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== द्वयाधारी निरूपण == किसी द्वयाधारी संख्या के मान की गणना निम्नलिखित प्रकार से करते हैं-
अंकगणित
300
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16
[ 1101 ] 2 = 1 ⋅ 2 3 + 1 ⋅ 2 2 + 0 ⋅ 2 1 + 1 ⋅ 2 0 = [ 13 ] 10 {\displaystyle [1101]_{2}=1\cdot 2^{3}+1\cdot 2^{2}+0\cdot 2^{1}+1\cdot 2^{0}=[13]_{10}}
अंकगणित
301
null
35
द्वयाधारी पद्धति में निरूपित संख्या के आगे या पीछे 'कुछ' जोड़कर यह स्पष्त किया जाता है कि संख्या द्वि-आधारी है (न कि दाशमिक, अष्टाधारी या षोडशाधारी)। नीचे लिखे हुए सभी 'संकेतों का समूह' संख्या 'छः सौ सरसठ (667) को निरूपित कर रहे हैं। किन्तु पहला वाला निरूपण सबसे अधिक प्रचलित है।
अंकगणित
302
null
51
1 0 1 0 0 1 1 0 1 1 | − | − − | | − | | x o x o o x x o x x y n y n n y y n y y
अंकगणित
303
null
40
भ्रम से बचाने के 0 और 1 का प्रयोग करके लिखे गये द्वि-आधारी संख्याओं के साथ कुछ और भी लगा दिया जाता है ताकि उसका आधार (२) स्पष्ट रहे। इस प्रकार, निम्नलिखित सभी निरूपण एक ही संख्या को निरूपित करते हैं-
अंकगणित
304
null
41
100101 द्वयाधारी (आधार का स्पष्ट उल्लेख कर दिया है) 100101b (यहाँ प्रत्यय जोड़ दिया है जो द्वयाधारी संख्या को सूचित कर रहा है।) 100101B (यहाँ भी प्रत्यय जोड़ दिया है जो द्वयाधारी संख्या को सूचित कर रहा है।) bin 100101 ((यहाँ संख्या के पहले उपसर्ग bin जोड़ दिया है जो द्वयाधारी संख्या को सूचित कर रहा है।) 1001012 (यहाँ आ...
अंकगणित
305
null
194
== द्वयाधारी गिनती (Counting in binary) == नीचे द्वयाधारी संख्या पद्धति में शून्य से सोलह तक की गिनती (लिखने का तरीका) दिया गया है।
अंकगणित
306
null
24
== बाहरी कड़ियाँ == Binary Numbers in Ancient India Counting Computer Memory कंप्यूटर मेमोरी का गिनती
अंकगणित
307
null
16
प्रतिशत (Percent) गणित में किसी अनुपात को व्यक्त करने का एक तरीका है। प्रतिशत का अर्थ है प्रति सौ या प्रति सैकड़ा (% =1/100) ; एक सौ में एक। उदाहरण के लिये माना कि गणित के प्रश्नपत्र का पूर्णांक 50 है और उस प्रश्नपत्र में कोई छात्र 48 अंक प्राप्त करता है तो कहते हैं कि उस छात्र को 48/50 = 96/100 = 96 प्रतिशत (96%) अंक ...
अंकगणित
308
null
127
उदाहरण 1. 7/8 को प्रतिशत भिन्न में लिखिए। हल: 7/8 = (7/8*100)% = 87.5% 2. प्रतिशत भिन्न को दशमलव या साधारण भिन्न में बदलने के लिए उस भिन्न में 100 से भाग देते हैं।
अंकगणित
309
null
34
उदाहरण 2. 40% को साधारण भिन्न में लिखिए। हल: 40% = 40/100 = 2/5 3. किसी वस्तु के भाव में x % वृद्धि हो जाने पर, इस मद पर खर्च न बढ़े इसके लिए वस्तु की खपत में कमी = [x/(x+100)] * 100
अंकगणित
310
null
43
== अन्य प्रणालियाँ == विभिन्न स्थितियों में किसी अनुपात को व्यक्त करने के अलग-अलग तरीके अपनाए जाते हैं। प्रतिशत में अनुपात का आधार (हर) १०० होता है। इसी प्रकार १०००, १ लाख, या १० लाख को आधार मानकर भी अनुपातों को व्यक्त करने की प्रथा है। यदि १० लाख लोगों में से ७ लोग किसी रोग से पीड़ित हैं तो कहते हैं कि उस रोग से दुनिय...
अंकगणित
311
null
76
== बाहरी कड़ियाँ == Express learning - percentages BBC raw money
अंकगणित
312
null
11
भिन्न (Fraction) एक संख्या है जो पूर्ण के किसी भाग को दर्शाती है। भिन्न दो पूर्ण संख्याओं का भागफल है। भिन्न का एक उदाहरण है 3 5 {\displaystyle {\tfrac {3}{5}}} जिसमें 3 अंश कहलाता है और 5 हर कहलाता है।
अंकगणित
313
null
40
== भिन्नों के विभिन्न रूप == भिन्नों के कई रूप हैं: (1) उचित भिन्नों के अंश का परम मान उनके हर के परम मान से कम होता है, जैस 3/4, 2/3, 5/7 (2) विषम भिन्नों के अंश का परम मान उनके हर के परम मान से अधिक होता है, जैस 5/4, 8/3, 5/3 (3) मिश्रित भिन्नों के दो भाग हैं: एक भाग पूर्ण संख्या होता है और एक भाग उचित भिन्न होता है,...
अंकगणित
314
null
143
(1) यदि किसी राशि को ख बराबर भागों में बाटें और उनमें से क भाग ले लें, तो इन क भागों का पूरी राशि का क/ख भाग कहते हैं, या (2) इस प्रकार की यदि क राशियाँ ले और उनके ख बराबर भाग करें, तो प्रत्येक को एक राशि के क/ख भाग कहते हैं। दो संख्याओं क और ख के अनुपात को भी क/ख भिन्न से व्यक्त किया जाता है। यदि भिन्न क/ख में क या ख ...
अंकगणित
315
null
169
a 0 + b 1 a 1 + b 2 a 2 + b 3 ⋱ {\displaystyle a_{0}+{\cfrac {b_{1}}{a_{1}+{\cfrac {b_{2}}{a_{2}+{\cfrac {b_{3}}{\ddots }}}}}}}
अंकगणित
316
null
22
== भिन्नों के नियम == भिन्नों के नियम निम्नलिखित है :
अंकगणित
317
null
11
यदि अंश और हर को एक ही संख्या से गुणा या भाग दें तो भिन्न के मान में कोई अंतर नहीं पड़ता, अर्थात्‌ a/b = (ak)/(bk) अतः १/२ और ४/८ के मान समान हैं। इन्हें तुल्य भिन्न कहते हैं।
अंकगणित
318
null
39
यदि दो भिन्नों के हर समान हों तो जिस भिन्न का अंश बड़ा होता है, वह दूसरे से बड़ा होगा। अतः १२/२५ और ७/२५ में से १२/२५ बड़ा है। यदि दो भिन्नों के अंश समान हों तो जिस भिन्न का हर छोटा होता है वह भिन्न दूसरे भिन्न से बड़ा होगा। अतः ३/५ और ३/११ में ३/५ बड़ा है।
अंकगणित
319
null
59
== दशमलव भिन्न == दशमलव अंकन पद्धति में भिन्न लिखने का दूसरा ढंग है, जो बहुत उपयोगी सिद्ध हुआ है। इस पद्धति में इकाई के दसवें, सौवें, हजारवें भाग को एक बिंदु के दाई ओर लिखकर प्रकट करते हैं। इस बिंदु को 'दशमलव बिंदु' और भिन्न को 'दशमलव भिन्न' कहते हैं, जैसे-
अंकगणित
320
null
52
5.764 = 5 + 7/10 + 6/100 + 4/1000 दशमलव भिन्न को जोड़ने या घटाने के नियम वे ही हैं जो साधारण संख्याओं के लिये हैं। गुणा का नियम यह है कि संख्या को साधारण संख्याओं की तरह गुणा कर गुणनफल में दशमलव बिंदु उतने अंकों के पहले लगाते हैं जो गुणक और गुण्य के दशमलव के बाद के स्थानों का जोड़ होता है, जैसे 4.567 x 3.0024 = 13.7119...
अंकगणित
321
null
123
=== बहुत छोटी या बहुत बड़ी संख्याओं का निरूपण === आजकल छोटी और अत्यधिक बड़ी संख्याओं का प्रयोग होता है। इनको सरलता से घात पद्धति से व्यक्त करते हैं तथा इन्हें इस प्रकार लिखते हैं: 0.000003 = 3 x 10-6 या 3,40,000 = 3.4 x 5 इस प्रकार लिखने से बड़ी बड़ी संख्याएँ सूक्ष्म रूप में लिखी जा सकती हैं और मस्तिष्क में संख्या के स...
अंकगणित
322
null
73
== इतिहास == अलग-अलग देशों में भिन्नों को लिखने के अलग अलग ढंग थे। भारत में अति प्राचीन काल से भिन्न का ज्ञान था। ऋग्वेद में अर्ध (1/2) और त्रिपाद (3/4) आया हुआ है। भिन्न का उपयोग तथा उसे लिखने का आधुनिक ढंग भारत की देन है। इसे भिन्नराशि कहते थे। 'भिन्नराशि' का उपयोग आर्यभट और भास्कराचार्य के ग्रन्थों में मिलता है। ब्र...
अंकगणित
323
null
191
६ १ २ १ १ १० ४ ५ ९ यह भिन्न, निम्नलिखित के तुल्य है-
अंकगणित
324
null
15
6 1 2 1 1 −1 4 5 9 आधुनिक निरूपण पद्धति के अनुसार इसे इस प्रकर लिखा जायेगा : 61/4, 11/5, and 2 − 1/9 (अर्थात, 18/9). आजकल भिन्न को लिखने में प्रयुक्त क्षैतिज रेखा का जो प्रयोग होता है, वैसा ही प्रयोग प्रथम बार अल हस्सार के ग्रन्थ में मिलता है। अल हस्सार, मध्यकाल का मोरक्को में जन्मा एक मुसलमान गणितज्ञ था।
अंकगणित
325
null
64
== इन्हें भी देखिए == वितत भिन्न (Continued fraction) आंशिक भिन्न श्रेणी (गणित) प्रतिशत
अंकगणित
326
null
14
अर्ध एक से दो को विभाजित करने के फलस्वरूप या किसी भी संख्या को उसके द्विगुण से विभाजित करने के फलस्वरूप उत्पन्न एकक अलघुकरणीय भग्नांक है। अर्ध अक्सर गणितीय समीकरणों, व्यंजनों, मापों आदि में दिखता है। अर्ध को समद्विभाजित किसी वस्तु का एक भाग भी कहा जा सकता है।
अंकगणित
327
null
49
यदि किसी वास्तविक संख्या को दो पूर्ण संख्याओं के बटा के रूप में व्यक्त किया जा सकता है तो उसे परिमेय संख्या (Rational number) कहते हैं। अर्थात कोई संख्या p q {\displaystyle {\frac {p}{q}}} , जहाँ p और q दोनों पूर्ण संख्याएं हैं और जहाँ q ≠ 0 {\displaystyle q\neq 0} , एक परिमेय संख्या है। १, २.५, ३/५, ०.७ आदि परिमेय संख...
अंकगणित
328
null
155
जब संख्या से सम्बन्धित कोई गणना बिना कागज, पेन, पेंसिल, कैलकुलेटर, कम्प्यूटर के की जाती है तो इसे मनगणित (Mental calculation) कहते हैं। जब कोई गणनाकारी औजार न हो, या अन्य विधियों की अपेक्षा मन से गणना करना शीघ्र सम्भव हो तो मनगणित का प्रयोग किया जाता है (जैसे प्रतियोगिता परीक्षाओं में)। मनगणित की विशेषता यह है कि इसमें...
अंकगणित
329
null
77
== इन्हें भी देखें == अनुप्रयुक्त गणित वैदिक गणित (पुस्तक)
अंकगणित
330
null
10
== बाहरी कड़ियाँ == Mental Calculation World Cup Mental processes and the creation of a secondary memory to facilitate calculation Evidence for Increased Functional Specialization in the Left Inferior Parietal Cortex Large EEG waves ellicited by Mental Calculation PDF Javascript program for mental arithmetic
अंकगणित
331
null
44
संख्याओं को लिखने एवं उनके नामकरण के सुव्यवस्थित नियमों को संख्या पद्धति (Number system) कहते हैं। इसके लिये निर्धारित प्रतीकों का प्रयोग किया जाता है जिनकी संख्या निश्चित एवं सीमित होती है। इन प्रतीकों को विविध प्रकार से व्यस्थित करके भिन्न-भिन्न संख्याएँ निरूपित की जाती हैं। दशमलव पद्धति, द्वयाधारी संख्या पद्धति, अष्...
अंकगणित
332
null
65
== स्थानीय मान पर आधारित संख्या पद्धति == स्थानीय मान पर आधारित संख्या पद्धति में 2 या अधिक प्रतीक उपयोग में लाये जाते हैं। जितने प्रतीक होते हैं वही उस संख्या पद्धति का आधार (base) कहलाता है। इन प्रतीकों का मान शून्य से लेकर b-1 तक होता है जहाँ b आधार है। नीचे दो संख्याओं का उदाहरण दिया गया है, जो क्रमशः दशमलव पद्धति ...
अंकगणित
333
null
69
2003 10 = 2 × 10 3 + 0 × 10 2 + 0 × 10 1 + 3 × 10 0 {\displaystyle 2003_{10}=2\times 10^{3}+0\times 10^{2}+0\times 10^{1}+3\times 10^{0}}
अंकगणित
334
null
28
1100 2 = 1 × 2 3 + 1 × 2 2 + 0 × 2 1 + 0 × 2 0 = 8 + 4 = 12 10 {\displaystyle 1100_{2}=1\times 2^{3}+1\times 2^{2}+0\times 2^{1}+0\times 2^{0}=8+4=12_{10}}
अंकगणित
335
null
35
== परिचय == संख्या पद्धतियाँ (Numeral system) हरेक भाषा में कुछ न कुछ अंक अवश्य होते हैं। इकाई की संकल्पना से "एक" की और अनेकता की संकल्पना से "दो" की रचना हुए बिना नहीं रहती। अव्यवस्थित संख्यालेखन कदाचित् ही किसी भाषा में होगा। ऑस्ट्रेलिया की भाषाओं, यूइन - कुरी आदि, तथा वहाँ की मध्य दक्षिणी भाषाओं में ऐसी अव्यवस्था ह...
अंकगणित
336
null
521
== इन्हें भी देखें == संख्या पद्धतियों की सूची द्वयाधारी संख्या पद्धति (बाइनरी नम्बर सिस्टम) अष्टाधारी संख्या पद्धति (ऑक्टल नम्बर सिस्टम) षोडशाधारी संख्या पद्धति (हेक्साडेसिमल नम्बर सिस्टम) दशमलव पद्धति (डेसिमल नम्बर सिस्टम) संख्या सिद्धान्त (नम्बर सिस्टम)
अंकगणित
337
null
36
== बाहरी कड़ियाँ == Numerical Mechanisms and Children's Concept of Numbers Software for converting from one numeral system to another
अंकगणित
338
null
20
अन्तर्राष्ट्रीय संख्या पद्धति (International System of Numeration) संख्यांकन की दशमलव पद्धति पर आधारित प्रणाली है जिसमें संख्याओं को तीन-तीन अंकों के समूह में लिखा और व्यक्त किया जाता है। यह भारतीय संख्या पद्धति से भिन्न है जिसमें 9,999 से अधिक बड़ी संख्याओं में बायें के अंको को दो के समूह में (अल्पविराम द्वारा) अलग कर...
अंकगणित
339
null
217
== अन्तर्राष्ट्रीय और भारतीय पद्धति की तुलना == अंतर्राष्ट्रीय संख्या पद्धति में संख्याओं के मौखिक नाम और उनके संगत परिमाण निम्नलिखित हैं। साथ ही इनके संगत भारतीय पद्धति के नाम भी दिए गये हैं:
अंकगणित
340
null
34
== भारतीय और अन्तरराष्ट्रीय पद्धति की तुलना == भारतीय संख्या पद्धति में संख्याओं के मौखिक नाम और उनके संगत परिमाण क्रमिक रूप से निम्नलिखित हैं। साथ ही इनके संगत अन्तरराष्ट्रीय पद्धति के नाम भी दिए गये हैं:
अंकगणित
341
null
37
== इन्हें भी देखें == देवनागरी अंक भारतीय अंक प्रणाली भारतीय संख्या प्रणाली रोमन अंक छोटे और बड़े संख्या पैमाने (अंग्रेजी)
अंकगणित
342
null
21
दशमलव बिन्दु (decimal separator या decimal point या decimal comma) गणितीय संख्याओं को लिखने का एक प्रतीक है। प्राय: यह दाशमिक संख्या पद्धति में प्रयुक्त होता है और संख्या के पूर्णांक भाग एवं अपूर्णाक भागों के बीच में लगाया जाता है। किन्तु अन्य पद्धतियों में भी यह अलग अर्थ मेंप्रयुक्त हो सकता है। ऐतिहासिक रूप से दशमलव क...
अंकगणित
343
null
84
द्व्याधारित (द्वि + आधारित) या द्व्यंकीय (द्वि + अंकीय) संख्या पद्धति गणितीय अभिव्यक्ति की एक विधि है जो केवल दो अंकों का प्रयोग करती है: 0 (शून्य) और 1 (एक)। द्व्यंकीय अंक प्रणाली 2 के आधार के साथ स्थितीय संकेतन है। प्रत्येक अंक को द्व्यंक कहा जाता है। लॉजिक गेटों का प्रयोग करते हुए अंकीय वैद्युतिक परिपथ में इसके सीधे...
अंकगणित
344
null
103
== इतिहास == आधुनिक बाइनरी संख्या प्रणाली का अध्ययन यूरोप में 16वीं और 17वीं शताब्दी में थॉमस हैरियट, जुआन कैरामुएल लोबकोविट्ज़ और गॉटफ्राइड लीबनिज द्वारा किया गया था। हालाँकि, बाइनरी संख्याओं से जुड़ी प्रणालियाँ प्राचीन मिस्र, चीन और भारत सहित कई संस्कृतियों में पहले भी सामने आई हैं। लीबनिज़ विशेष रूप से चीनी आई चिंग ...
अंकगणित
345
null
58
=== मिस्र === प्राचीन मिस्र के शास्त्रियों ने अपने अंशों के लिए दो अलग-अलग प्रणालियों का उपयोग किया, मिस्र के अंश (बाइनरी संख्या प्रणाली से असंबंधित) और आई ऑफ होरस अंश (ऐसा नाम इसलिए रखा गया क्योंकि गणित के कई इतिहासकारों का मानना है कि इस प्रणाली के लिए इस्तेमाल किए गए प्रतीकों को आंख बनाने की व्यवस्था की जा सकती है ह...
अंकगणित
346
null
150
=== चीन === प्राचीन चीन में, आई चिंग के शास्त्रीय पाठ में, 8 ट्रिगर्स और 64 हेक्साग्राम्स की एक पूरी श्रृंखला (3 के अनुरूप बिट्स) और 6-बिट बाइनरी नंबर। चीनी विद्वान और दार्शनिक शाओ योंग ने साँचा:11वीं सदी में आई चिंग के हेक्साग्राम्स की एक क्रमबद्ध बाइनरी व्यवस्था विकसित की, जो दशमलव अनुक्रम का प्रतिनिधित्व करती है। 0 ...
अंकगणित
347
null
67
=== भारत === प्राचीन गणितज्ञ भारतीय पिंगला ने छंद का वर्णन करने के लिए एक द्विआधारी प्रणाली विकसित की। इसमें छोटे और लंबे अक्षरों (बाद वाले की लंबाई दो छोटे अक्षरों के बराबर होती है) के रूप में बाइनरी संख्याओं का उपयोग किया जाता है, जिससे यह मोर्स कोड के समान हो जाता है। इन्हें लघु (प्रकाश) और गुरु (भारी) अक्षरों के ना...
अंकगणित
348
null
67
=== एक और संस्कृति === फ़्रेंच पोलिनेशिया में मंगरेवा द्वीप के निवासी 1450 से पहले एक हाइब्रिड बाइनरी-दशमलव प्रणाली का उपयोग करते थे।बाइनरी संयोजनों की इसी तरह की श्रृंखला का उपयोग पारंपरिक अफ्रीकी भविष्यवाणी प्रणालियों में भी किया गया है, जैसे कि इफा, साथ ही पश्चिमी मध्ययुगीन जियोमेंसी में भी.
अंकगणित
349
null
50
=== लीबनिज के पश्चिमी पूर्ववर्ती === 1605 फ्रांसिस बेकन में उन्होंने एक ऐसी प्रणाली की बात की जिसके द्वारा वर्णमाला के अक्षरों को बाइनरी अंकों के अनुक्रम में कम किया जा सकता है, जिसे किसी भी मनमाने पाठ के फ़ॉन्ट में हल्के बदलाव के रूप में एन्कोड किया जा सकता है। 1670 में जुआन कैरामुएल ने अपनी पुस्तक मैथेसिस बाइसेप्स प्...
अंकगणित
350
null
74
=== लीबनिज और आई चिंग === आधुनिक बाइनरी सिस्टम को पूरी तरह से लीबनिज ने, साँचा:18वीं सदी में, अपने लेख "एक्सप्लिकेशन डे ल'अरिथमेटिक बिनेयर'' में प्रलेखित किया था। इसमें चीनी गणितज्ञों द्वारा प्रयुक्त बाइनरी प्रतीकों का उल्लेख है। लीबनिज़ ने भाषाई शब्दों को बदलने के लिए दो चरों की एक गणितीय प्रणाली - 0/1 - का उपयोग किया...
अंकगणित
351
null
69
=== बाद के विकास === 1854 में, ब्रिटिश गणितज्ञ जॉर्ज बूले ने एक लेख प्रकाशित किया था जिसमें पहले और बाद में तर्क की एक प्रणाली का विवरण दिया गया था जिसे अंततः बूले का बीजगणित कहा जाएगा। ऐसी प्रणाली वर्तमान बाइनरी सिस्टम के विकास में, विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक सर्किट के विकास में, मौलिक भूमिका निभाएगी।
अंकगणित
352
null
57
== द्वयाधारी निरूपण == किसी द्वयाधारी संख्या के मान की गणना निम्नलिखित प्रकार से करते हैं-
अंकगणित
353
null
16
[ 1101 ] 2 = 1 ⋅ 2 3 + 1 ⋅ 2 2 + 0 ⋅ 2 1 + 1 ⋅ 2 0 = [ 13 ] 10 {\displaystyle [1101]_{2}=1\cdot 2^{3}+1\cdot 2^{2}+0\cdot 2^{1}+1\cdot 2^{0}=[13]_{10}}
अंकगणित
354
null
35
द्वयाधारी पद्धति में निरूपित संख्या के आगे या पीछे 'कुछ' जोड़कर यह स्पष्त किया जाता है कि संख्या द्वि-आधारी है (न कि दाशमिक, अष्टाधारी या षोडशाधारी)। नीचे लिखे हुए सभी 'संकेतों का समूह' संख्या 'छः सौ सरसठ (667) को निरूपित कर रहे हैं। किन्तु पहला वाला निरूपण सबसे अधिक प्रचलित है।
अंकगणित
355
null
51
1 0 1 0 0 1 1 0 1 1 | − | − − | | − | | x o x o o x x o x x y n y n n y y n y y
अंकगणित
356
null
40
भ्रम से बचाने के 0 और 1 का प्रयोग करके लिखे गये द्वि-आधारी संख्याओं के साथ कुछ और भी लगा दिया जाता है ताकि उसका आधार (२) स्पष्ट रहे। इस प्रकार, निम्नलिखित सभी निरूपण एक ही संख्या को निरूपित करते हैं-
अंकगणित
357
null
41
100101 द्वयाधारी (आधार का स्पष्ट उल्लेख कर दिया है) 100101b (यहाँ प्रत्यय जोड़ दिया है जो द्वयाधारी संख्या को सूचित कर रहा है।) 100101B (यहाँ भी प्रत्यय जोड़ दिया है जो द्वयाधारी संख्या को सूचित कर रहा है।) bin 100101 ((यहाँ संख्या के पहले उपसर्ग bin जोड़ दिया है जो द्वयाधारी संख्या को सूचित कर रहा है।) 1001012 (यहाँ आ...
अंकगणित
358
null
194
== द्वयाधारी गिनती (Counting in binary) == नीचे द्वयाधारी संख्या पद्धति में शून्य से सोलह तक की गिनती (लिखने का तरीका) दिया गया है।
अंकगणित
359
null
24
== बाहरी कड़ियाँ == Binary Numbers in Ancient India Counting Computer Memory कंप्यूटर मेमोरी का गिनती
अंकगणित
360
null
16
== इतिहास == अतिरिक्त-३ या ३-अतिरिक्त बाइनरी कोड एक आत्म पूरक द्विआधारी कोडित दशमलव कोड और अंक प्रणाली है। यह एक पक्षपाती प्रतिनिधित्व है।अतिरिक्त-३ कुछ पुराने कंप्यूटर पर,साथ ही कैश रजिस्टर और हाथ से आयोजित १९७० के दशक के पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक कैलकुलेटर,अन्य उपयोगों के बीच में इस्तेमाल किया गया था।
अंकगणित
361
null
50
== प्रतिनिधित्व == पक्षपातपूर्ण कोड,एक पूर्व निर्धारित संख्या 'एन' एक पक्षपातपूर्ण एक मुल्या के रूप में उपयोग करते हुए सकारात्मक और नकारात्मक संख्या का एक संतुलित संख्या के साथ मूल्यों का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक तरीका है। पक्षपातपूर्ण कोड (और ग्रे कोड) गैर भारित कोड रहे हैं। अतिरिक्त-३ में, संख्या दशमलव अंकों के रू...
अंकगणित
362
null
240
== प्रेरणा == गैर पक्षपातपूर्ण कोडिंग पर अतिरिक्त-३ कोडिंग का प्राथमिक लाभ यह है कि एक दशमलव संख्या में हो सकता है नौ ' पूरित ( घटाव के लिए) के रूप में आसानी के रूप में एक बाइनरी संख्या में हो सकता है वाले पूरित;बस सभी बिट्स पलटना। इसके अलावा,जब दो अतिरिक्त-३ अंकों का योग ९ से अधिक है, एक ४ बिट योजक का कैरी सा उच्च स्थ...
अंकगणित
363
null
122
विंशाधारी (vigesimal) ऐसी संख्या प्रणाली होती है जो २० (बीस) पर आधारित हो, ठीक इसी तरह जैसे दशमलव प्रणाली दस पर आधारित होती है। गिलगित-बल्तिस्तान में बोली जाने वाली बुरुशस्की भाषा इसकी एक उदाहरण है।
अंकगणित
364
null
35
== स्थानीय प्रतीक == ये सभी स्थानीय-मान पर आधारित हैं। इनमें से कुछ निम्नलिखित हैं-
अंकगणित
365
null
15
For the definition of standard positional numeral systems, see Non-standard positional numeral systems. The common names are derived somewhat arbitrarily from Latin and Greek. For more information, see Hexadecimal#Etymology.
अंकगणित
366
null
29
==== Negative bases ==== The common names of the negative base numeral systems are formed using the prefix nega-, giving names such as:
अंकगणित
367
null
23
== गैर-स्थानीय अंकन (non-positional notation) == बेबिलोन अंकों (Babylonian numerals) के पहले विकसित सभी संख्या पद्धतियाँ स्थानीय मान पर आधारित नहीं हैं।
अंकगणित
368
null
22
अष्टाधारी संख्या पद्धति यह एक ऐसी प्रणाली है जिसका आधार आठ है और 0 से 7 तक की संख्याओं का उपयोग किया जाता है। यह बाइनरी संख्याओं, दशमलव संख्याओं और हेक्साडेसिमल संख्याओं के अलावा संख्या प्रणालियों के वर्गीकरणों में से एक है। अष्टक चिन्ह का उपयोग उन संख्याओं को दर्शाने के लिए किया जाता है जिनका आधार 8 होता है। यह (ऑक्टल...
अंकगणित
369
null
110
== बाहरी कड़ियाँ == Online Converter for Decimal/Octal Numerals (JavaScript, GPL) Octomatics is a numeral system enabling simple visual calculation in octal.
अंकगणित
370
null
22
द्वयाधारी कूटित दशमलव (अंग्रेज़ी:बाइनरी कोडेड डेसिमल) इलेक्ट्रॉनिक एवं कंप्यूटिंग सिस्टम्स में, दशमलव संख्या प्रणाली की संख्याओं प्रत्येक अंक के लिये एक द्वयाधारी कूट देकर मिश्रित रूप में पूरी दशमलव संख्या केल इये लिखा गया द्वयाधारी रूप का कूट होता है। इस प्रणाली की मुख्य सुविधा है, इसके द्वारा कूटित संख्याओं को वापस अ...
अंकगणित
371
null
85
== कूटीकरण == दशमलव संख्या को बीसीडी कूट अंतरण हेतु प्रत्येक दशामलव अंक को एक चार-बिट (निबल) में सहेजा जाता है।
अंकगणित
372
null
21
दशमलव : 0 1 2 3 4 5 6 7 8 9 बीसीडी: 0000 0001 0010 0011 0100 0101 0110 0111 1000 1001
अंकगणित
373
null
23
चूंकि अधिकांश कंप्यूटर डाटा को ८-बिट रूप में भंडारण करते हैं, तो १ निबल के बीसीडी अंकों को सहेजने के दो तरीके होते हैं:
अंकगणित
374
null
24
प्रत्येक अंक एक बाइट के एक निब्ल में सहेजा जाता है, जिसका दूसरा निबल सभी-शून्य कर दिय़ा जाता है, या सभी १ (एबसाइडिक कूट की तरह), या 0011 (आस्की कूट की तरह) प्रत्येक बाइट में दो अंक सहेजे जाते हैं।
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375
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40
== सन्दर्भ == कम्प्यूटिंग और इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों में, द्विआधारी-कोडित दशमलव (बीसीडी) दशमलव अंकों के द्विआधारी एन्कोडिंग का एक वर्ग है जहां प्रत्येक दशमलव अंक को एक निश्चित संख्या की बिट्स द्वारा दर्शाया जाता है, आमतौर पर चार या आठ। किसी विशेष चिह्न या किसी अन्य संकेत (उदाहरण के लिए, त्रुटि या अतिप्रवाह) के लिए विशे...
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376
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62
बाइट-ओरिएंटेड सिस्टम (अर्थात अधिकांश आधुनिक कंप्यूटर) में, बिना शर्त पैक बीसीडी [1] आमतौर पर प्रत्येक अंक के लिए एक पूर्ण बाइट का अर्थ है (अक्सर एक चिन्ह होता है), जबकि पैक बीसीडी आम तौर पर दो दशमलव अंकों का लाभ उठाकर एक बाइट के भीतर रखता है तथ्य यह है कि चार बिट्स 0 से 9 की श्रेणी का प्रतिनिधित्व करने के लिए पर्याप्त ...
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377
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314
द्व्याधारित (द्वि + आधारित) या द्व्यंकीय (द्वि + अंकीय) संख्या पद्धति गणितीय अभिव्यक्ति की एक विधि है जो केवल दो अंकों का प्रयोग करती है: 0 (शून्य) और 1 (एक)। द्व्यंकीय अंक प्रणाली 2 के आधार के साथ स्थितीय संकेतन है। प्रत्येक अंक को द्व्यंक कहा जाता है। लॉजिक गेटों का प्रयोग करते हुए अंकीय वैद्युतिक परिपथ में इसके सीधे...
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378
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103
== इतिहास == आधुनिक बाइनरी संख्या प्रणाली का अध्ययन यूरोप में 16वीं और 17वीं शताब्दी में थॉमस हैरियट, जुआन कैरामुएल लोबकोविट्ज़ और गॉटफ्राइड लीबनिज द्वारा किया गया था। हालाँकि, बाइनरी संख्याओं से जुड़ी प्रणालियाँ प्राचीन मिस्र, चीन और भारत सहित कई संस्कृतियों में पहले भी सामने आई हैं। लीबनिज़ विशेष रूप से चीनी आई चिंग ...
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379
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58
=== मिस्र === प्राचीन मिस्र के शास्त्रियों ने अपने अंशों के लिए दो अलग-अलग प्रणालियों का उपयोग किया, मिस्र के अंश (बाइनरी संख्या प्रणाली से असंबंधित) और आई ऑफ होरस अंश (ऐसा नाम इसलिए रखा गया क्योंकि गणित के कई इतिहासकारों का मानना है कि इस प्रणाली के लिए इस्तेमाल किए गए प्रतीकों को आंख बनाने की व्यवस्था की जा सकती है ह...
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380
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150
=== चीन === प्राचीन चीन में, आई चिंग के शास्त्रीय पाठ में, 8 ट्रिगर्स और 64 हेक्साग्राम्स की एक पूरी श्रृंखला (3 के अनुरूप बिट्स) और 6-बिट बाइनरी नंबर। चीनी विद्वान और दार्शनिक शाओ योंग ने साँचा:11वीं सदी में आई चिंग के हेक्साग्राम्स की एक क्रमबद्ध बाइनरी व्यवस्था विकसित की, जो दशमलव अनुक्रम का प्रतिनिधित्व करती है। 0 ...
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381
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67
=== भारत === प्राचीन गणितज्ञ भारतीय पिंगला ने छंद का वर्णन करने के लिए एक द्विआधारी प्रणाली विकसित की। इसमें छोटे और लंबे अक्षरों (बाद वाले की लंबाई दो छोटे अक्षरों के बराबर होती है) के रूप में बाइनरी संख्याओं का उपयोग किया जाता है, जिससे यह मोर्स कोड के समान हो जाता है। इन्हें लघु (प्रकाश) और गुरु (भारी) अक्षरों के ना...
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382
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67
=== एक और संस्कृति === फ़्रेंच पोलिनेशिया में मंगरेवा द्वीप के निवासी 1450 से पहले एक हाइब्रिड बाइनरी-दशमलव प्रणाली का उपयोग करते थे।बाइनरी संयोजनों की इसी तरह की श्रृंखला का उपयोग पारंपरिक अफ्रीकी भविष्यवाणी प्रणालियों में भी किया गया है, जैसे कि इफा, साथ ही पश्चिमी मध्ययुगीन जियोमेंसी में भी.
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383
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50
=== लीबनिज के पश्चिमी पूर्ववर्ती === 1605 फ्रांसिस बेकन में उन्होंने एक ऐसी प्रणाली की बात की जिसके द्वारा वर्णमाला के अक्षरों को बाइनरी अंकों के अनुक्रम में कम किया जा सकता है, जिसे किसी भी मनमाने पाठ के फ़ॉन्ट में हल्के बदलाव के रूप में एन्कोड किया जा सकता है। 1670 में जुआन कैरामुएल ने अपनी पुस्तक मैथेसिस बाइसेप्स प्...
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384
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74
=== लीबनिज और आई चिंग === आधुनिक बाइनरी सिस्टम को पूरी तरह से लीबनिज ने, साँचा:18वीं सदी में, अपने लेख "एक्सप्लिकेशन डे ल'अरिथमेटिक बिनेयर'' में प्रलेखित किया था। इसमें चीनी गणितज्ञों द्वारा प्रयुक्त बाइनरी प्रतीकों का उल्लेख है। लीबनिज़ ने भाषाई शब्दों को बदलने के लिए दो चरों की एक गणितीय प्रणाली - 0/1 - का उपयोग किया...
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385
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69
=== बाद के विकास === 1854 में, ब्रिटिश गणितज्ञ जॉर्ज बूले ने एक लेख प्रकाशित किया था जिसमें पहले और बाद में तर्क की एक प्रणाली का विवरण दिया गया था जिसे अंततः बूले का बीजगणित कहा जाएगा। ऐसी प्रणाली वर्तमान बाइनरी सिस्टम के विकास में, विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक सर्किट के विकास में, मौलिक भूमिका निभाएगी।
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386
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57
== द्वयाधारी निरूपण == किसी द्वयाधारी संख्या के मान की गणना निम्नलिखित प्रकार से करते हैं-
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387
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16
[ 1101 ] 2 = 1 ⋅ 2 3 + 1 ⋅ 2 2 + 0 ⋅ 2 1 + 1 ⋅ 2 0 = [ 13 ] 10 {\displaystyle [1101]_{2}=1\cdot 2^{3}+1\cdot 2^{2}+0\cdot 2^{1}+1\cdot 2^{0}=[13]_{10}}
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35
द्वयाधारी पद्धति में निरूपित संख्या के आगे या पीछे 'कुछ' जोड़कर यह स्पष्त किया जाता है कि संख्या द्वि-आधारी है (न कि दाशमिक, अष्टाधारी या षोडशाधारी)। नीचे लिखे हुए सभी 'संकेतों का समूह' संख्या 'छः सौ सरसठ (667) को निरूपित कर रहे हैं। किन्तु पहला वाला निरूपण सबसे अधिक प्रचलित है।
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51
1 0 1 0 0 1 1 0 1 1 | − | − − | | − | | x o x o o x x o x x y n y n n y y n y y
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390
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40
भ्रम से बचाने के 0 और 1 का प्रयोग करके लिखे गये द्वि-आधारी संख्याओं के साथ कुछ और भी लगा दिया जाता है ताकि उसका आधार (२) स्पष्ट रहे। इस प्रकार, निम्नलिखित सभी निरूपण एक ही संख्या को निरूपित करते हैं-
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391
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41
100101 द्वयाधारी (आधार का स्पष्ट उल्लेख कर दिया है) 100101b (यहाँ प्रत्यय जोड़ दिया है जो द्वयाधारी संख्या को सूचित कर रहा है।) 100101B (यहाँ भी प्रत्यय जोड़ दिया है जो द्वयाधारी संख्या को सूचित कर रहा है।) bin 100101 ((यहाँ संख्या के पहले उपसर्ग bin जोड़ दिया है जो द्वयाधारी संख्या को सूचित कर रहा है।) 1001012 (यहाँ आ...
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392
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194
== द्वयाधारी गिनती (Counting in binary) == नीचे द्वयाधारी संख्या पद्धति में शून्य से सोलह तक की गिनती (लिखने का तरीका) दिया गया है।
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393
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24
== बाहरी कड़ियाँ == Binary Numbers in Ancient India Counting Computer Memory कंप्यूटर मेमोरी का गिनती
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394
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16
गणित और कंप्यूटर विज्ञान में, षोडश आधारी (हेक्साडेसिमल) एक स्थितीय अंक प्रणाली (पोजीशनल न्यूमरल सिस्टम) है जिसके आधारांक (बेस) का मान 16 होता है। इसमें सोलह अलग-अलग प्रतीकों का इस्तेमाल होता है जिसमें 0 से 9 तक के प्रतीक शून्य से नौ तक के मानों को प्रदर्शित करते हैं और A, B, C, D, E, F (या वैकल्पिक रूप से a से f) तक के...
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395
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207
== हेक्साडेसिमल का प्रदर्शन == साँचा:Hexadecimal table जिन परिस्थितियों में रेफरेंस का अभाव होता है, उन परिस्थितियों में अन्य मूल अंकों (आधारांक) में व्यक्त की गई संख्याओं के साथ एक हेक्साडेसिमल संख्‍या अस्‍पष्‍ट और भ्रामक हो सकती है। स्‍पष्‍ट रूप से मानों को व्यक्त करने की कई पद्धतियां प्रचलित हैं। एक संख्‍यात्‍मक सबस...
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396
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131
यूआरएल (URL) में, कैरेक्टर कोड को % उपसर्ग युक्त हेक्साडेसिमल युग्‍म के रूप में लिखा जाता है: http://www.example.com/name%20with%20spaces जहां %20 रिक्त स्थान (खाली जगह) कैरेक्टर (कोड मान 20 हेक्स में, 32 दशमलव में) है। एक्सएमएल (XML) और एक्सएचटीएमएल (XHTML) में, कैरेक्टरों को &#xcode; नोटेशन का इस्तेमाल करके हेक्साडेस...
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397
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674
क्विकबेसिक (QuickBASIC), फ्रीबेसिक (FreeBASIC) और विजुअल बेसिक (Visual Basic) में हेक्साडेसिमल संख्याओं के साथ उपसर्ग के रूप में &H का इस्तेमाल होता है: &H5A3 बीबीसी बेसिक (BBC BASIC) और लोकोमोटिव बेसिक (Locomotive BASIC) में हेक्स के लिए & का इस्तेमाल होता है. टीआई-89 (TI-89) और 92 श्रृंखला में 0h उपसर्ग का इस्तेमाल ह...
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398
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207
अक्षर अंकों के लिए लोअरकेस या अपरकेस का इस्तेमाल करने की कोई सार्वभौमिक परंपरा नहीं है और समुदाय के मानकों या परंपरा के माध्यम से विशेष परिवेशों में प्रत्येक का प्रचलन है या प्रत्येक को प्राथमिकता दी जाती है। कंप्यूटरों के आरंभिक इतिहास में नौ से ऊपर के अंकों को प्रदर्शित करने के लिए A से लेकर F तक के अक्षरों का विकल्प...
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399
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175