रहे थे। फिल्म इंडस्ट्री से ताल्लुक रखने वाली अमृता फडणवीस ने महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से शादी की है। अमृता फडणवीस सिंगर हैं। राजनेता रवि राणा से शादी करने के बाद तेलुगु सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री नवनीत कौर राणा इंडस्ट्री से दूरी बनाए हुए है। अब वो पति के साथ राजनीति में कदम रख चुकी है। एक समय पर बॉलीवुड में नजर आने वाली आयशा टाकिया ने समाजवादी पार्टी नेता फरहान आजमी से शादी की है। साउथ सिनेमा से नाता रखने वाली राधिका कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की पत्नी हैं। दोनों ने गुपचुप शादी की थी। |
मङ्क १२
को टीका (लिपि सन् १८५३) में अस्पष्ट सडान्वयी व्याख्या है, परन्तु गूढ़ स्थलों को समझाने के कारण यह पर्याप्त महत्त्वपूर्ण है । भाषा मिश्रित है । 'दृष्टांत सागर टीका' रामसनेही पंथ के संस्थापक श्री रामचरन दास के ग्रंथ 'दृष्टांत सागर की टीका है जो उनके अन्तेवासी रामजन द्वारा सं० १८४० के लगभग लिखी गई थी। इस टीका की भाषा राजस्थानी प्रजभाषा - मिश्रित, विकृत तथा तद्भव-निष्ठ है । 'मानस' की महंत रामचरणदास और संतसिंह पंजाबी कृत टीकाओ में क्रमशः अवधी-मिश्रित और पंजाबी प्रभावित खड़ीबोली प्रयुक्त है । 'सूर्य सिद्धांत' (सं० १८३६) पंडित कमोदानंद मिश्र द्वारा संस्कृत से अनूदित ज्योतिप्-ग्रंथ है। भाषा पर पूर्वी प्रभाव है। 'गोराबादल की वारता (सं० १८८० के लगभग ) जटमल कृत 'गोराबादल की बात का अनुवाद है । भाषा अशक्त और अव्यवस्थित है । अ
इन टीकात्मक तथा अनूदित रचनाओं के अतिरिक्त रीतिकाल में मौलिक स्वतंन गद्य-रचनाएँ भी पर्याप्त संख्या में निर्मित हुईं । इस काल की ब्रजभाषा, फ़ारसी, फ़ारसी पंजाबी आदि से प्रभावित खड़ीबोली- गद्य की कुछ उल्लेखनीय मौलिक रचनाएँ हैं - एकादशी महिमा', 'सीधा रास्ता' (इस्लामविक 'फर्मदामा' (पोथोसलोत्री की), 'बाजनामा ' 'सकुनावली', 'हकीकत', 'नरलिदास गाँड़ की दवावैत', 'जिनसुखसूरि मजलस', 'लखपन राउ दवावेत', 'मंडोबर का वर्णन', 'सुगसुर निर्णय', 'चकत्ता की पातस्याही की परम्परा', 'मोक्षमार्गप्रकाश', 'अनुभव नकाश', 'चिविलास' गीर 'परमात्मपुराण । इनमें प्रथम दो धार्मिक, तीसरी-चौथी चिकित्सा विषयक, पंचम शकुन विषयक, छटी प्रणामी सम्प्रदाय के 'मारफत सागर' ग्रंथ का परिचय, सातवी, आठवीं, नवीं और दसवीं अनुप्रासयुक्त ललित गद्य को कथात्मक वर्णनात्मक रचनाएँ, ग्यारहवी निबंधात्मक, बारहवीं इतिहास विषयक और अन्तिम वार जैनदर्शन दिपक रचनाएँ है। यहाँ यह उल्लेख करना असंगत न होगा कि जटमल कृत 'गोरा बादल की बात' पद्य-रचना है, गद्य की नहीं। इसका गद्यरूपान्तर किसी ने १८२४ ई० के लगभग किया था । उल्लित 'दवावैत' संज्ञक मानुप्रास गद्य की रचनाएँ प्रायः राजस्थानी मिश्रित खड़ीबोली में है। वर्णनात्मक कथात्मक तथा निबन्धात्मक रचनाएँ विरल हैं । कुछ नाटकों और पत्रों में भी ललित गद्य के दर्शन होते हैं। जैसा कि हम कह चुके हैं, ललित गद्य की अपेक्षा उपयोगी गद्य का -- दार्शनिक, धार्मिक और चिकित्सा, ज्योतिष, इतिहास, भूगोल, सामुद्रिक, शकुन प्रादि विषयों के शुष्क गद्य का - प्राधान्य है। यह भी अनूदित रूप में अधिक है।
ईसा की १६वीं सदी के प्रारम्भ में फोर्ट विलियम कॉलिज में भी खड़ीबोली- गद्य मे महत्त्वपूर्ण पुस्तकों का निर्मात हुआ । इस कॉलिज से सम्बद्ध व्यक्तियों द्वारा रचित कुछ ग्रथ है - 'नातिकतोपाख्यान', 'रामचरित्र', 'प्रेम सागर', 'लालचन्द्रिका टीका', 'सिंहासन बत्तीसी', 'बैताल पच्चीसी', 'भक्तमाल ठीका' और 'हातिमताई' का अनुवाद । सदलमिश्र कृत 'नासिकेतोपाख्यान', 'यजुर्वेद' तथा 'कठोपनिषद्' की नचिकेत - कथा पर आधृत है। इस पुस्तक में पूर्वी प्रयोगों, ब्रजभाषा-रूपों, पंडिताऊपन तथा असंतुलित शिथिल वाक्यों के होने पर भी खड़ीबोली गद्य का पर्याप्त स्वच्छ सुठु रूप है । 'रामचरित्र' भी सदल मिश्र की रचना है । की प्रति लंदन के इंडिया आफिस लायब्रेरी में सुरक्षित थी और अब बिहार | मङ्क बारह को टीका में अस्पष्ट सडान्वयी व्याख्या है, परन्तु गूढ़ स्थलों को समझाने के कारण यह पर्याप्त महत्त्वपूर्ण है । भाषा मिश्रित है । 'दृष्टांत सागर टीका' रामसनेही पंथ के संस्थापक श्री रामचरन दास के ग्रंथ 'दृष्टांत सागर की टीका है जो उनके अन्तेवासी रामजन द्वारा संशून्य एक हज़ार आठ सौ चालीस के लगभग लिखी गई थी। इस टीका की भाषा राजस्थानी प्रजभाषा - मिश्रित, विकृत तथा तद्भव-निष्ठ है । 'मानस' की महंत रामचरणदास और संतसिंह पंजाबी कृत टीकाओ में क्रमशः अवधी-मिश्रित और पंजाबी प्रभावित खड़ीबोली प्रयुक्त है । 'सूर्य सिद्धांत' पंडित कमोदानंद मिश्र द्वारा संस्कृत से अनूदित ज्योतिप्-ग्रंथ है। भाषा पर पूर्वी प्रभाव है। 'गोराबादल की वारता जटमल कृत 'गोराबादल की बात का अनुवाद है । भाषा अशक्त और अव्यवस्थित है । अ इन टीकात्मक तथा अनूदित रचनाओं के अतिरिक्त रीतिकाल में मौलिक स्वतंन गद्य-रचनाएँ भी पर्याप्त संख्या में निर्मित हुईं । इस काल की ब्रजभाषा, फ़ारसी, फ़ारसी पंजाबी आदि से प्रभावित खड़ीबोली- गद्य की कुछ उल्लेखनीय मौलिक रचनाएँ हैं - एकादशी महिमा', 'सीधा रास्ता' , 'बाजनामा ' 'सकुनावली', 'हकीकत', 'नरलिदास गाँड़ की दवावैत', 'जिनसुखसूरि मजलस', 'लखपन राउ दवावेत', 'मंडोबर का वर्णन', 'सुगसुर निर्णय', 'चकत्ता की पातस्याही की परम्परा', 'मोक्षमार्गप्रकाश', 'अनुभव नकाश', 'चिविलास' गीर 'परमात्मपुराण । इनमें प्रथम दो धार्मिक, तीसरी-चौथी चिकित्सा विषयक, पंचम शकुन विषयक, छटी प्रणामी सम्प्रदाय के 'मारफत सागर' ग्रंथ का परिचय, सातवी, आठवीं, नवीं और दसवीं अनुप्रासयुक्त ललित गद्य को कथात्मक वर्णनात्मक रचनाएँ, ग्यारहवी निबंधात्मक, बारहवीं इतिहास विषयक और अन्तिम वार जैनदर्शन दिपक रचनाएँ है। यहाँ यह उल्लेख करना असंगत न होगा कि जटमल कृत 'गोरा बादल की बात' पद्य-रचना है, गद्य की नहीं। इसका गद्यरूपान्तर किसी ने एक हज़ार आठ सौ चौबीस ईशून्य के लगभग किया था । उल्लित 'दवावैत' संज्ञक मानुप्रास गद्य की रचनाएँ प्रायः राजस्थानी मिश्रित खड़ीबोली में है। वर्णनात्मक कथात्मक तथा निबन्धात्मक रचनाएँ विरल हैं । कुछ नाटकों और पत्रों में भी ललित गद्य के दर्शन होते हैं। जैसा कि हम कह चुके हैं, ललित गद्य की अपेक्षा उपयोगी गद्य का -- दार्शनिक, धार्मिक और चिकित्सा, ज्योतिष, इतिहास, भूगोल, सामुद्रिक, शकुन प्रादि विषयों के शुष्क गद्य का - प्राधान्य है। यह भी अनूदित रूप में अधिक है। ईसा की सोलहवीं सदी के प्रारम्भ में फोर्ट विलियम कॉलिज में भी खड़ीबोली- गद्य मे महत्त्वपूर्ण पुस्तकों का निर्मात हुआ । इस कॉलिज से सम्बद्ध व्यक्तियों द्वारा रचित कुछ ग्रथ है - 'नातिकतोपाख्यान', 'रामचरित्र', 'प्रेम सागर', 'लालचन्द्रिका टीका', 'सिंहासन बत्तीसी', 'बैताल पच्चीसी', 'भक्तमाल ठीका' और 'हातिमताई' का अनुवाद । सदलमिश्र कृत 'नासिकेतोपाख्यान', 'यजुर्वेद' तथा 'कठोपनिषद्' की नचिकेत - कथा पर आधृत है। इस पुस्तक में पूर्वी प्रयोगों, ब्रजभाषा-रूपों, पंडिताऊपन तथा असंतुलित शिथिल वाक्यों के होने पर भी खड़ीबोली गद्य का पर्याप्त स्वच्छ सुठु रूप है । 'रामचरित्र' भी सदल मिश्र की रचना है । की प्रति लंदन के इंडिया आफिस लायब्रेरी में सुरक्षित थी और अब बिहार |
मुंबई। टेलीविजन के चर्चित रियलिटी शो बिग बॉस (Bigg Boss) में हर साल खूब लड़ाई झगड़े देखने को मिलते हैं, लेकिन इसी के साथ यहां एक न एक प्यार भरा रिश्ता भी दिखाई देता है. बिग बॉस 15 (Bigg Boss 15) में करण कुंद्रा (Karan Kundrra) और तेजस्वी प्रकाश (Tejasswi Prakash) की जोड़ी ने खूब सुर्खियां बटोरी. इन दोनों की लव स्टोरी ने शो में चार चांद भी लगा दिए. कई बार तो यह कहा गया कि शो की टीआरपी के लिए इन दोनों की नजदीकियों को बताया जा रहा है. लोगों को यह कहते भी सुना गया था कि शो में साथ हैं बाहर आते ही एक दूसरे एक को भूल जाएंगे. इन सभी बातों पर तब विराम लग गया जब सो के बाद भी यह दोनों अक्सर साथ देखे जाने लगे. आए दिन दोनों की तस्वीरें या वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आती रहती है. हाल ही में दोनों का एक वीडियो सामने आया है जिसने करण कुंद्रा ने तेजस्वी के साथ कुछ ऐसी हरकत करती है कि तेजस्वी शर्म से पानी पानी हो गई.
करण और तेजस्वी (Karan And Tejasswi) का यह वीडियो भारती सिंह और हर्ष लिंबाचिया (Bharti Singh And Haarsh Limbachiyaa) के शो खतरा खतरा खतरा का है. शो पर पहुंचे कपल ने यहां खूब धमाल मचाया और मैं तेनू समझावां गाने पर डांस करते हुए दिखाई दिए. यह दोनों डांस करते हुए एक दूसरे में इतना खो गए कि इन्हें आसपास का कुछ ध्यान ही नहीं था. इसी दौरान करण (Karan) ने तेजस्वी (Tejasswi) को गालों पर किस कर दिया. करण ने जैसे ही तेजस्वी को किस किया तेजस्वी शर्म से लाल हो गई.
शो से एक और वीडियो सामने आई है फराह खान (Farah Khan) और हर्ष लिंबाचिया (Haarsh Limbachiyaa) मौज मस्ती करते दिख रहे हैं. जबसे करण और तेजस्वी का वीडियो सामने आया है यह तेजी से वायरल हो रहा है और फैंस इस वीडियो को बहुत पसंद कर रहे हैं.
| मुंबई। टेलीविजन के चर्चित रियलिटी शो बिग बॉस में हर साल खूब लड़ाई झगड़े देखने को मिलते हैं, लेकिन इसी के साथ यहां एक न एक प्यार भरा रिश्ता भी दिखाई देता है. बिग बॉस पंद्रह में करण कुंद्रा और तेजस्वी प्रकाश की जोड़ी ने खूब सुर्खियां बटोरी. इन दोनों की लव स्टोरी ने शो में चार चांद भी लगा दिए. कई बार तो यह कहा गया कि शो की टीआरपी के लिए इन दोनों की नजदीकियों को बताया जा रहा है. लोगों को यह कहते भी सुना गया था कि शो में साथ हैं बाहर आते ही एक दूसरे एक को भूल जाएंगे. इन सभी बातों पर तब विराम लग गया जब सो के बाद भी यह दोनों अक्सर साथ देखे जाने लगे. आए दिन दोनों की तस्वीरें या वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आती रहती है. हाल ही में दोनों का एक वीडियो सामने आया है जिसने करण कुंद्रा ने तेजस्वी के साथ कुछ ऐसी हरकत करती है कि तेजस्वी शर्म से पानी पानी हो गई. करण और तेजस्वी का यह वीडियो भारती सिंह और हर्ष लिंबाचिया के शो खतरा खतरा खतरा का है. शो पर पहुंचे कपल ने यहां खूब धमाल मचाया और मैं तेनू समझावां गाने पर डांस करते हुए दिखाई दिए. यह दोनों डांस करते हुए एक दूसरे में इतना खो गए कि इन्हें आसपास का कुछ ध्यान ही नहीं था. इसी दौरान करण ने तेजस्वी को गालों पर किस कर दिया. करण ने जैसे ही तेजस्वी को किस किया तेजस्वी शर्म से लाल हो गई. शो से एक और वीडियो सामने आई है फराह खान और हर्ष लिंबाचिया मौज मस्ती करते दिख रहे हैं. जबसे करण और तेजस्वी का वीडियो सामने आया है यह तेजी से वायरल हो रहा है और फैंस इस वीडियो को बहुत पसंद कर रहे हैं. |
करौली जिले के सदर थाना क्षेत्र के जाखेर नदी की पुलिया के समीप एक ट्रैक्टर-ट्रॉली के नीचे दबने से बाइक सवार युवक की दर्दनाक मौत हो गई। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया। पुलिस मामले की जांच कर रही।
थानाधिकारी अमित शर्मा ने बताया कि हादसे में अकोलपुरा गांव निवासी रामदास जाटव (18) पुत्र बत्तो जाटव की मौत हो गई। वह मजदूरी का काम करता था। मंगलवार को वह जाखेर नदी की ओर से बाइक से आ रहा था। इसी दौरान करौली की तरफ से ट्रैक्टर-ट्रॉली चारा डाल कर लौट रही थी। जिसमें कुछ महिलाएं बैठी हुई थी।
जाखेर नदी की पुलिया के पास तीखे मोड़ पर अनियंत्रित होकर तेज रफ्तार ट्रैक्टर-ट्रॉली अचानक पलट गई। जिससे बाइक सवार ट्रॉली के नीचे दब गया। जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। हादसे के बाद ड्राइवर मौके से फरार हो गया। घटना की सूचना पर सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों की मदद से करीब 2 घंटे की मशक्कत के बाद शव को ट्रॉली के नीचे से बाहर निकाला। पुलिस ने मृतक के शव को पोस्टमार्टम को हॉस्पिटल की मोर्चरी भिजवाया। पुलिस ने ट्रैक्टर ट्रॉली को जब्त कर ड्राइवर की तलाश शुरू कर दी है।
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| करौली जिले के सदर थाना क्षेत्र के जाखेर नदी की पुलिया के समीप एक ट्रैक्टर-ट्रॉली के नीचे दबने से बाइक सवार युवक की दर्दनाक मौत हो गई। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया। पुलिस मामले की जांच कर रही। थानाधिकारी अमित शर्मा ने बताया कि हादसे में अकोलपुरा गांव निवासी रामदास जाटव पुत्र बत्तो जाटव की मौत हो गई। वह मजदूरी का काम करता था। मंगलवार को वह जाखेर नदी की ओर से बाइक से आ रहा था। इसी दौरान करौली की तरफ से ट्रैक्टर-ट्रॉली चारा डाल कर लौट रही थी। जिसमें कुछ महिलाएं बैठी हुई थी। जाखेर नदी की पुलिया के पास तीखे मोड़ पर अनियंत्रित होकर तेज रफ्तार ट्रैक्टर-ट्रॉली अचानक पलट गई। जिससे बाइक सवार ट्रॉली के नीचे दब गया। जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। हादसे के बाद ड्राइवर मौके से फरार हो गया। घटना की सूचना पर सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों की मदद से करीब दो घंटाटे की मशक्कत के बाद शव को ट्रॉली के नीचे से बाहर निकाला। पुलिस ने मृतक के शव को पोस्टमार्टम को हॉस्पिटल की मोर्चरी भिजवाया। पुलिस ने ट्रैक्टर ट्रॉली को जब्त कर ड्राइवर की तलाश शुरू कर दी है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
हीरो मोटोकॉर्प (hero motocorp) की बिक्री हर महीने टॉप पर ही रहती है। हर बार की तरह इस बार भी कंपनी की बाइक्स और स्कूटर्स की बिक्री ने जबरस्त ग्रोथ हासिल की है। अगस्त महीने की ही बात करें, तो कंपनी के 9 मॉडल्स की डिमांड सबसे ज्यादा रही है, जिनमें से 3 बाइक्स की बिक्री ने कंपनी ने काफी मजबूती दी है। यहां हम आपको अगस्त (2022) में सबसे ज्यादा बिकने वाली उन्हीं तीन बाइक्स के बारे में जानकारी दे रहे हैं।
बाइक सेगमेंट में Hero Splendor Plus सबसे ज्याद बिकने वाला मॉडल है। यह बाइक कई महीनों से पहले स्थान पर अपनी जगह बनाए हुए है। 100cc बाइक सेगमेंट में Splendor Plus काफी ज्यादा पसंद की जाती है। अगस्त महीने में कंपनी ने इसकी 2,86,007 यूनिट्स की बिक्री की थी, जबकि बीते साल अगस्त महीने में यह आंकड़ा 2,41,703 यूनिट्स का रहा था यानी इस बार कंपनी 44,304 यूनिट्स ज्यादा बेचने में सफल रही है। इस बार बिक्री में 18.33% का इजाफा हुआ है।
HF Deluxe, हीरो मोटोकॉर्प की दूसरी सबसे ज्यादा बिकने वाली बाइक बनी है। 100cc बाइक सेगमेंट में इस बाइक को भी काफी पसंद किया जाता है। अगस्त महीने में कंपनी ने इसकी 72,224 यूनिट्स की बिक्री की थी, जबकि बीते साल अगस्त महीने में यह आंकड़ा 1,14,575 यूनिट्स का रहा था। यानी इस बार कंपनी ने 42,351 यूनिट्स कम बेचे हैं। यानी इस बार बिक्री में 36.96 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई।
फैमिली क्लास के बीच यह बाइक काफी ज्यादा पॉपुलर है। अपने नए अवतार में यह बाइक ग्राहकों को खूब लुभा रही है। यह बाइक स्टाइल के साथ माइलेज में भी काफी अच्छी मानी जाती है। अगस्त महीने में कंपनी ने इसकी 28,149 यूनिट्स की बिक्री की थी, जबकि बीते साल अगस्त महीने में यह आंकड़ा केवल 14,812 यूनिट्स का रहा था। यानी इस बार कंपनी ने 13,337 यूनिट्स ज्यादा बेचे हैं। इस बार बिक्री में 90.04 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है।
| हीरो मोटोकॉर्प की बिक्री हर महीने टॉप पर ही रहती है। हर बार की तरह इस बार भी कंपनी की बाइक्स और स्कूटर्स की बिक्री ने जबरस्त ग्रोथ हासिल की है। अगस्त महीने की ही बात करें, तो कंपनी के नौ मॉडल्स की डिमांड सबसे ज्यादा रही है, जिनमें से तीन बाइक्स की बिक्री ने कंपनी ने काफी मजबूती दी है। यहां हम आपको अगस्त में सबसे ज्यादा बिकने वाली उन्हीं तीन बाइक्स के बारे में जानकारी दे रहे हैं। बाइक सेगमेंट में Hero Splendor Plus सबसे ज्याद बिकने वाला मॉडल है। यह बाइक कई महीनों से पहले स्थान पर अपनी जगह बनाए हुए है। एक सौcc बाइक सेगमेंट में Splendor Plus काफी ज्यादा पसंद की जाती है। अगस्त महीने में कंपनी ने इसकी दो,छियासी,सात यूनिट्स की बिक्री की थी, जबकि बीते साल अगस्त महीने में यह आंकड़ा दो,इकतालीस,सात सौ तीन यूनिट्स का रहा था यानी इस बार कंपनी चौंतालीस,तीन सौ चार यूनिट्स ज्यादा बेचने में सफल रही है। इस बार बिक्री में अट्ठारह.तैंतीस% का इजाफा हुआ है। HF Deluxe, हीरो मोटोकॉर्प की दूसरी सबसे ज्यादा बिकने वाली बाइक बनी है। एक सौcc बाइक सेगमेंट में इस बाइक को भी काफी पसंद किया जाता है। अगस्त महीने में कंपनी ने इसकी बहत्तर,दो सौ चौबीस यूनिट्स की बिक्री की थी, जबकि बीते साल अगस्त महीने में यह आंकड़ा एक,चौदह,पाँच सौ पचहत्तर यूनिट्स का रहा था। यानी इस बार कंपनी ने बयालीस,तीन सौ इक्यावन यूनिट्स कम बेचे हैं। यानी इस बार बिक्री में छत्तीस.छियानवे प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। फैमिली क्लास के बीच यह बाइक काफी ज्यादा पॉपुलर है। अपने नए अवतार में यह बाइक ग्राहकों को खूब लुभा रही है। यह बाइक स्टाइल के साथ माइलेज में भी काफी अच्छी मानी जाती है। अगस्त महीने में कंपनी ने इसकी अट्ठाईस,एक सौ उनचास यूनिट्स की बिक्री की थी, जबकि बीते साल अगस्त महीने में यह आंकड़ा केवल चौदह,आठ सौ बारह यूनिट्स का रहा था। यानी इस बार कंपनी ने तेरह,तीन सौ सैंतीस यूनिट्स ज्यादा बेचे हैं। इस बार बिक्री में नब्बे.चार प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है। |
रेल मंत्री पीयूष गोयल ने महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार से एकबार फिर कल चलने वाली ट्रेनों के यात्रियों की लिस्ट मांगी है।
मुंबई। देशभर में बेहद तेजी से बढ़ रहे कोरोना संकट के बीच प्रवासी मजदूर लगातार पलायन कर रहे हैं। इस बीच महाराष्ट्र में पहले लॉकडाउन के बाद से ही फंसे प्रवासी कामगारों के लिए रेल मंत्री पीयूष गोयल ने महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार से एकबार फिर कल चलने वाली ट्रेनों के यात्रियों की लिस्ट मांगी है।
सभी निर्धारित जानकारी जैसे, कहाँ से ट्रेन चलेगी, यात्रियों की ट्रेनों के हिसाब से सूची, उनका मेडिकल सर्टिफ़िकेट और कहाँ ट्रेन जानी है, यह सब सूचना अगले एक घंटे में मध्य रेलवे के महाप्रबंधक को पहुँचाने की कृपा करे, जिससे हम ट्रेनों की योजना समय पर कर सके।
| रेल मंत्री पीयूष गोयल ने महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार से एकबार फिर कल चलने वाली ट्रेनों के यात्रियों की लिस्ट मांगी है। मुंबई। देशभर में बेहद तेजी से बढ़ रहे कोरोना संकट के बीच प्रवासी मजदूर लगातार पलायन कर रहे हैं। इस बीच महाराष्ट्र में पहले लॉकडाउन के बाद से ही फंसे प्रवासी कामगारों के लिए रेल मंत्री पीयूष गोयल ने महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार से एकबार फिर कल चलने वाली ट्रेनों के यात्रियों की लिस्ट मांगी है। सभी निर्धारित जानकारी जैसे, कहाँ से ट्रेन चलेगी, यात्रियों की ट्रेनों के हिसाब से सूची, उनका मेडिकल सर्टिफ़िकेट और कहाँ ट्रेन जानी है, यह सब सूचना अगले एक घंटे में मध्य रेलवे के महाप्रबंधक को पहुँचाने की कृपा करे, जिससे हम ट्रेनों की योजना समय पर कर सके। |
मंडुआडीह थाना क्षेत्र के महेशपुर (बाटा मोड़) के पास कैंट से रोहनिया की तरफ जा रहे डंफर की चपेट में आने से चोलापुर निवासी पत्र विक्रेता की मौत हो गई। घटना के बाद डंफर चालक तो मौके से भाग निकला लेकिन क्षेत्रीय लोगों ने गाड़ी का नंबर नोट कर पुलिस को सौंप दिया है। पुलिस आरोपी डंफर चालक की तलाश कर रही है।
महावीर रोड बड़वापुर थाना चोलापुर निवासी रिटायर्ड प्रिंसिपल बालमुकुंद दीक्षित के तीन बेटों में सबसे छोटा बेटा अशोक कुमार दीक्षित (28 वर्ष) अखबार बेचकर घर वालों का पेट पालता था। रविवार को वह भुल्लनपुर में अपनी बहन के जा रहा था। साइकिल से वो महेशपुर के पास पहुंचा ही था तभी पीछे से आ रहे डम्फर ने उसे धक्का मार दिया। जिससे वह साइकिल लेकर गिर पड़ा और सिर में गम्भीर चोट आई सड़क पर खून से लथपथ पड़ा देखकर लोग जब तक उसे अस्पताल पहुंचाते तब तक उसकी मौत हो गई।
हादसे की सूचना के बाद मौके पर एसओ मंडुवाडीह फरीद अहमद पहुंचे और उन्होंने मृतक की जेब से मिले मोबाइल फोन से उसके मौसेरे भाई आशीष कुमार मिश्रा को सूचना दी गई सूचना पर पहुंचे आशीष ने मृतक की शिनाख्त की। घटना के बाद चालक डंफर समेत भाग निकला। वहीं बाद में मौके पर पहुंचे मृतक के जीजा राजीव रंजन उपाध्याय ने पुलिस ने डंफर का नंबर लिखकर तहरीर दी। जिसके बाद पुलिस फास्ट हुई।
| मंडुआडीह थाना क्षेत्र के महेशपुर के पास कैंट से रोहनिया की तरफ जा रहे डंफर की चपेट में आने से चोलापुर निवासी पत्र विक्रेता की मौत हो गई। घटना के बाद डंफर चालक तो मौके से भाग निकला लेकिन क्षेत्रीय लोगों ने गाड़ी का नंबर नोट कर पुलिस को सौंप दिया है। पुलिस आरोपी डंफर चालक की तलाश कर रही है। महावीर रोड बड़वापुर थाना चोलापुर निवासी रिटायर्ड प्रिंसिपल बालमुकुंद दीक्षित के तीन बेटों में सबसे छोटा बेटा अशोक कुमार दीक्षित अखबार बेचकर घर वालों का पेट पालता था। रविवार को वह भुल्लनपुर में अपनी बहन के जा रहा था। साइकिल से वो महेशपुर के पास पहुंचा ही था तभी पीछे से आ रहे डम्फर ने उसे धक्का मार दिया। जिससे वह साइकिल लेकर गिर पड़ा और सिर में गम्भीर चोट आई सड़क पर खून से लथपथ पड़ा देखकर लोग जब तक उसे अस्पताल पहुंचाते तब तक उसकी मौत हो गई। हादसे की सूचना के बाद मौके पर एसओ मंडुवाडीह फरीद अहमद पहुंचे और उन्होंने मृतक की जेब से मिले मोबाइल फोन से उसके मौसेरे भाई आशीष कुमार मिश्रा को सूचना दी गई सूचना पर पहुंचे आशीष ने मृतक की शिनाख्त की। घटना के बाद चालक डंफर समेत भाग निकला। वहीं बाद में मौके पर पहुंचे मृतक के जीजा राजीव रंजन उपाध्याय ने पुलिस ने डंफर का नंबर लिखकर तहरीर दी। जिसके बाद पुलिस फास्ट हुई। |
Samsung galaxy alert: Smart Phone अब इतने स्मार्ट हो गए हैं कि इनसे कॉल और मैसेज ही नहीं कई आवश्यक चीज़े भी एक क्लिक में की जा सकती है। आज के समय में Smart Phone हमारी लाइफ का अहम हिस्सा हैं, क्योंकि इससे बैंक के काम, फोटोग्राफी, मैप पर रास्ता देखने जैसे कई काम सरलता से किए जा सकते हैं। टेलीफोन जितना आसान और ज़रूरी हो गया, डेटा लीक होने का खतरा भी उतना ही बढ़ गया है। इसलिए कंपनी हमे समय-समय पर सॉफ्टवेयर अपडेट इंस्टॉल करने की राय देती हैं।
सैमसंग ने यूज़र्स को ऐप्स के लेटेस्ट वर्जन पर काम करने की राय दी है ताकि वह सिक्योर रहें। सैमसंग गैलेक्सी का उपयोग लाखों लोग रहे हैं। हालांकि अभी भी कई लोग ऐसे हैं जो पुराने वर्जन का उपयोग कर रहे हैं और डराने वाली बात ये है कि पुराने वर्जन को आसानी से हैक किया जा सकता है। सैमसंग गैलेक्सी स्टोर ऐप में ऐसी ही एक खामी देखी गई है और हिंदुस्तान गवर्नमेंट ने सैमसंग गैलेक्सी यूजर्स के लिए एक चेतावनी जारी की है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार CERT-In ने खुलासा किया है कि सैमसंग गैलेक्सी स्टोर ऐप में एक खामी की सूचना दी गई है जो एक क्षेत्रीय हमलावर को टारगेट टेलीफोन पर अनचाही ऐप इंस्टॉल करने या कोड डालने की अनुमति दे सकती है। ये खामी सैमसंग गैलेक्सी स्टोर ऐप के 4. 5. 49. 8 से पहले वर्जन वाले सैमसंग गैलेक्सी Smart Phone यूज़र्स को प्रभावित करेगी।
CERT-In ने बताया है कि ये खामी Android 13 पर टेलीफोन चलाने वालों पर कोई असर नहीं करेगी। सैमसंग गैलेक्सी स्टोर में यह परेशानी 'वेबव्यू में गलत ढंग से कॉन्फिगर किए गए फिल्टर' के कारण होती है।
यदि आप Google क्रोम में मैलिशयस हाइपरलिंक या पहले से इंस्टॉल किए गए एप्लिकेशन को टैप करते हैं तो एक हमलावर इस खामी का लाभ उठा सकता है। एक लोकल हमलावर सैमसंग के URL फिल्टर को बायपास कर सकता है और एक हमलावर-नियंत्रित डोमेन के लिए एक वेबव्यू लॉन्च कर सकता है। सैमसंग गैलेक्सी स्टोर ऐप के यूज़र्स को राय दी जाती है कि वे अपने ऐप को लेटेस्ट वर्जन में अपडेट करें।
| Samsung galaxy alert: Smart Phone अब इतने स्मार्ट हो गए हैं कि इनसे कॉल और मैसेज ही नहीं कई आवश्यक चीज़े भी एक क्लिक में की जा सकती है। आज के समय में Smart Phone हमारी लाइफ का अहम हिस्सा हैं, क्योंकि इससे बैंक के काम, फोटोग्राफी, मैप पर रास्ता देखने जैसे कई काम सरलता से किए जा सकते हैं। टेलीफोन जितना आसान और ज़रूरी हो गया, डेटा लीक होने का खतरा भी उतना ही बढ़ गया है। इसलिए कंपनी हमे समय-समय पर सॉफ्टवेयर अपडेट इंस्टॉल करने की राय देती हैं। सैमसंग ने यूज़र्स को ऐप्स के लेटेस्ट वर्जन पर काम करने की राय दी है ताकि वह सिक्योर रहें। सैमसंग गैलेक्सी का उपयोग लाखों लोग रहे हैं। हालांकि अभी भी कई लोग ऐसे हैं जो पुराने वर्जन का उपयोग कर रहे हैं और डराने वाली बात ये है कि पुराने वर्जन को आसानी से हैक किया जा सकता है। सैमसंग गैलेक्सी स्टोर ऐप में ऐसी ही एक खामी देखी गई है और हिंदुस्तान गवर्नमेंट ने सैमसंग गैलेक्सी यूजर्स के लिए एक चेतावनी जारी की है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार CERT-In ने खुलासा किया है कि सैमसंग गैलेक्सी स्टोर ऐप में एक खामी की सूचना दी गई है जो एक क्षेत्रीय हमलावर को टारगेट टेलीफोन पर अनचाही ऐप इंस्टॉल करने या कोड डालने की अनुमति दे सकती है। ये खामी सैमसंग गैलेक्सी स्टोर ऐप के चार. पाँच. उनचास. आठ से पहले वर्जन वाले सैमसंग गैलेक्सी Smart Phone यूज़र्स को प्रभावित करेगी। CERT-In ने बताया है कि ये खामी Android तेरह पर टेलीफोन चलाने वालों पर कोई असर नहीं करेगी। सैमसंग गैलेक्सी स्टोर में यह परेशानी 'वेबव्यू में गलत ढंग से कॉन्फिगर किए गए फिल्टर' के कारण होती है। यदि आप Google क्रोम में मैलिशयस हाइपरलिंक या पहले से इंस्टॉल किए गए एप्लिकेशन को टैप करते हैं तो एक हमलावर इस खामी का लाभ उठा सकता है। एक लोकल हमलावर सैमसंग के URL फिल्टर को बायपास कर सकता है और एक हमलावर-नियंत्रित डोमेन के लिए एक वेबव्यू लॉन्च कर सकता है। सैमसंग गैलेक्सी स्टोर ऐप के यूज़र्स को राय दी जाती है कि वे अपने ऐप को लेटेस्ट वर्जन में अपडेट करें। |
नव-जौवन की बाढ़ ते बडे गरब ते फाटि । मेरे गुरु को धनुष यह निरमै निरमै है दिय काटि अबै यह
दृप्तभूपाल-कंट-शोणित करि भक्षण । मेरो फरसा पडे तासु ऊपर निर्दय-मन । है जावै परतच्छ वच्छ को सब नव-जौवन ॥
परशुराम ने, जब धनुष के टुकडे हुए देखे तो वे बोले- किसी को नवयौवन की उमग के कारण, अभिमानरूपी ज्वर तेज हो गया है, तभी तो उसने निर्भय होकर मेरे गुरु - भगवान् शिव - का धनुष तोड डाला । अब उसके ऊपर यह मेरा भयकर फरसा निर्दयता के साथ गिरे, जिसने काटे हुए अभिमानी भूमिपतियो के गले से झरते हुए रुधिर का पान किया हैमैं चाहता हूँ कि उस उन्मत्त की निर्दयतापूर्वक खबर ली जाय ।
यहाॅ जिसको परशुराम ने उस समय यह नहीं जाना था कि 'यह भगवान् राम है, वह गुरु ( शिवजी ) के धनुष को तोड़ देनेवाला आळबन है। गुरुद्रोही का नाम न लेना चाहिए इस कारण, अथवा क्रोधोत्पत्ति के कारण, 'तोडनेवाला' यह विशेषण मात्र ही कहा गया है, विशेष्य ( तोड़नेवाले का नाम ) नहीं । एक प्रकार की भुवनव्यापी ध्वनि से अनुमान किया हुआ 'निर्भय होकर धनुष तोड़ देना' उद्दीपन है, कठोर वचन अनुभाव है और गर्व, उग्रता आदि सचारी भाव है ।
यह धनुष के भग की ध्वनि से समाधि टूट जाने पर परशुरामजी की उक्ति है। इस पद्य की अत्यंत उद्धत रचना भी रौद्ररस की परम ओजस्विता को पुष्ट करती है ।
यद्यपि अन्यत्र गुरु का स्मरण होने पर अहकार का निवृत्त हो जाना आवश्यक है; पर इस प्रसग में, ऐसे अवसर पर भी, गर्व का उत्कर्ष | नव-जौवन की बाढ़ ते बडे गरब ते फाटि । मेरे गुरु को धनुष यह निरमै निरमै है दिय काटि अबै यह दृप्तभूपाल-कंट-शोणित करि भक्षण । मेरो फरसा पडे तासु ऊपर निर्दय-मन । है जावै परतच्छ वच्छ को सब नव-जौवन ॥ परशुराम ने, जब धनुष के टुकडे हुए देखे तो वे बोले- किसी को नवयौवन की उमग के कारण, अभिमानरूपी ज्वर तेज हो गया है, तभी तो उसने निर्भय होकर मेरे गुरु - भगवान् शिव - का धनुष तोड डाला । अब उसके ऊपर यह मेरा भयकर फरसा निर्दयता के साथ गिरे, जिसने काटे हुए अभिमानी भूमिपतियो के गले से झरते हुए रुधिर का पान किया हैमैं चाहता हूँ कि उस उन्मत्त की निर्दयतापूर्वक खबर ली जाय । यहाॅ जिसको परशुराम ने उस समय यह नहीं जाना था कि 'यह भगवान् राम है, वह गुरु के धनुष को तोड़ देनेवाला आळबन है। गुरुद्रोही का नाम न लेना चाहिए इस कारण, अथवा क्रोधोत्पत्ति के कारण, 'तोडनेवाला' यह विशेषण मात्र ही कहा गया है, विशेष्य नहीं । एक प्रकार की भुवनव्यापी ध्वनि से अनुमान किया हुआ 'निर्भय होकर धनुष तोड़ देना' उद्दीपन है, कठोर वचन अनुभाव है और गर्व, उग्रता आदि सचारी भाव है । यह धनुष के भग की ध्वनि से समाधि टूट जाने पर परशुरामजी की उक्ति है। इस पद्य की अत्यंत उद्धत रचना भी रौद्ररस की परम ओजस्विता को पुष्ट करती है । यद्यपि अन्यत्र गुरु का स्मरण होने पर अहकार का निवृत्त हो जाना आवश्यक है; पर इस प्रसग में, ऐसे अवसर पर भी, गर्व का उत्कर्ष |
जबलपुर, यशभारत। अधारताल थाना अंतर्गत एक पैथोलॉजी में कार्य करने वाली युवती के साथ बलात्कार का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोपी के मकान में युवती अपने परिजनों समेत किराए से रहती थी और आरोपी ही उसे रोज पैथोलॉजी छोड़ता था। इसी बीच युवती को प्रेम के जाल में फांसकर आरोपी ने दुष्कर्म किया। जब युवती ने विवाह के लिए कहा तो आरोपी ने साफ मुकरते हुए कहा कि वह खुद दो बच्चों का बाप है। ऐसे में दूसरा विवाह कैसे कर सकता है। जिसके बाद पीडि़ता रोते हुए थाने पहुंची। पुलिस ने पीडि़ता की रिपोर्ट पर मामला दर्ज कर, जांच में लिया है।
पुलिस ने पूरे मामले की जानकारी देते हुए बताया कि 23 वर्षीय युवती ने थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज करवाते हुए बताया कि वह एक हॉस्पिटल के पैथोलॉजी में कार्य करती है। जहां उसका मकान मालिक रोज उसे छोड़कर आता है। पीडि़ता ने बताया कि इसी बीच उसने नजदीकियां बढ़ा ली और उसका दैहिक शोषण किया।
थाने पहुंची पीडि़ता ने बताया कि जब उसने आरोपी 42 वर्षीय युवक से विवाह के लिए दबाव बनाया तो उसने कहा कि वह दो बच्चों का बाप है और दूसरा विवाह नहीं कर सकता। जिसके बाद आरोपी ने पीडि़ता से बात करना भी बंद कर दी। वहीं, प्रकरण दर्ज होते ही पुलिस ने आरोपी को दबोच लिया है। जिससे पूछताछ जारी है।
| जबलपुर, यशभारत। अधारताल थाना अंतर्गत एक पैथोलॉजी में कार्य करने वाली युवती के साथ बलात्कार का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोपी के मकान में युवती अपने परिजनों समेत किराए से रहती थी और आरोपी ही उसे रोज पैथोलॉजी छोड़ता था। इसी बीच युवती को प्रेम के जाल में फांसकर आरोपी ने दुष्कर्म किया। जब युवती ने विवाह के लिए कहा तो आरोपी ने साफ मुकरते हुए कहा कि वह खुद दो बच्चों का बाप है। ऐसे में दूसरा विवाह कैसे कर सकता है। जिसके बाद पीडि़ता रोते हुए थाने पहुंची। पुलिस ने पीडि़ता की रिपोर्ट पर मामला दर्ज कर, जांच में लिया है। पुलिस ने पूरे मामले की जानकारी देते हुए बताया कि तेईस वर्षीय युवती ने थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज करवाते हुए बताया कि वह एक हॉस्पिटल के पैथोलॉजी में कार्य करती है। जहां उसका मकान मालिक रोज उसे छोड़कर आता है। पीडि़ता ने बताया कि इसी बीच उसने नजदीकियां बढ़ा ली और उसका दैहिक शोषण किया। थाने पहुंची पीडि़ता ने बताया कि जब उसने आरोपी बयालीस वर्षीय युवक से विवाह के लिए दबाव बनाया तो उसने कहा कि वह दो बच्चों का बाप है और दूसरा विवाह नहीं कर सकता। जिसके बाद आरोपी ने पीडि़ता से बात करना भी बंद कर दी। वहीं, प्रकरण दर्ज होते ही पुलिस ने आरोपी को दबोच लिया है। जिससे पूछताछ जारी है। |
अगर आप भी एक iPhone यूजर है तो इस खबर को जरूर पढ़िये क्योंकि आपके आईफोन का डेटा पर नज़र रखी जा रही है वो भी आपकी बिना मर्जी के। जानिए कैसे ठीक करें इस गंभीर समस्या को। (PC- Apple India)
नई दिल्ली, टेक डेस्क। Apple ने हाल ही में iPhone के लिए iOS 16 का नया सॉफ्टवेयर अपडेट जारी किया था। अब यदि आपने अभी तक iOS 16. 3 का नया अपडेट इन्स्टाल नहीं किया है, तो आपका आईफोन अब सुरक्षित नहीं रह गया है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार iOS के पिछले वर्जन 16. 2 में एक बग पाया गया था जिससे फोन में मौजूद थर्ड पार्टी ऐप्स को यूजर्स के निजी डेटा पर एक्सेस मिल जाता है। Apple Maps में बग आने से कई अन्य ऐप्स भी यूजर्स की लोकेशन को ट्रेक कर पा रही थी, वो भी तब जब यूजर्स ने अपनी लोकेशन शेयर करने की अनुमति नहीं दी थी। इसी को देखते हुए ऐप्पल ने अपने iOS 16. 2 को iOS 16. 3 पर अपग्रेड करने के लिए नया अपडेट जारी कर दिया।
ऐप्पल के नए iOS 16. 3 अपडेट से इस समस्या का समाधान हो गया है। लेकिन जिन लोगों ने अभी तक iOS 16. 3 में अपग्रेड नहीं किया है वो कृपया जल्द से जल्द अपने आईफोन का सॉफ्टवेयर अपग्रेड कर लें।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ब्राज़ील देश की बेहद मशहूर फूड डिलीवरी ऐप iFood iOS 16. 2 में यूजर्स की लोकेशन की जानकारी ले रही थी। जबकि ऐप के यूजर्स ने अपनी लोकेशन शेयर करने की अनुमति नहीं दे रखी थी। इसके अलावा और भी कुछ ऐप्स के होने की संभावना है। ऐप्पल ने बग को रिज़र्व्ड कैटेगरी में रख दिया है। अब यूजर्स को आईओएस 16. 3 में अपडेट करने का बाद इस समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा।
- अपडेट के लिए यूजर्स को अपने आईफोन की Settings में जाना है।
- उसके बाद फिर General में जाना है।
- अब आपको यहाँ Software Update का विकल्प मिलेगा, इस पर टैप करें।
- अब अंत में अपने पासकोड के जरिये सॉफ्टवेयर डाउनलोड करें।
| अगर आप भी एक iPhone यूजर है तो इस खबर को जरूर पढ़िये क्योंकि आपके आईफोन का डेटा पर नज़र रखी जा रही है वो भी आपकी बिना मर्जी के। जानिए कैसे ठीक करें इस गंभीर समस्या को। नई दिल्ली, टेक डेस्क। Apple ने हाल ही में iPhone के लिए iOS सोलह का नया सॉफ्टवेयर अपडेट जारी किया था। अब यदि आपने अभी तक iOS सोलह. तीन का नया अपडेट इन्स्टाल नहीं किया है, तो आपका आईफोन अब सुरक्षित नहीं रह गया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार iOS के पिछले वर्जन सोलह. दो में एक बग पाया गया था जिससे फोन में मौजूद थर्ड पार्टी ऐप्स को यूजर्स के निजी डेटा पर एक्सेस मिल जाता है। Apple Maps में बग आने से कई अन्य ऐप्स भी यूजर्स की लोकेशन को ट्रेक कर पा रही थी, वो भी तब जब यूजर्स ने अपनी लोकेशन शेयर करने की अनुमति नहीं दी थी। इसी को देखते हुए ऐप्पल ने अपने iOS सोलह. दो को iOS सोलह. तीन पर अपग्रेड करने के लिए नया अपडेट जारी कर दिया। ऐप्पल के नए iOS सोलह. तीन अपडेट से इस समस्या का समाधान हो गया है। लेकिन जिन लोगों ने अभी तक iOS सोलह. तीन में अपग्रेड नहीं किया है वो कृपया जल्द से जल्द अपने आईफोन का सॉफ्टवेयर अपग्रेड कर लें। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ब्राज़ील देश की बेहद मशहूर फूड डिलीवरी ऐप iFood iOS सोलह. दो में यूजर्स की लोकेशन की जानकारी ले रही थी। जबकि ऐप के यूजर्स ने अपनी लोकेशन शेयर करने की अनुमति नहीं दे रखी थी। इसके अलावा और भी कुछ ऐप्स के होने की संभावना है। ऐप्पल ने बग को रिज़र्व्ड कैटेगरी में रख दिया है। अब यूजर्स को आईओएस सोलह. तीन में अपडेट करने का बाद इस समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। - अपडेट के लिए यूजर्स को अपने आईफोन की Settings में जाना है। - उसके बाद फिर General में जाना है। - अब आपको यहाँ Software Update का विकल्प मिलेगा, इस पर टैप करें। - अब अंत में अपने पासकोड के जरिये सॉफ्टवेयर डाउनलोड करें। |
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देश में कोविड के 11,850 नए केस, 555 की गई जान !
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Atal Pension Yojana: आयकर कानून के तहत 2. 5 लाख रुपये तक की कर योग्य आय वाले लोगों को आयकर का भुगतान करने की जरूरत नहीं है।
Atal Pension Yojana: आयकरदाता एक अक्टूबर से सरकार की सामाजिक सुरक्षा योजना एपीवाई में नामांकन नहीं कर सकेंगे। एक अधिसूचना में यह जानकारी दी गई। सरकार ने मुख्य रूप से असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए एक जून, 2015 को अटल पेंशन योजना (एपीवाई) शुरू की थी।
मंत्रालय ने एपीवाई पर अपनी पिछली अधिसूचना में बदलाव किया है। बुधवार को जारी नयी अधिसूचना उन अंशधारकों पर लागू नहीं होगी, जो एक अक्टूबर 2022 से पहले इस योजना में शामिल हुए हैं। अधिसूचना के मुताबिक, यदि कोई अंशधारक, जो एक अक्टूबर, 2022 को या उसके बाद इस योजना में शामिल हुआ है।
बाद में पाया जाता है कि वह आवेदन की तारीख को या उससे पहले आयकरदाता रहा है, तो उसका एपीवाई खाता बंद कर दिया जाएगा और अबतक की संचित पेंशन राशि उसे दे दी जाएगी। वित्तीय सेवा विभाग ने एक ट्वीट में कहा, "एक अक्टूबर, 2022 से आयकरदाता एपीवाई में शामिल होने के पात्र नहीं होंगे।
आबादी के वंचित तबके तक पेंशन का लाभ बेहतर ढंग से पहुंचाने के लिए एपीवाई में संशोधन किया गया है। " विभाग वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आता है। आयकर कानून के तहत 2. 5 लाख रुपये तक की कर योग्य आय वाले लोगों को आयकर का भुगतान करने की जरूरत नहीं है।
| Atal Pension Yojana: आयकर कानून के तहत दो. पाँच लाख रुपये तक की कर योग्य आय वाले लोगों को आयकर का भुगतान करने की जरूरत नहीं है। Atal Pension Yojana: आयकरदाता एक अक्टूबर से सरकार की सामाजिक सुरक्षा योजना एपीवाई में नामांकन नहीं कर सकेंगे। एक अधिसूचना में यह जानकारी दी गई। सरकार ने मुख्य रूप से असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए एक जून, दो हज़ार पंद्रह को अटल पेंशन योजना शुरू की थी। मंत्रालय ने एपीवाई पर अपनी पिछली अधिसूचना में बदलाव किया है। बुधवार को जारी नयी अधिसूचना उन अंशधारकों पर लागू नहीं होगी, जो एक अक्टूबर दो हज़ार बाईस से पहले इस योजना में शामिल हुए हैं। अधिसूचना के मुताबिक, यदि कोई अंशधारक, जो एक अक्टूबर, दो हज़ार बाईस को या उसके बाद इस योजना में शामिल हुआ है। बाद में पाया जाता है कि वह आवेदन की तारीख को या उससे पहले आयकरदाता रहा है, तो उसका एपीवाई खाता बंद कर दिया जाएगा और अबतक की संचित पेंशन राशि उसे दे दी जाएगी। वित्तीय सेवा विभाग ने एक ट्वीट में कहा, "एक अक्टूबर, दो हज़ार बाईस से आयकरदाता एपीवाई में शामिल होने के पात्र नहीं होंगे। आबादी के वंचित तबके तक पेंशन का लाभ बेहतर ढंग से पहुंचाने के लिए एपीवाई में संशोधन किया गया है। " विभाग वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आता है। आयकर कानून के तहत दो. पाँच लाख रुपये तक की कर योग्य आय वाले लोगों को आयकर का भुगतान करने की जरूरत नहीं है। |
उत्तरोत्तर वृद्धि सम्भावित है। पुरूष वर्ग में वर्ष २०११-२०१६ के मध्य जीवन की प्रत्याशा ६६.६ है जबकि इसी वर्ग में वर्ष १६६६-२००१ में यह केवल ६२.४ थी अर्थात अनूमान है कि १६६६-२००१ की तुलना में ४.६ की वृद्धि सम्भावित है। महिलाओं के संदर्भ में भी १६६६-२००१ की तुलना में २०११-२०१६ में ५.८ की बढ़ोत्तरी सम्भावित है। प्रक्षेपित तथ्यों से यह भी स्पष्ट है कि महिला वर्ग में जीवन प्रत्याशा में पुरुष वर्ग की तुलना में अधिक वृद्धि सम्भावित है।
जहाँ तक विभिन्न राज्यों के जीवन प्रत्याशा विषयक अनुमानों का प्रश्न है केरल सर्वोच्च जीवन प्रत्याशा वाला राज्य है जबकि मध्यप्रदेश के सन्दर्भ में सबसे कम प्रत्याशा अनुमानित है। उत्तर प्रदेश के विषय में अनुमान है कि यहाँ जीवन प्रत्याशा भारत की स्थिति के अनुरूप ही है ।
जनसंख्या प्रक्षेपण समिति ने भारत तथा घनी आबादी वाले
प्रदेशों की शिशु मृत्युदर का भी वर्ष १६६६-२०१६ हेतु प्रक्षेपण किया है। एतद् विषयक आकड़ो हेतु तालिका २.१६ विकाश दृष्टव्य है ।
प्रक्षेपित शिशु मृत्यु के आंकड़ों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि सम्बन्धित वर्षों ( १६६६-२०१६) में शिशु मृत्यु दर में उत्तरोत्तर कमी अनुमानित है। शिशु मृत्यु दर में कमी दोनों ही लिंगों अर्थात पुरूष - शिशु तथा महिला शिशुओं की मृत्युदर में कमी आयेगी । आंकड़ों के आधार पर यह भी अनुमान है कि केरल में सबसे कम शिशु मृत्युदर वाला राज्य है। जबकि उड़ीसा राज्य की शिशु मृत्युदर सर्वाधिक है। जहां तक उत्तर प्रदेश मे शिशु मृत्युदर का प्रश्न है । पुरूष शिशुओ के लिए १६६६ में जहां यह दर ६४ अनुमानित थी वहीं २०११-२०१६ में घटकर यह दर २६ रह जायेगी। शिशु मृत्युदर में सम्भावित कमी का कारण स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार हो सकता है। महिला शिशु दर में लोगों में बालिकाओं के प्रति सोच में बदलाव भी एक कारण हो सकता है । केरल राज्य में सबसे कम शिशु मृत्यु दर की पृष्ठभूमि में वहां के साक्षरता स्तर का उच्च होना ही सबल कारण प्रतीत होता है । | उत्तरोत्तर वृद्धि सम्भावित है। पुरूष वर्ग में वर्ष दो हज़ार ग्यारह-दो हज़ार सोलह के मध्य जीवन की प्रत्याशा छयासठ.छः है जबकि इसी वर्ग में वर्ष एक हज़ार छः सौ छयासठ-दो हज़ार एक में यह केवल बासठ.चार थी अर्थात अनूमान है कि एक हज़ार छः सौ छयासठ-दो हज़ार एक की तुलना में चार.छः की वृद्धि सम्भावित है। महिलाओं के संदर्भ में भी एक हज़ार छः सौ छयासठ-दो हज़ार एक की तुलना में दो हज़ार ग्यारह-दो हज़ार सोलह में पाँच.आठ की बढ़ोत्तरी सम्भावित है। प्रक्षेपित तथ्यों से यह भी स्पष्ट है कि महिला वर्ग में जीवन प्रत्याशा में पुरुष वर्ग की तुलना में अधिक वृद्धि सम्भावित है। जहाँ तक विभिन्न राज्यों के जीवन प्रत्याशा विषयक अनुमानों का प्रश्न है केरल सर्वोच्च जीवन प्रत्याशा वाला राज्य है जबकि मध्यप्रदेश के सन्दर्भ में सबसे कम प्रत्याशा अनुमानित है। उत्तर प्रदेश के विषय में अनुमान है कि यहाँ जीवन प्रत्याशा भारत की स्थिति के अनुरूप ही है । जनसंख्या प्रक्षेपण समिति ने भारत तथा घनी आबादी वाले प्रदेशों की शिशु मृत्युदर का भी वर्ष एक हज़ार छः सौ छयासठ-दो हज़ार सोलह हेतु प्रक्षेपण किया है। एतद् विषयक आकड़ो हेतु तालिका दो.सोलह विकाश दृष्टव्य है । प्रक्षेपित शिशु मृत्यु के आंकड़ों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि सम्बन्धित वर्षों में शिशु मृत्यु दर में उत्तरोत्तर कमी अनुमानित है। शिशु मृत्यु दर में कमी दोनों ही लिंगों अर्थात पुरूष - शिशु तथा महिला शिशुओं की मृत्युदर में कमी आयेगी । आंकड़ों के आधार पर यह भी अनुमान है कि केरल में सबसे कम शिशु मृत्युदर वाला राज्य है। जबकि उड़ीसा राज्य की शिशु मृत्युदर सर्वाधिक है। जहां तक उत्तर प्रदेश मे शिशु मृत्युदर का प्रश्न है । पुरूष शिशुओ के लिए एक हज़ार छः सौ छयासठ में जहां यह दर चौंसठ अनुमानित थी वहीं दो हज़ार ग्यारह-दो हज़ार सोलह में घटकर यह दर छब्बीस रह जायेगी। शिशु मृत्युदर में सम्भावित कमी का कारण स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार हो सकता है। महिला शिशु दर में लोगों में बालिकाओं के प्रति सोच में बदलाव भी एक कारण हो सकता है । केरल राज्य में सबसे कम शिशु मृत्यु दर की पृष्ठभूमि में वहां के साक्षरता स्तर का उच्च होना ही सबल कारण प्रतीत होता है । |
पटना. बिहार में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भले ही बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं. लेकिन, प्रदेश के दूसरे जिलों की हालत तो छोड़िए राजधानी पटना में ही बदहाल स्वास्थ्य सिस्टम की ऐसी तस्वीरें देखने को मिल जाएंगी जो तमाम सरकारी दावों को खोखला बताती नजर आती है. दरअसल इन दिनों पटना में आर्थिक रूप से कमजोर एक बेबस मां अपनी टीबी ग्रस्त बेटी के इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों के चक्कर काट रही हैं. लेकिन, सरकार की ओर से टीबी बीमारी में दी जाने वाली मुफ्त दवा तक उन्हें नहीं मिल पा रही है, इलाज तो दूर की बात है.
दरअसल पटना में एक मजबूर मां को अब आम लोगों की मदद का इंतजार है. दरअसल उनके दो बच्चों की मौत पहले ही टीबी बीमारी से हो गयी है. अब उनकी तीसरी बच्ची को भी टीबी बीमारी हो गयी है. ऐसे में पटना सिटी के अम्बेडकर नगर की रहने वाली अनिता देवी अपनी बेटी के इलाज के लिए पिछले दो महीने से सरकारी अस्पतालों के चक्कर लगा रही हैं. लेकिन न तो कोई अस्पताल उनकी बेटी को भर्ती कर रहा है और न ही उन्हें दवा मुहैया करा रहा है. बता दें, राज्य सरकार की ओर से टीबी मरीजों को मुफ्त दवा देने का प्रावधान है.
अनिता देवी की 11 साल की बेटी रितिका पिछले 6 महीनों से टीबी की बीमारी से ग्रसित है. रितिका की हालत ऐसी हो गई है कि वह खुद से चलने में असमर्थ है. मां अपनी बेटी को लेकर नालंदा मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल में पिछले दो महीनों से चक्कर लगा रही है. पर उसे भर्ती नहीं लिया जा रहा है. OPD में डॉक्टर ने देखा और दवाइयां तो लिखी पर अस्पताल में दवाई तक मिल रही है. चौकाने वाली बात यह है कि अस्पताल में टीबी की दवाएं और इलाज मुफ्त करने का प्रावधान है. लेकिन, पीड़ितों के अनुसार यहां दवाएं मिलती ही नहीं है. पीड़िता की मां अनिता देवी ने बताया कि अस्पताल में भर्ती कराने की बात कही तो डॉक्टर ने कहा यहां सुविधा नहीं है.
बता दें, अनीता देवी जब अपनी टीबी ग्रसित बच्ची रितिका को लेकर पटना स्थित एनएमसीएच के डिप्टी सुपरिटेंडेंट डॉ गोपाल के पास इलाज के लिए पहुंची तो उन्हें इमरजेंसी में जाने को कहा गया, जब मां अपनी बेटी को लेकर इमरजेंसी में गई तो कहा गया कि बच्चा वार्ड में ले जाएं. मां बेटी को लेकर बच्चा वार्ड पहुचीं तो डॉक्टर जायसवाल ने यह कहते हुए बच्ची को भर्ती करने से इंकार कर दिया कि यहां सुविधा नहीं है और दूसरे बच्चो को संक्रमण का खतरा है. इसके बाद अनीता देवी को टीबीडीसी जो टीबी ग्रसित बच्चों के इलाज के लिए बना है वहां जाने के लिए कहा गया, जब मां बेटी को लेकर टीबीडीसी पहुचीं तो डॉ अजय ने यह लिखते हुए बताया कि यहां टीबी सेंटर में एडमिशन की व्यवस्था नहीं है. सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर एक मां अपने बेटी को लेकर कहां जाए जबकि स्वास्थ्य विभाग के निर्देश के मुताबिक टीबी का इलाज मुफ्त में हर जगह किया जाता है.
अनिता देवी पर मुसीबत का पहाड़ टूट पड़ा है. दरअसल कुछ साल पहले ही अनिता देवी के बड़े बेटे 18 वर्षीय सौरव कुमार की टीबी की बीमारी के कारण मौत हो गयी थी. वह उस दौरान पर अपने बेटे के इलाज के लिए जिला अस्पताल भटकती रही थीं. लेकिन, अस्पताल में टीबी का बेहतर इलाज नहीं होने के कारण उनके बेटे की मौत हो गई थी. अनिता देवी इससे उबर भी नहीं पाईं थी कि दूसरी बेटी नंदिनी जिसकी उम्र मात्र 15 साल थी वह भी टीबी की बीमारी से इलाज के अभाव में गुजर गई. अब तीसरी बेटी रितिका भी टीबी से ग्रसित है और उसे भी बेहतर इलाज नहीं मिल रहा है.
बता दें अनिता देवी के पति की भी मौत पहले ही हो चुकी है. अनीता किसी तरह दूसरों के घर मेड का काम करके अपना और अपनी बेटी का भरण-पोषण करती हैं. ऐसे में वह अपनी बेटी का इलाज कैसे करवाएं, यह उनके लिए बड़ी समस्या है. उनके पास इतने पैसे नहीं हैं कि वह निजी अस्पताल में बेटी का इलाज करवा सकें. अनीता देवी अब आम लोगों से भी मदद के लिए गुहार लगा रही हैं. ताकि किसी तरह उनकी बेटी का इलाज हो सके और उसकी जान बच सके.
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| पटना. बिहार में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भले ही बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं. लेकिन, प्रदेश के दूसरे जिलों की हालत तो छोड़िए राजधानी पटना में ही बदहाल स्वास्थ्य सिस्टम की ऐसी तस्वीरें देखने को मिल जाएंगी जो तमाम सरकारी दावों को खोखला बताती नजर आती है. दरअसल इन दिनों पटना में आर्थिक रूप से कमजोर एक बेबस मां अपनी टीबी ग्रस्त बेटी के इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों के चक्कर काट रही हैं. लेकिन, सरकार की ओर से टीबी बीमारी में दी जाने वाली मुफ्त दवा तक उन्हें नहीं मिल पा रही है, इलाज तो दूर की बात है. दरअसल पटना में एक मजबूर मां को अब आम लोगों की मदद का इंतजार है. दरअसल उनके दो बच्चों की मौत पहले ही टीबी बीमारी से हो गयी है. अब उनकी तीसरी बच्ची को भी टीबी बीमारी हो गयी है. ऐसे में पटना सिटी के अम्बेडकर नगर की रहने वाली अनिता देवी अपनी बेटी के इलाज के लिए पिछले दो महीने से सरकारी अस्पतालों के चक्कर लगा रही हैं. लेकिन न तो कोई अस्पताल उनकी बेटी को भर्ती कर रहा है और न ही उन्हें दवा मुहैया करा रहा है. बता दें, राज्य सरकार की ओर से टीबी मरीजों को मुफ्त दवा देने का प्रावधान है. अनिता देवी की ग्यारह साल की बेटी रितिका पिछले छः महीनों से टीबी की बीमारी से ग्रसित है. रितिका की हालत ऐसी हो गई है कि वह खुद से चलने में असमर्थ है. मां अपनी बेटी को लेकर नालंदा मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल में पिछले दो महीनों से चक्कर लगा रही है. पर उसे भर्ती नहीं लिया जा रहा है. OPD में डॉक्टर ने देखा और दवाइयां तो लिखी पर अस्पताल में दवाई तक मिल रही है. चौकाने वाली बात यह है कि अस्पताल में टीबी की दवाएं और इलाज मुफ्त करने का प्रावधान है. लेकिन, पीड़ितों के अनुसार यहां दवाएं मिलती ही नहीं है. पीड़िता की मां अनिता देवी ने बताया कि अस्पताल में भर्ती कराने की बात कही तो डॉक्टर ने कहा यहां सुविधा नहीं है. बता दें, अनीता देवी जब अपनी टीबी ग्रसित बच्ची रितिका को लेकर पटना स्थित एनएमसीएच के डिप्टी सुपरिटेंडेंट डॉ गोपाल के पास इलाज के लिए पहुंची तो उन्हें इमरजेंसी में जाने को कहा गया, जब मां अपनी बेटी को लेकर इमरजेंसी में गई तो कहा गया कि बच्चा वार्ड में ले जाएं. मां बेटी को लेकर बच्चा वार्ड पहुचीं तो डॉक्टर जायसवाल ने यह कहते हुए बच्ची को भर्ती करने से इंकार कर दिया कि यहां सुविधा नहीं है और दूसरे बच्चो को संक्रमण का खतरा है. इसके बाद अनीता देवी को टीबीडीसी जो टीबी ग्रसित बच्चों के इलाज के लिए बना है वहां जाने के लिए कहा गया, जब मां बेटी को लेकर टीबीडीसी पहुचीं तो डॉ अजय ने यह लिखते हुए बताया कि यहां टीबी सेंटर में एडमिशन की व्यवस्था नहीं है. सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर एक मां अपने बेटी को लेकर कहां जाए जबकि स्वास्थ्य विभाग के निर्देश के मुताबिक टीबी का इलाज मुफ्त में हर जगह किया जाता है. अनिता देवी पर मुसीबत का पहाड़ टूट पड़ा है. दरअसल कुछ साल पहले ही अनिता देवी के बड़े बेटे अट्ठारह वर्षीय सौरव कुमार की टीबी की बीमारी के कारण मौत हो गयी थी. वह उस दौरान पर अपने बेटे के इलाज के लिए जिला अस्पताल भटकती रही थीं. लेकिन, अस्पताल में टीबी का बेहतर इलाज नहीं होने के कारण उनके बेटे की मौत हो गई थी. अनिता देवी इससे उबर भी नहीं पाईं थी कि दूसरी बेटी नंदिनी जिसकी उम्र मात्र पंद्रह साल थी वह भी टीबी की बीमारी से इलाज के अभाव में गुजर गई. अब तीसरी बेटी रितिका भी टीबी से ग्रसित है और उसे भी बेहतर इलाज नहीं मिल रहा है. बता दें अनिता देवी के पति की भी मौत पहले ही हो चुकी है. अनीता किसी तरह दूसरों के घर मेड का काम करके अपना और अपनी बेटी का भरण-पोषण करती हैं. ऐसे में वह अपनी बेटी का इलाज कैसे करवाएं, यह उनके लिए बड़ी समस्या है. उनके पास इतने पैसे नहीं हैं कि वह निजी अस्पताल में बेटी का इलाज करवा सकें. अनीता देवी अब आम लोगों से भी मदद के लिए गुहार लगा रही हैं. ताकि किसी तरह उनकी बेटी का इलाज हो सके और उसकी जान बच सके. . |
Ranchi News: पूर्व मध्य रेलवे अंतर्गत धनबाद मंडल के गढ़वा रोड, तोलरा एवं रजहरा स्टेशनों पर प्री-नॉन इंटरलॉकिंग और नॉन इंटरलॉकिंग काम के लिए दक्षिण पूर्व रेलवे में रेल सेवा बाधित रहेगी। मंगलवार से तीन मार्च तक ट्रेनों का परिचालन प्रभावित रहना है। रेलवे ने इसको लेकर सूचना जारी कर दी है।
इन ट्रेनों का बदला गया है रूटरेलवे अधिकारी के मुताबिक 26 फरवरी को ट्रेन नंबर 12453 रांची-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस, 25 फरवरी को ट्रेन नंबर 12454 नई दिल्ली-रांची राजधानी एक्सप्रेस, 22 फरवरी को ट्रेन नंबर 18101 टाटा नगर-जम्मू तवी एक्सप्रेस, 22 फरवरी से 27 फरवरी तक ट्रेन नंबर 18102 जम्मू तवी-टाटा नगर एक्सप्रेस, 23 फरवरी से 28 फरवरी तक ट्रेन नंबर 18309 संबलपुर-जम्मू तवी एक्सप्रेस, 23 फरवरी से 28 फरवरी ट्रेन नंबर 18310 जम्मू तवी-संबलपुर एक्सप्रेस का मार्ग बदला गया है। इन सभी ट्रेनों का परिचालन गढ़वा रोड-डेहरी ऑन सोन होकर पंडित दीनदयाल उपध्याय जंक्शन होते हुए चुनार से जाएगा। ट्रेनों का रूट बदले से इनके निर्धारित रूट वाले यात्रियों को काफी परेशानी उठानी पड़ेगी। होली को लेकर इस रूट पर यात्रियों की संख्या काफी बढ़ी हुई है। इन सभी को अब बदले मार्ग से यात्रा करने पर यात्रियों की संख्या और बढ़ जाएगी। हालांकि रेलवे प्रशासन की ओर से होली स्पेशल ट्रेनों का परिचालन किया जाएगा। कई अलग-अलग रूटों पर होली स्पेशल ट्रेनों का शिड्यूल जारी भी कर दिया गया है। अगले हफ्ते तक और स्पेशल ट्रेनों की घोषणा की जा सकती है।
मंगलवार से चलेगी पार्सल एक्सप्रेस ट्रेनट्रेन नंबर 00807 संकरेल गुड्स टर्मिनल-गुवाहाटी पार्सल एक्सप्रेस हर मंगलवार को संकरेल गुड्स टर्मिनल से रवाना होगी। बुधवार को यह ट्रेन रात 8:30 बजे गुवाहाटी पहुंचेगी। वापसी में यह ट्रेन 00808 गुवाहाटी-संकरेल गुड्स टर्मिनल पार्सल एक्सप्रेस गुरुवार, शुक्रवार और मंगलवार को रवाना होगी। यह ट्रेन शाम 7:30 बजे संकरेल गुड्स टर्मिनल पहुंचेगी। यह पार्सल एक्सप्रेस ट्रेन मालदा टाउन, रंगपानी, न्यू जलपाईगुरी, सिलीगुड़ी, अलीपुरदौर में रुकेगी।
PM Modi के USA दौरे को लेकर राजदूत ने क्या कहा ?
Exclusive Interview में Ashwini Vaishnaw ने कहा, 'पिछले 9 सालों में PM Modi ने रेलवे को ट्रांसफॉर्म किया'
Sawal Public Ka : Navika से पहलवानों के प्रदर्शन पर क्या बोली स्मृति ईरानी ?
Opinion India Ka : 'गॉडमदर' कहां फरार. . एक्सपोज हुए सारे मददगार !
| Ranchi News: पूर्व मध्य रेलवे अंतर्गत धनबाद मंडल के गढ़वा रोड, तोलरा एवं रजहरा स्टेशनों पर प्री-नॉन इंटरलॉकिंग और नॉन इंटरलॉकिंग काम के लिए दक्षिण पूर्व रेलवे में रेल सेवा बाधित रहेगी। मंगलवार से तीन मार्च तक ट्रेनों का परिचालन प्रभावित रहना है। रेलवे ने इसको लेकर सूचना जारी कर दी है। इन ट्रेनों का बदला गया है रूटरेलवे अधिकारी के मुताबिक छब्बीस फरवरी को ट्रेन नंबर बारह हज़ार चार सौ तिरेपन रांची-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस, पच्चीस फरवरी को ट्रेन नंबर बारह हज़ार चार सौ चौवन नई दिल्ली-रांची राजधानी एक्सप्रेस, बाईस फरवरी को ट्रेन नंबर अट्ठारह हज़ार एक सौ एक टाटा नगर-जम्मू तवी एक्सप्रेस, बाईस फरवरी से सत्ताईस फरवरी तक ट्रेन नंबर अट्ठारह हज़ार एक सौ दो जम्मू तवी-टाटा नगर एक्सप्रेस, तेईस फरवरी से अट्ठाईस फरवरी तक ट्रेन नंबर अट्ठारह हज़ार तीन सौ नौ संबलपुर-जम्मू तवी एक्सप्रेस, तेईस फरवरी से अट्ठाईस फरवरी ट्रेन नंबर अट्ठारह हज़ार तीन सौ दस जम्मू तवी-संबलपुर एक्सप्रेस का मार्ग बदला गया है। इन सभी ट्रेनों का परिचालन गढ़वा रोड-डेहरी ऑन सोन होकर पंडित दीनदयाल उपध्याय जंक्शन होते हुए चुनार से जाएगा। ट्रेनों का रूट बदले से इनके निर्धारित रूट वाले यात्रियों को काफी परेशानी उठानी पड़ेगी। होली को लेकर इस रूट पर यात्रियों की संख्या काफी बढ़ी हुई है। इन सभी को अब बदले मार्ग से यात्रा करने पर यात्रियों की संख्या और बढ़ जाएगी। हालांकि रेलवे प्रशासन की ओर से होली स्पेशल ट्रेनों का परिचालन किया जाएगा। कई अलग-अलग रूटों पर होली स्पेशल ट्रेनों का शिड्यूल जारी भी कर दिया गया है। अगले हफ्ते तक और स्पेशल ट्रेनों की घोषणा की जा सकती है। मंगलवार से चलेगी पार्सल एक्सप्रेस ट्रेनट्रेन नंबर आठ सौ सात संकरेल गुड्स टर्मिनल-गुवाहाटी पार्सल एक्सप्रेस हर मंगलवार को संकरेल गुड्स टर्मिनल से रवाना होगी। बुधवार को यह ट्रेन रात आठ:तीस बजे गुवाहाटी पहुंचेगी। वापसी में यह ट्रेन आठ सौ आठ गुवाहाटी-संकरेल गुड्स टर्मिनल पार्सल एक्सप्रेस गुरुवार, शुक्रवार और मंगलवार को रवाना होगी। यह ट्रेन शाम सात:तीस बजे संकरेल गुड्स टर्मिनल पहुंचेगी। यह पार्सल एक्सप्रेस ट्रेन मालदा टाउन, रंगपानी, न्यू जलपाईगुरी, सिलीगुड़ी, अलीपुरदौर में रुकेगी। PM Modi के USA दौरे को लेकर राजदूत ने क्या कहा ? Exclusive Interview में Ashwini Vaishnaw ने कहा, 'पिछले नौ सालों में PM Modi ने रेलवे को ट्रांसफॉर्म किया' Sawal Public Ka : Navika से पहलवानों के प्रदर्शन पर क्या बोली स्मृति ईरानी ? Opinion India Ka : 'गॉडमदर' कहां फरार. . एक्सपोज हुए सारे मददगार ! |
बालेश्वर (ओड़िशा), (भाषा)। परमाणु आयुध ले जाने में सक्षम पृथ्वी-2 मिसाइल का सेना द्वारा किया जाने वाला दोहरा प्रायोगिक परीक्षण एक तकनीकी समस्या के चलते आज टाल दिया गया। परीक्षण बालेश्वर के नजदीक चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण केंद (आईटीआर) से किया जाना था। आईटीआर निदेशक एसपी दास ने बताया, तकनीकी खामी के चलते परीक्षण टाल दिया गया। उन्होंने कहा कि तकनीकी समस्या को दूर करने के बाद आगे परीक्षण की तारीख के बारे में फैसला किया जाएगा। दास का बयान मीडिया में आई इन खबरों के बीच आया है कि दोहरे परीक्षण के दौरान दो मिसाइलें उड़ान भरने में विफल हो गईं। मुझे नहीं पता कि उन्होंने किस आधार पर निष्कर्ष निकाल लिया कि परीक्षण विफल हो गया। परीक्षण से जुड़े रक्षा अधिकारियों एवं वैज्ञानिकों ने परीक्षण स्थगित होने के सही कारणों के बारे में चुप्पी साध रखी है। रक्षा सूत्रों ने बताया कि सतह से सतह पर मार करने वाली देश में विकसित दो मिसाइलों को सेना के प्रायोगिक परीक्षण के रूप में आईटीआर के परिसर तीन से मोबाइल लांचर के जरिए छोड़ा जाना था। सूत्रों ने कहा कि मिसाइलों को सशस्त्र बलों के भंडार से लिया गया था और समूची प्रक्षेपण गतिविधियां एसएफसी द्वारा की जानी थीं।
| बालेश्वर , । परमाणु आयुध ले जाने में सक्षम पृथ्वी-दो मिसाइल का सेना द्वारा किया जाने वाला दोहरा प्रायोगिक परीक्षण एक तकनीकी समस्या के चलते आज टाल दिया गया। परीक्षण बालेश्वर के नजदीक चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण केंद से किया जाना था। आईटीआर निदेशक एसपी दास ने बताया, तकनीकी खामी के चलते परीक्षण टाल दिया गया। उन्होंने कहा कि तकनीकी समस्या को दूर करने के बाद आगे परीक्षण की तारीख के बारे में फैसला किया जाएगा। दास का बयान मीडिया में आई इन खबरों के बीच आया है कि दोहरे परीक्षण के दौरान दो मिसाइलें उड़ान भरने में विफल हो गईं। मुझे नहीं पता कि उन्होंने किस आधार पर निष्कर्ष निकाल लिया कि परीक्षण विफल हो गया। परीक्षण से जुड़े रक्षा अधिकारियों एवं वैज्ञानिकों ने परीक्षण स्थगित होने के सही कारणों के बारे में चुप्पी साध रखी है। रक्षा सूत्रों ने बताया कि सतह से सतह पर मार करने वाली देश में विकसित दो मिसाइलों को सेना के प्रायोगिक परीक्षण के रूप में आईटीआर के परिसर तीन से मोबाइल लांचर के जरिए छोड़ा जाना था। सूत्रों ने कहा कि मिसाइलों को सशस्त्र बलों के भंडार से लिया गया था और समूची प्रक्षेपण गतिविधियां एसएफसी द्वारा की जानी थीं। |
आज लोकसभा चुनाव 2019 के चौथे चरण में 71 सीटों पर वोटिंग खत्म हो गई है। इन 71 सीटों पर सबसे ज्यादा चर्चा मायानगरी मुंबई की रही। यहां बॉलीवुड के कई सितारे घर से बाहर निकले और अपने मताधिकार का इस्तेमाल करते नजर आए। लेकिन इन सब में कुछ ऐसी भी सितारे रहे जो किसी न किसी वजह से वोट डालने में असमर्थ रहे। तो चलिए हम आपको उन सितारों के बारे में जो नहीं डाल सके वोट।
बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर ऋषि कपूर इस बार वोट डालने से वंचित रह गए। गौरतलब है कि वह लंबे समय से न्यूयॉर्क में अपना इलाज करवा रहे हैं। जिसके चलते वह वोट नहीं डाल सके। लेकिन ऋषि कपूर ने मुंबई में मतदान से पहले अपने फैंस से वोट डालने की अपील जरूर की।
एक्टर चंकी पांडे और बॉलीवुड की अपकमिंग हीरोइन अनन्या पांडे ने भी इस लोक सभा चुनाव अपना वोट नहीं डाला है। इस बात की जानकारी खुद अनन्या ने इंस्टाग्राम पर दी। उनकी इंस्टा पोस्ट के अनुसार उनके वोटर आइडी में कुछ दिक्कत के चलते वह वोट नहीं डाल सकीं।
बॉलीवुड अभिनेत्री नीतू कपूर भी इस बार वोट नहीं डाल सकीं। खबरों की मानें तो जब से उनके पति ऋषि कपूर का न्यूयॉर्क में इलाज चल रहा है तब से वह उनके साथ न्यूयॉर्क मेें ही हैं। इस वजह से वह भी वोट नहीं डाल सकीं।
आलिया भट्ट के पास भारत की नागरिकता नहीं है। आलिया की मां सोनी राजदान बर्मिंघम से हैं और उनके पास ब्रिटिश नागरिकता है। यही कारण है कि आलिया के पास ब्रिटिश पासपोर्ट और वहीं की नागरिकता है। इसलिए उनके पास वोट डालने का अधिकार नहीं है।
| आज लोकसभा चुनाव दो हज़ार उन्नीस के चौथे चरण में इकहत्तर सीटों पर वोटिंग खत्म हो गई है। इन इकहत्तर सीटों पर सबसे ज्यादा चर्चा मायानगरी मुंबई की रही। यहां बॉलीवुड के कई सितारे घर से बाहर निकले और अपने मताधिकार का इस्तेमाल करते नजर आए। लेकिन इन सब में कुछ ऐसी भी सितारे रहे जो किसी न किसी वजह से वोट डालने में असमर्थ रहे। तो चलिए हम आपको उन सितारों के बारे में जो नहीं डाल सके वोट। बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर ऋषि कपूर इस बार वोट डालने से वंचित रह गए। गौरतलब है कि वह लंबे समय से न्यूयॉर्क में अपना इलाज करवा रहे हैं। जिसके चलते वह वोट नहीं डाल सके। लेकिन ऋषि कपूर ने मुंबई में मतदान से पहले अपने फैंस से वोट डालने की अपील जरूर की। एक्टर चंकी पांडे और बॉलीवुड की अपकमिंग हीरोइन अनन्या पांडे ने भी इस लोक सभा चुनाव अपना वोट नहीं डाला है। इस बात की जानकारी खुद अनन्या ने इंस्टाग्राम पर दी। उनकी इंस्टा पोस्ट के अनुसार उनके वोटर आइडी में कुछ दिक्कत के चलते वह वोट नहीं डाल सकीं। बॉलीवुड अभिनेत्री नीतू कपूर भी इस बार वोट नहीं डाल सकीं। खबरों की मानें तो जब से उनके पति ऋषि कपूर का न्यूयॉर्क में इलाज चल रहा है तब से वह उनके साथ न्यूयॉर्क मेें ही हैं। इस वजह से वह भी वोट नहीं डाल सकीं। आलिया भट्ट के पास भारत की नागरिकता नहीं है। आलिया की मां सोनी राजदान बर्मिंघम से हैं और उनके पास ब्रिटिश नागरिकता है। यही कारण है कि आलिया के पास ब्रिटिश पासपोर्ट और वहीं की नागरिकता है। इसलिए उनके पास वोट डालने का अधिकार नहीं है। |
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सफा खेड़ी गाव में रियलिटी शो में एक करोड़ रुपये की राशि जीतने वाली राजरानी जब रविवार को गांव लौटी तो उनका ढोल नगाड़ों के साथ स्वागत किया गया। गांव में पहुंचने पर जोरदार स्वागत हुआ।
नरवाना से खुली जीप में ग्रामीण डीजे के साथ राजरानी को गाव तक लेकर आए। यहा मंदिर में पूजा अर्चना करने के बाद खुली जीप में रियलिटी शो में विजेता की ट्राफी हाथों में लेकर ग्रामीणों द्वारा किए जा रहे नागरिक अभिनंदन पर आभार व्यक्त किया। यहां महिलाओं ने मंगल गीत गाकर राजरानी का गाव में पहुचने पर स्वागत किया। गाव में मिले सम्मान से उत्साहित राजरानी स्वयं महिलाओं के बीच जाकर डीजे पर नाची।
गौरतलब है कि 45 दिनों तक फिलीपींस के द्वीप पर चली प्रतियोगिता में 22 प्रतिभागियों ने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में विजेता को एक करोड़ रुपये की राशि नकद पुरस्कार के रूप में दी गई। रियलिटी शो विजेता राजरानी ने कहा कि उसने सोचा नहीं था कि मैं यहा तक पहुंच पाएगी।
यह सब कुछ सपने की तरह हुआ जो आखिर में सच हुआ। उन्होंने कहा कि वहां का अनुभव याद करूं तो अब आसान लगता है। टापू पर सोते थे, सामने से सूरज निकलता था। जब वहा पर थे तो बहुत मुश्किल था वहा रहना। न नमक, न मीठा और न पीने के लिए चाय होती थी। कुछ भी खाने के लिए नहीं था, सिर्फ उबले हुए चावल थे। वहा से आने के बाद हर चीज की कद्र होने लगी है। खाना कितना खाना चाहिए, घर वाले दूर रहे तो कैसा लगता है, मोबाइल टीवी न हो तो कैसे रहना है, कभी खाने के लिए चार-पाच दिन कुछ नहीं हो तो हमें कैसे रहना है, बिना चारपाई के, पंखे के कैसे सोना है।
राजरानी ने कहा कि बेटिया आज के जमाने में किसी से कम नहीं है। मैं अपने घर में चौथी लड़की हूं सबसे छोटी हूं। उसे बढ़ावा दिया इतनी ऊपर तक भेजा। लड़कियां आज लड़कों से बढ़ कर हैं। उसने वहा बहुत से लड़कों को हराया है। लड़कियों को बढ़ावा दें, लड़किया देश की शान है। उन्होंने कहा कि वह हाकी ओपन टूर्नामेंट खेलेंगी, क्योंकि हाकी से उसका सब कुछ हुआ है। हाकी वह बचपन से खेलती आई हैं और वह हाकी कभी नहीं छोड़ेगी। जितना मुझे मौका मिलेगा वह हाकी खेलेगी। सरपंच बलबीर ने कहा कि राजरानी ने रियेलिटी शो जीतकर गाव का नाम देश भर में रोशन करने का काम किया है। इस अवसर पर रवि, सुरेद्र, ईश्वर, अजमेर, प्रदीप, सिक्कम देवी, सुरेद्र श्योकंद आदि उपस्थित थे।
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Bahraich News : जिला कृषि अधिकारी सतीश कुमार पाण्डेय ने बुधवार को पयागपुर तहसील क्षेत्र में संचालित खाद और बीज के दुकानों पर छापेमारी की।
Bahraich News : जिला कृषि अधिकारी (District Agriculture Officer) ने बुधवार को पयागपुर तहसील क्षेत्र (Payagpur Tehsil Area) में संचालित खाद और बीज के दुकानों पर छापेमारी की। छापेमारी के दौरान एक खाद की दुकान का लाइसेंस निरस्त (Fertilizer shop license canceled) कर दिया गया है। जबकि तीन दुकानदारों को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है। वहीं दोपहर में 430 एमटी डीएपी खाद (430 MT DAP Fertilizer) पहुंच गया है। 3712 एमटी इफको खाद कल तक आ जायेगी।
जिला कृषि अधिकारी सतीश कुमार पाण्डेय (District Agriculture Officer Satish Kumar Pandey) ने बुधवार को पयागपुर तहसील क्षेत्र में संचालित खाद और बीज के दुकानों पर छापेमारी की। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि दुकान और सरकारी केंद्र पर खाद होने के बाद भी किसानों को दिक्कत हो रही हैI इसको देखते हुए बुधवार को दुकानों पर छापेमारी की गई।
तहसील क्षेत्र के खजुरी गांव में संचालित पाठक बीज भंडार (Pathak Seed Store) में कमियां मिलने पर लाइसेंस निलंबित कर दिया गया है। जबकि बृजेश पांडेय खाद की दुकान का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि आमदापुर में स्थित शुक्ला खाद की दुकान, परिहाट में स्थित किसान बीज भंडार और सिंह खाद भंडार को नोटिस भेजा गया है। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि नोटिस का जवाब नहीं मिला तो संबंधित के विरुद्ध भी करवाई की जाएगी।
जिला कृषि अधिकारी की छापेमारी से अन्य दुकानदारों में हड़कंप की स्थिति रही। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि केंद्रों पर खाद उपलब्ध है। किसानों को आधार कार्ड, खतौनी के द्वारा खाद पास मशीन से बिक्री करें। जिससे सब्सिडी खाते में भेजी जा सके।
जिला कृषि अधिकारी सतीश कुमार पाण्डेय ने बताया की बुधवार को 430 एमटी डीएपी पहुंच गई है। जिसे विभिन्न सरकारी केंद्रों पर भेज दी गई है। केंद्रो पर किसानों को खाद देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि 3712 एमटी इफको कल तक आ जायेगी।
| Bahraich News : जिला कृषि अधिकारी सतीश कुमार पाण्डेय ने बुधवार को पयागपुर तहसील क्षेत्र में संचालित खाद और बीज के दुकानों पर छापेमारी की। Bahraich News : जिला कृषि अधिकारी ने बुधवार को पयागपुर तहसील क्षेत्र में संचालित खाद और बीज के दुकानों पर छापेमारी की। छापेमारी के दौरान एक खाद की दुकान का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया है। जबकि तीन दुकानदारों को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है। वहीं दोपहर में चार सौ तीस एमटी डीएपी खाद पहुंच गया है। तीन हज़ार सात सौ बारह एमटी इफको खाद कल तक आ जायेगी। जिला कृषि अधिकारी सतीश कुमार पाण्डेय ने बुधवार को पयागपुर तहसील क्षेत्र में संचालित खाद और बीज के दुकानों पर छापेमारी की। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि दुकान और सरकारी केंद्र पर खाद होने के बाद भी किसानों को दिक्कत हो रही हैI इसको देखते हुए बुधवार को दुकानों पर छापेमारी की गई। तहसील क्षेत्र के खजुरी गांव में संचालित पाठक बीज भंडार में कमियां मिलने पर लाइसेंस निलंबित कर दिया गया है। जबकि बृजेश पांडेय खाद की दुकान का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि आमदापुर में स्थित शुक्ला खाद की दुकान, परिहाट में स्थित किसान बीज भंडार और सिंह खाद भंडार को नोटिस भेजा गया है। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि नोटिस का जवाब नहीं मिला तो संबंधित के विरुद्ध भी करवाई की जाएगी। जिला कृषि अधिकारी की छापेमारी से अन्य दुकानदारों में हड़कंप की स्थिति रही। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि केंद्रों पर खाद उपलब्ध है। किसानों को आधार कार्ड, खतौनी के द्वारा खाद पास मशीन से बिक्री करें। जिससे सब्सिडी खाते में भेजी जा सके। जिला कृषि अधिकारी सतीश कुमार पाण्डेय ने बताया की बुधवार को चार सौ तीस एमटी डीएपी पहुंच गई है। जिसे विभिन्न सरकारी केंद्रों पर भेज दी गई है। केंद्रो पर किसानों को खाद देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि तीन हज़ार सात सौ बारह एमटी इफको कल तक आ जायेगी। |
विद्वान एवम् पढ़े लिखे लोगों से सम्मान व प्रतिष्ठा प्राप्त करेंगे। विदेशियों से संबंध सफलदायक रहेंगे। लम्बी यात्राओं की भी संभावना है। धार्मिक कृत्य करने की प्रवृति रहेगी। सुखी जीवन बितायेंगे। मां बाप से संबंध अति मधुर रहेंगे।
पूनम यादव सावधान रहें क्योंकि पूनम यादव की बुद्धि भ्रमित हो सकती है। स्वास्थ्य एवं पारिवारिक सदस्यों के कारण परेशानी होगी। सट्टेबाजी से बचें। कुछ ऐसे खर्चे भी करने पड़ेंगे जो पूनम यादव के नियंत्रण से बाहर होंगे। मित्र एवं सहयोगियों से निराशा हाथ लगेगी। यात्रा से थकान होगी।
इस अवधि के दौरान दुर्घटनायें मानसिक शांति भंग कर सकती हैं। प्रयासों में असफलता ही हाथ लगेगी। पूनम यादव के भ्रम भयकारी मनोविकृति बन सकते हैं। पूनम यादव की साथी का बर्ताव पूनम यादव को असहनीय मालूम पड़ेगा। धन्धे / व्यापार में भी काम अच्छा नहीं चलेगा। कुछ न कुछ परेशानियां पूनम यादव को सदैव घेरे रहेंगी। स्वास्थ्य की समस्याओं के कारण पूनम यादव सही प्रकार से अपने वचन नहीं निभा पायेंगे। गूढ विज्ञान की ओर पूनम यादव की रूचि जागृत होगी और कुछ अतीन्द्रिय अनुभव भी प्राप्त कर सकते हैं।
इस अवधि में जीवन व्यापन सुविधा सम्पन्न रहेगा। पारिवारिक सुख प्राप्त करेंगे। सम्पती पर धन व्यय होगा। घर की वस्तुओं चल अचल सम्पती आदि पर व्यय होगा तथा व्यापार/व्यवसाय के विकास पर भी धन व्यय करेंगे। अचानक व अयाचित लाभ प्राप्त करेंगे। बड़ें अफसरों और शक्तिवान व्यक्तियों के सम्पर्क में आयेंगे। पूनम यादव की ख्याति और सम्मान में इजाफा होगा। व्यापार में बदलाव या नौकरी की पदोन्नति की संभावना है। धर्म के प्रति पूनम यादव का झुकाव रहेगा और पवित्र स्थलों की यात्रा करेंगे। इस पूरी अवधि में दिमाग सान्कूल रहेगा और सुख भोगेंगे।
इस अवधि के दौरान पूनम यादव खूब खुश रहेंगे। पूनम यादव के प्रयास अच्छे परिणाम देना शुरू कर देंगे। सरकारी अफसरों, वरिष्ठ लोगों एवं माता पिता से संबंध अति मधुर रहेंगे। एक लम्बी यात्रा बहुत फायदेमंद रहेगी। पूनम यादव के मित्र व सहयोगी पूनम यादव की पूरी सहायता करेंगे। पूनम यादव का मन अध्यात्म और जीवन के उच्च दर्शन की ओर मुड़ जाएगा। नए व्यापार करने या नौकरी बदलने की पूरी संभावना है। विरोधी पूनम यादव को कोई नुकसान नहीं पहुंचा पाएगें। छोटी मोटी बीमारियां लगी रहेंगी।
इस अवधि में पूनम यादव के अन्दर बैठी हुई व्यवसाय कि सहज योग्यता विकास प्राप्त करेगी। पूनम यादव की व्यवहार बुद्धि और समीक्षात्मक दृष्टि चैतन्य रहेगी। पूनम यादव बहुत सलीके से काम करेंगे। सुखी रहेंगे और साधारण तौर पर प्रसन्नता प्राप्त होगी। अपनी कर्मठता से पूनम यादव बहुत लाभ उठायेंगे। पारिवारिक वातावरण सौमनस्यपूर्ण रहेगा। माता पिता से संबंध मधुर रहेंगे। विलास सामग्री पर व्यय करेंगे। संचार माध्यम से शुभ समाचार प्राप्त होंगे। शुभ संस्कार भी मनाया जा सकता है।
गन्दी भाषा बोलने के कारण अपने लोगों से भी पूनम यादव की दुश्मनी होने की संभावना है। इसलिये पूनम यादव को अपनी वाणी पर पूरा नियंत्रण रखना चाहिए। खास तौर पर उन लोगों के प्रति जिनसे पूनम यादव की घनिष्टता है। नहीं तो गलतफहमी हो जायेगी। पैसे रूपये की हानि होने की संभावना है। अपने पारिवारिक सदस्यों के साथ पूनम यादव के निर्वाह में मुश्किलें पेश आयेंगी। इस अवधि में कोई नये उघम न शुरू करें। इसी माह में पूनम यादव के व्याधिग्रस्त होने की भी संभावना है। आत्मविश्वास की कमी पूनम यादव में स्पष्ट परिलक्षित होगी। यात्राओं का कोई व्यवहारिक अर्थ नहीं निकलेगा। साधारण तौर पर यह समय पूनम यादव के लिये अच्छा नहीं है क्योंकि आत्मीय जन भी काफीदूर हो जायेंगे।
यह समय बड़े आराम से कटेगा। प्रतिष्ठा पद वृद्धि होगी और आमदनी भी बढ़ेगी। पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा। नफे का सौदा होगा। परिवार में एक प्रकार का सम्मेलन होगा जिसमें सब लोग इकट्ठे होंगे। यात्राओं से भी अच्छे समाचार मिलेंगे। विरोधी नुकसान नहीं पहुंचा पायेंगे। परिवार में सदस्यों की संख्या में बढोत्तरी की संभावना है। प्रयत्नों में सफलता मिलेगी। पूनम यादव की माता पूनम यादव को पूरा सहयोग देंगी। हर लिहाज से यह समय अच्छा है।
इस अवधि में पूनम यादव को मेहनत करनी पड़ेगी जो पूनम यादव कर नहीं पायेंगे। लगातार किया गया कड़ा परिश्रम थका भी शीघ्र देगा और कार्य क्षमता भी कम हो जायेगी। बुरे कार्यों में प्रवृती रहने की पूनम यादव की चेष्टा रहेगी। मां बाप का बुरा स्वास्थ्य चिन्ताग्रस्त रखेगा। कार या कोईवाहन बहुत तेजी से न चलाएं।
| विद्वान एवम् पढ़े लिखे लोगों से सम्मान व प्रतिष्ठा प्राप्त करेंगे। विदेशियों से संबंध सफलदायक रहेंगे। लम्बी यात्राओं की भी संभावना है। धार्मिक कृत्य करने की प्रवृति रहेगी। सुखी जीवन बितायेंगे। मां बाप से संबंध अति मधुर रहेंगे। पूनम यादव सावधान रहें क्योंकि पूनम यादव की बुद्धि भ्रमित हो सकती है। स्वास्थ्य एवं पारिवारिक सदस्यों के कारण परेशानी होगी। सट्टेबाजी से बचें। कुछ ऐसे खर्चे भी करने पड़ेंगे जो पूनम यादव के नियंत्रण से बाहर होंगे। मित्र एवं सहयोगियों से निराशा हाथ लगेगी। यात्रा से थकान होगी। इस अवधि के दौरान दुर्घटनायें मानसिक शांति भंग कर सकती हैं। प्रयासों में असफलता ही हाथ लगेगी। पूनम यादव के भ्रम भयकारी मनोविकृति बन सकते हैं। पूनम यादव की साथी का बर्ताव पूनम यादव को असहनीय मालूम पड़ेगा। धन्धे / व्यापार में भी काम अच्छा नहीं चलेगा। कुछ न कुछ परेशानियां पूनम यादव को सदैव घेरे रहेंगी। स्वास्थ्य की समस्याओं के कारण पूनम यादव सही प्रकार से अपने वचन नहीं निभा पायेंगे। गूढ विज्ञान की ओर पूनम यादव की रूचि जागृत होगी और कुछ अतीन्द्रिय अनुभव भी प्राप्त कर सकते हैं। इस अवधि में जीवन व्यापन सुविधा सम्पन्न रहेगा। पारिवारिक सुख प्राप्त करेंगे। सम्पती पर धन व्यय होगा। घर की वस्तुओं चल अचल सम्पती आदि पर व्यय होगा तथा व्यापार/व्यवसाय के विकास पर भी धन व्यय करेंगे। अचानक व अयाचित लाभ प्राप्त करेंगे। बड़ें अफसरों और शक्तिवान व्यक्तियों के सम्पर्क में आयेंगे। पूनम यादव की ख्याति और सम्मान में इजाफा होगा। व्यापार में बदलाव या नौकरी की पदोन्नति की संभावना है। धर्म के प्रति पूनम यादव का झुकाव रहेगा और पवित्र स्थलों की यात्रा करेंगे। इस पूरी अवधि में दिमाग सान्कूल रहेगा और सुख भोगेंगे। इस अवधि के दौरान पूनम यादव खूब खुश रहेंगे। पूनम यादव के प्रयास अच्छे परिणाम देना शुरू कर देंगे। सरकारी अफसरों, वरिष्ठ लोगों एवं माता पिता से संबंध अति मधुर रहेंगे। एक लम्बी यात्रा बहुत फायदेमंद रहेगी। पूनम यादव के मित्र व सहयोगी पूनम यादव की पूरी सहायता करेंगे। पूनम यादव का मन अध्यात्म और जीवन के उच्च दर्शन की ओर मुड़ जाएगा। नए व्यापार करने या नौकरी बदलने की पूरी संभावना है। विरोधी पूनम यादव को कोई नुकसान नहीं पहुंचा पाएगें। छोटी मोटी बीमारियां लगी रहेंगी। इस अवधि में पूनम यादव के अन्दर बैठी हुई व्यवसाय कि सहज योग्यता विकास प्राप्त करेगी। पूनम यादव की व्यवहार बुद्धि और समीक्षात्मक दृष्टि चैतन्य रहेगी। पूनम यादव बहुत सलीके से काम करेंगे। सुखी रहेंगे और साधारण तौर पर प्रसन्नता प्राप्त होगी। अपनी कर्मठता से पूनम यादव बहुत लाभ उठायेंगे। पारिवारिक वातावरण सौमनस्यपूर्ण रहेगा। माता पिता से संबंध मधुर रहेंगे। विलास सामग्री पर व्यय करेंगे। संचार माध्यम से शुभ समाचार प्राप्त होंगे। शुभ संस्कार भी मनाया जा सकता है। गन्दी भाषा बोलने के कारण अपने लोगों से भी पूनम यादव की दुश्मनी होने की संभावना है। इसलिये पूनम यादव को अपनी वाणी पर पूरा नियंत्रण रखना चाहिए। खास तौर पर उन लोगों के प्रति जिनसे पूनम यादव की घनिष्टता है। नहीं तो गलतफहमी हो जायेगी। पैसे रूपये की हानि होने की संभावना है। अपने पारिवारिक सदस्यों के साथ पूनम यादव के निर्वाह में मुश्किलें पेश आयेंगी। इस अवधि में कोई नये उघम न शुरू करें। इसी माह में पूनम यादव के व्याधिग्रस्त होने की भी संभावना है। आत्मविश्वास की कमी पूनम यादव में स्पष्ट परिलक्षित होगी। यात्राओं का कोई व्यवहारिक अर्थ नहीं निकलेगा। साधारण तौर पर यह समय पूनम यादव के लिये अच्छा नहीं है क्योंकि आत्मीय जन भी काफीदूर हो जायेंगे। यह समय बड़े आराम से कटेगा। प्रतिष्ठा पद वृद्धि होगी और आमदनी भी बढ़ेगी। पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा। नफे का सौदा होगा। परिवार में एक प्रकार का सम्मेलन होगा जिसमें सब लोग इकट्ठे होंगे। यात्राओं से भी अच्छे समाचार मिलेंगे। विरोधी नुकसान नहीं पहुंचा पायेंगे। परिवार में सदस्यों की संख्या में बढोत्तरी की संभावना है। प्रयत्नों में सफलता मिलेगी। पूनम यादव की माता पूनम यादव को पूरा सहयोग देंगी। हर लिहाज से यह समय अच्छा है। इस अवधि में पूनम यादव को मेहनत करनी पड़ेगी जो पूनम यादव कर नहीं पायेंगे। लगातार किया गया कड़ा परिश्रम थका भी शीघ्र देगा और कार्य क्षमता भी कम हो जायेगी। बुरे कार्यों में प्रवृती रहने की पूनम यादव की चेष्टा रहेगी। मां बाप का बुरा स्वास्थ्य चिन्ताग्रस्त रखेगा। कार या कोईवाहन बहुत तेजी से न चलाएं। |
कुंभ राशि के जातक अपने रूटीन कार्यों को करने में व्यस्त रहेंगे। व्यावसायिक दृष्टि से दिन कुछ खास नहीं है। स्पोर्ट्स से संबंधित कामकाज करने वाले जातकों को लाभ होने की संभावना बनती है। कमाई के मामले में दिन सामान्य रहेगा, खर्च अधिक रहेंगे।
| कुंभ राशि के जातक अपने रूटीन कार्यों को करने में व्यस्त रहेंगे। व्यावसायिक दृष्टि से दिन कुछ खास नहीं है। स्पोर्ट्स से संबंधित कामकाज करने वाले जातकों को लाभ होने की संभावना बनती है। कमाई के मामले में दिन सामान्य रहेगा, खर्च अधिक रहेंगे। |
नयी दिल्ली, नौ जुलाई राष्ट्रीय राजधानी में शुक्रवार की सुबह उमस रहने के साथ ही न्यूनतम तापमान सामान्य से चार डिग्री कम 24. 1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
मौसम विज्ञान विभाग ने बताया कि सुबह साढ़े आठ बजे हवा में आर्द्रता का स्तर 73 प्रतिशत रहा। दिन में आमतौर पर बादल छाए रहने और दोपहर या शाम के समय हल्की बारिश या गरज के साथ छींटे पड़ने का अनुमान है। वहीं, अधिकतम तापमान लगभग 39 डिग्री सेल्सियस के आस पास रह सकता है।
दिल्ली में बृहस्पतिवार को अधिकतम तापमान सामान्य से पांच डिग्री अधिक 41. 8 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान सामान्य ये तीन डिग्री अधिक 30. 6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
| नयी दिल्ली, नौ जुलाई राष्ट्रीय राजधानी में शुक्रवार की सुबह उमस रहने के साथ ही न्यूनतम तापमान सामान्य से चार डिग्री कम चौबीस. एक डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विज्ञान विभाग ने बताया कि सुबह साढ़े आठ बजे हवा में आर्द्रता का स्तर तिहत्तर प्रतिशत रहा। दिन में आमतौर पर बादल छाए रहने और दोपहर या शाम के समय हल्की बारिश या गरज के साथ छींटे पड़ने का अनुमान है। वहीं, अधिकतम तापमान लगभग उनतालीस डिग्री सेल्सियस के आस पास रह सकता है। दिल्ली में बृहस्पतिवार को अधिकतम तापमान सामान्य से पांच डिग्री अधिक इकतालीस. आठ डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान सामान्य ये तीन डिग्री अधिक तीस. छः डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है। |
और गति ( मोशन ) से हुई है। निर्माण का उपादान द्रव्य है जिसके द्वारा मानव शरीर मन और अन्य भौतिक पदार्थों की रचना हुई । चिन्ता सर्ग के देवता का भोगवाद भी इसी विचारधारा का समर्थन करता है १३
द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद के दार्शनिक दृष्टिकोण के अनुसार सृष्टि के मूल तत्व मैटर का निरन्तर रूप परिवर्तन होता रहता है । इस परिवर्तन की प्रकृति द्वन्दात्मक है क्योंकि हर परिवर्तन के मूल में संघर्ष स्थित है। अपने संघर्षमय परिस्थिति में ही कालान्तर में नयी संघात्मिक व्यवस्था का उदय होता है। यह विकास की प्रक्रिया है। इसका मूल कारUT भौतिक परिस्थितियों है जिससे ऐतिहासिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि का निर्माण होता है। यही कारण है कि बात्मक भौतिकवाद की विचारधारा में व्यक्ति की ठोस परिस्थिति की सापकाता को देखा जाता है और परिवर्तन भी आन्तरिक के निर्ममत ही माना जाता है। वास्तव में यह विचारधारा उस भारतीय अध्यात्मिक विचारधारा के बिलकुल विलीम है जो सृष्टि का उद्गम और विकास चैतन-शक्ति से मानता है। प्रसाद के कामायची पर इन्द्रामक भौतिकवाद की छाया वहीं दीख पड़ती है, जहाँ पर मनु बड़ा से प्रभावित है । एक सर्ग में बुद्धि पक्ष की प्रबलता के कारण प्रसाद पराक भौतिकवाद की छाया भले ही देख ली जाय पर यह जीवन दर्शन न कामायनी का अभीष्ट है, न प्रसाद का । प्रसाद ने इस विचारधारा को मनु पर उनकी जड़ भौतिक सभ्यता के प्रभाव रूप में दिखाया। साथ ही कालान्तर में उसकी सारहीनता भी प्रमाणित कर दी, क्योंकि अध्यात्मवाद से इसका सामंजस्य नहीं
हो पाया ।
प्रसाद के अनुसार काव्य में की संकल्पात्मक मूल अनुभूति
की मुख्य धारा रहस्यवाद है। १३० जहाँ तक प्रसाद साहित्य में रहस्यवाद
१२६ः कामायनी
१३० काव्य वय और कला तथा अन्य निबन्ध, ५० ४६
की स्थिति का प्रश्न है करना के प्रथम संस्करण ( संवत् १६७५) तक उनकी रचनाओं में इस विचारधारा के दर्शन नहीं होते। पर इसके दूसरे संस्करण ( संवत् १९८४ ) में प्रथम संस्करण से पर्याप्त मिलता दीख पड़ता है इसमें ३१ कविताएं जोड़ी गयी जिनमें पं० रामचन्द्र शुक्ल के अनुसार भी पूरा रहस्यवाद, अभिव्यंजना का अनूठापन, व्यंजक चित्रविधान सब कुछ मिल जाता है ।
परन्तु यदि विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण से देखा जाय तो कानन कुसुम से ही रहस्यवाद की अनूठी फलक मिलती है। इसकी अनेक कविताएं भौतिक प्रेम की श्राध्यात्मिक रूप देने में अग्रसर है।
जयति प्रेमनिधि । जिसकी करुणा नौका पार लगाती है । जयति महासंगीत । विश्व - वीUTT जिसकी ध्वनि गाती है !
कवि ईश्वर के निराकार रूप की बंदना करते हुए उसकी दया, प्रेम, करुणा के भावों का स्मरण करता है। साथ ही निर्गुण ईश्वर के प्रति श्रद्धा अभिव्यक्त करता है जिसकी उपासना व्यक्ति कहीं भी कर सकता है । पर दूसरे ही Tण वह ईश्वर के सौन्दर्य को देखकर भर तृप्त होने की बात करता है
देख लो जी भर इसे देखा करो, इस कलम से चित पर रेखा करो । १३४ लिखते लिखते वह चित्र बन जाय गा, सत्य, सन्दर तब प्रकटहोजायेगा
दर्शन के अनन्तर तो पानी सता ही मिट जाती है पर उसके पूर्व इस अज्ञात सत्ता के प्रति प्रेम स्वतः हो जाता है और बिना दर्शन के स्वयं अपनी सत्ता भी पीड़ामय हो जाती है। कदाचित इसी और कवि ने संकेत किया है कि मैं तो तुमको भूल गया हूँ पाकर प्रेममयी पीड़ा ।
कवि ने यहाँ प्रेम-परक रहस्यवाद की और निर्देश किया है।
१३१ः हिन्दी साहित्य का इतिहास पु० ६२४ १३२ः कानन कुसुम, ५० ३ १३३ः कानन कुसुम, पृ०
१३४ कानन कुसुम ५० ५१
१३५ कानन कुसुम, ५० २३ | और गति से हुई है। निर्माण का उपादान द्रव्य है जिसके द्वारा मानव शरीर मन और अन्य भौतिक पदार्थों की रचना हुई । चिन्ता सर्ग के देवता का भोगवाद भी इसी विचारधारा का समर्थन करता है तेरह द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद के दार्शनिक दृष्टिकोण के अनुसार सृष्टि के मूल तत्व मैटर का निरन्तर रूप परिवर्तन होता रहता है । इस परिवर्तन की प्रकृति द्वन्दात्मक है क्योंकि हर परिवर्तन के मूल में संघर्ष स्थित है। अपने संघर्षमय परिस्थिति में ही कालान्तर में नयी संघात्मिक व्यवस्था का उदय होता है। यह विकास की प्रक्रिया है। इसका मूल कारUT भौतिक परिस्थितियों है जिससे ऐतिहासिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि का निर्माण होता है। यही कारण है कि बात्मक भौतिकवाद की विचारधारा में व्यक्ति की ठोस परिस्थिति की सापकाता को देखा जाता है और परिवर्तन भी आन्तरिक के निर्ममत ही माना जाता है। वास्तव में यह विचारधारा उस भारतीय अध्यात्मिक विचारधारा के बिलकुल विलीम है जो सृष्टि का उद्गम और विकास चैतन-शक्ति से मानता है। प्रसाद के कामायची पर इन्द्रामक भौतिकवाद की छाया वहीं दीख पड़ती है, जहाँ पर मनु बड़ा से प्रभावित है । एक सर्ग में बुद्धि पक्ष की प्रबलता के कारण प्रसाद पराक भौतिकवाद की छाया भले ही देख ली जाय पर यह जीवन दर्शन न कामायनी का अभीष्ट है, न प्रसाद का । प्रसाद ने इस विचारधारा को मनु पर उनकी जड़ भौतिक सभ्यता के प्रभाव रूप में दिखाया। साथ ही कालान्तर में उसकी सारहीनता भी प्रमाणित कर दी, क्योंकि अध्यात्मवाद से इसका सामंजस्य नहीं हो पाया । प्रसाद के अनुसार काव्य में की संकल्पात्मक मूल अनुभूति की मुख्य धारा रहस्यवाद है। एक सौ तीस जहाँ तक प्रसाद साहित्य में रहस्यवाद एक सौ छब्बीसः कामायनी एक सौ तीस काव्य वय और कला तथा अन्य निबन्ध, पचास छियालीस की स्थिति का प्रश्न है करना के प्रथम संस्करण तक उनकी रचनाओं में इस विचारधारा के दर्शन नहीं होते। पर इसके दूसरे संस्करण में प्रथम संस्करण से पर्याप्त मिलता दीख पड़ता है इसमें इकतीस कविताएं जोड़ी गयी जिनमें पंशून्य रामचन्द्र शुक्ल के अनुसार भी पूरा रहस्यवाद, अभिव्यंजना का अनूठापन, व्यंजक चित्रविधान सब कुछ मिल जाता है । परन्तु यदि विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण से देखा जाय तो कानन कुसुम से ही रहस्यवाद की अनूठी फलक मिलती है। इसकी अनेक कविताएं भौतिक प्रेम की श्राध्यात्मिक रूप देने में अग्रसर है। जयति प्रेमनिधि । जिसकी करुणा नौका पार लगाती है । जयति महासंगीत । विश्व - वीUTT जिसकी ध्वनि गाती है ! कवि ईश्वर के निराकार रूप की बंदना करते हुए उसकी दया, प्रेम, करुणा के भावों का स्मरण करता है। साथ ही निर्गुण ईश्वर के प्रति श्रद्धा अभिव्यक्त करता है जिसकी उपासना व्यक्ति कहीं भी कर सकता है । पर दूसरे ही Tण वह ईश्वर के सौन्दर्य को देखकर भर तृप्त होने की बात करता है देख लो जी भर इसे देखा करो, इस कलम से चित पर रेखा करो । एक सौ चौंतीस लिखते लिखते वह चित्र बन जाय गा, सत्य, सन्दर तब प्रकटहोजायेगा दर्शन के अनन्तर तो पानी सता ही मिट जाती है पर उसके पूर्व इस अज्ञात सत्ता के प्रति प्रेम स्वतः हो जाता है और बिना दर्शन के स्वयं अपनी सत्ता भी पीड़ामय हो जाती है। कदाचित इसी और कवि ने संकेत किया है कि मैं तो तुमको भूल गया हूँ पाकर प्रेममयी पीड़ा । कवि ने यहाँ प्रेम-परक रहस्यवाद की और निर्देश किया है। एक सौ इकतीसः हिन्दी साहित्य का इतिहास पुशून्य छः सौ चौबीस एक सौ बत्तीसः कानन कुसुम, पचास तीन एक सौ तैंतीसः कानन कुसुम, पृशून्य एक सौ चौंतीस कानन कुसुम पचास इक्यावन एक सौ पैंतीस कानन कुसुम, पचास तेईस |
अगर आप भी सरसों की बुवाई करना चाहते हैं तो यह बिल्कुल सही समय है, सरसों की बुवाई में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए इस बारे में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की वैज्ञानिक डॉ कपिला शेखावत विस्तार से बता रही हैं।
अगर आप देश के उत्तरी मैदानी क्षेत्र से हैं तो 10 अक्टूबर से 22 अक्टूबर तक सरसों की बुवाई का सबसे सही समय है।
भारत के उत्तरी मैदानी क्षेत्रों में सर्दियों में तिलहन की खेती की जाती है, इसमें सरसों और लाही प्रमुख फसलें होती हैं। इसमें करीब 42 प्रतिशत तक तेल की मात्रा होती है।
समय पर बोई जाने वाली किस्मों में पूसा विजय, पूसा मस्टर्ड-24, 25, 27, 28, 29, 30 और 32 हैं । इसके अलावा गिरिराज, राधिका, एमआरसी डीआरटू, एनआरसी601, एनआरसीएचवी 101, एनआरसीएचवी 506 ये किस्में भी अच्छी हैं।
अगर किसान भाई समय पर बुवाई नहीं कर पाते हैं तो कुछ पछेती किस्में भी हैं, जिनमें स्वर्ण ज्योति, वरदान, नवगोल्ड, आरजीएन 506, पूसा तारक और पीएम 26 या पूसा मस्टर्ड 26 किस्में हैं, इनमें से किसी भी फसल को नवम्बर के पहले सप्ताह में फसल की पछेती बुवाई कर सकते हैं।
लवण प्रभावित मृदा हैं तो उनके लिए सीएस 52 और सीएस 54 अच्छी किस्में हैं।
अब खेत के चुनाव के बारे में हम सभी जानते हैं अच्छी जल धारण क्षमता वाली मृदा होनी चाहिए, जलभराव वाला खेत नहीं होना चाहिए।
प्रति हेक्टेयर के हिसाब से चार-पाँच किलो बीज ही इस्तेमाल करना चाहिए। कई किसान कहते हैं कि सीड ड्रिल से बुवाई करने पर ज़्यादा बीज गिर जाता है तो किसान रेत या बजरी मिला सकते हैं।
बुवाई से पहले बीजोपचार बहुत ज़रूरी होता है, इससे बीज जनित बीमारियों का ख़तरा नहीं होता है।
सरसों की शुरुआती अवस्था में कुछ कीट ज़्यादा नुकसान पहुँचाते हैं, जो छोटे पौधों को काट देते हैं, इससे बचाव के लिए बीज को इमिडाक्लोप्रिड से उपचारित करके बोना चाहिए। इसके साथ ही फफूंद जनित बीमारियों से बचने के लिए ट्राइकोडर्मा से भी उपचारित करना चाहिए।
बीज उपचार के बाद अब बारी आती है बुवाई की। अगर आप सीड ड्रिल से बुवाई करते हैं तो परंपरागत किस्मों में एक पंक्ति से दूसरी पंक्ति की दूरी करीब 30 सेमी होनी चाहिए। जबकि उन्नत किस्मों में करीब 45 सेमी की दूरी रखते हैं और पौधों से पौधों की दूरी 10-12 सेमी रखनी चाहिए।
अगर पौधों की संख्या अधिक है तो पौधों को निकाल कर चारे में भी इस्तेमाल कर सकते हैं। पौधों को जितनी अधिक जगह मिलेगी उतनी ही अच्छी वृद्धि होगी।
अब बात आती है पोषक तत्वों की, क्योंकि पौधों के समग्र विकास और बढ़वार के लिए करीब 17 पोषक तत्वों की जरूरत होती है, जिसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम प्रमुख हैं।
नाइट्रोजन को अधिकतम दो बार में देते हैं, पहले भाग को बुवाई के समय और दूसरे भाग को पहली सिंचाई के बाद में देते हैं।
पोटेशियम के लिए आप एमओपी का प्रयोग कर सकते हैं, क्योंकि आज कल हम दो या तीन फसलें लेते हैं तो सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी देखी गई है। जिंक या आयरन सल्फेट का बुवाई के समय प्रयोग कर सकते हैं। बुवाई के लिए करीब 20 से 25 किलोग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से आखिर जुताई से पहले देनी होती है।
एक साल में एक बार ही जिंक और आयरन का प्रयोग करें। अगर खरीफ की फसल में उपयोग किया है तो रबी में इसका इस्तेमाल नहीं करना पड़ेगा। सरसों के लिए सल्फर एक महत्वपूर्ण पोषक तत्व है इसका करीब 30 से 40 किलोग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से देनी होगी।
और इसके साथ ही एक और पोषक तत्व है, जिसको हम बोरान के नाम से जानते है। वो भी सरसों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। इसकी कमी से फलियों में दाने नहीं बनते वो खाली रह जाती हैं। इसके लिए एक किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से सभी पोषक तत्वों के साथ में देना होगा।
इसके साथ ही एक महत्वपूर्ण आयाम है खरपतवार, ये फसलों को काफी नुकसान पहुँचाते हैं, अगर खरपतवार का नियंत्रण नहीं किया गया तो करीब 30 से 40 प्रतिशत फसल में नुकसान देखा गया है।
30 से 35 दिन बाद खेत में पहली सिंचाई देते हैं उसके बाद खरपतवार दिखाई देते हैं तो निराई गुड़ाई से उन्हें निकाल सकते हैं।
| अगर आप भी सरसों की बुवाई करना चाहते हैं तो यह बिल्कुल सही समय है, सरसों की बुवाई में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए इस बारे में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की वैज्ञानिक डॉ कपिला शेखावत विस्तार से बता रही हैं। अगर आप देश के उत्तरी मैदानी क्षेत्र से हैं तो दस अक्टूबर से बाईस अक्टूबर तक सरसों की बुवाई का सबसे सही समय है। भारत के उत्तरी मैदानी क्षेत्रों में सर्दियों में तिलहन की खेती की जाती है, इसमें सरसों और लाही प्रमुख फसलें होती हैं। इसमें करीब बयालीस प्रतिशत तक तेल की मात्रा होती है। समय पर बोई जाने वाली किस्मों में पूसा विजय, पूसा मस्टर्ड-चौबीस, पच्चीस, सत्ताईस, अट्ठाईस, उनतीस, तीस और बत्तीस हैं । इसके अलावा गिरिराज, राधिका, एमआरसी डीआरटू, एनआरसीछः सौ एक, एनआरसीएचवी एक सौ एक, एनआरसीएचवी पाँच सौ छः ये किस्में भी अच्छी हैं। अगर किसान भाई समय पर बुवाई नहीं कर पाते हैं तो कुछ पछेती किस्में भी हैं, जिनमें स्वर्ण ज्योति, वरदान, नवगोल्ड, आरजीएन पाँच सौ छः, पूसा तारक और पीएम छब्बीस या पूसा मस्टर्ड छब्बीस किस्में हैं, इनमें से किसी भी फसल को नवम्बर के पहले सप्ताह में फसल की पछेती बुवाई कर सकते हैं। लवण प्रभावित मृदा हैं तो उनके लिए सीएस बावन और सीएस चौवन अच्छी किस्में हैं। अब खेत के चुनाव के बारे में हम सभी जानते हैं अच्छी जल धारण क्षमता वाली मृदा होनी चाहिए, जलभराव वाला खेत नहीं होना चाहिए। प्रति हेक्टेयर के हिसाब से चार-पाँच किलो बीज ही इस्तेमाल करना चाहिए। कई किसान कहते हैं कि सीड ड्रिल से बुवाई करने पर ज़्यादा बीज गिर जाता है तो किसान रेत या बजरी मिला सकते हैं। बुवाई से पहले बीजोपचार बहुत ज़रूरी होता है, इससे बीज जनित बीमारियों का ख़तरा नहीं होता है। सरसों की शुरुआती अवस्था में कुछ कीट ज़्यादा नुकसान पहुँचाते हैं, जो छोटे पौधों को काट देते हैं, इससे बचाव के लिए बीज को इमिडाक्लोप्रिड से उपचारित करके बोना चाहिए। इसके साथ ही फफूंद जनित बीमारियों से बचने के लिए ट्राइकोडर्मा से भी उपचारित करना चाहिए। बीज उपचार के बाद अब बारी आती है बुवाई की। अगर आप सीड ड्रिल से बुवाई करते हैं तो परंपरागत किस्मों में एक पंक्ति से दूसरी पंक्ति की दूरी करीब तीस सेमी होनी चाहिए। जबकि उन्नत किस्मों में करीब पैंतालीस सेमी की दूरी रखते हैं और पौधों से पौधों की दूरी दस-बारह सेमी रखनी चाहिए। अगर पौधों की संख्या अधिक है तो पौधों को निकाल कर चारे में भी इस्तेमाल कर सकते हैं। पौधों को जितनी अधिक जगह मिलेगी उतनी ही अच्छी वृद्धि होगी। अब बात आती है पोषक तत्वों की, क्योंकि पौधों के समग्र विकास और बढ़वार के लिए करीब सत्रह पोषक तत्वों की जरूरत होती है, जिसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम प्रमुख हैं। नाइट्रोजन को अधिकतम दो बार में देते हैं, पहले भाग को बुवाई के समय और दूसरे भाग को पहली सिंचाई के बाद में देते हैं। पोटेशियम के लिए आप एमओपी का प्रयोग कर सकते हैं, क्योंकि आज कल हम दो या तीन फसलें लेते हैं तो सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी देखी गई है। जिंक या आयरन सल्फेट का बुवाई के समय प्रयोग कर सकते हैं। बुवाई के लिए करीब बीस से पच्चीस किलोग्रामग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से आखिर जुताई से पहले देनी होती है। एक साल में एक बार ही जिंक और आयरन का प्रयोग करें। अगर खरीफ की फसल में उपयोग किया है तो रबी में इसका इस्तेमाल नहीं करना पड़ेगा। सरसों के लिए सल्फर एक महत्वपूर्ण पोषक तत्व है इसका करीब तीस से चालीस किलोग्रामग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से देनी होगी। और इसके साथ ही एक और पोषक तत्व है, जिसको हम बोरान के नाम से जानते है। वो भी सरसों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। इसकी कमी से फलियों में दाने नहीं बनते वो खाली रह जाती हैं। इसके लिए एक किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से सभी पोषक तत्वों के साथ में देना होगा। इसके साथ ही एक महत्वपूर्ण आयाम है खरपतवार, ये फसलों को काफी नुकसान पहुँचाते हैं, अगर खरपतवार का नियंत्रण नहीं किया गया तो करीब तीस से चालीस प्रतिशत फसल में नुकसान देखा गया है। तीस से पैंतीस दिन बाद खेत में पहली सिंचाई देते हैं उसके बाद खरपतवार दिखाई देते हैं तो निराई गुड़ाई से उन्हें निकाल सकते हैं। |
लगातार कई साल तक मना करने के बाद आख़िरकार चीन ने अरूणाचल प्रदेश के एक प्रोफ़ेसर को चीन का वीज़ा दे दिया है.
चीन अरूणाचल प्रदेश पर अपना दावा ठोंकता रहा है.
उसका कहना है कि अरूणाचल प्रदेश चीन का ही हिस्सा है और ऐसे में स्थानीय लोगो को चीन आने के लिए वीज़ा की ज़रूरत नही है.
लेकिन अब दिल्ली स्थित चीनी दूतावास ने प्रोफ़ेसर मारपे सोरा को चीन भ्रमण के लिए वीज़ा दे दिया है. मारपे सोरा अरूणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर के राजीव गाँधी विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर हैं.
अधिकारिक सूत्रो के अनुसार मारपे सोरा भारतीय उद्योग महासंघ के इंडो-चाईना एलायंस सेंटर के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने चीन जा रहे हैं.
इस साल के शुरू में चीन ने भारतीय प्रशासनिक अधिकारी औऱ अरूणाचल प्रदेश के निवासी गणेश कोयु को वीज़ा देने से इन्कार कर दिया था.
भारत सरकार ने चीन के इस रवैये पर निराशा ज़ाहिर की थी और प्रशासनिक अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल की चीन यात्रा को रद्द कर दिया था.
हाल के दिनो में चीन की ओर से बयान आए थे जिसमें सीमा विवाद को लेकर चल रही बातचीत में तल्ख़ी आई थी.
जानकारो का मानना है कि ताज़ा फ़ैसले से चीन ने भारत को ये संदेश देने का प्रयास किया है कि चीन भारत के साथ सीमा विवाद सुलझाने के लिए गंभीर है.
| लगातार कई साल तक मना करने के बाद आख़िरकार चीन ने अरूणाचल प्रदेश के एक प्रोफ़ेसर को चीन का वीज़ा दे दिया है. चीन अरूणाचल प्रदेश पर अपना दावा ठोंकता रहा है. उसका कहना है कि अरूणाचल प्रदेश चीन का ही हिस्सा है और ऐसे में स्थानीय लोगो को चीन आने के लिए वीज़ा की ज़रूरत नही है. लेकिन अब दिल्ली स्थित चीनी दूतावास ने प्रोफ़ेसर मारपे सोरा को चीन भ्रमण के लिए वीज़ा दे दिया है. मारपे सोरा अरूणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर के राजीव गाँधी विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर हैं. अधिकारिक सूत्रो के अनुसार मारपे सोरा भारतीय उद्योग महासंघ के इंडो-चाईना एलायंस सेंटर के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने चीन जा रहे हैं. इस साल के शुरू में चीन ने भारतीय प्रशासनिक अधिकारी औऱ अरूणाचल प्रदेश के निवासी गणेश कोयु को वीज़ा देने से इन्कार कर दिया था. भारत सरकार ने चीन के इस रवैये पर निराशा ज़ाहिर की थी और प्रशासनिक अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल की चीन यात्रा को रद्द कर दिया था. हाल के दिनो में चीन की ओर से बयान आए थे जिसमें सीमा विवाद को लेकर चल रही बातचीत में तल्ख़ी आई थी. जानकारो का मानना है कि ताज़ा फ़ैसले से चीन ने भारत को ये संदेश देने का प्रयास किया है कि चीन भारत के साथ सीमा विवाद सुलझाने के लिए गंभीर है. |
कोलकाता, 30 मार्च (आईएएनएस)। कोलकाता में दो लोगों 60 ग्राम हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया गया। जब्त की गई हेरोइन की कीमत 50,000 रुपये आंकी गई है। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी।
दोनों को अगा मेहदी स्ट्रीट से शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया।
| कोलकाता, तीस मार्च । कोलकाता में दो लोगों साठ ग्राम हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया गया। जब्त की गई हेरोइन की कीमत पचास,शून्य रुपयापये आंकी गई है। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। दोनों को अगा मेहदी स्ट्रीट से शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया। |
परास्त हुए, पर इस संग्राम ने संसार में वह शक्ति उत्पन्न कर दी, जिसके कारण साम्राज्यों का टिक सकना सम्भव नहीं रहा ।
(३) वर्साय की सन्धि द्वारा जर्मनी के साथ अन्याय हुआ था । पेरिस की सन्धि-परिषद् द्वारा यूरोप की जो नई व्यवस्था कायम हुई थी, उसमें १९१४-१८ के परास्त देशों के साथ बहुत कुछ अन्याय किया गया था । इटली और जापान भी उससे संतुष्ट थे । वर्साय की इन भूलों का प्रतिशोध शान्तिमय उपायों से नहीं हो सका । उसके लिए युद्ध का आश्रय लेना आवश्यक हो गया ।
(४) विश्वसंग्राम का तात्कालिक कारण जर्मनी का पोलैण्ड पर क्रमण था। पर यदि यह आक्रमण न भी होता, तो भी संसार में लोकतन्त्रवाद और अधिनायकवाद (डिक्टेटरशिप) का साथ साथ रह सकना सम्भव न होता । किसी न किसी प्रश्न पर उनमें लड़ाई छिड़ती ही । वस्तुतः, विश्वसंग्राम में दो प्रवृत्तियों व दो आदर्शों के बीच में संघर्ष चल रहा था । एक प्रवृत्ति वह थी, जिसे फ्रांस की राज्यक्रान्ति ने पैदा किया था । दूसरी प्रवृत्ति उसकी प्रतिक्रिया के रूप में थी, जिसके प्रतिनिधि हिटलर और मुसोलिनी थे ।
सत्तावनवाँ अध्याय विश्वसंग्राम का इतिवृत्त १. पोलैण्ड का अन्त
एक सितम्बर, १९३६ को प्रातःकाल विश्वसंग्राम का श्रीगणेश हुआ। जर्मनी के बीच में से, डान्सिग के बन्दरगाह तक पहुँचने के लिए पोलैण्ड को जो गलियारा दिया गया था, उस पर उत्तर और दक्षिण, दोनों ओर से क्रमण किया गया। वारसा व अन्य पोल नगरों पर हवाई जहाजों द्वारा गोलाबारी की गई। हवाई जहाज के ग्रड्डों, रेलवे स्टेशनों व प्रमुख कारखानों पर वायुमार्ग से हमला किया गया। अन्सिग के बन्दरगाह पर समुद्र द्वारा आक्रमण हुआ। जर्मनी की जल, स्थल व वायुसेना एक साथ मिलकर पोलैण्ड को कुचल डालने के लिए आगे बढ़ने लगी । पोलैण्ड के लिए यह असम्भव था, कि जर्मनी की शक्ति - शाली सेना का मुकाबला कर सकता । यद्यपि उसके सैनिकों की संख्या दस लाख से ऊपर थी, पर ये नये वैज्ञानिक साधनों व उत्कृष्ट स्त्र शस्त्रों से सज्जित नहीं थे । पोलैण्ड की सेना जर्मनी के सम्मुख नहीं टिक सकी। चार दिन की लड़ाई के बाद, ५ सितम्बर को सम्पूर्ण साइलीशिया पर जर्मनी का कब्जा हो गया। दो सप्ताह में जर्मन सेनाएँ वारसा तक पहुँच गई ।
फ्रांस और ब्रिटेन ने पोलैण्ड को यह आश्वासन दिया हुआ था, कि जर्मनी द्वारा आक्रमण होने की दशा में ये देश उसकी पूरी तरह सहायता करेंगे। इसी कारण, एक सितम्बर को लड़ाई शुरू होने पर लण्डन और पेरिस से जर्मनी को यह अल्टिमेटम दिया गया था, कि पोलैण्ड पर
जिन सेनाओं ने हमला किया है, उन्हें तुरन्त वापस बुला लिया जाय । जर्मनी ने इस अल्टिमेटम की कोई परवाह नहीं की। परिणाम यह हुआ, कि ३ सितम्बर को फ्रांस और ब्रिटेन ने जर्मनी के खिलाफ लड़ाई की घोषणा कर दी। पोलैण्ड की सहायता करने के दो ही तरीके थे । एक तो यह, कि हवाई जहाजों द्वारा जर्मनी पर हमला किया जाय, और दूसरा यह कि जर्मनी की पश्चिमी सीमा पर लड़ाई छेड़ दी जाय । पोलैण्ड को यही आशा थी, कि फ्रांस और ब्रिटेन तुरन्त ही जर्मनी के खिलाफ सैनिक कार्रवाई शुरू कर देंगे। पर उसे निराश होना पड़ा। ब्रिटेन व फ्रांस की वायुसेना ने किसी भी प्रकार उसकी सहायता नहीं की, और न ही इस पैमाने पर पश्चिमी सीमा पर लड़ाई शुरू हुई, जिससे जर्मन सेनाओं को पोलैण्ड पर हमला करने में कुछ ढील देने की आवश्यकता हो ।
इसी बीच में, जब कि जर्मन सेनायें वारसा को तहस नहस करने में लगी थीं, १७ सितम्बर को प्रातः ४ बजे रशियन सेनाओं ने पोलैण्ड पर
कर दिया। रशिया समझता था, कि युक्रेनिया का जो प्रदेश पोलैण्ड की अधीनता में है, वह अनुचित है, और उसे स्वतन्त्र करके युक्रेनिया के साथ मिला देना चाहिए । उसने सोचा कि पोलैण्ड शीघ्र ही जर्मनी के हाथ में चला जायगा, और फिर इस प्रदेश को प्राप्त कर सकना सम्भव नहीं रहेगा। पाँच दिन में रशियन सेनाओं ने इस सारे प्रदेश पर अधिकार कर लिया। उधर जर्मन सेनायें भी निरन्तर आगे बढ़ रही थीं। वारसा देर तक उनके सम्मुख नहीं टिक सका । उसने घुटने टेक दिये, और पोलैण्ड की स्वतन्त्रता का अन्त हो गया ।
पर पोल लोगों ने अपराधीनता को स्वीकार नहीं किया। फ्रांस में स्वतन्त्र पोल सरकार का संगठन किया गया । जनरल सिकोस्कों इसका प्रधानमन्त्री बना । जो पोल सेना नष्ट होने या जर्मनी के हाथ में पड़ने से बच गई थी, उसका फ्रांस में ही पुनः संगठन किया गया । इसमें | परास्त हुए, पर इस संग्राम ने संसार में वह शक्ति उत्पन्न कर दी, जिसके कारण साम्राज्यों का टिक सकना सम्भव नहीं रहा । वर्साय की सन्धि द्वारा जर्मनी के साथ अन्याय हुआ था । पेरिस की सन्धि-परिषद् द्वारा यूरोप की जो नई व्यवस्था कायम हुई थी, उसमें एक हज़ार नौ सौ चौदह-अट्ठारह के परास्त देशों के साथ बहुत कुछ अन्याय किया गया था । इटली और जापान भी उससे संतुष्ट थे । वर्साय की इन भूलों का प्रतिशोध शान्तिमय उपायों से नहीं हो सका । उसके लिए युद्ध का आश्रय लेना आवश्यक हो गया । विश्वसंग्राम का तात्कालिक कारण जर्मनी का पोलैण्ड पर क्रमण था। पर यदि यह आक्रमण न भी होता, तो भी संसार में लोकतन्त्रवाद और अधिनायकवाद का साथ साथ रह सकना सम्भव न होता । किसी न किसी प्रश्न पर उनमें लड़ाई छिड़ती ही । वस्तुतः, विश्वसंग्राम में दो प्रवृत्तियों व दो आदर्शों के बीच में संघर्ष चल रहा था । एक प्रवृत्ति वह थी, जिसे फ्रांस की राज्यक्रान्ति ने पैदा किया था । दूसरी प्रवृत्ति उसकी प्रतिक्रिया के रूप में थी, जिसके प्रतिनिधि हिटलर और मुसोलिनी थे । सत्तावनवाँ अध्याय विश्वसंग्राम का इतिवृत्त एक. पोलैण्ड का अन्त एक सितम्बर, एक हज़ार नौ सौ छत्तीस को प्रातःकाल विश्वसंग्राम का श्रीगणेश हुआ। जर्मनी के बीच में से, डान्सिग के बन्दरगाह तक पहुँचने के लिए पोलैण्ड को जो गलियारा दिया गया था, उस पर उत्तर और दक्षिण, दोनों ओर से क्रमण किया गया। वारसा व अन्य पोल नगरों पर हवाई जहाजों द्वारा गोलाबारी की गई। हवाई जहाज के ग्रड्डों, रेलवे स्टेशनों व प्रमुख कारखानों पर वायुमार्ग से हमला किया गया। अन्सिग के बन्दरगाह पर समुद्र द्वारा आक्रमण हुआ। जर्मनी की जल, स्थल व वायुसेना एक साथ मिलकर पोलैण्ड को कुचल डालने के लिए आगे बढ़ने लगी । पोलैण्ड के लिए यह असम्भव था, कि जर्मनी की शक्ति - शाली सेना का मुकाबला कर सकता । यद्यपि उसके सैनिकों की संख्या दस लाख से ऊपर थी, पर ये नये वैज्ञानिक साधनों व उत्कृष्ट स्त्र शस्त्रों से सज्जित नहीं थे । पोलैण्ड की सेना जर्मनी के सम्मुख नहीं टिक सकी। चार दिन की लड़ाई के बाद, पाँच सितम्बर को सम्पूर्ण साइलीशिया पर जर्मनी का कब्जा हो गया। दो सप्ताह में जर्मन सेनाएँ वारसा तक पहुँच गई । फ्रांस और ब्रिटेन ने पोलैण्ड को यह आश्वासन दिया हुआ था, कि जर्मनी द्वारा आक्रमण होने की दशा में ये देश उसकी पूरी तरह सहायता करेंगे। इसी कारण, एक सितम्बर को लड़ाई शुरू होने पर लण्डन और पेरिस से जर्मनी को यह अल्टिमेटम दिया गया था, कि पोलैण्ड पर जिन सेनाओं ने हमला किया है, उन्हें तुरन्त वापस बुला लिया जाय । जर्मनी ने इस अल्टिमेटम की कोई परवाह नहीं की। परिणाम यह हुआ, कि तीन सितम्बर को फ्रांस और ब्रिटेन ने जर्मनी के खिलाफ लड़ाई की घोषणा कर दी। पोलैण्ड की सहायता करने के दो ही तरीके थे । एक तो यह, कि हवाई जहाजों द्वारा जर्मनी पर हमला किया जाय, और दूसरा यह कि जर्मनी की पश्चिमी सीमा पर लड़ाई छेड़ दी जाय । पोलैण्ड को यही आशा थी, कि फ्रांस और ब्रिटेन तुरन्त ही जर्मनी के खिलाफ सैनिक कार्रवाई शुरू कर देंगे। पर उसे निराश होना पड़ा। ब्रिटेन व फ्रांस की वायुसेना ने किसी भी प्रकार उसकी सहायता नहीं की, और न ही इस पैमाने पर पश्चिमी सीमा पर लड़ाई शुरू हुई, जिससे जर्मन सेनाओं को पोलैण्ड पर हमला करने में कुछ ढील देने की आवश्यकता हो । इसी बीच में, जब कि जर्मन सेनायें वारसा को तहस नहस करने में लगी थीं, सत्रह सितम्बर को प्रातः चार बजे रशियन सेनाओं ने पोलैण्ड पर कर दिया। रशिया समझता था, कि युक्रेनिया का जो प्रदेश पोलैण्ड की अधीनता में है, वह अनुचित है, और उसे स्वतन्त्र करके युक्रेनिया के साथ मिला देना चाहिए । उसने सोचा कि पोलैण्ड शीघ्र ही जर्मनी के हाथ में चला जायगा, और फिर इस प्रदेश को प्राप्त कर सकना सम्भव नहीं रहेगा। पाँच दिन में रशियन सेनाओं ने इस सारे प्रदेश पर अधिकार कर लिया। उधर जर्मन सेनायें भी निरन्तर आगे बढ़ रही थीं। वारसा देर तक उनके सम्मुख नहीं टिक सका । उसने घुटने टेक दिये, और पोलैण्ड की स्वतन्त्रता का अन्त हो गया । पर पोल लोगों ने अपराधीनता को स्वीकार नहीं किया। फ्रांस में स्वतन्त्र पोल सरकार का संगठन किया गया । जनरल सिकोस्कों इसका प्रधानमन्त्री बना । जो पोल सेना नष्ट होने या जर्मनी के हाथ में पड़ने से बच गई थी, उसका फ्रांस में ही पुनः संगठन किया गया । इसमें |
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की फस्द खोलें और मत्राद फेंफडे के दाहिनी तरफ में है या बांयी तरफ उस के पहचानने की यह विधि है कि ज्वरके समय ध्यान दे कि फोनसी तरफ का गाल विशेष लाल हो जाता है और छातीका भारापन कोनसी तरफ में मालूम होता है फिर जिस तरफ का गाल लाल हो और जिस तरफ में भारापन मालूम हो तो उसी तरफ सूजन है और ऐसेही जिस फरवटपर रोगी लेटे और उस समय मुखमें रतूत्रत विशेष आवे तो जान सकते हैं कि माद फेंफडेके इसी तरफ में है जैसे जो सृजन उसकी दाहिनी तरफ में हो तो दाहिनी करवटपर लेटनेसे चूक और रतूवत विशेष निकलेगी और ऐसेही उसके विरुद्ध । और साफिन की फस्द के खोलने के पीछे जो दफ्त अन्दाम की फस्दको वासलीकफी फस्ट से पहिले खोलें तो अति उत्तम होगा और खूनको शक्ति के अनुसार निकलना चाहिये जैसे जो रोगी बलवान हो तो तीन दिनका अन्तर देकर दूसरी फस्द खोलनी चा हिये और जो आरम्भमें वासलीफ की फस्द से आरम्भ करें तो चाहिये कि मूजन दूसरी ओर से फस्द खोले और परिणाम में उचित स्थान में से खोलें और फस्द खोलने और मवाद कम होने के पीछे कदाचित् छाती में पछने लगाने की आवश्यकता होती है जिससे जो मवाद बच रहा है वह कम होजाय और बाहर की तरफ आजाय और हकीम जालीनूस कहता है कि जो उपर बहुत गर्म हो तो दस्तावर दवा न देवे और केवल फस्द ही खो क्योंकि दो लने में भय नहीं और दस्तावर दवाओं के देने में पहाभय है क्योंकि कभी ऐसा होता है कि दस्तावर दवाएँ मवाद को हिलाकर दस्त नहीं लाती है और दर्द पड़ जाता है और कदाचित् वस्त बहुत बढ़ जाते हैं जिस मनुष्य के अंग लटकने की जगह में और मुरूप फेंफडे में सूजन हो तो फस्द सोलनी लाभदायक होगी और लटकी हुई जगह के मूम जाने का यह चिन्ह है कि गर्दन की इसली के समीप दर्द मालूम हो और जिस मनुष्य की पसलियों की तरफ दर्द हो तो उसको दस्तावर दवा विशेष लाभदायक होगी और जो हकीम ठीक समझे तो फस्द भी खोने और मवाद को गहराई में में निफा लने वाली दवा भी दे उसपे देखने से निश्चय होगा और उस सूजन में फि जो नजले से उत्पन्न हो फीफाल की फस्द खोलना लाभदायक है। और इन सब रोगों में मवाद के गाटे करने वाले पर्वत जैसा दयाहना दर्प और गिन चीजों से गवाद रुक जाता है का पानी में देना पाहिये । विताब शफाई के बनाने वाले ने लिखा है कि यूनान दाना सर्वन स
कालु आव पतले जुल्लाव के साथ ठहग २ कर पिवावें और गुनगुने पानी में छाती और पसलियों पर तरेदादें जिससे श्वास समानता से आप और जो दर्द होतो भी थम जायगा [लाभ ] जबकि मुजन में पीन पहनाय और ने का समय समपि आये तो श्वास का रुक्कर आना, छाती का भारापन और दर्द विशेष होजाय और जिसदिन पूजाय तो उवर जाने से आवे फिर जो अच्छी तरह से मवाद न निकला हो तो पीव के निकालने में परिश्रम करें जैसा कि नफ्सउलमिद्दा [ थूकमें पवि आना ] में वर्णन किया गया है और इसमकरण के अन्त में भी वर्णन किया जायगा और जानना चाहिये कि बहुधा ऐसा होता है कि फेंफड़े की सूजन बहुत पकजाने से पहले किसी कारण से जैसा बहुत क्रोष, कठिन परिश्रम, उपफाई लेना आदि कर्मों से फूटजाय और फेवल खून वा कधी पीच के साथ आने लगे तो इस सूरत में उसी समय फस्ट खोलनी चाहिये और सुखमें खून आने के इलाज की तरफ आरुद होना चाहिये । दूसरा भेद वह है कि सृजन का मवाद सादा अर्थात् बेसडा हुआ फफहो तो लुभव की अधिक्ता चहरेपर साली पर न होना, दयारा विशेष तग होना, छाती की गर्मी का कम होना, और सुख भरभराया हुआ दिखाई देना और ज्वर तथा भारापन या मगर होना ये लक्षण होते हैं और जानना चाहिये फि भीतर के अगों की कोई सुजन बिना श्वर के नहीं होनी परन्तु विशेषता और न्यूनता गवादके अनुसार होती है और कभी ऐसा होता है कि फेंफड़े में पानी कौसी तरीही हो जाती है और रोगी की दमानलन्थर वाले फीस होजाय और रासायर हर समय रहने एगे। आरम्भ में गर्म राजन के इलाज की तरफ आरड हो अर्थात् मियत कोहला परे और जय मवाद के हटाने वाली दवाओं का रेप करें जिससे पदाचित मयाद हट जाये और जप कई दिन पीज और जाता रहेगी होने लगे तो जो कुछ कफबारी खांसी वर्लन दिया गया है। अर्यापारा और मवाद का निकासना यही इस दूसरे प्रकार के रोग में पाम में शा और जूफा, अमीर या मैथी का वादा दिवावें और भोजन ग्रामसेवा पानी, जी का पानी, गैर का पानी, गृह की हसी पा सीरा शाद और पी सपा और जो मयाद रफा हुआ हो तो मानपद्मा, सुनना पैदा इटी १ तोले और ५ दाने अमीर पानी में औऔर में अ मस्सास विना पार्ट टाल्दें और निफर बादाम का तेल मियर विमानें
कालु आव पतले जुल्लाव के साथ ठहग २ कर पिवावें और गुनगुने पानी में छाती और पसलियों पर तरेदादें जिससे दबास समानता से आये और जो दर्द होतो भी थम जायगा [लाभ ] जबकि मुजन में पीर पहनाय और ने का समय समपि आये तो श्वास का रुक्कर आना, छाती का भारापन और दर्द विशेष होजाय और जिसदिन पूजाय तो उवर जाने से आयें फिर जो अच्छी तरह से मवाद न निकला हो तो पीव के निकालने में परिश्रम परें जैसा कि नफ्सउलमिद्दा [ थूकमें पवि आना ] में वर्णन किया गया है और इसप्रकरण के अन्त में भी वर्णन किया जायगा और जानना चाहिये कि बहुधा ऐसा होता है कि फेंफडेकी सृजन बहुत पकजाने से पहले किसी कारण से जैसा बहुत क्रोध, कठिन परिश्रम, उबकाई लेना आदि कर्मो से फूटजाय और फेवल खून वा कधी पीच के साथ आने लगे तो इस सूरत में उसी समय फस्ट खोलनी चाहिये और सुखमें खुन आने के इलाज की तरफ आरुढं होना चाहिये । दूसरा भेद वह है कि सुजन का मवाद सादा अर्थात् बेसडा हुआ फफहो तो लुभव की अधिकता चहरेपर लाली पा न होना, दवारा विशेष तग होना, छाती की गर्मी का कम होना, और मुख भरभराया हुआ दिखाई देना और ज्वर तथा भारापन या गट होना ये होते है और जानना चाहिये फि भीतर के अगों की कोई सुजन बिना उचर के नहीं होती परन्तु विशेषता और न्यूनता मवादके अनुसार होती है और भी ऐसा होता है कि फेंफड़े में पानी कोसी तरीही हो जाती है और रोगी की दमानरन्थर वाले फांसी होनाय और उपर हर समय रहने लगे। आरम्म
में गर्म राजन के इलाज की तरफ आस्ट हो अर्थात् मियत को हम परें और जय मवाद के हटाने वाली दवाओं पा रेप करें जिससे पदाचित मचाद इट जाये और जय कई दिन पी जांप और यर जाता रहेगी होने लगे तो जो कुछ कफबारी खांसी वर्लन किया गया है। अर्यादाना और मवाद का निकालना पही इस दूसरे प्रकार के रोग में काम में और जुफा, अमीर मेथीका पाटा दियाबें और भोजन बावापानी, जी का पानी, गैह पा पानी, गेहू की इसी पा सीरा शहद और पी साग सपा और जो मयाद रफा हुआ हो तो मानपक्षा, सुनना पैदा ५० इटी १ नोले और 4 दाने अमीर पानी में और में मस्साथ दिवना पाल्दें और नर बादाम का देल र विमानें
(तिब्ब अफचर )
लाभदायक हैं और कभी इन चटनियों में कोई ज्ञानशक्ति के नष्टकरने वाली वस्तु मिलालेते हैं जैसे खशखाश की छाल और खुगसानी अजवायन जिससे स सी एकजाती है और जब मचाद बिलकुल पकगया हो तो उसके फोडने का उपाय करें और यह इस प्रकार का होता है कि लननी का घूम करें और मुख खोलकर उस पर रक्खें जिससे धूआं गले में पहुंचे और रोगी को इस पर बैठना और उसके मूहों को जोर से हिलाना, मछली का शोरुना पीना यारज फयकरा और इन्द्रायन के गूदे की गोलियां बनाकर रात के समय में रखना जिससे धीरे २ पानी होफर गले में जाय और होंगे, जावशीर के साथ डालकर देना इससे लाभदायक है और राई को शहद के पानी में देंनाभी ठीक है और कोई २ हकीम खाने के पीछे वमन परादेते हैं जिससे उसकी गति से सूजन फूट जाय परन्तु उसमें भयो क्योंकि कदादि विशेष खोलदे और मवाद को एक साथ हटाये और गलासूम जाप । जानना चा हिये कि पुराने हकीम पकाने वाले और खोलने वाले उपाय सात दिव पीछे काम में लाये है परन्तु ज्ञानवान हकीम को चाहिये कि ऐसे मार्ग में न चले कि गिरपढे किंतु ऐसी सावधानी करें जिससे गर्मी और मूजन विशेष न हो और रोग पर रोग न चढ़ और जर सूजन सुलमाग और पीय आने लगे और रोगी को अपने देश में इलफापन मालूम हो तो छाती के साफ फरने के लिये जो कुछ तर खांसी और श्वास के तग आने में वर्णन किया गया है और धूक में पीव आने में वर्णन हो चुका है काम में लाने और उचित है कि फेंफड़े की पीव, मिगर की रगर्क द्वारा निगरमें जाय और यहां से मलमूत्र के द्वारा निकल जाय जैसा कि छानी में पीव के बद होने के विषय में इसका वर्णन आरंगा ।
सिक अर्थात फेंफड़े में पीय पढजाने का वर्णन । जानना चाहिये कि यह रोग उन लोगों को उत्पन होता है जिनके दि माग से घेपदार स्तूपरों फेंफड़े पर गिरती रहती है यह दवा विशेष खांसी उत्पन्न करता है और जो घाव पेफड़े में उत्पन्न होना है तो रूप अच्छा होता है। यह रोग बहुत दिनों तक रहता है और कमी तरण अपरगा तक बाफी रहता है। यह रोग उडे उघरी देशों में गर्मी तथा माई की ऋतु में और पूर्वी देशों में सरीफ की ऋतु में उत्पन्न होता है और प
( तिब्द अकबर )
लाभदायक है और कभी इन चटनियों में कोई शनशक्ति के नष्टकरने वाली वस्तु मिळालेते हैं जैसे खशखाश की छाल और खुगसानी अजवायन जिससे स सी एकजाती हैं और जब मवाद बिलकुल पकगया हो तो उसके फोड़ने का उपाय करें और यह इस प्रकार का होता है कि लुननी का करें और मुख खोलकर उस पर स्वखें जिससे धूआं गले में पहुंचे और रोगी को इसी पर बैठना और उसके मूढों को जोर से हिलाना, मछली का शोरूषा पीना पारज फयकरा और इन्द्रायन के गूदे की गोलियां बनाकर रात के समय ख में रखना जिससे धीरे २ पानी होफर गले में जाय और हींग, जावशीर के साथ डालकर दैना इससे लाभदायक है और राई को शहद के पानी में हैनाभी ठीक है और कोई २ हकीम खाने के पीछे वमन फरादेते है जिससे उसकी गति से सूजन फूट जाय परन्तु उसमें भयदै क्योंकि कदाचिद् विशेष खोलदे और मत्राद को एक साथ हटाये और गलाज जाप । जानना था दिये कि पुराने हकीम पकाने वाले और खोलने वाले उपाय सात दिन के पीछे काम में लाये है परन्तु ज्ञानवान हकीम को चाहिये कि ऐसे मार्ग में न घले कि गिरपढे किंतु ऐसी सावधानी करें जिससे गर्मी और मूजन विशेष न हो और रोग पर रोग न चढ़ और जर सूजन सुलमाग और पीय आने लगे और रोगी को अपने देश में इलफापन मालूम हो तो छाती के साफ फरने के लिये जो कुछ तर खांसी और श्वास के तग आने में वर्णन किया गया है और धूक में पीव आने में वर्णन हो चुका है काम में लायें और वचित है कि फेंफडे की पीव, मिगर की रगर्क द्वारा निगरमें जाप और मां से मलमूत्र के द्वारा निकल जाय जैसा कि छानी में पीव के बद होने के विषय में इसका वर्णन आउँगा ।
सिक अर्थात फेंफड़े में पीय पढजाने का वर्णन । जानना चाहिये कि यह रोग उन लोगों को उत्पन्न होता है जिनके दि माग से घेपदार स्तूप फेंफड़े पर गिरती रहती है यह दवा विशेष खांसी उत्पन्न करता है और जो घाव पेफड़े में उत्पन्न होता है तो कम होता है। यह रोग बहुत दिनों तक रहता है और कमी तरण अपरमा तक पाफी रहता है। यह रोग उडे चघरी देशों में गर्मी तथा आहे की तु और पूर्वी देशों में सरीफ की ऋतु में उत्पन्न होता है और न | की फस्द खोलें और मत्राद फेंफडे के दाहिनी तरफ में है या बांयी तरफ उस के पहचानने की यह विधि है कि ज्वरके समय ध्यान दे कि फोनसी तरफ का गाल विशेष लाल हो जाता है और छातीका भारापन कोनसी तरफ में मालूम होता है फिर जिस तरफ का गाल लाल हो और जिस तरफ में भारापन मालूम हो तो उसी तरफ सूजन है और ऐसेही जिस फरवटपर रोगी लेटे और उस समय मुखमें रतूत्रत विशेष आवे तो जान सकते हैं कि माद फेंफडेके इसी तरफ में है जैसे जो सृजन उसकी दाहिनी तरफ में हो तो दाहिनी करवटपर लेटनेसे चूक और रतूवत विशेष निकलेगी और ऐसेही उसके विरुद्ध । और साफिन की फस्द के खोलने के पीछे जो दफ्त अन्दाम की फस्दको वासलीकफी फस्ट से पहिले खोलें तो अति उत्तम होगा और खूनको शक्ति के अनुसार निकलना चाहिये जैसे जो रोगी बलवान हो तो तीन दिनका अन्तर देकर दूसरी फस्द खोलनी चा हिये और जो आरम्भमें वासलीफ की फस्द से आरम्भ करें तो चाहिये कि मूजन दूसरी ओर से फस्द खोले और परिणाम में उचित स्थान में से खोलें और फस्द खोलने और मवाद कम होने के पीछे कदाचित् छाती में पछने लगाने की आवश्यकता होती है जिससे जो मवाद बच रहा है वह कम होजाय और बाहर की तरफ आजाय और हकीम जालीनूस कहता है कि जो उपर बहुत गर्म हो तो दस्तावर दवा न देवे और केवल फस्द ही खो क्योंकि दो लने में भय नहीं और दस्तावर दवाओं के देने में पहाभय है क्योंकि कभी ऐसा होता है कि दस्तावर दवाएँ मवाद को हिलाकर दस्त नहीं लाती है और दर्द पड़ जाता है और कदाचित् वस्त बहुत बढ़ जाते हैं जिस मनुष्य के अंग लटकने की जगह में और मुरूप फेंफडे में सूजन हो तो फस्द सोलनी लाभदायक होगी और लटकी हुई जगह के मूम जाने का यह चिन्ह है कि गर्दन की इसली के समीप दर्द मालूम हो और जिस मनुष्य की पसलियों की तरफ दर्द हो तो उसको दस्तावर दवा विशेष लाभदायक होगी और जो हकीम ठीक समझे तो फस्द भी खोने और मवाद को गहराई में में निफा लने वाली दवा भी दे उसपे देखने से निश्चय होगा और उस सूजन में फि जो नजले से उत्पन्न हो फीफाल की फस्द खोलना लाभदायक है। और इन सब रोगों में मवाद के गाटे करने वाले पर्वत जैसा दयाहना दर्प और गिन चीजों से गवाद रुक जाता है का पानी में देना पाहिये । विताब शफाई के बनाने वाले ने लिखा है कि यूनान दाना सर्वन स कालु आव पतले जुल्लाव के साथ ठहग दो कर पिवावें और गुनगुने पानी में छाती और पसलियों पर तरेदादें जिससे श्वास समानता से आप और जो दर्द होतो भी थम जायगा [लाभ ] जबकि मुजन में पीन पहनाय और ने का समय समपि आये तो श्वास का रुक्कर आना, छाती का भारापन और दर्द विशेष होजाय और जिसदिन पूजाय तो उवर जाने से आवे फिर जो अच्छी तरह से मवाद न निकला हो तो पीव के निकालने में परिश्रम करें जैसा कि नफ्सउलमिद्दा [ थूकमें पवि आना ] में वर्णन किया गया है और इसमकरण के अन्त में भी वर्णन किया जायगा और जानना चाहिये कि बहुधा ऐसा होता है कि फेंफड़े की सूजन बहुत पकजाने से पहले किसी कारण से जैसा बहुत क्रोष, कठिन परिश्रम, उपफाई लेना आदि कर्मों से फूटजाय और फेवल खून वा कधी पीच के साथ आने लगे तो इस सूरत में उसी समय फस्ट खोलनी चाहिये और सुखमें खून आने के इलाज की तरफ आरुद होना चाहिये । दूसरा भेद वह है कि सृजन का मवाद सादा अर्थात् बेसडा हुआ फफहो तो लुभव की अधिक्ता चहरेपर साली पर न होना, दयारा विशेष तग होना, छाती की गर्मी का कम होना, और सुख भरभराया हुआ दिखाई देना और ज्वर तथा भारापन या मगर होना ये लक्षण होते हैं और जानना चाहिये फि भीतर के अगों की कोई सुजन बिना श्वर के नहीं होनी परन्तु विशेषता और न्यूनता गवादके अनुसार होती है और कभी ऐसा होता है कि फेंफड़े में पानी कौसी तरीही हो जाती है और रोगी की दमानलन्थर वाले फीस होजाय और रासायर हर समय रहने एगे। आरम्भ में गर्म राजन के इलाज की तरफ आरड हो अर्थात् मियत कोहला परे और जय मवाद के हटाने वाली दवाओं का रेप करें जिससे पदाचित मयाद हट जाये और जप कई दिन पीज और जाता रहेगी होने लगे तो जो कुछ कफबारी खांसी वर्लन दिया गया है। अर्यापारा और मवाद का निकासना यही इस दूसरे प्रकार के रोग में पाम में शा और जूफा, अमीर या मैथी का वादा दिवावें और भोजन ग्रामसेवा पानी, जी का पानी, गैर का पानी, गृह की हसी पा सीरा शाद और पी सपा और जो मयाद रफा हुआ हो तो मानपद्मा, सुनना पैदा इटी एक तोले और पाँच दाने अमीर पानी में औऔर में अ मस्सास विना पार्ट टाल्दें और निफर बादाम का तेल मियर विमानें कालु आव पतले जुल्लाव के साथ ठहग दो कर पिवावें और गुनगुने पानी में छाती और पसलियों पर तरेदादें जिससे दबास समानता से आये और जो दर्द होतो भी थम जायगा [लाभ ] जबकि मुजन में पीर पहनाय और ने का समय समपि आये तो श्वास का रुक्कर आना, छाती का भारापन और दर्द विशेष होजाय और जिसदिन पूजाय तो उवर जाने से आयें फिर जो अच्छी तरह से मवाद न निकला हो तो पीव के निकालने में परिश्रम परें जैसा कि नफ्सउलमिद्दा [ थूकमें पवि आना ] में वर्णन किया गया है और इसप्रकरण के अन्त में भी वर्णन किया जायगा और जानना चाहिये कि बहुधा ऐसा होता है कि फेंफडेकी सृजन बहुत पकजाने से पहले किसी कारण से जैसा बहुत क्रोध, कठिन परिश्रम, उबकाई लेना आदि कर्मो से फूटजाय और फेवल खून वा कधी पीच के साथ आने लगे तो इस सूरत में उसी समय फस्ट खोलनी चाहिये और सुखमें खुन आने के इलाज की तरफ आरुढं होना चाहिये । दूसरा भेद वह है कि सुजन का मवाद सादा अर्थात् बेसडा हुआ फफहो तो लुभव की अधिकता चहरेपर लाली पा न होना, दवारा विशेष तग होना, छाती की गर्मी का कम होना, और मुख भरभराया हुआ दिखाई देना और ज्वर तथा भारापन या गट होना ये होते है और जानना चाहिये फि भीतर के अगों की कोई सुजन बिना उचर के नहीं होती परन्तु विशेषता और न्यूनता मवादके अनुसार होती है और भी ऐसा होता है कि फेंफड़े में पानी कोसी तरीही हो जाती है और रोगी की दमानरन्थर वाले फांसी होनाय और उपर हर समय रहने लगे। आरम्म में गर्म राजन के इलाज की तरफ आस्ट हो अर्थात् मियत को हम परें और जय मवाद के हटाने वाली दवाओं पा रेप करें जिससे पदाचित मचाद इट जाये और जय कई दिन पी जांप और यर जाता रहेगी होने लगे तो जो कुछ कफबारी खांसी वर्लन किया गया है। अर्यादाना और मवाद का निकालना पही इस दूसरे प्रकार के रोग में काम में और जुफा, अमीर मेथीका पाटा दियाबें और भोजन बावापानी, जी का पानी, गैह पा पानी, गेहू की इसी पा सीरा शहद और पी साग सपा और जो मयाद रफा हुआ हो तो मानपक्षा, सुनना पैदा पचास इटी एक नोले और चार दाने अमीर पानी में और में मस्साथ दिवना पाल्दें और नर बादाम का देल र विमानें लाभदायक हैं और कभी इन चटनियों में कोई ज्ञानशक्ति के नष्टकरने वाली वस्तु मिलालेते हैं जैसे खशखाश की छाल और खुगसानी अजवायन जिससे स सी एकजाती है और जब मचाद बिलकुल पकगया हो तो उसके फोडने का उपाय करें और यह इस प्रकार का होता है कि लननी का घूम करें और मुख खोलकर उस पर रक्खें जिससे धूआं गले में पहुंचे और रोगी को इस पर बैठना और उसके मूहों को जोर से हिलाना, मछली का शोरुना पीना यारज फयकरा और इन्द्रायन के गूदे की गोलियां बनाकर रात के समय में रखना जिससे धीरे दो पानी होफर गले में जाय और होंगे, जावशीर के साथ डालकर देना इससे लाभदायक है और राई को शहद के पानी में देंनाभी ठीक है और कोई दो हकीम खाने के पीछे वमन परादेते हैं जिससे उसकी गति से सूजन फूट जाय परन्तु उसमें भयो क्योंकि कदादि विशेष खोलदे और मवाद को एक साथ हटाये और गलासूम जाप । जानना चा हिये कि पुराने हकीम पकाने वाले और खोलने वाले उपाय सात दिव पीछे काम में लाये है परन्तु ज्ञानवान हकीम को चाहिये कि ऐसे मार्ग में न चले कि गिरपढे किंतु ऐसी सावधानी करें जिससे गर्मी और मूजन विशेष न हो और रोग पर रोग न चढ़ और जर सूजन सुलमाग और पीय आने लगे और रोगी को अपने देश में इलफापन मालूम हो तो छाती के साफ फरने के लिये जो कुछ तर खांसी और श्वास के तग आने में वर्णन किया गया है और धूक में पीव आने में वर्णन हो चुका है काम में लाने और उचित है कि फेंफड़े की पीव, मिगर की रगर्क द्वारा निगरमें जाय और यहां से मलमूत्र के द्वारा निकल जाय जैसा कि छानी में पीव के बद होने के विषय में इसका वर्णन आरंगा । सिक अर्थात फेंफड़े में पीय पढजाने का वर्णन । जानना चाहिये कि यह रोग उन लोगों को उत्पन होता है जिनके दि माग से घेपदार स्तूपरों फेंफड़े पर गिरती रहती है यह दवा विशेष खांसी उत्पन्न करता है और जो घाव पेफड़े में उत्पन्न होना है तो रूप अच्छा होता है। यह रोग बहुत दिनों तक रहता है और कमी तरण अपरगा तक बाफी रहता है। यह रोग उडे उघरी देशों में गर्मी तथा माई की ऋतु में और पूर्वी देशों में सरीफ की ऋतु में उत्पन्न होता है और प लाभदायक है और कभी इन चटनियों में कोई शनशक्ति के नष्टकरने वाली वस्तु मिळालेते हैं जैसे खशखाश की छाल और खुगसानी अजवायन जिससे स सी एकजाती हैं और जब मवाद बिलकुल पकगया हो तो उसके फोड़ने का उपाय करें और यह इस प्रकार का होता है कि लुननी का करें और मुख खोलकर उस पर स्वखें जिससे धूआं गले में पहुंचे और रोगी को इसी पर बैठना और उसके मूढों को जोर से हिलाना, मछली का शोरूषा पीना पारज फयकरा और इन्द्रायन के गूदे की गोलियां बनाकर रात के समय ख में रखना जिससे धीरे दो पानी होफर गले में जाय और हींग, जावशीर के साथ डालकर दैना इससे लाभदायक है और राई को शहद के पानी में हैनाभी ठीक है और कोई दो हकीम खाने के पीछे वमन फरादेते है जिससे उसकी गति से सूजन फूट जाय परन्तु उसमें भयदै क्योंकि कदाचिद् विशेष खोलदे और मत्राद को एक साथ हटाये और गलाज जाप । जानना था दिये कि पुराने हकीम पकाने वाले और खोलने वाले उपाय सात दिन के पीछे काम में लाये है परन्तु ज्ञानवान हकीम को चाहिये कि ऐसे मार्ग में न घले कि गिरपढे किंतु ऐसी सावधानी करें जिससे गर्मी और मूजन विशेष न हो और रोग पर रोग न चढ़ और जर सूजन सुलमाग और पीय आने लगे और रोगी को अपने देश में इलफापन मालूम हो तो छाती के साफ फरने के लिये जो कुछ तर खांसी और श्वास के तग आने में वर्णन किया गया है और धूक में पीव आने में वर्णन हो चुका है काम में लायें और वचित है कि फेंफडे की पीव, मिगर की रगर्क द्वारा निगरमें जाप और मां से मलमूत्र के द्वारा निकल जाय जैसा कि छानी में पीव के बद होने के विषय में इसका वर्णन आउँगा । सिक अर्थात फेंफड़े में पीय पढजाने का वर्णन । जानना चाहिये कि यह रोग उन लोगों को उत्पन्न होता है जिनके दि माग से घेपदार स्तूप फेंफड़े पर गिरती रहती है यह दवा विशेष खांसी उत्पन्न करता है और जो घाव पेफड़े में उत्पन्न होता है तो कम होता है। यह रोग बहुत दिनों तक रहता है और कमी तरण अपरमा तक पाफी रहता है। यह रोग उडे चघरी देशों में गर्मी तथा आहे की तु और पूर्वी देशों में सरीफ की ऋतु में उत्पन्न होता है और न |
पितृ शासन है और तीसरा पति द्वारा पत्नी का शासन है । यद्यपि गृहपति, पत्नी और सन्तान दोनों पर शासन करता है, तथा दोनों पर स्वतंत्र जनों के समान शासन करता है, तथापि दोनों पर शासन करने का प्रकार एक ही नहीं होता। पत्नी पर शासन करने का प्रकार वैध शासन' का प्रकार होता है तथा सन्तान पर शासन का प्रकार राजकीय शासन का प्रकार होता है । यदि प्रकृति के नियम में अपवाद न हो तो पुरुष स्त्री की अपेक्षा शासन के लिये अधिक उपयुक्त होता है तथा अधिक अवस्थावाला एवं पूर्ण विकसित कम अवस्थावाले तथा अविकसित की अपेक्षा अधिक योग्य होता है। अधिकांश ऐसे प्रसंगों में, जहाँ कि वैध-शासन चलता है, शासन करना और शासित होना पर्यायक्रम से हुआ करता है ; ( क्योंकि वैधशासन की भावना में ही यह बात सन्निहित होती है कि ) किसी भी राजनीतिक परिषद् के सदस्य प्रकृत्या एक बराबर होते हैं और उनमें कुछ भी अन्तर नहीं होता । परन्तु फिर भी, जब कोई एक व्यक्ति शासन करता होता है (अथवा नागरिकों की कोई एक परिषद् शासन करती होती है) तथा अन्य लोग शासित होते हुए होते हैं तब शासक ( अथवा शासकमंडल) बाह्याचार, संबोधन- पद्धति, सम्मानसूचक पदों में भेद की स्थापना करने की चेष्टा करता है, जैसा कि अपने पैरधोने की परात के विषय में अमासिस के कथन से स्पष्ट प्रकट है । पति का पत्नी के प्रति स्थायी रूप से वही संबंध होता है जो वैध-शासक का शासितों के प्रति ( अस्थायी रूप से ) होता है । पिता का सन्तान पर जो शासन होता है वह ऐसा होता है जैसा कि राजा का अपनी प्रजा पर ; क्योंकि वह प्रेम और आयु के सम्मान के आधार पर शासक की स्थिति में होता है तथा यह स्थिति वैसी ही होती है जैसी कि राजकीय शासन की । इसलिए जियुस ( द्यौस् ) को संबोधन करते हुए होमेर ने ठीक ही कहा --
"पिता मानवों का, देवों
क्योंकि वह इन सबका राजा है। राजा प्रकृति से ही अपने प्रजाजनों से श्रेष्ठ होना चाहिये पर जाति अथवा कुल में उन्हीं के समान होना चाहिये तथा गुरुजनों और छोटों एवं पिता और सन्तान का संबंध इसी प्रकार का होता है ।
१. वैध शासन से तात्पर्य उस शासन से है जो किसी संविधान के नियमों का अनुसरण करता है तथा जिसमें सब प्रजाजनों को पर्याय से शासन करने तथा शासित होने का अवसर प्राप्त होता है। यह तानाशाही शासन से भिन्न है जिसमें शासक
स्वेच्छा से शासन करता है तथा शासितों को शासन में कोई अधिकार प्राप्त नहीं होता। अरिस्तू के मतानुसार पति पत्नी पर जो शासन करता है वह बहुत कुछ वैधानिक प्रकार का होता है। अन्तर केबल इतना ही है कि इस व्यवस्था में शासक और शासित की स्थिति में पर्यायक्रम से परिवर्तन नहीं होता।
२. अमासिस एक साधारण प्रजाजन था; आगे चलकर वह राजा हो गया। उसने एक स्वर्ण देव-प्रतिमा को गलवाकर अपने पैर धोने के लिये परात बनवाई। मिस्र देश के रहनेवाले इस परात का भी अत्यधिक सम्मान करने लगे। अमासिस् ने एक बार अपने प्रजाजनों को उपदेश करते हुए उस परात का दृष्टान्त देकर समझाया कि मेरी अपनी स्थिति बहुत कुछ इस परात के समान है; पर मेरे प्रति तुम लोगों का व्यवहार जो मेरी वर्तमान स्थिति है उसके अनुरूप होना चाहिये न कि मेरी भूतकालिक स्थिति के अनुरूप ।
३. राजा का शासन प्रजा के प्रति प्रेम और सद्भावना से पूर्ण होना चाहिये । ऐतिहासिक वृष्टि से अरिस्तू राजा को एक बड़े कुटुम्ब के ज्येष्ठ श्रेष्ठ पुरुष से विकसित हुआ मानता है। आगे चलकर वह राजकीय शासन का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है। ऐसा प्रतीत होता है कि वह राजकीय शासन को उत्तम प्रकार का शासन मानता । तुलना कीजिये सं० -- "राजा प्रकृतिरञ्जनात् ।"
४. द्यौस के लिए मूल में "जियुस्" का कर्म कारक का रूप "दिया" प्रयुक्त हुआ है । यह शब्द संस्कृत के द्यौस का सजातीय है। भारतीय एवं ग्रीक दोनों धर्मों में द्यौस सबका पिता एवं शासक है।
शासक तथा शासित के गुणों में अंतर
इसलिये यह स्पष्ट है कि गृह-प्रबन्ध-कला निर्जीव सम्पत्ति की अपेक्षा मनुष्यों के प्रति, धन ( जिसको हम सम्पदा कहते हैं ) की उत्तमता की अपेक्षा मनुष्यों की उत्तमता के प्रति और ( मनुष्यों में भी ) दासों की अपेक्षा स्वतंत्र पुरुषों के प्रति अधिक ध्यान देती है। इस संबंध में सर्वप्रथम यह प्रश्न उत्पन्न होता है कि क्या किसी दास में उपकरणात्मक तथा (निम्न कोटि के ) सेवात्मक गुणों के अतिरिक्त अथवा इनसे ऊँची और कोई उत्तमता किचिन्मात्र भी हो सकती है ? क्या उसमें संयम, साहस, न्याय एवं इसी प्रकार की अन्य सद्वृत्तियाँ हो सकती हैं अथवा उसमें कठोर शारीरिक सेवा
की वृत्ति को छोड़कर और कोई भी गुण नहीं होता ? दोनों प्रकार के उत्तरों (हाँ अथवा नहीं) में कठिनाई का सामना है। यदि दासों में उच्च कोटि के गुण माने जायँ तो वे स्वतंत्र मनुष्यों से किस प्रकार भिन्न होंगे? यदि यह कहें कि उनमें यह गुण नहीं हैं तो यह एक अनोखी बात होगी कि मनुष्य होने के कारण विवेक के भागीदार होते हुए भी ( वे विवेकजन्य सद्गुणों से वंचित हैं ) । लगभग इसी से मिलता-जुलता प्रश्न स्त्रियों और बच्चों के विषय में भी पूछा जा सकता है कि क्या उनमें सद्गुण होते हैं ; क्या स्त्री को भी संयत, साहसी और न्यायी होना चाहिये; और क्या कोई बच्चा असंयत, अथवा संयत हो सकता है या नहीं ? यही प्रश्न सामान्यरूपेण पूछा जाना चाहिये और वह इस प्रकार कि जो प्रकृत्या शासक हैं तथा जो प्रकृत्या शासित हैं उनके गुण एक ही हैं अथवा एक दूसरे से पृथक् हैं ? यदि यह कहो कि दोनों में समान रूप से उदार स्वभाव होना चाहिये तो ऐसा क्यों होना चाहिये कि उनमें से एक तो सर्वदा शासन करे और दूसरा नित्य शासित हो । और न यह अन्तर अधिक या अल्प मात्रा के अन्तर के समान है; क्योंकि शासक और शासित का अन्तर तो प्रकारगत अन्तर है, एवं अधिक और अल्प ( मात्रा का ) इससे कोई संबंध नहीं है । यदि, दूसरी ओर यह कहें कि उनमें से एक में तो सद्गुण होने चाहिये तथा दूसरे में नहीं होने चाहिये तो यह बड़ी अनोखी सम्मति होगी। क्योंकि यदि शासक संयमी और न्यायी न हो तो वह अच्छे प्रकार से शासन कैसे कर सकेगा एवं यदि शासित संयमी और न्यायी न हो तो वह भले प्रकार शासित कैसे हो सकता है ? कोई भी ऐसा व्यक्ति जो उच्छृङ्खल अथवा कायर हो, अपने कर्तव्य का पालन निश्चयमेव नहीं कर सकता । अतएव यह स्पष्ट है कि सद्गुणों में तो दोनों का भाग अवश्य होना चाहिये, पर ( दोनों के -- अर्थात् शासक और शासितों के ) सद्गुण भिन्न प्रकार के होने चाहिये, ठीक जिस प्रकार कि प्रकृत्या शासितव्य प्रजाजनों के सद्गुणों में भी प्रकार - भेद होता है ।
और यह विचार ( कि शासक और शासितों के गुण पृथक् पृथक् होते हैं) हमको सीधे आत्मा (साक्षी) के स्वरूप की ओर ले जाता है। आत्मा में स्वाभाविकतया एक अंश शासक है तथा दूसरा शासित ; एवं इनमें से प्रत्येक का अपना पृथक् गुण है, एकगुणका संबंध शासक एवं विवेकयुक्त अंश से है तथा दूसरेका शासित एवं अविवेकयुक्त अंश से। और फिर यह तो स्पष्ट ही है कि जो बात प्रस्तुत प्रकरण में ठीक बैठती है वह अन्य स्थलों में भी लागू होती है; अतएव हम इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि यह एक सामान्य नियम है कि शासक और शासित अंशों की सत्ता स्वभाव से ही है। पर एक ही नियम क्षेत्र-भेद के अनुसार भिन्न प्रकार से काम करता है। स्वतंत्र पुरुष जिस प्रकार दास पर
शासन करता है वह उस प्रकार से भिन्न होता है जिस प्रकार से पुरुष स्त्री पर शासन करता है अथवा बड़ा मनुष्य बच्चे पर । आत्मा के (उपर्युक्त) अंश तो इन ( स्वतंत्र पुरुष, दास, स्त्री, पुरुष, एवं बड़े और बालक ) सब में ही विद्यमान रहते हैं पर उनकी स्थिति इनमें से प्रत्येक में पृथक् प्रकार से होती है । " दास में विचार करने की क्षमता बिलकुल नहीं होती' ; स्त्री में यह क्षमता होती तो है पर अधिकारशून्य ( अथवा अकिंचित्कर) ही रहती है, एवं होती बच्चों में भी है पर अपरिपक्व ( अविकसित ) रूप में ही । तथा जैसा (आत्मा के अंशों के विषय में समझा जाता है) वैसा ही अवश्यमेव सदाचार संबंधी सद्गुणों की स्थिति के विषय में भी समझा जाना चाहिये । ( उपर्युक्त ) सब व्यक्ति इन सद्गुणों में भागीदार होते हैं, पर एक ही प्रकार से नहीं प्रत्युत प्रत्येक व्यक्ति उसी प्रकार और उतनी ही मात्रा में उनका भाजन होता है जो उसके अपने कार्य को पूर्ण करने के लिये उपयुक्त हों । अतः शासक को सदाचार-संबंधी पूर्ण विकसित सद्गुण प्राप्त होना चाहिये; क्योंकि यदि उसके कार्य के पूर्ण स्वरूप का निरपेक्ष भाव से विचार करें तो उसके लिये श्रेष्ठ निर्माता की आवश्यकता प्रतीत होगी तथा ऐसा उत्तम निर्माता विवेक ही है । शेष अन्य व्यक्तियों को सदाचार संबंधी सद्गुण की आवश्यकता उतनी ही मात्रा में होती है जितनी उनमें से प्रत्येक की स्थिति के लिये अपेक्षित है । इस प्रकार यह स्पष्ट है कि आचार-संबंधी सद्गुण तो उपर्युक्त सभी व्यक्तियों में उपलब्ध होता है तथापि, जैसा कि सॉस' का मत है, स्त्री और पुरुष का संयम एक-सा नहीं होता और न उनमें पाये जानेवाले साहस और न्याय ही एक समान होते हैं । उदाहरणार्थ पुरुष में पाया जानेवाला साहस शासकोचित होता है एवं स्त्री में पाया जानेवाला सेवकोचित । यही बात अन्य सब सद्गुणों के संबंध में भी लागू होती है ।
जब हम इस विषय पर अधिक विस्तार के साथ दृष्टिपात करेंगे और इसके पृथक् पृथक् विभागों का विचार करेंगे तो यही निष्कर्ष और भी अधिक स्पष्टतया निष्पन्न हो जायगा । सामान्य शब्दों का प्रयोग करते हुए यह मत प्रकट करना कि सद्गुण ( अथवा सद्वृत्ति ) "आत्मा की स्वस्थता है" (अच्छी अवस्था है) अथवा "उचित कर्म" है अथवा ऐसी ही अन्य कोई बात है, तो अपने ही को धोखा देना होगा। इस प्रकार की सामान्य परिभाषाओं की अपेक्षा तो सद्गुण अथवा भलाई के प्रकारों की गिनती गिना देने की पद्धति कहीं अधिक अच्छी है, जिसका अनुसरण गौर्गियास के द्वारा किया गया है । अतः सब वर्गों के विषय में यह समझा जाना चाहिये कि उनके अपने अपने भलाई के विशेष लक्षण होते हैं; एवं यह जो सौफौक्लेस् ने स्त्रियों के विषय में कहा है कि
"नारी की सुषमा है मौन" इसमें भी सामान्य सत्य निहित है, पर यह सत्य पुरुष के विषय में लागू नहीं होता । ( इसी प्रकार यदि बालकों के उदाहरण को लें तो) बच्चा जो अपरिपक्व होता है तो यह स्पष्ट ही है कि उसकी सद्वृत्ति (अथवा भलाई) केवल अपने वर्तमान स्वरूप की अपेक्षा ऐसी ( अर्थात् अपरिपक्व ) नहीं होती प्रत्युत उसकी भावी परिणति एवं उस परिणति की ओर उसका नेतृत्व करनेवाले गुरु ( पिता ) की अपेक्षा अपरिपक्व होती है। ऐसे ही दास की सद्वृत्ति ( = भलाई ) प्रभु-संबंध सापेक्ष्य है ।
हम यह निर्णय तो स्थापित कर चुके कि दास को जीवन की आवश्यकताओं के लिये उपयोगी होना चाहिये । अतएव ( उक्त निर्णय से ) यह स्पष्ट ही है कि उनको थोड़े से ही सद्गुण की आवश्यकता है; और वह वास्तव में बस इतना होना चाहिये कि जिससे वह कहीं असंयम अथवा भीरुता के कारण अपने कर्त्तव्य से च्युत न हो जाय । इस पर यह प्रश्न हो सकता है कि जो बात हम कह रहे हैं यदि वह सत्य हो तो क्या शिल्पकारों में भी सद्गुण की आवश्यकता नहीं होनी चाहिये ; क्योंकि वे भी तो प्रायः असंयम के कारण अपने काम में त्रुटि किया करते हैं । परन्तु क्या इन दोनों उदाहरणों में बहुत अधिक अन्तर नहीं है ? दास तो अपने स्वामी के जीवन में भागीदार होता है, पर शिल्पकार का स्वामी के साथ संबंध इतना समीप का नहीं, अपेक्षाकृत दूर का होता है । उससे अपेक्षित (दास की) भलाई की मात्रा उतनी ही होती है जितनी मात्रा में वह दासत्व के अन्तर्गत रहता है, क्योंकि निचले प्रकार के शिल्पी की दासता सीमित प्रकार की ( अथवा केवल सीमित प्रयोजन के निमित्त ) होती है । और फिर (दास और शिल्पकार में एक अन्तर यह भी है कि ) दास तो उस वर्ग में से है जो प्रकृति से ही दासवर्ग है पर न तो कोई मोची इस वर्ग के अन्तर्गत है और न अन्य कोई शिल्पी । अतएव यह स्पष्ट है कि दास में इस उपर्युक्त नैतिक उत्तमता को उत्पन्न करने का मूल कारण गृहपति होना चाहिये, पर उसको ऐसा (नैतिक ) संरक्षक के रूप में होना चाहिये न कि उस स्वामित्वकला को धारण करनेवाले के रूप में जो सेवक को विशिष्ट कर्तव्यों के पालन करने का निर्देश करती है। इसलिए जो लोग कहते हैं कि दासों से विवेक को ( विवेकपूर्ण शिक्षण को ) दूर रखना चाहिये और उनके प्रति केवल आदेश का ही प्रयोग करना चाहिये, वे ठीक नहीं कहते।" नैतिक शिक्षा ( अथवा चेतावनी ) तो दासों को बच्चों की अपेक्षा कहीं अधिक दी जानी चाहिये ।
इस विषय का इतना विवेचन पर्याप्त होगा। पति और पत्नी का संबंध, माता-पिता तथा संतान का संबंध, इन संबंधों के घटकों की पृथक् पृथक् उत्तमता, घटकों के पारस्परिक
सम्पर्क का स्वरूप, उसके गुण एवं दोष, इन गुणों की प्राप्ति किस प्रकार की जाय तथा इन दोषों से किस प्रकार दूर भागा जाये (इत्यादि) विषयों का विवेचन ( शेष रह गया है)। इन सबका विवेचन ( आगे चलकर ) विभिन्न प्रकार की शासन व्यवस्थाओं का वर्णन करते समय अवश्यमेव किया जायगा। प्रत्येक गृहस्थी राष्ट्र का ( घटक) अंग है । यह ( पति पत्नी का समाज एवं माता-पिता एवं सन्तान का समाज ) गृहस्थी का अंग है । प्रत्येक अवयव की उत्तमता का विचार अवयवी की उत्तमता पर दृष्टि रखते हुए किया जाना चाहिये । अतएव यदि बच्चों और स्त्रियों की उत्तमता के होने से नगर की उत्तमता में कोई अन्तर पड़ता हो तो बच्चों और स्त्रियों की शिक्षा का विचार आरंभ करने के पूर्व हमको (समग्र-) नगर के शांसन पर अवश्य दृष्टिपात कर लेना चाहिये बच्चों और स्त्रियों की उत्तमता के कारण नगर की ( अथवा शासन की) उत्तमता में तो अवश्यमेव अन्तर पड़ना चाहिये क्योंकि नारियाँ स्वतंत्र व्यक्तियों की संख्या का आधा भाग होती हैं, एवं बालक बड़े होकर राष्ट्र के शासन में भागीदार बनते । (अतः उपर्युक्त विषयों का विवेचन इस समय स्थगित कर दिया गया है । )
क्योंकि प्रस्तुत विषय ( अर्थात् गृहस्थी) के कुछ अंगों (दासता एवं साधनोपलब्धि ) का विवेचन हो चुका तथा अन्य अंगों ( विवाह, प्रजोत्पादन एवं शिक्षा इत्यादि ) का विचार आगे किया जायगा " अतएव इस विषय को समाप्त हुआ मानकर अब हम नये विषय का विवेचन आरंभ करें, एवं सर्वप्रथम उन मनीषियों के सिद्धान्तों की समीक्षा करें जिन्होंने श्रेष्ठ ( = आदर्श ) शासन-पद्धतियों के विषय में विचार प्रस्तुत किये हैं। " )
अर्थात् गृह-प्रबन्ध-कला आर्थिक की अपेक्षा नैतिक अधिक है। उसका उद्देश्य गृहपति, पत्नी, सन्तान एवं दासों के पारस्परिक संबंध को अधिक से अधिक उत्तम बनाना है।
२. ग्रीक लोगों में चार नैतिक गुण सर्वोपरि माने जाते थे। यह चार गुण धृति अथवा साहस, संयम, न्याय एवं प्रज्ञा । यहाँ अरिस्तू ने दास के संबंध में प्रज्ञा का उल्लेख नहीं किया है क्योंकि वह वास में विवेक की बहुत थोड़ी सी मात्रा को स्वीकार करता है।
३. सामान्य प्रकार से सभी शासक और शासितों के विषय में पूछा जाना चाहियेकेवल दास, अथवा स्त्री अथवा बालक के विषय में विशेष रूप से नहीं।
४. 'उदार स्वभाव' के लिये मूल ग्रीक भाषा में "कलोकागाथिया" शब्द आया | पितृ शासन है और तीसरा पति द्वारा पत्नी का शासन है । यद्यपि गृहपति, पत्नी और सन्तान दोनों पर शासन करता है, तथा दोनों पर स्वतंत्र जनों के समान शासन करता है, तथापि दोनों पर शासन करने का प्रकार एक ही नहीं होता। पत्नी पर शासन करने का प्रकार वैध शासन' का प्रकार होता है तथा सन्तान पर शासन का प्रकार राजकीय शासन का प्रकार होता है । यदि प्रकृति के नियम में अपवाद न हो तो पुरुष स्त्री की अपेक्षा शासन के लिये अधिक उपयुक्त होता है तथा अधिक अवस्थावाला एवं पूर्ण विकसित कम अवस्थावाले तथा अविकसित की अपेक्षा अधिक योग्य होता है। अधिकांश ऐसे प्रसंगों में, जहाँ कि वैध-शासन चलता है, शासन करना और शासित होना पर्यायक्रम से हुआ करता है ; किसी भी राजनीतिक परिषद् के सदस्य प्रकृत्या एक बराबर होते हैं और उनमें कुछ भी अन्तर नहीं होता । परन्तु फिर भी, जब कोई एक व्यक्ति शासन करता होता है तथा अन्य लोग शासित होते हुए होते हैं तब शासक बाह्याचार, संबोधन- पद्धति, सम्मानसूचक पदों में भेद की स्थापना करने की चेष्टा करता है, जैसा कि अपने पैरधोने की परात के विषय में अमासिस के कथन से स्पष्ट प्रकट है । पति का पत्नी के प्रति स्थायी रूप से वही संबंध होता है जो वैध-शासक का शासितों के प्रति होता है । पिता का सन्तान पर जो शासन होता है वह ऐसा होता है जैसा कि राजा का अपनी प्रजा पर ; क्योंकि वह प्रेम और आयु के सम्मान के आधार पर शासक की स्थिति में होता है तथा यह स्थिति वैसी ही होती है जैसी कि राजकीय शासन की । इसलिए जियुस को संबोधन करते हुए होमेर ने ठीक ही कहा -- "पिता मानवों का, देवों क्योंकि वह इन सबका राजा है। राजा प्रकृति से ही अपने प्रजाजनों से श्रेष्ठ होना चाहिये पर जाति अथवा कुल में उन्हीं के समान होना चाहिये तथा गुरुजनों और छोटों एवं पिता और सन्तान का संबंध इसी प्रकार का होता है । एक. वैध शासन से तात्पर्य उस शासन से है जो किसी संविधान के नियमों का अनुसरण करता है तथा जिसमें सब प्रजाजनों को पर्याय से शासन करने तथा शासित होने का अवसर प्राप्त होता है। यह तानाशाही शासन से भिन्न है जिसमें शासक स्वेच्छा से शासन करता है तथा शासितों को शासन में कोई अधिकार प्राप्त नहीं होता। अरिस्तू के मतानुसार पति पत्नी पर जो शासन करता है वह बहुत कुछ वैधानिक प्रकार का होता है। अन्तर केबल इतना ही है कि इस व्यवस्था में शासक और शासित की स्थिति में पर्यायक्रम से परिवर्तन नहीं होता। दो. अमासिस एक साधारण प्रजाजन था; आगे चलकर वह राजा हो गया। उसने एक स्वर्ण देव-प्रतिमा को गलवाकर अपने पैर धोने के लिये परात बनवाई। मिस्र देश के रहनेवाले इस परात का भी अत्यधिक सम्मान करने लगे। अमासिस् ने एक बार अपने प्रजाजनों को उपदेश करते हुए उस परात का दृष्टान्त देकर समझाया कि मेरी अपनी स्थिति बहुत कुछ इस परात के समान है; पर मेरे प्रति तुम लोगों का व्यवहार जो मेरी वर्तमान स्थिति है उसके अनुरूप होना चाहिये न कि मेरी भूतकालिक स्थिति के अनुरूप । तीन. राजा का शासन प्रजा के प्रति प्रेम और सद्भावना से पूर्ण होना चाहिये । ऐतिहासिक वृष्टि से अरिस्तू राजा को एक बड़े कुटुम्ब के ज्येष्ठ श्रेष्ठ पुरुष से विकसित हुआ मानता है। आगे चलकर वह राजकीय शासन का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है। ऐसा प्रतीत होता है कि वह राजकीय शासन को उत्तम प्रकार का शासन मानता । तुलना कीजिये संशून्य -- "राजा प्रकृतिरञ्जनात् ।" चार. द्यौस के लिए मूल में "जियुस्" का कर्म कारक का रूप "दिया" प्रयुक्त हुआ है । यह शब्द संस्कृत के द्यौस का सजातीय है। भारतीय एवं ग्रीक दोनों धर्मों में द्यौस सबका पिता एवं शासक है। शासक तथा शासित के गुणों में अंतर इसलिये यह स्पष्ट है कि गृह-प्रबन्ध-कला निर्जीव सम्पत्ति की अपेक्षा मनुष्यों के प्रति, धन की उत्तमता की अपेक्षा मनुष्यों की उत्तमता के प्रति और दासों की अपेक्षा स्वतंत्र पुरुषों के प्रति अधिक ध्यान देती है। इस संबंध में सर्वप्रथम यह प्रश्न उत्पन्न होता है कि क्या किसी दास में उपकरणात्मक तथा सेवात्मक गुणों के अतिरिक्त अथवा इनसे ऊँची और कोई उत्तमता किचिन्मात्र भी हो सकती है ? क्या उसमें संयम, साहस, न्याय एवं इसी प्रकार की अन्य सद्वृत्तियाँ हो सकती हैं अथवा उसमें कठोर शारीरिक सेवा की वृत्ति को छोड़कर और कोई भी गुण नहीं होता ? दोनों प्रकार के उत्तरों में कठिनाई का सामना है। यदि दासों में उच्च कोटि के गुण माने जायँ तो वे स्वतंत्र मनुष्यों से किस प्रकार भिन्न होंगे? यदि यह कहें कि उनमें यह गुण नहीं हैं तो यह एक अनोखी बात होगी कि मनुष्य होने के कारण विवेक के भागीदार होते हुए भी । लगभग इसी से मिलता-जुलता प्रश्न स्त्रियों और बच्चों के विषय में भी पूछा जा सकता है कि क्या उनमें सद्गुण होते हैं ; क्या स्त्री को भी संयत, साहसी और न्यायी होना चाहिये; और क्या कोई बच्चा असंयत, अथवा संयत हो सकता है या नहीं ? यही प्रश्न सामान्यरूपेण पूछा जाना चाहिये और वह इस प्रकार कि जो प्रकृत्या शासक हैं तथा जो प्रकृत्या शासित हैं उनके गुण एक ही हैं अथवा एक दूसरे से पृथक् हैं ? यदि यह कहो कि दोनों में समान रूप से उदार स्वभाव होना चाहिये तो ऐसा क्यों होना चाहिये कि उनमें से एक तो सर्वदा शासन करे और दूसरा नित्य शासित हो । और न यह अन्तर अधिक या अल्प मात्रा के अन्तर के समान है; क्योंकि शासक और शासित का अन्तर तो प्रकारगत अन्तर है, एवं अधिक और अल्प इससे कोई संबंध नहीं है । यदि, दूसरी ओर यह कहें कि उनमें से एक में तो सद्गुण होने चाहिये तथा दूसरे में नहीं होने चाहिये तो यह बड़ी अनोखी सम्मति होगी। क्योंकि यदि शासक संयमी और न्यायी न हो तो वह अच्छे प्रकार से शासन कैसे कर सकेगा एवं यदि शासित संयमी और न्यायी न हो तो वह भले प्रकार शासित कैसे हो सकता है ? कोई भी ऐसा व्यक्ति जो उच्छृङ्खल अथवा कायर हो, अपने कर्तव्य का पालन निश्चयमेव नहीं कर सकता । अतएव यह स्पष्ट है कि सद्गुणों में तो दोनों का भाग अवश्य होना चाहिये, पर सद्गुण भिन्न प्रकार के होने चाहिये, ठीक जिस प्रकार कि प्रकृत्या शासितव्य प्रजाजनों के सद्गुणों में भी प्रकार - भेद होता है । और यह विचार हमको सीधे आत्मा के स्वरूप की ओर ले जाता है। आत्मा में स्वाभाविकतया एक अंश शासक है तथा दूसरा शासित ; एवं इनमें से प्रत्येक का अपना पृथक् गुण है, एकगुणका संबंध शासक एवं विवेकयुक्त अंश से है तथा दूसरेका शासित एवं अविवेकयुक्त अंश से। और फिर यह तो स्पष्ट ही है कि जो बात प्रस्तुत प्रकरण में ठीक बैठती है वह अन्य स्थलों में भी लागू होती है; अतएव हम इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि यह एक सामान्य नियम है कि शासक और शासित अंशों की सत्ता स्वभाव से ही है। पर एक ही नियम क्षेत्र-भेद के अनुसार भिन्न प्रकार से काम करता है। स्वतंत्र पुरुष जिस प्रकार दास पर शासन करता है वह उस प्रकार से भिन्न होता है जिस प्रकार से पुरुष स्त्री पर शासन करता है अथवा बड़ा मनुष्य बच्चे पर । आत्मा के अंश तो इन सब में ही विद्यमान रहते हैं पर उनकी स्थिति इनमें से प्रत्येक में पृथक् प्रकार से होती है । " दास में विचार करने की क्षमता बिलकुल नहीं होती' ; स्त्री में यह क्षमता होती तो है पर अधिकारशून्य ही रहती है, एवं होती बच्चों में भी है पर अपरिपक्व रूप में ही । तथा जैसा वैसा ही अवश्यमेव सदाचार संबंधी सद्गुणों की स्थिति के विषय में भी समझा जाना चाहिये । सब व्यक्ति इन सद्गुणों में भागीदार होते हैं, पर एक ही प्रकार से नहीं प्रत्युत प्रत्येक व्यक्ति उसी प्रकार और उतनी ही मात्रा में उनका भाजन होता है जो उसके अपने कार्य को पूर्ण करने के लिये उपयुक्त हों । अतः शासक को सदाचार-संबंधी पूर्ण विकसित सद्गुण प्राप्त होना चाहिये; क्योंकि यदि उसके कार्य के पूर्ण स्वरूप का निरपेक्ष भाव से विचार करें तो उसके लिये श्रेष्ठ निर्माता की आवश्यकता प्रतीत होगी तथा ऐसा उत्तम निर्माता विवेक ही है । शेष अन्य व्यक्तियों को सदाचार संबंधी सद्गुण की आवश्यकता उतनी ही मात्रा में होती है जितनी उनमें से प्रत्येक की स्थिति के लिये अपेक्षित है । इस प्रकार यह स्पष्ट है कि आचार-संबंधी सद्गुण तो उपर्युक्त सभी व्यक्तियों में उपलब्ध होता है तथापि, जैसा कि सॉस' का मत है, स्त्री और पुरुष का संयम एक-सा नहीं होता और न उनमें पाये जानेवाले साहस और न्याय ही एक समान होते हैं । उदाहरणार्थ पुरुष में पाया जानेवाला साहस शासकोचित होता है एवं स्त्री में पाया जानेवाला सेवकोचित । यही बात अन्य सब सद्गुणों के संबंध में भी लागू होती है । जब हम इस विषय पर अधिक विस्तार के साथ दृष्टिपात करेंगे और इसके पृथक् पृथक् विभागों का विचार करेंगे तो यही निष्कर्ष और भी अधिक स्पष्टतया निष्पन्न हो जायगा । सामान्य शब्दों का प्रयोग करते हुए यह मत प्रकट करना कि सद्गुण "आत्मा की स्वस्थता है" अथवा "उचित कर्म" है अथवा ऐसी ही अन्य कोई बात है, तो अपने ही को धोखा देना होगा। इस प्रकार की सामान्य परिभाषाओं की अपेक्षा तो सद्गुण अथवा भलाई के प्रकारों की गिनती गिना देने की पद्धति कहीं अधिक अच्छी है, जिसका अनुसरण गौर्गियास के द्वारा किया गया है । अतः सब वर्गों के विषय में यह समझा जाना चाहिये कि उनके अपने अपने भलाई के विशेष लक्षण होते हैं; एवं यह जो सौफौक्लेस् ने स्त्रियों के विषय में कहा है कि "नारी की सुषमा है मौन" इसमें भी सामान्य सत्य निहित है, पर यह सत्य पुरुष के विषय में लागू नहीं होता । बच्चा जो अपरिपक्व होता है तो यह स्पष्ट ही है कि उसकी सद्वृत्ति केवल अपने वर्तमान स्वरूप की अपेक्षा ऐसी नहीं होती प्रत्युत उसकी भावी परिणति एवं उस परिणति की ओर उसका नेतृत्व करनेवाले गुरु की अपेक्षा अपरिपक्व होती है। ऐसे ही दास की सद्वृत्ति प्रभु-संबंध सापेक्ष्य है । हम यह निर्णय तो स्थापित कर चुके कि दास को जीवन की आवश्यकताओं के लिये उपयोगी होना चाहिये । अतएव यह स्पष्ट ही है कि उनको थोड़े से ही सद्गुण की आवश्यकता है; और वह वास्तव में बस इतना होना चाहिये कि जिससे वह कहीं असंयम अथवा भीरुता के कारण अपने कर्त्तव्य से च्युत न हो जाय । इस पर यह प्रश्न हो सकता है कि जो बात हम कह रहे हैं यदि वह सत्य हो तो क्या शिल्पकारों में भी सद्गुण की आवश्यकता नहीं होनी चाहिये ; क्योंकि वे भी तो प्रायः असंयम के कारण अपने काम में त्रुटि किया करते हैं । परन्तु क्या इन दोनों उदाहरणों में बहुत अधिक अन्तर नहीं है ? दास तो अपने स्वामी के जीवन में भागीदार होता है, पर शिल्पकार का स्वामी के साथ संबंध इतना समीप का नहीं, अपेक्षाकृत दूर का होता है । उससे अपेक्षित भलाई की मात्रा उतनी ही होती है जितनी मात्रा में वह दासत्व के अन्तर्गत रहता है, क्योंकि निचले प्रकार के शिल्पी की दासता सीमित प्रकार की होती है । और फिर दास तो उस वर्ग में से है जो प्रकृति से ही दासवर्ग है पर न तो कोई मोची इस वर्ग के अन्तर्गत है और न अन्य कोई शिल्पी । अतएव यह स्पष्ट है कि दास में इस उपर्युक्त नैतिक उत्तमता को उत्पन्न करने का मूल कारण गृहपति होना चाहिये, पर उसको ऐसा संरक्षक के रूप में होना चाहिये न कि उस स्वामित्वकला को धारण करनेवाले के रूप में जो सेवक को विशिष्ट कर्तव्यों के पालन करने का निर्देश करती है। इसलिए जो लोग कहते हैं कि दासों से विवेक को दूर रखना चाहिये और उनके प्रति केवल आदेश का ही प्रयोग करना चाहिये, वे ठीक नहीं कहते।" नैतिक शिक्षा तो दासों को बच्चों की अपेक्षा कहीं अधिक दी जानी चाहिये । इस विषय का इतना विवेचन पर्याप्त होगा। पति और पत्नी का संबंध, माता-पिता तथा संतान का संबंध, इन संबंधों के घटकों की पृथक् पृथक् उत्तमता, घटकों के पारस्परिक सम्पर्क का स्वरूप, उसके गुण एवं दोष, इन गुणों की प्राप्ति किस प्रकार की जाय तथा इन दोषों से किस प्रकार दूर भागा जाये विषयों का विवेचन । इन सबका विवेचन विभिन्न प्रकार की शासन व्यवस्थाओं का वर्णन करते समय अवश्यमेव किया जायगा। प्रत्येक गृहस्थी राष्ट्र का अंग है । यह गृहस्थी का अंग है । प्रत्येक अवयव की उत्तमता का विचार अवयवी की उत्तमता पर दृष्टि रखते हुए किया जाना चाहिये । अतएव यदि बच्चों और स्त्रियों की उत्तमता के होने से नगर की उत्तमता में कोई अन्तर पड़ता हो तो बच्चों और स्त्रियों की शिक्षा का विचार आरंभ करने के पूर्व हमको नगर के शांसन पर अवश्य दृष्टिपात कर लेना चाहिये बच्चों और स्त्रियों की उत्तमता के कारण नगर की उत्तमता में तो अवश्यमेव अन्तर पड़ना चाहिये क्योंकि नारियाँ स्वतंत्र व्यक्तियों की संख्या का आधा भाग होती हैं, एवं बालक बड़े होकर राष्ट्र के शासन में भागीदार बनते । क्योंकि प्रस्तुत विषय के कुछ अंगों का विवेचन हो चुका तथा अन्य अंगों का विचार आगे किया जायगा " अतएव इस विषय को समाप्त हुआ मानकर अब हम नये विषय का विवेचन आरंभ करें, एवं सर्वप्रथम उन मनीषियों के सिद्धान्तों की समीक्षा करें जिन्होंने श्रेष्ठ शासन-पद्धतियों के विषय में विचार प्रस्तुत किये हैं। " ) अर्थात् गृह-प्रबन्ध-कला आर्थिक की अपेक्षा नैतिक अधिक है। उसका उद्देश्य गृहपति, पत्नी, सन्तान एवं दासों के पारस्परिक संबंध को अधिक से अधिक उत्तम बनाना है। दो. ग्रीक लोगों में चार नैतिक गुण सर्वोपरि माने जाते थे। यह चार गुण धृति अथवा साहस, संयम, न्याय एवं प्रज्ञा । यहाँ अरिस्तू ने दास के संबंध में प्रज्ञा का उल्लेख नहीं किया है क्योंकि वह वास में विवेक की बहुत थोड़ी सी मात्रा को स्वीकार करता है। तीन. सामान्य प्रकार से सभी शासक और शासितों के विषय में पूछा जाना चाहियेकेवल दास, अथवा स्त्री अथवा बालक के विषय में विशेष रूप से नहीं। चार. 'उदार स्वभाव' के लिये मूल ग्रीक भाषा में "कलोकागाथिया" शब्द आया |
कौन अपने अच्छे कार्यों के लिए प्रशंसा, सम्मान या शाबाशी नहीं पाना चाहता? यह सभी की आन्तरिक इच्छा तथा दबी हुई चाहत होती है कि उनके द्वारा किए गए उत्कृष्ट शैक्षिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, प्रशासनिक, राजनैतिक तथा मानवीय कार्यों के लिए मान-सम्मान, प्रतिष्ठा तथा पहचान मिले। यह समाज में व्यक्तियों को उत्कृष्ट एवं श्रेष्ठ कार्य के लिए प्रोत्साहित करने के लिए आवश्यक भी है। वैसे श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को उपदेश देते हुए केवल कर्म करने तथा फल की इच्छा न करने का संदेश दिया है। मनुष्य की इच्छाएं, आकांक्षाएं और मनोकामनाएं उसे कर्म के पश्चात फल के लिए आकर्षित तथा प्रभावित करती हैं जो स्वाभाविक भी है। आज विभिन्न सरकारी तथा गैर सरकारी क्षेत्रों में श्रेष्ठ एवं कर्मठ कर्मचारियों एवं अधिकारियों को प्रेरित एवं प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न सम्मान, अलंकरण एवं अवार्ड निर्धारित किए गए हैं। विभिन्न मानकों के आधार पर कर्मचारियों का सम्मान के लिए चयन किया जाता है, लेकिन हर बार मानकों, चयन प्रक्रिया तथा चयनकर्ताओं पर उंगलियां उठती रही हैं। इसका कारण या तो श्रेष्ठता की स्वीकार्यता नहीं है या फिर चयन प्रक्रिया दोषी होती है। अनेकों बार तो विरोध के स्वर न्यायालय तक पहुंच चुके हैं। इसके अतिरिक्त समाज में अनेकों गैर सरकारी संस्थाएं भी विभिन्न क्षेत्रों में सराहनीय कार्य करने वालों को सम्मानित कर प्रोत्साहित करती हैं। आजकल बहुत सी संस्थाएं सम्मानित होने के लिए आनलाइन तथा ऑफलाइन आवेदन आमंत्रित करती हैं। कभी-कभी ये संस्थाएं ज्यूरी द्वारा चयनित व्यक्तियों को अग्रिम फीस, आने-जाने के माध्यम तथा होटल आदि में ठहरने आदि की व्यवस्था के बारे में जानकारी प्राप्त करती हैं। कभी-कभी यह भी एक व्यवसाय के रूप में प्रतीत होता है।
सम्मान चाहने वालों में भी प्रतिस्पर्धा तथा तीव्र महत्त्वाकांक्षा सी दिखाई देती है। इसी कारण योग्य व्यक्तियों की उपेक्षा भी होती है। अनेकों बार महत्त्वाकांक्षी व्यक्ति अपना कार्य छोड़ कर केवल पुरस्कारों के आवेदन, प्रबन्धन तथा जुगाड़ पर केन्द्रित रहते हैं। इससे कार्यव्यवस्था प्रभावित होती है। पुरस्कारों की इस तीव्र महत्त्वाकांक्षा तथा प्रतिस्पर्धा के कारण अनेकों कर्मठ व्यक्तियों की उपेक्षा होती है जिससे ईमानदारी से कार्य करने वालों का मनोबल भी कम होता है। अनेकों बार अंगूर खट्टे होने के कारण भी इस प्रकार की चर्चाएं जन्म लेती हैं परन्तु यह भी आवश्यक है कि जहां समाज में श्रेष्ठ कार्य करने के लिए मान-सम्मान तथा अलंकरण आवश्यक है, वहीं पर पुरस्कारों की गरिमा भी बहुत आवश्यक है। कुछ पुरस्कार महत्त्वाकांक्षी लोग किसी भी कीमत पर पुरस्कार प्राप्त करना चाहते हैं तथा वे 'पुरस्कार प्रबन्धन कला कौशल' में बहुत ही दक्ष होते हैं। ऐसे लोग जहां अपनी तीव्र इच्छा एवं महत्त्वाकांक्षा को पूरा करने में पूरा श्रम करते हैं तथा पूरा दिमाग एवं शक्ति लगा कर एड़ी-चोटी का जोर लगा देते हैं, वहीं पर ये लोग योग्य एवं पात्र व्यक्तियों को नीचा दिखाकर उनका मनोबल गिराने में कोई कसर नहीं छोड़ते। पिछले माह सम्पन्न हुए हिमाचल प्रदेश विधानसभा के सत्र में शिक्षा की गुणवत्ता, शिक्षकों के स्थानांतरण तथा प्रतिवर्ष राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर प्रदान किए जाने वाले शिक्षक पुरस्कारों में जनता द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों ने चिंता जाहिर की। कुछ विधानसभा सदस्यों ने शिक्षक पुरस्कारों पर अध्यापकों के चयन पर उंगली उठाते हुए बहुत ही गम्भीर सवाल उठाए हैं। विधानसभा चर्चा में जनता द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों ने ऐसे लोगों को भी व्यवस्था द्वारा पुरस्कृत किए जाने की बात स्वीकार की जिनका पाठशाला, बच्चों तथा कक्षा शिक्षण से दूर-दूर तक संबंध नहीं था।
जनता के प्रतिनिधियों ने ऐसे लोगों द्वारा उनके अनुमोदन के लिए जी हुजूरी करने की बात विधानसभा पटल पर स्वीकारी है। इसी कारण इन पुरस्कारों में चयन पर अनेकों बार अध्यापक माननीय न्यायालयों में भी गुहार कर चुके हैं। कुछ मामलों में तो न्यायालय ने पुरस्कारों को रद्द कर वापिस करने के भी निर्देश दिए हैं। क्या गरिमा रह गई है व्यक्तियों एवं पुरस्कारों की? किसी को अलंकृत एवं सम्मानित करने वाले पुरस्कार यदि स्वयं ही विवादित हो जाएं तो ऐसे पुरस्कारों से दूरी ही भली। सरकारों, विभागों तथा गैर सरकारी संस्थाओं को विवादों से बचने का पूर्ण प्रयास करना चाहिए तथा पूर्वनिश्चित मानकों के अनुसार पुरस्कार विजेताओं का चयन करना चाहिए। विभाग या संस्था में दिए गए उनके योगदान को ईमानदारी से वरीयता दी जानी चाहिए। वैसे भी योग्य, पात्र, कर्मठ, ईमानदार, उदाहरणीय व्यक्तियों के चयन से पुरस्कारों की गरिमा तथा विश्वसनीयता बढ़ती है। अयोग्य व्यक्तियों का सम्मान होने से दो नुकसान हैं, एक तो योग्य व्यक्ति निरुत्साहित होते हैं तथा अयोग्य सिर पर बैठ कर अपनी सामाजिक पहचान एवं कीर्ति का नाजायज फायदा उठाते हैं। वर्तमान में विभिन्न विभागों में प्रतिभाओं का आकलन, चयन करने तथा तथा पुरस्कृत करने वाली तीसरी प्रशासनिक आंख भी मोतियाबिंद का शिकार हो चुकी है। अराजपत्रित संस्थाओं में भी सम्मानित होने के लिए व्यावसायिक सम्बन्ध तथा व्यक्तिगत भाईचारा काम कर जाता है। इससे परस्पर सम्मानित तथा एक-दूसरे के यहां प्रतिष्ठित होने की संस्कृति भी प्रचलित हुई है।
सम्मान समारोह निश्चित रूप से आयोजित होने चाहिए तथा विभिन्न क्षेत्रों में कत्र्तव्यनिष्ठा तथा ईमानदारी से कार्य करने वालों का मान-सम्मान होना चाहिए। इससे समाज में उत्कृष्ट कार्य करने वालों का मनोबल बढ़ता है। सम्मान से नवाजे जाने वाली शख्सियतों से भी आग्रह है कि सच में मानवता की सेवा करें तथा परमात्मा को हाजिर-नाजिर रख कर सम्मान का हकदार बनें, अन्यथा झूठे सम्मान से आत्मग्लानि होती है। बिना फल की इच्छा से कर्म कर ईश्वर निमित्त समर्पित करते रहें। सरकारी तथा गैर सरकारी क्षेत्र में प्रदान किए जाने वाले इन पुरस्कारों को प्राप्त करने वाले व्यक्तियों का चयन बिना किसी पूर्वाग्रह तथा बिना भेदभाव एवं पक्षपात से होना चाहिए। इससे पुरस्कार, संस्था, चयन समितियों तथा पुरस्कृत व्यक्तियों की गरिमा तथा विश्वसनीयता बनी रहती है, अन्यथा इससे समाज में श्रेष्ठ कार्य करने वालों का मनोबल, आत्मविश्वास तथा कार्यसंस्कृति भी प्रभावित होती है। सम्मान होना चाहिए व्यक्ति की प्रतिभा, श्रेष्ठता, योगदान तथा महान कार्यों का, महत्त्वाकांक्षा, जुगाड़ तथा सिफारिश का नहीं होना चाहिए।
| कौन अपने अच्छे कार्यों के लिए प्रशंसा, सम्मान या शाबाशी नहीं पाना चाहता? यह सभी की आन्तरिक इच्छा तथा दबी हुई चाहत होती है कि उनके द्वारा किए गए उत्कृष्ट शैक्षिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, प्रशासनिक, राजनैतिक तथा मानवीय कार्यों के लिए मान-सम्मान, प्रतिष्ठा तथा पहचान मिले। यह समाज में व्यक्तियों को उत्कृष्ट एवं श्रेष्ठ कार्य के लिए प्रोत्साहित करने के लिए आवश्यक भी है। वैसे श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को उपदेश देते हुए केवल कर्म करने तथा फल की इच्छा न करने का संदेश दिया है। मनुष्य की इच्छाएं, आकांक्षाएं और मनोकामनाएं उसे कर्म के पश्चात फल के लिए आकर्षित तथा प्रभावित करती हैं जो स्वाभाविक भी है। आज विभिन्न सरकारी तथा गैर सरकारी क्षेत्रों में श्रेष्ठ एवं कर्मठ कर्मचारियों एवं अधिकारियों को प्रेरित एवं प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न सम्मान, अलंकरण एवं अवार्ड निर्धारित किए गए हैं। विभिन्न मानकों के आधार पर कर्मचारियों का सम्मान के लिए चयन किया जाता है, लेकिन हर बार मानकों, चयन प्रक्रिया तथा चयनकर्ताओं पर उंगलियां उठती रही हैं। इसका कारण या तो श्रेष्ठता की स्वीकार्यता नहीं है या फिर चयन प्रक्रिया दोषी होती है। अनेकों बार तो विरोध के स्वर न्यायालय तक पहुंच चुके हैं। इसके अतिरिक्त समाज में अनेकों गैर सरकारी संस्थाएं भी विभिन्न क्षेत्रों में सराहनीय कार्य करने वालों को सम्मानित कर प्रोत्साहित करती हैं। आजकल बहुत सी संस्थाएं सम्मानित होने के लिए आनलाइन तथा ऑफलाइन आवेदन आमंत्रित करती हैं। कभी-कभी ये संस्थाएं ज्यूरी द्वारा चयनित व्यक्तियों को अग्रिम फीस, आने-जाने के माध्यम तथा होटल आदि में ठहरने आदि की व्यवस्था के बारे में जानकारी प्राप्त करती हैं। कभी-कभी यह भी एक व्यवसाय के रूप में प्रतीत होता है। सम्मान चाहने वालों में भी प्रतिस्पर्धा तथा तीव्र महत्त्वाकांक्षा सी दिखाई देती है। इसी कारण योग्य व्यक्तियों की उपेक्षा भी होती है। अनेकों बार महत्त्वाकांक्षी व्यक्ति अपना कार्य छोड़ कर केवल पुरस्कारों के आवेदन, प्रबन्धन तथा जुगाड़ पर केन्द्रित रहते हैं। इससे कार्यव्यवस्था प्रभावित होती है। पुरस्कारों की इस तीव्र महत्त्वाकांक्षा तथा प्रतिस्पर्धा के कारण अनेकों कर्मठ व्यक्तियों की उपेक्षा होती है जिससे ईमानदारी से कार्य करने वालों का मनोबल भी कम होता है। अनेकों बार अंगूर खट्टे होने के कारण भी इस प्रकार की चर्चाएं जन्म लेती हैं परन्तु यह भी आवश्यक है कि जहां समाज में श्रेष्ठ कार्य करने के लिए मान-सम्मान तथा अलंकरण आवश्यक है, वहीं पर पुरस्कारों की गरिमा भी बहुत आवश्यक है। कुछ पुरस्कार महत्त्वाकांक्षी लोग किसी भी कीमत पर पुरस्कार प्राप्त करना चाहते हैं तथा वे 'पुरस्कार प्रबन्धन कला कौशल' में बहुत ही दक्ष होते हैं। ऐसे लोग जहां अपनी तीव्र इच्छा एवं महत्त्वाकांक्षा को पूरा करने में पूरा श्रम करते हैं तथा पूरा दिमाग एवं शक्ति लगा कर एड़ी-चोटी का जोर लगा देते हैं, वहीं पर ये लोग योग्य एवं पात्र व्यक्तियों को नीचा दिखाकर उनका मनोबल गिराने में कोई कसर नहीं छोड़ते। पिछले माह सम्पन्न हुए हिमाचल प्रदेश विधानसभा के सत्र में शिक्षा की गुणवत्ता, शिक्षकों के स्थानांतरण तथा प्रतिवर्ष राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर प्रदान किए जाने वाले शिक्षक पुरस्कारों में जनता द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों ने चिंता जाहिर की। कुछ विधानसभा सदस्यों ने शिक्षक पुरस्कारों पर अध्यापकों के चयन पर उंगली उठाते हुए बहुत ही गम्भीर सवाल उठाए हैं। विधानसभा चर्चा में जनता द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों ने ऐसे लोगों को भी व्यवस्था द्वारा पुरस्कृत किए जाने की बात स्वीकार की जिनका पाठशाला, बच्चों तथा कक्षा शिक्षण से दूर-दूर तक संबंध नहीं था। जनता के प्रतिनिधियों ने ऐसे लोगों द्वारा उनके अनुमोदन के लिए जी हुजूरी करने की बात विधानसभा पटल पर स्वीकारी है। इसी कारण इन पुरस्कारों में चयन पर अनेकों बार अध्यापक माननीय न्यायालयों में भी गुहार कर चुके हैं। कुछ मामलों में तो न्यायालय ने पुरस्कारों को रद्द कर वापिस करने के भी निर्देश दिए हैं। क्या गरिमा रह गई है व्यक्तियों एवं पुरस्कारों की? किसी को अलंकृत एवं सम्मानित करने वाले पुरस्कार यदि स्वयं ही विवादित हो जाएं तो ऐसे पुरस्कारों से दूरी ही भली। सरकारों, विभागों तथा गैर सरकारी संस्थाओं को विवादों से बचने का पूर्ण प्रयास करना चाहिए तथा पूर्वनिश्चित मानकों के अनुसार पुरस्कार विजेताओं का चयन करना चाहिए। विभाग या संस्था में दिए गए उनके योगदान को ईमानदारी से वरीयता दी जानी चाहिए। वैसे भी योग्य, पात्र, कर्मठ, ईमानदार, उदाहरणीय व्यक्तियों के चयन से पुरस्कारों की गरिमा तथा विश्वसनीयता बढ़ती है। अयोग्य व्यक्तियों का सम्मान होने से दो नुकसान हैं, एक तो योग्य व्यक्ति निरुत्साहित होते हैं तथा अयोग्य सिर पर बैठ कर अपनी सामाजिक पहचान एवं कीर्ति का नाजायज फायदा उठाते हैं। वर्तमान में विभिन्न विभागों में प्रतिभाओं का आकलन, चयन करने तथा तथा पुरस्कृत करने वाली तीसरी प्रशासनिक आंख भी मोतियाबिंद का शिकार हो चुकी है। अराजपत्रित संस्थाओं में भी सम्मानित होने के लिए व्यावसायिक सम्बन्ध तथा व्यक्तिगत भाईचारा काम कर जाता है। इससे परस्पर सम्मानित तथा एक-दूसरे के यहां प्रतिष्ठित होने की संस्कृति भी प्रचलित हुई है। सम्मान समारोह निश्चित रूप से आयोजित होने चाहिए तथा विभिन्न क्षेत्रों में कत्र्तव्यनिष्ठा तथा ईमानदारी से कार्य करने वालों का मान-सम्मान होना चाहिए। इससे समाज में उत्कृष्ट कार्य करने वालों का मनोबल बढ़ता है। सम्मान से नवाजे जाने वाली शख्सियतों से भी आग्रह है कि सच में मानवता की सेवा करें तथा परमात्मा को हाजिर-नाजिर रख कर सम्मान का हकदार बनें, अन्यथा झूठे सम्मान से आत्मग्लानि होती है। बिना फल की इच्छा से कर्म कर ईश्वर निमित्त समर्पित करते रहें। सरकारी तथा गैर सरकारी क्षेत्र में प्रदान किए जाने वाले इन पुरस्कारों को प्राप्त करने वाले व्यक्तियों का चयन बिना किसी पूर्वाग्रह तथा बिना भेदभाव एवं पक्षपात से होना चाहिए। इससे पुरस्कार, संस्था, चयन समितियों तथा पुरस्कृत व्यक्तियों की गरिमा तथा विश्वसनीयता बनी रहती है, अन्यथा इससे समाज में श्रेष्ठ कार्य करने वालों का मनोबल, आत्मविश्वास तथा कार्यसंस्कृति भी प्रभावित होती है। सम्मान होना चाहिए व्यक्ति की प्रतिभा, श्रेष्ठता, योगदान तथा महान कार्यों का, महत्त्वाकांक्षा, जुगाड़ तथा सिफारिश का नहीं होना चाहिए। |
नई दिल्ली, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) अधिनियम पर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ दलितों के देशव्यापी विरोध प्रदर्शन में हिंसा के लिए मंगलवार को केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने विपक्षी पार्टियों को जिम्मेदार ठहराया। गहलोत ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, हमने विपक्षी पार्टियों से आंदोलन वापस लेने की अपील की थी, लेकिन उन्होंने दलितों व आदिवासियों को उकसा दिया..सात लोगों की मौत हो गई, संपत्ति का नुकसान हुआ और झड़पें हुईं। नकारात्मक भूमिका निभाने वाली विपक्षी पार्टियां ही इसके लिए जिम्मेदार हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के डीएनए को दलित विरोधी बताने पर उन्होंने कहा, भाजपा अकेली पार्टी है जिसने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के भले के लिए काम किया है। हमें जब भी मौका मिला, हमने उनके फायदे के लिए ऐतिहासिक फैसले लिए हैं।
सर्वोच्च न्यायालय ने 20 मार्च को आदेश दिया था कि एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम,1989 के अंतर्गत आरोपी की गिरफ्तारी अनिवार्य नहीं होगी तथा प्राथमिक जांच और सक्षम अधिकारी की स्वीकृति के बाद ही दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार अगर प्रथमदृष्टया मामला नहीं बनता है तो अग्रिम जमानत ली जा सकती है।
गहलोत ने कहा कि कांग्रेस ने तो संसद भवन के मुख्य कक्ष में डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर भी नहीं लगाई थी। उनकी तस्वीर भाजपा के प्रस्ताव पर तत्कालीन वी.पी. सिंह सरकार ने लगाई थी।
मंत्री ने दावा किया कि नरेंद्र मोदी सरकार ने इस एससी-एसटी एक्ट को संशोधित कर और मजबूत किया है।
लखनऊ। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी (ISI) के लिए भारतीय सेना की जासूसी करने वाले एक युवक शैलेश कुमार उर्फ शैलेंद्र सिंह चौहान को आतंक निरोधक दस्ता (ATS) ने मंगलवार को लखनऊ से गिरफ्तार किया है। वह मूल रूप से उप्र के कासगंज जिले के पटियाली थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले जिनौल गांव का रहने वाला है।
आरोपी भारतीय सेना की गोपनीय सूचनाएं व्हाट्सएप और फेसबुक के माध्यम से ISI को साझा कर रहा था। खुलासा होने के बाद कासगंज जिले की पुलिस भी सक्रिय हो गई। पुलिस आरोपी शैलेश कुमार उर्फ शैलेंद्र सिंह चौहान के घर पहुंचकर जांच में जुट गई है। एसपी सौरभ दीक्षित ने सीओ पटियाली को इस मामले में जानकारी जुटाने के निर्देश दिए हैं। ATS ने आरोपी के खिलाफ आईटी एक्ट की धाराओं एवं विधि विरुद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिनियम की धाराओं में मामला दर्ज किया है।
आरोपी शैलेश पूर्व में 8-9 माह तक अरुणांचल प्रदेश में भारतीय सेना में अस्थायी श्रमिक के रूप में कार्य कर चुका है। वहां रहने के दौरान उसके पास सेना की महत्वपूर्ण जानकारियां थीं। वह सेना में किसी पद पर कार्यरत नहीं है, लेकिन वह स्वयं के भारतीय सेना में तैनात होना बताता है।
सोशल मीडिया पर भी शैलेश चौहान के नाम से उसकी प्रोफाइल बनी हुई है। उस पर भारतीय सेना की यूनिफॉर्म पहने हुए उसकी फोटो लगी है। शैलेश पहले ISI हैंडलर हरलीन कौर नाम की महिला के संपर्क में आया। उससे मैसेंजर पर बात हुई। उसके बाद वह ISI हैंडलर प्रीती के संपर्क में आया। उसकी ऑडियो कॉल के माध्यम से बात होने लगी। शैलेश ने प्रीती को भी अपना परिचय सेना के जवान के रूप में दिया। निजी बातचीत के दौरान प्रीती ने उसे ISI के लिए काम करने की बात कही।
इसके बदले अच्छी रकम देने का लालच दिया। लालच में आकर शैलेश ने प्रीती को सेना से जुड़े महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की लोकेशन, सेना की गाड़ियों के मूवमेंट के फोटो भेजे। यही फोटो उसने हरलीन कौर को भी भेजे। शैलेश को फोन पे पर अप्रैल 2023 से रुपये मिलने लगे। एसपी सौरभ दीक्षित ने बताया कि इस मामले की जानकारी कराई जा रही है। पटियाली सीओ को पूरी जांच पड़ताल का जिम्मा सौंपा है।
| नई दिल्ली, तीन अप्रैल । अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति अधिनियम पर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ दलितों के देशव्यापी विरोध प्रदर्शन में हिंसा के लिए मंगलवार को केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने विपक्षी पार्टियों को जिम्मेदार ठहराया। गहलोत ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, हमने विपक्षी पार्टियों से आंदोलन वापस लेने की अपील की थी, लेकिन उन्होंने दलितों व आदिवासियों को उकसा दिया..सात लोगों की मौत हो गई, संपत्ति का नुकसान हुआ और झड़पें हुईं। नकारात्मक भूमिका निभाने वाली विपक्षी पार्टियां ही इसके लिए जिम्मेदार हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के डीएनए को दलित विरोधी बताने पर उन्होंने कहा, भाजपा अकेली पार्टी है जिसने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के भले के लिए काम किया है। हमें जब भी मौका मिला, हमने उनके फायदे के लिए ऐतिहासिक फैसले लिए हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने बीस मार्च को आदेश दिया था कि एससी/एसटी अधिनियम,एक हज़ार नौ सौ नवासी के अंतर्गत आरोपी की गिरफ्तारी अनिवार्य नहीं होगी तथा प्राथमिक जांच और सक्षम अधिकारी की स्वीकृति के बाद ही दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार अगर प्रथमदृष्टया मामला नहीं बनता है तो अग्रिम जमानत ली जा सकती है। गहलोत ने कहा कि कांग्रेस ने तो संसद भवन के मुख्य कक्ष में डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर भी नहीं लगाई थी। उनकी तस्वीर भाजपा के प्रस्ताव पर तत्कालीन वी.पी. सिंह सरकार ने लगाई थी। मंत्री ने दावा किया कि नरेंद्र मोदी सरकार ने इस एससी-एसटी एक्ट को संशोधित कर और मजबूत किया है। लखनऊ। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के लिए भारतीय सेना की जासूसी करने वाले एक युवक शैलेश कुमार उर्फ शैलेंद्र सिंह चौहान को आतंक निरोधक दस्ता ने मंगलवार को लखनऊ से गिरफ्तार किया है। वह मूल रूप से उप्र के कासगंज जिले के पटियाली थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले जिनौल गांव का रहने वाला है। आरोपी भारतीय सेना की गोपनीय सूचनाएं व्हाट्सएप और फेसबुक के माध्यम से ISI को साझा कर रहा था। खुलासा होने के बाद कासगंज जिले की पुलिस भी सक्रिय हो गई। पुलिस आरोपी शैलेश कुमार उर्फ शैलेंद्र सिंह चौहान के घर पहुंचकर जांच में जुट गई है। एसपी सौरभ दीक्षित ने सीओ पटियाली को इस मामले में जानकारी जुटाने के निर्देश दिए हैं। ATS ने आरोपी के खिलाफ आईटी एक्ट की धाराओं एवं विधि विरुद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिनियम की धाराओं में मामला दर्ज किया है। आरोपी शैलेश पूर्व में आठ-नौ माह तक अरुणांचल प्रदेश में भारतीय सेना में अस्थायी श्रमिक के रूप में कार्य कर चुका है। वहां रहने के दौरान उसके पास सेना की महत्वपूर्ण जानकारियां थीं। वह सेना में किसी पद पर कार्यरत नहीं है, लेकिन वह स्वयं के भारतीय सेना में तैनात होना बताता है। सोशल मीडिया पर भी शैलेश चौहान के नाम से उसकी प्रोफाइल बनी हुई है। उस पर भारतीय सेना की यूनिफॉर्म पहने हुए उसकी फोटो लगी है। शैलेश पहले ISI हैंडलर हरलीन कौर नाम की महिला के संपर्क में आया। उससे मैसेंजर पर बात हुई। उसके बाद वह ISI हैंडलर प्रीती के संपर्क में आया। उसकी ऑडियो कॉल के माध्यम से बात होने लगी। शैलेश ने प्रीती को भी अपना परिचय सेना के जवान के रूप में दिया। निजी बातचीत के दौरान प्रीती ने उसे ISI के लिए काम करने की बात कही। इसके बदले अच्छी रकम देने का लालच दिया। लालच में आकर शैलेश ने प्रीती को सेना से जुड़े महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की लोकेशन, सेना की गाड़ियों के मूवमेंट के फोटो भेजे। यही फोटो उसने हरलीन कौर को भी भेजे। शैलेश को फोन पे पर अप्रैल दो हज़ार तेईस से रुपये मिलने लगे। एसपी सौरभ दीक्षित ने बताया कि इस मामले की जानकारी कराई जा रही है। पटियाली सीओ को पूरी जांच पड़ताल का जिम्मा सौंपा है। |
ककरोई में जहां खेत पर गए भाई को रास्ते में घेरकर चचेरे भाइयों ने दाव और कुल्हाड़ी से काट डाला वहीं खेवड़ा में भाइयों पर गांव की पंचायत में ही गोलियां बरसा दीं जिनमें से एक की माैत हो गई।
साेनीपत, डीपी आर्य। जिन हाथों पर रक्षा का भरोसा था, वो ही खून से रंग गए। जो भाई बचपन से साथ खेले-खाए, वही अपनों के खून के प्यासे हो गए। दोनों घटनाओं में हत्या भी बेरहमी से की गईं। ककरोई में जहां खेत पर गए भाई को रास्ते में घेरकर चचेरे भाइयों ने दाव और कुल्हाड़ी से काट डाला, वहीं खेवड़ा में भाइयों पर गांव की पंचायत में ही गोलियां बरसा दीं, जिनमें से एक की माैत हो गई। दोनों ही मामलों में कोई ऐसी रंजिश नहीं थी, जिसमें अपनों का खून बहाने पर आमादा होते।
जिले में सोमवार को ककरोई और खेवड़ा दो स्थानों पर युवकों को मौत के घाट उतार दिया गया। दोनों ही घटनाओं को अंजाम देने वाले सगे चचेरे भाई हैं। वहीं किसी भी मामले में बहुत गहरी रंजिश नहीं थी। ककरोई में आरोपित मनीष और विक्की का छोटे भाई मृतक सन्नी से बड़ा प्रेम था। तीनों भाई अधिकतर साथ रहते थे।
अप्रैल में फसल अवशेष जलाते समय मनीष से सन्नी के गेहूं में आग लग गई थी। इसको लेकर दोनों भाइयों में विवाद हुआ। उसके बाद मारपीट होने पर पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। अब मनीष ने अपने भाइयों राहुल, विक्की व पिता-ताऊ के साथ मिलकर सन्नी को धारदार हथियारों से काट डाला।
सन्नी ने बचाव की गुहार लगाई, वह बचकर भागा, लेकिन हमलावरों के सिर पर खून सवार था। सन्नी का मोबाइल ट्रैक्टर के पास पड़ा था। ट्रैक्टर पर भी खून फैला हुआ था और सन्नी का शव करीब 500 मीटर दूर पड़ा मिला। हमलावर हत्या करके ही शांत हुए।
ऐसा ही वाकया गांव खेवड़ा में हुआ। वहां गांव में पंचायती जमीन की नीलामी को लेकर पंचायत चल रही थी। मृतक सूरज और आरोपित दीपक दोनों ही पक्ष जमीन लेने का प्रयास कर रहे थे। दोनों पक्ष्र सगे चचेरे भाई हैं। वहीं पर दोनाें पक्षों में बोली लगाने को लेकर विवाद हो गया। इस दौरान दीपक व सुनील ने अपने पक्ष के लाेगों के साथ भरी पंचायत में फायरिंग शुरू कर दी। फायरिंग में उनके चचेरे भाई सूरज व साेनू को गोली गईं। इसमें सूरज की अस्पताल ले जाने के दौरान मौत हो गई। दोनों ही मामलों में आरोपिताें के हाथ अपनों के खून से रंग गए।
मामले को लेकर क्या बोले मनोविशेषज्ञ?
सगे संबंधियों पर आक्रामक होने की घटनाएं मन में पल रही कुंठा का परिणाम हैं। कुंठित व्यक्ति अपने मनोभावों को दबाए रखते हैं। ऐसे में वह एकाएक आक्रामक हो जाते हैं और ऐसी घटनाओं को अंजाम दे देते हैं। अपनों के साथ बैठकर खुलकर बात करने की आदत डालें और किसी भी विवाद को ज्यादा लंबा ना खिंचने दें। मनोभावों में परिवर्तन दिखाई दे तो उनकी काउंसलिंग कराएं।
- डॉ. अनिल कुमार, मनोविशेषज्ञ बाल कल्याण विभाग- हरियाणा।
| ककरोई में जहां खेत पर गए भाई को रास्ते में घेरकर चचेरे भाइयों ने दाव और कुल्हाड़ी से काट डाला वहीं खेवड़ा में भाइयों पर गांव की पंचायत में ही गोलियां बरसा दीं जिनमें से एक की माैत हो गई। साेनीपत, डीपी आर्य। जिन हाथों पर रक्षा का भरोसा था, वो ही खून से रंग गए। जो भाई बचपन से साथ खेले-खाए, वही अपनों के खून के प्यासे हो गए। दोनों घटनाओं में हत्या भी बेरहमी से की गईं। ककरोई में जहां खेत पर गए भाई को रास्ते में घेरकर चचेरे भाइयों ने दाव और कुल्हाड़ी से काट डाला, वहीं खेवड़ा में भाइयों पर गांव की पंचायत में ही गोलियां बरसा दीं, जिनमें से एक की माैत हो गई। दोनों ही मामलों में कोई ऐसी रंजिश नहीं थी, जिसमें अपनों का खून बहाने पर आमादा होते। जिले में सोमवार को ककरोई और खेवड़ा दो स्थानों पर युवकों को मौत के घाट उतार दिया गया। दोनों ही घटनाओं को अंजाम देने वाले सगे चचेरे भाई हैं। वहीं किसी भी मामले में बहुत गहरी रंजिश नहीं थी। ककरोई में आरोपित मनीष और विक्की का छोटे भाई मृतक सन्नी से बड़ा प्रेम था। तीनों भाई अधिकतर साथ रहते थे। अप्रैल में फसल अवशेष जलाते समय मनीष से सन्नी के गेहूं में आग लग गई थी। इसको लेकर दोनों भाइयों में विवाद हुआ। उसके बाद मारपीट होने पर पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। अब मनीष ने अपने भाइयों राहुल, विक्की व पिता-ताऊ के साथ मिलकर सन्नी को धारदार हथियारों से काट डाला। सन्नी ने बचाव की गुहार लगाई, वह बचकर भागा, लेकिन हमलावरों के सिर पर खून सवार था। सन्नी का मोबाइल ट्रैक्टर के पास पड़ा था। ट्रैक्टर पर भी खून फैला हुआ था और सन्नी का शव करीब पाँच सौ मीटर दूर पड़ा मिला। हमलावर हत्या करके ही शांत हुए। ऐसा ही वाकया गांव खेवड़ा में हुआ। वहां गांव में पंचायती जमीन की नीलामी को लेकर पंचायत चल रही थी। मृतक सूरज और आरोपित दीपक दोनों ही पक्ष जमीन लेने का प्रयास कर रहे थे। दोनों पक्ष्र सगे चचेरे भाई हैं। वहीं पर दोनाें पक्षों में बोली लगाने को लेकर विवाद हो गया। इस दौरान दीपक व सुनील ने अपने पक्ष के लाेगों के साथ भरी पंचायत में फायरिंग शुरू कर दी। फायरिंग में उनके चचेरे भाई सूरज व साेनू को गोली गईं। इसमें सूरज की अस्पताल ले जाने के दौरान मौत हो गई। दोनों ही मामलों में आरोपिताें के हाथ अपनों के खून से रंग गए। मामले को लेकर क्या बोले मनोविशेषज्ञ? सगे संबंधियों पर आक्रामक होने की घटनाएं मन में पल रही कुंठा का परिणाम हैं। कुंठित व्यक्ति अपने मनोभावों को दबाए रखते हैं। ऐसे में वह एकाएक आक्रामक हो जाते हैं और ऐसी घटनाओं को अंजाम दे देते हैं। अपनों के साथ बैठकर खुलकर बात करने की आदत डालें और किसी भी विवाद को ज्यादा लंबा ना खिंचने दें। मनोभावों में परिवर्तन दिखाई दे तो उनकी काउंसलिंग कराएं। - डॉ. अनिल कुमार, मनोविशेषज्ञ बाल कल्याण विभाग- हरियाणा। |
मुरादाबाद, 09 सितम्बर (हि.स.)। मुरादाबाद के थाना पाकबड़ा क्षेत्र के रतनपुर कलां गांव निवासी दिव्यांग युवती ने एसएसपी को दिए शिकायती पत्र में बताया कि शुक्रवार को उसके भाई व भाई के साले ने अन्य लोगों ने उसकी बैसाखी छीन कर उसके साथ मारपीट की। साथ ही पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपितों तो ने उसे घर छोड़कर न जाने पर जान से मारने की धमकी भी दी है। पीड़िता की तहरीर के आधार पर आज थाना पुलिस ने एसएसपी के आदेश पर चार आरोपितों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया।
थाना पाकबड़ा क्षेत्र के रतनपुर कलां गांव निवासी दिव्यांग शबाना ने बीते दिन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हेमराज मीणा को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाते हुए बताया कि शुक्रवार सुबह आठ बजे अपने घर में थी। इसी दौरान वहां उसका भाई नूर हसन और भाई के साले कासिम, नाजिम व आरिफ निवासी रतनपुर कलां ने बैसाखी छीनकर जमीन पर गिराकर उसे मारपीट कर घायल कर दिया। इसके अलावा पीड़िता को धमकी दे रहे कि तू घर छोड़कर कहीं चली जा नहीं तो तुझे जान से मार देंगे। मेरे पति के साथ भी मुझे रहने नहीं दे रहे हैं। मेरे पति की जान माल के दुश्मन बन गए हैं। उक्त लोगों ने मेरा मोबाइल और पैसे भी छीन लिए हैं। इन सभी से मुझे अपनी जान का खतरा बना हुआ है। दिव्यांग युवती ने कहा कि मैंने थाना पाकबड़ा पुलिस से शिकायत की लेकिन पुलिस ने शिकायत को नजर अंदाज कर दिया। एसएसपी के आदेश पर पाकबड़ा पुलिस ने शनिवार को मामले में आरोपित नूर हसन, कासिम, नाजिम और आसिफ के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरु कर दी हैं।
| मुरादाबाद, नौ सितम्बर । मुरादाबाद के थाना पाकबड़ा क्षेत्र के रतनपुर कलां गांव निवासी दिव्यांग युवती ने एसएसपी को दिए शिकायती पत्र में बताया कि शुक्रवार को उसके भाई व भाई के साले ने अन्य लोगों ने उसकी बैसाखी छीन कर उसके साथ मारपीट की। साथ ही पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपितों तो ने उसे घर छोड़कर न जाने पर जान से मारने की धमकी भी दी है। पीड़िता की तहरीर के आधार पर आज थाना पुलिस ने एसएसपी के आदेश पर चार आरोपितों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया। थाना पाकबड़ा क्षेत्र के रतनपुर कलां गांव निवासी दिव्यांग शबाना ने बीते दिन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हेमराज मीणा को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाते हुए बताया कि शुक्रवार सुबह आठ बजे अपने घर में थी। इसी दौरान वहां उसका भाई नूर हसन और भाई के साले कासिम, नाजिम व आरिफ निवासी रतनपुर कलां ने बैसाखी छीनकर जमीन पर गिराकर उसे मारपीट कर घायल कर दिया। इसके अलावा पीड़िता को धमकी दे रहे कि तू घर छोड़कर कहीं चली जा नहीं तो तुझे जान से मार देंगे। मेरे पति के साथ भी मुझे रहने नहीं दे रहे हैं। मेरे पति की जान माल के दुश्मन बन गए हैं। उक्त लोगों ने मेरा मोबाइल और पैसे भी छीन लिए हैं। इन सभी से मुझे अपनी जान का खतरा बना हुआ है। दिव्यांग युवती ने कहा कि मैंने थाना पाकबड़ा पुलिस से शिकायत की लेकिन पुलिस ने शिकायत को नजर अंदाज कर दिया। एसएसपी के आदेश पर पाकबड़ा पुलिस ने शनिवार को मामले में आरोपित नूर हसन, कासिम, नाजिम और आसिफ के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरु कर दी हैं। |
वैसे, आपने उधारी को लेकर बहुत सारे किस्से सुने होंगे, लेकिन एक विदेशी सांसद ने ईमानदारी की मिसाल पेश की है। महज 200 रुपये की उधारी चुकाने के लिए वह हजारों मिल से चलकर भारत आए और दुकानदार की उधारी चुकाई। यह उधारी चुकाने के लिए वह 4,810 किमी चलकर आए और उन्हें आने में यहां तक 30 साल लग गए, लेकिन आए तो ब्याज सहित दुकानदार को उधारी चुकाई। यह विदेशी सांसद पिछले रविवार को महाराष्ट्र के औरंगाबाद पहुंचें और एक सामान्य से दुकानदार परिवार के अतिथि बने थे। हजारों मिलकर चलकर आने वाले सांसद का नाम है रिचर्ड न्यागका टोंगी। वह अफ्रीकी देश कीनिया के सांसद हैं। यही नहीं टोंगी केन्याई संसद में विदेश मामलों की समिति के उपाध्यक्ष भी हैं। हाल ही में जब वह भारत की यात्रा पर आए, तो वह उधारी चुकाने से नहीं भूले। नई दिल्ली में निर्धारित कार्यक्रम समाप्त होने के बाद रिचर्ड न्यागका टोंगी औरंगाबाद में काशीनाथ मार्तंडराव गवली के घर पहुंचें। काशीनाथ को देखते ही रिचर्ड की आंखें नम हो गईं, तो गवली परिवार के भी सभी लोग भावुक हो गए।
वर्तमान में केन्या में सांसद रिचर्ड न्यागका टोंगी 1985 से 1989 तक महाराष्ट्र के औरंगाबाद में रहकर मौलाना आजाद कॉलेज में पढ़ाई कर रहे थे। पूर्वी अफ्रीका के केन्या में रहने वाले रिचर्ड न्यागका टोंगी भारत एक विद्यार्थी के रूप में आए थे। उन्होंने वानखेड़ेनगर नगर में कॉलेज के सामने ही एक कमरा किराये पर ले रखा था। वहीं किराने की एक दुकान थी, जहां से टोंगी सामान खरीदते थे। एक बार उनके पास दुकानदार की 200 रुपए की उधारी हो गई थी। यहां पर करीब पांच साल रहने के दौरान उन पर काशीनाथ की 200 रुपए की उधारी हो गई। टोंगी सोचते थे कि वे पढ़ाई पूरी होने के बाद स्वदेश लौटने से पहले उधारी चुका देंगे, परंतु ऐसा हुआ नहीं या हो न सका। रिचर्ड न्यागका टोंगी पढ़ाई पूरी करते ही स्वदेश लौटने की खुशी में बिना उधारी चुकाए ही औरंगाबाद से केन्या चले गए। वह देश लौटे ही राजनीति पार्टी में शामिल हो गए और 2017 में न्यारीबरी चाचे निर्वाचन क्षेत्र से सांसद भी बने।
सांसद को हमेशा ही उधारी की बात याद रही और 200 रुपए न चुका पाने की बात उन्हें कचोटती रही। जब उन्हें हाल ही में भारत आने का मौका मिला तो उधारी को चुकाने का फैसला लिया। पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के लिए केन्या का शिष्टमंडल भारत आया था। संयोगवश टोंगी भी इस शिष्टमंडल में शामिल थे। दिल्ली का कार्यक्रम पूरा करने के बाद वह 30 साल पुराने कर्ज को लौटाने को चुकाने के लिए अपनी पत्नी पत्नी मिशेल के साथ औरंगाबाद पहुंचें। लेकिन तब से और अब समय में औरंगाबाद काफी बदल गया था। इसलिए उन्हें काफी दिक्कत हुई, लेकिन 2 घंटे तक खोजबीन करने के बाद उन्हें वही किराने की दुकान मिल गई जहां से वह सामान खरीदते थे।
श्री कृष्ण प्रोविज़न स्टोर पर उनकी मुलाकात काशीनाथ से हुई। जब गवली को टोंगी के आने की वजह का पता चला तो वह बेहद भावुक हो गए। उन्होंने काशीनाथ को सिर्फ 200 रुपए नहीं, अपितु 250 यूरो (19,500 रुपए) दिए। इसके बाद ही उन्होंने राहत की सांस ली। कर्ज चुकाने के बाद सांसद टोंगी ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा कि मैंने 22 साल पहले 200 रुपए का कर्ज लिया था जिसे मैं अभी तक चुका नहीं पाया था। आज मुझे चुकाने का मौका मिला। उन्होंने लिखा मैंने गवली को धन्यवाद दिया क्योंकि उन्होंने उस वक्त मेरी मदद की जब मैं संघर्ष कर रहा था। आज मुझे यह कर्ज चुकाकर काफी सुकून मिला। जब दोनों ही लोग मिले तो उस दौर की बहुत बातचीत हुई। काशीनाथ को भी 80 के दशक का अपना जमाना याद आ गया, जब वे विदेशी विद्यार्थियों को किराए पर कमरे उपलब्ध कराते थे।
| वैसे, आपने उधारी को लेकर बहुत सारे किस्से सुने होंगे, लेकिन एक विदेशी सांसद ने ईमानदारी की मिसाल पेश की है। महज दो सौ रुपयापये की उधारी चुकाने के लिए वह हजारों मिल से चलकर भारत आए और दुकानदार की उधारी चुकाई। यह उधारी चुकाने के लिए वह चार,आठ सौ दस किमी चलकर आए और उन्हें आने में यहां तक तीस साल लग गए, लेकिन आए तो ब्याज सहित दुकानदार को उधारी चुकाई। यह विदेशी सांसद पिछले रविवार को महाराष्ट्र के औरंगाबाद पहुंचें और एक सामान्य से दुकानदार परिवार के अतिथि बने थे। हजारों मिलकर चलकर आने वाले सांसद का नाम है रिचर्ड न्यागका टोंगी। वह अफ्रीकी देश कीनिया के सांसद हैं। यही नहीं टोंगी केन्याई संसद में विदेश मामलों की समिति के उपाध्यक्ष भी हैं। हाल ही में जब वह भारत की यात्रा पर आए, तो वह उधारी चुकाने से नहीं भूले। नई दिल्ली में निर्धारित कार्यक्रम समाप्त होने के बाद रिचर्ड न्यागका टोंगी औरंगाबाद में काशीनाथ मार्तंडराव गवली के घर पहुंचें। काशीनाथ को देखते ही रिचर्ड की आंखें नम हो गईं, तो गवली परिवार के भी सभी लोग भावुक हो गए। वर्तमान में केन्या में सांसद रिचर्ड न्यागका टोंगी एक हज़ार नौ सौ पचासी से एक हज़ार नौ सौ नवासी तक महाराष्ट्र के औरंगाबाद में रहकर मौलाना आजाद कॉलेज में पढ़ाई कर रहे थे। पूर्वी अफ्रीका के केन्या में रहने वाले रिचर्ड न्यागका टोंगी भारत एक विद्यार्थी के रूप में आए थे। उन्होंने वानखेड़ेनगर नगर में कॉलेज के सामने ही एक कमरा किराये पर ले रखा था। वहीं किराने की एक दुकान थी, जहां से टोंगी सामान खरीदते थे। एक बार उनके पास दुकानदार की दो सौ रुपयापए की उधारी हो गई थी। यहां पर करीब पांच साल रहने के दौरान उन पर काशीनाथ की दो सौ रुपयापए की उधारी हो गई। टोंगी सोचते थे कि वे पढ़ाई पूरी होने के बाद स्वदेश लौटने से पहले उधारी चुका देंगे, परंतु ऐसा हुआ नहीं या हो न सका। रिचर्ड न्यागका टोंगी पढ़ाई पूरी करते ही स्वदेश लौटने की खुशी में बिना उधारी चुकाए ही औरंगाबाद से केन्या चले गए। वह देश लौटे ही राजनीति पार्टी में शामिल हो गए और दो हज़ार सत्रह में न्यारीबरी चाचे निर्वाचन क्षेत्र से सांसद भी बने। सांसद को हमेशा ही उधारी की बात याद रही और दो सौ रुपयापए न चुका पाने की बात उन्हें कचोटती रही। जब उन्हें हाल ही में भारत आने का मौका मिला तो उधारी को चुकाने का फैसला लिया। पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के लिए केन्या का शिष्टमंडल भारत आया था। संयोगवश टोंगी भी इस शिष्टमंडल में शामिल थे। दिल्ली का कार्यक्रम पूरा करने के बाद वह तीस साल पुराने कर्ज को लौटाने को चुकाने के लिए अपनी पत्नी पत्नी मिशेल के साथ औरंगाबाद पहुंचें। लेकिन तब से और अब समय में औरंगाबाद काफी बदल गया था। इसलिए उन्हें काफी दिक्कत हुई, लेकिन दो घंटाटे तक खोजबीन करने के बाद उन्हें वही किराने की दुकान मिल गई जहां से वह सामान खरीदते थे। श्री कृष्ण प्रोविज़न स्टोर पर उनकी मुलाकात काशीनाथ से हुई। जब गवली को टोंगी के आने की वजह का पता चला तो वह बेहद भावुक हो गए। उन्होंने काशीनाथ को सिर्फ दो सौ रुपयापए नहीं, अपितु दो सौ पचास यूरो दिए। इसके बाद ही उन्होंने राहत की सांस ली। कर्ज चुकाने के बाद सांसद टोंगी ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा कि मैंने बाईस साल पहले दो सौ रुपयापए का कर्ज लिया था जिसे मैं अभी तक चुका नहीं पाया था। आज मुझे चुकाने का मौका मिला। उन्होंने लिखा मैंने गवली को धन्यवाद दिया क्योंकि उन्होंने उस वक्त मेरी मदद की जब मैं संघर्ष कर रहा था। आज मुझे यह कर्ज चुकाकर काफी सुकून मिला। जब दोनों ही लोग मिले तो उस दौर की बहुत बातचीत हुई। काशीनाथ को भी अस्सी के दशक का अपना जमाना याद आ गया, जब वे विदेशी विद्यार्थियों को किराए पर कमरे उपलब्ध कराते थे। |
PATNA : राजधानी पटना में नौकरी दिलाने के नाम पर पैसा एंठने वाले गिरोह का खुलासा हुआ है. इस मामले में पत्रकार नगर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. प्रतियोगिता परीक्षा को पास कराकर नौकरी दिलाने वाला चार सेटर गिरफ्तार किये गये हैं. गिरफ्तार ठगों के पास से सिम कार्ड लगाने वाला आठ ब्लूटूथ, 21 ब्लूटूथ स्पीकर,कई प्रतियोगिता परीक्षा के प्रवेश पत्र, चार एटीएम, एसबीआई के खाते में नौ लाख की जमा रकम समेत अवैध लेनदेन के कागजात बरामद किये गये हैं. एसबीआई के खाते को फ्रीज कर दिया गया है.
जिन जालसाजों की गिरफ़्तारी हुई है उनकी पहचान मनोज कुमार उर्फ हरी, विकास कुमार, गोपेश कुमार और प्रभात कुमार के रूप में हुई है. विकास होमगार्ड का जवान है. मनोज और विकास गया के टेकारी थानांतर्गत मुरगी बिगहा मोहल्ले का रहने वाला है, जबकि गोपेश और प्रभात नालंदा जिले के सरमेरा थाना क्षेत्र के चेरों के निवासी हैं.
पूछताछ में उन्होंने बताया कि वे प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली कर अभ्यर्थियों को सफलता दिलाने का दावा करते हैं. उनके पास से केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती बोर्ड) के अभ्यर्थियों का प्रवेशपत्र मिला, जिसका सत्यापन कराया जा रहा है. गिरफ्तार विकास ने खुद को होमगार्ड का जवान बताया है. उसकी तैनाती अभी लखीसराय जिले के बड़हिया थाना क्षेत्र में है. उसका कहना है कि वह एक साल से जालसाज गिरोह के संपर्क में है. वह अभ्यर्थियों को जाल में फंसाने का काम है. सिपाही भर्ती में लिखित परीक्षा पास करने के लिए उसने 25 अभ्यर्थी से छह-छह लाख रुपये लिए हैं.
गौरतलब है कि गर्दनीबाग हाईस्कूल ग्राउंड में सिपाही भर्ती के लिए अभ्यर्थियों की शारीरिक परीक्षा ली जा रही है. इस दौरान अब तक तीन दर्जन से अधिक अभ्यर्थियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जिन्होंने स्कालर या दूसरे माध्यम से लिखित परीक्षा पास की और शारीरिक दक्षता परीक्षा देने खुद आए थे.
| PATNA : राजधानी पटना में नौकरी दिलाने के नाम पर पैसा एंठने वाले गिरोह का खुलासा हुआ है. इस मामले में पत्रकार नगर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. प्रतियोगिता परीक्षा को पास कराकर नौकरी दिलाने वाला चार सेटर गिरफ्तार किये गये हैं. गिरफ्तार ठगों के पास से सिम कार्ड लगाने वाला आठ ब्लूटूथ, इक्कीस ब्लूटूथ स्पीकर,कई प्रतियोगिता परीक्षा के प्रवेश पत्र, चार एटीएम, एसबीआई के खाते में नौ लाख की जमा रकम समेत अवैध लेनदेन के कागजात बरामद किये गये हैं. एसबीआई के खाते को फ्रीज कर दिया गया है. जिन जालसाजों की गिरफ़्तारी हुई है उनकी पहचान मनोज कुमार उर्फ हरी, विकास कुमार, गोपेश कुमार और प्रभात कुमार के रूप में हुई है. विकास होमगार्ड का जवान है. मनोज और विकास गया के टेकारी थानांतर्गत मुरगी बिगहा मोहल्ले का रहने वाला है, जबकि गोपेश और प्रभात नालंदा जिले के सरमेरा थाना क्षेत्र के चेरों के निवासी हैं. पूछताछ में उन्होंने बताया कि वे प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली कर अभ्यर्थियों को सफलता दिलाने का दावा करते हैं. उनके पास से केंद्रीय चयन पर्षद के अभ्यर्थियों का प्रवेशपत्र मिला, जिसका सत्यापन कराया जा रहा है. गिरफ्तार विकास ने खुद को होमगार्ड का जवान बताया है. उसकी तैनाती अभी लखीसराय जिले के बड़हिया थाना क्षेत्र में है. उसका कहना है कि वह एक साल से जालसाज गिरोह के संपर्क में है. वह अभ्यर्थियों को जाल में फंसाने का काम है. सिपाही भर्ती में लिखित परीक्षा पास करने के लिए उसने पच्चीस अभ्यर्थी से छह-छह लाख रुपये लिए हैं. गौरतलब है कि गर्दनीबाग हाईस्कूल ग्राउंड में सिपाही भर्ती के लिए अभ्यर्थियों की शारीरिक परीक्षा ली जा रही है. इस दौरान अब तक तीन दर्जन से अधिक अभ्यर्थियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जिन्होंने स्कालर या दूसरे माध्यम से लिखित परीक्षा पास की और शारीरिक दक्षता परीक्षा देने खुद आए थे. |
सहरसा रमन ठाकुर : सदर थाना के सराही रोड स्थित दुर्गा नर्सिंग होम पर गोलीबारी और एक डॉक्टर से मांगी गयी दस लाख रूपये की रंगदारी मामले को पुलिस गंभीरता से नहीं ले रही है। घटना के अड़तालीस घंटे से अधिक समय बीतने के बावजूद नामजद अभियुक्तों की गिरफ्तारी नही होना इसी बात को दर्शाता है। जबकि केस दर्ज करने वाले डॉक्टर सहित नर्सिंग होम के स्टाफ का कहना है कि इस मामले में नामजद बनाये गये दोनों अभियुक्त शहरी इलाके में खुलेआम घूम रहा है। अभियुक्तों द्वारा नर्सिंग होम पर किये गए गोलीबारी के अभी तक निशान मौजूद हैं।
जिसमे प्रवीण कुमार सिंह उर्फ चुनचुन सिंह और सिद्धार्थ कुमार उर्फ गोविंदा को नामजद बनाया गया है। आम डॉक्टरों से अलग दुर्गा नर्सिंग होम में आज तक किसी मरीज को पैसे के अभाव में बिना इलाज लौटना नही पड़ा है। स्टाफ के मुताबिक करीब दो सप्ताह पूर्व भी नामजद अभियुक्त ने क्लीनिक पर जाकर गाली गलौज किया था जिसका प्रतिकार स्थानीय लोगों ने जमकर किया था। इस दौरान काफी संख्या में जुटे लोगों ने अपराधियों को खदेड़ खदेड़ कर दौड़ा दिया । लोगों का कहना है कि जिस तरह पुलिस लापरवाही के चलते दान पेटी चोरी के एक माह बाद माता चंडिका देवी की मूर्ति चोरों ने चुरा ली तो कहीं पुलिस किसी बड़ी वारदात का तो इंतजार नहीं कर रही है।
| सहरसा रमन ठाकुर : सदर थाना के सराही रोड स्थित दुर्गा नर्सिंग होम पर गोलीबारी और एक डॉक्टर से मांगी गयी दस लाख रूपये की रंगदारी मामले को पुलिस गंभीरता से नहीं ले रही है। घटना के अड़तालीस घंटे से अधिक समय बीतने के बावजूद नामजद अभियुक्तों की गिरफ्तारी नही होना इसी बात को दर्शाता है। जबकि केस दर्ज करने वाले डॉक्टर सहित नर्सिंग होम के स्टाफ का कहना है कि इस मामले में नामजद बनाये गये दोनों अभियुक्त शहरी इलाके में खुलेआम घूम रहा है। अभियुक्तों द्वारा नर्सिंग होम पर किये गए गोलीबारी के अभी तक निशान मौजूद हैं। जिसमे प्रवीण कुमार सिंह उर्फ चुनचुन सिंह और सिद्धार्थ कुमार उर्फ गोविंदा को नामजद बनाया गया है। आम डॉक्टरों से अलग दुर्गा नर्सिंग होम में आज तक किसी मरीज को पैसे के अभाव में बिना इलाज लौटना नही पड़ा है। स्टाफ के मुताबिक करीब दो सप्ताह पूर्व भी नामजद अभियुक्त ने क्लीनिक पर जाकर गाली गलौज किया था जिसका प्रतिकार स्थानीय लोगों ने जमकर किया था। इस दौरान काफी संख्या में जुटे लोगों ने अपराधियों को खदेड़ खदेड़ कर दौड़ा दिया । लोगों का कहना है कि जिस तरह पुलिस लापरवाही के चलते दान पेटी चोरी के एक माह बाद माता चंडिका देवी की मूर्ति चोरों ने चुरा ली तो कहीं पुलिस किसी बड़ी वारदात का तो इंतजार नहीं कर रही है। |
स्थान में भी बदलाव ला सकती हैं। बडे रूम का सामान टेबल या साइड टेबल,
हैं। इससे लिविंग रूम और बेडरूम दोनों में बदलाव महसूस होगा।
हैं।
सकती हैं और उसे लाइट के ऊपर लगा सकती हैं। यह देखने में आकर्षक लगता है।
को रंग कर उस पर गि्लटर लगाकर बाउल में रखकर सजा सकते हैं।
| स्थान में भी बदलाव ला सकती हैं। बडे रूम का सामान टेबल या साइड टेबल, हैं। इससे लिविंग रूम और बेडरूम दोनों में बदलाव महसूस होगा। हैं। सकती हैं और उसे लाइट के ऊपर लगा सकती हैं। यह देखने में आकर्षक लगता है। को रंग कर उस पर गि्लटर लगाकर बाउल में रखकर सजा सकते हैं। |
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