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2,383
अगर आप दो घंटे के लिए एक शानदार अनुभव में खो जाना चाहते हैं तो ' दम लगा के हईशा ' जरुर देखें ।
positive
2,384
इस फिल्म में दिखाया गया है कि खूबसूरती वो नहीं होती जो हमें आंखों से नजर आती है ।
neutral
2,385
यह बहुत ही खूबसूरत फिल्म है जिसमें दिल को छू लेने वाली कहानी है ।
positive
2,386
फिल्म के हर कलाकार ने उम्दा अभिनय किया है ।
positive
2,387
फिल्म के गाने , संगीत , माहौल , डॉयलॉग सब कुछ कमाल का है ।
positive
2,388
इन सबसे भी ज्यादा प्रभावशाली है फिल्म का निर्देशन ।
positive
2,389
बड़ी ही खूबसूरती से फिल्म की कहानी आगे बढ़ती है और संध्या के व्यक्तित्व के छुपे पहलूओं को सामने लाती है ।
positive
2,390
इस फिल्म की कहानी हरिद्वार और ऋषिकेश के घाटों के आसपास बुनी गई है ।
neutral
2,391
यह फिल्म हमें दिखाती है कि कोई फिल्म कितनी सादगी और खूबसूरती से बनाई जा सकती है ।
positive
2,392
फिल्म के निर्देशक शरद कटारिया की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि उन्होंने हरिद्वार और बनारस की संस्कृति के साथ ही वहां के लोगों की मानसिकता को भी बहुत ही अच्छी तरह पेश कर पाए ।
positive
2,393
उन्होंने इस बात का भी ध्यान रखा है कि फिल्म की भाषा बिल्कुल वास्तविक लगे ।
positive
2,394
साथ ही फिल्म में बेहद मनोरंजक तरीके से हास्य का तानाबाना भी बुना गया है ।
positive
2,395
90 के दशक के संगीत और उस दौर के सबसे मशहूर गायक कुमार शानू को फिल्म के कई दृश्यों में याद किया गया है ।
positive
2,396
नई अभिनेत्री भूमि पेडनेकर ने संध्या के किरदार में जान डाल दी है ।
positive
2,397
शायद ही कोई और उनके जैसी खूबसूरती व सादगी से इस भूमिका को निभा पाता ।
positive
2,398
इस फिल्म की कास्टिंग लाजबाव है जिसका श्रेय कास्टिंग डाइरेक्टर शानू शर्मा को जाता है ।
positive
2,399
उनकी इस बात के लिए खासतौर से तारीफ की जानी चाहिए कि इस फिल्म में उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री के सबसे प्रतिभाशाली कलाकारों का चयन किया ।
positive
2,400
यकीनन यह बॉलीवुड की रोमांटिक कॉमेडी में अब तक की सबसे बेहतरीन फिल्म है ।
positive
2,401
' दम लगा के हईशा ' धीरे - धीरे आपके दिल में उतरती है और सिनेमा हॉल से निकलने के बाद भी आप फिल्म आपके मन में बसी होती है ।
positive
2,402
इस फिल्म की सबसे खास बात यह है कि इस फिल्म देखने के बाद अाप यकीनन अपने जीवन में उनलोगों को महत्व देना शुरू कर देंगे जिनकी आप उपेक्षा करते रहते हैं ।
positive
2,403
श्रीराम राघवन की ' बदलापुर ' हिंदी फिल्मों के प्रचलित जोनर बदले की कहानी है ।
neutral
2,404
इस हिस्से में घटनाएं तेजी से घटती हैं ।
neutral
2,405
फिल्म की गति धीमी नहीं पड़ती ।
positive
2,406
श्रीराम राघवन पहले ही फ्रेम से दर्शकों को सावधान की मुद्रा में बिठा देते हैं ।
neutral
2,407
अच्छी बात है कि टर्न और ट्विस्ट लगातार बनी रहती है ।
positive
2,408
वरुण धवन अपेक्षाकृत नए एक्टर हैं ।
neutral
2,409
उनकी मेहनत जाहिर है ।
neutral
2,410
उन्होंने रघु के बदलते भावों को व्यक्त करने में अच्छी - खासी मेहनत की है ।
positive
2,411
दूसरी तरफ नवाजुद्दीन सिद्दीकी की फितरत प्रभावित करती है ।
positive
2,412
वरुण की मेहनत और नवाज की फितरत से ' बदलापुर ' रोचक और रोमांचक हुई है ।
positive
2,413
वरुण सधे अभिनेता नवाज के आगे टिके रहते हैं ।
positive
2,414
नवाज हमारे समय के सिद्ध अभिनेता हैं ।
positive
2,415
यह फिल्म वरुण और नवाज के अभिनय के लिए याद रखी जाएगी ।
positive
2,416
फिल्म में महिला किरदारों को सीमित स्पेस में ही पर्याप्त महत्व दिया गया है ।
neutral
2,417
उन्हें अच्छी तरह गढ़ा गया है ।
positive
2,418
पांचों महिला किरदारों ने अपनी भूमिकाओं को संजीदगी से निभाया है ।
positive
2,419
प्रभावशाली दृश्य राधिका आप्टे और हुमा कुरैशी को मिले हैं ।
positive
2,420
यों दिव्या दत्ता , प्रतिमा कण्णन और यामी गौतम लेश मात्र भी कम असरदार नहीं हैं ।
positive
2,421
कुमुद मिश्रा की सहजता और स्वाभाविकता उल्लेखनीय है ।
positive
2,422
श्रीराम राघवन ने बदले की रोमांचक फिल्म को नया ट्विस्ट दे दिया है ।
positive
2,423
बहुत कम फिल्में ऐसी होती हैं , जो आरंंभ से अंत तक दर्शकों को बांध ही न पाएं ।
negative
2,424
विक्रमजीत सिंह की ' रॉय ' ऐसी ही फिल्म है ।
neutral
2,425
साधारण फिल्मों में भी कुछ दृश्य , गीत और सिक्वेंस मिल जाते हैं , जिसे दर्शकों का मन बहल जाता है ।
positive
2,426
' रॉय ' लगातार उलझती और उलझाती जाती है ।
neutral
2,427
हालांकि इसमें दो पॉपुलर हीरो हैं ।
neutral
2,428
रणबीर कपूर और अर्जुन रामपाल का आकर्षण भी काम नहीं आता ।
negative
2,429
ऊपर से डबल रोल में आई जैक्लीन फर्नांडीस डबल बोर करती हैं ।
negative
2,430
आयशा और टीया में बताने पर ही फर्क मालूम होता है या फिर रणबीर और अर्जुन के साथ होने पर पता चलता है कि वे दो हैं ।
neutral
2,431
हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के बैकड्रॉप पर बनी ' रॉय ' इंडस्ट्री की गॉसिप इमेज ही पेश करती है ।
neutral
2,432
' रॉय ' की सबसे कमजोर कड़ी जैक्लीन फर्नांडीस हैं ।
negative
2,433
उन्होंने नाच - गाने में भरपूर ऊर्जा दिखाई है ।
positive
2,434
अभिनय से अभी वह कोसों दूर हैं ।
negative
2,435
अर्जुन रामपाल और रणबीर कपूर समर्थ अभिनेता हैं ।
positive
2,436
निर्देशक ने इस फिल्म में उनके सामर्थ्य का उपयोग गैरजरूरी समझा है ।
neutral
2,437
दोनों ने बेपरवाही के साथ काम किया है ।
negative
2,438
अन्य दिक्कते भी हैं ।
negative
2,439
अर्जुंन रामपाल की दाढ़ी चिपकाई हुई दिखती है ।
neutral
2,440
रॉय के रूप में रणबीर कपूर भी खोए - खोए से हैं ।
neutral
2,441
दोनों एक समय के बाद नीरस और अप्रभावी हो जाते हैं ।
negative
2,442
फिल्म की थीम के हिसाब से सलेटी रंग चुना गया है , लेकिन वह अधिक काम नहीं आ पाता ।
negative
2,443
निर्देशक और लेखक ने पटकथा पर अधिक मेहनत नहीं की है ।
negative
2,444
कुछ नया करने और दिखाने के चक्कर में फिल्म फिसल गई है ।
negative
2,445
फिल्म के गाने ठीक - ठाक हैं ।
positive
2,446
उनकी लोकप्रियता से कुछ दर्शक भले ही आ जाएं ।
positive
2,447
फिल्म में एक संवाद है कि जो बात समझ में नहीं आती , वह सुनाई भी नहीं पड़ती ।
neutral
2,448
उसी तर्ज में कहें तो जो दृश्य समझ में नहीं आते , वे दिखाई भी नहीं पड़ते ।
neutral
2,449
' षमिताभ ' अनोखी व प्रयोगवादी किस्सागोई करने को मशहूर फिल्मकार आर. बाल्की की फिल्म है ।
neutral
2,450
' षमिताभ ' की कहानी एक गूंगे शख्स की है , जो हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का सुपरस्टार बन जाता है ।
neutral
2,451
' षमिताभ ' बड़ी खूबसूरती से हिंदी फिल्मकारों व सितारों की लकीर के फकीर वाली सोच व कार्यप्रणाली पर करारा प्रहार कर जाती है ।
neutral
2,452
वह माइंडलेस मसाला फिल्मों पर तंज कसते हुए उन्हें आड़े हाथों लेती है ।
neutral
2,453
फिल्म में अमिताभ बच्चन के असल जिंदगी से जुड़े अनुभव भी हैं ।
neutral
2,454
वे अपनी दमदार संवाद अदायगी से बताते हैं कि 70 पार होने के बावजूद उनमें अब भी काफी ऊर्जा और उत्साह बाकी है ।
positive
2,455
अब यह फिल्मकारों पर निर्भर करता है कि वे उनके किन शेड्स को उभार और बाहर निकाल पाने में सक्षम है ।
neutral
2,456
धनुष ने अपने किरदार से अमिताभ बच्चन की बुलंद आवाज और चेहरे पर हाव - भाव को ठीक - ठाक तौर पर कैरी किया है ।
positive
2,457
अक्षरा हासन इस फिल्म से अपना डेब्यू कर रही हैं ।
neutral
2,458
उन्होंने असिस्टेंट डायरेक्टर यानी एडी की भूमिका का निर्वहन किया है ।
neutral
2,460
फिल्म का निर्देशन असाधारण है ।
neutral
2,461
आर. बाल्की ने 156 मिनट लंबी फिल्म को बोझिल नहीं होने दिया है ।
neutral
2,462
उन्होंने परिस्थितियों का ताना - बाना बेहद रोचक और तार्किक बुना है ।
positive
2,463
फिल्म में अभिनेत्री रेखा को सीन पर ला अमिताभ बच्चन की आवाज बोलने वाले शख्स को बेस्ट एक्टर दिलवाने का आइडिया अनोखा और खूबसूरत बन पड़ा है ।
positive
2,464
स्वानंद किरकिरे ने अपनी प्रतिष्ठा के मुताबिक सीन को आगे बढ़ाने में मदद करने वाले गाने लिखे हैं ।
neutral
2,465
इलैयाराजा का संगीत कर्णप्रिय है ।
positive
2,466
पीसी श्रीराम की सिनेमैटोग्राफी उम्दा है ।
positive
2,467
विभु पुरी निर्देशित ' हवाईजादा ' पीरियड फिल्म है ।
neutral
2,468
संक्षिप्त साक्ष्यों के आधार पर विभु पुरी ने शिवकर तलपड़े की कथा बुनी है ।
neutral
2,469
ऐसा कहा जाता है कि शिवकर तलपड़े ने राइट बंधुओं से आठ साल पहले मुंबई की चौपाटी में विश्व का पहला विमान उड़ाया था ।
neutral
2,470
अंग्रेजों के शासन में देश की इस प्रतिभा को ख्याति और पहचान नहीं मिल पाई थी ।
neutral
2,471
119 सालों के बाद विभु पुरी की फिल्म में इस ' हवाईजादा ' की कथा कही गई है ।
neutral
2,472
बोलचाल , पहनावे और उपयोगी वस्तुओं के उपयोग में सावधानी नहीं बरती गई है ।
negative
2,473
हां , सेट आकर्षक हैं , पर सब कुछ बहुत ही घना और भव्य है ।
positive
2,474
ऐसे समय में जब स्पेस की अधिक दिक्कत नहीं थी , इस फिल्म को देखते हुए व्यक्ति और वस्तु में रगड़ सी प्रतीत होती है ।
neutral
2,475
अतीत की ऐसी कथाएं किसी भी देश के इतिहास के संरक्षण और वर्तमान के लिए बहुत जरूरी होती हैं , लेकिन उन्हें गहरे शोध और साक्ष्यों के आधार पर फिल्म की कहानी लिखी है ।
neutral
2,476
शिवकर तलपड़े और उनके सहयोगी चरित्र थोड़े नाटकीय और कृत्रिम लगते हैं ।
neutral
2,477
सनकी वैज्ञानिक शास्त्री का किरदार ऐसा ही लगता है ।
neutral
2,478
फिल्म में ही दिखाया गया है कि वेदों और ऐतिहासिक ग्रंथों के आधार पर शास्त्री ने वैमानिकी की पुस्तक तैयार की थी , फिर उस पुस्तक के आधार पर विमान बनाने और उड़ाने का श्रेय अकेले शिवकर तलपड़े को देना उचित नहीं लगता ।
neutral
2,479
विभु पुरी अपनी सोच और ईमानदारी से उन्नीसवीं सदी के अंतिम वर्षों का माहौल रचते हैं ।
positive
2,480
इसमें उनके आर्ट डायरेक्टर अमित रे ने भरपूर सहयोग दिया है ।
positive
2,481
उन्होंने पीरियड को वर्तमान संदर्भ दिया है , लेकिन उसकी वजह से तत्कालीन परिस्थितियों के चित्रण में फांक रह गई है ।
neutral
2,482
उन्नीसवीं सदी की मुंबई की बोली और माहौल रचने में भी फिल्म की टीम की मेहनत सराहनीय है ।
positive
2,483
कलाकारों में आयुष्मान खुराना ने शिवकर तलपड़े की चंचलता और सनकी मिजाज को पकडऩे की अच्छी कोशिश की है ।
positive