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इस पाठ का सारांश बनाओ: एफडीआई मामले पर जारी गतिरोध को खत्म करने के उद्देश्य से भाजपा नेताओं को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा दिए गए रात्रिभोज में इस मामले पर कोई हल नहीं निकला। मुख्य विपक्षी दल ने इस बात पर जोर दिया कि संसद में मत विभाजन के प्रावधान वाले नियम के तहत ही इस मुद्दे पर चर्चा की जाए।
इस रात्रिभोज में भाजपा के संसदीय दल के अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी, लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्यसभा में उनके समकक्ष अरुण जेटली शामिल हुए। ससंदीय मामलों के मंत्री कमलनाथ और वित्त मंत्री पी चिदंबरम भी इस अवसर पर मौजूद थे।टिप्पणियां
सूत्रों ने बताया कि रात्रिभोज में एफडीआई मसले पर जारी गतिरोध का हल निकालने में असफलता मिली क्योंकि भाजपा अपने रुख पर अड़ी रही। इससे शुक्रवार को भी संसद में गतिरोध का दौर जारी रहने की आशंका है।
सरकार का कहना है कि चूंकि बहु-ब्रांड खुदरा क्षेत्र में 51 प्रतिशत एफडीआई को मंजूरी देने का फैसला एक कार्यकारी आदेश के तहत लिया गया, इसलिए इस मुद्दे पर संसद में चर्चा की जा सकती है लेकिन इसपर मतदान नहीं कराया जा सकता। लेकिन भाजपा और वाम दलों समेत अन्य विपक्षी दल सरकार के रुख से इत्तेफाक नहीं रखते और उनका मानना है कि सरकार ने संसद के दोनो सदनों में खुदरा क्षेत्र में एफडीआई पर फैसला सभी पक्षों से बातचीत करने के बाद लिए जाने का भरोसा दिया था जिसे उसने तोड़ दिया। इस वजह से ये दल अब एफडीआई के मुद्दे पर संसद में चर्चा और मत विभाजन चाहते हैं।
इस रात्रिभोज में भाजपा के संसदीय दल के अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी, लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्यसभा में उनके समकक्ष अरुण जेटली शामिल हुए। ससंदीय मामलों के मंत्री कमलनाथ और वित्त मंत्री पी चिदंबरम भी इस अवसर पर मौजूद थे।टिप्पणियां
सूत्रों ने बताया कि रात्रिभोज में एफडीआई मसले पर जारी गतिरोध का हल निकालने में असफलता मिली क्योंकि भाजपा अपने रुख पर अड़ी रही। इससे शुक्रवार को भी संसद में गतिरोध का दौर जारी रहने की आशंका है।
सरकार का कहना है कि चूंकि बहु-ब्रांड खुदरा क्षेत्र में 51 प्रतिशत एफडीआई को मंजूरी देने का फैसला एक कार्यकारी आदेश के तहत लिया गया, इसलिए इस मुद्दे पर संसद में चर्चा की जा सकती है लेकिन इसपर मतदान नहीं कराया जा सकता। लेकिन भाजपा और वाम दलों समेत अन्य विपक्षी दल सरकार के रुख से इत्तेफाक नहीं रखते और उनका मानना है कि सरकार ने संसद के दोनो सदनों में खुदरा क्षेत्र में एफडीआई पर फैसला सभी पक्षों से बातचीत करने के बाद लिए जाने का भरोसा दिया था जिसे उसने तोड़ दिया। इस वजह से ये दल अब एफडीआई के मुद्दे पर संसद में चर्चा और मत विभाजन चाहते हैं।
सूत्रों ने बताया कि रात्रिभोज में एफडीआई मसले पर जारी गतिरोध का हल निकालने में असफलता मिली क्योंकि भाजपा अपने रुख पर अड़ी रही। इससे शुक्रवार को भी संसद में गतिरोध का दौर जारी रहने की आशंका है।
सरकार का कहना है कि चूंकि बहु-ब्रांड खुदरा क्षेत्र में 51 प्रतिशत एफडीआई को मंजूरी देने का फैसला एक कार्यकारी आदेश के तहत लिया गया, इसलिए इस मुद्दे पर संसद में चर्चा की जा सकती है लेकिन इसपर मतदान नहीं कराया जा सकता। लेकिन भाजपा और वाम दलों समेत अन्य विपक्षी दल सरकार के रुख से इत्तेफाक नहीं रखते और उनका मानना है कि सरकार ने संसद के दोनो सदनों में खुदरा क्षेत्र में एफडीआई पर फैसला सभी पक्षों से बातचीत करने के बाद लिए जाने का भरोसा दिया था जिसे उसने तोड़ दिया। इस वजह से ये दल अब एफडीआई के मुद्दे पर संसद में चर्चा और मत विभाजन चाहते हैं।
सरकार का कहना है कि चूंकि बहु-ब्रांड खुदरा क्षेत्र में 51 प्रतिशत एफडीआई को मंजूरी देने का फैसला एक कार्यकारी आदेश के तहत लिया गया, इसलिए इस मुद्दे पर संसद में चर्चा की जा सकती है लेकिन इसपर मतदान नहीं कराया जा सकता। लेकिन भाजपा और वाम दलों समेत अन्य विपक्षी दल सरकार के रुख से इत्तेफाक नहीं रखते और उनका मानना है कि सरकार ने संसद के दोनो सदनों में खुदरा क्षेत्र में एफडीआई पर फैसला सभी पक्षों से बातचीत करने के बाद लिए जाने का भरोसा दिया था जिसे उसने तोड़ दिया। इस वजह से ये दल अब एफडीआई के मुद्दे पर संसद में चर्चा और मत विभाजन चाहते हैं। | सारांश: एफडीआई मामले पर जारी गतिरोध को खत्म करने के उद्देश्य से भाजपा नेताओं को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा दिए गए रात्रिभोज में इस मामले पर कोई हल नहीं निकला। | 33 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: दिल्ली से सटे नोएडा में लोग सड़कों कर रांग साइड वाहन न चलाएं, इसके मद्देनजर सड़कों पर टायर किलर लगाए जा रहे हैं. यानी अगर आपने सड़क पर गलत दिशा में गाड़ी चलाई तो आपके टायर फट जाएंगे.
नोएडा के सेक्टर 74 के एक चौराहे पर स्पीड ब्रेकरनुमा टायर किलर लगाए गए हैं. नोएडा अथॉरिटी ने ये सड़क पर इसलिए लगाए हैं कि जिससे लोग वाहन लेकर रांग साइड न चल पाएं. अगर कोई गलत दिशा में आया तो टायर किलर में लगा नुकीला हिस्सा अपने आप बाहर आ जाएगा और वाहन का टायर फट जाएगा.
लोग गलत साइड आने से पहले सावधान ही जाएं इसके लिए बैनर भी लगाए गए हैं. ऐसे ही टायर किलर नोएडा में चार-पांच जगहों पर और लगाए जा रहे हैं. अगर प्रयोग सफल रहा तो यह और स्थानों पर भी लगाए जाएंगे. एक टायर किलर सोमवार को लगाया गया, जिसकी ऊंचाई ज्यादा कर दी गई. इससे सही दिशा में आ रही कई गाड़ियों के निचले हिस्से में ये टकरा गया. यहां तक कि एक डंपर के निचले हिस्से से टकराने के बाद टायर किलर का बीच का हिस्सा ही टूट गया, क्योंकि इसे मजबूती से नहीं लगाया गया था. अब नए सिरे से इसे लगाने की कोशिश की जा रही है.
पुणे के बाद नोएडा दूसरा शहर है जहां टायर किलर लगाए जा रहे हैं. हालांकि टायर किलर लगाने को लेकर हमेशा विवाद रहा है. कई जानकर इसे यात्रियों के सुरक्षित नहीं मानते इसलिए पुणे में भी ये ट्रैफिक पुलिस के विरोध के बाद बाद हटा दिए गए. नोएडा में इनका प्रयोग कितना सफल रहता है, ये देखना होगा. | यह एक सारांश है: नोएडा के सेक्टर 74 के एक चौराहे पर स्पीड ब्रेकरनुमा टायर किलर लगे
नोएडा में चार-पांच जगहों पर और लगाए जा रहे हैं टायर किलर
पुणे के बाद नोएडा दूसरा शहर है जहां टायर किलर लगाए जा रहे | 21 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: सुपर स्टार शाहरुख खान ट्विटर पर वापस नहीं लौटे हैं और हाल ही में गायक मीका सिंह को कोई संदेश नहीं भेजा है।
सूत्र के मुताबिक, 47 वर्षीय शाहरुख ने 9 जून से ट्विटर पर कुछ नहीं लिखा है। शुक्रवार को मीका का ट्विटर पर संदेश था कि शाहरुख ने उन्हें लिखा है, "मैं शाहरुख हूं मैं चाहता हूं कि कृपया वापस आ जाएं!" लेकिन शाहरुख के करीबी एक सूत्र ने स्पष्ट किया कि वह ट्विटर पर वापस नहीं आए हैं और वह संदेश किसी तकनीकी गड़बड़ी का नतीजा था।टिप्पणियां
शाहरुख के करीबी दोस्त और 'ओम शांति ओम' के मुश्ताक शेख ने भी यही बात कही। उन्होंने कहा, "मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि शाहरुख ने ट्विट नहीं किया है। वह जब चाहेंगे तब वापस आएंगे।"
शेख ने लिखा कि ट्विटर पर शाहरुख के 9 जून के संदेश से आभास होता है कि जिस तरह से सोशल साइट लोगों को गलत तरीके से प्रभावित कर रही है, उससे वह दुखी हैं। उन्होंने लिखा था, "दुख की बात है, नेट पर मैं कट्टर राष्ट्रवाद, धार्मिक असहिष्णुता के बारे में पढ़ता रहता था और मुझे लगता था कि यहां (ट्विटर) संकीर्णता नहीं होगी लेकिन ऐसा नहीं है।"
सूत्र के मुताबिक, 47 वर्षीय शाहरुख ने 9 जून से ट्विटर पर कुछ नहीं लिखा है। शुक्रवार को मीका का ट्विटर पर संदेश था कि शाहरुख ने उन्हें लिखा है, "मैं शाहरुख हूं मैं चाहता हूं कि कृपया वापस आ जाएं!" लेकिन शाहरुख के करीबी एक सूत्र ने स्पष्ट किया कि वह ट्विटर पर वापस नहीं आए हैं और वह संदेश किसी तकनीकी गड़बड़ी का नतीजा था।टिप्पणियां
शाहरुख के करीबी दोस्त और 'ओम शांति ओम' के मुश्ताक शेख ने भी यही बात कही। उन्होंने कहा, "मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि शाहरुख ने ट्विट नहीं किया है। वह जब चाहेंगे तब वापस आएंगे।"
शेख ने लिखा कि ट्विटर पर शाहरुख के 9 जून के संदेश से आभास होता है कि जिस तरह से सोशल साइट लोगों को गलत तरीके से प्रभावित कर रही है, उससे वह दुखी हैं। उन्होंने लिखा था, "दुख की बात है, नेट पर मैं कट्टर राष्ट्रवाद, धार्मिक असहिष्णुता के बारे में पढ़ता रहता था और मुझे लगता था कि यहां (ट्विटर) संकीर्णता नहीं होगी लेकिन ऐसा नहीं है।"
शाहरुख के करीबी दोस्त और 'ओम शांति ओम' के मुश्ताक शेख ने भी यही बात कही। उन्होंने कहा, "मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि शाहरुख ने ट्विट नहीं किया है। वह जब चाहेंगे तब वापस आएंगे।"
शेख ने लिखा कि ट्विटर पर शाहरुख के 9 जून के संदेश से आभास होता है कि जिस तरह से सोशल साइट लोगों को गलत तरीके से प्रभावित कर रही है, उससे वह दुखी हैं। उन्होंने लिखा था, "दुख की बात है, नेट पर मैं कट्टर राष्ट्रवाद, धार्मिक असहिष्णुता के बारे में पढ़ता रहता था और मुझे लगता था कि यहां (ट्विटर) संकीर्णता नहीं होगी लेकिन ऐसा नहीं है।"
शेख ने लिखा कि ट्विटर पर शाहरुख के 9 जून के संदेश से आभास होता है कि जिस तरह से सोशल साइट लोगों को गलत तरीके से प्रभावित कर रही है, उससे वह दुखी हैं। उन्होंने लिखा था, "दुख की बात है, नेट पर मैं कट्टर राष्ट्रवाद, धार्मिक असहिष्णुता के बारे में पढ़ता रहता था और मुझे लगता था कि यहां (ट्विटर) संकीर्णता नहीं होगी लेकिन ऐसा नहीं है।" | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: सुपर स्टार शाहरुख खान ट्विटर पर वापस नहीं लौटे हैं और हाल ही में गायक मीका सिंह को कोई संदेश नहीं भेजा है। | 19 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गुरुवार से प्रस्तावित अपना जापान दौरा स्थगित कर दिया है। जापान के राजनीतिक घटनाक्रम के कारण उन्होंने यह दौरा स्थगित किया है। लेकिन सप्ताह के अंत में वह कम्बोडिया का अपना दौरा जारी रखेंगे।
विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि जापानी विदेश मंत्रालय के साथ बातचीत कर बाद में कोई नई तारीख तय की जाएगी।टिप्पणियां
जापानी प्रधानमंत्री योशिहिको नोदा ने विपक्ष के साथ चुनावी सुधार सहित विभिन्न मुद्दों पर मतभेद के बाद कहा है कि वह संसद के निचले सदन को भंग कर सकते हैं।
मनमोहन सिंह इस सप्ताह के अंत में 18 से 20 नवम्बर तक चलने वाले आसियान-भारत शिखर बैठक और पूर्व एशिया शिखर सम्मेलन के लिए कम्बोडिया जाएंगे।
विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि जापानी विदेश मंत्रालय के साथ बातचीत कर बाद में कोई नई तारीख तय की जाएगी।टिप्पणियां
जापानी प्रधानमंत्री योशिहिको नोदा ने विपक्ष के साथ चुनावी सुधार सहित विभिन्न मुद्दों पर मतभेद के बाद कहा है कि वह संसद के निचले सदन को भंग कर सकते हैं।
मनमोहन सिंह इस सप्ताह के अंत में 18 से 20 नवम्बर तक चलने वाले आसियान-भारत शिखर बैठक और पूर्व एशिया शिखर सम्मेलन के लिए कम्बोडिया जाएंगे।
जापानी प्रधानमंत्री योशिहिको नोदा ने विपक्ष के साथ चुनावी सुधार सहित विभिन्न मुद्दों पर मतभेद के बाद कहा है कि वह संसद के निचले सदन को भंग कर सकते हैं।
मनमोहन सिंह इस सप्ताह के अंत में 18 से 20 नवम्बर तक चलने वाले आसियान-भारत शिखर बैठक और पूर्व एशिया शिखर सम्मेलन के लिए कम्बोडिया जाएंगे।
मनमोहन सिंह इस सप्ताह के अंत में 18 से 20 नवम्बर तक चलने वाले आसियान-भारत शिखर बैठक और पूर्व एशिया शिखर सम्मेलन के लिए कम्बोडिया जाएंगे। | प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गुरुवार से प्रस्तावित अपना जापान दौरा स्थगित कर दिया है। जापान के राजनीतिक घटनाक्रम के कारण उन्होंने यह दौरा स्थगित किया है। लेकिन सप्ताह के अंत में वह कम्बोडिया का अपना दौरा जारी रखेंगे। | 1 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: जम्मू एवं कश्मीर में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 1ए पर दुर्घटना में घायल अमरनाथ तीर्थ यात्रियों को बचाने के लिए स्थानीय मुस्लिमों ने बुधवार को अपनी जान जोखिम में डाल कर कर्फ्यू को धता बताए और उन्हें अस्पताल पहुंचाए। अमरनाथ तीर्थ यात्रियों को ले जा रही एक मिनी बस अनंतनाग जिले में बिजबेहरा शहर के निकट दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसमें बस चालक की मौत हो गई। चालक की मौत के साथ राजमार्ग पर मरने वालों की संख्या बढ़ कर दो हो गई है।
इससे पहले हुई दुर्घटना में एक तीर्थयात्री की मौत हो गई थी और 20 अन्य घायल हो गए थे।
हाल में कश्मीर घाटी में हुई हिंसा में दो लोगों की मौत पर मातम मना रहे बिजबेहरा शहर के स्थानीय लोगों ने दुर्घटना स्थल पर जाने के लिए अपने निजी दुख और कर्फ्यू की अनदेखी की और घायल तीर्थ यात्रियों को बचाया।
एक चश्मदीद ने आईएएनएस से कहा, "स्थानीय मुसलमान अपने निजी वाहनों से घायलों को अस्पताल ले गए। कुछ लोगों ने तो घायलों को श्रीनगर स्थित अस्पताल भी ले गए।"
एक बड़े आतंकवादी बुरहान वानी की हत्या के बाद विगत चार दिनों से हिंसा का दंश झेलने के बावजूद बिजबेहरा के स्थानीय लोगों के भाव अनुकरणीय थे। घाटी में हिंसा के दौरान 34 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 33 आम नागरिक और एक पुलिसकर्मी शामिल थे।
हिंसा में मारे गए 34 लोगों में 32 लोग दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग, शोपियां, कुलगाम और पुलवामा जिलों के रहने वाले थे जबकि एक-एक व्यक्ति श्रीनगर और कुपवाड़ा जिले के रहने वाले थे।
एक दिन पहले बिजबेहरा शहर में दो प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी और बुधवार को भी शहर में भारी तनाव है।
एक प्रत्यक्षदर्शी ने कहा कि हिंसा फैली होने के बावजूद स्थानीय लोगों ने मानवता की पुकार की अनदेखी नहीं की।(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) | यह एक सारांश है: यात्रियों की बस अनंतनाग जिले के बिजबेहरा के पास हुई थी दुर्घटनाग्रस्त
बिजबेहरा के लोगों ने कर्फ्यू की अनदेखी कर घायल तीर्थयात्रियों को बचाया
हिंसा फैली होने के बावजूद स्थानीय लोगों ने मानवता की अनदेखी नहीं की | 24 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: 'एवेंजर्स एंडगेम' ( Avengers Endgame) आज दुनियाभर में रिलीज हो गई है. इस फिल्म को लेकर दुनियाभर के लोगों में खासा क्रेज है. अब 'एवेंजर्स: एंडगेम (Avengers: Endgame)' के क्रेज की गिरफ्त में Google भी आ गया है और Thanos की एक चुटकी पर गूगल सर्च के सारे नतीजे गायब हो रहे हैं. हॉलीवुड फिल्म 'एवेंजर्स: एंडगेम (Avengers: Endgame)' आज रिलीज हो गई है और दुनिया भर में इसका क्रेज सिर चढ़कर बोल रहा है. 'एवेंजर्स: एंडगेम (Avengers: Endgame)' का जादू गूगल भी चल गया है. Google पर Thanos लिखने के बाद सर्च के नतीजे सामने आते हैं. इसके बाद राइट हैंड साइड पर Thanos का गॉन्टलेट (Thanos Gauntlet) बना आता है जिसपर क्लिक करते ही गूगल के सर्च नतीजे एक के बाद एक गायब होते चले जाते हैं. बिल्कुल वैसे ही जैसे Thanos (Google Thanos) ने चुटकी बजाकर आधी दुनिया को खत्म कर दिया था.
Google का यह नया गेम बहुत पसंद किया जा रहा है और 'एवेंजर्स: एंडगेम (Avengers: Endgame)' के इस क्रेज के बीच में यह कुछ अनोखा प्रयोग खूब कामयाब हो रहा है. बता दें कि हॉलीवुड फिल्म 'एवेंजर्स : एंडगेम (Avengers: Endgame)' का पूरी दुनिया बहुत ही बेसब्री से इंतजार कर रही है, लेकिन फिल्म के ऑनलाइन लीक होने की खबर आ रही है. 'एवेंजर्स : एंडगेम (Avengers: Endgame)' फिल्म निर्माताओं और कलाकारों ने पाइरेसी से बचाने की बहुत कोशिशें की, लेकिन इसके बावजूद फिल्म कुछ वेबसाइट्स पर आखिरकार लीक हो ही गई. वैरायटी डॉट कॉम ने बुधवार को एक रिपोर्ट जारी की जिसके मुताबिक, 'एवेंजर्स : एंडगेम (Avengers: Endgame)' की लीक कॉपी एक दिन पहले हुई एक चीनी थिएटर स्क्रीनिंग से आई है.
एवेंजर्स एंडगेम (Avengers Endgame)' को डायरेक्टर जोड़ी एंथनी रूसो और जो रूसो ने डायरेक्ट किया है. 'एवेंजर्स एंडगेम (Avengers Endgame)' में रॉबर्ट डाउनी जूनियर (Iron Man), क्रिस इवान्स (Captain Ameria), मार्क रूफैलो (Hulk), क्रिस हेम्सवर्थ (Thor), स्कारलेट योहानसन (Black Widow), जेरेमी रेनर (Hawk Eye), पॉल रूड (Ant Man), ब्री लार्सन (Captain America), और जोश ब्रोलिन (Thanos) लीड रोल में हैं. | सारांश: Avengers Endgame की चपेट में अब गूगल भी आया
Thanos की एक चुटकी पर गूगल सर्च के सारे नतीजे गायब हो रहे हैं
इस फिल्म को लेकर दुनियाभर के लोगों में खासा क्रेज है | 5 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: इंग्लैंड ने तीसरे वन-डे में दक्षिण अफ्रीका को चार विकेट से हराकर पांच मैचों की क्रिकेट शृंखला में 1-1 की बराबरी हासिल करते हुए आईसीसी रैंकिंग में शीर्ष स्थान भी एक बार फिर अपने नाम कर लिया।
इंग्लैंड ने इसी हफ्ते की शुरुआत में दूसरे वन-डे में शिकस्त के साथ नंबर एक रैंकिंग दक्षिण अफ्रीका को गंवा दी थी। दक्षिण अफ्रीका की टीम पहले बल्लेबाजी करते हुए 211 रन पर सिमट गई थी, जिसके जवाब में इंग्लैंड ने इयोन मोर्गन (73) और जोनाथन ट्राट (71) की उम्दा पारियों की मदद से 12 गेंद शेष रहते छह विकेट पर 212 रन बनाकर मैच जीत लिया। दक्षिण अफ्रीका की ओर से रोबिन पीटरसन सबसे सफल गेंदबाज रहे, जिन्होंने 39 रन देकर दो विकेट चटकाए।टिप्पणियां
इस जीत के साथ इंग्लैंड एक बार फिर आईसीसी रैंकिंग में शीर्ष पर पहुंच गया है। उसके 121 अंक हैं। दक्षिण अफ्रीका 120 अंक के साथ दूसरे स्थान पर खिसक गया है।
इससे पहले टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने उतरे दक्षिण अफ्रीका की शुरुआत अच्छी रही। लेकिन जेम्स एंडरसन (44 रन पर चार विकेट) और टीम में वापसी कर रहे जेड डर्नबैक (44 रन पर तीन विकेट) ने हालांकि मेहमान टीम के मध्यक्रम को ध्वस्त करते हुए उसे 211 रन पर समेट दिया।
इंग्लैंड ने इसी हफ्ते की शुरुआत में दूसरे वन-डे में शिकस्त के साथ नंबर एक रैंकिंग दक्षिण अफ्रीका को गंवा दी थी। दक्षिण अफ्रीका की टीम पहले बल्लेबाजी करते हुए 211 रन पर सिमट गई थी, जिसके जवाब में इंग्लैंड ने इयोन मोर्गन (73) और जोनाथन ट्राट (71) की उम्दा पारियों की मदद से 12 गेंद शेष रहते छह विकेट पर 212 रन बनाकर मैच जीत लिया। दक्षिण अफ्रीका की ओर से रोबिन पीटरसन सबसे सफल गेंदबाज रहे, जिन्होंने 39 रन देकर दो विकेट चटकाए।टिप्पणियां
इस जीत के साथ इंग्लैंड एक बार फिर आईसीसी रैंकिंग में शीर्ष पर पहुंच गया है। उसके 121 अंक हैं। दक्षिण अफ्रीका 120 अंक के साथ दूसरे स्थान पर खिसक गया है।
इससे पहले टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने उतरे दक्षिण अफ्रीका की शुरुआत अच्छी रही। लेकिन जेम्स एंडरसन (44 रन पर चार विकेट) और टीम में वापसी कर रहे जेड डर्नबैक (44 रन पर तीन विकेट) ने हालांकि मेहमान टीम के मध्यक्रम को ध्वस्त करते हुए उसे 211 रन पर समेट दिया।
इस जीत के साथ इंग्लैंड एक बार फिर आईसीसी रैंकिंग में शीर्ष पर पहुंच गया है। उसके 121 अंक हैं। दक्षिण अफ्रीका 120 अंक के साथ दूसरे स्थान पर खिसक गया है।
इससे पहले टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने उतरे दक्षिण अफ्रीका की शुरुआत अच्छी रही। लेकिन जेम्स एंडरसन (44 रन पर चार विकेट) और टीम में वापसी कर रहे जेड डर्नबैक (44 रन पर तीन विकेट) ने हालांकि मेहमान टीम के मध्यक्रम को ध्वस्त करते हुए उसे 211 रन पर समेट दिया।
इससे पहले टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने उतरे दक्षिण अफ्रीका की शुरुआत अच्छी रही। लेकिन जेम्स एंडरसन (44 रन पर चार विकेट) और टीम में वापसी कर रहे जेड डर्नबैक (44 रन पर तीन विकेट) ने हालांकि मेहमान टीम के मध्यक्रम को ध्वस्त करते हुए उसे 211 रन पर समेट दिया। | यह एक सारांश है: इंग्लैंड ने तीसरे वन-डे में दक्षिण अफ्रीका को चार विकेट से हराकर पांच मैचों की शृंखला में 1-1 की बराबरी हासिल करते हुए आईसीसी रैंकिंग में शीर्ष स्थान भी फिर अपने नाम कर लिया। | 21 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने उम्मीद जताई कि देश में नई आयकर व्यवस्था लागू करने के लिए प्रत्यक्ष कर संहिता (डीटीसी) अप्रैल, 2012 से अमल में आ जाएगी। यह 1961 के आयकर कानून का स्थान लेगी। राजधानी में कर और समानता पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुखर्जी ने कहा, प्रस्तावित प्रत्यक्ष कर संहिता प्रत्यक्ष करों के संबंध में नीतिगत बदलाव लाएगा। इसे अगले वित्त वर्ष से अमल में लाया जाना है। उन्होंने कालेधन की समस्या से निपटने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने पर भी बल दिया। कर प्रणाली को आधुनिक बनाने के प्रयास के तहत सरकार ने नई व्यवस्था लाने का प्रस्ताव किया है। उन्होंने उत्पाद शुल्क और बिक्री कर जैसे अप्रत्यक्ष करों की व्यवस्था में सुधार के लिए भारत में किए जा रहे उपायों की भी जानकारी दी। वित्त मंत्री ने कहा, हम (राज्य से केंद्र तक) पूरी अर्थव्यस्था के लिए सामान्य मूल्य वर्धित कर प्रणाली वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। देश में सरकार द्वारा कर सुधारों की दिशा में उठाए जा रहे कदमों का जिक्र करते हुए मुखर्जी ने कर चोरी तथा काले धन की समस्या से निपटने के लिए मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा, कर चोरी प्रगतिशील कर नीति के लाभ को कमजोर करता है। मंत्री ने कहा, इन मुद्दों के हल के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग तथा सीमा पार बेहतर तालमेल के लिए कर प्रणाली को जोड़े जाने की जरूरत है...। ग्लोबल फिनांशियल इंटीग्रिटी रिपोर्ट का हवाला देते हुए मुखर्जी ने कहा कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं तथा विकासशील देशों से अवैध तरीके से सालाना औसतन 725 से 810 अरब डॉलर की पूंजी बाहर ले जाई जा रही है। | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने उम्मीद जताई कि देश में नई आयकर व्यवस्था लागू करने के लिए प्रत्यक्ष कर संहिता अप्रैल, 2012 से अमल में आ जाएगी। | 25 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: अपना आखिरी टी-20 मैच खेल रहे राजस्थान रॉयल्स के कप्तान राहुल द्रविड़ और मुंबई इंडियंस के सचिन तेंदुलकर को रविवार को फिरोजशाह कोटला मैदान में चैंपियंस लीग ट्वेंटी-20 फाइनल के दौरान उनकी टीम के साथियों ने ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया।
क्षेत्ररक्षण का फैसला करने के बाद जब द्रविड़ मैदान में आए तो राजस्थान रॉयल्स के खिलाड़ियों ने उन्हें सलामी दी, जबकि तेंदुलकर को उस वक्त गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, जब वह 15 रन पर शेट वॉटसन की गेंद पर बोल्ड हुए।टिप्पणियां
द्रविड़ आखिरी दफा आज मैदान पर उतरे और गॉर्ड ऑफ ऑनर के लिए अपनी टीम के साथियों का शुक्रिया अदा किया।
तेंदुलकर के लिए भी लोगों ने उस वक्त खड़े होकर तालियां बजायीं जब वह अपना हेल्मेट निकाल कर पैविलियन की ओर जा रहे थे।
क्षेत्ररक्षण का फैसला करने के बाद जब द्रविड़ मैदान में आए तो राजस्थान रॉयल्स के खिलाड़ियों ने उन्हें सलामी दी, जबकि तेंदुलकर को उस वक्त गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, जब वह 15 रन पर शेट वॉटसन की गेंद पर बोल्ड हुए।टिप्पणियां
द्रविड़ आखिरी दफा आज मैदान पर उतरे और गॉर्ड ऑफ ऑनर के लिए अपनी टीम के साथियों का शुक्रिया अदा किया।
तेंदुलकर के लिए भी लोगों ने उस वक्त खड़े होकर तालियां बजायीं जब वह अपना हेल्मेट निकाल कर पैविलियन की ओर जा रहे थे।
द्रविड़ आखिरी दफा आज मैदान पर उतरे और गॉर्ड ऑफ ऑनर के लिए अपनी टीम के साथियों का शुक्रिया अदा किया।
तेंदुलकर के लिए भी लोगों ने उस वक्त खड़े होकर तालियां बजायीं जब वह अपना हेल्मेट निकाल कर पैविलियन की ओर जा रहे थे।
तेंदुलकर के लिए भी लोगों ने उस वक्त खड़े होकर तालियां बजायीं जब वह अपना हेल्मेट निकाल कर पैविलियन की ओर जा रहे थे। | अपना आखिरी टी-20 मैच खेल रहे राजस्थान रॉयल्स के कप्तान राहुल द्रविड़ और मुंबई इंडियंस के सचिन तेंदुलकर को रविवार को फिरोजशाह कोटला मैदान में चैंपियंस लीग ट्वेंटी-20 फाइनल के दौरान उनकी टीम के साथियों ने ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया। | 1 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: पूरे 16 साल तक की भूख हड़ताल के बाद भी मणिपुर की ‘लौह महिला’ इरोम शर्मिला की अच्छी सेहत का राज उनकी इच्छाशक्ति और रोजाना योगाभ्यास करने में छिपा है. इस भूख हड़ताल के दौरान उन्हें नाक से जबरन तरल भोजन दिया जाता था.
शर्मिला के सहयोगियों और उनके परिवार के सदस्यों के अनुसार, शर्मिला ने 1998 में योग सीखा था. इसके दो साल बाद वह भूख हड़ताल पर बैठ गई थीं. यह भूख हड़ताल कल खत्म हो गई. शर्मिला के भाई इरोम सिंहजीत ने बताया, ‘‘यह उनकी मजबूत इच्छाशक्ति और रोजाना योगाभ्यास की आदत ही है, जिसने उन्हें शारीरिक रूप से फिट रखा है.’’
नब्बे के दशक में युवती रहीं शर्मिला को प्राकृतिक चिकित्सा के विषय ने बहुत प्रभावित किया. उन्होंने इससे जुड़ा कोर्स शुरू किया. इसमें प्राकृतिक उपचार के माध्यम के रूप में योग भी शामिल था. शर्मिला ने अपनी जीवनीकार दीप्ती प्रिया महरोत्रा को किताब ‘बर्निंग ब्राइट’ के लिए बताया था, ‘‘योग फुटबॉल की तरह नहीं है. यह अलग है. यदि कोई व्यक्ति योग करता है तो यह उसे लंबा जीवन जीने में मदद कर सकता है. योग करके आप 100 साल तक जी सकते हैं. यह फुटबॉल जैसे अन्य खेलों के जैसा नहीं है.’’
उन्होंने याद किया कि उन्होंने 1998-99 में योगासन करने शुरू कर दिए थे और तब से वह हर रोज इसे करती आ रही हैं. शर्मिला को प्रकृति के करीब बताने वाली इस किताब में कहा गया है कि वह योग और टहलने के जरिए अपने शरीर के साथ लगातार प्रयोग करती रहती थीं. चूंकि उनकी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल को आत्महत्या करने की कोशिश के रूप देखा जाता रहा, इसलिए उन्हें पुलिस की हिरासत में रहना पड़ा. टिप्पणियां
आत्महत्या की कोशिश को एक दंडनीय अपराध माना जाता रहा है. शर्मिला को पिछले 16 साल का लगभग पूरा समय इंफाल स्थित जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज हॉस्पिटल में बिताना पड़ा. शर्मिला को नाक के जरिए पेट तक पहुंचने वाली नली के जरिए जबरन तरल आहार दिया जाता था. यह आहार उबले चावल, दाल और सब्जियों से बना होता था. विचाराधीन कैदी होने के नाते अपने अनशन के दौरान शर्मिला ने एकाकी जीवन बिताया. उनसे मिलने कभी-कभार ही लोग आते थे.(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
शर्मिला के सहयोगियों और उनके परिवार के सदस्यों के अनुसार, शर्मिला ने 1998 में योग सीखा था. इसके दो साल बाद वह भूख हड़ताल पर बैठ गई थीं. यह भूख हड़ताल कल खत्म हो गई. शर्मिला के भाई इरोम सिंहजीत ने बताया, ‘‘यह उनकी मजबूत इच्छाशक्ति और रोजाना योगाभ्यास की आदत ही है, जिसने उन्हें शारीरिक रूप से फिट रखा है.’’
नब्बे के दशक में युवती रहीं शर्मिला को प्राकृतिक चिकित्सा के विषय ने बहुत प्रभावित किया. उन्होंने इससे जुड़ा कोर्स शुरू किया. इसमें प्राकृतिक उपचार के माध्यम के रूप में योग भी शामिल था. शर्मिला ने अपनी जीवनीकार दीप्ती प्रिया महरोत्रा को किताब ‘बर्निंग ब्राइट’ के लिए बताया था, ‘‘योग फुटबॉल की तरह नहीं है. यह अलग है. यदि कोई व्यक्ति योग करता है तो यह उसे लंबा जीवन जीने में मदद कर सकता है. योग करके आप 100 साल तक जी सकते हैं. यह फुटबॉल जैसे अन्य खेलों के जैसा नहीं है.’’
उन्होंने याद किया कि उन्होंने 1998-99 में योगासन करने शुरू कर दिए थे और तब से वह हर रोज इसे करती आ रही हैं. शर्मिला को प्रकृति के करीब बताने वाली इस किताब में कहा गया है कि वह योग और टहलने के जरिए अपने शरीर के साथ लगातार प्रयोग करती रहती थीं. चूंकि उनकी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल को आत्महत्या करने की कोशिश के रूप देखा जाता रहा, इसलिए उन्हें पुलिस की हिरासत में रहना पड़ा. टिप्पणियां
आत्महत्या की कोशिश को एक दंडनीय अपराध माना जाता रहा है. शर्मिला को पिछले 16 साल का लगभग पूरा समय इंफाल स्थित जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज हॉस्पिटल में बिताना पड़ा. शर्मिला को नाक के जरिए पेट तक पहुंचने वाली नली के जरिए जबरन तरल आहार दिया जाता था. यह आहार उबले चावल, दाल और सब्जियों से बना होता था. विचाराधीन कैदी होने के नाते अपने अनशन के दौरान शर्मिला ने एकाकी जीवन बिताया. उनसे मिलने कभी-कभार ही लोग आते थे.(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
नब्बे के दशक में युवती रहीं शर्मिला को प्राकृतिक चिकित्सा के विषय ने बहुत प्रभावित किया. उन्होंने इससे जुड़ा कोर्स शुरू किया. इसमें प्राकृतिक उपचार के माध्यम के रूप में योग भी शामिल था. शर्मिला ने अपनी जीवनीकार दीप्ती प्रिया महरोत्रा को किताब ‘बर्निंग ब्राइट’ के लिए बताया था, ‘‘योग फुटबॉल की तरह नहीं है. यह अलग है. यदि कोई व्यक्ति योग करता है तो यह उसे लंबा जीवन जीने में मदद कर सकता है. योग करके आप 100 साल तक जी सकते हैं. यह फुटबॉल जैसे अन्य खेलों के जैसा नहीं है.’’
उन्होंने याद किया कि उन्होंने 1998-99 में योगासन करने शुरू कर दिए थे और तब से वह हर रोज इसे करती आ रही हैं. शर्मिला को प्रकृति के करीब बताने वाली इस किताब में कहा गया है कि वह योग और टहलने के जरिए अपने शरीर के साथ लगातार प्रयोग करती रहती थीं. चूंकि उनकी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल को आत्महत्या करने की कोशिश के रूप देखा जाता रहा, इसलिए उन्हें पुलिस की हिरासत में रहना पड़ा. टिप्पणियां
आत्महत्या की कोशिश को एक दंडनीय अपराध माना जाता रहा है. शर्मिला को पिछले 16 साल का लगभग पूरा समय इंफाल स्थित जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज हॉस्पिटल में बिताना पड़ा. शर्मिला को नाक के जरिए पेट तक पहुंचने वाली नली के जरिए जबरन तरल आहार दिया जाता था. यह आहार उबले चावल, दाल और सब्जियों से बना होता था. विचाराधीन कैदी होने के नाते अपने अनशन के दौरान शर्मिला ने एकाकी जीवन बिताया. उनसे मिलने कभी-कभार ही लोग आते थे.(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
उन्होंने याद किया कि उन्होंने 1998-99 में योगासन करने शुरू कर दिए थे और तब से वह हर रोज इसे करती आ रही हैं. शर्मिला को प्रकृति के करीब बताने वाली इस किताब में कहा गया है कि वह योग और टहलने के जरिए अपने शरीर के साथ लगातार प्रयोग करती रहती थीं. चूंकि उनकी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल को आत्महत्या करने की कोशिश के रूप देखा जाता रहा, इसलिए उन्हें पुलिस की हिरासत में रहना पड़ा. टिप्पणियां
आत्महत्या की कोशिश को एक दंडनीय अपराध माना जाता रहा है. शर्मिला को पिछले 16 साल का लगभग पूरा समय इंफाल स्थित जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज हॉस्पिटल में बिताना पड़ा. शर्मिला को नाक के जरिए पेट तक पहुंचने वाली नली के जरिए जबरन तरल आहार दिया जाता था. यह आहार उबले चावल, दाल और सब्जियों से बना होता था. विचाराधीन कैदी होने के नाते अपने अनशन के दौरान शर्मिला ने एकाकी जीवन बिताया. उनसे मिलने कभी-कभार ही लोग आते थे.(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
आत्महत्या की कोशिश को एक दंडनीय अपराध माना जाता रहा है. शर्मिला को पिछले 16 साल का लगभग पूरा समय इंफाल स्थित जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज हॉस्पिटल में बिताना पड़ा. शर्मिला को नाक के जरिए पेट तक पहुंचने वाली नली के जरिए जबरन तरल आहार दिया जाता था. यह आहार उबले चावल, दाल और सब्जियों से बना होता था. विचाराधीन कैदी होने के नाते अपने अनशन के दौरान शर्मिला ने एकाकी जीवन बिताया. उनसे मिलने कभी-कभार ही लोग आते थे.(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: इरोम की अच्छी सेहत का राज उनकी इच्छाशक्ति और योग में छिपा है
भूख हड़ताल के दौरान उन्हें नाक से जबरन तरल भोजन दिया जाता था
''योग करके आप 100 साल तक जी सकते हैं. यह अन्य खेलों के जैसा नहीं है'' | 25 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत देश के अगले सेना अध्यक्ष होंगे. वर्तमान समय में वह थलसेना सहसेनाध्यक्ष के पद पर कार्यरत हैं. लेफ्टिनेंट जनरल रावत जनरल दलबीर सिंह का स्थान लेंगे. 23 दिन बाद वह अपनी नई ज़िम्मेदारी संभालेंगे. आमतौर पर नए सेना प्रमुख के नाम की घोषणा लगभग दो माह पहले हो जाती है लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ.
सरकार ने उनकी नियुक्ति छह माह पूर्व ही थलसेना सहसेनाध्यक्ष पद पर की थी. उनकी यह नियुक्ति उस समय हुई थी जब घाटी में अशांति का दौर था. नए सेना प्रमुख की नियुक्ति से सरकार ने इस बात की ओर संकेत दे दिया है कि वह घाटी की स्थिति पर आगे भी कड़ी नज़र बनाए हुए है.
भारत के थल सेना अध्यक्ष जनरल दलबीर सिंह 31 दिसम्बर को रिटायर हो रहे हैं. थल सेना अध्यक्ष के पद तक का सफ़र तय करने वाले लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत के पिता लेफ्टिनेंट जनरल एलएस रावत भारतीय सेना में डिप्टी चीफ के पद से रिटायर हुए थे. उनके पिता भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून के कमांडेंट के पद पर भी रहे. वहीं जनरल रावत ने सहसेनाध्यक्ष का पद संभालने से पहले सेना की दक्षिणी कमान के कमांडर का पद संभाला था.
ले. जनरल बिपिन रावत का जन्म उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में हुआ था. वह इस पद पर पहुंचने वाले उत्तराखंड के पहले अधिकारी है. शिमला के सेंट एडवर्ड स्कूल के पूर्व छात्र रहे जनरल रावत ने वर्ष 1978 में इंडियन मिलिट्री एकेडमी देहरादून से पास आउट होने के बाद उन्हें 11वीं गोरखा राइफल्स की पांचवीं बटालियन में कमीशन मिला.
जनरल रावत का करियर उपलब्धियां भरा रहा है. वह दिसंबर 1978 में भारतीय सैन्य अकादमी से पासआउट होने वाले बैच के श्रेष्ठतम कैडेट रहे और उन्हें स्वार्ड ऑफ ऑनर मिला. लेफ्टिनेंट जनरल विपिन रावत अति विशिष्ट सेवा मेडल, युद्ध सेवा मेडल, सेना मेडल व विशिष्ट सेवा मेडल जैसे कई सम्मान से अलंकृत किए गए हैं. टिप्पणियां
अपनी पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए लेफ्टिनेंट जनरल विपिन रावत इस पद पर पहुंचे हैं. इससे पहले उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल लक्ष्मण सिंह रावत सेना में डिप्टी चीफ के पद से रिटायर हुए थे. उनके पिता भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून के कमांडेंट भी रहे. वहीं जनरल रावत ने सहसेनाध्यक्ष का पद संभालने से पहले
सेना की दक्षिणी कमान के कमांडर का पद भी संभाल चुके हैं.
कांगो में मल्टीनेशन ब्रिगेड की कमान संभालने के साथ ही वह यूएन मिशन में सेक्रेटरी जनरल व फोर्स कमांडर भी रह चुके हैं. सेना में कई अहम पद संभालने के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा पर उनके लेख विभिन्न जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं. मिलिट्री मीडिया स्ट्रैटिजिक स्टडीज पर शोध के लिए उन्हें डॉक्टरेट की उपाधि भी मिल चुकी है.
सरकार ने उनकी नियुक्ति छह माह पूर्व ही थलसेना सहसेनाध्यक्ष पद पर की थी. उनकी यह नियुक्ति उस समय हुई थी जब घाटी में अशांति का दौर था. नए सेना प्रमुख की नियुक्ति से सरकार ने इस बात की ओर संकेत दे दिया है कि वह घाटी की स्थिति पर आगे भी कड़ी नज़र बनाए हुए है.
भारत के थल सेना अध्यक्ष जनरल दलबीर सिंह 31 दिसम्बर को रिटायर हो रहे हैं. थल सेना अध्यक्ष के पद तक का सफ़र तय करने वाले लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत के पिता लेफ्टिनेंट जनरल एलएस रावत भारतीय सेना में डिप्टी चीफ के पद से रिटायर हुए थे. उनके पिता भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून के कमांडेंट के पद पर भी रहे. वहीं जनरल रावत ने सहसेनाध्यक्ष का पद संभालने से पहले सेना की दक्षिणी कमान के कमांडर का पद संभाला था.
ले. जनरल बिपिन रावत का जन्म उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में हुआ था. वह इस पद पर पहुंचने वाले उत्तराखंड के पहले अधिकारी है. शिमला के सेंट एडवर्ड स्कूल के पूर्व छात्र रहे जनरल रावत ने वर्ष 1978 में इंडियन मिलिट्री एकेडमी देहरादून से पास आउट होने के बाद उन्हें 11वीं गोरखा राइफल्स की पांचवीं बटालियन में कमीशन मिला.
जनरल रावत का करियर उपलब्धियां भरा रहा है. वह दिसंबर 1978 में भारतीय सैन्य अकादमी से पासआउट होने वाले बैच के श्रेष्ठतम कैडेट रहे और उन्हें स्वार्ड ऑफ ऑनर मिला. लेफ्टिनेंट जनरल विपिन रावत अति विशिष्ट सेवा मेडल, युद्ध सेवा मेडल, सेना मेडल व विशिष्ट सेवा मेडल जैसे कई सम्मान से अलंकृत किए गए हैं. टिप्पणियां
अपनी पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए लेफ्टिनेंट जनरल विपिन रावत इस पद पर पहुंचे हैं. इससे पहले उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल लक्ष्मण सिंह रावत सेना में डिप्टी चीफ के पद से रिटायर हुए थे. उनके पिता भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून के कमांडेंट भी रहे. वहीं जनरल रावत ने सहसेनाध्यक्ष का पद संभालने से पहले
सेना की दक्षिणी कमान के कमांडर का पद भी संभाल चुके हैं.
कांगो में मल्टीनेशन ब्रिगेड की कमान संभालने के साथ ही वह यूएन मिशन में सेक्रेटरी जनरल व फोर्स कमांडर भी रह चुके हैं. सेना में कई अहम पद संभालने के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा पर उनके लेख विभिन्न जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं. मिलिट्री मीडिया स्ट्रैटिजिक स्टडीज पर शोध के लिए उन्हें डॉक्टरेट की उपाधि भी मिल चुकी है.
भारत के थल सेना अध्यक्ष जनरल दलबीर सिंह 31 दिसम्बर को रिटायर हो रहे हैं. थल सेना अध्यक्ष के पद तक का सफ़र तय करने वाले लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत के पिता लेफ्टिनेंट जनरल एलएस रावत भारतीय सेना में डिप्टी चीफ के पद से रिटायर हुए थे. उनके पिता भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून के कमांडेंट के पद पर भी रहे. वहीं जनरल रावत ने सहसेनाध्यक्ष का पद संभालने से पहले सेना की दक्षिणी कमान के कमांडर का पद संभाला था.
ले. जनरल बिपिन रावत का जन्म उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में हुआ था. वह इस पद पर पहुंचने वाले उत्तराखंड के पहले अधिकारी है. शिमला के सेंट एडवर्ड स्कूल के पूर्व छात्र रहे जनरल रावत ने वर्ष 1978 में इंडियन मिलिट्री एकेडमी देहरादून से पास आउट होने के बाद उन्हें 11वीं गोरखा राइफल्स की पांचवीं बटालियन में कमीशन मिला.
जनरल रावत का करियर उपलब्धियां भरा रहा है. वह दिसंबर 1978 में भारतीय सैन्य अकादमी से पासआउट होने वाले बैच के श्रेष्ठतम कैडेट रहे और उन्हें स्वार्ड ऑफ ऑनर मिला. लेफ्टिनेंट जनरल विपिन रावत अति विशिष्ट सेवा मेडल, युद्ध सेवा मेडल, सेना मेडल व विशिष्ट सेवा मेडल जैसे कई सम्मान से अलंकृत किए गए हैं. टिप्पणियां
अपनी पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए लेफ्टिनेंट जनरल विपिन रावत इस पद पर पहुंचे हैं. इससे पहले उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल लक्ष्मण सिंह रावत सेना में डिप्टी चीफ के पद से रिटायर हुए थे. उनके पिता भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून के कमांडेंट भी रहे. वहीं जनरल रावत ने सहसेनाध्यक्ष का पद संभालने से पहले
सेना की दक्षिणी कमान के कमांडर का पद भी संभाल चुके हैं.
कांगो में मल्टीनेशन ब्रिगेड की कमान संभालने के साथ ही वह यूएन मिशन में सेक्रेटरी जनरल व फोर्स कमांडर भी रह चुके हैं. सेना में कई अहम पद संभालने के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा पर उनके लेख विभिन्न जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं. मिलिट्री मीडिया स्ट्रैटिजिक स्टडीज पर शोध के लिए उन्हें डॉक्टरेट की उपाधि भी मिल चुकी है.
ले. जनरल बिपिन रावत का जन्म उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में हुआ था. वह इस पद पर पहुंचने वाले उत्तराखंड के पहले अधिकारी है. शिमला के सेंट एडवर्ड स्कूल के पूर्व छात्र रहे जनरल रावत ने वर्ष 1978 में इंडियन मिलिट्री एकेडमी देहरादून से पास आउट होने के बाद उन्हें 11वीं गोरखा राइफल्स की पांचवीं बटालियन में कमीशन मिला.
जनरल रावत का करियर उपलब्धियां भरा रहा है. वह दिसंबर 1978 में भारतीय सैन्य अकादमी से पासआउट होने वाले बैच के श्रेष्ठतम कैडेट रहे और उन्हें स्वार्ड ऑफ ऑनर मिला. लेफ्टिनेंट जनरल विपिन रावत अति विशिष्ट सेवा मेडल, युद्ध सेवा मेडल, सेना मेडल व विशिष्ट सेवा मेडल जैसे कई सम्मान से अलंकृत किए गए हैं. टिप्पणियां
अपनी पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए लेफ्टिनेंट जनरल विपिन रावत इस पद पर पहुंचे हैं. इससे पहले उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल लक्ष्मण सिंह रावत सेना में डिप्टी चीफ के पद से रिटायर हुए थे. उनके पिता भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून के कमांडेंट भी रहे. वहीं जनरल रावत ने सहसेनाध्यक्ष का पद संभालने से पहले
सेना की दक्षिणी कमान के कमांडर का पद भी संभाल चुके हैं.
कांगो में मल्टीनेशन ब्रिगेड की कमान संभालने के साथ ही वह यूएन मिशन में सेक्रेटरी जनरल व फोर्स कमांडर भी रह चुके हैं. सेना में कई अहम पद संभालने के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा पर उनके लेख विभिन्न जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं. मिलिट्री मीडिया स्ट्रैटिजिक स्टडीज पर शोध के लिए उन्हें डॉक्टरेट की उपाधि भी मिल चुकी है.
जनरल रावत का करियर उपलब्धियां भरा रहा है. वह दिसंबर 1978 में भारतीय सैन्य अकादमी से पासआउट होने वाले बैच के श्रेष्ठतम कैडेट रहे और उन्हें स्वार्ड ऑफ ऑनर मिला. लेफ्टिनेंट जनरल विपिन रावत अति विशिष्ट सेवा मेडल, युद्ध सेवा मेडल, सेना मेडल व विशिष्ट सेवा मेडल जैसे कई सम्मान से अलंकृत किए गए हैं. टिप्पणियां
अपनी पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए लेफ्टिनेंट जनरल विपिन रावत इस पद पर पहुंचे हैं. इससे पहले उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल लक्ष्मण सिंह रावत सेना में डिप्टी चीफ के पद से रिटायर हुए थे. उनके पिता भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून के कमांडेंट भी रहे. वहीं जनरल रावत ने सहसेनाध्यक्ष का पद संभालने से पहले
सेना की दक्षिणी कमान के कमांडर का पद भी संभाल चुके हैं.
कांगो में मल्टीनेशन ब्रिगेड की कमान संभालने के साथ ही वह यूएन मिशन में सेक्रेटरी जनरल व फोर्स कमांडर भी रह चुके हैं. सेना में कई अहम पद संभालने के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा पर उनके लेख विभिन्न जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं. मिलिट्री मीडिया स्ट्रैटिजिक स्टडीज पर शोध के लिए उन्हें डॉक्टरेट की उपाधि भी मिल चुकी है.
अपनी पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए लेफ्टिनेंट जनरल विपिन रावत इस पद पर पहुंचे हैं. इससे पहले उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल लक्ष्मण सिंह रावत सेना में डिप्टी चीफ के पद से रिटायर हुए थे. उनके पिता भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून के कमांडेंट भी रहे. वहीं जनरल रावत ने सहसेनाध्यक्ष का पद संभालने से पहले
सेना की दक्षिणी कमान के कमांडर का पद भी संभाल चुके हैं.
कांगो में मल्टीनेशन ब्रिगेड की कमान संभालने के साथ ही वह यूएन मिशन में सेक्रेटरी जनरल व फोर्स कमांडर भी रह चुके हैं. सेना में कई अहम पद संभालने के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा पर उनके लेख विभिन्न जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं. मिलिट्री मीडिया स्ट्रैटिजिक स्टडीज पर शोध के लिए उन्हें डॉक्टरेट की उपाधि भी मिल चुकी है.
कांगो में मल्टीनेशन ब्रिगेड की कमान संभालने के साथ ही वह यूएन मिशन में सेक्रेटरी जनरल व फोर्स कमांडर भी रह चुके हैं. सेना में कई अहम पद संभालने के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा पर उनके लेख विभिन्न जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं. मिलिट्री मीडिया स्ट्रैटिजिक स्टडीज पर शोध के लिए उन्हें डॉक्टरेट की उपाधि भी मिल चुकी है. | संक्षिप्त सारांश: वर्तमान समय में वह थलसेना सहसेनाध्यक्ष के पद पर कार्यरत हैं
लेफ्टिनेंट जनरल रावत जनरल दलबीर सिंह का स्थान लेंगे
सरकार ने छह माह पूर्व ही थलसेना सहसेनाध्यक्ष पद पर नियुक्ति की थी | 23 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: दुनियाभर के विभिन्न हिस्सों में लोगों ने धूमधाम से वर्ष 2011 को विदा किया और 2012 का स्वागत किया। नए साल का पहला जश्न समोआ और टोकेलू में मनाया गया। समोआ दक्षिणी प्रशांत महासागर के ओसेनिक क्षेत्र का द्विपीय देश है, जबकि टोकेलू न्यूजीलैंड का स्वायत्त क्षेत्र है। दोनों देशों में समय को 24 घंटे आगे खिसकाया गया है। जिसके कारण दोनों जगहों के कैलेंडर में 29 दिसम्बर के बाद सीधे 31 दिसम्बर आया और इस वजह से अब तक नए साल का सबसे आखिर में स्वागत करने वाली दोनों जगहों पर इस बार सबसे पहले नए साल का स्वागत किया गया।
बीबीसी के मुताबिक दुनिया में नए साल का सबसे पहले स्वागत करने वाला देश होने के कारण लोगों ने शनिवार की सुबह से ही जश्न मनाना शुरू कर दिया। आस्ट्रेलिया में मध्य रात्रि में 15 मिनट की आतिशबाजी के साथ नए साल का स्वागत किया गया।
जापान में लोगों ने टोक्यो टावर के सामने शुभकामना संदेश लिखे हीलियम भरे गुब्बारे छोड़कर नए साल का स्वागत किया। रविवार को दूसरी पारी की शुरुआत कर रहे संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने उम्मीद जताई कि वर्ष 2011 में अरब देशों में हुए व्यापक विरोध प्रदर्शन से शुरू हुई लोकतंत्र की मुहिम आगे भी जारी रहेगी। जर्मनी की चांसलर एंजेला मार्केल का नए साल का शुभकामना संदेश हालांकि अपेक्षाकृत निराशाजनक रहा।
मार्केल ने कहा कि वर्ष 2012 वर्ष 2011 की तुलना में अधिक कठिन रहेगा, लेकिन उन्होंने उम्मीद जताई कि कर्ज संकट के कारण यूरोपीय देश एक-दूसरे के निकट आएंगे। | संक्षिप्त पाठ: दुनियाभर के विभिन्न हिस्सों में लोगों ने धूमधाम से वर्ष 2011 को विदा किया और 2012 का स्वागत किया। | 14 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: आईसीसी टेस्ट टीम और गेंदबाजी रैंकिंग में शीर्ष पर कोई बदलाव नहीं हुआ है. इस रैंकिंग में भारत और इसके ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने अपना पहला स्थान बरकरार रखा है. भारत टीम तालिका में 115 अंक लेकर चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान (111) और ऑस्ट्रेलिया (108) से आगे शीर्ष पर है. इंग्लैंड की टीम चौथे स्थान पर है. उसके बाद दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, न्यूजीलैंड, वेस्टइंडीज, बांग्लादेश और जिम्बाब्वे की टीमें हैं.
अश्विन न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज के दौरान दूसरे सबसे तेज 200 विकेट चटकाने वाले गेंदबाज बने थे. उन्होंने 900 अंक से अपना पहला पोजिशन कायम रखा है. दक्षिण अफ्रीका के तेज गेंदबाज डेल स्टेन (878) दूसरे और इंग्लैंड के जेम्स एंडरसन (853) तीसरे स्थान पर हैं. अश्विन के स्पिन जोड़ीदार रविंद्र जडेजा 805 अंक के साथ सातवें स्थान पर हैं.
अश्विन ऑलराउंडरों की सूची में भी 451 अंक लेकर शीर्ष पर हैं. इस सूची में जडेजा 292 अंक के साथ पांचवें स्थान पर हैं. अजिंक्य रहाणे बल्लेबाजों की सूची में 825 अंक लेकर शीर्ष रैंकिंग वाले भारतीय बल्लेबाज हैं, जबकि चेतेश्वर पुजारा और कप्तान विराट कोहली ने एक-एक पायदान के फायदे से क्रमश: 14वां और 16वां स्थान हासिल किया.
बांग्लादेश के युवा स्पिनर मेहदी हसन अपनी टीम को इंग्लैंड पर पहली टेस्ट जीत दिलाने के बाद एमआरएफ टायर्स गेंदबाजों की रैंकिंग में 33वें स्थान पर पहुंच गए हैं. बांग्लादेश ने इस जीत की बदौलत मीरपुर में 1-1 से सीरीज ड्रॉ कराई. मेहदी ने आठ महीने पहले इसी स्थल पर आईसीसी अंडर-19 क्रिकेट विश्वकप 2016 के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का पुरस्कार जीता था. उन्होंने मैच के दौरान 159 रन देकर 12 विकेट चटकाए थे, जिसकी बदौलत उन्होंने 28 पायदान की छलांग लगाई. इस ऑफ स्पिनर ने चटगांव में अपने पर्दापण में 138 रन देकर सात विकेट झटककर पिछले हफ्ते ही रैंकिंग में प्रवेश किया था.
बल्लेबाजों के लिए यह टेस्ट मुश्किल रहा. इंग्लैंड के कप्तान एलिस्टर कुक ने एक पायदान के फायदे से 11वां स्थान हासिल किया, उन्होंने 14 और 59 रन की पारी खेली थी. बांग्लादेश के सलामी बल्लेबाज तमीम इकबाल ने 104 और 40 रन की पारी खेलकर चार पायदान की छलांग लगाई, जिससे वह 20वें स्थान पर पहुंच गए. शकिबुल हसन एक पायदान के फायदे से 27वें और इमरूल कायेस दो पायदान के फायदे से 53वें स्थान पर पहुंच गए हैं.टिप्पणियां
वहीं इंग्लैंड के जो रूट शीर्ष तीन से बाहर हो गए. वह 56 और एक रन के स्कोर से दो पायदान खिसककर पांचवें स्थान पर हैं. बांग्लादेश ने मीरपुर में 108 रन की जीत से आठ रैंकिंग अंक हासिल किए. इसका मतलब उसके अब 65 अंक हैं और वह आठवीं रैंकिंग पर काबिज वेस्टइंडीज से महज दो अंक पीछे हैं. वहीं चौथी रैंकिंग की इंग्लैंड टीम ने तीन अंक गंवाए, जिससे उसके 105 अंक रह गए.(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
अश्विन न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज के दौरान दूसरे सबसे तेज 200 विकेट चटकाने वाले गेंदबाज बने थे. उन्होंने 900 अंक से अपना पहला पोजिशन कायम रखा है. दक्षिण अफ्रीका के तेज गेंदबाज डेल स्टेन (878) दूसरे और इंग्लैंड के जेम्स एंडरसन (853) तीसरे स्थान पर हैं. अश्विन के स्पिन जोड़ीदार रविंद्र जडेजा 805 अंक के साथ सातवें स्थान पर हैं.
अश्विन ऑलराउंडरों की सूची में भी 451 अंक लेकर शीर्ष पर हैं. इस सूची में जडेजा 292 अंक के साथ पांचवें स्थान पर हैं. अजिंक्य रहाणे बल्लेबाजों की सूची में 825 अंक लेकर शीर्ष रैंकिंग वाले भारतीय बल्लेबाज हैं, जबकि चेतेश्वर पुजारा और कप्तान विराट कोहली ने एक-एक पायदान के फायदे से क्रमश: 14वां और 16वां स्थान हासिल किया.
बांग्लादेश के युवा स्पिनर मेहदी हसन अपनी टीम को इंग्लैंड पर पहली टेस्ट जीत दिलाने के बाद एमआरएफ टायर्स गेंदबाजों की रैंकिंग में 33वें स्थान पर पहुंच गए हैं. बांग्लादेश ने इस जीत की बदौलत मीरपुर में 1-1 से सीरीज ड्रॉ कराई. मेहदी ने आठ महीने पहले इसी स्थल पर आईसीसी अंडर-19 क्रिकेट विश्वकप 2016 के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का पुरस्कार जीता था. उन्होंने मैच के दौरान 159 रन देकर 12 विकेट चटकाए थे, जिसकी बदौलत उन्होंने 28 पायदान की छलांग लगाई. इस ऑफ स्पिनर ने चटगांव में अपने पर्दापण में 138 रन देकर सात विकेट झटककर पिछले हफ्ते ही रैंकिंग में प्रवेश किया था.
बल्लेबाजों के लिए यह टेस्ट मुश्किल रहा. इंग्लैंड के कप्तान एलिस्टर कुक ने एक पायदान के फायदे से 11वां स्थान हासिल किया, उन्होंने 14 और 59 रन की पारी खेली थी. बांग्लादेश के सलामी बल्लेबाज तमीम इकबाल ने 104 और 40 रन की पारी खेलकर चार पायदान की छलांग लगाई, जिससे वह 20वें स्थान पर पहुंच गए. शकिबुल हसन एक पायदान के फायदे से 27वें और इमरूल कायेस दो पायदान के फायदे से 53वें स्थान पर पहुंच गए हैं.टिप्पणियां
वहीं इंग्लैंड के जो रूट शीर्ष तीन से बाहर हो गए. वह 56 और एक रन के स्कोर से दो पायदान खिसककर पांचवें स्थान पर हैं. बांग्लादेश ने मीरपुर में 108 रन की जीत से आठ रैंकिंग अंक हासिल किए. इसका मतलब उसके अब 65 अंक हैं और वह आठवीं रैंकिंग पर काबिज वेस्टइंडीज से महज दो अंक पीछे हैं. वहीं चौथी रैंकिंग की इंग्लैंड टीम ने तीन अंक गंवाए, जिससे उसके 105 अंक रह गए.(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
अश्विन ऑलराउंडरों की सूची में भी 451 अंक लेकर शीर्ष पर हैं. इस सूची में जडेजा 292 अंक के साथ पांचवें स्थान पर हैं. अजिंक्य रहाणे बल्लेबाजों की सूची में 825 अंक लेकर शीर्ष रैंकिंग वाले भारतीय बल्लेबाज हैं, जबकि चेतेश्वर पुजारा और कप्तान विराट कोहली ने एक-एक पायदान के फायदे से क्रमश: 14वां और 16वां स्थान हासिल किया.
बांग्लादेश के युवा स्पिनर मेहदी हसन अपनी टीम को इंग्लैंड पर पहली टेस्ट जीत दिलाने के बाद एमआरएफ टायर्स गेंदबाजों की रैंकिंग में 33वें स्थान पर पहुंच गए हैं. बांग्लादेश ने इस जीत की बदौलत मीरपुर में 1-1 से सीरीज ड्रॉ कराई. मेहदी ने आठ महीने पहले इसी स्थल पर आईसीसी अंडर-19 क्रिकेट विश्वकप 2016 के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का पुरस्कार जीता था. उन्होंने मैच के दौरान 159 रन देकर 12 विकेट चटकाए थे, जिसकी बदौलत उन्होंने 28 पायदान की छलांग लगाई. इस ऑफ स्पिनर ने चटगांव में अपने पर्दापण में 138 रन देकर सात विकेट झटककर पिछले हफ्ते ही रैंकिंग में प्रवेश किया था.
बल्लेबाजों के लिए यह टेस्ट मुश्किल रहा. इंग्लैंड के कप्तान एलिस्टर कुक ने एक पायदान के फायदे से 11वां स्थान हासिल किया, उन्होंने 14 और 59 रन की पारी खेली थी. बांग्लादेश के सलामी बल्लेबाज तमीम इकबाल ने 104 और 40 रन की पारी खेलकर चार पायदान की छलांग लगाई, जिससे वह 20वें स्थान पर पहुंच गए. शकिबुल हसन एक पायदान के फायदे से 27वें और इमरूल कायेस दो पायदान के फायदे से 53वें स्थान पर पहुंच गए हैं.टिप्पणियां
वहीं इंग्लैंड के जो रूट शीर्ष तीन से बाहर हो गए. वह 56 और एक रन के स्कोर से दो पायदान खिसककर पांचवें स्थान पर हैं. बांग्लादेश ने मीरपुर में 108 रन की जीत से आठ रैंकिंग अंक हासिल किए. इसका मतलब उसके अब 65 अंक हैं और वह आठवीं रैंकिंग पर काबिज वेस्टइंडीज से महज दो अंक पीछे हैं. वहीं चौथी रैंकिंग की इंग्लैंड टीम ने तीन अंक गंवाए, जिससे उसके 105 अंक रह गए.(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
बांग्लादेश के युवा स्पिनर मेहदी हसन अपनी टीम को इंग्लैंड पर पहली टेस्ट जीत दिलाने के बाद एमआरएफ टायर्स गेंदबाजों की रैंकिंग में 33वें स्थान पर पहुंच गए हैं. बांग्लादेश ने इस जीत की बदौलत मीरपुर में 1-1 से सीरीज ड्रॉ कराई. मेहदी ने आठ महीने पहले इसी स्थल पर आईसीसी अंडर-19 क्रिकेट विश्वकप 2016 के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का पुरस्कार जीता था. उन्होंने मैच के दौरान 159 रन देकर 12 विकेट चटकाए थे, जिसकी बदौलत उन्होंने 28 पायदान की छलांग लगाई. इस ऑफ स्पिनर ने चटगांव में अपने पर्दापण में 138 रन देकर सात विकेट झटककर पिछले हफ्ते ही रैंकिंग में प्रवेश किया था.
बल्लेबाजों के लिए यह टेस्ट मुश्किल रहा. इंग्लैंड के कप्तान एलिस्टर कुक ने एक पायदान के फायदे से 11वां स्थान हासिल किया, उन्होंने 14 और 59 रन की पारी खेली थी. बांग्लादेश के सलामी बल्लेबाज तमीम इकबाल ने 104 और 40 रन की पारी खेलकर चार पायदान की छलांग लगाई, जिससे वह 20वें स्थान पर पहुंच गए. शकिबुल हसन एक पायदान के फायदे से 27वें और इमरूल कायेस दो पायदान के फायदे से 53वें स्थान पर पहुंच गए हैं.टिप्पणियां
वहीं इंग्लैंड के जो रूट शीर्ष तीन से बाहर हो गए. वह 56 और एक रन के स्कोर से दो पायदान खिसककर पांचवें स्थान पर हैं. बांग्लादेश ने मीरपुर में 108 रन की जीत से आठ रैंकिंग अंक हासिल किए. इसका मतलब उसके अब 65 अंक हैं और वह आठवीं रैंकिंग पर काबिज वेस्टइंडीज से महज दो अंक पीछे हैं. वहीं चौथी रैंकिंग की इंग्लैंड टीम ने तीन अंक गंवाए, जिससे उसके 105 अंक रह गए.(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
बल्लेबाजों के लिए यह टेस्ट मुश्किल रहा. इंग्लैंड के कप्तान एलिस्टर कुक ने एक पायदान के फायदे से 11वां स्थान हासिल किया, उन्होंने 14 और 59 रन की पारी खेली थी. बांग्लादेश के सलामी बल्लेबाज तमीम इकबाल ने 104 और 40 रन की पारी खेलकर चार पायदान की छलांग लगाई, जिससे वह 20वें स्थान पर पहुंच गए. शकिबुल हसन एक पायदान के फायदे से 27वें और इमरूल कायेस दो पायदान के फायदे से 53वें स्थान पर पहुंच गए हैं.टिप्पणियां
वहीं इंग्लैंड के जो रूट शीर्ष तीन से बाहर हो गए. वह 56 और एक रन के स्कोर से दो पायदान खिसककर पांचवें स्थान पर हैं. बांग्लादेश ने मीरपुर में 108 रन की जीत से आठ रैंकिंग अंक हासिल किए. इसका मतलब उसके अब 65 अंक हैं और वह आठवीं रैंकिंग पर काबिज वेस्टइंडीज से महज दो अंक पीछे हैं. वहीं चौथी रैंकिंग की इंग्लैंड टीम ने तीन अंक गंवाए, जिससे उसके 105 अंक रह गए.(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
वहीं इंग्लैंड के जो रूट शीर्ष तीन से बाहर हो गए. वह 56 और एक रन के स्कोर से दो पायदान खिसककर पांचवें स्थान पर हैं. बांग्लादेश ने मीरपुर में 108 रन की जीत से आठ रैंकिंग अंक हासिल किए. इसका मतलब उसके अब 65 अंक हैं और वह आठवीं रैंकिंग पर काबिज वेस्टइंडीज से महज दो अंक पीछे हैं. वहीं चौथी रैंकिंग की इंग्लैंड टीम ने तीन अंक गंवाए, जिससे उसके 105 अंक रह गए.(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) | सारांश: भारत टीम 115 अंकों के साथ टॉप पर
पाकिस्तान दूसरे और ऑस्ट्रेलिया तीसरे नंबर पर
अश्विन ऑलराउंडरों की सूची में भी 451 अंक लेकर शीर्ष पर हैं | 5 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: जब मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में किसान आंदोलन अपने पूरे चरम पर था, किसान गोलियां और लाठी खा रहा था, तब देश के किसान कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह मौन थे और योग गुरु बाबा रामदेव के साथ योग कर रहे थे. यह मुद्दा मीडिया में खूब उछला. कृषि मंत्री की खूब किरकिरी भी हुई.
शायद इसी से सबक लेकर कृषि एव किसान कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह ने ब्रिक्स देशों के कृषि सम्मेलन के लिए चीन के अपने यात्रा कार्यक्रम को रद्द कर दिया है. यह सम्मेलन 15 से 17 जून तक आयोजित किया जा रहा है.
भारी फसल उत्पादन के कारण विभिन्न कृषि उत्पादों की कीमतों में गिरावट के मद्देनजर मध्य प्रदेश जैसे कुछ राज्यों में ऋण माफी और अधिक खरीद मूल्य की मांग के साथ किसान आंदोलन कर रहे हैं. ब्रिक्स कृषि सहयोग समूह की बैठक में भाग लेने के लिए कृषि मंत्री गुरुवार को चीन के लिए उड़ान भरने वाले थे.
एक सरकारी बयान में कहा गया है कि मौजूदा हालात में किसानों के हित में और राज्यों को नीतिगत फैसले लेने में मदद देने के लिए कृषि मंत्री ने चीन के अपने दौरे को रद्द कर दिया है. इसमें कहा गया है कि उनके स्थान पर कृषि सचिव ब्रिक्स की बैठक में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे. टिप्पणियां
उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र ने किसानों को राहत देने के लिए ऋण माफी की घोषणा की है. मध्य प्रदेश, कर्नाटक और कई अन्य राज्य ऋण माफ करने के लिए दवाब में हैं जिसके बारे में प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन ने कहा कि यह तात्कालिक आवश्यकता है. देश के कई हिस्सों में किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन मध्य प्रदेश में यह आंदोलन हिंसक हो गया था.
(इनपुट भाषा से भी)
शायद इसी से सबक लेकर कृषि एव किसान कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह ने ब्रिक्स देशों के कृषि सम्मेलन के लिए चीन के अपने यात्रा कार्यक्रम को रद्द कर दिया है. यह सम्मेलन 15 से 17 जून तक आयोजित किया जा रहा है.
भारी फसल उत्पादन के कारण विभिन्न कृषि उत्पादों की कीमतों में गिरावट के मद्देनजर मध्य प्रदेश जैसे कुछ राज्यों में ऋण माफी और अधिक खरीद मूल्य की मांग के साथ किसान आंदोलन कर रहे हैं. ब्रिक्स कृषि सहयोग समूह की बैठक में भाग लेने के लिए कृषि मंत्री गुरुवार को चीन के लिए उड़ान भरने वाले थे.
एक सरकारी बयान में कहा गया है कि मौजूदा हालात में किसानों के हित में और राज्यों को नीतिगत फैसले लेने में मदद देने के लिए कृषि मंत्री ने चीन के अपने दौरे को रद्द कर दिया है. इसमें कहा गया है कि उनके स्थान पर कृषि सचिव ब्रिक्स की बैठक में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे. टिप्पणियां
उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र ने किसानों को राहत देने के लिए ऋण माफी की घोषणा की है. मध्य प्रदेश, कर्नाटक और कई अन्य राज्य ऋण माफ करने के लिए दवाब में हैं जिसके बारे में प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन ने कहा कि यह तात्कालिक आवश्यकता है. देश के कई हिस्सों में किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन मध्य प्रदेश में यह आंदोलन हिंसक हो गया था.
(इनपुट भाषा से भी)
भारी फसल उत्पादन के कारण विभिन्न कृषि उत्पादों की कीमतों में गिरावट के मद्देनजर मध्य प्रदेश जैसे कुछ राज्यों में ऋण माफी और अधिक खरीद मूल्य की मांग के साथ किसान आंदोलन कर रहे हैं. ब्रिक्स कृषि सहयोग समूह की बैठक में भाग लेने के लिए कृषि मंत्री गुरुवार को चीन के लिए उड़ान भरने वाले थे.
एक सरकारी बयान में कहा गया है कि मौजूदा हालात में किसानों के हित में और राज्यों को नीतिगत फैसले लेने में मदद देने के लिए कृषि मंत्री ने चीन के अपने दौरे को रद्द कर दिया है. इसमें कहा गया है कि उनके स्थान पर कृषि सचिव ब्रिक्स की बैठक में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे. टिप्पणियां
उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र ने किसानों को राहत देने के लिए ऋण माफी की घोषणा की है. मध्य प्रदेश, कर्नाटक और कई अन्य राज्य ऋण माफ करने के लिए दवाब में हैं जिसके बारे में प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन ने कहा कि यह तात्कालिक आवश्यकता है. देश के कई हिस्सों में किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन मध्य प्रदेश में यह आंदोलन हिंसक हो गया था.
(इनपुट भाषा से भी)
एक सरकारी बयान में कहा गया है कि मौजूदा हालात में किसानों के हित में और राज्यों को नीतिगत फैसले लेने में मदद देने के लिए कृषि मंत्री ने चीन के अपने दौरे को रद्द कर दिया है. इसमें कहा गया है कि उनके स्थान पर कृषि सचिव ब्रिक्स की बैठक में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे. टिप्पणियां
उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र ने किसानों को राहत देने के लिए ऋण माफी की घोषणा की है. मध्य प्रदेश, कर्नाटक और कई अन्य राज्य ऋण माफ करने के लिए दवाब में हैं जिसके बारे में प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन ने कहा कि यह तात्कालिक आवश्यकता है. देश के कई हिस्सों में किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन मध्य प्रदेश में यह आंदोलन हिंसक हो गया था.
(इनपुट भाषा से भी)
उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र ने किसानों को राहत देने के लिए ऋण माफी की घोषणा की है. मध्य प्रदेश, कर्नाटक और कई अन्य राज्य ऋण माफ करने के लिए दवाब में हैं जिसके बारे में प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन ने कहा कि यह तात्कालिक आवश्यकता है. देश के कई हिस्सों में किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन मध्य प्रदेश में यह आंदोलन हिंसक हो गया था.
(इनपुट भाषा से भी)
(इनपुट भाषा से भी) | संक्षिप्त पाठ: 15-17 जून को चीन में ब्रिक्स कृषि सम्मेलन आयोजित हो रहा है
इस सम्मेलन में अब कृषि मंत्री के स्थान पर कृषि सचिव जाएंगे
देश के कई राज्यों में इस समय किसान आंदोलन चल रहे हैं | 13 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने मंत्रिमंडल के 55 में से 34 सदस्यों ने वर्ष 2011 में कर रिटर्न नहीं दाखिल की।
पाकिस्तानी समाचार-पत्र 'न्यूज इंटरनेशनल' के संपादकीय के अनुसार, फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू के एक अधिकारी ने बताया कि नेशनल असेम्बली के 200 और सीनेट के 60 सदस्यों को कर नोटिस भेजा जाएगा।टिप्पणियां
समाचार पत्र के अनुसार, मंत्रिमंडल के 60 प्रतिशत और पाकिस्तान की संसद के दोनों सदनों के करीब दो-तिहाई सदस्यों ने पिछले साल कर के लिए एक रुपये भी नहीं दिया। राष्ट्रपति ने भी वर्ष 2011 में कर रिटर्न नहीं दाखिल की।
विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार ने भी कर के रूप में बहुत कम राशि चुकायी। समाचार पत्र ने लिखा है कि खार ने केवल 69,619 रुपये का कर चुकाया, जो उनके द्वारा डिजनायर हैंडबैग्स पर खर्च की जाने वाली राशि से भी कम है।
पाकिस्तानी समाचार-पत्र 'न्यूज इंटरनेशनल' के संपादकीय के अनुसार, फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू के एक अधिकारी ने बताया कि नेशनल असेम्बली के 200 और सीनेट के 60 सदस्यों को कर नोटिस भेजा जाएगा।टिप्पणियां
समाचार पत्र के अनुसार, मंत्रिमंडल के 60 प्रतिशत और पाकिस्तान की संसद के दोनों सदनों के करीब दो-तिहाई सदस्यों ने पिछले साल कर के लिए एक रुपये भी नहीं दिया। राष्ट्रपति ने भी वर्ष 2011 में कर रिटर्न नहीं दाखिल की।
विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार ने भी कर के रूप में बहुत कम राशि चुकायी। समाचार पत्र ने लिखा है कि खार ने केवल 69,619 रुपये का कर चुकाया, जो उनके द्वारा डिजनायर हैंडबैग्स पर खर्च की जाने वाली राशि से भी कम है।
समाचार पत्र के अनुसार, मंत्रिमंडल के 60 प्रतिशत और पाकिस्तान की संसद के दोनों सदनों के करीब दो-तिहाई सदस्यों ने पिछले साल कर के लिए एक रुपये भी नहीं दिया। राष्ट्रपति ने भी वर्ष 2011 में कर रिटर्न नहीं दाखिल की।
विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार ने भी कर के रूप में बहुत कम राशि चुकायी। समाचार पत्र ने लिखा है कि खार ने केवल 69,619 रुपये का कर चुकाया, जो उनके द्वारा डिजनायर हैंडबैग्स पर खर्च की जाने वाली राशि से भी कम है।
विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार ने भी कर के रूप में बहुत कम राशि चुकायी। समाचार पत्र ने लिखा है कि खार ने केवल 69,619 रुपये का कर चुकाया, जो उनके द्वारा डिजनायर हैंडबैग्स पर खर्च की जाने वाली राशि से भी कम है। | संक्षिप्त सारांश: विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार ने भी कर के रूप में बहुत कम राशि चुकायी। समाचार पत्र ने लिखा है कि खार ने केवल 69,619 रुपये का कर चुकाया, जो उनके द्वारा डिजनायर हैंडबैग्स पर खर्च की जाने वाली राशि से भी कम है। | 23 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: वित्तीय अनियमिताओं के आरोपों और कई अन्य विवादों से घिरी इंडियन प्रीमियर लीग शनिवार से शुरू हो रही दो दिवसीय नीलामी के साथ फिर से नई शुरूआत करेगी, जिसमें इस ट्वेंटी-20 लीग के चौथे टूर्नामेंट के लिए चोटी के 350 खिलाड़ियों की बोली लगेगी। आईपीएल बीसीसीआई के लिए काफी सफल रहा है और उपमहाद्वीप में होने वाले एकदिवसीय विश्व कप के सिर्फ छह दिन बाद आठ अप्रैल को शुरू हो रही इस ट्वेंटी-20 लीग में इस बार 10 टीमों के हिस्सा लेने और 74 मैचों के आयोजन का कार्यक्रम है। वर्ष 2008 में शुरुआत से ही यह टूर्नामेंट विवादों का हिस्सा रहा। वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगने के बाद पिछले साल आईपीएल के करिश्माई आयुक्त ललित मोदी को बर्खास्त कर दिया गया, जबकि दो फ्रेंचाइजी किंग्स इलेवन पंजाब और राजस्थान रायल्स लीग में बने रहने के लिए बीसीसीआई के साथ अदालत में संघर्ष कर रही हैं। इन दोनों टीमों को बोर्ड ने स्वामित्व पैटर्न में कथित तौर नियमों का उल्लंघन करने पर बर्खास्त कर दिया था। सुरक्षा कारणों से ब्रिटेन में रह रहे मोदी पर फ्रेंचाइजियों का अधिकार देते समय दोस्तों और रिश्तेदारों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगा। इसके अलावा उन पर आईपीएल से जुड़े विभिन्न करारों में रिश्वत लेने का भी आरोप लगा जिसे उन्होंने सिरे से खारिज कर दिया। | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: वित्तीय अनियमिताओं के आरोपों और अन्य विवादों से घिरी इंडियन प्रीमियर लीग शनिवार से शुरू हो रही दो दिवसीय नीलामी के साथ फिर से शुरूआत करेगी | 25 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: एक भारतीय अरबपति दंपति पंकज और राधिका ओसवाल ने ऑस्ट्रेलिया के एक प्रमुख बैंक पर 1.9 अरब डॉलर का मुकदमा ठोका था. देश के सबसे बड़े बैंकों में शुमार इस कंपनी ने आखिरकार मजबूर होकर इस दंपति से सुलह समझौता कर 110 मिलियन डॉलर देकर मामले का निपटारा किया. दरअसल इस दंपति ने आरोप लगाया था कि ऑस्ट्रेलिया एंड न्यूजीलैंड बैंकिंग ग्रुप (एएनजेड) ने जब उनको शेयरों को बेचा तो उनके शेयरों की कीमत कम आंकी थी.
इस संबंध में ओसवाल दंपति के प्रवक्ता ने कहा, ''वे मामले के निपटारे से पूरी तरह संतुष्ट हैं. उन्हें बहुत खुशी है कि कोर्ट के समक्ष तथ्यों को सही तरह से रख सके और प्रसन्न हैं कि मामले का इस तरह से पटाक्षेप हुआ. अब वे ऑस्ट्रेलिया में भी नहीं रुकेंगे. वे अपनी भावी योजनाएं बना रहे हैं. यह राशि मामले के निपटारे के आकार को नहीं दर्शाती लेकिन इसका पूरा ब्यौरा उजागर नहीं करने की गोपनीयता की शर्तों से बंधे हैं.''
इस संबंध में एएनजेड के सीईओ का कहना है कि इस सेटेलमेंट का आशय यह नहीं है कि बैंक ने अपनी गलती स्वीकार की है. इस मामले में ओसवाल के प्रवक्ता का कहना है कि यह बेहद 'आश्चर्य' की बात है कि बैंक जिन आरोपों को निराधार बता रहा है, उसके निपटारे के लिए इतनी बड़ी धनराशि देने का इच्छुक है.
उल्लेखनीय है कि ओसवाल दंपति को 2010 में पर्थ में अपने भव्य बंगले के निर्माण को उस वक्त रोकना पड़ा था, जब उसके खिलाफ आपत्तियां उठी थीं. यह भवन स्वान नदी पर था और इसको ''स्वान का ताज'' कहा जा रहा था. इसके निर्माण पर 53 मिलियन डॉलर खर्च किया जाना था. इसी सितंबर में स्थानीय कौंसिल ने घोषणा करते हुए कहा है कि इसे गिरा दिया जाएगा.टिप्पणियां
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
इस संबंध में ओसवाल दंपति के प्रवक्ता ने कहा, ''वे मामले के निपटारे से पूरी तरह संतुष्ट हैं. उन्हें बहुत खुशी है कि कोर्ट के समक्ष तथ्यों को सही तरह से रख सके और प्रसन्न हैं कि मामले का इस तरह से पटाक्षेप हुआ. अब वे ऑस्ट्रेलिया में भी नहीं रुकेंगे. वे अपनी भावी योजनाएं बना रहे हैं. यह राशि मामले के निपटारे के आकार को नहीं दर्शाती लेकिन इसका पूरा ब्यौरा उजागर नहीं करने की गोपनीयता की शर्तों से बंधे हैं.''
इस संबंध में एएनजेड के सीईओ का कहना है कि इस सेटेलमेंट का आशय यह नहीं है कि बैंक ने अपनी गलती स्वीकार की है. इस मामले में ओसवाल के प्रवक्ता का कहना है कि यह बेहद 'आश्चर्य' की बात है कि बैंक जिन आरोपों को निराधार बता रहा है, उसके निपटारे के लिए इतनी बड़ी धनराशि देने का इच्छुक है.
उल्लेखनीय है कि ओसवाल दंपति को 2010 में पर्थ में अपने भव्य बंगले के निर्माण को उस वक्त रोकना पड़ा था, जब उसके खिलाफ आपत्तियां उठी थीं. यह भवन स्वान नदी पर था और इसको ''स्वान का ताज'' कहा जा रहा था. इसके निर्माण पर 53 मिलियन डॉलर खर्च किया जाना था. इसी सितंबर में स्थानीय कौंसिल ने घोषणा करते हुए कहा है कि इसे गिरा दिया जाएगा.टिप्पणियां
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
इस संबंध में एएनजेड के सीईओ का कहना है कि इस सेटेलमेंट का आशय यह नहीं है कि बैंक ने अपनी गलती स्वीकार की है. इस मामले में ओसवाल के प्रवक्ता का कहना है कि यह बेहद 'आश्चर्य' की बात है कि बैंक जिन आरोपों को निराधार बता रहा है, उसके निपटारे के लिए इतनी बड़ी धनराशि देने का इच्छुक है.
उल्लेखनीय है कि ओसवाल दंपति को 2010 में पर्थ में अपने भव्य बंगले के निर्माण को उस वक्त रोकना पड़ा था, जब उसके खिलाफ आपत्तियां उठी थीं. यह भवन स्वान नदी पर था और इसको ''स्वान का ताज'' कहा जा रहा था. इसके निर्माण पर 53 मिलियन डॉलर खर्च किया जाना था. इसी सितंबर में स्थानीय कौंसिल ने घोषणा करते हुए कहा है कि इसे गिरा दिया जाएगा.टिप्पणियां
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
उल्लेखनीय है कि ओसवाल दंपति को 2010 में पर्थ में अपने भव्य बंगले के निर्माण को उस वक्त रोकना पड़ा था, जब उसके खिलाफ आपत्तियां उठी थीं. यह भवन स्वान नदी पर था और इसको ''स्वान का ताज'' कहा जा रहा था. इसके निर्माण पर 53 मिलियन डॉलर खर्च किया जाना था. इसी सितंबर में स्थानीय कौंसिल ने घोषणा करते हुए कहा है कि इसे गिरा दिया जाएगा.टिप्पणियां
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) | संक्षिप्त पाठ: भारतीय दंपति ने 1.9 अरब डॉलर का मुकदमा ठोका था
बैंक को अब देने होंगे 110 मिलियन डॉलर
ऑस्ट्रेलियाई बैंक ने कहा कि सेटेलमेंट की शर्तें गोपनीय हैं | 14 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के छठे चरण में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 13 जिलों की 68 सीटों पर 86 महिलाओं सहित कुल 1103 उम्मीदवार मैदान में हैं जिनकी किस्मत का फैसला करीब 2.14 करोड़ मतदाता करेंगे।
इस चरण में 37 निवर्तमान विधायक भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
इस चरण के तहत जिन 13 जिलों में मतदान होना है, उनमें गौतमबुद्धनगर (नोएडा), गाजियाबाद, मेरठ, बागपत, बुलंदशहर, आगरा, मथुरा, अलीगढ़, हाथरस, प्रबुद्धनगर, पंचशीलनगर, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर शामिल हैं।
तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और शांतिपूर्ण मतदान के लिए सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं। हरियाणा और दिल्ली की सीमा से लगे हुए विधानसभा क्षेत्रों में सुरक्षा की अतिरिक्त व्यवस्था की गई है।
मतदान के लिए कुल 22,137 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। मतदान प्रक्रिया में 30,028 इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) का इस्तेमाल होगा।
प्रदेश में होने वाले इस चरण के मतदान में कई दिग्गजों की किस्मत दांव पर है, जिसमें वर्तमान सरकार के कुछ मंत्री भी हैं।
इस चरण में बहुजन समाज पार्टी सरकार के पांच मंत्री- रामवीर उपाध्याय हाथरस की सिकन्दराराऊ सीट से, जयवीर सिंह अलीगढ़ की बरौली सीट से, वेदराम भाटी मेरठ की किठौर सीट से, चौ. लक्ष्मी नारायण मथुरा की छाता सीट से और धर्म सिंह सैनी सहारनपुर की नकुड़ सीट से चुनाव मैदान में हैं।
अन्य दिग्गजों में राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) प्रमुख अजित सिंह के बेटे एवं मथुरा से सांसद जयंत चौधरी मथुरा की मांट सीट से, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हुकुम सिंह प्रबुद्धनगर की कैराना सीट से चुनावी अखाड़े में हैं।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के इस चरण के प्रचार अभियान में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, भाजपा और बसपा सहित अन्य दलों के नेताओं ने ताबड़तोड़ रैलियां कर अपनी पूरी ताकत झोंक दी।
ब्रजक्षेत्र यानी आगरा और अलीगढ़ मंडलों की 40 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में बॉलीवुड की कई हस्तियों ने भी राजनीतिक चोला ओढ़कर चुनाव प्रचार किया।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी, सपा मुखिया मुलायम सिंह, बसपा अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री मायावती और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी, भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह, भाजपा के ही अरुण जेटली, रालोद प्रमुख अजित सिंह आदि नेताओं ने प्रमुख क्षेत्रों जैसे आगरा, मथुरा, अलीगढ़, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, बागपत, हापुड़, हाथरस, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर में ताबड़तोड़ रैलियां और रोड शो किए हैं।
आगरा शहर से 28 पार्टी मैदान में हैं। यहां मुकाबला चतुष्कोणीय नजर आता है लेकिन कुछ छोटे दल और निर्दलीय प्रत्याशी वोट काटने की स्थिति में हैं। अमर सिंह के अभियान से मुलायम सिंह मुसीबत में पड़ सकते हैं तो टिकट न मिलने से नाराज कई दूसरे प्रत्याशी भी मुश्किलें खड़ी कर पा रहे हैं। फतेहपुर सीकरी सीट पर टिकट न मिलने से नाराज राजकुमार चाहर निर्दलीय चुनाव लड़कर रालोद के बाबू लाल को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।
आगरा जनपद में कुल नौ सीटें हैं जिनमें पिछली बार बसपा को 6 सीटें मिली थीं। लेकिन इस बार सीटों के परिसीमन और किसी के पक्ष में कोई खास हवा न होने के चलते सभी राजनीतिक दल ऊहापोह की स्थिति में हैं। पिछली बार यहां 43 फीसदी वोट पड़े थे लेकिन इस बार अन्ना फैक्टर के चलते और पहले पांच दौर के मतदान को देखते हुए इसके कम से कम 60 फीसदी तक होने का अनुमान है।
आगरा से लगे मथुरा जनपद में कमोबेश स्थिति ऐसी ही है। विश्लेषकों के अनुसार बसपा को नुकसान तो होगा लेकिन कितना इसपर कोई खुलकर आकलन नहीं कर पा रहा है।
इस चरण में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की साख भी दांव पर लगी है क्योंकि उनके बेटे एवं जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) अध्यक्ष राजवीर सिंह बुलंदशहर की डिबाई सीट से और पुत्रवधू प्रेमलता अलीगढ़ की अतरौली सीट से किस्मत आजमा रही हैं। इसके अलावा पूर्व मंत्री हाजी याकूब कुरैशी और रालोद नेता कोकब हमीद भी चर्चित चेहरे हैं।
प्रदेश में अपने वजूद को बचाने की लड़ाई लड़ रहे पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने बेटे राजवीर सिंह को डिबाई विधानसभा क्षेत्र से जिताने की है।
कभी भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता रहे कल्याण सिंह को बुलंदशहर में काफी सम्मान प्राप्त है। उनसे जुड़े लोध राजपूतों के वर्चस्व को चुनौती देते हुए विरोधियों ने राजवीर सिंह के लिए भी मजबूत किलेबंदी तो कर ही रखी है, खुद अपने भी उन्हें चक्रव्यूह में घेरने की कोशिश में लगे हुए हैं। राजवीर के सामने चुनौती पिछले विधानसभा चुनाव की हार का बदला लेने की भी है। पिछली बार बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार श्रीभगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित ने उन्हें हार का स्वाद चखाया था। इस बार शर्मा सपा के टिकट पर मैदान में हैं। बसपा ने इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखने के लिए ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय के भाई विनोद उपाध्याय को मैदान में उतारा है लेकिन राजवीर की असली परेशानी तो भाजपा के उम्मीदवार रवींद्र सिंह बढ़ा रहे हैं। पहली बार चुनाव मैदान में उतरे रवींद्र सिंह पूर्व विधायक राम सिंह के पुत्र हैं, जो कल्याण सिंह के काफी करीबी माने जाते थे। भाजपा ने लोध वोट बैंक में सेंधमारी की गरज से ही राम सिंह को पहले प्रत्याशी घोषित किया था लेकिन उन्होंने अपने पुत्र का नाम आगे कर दिया।
डिबाई विधानसभा क्षेत्र में बात विकास की करें, तो यहां की बदहाली को देखकर यही लगता है कि यहां के जनप्रतिनिधियों ने विकास को कोई तवज्जो नहीं दी है।
स्थानीय लोगों की मानें तो ऊर्जा मंत्री के भाई के चुनाव मैदान में उतरने के कारण बिजली आपूर्ति थोड़ी सुधरी है, लेकिन वह भी चुनाव से ऐन पहले।
डिबाई विधानसभा क्षेत्र के जातीय आंकड़ों की बात करें, तो यहां लोध राजपूत मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक करीब 92,000 है, जो निर्णायक साबित होती है। इसके अलावा मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 38,000, क्षत्रिय 16,000 और जाट मतदाताओं की लगभग 18,000 संख्या भी उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करने में महत्वपूर्ण साबित होगी।
अलीगढ़ जनपद की सात विधानसभा सीटों पर 1197148 पुरुष और 957556 स्त्री मतदाता अपने प्रतिनिधि का चयन करेंगे।
नए परिसीमन के कारण हाई प्रोफाइल सीट और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के गढ़ अतरौली में उनकी पुत्रवधु व जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) की प्रत्याशी प्रेमलता वर्मा, भाजपा के राजेश भारद्वाज, सपा के वीरेश यादव, बसपा के साकिब, कांग्रेस के विजेंद्र सिंह और राष्ट्रीय सवर्ण दल के चमन शर्मा का बहुकोणीय मुकाबला है।
अलीगढ़ शहर विधानसभा क्षेत्र से सपा प्रत्याशी जफर आलम, भाजपा के आशुतोष वार्ष्णेय, कांग्रेस के योगेश दीक्षित, बसपा के संजय शर्मा और रासद के प्रत्याशी डॉ. सीपी गुप्ता के बीच मुकाबला है।
बरौली क्षेत्र से बसपा सरकार में मंत्री रहे जयवीर सिंह तीसरी बार सफलता प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं। रालोद के दलवीर सिंह, भाजपा के मुनीश गौड़, सपा के मोहन लाल बघेल, जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के केशव सिंह और रासद के गजेंद्र सिंह उन्हें टक्कर दे रहे हैं।
कोल विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी विवेक बंसल, सपा के जमीरुल्ला, बसपा के जियाउर्रहमान और भाजपा के योगेंद्र लालू दौड़ में शामिल हैं।
रालोद की परंपरागत सीट माने जाने वाले इगलास क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी त्रिलोकीराम परंपरा को कायम रखने की कोशिश करेंगे। उनका बसपा के राजेंद्र कुमार, भाजपा की रामसखी कठेरिया से कड़ा मुकाबला है।
रालोद के ही दूसरे गढ़ खैर क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी भगवती प्रसाद और बसपा की राजरानी मुख्य दौड़ में शामिल हैं। भाजपा के अनूप वाल्मीकि और सपा के गुरविंदर सिंह भी अपनी पूरी ताकत झौंकी है।
छर्रा में सपा प्रत्याशी राकेश सिंह, कांग्रेस के परवेज अहमद, बसपा के मूलचंद्र बघेल और जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के रवेंद्र पाल सिंह में कड़ी टक्कर है।
आगरा में राजनीतिक विश्लेषक बृज खंडेलवाल ने बताया, "पिछले पांच चरणों के मतदान के बाद कोई भी पार्टी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नहीं है। इस दौर के मतदान के बाद भी स्थिति बदलती नहीं दिख रही। इस बार का चुनाव बिल्कुल अलग किस्म का है। पूरी तरह सक्रिय भूमिका निभा रहा निर्वाचन आयोग इसके लिए धन्यवाद का पात्र है, जिसने अपने तेवर में कोई नरमी नहीं दिखाई और न ही किसी पार्टी को कोई छूट दी।"टिप्पणियां
क्षेत्रीय मीडिया और गैर सरकारी संगठनों ने भी मतदाताओं को प्रेरित करने के लिए कई सिलसिलेवार कार्यक्रम चलाए हैं।
इस दौर में खास बात जो देखने में आई है वह यह है कि इस बार चुनावों पर पैसे का असर नहीं दिख रहा है। प्रशासन सख्ती से नजर रख रहा है।
(कुछ अंश एजेंसियों से)
इस चरण में 37 निवर्तमान विधायक भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
इस चरण के तहत जिन 13 जिलों में मतदान होना है, उनमें गौतमबुद्धनगर (नोएडा), गाजियाबाद, मेरठ, बागपत, बुलंदशहर, आगरा, मथुरा, अलीगढ़, हाथरस, प्रबुद्धनगर, पंचशीलनगर, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर शामिल हैं।
तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और शांतिपूर्ण मतदान के लिए सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं। हरियाणा और दिल्ली की सीमा से लगे हुए विधानसभा क्षेत्रों में सुरक्षा की अतिरिक्त व्यवस्था की गई है।
मतदान के लिए कुल 22,137 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। मतदान प्रक्रिया में 30,028 इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) का इस्तेमाल होगा।
प्रदेश में होने वाले इस चरण के मतदान में कई दिग्गजों की किस्मत दांव पर है, जिसमें वर्तमान सरकार के कुछ मंत्री भी हैं।
इस चरण में बहुजन समाज पार्टी सरकार के पांच मंत्री- रामवीर उपाध्याय हाथरस की सिकन्दराराऊ सीट से, जयवीर सिंह अलीगढ़ की बरौली सीट से, वेदराम भाटी मेरठ की किठौर सीट से, चौ. लक्ष्मी नारायण मथुरा की छाता सीट से और धर्म सिंह सैनी सहारनपुर की नकुड़ सीट से चुनाव मैदान में हैं।
अन्य दिग्गजों में राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) प्रमुख अजित सिंह के बेटे एवं मथुरा से सांसद जयंत चौधरी मथुरा की मांट सीट से, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हुकुम सिंह प्रबुद्धनगर की कैराना सीट से चुनावी अखाड़े में हैं।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के इस चरण के प्रचार अभियान में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, भाजपा और बसपा सहित अन्य दलों के नेताओं ने ताबड़तोड़ रैलियां कर अपनी पूरी ताकत झोंक दी।
ब्रजक्षेत्र यानी आगरा और अलीगढ़ मंडलों की 40 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में बॉलीवुड की कई हस्तियों ने भी राजनीतिक चोला ओढ़कर चुनाव प्रचार किया।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी, सपा मुखिया मुलायम सिंह, बसपा अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री मायावती और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी, भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह, भाजपा के ही अरुण जेटली, रालोद प्रमुख अजित सिंह आदि नेताओं ने प्रमुख क्षेत्रों जैसे आगरा, मथुरा, अलीगढ़, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, बागपत, हापुड़, हाथरस, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर में ताबड़तोड़ रैलियां और रोड शो किए हैं।
आगरा शहर से 28 पार्टी मैदान में हैं। यहां मुकाबला चतुष्कोणीय नजर आता है लेकिन कुछ छोटे दल और निर्दलीय प्रत्याशी वोट काटने की स्थिति में हैं। अमर सिंह के अभियान से मुलायम सिंह मुसीबत में पड़ सकते हैं तो टिकट न मिलने से नाराज कई दूसरे प्रत्याशी भी मुश्किलें खड़ी कर पा रहे हैं। फतेहपुर सीकरी सीट पर टिकट न मिलने से नाराज राजकुमार चाहर निर्दलीय चुनाव लड़कर रालोद के बाबू लाल को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।
आगरा जनपद में कुल नौ सीटें हैं जिनमें पिछली बार बसपा को 6 सीटें मिली थीं। लेकिन इस बार सीटों के परिसीमन और किसी के पक्ष में कोई खास हवा न होने के चलते सभी राजनीतिक दल ऊहापोह की स्थिति में हैं। पिछली बार यहां 43 फीसदी वोट पड़े थे लेकिन इस बार अन्ना फैक्टर के चलते और पहले पांच दौर के मतदान को देखते हुए इसके कम से कम 60 फीसदी तक होने का अनुमान है।
आगरा से लगे मथुरा जनपद में कमोबेश स्थिति ऐसी ही है। विश्लेषकों के अनुसार बसपा को नुकसान तो होगा लेकिन कितना इसपर कोई खुलकर आकलन नहीं कर पा रहा है।
इस चरण में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की साख भी दांव पर लगी है क्योंकि उनके बेटे एवं जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) अध्यक्ष राजवीर सिंह बुलंदशहर की डिबाई सीट से और पुत्रवधू प्रेमलता अलीगढ़ की अतरौली सीट से किस्मत आजमा रही हैं। इसके अलावा पूर्व मंत्री हाजी याकूब कुरैशी और रालोद नेता कोकब हमीद भी चर्चित चेहरे हैं।
प्रदेश में अपने वजूद को बचाने की लड़ाई लड़ रहे पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने बेटे राजवीर सिंह को डिबाई विधानसभा क्षेत्र से जिताने की है।
कभी भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता रहे कल्याण सिंह को बुलंदशहर में काफी सम्मान प्राप्त है। उनसे जुड़े लोध राजपूतों के वर्चस्व को चुनौती देते हुए विरोधियों ने राजवीर सिंह के लिए भी मजबूत किलेबंदी तो कर ही रखी है, खुद अपने भी उन्हें चक्रव्यूह में घेरने की कोशिश में लगे हुए हैं। राजवीर के सामने चुनौती पिछले विधानसभा चुनाव की हार का बदला लेने की भी है। पिछली बार बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार श्रीभगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित ने उन्हें हार का स्वाद चखाया था। इस बार शर्मा सपा के टिकट पर मैदान में हैं। बसपा ने इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखने के लिए ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय के भाई विनोद उपाध्याय को मैदान में उतारा है लेकिन राजवीर की असली परेशानी तो भाजपा के उम्मीदवार रवींद्र सिंह बढ़ा रहे हैं। पहली बार चुनाव मैदान में उतरे रवींद्र सिंह पूर्व विधायक राम सिंह के पुत्र हैं, जो कल्याण सिंह के काफी करीबी माने जाते थे। भाजपा ने लोध वोट बैंक में सेंधमारी की गरज से ही राम सिंह को पहले प्रत्याशी घोषित किया था लेकिन उन्होंने अपने पुत्र का नाम आगे कर दिया।
डिबाई विधानसभा क्षेत्र में बात विकास की करें, तो यहां की बदहाली को देखकर यही लगता है कि यहां के जनप्रतिनिधियों ने विकास को कोई तवज्जो नहीं दी है।
स्थानीय लोगों की मानें तो ऊर्जा मंत्री के भाई के चुनाव मैदान में उतरने के कारण बिजली आपूर्ति थोड़ी सुधरी है, लेकिन वह भी चुनाव से ऐन पहले।
डिबाई विधानसभा क्षेत्र के जातीय आंकड़ों की बात करें, तो यहां लोध राजपूत मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक करीब 92,000 है, जो निर्णायक साबित होती है। इसके अलावा मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 38,000, क्षत्रिय 16,000 और जाट मतदाताओं की लगभग 18,000 संख्या भी उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करने में महत्वपूर्ण साबित होगी।
अलीगढ़ जनपद की सात विधानसभा सीटों पर 1197148 पुरुष और 957556 स्त्री मतदाता अपने प्रतिनिधि का चयन करेंगे।
नए परिसीमन के कारण हाई प्रोफाइल सीट और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के गढ़ अतरौली में उनकी पुत्रवधु व जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) की प्रत्याशी प्रेमलता वर्मा, भाजपा के राजेश भारद्वाज, सपा के वीरेश यादव, बसपा के साकिब, कांग्रेस के विजेंद्र सिंह और राष्ट्रीय सवर्ण दल के चमन शर्मा का बहुकोणीय मुकाबला है।
अलीगढ़ शहर विधानसभा क्षेत्र से सपा प्रत्याशी जफर आलम, भाजपा के आशुतोष वार्ष्णेय, कांग्रेस के योगेश दीक्षित, बसपा के संजय शर्मा और रासद के प्रत्याशी डॉ. सीपी गुप्ता के बीच मुकाबला है।
बरौली क्षेत्र से बसपा सरकार में मंत्री रहे जयवीर सिंह तीसरी बार सफलता प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं। रालोद के दलवीर सिंह, भाजपा के मुनीश गौड़, सपा के मोहन लाल बघेल, जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के केशव सिंह और रासद के गजेंद्र सिंह उन्हें टक्कर दे रहे हैं।
कोल विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी विवेक बंसल, सपा के जमीरुल्ला, बसपा के जियाउर्रहमान और भाजपा के योगेंद्र लालू दौड़ में शामिल हैं।
रालोद की परंपरागत सीट माने जाने वाले इगलास क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी त्रिलोकीराम परंपरा को कायम रखने की कोशिश करेंगे। उनका बसपा के राजेंद्र कुमार, भाजपा की रामसखी कठेरिया से कड़ा मुकाबला है।
रालोद के ही दूसरे गढ़ खैर क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी भगवती प्रसाद और बसपा की राजरानी मुख्य दौड़ में शामिल हैं। भाजपा के अनूप वाल्मीकि और सपा के गुरविंदर सिंह भी अपनी पूरी ताकत झौंकी है।
छर्रा में सपा प्रत्याशी राकेश सिंह, कांग्रेस के परवेज अहमद, बसपा के मूलचंद्र बघेल और जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के रवेंद्र पाल सिंह में कड़ी टक्कर है।
आगरा में राजनीतिक विश्लेषक बृज खंडेलवाल ने बताया, "पिछले पांच चरणों के मतदान के बाद कोई भी पार्टी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नहीं है। इस दौर के मतदान के बाद भी स्थिति बदलती नहीं दिख रही। इस बार का चुनाव बिल्कुल अलग किस्म का है। पूरी तरह सक्रिय भूमिका निभा रहा निर्वाचन आयोग इसके लिए धन्यवाद का पात्र है, जिसने अपने तेवर में कोई नरमी नहीं दिखाई और न ही किसी पार्टी को कोई छूट दी।"टिप्पणियां
क्षेत्रीय मीडिया और गैर सरकारी संगठनों ने भी मतदाताओं को प्रेरित करने के लिए कई सिलसिलेवार कार्यक्रम चलाए हैं।
इस दौर में खास बात जो देखने में आई है वह यह है कि इस बार चुनावों पर पैसे का असर नहीं दिख रहा है। प्रशासन सख्ती से नजर रख रहा है।
(कुछ अंश एजेंसियों से)
इस चरण के तहत जिन 13 जिलों में मतदान होना है, उनमें गौतमबुद्धनगर (नोएडा), गाजियाबाद, मेरठ, बागपत, बुलंदशहर, आगरा, मथुरा, अलीगढ़, हाथरस, प्रबुद्धनगर, पंचशीलनगर, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर शामिल हैं।
तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और शांतिपूर्ण मतदान के लिए सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं। हरियाणा और दिल्ली की सीमा से लगे हुए विधानसभा क्षेत्रों में सुरक्षा की अतिरिक्त व्यवस्था की गई है।
मतदान के लिए कुल 22,137 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। मतदान प्रक्रिया में 30,028 इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) का इस्तेमाल होगा।
प्रदेश में होने वाले इस चरण के मतदान में कई दिग्गजों की किस्मत दांव पर है, जिसमें वर्तमान सरकार के कुछ मंत्री भी हैं।
इस चरण में बहुजन समाज पार्टी सरकार के पांच मंत्री- रामवीर उपाध्याय हाथरस की सिकन्दराराऊ सीट से, जयवीर सिंह अलीगढ़ की बरौली सीट से, वेदराम भाटी मेरठ की किठौर सीट से, चौ. लक्ष्मी नारायण मथुरा की छाता सीट से और धर्म सिंह सैनी सहारनपुर की नकुड़ सीट से चुनाव मैदान में हैं।
अन्य दिग्गजों में राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) प्रमुख अजित सिंह के बेटे एवं मथुरा से सांसद जयंत चौधरी मथुरा की मांट सीट से, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हुकुम सिंह प्रबुद्धनगर की कैराना सीट से चुनावी अखाड़े में हैं।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के इस चरण के प्रचार अभियान में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, भाजपा और बसपा सहित अन्य दलों के नेताओं ने ताबड़तोड़ रैलियां कर अपनी पूरी ताकत झोंक दी।
ब्रजक्षेत्र यानी आगरा और अलीगढ़ मंडलों की 40 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में बॉलीवुड की कई हस्तियों ने भी राजनीतिक चोला ओढ़कर चुनाव प्रचार किया।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी, सपा मुखिया मुलायम सिंह, बसपा अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री मायावती और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी, भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह, भाजपा के ही अरुण जेटली, रालोद प्रमुख अजित सिंह आदि नेताओं ने प्रमुख क्षेत्रों जैसे आगरा, मथुरा, अलीगढ़, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, बागपत, हापुड़, हाथरस, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर में ताबड़तोड़ रैलियां और रोड शो किए हैं।
आगरा शहर से 28 पार्टी मैदान में हैं। यहां मुकाबला चतुष्कोणीय नजर आता है लेकिन कुछ छोटे दल और निर्दलीय प्रत्याशी वोट काटने की स्थिति में हैं। अमर सिंह के अभियान से मुलायम सिंह मुसीबत में पड़ सकते हैं तो टिकट न मिलने से नाराज कई दूसरे प्रत्याशी भी मुश्किलें खड़ी कर पा रहे हैं। फतेहपुर सीकरी सीट पर टिकट न मिलने से नाराज राजकुमार चाहर निर्दलीय चुनाव लड़कर रालोद के बाबू लाल को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।
आगरा जनपद में कुल नौ सीटें हैं जिनमें पिछली बार बसपा को 6 सीटें मिली थीं। लेकिन इस बार सीटों के परिसीमन और किसी के पक्ष में कोई खास हवा न होने के चलते सभी राजनीतिक दल ऊहापोह की स्थिति में हैं। पिछली बार यहां 43 फीसदी वोट पड़े थे लेकिन इस बार अन्ना फैक्टर के चलते और पहले पांच दौर के मतदान को देखते हुए इसके कम से कम 60 फीसदी तक होने का अनुमान है।
आगरा से लगे मथुरा जनपद में कमोबेश स्थिति ऐसी ही है। विश्लेषकों के अनुसार बसपा को नुकसान तो होगा लेकिन कितना इसपर कोई खुलकर आकलन नहीं कर पा रहा है।
इस चरण में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की साख भी दांव पर लगी है क्योंकि उनके बेटे एवं जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) अध्यक्ष राजवीर सिंह बुलंदशहर की डिबाई सीट से और पुत्रवधू प्रेमलता अलीगढ़ की अतरौली सीट से किस्मत आजमा रही हैं। इसके अलावा पूर्व मंत्री हाजी याकूब कुरैशी और रालोद नेता कोकब हमीद भी चर्चित चेहरे हैं।
प्रदेश में अपने वजूद को बचाने की लड़ाई लड़ रहे पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने बेटे राजवीर सिंह को डिबाई विधानसभा क्षेत्र से जिताने की है।
कभी भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता रहे कल्याण सिंह को बुलंदशहर में काफी सम्मान प्राप्त है। उनसे जुड़े लोध राजपूतों के वर्चस्व को चुनौती देते हुए विरोधियों ने राजवीर सिंह के लिए भी मजबूत किलेबंदी तो कर ही रखी है, खुद अपने भी उन्हें चक्रव्यूह में घेरने की कोशिश में लगे हुए हैं। राजवीर के सामने चुनौती पिछले विधानसभा चुनाव की हार का बदला लेने की भी है। पिछली बार बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार श्रीभगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित ने उन्हें हार का स्वाद चखाया था। इस बार शर्मा सपा के टिकट पर मैदान में हैं। बसपा ने इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखने के लिए ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय के भाई विनोद उपाध्याय को मैदान में उतारा है लेकिन राजवीर की असली परेशानी तो भाजपा के उम्मीदवार रवींद्र सिंह बढ़ा रहे हैं। पहली बार चुनाव मैदान में उतरे रवींद्र सिंह पूर्व विधायक राम सिंह के पुत्र हैं, जो कल्याण सिंह के काफी करीबी माने जाते थे। भाजपा ने लोध वोट बैंक में सेंधमारी की गरज से ही राम सिंह को पहले प्रत्याशी घोषित किया था लेकिन उन्होंने अपने पुत्र का नाम आगे कर दिया।
डिबाई विधानसभा क्षेत्र में बात विकास की करें, तो यहां की बदहाली को देखकर यही लगता है कि यहां के जनप्रतिनिधियों ने विकास को कोई तवज्जो नहीं दी है।
स्थानीय लोगों की मानें तो ऊर्जा मंत्री के भाई के चुनाव मैदान में उतरने के कारण बिजली आपूर्ति थोड़ी सुधरी है, लेकिन वह भी चुनाव से ऐन पहले।
डिबाई विधानसभा क्षेत्र के जातीय आंकड़ों की बात करें, तो यहां लोध राजपूत मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक करीब 92,000 है, जो निर्णायक साबित होती है। इसके अलावा मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 38,000, क्षत्रिय 16,000 और जाट मतदाताओं की लगभग 18,000 संख्या भी उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करने में महत्वपूर्ण साबित होगी।
अलीगढ़ जनपद की सात विधानसभा सीटों पर 1197148 पुरुष और 957556 स्त्री मतदाता अपने प्रतिनिधि का चयन करेंगे।
नए परिसीमन के कारण हाई प्रोफाइल सीट और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के गढ़ अतरौली में उनकी पुत्रवधु व जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) की प्रत्याशी प्रेमलता वर्मा, भाजपा के राजेश भारद्वाज, सपा के वीरेश यादव, बसपा के साकिब, कांग्रेस के विजेंद्र सिंह और राष्ट्रीय सवर्ण दल के चमन शर्मा का बहुकोणीय मुकाबला है।
अलीगढ़ शहर विधानसभा क्षेत्र से सपा प्रत्याशी जफर आलम, भाजपा के आशुतोष वार्ष्णेय, कांग्रेस के योगेश दीक्षित, बसपा के संजय शर्मा और रासद के प्रत्याशी डॉ. सीपी गुप्ता के बीच मुकाबला है।
बरौली क्षेत्र से बसपा सरकार में मंत्री रहे जयवीर सिंह तीसरी बार सफलता प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं। रालोद के दलवीर सिंह, भाजपा के मुनीश गौड़, सपा के मोहन लाल बघेल, जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के केशव सिंह और रासद के गजेंद्र सिंह उन्हें टक्कर दे रहे हैं।
कोल विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी विवेक बंसल, सपा के जमीरुल्ला, बसपा के जियाउर्रहमान और भाजपा के योगेंद्र लालू दौड़ में शामिल हैं।
रालोद की परंपरागत सीट माने जाने वाले इगलास क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी त्रिलोकीराम परंपरा को कायम रखने की कोशिश करेंगे। उनका बसपा के राजेंद्र कुमार, भाजपा की रामसखी कठेरिया से कड़ा मुकाबला है।
रालोद के ही दूसरे गढ़ खैर क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी भगवती प्रसाद और बसपा की राजरानी मुख्य दौड़ में शामिल हैं। भाजपा के अनूप वाल्मीकि और सपा के गुरविंदर सिंह भी अपनी पूरी ताकत झौंकी है।
छर्रा में सपा प्रत्याशी राकेश सिंह, कांग्रेस के परवेज अहमद, बसपा के मूलचंद्र बघेल और जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के रवेंद्र पाल सिंह में कड़ी टक्कर है।
आगरा में राजनीतिक विश्लेषक बृज खंडेलवाल ने बताया, "पिछले पांच चरणों के मतदान के बाद कोई भी पार्टी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नहीं है। इस दौर के मतदान के बाद भी स्थिति बदलती नहीं दिख रही। इस बार का चुनाव बिल्कुल अलग किस्म का है। पूरी तरह सक्रिय भूमिका निभा रहा निर्वाचन आयोग इसके लिए धन्यवाद का पात्र है, जिसने अपने तेवर में कोई नरमी नहीं दिखाई और न ही किसी पार्टी को कोई छूट दी।"टिप्पणियां
क्षेत्रीय मीडिया और गैर सरकारी संगठनों ने भी मतदाताओं को प्रेरित करने के लिए कई सिलसिलेवार कार्यक्रम चलाए हैं।
इस दौर में खास बात जो देखने में आई है वह यह है कि इस बार चुनावों पर पैसे का असर नहीं दिख रहा है। प्रशासन सख्ती से नजर रख रहा है।
(कुछ अंश एजेंसियों से)
तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और शांतिपूर्ण मतदान के लिए सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं। हरियाणा और दिल्ली की सीमा से लगे हुए विधानसभा क्षेत्रों में सुरक्षा की अतिरिक्त व्यवस्था की गई है।
मतदान के लिए कुल 22,137 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। मतदान प्रक्रिया में 30,028 इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) का इस्तेमाल होगा।
प्रदेश में होने वाले इस चरण के मतदान में कई दिग्गजों की किस्मत दांव पर है, जिसमें वर्तमान सरकार के कुछ मंत्री भी हैं।
इस चरण में बहुजन समाज पार्टी सरकार के पांच मंत्री- रामवीर उपाध्याय हाथरस की सिकन्दराराऊ सीट से, जयवीर सिंह अलीगढ़ की बरौली सीट से, वेदराम भाटी मेरठ की किठौर सीट से, चौ. लक्ष्मी नारायण मथुरा की छाता सीट से और धर्म सिंह सैनी सहारनपुर की नकुड़ सीट से चुनाव मैदान में हैं।
अन्य दिग्गजों में राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) प्रमुख अजित सिंह के बेटे एवं मथुरा से सांसद जयंत चौधरी मथुरा की मांट सीट से, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हुकुम सिंह प्रबुद्धनगर की कैराना सीट से चुनावी अखाड़े में हैं।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के इस चरण के प्रचार अभियान में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, भाजपा और बसपा सहित अन्य दलों के नेताओं ने ताबड़तोड़ रैलियां कर अपनी पूरी ताकत झोंक दी।
ब्रजक्षेत्र यानी आगरा और अलीगढ़ मंडलों की 40 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में बॉलीवुड की कई हस्तियों ने भी राजनीतिक चोला ओढ़कर चुनाव प्रचार किया।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी, सपा मुखिया मुलायम सिंह, बसपा अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री मायावती और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी, भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह, भाजपा के ही अरुण जेटली, रालोद प्रमुख अजित सिंह आदि नेताओं ने प्रमुख क्षेत्रों जैसे आगरा, मथुरा, अलीगढ़, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, बागपत, हापुड़, हाथरस, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर में ताबड़तोड़ रैलियां और रोड शो किए हैं।
आगरा शहर से 28 पार्टी मैदान में हैं। यहां मुकाबला चतुष्कोणीय नजर आता है लेकिन कुछ छोटे दल और निर्दलीय प्रत्याशी वोट काटने की स्थिति में हैं। अमर सिंह के अभियान से मुलायम सिंह मुसीबत में पड़ सकते हैं तो टिकट न मिलने से नाराज कई दूसरे प्रत्याशी भी मुश्किलें खड़ी कर पा रहे हैं। फतेहपुर सीकरी सीट पर टिकट न मिलने से नाराज राजकुमार चाहर निर्दलीय चुनाव लड़कर रालोद के बाबू लाल को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।
आगरा जनपद में कुल नौ सीटें हैं जिनमें पिछली बार बसपा को 6 सीटें मिली थीं। लेकिन इस बार सीटों के परिसीमन और किसी के पक्ष में कोई खास हवा न होने के चलते सभी राजनीतिक दल ऊहापोह की स्थिति में हैं। पिछली बार यहां 43 फीसदी वोट पड़े थे लेकिन इस बार अन्ना फैक्टर के चलते और पहले पांच दौर के मतदान को देखते हुए इसके कम से कम 60 फीसदी तक होने का अनुमान है।
आगरा से लगे मथुरा जनपद में कमोबेश स्थिति ऐसी ही है। विश्लेषकों के अनुसार बसपा को नुकसान तो होगा लेकिन कितना इसपर कोई खुलकर आकलन नहीं कर पा रहा है।
इस चरण में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की साख भी दांव पर लगी है क्योंकि उनके बेटे एवं जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) अध्यक्ष राजवीर सिंह बुलंदशहर की डिबाई सीट से और पुत्रवधू प्रेमलता अलीगढ़ की अतरौली सीट से किस्मत आजमा रही हैं। इसके अलावा पूर्व मंत्री हाजी याकूब कुरैशी और रालोद नेता कोकब हमीद भी चर्चित चेहरे हैं।
प्रदेश में अपने वजूद को बचाने की लड़ाई लड़ रहे पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने बेटे राजवीर सिंह को डिबाई विधानसभा क्षेत्र से जिताने की है।
कभी भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता रहे कल्याण सिंह को बुलंदशहर में काफी सम्मान प्राप्त है। उनसे जुड़े लोध राजपूतों के वर्चस्व को चुनौती देते हुए विरोधियों ने राजवीर सिंह के लिए भी मजबूत किलेबंदी तो कर ही रखी है, खुद अपने भी उन्हें चक्रव्यूह में घेरने की कोशिश में लगे हुए हैं। राजवीर के सामने चुनौती पिछले विधानसभा चुनाव की हार का बदला लेने की भी है। पिछली बार बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार श्रीभगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित ने उन्हें हार का स्वाद चखाया था। इस बार शर्मा सपा के टिकट पर मैदान में हैं। बसपा ने इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखने के लिए ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय के भाई विनोद उपाध्याय को मैदान में उतारा है लेकिन राजवीर की असली परेशानी तो भाजपा के उम्मीदवार रवींद्र सिंह बढ़ा रहे हैं। पहली बार चुनाव मैदान में उतरे रवींद्र सिंह पूर्व विधायक राम सिंह के पुत्र हैं, जो कल्याण सिंह के काफी करीबी माने जाते थे। भाजपा ने लोध वोट बैंक में सेंधमारी की गरज से ही राम सिंह को पहले प्रत्याशी घोषित किया था लेकिन उन्होंने अपने पुत्र का नाम आगे कर दिया।
डिबाई विधानसभा क्षेत्र में बात विकास की करें, तो यहां की बदहाली को देखकर यही लगता है कि यहां के जनप्रतिनिधियों ने विकास को कोई तवज्जो नहीं दी है।
स्थानीय लोगों की मानें तो ऊर्जा मंत्री के भाई के चुनाव मैदान में उतरने के कारण बिजली आपूर्ति थोड़ी सुधरी है, लेकिन वह भी चुनाव से ऐन पहले।
डिबाई विधानसभा क्षेत्र के जातीय आंकड़ों की बात करें, तो यहां लोध राजपूत मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक करीब 92,000 है, जो निर्णायक साबित होती है। इसके अलावा मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 38,000, क्षत्रिय 16,000 और जाट मतदाताओं की लगभग 18,000 संख्या भी उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करने में महत्वपूर्ण साबित होगी।
अलीगढ़ जनपद की सात विधानसभा सीटों पर 1197148 पुरुष और 957556 स्त्री मतदाता अपने प्रतिनिधि का चयन करेंगे।
नए परिसीमन के कारण हाई प्रोफाइल सीट और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के गढ़ अतरौली में उनकी पुत्रवधु व जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) की प्रत्याशी प्रेमलता वर्मा, भाजपा के राजेश भारद्वाज, सपा के वीरेश यादव, बसपा के साकिब, कांग्रेस के विजेंद्र सिंह और राष्ट्रीय सवर्ण दल के चमन शर्मा का बहुकोणीय मुकाबला है।
अलीगढ़ शहर विधानसभा क्षेत्र से सपा प्रत्याशी जफर आलम, भाजपा के आशुतोष वार्ष्णेय, कांग्रेस के योगेश दीक्षित, बसपा के संजय शर्मा और रासद के प्रत्याशी डॉ. सीपी गुप्ता के बीच मुकाबला है।
बरौली क्षेत्र से बसपा सरकार में मंत्री रहे जयवीर सिंह तीसरी बार सफलता प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं। रालोद के दलवीर सिंह, भाजपा के मुनीश गौड़, सपा के मोहन लाल बघेल, जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के केशव सिंह और रासद के गजेंद्र सिंह उन्हें टक्कर दे रहे हैं।
कोल विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी विवेक बंसल, सपा के जमीरुल्ला, बसपा के जियाउर्रहमान और भाजपा के योगेंद्र लालू दौड़ में शामिल हैं।
रालोद की परंपरागत सीट माने जाने वाले इगलास क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी त्रिलोकीराम परंपरा को कायम रखने की कोशिश करेंगे। उनका बसपा के राजेंद्र कुमार, भाजपा की रामसखी कठेरिया से कड़ा मुकाबला है।
रालोद के ही दूसरे गढ़ खैर क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी भगवती प्रसाद और बसपा की राजरानी मुख्य दौड़ में शामिल हैं। भाजपा के अनूप वाल्मीकि और सपा के गुरविंदर सिंह भी अपनी पूरी ताकत झौंकी है।
छर्रा में सपा प्रत्याशी राकेश सिंह, कांग्रेस के परवेज अहमद, बसपा के मूलचंद्र बघेल और जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के रवेंद्र पाल सिंह में कड़ी टक्कर है।
आगरा में राजनीतिक विश्लेषक बृज खंडेलवाल ने बताया, "पिछले पांच चरणों के मतदान के बाद कोई भी पार्टी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नहीं है। इस दौर के मतदान के बाद भी स्थिति बदलती नहीं दिख रही। इस बार का चुनाव बिल्कुल अलग किस्म का है। पूरी तरह सक्रिय भूमिका निभा रहा निर्वाचन आयोग इसके लिए धन्यवाद का पात्र है, जिसने अपने तेवर में कोई नरमी नहीं दिखाई और न ही किसी पार्टी को कोई छूट दी।"टिप्पणियां
क्षेत्रीय मीडिया और गैर सरकारी संगठनों ने भी मतदाताओं को प्रेरित करने के लिए कई सिलसिलेवार कार्यक्रम चलाए हैं।
इस दौर में खास बात जो देखने में आई है वह यह है कि इस बार चुनावों पर पैसे का असर नहीं दिख रहा है। प्रशासन सख्ती से नजर रख रहा है।
(कुछ अंश एजेंसियों से)
मतदान के लिए कुल 22,137 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। मतदान प्रक्रिया में 30,028 इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) का इस्तेमाल होगा।
प्रदेश में होने वाले इस चरण के मतदान में कई दिग्गजों की किस्मत दांव पर है, जिसमें वर्तमान सरकार के कुछ मंत्री भी हैं।
इस चरण में बहुजन समाज पार्टी सरकार के पांच मंत्री- रामवीर उपाध्याय हाथरस की सिकन्दराराऊ सीट से, जयवीर सिंह अलीगढ़ की बरौली सीट से, वेदराम भाटी मेरठ की किठौर सीट से, चौ. लक्ष्मी नारायण मथुरा की छाता सीट से और धर्म सिंह सैनी सहारनपुर की नकुड़ सीट से चुनाव मैदान में हैं।
अन्य दिग्गजों में राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) प्रमुख अजित सिंह के बेटे एवं मथुरा से सांसद जयंत चौधरी मथुरा की मांट सीट से, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हुकुम सिंह प्रबुद्धनगर की कैराना सीट से चुनावी अखाड़े में हैं।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के इस चरण के प्रचार अभियान में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, भाजपा और बसपा सहित अन्य दलों के नेताओं ने ताबड़तोड़ रैलियां कर अपनी पूरी ताकत झोंक दी।
ब्रजक्षेत्र यानी आगरा और अलीगढ़ मंडलों की 40 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में बॉलीवुड की कई हस्तियों ने भी राजनीतिक चोला ओढ़कर चुनाव प्रचार किया।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी, सपा मुखिया मुलायम सिंह, बसपा अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री मायावती और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी, भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह, भाजपा के ही अरुण जेटली, रालोद प्रमुख अजित सिंह आदि नेताओं ने प्रमुख क्षेत्रों जैसे आगरा, मथुरा, अलीगढ़, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, बागपत, हापुड़, हाथरस, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर में ताबड़तोड़ रैलियां और रोड शो किए हैं।
आगरा शहर से 28 पार्टी मैदान में हैं। यहां मुकाबला चतुष्कोणीय नजर आता है लेकिन कुछ छोटे दल और निर्दलीय प्रत्याशी वोट काटने की स्थिति में हैं। अमर सिंह के अभियान से मुलायम सिंह मुसीबत में पड़ सकते हैं तो टिकट न मिलने से नाराज कई दूसरे प्रत्याशी भी मुश्किलें खड़ी कर पा रहे हैं। फतेहपुर सीकरी सीट पर टिकट न मिलने से नाराज राजकुमार चाहर निर्दलीय चुनाव लड़कर रालोद के बाबू लाल को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।
आगरा जनपद में कुल नौ सीटें हैं जिनमें पिछली बार बसपा को 6 सीटें मिली थीं। लेकिन इस बार सीटों के परिसीमन और किसी के पक्ष में कोई खास हवा न होने के चलते सभी राजनीतिक दल ऊहापोह की स्थिति में हैं। पिछली बार यहां 43 फीसदी वोट पड़े थे लेकिन इस बार अन्ना फैक्टर के चलते और पहले पांच दौर के मतदान को देखते हुए इसके कम से कम 60 फीसदी तक होने का अनुमान है।
आगरा से लगे मथुरा जनपद में कमोबेश स्थिति ऐसी ही है। विश्लेषकों के अनुसार बसपा को नुकसान तो होगा लेकिन कितना इसपर कोई खुलकर आकलन नहीं कर पा रहा है।
इस चरण में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की साख भी दांव पर लगी है क्योंकि उनके बेटे एवं जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) अध्यक्ष राजवीर सिंह बुलंदशहर की डिबाई सीट से और पुत्रवधू प्रेमलता अलीगढ़ की अतरौली सीट से किस्मत आजमा रही हैं। इसके अलावा पूर्व मंत्री हाजी याकूब कुरैशी और रालोद नेता कोकब हमीद भी चर्चित चेहरे हैं।
प्रदेश में अपने वजूद को बचाने की लड़ाई लड़ रहे पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने बेटे राजवीर सिंह को डिबाई विधानसभा क्षेत्र से जिताने की है।
कभी भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता रहे कल्याण सिंह को बुलंदशहर में काफी सम्मान प्राप्त है। उनसे जुड़े लोध राजपूतों के वर्चस्व को चुनौती देते हुए विरोधियों ने राजवीर सिंह के लिए भी मजबूत किलेबंदी तो कर ही रखी है, खुद अपने भी उन्हें चक्रव्यूह में घेरने की कोशिश में लगे हुए हैं। राजवीर के सामने चुनौती पिछले विधानसभा चुनाव की हार का बदला लेने की भी है। पिछली बार बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार श्रीभगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित ने उन्हें हार का स्वाद चखाया था। इस बार शर्मा सपा के टिकट पर मैदान में हैं। बसपा ने इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखने के लिए ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय के भाई विनोद उपाध्याय को मैदान में उतारा है लेकिन राजवीर की असली परेशानी तो भाजपा के उम्मीदवार रवींद्र सिंह बढ़ा रहे हैं। पहली बार चुनाव मैदान में उतरे रवींद्र सिंह पूर्व विधायक राम सिंह के पुत्र हैं, जो कल्याण सिंह के काफी करीबी माने जाते थे। भाजपा ने लोध वोट बैंक में सेंधमारी की गरज से ही राम सिंह को पहले प्रत्याशी घोषित किया था लेकिन उन्होंने अपने पुत्र का नाम आगे कर दिया।
डिबाई विधानसभा क्षेत्र में बात विकास की करें, तो यहां की बदहाली को देखकर यही लगता है कि यहां के जनप्रतिनिधियों ने विकास को कोई तवज्जो नहीं दी है।
स्थानीय लोगों की मानें तो ऊर्जा मंत्री के भाई के चुनाव मैदान में उतरने के कारण बिजली आपूर्ति थोड़ी सुधरी है, लेकिन वह भी चुनाव से ऐन पहले।
डिबाई विधानसभा क्षेत्र के जातीय आंकड़ों की बात करें, तो यहां लोध राजपूत मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक करीब 92,000 है, जो निर्णायक साबित होती है। इसके अलावा मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 38,000, क्षत्रिय 16,000 और जाट मतदाताओं की लगभग 18,000 संख्या भी उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करने में महत्वपूर्ण साबित होगी।
अलीगढ़ जनपद की सात विधानसभा सीटों पर 1197148 पुरुष और 957556 स्त्री मतदाता अपने प्रतिनिधि का चयन करेंगे।
नए परिसीमन के कारण हाई प्रोफाइल सीट और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के गढ़ अतरौली में उनकी पुत्रवधु व जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) की प्रत्याशी प्रेमलता वर्मा, भाजपा के राजेश भारद्वाज, सपा के वीरेश यादव, बसपा के साकिब, कांग्रेस के विजेंद्र सिंह और राष्ट्रीय सवर्ण दल के चमन शर्मा का बहुकोणीय मुकाबला है।
अलीगढ़ शहर विधानसभा क्षेत्र से सपा प्रत्याशी जफर आलम, भाजपा के आशुतोष वार्ष्णेय, कांग्रेस के योगेश दीक्षित, बसपा के संजय शर्मा और रासद के प्रत्याशी डॉ. सीपी गुप्ता के बीच मुकाबला है।
बरौली क्षेत्र से बसपा सरकार में मंत्री रहे जयवीर सिंह तीसरी बार सफलता प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं। रालोद के दलवीर सिंह, भाजपा के मुनीश गौड़, सपा के मोहन लाल बघेल, जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के केशव सिंह और रासद के गजेंद्र सिंह उन्हें टक्कर दे रहे हैं।
कोल विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी विवेक बंसल, सपा के जमीरुल्ला, बसपा के जियाउर्रहमान और भाजपा के योगेंद्र लालू दौड़ में शामिल हैं।
रालोद की परंपरागत सीट माने जाने वाले इगलास क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी त्रिलोकीराम परंपरा को कायम रखने की कोशिश करेंगे। उनका बसपा के राजेंद्र कुमार, भाजपा की रामसखी कठेरिया से कड़ा मुकाबला है।
रालोद के ही दूसरे गढ़ खैर क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी भगवती प्रसाद और बसपा की राजरानी मुख्य दौड़ में शामिल हैं। भाजपा के अनूप वाल्मीकि और सपा के गुरविंदर सिंह भी अपनी पूरी ताकत झौंकी है।
छर्रा में सपा प्रत्याशी राकेश सिंह, कांग्रेस के परवेज अहमद, बसपा के मूलचंद्र बघेल और जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के रवेंद्र पाल सिंह में कड़ी टक्कर है।
आगरा में राजनीतिक विश्लेषक बृज खंडेलवाल ने बताया, "पिछले पांच चरणों के मतदान के बाद कोई भी पार्टी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नहीं है। इस दौर के मतदान के बाद भी स्थिति बदलती नहीं दिख रही। इस बार का चुनाव बिल्कुल अलग किस्म का है। पूरी तरह सक्रिय भूमिका निभा रहा निर्वाचन आयोग इसके लिए धन्यवाद का पात्र है, जिसने अपने तेवर में कोई नरमी नहीं दिखाई और न ही किसी पार्टी को कोई छूट दी।"टिप्पणियां
क्षेत्रीय मीडिया और गैर सरकारी संगठनों ने भी मतदाताओं को प्रेरित करने के लिए कई सिलसिलेवार कार्यक्रम चलाए हैं।
इस दौर में खास बात जो देखने में आई है वह यह है कि इस बार चुनावों पर पैसे का असर नहीं दिख रहा है। प्रशासन सख्ती से नजर रख रहा है।
(कुछ अंश एजेंसियों से)
प्रदेश में होने वाले इस चरण के मतदान में कई दिग्गजों की किस्मत दांव पर है, जिसमें वर्तमान सरकार के कुछ मंत्री भी हैं।
इस चरण में बहुजन समाज पार्टी सरकार के पांच मंत्री- रामवीर उपाध्याय हाथरस की सिकन्दराराऊ सीट से, जयवीर सिंह अलीगढ़ की बरौली सीट से, वेदराम भाटी मेरठ की किठौर सीट से, चौ. लक्ष्मी नारायण मथुरा की छाता सीट से और धर्म सिंह सैनी सहारनपुर की नकुड़ सीट से चुनाव मैदान में हैं।
अन्य दिग्गजों में राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) प्रमुख अजित सिंह के बेटे एवं मथुरा से सांसद जयंत चौधरी मथुरा की मांट सीट से, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हुकुम सिंह प्रबुद्धनगर की कैराना सीट से चुनावी अखाड़े में हैं।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के इस चरण के प्रचार अभियान में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, भाजपा और बसपा सहित अन्य दलों के नेताओं ने ताबड़तोड़ रैलियां कर अपनी पूरी ताकत झोंक दी।
ब्रजक्षेत्र यानी आगरा और अलीगढ़ मंडलों की 40 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में बॉलीवुड की कई हस्तियों ने भी राजनीतिक चोला ओढ़कर चुनाव प्रचार किया।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी, सपा मुखिया मुलायम सिंह, बसपा अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री मायावती और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी, भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह, भाजपा के ही अरुण जेटली, रालोद प्रमुख अजित सिंह आदि नेताओं ने प्रमुख क्षेत्रों जैसे आगरा, मथुरा, अलीगढ़, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, बागपत, हापुड़, हाथरस, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर में ताबड़तोड़ रैलियां और रोड शो किए हैं।
आगरा शहर से 28 पार्टी मैदान में हैं। यहां मुकाबला चतुष्कोणीय नजर आता है लेकिन कुछ छोटे दल और निर्दलीय प्रत्याशी वोट काटने की स्थिति में हैं। अमर सिंह के अभियान से मुलायम सिंह मुसीबत में पड़ सकते हैं तो टिकट न मिलने से नाराज कई दूसरे प्रत्याशी भी मुश्किलें खड़ी कर पा रहे हैं। फतेहपुर सीकरी सीट पर टिकट न मिलने से नाराज राजकुमार चाहर निर्दलीय चुनाव लड़कर रालोद के बाबू लाल को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।
आगरा जनपद में कुल नौ सीटें हैं जिनमें पिछली बार बसपा को 6 सीटें मिली थीं। लेकिन इस बार सीटों के परिसीमन और किसी के पक्ष में कोई खास हवा न होने के चलते सभी राजनीतिक दल ऊहापोह की स्थिति में हैं। पिछली बार यहां 43 फीसदी वोट पड़े थे लेकिन इस बार अन्ना फैक्टर के चलते और पहले पांच दौर के मतदान को देखते हुए इसके कम से कम 60 फीसदी तक होने का अनुमान है।
आगरा से लगे मथुरा जनपद में कमोबेश स्थिति ऐसी ही है। विश्लेषकों के अनुसार बसपा को नुकसान तो होगा लेकिन कितना इसपर कोई खुलकर आकलन नहीं कर पा रहा है।
इस चरण में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की साख भी दांव पर लगी है क्योंकि उनके बेटे एवं जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) अध्यक्ष राजवीर सिंह बुलंदशहर की डिबाई सीट से और पुत्रवधू प्रेमलता अलीगढ़ की अतरौली सीट से किस्मत आजमा रही हैं। इसके अलावा पूर्व मंत्री हाजी याकूब कुरैशी और रालोद नेता कोकब हमीद भी चर्चित चेहरे हैं।
प्रदेश में अपने वजूद को बचाने की लड़ाई लड़ रहे पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने बेटे राजवीर सिंह को डिबाई विधानसभा क्षेत्र से जिताने की है।
कभी भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता रहे कल्याण सिंह को बुलंदशहर में काफी सम्मान प्राप्त है। उनसे जुड़े लोध राजपूतों के वर्चस्व को चुनौती देते हुए विरोधियों ने राजवीर सिंह के लिए भी मजबूत किलेबंदी तो कर ही रखी है, खुद अपने भी उन्हें चक्रव्यूह में घेरने की कोशिश में लगे हुए हैं। राजवीर के सामने चुनौती पिछले विधानसभा चुनाव की हार का बदला लेने की भी है। पिछली बार बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार श्रीभगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित ने उन्हें हार का स्वाद चखाया था। इस बार शर्मा सपा के टिकट पर मैदान में हैं। बसपा ने इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखने के लिए ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय के भाई विनोद उपाध्याय को मैदान में उतारा है लेकिन राजवीर की असली परेशानी तो भाजपा के उम्मीदवार रवींद्र सिंह बढ़ा रहे हैं। पहली बार चुनाव मैदान में उतरे रवींद्र सिंह पूर्व विधायक राम सिंह के पुत्र हैं, जो कल्याण सिंह के काफी करीबी माने जाते थे। भाजपा ने लोध वोट बैंक में सेंधमारी की गरज से ही राम सिंह को पहले प्रत्याशी घोषित किया था लेकिन उन्होंने अपने पुत्र का नाम आगे कर दिया।
डिबाई विधानसभा क्षेत्र में बात विकास की करें, तो यहां की बदहाली को देखकर यही लगता है कि यहां के जनप्रतिनिधियों ने विकास को कोई तवज्जो नहीं दी है।
स्थानीय लोगों की मानें तो ऊर्जा मंत्री के भाई के चुनाव मैदान में उतरने के कारण बिजली आपूर्ति थोड़ी सुधरी है, लेकिन वह भी चुनाव से ऐन पहले।
डिबाई विधानसभा क्षेत्र के जातीय आंकड़ों की बात करें, तो यहां लोध राजपूत मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक करीब 92,000 है, जो निर्णायक साबित होती है। इसके अलावा मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 38,000, क्षत्रिय 16,000 और जाट मतदाताओं की लगभग 18,000 संख्या भी उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करने में महत्वपूर्ण साबित होगी।
अलीगढ़ जनपद की सात विधानसभा सीटों पर 1197148 पुरुष और 957556 स्त्री मतदाता अपने प्रतिनिधि का चयन करेंगे।
नए परिसीमन के कारण हाई प्रोफाइल सीट और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के गढ़ अतरौली में उनकी पुत्रवधु व जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) की प्रत्याशी प्रेमलता वर्मा, भाजपा के राजेश भारद्वाज, सपा के वीरेश यादव, बसपा के साकिब, कांग्रेस के विजेंद्र सिंह और राष्ट्रीय सवर्ण दल के चमन शर्मा का बहुकोणीय मुकाबला है।
अलीगढ़ शहर विधानसभा क्षेत्र से सपा प्रत्याशी जफर आलम, भाजपा के आशुतोष वार्ष्णेय, कांग्रेस के योगेश दीक्षित, बसपा के संजय शर्मा और रासद के प्रत्याशी डॉ. सीपी गुप्ता के बीच मुकाबला है।
बरौली क्षेत्र से बसपा सरकार में मंत्री रहे जयवीर सिंह तीसरी बार सफलता प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं। रालोद के दलवीर सिंह, भाजपा के मुनीश गौड़, सपा के मोहन लाल बघेल, जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के केशव सिंह और रासद के गजेंद्र सिंह उन्हें टक्कर दे रहे हैं।
कोल विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी विवेक बंसल, सपा के जमीरुल्ला, बसपा के जियाउर्रहमान और भाजपा के योगेंद्र लालू दौड़ में शामिल हैं।
रालोद की परंपरागत सीट माने जाने वाले इगलास क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी त्रिलोकीराम परंपरा को कायम रखने की कोशिश करेंगे। उनका बसपा के राजेंद्र कुमार, भाजपा की रामसखी कठेरिया से कड़ा मुकाबला है।
रालोद के ही दूसरे गढ़ खैर क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी भगवती प्रसाद और बसपा की राजरानी मुख्य दौड़ में शामिल हैं। भाजपा के अनूप वाल्मीकि और सपा के गुरविंदर सिंह भी अपनी पूरी ताकत झौंकी है।
छर्रा में सपा प्रत्याशी राकेश सिंह, कांग्रेस के परवेज अहमद, बसपा के मूलचंद्र बघेल और जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के रवेंद्र पाल सिंह में कड़ी टक्कर है।
आगरा में राजनीतिक विश्लेषक बृज खंडेलवाल ने बताया, "पिछले पांच चरणों के मतदान के बाद कोई भी पार्टी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नहीं है। इस दौर के मतदान के बाद भी स्थिति बदलती नहीं दिख रही। इस बार का चुनाव बिल्कुल अलग किस्म का है। पूरी तरह सक्रिय भूमिका निभा रहा निर्वाचन आयोग इसके लिए धन्यवाद का पात्र है, जिसने अपने तेवर में कोई नरमी नहीं दिखाई और न ही किसी पार्टी को कोई छूट दी।"टिप्पणियां
क्षेत्रीय मीडिया और गैर सरकारी संगठनों ने भी मतदाताओं को प्रेरित करने के लिए कई सिलसिलेवार कार्यक्रम चलाए हैं।
इस दौर में खास बात जो देखने में आई है वह यह है कि इस बार चुनावों पर पैसे का असर नहीं दिख रहा है। प्रशासन सख्ती से नजर रख रहा है।
(कुछ अंश एजेंसियों से)
इस चरण में बहुजन समाज पार्टी सरकार के पांच मंत्री- रामवीर उपाध्याय हाथरस की सिकन्दराराऊ सीट से, जयवीर सिंह अलीगढ़ की बरौली सीट से, वेदराम भाटी मेरठ की किठौर सीट से, चौ. लक्ष्मी नारायण मथुरा की छाता सीट से और धर्म सिंह सैनी सहारनपुर की नकुड़ सीट से चुनाव मैदान में हैं।
अन्य दिग्गजों में राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) प्रमुख अजित सिंह के बेटे एवं मथुरा से सांसद जयंत चौधरी मथुरा की मांट सीट से, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हुकुम सिंह प्रबुद्धनगर की कैराना सीट से चुनावी अखाड़े में हैं।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के इस चरण के प्रचार अभियान में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, भाजपा और बसपा सहित अन्य दलों के नेताओं ने ताबड़तोड़ रैलियां कर अपनी पूरी ताकत झोंक दी।
ब्रजक्षेत्र यानी आगरा और अलीगढ़ मंडलों की 40 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में बॉलीवुड की कई हस्तियों ने भी राजनीतिक चोला ओढ़कर चुनाव प्रचार किया।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी, सपा मुखिया मुलायम सिंह, बसपा अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री मायावती और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी, भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह, भाजपा के ही अरुण जेटली, रालोद प्रमुख अजित सिंह आदि नेताओं ने प्रमुख क्षेत्रों जैसे आगरा, मथुरा, अलीगढ़, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, बागपत, हापुड़, हाथरस, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर में ताबड़तोड़ रैलियां और रोड शो किए हैं।
आगरा शहर से 28 पार्टी मैदान में हैं। यहां मुकाबला चतुष्कोणीय नजर आता है लेकिन कुछ छोटे दल और निर्दलीय प्रत्याशी वोट काटने की स्थिति में हैं। अमर सिंह के अभियान से मुलायम सिंह मुसीबत में पड़ सकते हैं तो टिकट न मिलने से नाराज कई दूसरे प्रत्याशी भी मुश्किलें खड़ी कर पा रहे हैं। फतेहपुर सीकरी सीट पर टिकट न मिलने से नाराज राजकुमार चाहर निर्दलीय चुनाव लड़कर रालोद के बाबू लाल को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।
आगरा जनपद में कुल नौ सीटें हैं जिनमें पिछली बार बसपा को 6 सीटें मिली थीं। लेकिन इस बार सीटों के परिसीमन और किसी के पक्ष में कोई खास हवा न होने के चलते सभी राजनीतिक दल ऊहापोह की स्थिति में हैं। पिछली बार यहां 43 फीसदी वोट पड़े थे लेकिन इस बार अन्ना फैक्टर के चलते और पहले पांच दौर के मतदान को देखते हुए इसके कम से कम 60 फीसदी तक होने का अनुमान है।
आगरा से लगे मथुरा जनपद में कमोबेश स्थिति ऐसी ही है। विश्लेषकों के अनुसार बसपा को नुकसान तो होगा लेकिन कितना इसपर कोई खुलकर आकलन नहीं कर पा रहा है।
इस चरण में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की साख भी दांव पर लगी है क्योंकि उनके बेटे एवं जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) अध्यक्ष राजवीर सिंह बुलंदशहर की डिबाई सीट से और पुत्रवधू प्रेमलता अलीगढ़ की अतरौली सीट से किस्मत आजमा रही हैं। इसके अलावा पूर्व मंत्री हाजी याकूब कुरैशी और रालोद नेता कोकब हमीद भी चर्चित चेहरे हैं।
प्रदेश में अपने वजूद को बचाने की लड़ाई लड़ रहे पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने बेटे राजवीर सिंह को डिबाई विधानसभा क्षेत्र से जिताने की है।
कभी भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता रहे कल्याण सिंह को बुलंदशहर में काफी सम्मान प्राप्त है। उनसे जुड़े लोध राजपूतों के वर्चस्व को चुनौती देते हुए विरोधियों ने राजवीर सिंह के लिए भी मजबूत किलेबंदी तो कर ही रखी है, खुद अपने भी उन्हें चक्रव्यूह में घेरने की कोशिश में लगे हुए हैं। राजवीर के सामने चुनौती पिछले विधानसभा चुनाव की हार का बदला लेने की भी है। पिछली बार बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार श्रीभगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित ने उन्हें हार का स्वाद चखाया था। इस बार शर्मा सपा के टिकट पर मैदान में हैं। बसपा ने इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखने के लिए ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय के भाई विनोद उपाध्याय को मैदान में उतारा है लेकिन राजवीर की असली परेशानी तो भाजपा के उम्मीदवार रवींद्र सिंह बढ़ा रहे हैं। पहली बार चुनाव मैदान में उतरे रवींद्र सिंह पूर्व विधायक राम सिंह के पुत्र हैं, जो कल्याण सिंह के काफी करीबी माने जाते थे। भाजपा ने लोध वोट बैंक में सेंधमारी की गरज से ही राम सिंह को पहले प्रत्याशी घोषित किया था लेकिन उन्होंने अपने पुत्र का नाम आगे कर दिया।
डिबाई विधानसभा क्षेत्र में बात विकास की करें, तो यहां की बदहाली को देखकर यही लगता है कि यहां के जनप्रतिनिधियों ने विकास को कोई तवज्जो नहीं दी है।
स्थानीय लोगों की मानें तो ऊर्जा मंत्री के भाई के चुनाव मैदान में उतरने के कारण बिजली आपूर्ति थोड़ी सुधरी है, लेकिन वह भी चुनाव से ऐन पहले।
डिबाई विधानसभा क्षेत्र के जातीय आंकड़ों की बात करें, तो यहां लोध राजपूत मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक करीब 92,000 है, जो निर्णायक साबित होती है। इसके अलावा मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 38,000, क्षत्रिय 16,000 और जाट मतदाताओं की लगभग 18,000 संख्या भी उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करने में महत्वपूर्ण साबित होगी।
अलीगढ़ जनपद की सात विधानसभा सीटों पर 1197148 पुरुष और 957556 स्त्री मतदाता अपने प्रतिनिधि का चयन करेंगे।
नए परिसीमन के कारण हाई प्रोफाइल सीट और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के गढ़ अतरौली में उनकी पुत्रवधु व जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) की प्रत्याशी प्रेमलता वर्मा, भाजपा के राजेश भारद्वाज, सपा के वीरेश यादव, बसपा के साकिब, कांग्रेस के विजेंद्र सिंह और राष्ट्रीय सवर्ण दल के चमन शर्मा का बहुकोणीय मुकाबला है।
अलीगढ़ शहर विधानसभा क्षेत्र से सपा प्रत्याशी जफर आलम, भाजपा के आशुतोष वार्ष्णेय, कांग्रेस के योगेश दीक्षित, बसपा के संजय शर्मा और रासद के प्रत्याशी डॉ. सीपी गुप्ता के बीच मुकाबला है।
बरौली क्षेत्र से बसपा सरकार में मंत्री रहे जयवीर सिंह तीसरी बार सफलता प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं। रालोद के दलवीर सिंह, भाजपा के मुनीश गौड़, सपा के मोहन लाल बघेल, जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के केशव सिंह और रासद के गजेंद्र सिंह उन्हें टक्कर दे रहे हैं।
कोल विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी विवेक बंसल, सपा के जमीरुल्ला, बसपा के जियाउर्रहमान और भाजपा के योगेंद्र लालू दौड़ में शामिल हैं।
रालोद की परंपरागत सीट माने जाने वाले इगलास क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी त्रिलोकीराम परंपरा को कायम रखने की कोशिश करेंगे। उनका बसपा के राजेंद्र कुमार, भाजपा की रामसखी कठेरिया से कड़ा मुकाबला है।
रालोद के ही दूसरे गढ़ खैर क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी भगवती प्रसाद और बसपा की राजरानी मुख्य दौड़ में शामिल हैं। भाजपा के अनूप वाल्मीकि और सपा के गुरविंदर सिंह भी अपनी पूरी ताकत झौंकी है।
छर्रा में सपा प्रत्याशी राकेश सिंह, कांग्रेस के परवेज अहमद, बसपा के मूलचंद्र बघेल और जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के रवेंद्र पाल सिंह में कड़ी टक्कर है।
आगरा में राजनीतिक विश्लेषक बृज खंडेलवाल ने बताया, "पिछले पांच चरणों के मतदान के बाद कोई भी पार्टी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नहीं है। इस दौर के मतदान के बाद भी स्थिति बदलती नहीं दिख रही। इस बार का चुनाव बिल्कुल अलग किस्म का है। पूरी तरह सक्रिय भूमिका निभा रहा निर्वाचन आयोग इसके लिए धन्यवाद का पात्र है, जिसने अपने तेवर में कोई नरमी नहीं दिखाई और न ही किसी पार्टी को कोई छूट दी।"टिप्पणियां
क्षेत्रीय मीडिया और गैर सरकारी संगठनों ने भी मतदाताओं को प्रेरित करने के लिए कई सिलसिलेवार कार्यक्रम चलाए हैं।
इस दौर में खास बात जो देखने में आई है वह यह है कि इस बार चुनावों पर पैसे का असर नहीं दिख रहा है। प्रशासन सख्ती से नजर रख रहा है।
(कुछ अंश एजेंसियों से)
अन्य दिग्गजों में राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) प्रमुख अजित सिंह के बेटे एवं मथुरा से सांसद जयंत चौधरी मथुरा की मांट सीट से, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हुकुम सिंह प्रबुद्धनगर की कैराना सीट से चुनावी अखाड़े में हैं।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के इस चरण के प्रचार अभियान में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, भाजपा और बसपा सहित अन्य दलों के नेताओं ने ताबड़तोड़ रैलियां कर अपनी पूरी ताकत झोंक दी।
ब्रजक्षेत्र यानी आगरा और अलीगढ़ मंडलों की 40 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में बॉलीवुड की कई हस्तियों ने भी राजनीतिक चोला ओढ़कर चुनाव प्रचार किया।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी, सपा मुखिया मुलायम सिंह, बसपा अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री मायावती और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी, भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह, भाजपा के ही अरुण जेटली, रालोद प्रमुख अजित सिंह आदि नेताओं ने प्रमुख क्षेत्रों जैसे आगरा, मथुरा, अलीगढ़, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, बागपत, हापुड़, हाथरस, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर में ताबड़तोड़ रैलियां और रोड शो किए हैं।
आगरा शहर से 28 पार्टी मैदान में हैं। यहां मुकाबला चतुष्कोणीय नजर आता है लेकिन कुछ छोटे दल और निर्दलीय प्रत्याशी वोट काटने की स्थिति में हैं। अमर सिंह के अभियान से मुलायम सिंह मुसीबत में पड़ सकते हैं तो टिकट न मिलने से नाराज कई दूसरे प्रत्याशी भी मुश्किलें खड़ी कर पा रहे हैं। फतेहपुर सीकरी सीट पर टिकट न मिलने से नाराज राजकुमार चाहर निर्दलीय चुनाव लड़कर रालोद के बाबू लाल को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।
आगरा जनपद में कुल नौ सीटें हैं जिनमें पिछली बार बसपा को 6 सीटें मिली थीं। लेकिन इस बार सीटों के परिसीमन और किसी के पक्ष में कोई खास हवा न होने के चलते सभी राजनीतिक दल ऊहापोह की स्थिति में हैं। पिछली बार यहां 43 फीसदी वोट पड़े थे लेकिन इस बार अन्ना फैक्टर के चलते और पहले पांच दौर के मतदान को देखते हुए इसके कम से कम 60 फीसदी तक होने का अनुमान है।
आगरा से लगे मथुरा जनपद में कमोबेश स्थिति ऐसी ही है। विश्लेषकों के अनुसार बसपा को नुकसान तो होगा लेकिन कितना इसपर कोई खुलकर आकलन नहीं कर पा रहा है।
इस चरण में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की साख भी दांव पर लगी है क्योंकि उनके बेटे एवं जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) अध्यक्ष राजवीर सिंह बुलंदशहर की डिबाई सीट से और पुत्रवधू प्रेमलता अलीगढ़ की अतरौली सीट से किस्मत आजमा रही हैं। इसके अलावा पूर्व मंत्री हाजी याकूब कुरैशी और रालोद नेता कोकब हमीद भी चर्चित चेहरे हैं।
प्रदेश में अपने वजूद को बचाने की लड़ाई लड़ रहे पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने बेटे राजवीर सिंह को डिबाई विधानसभा क्षेत्र से जिताने की है।
कभी भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता रहे कल्याण सिंह को बुलंदशहर में काफी सम्मान प्राप्त है। उनसे जुड़े लोध राजपूतों के वर्चस्व को चुनौती देते हुए विरोधियों ने राजवीर सिंह के लिए भी मजबूत किलेबंदी तो कर ही रखी है, खुद अपने भी उन्हें चक्रव्यूह में घेरने की कोशिश में लगे हुए हैं। राजवीर के सामने चुनौती पिछले विधानसभा चुनाव की हार का बदला लेने की भी है। पिछली बार बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार श्रीभगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित ने उन्हें हार का स्वाद चखाया था। इस बार शर्मा सपा के टिकट पर मैदान में हैं। बसपा ने इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखने के लिए ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय के भाई विनोद उपाध्याय को मैदान में उतारा है लेकिन राजवीर की असली परेशानी तो भाजपा के उम्मीदवार रवींद्र सिंह बढ़ा रहे हैं। पहली बार चुनाव मैदान में उतरे रवींद्र सिंह पूर्व विधायक राम सिंह के पुत्र हैं, जो कल्याण सिंह के काफी करीबी माने जाते थे। भाजपा ने लोध वोट बैंक में सेंधमारी की गरज से ही राम सिंह को पहले प्रत्याशी घोषित किया था लेकिन उन्होंने अपने पुत्र का नाम आगे कर दिया।
डिबाई विधानसभा क्षेत्र में बात विकास की करें, तो यहां की बदहाली को देखकर यही लगता है कि यहां के जनप्रतिनिधियों ने विकास को कोई तवज्जो नहीं दी है।
स्थानीय लोगों की मानें तो ऊर्जा मंत्री के भाई के चुनाव मैदान में उतरने के कारण बिजली आपूर्ति थोड़ी सुधरी है, लेकिन वह भी चुनाव से ऐन पहले।
डिबाई विधानसभा क्षेत्र के जातीय आंकड़ों की बात करें, तो यहां लोध राजपूत मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक करीब 92,000 है, जो निर्णायक साबित होती है। इसके अलावा मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 38,000, क्षत्रिय 16,000 और जाट मतदाताओं की लगभग 18,000 संख्या भी उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करने में महत्वपूर्ण साबित होगी।
अलीगढ़ जनपद की सात विधानसभा सीटों पर 1197148 पुरुष और 957556 स्त्री मतदाता अपने प्रतिनिधि का चयन करेंगे।
नए परिसीमन के कारण हाई प्रोफाइल सीट और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के गढ़ अतरौली में उनकी पुत्रवधु व जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) की प्रत्याशी प्रेमलता वर्मा, भाजपा के राजेश भारद्वाज, सपा के वीरेश यादव, बसपा के साकिब, कांग्रेस के विजेंद्र सिंह और राष्ट्रीय सवर्ण दल के चमन शर्मा का बहुकोणीय मुकाबला है।
अलीगढ़ शहर विधानसभा क्षेत्र से सपा प्रत्याशी जफर आलम, भाजपा के आशुतोष वार्ष्णेय, कांग्रेस के योगेश दीक्षित, बसपा के संजय शर्मा और रासद के प्रत्याशी डॉ. सीपी गुप्ता के बीच मुकाबला है।
बरौली क्षेत्र से बसपा सरकार में मंत्री रहे जयवीर सिंह तीसरी बार सफलता प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं। रालोद के दलवीर सिंह, भाजपा के मुनीश गौड़, सपा के मोहन लाल बघेल, जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के केशव सिंह और रासद के गजेंद्र सिंह उन्हें टक्कर दे रहे हैं।
कोल विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी विवेक बंसल, सपा के जमीरुल्ला, बसपा के जियाउर्रहमान और भाजपा के योगेंद्र लालू दौड़ में शामिल हैं।
रालोद की परंपरागत सीट माने जाने वाले इगलास क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी त्रिलोकीराम परंपरा को कायम रखने की कोशिश करेंगे। उनका बसपा के राजेंद्र कुमार, भाजपा की रामसखी कठेरिया से कड़ा मुकाबला है।
रालोद के ही दूसरे गढ़ खैर क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी भगवती प्रसाद और बसपा की राजरानी मुख्य दौड़ में शामिल हैं। भाजपा के अनूप वाल्मीकि और सपा के गुरविंदर सिंह भी अपनी पूरी ताकत झौंकी है।
छर्रा में सपा प्रत्याशी राकेश सिंह, कांग्रेस के परवेज अहमद, बसपा के मूलचंद्र बघेल और जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के रवेंद्र पाल सिंह में कड़ी टक्कर है।
आगरा में राजनीतिक विश्लेषक बृज खंडेलवाल ने बताया, "पिछले पांच चरणों के मतदान के बाद कोई भी पार्टी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नहीं है। इस दौर के मतदान के बाद भी स्थिति बदलती नहीं दिख रही। इस बार का चुनाव बिल्कुल अलग किस्म का है। पूरी तरह सक्रिय भूमिका निभा रहा निर्वाचन आयोग इसके लिए धन्यवाद का पात्र है, जिसने अपने तेवर में कोई नरमी नहीं दिखाई और न ही किसी पार्टी को कोई छूट दी।"टिप्पणियां
क्षेत्रीय मीडिया और गैर सरकारी संगठनों ने भी मतदाताओं को प्रेरित करने के लिए कई सिलसिलेवार कार्यक्रम चलाए हैं।
इस दौर में खास बात जो देखने में आई है वह यह है कि इस बार चुनावों पर पैसे का असर नहीं दिख रहा है। प्रशासन सख्ती से नजर रख रहा है।
(कुछ अंश एजेंसियों से)
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के इस चरण के प्रचार अभियान में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, भाजपा और बसपा सहित अन्य दलों के नेताओं ने ताबड़तोड़ रैलियां कर अपनी पूरी ताकत झोंक दी।
ब्रजक्षेत्र यानी आगरा और अलीगढ़ मंडलों की 40 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में बॉलीवुड की कई हस्तियों ने भी राजनीतिक चोला ओढ़कर चुनाव प्रचार किया।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी, सपा मुखिया मुलायम सिंह, बसपा अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री मायावती और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी, भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह, भाजपा के ही अरुण जेटली, रालोद प्रमुख अजित सिंह आदि नेताओं ने प्रमुख क्षेत्रों जैसे आगरा, मथुरा, अलीगढ़, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, बागपत, हापुड़, हाथरस, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर में ताबड़तोड़ रैलियां और रोड शो किए हैं।
आगरा शहर से 28 पार्टी मैदान में हैं। यहां मुकाबला चतुष्कोणीय नजर आता है लेकिन कुछ छोटे दल और निर्दलीय प्रत्याशी वोट काटने की स्थिति में हैं। अमर सिंह के अभियान से मुलायम सिंह मुसीबत में पड़ सकते हैं तो टिकट न मिलने से नाराज कई दूसरे प्रत्याशी भी मुश्किलें खड़ी कर पा रहे हैं। फतेहपुर सीकरी सीट पर टिकट न मिलने से नाराज राजकुमार चाहर निर्दलीय चुनाव लड़कर रालोद के बाबू लाल को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।
आगरा जनपद में कुल नौ सीटें हैं जिनमें पिछली बार बसपा को 6 सीटें मिली थीं। लेकिन इस बार सीटों के परिसीमन और किसी के पक्ष में कोई खास हवा न होने के चलते सभी राजनीतिक दल ऊहापोह की स्थिति में हैं। पिछली बार यहां 43 फीसदी वोट पड़े थे लेकिन इस बार अन्ना फैक्टर के चलते और पहले पांच दौर के मतदान को देखते हुए इसके कम से कम 60 फीसदी तक होने का अनुमान है।
आगरा से लगे मथुरा जनपद में कमोबेश स्थिति ऐसी ही है। विश्लेषकों के अनुसार बसपा को नुकसान तो होगा लेकिन कितना इसपर कोई खुलकर आकलन नहीं कर पा रहा है।
इस चरण में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की साख भी दांव पर लगी है क्योंकि उनके बेटे एवं जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) अध्यक्ष राजवीर सिंह बुलंदशहर की डिबाई सीट से और पुत्रवधू प्रेमलता अलीगढ़ की अतरौली सीट से किस्मत आजमा रही हैं। इसके अलावा पूर्व मंत्री हाजी याकूब कुरैशी और रालोद नेता कोकब हमीद भी चर्चित चेहरे हैं।
प्रदेश में अपने वजूद को बचाने की लड़ाई लड़ रहे पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने बेटे राजवीर सिंह को डिबाई विधानसभा क्षेत्र से जिताने की है।
कभी भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता रहे कल्याण सिंह को बुलंदशहर में काफी सम्मान प्राप्त है। उनसे जुड़े लोध राजपूतों के वर्चस्व को चुनौती देते हुए विरोधियों ने राजवीर सिंह के लिए भी मजबूत किलेबंदी तो कर ही रखी है, खुद अपने भी उन्हें चक्रव्यूह में घेरने की कोशिश में लगे हुए हैं। राजवीर के सामने चुनौती पिछले विधानसभा चुनाव की हार का बदला लेने की भी है। पिछली बार बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार श्रीभगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित ने उन्हें हार का स्वाद चखाया था। इस बार शर्मा सपा के टिकट पर मैदान में हैं। बसपा ने इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखने के लिए ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय के भाई विनोद उपाध्याय को मैदान में उतारा है लेकिन राजवीर की असली परेशानी तो भाजपा के उम्मीदवार रवींद्र सिंह बढ़ा रहे हैं। पहली बार चुनाव मैदान में उतरे रवींद्र सिंह पूर्व विधायक राम सिंह के पुत्र हैं, जो कल्याण सिंह के काफी करीबी माने जाते थे। भाजपा ने लोध वोट बैंक में सेंधमारी की गरज से ही राम सिंह को पहले प्रत्याशी घोषित किया था लेकिन उन्होंने अपने पुत्र का नाम आगे कर दिया।
डिबाई विधानसभा क्षेत्र में बात विकास की करें, तो यहां की बदहाली को देखकर यही लगता है कि यहां के जनप्रतिनिधियों ने विकास को कोई तवज्जो नहीं दी है।
स्थानीय लोगों की मानें तो ऊर्जा मंत्री के भाई के चुनाव मैदान में उतरने के कारण बिजली आपूर्ति थोड़ी सुधरी है, लेकिन वह भी चुनाव से ऐन पहले।
डिबाई विधानसभा क्षेत्र के जातीय आंकड़ों की बात करें, तो यहां लोध राजपूत मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक करीब 92,000 है, जो निर्णायक साबित होती है। इसके अलावा मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 38,000, क्षत्रिय 16,000 और जाट मतदाताओं की लगभग 18,000 संख्या भी उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करने में महत्वपूर्ण साबित होगी।
अलीगढ़ जनपद की सात विधानसभा सीटों पर 1197148 पुरुष और 957556 स्त्री मतदाता अपने प्रतिनिधि का चयन करेंगे।
नए परिसीमन के कारण हाई प्रोफाइल सीट और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के गढ़ अतरौली में उनकी पुत्रवधु व जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) की प्रत्याशी प्रेमलता वर्मा, भाजपा के राजेश भारद्वाज, सपा के वीरेश यादव, बसपा के साकिब, कांग्रेस के विजेंद्र सिंह और राष्ट्रीय सवर्ण दल के चमन शर्मा का बहुकोणीय मुकाबला है।
अलीगढ़ शहर विधानसभा क्षेत्र से सपा प्रत्याशी जफर आलम, भाजपा के आशुतोष वार्ष्णेय, कांग्रेस के योगेश दीक्षित, बसपा के संजय शर्मा और रासद के प्रत्याशी डॉ. सीपी गुप्ता के बीच मुकाबला है।
बरौली क्षेत्र से बसपा सरकार में मंत्री रहे जयवीर सिंह तीसरी बार सफलता प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं। रालोद के दलवीर सिंह, भाजपा के मुनीश गौड़, सपा के मोहन लाल बघेल, जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के केशव सिंह और रासद के गजेंद्र सिंह उन्हें टक्कर दे रहे हैं।
कोल विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी विवेक बंसल, सपा के जमीरुल्ला, बसपा के जियाउर्रहमान और भाजपा के योगेंद्र लालू दौड़ में शामिल हैं।
रालोद की परंपरागत सीट माने जाने वाले इगलास क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी त्रिलोकीराम परंपरा को कायम रखने की कोशिश करेंगे। उनका बसपा के राजेंद्र कुमार, भाजपा की रामसखी कठेरिया से कड़ा मुकाबला है।
रालोद के ही दूसरे गढ़ खैर क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी भगवती प्रसाद और बसपा की राजरानी मुख्य दौड़ में शामिल हैं। भाजपा के अनूप वाल्मीकि और सपा के गुरविंदर सिंह भी अपनी पूरी ताकत झौंकी है।
छर्रा में सपा प्रत्याशी राकेश सिंह, कांग्रेस के परवेज अहमद, बसपा के मूलचंद्र बघेल और जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के रवेंद्र पाल सिंह में कड़ी टक्कर है।
आगरा में राजनीतिक विश्लेषक बृज खंडेलवाल ने बताया, "पिछले पांच चरणों के मतदान के बाद कोई भी पार्टी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नहीं है। इस दौर के मतदान के बाद भी स्थिति बदलती नहीं दिख रही। इस बार का चुनाव बिल्कुल अलग किस्म का है। पूरी तरह सक्रिय भूमिका निभा रहा निर्वाचन आयोग इसके लिए धन्यवाद का पात्र है, जिसने अपने तेवर में कोई नरमी नहीं दिखाई और न ही किसी पार्टी को कोई छूट दी।"टिप्पणियां
क्षेत्रीय मीडिया और गैर सरकारी संगठनों ने भी मतदाताओं को प्रेरित करने के लिए कई सिलसिलेवार कार्यक्रम चलाए हैं।
इस दौर में खास बात जो देखने में आई है वह यह है कि इस बार चुनावों पर पैसे का असर नहीं दिख रहा है। प्रशासन सख्ती से नजर रख रहा है।
(कुछ अंश एजेंसियों से)
ब्रजक्षेत्र यानी आगरा और अलीगढ़ मंडलों की 40 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में बॉलीवुड की कई हस्तियों ने भी राजनीतिक चोला ओढ़कर चुनाव प्रचार किया।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी, सपा मुखिया मुलायम सिंह, बसपा अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री मायावती और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी, भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह, भाजपा के ही अरुण जेटली, रालोद प्रमुख अजित सिंह आदि नेताओं ने प्रमुख क्षेत्रों जैसे आगरा, मथुरा, अलीगढ़, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, बागपत, हापुड़, हाथरस, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर में ताबड़तोड़ रैलियां और रोड शो किए हैं।
आगरा शहर से 28 पार्टी मैदान में हैं। यहां मुकाबला चतुष्कोणीय नजर आता है लेकिन कुछ छोटे दल और निर्दलीय प्रत्याशी वोट काटने की स्थिति में हैं। अमर सिंह के अभियान से मुलायम सिंह मुसीबत में पड़ सकते हैं तो टिकट न मिलने से नाराज कई दूसरे प्रत्याशी भी मुश्किलें खड़ी कर पा रहे हैं। फतेहपुर सीकरी सीट पर टिकट न मिलने से नाराज राजकुमार चाहर निर्दलीय चुनाव लड़कर रालोद के बाबू लाल को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।
आगरा जनपद में कुल नौ सीटें हैं जिनमें पिछली बार बसपा को 6 सीटें मिली थीं। लेकिन इस बार सीटों के परिसीमन और किसी के पक्ष में कोई खास हवा न होने के चलते सभी राजनीतिक दल ऊहापोह की स्थिति में हैं। पिछली बार यहां 43 फीसदी वोट पड़े थे लेकिन इस बार अन्ना फैक्टर के चलते और पहले पांच दौर के मतदान को देखते हुए इसके कम से कम 60 फीसदी तक होने का अनुमान है।
आगरा से लगे मथुरा जनपद में कमोबेश स्थिति ऐसी ही है। विश्लेषकों के अनुसार बसपा को नुकसान तो होगा लेकिन कितना इसपर कोई खुलकर आकलन नहीं कर पा रहा है।
इस चरण में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की साख भी दांव पर लगी है क्योंकि उनके बेटे एवं जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) अध्यक्ष राजवीर सिंह बुलंदशहर की डिबाई सीट से और पुत्रवधू प्रेमलता अलीगढ़ की अतरौली सीट से किस्मत आजमा रही हैं। इसके अलावा पूर्व मंत्री हाजी याकूब कुरैशी और रालोद नेता कोकब हमीद भी चर्चित चेहरे हैं।
प्रदेश में अपने वजूद को बचाने की लड़ाई लड़ रहे पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने बेटे राजवीर सिंह को डिबाई विधानसभा क्षेत्र से जिताने की है।
कभी भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता रहे कल्याण सिंह को बुलंदशहर में काफी सम्मान प्राप्त है। उनसे जुड़े लोध राजपूतों के वर्चस्व को चुनौती देते हुए विरोधियों ने राजवीर सिंह के लिए भी मजबूत किलेबंदी तो कर ही रखी है, खुद अपने भी उन्हें चक्रव्यूह में घेरने की कोशिश में लगे हुए हैं। राजवीर के सामने चुनौती पिछले विधानसभा चुनाव की हार का बदला लेने की भी है। पिछली बार बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार श्रीभगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित ने उन्हें हार का स्वाद चखाया था। इस बार शर्मा सपा के टिकट पर मैदान में हैं। बसपा ने इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखने के लिए ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय के भाई विनोद उपाध्याय को मैदान में उतारा है लेकिन राजवीर की असली परेशानी तो भाजपा के उम्मीदवार रवींद्र सिंह बढ़ा रहे हैं। पहली बार चुनाव मैदान में उतरे रवींद्र सिंह पूर्व विधायक राम सिंह के पुत्र हैं, जो कल्याण सिंह के काफी करीबी माने जाते थे। भाजपा ने लोध वोट बैंक में सेंधमारी की गरज से ही राम सिंह को पहले प्रत्याशी घोषित किया था लेकिन उन्होंने अपने पुत्र का नाम आगे कर दिया।
डिबाई विधानसभा क्षेत्र में बात विकास की करें, तो यहां की बदहाली को देखकर यही लगता है कि यहां के जनप्रतिनिधियों ने विकास को कोई तवज्जो नहीं दी है।
स्थानीय लोगों की मानें तो ऊर्जा मंत्री के भाई के चुनाव मैदान में उतरने के कारण बिजली आपूर्ति थोड़ी सुधरी है, लेकिन वह भी चुनाव से ऐन पहले।
डिबाई विधानसभा क्षेत्र के जातीय आंकड़ों की बात करें, तो यहां लोध राजपूत मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक करीब 92,000 है, जो निर्णायक साबित होती है। इसके अलावा मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 38,000, क्षत्रिय 16,000 और जाट मतदाताओं की लगभग 18,000 संख्या भी उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करने में महत्वपूर्ण साबित होगी।
अलीगढ़ जनपद की सात विधानसभा सीटों पर 1197148 पुरुष और 957556 स्त्री मतदाता अपने प्रतिनिधि का चयन करेंगे।
नए परिसीमन के कारण हाई प्रोफाइल सीट और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के गढ़ अतरौली में उनकी पुत्रवधु व जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) की प्रत्याशी प्रेमलता वर्मा, भाजपा के राजेश भारद्वाज, सपा के वीरेश यादव, बसपा के साकिब, कांग्रेस के विजेंद्र सिंह और राष्ट्रीय सवर्ण दल के चमन शर्मा का बहुकोणीय मुकाबला है।
अलीगढ़ शहर विधानसभा क्षेत्र से सपा प्रत्याशी जफर आलम, भाजपा के आशुतोष वार्ष्णेय, कांग्रेस के योगेश दीक्षित, बसपा के संजय शर्मा और रासद के प्रत्याशी डॉ. सीपी गुप्ता के बीच मुकाबला है।
बरौली क्षेत्र से बसपा सरकार में मंत्री रहे जयवीर सिंह तीसरी बार सफलता प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं। रालोद के दलवीर सिंह, भाजपा के मुनीश गौड़, सपा के मोहन लाल बघेल, जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के केशव सिंह और रासद के गजेंद्र सिंह उन्हें टक्कर दे रहे हैं।
कोल विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी विवेक बंसल, सपा के जमीरुल्ला, बसपा के जियाउर्रहमान और भाजपा के योगेंद्र लालू दौड़ में शामिल हैं।
रालोद की परंपरागत सीट माने जाने वाले इगलास क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी त्रिलोकीराम परंपरा को कायम रखने की कोशिश करेंगे। उनका बसपा के राजेंद्र कुमार, भाजपा की रामसखी कठेरिया से कड़ा मुकाबला है।
रालोद के ही दूसरे गढ़ खैर क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी भगवती प्रसाद और बसपा की राजरानी मुख्य दौड़ में शामिल हैं। भाजपा के अनूप वाल्मीकि और सपा के गुरविंदर सिंह भी अपनी पूरी ताकत झौंकी है।
छर्रा में सपा प्रत्याशी राकेश सिंह, कांग्रेस के परवेज अहमद, बसपा के मूलचंद्र बघेल और जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के रवेंद्र पाल सिंह में कड़ी टक्कर है।
आगरा में राजनीतिक विश्लेषक बृज खंडेलवाल ने बताया, "पिछले पांच चरणों के मतदान के बाद कोई भी पार्टी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नहीं है। इस दौर के मतदान के बाद भी स्थिति बदलती नहीं दिख रही। इस बार का चुनाव बिल्कुल अलग किस्म का है। पूरी तरह सक्रिय भूमिका निभा रहा निर्वाचन आयोग इसके लिए धन्यवाद का पात्र है, जिसने अपने तेवर में कोई नरमी नहीं दिखाई और न ही किसी पार्टी को कोई छूट दी।"टिप्पणियां
क्षेत्रीय मीडिया और गैर सरकारी संगठनों ने भी मतदाताओं को प्रेरित करने के लिए कई सिलसिलेवार कार्यक्रम चलाए हैं।
इस दौर में खास बात जो देखने में आई है वह यह है कि इस बार चुनावों पर पैसे का असर नहीं दिख रहा है। प्रशासन सख्ती से नजर रख रहा है।
(कुछ अंश एजेंसियों से)
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी, सपा मुखिया मुलायम सिंह, बसपा अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री मायावती और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी, भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह, भाजपा के ही अरुण जेटली, रालोद प्रमुख अजित सिंह आदि नेताओं ने प्रमुख क्षेत्रों जैसे आगरा, मथुरा, अलीगढ़, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, बागपत, हापुड़, हाथरस, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर में ताबड़तोड़ रैलियां और रोड शो किए हैं।
आगरा शहर से 28 पार्टी मैदान में हैं। यहां मुकाबला चतुष्कोणीय नजर आता है लेकिन कुछ छोटे दल और निर्दलीय प्रत्याशी वोट काटने की स्थिति में हैं। अमर सिंह के अभियान से मुलायम सिंह मुसीबत में पड़ सकते हैं तो टिकट न मिलने से नाराज कई दूसरे प्रत्याशी भी मुश्किलें खड़ी कर पा रहे हैं। फतेहपुर सीकरी सीट पर टिकट न मिलने से नाराज राजकुमार चाहर निर्दलीय चुनाव लड़कर रालोद के बाबू लाल को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।
आगरा जनपद में कुल नौ सीटें हैं जिनमें पिछली बार बसपा को 6 सीटें मिली थीं। लेकिन इस बार सीटों के परिसीमन और किसी के पक्ष में कोई खास हवा न होने के चलते सभी राजनीतिक दल ऊहापोह की स्थिति में हैं। पिछली बार यहां 43 फीसदी वोट पड़े थे लेकिन इस बार अन्ना फैक्टर के चलते और पहले पांच दौर के मतदान को देखते हुए इसके कम से कम 60 फीसदी तक होने का अनुमान है।
आगरा से लगे मथुरा जनपद में कमोबेश स्थिति ऐसी ही है। विश्लेषकों के अनुसार बसपा को नुकसान तो होगा लेकिन कितना इसपर कोई खुलकर आकलन नहीं कर पा रहा है।
इस चरण में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की साख भी दांव पर लगी है क्योंकि उनके बेटे एवं जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) अध्यक्ष राजवीर सिंह बुलंदशहर की डिबाई सीट से और पुत्रवधू प्रेमलता अलीगढ़ की अतरौली सीट से किस्मत आजमा रही हैं। इसके अलावा पूर्व मंत्री हाजी याकूब कुरैशी और रालोद नेता कोकब हमीद भी चर्चित चेहरे हैं।
प्रदेश में अपने वजूद को बचाने की लड़ाई लड़ रहे पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने बेटे राजवीर सिंह को डिबाई विधानसभा क्षेत्र से जिताने की है।
कभी भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता रहे कल्याण सिंह को बुलंदशहर में काफी सम्मान प्राप्त है। उनसे जुड़े लोध राजपूतों के वर्चस्व को चुनौती देते हुए विरोधियों ने राजवीर सिंह के लिए भी मजबूत किलेबंदी तो कर ही रखी है, खुद अपने भी उन्हें चक्रव्यूह में घेरने की कोशिश में लगे हुए हैं। राजवीर के सामने चुनौती पिछले विधानसभा चुनाव की हार का बदला लेने की भी है। पिछली बार बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार श्रीभगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित ने उन्हें हार का स्वाद चखाया था। इस बार शर्मा सपा के टिकट पर मैदान में हैं। बसपा ने इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखने के लिए ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय के भाई विनोद उपाध्याय को मैदान में उतारा है लेकिन राजवीर की असली परेशानी तो भाजपा के उम्मीदवार रवींद्र सिंह बढ़ा रहे हैं। पहली बार चुनाव मैदान में उतरे रवींद्र सिंह पूर्व विधायक राम सिंह के पुत्र हैं, जो कल्याण सिंह के काफी करीबी माने जाते थे। भाजपा ने लोध वोट बैंक में सेंधमारी की गरज से ही राम सिंह को पहले प्रत्याशी घोषित किया था लेकिन उन्होंने अपने पुत्र का नाम आगे कर दिया।
डिबाई विधानसभा क्षेत्र में बात विकास की करें, तो यहां की बदहाली को देखकर यही लगता है कि यहां के जनप्रतिनिधियों ने विकास को कोई तवज्जो नहीं दी है।
स्थानीय लोगों की मानें तो ऊर्जा मंत्री के भाई के चुनाव मैदान में उतरने के कारण बिजली आपूर्ति थोड़ी सुधरी है, लेकिन वह भी चुनाव से ऐन पहले।
डिबाई विधानसभा क्षेत्र के जातीय आंकड़ों की बात करें, तो यहां लोध राजपूत मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक करीब 92,000 है, जो निर्णायक साबित होती है। इसके अलावा मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 38,000, क्षत्रिय 16,000 और जाट मतदाताओं की लगभग 18,000 संख्या भी उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करने में महत्वपूर्ण साबित होगी।
अलीगढ़ जनपद की सात विधानसभा सीटों पर 1197148 पुरुष और 957556 स्त्री मतदाता अपने प्रतिनिधि का चयन करेंगे।
नए परिसीमन के कारण हाई प्रोफाइल सीट और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के गढ़ अतरौली में उनकी पुत्रवधु व जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) की प्रत्याशी प्रेमलता वर्मा, भाजपा के राजेश भारद्वाज, सपा के वीरेश यादव, बसपा के साकिब, कांग्रेस के विजेंद्र सिंह और राष्ट्रीय सवर्ण दल के चमन शर्मा का बहुकोणीय मुकाबला है।
अलीगढ़ शहर विधानसभा क्षेत्र से सपा प्रत्याशी जफर आलम, भाजपा के आशुतोष वार्ष्णेय, कांग्रेस के योगेश दीक्षित, बसपा के संजय शर्मा और रासद के प्रत्याशी डॉ. सीपी गुप्ता के बीच मुकाबला है।
बरौली क्षेत्र से बसपा सरकार में मंत्री रहे जयवीर सिंह तीसरी बार सफलता प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं। रालोद के दलवीर सिंह, भाजपा के मुनीश गौड़, सपा के मोहन लाल बघेल, जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के केशव सिंह और रासद के गजेंद्र सिंह उन्हें टक्कर दे रहे हैं।
कोल विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी विवेक बंसल, सपा के जमीरुल्ला, बसपा के जियाउर्रहमान और भाजपा के योगेंद्र लालू दौड़ में शामिल हैं।
रालोद की परंपरागत सीट माने जाने वाले इगलास क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी त्रिलोकीराम परंपरा को कायम रखने की कोशिश करेंगे। उनका बसपा के राजेंद्र कुमार, भाजपा की रामसखी कठेरिया से कड़ा मुकाबला है।
रालोद के ही दूसरे गढ़ खैर क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी भगवती प्रसाद और बसपा की राजरानी मुख्य दौड़ में शामिल हैं। भाजपा के अनूप वाल्मीकि और सपा के गुरविंदर सिंह भी अपनी पूरी ताकत झौंकी है।
छर्रा में सपा प्रत्याशी राकेश सिंह, कांग्रेस के परवेज अहमद, बसपा के मूलचंद्र बघेल और जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के रवेंद्र पाल सिंह में कड़ी टक्कर है।
आगरा में राजनीतिक विश्लेषक बृज खंडेलवाल ने बताया, "पिछले पांच चरणों के मतदान के बाद कोई भी पार्टी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नहीं है। इस दौर के मतदान के बाद भी स्थिति बदलती नहीं दिख रही। इस बार का चुनाव बिल्कुल अलग किस्म का है। पूरी तरह सक्रिय भूमिका निभा रहा निर्वाचन आयोग इसके लिए धन्यवाद का पात्र है, जिसने अपने तेवर में कोई नरमी नहीं दिखाई और न ही किसी पार्टी को कोई छूट दी।"टिप्पणियां
क्षेत्रीय मीडिया और गैर सरकारी संगठनों ने भी मतदाताओं को प्रेरित करने के लिए कई सिलसिलेवार कार्यक्रम चलाए हैं।
इस दौर में खास बात जो देखने में आई है वह यह है कि इस बार चुनावों पर पैसे का असर नहीं दिख रहा है। प्रशासन सख्ती से नजर रख रहा है।
(कुछ अंश एजेंसियों से)
आगरा शहर से 28 पार्टी मैदान में हैं। यहां मुकाबला चतुष्कोणीय नजर आता है लेकिन कुछ छोटे दल और निर्दलीय प्रत्याशी वोट काटने की स्थिति में हैं। अमर सिंह के अभियान से मुलायम सिंह मुसीबत में पड़ सकते हैं तो टिकट न मिलने से नाराज कई दूसरे प्रत्याशी भी मुश्किलें खड़ी कर पा रहे हैं। फतेहपुर सीकरी सीट पर टिकट न मिलने से नाराज राजकुमार चाहर निर्दलीय चुनाव लड़कर रालोद के बाबू लाल को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।
आगरा जनपद में कुल नौ सीटें हैं जिनमें पिछली बार बसपा को 6 सीटें मिली थीं। लेकिन इस बार सीटों के परिसीमन और किसी के पक्ष में कोई खास हवा न होने के चलते सभी राजनीतिक दल ऊहापोह की स्थिति में हैं। पिछली बार यहां 43 फीसदी वोट पड़े थे लेकिन इस बार अन्ना फैक्टर के चलते और पहले पांच दौर के मतदान को देखते हुए इसके कम से कम 60 फीसदी तक होने का अनुमान है।
आगरा से लगे मथुरा जनपद में कमोबेश स्थिति ऐसी ही है। विश्लेषकों के अनुसार बसपा को नुकसान तो होगा लेकिन कितना इसपर कोई खुलकर आकलन नहीं कर पा रहा है।
इस चरण में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की साख भी दांव पर लगी है क्योंकि उनके बेटे एवं जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) अध्यक्ष राजवीर सिंह बुलंदशहर की डिबाई सीट से और पुत्रवधू प्रेमलता अलीगढ़ की अतरौली सीट से किस्मत आजमा रही हैं। इसके अलावा पूर्व मंत्री हाजी याकूब कुरैशी और रालोद नेता कोकब हमीद भी चर्चित चेहरे हैं।
प्रदेश में अपने वजूद को बचाने की लड़ाई लड़ रहे पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने बेटे राजवीर सिंह को डिबाई विधानसभा क्षेत्र से जिताने की है।
कभी भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता रहे कल्याण सिंह को बुलंदशहर में काफी सम्मान प्राप्त है। उनसे जुड़े लोध राजपूतों के वर्चस्व को चुनौती देते हुए विरोधियों ने राजवीर सिंह के लिए भी मजबूत किलेबंदी तो कर ही रखी है, खुद अपने भी उन्हें चक्रव्यूह में घेरने की कोशिश में लगे हुए हैं। राजवीर के सामने चुनौती पिछले विधानसभा चुनाव की हार का बदला लेने की भी है। पिछली बार बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार श्रीभगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित ने उन्हें हार का स्वाद चखाया था। इस बार शर्मा सपा के टिकट पर मैदान में हैं। बसपा ने इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखने के लिए ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय के भाई विनोद उपाध्याय को मैदान में उतारा है लेकिन राजवीर की असली परेशानी तो भाजपा के उम्मीदवार रवींद्र सिंह बढ़ा रहे हैं। पहली बार चुनाव मैदान में उतरे रवींद्र सिंह पूर्व विधायक राम सिंह के पुत्र हैं, जो कल्याण सिंह के काफी करीबी माने जाते थे। भाजपा ने लोध वोट बैंक में सेंधमारी की गरज से ही राम सिंह को पहले प्रत्याशी घोषित किया था लेकिन उन्होंने अपने पुत्र का नाम आगे कर दिया।
डिबाई विधानसभा क्षेत्र में बात विकास की करें, तो यहां की बदहाली को देखकर यही लगता है कि यहां के जनप्रतिनिधियों ने विकास को कोई तवज्जो नहीं दी है।
स्थानीय लोगों की मानें तो ऊर्जा मंत्री के भाई के चुनाव मैदान में उतरने के कारण बिजली आपूर्ति थोड़ी सुधरी है, लेकिन वह भी चुनाव से ऐन पहले।
डिबाई विधानसभा क्षेत्र के जातीय आंकड़ों की बात करें, तो यहां लोध राजपूत मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक करीब 92,000 है, जो निर्णायक साबित होती है। इसके अलावा मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 38,000, क्षत्रिय 16,000 और जाट मतदाताओं की लगभग 18,000 संख्या भी उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करने में महत्वपूर्ण साबित होगी।
अलीगढ़ जनपद की सात विधानसभा सीटों पर 1197148 पुरुष और 957556 स्त्री मतदाता अपने प्रतिनिधि का चयन करेंगे।
नए परिसीमन के कारण हाई प्रोफाइल सीट और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के गढ़ अतरौली में उनकी पुत्रवधु व जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) की प्रत्याशी प्रेमलता वर्मा, भाजपा के राजेश भारद्वाज, सपा के वीरेश यादव, बसपा के साकिब, कांग्रेस के विजेंद्र सिंह और राष्ट्रीय सवर्ण दल के चमन शर्मा का बहुकोणीय मुकाबला है।
अलीगढ़ शहर विधानसभा क्षेत्र से सपा प्रत्याशी जफर आलम, भाजपा के आशुतोष वार्ष्णेय, कांग्रेस के योगेश दीक्षित, बसपा के संजय शर्मा और रासद के प्रत्याशी डॉ. सीपी गुप्ता के बीच मुकाबला है।
बरौली क्षेत्र से बसपा सरकार में मंत्री रहे जयवीर सिंह तीसरी बार सफलता प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं। रालोद के दलवीर सिंह, भाजपा के मुनीश गौड़, सपा के मोहन लाल बघेल, जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के केशव सिंह और रासद के गजेंद्र सिंह उन्हें टक्कर दे रहे हैं।
कोल विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी विवेक बंसल, सपा के जमीरुल्ला, बसपा के जियाउर्रहमान और भाजपा के योगेंद्र लालू दौड़ में शामिल हैं।
रालोद की परंपरागत सीट माने जाने वाले इगलास क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी त्रिलोकीराम परंपरा को कायम रखने की कोशिश करेंगे। उनका बसपा के राजेंद्र कुमार, भाजपा की रामसखी कठेरिया से कड़ा मुकाबला है।
रालोद के ही दूसरे गढ़ खैर क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी भगवती प्रसाद और बसपा की राजरानी मुख्य दौड़ में शामिल हैं। भाजपा के अनूप वाल्मीकि और सपा के गुरविंदर सिंह भी अपनी पूरी ताकत झौंकी है।
छर्रा में सपा प्रत्याशी राकेश सिंह, कांग्रेस के परवेज अहमद, बसपा के मूलचंद्र बघेल और जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के रवेंद्र पाल सिंह में कड़ी टक्कर है।
आगरा में राजनीतिक विश्लेषक बृज खंडेलवाल ने बताया, "पिछले पांच चरणों के मतदान के बाद कोई भी पार्टी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नहीं है। इस दौर के मतदान के बाद भी स्थिति बदलती नहीं दिख रही। इस बार का चुनाव बिल्कुल अलग किस्म का है। पूरी तरह सक्रिय भूमिका निभा रहा निर्वाचन आयोग इसके लिए धन्यवाद का पात्र है, जिसने अपने तेवर में कोई नरमी नहीं दिखाई और न ही किसी पार्टी को कोई छूट दी।"टिप्पणियां
क्षेत्रीय मीडिया और गैर सरकारी संगठनों ने भी मतदाताओं को प्रेरित करने के लिए कई सिलसिलेवार कार्यक्रम चलाए हैं।
इस दौर में खास बात जो देखने में आई है वह यह है कि इस बार चुनावों पर पैसे का असर नहीं दिख रहा है। प्रशासन सख्ती से नजर रख रहा है।
(कुछ अंश एजेंसियों से)
आगरा जनपद में कुल नौ सीटें हैं जिनमें पिछली बार बसपा को 6 सीटें मिली थीं। लेकिन इस बार सीटों के परिसीमन और किसी के पक्ष में कोई खास हवा न होने के चलते सभी राजनीतिक दल ऊहापोह की स्थिति में हैं। पिछली बार यहां 43 फीसदी वोट पड़े थे लेकिन इस बार अन्ना फैक्टर के चलते और पहले पांच दौर के मतदान को देखते हुए इसके कम से कम 60 फीसदी तक होने का अनुमान है।
आगरा से लगे मथुरा जनपद में कमोबेश स्थिति ऐसी ही है। विश्लेषकों के अनुसार बसपा को नुकसान तो होगा लेकिन कितना इसपर कोई खुलकर आकलन नहीं कर पा रहा है।
इस चरण में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की साख भी दांव पर लगी है क्योंकि उनके बेटे एवं जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) अध्यक्ष राजवीर सिंह बुलंदशहर की डिबाई सीट से और पुत्रवधू प्रेमलता अलीगढ़ की अतरौली सीट से किस्मत आजमा रही हैं। इसके अलावा पूर्व मंत्री हाजी याकूब कुरैशी और रालोद नेता कोकब हमीद भी चर्चित चेहरे हैं।
प्रदेश में अपने वजूद को बचाने की लड़ाई लड़ रहे पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने बेटे राजवीर सिंह को डिबाई विधानसभा क्षेत्र से जिताने की है।
कभी भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता रहे कल्याण सिंह को बुलंदशहर में काफी सम्मान प्राप्त है। उनसे जुड़े लोध राजपूतों के वर्चस्व को चुनौती देते हुए विरोधियों ने राजवीर सिंह के लिए भी मजबूत किलेबंदी तो कर ही रखी है, खुद अपने भी उन्हें चक्रव्यूह में घेरने की कोशिश में लगे हुए हैं। राजवीर के सामने चुनौती पिछले विधानसभा चुनाव की हार का बदला लेने की भी है। पिछली बार बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार श्रीभगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित ने उन्हें हार का स्वाद चखाया था। इस बार शर्मा सपा के टिकट पर मैदान में हैं। बसपा ने इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखने के लिए ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय के भाई विनोद उपाध्याय को मैदान में उतारा है लेकिन राजवीर की असली परेशानी तो भाजपा के उम्मीदवार रवींद्र सिंह बढ़ा रहे हैं। पहली बार चुनाव मैदान में उतरे रवींद्र सिंह पूर्व विधायक राम सिंह के पुत्र हैं, जो कल्याण सिंह के काफी करीबी माने जाते थे। भाजपा ने लोध वोट बैंक में सेंधमारी की गरज से ही राम सिंह को पहले प्रत्याशी घोषित किया था लेकिन उन्होंने अपने पुत्र का नाम आगे कर दिया।
डिबाई विधानसभा क्षेत्र में बात विकास की करें, तो यहां की बदहाली को देखकर यही लगता है कि यहां के जनप्रतिनिधियों ने विकास को कोई तवज्जो नहीं दी है।
स्थानीय लोगों की मानें तो ऊर्जा मंत्री के भाई के चुनाव मैदान में उतरने के कारण बिजली आपूर्ति थोड़ी सुधरी है, लेकिन वह भी चुनाव से ऐन पहले।
डिबाई विधानसभा क्षेत्र के जातीय आंकड़ों की बात करें, तो यहां लोध राजपूत मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक करीब 92,000 है, जो निर्णायक साबित होती है। इसके अलावा मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 38,000, क्षत्रिय 16,000 और जाट मतदाताओं की लगभग 18,000 संख्या भी उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करने में महत्वपूर्ण साबित होगी।
अलीगढ़ जनपद की सात विधानसभा सीटों पर 1197148 पुरुष और 957556 स्त्री मतदाता अपने प्रतिनिधि का चयन करेंगे।
नए परिसीमन के कारण हाई प्रोफाइल सीट और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के गढ़ अतरौली में उनकी पुत्रवधु व जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) की प्रत्याशी प्रेमलता वर्मा, भाजपा के राजेश भारद्वाज, सपा के वीरेश यादव, बसपा के साकिब, कांग्रेस के विजेंद्र सिंह और राष्ट्रीय सवर्ण दल के चमन शर्मा का बहुकोणीय मुकाबला है।
अलीगढ़ शहर विधानसभा क्षेत्र से सपा प्रत्याशी जफर आलम, भाजपा के आशुतोष वार्ष्णेय, कांग्रेस के योगेश दीक्षित, बसपा के संजय शर्मा और रासद के प्रत्याशी डॉ. सीपी गुप्ता के बीच मुकाबला है।
बरौली क्षेत्र से बसपा सरकार में मंत्री रहे जयवीर सिंह तीसरी बार सफलता प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं। रालोद के दलवीर सिंह, भाजपा के मुनीश गौड़, सपा के मोहन लाल बघेल, जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के केशव सिंह और रासद के गजेंद्र सिंह उन्हें टक्कर दे रहे हैं।
कोल विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी विवेक बंसल, सपा के जमीरुल्ला, बसपा के जियाउर्रहमान और भाजपा के योगेंद्र लालू दौड़ में शामिल हैं।
रालोद की परंपरागत सीट माने जाने वाले इगलास क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी त्रिलोकीराम परंपरा को कायम रखने की कोशिश करेंगे। उनका बसपा के राजेंद्र कुमार, भाजपा की रामसखी कठेरिया से कड़ा मुकाबला है।
रालोद के ही दूसरे गढ़ खैर क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी भगवती प्रसाद और बसपा की राजरानी मुख्य दौड़ में शामिल हैं। भाजपा के अनूप वाल्मीकि और सपा के गुरविंदर सिंह भी अपनी पूरी ताकत झौंकी है।
छर्रा में सपा प्रत्याशी राकेश सिंह, कांग्रेस के परवेज अहमद, बसपा के मूलचंद्र बघेल और जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के रवेंद्र पाल सिंह में कड़ी टक्कर है।
आगरा में राजनीतिक विश्लेषक बृज खंडेलवाल ने बताया, "पिछले पांच चरणों के मतदान के बाद कोई भी पार्टी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नहीं है। इस दौर के मतदान के बाद भी स्थिति बदलती नहीं दिख रही। इस बार का चुनाव बिल्कुल अलग किस्म का है। पूरी तरह सक्रिय भूमिका निभा रहा निर्वाचन आयोग इसके लिए धन्यवाद का पात्र है, जिसने अपने तेवर में कोई नरमी नहीं दिखाई और न ही किसी पार्टी को कोई छूट दी।"टिप्पणियां
क्षेत्रीय मीडिया और गैर सरकारी संगठनों ने भी मतदाताओं को प्रेरित करने के लिए कई सिलसिलेवार कार्यक्रम चलाए हैं।
इस दौर में खास बात जो देखने में आई है वह यह है कि इस बार चुनावों पर पैसे का असर नहीं दिख रहा है। प्रशासन सख्ती से नजर रख रहा है।
(कुछ अंश एजेंसियों से)
आगरा से लगे मथुरा जनपद में कमोबेश स्थिति ऐसी ही है। विश्लेषकों के अनुसार बसपा को नुकसान तो होगा लेकिन कितना इसपर कोई खुलकर आकलन नहीं कर पा रहा है।
इस चरण में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की साख भी दांव पर लगी है क्योंकि उनके बेटे एवं जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) अध्यक्ष राजवीर सिंह बुलंदशहर की डिबाई सीट से और पुत्रवधू प्रेमलता अलीगढ़ की अतरौली सीट से किस्मत आजमा रही हैं। इसके अलावा पूर्व मंत्री हाजी याकूब कुरैशी और रालोद नेता कोकब हमीद भी चर्चित चेहरे हैं।
प्रदेश में अपने वजूद को बचाने की लड़ाई लड़ रहे पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने बेटे राजवीर सिंह को डिबाई विधानसभा क्षेत्र से जिताने की है।
कभी भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता रहे कल्याण सिंह को बुलंदशहर में काफी सम्मान प्राप्त है। उनसे जुड़े लोध राजपूतों के वर्चस्व को चुनौती देते हुए विरोधियों ने राजवीर सिंह के लिए भी मजबूत किलेबंदी तो कर ही रखी है, खुद अपने भी उन्हें चक्रव्यूह में घेरने की कोशिश में लगे हुए हैं। राजवीर के सामने चुनौती पिछले विधानसभा चुनाव की हार का बदला लेने की भी है। पिछली बार बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार श्रीभगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित ने उन्हें हार का स्वाद चखाया था। इस बार शर्मा सपा के टिकट पर मैदान में हैं। बसपा ने इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखने के लिए ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय के भाई विनोद उपाध्याय को मैदान में उतारा है लेकिन राजवीर की असली परेशानी तो भाजपा के उम्मीदवार रवींद्र सिंह बढ़ा रहे हैं। पहली बार चुनाव मैदान में उतरे रवींद्र सिंह पूर्व विधायक राम सिंह के पुत्र हैं, जो कल्याण सिंह के काफी करीबी माने जाते थे। भाजपा ने लोध वोट बैंक में सेंधमारी की गरज से ही राम सिंह को पहले प्रत्याशी घोषित किया था लेकिन उन्होंने अपने पुत्र का नाम आगे कर दिया।
डिबाई विधानसभा क्षेत्र में बात विकास की करें, तो यहां की बदहाली को देखकर यही लगता है कि यहां के जनप्रतिनिधियों ने विकास को कोई तवज्जो नहीं दी है।
स्थानीय लोगों की मानें तो ऊर्जा मंत्री के भाई के चुनाव मैदान में उतरने के कारण बिजली आपूर्ति थोड़ी सुधरी है, लेकिन वह भी चुनाव से ऐन पहले।
डिबाई विधानसभा क्षेत्र के जातीय आंकड़ों की बात करें, तो यहां लोध राजपूत मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक करीब 92,000 है, जो निर्णायक साबित होती है। इसके अलावा मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 38,000, क्षत्रिय 16,000 और जाट मतदाताओं की लगभग 18,000 संख्या भी उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करने में महत्वपूर्ण साबित होगी।
अलीगढ़ जनपद की सात विधानसभा सीटों पर 1197148 पुरुष और 957556 स्त्री मतदाता अपने प्रतिनिधि का चयन करेंगे।
नए परिसीमन के कारण हाई प्रोफाइल सीट और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के गढ़ अतरौली में उनकी पुत्रवधु व जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) की प्रत्याशी प्रेमलता वर्मा, भाजपा के राजेश भारद्वाज, सपा के वीरेश यादव, बसपा के साकिब, कांग्रेस के विजेंद्र सिंह और राष्ट्रीय सवर्ण दल के चमन शर्मा का बहुकोणीय मुकाबला है।
अलीगढ़ शहर विधानसभा क्षेत्र से सपा प्रत्याशी जफर आलम, भाजपा के आशुतोष वार्ष्णेय, कांग्रेस के योगेश दीक्षित, बसपा के संजय शर्मा और रासद के प्रत्याशी डॉ. सीपी गुप्ता के बीच मुकाबला है।
बरौली क्षेत्र से बसपा सरकार में मंत्री रहे जयवीर सिंह तीसरी बार सफलता प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं। रालोद के दलवीर सिंह, भाजपा के मुनीश गौड़, सपा के मोहन लाल बघेल, जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के केशव सिंह और रासद के गजेंद्र सिंह उन्हें टक्कर दे रहे हैं।
कोल विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी विवेक बंसल, सपा के जमीरुल्ला, बसपा के जियाउर्रहमान और भाजपा के योगेंद्र लालू दौड़ में शामिल हैं।
रालोद की परंपरागत सीट माने जाने वाले इगलास क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी त्रिलोकीराम परंपरा को कायम रखने की कोशिश करेंगे। उनका बसपा के राजेंद्र कुमार, भाजपा की रामसखी कठेरिया से कड़ा मुकाबला है।
रालोद के ही दूसरे गढ़ खैर क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी भगवती प्रसाद और बसपा की राजरानी मुख्य दौड़ में शामिल हैं। भाजपा के अनूप वाल्मीकि और सपा के गुरविंदर सिंह भी अपनी पूरी ताकत झौंकी है।
छर्रा में सपा प्रत्याशी राकेश सिंह, कांग्रेस के परवेज अहमद, बसपा के मूलचंद्र बघेल और जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के रवेंद्र पाल सिंह में कड़ी टक्कर है।
आगरा में राजनीतिक विश्लेषक बृज खंडेलवाल ने बताया, "पिछले पांच चरणों के मतदान के बाद कोई भी पार्टी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नहीं है। इस दौर के मतदान के बाद भी स्थिति बदलती नहीं दिख रही। इस बार का चुनाव बिल्कुल अलग किस्म का है। पूरी तरह सक्रिय भूमिका निभा रहा निर्वाचन आयोग इसके लिए धन्यवाद का पात्र है, जिसने अपने तेवर में कोई नरमी नहीं दिखाई और न ही किसी पार्टी को कोई छूट दी।"टिप्पणियां
क्षेत्रीय मीडिया और गैर सरकारी संगठनों ने भी मतदाताओं को प्रेरित करने के लिए कई सिलसिलेवार कार्यक्रम चलाए हैं।
इस दौर में खास बात जो देखने में आई है वह यह है कि इस बार चुनावों पर पैसे का असर नहीं दिख रहा है। प्रशासन सख्ती से नजर रख रहा है।
(कुछ अंश एजेंसियों से)
इस चरण में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की साख भी दांव पर लगी है क्योंकि उनके बेटे एवं जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) अध्यक्ष राजवीर सिंह बुलंदशहर की डिबाई सीट से और पुत्रवधू प्रेमलता अलीगढ़ की अतरौली सीट से किस्मत आजमा रही हैं। इसके अलावा पूर्व मंत्री हाजी याकूब कुरैशी और रालोद नेता कोकब हमीद भी चर्चित चेहरे हैं।
प्रदेश में अपने वजूद को बचाने की लड़ाई लड़ रहे पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने बेटे राजवीर सिंह को डिबाई विधानसभा क्षेत्र से जिताने की है।
कभी भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता रहे कल्याण सिंह को बुलंदशहर में काफी सम्मान प्राप्त है। उनसे जुड़े लोध राजपूतों के वर्चस्व को चुनौती देते हुए विरोधियों ने राजवीर सिंह के लिए भी मजबूत किलेबंदी तो कर ही रखी है, खुद अपने भी उन्हें चक्रव्यूह में घेरने की कोशिश में लगे हुए हैं। राजवीर के सामने चुनौती पिछले विधानसभा चुनाव की हार का बदला लेने की भी है। पिछली बार बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार श्रीभगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित ने उन्हें हार का स्वाद चखाया था। इस बार शर्मा सपा के टिकट पर मैदान में हैं। बसपा ने इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखने के लिए ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय के भाई विनोद उपाध्याय को मैदान में उतारा है लेकिन राजवीर की असली परेशानी तो भाजपा के उम्मीदवार रवींद्र सिंह बढ़ा रहे हैं। पहली बार चुनाव मैदान में उतरे रवींद्र सिंह पूर्व विधायक राम सिंह के पुत्र हैं, जो कल्याण सिंह के काफी करीबी माने जाते थे। भाजपा ने लोध वोट बैंक में सेंधमारी की गरज से ही राम सिंह को पहले प्रत्याशी घोषित किया था लेकिन उन्होंने अपने पुत्र का नाम आगे कर दिया।
डिबाई विधानसभा क्षेत्र में बात विकास की करें, तो यहां की बदहाली को देखकर यही लगता है कि यहां के जनप्रतिनिधियों ने विकास को कोई तवज्जो नहीं दी है।
स्थानीय लोगों की मानें तो ऊर्जा मंत्री के भाई के चुनाव मैदान में उतरने के कारण बिजली आपूर्ति थोड़ी सुधरी है, लेकिन वह भी चुनाव से ऐन पहले।
डिबाई विधानसभा क्षेत्र के जातीय आंकड़ों की बात करें, तो यहां लोध राजपूत मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक करीब 92,000 है, जो निर्णायक साबित होती है। इसके अलावा मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 38,000, क्षत्रिय 16,000 और जाट मतदाताओं की लगभग 18,000 संख्या भी उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करने में महत्वपूर्ण साबित होगी।
अलीगढ़ जनपद की सात विधानसभा सीटों पर 1197148 पुरुष और 957556 स्त्री मतदाता अपने प्रतिनिधि का चयन करेंगे।
नए परिसीमन के कारण हाई प्रोफाइल सीट और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के गढ़ अतरौली में उनकी पुत्रवधु व जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) की प्रत्याशी प्रेमलता वर्मा, भाजपा के राजेश भारद्वाज, सपा के वीरेश यादव, बसपा के साकिब, कांग्रेस के विजेंद्र सिंह और राष्ट्रीय सवर्ण दल के चमन शर्मा का बहुकोणीय मुकाबला है।
अलीगढ़ शहर विधानसभा क्षेत्र से सपा प्रत्याशी जफर आलम, भाजपा के आशुतोष वार्ष्णेय, कांग्रेस के योगेश दीक्षित, बसपा के संजय शर्मा और रासद के प्रत्याशी डॉ. सीपी गुप्ता के बीच मुकाबला है।
बरौली क्षेत्र से बसपा सरकार में मंत्री रहे जयवीर सिंह तीसरी बार सफलता प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं। रालोद के दलवीर सिंह, भाजपा के मुनीश गौड़, सपा के मोहन लाल बघेल, जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के केशव सिंह और रासद के गजेंद्र सिंह उन्हें टक्कर दे रहे हैं।
कोल विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी विवेक बंसल, सपा के जमीरुल्ला, बसपा के जियाउर्रहमान और भाजपा के योगेंद्र लालू दौड़ में शामिल हैं।
रालोद की परंपरागत सीट माने जाने वाले इगलास क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी त्रिलोकीराम परंपरा को कायम रखने की कोशिश करेंगे। उनका बसपा के राजेंद्र कुमार, भाजपा की रामसखी कठेरिया से कड़ा मुकाबला है।
रालोद के ही दूसरे गढ़ खैर क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी भगवती प्रसाद और बसपा की राजरानी मुख्य दौड़ में शामिल हैं। भाजपा के अनूप वाल्मीकि और सपा के गुरविंदर सिंह भी अपनी पूरी ताकत झौंकी है।
छर्रा में सपा प्रत्याशी राकेश सिंह, कांग्रेस के परवेज अहमद, बसपा के मूलचंद्र बघेल और जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के रवेंद्र पाल सिंह में कड़ी टक्कर है।
आगरा में राजनीतिक विश्लेषक बृज खंडेलवाल ने बताया, "पिछले पांच चरणों के मतदान के बाद कोई भी पार्टी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नहीं है। इस दौर के मतदान के बाद भी स्थिति बदलती नहीं दिख रही। इस बार का चुनाव बिल्कुल अलग किस्म का है। पूरी तरह सक्रिय भूमिका निभा रहा निर्वाचन आयोग इसके लिए धन्यवाद का पात्र है, जिसने अपने तेवर में कोई नरमी नहीं दिखाई और न ही किसी पार्टी को कोई छूट दी।"टिप्पणियां
क्षेत्रीय मीडिया और गैर सरकारी संगठनों ने भी मतदाताओं को प्रेरित करने के लिए कई सिलसिलेवार कार्यक्रम चलाए हैं।
इस दौर में खास बात जो देखने में आई है वह यह है कि इस बार चुनावों पर पैसे का असर नहीं दिख रहा है। प्रशासन सख्ती से नजर रख रहा है।
(कुछ अंश एजेंसियों से)
प्रदेश में अपने वजूद को बचाने की लड़ाई लड़ रहे पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने बेटे राजवीर सिंह को डिबाई विधानसभा क्षेत्र से जिताने की है।
कभी भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता रहे कल्याण सिंह को बुलंदशहर में काफी सम्मान प्राप्त है। उनसे जुड़े लोध राजपूतों के वर्चस्व को चुनौती देते हुए विरोधियों ने राजवीर सिंह के लिए भी मजबूत किलेबंदी तो कर ही रखी है, खुद अपने भी उन्हें चक्रव्यूह में घेरने की कोशिश में लगे हुए हैं। राजवीर के सामने चुनौती पिछले विधानसभा चुनाव की हार का बदला लेने की भी है। पिछली बार बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार श्रीभगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित ने उन्हें हार का स्वाद चखाया था। इस बार शर्मा सपा के टिकट पर मैदान में हैं। बसपा ने इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखने के लिए ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय के भाई विनोद उपाध्याय को मैदान में उतारा है लेकिन राजवीर की असली परेशानी तो भाजपा के उम्मीदवार रवींद्र सिंह बढ़ा रहे हैं। पहली बार चुनाव मैदान में उतरे रवींद्र सिंह पूर्व विधायक राम सिंह के पुत्र हैं, जो कल्याण सिंह के काफी करीबी माने जाते थे। भाजपा ने लोध वोट बैंक में सेंधमारी की गरज से ही राम सिंह को पहले प्रत्याशी घोषित किया था लेकिन उन्होंने अपने पुत्र का नाम आगे कर दिया।
डिबाई विधानसभा क्षेत्र में बात विकास की करें, तो यहां की बदहाली को देखकर यही लगता है कि यहां के जनप्रतिनिधियों ने विकास को कोई तवज्जो नहीं दी है।
स्थानीय लोगों की मानें तो ऊर्जा मंत्री के भाई के चुनाव मैदान में उतरने के कारण बिजली आपूर्ति थोड़ी सुधरी है, लेकिन वह भी चुनाव से ऐन पहले।
डिबाई विधानसभा क्षेत्र के जातीय आंकड़ों की बात करें, तो यहां लोध राजपूत मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक करीब 92,000 है, जो निर्णायक साबित होती है। इसके अलावा मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 38,000, क्षत्रिय 16,000 और जाट मतदाताओं की लगभग 18,000 संख्या भी उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करने में महत्वपूर्ण साबित होगी।
अलीगढ़ जनपद की सात विधानसभा सीटों पर 1197148 पुरुष और 957556 स्त्री मतदाता अपने प्रतिनिधि का चयन करेंगे।
नए परिसीमन के कारण हाई प्रोफाइल सीट और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के गढ़ अतरौली में उनकी पुत्रवधु व जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) की प्रत्याशी प्रेमलता वर्मा, भाजपा के राजेश भारद्वाज, सपा के वीरेश यादव, बसपा के साकिब, कांग्रेस के विजेंद्र सिंह और राष्ट्रीय सवर्ण दल के चमन शर्मा का बहुकोणीय मुकाबला है।
अलीगढ़ शहर विधानसभा क्षेत्र से सपा प्रत्याशी जफर आलम, भाजपा के आशुतोष वार्ष्णेय, कांग्रेस के योगेश दीक्षित, बसपा के संजय शर्मा और रासद के प्रत्याशी डॉ. सीपी गुप्ता के बीच मुकाबला है।
बरौली क्षेत्र से बसपा सरकार में मंत्री रहे जयवीर सिंह तीसरी बार सफलता प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं। रालोद के दलवीर सिंह, भाजपा के मुनीश गौड़, सपा के मोहन लाल बघेल, जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के केशव सिंह और रासद के गजेंद्र सिंह उन्हें टक्कर दे रहे हैं।
कोल विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी विवेक बंसल, सपा के जमीरुल्ला, बसपा के जियाउर्रहमान और भाजपा के योगेंद्र लालू दौड़ में शामिल हैं।
रालोद की परंपरागत सीट माने जाने वाले इगलास क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी त्रिलोकीराम परंपरा को कायम रखने की कोशिश करेंगे। उनका बसपा के राजेंद्र कुमार, भाजपा की रामसखी कठेरिया से कड़ा मुकाबला है।
रालोद के ही दूसरे गढ़ खैर क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी भगवती प्रसाद और बसपा की राजरानी मुख्य दौड़ में शामिल हैं। भाजपा के अनूप वाल्मीकि और सपा के गुरविंदर सिंह भी अपनी पूरी ताकत झौंकी है।
छर्रा में सपा प्रत्याशी राकेश सिंह, कांग्रेस के परवेज अहमद, बसपा के मूलचंद्र बघेल और जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के रवेंद्र पाल सिंह में कड़ी टक्कर है।
आगरा में राजनीतिक विश्लेषक बृज खंडेलवाल ने बताया, "पिछले पांच चरणों के मतदान के बाद कोई भी पार्टी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नहीं है। इस दौर के मतदान के बाद भी स्थिति बदलती नहीं दिख रही। इस बार का चुनाव बिल्कुल अलग किस्म का है। पूरी तरह सक्रिय भूमिका निभा रहा निर्वाचन आयोग इसके लिए धन्यवाद का पात्र है, जिसने अपने तेवर में कोई नरमी नहीं दिखाई और न ही किसी पार्टी को कोई छूट दी।"टिप्पणियां
क्षेत्रीय मीडिया और गैर सरकारी संगठनों ने भी मतदाताओं को प्रेरित करने के लिए कई सिलसिलेवार कार्यक्रम चलाए हैं।
इस दौर में खास बात जो देखने में आई है वह यह है कि इस बार चुनावों पर पैसे का असर नहीं दिख रहा है। प्रशासन सख्ती से नजर रख रहा है।
(कुछ अंश एजेंसियों से)
कभी भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता रहे कल्याण सिंह को बुलंदशहर में काफी सम्मान प्राप्त है। उनसे जुड़े लोध राजपूतों के वर्चस्व को चुनौती देते हुए विरोधियों ने राजवीर सिंह के लिए भी मजबूत किलेबंदी तो कर ही रखी है, खुद अपने भी उन्हें चक्रव्यूह में घेरने की कोशिश में लगे हुए हैं। राजवीर के सामने चुनौती पिछले विधानसभा चुनाव की हार का बदला लेने की भी है। पिछली बार बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार श्रीभगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित ने उन्हें हार का स्वाद चखाया था। इस बार शर्मा सपा के टिकट पर मैदान में हैं। बसपा ने इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखने के लिए ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय के भाई विनोद उपाध्याय को मैदान में उतारा है लेकिन राजवीर की असली परेशानी तो भाजपा के उम्मीदवार रवींद्र सिंह बढ़ा रहे हैं। पहली बार चुनाव मैदान में उतरे रवींद्र सिंह पूर्व विधायक राम सिंह के पुत्र हैं, जो कल्याण सिंह के काफी करीबी माने जाते थे। भाजपा ने लोध वोट बैंक में सेंधमारी की गरज से ही राम सिंह को पहले प्रत्याशी घोषित किया था लेकिन उन्होंने अपने पुत्र का नाम आगे कर दिया।
डिबाई विधानसभा क्षेत्र में बात विकास की करें, तो यहां की बदहाली को देखकर यही लगता है कि यहां के जनप्रतिनिधियों ने विकास को कोई तवज्जो नहीं दी है।
स्थानीय लोगों की मानें तो ऊर्जा मंत्री के भाई के चुनाव मैदान में उतरने के कारण बिजली आपूर्ति थोड़ी सुधरी है, लेकिन वह भी चुनाव से ऐन पहले।
डिबाई विधानसभा क्षेत्र के जातीय आंकड़ों की बात करें, तो यहां लोध राजपूत मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक करीब 92,000 है, जो निर्णायक साबित होती है। इसके अलावा मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 38,000, क्षत्रिय 16,000 और जाट मतदाताओं की लगभग 18,000 संख्या भी उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करने में महत्वपूर्ण साबित होगी।
अलीगढ़ जनपद की सात विधानसभा सीटों पर 1197148 पुरुष और 957556 स्त्री मतदाता अपने प्रतिनिधि का चयन करेंगे।
नए परिसीमन के कारण हाई प्रोफाइल सीट और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के गढ़ अतरौली में उनकी पुत्रवधु व जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) की प्रत्याशी प्रेमलता वर्मा, भाजपा के राजेश भारद्वाज, सपा के वीरेश यादव, बसपा के साकिब, कांग्रेस के विजेंद्र सिंह और राष्ट्रीय सवर्ण दल के चमन शर्मा का बहुकोणीय मुकाबला है।
अलीगढ़ शहर विधानसभा क्षेत्र से सपा प्रत्याशी जफर आलम, भाजपा के आशुतोष वार्ष्णेय, कांग्रेस के योगेश दीक्षित, बसपा के संजय शर्मा और रासद के प्रत्याशी डॉ. सीपी गुप्ता के बीच मुकाबला है।
बरौली क्षेत्र से बसपा सरकार में मंत्री रहे जयवीर सिंह तीसरी बार सफलता प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं। रालोद के दलवीर सिंह, भाजपा के मुनीश गौड़, सपा के मोहन लाल बघेल, जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के केशव सिंह और रासद के गजेंद्र सिंह उन्हें टक्कर दे रहे हैं।
कोल विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी विवेक बंसल, सपा के जमीरुल्ला, बसपा के जियाउर्रहमान और भाजपा के योगेंद्र लालू दौड़ में शामिल हैं।
रालोद की परंपरागत सीट माने जाने वाले इगलास क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी त्रिलोकीराम परंपरा को कायम रखने की कोशिश करेंगे। उनका बसपा के राजेंद्र कुमार, भाजपा की रामसखी कठेरिया से कड़ा मुकाबला है।
रालोद के ही दूसरे गढ़ खैर क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी भगवती प्रसाद और बसपा की राजरानी मुख्य दौड़ में शामिल हैं। भाजपा के अनूप वाल्मीकि और सपा के गुरविंदर सिंह भी अपनी पूरी ताकत झौंकी है।
छर्रा में सपा प्रत्याशी राकेश सिंह, कांग्रेस के परवेज अहमद, बसपा के मूलचंद्र बघेल और जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के रवेंद्र पाल सिंह में कड़ी टक्कर है।
आगरा में राजनीतिक विश्लेषक बृज खंडेलवाल ने बताया, "पिछले पांच चरणों के मतदान के बाद कोई भी पार्टी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नहीं है। इस दौर के मतदान के बाद भी स्थिति बदलती नहीं दिख रही। इस बार का चुनाव बिल्कुल अलग किस्म का है। पूरी तरह सक्रिय भूमिका निभा रहा निर्वाचन आयोग इसके लिए धन्यवाद का पात्र है, जिसने अपने तेवर में कोई नरमी नहीं दिखाई और न ही किसी पार्टी को कोई छूट दी।"टिप्पणियां
क्षेत्रीय मीडिया और गैर सरकारी संगठनों ने भी मतदाताओं को प्रेरित करने के लिए कई सिलसिलेवार कार्यक्रम चलाए हैं।
इस दौर में खास बात जो देखने में आई है वह यह है कि इस बार चुनावों पर पैसे का असर नहीं दिख रहा है। प्रशासन सख्ती से नजर रख रहा है।
(कुछ अंश एजेंसियों से)
डिबाई विधानसभा क्षेत्र में बात विकास की करें, तो यहां की बदहाली को देखकर यही लगता है कि यहां के जनप्रतिनिधियों ने विकास को कोई तवज्जो नहीं दी है।
स्थानीय लोगों की मानें तो ऊर्जा मंत्री के भाई के चुनाव मैदान में उतरने के कारण बिजली आपूर्ति थोड़ी सुधरी है, लेकिन वह भी चुनाव से ऐन पहले।
डिबाई विधानसभा क्षेत्र के जातीय आंकड़ों की बात करें, तो यहां लोध राजपूत मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक करीब 92,000 है, जो निर्णायक साबित होती है। इसके अलावा मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 38,000, क्षत्रिय 16,000 और जाट मतदाताओं की लगभग 18,000 संख्या भी उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करने में महत्वपूर्ण साबित होगी।
अलीगढ़ जनपद की सात विधानसभा सीटों पर 1197148 पुरुष और 957556 स्त्री मतदाता अपने प्रतिनिधि का चयन करेंगे।
नए परिसीमन के कारण हाई प्रोफाइल सीट और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के गढ़ अतरौली में उनकी पुत्रवधु व जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) की प्रत्याशी प्रेमलता वर्मा, भाजपा के राजेश भारद्वाज, सपा के वीरेश यादव, बसपा के साकिब, कांग्रेस के विजेंद्र सिंह और राष्ट्रीय सवर्ण दल के चमन शर्मा का बहुकोणीय मुकाबला है।
अलीगढ़ शहर विधानसभा क्षेत्र से सपा प्रत्याशी जफर आलम, भाजपा के आशुतोष वार्ष्णेय, कांग्रेस के योगेश दीक्षित, बसपा के संजय शर्मा और रासद के प्रत्याशी डॉ. सीपी गुप्ता के बीच मुकाबला है।
बरौली क्षेत्र से बसपा सरकार में मंत्री रहे जयवीर सिंह तीसरी बार सफलता प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं। रालोद के दलवीर सिंह, भाजपा के मुनीश गौड़, सपा के मोहन लाल बघेल, जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के केशव सिंह और रासद के गजेंद्र सिंह उन्हें टक्कर दे रहे हैं।
कोल विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी विवेक बंसल, सपा के जमीरुल्ला, बसपा के जियाउर्रहमान और भाजपा के योगेंद्र लालू दौड़ में शामिल हैं।
रालोद की परंपरागत सीट माने जाने वाले इगलास क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी त्रिलोकीराम परंपरा को कायम रखने की कोशिश करेंगे। उनका बसपा के राजेंद्र कुमार, भाजपा की रामसखी कठेरिया से कड़ा मुकाबला है।
रालोद के ही दूसरे गढ़ खैर क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी भगवती प्रसाद और बसपा की राजरानी मुख्य दौड़ में शामिल हैं। भाजपा के अनूप वाल्मीकि और सपा के गुरविंदर सिंह भी अपनी पूरी ताकत झौंकी है।
छर्रा में सपा प्रत्याशी राकेश सिंह, कांग्रेस के परवेज अहमद, बसपा के मूलचंद्र बघेल और जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के रवेंद्र पाल सिंह में कड़ी टक्कर है।
आगरा में राजनीतिक विश्लेषक बृज खंडेलवाल ने बताया, "पिछले पांच चरणों के मतदान के बाद कोई भी पार्टी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नहीं है। इस दौर के मतदान के बाद भी स्थिति बदलती नहीं दिख रही। इस बार का चुनाव बिल्कुल अलग किस्म का है। पूरी तरह सक्रिय भूमिका निभा रहा निर्वाचन आयोग इसके लिए धन्यवाद का पात्र है, जिसने अपने तेवर में कोई नरमी नहीं दिखाई और न ही किसी पार्टी को कोई छूट दी।"टिप्पणियां
क्षेत्रीय मीडिया और गैर सरकारी संगठनों ने भी मतदाताओं को प्रेरित करने के लिए कई सिलसिलेवार कार्यक्रम चलाए हैं।
इस दौर में खास बात जो देखने में आई है वह यह है कि इस बार चुनावों पर पैसे का असर नहीं दिख रहा है। प्रशासन सख्ती से नजर रख रहा है।
(कुछ अंश एजेंसियों से)
स्थानीय लोगों की मानें तो ऊर्जा मंत्री के भाई के चुनाव मैदान में उतरने के कारण बिजली आपूर्ति थोड़ी सुधरी है, लेकिन वह भी चुनाव से ऐन पहले।
डिबाई विधानसभा क्षेत्र के जातीय आंकड़ों की बात करें, तो यहां लोध राजपूत मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक करीब 92,000 है, जो निर्णायक साबित होती है। इसके अलावा मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 38,000, क्षत्रिय 16,000 और जाट मतदाताओं की लगभग 18,000 संख्या भी उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करने में महत्वपूर्ण साबित होगी।
अलीगढ़ जनपद की सात विधानसभा सीटों पर 1197148 पुरुष और 957556 स्त्री मतदाता अपने प्रतिनिधि का चयन करेंगे।
नए परिसीमन के कारण हाई प्रोफाइल सीट और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के गढ़ अतरौली में उनकी पुत्रवधु व जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) की प्रत्याशी प्रेमलता वर्मा, भाजपा के राजेश भारद्वाज, सपा के वीरेश यादव, बसपा के साकिब, कांग्रेस के विजेंद्र सिंह और राष्ट्रीय सवर्ण दल के चमन शर्मा का बहुकोणीय मुकाबला है।
अलीगढ़ शहर विधानसभा क्षेत्र से सपा प्रत्याशी जफर आलम, भाजपा के आशुतोष वार्ष्णेय, कांग्रेस के योगेश दीक्षित, बसपा के संजय शर्मा और रासद के प्रत्याशी डॉ. सीपी गुप्ता के बीच मुकाबला है।
बरौली क्षेत्र से बसपा सरकार में मंत्री रहे जयवीर सिंह तीसरी बार सफलता प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं। रालोद के दलवीर सिंह, भाजपा के मुनीश गौड़, सपा के मोहन लाल बघेल, जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के केशव सिंह और रासद के गजेंद्र सिंह उन्हें टक्कर दे रहे हैं।
कोल विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी विवेक बंसल, सपा के जमीरुल्ला, बसपा के जियाउर्रहमान और भाजपा के योगेंद्र लालू दौड़ में शामिल हैं।
रालोद की परंपरागत सीट माने जाने वाले इगलास क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी त्रिलोकीराम परंपरा को कायम रखने की कोशिश करेंगे। उनका बसपा के राजेंद्र कुमार, भाजपा की रामसखी कठेरिया से कड़ा मुकाबला है।
रालोद के ही दूसरे गढ़ खैर क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी भगवती प्रसाद और बसपा की राजरानी मुख्य दौड़ में शामिल हैं। भाजपा के अनूप वाल्मीकि और सपा के गुरविंदर सिंह भी अपनी पूरी ताकत झौंकी है।
छर्रा में सपा प्रत्याशी राकेश सिंह, कांग्रेस के परवेज अहमद, बसपा के मूलचंद्र बघेल और जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के रवेंद्र पाल सिंह में कड़ी टक्कर है।
आगरा में राजनीतिक विश्लेषक बृज खंडेलवाल ने बताया, "पिछले पांच चरणों के मतदान के बाद कोई भी पार्टी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नहीं है। इस दौर के मतदान के बाद भी स्थिति बदलती नहीं दिख रही। इस बार का चुनाव बिल्कुल अलग किस्म का है। पूरी तरह सक्रिय भूमिका निभा रहा निर्वाचन आयोग इसके लिए धन्यवाद का पात्र है, जिसने अपने तेवर में कोई नरमी नहीं दिखाई और न ही किसी पार्टी को कोई छूट दी।"टिप्पणियां
क्षेत्रीय मीडिया और गैर सरकारी संगठनों ने भी मतदाताओं को प्रेरित करने के लिए कई सिलसिलेवार कार्यक्रम चलाए हैं।
इस दौर में खास बात जो देखने में आई है वह यह है कि इस बार चुनावों पर पैसे का असर नहीं दिख रहा है। प्रशासन सख्ती से नजर रख रहा है।
(कुछ अंश एजेंसियों से)
डिबाई विधानसभा क्षेत्र के जातीय आंकड़ों की बात करें, तो यहां लोध राजपूत मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक करीब 92,000 है, जो निर्णायक साबित होती है। इसके अलावा मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 38,000, क्षत्रिय 16,000 और जाट मतदाताओं की लगभग 18,000 संख्या भी उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करने में महत्वपूर्ण साबित होगी।
अलीगढ़ जनपद की सात विधानसभा सीटों पर 1197148 पुरुष और 957556 स्त्री मतदाता अपने प्रतिनिधि का चयन करेंगे।
नए परिसीमन के कारण हाई प्रोफाइल सीट और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के गढ़ अतरौली में उनकी पुत्रवधु व जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) की प्रत्याशी प्रेमलता वर्मा, भाजपा के राजेश भारद्वाज, सपा के वीरेश यादव, बसपा के साकिब, कांग्रेस के विजेंद्र सिंह और राष्ट्रीय सवर्ण दल के चमन शर्मा का बहुकोणीय मुकाबला है।
अलीगढ़ शहर विधानसभा क्षेत्र से सपा प्रत्याशी जफर आलम, भाजपा के आशुतोष वार्ष्णेय, कांग्रेस के योगेश दीक्षित, बसपा के संजय शर्मा और रासद के प्रत्याशी डॉ. सीपी गुप्ता के बीच मुकाबला है।
बरौली क्षेत्र से बसपा सरकार में मंत्री रहे जयवीर सिंह तीसरी बार सफलता प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं। रालोद के दलवीर सिंह, भाजपा के मुनीश गौड़, सपा के मोहन लाल बघेल, जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के केशव सिंह और रासद के गजेंद्र सिंह उन्हें टक्कर दे रहे हैं।
कोल विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी विवेक बंसल, सपा के जमीरुल्ला, बसपा के जियाउर्रहमान और भाजपा के योगेंद्र लालू दौड़ में शामिल हैं।
रालोद की परंपरागत सीट माने जाने वाले इगलास क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी त्रिलोकीराम परंपरा को कायम रखने की कोशिश करेंगे। उनका बसपा के राजेंद्र कुमार, भाजपा की रामसखी कठेरिया से कड़ा मुकाबला है।
रालोद के ही दूसरे गढ़ खैर क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी भगवती प्रसाद और बसपा की राजरानी मुख्य दौड़ में शामिल हैं। भाजपा के अनूप वाल्मीकि और सपा के गुरविंदर सिंह भी अपनी पूरी ताकत झौंकी है।
छर्रा में सपा प्रत्याशी राकेश सिंह, कांग्रेस के परवेज अहमद, बसपा के मूलचंद्र बघेल और जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के रवेंद्र पाल सिंह में कड़ी टक्कर है।
आगरा में राजनीतिक विश्लेषक बृज खंडेलवाल ने बताया, "पिछले पांच चरणों के मतदान के बाद कोई भी पार्टी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नहीं है। इस दौर के मतदान के बाद भी स्थिति बदलती नहीं दिख रही। इस बार का चुनाव बिल्कुल अलग किस्म का है। पूरी तरह सक्रिय भूमिका निभा रहा निर्वाचन आयोग इसके लिए धन्यवाद का पात्र है, जिसने अपने तेवर में कोई नरमी नहीं दिखाई और न ही किसी पार्टी को कोई छूट दी।"टिप्पणियां
क्षेत्रीय मीडिया और गैर सरकारी संगठनों ने भी मतदाताओं को प्रेरित करने के लिए कई सिलसिलेवार कार्यक्रम चलाए हैं।
इस दौर में खास बात जो देखने में आई है वह यह है कि इस बार चुनावों पर पैसे का असर नहीं दिख रहा है। प्रशासन सख्ती से नजर रख रहा है।
(कुछ अंश एजेंसियों से)
अलीगढ़ जनपद की सात विधानसभा सीटों पर 1197148 पुरुष और 957556 स्त्री मतदाता अपने प्रतिनिधि का चयन करेंगे।
नए परिसीमन के कारण हाई प्रोफाइल सीट और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के गढ़ अतरौली में उनकी पुत्रवधु व जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) की प्रत्याशी प्रेमलता वर्मा, भाजपा के राजेश भारद्वाज, सपा के वीरेश यादव, बसपा के साकिब, कांग्रेस के विजेंद्र सिंह और राष्ट्रीय सवर्ण दल के चमन शर्मा का बहुकोणीय मुकाबला है।
अलीगढ़ शहर विधानसभा क्षेत्र से सपा प्रत्याशी जफर आलम, भाजपा के आशुतोष वार्ष्णेय, कांग्रेस के योगेश दीक्षित, बसपा के संजय शर्मा और रासद के प्रत्याशी डॉ. सीपी गुप्ता के बीच मुकाबला है।
बरौली क्षेत्र से बसपा सरकार में मंत्री रहे जयवीर सिंह तीसरी बार सफलता प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं। रालोद के दलवीर सिंह, भाजपा के मुनीश गौड़, सपा के मोहन लाल बघेल, जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के केशव सिंह और रासद के गजेंद्र सिंह उन्हें टक्कर दे रहे हैं।
कोल विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी विवेक बंसल, सपा के जमीरुल्ला, बसपा के जियाउर्रहमान और भाजपा के योगेंद्र लालू दौड़ में शामिल हैं।
रालोद की परंपरागत सीट माने जाने वाले इगलास क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी त्रिलोकीराम परंपरा को कायम रखने की कोशिश करेंगे। उनका बसपा के राजेंद्र कुमार, भाजपा की रामसखी कठेरिया से कड़ा मुकाबला है।
रालोद के ही दूसरे गढ़ खैर क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी भगवती प्रसाद और बसपा की राजरानी मुख्य दौड़ में शामिल हैं। भाजपा के अनूप वाल्मीकि और सपा के गुरविंदर सिंह भी अपनी पूरी ताकत झौंकी है।
छर्रा में सपा प्रत्याशी राकेश सिंह, कांग्रेस के परवेज अहमद, बसपा के मूलचंद्र बघेल और जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के रवेंद्र पाल सिंह में कड़ी टक्कर है।
आगरा में राजनीतिक विश्लेषक बृज खंडेलवाल ने बताया, "पिछले पांच चरणों के मतदान के बाद कोई भी पार्टी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नहीं है। इस दौर के मतदान के बाद भी स्थिति बदलती नहीं दिख रही। इस बार का चुनाव बिल्कुल अलग किस्म का है। पूरी तरह सक्रिय भूमिका निभा रहा निर्वाचन आयोग इसके लिए धन्यवाद का पात्र है, जिसने अपने तेवर में कोई नरमी नहीं दिखाई और न ही किसी पार्टी को कोई छूट दी।"टिप्पणियां
क्षेत्रीय मीडिया और गैर सरकारी संगठनों ने भी मतदाताओं को प्रेरित करने के लिए कई सिलसिलेवार कार्यक्रम चलाए हैं।
इस दौर में खास बात जो देखने में आई है वह यह है कि इस बार चुनावों पर पैसे का असर नहीं दिख रहा है। प्रशासन सख्ती से नजर रख रहा है।
(कुछ अंश एजेंसियों से)
नए परिसीमन के कारण हाई प्रोफाइल सीट और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के गढ़ अतरौली में उनकी पुत्रवधु व जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) की प्रत्याशी प्रेमलता वर्मा, भाजपा के राजेश भारद्वाज, सपा के वीरेश यादव, बसपा के साकिब, कांग्रेस के विजेंद्र सिंह और राष्ट्रीय सवर्ण दल के चमन शर्मा का बहुकोणीय मुकाबला है।
अलीगढ़ शहर विधानसभा क्षेत्र से सपा प्रत्याशी जफर आलम, भाजपा के आशुतोष वार्ष्णेय, कांग्रेस के योगेश दीक्षित, बसपा के संजय शर्मा और रासद के प्रत्याशी डॉ. सीपी गुप्ता के बीच मुकाबला है।
बरौली क्षेत्र से बसपा सरकार में मंत्री रहे जयवीर सिंह तीसरी बार सफलता प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं। रालोद के दलवीर सिंह, भाजपा के मुनीश गौड़, सपा के मोहन लाल बघेल, जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के केशव सिंह और रासद के गजेंद्र सिंह उन्हें टक्कर दे रहे हैं।
कोल विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी विवेक बंसल, सपा के जमीरुल्ला, बसपा के जियाउर्रहमान और भाजपा के योगेंद्र लालू दौड़ में शामिल हैं।
रालोद की परंपरागत सीट माने जाने वाले इगलास क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी त्रिलोकीराम परंपरा को कायम रखने की कोशिश करेंगे। उनका बसपा के राजेंद्र कुमार, भाजपा की रामसखी कठेरिया से कड़ा मुकाबला है।
रालोद के ही दूसरे गढ़ खैर क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी भगवती प्रसाद और बसपा की राजरानी मुख्य दौड़ में शामिल हैं। भाजपा के अनूप वाल्मीकि और सपा के गुरविंदर सिंह भी अपनी पूरी ताकत झौंकी है।
छर्रा में सपा प्रत्याशी राकेश सिंह, कांग्रेस के परवेज अहमद, बसपा के मूलचंद्र बघेल और जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के रवेंद्र पाल सिंह में कड़ी टक्कर है।
आगरा में राजनीतिक विश्लेषक बृज खंडेलवाल ने बताया, "पिछले पांच चरणों के मतदान के बाद कोई भी पार्टी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नहीं है। इस दौर के मतदान के बाद भी स्थिति बदलती नहीं दिख रही। इस बार का चुनाव बिल्कुल अलग किस्म का है। पूरी तरह सक्रिय भूमिका निभा रहा निर्वाचन आयोग इसके लिए धन्यवाद का पात्र है, जिसने अपने तेवर में कोई नरमी नहीं दिखाई और न ही किसी पार्टी को कोई छूट दी।"टिप्पणियां
क्षेत्रीय मीडिया और गैर सरकारी संगठनों ने भी मतदाताओं को प्रेरित करने के लिए कई सिलसिलेवार कार्यक्रम चलाए हैं।
इस दौर में खास बात जो देखने में आई है वह यह है कि इस बार चुनावों पर पैसे का असर नहीं दिख रहा है। प्रशासन सख्ती से नजर रख रहा है।
(कुछ अंश एजेंसियों से)
अलीगढ़ शहर विधानसभा क्षेत्र से सपा प्रत्याशी जफर आलम, भाजपा के आशुतोष वार्ष्णेय, कांग्रेस के योगेश दीक्षित, बसपा के संजय शर्मा और रासद के प्रत्याशी डॉ. सीपी गुप्ता के बीच मुकाबला है।
बरौली क्षेत्र से बसपा सरकार में मंत्री रहे जयवीर सिंह तीसरी बार सफलता प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं। रालोद के दलवीर सिंह, भाजपा के मुनीश गौड़, सपा के मोहन लाल बघेल, जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के केशव सिंह और रासद के गजेंद्र सिंह उन्हें टक्कर दे रहे हैं।
कोल विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी विवेक बंसल, सपा के जमीरुल्ला, बसपा के जियाउर्रहमान और भाजपा के योगेंद्र लालू दौड़ में शामिल हैं।
रालोद की परंपरागत सीट माने जाने वाले इगलास क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी त्रिलोकीराम परंपरा को कायम रखने की कोशिश करेंगे। उनका बसपा के राजेंद्र कुमार, भाजपा की रामसखी कठेरिया से कड़ा मुकाबला है।
रालोद के ही दूसरे गढ़ खैर क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी भगवती प्रसाद और बसपा की राजरानी मुख्य दौड़ में शामिल हैं। भाजपा के अनूप वाल्मीकि और सपा के गुरविंदर सिंह भी अपनी पूरी ताकत झौंकी है।
छर्रा में सपा प्रत्याशी राकेश सिंह, कांग्रेस के परवेज अहमद, बसपा के मूलचंद्र बघेल और जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के रवेंद्र पाल सिंह में कड़ी टक्कर है।
आगरा में राजनीतिक विश्लेषक बृज खंडेलवाल ने बताया, "पिछले पांच चरणों के मतदान के बाद कोई भी पार्टी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नहीं है। इस दौर के मतदान के बाद भी स्थिति बदलती नहीं दिख रही। इस बार का चुनाव बिल्कुल अलग किस्म का है। पूरी तरह सक्रिय भूमिका निभा रहा निर्वाचन आयोग इसके लिए धन्यवाद का पात्र है, जिसने अपने तेवर में कोई नरमी नहीं दिखाई और न ही किसी पार्टी को कोई छूट दी।"टिप्पणियां
क्षेत्रीय मीडिया और गैर सरकारी संगठनों ने भी मतदाताओं को प्रेरित करने के लिए कई सिलसिलेवार कार्यक्रम चलाए हैं।
इस दौर में खास बात जो देखने में आई है वह यह है कि इस बार चुनावों पर पैसे का असर नहीं दिख रहा है। प्रशासन सख्ती से नजर रख रहा है।
(कुछ अंश एजेंसियों से)
बरौली क्षेत्र से बसपा सरकार में मंत्री रहे जयवीर सिंह तीसरी बार सफलता प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं। रालोद के दलवीर सिंह, भाजपा के मुनीश गौड़, सपा के मोहन लाल बघेल, जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के केशव सिंह और रासद के गजेंद्र सिंह उन्हें टक्कर दे रहे हैं।
कोल विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी विवेक बंसल, सपा के जमीरुल्ला, बसपा के जियाउर्रहमान और भाजपा के योगेंद्र लालू दौड़ में शामिल हैं।
रालोद की परंपरागत सीट माने जाने वाले इगलास क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी त्रिलोकीराम परंपरा को कायम रखने की कोशिश करेंगे। उनका बसपा के राजेंद्र कुमार, भाजपा की रामसखी कठेरिया से कड़ा मुकाबला है।
रालोद के ही दूसरे गढ़ खैर क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी भगवती प्रसाद और बसपा की राजरानी मुख्य दौड़ में शामिल हैं। भाजपा के अनूप वाल्मीकि और सपा के गुरविंदर सिंह भी अपनी पूरी ताकत झौंकी है।
छर्रा में सपा प्रत्याशी राकेश सिंह, कांग्रेस के परवेज अहमद, बसपा के मूलचंद्र बघेल और जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के रवेंद्र पाल सिंह में कड़ी टक्कर है।
आगरा में राजनीतिक विश्लेषक बृज खंडेलवाल ने बताया, "पिछले पांच चरणों के मतदान के बाद कोई भी पार्टी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नहीं है। इस दौर के मतदान के बाद भी स्थिति बदलती नहीं दिख रही। इस बार का चुनाव बिल्कुल अलग किस्म का है। पूरी तरह सक्रिय भूमिका निभा रहा निर्वाचन आयोग इसके लिए धन्यवाद का पात्र है, जिसने अपने तेवर में कोई नरमी नहीं दिखाई और न ही किसी पार्टी को कोई छूट दी।"टिप्पणियां
क्षेत्रीय मीडिया और गैर सरकारी संगठनों ने भी मतदाताओं को प्रेरित करने के लिए कई सिलसिलेवार कार्यक्रम चलाए हैं।
इस दौर में खास बात जो देखने में आई है वह यह है कि इस बार चुनावों पर पैसे का असर नहीं दिख रहा है। प्रशासन सख्ती से नजर रख रहा है।
(कुछ अंश एजेंसियों से)
कोल विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी विवेक बंसल, सपा के जमीरुल्ला, बसपा के जियाउर्रहमान और भाजपा के योगेंद्र लालू दौड़ में शामिल हैं।
रालोद की परंपरागत सीट माने जाने वाले इगलास क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी त्रिलोकीराम परंपरा को कायम रखने की कोशिश करेंगे। उनका बसपा के राजेंद्र कुमार, भाजपा की रामसखी कठेरिया से कड़ा मुकाबला है।
रालोद के ही दूसरे गढ़ खैर क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी भगवती प्रसाद और बसपा की राजरानी मुख्य दौड़ में शामिल हैं। भाजपा के अनूप वाल्मीकि और सपा के गुरविंदर सिंह भी अपनी पूरी ताकत झौंकी है।
छर्रा में सपा प्रत्याशी राकेश सिंह, कांग्रेस के परवेज अहमद, बसपा के मूलचंद्र बघेल और जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के रवेंद्र पाल सिंह में कड़ी टक्कर है।
आगरा में राजनीतिक विश्लेषक बृज खंडेलवाल ने बताया, "पिछले पांच चरणों के मतदान के बाद कोई भी पार्टी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नहीं है। इस दौर के मतदान के बाद भी स्थिति बदलती नहीं दिख रही। इस बार का चुनाव बिल्कुल अलग किस्म का है। पूरी तरह सक्रिय भूमिका निभा रहा निर्वाचन आयोग इसके लिए धन्यवाद का पात्र है, जिसने अपने तेवर में कोई नरमी नहीं दिखाई और न ही किसी पार्टी को कोई छूट दी।"टिप्पणियां
क्षेत्रीय मीडिया और गैर सरकारी संगठनों ने भी मतदाताओं को प्रेरित करने के लिए कई सिलसिलेवार कार्यक्रम चलाए हैं।
इस दौर में खास बात जो देखने में आई है वह यह है कि इस बार चुनावों पर पैसे का असर नहीं दिख रहा है। प्रशासन सख्ती से नजर रख रहा है।
(कुछ अंश एजेंसियों से)
रालोद की परंपरागत सीट माने जाने वाले इगलास क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी त्रिलोकीराम परंपरा को कायम रखने की कोशिश करेंगे। उनका बसपा के राजेंद्र कुमार, भाजपा की रामसखी कठेरिया से कड़ा मुकाबला है।
रालोद के ही दूसरे गढ़ खैर क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी भगवती प्रसाद और बसपा की राजरानी मुख्य दौड़ में शामिल हैं। भाजपा के अनूप वाल्मीकि और सपा के गुरविंदर सिंह भी अपनी पूरी ताकत झौंकी है।
छर्रा में सपा प्रत्याशी राकेश सिंह, कांग्रेस के परवेज अहमद, बसपा के मूलचंद्र बघेल और जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के रवेंद्र पाल सिंह में कड़ी टक्कर है।
आगरा में राजनीतिक विश्लेषक बृज खंडेलवाल ने बताया, "पिछले पांच चरणों के मतदान के बाद कोई भी पार्टी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नहीं है। इस दौर के मतदान के बाद भी स्थिति बदलती नहीं दिख रही। इस बार का चुनाव बिल्कुल अलग किस्म का है। पूरी तरह सक्रिय भूमिका निभा रहा निर्वाचन आयोग इसके लिए धन्यवाद का पात्र है, जिसने अपने तेवर में कोई नरमी नहीं दिखाई और न ही किसी पार्टी को कोई छूट दी।"टिप्पणियां
क्षेत्रीय मीडिया और गैर सरकारी संगठनों ने भी मतदाताओं को प्रेरित करने के लिए कई सिलसिलेवार कार्यक्रम चलाए हैं।
इस दौर में खास बात जो देखने में आई है वह यह है कि इस बार चुनावों पर पैसे का असर नहीं दिख रहा है। प्रशासन सख्ती से नजर रख रहा है।
(कुछ अंश एजेंसियों से)
रालोद के ही दूसरे गढ़ खैर क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी भगवती प्रसाद और बसपा की राजरानी मुख्य दौड़ में शामिल हैं। भाजपा के अनूप वाल्मीकि और सपा के गुरविंदर सिंह भी अपनी पूरी ताकत झौंकी है।
छर्रा में सपा प्रत्याशी राकेश सिंह, कांग्रेस के परवेज अहमद, बसपा के मूलचंद्र बघेल और जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के रवेंद्र पाल सिंह में कड़ी टक्कर है।
आगरा में राजनीतिक विश्लेषक बृज खंडेलवाल ने बताया, "पिछले पांच चरणों के मतदान के बाद कोई भी पार्टी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नहीं है। इस दौर के मतदान के बाद भी स्थिति बदलती नहीं दिख रही। इस बार का चुनाव बिल्कुल अलग किस्म का है। पूरी तरह सक्रिय भूमिका निभा रहा निर्वाचन आयोग इसके लिए धन्यवाद का पात्र है, जिसने अपने तेवर में कोई नरमी नहीं दिखाई और न ही किसी पार्टी को कोई छूट दी।"टिप्पणियां
क्षेत्रीय मीडिया और गैर सरकारी संगठनों ने भी मतदाताओं को प्रेरित करने के लिए कई सिलसिलेवार कार्यक्रम चलाए हैं।
इस दौर में खास बात जो देखने में आई है वह यह है कि इस बार चुनावों पर पैसे का असर नहीं दिख रहा है। प्रशासन सख्ती से नजर रख रहा है।
(कुछ अंश एजेंसियों से)
छर्रा में सपा प्रत्याशी राकेश सिंह, कांग्रेस के परवेज अहमद, बसपा के मूलचंद्र बघेल और जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के रवेंद्र पाल सिंह में कड़ी टक्कर है।
आगरा में राजनीतिक विश्लेषक बृज खंडेलवाल ने बताया, "पिछले पांच चरणों के मतदान के बाद कोई भी पार्टी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नहीं है। इस दौर के मतदान के बाद भी स्थिति बदलती नहीं दिख रही। इस बार का चुनाव बिल्कुल अलग किस्म का है। पूरी तरह सक्रिय भूमिका निभा रहा निर्वाचन आयोग इसके लिए धन्यवाद का पात्र है, जिसने अपने तेवर में कोई नरमी नहीं दिखाई और न ही किसी पार्टी को कोई छूट दी।"टिप्पणियां
क्षेत्रीय मीडिया और गैर सरकारी संगठनों ने भी मतदाताओं को प्रेरित करने के लिए कई सिलसिलेवार कार्यक्रम चलाए हैं।
इस दौर में खास बात जो देखने में आई है वह यह है कि इस बार चुनावों पर पैसे का असर नहीं दिख रहा है। प्रशासन सख्ती से नजर रख रहा है।
(कुछ अंश एजेंसियों से)
आगरा में राजनीतिक विश्लेषक बृज खंडेलवाल ने बताया, "पिछले पांच चरणों के मतदान के बाद कोई भी पार्टी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नहीं है। इस दौर के मतदान के बाद भी स्थिति बदलती नहीं दिख रही। इस बार का चुनाव बिल्कुल अलग किस्म का है। पूरी तरह सक्रिय भूमिका निभा रहा निर्वाचन आयोग इसके लिए धन्यवाद का पात्र है, जिसने अपने तेवर में कोई नरमी नहीं दिखाई और न ही किसी पार्टी को कोई छूट दी।"टिप्पणियां
क्षेत्रीय मीडिया और गैर सरकारी संगठनों ने भी मतदाताओं को प्रेरित करने के लिए कई सिलसिलेवार कार्यक्रम चलाए हैं।
इस दौर में खास बात जो देखने में आई है वह यह है कि इस बार चुनावों पर पैसे का असर नहीं दिख रहा है। प्रशासन सख्ती से नजर रख रहा है।
(कुछ अंश एजेंसियों से)
क्षेत्रीय मीडिया और गैर सरकारी संगठनों ने भी मतदाताओं को प्रेरित करने के लिए कई सिलसिलेवार कार्यक्रम चलाए हैं।
इस दौर में खास बात जो देखने में आई है वह यह है कि इस बार चुनावों पर पैसे का असर नहीं दिख रहा है। प्रशासन सख्ती से नजर रख रहा है।
(कुछ अंश एजेंसियों से)
इस दौर में खास बात जो देखने में आई है वह यह है कि इस बार चुनावों पर पैसे का असर नहीं दिख रहा है। प्रशासन सख्ती से नजर रख रहा है।
(कुछ अंश एजेंसियों से) | यहाँ एक सारांश है:उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के छठे चरण में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 13 जिलों की 68 सीटों पर 86 महिलाओं सहित कुल 1103 उम्मीदवार मैदान में हैं जिनकी किस्मत का फैसला करीब 2.14 करोड़ मतदाता करेंगे। | 18 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: फिनलैंड की हैंडसेट कंपनी नोकिया ने नया स्मार्टफोन लूमिया 1020 पेश किया है। इस स्मार्टफोन में 41 मेगापिक्सेल का कैमरा लगा है। कंपनी ने कहा है कि इस मॉडल से इमेजिंग में उसकी अग्रणी स्थिति और मजबूत हो सकेगी।टिप्पणियां
नोकिया के अध्यक्ष एवं सीईओ स्टीफन इलॉप ने कहा कि लूमिया 1020 से तस्वीरों को नया अर्थ मिलेगा और इमेजिंग में कंपनी की स्थिति और मजबूत होगी।
नोकिया लूमिया 1020 में 1.2 एमपी का फ्रंट कैमरा लगा है, जिससे वीडियो कॉल्स की जा सकती हैं। नोकिया लूमिया 1020 की बिक्री अमेरिका में 26 जुलाई से शुरू करेगी। इसकी कीमत 299.99 डॉलर (लगभग 17,890 रुपये) है।
नोकिया के अध्यक्ष एवं सीईओ स्टीफन इलॉप ने कहा कि लूमिया 1020 से तस्वीरों को नया अर्थ मिलेगा और इमेजिंग में कंपनी की स्थिति और मजबूत होगी।
नोकिया लूमिया 1020 में 1.2 एमपी का फ्रंट कैमरा लगा है, जिससे वीडियो कॉल्स की जा सकती हैं। नोकिया लूमिया 1020 की बिक्री अमेरिका में 26 जुलाई से शुरू करेगी। इसकी कीमत 299.99 डॉलर (लगभग 17,890 रुपये) है।
नोकिया लूमिया 1020 में 1.2 एमपी का फ्रंट कैमरा लगा है, जिससे वीडियो कॉल्स की जा सकती हैं। नोकिया लूमिया 1020 की बिक्री अमेरिका में 26 जुलाई से शुरू करेगी। इसकी कीमत 299.99 डॉलर (लगभग 17,890 रुपये) है। | यहाँ एक सारांश है:फिनलैंड की हैंडसेट कंपनी नोकिया ने नया स्मार्टफोन लूमिया 1020 पेश किया है, जिसमें 41 मेगापिक्सेल का कैमरा लगा है। अमेरिका में इसकी बिक्री 26 जुलाई से शुरू करेगी। इसकी कीमत 299.99 डॉलर (लगभग 17,890 रुपये) है। | 15 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: सीरिया में चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों और राष्ट्रपति बशर अल-असद द्वारा निहत्थे लोगों के खिलाफ की जा रही हिंसक कार्रवाई की आलोचना करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने देश में जारी हिंसा पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। हिलेरी ने कहा, निहत्थे लोगों पर राष्ट्रपति असद की क्रूर कार्रवाई ने इस क्षेत्र, विश्व और सबसे महत्वपूर्ण सीरियाई लोगों में जबर्दस्त गुस्सा पैदा किया है। अरब लीग, जीसीसी और जोर्डन और मिस्र की सरकारों ने इस कार्रवाई की निंदा की है। कई चेतावनियों के बाद अब तुर्की के राष्ट्रपति ने भी घोषणा की है कि वह असद पर अपना विश्वास खो चुके हैं। लीबिया को लेकर पेरिस में हुए एक सम्मेलन के बाद हिलेरी ने कहा, हिंसा रुकनी चाहिए और असद को सत्ता छोड़ने की जरूरत है। सीरिया को आगे बढ़ने की जरूरत है। असद पर दबाव बनाने की बात करते हुए उन्होंने कहा, इस अभियान में जो अमेरिका के साथ हैं उन्हें अपनी बातों को ठोस कदम में तब्दील करने की जरूरत है ताकि असद और उनके चमचों पर दबाव बनाया जा सके। इसमें सीरिया के खिलाफ नए प्रतिबंध लगाए जाने भी शामिल हैं। | यहाँ एक सारांश है:हिलेरी ने कहा, निहत्थे लोगों पर राष्ट्रपति असद की क्रूर कार्रवाई ने इस क्षेत्र, विश्व और सबसे महत्वपूर्ण सीरियाई लोगों में जबर्दस्त गुस्सा पैदा किया है। | 4 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ भारत में हो रहे प्रदर्शनों पर यहां चीनी महावाणिज्य दूत जेड लियोउ ने बुधवार को कहा कि यह भारत का आंतरिक मामला है. कोलकाता में नियुक्त चीन के महावाणिज्य दूत ने कहा कि भारत को ही इस समस्या का हल निकालना होगा. लियोउ ने एक कार्यक्रम के इतर पत्रकारों से कहा, ‘यह भारत का आंतरिक मामला है. हमारे पास इस पर कहने के लिए कुछ नहीं है. यह आपका देश है और आपको अपने मुद्दे खुद ही हल करने होंगे.' उन्होंने कहा कि भारत और चीन के बीच अच्छे संबंध हैं.
बता दें, देशभर में बुधवार को नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में कुछ नरमी आयी . एक ओर पुलिस और अर्द्धसैन्य बलों ने दिल्ली के उत्तर पूर्वी इलाके में फ्लैग मार्च किया तो दूसरी ओर उच्चतम न्यायालय ने विवादित कानून की संवैधानिक वैधता की जांच करने का फैसला किया लेकिन उसके कार्यान्वयन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. दिल्ली के सीलमपुर और जाफराबाद इलाकों में हालात नियंत्रण में रहे लेकिन अधिकारियों ने एहतियातन निषेद्याज्ञा लगा दी. यहां मंगलवार को कानून के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान 12 पुलिसकर्मियों समेत 21 लोग घायल हो गए थे. पुलिस ने मंगलवार को हुई हिंसा के संबंध में अभी तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया है.
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने संशोधित नागरिकता कानून और एनआरसी के विरोध में लगातार तीसरे दिन बुधवार को रैली निकाली. बनर्जी ने संशोधित नागरिकता कानून को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने देश को जलता हुआ छोड़ दिया है और उन्हें ही आग बुझानी होगी. अधिकारियों ने बताया कि पश्चिम बंगाल में हिंसा की किसी नयी घटना की रिपोर्ट नहीं है और असम भी शांत है. इन दोनों राज्यों में 11 दिसंबर को संसद द्वारा विवादित नागरिकता (संशोधन) विधेयक के पारित होने के बाद हिंसक प्रदर्शन हुए थे.
दिल्ली में तीसरे दिन जामिया मिल्लिया इस्लामिया के बाहर छात्रों और स्थानीय निवासियों समेत प्रदर्शनकारियों का प्रदर्शन जारी रहा. इसमें शामिल होते हुए पूर्व जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने कहा कि यह प्रदर्शन न केवल मुस्लिमों को बचाने की लड़ाई है बल्कि पूरे देश की रक्षा की लड़ाई है. विश्वविद्यालय के गेट नंबर सात के बाहर प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कुमार ने कहा कि लोगों को राष्ट्रीय नागरिक पंजी को लेकर अधिक चिंतित होना चाहिए जो कि विवादित नागरिकता कानून के मुकाबले कहीं अधिक खतरनाक है.
बसपा सांसदों ने संशोधित नागरिकता क़ानून को ‘‘विभाजनकारी'' बताते हुए बुधवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की और इस कानून को वापस लेने की मांग करते हुए उन्हें एक ज्ञापन सौंपा. पार्टी ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और नदवा कॉलेज के छात्रों पर ‘‘पुलिस कार्रवाई'' की न्यायिक जाँच कराने की भी माँग की.
महाराष्ट्र में मुस्लिम बहुल मुंब्रा समेत कई हिस्सों और मध्य प्रदेश के भोपाल में भी प्रदर्शन हुए. भोपाल के इकबाल मैदान में नागरिकता संशोधन कानून को ‘काला कानून' करार देने के साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर परोक्ष हमला करते हुए वरिष्ठ कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि मुस्लिम माताओं और बहनों का ध्यान रखने के अलावा ‘‘प्रथम सेवक'' को ‘‘प्रथम सेविका'' का भी ध्यान रखना चाहिए.
मद्रास विश्वविद्यालय में छात्रों के एक धड़े ने इस कानून के खिलाफ लगातार तीसरे दिन बुधवार को भी प्रदर्शन किया. मक्कल नीधि मय्यम के प्रमुख कमल हासन ने मद्रास विश्वविद्यालय का दौरा किया और विरोध कर रहे छात्रों के साथ एकजुटता का प्रदर्शन किया. हालाँकि, उन्हें मुख्य परिसर में घुसने की अनुमति नहीं दी गई और उन्होंने विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों से विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार के पीछे से ही बात की. | सारांश: 11 दिसंबर को संसद से पास हुआ था नागरिकता संशोधन बिल
मंगलवार को हुए प्रदर्शन में 21 लोग हुए थे घायल
बसपा कार्यकर्ताओं ने कानून को बताया विभाजनकारी | 33 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: संसद का मॉनसून सत्र आरंभ हो गया है। अपने भाषण में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने विपक्ष से सहयोग की अपील की है। पीएम ने विपक्ष से कहा कि कई अहम मुद्दे फिलहाल कोर्ट में लंबित हैं और कोर्ट को अपना काम करने देना चाहिए। पीएम ने अन्ना हजारे के अनशन पर जाने की धमकी पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि कानून संसद में बनते हैं और किसी भी प्रकार का दबाव सही नहीं है।संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद लोकसभा की कार्यवाही को मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। दूसरी ओर, राज्यसभा की कार्यवाही को भी मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। राज्य सभा में विपक्ष ने सत्र के आरंभ होते ही अध्यक्ष से प्रश्नकाल स्थगित कर 2जी पर बहस और वोटिंग कराने की मांग कर जोरदार हंगामा किया। सरकार की ओर से कहा गया कि बिना किसी का नाम लिए वह इस मुद्दे पर बहस को तैयार है। किंतु विपक्ष का सीधे प्रधानमंत्री और यूपीए अध्यक्षा सोनिया गांधी का पर आरोप लगाने के बाद बात नहीं बन पाई और कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। आज से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में काफी हंगामा होने के आसार व्यक्त किए जा रहे थे। भ्रष्टाचार के मुद्दों पर सरकार को घेरने के संबंध में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पहले ही कह दिया था कि उन्हें किसी बात का खौफ नहीं है, क्योंकि विपक्ष के बहुत से शर्मिन्दा करने वाले राज़ हैं। उधर, विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि प्रधानमंत्री के तरकश में जितने तीर हैं, चला कर देख लें और यह देखा जाएगा कि कौन किस पर वार करता है। प्रधानमंत्री और विपक्ष की नेता ने एक दूसरे को ललकारने वाली ये बातें उस सर्वदलीय बैठक के बाद कहीं जिसे लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने संसद को सुचारू रूप से चलाने के बारे में चर्चा के लिए बुलाया था। | यहाँ एक सारांश है:संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही को मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। | 15 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: गुजरात विधानसभा चुनाव में चार सीटों पर हार जीत का फैसला 1000 से भी कम मतों के अंतर से निर्धारित हुआ। कांग्रेस के पूनमभाई परमार ने सोजितरा विधानसभा क्षेत्र से 162 मतों के अंतर से जीत हासिल की।
पूनमभाई ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विपुल कुमार पटेल को 162 मतों के अंतर से हराया। कांग्रेस को यहां 65210 एवं पटेल को 65048 मत मिले।
दिलचस्प बात यह है कि भाजपा से अलग हुए केशूभाई पटेल की पार्टी गुजरात परिवर्तन पार्टी (जीपीपी) के उम्मीदवार ने 642 मत प्राप्त कर सातवां स्थान हासिल किया।
कलोल से कांग्रेस के बलदेवजी ठाकोर ने भाजपा के अतुलभाई पटेल को 343 मतों के अंतर से पराजित किया। ठाकोर को 64757 और पटेल को 64414 मत प्राप्त हुए। यहां भी जीपीपी के उम्मीदवार 543 मत प्राप्त कर आठवें स्थान पर रहा।टिप्पणियां
कंकरेज में भी यही कहानी दोहराई गई। कांग्रेस प्रत्याशी दर्शनभाई खानपुरा ने 73900 मत प्राप्त कर भाजपा के कीर्ति सिंह को 600 मतों के अंतर से पराजित किया। यहां पर जीपीपी के उम्मीदवार ने 7371 मत प्राप्त कर भाजपा प्रत्याशी की जीत की राह में रोड़ा अटका दिया।
यद्यपि आनंद से भाजपा को सफलता हासिल हुई। भाजपा उम्मीदवार दिलीपभाई पटेल ने 82956 मत प्राप्त कर कांग्रेस के कांतिभाई परमार को 987 मतों के अंतर से हरा दिया।
पूनमभाई ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विपुल कुमार पटेल को 162 मतों के अंतर से हराया। कांग्रेस को यहां 65210 एवं पटेल को 65048 मत मिले।
दिलचस्प बात यह है कि भाजपा से अलग हुए केशूभाई पटेल की पार्टी गुजरात परिवर्तन पार्टी (जीपीपी) के उम्मीदवार ने 642 मत प्राप्त कर सातवां स्थान हासिल किया।
कलोल से कांग्रेस के बलदेवजी ठाकोर ने भाजपा के अतुलभाई पटेल को 343 मतों के अंतर से पराजित किया। ठाकोर को 64757 और पटेल को 64414 मत प्राप्त हुए। यहां भी जीपीपी के उम्मीदवार 543 मत प्राप्त कर आठवें स्थान पर रहा।टिप्पणियां
कंकरेज में भी यही कहानी दोहराई गई। कांग्रेस प्रत्याशी दर्शनभाई खानपुरा ने 73900 मत प्राप्त कर भाजपा के कीर्ति सिंह को 600 मतों के अंतर से पराजित किया। यहां पर जीपीपी के उम्मीदवार ने 7371 मत प्राप्त कर भाजपा प्रत्याशी की जीत की राह में रोड़ा अटका दिया।
यद्यपि आनंद से भाजपा को सफलता हासिल हुई। भाजपा उम्मीदवार दिलीपभाई पटेल ने 82956 मत प्राप्त कर कांग्रेस के कांतिभाई परमार को 987 मतों के अंतर से हरा दिया।
दिलचस्प बात यह है कि भाजपा से अलग हुए केशूभाई पटेल की पार्टी गुजरात परिवर्तन पार्टी (जीपीपी) के उम्मीदवार ने 642 मत प्राप्त कर सातवां स्थान हासिल किया।
कलोल से कांग्रेस के बलदेवजी ठाकोर ने भाजपा के अतुलभाई पटेल को 343 मतों के अंतर से पराजित किया। ठाकोर को 64757 और पटेल को 64414 मत प्राप्त हुए। यहां भी जीपीपी के उम्मीदवार 543 मत प्राप्त कर आठवें स्थान पर रहा।टिप्पणियां
कंकरेज में भी यही कहानी दोहराई गई। कांग्रेस प्रत्याशी दर्शनभाई खानपुरा ने 73900 मत प्राप्त कर भाजपा के कीर्ति सिंह को 600 मतों के अंतर से पराजित किया। यहां पर जीपीपी के उम्मीदवार ने 7371 मत प्राप्त कर भाजपा प्रत्याशी की जीत की राह में रोड़ा अटका दिया।
यद्यपि आनंद से भाजपा को सफलता हासिल हुई। भाजपा उम्मीदवार दिलीपभाई पटेल ने 82956 मत प्राप्त कर कांग्रेस के कांतिभाई परमार को 987 मतों के अंतर से हरा दिया।
कलोल से कांग्रेस के बलदेवजी ठाकोर ने भाजपा के अतुलभाई पटेल को 343 मतों के अंतर से पराजित किया। ठाकोर को 64757 और पटेल को 64414 मत प्राप्त हुए। यहां भी जीपीपी के उम्मीदवार 543 मत प्राप्त कर आठवें स्थान पर रहा।टिप्पणियां
कंकरेज में भी यही कहानी दोहराई गई। कांग्रेस प्रत्याशी दर्शनभाई खानपुरा ने 73900 मत प्राप्त कर भाजपा के कीर्ति सिंह को 600 मतों के अंतर से पराजित किया। यहां पर जीपीपी के उम्मीदवार ने 7371 मत प्राप्त कर भाजपा प्रत्याशी की जीत की राह में रोड़ा अटका दिया।
यद्यपि आनंद से भाजपा को सफलता हासिल हुई। भाजपा उम्मीदवार दिलीपभाई पटेल ने 82956 मत प्राप्त कर कांग्रेस के कांतिभाई परमार को 987 मतों के अंतर से हरा दिया।
कंकरेज में भी यही कहानी दोहराई गई। कांग्रेस प्रत्याशी दर्शनभाई खानपुरा ने 73900 मत प्राप्त कर भाजपा के कीर्ति सिंह को 600 मतों के अंतर से पराजित किया। यहां पर जीपीपी के उम्मीदवार ने 7371 मत प्राप्त कर भाजपा प्रत्याशी की जीत की राह में रोड़ा अटका दिया।
यद्यपि आनंद से भाजपा को सफलता हासिल हुई। भाजपा उम्मीदवार दिलीपभाई पटेल ने 82956 मत प्राप्त कर कांग्रेस के कांतिभाई परमार को 987 मतों के अंतर से हरा दिया।
यद्यपि आनंद से भाजपा को सफलता हासिल हुई। भाजपा उम्मीदवार दिलीपभाई पटेल ने 82956 मत प्राप्त कर कांग्रेस के कांतिभाई परमार को 987 मतों के अंतर से हरा दिया। | यहाँ एक सारांश है:गुजरात विधानसभा चुनाव में चार सीटों पर हार जीत का फैसला 1000 से भी कम मतों के अंतर से निर्धारित हुआ। कांग्रेस के पूनमभाई परमार ने सोजितरा विधानसभा क्षेत्र से 162 मतों के अंतर से जीत हासिल की। | 18 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: कांग्रेस ने रविवार को गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे की उस टिप्पणी के लिए उनका बचाव किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) अपने शिविरों में हिंदू आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है। शिंदे की इस टिप्पणी से भड़की भाजपा ने रविवार को कहा कि अपने बयान के लिए गृह मंत्री माफी मांगें।
शिंदे ने कहा कि उन्होंने केवल वही कहा जो मीडिया में आया है और उनका इशारा "भगवा आतंकवाद" की ओर था। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के चिंतन शिविर में शिंदे ने दक्षिण पंथी तत्वों के आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता की ओर इशारा किया था और कहा था कि भ्रामक सूचनाओं से सावधान रहने की जरूरत है।
शिंदे ने कहा था, "जांच के बाद हमने पाया कि या तो भाजपा या फिर आरएसएस अपने प्रशिक्षण शिविरों में हिंदू आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है। यह चिंता की बात है।"
बाद में उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "इसमें नई बात कुछ भी नहीं है। यह सब कई बार अखबारों में आ चुका है। मैंने भगवा आतंकवाद की बातें की हैं।"
अपने भाषण में शिंदे ने समझौता एक्सप्रेस में विस्फोट, हैदराबाद की मक्का मस्जिद और महाराष्ट्र के मालेगांव की घटना का जिक्र किया और कहा कि भ्रामक सूचनाओं से सावधान रहना चाहिए कि बम अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने रखे थे।
कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने संवाददाताओं से कहा, "हम तो लंबे समय से यह जानते हैं। शिंदे ने यह कहने का साहस किया।"टिप्पणियां
भाजपा नेता सुषमा स्वराज ने कहा, "भगवा आतंकवाद के खिलाफ है। भगवा हमारी परंपरा, संस्कृति और त्याग का प्रतीक है। गृह मंत्री को राष्ट्र से माफी मांगनी चाहिए।"
संसदीय कार्य राज्य मंत्री राजीव शुक्ला ने कहा, "कोई हिंदू या मुस्लिम आतंकवाद नहीं है। उनका आशय दक्षिणपंथी आतंकवाद से था।"
शिंदे ने कहा कि उन्होंने केवल वही कहा जो मीडिया में आया है और उनका इशारा "भगवा आतंकवाद" की ओर था। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के चिंतन शिविर में शिंदे ने दक्षिण पंथी तत्वों के आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता की ओर इशारा किया था और कहा था कि भ्रामक सूचनाओं से सावधान रहने की जरूरत है।
शिंदे ने कहा था, "जांच के बाद हमने पाया कि या तो भाजपा या फिर आरएसएस अपने प्रशिक्षण शिविरों में हिंदू आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है। यह चिंता की बात है।"
बाद में उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "इसमें नई बात कुछ भी नहीं है। यह सब कई बार अखबारों में आ चुका है। मैंने भगवा आतंकवाद की बातें की हैं।"
अपने भाषण में शिंदे ने समझौता एक्सप्रेस में विस्फोट, हैदराबाद की मक्का मस्जिद और महाराष्ट्र के मालेगांव की घटना का जिक्र किया और कहा कि भ्रामक सूचनाओं से सावधान रहना चाहिए कि बम अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने रखे थे।
कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने संवाददाताओं से कहा, "हम तो लंबे समय से यह जानते हैं। शिंदे ने यह कहने का साहस किया।"टिप्पणियां
भाजपा नेता सुषमा स्वराज ने कहा, "भगवा आतंकवाद के खिलाफ है। भगवा हमारी परंपरा, संस्कृति और त्याग का प्रतीक है। गृह मंत्री को राष्ट्र से माफी मांगनी चाहिए।"
संसदीय कार्य राज्य मंत्री राजीव शुक्ला ने कहा, "कोई हिंदू या मुस्लिम आतंकवाद नहीं है। उनका आशय दक्षिणपंथी आतंकवाद से था।"
शिंदे ने कहा था, "जांच के बाद हमने पाया कि या तो भाजपा या फिर आरएसएस अपने प्रशिक्षण शिविरों में हिंदू आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है। यह चिंता की बात है।"
बाद में उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "इसमें नई बात कुछ भी नहीं है। यह सब कई बार अखबारों में आ चुका है। मैंने भगवा आतंकवाद की बातें की हैं।"
अपने भाषण में शिंदे ने समझौता एक्सप्रेस में विस्फोट, हैदराबाद की मक्का मस्जिद और महाराष्ट्र के मालेगांव की घटना का जिक्र किया और कहा कि भ्रामक सूचनाओं से सावधान रहना चाहिए कि बम अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने रखे थे।
कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने संवाददाताओं से कहा, "हम तो लंबे समय से यह जानते हैं। शिंदे ने यह कहने का साहस किया।"टिप्पणियां
भाजपा नेता सुषमा स्वराज ने कहा, "भगवा आतंकवाद के खिलाफ है। भगवा हमारी परंपरा, संस्कृति और त्याग का प्रतीक है। गृह मंत्री को राष्ट्र से माफी मांगनी चाहिए।"
संसदीय कार्य राज्य मंत्री राजीव शुक्ला ने कहा, "कोई हिंदू या मुस्लिम आतंकवाद नहीं है। उनका आशय दक्षिणपंथी आतंकवाद से था।"
बाद में उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "इसमें नई बात कुछ भी नहीं है। यह सब कई बार अखबारों में आ चुका है। मैंने भगवा आतंकवाद की बातें की हैं।"
अपने भाषण में शिंदे ने समझौता एक्सप्रेस में विस्फोट, हैदराबाद की मक्का मस्जिद और महाराष्ट्र के मालेगांव की घटना का जिक्र किया और कहा कि भ्रामक सूचनाओं से सावधान रहना चाहिए कि बम अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने रखे थे।
कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने संवाददाताओं से कहा, "हम तो लंबे समय से यह जानते हैं। शिंदे ने यह कहने का साहस किया।"टिप्पणियां
भाजपा नेता सुषमा स्वराज ने कहा, "भगवा आतंकवाद के खिलाफ है। भगवा हमारी परंपरा, संस्कृति और त्याग का प्रतीक है। गृह मंत्री को राष्ट्र से माफी मांगनी चाहिए।"
संसदीय कार्य राज्य मंत्री राजीव शुक्ला ने कहा, "कोई हिंदू या मुस्लिम आतंकवाद नहीं है। उनका आशय दक्षिणपंथी आतंकवाद से था।"
अपने भाषण में शिंदे ने समझौता एक्सप्रेस में विस्फोट, हैदराबाद की मक्का मस्जिद और महाराष्ट्र के मालेगांव की घटना का जिक्र किया और कहा कि भ्रामक सूचनाओं से सावधान रहना चाहिए कि बम अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने रखे थे।
कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने संवाददाताओं से कहा, "हम तो लंबे समय से यह जानते हैं। शिंदे ने यह कहने का साहस किया।"टिप्पणियां
भाजपा नेता सुषमा स्वराज ने कहा, "भगवा आतंकवाद के खिलाफ है। भगवा हमारी परंपरा, संस्कृति और त्याग का प्रतीक है। गृह मंत्री को राष्ट्र से माफी मांगनी चाहिए।"
संसदीय कार्य राज्य मंत्री राजीव शुक्ला ने कहा, "कोई हिंदू या मुस्लिम आतंकवाद नहीं है। उनका आशय दक्षिणपंथी आतंकवाद से था।"
कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने संवाददाताओं से कहा, "हम तो लंबे समय से यह जानते हैं। शिंदे ने यह कहने का साहस किया।"टिप्पणियां
भाजपा नेता सुषमा स्वराज ने कहा, "भगवा आतंकवाद के खिलाफ है। भगवा हमारी परंपरा, संस्कृति और त्याग का प्रतीक है। गृह मंत्री को राष्ट्र से माफी मांगनी चाहिए।"
संसदीय कार्य राज्य मंत्री राजीव शुक्ला ने कहा, "कोई हिंदू या मुस्लिम आतंकवाद नहीं है। उनका आशय दक्षिणपंथी आतंकवाद से था।"
भाजपा नेता सुषमा स्वराज ने कहा, "भगवा आतंकवाद के खिलाफ है। भगवा हमारी परंपरा, संस्कृति और त्याग का प्रतीक है। गृह मंत्री को राष्ट्र से माफी मांगनी चाहिए।"
संसदीय कार्य राज्य मंत्री राजीव शुक्ला ने कहा, "कोई हिंदू या मुस्लिम आतंकवाद नहीं है। उनका आशय दक्षिणपंथी आतंकवाद से था।"
संसदीय कार्य राज्य मंत्री राजीव शुक्ला ने कहा, "कोई हिंदू या मुस्लिम आतंकवाद नहीं है। उनका आशय दक्षिणपंथी आतंकवाद से था।" | कांग्रेस ने रविवार को गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे की उस टिप्पणी के लिए उनका बचाव किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) अपने शिविरों में हिंदू आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है। शिंदे की इस टिप्पणी से भड़की भाजपा ने रविवार को कहा कि अ | 34 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: गौरतलब है कि गेंद और बल्ले, दोनों से टीम के लिए योगदान देने की क्षमता के कारण जड्डू कप्तान विराट कोहली के पसंदीदा प्लेयर बन चुके हैं. रवींद्र जडेजा इस समय दुनिया के नंबर एक टेस्ट गेंदबाज हैं. इस सीजन में उन्होंने अपनी इस क्षमता को बखूबी प्रदर्शित किया है. उन्होंने एक सीजन में 500 रन बनाने के साथ ही 50 विकेट लेने का कारनामा किया है. ऐसा करने वाले वह दुनिया के तीसरे खिलाड़ी हैं. इससे पहले भारतीय ऑल राउंडर कपिल देव और ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज मिचेल जॉनसन भी ऐसा कर चुके हैं. कपिल देव ने सबसे पहले 1979-80 में यह कारनामा किया था जबकि मिचेल जॉनसन ने 2008-09 में यह कमाल किया था .
गौरतलब है कि गेंद और बल्ले, दोनों से टीम के लिए योगदान देने की क्षमता के कारण जड्डू कप्तान विराट कोहली के पसंदीदा प्लेयर बन चुके हैं. रवींद्र जडेजा इस समय दुनिया के नंबर एक टेस्ट गेंदबाज हैं. इस सीजन में उन्होंने अपनी इस क्षमता को बखूबी प्रदर्शित किया है. उन्होंने एक सीजन में 500 रन बनाने के साथ ही 50 विकेट लेने का कारनामा किया है. ऐसा करने वाले वह दुनिया के तीसरे खिलाड़ी हैं. इससे पहले भारतीय ऑल राउंडर कपिल देव और ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज मिचेल जॉनसन भी ऐसा कर चुके हैं. कपिल देव ने सबसे पहले 1979-80 में यह कारनामा किया था जबकि मिचेल जॉनसन ने 2008-09 में यह कमाल किया था . | टेस्ट क्रिकेट में जडेजा ने अपने 150 विकेट पूरे किए
श्रीलंका की पहली पारी में दो विकेट हासिल किए
टेस्ट क्रिकेट के नंबर वन बॉलर हैं रवींद्र जडेजा | 26 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: व्हाइट हाउस ने कहा है कि वैश्विक स्तर पर हुए साइबर हमले का असर अमेरिका पर उतना अधिक नहीं पड़ा है,जितना कुछ अन्य देशों में पड़ा है. व्हाइट हाउस के अनुसार, इस साइबर हमले के चलते 70 हजार डॉलर से भी कम की ही फिरौती दी गई है.
अमेरिकी राष्ट्रपति के गृह सुरक्षा और आतंकवाद से निपटने के मामलों के सहायक टॉम बोसर्ट ने कहा, ‘अमेरिका में इसके असर की दर दुनिया के कई अन्य हिस्सों की तुलना में कम रही है लेकिन हमें अतिरिक्त नेटवर्कों पर भारी असर देखने को मिल सकता है क्योंकि ये मालवेयर हमले अपना रूप बदलते हैं. ’व्हाइट हाउस के दैनिक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘धन उगाहने के लिए अंजाम दी गई आपराधिक गतिविधि प्रतीत होने के बावजूद ऐसा लगता है कि फिरौती के तौर पर 70 हजार डॉलर से कम की राशि दी गई है और हमें इस बात की जानकारी नहीं है कि यह भुगतान करने से कोई डेटा वापस हासिल हुआ है या नहीं. ’
बोसर्ट ने कहा, ‘साइबर थ्रेट इंटेलिजेंस इंटीग्रेशन सेंटर भी हमलों की जांच को ध्यान में रखते हुए विभिन्न निष्कषरें के बारे में हमें जानकारी दे रहा है.’ उन्होंने कहा कि प्रशासन इस स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है और अमेरिकी सरकार इस मुद्दे से उबरने के लिए हर क्षमता को एकजुट कर रहा है. इसके साथ-साथ वह निजी क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि मैंने कुछ ही समय पहले ब्रिटेन में अपने समकक्ष से बात की और मुझे उनसे यह जानकारी मिली कि उन्हें इस रैनसमवेयर घटना पर काबू कर लेने का अहसास हो रहा है.
उन्होंने कहा, ‘हमारी तरह उन्हें भी यह अहसास है कि यह एक वैश्विक हमला है. मंगलवार सुबह इससे प्रभावित देशों की संख्या 150 हो गई और इससे प्रभावित मशीनों की संख्या तीन लाख से ज्यादा है.’ व्हाइट हाउस के अधिकारी ने कहा कि अच्छी खबर यह है कि इसके संक्रमण की दर सप्ताहांत पर कम हो गई है. पिछली बार जब हमने बात की थी, तब इसके बारे में बहुत चिंतित थे.
बोसर्ट ने कहा, ‘साइबर थ्रेट इंटेलिजेंस इंटीग्रेशन सेंटर भी हमलों की जांच को ध्यान में रखते हुए विभिन्न निष्कषरें के बारे में हमें जानकारी दे रहा है.’ उन्होंने कहा कि प्रशासन इस स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है और अमेरिकी सरकार इस मुद्दे से उबरने के लिए हर क्षमता को एकजुट कर रहा है. इसके साथ-साथ वह निजी क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि मैंने कुछ ही समय पहले ब्रिटेन में अपने समकक्ष से बात की और मुझे उनसे यह जानकारी मिली कि उन्हें इस रैनसमवेयर घटना पर काबू कर लेने का अहसास हो रहा है.
उन्होंने कहा, ‘हमारी तरह उन्हें भी यह अहसास है कि यह एक वैश्विक हमला है. मंगलवार सुबह इससे प्रभावित देशों की संख्या 150 हो गई और इससे प्रभावित मशीनों की संख्या तीन लाख से ज्यादा है.’ व्हाइट हाउस के अधिकारी ने कहा कि अच्छी खबर यह है कि इसके संक्रमण की दर सप्ताहांत पर कम हो गई है. पिछली बार जब हमने बात की थी, तब इसके बारे में बहुत चिंतित थे. | संक्षिप्त सारांश: अमेरिका में इसके असर की दर दुनिया के कई अन्य हिस्सों की तुलना में कम रही
फिरौती के तौर पर 70 हजार डॉलर से कम की राशि दी गई है
अमेरिकी सरकार इस मुद्दे से उबरने के लिए हर क्षमता को एकजुट कर रहा है | 10 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: दिल्ली के बवाना से 15 साल की एक लड़की को मुक्त कराया गया है. लड़की को उसकी मां ने पिछले सप्ताह कथित रूप से तस्करों को बेच दिया था. दिल्ली महिला आयोग ने रविवार को यह जानकारी दी. आयोग के अनुसार मुक्त कराई गई लड़की ने कहा कि उसकी मां ने उसके एक साल के भाई को पिछले महीने तस्करों को बेच दिया था. आयोग ने बताया कि लड़की की मां ने 15 सितंबर को उसे उसके साथ उसकी बहन के घर बदरपुर चलने की बात कही थी, लेकिन इसकी बजाय वह उसे निजामुद्दीन में एक होटल ले गई.
DCW ने बताया कि होटल में सौदा करने के बाद मां ने उसे कहा कि उसे कहीं जाना होगा और शाहिद नाम का कोई व्यक्ति उसे घर ले आएगा, लेकिन शाहिद उसे बवाना गांव में ईश्वर कॉलोनी स्थित अपने घर ले गया. शाहिद के घर पर मौजूद अन्य लड़कियों ने उसे शादी का जोड़ा पहनकर तैयार होने को कहा. उन्होंने लड़की को बताया कि उसकी मां ने उसे एक लाख रुपये में बेच दिया है.
इसके बाद हालांकि एक दिन के अंदर ही वह किसी तरह शाहिद के घर से भागने में सफल रही और बवाना में अपने घर पहुंचकर पड़ोसियों से मदद मांगी जिन्होंने दिल्ली महिला आयोग को फोन किया. लड़की अपनी मां, सौतेले पिता और चार भाई-बहनों के साथ रहती थी. उन्होंने बताया कि इस संबंध में पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है, लेकिन अभी किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है और लड़की को आश्रय गृह भेज दिया गया है.
Video: झारखंड : पैसों की तंगी से जूझते बाप ने बेच दी बेटी | यहाँ एक सारांश है:दिल्ली के बवाना से 15 साल की एक लड़की को कराया मुक्त
लड़की को मां ने पिछले सप्ताह कथित रूप से तस्करों को बेच दिया था
एक लाख रूपए में किया था सौदा | 12 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: ब्रिटेन में एक छात्रा कक्षा में इतनी ऊब गई कि उसने बहुत ताकत लगाकर जम्हाई ली। इससे उसका मुंह खुला का खुला रह गया, जम्हाई लेने से उसके जबड़े अपने स्थान पर हट गए। छात्रा की इस अवस्था का वीडियो यू-ट्यूब पर जारी हुआ है जिसे 600,000 बार देखा गया। 17 वर्षीय होली थॉम्पसन ने जम्हाई लेते समय बहुत ताकत के साथ अपना मुंह इतना ज्यादा खोल लिया कि फिर वह बंद नहीं हो सका। समाचार पत्र 'द सन' के मुताबिक छात्रा के जबड़े अपने स्थान से हट गए और उसे अस्पताल ले जाना पड़ा। होली ने सबसे पहले अपनी इस दशा के बारे में अपनी सहपाठी को बताया लेकिन उसकी मदद के बाद भी उनका मुंह बंद न हो सका। बाद में स्कूल की नर्स ने उनका मुंह बंद करने का हर सम्भव प्रयास किया लेकिन इससे भी कोई मदद नहीं मिली। इसके बाद होली को नॉर्थैम्पटन अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉ. एजिरो ओबाक्पोनोव ने होली के मुंह में जबरदस्ती लकड़ी की 26 खपच्चियां फंसाईं। इससे उनका मुंह और ज्यादा खोलने में मदद मिली और फिर उनके जबड़े की मांसपेशियों को फिर से व्यवस्थित किया गया। होली कहती हैं, "जब हमें लगा कि हम मुंह बंद नहीं कर सकते, तब मेरी मित्र ने शिक्षक को इस सम्बंध में बताया। सभी छात्र हंस पड़े थे। यह बहुत खराब था।" यू-ट्यूब पर होली के इस वीडियो फुटेज को लगभग 600,000 बार देखा गया। | संक्षिप्त पाठ: ब्रिटेन में एक छात्रा कक्षा में इतनी ऊब गई कि उसने बहुत ताकत लगाकर जम्हाई ली। इससे उसका मुंह खुला का खुला रह गया, जम्हाई लेने से उसके जबड़े अपने स्थान पर हट गए। | 27 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: पीएम मोदी ने बुधवार को अपनी कैबिनेट के मंत्रियों के साथ मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने उनसे कई मुद्दों पर बात की. सूत्रों के अनुसार पीएम मोदी ने मंत्रिपरिषद की बैठक में कैबिनेट मंत्रियों से कहा कि अपने मंत्रालय के राज्य मंत्रियों को भई काम दें. उन्होंने इस मौके पर सभी मंत्रियों से कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं से मिलें. इसके लिए बकायदा दिन और समय भी तय किया जाए. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पीएम मोदी ने अपने सभी मंत्रियों से सभी सांसदों से भी नियमित तौर पर मिलने की सलाह दी. साथ ही उन्होंने कहा कि सांसद जब भी मिलने का समय मांगे उन्हें समय दिया जाए.
इस बैठक के दौरान पीएम ने सभी मंत्रियों को समय पर दफ्तर जाने की भी सलाह दी. उन्होंने कहा कि हमें चाहिए कि हम दफ्तर का काम दफ्तर में ही खत्म करें. उसके लिए हमें अपने घर में अतिरिक्त समय निकालने की जरूरत न पड़े. खास बात यह है कि इस बैठक में तीन वरिष्ठ मंत्रियों ने मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रजेंटेशन भी दिया. जिन मंत्रियों ने प्रजेंटेशन दिया उनमें निर्मला सीतारमण, पीयूष गोयल और नरेंद्र सिंह तोमर मौजूद थे. निर्मला सीतारमण ने अपने प्रजेंटेशन में बजट के लिए इनपुट देने को लेकर अपनी बात रखी. वहीं, पीयूष गोयल ने पांच साल के लिए अपना विजन डॉक्यूमेंट पेश किया. जबकि नरेंद्र सिंह तोम ने संसद सत्र का अधिकतम उपयोग कैसे किया जा सकता है इस पर भी प्रजेंटेशन दिया. गौरतलब है कि पीएम मोदी ने कुछ दिन पहले भी अपने कैबिनेट की बैठक की थी.
इस बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए थे. मोदी सरकार ने 2019 के अपने चुनावी घोषणापत्र के वादों को पूरा करने की कोशिश की है. पहले ही दिन मोदी सरकार ने कुछ बड़े फ़ैसले लिए, नेशनल डिफेंस फंड के तहत मिलने वाली स्कालरशिप में लड़कों के लिए 25 फीसदी और लड़कियों के लिए 33 फीसदी की बढ़ोतरी हुई साथ ही कैबिनेट ने असंगठित मजद़ूरों को 3 हज़ार रुपये मासिक पेंशन के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी. दूसरी पारी शुरू होते ही एनडीए सरकार ने अपने चुनावी वादों को पूरा करने की तरफ़ तेज़ क़दम बढ़ाते हुए कुछ बड़े फ़ैसले लिए थे. पहली बड़ी सौग़ात किसानों को दी गई थी जिसमें पीएम किसान योजना में अब सभी किसानों को 6000 रुपये मिलेंगे. अतंरिम बजट में पीएमकेएसएस के लिए 75000 करोड़ रुपये मिले. इसमें 12 करोड़ ग़रीब और सीमांत किसानों को फ़ायदे का लक्ष्य था. इन किसानों के पास 2 हेक्टेयर तक भूमि वाले किसान शामिल थे. इसके तहत 3.11 करोड़ किसानों को 2000 रुपये मिल भी चुके हैं. 2.75 करोड़ लाभ पाने वालों को दूसरी क़िस्त भी मिल गई है.
सबसे बड़ा फैसला प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना का दायरा बढ़ाने का हुआ था. इस योजना से करीब 15 करोड़ किसानों को फायदा होगा. इसके अलावा छोटे व्यापारियों के भी कैबिनेट ने पेंशन योजना को मंजूरी दे दी. इससे करीब 3 करोड़ खुदरा व्यापारियों और छोटे दुकानदारों को होगा फायदा. छोटे और सीमांत किसानों की सामाजिक सुरक्षा के लिए स्कीम लांच कर दी गई है.
असंगठित कामगारों पर सरकार मेहरबान हुई थी और उनके लिए पेंशन योजना को मंजूरी दे दी गई थी.
- योजना का नाम श्रमयोगी मानधन योजना होगा और इसे एलआईसी चलाएगी.
- असंगठित क्षेत्र में 60 साल की उम्र के बाद पेंशन
- 3000 रुपये प्रति माह की पेंशन मिलेगी
- 15 हज़ार रुपये मासिक आय वालों को लाभ
- 29 साल की उम्र वाले 100 रुपये मासिक देंगे
- 40 साल की उम्र वाले 200 रुपये मासिक देंगे
- अंतरिम बजट में स्कीम की घोषणा हुई थी
गौरतलब है कि शुक्रवार को श्रम और रोज़गार मंत्री संतोष गंगवार ने NDTV से कहा था कि उनके मंत्रालय ने प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है. उधर देश की नई वित्त मंत्री बनीं निर्मला सीतारमण ने नई ज़िम्मेदारी मिलने के बाद पिछले वित्त मंत्री अरुण जेटली से जाकर मिलीं. स्वास्थ्य कारणों से जेटली ने इस बार मंत्री बनने से मना कर दिया था.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद ट्वीट कर कैबिनेट के महत्वपूर्ण फैसलों की जानकारी दी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि नयी सरकार ने केंद्रीय मंत्रिमंडल की पहली बैठक में किसान और व्यापारी कल्याण से जुड़े चार बड़े फैसले लिये. भाजपा ने अपने चुनाव घोषणापत्र में इनका वादा किया था. मोदी ने कैबिनेट की बैठक के बाद ट्वीट किया, ‘‘इस कार्यकाल की पहली कैबिनेट में नयी इबारत लिखने वाले फैसले लिये गये जिससे खुश हूं. इन फैसलों से मेहतनी किसानों और कर्मशील व्यापारियों को अत्यंत लाभ होगा.'' उन्होंने कहा कि फैसले कई भारतीयों की गरिमा और सशक्तीकरण को बढ़ावा देंगे. मोदी ने लिखा, ‘‘जनता प्रथम, जनता सदैव''. | सारांश: पीएम मोदी ने सभी मंत्रियों से की बैठक
कार्यकर्ताओं के बीच जाने की बात कही गई
समय पर काम पूरा करने की भी दी गई नसीहत | 7 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: मध्य प्रदेश के भिंड में सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के धर्मपुरी मोहल्ले में 8-वर्षीय एक बच्चे के हाथ से खेल-खेल में एक पिस्तौल से अचानक गोली चल जाने से उसकी बड़ी बहन की मौत हो गई.
भिंड के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेंद्र वर्मा ने बताया कि मृतक की पहचान निधि (10) के रूप में की गई है. उन्होंने कहा कि दिनेश कुमार ओझा कलेक्ट्रेट में क्लर्क की नौकरी करते हैं. उनके पास लाइसेंसी पिस्तौल है.
वर्मा ने बताया कि ओझा का आठ साल का बेटा अनुज एवं बेटी निधि अपने ही घर पर सुबह पलंग पर खेल रहे थे. इसी दौरान, अनुज ने वहां रखी पिस्तौल उठा ली और खेल-खेल में अचानक पिस्तौल से गोली चल गई. गोली उसकी बड़ी बहन निधि की छाती पर लगी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई.टिप्पणियां
उन्होंने कहा कि शव का पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंप दिया गया है. वर्मा ने बताया कि इस संबंध में मामला दर्ज कर सिटी कोतवाली प्रभारी शैलेन्द्र कुशवाह को जांच करने के आदेश दिए गए हैं. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
भिंड के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेंद्र वर्मा ने बताया कि मृतक की पहचान निधि (10) के रूप में की गई है. उन्होंने कहा कि दिनेश कुमार ओझा कलेक्ट्रेट में क्लर्क की नौकरी करते हैं. उनके पास लाइसेंसी पिस्तौल है.
वर्मा ने बताया कि ओझा का आठ साल का बेटा अनुज एवं बेटी निधि अपने ही घर पर सुबह पलंग पर खेल रहे थे. इसी दौरान, अनुज ने वहां रखी पिस्तौल उठा ली और खेल-खेल में अचानक पिस्तौल से गोली चल गई. गोली उसकी बड़ी बहन निधि की छाती पर लगी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई.टिप्पणियां
उन्होंने कहा कि शव का पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंप दिया गया है. वर्मा ने बताया कि इस संबंध में मामला दर्ज कर सिटी कोतवाली प्रभारी शैलेन्द्र कुशवाह को जांच करने के आदेश दिए गए हैं. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
वर्मा ने बताया कि ओझा का आठ साल का बेटा अनुज एवं बेटी निधि अपने ही घर पर सुबह पलंग पर खेल रहे थे. इसी दौरान, अनुज ने वहां रखी पिस्तौल उठा ली और खेल-खेल में अचानक पिस्तौल से गोली चल गई. गोली उसकी बड़ी बहन निधि की छाती पर लगी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई.टिप्पणियां
उन्होंने कहा कि शव का पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंप दिया गया है. वर्मा ने बताया कि इस संबंध में मामला दर्ज कर सिटी कोतवाली प्रभारी शैलेन्द्र कुशवाह को जांच करने के आदेश दिए गए हैं. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
उन्होंने कहा कि शव का पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंप दिया गया है. वर्मा ने बताया कि इस संबंध में मामला दर्ज कर सिटी कोतवाली प्रभारी शैलेन्द्र कुशवाह को जांच करने के आदेश दिए गए हैं. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: पिता की लाइसेंसी पिस्तौल पलंग पर रखी थी
खेल-खेल में पिस्तौल से गोली चल गई
गोली उसकी बड़ी बहन की छाती में लग गई | 32 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: हरियाणा के रेवाड़ी में एक सौतेली मां और दादा ने छह साल की बच्ची को नहर में फेंककर मारने की कोशिश की। बच्ची के पिता विदेश में काम करते हैं और उनका परिवार रेवाड़ी के पास लूखी में रहता है। सौतली मां और दादा रात के अंधेरे में बच्ची को गांव के बाहर एक नहर में फेंकने गए थे, लेकिन सौतेली मां ने बच्ची को नहर में फेंकने की बजाय छोड़ देने की बात कही।
बच्ची बाद में एक गांव के बुजुर्ग को मिली और उसने अपने परिवार के बारे में उसे सब कुछ बता दिया। पुलिस ने बच्ची को उसके परिवारवालों को सौंप दिया है, जबकि ग्राम पंचायत ने इस मामले में सौतेली मां और दादा को 11 हजार रुपये मंदिर में चढ़ाने और बच्ची को अच्छी शिक्षा देने का फैसला सुनाया है।
बच्ची बाद में एक गांव के बुजुर्ग को मिली और उसने अपने परिवार के बारे में उसे सब कुछ बता दिया। पुलिस ने बच्ची को उसके परिवारवालों को सौंप दिया है, जबकि ग्राम पंचायत ने इस मामले में सौतेली मां और दादा को 11 हजार रुपये मंदिर में चढ़ाने और बच्ची को अच्छी शिक्षा देने का फैसला सुनाया है। | संक्षिप्त सारांश: सौतली मां और दादा रात के अंधेरे में बच्ची को गांव के बाहर एक नहर में फेंकने गए थे, लेकिन सौतेली मां ने बच्ची को नहर में फेंकने की बजाय छोड़ देने की बात कही। | 0 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: हवाई किराए घटाने को लेकर प्रतिस्पर्धा बुधवार को और तेज हो गई। सार्वजनिक क्षेत्र की एयर इंडिया भी इस होड़ में शामिल हो गई है।
जेट एयरवेज ने साल के अंत तक यात्रा के लिए न्यूनतम 2,250 रुपये में 20 लाख सीटों की मंगलवार को पेशकश की जिसके बाद सभी बजट एयरलाइंस इंडिगो, स्पाइसजेट और गोएयर इस प्रतिस्पर्धा में कूद गईं।
एयर इंडिया ने आज शाम एक विशेष किराए की पेशकश की जिसके तहत घरेलू उड़ानों पर एक तरफ के नियमित किराए में कंपनी 40 प्रतिशत तक छूट दी देगी।
दिल्ली-मुंबई रूट पर अप्रैल के मध्य में एक तरफ की यात्रा के लिए इकोनॉमी क्लास में एयर इंडिया द्वारा 3,201 रुपये, इंडिगो द्वारा 3,340 रुपये, जेट एयरवेज द्वारा 3,350 रुपये और स्पाइसजेट द्वारा 4,426 रुपये के किराए की पेशकश की जा रही है।
वहीं, दिल्ली-चेन्नई रूट पर एयर इंडिया 3,701 रुपये, इंडिगो 3,840 रुपये, जेट एयरवेज 3,850 रुपये, जेट कनेक्ट 4,008 रुपये और स्पाइसजेट 4,714 रुपये के किराए की पेशकश कर रही है।
इसी तरह, दिल्ली-कोलकाता रूट पर एयर इंडिया 3,201 रुपये, इंडिगो 3,241 रुपये, स्पाइसजेट 4,662 रुपये और जेट कनेक्ट 4,663 रुपये के किराए की पेशकश कर रही है।टिप्पणियां
उल्लेखनीय है कि किराए घटाने की होड़ पिछले महीने स्पाइसजेट ने शुरू की जिसमें उसने सीमित अवधि के लिए 2,013 रुपये में 10 लाख सीटों की पेशकश की थी।
ट्रैवेल पोर्टल एक्सपीडिया के कंट्री हेड विक्रम मल्ही ने कहा कि किराए घटने से विमानन कंपनियों को अपनी सीटें भरने में मदद मिलेगी।
जेट एयरवेज ने साल के अंत तक यात्रा के लिए न्यूनतम 2,250 रुपये में 20 लाख सीटों की मंगलवार को पेशकश की जिसके बाद सभी बजट एयरलाइंस इंडिगो, स्पाइसजेट और गोएयर इस प्रतिस्पर्धा में कूद गईं।
एयर इंडिया ने आज शाम एक विशेष किराए की पेशकश की जिसके तहत घरेलू उड़ानों पर एक तरफ के नियमित किराए में कंपनी 40 प्रतिशत तक छूट दी देगी।
दिल्ली-मुंबई रूट पर अप्रैल के मध्य में एक तरफ की यात्रा के लिए इकोनॉमी क्लास में एयर इंडिया द्वारा 3,201 रुपये, इंडिगो द्वारा 3,340 रुपये, जेट एयरवेज द्वारा 3,350 रुपये और स्पाइसजेट द्वारा 4,426 रुपये के किराए की पेशकश की जा रही है।
वहीं, दिल्ली-चेन्नई रूट पर एयर इंडिया 3,701 रुपये, इंडिगो 3,840 रुपये, जेट एयरवेज 3,850 रुपये, जेट कनेक्ट 4,008 रुपये और स्पाइसजेट 4,714 रुपये के किराए की पेशकश कर रही है।
इसी तरह, दिल्ली-कोलकाता रूट पर एयर इंडिया 3,201 रुपये, इंडिगो 3,241 रुपये, स्पाइसजेट 4,662 रुपये और जेट कनेक्ट 4,663 रुपये के किराए की पेशकश कर रही है।टिप्पणियां
उल्लेखनीय है कि किराए घटाने की होड़ पिछले महीने स्पाइसजेट ने शुरू की जिसमें उसने सीमित अवधि के लिए 2,013 रुपये में 10 लाख सीटों की पेशकश की थी।
ट्रैवेल पोर्टल एक्सपीडिया के कंट्री हेड विक्रम मल्ही ने कहा कि किराए घटने से विमानन कंपनियों को अपनी सीटें भरने में मदद मिलेगी।
एयर इंडिया ने आज शाम एक विशेष किराए की पेशकश की जिसके तहत घरेलू उड़ानों पर एक तरफ के नियमित किराए में कंपनी 40 प्रतिशत तक छूट दी देगी।
दिल्ली-मुंबई रूट पर अप्रैल के मध्य में एक तरफ की यात्रा के लिए इकोनॉमी क्लास में एयर इंडिया द्वारा 3,201 रुपये, इंडिगो द्वारा 3,340 रुपये, जेट एयरवेज द्वारा 3,350 रुपये और स्पाइसजेट द्वारा 4,426 रुपये के किराए की पेशकश की जा रही है।
वहीं, दिल्ली-चेन्नई रूट पर एयर इंडिया 3,701 रुपये, इंडिगो 3,840 रुपये, जेट एयरवेज 3,850 रुपये, जेट कनेक्ट 4,008 रुपये और स्पाइसजेट 4,714 रुपये के किराए की पेशकश कर रही है।
इसी तरह, दिल्ली-कोलकाता रूट पर एयर इंडिया 3,201 रुपये, इंडिगो 3,241 रुपये, स्पाइसजेट 4,662 रुपये और जेट कनेक्ट 4,663 रुपये के किराए की पेशकश कर रही है।टिप्पणियां
उल्लेखनीय है कि किराए घटाने की होड़ पिछले महीने स्पाइसजेट ने शुरू की जिसमें उसने सीमित अवधि के लिए 2,013 रुपये में 10 लाख सीटों की पेशकश की थी।
ट्रैवेल पोर्टल एक्सपीडिया के कंट्री हेड विक्रम मल्ही ने कहा कि किराए घटने से विमानन कंपनियों को अपनी सीटें भरने में मदद मिलेगी।
दिल्ली-मुंबई रूट पर अप्रैल के मध्य में एक तरफ की यात्रा के लिए इकोनॉमी क्लास में एयर इंडिया द्वारा 3,201 रुपये, इंडिगो द्वारा 3,340 रुपये, जेट एयरवेज द्वारा 3,350 रुपये और स्पाइसजेट द्वारा 4,426 रुपये के किराए की पेशकश की जा रही है।
वहीं, दिल्ली-चेन्नई रूट पर एयर इंडिया 3,701 रुपये, इंडिगो 3,840 रुपये, जेट एयरवेज 3,850 रुपये, जेट कनेक्ट 4,008 रुपये और स्पाइसजेट 4,714 रुपये के किराए की पेशकश कर रही है।
इसी तरह, दिल्ली-कोलकाता रूट पर एयर इंडिया 3,201 रुपये, इंडिगो 3,241 रुपये, स्पाइसजेट 4,662 रुपये और जेट कनेक्ट 4,663 रुपये के किराए की पेशकश कर रही है।टिप्पणियां
उल्लेखनीय है कि किराए घटाने की होड़ पिछले महीने स्पाइसजेट ने शुरू की जिसमें उसने सीमित अवधि के लिए 2,013 रुपये में 10 लाख सीटों की पेशकश की थी।
ट्रैवेल पोर्टल एक्सपीडिया के कंट्री हेड विक्रम मल्ही ने कहा कि किराए घटने से विमानन कंपनियों को अपनी सीटें भरने में मदद मिलेगी।
वहीं, दिल्ली-चेन्नई रूट पर एयर इंडिया 3,701 रुपये, इंडिगो 3,840 रुपये, जेट एयरवेज 3,850 रुपये, जेट कनेक्ट 4,008 रुपये और स्पाइसजेट 4,714 रुपये के किराए की पेशकश कर रही है।
इसी तरह, दिल्ली-कोलकाता रूट पर एयर इंडिया 3,201 रुपये, इंडिगो 3,241 रुपये, स्पाइसजेट 4,662 रुपये और जेट कनेक्ट 4,663 रुपये के किराए की पेशकश कर रही है।टिप्पणियां
उल्लेखनीय है कि किराए घटाने की होड़ पिछले महीने स्पाइसजेट ने शुरू की जिसमें उसने सीमित अवधि के लिए 2,013 रुपये में 10 लाख सीटों की पेशकश की थी।
ट्रैवेल पोर्टल एक्सपीडिया के कंट्री हेड विक्रम मल्ही ने कहा कि किराए घटने से विमानन कंपनियों को अपनी सीटें भरने में मदद मिलेगी।
इसी तरह, दिल्ली-कोलकाता रूट पर एयर इंडिया 3,201 रुपये, इंडिगो 3,241 रुपये, स्पाइसजेट 4,662 रुपये और जेट कनेक्ट 4,663 रुपये के किराए की पेशकश कर रही है।टिप्पणियां
उल्लेखनीय है कि किराए घटाने की होड़ पिछले महीने स्पाइसजेट ने शुरू की जिसमें उसने सीमित अवधि के लिए 2,013 रुपये में 10 लाख सीटों की पेशकश की थी।
ट्रैवेल पोर्टल एक्सपीडिया के कंट्री हेड विक्रम मल्ही ने कहा कि किराए घटने से विमानन कंपनियों को अपनी सीटें भरने में मदद मिलेगी।
उल्लेखनीय है कि किराए घटाने की होड़ पिछले महीने स्पाइसजेट ने शुरू की जिसमें उसने सीमित अवधि के लिए 2,013 रुपये में 10 लाख सीटों की पेशकश की थी।
ट्रैवेल पोर्टल एक्सपीडिया के कंट्री हेड विक्रम मल्ही ने कहा कि किराए घटने से विमानन कंपनियों को अपनी सीटें भरने में मदद मिलेगी।
ट्रैवेल पोर्टल एक्सपीडिया के कंट्री हेड विक्रम मल्ही ने कहा कि किराए घटने से विमानन कंपनियों को अपनी सीटें भरने में मदद मिलेगी। | जेट एयरवेज ने साल के अंत तक यात्रा के लिए न्यूनतम 2,250 रुपये में 20 लाख सीटों की मंगलवार को पेशकश की जिसके बाद सभी बजट एयरलाइंस इंडिगो, स्पाइसजेट और गोएयर इस प्रतिस्पर्धा में कूद गईं। | 1 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: संसदीय मामलों के मंत्री अनंत कुमार ने भी कहा, हम पीट पीटकर हत्या किए जाने और उत्पीड़न की घटनाओं पर चर्चा के लिए तैयार हैं, लेकिन जिस प्रकार से कागज की गेंद बनाकर आसन की ओर उछाली गयीं वह असंसदीय है. सभी दलों की ओर से मैं कांग्रेस से आग्रह करता हूं कि उसके नेताओं को सोचना चाहिए, आसन से क्षमा याचना करनी चाहिए. उन्होंने कहा, कांग्रेस सदस्यों को अध्यक्ष के सामने खड़े होकर कहना चाहिए कि हम क्षमाप्रार्थी हैं. केवल निलंबन को वापस लेने की मांग करने से कुछ नहीं होता है. ये सदन प्रजातंत्र का मंदिर है और इस मंदिर की अध्यक्षता स्पीकर मैडम करती हैं जो कि एक महिला हैं और कांग्रेस सदस्यों ने एक महिला पर कागज फाड़ कर फेंके. सदन से बाहर यह आचरण किया होता तो भारतीय दंड संहिता की धारा लग जाती. अनंत कुमार ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है. इसी बीच कांग्रेस सदस्यों का हंगामा बढ़ने लगा तो अनंत कुमार ने सख्त लहजे में कहा कि ऐसा व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. ऐसा कहते हुए उन्होंने एक शब्द विशेष का इस्तेमाल किया जिसे अध्यक्ष ने कार्यवाही से निकाले जाने की व्यवस्था दी.टिप्पणियां(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) | सारांश: 24 जुलाई को पर्चे फाड़कर आसन की ओर उछाले थे
6 कांग्रेसी सांसदों को किया था निलंबित
आप माफी भी नहीं मांगेंगे और हंगामा भी करें | 5 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: जम्मू और कश्मीर आरक्षण अधिनियम 2004 में संशोधन करते हुए यह अध्यादेश अंतर्राष्ट्रीय सीमा के पास रहने वाले लोगों को भी आरक्षण का लाभ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास रहने वाले लोगों की तरह प्रदान करता है
इस विधेयक का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने वाले अध्यादेश की जगह लेना है. इससे जम्मू-कश्मीर में आर्थिक रूप से कमजोर किसी भी धर्म या जाति के युवा को राज्य सरकार की नौकरियां प्राप्त करना आसान हो जाएगा. जनवरी 2019 में 103 वें संविधान संशोधन के जरिए देश के बाकी हिस्सों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया था.
अमित शाह के विधायी एजेंडे का बारीकी से पालन करने की उम्मीद है और जम्मू-कश्मीर से संबंधित इस विधेयक के साथ शुरूआत करने का उनका निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
बता दें लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार करते समय शाह ने संविधान के अनुच्छेद 370 को रद्द करने की बात कही थी. साथ ही अपने चुनावी घोषणा पत्र में बीजेपी ने अनुच्छेद 35A को खत्म करने के अपने इरादे को भी दोहराया था. | संक्षिप्त पाठ: 28 फरवरी को अध्यादेश को मिली थी मंजूरी
कमजोर वर्ग के युवाओं को मिलेगा 10 फीसदी आरक्षण
अमित शाह का लोकसभा में यह पहला बिल | 30 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: महाराष्ट्र में बीड़ के दो किसानों पर बैंक के पैसे लूटने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक सूखे से प्रभावित आरोपी किसान कृषि बीमा के पैसे लेने बैंक में जाते थे, लेकिन कई दिनों तक भागदौड़ के बाद जब उन्हें पैसे नहीं मिले तो उन्होंने इस वारदात को अंजाम देने का प्लान बनाया।
आरोपी शंकर दामोदर शेंडगे और ऋषिकेश श्रीहरी महानोर 8 दिनों से बीमा के पैसों के लिये बैंक के चक्कर लगा रहे थे। लेकिन जब पैसे नहीं मिले तब उनके मन में बैंक के पैसे लूटने का प्लान आया। जांच अधिकारी दिनेश आहेर के मुताबिक बीड़ जिले में गेवराई ब्रांच से कैशियर, ड्राइवर जब पैसे लेकर सब ब्रांच में जा रहे थे तभी रास्ते में दो लोग आए उन्होंने हथियार का भय दिखाकर उनके आंखों में मिर्ची डाल दी और पैसे लूटकर भाग गए। पुलिस के आला अधिकारियों को जानकारी मिलते ही एडिश्नल एसपी, एसपी के निर्देश पर टीमें बनाई तो पता लगा कि दो बाइक सवार को कुछ लोगों ने तेजी से जाते देखा था। दोनों पैसे पेड़ के नीचे छिपाकर खेत में काम करने लगे, बाइक से पहचान कर जब दोनों से पुलिस ने पूछताछ की तो सारी बातें पता लग गई।टिप्पणियां
पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने लूटी हुई रकम को एक पेड़ के नीचे गड्डे में छिपाकर रखा, और खेत में काम करने लगे लेकिन जिस बाइक से उन्होंने वारदात को अंजाम दिया था उसे छिपाना भूल गये। जिसकी मदद से पुलिस ने उन्हें धर दबोचा। आरोपियों की निशानदेही पर हथियार, बाइक सबकुछ पुलिस ने जब्त कर लिया है।
आरोपी शंकर दामोदर शेंडगे और ऋषिकेश श्रीहरी महानोर 8 दिनों से बीमा के पैसों के लिये बैंक के चक्कर लगा रहे थे। लेकिन जब पैसे नहीं मिले तब उनके मन में बैंक के पैसे लूटने का प्लान आया। जांच अधिकारी दिनेश आहेर के मुताबिक बीड़ जिले में गेवराई ब्रांच से कैशियर, ड्राइवर जब पैसे लेकर सब ब्रांच में जा रहे थे तभी रास्ते में दो लोग आए उन्होंने हथियार का भय दिखाकर उनके आंखों में मिर्ची डाल दी और पैसे लूटकर भाग गए। पुलिस के आला अधिकारियों को जानकारी मिलते ही एडिश्नल एसपी, एसपी के निर्देश पर टीमें बनाई तो पता लगा कि दो बाइक सवार को कुछ लोगों ने तेजी से जाते देखा था। दोनों पैसे पेड़ के नीचे छिपाकर खेत में काम करने लगे, बाइक से पहचान कर जब दोनों से पुलिस ने पूछताछ की तो सारी बातें पता लग गई।टिप्पणियां
पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने लूटी हुई रकम को एक पेड़ के नीचे गड्डे में छिपाकर रखा, और खेत में काम करने लगे लेकिन जिस बाइक से उन्होंने वारदात को अंजाम दिया था उसे छिपाना भूल गये। जिसकी मदद से पुलिस ने उन्हें धर दबोचा। आरोपियों की निशानदेही पर हथियार, बाइक सबकुछ पुलिस ने जब्त कर लिया है।
पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने लूटी हुई रकम को एक पेड़ के नीचे गड्डे में छिपाकर रखा, और खेत में काम करने लगे लेकिन जिस बाइक से उन्होंने वारदात को अंजाम दिया था उसे छिपाना भूल गये। जिसकी मदद से पुलिस ने उन्हें धर दबोचा। आरोपियों की निशानदेही पर हथियार, बाइक सबकुछ पुलिस ने जब्त कर लिया है। | सारांश: बीमा के पैसों के लिए 8 दिनों से बैंक के चक्कर लगा रहे थे किसान।
पैसे नहीं मिले तो बनाया बैंक लूटने का प्लान।
लूट के पैसे पेड़ के नीचे छिपाकर खेत में कर रहे थे काम। | 7 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: रिलायंस एडीए समूह के अध्यक्ष अनिल अंबानी को दिल्ली की एक विशेष अदालत ने 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में शनिवार को अभियोजन पक्ष के गवाह के रूप में व्यक्तिगत तौर पर पेश होने से छूट दे दी।
सीबीआई के विशेष न्यायाधीश ओपी सैनी ने अंबानी की उस याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें उन्होंने पूर्व-निर्धारित कारोबारी व्यस्तता के आधार पर शनिवार को व्यक्तिगत तौर पर पेश होने से छूट मांगी थी।
अंबानी की ओर से न्यायाधीश ओपी सैनी के समक्ष प्रस्तुत इस अर्जी में कहा गया था कि 23 जुलाई को उन्हें समन मिला। उसमें उन्हें पेशी के लिए केवल दो दिन से कुछ अधिक समय का वक्त दिया गया है। ऐसे में उनके लिए इस बहुत ही कम समय के नोटिस पर 26 जुलाई, 2013 को दिल्ली पहुंचना संभव नहीं होगा।
उन्होंने अर्जी में कहा, सिर्फ दो दिन से कुछ अधिक घंटे का वक्त दिया गया है और मेरी पूर्व निर्धारित व्यस्तताएं बहुत अधिक हैं। अंबानी ने कहा कि वह 15 अगस्त के बाद किसी भी दिन अदालत के सामने पेश हो सकते हैं। अंबानी ने कहा, मेरा निवेदन है कि मुझे पेशी से छूट दी जाए और अपनी सुविधा से 15 अगस्त, 2013 के बाद का वक्त दें। टिप्पणियां
उधर, सुप्रीम कोर्ट ने आज रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड की उस याचिका पर तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें अंबानी और उनकी पत्नी टीना अंबानी को 2जी मामले में अभियोजन पक्ष के गवाह के तौर पर पेश होने के संबंध में विशेष अदालत द्वारा जारी आदेश को चुनौती दी गई है। उच्चतम न्यायालय ने आरटीएल की याचिका की सुनवाई के लिए सोमवार की तारीख मुकर्रर की है।
इस याचिका की न्यायमूर्ति सिंघवी और केएस राधाकृष्णन की पीठ करेगी, जो 2जी से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही है। विशेष अदालत ने अनिल अंबानी, उनकी पत्नी टीना और अन्य को गवाह बनाने की सबीआई की उस अपील को स्वीकार कर लिया है, जिसमें कहा गया था कि अनिल और टीना अंबानी अपने समूह की कंपनियों द्वारा स्वान टेलीकॉम में कथित तौर पर 990 करोड़ रुपये के निवेश के बारे में नई जानकारी दे सकते हैं।
सीबीआई के विशेष न्यायाधीश ओपी सैनी ने अंबानी की उस याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें उन्होंने पूर्व-निर्धारित कारोबारी व्यस्तता के आधार पर शनिवार को व्यक्तिगत तौर पर पेश होने से छूट मांगी थी।
अंबानी की ओर से न्यायाधीश ओपी सैनी के समक्ष प्रस्तुत इस अर्जी में कहा गया था कि 23 जुलाई को उन्हें समन मिला। उसमें उन्हें पेशी के लिए केवल दो दिन से कुछ अधिक समय का वक्त दिया गया है। ऐसे में उनके लिए इस बहुत ही कम समय के नोटिस पर 26 जुलाई, 2013 को दिल्ली पहुंचना संभव नहीं होगा।
उन्होंने अर्जी में कहा, सिर्फ दो दिन से कुछ अधिक घंटे का वक्त दिया गया है और मेरी पूर्व निर्धारित व्यस्तताएं बहुत अधिक हैं। अंबानी ने कहा कि वह 15 अगस्त के बाद किसी भी दिन अदालत के सामने पेश हो सकते हैं। अंबानी ने कहा, मेरा निवेदन है कि मुझे पेशी से छूट दी जाए और अपनी सुविधा से 15 अगस्त, 2013 के बाद का वक्त दें। टिप्पणियां
उधर, सुप्रीम कोर्ट ने आज रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड की उस याचिका पर तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें अंबानी और उनकी पत्नी टीना अंबानी को 2जी मामले में अभियोजन पक्ष के गवाह के तौर पर पेश होने के संबंध में विशेष अदालत द्वारा जारी आदेश को चुनौती दी गई है। उच्चतम न्यायालय ने आरटीएल की याचिका की सुनवाई के लिए सोमवार की तारीख मुकर्रर की है।
इस याचिका की न्यायमूर्ति सिंघवी और केएस राधाकृष्णन की पीठ करेगी, जो 2जी से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही है। विशेष अदालत ने अनिल अंबानी, उनकी पत्नी टीना और अन्य को गवाह बनाने की सबीआई की उस अपील को स्वीकार कर लिया है, जिसमें कहा गया था कि अनिल और टीना अंबानी अपने समूह की कंपनियों द्वारा स्वान टेलीकॉम में कथित तौर पर 990 करोड़ रुपये के निवेश के बारे में नई जानकारी दे सकते हैं।
अंबानी की ओर से न्यायाधीश ओपी सैनी के समक्ष प्रस्तुत इस अर्जी में कहा गया था कि 23 जुलाई को उन्हें समन मिला। उसमें उन्हें पेशी के लिए केवल दो दिन से कुछ अधिक समय का वक्त दिया गया है। ऐसे में उनके लिए इस बहुत ही कम समय के नोटिस पर 26 जुलाई, 2013 को दिल्ली पहुंचना संभव नहीं होगा।
उन्होंने अर्जी में कहा, सिर्फ दो दिन से कुछ अधिक घंटे का वक्त दिया गया है और मेरी पूर्व निर्धारित व्यस्तताएं बहुत अधिक हैं। अंबानी ने कहा कि वह 15 अगस्त के बाद किसी भी दिन अदालत के सामने पेश हो सकते हैं। अंबानी ने कहा, मेरा निवेदन है कि मुझे पेशी से छूट दी जाए और अपनी सुविधा से 15 अगस्त, 2013 के बाद का वक्त दें। टिप्पणियां
उधर, सुप्रीम कोर्ट ने आज रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड की उस याचिका पर तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें अंबानी और उनकी पत्नी टीना अंबानी को 2जी मामले में अभियोजन पक्ष के गवाह के तौर पर पेश होने के संबंध में विशेष अदालत द्वारा जारी आदेश को चुनौती दी गई है। उच्चतम न्यायालय ने आरटीएल की याचिका की सुनवाई के लिए सोमवार की तारीख मुकर्रर की है।
इस याचिका की न्यायमूर्ति सिंघवी और केएस राधाकृष्णन की पीठ करेगी, जो 2जी से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही है। विशेष अदालत ने अनिल अंबानी, उनकी पत्नी टीना और अन्य को गवाह बनाने की सबीआई की उस अपील को स्वीकार कर लिया है, जिसमें कहा गया था कि अनिल और टीना अंबानी अपने समूह की कंपनियों द्वारा स्वान टेलीकॉम में कथित तौर पर 990 करोड़ रुपये के निवेश के बारे में नई जानकारी दे सकते हैं।
उन्होंने अर्जी में कहा, सिर्फ दो दिन से कुछ अधिक घंटे का वक्त दिया गया है और मेरी पूर्व निर्धारित व्यस्तताएं बहुत अधिक हैं। अंबानी ने कहा कि वह 15 अगस्त के बाद किसी भी दिन अदालत के सामने पेश हो सकते हैं। अंबानी ने कहा, मेरा निवेदन है कि मुझे पेशी से छूट दी जाए और अपनी सुविधा से 15 अगस्त, 2013 के बाद का वक्त दें। टिप्पणियां
उधर, सुप्रीम कोर्ट ने आज रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड की उस याचिका पर तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें अंबानी और उनकी पत्नी टीना अंबानी को 2जी मामले में अभियोजन पक्ष के गवाह के तौर पर पेश होने के संबंध में विशेष अदालत द्वारा जारी आदेश को चुनौती दी गई है। उच्चतम न्यायालय ने आरटीएल की याचिका की सुनवाई के लिए सोमवार की तारीख मुकर्रर की है।
इस याचिका की न्यायमूर्ति सिंघवी और केएस राधाकृष्णन की पीठ करेगी, जो 2जी से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही है। विशेष अदालत ने अनिल अंबानी, उनकी पत्नी टीना और अन्य को गवाह बनाने की सबीआई की उस अपील को स्वीकार कर लिया है, जिसमें कहा गया था कि अनिल और टीना अंबानी अपने समूह की कंपनियों द्वारा स्वान टेलीकॉम में कथित तौर पर 990 करोड़ रुपये के निवेश के बारे में नई जानकारी दे सकते हैं।
उधर, सुप्रीम कोर्ट ने आज रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड की उस याचिका पर तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें अंबानी और उनकी पत्नी टीना अंबानी को 2जी मामले में अभियोजन पक्ष के गवाह के तौर पर पेश होने के संबंध में विशेष अदालत द्वारा जारी आदेश को चुनौती दी गई है। उच्चतम न्यायालय ने आरटीएल की याचिका की सुनवाई के लिए सोमवार की तारीख मुकर्रर की है।
इस याचिका की न्यायमूर्ति सिंघवी और केएस राधाकृष्णन की पीठ करेगी, जो 2जी से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही है। विशेष अदालत ने अनिल अंबानी, उनकी पत्नी टीना और अन्य को गवाह बनाने की सबीआई की उस अपील को स्वीकार कर लिया है, जिसमें कहा गया था कि अनिल और टीना अंबानी अपने समूह की कंपनियों द्वारा स्वान टेलीकॉम में कथित तौर पर 990 करोड़ रुपये के निवेश के बारे में नई जानकारी दे सकते हैं।
इस याचिका की न्यायमूर्ति सिंघवी और केएस राधाकृष्णन की पीठ करेगी, जो 2जी से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही है। विशेष अदालत ने अनिल अंबानी, उनकी पत्नी टीना और अन्य को गवाह बनाने की सबीआई की उस अपील को स्वीकार कर लिया है, जिसमें कहा गया था कि अनिल और टीना अंबानी अपने समूह की कंपनियों द्वारा स्वान टेलीकॉम में कथित तौर पर 990 करोड़ रुपये के निवेश के बारे में नई जानकारी दे सकते हैं। | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: अनिल अंबानी की अर्जी पर 2जी मामले की सुनवाई कर रही दिल्ली की विशेष अदालत में शुक्रवार को गवाह के तौर पर व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए 15 अगस्त तक के लिए छूट दे दी है। | 25 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: हार्वर्ड विश्वविद्यालय के एक नए अध्ययन में कहा गया है कि भारत वैश्विक वृद्धि के स्तंभ के रूप में उभरा है और दशकों तक यह चीन से बढ़त बनाए रखेगा. हार्वर्ड विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (सीआईडी) के वृद्धि अनुमानों के अनुसार कई कारणों से 7.7 प्रतिशत की औसत वृद्धि दर के साथ 2025 तक तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शीर्ष पर बना रहेगा. सीआईडी के शोध में कहा गया है कि वैश्विक वृद्धि का केंद्र पिछले कुछ साल में चीन से पड़ोसी भारत की ओर स्थानांतरित हुआ है. आगामी दशक में यह कायम रहेगा.
अध्ययन में कहा गया है कि आज की तारीख तक भारत ने जो क्षमताएं हासिल की है, उनके मद्देनजर वह विविध क्षेत्रों में उतरने को लेकर बेहतर स्थिति में जिसकी उसकी तेजी वृद्धि की संभावनाएं कायम रहेंगी. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने अपने निर्याता आधार का विविधीकरण किया है और इसमें रसायन, वाहन और कुछ इलेक्ट्रानिक्स सहित अधिक जटिल क्षेत्रों को शामिल किया है.
रिपोर्ट कहती हैकि प्रमुख पेट्रोलियम अर्थव्यवस्थाएं एक संसाधन पर निर्भर रहने का प्रभाव झेल रही हैं. वहीं भारत, इंडोनेशिया और वियतनाम ने नई क्षमताएं हासिल की हैं जो अधिक विविध और अधिक जटिल उत्पादन की अनुमति देता है जो आगामी वर्षो में तेजी वृद्धि का संकेत देता है. टिप्पणियां
रिपोर्ट में कहा गया है कि आथर्कि वृद्धि एक आसान तरीका नहीं चुनती. भारत, तुर्की, इंडोनेशिया, यूगांडा और बुल्गारिया जैसे देशों के तेज वृद्धि दर्ज करने की उम्मीद है और ये सभी देश राजनीतिक, संस्थागत, भौगोलिक और जनसांख्यिकीय रूप में विविधता रखते हैं.(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
अध्ययन में कहा गया है कि आज की तारीख तक भारत ने जो क्षमताएं हासिल की है, उनके मद्देनजर वह विविध क्षेत्रों में उतरने को लेकर बेहतर स्थिति में जिसकी उसकी तेजी वृद्धि की संभावनाएं कायम रहेंगी. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने अपने निर्याता आधार का विविधीकरण किया है और इसमें रसायन, वाहन और कुछ इलेक्ट्रानिक्स सहित अधिक जटिल क्षेत्रों को शामिल किया है.
रिपोर्ट कहती हैकि प्रमुख पेट्रोलियम अर्थव्यवस्थाएं एक संसाधन पर निर्भर रहने का प्रभाव झेल रही हैं. वहीं भारत, इंडोनेशिया और वियतनाम ने नई क्षमताएं हासिल की हैं जो अधिक विविध और अधिक जटिल उत्पादन की अनुमति देता है जो आगामी वर्षो में तेजी वृद्धि का संकेत देता है. टिप्पणियां
रिपोर्ट में कहा गया है कि आथर्कि वृद्धि एक आसान तरीका नहीं चुनती. भारत, तुर्की, इंडोनेशिया, यूगांडा और बुल्गारिया जैसे देशों के तेज वृद्धि दर्ज करने की उम्मीद है और ये सभी देश राजनीतिक, संस्थागत, भौगोलिक और जनसांख्यिकीय रूप में विविधता रखते हैं.(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
रिपोर्ट कहती हैकि प्रमुख पेट्रोलियम अर्थव्यवस्थाएं एक संसाधन पर निर्भर रहने का प्रभाव झेल रही हैं. वहीं भारत, इंडोनेशिया और वियतनाम ने नई क्षमताएं हासिल की हैं जो अधिक विविध और अधिक जटिल उत्पादन की अनुमति देता है जो आगामी वर्षो में तेजी वृद्धि का संकेत देता है. टिप्पणियां
रिपोर्ट में कहा गया है कि आथर्कि वृद्धि एक आसान तरीका नहीं चुनती. भारत, तुर्की, इंडोनेशिया, यूगांडा और बुल्गारिया जैसे देशों के तेज वृद्धि दर्ज करने की उम्मीद है और ये सभी देश राजनीतिक, संस्थागत, भौगोलिक और जनसांख्यिकीय रूप में विविधता रखते हैं.(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
रिपोर्ट में कहा गया है कि आथर्कि वृद्धि एक आसान तरीका नहीं चुनती. भारत, तुर्की, इंडोनेशिया, यूगांडा और बुल्गारिया जैसे देशों के तेज वृद्धि दर्ज करने की उम्मीद है और ये सभी देश राजनीतिक, संस्थागत, भौगोलिक और जनसांख्यिकीय रूप में विविधता रखते हैं.(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) | यह एक सारांश है: हार्वर्ड विश्वविद्यालय का नया अध्ययन, भारत वैश्विक वृद्धि के स्तंभ के रूप
दशकों तक यह चीन पर बढ़त बनाए रखेगा भारत
भारत, इंडोनेशिया और वियतनाम ने नई क्षमताएं हासिल की हैं | 24 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: दिल्ली पुलिस आयुक्त नीरज कुमार ने कहा है कि राजस्थान रॉयल्स के अतिरिक्त एक और आईपीएल टीम के स्पॉट फिक्सिंग में शामिल होने की संभावना है, लेकिन अब तक इस संबंध में कोई सफलता नहीं मिली है।
नीरज कुमार ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा, दिल्ली पुलिस सफलता की उम्मीद कर रही है, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली है, इसलिए हम मामले के व्यापक पहलुओं को देखेंगे। यह पूछे जाने पर कि क्या वह राजस्थान रॉयल्स के अतिरिक्त किसी और टीम का नाम लेना चाहेंगे, तो कुमार ने कहा, मुझे तब तक किसी का नाम नहीं लेना चाहिए, जब तक अपने दावे के समर्थन में मेरे पास सामग्री न हो।टिप्पणियां
अन्य खिलाड़ियों की संलिप्तता के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, नहीं, कुछ भी ठोस नहीं है। हमारे पास काफी सूचना है, लेकिन सूचना का मतलब सबूत नहीं होता है। और मैं किसी भी रूप में किसी भी टीम या किसी व्यक्ति का नाम लेने में विश्वास नहीं करता, जब तक कि इसके समर्थन में सामग्री न हो।
स्पॉट फिक्सिंग में संलिप्तता की बात राजस्थान रॉयल्स के क्रिकेटर श्रीसंत द्वारा स्वीकार करने के बारे में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा, उसने स्वीकार कर लिया है। लेकिन हमारे समक्ष उसकी स्वीकारोक्ति का कोई महत्व नहीं है, क्योंकि वह अदालत में स्वीकार्य सबूत नहीं है...लेकिन किसी भी बात के खुलासे के बाद सामग्री की बरामदगी के बाद यह स्वीकार्य है। सट्टेबाजों से कथित तौर पर मिले धन से श्रीसंत के लैपटॉप और महंगे जीन्स खरीदने के सबूत के बारे में पूछे जाने पर कुमार ने कहा, हम आपको यह (सबूत) नहीं देंगे, बल्कि अदालत को देंगे।
नीरज कुमार ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा, दिल्ली पुलिस सफलता की उम्मीद कर रही है, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली है, इसलिए हम मामले के व्यापक पहलुओं को देखेंगे। यह पूछे जाने पर कि क्या वह राजस्थान रॉयल्स के अतिरिक्त किसी और टीम का नाम लेना चाहेंगे, तो कुमार ने कहा, मुझे तब तक किसी का नाम नहीं लेना चाहिए, जब तक अपने दावे के समर्थन में मेरे पास सामग्री न हो।टिप्पणियां
अन्य खिलाड़ियों की संलिप्तता के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, नहीं, कुछ भी ठोस नहीं है। हमारे पास काफी सूचना है, लेकिन सूचना का मतलब सबूत नहीं होता है। और मैं किसी भी रूप में किसी भी टीम या किसी व्यक्ति का नाम लेने में विश्वास नहीं करता, जब तक कि इसके समर्थन में सामग्री न हो।
स्पॉट फिक्सिंग में संलिप्तता की बात राजस्थान रॉयल्स के क्रिकेटर श्रीसंत द्वारा स्वीकार करने के बारे में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा, उसने स्वीकार कर लिया है। लेकिन हमारे समक्ष उसकी स्वीकारोक्ति का कोई महत्व नहीं है, क्योंकि वह अदालत में स्वीकार्य सबूत नहीं है...लेकिन किसी भी बात के खुलासे के बाद सामग्री की बरामदगी के बाद यह स्वीकार्य है। सट्टेबाजों से कथित तौर पर मिले धन से श्रीसंत के लैपटॉप और महंगे जीन्स खरीदने के सबूत के बारे में पूछे जाने पर कुमार ने कहा, हम आपको यह (सबूत) नहीं देंगे, बल्कि अदालत को देंगे।
अन्य खिलाड़ियों की संलिप्तता के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, नहीं, कुछ भी ठोस नहीं है। हमारे पास काफी सूचना है, लेकिन सूचना का मतलब सबूत नहीं होता है। और मैं किसी भी रूप में किसी भी टीम या किसी व्यक्ति का नाम लेने में विश्वास नहीं करता, जब तक कि इसके समर्थन में सामग्री न हो।
स्पॉट फिक्सिंग में संलिप्तता की बात राजस्थान रॉयल्स के क्रिकेटर श्रीसंत द्वारा स्वीकार करने के बारे में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा, उसने स्वीकार कर लिया है। लेकिन हमारे समक्ष उसकी स्वीकारोक्ति का कोई महत्व नहीं है, क्योंकि वह अदालत में स्वीकार्य सबूत नहीं है...लेकिन किसी भी बात के खुलासे के बाद सामग्री की बरामदगी के बाद यह स्वीकार्य है। सट्टेबाजों से कथित तौर पर मिले धन से श्रीसंत के लैपटॉप और महंगे जीन्स खरीदने के सबूत के बारे में पूछे जाने पर कुमार ने कहा, हम आपको यह (सबूत) नहीं देंगे, बल्कि अदालत को देंगे।
स्पॉट फिक्सिंग में संलिप्तता की बात राजस्थान रॉयल्स के क्रिकेटर श्रीसंत द्वारा स्वीकार करने के बारे में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा, उसने स्वीकार कर लिया है। लेकिन हमारे समक्ष उसकी स्वीकारोक्ति का कोई महत्व नहीं है, क्योंकि वह अदालत में स्वीकार्य सबूत नहीं है...लेकिन किसी भी बात के खुलासे के बाद सामग्री की बरामदगी के बाद यह स्वीकार्य है। सट्टेबाजों से कथित तौर पर मिले धन से श्रीसंत के लैपटॉप और महंगे जीन्स खरीदने के सबूत के बारे में पूछे जाने पर कुमार ने कहा, हम आपको यह (सबूत) नहीं देंगे, बल्कि अदालत को देंगे। | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: दिल्ली पुलिस कमिश्नर नीरज कुमार ने कहा कि राजस्थान रॉयल्स के अतिरिक्त एक और आईपीएल टीम के स्पॉट फिक्सिंग में शामिल होने की संभावना है, लेकिन अभी इस संबंध में कोई सफलता नहीं मिली है। | 25 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: स्पेन की पुलिस ने शुक्रवार को बताया कि उसने दुर्घटनाग्रस्त हुई ट्रेन के चालक को आपराधिक लापरवाही के आरोप में हिरासत में लिया है।
बुधवार के इस हादसे पर पूरा देश आज शोक मना रहा है। पुलिस का कहना है कि घटना में विदेशियों सहित 78 लोग मारे गए हैं।
पश्चिमोत्तर गैलिशिया क्षेत्र के पुलिस प्रमुख जैमे इग्लेशियस ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि पवित्र शहर सांतियागो दे कंपोस्तेला के पास हुई घटना के मामले में 52 वर्षीय चालक पर ‘लापरवाही’ सहित आपराधिक आरोप हैं।
उन्होंने बताया कि चालक को बृहस्पतिवार को अस्पताल में ही हिरासत में ले लिया गया।
स्पेन के न्यायाधीश ने पुलिस को चालक से पूछताछ करने का आदेश दिया है।
अभी तक चालक पर कोई आरोप नहीं लगाया गया है। पुलिस ने अभी तक उससे पूछताछ भी नहीं की है। टिप्पणियां
पश्चिमोत्तर स्पेन में कल एक ट्रेन के पटरी से उतरने की घटना में 78 यात्रियों की मौत हो गई और 100 से अधिक यात्री घायल हो गए। छह ही अभी शिनाख्त नहीं हो सकी है।
स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि मृतकों में चार विदेशी शामिल हैं। विदेशी मृतकों में एक अमेरिकी, एक अलजीरियाई, एक मेक्सिको वासी और एक फ्रांसीसी शामिल है।
बुधवार के इस हादसे पर पूरा देश आज शोक मना रहा है। पुलिस का कहना है कि घटना में विदेशियों सहित 78 लोग मारे गए हैं।
पश्चिमोत्तर गैलिशिया क्षेत्र के पुलिस प्रमुख जैमे इग्लेशियस ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि पवित्र शहर सांतियागो दे कंपोस्तेला के पास हुई घटना के मामले में 52 वर्षीय चालक पर ‘लापरवाही’ सहित आपराधिक आरोप हैं।
उन्होंने बताया कि चालक को बृहस्पतिवार को अस्पताल में ही हिरासत में ले लिया गया।
स्पेन के न्यायाधीश ने पुलिस को चालक से पूछताछ करने का आदेश दिया है।
अभी तक चालक पर कोई आरोप नहीं लगाया गया है। पुलिस ने अभी तक उससे पूछताछ भी नहीं की है। टिप्पणियां
पश्चिमोत्तर स्पेन में कल एक ट्रेन के पटरी से उतरने की घटना में 78 यात्रियों की मौत हो गई और 100 से अधिक यात्री घायल हो गए। छह ही अभी शिनाख्त नहीं हो सकी है।
स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि मृतकों में चार विदेशी शामिल हैं। विदेशी मृतकों में एक अमेरिकी, एक अलजीरियाई, एक मेक्सिको वासी और एक फ्रांसीसी शामिल है।
पश्चिमोत्तर गैलिशिया क्षेत्र के पुलिस प्रमुख जैमे इग्लेशियस ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि पवित्र शहर सांतियागो दे कंपोस्तेला के पास हुई घटना के मामले में 52 वर्षीय चालक पर ‘लापरवाही’ सहित आपराधिक आरोप हैं।
उन्होंने बताया कि चालक को बृहस्पतिवार को अस्पताल में ही हिरासत में ले लिया गया।
स्पेन के न्यायाधीश ने पुलिस को चालक से पूछताछ करने का आदेश दिया है।
अभी तक चालक पर कोई आरोप नहीं लगाया गया है। पुलिस ने अभी तक उससे पूछताछ भी नहीं की है। टिप्पणियां
पश्चिमोत्तर स्पेन में कल एक ट्रेन के पटरी से उतरने की घटना में 78 यात्रियों की मौत हो गई और 100 से अधिक यात्री घायल हो गए। छह ही अभी शिनाख्त नहीं हो सकी है।
स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि मृतकों में चार विदेशी शामिल हैं। विदेशी मृतकों में एक अमेरिकी, एक अलजीरियाई, एक मेक्सिको वासी और एक फ्रांसीसी शामिल है।
उन्होंने बताया कि चालक को बृहस्पतिवार को अस्पताल में ही हिरासत में ले लिया गया।
स्पेन के न्यायाधीश ने पुलिस को चालक से पूछताछ करने का आदेश दिया है।
अभी तक चालक पर कोई आरोप नहीं लगाया गया है। पुलिस ने अभी तक उससे पूछताछ भी नहीं की है। टिप्पणियां
पश्चिमोत्तर स्पेन में कल एक ट्रेन के पटरी से उतरने की घटना में 78 यात्रियों की मौत हो गई और 100 से अधिक यात्री घायल हो गए। छह ही अभी शिनाख्त नहीं हो सकी है।
स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि मृतकों में चार विदेशी शामिल हैं। विदेशी मृतकों में एक अमेरिकी, एक अलजीरियाई, एक मेक्सिको वासी और एक फ्रांसीसी शामिल है।
स्पेन के न्यायाधीश ने पुलिस को चालक से पूछताछ करने का आदेश दिया है।
अभी तक चालक पर कोई आरोप नहीं लगाया गया है। पुलिस ने अभी तक उससे पूछताछ भी नहीं की है। टिप्पणियां
पश्चिमोत्तर स्पेन में कल एक ट्रेन के पटरी से उतरने की घटना में 78 यात्रियों की मौत हो गई और 100 से अधिक यात्री घायल हो गए। छह ही अभी शिनाख्त नहीं हो सकी है।
स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि मृतकों में चार विदेशी शामिल हैं। विदेशी मृतकों में एक अमेरिकी, एक अलजीरियाई, एक मेक्सिको वासी और एक फ्रांसीसी शामिल है।
अभी तक चालक पर कोई आरोप नहीं लगाया गया है। पुलिस ने अभी तक उससे पूछताछ भी नहीं की है। टिप्पणियां
पश्चिमोत्तर स्पेन में कल एक ट्रेन के पटरी से उतरने की घटना में 78 यात्रियों की मौत हो गई और 100 से अधिक यात्री घायल हो गए। छह ही अभी शिनाख्त नहीं हो सकी है।
स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि मृतकों में चार विदेशी शामिल हैं। विदेशी मृतकों में एक अमेरिकी, एक अलजीरियाई, एक मेक्सिको वासी और एक फ्रांसीसी शामिल है।
पश्चिमोत्तर स्पेन में कल एक ट्रेन के पटरी से उतरने की घटना में 78 यात्रियों की मौत हो गई और 100 से अधिक यात्री घायल हो गए। छह ही अभी शिनाख्त नहीं हो सकी है।
स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि मृतकों में चार विदेशी शामिल हैं। विदेशी मृतकों में एक अमेरिकी, एक अलजीरियाई, एक मेक्सिको वासी और एक फ्रांसीसी शामिल है।
स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि मृतकों में चार विदेशी शामिल हैं। विदेशी मृतकों में एक अमेरिकी, एक अलजीरियाई, एक मेक्सिको वासी और एक फ्रांसीसी शामिल है। | संक्षिप्त सारांश: स्पेन की पुलिस ने शुक्रवार को बताया कि उसने दुर्घटनाग्रस्त हुई ट्रेन के चालक को आपराधिक लापरवाही के आरोप में हिरासत में लिया है। | 10 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: Danish Zehen Video: मशहूर यूट्यूबर दानिश जेहन (Danish Zehen) की आज पहली डेथ एनिवर्सरी है. इस मौके पर उनके कई वीडियो यूट्यूब पर वायरल हो रहे हैं. बता दें, पीछले साल दानिश जेहन का अचानक एक कार हादसे में निधन हो गया था. दानिश जेहन के अचानक हुए निधन से सोशल मीडिया पर तहलका मच गया था. यूट्यूबर दानिश जेहन के निधन को आज एक साल पूरा हो गया है. दानिश जेहन एक शादी से लौट रहे थे, तभी वाशी में उनकी कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई और इस हादसे में दानिश का निधन हो गया. बता दें, दानिश जेहन MTV के रियलिटी शो ‘Ace of Space' के कंटेस्टेंट भी रह चुके हैं. देखें उनके पांच वीडियो जिन्होंने सोशल मीडिया पर मचा दी थी धूम.
ट्विंकल खन्ना ने पहने प्याज से बने हुए झुमके, Photo शेयर कर कही ये बात...
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जेहन (Danish Zehen) की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उनकी आखिरी यात्रा में फैन्स की जबरदस्त भीड़ जुटी थी.
दानिश जेहन (Danish Zehen) की मौत की खबर से उनके दोस्तों और फैंस को काफी बड़ा झटका लगा था. उनके निधन के बाद भी इंस्टाग्राम पर उनके फॉलोअर्स की संख्या बढ़ती ही जा रही थी. लेकिन उसके बाद खबर आई थी की इंस्टाग्राम अकाउंट को डिलीट कर दिया गया. बता दें कि दानिश जेहन ने (Danish Zehen) एक्सिडेंट से कुछ घंटे पहले ही अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया था. सोशल मीडिया पर अपने वीडियो और तस्वीरों से धमाल मचा देने वाले दानिश जेहन (Danish Zehen) ने बॉलीवुड एक्ट्रेस सारा अली खान (Sara Ali Khan) का दिल भी जीत लिया था.
दानिश जहन (Danish Zehen) का ये वीडियो खूब वायरल हुआ था.
Tamannaah Dance Video: तमन्ना भाटिया के बर्थडे पर मची सोशल मीडिया पर धूम, देखें उनके 5 धमाकेदार वीडियो
दानिश जेहन (Danish Zehen) और सारा अली खान (Sara Ali Khan) का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा था. इस वीडियो में सारा अली खान एक सोफे पर बैठी नजर आई थीं और दानिश जेहन अपना स्वैग दिखा रहे थे. दानिश जेहन अपने स्वैग से सारा अली खान को इम्प्रेस करते है और सारा अली खान उनके स्टाइल से हैरान रह जाती. लेकिन दानिश का इस तरह चले जाने ने उनके फैन्स को जबरदस्त झटका पहुंचाया था. | यहाँ एक सारांश है:दानिश जेहन की आज है पहली डेथ एनीवर्सरी
दानिश जेहन के पांच फेमस वीडियो
यूट्यूब पर खूब वायरल हो रहे है दानिश जेहन के ये वीडियो | 18 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: मलेशिया एयरलाइन्स के लापता विमान एमएच370 की पानी के नीचे तलाश में जुटे हॉलैंड की कंपनी के शीर्ष खोजकर्ताओं ने कहा है कि उनके मुताबिक संभवतः विमान अंतिम क्षणों में सीधे नीचे नहीं डूबा, और उसे पायलट द्वारा चलाया जाना मुमकिन हो गया हो, और वह कहीं और ले जाया गया हो, जिसका अर्थ यह हुआ कि वे पिछले दो साल से समुद्र के गलत हिस्से में खोज कर रहे हैं।
मलेशिया एयरलाइन्स की उड़ान संख्या एमएच370 मार्च, 2014 में कुआला लंपुर से बीजिंग जाते वक्त 239 यात्रियों तथा क्रू समेत लापता हो गई थी। इंजीनियरिंग ग्रुप फुगरो के नेतृत्व में खोजकर्ताओं का एक दल विमान के मलबे की तलाश में पिछले दो साल समुद्र का इतना बड़ा हिस्सा खंगाल रहा है, जितना बड़ा ग्रीस देश है...
पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के पास दक्षिणी हिन्द महासागर में 1,20,000 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में जारी यह खोज तीन महीने में खत्म होने की संभावना है, जिसके बाद इसे रोका जा सकता है, लेकिन उस मुद्दे पर शुक्रवार को मलेशिया, चीन और ऑस्ट्रेलिया के बीच एक बैठक होने जा रही है। फिलहाल खोज के दौरान कुछ भी खोजा नहीं जा सका है।
फुगरो के प्रोजेक्ट डायरेक्टर पॉल कैनेडी ने समाचार एजेंसी रॉयटर को बताया, "अगर वह यहां नहीं है, तो इसका अर्थ है कि वह कहीं और है..."
हालांकि कैनेडी किसी भी संभावना से इंकार नहीं करते, लेकिन उनकी टीम के मुताबिक यह संभावना भी है कि अंतिम क्षणों में पायलट उसे चलाने में कामयाब हो गया हो, जिसका अर्थ यह हुआ कि वह उस इलाके से बाहर निकल गया हो, जो सैटेलाइट तस्वीरों से आंकड़े जुटाकर खोज के लिए तय किया गया था।टिप्पणियां
कैनेडी ने कहा, "अगर उसे चलाया गया था, तो वह काफी दूर तक गया हो सकता है... हो सकता है, उसे चलाकर उस इलाके से काफी दूर तक ले जाया गया हो, जहां हम खोज रहे हैं, सो, तर्कपूर्ण नतीजा यही है कि ऐसा हुआ होना मुमकिन है..."(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
मलेशिया एयरलाइन्स की उड़ान संख्या एमएच370 मार्च, 2014 में कुआला लंपुर से बीजिंग जाते वक्त 239 यात्रियों तथा क्रू समेत लापता हो गई थी। इंजीनियरिंग ग्रुप फुगरो के नेतृत्व में खोजकर्ताओं का एक दल विमान के मलबे की तलाश में पिछले दो साल समुद्र का इतना बड़ा हिस्सा खंगाल रहा है, जितना बड़ा ग्रीस देश है...
पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के पास दक्षिणी हिन्द महासागर में 1,20,000 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में जारी यह खोज तीन महीने में खत्म होने की संभावना है, जिसके बाद इसे रोका जा सकता है, लेकिन उस मुद्दे पर शुक्रवार को मलेशिया, चीन और ऑस्ट्रेलिया के बीच एक बैठक होने जा रही है। फिलहाल खोज के दौरान कुछ भी खोजा नहीं जा सका है।
फुगरो के प्रोजेक्ट डायरेक्टर पॉल कैनेडी ने समाचार एजेंसी रॉयटर को बताया, "अगर वह यहां नहीं है, तो इसका अर्थ है कि वह कहीं और है..."
हालांकि कैनेडी किसी भी संभावना से इंकार नहीं करते, लेकिन उनकी टीम के मुताबिक यह संभावना भी है कि अंतिम क्षणों में पायलट उसे चलाने में कामयाब हो गया हो, जिसका अर्थ यह हुआ कि वह उस इलाके से बाहर निकल गया हो, जो सैटेलाइट तस्वीरों से आंकड़े जुटाकर खोज के लिए तय किया गया था।टिप्पणियां
कैनेडी ने कहा, "अगर उसे चलाया गया था, तो वह काफी दूर तक गया हो सकता है... हो सकता है, उसे चलाकर उस इलाके से काफी दूर तक ले जाया गया हो, जहां हम खोज रहे हैं, सो, तर्कपूर्ण नतीजा यही है कि ऐसा हुआ होना मुमकिन है..."(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के पास दक्षिणी हिन्द महासागर में 1,20,000 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में जारी यह खोज तीन महीने में खत्म होने की संभावना है, जिसके बाद इसे रोका जा सकता है, लेकिन उस मुद्दे पर शुक्रवार को मलेशिया, चीन और ऑस्ट्रेलिया के बीच एक बैठक होने जा रही है। फिलहाल खोज के दौरान कुछ भी खोजा नहीं जा सका है।
फुगरो के प्रोजेक्ट डायरेक्टर पॉल कैनेडी ने समाचार एजेंसी रॉयटर को बताया, "अगर वह यहां नहीं है, तो इसका अर्थ है कि वह कहीं और है..."
हालांकि कैनेडी किसी भी संभावना से इंकार नहीं करते, लेकिन उनकी टीम के मुताबिक यह संभावना भी है कि अंतिम क्षणों में पायलट उसे चलाने में कामयाब हो गया हो, जिसका अर्थ यह हुआ कि वह उस इलाके से बाहर निकल गया हो, जो सैटेलाइट तस्वीरों से आंकड़े जुटाकर खोज के लिए तय किया गया था।टिप्पणियां
कैनेडी ने कहा, "अगर उसे चलाया गया था, तो वह काफी दूर तक गया हो सकता है... हो सकता है, उसे चलाकर उस इलाके से काफी दूर तक ले जाया गया हो, जहां हम खोज रहे हैं, सो, तर्कपूर्ण नतीजा यही है कि ऐसा हुआ होना मुमकिन है..."(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
फुगरो के प्रोजेक्ट डायरेक्टर पॉल कैनेडी ने समाचार एजेंसी रॉयटर को बताया, "अगर वह यहां नहीं है, तो इसका अर्थ है कि वह कहीं और है..."
हालांकि कैनेडी किसी भी संभावना से इंकार नहीं करते, लेकिन उनकी टीम के मुताबिक यह संभावना भी है कि अंतिम क्षणों में पायलट उसे चलाने में कामयाब हो गया हो, जिसका अर्थ यह हुआ कि वह उस इलाके से बाहर निकल गया हो, जो सैटेलाइट तस्वीरों से आंकड़े जुटाकर खोज के लिए तय किया गया था।टिप्पणियां
कैनेडी ने कहा, "अगर उसे चलाया गया था, तो वह काफी दूर तक गया हो सकता है... हो सकता है, उसे चलाकर उस इलाके से काफी दूर तक ले जाया गया हो, जहां हम खोज रहे हैं, सो, तर्कपूर्ण नतीजा यही है कि ऐसा हुआ होना मुमकिन है..."(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
हालांकि कैनेडी किसी भी संभावना से इंकार नहीं करते, लेकिन उनकी टीम के मुताबिक यह संभावना भी है कि अंतिम क्षणों में पायलट उसे चलाने में कामयाब हो गया हो, जिसका अर्थ यह हुआ कि वह उस इलाके से बाहर निकल गया हो, जो सैटेलाइट तस्वीरों से आंकड़े जुटाकर खोज के लिए तय किया गया था।टिप्पणियां
कैनेडी ने कहा, "अगर उसे चलाया गया था, तो वह काफी दूर तक गया हो सकता है... हो सकता है, उसे चलाकर उस इलाके से काफी दूर तक ले जाया गया हो, जहां हम खोज रहे हैं, सो, तर्कपूर्ण नतीजा यही है कि ऐसा हुआ होना मुमकिन है..."(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
कैनेडी ने कहा, "अगर उसे चलाया गया था, तो वह काफी दूर तक गया हो सकता है... हो सकता है, उसे चलाकर उस इलाके से काफी दूर तक ले जाया गया हो, जहां हम खोज रहे हैं, सो, तर्कपूर्ण नतीजा यही है कि ऐसा हुआ होना मुमकिन है..."(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) | सारांश: खोजकर्ताओं के मुताबिक, संभवतः विमान अंतिम क्षणों में सीधे नीचे नहीं डूबा
"संभव है, अंत समय में पायलटों द्वारा उसे चलाया जाना मुमकिन हो गया हो..."
इसका अर्थ हुआ कि वे दो साल से समुद्र के गलत हिस्से में खोज कर रहे हैं | 33 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: पाकिस्तान के कराची शहर में एक सीमा चौकी पर अज्ञात हमलावरों की गोलीबारी में चार पुलिसकर्मियों की मौत हो गई। हमलावर मोटरसाइकिल से आए थे।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, सिंध के पुलिस महानिरीक्षक फयाज लघारी ने बताया कि हमलावरों ने कराची के मुख्य राजमार्ग पर स्थित सीमा चौकी पर गोलीबारी की।टिप्पणियां
यह घटना रात के लगभग 9.20 बजे की है। घटना के बाद हमलावर फरार हो गए।
इस हमले की जिम्मेदारी अब तक किसी ने नहीं ली है।
यह घटना शहर में हुए दो विस्फोटों के तुरंत बाद हुई है जिसमें कम से कम 40 लोगों की मौत हो गई थी तथा 130 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, सिंध के पुलिस महानिरीक्षक फयाज लघारी ने बताया कि हमलावरों ने कराची के मुख्य राजमार्ग पर स्थित सीमा चौकी पर गोलीबारी की।टिप्पणियां
यह घटना रात के लगभग 9.20 बजे की है। घटना के बाद हमलावर फरार हो गए।
इस हमले की जिम्मेदारी अब तक किसी ने नहीं ली है।
यह घटना शहर में हुए दो विस्फोटों के तुरंत बाद हुई है जिसमें कम से कम 40 लोगों की मौत हो गई थी तथा 130 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे।
यह घटना रात के लगभग 9.20 बजे की है। घटना के बाद हमलावर फरार हो गए।
इस हमले की जिम्मेदारी अब तक किसी ने नहीं ली है।
यह घटना शहर में हुए दो विस्फोटों के तुरंत बाद हुई है जिसमें कम से कम 40 लोगों की मौत हो गई थी तथा 130 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे।
इस हमले की जिम्मेदारी अब तक किसी ने नहीं ली है।
यह घटना शहर में हुए दो विस्फोटों के तुरंत बाद हुई है जिसमें कम से कम 40 लोगों की मौत हो गई थी तथा 130 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। | सारांश: पाकिस्तान के कराची शहर में एक सीमा चौकी पर अज्ञात हमलावरों की गोलीबारी में चार पुलिसकर्मियों की मौत हो गई। हमलावर मोटरसाइकिल से आए थे। | 5 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले की टीवी एक्टर शरद मल्होत्रा ने कड़ी निंदा की है. उन्होंने कहा कि मुझे उन जवानों के परिजनों के लिए बहुत दुख और आतंकी हमले पर बहुत गुस्सा आ रहा है. मेरा दिल उन जवानों के लिए रो रहा है, जो इस हमले में शहीद हो गए. हमले के गुनहगारों को जिंदा दफनाओ. मुझे आशा है कि सरकार इस दिशा में कड़ा कदम उठाएगी और ऐसे हमले दोबारा नहीं होंगे.
पुलवामा में हुए आतंकी हमले पर मशहूर टीवी एक्टर अर्जुन बिजलानी ने कहा कि यह सभी एक लिए एक काले दिन की तरह था. जब मुझे इसकी खबर मिली तो बहुत गुस्सा आया. मुझे आशा है कि भारतीय सेना आंतकियों को कड़ा सबक सिखाएगी. एक्टर अर्जुन ने शहीदों के परिजनों के प्रति दुख व्यक्त किया और कहा कि मानव जीवन बहुत वैल्यूवल है और इस तरह की घटनाएं देश में नहीं होनी चाहिए.
इस आतंकी हमले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए टीवी एक्टर शशांक व्यास ने कहा कि भारत को इस दिशा में कड़ा कदम उठाना चाहिए. कोई भी व्यक्ति पाकिस्तान और कश्मीर जाते समय कैसे सुरक्षित रह सकता है, जब इस तरह के हमले होंगे. जिंदगी बहुत छोटी होती है और सभी को शांति से रहने का अधिकार है.
पुलवामा हमले पर टीवी एक्टर जेसन शाह ने कहा कि हमें गुस्से में कोई कदम नहीं उठाना चाहिए. गुस्से से कोई बदलाव नहीं आ सकता. इस हमले पर दुख जताते हुए उन्होंने कहा कि यह सब राजनीति की वजह से हो रहा है. दुनियाभर में लोगों के बीच प्यार की जरुरत है.
आतंकी हमले की निंदा करते हुए टीवी एक्टर रेहान रॉय ने कहा कि मेरा दिल उन शहीद जवानों और उनके परिजनों के लिए रो रहा है. उन कायरों को जिंदा दफनाओ. उन्होंने कहा कि सरकार को इस दिशा में कड़े कदम उठाने चाहिए. हमारे देश के जवान ही असली हीरो हैं.
जम्मू कश्नीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले पर टीवी एक्ट्रेस मून बनर्जी ने कहा कि हमें कैसी भी इस तरह की कायराना हरकत रोकने की जरुरत है और इसके लिए छोटे से छोटा प्रयास भी महत्वपूर्ण है . | सारांश: पुलवामा अटैक पर टीवी सितारों ने दी कड़ी प्रतिक्रिया
इस आतंकी हमले को बताया कायराना
सरकार से कड़ा कदम उठाने की मांग की | 7 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश से लगातार लाल चंदन की तस्करी हो रही है. दक्षिणी राज्यों से चंदन दिल्ली और फिर दिल्ली से नेपाल होते हुए चीन पहुंचता है. दिल्ली पुलिस ने एक चंदन तस्कर अमित वर्मा को गिरफ्तार कर बड़ी मात्रा में चंदन बरामद कर यह खुलासा किया है.
गत तीन जून को जब दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने असोला इलाके में अमित वर्मा के गोदाम पर छापा मारा तो वहां से 571 किलो लाल चंदन बरामद हुआ. अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत करीब दो करोड़ रुपये है, जबकि भारत में कीमत करीब 50 लाख रुपये है. अमित मूल रूप से दार्जिलिंग का रहने वाला है. वह पिछले कुछ समय से लाल चंदन की तस्करी का गोरखधंधा कर रहा है.
पुलिस के मुताबिक लाल चंदन की तस्करी कर्नाटक,आंध्रप्रदेश और तमिलनाडु के सीमावर्ती इलाकों से होती है. गैंग के लोग वहां से अवैध तरीके से चंदन ट्रक में कैविटी बनाकर दिल्ली लाते हैं, फिर दिल्ली से नेपाल ले जाते हैं और नेपाल से चीन ले जाते हैं क्योंकि वहां चंदन महंगा बिकता है. नेपाल में चंदन के दो बड़े खरीददार हैं. गैंग के सभी लोगों की पहचान हो गई है और उन्हें पकड़ने की कोशिश की जा रही है.
पुलिस के अनुसार आरोपी अमित मूल रूप से दार्जिलिंग का रहने वाला है. उसके दो चचेरे भाई दीपक वर्मा और नीरज सहगल भी इसी धंधे में हैं. उन्हें पिछले साल सितंबर में क्राइम ब्रांच ने ही गिरफ्तार किया था. | बरामद 571 किलो चंदन की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब दो करोड़ रुपये
कर्नाटक,आंध्रप्रदेश और तमिलनाडु से होती है लाल चंदन की तस्करी
दक्षिण भारत से दिल्ली और फिर नेपाल होकर चीन जाता है चंदन | 28 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने किश्तवाड़ में शुक्रवार की हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का वादा किया और लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने मुख्यधारा अथवा अलगाववाद समर्थक किसी भी नेता को हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में नहीं जाने देने का फैसला किया है, क्योंकि इससे स्थिति ज्यादा बिगड़ सकती है। किश्तवाड़ जाते वक्त बीजेपी नेता अरुण जेटली को जम्मू हवाई अड्डे पर रोके जाने के तत्काल बाद उमर ने कहा, ...और इनमें अरुण जेटली भी शामिल हैं।
किसी राजनीतिक दल का नाम लिए बगैर मुख्यमंत्री ने कहा, इन नेताओं का एकमात्र मकसद यही नजर आता है कि राज्य में 2008 के हालात (अमरनाथ भूमि विवाद आंदोलन) पैदा किए जाएं, ताकि वे संसदीय चुनाव और विधानसभा चुनाव में फायदा उठा सकें। उमर ने कहा कि उन्होंने लोकसभा में विपक्ष की नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज से बात की है। उन्होंने कहा, नेता प्रतिपक्ष के साथ टेलीफोन पर हुई बातचीत में मैंने उनसे कहा कि वे इस क्षेत्र में अपने लोगों से कहें कि शांति बनाए रखें और इस मुद्दे को हवा नहीं दें।
उमर ने आरोप लगाया, किश्तवाड़ की घटना के बाद पैदा हुए हालात का फायदा उठाने लोगों के ध्रुवीकरण करने का प्रयास हो रहा है। अब तक ये लोग इसमें कामयाब नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा, मैं आपको उन राज्यों का नाम बता सकता हूं, जहां इसी साल सांप्रदायिक दंगे हुए हैं। क्या ये लोग उन जगहों पर गए? ये लोग क्यों जम्मू-कश्मीर और खासकर जम्मू क्षेत्र को ही चुन रहे हैं? क्या घाटी में शिया-सुन्नी झड़पों को ज्यादा समय हो गया? ये लोग उस वक्त कहां थे? मुख्यमंत्री ने इंसाफ का भरोसा देते हुए लोगों से आग्रह किया कि वे किश्तवाड़ की स्थिति को लेकर अफवाहों पर ध्यान नहीं दें। टिप्पणियां
उमर ने संवाददाताओं से कहा, मेरी लोगों से गुजारिश है कि वे उन सियासी दलों को कामयाब नहीं होने दें, जो इंसानी हितों से ऊपर अपने राजनीतिक हितों को रख रहे हैं, ताकि स्थिति का फायदा उठा सकें। उन्होंने कहा, कृपया अफवाहों को खारिज कर दें। हम कानून-व्यवस्था बहाल करेंगे और इंसाफ मिलना सुनिश्चित करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी अपील आम आदमी पर केंद्रित है, राजनीतिक दलों पर नहीं।
उमर ने कहा कि किश्तवाड़ की घटना के बारे में लोगों की चिंताओं का निवारण करने के लिए उनकी सरकार हर कदम उठाएगी। उन्होंने कहा, मैं लोगों को यकीन दिलाना चाहता हूं कि हम यह सुनिश्चित करेंगे कि यह अशांति राज्य के दूसरे हिस्सों में नहीं फैले। हम किश्तवाड़ और आसपास के इलाकों में शांति बहाल करने के लिए हर जरूरी कदम उठाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किश्तवाड़ हिंसा की जांच के तथ्यों से लोगों को अवगत कराया जाए उमर ने कहा, हम यह भी सुनिश्चित करेंगे कि किश्तवाड़ और दूसरे इलाकों में जानमाल के हुए नुकसान के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हो और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने मुख्यधारा अथवा अलगाववाद समर्थक किसी भी नेता को हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में नहीं जाने देने का फैसला किया है, क्योंकि इससे स्थिति ज्यादा बिगड़ सकती है। किश्तवाड़ जाते वक्त बीजेपी नेता अरुण जेटली को जम्मू हवाई अड्डे पर रोके जाने के तत्काल बाद उमर ने कहा, ...और इनमें अरुण जेटली भी शामिल हैं।
किसी राजनीतिक दल का नाम लिए बगैर मुख्यमंत्री ने कहा, इन नेताओं का एकमात्र मकसद यही नजर आता है कि राज्य में 2008 के हालात (अमरनाथ भूमि विवाद आंदोलन) पैदा किए जाएं, ताकि वे संसदीय चुनाव और विधानसभा चुनाव में फायदा उठा सकें। उमर ने कहा कि उन्होंने लोकसभा में विपक्ष की नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज से बात की है। उन्होंने कहा, नेता प्रतिपक्ष के साथ टेलीफोन पर हुई बातचीत में मैंने उनसे कहा कि वे इस क्षेत्र में अपने लोगों से कहें कि शांति बनाए रखें और इस मुद्दे को हवा नहीं दें।
उमर ने आरोप लगाया, किश्तवाड़ की घटना के बाद पैदा हुए हालात का फायदा उठाने लोगों के ध्रुवीकरण करने का प्रयास हो रहा है। अब तक ये लोग इसमें कामयाब नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा, मैं आपको उन राज्यों का नाम बता सकता हूं, जहां इसी साल सांप्रदायिक दंगे हुए हैं। क्या ये लोग उन जगहों पर गए? ये लोग क्यों जम्मू-कश्मीर और खासकर जम्मू क्षेत्र को ही चुन रहे हैं? क्या घाटी में शिया-सुन्नी झड़पों को ज्यादा समय हो गया? ये लोग उस वक्त कहां थे? मुख्यमंत्री ने इंसाफ का भरोसा देते हुए लोगों से आग्रह किया कि वे किश्तवाड़ की स्थिति को लेकर अफवाहों पर ध्यान नहीं दें। टिप्पणियां
उमर ने संवाददाताओं से कहा, मेरी लोगों से गुजारिश है कि वे उन सियासी दलों को कामयाब नहीं होने दें, जो इंसानी हितों से ऊपर अपने राजनीतिक हितों को रख रहे हैं, ताकि स्थिति का फायदा उठा सकें। उन्होंने कहा, कृपया अफवाहों को खारिज कर दें। हम कानून-व्यवस्था बहाल करेंगे और इंसाफ मिलना सुनिश्चित करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी अपील आम आदमी पर केंद्रित है, राजनीतिक दलों पर नहीं।
उमर ने कहा कि किश्तवाड़ की घटना के बारे में लोगों की चिंताओं का निवारण करने के लिए उनकी सरकार हर कदम उठाएगी। उन्होंने कहा, मैं लोगों को यकीन दिलाना चाहता हूं कि हम यह सुनिश्चित करेंगे कि यह अशांति राज्य के दूसरे हिस्सों में नहीं फैले। हम किश्तवाड़ और आसपास के इलाकों में शांति बहाल करने के लिए हर जरूरी कदम उठाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किश्तवाड़ हिंसा की जांच के तथ्यों से लोगों को अवगत कराया जाए उमर ने कहा, हम यह भी सुनिश्चित करेंगे कि किश्तवाड़ और दूसरे इलाकों में जानमाल के हुए नुकसान के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हो और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।
किसी राजनीतिक दल का नाम लिए बगैर मुख्यमंत्री ने कहा, इन नेताओं का एकमात्र मकसद यही नजर आता है कि राज्य में 2008 के हालात (अमरनाथ भूमि विवाद आंदोलन) पैदा किए जाएं, ताकि वे संसदीय चुनाव और विधानसभा चुनाव में फायदा उठा सकें। उमर ने कहा कि उन्होंने लोकसभा में विपक्ष की नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज से बात की है। उन्होंने कहा, नेता प्रतिपक्ष के साथ टेलीफोन पर हुई बातचीत में मैंने उनसे कहा कि वे इस क्षेत्र में अपने लोगों से कहें कि शांति बनाए रखें और इस मुद्दे को हवा नहीं दें।
उमर ने आरोप लगाया, किश्तवाड़ की घटना के बाद पैदा हुए हालात का फायदा उठाने लोगों के ध्रुवीकरण करने का प्रयास हो रहा है। अब तक ये लोग इसमें कामयाब नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा, मैं आपको उन राज्यों का नाम बता सकता हूं, जहां इसी साल सांप्रदायिक दंगे हुए हैं। क्या ये लोग उन जगहों पर गए? ये लोग क्यों जम्मू-कश्मीर और खासकर जम्मू क्षेत्र को ही चुन रहे हैं? क्या घाटी में शिया-सुन्नी झड़पों को ज्यादा समय हो गया? ये लोग उस वक्त कहां थे? मुख्यमंत्री ने इंसाफ का भरोसा देते हुए लोगों से आग्रह किया कि वे किश्तवाड़ की स्थिति को लेकर अफवाहों पर ध्यान नहीं दें। टिप्पणियां
उमर ने संवाददाताओं से कहा, मेरी लोगों से गुजारिश है कि वे उन सियासी दलों को कामयाब नहीं होने दें, जो इंसानी हितों से ऊपर अपने राजनीतिक हितों को रख रहे हैं, ताकि स्थिति का फायदा उठा सकें। उन्होंने कहा, कृपया अफवाहों को खारिज कर दें। हम कानून-व्यवस्था बहाल करेंगे और इंसाफ मिलना सुनिश्चित करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी अपील आम आदमी पर केंद्रित है, राजनीतिक दलों पर नहीं।
उमर ने कहा कि किश्तवाड़ की घटना के बारे में लोगों की चिंताओं का निवारण करने के लिए उनकी सरकार हर कदम उठाएगी। उन्होंने कहा, मैं लोगों को यकीन दिलाना चाहता हूं कि हम यह सुनिश्चित करेंगे कि यह अशांति राज्य के दूसरे हिस्सों में नहीं फैले। हम किश्तवाड़ और आसपास के इलाकों में शांति बहाल करने के लिए हर जरूरी कदम उठाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किश्तवाड़ हिंसा की जांच के तथ्यों से लोगों को अवगत कराया जाए उमर ने कहा, हम यह भी सुनिश्चित करेंगे कि किश्तवाड़ और दूसरे इलाकों में जानमाल के हुए नुकसान के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हो और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।
उमर ने आरोप लगाया, किश्तवाड़ की घटना के बाद पैदा हुए हालात का फायदा उठाने लोगों के ध्रुवीकरण करने का प्रयास हो रहा है। अब तक ये लोग इसमें कामयाब नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा, मैं आपको उन राज्यों का नाम बता सकता हूं, जहां इसी साल सांप्रदायिक दंगे हुए हैं। क्या ये लोग उन जगहों पर गए? ये लोग क्यों जम्मू-कश्मीर और खासकर जम्मू क्षेत्र को ही चुन रहे हैं? क्या घाटी में शिया-सुन्नी झड़पों को ज्यादा समय हो गया? ये लोग उस वक्त कहां थे? मुख्यमंत्री ने इंसाफ का भरोसा देते हुए लोगों से आग्रह किया कि वे किश्तवाड़ की स्थिति को लेकर अफवाहों पर ध्यान नहीं दें। टिप्पणियां
उमर ने संवाददाताओं से कहा, मेरी लोगों से गुजारिश है कि वे उन सियासी दलों को कामयाब नहीं होने दें, जो इंसानी हितों से ऊपर अपने राजनीतिक हितों को रख रहे हैं, ताकि स्थिति का फायदा उठा सकें। उन्होंने कहा, कृपया अफवाहों को खारिज कर दें। हम कानून-व्यवस्था बहाल करेंगे और इंसाफ मिलना सुनिश्चित करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी अपील आम आदमी पर केंद्रित है, राजनीतिक दलों पर नहीं।
उमर ने कहा कि किश्तवाड़ की घटना के बारे में लोगों की चिंताओं का निवारण करने के लिए उनकी सरकार हर कदम उठाएगी। उन्होंने कहा, मैं लोगों को यकीन दिलाना चाहता हूं कि हम यह सुनिश्चित करेंगे कि यह अशांति राज्य के दूसरे हिस्सों में नहीं फैले। हम किश्तवाड़ और आसपास के इलाकों में शांति बहाल करने के लिए हर जरूरी कदम उठाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किश्तवाड़ हिंसा की जांच के तथ्यों से लोगों को अवगत कराया जाए उमर ने कहा, हम यह भी सुनिश्चित करेंगे कि किश्तवाड़ और दूसरे इलाकों में जानमाल के हुए नुकसान के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हो और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।
उमर ने संवाददाताओं से कहा, मेरी लोगों से गुजारिश है कि वे उन सियासी दलों को कामयाब नहीं होने दें, जो इंसानी हितों से ऊपर अपने राजनीतिक हितों को रख रहे हैं, ताकि स्थिति का फायदा उठा सकें। उन्होंने कहा, कृपया अफवाहों को खारिज कर दें। हम कानून-व्यवस्था बहाल करेंगे और इंसाफ मिलना सुनिश्चित करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी अपील आम आदमी पर केंद्रित है, राजनीतिक दलों पर नहीं।
उमर ने कहा कि किश्तवाड़ की घटना के बारे में लोगों की चिंताओं का निवारण करने के लिए उनकी सरकार हर कदम उठाएगी। उन्होंने कहा, मैं लोगों को यकीन दिलाना चाहता हूं कि हम यह सुनिश्चित करेंगे कि यह अशांति राज्य के दूसरे हिस्सों में नहीं फैले। हम किश्तवाड़ और आसपास के इलाकों में शांति बहाल करने के लिए हर जरूरी कदम उठाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किश्तवाड़ हिंसा की जांच के तथ्यों से लोगों को अवगत कराया जाए उमर ने कहा, हम यह भी सुनिश्चित करेंगे कि किश्तवाड़ और दूसरे इलाकों में जानमाल के हुए नुकसान के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हो और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।
उमर ने कहा कि किश्तवाड़ की घटना के बारे में लोगों की चिंताओं का निवारण करने के लिए उनकी सरकार हर कदम उठाएगी। उन्होंने कहा, मैं लोगों को यकीन दिलाना चाहता हूं कि हम यह सुनिश्चित करेंगे कि यह अशांति राज्य के दूसरे हिस्सों में नहीं फैले। हम किश्तवाड़ और आसपास के इलाकों में शांति बहाल करने के लिए हर जरूरी कदम उठाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किश्तवाड़ हिंसा की जांच के तथ्यों से लोगों को अवगत कराया जाए उमर ने कहा, हम यह भी सुनिश्चित करेंगे कि किश्तवाड़ और दूसरे इलाकों में जानमाल के हुए नुकसान के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हो और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। | जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, मेरी लोगों से गुजारिश है कि वे उन सियासी दलों को कामयाब नहीं होने दें, जो इंसानी हितों से ऊपर अपने राजनीतिक हितों को रख रहे हैं, ताकि स्थिति का फायदा उठा सकें। | 1 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: भारत की दिग्गज बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल को घुटने के उपचार के लिए हैदराबाद के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है. इस चोट के कारण ही रियो ओलिंपिक में उनका खेल प्रभावित हुआ था. भारत की 26 वर्षीय खिलाड़ी रियो खेलों के दूसरे ग्रुप मैच में यूक्रेन की मारिया यूलितिना के हाथों हारकर प्रतियोगिता से बाहर हो गई थीं.
साइना के पिता हरवीर सिंह नेकहा, ‘साइना पिछले दो दिन से अस्पताल में भर्ती है और उसकी चोट का उपचार चल रहा है जो रियो ओलिंपिक में मारिया के खिलाफ मैच के दौरान और बढ़ गई थी.’ साइना ने दाहिने घुटने में सूजन की बात कही थी, जिससे कोर्ट में उनका मूवमेंट प्रभावित हुआ और इसलिए वह ग्रुप चरण से ही बाहर हो गयी थीं.टिप्पणियां
सिंह ने कहा कि साइना 16 अगस्त को घर लौटी और अगले ही दिन उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती हो गयी. उन्होंने हालांकि एमआरआई स्कैन के परिणाम का विवरण नहीं दिया. सिंह ने कहा, ‘डॉक्टरों ने एमआरआई स्कैन के परिणाम के बारे में मुझे अभी नहीं बताया है. मैं इस बारे में आज नहीं, बल्कि कल बात कर पाने की स्थिति में रहूंगा.’उन्होंने साथ ही कहा कि आगे की जांच के लिए साइना कल मुंबई के लिए उड़ान भरेंगी. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
साइना के पिता हरवीर सिंह नेकहा, ‘साइना पिछले दो दिन से अस्पताल में भर्ती है और उसकी चोट का उपचार चल रहा है जो रियो ओलिंपिक में मारिया के खिलाफ मैच के दौरान और बढ़ गई थी.’ साइना ने दाहिने घुटने में सूजन की बात कही थी, जिससे कोर्ट में उनका मूवमेंट प्रभावित हुआ और इसलिए वह ग्रुप चरण से ही बाहर हो गयी थीं.टिप्पणियां
सिंह ने कहा कि साइना 16 अगस्त को घर लौटी और अगले ही दिन उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती हो गयी. उन्होंने हालांकि एमआरआई स्कैन के परिणाम का विवरण नहीं दिया. सिंह ने कहा, ‘डॉक्टरों ने एमआरआई स्कैन के परिणाम के बारे में मुझे अभी नहीं बताया है. मैं इस बारे में आज नहीं, बल्कि कल बात कर पाने की स्थिति में रहूंगा.’उन्होंने साथ ही कहा कि आगे की जांच के लिए साइना कल मुंबई के लिए उड़ान भरेंगी. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
सिंह ने कहा कि साइना 16 अगस्त को घर लौटी और अगले ही दिन उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती हो गयी. उन्होंने हालांकि एमआरआई स्कैन के परिणाम का विवरण नहीं दिया. सिंह ने कहा, ‘डॉक्टरों ने एमआरआई स्कैन के परिणाम के बारे में मुझे अभी नहीं बताया है. मैं इस बारे में आज नहीं, बल्कि कल बात कर पाने की स्थिति में रहूंगा.’उन्होंने साथ ही कहा कि आगे की जांच के लिए साइना कल मुंबई के लिए उड़ान भरेंगी. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: रियो में दूसरे ग्रुप मैच में यूक्रेन की मारिया से हार गई थीं
इस मैच के दौरान साइना के दाएं घुटने में थी सूजन
16 अगस्त को भारत वापस लौटी है यह बैडमिंटन स्टार | 25 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: भारत के मणिपुर और मिजोरम से 53 यहूदी सोमवार को इस्राइल पहुंच गए।
भारतीय यहूदियों को इस्राइल 2005 में मान्यता दी थी। इस्राइल का कहना है कि 800 ईशापूर्व ‘बनेई मेनांशे’ समुदाय के लोग इस्राइल से भारत चले गए थे।टिप्पणियां
ऐसे करीब 1,700 यहूदी पहले ही भारत से इस्राइल में बस चुके हैं, लेकिन कई सवाल खड़े होने पर 2007 में भारतीय यहूदियों को यहां वापस बुलाने की प्रक्रिया रोक दी गई थी। अब फिर ये यह प्रक्रिया शुरू हुई है।
यह समुदाय अपने पूर्वजों की तरह ही यहूदी धर्म का पालन करता है। ये लोग यहूदी त्यौहारों को पारंपरिक तरीके से मनाते हैं।
भारतीय यहूदियों को इस्राइल 2005 में मान्यता दी थी। इस्राइल का कहना है कि 800 ईशापूर्व ‘बनेई मेनांशे’ समुदाय के लोग इस्राइल से भारत चले गए थे।टिप्पणियां
ऐसे करीब 1,700 यहूदी पहले ही भारत से इस्राइल में बस चुके हैं, लेकिन कई सवाल खड़े होने पर 2007 में भारतीय यहूदियों को यहां वापस बुलाने की प्रक्रिया रोक दी गई थी। अब फिर ये यह प्रक्रिया शुरू हुई है।
यह समुदाय अपने पूर्वजों की तरह ही यहूदी धर्म का पालन करता है। ये लोग यहूदी त्यौहारों को पारंपरिक तरीके से मनाते हैं।
ऐसे करीब 1,700 यहूदी पहले ही भारत से इस्राइल में बस चुके हैं, लेकिन कई सवाल खड़े होने पर 2007 में भारतीय यहूदियों को यहां वापस बुलाने की प्रक्रिया रोक दी गई थी। अब फिर ये यह प्रक्रिया शुरू हुई है।
यह समुदाय अपने पूर्वजों की तरह ही यहूदी धर्म का पालन करता है। ये लोग यहूदी त्यौहारों को पारंपरिक तरीके से मनाते हैं।
यह समुदाय अपने पूर्वजों की तरह ही यहूदी धर्म का पालन करता है। ये लोग यहूदी त्यौहारों को पारंपरिक तरीके से मनाते हैं। | संक्षिप्त सारांश: भारत के मणिपुर और मिजोरम से 53 यहूदी सोमवार को इस्राइल पहुंच गए। भारतीय यहूदियों को इस्राइल 2005 में मान्यता दी थी। इस्राइल का कहना है कि 800 ईशापूर्व ‘बनेई मेनांशे’ समुदाय के लोग इस्राइल से भारत चले गए थे। | 23 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: जापान में गुरुवार को रिक्टर पैमाने पर 6.1 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए. द इंडिपेंडेंट ने अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के हवाले से बताया कि कामिशी से लगभग 281 किलोमीटर दक्षिणपूर्व में और फुकुशिमा से लगभग 321 मील दूर पूर्व में भूंकप के झटके महसूस किए गए. भूकंप के झटके तड़के 2.37 बजे महसूस किए गए. भूकंप से अभी किसी तरह की क्षति की कोई खबर नहीं है. सुनामी की चेतावनी भी जारी नहीं की गई है.मैक्सिको में भूकंप : विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा- सभी भारतीय सुरक्षितटिप्पणियां
इससे पहले मेक्सिको में मंगलवार को आए रिक्टर पैमाने पर 7.1 तीव्रता के भूकंप में मरने वालों की संख्या बढ़कर 250 पार कर गई है. समाचार एजेंसी एफे ने बुधवार को बताया कि मंगलवार को आए भूकंप से प्रभावित लोगों को चिकित्सीय सहायता एवं जरूरी सामानों की आपूर्ति की जा रही है. राष्ट्रपति एनरिक पेना नीटो ने मोरेलोस के जोजुटला के दौरे के दौरान कहा, शांति बनाए रखें. आज सबसे जरूरी यह है कि आपमें से कई लोगों सुरक्षित हैं. उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता जरूरतमंदों को तत्काल सेवाएं मुहैया कराना है, अधिकारियों ने भूकंप से हुई तबाही का विस्तृत सर्वेक्षण शुरू कर दिया है ताकि भूकंप में अपने घरों को खो चुके लोगों को सहायता उपलब्ध कराई जा सके. न्यूजीलैंड में 5.8 तीव्रता का भूकंप, दोपहर 1 बजकर 43 मिनट पर आया भूकंप
मैक्सिको में भूकंप : विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा- सभी भारतीय सुरक्षितटिप्पणियां
इससे पहले मेक्सिको में मंगलवार को आए रिक्टर पैमाने पर 7.1 तीव्रता के भूकंप में मरने वालों की संख्या बढ़कर 250 पार कर गई है. समाचार एजेंसी एफे ने बुधवार को बताया कि मंगलवार को आए भूकंप से प्रभावित लोगों को चिकित्सीय सहायता एवं जरूरी सामानों की आपूर्ति की जा रही है. राष्ट्रपति एनरिक पेना नीटो ने मोरेलोस के जोजुटला के दौरे के दौरान कहा, शांति बनाए रखें. आज सबसे जरूरी यह है कि आपमें से कई लोगों सुरक्षित हैं. उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता जरूरतमंदों को तत्काल सेवाएं मुहैया कराना है, अधिकारियों ने भूकंप से हुई तबाही का विस्तृत सर्वेक्षण शुरू कर दिया है ताकि भूकंप में अपने घरों को खो चुके लोगों को सहायता उपलब्ध कराई जा सके. न्यूजीलैंड में 5.8 तीव्रता का भूकंप, दोपहर 1 बजकर 43 मिनट पर आया भूकंप
इससे पहले मेक्सिको में मंगलवार को आए रिक्टर पैमाने पर 7.1 तीव्रता के भूकंप में मरने वालों की संख्या बढ़कर 250 पार कर गई है. समाचार एजेंसी एफे ने बुधवार को बताया कि मंगलवार को आए भूकंप से प्रभावित लोगों को चिकित्सीय सहायता एवं जरूरी सामानों की आपूर्ति की जा रही है. राष्ट्रपति एनरिक पेना नीटो ने मोरेलोस के जोजुटला के दौरे के दौरान कहा, शांति बनाए रखें. आज सबसे जरूरी यह है कि आपमें से कई लोगों सुरक्षित हैं. उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता जरूरतमंदों को तत्काल सेवाएं मुहैया कराना है, अधिकारियों ने भूकंप से हुई तबाही का विस्तृत सर्वेक्षण शुरू कर दिया है ताकि भूकंप में अपने घरों को खो चुके लोगों को सहायता उपलब्ध कराई जा सके. न्यूजीलैंड में 5.8 तीव्रता का भूकंप, दोपहर 1 बजकर 43 मिनट पर आया भूकंप
न्यूजीलैंड में 5.8 तीव्रता का भूकंप, दोपहर 1 बजकर 43 मिनट पर आया भूकंप | संक्षिप्त सारांश: जापान में आया 6.1 तीव्रता का भूकंप
सुनामी की चेतावनी नहीं
मैक्सिको में आया था 7.1 तीव्रता का भूकंप | 10 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने आज कहा कि आम आदमी पार्टी (AAP) ने दिल्ली को गड्ढों में तब्दील कर दिया है. उन्होंने कहा कि राजधानी का विकास केंद्र के साथ मिलकर बेहतर हो सकता है पर 'आप' को इससे मतलब नहीं है. उन्होंने आप पर आरोप लगाया कि वह कांग्रेस (Congress) के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ने के लिए उतावली थी. मूल्यों और आदर्शों के बिना की जाने वाली राजनीति तो समाज और राष्ट्र के लिए घातक है.
लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections 2019) में बीजेपी (BJP) के पूर्वी दिल्ली के उम्मीदवार गौतम गंभीर (Gautam Gambhir) के लिए मंडावली में प्रचार के दौरान योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने उक्त बात कही. उन्होंने कहा कि देश के अंदर एक ही गूंज है..मोदी सरकार. यह अचानक नहीं है. पांच वर्षों में भारत का सम्मान विश्व में बढ़ा है. योग की परम्परा का 193 देशों में विस्तार हुआ. विश्व योग दिवस को भारत के नाम कर दिया गया. पहली बार कुम्भ के आयोजन को वैश्विक मान्यता मिली.
योगी (Yogi Adityanath) ने कहा कि मोदी जी के कारण अजहर मसूद को वैश्विक आतंकवादी घोषित किया गया. उसकी उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है. वह कुत्ते की मौत मरेगा जैसे ओसामा मारा गया था. दुनिया में भारत का अपना सम्मान है. अपराधी, आतंकवादी या तो जेल में रहेंगे या फिर ऊपर जाएंगे. उन्होंने पूछा कि पांच वर्ष में क्या कोई विस्फोट हुआ? यह मोदी की ताकत है.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल, मेट्रो, AIIMS, IIT, गरीबों को मकान, शौचालय, गैस कनेक्शन सहित मोदी सरकार की विभिन्न योजनाओं का जिक्र किया और मतदाताओं से गौतम गंभीर को समर्थन देने के लिए कहा. योगी ने कहा कि क्रिकेट में ओपनिंग में शानदार पारी दिल्ली की सात सीटों पर हो.
योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने कहा कि कांग्रेस फेल हो चुकी है. शहजादे पहले फेल हो गए अब अमेठी में हार होती देखकर शहजादी को उतारा है. कांग्रेस नकारात्मक राजनीति के कारण परास्त हो रही है. उन्होंने कहा कि इस बार भारत की समृद्धि के लिए, विकास, सुशासन, सुरक्षा के नाम पर वोट बीजेपी को मिलने चाहिए.
पूर्व क्रिकेटर और पूर्वी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र के बीजेपी उम्मीदवार गौतम गंभीर (Gautam Gambhir) ने कहा कि राजनीति सच्चे दिल, नियत और सोच के साथ करेंगे. झूठे वादे नहीं करेंगे. साढ़े चार साल में सीएम अरविंद केजरीवाल ने झूठे वादे किए. वादे पूरे नहीं हुए तो पूर्ण राज्य का मुद्दा शुरू कर दिया. उन्होंने कहा कि वे केजरीवाल से बहस के लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा कि केजरीवाल वक्त दें...समय आपका, जगह भी आपकी, डिबेट जनता के बीच होगा.
गौतम गंभीर (Gautam Gambhir) ने कहा कि केजरीवाल को बहस के लिए चैलेंज किया था लेकिन जवाब नहीं आया. मुझे क्रिकेट ने एक चीज सिखाई, लड़ाई लड़ें तो आमने-सामने, 'आप' की तरह नहीं. उन्होंने आम आदमी पार्टी पर आरोप लगाया कि आप ने उनका नॉमिनेशन रद्द कराने की कोशिश की थी. वे गाली देते हैं..माफी मांगते हैं..फिर पैरों पर गिरते हैं... फिर गाली देने लगते हैं. हम विकास की बात करते हैं.
आप (AAP) द्वारा केजरीवाल पर हमले का आरोप बीजेपी पर लगाए जाने पर गंभीर ने कहा कि वे इतने बड़े लीडर नहीं हैं कि बीजेपी उनके बारे में सोचे. | संक्षिप्त सारांश: कांग्रेस से गठबंधन की कोशिशों पर 'आप' को बनाया निशाना
विकास, सुशासन, सुरक्षा के नाम पर बीजेपी के लिए मांगे वोट
गौतम गंभीर ने केजरीवाल को बहस करने की चुनौती दी | 0 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि उन्होंने अपने अग्रिम कर का भुगतान कर दिया है और दूसरे करदाताओं को भी ऐसा करना चाहिए।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की चेयरपर्सन पूनम किशोर सक्सेना की ओर मुखातिब होते हुए चिदंबरम ने कहा, मैंने अग्रिम कर के चेक पर दस्तखत कर दिए। मैंने इसे अपनी पत्नी के जरिये भेजा है.. इसीलिए उम्मीद है कि अग्रिम कर का भुगतान हो गया होगा। ऐसे में उन्हें (सीबीडीटी चेयरपर्सन को) कुछ पैसे मुझसे भी मिलेंगे। अग्रिम कर भुगतान की अंतिम तारीख 15 दिसंबर है और इस सप्ताह की शुरुआथ में वित्त मंत्रालय ने करदाताओं से अपनी वास्तविक आय का खुलासा करते हुए उसी के अनुरूप अग्रिम कर जमा करने, अन्यथा कार्रवाई का सामना करने को तैयार रहने को कहा था।टिप्पणियां
चिदंबरम ने कहा, 15 दिसंबर अग्रिम कर दिवस है। वास्तव में लोग 31 दिसंबर तक कर दे सकते हैं। कोई जुर्माना नहीं लगेगा। कुछ दिनों के लिए ब्याज वसूला जाएगा। उन्होंने कहा, लोगों को निश्चिततौर पर अग्रिम रूप से आयकर देना चाहिए। मैं उम्मीद करता हूं कि भले ही अच्छा या उम्दा हो लेकिन इस बार अनुपालन होगा..कर का भुगतान कर आप अपना सिर ऊंचा रखे ताकि आपको आयकर अधिकारियों से छिपने की जरूरत नहीं है। मंत्री ने उम्मीद जतायी कि सरकार प्रत्यक्ष कर संग्रह लक्ष्य को पूरा कर लेगी और हर कोई अपनी वास्तविक आय का खुलासा करे तब राजस्व संग्रह बजटीय अनुमान से कहीं अधिक होगा।
चिदंबरम ने कहा, हमारे पास लोगों की खरीद, म्यूचुअल फंड के बारे में आंकड़ा है और अगर हर कोई अगर अग्रिम कर दे तो हम वास्तव में लक्ष्य से अधिक प्राप्त करेंगे।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की चेयरपर्सन पूनम किशोर सक्सेना की ओर मुखातिब होते हुए चिदंबरम ने कहा, मैंने अग्रिम कर के चेक पर दस्तखत कर दिए। मैंने इसे अपनी पत्नी के जरिये भेजा है.. इसीलिए उम्मीद है कि अग्रिम कर का भुगतान हो गया होगा। ऐसे में उन्हें (सीबीडीटी चेयरपर्सन को) कुछ पैसे मुझसे भी मिलेंगे। अग्रिम कर भुगतान की अंतिम तारीख 15 दिसंबर है और इस सप्ताह की शुरुआथ में वित्त मंत्रालय ने करदाताओं से अपनी वास्तविक आय का खुलासा करते हुए उसी के अनुरूप अग्रिम कर जमा करने, अन्यथा कार्रवाई का सामना करने को तैयार रहने को कहा था।टिप्पणियां
चिदंबरम ने कहा, 15 दिसंबर अग्रिम कर दिवस है। वास्तव में लोग 31 दिसंबर तक कर दे सकते हैं। कोई जुर्माना नहीं लगेगा। कुछ दिनों के लिए ब्याज वसूला जाएगा। उन्होंने कहा, लोगों को निश्चिततौर पर अग्रिम रूप से आयकर देना चाहिए। मैं उम्मीद करता हूं कि भले ही अच्छा या उम्दा हो लेकिन इस बार अनुपालन होगा..कर का भुगतान कर आप अपना सिर ऊंचा रखे ताकि आपको आयकर अधिकारियों से छिपने की जरूरत नहीं है। मंत्री ने उम्मीद जतायी कि सरकार प्रत्यक्ष कर संग्रह लक्ष्य को पूरा कर लेगी और हर कोई अपनी वास्तविक आय का खुलासा करे तब राजस्व संग्रह बजटीय अनुमान से कहीं अधिक होगा।
चिदंबरम ने कहा, हमारे पास लोगों की खरीद, म्यूचुअल फंड के बारे में आंकड़ा है और अगर हर कोई अगर अग्रिम कर दे तो हम वास्तव में लक्ष्य से अधिक प्राप्त करेंगे।
चिदंबरम ने कहा, 15 दिसंबर अग्रिम कर दिवस है। वास्तव में लोग 31 दिसंबर तक कर दे सकते हैं। कोई जुर्माना नहीं लगेगा। कुछ दिनों के लिए ब्याज वसूला जाएगा। उन्होंने कहा, लोगों को निश्चिततौर पर अग्रिम रूप से आयकर देना चाहिए। मैं उम्मीद करता हूं कि भले ही अच्छा या उम्दा हो लेकिन इस बार अनुपालन होगा..कर का भुगतान कर आप अपना सिर ऊंचा रखे ताकि आपको आयकर अधिकारियों से छिपने की जरूरत नहीं है। मंत्री ने उम्मीद जतायी कि सरकार प्रत्यक्ष कर संग्रह लक्ष्य को पूरा कर लेगी और हर कोई अपनी वास्तविक आय का खुलासा करे तब राजस्व संग्रह बजटीय अनुमान से कहीं अधिक होगा।
चिदंबरम ने कहा, हमारे पास लोगों की खरीद, म्यूचुअल फंड के बारे में आंकड़ा है और अगर हर कोई अगर अग्रिम कर दे तो हम वास्तव में लक्ष्य से अधिक प्राप्त करेंगे।
चिदंबरम ने कहा, हमारे पास लोगों की खरीद, म्यूचुअल फंड के बारे में आंकड़ा है और अगर हर कोई अगर अग्रिम कर दे तो हम वास्तव में लक्ष्य से अधिक प्राप्त करेंगे। | यह एक सारांश है: वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि उन्होंने अपने अग्रिम कर का भुगतान कर दिया है और दूसरे करदाताओं को भी ऐसा करना चाहिए। | 21 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: हालांकि, कुछ दिन पहले ही शिवपाल ने सपा में शामिल होने की संभावना से तो इनकार कर दिया था, लेकिन गठबंधन में शामिल होने की इच्छा जरूर जाहिर की थी. शिवपाल ने कहा था, ‘प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का सपा में विलय करने या मेरी सपा में वापसी का कोई सवाल ही नहीं उठता. हालांकि, मैं भाजपा जैसी सांप्रदायिक शक्ति को सत्ता से दूर रखने के लिए समान विचारधारा वाली पार्टियों से गठबंधन करने को तैयार हूं. मगर वह भी तब होगा, जब हमें सम्मानजनक संख्या में सीटें मिलेंगी.'
उन्होंने कहा कि प्रसपा के गठन के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश के लगभग हर जिले का दौरा किया है. उन्हें हर जगह उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली हैं. अगर किसी पार्टी से गठबंधन नहीं हुआ तो प्रसपा प्रदेश की सभी 80 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी.
बता दें, बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी आगामी लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की कुल 80 लोकसभा सीटों में से 38-38 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेंगी. इन दोनों पार्टियों ने राज्य की दो सीटें छोटी पार्टियों के लिए छोडी हैं, जबकि अमेठी और रायबरेली की दो सीटें कांग्रेस पार्टी के लिए छोड़ने का फैसला किया है. बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शनिवार को संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में यह घोषणा की. मायावती ने बसपा-सपा गठबंधन को ‘नई राजनीतिक क्रांति का आगाज' करार देते हुए कहा कि इस गठबंधन से ‘गुरू-चेला' (नरेंद्र मोदी और अमित शाह) की नींद उड़ जाएगी.
उन्होंने कहा, ‘नए वर्ष में यह एक प्रकार की नई राजनीतिक क्रांति की शुरुआत है. इस गठबंधन से समाज की बहुत उम्मीदें जग गई हैं. यह सिर्फ दो पार्टियों का मेल नहीं है बल्कि सर्वसमाज (दलित, पिछड़ा, मुस्लिम, आदिवासी, गरीबों, किसानों और नौजवानों) का मेल है. यह सामाजिक परिवर्तन का बड़ा आंदोलन बन सकता है.' | यहाँ एक सारांश है:सपा-बसपा गठबंधन पर दिया बयान
कहा- मेरे बिना अधूरा
मायावती-अखिलेश ने मिलााए हाथ | 18 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: दार्जिलिंग के सांसद राजू बिस्ता के पत्र के जवाब में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा भेजे गए एक पत्र में 'गोरखालैंड' शब्द के उल्लेख से विवाद पैदा हो गया है. दरअसल, तृणमूल कांग्रेस को इसमें राज्य को बांटने की साजिश नजर आ रही है. हालांकि, लोकसभा चुनाव के बाद पश्चिम बंगाल में एक बड़ी ताकत के रूप में उभरी भाजपा ने इस आरोप को 'बेबुनियाद' करार दिया है. भगवा पार्टी सूत्रों के अनुसार बिस्ता ने जुलाई में शाह को पत्र भेज कर दिल्ली में खासतौर पर पूर्वोत्तर के लोगों के साथ होने वाले नस्ली भेदभाव का मुकाबला करने के लिए दिल्ली पुलिस द्वारा बनायी गयी विशेष शाखा के दायरे से गोरखाओं को बाहर रखने को लेकर चिंता प्रकट की थी.
शाह ने बिस्ता के पत्र के जवाब में कहा कि 'गोरखालैंड और लद्दाख' के लोगों को लेकर उनकी चिंता पर गौर किया जा रहा है. शाह द्वारा 'गोरखालैंड' शब्द का इस्तेमाल किए जाने की तृणमूल कांग्रेस ने आलोचना की है. तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं मंत्री गौतम देब ने कहा, 'उन्होंने गोरखालैंड शब्द का इस्तेमाल क्यों किया. पूरे क्षेत्र में गोरखालैंड नाम की कोई जगह नहीं है. ऐसा जान पड़ता है कि जम्मू कश्मीर को बांटने के बाद भाजपा बंगाल को विभाजित करने की योजना बना रही है. लेकिन जब तक यहां तृणमूल कांग्रेस है, राज्य को कोई बांट नहीं सकता.'
वहीं, बिस्ता ने कहा कि गोरखालैंड शब्द के इस्तेमाल का पृथक राज्य के गठन से कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने कहा, 'गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन (जीटीए) 2011 में तृणमूल कांग्रेस सरकार, गोरखा जनमुक्ति मोर्चा और केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार के बीच त्रिपक्षीय समझौते के बाद बना था. ऐसे में यदि वे लोग गोरखालैंड शब्द का इस्तेमाल कर सकते हैं तो हम इस क्षेत्र के बाशिंदों को संबोधित करने के लिए इसका इस्तेमाल क्यों नहीं कर सकते हैं.'
जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को समाप्त करने और उसे दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांटने के केंद्र के कदम के बाद गोरखा क्षेत्र के भी कई दल दार्जिलिंग के लिए केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा मांगने लगे हैं. | संक्षिप्त पाठ: अमित शाह ने किया 'गोरखालैंड' शब्द का इस्तेमाल
'गोरखालैंड' शब्द पर छिड़ा विवाद
तृणमूल कांग्रेस ने लगाया राज्य को बांटने का आरोप | 14 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: देश में हर तरफ महिलाओं पर हो रहे अत्याचार का विरोध हो रहा है, लेकिन फिर भी ये घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही। चंडीगढ़ के एक दंपति घरेलू कामकाज के लिए एक लड़की को बंगाल से अपने घर पर लाए थे, लेकिन फिर बाद में उन्होंने उसे देह व्यापार में झोंकने की कोशिश की। लड़की के विरोध करने पर इस आदमी ने उसके साथ बलात्कार किया और उसकी पत्नी ने इस घटना का वीडियो बनाया।टिप्पणियां
इसके बाद दंपति ने इस लड़की को भूखा रखा और बेडमिंटन के रैकेट से पीटा। इस घटना से दुखी हुई लड़की बाथरूम की खिड़की से कूद गई, जिसमें इसे बंद करके रखा गया था।
बाद में आसपास के लोगों ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया और तब लड़की ने पुलिस को यह सारी घटना बताई। इसके बाद पुलिस ने उस दंपति को गिरफ्तार करके उसके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।
इसके बाद दंपति ने इस लड़की को भूखा रखा और बेडमिंटन के रैकेट से पीटा। इस घटना से दुखी हुई लड़की बाथरूम की खिड़की से कूद गई, जिसमें इसे बंद करके रखा गया था।
बाद में आसपास के लोगों ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया और तब लड़की ने पुलिस को यह सारी घटना बताई। इसके बाद पुलिस ने उस दंपति को गिरफ्तार करके उसके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।
बाद में आसपास के लोगों ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया और तब लड़की ने पुलिस को यह सारी घटना बताई। इसके बाद पुलिस ने उस दंपति को गिरफ्तार करके उसके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। | सारांश: चंडीगढ़ के एक दंपति घरेलू कामकाज के लिए एक लड़की को बंगाल से अपने घर पर लाए थे, लेकिन फिर बाद में उन्होंने उसे देह व्यापार में झोंकने की कोशिश की। | 5 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: कांग्रेस पार्टी की महासचिव बनने के बाद प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi Vadra) आज पहली बार उत्तर प्रदेश पहुंच रही हैं. लखनऊ से वह चुनावी अभियान का शंखनाद करेंगी. यहां उनका रोड शो होगा. इस दौरान उनके साथ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया भी होंगे. बता दें कांग्रेस पार्टी ने पिछले महीने ही प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi Vadra) को पूर्वी यूपी का प्रभारी भी बनाया गया था. प्रियंका अगले 4 दिनों उत्तर प्रदेश में रहेंगी. जहां वह न सिर्फ चुनावी अभियान करेंगी बल्कि बड़े पैमाने पर कार्यकर्ताओं का मिजाज भी समझेंगी. प्रियंका गांधी के लखनऊ पहुंचने से पहले उनका ऑडियो मैसेज जनता तक पहुंच गया है. जहां वह लोगों से नई राजनीति की बात करती नजर आ रही हैं. प्रियंका के दौरे से पहले कांग्रेस का राज्य मुख्यालय भी सजाया संवारा गया है. कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने प्रियंका-राहुल के स्वागत की जोरदारी तैयारी की है. प्रियंका ने कांग्रेस के शक्ति ऐप के जरिए कहा, ‘‘मैं आप सब से मिलने के लिए कल लखनऊ आ रही हूं. मुझे उम्मीद है कि साथ मिल कर हम नयी तरह की राजनीति शुरू करेंगे, ऐसी राजनीति जिसमें आप सब हितधारक होंगे...मेरे युवा मित्रों, मेरी बहनों और यहां तक कि सबसे कमजोर व्यक्ति, सबकी आवाज सुनी जाएगी.
तीनों नेताओं के हवाईअड्डे से पार्टी के राज्य मुख्यालय तक की यात्रा के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं का रोड शो करने की योजना है. कांग्रेस लोकसभा चुनाव से पहले इस यात्रा को राज्य में पार्टी के चुनाव प्रचार के शंखनाद के तौर पर देख रही है. प्रियंका (Priyanka Gandhi Vadra) ने कहा, आइए, एक नये भविष्य का निर्माण करें, मेरे साथ नयी राजनीति करें. धन्यवाद. सिंधिया ने अपने संदेश में कहा, कल मैं आपके पास आ रहा हूं. उप्र के युवाओं को भविष्य के लिए एक खाके की और राज्य को बदलाव की जरूरत है. आइए हमारे साथ जुड़िये और उत्तर प्रदेश में बदलाव लाइए. कांग्रेस के दोनों महासचिव 12,13 और 14 फरवरी को लखनऊ में प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बात करेंगे.
वहीं प्रियंका के उत्तर प्रदेश दौरे से पहले सियासी बयानबाजी का दौर भी देखने को मिला. कांग्रेस के नेता उत्साहित नजर आ रहे हैं तो बीजेपी इसे फर्क नहीं पड़ने की बात कह रही है. लखनऊ रैली से पहले बीजेपी सुशील मोदी ने कहा कि प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi Vadra) की रैली से बीजेपी के जनाधार को कोई फर्क नहीं पड़ेगा. तो वहीं राजीव गांधी सरकार में संचार क्रांति की अगुवाई करने वाले सैम पित्रादा ने कहा कि राहुल और प्रियंका की जोड़ी लोकसभा चुनाव में पासा पलट देगी. | संक्षिप्त सारांश: यूपी के अभियान का आगाज करेंगी प्रियंका गांधी
लखनऊ में राहुल गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ रोड शो
अगले 4 दिनों तक यूपी में करेंगी दौरा | 23 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: ठीक एक साल चार दिन बाद आखिर में वह घड़ी आ गई, जब लंबे समय से इंतजार कर रहे क्रिकेट प्रेमियों ने सचिन तेंदुलकर के बल्ले से महाशतक बनते हुए देखा। इसके साथ ही क्रिकेट में नया इतिहास बन गया। तेंदुलकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 100 शतक जड़ने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज बन गए हैं।
पाकिस्तान, इंग्लैंड, वेस्टइंडीज, ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका के खिलाफ चूकने के बाद तेंदुलकर ने शेरे बांग्ला स्टेडियम में साकिब अल हसन की गेंद पर एक रन लेकर उपलब्धियों का नया शिखर छुआ। इस महान बल्लेबाज ने भी 370 दिन के बाद तिहरे अंक में पहुंचने पर राहत की सांस ली और दर्शकों के साथ-साथ ईश्वर का शुक्रिया अदा किया। भारतीय खिलाड़ियों ने ड्रेसिंग रूम में खड़े होकर इस महान उपलब्धि को सलाम किया, तो बांग्लादेशी खिलाड़ी भी क्रिकेट के खेल की इस अद्भुत घटना के समय इस महान हस्ती को बधाई देने में पीछे नहीं रहे। उन्होंने इसके लिए 138 गेंद खेली तथा 10 चौके और एक छक्का लगाया।
तेंदुलकर यह उपलब्धि हासिल करने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज हैं और फिलहाल कोई भी अन्य बल्लेबाज उनके इस रिकॉर्ड तक पहुंचने की स्थिति में नहीं दिखता है। तेंदुलकर के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सर्वाधिक शतक रिकी पोंटिंग (71) के नाम दर्ज हैं और वह भारतीय बल्लेबाज से 29 शतक पीछे हैं। रिकॉर्डों के बादशाह के नाम पर अब टेस्ट क्रिकेट में 51 और एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 49 शतक दर्ज हैं।
तेंदुलकर ने अपना पहला टेस्ट शतक 14 अगस्त, 1990 को इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर टेस्ट मैच में लगाया था। तब वह महज 17 साल 107 दिन के थे। उन्हें एकदिवसीय क्रिकेट में अपना पहला शतक जड़ने के लिए 78 मैच का इंतजार करना पड़ा, लेकिन जब उन्होंने 9 सितंबर, 1994 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कोलंबो में यह मुकाम हासिल किया, तो फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।
इस स्टार बल्लेबाज ने अपना 25वां और 50वां अंतरराष्ट्रीय शतक भी टेस्ट मैचों में ही लगाया। उन्होंने 25वां शतक अगस्त, 1997 में श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो और 50वां शतक जिम्बाब्वे के खिलाफ नवंबर, 2000 में नागपुर में लगाया था। अपना 75वां सैकड़ा तेंदुलकर ने वेस्टइंडीज के खिलाफ ही कुआलालम्पुर में एकदिवसीय मैच में जमाया था।टिप्पणियां
तेंदुलकर को अपना पहला दोहरा शतक जड़ने के लिए लगभग 10 साल का इंतजार करना पड़ा। उन्होंने यह उपलब्धि अक्टूबर, 1999 में न्यूजीलैंड के खिलाफ अहमदाबाद में हासिल की थी। वह जनवरी, 2010 में एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में दोहरा सैकड़ा जड़ने वाले पहले बल्लेबाज बने थे। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सर्वाधिक 20 शतक लगाए हैं। इसके बाद श्रीलंका (17), दक्षिण अफ्रीका (12), इंग्लैंड और न्यूजीलैंड (दोनों नौ), जिम्बाब्वे (आठ), वेस्टइंडीज और पाकिस्तान (सात), बांग्लादेश (पांच), कीनिया (चार) और नामीबिया (एक) का नंबर आता है।
शतकों के लिहाज से 1998 का साल उनके लिए काफी अच्छा रहा। उस साल तेंदुलकर ने 12 शतक जमाए। इसके अलावा उन्होंने 1996, 1999 और 2010 में आठ-आठ तथा 2001 में सात शतक लगाए थे। इस साल यह उनका चौथा अंतरराष्ट्रीय शतक है। तेंदुलकर ने भारत की तरफ जिन 98 अंतरराष्ट्रीय मैचों में कप्तानी की, उनमें उन्होंने 13 शतक लगाए, लेकिन सबसे ज्यादा सैकड़े उन्होंने मोहम्मद अजहरूद्दीन के कप्तान रहते हुए ठोके। इस दौरान तेंदुलकर के बल्ले से 33 शतक निकले, जबकि सौरव गांगुली की कप्तानी में उन्होंने 24, महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में 19, राहुल द्रविड़ की कप्तानी में आठ, अनिल कुंबले की कप्तानी में दो और वीरेंद्र सहवाग की कप्तानी में एक शतक जमाया है।
पाकिस्तान, इंग्लैंड, वेस्टइंडीज, ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका के खिलाफ चूकने के बाद तेंदुलकर ने शेरे बांग्ला स्टेडियम में साकिब अल हसन की गेंद पर एक रन लेकर उपलब्धियों का नया शिखर छुआ। इस महान बल्लेबाज ने भी 370 दिन के बाद तिहरे अंक में पहुंचने पर राहत की सांस ली और दर्शकों के साथ-साथ ईश्वर का शुक्रिया अदा किया। भारतीय खिलाड़ियों ने ड्रेसिंग रूम में खड़े होकर इस महान उपलब्धि को सलाम किया, तो बांग्लादेशी खिलाड़ी भी क्रिकेट के खेल की इस अद्भुत घटना के समय इस महान हस्ती को बधाई देने में पीछे नहीं रहे। उन्होंने इसके लिए 138 गेंद खेली तथा 10 चौके और एक छक्का लगाया।
तेंदुलकर यह उपलब्धि हासिल करने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज हैं और फिलहाल कोई भी अन्य बल्लेबाज उनके इस रिकॉर्ड तक पहुंचने की स्थिति में नहीं दिखता है। तेंदुलकर के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सर्वाधिक शतक रिकी पोंटिंग (71) के नाम दर्ज हैं और वह भारतीय बल्लेबाज से 29 शतक पीछे हैं। रिकॉर्डों के बादशाह के नाम पर अब टेस्ट क्रिकेट में 51 और एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 49 शतक दर्ज हैं।
तेंदुलकर ने अपना पहला टेस्ट शतक 14 अगस्त, 1990 को इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर टेस्ट मैच में लगाया था। तब वह महज 17 साल 107 दिन के थे। उन्हें एकदिवसीय क्रिकेट में अपना पहला शतक जड़ने के लिए 78 मैच का इंतजार करना पड़ा, लेकिन जब उन्होंने 9 सितंबर, 1994 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कोलंबो में यह मुकाम हासिल किया, तो फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।
इस स्टार बल्लेबाज ने अपना 25वां और 50वां अंतरराष्ट्रीय शतक भी टेस्ट मैचों में ही लगाया। उन्होंने 25वां शतक अगस्त, 1997 में श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो और 50वां शतक जिम्बाब्वे के खिलाफ नवंबर, 2000 में नागपुर में लगाया था। अपना 75वां सैकड़ा तेंदुलकर ने वेस्टइंडीज के खिलाफ ही कुआलालम्पुर में एकदिवसीय मैच में जमाया था।टिप्पणियां
तेंदुलकर को अपना पहला दोहरा शतक जड़ने के लिए लगभग 10 साल का इंतजार करना पड़ा। उन्होंने यह उपलब्धि अक्टूबर, 1999 में न्यूजीलैंड के खिलाफ अहमदाबाद में हासिल की थी। वह जनवरी, 2010 में एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में दोहरा सैकड़ा जड़ने वाले पहले बल्लेबाज बने थे। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सर्वाधिक 20 शतक लगाए हैं। इसके बाद श्रीलंका (17), दक्षिण अफ्रीका (12), इंग्लैंड और न्यूजीलैंड (दोनों नौ), जिम्बाब्वे (आठ), वेस्टइंडीज और पाकिस्तान (सात), बांग्लादेश (पांच), कीनिया (चार) और नामीबिया (एक) का नंबर आता है।
शतकों के लिहाज से 1998 का साल उनके लिए काफी अच्छा रहा। उस साल तेंदुलकर ने 12 शतक जमाए। इसके अलावा उन्होंने 1996, 1999 और 2010 में आठ-आठ तथा 2001 में सात शतक लगाए थे। इस साल यह उनका चौथा अंतरराष्ट्रीय शतक है। तेंदुलकर ने भारत की तरफ जिन 98 अंतरराष्ट्रीय मैचों में कप्तानी की, उनमें उन्होंने 13 शतक लगाए, लेकिन सबसे ज्यादा सैकड़े उन्होंने मोहम्मद अजहरूद्दीन के कप्तान रहते हुए ठोके। इस दौरान तेंदुलकर के बल्ले से 33 शतक निकले, जबकि सौरव गांगुली की कप्तानी में उन्होंने 24, महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में 19, राहुल द्रविड़ की कप्तानी में आठ, अनिल कुंबले की कप्तानी में दो और वीरेंद्र सहवाग की कप्तानी में एक शतक जमाया है।
तेंदुलकर यह उपलब्धि हासिल करने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज हैं और फिलहाल कोई भी अन्य बल्लेबाज उनके इस रिकॉर्ड तक पहुंचने की स्थिति में नहीं दिखता है। तेंदुलकर के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सर्वाधिक शतक रिकी पोंटिंग (71) के नाम दर्ज हैं और वह भारतीय बल्लेबाज से 29 शतक पीछे हैं। रिकॉर्डों के बादशाह के नाम पर अब टेस्ट क्रिकेट में 51 और एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 49 शतक दर्ज हैं।
तेंदुलकर ने अपना पहला टेस्ट शतक 14 अगस्त, 1990 को इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर टेस्ट मैच में लगाया था। तब वह महज 17 साल 107 दिन के थे। उन्हें एकदिवसीय क्रिकेट में अपना पहला शतक जड़ने के लिए 78 मैच का इंतजार करना पड़ा, लेकिन जब उन्होंने 9 सितंबर, 1994 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कोलंबो में यह मुकाम हासिल किया, तो फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।
इस स्टार बल्लेबाज ने अपना 25वां और 50वां अंतरराष्ट्रीय शतक भी टेस्ट मैचों में ही लगाया। उन्होंने 25वां शतक अगस्त, 1997 में श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो और 50वां शतक जिम्बाब्वे के खिलाफ नवंबर, 2000 में नागपुर में लगाया था। अपना 75वां सैकड़ा तेंदुलकर ने वेस्टइंडीज के खिलाफ ही कुआलालम्पुर में एकदिवसीय मैच में जमाया था।टिप्पणियां
तेंदुलकर को अपना पहला दोहरा शतक जड़ने के लिए लगभग 10 साल का इंतजार करना पड़ा। उन्होंने यह उपलब्धि अक्टूबर, 1999 में न्यूजीलैंड के खिलाफ अहमदाबाद में हासिल की थी। वह जनवरी, 2010 में एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में दोहरा सैकड़ा जड़ने वाले पहले बल्लेबाज बने थे। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सर्वाधिक 20 शतक लगाए हैं। इसके बाद श्रीलंका (17), दक्षिण अफ्रीका (12), इंग्लैंड और न्यूजीलैंड (दोनों नौ), जिम्बाब्वे (आठ), वेस्टइंडीज और पाकिस्तान (सात), बांग्लादेश (पांच), कीनिया (चार) और नामीबिया (एक) का नंबर आता है।
शतकों के लिहाज से 1998 का साल उनके लिए काफी अच्छा रहा। उस साल तेंदुलकर ने 12 शतक जमाए। इसके अलावा उन्होंने 1996, 1999 और 2010 में आठ-आठ तथा 2001 में सात शतक लगाए थे। इस साल यह उनका चौथा अंतरराष्ट्रीय शतक है। तेंदुलकर ने भारत की तरफ जिन 98 अंतरराष्ट्रीय मैचों में कप्तानी की, उनमें उन्होंने 13 शतक लगाए, लेकिन सबसे ज्यादा सैकड़े उन्होंने मोहम्मद अजहरूद्दीन के कप्तान रहते हुए ठोके। इस दौरान तेंदुलकर के बल्ले से 33 शतक निकले, जबकि सौरव गांगुली की कप्तानी में उन्होंने 24, महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में 19, राहुल द्रविड़ की कप्तानी में आठ, अनिल कुंबले की कप्तानी में दो और वीरेंद्र सहवाग की कप्तानी में एक शतक जमाया है।
तेंदुलकर ने अपना पहला टेस्ट शतक 14 अगस्त, 1990 को इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर टेस्ट मैच में लगाया था। तब वह महज 17 साल 107 दिन के थे। उन्हें एकदिवसीय क्रिकेट में अपना पहला शतक जड़ने के लिए 78 मैच का इंतजार करना पड़ा, लेकिन जब उन्होंने 9 सितंबर, 1994 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कोलंबो में यह मुकाम हासिल किया, तो फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।
इस स्टार बल्लेबाज ने अपना 25वां और 50वां अंतरराष्ट्रीय शतक भी टेस्ट मैचों में ही लगाया। उन्होंने 25वां शतक अगस्त, 1997 में श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो और 50वां शतक जिम्बाब्वे के खिलाफ नवंबर, 2000 में नागपुर में लगाया था। अपना 75वां सैकड़ा तेंदुलकर ने वेस्टइंडीज के खिलाफ ही कुआलालम्पुर में एकदिवसीय मैच में जमाया था।टिप्पणियां
तेंदुलकर को अपना पहला दोहरा शतक जड़ने के लिए लगभग 10 साल का इंतजार करना पड़ा। उन्होंने यह उपलब्धि अक्टूबर, 1999 में न्यूजीलैंड के खिलाफ अहमदाबाद में हासिल की थी। वह जनवरी, 2010 में एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में दोहरा सैकड़ा जड़ने वाले पहले बल्लेबाज बने थे। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सर्वाधिक 20 शतक लगाए हैं। इसके बाद श्रीलंका (17), दक्षिण अफ्रीका (12), इंग्लैंड और न्यूजीलैंड (दोनों नौ), जिम्बाब्वे (आठ), वेस्टइंडीज और पाकिस्तान (सात), बांग्लादेश (पांच), कीनिया (चार) और नामीबिया (एक) का नंबर आता है।
शतकों के लिहाज से 1998 का साल उनके लिए काफी अच्छा रहा। उस साल तेंदुलकर ने 12 शतक जमाए। इसके अलावा उन्होंने 1996, 1999 और 2010 में आठ-आठ तथा 2001 में सात शतक लगाए थे। इस साल यह उनका चौथा अंतरराष्ट्रीय शतक है। तेंदुलकर ने भारत की तरफ जिन 98 अंतरराष्ट्रीय मैचों में कप्तानी की, उनमें उन्होंने 13 शतक लगाए, लेकिन सबसे ज्यादा सैकड़े उन्होंने मोहम्मद अजहरूद्दीन के कप्तान रहते हुए ठोके। इस दौरान तेंदुलकर के बल्ले से 33 शतक निकले, जबकि सौरव गांगुली की कप्तानी में उन्होंने 24, महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में 19, राहुल द्रविड़ की कप्तानी में आठ, अनिल कुंबले की कप्तानी में दो और वीरेंद्र सहवाग की कप्तानी में एक शतक जमाया है।
इस स्टार बल्लेबाज ने अपना 25वां और 50वां अंतरराष्ट्रीय शतक भी टेस्ट मैचों में ही लगाया। उन्होंने 25वां शतक अगस्त, 1997 में श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो और 50वां शतक जिम्बाब्वे के खिलाफ नवंबर, 2000 में नागपुर में लगाया था। अपना 75वां सैकड़ा तेंदुलकर ने वेस्टइंडीज के खिलाफ ही कुआलालम्पुर में एकदिवसीय मैच में जमाया था।टिप्पणियां
तेंदुलकर को अपना पहला दोहरा शतक जड़ने के लिए लगभग 10 साल का इंतजार करना पड़ा। उन्होंने यह उपलब्धि अक्टूबर, 1999 में न्यूजीलैंड के खिलाफ अहमदाबाद में हासिल की थी। वह जनवरी, 2010 में एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में दोहरा सैकड़ा जड़ने वाले पहले बल्लेबाज बने थे। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सर्वाधिक 20 शतक लगाए हैं। इसके बाद श्रीलंका (17), दक्षिण अफ्रीका (12), इंग्लैंड और न्यूजीलैंड (दोनों नौ), जिम्बाब्वे (आठ), वेस्टइंडीज और पाकिस्तान (सात), बांग्लादेश (पांच), कीनिया (चार) और नामीबिया (एक) का नंबर आता है।
शतकों के लिहाज से 1998 का साल उनके लिए काफी अच्छा रहा। उस साल तेंदुलकर ने 12 शतक जमाए। इसके अलावा उन्होंने 1996, 1999 और 2010 में आठ-आठ तथा 2001 में सात शतक लगाए थे। इस साल यह उनका चौथा अंतरराष्ट्रीय शतक है। तेंदुलकर ने भारत की तरफ जिन 98 अंतरराष्ट्रीय मैचों में कप्तानी की, उनमें उन्होंने 13 शतक लगाए, लेकिन सबसे ज्यादा सैकड़े उन्होंने मोहम्मद अजहरूद्दीन के कप्तान रहते हुए ठोके। इस दौरान तेंदुलकर के बल्ले से 33 शतक निकले, जबकि सौरव गांगुली की कप्तानी में उन्होंने 24, महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में 19, राहुल द्रविड़ की कप्तानी में आठ, अनिल कुंबले की कप्तानी में दो और वीरेंद्र सहवाग की कप्तानी में एक शतक जमाया है।
तेंदुलकर को अपना पहला दोहरा शतक जड़ने के लिए लगभग 10 साल का इंतजार करना पड़ा। उन्होंने यह उपलब्धि अक्टूबर, 1999 में न्यूजीलैंड के खिलाफ अहमदाबाद में हासिल की थी। वह जनवरी, 2010 में एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में दोहरा सैकड़ा जड़ने वाले पहले बल्लेबाज बने थे। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सर्वाधिक 20 शतक लगाए हैं। इसके बाद श्रीलंका (17), दक्षिण अफ्रीका (12), इंग्लैंड और न्यूजीलैंड (दोनों नौ), जिम्बाब्वे (आठ), वेस्टइंडीज और पाकिस्तान (सात), बांग्लादेश (पांच), कीनिया (चार) और नामीबिया (एक) का नंबर आता है।
शतकों के लिहाज से 1998 का साल उनके लिए काफी अच्छा रहा। उस साल तेंदुलकर ने 12 शतक जमाए। इसके अलावा उन्होंने 1996, 1999 और 2010 में आठ-आठ तथा 2001 में सात शतक लगाए थे। इस साल यह उनका चौथा अंतरराष्ट्रीय शतक है। तेंदुलकर ने भारत की तरफ जिन 98 अंतरराष्ट्रीय मैचों में कप्तानी की, उनमें उन्होंने 13 शतक लगाए, लेकिन सबसे ज्यादा सैकड़े उन्होंने मोहम्मद अजहरूद्दीन के कप्तान रहते हुए ठोके। इस दौरान तेंदुलकर के बल्ले से 33 शतक निकले, जबकि सौरव गांगुली की कप्तानी में उन्होंने 24, महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में 19, राहुल द्रविड़ की कप्तानी में आठ, अनिल कुंबले की कप्तानी में दो और वीरेंद्र सहवाग की कप्तानी में एक शतक जमाया है।
शतकों के लिहाज से 1998 का साल उनके लिए काफी अच्छा रहा। उस साल तेंदुलकर ने 12 शतक जमाए। इसके अलावा उन्होंने 1996, 1999 और 2010 में आठ-आठ तथा 2001 में सात शतक लगाए थे। इस साल यह उनका चौथा अंतरराष्ट्रीय शतक है। तेंदुलकर ने भारत की तरफ जिन 98 अंतरराष्ट्रीय मैचों में कप्तानी की, उनमें उन्होंने 13 शतक लगाए, लेकिन सबसे ज्यादा सैकड़े उन्होंने मोहम्मद अजहरूद्दीन के कप्तान रहते हुए ठोके। इस दौरान तेंदुलकर के बल्ले से 33 शतक निकले, जबकि सौरव गांगुली की कप्तानी में उन्होंने 24, महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में 19, राहुल द्रविड़ की कप्तानी में आठ, अनिल कुंबले की कप्तानी में दो और वीरेंद्र सहवाग की कप्तानी में एक शतक जमाया है। | यह एक सारांश है: ठीक एक साल चार दिन बाद आखिर में वह घड़ी आ गई, जब लंबे समय से इंतजार कर रहे क्रिकेट प्रेमियों ने सचिन तेंदुलकर के बल्ले से महाशतक बनते हुए देखा। | 9 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर बाबा रामदेव (Baba Ramdev) को चिलम दान देकर साधुओं ने ‘नशामुक्त भारत'' का सपना पूरा करने की दिशा में ऐतिहासिक शुरुआत की
प्रयागराज (Prayagraj) में महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर कुंभ (Kumbh) परिसर में ‘‘चिलम छोड़ो आंदोलन'' की शुरुआत करते हुए बाबा रामदेव ने साधुओं की सर्वसमावेशी संगत में आह्नान करते हुए कहा कि नशा, चिलम आदि से साधुओं का गौरव और हमारी महान संत परम्परा बदनाम होती है.
बाबा रामदेव ने कहा कि जब हम कल्याण के लिए घर-परिवार और मोह-माया छोड़कर इस पावनी ऋषि परम्परा में आ गए तो क्या हम नशा, चिलम और तम्बाकू आदि नहीं छोड़ सकते? इस पर सर्वप्रथम निर्मोही अखाड़े के महंत राजेन्द्र दास महाराज ने चिलम दान देकर इस अभियान की शुरुआत की और नशा मुक्ति के लिए संकल्प लिया. यह वही अखाड़ा है जो कुंभ में सबसे पहले शाही स्नान करता है.
बाबा रामदेव के प्रवक्ता एसके तिजारावाला ने एनडीटीवी को बताया कि इस अवसर पर श्री पंच तेरा भाई त्यागी खालसा अखाड़ा (त्यागियों की जमात) के भगवत दास जी, तुलसीदास जी, लाल बाबा, मनोज दास की प्रेरणा से और बाबा रामदेव के आह्नान पर सैकड़ों साधु-सन्यासियों ने चिलम दान की और शपथ ली.
बाबा रामदेव महाराज ने इस संगत को संबोधित करते हुए कहा कि हम सब एक ईश्वर की संतान हैं. हम सब एक समान हैं, सब महान हैं. हमारा खून एक और हमारे पूर्वज एक हैं. कोई ऊंच-नीच नहीं और कोई भेदभाव नहीं. हमारे पूर्वज गौतम, कणादि, जैमिनि, पाणिनि, पतंजलि, राम, कृष्ण आदि कोई चिलम नहीं पीता था. हमने साधुओं का और संत परम्परा का गौरव बढ़ाया है. हम त्याग करते हैं, तप करते हैं, जन कल्याण करते हैं.
बाबा रामदेव ने कहा कि महात्माओं ने विदेशियों का शीर्षासन कराया है. संत परोपकारी होते हैं. हम रोजगार देते हैं. हमने दो लाख लोगों को रोजगार दिया है और धर्म-संस्कृति की रक्षा कर रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि मैं युवाओं का नशा छुड़वाता हूं तब लोग कहते हैं कि आप महात्माओं का नशा क्यों नहीं छुड़वाते हो. मैं इसका क्या उत्तर दूं? आप अपनी चिलम दान करो, नशा छोड़कर मानवता के लिए प्रेरणा बनो. | संक्षिप्त सारांश: कहा - नशे से साधुओं का गौरव और महान संत परम्परा होती है बदनाम
गौतम, कणादि, जैमिनि, पाणिनि, पतंजलि, राम, कृष्ण कोई चिलम नहीं पीता था
निर्मोही अखाड़े के महंत राजेन्द्र दास महाराज ने सबसे पहले चिलम दान दी | 8 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोमवार को लोक भवन में सात विभूतियों को 'यश भारती' पुरस्कार से सम्मानित किया. इस वर्ष अब तक 84 लोगों को 'यश भारती' सम्मान दिए जा चुके हैं. इस साल चौथीबार यह सम्मान दिया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में सूबे की 'लक्ष्मीबाई पुरस्कार' विजेताओं को भी सम्मानित किया.
मुख्यमंत्री ने मशहूर पियानो वादक ब्रायन साइल्स, पैरा बैडमिण्टन खिलाड़ी गौरव खन्ना, लोकगायिका रिचा जोशी, बॉडी बिल्डर वासी खान, संगीतकार देवेंद्र कुमार, खेल प्रशासन से जूड़े आनंदेश्वर पांडेय व साहित्यकार डॉ. राम सिंह यादव को 'यश भारती' से सम्मानित किया. उन्होंने 88 लोगों को 'रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार' से नवाजा और 315 ग्राम प्रधानों को 'वीरता पुरस्कार' से सम्मानित किया.
अपने संबोधन में अखिलेश ने कहा कि 'यश भारती' की शुरुआत नेताजी ने की थी. यह प्रतिभा का सम्मान है और हम प्रतिभाओं को खोज रहे हैं. उन्होंने कहा कि देश की तरक्की बिना आधी आबादी के संभव नहीं है और देश की आधी आबादी उत्तर प्रदेश की है. टिप्पणियां
सरकारी की उपलब्धियों पर रोशनी डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि समाजवादी लोगों ने बेटियों को लक्ष्मीबाई का सम्मान दिया है. महिलाओं के लिए समाजवादी पेंशन योजना का की शुरुआत की और शिक्षा के क्षेत्र में सबसे ज्यादा लैपटॉप बांटे हैं.
बता दें कि फिल्म, कला, साहित्य, संस्कृति, खेल, चिकित्सा, समाजसेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण काम करने वालों को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 'यश भारती' सम्मान दिया जाता है.
मुख्यमंत्री ने मशहूर पियानो वादक ब्रायन साइल्स, पैरा बैडमिण्टन खिलाड़ी गौरव खन्ना, लोकगायिका रिचा जोशी, बॉडी बिल्डर वासी खान, संगीतकार देवेंद्र कुमार, खेल प्रशासन से जूड़े आनंदेश्वर पांडेय व साहित्यकार डॉ. राम सिंह यादव को 'यश भारती' से सम्मानित किया. उन्होंने 88 लोगों को 'रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार' से नवाजा और 315 ग्राम प्रधानों को 'वीरता पुरस्कार' से सम्मानित किया.
अपने संबोधन में अखिलेश ने कहा कि 'यश भारती' की शुरुआत नेताजी ने की थी. यह प्रतिभा का सम्मान है और हम प्रतिभाओं को खोज रहे हैं. उन्होंने कहा कि देश की तरक्की बिना आधी आबादी के संभव नहीं है और देश की आधी आबादी उत्तर प्रदेश की है. टिप्पणियां
सरकारी की उपलब्धियों पर रोशनी डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि समाजवादी लोगों ने बेटियों को लक्ष्मीबाई का सम्मान दिया है. महिलाओं के लिए समाजवादी पेंशन योजना का की शुरुआत की और शिक्षा के क्षेत्र में सबसे ज्यादा लैपटॉप बांटे हैं.
बता दें कि फिल्म, कला, साहित्य, संस्कृति, खेल, चिकित्सा, समाजसेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण काम करने वालों को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 'यश भारती' सम्मान दिया जाता है.
अपने संबोधन में अखिलेश ने कहा कि 'यश भारती' की शुरुआत नेताजी ने की थी. यह प्रतिभा का सम्मान है और हम प्रतिभाओं को खोज रहे हैं. उन्होंने कहा कि देश की तरक्की बिना आधी आबादी के संभव नहीं है और देश की आधी आबादी उत्तर प्रदेश की है. टिप्पणियां
सरकारी की उपलब्धियों पर रोशनी डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि समाजवादी लोगों ने बेटियों को लक्ष्मीबाई का सम्मान दिया है. महिलाओं के लिए समाजवादी पेंशन योजना का की शुरुआत की और शिक्षा के क्षेत्र में सबसे ज्यादा लैपटॉप बांटे हैं.
बता दें कि फिल्म, कला, साहित्य, संस्कृति, खेल, चिकित्सा, समाजसेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण काम करने वालों को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 'यश भारती' सम्मान दिया जाता है.
सरकारी की उपलब्धियों पर रोशनी डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि समाजवादी लोगों ने बेटियों को लक्ष्मीबाई का सम्मान दिया है. महिलाओं के लिए समाजवादी पेंशन योजना का की शुरुआत की और शिक्षा के क्षेत्र में सबसे ज्यादा लैपटॉप बांटे हैं.
बता दें कि फिल्म, कला, साहित्य, संस्कृति, खेल, चिकित्सा, समाजसेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण काम करने वालों को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 'यश भारती' सम्मान दिया जाता है.
बता दें कि फिल्म, कला, साहित्य, संस्कृति, खेल, चिकित्सा, समाजसेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण काम करने वालों को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 'यश भारती' सम्मान दिया जाता है. | इस साल 84 लोगों को मिल चुका है 'यश भारती सम्मान'
चौथी बार किया गया 'यश भारती सम्मान' समारोह का आयोजन
फिल्म, कला, संस्कृति, खेल आदि के लिए दिया जाता है यह सम्मान | 34 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में जुटे कई राज्यों के वित्त मंत्रियों ने केंद्र सरकार से पेशा कर लागू करने का अधिकार राज्यों को दिए जाने की मांग की। मौजूदा व्यवस्था के तहत इसके लिए संसद में संशोधन प्रस्ताव पेश करना होता है। इस अनिवार्यता को राज्य सरकारें हटाना चाहती हैं।
केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई वित्त मंत्रियों की प्राधिकार समिति की दो दिवसीय बैठक सोमवार को भोपाल में शुरू हुई। समिति के अध्यक्ष और बिहार के उप मुख्यमंत्री व वित्त मंत्री सुशील मोदी ने संवाददाताओं को बताया कि पहले चरण में सभी वित्त मंत्रियों के बीच पेशा कर लागू करने का अधिकार राज्यों को देने पर सहमति बनी।
उन्होंने बताया कि पेशा कर में अंतिम संशोधन वर्ष 1988 में हुआ था, जिसके अनुसार अधिकतम पेशा कर 2500 रुपये लगाने की व्यवस्था की गई थी। वर्तमान व्यवस्था के मुताबित पेशा कर की इस ऊपरी सीमा को बढ़ाने के लिए संसद में प्रस्ताव पारित कराना होगा। सभी वित्त मंत्रियों की राय है कि संसद से एक संशोधन पारित कर पेशा कर लागू करने का अधिकार राज्यों को दे दिया जाए।
मोदी ने बताया कि कई क्षेत्र ऐसे हैं, जहां केंद्र सरकार द्वारा लागू सेवा कर तथा राज्यों द्वारा लागू वैट दोनों वसूले जाते हैं। इस प्रकार उपभोक्ताओं पर दो करों की मार पड़ती है। लिहाजा राज्यों की सूची में शामिल क्षेत्रों को केंद्र की अनुसूची से बाहर कर दिया जाए।
वित्त मंत्रियों की यह भी मांग है कि केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत दी जाने वाली राशि सीधे राज्य सरकारों को दी जाए। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन, सर्व शिक्षा अभियान जैसी कई योजनाएं हैं, जिनके लिए राशि समितियों को दी जाती हैं। परिणामस्वरूप इस पर सरकार का नियंत्रण नहीं रहता। इन पर सरकारों का नियंत्रण रहे, इसके लिए यह राशि सरकारों को दी जानी चाहिए।टिप्पणियां
राज्य सरकारों के वित्त मंत्रियों ने सेवा कर की परिभाषा में संशोधन की मांग भी की है। उनका सुझाव है कि सेवा को सिर्फ आर्थिक गतिविधि से जोड़ा जाना चाहिए, न कि हर गतिविधि को सेवाकर में रखा जाए। वित्त मंत्रियों ने केंद्रीय वणिज्य कर की क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान भी जल्द किए जाने की मांग की।
दो दिन तक चलने वाली इस बैठक में हरियाणा, तामिलनाडु, दिल्ली, मध्य प्रदेश, असम, जम्मू एवं कश्मीर, छत्तीसगढ़ और बिहार के वित्त मंत्री हिस्सा ले रहे हैं। पांच राज्यों में चुनाव होने के कारण वहां के वित्त मंत्री बैठक में हिस्सा लेने नहीं पहुंचे।
केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई वित्त मंत्रियों की प्राधिकार समिति की दो दिवसीय बैठक सोमवार को भोपाल में शुरू हुई। समिति के अध्यक्ष और बिहार के उप मुख्यमंत्री व वित्त मंत्री सुशील मोदी ने संवाददाताओं को बताया कि पहले चरण में सभी वित्त मंत्रियों के बीच पेशा कर लागू करने का अधिकार राज्यों को देने पर सहमति बनी।
उन्होंने बताया कि पेशा कर में अंतिम संशोधन वर्ष 1988 में हुआ था, जिसके अनुसार अधिकतम पेशा कर 2500 रुपये लगाने की व्यवस्था की गई थी। वर्तमान व्यवस्था के मुताबित पेशा कर की इस ऊपरी सीमा को बढ़ाने के लिए संसद में प्रस्ताव पारित कराना होगा। सभी वित्त मंत्रियों की राय है कि संसद से एक संशोधन पारित कर पेशा कर लागू करने का अधिकार राज्यों को दे दिया जाए।
मोदी ने बताया कि कई क्षेत्र ऐसे हैं, जहां केंद्र सरकार द्वारा लागू सेवा कर तथा राज्यों द्वारा लागू वैट दोनों वसूले जाते हैं। इस प्रकार उपभोक्ताओं पर दो करों की मार पड़ती है। लिहाजा राज्यों की सूची में शामिल क्षेत्रों को केंद्र की अनुसूची से बाहर कर दिया जाए।
वित्त मंत्रियों की यह भी मांग है कि केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत दी जाने वाली राशि सीधे राज्य सरकारों को दी जाए। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन, सर्व शिक्षा अभियान जैसी कई योजनाएं हैं, जिनके लिए राशि समितियों को दी जाती हैं। परिणामस्वरूप इस पर सरकार का नियंत्रण नहीं रहता। इन पर सरकारों का नियंत्रण रहे, इसके लिए यह राशि सरकारों को दी जानी चाहिए।टिप्पणियां
राज्य सरकारों के वित्त मंत्रियों ने सेवा कर की परिभाषा में संशोधन की मांग भी की है। उनका सुझाव है कि सेवा को सिर्फ आर्थिक गतिविधि से जोड़ा जाना चाहिए, न कि हर गतिविधि को सेवाकर में रखा जाए। वित्त मंत्रियों ने केंद्रीय वणिज्य कर की क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान भी जल्द किए जाने की मांग की।
दो दिन तक चलने वाली इस बैठक में हरियाणा, तामिलनाडु, दिल्ली, मध्य प्रदेश, असम, जम्मू एवं कश्मीर, छत्तीसगढ़ और बिहार के वित्त मंत्री हिस्सा ले रहे हैं। पांच राज्यों में चुनाव होने के कारण वहां के वित्त मंत्री बैठक में हिस्सा लेने नहीं पहुंचे।
उन्होंने बताया कि पेशा कर में अंतिम संशोधन वर्ष 1988 में हुआ था, जिसके अनुसार अधिकतम पेशा कर 2500 रुपये लगाने की व्यवस्था की गई थी। वर्तमान व्यवस्था के मुताबित पेशा कर की इस ऊपरी सीमा को बढ़ाने के लिए संसद में प्रस्ताव पारित कराना होगा। सभी वित्त मंत्रियों की राय है कि संसद से एक संशोधन पारित कर पेशा कर लागू करने का अधिकार राज्यों को दे दिया जाए।
मोदी ने बताया कि कई क्षेत्र ऐसे हैं, जहां केंद्र सरकार द्वारा लागू सेवा कर तथा राज्यों द्वारा लागू वैट दोनों वसूले जाते हैं। इस प्रकार उपभोक्ताओं पर दो करों की मार पड़ती है। लिहाजा राज्यों की सूची में शामिल क्षेत्रों को केंद्र की अनुसूची से बाहर कर दिया जाए।
वित्त मंत्रियों की यह भी मांग है कि केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत दी जाने वाली राशि सीधे राज्य सरकारों को दी जाए। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन, सर्व शिक्षा अभियान जैसी कई योजनाएं हैं, जिनके लिए राशि समितियों को दी जाती हैं। परिणामस्वरूप इस पर सरकार का नियंत्रण नहीं रहता। इन पर सरकारों का नियंत्रण रहे, इसके लिए यह राशि सरकारों को दी जानी चाहिए।टिप्पणियां
राज्य सरकारों के वित्त मंत्रियों ने सेवा कर की परिभाषा में संशोधन की मांग भी की है। उनका सुझाव है कि सेवा को सिर्फ आर्थिक गतिविधि से जोड़ा जाना चाहिए, न कि हर गतिविधि को सेवाकर में रखा जाए। वित्त मंत्रियों ने केंद्रीय वणिज्य कर की क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान भी जल्द किए जाने की मांग की।
दो दिन तक चलने वाली इस बैठक में हरियाणा, तामिलनाडु, दिल्ली, मध्य प्रदेश, असम, जम्मू एवं कश्मीर, छत्तीसगढ़ और बिहार के वित्त मंत्री हिस्सा ले रहे हैं। पांच राज्यों में चुनाव होने के कारण वहां के वित्त मंत्री बैठक में हिस्सा लेने नहीं पहुंचे।
मोदी ने बताया कि कई क्षेत्र ऐसे हैं, जहां केंद्र सरकार द्वारा लागू सेवा कर तथा राज्यों द्वारा लागू वैट दोनों वसूले जाते हैं। इस प्रकार उपभोक्ताओं पर दो करों की मार पड़ती है। लिहाजा राज्यों की सूची में शामिल क्षेत्रों को केंद्र की अनुसूची से बाहर कर दिया जाए।
वित्त मंत्रियों की यह भी मांग है कि केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत दी जाने वाली राशि सीधे राज्य सरकारों को दी जाए। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन, सर्व शिक्षा अभियान जैसी कई योजनाएं हैं, जिनके लिए राशि समितियों को दी जाती हैं। परिणामस्वरूप इस पर सरकार का नियंत्रण नहीं रहता। इन पर सरकारों का नियंत्रण रहे, इसके लिए यह राशि सरकारों को दी जानी चाहिए।टिप्पणियां
राज्य सरकारों के वित्त मंत्रियों ने सेवा कर की परिभाषा में संशोधन की मांग भी की है। उनका सुझाव है कि सेवा को सिर्फ आर्थिक गतिविधि से जोड़ा जाना चाहिए, न कि हर गतिविधि को सेवाकर में रखा जाए। वित्त मंत्रियों ने केंद्रीय वणिज्य कर की क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान भी जल्द किए जाने की मांग की।
दो दिन तक चलने वाली इस बैठक में हरियाणा, तामिलनाडु, दिल्ली, मध्य प्रदेश, असम, जम्मू एवं कश्मीर, छत्तीसगढ़ और बिहार के वित्त मंत्री हिस्सा ले रहे हैं। पांच राज्यों में चुनाव होने के कारण वहां के वित्त मंत्री बैठक में हिस्सा लेने नहीं पहुंचे।
वित्त मंत्रियों की यह भी मांग है कि केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत दी जाने वाली राशि सीधे राज्य सरकारों को दी जाए। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन, सर्व शिक्षा अभियान जैसी कई योजनाएं हैं, जिनके लिए राशि समितियों को दी जाती हैं। परिणामस्वरूप इस पर सरकार का नियंत्रण नहीं रहता। इन पर सरकारों का नियंत्रण रहे, इसके लिए यह राशि सरकारों को दी जानी चाहिए।टिप्पणियां
राज्य सरकारों के वित्त मंत्रियों ने सेवा कर की परिभाषा में संशोधन की मांग भी की है। उनका सुझाव है कि सेवा को सिर्फ आर्थिक गतिविधि से जोड़ा जाना चाहिए, न कि हर गतिविधि को सेवाकर में रखा जाए। वित्त मंत्रियों ने केंद्रीय वणिज्य कर की क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान भी जल्द किए जाने की मांग की।
दो दिन तक चलने वाली इस बैठक में हरियाणा, तामिलनाडु, दिल्ली, मध्य प्रदेश, असम, जम्मू एवं कश्मीर, छत्तीसगढ़ और बिहार के वित्त मंत्री हिस्सा ले रहे हैं। पांच राज्यों में चुनाव होने के कारण वहां के वित्त मंत्री बैठक में हिस्सा लेने नहीं पहुंचे।
राज्य सरकारों के वित्त मंत्रियों ने सेवा कर की परिभाषा में संशोधन की मांग भी की है। उनका सुझाव है कि सेवा को सिर्फ आर्थिक गतिविधि से जोड़ा जाना चाहिए, न कि हर गतिविधि को सेवाकर में रखा जाए। वित्त मंत्रियों ने केंद्रीय वणिज्य कर की क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान भी जल्द किए जाने की मांग की।
दो दिन तक चलने वाली इस बैठक में हरियाणा, तामिलनाडु, दिल्ली, मध्य प्रदेश, असम, जम्मू एवं कश्मीर, छत्तीसगढ़ और बिहार के वित्त मंत्री हिस्सा ले रहे हैं। पांच राज्यों में चुनाव होने के कारण वहां के वित्त मंत्री बैठक में हिस्सा लेने नहीं पहुंचे।
दो दिन तक चलने वाली इस बैठक में हरियाणा, तामिलनाडु, दिल्ली, मध्य प्रदेश, असम, जम्मू एवं कश्मीर, छत्तीसगढ़ और बिहार के वित्त मंत्री हिस्सा ले रहे हैं। पांच राज्यों में चुनाव होने के कारण वहां के वित्त मंत्री बैठक में हिस्सा लेने नहीं पहुंचे। | संक्षिप्त सारांश: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में जुटे कई राज्यों के वित्त मंत्रियों ने केंद्र सरकार से पेशा कर लागू करने का अधिकार राज्यों को दिए जाने की मांग की। | 8 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: भारत भी आज उन देशों की लिस्ट में शामिल हो गया है जिनके पास परमाणु ताकत वाली पनडुब्बी होने का गौरव है। रूस से लाई गई पनडुब्बी 'नेरपा' को आज भारतीय नेवी में शामिल किया गया।
'नेरपा' पनडुब्बी के लिए भारत ने रूस के साथ 2004 में एक कॉन्ट्रेक्ट किया था जिसकी कीमत थी 900 मिलियन डॉलर है हालांकि इसको कई साल पहले ही भारतीय नेवी में शामिल किया जाना था लेकिन इस पनडुब्बी के ट्रायल के समय एक हादसा हो गया था जिसमें कई रूसी सैनिकों की मौत हो गई थी जिसके बाद उस वक्त इसे भारत लाना टाल दिया गया था।
'नेरपा' पनडुब्बी के लिए भारत ने रूस के साथ 2004 में एक कॉन्ट्रेक्ट किया था जिसकी कीमत थी 900 मिलियन डॉलर है हालांकि इसको कई साल पहले ही भारतीय नेवी में शामिल किया जाना था लेकिन इस पनडुब्बी के ट्रायल के समय एक हादसा हो गया था जिसमें कई रूसी सैनिकों की मौत हो गई थी जिसके बाद उस वक्त इसे भारत लाना टाल दिया गया था। | संक्षिप्त पाठ: भारत भी आज उन देशों की लिस्ट में शामिल हो गया है जिनके पास परमाणु ताकत वाली पनडुब्बी होने का गौरव है। रूस से लाई गई पनडुब्बी 'नेरपा' को आज भारतीय नेवी में शामिल किया गया। | 22 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: Hypertension Diet: हाई ब्लड प्रेशर से रहना है दूर, तो अपनाएं ये तरीके...
Health Tips: तेल की मालिश करने से होंगे ये गजब फायदे! जानें कहां और कैसे करें मालिश
लहसुन को ब्लड प्रेशर कंट्रोल का एक बेहतरीन स्रोत माना जाता है. ये शरीर में कॉलेस्ट्रॉरल के लेवल को नियंत्रण में रखना, इम्युनिटी को सुधारना, बालों की देखभाल व स्किन को भी फायदा पहुंचाता है. लहसुन को पका कर खाने में कोई बड़ा नुकसान नहीं है, लेकिन इस कारण इसके कुछ आवश्यक गुण खत्म हो जाते हैं. आप, लहसुन को काट कर उसे सीधे पानी के साथ खा सकते हैं, लेकिन अगर आपको इसे कच्चा खाना पंसद नहीं है तो आप इसे अपने फूड में मिलाकर इसे अपनी डाइट का हिस्सा बना सकते हैं. इस काटने के बाद थोड़ी देर रख देने से यह हवा में मौजूद ऑक्सिजन से भी मिल जाता है, जो शरीर के लिए फायदेमंद माना जाता है.
डिलीवरी के बाद रखें ब्लड प्रेशर पर नजर, हो सकता है दिल को खतरा...
आयुर्वेदिक चिकित्सकों के अनुसार बीपी अचानक से बढ़ने पर आधा गिलास पानी में काली मिर्च पाउडर डालकर इस्तेमाल करें. इसके अलावा काली मिर्च का सेवन नियमित करने से न केवल खाने का स्वाद बढ़ेगा, बल्कि कई बीमारियों से भी राहत मिल सकती है. इसे सब्जियों में डालकर नियमित खाया जा सकता है. इससे पाचन सिस्टम मजबूत होता है। ये मलेरिया में भी काफी फायदेमंद होती है. इतना ही नहीं दांतों के दर्द में भी काली मिर्च तुरंत आराम देती है. काली मिर्च के नियमित प्रयोग से आंखों की रोशनी बढ़ती है. शरीर के किसी हिस्से में अगर सूजन आ रही हो, वहां काली मिर्च पीसकर लगा दें तो काफी जल्दी आराम मिल जाता है.
अगर आप भी पीते हैं 'चाय', तो हाई बीपी के हो सकते हैं शिकार
आंवला हाई ब्लड प्रेशर ही नहीं कई बीमारियों को शरीर से दूर रखने में मदद करता है. आप पानी में आधा चम्मच आंवले (Amla) का पाउडर मिलाकर इसका सेवन कर सकते हैं. इतना ही नहीं इसे शहद के साथ मिलाकर भी खाया जा सकता है. दरअसल, शहद शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है. आंवले का इस्तेमाल सुबह खाली पेट किया जाना चाहिए. आप आंवले के जूस को भी अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं.
आलू खाने से होते हैं ये 4 नुकसान, क्या आपको पता है...
प्याज क्वेरसेटिन नामक फ्लेवोनॉयड्स से भरपूर होता है जो आपके रक्त वाहिकाओं को पतला करने में मदद करता है. इसके सेवन के बाद ब्लड प्रेशर को तुरंत कम किया जा सकता है. भारत में इसे ज्यादातर सलाद और सब्जियों में इस्तेमाल किया जाता है.
Benefits of Spinach: पालक के 4 आश्चर्यजनक फायदे, जिनके बारे में नहीं जानते आप!
नोट: अपने आहार में किसी भी तरह का बदलाव बिना डॉक्टर की सलाह के न करें.
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Weight Loss: ये व्यायाम घटाएंगे पेट की चर्बी, वजन कम करने के साथ बनाएंगे बॉडी शेप
Sugarcane Health Benefits: गन्ने के 12 स्वास्थ्य लाभ कर देंगे आपको हैरान, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर के लिए भी रामबाण
Unhealthy Food: चिप्स हो सकते हैं खतरनाक, रहें सतर्क कहीं आपको न हो जाए डायबिटीज और दिल की बीमारी!
Ginger Tea Health Benefits: अदरक की चाय करेगी कमाल! जानें अदरक के गजब फायदे | हाई ब्लड प्रेशर में आजमाएं ये घरेलू नुस्खे.
High Blood Pressure में लहसुन है फायदेमंद.
हाई ब्लड प्रेशर में आंवला भी देगा लाभ. | 26 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: तेल कीमतों के दो साल के उच्च स्तर पर पहुंचने के बीच महंगाई और ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की चिंताओं से बंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स 75 अंक की गिरावट के साथ 19,612 अंक पर आ गया। बाजार में हल्की मुनाफावसूली का दौर भी देखने को मिली। तेल कीमतों में तेजी से निवेशकों को चिंता है कि इससे महंगाई और ब्याज दरें बढ़ सकती हैं। बंबई शेयर बाजार का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 74.62 अंक या 0.38 प्रतिशत गिरकर 19,612.20 अंक पर आ गया। कारोबार के दौरान यह 19,550.55 अंक से 19,811.14 अंक के दायरे में घूमता रहा। इसी के अनुरूप नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 18.30 अंक गिरकर 5,891.75 अंक रह गया। कारोबार के दौरान यह 5,868.80 से 5,944.45 अंक के दायरे में घूमता रहा। बाजार विश्लेषकों ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों की वजह से निवेशक महंगाई को लेकर चिंतित है। भारतीय रिजर्व बैंक ब्याज दरों में और वृद्धि कर सकता है जिससे कंपनियों की आमदनी प्रभावित होगी। केंद्रीय बैंक ने मंगलवार को संकेत दिया था कि महंगाई को देखते हुए सुगम मौद्रिक नीति अभी दूर की बात है। केंद्रीय बैंक पिछले एक साल के दौरान नीतिगत दरों में आठ बार बढ़ोतरी कर चुका है। मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज के प्रबंधक (डेरिवेटिव्स) भविन देसाई ने कहा, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें बाजार की गति में रुकावट पैदा कर रही हैं। आईआईएफएल के अनुसंधान प्रमुख (भारतीय निजी ग्राहक) अमर अंबानी ने कहा, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों की वजह से महत्वपूर्ण शेयर दूसरे दिन एकीकरण की प्रक्रिया में रहे। ब्याज दरों को लेकर चिंता बढ़ी है। | सारांश: एनएसई का निफ्टी भी 18.30 अंक गिरकर 5,891.75 अंक रह गया। कारोबार के दौरान यह 5,868.80 से 5,944.45 अंक के दायरे में घूमता रहा। | 31 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अत्याधुनिक और देश की सबसे लंबी चेनानी-नाशरी सुरंग का उद्घाटन किया. पीएम मोदी ने सुरंग के अंदर जीप से यात्रा की. इस दौरान सुरंग में वह थोड़ी देर पैदल भी चले. जम्मू से कश्मीर घाटी जाने वाले वाहनों को इस टनल से गुजरना काफी सस्ता पड़ेगा क्योंकि पहले चनैनी से नाशरी तक के 41 किमी लंबे रास्ते काफी टेढ़े मेढ़े और जबरदस्त चढ़ाई वाले थे जिस पर वाहन चलाना काफी मुश्किल होता था. साथ में औसतन तीन लीटर पेट्रोल खर्च भी होता था लेकिन अब यह सफर मात्र 55 रुपये में होगा. इससे महीने में करीब 30 लाख रुपये ईंधन की बचत होगी.
यह एक ऐसा टनल है, जिसके भीतर और बाहर लगे हैंं 124 सीसीटीवी कैमरे. हर कैमरे की दूरी 75 मीटर है. 360 डिग्री घूमने वाले कैमरे. सुरंग के अंदर घुटन महसूस न हो इसलिए इसे पूरी तरह हवादार बनाया गया है, साथ ही निगरानी के लिए संचार व्यवस्था का दुरुस्त इंतजाम किया गया है. इस टनल की लबाई है 9.2 किलोमीटर. विपरीत भौगोलिक परिस्थितियों में आरएफएंडएफएस ट्रांसपोर्ट नेटवर्क लिमिटेड ने देश की सबसे बड़ी सड़क परिवहन टनल का निर्माण रिकॉर्ड साढ़े चार साल में किया है. इसका नाम चनैनी-नाशरी टनल रखा गया है क्योंकि यह जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर चनैनी से शुरू होकर नाशरी नामक स्थान पर जाकर खुलती है. 286 किलोमीटर लंबी जम्मू-श्रीनगर चार लेन राजमार्ग वाली परियोजना का यह हिस्सा 9.2 किलोमीटर लंबी दोहरी ट्यूब सुरंग पर 23 मई 2011 मे शुरू हुआ. इस सुरंग मार्ग पर 3,720 करोड़ रुपए की लागत आई है.
1200 मीटर की ऊंचाई पर बने इस सुरंग में दो समानातंर ट्यूब हैं. मुख्य ट्यूब का व्यास 13 मीटर है और सुरक्षा ट्यूब या निकास ट्यूब का व्यास छह मीटर है. दोनों ट्यूब में 29 जगहों पर क्रॉस पैसेज है. मुख्य ट्यूब में हर 8 मीटर पर ताजा हवा के लिए इनलेट बनाए गए हैं. हवा बाहर जाने के लिए हर 100 मीटर पर आउटलेट बनाए गए हैं. सुरंग में हर 150 मीटर पर एसओएस बॉक्स लगे हैं. आपातकालीन स्थिति में यात्री इनका इस्तेमाल हॉट लाइन की तरह कर सकेंगे. आईटीसीआर से मदद पाने के लिए यात्रियों को एसओएस बॉक्स खोलकर बस 'हैलो' बोलना होगा. एसओएस बॉक्स में फर्स्ट एड का सामान और कुछ जरूरी दवाएं भी होंगी ताकि किसी तरह का हादसा होने पर उन्हें तुरंत जरुरी मदद मिल सके. | यह एक सारांश है: इस सबसे लंबी सुरंग में 124 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं
इससे जम्मू और कश्मीर के बीच की दूरी 41 किलोमीटर कम हो जाएगी
इस टनल की लंबाई 9.2 किलोमीटर है | 24 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: राष्ट्रपति चुनाव के लिए अपनी उम्मीदवारी की चर्चा के जोर पकड़ने के बीच वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि कोई भी अपनी इच्छा से राष्ट्रपति नहीं बन सकता और इस मुद्दे पर पार्टी ही फैसला करेगी।
मुखर्जी ने कोलकाता में अपने आवास पर संवाददाताओं से कहा, यह फैसला पार्टी करती है। कोई अपनी इच्छा से राष्ट्रपति नहीं बन सकता। यूपीए सूत्रों ने शुक्रवार को कहा था कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी 15 जून के आसपास कोई फैसला करेंगी, शायद चुनाव आयोग द्वारा चुनाव अधिसूचना जारी होने के कुछ दिन बाद।टिप्पणियां
कांग्रेस अध्यक्ष के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल ने भी शुक्रवार को नार्थ ब्लॉक में मुखर्जी से मुलाकात की थी। सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस ने पहले ही सरकार के सहयोगी दलों डीएमके, एनसीपी और राष्ट्रीय लोकदल का और समाजवादी पार्टी जैसे दलों से बाहरी समर्थन हासिल कर चुकी है।
साथ ही बाहर से समर्थन देने वाली बीएसपी और सरकार की दूसरे सबसे बड़ी घटक तृणमूल कांग्रेस द्वारा यूपीए उम्मीदवार का विरोध किए जाने की संभावना नहीं है। पश्चिम बंगाल में अगले साल पंचायत चुनाव अकेले लड़ने के फैसले पर मुखर्जी ने कहा कि यह फैसला पश्चिम बंगाल की कांग्रेस इकाई को करना है। मुझे इस पर कोई टिप्पणी नहीं करनी है।
मुखर्जी ने कोलकाता में अपने आवास पर संवाददाताओं से कहा, यह फैसला पार्टी करती है। कोई अपनी इच्छा से राष्ट्रपति नहीं बन सकता। यूपीए सूत्रों ने शुक्रवार को कहा था कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी 15 जून के आसपास कोई फैसला करेंगी, शायद चुनाव आयोग द्वारा चुनाव अधिसूचना जारी होने के कुछ दिन बाद।टिप्पणियां
कांग्रेस अध्यक्ष के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल ने भी शुक्रवार को नार्थ ब्लॉक में मुखर्जी से मुलाकात की थी। सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस ने पहले ही सरकार के सहयोगी दलों डीएमके, एनसीपी और राष्ट्रीय लोकदल का और समाजवादी पार्टी जैसे दलों से बाहरी समर्थन हासिल कर चुकी है।
साथ ही बाहर से समर्थन देने वाली बीएसपी और सरकार की दूसरे सबसे बड़ी घटक तृणमूल कांग्रेस द्वारा यूपीए उम्मीदवार का विरोध किए जाने की संभावना नहीं है। पश्चिम बंगाल में अगले साल पंचायत चुनाव अकेले लड़ने के फैसले पर मुखर्जी ने कहा कि यह फैसला पश्चिम बंगाल की कांग्रेस इकाई को करना है। मुझे इस पर कोई टिप्पणी नहीं करनी है।
कांग्रेस अध्यक्ष के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल ने भी शुक्रवार को नार्थ ब्लॉक में मुखर्जी से मुलाकात की थी। सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस ने पहले ही सरकार के सहयोगी दलों डीएमके, एनसीपी और राष्ट्रीय लोकदल का और समाजवादी पार्टी जैसे दलों से बाहरी समर्थन हासिल कर चुकी है।
साथ ही बाहर से समर्थन देने वाली बीएसपी और सरकार की दूसरे सबसे बड़ी घटक तृणमूल कांग्रेस द्वारा यूपीए उम्मीदवार का विरोध किए जाने की संभावना नहीं है। पश्चिम बंगाल में अगले साल पंचायत चुनाव अकेले लड़ने के फैसले पर मुखर्जी ने कहा कि यह फैसला पश्चिम बंगाल की कांग्रेस इकाई को करना है। मुझे इस पर कोई टिप्पणी नहीं करनी है।
साथ ही बाहर से समर्थन देने वाली बीएसपी और सरकार की दूसरे सबसे बड़ी घटक तृणमूल कांग्रेस द्वारा यूपीए उम्मीदवार का विरोध किए जाने की संभावना नहीं है। पश्चिम बंगाल में अगले साल पंचायत चुनाव अकेले लड़ने के फैसले पर मुखर्जी ने कहा कि यह फैसला पश्चिम बंगाल की कांग्रेस इकाई को करना है। मुझे इस पर कोई टिप्पणी नहीं करनी है। | यह एक सारांश है: राष्ट्रपति चुनाव के लिए अपनी उम्मीदवारी की चर्चा के जोर पकड़ने के बीच वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि कोई भी अपनी इच्छा से राष्ट्रपति नहीं बन सकता और इस मुद्दे पर पार्टी ही फैसला करेगी। | 24 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: बांग्लादेश के खिलाफ लगभग एक दशक पहले पदार्पण के बाद से ही भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को बल्लेबाजी और अपने बालों के साथ कुछ नया करने के लिए जाना जाता है।
धोनी को रविवार को रांची चैम्पियन्स लीग में दक्षिण अफ्रीका की टीम टाइटन्स के खिलाफ चेन्नई सुपरकिंग्स की अगुआई करते हुए नए हेयर स्टाइल के साथ देखा गया था।
धोनी ने जब लगभग एक दशक पहले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा तो उनके बाल लंबे थे और अब उन्होंने नया हेयर स्टाइल बनाया है जिसमें उन्होंने अपने सिर के दोनों तरफ के बाल मुंडवा दिए हैं और सिर्फ बीच में बाल छोड़े हैं। इस हेयर स्टाइल को एक समय इंग्लैंड के स्टार स्ट्राइकर डेविड बैकहम ने काफी लोकप्रिय किया था।
भारतीय कप्तान के बाल हमेशा से ही उनके प्रशंसकों के बीच काफी लोकप्रिय रहे हैं। रांची ही नहीं बल्कि पूरे देश के उनके प्रशसंकों ने उनके लंबे से लेकर छोटे हर तरह के बालों को पसंद दिया है।
धोनी जब भी रांची आते हैं तो काया सैलून में अपने बाल कटवाते हैं जिससे इस सैलून के बाहर सैकड़ों प्रशंसक जुट जाते हैं और पुलिस को उन्हें नियंत्रित करने में मुश्किल का सामना करना पड़ता है।टिप्पणियां
नवंबर 2006 में तो रांची के तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक अखिल कुमार झा को धोनी से आग्रह करना पड़ा कि वे सैलून में जाने से पहले पुलिस को सूचित करें। परवेज मुशर्रफ भी जब पाकिस्तान के राष्ट्रपति थे तो उन्होंने मैच के बाद अपने भाषण में धोनी के हेयर स्टाइल पर बयान दिया था।
मुशर्रफ ने कहा था, ‘मैंने एक बैनर में देखा कि आपसे बाल कटवाने को कहा गया है। लेकिन (अगर) आप मेरा नजरिया जानना चाहेंगे तो आप इसी तरह अच्छे लगते हैं और आपको बाल कटवाने की जरूरत नहीं है।’
धोनी को रविवार को रांची चैम्पियन्स लीग में दक्षिण अफ्रीका की टीम टाइटन्स के खिलाफ चेन्नई सुपरकिंग्स की अगुआई करते हुए नए हेयर स्टाइल के साथ देखा गया था।
धोनी ने जब लगभग एक दशक पहले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा तो उनके बाल लंबे थे और अब उन्होंने नया हेयर स्टाइल बनाया है जिसमें उन्होंने अपने सिर के दोनों तरफ के बाल मुंडवा दिए हैं और सिर्फ बीच में बाल छोड़े हैं। इस हेयर स्टाइल को एक समय इंग्लैंड के स्टार स्ट्राइकर डेविड बैकहम ने काफी लोकप्रिय किया था।
भारतीय कप्तान के बाल हमेशा से ही उनके प्रशंसकों के बीच काफी लोकप्रिय रहे हैं। रांची ही नहीं बल्कि पूरे देश के उनके प्रशसंकों ने उनके लंबे से लेकर छोटे हर तरह के बालों को पसंद दिया है।
धोनी जब भी रांची आते हैं तो काया सैलून में अपने बाल कटवाते हैं जिससे इस सैलून के बाहर सैकड़ों प्रशंसक जुट जाते हैं और पुलिस को उन्हें नियंत्रित करने में मुश्किल का सामना करना पड़ता है।टिप्पणियां
नवंबर 2006 में तो रांची के तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक अखिल कुमार झा को धोनी से आग्रह करना पड़ा कि वे सैलून में जाने से पहले पुलिस को सूचित करें। परवेज मुशर्रफ भी जब पाकिस्तान के राष्ट्रपति थे तो उन्होंने मैच के बाद अपने भाषण में धोनी के हेयर स्टाइल पर बयान दिया था।
मुशर्रफ ने कहा था, ‘मैंने एक बैनर में देखा कि आपसे बाल कटवाने को कहा गया है। लेकिन (अगर) आप मेरा नजरिया जानना चाहेंगे तो आप इसी तरह अच्छे लगते हैं और आपको बाल कटवाने की जरूरत नहीं है।’
धोनी ने जब लगभग एक दशक पहले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा तो उनके बाल लंबे थे और अब उन्होंने नया हेयर स्टाइल बनाया है जिसमें उन्होंने अपने सिर के दोनों तरफ के बाल मुंडवा दिए हैं और सिर्फ बीच में बाल छोड़े हैं। इस हेयर स्टाइल को एक समय इंग्लैंड के स्टार स्ट्राइकर डेविड बैकहम ने काफी लोकप्रिय किया था।
भारतीय कप्तान के बाल हमेशा से ही उनके प्रशंसकों के बीच काफी लोकप्रिय रहे हैं। रांची ही नहीं बल्कि पूरे देश के उनके प्रशसंकों ने उनके लंबे से लेकर छोटे हर तरह के बालों को पसंद दिया है।
धोनी जब भी रांची आते हैं तो काया सैलून में अपने बाल कटवाते हैं जिससे इस सैलून के बाहर सैकड़ों प्रशंसक जुट जाते हैं और पुलिस को उन्हें नियंत्रित करने में मुश्किल का सामना करना पड़ता है।टिप्पणियां
नवंबर 2006 में तो रांची के तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक अखिल कुमार झा को धोनी से आग्रह करना पड़ा कि वे सैलून में जाने से पहले पुलिस को सूचित करें। परवेज मुशर्रफ भी जब पाकिस्तान के राष्ट्रपति थे तो उन्होंने मैच के बाद अपने भाषण में धोनी के हेयर स्टाइल पर बयान दिया था।
मुशर्रफ ने कहा था, ‘मैंने एक बैनर में देखा कि आपसे बाल कटवाने को कहा गया है। लेकिन (अगर) आप मेरा नजरिया जानना चाहेंगे तो आप इसी तरह अच्छे लगते हैं और आपको बाल कटवाने की जरूरत नहीं है।’
भारतीय कप्तान के बाल हमेशा से ही उनके प्रशंसकों के बीच काफी लोकप्रिय रहे हैं। रांची ही नहीं बल्कि पूरे देश के उनके प्रशसंकों ने उनके लंबे से लेकर छोटे हर तरह के बालों को पसंद दिया है।
धोनी जब भी रांची आते हैं तो काया सैलून में अपने बाल कटवाते हैं जिससे इस सैलून के बाहर सैकड़ों प्रशंसक जुट जाते हैं और पुलिस को उन्हें नियंत्रित करने में मुश्किल का सामना करना पड़ता है।टिप्पणियां
नवंबर 2006 में तो रांची के तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक अखिल कुमार झा को धोनी से आग्रह करना पड़ा कि वे सैलून में जाने से पहले पुलिस को सूचित करें। परवेज मुशर्रफ भी जब पाकिस्तान के राष्ट्रपति थे तो उन्होंने मैच के बाद अपने भाषण में धोनी के हेयर स्टाइल पर बयान दिया था।
मुशर्रफ ने कहा था, ‘मैंने एक बैनर में देखा कि आपसे बाल कटवाने को कहा गया है। लेकिन (अगर) आप मेरा नजरिया जानना चाहेंगे तो आप इसी तरह अच्छे लगते हैं और आपको बाल कटवाने की जरूरत नहीं है।’
धोनी जब भी रांची आते हैं तो काया सैलून में अपने बाल कटवाते हैं जिससे इस सैलून के बाहर सैकड़ों प्रशंसक जुट जाते हैं और पुलिस को उन्हें नियंत्रित करने में मुश्किल का सामना करना पड़ता है।टिप्पणियां
नवंबर 2006 में तो रांची के तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक अखिल कुमार झा को धोनी से आग्रह करना पड़ा कि वे सैलून में जाने से पहले पुलिस को सूचित करें। परवेज मुशर्रफ भी जब पाकिस्तान के राष्ट्रपति थे तो उन्होंने मैच के बाद अपने भाषण में धोनी के हेयर स्टाइल पर बयान दिया था।
मुशर्रफ ने कहा था, ‘मैंने एक बैनर में देखा कि आपसे बाल कटवाने को कहा गया है। लेकिन (अगर) आप मेरा नजरिया जानना चाहेंगे तो आप इसी तरह अच्छे लगते हैं और आपको बाल कटवाने की जरूरत नहीं है।’
नवंबर 2006 में तो रांची के तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक अखिल कुमार झा को धोनी से आग्रह करना पड़ा कि वे सैलून में जाने से पहले पुलिस को सूचित करें। परवेज मुशर्रफ भी जब पाकिस्तान के राष्ट्रपति थे तो उन्होंने मैच के बाद अपने भाषण में धोनी के हेयर स्टाइल पर बयान दिया था।
मुशर्रफ ने कहा था, ‘मैंने एक बैनर में देखा कि आपसे बाल कटवाने को कहा गया है। लेकिन (अगर) आप मेरा नजरिया जानना चाहेंगे तो आप इसी तरह अच्छे लगते हैं और आपको बाल कटवाने की जरूरत नहीं है।’
मुशर्रफ ने कहा था, ‘मैंने एक बैनर में देखा कि आपसे बाल कटवाने को कहा गया है। लेकिन (अगर) आप मेरा नजरिया जानना चाहेंगे तो आप इसी तरह अच्छे लगते हैं और आपको बाल कटवाने की जरूरत नहीं है।’ | धोनी को रविवार को रांची चैम्पियन्स लीग में दक्षिण अफ्रीका की टीम टाइटन्स के खिलाफ चेन्नई सुपरकिंग्स की अगुआई करते हुए नए हेयर स्टाइल के साथ देखा गया था। | 28 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: यूपी के दादरी इलाके में एक विकलांग महिला के साथ गैंगरेप का मामला समाने आया है। पुलिस के मुताबिक, बलात्कार करने वाले दोनों आरोपी महिला के पति के दोस्त हैं। पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दूसरे की तलाश जारी है। पीड़िता ने बताया कि वह बाजार से लौट रही थी उसी दौरान उसे दोनों आरोपी मिले। आरोपियों ने उसे घर तक छोड़ने की बात कह कर बाइक पर बिठाया और अपने घर ले जाकर उसके साथ बलात्कार किया।टिप्पणियां
उधर, गुडगांव के सोहना में भी एक 5 साल की बच्ची के साथ बलात्कार कार मामला सामने आया है। बच्ची के साथ बलात्कार का आरोप उसके रिश्तेदार पर है। पुलिस ने आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी राजस्थान का रहने वाला है। आज उसे जिला अदालत में पेश किया जाएगा। बलात्कार पीड़ित बच्ची को प्राथमिक जांच के बाद छोड़ दिया है।
इसके साथ राजस्थान के बाड़मेर जिले के एक गांव में दो हफ्ते पहले एक नाबालिग लड़की की बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई थी और हालत अब यह है कि मृतक के परिवार को लगातार जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। धमकियों के बाद इस परिवार ने गांव छोड़ दिया है और ये बाड़मेर के सेन समाज भवन में रहने को मजबूर हैं। इस परिवार को अब तक प्रशासन से भी कोई मदद नहीं मिली है और न ही पुलिस सुरक्षा का कोई आश्वसान दे रही है हालांकि पुलिस ने इस मामले में अभी तक चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन फिर भी परिवार को धमकी मिलने का सिलसिला बंद नहीं हो रहा है।
उधर, गुडगांव के सोहना में भी एक 5 साल की बच्ची के साथ बलात्कार कार मामला सामने आया है। बच्ची के साथ बलात्कार का आरोप उसके रिश्तेदार पर है। पुलिस ने आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी राजस्थान का रहने वाला है। आज उसे जिला अदालत में पेश किया जाएगा। बलात्कार पीड़ित बच्ची को प्राथमिक जांच के बाद छोड़ दिया है।
इसके साथ राजस्थान के बाड़मेर जिले के एक गांव में दो हफ्ते पहले एक नाबालिग लड़की की बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई थी और हालत अब यह है कि मृतक के परिवार को लगातार जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। धमकियों के बाद इस परिवार ने गांव छोड़ दिया है और ये बाड़मेर के सेन समाज भवन में रहने को मजबूर हैं। इस परिवार को अब तक प्रशासन से भी कोई मदद नहीं मिली है और न ही पुलिस सुरक्षा का कोई आश्वसान दे रही है हालांकि पुलिस ने इस मामले में अभी तक चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन फिर भी परिवार को धमकी मिलने का सिलसिला बंद नहीं हो रहा है।
इसके साथ राजस्थान के बाड़मेर जिले के एक गांव में दो हफ्ते पहले एक नाबालिग लड़की की बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई थी और हालत अब यह है कि मृतक के परिवार को लगातार जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। धमकियों के बाद इस परिवार ने गांव छोड़ दिया है और ये बाड़मेर के सेन समाज भवन में रहने को मजबूर हैं। इस परिवार को अब तक प्रशासन से भी कोई मदद नहीं मिली है और न ही पुलिस सुरक्षा का कोई आश्वसान दे रही है हालांकि पुलिस ने इस मामले में अभी तक चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन फिर भी परिवार को धमकी मिलने का सिलसिला बंद नहीं हो रहा है। | पुलिस के मुताबिक, बलात्कार करने वाले दोनों आरोपी महिला के पति के दोस्त हैं। पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दूसरे की तलाश जारी है। | 1 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा है कि अगर अदालत बलात्कारियों की मौत की सजा देती है, तो उसे माफ करने की सिफारिश वह राष्ट्रपति से कभी भी नहीं करेंगे।टिप्पणियां
शिंदे से एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में सवाल किया गया था कि क्या वह बलात्कारियों की मौत की सजा माफ करने की सिफारिश राष्ट्रपति से करेंगे? उनका जवाब था, जब तक मैं इस कुर्सी पर (गृहमंत्री पद पर) हूं, मैं राष्ट्रपति से कभी भी ऐसी सिफारिश नहीं करूंगा। उन्होंने कहा कि बलात्कार के सभी मामलों को दुर्लभ से दुर्लभतम नहीं माना जा सकता, लेकिन 16 दिसंबर की रात 23 साल की युवती के साथ हुई सामूहिक बलात्कार की घटना दुर्लभ से दुर्लभतम मामला है।
पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्वारा मौत की सजा को कम करने के पूर्व के मामलों पर शिंदे ने कहा कि वह उन मामलों के बारे में नहीं जानते। कम से कम उनके (शिंदे के) कार्यकाल के दौरान ऐसा नहीं हुआ। केवल एक मौत की सजा, जिसकी मैंने सिफारिश की थी (अजमल कसाब), सबको पता है। यहां तक कि 'वाशिंगटन पोस्ट' ने भी इसको सराहा है। प्रतिभा पाटिल ने केंद्र की सिफारिश पर 35 दोषियों की मौत की सजा कम कर दी थी। इनमें सात बलात्कारी भी शामिल थे।
शिंदे से एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में सवाल किया गया था कि क्या वह बलात्कारियों की मौत की सजा माफ करने की सिफारिश राष्ट्रपति से करेंगे? उनका जवाब था, जब तक मैं इस कुर्सी पर (गृहमंत्री पद पर) हूं, मैं राष्ट्रपति से कभी भी ऐसी सिफारिश नहीं करूंगा। उन्होंने कहा कि बलात्कार के सभी मामलों को दुर्लभ से दुर्लभतम नहीं माना जा सकता, लेकिन 16 दिसंबर की रात 23 साल की युवती के साथ हुई सामूहिक बलात्कार की घटना दुर्लभ से दुर्लभतम मामला है।
पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्वारा मौत की सजा को कम करने के पूर्व के मामलों पर शिंदे ने कहा कि वह उन मामलों के बारे में नहीं जानते। कम से कम उनके (शिंदे के) कार्यकाल के दौरान ऐसा नहीं हुआ। केवल एक मौत की सजा, जिसकी मैंने सिफारिश की थी (अजमल कसाब), सबको पता है। यहां तक कि 'वाशिंगटन पोस्ट' ने भी इसको सराहा है। प्रतिभा पाटिल ने केंद्र की सिफारिश पर 35 दोषियों की मौत की सजा कम कर दी थी। इनमें सात बलात्कारी भी शामिल थे।
पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्वारा मौत की सजा को कम करने के पूर्व के मामलों पर शिंदे ने कहा कि वह उन मामलों के बारे में नहीं जानते। कम से कम उनके (शिंदे के) कार्यकाल के दौरान ऐसा नहीं हुआ। केवल एक मौत की सजा, जिसकी मैंने सिफारिश की थी (अजमल कसाब), सबको पता है। यहां तक कि 'वाशिंगटन पोस्ट' ने भी इसको सराहा है। प्रतिभा पाटिल ने केंद्र की सिफारिश पर 35 दोषियों की मौत की सजा कम कर दी थी। इनमें सात बलात्कारी भी शामिल थे। | केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा है कि अगर अदालत बलात्कारियों की मौत की सजा देती है, तो उसे माफ करने की सिफारिश वह राष्ट्रपति से कभी भी नहीं करेंगे। | 26 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: भारतीय पैरासाइकिलिस्ट आदित्य मेहता के पांव से खून बहता रहा, जब उन्हें बेंगलुरू के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर नकली पांव उतारने के लिए मजबूर किया गया. उनके साथ ऐसा पिछले दो महीने में दूसरी बार हुआ है.
बेंगलुरू एयरपोर्ट पर मंगलवार को सुरक्षा जांच के दौरान आदित्य को नकली पांव हटाकर दिखाने के लिए कहा गया, और उसके बाद उड़ान पकड़ने की जल्दी की वजह से वह उसे वापस पहनते हुए घायल भी हो गए.
आदित्य ने समाचार एजेंसी पीटीआई को हैदराबाद से फोन पर बातचीत करते हुए बताया, "उन्होंने मुझे नकली पांव हटाने के लिए मजबूर किया... उसे वापस पहनने में मुझे 45 मिनट लगे... जब मैं उसे वापस पहन रहा था, अधिकारी मुझसे जल्दी बाहर आने के लिए कह रहे थे, क्योंकि उड़ान का वक्त नज़दीक था... उसी टेंशन में मैंने स्टंप को ज़्यादा ज़ोर से दबाना शुरू कर दिया, और घर आकर पांव हटाने पर पता चला, उससे खून बह रहा था..."
इससे पहले भी दो बार दिल्ली तथा बेंगलुरू के एयरपोर्ट पर सुरक्षाधिकारियों ने पैरासाइकिलिस्ट आदित्य मेहता को इसी तरह नकली पांव हटाने के लिए मजबूर किया जा चुका है.
आदित्य ने कहा कि जिस अधिकारी ने मुझसे पांव हटाकर दिखाने के लिए कहा था, मैंने उनसे अनुरोध किया था कि उड़ान में 30 मिनट ही बचे हैं, जबकि इसे वापस पहनने में मुझे कम से कम 45 मिनट लग जाएंगे. आदित्य ने बताया, "लेकिन अधिकारी ने कहा, 'नहीं, अगर आपको चोट लगी है, तो यह आपकी समस्या है...' हमें सुरक्षा का ध्यान रखना है, और आपको हमें हमारी ड्यूटी करने देनी चाहिए..."
आदित्य के अनुसार, उन्होंने ड्यूटी पर तैनात अधिकारी को यह भी बताया था कि वह तीन अन्य एयरपोर्टों पर भी जा चुके हैं, लेकिन कहीं भी उनसे पांव हटाकर दिखाने के लिए नहीं कहा गया. आदित्य ने कहा, "मैंने उनसे कहा था कि सुरक्षाधिकारी ईटीडी की जांच कर सकते हैं..."टिप्पणियां
इसके बाद सोशल मीडिया पर अपने गुस्से का इज़हार करते हुए आदित्य ने लिखा कि नागरिक उड्डयन महानिदेशक (डीजीसीए) को दिव्यांगों की खातिर फुल-बॉडी स्कैनर लगाए जाने के लिए लिखने के बावजूद कुछ भी नहीं किया गया है.
उधर, हैदराबाद स्थित डीजीसीए कार्यालय के अनुसार, नकली पांव लगाकर पहुंचे लोगों से उसे हटाकर दिखाने के लिए कहना सुरक्षा के लिहाज़ से कतई सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है.
बेंगलुरू एयरपोर्ट पर मंगलवार को सुरक्षा जांच के दौरान आदित्य को नकली पांव हटाकर दिखाने के लिए कहा गया, और उसके बाद उड़ान पकड़ने की जल्दी की वजह से वह उसे वापस पहनते हुए घायल भी हो गए.
आदित्य ने समाचार एजेंसी पीटीआई को हैदराबाद से फोन पर बातचीत करते हुए बताया, "उन्होंने मुझे नकली पांव हटाने के लिए मजबूर किया... उसे वापस पहनने में मुझे 45 मिनट लगे... जब मैं उसे वापस पहन रहा था, अधिकारी मुझसे जल्दी बाहर आने के लिए कह रहे थे, क्योंकि उड़ान का वक्त नज़दीक था... उसी टेंशन में मैंने स्टंप को ज़्यादा ज़ोर से दबाना शुरू कर दिया, और घर आकर पांव हटाने पर पता चला, उससे खून बह रहा था..."
इससे पहले भी दो बार दिल्ली तथा बेंगलुरू के एयरपोर्ट पर सुरक्षाधिकारियों ने पैरासाइकिलिस्ट आदित्य मेहता को इसी तरह नकली पांव हटाने के लिए मजबूर किया जा चुका है.
आदित्य ने कहा कि जिस अधिकारी ने मुझसे पांव हटाकर दिखाने के लिए कहा था, मैंने उनसे अनुरोध किया था कि उड़ान में 30 मिनट ही बचे हैं, जबकि इसे वापस पहनने में मुझे कम से कम 45 मिनट लग जाएंगे. आदित्य ने बताया, "लेकिन अधिकारी ने कहा, 'नहीं, अगर आपको चोट लगी है, तो यह आपकी समस्या है...' हमें सुरक्षा का ध्यान रखना है, और आपको हमें हमारी ड्यूटी करने देनी चाहिए..."
आदित्य के अनुसार, उन्होंने ड्यूटी पर तैनात अधिकारी को यह भी बताया था कि वह तीन अन्य एयरपोर्टों पर भी जा चुके हैं, लेकिन कहीं भी उनसे पांव हटाकर दिखाने के लिए नहीं कहा गया. आदित्य ने कहा, "मैंने उनसे कहा था कि सुरक्षाधिकारी ईटीडी की जांच कर सकते हैं..."टिप्पणियां
इसके बाद सोशल मीडिया पर अपने गुस्से का इज़हार करते हुए आदित्य ने लिखा कि नागरिक उड्डयन महानिदेशक (डीजीसीए) को दिव्यांगों की खातिर फुल-बॉडी स्कैनर लगाए जाने के लिए लिखने के बावजूद कुछ भी नहीं किया गया है.
उधर, हैदराबाद स्थित डीजीसीए कार्यालय के अनुसार, नकली पांव लगाकर पहुंचे लोगों से उसे हटाकर दिखाने के लिए कहना सुरक्षा के लिहाज़ से कतई सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है.
आदित्य ने समाचार एजेंसी पीटीआई को हैदराबाद से फोन पर बातचीत करते हुए बताया, "उन्होंने मुझे नकली पांव हटाने के लिए मजबूर किया... उसे वापस पहनने में मुझे 45 मिनट लगे... जब मैं उसे वापस पहन रहा था, अधिकारी मुझसे जल्दी बाहर आने के लिए कह रहे थे, क्योंकि उड़ान का वक्त नज़दीक था... उसी टेंशन में मैंने स्टंप को ज़्यादा ज़ोर से दबाना शुरू कर दिया, और घर आकर पांव हटाने पर पता चला, उससे खून बह रहा था..."
इससे पहले भी दो बार दिल्ली तथा बेंगलुरू के एयरपोर्ट पर सुरक्षाधिकारियों ने पैरासाइकिलिस्ट आदित्य मेहता को इसी तरह नकली पांव हटाने के लिए मजबूर किया जा चुका है.
आदित्य ने कहा कि जिस अधिकारी ने मुझसे पांव हटाकर दिखाने के लिए कहा था, मैंने उनसे अनुरोध किया था कि उड़ान में 30 मिनट ही बचे हैं, जबकि इसे वापस पहनने में मुझे कम से कम 45 मिनट लग जाएंगे. आदित्य ने बताया, "लेकिन अधिकारी ने कहा, 'नहीं, अगर आपको चोट लगी है, तो यह आपकी समस्या है...' हमें सुरक्षा का ध्यान रखना है, और आपको हमें हमारी ड्यूटी करने देनी चाहिए..."
आदित्य के अनुसार, उन्होंने ड्यूटी पर तैनात अधिकारी को यह भी बताया था कि वह तीन अन्य एयरपोर्टों पर भी जा चुके हैं, लेकिन कहीं भी उनसे पांव हटाकर दिखाने के लिए नहीं कहा गया. आदित्य ने कहा, "मैंने उनसे कहा था कि सुरक्षाधिकारी ईटीडी की जांच कर सकते हैं..."टिप्पणियां
इसके बाद सोशल मीडिया पर अपने गुस्से का इज़हार करते हुए आदित्य ने लिखा कि नागरिक उड्डयन महानिदेशक (डीजीसीए) को दिव्यांगों की खातिर फुल-बॉडी स्कैनर लगाए जाने के लिए लिखने के बावजूद कुछ भी नहीं किया गया है.
उधर, हैदराबाद स्थित डीजीसीए कार्यालय के अनुसार, नकली पांव लगाकर पहुंचे लोगों से उसे हटाकर दिखाने के लिए कहना सुरक्षा के लिहाज़ से कतई सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है.
इससे पहले भी दो बार दिल्ली तथा बेंगलुरू के एयरपोर्ट पर सुरक्षाधिकारियों ने पैरासाइकिलिस्ट आदित्य मेहता को इसी तरह नकली पांव हटाने के लिए मजबूर किया जा चुका है.
आदित्य ने कहा कि जिस अधिकारी ने मुझसे पांव हटाकर दिखाने के लिए कहा था, मैंने उनसे अनुरोध किया था कि उड़ान में 30 मिनट ही बचे हैं, जबकि इसे वापस पहनने में मुझे कम से कम 45 मिनट लग जाएंगे. आदित्य ने बताया, "लेकिन अधिकारी ने कहा, 'नहीं, अगर आपको चोट लगी है, तो यह आपकी समस्या है...' हमें सुरक्षा का ध्यान रखना है, और आपको हमें हमारी ड्यूटी करने देनी चाहिए..."
आदित्य के अनुसार, उन्होंने ड्यूटी पर तैनात अधिकारी को यह भी बताया था कि वह तीन अन्य एयरपोर्टों पर भी जा चुके हैं, लेकिन कहीं भी उनसे पांव हटाकर दिखाने के लिए नहीं कहा गया. आदित्य ने कहा, "मैंने उनसे कहा था कि सुरक्षाधिकारी ईटीडी की जांच कर सकते हैं..."टिप्पणियां
इसके बाद सोशल मीडिया पर अपने गुस्से का इज़हार करते हुए आदित्य ने लिखा कि नागरिक उड्डयन महानिदेशक (डीजीसीए) को दिव्यांगों की खातिर फुल-बॉडी स्कैनर लगाए जाने के लिए लिखने के बावजूद कुछ भी नहीं किया गया है.
उधर, हैदराबाद स्थित डीजीसीए कार्यालय के अनुसार, नकली पांव लगाकर पहुंचे लोगों से उसे हटाकर दिखाने के लिए कहना सुरक्षा के लिहाज़ से कतई सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है.
आदित्य ने कहा कि जिस अधिकारी ने मुझसे पांव हटाकर दिखाने के लिए कहा था, मैंने उनसे अनुरोध किया था कि उड़ान में 30 मिनट ही बचे हैं, जबकि इसे वापस पहनने में मुझे कम से कम 45 मिनट लग जाएंगे. आदित्य ने बताया, "लेकिन अधिकारी ने कहा, 'नहीं, अगर आपको चोट लगी है, तो यह आपकी समस्या है...' हमें सुरक्षा का ध्यान रखना है, और आपको हमें हमारी ड्यूटी करने देनी चाहिए..."
आदित्य के अनुसार, उन्होंने ड्यूटी पर तैनात अधिकारी को यह भी बताया था कि वह तीन अन्य एयरपोर्टों पर भी जा चुके हैं, लेकिन कहीं भी उनसे पांव हटाकर दिखाने के लिए नहीं कहा गया. आदित्य ने कहा, "मैंने उनसे कहा था कि सुरक्षाधिकारी ईटीडी की जांच कर सकते हैं..."टिप्पणियां
इसके बाद सोशल मीडिया पर अपने गुस्से का इज़हार करते हुए आदित्य ने लिखा कि नागरिक उड्डयन महानिदेशक (डीजीसीए) को दिव्यांगों की खातिर फुल-बॉडी स्कैनर लगाए जाने के लिए लिखने के बावजूद कुछ भी नहीं किया गया है.
उधर, हैदराबाद स्थित डीजीसीए कार्यालय के अनुसार, नकली पांव लगाकर पहुंचे लोगों से उसे हटाकर दिखाने के लिए कहना सुरक्षा के लिहाज़ से कतई सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है.
आदित्य के अनुसार, उन्होंने ड्यूटी पर तैनात अधिकारी को यह भी बताया था कि वह तीन अन्य एयरपोर्टों पर भी जा चुके हैं, लेकिन कहीं भी उनसे पांव हटाकर दिखाने के लिए नहीं कहा गया. आदित्य ने कहा, "मैंने उनसे कहा था कि सुरक्षाधिकारी ईटीडी की जांच कर सकते हैं..."टिप्पणियां
इसके बाद सोशल मीडिया पर अपने गुस्से का इज़हार करते हुए आदित्य ने लिखा कि नागरिक उड्डयन महानिदेशक (डीजीसीए) को दिव्यांगों की खातिर फुल-बॉडी स्कैनर लगाए जाने के लिए लिखने के बावजूद कुछ भी नहीं किया गया है.
उधर, हैदराबाद स्थित डीजीसीए कार्यालय के अनुसार, नकली पांव लगाकर पहुंचे लोगों से उसे हटाकर दिखाने के लिए कहना सुरक्षा के लिहाज़ से कतई सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है.
इसके बाद सोशल मीडिया पर अपने गुस्से का इज़हार करते हुए आदित्य ने लिखा कि नागरिक उड्डयन महानिदेशक (डीजीसीए) को दिव्यांगों की खातिर फुल-बॉडी स्कैनर लगाए जाने के लिए लिखने के बावजूद कुछ भी नहीं किया गया है.
उधर, हैदराबाद स्थित डीजीसीए कार्यालय के अनुसार, नकली पांव लगाकर पहुंचे लोगों से उसे हटाकर दिखाने के लिए कहना सुरक्षा के लिहाज़ से कतई सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है.
उधर, हैदराबाद स्थित डीजीसीए कार्यालय के अनुसार, नकली पांव लगाकर पहुंचे लोगों से उसे हटाकर दिखाने के लिए कहना सुरक्षा के लिहाज़ से कतई सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है. | मंगलवार को सुरक्षा जांच के दौरान आदित्य का नकली पांव हटवाया गया
बाद में उड़ान पकड़ने की जल्दी में वह उसे वापस पहनते हुए घायल हो गए
पहले दिल्ली एयरपोर्ट पर भी उन्हें नकली पांव हटाने को मजबूर किया गया था | 26 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: दिल्ली-एनसीआर (Delhi Rain) में शुक्रवार सुबह उमस के साथ न्यूनतम तापमान सामान्य से एक डिग्री अधिक 28 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. दिल्ली एनसीआर में शाम तक हल्की बारिश के भी आसार हैं. मौसम विभाग ने यहां हल्की बारिश और आसमान में आमतौर पर बादल छाए रहने का पूर्वानुमान लगाया है. दिल्ली एनसीआर (Delhi Weather) में आज अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है. भारतीय मौसम विभाग ने गुरुवार को चार महीने के बारिश के मौसम के दूसरे भाग के पूर्वानुमान में कहा कि मॉनसून अगस्त और सितंबर में सामान्य रहने की उम्मीद है. गणना के रूप में, दो महीने की समयावधि में बारिश कुल मिलाकर देशभर में दीर्घावधि औसत (एलपीए) की सौ प्रतिशत रहने की संभावना है जिसमें आठ प्रतिशत अधिक या कम की आदर्श गलती हो सकती है. अगस्त में बारिश एलपीए की 99 प्रतिशत रहने की संभावना है जिसमें नौ प्रतिशत अधिक या कम की गलती हो सकती है. विभाग ने कहा कि पूर्वानुमान कहता है कि दक्षिण पश्चिम मॉनसून सत्र के दूसरे भाग के दौरान देशभर में बारिश सामान्य (एलपीए का 94-106 प्रतिशत) रहने की संभावना है. | दिल्ली एनसीआर में बारिश के आसार
लोगों को मिल सकती है उमस से राहत
शुक्रवार सुबह 28 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया तापमान | 26 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: शेयर बाजार में अगले सप्ताह निवेशकों की नजर 2012-13 की चौथी तिमाही में कंपनियों के परिणामों पर टिकी रहेगी। सरकार थोक मूल्यों की महंगाई के आंकड़े जारी करेगी। शेयर बाजार शुक्रवार 19 अप्रैल 2013 को राम नवमी के मौके पर बंद रहेगा।
अगले करीब दो महीने तक पिछले कारोबारी वर्ष की चौथी तिमाही के परिणाम आते रहेंगे।
अगले सप्ताह मंगलवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल), बुधवार को टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), गुरुवार को इंडसइंड बैंक और शुक्रवार को विप्रो जैसी प्रमुख कंपनियां अपने परिणाम प्रकाशित करेंगी।
सरकार सोमवार 15 मार्च को मार्च महीने के लिए थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई दर के आंकड़े जारी करेगी। फरवरी महीने में थोक महंगाई दर 6.84 फीसदी थी।
आने वाले कुछ महीनों में बाजार में शेयरों की व्यापक आपूर्ति के कारण शेयर बाजारों के सूचकांकों के ऊपर की ओर बढ़ने की उम्मीद कम है। शेयर बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के दिशानिर्देश के मुताबिक सूचीबद्ध निजी कंपनियों में प्रमोटर की हिस्सेदारी घटानी होगी और आम निवेशकों को कम से कम 25 फीसदी हिस्सेदारी देनी होगी। इसी तरह सरकारी सूचीबद्ध कंपनियों में आम निवेशकों को कम से कम 10 फीसदी हिस्सेदारी देनी होगी।
सेबी के आदेश के मुताबिक निजी कंपनियों के संस्थापकों को 30 जून 2013 तक अपनी हिस्सेदारी घटानी होगी, जबकि सरकारी कंपनियों को 31 अगस्त तक सेबी के आदेश पालन करना होगा।
वर्ष 2014 में सरकारी कंपनियों के विनिवेश के सरकारी लक्ष्य से भी शेयरों की बिकवाली को हवा मिलेगी। सरकार ने सार्वजनिक कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी के विनिवेश से वर्तमान कारोबारी वर्ष में 40 हजार करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा है। सरकार ने निजी कम्पनियों में भी अपनी हिस्सेदारी के विनिवेश से 14 हजार करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है।
इस महीने भारतीय मौसम विभाग दक्षिण पश्चिमी मानसून का भी प्रारंभिक पूर्वानुमान जारी करेगा। भारतीय रिजर्व बैंक तीन मई को कारोबारी वर्ष 2013-14 के लिए मौद्रिक नीति भी जारी करेगा।
संसद में बजट सत्र का दूसरा हिस्सा 22 अप्रैल को फिर से शुरू होने वाला है। इस दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा या मतदान हो सकता है। इन विधेयकों में शामिल हैं फॉरवर्ड कंट्रैक्ट्स (रेगुलेशन) एमेंडमेंट विधेयक-2010, पेंशन फंड रेगुलेटर एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी विधेयक-2011, भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापना विधेयक-2011, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक 2011 और बीमा कानून (संशोधन) विधेयक-2008। सत्र 10 मई को समाप्त होगा।
पांच मई 2013 को कर्नाटक में होने वाले विधानसभा चुनाव भी बाजार को कुछ हद तक प्रभावित कर सकते हैं। चुनाव का परिणाम आठ मई को घोषित होगा।टिप्पणियां
लोकसभा चुनाव से जुड़ी खबरों के चलते अगले साल मई तक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने के आसार हैं। माना जा रहा है कि अगली सरकार कई पार्टियों की मिली-जुली हो सकती है। सुधार की प्रक्रिया के अवरुद्ध होने की आशंका है। इसका असर वित्तीय घाटा प्रबंधन पर नकारात्मक रूप से पड़ सकता है और वैश्विक रेटिंग एजेंसियां भारत की रेटिंग घटा सकती हैं।
बाजार में इस वक्त काफी गिरावट चल रहा है इसे देखते हुए निवेशक बॉटम अप की रणनीति अपना सकते हैं। यानी वे सस्ते शेयर खरीद सकते हैं। छोटे निवेशकों को इस दौरान सेक्टर कॉल लेने के बजाय खास-खास शेयरों पर ध्यान देना चाहिए।
अगले करीब दो महीने तक पिछले कारोबारी वर्ष की चौथी तिमाही के परिणाम आते रहेंगे।
अगले सप्ताह मंगलवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल), बुधवार को टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), गुरुवार को इंडसइंड बैंक और शुक्रवार को विप्रो जैसी प्रमुख कंपनियां अपने परिणाम प्रकाशित करेंगी।
सरकार सोमवार 15 मार्च को मार्च महीने के लिए थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई दर के आंकड़े जारी करेगी। फरवरी महीने में थोक महंगाई दर 6.84 फीसदी थी।
आने वाले कुछ महीनों में बाजार में शेयरों की व्यापक आपूर्ति के कारण शेयर बाजारों के सूचकांकों के ऊपर की ओर बढ़ने की उम्मीद कम है। शेयर बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के दिशानिर्देश के मुताबिक सूचीबद्ध निजी कंपनियों में प्रमोटर की हिस्सेदारी घटानी होगी और आम निवेशकों को कम से कम 25 फीसदी हिस्सेदारी देनी होगी। इसी तरह सरकारी सूचीबद्ध कंपनियों में आम निवेशकों को कम से कम 10 फीसदी हिस्सेदारी देनी होगी।
सेबी के आदेश के मुताबिक निजी कंपनियों के संस्थापकों को 30 जून 2013 तक अपनी हिस्सेदारी घटानी होगी, जबकि सरकारी कंपनियों को 31 अगस्त तक सेबी के आदेश पालन करना होगा।
वर्ष 2014 में सरकारी कंपनियों के विनिवेश के सरकारी लक्ष्य से भी शेयरों की बिकवाली को हवा मिलेगी। सरकार ने सार्वजनिक कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी के विनिवेश से वर्तमान कारोबारी वर्ष में 40 हजार करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा है। सरकार ने निजी कम्पनियों में भी अपनी हिस्सेदारी के विनिवेश से 14 हजार करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है।
इस महीने भारतीय मौसम विभाग दक्षिण पश्चिमी मानसून का भी प्रारंभिक पूर्वानुमान जारी करेगा। भारतीय रिजर्व बैंक तीन मई को कारोबारी वर्ष 2013-14 के लिए मौद्रिक नीति भी जारी करेगा।
संसद में बजट सत्र का दूसरा हिस्सा 22 अप्रैल को फिर से शुरू होने वाला है। इस दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा या मतदान हो सकता है। इन विधेयकों में शामिल हैं फॉरवर्ड कंट्रैक्ट्स (रेगुलेशन) एमेंडमेंट विधेयक-2010, पेंशन फंड रेगुलेटर एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी विधेयक-2011, भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापना विधेयक-2011, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक 2011 और बीमा कानून (संशोधन) विधेयक-2008। सत्र 10 मई को समाप्त होगा।
पांच मई 2013 को कर्नाटक में होने वाले विधानसभा चुनाव भी बाजार को कुछ हद तक प्रभावित कर सकते हैं। चुनाव का परिणाम आठ मई को घोषित होगा।टिप्पणियां
लोकसभा चुनाव से जुड़ी खबरों के चलते अगले साल मई तक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने के आसार हैं। माना जा रहा है कि अगली सरकार कई पार्टियों की मिली-जुली हो सकती है। सुधार की प्रक्रिया के अवरुद्ध होने की आशंका है। इसका असर वित्तीय घाटा प्रबंधन पर नकारात्मक रूप से पड़ सकता है और वैश्विक रेटिंग एजेंसियां भारत की रेटिंग घटा सकती हैं।
बाजार में इस वक्त काफी गिरावट चल रहा है इसे देखते हुए निवेशक बॉटम अप की रणनीति अपना सकते हैं। यानी वे सस्ते शेयर खरीद सकते हैं। छोटे निवेशकों को इस दौरान सेक्टर कॉल लेने के बजाय खास-खास शेयरों पर ध्यान देना चाहिए।
अगले सप्ताह मंगलवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल), बुधवार को टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), गुरुवार को इंडसइंड बैंक और शुक्रवार को विप्रो जैसी प्रमुख कंपनियां अपने परिणाम प्रकाशित करेंगी।
सरकार सोमवार 15 मार्च को मार्च महीने के लिए थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई दर के आंकड़े जारी करेगी। फरवरी महीने में थोक महंगाई दर 6.84 फीसदी थी।
आने वाले कुछ महीनों में बाजार में शेयरों की व्यापक आपूर्ति के कारण शेयर बाजारों के सूचकांकों के ऊपर की ओर बढ़ने की उम्मीद कम है। शेयर बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के दिशानिर्देश के मुताबिक सूचीबद्ध निजी कंपनियों में प्रमोटर की हिस्सेदारी घटानी होगी और आम निवेशकों को कम से कम 25 फीसदी हिस्सेदारी देनी होगी। इसी तरह सरकारी सूचीबद्ध कंपनियों में आम निवेशकों को कम से कम 10 फीसदी हिस्सेदारी देनी होगी।
सेबी के आदेश के मुताबिक निजी कंपनियों के संस्थापकों को 30 जून 2013 तक अपनी हिस्सेदारी घटानी होगी, जबकि सरकारी कंपनियों को 31 अगस्त तक सेबी के आदेश पालन करना होगा।
वर्ष 2014 में सरकारी कंपनियों के विनिवेश के सरकारी लक्ष्य से भी शेयरों की बिकवाली को हवा मिलेगी। सरकार ने सार्वजनिक कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी के विनिवेश से वर्तमान कारोबारी वर्ष में 40 हजार करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा है। सरकार ने निजी कम्पनियों में भी अपनी हिस्सेदारी के विनिवेश से 14 हजार करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है।
इस महीने भारतीय मौसम विभाग दक्षिण पश्चिमी मानसून का भी प्रारंभिक पूर्वानुमान जारी करेगा। भारतीय रिजर्व बैंक तीन मई को कारोबारी वर्ष 2013-14 के लिए मौद्रिक नीति भी जारी करेगा।
संसद में बजट सत्र का दूसरा हिस्सा 22 अप्रैल को फिर से शुरू होने वाला है। इस दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा या मतदान हो सकता है। इन विधेयकों में शामिल हैं फॉरवर्ड कंट्रैक्ट्स (रेगुलेशन) एमेंडमेंट विधेयक-2010, पेंशन फंड रेगुलेटर एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी विधेयक-2011, भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापना विधेयक-2011, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक 2011 और बीमा कानून (संशोधन) विधेयक-2008। सत्र 10 मई को समाप्त होगा।
पांच मई 2013 को कर्नाटक में होने वाले विधानसभा चुनाव भी बाजार को कुछ हद तक प्रभावित कर सकते हैं। चुनाव का परिणाम आठ मई को घोषित होगा।टिप्पणियां
लोकसभा चुनाव से जुड़ी खबरों के चलते अगले साल मई तक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने के आसार हैं। माना जा रहा है कि अगली सरकार कई पार्टियों की मिली-जुली हो सकती है। सुधार की प्रक्रिया के अवरुद्ध होने की आशंका है। इसका असर वित्तीय घाटा प्रबंधन पर नकारात्मक रूप से पड़ सकता है और वैश्विक रेटिंग एजेंसियां भारत की रेटिंग घटा सकती हैं।
बाजार में इस वक्त काफी गिरावट चल रहा है इसे देखते हुए निवेशक बॉटम अप की रणनीति अपना सकते हैं। यानी वे सस्ते शेयर खरीद सकते हैं। छोटे निवेशकों को इस दौरान सेक्टर कॉल लेने के बजाय खास-खास शेयरों पर ध्यान देना चाहिए।
सरकार सोमवार 15 मार्च को मार्च महीने के लिए थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई दर के आंकड़े जारी करेगी। फरवरी महीने में थोक महंगाई दर 6.84 फीसदी थी।
आने वाले कुछ महीनों में बाजार में शेयरों की व्यापक आपूर्ति के कारण शेयर बाजारों के सूचकांकों के ऊपर की ओर बढ़ने की उम्मीद कम है। शेयर बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के दिशानिर्देश के मुताबिक सूचीबद्ध निजी कंपनियों में प्रमोटर की हिस्सेदारी घटानी होगी और आम निवेशकों को कम से कम 25 फीसदी हिस्सेदारी देनी होगी। इसी तरह सरकारी सूचीबद्ध कंपनियों में आम निवेशकों को कम से कम 10 फीसदी हिस्सेदारी देनी होगी।
सेबी के आदेश के मुताबिक निजी कंपनियों के संस्थापकों को 30 जून 2013 तक अपनी हिस्सेदारी घटानी होगी, जबकि सरकारी कंपनियों को 31 अगस्त तक सेबी के आदेश पालन करना होगा।
वर्ष 2014 में सरकारी कंपनियों के विनिवेश के सरकारी लक्ष्य से भी शेयरों की बिकवाली को हवा मिलेगी। सरकार ने सार्वजनिक कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी के विनिवेश से वर्तमान कारोबारी वर्ष में 40 हजार करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा है। सरकार ने निजी कम्पनियों में भी अपनी हिस्सेदारी के विनिवेश से 14 हजार करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है।
इस महीने भारतीय मौसम विभाग दक्षिण पश्चिमी मानसून का भी प्रारंभिक पूर्वानुमान जारी करेगा। भारतीय रिजर्व बैंक तीन मई को कारोबारी वर्ष 2013-14 के लिए मौद्रिक नीति भी जारी करेगा।
संसद में बजट सत्र का दूसरा हिस्सा 22 अप्रैल को फिर से शुरू होने वाला है। इस दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा या मतदान हो सकता है। इन विधेयकों में शामिल हैं फॉरवर्ड कंट्रैक्ट्स (रेगुलेशन) एमेंडमेंट विधेयक-2010, पेंशन फंड रेगुलेटर एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी विधेयक-2011, भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापना विधेयक-2011, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक 2011 और बीमा कानून (संशोधन) विधेयक-2008। सत्र 10 मई को समाप्त होगा।
पांच मई 2013 को कर्नाटक में होने वाले विधानसभा चुनाव भी बाजार को कुछ हद तक प्रभावित कर सकते हैं। चुनाव का परिणाम आठ मई को घोषित होगा।टिप्पणियां
लोकसभा चुनाव से जुड़ी खबरों के चलते अगले साल मई तक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने के आसार हैं। माना जा रहा है कि अगली सरकार कई पार्टियों की मिली-जुली हो सकती है। सुधार की प्रक्रिया के अवरुद्ध होने की आशंका है। इसका असर वित्तीय घाटा प्रबंधन पर नकारात्मक रूप से पड़ सकता है और वैश्विक रेटिंग एजेंसियां भारत की रेटिंग घटा सकती हैं।
बाजार में इस वक्त काफी गिरावट चल रहा है इसे देखते हुए निवेशक बॉटम अप की रणनीति अपना सकते हैं। यानी वे सस्ते शेयर खरीद सकते हैं। छोटे निवेशकों को इस दौरान सेक्टर कॉल लेने के बजाय खास-खास शेयरों पर ध्यान देना चाहिए।
आने वाले कुछ महीनों में बाजार में शेयरों की व्यापक आपूर्ति के कारण शेयर बाजारों के सूचकांकों के ऊपर की ओर बढ़ने की उम्मीद कम है। शेयर बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के दिशानिर्देश के मुताबिक सूचीबद्ध निजी कंपनियों में प्रमोटर की हिस्सेदारी घटानी होगी और आम निवेशकों को कम से कम 25 फीसदी हिस्सेदारी देनी होगी। इसी तरह सरकारी सूचीबद्ध कंपनियों में आम निवेशकों को कम से कम 10 फीसदी हिस्सेदारी देनी होगी।
सेबी के आदेश के मुताबिक निजी कंपनियों के संस्थापकों को 30 जून 2013 तक अपनी हिस्सेदारी घटानी होगी, जबकि सरकारी कंपनियों को 31 अगस्त तक सेबी के आदेश पालन करना होगा।
वर्ष 2014 में सरकारी कंपनियों के विनिवेश के सरकारी लक्ष्य से भी शेयरों की बिकवाली को हवा मिलेगी। सरकार ने सार्वजनिक कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी के विनिवेश से वर्तमान कारोबारी वर्ष में 40 हजार करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा है। सरकार ने निजी कम्पनियों में भी अपनी हिस्सेदारी के विनिवेश से 14 हजार करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है।
इस महीने भारतीय मौसम विभाग दक्षिण पश्चिमी मानसून का भी प्रारंभिक पूर्वानुमान जारी करेगा। भारतीय रिजर्व बैंक तीन मई को कारोबारी वर्ष 2013-14 के लिए मौद्रिक नीति भी जारी करेगा।
संसद में बजट सत्र का दूसरा हिस्सा 22 अप्रैल को फिर से शुरू होने वाला है। इस दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा या मतदान हो सकता है। इन विधेयकों में शामिल हैं फॉरवर्ड कंट्रैक्ट्स (रेगुलेशन) एमेंडमेंट विधेयक-2010, पेंशन फंड रेगुलेटर एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी विधेयक-2011, भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापना विधेयक-2011, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक 2011 और बीमा कानून (संशोधन) विधेयक-2008। सत्र 10 मई को समाप्त होगा।
पांच मई 2013 को कर्नाटक में होने वाले विधानसभा चुनाव भी बाजार को कुछ हद तक प्रभावित कर सकते हैं। चुनाव का परिणाम आठ मई को घोषित होगा।टिप्पणियां
लोकसभा चुनाव से जुड़ी खबरों के चलते अगले साल मई तक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने के आसार हैं। माना जा रहा है कि अगली सरकार कई पार्टियों की मिली-जुली हो सकती है। सुधार की प्रक्रिया के अवरुद्ध होने की आशंका है। इसका असर वित्तीय घाटा प्रबंधन पर नकारात्मक रूप से पड़ सकता है और वैश्विक रेटिंग एजेंसियां भारत की रेटिंग घटा सकती हैं।
बाजार में इस वक्त काफी गिरावट चल रहा है इसे देखते हुए निवेशक बॉटम अप की रणनीति अपना सकते हैं। यानी वे सस्ते शेयर खरीद सकते हैं। छोटे निवेशकों को इस दौरान सेक्टर कॉल लेने के बजाय खास-खास शेयरों पर ध्यान देना चाहिए।
सेबी के आदेश के मुताबिक निजी कंपनियों के संस्थापकों को 30 जून 2013 तक अपनी हिस्सेदारी घटानी होगी, जबकि सरकारी कंपनियों को 31 अगस्त तक सेबी के आदेश पालन करना होगा।
वर्ष 2014 में सरकारी कंपनियों के विनिवेश के सरकारी लक्ष्य से भी शेयरों की बिकवाली को हवा मिलेगी। सरकार ने सार्वजनिक कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी के विनिवेश से वर्तमान कारोबारी वर्ष में 40 हजार करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा है। सरकार ने निजी कम्पनियों में भी अपनी हिस्सेदारी के विनिवेश से 14 हजार करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है।
इस महीने भारतीय मौसम विभाग दक्षिण पश्चिमी मानसून का भी प्रारंभिक पूर्वानुमान जारी करेगा। भारतीय रिजर्व बैंक तीन मई को कारोबारी वर्ष 2013-14 के लिए मौद्रिक नीति भी जारी करेगा।
संसद में बजट सत्र का दूसरा हिस्सा 22 अप्रैल को फिर से शुरू होने वाला है। इस दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा या मतदान हो सकता है। इन विधेयकों में शामिल हैं फॉरवर्ड कंट्रैक्ट्स (रेगुलेशन) एमेंडमेंट विधेयक-2010, पेंशन फंड रेगुलेटर एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी विधेयक-2011, भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापना विधेयक-2011, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक 2011 और बीमा कानून (संशोधन) विधेयक-2008। सत्र 10 मई को समाप्त होगा।
पांच मई 2013 को कर्नाटक में होने वाले विधानसभा चुनाव भी बाजार को कुछ हद तक प्रभावित कर सकते हैं। चुनाव का परिणाम आठ मई को घोषित होगा।टिप्पणियां
लोकसभा चुनाव से जुड़ी खबरों के चलते अगले साल मई तक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने के आसार हैं। माना जा रहा है कि अगली सरकार कई पार्टियों की मिली-जुली हो सकती है। सुधार की प्रक्रिया के अवरुद्ध होने की आशंका है। इसका असर वित्तीय घाटा प्रबंधन पर नकारात्मक रूप से पड़ सकता है और वैश्विक रेटिंग एजेंसियां भारत की रेटिंग घटा सकती हैं।
बाजार में इस वक्त काफी गिरावट चल रहा है इसे देखते हुए निवेशक बॉटम अप की रणनीति अपना सकते हैं। यानी वे सस्ते शेयर खरीद सकते हैं। छोटे निवेशकों को इस दौरान सेक्टर कॉल लेने के बजाय खास-खास शेयरों पर ध्यान देना चाहिए।
वर्ष 2014 में सरकारी कंपनियों के विनिवेश के सरकारी लक्ष्य से भी शेयरों की बिकवाली को हवा मिलेगी। सरकार ने सार्वजनिक कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी के विनिवेश से वर्तमान कारोबारी वर्ष में 40 हजार करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा है। सरकार ने निजी कम्पनियों में भी अपनी हिस्सेदारी के विनिवेश से 14 हजार करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है।
इस महीने भारतीय मौसम विभाग दक्षिण पश्चिमी मानसून का भी प्रारंभिक पूर्वानुमान जारी करेगा। भारतीय रिजर्व बैंक तीन मई को कारोबारी वर्ष 2013-14 के लिए मौद्रिक नीति भी जारी करेगा।
संसद में बजट सत्र का दूसरा हिस्सा 22 अप्रैल को फिर से शुरू होने वाला है। इस दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा या मतदान हो सकता है। इन विधेयकों में शामिल हैं फॉरवर्ड कंट्रैक्ट्स (रेगुलेशन) एमेंडमेंट विधेयक-2010, पेंशन फंड रेगुलेटर एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी विधेयक-2011, भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापना विधेयक-2011, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक 2011 और बीमा कानून (संशोधन) विधेयक-2008। सत्र 10 मई को समाप्त होगा।
पांच मई 2013 को कर्नाटक में होने वाले विधानसभा चुनाव भी बाजार को कुछ हद तक प्रभावित कर सकते हैं। चुनाव का परिणाम आठ मई को घोषित होगा।टिप्पणियां
लोकसभा चुनाव से जुड़ी खबरों के चलते अगले साल मई तक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने के आसार हैं। माना जा रहा है कि अगली सरकार कई पार्टियों की मिली-जुली हो सकती है। सुधार की प्रक्रिया के अवरुद्ध होने की आशंका है। इसका असर वित्तीय घाटा प्रबंधन पर नकारात्मक रूप से पड़ सकता है और वैश्विक रेटिंग एजेंसियां भारत की रेटिंग घटा सकती हैं।
बाजार में इस वक्त काफी गिरावट चल रहा है इसे देखते हुए निवेशक बॉटम अप की रणनीति अपना सकते हैं। यानी वे सस्ते शेयर खरीद सकते हैं। छोटे निवेशकों को इस दौरान सेक्टर कॉल लेने के बजाय खास-खास शेयरों पर ध्यान देना चाहिए।
इस महीने भारतीय मौसम विभाग दक्षिण पश्चिमी मानसून का भी प्रारंभिक पूर्वानुमान जारी करेगा। भारतीय रिजर्व बैंक तीन मई को कारोबारी वर्ष 2013-14 के लिए मौद्रिक नीति भी जारी करेगा।
संसद में बजट सत्र का दूसरा हिस्सा 22 अप्रैल को फिर से शुरू होने वाला है। इस दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा या मतदान हो सकता है। इन विधेयकों में शामिल हैं फॉरवर्ड कंट्रैक्ट्स (रेगुलेशन) एमेंडमेंट विधेयक-2010, पेंशन फंड रेगुलेटर एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी विधेयक-2011, भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापना विधेयक-2011, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक 2011 और बीमा कानून (संशोधन) विधेयक-2008। सत्र 10 मई को समाप्त होगा।
पांच मई 2013 को कर्नाटक में होने वाले विधानसभा चुनाव भी बाजार को कुछ हद तक प्रभावित कर सकते हैं। चुनाव का परिणाम आठ मई को घोषित होगा।टिप्पणियां
लोकसभा चुनाव से जुड़ी खबरों के चलते अगले साल मई तक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने के आसार हैं। माना जा रहा है कि अगली सरकार कई पार्टियों की मिली-जुली हो सकती है। सुधार की प्रक्रिया के अवरुद्ध होने की आशंका है। इसका असर वित्तीय घाटा प्रबंधन पर नकारात्मक रूप से पड़ सकता है और वैश्विक रेटिंग एजेंसियां भारत की रेटिंग घटा सकती हैं।
बाजार में इस वक्त काफी गिरावट चल रहा है इसे देखते हुए निवेशक बॉटम अप की रणनीति अपना सकते हैं। यानी वे सस्ते शेयर खरीद सकते हैं। छोटे निवेशकों को इस दौरान सेक्टर कॉल लेने के बजाय खास-खास शेयरों पर ध्यान देना चाहिए।
संसद में बजट सत्र का दूसरा हिस्सा 22 अप्रैल को फिर से शुरू होने वाला है। इस दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा या मतदान हो सकता है। इन विधेयकों में शामिल हैं फॉरवर्ड कंट्रैक्ट्स (रेगुलेशन) एमेंडमेंट विधेयक-2010, पेंशन फंड रेगुलेटर एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी विधेयक-2011, भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापना विधेयक-2011, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक 2011 और बीमा कानून (संशोधन) विधेयक-2008। सत्र 10 मई को समाप्त होगा।
पांच मई 2013 को कर्नाटक में होने वाले विधानसभा चुनाव भी बाजार को कुछ हद तक प्रभावित कर सकते हैं। चुनाव का परिणाम आठ मई को घोषित होगा।टिप्पणियां
लोकसभा चुनाव से जुड़ी खबरों के चलते अगले साल मई तक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने के आसार हैं। माना जा रहा है कि अगली सरकार कई पार्टियों की मिली-जुली हो सकती है। सुधार की प्रक्रिया के अवरुद्ध होने की आशंका है। इसका असर वित्तीय घाटा प्रबंधन पर नकारात्मक रूप से पड़ सकता है और वैश्विक रेटिंग एजेंसियां भारत की रेटिंग घटा सकती हैं।
बाजार में इस वक्त काफी गिरावट चल रहा है इसे देखते हुए निवेशक बॉटम अप की रणनीति अपना सकते हैं। यानी वे सस्ते शेयर खरीद सकते हैं। छोटे निवेशकों को इस दौरान सेक्टर कॉल लेने के बजाय खास-खास शेयरों पर ध्यान देना चाहिए।
पांच मई 2013 को कर्नाटक में होने वाले विधानसभा चुनाव भी बाजार को कुछ हद तक प्रभावित कर सकते हैं। चुनाव का परिणाम आठ मई को घोषित होगा।टिप्पणियां
लोकसभा चुनाव से जुड़ी खबरों के चलते अगले साल मई तक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने के आसार हैं। माना जा रहा है कि अगली सरकार कई पार्टियों की मिली-जुली हो सकती है। सुधार की प्रक्रिया के अवरुद्ध होने की आशंका है। इसका असर वित्तीय घाटा प्रबंधन पर नकारात्मक रूप से पड़ सकता है और वैश्विक रेटिंग एजेंसियां भारत की रेटिंग घटा सकती हैं।
बाजार में इस वक्त काफी गिरावट चल रहा है इसे देखते हुए निवेशक बॉटम अप की रणनीति अपना सकते हैं। यानी वे सस्ते शेयर खरीद सकते हैं। छोटे निवेशकों को इस दौरान सेक्टर कॉल लेने के बजाय खास-खास शेयरों पर ध्यान देना चाहिए।
लोकसभा चुनाव से जुड़ी खबरों के चलते अगले साल मई तक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने के आसार हैं। माना जा रहा है कि अगली सरकार कई पार्टियों की मिली-जुली हो सकती है। सुधार की प्रक्रिया के अवरुद्ध होने की आशंका है। इसका असर वित्तीय घाटा प्रबंधन पर नकारात्मक रूप से पड़ सकता है और वैश्विक रेटिंग एजेंसियां भारत की रेटिंग घटा सकती हैं।
बाजार में इस वक्त काफी गिरावट चल रहा है इसे देखते हुए निवेशक बॉटम अप की रणनीति अपना सकते हैं। यानी वे सस्ते शेयर खरीद सकते हैं। छोटे निवेशकों को इस दौरान सेक्टर कॉल लेने के बजाय खास-खास शेयरों पर ध्यान देना चाहिए।
बाजार में इस वक्त काफी गिरावट चल रहा है इसे देखते हुए निवेशक बॉटम अप की रणनीति अपना सकते हैं। यानी वे सस्ते शेयर खरीद सकते हैं। छोटे निवेशकों को इस दौरान सेक्टर कॉल लेने के बजाय खास-खास शेयरों पर ध्यान देना चाहिए। | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: शेयर बाजार में अगले सप्ताह निवेशकों की नजर 2012-13 की चौथी तिमाही में कंपनियों के परिणामों पर टिकी रहेगी। सरकार थोक मूल्यों की महंगाई के आंकड़े जारी करेगी। शेयर बाजार शुक्रवार 19 अप्रैल 2013 को राम नवमी के मौके पर बंद रहेगा। | 32 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: देश के अब तक के सबसे भारी संचार उपग्रह जीसेट-10 को शनिवार को दक्षिण अमेरिका के फ्रेंच गुयाना स्थित कौरौ लांचपैड से एरियन-5 रॉकेट के जरिए सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया। यह उपग्रह दूरसंचार, डायरेक्ट-टू-होम प्रसारण और नागरिक उड्डयन की जरूरतें पूरी करेगा।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो)द्वारा निर्मित जीसेट-10 अब तक का सबसे भारी संचार उपग्रह है। इसका वजन 3,400 किलोग्राम वजन है। यह नवम्बर से काम करने लगेगा और यह 15 वर्ष तक काम करता रहेगा। इसके निर्माण पर प्रक्षेपण खर्च और बीमा राशि सहित 750 करोड़ रुपये (13.5 करोड़ डॉलर से अधिक) की लागत आई है।
इसरो के बेंगलुरू मुख्यालय से जारी एक बयान में कहा गया है कि यूरोपियन एरियन-5 रॉकेट ने 3,400 किलोग्राम वजन वाले उपग्रह जीसेट -10 को प्रक्षेपण के 30 मिनट और 45 सेकेंड बाद अंडाकार भूसमकालिक स्थानांतरण कक्ष में पहुंचाया।
फ्रेंच गुयाना दक्षिण अमेरिका में है और यूरोपियाई अंतरिक्ष केंद्र कौरौ भी वहीं पर स्थित है। उपग्रह के स्थानांतरण कक्ष में पहुंचने के तुरंत बाद कर्नाटक के हासन स्थित इसरो के मुख्य नियंत्रण केंद्र ने जीसेट -10 की कमान और नियंत्रण कार्य संभाल लिया।
इसरो के मुताबिक, उपग्रह की कार्यक्षमता की प्रारंभिक जांच विभिन्न उपप्रणालियों पर की गई और सभी मापदंडों पर इसे संतोषप्रद पाया गया।
इसके बाद ऑनबोर्ड प्रणोदन प्रणाली का उपयोग करते हुए उपग्रह को पृथ्वी और सूर्य की ओर उन्मुख किया गया। इस उपग्रह की संचालन बेहतर स्थिति में है।
भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि अगले पांच दिन बाद उपग्रह का कक्ष बढ़ाया जाएगा और इसे पृथ्वी के स्थिर कक्ष में ले जाया जाएगा। यह कक्ष भूमध्यरेखा से लगभग 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर है। इसके बाद उपग्रह में लगे दो सौर पैनलों को संचालित किया जाएगा।
इसरो ने बताया कि सभी परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे होने के बाद यह उपग्रह इस वर्ष नवम्बर तक संचालन के लिए तैयार हो जाएगा। जीसेट-10 के संचालन की अवधि लगभग 15 वर्ष रहेगी। इसे इनसेट-4ए और जीसेट-12 के साथ जोड़ा जाएगा।
इसे भारत के 101वें अंतरिक्ष अभियान 'अच्छा स्वास्थ्य' के तहत प्रक्षेपित किया गया। यह उपग्रह नवम्बर तक काम करने लगेगा।
बयान के अनुसार, "जीसेट-10 उपग्रह में 30 संचार अभिग्राही हैं। 12 कू-बैंड में, 12 सी-बैंड में और छह अभिग्राही विस्तारित सी-बैंड में लगे हैं। इसके अलावा इसमें एक नकारात्मक अंतरिक्ष उपकरण 'गगन' लगाया गया है जो परिष्कृत शुद्धता के जीपीएस संकेत मुहैया कराएगा। भारतीय हवाईअड्डा प्राधिकरण इस उपकरण का उपयोग नागरिक उड्डयन की जरूरतें पूरी करने के लिए कर सकेगा।"
'जीपीए एडेड जियो ऑगमेंटेड नेविगेशन' को संक्षेप में गगन कहा जाता है। यह उपग्रह शनिवार को दोपहर 2.48 बजे प्रक्षेपित किया गया।टिप्पणियां
इसरो ने बताया कि मई 2011 में जीसेट-8 के प्रक्षेपण के बाद यह दूसरा उपग्रह है जिसे अंतरिक्ष उपकरण गगन के साथ इनसेट या जीसेट उपग्रह समूह में शामिल किया गया है।
जीसेट-10 की लागत प्रक्षेपण खर्च और बीमा राशि सहित 750 करोड़ रुपये (13.5 करोड़ डॉलर से अधिक) है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो)द्वारा निर्मित जीसेट-10 अब तक का सबसे भारी संचार उपग्रह है। इसका वजन 3,400 किलोग्राम वजन है। यह नवम्बर से काम करने लगेगा और यह 15 वर्ष तक काम करता रहेगा। इसके निर्माण पर प्रक्षेपण खर्च और बीमा राशि सहित 750 करोड़ रुपये (13.5 करोड़ डॉलर से अधिक) की लागत आई है।
इसरो के बेंगलुरू मुख्यालय से जारी एक बयान में कहा गया है कि यूरोपियन एरियन-5 रॉकेट ने 3,400 किलोग्राम वजन वाले उपग्रह जीसेट -10 को प्रक्षेपण के 30 मिनट और 45 सेकेंड बाद अंडाकार भूसमकालिक स्थानांतरण कक्ष में पहुंचाया।
फ्रेंच गुयाना दक्षिण अमेरिका में है और यूरोपियाई अंतरिक्ष केंद्र कौरौ भी वहीं पर स्थित है। उपग्रह के स्थानांतरण कक्ष में पहुंचने के तुरंत बाद कर्नाटक के हासन स्थित इसरो के मुख्य नियंत्रण केंद्र ने जीसेट -10 की कमान और नियंत्रण कार्य संभाल लिया।
इसरो के मुताबिक, उपग्रह की कार्यक्षमता की प्रारंभिक जांच विभिन्न उपप्रणालियों पर की गई और सभी मापदंडों पर इसे संतोषप्रद पाया गया।
इसके बाद ऑनबोर्ड प्रणोदन प्रणाली का उपयोग करते हुए उपग्रह को पृथ्वी और सूर्य की ओर उन्मुख किया गया। इस उपग्रह की संचालन बेहतर स्थिति में है।
भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि अगले पांच दिन बाद उपग्रह का कक्ष बढ़ाया जाएगा और इसे पृथ्वी के स्थिर कक्ष में ले जाया जाएगा। यह कक्ष भूमध्यरेखा से लगभग 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर है। इसके बाद उपग्रह में लगे दो सौर पैनलों को संचालित किया जाएगा।
इसरो ने बताया कि सभी परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे होने के बाद यह उपग्रह इस वर्ष नवम्बर तक संचालन के लिए तैयार हो जाएगा। जीसेट-10 के संचालन की अवधि लगभग 15 वर्ष रहेगी। इसे इनसेट-4ए और जीसेट-12 के साथ जोड़ा जाएगा।
इसे भारत के 101वें अंतरिक्ष अभियान 'अच्छा स्वास्थ्य' के तहत प्रक्षेपित किया गया। यह उपग्रह नवम्बर तक काम करने लगेगा।
बयान के अनुसार, "जीसेट-10 उपग्रह में 30 संचार अभिग्राही हैं। 12 कू-बैंड में, 12 सी-बैंड में और छह अभिग्राही विस्तारित सी-बैंड में लगे हैं। इसके अलावा इसमें एक नकारात्मक अंतरिक्ष उपकरण 'गगन' लगाया गया है जो परिष्कृत शुद्धता के जीपीएस संकेत मुहैया कराएगा। भारतीय हवाईअड्डा प्राधिकरण इस उपकरण का उपयोग नागरिक उड्डयन की जरूरतें पूरी करने के लिए कर सकेगा।"
'जीपीए एडेड जियो ऑगमेंटेड नेविगेशन' को संक्षेप में गगन कहा जाता है। यह उपग्रह शनिवार को दोपहर 2.48 बजे प्रक्षेपित किया गया।टिप्पणियां
इसरो ने बताया कि मई 2011 में जीसेट-8 के प्रक्षेपण के बाद यह दूसरा उपग्रह है जिसे अंतरिक्ष उपकरण गगन के साथ इनसेट या जीसेट उपग्रह समूह में शामिल किया गया है।
जीसेट-10 की लागत प्रक्षेपण खर्च और बीमा राशि सहित 750 करोड़ रुपये (13.5 करोड़ डॉलर से अधिक) है।
इसरो के बेंगलुरू मुख्यालय से जारी एक बयान में कहा गया है कि यूरोपियन एरियन-5 रॉकेट ने 3,400 किलोग्राम वजन वाले उपग्रह जीसेट -10 को प्रक्षेपण के 30 मिनट और 45 सेकेंड बाद अंडाकार भूसमकालिक स्थानांतरण कक्ष में पहुंचाया।
फ्रेंच गुयाना दक्षिण अमेरिका में है और यूरोपियाई अंतरिक्ष केंद्र कौरौ भी वहीं पर स्थित है। उपग्रह के स्थानांतरण कक्ष में पहुंचने के तुरंत बाद कर्नाटक के हासन स्थित इसरो के मुख्य नियंत्रण केंद्र ने जीसेट -10 की कमान और नियंत्रण कार्य संभाल लिया।
इसरो के मुताबिक, उपग्रह की कार्यक्षमता की प्रारंभिक जांच विभिन्न उपप्रणालियों पर की गई और सभी मापदंडों पर इसे संतोषप्रद पाया गया।
इसके बाद ऑनबोर्ड प्रणोदन प्रणाली का उपयोग करते हुए उपग्रह को पृथ्वी और सूर्य की ओर उन्मुख किया गया। इस उपग्रह की संचालन बेहतर स्थिति में है।
भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि अगले पांच दिन बाद उपग्रह का कक्ष बढ़ाया जाएगा और इसे पृथ्वी के स्थिर कक्ष में ले जाया जाएगा। यह कक्ष भूमध्यरेखा से लगभग 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर है। इसके बाद उपग्रह में लगे दो सौर पैनलों को संचालित किया जाएगा।
इसरो ने बताया कि सभी परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे होने के बाद यह उपग्रह इस वर्ष नवम्बर तक संचालन के लिए तैयार हो जाएगा। जीसेट-10 के संचालन की अवधि लगभग 15 वर्ष रहेगी। इसे इनसेट-4ए और जीसेट-12 के साथ जोड़ा जाएगा।
इसे भारत के 101वें अंतरिक्ष अभियान 'अच्छा स्वास्थ्य' के तहत प्रक्षेपित किया गया। यह उपग्रह नवम्बर तक काम करने लगेगा।
बयान के अनुसार, "जीसेट-10 उपग्रह में 30 संचार अभिग्राही हैं। 12 कू-बैंड में, 12 सी-बैंड में और छह अभिग्राही विस्तारित सी-बैंड में लगे हैं। इसके अलावा इसमें एक नकारात्मक अंतरिक्ष उपकरण 'गगन' लगाया गया है जो परिष्कृत शुद्धता के जीपीएस संकेत मुहैया कराएगा। भारतीय हवाईअड्डा प्राधिकरण इस उपकरण का उपयोग नागरिक उड्डयन की जरूरतें पूरी करने के लिए कर सकेगा।"
'जीपीए एडेड जियो ऑगमेंटेड नेविगेशन' को संक्षेप में गगन कहा जाता है। यह उपग्रह शनिवार को दोपहर 2.48 बजे प्रक्षेपित किया गया।टिप्पणियां
इसरो ने बताया कि मई 2011 में जीसेट-8 के प्रक्षेपण के बाद यह दूसरा उपग्रह है जिसे अंतरिक्ष उपकरण गगन के साथ इनसेट या जीसेट उपग्रह समूह में शामिल किया गया है।
जीसेट-10 की लागत प्रक्षेपण खर्च और बीमा राशि सहित 750 करोड़ रुपये (13.5 करोड़ डॉलर से अधिक) है।
फ्रेंच गुयाना दक्षिण अमेरिका में है और यूरोपियाई अंतरिक्ष केंद्र कौरौ भी वहीं पर स्थित है। उपग्रह के स्थानांतरण कक्ष में पहुंचने के तुरंत बाद कर्नाटक के हासन स्थित इसरो के मुख्य नियंत्रण केंद्र ने जीसेट -10 की कमान और नियंत्रण कार्य संभाल लिया।
इसरो के मुताबिक, उपग्रह की कार्यक्षमता की प्रारंभिक जांच विभिन्न उपप्रणालियों पर की गई और सभी मापदंडों पर इसे संतोषप्रद पाया गया।
इसके बाद ऑनबोर्ड प्रणोदन प्रणाली का उपयोग करते हुए उपग्रह को पृथ्वी और सूर्य की ओर उन्मुख किया गया। इस उपग्रह की संचालन बेहतर स्थिति में है।
भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि अगले पांच दिन बाद उपग्रह का कक्ष बढ़ाया जाएगा और इसे पृथ्वी के स्थिर कक्ष में ले जाया जाएगा। यह कक्ष भूमध्यरेखा से लगभग 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर है। इसके बाद उपग्रह में लगे दो सौर पैनलों को संचालित किया जाएगा।
इसरो ने बताया कि सभी परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे होने के बाद यह उपग्रह इस वर्ष नवम्बर तक संचालन के लिए तैयार हो जाएगा। जीसेट-10 के संचालन की अवधि लगभग 15 वर्ष रहेगी। इसे इनसेट-4ए और जीसेट-12 के साथ जोड़ा जाएगा।
इसे भारत के 101वें अंतरिक्ष अभियान 'अच्छा स्वास्थ्य' के तहत प्रक्षेपित किया गया। यह उपग्रह नवम्बर तक काम करने लगेगा।
बयान के अनुसार, "जीसेट-10 उपग्रह में 30 संचार अभिग्राही हैं। 12 कू-बैंड में, 12 सी-बैंड में और छह अभिग्राही विस्तारित सी-बैंड में लगे हैं। इसके अलावा इसमें एक नकारात्मक अंतरिक्ष उपकरण 'गगन' लगाया गया है जो परिष्कृत शुद्धता के जीपीएस संकेत मुहैया कराएगा। भारतीय हवाईअड्डा प्राधिकरण इस उपकरण का उपयोग नागरिक उड्डयन की जरूरतें पूरी करने के लिए कर सकेगा।"
'जीपीए एडेड जियो ऑगमेंटेड नेविगेशन' को संक्षेप में गगन कहा जाता है। यह उपग्रह शनिवार को दोपहर 2.48 बजे प्रक्षेपित किया गया।टिप्पणियां
इसरो ने बताया कि मई 2011 में जीसेट-8 के प्रक्षेपण के बाद यह दूसरा उपग्रह है जिसे अंतरिक्ष उपकरण गगन के साथ इनसेट या जीसेट उपग्रह समूह में शामिल किया गया है।
जीसेट-10 की लागत प्रक्षेपण खर्च और बीमा राशि सहित 750 करोड़ रुपये (13.5 करोड़ डॉलर से अधिक) है।
इसरो के मुताबिक, उपग्रह की कार्यक्षमता की प्रारंभिक जांच विभिन्न उपप्रणालियों पर की गई और सभी मापदंडों पर इसे संतोषप्रद पाया गया।
इसके बाद ऑनबोर्ड प्रणोदन प्रणाली का उपयोग करते हुए उपग्रह को पृथ्वी और सूर्य की ओर उन्मुख किया गया। इस उपग्रह की संचालन बेहतर स्थिति में है।
भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि अगले पांच दिन बाद उपग्रह का कक्ष बढ़ाया जाएगा और इसे पृथ्वी के स्थिर कक्ष में ले जाया जाएगा। यह कक्ष भूमध्यरेखा से लगभग 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर है। इसके बाद उपग्रह में लगे दो सौर पैनलों को संचालित किया जाएगा।
इसरो ने बताया कि सभी परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे होने के बाद यह उपग्रह इस वर्ष नवम्बर तक संचालन के लिए तैयार हो जाएगा। जीसेट-10 के संचालन की अवधि लगभग 15 वर्ष रहेगी। इसे इनसेट-4ए और जीसेट-12 के साथ जोड़ा जाएगा।
इसे भारत के 101वें अंतरिक्ष अभियान 'अच्छा स्वास्थ्य' के तहत प्रक्षेपित किया गया। यह उपग्रह नवम्बर तक काम करने लगेगा।
बयान के अनुसार, "जीसेट-10 उपग्रह में 30 संचार अभिग्राही हैं। 12 कू-बैंड में, 12 सी-बैंड में और छह अभिग्राही विस्तारित सी-बैंड में लगे हैं। इसके अलावा इसमें एक नकारात्मक अंतरिक्ष उपकरण 'गगन' लगाया गया है जो परिष्कृत शुद्धता के जीपीएस संकेत मुहैया कराएगा। भारतीय हवाईअड्डा प्राधिकरण इस उपकरण का उपयोग नागरिक उड्डयन की जरूरतें पूरी करने के लिए कर सकेगा।"
'जीपीए एडेड जियो ऑगमेंटेड नेविगेशन' को संक्षेप में गगन कहा जाता है। यह उपग्रह शनिवार को दोपहर 2.48 बजे प्रक्षेपित किया गया।टिप्पणियां
इसरो ने बताया कि मई 2011 में जीसेट-8 के प्रक्षेपण के बाद यह दूसरा उपग्रह है जिसे अंतरिक्ष उपकरण गगन के साथ इनसेट या जीसेट उपग्रह समूह में शामिल किया गया है।
जीसेट-10 की लागत प्रक्षेपण खर्च और बीमा राशि सहित 750 करोड़ रुपये (13.5 करोड़ डॉलर से अधिक) है।
इसके बाद ऑनबोर्ड प्रणोदन प्रणाली का उपयोग करते हुए उपग्रह को पृथ्वी और सूर्य की ओर उन्मुख किया गया। इस उपग्रह की संचालन बेहतर स्थिति में है।
भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि अगले पांच दिन बाद उपग्रह का कक्ष बढ़ाया जाएगा और इसे पृथ्वी के स्थिर कक्ष में ले जाया जाएगा। यह कक्ष भूमध्यरेखा से लगभग 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर है। इसके बाद उपग्रह में लगे दो सौर पैनलों को संचालित किया जाएगा।
इसरो ने बताया कि सभी परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे होने के बाद यह उपग्रह इस वर्ष नवम्बर तक संचालन के लिए तैयार हो जाएगा। जीसेट-10 के संचालन की अवधि लगभग 15 वर्ष रहेगी। इसे इनसेट-4ए और जीसेट-12 के साथ जोड़ा जाएगा।
इसे भारत के 101वें अंतरिक्ष अभियान 'अच्छा स्वास्थ्य' के तहत प्रक्षेपित किया गया। यह उपग्रह नवम्बर तक काम करने लगेगा।
बयान के अनुसार, "जीसेट-10 उपग्रह में 30 संचार अभिग्राही हैं। 12 कू-बैंड में, 12 सी-बैंड में और छह अभिग्राही विस्तारित सी-बैंड में लगे हैं। इसके अलावा इसमें एक नकारात्मक अंतरिक्ष उपकरण 'गगन' लगाया गया है जो परिष्कृत शुद्धता के जीपीएस संकेत मुहैया कराएगा। भारतीय हवाईअड्डा प्राधिकरण इस उपकरण का उपयोग नागरिक उड्डयन की जरूरतें पूरी करने के लिए कर सकेगा।"
'जीपीए एडेड जियो ऑगमेंटेड नेविगेशन' को संक्षेप में गगन कहा जाता है। यह उपग्रह शनिवार को दोपहर 2.48 बजे प्रक्षेपित किया गया।टिप्पणियां
इसरो ने बताया कि मई 2011 में जीसेट-8 के प्रक्षेपण के बाद यह दूसरा उपग्रह है जिसे अंतरिक्ष उपकरण गगन के साथ इनसेट या जीसेट उपग्रह समूह में शामिल किया गया है।
जीसेट-10 की लागत प्रक्षेपण खर्च और बीमा राशि सहित 750 करोड़ रुपये (13.5 करोड़ डॉलर से अधिक) है।
भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि अगले पांच दिन बाद उपग्रह का कक्ष बढ़ाया जाएगा और इसे पृथ्वी के स्थिर कक्ष में ले जाया जाएगा। यह कक्ष भूमध्यरेखा से लगभग 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर है। इसके बाद उपग्रह में लगे दो सौर पैनलों को संचालित किया जाएगा।
इसरो ने बताया कि सभी परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे होने के बाद यह उपग्रह इस वर्ष नवम्बर तक संचालन के लिए तैयार हो जाएगा। जीसेट-10 के संचालन की अवधि लगभग 15 वर्ष रहेगी। इसे इनसेट-4ए और जीसेट-12 के साथ जोड़ा जाएगा।
इसे भारत के 101वें अंतरिक्ष अभियान 'अच्छा स्वास्थ्य' के तहत प्रक्षेपित किया गया। यह उपग्रह नवम्बर तक काम करने लगेगा।
बयान के अनुसार, "जीसेट-10 उपग्रह में 30 संचार अभिग्राही हैं। 12 कू-बैंड में, 12 सी-बैंड में और छह अभिग्राही विस्तारित सी-बैंड में लगे हैं। इसके अलावा इसमें एक नकारात्मक अंतरिक्ष उपकरण 'गगन' लगाया गया है जो परिष्कृत शुद्धता के जीपीएस संकेत मुहैया कराएगा। भारतीय हवाईअड्डा प्राधिकरण इस उपकरण का उपयोग नागरिक उड्डयन की जरूरतें पूरी करने के लिए कर सकेगा।"
'जीपीए एडेड जियो ऑगमेंटेड नेविगेशन' को संक्षेप में गगन कहा जाता है। यह उपग्रह शनिवार को दोपहर 2.48 बजे प्रक्षेपित किया गया।टिप्पणियां
इसरो ने बताया कि मई 2011 में जीसेट-8 के प्रक्षेपण के बाद यह दूसरा उपग्रह है जिसे अंतरिक्ष उपकरण गगन के साथ इनसेट या जीसेट उपग्रह समूह में शामिल किया गया है।
जीसेट-10 की लागत प्रक्षेपण खर्च और बीमा राशि सहित 750 करोड़ रुपये (13.5 करोड़ डॉलर से अधिक) है।
इसरो ने बताया कि सभी परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे होने के बाद यह उपग्रह इस वर्ष नवम्बर तक संचालन के लिए तैयार हो जाएगा। जीसेट-10 के संचालन की अवधि लगभग 15 वर्ष रहेगी। इसे इनसेट-4ए और जीसेट-12 के साथ जोड़ा जाएगा।
इसे भारत के 101वें अंतरिक्ष अभियान 'अच्छा स्वास्थ्य' के तहत प्रक्षेपित किया गया। यह उपग्रह नवम्बर तक काम करने लगेगा।
बयान के अनुसार, "जीसेट-10 उपग्रह में 30 संचार अभिग्राही हैं। 12 कू-बैंड में, 12 सी-बैंड में और छह अभिग्राही विस्तारित सी-बैंड में लगे हैं। इसके अलावा इसमें एक नकारात्मक अंतरिक्ष उपकरण 'गगन' लगाया गया है जो परिष्कृत शुद्धता के जीपीएस संकेत मुहैया कराएगा। भारतीय हवाईअड्डा प्राधिकरण इस उपकरण का उपयोग नागरिक उड्डयन की जरूरतें पूरी करने के लिए कर सकेगा।"
'जीपीए एडेड जियो ऑगमेंटेड नेविगेशन' को संक्षेप में गगन कहा जाता है। यह उपग्रह शनिवार को दोपहर 2.48 बजे प्रक्षेपित किया गया।टिप्पणियां
इसरो ने बताया कि मई 2011 में जीसेट-8 के प्रक्षेपण के बाद यह दूसरा उपग्रह है जिसे अंतरिक्ष उपकरण गगन के साथ इनसेट या जीसेट उपग्रह समूह में शामिल किया गया है।
जीसेट-10 की लागत प्रक्षेपण खर्च और बीमा राशि सहित 750 करोड़ रुपये (13.5 करोड़ डॉलर से अधिक) है।
इसे भारत के 101वें अंतरिक्ष अभियान 'अच्छा स्वास्थ्य' के तहत प्रक्षेपित किया गया। यह उपग्रह नवम्बर तक काम करने लगेगा।
बयान के अनुसार, "जीसेट-10 उपग्रह में 30 संचार अभिग्राही हैं। 12 कू-बैंड में, 12 सी-बैंड में और छह अभिग्राही विस्तारित सी-बैंड में लगे हैं। इसके अलावा इसमें एक नकारात्मक अंतरिक्ष उपकरण 'गगन' लगाया गया है जो परिष्कृत शुद्धता के जीपीएस संकेत मुहैया कराएगा। भारतीय हवाईअड्डा प्राधिकरण इस उपकरण का उपयोग नागरिक उड्डयन की जरूरतें पूरी करने के लिए कर सकेगा।"
'जीपीए एडेड जियो ऑगमेंटेड नेविगेशन' को संक्षेप में गगन कहा जाता है। यह उपग्रह शनिवार को दोपहर 2.48 बजे प्रक्षेपित किया गया।टिप्पणियां
इसरो ने बताया कि मई 2011 में जीसेट-8 के प्रक्षेपण के बाद यह दूसरा उपग्रह है जिसे अंतरिक्ष उपकरण गगन के साथ इनसेट या जीसेट उपग्रह समूह में शामिल किया गया है।
जीसेट-10 की लागत प्रक्षेपण खर्च और बीमा राशि सहित 750 करोड़ रुपये (13.5 करोड़ डॉलर से अधिक) है।
बयान के अनुसार, "जीसेट-10 उपग्रह में 30 संचार अभिग्राही हैं। 12 कू-बैंड में, 12 सी-बैंड में और छह अभिग्राही विस्तारित सी-बैंड में लगे हैं। इसके अलावा इसमें एक नकारात्मक अंतरिक्ष उपकरण 'गगन' लगाया गया है जो परिष्कृत शुद्धता के जीपीएस संकेत मुहैया कराएगा। भारतीय हवाईअड्डा प्राधिकरण इस उपकरण का उपयोग नागरिक उड्डयन की जरूरतें पूरी करने के लिए कर सकेगा।"
'जीपीए एडेड जियो ऑगमेंटेड नेविगेशन' को संक्षेप में गगन कहा जाता है। यह उपग्रह शनिवार को दोपहर 2.48 बजे प्रक्षेपित किया गया।टिप्पणियां
इसरो ने बताया कि मई 2011 में जीसेट-8 के प्रक्षेपण के बाद यह दूसरा उपग्रह है जिसे अंतरिक्ष उपकरण गगन के साथ इनसेट या जीसेट उपग्रह समूह में शामिल किया गया है।
जीसेट-10 की लागत प्रक्षेपण खर्च और बीमा राशि सहित 750 करोड़ रुपये (13.5 करोड़ डॉलर से अधिक) है।
'जीपीए एडेड जियो ऑगमेंटेड नेविगेशन' को संक्षेप में गगन कहा जाता है। यह उपग्रह शनिवार को दोपहर 2.48 बजे प्रक्षेपित किया गया।टिप्पणियां
इसरो ने बताया कि मई 2011 में जीसेट-8 के प्रक्षेपण के बाद यह दूसरा उपग्रह है जिसे अंतरिक्ष उपकरण गगन के साथ इनसेट या जीसेट उपग्रह समूह में शामिल किया गया है।
जीसेट-10 की लागत प्रक्षेपण खर्च और बीमा राशि सहित 750 करोड़ रुपये (13.5 करोड़ डॉलर से अधिक) है।
इसरो ने बताया कि मई 2011 में जीसेट-8 के प्रक्षेपण के बाद यह दूसरा उपग्रह है जिसे अंतरिक्ष उपकरण गगन के साथ इनसेट या जीसेट उपग्रह समूह में शामिल किया गया है।
जीसेट-10 की लागत प्रक्षेपण खर्च और बीमा राशि सहित 750 करोड़ रुपये (13.5 करोड़ डॉलर से अधिक) है।
जीसेट-10 की लागत प्रक्षेपण खर्च और बीमा राशि सहित 750 करोड़ रुपये (13.5 करोड़ डॉलर से अधिक) है। | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: देश के अब तक के सबसे भारी संचार उपग्रह जीसेट-10 को शनिवार को दक्षिण अमेरिका के फ्रेंच गुयाना स्थित कौरौ लांचपैड से एरियन-5 रॉकेट के जरिए सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया। | 11 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: चीन की सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी :पीएलए: ने कहा है कि वह भारतीय रक्षा बलों के साथ संबंध बढ़ाने पर विचार कर रही है। विश्व की सबसे बड़ी थलसेना पीएलए की तरफ से जारी 41 पन्नों के एक श्वेत पत्र में सेना की नीतियों और अनुभवों की बात की गई है और कहा गया है कि पीएलए अपने पड़ोसी देशों के साथ विश्वास बहाली पर काम करने पर विचार कर रही है। इसके अलावा पीसीए पाकिस्तानी सेना के साथ पहले से जारी बहुआयामी रिश्तों को और ज्यादा मजबूत करने पर विचार कर रही है। चीन के शीर्ष सैन्य अधिकारी द्वारा मीडिया के सामने जारी किए गए पीएलए के इस नीतिगत दस्तावेज में कहा गया है चीन ने अपने पड़ोसी देशों के साथ सैन्य रिश्तों को मजबूत किया है। यह डीपीआरके :उत्तरी कोरिया: और आरओके :दक्षिण कोरिया: की सेना के साथ मित्रवत आदान-प्रदान करती है, चीन-जापान रक्षा आदान-प्रदान पर बल देती है, बहुआयामी चीन-पाकिस्तान सैन्य आदान-प्रदान और आपसी सहयोग पर बल देती है और चीन-भारत सैन्य संबंधों को बढ़ाने के लिए प्रयासरत है। इसके अलावा चीन ने जम्मू-कश्मीर के निवासियों को नत्थी वीजा :स्टेपल वीजा: देने की नीति पर भी विचार करने का वादा किया है। | संक्षिप्त सारांश: विश्व की सबसे बड़ी थलसेना पीएलए की तरफ से जारी 41 पन्नों के एक श्वेत पत्र में सेना की नीतियों और अनुभवों की बात की गई है। | 0 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: चीन के उप विदेश मंत्री लुओ झाओहुई ने कहा है कि भारत और चीन को अपने मतभेदों को नियंत्रित करने की कोशिश से परे जाकर द्विपक्षीय संबंधों में उतार-चढ़ाव के ‘विचित्र चक्र' को तोड़ना चाहिए. लुओ ने बीजिंग में आयोजित ‘चौथे भारत-चीन थिंक टैंक फोरम' में कहा, ‘चीन और भारत का एक साथ उदय 21वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना है.' चीनी विदेश मंत्रालाय की ओर से जारी बयान के अनुसार लुओ ने कहा, ‘दोनों देशों को मतभेदों को नियंत्रित करने के तरीकों से आगे बढ़कर द्विपक्षीय संबंधों में उतार-चढ़ाव के विचित्र चक्र को तोड़ना चाहिए, आपसी विश्वास मजबूत करना चाहिए, मतभेदों से उचित तरीके से निपटना चाहिए, साझे विकास के मार्ग तलाशने चाहिए और बड़े विकासशील देशों के शांतिपूर्वक रहने और मिलकर विकास करने के तरीके खोजने चाहिए.'
बता दें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मई 2015 में चीन यात्रा के दौरान थिंक-टैंक फोरम की स्थापना की गई थी. भारत और चीन के शीर्ष राजनयिक इस बैठक में इस बात पर सहमत हुए कि दोनों देशों को क्षेत्रीय एवं वैश्विक स्तर पर सहयोग करना चाहिए और एशियाई सदी को साकार करने के लिए बहुआयामी संबंधों को अवश्य कायम रखना चाहिए. शनिवार को संपन्न हुए चौथे भारत-चीन थिंक टैंक फोरम में दोनों देशों के राजनयिकों ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए कई मुद्दों पर चर्चा की. बैठक में भाग लेने वाले अधिकारियों ने सर्वसम्मति से यह विचार जाहिर किया कि दोनों देशों को द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर करीबी सहयोग करना चाहिए. इस फोरम का आयोजन इंडियन काउंसिल ऑफ वल्डर्स अफेयर्स (ICWA) और चाइनीज एकेडमी ऑफ सोशल साइंसेज (CASS) ने संयुक्त रूप से किया.
लड़की को परोसी मूंगफली, तो ब्रिटेन में भारतीय रेस्टोरेंट पर लगा 3.5 लाख का जुर्माना
भारतीय दूतावास ने जारी एक बयान में कहा, ‘एशियाई सदी में भारत-चीन संबंध' के तहत इस मंच ने भारत और चीन के बीच करीबी विकास साझेदारी बनाने सहित विभिन्न मुद्दों पर गहराई से चर्चा की. बयान में कहा गया है कि यह चर्चा दोस्ती और खुलेपन की भावना के साथ हुई और इसने दोनों देशों के बीच परस्पर समझ बढ़ाने में योगदान दिया. इसमें कहा गया है, ‘बैठक में भाग लेने वालों ने इसके बारे में सर्वसम्मत विचार प्रकट किया कि पड़ोसी एवं तेजी से विकास करने वाले देश होने के नाते यह जरूरी है कि भारत और चीन, दोनों देश द्विपक्षीय रूप से और क्षेत्रीय एवं वैश्विक स्तर पर सहयोग करेंगे. भारत-चीन संबंध उभरती एशियाई सदी के लिए एक अहम संबंध है.
बैठक में हिस्सा लेने वाले 15 सदस्यीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ICWA के महानिदेशक टीसीए राघवन ने किया. राघवन ने कहा कि उपमहाद्वीप की दो बड़ी शक्तियां, भारत और चीन को अवश्य ही बहुआयामी संबंध कायम रखना चाहिए. चीन में नियुक्त भारत के उप राजदूत ए. विमल ने कहा कि यह समझना जरूरी है कि यह सदी बेशक भारत और चीन की है. उन्होंने कहा, ‘हमें शोध कार्यों के लिये युवा विद्वानों की एक दूसरे देशों के शोध केंद्रों में संक्षिप्त यात्रा या तीन या छह महीनों का इंटर्नशिप कराने पर विचार करना चाहिए.' | संक्षिप्त पाठ: द्विपक्षीय संबंधों में उतार-चढ़ाव के ‘विचित्र चक्र’ को तोड़ना चाहिए
लुओ ने बीजिंग में आयोजित ‘चौथे भारत-चीन थिंक टैंक फोरम’ में कही यह बात
चीन और भारत का एक साथ उदय 21वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण घटना है | 14 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: दक्षिण अफ्रीका के स्टार बल्लेबाज जाक कैलिस ने टेस्ट मैचों में 39वां शतक जमाकर ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग की बराबरी कर ली है। टेस्ट क्रिकेट में कैलिस से अधिक शतक अब केवल भारतीय दिग्गज सचिन तेंदुलकर के नाम पर दर्ज हैं, जो सेंचुरियन में खेले गए पहले टेस्ट मैच में 50 टेस्ट शतक जड़ने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज बने थे। कैलिस ने भारत के खिलाफ तीसरे और अंतिम टेस्ट मैच की पहली पारी में अपने करियर का 39वां शतक बनाया। यह उनका न्यूलैंड्स पर सातवां और भारत के खिलाफ पांचवां शतक है। कैलिस का यह 145वां टेस्ट मैच है, जबकि पोंटिंग ने अपने 39 शतक के लिए 152 मैच खेले हैं। कैलिस अब तक टेस्ट खेलने वाले देशों में से केवल श्रीलंका के खिलाफ ही शतक नहीं लगा पाए हैं। उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ सर्वाधिक आठ और इंग्लैंड के खिलाफ सात शतक जड़े हैं। पाकिस्तान के खिलाफ छह, भारत और न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच-पांच, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चार, जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन और बांग्लादेश के खिलाफ एक शतक जड़ने वाले इस स्टार आलराउंडर ने अपना एकमात्र दोहरा शतक भारत के खिलाफ सेंचुरियन में लगाया था। टेस्ट क्रिकेट में 30 या इससे अधिक शतक लगाने वाले बल्लेबाज इस प्रकार हैं-सचिन तेंदुलकर (50), जाक कैलिस और रिकी पोंटिंग (दोनों 39), सुनील गावस्कर और ब्रायन लारा (दोनों 34), स्टीव वा (32), राहुल द्रविड़ (31) और मैथ्यू हेडन (30)। | संक्षिप्त सारांश: दक्षिण अफ्रीका के स्टार बल्लेबाज जाक कैलिस ने टेस्ट मैचों में 39वां शतक जमाकर ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग की बराबरी कर ली है। | 8 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: कर्नाटक में सत्तारूढ़ भाजपा पर हमला तेज करते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि उसने (भाजपा ने) राज्य के लोगों का भविष्य ‘माफिया’ के पास ‘गिरवी’ रख दिया है और प्रदेश को खनन कारोबारी रेड्डी बंधुओं के हाथों बेच दिया है।
राज्य में 5 मई को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए अपने प्रचार अभियान के तीसरे चरण में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पार्टी (भाजपा) ने राज्य में सत्ता में आने के लिए रेड्डी बंधुओं जी जनार्दन और जी करूणाकर को तैयार किया।
कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा, ‘‘भाजपा के लोग भ्रष्टाचार के बारे में बात करते हैं। कल ही संसद में उन्होंने भ्रष्टाचार के बारे में बोला। लेकिन वे कर्नाटक के बारे में कुछ नहीं कहेंगे। वे कर्नाटक में भ्रष्टाचार के बारे में कुछ नहीं कहेंगे। वे इस बारे में नहीं बात करेंगे कि एक मुख्यमंत्री को जेल जाना पड़ा। वे रेड्डी बंधुओं के बारे में कुछ नहीं कहेंगे जिनके हाथों उन्होंने पूरे राज्य को बेच दिया... वे भ्रष्टाचार की बात करते हैं।’’
राहुल ने कहा कि ऐसा भी समय था जब कर्नाटक दमक रहा था और हम इस राज्य के प्रगतिशील और अग्रणी होने की बात करते थे। लेकिन यह दुखद है कि पिछले नौ वर्षों में कर्नाटक की चमक समाप्त हो गई है। बीएस येदियुरप्पा का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि इतिहास में पहली बार किसी मुख्यमंत्री को जेल जाना पड़ा। ‘‘और आपका भविष्य माफिया के पास गिरवी रख दिया गया है।’’
उन्होंने कहा कि कर्नाटक में प्रचुर मात्रा में प्राकृतिक संसाधन हैं जिसमें बड़ी मात्रा लौह अयस्क की है। ‘‘यह संसाधन किसी एक व्यक्ति की जागीर नहीं है। यह कर्नाटक के सभी लोगों का है। यह राज्य के युवाओं और बुजुर्गो का है।’’ रेड्डी बंधुओं पर परोक्ष निशाना साधते हुए राहुल ने कहा कि संसाधनों का उपयोग राज्य के युवाओं का भविष्य बनाने के लिए किया जाना चाहिए था लेकिन पिछले नौ वर्षों में यह धन एक परिवार के पास गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘सत्ता में वापस आने के लिए भाजपा को रेड्डी बंधुओं का समर्थन मिला।’’ कांग्रेस उपाध्यक्ष ने सवाल किया कि यह पैसा उनके पास कहां से आया और फिर उपस्थित भीड़ से कहा कि यह आपके संसाधन से आया है।टिप्पणियां
राहुल ने कहा कि लौह अयस्क चीन को निर्यात किये जाने की बजाए राज्य में नौकरियों के सृजन के लिए इस्पात संयंत्र स्थापित किया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा, ‘‘आपको एक भ्रष्ट विधानसभा मिली है लेकिन नौकरियां नहीं मिली हैं। आपका संसाधन चीन जा रहा है। इस तरह की सरकार भाजपा ने पिछले नौ वषरे में दी है। आपके प्राकृतिक संसाधन कुछ लोगों के समूहों को दिये गए हैं और विधान सभा माफिया को सौंप दी गई है।’’
किसानों को पेयजल और बिजली प्रदान करने में भाजपा सरकार के विफल होने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा कि कर्नाटक में जो खेल चल रहा है, वह आपके (जनता) बारे में नहीं है। यह पैसे से जुड़ा है। यह आपके भविष्य के लिए नहीं है। यह आपसे (लोगों) पैसा झटकने से जुड़ा है।
राज्य में 5 मई को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए अपने प्रचार अभियान के तीसरे चरण में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पार्टी (भाजपा) ने राज्य में सत्ता में आने के लिए रेड्डी बंधुओं जी जनार्दन और जी करूणाकर को तैयार किया।
कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा, ‘‘भाजपा के लोग भ्रष्टाचार के बारे में बात करते हैं। कल ही संसद में उन्होंने भ्रष्टाचार के बारे में बोला। लेकिन वे कर्नाटक के बारे में कुछ नहीं कहेंगे। वे कर्नाटक में भ्रष्टाचार के बारे में कुछ नहीं कहेंगे। वे इस बारे में नहीं बात करेंगे कि एक मुख्यमंत्री को जेल जाना पड़ा। वे रेड्डी बंधुओं के बारे में कुछ नहीं कहेंगे जिनके हाथों उन्होंने पूरे राज्य को बेच दिया... वे भ्रष्टाचार की बात करते हैं।’’
राहुल ने कहा कि ऐसा भी समय था जब कर्नाटक दमक रहा था और हम इस राज्य के प्रगतिशील और अग्रणी होने की बात करते थे। लेकिन यह दुखद है कि पिछले नौ वर्षों में कर्नाटक की चमक समाप्त हो गई है। बीएस येदियुरप्पा का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि इतिहास में पहली बार किसी मुख्यमंत्री को जेल जाना पड़ा। ‘‘और आपका भविष्य माफिया के पास गिरवी रख दिया गया है।’’
उन्होंने कहा कि कर्नाटक में प्रचुर मात्रा में प्राकृतिक संसाधन हैं जिसमें बड़ी मात्रा लौह अयस्क की है। ‘‘यह संसाधन किसी एक व्यक्ति की जागीर नहीं है। यह कर्नाटक के सभी लोगों का है। यह राज्य के युवाओं और बुजुर्गो का है।’’ रेड्डी बंधुओं पर परोक्ष निशाना साधते हुए राहुल ने कहा कि संसाधनों का उपयोग राज्य के युवाओं का भविष्य बनाने के लिए किया जाना चाहिए था लेकिन पिछले नौ वर्षों में यह धन एक परिवार के पास गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘सत्ता में वापस आने के लिए भाजपा को रेड्डी बंधुओं का समर्थन मिला।’’ कांग्रेस उपाध्यक्ष ने सवाल किया कि यह पैसा उनके पास कहां से आया और फिर उपस्थित भीड़ से कहा कि यह आपके संसाधन से आया है।टिप्पणियां
राहुल ने कहा कि लौह अयस्क चीन को निर्यात किये जाने की बजाए राज्य में नौकरियों के सृजन के लिए इस्पात संयंत्र स्थापित किया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा, ‘‘आपको एक भ्रष्ट विधानसभा मिली है लेकिन नौकरियां नहीं मिली हैं। आपका संसाधन चीन जा रहा है। इस तरह की सरकार भाजपा ने पिछले नौ वषरे में दी है। आपके प्राकृतिक संसाधन कुछ लोगों के समूहों को दिये गए हैं और विधान सभा माफिया को सौंप दी गई है।’’
किसानों को पेयजल और बिजली प्रदान करने में भाजपा सरकार के विफल होने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा कि कर्नाटक में जो खेल चल रहा है, वह आपके (जनता) बारे में नहीं है। यह पैसे से जुड़ा है। यह आपके भविष्य के लिए नहीं है। यह आपसे (लोगों) पैसा झटकने से जुड़ा है।
कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा, ‘‘भाजपा के लोग भ्रष्टाचार के बारे में बात करते हैं। कल ही संसद में उन्होंने भ्रष्टाचार के बारे में बोला। लेकिन वे कर्नाटक के बारे में कुछ नहीं कहेंगे। वे कर्नाटक में भ्रष्टाचार के बारे में कुछ नहीं कहेंगे। वे इस बारे में नहीं बात करेंगे कि एक मुख्यमंत्री को जेल जाना पड़ा। वे रेड्डी बंधुओं के बारे में कुछ नहीं कहेंगे जिनके हाथों उन्होंने पूरे राज्य को बेच दिया... वे भ्रष्टाचार की बात करते हैं।’’
राहुल ने कहा कि ऐसा भी समय था जब कर्नाटक दमक रहा था और हम इस राज्य के प्रगतिशील और अग्रणी होने की बात करते थे। लेकिन यह दुखद है कि पिछले नौ वर्षों में कर्नाटक की चमक समाप्त हो गई है। बीएस येदियुरप्पा का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि इतिहास में पहली बार किसी मुख्यमंत्री को जेल जाना पड़ा। ‘‘और आपका भविष्य माफिया के पास गिरवी रख दिया गया है।’’
उन्होंने कहा कि कर्नाटक में प्रचुर मात्रा में प्राकृतिक संसाधन हैं जिसमें बड़ी मात्रा लौह अयस्क की है। ‘‘यह संसाधन किसी एक व्यक्ति की जागीर नहीं है। यह कर्नाटक के सभी लोगों का है। यह राज्य के युवाओं और बुजुर्गो का है।’’ रेड्डी बंधुओं पर परोक्ष निशाना साधते हुए राहुल ने कहा कि संसाधनों का उपयोग राज्य के युवाओं का भविष्य बनाने के लिए किया जाना चाहिए था लेकिन पिछले नौ वर्षों में यह धन एक परिवार के पास गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘सत्ता में वापस आने के लिए भाजपा को रेड्डी बंधुओं का समर्थन मिला।’’ कांग्रेस उपाध्यक्ष ने सवाल किया कि यह पैसा उनके पास कहां से आया और फिर उपस्थित भीड़ से कहा कि यह आपके संसाधन से आया है।टिप्पणियां
राहुल ने कहा कि लौह अयस्क चीन को निर्यात किये जाने की बजाए राज्य में नौकरियों के सृजन के लिए इस्पात संयंत्र स्थापित किया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा, ‘‘आपको एक भ्रष्ट विधानसभा मिली है लेकिन नौकरियां नहीं मिली हैं। आपका संसाधन चीन जा रहा है। इस तरह की सरकार भाजपा ने पिछले नौ वषरे में दी है। आपके प्राकृतिक संसाधन कुछ लोगों के समूहों को दिये गए हैं और विधान सभा माफिया को सौंप दी गई है।’’
किसानों को पेयजल और बिजली प्रदान करने में भाजपा सरकार के विफल होने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा कि कर्नाटक में जो खेल चल रहा है, वह आपके (जनता) बारे में नहीं है। यह पैसे से जुड़ा है। यह आपके भविष्य के लिए नहीं है। यह आपसे (लोगों) पैसा झटकने से जुड़ा है।
राहुल ने कहा कि ऐसा भी समय था जब कर्नाटक दमक रहा था और हम इस राज्य के प्रगतिशील और अग्रणी होने की बात करते थे। लेकिन यह दुखद है कि पिछले नौ वर्षों में कर्नाटक की चमक समाप्त हो गई है। बीएस येदियुरप्पा का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि इतिहास में पहली बार किसी मुख्यमंत्री को जेल जाना पड़ा। ‘‘और आपका भविष्य माफिया के पास गिरवी रख दिया गया है।’’
उन्होंने कहा कि कर्नाटक में प्रचुर मात्रा में प्राकृतिक संसाधन हैं जिसमें बड़ी मात्रा लौह अयस्क की है। ‘‘यह संसाधन किसी एक व्यक्ति की जागीर नहीं है। यह कर्नाटक के सभी लोगों का है। यह राज्य के युवाओं और बुजुर्गो का है।’’ रेड्डी बंधुओं पर परोक्ष निशाना साधते हुए राहुल ने कहा कि संसाधनों का उपयोग राज्य के युवाओं का भविष्य बनाने के लिए किया जाना चाहिए था लेकिन पिछले नौ वर्षों में यह धन एक परिवार के पास गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘सत्ता में वापस आने के लिए भाजपा को रेड्डी बंधुओं का समर्थन मिला।’’ कांग्रेस उपाध्यक्ष ने सवाल किया कि यह पैसा उनके पास कहां से आया और फिर उपस्थित भीड़ से कहा कि यह आपके संसाधन से आया है।टिप्पणियां
राहुल ने कहा कि लौह अयस्क चीन को निर्यात किये जाने की बजाए राज्य में नौकरियों के सृजन के लिए इस्पात संयंत्र स्थापित किया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा, ‘‘आपको एक भ्रष्ट विधानसभा मिली है लेकिन नौकरियां नहीं मिली हैं। आपका संसाधन चीन जा रहा है। इस तरह की सरकार भाजपा ने पिछले नौ वषरे में दी है। आपके प्राकृतिक संसाधन कुछ लोगों के समूहों को दिये गए हैं और विधान सभा माफिया को सौंप दी गई है।’’
किसानों को पेयजल और बिजली प्रदान करने में भाजपा सरकार के विफल होने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा कि कर्नाटक में जो खेल चल रहा है, वह आपके (जनता) बारे में नहीं है। यह पैसे से जुड़ा है। यह आपके भविष्य के लिए नहीं है। यह आपसे (लोगों) पैसा झटकने से जुड़ा है।
उन्होंने कहा कि कर्नाटक में प्रचुर मात्रा में प्राकृतिक संसाधन हैं जिसमें बड़ी मात्रा लौह अयस्क की है। ‘‘यह संसाधन किसी एक व्यक्ति की जागीर नहीं है। यह कर्नाटक के सभी लोगों का है। यह राज्य के युवाओं और बुजुर्गो का है।’’ रेड्डी बंधुओं पर परोक्ष निशाना साधते हुए राहुल ने कहा कि संसाधनों का उपयोग राज्य के युवाओं का भविष्य बनाने के लिए किया जाना चाहिए था लेकिन पिछले नौ वर्षों में यह धन एक परिवार के पास गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘सत्ता में वापस आने के लिए भाजपा को रेड्डी बंधुओं का समर्थन मिला।’’ कांग्रेस उपाध्यक्ष ने सवाल किया कि यह पैसा उनके पास कहां से आया और फिर उपस्थित भीड़ से कहा कि यह आपके संसाधन से आया है।टिप्पणियां
राहुल ने कहा कि लौह अयस्क चीन को निर्यात किये जाने की बजाए राज्य में नौकरियों के सृजन के लिए इस्पात संयंत्र स्थापित किया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा, ‘‘आपको एक भ्रष्ट विधानसभा मिली है लेकिन नौकरियां नहीं मिली हैं। आपका संसाधन चीन जा रहा है। इस तरह की सरकार भाजपा ने पिछले नौ वषरे में दी है। आपके प्राकृतिक संसाधन कुछ लोगों के समूहों को दिये गए हैं और विधान सभा माफिया को सौंप दी गई है।’’
किसानों को पेयजल और बिजली प्रदान करने में भाजपा सरकार के विफल होने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा कि कर्नाटक में जो खेल चल रहा है, वह आपके (जनता) बारे में नहीं है। यह पैसे से जुड़ा है। यह आपके भविष्य के लिए नहीं है। यह आपसे (लोगों) पैसा झटकने से जुड़ा है।
उन्होंने कहा, ‘‘सत्ता में वापस आने के लिए भाजपा को रेड्डी बंधुओं का समर्थन मिला।’’ कांग्रेस उपाध्यक्ष ने सवाल किया कि यह पैसा उनके पास कहां से आया और फिर उपस्थित भीड़ से कहा कि यह आपके संसाधन से आया है।टिप्पणियां
राहुल ने कहा कि लौह अयस्क चीन को निर्यात किये जाने की बजाए राज्य में नौकरियों के सृजन के लिए इस्पात संयंत्र स्थापित किया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा, ‘‘आपको एक भ्रष्ट विधानसभा मिली है लेकिन नौकरियां नहीं मिली हैं। आपका संसाधन चीन जा रहा है। इस तरह की सरकार भाजपा ने पिछले नौ वषरे में दी है। आपके प्राकृतिक संसाधन कुछ लोगों के समूहों को दिये गए हैं और विधान सभा माफिया को सौंप दी गई है।’’
किसानों को पेयजल और बिजली प्रदान करने में भाजपा सरकार के विफल होने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा कि कर्नाटक में जो खेल चल रहा है, वह आपके (जनता) बारे में नहीं है। यह पैसे से जुड़ा है। यह आपके भविष्य के लिए नहीं है। यह आपसे (लोगों) पैसा झटकने से जुड़ा है।
राहुल ने कहा कि लौह अयस्क चीन को निर्यात किये जाने की बजाए राज्य में नौकरियों के सृजन के लिए इस्पात संयंत्र स्थापित किया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा, ‘‘आपको एक भ्रष्ट विधानसभा मिली है लेकिन नौकरियां नहीं मिली हैं। आपका संसाधन चीन जा रहा है। इस तरह की सरकार भाजपा ने पिछले नौ वषरे में दी है। आपके प्राकृतिक संसाधन कुछ लोगों के समूहों को दिये गए हैं और विधान सभा माफिया को सौंप दी गई है।’’
किसानों को पेयजल और बिजली प्रदान करने में भाजपा सरकार के विफल होने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा कि कर्नाटक में जो खेल चल रहा है, वह आपके (जनता) बारे में नहीं है। यह पैसे से जुड़ा है। यह आपके भविष्य के लिए नहीं है। यह आपसे (लोगों) पैसा झटकने से जुड़ा है।
किसानों को पेयजल और बिजली प्रदान करने में भाजपा सरकार के विफल होने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा कि कर्नाटक में जो खेल चल रहा है, वह आपके (जनता) बारे में नहीं है। यह पैसे से जुड़ा है। यह आपके भविष्य के लिए नहीं है। यह आपसे (लोगों) पैसा झटकने से जुड़ा है। | यह एक सारांश है: कर्नाटक में सत्तारूढ़ भाजपा पर हमला तेज करते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि उसने (भाजपा ने) राज्य के लोगों का भविष्य ‘माफिया’ के पास ‘गिरवी’ रख दिया है और प्रदेश को खनन कारोबारी रेड्डी बंधुओं के हाथों बेच दिया है। | 24 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: पंकज त्रिपाठी (Pankaj Tripathi) अपने शानदारी एक्टिंग और कमाल की डायलॉग डिलिवरी के लिए पहचाने जाते हैं. अमेजॉन प्राइम वीडियो (Amazon Prime Video) सीरीज 'मिर्जापुर (Mirzapur)' के कालीन भैया के कैरेक्टर ने तो उनके फैन्स की संख्या में जबरदस्त इजाफा कर दिया है. 'बरेली की बर्फी' में बिट्टी मिश्रा के पापा का रोल हो या फिर 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' का सुल्तान, पंकज त्रिपाठी (Pankaj Tripathi) ने हमेशा ही अपनी एक्टिंग से दिल जीतने का काम किया है. वैलेन्टाइंस डे के मौके पर भी पंकज त्रिपाठी (Pankaj Tripathi) बहुत ही अनोखे अंदाज में अपने फैन्स के सामने पेश हुए हैं और उन्होंने प्यार का संदेश दिया है.
बॉलीवुड एक्टर पंकज त्रिपाठी (Pankaj Tripathi) ने वैलेंटाइन्स डे (Valentine's Day) के मौके पर अपने फैन्स की रिक्वेस्ट रर लिखा हैः "वैलेंटाइन डे को लेकर कुछ लोगों ने मैसेज किया है और मेरा ओपिनियन जानना चाहा है. मेरा मानना है कि ये सुहाना मौसम फिजाओं में प्रेम रंग घोलता है. अलग-अलग संस्कृतियों में अलग तरीके से इसे सेलिब्रेट किया जाता है. बचपन से हमने वसंत ऋतु का साहित्य पढ़ा है. आप भी समय निकालिए और पढ़कर देखिए. अज्ञेय, निराला, पंत, रघुवीर सहाय, केदारनाथ सिंह, जायसी और किसने नही लिखा है इस ऋतु पर. इस समय मे हवाओं, फूलों की छटा को कभी महसूस कर के देखिए. दुनिया प्रेम से चलती है. एक दूसरे के प्रति आस्था, विस्वास, सम्मान और प्रेम समाज को बेहतर बनाता है। इसे नाम चाहे जो भी दीजिए फर्क नही पड़ता."
पंकज त्रिपाठी (Pankaj Tripathi) 2019 में बड़े कमाल करने वाले हैं. पंकज त्रिपाठी की 'लुका छिपी' मार्च में रिलीज हो रही है. उसके बाद पंकज त्रिपाठी 'ड्राइव' और 'सुपर 30' में भी वे अहम रोल निभाते दिखेंगे. रणवीर सिंह की '83 में पंकज त्रिपाठी कोच का रोल कर रहे हैं. यही नहीं, पंकज जल्द ही अपनी पहली हॉलीवुड फिल्म की शूटिंग शुरू करेंगे, जिसमें कोई और नहीं बल्कि हॉलीवुड के बेहद चाहते अभिनेता क्रिस हेम्सवर्थ, मार्वल यूनिवर्स के एवेंजर्स के थॉर होंगे। | संक्षिप्त सारांश: 'मिर्जापुर' है सुपरहिट सीरीज
खतरनाक रोल में दिखे थे पंकज
'लुका छिपी' में भी आएंगे नजर | 23 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: अब बात करें वोटों की गणित की तो गुजरात में लगभग में 40 फीसदी आबादी ओबीसी की है जो कम से कम 70 सीटों को प्रभावित कर सकते हैं. कांग्रेस को उम्मीद है कि दलित नेता अल्पेश ठाकोर के आ जाने से उसे इस इलाके में फायदा हो सकता है. यह बीजेपी के सामने बड़ी मुश्किल हो सकती है. तो दूसरी ओर ओर शंकर सिंह वाघेला कांग्रेस से अलग हो गए हैं. उनके बारे में कहा जाता है कि पिछली बार कांग्रेस को इनकी वजह से भी फायदा हुआ था. लेकिन इस बार वाघेला ने खुद जन विकल्प पार्टी बनाकर मैदान में हैं. बीजेपी को लगता है कि वाघेला उसके खिलाफ पड़ने वाले वोटों को काट देंगे और इससे फायदा हो सकता है.
अब बात करें कांग्रेस के जीत के फॉर्मूले को तो राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि साल 2002 में भाजपा की वोट हिस्सेदारी कांग्रेस के मुकाबले 10...11 प्रतिशत ज्यादा थी. ऐसे में महज 6 प्रतिशत वोटों के कांग्रेस की तरफ झुकाव से भाजपा को बड़ा झटका लग सकता है और इस झटके को देने के लिए कांग्रेस के पास जातिगत समीकणों के अलावा कोई चारा नहीं है. लेकिन अभी कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौती यह है कि अभी गुजरात में पीएम मोदी का तूफानी चुनाव प्रचार होना बाकी है जैसा वह करते आए हैं. | संक्षिप्त पाठ: सिर्फ 6 फीसदी वोटों का झुकाव बीजेपी को दे सकता है झटका
पहली बार कांग्रेस खुलकर जातिगत समीकरणों को साधने में जुटी
बीजेपी के पास भी अपना एक फॉर्मूला | 27 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: ख़बर है कि बॉलीवुड सुपरस्टार आमिर खान का बेटा जुनैद अपने पिता के ही नक्शेकदम पर चलते हुए अपने साथ पढ़ती रही सोनम वर्मा के साथ प्रेम की पींगें बढ़ा रहा है। उल्लेखनीय है कि आमिर खान की पूर्व पत्नी और जुनैद की मां दरअसल आमिर का बचपन का प्यार थीं।
21-वर्षीय जुनैद खान के सोशल मीडिया पेज पर जाकर देखने पर पता चला कि जुनैद और सोनम की पहली मुलाकात एचआर कॉलेज में हुई थी, जहां दोनों एक साथ पढ़ा करते थे। वैसे आजकल सोनम वर्मा मीडिया स्टडीज़ में एमबीए कर रही हैं।
एक सूत्र ने जानकारी दी है कि दोनों (जुनैद और सोनम) पिछले एक साल से एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं। उन्होंने अब तक इस रिश्ते को सार्वजनिक नहीं किया था, लेकिन अब दोनों को ही खुलकर सामने आने में कोई परेशानी महसूस नहीं होती। उन्हें कई बार एक साथ घूमते-फिरते देखा गया है।
वैसे ऐसा लग रहा है कि आजकल एक आने वाली फिल्म में राजकुमार हिरानी के सहायक की भूमिका निभा रहे जुनैद खान ने अपनी गर्लफ्रेंड सोनम वर्मा को अपने पिता आमिर खान से मिलवा दिया है। | सारांश: 21-वर्षीय जुनैद खान के सोशल मीडिया पेज पर जाकर देखने पर पता चला कि जुनैद और सोनम की पहली मुलाकात एचआर कॉलेज में हुई थी, जहां दोनों एक साथ पढ़ा करते थे। वैसे आजकल सोनम वर्मा मीडिया स्टडीज़ में एमबीए कर रही हैं। | 7 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: इससे पूर्व सोमवार को गुरुग्राम में रेयान इंटरनेशनल स्कूल परिसर में सात वर्षीय स्कूली छात्र की निर्मम हत्या के संबंध में गुरुग्राम पुलिस ने स्कूल के दो शीर्ष अधिकारियों को सोमवार को गिरफ्तार किया और कहा कि मामले में सबूत नष्ट करने का प्रयास किया गया. पुलिस ने रेयान इंटरनेशनल स्कूल समूह के लीगल हैड फ्रांसिस थॉमस और एचआर हैड जेयस थॉमस को गिरफ्तार किया. इन्हें सोहना की अदालत में पेश किया गया था जिसने उन्हें दो दिनों के लिये पुलिस हिरासत में भेज दिया. गुरुग्राम के पुलिस आयुक्त संदीप खिरवार ने कहा कि मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) का मानना है कि मामले में सबूतों से छेड़छाड़ की गई.
खिरवार ने कहा, "एसआईटी ने सोहना अदालत को बताया कि ऐसा प्रतीत होता है कि सबूतों को नष्ट किया गया. बच्चा जहां मृत पाया गया था, वहां घटनास्थल से खून के धब्बों को धोने का प्रयास किया गया. उसके पानी के बोतल और बैग पर लगे खून के निशान को मिटाने का प्रयास किया गया. कुछ अन्य सबूतों से भी छेड़छाड़ की गई."टिप्पणियां
खिरवार ने कहा कि आरोप पत्र दायर करते वक्त स्कूल प्रबंधन या किसी अन्य कर्मचारी के इसमें संलिप्त पाये जाने पर उनके खिलाफ हम लोग उचित धाराएं लगाएंगे. हरियाणा पुलिस के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक कानून प्रबंधन मोहम्मद अकील ने भी अपराध स्थल का दौरा किया था. गुरुग्राम के रयान इंटरनेशनल स्कूल में 7 साल के बच्चे की बेरहमी से की गई हत्या के मामले में स्कूल मैनेजमेंट के दो सीनियर अधिकारियों को गिरफ्तार हो चुके हैं. स्कूल के रीजनल हेड और एचआर हेड को गिरफ्तार किया जा चुका है. दोनों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें दो दिनों की पुलिस रिमांड में भेज दिया गया. सोहना थाने के एसएचओ को भी सस्पेंड कर दिया गया है.
खिरवार ने कहा, "एसआईटी ने सोहना अदालत को बताया कि ऐसा प्रतीत होता है कि सबूतों को नष्ट किया गया. बच्चा जहां मृत पाया गया था, वहां घटनास्थल से खून के धब्बों को धोने का प्रयास किया गया. उसके पानी के बोतल और बैग पर लगे खून के निशान को मिटाने का प्रयास किया गया. कुछ अन्य सबूतों से भी छेड़छाड़ की गई."टिप्पणियां
खिरवार ने कहा कि आरोप पत्र दायर करते वक्त स्कूल प्रबंधन या किसी अन्य कर्मचारी के इसमें संलिप्त पाये जाने पर उनके खिलाफ हम लोग उचित धाराएं लगाएंगे. हरियाणा पुलिस के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक कानून प्रबंधन मोहम्मद अकील ने भी अपराध स्थल का दौरा किया था. गुरुग्राम के रयान इंटरनेशनल स्कूल में 7 साल के बच्चे की बेरहमी से की गई हत्या के मामले में स्कूल मैनेजमेंट के दो सीनियर अधिकारियों को गिरफ्तार हो चुके हैं. स्कूल के रीजनल हेड और एचआर हेड को गिरफ्तार किया जा चुका है. दोनों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें दो दिनों की पुलिस रिमांड में भेज दिया गया. सोहना थाने के एसएचओ को भी सस्पेंड कर दिया गया है.
खिरवार ने कहा कि आरोप पत्र दायर करते वक्त स्कूल प्रबंधन या किसी अन्य कर्मचारी के इसमें संलिप्त पाये जाने पर उनके खिलाफ हम लोग उचित धाराएं लगाएंगे. हरियाणा पुलिस के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक कानून प्रबंधन मोहम्मद अकील ने भी अपराध स्थल का दौरा किया था. गुरुग्राम के रयान इंटरनेशनल स्कूल में 7 साल के बच्चे की बेरहमी से की गई हत्या के मामले में स्कूल मैनेजमेंट के दो सीनियर अधिकारियों को गिरफ्तार हो चुके हैं. स्कूल के रीजनल हेड और एचआर हेड को गिरफ्तार किया जा चुका है. दोनों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें दो दिनों की पुलिस रिमांड में भेज दिया गया. सोहना थाने के एसएचओ को भी सस्पेंड कर दिया गया है.
गुरुग्राम के रयान इंटरनेशनल स्कूल में 7 साल के बच्चे की बेरहमी से की गई हत्या के मामले में स्कूल मैनेजमेंट के दो सीनियर अधिकारियों को गिरफ्तार हो चुके हैं. स्कूल के रीजनल हेड और एचआर हेड को गिरफ्तार किया जा चुका है. दोनों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें दो दिनों की पुलिस रिमांड में भेज दिया गया. सोहना थाने के एसएचओ को भी सस्पेंड कर दिया गया है. | यहाँ एक सारांश है:रायन पिंटो पर लटक रही है कार्रवाई की तलवार
आरोपी अशोक को 18 तक जेल भेजा गया
मालिकों की अग्रिम जमानत अर्जी पर बुधवार को सुनवाई करेगा बॉम्बे हाईकोर्ट | 18 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: भ्रष्टाचार और नीतिगत अनिश्चितताओं की धारणा ने भारतीय कंपनियों की वित्तीय साख के लिए के लिए देश विदेश से जुड़ा जोखिम जोखिम बढ़ा है।टिप्पणियां
स्टैंडर्ड एंड पुअर्स के मुताबिक भारत में पिछले दो साल से इस तरह का जोखिम बढ़ा है। भ्रष्टाचार और नीतिगत अनिश्चितताओं के कारण कंपनियों को अपने नकदी प्रवाह के प्रबंधन, दीर्घकालिक रणनीति बनाने और निवेश योजनाओं को आगे बढ़ाने में मुश्किल हो रही है।
रेटिंग एजेंसी ने कहा कि भारत में सरकार नीतिगत मुद्दों के समाधान के लिए उद्योगों के साथ बातचीत में लगी है पर ‘अभी हमें कोई बड़ी उत्साहजनक कार्रवाई नहीं दिखाई नहीं दे रही है।’
स्टैंडर्ड एंड पुअर्स के मुताबिक भारत में पिछले दो साल से इस तरह का जोखिम बढ़ा है। भ्रष्टाचार और नीतिगत अनिश्चितताओं के कारण कंपनियों को अपने नकदी प्रवाह के प्रबंधन, दीर्घकालिक रणनीति बनाने और निवेश योजनाओं को आगे बढ़ाने में मुश्किल हो रही है।
रेटिंग एजेंसी ने कहा कि भारत में सरकार नीतिगत मुद्दों के समाधान के लिए उद्योगों के साथ बातचीत में लगी है पर ‘अभी हमें कोई बड़ी उत्साहजनक कार्रवाई नहीं दिखाई नहीं दे रही है।’
रेटिंग एजेंसी ने कहा कि भारत में सरकार नीतिगत मुद्दों के समाधान के लिए उद्योगों के साथ बातचीत में लगी है पर ‘अभी हमें कोई बड़ी उत्साहजनक कार्रवाई नहीं दिखाई नहीं दे रही है।’ | सारांश: भ्रष्टाचार और नीतिगत अनिश्चितताओं की धारणा ने भारतीय कंपनियों की वित्तीय साख के लिए के लिए देश विदेश से जुड़ा जोखिम जोखिम बढ़ा है। | 7 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: पाकिस्तान में आम चुनाव से पहले कराए गए एक सर्वेक्षण में कहा गया है कि नवाज शरीफ और इमरान खान की पार्टियों के बीच कांटे की टक्कर है।
‘हेरल्ड’ पत्रिका की ओर से कराए गए सर्वेक्षण के अनुसार 25 फीसदी लोगों ने कहा कि वे शरीफ की पार्टी पीएमएल-एन के लिए मतदान करेंगे, जबकि 24.98 फीसदी लोगों की पसंद इमरान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ रही। पाकिस्तान में 11 मई को आम चुनाव है।
सर्वेक्षण में शामिल लोगों में से सिर्फ 17.74 फीसदी लोगों ने कहा कि वे पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के लिए मतदान करेंगे। हाल ही में पीपीपी के नेतृत्व वाली सरकार ने अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा किया था।
पंजाब प्रांत में पीएमएल-एन लोगों की पहली पसंद के तौर पर सामने आई है। यहां पार्टी को पसंद करने वालों की संख्या 38.66 फीसदी रही। इमरान की पार्टी को पंजाब में 30.46 फीसदी लोगों ने पसंद किया। सर्वेक्षण के अनुसार इस प्रांत में पीपीपी के समर्थकों की तादाद महज 14.33 फीसदी है।टिप्पणियां
पीपीपी के पारंपरिक गढ़ सिंध में उसे सबसे अधिक लोगों ने इस सर्वेक्षण में पंसद किया है। यहां 35.21 फीसदी लोगों ने कहा कि वे पीपीपी के लिए मतदान करेंगे। सिंध में मुत्तहिदा कौमी मूवमेंट के लिए मतदान करने की हामी भरने वालों की संख्या 19.37 फीसदी रही। इमरान की तहरीक-ए-इंसाफ को 8.45 फीसदी और पीएमएल-एन को 8.1 फीसदी लोगों ने पसंद किया।
खबर पख्तूनख्वाह में 35.41 फीसदी लोगों ने कहा कि वे इमरान खान की पार्टी को मत देंगे। यहां पीएमएल-एन को पंसद करने वालों की संख्या 12.92 फीसदी रही। अवामी नेशनल पार्टी को मतदान करने के लिए 12.44 फीसदी लोगों ने हामी भरी।
‘हेरल्ड’ पत्रिका की ओर से कराए गए सर्वेक्षण के अनुसार 25 फीसदी लोगों ने कहा कि वे शरीफ की पार्टी पीएमएल-एन के लिए मतदान करेंगे, जबकि 24.98 फीसदी लोगों की पसंद इमरान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ रही। पाकिस्तान में 11 मई को आम चुनाव है।
सर्वेक्षण में शामिल लोगों में से सिर्फ 17.74 फीसदी लोगों ने कहा कि वे पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के लिए मतदान करेंगे। हाल ही में पीपीपी के नेतृत्व वाली सरकार ने अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा किया था।
पंजाब प्रांत में पीएमएल-एन लोगों की पहली पसंद के तौर पर सामने आई है। यहां पार्टी को पसंद करने वालों की संख्या 38.66 फीसदी रही। इमरान की पार्टी को पंजाब में 30.46 फीसदी लोगों ने पसंद किया। सर्वेक्षण के अनुसार इस प्रांत में पीपीपी के समर्थकों की तादाद महज 14.33 फीसदी है।टिप्पणियां
पीपीपी के पारंपरिक गढ़ सिंध में उसे सबसे अधिक लोगों ने इस सर्वेक्षण में पंसद किया है। यहां 35.21 फीसदी लोगों ने कहा कि वे पीपीपी के लिए मतदान करेंगे। सिंध में मुत्तहिदा कौमी मूवमेंट के लिए मतदान करने की हामी भरने वालों की संख्या 19.37 फीसदी रही। इमरान की तहरीक-ए-इंसाफ को 8.45 फीसदी और पीएमएल-एन को 8.1 फीसदी लोगों ने पसंद किया।
खबर पख्तूनख्वाह में 35.41 फीसदी लोगों ने कहा कि वे इमरान खान की पार्टी को मत देंगे। यहां पीएमएल-एन को पंसद करने वालों की संख्या 12.92 फीसदी रही। अवामी नेशनल पार्टी को मतदान करने के लिए 12.44 फीसदी लोगों ने हामी भरी।
सर्वेक्षण में शामिल लोगों में से सिर्फ 17.74 फीसदी लोगों ने कहा कि वे पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के लिए मतदान करेंगे। हाल ही में पीपीपी के नेतृत्व वाली सरकार ने अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा किया था।
पंजाब प्रांत में पीएमएल-एन लोगों की पहली पसंद के तौर पर सामने आई है। यहां पार्टी को पसंद करने वालों की संख्या 38.66 फीसदी रही। इमरान की पार्टी को पंजाब में 30.46 फीसदी लोगों ने पसंद किया। सर्वेक्षण के अनुसार इस प्रांत में पीपीपी के समर्थकों की तादाद महज 14.33 फीसदी है।टिप्पणियां
पीपीपी के पारंपरिक गढ़ सिंध में उसे सबसे अधिक लोगों ने इस सर्वेक्षण में पंसद किया है। यहां 35.21 फीसदी लोगों ने कहा कि वे पीपीपी के लिए मतदान करेंगे। सिंध में मुत्तहिदा कौमी मूवमेंट के लिए मतदान करने की हामी भरने वालों की संख्या 19.37 फीसदी रही। इमरान की तहरीक-ए-इंसाफ को 8.45 फीसदी और पीएमएल-एन को 8.1 फीसदी लोगों ने पसंद किया।
खबर पख्तूनख्वाह में 35.41 फीसदी लोगों ने कहा कि वे इमरान खान की पार्टी को मत देंगे। यहां पीएमएल-एन को पंसद करने वालों की संख्या 12.92 फीसदी रही। अवामी नेशनल पार्टी को मतदान करने के लिए 12.44 फीसदी लोगों ने हामी भरी।
पंजाब प्रांत में पीएमएल-एन लोगों की पहली पसंद के तौर पर सामने आई है। यहां पार्टी को पसंद करने वालों की संख्या 38.66 फीसदी रही। इमरान की पार्टी को पंजाब में 30.46 फीसदी लोगों ने पसंद किया। सर्वेक्षण के अनुसार इस प्रांत में पीपीपी के समर्थकों की तादाद महज 14.33 फीसदी है।टिप्पणियां
पीपीपी के पारंपरिक गढ़ सिंध में उसे सबसे अधिक लोगों ने इस सर्वेक्षण में पंसद किया है। यहां 35.21 फीसदी लोगों ने कहा कि वे पीपीपी के लिए मतदान करेंगे। सिंध में मुत्तहिदा कौमी मूवमेंट के लिए मतदान करने की हामी भरने वालों की संख्या 19.37 फीसदी रही। इमरान की तहरीक-ए-इंसाफ को 8.45 फीसदी और पीएमएल-एन को 8.1 फीसदी लोगों ने पसंद किया।
खबर पख्तूनख्वाह में 35.41 फीसदी लोगों ने कहा कि वे इमरान खान की पार्टी को मत देंगे। यहां पीएमएल-एन को पंसद करने वालों की संख्या 12.92 फीसदी रही। अवामी नेशनल पार्टी को मतदान करने के लिए 12.44 फीसदी लोगों ने हामी भरी।
पीपीपी के पारंपरिक गढ़ सिंध में उसे सबसे अधिक लोगों ने इस सर्वेक्षण में पंसद किया है। यहां 35.21 फीसदी लोगों ने कहा कि वे पीपीपी के लिए मतदान करेंगे। सिंध में मुत्तहिदा कौमी मूवमेंट के लिए मतदान करने की हामी भरने वालों की संख्या 19.37 फीसदी रही। इमरान की तहरीक-ए-इंसाफ को 8.45 फीसदी और पीएमएल-एन को 8.1 फीसदी लोगों ने पसंद किया।
खबर पख्तूनख्वाह में 35.41 फीसदी लोगों ने कहा कि वे इमरान खान की पार्टी को मत देंगे। यहां पीएमएल-एन को पंसद करने वालों की संख्या 12.92 फीसदी रही। अवामी नेशनल पार्टी को मतदान करने के लिए 12.44 फीसदी लोगों ने हामी भरी।
खबर पख्तूनख्वाह में 35.41 फीसदी लोगों ने कहा कि वे इमरान खान की पार्टी को मत देंगे। यहां पीएमएल-एन को पंसद करने वालों की संख्या 12.92 फीसदी रही। अवामी नेशनल पार्टी को मतदान करने के लिए 12.44 फीसदी लोगों ने हामी भरी। | सारांश: ‘हेरल्ड’ पत्रिका की ओर से कराए गए सर्वेक्षण के अनुसार 25 फीसदी लोगों ने कहा कि वे शरीफ की पार्टी पीएमएल-एन के लिए मतदान करेंगे, जबकि 24.98 फीसदी लोगों की पसंद इमरान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ रही। पाकिस्तान में 11 मई को आम चुनाव है। | 20 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: मुंबई कस्टम की एयर इंटेलिजेंस यूनिट ने आज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से करीब एक करोड़ 36 लाख के सोने के बिस्किट पकड़े. कुल 24 सोने के बिस्किट बैंकॉक से आए छह यात्रियों के पास से बरामद हुए. यात्री सोने के बिस्किट अपने अंडर गारमेंट में छुपाकर लाए थे. टिप्पणियां
मुम्बई कस्टम के मुताबिक उन्हें लुधियाना की डीआरआई यूनिट से खुफिया रिपोर्ट मिली थी कि बैंकॉक से आने वाली एयर इंडिया की उड़ान से कुछ लोग सोने की तस्करी कर रहे हैं. सूचना के आधार पर कस्टम यूनिट ने मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरे छह यात्रियों को पकड़ा.
पकड़े गए सभी यात्रियों के पास हिंदुस्तानी पासपोर्ट मिले हैं. तस्करों के पास से 15500 यूरो भी मिले हैं. सभी पर कस्टम कानून 1962 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है. सभी पर संगठित तस्कर गिरोह का सदस्य होने का शक है.
मुम्बई कस्टम के मुताबिक उन्हें लुधियाना की डीआरआई यूनिट से खुफिया रिपोर्ट मिली थी कि बैंकॉक से आने वाली एयर इंडिया की उड़ान से कुछ लोग सोने की तस्करी कर रहे हैं. सूचना के आधार पर कस्टम यूनिट ने मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरे छह यात्रियों को पकड़ा.
पकड़े गए सभी यात्रियों के पास हिंदुस्तानी पासपोर्ट मिले हैं. तस्करों के पास से 15500 यूरो भी मिले हैं. सभी पर कस्टम कानून 1962 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है. सभी पर संगठित तस्कर गिरोह का सदस्य होने का शक है.
पकड़े गए सभी यात्रियों के पास हिंदुस्तानी पासपोर्ट मिले हैं. तस्करों के पास से 15500 यूरो भी मिले हैं. सभी पर कस्टम कानून 1962 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है. सभी पर संगठित तस्कर गिरोह का सदस्य होने का शक है. | यहाँ एक सारांश है:बरामद 24 बिस्किटों की कीमत एक करोड़ 36 लाख रुपये
मुंबई कस्टम की एयर इंटेलिजेंस यूनिट ने की कार्रवाई
खुफिया रिपोर्ट में तस्करी के बारे में मिली थी सूचना | 18 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: फर्राटा किंग उसेन बोल्ट और महान तैराक माइकल फेल्प्स के ढेरों गोल्ड मेडल्स ने ओलिंपिक का पूरा परिदृश्य बदलकर रख दिया है. खेलों के महाकुंभ में उनकी आखिरी भागीदारी के बाद ओलिंपिक खेलों में एक बड़ा सूनापन आ जाएगा. यह देखना दिलचस्प होगा कि टोक्यो में वर्ष 2020 में होने वाले ओलिंपिक में 'नया नायक' बनकर कौन आएगा उभरेगा जो अपने खेल कौशल से दुनिया भर को चौंकाएगा.
अंतराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के प्रमुख थॉमस बाक ने दोनों खिलाड़ियों को ‘महानायक’ बताया है लेकिन 31वें ओलिंपिक खेल खत्म होने के बाद वह सोचेंगे कि इस सूनेपन को कैसा भरा जाए. 30 साल के बोल्ट ने 9 जबकि 31 साल के फेल्प्स ने 23 गोल्ड जीते हैं. अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक समिति (आईओसी) के अध्यक्ष थॉमस बाक ने कल कहा, ‘हमने ऐसे खिलाड़ी देखे हैं जो यहां आने से पहले ही महानायक बन गए थे, जिन्होंने महानायकों के तौर पर अपनी स्थिति मजबूत की जैसे कि माइकल फेल्प्स और उसेन बोल्ट.’ दोनों ने ओलंपिक में पहली बार हिस्सा लेने के बाद से लगातार अपना प्रदर्शन बेहतर किया. 15 साल के फेल्प्स ने पहली बार 2000 के सिडनी ओलिंपिक में 200 मीटर में हिस्सा लिया था जबकि 17 साल के बोल्ट 2004 के एथेंस ओलंपिक में 200 मीटर की अपनी हीट में पांचवें स्थान पर रहे थे.
लेकिन एथेंस ओलंपिक में फेल्प्स ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए छह गोल्ड एवं दो ब्रॉन्ज मेडल जीतकर मार्क स्पिट्ज के सात खिताबों के रिकॉर्ड को चुनौती दी थी. 2008 के बीजिंग ओलिंपिक में उन्होंने तैराकी की अपनी सभी आठ प्रतिस्पर्धाओं में आठ गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया जबकि बोल्ट ने वहां 100 मीटर, 200 मीटर और चार गुणा 100 मीटर दौड़ स्पर्धाओं में गोल्ड जीतकर बर्डस नेस्ट स्टेडियम में दर्शकों को अपना दीवाना बना दिया. 2012 के लंदन ओलिंपिक में बोल्ट ने फिर से तीनों स्पर्धाओं में गोल्ड जीता जबकि फेल्प्स ने अपने खाते में चार और गोल्ड जोड़े. टिप्पणियां
रियो में पांच गोल्ड जीतकर अमेरिकी तैराक ने 23 स्वर्ण सहित अपने पदकों की कुल संख्या 28 कर ली जबकि बोल्ट ने फिर से तीन स्पर्धाओं का गोल्ड जीत लिया. बोल्ट के नाम नौ ओलंपिक गोल्ड हैं. तमाम उपलब्धियों की वजह से ही बोल्ट ने अब कहा है, ‘मैंने दुनिया को साबित कर दिया कि मैं महानतम हूं.’ वहीं फेल्प्स ने कहा, ‘एक बच्चे के तौर पर मैंने अपने लिए एक ऐसा लक्ष्य तय किया था जिसे पहले कोई हासिल नहीं कर पाया. अब मैं अपने करियर पर नजर जमाऊं तो कह सकता हूं कि मैंने ऐसा कर दिखाया.’(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
अंतराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के प्रमुख थॉमस बाक ने दोनों खिलाड़ियों को ‘महानायक’ बताया है लेकिन 31वें ओलिंपिक खेल खत्म होने के बाद वह सोचेंगे कि इस सूनेपन को कैसा भरा जाए. 30 साल के बोल्ट ने 9 जबकि 31 साल के फेल्प्स ने 23 गोल्ड जीते हैं. अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक समिति (आईओसी) के अध्यक्ष थॉमस बाक ने कल कहा, ‘हमने ऐसे खिलाड़ी देखे हैं जो यहां आने से पहले ही महानायक बन गए थे, जिन्होंने महानायकों के तौर पर अपनी स्थिति मजबूत की जैसे कि माइकल फेल्प्स और उसेन बोल्ट.’ दोनों ने ओलंपिक में पहली बार हिस्सा लेने के बाद से लगातार अपना प्रदर्शन बेहतर किया. 15 साल के फेल्प्स ने पहली बार 2000 के सिडनी ओलिंपिक में 200 मीटर में हिस्सा लिया था जबकि 17 साल के बोल्ट 2004 के एथेंस ओलंपिक में 200 मीटर की अपनी हीट में पांचवें स्थान पर रहे थे.
लेकिन एथेंस ओलंपिक में फेल्प्स ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए छह गोल्ड एवं दो ब्रॉन्ज मेडल जीतकर मार्क स्पिट्ज के सात खिताबों के रिकॉर्ड को चुनौती दी थी. 2008 के बीजिंग ओलिंपिक में उन्होंने तैराकी की अपनी सभी आठ प्रतिस्पर्धाओं में आठ गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया जबकि बोल्ट ने वहां 100 मीटर, 200 मीटर और चार गुणा 100 मीटर दौड़ स्पर्धाओं में गोल्ड जीतकर बर्डस नेस्ट स्टेडियम में दर्शकों को अपना दीवाना बना दिया. 2012 के लंदन ओलिंपिक में बोल्ट ने फिर से तीनों स्पर्धाओं में गोल्ड जीता जबकि फेल्प्स ने अपने खाते में चार और गोल्ड जोड़े. टिप्पणियां
रियो में पांच गोल्ड जीतकर अमेरिकी तैराक ने 23 स्वर्ण सहित अपने पदकों की कुल संख्या 28 कर ली जबकि बोल्ट ने फिर से तीन स्पर्धाओं का गोल्ड जीत लिया. बोल्ट के नाम नौ ओलंपिक गोल्ड हैं. तमाम उपलब्धियों की वजह से ही बोल्ट ने अब कहा है, ‘मैंने दुनिया को साबित कर दिया कि मैं महानतम हूं.’ वहीं फेल्प्स ने कहा, ‘एक बच्चे के तौर पर मैंने अपने लिए एक ऐसा लक्ष्य तय किया था जिसे पहले कोई हासिल नहीं कर पाया. अब मैं अपने करियर पर नजर जमाऊं तो कह सकता हूं कि मैंने ऐसा कर दिखाया.’(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
लेकिन एथेंस ओलंपिक में फेल्प्स ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए छह गोल्ड एवं दो ब्रॉन्ज मेडल जीतकर मार्क स्पिट्ज के सात खिताबों के रिकॉर्ड को चुनौती दी थी. 2008 के बीजिंग ओलिंपिक में उन्होंने तैराकी की अपनी सभी आठ प्रतिस्पर्धाओं में आठ गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया जबकि बोल्ट ने वहां 100 मीटर, 200 मीटर और चार गुणा 100 मीटर दौड़ स्पर्धाओं में गोल्ड जीतकर बर्डस नेस्ट स्टेडियम में दर्शकों को अपना दीवाना बना दिया. 2012 के लंदन ओलिंपिक में बोल्ट ने फिर से तीनों स्पर्धाओं में गोल्ड जीता जबकि फेल्प्स ने अपने खाते में चार और गोल्ड जोड़े. टिप्पणियां
रियो में पांच गोल्ड जीतकर अमेरिकी तैराक ने 23 स्वर्ण सहित अपने पदकों की कुल संख्या 28 कर ली जबकि बोल्ट ने फिर से तीन स्पर्धाओं का गोल्ड जीत लिया. बोल्ट के नाम नौ ओलंपिक गोल्ड हैं. तमाम उपलब्धियों की वजह से ही बोल्ट ने अब कहा है, ‘मैंने दुनिया को साबित कर दिया कि मैं महानतम हूं.’ वहीं फेल्प्स ने कहा, ‘एक बच्चे के तौर पर मैंने अपने लिए एक ऐसा लक्ष्य तय किया था जिसे पहले कोई हासिल नहीं कर पाया. अब मैं अपने करियर पर नजर जमाऊं तो कह सकता हूं कि मैंने ऐसा कर दिखाया.’(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
रियो में पांच गोल्ड जीतकर अमेरिकी तैराक ने 23 स्वर्ण सहित अपने पदकों की कुल संख्या 28 कर ली जबकि बोल्ट ने फिर से तीन स्पर्धाओं का गोल्ड जीत लिया. बोल्ट के नाम नौ ओलंपिक गोल्ड हैं. तमाम उपलब्धियों की वजह से ही बोल्ट ने अब कहा है, ‘मैंने दुनिया को साबित कर दिया कि मैं महानतम हूं.’ वहीं फेल्प्स ने कहा, ‘एक बच्चे के तौर पर मैंने अपने लिए एक ऐसा लक्ष्य तय किया था जिसे पहले कोई हासिल नहीं कर पाया. अब मैं अपने करियर पर नजर जमाऊं तो कह सकता हूं कि मैंने ऐसा कर दिखाया.’(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) | यहाँ एक सारांश है:आईओसी प्रमुख बाक ने दोनों को बताया‘महानायक’
30 साल के बोल्ट ने चार ओलिंपिक में 9 गोल्ड जीते
31 वर्षीय फेल्पस ने पांच ओलिंपिक में जीत डाले 23 गोल्ड | 4 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहला वादा पूरा करने जा रहे हैं. भाजपा सरकार के 'संकल्प पत्र पर अमल के तहत लखनऊ पुलिस जोन के 11 जिलों में महिलाओं से छेड़खानी रोकने के लिए 'एंटी रोमियो दल' बनाने के आदेश दिए गए हैं. लखनऊ जोन के पुलिस महानिरीक्षक ए. सतीश गणेश ने मंगलवार को कहा कि जोन के 11 जिलों में एक माह का विशेष अभियान शुरू किया है और वह हर सप्ताह इसकी कार्रवाई की समीक्षा करेंगे.
उन्होंने कहा कि इस अभियान के प्रमुख बिंदुओं में महिलाओं/ छात्राओं के साथ छेड़खानी और अभद्र टिप्पणी की रोकथाम के लिये सम्बन्धित थाना स्तर पर 'एंटी रोमियो स्क्वॉड' का गठन करके कार्यवाही सुनिश्चित करने का आदेश शामिल है. साथ ही ऐसे अपराधी, जिनके खिलाफ महिलाओं के साथ छेड़खानी/बलात्कार जैसे गम्भीर अपराधों में आरोप पत्र दाखिल किया गया है, उनके खिलाफ गुण्डा एक्ट के तहत कार्यवाही की जाए.टिप्पणियां
मालूम हो कि भाजपा ने अपने चुनाव घोषणापत्र में वादा किया था कि महिलाओं और लड़कियों से छेड़छाड़ की घटनाओं पर सख्ती से रोक लगाने के लिए 'एंटी रोमियो दल' बनाए जाएंगे. इस तरह से योगी आदित्यनाथ ने अपने पहले वादू को पूरा करने की दिशा में कदम उठा दिए हैं.
पुलिस महानिरीक्षक के आदेश में गौकशी पर प्रभावी रूप से अंकुश लगाते हुए ऐसे मामलों में नामजद किये गये या प्रकाश में आये अभियुक्तों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने तथा पशु तस्करी पर कड़ाई से रोक लगाने को कहा गया है. गणेश ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि भूमाफिया तथा अवैध शराब की बिक्री तथा तस्करी करने वाले माफियाओं का चिन्हीकरण करके उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, गैंगस्टर एक्ट, गुण्डा एक्ट, शस्त्र निरस्त्रीकरण तथा हिस्ट्रीशीट खोली जाए. साथ ही पैरोल पर छूटे ऐसे अपराधियों की तत्काल गिरफ्तारी की जाए, जो पैरोल की शर्तो का उल्लंघन कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि इस अभियान के प्रमुख बिंदुओं में महिलाओं/ छात्राओं के साथ छेड़खानी और अभद्र टिप्पणी की रोकथाम के लिये सम्बन्धित थाना स्तर पर 'एंटी रोमियो स्क्वॉड' का गठन करके कार्यवाही सुनिश्चित करने का आदेश शामिल है. साथ ही ऐसे अपराधी, जिनके खिलाफ महिलाओं के साथ छेड़खानी/बलात्कार जैसे गम्भीर अपराधों में आरोप पत्र दाखिल किया गया है, उनके खिलाफ गुण्डा एक्ट के तहत कार्यवाही की जाए.टिप्पणियां
मालूम हो कि भाजपा ने अपने चुनाव घोषणापत्र में वादा किया था कि महिलाओं और लड़कियों से छेड़छाड़ की घटनाओं पर सख्ती से रोक लगाने के लिए 'एंटी रोमियो दल' बनाए जाएंगे. इस तरह से योगी आदित्यनाथ ने अपने पहले वादू को पूरा करने की दिशा में कदम उठा दिए हैं.
पुलिस महानिरीक्षक के आदेश में गौकशी पर प्रभावी रूप से अंकुश लगाते हुए ऐसे मामलों में नामजद किये गये या प्रकाश में आये अभियुक्तों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने तथा पशु तस्करी पर कड़ाई से रोक लगाने को कहा गया है. गणेश ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि भूमाफिया तथा अवैध शराब की बिक्री तथा तस्करी करने वाले माफियाओं का चिन्हीकरण करके उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, गैंगस्टर एक्ट, गुण्डा एक्ट, शस्त्र निरस्त्रीकरण तथा हिस्ट्रीशीट खोली जाए. साथ ही पैरोल पर छूटे ऐसे अपराधियों की तत्काल गिरफ्तारी की जाए, जो पैरोल की शर्तो का उल्लंघन कर रहे हैं.
मालूम हो कि भाजपा ने अपने चुनाव घोषणापत्र में वादा किया था कि महिलाओं और लड़कियों से छेड़छाड़ की घटनाओं पर सख्ती से रोक लगाने के लिए 'एंटी रोमियो दल' बनाए जाएंगे. इस तरह से योगी आदित्यनाथ ने अपने पहले वादू को पूरा करने की दिशा में कदम उठा दिए हैं.
पुलिस महानिरीक्षक के आदेश में गौकशी पर प्रभावी रूप से अंकुश लगाते हुए ऐसे मामलों में नामजद किये गये या प्रकाश में आये अभियुक्तों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने तथा पशु तस्करी पर कड़ाई से रोक लगाने को कहा गया है. गणेश ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि भूमाफिया तथा अवैध शराब की बिक्री तथा तस्करी करने वाले माफियाओं का चिन्हीकरण करके उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, गैंगस्टर एक्ट, गुण्डा एक्ट, शस्त्र निरस्त्रीकरण तथा हिस्ट्रीशीट खोली जाए. साथ ही पैरोल पर छूटे ऐसे अपराधियों की तत्काल गिरफ्तारी की जाए, जो पैरोल की शर्तो का उल्लंघन कर रहे हैं.
पुलिस महानिरीक्षक के आदेश में गौकशी पर प्रभावी रूप से अंकुश लगाते हुए ऐसे मामलों में नामजद किये गये या प्रकाश में आये अभियुक्तों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने तथा पशु तस्करी पर कड़ाई से रोक लगाने को कहा गया है. गणेश ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि भूमाफिया तथा अवैध शराब की बिक्री तथा तस्करी करने वाले माफियाओं का चिन्हीकरण करके उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, गैंगस्टर एक्ट, गुण्डा एक्ट, शस्त्र निरस्त्रीकरण तथा हिस्ट्रीशीट खोली जाए. साथ ही पैरोल पर छूटे ऐसे अपराधियों की तत्काल गिरफ्तारी की जाए, जो पैरोल की शर्तो का उल्लंघन कर रहे हैं. | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: लखनऊ जोन के जोन के 11 जिलों में एक माह का विशेष अभियान शुरू किया है
हर सप्ताह अभियान में की कार्रवाई की समीक्षा की जाएगी
भाजपा ने अपने चुनाव घोषणापत्र में वादा किया था वादा | 3 | ['hin'] |
एक सारांश बनाओ: धार्मिक गुरु आसाराम बापू का हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया है। इस दुर्घटना में चार अन्य लोगों के साथ आसाराम बापू घायल हो गए हैं।टिप्पणियां
आसाराम बापू एक धार्मिक आयोजन में भाग लेने के लिए गोधरा गए थे।
बताया जा रहा है कि तकनीकी खराबी के कारण यह क्रैश हुआ है। प्रत्यक्षदर्शी का कहना है कि तकनीकी खराबी की वजह से हेलीकॉप्टर को पायलट ने सूझ-बूझ का परिचय देते हुए जमीन के करीब ही ले जाकर लैंड किया। इसी लैंडिंग के बाद यह दुर्घटना घटी।
आसाराम बापू एक धार्मिक आयोजन में भाग लेने के लिए गोधरा गए थे।
बताया जा रहा है कि तकनीकी खराबी के कारण यह क्रैश हुआ है। प्रत्यक्षदर्शी का कहना है कि तकनीकी खराबी की वजह से हेलीकॉप्टर को पायलट ने सूझ-बूझ का परिचय देते हुए जमीन के करीब ही ले जाकर लैंड किया। इसी लैंडिंग के बाद यह दुर्घटना घटी।
बताया जा रहा है कि तकनीकी खराबी के कारण यह क्रैश हुआ है। प्रत्यक्षदर्शी का कहना है कि तकनीकी खराबी की वजह से हेलीकॉप्टर को पायलट ने सूझ-बूझ का परिचय देते हुए जमीन के करीब ही ले जाकर लैंड किया। इसी लैंडिंग के बाद यह दुर्घटना घटी। | संक्षिप्त सारांश: धार्मिक गुरु आसाराम बापू का हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया है। इस दुर्घटना में चार अन्य लोगों के साथ आसाराम बापू घायल हो गए हैं। | 8 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: ऋतिक रोशन (Hritik Roshan) की अपकमिंग फिल्म 'सुपर 30' (Super 30) में दर्शक अब उदित नारायण (Udit Narayan) की आवाज का भी लुत्फ उठा सकेंगे. हिंदी के मशहूर गायकार उदित नारायण (Udit Narayan) ने 'सुपर 30' (Super 30) के लिए 'जुगरफिया' गीत गाया है. इस गीत में मशहूर प्लेबैक सिंगर श्रेया घोषाल (Shreya Ghoshal) ने भी उदित नारायण का साथ दिया है. बताया जा रहा है कि फिल्म सुपर 30 का यह गाना एक रोमांटिक गाना है, जिसमें सिंगर उदित नारायण (Udit Narayan) श्रेया घोषाल की आवाज का जादू बिखेरा गया है. इस गाने को लेकर खुद सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार (Anand Kumar) भी बहुत उत्साहित हैं. 'सुपर 30' (Super 30) के 'जुगरफिया' गाने को अमिताभ भट्टाचार्या ने लिखा है, जबिक इसे कम्पोज करने का कार्य अजय-अतुल (Ajay-Atul) ने किया है.
फिल्म 'सुपर 30' (Super 30) में नए रोमांटिक गाने को लेकर आनंद कुमार काफी खुश हैं. अपनी यह खुशी आनंद कुमार (Anand Kumar) ने मीडिया से बातचीत के दौरान जाहिर की. मीडिया से बात करते हुए आनंद कुमार ने कहा 'ऋतिक रोशन की आने वाली फिल्म 'सुपर 30' में बॉलीवुड के बेहतरीन गायक उदित नारायण (Udit Narayan) ने 'जुगरफिया' गीत गाया है. यह गीत बिहार के लोगों को भी बहुत पसंद आएगा.' आनंद कुमार ने आगे बताया 'बिहार के लोगों के लिए यह काफी प्रसन्नता की बात है कि 'सुपर 30' पर बनी फिल्म के गाने में बिहार के ही गायक ने अपनी आवाज दी है.'
बता दें कि ऋतिक रोशन (Hritik Roshan) की अपकमिंग फिल्म 'सुपर 30' (Super 30) बिहार में जन्मे आनंद कुमार (Anand Kumar) के जीवन पर आधारित है. बिहार के आनंद कुमार ने अपने ज्ञान के जरिए आर्थिक रूप से पिछड़े बच्चों को आईआईटी परीक्षा पास करने की ट्रेनिंग दी थी. फिल्म 'सुपर 30' में ऋतिक रोशन आनंद कुमार का किरदार निभाएंगे. फिल्म में उनके अलावा मृनाल ठाकुर, पंकज त्रिपाठी, नंदिश सिंह और जॉनी लिवर जैसे कई कलाकार भी नजर आएंगे. ऋतिक रोशन की यह फिल्म 12 जुलाई को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी. इसका निर्देशन विकास बहल ने किया है. | यह एक सारांश है: फिल्म सुपर 30 में अपनी आवाज का जादू बिखेरेंगे उदित नारायण
फिल्म का रोमांटिक गाना 'जुगरफिया' गाएंगे उदित नारायण
गाने में प्लेबैक सिंगर श्रेया घोषाल भी देंगी साथ | 9 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: दिल्ली की एक अदालत ने हरियाणा के मिर्चपुर गांव में पिछले साल 70 वर्षीय एक दलित और उसकी विकलांग बेटी को जिंदा जला देने के मामले में आरोपी बनाए गए 97 में से 15 लोगों को विभिन्न आपराधिक धाराओं के तहत दोषी करार दिया। हालांकि, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कामिनी लाउ ने इन 15 आरोपियों को हत्या के मामले में दोषी करार नहीं दिया है। कुलविंदर, रामफल और राजेन्दर को 21 अप्रैल को ताराचंद के घर को आग के हवाले करने को लेकर आईपीसी की धारा 304 के तहत दोषी करार दिया गया। गांव के प्रभावी जाटों और दलितों के बीच जातीय विवाद के बाद यह घटना हुई थी। इन 15 आरोपियों में से 12 को आगजनी, दंगा करने और गैर कानूनी रूप से एकत्र होने के आरोप में दोषी करार दिया गया। अदालत ने अपने फैसले में इस मामले में हरियाणा पुलिस की खिंचाई करते हुए कहा, जिस तरह से पूरे मामले को निपटाया गया वह अनुचित है। गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल नौ दिसंबर को इस मामले को दिल्ली स्थानांतरित कर दिया था। हरियाणा में निष्पक्ष सुनवाई नहीं होने की पीड़ितों की अर्जी पर ऐसा किया गया था। न्यायाधीश ने कहा कि राजनीतिक दबाव के चलते कई आरोपियों को फंसाए जाने की संभावना खारिज नहीं की जा सकती है। अदालत ने हिसार जिले के नारनौंद पुलिस थाना के प्रभारी विनोद के. काजल सहित 82 आरोपियों को निर्दोष करार दिया। | यह एक सारांश है: दिल्ली की एक अदालत ने मिर्चपुर में पिछले साल 70 वर्षीय एक दलित और उसकी विकलांग बेटी को जिंदा जला देने के मामले में 15 लोगों को दोषी करार दिया। | 24 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: केंद्र सरकार ने लोकपाल कानून के अनिवार्य प्रावधान के तहत केंद्रीय कर्मचारियों की ओर से संपत्तियों और देनदारियों का ब्यौरा देने की समयसीमा को अनिश्चित समय के लिए बढ़ा दिया है.
सरकार की ओर से इस संदर्भ में नया प्रारूप और नियमावली को अंतिम रूप दिया जा रहा है. पहले इस संपत्ति और देनदारियों का ब्यौरा देने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर तय की गई थी.
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है, 'सरकारी नौकरशाहों की ओर से संपत्तियों और देनदारियों का ब्यौरा देने की अभी जरूरत नहीं है. सरकार नई नियमावली को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है. इन नियमों को एक तय प्रारूप, ढंग और समसयीमा में अधिसूचित किया जाएगा, जिसके तहत सरकारी नौकरशाह लोकपाल अधिनियम के संशोधित प्रावधान के तहत अपनी संपत्तियों और देनदारियों का ब्यौरा दे सकेंगे'. आदेश में कहा गया, 'ऐसे में सभी सरकारी नौकरशाह नए नियमों के तहत संपत्तियों और देनदारियों का ब्यौरा दे सकेंगे'. देश में करीब 50.68 लाख केंद्रीय कर्मचारी हैं.टिप्पणियां
लोकपाल कानून के नियमों के अनुसार, सरकारी नौकरशाहों को हर साल 31 मार्च को अथवा 31 जुलाई तक अपनी संपत्तियों और देनदारियों का ब्यौरा देना होगा. (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
सरकार की ओर से इस संदर्भ में नया प्रारूप और नियमावली को अंतिम रूप दिया जा रहा है. पहले इस संपत्ति और देनदारियों का ब्यौरा देने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर तय की गई थी.
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है, 'सरकारी नौकरशाहों की ओर से संपत्तियों और देनदारियों का ब्यौरा देने की अभी जरूरत नहीं है. सरकार नई नियमावली को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है. इन नियमों को एक तय प्रारूप, ढंग और समसयीमा में अधिसूचित किया जाएगा, जिसके तहत सरकारी नौकरशाह लोकपाल अधिनियम के संशोधित प्रावधान के तहत अपनी संपत्तियों और देनदारियों का ब्यौरा दे सकेंगे'. आदेश में कहा गया, 'ऐसे में सभी सरकारी नौकरशाह नए नियमों के तहत संपत्तियों और देनदारियों का ब्यौरा दे सकेंगे'. देश में करीब 50.68 लाख केंद्रीय कर्मचारी हैं.टिप्पणियां
लोकपाल कानून के नियमों के अनुसार, सरकारी नौकरशाहों को हर साल 31 मार्च को अथवा 31 जुलाई तक अपनी संपत्तियों और देनदारियों का ब्यौरा देना होगा. (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है, 'सरकारी नौकरशाहों की ओर से संपत्तियों और देनदारियों का ब्यौरा देने की अभी जरूरत नहीं है. सरकार नई नियमावली को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है. इन नियमों को एक तय प्रारूप, ढंग और समसयीमा में अधिसूचित किया जाएगा, जिसके तहत सरकारी नौकरशाह लोकपाल अधिनियम के संशोधित प्रावधान के तहत अपनी संपत्तियों और देनदारियों का ब्यौरा दे सकेंगे'. आदेश में कहा गया, 'ऐसे में सभी सरकारी नौकरशाह नए नियमों के तहत संपत्तियों और देनदारियों का ब्यौरा दे सकेंगे'. देश में करीब 50.68 लाख केंद्रीय कर्मचारी हैं.टिप्पणियां
लोकपाल कानून के नियमों के अनुसार, सरकारी नौकरशाहों को हर साल 31 मार्च को अथवा 31 जुलाई तक अपनी संपत्तियों और देनदारियों का ब्यौरा देना होगा. (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
लोकपाल कानून के नियमों के अनुसार, सरकारी नौकरशाहों को हर साल 31 मार्च को अथवा 31 जुलाई तक अपनी संपत्तियों और देनदारियों का ब्यौरा देना होगा. (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) | यहाँ एक सारांश है:ब्यौरा देने की समयसीमा को अनिश्चित समय के लिए बढाया गया.
संपत्ति-देनदारियों का ब्यौरा देने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर तय की गई थी.
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की ओर से जारी आदेश में यह कहा गया. | 12 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: बंबई शेयर बाजार (बीएसई) ने जुलाई-सितंबर तिमाही के लिए सेंसेक्स में जबर्दस्त उतार-चढ़ाव के मामले में 3,475 अंक का खटका तय किया है।टिप्पणियां
इसका मतलब, अगर इस दौरान कारोबार में भारी अस्थिरता के चलते सेंसेक्स किसी दिन 20 प्रतिशत या 3,475 अंक ऊपर या नीचे चला जाता है तो कारोबार दिनभर के लिए रोक दिया जाएगा।
बीएसई द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक, संवेदी सूचकांक में 10 प्रतिशत, 15 प्रतिशत और 20 प्रतिशत के उतार-चढ़ाव की स्थित में सर्किट ब्रेकर लागू होंगे जिनमें कारोबार कुछ समय के लिए रोका जाता है।
इसका मतलब, अगर इस दौरान कारोबार में भारी अस्थिरता के चलते सेंसेक्स किसी दिन 20 प्रतिशत या 3,475 अंक ऊपर या नीचे चला जाता है तो कारोबार दिनभर के लिए रोक दिया जाएगा।
बीएसई द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक, संवेदी सूचकांक में 10 प्रतिशत, 15 प्रतिशत और 20 प्रतिशत के उतार-चढ़ाव की स्थित में सर्किट ब्रेकर लागू होंगे जिनमें कारोबार कुछ समय के लिए रोका जाता है।
बीएसई द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक, संवेदी सूचकांक में 10 प्रतिशत, 15 प्रतिशत और 20 प्रतिशत के उतार-चढ़ाव की स्थित में सर्किट ब्रेकर लागू होंगे जिनमें कारोबार कुछ समय के लिए रोका जाता है। | संक्षिप्त सारांश: बंबई शेयर बाजार (बीएसई) ने जुलाई-सितंबर तिमाही के लिए सेंसेक्स में जबर्दस्त उतार-चढ़ाव के मामले में 3,475 अंक का खटका तय किया है। | 23 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: दिल्ली में सोमवार को एनटी अवॉर्ड्स का ऐलान किया गया। इस मौके पर एनडीटीवी को कई कैटेगरी में अवॉर्ड मिले हैं।
इनमें बेस्ट इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट का अवॉर्ड सुनील सिंह की रिपोर्ट 'बांग्लादेश कनेक्शन’ को मिला है। अफ़शां अंजुम को बेस्ट न्यूज़ स्पोर्ट्स प्रेजेंटर और शरद शर्मा को बेस्ट रिपोर्टर का अवॉर्ड मिला।
एनडीटीवी ग्रुप एडिटर बरखा दत्त को बेस्ट टीवी न्यूज़ ऐंकर का अवॉर्ड दिया गया।टिप्पणियां
बेस्ट इंग्लिश स्पोर्ट्स प्रेजेंटर निखिल नाज़ और सोनल मेहरोत्रा को बेस्ट युवा टीवी पत्रकार का अवॉर्ड मिला।
इनके अलावा बेस्ट एंटरटेनमेंट फीचर के लिए 'जय जवान' को चुना गया। साथ ही 'वतन के रखवाले' को बेस्ट शो पैकेजिंग का अवॉर्ड मिला है।
इनमें बेस्ट इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट का अवॉर्ड सुनील सिंह की रिपोर्ट 'बांग्लादेश कनेक्शन’ को मिला है। अफ़शां अंजुम को बेस्ट न्यूज़ स्पोर्ट्स प्रेजेंटर और शरद शर्मा को बेस्ट रिपोर्टर का अवॉर्ड मिला।
एनडीटीवी ग्रुप एडिटर बरखा दत्त को बेस्ट टीवी न्यूज़ ऐंकर का अवॉर्ड दिया गया।टिप्पणियां
बेस्ट इंग्लिश स्पोर्ट्स प्रेजेंटर निखिल नाज़ और सोनल मेहरोत्रा को बेस्ट युवा टीवी पत्रकार का अवॉर्ड मिला।
इनके अलावा बेस्ट एंटरटेनमेंट फीचर के लिए 'जय जवान' को चुना गया। साथ ही 'वतन के रखवाले' को बेस्ट शो पैकेजिंग का अवॉर्ड मिला है।
एनडीटीवी ग्रुप एडिटर बरखा दत्त को बेस्ट टीवी न्यूज़ ऐंकर का अवॉर्ड दिया गया।टिप्पणियां
बेस्ट इंग्लिश स्पोर्ट्स प्रेजेंटर निखिल नाज़ और सोनल मेहरोत्रा को बेस्ट युवा टीवी पत्रकार का अवॉर्ड मिला।
इनके अलावा बेस्ट एंटरटेनमेंट फीचर के लिए 'जय जवान' को चुना गया। साथ ही 'वतन के रखवाले' को बेस्ट शो पैकेजिंग का अवॉर्ड मिला है।
बेस्ट इंग्लिश स्पोर्ट्स प्रेजेंटर निखिल नाज़ और सोनल मेहरोत्रा को बेस्ट युवा टीवी पत्रकार का अवॉर्ड मिला।
इनके अलावा बेस्ट एंटरटेनमेंट फीचर के लिए 'जय जवान' को चुना गया। साथ ही 'वतन के रखवाले' को बेस्ट शो पैकेजिंग का अवॉर्ड मिला है।
इनके अलावा बेस्ट एंटरटेनमेंट फीचर के लिए 'जय जवान' को चुना गया। साथ ही 'वतन के रखवाले' को बेस्ट शो पैकेजिंग का अवॉर्ड मिला है। | दिल्ली में सोमवार को एनटी अवॉर्ड्स का ऐलान किया गया। इस मौके पर एनडीटीवी को कई कैटेगरी में अवॉर्ड मिले हैं। | 1 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: बोफोर्स घोटाले में स्वीडिश पुलिस के पूर्व प्रमुख स्टेन लिंडस्ट्रोम ने कहा है कि इस घोटाले में अमिताभ बच्चन की कोई भूमिका नहीं थी और उनका नाम प्लांट किया गया था। लिंडस्ट्रोम के इस बयान के बाद अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग पर खुशी जाहिर करते हुए लिखा है कि मेरा भरोसा बहाल हुआ है।
उन्होंने उन चार वर्षों को याद किया है, जब परिवार ने एकजुट होकर उन आरोपों का सामना किया। अमिताभ ने लिखा है कि घटना के 25 साल बाद उस शख्स की तरफ से मैं अपने बेकसूर होने की बात सुन रहा हूं, जिसने इन आरोपों की जांच शुरू की थी...उस गलती की, जो मुझसे कभी नहीं हुई। उस धब्बे की जो मुझ पर लगा रहा, उस कलंक की जो मुझ पर थोपा जाता रहा। कोई कभी उन सालों, महीनों, दिनों और घंटों की यातना को नहीं समझ सकेगा, जरा भी नहीं अंदाजा नहीं लगा सकेगा, जो मैंने झेली। वहीं अमिताभ बच्चन की पत्नी जया बच्चन ने कहा है कि आखिरकार सच्चाई सामने आ गई है। ईश्वर महान है।
उन्होंने उन चार वर्षों को याद किया है, जब परिवार ने एकजुट होकर उन आरोपों का सामना किया। अमिताभ ने लिखा है कि घटना के 25 साल बाद उस शख्स की तरफ से मैं अपने बेकसूर होने की बात सुन रहा हूं, जिसने इन आरोपों की जांच शुरू की थी...उस गलती की, जो मुझसे कभी नहीं हुई। उस धब्बे की जो मुझ पर लगा रहा, उस कलंक की जो मुझ पर थोपा जाता रहा। कोई कभी उन सालों, महीनों, दिनों और घंटों की यातना को नहीं समझ सकेगा, जरा भी नहीं अंदाजा नहीं लगा सकेगा, जो मैंने झेली। वहीं अमिताभ बच्चन की पत्नी जया बच्चन ने कहा है कि आखिरकार सच्चाई सामने आ गई है। ईश्वर महान है। | बोफोर्स घोटाले में स्वीडिश पुलिस के पूर्व प्रमुख स्टेन लिंडस्ट्रोम ने कहा है कि इस घोटाले में अमिताभ बच्चन की कोई भूमिका नहीं थी और उनका नाम प्लांट किया गया था। | 28 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: पाकिस्तान ने आतंकवादी संगठन अलकायदा के प्रमुख ओसामा बिन लादेन के परिवार के 16 सदस्यों के निर्वासन की तैयारियां शुरू कर दी हैं। मंगलवार की मध्यरात्रि तक इन सदस्यों की 45 दिन की जेल की सजा पूरी हो जाएगी।
ओसामा को पिछले साल मई में एबटाबाद में अमेरिकी कमांडोज ने मार गिराया था। समाचार पत्र 'डॉन' ने एक सूत्र के हवाले से लिखा है कि गृह मंत्रालय में ओसामा के परिवार के सदस्यों के निर्वासन के लिए तैयारियां की जा रही हैं।टिप्पणियां
ओसामा की तीन पत्नियों में दो सऊदी व एक यमनी है। उसके 13 बच्चे हैं। इन सभी को तीन मार्च को हिरासत में लिया गया था। सभी को एक घर में रखा गया था और इस घर को उप-जेल घोषित किया गया था।
उन्हें वैध यात्रा दस्तावेजों के बिना पाकिस्तान में प्रवेश करने व गैरकानूनी रूप से यहां रहने के मामले में दोषी पाया गया था। ओसामा परिवार के वकील आमिर खलिल ने बताया कि सभी सदस्यों के यात्रा दस्तावेज तैयार हैं।
ओसामा को पिछले साल मई में एबटाबाद में अमेरिकी कमांडोज ने मार गिराया था। समाचार पत्र 'डॉन' ने एक सूत्र के हवाले से लिखा है कि गृह मंत्रालय में ओसामा के परिवार के सदस्यों के निर्वासन के लिए तैयारियां की जा रही हैं।टिप्पणियां
ओसामा की तीन पत्नियों में दो सऊदी व एक यमनी है। उसके 13 बच्चे हैं। इन सभी को तीन मार्च को हिरासत में लिया गया था। सभी को एक घर में रखा गया था और इस घर को उप-जेल घोषित किया गया था।
उन्हें वैध यात्रा दस्तावेजों के बिना पाकिस्तान में प्रवेश करने व गैरकानूनी रूप से यहां रहने के मामले में दोषी पाया गया था। ओसामा परिवार के वकील आमिर खलिल ने बताया कि सभी सदस्यों के यात्रा दस्तावेज तैयार हैं।
ओसामा की तीन पत्नियों में दो सऊदी व एक यमनी है। उसके 13 बच्चे हैं। इन सभी को तीन मार्च को हिरासत में लिया गया था। सभी को एक घर में रखा गया था और इस घर को उप-जेल घोषित किया गया था।
उन्हें वैध यात्रा दस्तावेजों के बिना पाकिस्तान में प्रवेश करने व गैरकानूनी रूप से यहां रहने के मामले में दोषी पाया गया था। ओसामा परिवार के वकील आमिर खलिल ने बताया कि सभी सदस्यों के यात्रा दस्तावेज तैयार हैं।
उन्हें वैध यात्रा दस्तावेजों के बिना पाकिस्तान में प्रवेश करने व गैरकानूनी रूप से यहां रहने के मामले में दोषी पाया गया था। ओसामा परिवार के वकील आमिर खलिल ने बताया कि सभी सदस्यों के यात्रा दस्तावेज तैयार हैं। | सारांश: पाकिस्तान ने आतंकवादी संगठन अलकायदा के प्रमुख ओसामा बिन लादेन के परिवार के 16 सदस्यों के निर्वासन की तैयारियां शुरू कर दी हैं। | 20 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन के बाद नालंदा विश्वविद्यालय के दूसरे चांसलर जॉर्ज यो ने यह कहते हुए पद से इस्तीफा दे दिया कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता को प्रभावित किया जा रहा है, क्योंकि उन्हें संस्थान में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर 'नोटिस तक नहीं दिया गया.'
यो ने विश्वविद्यालय के पूर्ववर्ती बोर्ड के सदस्यों को भेजे एक बयान में कहा, 'जिन परिस्थितियों में नालंदा विश्वविद्यालय में नेतृत्व परिवर्तन अचानक और तुरंत क्रियान्वित किया गया, वह विश्वविद्यालय के विकास के लिए परेशानी पैदा करने वाला तथा संभवत: नुकसानदायक है.'
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने विश्वविद्यालय के विजिटर के रूप में 21 नवंबर को बोर्ड का पुनर्गठन किया था, जिससे प्रतिष्ठित संस्थान की संचालन इकाई का सरकार द्वारा पुनर्गठन किए जाने के बाद संस्थान के साथ सेन का लगभग एक दशक पुरान संबंध खत्म हो गया था.
यो ने कहा, 'यह समझ से परे है कि मुझे चांसलर के रूप में इसका नोटिस क्यों नहीं दिया गया. जब मुझे पिछले साल अमर्त्य सेन से जिम्मेदारी लेने को आमंत्रित किया गया था तो मुझे बार-बार आश्वासन दिया गया था कि विश्वविद्यालय को स्वायत्तता रहेगी. अब ऐसा प्रतीत नहीं होता.' उन्होंने कहा, 'तदनुसार, और गहरे दुख के साथ मैंने विजिटर को चांसलर के रूप में अपना त्यागपत्र भेज दिया है.'
सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रपति ने विश्वविद्यालय के विजिटर के रूप में अपनी क्षमता के तहत नालंदा विश्वविद्यालय कानून 2010 के प्रावधानों के अनुरूप संचालन बोर्ड के पुनर्गठन को मंजूरी दे दी. उन्होंने वाइस चांसलर का अस्थाई प्रभार विश्वविद्यालय के सबसे वरिष्ठ डीन को दिए जाने को भी मंजूरी दे दी, क्योंकि मौजूदा वाइस चांसलर गोपा सबरवाल का एक साल का विस्तार गुरुवार को पूरा हो गया.टिप्पणियां
नए वाइस चांसलर की नियुक्ति होने तक यह व्यवस्था होगी. नए संचालन बोर्ड में 14 सदस्य होंगे, जिसकी अध्यक्षता चांसलर करेंगे. इसमें वाइस चांसलर, भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया, लाओस पीडीआर और थाईलैंड द्वारा नामांकित पांच सदस्य भी होंगे. पूर्व राजस्व सचिव एनके सिंह भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे. वह नालंदा मेंटर्स ग्रुप के सदस्य भी थे.(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
यो ने विश्वविद्यालय के पूर्ववर्ती बोर्ड के सदस्यों को भेजे एक बयान में कहा, 'जिन परिस्थितियों में नालंदा विश्वविद्यालय में नेतृत्व परिवर्तन अचानक और तुरंत क्रियान्वित किया गया, वह विश्वविद्यालय के विकास के लिए परेशानी पैदा करने वाला तथा संभवत: नुकसानदायक है.'
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने विश्वविद्यालय के विजिटर के रूप में 21 नवंबर को बोर्ड का पुनर्गठन किया था, जिससे प्रतिष्ठित संस्थान की संचालन इकाई का सरकार द्वारा पुनर्गठन किए जाने के बाद संस्थान के साथ सेन का लगभग एक दशक पुरान संबंध खत्म हो गया था.
यो ने कहा, 'यह समझ से परे है कि मुझे चांसलर के रूप में इसका नोटिस क्यों नहीं दिया गया. जब मुझे पिछले साल अमर्त्य सेन से जिम्मेदारी लेने को आमंत्रित किया गया था तो मुझे बार-बार आश्वासन दिया गया था कि विश्वविद्यालय को स्वायत्तता रहेगी. अब ऐसा प्रतीत नहीं होता.' उन्होंने कहा, 'तदनुसार, और गहरे दुख के साथ मैंने विजिटर को चांसलर के रूप में अपना त्यागपत्र भेज दिया है.'
सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रपति ने विश्वविद्यालय के विजिटर के रूप में अपनी क्षमता के तहत नालंदा विश्वविद्यालय कानून 2010 के प्रावधानों के अनुरूप संचालन बोर्ड के पुनर्गठन को मंजूरी दे दी. उन्होंने वाइस चांसलर का अस्थाई प्रभार विश्वविद्यालय के सबसे वरिष्ठ डीन को दिए जाने को भी मंजूरी दे दी, क्योंकि मौजूदा वाइस चांसलर गोपा सबरवाल का एक साल का विस्तार गुरुवार को पूरा हो गया.टिप्पणियां
नए वाइस चांसलर की नियुक्ति होने तक यह व्यवस्था होगी. नए संचालन बोर्ड में 14 सदस्य होंगे, जिसकी अध्यक्षता चांसलर करेंगे. इसमें वाइस चांसलर, भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया, लाओस पीडीआर और थाईलैंड द्वारा नामांकित पांच सदस्य भी होंगे. पूर्व राजस्व सचिव एनके सिंह भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे. वह नालंदा मेंटर्स ग्रुप के सदस्य भी थे.(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने विश्वविद्यालय के विजिटर के रूप में 21 नवंबर को बोर्ड का पुनर्गठन किया था, जिससे प्रतिष्ठित संस्थान की संचालन इकाई का सरकार द्वारा पुनर्गठन किए जाने के बाद संस्थान के साथ सेन का लगभग एक दशक पुरान संबंध खत्म हो गया था.
यो ने कहा, 'यह समझ से परे है कि मुझे चांसलर के रूप में इसका नोटिस क्यों नहीं दिया गया. जब मुझे पिछले साल अमर्त्य सेन से जिम्मेदारी लेने को आमंत्रित किया गया था तो मुझे बार-बार आश्वासन दिया गया था कि विश्वविद्यालय को स्वायत्तता रहेगी. अब ऐसा प्रतीत नहीं होता.' उन्होंने कहा, 'तदनुसार, और गहरे दुख के साथ मैंने विजिटर को चांसलर के रूप में अपना त्यागपत्र भेज दिया है.'
सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रपति ने विश्वविद्यालय के विजिटर के रूप में अपनी क्षमता के तहत नालंदा विश्वविद्यालय कानून 2010 के प्रावधानों के अनुरूप संचालन बोर्ड के पुनर्गठन को मंजूरी दे दी. उन्होंने वाइस चांसलर का अस्थाई प्रभार विश्वविद्यालय के सबसे वरिष्ठ डीन को दिए जाने को भी मंजूरी दे दी, क्योंकि मौजूदा वाइस चांसलर गोपा सबरवाल का एक साल का विस्तार गुरुवार को पूरा हो गया.टिप्पणियां
नए वाइस चांसलर की नियुक्ति होने तक यह व्यवस्था होगी. नए संचालन बोर्ड में 14 सदस्य होंगे, जिसकी अध्यक्षता चांसलर करेंगे. इसमें वाइस चांसलर, भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया, लाओस पीडीआर और थाईलैंड द्वारा नामांकित पांच सदस्य भी होंगे. पूर्व राजस्व सचिव एनके सिंह भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे. वह नालंदा मेंटर्स ग्रुप के सदस्य भी थे.(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
यो ने कहा, 'यह समझ से परे है कि मुझे चांसलर के रूप में इसका नोटिस क्यों नहीं दिया गया. जब मुझे पिछले साल अमर्त्य सेन से जिम्मेदारी लेने को आमंत्रित किया गया था तो मुझे बार-बार आश्वासन दिया गया था कि विश्वविद्यालय को स्वायत्तता रहेगी. अब ऐसा प्रतीत नहीं होता.' उन्होंने कहा, 'तदनुसार, और गहरे दुख के साथ मैंने विजिटर को चांसलर के रूप में अपना त्यागपत्र भेज दिया है.'
सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रपति ने विश्वविद्यालय के विजिटर के रूप में अपनी क्षमता के तहत नालंदा विश्वविद्यालय कानून 2010 के प्रावधानों के अनुरूप संचालन बोर्ड के पुनर्गठन को मंजूरी दे दी. उन्होंने वाइस चांसलर का अस्थाई प्रभार विश्वविद्यालय के सबसे वरिष्ठ डीन को दिए जाने को भी मंजूरी दे दी, क्योंकि मौजूदा वाइस चांसलर गोपा सबरवाल का एक साल का विस्तार गुरुवार को पूरा हो गया.टिप्पणियां
नए वाइस चांसलर की नियुक्ति होने तक यह व्यवस्था होगी. नए संचालन बोर्ड में 14 सदस्य होंगे, जिसकी अध्यक्षता चांसलर करेंगे. इसमें वाइस चांसलर, भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया, लाओस पीडीआर और थाईलैंड द्वारा नामांकित पांच सदस्य भी होंगे. पूर्व राजस्व सचिव एनके सिंह भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे. वह नालंदा मेंटर्स ग्रुप के सदस्य भी थे.(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रपति ने विश्वविद्यालय के विजिटर के रूप में अपनी क्षमता के तहत नालंदा विश्वविद्यालय कानून 2010 के प्रावधानों के अनुरूप संचालन बोर्ड के पुनर्गठन को मंजूरी दे दी. उन्होंने वाइस चांसलर का अस्थाई प्रभार विश्वविद्यालय के सबसे वरिष्ठ डीन को दिए जाने को भी मंजूरी दे दी, क्योंकि मौजूदा वाइस चांसलर गोपा सबरवाल का एक साल का विस्तार गुरुवार को पूरा हो गया.टिप्पणियां
नए वाइस चांसलर की नियुक्ति होने तक यह व्यवस्था होगी. नए संचालन बोर्ड में 14 सदस्य होंगे, जिसकी अध्यक्षता चांसलर करेंगे. इसमें वाइस चांसलर, भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया, लाओस पीडीआर और थाईलैंड द्वारा नामांकित पांच सदस्य भी होंगे. पूर्व राजस्व सचिव एनके सिंह भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे. वह नालंदा मेंटर्स ग्रुप के सदस्य भी थे.(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
नए वाइस चांसलर की नियुक्ति होने तक यह व्यवस्था होगी. नए संचालन बोर्ड में 14 सदस्य होंगे, जिसकी अध्यक्षता चांसलर करेंगे. इसमें वाइस चांसलर, भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया, लाओस पीडीआर और थाईलैंड द्वारा नामांकित पांच सदस्य भी होंगे. पूर्व राजस्व सचिव एनके सिंह भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे. वह नालंदा मेंटर्स ग्रुप के सदस्य भी थे.(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) | यह एक सारांश है: नालंदा विश्वविद्यालय के दूसरे चांसलर थे जॉर्ज यो
उन्होंने विश्वविद्यालय की स्वायत्तता को प्रभावित किए जाने का आरोप लगाया
कहा- संस्थान में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर 'नोटिस तक नहीं दिया गया' | 2 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: बैंकों से लोन को लेकर डिफाल्टर हुए किंगफिशर एयरलाइंस के मालिक विजय माल्या अवमानना मामले की आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट ने अब अगली सुनवाई के लिए 14 जुलाई की तारीख तय की है. कोर्ट में नोटिस के बावजूद माल्या पेश नहीं हुए. सुनवाई के दौरान केंद्रीय गृमंत्रालय की ओर से वकील भी नहीं आए.
9 मई को सुप्रीम कोर्ट ने माल्या को अवमानना का दोषी माना था क्योंकि उन्होंने संपत्ति का पूरा ब्योरा नहीं दिया. इससे पहले कोर्ट ने 10 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया था. इस दौरान सजा पर सुनवाई होगी.
9 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने विजय माल्या के खिलाफ अदालत की अवमानना और डिएगो डील से माल्या को मिले 40 मिलियन यूएस डॉलर पर अपना आदेश सुरक्षित रखा था. बैंकों ने मांग की है कि 40 मिलियन यूएस डॉलर जो डिएगो डील से मिले थे उनको सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा कराया जाए. सुप्रीम कोर्ट का आदेश सरकार के यूके से प्रत्यार्पण में भी मदद करेगा.
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने माल्या से पूछा था कि आपने जो कोर्ट में अपनी सम्पतियों के बारे में जानकारी दी थी वो सही है या नहीं ? क्या आपने कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश का उल्लंघन तो नहीं किया ? क्योंकि कर्नाटक हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि माल्या बिना कोर्ट के अनुमति कोई भी ट्रांजेक्शन नहीं कर सकते. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा था कि माल्या के खिलाफ कोर्ट के आदेश को कैसे लागू किया जा सकता है.
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि माल्या को वापस लाने की कोशिश की जा रही है. वहीं SBI ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि माल्या के ऊपर 9200 करोड़ रुपये का बकाया है. बैकों ने कहा- माल्या की याचिका पर सुनवाई नहीं होनी चाहिए, क्योंकि वह बार-बार कोर्ट के आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं. विजय माल्या ने कोर्ट में कहा था कि उनके पास इतने पैसे नहीं है कि वे 9200 करोड़ रुपये बैंक के कर्ज़ को अदा कर पाएं, क्योंकि उनकी सभी सम्पतियों को पहले ही जब्त कर लिया गया है.
विजय माल्या ने सुप्रीम कोर्ट में कहा उनके पास जो भी संपत्ति है वह जब्त की जा चुकी है. अब उनके पास पैसे नहीं हैं. विजय माल्या ने कहा कि जो 2000 करोड़ की उनकी संपत्ति को बैंक ने जब्त की है, बैंक चाहे तो उसे बेच सकता है. सुप्रीम कोर्ट किंगफिशर एयरलाइंस के मुखिया विजय माल्या के खिलाफ बैंकों की दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था. सुनवाई में बैंकों ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की थी और कहा था कि कोर्ट किंगफिशर एयरलाइंस के मुखिया विजय माल्या को आदेश दे कि वह डिएगो डील से मिले 40 मिलियन यूएस डॉलर को एक हफ्ते के भीतर उसे भारत लेकर आए. अगर वह पैसे को वापस भारत नहीं लाते तो व्यक्तिगत तौर पर कोर्ट में पेश हों.
बैंकों ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि डिएगो डील से मिले 40 मिलियन डॉलर को बच्चों के अकाउंट में ट्रांसफर किया है और उसका एक ट्रस्ट बना रखा है. SBI और दूसरे बैंकों ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की और कहा कि माल्या ने कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन कर डिएगो डील से मिले 40 मिलियन डालर को बच्चों के अकाउंट में ट्रांसफर किया है.टिप्पणियां
बैंको ने डिएगो डील से मिले 40 मिलियन अमेरिकी डॉलर को सुप्रीम कोर्ट में जमा कराने की मांग की थी. इससे पहले विजय माल्या की याचिका पर कोर्ट ने बैंको को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. याचिका में माल्या ने अवमानना नोटिस को वापस लेने की मांग की थी. माल्या का कहना है कि संपत्ति का ब्योरा समझौते के लिए दिया था जबकि समझौता नहीं हो रहा है. लिहाजा कोई अवमानना का मामला नहीं बनता. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट किंगफिशर एयरलाइंस के मुखिया विजय माल्या के खिलाफ अदालत की अवमानना के मामले की सुनवाई कर रहा है.
SBI और बैंकों ने सुप्रीम कोर्ट में अदालत की अवमानना की याचिका दाखिल की है जिस पर कोर्ट ने माल्या को नोटिस जारी कर पूछा था कि क्यों ना उनके खिलाफ अवमानना का मुकदमा चलाया जाए ?
बैंकों की याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर माल्या ने सील कवर में संपत्ति का ब्योरा दिया, वह गलत है. AG ने कोर्ट को कहा कि माल्या ने इस डिक्लेरेशन में कई जानकारियां छिपाई, झूठ बोला है. माल्या ने 2500 करोड के कैश का लेन देन भी छिपाया है जो कोर्ट के आदेश की अवमानना है. दरअसल कोर्ट के आदेश पर माल्या ने देश विदेशी अपनी संपत्ति का ब्योरा दाखिल किया था. इससे पहले बैंकों का करीब 9000 करोड़ रुपये लोन ना चुकाने के मामले में कोर्ट ने माल्या को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था.
9 मई को सुप्रीम कोर्ट ने माल्या को अवमानना का दोषी माना था क्योंकि उन्होंने संपत्ति का पूरा ब्योरा नहीं दिया. इससे पहले कोर्ट ने 10 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया था. इस दौरान सजा पर सुनवाई होगी.
9 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने विजय माल्या के खिलाफ अदालत की अवमानना और डिएगो डील से माल्या को मिले 40 मिलियन यूएस डॉलर पर अपना आदेश सुरक्षित रखा था. बैंकों ने मांग की है कि 40 मिलियन यूएस डॉलर जो डिएगो डील से मिले थे उनको सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा कराया जाए. सुप्रीम कोर्ट का आदेश सरकार के यूके से प्रत्यार्पण में भी मदद करेगा.
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने माल्या से पूछा था कि आपने जो कोर्ट में अपनी सम्पतियों के बारे में जानकारी दी थी वो सही है या नहीं ? क्या आपने कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश का उल्लंघन तो नहीं किया ? क्योंकि कर्नाटक हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि माल्या बिना कोर्ट के अनुमति कोई भी ट्रांजेक्शन नहीं कर सकते. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा था कि माल्या के खिलाफ कोर्ट के आदेश को कैसे लागू किया जा सकता है.
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि माल्या को वापस लाने की कोशिश की जा रही है. वहीं SBI ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि माल्या के ऊपर 9200 करोड़ रुपये का बकाया है. बैकों ने कहा- माल्या की याचिका पर सुनवाई नहीं होनी चाहिए, क्योंकि वह बार-बार कोर्ट के आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं. विजय माल्या ने कोर्ट में कहा था कि उनके पास इतने पैसे नहीं है कि वे 9200 करोड़ रुपये बैंक के कर्ज़ को अदा कर पाएं, क्योंकि उनकी सभी सम्पतियों को पहले ही जब्त कर लिया गया है.
विजय माल्या ने सुप्रीम कोर्ट में कहा उनके पास जो भी संपत्ति है वह जब्त की जा चुकी है. अब उनके पास पैसे नहीं हैं. विजय माल्या ने कहा कि जो 2000 करोड़ की उनकी संपत्ति को बैंक ने जब्त की है, बैंक चाहे तो उसे बेच सकता है. सुप्रीम कोर्ट किंगफिशर एयरलाइंस के मुखिया विजय माल्या के खिलाफ बैंकों की दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था. सुनवाई में बैंकों ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की थी और कहा था कि कोर्ट किंगफिशर एयरलाइंस के मुखिया विजय माल्या को आदेश दे कि वह डिएगो डील से मिले 40 मिलियन यूएस डॉलर को एक हफ्ते के भीतर उसे भारत लेकर आए. अगर वह पैसे को वापस भारत नहीं लाते तो व्यक्तिगत तौर पर कोर्ट में पेश हों.
बैंकों ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि डिएगो डील से मिले 40 मिलियन डॉलर को बच्चों के अकाउंट में ट्रांसफर किया है और उसका एक ट्रस्ट बना रखा है. SBI और दूसरे बैंकों ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की और कहा कि माल्या ने कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन कर डिएगो डील से मिले 40 मिलियन डालर को बच्चों के अकाउंट में ट्रांसफर किया है.टिप्पणियां
बैंको ने डिएगो डील से मिले 40 मिलियन अमेरिकी डॉलर को सुप्रीम कोर्ट में जमा कराने की मांग की थी. इससे पहले विजय माल्या की याचिका पर कोर्ट ने बैंको को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. याचिका में माल्या ने अवमानना नोटिस को वापस लेने की मांग की थी. माल्या का कहना है कि संपत्ति का ब्योरा समझौते के लिए दिया था जबकि समझौता नहीं हो रहा है. लिहाजा कोई अवमानना का मामला नहीं बनता. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट किंगफिशर एयरलाइंस के मुखिया विजय माल्या के खिलाफ अदालत की अवमानना के मामले की सुनवाई कर रहा है.
SBI और बैंकों ने सुप्रीम कोर्ट में अदालत की अवमानना की याचिका दाखिल की है जिस पर कोर्ट ने माल्या को नोटिस जारी कर पूछा था कि क्यों ना उनके खिलाफ अवमानना का मुकदमा चलाया जाए ?
बैंकों की याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर माल्या ने सील कवर में संपत्ति का ब्योरा दिया, वह गलत है. AG ने कोर्ट को कहा कि माल्या ने इस डिक्लेरेशन में कई जानकारियां छिपाई, झूठ बोला है. माल्या ने 2500 करोड के कैश का लेन देन भी छिपाया है जो कोर्ट के आदेश की अवमानना है. दरअसल कोर्ट के आदेश पर माल्या ने देश विदेशी अपनी संपत्ति का ब्योरा दाखिल किया था. इससे पहले बैंकों का करीब 9000 करोड़ रुपये लोन ना चुकाने के मामले में कोर्ट ने माल्या को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था.
9 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने विजय माल्या के खिलाफ अदालत की अवमानना और डिएगो डील से माल्या को मिले 40 मिलियन यूएस डॉलर पर अपना आदेश सुरक्षित रखा था. बैंकों ने मांग की है कि 40 मिलियन यूएस डॉलर जो डिएगो डील से मिले थे उनको सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा कराया जाए. सुप्रीम कोर्ट का आदेश सरकार के यूके से प्रत्यार्पण में भी मदद करेगा.
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने माल्या से पूछा था कि आपने जो कोर्ट में अपनी सम्पतियों के बारे में जानकारी दी थी वो सही है या नहीं ? क्या आपने कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश का उल्लंघन तो नहीं किया ? क्योंकि कर्नाटक हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि माल्या बिना कोर्ट के अनुमति कोई भी ट्रांजेक्शन नहीं कर सकते. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा था कि माल्या के खिलाफ कोर्ट के आदेश को कैसे लागू किया जा सकता है.
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि माल्या को वापस लाने की कोशिश की जा रही है. वहीं SBI ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि माल्या के ऊपर 9200 करोड़ रुपये का बकाया है. बैकों ने कहा- माल्या की याचिका पर सुनवाई नहीं होनी चाहिए, क्योंकि वह बार-बार कोर्ट के आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं. विजय माल्या ने कोर्ट में कहा था कि उनके पास इतने पैसे नहीं है कि वे 9200 करोड़ रुपये बैंक के कर्ज़ को अदा कर पाएं, क्योंकि उनकी सभी सम्पतियों को पहले ही जब्त कर लिया गया है.
विजय माल्या ने सुप्रीम कोर्ट में कहा उनके पास जो भी संपत्ति है वह जब्त की जा चुकी है. अब उनके पास पैसे नहीं हैं. विजय माल्या ने कहा कि जो 2000 करोड़ की उनकी संपत्ति को बैंक ने जब्त की है, बैंक चाहे तो उसे बेच सकता है. सुप्रीम कोर्ट किंगफिशर एयरलाइंस के मुखिया विजय माल्या के खिलाफ बैंकों की दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था. सुनवाई में बैंकों ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की थी और कहा था कि कोर्ट किंगफिशर एयरलाइंस के मुखिया विजय माल्या को आदेश दे कि वह डिएगो डील से मिले 40 मिलियन यूएस डॉलर को एक हफ्ते के भीतर उसे भारत लेकर आए. अगर वह पैसे को वापस भारत नहीं लाते तो व्यक्तिगत तौर पर कोर्ट में पेश हों.
बैंकों ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि डिएगो डील से मिले 40 मिलियन डॉलर को बच्चों के अकाउंट में ट्रांसफर किया है और उसका एक ट्रस्ट बना रखा है. SBI और दूसरे बैंकों ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की और कहा कि माल्या ने कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन कर डिएगो डील से मिले 40 मिलियन डालर को बच्चों के अकाउंट में ट्रांसफर किया है.टिप्पणियां
बैंको ने डिएगो डील से मिले 40 मिलियन अमेरिकी डॉलर को सुप्रीम कोर्ट में जमा कराने की मांग की थी. इससे पहले विजय माल्या की याचिका पर कोर्ट ने बैंको को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. याचिका में माल्या ने अवमानना नोटिस को वापस लेने की मांग की थी. माल्या का कहना है कि संपत्ति का ब्योरा समझौते के लिए दिया था जबकि समझौता नहीं हो रहा है. लिहाजा कोई अवमानना का मामला नहीं बनता. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट किंगफिशर एयरलाइंस के मुखिया विजय माल्या के खिलाफ अदालत की अवमानना के मामले की सुनवाई कर रहा है.
SBI और बैंकों ने सुप्रीम कोर्ट में अदालत की अवमानना की याचिका दाखिल की है जिस पर कोर्ट ने माल्या को नोटिस जारी कर पूछा था कि क्यों ना उनके खिलाफ अवमानना का मुकदमा चलाया जाए ?
बैंकों की याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर माल्या ने सील कवर में संपत्ति का ब्योरा दिया, वह गलत है. AG ने कोर्ट को कहा कि माल्या ने इस डिक्लेरेशन में कई जानकारियां छिपाई, झूठ बोला है. माल्या ने 2500 करोड के कैश का लेन देन भी छिपाया है जो कोर्ट के आदेश की अवमानना है. दरअसल कोर्ट के आदेश पर माल्या ने देश विदेशी अपनी संपत्ति का ब्योरा दाखिल किया था. इससे पहले बैंकों का करीब 9000 करोड़ रुपये लोन ना चुकाने के मामले में कोर्ट ने माल्या को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था.
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने माल्या से पूछा था कि आपने जो कोर्ट में अपनी सम्पतियों के बारे में जानकारी दी थी वो सही है या नहीं ? क्या आपने कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश का उल्लंघन तो नहीं किया ? क्योंकि कर्नाटक हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि माल्या बिना कोर्ट के अनुमति कोई भी ट्रांजेक्शन नहीं कर सकते. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा था कि माल्या के खिलाफ कोर्ट के आदेश को कैसे लागू किया जा सकता है.
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि माल्या को वापस लाने की कोशिश की जा रही है. वहीं SBI ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि माल्या के ऊपर 9200 करोड़ रुपये का बकाया है. बैकों ने कहा- माल्या की याचिका पर सुनवाई नहीं होनी चाहिए, क्योंकि वह बार-बार कोर्ट के आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं. विजय माल्या ने कोर्ट में कहा था कि उनके पास इतने पैसे नहीं है कि वे 9200 करोड़ रुपये बैंक के कर्ज़ को अदा कर पाएं, क्योंकि उनकी सभी सम्पतियों को पहले ही जब्त कर लिया गया है.
विजय माल्या ने सुप्रीम कोर्ट में कहा उनके पास जो भी संपत्ति है वह जब्त की जा चुकी है. अब उनके पास पैसे नहीं हैं. विजय माल्या ने कहा कि जो 2000 करोड़ की उनकी संपत्ति को बैंक ने जब्त की है, बैंक चाहे तो उसे बेच सकता है. सुप्रीम कोर्ट किंगफिशर एयरलाइंस के मुखिया विजय माल्या के खिलाफ बैंकों की दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था. सुनवाई में बैंकों ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की थी और कहा था कि कोर्ट किंगफिशर एयरलाइंस के मुखिया विजय माल्या को आदेश दे कि वह डिएगो डील से मिले 40 मिलियन यूएस डॉलर को एक हफ्ते के भीतर उसे भारत लेकर आए. अगर वह पैसे को वापस भारत नहीं लाते तो व्यक्तिगत तौर पर कोर्ट में पेश हों.
बैंकों ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि डिएगो डील से मिले 40 मिलियन डॉलर को बच्चों के अकाउंट में ट्रांसफर किया है और उसका एक ट्रस्ट बना रखा है. SBI और दूसरे बैंकों ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की और कहा कि माल्या ने कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन कर डिएगो डील से मिले 40 मिलियन डालर को बच्चों के अकाउंट में ट्रांसफर किया है.टिप्पणियां
बैंको ने डिएगो डील से मिले 40 मिलियन अमेरिकी डॉलर को सुप्रीम कोर्ट में जमा कराने की मांग की थी. इससे पहले विजय माल्या की याचिका पर कोर्ट ने बैंको को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. याचिका में माल्या ने अवमानना नोटिस को वापस लेने की मांग की थी. माल्या का कहना है कि संपत्ति का ब्योरा समझौते के लिए दिया था जबकि समझौता नहीं हो रहा है. लिहाजा कोई अवमानना का मामला नहीं बनता. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट किंगफिशर एयरलाइंस के मुखिया विजय माल्या के खिलाफ अदालत की अवमानना के मामले की सुनवाई कर रहा है.
SBI और बैंकों ने सुप्रीम कोर्ट में अदालत की अवमानना की याचिका दाखिल की है जिस पर कोर्ट ने माल्या को नोटिस जारी कर पूछा था कि क्यों ना उनके खिलाफ अवमानना का मुकदमा चलाया जाए ?
बैंकों की याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर माल्या ने सील कवर में संपत्ति का ब्योरा दिया, वह गलत है. AG ने कोर्ट को कहा कि माल्या ने इस डिक्लेरेशन में कई जानकारियां छिपाई, झूठ बोला है. माल्या ने 2500 करोड के कैश का लेन देन भी छिपाया है जो कोर्ट के आदेश की अवमानना है. दरअसल कोर्ट के आदेश पर माल्या ने देश विदेशी अपनी संपत्ति का ब्योरा दाखिल किया था. इससे पहले बैंकों का करीब 9000 करोड़ रुपये लोन ना चुकाने के मामले में कोर्ट ने माल्या को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था.
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि माल्या को वापस लाने की कोशिश की जा रही है. वहीं SBI ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि माल्या के ऊपर 9200 करोड़ रुपये का बकाया है. बैकों ने कहा- माल्या की याचिका पर सुनवाई नहीं होनी चाहिए, क्योंकि वह बार-बार कोर्ट के आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं. विजय माल्या ने कोर्ट में कहा था कि उनके पास इतने पैसे नहीं है कि वे 9200 करोड़ रुपये बैंक के कर्ज़ को अदा कर पाएं, क्योंकि उनकी सभी सम्पतियों को पहले ही जब्त कर लिया गया है.
विजय माल्या ने सुप्रीम कोर्ट में कहा उनके पास जो भी संपत्ति है वह जब्त की जा चुकी है. अब उनके पास पैसे नहीं हैं. विजय माल्या ने कहा कि जो 2000 करोड़ की उनकी संपत्ति को बैंक ने जब्त की है, बैंक चाहे तो उसे बेच सकता है. सुप्रीम कोर्ट किंगफिशर एयरलाइंस के मुखिया विजय माल्या के खिलाफ बैंकों की दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था. सुनवाई में बैंकों ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की थी और कहा था कि कोर्ट किंगफिशर एयरलाइंस के मुखिया विजय माल्या को आदेश दे कि वह डिएगो डील से मिले 40 मिलियन यूएस डॉलर को एक हफ्ते के भीतर उसे भारत लेकर आए. अगर वह पैसे को वापस भारत नहीं लाते तो व्यक्तिगत तौर पर कोर्ट में पेश हों.
बैंकों ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि डिएगो डील से मिले 40 मिलियन डॉलर को बच्चों के अकाउंट में ट्रांसफर किया है और उसका एक ट्रस्ट बना रखा है. SBI और दूसरे बैंकों ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की और कहा कि माल्या ने कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन कर डिएगो डील से मिले 40 मिलियन डालर को बच्चों के अकाउंट में ट्रांसफर किया है.टिप्पणियां
बैंको ने डिएगो डील से मिले 40 मिलियन अमेरिकी डॉलर को सुप्रीम कोर्ट में जमा कराने की मांग की थी. इससे पहले विजय माल्या की याचिका पर कोर्ट ने बैंको को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. याचिका में माल्या ने अवमानना नोटिस को वापस लेने की मांग की थी. माल्या का कहना है कि संपत्ति का ब्योरा समझौते के लिए दिया था जबकि समझौता नहीं हो रहा है. लिहाजा कोई अवमानना का मामला नहीं बनता. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट किंगफिशर एयरलाइंस के मुखिया विजय माल्या के खिलाफ अदालत की अवमानना के मामले की सुनवाई कर रहा है.
SBI और बैंकों ने सुप्रीम कोर्ट में अदालत की अवमानना की याचिका दाखिल की है जिस पर कोर्ट ने माल्या को नोटिस जारी कर पूछा था कि क्यों ना उनके खिलाफ अवमानना का मुकदमा चलाया जाए ?
बैंकों की याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर माल्या ने सील कवर में संपत्ति का ब्योरा दिया, वह गलत है. AG ने कोर्ट को कहा कि माल्या ने इस डिक्लेरेशन में कई जानकारियां छिपाई, झूठ बोला है. माल्या ने 2500 करोड के कैश का लेन देन भी छिपाया है जो कोर्ट के आदेश की अवमानना है. दरअसल कोर्ट के आदेश पर माल्या ने देश विदेशी अपनी संपत्ति का ब्योरा दाखिल किया था. इससे पहले बैंकों का करीब 9000 करोड़ रुपये लोन ना चुकाने के मामले में कोर्ट ने माल्या को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था.
विजय माल्या ने सुप्रीम कोर्ट में कहा उनके पास जो भी संपत्ति है वह जब्त की जा चुकी है. अब उनके पास पैसे नहीं हैं. विजय माल्या ने कहा कि जो 2000 करोड़ की उनकी संपत्ति को बैंक ने जब्त की है, बैंक चाहे तो उसे बेच सकता है. सुप्रीम कोर्ट किंगफिशर एयरलाइंस के मुखिया विजय माल्या के खिलाफ बैंकों की दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था. सुनवाई में बैंकों ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की थी और कहा था कि कोर्ट किंगफिशर एयरलाइंस के मुखिया विजय माल्या को आदेश दे कि वह डिएगो डील से मिले 40 मिलियन यूएस डॉलर को एक हफ्ते के भीतर उसे भारत लेकर आए. अगर वह पैसे को वापस भारत नहीं लाते तो व्यक्तिगत तौर पर कोर्ट में पेश हों.
बैंकों ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि डिएगो डील से मिले 40 मिलियन डॉलर को बच्चों के अकाउंट में ट्रांसफर किया है और उसका एक ट्रस्ट बना रखा है. SBI और दूसरे बैंकों ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की और कहा कि माल्या ने कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन कर डिएगो डील से मिले 40 मिलियन डालर को बच्चों के अकाउंट में ट्रांसफर किया है.टिप्पणियां
बैंको ने डिएगो डील से मिले 40 मिलियन अमेरिकी डॉलर को सुप्रीम कोर्ट में जमा कराने की मांग की थी. इससे पहले विजय माल्या की याचिका पर कोर्ट ने बैंको को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. याचिका में माल्या ने अवमानना नोटिस को वापस लेने की मांग की थी. माल्या का कहना है कि संपत्ति का ब्योरा समझौते के लिए दिया था जबकि समझौता नहीं हो रहा है. लिहाजा कोई अवमानना का मामला नहीं बनता. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट किंगफिशर एयरलाइंस के मुखिया विजय माल्या के खिलाफ अदालत की अवमानना के मामले की सुनवाई कर रहा है.
SBI और बैंकों ने सुप्रीम कोर्ट में अदालत की अवमानना की याचिका दाखिल की है जिस पर कोर्ट ने माल्या को नोटिस जारी कर पूछा था कि क्यों ना उनके खिलाफ अवमानना का मुकदमा चलाया जाए ?
बैंकों की याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर माल्या ने सील कवर में संपत्ति का ब्योरा दिया, वह गलत है. AG ने कोर्ट को कहा कि माल्या ने इस डिक्लेरेशन में कई जानकारियां छिपाई, झूठ बोला है. माल्या ने 2500 करोड के कैश का लेन देन भी छिपाया है जो कोर्ट के आदेश की अवमानना है. दरअसल कोर्ट के आदेश पर माल्या ने देश विदेशी अपनी संपत्ति का ब्योरा दाखिल किया था. इससे पहले बैंकों का करीब 9000 करोड़ रुपये लोन ना चुकाने के मामले में कोर्ट ने माल्या को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था.
बैंको ने डिएगो डील से मिले 40 मिलियन अमेरिकी डॉलर को सुप्रीम कोर्ट में जमा कराने की मांग की थी. इससे पहले विजय माल्या की याचिका पर कोर्ट ने बैंको को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. याचिका में माल्या ने अवमानना नोटिस को वापस लेने की मांग की थी. माल्या का कहना है कि संपत्ति का ब्योरा समझौते के लिए दिया था जबकि समझौता नहीं हो रहा है. लिहाजा कोई अवमानना का मामला नहीं बनता. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट किंगफिशर एयरलाइंस के मुखिया विजय माल्या के खिलाफ अदालत की अवमानना के मामले की सुनवाई कर रहा है.
SBI और बैंकों ने सुप्रीम कोर्ट में अदालत की अवमानना की याचिका दाखिल की है जिस पर कोर्ट ने माल्या को नोटिस जारी कर पूछा था कि क्यों ना उनके खिलाफ अवमानना का मुकदमा चलाया जाए ?
बैंकों की याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर माल्या ने सील कवर में संपत्ति का ब्योरा दिया, वह गलत है. AG ने कोर्ट को कहा कि माल्या ने इस डिक्लेरेशन में कई जानकारियां छिपाई, झूठ बोला है. माल्या ने 2500 करोड के कैश का लेन देन भी छिपाया है जो कोर्ट के आदेश की अवमानना है. दरअसल कोर्ट के आदेश पर माल्या ने देश विदेशी अपनी संपत्ति का ब्योरा दाखिल किया था. इससे पहले बैंकों का करीब 9000 करोड़ रुपये लोन ना चुकाने के मामले में कोर्ट ने माल्या को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था.
SBI और बैंकों ने सुप्रीम कोर्ट में अदालत की अवमानना की याचिका दाखिल की है जिस पर कोर्ट ने माल्या को नोटिस जारी कर पूछा था कि क्यों ना उनके खिलाफ अवमानना का मुकदमा चलाया जाए ?
बैंकों की याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर माल्या ने सील कवर में संपत्ति का ब्योरा दिया, वह गलत है. AG ने कोर्ट को कहा कि माल्या ने इस डिक्लेरेशन में कई जानकारियां छिपाई, झूठ बोला है. माल्या ने 2500 करोड के कैश का लेन देन भी छिपाया है जो कोर्ट के आदेश की अवमानना है. दरअसल कोर्ट के आदेश पर माल्या ने देश विदेशी अपनी संपत्ति का ब्योरा दाखिल किया था. इससे पहले बैंकों का करीब 9000 करोड़ रुपये लोन ना चुकाने के मामले में कोर्ट ने माल्या को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. | संक्षिप्त पाठ: 9 मई को सुप्रीम कोर्ट ने माल्या को अवमानना का दोषी माना था
AG ने कोर्ट को कहा कि माल्या ने इस डिक्लेरेशन में कई जानकारियां छिपाई
सुप्रीम कोर्ट का आदेश सरकार यूके से प्रत्यार्पण में भी मदद करेगा. | 22 | ['hin'] |
दिए गए पाठ के लिए एक सारांश बनाएं: कानून मंत्री अश्विनी कुमार आज प्रधानमंत्री कार्यालय गए, लेकिन कथित रूप से वह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से नहीं मिल सके, क्योंकि प्रधानमंत्री कुछ ही मिनट बाद दफ्तर से चले गए। मनमोहन सिंह हालांकि इससे पहले अटॉर्नी जनरल जीए वाहनवती से मिले थे। यह भी खबर है कि कैबिनेट में जल्द ही फेरबदल हो सकता है और सूत्रों के मुताबिक अश्विनी कुमार और रेलमंत्री पवन कुमार बंसल को हटाया जा सकता है। सोनिया गांधी इन दोनों को हटाने के पक्ष में हैं।
अश्विनी कुमार ने खुद कहा कि वह प्रधानमंत्री से नहीं मिल पाए हैं। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणियों के बाद अश्विनी कुमार पर इस्तीफे का दबाव बढ़ गया है और इसीलिए यह मुलाकात अहम मानी जा रही थी। इससे पहले, जब अश्विनी कुमार से मीडिया ने सवाल पूछना चाहा था, तो वह बिना कोई जवाब दिए चले गए थे। इधर, प्रधानमंत्री के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलने की भी खबर है।
इससे पहले, ऐसी खबरें थीं कि कोयला ब्लॉक आवंटन मामले की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा सरकार की खिंचाई किए जाने के दूसरे दिन कानून मंत्री अश्विनी कुमार ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात की। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने कोयला घोटाला जांच रिपोर्ट से 'सार’ बदल दिए जाने के लिए सीबीआई, प्रधानमंत्री कार्यालय और कोयला मंत्रालय के अधिकारियों पर कड़ी टिप्पणी की थी। टिप्पणियां
अदालत ने सरकार को यह निर्देश भी दिया कि वह सीबीआई को बाहरी प्रभाव और अनुचित दखल से बचाने के लिए 10 जुलाई से पहले एक कानून बनाए। शीर्ष अदालत ने सीबीआई की रिपोर्ट को हल्का किए जाने में कानून मंत्री की भूमिका के संबंध में भी टिप्पणियां की थीं। उसने कहा है कि अगर कानून मंत्री के सुझाव पर स्थिति रिपोर्ट में बदलाव किया जाए, तो क्या इससे जांच की निष्पक्षता प्रभावित नहीं हो जाती?
अदालत ने हालांकि, इसके अलावा कुमार के खिलाफ कोई अन्य कड़ी टिप्पणी नहीं की। कैबिनेट में अपनी जगह बनाए रखने के लिए प्रयासरत अश्विनी कुमार के इस्तीफे को लेकर विपक्ष सरकार पर बड़ा दबाव बनाए हुए है।
अश्विनी कुमार ने खुद कहा कि वह प्रधानमंत्री से नहीं मिल पाए हैं। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणियों के बाद अश्विनी कुमार पर इस्तीफे का दबाव बढ़ गया है और इसीलिए यह मुलाकात अहम मानी जा रही थी। इससे पहले, जब अश्विनी कुमार से मीडिया ने सवाल पूछना चाहा था, तो वह बिना कोई जवाब दिए चले गए थे। इधर, प्रधानमंत्री के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलने की भी खबर है।
इससे पहले, ऐसी खबरें थीं कि कोयला ब्लॉक आवंटन मामले की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा सरकार की खिंचाई किए जाने के दूसरे दिन कानून मंत्री अश्विनी कुमार ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात की। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने कोयला घोटाला जांच रिपोर्ट से 'सार’ बदल दिए जाने के लिए सीबीआई, प्रधानमंत्री कार्यालय और कोयला मंत्रालय के अधिकारियों पर कड़ी टिप्पणी की थी। टिप्पणियां
अदालत ने सरकार को यह निर्देश भी दिया कि वह सीबीआई को बाहरी प्रभाव और अनुचित दखल से बचाने के लिए 10 जुलाई से पहले एक कानून बनाए। शीर्ष अदालत ने सीबीआई की रिपोर्ट को हल्का किए जाने में कानून मंत्री की भूमिका के संबंध में भी टिप्पणियां की थीं। उसने कहा है कि अगर कानून मंत्री के सुझाव पर स्थिति रिपोर्ट में बदलाव किया जाए, तो क्या इससे जांच की निष्पक्षता प्रभावित नहीं हो जाती?
अदालत ने हालांकि, इसके अलावा कुमार के खिलाफ कोई अन्य कड़ी टिप्पणी नहीं की। कैबिनेट में अपनी जगह बनाए रखने के लिए प्रयासरत अश्विनी कुमार के इस्तीफे को लेकर विपक्ष सरकार पर बड़ा दबाव बनाए हुए है।
इससे पहले, ऐसी खबरें थीं कि कोयला ब्लॉक आवंटन मामले की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा सरकार की खिंचाई किए जाने के दूसरे दिन कानून मंत्री अश्विनी कुमार ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात की। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने कोयला घोटाला जांच रिपोर्ट से 'सार’ बदल दिए जाने के लिए सीबीआई, प्रधानमंत्री कार्यालय और कोयला मंत्रालय के अधिकारियों पर कड़ी टिप्पणी की थी। टिप्पणियां
अदालत ने सरकार को यह निर्देश भी दिया कि वह सीबीआई को बाहरी प्रभाव और अनुचित दखल से बचाने के लिए 10 जुलाई से पहले एक कानून बनाए। शीर्ष अदालत ने सीबीआई की रिपोर्ट को हल्का किए जाने में कानून मंत्री की भूमिका के संबंध में भी टिप्पणियां की थीं। उसने कहा है कि अगर कानून मंत्री के सुझाव पर स्थिति रिपोर्ट में बदलाव किया जाए, तो क्या इससे जांच की निष्पक्षता प्रभावित नहीं हो जाती?
अदालत ने हालांकि, इसके अलावा कुमार के खिलाफ कोई अन्य कड़ी टिप्पणी नहीं की। कैबिनेट में अपनी जगह बनाए रखने के लिए प्रयासरत अश्विनी कुमार के इस्तीफे को लेकर विपक्ष सरकार पर बड़ा दबाव बनाए हुए है।
अदालत ने सरकार को यह निर्देश भी दिया कि वह सीबीआई को बाहरी प्रभाव और अनुचित दखल से बचाने के लिए 10 जुलाई से पहले एक कानून बनाए। शीर्ष अदालत ने सीबीआई की रिपोर्ट को हल्का किए जाने में कानून मंत्री की भूमिका के संबंध में भी टिप्पणियां की थीं। उसने कहा है कि अगर कानून मंत्री के सुझाव पर स्थिति रिपोर्ट में बदलाव किया जाए, तो क्या इससे जांच की निष्पक्षता प्रभावित नहीं हो जाती?
अदालत ने हालांकि, इसके अलावा कुमार के खिलाफ कोई अन्य कड़ी टिप्पणी नहीं की। कैबिनेट में अपनी जगह बनाए रखने के लिए प्रयासरत अश्विनी कुमार के इस्तीफे को लेकर विपक्ष सरकार पर बड़ा दबाव बनाए हुए है।
अदालत ने हालांकि, इसके अलावा कुमार के खिलाफ कोई अन्य कड़ी टिप्पणी नहीं की। कैबिनेट में अपनी जगह बनाए रखने के लिए प्रयासरत अश्विनी कुमार के इस्तीफे को लेकर विपक्ष सरकार पर बड़ा दबाव बनाए हुए है। | दरअसल, सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणियों के बाद अश्विनी कुमार पर इस्तीफे का दबाव बढ़ गया है। मनमोहन सिंह हालांकि इससे पहले अटॉर्नी जनरल जीए वाहनवती से मिले थे। | 6 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: चीन ने अपने एक बैंक के खिलाफ ईरान के साथ कारोबार को ले कर अमेरिका की ओर से लगाए गए कड़े प्रतिबंध का विरोध किया है। चीन ने कहा है कि इससे अमेरिका के साथ उसके संबंध बिगड़ सकते हैं। चीन के विदेश मंत्रालय ने बैंक आफ कुन्लुन पर से प्रतिबंध हटाने की मांग की है।टिप्पणियां
बैंक आफ कुन्लुन चायना नैशनल पेट्रोलियम कार्प से संबद्ध है। बैंक ने कहा है कि उसका काम सामान्य तरीके से चल रहा है और पाबंदी का उस पर कोई असर नहीं होगा।
बैंक के एक प्रवक्ता ने चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाईम्स से कहा ‘बैंक यह नहीं बता सकता कि उसकी ओर से ईरान को कितना ऋण दिया गया है क्योंकि यह व्यवसायिक गोपनीयता का विषय है।’
बैंक आफ कुन्लुन चायना नैशनल पेट्रोलियम कार्प से संबद्ध है। बैंक ने कहा है कि उसका काम सामान्य तरीके से चल रहा है और पाबंदी का उस पर कोई असर नहीं होगा।
बैंक के एक प्रवक्ता ने चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाईम्स से कहा ‘बैंक यह नहीं बता सकता कि उसकी ओर से ईरान को कितना ऋण दिया गया है क्योंकि यह व्यवसायिक गोपनीयता का विषय है।’
बैंक के एक प्रवक्ता ने चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाईम्स से कहा ‘बैंक यह नहीं बता सकता कि उसकी ओर से ईरान को कितना ऋण दिया गया है क्योंकि यह व्यवसायिक गोपनीयता का विषय है।’ | यह एक सारांश है: बैंक के एक प्रवक्ता ने चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाईम्स से कहा ‘बैंक यह नहीं बता सकता कि उसकी ओर से ईरान को कितना ऋण दिया गया है क्योंकि यह व्यावसायिक गोपनीयता का विषय है।’ | 24 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: भारतीय बल्लेबाज सुरेश रैना पर मंगलवार को वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे क्रिकेट टेस्ट के पहले दिन आईसीसी आचार संहिता के लेवल एक के उल्लघंन के लिए 25 प्रतिशत फीस का जुर्माना लगाया गया। आईसीसी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार इस बल्लेबाज को आचार संहिता की धारा 2.1.3 के उल्लघंन का दोषी पाया गया जो अंपायरों के फैसले पर एक्शन या शब्दों के जरिए नाराजगी दिखाने संबंधित है। पहले दिन का खेल समाप्त होने के बाद बायें हाथ के बल्लेबाज को दोषी पाया गया और उन्होंने मैच रैफरी क्रिस ब्राड द्वारा प्रस्तावित जुर्माने को स्वीकार लिया। मैदानी अंपायर असद रौफ और बिली बाडन तथा तीसरे अंपायर ग्रेगरी ब्रथवाटे और चौथे अधिकारी नोरमैन मैल्कम ने यह आरोप लगाया था। यह घटना 56वें ओवर में हुई जब रैना 53 रन पर बल्लेबाजी कर रहे थे और शार्ट लेग पर खड़े क्षेत्ररक्षक एड्रियन बराथ ने देवेंद्र बीशू की गेंद पर उनका कैच लपक लिया। अंपायर रौफ ने फैसला देने में देरी की जिससे रैना इस फैसले से नाखुख दिखे। | दिए गए पाठ का सारांश यह हो सकता है: आईसीसी के अनुसार सुरेश रैना को आचार संहिता की धारा 2.1.3 के उल्लघंन का दोषी पाया गया। | 3 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाओ: भारत और द. अफ्रीका के बीच खेला जा रहा चौथा एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच बारिश के कारण बीच में रोकना पड़ा। बारिश की वजह से जब खेल रोका गया तब भारत ने 31.3 ओवर में छह विकेट पर 137 रन बनाए थे। उसे अब भी द. अफ्रीका में पहली बार श्रृंखला जीतने का अपना सपना पूरा करने के लिए 129 रन की दरकार है। भारतीय उम्मीदें युवा विराट कोहली पर टिकी हैं जो 83 रन पर खेल रहे हैं। उन्होंने अब तक 87 गेंद का सामना करके सात चौके और दो छक्के लगाए हैं। उनके साथ दूसरे छोर पर हरभजन सिंह दो रन पर खेल रहे हैं। इससे पहले, बाएं हाथ के कामचलाऊ स्पिनर युवराज सिंह ने खुद को उपयोगी गेंदबाज साबित करके तीन महत्वपूर्ण विकेट हासिल किए लेकिन इसके बावजूद द. अफ्रीका हाशिम अमला और जेपी डुमिनी के अर्द्धशतकों से भारत के खिलाफ चौथे एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच में सात विकेट पर 265 रन का चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा करने में सफल रहा। अमला (64) की प्रवाहमय पारी से द. अफ्रीका ने टॉस जीतने के बाद पहले बल्लेबाजी करते हुए अच्छी शुरुआत की लेकिन युवराज की शानदार गेंदबाजी और रन लेने में हडबड़ाहट के कारण 22 गेंद और 12 रन के अंदर चार विकेट गंवाने से उसकी टीम बैकफुट पर चली गई। डुमिनी (नाबाद 71) ने इसके बाद जोहान बोथा (44) के साथ छठे विकेट के लिए 70 और रोबिन पीटरसन (31) के साथ सातवें विकेट के लिए 54 रन की साझेदारियां करके टीम को मजबूत स्कोर तक पहुंचाया। युवराज ने आठ ओवर में 34 रन देकर तीन विकेट लिए जबकि अमला सहित तीन बल्लेबाज रन आउट हुए। दक्षिण अफ्रीकी सलामी बल्लेबाजों विशेषकर कप्तान ग्रीम स्मिथ को शुरू में काफी संघर्ष करना पड़ा। पहले पांच ओवर में केवल 10 रन बनाने वाले द. अफ्रीका ने अमला के कुछ आकर्षक ड्राइव की मदद से इसके बाद रन गति तेज की। अमला ने मुनाफ पटेल पर लगातार तीन चौके जड़कर उन्हें आक्रमण से हटवाया। | यहाँ एक सारांश है:बारिश की वजह से जब खेल रोका गया तब भारत ने 31.3 ओवर में छह विकेट पर 137 रन बनाए थे। | 18 | ['hin'] |
इस पाठ का सारांश बनाएं: केंद्र की यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन दे रही समाजवादी पार्टी द्वारा पिछले कुछ दिनों में सरकार के खिलाफ तीखे बयान दिए जाने के बीच प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने गुरुवार को सपा द्वारा समर्थन वापसी की संभावना तो स्वीकार की, लेकिन सरकार को कोई खतरा होने या समय-पूर्व चुनाव की संभावनाओं को खारिज कर दिया।
गठबंधन की बाध्यताओं को सुधार प्रक्रिया के आड़े नहीं आने देने का संकल्प जताते हुए मनमोहन ने कहा कि सरकार को सुधार कार्यक्रम आगे बढ़ाने का विश्वास है और इसके परिणाम अगले कुछ महीनों में सामने आएंगे।
डॉ सिंह की बातों से ऐसा प्रतीत हुआ कि वह स्वयं को अगले लोकसभा चुनाव के बाद प्रधानमंत्री के दौड़ से खारिज नहीं कर रहे हैं। सिंह ने कहा, ‘‘यह स्वाभाविक है कि गठबंधन को कई मुद्दों से रूबरू होना पड़ता है। कई बार ऐसा लगता है कि इस प्रकार की व्यवस्था स्थायी नहीं है और मैं इससे इंकार नहीं करता कि ऐसी संभावनाएं नहीं उत्पन्न होती।’’
दक्षिण अफ्रीका के डरबन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद अपनी चार-दिवसीय यात्रा से लौटते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि हमारी सरकार पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा करेगी। लोकसभा के लिए अगले चुनाव निर्धारित समय पर (2014) ही होंगे।’’ मनमोहन सिंह से पूछा गया था कि डीएमकेके यूपीए सरकार से अलग होने के बाद क्या अब सपा भी समर्थन वापस ले सकती है। टिप्पणियां
डीएमके के लोकसभा में 18 सांसद हैं और उसने श्रीलंकाई तमिलों के मुद्दे पर यूपीए सरकार से समर्थन वापस ले लिया और पिछले कुछ दिनों से समाजवादी पार्टी सरकार और कांग्रेस पार्टी को निशाना बना रही है। समाजवादी पार्टी के लोकसभा में 22 सांसद और बसपा के 21 सांसद हैं, जो केंद्र सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे हैं और कई बार संकट में सरकार को उबारने का काम किया है।
यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार के पास सुधारों को जारी रखने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं, प्रधानमंत्री ने कहा कि सुधार एक बार तय की जाने वाली व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘सुधारों को आगे बढ़ाते हुए निश्चित तौर पर इस तथ्य को ध्यान में रखना होगा कि संसद में हमारे कुछ सुधारों को मंजूरी दिलाने के लिए हमारे पास बहुमत नहीं है, इसलिए हम निश्चित तौर पर हमारे सहयोगियों की शुभेच्छा पर निर्भर हैं और मैं अंतिम व्यक्ति होऊंगा, जो इस बात से इनकार करूंगा कि इसमें अनिश्चितताएं हैं।’’
गठबंधन की बाध्यताओं को सुधार प्रक्रिया के आड़े नहीं आने देने का संकल्प जताते हुए मनमोहन ने कहा कि सरकार को सुधार कार्यक्रम आगे बढ़ाने का विश्वास है और इसके परिणाम अगले कुछ महीनों में सामने आएंगे।
डॉ सिंह की बातों से ऐसा प्रतीत हुआ कि वह स्वयं को अगले लोकसभा चुनाव के बाद प्रधानमंत्री के दौड़ से खारिज नहीं कर रहे हैं। सिंह ने कहा, ‘‘यह स्वाभाविक है कि गठबंधन को कई मुद्दों से रूबरू होना पड़ता है। कई बार ऐसा लगता है कि इस प्रकार की व्यवस्था स्थायी नहीं है और मैं इससे इंकार नहीं करता कि ऐसी संभावनाएं नहीं उत्पन्न होती।’’
दक्षिण अफ्रीका के डरबन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद अपनी चार-दिवसीय यात्रा से लौटते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि हमारी सरकार पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा करेगी। लोकसभा के लिए अगले चुनाव निर्धारित समय पर (2014) ही होंगे।’’ मनमोहन सिंह से पूछा गया था कि डीएमकेके यूपीए सरकार से अलग होने के बाद क्या अब सपा भी समर्थन वापस ले सकती है। टिप्पणियां
डीएमके के लोकसभा में 18 सांसद हैं और उसने श्रीलंकाई तमिलों के मुद्दे पर यूपीए सरकार से समर्थन वापस ले लिया और पिछले कुछ दिनों से समाजवादी पार्टी सरकार और कांग्रेस पार्टी को निशाना बना रही है। समाजवादी पार्टी के लोकसभा में 22 सांसद और बसपा के 21 सांसद हैं, जो केंद्र सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे हैं और कई बार संकट में सरकार को उबारने का काम किया है।
यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार के पास सुधारों को जारी रखने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं, प्रधानमंत्री ने कहा कि सुधार एक बार तय की जाने वाली व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘सुधारों को आगे बढ़ाते हुए निश्चित तौर पर इस तथ्य को ध्यान में रखना होगा कि संसद में हमारे कुछ सुधारों को मंजूरी दिलाने के लिए हमारे पास बहुमत नहीं है, इसलिए हम निश्चित तौर पर हमारे सहयोगियों की शुभेच्छा पर निर्भर हैं और मैं अंतिम व्यक्ति होऊंगा, जो इस बात से इनकार करूंगा कि इसमें अनिश्चितताएं हैं।’’
डॉ सिंह की बातों से ऐसा प्रतीत हुआ कि वह स्वयं को अगले लोकसभा चुनाव के बाद प्रधानमंत्री के दौड़ से खारिज नहीं कर रहे हैं। सिंह ने कहा, ‘‘यह स्वाभाविक है कि गठबंधन को कई मुद्दों से रूबरू होना पड़ता है। कई बार ऐसा लगता है कि इस प्रकार की व्यवस्था स्थायी नहीं है और मैं इससे इंकार नहीं करता कि ऐसी संभावनाएं नहीं उत्पन्न होती।’’
दक्षिण अफ्रीका के डरबन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद अपनी चार-दिवसीय यात्रा से लौटते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि हमारी सरकार पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा करेगी। लोकसभा के लिए अगले चुनाव निर्धारित समय पर (2014) ही होंगे।’’ मनमोहन सिंह से पूछा गया था कि डीएमकेके यूपीए सरकार से अलग होने के बाद क्या अब सपा भी समर्थन वापस ले सकती है। टिप्पणियां
डीएमके के लोकसभा में 18 सांसद हैं और उसने श्रीलंकाई तमिलों के मुद्दे पर यूपीए सरकार से समर्थन वापस ले लिया और पिछले कुछ दिनों से समाजवादी पार्टी सरकार और कांग्रेस पार्टी को निशाना बना रही है। समाजवादी पार्टी के लोकसभा में 22 सांसद और बसपा के 21 सांसद हैं, जो केंद्र सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे हैं और कई बार संकट में सरकार को उबारने का काम किया है।
यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार के पास सुधारों को जारी रखने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं, प्रधानमंत्री ने कहा कि सुधार एक बार तय की जाने वाली व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘सुधारों को आगे बढ़ाते हुए निश्चित तौर पर इस तथ्य को ध्यान में रखना होगा कि संसद में हमारे कुछ सुधारों को मंजूरी दिलाने के लिए हमारे पास बहुमत नहीं है, इसलिए हम निश्चित तौर पर हमारे सहयोगियों की शुभेच्छा पर निर्भर हैं और मैं अंतिम व्यक्ति होऊंगा, जो इस बात से इनकार करूंगा कि इसमें अनिश्चितताएं हैं।’’
दक्षिण अफ्रीका के डरबन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद अपनी चार-दिवसीय यात्रा से लौटते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि हमारी सरकार पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा करेगी। लोकसभा के लिए अगले चुनाव निर्धारित समय पर (2014) ही होंगे।’’ मनमोहन सिंह से पूछा गया था कि डीएमकेके यूपीए सरकार से अलग होने के बाद क्या अब सपा भी समर्थन वापस ले सकती है। टिप्पणियां
डीएमके के लोकसभा में 18 सांसद हैं और उसने श्रीलंकाई तमिलों के मुद्दे पर यूपीए सरकार से समर्थन वापस ले लिया और पिछले कुछ दिनों से समाजवादी पार्टी सरकार और कांग्रेस पार्टी को निशाना बना रही है। समाजवादी पार्टी के लोकसभा में 22 सांसद और बसपा के 21 सांसद हैं, जो केंद्र सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे हैं और कई बार संकट में सरकार को उबारने का काम किया है।
यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार के पास सुधारों को जारी रखने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं, प्रधानमंत्री ने कहा कि सुधार एक बार तय की जाने वाली व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘सुधारों को आगे बढ़ाते हुए निश्चित तौर पर इस तथ्य को ध्यान में रखना होगा कि संसद में हमारे कुछ सुधारों को मंजूरी दिलाने के लिए हमारे पास बहुमत नहीं है, इसलिए हम निश्चित तौर पर हमारे सहयोगियों की शुभेच्छा पर निर्भर हैं और मैं अंतिम व्यक्ति होऊंगा, जो इस बात से इनकार करूंगा कि इसमें अनिश्चितताएं हैं।’’
डीएमके के लोकसभा में 18 सांसद हैं और उसने श्रीलंकाई तमिलों के मुद्दे पर यूपीए सरकार से समर्थन वापस ले लिया और पिछले कुछ दिनों से समाजवादी पार्टी सरकार और कांग्रेस पार्टी को निशाना बना रही है। समाजवादी पार्टी के लोकसभा में 22 सांसद और बसपा के 21 सांसद हैं, जो केंद्र सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे हैं और कई बार संकट में सरकार को उबारने का काम किया है।
यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार के पास सुधारों को जारी रखने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं, प्रधानमंत्री ने कहा कि सुधार एक बार तय की जाने वाली व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘सुधारों को आगे बढ़ाते हुए निश्चित तौर पर इस तथ्य को ध्यान में रखना होगा कि संसद में हमारे कुछ सुधारों को मंजूरी दिलाने के लिए हमारे पास बहुमत नहीं है, इसलिए हम निश्चित तौर पर हमारे सहयोगियों की शुभेच्छा पर निर्भर हैं और मैं अंतिम व्यक्ति होऊंगा, जो इस बात से इनकार करूंगा कि इसमें अनिश्चितताएं हैं।’’
यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार के पास सुधारों को जारी रखने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं, प्रधानमंत्री ने कहा कि सुधार एक बार तय की जाने वाली व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘सुधारों को आगे बढ़ाते हुए निश्चित तौर पर इस तथ्य को ध्यान में रखना होगा कि संसद में हमारे कुछ सुधारों को मंजूरी दिलाने के लिए हमारे पास बहुमत नहीं है, इसलिए हम निश्चित तौर पर हमारे सहयोगियों की शुभेच्छा पर निर्भर हैं और मैं अंतिम व्यक्ति होऊंगा, जो इस बात से इनकार करूंगा कि इसमें अनिश्चितताएं हैं।’’ | केंद्र सरकार को बाहर से समर्थन दे रही समाजवादी पार्टी द्वारा पिछले कुछ दिनों में सरकार के खिलाफ तीखे बयान दिए जाने के बीच प्रधानमंत्री ने सपा द्वारा समर्थन वापसी की संभावना स्वीकार की, लेकिन सरकार को कोई खतरा होने या समय-पूर्व चुनाव की संभावनाओं को खारिज | 34 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: रिजर्व बैंक की मौद्रिक एवं ऋण नीति की तीसरी तिमाही समीक्षा पिछले महीने के अंत में जारी होने के बाद स्टेट बैंक ने यह कदम उठाया है। बैंक ने एक वक्तव्य में कहा गया है कि उसने अपनी आधार दर 0.25 प्रतिशत बढाकर 8.25 प्रतिशत कर दी है। आधार दर में इस वृद्धि के बाद बैंक के सभी तरह के ऋण महंगे हो जाएंगे। स्टेट बैंक ने इसके साथ ही अपनी बैंचमार्क प्रधान ब्याज दर (बीपीएलआर) दर को भी 0.25 प्रतिशत वृद्धि के साथ 13 प्रतिशत कर दिया। मौजूदा कर्जदारों के कर्ज पर इसका असर होगा। बैंक ने कुछ चुनींदा अवधि की जमाओं पर भी ब्याज दर में 0. 25 प्रतिशत अंक की वृद्धि की है। बैंक की 555 दिन और 1,000 दिन की सावधि जमाओं पर अब 9 प्रतिशत के बजाय 9.25 प्रतिशत तक ब्याज दिया जाएगा। नई दरें 14 फरवरी से लागू होंगी। रिजर्व बैंक ने 25 जनवरी को जारी मौद्रिक एवं ऋण नीति की तिमाही समीक्षा में बैंकों के साथ अल्पकालिक लेनदेन वाली रेपो और रिवर्स रेपो दर में 0.25 प्रतिशत अंक वृद्धि कर दी थी। उसके बाद से कई बैंकों ने अपनी आधार और बीपीएलआर दरों में विभिन्न स्तरों पर वृद्धि की है। पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन ओवरसीज बैंक सहित सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के कई बैंक अपनी ब्याज दरों में वृद्धि कर चुके हैं। सावधि जमाओं पर ब्याज बढ़ने से जहां एक तरफ बचत करने वालों को ज्यादा ब्याज मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ आवास एवं वाहन के लिए कर्ज लेने वालों की भुगतान की मासिक किस्तें बढ़ जाएंगी। इसी बीच, भारती स्टेट बैंक के प्रबंध निदेशक आर श्रीधरन ने कोलकाता में कहा कि बैंक के ऋण कारोबार में चालू वित्तवर्ष में 19 प्रतिशत तक वृद्धि होने की संभावना है। उन्होंने कहा, चालू वित्तवर्ष में साख (बैंक द्वारा दिए गए ऋण) में 18 से 19 प्रतिशत की वृद्धि होगी। | यहाँ एक सारांश है:सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक ने चुनींदा परिपक्वता वाली जमा और कर्ज पर ब्याज दर में चौथाई फीसदी तक वृद्धि कर दी है। | 17 | ['hin'] |
इस के लिए एक सारांश बनाएं: बहरहाल, मीडिया के बार-बार पूछने के बावजूद कम्प्यूटर बाबा ने भाजपा के उन विधायकों के किसी भी ब्योरे का खुलासा नहीं किया, जिनके बारे में उनका दावा है कि वे पाला बदलने के संबंध में उनके संपर्क में हैं. पिछले महीने नदी संरक्षण न्यास के अध्यक्ष का पदभार संभालने वाले धार्मिक नेता ने कहा, 'सही समय आने पर उन विधायकों का नाम भी पता चल जायेगा. अभी मैं आपको सिर्फ इतना बता सकता हूं कि ये विधायक भी मुझ जैसे साधु-संतों की तरह भाजपा की कार्यशैली से नाराज हैं.'
बता दें कि प्रदेश विधानसभा में बुधवार शाम दंड विधि (मध्य प्रदेश संशोधन) विधेयक 2019 के पक्ष में भाजपा के दो सदस्यों सहित कुल 122 विधायकों ने मतदान किया था. विधेयक को लेकर राज्य की कांग्रेस सरकार का समर्थन करने वाले भाजपा के इन विधायकों में नारायण त्रिपाठी (मैहर) और शरद कौल (ब्यौहारी) शामिल हैं. कम्प्यूटर बाबा का असली नाम नामदेव दास त्यागी है और वह एक जमाने में भाजपा की प्रदेश इकाई के नजदीक माने जाते थे. | कम्प्यूटर बाबा का बड़ा बयान
बीजेपी के चार सांसद पाला बदलने को तैयार
एक बिल पर दो BJP विधायकों ने दिया था समर्थन | 28 | ['hin'] |
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