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कुछ घाटी युवतियाँ एक-दूसरी को छेड़ती हुई पुल की सीढ़ियाँ उतर रही थीं। | 1 |
विवाह के वचन-भंग का और मान-हानि का दावा करूंगा' कहकर मामा घूम-घूमकर खूब शोर मचाने लगे। | 4 |
नींद ने जोर मारा। | 4 |
भाई के इस जन्म से शशिकला को बहुत दु:ख हुआ और जयगोपाल बाबू भी इस नन्हे साले को पाकर विशेष प्रसन्न नहीं हुए। | 4 |
हाँ कभी कभी वो कन्खियों से एक दूसरे को देख लेते थे। | 1 |
रेलवे स्टेशन के पास की लड़की है। | 1 |
हामिद को यकीन न आया—ऐसे रूपये जिन्नात को कहॉँ से मिल जाऍंगी? | 2 |
सीताराम जी सरीखे व्यक्ति के लिए किसी विशेष आडंबर की आवश्यकता भी तो न थी। | 1 |
उन जनरल साहब के साथियों का एक दल इस स्टेशन से चढ़ने का प्रयत्न कर रहा था। | 1 |
अगले इतवार को आवेंगे। | 2 |
श्रीकंठ—उसकी इस दुष्टता को मैं कदापि नहीं सह सकता। | 2 |
श्रीकंठ ने चिंतित स्वर से पूछा--आखिर बात क्या हुई? | 2 |
उसे उठाकर उसने ज़ोर से वापस पटक दिया। | 4 |
आख़िर वो भी तो कितना ही अरसा उस के घर के सेहन में बरसात की चिलचिलाती-धूप में खड़ा रहा था और उस ने इस की कोई पर्वा न की थी .. . | 1 |
“हटाओ इस छेड़ख़ानी को” शाहिदा ने सलमा के गाल पर हल्की सी चपत लगाई “ये छेड़ख़ानी है? | 2 |
बाबू... | 2 |
क्या कह रहे हो तुम? मैं नहीं समझा। | 2 |
मैं हाथ में एक पुस्तक लिए उस ओर कान लगाए था। | 1 |
तब से इन दोनों बच्चों की मेरे यहाँ वही हालत थी जो यतीमों की होती है। | 2 |
उत्तरायण में जो पगडंडी दो पहाड़ियों के बीच से मोटर-मार्ग तक जाती थी, उसके अंत में मोटर-स्टाप पर एक ही दूकान थी, जिसमें आवश्यक खाद्य-सामग्री प्राप्त हो सकती थी। | 1 |
जरा देर चुप रहकर फिर आज्ञा की, ‘बोल वर्ण। ’ अर्जुन की जान आ पड़ी। | 4 |
वह अपने दोस्त की ज़ी भर के बातें करना चाहता था। | 1 |
वो बोली: अरे वो तो मेरा सगा भाई था। | 2 |
हीराबाई हाथ की बैंगनी साफी से चेहरा पोंछती है। | 4 |
अहीर ने कहा- दोहरे बाँट रखे हैं। | 2 |
क्या इन कृत्रिम युक्तियों से तुमने मेरे पिता को अपना न बनाना चाहा था और अब विदाई के समय धन्यवाद के कुछ मूल्यहीन सिक्के उस सेविका की ओर फेंकते हो, जो तुम्हारे छल से छली जा चुकी है? | 2 |
केदार— मैं नहीं जानता, जो चाहे कर। पन्ना केदार के मन की बात समझ गयी। | 2 |
बाढ़ की बातचीत में बालिका का प्रसंग भी आया। | 4 |
उस की वजह सिर्फ़ ये थी कि मुंशी करीम बख़्श चंद आदमीयों की ख़िदमत करने में बेहद मुसर्रत महसूस करता था उन चंद ख़ासुलख़ास आदमीयों की ख़िदमतगुज़ारी में जिन से उसे दिली अक़ीदत थी। | 1 |
केवल इतना ही नहीं; अपितु पहले जो उनके दिन व्यर्थ आलस्य में कट जाएा करते थे, उधर दो वर्ष से अपनी आर्थिक अवस्था सुधरने की कोशिश के रूप में उनके मन में एक प्रकार की जबर्दस्त क्रांति का उदय हुआ। | 1 |
इन्होंने कहा' शहर कोतवाल का अधिकार पूर्ण शब्द उनके कानों में गूंज गया। | 2 |
हिरामन ने रूपया लेते हुए कहा,' क्या बोलेंगे!' उसने हँसने की चेष्टा की। | 4 |
" आओ जी! आओ बैठ जाओ।" मान सिंह अंदर आ के चारपाई पे बैठ गया | | 2 |
मैंने सोचा, अभी झोली कंधे पर डाले, सर पर एक मुसीबत आ खड़ी होगी और मेरा सत्तहरवा अध्याय आज अधूरा रह जाएगा। | 4 |
उन्हीं में से एक से कहा-'' भाई, तुम मेरे बच्चों की खबर ला दो। | 2 |
“मुझे आज जाते हुए बाज़ार से सौदा लेकर जाना है, ” वह कह रही थी। | 2 |
सरकस कंपनी की मेम के हाथ की चाय पी कर उसने देख लिया है। | 4 |
अंततः दोनों में अलगौझी हो गई थी। | 1 |
सरदार की स्त्री ने पूजा की सामग्री के पास चक्कर काटती हुई बिल्ली को भगाया। | 4 |
" चुप रहो।" और बेंत के संकेत से उसे चौकी से उठाकर सामने खड़ा होने का हुक्म दिया। | 4 |
शहर-शहर में गिरफ्तारियों का तांता लग गया। | 4 |
मगर तुम्हें किसी दूसरे नौजवान के साथ देखकर वापिस चला गया था। | 2 |
जितने देवता हैं, चूँकि देवता हैं, इसलिए धर्मात्मा हैं। | 3 |
. ..एक घड़ी रात तक हम लोग पहुँच जाएँगे।' हीराबाई को फारबिसगंज पहुँचने की जल्दी नहीं। | 2 |
उन्होंने फिर एक पत्र बाबू राधाकृष्ण को शीघ्र ही तारीख निश्चित काने के लिए लिख भेजा। | 4 |
डरा हुआ आदमी क्या नहीं कर सकता। | 0 |
रग्घू— तो फिर क्या करुँ, तू ही बता? | 2 |
अपने आप में असहज सा महसूस कर रहा था। | 1 |
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