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∑ i = 1 n i 3 = ( n ( n + 1 ) 2 ) 2 = n 4 4 + n 3 2 + n 2 4 = [ ∑ i = 1 n i ] 2 {\displaystyle \sum _{i=1}^{n}i^{3}=\left({\frac {n(n+1)}{2}}\right)^{2}={\frac {n^{4}}{4}}+{\frac {n^{3}}{2}}+{\frac {n^{2}}{4}}=\left[\sum _{i=1}^{n}i\right]^{2}}
अंकगणित
100
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48
∑ i = 1 n i 4 = n ( n + 1 ) ( 2 n + 1 ) ( 3 n 2 + 3 n − 1 ) 30 = n 5 5 + n 4 2 + n 3 3 − n 30 {\displaystyle \sum _{i=1}^{n}i^{4}={\frac {n(n+1)(2n+1)(3n^{2}+3n-1)}{30}}={\frac {n^{5}}{5}}+{\frac {n^{4}}{2}}+{\frac {n^{3}}{3}}-{\frac {n}{30}}}
अंकगणित
101
null
54
∑ i = 0 n i p = ( n + 1 ) p + 1 p + 1 + ∑ k = 1 p B k p − k + 1 ( p k ) ( n + 1 ) p − k + 1 {\displaystyle \sum _{i=0}^{n}i^{p}={\frac {(n+1)^{p+1}}{p+1}}+\sum _{k=1}^{p}{\frac {B_{k}}{p-k+1}}{p \choose k}(n+1)^{p-k+1}} जहाँ B k {\displaystyle B_{k}} एक बर्नौली संख्या को दर्शाता है।
अंकगणित
102
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65
निम्नलिखित सूत्र ∑ i = 1 n i 3 = ( ∑ i = 1 n i ) 2 {\displaystyle \sum _{i=1}^{n}i^{3}=\left(\sum _{i=1}^{n}i\right)^{2}} किसी भी प्राकृतिक संख्या मान पर एक श्रेणी शुरू करने के लिए सामान्यीकृत के जोड़तोड़ हैं (i.e., m ∈ N {\displaystyle m\in \mathbb {N} } ):
अंकगणित
103
null
49
( ∑ i = m n i ) 2 = ∑ i = m n ( i 3 − i m ( m − 1 ) ) {\displaystyle \left(\sum _{i=m}^{n}i\right)^{2}=\sum _{i=m}^{n}(i^{3}-im(m-1))}
अंकगणित
104
null
31
∑ i = m n i 3 = ( ∑ i = m n i ) 2 + m ( m − 1 ) ∑ i = m n i {\displaystyle \sum _{i=m}^{n}i^{3}=\left(\sum _{i=m}^{n}i\right)^{2}+m(m-1)\sum _{i=m}^{n}i}
अंकगणित
105
null
35
=== चरघातांकी पदों के योग === नीचे के योगों में x एक स्थिरांक है जो 1 . के बराबर नहीं है
अंकगणित
106
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21
∑ i = m n − 1 x i = x m − x n 1 − x {\displaystyle \sum _{i=m}^{n-1}x^{i}={\frac {x^{m}-x^{n}}{1-x}}} (m < n; देखें गुणोत्तर श्रेणी)
अंकगणित
107
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28
∑ i = 0 n − 1 x i = 1 − x n 1 − x {\displaystyle \sum _{i=0}^{n-1}x^{i}={\frac {1-x^{n}}{1-x}}} (1 से शुरू होने वाली गुणोत्तर श्रेणी)
अंकगणित
108
null
28
∑ i = 0 n − 1 i x i = x − n x n + ( n − 1 ) x n + 1 ( 1 − x ) 2 {\displaystyle \sum _{i=0}^{n-1}ix^{i}={\frac {x-nx^{n}+(n-1)x^{n+1}}{(1-x)^{2}}}}
अंकगणित
109
null
36
∑ i = 0 n − 1 i 2 i = 2 + ( n − 2 ) 2 n {\displaystyle \sum _{i=0}^{n-1}i2^{i}=2+(n-2)2^{n}} (विशेष स्थिति जब x = 2)
अंकगणित
110
null
29
∑ i = 0 n − 1 i 2 i = 2 − n + 1 2 n − 1 {\displaystyle \sum _{i=0}^{n-1}{\frac {i}{2^{i}}}=2-{\frac {n+1}{2^{n-1}}}} (विशेष स्थिति जब x = 1/2)
अंकगणित
111
null
31
=== द्विपद गुणांकों वाले संकलन (summations involving binomial coefficients) === द्विपद गुणांकों (ठोस गणित का एक पूरा अध्याय केवल बुनियादी तकनीकों के लिए समर्पित है) को शामिल करने वाली बहुत सारी योग सर्वसमिकाएँ मौजूद हैं। कुछ सबसे बुनियादी निम्नलिखित हैं।
अंकगणित
112
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40
∑ i = 0 n ( n i ) = 2 n {\displaystyle \sum _{i=0}^{n}{n \choose i}=2^{n}}
अंकगणित
113
null
17
∑ i = 1 n i ( n i ) = n 2 n − 1 {\displaystyle \sum _{i=1}^{n}i{n \choose i}=n2^{n-1}}
अंकगणित
114
null
21
∑ i = 0 n i ! ⋅ ( n i ) = ⌊ n ! ⋅ e ⌋ {\displaystyle \sum _{i=0}^{n}i!\cdot {n \choose i}=\lfloor n!\cdot e\rfloor }
अंकगणित
115
null
28
∑ i = 0 n − 1 ( i k ) = ( n k + 1 ) {\displaystyle \sum _{i=0}^{n-1}{i \choose k}={n \choose k+1}}
अंकगणित
116
null
25
∑ i = 0 n ( n i ) a ( n − i ) b i = ( a + b ) n {\displaystyle \sum _{i=0}^{n}{n \choose i}a^{(n-i)}b^{i}=(a+b)^{n}} , द्विपद प्रमेय
अंकगणित
117
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32
== वृद्धि दर == निम्नलिखित उपयोगी सन्निकटन है,(थीटा प्रतीक का उपयोग करके):
अंकगणित
118
null
12
∑ i = 1 n i c = Θ ( n c + 1 ) {\displaystyle \sum _{i=1}^{n}i^{c}=\Theta (n^{c+1})} −1 से अधिक वास्तविक c के लिए
अंकगणित
119
null
26
∑ i = 1 n 1 i = Θ ( log ⁡ n ) {\displaystyle \sum _{i=1}^{n}{\frac {1}{i}}=\Theta (\log n)} (देखें हरात्मक संख्या)
अंकगणित
120
null
23
∑ i = 1 n c i = Θ ( c n ) {\displaystyle \sum _{i=1}^{n}c^{i}=\Theta (c^{n})} वास्तविक c के लिए 1 से बड़ा
अंकगणित
121
null
24
∑ i = 1 n log ⁡ ( i ) c = Θ ( n ⋅ log ⁡ ( n ) c ) {\displaystyle \sum _{i=1}^{n}\log(i)^{c}=\Theta (n\cdot \log(n)^{c})} गैर-ऋणात्मक वास्तविक c के लिए
अंकगणित
122
null
33
∑ i = 1 n log ⁡ ( i ) c ⋅ i d = Θ ( n d + 1 ⋅ log ⁡ ( n ) c ) {\displaystyle \sum _{i=1}^{n}\log(i)^{c}\cdot i^{d}=\Theta (n^{d+1}\cdot \log(n)^{c})} गैर-ऋणात्मक वास्तविक c, d के लिए
अंकगणित
123
null
41
∑ i = 1 n log ⁡ ( i ) c ⋅ i d ⋅ b i = Θ ( n d ⋅ log ⁡ ( n ) c ⋅ b n ) {\displaystyle \sum _{i=1}^{n}\log(i)^{c}\cdot i^{d}\cdot b^{i}=\Theta (n^{d}\cdot \log(n)^{c}\cdot b^{n})} गैर-ऋणात्मक वास्तविक के लिए b> 1, c, d
अंकगणित
124
null
49
== बाहरी कड़ियाँ == Derivation of Polynomials to Express the Sum of Natural Numbers with Exponents
अंकगणित
125
null
16
संख्याएँ वे गणितीय वस्तुएँ हैं जिनका उपयोग मापने, गिनने और नामकरण करने के लिए किया जाता है। १, २, ३, ४ आदि प्राकृतिक संख्याएँ इसकी सबसे मूलभूत उदाहरण हैं। इसके अलावा वास्तविक संख्याएँ (जैसे १२.४५, ९९.७५ आदि) और अन्य प्रकार की संख्याएँ भी आधुनिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में प्रयुक्त होतीं हैं। संख्याएँ हमारे जीवन के ढर्रे को निर्धरित करती हैं। केल्विन ने संख्याओं के बारे में कहा है कि आप किसी परिघटना के बारे में कुछ नहीं जानते यदि आप उसे संख्याओं के द्वारा अभिव्यक्त नहीं कर सकते। जीवन के कुछ ऐसे क्षेत्रों में भी संख्याओं की अहमियत है जो इतने आम नहीं माने जाते। किसी धावक के समय में 0.001 सैकिंड का अंतर भी उसे स्वर्ण दिला सकता है या उसे इससे वंचित कर सकता है। किसी पहिए के व्यास में एक सेंटीमीटर के हजारवें हिस्से जितना फर्क उसे किसी घड़ी के लिए बेकार कर सकता है। किसी व्यक्ति की पहचान के लिए उसका टेलीफोन नंबर, राशन कार्ड पर पड़ा नंबर, बैंक खाते का नंबर या परीक्षा का रोल नंबर मददगार होते हैं। सुखदेव जाट सुखदेव चौधरी के अनुसार अंकों के समूह को संख्या कहते हैं जीरो से लेकर के 9 तक कुल अंक 10 होते हैं जिनका निर्माण करके बहुत सारी संख्या बनाई जा सकती है उदाहरण के लिए 10, 123 189 ईटीसी
अंकगणित
126
null
215
== संख्याओं का उद्भव == संख्याएं मानव सभ्यता जितनी ही पुरानी हैं। आक्सफोर्ड स्थित एशमोलियन अजायबघर में राजाधिकार का प्रतीक एक मिस्री शाही दंड (रायल मेस) रखा है, जिस पर 1,20,000 कैदियों, 4,00,000 बैलों और 14,22,000 बकरियों का रिकार्ड दर्ज है। इस रिकार्ड से जो 3400 ईसा पूर्व से पहले का है, पता चलता है कि प्राचीन काल में लोग बड़ी संख्याओं को लिखना जानते थे। बेशक संख्याओं की शुरूआत मिस्रवासियों से भी बहुत पहले हुई होगी। आदिमानव का गिनती से इतना वास्ता नहीं पड़ता था। रहने के लिए उसके पास गुफा थी, भोजन पेड़-पौधों द्वारा या फिर हथियारों से शिकार करके उसे मिल जाता था। मगर करीब 10,000 साल पहले जब आदिमानवों ने गाँवों में बस कर खेती का काम और पशुपालन आरंभ किया तो उनका जीवन पहले से कहीं अधिक जटिल हो गया। उन्हें अपने रोजमर्रा के कार्यक्रम के साथ अपने सार्वजनिक एवं पारिवारिक जीवन में भी नियमितता लाने की जरूरत महसूस हुई। उन्हें पशुओं की गिनती करने, कृषि उपज का हिसाब रखने, भूमि की पैमाइश तथा समय की जानकारी के लिए संख्याओं की जरूरत पड़ी। दुनिया के विभिन्न भागों में जैसे कि बेबीलोन, मिस्र, भारत, चीन तथा कई और स्थानों पर विभिन्न सभ्यताओं का निवास था। इन सभी सभ्यताओं ने संभवतया एक ही समय के दौरान अपनी-अपनी संख्या-पद्धतियों का विकास किया होगा। बेबीलोन निवासियों की प्राचीन मिट्टी की प्रतिमाओं में संख्याएं खुदी मिलती हैं। तेज धार वाली पतली डंडियों से वे गीली मिट्टी पर शंकु आकार के प्रतीक चिह्नों की खुदाई करते, बाद में इन्हें ईंटों की शक्ल दे देते। एक (1), दस (10), सौ (100) आदि के लिए विशेष प्रतीकों का इस्तेमाल किया जाता था। इन प्रतीकों की पुनरावृत्ति द्वारा ही वे किसी संख्या को प्रदर्शित करते जैसे कि 1000 को लिखने के लिए वे प्रतीक चिह्न का सहारा लेते। या फिर 100 की संख्या को दस बलिखते थे। बेबीलोनवासी काफी बड़ी संख्याओं की गिनती वे 60 की संख्या के माध्यम से ही करते, जैसा कि आजकल हम संख्या 10 के माध्यम से अपनी गिनती करते हैं। मिस्र के प्राचीन निवासी भी बड़ी संख्याओं की गिनती करना जानते थे तथा साल में 365 दिन होने की जानकारी उनके पास थी।
अंकगणित
127
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354
== संख्याओं का वर्गीकरण == मूलतः संख्या का अर्थ 'प्राकृतिक संख्याओं' से लिया गया था। आगे चलकर धीरे-धीरे 'संख्याओं' का क्षेत्र विस्तृत होता गया तथा पूर्णांक, परिमेय संख्या, वास्तविक संख्या होते हुए समिश्र संख्या तक पहुँच चुका है। संख्याओं के समुच्चय में यह सम्बन्ध है: N ⊂ Z ⊂ Q ⊂ R ⊂ C . {\displaystyle \mathbb {N} \subset \mathbb {Z} \subset \mathbb {Q} \subset \mathbb {R} \subset \mathbb {C} .}
अंकगणित
128
null
71
== संख्याओं का महत्व == एक आम आदमी के जीवन की निम्नांकित स्थितियों को देखिए: 1. सवेरे-सवेरे अलार्म घड़ी की आवाज एक दफ्तर जाने वाले को जगाती है। ‘‘छह बज गए; अब उठना चाहिए।’’ इस तरह उस व्यक्ति की दिनचर्या की शुरूआत होती है। 2. बस में कंडक्टर यात्री से कहता है : ‘‘चालीस पैसे और दीजिए।’’ यात्री : ‘‘क्यों मैं तो आपको सही भाड़ा दे चुका हूं।’’ कंडक्टर : ‘‘भाड़ा अब 25 प्रतिशत बढ़ गया है।’’ यात्री : ‘‘अच्छा, यह बात है।’’ 3. एक गृहिणी किसी महानगर में दूध के बूथ पर जा कर कहती है, ‘‘मुझे दो लीटर वाली एक थैली दीजिए।’’ ‘‘मेरे पास दो लीटर वाली थैली नहीं है।’’ ‘‘ठीक है, तब एक लीटर वाली एक थैली और आधे-आधे लीटर वाली दो थैलियां ही आप मुझे दे दीजिए।’’ 4. एक रेस्तरां में बिल पर नजर दौड़ाते हुए एक ग्राहक कहता है : ‘‘वेटर ! तुमने बिल के पैसे ठीक से नहीं जोड़े हैं। बिल 9.50 की बजाए 8.50 रु. का होना चाहिए।’’ ‘‘मुझे अफोसस है, श्रीमान् !’’ ये कुछ ऐसी स्थितियाँ हैं जो संख्याओं के रोजमर्रा के जीवन में इस्तेमाल को दर्शाती हैं।
अंकगणित
129
null
186
अंक (डिजिट) स्थानीय मान भूतसंख्या पद्धति कटपयादि संख्या पद्धति आर्यभट की संख्यापद्धति संख्या सिद्धान्त अभाज्य संख्या या रूूूढ़ संख्याा (प्राइम नम्बर) गणितीय नियतांक भौतिक नियतांक परिमाण की कोटि (ऑर्डर ऑफ मैग्निट्यूड) पूर्ण संख्या और पूर्णांक संख्या== बाहरी कड़ियाँ ==
अंकगणित
130
null
39
https://web.archive.org/web/20091004230123/http://eom.springer.de/a/a013260.htm Mesopotamian and Germanic numbers BBC Radio 4, In Our Time: Negative Numbers '4000 Years of Numbers', lecture by Robin Wilson, 07/11/07, Gresham College (available for download as MP3 or MP4, and as a text file)। https://web.archive.org/web/20121003185207/http://planetmath.org/encyclopedia/MayanMath2.html
अंकगणित
131
null
37
संख्याओं को लिखने एवं उनके नामकरण के सुव्यवस्थित नियमों को संख्या पद्धति (Number system) कहते हैं। इसके लिये निर्धारित प्रतीकों का प्रयोग किया जाता है जिनकी संख्या निश्चित एवं सीमित होती है। इन प्रतीकों को विविध प्रकार से व्यस्थित करके भिन्न-भिन्न संख्याएँ निरूपित की जाती हैं। दशमलव पद्धति, द्वयाधारी संख्या पद्धति, अष्टाधारी संख्या पद्धति तथा षोडषाधारी संख्या पद्धति आदि कुछ प्रमुख प्रचलित संख्या पद्धतियाँ हैं।
अंकगणित
132
null
65
== स्थानीय मान पर आधारित संख्या पद्धति == स्थानीय मान पर आधारित संख्या पद्धति में 2 या अधिक प्रतीक उपयोग में लाये जाते हैं। जितने प्रतीक होते हैं वही उस संख्या पद्धति का आधार (base) कहलाता है। इन प्रतीकों का मान शून्य से लेकर b-1 तक होता है जहाँ b आधार है। नीचे दो संख्याओं का उदाहरण दिया गया है, जो क्रमशः दशमलव पद्धति तथा बाइनरी पद्धति में है-
अंकगणित
133
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69
2003 10 = 2 × 10 3 + 0 × 10 2 + 0 × 10 1 + 3 × 10 0 {\displaystyle 2003_{10}=2\times 10^{3}+0\times 10^{2}+0\times 10^{1}+3\times 10^{0}}
अंकगणित
134
null
28
1100 2 = 1 × 2 3 + 1 × 2 2 + 0 × 2 1 + 0 × 2 0 = 8 + 4 = 12 10 {\displaystyle 1100_{2}=1\times 2^{3}+1\times 2^{2}+0\times 2^{1}+0\times 2^{0}=8+4=12_{10}}
अंकगणित
135
null
35
== परिचय == संख्या पद्धतियाँ (Numeral system) हरेक भाषा में कुछ न कुछ अंक अवश्य होते हैं। इकाई की संकल्पना से "एक" की और अनेकता की संकल्पना से "दो" की रचना हुए बिना नहीं रहती। अव्यवस्थित संख्यालेखन कदाचित् ही किसी भाषा में होगा। ऑस्ट्रेलिया की भाषाओं, यूइन - कुरी आदि, तथा वहाँ की मध्य दक्षिणी भाषाओं में ऐसी अव्यवस्था है। अंडमन द्वीपों और मलक्का के वासियों ने एक और दो के किले अंक तो बनाए हैं, लेकिन जोड़ते वे एक-एक करके ही हैं। ऐसी ही बात दक्षिण अमरीका की शिकीटो के बारे में है। व्यवस्थित पद्धतियों के संक्षिप्त विवरण ये हैं : युग्मक पद्धति में एक और दो के लिए अंक हैं और 3 को 2+1 (अर्थात् एक युग्म और एक), 4 को 2+2 इत्यादि के रूप में प्रकट करते हैं। यह पद्धति ऑस्ट्रलिया और न्यूगिनी की जातियों, अफ्रीका की बुशमैन, दक्षिण अमरीका की फ्यूजियन, यमन, ग्वादिकी, शिपया आदि जातियों में है। इस पद्धति की उत्पत्ति शरीर के उन अंगों को देखकर हुई जो जोड़ों में हैं। चतुष्टक पद्धति में चार से अधिक संख्याएँ, संयोजन द्वारा, इस प्रकार प्रकट की जाती हैं : 5 = 4 + 1; 7 = 4 + 3; 8 = 4 + 4 या 2 x 4। विशेष रूप से कैलिफोर्निया में सलिना जाति द्वारा यह पद्धति प्रयुक्त होती है। वहाँ आकाश के चार भागों का धर्म, परंपरा और देवकथाओं में विशेष महत्व है। षटक पद्धति मूल रूप से उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका ही हुका, बुलंदा, एप्को जातियों में प्रचलित है। आगे चलकर यह द्वादश पद्धति में विकसित हुई। इसकी विशेषता यह है कि 12 के नि:शेष खंड कितने ही हो जाते हैं। इसी कारण यह ज्योतिष, लंबाई मापन और मुद्राप्रणाली में प्रचलित हुई। पंचक पद्धति अविकल रूप से दक्षिण अमरीका के सरावेका की अरोवक भाषा में मिलती है। अन्यत्र इसका संयोजन दशमक या विंशति पद्धति के साथ हो गया है। विंशति पद्धति में आधार 20 है। इसे पंचक, दशमक और युग्मक पद्धतियों से संयुक्त पाया जाता है। इन पद्धतियों का आरंभ हाथ और पैर की अंगुलियों से हुआ। इस प्रकार "पाँच" का अर्थ हाथ, दस का अर्थ दोनों हाथ, 15 का अर्थ दोनों हाथ और एक पैर तथा 20 का अर्थ दोनों पैर और हाथ, अर्थात् पूर्ण मनुष्य, हो जाता है। पंचक विंशति पद्धति प्राय: ऑस्ट्रेलिया तथा न्यूगिनी के कुछ भागों में, एशिया-यूरोप की सीमा पर और तिब्बती-वर्मी भाषाओं के हिमालयी वर्ग में है। दशमक विंशति पद्धति, मुंडा भाषाओं, हिमालय के तिब्बती-चीनी वर्गों और काकेशिया की भाषाओं में प्रचलित है। दशमक पद्धति के पंचक-दशमक रूप में द्वितीय पंचक की संख्याएँ पाँच में जोड़कर बनती हैं, यथा 6 = 5 + 1, या युग्मों द्वारा, यथा 6 = 3 x 2, या व्याकलन द्वारा भी, यथा 9 = 10 - 1। यह पद्धति कृषिप्रधान सभ्यताओं में प्रचलित हुई। अफ्रीका की वंटू, नीलोटी, व्यूल, न्योन्की और मन्कू भाषाओं में इसका विशेष प्रचलन है। शुद्ध दशमक पद्धति में पंचक का प्रयोग नहीं होता। इसकी उत्पत्ति यायावर (खानाबदोश) वर्गों में हुई, जिन्हें गाय, घोड़े, ऊँट, भेड़ के झुंडों को गिनने होते थे। तब से फैलते फैलते अब यह पद्धति विश्वव्यापी हो गई हैं। केवल मेक्सिकी और मध्य अमरीका में, अब भी ज्योतिष में प्रयुक्त होने के कारण, विंशति पद्धति सुरक्षित है।
अंकगणित
136
null
521
== इन्हें भी देखें == संख्या पद्धतियों की सूची द्वयाधारी संख्या पद्धति (बाइनरी नम्बर सिस्टम) अष्टाधारी संख्या पद्धति (ऑक्टल नम्बर सिस्टम) षोडशाधारी संख्या पद्धति (हेक्साडेसिमल नम्बर सिस्टम) दशमलव पद्धति (डेसिमल नम्बर सिस्टम) संख्या सिद्धान्त (नम्बर सिस्टम)
अंकगणित
137
null
36
== बाहरी कड़ियाँ == Numerical Mechanisms and Children's Concept of Numbers Software for converting from one numeral system to another
अंकगणित
138
null
20
वे 1 से बड़ी [प्राकृतिक संख्याएँ], जो स्वयं और 1 के अतिरिक्त और किसी प्राकृतिक संख्या से विभाजित नहीं होतीं, उन्हें 'अभाज्य संख्या' कहते हैं। वे १ से बड़ी प्राकृतिक संख्याएँ जो अभाज्य संख्याँ (whole number) नहीं हैं उन्हें भाज्य संख्या Archived 2023-04-19 at the वेबैक मशीन कहते हैं। अभाज्य संख्याओं की संख्या अनन्त हैं जिसे ३०० ईसापूर्व यूक्लिड ने प्रदर्शित कर दिया था। १ को परिभाषा के अनुसार अभाज्य नहीं माना जाता है। क्योकि १ न तो भाज्य है और न अभाज्य है 46 अभाज्य संख्याएं नीचे दी गयीं हैं- 2, 3, 5, 7, 11, 13, 17, 19, 23, 29, 31, 37, 41, 43, 47, 53, 59, 61, 67, 71, 73, 79, 83, 89, 97, 101, 103, 107, 109, 113, 127, 131, 137, 139, 149, 151, 157, 163, 167, 173, 179, 181, 191, 193, 197, 199. अभाज्य संख्याओं का महत्त्व यह है कि किसी भी अशून्य प्राकृतिक संख्या के गुणनखण्ड को केवल अभाज्य संख्याओं के द्वारा व्यक्त किया जा सकता है और यह गुणनखण्ड एकमेव (unique) होता है। इसे अंकगणित का मौलिक प्रमेय कहा जाता है। I अभाज्य संख्या को रूढ़ संख्या भी कहा जाता है। रूढ़ संख्या के गुण
अंकगणित
139
null
191
1 से बड़ी प्रत्येक प्राकृतिक संख्या का कम से कम एक रूढ़ विभाजक अवश्य होता है।
अंकगणित
140
null
16
== इतिहास == प्राचीन मिस्र में अभाज्य संख्या का ज्ञान होने का संकेत रायंड पपायरस (Rhind Papyrus) में मिलता है। अभाज्य संख्या पे विस्तृत जानकारी प्राचीन यूनान (३०० ईसापूर्व) के गणितज्ञ यूक्लिड के द्वारा लिखी पुस्तक "एलिमेंट्स" में मिलती है। अभाज्य संख्या का अगला विस्तृत उल्लेख सत्रवहीं शताब्दी के गणितज्ञ पियेरे डे फरमैट(1601-1665) के द्वारा मिलता है। फरमैट ने एक सूत्र दिया था जिससे अभाज्य संख्या का अनुमान लगाया जा सकता है। फरमैट ने अनुमान लगाया की जिस भी संख्या को ( 2^2^n +1), जहाँ n एक प्राकृतिक संख्या है, के रूप में लिखा जा सकता है, वो अभाज्य संख्या होंगे। हालाँकि n=4 तक ये सही था, पर n=5 पर जो संख्या आती है- (2^32 +1) वह 641 से विभाजित हो जाती है, अतः ये अभाज्य संख्या नहीं है। इसके बाद जो अभाज्य संख्या पे उल्लेखनीय कार्य हुआ, उसका श्रेय जर्मनी के वैज्ञानिक और गणितज्ञ जोहान्न कार्ल फ्रेडरिक ग़ौस्स (1777- 1855) को जाता है। गणित में काफ़ी संख्या शृंखलाएं होती हैं, जैसे ज्यामितीय श्रेणी, समांतर श्रेणी इत्यादि, जिनके सूत्र की मदद से शृंखला के किसी संख्या को पता किया जा सकता है, पर अभाज्य संख्याओं की ऐसी कोई शृंखला सूत्र का पता नहीं चल पाया है, क्योंकि ये कोई स्थाई प्रारूप (Pattern) का पालन नहीं करती | गणित के छेत्र में आज भी ये एक अनसुलझी समस्या है।
अंकगणित
141
null
218
== बाहरी कड़ियाँ == Caldwell, Chris, The Prime Pages at primes.utm.edu. Prime Numbers at MathWorld MacTutor history of prime numbers The prime puzzles An English translation of Euclid's proof that there are infinitely many primes Number Spiral with prime patterns An Introduction to Analytic Number Theory, by Ilan Vardi and Cyril Banderier EFF Cooperative Computing Awards Why a Number Is Prime by Enrique Zeleny, Wolfram Demonstrations Project. Plus teacher and student package: prime numbers from Plus, the free online mathematics magazine produced by the Millennium Mathematics Project at the University of Cambridge
अंकगणित
142
null
92
=== अभाज्य संख्याओं के जनित्र एवं गणित्र (कैलकुलेटर) === C/C++ source code for a simple primality test Online Prime Number Generator and Checker - instantly checks and finds prime numbers up to 128 digits long (does NOT require Java or JavaScript) Prime number calculator — Check prime number, and find next largest and next smallest prime numbers (requires JavaScript). Fast Online primality test — Dario Alpern's personal site – Makes use of the Elliptic Curve Method (up to thousands digits numbers check!, requires Java) Prime Number Generator — Generates a given number of primes above a given start number. Primes from WIMS is an online prime generator. Huge database of prime numbers All prime numbers below 10,000,000,000
अंकगणित
143
null
117
० - शून्यम् १ - एकः (पुल्लिंग), एका (स्त्रीलिंग) , एकम् (नपुंसकलिंग), २ -द्वौ, द्वे ३ - त्रयः,तिस्रः,त्रीणि ४ -चत्वारः चतस्रः, चत्वारि चार (४) के बाद सभी संखाएँ सभी लिंगों में एकसमान रूप में होती हैं।
अंकगणित
144
null
36
५ - पंच/पञ्च ६ - षट् , ७ - सप्त , ८ - अष्ट , ९ - नव , १० - दश , (११ से ४० तक २ के लिये द्वा , ३ के लिये त्रय: / त्रयो , ८ के लिये अष्टा का प्रयोग होता है। और ४० के उपर २ के लिये द्वि , ३ के लिये त्रि, तथा ८ के लिये अष्ट प्रयोग किए जाते हैं । ) ११ - एकादश , १२ - द्वादश , १३ - त्रयोदश , १४ - चतुर्दश , १५ - पंचदश १६ - षोडश , १७ - सप्तदश , १८ - अष्टादश , १९ - नवदश/ऊनविंशतिः/एकोनविंशतिः , २० - विंशति: , २१ - एकविंशतिः , २२ - द्वाविंशतिः , २३ - त्रयोविंशति: , २४ - चतुर्विंशतिः , २५ - पंचविंशतिः २६ - षड्‌विंशतिः , २७ - सप्तविंशतिः , २८ - अष्टाविंशतिः , २९ - नवविंशतिः/एकोनत्रिंशत्/ऊनत्रिंशत् , ३० - त्रिंशत् , ४० - चत्वारिंशत् , ५० - पंचाशत् एकपञ्चाशत्‌ , द्विपञ्चापञ्चाशत् , त्रिपञ्चाशत् , चतुर्पञ्चाशत् , पञ्चपञ्चाशत् ६० - षष्टिः , ७० - सप्ततिः , ८० - अशीतिः , एकाशीति: , द्-व्य-शीतिः , त्र्यशीतिः , चतुराशीतिः , पञ्चाशीतिः , षडशीतिः , सप्ताशीतिः , अष्टाशीतिः , (८९ - नवाशीतिः वा एकोननवति: वा) ९० - नवतिः सौ/शत(१००)- शतम् हज़ार/सहस्र - सहस्रम् १० हज़ार/१० सहस्र- अयुतम् लाख/लक्ष (सौ/शत सहस्र)- लक्षम् करोड़ (सौ/शत लाख)- कोटिः अरब (सौ/शत करोड़)- अर्बुदम् खरब (सौ/शत अरब)- खर्वम् नील (सौ/शत खरब) - नीलम् पद्म (सौ/शत नील)- पद्मम् आधा - अर्द्धम् एक पाव - पादम्, अर्द्धार्द्धम् पूरा - पूर्णम् अनन्त - अनन्तम्
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145
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250
== बाहरी कड़ियाँ == Sanskrit Counting Archived 2022-05-18 at the वेबैक मशीन
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146
null
12
काठी बिंदु या सैडल प्वॉइंट (Saddle Point) अर्थव्यवस्था के अंतर्गत व्यवहृत खेल सिद्धांत (Game Theory) से संबंधित एक पद है। दो प्रतिद्वंद्वी फर्मों के मध्य समाधान का वह बिंदु जहाँ दोनों प्रतिद्वंद्वियों में आम सहमति बन जाती है, काठी बिंदु या सैडल प्वॉइंट कहलाती है।
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147
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45
'एक छवि के पहलू अनुपात' चौड़ाई और उसकी ऊंचाई के बीच आनुपातिक संबंध का वर्णन. यह आमतौर पर दो संख्याओं के रूप में एक बृहदान्त्र द्वारा 16:09 में के रूप में, अलग व्यक्त किया है। के लिए एक 'एक्स': वाई पहलू अनुपात, कोई फर्क नहीं पड़ता कि कैसे छोटे या बड़े छवि है, अगर चौड़ाई में बांटा गया है एक्स बराबर लंबाई और ऊंचाई की इकाइयों यह एक ही लंबाई का उपयोग करके मापा जाता है इकाई, ऊंचाई वाई इकाइयों को मापा जाएगा. उदाहरण के लिए, 16:9 का एक पहलू अनुपात के साथ सभी छवियों के एक समूह पर विचार. एक छवि 16 इंच चौड़ा और 9 इंच ऊंची है। एक और 16 सेंटीमीटर चौड़ा और 9 सेंटीमीटर उच्च छवि है। तीसरा 8 गज की दूरी पर विस्तृत और 4.5 गज उच्च है।
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148
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133
== 1:1 == वर्ग क्लासिक छवि है और कुछ डिजिटल कैमरों अभी भी एक विकल्प के रूप में उपलब्ध है और फिल्म कैमरों के दिनों में जब वर्ग छवि कुछ मध्यम प्रारूप कैमरों शूटिंग 120 फिल्म spools पर लुढ़का हुआ है का उपयोग कर फोटोग्राफरों के साथ लोकप्रिय था वापस harkens . 6 x 6 सेमी छवि आकार क्लासिक 01:01 प्रारूप हाल ही में था। 120 फिल्म अभी भी पाया जा सकता है और आज का उपयोग किया।
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149
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78
== 4:3 == सबसे डिजिटल द्वारा प्रयोग किया जाता है बिंदु और कैमरा, चार तिहाई प्रणाली, कुटीर चार तिहाई प्रणाली कैमरों और [[मध्यम प्रारूप] 645 कैमरों. 04:03 डिजिटल प्रारूप की लोकप्रियता समय के तत्कालीन प्रचलित डिजिटल प्रदर्शित करता है, 4:3 कंप्यूटर पर नज़र रखता है मैच के लिए विकसित किया गया था। NKJGHASV JWEGNM ASFUH JFJVNNHFIBGH
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150
null
56
कण भौतिकी और नाभिकीय भौतिकी में शाखन अनुपात (branching ratio) किसी क्षय में क्षय होने वाले कण के इच्छित कण (अथवा कणों) में क्षय होने की प्रायिकता को कहते हैं। दूसरे शब्दों में किसी विशेष विधा में कण के क्षय का उसके सभी क्षयों से अनुपात को शाखन अनुपात कहते हैं। यह या तो परमाणुओं के रेडियोधर्मी क्षय या मूलकणों के क्षय पर लागू होता है। यह आंशिक क्षय नियतांक और सम्पूर्ण क्षय नियतांक के अनुपात के बराबर होता है। कभी-कभी इसे आंशिक अर्ध-आयु भी कहा जाता है, लेकिन यह शब्द भ्रामक है; क्योंकि अन्य विधा में क्षय के कारण यह सत्य नहीं है कि आधे कण अपने आंशिक अर्ध-आयु के बाद एक विशेष क्षय विधा के माध्यम से क्षय करेंगे। आंशिक अर्ध-आयु केवल आंशिक क्षय नियतांक λ को निर्दिष्ट करने का एक वैकल्पिक तरीका है, दोनों को निम्नलिखित सूत्र से लिखा जा सकता हैः
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151
null
145
t 1 / 2 = ln ⁡ 2 λ . {\displaystyle t_{1/2}={\frac {\ln 2}{\lambda }}.}
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152
null
15
== बाहरी कड़ियाँ == एल. बी. एन. एल. समस्थानिक परियोजना कण डेटा समूह (कण भौतिकी के लिए सूची) परमाणु संरचना और क्षय डेटा-परमाणु क्षय के लिए IAEA
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153
null
27
गणित में दो चर राशियाँ x तथा y समानुपाती (proportional) कही जाती हैं यदि y x {\displaystyle {\tfrac {y}{x}}} का मान नियत (स्थिर/constant) हो। ऐसी स्थिति में कहते हैं कि पहली राशि, दूसरी राशि के समानुपाती है। उदाहरण के लिये, यदि कोई वस्तु नियत वेग से गति कर रही है तो उसके द्वारा तय की गयी दूरी, समय के समानुपाती होगी। दो अनुपातों (ratios) की समता को समानुपात (proportionality) कहते हैं। जैसे a c = b d , {\displaystyle {\tfrac {a}{c}}\ =\ {\tfrac {b}{d}},} एक समानुपात है जिसमें कोई भी पद शून्य नहीं है।
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154
null
94
== निरूपण == समानुपात को सामान्यतः अनुपात के चिह्न (:) को दो बार लिखकर निरूपित किया जाता है। कभी कभी इसे भिन्न रूप में भी लिखा जाता है। जैसे:
अंकगणित
155
null
29
a : b :: c : d ⇒ a b = c d {\displaystyle a:b::c:d\quad \Rightarrow {\frac {a}{b}}={\frac {c}{d}}}
अंकगणित
156
null
19
== अनुक्रमानुपात और समानुपात == सामान्यतः अनुक्रमानुपात (direct proportionality) और समानुपात (proportionality) का अर्थ समान होता है। सरल अंकगणितीय और बीजगणितीय गणनाओं में समानुपात शब्द का प्रयोग उपयुक्त माना जाता है और इसे उपरोक्त निरूपण विधि से निरूपित किया जाता है। लेकिन उच्च कोटि की गणनाओं अथवा भौतिकी गणनाओं में अनुक्रमानुपात का उपयोग किया जाता है। अनुक्रमानुपात को अनुक्रमानुपाती चिह्न अल्फा (α) से निरूपित किया जाता है। अनुक्रमानुपाती चिह्न को हटाने के लिए अनुक्रमानुपाती चिह्न के एक तरफ के व्यंजक को (सामान्यतः दायीं ओर) एक नियतांक से गुणा कर दिया जाता है जिसे अनुक्रमानुपाती नियतांक कहा जाता है।
अंकगणित
157
null
98
x α y ⇒ x = m × y {\displaystyle x\alpha y\quad \Rightarrow x=m\times y} यहाँ m अनुक्रमानुपाती नियतांक है।
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158
null
20
a : b = c : d ⇒ b : a = d : c {\displaystyle a:b=c:d\quad \Rightarrow \quad b:a=d:c}
अंकगणित
159
null
20
a : b = c : d ⇒ ( a + c ) : ( b + d ) = a : b {\displaystyle a:b=c:d\quad \Rightarrow \quad (a+c):(b+d)=a:b}
अंकगणित
160
null
28
== व्युत्क्रमानुपात == यदि दो चर राशियाँ इस प्रकार बदलतीं हैं कि दोनो का गुणनफल सदा नियत (कान्स्टैन्ट) रहता है तो कहते हैं कि वे परस्पर 'व्युत्क्रमानुपाती' (inversely proportional या varying inversely, in inverse variation, or in inverse proportion or reciprocal proportion)) हैं। उदाहरण के लिये, किसी निश्चित दूरी को तय करने में लगा समय, चाल के व्युत्क्रमानुपाती होगा। अर्थात चाल जितना ही अधिक होगा, उस दूरी को तय करने में उतना ही कम समय लगेगा।
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161
null
76
जोड़ने की प्रक्रिया के विरुद्ध प्रक्रिया को घटाना (en:Subtraction) कहा जाता है। जब किसी संख्या अथवा अंक से किसी दूसरी संख्या या अंक को कम किया जाता है तो उसे घटाना कहा जाता है। घटाने को - चिह्न से प्रदर्शित किया जाता है, जिसे ऋण (en:Minus) चिह्न कहते हैं। उदाहरणः
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162
null
50
336-235 = 101 36 - 5 = 31 इसकी खोज भारत में की गई थी।
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163
null
15
जब किसी संख्या या अंक में एक या एक से अधिक संख्या या अंक को मिलाया जाता है तो उसे जोड़ या योग (en:Addition) कहते हैं। जोड़ को + चिह्न से प्रदर्शित किया जाता है। इस चिह्न को धन (en:Plus) चिह्न कहते हैं। जोड़ दो प्रकार से होते है ,धनात्मक तथा ऋणात्मक । उदाहरणः 14 + 6 = 20 (-4)+(-5) = -9
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164
null
62
संख्याओं के किसी क्रम को जोड़ने की संक्रिया संकलन (Summation) कहलाती है। इसका परिणाम योग (sum) या कुलयोग (total) कहलाती है।
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165
null
21
=== कैपितल सिग्मा (Capital-sigma) === यह निम्नलिखित तरीके से परिभाषित है-
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166
null
11
∑ i = m n x i = x m + x m + 1 + x m + 2 + ⋯ + x n − 1 + x n . {\displaystyle \sum _{i=m}^{n}x_{i}=x_{m}+x_{m+1}+x_{m+2}+\cdots +x_{n-1}+x_{n}.}
अंकगणित
167
null
35
∑ k = 2 6 k 2 = 2 2 + 3 2 + 4 2 + 5 2 + 6 2 = 90. {\displaystyle \sum _{k=2}^{6}k^{2}=2^{2}+3^{2}+4^{2}+5^{2}+6^{2}=90.}
अंकगणित
168
null
27
∑ n = s t C ⋅ f ( n ) = C ⋅ ∑ n = s t f ( n ) {\displaystyle \sum _{n=s}^{t}C\cdot f(n)=C\cdot \sum _{n=s}^{t}f(n)} , जहाँ C एक स्थिरांक है
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169
null
35
∑ n = s t f ( n ) + ∑ n = s t g ( n ) = ∑ n = s t [ f ( n ) + g ( n ) ] {\displaystyle \sum _{n=s}^{t}f(n)+\sum _{n=s}^{t}g(n)=\sum _{n=s}^{t}\left[f(n)+g(n)\right]}
अंकगणित
170
null
41
∑ n = s t f ( n ) − ∑ n = s t g ( n ) = ∑ n = s t [ f ( n ) − g ( n ) ] {\displaystyle \sum _{n=s}^{t}f(n)-\sum _{n=s}^{t}g(n)=\sum _{n=s}^{t}\left[f(n)-g(n)\right]}
अंकगणित
171
null
41
∑ n = s t f ( n ) = ∑ n = s + p t + p f ( n − p ) {\displaystyle \sum _{n=s}^{t}f(n)=\sum _{n=s+p}^{t+p}f(n-p)}
अंकगणित
172
null
29
∑ n = s j f ( n ) + ∑ n = j + 1 t f ( n ) = ∑ n = s t f ( n ) {\displaystyle \sum _{n=s}^{j}f(n)+\sum _{n=j+1}^{t}f(n)=\sum _{n=s}^{t}f(n)}
अंकगणित
173
null
36
( ∑ i = k 0 k 1 a i ) ( ∑ j = l 0 l 1 b j ) = ∑ i = k 0 k 1 ∑ j = l 0 l 1 a i b j {\displaystyle \left(\sum _{i=k_{0}}^{k_{1}}a_{i}\right)\left(\sum _{j=l_{0}}^{l_{1}}b_{j}\right)=\sum _{i=k_{0}}^{k_{1}}\sum _{j=l_{0}}^{l_{1}}a_{i}b_{j}}
अंकगणित
174
null
47
∑ i = k 0 k 1 ∑ j = l 0 l 1 a i , j = ∑ j = l 0 l 1 ∑ i = k 0 k 1 a i , j {\displaystyle \sum _{i=k_{0}}^{k_{1}}\sum _{j=l_{0}}^{l_{1}}a_{i,j}=\sum _{j=l_{0}}^{l_{1}}\sum _{i=k_{0}}^{k_{1}}a_{i,j}}
अंकगणित
175
null
43
∑ n = 0 t f ( 2 n ) + ∑ n = 0 t f ( 2 n + 1 ) = ∑ n = 0 2 t + 1 f ( n ) {\displaystyle \sum _{n=0}^{t}f(2n)+\sum _{n=0}^{t}f(2n+1)=\sum _{n=0}^{2t+1}f(n)}
अंकगणित
176
null
41
∑ n = 0 t ∑ i = 0 z − 1 f ( z ⋅ n + i ) = ∑ n = 0 z ⋅ t + z − 1 f ( n ) {\displaystyle \sum _{n=0}^{t}\sum _{i=0}^{z-1}f(z\cdot n+i)=\sum _{n=0}^{z\cdot t+z-1}f(n)}
अंकगणित
177
null
43
∑ n = s t ln ⁡ f ( n ) = ln ⁡ ∏ n = s t f ( n ) {\displaystyle \sum _{n=s}^{t}\ln f(n)=\ln \prod _{n=s}^{t}f(n)}
अंकगणित
178
null
29
c [ ∑ n = s t f ( n ) ] = ∏ n = s t c f ( n ) {\displaystyle c^{\left[\sum _{n=s}^{t}f(n)\right]}=\prod _{n=s}^{t}c^{f(n)}}
अंकगणित
179
null
27
∑ i = m n 1 = n − m + 1 {\displaystyle \sum _{i=m}^{n}1=n-m+1}
अंकगणित
180
null
15
∑ i = 1 n 1 i = H n {\displaystyle \sum _{i=1}^{n}{\frac {1}{i}}=H_{n}} (देखें हरात्मक संख्या)
अंकगणित
181
null
17
∑ i = m n i = ( n − m + 1 ) ( n + m ) 2 {\displaystyle \sum _{i=m}^{n}i={\frac {(n-m+1)(n+m)}{2}}} (देखें समांतर श्रेणी)
अंकगणित
182
null
27
∑ i = 0 n i = ∑ i = 1 n i = n ( n + 1 ) 2 {\displaystyle \sum _{i=0}^{n}i=\sum _{i=1}^{n}i={\frac {n(n+1)}{2}}} (समांतर श्रेणी का विशेष मामला)
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183
null
31
∑ i = 1 n i 2 = n ( n + 1 ) ( 2 n + 1 ) 6 = n 3 3 + n 2 2 + n 6 {\displaystyle \sum _{i=1}^{n}i^{2}={\frac {n(n+1)(2n+1)}{6}}={\frac {n^{3}}{3}}+{\frac {n^{2}}{2}}+{\frac {n}{6}}}
अंकगणित
184
null
39
∑ i = 1 n i 3 = ( n ( n + 1 ) 2 ) 2 = n 4 4 + n 3 2 + n 2 4 = [ ∑ i = 1 n i ] 2 {\displaystyle \sum _{i=1}^{n}i^{3}=\left({\frac {n(n+1)}{2}}\right)^{2}={\frac {n^{4}}{4}}+{\frac {n^{3}}{2}}+{\frac {n^{2}}{4}}=\left[\sum _{i=1}^{n}i\right]^{2}}
अंकगणित
185
null
48
∑ i = 1 n i 4 = n ( n + 1 ) ( 2 n + 1 ) ( 3 n 2 + 3 n − 1 ) 30 = n 5 5 + n 4 2 + n 3 3 − n 30 {\displaystyle \sum _{i=1}^{n}i^{4}={\frac {n(n+1)(2n+1)(3n^{2}+3n-1)}{30}}={\frac {n^{5}}{5}}+{\frac {n^{4}}{2}}+{\frac {n^{3}}{3}}-{\frac {n}{30}}}
अंकगणित
186
null
54
∑ i = 0 n i p = ( n + 1 ) p + 1 p + 1 + ∑ k = 1 p B k p − k + 1 ( p k ) ( n + 1 ) p − k + 1 {\displaystyle \sum _{i=0}^{n}i^{p}={\frac {(n+1)^{p+1}}{p+1}}+\sum _{k=1}^{p}{\frac {B_{k}}{p-k+1}}{p \choose k}(n+1)^{p-k+1}} जहाँ B k {\displaystyle B_{k}} एक बर्नौली संख्या को दर्शाता है।
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187
null
65
निम्नलिखित सूत्र ∑ i = 1 n i 3 = ( ∑ i = 1 n i ) 2 {\displaystyle \sum _{i=1}^{n}i^{3}=\left(\sum _{i=1}^{n}i\right)^{2}} किसी भी प्राकृतिक संख्या मान पर एक श्रेणी शुरू करने के लिए सामान्यीकृत के जोड़तोड़ हैं (i.e., m ∈ N {\displaystyle m\in \mathbb {N} } ):
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188
null
49
( ∑ i = m n i ) 2 = ∑ i = m n ( i 3 − i m ( m − 1 ) ) {\displaystyle \left(\sum _{i=m}^{n}i\right)^{2}=\sum _{i=m}^{n}(i^{3}-im(m-1))}
अंकगणित
189
null
31
∑ i = m n i 3 = ( ∑ i = m n i ) 2 + m ( m − 1 ) ∑ i = m n i {\displaystyle \sum _{i=m}^{n}i^{3}=\left(\sum _{i=m}^{n}i\right)^{2}+m(m-1)\sum _{i=m}^{n}i}
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190
null
35
=== चरघातांकी पदों के योग === नीचे के योगों में x एक स्थिरांक है जो 1 . के बराबर नहीं है
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191
null
21
∑ i = m n − 1 x i = x m − x n 1 − x {\displaystyle \sum _{i=m}^{n-1}x^{i}={\frac {x^{m}-x^{n}}{1-x}}} (m < n; देखें गुणोत्तर श्रेणी)
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192
null
28
∑ i = 0 n − 1 x i = 1 − x n 1 − x {\displaystyle \sum _{i=0}^{n-1}x^{i}={\frac {1-x^{n}}{1-x}}} (1 से शुरू होने वाली गुणोत्तर श्रेणी)
अंकगणित
193
null
28
∑ i = 0 n − 1 i x i = x − n x n + ( n − 1 ) x n + 1 ( 1 − x ) 2 {\displaystyle \sum _{i=0}^{n-1}ix^{i}={\frac {x-nx^{n}+(n-1)x^{n+1}}{(1-x)^{2}}}}
अंकगणित
194
null
36
∑ i = 0 n − 1 i 2 i = 2 + ( n − 2 ) 2 n {\displaystyle \sum _{i=0}^{n-1}i2^{i}=2+(n-2)2^{n}} (विशेष स्थिति जब x = 2)
अंकगणित
195
null
29
∑ i = 0 n − 1 i 2 i = 2 − n + 1 2 n − 1 {\displaystyle \sum _{i=0}^{n-1}{\frac {i}{2^{i}}}=2-{\frac {n+1}{2^{n-1}}}} (विशेष स्थिति जब x = 1/2)
अंकगणित
196
null
31
=== द्विपद गुणांकों वाले संकलन (summations involving binomial coefficients) === द्विपद गुणांकों (ठोस गणित का एक पूरा अध्याय केवल बुनियादी तकनीकों के लिए समर्पित है) को शामिल करने वाली बहुत सारी योग सर्वसमिकाएँ मौजूद हैं। कुछ सबसे बुनियादी निम्नलिखित हैं।
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197
null
40
∑ i = 0 n ( n i ) = 2 n {\displaystyle \sum _{i=0}^{n}{n \choose i}=2^{n}}
अंकगणित
198
null
17
∑ i = 1 n i ( n i ) = n 2 n − 1 {\displaystyle \sum _{i=1}^{n}i{n \choose i}=n2^{n-1}}
अंकगणित
199
null
21